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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और सांसद राहुल गांधी को ED की ओर से नेशनल हेराल्ड मामले में तलब किए जाने पर सियासत गरमा गई है। राहुल गांधी को पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर कांग्रेस के आंदोलन पर BJP ने हमला बोला है। BJP प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, अर्जुनराम मेघवाल, सांसद राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा है कि राहुल-सोनिया से पूछताछ में केन्द्र सरकार का कोई रोल नहीं है। बल्कि कांग्रेस नेता भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। राहुल को पूछताछ के लिए बुलाने पर विरोध प्रदर्शन करने से चोर की दाढ़ी में तिनका नजर आ रहा है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि कांग्रेस किस बात का सत्याग्रह कर रही है। ED ने उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया। इसमें केंद्र का कोई रोल नहीं है। कांग्रेस के फर्जी सत्याग्रह से गांधी जी भी स्वर्ग में हैरान हो रहे होंगे। यह देश संविधान से चलता है और ED देश के आर्थिक अनुशासन को बनाकर रखने वाली संस्था है। जिसके सामने कांग्रेस नेताओं को अपना पक्ष रखना चाहिए। लेकिन यहां तो चोर की दाढ़ी में तिनका नजर आता है। केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा मुझे लगता है कि कांग्रेस नेताओं को अपने गिरेबां में झांकना चाहिए। जहां तक केंद्रीय एजेंसी ED का सब्जेक्ट है। सांच को आंच नहीं होती। ऐसी कहावत हमारे देश में प्रचलित है। अगर किसी ने पाप नहीं किया है तो उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जिसने भी पाप किया है, गबन किया है, आर्थिक अपराध किया है, वो बचना भी नहीं चाहिए। केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कांग्रेस नेता भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। जब कोई जांच एजेंसी उन्हें केस में पक्ष रखने के लिए बुलाती हैं, तो वह अपने नेताओं को बुलाकर प्रदर्शन करवाते हैं और एजेंसियों पर अनुचित दबाव डालते हैं। ED राहुल गांधी को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया। इसमें केंद्र सरकार का कोई रोल नहीं है। लेकिन अब जनता भी कांग्रेस का चरित्र जान गई है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने कहा कांग्रेस आखिर किस बात का सत्याग्रह कर रही है। पहले उसने गांधीजी का नाम हड़पा और अब झूठा सत्याग्रह कर रही है। कांग्रेस नेताओं का यह प्रदर्शन देश के संविधान और कानून के खिलाफ है। क्या राहुल और सोनिया गांधी नहीं चाहते कि देश में कानून का राज चले। यदि चाहते हैं तो फिर उन्हें किस बात का डर और भय है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और सांसद राहुल गांधी को ED की ओर से नेशनल हेराल्ड मामले में तलब किए जाने पर सियासत गरमा गई है। राहुल गांधी को पूछताछ के लिए बुलाए जाने पर कांग्रेस के आंदोलन पर BJP ने हमला बोला है। BJP प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, अर्जुनराम मेघवाल, सांसद राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा है कि राहुल-सोनिया से पूछताछ में केन्द्र सरकार का कोई रोल नहीं है। बल्कि कांग्रेस नेता भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। राहुल को पूछताछ के लिए बुलाने पर विरोध प्रदर्शन करने से चोर की दाढ़ी में तिनका नजर आ रहा है। बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि कांग्रेस किस बात का सत्याग्रह कर रही है। ED ने उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया। इसमें केंद्र का कोई रोल नहीं है। कांग्रेस के फर्जी सत्याग्रह से गांधी जी भी स्वर्ग में हैरान हो रहे होंगे। यह देश संविधान से चलता है और ED देश के आर्थिक अनुशासन को बनाकर रखने वाली संस्था है। जिसके सामने कांग्रेस नेताओं को अपना पक्ष रखना चाहिए। लेकिन यहां तो चोर की दाढ़ी में तिनका नजर आता है। केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा मुझे लगता है कि कांग्रेस नेताओं को अपने गिरेबां में झांकना चाहिए। जहां तक केंद्रीय एजेंसी ED का सब्जेक्ट है। सांच को आंच नहीं होती। ऐसी कहावत हमारे देश में प्रचलित है। अगर किसी ने पाप नहीं किया है तो उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन जिसने भी पाप किया है, गबन किया है, आर्थिक अपराध किया है, वो बचना भी नहीं चाहिए। केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कांग्रेस नेता भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। जब कोई जांच एजेंसी उन्हें केस में पक्ष रखने के लिए बुलाती हैं, तो वह अपने नेताओं को बुलाकर प्रदर्शन करवाते हैं और एजेंसियों पर अनुचित दबाव डालते हैं। ED राहुल गांधी को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया। इसमें केंद्र सरकार का कोई रोल नहीं है। लेकिन अब जनता भी कांग्रेस का चरित्र जान गई है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़ ने कहा कांग्रेस आखिर किस बात का सत्याग्रह कर रही है। पहले उसने गांधीजी का नाम हड़पा और अब झूठा सत्याग्रह कर रही है। कांग्रेस नेताओं का यह प्रदर्शन देश के संविधान और कानून के खिलाफ है। क्या राहुल और सोनिया गांधी नहीं चाहते कि देश में कानून का राज चले। यदि चाहते हैं तो फिर उन्हें किस बात का डर और भय है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
वापू की प्रम प्रसादी ३३७ जा मित्र आश्रम के साथ अपना सबध बरावर बनाए रहे है अर्थात बुधाभाई और जेठाभाई, वे आश्रम में अवैतनिक प्रबंधको की हैसियत से रहने को प्रस्तुत है । उनके अपना निर्वाह करने के निजी साधन है और वे चिरकाल से हरिजना को सेवा म लग आ रह है। आश्रम मे एक और यक्ति एसा है जिसने अपना जीवन हरिजन सेवा के लिए अर्पित कर दिया है और जो आश्रम में रहने को प्रस नतापूवव राजी हो जायेगा । वह हरिजन बालक-बालिकाजा के शिक्षण काय म विशेषन सा बन गया है । अत मेन वैसी समिति का सुझाव दिया है। उसके लिए ट्रस्ट का प्रबंध करना कठिन नही होगा, न यही जावश्यक है कि मैंने काय शोलता के जो जो अग गिनाए है उन सवा एक्साथ और तुरत ही हाथ मे निया जाए। तुम्ह मालूम हो है कि इस समय भी आश्रम में कुछ हरिजन परिवार रह रहे हैं । आश्रम के सदस्यो वा बराबर यही स्वप्न रहा है कि हरिजन परिवारा को एक वस्ती बने, पर कुछ एक परिवार को बसाने के सिवा अभी तक इस दिशा में विशेष प्रगति नही हुई है । चमडा कमाने के प्रयोग भी किये गये थे। आश्रम के परित्याग की घडी तक चप्पलें बनाई जा रही थी। आश्रम की इमारतो म एक बडा सा छात्रावास भी है जिसम १०० छात्र आराम से रह सकते हैं । कपडा बुनने के लिए एक काफी बडा शेड है और मैंने जो काम गिनाये है उनकी व्यवस्था जय इमारता म सुगमता से हो सकती है। यह सम्पत्ति १०० एकड भूमि में फली हुइ है । इसलिए मैं यह वह सकता हू कि उल्लिखित उद्देश्या की पूर्ति के लिए स्थान आवश्यकता से भी बड़ा है पर जाग चलकर इस वायशीलता म जितनी वृद्धि को जाशा ह उस ध्यान में रखा जाए, तो स्थान कुछ बहुत वडा भी नही है । आशा है सोसाइटी ट्रस्टिया के प्रस्ताव को स्वीकार करेगी तथा इसम निहित उत्तरदायित्व वा भली भानि निर्वाह करगी। श्री घनश्यामदास विडला प्रधान हरिजन सेवन मण्डल बिडला मिल, दिल्ली ! भवदीय मो०० गाधी ३३८ बापू की प्रेम प्रसादा आश्रम को मडल का सौंपने के आपके प्रस्ताव को मंजूर करन की सूचना मैंने तार द्वारा द दी है। पहले तो मैं इस दुविधा में पड़ गया कि आश्रम की देखरेख का काम इतनी दूर से कसे निभाया जायेगा पर फिर इस जानकारी न कि आपके कुछ विश्वासी आदमी आश्रम में ही रहगे मेरे सशय का निवारण कर दिया। मुय जाता है कि आपने हम लोगाम जो आस्था व्यक्त की है हम अपने आपको उसका अधिकारी साबित कर सकेंगे। मैंने वाद्रीय वोड के सदस्या की राय लिये बिना ही आपका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया क्योंकि मुझे पूरा भरोसा था कि वे मेरे वाय का सहप अनुमोदन करेंगे। आपने अपने पत्र के दूसरे परे म जो चार उद्देश्य गिनाये हैं उन्हे मण्डल हमेशा अपने सामने रखेगा । आपकी देन और हमारी मजूरी के फलस्वरूप वुछ विचारणीय प्रश्न और उठ खड़े हुए है। अब तक हमारे पास बक् म जमा रक्म को छोड़ किसी प्रकार की सम्पत्ति नहीं थी हा हम एक हरिजन छात्रावास के लिए दिल्ली म जमीन खरीदन की वात अवश्य सोच रहे थ। पर अब आपकी देन वा स्वीकार करने के बाद हमारे पास बहुमूल्य अचल सम्पत्ति हो जायेगी। प्रश्न तत्काल उठता है कि इस सम्पत्ति का स्वामी कौन होगा ? क्या हरिजन मण्डल ? यदि ऐसी बात है तो यावहारिक दृष्टि से हरिजन मण्डल से अभिप्राय उन लोगो से होगा जिनकी अनुमति से वह अस्तित्व में हो जबकि इस समय मडल म अनुमति नाम से की कोई वस्तु नही है । फलत हम यह निर्णय करना होगा वि हम भविष्य के लिए किस प्रकार का विधान बनायें। मैं संस्थाओं के गठन के मामले में जरूरत स ज्यादा प्रजातवीय तत्व रखने के पक्ष में नहीं हू । प्रबंधवाय म प्रजातनीय तत्वा को प्रश्रय दने का एकमात्र परिणाम यह होता है कि दलबादी को प्रोत्साहन मिलता है । और राजमर्रा की व्यवस्था में कठिनाइया उपस्थित होती है। पर साथ ही जहा लाखो की सम्पत्तिवाली संस्था के प्रबंध का प्रश्न हा वहा आवश्य बता से अधिक एक्तवाय विधान भी ठीक नहीं है । शायद इन दोनों प्रकार के दूपणा से वचन का उचित माग यही होगा कि विधान न ता जरूरत से ज्यादा एक्तत्त्रीय हा और न आवश्यक्ता से अधिक प्रजातनीय । पता नही आपको यह सुझाव वसा लगगा कि कोई एक दजन ऐसे यक्तियों को छाटा जाय जो आजीवन बापू की प्रम प्रसादी ३३६ मडल की सेवा का व्रत लें। इही को सस्थापक सदस्य माना जाए और क्वल ये ही वोट देने के अधिकारी हो । जो अपेक्षाकृत अधिक व्यापक अधिकार अध्यक्ष कामिल हुए है, वे सदस्या का दिये जाए। यदि आपका यह सुयाव रुचिकर लग, तो मेरा दूसरा सुझाव यह है कि सम्पत्ति को रखने के लिए टस्टिया का एक जलग बोड बनाया जाय। उस बोड का यह अधिकार रह कि यदि वह यह देखे कि हरिजन बोड सम्पत्ति का उचित उपयोग नहीं कर रहा है तो वह सम्पत्ति को उससे वापस ले ले । यह दूसरा सुझाव तभी अपनाना ठीक रहेगा, जब हम यह फसला करें कि मडल का प्रजातवीय ढाचा ही उपादेय है। आपने पाच यक्तिया की समिति के गठन का सुझाव दिया है। इनमें से तीन व्यक्ति जहमदाबाद के नागरिक होंगे तथा बाकी दा व्यक्ति मडल के अध्यक्ष और मत्री हाग। मुझे यह ज्ञान नहीं है कि इस समिति के जिम्मे ट्रस्टियो के रूप मे आश्रम को सम्पत्ति के प्रबध का काम रहेगा, अथवा वह परामश मात्र देगी। यदि यह समिति ट्रस्टियो वे रूप में काम करेगी, तो इस व्यवस्था में मडल की क्या हैसियत होगी और जहमदाबाद के नागरिका के निर्वाचन में कौन-सी प्रणाली अपनाई जायेगी ? और यदि ट्रस्ट बोड प्रजातनीय ढांचे का होगा तो उसमें मडल के अध्यक्ष और मत्रो मण्डल का क्सि रूप में प्रतिनिधित्व करेंगे ? अपने वतमान रूप में विधान के अतगत क्या कठिनाइया उपस्थित होगी तथा हद दर्जे के प्रजातन्त्रीय विधान के अन्तगत क्या कठिनाइया सामने आयेंगी इसका में समझता हू मैंने यथेष्ट दिग्दशन करा दिया है। मैं चाहता हू कि जाप इस प्रश्न पर भली भाति विचार करवे मुझे अपना सुझाव दें । यदि हम किसी सम्पत्ति का जिम्मा नही लेना हो तब तो वर्तमान विधान ही अच्छा खासा है। महात्मा मो० क० गाधो,
वापू की प्रम प्रसादी तीन सौ सैंतीस जा मित्र आश्रम के साथ अपना सबध बरावर बनाए रहे है अर्थात बुधाभाई और जेठाभाई, वे आश्रम में अवैतनिक प्रबंधको की हैसियत से रहने को प्रस्तुत है । उनके अपना निर्वाह करने के निजी साधन है और वे चिरकाल से हरिजना को सेवा म लग आ रह है। आश्रम मे एक और यक्ति एसा है जिसने अपना जीवन हरिजन सेवा के लिए अर्पित कर दिया है और जो आश्रम में रहने को प्रस नतापूवव राजी हो जायेगा । वह हरिजन बालक-बालिकाजा के शिक्षण काय म विशेषन सा बन गया है । अत मेन वैसी समिति का सुझाव दिया है। उसके लिए ट्रस्ट का प्रबंध करना कठिन नही होगा, न यही जावश्यक है कि मैंने काय शोलता के जो जो अग गिनाए है उन सवा एक्साथ और तुरत ही हाथ मे निया जाए। तुम्ह मालूम हो है कि इस समय भी आश्रम में कुछ हरिजन परिवार रह रहे हैं । आश्रम के सदस्यो वा बराबर यही स्वप्न रहा है कि हरिजन परिवारा को एक वस्ती बने, पर कुछ एक परिवार को बसाने के सिवा अभी तक इस दिशा में विशेष प्रगति नही हुई है । चमडा कमाने के प्रयोग भी किये गये थे। आश्रम के परित्याग की घडी तक चप्पलें बनाई जा रही थी। आश्रम की इमारतो म एक बडा सा छात्रावास भी है जिसम एक सौ छात्र आराम से रह सकते हैं । कपडा बुनने के लिए एक काफी बडा शेड है और मैंने जो काम गिनाये है उनकी व्यवस्था जय इमारता म सुगमता से हो सकती है। यह सम्पत्ति एक सौ एकड भूमि में फली हुइ है । इसलिए मैं यह वह सकता हू कि उल्लिखित उद्देश्या की पूर्ति के लिए स्थान आवश्यकता से भी बड़ा है पर जाग चलकर इस वायशीलता म जितनी वृद्धि को जाशा ह उस ध्यान में रखा जाए, तो स्थान कुछ बहुत वडा भी नही है । आशा है सोसाइटी ट्रस्टिया के प्रस्ताव को स्वीकार करेगी तथा इसम निहित उत्तरदायित्व वा भली भानि निर्वाह करगी। श्री घनश्यामदास विडला प्रधान हरिजन सेवन मण्डल बिडला मिल, दिल्ली ! भवदीय मोशून्य गाधी तीन सौ अड़तीस बापू की प्रेम प्रसादा आश्रम को मडल का सौंपने के आपके प्रस्ताव को मंजूर करन की सूचना मैंने तार द्वारा द दी है। पहले तो मैं इस दुविधा में पड़ गया कि आश्रम की देखरेख का काम इतनी दूर से कसे निभाया जायेगा पर फिर इस जानकारी न कि आपके कुछ विश्वासी आदमी आश्रम में ही रहगे मेरे सशय का निवारण कर दिया। मुय जाता है कि आपने हम लोगाम जो आस्था व्यक्त की है हम अपने आपको उसका अधिकारी साबित कर सकेंगे। मैंने वाद्रीय वोड के सदस्या की राय लिये बिना ही आपका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया क्योंकि मुझे पूरा भरोसा था कि वे मेरे वाय का सहप अनुमोदन करेंगे। आपने अपने पत्र के दूसरे परे म जो चार उद्देश्य गिनाये हैं उन्हे मण्डल हमेशा अपने सामने रखेगा । आपकी देन और हमारी मजूरी के फलस्वरूप वुछ विचारणीय प्रश्न और उठ खड़े हुए है। अब तक हमारे पास बक् म जमा रक्म को छोड़ किसी प्रकार की सम्पत्ति नहीं थी हा हम एक हरिजन छात्रावास के लिए दिल्ली म जमीन खरीदन की वात अवश्य सोच रहे थ। पर अब आपकी देन वा स्वीकार करने के बाद हमारे पास बहुमूल्य अचल सम्पत्ति हो जायेगी। प्रश्न तत्काल उठता है कि इस सम्पत्ति का स्वामी कौन होगा ? क्या हरिजन मण्डल ? यदि ऐसी बात है तो यावहारिक दृष्टि से हरिजन मण्डल से अभिप्राय उन लोगो से होगा जिनकी अनुमति से वह अस्तित्व में हो जबकि इस समय मडल म अनुमति नाम से की कोई वस्तु नही है । फलत हम यह निर्णय करना होगा वि हम भविष्य के लिए किस प्रकार का विधान बनायें। मैं संस्थाओं के गठन के मामले में जरूरत स ज्यादा प्रजातवीय तत्व रखने के पक्ष में नहीं हू । प्रबंधवाय म प्रजातनीय तत्वा को प्रश्रय दने का एकमात्र परिणाम यह होता है कि दलबादी को प्रोत्साहन मिलता है । और राजमर्रा की व्यवस्था में कठिनाइया उपस्थित होती है। पर साथ ही जहा लाखो की सम्पत्तिवाली संस्था के प्रबंध का प्रश्न हा वहा आवश्य बता से अधिक एक्तवाय विधान भी ठीक नहीं है । शायद इन दोनों प्रकार के दूपणा से वचन का उचित माग यही होगा कि विधान न ता जरूरत से ज्यादा एक्तत्त्रीय हा और न आवश्यक्ता से अधिक प्रजातनीय । पता नही आपको यह सुझाव वसा लगगा कि कोई एक दजन ऐसे यक्तियों को छाटा जाय जो आजीवन बापू की प्रम प्रसादी तीन सौ छत्तीस मडल की सेवा का व्रत लें। इही को सस्थापक सदस्य माना जाए और क्वल ये ही वोट देने के अधिकारी हो । जो अपेक्षाकृत अधिक व्यापक अधिकार अध्यक्ष कामिल हुए है, वे सदस्या का दिये जाए। यदि आपका यह सुयाव रुचिकर लग, तो मेरा दूसरा सुझाव यह है कि सम्पत्ति को रखने के लिए टस्टिया का एक जलग बोड बनाया जाय। उस बोड का यह अधिकार रह कि यदि वह यह देखे कि हरिजन बोड सम्पत्ति का उचित उपयोग नहीं कर रहा है तो वह सम्पत्ति को उससे वापस ले ले । यह दूसरा सुझाव तभी अपनाना ठीक रहेगा, जब हम यह फसला करें कि मडल का प्रजातवीय ढाचा ही उपादेय है। आपने पाच यक्तिया की समिति के गठन का सुझाव दिया है। इनमें से तीन व्यक्ति जहमदाबाद के नागरिक होंगे तथा बाकी दा व्यक्ति मडल के अध्यक्ष और मत्री हाग। मुझे यह ज्ञान नहीं है कि इस समिति के जिम्मे ट्रस्टियो के रूप मे आश्रम को सम्पत्ति के प्रबध का काम रहेगा, अथवा वह परामश मात्र देगी। यदि यह समिति ट्रस्टियो वे रूप में काम करेगी, तो इस व्यवस्था में मडल की क्या हैसियत होगी और जहमदाबाद के नागरिका के निर्वाचन में कौन-सी प्रणाली अपनाई जायेगी ? और यदि ट्रस्ट बोड प्रजातनीय ढांचे का होगा तो उसमें मडल के अध्यक्ष और मत्रो मण्डल का क्सि रूप में प्रतिनिधित्व करेंगे ? अपने वतमान रूप में विधान के अतगत क्या कठिनाइया उपस्थित होगी तथा हद दर्जे के प्रजातन्त्रीय विधान के अन्तगत क्या कठिनाइया सामने आयेंगी इसका में समझता हू मैंने यथेष्ट दिग्दशन करा दिया है। मैं चाहता हू कि जाप इस प्रश्न पर भली भाति विचार करवे मुझे अपना सुझाव दें । यदि हम किसी सम्पत्ति का जिम्मा नही लेना हो तब तो वर्तमान विधान ही अच्छा खासा है। महात्मा मोशून्य कशून्य गाधो,
>BAREILLY: पत्नी-पत्नी के बीच की लड़ाई की गूंज गवर्नर हाउस तक पहुंच गई है। दरअसल, एक महिला ने आरयू के एक प्रोफेसर के बारे में आरटीआई से इंफॉर्मेशन मांगी तो आरयू ने नहीं दी। जिसके बाद उसने इसकी कंप्लेन गर्वनर हाउस में की। जिसके बाद गर्वनर ने मुशहिद हुसैन को मामले की जांच के निर्देश ि1दए हैं। आरयू के इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट ऑफ इंजीनियरिंग(ईई) के प्रोफेसर मुकुल कुमार का पत्नी प्रतिभा वर्मा से विवाद चल रहा है। महिला का आरोप है कि पति दहेज की मांग की। मांग पूरी नहीं होने पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान घर से निकाल दिया। मजबूरी में मायके जाकर रहना पड़ा। जहां एक बेटी को जन्म दिया। इसी दौरान पति ने फोन कर तलाक मांगा। साथ ही पीलीभीत के परिवार न्यायालय में वाद दायर कर दिया। जिसमें प्रोफेसर ने अपने आप को बेरोजगार बताया। जबकि, हकीकत में वह आरयू के इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट ऑफ इंजीनियरिंग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। प्रतिभा वर्मा का आरोप है कि यूनिवर्सिटी से जब आरटीआई के तहत आरोपी का ब्योरा मांगा, तो उसके दबाव में एडमिनिस्ट्रेशन ने जानकारी देने से मना कर दिया। महिला ने 29 दिसंबर 2016 को गवर्नर राम नाइक को शिकायती पत्र लिखा। वहीं इस मामले में गवर्नर ने आरयू वीसी प्रो। मुशाहिद हुसैन से प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। वीसी ने रजिस्ट्रार डॉ। एसएल मौर्य को निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द महिला को सूचना उपलब्ध कराई जाए।
>BAREILLY: पत्नी-पत्नी के बीच की लड़ाई की गूंज गवर्नर हाउस तक पहुंच गई है। दरअसल, एक महिला ने आरयू के एक प्रोफेसर के बारे में आरटीआई से इंफॉर्मेशन मांगी तो आरयू ने नहीं दी। जिसके बाद उसने इसकी कंप्लेन गर्वनर हाउस में की। जिसके बाद गर्वनर ने मुशहिद हुसैन को मामले की जांच के निर्देश िएकदए हैं। आरयू के इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट ऑफ इंजीनियरिंग के प्रोफेसर मुकुल कुमार का पत्नी प्रतिभा वर्मा से विवाद चल रहा है। महिला का आरोप है कि पति दहेज की मांग की। मांग पूरी नहीं होने पर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया। साथ ही प्रेगनेंसी के दौरान घर से निकाल दिया। मजबूरी में मायके जाकर रहना पड़ा। जहां एक बेटी को जन्म दिया। इसी दौरान पति ने फोन कर तलाक मांगा। साथ ही पीलीभीत के परिवार न्यायालय में वाद दायर कर दिया। जिसमें प्रोफेसर ने अपने आप को बेरोजगार बताया। जबकि, हकीकत में वह आरयू के इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट ऑफ इंजीनियरिंग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। प्रतिभा वर्मा का आरोप है कि यूनिवर्सिटी से जब आरटीआई के तहत आरोपी का ब्योरा मांगा, तो उसके दबाव में एडमिनिस्ट्रेशन ने जानकारी देने से मना कर दिया। महिला ने उनतीस दिसंबर दो हज़ार सोलह को गवर्नर राम नाइक को शिकायती पत्र लिखा। वहीं इस मामले में गवर्नर ने आरयू वीसी प्रो। मुशाहिद हुसैन से प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। वीसी ने रजिस्ट्रार डॉ। एसएल मौर्य को निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द महिला को सूचना उपलब्ध कराई जाए।
यूके में लगातार बढ़ रहे कोरोना के मामलों और मृतकों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी के बीच प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। बोरिस ने देश में लॉकडाउन को आगे बढ़ाने के साथ-साथ नई रूपरेखा भी तैयार की है। यूके के पीएम ने रविवार को देश में लगे लॉकडाउन को एक जून तक बढ़ाने का फैसला किया, साथ ही सार्वजनिक स्थानों को खोलने के लिए जुलाई के पहले हफ्ते की समयसीमा रखी। हालांकि बोरिस ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के मद्देनजर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। उन्होंने कहा कि जो लोग घर से काम कर सकते हैं वो करें लेकिन जिन्हें बाहर जाकर काम करने की जरुरत है, वे बाहर निकलकर काम कर सकते हैं। बोरिस ने साथ ही लोगों से कहा कि वे नजदीकी पार्कों और घर के बाहर में अपने परिवार के साथ एक्सरसाइज कर सकते हैं, खेल भी सकते हैं, जिन्हें किसी दूसरी जगह जाना, वे अपनी गाड़ी से जा सकते हैं। हालांकि इस दौरान मास्क लगाना सभी के लिए अनिवार्य होगा। जॉनसन ने साफ संकेत दिया है कि अगर मामले बढ़े तो पाबंदियां बढ़ाई जा सकती हैं। जॉनसन ने कुछ छूट के साथ दिशानिर्देश जारी किये हैं। आप स्थानीय पार्क में सूरज के नीचे बैठ सकते है, किसी दूसरी जगह जा सकते हैं, खेल सकते हैं लेकिन सिर्फ अपने परिवार के लोगों के साथ। काम पर लौटने वाले लोग सार्वजनिक वाहनों का कम से कम इस्तेमाल करें। देश में आने वाले व्यक्ति को तुरंत क्वारंटीन होना पड़ेगा। बायोसिक्योरिटी सेंटर द्वारा नया अलर्ट सिस्टम लगाया जाएगा। प्राइमरी स्कूल्स एक जून से खुल सकेंगे, लेकिन उसका फैसला परिस्थिति को देखकर होगा। एक जुलाई से अधिक दुकानें और होटल खुल पाएंगे। बता दें कि यूके इस वक्त सबसे ज्यादा संक्रमितों के मामले में तीसरे स्थान पर है, यहां दो लाख से अधिक लोग संक्रमित हैं और 31,000 से अधिक की मौत हुई है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
यूके में लगातार बढ़ रहे कोरोना के मामलों और मृतकों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी के बीच प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। बोरिस ने देश में लॉकडाउन को आगे बढ़ाने के साथ-साथ नई रूपरेखा भी तैयार की है। यूके के पीएम ने रविवार को देश में लगे लॉकडाउन को एक जून तक बढ़ाने का फैसला किया, साथ ही सार्वजनिक स्थानों को खोलने के लिए जुलाई के पहले हफ्ते की समयसीमा रखी। हालांकि बोरिस ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के मद्देनजर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। उन्होंने कहा कि जो लोग घर से काम कर सकते हैं वो करें लेकिन जिन्हें बाहर जाकर काम करने की जरुरत है, वे बाहर निकलकर काम कर सकते हैं। बोरिस ने साथ ही लोगों से कहा कि वे नजदीकी पार्कों और घर के बाहर में अपने परिवार के साथ एक्सरसाइज कर सकते हैं, खेल भी सकते हैं, जिन्हें किसी दूसरी जगह जाना, वे अपनी गाड़ी से जा सकते हैं। हालांकि इस दौरान मास्क लगाना सभी के लिए अनिवार्य होगा। जॉनसन ने साफ संकेत दिया है कि अगर मामले बढ़े तो पाबंदियां बढ़ाई जा सकती हैं। जॉनसन ने कुछ छूट के साथ दिशानिर्देश जारी किये हैं। आप स्थानीय पार्क में सूरज के नीचे बैठ सकते है, किसी दूसरी जगह जा सकते हैं, खेल सकते हैं लेकिन सिर्फ अपने परिवार के लोगों के साथ। काम पर लौटने वाले लोग सार्वजनिक वाहनों का कम से कम इस्तेमाल करें। देश में आने वाले व्यक्ति को तुरंत क्वारंटीन होना पड़ेगा। बायोसिक्योरिटी सेंटर द्वारा नया अलर्ट सिस्टम लगाया जाएगा। प्राइमरी स्कूल्स एक जून से खुल सकेंगे, लेकिन उसका फैसला परिस्थिति को देखकर होगा। एक जुलाई से अधिक दुकानें और होटल खुल पाएंगे। बता दें कि यूके इस वक्त सबसे ज्यादा संक्रमितों के मामले में तीसरे स्थान पर है, यहां दो लाख से अधिक लोग संक्रमित हैं और इकतीस,शून्य से अधिक की मौत हुई है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
Delhi Violence : सीएए और एनआरसी को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन में दिल्ली में सोमवार को हुई हिंसा पर पूर्व राज्यसभा सांसद और लेखक जावेद अख्तर का रिएक्शन सामने आया है. जावेद अख्तर ने देश की राजधानी में हुई इस प्रकार की हिंसा की निंदा की है. जावेद अख्तर ने अपने ट्वीट में कहा, "दिल्ली में हिंसा का स्तर किस कदर बढ़ गया है. सभा कपिल मिश्राओं को बेपर्दा हो रहे हैं. ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि दिल्ली के आम निवासियों को ये यकीन दिलाया जा सके कि ये सब सीएए के विरोध प्रदर्शन के कारण हो रहा है. और कुछ समय बाद दिल्ली पुलिस इसका समाधान निकाल लेगी. " आपको यहां बता दें कि सोमवार को राजधानी दिल्ली में सीएए विरोधियों और समर्थकों के बीच हुई हिंसा हुई. इस हिंसा ने कल पूरे देश को दहला दिया. जाफराबाद और मौजपुर में कई कई गाड़ियों, दुकानों और मकानों में आग लगा दी गई. झड़प में दिल्ली पुलिस के एक कॉन्सटेबल समेत चार आम नागरिकों की मौत हो गई. वहीं, इस सब के बीच बीजेपी नेता कपिल मिश्रा का एक बयान लगातार वायरल हो रहा है. इस बयान में कपिल मिश्रा कहते नजर आ रहे थे कि यदि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चले जाने तक पुलिस प्रदर्शनकारियों को सड़कों से हटा दें नहीं तो उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ेगा.
Delhi Violence : सीएए और एनआरसी को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन में दिल्ली में सोमवार को हुई हिंसा पर पूर्व राज्यसभा सांसद और लेखक जावेद अख्तर का रिएक्शन सामने आया है. जावेद अख्तर ने देश की राजधानी में हुई इस प्रकार की हिंसा की निंदा की है. जावेद अख्तर ने अपने ट्वीट में कहा, "दिल्ली में हिंसा का स्तर किस कदर बढ़ गया है. सभा कपिल मिश्राओं को बेपर्दा हो रहे हैं. ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि दिल्ली के आम निवासियों को ये यकीन दिलाया जा सके कि ये सब सीएए के विरोध प्रदर्शन के कारण हो रहा है. और कुछ समय बाद दिल्ली पुलिस इसका समाधान निकाल लेगी. " आपको यहां बता दें कि सोमवार को राजधानी दिल्ली में सीएए विरोधियों और समर्थकों के बीच हुई हिंसा हुई. इस हिंसा ने कल पूरे देश को दहला दिया. जाफराबाद और मौजपुर में कई कई गाड़ियों, दुकानों और मकानों में आग लगा दी गई. झड़प में दिल्ली पुलिस के एक कॉन्सटेबल समेत चार आम नागरिकों की मौत हो गई. वहीं, इस सब के बीच बीजेपी नेता कपिल मिश्रा का एक बयान लगातार वायरल हो रहा है. इस बयान में कपिल मिश्रा कहते नजर आ रहे थे कि यदि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चले जाने तक पुलिस प्रदर्शनकारियों को सड़कों से हटा दें नहीं तो उन्हें सड़कों पर उतरना पड़ेगा.
उनके जवाब में एक घराती भी गरमाये सुर से बोल उठा--दाना के लायक बस एक घोड़ा है। दो पसेरी उसके बास्ते काफी है। गदहों के वास्ते हमारे यहाँ दाना नहीं है । भूसा चाहे गाड़ी लदवा लीजिये । गदहों की बात सुनकर सुक्खु तिवारी और भी भवक उठेगदहे लाये हैं, तब तो हम धोबी हुए। अब तो हम हरगिज ब्याह नहीं करेंगे। कोई है रे, बुलाओ कहारों को ! इसी रात को दुलहे को घर पहुँचा दें । हो चुका यहाँ ब्याह । रक्खें अपनी लड़की अपने घरअचार डाले ! हमारे लड़का है, तो बहुत कनिया मिलेगी। दुनिया में कनिया का अकाल थोड़े है । घरातियों में से एक आदमी आगे बढ़कर बोला- किसका ऐसा कलेजा है कि दुलहे को इस गाँव के सिवाने से बाहर ले जायगा ? उसके धड़ पर हमलोग सिर रहने देंगे ? लड़का तो अब हमारा हो चुका, ब्याह किसी के बाप के रोके नहीं रुक सकता। लड़की के अचार डालने की चाल आप ही के गाँव में होगी ! हमारे यहाँ आपके गाँव-जैसी छुटखेली नहीं होती ! इसी तरह बात ही बात में बहुत बढ़ गई । मूसन तिवारी अपने छोटे भाई को मना करते ही रह गये, बाबूजी बीच-बराव करते-करते थक गये, मगर कोई समझदार न निकला ! तब तक गाँववाले लड़ लेकर आ जुटे । बाबुजी झगड़े को तूल पकड़ते देखकर सुख तिवारी की बाँह पकड़े हुए छोलदारी के अन्दर खींच ले गये । एक घराती ने कहारों को डाँटकर कहा- लगन की घड़ी बीत रही है। भले आदमी की तरह तुमलोग घर को मँड़वे में ले चलो, नहीं तो मुंज की तरह यहीं थूरेंगे । दुलहे को ले जाने की बात सुनते ही सुक्खु तिवारी को घूरनसिंह के जिम्मे कर बाबूजी झटपट रावटी से बाहर आ गये। किसी-किसी
उनके जवाब में एक घराती भी गरमाये सुर से बोल उठा--दाना के लायक बस एक घोड़ा है। दो पसेरी उसके बास्ते काफी है। गदहों के वास्ते हमारे यहाँ दाना नहीं है । भूसा चाहे गाड़ी लदवा लीजिये । गदहों की बात सुनकर सुक्खु तिवारी और भी भवक उठेगदहे लाये हैं, तब तो हम धोबी हुए। अब तो हम हरगिज ब्याह नहीं करेंगे। कोई है रे, बुलाओ कहारों को ! इसी रात को दुलहे को घर पहुँचा दें । हो चुका यहाँ ब्याह । रक्खें अपनी लड़की अपने घरअचार डाले ! हमारे लड़का है, तो बहुत कनिया मिलेगी। दुनिया में कनिया का अकाल थोड़े है । घरातियों में से एक आदमी आगे बढ़कर बोला- किसका ऐसा कलेजा है कि दुलहे को इस गाँव के सिवाने से बाहर ले जायगा ? उसके धड़ पर हमलोग सिर रहने देंगे ? लड़का तो अब हमारा हो चुका, ब्याह किसी के बाप के रोके नहीं रुक सकता। लड़की के अचार डालने की चाल आप ही के गाँव में होगी ! हमारे यहाँ आपके गाँव-जैसी छुटखेली नहीं होती ! इसी तरह बात ही बात में बहुत बढ़ गई । मूसन तिवारी अपने छोटे भाई को मना करते ही रह गये, बाबूजी बीच-बराव करते-करते थक गये, मगर कोई समझदार न निकला ! तब तक गाँववाले लड़ लेकर आ जुटे । बाबुजी झगड़े को तूल पकड़ते देखकर सुख तिवारी की बाँह पकड़े हुए छोलदारी के अन्दर खींच ले गये । एक घराती ने कहारों को डाँटकर कहा- लगन की घड़ी बीत रही है। भले आदमी की तरह तुमलोग घर को मँड़वे में ले चलो, नहीं तो मुंज की तरह यहीं थूरेंगे । दुलहे को ले जाने की बात सुनते ही सुक्खु तिवारी को घूरनसिंह के जिम्मे कर बाबूजी झटपट रावटी से बाहर आ गये। किसी-किसी
नयी दिल्ली, 28 सितंबर सिक्किम सरकार ने राज्य को फिल्म निर्माण के प्रमुख स्थल के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से 'पर्यावरण धरोहर फिल्म गांव' के विकास का प्रस्ताव पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डोनर) के पास भेजा है । उन्होंने कहा कि सिक्किम सरकार चाहती है कि देश-विदेश के फिल्म निर्माता राज्य में आएं और फिल्मों का निर्माण करें। शर्मा ने कहा, " राज्य में फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये हमने 100 फिल्म शूटिंग स्थलों का चयन किया है जो प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से काफी समृद्ध हैं । हमने फिल्म नीति बनाई है जिसमें स्थानीय एवं राष्ट्रीय स्तर के फिल्म निर्माताओं को प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। इस दौरान शर्मा ने 10 दिसंबर से दूसरा सिक्किम वैश्विक फिल्म समारोह आयोजित किये जाने की भी घोषणा की । सिक्किम फिल्म प्रोत्साहन बोर्ड की अध्यक्ष पूजा शर्मा ने कहा कि कोई फिल्म निर्माता अगर राज्य में फिल्म की 75 प्रतिशत शूटिंग करेगा और 50 स्थानीय कलाकारों को लेगा, तो उसे प्रदेश सरकार से योजना के तहत लाभ मिलेगा। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
नयी दिल्ली, अट्ठाईस सितंबर सिक्किम सरकार ने राज्य को फिल्म निर्माण के प्रमुख स्थल के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से 'पर्यावरण धरोहर फिल्म गांव' के विकास का प्रस्ताव पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के पास भेजा है । उन्होंने कहा कि सिक्किम सरकार चाहती है कि देश-विदेश के फिल्म निर्माता राज्य में आएं और फिल्मों का निर्माण करें। शर्मा ने कहा, " राज्य में फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये हमने एक सौ फिल्म शूटिंग स्थलों का चयन किया है जो प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से काफी समृद्ध हैं । हमने फिल्म नीति बनाई है जिसमें स्थानीय एवं राष्ट्रीय स्तर के फिल्म निर्माताओं को प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। इस दौरान शर्मा ने दस दिसंबर से दूसरा सिक्किम वैश्विक फिल्म समारोह आयोजित किये जाने की भी घोषणा की । सिक्किम फिल्म प्रोत्साहन बोर्ड की अध्यक्ष पूजा शर्मा ने कहा कि कोई फिल्म निर्माता अगर राज्य में फिल्म की पचहत्तर प्रतिशत शूटिंग करेगा और पचास स्थानीय कलाकारों को लेगा, तो उसे प्रदेश सरकार से योजना के तहत लाभ मिलेगा। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने जन्मदिन के अवसर पर परिवार संग केक काटा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर उन्होंने परिवार के साथ की कुछ तस्वीरें ट्वीटर पर शेयर की है। इस खास मौके पर उन्होंने परिवार के साथ की कुछ तस्वीरें ट्वीटर पर शेयर की है। साथ ही बड़े ही भावुक अंदाज में लिखा है - कि जीवन की यात्रा चलती रहती है और परिवार स्थायी हमसफर होता है। जिनका संबल आजीवन मिलता है। आज एक पड़ाव और पार हो रहा है। तस्वीरों में भूपेश बघेल अपनी धर्मपत्नी के साथ नजर आ रहे हैं।
रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने जन्मदिन के अवसर पर परिवार संग केक काटा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर उन्होंने परिवार के साथ की कुछ तस्वीरें ट्वीटर पर शेयर की है। इस खास मौके पर उन्होंने परिवार के साथ की कुछ तस्वीरें ट्वीटर पर शेयर की है। साथ ही बड़े ही भावुक अंदाज में लिखा है - कि जीवन की यात्रा चलती रहती है और परिवार स्थायी हमसफर होता है। जिनका संबल आजीवन मिलता है। आज एक पड़ाव और पार हो रहा है। तस्वीरों में भूपेश बघेल अपनी धर्मपत्नी के साथ नजर आ रहे हैं।
नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बैंक खातों व अन्य सेवाओं के लिए आधार कार्ड लिंक करवाने की तारीख 31 मार्च 2018 तक के लिए बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, एटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने अदालत के सामने कहा कि मोबाइल नंबर से आधार लिंक करवाने की तारीख 6 फरवरी ही रहेगी। एटॉर्नी जनरल ने अदालत को यह भी बताया कि डेटा प्रोटेक्शन कमेटी सरकार के सामने अपनी अंतिम रिपोर्ट फरवरी 2018 तक रख देगी। बता दें कि सरकार ने न सिर्फ अहम सेवाओं से आधार को लिंक करवाना अनिवार्य किया है बल्कि उसने इसके लिए कुछ निश्चित तारीखों का भी ऐलान किया है। अब तक अधिकतर कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए 31 दिसंबर, 2017 तक आधार कार्ड को लिंक कराना जरूरी था। आधार की अनिवार्यता पर रोक की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक बेंच गठित करने की बात कही है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि अगले सप्ताह अदालत 5 सदस्यीय संविधान पीठ का गठन करेगी, जो अर्जियों पर सुनवाई करेगी। सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने कहा कि आधार कार्ड की अनिवार्यता पर अब रोक नहीं लगाई जा सकती क्योंकि अब इस पर काफी आगे बढ़ा जा चुका है और कई साल बीत गए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस मसले पर बहस करने के लिए तैयार है। केस की सुनवाई के दौरान आधार कार्ड की अनिवार्यता को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत से मामले को तेजी से निपटाने की भी मांग की।
नई दिल्लीः केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि बैंक खातों व अन्य सेवाओं के लिए आधार कार्ड लिंक करवाने की तारीख इकतीस मार्च दो हज़ार अट्ठारह तक के लिए बढ़ाई जा सकती है। हालांकि, एटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने अदालत के सामने कहा कि मोबाइल नंबर से आधार लिंक करवाने की तारीख छः फरवरी ही रहेगी। एटॉर्नी जनरल ने अदालत को यह भी बताया कि डेटा प्रोटेक्शन कमेटी सरकार के सामने अपनी अंतिम रिपोर्ट फरवरी दो हज़ार अट्ठारह तक रख देगी। बता दें कि सरकार ने न सिर्फ अहम सेवाओं से आधार को लिंक करवाना अनिवार्य किया है बल्कि उसने इसके लिए कुछ निश्चित तारीखों का भी ऐलान किया है। अब तक अधिकतर कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए इकतीस दिसंबर, दो हज़ार सत्रह तक आधार कार्ड को लिंक कराना जरूरी था। आधार की अनिवार्यता पर रोक की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक बेंच गठित करने की बात कही है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि अगले सप्ताह अदालत पाँच सदस्यीय संविधान पीठ का गठन करेगी, जो अर्जियों पर सुनवाई करेगी। सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने कहा कि आधार कार्ड की अनिवार्यता पर अब रोक नहीं लगाई जा सकती क्योंकि अब इस पर काफी आगे बढ़ा जा चुका है और कई साल बीत गए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस मसले पर बहस करने के लिए तैयार है। केस की सुनवाई के दौरान आधार कार्ड की अनिवार्यता को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत से मामले को तेजी से निपटाने की भी मांग की।
चिलचिलाती धूप एवं गर्म हवा के थपेड़ों ने लोगों का मानों जीना दुश्वार कर दिया है। सुबह 10 बजे के बाद विरान हो जा रही हैं राजधानी की सड़कें। सोनपुर बौद्ध बलांगीर खुर्दा एवं नयागड़ जैसे पांच जिलों में येलो अलर्ट विभाग की तरफ से जारी। जासं. , भुवनेश्वर : ओड़िशा की राजधानी भुवनेश्वर के साथ पूरे प्रदेश में सूर्यदेव का प्रचंड प्रकोप जारी है। चिलचिलाती धूप एवं गर्म हवा के थपेड़ों ने लोगों का मानों जीना दुश्वार कर दिया है। आलम यह है कि यदि बहुत जरूरी ना हो तो लोग सुबह 9 बजे से लेकर अपराह्न 4 बजे तक घरों में ही रहना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। दोपहर के समय सड़कें सुनसान हो जा रही हैं। तटीय ओडिशा से लेकर पश्चिम एवं अंदरूनी ओड़िशा में हर जगह गर्मी को लेकर मानो हाहाकर से मचा हुआ है। वहीं मौसम विभाग ने आगामी 28 अप्रैल तक ग्रीष्मप्रवाह की स्थिति जारी रहने की भविष्यवाणी कर दी है। भुवनेश्वर मौसम विभाग केन्द्र से मिली जानकारी के मुताबिक अगले तीन दिन तक समान स्थिति जारी रहेगी। अनेक स्थान पर पारा स्वभाविक से 3 से 5 डिसे. अधिक रहेगा। 28 अप्रैल तक ग्रीष्म प्रवाह जारी रहेगा। भारी ग्रीष्म प्रवाह की सम्भावना को देखते हुए सोनपुर, बौद्ध, बलांगीर, खुर्दा एवं नयागड़ जैसे पांच जिलों में येलो अलर्ट विभाग की तरफ से जारी की गई है। उसी तरह से अन्दरूनी ओड़िशा के कई जगहों पर भी तापमान स्वभाविक से 3 से 5 डिसे अधिक रहने का अनुमान मौसम विभाग ने लगाया है। रविवार को राजधानी भुवनेश्वर में तापमान 43. 3 डिसे जबकि सोनपुर में सर्वाधिक 43. 8 डिसे पारा रेकर्ड किया गया है। केवल ये दो शहर ही नहीं बल्कि प्रदेश के 28 शहरों में पारा 40 डिसे. के पार रेकर्ड किया गया। 8 शहर में तो पारा 42 डिसे से अधिक था। अनुगुल में 43. 1 डिसे. , तालचेर में 43 डिसे, बलांगीर में 42. 3 डिसे पारा रेकर्ड किया गया है।
चिलचिलाती धूप एवं गर्म हवा के थपेड़ों ने लोगों का मानों जीना दुश्वार कर दिया है। सुबह दस बजे के बाद विरान हो जा रही हैं राजधानी की सड़कें। सोनपुर बौद्ध बलांगीर खुर्दा एवं नयागड़ जैसे पांच जिलों में येलो अलर्ट विभाग की तरफ से जारी। जासं. , भुवनेश्वर : ओड़िशा की राजधानी भुवनेश्वर के साथ पूरे प्रदेश में सूर्यदेव का प्रचंड प्रकोप जारी है। चिलचिलाती धूप एवं गर्म हवा के थपेड़ों ने लोगों का मानों जीना दुश्वार कर दिया है। आलम यह है कि यदि बहुत जरूरी ना हो तो लोग सुबह नौ बजे से लेकर अपराह्न चार बजे तक घरों में ही रहना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। दोपहर के समय सड़कें सुनसान हो जा रही हैं। तटीय ओडिशा से लेकर पश्चिम एवं अंदरूनी ओड़िशा में हर जगह गर्मी को लेकर मानो हाहाकर से मचा हुआ है। वहीं मौसम विभाग ने आगामी अट्ठाईस अप्रैल तक ग्रीष्मप्रवाह की स्थिति जारी रहने की भविष्यवाणी कर दी है। भुवनेश्वर मौसम विभाग केन्द्र से मिली जानकारी के मुताबिक अगले तीन दिन तक समान स्थिति जारी रहेगी। अनेक स्थान पर पारा स्वभाविक से तीन से पाँच डिसे. अधिक रहेगा। अट्ठाईस अप्रैल तक ग्रीष्म प्रवाह जारी रहेगा। भारी ग्रीष्म प्रवाह की सम्भावना को देखते हुए सोनपुर, बौद्ध, बलांगीर, खुर्दा एवं नयागड़ जैसे पांच जिलों में येलो अलर्ट विभाग की तरफ से जारी की गई है। उसी तरह से अन्दरूनी ओड़िशा के कई जगहों पर भी तापमान स्वभाविक से तीन से पाँच डिसे अधिक रहने का अनुमान मौसम विभाग ने लगाया है। रविवार को राजधानी भुवनेश्वर में तापमान तैंतालीस. तीन डिसे जबकि सोनपुर में सर्वाधिक तैंतालीस. आठ डिसे पारा रेकर्ड किया गया है। केवल ये दो शहर ही नहीं बल्कि प्रदेश के अट्ठाईस शहरों में पारा चालीस डिसे. के पार रेकर्ड किया गया। आठ शहर में तो पारा बयालीस डिसे से अधिक था। अनुगुल में तैंतालीस. एक डिसे. , तालचेर में तैंतालीस डिसे, बलांगीर में बयालीस. तीन डिसे पारा रेकर्ड किया गया है।
अमरावती/दि. 23 - चांदूर बाजार में ग्राम पंचायत कर्मचारी यूनियन के राज्यस्तरीय सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए बतौर अध्यक्ष राज्यमंत्री बच्चु कडू ने कहा कि, लोकतंत्र में ग्राम विकास के लिहाज से संसद की तुलना में ग्राम पंचायत सबसे अधिक महत्वपूर्ण है और ग्राम पंचायतों का कामकाज सुचारू रखने में ग्राम पंचायत कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. ऐसे में आगामी तीन माह के भीतर ग्राम पंचायत कर्मचारियों का महामंडल स्थापित करते हुए सभी कर्मचारियो की प्रलंबित मांगों व मसलों को हल किया जायेगा. राज्यमंत्री बच्चु कडू की अध्यक्षता में आयोजीत इस कार्यक्रम में बतौर प्रमुख अतिथी विधायक राजकुमार पटेल, युवा सेना के जिला प्रमुख प्रकाश मारोटकर, कर्मचारी युनियन के राज्याध्यक्ष विलास कुमारवर, गिरीश दाभाडकर आदि उपस्थित थे. सभी गणमान्यों ने ग्रापं कर्मचारियों की मांगों को लेकर अपने समयोचित विचार व्यक्त किये. इस आयोजन में संगठन के जिल्हाध्यक्ष मंगेश ढोरे, सभापती वनमाला गणेशकर, काजी अल्लाउद्दीन, धनराज आंबटकर, दिलीप जाधव, संपत तांबे, रामेश्वर गायकी, नारायण होडे, अजय जाधव, दिलीप डिके, माणिक पवार, निलेश कडू, आकाश गुलसुंदरे, गोपाल वानखडे, पांडुरंग लोखंडे आदि उपस्थित थे.
अमरावती/दि. तेईस - चांदूर बाजार में ग्राम पंचायत कर्मचारी यूनियन के राज्यस्तरीय सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए बतौर अध्यक्ष राज्यमंत्री बच्चु कडू ने कहा कि, लोकतंत्र में ग्राम विकास के लिहाज से संसद की तुलना में ग्राम पंचायत सबसे अधिक महत्वपूर्ण है और ग्राम पंचायतों का कामकाज सुचारू रखने में ग्राम पंचायत कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. ऐसे में आगामी तीन माह के भीतर ग्राम पंचायत कर्मचारियों का महामंडल स्थापित करते हुए सभी कर्मचारियो की प्रलंबित मांगों व मसलों को हल किया जायेगा. राज्यमंत्री बच्चु कडू की अध्यक्षता में आयोजीत इस कार्यक्रम में बतौर प्रमुख अतिथी विधायक राजकुमार पटेल, युवा सेना के जिला प्रमुख प्रकाश मारोटकर, कर्मचारी युनियन के राज्याध्यक्ष विलास कुमारवर, गिरीश दाभाडकर आदि उपस्थित थे. सभी गणमान्यों ने ग्रापं कर्मचारियों की मांगों को लेकर अपने समयोचित विचार व्यक्त किये. इस आयोजन में संगठन के जिल्हाध्यक्ष मंगेश ढोरे, सभापती वनमाला गणेशकर, काजी अल्लाउद्दीन, धनराज आंबटकर, दिलीप जाधव, संपत तांबे, रामेश्वर गायकी, नारायण होडे, अजय जाधव, दिलीप डिके, माणिक पवार, निलेश कडू, आकाश गुलसुंदरे, गोपाल वानखडे, पांडुरंग लोखंडे आदि उपस्थित थे.
टीवी हो या फिल्मों में काम करने वाली एक्ट्रेसेज का दुबला पतला और स्लिम ट्रिम होना जरुरी है...इस बात को ही एक्ट्रेस बनने का पैमाना बना दिया गया। हमेशा से माना गया कि पतली एक्ट्रेसेज को ही काम मिलेगा, लेकिन इस बात की परिभाषा बॉलीवुड में किसी ने बदली तो वो थीं गुड्डी मारुती। हालांकि गुड्डी मारुती को कभी लीड एक्ट्रेस का किरदार निभाने का मौका नहीं मिला, लेकिन फिर भी काफी हेल्दी होते हुए भी उन्होंने फिल्म और टीवी दोनों इंडस्ट्री में जमकर काम किया। 5 अप्रैल को गुड्डी यानी बॉलीवुड की टुनटुन अपना जन्मदिन मना रही है। गुड्डी मारुती ने अपने भारी वजन को काफी अपने काम के आड़े नहीं आने दिया बल्कि उन्होंने इसे ही अपनी पहचान मिली। गोल मटोल होने के कारण ही उन्हें ब़ॉलीवुड ने नाम दिया टुनटुन। गुड्डी ने कई सारी बेहतरीन फिल्मों में काम किया और कॉमेडी सीन से भी पर्दे पर धमाल मचाया। गुड्डी ने दिल ने फिर याद किया, बेटी नंबर वन, बड़े दिलवाला, बीवी नंबर 1, गैर, राजाजी, दूल्हे राजा जी, बरसात की एक रात, मोहब्बत और जंग, बंदिश, मुकदमा, दिल तेरा दीवाना, द डॉन, इक्के पे इक्का, तहकीकात, आशिक आवार हनीमून , चमत्कार, त्रिनेश, फरिश्ते और इज्जतदार जैसी फिल्मों में देखा गया था। हालांकि टुनटुन अब पहले से काफी पतली हो चुकी हैं और आजल कल टीवी के फेमस शो ये उन दिनों की बात है में नजर आ रही है। ये शो इस कॉनसेप्ट पर आधारित है जिसमें 90 के दशक की प्रेम कहानी दिखाई दिखाई जा रही है। इसमें समीर और नैना उस दौर का प्यार दर्शकों को दिखा रहे हैं जब प्यार का एहसास आखों के जरिए बयान होता था औऱ तब जब चोरी छिपे ही मुलाकात हो पाती थी। इस शो में क़ॉलेज लाइफ को दिखाया जाना है जिसमें गुड्डी प्रिंसिपल के रोल में नजर आएंगी। गुड्डी ने बताया कि इस भूमिका के लिए जब प्रोड्क्शन हाउसने मुझसे संपर्क किया तो मेरे लिए ये काफी एक्साइटिंगथा। मैं कई फिल्मों और टीवी शो का हिस्सा रही हूं, लेकिन ऐसा पहली बार है जब मैं किसी 90 के दशक पर आधारित शो का हिस्सा बनने जा रही हूं। अपने रोल पर बात करते हुए गुड्डी ने कहा कि मैं इस शो में एक कॉलेज प्रिंसपिल की भूमिका निभाने जा रही हूं, इसको देखकर मुझे मेरे 90 की साल वाली फिल्मों की यादें ताजा हो जाती है। ऐसे लाजवाब शो का हिस्सा अच्छा बनना अच्छा लगता है जिसने अपनी शुरुआत से ही लगातार दर्शकों का मनोरंजन किया हो। गौरतलब है कि इस शो में गुड्डी का लुक एकदम बदला हुआ है। गुड्डी बहुत मोटी हुआ करती थी, लेकिन अब पहले से उनमें काफी बदलाव आ चुका है और इस शो में वो काफी स्मार्ट और स्लिम भी नजर आ रही हैं। पहले से गुड्डी अब काफी पतली हो गई हैं और उन्हें पसंद करने वाले उनका ये नया अवतार देखकर हैरान भी हो जाएंगे। हालांकि उनकी उम्र भी काफी बढ़ चुकी हैं। गुड्डी फिल्मों के अलावा. डोली अरमानों की, हम सबउल्लू हैं जैसे शो में नजर आ चुकी हैं। वो टीवी और बॉलीवुड दोनों की चहेती कलाकार रही हैं।
टीवी हो या फिल्मों में काम करने वाली एक्ट्रेसेज का दुबला पतला और स्लिम ट्रिम होना जरुरी है...इस बात को ही एक्ट्रेस बनने का पैमाना बना दिया गया। हमेशा से माना गया कि पतली एक्ट्रेसेज को ही काम मिलेगा, लेकिन इस बात की परिभाषा बॉलीवुड में किसी ने बदली तो वो थीं गुड्डी मारुती। हालांकि गुड्डी मारुती को कभी लीड एक्ट्रेस का किरदार निभाने का मौका नहीं मिला, लेकिन फिर भी काफी हेल्दी होते हुए भी उन्होंने फिल्म और टीवी दोनों इंडस्ट्री में जमकर काम किया। पाँच अप्रैल को गुड्डी यानी बॉलीवुड की टुनटुन अपना जन्मदिन मना रही है। गुड्डी मारुती ने अपने भारी वजन को काफी अपने काम के आड़े नहीं आने दिया बल्कि उन्होंने इसे ही अपनी पहचान मिली। गोल मटोल होने के कारण ही उन्हें ब़ॉलीवुड ने नाम दिया टुनटुन। गुड्डी ने कई सारी बेहतरीन फिल्मों में काम किया और कॉमेडी सीन से भी पर्दे पर धमाल मचाया। गुड्डी ने दिल ने फिर याद किया, बेटी नंबर वन, बड़े दिलवाला, बीवी नंबर एक, गैर, राजाजी, दूल्हे राजा जी, बरसात की एक रात, मोहब्बत और जंग, बंदिश, मुकदमा, दिल तेरा दीवाना, द डॉन, इक्के पे इक्का, तहकीकात, आशिक आवार हनीमून , चमत्कार, त्रिनेश, फरिश्ते और इज्जतदार जैसी फिल्मों में देखा गया था। हालांकि टुनटुन अब पहले से काफी पतली हो चुकी हैं और आजल कल टीवी के फेमस शो ये उन दिनों की बात है में नजर आ रही है। ये शो इस कॉनसेप्ट पर आधारित है जिसमें नब्बे के दशक की प्रेम कहानी दिखाई दिखाई जा रही है। इसमें समीर और नैना उस दौर का प्यार दर्शकों को दिखा रहे हैं जब प्यार का एहसास आखों के जरिए बयान होता था औऱ तब जब चोरी छिपे ही मुलाकात हो पाती थी। इस शो में क़ॉलेज लाइफ को दिखाया जाना है जिसमें गुड्डी प्रिंसिपल के रोल में नजर आएंगी। गुड्डी ने बताया कि इस भूमिका के लिए जब प्रोड्क्शन हाउसने मुझसे संपर्क किया तो मेरे लिए ये काफी एक्साइटिंगथा। मैं कई फिल्मों और टीवी शो का हिस्सा रही हूं, लेकिन ऐसा पहली बार है जब मैं किसी नब्बे के दशक पर आधारित शो का हिस्सा बनने जा रही हूं। अपने रोल पर बात करते हुए गुड्डी ने कहा कि मैं इस शो में एक कॉलेज प्रिंसपिल की भूमिका निभाने जा रही हूं, इसको देखकर मुझे मेरे नब्बे की साल वाली फिल्मों की यादें ताजा हो जाती है। ऐसे लाजवाब शो का हिस्सा अच्छा बनना अच्छा लगता है जिसने अपनी शुरुआत से ही लगातार दर्शकों का मनोरंजन किया हो। गौरतलब है कि इस शो में गुड्डी का लुक एकदम बदला हुआ है। गुड्डी बहुत मोटी हुआ करती थी, लेकिन अब पहले से उनमें काफी बदलाव आ चुका है और इस शो में वो काफी स्मार्ट और स्लिम भी नजर आ रही हैं। पहले से गुड्डी अब काफी पतली हो गई हैं और उन्हें पसंद करने वाले उनका ये नया अवतार देखकर हैरान भी हो जाएंगे। हालांकि उनकी उम्र भी काफी बढ़ चुकी हैं। गुड्डी फिल्मों के अलावा. डोली अरमानों की, हम सबउल्लू हैं जैसे शो में नजर आ चुकी हैं। वो टीवी और बॉलीवुड दोनों की चहेती कलाकार रही हैं।
संचार साधन अति महत्वपूर्ण स्थान रखते है। इनकी आपूर्ति से सामाजिक-आर्थिक विकास को नयी दिशा मिल सकेगी। आवागमन एवं संचार के इस महत्व को दृष्टिगत करते हुए अध्ययन क्षेत्र में इनके विकास की अति आवश्यकता है जिसके लिए हम निम्न नियोजनों का सहयोग ले सकते (अ) अध्ययन क्षेत्र में रेलमार्गो एवं सडक मार्गों को विकसित करने की आवश्यकता है। क्षेत्र मे रेलमार्गो का विकास अति आवश्यक है, उदाहरणार्थ- आज सम्पूर्ण देश में रेलमार्गों की कुल लम्बाई 62,600 किमी० है जबकि जनपद में इसकी लम्बाई मात्र 88 किमी० ही है। (ब) दूसरे अध्ययन क्षेत्र में कुल 13 विकासखण्डो में से आज भी 5 विकासखण्ड (अमौली, खजुहा, बहुआ, असोथर और हथगॉव) रेलमार्गों की सुविधा से वंचित है। प्रस्तावित रेलमार्ग (चित्र 3.4) के निर्माण से इस कमी का पूरा किया जा सकता है। एक अन्य रेलमार्ग को बिन्दकी रोड स्टेशन से खजुहा और अमौली होते हुए कानपुर तक निर्मित करने की आवश्यकता है। (स) जनपद में आज भी मात्र 9.67% ग्रामो को स्थानीय स्तर पर बस स्टाप की सुविधा प्राप्त है तथा 37.35% ग्रामों के निवासियो को आज भी यह सुविधा 5 किमी० से अधिक दूर पर उपलब्ध है (सारणी 6 3)। नये बस मार्गो एवं बसों की संख्या में वृद्धि कर इस कमी को पूरा करने की आवश्यकता है जिससे किसी भी ग्राम की बस स्टाप से दूरी 5 किमी० से अधिक न हो सके। (द) अध्ययन क्षेत्र के 30.47% ग्रामों को स्थानीय स्तर पर सडक सुविधा प्राप्त है जबकि 15.24% ग्रामो को आज भी इस सुविधा हेतु 5 किमी0 से अधिक की दूरी तय करनी पड़ती है। स्पष्ट है कि जनपद में सड़कों का विकास अति आवश्यक है। चित्र 3.4 में कुछ नये सड़क मार्गों का प्रस्ताव किया गया है। इनके निर्माण से अध्ययन क्षेत्र मे सड़क परिवहन की स्थिति को सुधारा जा सकता (य) डाक संचार साधन जो कि ग्रामीण जनता के लिए सबसे सस्ता साधन है, की जनपद मे कुल संख्या 252 है। इसमें 14 नगरीय क्षेत्र के डाकघर सम्मिलित हैं (सारणी 6.6 ) । इनमें से मात्र 17. 60% ग्रामो को स्थानीय स्तर पर डाकघर की सुविधा प्राप्त है तथा 13.76% ग्रामों को 5 किमी0 से भी अधिक दूर पर यह सुविधा उपलब्ध होती है (सारणी 6.7)। इसीलिए क्षेत्र में इस संचार साधन को और अधिक विकसित करने की आवश्यकता है जिसके लिए प्रत्येक विकासखण्ड में कम से कम 25 डाकघर स्थापित करने चाहिए। वर्तमान समय में असोथर, हथगाँव, विजयीपुर और धाता को छोड़कर शेष सभी विकासखण्डों मे डाकघरों की संख्या 20 से भी कम पायी जाती है। इन नये डाकघरों की स्थिति के चयन के समय यह ध्यान रखना होगा कि किसी भी गाँव को डाकघर की सुविधा के लिए 5 किमी० से अधिक की दूरी न तय करनी पड़े। (र) अध्ययन क्षेत्र में तारघर संचार साधन की अति दयनीय स्थिति है। अब तक जनपद में कुल 11 तारघर हैं ( सारणी 6.6), जिनमें मात्र 5 ग्रामीण क्षेत्र में स्थित हैं। क्षेत्र के मात्र 0.37% ग्रामों को इनकी सुविधा स्थानीय तौर पर उपलब्ध है जबकि 88.99% ग्रामों को आज भी इसके लिए 5 किमी0 से अधिक की दूरी तय करनी पड़ती है (सारणी 6.8) । ध्यातव्य है कि इस संचार सुविधा द्वारा अति महत्वपूर्ण सूचनाओ को कम से कम समय मे भेजने की सुविधा होती है। अतः इस सुविधा को क्षेत्र मे तत्काल विकसित करना चाहिए जिसके लिए लगभग प्रत्येक विकासखण्ड में 2 नये तारघर अविलम्ब स्थापित करने की आवश्यकता है। (ल) अध्यय क्षेत्र में सार्वजनिक दूरभाष बूथो की संख्या अति न्यून (मात्र 138) है। इसमें 27 नगरीय बूथ सम्मिलित हैं (सारणी 66 ) । दूरभाष सवाद प्रेषण का एक सशक्त माध्यम है तथा आधुनिक जीविका का महत्वपूर्ण अंग है। एतदर्थ नगरीय क्षेत्रों के अलावा प्रत्येक तहसील केन्द्र पर एक आधुनिक स्वचालित टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित करने की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक विकासखण्ड मे कम से कम 10 सार्वजनिक टेलीफोन बूथ लगाये जाने चाहिए जिससे ग्रामवासियों को इस सुविधा हेतु अधिक दूरी एव समय न नष्ट करना पडे । उपर्युक्त सभी नियोजन तथ्यों के आधार पर जनपद में आवागमन एवं संचार साधनों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है जिसका अनुकूल असर क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास पर पड़ेगा। 9.4 स्थानिक नियोजन हेतु व्यूह नीति :9.4.1 विकासशील क्षेत्र :चित्र 8.2 के अवलोकन से स्पष्ट है कि अध्ययन क्षेत्र में अमौली, हसवा, बहुआ, हथगॉव, ऐराया, विजयीपुर आदि विकासखण्ड विकासशील क्षेत्र के अन्तर्गत आते है। इन विकासशील क्षेत्रों को निम्न प्रकार के नियोजन प्रस्तावो द्वारा विकसित किया जा सकता है। (अ) चित्र 8.1A के अनुसार सर्वप्रथम विकासशील क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले सभी 6 विकासखण्डों में कृषि विकास को उच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। एतदर्थ(1) सिचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध करानी होगी। (2) कृषि सम्बन्धी (ट्रैक्टर और थेसर) नवीन उपकरणों के प्रयोग में समुचित वृद्धि करनी होगी। (3) यमुना के बाद प्रकोप (अमौली एव विजयीपुर विकासखण्ड) से बचाव हेतु प्रभावी योजना बनानी होगी। (4) कुशल एवं प्रशिक्षित कृषको की संख्या में वृद्धि करनी होगी। (5) कृषि विकास के लिए ग्रामीण बाजारो का विकास करना होगा जिसके लिये नियमित मण्डियां एवं उपमण्डिया विकसित करनी होगी जिसमे कृषि वस्तुओं की बिक्री नियमित रूप से हो सकेगी। (ब) चित्र 8.1B से स्पष्ट है कि ऐरायां, विजयीपुर, हसवा और बहुआ आदि सभी विकासखण्डों में औद्योगिक विकास को प्रथमिकता देने की आवश्यकता है। इसके लिये क्षेत्र में निम्न प्रकार के नियोजन किये जा सकते है313 (1) कच्चे माल की स्थानीय सुविधा होनी आवश्यक है अर्थात ऐसे उद्योग विकसित किये जाये जिनके लिए कच्चा माल समीप ही उपलब्ध हो । (2) लाइसेस प्रक्रिया में इस प्रकार के नियम बनाये जायं जिससे उन वस्तुओं (अगरबत्ती, मोमबत्ती और साबुन आदि) जिनका उत्पादन लघु एव कुटीर उद्योगों द्वारा हो रहा है, से सम्बन्धित लाइसेंस वृहद एवं मध्यम उद्योगो को न दिये जायं । (3) इन उद्योगो से उत्पादित वस्तुओ की लागत को कम करने के लिए इन्हें (लघु एवं पारिवारिक उद्योग) कम कीमत पर भूमि, पानी व विद्युत की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए। (4) इनके लिए परिवहन एव संचार की सुविधा में वृद्धि करनी चाहिए जिससे तैयार माल व कच्चे माल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से पहुॅचाया जा सके। (5) भण्डारण की सुविधा तथा छोटे स्थानो पर भी बिल्टी की सुविधा उपलब्ध करायी जानी चाहिए। (6) अध्ययन क्षेत्र में औद्योगिक विकास के लिए पूँजीपतियों व उद्योगपतियों को विभिन्न अधः सरचनात्मक सुविधाये, यथा - स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन तथा कम व्याज पर ऋण आदि उपलब्ध कराकर नवीन क्षेत्रों में उद्योग हेतु प्रोत्साहित किया जाना चाहिए । (स) चित्र 8.1C से स्पष्ट है कि हसवा, बहुआ और विजयीपुर में मध्यम तथा ऐरायां में तीव्र गति से जनसंख्या वृद्धि हुयी है, यह वृद्धि नैसर्गिक नहीं वरन् प्रवास से सम्बन्धित है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं (1) ऐसे कारणों का पता लगाया जाय जिनके कारण प्रवास को बढ़ावा मिल रहा है। इनमें बेरोजगारी, गरीबी और असुरक्षा की भावना की मुख्य भूमिका है। इसे स्वरोजगार को बढ़ावा देकर और शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधा आदि उपलब्ध कराकर रोका जा सकता है। (2) इसके अतिरिक्त जनसंख्या प्रवास को रोकने हेतु सम्बन्धित क्षेत्रों में लघु एवं कुटीर उद्योग विकसित किये जाय जिससे ग्रामीण युवको को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध हो सके एवं उन्हें नौकरी की तलाश में बाहर न जाना पडे। (3) ग्रामीण सम्पन्न वर्ग विशेषकर उच्च वर्गों द्वारा महिलाओं को प्रत्येक क्षेत्र (कृषि, उद्योग और व्यापार) के कार्यों मे सहभागिता का अवसर देना होगा जो अभी तक इसे अपनी सामाजिक हीनता के रूप में देखते हैं। (4) सम्बन्धित क्षेत्र में जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए विभिन्न सरकारी एवं सामाजिक संगठनों द्वारा सभाओ एवं गोष्ठियों का आयोजन किया जाना चाहिए। (5) परिवार नियोजन अपनाने हेतु इन्हें विभिन्न प्रकार के प्रलोभनों, यथा- मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास तथा रोजगार आदि का सहयोग लिया जा सकता है। (द) चित्र 8.1D से स्पष्ट है कि हसवा, बहुआ, हथगॉव, ऐराया और विजयीपुर में शैक्षिक विकास निम्न स्तर का है। चूँकि शिक्षा के विकास से प्रत्येक क्षेत्र का विकास प्रभावित होता है अतः इस विकसित करने की अति आवश्यकता है जिसके लिए निम्न कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए(1) सम्बन्धित क्षेत्र मे और अधिक विद्यालय स्थापित किये जाने चाहिए, उदाहरणस्वरूप - सम्पूर्ण जनपद मे राजकीय बालिका जूनियर हाई स्कूल की संख्या मात्र 3 (फतेहपुर, बहुआ और खजुहा) है। कम से कम प्रत्येक विकासखण्ड में एक राजकीय बालिका विद्यालय अवश्य स्थापित किया जाना चाहिए। (2) जनपद मे हायर सेकेन्ड्री स्कूलों की कुल संख्या 106 है। इनमें 19 नगरीय स्कूल भी सम्मिलित है अत. इनमे भी समुचित वृद्धि आवश्यक है। (3) अध्ययन क्षेत्र में कुल 4 महाविद्यालय है जिनमे विकासशील क्षेत्र में 1 हथगॉव विकासखण्ड में है अत. यहाँ पर अमौली और बहुआ प्रत्येक विकासखण्ड में 1 नया महाविद्यालय स्थापित किया जाना चाहिए । (4) सामाजिक संगठनों द्वारा शिविरों, मेलो और प्रदर्शिनियों आदि का आयोजन कर लोगों को शैक्षिक विकास हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए । (य) चित्र 8.1E से स्पष्ट है कि स्वास्थ्य सुविधा एव परिवार कल्याण का विकास हसवा, बहुआ, ऐरायां और विजयीपुर आदि विकासखण्डों मे निम्न स्तर का है। इसके लिए निम्न नियोजन नीति अपनायी जानी आवश्यक है(1) सम्बन्धित क्षेत्र के ग्रामीण निवासियो को संतुलित पोषाहार के संदर्भ में विस्तृत जानकारी देना चाहिए। इसके लिए शिविरों आदि का आयोजन किया जा सकता है। ( 2 ) लोगों को विभिन्न बीमारियों के बारे में बताया जाना चाहिए जिससे वे उन बीमारियों से सम्बन्धित कारणों को जानकर प्राथमिक स्तर पर ही उनसे बचाव या निदान का प्रयास कर सकें । (3) विकासशील क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रो की कुल संख्या (23) बहुत ही कम है। इनकी संख्या दोगुनी करने की जरूरत है। इन केन्द्रो पर आपरेशन की मुफ्त सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। (4) अधिकार प्राप्त स्थानीय प्रतिनिधियो द्वारा प्राथमिक केन्द्रों का निरीक्षण किया जाना चाहिए जिससे भ्रष्टाचार को रोककर स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावशाली बनाया जा सके। (र) चित्र 8.1F से स्पष्ट है कि अमौली, हसवा, बहुआ, हथगाँव और ऐरायां में आवागमन एवं संचार सुविधाओं का समुचित विकास नहीं हो सका है जिसके लिए निम्न प्रकार के नियोजनों की आवश्यकता है (1) सर्वप्रथम विकासशील क्षेत्र में सड़क घनत्व में वृद्धि करने की आवश्यकता है। इसे नयी सडकों का निर्माण कर प्रतिलाख जनसंख्या पर कुल पक्की सड़कों की लम्बाई 100 किमी0 तक करने की
संचार साधन अति महत्वपूर्ण स्थान रखते है। इनकी आपूर्ति से सामाजिक-आर्थिक विकास को नयी दिशा मिल सकेगी। आवागमन एवं संचार के इस महत्व को दृष्टिगत करते हुए अध्ययन क्षेत्र में इनके विकास की अति आवश्यकता है जिसके लिए हम निम्न नियोजनों का सहयोग ले सकते अध्ययन क्षेत्र में रेलमार्गो एवं सडक मार्गों को विकसित करने की आवश्यकता है। क्षेत्र मे रेलमार्गो का विकास अति आवश्यक है, उदाहरणार्थ- आज सम्पूर्ण देश में रेलमार्गों की कुल लम्बाई बासठ,छः सौ किमीशून्य है जबकि जनपद में इसकी लम्बाई मात्र अठासी किमीशून्य ही है। दूसरे अध्ययन क्षेत्र में कुल तेरह विकासखण्डो में से आज भी पाँच विकासखण्ड रेलमार्गों की सुविधा से वंचित है। प्रस्तावित रेलमार्ग के निर्माण से इस कमी का पूरा किया जा सकता है। एक अन्य रेलमार्ग को बिन्दकी रोड स्टेशन से खजुहा और अमौली होते हुए कानपुर तक निर्मित करने की आवश्यकता है। जनपद में आज भी मात्र नौ.सरसठ% ग्रामो को स्थानीय स्तर पर बस स्टाप की सुविधा प्राप्त है तथा सैंतीस.पैंतीस% ग्रामों के निवासियो को आज भी यह सुविधा पाँच किमीशून्य से अधिक दूर पर उपलब्ध है । नये बस मार्गो एवं बसों की संख्या में वृद्धि कर इस कमी को पूरा करने की आवश्यकता है जिससे किसी भी ग्राम की बस स्टाप से दूरी पाँच किमीशून्य से अधिक न हो सके। अध्ययन क्षेत्र के तीस.सैंतालीस% ग्रामों को स्थानीय स्तर पर सडक सुविधा प्राप्त है जबकि पंद्रह.चौबीस% ग्रामो को आज भी इस सुविधा हेतु पाँच किमीशून्य से अधिक की दूरी तय करनी पड़ती है। स्पष्ट है कि जनपद में सड़कों का विकास अति आवश्यक है। चित्र तीन.चार में कुछ नये सड़क मार्गों का प्रस्ताव किया गया है। इनके निर्माण से अध्ययन क्षेत्र मे सड़क परिवहन की स्थिति को सुधारा जा सकता डाक संचार साधन जो कि ग्रामीण जनता के लिए सबसे सस्ता साधन है, की जनपद मे कुल संख्या दो सौ बावन है। इसमें चौदह नगरीय क्षेत्र के डाकघर सम्मिलित हैं । इनमें से मात्र सत्रह. साठ% ग्रामो को स्थानीय स्तर पर डाकघर की सुविधा प्राप्त है तथा तेरह.छिहत्तर% ग्रामों को पाँच किमीशून्य से भी अधिक दूर पर यह सुविधा उपलब्ध होती है । इसीलिए क्षेत्र में इस संचार साधन को और अधिक विकसित करने की आवश्यकता है जिसके लिए प्रत्येक विकासखण्ड में कम से कम पच्चीस डाकघर स्थापित करने चाहिए। वर्तमान समय में असोथर, हथगाँव, विजयीपुर और धाता को छोड़कर शेष सभी विकासखण्डों मे डाकघरों की संख्या बीस से भी कम पायी जाती है। इन नये डाकघरों की स्थिति के चयन के समय यह ध्यान रखना होगा कि किसी भी गाँव को डाकघर की सुविधा के लिए पाँच किमीशून्य से अधिक की दूरी न तय करनी पड़े। अध्ययन क्षेत्र में तारघर संचार साधन की अति दयनीय स्थिति है। अब तक जनपद में कुल ग्यारह तारघर हैं , जिनमें मात्र पाँच ग्रामीण क्षेत्र में स्थित हैं। क्षेत्र के मात्र शून्य.सैंतीस% ग्रामों को इनकी सुविधा स्थानीय तौर पर उपलब्ध है जबकि अठासी.निन्यानवे% ग्रामों को आज भी इसके लिए पाँच किमीशून्य से अधिक की दूरी तय करनी पड़ती है । ध्यातव्य है कि इस संचार सुविधा द्वारा अति महत्वपूर्ण सूचनाओ को कम से कम समय मे भेजने की सुविधा होती है। अतः इस सुविधा को क्षेत्र मे तत्काल विकसित करना चाहिए जिसके लिए लगभग प्रत्येक विकासखण्ड में दो नये तारघर अविलम्ब स्थापित करने की आवश्यकता है। अध्यय क्षेत्र में सार्वजनिक दूरभाष बूथो की संख्या अति न्यून है। इसमें सत्ताईस नगरीय बूथ सम्मिलित हैं । दूरभाष सवाद प्रेषण का एक सशक्त माध्यम है तथा आधुनिक जीविका का महत्वपूर्ण अंग है। एतदर्थ नगरीय क्षेत्रों के अलावा प्रत्येक तहसील केन्द्र पर एक आधुनिक स्वचालित टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित करने की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक विकासखण्ड मे कम से कम दस सार्वजनिक टेलीफोन बूथ लगाये जाने चाहिए जिससे ग्रामवासियों को इस सुविधा हेतु अधिक दूरी एव समय न नष्ट करना पडे । उपर्युक्त सभी नियोजन तथ्यों के आधार पर जनपद में आवागमन एवं संचार साधनों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है जिसका अनुकूल असर क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास पर पड़ेगा। नौ.चार स्थानिक नियोजन हेतु व्यूह नीति :नौ.चार.एक विकासशील क्षेत्र :चित्र आठ.दो के अवलोकन से स्पष्ट है कि अध्ययन क्षेत्र में अमौली, हसवा, बहुआ, हथगॉव, ऐराया, विजयीपुर आदि विकासखण्ड विकासशील क्षेत्र के अन्तर्गत आते है। इन विकासशील क्षेत्रों को निम्न प्रकार के नियोजन प्रस्तावो द्वारा विकसित किया जा सकता है। चित्र आठ दशमलव एक एम्पीयर के अनुसार सर्वप्रथम विकासशील क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले सभी छः विकासखण्डों में कृषि विकास को उच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता है। एतदर्थ सिचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध करानी होगी। कृषि सम्बन्धी नवीन उपकरणों के प्रयोग में समुचित वृद्धि करनी होगी। यमुना के बाद प्रकोप से बचाव हेतु प्रभावी योजना बनानी होगी। कुशल एवं प्रशिक्षित कृषको की संख्या में वृद्धि करनी होगी। कृषि विकास के लिए ग्रामीण बाजारो का विकास करना होगा जिसके लिये नियमित मण्डियां एवं उपमण्डिया विकसित करनी होगी जिसमे कृषि वस्तुओं की बिक्री नियमित रूप से हो सकेगी। चित्र आठ.एकB से स्पष्ट है कि ऐरायां, विजयीपुर, हसवा और बहुआ आदि सभी विकासखण्डों में औद्योगिक विकास को प्रथमिकता देने की आवश्यकता है। इसके लिये क्षेत्र में निम्न प्रकार के नियोजन किये जा सकते हैतीन सौ तेरह कच्चे माल की स्थानीय सुविधा होनी आवश्यक है अर्थात ऐसे उद्योग विकसित किये जाये जिनके लिए कच्चा माल समीप ही उपलब्ध हो । लाइसेस प्रक्रिया में इस प्रकार के नियम बनाये जायं जिससे उन वस्तुओं जिनका उत्पादन लघु एव कुटीर उद्योगों द्वारा हो रहा है, से सम्बन्धित लाइसेंस वृहद एवं मध्यम उद्योगो को न दिये जायं । इन उद्योगो से उत्पादित वस्तुओ की लागत को कम करने के लिए इन्हें कम कीमत पर भूमि, पानी व विद्युत की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए। इनके लिए परिवहन एव संचार की सुविधा में वृद्धि करनी चाहिए जिससे तैयार माल व कच्चे माल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से पहुॅचाया जा सके। भण्डारण की सुविधा तथा छोटे स्थानो पर भी बिल्टी की सुविधा उपलब्ध करायी जानी चाहिए। अध्ययन क्षेत्र में औद्योगिक विकास के लिए पूँजीपतियों व उद्योगपतियों को विभिन्न अधः सरचनात्मक सुविधाये, यथा - स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन तथा कम व्याज पर ऋण आदि उपलब्ध कराकर नवीन क्षेत्रों में उद्योग हेतु प्रोत्साहित किया जाना चाहिए । चित्र आठ दशमलव एक डिग्री सेल्सियस से स्पष्ट है कि हसवा, बहुआ और विजयीपुर में मध्यम तथा ऐरायां में तीव्र गति से जनसंख्या वृद्धि हुयी है, यह वृद्धि नैसर्गिक नहीं वरन् प्रवास से सम्बन्धित है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं ऐसे कारणों का पता लगाया जाय जिनके कारण प्रवास को बढ़ावा मिल रहा है। इनमें बेरोजगारी, गरीबी और असुरक्षा की भावना की मुख्य भूमिका है। इसे स्वरोजगार को बढ़ावा देकर और शिक्षा तथा स्वास्थ्य सुविधा आदि उपलब्ध कराकर रोका जा सकता है। इसके अतिरिक्त जनसंख्या प्रवास को रोकने हेतु सम्बन्धित क्षेत्रों में लघु एवं कुटीर उद्योग विकसित किये जाय जिससे ग्रामीण युवको को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार उपलब्ध हो सके एवं उन्हें नौकरी की तलाश में बाहर न जाना पडे। ग्रामीण सम्पन्न वर्ग विशेषकर उच्च वर्गों द्वारा महिलाओं को प्रत्येक क्षेत्र के कार्यों मे सहभागिता का अवसर देना होगा जो अभी तक इसे अपनी सामाजिक हीनता के रूप में देखते हैं। सम्बन्धित क्षेत्र में जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए विभिन्न सरकारी एवं सामाजिक संगठनों द्वारा सभाओ एवं गोष्ठियों का आयोजन किया जाना चाहिए। परिवार नियोजन अपनाने हेतु इन्हें विभिन्न प्रकार के प्रलोभनों, यथा- मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास तथा रोजगार आदि का सहयोग लिया जा सकता है। चित्र आठ.एकD से स्पष्ट है कि हसवा, बहुआ, हथगॉव, ऐराया और विजयीपुर में शैक्षिक विकास निम्न स्तर का है। चूँकि शिक्षा के विकास से प्रत्येक क्षेत्र का विकास प्रभावित होता है अतः इस विकसित करने की अति आवश्यकता है जिसके लिए निम्न कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए सम्बन्धित क्षेत्र मे और अधिक विद्यालय स्थापित किये जाने चाहिए, उदाहरणस्वरूप - सम्पूर्ण जनपद मे राजकीय बालिका जूनियर हाई स्कूल की संख्या मात्र तीन है। कम से कम प्रत्येक विकासखण्ड में एक राजकीय बालिका विद्यालय अवश्य स्थापित किया जाना चाहिए। जनपद मे हायर सेकेन्ड्री स्कूलों की कुल संख्या एक सौ छः है। इनमें उन्नीस नगरीय स्कूल भी सम्मिलित है अत. इनमे भी समुचित वृद्धि आवश्यक है। अध्ययन क्षेत्र में कुल चार महाविद्यालय है जिनमे विकासशील क्षेत्र में एक हथगॉव विकासखण्ड में है अत. यहाँ पर अमौली और बहुआ प्रत्येक विकासखण्ड में एक नया महाविद्यालय स्थापित किया जाना चाहिए । सामाजिक संगठनों द्वारा शिविरों, मेलो और प्रदर्शिनियों आदि का आयोजन कर लोगों को शैक्षिक विकास हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए । चित्र आठ.एकE से स्पष्ट है कि स्वास्थ्य सुविधा एव परिवार कल्याण का विकास हसवा, बहुआ, ऐरायां और विजयीपुर आदि विकासखण्डों मे निम्न स्तर का है। इसके लिए निम्न नियोजन नीति अपनायी जानी आवश्यक है सम्बन्धित क्षेत्र के ग्रामीण निवासियो को संतुलित पोषाहार के संदर्भ में विस्तृत जानकारी देना चाहिए। इसके लिए शिविरों आदि का आयोजन किया जा सकता है। लोगों को विभिन्न बीमारियों के बारे में बताया जाना चाहिए जिससे वे उन बीमारियों से सम्बन्धित कारणों को जानकर प्राथमिक स्तर पर ही उनसे बचाव या निदान का प्रयास कर सकें । विकासशील क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रो की कुल संख्या बहुत ही कम है। इनकी संख्या दोगुनी करने की जरूरत है। इन केन्द्रो पर आपरेशन की मुफ्त सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। अधिकार प्राप्त स्थानीय प्रतिनिधियो द्वारा प्राथमिक केन्द्रों का निरीक्षण किया जाना चाहिए जिससे भ्रष्टाचार को रोककर स्वास्थ्य व्यवस्था को प्रभावशाली बनाया जा सके। चित्र आठ.एकF से स्पष्ट है कि अमौली, हसवा, बहुआ, हथगाँव और ऐरायां में आवागमन एवं संचार सुविधाओं का समुचित विकास नहीं हो सका है जिसके लिए निम्न प्रकार के नियोजनों की आवश्यकता है सर्वप्रथम विकासशील क्षेत्र में सड़क घनत्व में वृद्धि करने की आवश्यकता है। इसे नयी सडकों का निर्माण कर प्रतिलाख जनसंख्या पर कुल पक्की सड़कों की लम्बाई एक सौ किमीशून्य तक करने की
अमेरिकी स्मार्टफोन कंपनी Apple पर एक बार फिर करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाया गया है। फ्रांस की यूजर प्राइवेसी संस्था CNIL ने Apple पर उसके एप स्टोर के गलत इस्तेमाल को लेकर 80 लाख यूरो यानी करीब 70 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। CNIL का कहना है कि Apple ने अपने ऐप स्टोर से व्यक्तिगत विज्ञापन के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को लक्षित किया है। आपको बता दें कि हाल ही में जापान में आईफोन की थोक बिक्री के लिए ऐपल पर 10. 5 मिलियन डॉलर (करीब 870 करोड़ रुपये) का अतिरिक्त टैक्स लगाया गया है और ब्राजील में भी चार्जर उपलब्ध नहीं कराने पर कंपनी को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। 70 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाए जाने के बाद कंपनी ने प्राइवेसी वॉचडॉग के फैसले पर नाराजगी जताई है और कहा है कि वह इसके खिलाफ अपील करेगी। सीएनआईएल ने एक बयान में कहा कि आईफोन के सेटिंग आइकन में उपलब्ध विज्ञापन लक्ष्यीकरण सेटिंग्स को डिफ़ॉल्ट रूप से पहले से जांचा गया था, हालांकि डिवाइस के कामकाज के लिए यह बदलाव अनिवार्य नहीं है। CNIL का कहना है कि इस सेटिंग में बदलाव करके, कंपनी उपयोगकर्ता की सहमति के बिना उनके iPhone पर कुछ ऐप इंस्टॉल कर देती और उन्हें व्यक्तिगत विज्ञापन के माध्यम से लक्षित करती। आपको बता दें कि यह मामला 2021 का है और आईओएस ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर के पुराने वर्जन से जुड़ा है, जिसमें यूजर्स द्वारा की गई शिकायत के आधार पर यह जुर्माना लगाया गया है. आपको बता दें कि आईफोन के साथ बॉक्स में चार्जर नहीं देने को लेकर Apple पर कई बार मुकदमा चल चुका है। हाल ही में ब्राजील सरकार ने कई एप्पल स्टोर्स से आईफोन जब्त किए थे। इस ऑपरेशन को ऑपरेशन डिस्चार्ज नाम दिया गया। यह कार्रवाई एपल के सभी अधिकृत स्टोर्स पर हुई।
अमेरिकी स्मार्टफोन कंपनी Apple पर एक बार फिर करोड़ों रुपये का जुर्माना लगाया गया है। फ्रांस की यूजर प्राइवेसी संस्था CNIL ने Apple पर उसके एप स्टोर के गलत इस्तेमाल को लेकर अस्सी लाख यूरो यानी करीब सत्तर करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। CNIL का कहना है कि Apple ने अपने ऐप स्टोर से व्यक्तिगत विज्ञापन के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को लक्षित किया है। आपको बता दें कि हाल ही में जापान में आईफोन की थोक बिक्री के लिए ऐपल पर दस. पाँच मिलियन डॉलर का अतिरिक्त टैक्स लगाया गया है और ब्राजील में भी चार्जर उपलब्ध नहीं कराने पर कंपनी को कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। सत्तर करोड़ रुपए का जुर्माना लगाए जाने के बाद कंपनी ने प्राइवेसी वॉचडॉग के फैसले पर नाराजगी जताई है और कहा है कि वह इसके खिलाफ अपील करेगी। सीएनआईएल ने एक बयान में कहा कि आईफोन के सेटिंग आइकन में उपलब्ध विज्ञापन लक्ष्यीकरण सेटिंग्स को डिफ़ॉल्ट रूप से पहले से जांचा गया था, हालांकि डिवाइस के कामकाज के लिए यह बदलाव अनिवार्य नहीं है। CNIL का कहना है कि इस सेटिंग में बदलाव करके, कंपनी उपयोगकर्ता की सहमति के बिना उनके iPhone पर कुछ ऐप इंस्टॉल कर देती और उन्हें व्यक्तिगत विज्ञापन के माध्यम से लक्षित करती। आपको बता दें कि यह मामला दो हज़ार इक्कीस का है और आईओएस ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर के पुराने वर्जन से जुड़ा है, जिसमें यूजर्स द्वारा की गई शिकायत के आधार पर यह जुर्माना लगाया गया है. आपको बता दें कि आईफोन के साथ बॉक्स में चार्जर नहीं देने को लेकर Apple पर कई बार मुकदमा चल चुका है। हाल ही में ब्राजील सरकार ने कई एप्पल स्टोर्स से आईफोन जब्त किए थे। इस ऑपरेशन को ऑपरेशन डिस्चार्ज नाम दिया गया। यह कार्रवाई एपल के सभी अधिकृत स्टोर्स पर हुई।
बिलासपुर। Bilaspur News: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बिलासपुर से लोकसभा के पूर्व सांसद गोदिल प्रसाद अनुरागी का रविवार को निवास स्थान में निधन हो गया। पूर्व सासद अनुरागी लंबे समय से बीमार चल रहे थे। कुछ दिन शहर के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। डिस्चार्ज होने बाद घर से ही उनका इलाज चल रहा था। पूर्व सांसद के अस्वस्थ होने की जानकारी मिलने पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने स्वास्थ्य अधिकारियों को उनके उपयुक्त इलाज के निर्देश दिए थे। पूर्व सांसद अनुरागी बीते दो महीने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद व पूर्व विधायक गोदिल प्रसाद अनुरागी के निधन के कारण रविवार को जिले में पीडब्लूडी विभाग अंतर्गत होने वाले भूमिपूजन का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। मंथन सभा कक्ष में रखे गए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल वर्चुअली शामिल होने वाले थे। जैसे ही गोदिल प्रसाद अनुरागी के निधन की सूचना मिली मुख्यमंत्री के निर्देश पर बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत होने वाले भूमिपूजन कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया।
बिलासपुर। Bilaspur News: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और बिलासपुर से लोकसभा के पूर्व सांसद गोदिल प्रसाद अनुरागी का रविवार को निवास स्थान में निधन हो गया। पूर्व सासद अनुरागी लंबे समय से बीमार चल रहे थे। कुछ दिन शहर के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। डिस्चार्ज होने बाद घर से ही उनका इलाज चल रहा था। पूर्व सांसद के अस्वस्थ होने की जानकारी मिलने पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने स्वास्थ्य अधिकारियों को उनके उपयुक्त इलाज के निर्देश दिए थे। पूर्व सांसद अनुरागी बीते दो महीने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद व पूर्व विधायक गोदिल प्रसाद अनुरागी के निधन के कारण रविवार को जिले में पीडब्लूडी विभाग अंतर्गत होने वाले भूमिपूजन का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। मंथन सभा कक्ष में रखे गए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल वर्चुअली शामिल होने वाले थे। जैसे ही गोदिल प्रसाद अनुरागी के निधन की सूचना मिली मुख्यमंत्री के निर्देश पर बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र अंतर्गत होने वाले भूमिपूजन कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया।
३२ / भास उनका अभिमत है कि नाटकचक के कर्त्ता प्रसिद्ध कवि भास नहीं है, अपितु कोई केरल कवि है, जो ई० सन् सातवी शती में वर्तमान था । नाटकों के भरतवाक्यों में जिम राजसिंह का उल्लेख आया है, वह किसी केरलीय राजा का वाचक है। नाटकचक की भाषा महेन्द्रवीर विक्रम रचित मतविलास प्रहसन की भाषा से मिलती-जुलती है। पारिभाषिक शब्दों में भी पूर्ण साम्य है । अत वानेंट नाटकचक्र के कल्पित भास को सातवी शती का करते हैं । वानेंट के तर्कों का खण्डन' स्टेनकोनो, ध्रुव एव पुसालकर ने किया है जब कालिदाम और वाण ने भास का सातवी सदी के पूर्व उत्लेख कर दिया है, तो फिर सानवी सदी में भास का समय निश्चित करना हास्यास्पद है। यह सत्य है कि इन नाटको मे यत्र-तन प्रक्षेप हैं, पर इन प्रक्षेपो से भाम की प्राचीनता से किसी प्रकार की बाधा नही पड़ती । भास द्वारा प्रयुक्त प्राकृत के आधार पर समय निर्णय भास शटरचक्र मे प्रयुक्त प्राकृत भाषा के आधार पर भास के कालनिर्णय का प्रयास अनेक विद्वानों ने किया है । डॉ० हटॅल ने मुण्डकोपनिषद की भूमिका में लिखा है कि भास की रचनाओं को प्राकृत भाषा वालिदास की रच नाओ को प्राकृत भाषा की अपेक्षा प्राचीन है। भाम की भाषा का अध्ययन करने वालो मे डॉ० ए० वैनर्जी शास्त्री, विलियम प्रिंट्ज, लेस्नी, वो० एस० सुयार प्रमुख हैं। मुख्यकर ने विलियम प्रिट्ज के अध्ययन की जालोचना सन् १९४५ मे प्रकाशित की। प्रिट्ज ने पचरात्र' और 'वालचरित्र' मे गोपालको की भाषा को मागधो कहा है। यहाँ यह स्मरणीय है कि जिस मागधी मे कर्ता वारक एक वचन का अन्त 'ए' से होता है, वह मागधी यहाँ प्रयुक्त है । अत बालचरित और पचराय के गोपालको की भाषाको उत्तरी तथा पश्चिमी जनभाषाओं का ही रूप कहा जा सकता है। डॉ० वेलर ने इस प्राकृत शौरसेनी कहा है। 'वर्णभार' मे इन्द्र तथा 'बालचरित' मे गोपालक की भाषाको प्रजने अर्धमागधी वहा है। भास की प्राकृत भाषा के अध्ययन से ज्ञात होता है कि इस पर पालि स्वरावालि का पूरा प्रभाव है। इन्होंने कर्ता कारक एक वचन उत्तम पुरुष में 'अहम' के म्यान पर 'अहम्' और 'अड्के' १. पुमालकर, भास - ए स्टडी, पृ० १२९-१३२ भास का जोवन-वृत्त / ३३ का प्रयोग किया है । अश्वघोष ने 'अहम्' के लिए 'अहकम्' तथा वाद के रूपकों में 'हके', 'अके' और 'हगे' का प्रयोग हुआ है । प्रो० लेस्नी ने भास की प्राकृत भाषा की परिवर्तनशीलता तथा विभिन्न रूपों के साथ प्रयोगों की अधिकता के वल पर अश्वघोष और कालिदास से तुलनः की है और यह सिद्ध किया है कि ये नाटक कालिदास से पूर्व तथा अश्वघोष के बाद के हैं । इनके इस मत में बनर्जी शास्त्री ने अश्वघोष के बाद के होने में पर्याप्त सामग्री न होने से अपने समर्थन का अभाव दर्शाया है । भास के नाटकों में 'अम्हाअं' और 'अम्हाणं' दोनों प्रयोग 'अस्माकम्' के स्थान पर मिलते हैं । इन प्रयोगों के आधार पर 'भास' को अश्वघोष से पूर्ववर्ती नहीं माना जा सकता, क्योंकि ये दोनों प्रयोग मत्तविलास प्रहसन ( पृ० ३ तथा पृ० १२ ) में प्राप्त है। सुभद्रा धनंजय में भी 'अम्हाअं' और 'अम्हाणं' समान रूप से प्राप्त हैं। इसी प्रकार 'अड्के' का प्रयोग भी भास की मौलिकता नहीं है । डॉ० सुखयंकर ने शकुन्तला नाटक की देवनागरी प्रतियों में 'अहके' प्राप्त होने का निर्देश किया है । कुलशेखर वर्मन के सुभद्रा धनंजय तथा ताप्तीस्वयंवर में भी 'अके' शब्द प्राप्त होता है । 'आम्' शब्द का प्रयोग भास के रूपकों में प्रचुर परिमाण में मिलता है । यह पालि तथा अन्य प्राकृतों में भी प्राप्त है । अश्ववोप के तुर्फान हस्तलिखित प्रतियों में इसके प्रयोग से कोई विशेष प्रकाश नहीं मिलता । वस्तुतः यह शब्द विक्रमोर्वशीय, ताप्तीस्वयंवर एवं सुभद्रा- धनंजय में भी प्रयुक्त है । अतः इसे लौकिक साहित्य में प्रयुक्त मानना अधिक समीचीन है । महामहोपाध्याय हरप्रसाद शास्त्री ने लिखा है कि 'आम्' ही एक ऐसा शब्द है जो कि भास के बाद के लौकिक संस्कृत साहित्य के कवियों ने प्रयुक्त नहीं किया । यह शब्द 'पालि' में प्रयुक्त मिलता है । अतः भास का समय पालि भाषा का प्रचारकाल माना जा सकता है । पर अन्य नाटकों की प्राकृत भाषा का तुलनात्मक अध्ययन करने पर उक्त सिद्धान्त भ्रान्त प्रतीत होता है । 'करिअ' शब्द का प्रयोग पिशल के अनुसार शकुन्तला और मालविकाग्निमित्र को दक्षिण प्रतियों में ही केवल प्राप्त होता है। सुखयंकर इस प्रयोग को विशेष प्रयोग मानते हैं, क्योंकि यह अश्वघोप की तुर्कान हस्तलिखित प्रतियों में प्राप्त होता है । इसी प्रकार किस्स, किश्श, दिस्स, दिशश आदि प्रयोग भी अन्य ग्रन्थों में नहीं मिलते। इन प्रयोगों के आधार पर भी 'भास' की प्राचीनता मानी जा सकती है ।
बत्तीस / भास उनका अभिमत है कि नाटकचक के कर्त्ता प्रसिद्ध कवि भास नहीं है, अपितु कोई केरल कवि है, जो ईशून्य सन् सातवी शती में वर्तमान था । नाटकों के भरतवाक्यों में जिम राजसिंह का उल्लेख आया है, वह किसी केरलीय राजा का वाचक है। नाटकचक की भाषा महेन्द्रवीर विक्रम रचित मतविलास प्रहसन की भाषा से मिलती-जुलती है। पारिभाषिक शब्दों में भी पूर्ण साम्य है । अत वानेंट नाटकचक्र के कल्पित भास को सातवी शती का करते हैं । वानेंट के तर्कों का खण्डन' स्टेनकोनो, ध्रुव एव पुसालकर ने किया है जब कालिदाम और वाण ने भास का सातवी सदी के पूर्व उत्लेख कर दिया है, तो फिर सानवी सदी में भास का समय निश्चित करना हास्यास्पद है। यह सत्य है कि इन नाटको मे यत्र-तन प्रक्षेप हैं, पर इन प्रक्षेपो से भाम की प्राचीनता से किसी प्रकार की बाधा नही पड़ती । भास द्वारा प्रयुक्त प्राकृत के आधार पर समय निर्णय भास शटरचक्र मे प्रयुक्त प्राकृत भाषा के आधार पर भास के कालनिर्णय का प्रयास अनेक विद्वानों ने किया है । डॉशून्य हटॅल ने मुण्डकोपनिषद की भूमिका में लिखा है कि भास की रचनाओं को प्राकृत भाषा वालिदास की रच नाओ को प्राकृत भाषा की अपेक्षा प्राचीन है। भाम की भाषा का अध्ययन करने वालो मे डॉशून्य एशून्य वैनर्जी शास्त्री, विलियम प्रिंट्ज, लेस्नी, वोशून्य एसशून्य सुयार प्रमुख हैं। मुख्यकर ने विलियम प्रिट्ज के अध्ययन की जालोचना सन् एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस मे प्रकाशित की। प्रिट्ज ने पचरात्र' और 'वालचरित्र' मे गोपालको की भाषा को मागधो कहा है। यहाँ यह स्मरणीय है कि जिस मागधी मे कर्ता वारक एक वचन का अन्त 'ए' से होता है, वह मागधी यहाँ प्रयुक्त है । अत बालचरित और पचराय के गोपालको की भाषाको उत्तरी तथा पश्चिमी जनभाषाओं का ही रूप कहा जा सकता है। डॉशून्य वेलर ने इस प्राकृत शौरसेनी कहा है। 'वर्णभार' मे इन्द्र तथा 'बालचरित' मे गोपालक की भाषाको प्रजने अर्धमागधी वहा है। भास की प्राकृत भाषा के अध्ययन से ज्ञात होता है कि इस पर पालि स्वरावालि का पूरा प्रभाव है। इन्होंने कर्ता कारक एक वचन उत्तम पुरुष में 'अहम' के म्यान पर 'अहम्' और 'अड्के' एक. पुमालकर, भास - ए स्टडी, पृशून्य एक सौ उनतीस-एक सौ बत्तीस भास का जोवन-वृत्त / तैंतीस का प्रयोग किया है । अश्वघोष ने 'अहम्' के लिए 'अहकम्' तथा वाद के रूपकों में 'हके', 'अके' और 'हगे' का प्रयोग हुआ है । प्रोशून्य लेस्नी ने भास की प्राकृत भाषा की परिवर्तनशीलता तथा विभिन्न रूपों के साथ प्रयोगों की अधिकता के वल पर अश्वघोष और कालिदास से तुलनः की है और यह सिद्ध किया है कि ये नाटक कालिदास से पूर्व तथा अश्वघोष के बाद के हैं । इनके इस मत में बनर्जी शास्त्री ने अश्वघोष के बाद के होने में पर्याप्त सामग्री न होने से अपने समर्थन का अभाव दर्शाया है । भास के नाटकों में 'अम्हाअं' और 'अम्हाणं' दोनों प्रयोग 'अस्माकम्' के स्थान पर मिलते हैं । इन प्रयोगों के आधार पर 'भास' को अश्वघोष से पूर्ववर्ती नहीं माना जा सकता, क्योंकि ये दोनों प्रयोग मत्तविलास प्रहसन में प्राप्त है। सुभद्रा धनंजय में भी 'अम्हाअं' और 'अम्हाणं' समान रूप से प्राप्त हैं। इसी प्रकार 'अड्के' का प्रयोग भी भास की मौलिकता नहीं है । डॉशून्य सुखयंकर ने शकुन्तला नाटक की देवनागरी प्रतियों में 'अहके' प्राप्त होने का निर्देश किया है । कुलशेखर वर्मन के सुभद्रा धनंजय तथा ताप्तीस्वयंवर में भी 'अके' शब्द प्राप्त होता है । 'आम्' शब्द का प्रयोग भास के रूपकों में प्रचुर परिमाण में मिलता है । यह पालि तथा अन्य प्राकृतों में भी प्राप्त है । अश्ववोप के तुर्फान हस्तलिखित प्रतियों में इसके प्रयोग से कोई विशेष प्रकाश नहीं मिलता । वस्तुतः यह शब्द विक्रमोर्वशीय, ताप्तीस्वयंवर एवं सुभद्रा- धनंजय में भी प्रयुक्त है । अतः इसे लौकिक साहित्य में प्रयुक्त मानना अधिक समीचीन है । महामहोपाध्याय हरप्रसाद शास्त्री ने लिखा है कि 'आम्' ही एक ऐसा शब्द है जो कि भास के बाद के लौकिक संस्कृत साहित्य के कवियों ने प्रयुक्त नहीं किया । यह शब्द 'पालि' में प्रयुक्त मिलता है । अतः भास का समय पालि भाषा का प्रचारकाल माना जा सकता है । पर अन्य नाटकों की प्राकृत भाषा का तुलनात्मक अध्ययन करने पर उक्त सिद्धान्त भ्रान्त प्रतीत होता है । 'करिअ' शब्द का प्रयोग पिशल के अनुसार शकुन्तला और मालविकाग्निमित्र को दक्षिण प्रतियों में ही केवल प्राप्त होता है। सुखयंकर इस प्रयोग को विशेष प्रयोग मानते हैं, क्योंकि यह अश्वघोप की तुर्कान हस्तलिखित प्रतियों में प्राप्त होता है । इसी प्रकार किस्स, किश्श, दिस्स, दिशश आदि प्रयोग भी अन्य ग्रन्थों में नहीं मिलते। इन प्रयोगों के आधार पर भी 'भास' की प्राचीनता मानी जा सकती है ।
Baheda ke fayde: हेड़ा आयुर्वेद में कई बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होता है। दरअसल, इसमें कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो कि शरीर में वात,पित्त और कफ का बैलेंस करते हैं। इसके अलावा इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो कि शरीर की कई समस्याओं को कम करने में मदद कर सकते हैं। साथ ही ये सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं और पेट से जुड़ी कई समस्याओं में भी कारगर है। तो, आइए जानते हैं किन बीमारियों में हम बहेड़ा का सेवन (benefits of behada in hindi) कर सकते हैं और इसे खाने के फायदे क्या हैं। दस्त में बहेड़ा का सेवन काफी फायदेमंद है। बेहाड़ा फलों के अर्क के एंटीडायरेहियल प्रभाव होता है। साथ ही बेहड़ा अर्क के प्रशासन ने दस्त की घटनाओं को कम कर दिया। बेहाड़ा का अर्क जो कि प्रोस्टाग्लैंडीन E2 और नाइट्रिक ऑक्साइड से भरपूर होता है ये दस्त को रोकता है। इसके लिए बहेड़ा को दही में मिला कर इसका सेवन करें। बहेड़ा मूत्रवर्धक है यानी कि ये डाययूपेटिक गुणों से भरपूर है। ये सोडियम बैलेंस करने में मदद करता है। इसके अलावा ये कैल्शियम, ऑक्सालेट और फॉस्फेट को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है जो पथरी का कारण बनते हैं। साथ ही जिन लोगों में पथरी की समस्या है उनके लिए भी बहेड़ा का सेवन फायदेमंद है क्योंकि ये पथरी की समस्या में कारगर तरीके से काम करता है और इसे शरीर से फ्लश करने में भी मदद करता है। जोड़ों के दर्द में बहेड़ा फलों के अर्क काफी कारगर तरीके से काम करता है। इस अर्क में साइक्लोऑक्सीजिनेज एंजाइम होता है जो कि एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है। इसके अलावा इसमें एलाजिक एसिड और गैलिक एसिड होता है कि जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा बहेड़ा शरीर की गर्मी भी बढ़ाता है और सूजन को रोकता है। बहेड़ा वजन घटाने में मददगार है। ये फैट कम करने में मददगार है। दरअसल, ये मेटाबोलिज्म को तेज करता है और फैट पचाने में मददगार है। साथ ही ये एक्सरसाइज के दौरान शरीर की एनर्जी बढ़ाता है और वेट लॉस में मददगार है। डायबिटीज में बहेड़ा काफी कारगर है। दरअसल, ये इंसुलिन के प्रोडक्शन को बढ़ाता है और सी-पेप्टाइड और डायबिटीज कंट्रोल करने में मददगार है। साथ ही ये डायबिटीज में सूजन और न्यूरोपैथी की समस्या में कारगर है। डायबिटीज में आप इसके पाउडर का सेवन कर सकते हैं, जो कि ब्लड शुगर बैलेंस करने में मददगार होगा। Total Wellness is now just a click away.
Baheda ke fayde: हेड़ा आयुर्वेद में कई बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होता है। दरअसल, इसमें कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो कि शरीर में वात,पित्त और कफ का बैलेंस करते हैं। इसके अलावा इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो कि शरीर की कई समस्याओं को कम करने में मदद कर सकते हैं। साथ ही ये सर्दी-जुकाम जैसी समस्याओं और पेट से जुड़ी कई समस्याओं में भी कारगर है। तो, आइए जानते हैं किन बीमारियों में हम बहेड़ा का सेवन कर सकते हैं और इसे खाने के फायदे क्या हैं। दस्त में बहेड़ा का सेवन काफी फायदेमंद है। बेहाड़ा फलों के अर्क के एंटीडायरेहियल प्रभाव होता है। साथ ही बेहड़ा अर्क के प्रशासन ने दस्त की घटनाओं को कम कर दिया। बेहाड़ा का अर्क जो कि प्रोस्टाग्लैंडीन Eदो और नाइट्रिक ऑक्साइड से भरपूर होता है ये दस्त को रोकता है। इसके लिए बहेड़ा को दही में मिला कर इसका सेवन करें। बहेड़ा मूत्रवर्धक है यानी कि ये डाययूपेटिक गुणों से भरपूर है। ये सोडियम बैलेंस करने में मदद करता है। इसके अलावा ये कैल्शियम, ऑक्सालेट और फॉस्फेट को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है जो पथरी का कारण बनते हैं। साथ ही जिन लोगों में पथरी की समस्या है उनके लिए भी बहेड़ा का सेवन फायदेमंद है क्योंकि ये पथरी की समस्या में कारगर तरीके से काम करता है और इसे शरीर से फ्लश करने में भी मदद करता है। जोड़ों के दर्द में बहेड़ा फलों के अर्क काफी कारगर तरीके से काम करता है। इस अर्क में साइक्लोऑक्सीजिनेज एंजाइम होता है जो कि एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर है। इसके अलावा इसमें एलाजिक एसिड और गैलिक एसिड होता है कि जोड़ों के दर्द को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा बहेड़ा शरीर की गर्मी भी बढ़ाता है और सूजन को रोकता है। बहेड़ा वजन घटाने में मददगार है। ये फैट कम करने में मददगार है। दरअसल, ये मेटाबोलिज्म को तेज करता है और फैट पचाने में मददगार है। साथ ही ये एक्सरसाइज के दौरान शरीर की एनर्जी बढ़ाता है और वेट लॉस में मददगार है। डायबिटीज में बहेड़ा काफी कारगर है। दरअसल, ये इंसुलिन के प्रोडक्शन को बढ़ाता है और सी-पेप्टाइड और डायबिटीज कंट्रोल करने में मददगार है। साथ ही ये डायबिटीज में सूजन और न्यूरोपैथी की समस्या में कारगर है। डायबिटीज में आप इसके पाउडर का सेवन कर सकते हैं, जो कि ब्लड शुगर बैलेंस करने में मददगार होगा। Total Wellness is now just a click away.
Hyundai Exter SUV: हुंडई मोटर्स आने वाले कुछ ही समय में अपनी लेटेस्ट एक्सटर एसयूवी को भारत में लॉन्च करने वाली है. यह कार बीते कुछ समय से ही ग्राहकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो कंपनी इस नयी एसयूवी को 10 जुलाई के दिन लॉन्च कर सकती है. लोगों के भीतर Exter को लेकर उत्सुकता बनाये रखने के लिए कंपनी ने कई टीजर जारी किये है. इन टीजर्स की वजह से कार से जुड़े कुछ डिजाइन रिलेटेड फीचर्स सामने आये हैं. हुंडई ने हाल ही में एक नया टीजर जारी किया है जिसमें उन्होंने Exter के रियर प्रोफाइल से पर्दा उठाया है. जारी किये गए टीजर में आप देख सकते हैं कि इसका प्रोफाइल काफी बोल्ड होने के साथ आकर्षक भी लग रहा है. अगर आप भी Hyundai Exter SUV खरीदने की सोच रहे हैं तो पहले इससे जुडी कुछ बातें जान लें. हुंडई ने इस टीजर में SUV के रियर प्रोफाइल का खुलासा किया है और यह एक बोल्ड लुक को दर्शाता है. ऑटोमेकर की अगर माने तो कार के पिछले हिस्से में एक्सटर की आकर्षक डिजाइन फिलॉसफी जारी है. जारी किये गए नये टीजर में इस कार के रियर को काफी कॉम्पैक्ट, और बॉक्सी दिखने वाले एलईडी टेललाइट्स को H सिंबल के साथ दिखाया गया है. टीजर में आप टेललाइट्स को जोड़ने वाला एक चौड़ा काला पैनल भी देख सकते है. वहीं, कार के निचले हिस्से में एक रियर स्किड प्लेट दिया गया है, जो एसयूवी के टफ कैरेक्टर की ओर इशारा करती है. सामने आयी तस्वीरों से यह भी पता चलता है कि कार का एक SX वेरिएंट भी पेश किया जाएगा. Exter के फ्रंट प्रोफाइल से पहले ही पर्दा उठ चुका है, जिसमें H लेटर वाले बोनट की नोक पर बैठे हुए चिकना LED डे-टाइम रनिंग लाइट के साथ एक फ्लैट फेस दिखाया गया है. इस कार के हेडलैम्प्स बॉक्सी शेप और फीचर प्रोजेक्टर यूनिट्स के साथ आते हैं. एक स्पेसिफिक साइज का ब्लैक मेश फ्रंट ग्रिल और एक चंकी फ्रंट स्किड प्लेट अन्य डिजाइन एलिमेंट्स हैं जो फ्रंट प्रोफाइल पर दिखाई देते हैं, जबकि एसयूवी के साइड प्रोफाइल में अलॉय व्हील भी आधुनिक और नये डिजाइन के साथ आते हैं. हुंडई एक्सटर के इंजन ऑप्शंस पर नजर डालें तो इसमें आपको 1. 2 लीटर का नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन के साथ ही CNG का भी ऑप्शन मिल जाएगा. पेट्रोल इंजन 82bhp की मैक्स पावर और 114Nm की पीक टॉर्क जेनरेट करने की क्षमता रखता है जबकि, इसके CNG पावरट्रेन ऑप्शन में पावर और टॉर्क में थोड़ी कमी होने की उम्मीद जताई जा रही है. यह कार 5 स्पीड मैन्युअल गियरबॉक्स के साथ आएगी और इसमें आपको एक ऑप्शनल 5 स्पीड AMT का भी विकल्प मिल जाएगा.
Hyundai Exter SUV: हुंडई मोटर्स आने वाले कुछ ही समय में अपनी लेटेस्ट एक्सटर एसयूवी को भारत में लॉन्च करने वाली है. यह कार बीते कुछ समय से ही ग्राहकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो कंपनी इस नयी एसयूवी को दस जुलाई के दिन लॉन्च कर सकती है. लोगों के भीतर Exter को लेकर उत्सुकता बनाये रखने के लिए कंपनी ने कई टीजर जारी किये है. इन टीजर्स की वजह से कार से जुड़े कुछ डिजाइन रिलेटेड फीचर्स सामने आये हैं. हुंडई ने हाल ही में एक नया टीजर जारी किया है जिसमें उन्होंने Exter के रियर प्रोफाइल से पर्दा उठाया है. जारी किये गए टीजर में आप देख सकते हैं कि इसका प्रोफाइल काफी बोल्ड होने के साथ आकर्षक भी लग रहा है. अगर आप भी Hyundai Exter SUV खरीदने की सोच रहे हैं तो पहले इससे जुडी कुछ बातें जान लें. हुंडई ने इस टीजर में SUV के रियर प्रोफाइल का खुलासा किया है और यह एक बोल्ड लुक को दर्शाता है. ऑटोमेकर की अगर माने तो कार के पिछले हिस्से में एक्सटर की आकर्षक डिजाइन फिलॉसफी जारी है. जारी किये गए नये टीजर में इस कार के रियर को काफी कॉम्पैक्ट, और बॉक्सी दिखने वाले एलईडी टेललाइट्स को H सिंबल के साथ दिखाया गया है. टीजर में आप टेललाइट्स को जोड़ने वाला एक चौड़ा काला पैनल भी देख सकते है. वहीं, कार के निचले हिस्से में एक रियर स्किड प्लेट दिया गया है, जो एसयूवी के टफ कैरेक्टर की ओर इशारा करती है. सामने आयी तस्वीरों से यह भी पता चलता है कि कार का एक SX वेरिएंट भी पेश किया जाएगा. Exter के फ्रंट प्रोफाइल से पहले ही पर्दा उठ चुका है, जिसमें H लेटर वाले बोनट की नोक पर बैठे हुए चिकना LED डे-टाइम रनिंग लाइट के साथ एक फ्लैट फेस दिखाया गया है. इस कार के हेडलैम्प्स बॉक्सी शेप और फीचर प्रोजेक्टर यूनिट्स के साथ आते हैं. एक स्पेसिफिक साइज का ब्लैक मेश फ्रंट ग्रिल और एक चंकी फ्रंट स्किड प्लेट अन्य डिजाइन एलिमेंट्स हैं जो फ्रंट प्रोफाइल पर दिखाई देते हैं, जबकि एसयूवी के साइड प्रोफाइल में अलॉय व्हील भी आधुनिक और नये डिजाइन के साथ आते हैं. हुंडई एक्सटर के इंजन ऑप्शंस पर नजर डालें तो इसमें आपको एक. दो लीटरटर का नैचुरली एस्पिरेटेड पेट्रोल इंजन के साथ ही CNG का भी ऑप्शन मिल जाएगा. पेट्रोल इंजन बयासीbhp की मैक्स पावर और एक सौ चौदहNm की पीक टॉर्क जेनरेट करने की क्षमता रखता है जबकि, इसके CNG पावरट्रेन ऑप्शन में पावर और टॉर्क में थोड़ी कमी होने की उम्मीद जताई जा रही है. यह कार पाँच स्पीड मैन्युअल गियरबॉक्स के साथ आएगी और इसमें आपको एक ऑप्शनल पाँच स्पीड AMT का भी विकल्प मिल जाएगा.
डिस्काउंटों से भरे बाजारों , अखबारों में अखबारों से बड़े छपे विज्ञापनों को देख अब मुझे भीतर ही भीतर अहसास हो गया है कि हे राम ! तुम बनवास काट, घर के भेदी से लंका ढहवा अयोध्या की ओर लखन, सीता सहित कूच कर गए हो। और हम खालिस मध्यमवर्गीय तुम्हारे आने की खुषी में फटे झोले लिए बाजारों में सेल का माल खरीदने के लिए कतारों में खड़े हैं। इनदिनों तुम्हारे आने का पता हमें तबही चलता है जब हमारे बाजारों में पितरों से पीछा छुड़ाने के बाद सेल एटम बंब के धमाके सी शुरू होती है। जिधर देखो सेल ! बस सेल! डिस्काउंट ही डिस्काउंट! बाजार का हर लाला है कि तुम्हारे आने की खुशी में घी के दीए जलाना छोड़ अपने पुराने सुराने, गले सड़े माल को औने पौने दाम पर निकालने के लिए सेल डिस्काउंट के सहारे उतारू है। देखो तो, तुम्हारे आने की खुशी में अबके भी बाजार कैसे शर्म हया छोड़ सजा है। वह चाहता है कि इससे पहले कि तुम आओ, बाजार से सेल में उसका सड़ा फड़ा माल बिन हाथों के भी हाथों हाथ उठ जाए और तुम्हारे चलने के लिए बाजार का रास्ता खुला मिले ताकि तुम बाजार में से मजे से अपने महलों की ओर जा सको। इसलिए उसने कमेटी वाले तक पटा लिए हैं। देखो तो, बाजार से ही पता चला कि तुम सीता, लक्ष्मण और हनुमान सहित इस साल फिर लौट कर आ रहे हो तो मेरी पत्नी फिर पागल हो उठी है। इसलिए नहीं कि वह तुम्हारे स्वागत के लिए बेचैन है। वह तो इसलिए बौरार्इ है कि अब आएगा मजा सेल में अंट शंट माल की खरीददारी करने का! सोचती है, तुम्हारे आने से पहले जितना सेल का फायदा उठा लिया जाए, उठा लिया जाए। कल को क्या पता बाजार में सेल का माल मिले या न मिले। इधर तुम अयोध्या पहुंचे उधर सेल बंद! वैसे तो वह साल भर खरीददारी को लेकर पागल ही रहती है। पर तुम्हारे लौट कर आने के दिनों में वह विशेष रूप से पागल हो जाती है। राम नाम की सेल है, लूट सके तो लूट! अंत काल पछताएगी जब सेल जाएगी उठ! मैं उसे बहुत समझाता हूं कि भागवान! अपने देश के बाजारों में किसी न किसी के आने, किसी न किसी के जाने पर सेल लगती ही रहती है,पर उसके पास कान हों तो वह सुने। सच कहूं! अब हम मध्यमवर्गियों को तुम्हारे आने की खुशी उतनी नहीं होती जितनी तुम्हारे आने पर सेल लगने की होती है। तुम्हारे आने की खुशी में सेल के बहाने आटा दाल तक न खरीद पाने वाले भी सेल में बूट सूट तो खरीद ही लेते हैं! इसलिए कि कल दिन तुम ये न कहो कि मैं आया, पर मेरे आने की खुशी में हमने दो बरतन भी न खरीदे। तुम्हारे आने की खुशी में बाजार अपने नफे नुकसान को भूला भक्तों का उद्धार करने में जुट जाता है। तुम्हारे आने की खुशी में नुक्कड़ों तक की टूटी रेहडि़यों पर भी सेल! लाले हैं कि खुद नंगी टांगों के खड़े हैं, पर तुम्हारे आने की खुशी में जनता को सेल में पाजामें लंगोटी के भाव दे पुण्य लूट रहे हैं। कहीं र्इमानदारी की सेल तो कहीं सच की सेल! कहीं नैतिकता के साथ मानवीय मूल्य फ्री में देने के आष्वासन तो कहीं त्याग के साथ सातिवक प्रेम फ्री । पर लोग हैं कि देश काल वातावरण को देख इन्हें उठाने को सेल में भी तैयार नहीं। बेइमानी, भ्रस्टाचार, छल, कपट खरीदने से फुर्सत हो तो तो इस ओर बेचारी देखे। अब तुम्हारे आने के बारे में पंडित जी नहीं बताते, वे तो अपने यजमानों को छोड़ टीवी पर जा जमे हैं। अब बाजार से ही पता चलता है कि तुम आ रहे हो! वसंत के आने की सूचना कोयल नहीं देती, अब तो बाजार ही बताता है कि वसंत आ रहा है। होली आने की सूचना खिले फूल नहीं देते, बाजार ही देता है। बाजार को कुछ पता हो या न पर हमारे हर तीज त्यौहार का उसे पूरा पता है। देखा राम! बाजार हम लोगों की धार्मिक भावनाओं का कितना ध्यान रखता है? सच कहूं! आज की डेट में अगर बाजार न होता तो हम जैसे सांस्कृतिक तौर पर कभी के दिवालिए हो चुके होते!
डिस्काउंटों से भरे बाजारों , अखबारों में अखबारों से बड़े छपे विज्ञापनों को देख अब मुझे भीतर ही भीतर अहसास हो गया है कि हे राम ! तुम बनवास काट, घर के भेदी से लंका ढहवा अयोध्या की ओर लखन, सीता सहित कूच कर गए हो। और हम खालिस मध्यमवर्गीय तुम्हारे आने की खुषी में फटे झोले लिए बाजारों में सेल का माल खरीदने के लिए कतारों में खड़े हैं। इनदिनों तुम्हारे आने का पता हमें तबही चलता है जब हमारे बाजारों में पितरों से पीछा छुड़ाने के बाद सेल एटम बंब के धमाके सी शुरू होती है। जिधर देखो सेल ! बस सेल! डिस्काउंट ही डिस्काउंट! बाजार का हर लाला है कि तुम्हारे आने की खुशी में घी के दीए जलाना छोड़ अपने पुराने सुराने, गले सड़े माल को औने पौने दाम पर निकालने के लिए सेल डिस्काउंट के सहारे उतारू है। देखो तो, तुम्हारे आने की खुशी में अबके भी बाजार कैसे शर्म हया छोड़ सजा है। वह चाहता है कि इससे पहले कि तुम आओ, बाजार से सेल में उसका सड़ा फड़ा माल बिन हाथों के भी हाथों हाथ उठ जाए और तुम्हारे चलने के लिए बाजार का रास्ता खुला मिले ताकि तुम बाजार में से मजे से अपने महलों की ओर जा सको। इसलिए उसने कमेटी वाले तक पटा लिए हैं। देखो तो, बाजार से ही पता चला कि तुम सीता, लक्ष्मण और हनुमान सहित इस साल फिर लौट कर आ रहे हो तो मेरी पत्नी फिर पागल हो उठी है। इसलिए नहीं कि वह तुम्हारे स्वागत के लिए बेचैन है। वह तो इसलिए बौरार्इ है कि अब आएगा मजा सेल में अंट शंट माल की खरीददारी करने का! सोचती है, तुम्हारे आने से पहले जितना सेल का फायदा उठा लिया जाए, उठा लिया जाए। कल को क्या पता बाजार में सेल का माल मिले या न मिले। इधर तुम अयोध्या पहुंचे उधर सेल बंद! वैसे तो वह साल भर खरीददारी को लेकर पागल ही रहती है। पर तुम्हारे लौट कर आने के दिनों में वह विशेष रूप से पागल हो जाती है। राम नाम की सेल है, लूट सके तो लूट! अंत काल पछताएगी जब सेल जाएगी उठ! मैं उसे बहुत समझाता हूं कि भागवान! अपने देश के बाजारों में किसी न किसी के आने, किसी न किसी के जाने पर सेल लगती ही रहती है,पर उसके पास कान हों तो वह सुने। सच कहूं! अब हम मध्यमवर्गियों को तुम्हारे आने की खुशी उतनी नहीं होती जितनी तुम्हारे आने पर सेल लगने की होती है। तुम्हारे आने की खुशी में सेल के बहाने आटा दाल तक न खरीद पाने वाले भी सेल में बूट सूट तो खरीद ही लेते हैं! इसलिए कि कल दिन तुम ये न कहो कि मैं आया, पर मेरे आने की खुशी में हमने दो बरतन भी न खरीदे। तुम्हारे आने की खुशी में बाजार अपने नफे नुकसान को भूला भक्तों का उद्धार करने में जुट जाता है। तुम्हारे आने की खुशी में नुक्कड़ों तक की टूटी रेहडि़यों पर भी सेल! लाले हैं कि खुद नंगी टांगों के खड़े हैं, पर तुम्हारे आने की खुशी में जनता को सेल में पाजामें लंगोटी के भाव दे पुण्य लूट रहे हैं। कहीं र्इमानदारी की सेल तो कहीं सच की सेल! कहीं नैतिकता के साथ मानवीय मूल्य फ्री में देने के आष्वासन तो कहीं त्याग के साथ सातिवक प्रेम फ्री । पर लोग हैं कि देश काल वातावरण को देख इन्हें उठाने को सेल में भी तैयार नहीं। बेइमानी, भ्रस्टाचार, छल, कपट खरीदने से फुर्सत हो तो तो इस ओर बेचारी देखे। अब तुम्हारे आने के बारे में पंडित जी नहीं बताते, वे तो अपने यजमानों को छोड़ टीवी पर जा जमे हैं। अब बाजार से ही पता चलता है कि तुम आ रहे हो! वसंत के आने की सूचना कोयल नहीं देती, अब तो बाजार ही बताता है कि वसंत आ रहा है। होली आने की सूचना खिले फूल नहीं देते, बाजार ही देता है। बाजार को कुछ पता हो या न पर हमारे हर तीज त्यौहार का उसे पूरा पता है। देखा राम! बाजार हम लोगों की धार्मिक भावनाओं का कितना ध्यान रखता है? सच कहूं! आज की डेट में अगर बाजार न होता तो हम जैसे सांस्कृतिक तौर पर कभी के दिवालिए हो चुके होते!
Aaj Samaj (आज समाज), 27 May Weather Update, नई दिल्लीः देश के कई इलाकों में नौतपा के बीच बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं। शनिवार को नौतपा (नौ दिन आंधी और तूफान) का तीसरा दिन था इसके बावजूद आंधी-तूफान के साथ उत्तर भारत के कई राज्यों में लगभग रोज तेज बारिश हो रही है। इससे सड़क से लेकर हवाई यातायात बाधित हो रहा है। फ्लाइट्स डायवर्ट करनी पड़ रही हैं। पंजाब-हरियाणा, हिमाचल, यूपी व राजस्थान सहित सात राज्यों में अब भी 31 मई तक बारिश का अलर्ट है। दिल्ली-एनसीआर व हरियाणा-पंजाब सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में शनिवार सुबह तेज बारिश के साथ आंधी चली। इसके बाद दिल्ली एयरपोर्ट की ओर से शनिवार सुबह जारी की गई एडवाइजरी में कहा गया कि खराब मौसम के चलते एयरपोर्ट पर उड़ानें प्रभावित हुई हैं और ऐसे में यात्रियों से अनुरोध है कि वे उड़ान से पहले संबंधित एयरलाइन्स से कॉन्टैक्ट करें। पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में ऊंची चोटियों पर फिर बर्फबारी हुई है। हिमाचल, पंजाब और हरियाणा में शुक्रवार को हुई बारिश से तापमान में करीब 9 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई। बारिश के चलते हिमाचल में 9 सड़कें बंद हैं। पंजाब में शुक्रवार को 3. 3 एमएम बारिश दर्ज हुई। उत्तराखंड में स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मार्ग पर भारी बर्फ पड़ी है जिससे यातायात बाधित हो गया है। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि अगले तीन-चार दिन तक इसी तरह का मौसम रहने की संभावना है। दरअसल, उत्तरी पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू-कश्मीर के इलाके में साइक्लोनिक सकुर्लेशन बना है। हरियाणा के दक्षिणी हिस्से से सिक्किम और उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार तक ट्रफ लाइन बनी है। मप्र के पूर्वी हिस्से से होती हुई साउथ इंटीरियर कर्नाटक तक एक और नॉर्थ साउथ ट्रफ लाइन बनी है। राजस्थान, मध्यप्रदेश व झारखंड में भी तेज बारिश हो रही है जिससे तापमान 3 से 5 डिग्री कम हो गया है। झारखंड के विभिन्न इलाकों में बिजली गिरने से बीते दो दिन में 12 लोगों की मौत हो गई है। मध्यप्रदेश में शुक्रवार को भोपाल समेत 22 जिलों में आंधी और तेज हवा चली। 29 जिलों में बारिश हुई। रात 8:30 बजे तक भोपाल में 2 मिमी बारिश हुई। इसके साथ ही मई में पिछले 10 साल की बारिश का रिकॉर्ड भी टूट गया। राजस्थान मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार, राज्य में 29 मई तक आंधी-बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में इस दौरान 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और सड़कों पर पानी भर गया। सुबह आठ बजे तक कई इलाकों में विजिबिलिटी भी कम रही। मौसम विभाग ने दिल्ली में अगले दो-तीन दिन बारिश होने की संभावना जताई है। वहीं, 30 मई तक लू चलने की आशंका नहीं है। हरियाणा के भी अधिकतर जिलों में तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश हुई और राज्य में कई जगह सड़कें व गलियां तालाब बन गई। पेड़ गिर गए और बिजली के पोल ढह गए हैं। आईएमडी अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल मौसम ऐसा ही रहेगा। उत्तर प्रदेश व राजस्थान सहित सात राज्यों में 31 मई तक बारिश के आसार हैं। लेह के चांग्ला में भारी बर्फबारी के चलते महिलाओं व बच्चों सहित 100 श्रद्धालु फंस गए थे जिन्हें पुलिस ने रेस्क्यू किया है। लदाख पुलिस की यूनियन टेरिटरी डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स के अलावा सेना व जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स ने भी इस बचाव अभियान में अहम भूमिका निभाई। बचाव के बाद सभी यात्रियों को लेह भेज दिया गया है। देश में अभी मानसून दस्तक भी नहीं दे पाया कि अल-नीनो ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। इससे जून में बारिश कम और गर्मी ज्यादा पड़ने संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश में मानसून सीजन में सामान्य से कम यानी 92 फीसदी बारिश होगी। मौसम विभाग के विज्ञानी डीएस पई ने बताया है कि अल-नीनो का बारिश की कमी से सीधा असर नहीं होता। 1951 से अब तक 15 बार ऐसा मौका आया, जब मानसून के दौरान अल-नीनो परिस्थितियां भी बनी हुई थीं। इनमें से 9 बार मानसून में 90% से कम (सामान्य से कम), 4 बार सामान्य के आसपास यानी 90 से 100% के बीच और 2 बार 100% यानी सामान्य से ज्यादा बारिश हुई।
Aaj Samaj , सत्ताईस मई Weather Update, नई दिल्लीः देश के कई इलाकों में नौतपा के बीच बारिश और तेज हवाएं चल रही हैं। शनिवार को नौतपा का तीसरा दिन था इसके बावजूद आंधी-तूफान के साथ उत्तर भारत के कई राज्यों में लगभग रोज तेज बारिश हो रही है। इससे सड़क से लेकर हवाई यातायात बाधित हो रहा है। फ्लाइट्स डायवर्ट करनी पड़ रही हैं। पंजाब-हरियाणा, हिमाचल, यूपी व राजस्थान सहित सात राज्यों में अब भी इकतीस मई तक बारिश का अलर्ट है। दिल्ली-एनसीआर व हरियाणा-पंजाब सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में शनिवार सुबह तेज बारिश के साथ आंधी चली। इसके बाद दिल्ली एयरपोर्ट की ओर से शनिवार सुबह जारी की गई एडवाइजरी में कहा गया कि खराब मौसम के चलते एयरपोर्ट पर उड़ानें प्रभावित हुई हैं और ऐसे में यात्रियों से अनुरोध है कि वे उड़ान से पहले संबंधित एयरलाइन्स से कॉन्टैक्ट करें। पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में ऊंची चोटियों पर फिर बर्फबारी हुई है। हिमाचल, पंजाब और हरियाणा में शुक्रवार को हुई बारिश से तापमान में करीब नौ डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई। बारिश के चलते हिमाचल में नौ सड़कें बंद हैं। पंजाब में शुक्रवार को तीन. तीन एमएम बारिश दर्ज हुई। उत्तराखंड में स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मार्ग पर भारी बर्फ पड़ी है जिससे यातायात बाधित हो गया है। मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि अगले तीन-चार दिन तक इसी तरह का मौसम रहने की संभावना है। दरअसल, उत्तरी पाकिस्तान और उससे सटे जम्मू-कश्मीर के इलाके में साइक्लोनिक सकुर्लेशन बना है। हरियाणा के दक्षिणी हिस्से से सिक्किम और उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार तक ट्रफ लाइन बनी है। मप्र के पूर्वी हिस्से से होती हुई साउथ इंटीरियर कर्नाटक तक एक और नॉर्थ साउथ ट्रफ लाइन बनी है। राजस्थान, मध्यप्रदेश व झारखंड में भी तेज बारिश हो रही है जिससे तापमान तीन से पाँच डिग्री कम हो गया है। झारखंड के विभिन्न इलाकों में बिजली गिरने से बीते दो दिन में बारह लोगों की मौत हो गई है। मध्यप्रदेश में शुक्रवार को भोपाल समेत बाईस जिलों में आंधी और तेज हवा चली। उनतीस जिलों में बारिश हुई। रात आठ:तीस बजे तक भोपाल में दो मिमी बारिश हुई। इसके साथ ही मई में पिछले दस साल की बारिश का रिकॉर्ड भी टूट गया। राजस्थान मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार, राज्य में उनतीस मई तक आंधी-बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में इस दौरान सत्तर किलोग्राममीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और सड़कों पर पानी भर गया। सुबह आठ बजे तक कई इलाकों में विजिबिलिटी भी कम रही। मौसम विभाग ने दिल्ली में अगले दो-तीन दिन बारिश होने की संभावना जताई है। वहीं, तीस मई तक लू चलने की आशंका नहीं है। हरियाणा के भी अधिकतर जिलों में तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश हुई और राज्य में कई जगह सड़कें व गलियां तालाब बन गई। पेड़ गिर गए और बिजली के पोल ढह गए हैं। आईएमडी अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल मौसम ऐसा ही रहेगा। उत्तर प्रदेश व राजस्थान सहित सात राज्यों में इकतीस मई तक बारिश के आसार हैं। लेह के चांग्ला में भारी बर्फबारी के चलते महिलाओं व बच्चों सहित एक सौ श्रद्धालु फंस गए थे जिन्हें पुलिस ने रेस्क्यू किया है। लदाख पुलिस की यूनियन टेरिटरी डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स के अलावा सेना व जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स ने भी इस बचाव अभियान में अहम भूमिका निभाई। बचाव के बाद सभी यात्रियों को लेह भेज दिया गया है। देश में अभी मानसून दस्तक भी नहीं दे पाया कि अल-नीनो ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। इससे जून में बारिश कम और गर्मी ज्यादा पड़ने संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और मध्य प्रदेश में मानसून सीजन में सामान्य से कम यानी बानवे फीसदी बारिश होगी। मौसम विभाग के विज्ञानी डीएस पई ने बताया है कि अल-नीनो का बारिश की कमी से सीधा असर नहीं होता। एक हज़ार नौ सौ इक्यावन से अब तक पंद्रह बार ऐसा मौका आया, जब मानसून के दौरान अल-नीनो परिस्थितियां भी बनी हुई थीं। इनमें से नौ बार मानसून में नब्बे% से कम , चार बार सामान्य के आसपास यानी नब्बे से एक सौ% के बीच और दो बार एक सौ% यानी सामान्य से ज्यादा बारिश हुई।
नई दिल्लीः भारत में पिछले पांच महीनों में इस सप्ताह सबसे कम नए कोरोना केस दर्ज किए गए। इस सप्ताह 9-15 अगस्त के बीच देश में कोविड-19 के 2. 6 लाख से कम संक्रमण दर्ज किए गए, जो इसके पिछले सप्ताह के मुकाबले भी 6. 7 प्रतिशत कम है। गिरावट के बावजूद, पिछले छह हफ्तों से देश में साप्ताहिक मामले 2. 5 लाख से 3 लाख के बीच बने हुए हैं। इसका कारण है कुछ राज्यों में कोरोना के मामलों में इजाफा हुआ है। दरअसल, इस अवधि के दौरान केरल के साथ देश के कुछ अन्य राज्यों में भी कोरोना संक्रमण बढ़ता दिखा, जबकि उत्तर-पूर्व के राज्यों में मामलों में वृद्धि और गिरावट देखी गई। कर्नाटक, तमिलनाडु और हाल ही में हिमाचल प्रदेश में कोरोना के नए मामलों में मामूली इजाफा हुआ है। महाराष्ट्र में महामारी लगातार बनी हुई है, जहां संख्या में धीमी गिरावट आई है। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में रोजाना कोरोना के 1,000 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। भारत ने रविवार को समाप्त हुए सप्ताह में कोरोना के 2,55,819 ताजा मामले दर्ज किए। इससे पहले मार्च 8-14 में 1,55,912 संक्रमण सामने आए थे, उसके बाद से ये सबसे कम साप्ताहिक आंकड़ा है। मार्च की 22 हफ्ते पहले की बात है, जब देश में महामारी की दूसरी लहर उठ ही रही थी। देश में साप्ताहिक मामले 3-9 मई को चरम पर थे, जिसमें संक्रमण 27. 4 लाख से अधिक हो गया था। चरम पर पहुंचने के बाद से, कोरोना की साप्ताहिक गिनती 5-11 जुलाई वाले सप्ताह में पहली बार 3 लाख से नीचे आ गई. तब से यह संख्या कुछ हद तक स्थिर हो गई है। 26 जुलाई से 1 अगस्त के सप्ताह में 7. 5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। स बीच, वायरस से होने वाली मौतों में भी गिरावट जारी रही। चालू सप्ताह में 3,334 मौतें दर्ज की गईं, जो पिछले सप्ताह में हुईं 3,540 मौतों के मुकाबले 5. 8 परसेंट कम है। पिछले 24 घंटे में देश में लगभग 33,500 ताजा मामले दर्ज किए गए, जो पिछले 6 दिनों में कोरोना के नए मामलों का सबसे कम दैनिक आंकड़ा है। शुक्रवार को यह संख्या 36,135 और गुरुवार को 36,135 थी। इस बीच रविवार को वायरस से 421 मौतें दर्ज की गईं।
नई दिल्लीः भारत में पिछले पांच महीनों में इस सप्ताह सबसे कम नए कोरोना केस दर्ज किए गए। इस सप्ताह नौ-पंद्रह अगस्त के बीच देश में कोविड-उन्नीस के दो. छः लाख से कम संक्रमण दर्ज किए गए, जो इसके पिछले सप्ताह के मुकाबले भी छः. सात प्रतिशत कम है। गिरावट के बावजूद, पिछले छह हफ्तों से देश में साप्ताहिक मामले दो. पाँच लाख से तीन लाख के बीच बने हुए हैं। इसका कारण है कुछ राज्यों में कोरोना के मामलों में इजाफा हुआ है। दरअसल, इस अवधि के दौरान केरल के साथ देश के कुछ अन्य राज्यों में भी कोरोना संक्रमण बढ़ता दिखा, जबकि उत्तर-पूर्व के राज्यों में मामलों में वृद्धि और गिरावट देखी गई। कर्नाटक, तमिलनाडु और हाल ही में हिमाचल प्रदेश में कोरोना के नए मामलों में मामूली इजाफा हुआ है। महाराष्ट्र में महामारी लगातार बनी हुई है, जहां संख्या में धीमी गिरावट आई है। इसके अलावा, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में रोजाना कोरोना के एक,शून्य से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। भारत ने रविवार को समाप्त हुए सप्ताह में कोरोना के दो,पचपन,आठ सौ उन्नीस ताजा मामले दर्ज किए। इससे पहले मार्च आठ-चौदह में एक,पचपन,नौ सौ बारह संक्रमण सामने आए थे, उसके बाद से ये सबसे कम साप्ताहिक आंकड़ा है। मार्च की बाईस हफ्ते पहले की बात है, जब देश में महामारी की दूसरी लहर उठ ही रही थी। देश में साप्ताहिक मामले तीन-नौ मई को चरम पर थे, जिसमें संक्रमण सत्ताईस. चार लाख से अधिक हो गया था। चरम पर पहुंचने के बाद से, कोरोना की साप्ताहिक गिनती पाँच-ग्यारह जुलाई वाले सप्ताह में पहली बार तीन लाख से नीचे आ गई. तब से यह संख्या कुछ हद तक स्थिर हो गई है। छब्बीस जुलाई से एक अगस्त के सप्ताह में सात. पाँच फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। स बीच, वायरस से होने वाली मौतों में भी गिरावट जारी रही। चालू सप्ताह में तीन,तीन सौ चौंतीस मौतें दर्ज की गईं, जो पिछले सप्ताह में हुईं तीन,पाँच सौ चालीस मौतों के मुकाबले पाँच. आठ परसेंट कम है। पिछले चौबीस घंटाटे में देश में लगभग तैंतीस,पाँच सौ ताजा मामले दर्ज किए गए, जो पिछले छः दिनों में कोरोना के नए मामलों का सबसे कम दैनिक आंकड़ा है। शुक्रवार को यह संख्या छत्तीस,एक सौ पैंतीस और गुरुवार को छत्तीस,एक सौ पैंतीस थी। इस बीच रविवार को वायरस से चार सौ इक्कीस मौतें दर्ज की गईं।
भारतीय रेलवे ( Image Source : Abp Live ) Odisha Train Accident: ओडिशा में भीषण रेल दुर्घटना (Odisha Train Tragedy) में 288 लोगों की जान चली गई. करीब 900 लोग घायल हुए. हादसे की वजह बताते हुए रेल मंत्री (Rail Minister Ashwini Vaishnav) ने कहा कि यह हादसा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव के कारण हुआ. जिम्मेदार लोगों की पहचान कर ली गई है. रेलवे में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम वह होता है, जिसमें ट्रेन का ट्रैक तय किया जाता है. रेलवे के हवाले से ये बात सामने आई है कि बालासोर में 3 ट्रेनों के बीच जो दुर्घटना हुई, उन ट्रेनों के बीच टक्कर रोकने वाला कवच सिस्टम इस रूट पर मौजूद नहीं था. हालांकि, रेल मंत्री ने कहा है कि हादसे का इससे लेना-देना नहीं है. वहीं, कुछ जानकारों का कहना है कि यदि भारत में विकसित देशों जैसे एडवांस सिग्निलिंग सिस्टम और सिक्योरटी सिस्टम होते तो ऐसी घटना से बचा जा सकता था. यहां आज हम हम ट्रेन के पटरी से उतरने और ट्रेनों की टक्करों को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के बारे में जानेंगे और उन देशों के बारे में भी बताएंगे जो इस तरह के सुरक्षात्मक उपायों को लागू करने में सफल रहे हैं. जापान, जर्मनी, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण कोरिया और चीन ऐसे देश हैं, जहां ट्रेन एक्सीडेंट्स को रोकने की तकनीक बखूबी काम कर रही है. भारतीय रेलवे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रेल सर्विस मानी जाती है. यहां पर रोजाना करोड़ों लोग ट्रेनों में सफर करते हैं, ऐसे में रेलवे का आधुनिकीकरण और अत्यधिक सुरक्षित बनाने वाली तकनीक का होना बेहद जरूरी हो जाता है. कई पश्चिमी देशों में ट्रेनों में पॉजिटिव ट्रेन कंट्रोल (PTC) जैसे एडवांस सिग्नलिंग सिस्टम लगे होते हैं, ये एडवांस सिग्नलिंग सिस्टम हमारे यहां हों तो यह टेक्नोलॉजी ट्रेनों की संभावित टक्कर को रोकने के लिए स्वचालित रूप से ब्रेक लगा सकती है. ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली (TCAS) ये सिस्टम ट्रेन ऑपरेटरों (लोको पायलटों) को रीयल-टाइम अलर्ट प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें टकराव से बचने के लिए तत्काल कार्रवाई करने में मदद मिलती है. इसके अलावा रेलवे के संभावित खतरों की पहचान के लिए पटरियों का नियमित निरीक्षण करना भी बेहद जरूरी है. कई देशों में स्वचालित ट्रैक निरीक्षण (ATI) की सुविधा है. ये भारत में भी होनी चाहिए. भारतीय रेलवे के पास उन्नत संचार प्रणाली वायरलेस डेटा नेटवर्क और रीयल-टाइम रिपोर्टिंग टूल सहित यूरोपीय ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (ETCS) जैसी सुविधा भी होनी चाहिए. यूरोप के देश जर्मनी को अपने अच्छे सुरक्षा मानकों और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के लिए जाना जाता है. यह देश रेलवे कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर भी जोर देता है और नियमित सुरक्षा ऑडिट करता है. उसी प्रकार जापान भी अपने कुशल और सिक्योर ट्रेन सिस्टम के लिए फेमस है.
भारतीय रेलवे Odisha Train Accident: ओडिशा में भीषण रेल दुर्घटना में दो सौ अठासी लोगों की जान चली गई. करीब नौ सौ लोग घायल हुए. हादसे की वजह बताते हुए रेल मंत्री ने कहा कि यह हादसा इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग में बदलाव के कारण हुआ. जिम्मेदार लोगों की पहचान कर ली गई है. रेलवे में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम वह होता है, जिसमें ट्रेन का ट्रैक तय किया जाता है. रेलवे के हवाले से ये बात सामने आई है कि बालासोर में तीन ट्रेनों के बीच जो दुर्घटना हुई, उन ट्रेनों के बीच टक्कर रोकने वाला कवच सिस्टम इस रूट पर मौजूद नहीं था. हालांकि, रेल मंत्री ने कहा है कि हादसे का इससे लेना-देना नहीं है. वहीं, कुछ जानकारों का कहना है कि यदि भारत में विकसित देशों जैसे एडवांस सिग्निलिंग सिस्टम और सिक्योरटी सिस्टम होते तो ऐसी घटना से बचा जा सकता था. यहां आज हम हम ट्रेन के पटरी से उतरने और ट्रेनों की टक्करों को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के बारे में जानेंगे और उन देशों के बारे में भी बताएंगे जो इस तरह के सुरक्षात्मक उपायों को लागू करने में सफल रहे हैं. जापान, जर्मनी, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण कोरिया और चीन ऐसे देश हैं, जहां ट्रेन एक्सीडेंट्स को रोकने की तकनीक बखूबी काम कर रही है. भारतीय रेलवे दुनिया की चौथी सबसे बड़ी रेल सर्विस मानी जाती है. यहां पर रोजाना करोड़ों लोग ट्रेनों में सफर करते हैं, ऐसे में रेलवे का आधुनिकीकरण और अत्यधिक सुरक्षित बनाने वाली तकनीक का होना बेहद जरूरी हो जाता है. कई पश्चिमी देशों में ट्रेनों में पॉजिटिव ट्रेन कंट्रोल जैसे एडवांस सिग्नलिंग सिस्टम लगे होते हैं, ये एडवांस सिग्नलिंग सिस्टम हमारे यहां हों तो यह टेक्नोलॉजी ट्रेनों की संभावित टक्कर को रोकने के लिए स्वचालित रूप से ब्रेक लगा सकती है. ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली ये सिस्टम ट्रेन ऑपरेटरों को रीयल-टाइम अलर्ट प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें टकराव से बचने के लिए तत्काल कार्रवाई करने में मदद मिलती है. इसके अलावा रेलवे के संभावित खतरों की पहचान के लिए पटरियों का नियमित निरीक्षण करना भी बेहद जरूरी है. कई देशों में स्वचालित ट्रैक निरीक्षण की सुविधा है. ये भारत में भी होनी चाहिए. भारतीय रेलवे के पास उन्नत संचार प्रणाली वायरलेस डेटा नेटवर्क और रीयल-टाइम रिपोर्टिंग टूल सहित यूरोपीय ट्रेन कंट्रोल सिस्टम जैसी सुविधा भी होनी चाहिए. यूरोप के देश जर्मनी को अपने अच्छे सुरक्षा मानकों और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के लिए जाना जाता है. यह देश रेलवे कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर भी जोर देता है और नियमित सुरक्षा ऑडिट करता है. उसी प्रकार जापान भी अपने कुशल और सिक्योर ट्रेन सिस्टम के लिए फेमस है.
Ukraine Russia Issue: रूस और यूक्रेन के बीच तनाव काफी बढ़ गया है. इस मसले पर संयुक्त राष्ट्र में भारत और चीन के कदम से रूस ने खुशी जताई है और दोनों देशों का आभार जताया है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council) में यूक्रेन की स्थिति (Ukraine Conflict) पर बैठक से पहले चीन के प्रक्रियागत मतदान के खिलाफ मत देने और इसमें भारत, केन्या और गैबॉन के अनुपस्थित रहने पर संयुक्त राष्ट्र में एक रूस (Russia) के राजनयिक ने 'मतदान से पहले अमेरिकी दबाव के बावजूद डटे रहने' पर चारों देशों को शुक्रिया अदा किया है. भारत ने यूक्रेन सीमा पर 'तनावपूर्ण हालात' को लेकर चर्चा के लिए होने वाली बैठक से पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में प्रक्रियागत मतदान में भाग नहीं लिया था. बैठक से पहले परिषद के स्थायी और वीटो- अधिकार प्राप्त सदस्य रूस ने यह निर्धारित करने के लिए एक प्रक्रियागत वोट का आह्वान किया था कि क्या खुली बैठक आगे बढ़नी चाहिए (India on Ukraine Issue). अमेरिका के अनुरोध पर हुई बैठक के लिए परिषद को नौ मतों की आवश्यकता थी. रूस और चीन ने बैठक के खिलाफ मतदान किया, जबकि भारत, गैबॉन और केन्या ने भाग नहीं लिया. फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन सहित परिषद के 10 अन्य सदस्यों ने बैठक के चलने के पक्ष में मतदान किया. बैठक में भारत ने क्या कहा? बैठक में भारत ने रेखांकित किया कि 'शांत और रचनात्मक' कूटनीति 'समय की आवश्यकता.' है और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के व्यापक हित में सभी पक्षों द्वारा तनाव बढ़ाने वाले किसी भी कदम से बचना चाहिए. यूक्रेन की सीमाओं के पास हजारों रूसी सैनिकों के एकत्र होने के बीच यूक्रेन संकट पर चर्चा करने के लिए 15 सदस्यीय परिषद ने बैठक की थी. मास्को की कार्रवाई ने यूक्रेन पर आक्रमण की आशंकाओं को बढ़ा दिया है. रूस ने इस बात से इनकार किया कि वह हमले की योजना बना रहा है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति ने परिषद में कहा कि नई दिल्ली यूक्रेन से संबंधित घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रही है.
Ukraine Russia Issue: रूस और यूक्रेन के बीच तनाव काफी बढ़ गया है. इस मसले पर संयुक्त राष्ट्र में भारत और चीन के कदम से रूस ने खुशी जताई है और दोनों देशों का आभार जताया है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन की स्थिति पर बैठक से पहले चीन के प्रक्रियागत मतदान के खिलाफ मत देने और इसमें भारत, केन्या और गैबॉन के अनुपस्थित रहने पर संयुक्त राष्ट्र में एक रूस के राजनयिक ने 'मतदान से पहले अमेरिकी दबाव के बावजूद डटे रहने' पर चारों देशों को शुक्रिया अदा किया है. भारत ने यूक्रेन सीमा पर 'तनावपूर्ण हालात' को लेकर चर्चा के लिए होने वाली बैठक से पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में प्रक्रियागत मतदान में भाग नहीं लिया था. बैठक से पहले परिषद के स्थायी और वीटो- अधिकार प्राप्त सदस्य रूस ने यह निर्धारित करने के लिए एक प्रक्रियागत वोट का आह्वान किया था कि क्या खुली बैठक आगे बढ़नी चाहिए . अमेरिका के अनुरोध पर हुई बैठक के लिए परिषद को नौ मतों की आवश्यकता थी. रूस और चीन ने बैठक के खिलाफ मतदान किया, जबकि भारत, गैबॉन और केन्या ने भाग नहीं लिया. फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन सहित परिषद के दस अन्य सदस्यों ने बैठक के चलने के पक्ष में मतदान किया. बैठक में भारत ने क्या कहा? बैठक में भारत ने रेखांकित किया कि 'शांत और रचनात्मक' कूटनीति 'समय की आवश्यकता.' है और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के व्यापक हित में सभी पक्षों द्वारा तनाव बढ़ाने वाले किसी भी कदम से बचना चाहिए. यूक्रेन की सीमाओं के पास हजारों रूसी सैनिकों के एकत्र होने के बीच यूक्रेन संकट पर चर्चा करने के लिए पंद्रह सदस्यीय परिषद ने बैठक की थी. मास्को की कार्रवाई ने यूक्रेन पर आक्रमण की आशंकाओं को बढ़ा दिया है. रूस ने इस बात से इनकार किया कि वह हमले की योजना बना रहा है. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति ने परिषद में कहा कि नई दिल्ली यूक्रेन से संबंधित घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रही है.
डिजिटल कारोबारों के विलय को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की जांच का उसी स्थिति में सामना करना पड़ सकता है, अगर उसका ग्राहक आधार, उपयोगकर्ता का डेटा अधिक हो। इन मानदंडों को भारत में कारोबार का व्यापक परिचालन के तहत निर्धारित किया जाएगा। बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में सीसीआई के प्रमुख अशोक कुमार गुप्ता ने ये बातें कहीं। वैश्विक डिजिटल विलय और अधिग्रहण को लक्षित करने वाले प्रस्तावित प्रतिस्पर्धा विधेयक में सौदे के मूल्य का पैमाना तय करने में देश में कारोबार का व्यापक परिचालन अहम शर्त है। विधेयक को हाल में संपन्न हुए मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किया गया था, जिसे भारतीय जनता पार्टी के नेता जयंत सिन्हा की अगुआई वाली वित्त पर संसद की स्थायी समिति के पास समीक्षा के लिए भेजा गया है। समिति को विधेयक का मूल्यांकन करने और तीन महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। सीसीआई प्रमुख ने कहा, 'सौदे के मूल्य की सीमा के लिए स्थानीय गठजोड़ का मानदंड नई पीढ़ी के बाजार में किसी कंपनी के मूल्यांकन को प्रभावित करने वाले पहलू पर आधारित होना चाहिए। ये मानदंड बाजार-उन्मुख कारकों जैसे कि उपयोगकर्ताओं की संख्या, अनुबंधों की संख्या, भुगतान में प्राप्त कुल राशि आदि पर व्यापक रूप से आधारित होगा। हालांकि परिसंपत्ति और सालाना कारोबार में ये चीजें पूरी तरह से परिलक्षित नहीं होती थीं। 'गुप्ता ने कहा कि इस तरह के नियमन को हितधारकों के साथ परामर्श और आंतरिक स्तर पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानीय सांठगांठ के मानदंड का अभिप्राय ऐसे विलय एवं अधिग्रहण के सौदों को इसके दायरे से बाहर करना है जिनका परिचालन विशिष्ट रूप से विदेश में होता है या भारत में उस कारोबार का परिचालन सीमित है। प्रतिस्पर्धा विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि अगर सौदे का न्यूनतम मूल्य 2,000 करोड़ रुपये है और उसका अधिग्रहण किसी ऐसी कंपनी द्वारा किया जा रहा है जिसका भारत में अच्छा-खासा परिचालन है तो उक्त सौदे की जानकारी प्रतिस्पर्धा नियामक को देनी होगी। मौजूदा समय में सीसीआई का अधिकार क्षेत्र कानून में निर्धारित परिसंपत्ति और सालाना कारोबार की सीमा वाले विलय और अधिग्रहण तक ही सीमित है। नियामकीय खाई पैदा होने से सौदे के मूल्य जैसे अतिरिक्त अधिसूचना मानदंड शुरू करना जरूरी हो गया है। इसके बारे में गुप्ता ने कहा कि नए दौर के बाजार में उपयोगकर्ता, डेटा, वृद्धि और नेटवर्क प्रभाव जैसे कारक बाजार में अहम मुकाम हासिल करने का साधन बन गए हैं। उन्होंने कहा, 'नए दौर के कारोबार में किसी सफल कारोबारी मॉडल चलाने वाली वाली कंपनियों का अहम मूल्यांकन है मगर परिसंपत्तियां बहुत अधिक नहीं हैं और उनके वित्तीय ब्योरे में सालाना कारोबार बिल्कुल नहीं या मामूली दर्ज किया गया है। 'उन्होंने कहा कि अब यह सभी जगह व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है कि परंपरागत परिसंपत्ति/टर्नओवर का मापदंड नए दौर के बाजारों में संभावित प्रतिस्पर्धा विरोधी लेनदेन को पकड़ने में असफल रह सकता है। उन्होंने कहा, 'इसके नतीजतन जिन विलय एवं अधिग्रहण में कंपनियां या परिसंपत्तियां अभी तक मामूली या कोई टर्नओवर नहीं है, उन्हें ऊंची कीमत पर खरीदा जा रहा है। इसकी प्रतिस्पर्धा कानून के तहत जांच जरूरी है। '2,000 करोड़ रुपये की सीमा तय किए जाने को लेकर सीसीआई के प्रमुख ने कहा कि यह जर्मनी और ऑस्ट्रिया जैसे वैश्विक देशों के समान है, जिन्होंने विलय को नियंत्रित करने की अपनी प्रणाली में ऐसे ही मानदंड लागू किए हैं। Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
डिजिटल कारोबारों के विलय को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की जांच का उसी स्थिति में सामना करना पड़ सकता है, अगर उसका ग्राहक आधार, उपयोगकर्ता का डेटा अधिक हो। इन मानदंडों को भारत में कारोबार का व्यापक परिचालन के तहत निर्धारित किया जाएगा। बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में सीसीआई के प्रमुख अशोक कुमार गुप्ता ने ये बातें कहीं। वैश्विक डिजिटल विलय और अधिग्रहण को लक्षित करने वाले प्रस्तावित प्रतिस्पर्धा विधेयक में सौदे के मूल्य का पैमाना तय करने में देश में कारोबार का व्यापक परिचालन अहम शर्त है। विधेयक को हाल में संपन्न हुए मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किया गया था, जिसे भारतीय जनता पार्टी के नेता जयंत सिन्हा की अगुआई वाली वित्त पर संसद की स्थायी समिति के पास समीक्षा के लिए भेजा गया है। समिति को विधेयक का मूल्यांकन करने और तीन महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। सीसीआई प्रमुख ने कहा, 'सौदे के मूल्य की सीमा के लिए स्थानीय गठजोड़ का मानदंड नई पीढ़ी के बाजार में किसी कंपनी के मूल्यांकन को प्रभावित करने वाले पहलू पर आधारित होना चाहिए। ये मानदंड बाजार-उन्मुख कारकों जैसे कि उपयोगकर्ताओं की संख्या, अनुबंधों की संख्या, भुगतान में प्राप्त कुल राशि आदि पर व्यापक रूप से आधारित होगा। हालांकि परिसंपत्ति और सालाना कारोबार में ये चीजें पूरी तरह से परिलक्षित नहीं होती थीं। 'गुप्ता ने कहा कि इस तरह के नियमन को हितधारकों के साथ परामर्श और आंतरिक स्तर पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानीय सांठगांठ के मानदंड का अभिप्राय ऐसे विलय एवं अधिग्रहण के सौदों को इसके दायरे से बाहर करना है जिनका परिचालन विशिष्ट रूप से विदेश में होता है या भारत में उस कारोबार का परिचालन सीमित है। प्रतिस्पर्धा विधेयक में प्रस्ताव किया गया है कि अगर सौदे का न्यूनतम मूल्य दो,शून्य करोड़ रुपये है और उसका अधिग्रहण किसी ऐसी कंपनी द्वारा किया जा रहा है जिसका भारत में अच्छा-खासा परिचालन है तो उक्त सौदे की जानकारी प्रतिस्पर्धा नियामक को देनी होगी। मौजूदा समय में सीसीआई का अधिकार क्षेत्र कानून में निर्धारित परिसंपत्ति और सालाना कारोबार की सीमा वाले विलय और अधिग्रहण तक ही सीमित है। नियामकीय खाई पैदा होने से सौदे के मूल्य जैसे अतिरिक्त अधिसूचना मानदंड शुरू करना जरूरी हो गया है। इसके बारे में गुप्ता ने कहा कि नए दौर के बाजार में उपयोगकर्ता, डेटा, वृद्धि और नेटवर्क प्रभाव जैसे कारक बाजार में अहम मुकाम हासिल करने का साधन बन गए हैं। उन्होंने कहा, 'नए दौर के कारोबार में किसी सफल कारोबारी मॉडल चलाने वाली वाली कंपनियों का अहम मूल्यांकन है मगर परिसंपत्तियां बहुत अधिक नहीं हैं और उनके वित्तीय ब्योरे में सालाना कारोबार बिल्कुल नहीं या मामूली दर्ज किया गया है। 'उन्होंने कहा कि अब यह सभी जगह व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है कि परंपरागत परिसंपत्ति/टर्नओवर का मापदंड नए दौर के बाजारों में संभावित प्रतिस्पर्धा विरोधी लेनदेन को पकड़ने में असफल रह सकता है। उन्होंने कहा, 'इसके नतीजतन जिन विलय एवं अधिग्रहण में कंपनियां या परिसंपत्तियां अभी तक मामूली या कोई टर्नओवर नहीं है, उन्हें ऊंची कीमत पर खरीदा जा रहा है। इसकी प्रतिस्पर्धा कानून के तहत जांच जरूरी है। 'दो,शून्य करोड़ रुपये की सीमा तय किए जाने को लेकर सीसीआई के प्रमुख ने कहा कि यह जर्मनी और ऑस्ट्रिया जैसे वैश्विक देशों के समान है, जिन्होंने विलय को नियंत्रित करने की अपनी प्रणाली में ऐसे ही मानदंड लागू किए हैं। Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
Assam Board HS Result 2022 Date and Time: असम उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद (एएचएसईसी) कक्षा 12वीं की परीक्षा के परिणाम सोमवार, 27 जून को सुबह 9 बजे घोषित करेगा। छात्र अपना स्कोर कार्ड AHSEC की आधिकारिक वेबसाइट ahsec. assam. gov. in और resultsassam. nic. in पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं। बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट सुबह 9 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए घोषित की जाएगी। इस दौरान पास प्रतिशत और टॉपर्स के नाम की भी घोषणा की जाएगी। इसके तुरंत बाद, छात्र आधिकारिक वेबसाइटों पर अपना स्कोर कार्ड चेक कर सकेंगे। छात्रों को उनकी मार्कशीट की हार्ड कॉपी और एएचएसईसी द्वारा जारी किए गए पास सर्टिफिकेट बाद में अपने स्कूल से लेना होगा। बता दें इस महीने की शुरुआत में, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड असम ने कक्षा 10वीं की परीक्षा के परिणाम घोषित किए थे। आधिकारिक वेबसाइच resultsassam. nic. in पर जाएं। होमपेज पर एचएस रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें। अपने रोल नंबर के माध्यम से लॉगिन करें। सबमिट करें और अपना परिणाम चेक करें।
Assam Board HS Result दो हज़ार बाईस Date and Time: असम उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद कक्षा बारहवीं की परीक्षा के परिणाम सोमवार, सत्ताईस जून को सुबह नौ बजे घोषित करेगा। छात्र अपना स्कोर कार्ड AHSEC की आधिकारिक वेबसाइट ahsec. assam. gov. in और resultsassam. nic. in पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं। बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट सुबह नौ बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए घोषित की जाएगी। इस दौरान पास प्रतिशत और टॉपर्स के नाम की भी घोषणा की जाएगी। इसके तुरंत बाद, छात्र आधिकारिक वेबसाइटों पर अपना स्कोर कार्ड चेक कर सकेंगे। छात्रों को उनकी मार्कशीट की हार्ड कॉपी और एएचएसईसी द्वारा जारी किए गए पास सर्टिफिकेट बाद में अपने स्कूल से लेना होगा। बता दें इस महीने की शुरुआत में, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड असम ने कक्षा दसवीं की परीक्षा के परिणाम घोषित किए थे। आधिकारिक वेबसाइच resultsassam. nic. in पर जाएं। होमपेज पर एचएस रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें। अपने रोल नंबर के माध्यम से लॉगिन करें। सबमिट करें और अपना परिणाम चेक करें।
राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र का ट्विटर अकाउंट रविवार सुबह हैक कर लिया गया। सुबह 11. 28 बजे राज्यपाल के ट्विटर हैंडल से अरबी भाषा में ट्वीट किया गया। साथ में एक इमोटिकॉन भी पोस्ट किया गया है, जिसमें किस ऑफ लव साइन दिखाई दे रहा है। इधर, अकाउंट हैक होने के बाद देर शाम तक रिकवर नहीं हुआ। ट्विटर इंडिया को लिखा भी गया है। बताया जा रहा है अकाउंट हैक करने वाले इंटरनेशनल हैकर है। राज्य के प्रथम नागरिक राज्यपाल का ट्विटर अकाउंट हैक होते ही साइबर पुलिस और जयपुर पुलिस कमिश्नरेट हरकत में आ गए हैं। राजभवन से भी इसकी शिकायत की गई है। साइबर एक्सपर्ट्स राज्यपाल के ट्विटर अकाउंट को हैकर से वापस रिकवर करने की कोशिश में जुटे हैं। साथ ही अकाउंट किसने हैक किया और कहां से हैक हुआ, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। साइबर एक्सपर्ट्स की टीम राज्यपाल के अकाउंट के सिक्योरिटी फीचर्स को भी चेक कर रही है कि कैसे अकाउंट हैक हो गया? नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) का आधिकारिक ट्विटर हैंडल शनिवार देर रात हैक कर लिया गया। NDRF के एक सीनियर ऑफिसर ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि टेक्निकल एक्सपर्ट मामले की जांच कर रहे हैं और जल्द ही हैंडल को बहाल कर दिया जाएगा। इससे पहले 12 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्विटर अकाउंट को भी हैक कर लिया गया था। मामला ट्विटर तक पहंचने पर अकाउंट को तुरंत सुरक्षित किया गया। हैकर्स ने PM मोदी के ट्विटर अकाउंट को निशाना बनाते हुए तीन मिनट के भीतर दो ट्वीट किए थे। यह ट्वीट देर रात करीब 2. 11 बजे से 2. 15 के बीच हुए। हैक कर किए गए ट्वीट में बिटकॉइन को कानूनी मान्यता दिए जाने की बात कही गई थी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र का ट्विटर अकाउंट रविवार सुबह हैक कर लिया गया। सुबह ग्यारह. अट्ठाईस बजे राज्यपाल के ट्विटर हैंडल से अरबी भाषा में ट्वीट किया गया। साथ में एक इमोटिकॉन भी पोस्ट किया गया है, जिसमें किस ऑफ लव साइन दिखाई दे रहा है। इधर, अकाउंट हैक होने के बाद देर शाम तक रिकवर नहीं हुआ। ट्विटर इंडिया को लिखा भी गया है। बताया जा रहा है अकाउंट हैक करने वाले इंटरनेशनल हैकर है। राज्य के प्रथम नागरिक राज्यपाल का ट्विटर अकाउंट हैक होते ही साइबर पुलिस और जयपुर पुलिस कमिश्नरेट हरकत में आ गए हैं। राजभवन से भी इसकी शिकायत की गई है। साइबर एक्सपर्ट्स राज्यपाल के ट्विटर अकाउंट को हैकर से वापस रिकवर करने की कोशिश में जुटे हैं। साथ ही अकाउंट किसने हैक किया और कहां से हैक हुआ, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। साइबर एक्सपर्ट्स की टीम राज्यपाल के अकाउंट के सिक्योरिटी फीचर्स को भी चेक कर रही है कि कैसे अकाउंट हैक हो गया? नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स का आधिकारिक ट्विटर हैंडल शनिवार देर रात हैक कर लिया गया। NDRF के एक सीनियर ऑफिसर ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि टेक्निकल एक्सपर्ट मामले की जांच कर रहे हैं और जल्द ही हैंडल को बहाल कर दिया जाएगा। इससे पहले बारह दिसंबर दो हज़ार इक्कीस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्विटर अकाउंट को भी हैक कर लिया गया था। मामला ट्विटर तक पहंचने पर अकाउंट को तुरंत सुरक्षित किया गया। हैकर्स ने PM मोदी के ट्विटर अकाउंट को निशाना बनाते हुए तीन मिनट के भीतर दो ट्वीट किए थे। यह ट्वीट देर रात करीब दो. ग्यारह बजे से दो. पंद्रह के बीच हुए। हैक कर किए गए ट्वीट में बिटकॉइन को कानूनी मान्यता दिए जाने की बात कही गई थी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Government Diwali Offer,Eknath Shinde ; मुंबई. ;आगामी दिवाली को लेकर सरकार ने लिया बड़ा फैसला, त्योहार को देखते हुए सरकार ने मात्र 100 रुपए में दीवाली पैकेज देने का एलान किया है। जिसमे एक-एक किलो सूजी, बेसन, चीनी व एक लीटर ताड़ का तेल दिया जाएगा। बता दें कि यह फैसला महाराष्ट्र सरकार ने बीते मंगलवार को लिया हैं। जिसके तहत इस पैकेज का फायदा सिर्फ राशन कार्ड धारक ही उठा पाएंगे। Government Diwali Offer,Eknath Shinde : साथ ही जारी आदेश के अनुसार "राज्य में ऐसे 1. 70 करोड़ परिवार या सात करोड़ लोग हैं, जिनके पास राशन कार्ड की सुविधा है. वे राज्य द्वारा संचालित राशन की दुकानों से खाद्यान्न खरीदने के पात्र हैं. ' राशन एक माह की अवधि के लिए ई-पॉस सिस्टम के द्वारा दिया जाएगा। राज्य सरकार के सब्सिडी दरों पर आवश्यक वस्तुओं की पेशकश करने के फैसले से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को किराने के सामान के पैकेज का उपयोग करके दिवाली के लिए नाश्ता और मिठाई तैयार करने में मदद मिलेगी।
Government Diwali Offer,Eknath Shinde ; मुंबई. ;आगामी दिवाली को लेकर सरकार ने लिया बड़ा फैसला, त्योहार को देखते हुए सरकार ने मात्र एक सौ रुपयापए में दीवाली पैकेज देने का एलान किया है। जिसमे एक-एक किलो सूजी, बेसन, चीनी व एक लीटर ताड़ का तेल दिया जाएगा। बता दें कि यह फैसला महाराष्ट्र सरकार ने बीते मंगलवार को लिया हैं। जिसके तहत इस पैकेज का फायदा सिर्फ राशन कार्ड धारक ही उठा पाएंगे। Government Diwali Offer,Eknath Shinde : साथ ही जारी आदेश के अनुसार "राज्य में ऐसे एक. सत्तर करोड़ परिवार या सात करोड़ लोग हैं, जिनके पास राशन कार्ड की सुविधा है. वे राज्य द्वारा संचालित राशन की दुकानों से खाद्यान्न खरीदने के पात्र हैं. ' राशन एक माह की अवधि के लिए ई-पॉस सिस्टम के द्वारा दिया जाएगा। राज्य सरकार के सब्सिडी दरों पर आवश्यक वस्तुओं की पेशकश करने के फैसले से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को किराने के सामान के पैकेज का उपयोग करके दिवाली के लिए नाश्ता और मिठाई तैयार करने में मदद मिलेगी।
Hardoi News: हरदोई में गन्ने के खेत में मिली अज्ञात युवती के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवती के शव का पोस्टमार्टम किया गया तो पता चला है उसका प्राइवेट पार्ट कटा हुआ है। Hardoi News: दिल्ली में लड़की के साथ हुए मामले में अभी देश में तहलका मचा हुआ है इस बीच हरदोई में गन्ने के खेत में मिली अज्ञात युवती के शव (girl dead body found) की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अज्ञात युवती के शव का पोस्टमार्टम किया गया तो पता चला है उसका प्राइवेट पार्ट कटा हुआ है। हालांकि पुलिस का मानना है जंगली जानवरों ने युवती के शव के कई हिस्सों को खा लिया है लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर युवती की मौत (murder of girl by strangulation) का कारण भी उल्लेख किया गया है जिसके बाद चर्चाओं का बाजार भी गर्म है। दरअसल हरदोई के टडियावा गोपामऊ रोड पर एक ईंट भट्ठे के निकट चकरोट के किनारे गन्ने के खेत में युवती का शव पाया गया था। युवती का शव कई दिन पुराना है और उसके शव के कई हिस्सों को जानवरों ने भी खा लिया है। युवती की दुष्कर्म के बाद हत्या कर शव फेंके जाने की आशंका जताई गई थी वहीं एसपी ने मौके पर अधिकारियों के साथ पहुंचकर पड़ताल की और बताया था कि जल्द ही खुलासा किया जाएगा। सनसनीखेज घटना की जानकारी शनिवार को लोगों को उस वक्त हुई जब कुछ लोग गन्ने के खेत की तरफ पहुंचे थे। गन्ने के खेत में युवती का शव देख सनसनी फैल गयी थी। वही घटना की जानकारी पाकर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची जिसके बाद एसपी राजेश द्विवेदी एएसपी पश्चिमी दुर्गेश सिंह व सीओ हरियावां शिल्पाकुमारी भी मौके पर पहुंचकर पूरी घटना के बारे में जानकारी ली थी। युवती के शव की शिनाख्त नहीं हो सकी थी जिससे उसके शव को मोर्चरी में रखवा दिया गया था। 72 घंटे की अवधि पूरी हो जाने के बाद जब युवती के शव का पोस्टमार्टम कराया गया तो कई तथ्य चौंकाने वाले सामने आए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक युवती की गला दबाकर हत्या की गई थी साथ ही उसका प्राइवेट पार्ट भी कटा हुआ पाया गया है। युवती कौन थी कैसे यहां आई थी इस बात का अभी तक खुलासा नहीं हो सका है। हालांकि क्षेत्र में लोग चर्चा कर रहे हैं युवती को कहीं से लाया गया था और यहां पर डाला गया था। फिलहाल अपर पुलिस अधीक्षक दुर्गेश कुमार सिंह (Additional Superintendent of Police Durgesh Kumar Singh) ने बताया कि पूरे मामले की जांच पड़ताल की जा रही है।
Hardoi News: हरदोई में गन्ने के खेत में मिली अज्ञात युवती के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवती के शव का पोस्टमार्टम किया गया तो पता चला है उसका प्राइवेट पार्ट कटा हुआ है। Hardoi News: दिल्ली में लड़की के साथ हुए मामले में अभी देश में तहलका मचा हुआ है इस बीच हरदोई में गन्ने के खेत में मिली अज्ञात युवती के शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अज्ञात युवती के शव का पोस्टमार्टम किया गया तो पता चला है उसका प्राइवेट पार्ट कटा हुआ है। हालांकि पुलिस का मानना है जंगली जानवरों ने युवती के शव के कई हिस्सों को खा लिया है लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर युवती की मौत का कारण भी उल्लेख किया गया है जिसके बाद चर्चाओं का बाजार भी गर्म है। दरअसल हरदोई के टडियावा गोपामऊ रोड पर एक ईंट भट्ठे के निकट चकरोट के किनारे गन्ने के खेत में युवती का शव पाया गया था। युवती का शव कई दिन पुराना है और उसके शव के कई हिस्सों को जानवरों ने भी खा लिया है। युवती की दुष्कर्म के बाद हत्या कर शव फेंके जाने की आशंका जताई गई थी वहीं एसपी ने मौके पर अधिकारियों के साथ पहुंचकर पड़ताल की और बताया था कि जल्द ही खुलासा किया जाएगा। सनसनीखेज घटना की जानकारी शनिवार को लोगों को उस वक्त हुई जब कुछ लोग गन्ने के खेत की तरफ पहुंचे थे। गन्ने के खेत में युवती का शव देख सनसनी फैल गयी थी। वही घटना की जानकारी पाकर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची जिसके बाद एसपी राजेश द्विवेदी एएसपी पश्चिमी दुर्गेश सिंह व सीओ हरियावां शिल्पाकुमारी भी मौके पर पहुंचकर पूरी घटना के बारे में जानकारी ली थी। युवती के शव की शिनाख्त नहीं हो सकी थी जिससे उसके शव को मोर्चरी में रखवा दिया गया था। बहत्तर घंटाटे की अवधि पूरी हो जाने के बाद जब युवती के शव का पोस्टमार्टम कराया गया तो कई तथ्य चौंकाने वाले सामने आए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक युवती की गला दबाकर हत्या की गई थी साथ ही उसका प्राइवेट पार्ट भी कटा हुआ पाया गया है। युवती कौन थी कैसे यहां आई थी इस बात का अभी तक खुलासा नहीं हो सका है। हालांकि क्षेत्र में लोग चर्चा कर रहे हैं युवती को कहीं से लाया गया था और यहां पर डाला गया था। फिलहाल अपर पुलिस अधीक्षक दुर्गेश कुमार सिंह ने बताया कि पूरे मामले की जांच पड़ताल की जा रही है।
सुशांत सिंह राजपूत मामले में जब से ड्रग एंगल सामने आया है, इसने पूरी इंडस्ट्री में भूचाल ला दिया है. जो विवाद पहले सिर्फ एक केस तक सीमित था, अब वो पूरे बॉलीवुड में अपनी पैठ जमा चुका है. बॉलीवुड और उसका ड्रग कनेक्शन एक ऐसा मुद्दा बन गया है जिस पर सदन तक में जोरदार बहस देखने को मिली है. राज्यसभा में जया बच्चन की तरफ से रवि किशन पर निशाना साधना और कहना कि उन्होंने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया, इस बयान ने काफी बवाल कर दिया है. इस बहस में अब RSS भी कूद पड़ा है. देखें क्या बोले रामलाल. After Sushant Singh Rajput's death, the late actor's family raised suspicion. On the order of Supreme Court, CBI started investigation and then the Rhea Chakraborty's alleged links with drug peddlers came into the light. Rhea and her brother Showik Chakraborty were arrested by NCB. Kangana Ranaut accused that 90 per cent of Bollywood actors consume drugs. Yesterday, BJP MP Ravi Kishan urged Modi government to save the tinsel town. SP MP Jaya Bachchan slammed kangana Ranaut and Ravi Kishan in Parliament. Now RSS also jumps in this controversy. Watch what he said.
सुशांत सिंह राजपूत मामले में जब से ड्रग एंगल सामने आया है, इसने पूरी इंडस्ट्री में भूचाल ला दिया है. जो विवाद पहले सिर्फ एक केस तक सीमित था, अब वो पूरे बॉलीवुड में अपनी पैठ जमा चुका है. बॉलीवुड और उसका ड्रग कनेक्शन एक ऐसा मुद्दा बन गया है जिस पर सदन तक में जोरदार बहस देखने को मिली है. राज्यसभा में जया बच्चन की तरफ से रवि किशन पर निशाना साधना और कहना कि उन्होंने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया, इस बयान ने काफी बवाल कर दिया है. इस बहस में अब RSS भी कूद पड़ा है. देखें क्या बोले रामलाल. After Sushant Singh Rajput's death, the late actor's family raised suspicion. On the order of Supreme Court, CBI started investigation and then the Rhea Chakraborty's alleged links with drug peddlers came into the light. Rhea and her brother Showik Chakraborty were arrested by NCB. Kangana Ranaut accused that नब्बे per cent of Bollywood actors consume drugs. Yesterday, BJP MP Ravi Kishan urged Modi government to save the tinsel town. SP MP Jaya Bachchan slammed kangana Ranaut and Ravi Kishan in Parliament. Now RSS also jumps in this controversy. Watch what he said.
Don't Miss! सेक्स और गुप्त रोग पर समाज में फैली चुप्पी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर पिछले कुछ सालों में कई फिल्में सामने आई हैं। शुभ मंगल सावधान, खानदानी शफाखाना जैसी फिल्मों में इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा की गई है। ऐसे में इस विषय को नए अंदाज़ में सामने लेकर आने की कोशिश की है निर्देशक मिखिल मुसाले ने। "जब हम खांसी, सर्दी, बुखार और अन्य बीमारियों पर बात करें तो ठीक, लेकिन सेक्स संबंधी बीमारियों पर बात करना शर्मनाक हो जाता है। क्यों ?" कमिटि के सामने बैठे डॉक्टर वर्धी (बोमन ईरानी) जब यह संवाद करते हैं तो यह सवाल सिर्फ फिल्म के किरदारों के लिए नहीं, बल्कि दर्शकों की मानसिकता पर भी छोड़ा जाता है। हमारे समाज में सेक्स शब्द या उससे जुड़ी बीमारियों को लेकर बात करना आज भी अनुचित माना जाता है। इसी दबी कुचली संकुचित विचारधारा को बदलने की कोशिश की गई है फिल्म मेड इन चाइना में। दमदार कलाकारों के साथ निर्देशक मिखिल मुसाले इस फिल्म को काफी मजबूत बना सकते थे। लेकिन कमजोर निर्देशन और लचर पटकथा फिल्म को औसत बना देती है।
Don't Miss! सेक्स और गुप्त रोग पर समाज में फैली चुप्पी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर पिछले कुछ सालों में कई फिल्में सामने आई हैं। शुभ मंगल सावधान, खानदानी शफाखाना जैसी फिल्मों में इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा की गई है। ऐसे में इस विषय को नए अंदाज़ में सामने लेकर आने की कोशिश की है निर्देशक मिखिल मुसाले ने। "जब हम खांसी, सर्दी, बुखार और अन्य बीमारियों पर बात करें तो ठीक, लेकिन सेक्स संबंधी बीमारियों पर बात करना शर्मनाक हो जाता है। क्यों ?" कमिटि के सामने बैठे डॉक्टर वर्धी जब यह संवाद करते हैं तो यह सवाल सिर्फ फिल्म के किरदारों के लिए नहीं, बल्कि दर्शकों की मानसिकता पर भी छोड़ा जाता है। हमारे समाज में सेक्स शब्द या उससे जुड़ी बीमारियों को लेकर बात करना आज भी अनुचित माना जाता है। इसी दबी कुचली संकुचित विचारधारा को बदलने की कोशिश की गई है फिल्म मेड इन चाइना में। दमदार कलाकारों के साथ निर्देशक मिखिल मुसाले इस फिल्म को काफी मजबूत बना सकते थे। लेकिन कमजोर निर्देशन और लचर पटकथा फिल्म को औसत बना देती है।
शादी होने के बाद बिपाशा बसु ने बॉलीवुड से दूरी बना ली है । बिपाशा ने साल 2016 में करण सिंह ग्रोवर से शादी कर ली थी। 3 साल से बिपाशा की कोई फिल्म नहीं आई। बिपाशा आखिरी बार 'अलोन' फिल्म में करण के साथ नजर आई थीं। यहीं से दोनों की लव स्टोरी शुरू हुई थी। शादी से पहले बिपाशा बॉलीवुड के 6 एक्टर्स को डेट कर चुकी हैं। चलिए बिपाशा बसु के 41वें जन्मदिन पर हम आपको उनके अफेयर्स के बारे में बताते हैं। बॉलीवुड में सालों तक राज करने वालीं अभिनेत्री रीना रॉय का 7 जनवरी को जन्मदिन है। रीना रॉय बॉलीवुड की ऐसी अदाकारा है जिन्होंने मुख्य भूमिका से लेकर मां तक के सभी किरदारों को बड़ी स्क्रीन पर बखूबी निखाया। उनका नाम अपने समय में हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस की लिस्ट में भी शुमार रहा है। रीना रॉय को फिल्मों से किनारा किए हुए 20 साल हो चुके हैं। पहली फिल्म से लेकर अब तक के उनके लुक में काफी बदलाव आया है। तो चलिए उनके जन्मदिन पर हम आपको उनके बदलाव की कुछ तस्वीरें दिखाते हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण इन दिनों अपनी आगामी फिल्म 'छपाक' के प्रमोशन में व्यस्त हैं। जिसके सिलसिले में दीपिका पत्रकारों से रूबरू होती रहती हैं। पत्रकार भी दीपिका से उनकी फिल्म के साथ ही निजी जिंदगी से जुड़े सवाल भी करते रहते हैं। दीपिका भी उनके हर सवाल का जवाब देती रहती है। ऐसे में हाल ही में दीपिका से एक रिपोर्टर ने निजी जिंदगी से जुड़ा ऐसा सवाल कर लिया, जिसे सुन दीपिका खुद को रोक ना सकीं और दो-टूक जवाब दिया। पढ़ेंः रिपोर्टर ने किया दीपिका पादुकोण से प्रेग्नेंसी पर सवाल, अभिनेत्री ने कहा, 'आपसे पूछकर प्लान करूं? ' बॉलीवुड हो या टेलीविजन इंडस्ट्री दोनों ही जगह अभिनेता/अभिनेत्रियों को पैर जमाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। इस बारे में कई एक्टर्स ने भी बताया है कि इस इंडस्ट्री का सफर इतना आसान नहीं है। ऐसे में कास्टिंग काउच के भी कई मामले सामने आते हैं। हालांकि ये मामले तब सामने आते हैं जब ये अभिनेता इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना चुके होते हैं। पढ़ेंः कास्टिंग काउच का शिकार हुई थी ये अभिनेत्री, 65 वर्षीय डायरेक्टर ने कहा था 'टॉप उतारो'
शादी होने के बाद बिपाशा बसु ने बॉलीवुड से दूरी बना ली है । बिपाशा ने साल दो हज़ार सोलह में करण सिंह ग्रोवर से शादी कर ली थी। तीन साल से बिपाशा की कोई फिल्म नहीं आई। बिपाशा आखिरी बार 'अलोन' फिल्म में करण के साथ नजर आई थीं। यहीं से दोनों की लव स्टोरी शुरू हुई थी। शादी से पहले बिपाशा बॉलीवुड के छः एक्टर्स को डेट कर चुकी हैं। चलिए बिपाशा बसु के इकतालीसवें जन्मदिन पर हम आपको उनके अफेयर्स के बारे में बताते हैं। बॉलीवुड में सालों तक राज करने वालीं अभिनेत्री रीना रॉय का सात जनवरी को जन्मदिन है। रीना रॉय बॉलीवुड की ऐसी अदाकारा है जिन्होंने मुख्य भूमिका से लेकर मां तक के सभी किरदारों को बड़ी स्क्रीन पर बखूबी निखाया। उनका नाम अपने समय में हाईएस्ट पेड एक्ट्रेस की लिस्ट में भी शुमार रहा है। रीना रॉय को फिल्मों से किनारा किए हुए बीस साल हो चुके हैं। पहली फिल्म से लेकर अब तक के उनके लुक में काफी बदलाव आया है। तो चलिए उनके जन्मदिन पर हम आपको उनके बदलाव की कुछ तस्वीरें दिखाते हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण इन दिनों अपनी आगामी फिल्म 'छपाक' के प्रमोशन में व्यस्त हैं। जिसके सिलसिले में दीपिका पत्रकारों से रूबरू होती रहती हैं। पत्रकार भी दीपिका से उनकी फिल्म के साथ ही निजी जिंदगी से जुड़े सवाल भी करते रहते हैं। दीपिका भी उनके हर सवाल का जवाब देती रहती है। ऐसे में हाल ही में दीपिका से एक रिपोर्टर ने निजी जिंदगी से जुड़ा ऐसा सवाल कर लिया, जिसे सुन दीपिका खुद को रोक ना सकीं और दो-टूक जवाब दिया। पढ़ेंः रिपोर्टर ने किया दीपिका पादुकोण से प्रेग्नेंसी पर सवाल, अभिनेत्री ने कहा, 'आपसे पूछकर प्लान करूं? ' बॉलीवुड हो या टेलीविजन इंडस्ट्री दोनों ही जगह अभिनेता/अभिनेत्रियों को पैर जमाने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। इस बारे में कई एक्टर्स ने भी बताया है कि इस इंडस्ट्री का सफर इतना आसान नहीं है। ऐसे में कास्टिंग काउच के भी कई मामले सामने आते हैं। हालांकि ये मामले तब सामने आते हैं जब ये अभिनेता इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना चुके होते हैं। पढ़ेंः कास्टिंग काउच का शिकार हुई थी ये अभिनेत्री, पैंसठ वर्षीय डायरेक्टर ने कहा था 'टॉप उतारो'
गौरतलब है कि नौ अक्टूबर को दक्षिण कर्नाटक के मूडबिदरी में एक प्रशांत पुजारी की कुछ अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी थी जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने जिस नौवें आरोपी को गिरफ्तार किया है उसका नाम मोहम्मद इम्तियाज गन्टालकट्टे है। आपको बता दें कि कुछ बाइक सवार हमलावरों ने फूल का व्यवसाय करने वाले प्रशांत की निर्मम हत्या कर दी थी। इस हत्या का बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस बीच पुलिस पर राजनीतिक दवाब के कारण पक्षपात करने के आरोप भी लगते रहे जिसका डीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) आलोक मोहन ने खंडन करते हुए कहा कि अपराध का कोई धर्म नहीं होता और किसी भी पुलिसवाले काई राजनीतिक संबंध नहीं है। पुजारी की हत्या को दादरी में हुए अखलाक और कर्नाटक में हुए कालबुर्गी की हत्या से जोड़कर भी देखा जा रहा है। ऐसा माना जाता है कि उन दोनों की हत्या का बदला लेने के लिए पुजारी की हत्या की गई। वहीं पुलिस का कहना है कि एक सोची समझी रणनीति के तहत ही पुजारी की हत्या की गई।
गौरतलब है कि नौ अक्टूबर को दक्षिण कर्नाटक के मूडबिदरी में एक प्रशांत पुजारी की कुछ अज्ञात हमलावरों ने हत्या कर दी थी जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने जिस नौवें आरोपी को गिरफ्तार किया है उसका नाम मोहम्मद इम्तियाज गन्टालकट्टे है। आपको बता दें कि कुछ बाइक सवार हमलावरों ने फूल का व्यवसाय करने वाले प्रशांत की निर्मम हत्या कर दी थी। इस हत्या का बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इस बीच पुलिस पर राजनीतिक दवाब के कारण पक्षपात करने के आरोप भी लगते रहे जिसका डीजीपी आलोक मोहन ने खंडन करते हुए कहा कि अपराध का कोई धर्म नहीं होता और किसी भी पुलिसवाले काई राजनीतिक संबंध नहीं है। पुजारी की हत्या को दादरी में हुए अखलाक और कर्नाटक में हुए कालबुर्गी की हत्या से जोड़कर भी देखा जा रहा है। ऐसा माना जाता है कि उन दोनों की हत्या का बदला लेने के लिए पुजारी की हत्या की गई। वहीं पुलिस का कहना है कि एक सोची समझी रणनीति के तहत ही पुजारी की हत्या की गई।
वैश्विक महामारी कोविड-19 को लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक इसकी वैक्सीन बनाने के लिए शोध कर रहे हैं। लेकिन अभी तक इस वायरस का कोई संभावित इलाज नहीं मिल पाया है। इसी बीच अमेरिकी वैज्ञनिकों में एक शोध में बताया कि कोरोना वायरस सूरज की किरणों से खत्म हो जाता है। अमेरिकी अधिकारियों ने गुरूवार को इस शोध के बारे में जानकारी दी कि सूरज की किरणों के संपर्क में आते ही कोरोना वायरस खत्म हो जाता है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी के विज्ञान और प्रौद्योगिकी सलाहकार विलियम ब्रायन ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा कि वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस पर पराबैंगनी किरणों का शक्तिशाली प्रभाव देखा है। उन्होंने उम्मीद जताई की इसका प्रसार गर्मियों में कम हो सकता है। ब्रायन ने कहा कि हमारी शोध में पता चला कि सूरज कि सूरज की किरणें सतह और हवा दोनों में इस वायरस को मारने की क्षमता रखती है। हमने तापमान और नमी में भी ऐसे प्रभाव देखें। इसका मतलब यह है कि तापमान और नमी में वृद्धि वायरस के लिए फायदेमंद नहीं है।
वैश्विक महामारी कोविड-उन्नीस को लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक इसकी वैक्सीन बनाने के लिए शोध कर रहे हैं। लेकिन अभी तक इस वायरस का कोई संभावित इलाज नहीं मिल पाया है। इसी बीच अमेरिकी वैज्ञनिकों में एक शोध में बताया कि कोरोना वायरस सूरज की किरणों से खत्म हो जाता है। अमेरिकी अधिकारियों ने गुरूवार को इस शोध के बारे में जानकारी दी कि सूरज की किरणों के संपर्क में आते ही कोरोना वायरस खत्म हो जाता है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी के विज्ञान और प्रौद्योगिकी सलाहकार विलियम ब्रायन ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा कि वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस पर पराबैंगनी किरणों का शक्तिशाली प्रभाव देखा है। उन्होंने उम्मीद जताई की इसका प्रसार गर्मियों में कम हो सकता है। ब्रायन ने कहा कि हमारी शोध में पता चला कि सूरज कि सूरज की किरणें सतह और हवा दोनों में इस वायरस को मारने की क्षमता रखती है। हमने तापमान और नमी में भी ऐसे प्रभाव देखें। इसका मतलब यह है कि तापमान और नमी में वृद्धि वायरस के लिए फायदेमंद नहीं है।
- #Secret'अगर आपके पार्टनर के फोन में है दो-दो Calculator ऐप, तो समझ जाइए वो आपको धोखा दे रहा' रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उस परमाणु रॉकेट पर काम आगे बढ़ाने का वादा किया है, जिसके बारे में माना जाता है कि उसमें परीक्षण के दौरान हुए धमाके में पांच इंजीनियर और दो अन्य लोग मारे गए थे. ये दुर्घटना आठ अगस्त की बताई जाती है. रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि ये परीक्षण परमाणु क्रूज़ मिसाइल का हिस्सा था. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उस परमाणु रॉकेट पर काम आगे बढ़ाने का वादा किया है, जिसके बारे में माना जाता है कि उसमें परीक्षण के दौरान हुए धमाके में पांच इंजीनियर और दो अन्य लोग मारे गए थे. ये दुर्घटना आठ अगस्त की बताई जाती है. रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि ये परीक्षण परमाणु क्रूज़ मिसाइल का हिस्सा था. मृतकों की विधवाओं से रूसी राष्ट्रपति ने कहा, "कुछ भी हो, हम इस हथियार को दुरुस्त करेंगे. " रूसी राष्ट्रपति ने कहा, "इस तरह की अनुपम तकनीक अपने आप में बड़ी बेहद महत्वपूर्ण है जो भरोसेमंद होने के साथ धरती पर शांति की गारंटी भी है. " पुतिन ने ये बात वृहस्पतिवार को तब कहीं जब क्रेमलिन में आयोजित समारोह में मृतकों को मरणोपरांत सम्मानित किया जा रहा था. अगस्त की दुर्घटना कितनी गंभीर थी ? रूस की न्यूक्लियर एजेंसी रोसातोम के मुताबिक, ये परीक्षण न्योनोस्का नेवल टेस्ट रेंज में किया जा रहा था कि तभी आग लगी, इंजन में धमाका हुआ और आसपास जो लोग थे, समुद्र में जा गिरे. धमाके की वजह से कुल सात लोग मारे गए थे और छह अन्य घायल हुए थे. धमाके की वजह से विकिरण का स्तर 16 गुना तक बढ़ गया था. इसके बाद सफाई का काम भी बड़ी गोपनीयता से किया गया था. आख़िर किसका परीक्षण किया जा रहा था ? रूस ने बस इतनी पुष्टि की थी कि दुर्घटना के वक्त परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एक इंजन का परीक्षण किया जा रहा था. अटकलें हैं कि ये कोई एंटी-शिप मिसाइल या लंबी दूरी का पानी के नीचे काम करने वाला ड्रोन हो सकता है. लेकिन रूस और पश्चिम के विशेषज्ञों का मानना है कि ये संभवतः 9एम730 बूरेवेस्तनिक मिसाइल हो सकती है जिसे नैटो 'स्काइफॉल' के नाम से जानता है. राष्ट्रपति पुतिन के मुताबिक इसकी रेंज 'अंतहीन' है. इसे परमाणु हमले के जबाव के लिए तैयार किया गया है.
- #Secret'अगर आपके पार्टनर के फोन में है दो-दो Calculator ऐप, तो समझ जाइए वो आपको धोखा दे रहा' रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उस परमाणु रॉकेट पर काम आगे बढ़ाने का वादा किया है, जिसके बारे में माना जाता है कि उसमें परीक्षण के दौरान हुए धमाके में पांच इंजीनियर और दो अन्य लोग मारे गए थे. ये दुर्घटना आठ अगस्त की बताई जाती है. रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि ये परीक्षण परमाणु क्रूज़ मिसाइल का हिस्सा था. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उस परमाणु रॉकेट पर काम आगे बढ़ाने का वादा किया है, जिसके बारे में माना जाता है कि उसमें परीक्षण के दौरान हुए धमाके में पांच इंजीनियर और दो अन्य लोग मारे गए थे. ये दुर्घटना आठ अगस्त की बताई जाती है. रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि ये परीक्षण परमाणु क्रूज़ मिसाइल का हिस्सा था. मृतकों की विधवाओं से रूसी राष्ट्रपति ने कहा, "कुछ भी हो, हम इस हथियार को दुरुस्त करेंगे. " रूसी राष्ट्रपति ने कहा, "इस तरह की अनुपम तकनीक अपने आप में बड़ी बेहद महत्वपूर्ण है जो भरोसेमंद होने के साथ धरती पर शांति की गारंटी भी है. " पुतिन ने ये बात वृहस्पतिवार को तब कहीं जब क्रेमलिन में आयोजित समारोह में मृतकों को मरणोपरांत सम्मानित किया जा रहा था. अगस्त की दुर्घटना कितनी गंभीर थी ? रूस की न्यूक्लियर एजेंसी रोसातोम के मुताबिक, ये परीक्षण न्योनोस्का नेवल टेस्ट रेंज में किया जा रहा था कि तभी आग लगी, इंजन में धमाका हुआ और आसपास जो लोग थे, समुद्र में जा गिरे. धमाके की वजह से कुल सात लोग मारे गए थे और छह अन्य घायल हुए थे. धमाके की वजह से विकिरण का स्तर सोलह गुना तक बढ़ गया था. इसके बाद सफाई का काम भी बड़ी गोपनीयता से किया गया था. आख़िर किसका परीक्षण किया जा रहा था ? रूस ने बस इतनी पुष्टि की थी कि दुर्घटना के वक्त परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एक इंजन का परीक्षण किया जा रहा था. अटकलें हैं कि ये कोई एंटी-शिप मिसाइल या लंबी दूरी का पानी के नीचे काम करने वाला ड्रोन हो सकता है. लेकिन रूस और पश्चिम के विशेषज्ञों का मानना है कि ये संभवतः नौएमसात सौ तीस बूरेवेस्तनिक मिसाइल हो सकती है जिसे नैटो 'स्काइफॉल' के नाम से जानता है. राष्ट्रपति पुतिन के मुताबिक इसकी रेंज 'अंतहीन' है. इसे परमाणु हमले के जबाव के लिए तैयार किया गया है.
आम आदमी पार्टी ('आप") के लोकसभा सदस्य भगवंत मान पेशे से कॉमेडियन रहे हैं। सदन में भी अक्सर वे चुटीली और कई बार काव्यात्मक टिप्पणियां करते नजर आते हैं। कई बार उनकी ये टिप्पणियां खासी लोकप्रिय भी हुईं। खासकर सोशल मीडिया पर लोगों ने उनका खूब मजा लिया। मगर इस बार वे भूल गए कि हर चीज मजाक नहीं होती। उन्होंने संसद भवन परिसर की सुरक्षा प्रक्रियाओं का वीडियो बनाकर उसे फेसबुक पर अपलोड कर दिया। 10 मिनट से अधिक के इस वीडियो में उन्हें उन दरवाजों पर मौजूद सुरक्षा घेरों से गुजरते हुए देखा गया, जहां से सिर्फ सांसदों के वाहन ही आ-जा सकते हैं। संसद भवन परिसर में मौजूद दफ्तरों के अंदर के दृश्य भी उनके इस वीडियो में नजर आए। इन स्थानों के विजुअल सार्वजनिक करने के पीछे क्या मकसद था, समझना मुश्किल है। उनकी इस बात पर भरोसा करना कठिन है कि उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र के लोगों को संसद के अंदर की सुरक्षा व्यवस्था का नजारा दिखाने के लिए ऐसा किया। क्या उन्हें यह नहीं मालूम कि इस देश की संसद पर एक बार (13 दिसंबर 2001 को) घातक आतंकवादी हमला हो चुका है? उसमें आठ सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। जाहिर है, उसके मद्देनजर ऐसी लापरवाही को देश हल्के में नहीं ले सकता। अतः भगवंत मान के इस व्यवहार पर संसद में जैसा आक्रोश दिखा, वह स्वाभाविक ही है। पक्ष-विपक्ष के सभी दलों ('आप" के अलावा) के सांसदों ने मान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस मुद्दे को लेकर शुक्रवार को दोनों सदनों में कोई कामकाज नहीं हुआ। तब जाकर मान ने माफी मांगी। वरना, वीडियो जारी करने के बाद से वे बेपरवाह बने हुए थे। यह कहते रहे कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है। मगर उनकी क्षमा याचना से ना तो विभिन्न् दलों के सांसद संतुष्ट हुए, ना ही लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन उन्हें माफ करने के मूड में दिखीं। महाजन ने कहा- 'मुद्दा महज माफी मांगने से खत्म नहीं होगा। यह संसद की सुरक्षा का मसला है। " महाजन ने यहां तक कहा कि अगर मान ने सदन के अंदर का वीडियो बनाया होता, तो वे तुरंत कार्रवाई करतीं। भाजपा के दो सदस्यों ने मान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उधर दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस थाने में उनके खिलाफ एक केस दर्ज कराया गया है। साफ है, भगवंत मान फंस चुके हैं। इस घटनाक्रम से सबको सबक लेना चाहिए। नियम-कायदों का सम्मान एवं उनका पालन करना सबका कर्तव्य है, चाहे वह कितने ही ऊंचे पद पर बैठा हो। जनप्रतिनिधियों से अधिक जिम्मेदारी भरे व्यवहार की अपेक्षा रहती है। मान की पार्टी भी पहले मान्य शिष्टाचार के नियमों की अवहेलना करती रही है। मगर इस बार मान ने जो किया, वह नियमों के उल्लंघन की पराकाष्ठा है। इसके लिए उन पर उचित कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए।
आम आदमी पार्टी के लोकसभा सदस्य भगवंत मान पेशे से कॉमेडियन रहे हैं। सदन में भी अक्सर वे चुटीली और कई बार काव्यात्मक टिप्पणियां करते नजर आते हैं। कई बार उनकी ये टिप्पणियां खासी लोकप्रिय भी हुईं। खासकर सोशल मीडिया पर लोगों ने उनका खूब मजा लिया। मगर इस बार वे भूल गए कि हर चीज मजाक नहीं होती। उन्होंने संसद भवन परिसर की सुरक्षा प्रक्रियाओं का वीडियो बनाकर उसे फेसबुक पर अपलोड कर दिया। दस मिनट से अधिक के इस वीडियो में उन्हें उन दरवाजों पर मौजूद सुरक्षा घेरों से गुजरते हुए देखा गया, जहां से सिर्फ सांसदों के वाहन ही आ-जा सकते हैं। संसद भवन परिसर में मौजूद दफ्तरों के अंदर के दृश्य भी उनके इस वीडियो में नजर आए। इन स्थानों के विजुअल सार्वजनिक करने के पीछे क्या मकसद था, समझना मुश्किल है। उनकी इस बात पर भरोसा करना कठिन है कि उन्होंने अपने चुनाव क्षेत्र के लोगों को संसद के अंदर की सुरक्षा व्यवस्था का नजारा दिखाने के लिए ऐसा किया। क्या उन्हें यह नहीं मालूम कि इस देश की संसद पर एक बार घातक आतंकवादी हमला हो चुका है? उसमें आठ सुरक्षाकर्मी शहीद हुए थे। जाहिर है, उसके मद्देनजर ऐसी लापरवाही को देश हल्के में नहीं ले सकता। अतः भगवंत मान के इस व्यवहार पर संसद में जैसा आक्रोश दिखा, वह स्वाभाविक ही है। पक्ष-विपक्ष के सभी दलों के सांसदों ने मान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इस मुद्दे को लेकर शुक्रवार को दोनों सदनों में कोई कामकाज नहीं हुआ। तब जाकर मान ने माफी मांगी। वरना, वीडियो जारी करने के बाद से वे बेपरवाह बने हुए थे। यह कहते रहे कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है। मगर उनकी क्षमा याचना से ना तो विभिन्न् दलों के सांसद संतुष्ट हुए, ना ही लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन उन्हें माफ करने के मूड में दिखीं। महाजन ने कहा- 'मुद्दा महज माफी मांगने से खत्म नहीं होगा। यह संसद की सुरक्षा का मसला है। " महाजन ने यहां तक कहा कि अगर मान ने सदन के अंदर का वीडियो बनाया होता, तो वे तुरंत कार्रवाई करतीं। भाजपा के दो सदस्यों ने मान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उधर दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस थाने में उनके खिलाफ एक केस दर्ज कराया गया है। साफ है, भगवंत मान फंस चुके हैं। इस घटनाक्रम से सबको सबक लेना चाहिए। नियम-कायदों का सम्मान एवं उनका पालन करना सबका कर्तव्य है, चाहे वह कितने ही ऊंचे पद पर बैठा हो। जनप्रतिनिधियों से अधिक जिम्मेदारी भरे व्यवहार की अपेक्षा रहती है। मान की पार्टी भी पहले मान्य शिष्टाचार के नियमों की अवहेलना करती रही है। मगर इस बार मान ने जो किया, वह नियमों के उल्लंघन की पराकाष्ठा है। इसके लिए उन पर उचित कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए।
[ छठाबूढ़े बैल ! यज्ञ करेंगे ! यज्ञ करके एमाका प्रेम मुझे देंगे । मेरे - जो चाहें करें मैं एमाको चाहता हूँ, उसकी सम्पत्तिको चाहता हूँ ! मुझे उसकी सम्पत्तिसे गरज़ हैं, ये लोग जो चाहें करें, - मुझे क्या पडी है ! आ ! --" - - दरवाजेकी आड़ने खडी रांगणी कान दिये सब सुन रही थी । वह जल्दी जल्दी एमाके कमरेकी ओर गई । " अब मानकी ज़रूरत नहीं हैं दीदी साहब ! यदि उनका मान रखनेके लिए तुमने अबतक मान किया था, तो आज मान छोड़कर उनका मान रक्खो।" एमाके सोनेके कमरेमें रंगिणी अति व्याकुल स्वरसे यह बात कह रही थी । एमाने कहा - " रंगिणी, बाबा सचही ऐसे बदल गये ! वे साहब होकर अन्तमे संन्यासीके ढोंगमें जा फँसे । " रंगिणीने कहा - " वह संन्यासी पक्का ढोंगी है। उसकी बातें सुननेसे घृणा होती है। और मैंने आज जो कुछ देखा है, दीदी साहब, उससे समझ गई कि संन्यासी साधारण मनुष्य नहीं है। उसके लिए कुछ भी असाध्य नहीं है । ऐसे बड़े दुःखके समय तुमको सब बातें सुनाकर कष्ट न देती, किन्तु बिना कहे रहा नहीं जाता।" रंगिणीने कहा - " दीदी साहब, तुमने मेरे साथ जैसी नेकी की है, वह अवर्णनीय है। मैं असहाय हो, रास्ते रास्ते भीख माँगती फिरती थी, कितनी ही विपदमें फँस सकती थी, तुमने आश्रय दे मेरी रक्षाकी है। " वह पुराना पचड़ा क्यों छेडती हो रंगिणी ? .." तुझारे लिए पुराना है, किन्तु मेरे लिए नया ही है दीदी साहब ! वह आज और भी नया हो गया है । तुझें मालूम है दीदी साहब, मेरा जो वैष्णव था, वह
[ छठाबूढ़े बैल ! यज्ञ करेंगे ! यज्ञ करके एमाका प्रेम मुझे देंगे । मेरे - जो चाहें करें मैं एमाको चाहता हूँ, उसकी सम्पत्तिको चाहता हूँ ! मुझे उसकी सम्पत्तिसे गरज़ हैं, ये लोग जो चाहें करें, - मुझे क्या पडी है ! आ ! --" - - दरवाजेकी आड़ने खडी रांगणी कान दिये सब सुन रही थी । वह जल्दी जल्दी एमाके कमरेकी ओर गई । " अब मानकी ज़रूरत नहीं हैं दीदी साहब ! यदि उनका मान रखनेके लिए तुमने अबतक मान किया था, तो आज मान छोड़कर उनका मान रक्खो।" एमाके सोनेके कमरेमें रंगिणी अति व्याकुल स्वरसे यह बात कह रही थी । एमाने कहा - " रंगिणी, बाबा सचही ऐसे बदल गये ! वे साहब होकर अन्तमे संन्यासीके ढोंगमें जा फँसे । " रंगिणीने कहा - " वह संन्यासी पक्का ढोंगी है। उसकी बातें सुननेसे घृणा होती है। और मैंने आज जो कुछ देखा है, दीदी साहब, उससे समझ गई कि संन्यासी साधारण मनुष्य नहीं है। उसके लिए कुछ भी असाध्य नहीं है । ऐसे बड़े दुःखके समय तुमको सब बातें सुनाकर कष्ट न देती, किन्तु बिना कहे रहा नहीं जाता।" रंगिणीने कहा - " दीदी साहब, तुमने मेरे साथ जैसी नेकी की है, वह अवर्णनीय है। मैं असहाय हो, रास्ते रास्ते भीख माँगती फिरती थी, कितनी ही विपदमें फँस सकती थी, तुमने आश्रय दे मेरी रक्षाकी है। " वह पुराना पचड़ा क्यों छेडती हो रंगिणी ? .." तुझारे लिए पुराना है, किन्तु मेरे लिए नया ही है दीदी साहब ! वह आज और भी नया हो गया है । तुझें मालूम है दीदी साहब, मेरा जो वैष्णव था, वह
बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पटानी (Disha Patani) के पिता जगदीश पटानी का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया है। दिशा के पिता उत्तर प्रदेश पावर डिपार्टमेंट में विजिलेंस यूनिट के में काम करते हैं। दिशा के पिता के साथ 2 अन्य अफसर भी कोरोना पॉजिटिव निकले हैं। बुधवार को एडीशनल सीएमओ अशोक कुमार ने जगदीश पटानी और बाकी के दो ऑफिसरों को कोरोना होने की जानकारी दी। एडीशनल सीएमओ अशोक कुमार ने बताया कि जोनल चीफ इंजीनियर ऑफिस को अगले 48 घंटे के लिए बंद कर दिया गया है। ये तीनों अफसर ट्रांसफॉर्मर स्कैम की जांच कर रहे थे। बता दें कि दिशा पटानी के पिता यूपी पावर डिपार्टमेंट की विजिलेंस यूनिट में डिप्टी एसपी हैं। वहीं दिशा पटानी के वर्कफ्रंट की बात करें तो वे लास्ट फिल्म 'बागी 3' में एक गाने में नजर आई थीं। वहीँ दिशा जल्द ही सलमान खान के साथ फिल्म राधे में नजर आएंगी। दिशा ने बॉलीवुड में फिल्म 'एमएस धोनी' एंट्री की थी, जो काफी हिट हुई। इस फिल्म के बाद से दिशा का करियर बॉलीवुड में चल निकला। दिशा बागी 2, मलंग, भारत, कुंग फू योगा जैसी फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। दिशा अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी बोल्ड एंड हॉट तस्वीरें फैंस के साथ साझा करती रहती हैं। दिशा खुद को फिट रखने के लिए काफी मेहनत करती हैं। दिशा जिम में जमकर पसीना बहाती हैं। उनके जिम के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं।
बॉलीवुड एक्ट्रेस दिशा पटानी के पिता जगदीश पटानी का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया है। दिशा के पिता उत्तर प्रदेश पावर डिपार्टमेंट में विजिलेंस यूनिट के में काम करते हैं। दिशा के पिता के साथ दो अन्य अफसर भी कोरोना पॉजिटिव निकले हैं। बुधवार को एडीशनल सीएमओ अशोक कुमार ने जगदीश पटानी और बाकी के दो ऑफिसरों को कोरोना होने की जानकारी दी। एडीशनल सीएमओ अशोक कुमार ने बताया कि जोनल चीफ इंजीनियर ऑफिस को अगले अड़तालीस घंटाटे के लिए बंद कर दिया गया है। ये तीनों अफसर ट्रांसफॉर्मर स्कैम की जांच कर रहे थे। बता दें कि दिशा पटानी के पिता यूपी पावर डिपार्टमेंट की विजिलेंस यूनिट में डिप्टी एसपी हैं। वहीं दिशा पटानी के वर्कफ्रंट की बात करें तो वे लास्ट फिल्म 'बागी तीन' में एक गाने में नजर आई थीं। वहीँ दिशा जल्द ही सलमान खान के साथ फिल्म राधे में नजर आएंगी। दिशा ने बॉलीवुड में फिल्म 'एमएस धोनी' एंट्री की थी, जो काफी हिट हुई। इस फिल्म के बाद से दिशा का करियर बॉलीवुड में चल निकला। दिशा बागी दो, मलंग, भारत, कुंग फू योगा जैसी फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। दिशा अक्सर सोशल मीडिया पर अपनी बोल्ड एंड हॉट तस्वीरें फैंस के साथ साझा करती रहती हैं। दिशा खुद को फिट रखने के लिए काफी मेहनत करती हैं। दिशा जिम में जमकर पसीना बहाती हैं। उनके जिम के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं।
समस्तीपुर,बिहार ( मिथिला हिन्दी न्यूज कार्यालय 19 जनवरी '20 ) । सीएए, एनआरसी एवं एनपीआर के खिलाफ 10 जनवरी से मुख्यालय स्थित सरकारी बस स्टैंड में आहूत सत्याग्रह रविवार को 10वें दिन भी अनवरत जारी रहा। सत्याग्रह स्थल पर संविधान बचाओ संघर्ष समिति के फूलबाबू सिंह, जमीर हसन एवं फैजुर रहमान फैज के तीन सदस्यीय अध्यक्षमंडली की अध्यक्षता में सभा का आयोजन किया गया। संचालन सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने किया। रंजीत कुमार, उपेंद्र राय,महावीर पोद्दार, मो० फरमान, सैयद शम्श तवरेज, हरिश्चन्द्र राय, सैयद मसूद जावेद, ताहूर अनवर, मो० तौकीर, मो० गुफरान, रामचंद्र पासवान, मो० सगीर, मो० अकबर, मो० अलाउद्दीन, महावीर पोद्दार, जगदीश राय, सरविंद आनंद, खुर्शीद खैर, पप्पू खां समेत अन्य कई दलों एवं संगठनों के नेताओं ने सभा को संबोधित किया। सभा को संबोधित करते हुए माले नेता फूलबाबू सिंह ने कहा कि देश में ऐसा पहली वार हुआ है जब मोदी- शाह सरकार पहले कानून बनाई है और बाद में मिसकॉल, प्रेस कांफ्रेंस एवं रैली कर कानून का समर्थन मांग रही है। उन्होंने कहा कि देश के छात्र- नौजवान निः शुल्क शिक्षा और रोजगार मांग रही है जबकी मोदी- शाह सरकार गैर जरूरी नोटबंदी, जीएसटी, सीएए, एनआरसी, एनपीआर दे रही है। बेटी बचाओ का नारा नारा ही बनकर रह गया। महिलाओं की अनवरत हत्या- अपराध हो रही है। बाबा साहब के संविधान को बदलकर मनुवादी संविधान लाने की साजिश कर रही है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे को सरकार महिमा मंडित कर रही है। नागरिकता देने में धर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अनिश्चितकालीन सत्याग्रह को प्रशासन दबाब देकर समाप्त कराना चाहती है। यह लोकतंत्र के खिलाफ है। संबसंस के संयोजक फैजाबाद रहमान फैज ने कहा कि विपक्षी पार्टी- दलों के सहयोग मिलने से सत्याग्रह आंदोलन को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सीएए, एनआरसी एवं एनपीआर ने नीतीश- मोदी के मानवश्रृंखला को सुपर फ्लाप करा दिया। आने वाले दिनों में नागरिकता काला कानून राज्य के अलावे केंद्र सरकार को सत्ता से बेदखल करेगी। समस्तीपुर कार्यालय से राजेश कुमार वर्मा द्वारा सम्प्रेषित ।
समस्तीपुर,बिहार । सीएए, एनआरसी एवं एनपीआर के खिलाफ दस जनवरी से मुख्यालय स्थित सरकारी बस स्टैंड में आहूत सत्याग्रह रविवार को दसवें दिन भी अनवरत जारी रहा। सत्याग्रह स्थल पर संविधान बचाओ संघर्ष समिति के फूलबाबू सिंह, जमीर हसन एवं फैजुर रहमान फैज के तीन सदस्यीय अध्यक्षमंडली की अध्यक्षता में सभा का आयोजन किया गया। संचालन सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने किया। रंजीत कुमार, उपेंद्र राय,महावीर पोद्दार, मोशून्य फरमान, सैयद शम्श तवरेज, हरिश्चन्द्र राय, सैयद मसूद जावेद, ताहूर अनवर, मोशून्य तौकीर, मोशून्य गुफरान, रामचंद्र पासवान, मोशून्य सगीर, मोशून्य अकबर, मोशून्य अलाउद्दीन, महावीर पोद्दार, जगदीश राय, सरविंद आनंद, खुर्शीद खैर, पप्पू खां समेत अन्य कई दलों एवं संगठनों के नेताओं ने सभा को संबोधित किया। सभा को संबोधित करते हुए माले नेता फूलबाबू सिंह ने कहा कि देश में ऐसा पहली वार हुआ है जब मोदी- शाह सरकार पहले कानून बनाई है और बाद में मिसकॉल, प्रेस कांफ्रेंस एवं रैली कर कानून का समर्थन मांग रही है। उन्होंने कहा कि देश के छात्र- नौजवान निः शुल्क शिक्षा और रोजगार मांग रही है जबकी मोदी- शाह सरकार गैर जरूरी नोटबंदी, जीएसटी, सीएए, एनआरसी, एनपीआर दे रही है। बेटी बचाओ का नारा नारा ही बनकर रह गया। महिलाओं की अनवरत हत्या- अपराध हो रही है। बाबा साहब के संविधान को बदलकर मनुवादी संविधान लाने की साजिश कर रही है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे को सरकार महिमा मंडित कर रही है। नागरिकता देने में धर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अनिश्चितकालीन सत्याग्रह को प्रशासन दबाब देकर समाप्त कराना चाहती है। यह लोकतंत्र के खिलाफ है। संबसंस के संयोजक फैजाबाद रहमान फैज ने कहा कि विपक्षी पार्टी- दलों के सहयोग मिलने से सत्याग्रह आंदोलन को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सीएए, एनआरसी एवं एनपीआर ने नीतीश- मोदी के मानवश्रृंखला को सुपर फ्लाप करा दिया। आने वाले दिनों में नागरिकता काला कानून राज्य के अलावे केंद्र सरकार को सत्ता से बेदखल करेगी। समस्तीपुर कार्यालय से राजेश कुमार वर्मा द्वारा सम्प्रेषित ।
उपस्थित सभी महानुभाव और नौजवान साथियों। आज ऊर्जा संगम भी है और त्रिवेणी संगम भी है। त्रिवेणी संगम इस अर्थ में है कि तीन महत्वपूर्ण initiative जिनको आज हम Golden Jubilee के रूप में मना रहे हैं। ONGC Videsh Limited, Engineer India Limited and Barauni Refinery Limited इन तीनों क्षेत्र में गत 50 वर्षों में जिन जिन महानुभाव ने योगदान दिया है। इस अभियान को आगे बढ़ाया है और भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में ताकत देने के लिए निरंतर प्रयास किया है। मैं उन तीनों संस्थाओं से जुड़े सभी महानुभवों को हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं और मुझे विश्वास है कि जब हम Golden Jubilee Year मना रहे हैं तब पीछे मुड़कर के वो कौन सी हमारी कार्यशैली थी, वो कौन से हमारे निर्णय थे, वो कौन सा हमारा दर्शन था, जिसके कारण हम आगे बढ़े, वो कौन सी कमियां थी, जिसके कारण अगर कोई कमी रह गई थी तो वो क्या थी और अब जाकर के जब हम 50 साल के turning point पर खड़े हैं तब आने वाला 50 साल का हमारा लक्ष्य क्या होगा। हमारा मार्ग क्या होगा, हमारी शक्ति संचय के रास्ते क्या होंगे और राष्ट्र को शक्तिवान बनाने के लिए हमारे पुरूषार्थ किस प्रकार का होगा, उसका भी आप लोग रोड मैप तैयार करोगे, इसका मुझे पूरा विश्वास है। कोई देश तब प्रगति करता है, जब विचार के साथ व्यवस्थाएं जुड़ती है, अगर विचार के साथ व्यवस्था नहीं रहती है, तो विचार बांझ रह जाते हैं, उससे आगे कुछ निकलता नहीं है और इसलिए देश को अगर प्रगति करनी है तो हर Idea को Institutionalise करना होता है और देश् लम्बे स्तर से तब स्थाई भाव से तब प्रगति करता है जब उसका Institutional Mechanism अधिक मजबूत हो। Institutional Mechanism में auto-pilot ऐसी व्यवस्था हो कि वो नित्य-नूतन प्रयोग करता रहता हो। मैं समझता हूं कि हमारे पास आने वाले युग के लिए भी, नई व्यवस्थाओं के निर्माण की आवश्यकता है और वर्तमान में जो व्यवस्थाएं हमारे पास है जो Institutional Mechanism हैं, उस Institutional Mechanism को भी आने वाली शताब्दी के लिए किस प्रकार से अधिक आधुनिक बनाया जाए, नए innovation कैसे किये जाए, young man को कैसे incorporate किया जाए और न सिर्फ भारत की सीमाओं तक लेकिन Global Perspective में हम अपने विकास की दिशा कैसे तय करे और उन लक्ष्यों को कैसे पार करे, कैसे प्राप्त करे? उन बातों पर जितना हम ध्यान देंगे, तो विश्व की भारत के पास जो अपेक्षाएं हैं और दुनिया का 1/6 population, यह 1/6 population यह कहकर नहीं रोक सकता कि हमारी यह मुसीबत है, हमारी यह कठिनाई है। दुनिया के 1/6 population का तो यह लक्ष्य रहना चाहिए कि विश्व का 1/6 बोझ हम अकेले अपने कंधों पर उठाएंगे और विश्व को सुख-शांति देने में हमारा भी कोई न कोई सकारात्मक contribution होगा। यह Global Perspective के साथ भारत को अपने आप को सजग करना होगा, भारत को अपने आप को तैयार करना होगा और मुझे विश्वास है जिस देश के पास 65% जनसंख्या 35 साल से कम उम्र की हो young mind जिनके पास हो, अच्छे सपने देखने का जिन लोगों में सामर्थ्य हो ऐसी ऊर्जावान देश के लिए सपने देखना। ...और सपने पूरा करना कठिन नहीं है और मुझे विश्वास है कि आज जब हम इस महत्वपूर्ण अवसर पर ऊर्जा संगम के समारोह में मिले हैं, तब कल, आज और आने वाले कल का भी संगम हमारे मन-मस्तिष्क में स्थिर हो, ताकि हम नई ऊंचाईयों को पार करने के लिए विश्व के काम आने वाले भारत को तैयार करने में सफल हो सकें और इस अर्थ में आज मुझे आपके बीच आने का सौभाग्य मिला मैं आपको इसके लिए हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और आपके आगे की यात्रा बहुत ही उत्तम तरीके से राष्ट्र की सेवा में काम आएगी, ऐसा मुझे पूरा विश्वास है। नई सरकार बनने के बाद नये कई initiative लिये गये हैं। हम जानते हैं कि अगर हमें विकास करना है अगर हमें Global Bench Mark को achieve करना है तो हमारे लिये ऊर्जा के क्षेत्र में Self Sufficient होना बहुत अनिवार्य है। हमें किसी क्षेत्र में भी Growth करना है उसकी पहली आवश्यकता होती है ऊर्जा। आज Technology Driven society है और जब Technology Driven society है तो ऊर्जा ने अपनी अहम भूमिका स्थापित की है। ऊर्जा के स्रोत अलग-अलग हो सकते हैं, जो आज भी हमारे ध्यान में नहीं है वो भी शायद आने वाले दिनों में विश्व के सामने उजागर हो सकते है, लेकिन पूरे मानव जाति की विकास यात्रा को देखा जाए, तो ऊर्जा का अपना एक स्थान है, ऊर्जा एक प्रकार से विकास को ऊर्जा देने की ताकत बन जाती है और उस अर्थ में हमारे लिए ऊर्जा सुरक्षा ये आवश्यकता भी है और हमारी जिम्मेदारी भी है और उस जिम्मेदारी को पूरा करने की दिशा में हमने कुछ कदम उठाए हैं। पिछले दस महीनों में इस क्षेत्र में हमने जो reform को बल दिया है और reform को बल देने के कारण कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई है। हमारे यहां सामान्य नागरिक की चिंता करना यह हमारा पहला इरादा रहता है। हमारा मकसद है कि देश के common man को अधिक से अधिक सरलता से लाभ कैसे मिले। सब्सिडी ट्रांसफर्स दुनिया की सबसे बड़ी गैसे सब्सिडी को ट्रांसफर करने की स्कीम में सिर्फ सौ दिन के कालखंड में हमने सफलता पाई है और मैं मानता हूं कि एक तो किसी चीज में शुरू करना, किसी चीज को achieve और किसी चीज को time-bound...समय रहते हुए चीजों को तोलते हुए देखें तो मैं विभाग के सभी मित्रों को सचिव श्री, मंत्री श्री को और उनकी टीम को सौ दिन के अल्प समय में दुनिया की सबसे बड़ी सब्सिडी ट्रांसफर स्कीम 12 करोड़ लोगों को बैंक खाते में सब्सिडी पहुंचना यह छोटा काम नहीं है। दुनिया का सबसे बड़ा काम है और जनधन Account जब खोल रहे थे तब तो कुछ लोग मजाक करने की हिम्मत करते थे, लेकिन अब नहीं करते, क्योंकि जनधन, जनधन के लिए नहीं था। जनशक्ति में परिवर्तित करने का प्रयास था और उसमें ऊर्जा शक्ति जोड़ने की प्रारंभ में करना था। कोई कल्पना कर सकता है कि beneficially को सीधा लाभ देकर के हमने कितना बड़ा leakage रोका है। मैं विशेषकर के Political पंडितों से आग्रह करूंगा कि जरा उसकी गहराई में जाए। मैं अपनी तरफ से claim करना नहीं चाहता हूं। जिस भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के खिलाफ बाते तो बहुत होती है लेकिन भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए Institutional Mechanism, Transparent Mechanism, Policy driven व्यवस्थाएं अगर निश्चित की जाए तो हम leakage को रोक सकते हैं और यह उत्तम उदाहरण cash transfer के द्वारा हमने सिद्ध किया है। पहले कितने सिलेंडर जाते थे अब कितने सिलेंडर जाते हैं, इससे पता चलेगा। पिछली बार हमने Parliament में एक छोटा सा उल्लेख किया था कि जिनको यह affordable है उन्होंने सब्सिडी क्यों लेनी चाहिए। क्या देश में ऐसे लोग नहीं निकल सकते कि जो कहें कि भई ठीक है, अब तो ईश्वर ने हमें बहुत दिया है, देश में हमें बहुत दिया है और गैस सिलेंडर के लिए सब्सिडी की जरूरत नहीं है। हम अपने पसीने की कमाई से अपना खाना पका सकते हैं और अपना पेट भर सकते हैं। छोटा सा स्पर्श किया था विषय पर लेकिन स्पर्श को भी देश के करीब 2 लाख 80 हजार लोगों ने सकारात्मक response किया और इस "Give it up" movement में भागीदारी हुए। सवाल यह नहीं है कि दो लाख, तीन लाख इसमें लोग जुड़े, सवाल यह है कि देश हमें चलाना है तो देश भागीदारी करने को तैयार होता है। देश का हर नागरिक भागीदारी करने को तैयार होता है। उनको अवसर देना चाहिए। देश के नागरिकों पर भरोसा करना चाहिए। हमारी सबसे बड़ी पहल यह है कि हम हिंदुस्तान के नागरिकों पर भरोसा कर करके आगे बढ़ना चाहते हैं और आपको जानकर के आनंद होगा कि समाज के एक वर्ग ने जिसने कहा कि हां भई हम अब सब्सिडी से गैस अब लेना नहीं चाहते, हम अपना पैसा दे सकते हैं। करीब 2 लाख 80 हजार से ज्यादा लोगों ने इसका एक प्रकार से देश को लाभ दिया है। उससे कम से कम 100 करोड़ रुपये की बचत होगी। यह 100 करोड़ रुपया किसी गांव में स्कूल बनाने के काम आएगा कि नहीं आएगा। किसी गरीब का बच्चा बीमार होगा तो उसके काम आएगा कि नहीं आएगा। जिसने भी यह काम किया है उसने एक प्रकार से गरीबों की सेवा करने का काम किया है। और यह जो सिलेंडर बचे हैं उन सिलेंडरों से हम पैसे बचाना नहीं चाहते, हम इसको गरीबों तक पहुंचाना चाहते हैं ताकि आज वो धुएं में चुल्हा जलाते हुए जो मां परेशान रहती है उसको कोई राह मिल जाए, उसके बच्चे को आरोग्य का लाभ मिल जाए। गरीब के घर तक गैस का सिलेंडर कैसे पहुंचे इसका हमने अभियान चलाया है और मैं आज विधिवत रूप से यह सफलता देखकर पहले तो हमने ऐसा ही कहा था कि चलो जरा कहे लेकिन जो response देश ने दिया है, मैं उन दो लाख 80 हजार लोगों से अधिक इस काम का जिम्मा लिया मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं, अभिनंदन करता हूं और देशवासियों को अपील करता हूं कि जिसके लिए भी यह संभव है अपनी जेब से.. अपना खाना पकाने की जिनकी ताकत है वो कृपया करके यह गैस सिलेंडर में सब्सिडी न लें। देने का भी एक आनंद होता है, देने का भी एक संतोष होता है और जब आप गैस सिलेंडर की सब्सिडी नहीं लेंगे तब मन में याद रखिए यह जो पैसे देश में बचने वाले हैं वो किसी न किसी गरीब के काम आने वाले हैं। वो आपके जीवन का संतोष होगा, आनंद होगा और मैं विधिवत रूप से देशवासियों से आग्रह करता हूं। जब मैं यह विचार कर रहा था, तब मैंने Department को पूछा था कि पहले जांच करो भई! मोदी के नाम का तो सिलेंडर कोई है नहीं न! मेरा सौभाग्य रहा कि मुझे कभी इस दुनिया से उलझना ही नहीं पड़ा है तो उसके कारण न कभी पहले लिया था न आज है तो फिर मैं एक moral ताकत से बोल सकता था हां भई हम यह कर सकते हैं और मैं आज विधिवत रूप से देशवासियों से अपील करता हूं कि अगर आपके पास इस देश ने जहां तक पहुंचाया है, देश का योगदान है। गरीब से गरीब का योगदान है आप यहां तक पहुंचने में, आपकी जेब भरने में गरीब के पसीने की महक है। आइए हम इस "Give it Up" movement में जुड़े, हम गैस सब्सिडी को छोड़ें, सामने से offer करे और इसमें भी नये नये लक्ष्य प्राप्त करके नये record स्थापित करे। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं जो सिलेंडर, आप सब्सिडी छोड़ेंगे वो हम गरीबों को पहुंचाएंगे। यह गरीबों के काम आएगा। हमने एक और काम किया है....5kg का सिलेंडर। जो विद्यार्थी पढाई के लिए शहर आता है...अब वो एक पूरा सिलेंडर लेकर के क्या करेगा, अब बेचारा एक कमरे में रहता है या तो कोई नौकरी के लिए गये हुए लोग है। यह जो घूमन जाति के लोग है, जो एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं, उनको 5kg का सिलेंडर मिलेगा, तो ऐसे गरीब लोगों को वो affordable भी होगा और उसकी जरूरत पूरी करने की व्यवस्था होगी। हमने उस दिशा में प्रयास किया है। हमने एक यह भी काम किया डीजल को deregulate किया। अब डीजल को deregulate करने के कारण reform के लिए एक महत्वपूर्ण माना जाता है। International दाम कम हुए थे तो थोड़ी सुविधा भी रही, लेकिन Market को तय करने दो, क्योंकि Global Market के दबाव में है और मैंने देखा है कि देश ने सहजता से इसको स्वीकार कर लिया है। कभी दाम ऊपर जाते हैं कभी दाम नीचे जाते हैं लेकिन लोगों को मालूम है कि भई इसमें सरकार का कोई रोल नहीं है। बाजार की जो स्थिति है वो उसी के साथ जुड़ गए है। तो भारत का नागरिक भी एक खरीदार के रूप में भी Global Economic का हिस्सा बनकर के अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए तैयार हुआ है। यह अपने आप में विकास के एक सकारात्मक दृश्य के रूप में मैं देख रहा हूं। मैं देख रहा हूं कि उसका भी लाभ होगा। हमने एक और महत्वपूर्ण निर्णय किया। जब ऊर्जा के क्षेत्र में चर्चा करते समय सभी क्षेत्रों में प्रयास करना पड़ेगा। Ethanol के लिए पेट्रोल में उसको Mix करने के लिए हमने उसमें initiative लिया, विधिवत रूप से लिया। हमारे गन्ने की खेती करने वाले किसान परेशान है, क्योंकि उसकी लागत से चीनी की कीमत कम हो रही है, चीनी के कारखाने बंद हो रहे हैं। अगर उसके लिए एक नई व्यवस्था जोड़ दी जाए। अगर चीनी बनाने वाले चीनी.. उनके पास excess है, चीनी के दाम टूट रहे हैं दुनिया में कोई Import करने वाला नहीं है, तो ऐसी स्थिति में आप चीनी मत बनाइये Ethanol बनाइये, कुछ मात्रा में Ethanol बनाइये, उसको प्रट्रोल में blend कर दिया जाए। किसी समय यह petroleum lobby के बारे में ऐसा कहा जाता था कि इतनी powerful होती है कि कोई निणर्य नहीं कर सकता। हमने निर्णय किया। यहां कई लोग बैठे होंगे, शायद उनको अच्छा नहीं भी लगेगा, लेकिन हमने निर्णय किया है और उसके कारण हम climate की भी चिंता करते हैं, environment की भी चिंता करते हैं, at the same time हम economy की भी चिंता करते हैं। और हमारा गरीब किसान, गन्ने का किसान है। यह ethanol के द्वारा, अब उसकी बहुत बड़ी मदद कर रहे हैं। हमारा जो sugar sector है उसको ताकत देने का एक उत्तम रास्ता हमने किया है और पहले ethanol का MSP भी नहीं था। Minimum Support Price का निर्णय नहीं था। उसका कोई Price.. कोई कीमत तय नहीं था। हमने तय कर दिया 48.50 पैसा to 49.50 पैसा तक इसका रहेगा ताकि एक राज्य में एक भाव हो, दूसरे राज्य में दूसरा हो, तो स्थिति खराब न हो और उसके कारण कोई भी company direct ले सकती है। कोई टेंडर प्रोसेस में जाना नहीं पड़ेगा, मार्केट रेट फिक्स कर दिया है। मैं समझता हूं कि उसके कारण भी एक और लाभ होगा। और एक काम हमने initiative लेने के लिए राज्यों से आग्रह किया है। जिन-जिन राज्यों में बंजर भूमि है। जहां पर अन्य फसल की संभावनाएं कम है, वहां पर Jatropha की खेती बहुत अच्छी हो सकती है। Jatropha की पैदावर अच्छी हो सकती है और Jatropha जैसे वो तिलहन है जिसमें से खाद्य तेल नहीं निकलता है, लेकिन कोई पदार्थ मिलता है, उसको बढ़ावा देना और उसको बायो डीजल के रूप में develop करना और जितनी मात्रा में हम बायो डीजल को मार्केट में लाएंगे, हमारा किसान जो खेत में पम्प चलाता है या ट्रेक्टर चलाता है उसको भी उसके कारण लाभ होगा। गरीब आदमी को किस प्रकार से लाभ हो, उस बल देने करने का हमारा प्रयास है। देश में अगर हमें विकास करना है तो भारत का..और अगर सिर्फ पश्चिमी छोर का विकास हो, तो देश का विकास कभी संभव नहीं होगा। असंतुलित विकास भी कभी-कभी विकास के लिए खुद समस्या बन जाता है। विकास संतुलित होना चाहिए। हर राज्य का 19-20 का फर्क तो हम समझ सकते हैं। लेकिन 80-20 के फर्क से देश नहीं चल सकता। और इसलिए पश्चिम में तो हमें economic activity दिखती है, लेकिन पूरब जहां सबसे ज्यादा प्राकृतिक संपदा है, पूर्वी भारत पूरा, जहां पर समर्थ लोग हैं, उनकी शक्ति कम नहीं होती है, लेकिन उनको अवसर नहीं मिलता। देश को आगे बढ़ाना है तो हमारा लक्ष्य है कि भारत का पूर्वी इलाका चाहे पूर्वी उत्तर प्रदेश हो, बिहार हो, उड़ीसा हो, असम हो, पश्चिम बंगाल हो, north east के इलाके हों, जहां पर विकास की विशाल-विपुल संभावना है, उस पर हमने बल देने का आग्रह किया है। Second green revolution से भूमि अगर बनेगी, तो पूर्वी भारत बनेगा, मुझे साफ दिखाई दे रहा है। जहां विपुल मात्रा में पानी है, उसी प्रकार से औद्योगिकी विकास में भी बड़ा contribute करने की संभावना पूर्वी भारत में पड़ी है और इसके लिए गैस ग्रिड नेटवर्क ऊर्जा जरूरत है। अगर पटना के पास गैस पाइप लाइन से मिलेगा, तो पटना में उद्योग आएंगे। बिहार के उन शहरों में भी उद्योग जाएंगे। असम में भी जाएंगे, पश्चिम बंगाल में भी जाएंगे, कलकत्ता में भी नई ऊर्जा आएगी और इसलिए हमने गैस ग्रिड का पाइप लाइन के नेटवर्क का एक बहुत अभियान उठाना हमने तय किया है और इतना ही नहीं शहरों में क्योंकि शहरों के pollution की बड़ी चर्चा है। और उसके लिए हमने तय किया है कि हम परिवारों में पाइप लाइन से गैस का connection करें। यह हम देना चाहते है। अब तक हिंदुस्तान में 27 लाख परिवारों के पास पाइप लाइन से गैस connection है। हम आने वाले चार साल में यह संख्या एक करोड़ पहुंचाना चाहते हैं, एक करोड़ परिवार को। अब पूरे-पूरे पूर्वी भारत में गैस ग्रिड से गैस देने का हमारा लक्ष्य है। मैं जानता हूं हजारों करोड़ रुपये का हमारा investment है लेकिन यह investment करना है, क्योंकि अगर एक बार ऊर्जा के स्रोत वहां विपुल मात्रा में होंगे, तो हमारा पूर्वी भारत में भी उद्योग लगाने वाले लोग पहुंचेंगे, अगर गैस उनको मिलता है तो उद्योग लगाने के लिए जाएंगे और फिर ऊर्जा की गारंटी होनी चाहिए, उसको लेकर के हम आगे बढ़ना चाहते हैं। हमने इस क्षेत्र में विकास करना है तो skill development में भी बल देना पड़ेगा। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से IIT जैसे हमारे Institution के हमारे students को बुलाया है। हमारे देश में यह बहुत बड़ी challenge है कि इस क्षेत्र में innovation कैसे करें। हम अभी भी पुराने ढर्रे से चल रहे हैं। यह young mind की जरूरत है और young mind का एक लाभ है, वो बड़े साहसिक होते हैं वो प्रयोग करने के लिए ताकत रखते हैं। जो अनुभव के किनारे पहुंचे हैं वो 50 बार सोचते है कि करू या न करूं, करूं या न करूं। अच्छा कबड्डी का खिलाड़ी भी Retire होने के बाद जब कबड्डी का खेल देखने खड़ा होता है, तो उसको भी डर रहता है कि अरे यह कहीं गिर न जाए, वो चिंता करता रहता है और इसलिए young mind जिसकी risk capacity बहुत होती है। ऐसे young mind को आज विशेष रूप से बुलाया है। मैं आग्रह करता हूं कि इस क्षेत्र में बहुत innovation की संभावनाएं है। innovation को हम किस प्रकार से ऊर्जा के क्षेत्र में हमारा mind apply करे। भारत को हम ऊर्जा क्षेत्र में सुरक्षित कैसे करे, स्वाबलंबी कैसे करें। उसकी पहली आवश्यकता है innovation, technology innovation, technology up-gradation, दूसरा है skill development. हमने skill development का एक अलग department बनाया है, लेकिन skill development को भी हम area specific, need specific and development specific बनाना चाहते हैं, requirement specific बनाना चाहते हैं। अब हमने एक बार हिसाब लगाया कि सिर्फ हमारे पेट्रोलियम सेक्टर में जो काम करते हैं जैसे गैस की पाइप लाइन लगती है, अब गैस की पाइप लाइन लगाने वाला पानी की पाइप लाइन लगाने वाला नहीं चल सकता। उसके लिए एक special skill चाहिए। व्यक्ति वही होगा, extra skill की आवश्यकता है, value addition की आवश्यकता है। हमने ऐसे ही सरसरी नजर से देखा तो करीब-करीब 136 चीजें ऐसी हाथ में आई कि जो field level पर food-soldier जो है उनके skill के लिए करने की आवश्यकता है। हमने एक अभियान चलाया है। आने वाले दिनों में इन सभी sectors में हम skill development को बल दे और सामान्य गरीब मजदूर भी है जो यह पेट्रोलियम सेक्टर में, ऊर्जा के सेक्टर में मान लीजिए solar energy पर हम initiative ले रहे हैं। अगर solar energy में initiative ले तो solar energy में वो wire-man काम करेगा कि solar energy में skill development का नये सिरे से सिलेबस बने, नये सिरे से उनके लिए कहीं एक व्यक्ति या दो व्यक्ति एक साल के दो साल के जो भी आवश्यक हो Skill Development Mission के साथ जोड़कर के हम पेट्रोलियम सेक्टर में भी ऊर्जा के सेक्टर में भी, ऐसी कितनी भी नई चीजें - और मैं तो चाहूंगा हम कंपनियों के साथ मिलकर के इसको करें। कंपनियां भी पार्टनर बनें और कंपनियों के साथ मिलकर के करेंगे तो Human Resource Development यह भी हमारे लिए उतना ही आवश्यक है जिसको लेकर के हम आगे बढ़ना चाहते हैं और मुझे विश्वास है कि हम आने वाले दिनों में एक प्रकार से innovation के लिए पूरा-पूरा अवसर, उसी प्रकार से इसको भी पाने का अवसर..। 2022 में भारत की आजादी के 75 साल हो रहे हैं। देश आजादी का अमृत पर्व बनाने वाला है। जिन महापुरूषों ने सपने देखे थे भारत को महान बनाने के और इसके लिए आजादी भी अपने आप को बलि चढ़ा दिया था, जवानी जेल में खपा दी थी, अपने-अपने परिवारों को तबाह कर दिया था, इसलिए कि हम आजादी की सांस ले सके, हम आजाद भारत में पल-बढ़ सके। हम वो भाग्यशाली लोग हैं, जो उनकी तपस्या और त्याग के कारण आज आजादी का आनंद ले रहे हैं। क्या हमारा जिम्मा नहीं है कि जिन महापुरूषों ने देश के लिए इतना बलिदान दिया हम उनको कैसा भारत समर्पित करेंगे। कैसा भारत देंगे। 2022 जबकि हिंदुस्तान की आजादी के 75 साल है। इस ऊर्जा के संगम में जो लोग आएं हैं मैं आपसे आग्रह करता हूं कि 2022 में जब देश आजादी का अमृत पर्व मनाए तब आज हम ऊर्जा के क्षेत्र में करीब 77% import करते हैं। तेल और गैस और पेट्रोलियम सेक्टर में। क्या आजादी के 2022 के पर्व पर, अमृत पर्व पर हम यह 77 में से कम से कम मैं ज्यादा नहीं कर रहा हूं, 10% import कम करेंगे, हम उतना 10% growth करेंगे, स्वाबलंबी बनेंगे यह सपना लेकर के आज हम कट कर सकते हैं क्या। एक बार हम 2022 में 10% import कमी करने में सफल हो जाते हैं, 10% growth करके हम उस ऊंचाई को पार कर सकते हैं तो मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि 2030 में हम यह import को 50% तक ला सकते हैं। लेकिन First Break-through होता है, पहला Break-through और मैं मानता हूं कि आजादी के दीवानों से बड़ी प्रेरणा क्या हो सकती है। आजादी के मरने-मिटने वालों को याद करके कह कि मैं इस क्षेत्र में काम कर रहा हूं, मैं मेरे देश को यह देकर के रहूंगा, आने वाले पांच-सात साल मेरे पास हैं। मैं पूरी ताकत लगा दूंगा और मैं देश में यह स्थिति पैदा करूं, ये सपने हम देखे कितने क्षेत्रों में initiative लिये है। हम मेगावाट से बाहर नहीं निकलते, हम गीगावाट की चर्चा करने लगे हैं। 100 गीगावाट solar energy, 60 giga-watt renewable energy, wind energy की दिशा में जाना यह अपने आप में बहुत बड़े सपने हमने देखे हैं। इन सपनों से आगे बढ़ेंगे तो हमारा import कम होगा। और 10% Growth...वो तो हमारी growth requirement है..लेकिन हमारा जो Growth होगा वो 10% से ज्यादा लगेगा, तब जाकर के हम 77% से 10% कम कर सकते हैं। तो हमारे लक्ष्य ऊंचे होंगे, तब जाकर के हम इसको पूरा कर सकेंगे और मैं चाहूंगा कि उसके लिए हम प्रयास करें। एक क्षेत्र की जितनी कंपनियां है, समय की मांग यह है कि हमारी ऊर्जा क्षेत्र की जितनी कंपनियां है Government हो चाहे वो Private कंपनियां हो, हम भारत के दायरे में ही अपने कारोबार को चलाकर के गुजारा करे यह enough नहीं है। हमारी इन कंपनियों को target करना चाहिए, जल्द से जल्द वो Multinational बने, क्योंकि ऊर्जा का एक पूरा Global Market बना हुआ है। एक मैं देख रहा हूं कि इन दिनों energy diplomacy एक नया क्षेत्र उभर गया। वैश्विक संबंधों में energy diplomacy एक requirement बन गई है। हमारी कंपनियां जितनी Multinational बनेगी, उतना मैं समझता हूं इस क्षेत्र में अपनी पहुंच बना पाएंगे, अपनी जगह बना पाएंगे। उसी प्रकार से ऊर्जा के क्षेत्र में India and Middle East, India and Central Asia, India and South Asia Corridor बनाना और उसको गति देना हमारे लिए बहुत आवश्यक है। आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में काम करने वाले हमारे सभी महानुभव इन चीजों पर focus करके कैसे काम करे। कुछ ऐसे अनछुए क्षेत्र हैं, जिसमें हम अपना पैर पसार सकते हैं, कि North America और Africa में Gas Power के रूप में हम स्थापित कर सकते हैं क्या? मुझे विश्वास है कि अगर इन सपनों को लेकर के हम अगर आगे बढ़ते हैं, उसी प्रकार से हमारे जो बंदरगाह है उसके साथ LNG terminal का network उसके साथ हम कैसे जोड़ सकते हैं। कई ऐसे विषय है कि जिसको अगर हम बल देंगे तो मैं समझता हूं कि हम इन चीजों को पार कर सकते हैं और यह बात निश्चित है कि ऊर्जावान भारत ही विश्व को नई ऊर्जा दे सकता है। अगर भारत ऊर्जावान बनेगा तो विश्व को नई ऊर्जा मिलने की संभावना है, तो 1/6 population के नाते दुनिया हमारे लिए क्या करती है इन सपनों से बाहर निकलकर के हम विश्व के लिए क्या करते हैं, यह सपने देखकर के चलेंगे तो देश का अपने आप भला होगा।
उपस्थित सभी महानुभाव और नौजवान साथियों। आज ऊर्जा संगम भी है और त्रिवेणी संगम भी है। त्रिवेणी संगम इस अर्थ में है कि तीन महत्वपूर्ण initiative जिनको आज हम Golden Jubilee के रूप में मना रहे हैं। ONGC Videsh Limited, Engineer India Limited and Barauni Refinery Limited इन तीनों क्षेत्र में गत पचास वर्षों में जिन जिन महानुभाव ने योगदान दिया है। इस अभियान को आगे बढ़ाया है और भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में ताकत देने के लिए निरंतर प्रयास किया है। मैं उन तीनों संस्थाओं से जुड़े सभी महानुभवों को हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं और मुझे विश्वास है कि जब हम Golden Jubilee Year मना रहे हैं तब पीछे मुड़कर के वो कौन सी हमारी कार्यशैली थी, वो कौन से हमारे निर्णय थे, वो कौन सा हमारा दर्शन था, जिसके कारण हम आगे बढ़े, वो कौन सी कमियां थी, जिसके कारण अगर कोई कमी रह गई थी तो वो क्या थी और अब जाकर के जब हम पचास साल के turning point पर खड़े हैं तब आने वाला पचास साल का हमारा लक्ष्य क्या होगा। हमारा मार्ग क्या होगा, हमारी शक्ति संचय के रास्ते क्या होंगे और राष्ट्र को शक्तिवान बनाने के लिए हमारे पुरूषार्थ किस प्रकार का होगा, उसका भी आप लोग रोड मैप तैयार करोगे, इसका मुझे पूरा विश्वास है। कोई देश तब प्रगति करता है, जब विचार के साथ व्यवस्थाएं जुड़ती है, अगर विचार के साथ व्यवस्था नहीं रहती है, तो विचार बांझ रह जाते हैं, उससे आगे कुछ निकलता नहीं है और इसलिए देश को अगर प्रगति करनी है तो हर Idea को Institutionalise करना होता है और देश् लम्बे स्तर से तब स्थाई भाव से तब प्रगति करता है जब उसका Institutional Mechanism अधिक मजबूत हो। Institutional Mechanism में auto-pilot ऐसी व्यवस्था हो कि वो नित्य-नूतन प्रयोग करता रहता हो। मैं समझता हूं कि हमारे पास आने वाले युग के लिए भी, नई व्यवस्थाओं के निर्माण की आवश्यकता है और वर्तमान में जो व्यवस्थाएं हमारे पास है जो Institutional Mechanism हैं, उस Institutional Mechanism को भी आने वाली शताब्दी के लिए किस प्रकार से अधिक आधुनिक बनाया जाए, नए innovation कैसे किये जाए, young man को कैसे incorporate किया जाए और न सिर्फ भारत की सीमाओं तक लेकिन Global Perspective में हम अपने विकास की दिशा कैसे तय करे और उन लक्ष्यों को कैसे पार करे, कैसे प्राप्त करे? उन बातों पर जितना हम ध्यान देंगे, तो विश्व की भारत के पास जो अपेक्षाएं हैं और दुनिया का एक/छः population, यह एक/छः population यह कहकर नहीं रोक सकता कि हमारी यह मुसीबत है, हमारी यह कठिनाई है। दुनिया के एक/छः population का तो यह लक्ष्य रहना चाहिए कि विश्व का एक/छः बोझ हम अकेले अपने कंधों पर उठाएंगे और विश्व को सुख-शांति देने में हमारा भी कोई न कोई सकारात्मक contribution होगा। यह Global Perspective के साथ भारत को अपने आप को सजग करना होगा, भारत को अपने आप को तैयार करना होगा और मुझे विश्वास है जिस देश के पास पैंसठ% जनसंख्या पैंतीस साल से कम उम्र की हो young mind जिनके पास हो, अच्छे सपने देखने का जिन लोगों में सामर्थ्य हो ऐसी ऊर्जावान देश के लिए सपने देखना। ...और सपने पूरा करना कठिन नहीं है और मुझे विश्वास है कि आज जब हम इस महत्वपूर्ण अवसर पर ऊर्जा संगम के समारोह में मिले हैं, तब कल, आज और आने वाले कल का भी संगम हमारे मन-मस्तिष्क में स्थिर हो, ताकि हम नई ऊंचाईयों को पार करने के लिए विश्व के काम आने वाले भारत को तैयार करने में सफल हो सकें और इस अर्थ में आज मुझे आपके बीच आने का सौभाग्य मिला मैं आपको इसके लिए हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और आपके आगे की यात्रा बहुत ही उत्तम तरीके से राष्ट्र की सेवा में काम आएगी, ऐसा मुझे पूरा विश्वास है। नई सरकार बनने के बाद नये कई initiative लिये गये हैं। हम जानते हैं कि अगर हमें विकास करना है अगर हमें Global Bench Mark को achieve करना है तो हमारे लिये ऊर्जा के क्षेत्र में Self Sufficient होना बहुत अनिवार्य है। हमें किसी क्षेत्र में भी Growth करना है उसकी पहली आवश्यकता होती है ऊर्जा। आज Technology Driven society है और जब Technology Driven society है तो ऊर्जा ने अपनी अहम भूमिका स्थापित की है। ऊर्जा के स्रोत अलग-अलग हो सकते हैं, जो आज भी हमारे ध्यान में नहीं है वो भी शायद आने वाले दिनों में विश्व के सामने उजागर हो सकते है, लेकिन पूरे मानव जाति की विकास यात्रा को देखा जाए, तो ऊर्जा का अपना एक स्थान है, ऊर्जा एक प्रकार से विकास को ऊर्जा देने की ताकत बन जाती है और उस अर्थ में हमारे लिए ऊर्जा सुरक्षा ये आवश्यकता भी है और हमारी जिम्मेदारी भी है और उस जिम्मेदारी को पूरा करने की दिशा में हमने कुछ कदम उठाए हैं। पिछले दस महीनों में इस क्षेत्र में हमने जो reform को बल दिया है और reform को बल देने के कारण कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई है। हमारे यहां सामान्य नागरिक की चिंता करना यह हमारा पहला इरादा रहता है। हमारा मकसद है कि देश के common man को अधिक से अधिक सरलता से लाभ कैसे मिले। सब्सिडी ट्रांसफर्स दुनिया की सबसे बड़ी गैसे सब्सिडी को ट्रांसफर करने की स्कीम में सिर्फ सौ दिन के कालखंड में हमने सफलता पाई है और मैं मानता हूं कि एक तो किसी चीज में शुरू करना, किसी चीज को achieve और किसी चीज को time-bound...समय रहते हुए चीजों को तोलते हुए देखें तो मैं विभाग के सभी मित्रों को सचिव श्री, मंत्री श्री को और उनकी टीम को सौ दिन के अल्प समय में दुनिया की सबसे बड़ी सब्सिडी ट्रांसफर स्कीम बारह करोड़ लोगों को बैंक खाते में सब्सिडी पहुंचना यह छोटा काम नहीं है। दुनिया का सबसे बड़ा काम है और जनधन Account जब खोल रहे थे तब तो कुछ लोग मजाक करने की हिम्मत करते थे, लेकिन अब नहीं करते, क्योंकि जनधन, जनधन के लिए नहीं था। जनशक्ति में परिवर्तित करने का प्रयास था और उसमें ऊर्जा शक्ति जोड़ने की प्रारंभ में करना था। कोई कल्पना कर सकता है कि beneficially को सीधा लाभ देकर के हमने कितना बड़ा leakage रोका है। मैं विशेषकर के Political पंडितों से आग्रह करूंगा कि जरा उसकी गहराई में जाए। मैं अपनी तरफ से claim करना नहीं चाहता हूं। जिस भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के खिलाफ बाते तो बहुत होती है लेकिन भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए Institutional Mechanism, Transparent Mechanism, Policy driven व्यवस्थाएं अगर निश्चित की जाए तो हम leakage को रोक सकते हैं और यह उत्तम उदाहरण cash transfer के द्वारा हमने सिद्ध किया है। पहले कितने सिलेंडर जाते थे अब कितने सिलेंडर जाते हैं, इससे पता चलेगा। पिछली बार हमने Parliament में एक छोटा सा उल्लेख किया था कि जिनको यह affordable है उन्होंने सब्सिडी क्यों लेनी चाहिए। क्या देश में ऐसे लोग नहीं निकल सकते कि जो कहें कि भई ठीक है, अब तो ईश्वर ने हमें बहुत दिया है, देश में हमें बहुत दिया है और गैस सिलेंडर के लिए सब्सिडी की जरूरत नहीं है। हम अपने पसीने की कमाई से अपना खाना पका सकते हैं और अपना पेट भर सकते हैं। छोटा सा स्पर्श किया था विषय पर लेकिन स्पर्श को भी देश के करीब दो लाख अस्सी हजार लोगों ने सकारात्मक response किया और इस "Give it up" movement में भागीदारी हुए। सवाल यह नहीं है कि दो लाख, तीन लाख इसमें लोग जुड़े, सवाल यह है कि देश हमें चलाना है तो देश भागीदारी करने को तैयार होता है। देश का हर नागरिक भागीदारी करने को तैयार होता है। उनको अवसर देना चाहिए। देश के नागरिकों पर भरोसा करना चाहिए। हमारी सबसे बड़ी पहल यह है कि हम हिंदुस्तान के नागरिकों पर भरोसा कर करके आगे बढ़ना चाहते हैं और आपको जानकर के आनंद होगा कि समाज के एक वर्ग ने जिसने कहा कि हां भई हम अब सब्सिडी से गैस अब लेना नहीं चाहते, हम अपना पैसा दे सकते हैं। करीब दो लाख अस्सी हजार से ज्यादा लोगों ने इसका एक प्रकार से देश को लाभ दिया है। उससे कम से कम एक सौ करोड़ रुपये की बचत होगी। यह एक सौ करोड़ रुपया किसी गांव में स्कूल बनाने के काम आएगा कि नहीं आएगा। किसी गरीब का बच्चा बीमार होगा तो उसके काम आएगा कि नहीं आएगा। जिसने भी यह काम किया है उसने एक प्रकार से गरीबों की सेवा करने का काम किया है। और यह जो सिलेंडर बचे हैं उन सिलेंडरों से हम पैसे बचाना नहीं चाहते, हम इसको गरीबों तक पहुंचाना चाहते हैं ताकि आज वो धुएं में चुल्हा जलाते हुए जो मां परेशान रहती है उसको कोई राह मिल जाए, उसके बच्चे को आरोग्य का लाभ मिल जाए। गरीब के घर तक गैस का सिलेंडर कैसे पहुंचे इसका हमने अभियान चलाया है और मैं आज विधिवत रूप से यह सफलता देखकर पहले तो हमने ऐसा ही कहा था कि चलो जरा कहे लेकिन जो response देश ने दिया है, मैं उन दो लाख अस्सी हजार लोगों से अधिक इस काम का जिम्मा लिया मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं, अभिनंदन करता हूं और देशवासियों को अपील करता हूं कि जिसके लिए भी यह संभव है अपनी जेब से.. अपना खाना पकाने की जिनकी ताकत है वो कृपया करके यह गैस सिलेंडर में सब्सिडी न लें। देने का भी एक आनंद होता है, देने का भी एक संतोष होता है और जब आप गैस सिलेंडर की सब्सिडी नहीं लेंगे तब मन में याद रखिए यह जो पैसे देश में बचने वाले हैं वो किसी न किसी गरीब के काम आने वाले हैं। वो आपके जीवन का संतोष होगा, आनंद होगा और मैं विधिवत रूप से देशवासियों से आग्रह करता हूं। जब मैं यह विचार कर रहा था, तब मैंने Department को पूछा था कि पहले जांच करो भई! मोदी के नाम का तो सिलेंडर कोई है नहीं न! मेरा सौभाग्य रहा कि मुझे कभी इस दुनिया से उलझना ही नहीं पड़ा है तो उसके कारण न कभी पहले लिया था न आज है तो फिर मैं एक moral ताकत से बोल सकता था हां भई हम यह कर सकते हैं और मैं आज विधिवत रूप से देशवासियों से अपील करता हूं कि अगर आपके पास इस देश ने जहां तक पहुंचाया है, देश का योगदान है। गरीब से गरीब का योगदान है आप यहां तक पहुंचने में, आपकी जेब भरने में गरीब के पसीने की महक है। आइए हम इस "Give it Up" movement में जुड़े, हम गैस सब्सिडी को छोड़ें, सामने से offer करे और इसमें भी नये नये लक्ष्य प्राप्त करके नये record स्थापित करे। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं जो सिलेंडर, आप सब्सिडी छोड़ेंगे वो हम गरीबों को पहुंचाएंगे। यह गरीबों के काम आएगा। हमने एक और काम किया है....पाँच किलोग्राम का सिलेंडर। जो विद्यार्थी पढाई के लिए शहर आता है...अब वो एक पूरा सिलेंडर लेकर के क्या करेगा, अब बेचारा एक कमरे में रहता है या तो कोई नौकरी के लिए गये हुए लोग है। यह जो घूमन जाति के लोग है, जो एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं, उनको पाँच किलोग्राम का सिलेंडर मिलेगा, तो ऐसे गरीब लोगों को वो affordable भी होगा और उसकी जरूरत पूरी करने की व्यवस्था होगी। हमने उस दिशा में प्रयास किया है। हमने एक यह भी काम किया डीजल को deregulate किया। अब डीजल को deregulate करने के कारण reform के लिए एक महत्वपूर्ण माना जाता है। International दाम कम हुए थे तो थोड़ी सुविधा भी रही, लेकिन Market को तय करने दो, क्योंकि Global Market के दबाव में है और मैंने देखा है कि देश ने सहजता से इसको स्वीकार कर लिया है। कभी दाम ऊपर जाते हैं कभी दाम नीचे जाते हैं लेकिन लोगों को मालूम है कि भई इसमें सरकार का कोई रोल नहीं है। बाजार की जो स्थिति है वो उसी के साथ जुड़ गए है। तो भारत का नागरिक भी एक खरीदार के रूप में भी Global Economic का हिस्सा बनकर के अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए तैयार हुआ है। यह अपने आप में विकास के एक सकारात्मक दृश्य के रूप में मैं देख रहा हूं। मैं देख रहा हूं कि उसका भी लाभ होगा। हमने एक और महत्वपूर्ण निर्णय किया। जब ऊर्जा के क्षेत्र में चर्चा करते समय सभी क्षेत्रों में प्रयास करना पड़ेगा। Ethanol के लिए पेट्रोल में उसको Mix करने के लिए हमने उसमें initiative लिया, विधिवत रूप से लिया। हमारे गन्ने की खेती करने वाले किसान परेशान है, क्योंकि उसकी लागत से चीनी की कीमत कम हो रही है, चीनी के कारखाने बंद हो रहे हैं। अगर उसके लिए एक नई व्यवस्था जोड़ दी जाए। अगर चीनी बनाने वाले चीनी.. उनके पास excess है, चीनी के दाम टूट रहे हैं दुनिया में कोई Import करने वाला नहीं है, तो ऐसी स्थिति में आप चीनी मत बनाइये Ethanol बनाइये, कुछ मात्रा में Ethanol बनाइये, उसको प्रट्रोल में blend कर दिया जाए। किसी समय यह petroleum lobby के बारे में ऐसा कहा जाता था कि इतनी powerful होती है कि कोई निणर्य नहीं कर सकता। हमने निर्णय किया। यहां कई लोग बैठे होंगे, शायद उनको अच्छा नहीं भी लगेगा, लेकिन हमने निर्णय किया है और उसके कारण हम climate की भी चिंता करते हैं, environment की भी चिंता करते हैं, at the same time हम economy की भी चिंता करते हैं। और हमारा गरीब किसान, गन्ने का किसान है। यह ethanol के द्वारा, अब उसकी बहुत बड़ी मदद कर रहे हैं। हमारा जो sugar sector है उसको ताकत देने का एक उत्तम रास्ता हमने किया है और पहले ethanol का MSP भी नहीं था। Minimum Support Price का निर्णय नहीं था। उसका कोई Price.. कोई कीमत तय नहीं था। हमने तय कर दिया अड़तालीस.पचास पैसा to उनचास.पचास पैसा तक इसका रहेगा ताकि एक राज्य में एक भाव हो, दूसरे राज्य में दूसरा हो, तो स्थिति खराब न हो और उसके कारण कोई भी company direct ले सकती है। कोई टेंडर प्रोसेस में जाना नहीं पड़ेगा, मार्केट रेट फिक्स कर दिया है। मैं समझता हूं कि उसके कारण भी एक और लाभ होगा। और एक काम हमने initiative लेने के लिए राज्यों से आग्रह किया है। जिन-जिन राज्यों में बंजर भूमि है। जहां पर अन्य फसल की संभावनाएं कम है, वहां पर Jatropha की खेती बहुत अच्छी हो सकती है। Jatropha की पैदावर अच्छी हो सकती है और Jatropha जैसे वो तिलहन है जिसमें से खाद्य तेल नहीं निकलता है, लेकिन कोई पदार्थ मिलता है, उसको बढ़ावा देना और उसको बायो डीजल के रूप में develop करना और जितनी मात्रा में हम बायो डीजल को मार्केट में लाएंगे, हमारा किसान जो खेत में पम्प चलाता है या ट्रेक्टर चलाता है उसको भी उसके कारण लाभ होगा। गरीब आदमी को किस प्रकार से लाभ हो, उस बल देने करने का हमारा प्रयास है। देश में अगर हमें विकास करना है तो भारत का..और अगर सिर्फ पश्चिमी छोर का विकास हो, तो देश का विकास कभी संभव नहीं होगा। असंतुलित विकास भी कभी-कभी विकास के लिए खुद समस्या बन जाता है। विकास संतुलित होना चाहिए। हर राज्य का उन्नीस-बीस का फर्क तो हम समझ सकते हैं। लेकिन अस्सी-बीस के फर्क से देश नहीं चल सकता। और इसलिए पश्चिम में तो हमें economic activity दिखती है, लेकिन पूरब जहां सबसे ज्यादा प्राकृतिक संपदा है, पूर्वी भारत पूरा, जहां पर समर्थ लोग हैं, उनकी शक्ति कम नहीं होती है, लेकिन उनको अवसर नहीं मिलता। देश को आगे बढ़ाना है तो हमारा लक्ष्य है कि भारत का पूर्वी इलाका चाहे पूर्वी उत्तर प्रदेश हो, बिहार हो, उड़ीसा हो, असम हो, पश्चिम बंगाल हो, north east के इलाके हों, जहां पर विकास की विशाल-विपुल संभावना है, उस पर हमने बल देने का आग्रह किया है। Second green revolution से भूमि अगर बनेगी, तो पूर्वी भारत बनेगा, मुझे साफ दिखाई दे रहा है। जहां विपुल मात्रा में पानी है, उसी प्रकार से औद्योगिकी विकास में भी बड़ा contribute करने की संभावना पूर्वी भारत में पड़ी है और इसके लिए गैस ग्रिड नेटवर्क ऊर्जा जरूरत है। अगर पटना के पास गैस पाइप लाइन से मिलेगा, तो पटना में उद्योग आएंगे। बिहार के उन शहरों में भी उद्योग जाएंगे। असम में भी जाएंगे, पश्चिम बंगाल में भी जाएंगे, कलकत्ता में भी नई ऊर्जा आएगी और इसलिए हमने गैस ग्रिड का पाइप लाइन के नेटवर्क का एक बहुत अभियान उठाना हमने तय किया है और इतना ही नहीं शहरों में क्योंकि शहरों के pollution की बड़ी चर्चा है। और उसके लिए हमने तय किया है कि हम परिवारों में पाइप लाइन से गैस का connection करें। यह हम देना चाहते है। अब तक हिंदुस्तान में सत्ताईस लाख परिवारों के पास पाइप लाइन से गैस connection है। हम आने वाले चार साल में यह संख्या एक करोड़ पहुंचाना चाहते हैं, एक करोड़ परिवार को। अब पूरे-पूरे पूर्वी भारत में गैस ग्रिड से गैस देने का हमारा लक्ष्य है। मैं जानता हूं हजारों करोड़ रुपये का हमारा investment है लेकिन यह investment करना है, क्योंकि अगर एक बार ऊर्जा के स्रोत वहां विपुल मात्रा में होंगे, तो हमारा पूर्वी भारत में भी उद्योग लगाने वाले लोग पहुंचेंगे, अगर गैस उनको मिलता है तो उद्योग लगाने के लिए जाएंगे और फिर ऊर्जा की गारंटी होनी चाहिए, उसको लेकर के हम आगे बढ़ना चाहते हैं। हमने इस क्षेत्र में विकास करना है तो skill development में भी बल देना पड़ेगा। इस कार्यक्रम में विशेष रूप से IIT जैसे हमारे Institution के हमारे students को बुलाया है। हमारे देश में यह बहुत बड़ी challenge है कि इस क्षेत्र में innovation कैसे करें। हम अभी भी पुराने ढर्रे से चल रहे हैं। यह young mind की जरूरत है और young mind का एक लाभ है, वो बड़े साहसिक होते हैं वो प्रयोग करने के लिए ताकत रखते हैं। जो अनुभव के किनारे पहुंचे हैं वो पचास बार सोचते है कि करू या न करूं, करूं या न करूं। अच्छा कबड्डी का खिलाड़ी भी Retire होने के बाद जब कबड्डी का खेल देखने खड़ा होता है, तो उसको भी डर रहता है कि अरे यह कहीं गिर न जाए, वो चिंता करता रहता है और इसलिए young mind जिसकी risk capacity बहुत होती है। ऐसे young mind को आज विशेष रूप से बुलाया है। मैं आग्रह करता हूं कि इस क्षेत्र में बहुत innovation की संभावनाएं है। innovation को हम किस प्रकार से ऊर्जा के क्षेत्र में हमारा mind apply करे। भारत को हम ऊर्जा क्षेत्र में सुरक्षित कैसे करे, स्वाबलंबी कैसे करें। उसकी पहली आवश्यकता है innovation, technology innovation, technology up-gradation, दूसरा है skill development. हमने skill development का एक अलग department बनाया है, लेकिन skill development को भी हम area specific, need specific and development specific बनाना चाहते हैं, requirement specific बनाना चाहते हैं। अब हमने एक बार हिसाब लगाया कि सिर्फ हमारे पेट्रोलियम सेक्टर में जो काम करते हैं जैसे गैस की पाइप लाइन लगती है, अब गैस की पाइप लाइन लगाने वाला पानी की पाइप लाइन लगाने वाला नहीं चल सकता। उसके लिए एक special skill चाहिए। व्यक्ति वही होगा, extra skill की आवश्यकता है, value addition की आवश्यकता है। हमने ऐसे ही सरसरी नजर से देखा तो करीब-करीब एक सौ छत्तीस चीजें ऐसी हाथ में आई कि जो field level पर food-soldier जो है उनके skill के लिए करने की आवश्यकता है। हमने एक अभियान चलाया है। आने वाले दिनों में इन सभी sectors में हम skill development को बल दे और सामान्य गरीब मजदूर भी है जो यह पेट्रोलियम सेक्टर में, ऊर्जा के सेक्टर में मान लीजिए solar energy पर हम initiative ले रहे हैं। अगर solar energy में initiative ले तो solar energy में वो wire-man काम करेगा कि solar energy में skill development का नये सिरे से सिलेबस बने, नये सिरे से उनके लिए कहीं एक व्यक्ति या दो व्यक्ति एक साल के दो साल के जो भी आवश्यक हो Skill Development Mission के साथ जोड़कर के हम पेट्रोलियम सेक्टर में भी ऊर्जा के सेक्टर में भी, ऐसी कितनी भी नई चीजें - और मैं तो चाहूंगा हम कंपनियों के साथ मिलकर के इसको करें। कंपनियां भी पार्टनर बनें और कंपनियों के साथ मिलकर के करेंगे तो Human Resource Development यह भी हमारे लिए उतना ही आवश्यक है जिसको लेकर के हम आगे बढ़ना चाहते हैं और मुझे विश्वास है कि हम आने वाले दिनों में एक प्रकार से innovation के लिए पूरा-पूरा अवसर, उसी प्रकार से इसको भी पाने का अवसर..। दो हज़ार बाईस में भारत की आजादी के पचहत्तर साल हो रहे हैं। देश आजादी का अमृत पर्व बनाने वाला है। जिन महापुरूषों ने सपने देखे थे भारत को महान बनाने के और इसके लिए आजादी भी अपने आप को बलि चढ़ा दिया था, जवानी जेल में खपा दी थी, अपने-अपने परिवारों को तबाह कर दिया था, इसलिए कि हम आजादी की सांस ले सके, हम आजाद भारत में पल-बढ़ सके। हम वो भाग्यशाली लोग हैं, जो उनकी तपस्या और त्याग के कारण आज आजादी का आनंद ले रहे हैं। क्या हमारा जिम्मा नहीं है कि जिन महापुरूषों ने देश के लिए इतना बलिदान दिया हम उनको कैसा भारत समर्पित करेंगे। कैसा भारत देंगे। दो हज़ार बाईस जबकि हिंदुस्तान की आजादी के पचहत्तर साल है। इस ऊर्जा के संगम में जो लोग आएं हैं मैं आपसे आग्रह करता हूं कि दो हज़ार बाईस में जब देश आजादी का अमृत पर्व मनाए तब आज हम ऊर्जा के क्षेत्र में करीब सतहत्तर% import करते हैं। तेल और गैस और पेट्रोलियम सेक्टर में। क्या आजादी के दो हज़ार बाईस के पर्व पर, अमृत पर्व पर हम यह सतहत्तर में से कम से कम मैं ज्यादा नहीं कर रहा हूं, दस% import कम करेंगे, हम उतना दस% growth करेंगे, स्वाबलंबी बनेंगे यह सपना लेकर के आज हम कट कर सकते हैं क्या। एक बार हम दो हज़ार बाईस में दस% import कमी करने में सफल हो जाते हैं, दस% growth करके हम उस ऊंचाई को पार कर सकते हैं तो मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि दो हज़ार तीस में हम यह import को पचास% तक ला सकते हैं। लेकिन First Break-through होता है, पहला Break-through और मैं मानता हूं कि आजादी के दीवानों से बड़ी प्रेरणा क्या हो सकती है। आजादी के मरने-मिटने वालों को याद करके कह कि मैं इस क्षेत्र में काम कर रहा हूं, मैं मेरे देश को यह देकर के रहूंगा, आने वाले पांच-सात साल मेरे पास हैं। मैं पूरी ताकत लगा दूंगा और मैं देश में यह स्थिति पैदा करूं, ये सपने हम देखे कितने क्षेत्रों में initiative लिये है। हम मेगावाट से बाहर नहीं निकलते, हम गीगावाट की चर्चा करने लगे हैं। एक सौ गीगावाट solar energy, साठ giga-watt renewable energy, wind energy की दिशा में जाना यह अपने आप में बहुत बड़े सपने हमने देखे हैं। इन सपनों से आगे बढ़ेंगे तो हमारा import कम होगा। और दस% Growth...वो तो हमारी growth requirement है..लेकिन हमारा जो Growth होगा वो दस% से ज्यादा लगेगा, तब जाकर के हम सतहत्तर% से दस% कम कर सकते हैं। तो हमारे लक्ष्य ऊंचे होंगे, तब जाकर के हम इसको पूरा कर सकेंगे और मैं चाहूंगा कि उसके लिए हम प्रयास करें। एक क्षेत्र की जितनी कंपनियां है, समय की मांग यह है कि हमारी ऊर्जा क्षेत्र की जितनी कंपनियां है Government हो चाहे वो Private कंपनियां हो, हम भारत के दायरे में ही अपने कारोबार को चलाकर के गुजारा करे यह enough नहीं है। हमारी इन कंपनियों को target करना चाहिए, जल्द से जल्द वो Multinational बने, क्योंकि ऊर्जा का एक पूरा Global Market बना हुआ है। एक मैं देख रहा हूं कि इन दिनों energy diplomacy एक नया क्षेत्र उभर गया। वैश्विक संबंधों में energy diplomacy एक requirement बन गई है। हमारी कंपनियां जितनी Multinational बनेगी, उतना मैं समझता हूं इस क्षेत्र में अपनी पहुंच बना पाएंगे, अपनी जगह बना पाएंगे। उसी प्रकार से ऊर्जा के क्षेत्र में India and Middle East, India and Central Asia, India and South Asia Corridor बनाना और उसको गति देना हमारे लिए बहुत आवश्यक है। आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में काम करने वाले हमारे सभी महानुभव इन चीजों पर focus करके कैसे काम करे। कुछ ऐसे अनछुए क्षेत्र हैं, जिसमें हम अपना पैर पसार सकते हैं, कि North America और Africa में Gas Power के रूप में हम स्थापित कर सकते हैं क्या? मुझे विश्वास है कि अगर इन सपनों को लेकर के हम अगर आगे बढ़ते हैं, उसी प्रकार से हमारे जो बंदरगाह है उसके साथ LNG terminal का network उसके साथ हम कैसे जोड़ सकते हैं। कई ऐसे विषय है कि जिसको अगर हम बल देंगे तो मैं समझता हूं कि हम इन चीजों को पार कर सकते हैं और यह बात निश्चित है कि ऊर्जावान भारत ही विश्व को नई ऊर्जा दे सकता है। अगर भारत ऊर्जावान बनेगा तो विश्व को नई ऊर्जा मिलने की संभावना है, तो एक/छः population के नाते दुनिया हमारे लिए क्या करती है इन सपनों से बाहर निकलकर के हम विश्व के लिए क्या करते हैं, यह सपने देखकर के चलेंगे तो देश का अपने आप भला होगा।
दैनिक राशिफल 27 मई 2023: ग्रह और नक्षत्र हर पल अपनी चाल बदलते रहते हैं। इन नक्षत्रों का हमारे जीवन पर भी बहुत प्रभाव पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आपकी कुंडली के किस भाव में कौन सा ग्रह और नक्षत्र चल रहा है उसी के अनुसार आपका जीवन प्रभावित होता है। ग्रहों की रोज बदलती चाल के कारण भी हमारा दिन अलग होता है। कभी सफलता मिलती है तो कभी दिन सामान्य रूप से गुजरता है। जानिए आज आपका दिन कैसा रहेगा। मेष राशिः गणेशजी कहते हैं, आप अपने पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताएंगे। सफल व्यावसायिक योजनाएँ आपकी प्रतिष्ठा को बढ़ाएगी और आपके सभी प्रयासों में आपकी मदद करेगी। पारिवारिक समस्याओं के समाप्त होने और महत्वपूर्ण कार्यों के संपन्न होने से आपका वर्चस्व बढ़ेगा। पैसों के मामले में ससुराल पक्ष से तनाव हो सकता है। मौसम बदलता रहता है इसलिए अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। वृषः गणेशजी कहते हैं, आज का दिन मिश्रित फल देगा। छात्रों के लिए विदेश में पढ़ने के लिए समय अच्छा है, कार्यों में एकाग्रता बनाए रखें। वाणी में नरमी से आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। विपरीत परिस्थितियों में भी आपका स्वभाव प्रेरणा देने वाला रहेगा। संपत्ति संबंधी विवाद भी किसी वरिष्ठ अधिकारी के सहयोग से समाप्त होंगे। व्यापार में धन प्राप्ति में कठिनाई हो सकती है। मिथुनः गणेशजी कहते हैं, आज का दिन मध्यम फलदायी रहेगा। बिजनेस में किसी सहकर्मी या रिश्तेदार के कारण मानसिक तनाव हो सकता है, धैर्य रखें। पैसों के लेन-देन में सावधानी बरतें, नहीं तो आज दिया हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना कम रहेगी। प्रतियोगी परीक्षा देते समय छात्रों को कुछ असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। शाम के समय वाहन चलाते समय सावधान रहें। कर्कः गणेशजी कहते हैं, अचानक पारिवारिक ख़र्चे मानसिक दबाव बढ़ा सकते हैं। आजीविका के क्षेत्र में चल रहे प्रयास सफल होंगे और भाइयों के सहयोग से लाभकारी स्थितियाँ बनेंगी। राजनीतिक सहयोग मिलेगा और रुके हुए सरकारी काम पूरे होंगे। पारिवारिक धन में वृद्धि होगी और विरोधियों की पराजय होगी। सिंहः गणेशजी कहते हैं, जीवनसाथी आपके रचनात्मक कार्यों से प्रभावित होंगे और महत्वपूर्ण कार्यों में आपकी सलाह लेंगे. धार्मिक कार्यों में आपका थोड़ा खर्चा होगा, लेकिन इससे आपकी कीर्ति में वृद्धि होगी। व्यापार की दिशा में सकारात्मक बदलाव से आपको सफलता मिलेगी और विरोधियों की बातों से आप मुक्त हो जाएंगे। बाहर के खान-पान पर नियंत्रण रखें, नहीं तो पेट दर्द की शिकायत हो सकती है। कन्याः गणेशजी कहते हैं, पारिवारिक सहयोग मिलेगा और नए व्यापारियों को लाभ होगा। राजनीतिक दिशा में किए गए प्रयास फलीभूत होंगे, जनता का अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। सत्ता पक्ष का सहयोग प्राप्त होगा और भविष्य में आपको उनसे लाभ होगा। किसी पुराने मित्र से लंबे समय बाद मुलाकात होगी। तुलाः गणेशजी कहते हैं, प्रेम विवाह के इच्छुक जातकों के लिए समय अनुकूल है। शुरुआत में कुछ रुकावटें आएंगी लेकिन अंत में आप पाएंगे कि हर कोई आपसे सहमत है। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें और डॉक्टर से जांच कराएं। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, जो धन में वृद्धि के संकेत दे रही है। कार्यक्षेत्र में आपके रुतबे और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। वृश्चिकः गणेशजी कहते हैं कि छात्रों को गुरुओं की मदद से भविष्य की योजना बनाने का मौका मिलेगा। आजीविका रोजगार की दिशा में किए गए प्रयास सफलता दिलाएंगे। लव लाइफ में उपहार मिलेंगे। जरूरी कार्यों को पूरा करने के लिए आप दूसरों का सहयोग लेने में सफल रहेंगे। क्षेत्र में अपनी परियोजनाओं को जल्दी पूरा करने से आपकी प्रभावशीलता और गति में वृद्धि होगी। धनुः गणेशजी कहते हैं, अधिक काम करने से सेहत कुछ नरम रहेगी। समाज से मनचाहा सहयोग प्राप्त होगा। अगर आप नौकरीपेशा हैं तो आपके अधिकारों में वृद्धि होगी और जिम्मेदारी बढ़ेगी। छात्रों को आर्थिक तंगी से राहत मिलेगी। शाम के समय किसी भी जोखिम भरे कार्य से बचें। मकरः गणेशजी कहते हैं, कोर्ट-कचहरी के मामलों में आपको लाभ होगा और जोखिम भरे फैसलों में भाग्य भी आपका साथ देगा। छात्रों के लिए उच्च शिक्षा की बाधाएँ समाप्त होंगी, लेकिन स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें। रोजगार के क्षेत्र में चल रहे प्रयास सफल होंगे। आकस्मिक धन लाभ हो रहा है। ससुराल पक्ष में किसी से अनबन हो सकती है, लेकिन पार्टनर का पूरा सहयोग मिलेगा। कुंभः गणेशजी कहते हैं, इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प के कारण आपको व्यापार में अच्छा लाभ मिलेगा और दोस्तों की मदद से व्यावसायिक योजना मजबूत होगी। पिता का मार्गदर्शन आपको कठिन निर्णय लेने में मदद करेगा। परिवार में सुलह के लिए समय मिलेगा। शाम को मित्रों के साथ मनोरंजन के अवसर प्राप्त होंगे। मीन राशिः गणेशजी कहते हैं, व्यापार में लाभ की स्थितियां बनेंगी और नए अवसर भी प्राप्त होंगे। चिकित्सा पेशेवरों की प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। प्रेम जीवन में अधिक अपेक्षाएं निराशा का कारण बन सकती हैं। आपके भाई की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आप प्रसन्न रहेंगे और आपका बोझ भी हल्का होगा। बेरोजगार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
दैनिक राशिफल सत्ताईस मई दो हज़ार तेईस: ग्रह और नक्षत्र हर पल अपनी चाल बदलते रहते हैं। इन नक्षत्रों का हमारे जीवन पर भी बहुत प्रभाव पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आपकी कुंडली के किस भाव में कौन सा ग्रह और नक्षत्र चल रहा है उसी के अनुसार आपका जीवन प्रभावित होता है। ग्रहों की रोज बदलती चाल के कारण भी हमारा दिन अलग होता है। कभी सफलता मिलती है तो कभी दिन सामान्य रूप से गुजरता है। जानिए आज आपका दिन कैसा रहेगा। मेष राशिः गणेशजी कहते हैं, आप अपने पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताएंगे। सफल व्यावसायिक योजनाएँ आपकी प्रतिष्ठा को बढ़ाएगी और आपके सभी प्रयासों में आपकी मदद करेगी। पारिवारिक समस्याओं के समाप्त होने और महत्वपूर्ण कार्यों के संपन्न होने से आपका वर्चस्व बढ़ेगा। पैसों के मामले में ससुराल पक्ष से तनाव हो सकता है। मौसम बदलता रहता है इसलिए अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। वृषः गणेशजी कहते हैं, आज का दिन मिश्रित फल देगा। छात्रों के लिए विदेश में पढ़ने के लिए समय अच्छा है, कार्यों में एकाग्रता बनाए रखें। वाणी में नरमी से आपकी प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। विपरीत परिस्थितियों में भी आपका स्वभाव प्रेरणा देने वाला रहेगा। संपत्ति संबंधी विवाद भी किसी वरिष्ठ अधिकारी के सहयोग से समाप्त होंगे। व्यापार में धन प्राप्ति में कठिनाई हो सकती है। मिथुनः गणेशजी कहते हैं, आज का दिन मध्यम फलदायी रहेगा। बिजनेस में किसी सहकर्मी या रिश्तेदार के कारण मानसिक तनाव हो सकता है, धैर्य रखें। पैसों के लेन-देन में सावधानी बरतें, नहीं तो आज दिया हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना कम रहेगी। प्रतियोगी परीक्षा देते समय छात्रों को कुछ असुविधा का सामना करना पड़ सकता है। शाम के समय वाहन चलाते समय सावधान रहें। कर्कः गणेशजी कहते हैं, अचानक पारिवारिक ख़र्चे मानसिक दबाव बढ़ा सकते हैं। आजीविका के क्षेत्र में चल रहे प्रयास सफल होंगे और भाइयों के सहयोग से लाभकारी स्थितियाँ बनेंगी। राजनीतिक सहयोग मिलेगा और रुके हुए सरकारी काम पूरे होंगे। पारिवारिक धन में वृद्धि होगी और विरोधियों की पराजय होगी। सिंहः गणेशजी कहते हैं, जीवनसाथी आपके रचनात्मक कार्यों से प्रभावित होंगे और महत्वपूर्ण कार्यों में आपकी सलाह लेंगे. धार्मिक कार्यों में आपका थोड़ा खर्चा होगा, लेकिन इससे आपकी कीर्ति में वृद्धि होगी। व्यापार की दिशा में सकारात्मक बदलाव से आपको सफलता मिलेगी और विरोधियों की बातों से आप मुक्त हो जाएंगे। बाहर के खान-पान पर नियंत्रण रखें, नहीं तो पेट दर्द की शिकायत हो सकती है। कन्याः गणेशजी कहते हैं, पारिवारिक सहयोग मिलेगा और नए व्यापारियों को लाभ होगा। राजनीतिक दिशा में किए गए प्रयास फलीभूत होंगे, जनता का अच्छा सहयोग प्राप्त होगा। सत्ता पक्ष का सहयोग प्राप्त होगा और भविष्य में आपको उनसे लाभ होगा। किसी पुराने मित्र से लंबे समय बाद मुलाकात होगी। तुलाः गणेशजी कहते हैं, प्रेम विवाह के इच्छुक जातकों के लिए समय अनुकूल है। शुरुआत में कुछ रुकावटें आएंगी लेकिन अंत में आप पाएंगे कि हर कोई आपसे सहमत है। माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें और डॉक्टर से जांच कराएं। दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, जो धन में वृद्धि के संकेत दे रही है। कार्यक्षेत्र में आपके रुतबे और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। वृश्चिकः गणेशजी कहते हैं कि छात्रों को गुरुओं की मदद से भविष्य की योजना बनाने का मौका मिलेगा। आजीविका रोजगार की दिशा में किए गए प्रयास सफलता दिलाएंगे। लव लाइफ में उपहार मिलेंगे। जरूरी कार्यों को पूरा करने के लिए आप दूसरों का सहयोग लेने में सफल रहेंगे। क्षेत्र में अपनी परियोजनाओं को जल्दी पूरा करने से आपकी प्रभावशीलता और गति में वृद्धि होगी। धनुः गणेशजी कहते हैं, अधिक काम करने से सेहत कुछ नरम रहेगी। समाज से मनचाहा सहयोग प्राप्त होगा। अगर आप नौकरीपेशा हैं तो आपके अधिकारों में वृद्धि होगी और जिम्मेदारी बढ़ेगी। छात्रों को आर्थिक तंगी से राहत मिलेगी। शाम के समय किसी भी जोखिम भरे कार्य से बचें। मकरः गणेशजी कहते हैं, कोर्ट-कचहरी के मामलों में आपको लाभ होगा और जोखिम भरे फैसलों में भाग्य भी आपका साथ देगा। छात्रों के लिए उच्च शिक्षा की बाधाएँ समाप्त होंगी, लेकिन स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें। रोजगार के क्षेत्र में चल रहे प्रयास सफल होंगे। आकस्मिक धन लाभ हो रहा है। ससुराल पक्ष में किसी से अनबन हो सकती है, लेकिन पार्टनर का पूरा सहयोग मिलेगा। कुंभः गणेशजी कहते हैं, इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प के कारण आपको व्यापार में अच्छा लाभ मिलेगा और दोस्तों की मदद से व्यावसायिक योजना मजबूत होगी। पिता का मार्गदर्शन आपको कठिन निर्णय लेने में मदद करेगा। परिवार में सुलह के लिए समय मिलेगा। शाम को मित्रों के साथ मनोरंजन के अवसर प्राप्त होंगे। मीन राशिः गणेशजी कहते हैं, व्यापार में लाभ की स्थितियां बनेंगी और नए अवसर भी प्राप्त होंगे। चिकित्सा पेशेवरों की प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। प्रेम जीवन में अधिक अपेक्षाएं निराशा का कारण बन सकती हैं। आपके भाई की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आप प्रसन्न रहेंगे और आपका बोझ भी हल्का होगा। बेरोजगार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।
चर्चा में क्यों? 08 अगस्त, 2021 को उत्तराखंड सरकार ने राज्य की कुल 22 महिलाओं व किशोरियों को 'तीलू रौतेली सम्मान' से सम्मानित किया है। - उत्तराखंड सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को वीरबाला तीलू रौतेली के नाम पर प्रतिवर्ष यह पुरस्कार दिया जाता है। इसकी शुरुआत 2006 में हुई थी। - इसके तहत राज्य सरकार 31 हज़ार रुपये व प्रशस्ति पत्र देती है। यह पुरस्कार राशि 2022 से बढ़ाकर 51 हजार रुपये कर दी गई है। - खेलः वंदना कटारिया (हरिद्वार), रुचि कालाकोटी (बागेश्वर), कनिका भंडारी (अल्मोड़ा)। - सामाजिक कार्यः अनुराधा वालिया (देहरादून), उमा जोशी (ऊधमसिंह नगर), दीपिका बोहरा एवं चीपिका चुफाल (पिथौरागढ़), रेनू गड़कोटी (चंपावत)। - कोविड संबंधी कार्यः चंद्रकला तिवारी (चमोली), पार्वती किरौला (नैनीताल), बबीता पुनेठा (पिथौरागढ़)। - स्वरोजगारः ममता मेहता (बागेश्वर), अंजरा रावत (पौड़ी), भावना शर्मा (अल्मोड़ा)। - शिक्षा व महिला जागरुकताः डॉ. राजकुमार भंडारी चौहान (देहरादून)। - शिक्षा, अनुसंधान व विकासः डॉ. कंचन नेगी (देहरादून)। - महिला स्वास्थ्य व पोषणः नमिता गुप्ता (ऊधमसिंह नगर)। - एनजीओः बिंदुवासिनी (ऊधमसिंह नगर)। - पर्वतारोहणः रीना रावत (उत्तरकाशी)। - बालिका शिक्षाः रेखा जोशी (पिथौरागढ़)। - कठिन परिस्थितियों में जीवनयापनः पूनम डोभाल (टिहरी)। - महिला स्व-सहायता समूहः श्यामा देवी (देहरादून)। चर्चा में क्यों? टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम की सदस्य रही उत्तराखंड की वंदना कटारिया को राज्य के महिला सशक्तीकरण विभाग की ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है। - 8 अगस्त, 2021 को आयोजित तीलू रौतेली सम्मान समारोह में राज्य महिला सशक्तीकरण मंत्री रेखा आर्या ने वंदना कटारिया को तीलू रौतेली सम्मान के साथ उक्त विभाग का ब्रांड एंबेसडर बनाया है। - ध्यातव्य है कि वंदना कटारिया भारत की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी हैं, जिन्होंने एक ही मैच में तीन गोल किये। - वंदना कटारिया उत्तराखंड के रोशनाबाद (हरिद्वार) की निवासी हैं, जो वर्ष 2006 से ही सीनियर महिला हॉकी टीम का हिस्सा हैं। - उत्तराखंड सरकार ने उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिये उन्हें तीलू रौतेली सम्मान व 25 लाख रुपये देने की घोषणा की है।
चर्चा में क्यों? आठ अगस्त, दो हज़ार इक्कीस को उत्तराखंड सरकार ने राज्य की कुल बाईस महिलाओं व किशोरियों को 'तीलू रौतेली सम्मान' से सम्मानित किया है। - उत्तराखंड सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को वीरबाला तीलू रौतेली के नाम पर प्रतिवर्ष यह पुरस्कार दिया जाता है। इसकी शुरुआत दो हज़ार छः में हुई थी। - इसके तहत राज्य सरकार इकतीस हज़ार रुपये व प्रशस्ति पत्र देती है। यह पुरस्कार राशि दो हज़ार बाईस से बढ़ाकर इक्यावन हजार रुपये कर दी गई है। - खेलः वंदना कटारिया , रुचि कालाकोटी , कनिका भंडारी । - सामाजिक कार्यः अनुराधा वालिया , उमा जोशी , दीपिका बोहरा एवं चीपिका चुफाल , रेनू गड़कोटी । - कोविड संबंधी कार्यः चंद्रकला तिवारी , पार्वती किरौला , बबीता पुनेठा । - स्वरोजगारः ममता मेहता , अंजरा रावत , भावना शर्मा । - शिक्षा व महिला जागरुकताः डॉ. राजकुमार भंडारी चौहान । - शिक्षा, अनुसंधान व विकासः डॉ. कंचन नेगी । - महिला स्वास्थ्य व पोषणः नमिता गुप्ता । - एनजीओः बिंदुवासिनी । - पर्वतारोहणः रीना रावत । - बालिका शिक्षाः रेखा जोशी । - कठिन परिस्थितियों में जीवनयापनः पूनम डोभाल । - महिला स्व-सहायता समूहः श्यामा देवी । चर्चा में क्यों? टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम की सदस्य रही उत्तराखंड की वंदना कटारिया को राज्य के महिला सशक्तीकरण विभाग की ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है। - आठ अगस्त, दो हज़ार इक्कीस को आयोजित तीलू रौतेली सम्मान समारोह में राज्य महिला सशक्तीकरण मंत्री रेखा आर्या ने वंदना कटारिया को तीलू रौतेली सम्मान के साथ उक्त विभाग का ब्रांड एंबेसडर बनाया है। - ध्यातव्य है कि वंदना कटारिया भारत की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी हैं, जिन्होंने एक ही मैच में तीन गोल किये। - वंदना कटारिया उत्तराखंड के रोशनाबाद की निवासी हैं, जो वर्ष दो हज़ार छः से ही सीनियर महिला हॉकी टीम का हिस्सा हैं। - उत्तराखंड सरकार ने उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिये उन्हें तीलू रौतेली सम्मान व पच्चीस लाख रुपये देने की घोषणा की है।
RANCHI: एक करोड़ रुपए के ईनामी माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश पर झारखंड पुलिस ने सरेंडर का प्रेशर बना दिया है। पुलिस सूत्रों की मानें, तो आकाश को संगठन के शीर्ष ओहदेदारों द्वारा संगठन से निकाले जाने की सूचना कई माह पूर्व पुलिस को मिली थी। अपने कुछ खास गुर्गो के साथ सेपरेट दस्ता बना कर लेवी वसूली के काम में लगे आकाश को संगठन से अलग कर दिया गया है। सेंट्रल कमिटी की कमान संभालने वाले सुधाकरण ने आकाश के सहयोगी रामप्रसाद मार्डी को उसकी हत्या की जिम्मेदारी सौंपी है। इसकी सूचना खुफिया विभाग को भी है। इस जानकारी के बाद आकाश ने पुलिस से सम्पर्क साधा है और पुलिस ने उसे दस्ते और हथियार के साथ सरेंडर करने की बात कही है। आकाश के दस्ते में फि लहाल 13 लोग शामिल हैं। इसमें असीम मंडल उर्फ आकाश के अलावा मदन महतो, सचिन उर्फ महादेव, वीरेन उर्फ सागर, प्रदीप मंडल, श्याम सिंकू, समीर सोरेन, मंगल, मीना, बेला, बुल्लू माणिक बिरहारे, जोबा टुडू व मालती शामिल हैं। जंगल के भीतर एक तरफ आकाश को मारने के लिए रामप्रसाद मार्डी अपने दस्ते के साथ घूम रहा है तो दूसरी तरफ पुलिस की 50 जवानों की टुकड़ी भी उसकी तलाश कर रही है। पमदा के तुंगबुरू और बोड़ाम के डांगाडीह इलाके में आकाश के दस्ते के छुपे होने की सूचना है। कुंदन पाहन के सरेंडर के पीछे जिस तरह सीआरपीएफ के अधिकारियों की भूमिका सामने आयी थी, ठीक उसी तरह आकाश को भी सरेंडर कराने के पीछे एक सीआरपीएफ अधिकारी काफी दिनों से प्रयासरत हैं। इस अधिकारी ने ही झारखंड पुलिस के सीनियर अफसर के साथ सम्पर्क कर आकाश को सरेंडर कराने पर तैयार किया है। कुन्दन पाहन, नकुल गोप और अब असीम मंडल उर्फ आकाश। हाल के दिनों में सरेंडर को तैयार इन सभी नक्सलियों को माओवादियों ने संगठन से बाहर निकाल दिया और इनकी हत्या का फरमान जारी किया गया। इनपर लेवी के रुपए डकारने और हथियार के साथ अलग दस्ता तैयार करने के आरोप लगे हैं। संगठन से निकाले जा चुके इन माओवादियों के लिए जंगल में पार्टी और पुलिस से एक साथ निपटना असंभव हो जाता है। ऐसे में मौत से बेहतर जेल जाना होता है साथ ही सरेंडर पालिसी के तहत मिलने वाली सुविधाओं का भी भरपूर लाभ मिलता है। यही कारण है कि मूलतः बंगाल में एक्टिव रह रहे आकाश ने सरेंडर के लिए झारखंड का कोल्हान प्रमंडल चुना है। अभी इस संबंध में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन पुलिस के सम्पर्क में आकर जो भी नक्सली सरेंडर करना चाहेगा, उसे सरकार की तरफ से बनाई गई पुनर्वास नीति का लाभ मिलेगा। हथियार डालना ज्यादा बेहतर विकल्प है उनके लिए।
RANCHI: एक करोड़ रुपए के ईनामी माओवादी असीम मंडल उर्फ आकाश पर झारखंड पुलिस ने सरेंडर का प्रेशर बना दिया है। पुलिस सूत्रों की मानें, तो आकाश को संगठन के शीर्ष ओहदेदारों द्वारा संगठन से निकाले जाने की सूचना कई माह पूर्व पुलिस को मिली थी। अपने कुछ खास गुर्गो के साथ सेपरेट दस्ता बना कर लेवी वसूली के काम में लगे आकाश को संगठन से अलग कर दिया गया है। सेंट्रल कमिटी की कमान संभालने वाले सुधाकरण ने आकाश के सहयोगी रामप्रसाद मार्डी को उसकी हत्या की जिम्मेदारी सौंपी है। इसकी सूचना खुफिया विभाग को भी है। इस जानकारी के बाद आकाश ने पुलिस से सम्पर्क साधा है और पुलिस ने उसे दस्ते और हथियार के साथ सरेंडर करने की बात कही है। आकाश के दस्ते में फि लहाल तेरह लोग शामिल हैं। इसमें असीम मंडल उर्फ आकाश के अलावा मदन महतो, सचिन उर्फ महादेव, वीरेन उर्फ सागर, प्रदीप मंडल, श्याम सिंकू, समीर सोरेन, मंगल, मीना, बेला, बुल्लू माणिक बिरहारे, जोबा टुडू व मालती शामिल हैं। जंगल के भीतर एक तरफ आकाश को मारने के लिए रामप्रसाद मार्डी अपने दस्ते के साथ घूम रहा है तो दूसरी तरफ पुलिस की पचास जवानों की टुकड़ी भी उसकी तलाश कर रही है। पमदा के तुंगबुरू और बोड़ाम के डांगाडीह इलाके में आकाश के दस्ते के छुपे होने की सूचना है। कुंदन पाहन के सरेंडर के पीछे जिस तरह सीआरपीएफ के अधिकारियों की भूमिका सामने आयी थी, ठीक उसी तरह आकाश को भी सरेंडर कराने के पीछे एक सीआरपीएफ अधिकारी काफी दिनों से प्रयासरत हैं। इस अधिकारी ने ही झारखंड पुलिस के सीनियर अफसर के साथ सम्पर्क कर आकाश को सरेंडर कराने पर तैयार किया है। कुन्दन पाहन, नकुल गोप और अब असीम मंडल उर्फ आकाश। हाल के दिनों में सरेंडर को तैयार इन सभी नक्सलियों को माओवादियों ने संगठन से बाहर निकाल दिया और इनकी हत्या का फरमान जारी किया गया। इनपर लेवी के रुपए डकारने और हथियार के साथ अलग दस्ता तैयार करने के आरोप लगे हैं। संगठन से निकाले जा चुके इन माओवादियों के लिए जंगल में पार्टी और पुलिस से एक साथ निपटना असंभव हो जाता है। ऐसे में मौत से बेहतर जेल जाना होता है साथ ही सरेंडर पालिसी के तहत मिलने वाली सुविधाओं का भी भरपूर लाभ मिलता है। यही कारण है कि मूलतः बंगाल में एक्टिव रह रहे आकाश ने सरेंडर के लिए झारखंड का कोल्हान प्रमंडल चुना है। अभी इस संबंध में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन पुलिस के सम्पर्क में आकर जो भी नक्सली सरेंडर करना चाहेगा, उसे सरकार की तरफ से बनाई गई पुनर्वास नीति का लाभ मिलेगा। हथियार डालना ज्यादा बेहतर विकल्प है उनके लिए।
Araria : बिहार में मॉब लिंचिंग का मामला सामने आया है. जहां मोबाइल चोरी के आरोप में एक युवक की भीड़ ने जमकर पिटाई कर दी है. जिसे युवक की मौत हो गयी. यह मामला बिहार के अररिया जिले के नगर थाना क्षेत्र का सिसौना का है. मृतक की पहचान मुहर्रम के रूप में हुई है. इस घटना के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया हैऔर सभी से पूछताछ की जा रही है. स्थानीय लोगों ने बताया कि युवक को भीड़ ने मोबाइल चोरी करते हुए रंगे हाथ पकड़ा था. जिसके बाद उसे एक कमरे ले जाकर लोगों ने जमकर पिटाई की. जिसे युवक की मौके पर ही मौत हो गयी. युवक की मौत की सूचना भीड़ में ही किसी ने पुलिस को दी. जिसके बाद एसपी हृदयकान्त अपने दल बल के साथ मौके पर पहुंचे. और घटनास्थल का जायजा लिया. एसपी हृदयकान्त ने बताया कि इस घटना में शामिल एक महिला समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. सभी से पूछताछ की जा रही है. एसपी ने बताया कि मृतक की पहचान मुहर्रम नामक युवक के रूप में हुई है. जो नगर थाना क्षेत्र के सिसौना वार्ड का ही रहने वाला है. SP समेत SDPO और नगर थानाध्यक्ष ने आरोपियों को कड़ी सजा दिलवाने का आश्वासन दिया है. SP हृदयकान्त ने कहा कि युवक की हत्या कैसे हुई इसकी जांच की जा रही है. यह घटना मॉब लिंचिंग है या नहीं इसकी गहन जांच की जा रही है. इस वारदात के बाद शहरी इलाके में दहशत का माहौल है.
Araria : बिहार में मॉब लिंचिंग का मामला सामने आया है. जहां मोबाइल चोरी के आरोप में एक युवक की भीड़ ने जमकर पिटाई कर दी है. जिसे युवक की मौत हो गयी. यह मामला बिहार के अररिया जिले के नगर थाना क्षेत्र का सिसौना का है. मृतक की पहचान मुहर्रम के रूप में हुई है. इस घटना के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया हैऔर सभी से पूछताछ की जा रही है. स्थानीय लोगों ने बताया कि युवक को भीड़ ने मोबाइल चोरी करते हुए रंगे हाथ पकड़ा था. जिसके बाद उसे एक कमरे ले जाकर लोगों ने जमकर पिटाई की. जिसे युवक की मौके पर ही मौत हो गयी. युवक की मौत की सूचना भीड़ में ही किसी ने पुलिस को दी. जिसके बाद एसपी हृदयकान्त अपने दल बल के साथ मौके पर पहुंचे. और घटनास्थल का जायजा लिया. एसपी हृदयकान्त ने बताया कि इस घटना में शामिल एक महिला समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. सभी से पूछताछ की जा रही है. एसपी ने बताया कि मृतक की पहचान मुहर्रम नामक युवक के रूप में हुई है. जो नगर थाना क्षेत्र के सिसौना वार्ड का ही रहने वाला है. SP समेत SDPO और नगर थानाध्यक्ष ने आरोपियों को कड़ी सजा दिलवाने का आश्वासन दिया है. SP हृदयकान्त ने कहा कि युवक की हत्या कैसे हुई इसकी जांच की जा रही है. यह घटना मॉब लिंचिंग है या नहीं इसकी गहन जांच की जा रही है. इस वारदात के बाद शहरी इलाके में दहशत का माहौल है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बी टी सी 2015 के चतुर्थ सेमेस्टर के अंक पत्र की खामियों के चलते बेसिक स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती ऑनलाइन फार्म न भर पाने वाली वंदना शर्मा को आवेदन जमा करने व् भर्ती परीक्षा में बैठने देने का निर्देश दिया है किंतु बिना कोर्ट की अनुमति के परिणाम घोषित न करने का आदेश दिया है। प्रयागराजः इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बी टी सी 2015 के चतुर्थ सेमेस्टर के अंक पत्र की खामियों के चलते बेसिक स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती ऑनलाइन फार्म न भर पाने वाली वंदना शर्मा को आवेदन जमा करने व् भर्ती परीक्षा में बैठने देने का निर्देश दिया है किंतु बिना कोर्ट की अनुमति के परिणाम घोषित न करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि याची का अधिकार याचिका के निर्णय पर निर्भर करेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने दिया है। मालूम हो याची ने बी टी सी चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा राजा शारदा महेश इंटर कालेज सोनभद्र से दी । परिणाम घोषित हुआ तो उसे हिंदी पेपर में गैर हाजिर बताया गया। याची ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकरण को दिया । किन्तु खामी दुरुस्त न होने के कारण फार्म नही भरा जा सका। कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ता से जवाब मांगा है और कहा है कि याची का फार्म हार्ड कॉपी में जमा किया जाय । याचिका की सुनवाई 8 जनवरी को होगी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बी टी सी दो हज़ार पंद्रह के चतुर्थ सेमेस्टर के अंक पत्र की खामियों के चलते बेसिक स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती ऑनलाइन फार्म न भर पाने वाली वंदना शर्मा को आवेदन जमा करने व् भर्ती परीक्षा में बैठने देने का निर्देश दिया है किंतु बिना कोर्ट की अनुमति के परिणाम घोषित न करने का आदेश दिया है। प्रयागराजः इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बी टी सी दो हज़ार पंद्रह के चतुर्थ सेमेस्टर के अंक पत्र की खामियों के चलते बेसिक स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती ऑनलाइन फार्म न भर पाने वाली वंदना शर्मा को आवेदन जमा करने व् भर्ती परीक्षा में बैठने देने का निर्देश दिया है किंतु बिना कोर्ट की अनुमति के परिणाम घोषित न करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि याची का अधिकार याचिका के निर्णय पर निर्भर करेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने दिया है। मालूम हो याची ने बी टी सी चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा राजा शारदा महेश इंटर कालेज सोनभद्र से दी । परिणाम घोषित हुआ तो उसे हिंदी पेपर में गैर हाजिर बताया गया। याची ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकरण को दिया । किन्तु खामी दुरुस्त न होने के कारण फार्म नही भरा जा सका। कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ता से जवाब मांगा है और कहा है कि याची का फार्म हार्ड कॉपी में जमा किया जाय । याचिका की सुनवाई आठ जनवरी को होगी।
लखनऊ। बरसात का सीजन आने में कुछ दिन ही बाकी हैं। सड़कों पर जलभराव न हो इसके लिए लखनऊ में नाले और नालियों की सफाई चल रही है, लेकिन कई जगह ऐसी भी हैं जहां नगर निगम चाह कर भी सफाई नहीं करवा पाता। प्रदेश में योगी सरकार आते ही सरकारी जमीनों से तो कब्जे हटने लगे हैं पर नालों पर जो कब्जे हैं वो कैसे हटेंगे, ये गौर करने वाली बात है। लखनऊ के अधिकांश नाले अतिक्रमण का शिकार हैं, जिसके चलते नगर निगम चाहकर भी समय से नालों की सफाई नहीं करा पाता और बारिश के मौसम में जलभराव से लोगों को परेशानी होती है। लोगों ने जगह-जगह नालों पर स्लैब डालकर कब्जा कर लिया है। अतिक्रमण के चलते नालों की सफाई नहीं हो पाती और बरसात में नाला भरा होने के कारण नाले का पानी उल्टा घरों में जाने लगता है।" वहीं बालागंज वार्ड के पूर्व सभासद भारत सिंह राजपूत बताते हैं, "नगर निगम अभिलेखों में नाले की चौड़ाई 60 फिट दर्ज है, लेकिन मौके पर नाला कहीं छह फिट तो कहीं आठ फिट बचा है।" नगर निगम की जोनल अधिकारी ने आश्वासन तो दिया है लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है, ऐसे वादे उसे पहले कई बार मिल चुके हैं लेकिन नाले के सफाई नहीं हुई, इस बार फिर जलभराव से जूझना होगा। ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।
लखनऊ। बरसात का सीजन आने में कुछ दिन ही बाकी हैं। सड़कों पर जलभराव न हो इसके लिए लखनऊ में नाले और नालियों की सफाई चल रही है, लेकिन कई जगह ऐसी भी हैं जहां नगर निगम चाह कर भी सफाई नहीं करवा पाता। प्रदेश में योगी सरकार आते ही सरकारी जमीनों से तो कब्जे हटने लगे हैं पर नालों पर जो कब्जे हैं वो कैसे हटेंगे, ये गौर करने वाली बात है। लखनऊ के अधिकांश नाले अतिक्रमण का शिकार हैं, जिसके चलते नगर निगम चाहकर भी समय से नालों की सफाई नहीं करा पाता और बारिश के मौसम में जलभराव से लोगों को परेशानी होती है। लोगों ने जगह-जगह नालों पर स्लैब डालकर कब्जा कर लिया है। अतिक्रमण के चलते नालों की सफाई नहीं हो पाती और बरसात में नाला भरा होने के कारण नाले का पानी उल्टा घरों में जाने लगता है।" वहीं बालागंज वार्ड के पूर्व सभासद भारत सिंह राजपूत बताते हैं, "नगर निगम अभिलेखों में नाले की चौड़ाई साठ फिट दर्ज है, लेकिन मौके पर नाला कहीं छह फिट तो कहीं आठ फिट बचा है।" नगर निगम की जोनल अधिकारी ने आश्वासन तो दिया है लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है, ऐसे वादे उसे पहले कई बार मिल चुके हैं लेकिन नाले के सफाई नहीं हुई, इस बार फिर जलभराव से जूझना होगा। ताजा अपडेट के लिए हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए यहां, ट्विटर हैंडल को फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें।
इंग्लैंड की वनडे और टी 20 टीम के कप्तान इयोन मोर्गन (Eoin Morgan) ने अपने देश के टेस्ट कप्तान जोए रूट (Joe Root) की आलोचना की है। स्पोर्ट्स डेस्कः इंग्लिश क्रिकेट (English Cricket) इस समय खराब दौर से गुजर रहा है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की एशेज सीरीज (Ashes Series) में हार के बाद तो स्थिति और भी खराब हो गई है। इससे भी बुरी स्थिति तब हो गई जब इंग्लैंड के टेस्ट और सीमित ओवर क्रिकेट टीम के कप्तान आमने-सामने हो गए। इंग्लैंड के सीमित ओवरों के कप्तान इयोन मोर्गन (Eoin Morgan) ने एशेज सीरीज में टीम की करारी हार के लिए 'द हंड्रेड' और टी20 को दोषी ठहराने के लिए अपने देश के टेस्ट कप्तान जोए रूट (Joe Root) की आलोचना की है। उन्होंने रूट को जवाब देते हुए कहा, "छोटे प्रारूपों के गेम पर उंगली उठाना हास्यास्पद है। " मॉर्गन ने बुधवार को कहा, "जो लोग सीमित ओवरों के क्रिकेट को बहाने के रूप में इस्तेमाल करते हैं, वे क्रिकेट नहीं देखते हैं। टेस्ट मैच क्रिकेट हमेशा प्राथमिकता रही है। यह हमारे खिलाड़ियों के लिए सबसे बेहतर प्रारूप है। " व्हाइट बॉल टीम के कप्तान ने कहा, "निश्चित रूप से एशेज के दौरान ऑस्ट्रेलिया में कठिन समय रहा है लेकिन वे हमेशा से ऐसे ही रहे हैं। हम पिछली दो सीरीज 4-0 से हार गए हैं। लेकिन 'हंड्रेड' पर उंगली उठाना हास्यास्पद है। यह एक अविश्वसनीय सफलता है। " मोर्गन ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "यह सभी प्रारूपों में होता है, लेकिन मैं इस बात पर जोर देता हूं कि टेस्ट मैच क्रिकेट हमेशा प्राथमिकता रहा है। क्रिकेट का लंबा प्रारूप हमेशा ईसीबी के लिए प्राथमिकता रहा है। " इंग्लैंड क्रिकेट टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एशेज सीरीज में 0-4 से हार का सामना करना पड़ा। सिडनी में खेले गए चौथे टेस्ट में स्टुअर्ट ब्रॉड और जिमी एंडरसन के बीच केवल अंतिम विकेट की साझेदारी ने इंग्लैंड को क्लीन स्वीप होने से बचा लिया था। टेस्ट सीरीज हार के बाद टेस्ट कप्तान जोए रूट ने तब से खुले तौर पर कहा, "इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) लाल गेंद के खेल के बदले सबसे ज्यादा सीमित ओवरों के क्रिकेट को प्राथमिकता दे रहा है। " यह भी पढ़ेंः
इंग्लैंड की वनडे और टी बीस टीम के कप्तान इयोन मोर्गन ने अपने देश के टेस्ट कप्तान जोए रूट की आलोचना की है। स्पोर्ट्स डेस्कः इंग्लिश क्रिकेट इस समय खराब दौर से गुजर रहा है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की एशेज सीरीज में हार के बाद तो स्थिति और भी खराब हो गई है। इससे भी बुरी स्थिति तब हो गई जब इंग्लैंड के टेस्ट और सीमित ओवर क्रिकेट टीम के कप्तान आमने-सामने हो गए। इंग्लैंड के सीमित ओवरों के कप्तान इयोन मोर्गन ने एशेज सीरीज में टीम की करारी हार के लिए 'द हंड्रेड' और टीबीस को दोषी ठहराने के लिए अपने देश के टेस्ट कप्तान जोए रूट की आलोचना की है। उन्होंने रूट को जवाब देते हुए कहा, "छोटे प्रारूपों के गेम पर उंगली उठाना हास्यास्पद है। " मॉर्गन ने बुधवार को कहा, "जो लोग सीमित ओवरों के क्रिकेट को बहाने के रूप में इस्तेमाल करते हैं, वे क्रिकेट नहीं देखते हैं। टेस्ट मैच क्रिकेट हमेशा प्राथमिकता रही है। यह हमारे खिलाड़ियों के लिए सबसे बेहतर प्रारूप है। " व्हाइट बॉल टीम के कप्तान ने कहा, "निश्चित रूप से एशेज के दौरान ऑस्ट्रेलिया में कठिन समय रहा है लेकिन वे हमेशा से ऐसे ही रहे हैं। हम पिछली दो सीरीज चार-शून्य से हार गए हैं। लेकिन 'हंड्रेड' पर उंगली उठाना हास्यास्पद है। यह एक अविश्वसनीय सफलता है। " मोर्गन ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "यह सभी प्रारूपों में होता है, लेकिन मैं इस बात पर जोर देता हूं कि टेस्ट मैच क्रिकेट हमेशा प्राथमिकता रहा है। क्रिकेट का लंबा प्रारूप हमेशा ईसीबी के लिए प्राथमिकता रहा है। " इंग्लैंड क्रिकेट टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एशेज सीरीज में शून्य-चार से हार का सामना करना पड़ा। सिडनी में खेले गए चौथे टेस्ट में स्टुअर्ट ब्रॉड और जिमी एंडरसन के बीच केवल अंतिम विकेट की साझेदारी ने इंग्लैंड को क्लीन स्वीप होने से बचा लिया था। टेस्ट सीरीज हार के बाद टेस्ट कप्तान जोए रूट ने तब से खुले तौर पर कहा, "इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड लाल गेंद के खेल के बदले सबसे ज्यादा सीमित ओवरों के क्रिकेट को प्राथमिकता दे रहा है। " यह भी पढ़ेंः
नई दिल्ली। जहां एक तरफ फ़िल्म बाहुबली ने बॉक्स ऑफिस पर झंडे गाड़ दिए वहीं अब उसकी लोकप्रियता सोशल मीडिया पर भी बढ़ती जा रही है। फेसबुक के जरिए शुक्रवार को इस बात का खुलासा किया गया कि उसके मैसेंजर एप पर एनिमेटेड बाहुबली फिल्म के 1. 34 करोड़ स्टीकर्स डाउनलोड किए गए हैं। कंपनी ने एक बयान में बताया कि ये करोड़ों स्टीकर्स केवल सात दिनों में ही डाउनलोड किए गए हैं। इतना ही नहीं, बाहुबली के फेसबुक पेज पर एक करोड़ से ज्यादा गतिविधियां दर्ज की गईं हैं। ये स्टीकर्स 23 मई से स्टोर से लगातार डाउनलोड हो रहें हैं। प्रशंसक बाहुबली, कटप्पा के साथ बाकी किरदारों के स्टीकर्स भी पसंद कर डाउनलोड कर रहें हैं। प्रशंसकों की भीड़ जुटाने के लिए फेसबुक पर मार्केटिंग कैंपेन द्वारा #WKKB (वाय कटप्पा किल्ड बाहुबली) को डिजाइन किया गया था। फिल्म की मार्केटिंग अभियान के दौरान बाहुबली के फेसबुक पेज पर इससे संबंधित गतिविधि में सात बार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दर्ज की गईं हैं। इस साल बाहुबली 2 भी लोगों के बीच छाई रही और लगभग 1,600 करोड़ रुपए से ऊपर की कमाई की। फिल्म ने 500 करोड़ रुपए केवल हिंदी में ही कमाए हैं। जहां अभी तक केवल आमिर खान की फिल्मों ने ही फिल्मी क्लब शुरू किया था वहीं अब 'बाहुबली' ने भी क्लब खोलकर करारी टक्कर दी है। 'गजनी' ने 100 रुपए करोड़, 'थ्री इडियट्स' ने 200 करोड़ रुपए और 'पीके' ने 300 करोड़ रुपए के क्लब शुरू किए लेकिन बाहुबली ने ये सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए 500 करोड़ रुपए का क्लब खोला।
नई दिल्ली। जहां एक तरफ फ़िल्म बाहुबली ने बॉक्स ऑफिस पर झंडे गाड़ दिए वहीं अब उसकी लोकप्रियता सोशल मीडिया पर भी बढ़ती जा रही है। फेसबुक के जरिए शुक्रवार को इस बात का खुलासा किया गया कि उसके मैसेंजर एप पर एनिमेटेड बाहुबली फिल्म के एक. चौंतीस करोड़ स्टीकर्स डाउनलोड किए गए हैं। कंपनी ने एक बयान में बताया कि ये करोड़ों स्टीकर्स केवल सात दिनों में ही डाउनलोड किए गए हैं। इतना ही नहीं, बाहुबली के फेसबुक पेज पर एक करोड़ से ज्यादा गतिविधियां दर्ज की गईं हैं। ये स्टीकर्स तेईस मई से स्टोर से लगातार डाउनलोड हो रहें हैं। प्रशंसक बाहुबली, कटप्पा के साथ बाकी किरदारों के स्टीकर्स भी पसंद कर डाउनलोड कर रहें हैं। प्रशंसकों की भीड़ जुटाने के लिए फेसबुक पर मार्केटिंग कैंपेन द्वारा #WKKB को डिजाइन किया गया था। फिल्म की मार्केटिंग अभियान के दौरान बाहुबली के फेसबुक पेज पर इससे संबंधित गतिविधि में सात बार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दर्ज की गईं हैं। इस साल बाहुबली दो भी लोगों के बीच छाई रही और लगभग एक,छः सौ करोड़ रुपए से ऊपर की कमाई की। फिल्म ने पाँच सौ करोड़ रुपए केवल हिंदी में ही कमाए हैं। जहां अभी तक केवल आमिर खान की फिल्मों ने ही फिल्मी क्लब शुरू किया था वहीं अब 'बाहुबली' ने भी क्लब खोलकर करारी टक्कर दी है। 'गजनी' ने एक सौ रुपयापए करोड़, 'थ्री इडियट्स' ने दो सौ करोड़ रुपए और 'पीके' ने तीन सौ करोड़ रुपए के क्लब शुरू किए लेकिन बाहुबली ने ये सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए पाँच सौ करोड़ रुपए का क्लब खोला।
इत्यादि है । इन सोलह स्वर्गोके ५२ पटल हैं । उनके आगे ऊपर-ऊपर नो ग्रैवेयकोंके नौ पटल हैं, उनके ऊपर नौ अनुदिशोका एक पटल है और उसके ऊपर पाँच अनुत्तर विमानोका एक पटल है । इन सबके मिलाकर शठ पटल हैं - उनमे इन्द्रक, श्रेणीवद्ध और विप्रकीर्णकके भेदसे तीन प्रकारके विमान है । वीचके इन्द्रक विमान कहलाते है, उनके उत्तर, दक्षिण और पूर्व, पश्चिममें पक्तिवद्ध विमान श्रेणीबद्ध कहलाते है और उनके बीचमे प्रक्षिप्त पुष्पोंके समान स्थित विमान प्रकीर्णक कहलाते है । पूर्व भवमे जो जीव जैसा कर्म करते है उसीके अनुसार वे इन विमानोमे उत्पन्न होते हैं । सामान्यरूपसे कल्पोपपन्न और कल्पनातीत देवोको वैमानिक देव कहते हैं । इन वैमानिक देवोकी कान्ति, लेश्याकी विशुद्धता, आयु, इन्द्रिय तथा अवधिज्ञानका विषय, सुख और प्रभाव ऊपर-ऊपर अधिक होता जाता है तथा अभिमान, गति, देह और परिग्रह ऊपर ऊपर कम होता जाता है। नीचेके स्वर्गीमें रहनेवाले देवोको जितना अभिमान है उपरितन स्वर्गोके देवोका अभिमान उससे कम होता जाता है । गति भी उत्तरोत्तर कम होती जाती है, यहाँ तक कि सोलह स्वर्गके आगेके देव अपना स्थान छोडकर अन्यत्र गमन नही करते । शरीरको ऊँचाई भी ऊपरऊपर कम होती जाती है । देवोकी आयु और शरीरकी अवगाहनाका वर्णन पहले आ चुका है । परिग्रह भी उत्तरोत्तर कम होता जाता है । यह समस्त लोक ससारी जीवोका क्षेत्र कहलाता है । सिद्ध जीवोका क्षेत्र ऊर्ध्वंलोकके अन्तमे है अर्थात् लोकान्तमें तीन कोशका धनोदधिवातवलय, दो कोशका घनवातवलय और पन्द्रहसौ पचहत्तर धनुषका तनुवातवलय है । इस तनुवात वलयके अन्तिम पाँचसौ पच्चीस योजनका क्षेत्र सिद्धक्षेत्र कहलाता है । इसीमे सिद्धोका निवास है ।। २२५-२३३ ।। जीवोंके भेद सामान्यादेकधा जीवो वो मुक्तस्ततो द्विधा । स एवासिनोसिद्धसिद्धत्वात् कीर्त्यते त्रिधा ।।२३४॥ श्वाभ्रतिर्यग्नरामर्त्यविकल्पात् स चतुर्विधः । प्रशमक्षयतद्वन्द्वपरिणामोदयोद्भवात् ।।२३५॥ भावात्पञ्चविधत्वात् स पञ्चभेदः प्ररूप्यते । पड़ मार्गगमनात्पोढा सप्तधा सप्तभङ्गतः ।।२३६॥ अष्टधाष्टगुणात्मत्वाष्टकमवृतोऽपि पदार्थनवकात्मत्वावधा दशजीवभिदात्मत्वादिति दशधा तु सः । चिन्त्यं यथागमम् ।।२३७।। ( षट्पदम् ) अर्थ - सामान्यकी अपेक्षा जीव एक प्रकारका है, बद्ध और मुक्तकी अपेक्षा - दो प्रकारका है, असिद्ध, नोसिद्ध - जीवन्मुक्त - अरहत और सिद्धकी अपेक्षा तीन प्रकारका है, नारकी, तिर्यञ्च, मनुष्य और देवके भेदसे चार प्रकारका है, उपशम, क्षय, क्षयोपगम, परिणाम और उदयसे होनेवाले भावोसे पञ्चरुप होनेके कारण पाँच प्रकारका है, चार दिशाओ और ऊपर, नीचे इस तरह छह दिशाओमे गमन करनेके कारण छह प्रकारका है, स्यादस्ति, स्यात् नास्ति, स्यादस्ति नास्ति, स्यादवक्तव्य, स्यादस्तिअवक्तव्य, स्याद्नास्तिअवक्तव्य और स्यादस्तिनास्तिअवक्तव्य इन सात भङ्गरूप होनेसे सात प्रकारका है, ज्ञानादि आठगुणोंसे तन्मय होनेके कारण आठ प्रकारका है, जीव, अजीव, आस्रव, वन्ध, सवर, निर्जरा, मोक्ष, पुण्य और पाप इन नो पदार्थरूप होनेसे नौ प्रकारका है तथा जीवसमासके प्रकरणमे कहे गये दश भेदरूप होनेसे दश प्रकारका है । इस तरह आगमके अनुसार और भी भेदोका विचार किया जा सकता है ।। २३४-२३७ ।। जीवतत्त्वकी श्रद्धा आदिसे मोक्षको प्राप्तिका वर्णन इत्येतज्जीवतन्त्वं यः श्रद्धत्ते वेत्युपेक्षते । शेषतः समं पड्भिः स हि निर्वाणभाग्भवेत् ।।२३८ ॥ अर्थ - इस तरह शेष छह तत्त्वोके साथ जो जीवतत्त्वकी श्रद्धा करता है, उसे जानता है और उससे उपेक्षा कर चारित्र धारण करता है वह निश्चयसे निर्वाणको प्राप्त होता है ।। २३८ ।। इस तरह श्रीअमृतचन्द्राचार्य द्वारा विरचित तत्त्वार्थसारमें जीवतत्त्वका वर्णन करनेवाला दूसरा अधिकार पूर्ण हुमा । तृतीयाधिकार ( अजीवाधिकार ) मङ्गलाचरण और प्रतिज्ञावाक्य अनन्त केवलज्योतिः प्रकाशितजगत्त्रयान् । प्रणिपत्य जिनान् सर्वानजीवः संप्रचक्ष्यते ॥१॥ अर्थ - अनन्तकेवलज्ञानरूपी ज्योतिके द्वारा तीनो जगत्को प्रकाशित करनेवाले समस्त अरहन्तोको नमस्कार कर अजीवतत्त्वका वर्णन किया जाता है ॥ १ ॥ पाँच अजीवोके नाम धर्माधर्मावथाकाशं तथा कालश्च पुद्गलाः । अजीवाः खलु पञ्चैते निर्दिष्टाः सर्वदर्शिभिः ॥ २ ॥ अर्थ - धर्म, अधर्म, आकाश, काल और पुद्गल, ये पाँच अजीव सर्वज्ञ भगवान्के द्वारा कहे गये हैं ॥ २ ॥ छह द्रव्योका निरूपण एते धर्मादयः पञ्च जीवाश्च प्रोक्तलक्षणाः । षड् द्रव्याणि निगद्यन्ते द्रव्ययाथात्म्यवेदिभिः ॥३॥ अर्थ - ये धर्मादिक पांच अजीव और जिनका लक्षण पहले कहा जा चुका है ऐसे जीव ये छह, द्रव्य के यथार्थस्वरूपको जाननेवाले जिनेन्द्र भगवान् के द्वारा द्रव्य कहे जाते हैं ॥ ३ ॥ पञ्चास्तिकायका वर्णन विना कालेन शेषाणि द्रव्याणि जिनपुङ्गवैः । पञ्चास्तिकायाः कथिताः प्रदेशानां बहुत्वतः ॥४॥ अर्थ-कालके विना शेष पाँच द्रव्य, प्रदेशोंकी अधिकताके कारण जिनेन्द्र भगवान्के द्वारा अस्तिकाय कहे गये हैं ॥ ४ ॥
इत्यादि है । इन सोलह स्वर्गोके बावन पटल हैं । उनके आगे ऊपर-ऊपर नो ग्रैवेयकोंके नौ पटल हैं, उनके ऊपर नौ अनुदिशोका एक पटल है और उसके ऊपर पाँच अनुत्तर विमानोका एक पटल है । इन सबके मिलाकर शठ पटल हैं - उनमे इन्द्रक, श्रेणीवद्ध और विप्रकीर्णकके भेदसे तीन प्रकारके विमान है । वीचके इन्द्रक विमान कहलाते है, उनके उत्तर, दक्षिण और पूर्व, पश्चिममें पक्तिवद्ध विमान श्रेणीबद्ध कहलाते है और उनके बीचमे प्रक्षिप्त पुष्पोंके समान स्थित विमान प्रकीर्णक कहलाते है । पूर्व भवमे जो जीव जैसा कर्म करते है उसीके अनुसार वे इन विमानोमे उत्पन्न होते हैं । सामान्यरूपसे कल्पोपपन्न और कल्पनातीत देवोको वैमानिक देव कहते हैं । इन वैमानिक देवोकी कान्ति, लेश्याकी विशुद्धता, आयु, इन्द्रिय तथा अवधिज्ञानका विषय, सुख और प्रभाव ऊपर-ऊपर अधिक होता जाता है तथा अभिमान, गति, देह और परिग्रह ऊपर ऊपर कम होता जाता है। नीचेके स्वर्गीमें रहनेवाले देवोको जितना अभिमान है उपरितन स्वर्गोके देवोका अभिमान उससे कम होता जाता है । गति भी उत्तरोत्तर कम होती जाती है, यहाँ तक कि सोलह स्वर्गके आगेके देव अपना स्थान छोडकर अन्यत्र गमन नही करते । शरीरको ऊँचाई भी ऊपरऊपर कम होती जाती है । देवोकी आयु और शरीरकी अवगाहनाका वर्णन पहले आ चुका है । परिग्रह भी उत्तरोत्तर कम होता जाता है । यह समस्त लोक ससारी जीवोका क्षेत्र कहलाता है । सिद्ध जीवोका क्षेत्र ऊर्ध्वंलोकके अन्तमे है अर्थात् लोकान्तमें तीन कोशका धनोदधिवातवलय, दो कोशका घनवातवलय और पन्द्रहसौ पचहत्तर धनुषका तनुवातवलय है । इस तनुवात वलयके अन्तिम पाँचसौ पच्चीस योजनका क्षेत्र सिद्धक्षेत्र कहलाता है । इसीमे सिद्धोका निवास है ।। दो सौ पच्चीस-दो सौ तैंतीस ।। जीवोंके भेद सामान्यादेकधा जीवो वो मुक्तस्ततो द्विधा । स एवासिनोसिद्धसिद्धत्वात् कीर्त्यते त्रिधा ।।दो सौ चौंतीस॥ श्वाभ्रतिर्यग्नरामर्त्यविकल्पात् स चतुर्विधः । प्रशमक्षयतद्वन्द्वपरिणामोदयोद्भवात् ।।दो सौ पैंतीस॥ भावात्पञ्चविधत्वात् स पञ्चभेदः प्ररूप्यते । पड़ मार्गगमनात्पोढा सप्तधा सप्तभङ्गतः ।।दो सौ छत्तीस॥ अष्टधाष्टगुणात्मत्वाष्टकमवृतोऽपि पदार्थनवकात्मत्वावधा दशजीवभिदात्मत्वादिति दशधा तु सः । चिन्त्यं यथागमम् ।।दो सौ सैंतीस।। अर्थ - सामान्यकी अपेक्षा जीव एक प्रकारका है, बद्ध और मुक्तकी अपेक्षा - दो प्रकारका है, असिद्ध, नोसिद्ध - जीवन्मुक्त - अरहत और सिद्धकी अपेक्षा तीन प्रकारका है, नारकी, तिर्यञ्च, मनुष्य और देवके भेदसे चार प्रकारका है, उपशम, क्षय, क्षयोपगम, परिणाम और उदयसे होनेवाले भावोसे पञ्चरुप होनेके कारण पाँच प्रकारका है, चार दिशाओ और ऊपर, नीचे इस तरह छह दिशाओमे गमन करनेके कारण छह प्रकारका है, स्यादस्ति, स्यात् नास्ति, स्यादस्ति नास्ति, स्यादवक्तव्य, स्यादस्तिअवक्तव्य, स्याद्नास्तिअवक्तव्य और स्यादस्तिनास्तिअवक्तव्य इन सात भङ्गरूप होनेसे सात प्रकारका है, ज्ञानादि आठगुणोंसे तन्मय होनेके कारण आठ प्रकारका है, जीव, अजीव, आस्रव, वन्ध, सवर, निर्जरा, मोक्ष, पुण्य और पाप इन नो पदार्थरूप होनेसे नौ प्रकारका है तथा जीवसमासके प्रकरणमे कहे गये दश भेदरूप होनेसे दश प्रकारका है । इस तरह आगमके अनुसार और भी भेदोका विचार किया जा सकता है ।। दो सौ चौंतीस-दो सौ सैंतीस ।। जीवतत्त्वकी श्रद्धा आदिसे मोक्षको प्राप्तिका वर्णन इत्येतज्जीवतन्त्वं यः श्रद्धत्ते वेत्युपेक्षते । शेषतः समं पड्भिः स हि निर्वाणभाग्भवेत् ।।दो सौ अड़तीस ॥ अर्थ - इस तरह शेष छह तत्त्वोके साथ जो जीवतत्त्वकी श्रद्धा करता है, उसे जानता है और उससे उपेक्षा कर चारित्र धारण करता है वह निश्चयसे निर्वाणको प्राप्त होता है ।। दो सौ अड़तीस ।। इस तरह श्रीअमृतचन्द्राचार्य द्वारा विरचित तत्त्वार्थसारमें जीवतत्त्वका वर्णन करनेवाला दूसरा अधिकार पूर्ण हुमा । तृतीयाधिकार मङ्गलाचरण और प्रतिज्ञावाक्य अनन्त केवलज्योतिः प्रकाशितजगत्त्रयान् । प्रणिपत्य जिनान् सर्वानजीवः संप्रचक्ष्यते ॥एक॥ अर्थ - अनन्तकेवलज्ञानरूपी ज्योतिके द्वारा तीनो जगत्को प्रकाशित करनेवाले समस्त अरहन्तोको नमस्कार कर अजीवतत्त्वका वर्णन किया जाता है ॥ एक ॥ पाँच अजीवोके नाम धर्माधर्मावथाकाशं तथा कालश्च पुद्गलाः । अजीवाः खलु पञ्चैते निर्दिष्टाः सर्वदर्शिभिः ॥ दो ॥ अर्थ - धर्म, अधर्म, आकाश, काल और पुद्गल, ये पाँच अजीव सर्वज्ञ भगवान्के द्वारा कहे गये हैं ॥ दो ॥ छह द्रव्योका निरूपण एते धर्मादयः पञ्च जीवाश्च प्रोक्तलक्षणाः । षड् द्रव्याणि निगद्यन्ते द्रव्ययाथात्म्यवेदिभिः ॥तीन॥ अर्थ - ये धर्मादिक पांच अजीव और जिनका लक्षण पहले कहा जा चुका है ऐसे जीव ये छह, द्रव्य के यथार्थस्वरूपको जाननेवाले जिनेन्द्र भगवान् के द्वारा द्रव्य कहे जाते हैं ॥ तीन ॥ पञ्चास्तिकायका वर्णन विना कालेन शेषाणि द्रव्याणि जिनपुङ्गवैः । पञ्चास्तिकायाः कथिताः प्रदेशानां बहुत्वतः ॥चार॥ अर्थ-कालके विना शेष पाँच द्रव्य, प्रदेशोंकी अधिकताके कारण जिनेन्द्र भगवान्के द्वारा अस्तिकाय कहे गये हैं ॥ चार ॥
अग्निहोत्र और अरुन्धती (महाकाव्य) शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। अग्निहोत्र vs. अरुन्धती (महाकाव्य) ब्राह्मण पुरोहित यज्ञ वेदी में घी का हवन करते हुए. अग्निहोत्र एक वैदिक यज्ञ है जिसका वर्णन यजुर्वेद में मिलता है। अग्निहोत्र एक नित्य वैदिक यज्ञ है। श्रेणीःयजुर्वेद. अरुन्धती हिन्दी भाषा का एक महाकाव्य है, जिसकी रचना जगद्गुरु रामभद्राचार्य (१९५०-) ने १९९४ में की थी। यह महाकाव्य १५ सर्गों और १२७९ पदों में विरचित है। महाकाव्य की कथावस्तु ऋषिदम्पती अरुन्धती और वसिष्ठ का जीवनचरित्र है, जोकि विविध हिन्दू धर्मग्रंथों में वर्णित है। महाकवि के अनुसार महाकाव्य की कथावस्तु का मानव की मनोवैज्ञानिक विकास परम्परा से घनिष्ठ सम्बन्ध है।रामभद्राचार्य १९९४, पृष्ठ iii - vi। महाकाव्य की एक प्रति का प्रकाशन श्री राघव साहित्य प्रकाशन निधि, हरिद्वार, उत्तर प्रदेश द्वारा १९९९४ में किया गया था। पुस्तक का विमोचन तत्कालीन भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा द्वारा जुलाई ७, १९९४ के दिन किया गया था। . अग्निहोत्र और अरुन्धती (महाकाव्य) आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)। अग्निहोत्र 2 संबंध है और अरुन्धती (महाकाव्य) 36 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (2 + 36)। यह लेख अग्निहोत्र और अरुन्धती (महाकाव्य) के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
अग्निहोत्र और अरुन्धती शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। अग्निहोत्र vs. अरुन्धती ब्राह्मण पुरोहित यज्ञ वेदी में घी का हवन करते हुए. अग्निहोत्र एक वैदिक यज्ञ है जिसका वर्णन यजुर्वेद में मिलता है। अग्निहोत्र एक नित्य वैदिक यज्ञ है। श्रेणीःयजुर्वेद. अरुन्धती हिन्दी भाषा का एक महाकाव्य है, जिसकी रचना जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में की थी। यह महाकाव्य पंद्रह सर्गों और एक हज़ार दो सौ उन्यासी पदों में विरचित है। महाकाव्य की कथावस्तु ऋषिदम्पती अरुन्धती और वसिष्ठ का जीवनचरित्र है, जोकि विविध हिन्दू धर्मग्रंथों में वर्णित है। महाकवि के अनुसार महाकाव्य की कथावस्तु का मानव की मनोवैज्ञानिक विकास परम्परा से घनिष्ठ सम्बन्ध है।रामभद्राचार्य एक हज़ार नौ सौ चौरानवे, पृष्ठ iii - vi। महाकाव्य की एक प्रति का प्रकाशन श्री राघव साहित्य प्रकाशन निधि, हरिद्वार, उत्तर प्रदेश द्वारा उन्नीस हज़ार नौ सौ चौरानवे में किया गया था। पुस्तक का विमोचन तत्कालीन भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा द्वारा जुलाई सात, एक हज़ार नौ सौ चौरानवे के दिन किया गया था। . अग्निहोत्र और अरुन्धती आम में शून्य बातें हैं । अग्निहोत्र दो संबंध है और अरुन्धती छत्तीस है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख अग्निहोत्र और अरुन्धती के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस की जांच में हर दिन नए मामले सामने आ रहे हैं. सुशांत की कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी सामने आ गए हैं. उधर रिया चक्रवर्ती की कॉल डिटेल्स से भी एक खुलासा हुआ है कि वो बॉलीवुड के कई बड़े सितारों के कांटेक्ट में थीं. आमिर खान, रकुल प्रीत सिंह, आदित्य रॉय कपूर, राणा दग्गुबाती, सनी सिंह तथा श्रद्धा कपूर के साथ रिया ने बात की थी. हालांकि इस सूची में एक ऐसा भी नंबर है जो डाउटफुल माना जा रहा है. प्राप्त मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रिया ने अपने मोबाइल में एक नंबर AU नाम से सेव कर रखा है. ये नंबर संदिग्ध बताया जा रहा है. रिया ने इस नंबर से 63 बार बातचीत की है. इस नंबर की बेहद चर्चा भी हो रही है. हालांकि इसे लेकर अब एक्ट्रेस रिया की टीम की ओर से सफाई भी आ गई है. AU नाम से सेव किए गए इस नंबर को लेकर अभिनेत्री की टीम की ओर से कहा गया है कि ये नंबर अनन्या उधास का है. अनन्या, रिया की फैमिली मित्र हैं. इसी कारण दोनों के मध्य अक्सर बातचीत होती थी. हालांकि रिया तथा अनन्या के मध्य इतनी बातचीत क्यों होती थी, इस बात खुलासा नहीं हो पाया है. आपको बता दें कि एक्ट्रेस ने आमिर खान को एक बार कॉल किया था जबकि आमिर ने उन्हें तीन SMS किये थे. वहीं रिया ने आदित्य रॉय कपूर को 16 बार कॉल किए थे, जबकि आदित्य ने उन्हें 7 बार फ़ोन किया. रकुल प्रीत सिंह को 30 बार कॉल किया, जबकि उनकी तरफ से 14 बार कॉल आया था. इसी के साथ मामले की जांच लगातार की जा रही है.
दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस की जांच में हर दिन नए मामले सामने आ रहे हैं. सुशांत की कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी सामने आ गए हैं. उधर रिया चक्रवर्ती की कॉल डिटेल्स से भी एक खुलासा हुआ है कि वो बॉलीवुड के कई बड़े सितारों के कांटेक्ट में थीं. आमिर खान, रकुल प्रीत सिंह, आदित्य रॉय कपूर, राणा दग्गुबाती, सनी सिंह तथा श्रद्धा कपूर के साथ रिया ने बात की थी. हालांकि इस सूची में एक ऐसा भी नंबर है जो डाउटफुल माना जा रहा है. प्राप्त मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रिया ने अपने मोबाइल में एक नंबर AU नाम से सेव कर रखा है. ये नंबर संदिग्ध बताया जा रहा है. रिया ने इस नंबर से तिरेसठ बार बातचीत की है. इस नंबर की बेहद चर्चा भी हो रही है. हालांकि इसे लेकर अब एक्ट्रेस रिया की टीम की ओर से सफाई भी आ गई है. AU नाम से सेव किए गए इस नंबर को लेकर अभिनेत्री की टीम की ओर से कहा गया है कि ये नंबर अनन्या उधास का है. अनन्या, रिया की फैमिली मित्र हैं. इसी कारण दोनों के मध्य अक्सर बातचीत होती थी. हालांकि रिया तथा अनन्या के मध्य इतनी बातचीत क्यों होती थी, इस बात खुलासा नहीं हो पाया है. आपको बता दें कि एक्ट्रेस ने आमिर खान को एक बार कॉल किया था जबकि आमिर ने उन्हें तीन SMS किये थे. वहीं रिया ने आदित्य रॉय कपूर को सोलह बार कॉल किए थे, जबकि आदित्य ने उन्हें सात बार फ़ोन किया. रकुल प्रीत सिंह को तीस बार कॉल किया, जबकि उनकी तरफ से चौदह बार कॉल आया था. इसी के साथ मामले की जांच लगातार की जा रही है.
बस्ती। शिक्षक दिवस पर मोदी का संबोधन कार्यक्रम स्कूलों में फ्लाप रहा। कुछ स्कूल कालेजों को छोड़कर बाकी जगहों पर शिक्षक केवल बैठे रहे। कुछ स्कूलों का आंखों देखा हाल जानने पहुंची अमर उजाला की टीम ने सच टटोलने की कोशिश की। जीजीआईसी में छात्राआें की भीड़ उमड़ पड़ी थी। यहां न तो टीवी का इंतजाम था और न ही प्रोजेक्टर का। कालेज की प्रिंसिपल ने टीवी और प्रोजेक्टर की जगह रेडियो का इंतजाम किया था। रेडियो के सामने माइक लगाकर सभी छात्राओं को मोदी को संबोधन सुनाया जा रहा था। जीआईसी में प्रोजेक्टर की व्यवस्था की गई थी। यहां स्टाफ के अलावा छात्र मौजूद थे मगर बहुत कम संख्या में। एक कमरे में मोदी के संबोधन को सुनने की व्यवस्था की गई थी। यहां पहुंचने पर सन्नाटा पसरा था। स्कूल में सिर्फ शिक्षक मौजूद थे। बच्चे एक भी नहीं थे। पूछने पर पता चला कि टीवी का इंतजाम नहीं हो पाया। बच्चे 12 बजे घर चले गए। यहां शिक्षक हाथ में पंखा लेकर झल रहे थे। रेडिया का भी इंतजाम नहीं था। यहां टीम पहुंची तो सन्नाटा पसरा था। बस शिक्षक पांच बजे का समय देख रहे थे कि कब घड़ी पांच बजाये और स्कूल बंद हो। यहां पूछने पर पता चलाकि बच्चे 12 बजे ही चले गए। सरकारी आदेश सुबह सात बजे पहुंचा। कोई इंतजाम नहीं हो पाया। यहां पहुंचने पर एक हजार से अधिक छात्र कैंपस में मौजूद थे। प्रोजेक्टर का इंतजाम किया गया था। मोदी के संबोधन के साथ ही उनसे पूछे जा रहे सवाल जवाब को बच्चे चाव से सुन रहे थे। सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधनाचार्य ने बताया कि सुबह से ही इंतजाम किया जा रहा था। शिक्षकोें व स्कूली बच्चों केे प्रयास से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम को हम सब सुन सके। बस्ती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शिक्षक दिवस पर संबोधन क ा कार्यक्रम सुनने आए बच्चों ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री से सवाल न पूछने का मलाल है। छात्रों का कहना था कि ऐसी व्यवस्था नहीं की गई थी कि वे सीधे सवाल पूछ सकें। जबकि देश में तमाम जगहों से छात्र प्रधानमंत्री से सीधे सवाल कर रहे थे। जीआईसी की छात्रा परहीन ने कहा कि वह नरेंद्र मोदी के संबोधन को लेकर दो दिनों से उत्साहित थीं। कालेज में टीवी का इंतजाम न होने की वजह से उन लोगों ने रेडियो से संबोधन सुना। वहीं प्रियंका ने कहा कि न तो कालेज में ऑन लाइन इंतजाम हो सका और न ही टीवी की व्यवस्था। इस वजह से मोदी के संबोधन को न देख पाने का मलाल है। वहीं छात्र मोहम्मद शमीम ने कहा कि तमाम विद्यार्थियों ने सवाल किए मगर उन्हें सीधे सवाल पूछने का मौका नहीं मिला। सरस्वती विद्या मंदिर के छात्र गौरव सिंह ने कहा कि मोदी के संबोधन को सुनकर लगा कि इस देश को ऐसा प्रधनमंत्री मिला है, जो हर मुद्दे पर संजीदा है।
बस्ती। शिक्षक दिवस पर मोदी का संबोधन कार्यक्रम स्कूलों में फ्लाप रहा। कुछ स्कूल कालेजों को छोड़कर बाकी जगहों पर शिक्षक केवल बैठे रहे। कुछ स्कूलों का आंखों देखा हाल जानने पहुंची अमर उजाला की टीम ने सच टटोलने की कोशिश की। जीजीआईसी में छात्राआें की भीड़ उमड़ पड़ी थी। यहां न तो टीवी का इंतजाम था और न ही प्रोजेक्टर का। कालेज की प्रिंसिपल ने टीवी और प्रोजेक्टर की जगह रेडियो का इंतजाम किया था। रेडियो के सामने माइक लगाकर सभी छात्राओं को मोदी को संबोधन सुनाया जा रहा था। जीआईसी में प्रोजेक्टर की व्यवस्था की गई थी। यहां स्टाफ के अलावा छात्र मौजूद थे मगर बहुत कम संख्या में। एक कमरे में मोदी के संबोधन को सुनने की व्यवस्था की गई थी। यहां पहुंचने पर सन्नाटा पसरा था। स्कूल में सिर्फ शिक्षक मौजूद थे। बच्चे एक भी नहीं थे। पूछने पर पता चला कि टीवी का इंतजाम नहीं हो पाया। बच्चे बारह बजे घर चले गए। यहां शिक्षक हाथ में पंखा लेकर झल रहे थे। रेडिया का भी इंतजाम नहीं था। यहां टीम पहुंची तो सन्नाटा पसरा था। बस शिक्षक पांच बजे का समय देख रहे थे कि कब घड़ी पांच बजाये और स्कूल बंद हो। यहां पूछने पर पता चलाकि बच्चे बारह बजे ही चले गए। सरकारी आदेश सुबह सात बजे पहुंचा। कोई इंतजाम नहीं हो पाया। यहां पहुंचने पर एक हजार से अधिक छात्र कैंपस में मौजूद थे। प्रोजेक्टर का इंतजाम किया गया था। मोदी के संबोधन के साथ ही उनसे पूछे जा रहे सवाल जवाब को बच्चे चाव से सुन रहे थे। सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधनाचार्य ने बताया कि सुबह से ही इंतजाम किया जा रहा था। शिक्षकोें व स्कूली बच्चों केे प्रयास से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम को हम सब सुन सके। बस्ती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शिक्षक दिवस पर संबोधन क ा कार्यक्रम सुनने आए बच्चों ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री से सवाल न पूछने का मलाल है। छात्रों का कहना था कि ऐसी व्यवस्था नहीं की गई थी कि वे सीधे सवाल पूछ सकें। जबकि देश में तमाम जगहों से छात्र प्रधानमंत्री से सीधे सवाल कर रहे थे। जीआईसी की छात्रा परहीन ने कहा कि वह नरेंद्र मोदी के संबोधन को लेकर दो दिनों से उत्साहित थीं। कालेज में टीवी का इंतजाम न होने की वजह से उन लोगों ने रेडियो से संबोधन सुना। वहीं प्रियंका ने कहा कि न तो कालेज में ऑन लाइन इंतजाम हो सका और न ही टीवी की व्यवस्था। इस वजह से मोदी के संबोधन को न देख पाने का मलाल है। वहीं छात्र मोहम्मद शमीम ने कहा कि तमाम विद्यार्थियों ने सवाल किए मगर उन्हें सीधे सवाल पूछने का मौका नहीं मिला। सरस्वती विद्या मंदिर के छात्र गौरव सिंह ने कहा कि मोदी के संबोधन को सुनकर लगा कि इस देश को ऐसा प्रधनमंत्री मिला है, जो हर मुद्दे पर संजीदा है।
एक यूक्रेनी अधिकारी ने आश्वस्त किया है कि मास्को को रूसी गैस के पारगमन के लिए एक नया अनुबंध यूक्रेनी जीटीएस के माध्यम से हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया जाएगा, क्योंकि पारगमन के लिए यूक्रेन के साथ पिछला समझौता एक्सएनयूएमएक्स पर दिसंबर एक्सएनयूएमएक्स पर समाप्त हो जाएगा, और इस समय तक गाजप्रोम को पूरा होने और नई गैस पाइपलाइन के संचालन में समय नहीं लगेगा " नॉर्ड स्ट्रीम- 31। " चूंकि रूस, एक तरह से या किसी अन्य, पहले से ही संपन्न समझौतों के तहत यूरोप में गैस पारगमन जारी रखने की आवश्यकता होगी, मास्को को कीव के साथ पारगमन समझौते में प्रवेश करना होगा। नई संधि के साथ रूसी पक्ष जितना लंबा खिंच जाएगा, उनके लिए निष्कर्ष निकालना उतना ही मुश्किल होगा, और जितना अधिक यह उन्हें खर्च करेगा, बॉयको ने कहा। बाल्टिक सागर के नीचे के किनारे पहले से बिछाई गई नॉर्ड स्ट्रीम गैस पाइपलाइन के बगल में नॉर्ड स्ट्रीम-एक्सएनयूएमएक्स गैस पाइपलाइन बनाई जा रही है और यह रूस और जर्मनी को जोड़ेगी। नई गैस पाइपलाइन की क्षमता प्रति वर्ष 2 अरबों क्यूबिक मीटर गैस होगी। संयुक्त उद्यम 55 का निर्माण बाल्टिक राज्यों, पोलैंड और यूक्रेन से संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके यूरोपीय "सहयोगियों" को रोकने के लिए हर तरह से कोशिश कर रहा है, यह दावा करते हुए कि यह पाइपलाइन "रूस द्वारा यूरोप की दासता" का एक और कारण है। इस बीच, निर्माणाधीन गैस पाइपलाइन का संचालन करने वाली कंपनी और गज़प्रॉम के प्रबंधन ने पहले कहा था कि निर्माण के साथ हस्तक्षेप की अनुपस्थिति में, संयुक्त उद्यम 2 पूरा हो जाएगा और जनवरी 1, 2020 से पहले परिचालन में आ जाएगा, जो स्वचालित रूप से अपने गैस पारगमन प्रणाली का उपयोग करने के लिए यूक्रेन की संभावना को कम कर देता है। ।
एक यूक्रेनी अधिकारी ने आश्वस्त किया है कि मास्को को रूसी गैस के पारगमन के लिए एक नया अनुबंध यूक्रेनी जीटीएस के माध्यम से हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया जाएगा, क्योंकि पारगमन के लिए यूक्रेन के साथ पिछला समझौता एक्सएनयूएमएक्स पर दिसंबर एक्सएनयूएमएक्स पर समाप्त हो जाएगा, और इस समय तक गाजप्रोम को पूरा होने और नई गैस पाइपलाइन के संचालन में समय नहीं लगेगा " नॉर्ड स्ट्रीम- इकतीस। " चूंकि रूस, एक तरह से या किसी अन्य, पहले से ही संपन्न समझौतों के तहत यूरोप में गैस पारगमन जारी रखने की आवश्यकता होगी, मास्को को कीव के साथ पारगमन समझौते में प्रवेश करना होगा। नई संधि के साथ रूसी पक्ष जितना लंबा खिंच जाएगा, उनके लिए निष्कर्ष निकालना उतना ही मुश्किल होगा, और जितना अधिक यह उन्हें खर्च करेगा, बॉयको ने कहा। बाल्टिक सागर के नीचे के किनारे पहले से बिछाई गई नॉर्ड स्ट्रीम गैस पाइपलाइन के बगल में नॉर्ड स्ट्रीम-एक्सएनयूएमएक्स गैस पाइपलाइन बनाई जा रही है और यह रूस और जर्मनी को जोड़ेगी। नई गैस पाइपलाइन की क्षमता प्रति वर्ष दो अरबों क्यूबिक मीटर गैस होगी। संयुक्त उद्यम पचपन का निर्माण बाल्टिक राज्यों, पोलैंड और यूक्रेन से संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके यूरोपीय "सहयोगियों" को रोकने के लिए हर तरह से कोशिश कर रहा है, यह दावा करते हुए कि यह पाइपलाइन "रूस द्वारा यूरोप की दासता" का एक और कारण है। इस बीच, निर्माणाधीन गैस पाइपलाइन का संचालन करने वाली कंपनी और गज़प्रॉम के प्रबंधन ने पहले कहा था कि निर्माण के साथ हस्तक्षेप की अनुपस्थिति में, संयुक्त उद्यम दो पूरा हो जाएगा और जनवरी एक, दो हज़ार बीस से पहले परिचालन में आ जाएगा, जो स्वचालित रूप से अपने गैस पारगमन प्रणाली का उपयोग करने के लिए यूक्रेन की संभावना को कम कर देता है। ।
भारत और डेनमार्क ने कोपेनहेगन में आज श्रम स्थानांतरण साझेदारी पर सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस सहमति पत्र पर प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री श्री वायलार रवि तथा डेनमार्क के शरणार्थी, आव्रजन एवं एकता मामलों के मंत्री श्री बी आर होर्नबेक ने हस्ताक्षर किए। किसी भी यूरोपीय देश के साथ यह पहला श्रम स्थानांतरण साझेदारी समझौता है। इससे डेनमार्क की अर्थव्यवस्था में कुशल और प्रशिक्षित श्रमिकों की बढती मांग की पूर्ति के लिए भारत से उपयुक्त रूप से श्रमिक वहां जा पाएंगे तथा अवैध अनियमित प्रवास पर रोक लगेगी। समझौते के तहत दोनों देश श्रमिकों के साथ उपयुक्त और सामान बर्ताव करेंगे। डेनमार्क में कुशल श्रमिकों की मांग वाले उभरते क्षेत्रों की पहचान तथा उनमें भर्ती के लिए पारस्परिक लाभकारी अध्ययन कार्यक्रम शुरु किया जाएगा। नियोक्ता से सीधा संपर्क स्थापित करवाकर श्रमिकों को बिचौलियों से मुक्त किया जाएगा। सभी प्रकार के श्रमिकों की श्रम कानूनों तथा मेजबान देश के संबंधित कानूनों के तहत सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित किएं जाएंगे। समझौते में दोनों देशों के संयुक्त कार्यबल के गठन का भी उल्लेख है।
भारत और डेनमार्क ने कोपेनहेगन में आज श्रम स्थानांतरण साझेदारी पर सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। इस सहमति पत्र पर प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री श्री वायलार रवि तथा डेनमार्क के शरणार्थी, आव्रजन एवं एकता मामलों के मंत्री श्री बी आर होर्नबेक ने हस्ताक्षर किए। किसी भी यूरोपीय देश के साथ यह पहला श्रम स्थानांतरण साझेदारी समझौता है। इससे डेनमार्क की अर्थव्यवस्था में कुशल और प्रशिक्षित श्रमिकों की बढती मांग की पूर्ति के लिए भारत से उपयुक्त रूप से श्रमिक वहां जा पाएंगे तथा अवैध अनियमित प्रवास पर रोक लगेगी। समझौते के तहत दोनों देश श्रमिकों के साथ उपयुक्त और सामान बर्ताव करेंगे। डेनमार्क में कुशल श्रमिकों की मांग वाले उभरते क्षेत्रों की पहचान तथा उनमें भर्ती के लिए पारस्परिक लाभकारी अध्ययन कार्यक्रम शुरु किया जाएगा। नियोक्ता से सीधा संपर्क स्थापित करवाकर श्रमिकों को बिचौलियों से मुक्त किया जाएगा। सभी प्रकार के श्रमिकों की श्रम कानूनों तथा मेजबान देश के संबंधित कानूनों के तहत सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित किएं जाएंगे। समझौते में दोनों देशों के संयुक्त कार्यबल के गठन का भी उल्लेख है।
रवि शास्त्री भारतीय टीम के मैनेजर भी रह चुके हैं और तब सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा थे तभी एक दिन शास्त्री ने गांगुली को बस में नहीं आने दिया था. सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) और रवि शास्त्री (Ravi shastri) के बीच मनमुटाव की खबरें जगजाहिर हैं. गांगुली जब बीसीसीआई की सीएसी में थे तब उन्होंने कोच पद के लिए इंटरव्यू देने आए रवि शास्त्री को न कह दिया था और अनिल कुंबले को चुना था. हालांकि कुंबले के हटने के बाद उन्हें शास्त्री को चुना था. गांगुली जब बीसीसीआई के अध्यक्ष बने थे तब भी यह खबरें थी कि शायद इससे शास्त्री को नुकसान हो सकता है लेकिन ऐसा हुआ नहीं और दोनों ने अपनी-अपने जिम्मेदारियों पर ध्यान दिया. इन दोनों के बीच तल्खी नई नहीं हैं. शास्त्री पहले भी टीम इंडिया के साथ रह चुके हैं और उस समय गांगुली टीम का हिस्सा थे. शास्त्री ने उस समय के दिलचस्प किस्से को याद किया है. साथ ही शास्त्री ने गांगुली से अपने संबंधों पर भी अपनी बात रखी है. शास्त्री इस समय इंग्लैंड में भारतीय टीम के साथ हैं. भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जा रही है. सीरीज इस समय 1-1 से बराबर है. दोनों टीमों के बीच चौथा मैच गुरुवार से शुरू हो रहा है. इस मैच को जीत दोनों टीमें सीरीज में बढ़त लेने चाहेंगी.
रवि शास्त्री भारतीय टीम के मैनेजर भी रह चुके हैं और तब सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा थे तभी एक दिन शास्त्री ने गांगुली को बस में नहीं आने दिया था. सौरव गांगुली और रवि शास्त्री के बीच मनमुटाव की खबरें जगजाहिर हैं. गांगुली जब बीसीसीआई की सीएसी में थे तब उन्होंने कोच पद के लिए इंटरव्यू देने आए रवि शास्त्री को न कह दिया था और अनिल कुंबले को चुना था. हालांकि कुंबले के हटने के बाद उन्हें शास्त्री को चुना था. गांगुली जब बीसीसीआई के अध्यक्ष बने थे तब भी यह खबरें थी कि शायद इससे शास्त्री को नुकसान हो सकता है लेकिन ऐसा हुआ नहीं और दोनों ने अपनी-अपने जिम्मेदारियों पर ध्यान दिया. इन दोनों के बीच तल्खी नई नहीं हैं. शास्त्री पहले भी टीम इंडिया के साथ रह चुके हैं और उस समय गांगुली टीम का हिस्सा थे. शास्त्री ने उस समय के दिलचस्प किस्से को याद किया है. साथ ही शास्त्री ने गांगुली से अपने संबंधों पर भी अपनी बात रखी है. शास्त्री इस समय इंग्लैंड में भारतीय टीम के साथ हैं. भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जा रही है. सीरीज इस समय एक-एक से बराबर है. दोनों टीमों के बीच चौथा मैच गुरुवार से शुरू हो रहा है. इस मैच को जीत दोनों टीमें सीरीज में बढ़त लेने चाहेंगी.
प्रतिनिधियों की विशिष्ट विशेषताओं में से एकसब्जी साम्राज्य विशेष संरचनाओं की अपनी कोशिकाओं में मौजूद है - प्लास्टिड्स। इनमें क्लोरोप्लास्ट्स, क्रोमोप्लास्ट्स और ल्यूकोप्लास्ट्स शामिल हैं, जिनकी संरचना और कार्यों पर हमारे लेख में चर्चा की जाएगी। प्लास्टिड्स क्या है? प्लास्टिड्स को पौधों की कोशिकाओं के ऑर्गेनियल्स कहा जाता है,कवक और कुछ protozoa। यह एक गोल आकार का बछड़ा है जिसमें अर्ध-स्वायत्त संरचना है। वे पारस्परिक रूप से एक-दूसरे में परिवर्तित करने में सक्षम हैं। उदाहरण के लिए, ल्यूकोप्लास्ट्स, जिनकी संरचना और कार्य सीधे सूर्य के प्रकाश के प्रभाव में बदलते हैं, क्लोरोप्लास्ट में परिवर्तित हो जाते हैं। कई लोगों ने देखा कि आलू कंद हिरण हैं। यह इस तरह के एक अद्भुत परिवर्तन का परिणाम है। लेकिन भोजन में ऐसे उत्पाद का उपयोग करने के लायक नहीं है। कंदों में क्लोरोप्लास्ट के साथ-साथ जहर - क्षारीय सोलानाइन जमा होता है। यह गंभीर खाद्य विषाक्तता पैदा कर सकता है और बच्चों के लिए विशेष रूप से खतरनाक है। फलों और सब्जियों को पकाते समय भी होता हैPlastids के interconversion। केवल इस मामले में क्रोमोप्लास्ट्स ल्यूकोप्लास्ट्स से बने होते हैं, जो पौधे के विभिन्न हिस्सों का रंग निर्धारित करते हैंः पीला, लाल, गुलाबी, बैंगनी आदि। ल्यूकोप्लास्ट्स, क्रोमोप्लास्ट प्लास्टिड्स, क्लोरोप्लास्ट्ससंरचना और कार्यों दोनों में भिन्न है। लेकिन वे सभी एक महत्वपूर्ण और अपरिवर्तनीय भूमिका निभाते हैं। पौधे के विभिन्न हिस्सों में रंग प्रदान करने की क्षमता इस तथ्य के कारण है कि क्रोमोप्लास्ट में विभिन्न रंगद्रव्य होते हैं - रंगीन पदार्थ। अधिकांश पौधों के कोरोला के उज्ज्वल पंखुड़ियों -एक ठेठ सबूत। यह रंग, फूलों की सुगंध के साथ, परागण के लिए कीड़े को आकर्षित करता है, जो निषेचन और फल के गठन से पहले होता है। हरी प्लास्टिड्स में वर्णक क्लोरोफिल होता है,जो उनके रंग को निर्धारित करता है। इस पदार्थ की उपस्थिति (कार्बन डाइऑक्साइड, पानी और सौर विकिरण के साथ) प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के लिए एक पूर्व शर्त है। इसके पाठ्यक्रम में पौधे कार्बोहाइड्रेट और ऑक्सीजन बनाते हैं। पहला उनके लिए पोषण, विकास और विकास का स्रोत है। और ऑक्सीजन गैस सभी जीवित चीजें हैं, बैक्टीरिया से मनुष्यों तक, सांस लेने के लिए उपयोग की जाती हैं। ल्यूकोप्लास्ट रंगहीन ऑर्गेनियल्स हैं। उनके पास नियमित गोलाकार आकार होता है। अंदर झिल्ली प्रणाली बल्कि कमजोर विकसित है। फॉर्म को केवल उस मामले में गलत में बदला जा सकता है जब पर्याप्त रूप से बड़े स्टार्च अनाज उनके साइटप्लाज्म में बनने लगते हैं। प्लास्टिड्स ल्यूकोप्लास्ट पौधे के अंतर्निहित पौधे ऊतक में निहित हैं। यह शूट - कंद, बल्ब, rhizomes के संशोधन के आधार बनाता है। ल्यूकोप्लास्ट्स का कार्य उनकी संरचना की ऐसी विशेषताओं द्वारा निर्धारित किया जाता है। इन गुणों की गुहा में कई मूल्यवान पोषक तत्व जमा हो सकते हैं। सभी plastids की तरह Leukoplasts, दो झिल्ली organelles हैं। हालांकि, आंतरिक खोल ढांचे के अंदर स्पष्ट रूप से परिभाषित रूपरेखा नहीं बनाता है। ल्यूकोप्लास्ट यूकेरियोटिक कोशिकाएं हैं। इसका मतलब है कि उनके साइटप्लाज्म में, आनुवांशिक जानकारी वाले डीएनए अणु सजाए गए नाभिक में निहित होते हैं। ये प्लास्टिड्स विशिष्ट हैं। प्रजातियों के आधार पर, वे विभिन्न प्रकार के कार्बनिक पदार्थों को जमा और संश्लेषित करने में सक्षम हैं। उदाहरण के लिए, कार्बोहाइड्रेट स्टार्च में एमिलोप्लास्ट होते हैं। यह पदार्थ सभी पौधों की विशेषता है, क्योंकि यह प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में प्राप्त ग्लूकोज से बनता है। ओलेप्लास्टी वसा पैदा करता है और स्टोर करता है। कुछ पौधों की कोशिकाओं में तरल वसा भी पाए जाते हैं और उन्हें तेल कहा जाता है। प्रोटीनोप्लास्ट में प्रोटीन होते हैं। यह ल्यूकोप्लास्ट्स की संरचना है जो इस तरह के कार्यों को निर्धारित करती है। विभिन्न पदार्थों के भंडारण और भंडारण के लिए जरूरी गुहा के अलावा, उनमें एंजाइम होते हैं। ये जैविक प्राकृतिक उत्प्रेरक रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करने में सक्षम हैं, लेकिन उनके उत्पादों का हिस्सा नहीं हैं। उदाहरण के लिए, एक साधारण ग्लूकोज कार्बोहाइड्रेट के प्रभाव में, एक स्टार्च पोलिसाक्राइड का गठन होता है। जब प्रकाश संश्लेषण के दौरान प्रतिकूल परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, तो यह फिर से मोनोमर्स में विभाजित होती है और पौधों द्वारा जीवन प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए उपयोग की जाती है। चूंकि ल्यूकोप्लास्ट का मुख्य कार्य हैपदार्थों का संचय, इन organelles पौधों के मोटा और मांसल भागों में निहित हैं। वे आलू कंदों में विशेष रूप से समृद्ध हैं। प्रत्येक स्कूली लड़का अपने ल्यूकोप्लास्ट्स में मौजूद स्टार्च के लिए गुणात्मक प्रतिक्रिया करने में सक्षम होता है। ऐसा करने के लिए, आपको केवल ताजा कटौती के लिए आयोडीन समाधान की कुछ बूंदों को लागू करने की आवश्यकता है। इसके प्रभाव के तहत, इस प्लास्टिड्स से पहले रंगहीन एक समृद्ध बैंगनी रंग प्राप्त करेगा। कम आवर्धन पर भी माइक्रोस्कोप के तहत उनकी जांच की जा सकती है। पौधों के बल्बों में कई ल्यूकोप्लास्ट भी होते हैं। पानी और कार्बोहाइड्रेट की बड़ी आपूर्ति के लिए धन्यवाद, ऐसी जड़ें पृथ्वी के नीचे सूखे, ठंढ और गर्मी के प्रतिकूल अवधि को सहन कर सकती हैं। उस पर, पौधे का उपरोक्त हिस्सा मर जाता है, और संशोधित शूट व्यवहार्य बना रहता है। उदाहरण के लिए, कुछ हफ्तों के लिए ट्यूलिप में बढ़ने और फूल होने का समय होता है। और आगे उनके बल्ब में इस वसंत संयंत्र के हरे रंग के हिस्सों द्वारा प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में गठित कार्बोहाइड्रेट जमा होता है। Rhizomes कोई अपवाद नहीं हैं। हर कोई जानता है कि खरबूजे से छुटकारा पाने में कितना मुश्किल है। वे सबसे मजबूत सूखे से भी डरते नहीं हैं, और पत्तियां मिट्टी की सतह पर फिर से दिखाई देती हैं। बात यह है कि पौधे खुद को विस्तारित इंटरस्टिस के साथ एक मोटा संशोधित शूट के रूप में जमीन के नीचे विकसित होता है। इसमें ल्यूकोप्लास्ट्स की एक बड़ी मात्रा होती है, और इसलिए पदार्थों का एक स्टॉक होता है। एंडोस्पर्म बीजों, कवक के बीजों, उच्च पौधों के अंडाकार इन प्लास्टिड्स की उपस्थिति के कारण सटीक रूप से अपने कार्य करते हैं। भ्रूण में ल्यूकोप्लास्ट्स की उपस्थिति का तथ्यपौधे जीवों का ऊतक साबित होता है। और वे तथाकथित proplastids से गठित होते हैं। ये संरचनाएं सभी प्रकार के समान organelles के अग्रदूत हैं। प्रारंभ में, वे मेरिस्टेम में स्थित हैं - पौधों के शैक्षणिक ऊतक। Proplastids आकार में 1 माइक्रोन तक माइक्रोस्कोपिक शरीर हैं। यह उनके साथ है कि पौधे कोशिकाओं के इन organelles के interconversion की पूरी श्रृंखला शुरू होता है।
प्रतिनिधियों की विशिष्ट विशेषताओं में से एकसब्जी साम्राज्य विशेष संरचनाओं की अपनी कोशिकाओं में मौजूद है - प्लास्टिड्स। इनमें क्लोरोप्लास्ट्स, क्रोमोप्लास्ट्स और ल्यूकोप्लास्ट्स शामिल हैं, जिनकी संरचना और कार्यों पर हमारे लेख में चर्चा की जाएगी। प्लास्टिड्स क्या है? प्लास्टिड्स को पौधों की कोशिकाओं के ऑर्गेनियल्स कहा जाता है,कवक और कुछ protozoa। यह एक गोल आकार का बछड़ा है जिसमें अर्ध-स्वायत्त संरचना है। वे पारस्परिक रूप से एक-दूसरे में परिवर्तित करने में सक्षम हैं। उदाहरण के लिए, ल्यूकोप्लास्ट्स, जिनकी संरचना और कार्य सीधे सूर्य के प्रकाश के प्रभाव में बदलते हैं, क्लोरोप्लास्ट में परिवर्तित हो जाते हैं। कई लोगों ने देखा कि आलू कंद हिरण हैं। यह इस तरह के एक अद्भुत परिवर्तन का परिणाम है। लेकिन भोजन में ऐसे उत्पाद का उपयोग करने के लायक नहीं है। कंदों में क्लोरोप्लास्ट के साथ-साथ जहर - क्षारीय सोलानाइन जमा होता है। यह गंभीर खाद्य विषाक्तता पैदा कर सकता है और बच्चों के लिए विशेष रूप से खतरनाक है। फलों और सब्जियों को पकाते समय भी होता हैPlastids के interconversion। केवल इस मामले में क्रोमोप्लास्ट्स ल्यूकोप्लास्ट्स से बने होते हैं, जो पौधे के विभिन्न हिस्सों का रंग निर्धारित करते हैंः पीला, लाल, गुलाबी, बैंगनी आदि। ल्यूकोप्लास्ट्स, क्रोमोप्लास्ट प्लास्टिड्स, क्लोरोप्लास्ट्ससंरचना और कार्यों दोनों में भिन्न है। लेकिन वे सभी एक महत्वपूर्ण और अपरिवर्तनीय भूमिका निभाते हैं। पौधे के विभिन्न हिस्सों में रंग प्रदान करने की क्षमता इस तथ्य के कारण है कि क्रोमोप्लास्ट में विभिन्न रंगद्रव्य होते हैं - रंगीन पदार्थ। अधिकांश पौधों के कोरोला के उज्ज्वल पंखुड़ियों -एक ठेठ सबूत। यह रंग, फूलों की सुगंध के साथ, परागण के लिए कीड़े को आकर्षित करता है, जो निषेचन और फल के गठन से पहले होता है। हरी प्लास्टिड्स में वर्णक क्लोरोफिल होता है,जो उनके रंग को निर्धारित करता है। इस पदार्थ की उपस्थिति प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के लिए एक पूर्व शर्त है। इसके पाठ्यक्रम में पौधे कार्बोहाइड्रेट और ऑक्सीजन बनाते हैं। पहला उनके लिए पोषण, विकास और विकास का स्रोत है। और ऑक्सीजन गैस सभी जीवित चीजें हैं, बैक्टीरिया से मनुष्यों तक, सांस लेने के लिए उपयोग की जाती हैं। ल्यूकोप्लास्ट रंगहीन ऑर्गेनियल्स हैं। उनके पास नियमित गोलाकार आकार होता है। अंदर झिल्ली प्रणाली बल्कि कमजोर विकसित है। फॉर्म को केवल उस मामले में गलत में बदला जा सकता है जब पर्याप्त रूप से बड़े स्टार्च अनाज उनके साइटप्लाज्म में बनने लगते हैं। प्लास्टिड्स ल्यूकोप्लास्ट पौधे के अंतर्निहित पौधे ऊतक में निहित हैं। यह शूट - कंद, बल्ब, rhizomes के संशोधन के आधार बनाता है। ल्यूकोप्लास्ट्स का कार्य उनकी संरचना की ऐसी विशेषताओं द्वारा निर्धारित किया जाता है। इन गुणों की गुहा में कई मूल्यवान पोषक तत्व जमा हो सकते हैं। सभी plastids की तरह Leukoplasts, दो झिल्ली organelles हैं। हालांकि, आंतरिक खोल ढांचे के अंदर स्पष्ट रूप से परिभाषित रूपरेखा नहीं बनाता है। ल्यूकोप्लास्ट यूकेरियोटिक कोशिकाएं हैं। इसका मतलब है कि उनके साइटप्लाज्म में, आनुवांशिक जानकारी वाले डीएनए अणु सजाए गए नाभिक में निहित होते हैं। ये प्लास्टिड्स विशिष्ट हैं। प्रजातियों के आधार पर, वे विभिन्न प्रकार के कार्बनिक पदार्थों को जमा और संश्लेषित करने में सक्षम हैं। उदाहरण के लिए, कार्बोहाइड्रेट स्टार्च में एमिलोप्लास्ट होते हैं। यह पदार्थ सभी पौधों की विशेषता है, क्योंकि यह प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में प्राप्त ग्लूकोज से बनता है। ओलेप्लास्टी वसा पैदा करता है और स्टोर करता है। कुछ पौधों की कोशिकाओं में तरल वसा भी पाए जाते हैं और उन्हें तेल कहा जाता है। प्रोटीनोप्लास्ट में प्रोटीन होते हैं। यह ल्यूकोप्लास्ट्स की संरचना है जो इस तरह के कार्यों को निर्धारित करती है। विभिन्न पदार्थों के भंडारण और भंडारण के लिए जरूरी गुहा के अलावा, उनमें एंजाइम होते हैं। ये जैविक प्राकृतिक उत्प्रेरक रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करने में सक्षम हैं, लेकिन उनके उत्पादों का हिस्सा नहीं हैं। उदाहरण के लिए, एक साधारण ग्लूकोज कार्बोहाइड्रेट के प्रभाव में, एक स्टार्च पोलिसाक्राइड का गठन होता है। जब प्रकाश संश्लेषण के दौरान प्रतिकूल परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, तो यह फिर से मोनोमर्स में विभाजित होती है और पौधों द्वारा जीवन प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए उपयोग की जाती है। चूंकि ल्यूकोप्लास्ट का मुख्य कार्य हैपदार्थों का संचय, इन organelles पौधों के मोटा और मांसल भागों में निहित हैं। वे आलू कंदों में विशेष रूप से समृद्ध हैं। प्रत्येक स्कूली लड़का अपने ल्यूकोप्लास्ट्स में मौजूद स्टार्च के लिए गुणात्मक प्रतिक्रिया करने में सक्षम होता है। ऐसा करने के लिए, आपको केवल ताजा कटौती के लिए आयोडीन समाधान की कुछ बूंदों को लागू करने की आवश्यकता है। इसके प्रभाव के तहत, इस प्लास्टिड्स से पहले रंगहीन एक समृद्ध बैंगनी रंग प्राप्त करेगा। कम आवर्धन पर भी माइक्रोस्कोप के तहत उनकी जांच की जा सकती है। पौधों के बल्बों में कई ल्यूकोप्लास्ट भी होते हैं। पानी और कार्बोहाइड्रेट की बड़ी आपूर्ति के लिए धन्यवाद, ऐसी जड़ें पृथ्वी के नीचे सूखे, ठंढ और गर्मी के प्रतिकूल अवधि को सहन कर सकती हैं। उस पर, पौधे का उपरोक्त हिस्सा मर जाता है, और संशोधित शूट व्यवहार्य बना रहता है। उदाहरण के लिए, कुछ हफ्तों के लिए ट्यूलिप में बढ़ने और फूल होने का समय होता है। और आगे उनके बल्ब में इस वसंत संयंत्र के हरे रंग के हिस्सों द्वारा प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में गठित कार्बोहाइड्रेट जमा होता है। Rhizomes कोई अपवाद नहीं हैं। हर कोई जानता है कि खरबूजे से छुटकारा पाने में कितना मुश्किल है। वे सबसे मजबूत सूखे से भी डरते नहीं हैं, और पत्तियां मिट्टी की सतह पर फिर से दिखाई देती हैं। बात यह है कि पौधे खुद को विस्तारित इंटरस्टिस के साथ एक मोटा संशोधित शूट के रूप में जमीन के नीचे विकसित होता है। इसमें ल्यूकोप्लास्ट्स की एक बड़ी मात्रा होती है, और इसलिए पदार्थों का एक स्टॉक होता है। एंडोस्पर्म बीजों, कवक के बीजों, उच्च पौधों के अंडाकार इन प्लास्टिड्स की उपस्थिति के कारण सटीक रूप से अपने कार्य करते हैं। भ्रूण में ल्यूकोप्लास्ट्स की उपस्थिति का तथ्यपौधे जीवों का ऊतक साबित होता है। और वे तथाकथित proplastids से गठित होते हैं। ये संरचनाएं सभी प्रकार के समान organelles के अग्रदूत हैं। प्रारंभ में, वे मेरिस्टेम में स्थित हैं - पौधों के शैक्षणिक ऊतक। Proplastids आकार में एक माइक्रोन तक माइक्रोस्कोपिक शरीर हैं। यह उनके साथ है कि पौधे कोशिकाओं के इन organelles के interconversion की पूरी श्रृंखला शुरू होता है।
आने वाले त्योहारी सीजन से पहले ई-कॉमर्स प्लेटफार्म Amazon ने Amazon Great Indian Festival sale शुरू कर दी है। जिसमें कई प्रोडक्ट्स और एक्सेसरीज़ पर बड़ा डिस्काउंट दिया जा रहा है। खास बात यह है कि सेल में अमेज़न ने 10 प्रतिशत इंस्टेंट डिस्काउंट देने के लिए एसबीआई बैंक के साथ हाथ मिलाया है। वहीं फिलहाल यहां हम आपको सेल में मिलने वाली शानदार Smartwatch और Smart Band के बारे में बता रहे हैं। बता दें कि स्मार्टवॉच और स्मार्ट बैंड की डिमांड आजकल काफी बढ़ गई है। इस खास डिवाइस की मदद से आप हार्ट रेट, SpO2, स्लीप टाइम जैसी कई हेल्थ से जुड़ी ट्रैकिंग कर सकते हैं। आइये, आगे ऑफर की डिटेल जानते हैं। Amazfit T-Rex 2 एक मजबूत स्मार्टवॉच है, जो गोल डायल के साथ आती है। यह रीयल-टाइम नेविगेशन, 150 से ज्यादा स्पोर्ट्स मोड, हार्ट रेट ट्रैकिंग, SpO2, स्लीप टाइम जैसे कई फीचर्स प्रदान करती है। वॉच में 10ATM वाटरप्रूफ तकनीक मिलती है और यह 24 दिन की बैटरी लाइफ प्रदान करती है। कीमत की बात करें तो फिलहाल वॉच पर 7,000 रुपये का डिस्काउंट मिल रहा है। इसकी कीमत अब 21,999 रुपये से सीधा 14,999 रुपये हो गई है। अगर आप एक सस्ती स्मार्टवॉच लेना चाहते हैं तो नॉइज़ कलरफिट पल्स ग्रैंड एक बढ़िया विकल्प है। इसकी पॉकेट-फ्रेंडली कीमत के बावजूद यह आपको कई फीचर्स प्रदान करती है। जैसे स्पोर्ट्स मोड, हार्ट रेट ट्रैकिंग, SpO2, स्लीप टाइम आदि। वहीं फिलहाल वॉच डिस्काउंट के आपको केवल 999 रु में मिल जाएगी। जिसकी असल कीमत 3,999 रुपये है। अगर आपका बजट कुछ ज्यादा है तो आप एप्पल वॉच एसई को भी चुन सकते हैं। यह एप्पल की एक किफायती पेशकश है, जो कई खास फीचर्स से लैस है। वॉच में स्पोर्ट्स मोड, हार्ट रेट ट्रैकिंग, SpO2, स्लीप टाइम जैसे फीचर्स दिए गए हैं। इसमें फॉल डिटेक्शन और इमरजेंसी एसओएस फीचर्स भी मिलता है। कीमत की बात करें तो मौजूदा सेल में यह वॉच आपको 27,900 रुपये में मिल जाएगी। जिसकी असल कीमत 36,900 रुपये है। अगर आप स्मार्ट वॉच की जगह स्मार्ट बैंड लेना चाहते हैं तो Xiaomi Mi स्मार्ट बैंड 6 काफी सस्ते में मिल रहा है। इसमें एक बड़ा AMOLED डिस्प्ले मौजूद है, जो आपको कई हेल्थ मेट्रिक्स आसानी से प्रदान करता है। कीमत की बात करें तो यह बैंड सेल में केवल 2,499 रुपये में मिल रहा है। जिसकी कीमत 3,999 रुपये है। Redmi स्मार्ट बैंड प्रो एक शानदार डिवाइस है, इसमें भी यूजर्स को बढ़िया हेल्थ ट्रैकिंग फीचर्स मिलते हैं। खास बात यह है कि यह दिखने में भी वॉच की तरह की लगता है। यूजर्स को इसमें ऑलवेज ऑन अमोलेड डिस्प्ले मिलता है। कीमत की बात करें तो यह बैंड आपको सेल में केवल 2,299 रुपये में मिल जाएगा। जिसकी कीमत 5,999 रुपये हुआ करती थी।
आने वाले त्योहारी सीजन से पहले ई-कॉमर्स प्लेटफार्म Amazon ने Amazon Great Indian Festival sale शुरू कर दी है। जिसमें कई प्रोडक्ट्स और एक्सेसरीज़ पर बड़ा डिस्काउंट दिया जा रहा है। खास बात यह है कि सेल में अमेज़न ने दस प्रतिशत इंस्टेंट डिस्काउंट देने के लिए एसबीआई बैंक के साथ हाथ मिलाया है। वहीं फिलहाल यहां हम आपको सेल में मिलने वाली शानदार Smartwatch और Smart Band के बारे में बता रहे हैं। बता दें कि स्मार्टवॉच और स्मार्ट बैंड की डिमांड आजकल काफी बढ़ गई है। इस खास डिवाइस की मदद से आप हार्ट रेट, SpOदो, स्लीप टाइम जैसी कई हेल्थ से जुड़ी ट्रैकिंग कर सकते हैं। आइये, आगे ऑफर की डिटेल जानते हैं। Amazfit T-Rex दो एक मजबूत स्मार्टवॉच है, जो गोल डायल के साथ आती है। यह रीयल-टाइम नेविगेशन, एक सौ पचास से ज्यादा स्पोर्ट्स मोड, हार्ट रेट ट्रैकिंग, SpOदो, स्लीप टाइम जैसे कई फीचर्स प्रदान करती है। वॉच में दसATM वाटरप्रूफ तकनीक मिलती है और यह चौबीस दिन की बैटरी लाइफ प्रदान करती है। कीमत की बात करें तो फिलहाल वॉच पर सात,शून्य रुपयापये का डिस्काउंट मिल रहा है। इसकी कीमत अब इक्कीस,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये से सीधा चौदह,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये हो गई है। अगर आप एक सस्ती स्मार्टवॉच लेना चाहते हैं तो नॉइज़ कलरफिट पल्स ग्रैंड एक बढ़िया विकल्प है। इसकी पॉकेट-फ्रेंडली कीमत के बावजूद यह आपको कई फीचर्स प्रदान करती है। जैसे स्पोर्ट्स मोड, हार्ट रेट ट्रैकिंग, SpOदो, स्लीप टाइम आदि। वहीं फिलहाल वॉच डिस्काउंट के आपको केवल नौ सौ निन्यानवे रुपया में मिल जाएगी। जिसकी असल कीमत तीन,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है। अगर आपका बजट कुछ ज्यादा है तो आप एप्पल वॉच एसई को भी चुन सकते हैं। यह एप्पल की एक किफायती पेशकश है, जो कई खास फीचर्स से लैस है। वॉच में स्पोर्ट्स मोड, हार्ट रेट ट्रैकिंग, SpOदो, स्लीप टाइम जैसे फीचर्स दिए गए हैं। इसमें फॉल डिटेक्शन और इमरजेंसी एसओएस फीचर्स भी मिलता है। कीमत की बात करें तो मौजूदा सेल में यह वॉच आपको सत्ताईस,नौ सौ रुपयापये में मिल जाएगी। जिसकी असल कीमत छत्तीस,नौ सौ रुपयापये है। अगर आप स्मार्ट वॉच की जगह स्मार्ट बैंड लेना चाहते हैं तो Xiaomi Mi स्मार्ट बैंड छः काफी सस्ते में मिल रहा है। इसमें एक बड़ा AMOLED डिस्प्ले मौजूद है, जो आपको कई हेल्थ मेट्रिक्स आसानी से प्रदान करता है। कीमत की बात करें तो यह बैंड सेल में केवल दो,चार सौ निन्यानवे रुपयापये में मिल रहा है। जिसकी कीमत तीन,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है। Redmi स्मार्ट बैंड प्रो एक शानदार डिवाइस है, इसमें भी यूजर्स को बढ़िया हेल्थ ट्रैकिंग फीचर्स मिलते हैं। खास बात यह है कि यह दिखने में भी वॉच की तरह की लगता है। यूजर्स को इसमें ऑलवेज ऑन अमोलेड डिस्प्ले मिलता है। कीमत की बात करें तो यह बैंड आपको सेल में केवल दो,दो सौ निन्यानवे रुपयापये में मिल जाएगा। जिसकी कीमत पाँच,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये हुआ करती थी।
नीति आयोग की निगरानी में देश के पहले मॉडल ब्लाक के रूप में विकसित हो रहे वाराणसी के सेवापुरी के आंगनबाड़ी केंद्रों को अत्याधुनिक रूप देने के लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सोमवार को तीन दिवसीय दौरे पर वाराणसी आएंगी। इस दौरान वे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से भी संवाद करेंगी। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
नीति आयोग की निगरानी में देश के पहले मॉडल ब्लाक के रूप में विकसित हो रहे वाराणसी के सेवापुरी के आंगनबाड़ी केंद्रों को अत्याधुनिक रूप देने के लिए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सोमवार को तीन दिवसीय दौरे पर वाराणसी आएंगी। इस दौरान वे स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से भी संवाद करेंगी। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
देश की राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) का तीन दिवसीय मंथन शिविर का सोमवार को पहला दिन रहा। संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने पहले दिन ही कांग्रेस को लकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई में कांग्रेस की भूमिका काबिले-तारीफ रही है। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर विचार रखते हुए केंद्र की मोदी सरकार को बिना नाम लिए दो बड़े संदेश भी दिए हैं। मोहन भागवत ने इस दौरान संघ की कार्यप्रणाली की जानकारी देने के साथ ही उन मसलों पर भी राय रखी, जिनकी वजह से संघ पर सवाल उठाए जाते हैं। मोहन भागवत ने बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उन बातों का जवाब दिया, जिसमें कहा गया कि पिछले पिछले 60 सालों में देश में कोई काम नहीं हुआ है। भागवत ने कहा कि आजादी की लड़ाई में कांग्रेस की अहम भूमिका रही जो तारीफ के काबिल है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की बदौलत देश की स्वतंत्रता के लिए सारे देश में एक आंदोलन खड़ा हुआ और देश को आजादी मिली। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस ने देश में काम किया है। बता दें कि मोहन भागवत ने इस दौरान लोगों के साथ सीधा सवांद करते हुए कहा कि संघ न ही तानाशाह है और न ही किसी को रिमोट से चलाता है। यह बात उन्होंने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को स्पष्ट करने के साथ ही संघ की तानाशाह और रिमोट कंट्रोल वाली छवि बनाने वालों को बताते हुए कही। उन्होंने कहा कि संघ के कदम-कदम पर सामूहिकता है और उसके स्वंयसेवक अपना कार्यक्षेत्र स्वंय चुनते हैं, संघ का इसमें कोई हाथ नहीं होता। उन्होंने कहा कि समन्वय बैठक में संघ अपने एक लाख 70 हजार से ज्यादा प्रकल्पों से जुड़े लोगों की चिंता करता है। तीन दिवसीय मंथन शिविर के पहले दिन संघ प्रमुख ने साफ कर दिया कि संघ को समझने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि सारी दुनिया में चर्चा है कि संघ शक्ति के रूप में देश में उपस्थित है, तो इसके बारे में पता भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ के संस्थापक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार को जाने बिना संघ को समझना मुश्किल है। मोहन भागवत ने कहा कि कांग्रेस के रूप में देश की स्वतंत्रता के लिए सारे में देश में एक आंदोलन खड़ा हुआ, जिसके अनेक सर्वस्वत्यागी महापुरूषों की प्रेरणा आज भी लोगों के जीवन को प्रेरित करती है। इस दौरान उन्होंने कहा कि 1857 के बाद देश को स्वतंत्र कराने के लिए अनके प्रयास हुए, जिनको मुख्य रूप से चार धाराओं में रखा जाता है। कांग्रेस के संदर्भ में उन्होंने कहा कि एक धारा का यह मानना था कि अपने देश के लोगों में राजनीतिक समझादीर कम है, सत्ता किसकी है, इसका महत्व क्या है, कम लोग जानते हैं और इसीलिए लोगों को राजनीतिक रूप से जागृत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसलिए कांग्रेस के रूप में बड़ा आंदोलन सारे देश में खड़ा हुआ, इस धारा ने स्वतंत्रता प्राप्ति में एक बड़ा योगदान दिया है।
देश की राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का तीन दिवसीय मंथन शिविर का सोमवार को पहला दिन रहा। संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने पहले दिन ही कांग्रेस को लकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई में कांग्रेस की भूमिका काबिले-तारीफ रही है। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर विचार रखते हुए केंद्र की मोदी सरकार को बिना नाम लिए दो बड़े संदेश भी दिए हैं। मोहन भागवत ने इस दौरान संघ की कार्यप्रणाली की जानकारी देने के साथ ही उन मसलों पर भी राय रखी, जिनकी वजह से संघ पर सवाल उठाए जाते हैं। मोहन भागवत ने बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उन बातों का जवाब दिया, जिसमें कहा गया कि पिछले पिछले साठ सालों में देश में कोई काम नहीं हुआ है। भागवत ने कहा कि आजादी की लड़ाई में कांग्रेस की अहम भूमिका रही जो तारीफ के काबिल है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की बदौलत देश की स्वतंत्रता के लिए सारे देश में एक आंदोलन खड़ा हुआ और देश को आजादी मिली। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस ने देश में काम किया है। बता दें कि मोहन भागवत ने इस दौरान लोगों के साथ सीधा सवांद करते हुए कहा कि संघ न ही तानाशाह है और न ही किसी को रिमोट से चलाता है। यह बात उन्होंने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को स्पष्ट करने के साथ ही संघ की तानाशाह और रिमोट कंट्रोल वाली छवि बनाने वालों को बताते हुए कही। उन्होंने कहा कि संघ के कदम-कदम पर सामूहिकता है और उसके स्वंयसेवक अपना कार्यक्षेत्र स्वंय चुनते हैं, संघ का इसमें कोई हाथ नहीं होता। उन्होंने कहा कि समन्वय बैठक में संघ अपने एक लाख सत्तर हजार से ज्यादा प्रकल्पों से जुड़े लोगों की चिंता करता है। तीन दिवसीय मंथन शिविर के पहले दिन संघ प्रमुख ने साफ कर दिया कि संघ को समझने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि सारी दुनिया में चर्चा है कि संघ शक्ति के रूप में देश में उपस्थित है, तो इसके बारे में पता भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ के संस्थापक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार को जाने बिना संघ को समझना मुश्किल है। मोहन भागवत ने कहा कि कांग्रेस के रूप में देश की स्वतंत्रता के लिए सारे में देश में एक आंदोलन खड़ा हुआ, जिसके अनेक सर्वस्वत्यागी महापुरूषों की प्रेरणा आज भी लोगों के जीवन को प्रेरित करती है। इस दौरान उन्होंने कहा कि एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के बाद देश को स्वतंत्र कराने के लिए अनके प्रयास हुए, जिनको मुख्य रूप से चार धाराओं में रखा जाता है। कांग्रेस के संदर्भ में उन्होंने कहा कि एक धारा का यह मानना था कि अपने देश के लोगों में राजनीतिक समझादीर कम है, सत्ता किसकी है, इसका महत्व क्या है, कम लोग जानते हैं और इसीलिए लोगों को राजनीतिक रूप से जागृत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसलिए कांग्रेस के रूप में बड़ा आंदोलन सारे देश में खड़ा हुआ, इस धारा ने स्वतंत्रता प्राप्ति में एक बड़ा योगदान दिया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तरफ से राज्यसभा में पेश किए गए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 में ये भी कहा गया है कि लोकसभा में जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश से पांच सीटें होंगी, जबकि लद्दाख में एक सीट होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से जम्मू-कश्मीर के प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ बैठक बुलाई गई है. इसमें राजनीतिक दलों की तरफ से 5 अगस्त 2019 के पहले की तरह विशेष राज्य की स्थिति का दर्जा बहाल रखने की मांग पर चर्चा की जाएगी, लेकिन पूर्ण राज्य के दर्जे का सवाल सीधे तौर पर जम्मू-कश्मीर में चल रही सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया से जुड़ा है. जानिए परिसीमन का क्या अर्थ है और इसे वर्तमान संदर्भ में एक विवादास्पद विषय के रूप में क्यों देखा जाता है. चुनाव अधिकारियों के अनुसार परिसीमन एक विधायी निकाय वाले देश या प्रांत में क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा या सीमा तय करने की प्रक्रिया है. वैसे भारत में परिसीमन का एक विवादित इतिहास रहा है. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 81 कहता है कि लोकसभा में सीटों को अलग-अलग राज्यों के बीच इस तरह से आवंटित किया जाना चाहिए कि उस संख्या और राज्य की जनसंख्या के बीच का अनुपात, जहां तक व्यावहारिक हो सभी राज्यों के लिए समान हो. हर राज्य में क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों के रूप में संविधान कहता है कि उन्हें इस तरह से विभाजित किया जाएगा कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र की जनसंख्या और उसे आवंटित सीटों की संख्या के बीच का अनुपात, जहां तक व्यावहारिक हो, पूरे राज्य में समान हो. लेकिन जनसंख्या परिवर्तन के अधीन है और इसलिए जनसंख्या की आवधिक समीक्षा और विभिन्न विधायी और निर्वाचित निकायों को सीटों के आवंटन में उपयुक्त समायोजन होना चाहिए. परिसीमन का काम देश में एक परिसीमन आयोग की तरफ से किया जाता है. देश में अब तक चार बार परिसीमन हो चुका है. पहली बार 1952, दूसरी बार 1963, तीसरी बार 1973 और चौथी बार 2002 में. ये जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से किया गया था, क्योंकि जिन राज्यों को परिवार नियोजन योजनाओं को आगे बढ़ाने में कम सफलता मिली उनके पास विधायकों की बड़ी संख्या हुई, वहीं जनसंख्या वृद्धि को कंट्रोल करने वाले राज्यों के पास कम विधायक हुए. क्या जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे का मतलब अलग परिसीमन था? इसका जवाब हां और ना दोनों है. जहां तक लोकसभा सीटों का सवाल है, जम्मू-कश्मीर के लिए परिसीमन अन्य राज्यों के साथ हुआ, लेकिन विधानसभा सीटों का सीमांकन उस अलग संविधान के अनुसार किया गया जो जम्मू-कश्मीर को अपनी विशेष स्थिति के आधार पर मिला था. लेकिन अनुच्छेद 370, जिसने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया था अब निरस्त हो गया है. जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों में कोई समायोजन नहीं हुआ, जब 2002 और 2008 के बीच देश भर में अंतिम परिसीमन अभ्यास आयोजित किया गया था. जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खोने और केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से बनाने के लिए एक परिसीमन आयोग का गठन किया गया था. जम्मू और कश्मीर 19 जून 2018 से केंद्रीय शासन के अधीन है. क्या परिसीमन के बाद संख्या बढ़ेगी? 2019 की रिपोर्ट से पहले केंद्र ने कहा था कि जम्मू और कश्मीर के केंद्रशासित प्रदेश की विधानसभा में सीटों की संख्या 107 से बढ़ाकर 114 की जाएगी. तब विधानसभा की प्रभावी ताकत 87 थी, जिसमें लद्दाख में आने वाली चार सीटें शामिल थीं. वहीं लद्दाख अब विधायिका के बिना एक अलग केंद्र शासित प्रदेश है. विधानसभा की चौबीस सीटें खाली रह गई हैं, क्योंकि वो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के अंतर्गत आती हैं.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की तरफ से राज्यसभा में पेश किए गए जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, दो हज़ार उन्नीस में ये भी कहा गया है कि लोकसभा में जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश से पांच सीटें होंगी, जबकि लद्दाख में एक सीट होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से जम्मू-कश्मीर के प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ बैठक बुलाई गई है. इसमें राजनीतिक दलों की तरफ से पाँच अगस्त दो हज़ार उन्नीस के पहले की तरह विशेष राज्य की स्थिति का दर्जा बहाल रखने की मांग पर चर्चा की जाएगी, लेकिन पूर्ण राज्य के दर्जे का सवाल सीधे तौर पर जम्मू-कश्मीर में चल रही सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया से जुड़ा है. जानिए परिसीमन का क्या अर्थ है और इसे वर्तमान संदर्भ में एक विवादास्पद विषय के रूप में क्यों देखा जाता है. चुनाव अधिकारियों के अनुसार परिसीमन एक विधायी निकाय वाले देश या प्रांत में क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा या सीमा तय करने की प्रक्रिया है. वैसे भारत में परिसीमन का एक विवादित इतिहास रहा है. भारतीय संविधान का अनुच्छेद इक्यासी कहता है कि लोकसभा में सीटों को अलग-अलग राज्यों के बीच इस तरह से आवंटित किया जाना चाहिए कि उस संख्या और राज्य की जनसंख्या के बीच का अनुपात, जहां तक व्यावहारिक हो सभी राज्यों के लिए समान हो. हर राज्य में क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों के रूप में संविधान कहता है कि उन्हें इस तरह से विभाजित किया जाएगा कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र की जनसंख्या और उसे आवंटित सीटों की संख्या के बीच का अनुपात, जहां तक व्यावहारिक हो, पूरे राज्य में समान हो. लेकिन जनसंख्या परिवर्तन के अधीन है और इसलिए जनसंख्या की आवधिक समीक्षा और विभिन्न विधायी और निर्वाचित निकायों को सीटों के आवंटन में उपयुक्त समायोजन होना चाहिए. परिसीमन का काम देश में एक परिसीमन आयोग की तरफ से किया जाता है. देश में अब तक चार बार परिसीमन हो चुका है. पहली बार एक हज़ार नौ सौ बावन, दूसरी बार एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ, तीसरी बार एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर और चौथी बार दो हज़ार दो में. ये जनसंख्या नियंत्रण को प्रोत्साहित करने की दृष्टि से किया गया था, क्योंकि जिन राज्यों को परिवार नियोजन योजनाओं को आगे बढ़ाने में कम सफलता मिली उनके पास विधायकों की बड़ी संख्या हुई, वहीं जनसंख्या वृद्धि को कंट्रोल करने वाले राज्यों के पास कम विधायक हुए. क्या जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे का मतलब अलग परिसीमन था? इसका जवाब हां और ना दोनों है. जहां तक लोकसभा सीटों का सवाल है, जम्मू-कश्मीर के लिए परिसीमन अन्य राज्यों के साथ हुआ, लेकिन विधानसभा सीटों का सीमांकन उस अलग संविधान के अनुसार किया गया जो जम्मू-कश्मीर को अपनी विशेष स्थिति के आधार पर मिला था. लेकिन अनुच्छेद तीन सौ सत्तर, जिसने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया था अब निरस्त हो गया है. जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों में कोई समायोजन नहीं हुआ, जब दो हज़ार दो और दो हज़ार आठ के बीच देश भर में अंतिम परिसीमन अभ्यास आयोजित किया गया था. जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खोने और केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से बनाने के लिए एक परिसीमन आयोग का गठन किया गया था. जम्मू और कश्मीर उन्नीस जून दो हज़ार अट्ठारह से केंद्रीय शासन के अधीन है. क्या परिसीमन के बाद संख्या बढ़ेगी? दो हज़ार उन्नीस की रिपोर्ट से पहले केंद्र ने कहा था कि जम्मू और कश्मीर के केंद्रशासित प्रदेश की विधानसभा में सीटों की संख्या एक सौ सात से बढ़ाकर एक सौ चौदह की जाएगी. तब विधानसभा की प्रभावी ताकत सत्तासी थी, जिसमें लद्दाख में आने वाली चार सीटें शामिल थीं. वहीं लद्दाख अब विधायिका के बिना एक अलग केंद्र शासित प्रदेश है. विधानसभा की चौबीस सीटें खाली रह गई हैं, क्योंकि वो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के अंतर्गत आती हैं.
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनर आकाश चोपड़ा (Aakash Chopra) ने आगामी इंडियन प्रीमियर लीग 2020 (IPL 2020) में विराट कोहली (Virat Kohli) की अगुआई वाली रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर टीम की कमजोरी ढूढ ली है। आकाश का मानना है कि पिछले साल खिलाड़ियों की नीलामी में आरसीबी सेलेक्टर्स से बहुत बड़ी चूक हुई। आकाश ने आरसीबी की बैटिंग लाइनअप के बारे में कहा कि शिवम दूबे, क्रिस मॉरिस, वाशिंगटन सुंदर और मोइन अली को शामिल करने के साथ फिनिशर की समस्या को दूर करने में सफल रही है। केकेआर के इस पूर्व बल्लेबाज ने कहा, ' आरसीबी की सबसे बड़ी समस्या डेथ ओवर में बैटिंग है। यदि एबी डीविलियर्स और विराट कोहली अंत तक क्रीज पर मौजूद रहते हैं तब तो ठीक है लेकिन जब ये नहीं होंगे तो कौन होगा? यह चिंता का विषय हो सकता है। हालांकि यह पहले से बेहतर है क्योंकि उनके पास मोइन अली, शिवम दूबे, वाशिंगटन सुंदर और क्रिस मॉरिस हैं। दूबे और सुंदर ने इंडिया के लिए अच्छा किया है। इन्होंने रन भी बनाए हैं। उन्हें मोइन अली को लोअर ऑर्डर में खिलाना चाहिए।
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व ओपनर आकाश चोपड़ा ने आगामी इंडियन प्रीमियर लीग दो हज़ार बीस में विराट कोहली की अगुआई वाली रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर टीम की कमजोरी ढूढ ली है। आकाश का मानना है कि पिछले साल खिलाड़ियों की नीलामी में आरसीबी सेलेक्टर्स से बहुत बड़ी चूक हुई। आकाश ने आरसीबी की बैटिंग लाइनअप के बारे में कहा कि शिवम दूबे, क्रिस मॉरिस, वाशिंगटन सुंदर और मोइन अली को शामिल करने के साथ फिनिशर की समस्या को दूर करने में सफल रही है। केकेआर के इस पूर्व बल्लेबाज ने कहा, ' आरसीबी की सबसे बड़ी समस्या डेथ ओवर में बैटिंग है। यदि एबी डीविलियर्स और विराट कोहली अंत तक क्रीज पर मौजूद रहते हैं तब तो ठीक है लेकिन जब ये नहीं होंगे तो कौन होगा? यह चिंता का विषय हो सकता है। हालांकि यह पहले से बेहतर है क्योंकि उनके पास मोइन अली, शिवम दूबे, वाशिंगटन सुंदर और क्रिस मॉरिस हैं। दूबे और सुंदर ने इंडिया के लिए अच्छा किया है। इन्होंने रन भी बनाए हैं। उन्हें मोइन अली को लोअर ऑर्डर में खिलाना चाहिए।
सैमसंग गैलेक्सी एस9, एस9 प्लस उपयोगकर्ता एक नया अपडेट देखेंगे जो फोन पर अधिक एआर इमोजिस जोड़ता है। कंपनी ने ओटीए अपडेट के माध्यम से वन टाइम स्क्रीन रिप्लेसमेंट और ड्यूल VoLTE को पेश कर दिया है। सैमसंग ने गैलेक्सी एस9 और एस9 प्लस स्मार्टफोन के लिए भावनाओं को व्यक्त करने के लिए संदेशों में इस्तेमाल किए जा सकने वाले अनुकूलन एनिमेटेड स्टिकर 18 एआर इमोजिस का एक नया सेट लॉन्च किया है। लॉन्च के साथ, गैलेक्सी एस9 और एस9 प्लस पर उपलब्ध एआर इमोजिस की कुल संख्या 36 हो गई है। नए एआर इमोजीस प्राप्त करने के लिए, उपयोगकर्ताओं को स्मार्टफोन के कैमरे ऐप को अपडेट करने की आवश्यकता होगी जो अब 'माय ऐप्स' में उपलब्ध है। दक्षिण कोरियाई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा, "सैमसंग ने एआर इमोजी बनने पर स्वचालित रूप से जेनरेट किए गए एनिमेटेड स्टिकर की संख्या को दोगुना करके अपने आंतरिक स्वयं को व्यक्त करना भी आसान बना दिया है।" कंपनी ने कहा कि आने वाले महीनों में यह 18 और अभिव्यक्तियों को जोड़ने की भी योजना है," जो फीचर की कुल संख्या को कैप्चरिंग स्टिकर विकल्पों को 54 तक लाएगा।" भारत-केंद्रित नवाचार के एक हिस्से के रूप में, सैमसंग ने गैलेक्सी एस9 जोड़ी में दो अन्य फीचर्स भी लॉन्च किए। इनमें शामिल हैं - ड्यूल VoLTE फीचर और एक नया वन-टाइम स्क्रीन प्रतिस्थापन प्रस्ताव। उपभोक्ताओं को (ओटीए) अद्यतन के माध्यम से ड्यूल VoLTE फीचर प्राप्त होगा। इस सुविधा के साथ, गैलेक्सी एस9 और एस9 प्लस उपयोगकर्ताओं के पास एक साथ दो VoLTE नेटवर्क से जुड़ने का विकल्प होगा और डेटा नेटवर्क का चयन कर सकते हैं जो उनकी ज़रूरत के अनुरूप है। एक बार स्क्रीन प्रतिस्थापन प्रस्ताव का लाभ उठाने के लिए, गैलेक्सी एस9 और एस9 प्लस उपभोक्ताओं को नौ महीने की अवधि के लिए अपनी स्क्रीन बदलने के लिए 1,999 रुपये का भुगतान करना होगा। यह प्रस्ताव 1 जून से 30 जून तक मान्य है।
सैमसंग गैलेक्सी एसनौ, एसनौ प्लस उपयोगकर्ता एक नया अपडेट देखेंगे जो फोन पर अधिक एआर इमोजिस जोड़ता है। कंपनी ने ओटीए अपडेट के माध्यम से वन टाइम स्क्रीन रिप्लेसमेंट और ड्यूल VoLTE को पेश कर दिया है। सैमसंग ने गैलेक्सी एसनौ और एसनौ प्लस स्मार्टफोन के लिए भावनाओं को व्यक्त करने के लिए संदेशों में इस्तेमाल किए जा सकने वाले अनुकूलन एनिमेटेड स्टिकर अट्ठारह एआर इमोजिस का एक नया सेट लॉन्च किया है। लॉन्च के साथ, गैलेक्सी एसनौ और एसनौ प्लस पर उपलब्ध एआर इमोजिस की कुल संख्या छत्तीस हो गई है। नए एआर इमोजीस प्राप्त करने के लिए, उपयोगकर्ताओं को स्मार्टफोन के कैमरे ऐप को अपडेट करने की आवश्यकता होगी जो अब 'माय ऐप्स' में उपलब्ध है। दक्षिण कोरियाई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा, "सैमसंग ने एआर इमोजी बनने पर स्वचालित रूप से जेनरेट किए गए एनिमेटेड स्टिकर की संख्या को दोगुना करके अपने आंतरिक स्वयं को व्यक्त करना भी आसान बना दिया है।" कंपनी ने कहा कि आने वाले महीनों में यह अट्ठारह और अभिव्यक्तियों को जोड़ने की भी योजना है," जो फीचर की कुल संख्या को कैप्चरिंग स्टिकर विकल्पों को चौवन तक लाएगा।" भारत-केंद्रित नवाचार के एक हिस्से के रूप में, सैमसंग ने गैलेक्सी एसनौ जोड़ी में दो अन्य फीचर्स भी लॉन्च किए। इनमें शामिल हैं - ड्यूल VoLTE फीचर और एक नया वन-टाइम स्क्रीन प्रतिस्थापन प्रस्ताव। उपभोक्ताओं को अद्यतन के माध्यम से ड्यूल VoLTE फीचर प्राप्त होगा। इस सुविधा के साथ, गैलेक्सी एसनौ और एसनौ प्लस उपयोगकर्ताओं के पास एक साथ दो VoLTE नेटवर्क से जुड़ने का विकल्प होगा और डेटा नेटवर्क का चयन कर सकते हैं जो उनकी ज़रूरत के अनुरूप है। एक बार स्क्रीन प्रतिस्थापन प्रस्ताव का लाभ उठाने के लिए, गैलेक्सी एसनौ और एसनौ प्लस उपभोक्ताओं को नौ महीने की अवधि के लिए अपनी स्क्रीन बदलने के लिए एक,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये का भुगतान करना होगा। यह प्रस्ताव एक जून से तीस जून तक मान्य है।
सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी को लेकर पुलिस लगातार अपनी जांच में लगी हुई है। पुलिस ने अब तक करीब 28 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। हाल ही में उनकी आखिरी कोस्टार रहीं संजना सांघी का बयान पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था। हाल ही में एक्ट्रेस ने 'दिल बेचारा' फिल्म का एक सीन शेयर किया तस्वीर फिल्म के शूटिंग लोकेशन जमशेदपुर की है. फिल्म के इस नए स्टिल में सुशांत स्पोर्ट्स जर्सी पहने मुस्कुराते नजर आ रहे हैं. वहीं संजना यलो टॉप में मुस्कुराती देखी जा सकती हैं. उनके नाक में ऑक्सीजन ट्यूब भी लगा हुआ है. दोनों की यह तस्वीर काफी शानदार है. संजना ने लिखा- 'ओए? तुम्हारे गंदे जोक्स पर मुझे तब तक हंसना है जब तक कि मेरे पेट में दर्द नहीं हो जाता. हैम एंड चीज ऑमलेट खाने में और चाय पीने में तुम्हारे साथ कंपटीशन लगानी है. जब तुम कहते थे- चल ना थोड़ा डांस करते हैं, वो भी किसी टफ सीन के बीच. युवल नोआ हरारी और फ्रयूड की किताबों पर हमारी सोच को लेकर बहस करनी है. '.
सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी को लेकर पुलिस लगातार अपनी जांच में लगी हुई है। पुलिस ने अब तक करीब अट्ठाईस लोगों के बयान दर्ज किए हैं। हाल ही में उनकी आखिरी कोस्टार रहीं संजना सांघी का बयान पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था। हाल ही में एक्ट्रेस ने 'दिल बेचारा' फिल्म का एक सीन शेयर किया तस्वीर फिल्म के शूटिंग लोकेशन जमशेदपुर की है. फिल्म के इस नए स्टिल में सुशांत स्पोर्ट्स जर्सी पहने मुस्कुराते नजर आ रहे हैं. वहीं संजना यलो टॉप में मुस्कुराती देखी जा सकती हैं. उनके नाक में ऑक्सीजन ट्यूब भी लगा हुआ है. दोनों की यह तस्वीर काफी शानदार है. संजना ने लिखा- 'ओए? तुम्हारे गंदे जोक्स पर मुझे तब तक हंसना है जब तक कि मेरे पेट में दर्द नहीं हो जाता. हैम एंड चीज ऑमलेट खाने में और चाय पीने में तुम्हारे साथ कंपटीशन लगानी है. जब तुम कहते थे- चल ना थोड़ा डांस करते हैं, वो भी किसी टफ सीन के बीच. युवल नोआ हरारी और फ्रयूड की किताबों पर हमारी सोच को लेकर बहस करनी है. '.
एमएस धोनी (MS Dhoni). ये नाम अब चलता फिरता क्रिकेट स्कूल है. जहां भी जाते हैं धोनी, खेलते हैं धोनी, अपनी छाप छोड़ते हैं. ठीक वैसे ही जैसे 21 साल के ऑलराउंडर मोक्ष मुर्गई (Moksh Murgai) पर छोड़ा है. वर्ल्ड क्रिकेट में जो शॉट धोनी का ट्रेडमार्क बना, जिस शॉट ने 2011 वर्ल्ड कप में भारत के फाइनल फतह के स्क्रिप्ट की आखिरी लाइन लिखी थी, उसी शॉट को देखकर जवां हुए, क्रिकेट खेलना सीखा मोक्ष मुर्गई ने. धोनी (Dhoni) विकेटकीपर बल्लेबाज हैं और मोक्ष उनसे प्रेरणा लेकर बैटिंग ऑलराउंडर बने. वो गेंद पर बल्ले से प्रहार करना भी जानते हैं और फिर उसी गेंद से विरोधी बल्लेबाजों के विकेट उखाड़ना भी. 21 साल के मोक्ष स्टेट लेवल क्रिकेट के उभरते सितारे हैं. उन्होंने अंडर-14, अंडर-16 और अंडर-19 कैटेगरी में डिस्ट्रिक्ट और इंटरजोनल स्तर पर क्रिकेट खेल रखा है. डोमेस्टिक लेवल पर धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने 30 से ज्यादा शतक, 50 से अधिक अर्धशतक और 250 प्लस विकेट चटकाए हैं. साल 2018 में मोक्ष मुर्गई इंटनेशनल स्कूल प्रीमियर लीग में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं, जिसमें साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और जिम्बाब्वे की टीमों ने भी हिस्सा लिया था. अब भई जो धोनी के क्रिकेट को देखकर बड़ा होगा. उनके खेल को फॉलो करेगा. वो धमाकेदार तो खेलेगा ही. लेकिन, ऐसा भी नहीं है कि 21 साल के ऑलराउंडर मोक्ष के लिए सारी चीजें आसानी से होती गईं. हर क्रिकेटर की तरह मोक्ष भी इंजरी के शिकार हुए. बैक इंजरी की वजह से मैदान से दूर रहने को कह दिया गया था. लेकिन, अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने चोट को महज कुछ ही महीनों में रफूचक्कर कर दोबारा मैदान पर लौट आए. लॉकडाउन में उन्होंने घर की छत्त को ही अपना प्रैक्टिस जोन बना लिया, जहां वो हर रोज 4 से 5 घंटे बल्लेबाजी का अभ्यास किया करते. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़े और DUSU के खेल अध्यक्ष रहे मोक्ष DDCA League 2018 में शिरकत कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपने ऑलराउंड खेल से सभी को चौंकाया था. मोक्ष ने उस टूर्नामेंट में 1200 से ज्यादा रन और 20 से ज्यादा विकेट उखाड़े थे. आशीष नेहरा एकेडमी से क्रिकेट की बारीकियां सीखने वाले मोक्ष रेलवे की अंडर-23 रणजी टीम के कैंप का भी हिस्सा बन चुके हैं. दाएं हाथ के बल्लेबाज और गेंदबाज का सपना धोनी की तरह बनना है. उनकी कप्तानी में IPL खेलना है. उनका सपना है पीली जर्सी में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलना. इस सपने को पंख देने की उनकी कोशिशें भी जारी है. बस, इंतजार है IPL की नीलामी में मोक्ष के नाम की बोली लगने और CSK के हथौड़े के उस पर चलने की.
एमएस धोनी . ये नाम अब चलता फिरता क्रिकेट स्कूल है. जहां भी जाते हैं धोनी, खेलते हैं धोनी, अपनी छाप छोड़ते हैं. ठीक वैसे ही जैसे इक्कीस साल के ऑलराउंडर मोक्ष मुर्गई पर छोड़ा है. वर्ल्ड क्रिकेट में जो शॉट धोनी का ट्रेडमार्क बना, जिस शॉट ने दो हज़ार ग्यारह वर्ल्ड कप में भारत के फाइनल फतह के स्क्रिप्ट की आखिरी लाइन लिखी थी, उसी शॉट को देखकर जवां हुए, क्रिकेट खेलना सीखा मोक्ष मुर्गई ने. धोनी विकेटकीपर बल्लेबाज हैं और मोक्ष उनसे प्रेरणा लेकर बैटिंग ऑलराउंडर बने. वो गेंद पर बल्ले से प्रहार करना भी जानते हैं और फिर उसी गेंद से विरोधी बल्लेबाजों के विकेट उखाड़ना भी. इक्कीस साल के मोक्ष स्टेट लेवल क्रिकेट के उभरते सितारे हैं. उन्होंने अंडर-चौदह, अंडर-सोलह और अंडर-उन्नीस कैटेगरी में डिस्ट्रिक्ट और इंटरजोनल स्तर पर क्रिकेट खेल रखा है. डोमेस्टिक लेवल पर धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने तीस से ज्यादा शतक, पचास से अधिक अर्धशतक और दो सौ पचास प्लस विकेट चटकाए हैं. साल दो हज़ार अट्ठारह में मोक्ष मुर्गई इंटनेशनल स्कूल प्रीमियर लीग में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं, जिसमें साउथ अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका और जिम्बाब्वे की टीमों ने भी हिस्सा लिया था. अब भई जो धोनी के क्रिकेट को देखकर बड़ा होगा. उनके खेल को फॉलो करेगा. वो धमाकेदार तो खेलेगा ही. लेकिन, ऐसा भी नहीं है कि इक्कीस साल के ऑलराउंडर मोक्ष के लिए सारी चीजें आसानी से होती गईं. हर क्रिकेटर की तरह मोक्ष भी इंजरी के शिकार हुए. बैक इंजरी की वजह से मैदान से दूर रहने को कह दिया गया था. लेकिन, अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने चोट को महज कुछ ही महीनों में रफूचक्कर कर दोबारा मैदान पर लौट आए. लॉकडाउन में उन्होंने घर की छत्त को ही अपना प्रैक्टिस जोन बना लिया, जहां वो हर रोज चार से पाँच घंटाटे बल्लेबाजी का अभ्यास किया करते. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़े और DUSU के खेल अध्यक्ष रहे मोक्ष DDCA League दो हज़ार अट्ठारह में शिरकत कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपने ऑलराउंड खेल से सभी को चौंकाया था. मोक्ष ने उस टूर्नामेंट में एक हज़ार दो सौ से ज्यादा रन और बीस से ज्यादा विकेट उखाड़े थे. आशीष नेहरा एकेडमी से क्रिकेट की बारीकियां सीखने वाले मोक्ष रेलवे की अंडर-तेईस रणजी टीम के कैंप का भी हिस्सा बन चुके हैं. दाएं हाथ के बल्लेबाज और गेंदबाज का सपना धोनी की तरह बनना है. उनकी कप्तानी में IPL खेलना है. उनका सपना है पीली जर्सी में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलना. इस सपने को पंख देने की उनकी कोशिशें भी जारी है. बस, इंतजार है IPL की नीलामी में मोक्ष के नाम की बोली लगने और CSK के हथौड़े के उस पर चलने की.
एक बच्चे के लिए अपार्टमेंट में खेल कोने। अपने हाथों से खेल के कोने कैसे बनाएं? जब विचार करने के लिए मुख्य गुणएक बच्चे के कमरे की व्यवस्था सुरक्षा और आराम है। यहां आप एक वास्तविक शानदार द्वीप बना सकते हैं। घर के अंदर, बच्चे रोमांचक बच्चों के खेल और निर्दोष मज़ाक के लिए समय बिताने के लिए, साथ ही साथ दुनिया के बारे में जानने और पूरी तरह से विकसित करने में सक्षम होंगे। यह महत्वपूर्ण है कि बच्चा भावनात्मक और शारीरिक दोनों रूप से स्वस्थ हो। इसके लिए आपको यह सोचने की जरूरत है कि कमरे के डिजाइन में क्या होगा। स्पोर्ट्स कॉर्नर को इसका एक अभिन्न अंग माना जाता है। इसलिए, जब परिसर की योजना बनाते समय उसके लिए जगह आवंटित की जानी चाहिए। अगला, विचार करें कि एक बच्चे के लिए खेल क्षेत्र कैसे सुसज्जित किया जाए। आधुनिक चिकित्सा के अनुसार, एक बच्चे में,हड्डियों और मांसपेशियों के विकसित होने से मस्तिष्क और आंतरिक अंग सही तरीके से बनते हैं। सक्रिय आंदोलनों का मानसिक विकास पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है, विशेष रूप से मस्तिष्क कोशिकाओं की गतिविधि पर। जल्दी से पर्याप्त, बच्चा बिना सहायता के अपने पैरों पर उठना शुरू कर देगा, बैठना और क्रॉल करना सीखेगा। इसका मतलब है कि यह बच्चे के लिए एक खेल क्षेत्र से लैस करने का समय है। तैयार संरचना खरीदना आवश्यक नहीं है,जो काफी जगह ले जाएगा। आप अपने हाथों से बच्चों के खेल क्षेत्र बना सकते हैं। इसके लिए पर्याप्त चीजें उपलब्ध होंगी। विशेष रूप से, हम एक साधारण मल के बारे में बात कर रहे हैं, एक ठोस पीठ, कुशन और एक इस्त्री बोर्ड के साथ बच्चों की कुर्सी। मुख्य कार्य बच्चे के सक्रिय आंदोलनों के लिए एक प्रोत्साहन बनाना है। उसे रेंगने, तकिए से बाधाओं को दूर करने, खड़े होने और एक स्टूल पर अपने हाथों से आराम करने की जरूरत है, और इसी तरह। आप सोफे पर एक इस्त्री बोर्ड लगा सकते हैं और इस तरह की स्लाइड पर बच्चे को रोल कर सकते हैं। यह ऐसे उत्पादों की खरीद पर विचार करने के लायक है। इस तरह के एक विकास केंद्र बच्चे को पैरों और हथियारों की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करेगा। यह दृष्टि और श्रवण के विकास में भी योगदान देता है। इसके अलावा, इस परिसर का शिशु आंदोलनों के समन्वय पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस तरह के खेल उपकरण बच्चे को लंबे समय तक ऊब नहीं होने देंगे। यह 4 महीने से शिशुओं के लिए उपयुक्त है। एक संगीत की स्थिति से, एक बच्चा संगीत सुनते हुए खिलौने और बटन तक पहुंच सकता है। नौ महीने पहले तक, बच्चा पूरी तरह से बैठना सीख जाएगा। उसकी गर्दन और पीठ की मांसपेशियां धीरे-धीरे मजबूत होंगी जब वह बटन दबाने लगेगा और खिलौनों को अपनी ओर खींचेगा। पहला असली क्या हैएक बच्चे के लिए खेल सिम्युलेटर? यह एक स्विंग और एक गेंद के बारे में है। वर्तमान में, ये विशेषताएँ किसी भी परिवार के लिए उपलब्ध हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि गेंद आकार में बहुत छोटी है, और स्विंग कोर्ट यार्ड पर है। बच्चे के विकास के लिए खेल बेहद जरूरी हैं। इस मामले में, उसे बड़ा होने के लिए इंतजार करने की कोई जरूरत नहीं है। डिजाइन चुनते समय क्या विचार किया जाना चाहिए? वर्तमान में बिक्री के लिए उपलब्ध हैधातु, प्लास्टिक और लकड़ी की विविधताएं। यदि अपने आप से घर पर एक स्पोर्ट्स कॉर्नर बनाना संभव नहीं है, तो आप एक तैयार उत्पाद खरीद सकते हैं। एक नियम के रूप में, डिजाइन ढहने योग्य हैं, इसलिए उन्हें आसानी से इकट्ठा और विघटित किया जा सकता है, कमरे के एक या दूसरे स्थान पर स्थापित किया जा सकता है। बच्चों का खेल क्या हैअपार्टमेंट में कोने? यह एक बंधनेवाला फ्रेम संरचना है। पी-, टी- और एल-आकार के प्रकार हैं। यह कॉन्फ़िगरेशन पर निर्भर करता है। ऐसे निर्माण किसी भी परिसर में स्थापित किए जा सकते हैं, जिसकी छत की ऊंचाई 2.35 मीटर से अधिक है। यह तत्व औसतन 0.5-4 वर्ग मीटर है। मीटर। मामले में एक लकड़ी के खेल कोने को चुना जाता हैअपार्टमेंट में, आपको क्रॉसबार डिजाइन के व्यास और ऊंचाई पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा परिसर कमरे में आराम पैदा करने में सक्षम है। यह युवा छात्रों के लिए बहुत ही पर्यावरण के अनुकूल और कम दर्दनाक है। हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ऐसे परिसर की सतह चिकनी और यहां तक कि होनी चाहिए। घर का स्पोर्ट्स कॉर्नर एक बहुत ही कार्यात्मक डिजाइन होना चाहिए। यह आइटम बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आवश्यक है कि बच्चा कक्षाओं में रुचि न खोए। जब इस तरह के एक परिसर को खरीदना भुगतान किया जाना चाहिएधातु की चीजों की पेंटिंग पर ध्यान देना। सबसे पहले, उन्हें बच्चों के लिए सुरक्षित होना चाहिए। यह बेहतर है अगर दीवार सलाखों का विवरण, उदाहरण के लिए, स्टेनलेस स्टील से बना हो। इस मामले में, एल्यूमीनियम उपयुक्त नहीं है, क्योंकि यह झुकता है। घर के लिए बच्चों के खेल क्षेत्र को दीवार पर लगाया जा सकता है, जो फर्नीचर से मुक्त है। इस प्रकार, यह एक न्यूनतम क्षेत्र पर कब्जा कर लेगा। और क्या करना है अगर अपार्टमेंट बल्कि छोटा है और व्यावहारिक रूप से कोई खाली जगह नहीं है? इस मामले में, आप द्वार में क्रॉसबार स्थापित कर सकते हैं। आप कई गोले खरीद सकते हैं, जो यदि आवश्यक हो तो बदल जाएगा। अपार्टमेंट में स्पोर्ट्स कॉर्नर पर खरीदा जा सकता हैअलग विन्यास। यह वांछनीय है कि डिजाइन एक ट्रैम्पोलिन से सुसज्जित था। लड़कों को इस पर कूदना पसंद आएगा। ट्रम्पोलिन पर लंबे "कूद" बच्चे को स्कूल में अधिक प्लोडिंग करेंगे। इस प्रकार, घर ऊर्जा के लिए एक जगह होगी। इस मामले में, खरीद करने की सलाह दी जाती हैजटिल, फ्रेम और क्षैतिज पट्टी जो स्टेनलेस स्टील से बने होते हैं। स्वाभाविक रूप से, इस डिजाइन में सभी तत्व धातु से बने नहीं हैं। उदाहरण के लिए, रस्सी के गोले लकड़ी के बने होते हैं। खरीदने से पहले, आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इन सभी सतहों का सावधानीपूर्वक इलाज किया जाता है। अन्यथा, बच्चे को एक किरच मिल सकती है। धातु परिसर के फायदे में यह तथ्य शामिल है कि यह इकट्ठा करने के लिए अधिक सरल है, उदाहरण के लिए, इसके लकड़ी के समकक्ष इसके अलावा, उसके गोले काफी वजन का सामना कर सकते हैं। प्रशिक्षण कैसे सुरक्षित करें? इसे खरीदते समय याद रखना चाहिएअपार्टमेंट में खेल क्षेत्र। सुरक्षा प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। बुरा नहीं है फर्श चटाई खरीदें। इस प्रकार, बच्चे को चोटों और चोटों से बचाया जाएगा। यह भी याद रखना चाहिए कि पहली बार बच्चे को एक वयस्क द्वारा सुरक्षित किया जाना चाहिए। बच्चे को यह समझाना आवश्यक है कि मुख्य प्रशिक्षण से पहले "वार्मिंग अप" के लिए कई सरल अभ्यास करना आवश्यक है। इस वार्म-अप के लिए धन्यवाद, आप चोट से बच सकते हैं। यदि क्षेत्र 12 वर्ग मीटर से अधिक है। मीटर।फिर विकल्पों की एक बड़ी संख्या है। ऐसी जगह कमरे में किसी भी खेल के कोने को रखने की अनुमति देगा। मिनी-कॉम्प्लेक्स सबसे सफल विकल्प है। एक नियम के रूप में, इसके उपकरण में निम्नलिखित शामिल हैंः - जिम्नास्टिक बजता है। - ट्रापेज़। - रस्सी। - रस्सी की सीढ़ी। - स्वीडिश दीवार। इस विकल्प की अनुमानित लागत लगभग है600 डॉलर। कीमत की गणना निर्माण और निर्माताओं की सामग्री के आधार पर की जाती है। लड़कों के लिए, जटिल को एक छिद्रण बैग के साथ पूरक किया जा सकता है। लड़कियों के लिए खेलने के घर और झूले फिट होते हैं। यदि अंतरिक्ष अनुमति देता है, तो आप ट्रैम्पोलिन के लिए एक क्षेत्र का चयन कर सकते हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि यह तत्व लगभग सभी बच्चों के सपनों का विषय है। यह बेहतर है कि कॉम्प्लेक्स एक अलग गेम ज़ोन में था। इस मामले में, एक गैर-अंकन और टिकाऊ दीवार खत्म की आवश्यकता होती है। सही फिट प्लास्टर, पेंट, प्लास्टिक पैनल या कॉर्क। अधिकांश संरचनाएं, एक स्वीडिश दीवार से सुसज्जित हैं, जो फर्श और छत के बीच स्थापित है। परिसर को ऊंचाई पर समायोजित करें। रबड़ के पैरों के लिए धन्यवाद, फर्श क्षतिग्रस्त नहीं होगा। निलंबित या निलंबित छत की उपस्थिति के मामले में, उन मॉडलों को चुनना आवश्यक है जो दीवार से जुड़े होते हैं। कुछ मामलों में, एक खेल क्षेत्र स्थापित करेंअपार्टमेंट इतना आसान नहीं है। तथ्य यह है कि परिसर आयामहीन नहीं है। ज्यादातर मामलों में, नर्सरी की व्यवस्था के लिए सबसे छोटा कमरा चुना जाता है। एक नियम के रूप में, हम 10 वर्ग मीटर के क्षेत्र के बारे में बात कर रहे हैं। मीटर। इस जगह में सभी फर्नीचर और गेम तत्वों को रखने के लिए कड़ी मेहनत करना आवश्यक है। रस्सी और स्वीडिश दीवार एक कोने के न्यूनतम पूर्ण सेट में शामिल हैं। इस विकल्प की लागत को बजट कहा जा सकता है - 350 डॉलर तक। ऐसे परिसरों का बन्धन सीधे दीवार तक पहुंचाया जाता है। इस वजह से, वे अधिक स्थान पर कब्जा नहीं करेंगे। एल-आकार का कोने इष्टतम संशोधन है। यदि आवश्यक हो, तो डिजाइन निम्नलिखित तत्वों द्वारा पूरक किया जा सकता हैः - प्रेस के लिए बोर्ड। - बास्केटबॉल घेरा। - नाशपाती। - छल्ले। आप अधिक किफायती का उपयोग भी कर सकते हैंविकल्प। यह फर्नीचर का एक संयोजन है। हालांकि, इस मामले में, पैसे नहीं, बल्कि अंतरिक्ष को बचाया जाएगा। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि एक समान सेट केवल ऑर्डर करने के लिए बनाया गया है। आप सोने के क्षेत्र के लिए विभिन्न विकल्पों की कोशिश कर सकते हैं। विशेष रूप से, यह बहु-स्तरीय बिस्तर पर लागू होता है। इस मामले में, खेल और गेमिंग क्षेत्र के लिए, ऊपरी स्तर (आंशिक रूप से) और साइड एक को आवंटित किया जाता है। अनुलग्नकों को संयोजित करने की आवश्यकता है। उन्हें आवश्यकतानुसार बदला जा सकता है। उसके बारे में, सबसे पहले, आपको उस घटना को याद रखने की आवश्यकता है जोअगर अपने हाथों से एक खेल क्षेत्र बनाने की योजना है। आपको बच्चे की उम्र को भी ध्यान में रखना चाहिए। अपार्टमेंट में एक खेल क्षेत्र चुनना, आपको यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि यह यथासंभव विश्वसनीय है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि निर्माता के पास इस उत्पाद के लिए उपयुक्त प्रमाण पत्र है। फास्टनरों की विश्वसनीयता पहले जांची जाती है। धातु और लकड़ी के परिसरों को चुनना बेहतर होता है। आपको बच्चे के लिए "नरम लैंडिंग" का भी ध्यान रखना चाहिए। फर्श पर लोचदार रबर मैट होना बेहतर है। वे एक इष्टतम फर्श को कवर कर रहे हैं। मैट को सतह पर घोंसला या चिपकाया जाना चाहिए। इस प्रकार, फिसलने की संभावना को बाहर रखा जाएगा। बच्चों के कमरे का आकार वास्तव में हो सकता हैमामूली। कुछ मामलों में, सबसे छोटी दीवार लगाने की भी जगह नहीं है। फिर आप अपने खुद के स्पोर्ट्स कॉर्नर को दूसरे कमरे में रख सकते हैं। उदाहरण के लिए, गलियारे या ड्राइंग रूम का हिस्सा इन उद्देश्यों के लिए उपयुक्त है। यह केवल बच्चों की दिशा तक सीमित होने के लिए वैकल्पिक है। आप एक मिनी-हॉल से लैस कर सकते हैं। सभी परिवार के सदस्य इसे कर सकते हैं। बच्चों का परिसर वयस्कों के लिए फिट होगा। विशेष रूप से, यह धातु किट पर लागू होता है। वह 120 किग्रा तक का सामना करने में सक्षम है। खेल क्षेत्र को अतिरिक्त उपकरणों से सुसज्जित किया जाना चाहिए। आप निम्नलिखित तत्वों का उपयोग कर सकते हैंः - प्रेस के लिए बोर्ड। - "चलना" ऑर्बिट्रेक। - फोल्डेबल ट्रेडमिल।
एक बच्चे के लिए अपार्टमेंट में खेल कोने। अपने हाथों से खेल के कोने कैसे बनाएं? जब विचार करने के लिए मुख्य गुणएक बच्चे के कमरे की व्यवस्था सुरक्षा और आराम है। यहां आप एक वास्तविक शानदार द्वीप बना सकते हैं। घर के अंदर, बच्चे रोमांचक बच्चों के खेल और निर्दोष मज़ाक के लिए समय बिताने के लिए, साथ ही साथ दुनिया के बारे में जानने और पूरी तरह से विकसित करने में सक्षम होंगे। यह महत्वपूर्ण है कि बच्चा भावनात्मक और शारीरिक दोनों रूप से स्वस्थ हो। इसके लिए आपको यह सोचने की जरूरत है कि कमरे के डिजाइन में क्या होगा। स्पोर्ट्स कॉर्नर को इसका एक अभिन्न अंग माना जाता है। इसलिए, जब परिसर की योजना बनाते समय उसके लिए जगह आवंटित की जानी चाहिए। अगला, विचार करें कि एक बच्चे के लिए खेल क्षेत्र कैसे सुसज्जित किया जाए। आधुनिक चिकित्सा के अनुसार, एक बच्चे में,हड्डियों और मांसपेशियों के विकसित होने से मस्तिष्क और आंतरिक अंग सही तरीके से बनते हैं। सक्रिय आंदोलनों का मानसिक विकास पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है, विशेष रूप से मस्तिष्क कोशिकाओं की गतिविधि पर। जल्दी से पर्याप्त, बच्चा बिना सहायता के अपने पैरों पर उठना शुरू कर देगा, बैठना और क्रॉल करना सीखेगा। इसका मतलब है कि यह बच्चे के लिए एक खेल क्षेत्र से लैस करने का समय है। तैयार संरचना खरीदना आवश्यक नहीं है,जो काफी जगह ले जाएगा। आप अपने हाथों से बच्चों के खेल क्षेत्र बना सकते हैं। इसके लिए पर्याप्त चीजें उपलब्ध होंगी। विशेष रूप से, हम एक साधारण मल के बारे में बात कर रहे हैं, एक ठोस पीठ, कुशन और एक इस्त्री बोर्ड के साथ बच्चों की कुर्सी। मुख्य कार्य बच्चे के सक्रिय आंदोलनों के लिए एक प्रोत्साहन बनाना है। उसे रेंगने, तकिए से बाधाओं को दूर करने, खड़े होने और एक स्टूल पर अपने हाथों से आराम करने की जरूरत है, और इसी तरह। आप सोफे पर एक इस्त्री बोर्ड लगा सकते हैं और इस तरह की स्लाइड पर बच्चे को रोल कर सकते हैं। यह ऐसे उत्पादों की खरीद पर विचार करने के लायक है। इस तरह के एक विकास केंद्र बच्चे को पैरों और हथियारों की मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करेगा। यह दृष्टि और श्रवण के विकास में भी योगदान देता है। इसके अलावा, इस परिसर का शिशु आंदोलनों के समन्वय पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस तरह के खेल उपकरण बच्चे को लंबे समय तक ऊब नहीं होने देंगे। यह चार महीने से शिशुओं के लिए उपयुक्त है। एक संगीत की स्थिति से, एक बच्चा संगीत सुनते हुए खिलौने और बटन तक पहुंच सकता है। नौ महीने पहले तक, बच्चा पूरी तरह से बैठना सीख जाएगा। उसकी गर्दन और पीठ की मांसपेशियां धीरे-धीरे मजबूत होंगी जब वह बटन दबाने लगेगा और खिलौनों को अपनी ओर खींचेगा। पहला असली क्या हैएक बच्चे के लिए खेल सिम्युलेटर? यह एक स्विंग और एक गेंद के बारे में है। वर्तमान में, ये विशेषताएँ किसी भी परिवार के लिए उपलब्ध हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि गेंद आकार में बहुत छोटी है, और स्विंग कोर्ट यार्ड पर है। बच्चे के विकास के लिए खेल बेहद जरूरी हैं। इस मामले में, उसे बड़ा होने के लिए इंतजार करने की कोई जरूरत नहीं है। डिजाइन चुनते समय क्या विचार किया जाना चाहिए? वर्तमान में बिक्री के लिए उपलब्ध हैधातु, प्लास्टिक और लकड़ी की विविधताएं। यदि अपने आप से घर पर एक स्पोर्ट्स कॉर्नर बनाना संभव नहीं है, तो आप एक तैयार उत्पाद खरीद सकते हैं। एक नियम के रूप में, डिजाइन ढहने योग्य हैं, इसलिए उन्हें आसानी से इकट्ठा और विघटित किया जा सकता है, कमरे के एक या दूसरे स्थान पर स्थापित किया जा सकता है। बच्चों का खेल क्या हैअपार्टमेंट में कोने? यह एक बंधनेवाला फ्रेम संरचना है। पी-, टी- और एल-आकार के प्रकार हैं। यह कॉन्फ़िगरेशन पर निर्भर करता है। ऐसे निर्माण किसी भी परिसर में स्थापित किए जा सकते हैं, जिसकी छत की ऊंचाई दो दशमलव पैंतीस मीटर से अधिक है। यह तत्व औसतन शून्य.पाँच-चार वर्ग मीटर है। मीटर। मामले में एक लकड़ी के खेल कोने को चुना जाता हैअपार्टमेंट में, आपको क्रॉसबार डिजाइन के व्यास और ऊंचाई पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा परिसर कमरे में आराम पैदा करने में सक्षम है। यह युवा छात्रों के लिए बहुत ही पर्यावरण के अनुकूल और कम दर्दनाक है। हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि ऐसे परिसर की सतह चिकनी और यहां तक कि होनी चाहिए। घर का स्पोर्ट्स कॉर्नर एक बहुत ही कार्यात्मक डिजाइन होना चाहिए। यह आइटम बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आवश्यक है कि बच्चा कक्षाओं में रुचि न खोए। जब इस तरह के एक परिसर को खरीदना भुगतान किया जाना चाहिएधातु की चीजों की पेंटिंग पर ध्यान देना। सबसे पहले, उन्हें बच्चों के लिए सुरक्षित होना चाहिए। यह बेहतर है अगर दीवार सलाखों का विवरण, उदाहरण के लिए, स्टेनलेस स्टील से बना हो। इस मामले में, एल्यूमीनियम उपयुक्त नहीं है, क्योंकि यह झुकता है। घर के लिए बच्चों के खेल क्षेत्र को दीवार पर लगाया जा सकता है, जो फर्नीचर से मुक्त है। इस प्रकार, यह एक न्यूनतम क्षेत्र पर कब्जा कर लेगा। और क्या करना है अगर अपार्टमेंट बल्कि छोटा है और व्यावहारिक रूप से कोई खाली जगह नहीं है? इस मामले में, आप द्वार में क्रॉसबार स्थापित कर सकते हैं। आप कई गोले खरीद सकते हैं, जो यदि आवश्यक हो तो बदल जाएगा। अपार्टमेंट में स्पोर्ट्स कॉर्नर पर खरीदा जा सकता हैअलग विन्यास। यह वांछनीय है कि डिजाइन एक ट्रैम्पोलिन से सुसज्जित था। लड़कों को इस पर कूदना पसंद आएगा। ट्रम्पोलिन पर लंबे "कूद" बच्चे को स्कूल में अधिक प्लोडिंग करेंगे। इस प्रकार, घर ऊर्जा के लिए एक जगह होगी। इस मामले में, खरीद करने की सलाह दी जाती हैजटिल, फ्रेम और क्षैतिज पट्टी जो स्टेनलेस स्टील से बने होते हैं। स्वाभाविक रूप से, इस डिजाइन में सभी तत्व धातु से बने नहीं हैं। उदाहरण के लिए, रस्सी के गोले लकड़ी के बने होते हैं। खरीदने से पहले, आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इन सभी सतहों का सावधानीपूर्वक इलाज किया जाता है। अन्यथा, बच्चे को एक किरच मिल सकती है। धातु परिसर के फायदे में यह तथ्य शामिल है कि यह इकट्ठा करने के लिए अधिक सरल है, उदाहरण के लिए, इसके लकड़ी के समकक्ष इसके अलावा, उसके गोले काफी वजन का सामना कर सकते हैं। प्रशिक्षण कैसे सुरक्षित करें? इसे खरीदते समय याद रखना चाहिएअपार्टमेंट में खेल क्षेत्र। सुरक्षा प्रशिक्षण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। बुरा नहीं है फर्श चटाई खरीदें। इस प्रकार, बच्चे को चोटों और चोटों से बचाया जाएगा। यह भी याद रखना चाहिए कि पहली बार बच्चे को एक वयस्क द्वारा सुरक्षित किया जाना चाहिए। बच्चे को यह समझाना आवश्यक है कि मुख्य प्रशिक्षण से पहले "वार्मिंग अप" के लिए कई सरल अभ्यास करना आवश्यक है। इस वार्म-अप के लिए धन्यवाद, आप चोट से बच सकते हैं। यदि क्षेत्र बारह वर्ग मीटर से अधिक है। मीटर।फिर विकल्पों की एक बड़ी संख्या है। ऐसी जगह कमरे में किसी भी खेल के कोने को रखने की अनुमति देगा। मिनी-कॉम्प्लेक्स सबसे सफल विकल्प है। एक नियम के रूप में, इसके उपकरण में निम्नलिखित शामिल हैंः - जिम्नास्टिक बजता है। - ट्रापेज़। - रस्सी। - रस्सी की सीढ़ी। - स्वीडिश दीवार। इस विकल्प की अनुमानित लागत लगभग हैछः सौ डॉलर। कीमत की गणना निर्माण और निर्माताओं की सामग्री के आधार पर की जाती है। लड़कों के लिए, जटिल को एक छिद्रण बैग के साथ पूरक किया जा सकता है। लड़कियों के लिए खेलने के घर और झूले फिट होते हैं। यदि अंतरिक्ष अनुमति देता है, तो आप ट्रैम्पोलिन के लिए एक क्षेत्र का चयन कर सकते हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि यह तत्व लगभग सभी बच्चों के सपनों का विषय है। यह बेहतर है कि कॉम्प्लेक्स एक अलग गेम ज़ोन में था। इस मामले में, एक गैर-अंकन और टिकाऊ दीवार खत्म की आवश्यकता होती है। सही फिट प्लास्टर, पेंट, प्लास्टिक पैनल या कॉर्क। अधिकांश संरचनाएं, एक स्वीडिश दीवार से सुसज्जित हैं, जो फर्श और छत के बीच स्थापित है। परिसर को ऊंचाई पर समायोजित करें। रबड़ के पैरों के लिए धन्यवाद, फर्श क्षतिग्रस्त नहीं होगा। निलंबित या निलंबित छत की उपस्थिति के मामले में, उन मॉडलों को चुनना आवश्यक है जो दीवार से जुड़े होते हैं। कुछ मामलों में, एक खेल क्षेत्र स्थापित करेंअपार्टमेंट इतना आसान नहीं है। तथ्य यह है कि परिसर आयामहीन नहीं है। ज्यादातर मामलों में, नर्सरी की व्यवस्था के लिए सबसे छोटा कमरा चुना जाता है। एक नियम के रूप में, हम दस वर्ग मीटर के क्षेत्र के बारे में बात कर रहे हैं। मीटर। इस जगह में सभी फर्नीचर और गेम तत्वों को रखने के लिए कड़ी मेहनत करना आवश्यक है। रस्सी और स्वीडिश दीवार एक कोने के न्यूनतम पूर्ण सेट में शामिल हैं। इस विकल्प की लागत को बजट कहा जा सकता है - तीन सौ पचास डॉलर तक। ऐसे परिसरों का बन्धन सीधे दीवार तक पहुंचाया जाता है। इस वजह से, वे अधिक स्थान पर कब्जा नहीं करेंगे। एल-आकार का कोने इष्टतम संशोधन है। यदि आवश्यक हो, तो डिजाइन निम्नलिखित तत्वों द्वारा पूरक किया जा सकता हैः - प्रेस के लिए बोर्ड। - बास्केटबॉल घेरा। - नाशपाती। - छल्ले। आप अधिक किफायती का उपयोग भी कर सकते हैंविकल्प। यह फर्नीचर का एक संयोजन है। हालांकि, इस मामले में, पैसे नहीं, बल्कि अंतरिक्ष को बचाया जाएगा। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि एक समान सेट केवल ऑर्डर करने के लिए बनाया गया है। आप सोने के क्षेत्र के लिए विभिन्न विकल्पों की कोशिश कर सकते हैं। विशेष रूप से, यह बहु-स्तरीय बिस्तर पर लागू होता है। इस मामले में, खेल और गेमिंग क्षेत्र के लिए, ऊपरी स्तर और साइड एक को आवंटित किया जाता है। अनुलग्नकों को संयोजित करने की आवश्यकता है। उन्हें आवश्यकतानुसार बदला जा सकता है। उसके बारे में, सबसे पहले, आपको उस घटना को याद रखने की आवश्यकता है जोअगर अपने हाथों से एक खेल क्षेत्र बनाने की योजना है। आपको बच्चे की उम्र को भी ध्यान में रखना चाहिए। अपार्टमेंट में एक खेल क्षेत्र चुनना, आपको यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि यह यथासंभव विश्वसनीय है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि निर्माता के पास इस उत्पाद के लिए उपयुक्त प्रमाण पत्र है। फास्टनरों की विश्वसनीयता पहले जांची जाती है। धातु और लकड़ी के परिसरों को चुनना बेहतर होता है। आपको बच्चे के लिए "नरम लैंडिंग" का भी ध्यान रखना चाहिए। फर्श पर लोचदार रबर मैट होना बेहतर है। वे एक इष्टतम फर्श को कवर कर रहे हैं। मैट को सतह पर घोंसला या चिपकाया जाना चाहिए। इस प्रकार, फिसलने की संभावना को बाहर रखा जाएगा। बच्चों के कमरे का आकार वास्तव में हो सकता हैमामूली। कुछ मामलों में, सबसे छोटी दीवार लगाने की भी जगह नहीं है। फिर आप अपने खुद के स्पोर्ट्स कॉर्नर को दूसरे कमरे में रख सकते हैं। उदाहरण के लिए, गलियारे या ड्राइंग रूम का हिस्सा इन उद्देश्यों के लिए उपयुक्त है। यह केवल बच्चों की दिशा तक सीमित होने के लिए वैकल्पिक है। आप एक मिनी-हॉल से लैस कर सकते हैं। सभी परिवार के सदस्य इसे कर सकते हैं। बच्चों का परिसर वयस्कों के लिए फिट होगा। विशेष रूप से, यह धातु किट पर लागू होता है। वह एक सौ बीस किग्रा तक का सामना करने में सक्षम है। खेल क्षेत्र को अतिरिक्त उपकरणों से सुसज्जित किया जाना चाहिए। आप निम्नलिखित तत्वों का उपयोग कर सकते हैंः - प्रेस के लिए बोर्ड। - "चलना" ऑर्बिट्रेक। - फोल्डेबल ट्रेडमिल।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए उनकी तुलना मुगल बादशाह औरंगजेब से की थी. इसी कड़ी में शनिवार को अखिलेश यादव ने ट्वीट करके सीएम योगी पर पलटवार किया. अखिलेश यादव ने कहा, "मुख्यमंत्री के लिए हर पिता 'पितातुल्य' होना चाहिए, उन्नाव की बलात्कार-पीड़िता का वो बेबस पिता भी जिसको उनकी पुलिस ने मार-मार कर मार डाला. इसी प्रकार हर पुत्री 'पुत्रीतुल्य' होनी चाहिए, वो पुत्री भी जिसे काला झंडा दिखाने पर जेल की काल कोठरी में डाला गया. यही सच्चा राजधर्म है. " इससे पहले सीएम योगी ने कहा," कि जिसने अपने पिता और चाचा को कैद कर दिया था, जो अपने पिता और चाचा का नहीं हुआ, आप सबको खुद से जोड़ने की बात कर रहा है" . . . इतिहास में एक चरित्र है, जिसने अपने पिता को जेल में डाल दिया था . . . यही वजह है कि कोई मुसलमान अपने बेटे का नाम औरंगजेब नहीं रखता . . . मुझे लगता है कि सपा के साथ कुछ ऐसी ही बात जुड़ी है. ' मुख्यमंत्री के लिए हर पिता 'पितातुल्य' होना चाहिए, उन्नाव की बलात्कार-पीड़िता का वो बेबस पिता भी जिसको उनकी पुलिस ने मार-मार कर मार डाला. इसी प्रकार हर पुत्री 'पुत्रीतुल्य' होनी चाहिए, वो पुत्री भी जिसे काला झंडा दिखाने पर जेल की काल कोठरी में डाला गया. यही सच्चा राजधर्म है. .
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए उनकी तुलना मुगल बादशाह औरंगजेब से की थी. इसी कड़ी में शनिवार को अखिलेश यादव ने ट्वीट करके सीएम योगी पर पलटवार किया. अखिलेश यादव ने कहा, "मुख्यमंत्री के लिए हर पिता 'पितातुल्य' होना चाहिए, उन्नाव की बलात्कार-पीड़िता का वो बेबस पिता भी जिसको उनकी पुलिस ने मार-मार कर मार डाला. इसी प्रकार हर पुत्री 'पुत्रीतुल्य' होनी चाहिए, वो पुत्री भी जिसे काला झंडा दिखाने पर जेल की काल कोठरी में डाला गया. यही सच्चा राजधर्म है. " इससे पहले सीएम योगी ने कहा," कि जिसने अपने पिता और चाचा को कैद कर दिया था, जो अपने पिता और चाचा का नहीं हुआ, आप सबको खुद से जोड़ने की बात कर रहा है" . . . इतिहास में एक चरित्र है, जिसने अपने पिता को जेल में डाल दिया था . . . यही वजह है कि कोई मुसलमान अपने बेटे का नाम औरंगजेब नहीं रखता . . . मुझे लगता है कि सपा के साथ कुछ ऐसी ही बात जुड़ी है. ' मुख्यमंत्री के लिए हर पिता 'पितातुल्य' होना चाहिए, उन्नाव की बलात्कार-पीड़िता का वो बेबस पिता भी जिसको उनकी पुलिस ने मार-मार कर मार डाला. इसी प्रकार हर पुत्री 'पुत्रीतुल्य' होनी चाहिए, वो पुत्री भी जिसे काला झंडा दिखाने पर जेल की काल कोठरी में डाला गया. यही सच्चा राजधर्म है. .
प्रियंका ने योगी को लिखे पत्र में कहा कि आपकी सरकार ने गन्ना की कीमत घोषित की। लेकिन उसमें एक रुपये की भी वृद्धि नहीं हुई है। जबकि उर्वरक की कीमत दोगुनी हो गयी है और बिजली की कीमत भी बढी है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहा कि वह संकट का सामना कर रहे किसानों को उनकी उपज का सही दाम सुनिश्चित करायें। प्रियंका ने योगी को लिखे पत्र में कहा कि आपकी सरकार ने गन्ना की कीमत घोषित की। लेकिन उसमें एक रुपये की भी वृद्धि नहीं हुई है। जबकि उर्वरक की कीमत दोगुनी हो गयी है और बिजली की कीमत भी बढी है। किसानों की उपज की लागत बढ रही है लेकिन उनके उत्पाद का दाम नहीं बढ रहा है। प्रियंका ने कहा कि इसी तरह धान की कीमत 1,850 रुपये प्रति कुंतल तय की गयी है लेकिन धान उगाने वाले किसान भी उचित दाम नहीं हासिल कर पा रहे हैं। उन्होंने योगी से कहा कि वह संकटग्रस्त किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य सुनिश्चित करायें। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि मैं मानती हूं कि आप सकारात्मक कदम उठाएंगे। राज्य सरकार ने गन्ने का राज्य समर्थन मूल्य सामान्य किस्म के लिए 2019 - 20 पेराई सत्र में 315 रुपये प्रति कुंतल रखा है। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब योगी सरकार ने गन्ने की कीमत में बढोतरी नहीं की है।
प्रियंका ने योगी को लिखे पत्र में कहा कि आपकी सरकार ने गन्ना की कीमत घोषित की। लेकिन उसमें एक रुपये की भी वृद्धि नहीं हुई है। जबकि उर्वरक की कीमत दोगुनी हो गयी है और बिजली की कीमत भी बढी है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कहा कि वह संकट का सामना कर रहे किसानों को उनकी उपज का सही दाम सुनिश्चित करायें। प्रियंका ने योगी को लिखे पत्र में कहा कि आपकी सरकार ने गन्ना की कीमत घोषित की। लेकिन उसमें एक रुपये की भी वृद्धि नहीं हुई है। जबकि उर्वरक की कीमत दोगुनी हो गयी है और बिजली की कीमत भी बढी है। किसानों की उपज की लागत बढ रही है लेकिन उनके उत्पाद का दाम नहीं बढ रहा है। प्रियंका ने कहा कि इसी तरह धान की कीमत एक,आठ सौ पचास रुपयापये प्रति कुंतल तय की गयी है लेकिन धान उगाने वाले किसान भी उचित दाम नहीं हासिल कर पा रहे हैं। उन्होंने योगी से कहा कि वह संकटग्रस्त किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य सुनिश्चित करायें। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि मैं मानती हूं कि आप सकारात्मक कदम उठाएंगे। राज्य सरकार ने गन्ने का राज्य समर्थन मूल्य सामान्य किस्म के लिए दो हज़ार उन्नीस - बीस पेराई सत्र में तीन सौ पंद्रह रुपयापये प्रति कुंतल रखा है। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब योगी सरकार ने गन्ने की कीमत में बढोतरी नहीं की है।
हाइब्रिड सोलर एक्लिप्स पूरा हो गया है जिसे ऑस्ट्रेलिया के वेस्टर्न कोस्ट देखा गया था। दुनियाभर के कुछ हिस्सों में आज सूर्य ग्रहण देखा गया है। सूर्य ग्रहण 20 अप्रैल को सुबह 7. 06 बजे से 12. 29 बजे तक चला। इसे वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया से साफ देखा गया। ग्रहण के दौरान, चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुज़रता है। पृथ्वी पर जहां चांद की परछाई ज्यादा होती है वहां इसका अनुभव ज्यादा था। जब चंद्रमा सूर्य से ज़्यादा दूर होता है तो तो एन्युलर एकलिप्स होता है। NASA ने सुबह 8 बजे से ही ग्रहण का टेलीस्कोप व्यू लाइव किया है। अगर आप दुनिया के ऐसे हिस्से में हैं जहां हाइब्रिड सोलर एक्लिप्स नहीं देख पाए हैं तो नीचे दिए गए NASA के लाइव वीडियो में देख सकते हैं।
हाइब्रिड सोलर एक्लिप्स पूरा हो गया है जिसे ऑस्ट्रेलिया के वेस्टर्न कोस्ट देखा गया था। दुनियाभर के कुछ हिस्सों में आज सूर्य ग्रहण देखा गया है। सूर्य ग्रहण बीस अप्रैल को सुबह सात. छः बजे से बारह. उनतीस बजे तक चला। इसे वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया से साफ देखा गया। ग्रहण के दौरान, चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुज़रता है। पृथ्वी पर जहां चांद की परछाई ज्यादा होती है वहां इसका अनुभव ज्यादा था। जब चंद्रमा सूर्य से ज़्यादा दूर होता है तो तो एन्युलर एकलिप्स होता है। NASA ने सुबह आठ बजे से ही ग्रहण का टेलीस्कोप व्यू लाइव किया है। अगर आप दुनिया के ऐसे हिस्से में हैं जहां हाइब्रिड सोलर एक्लिप्स नहीं देख पाए हैं तो नीचे दिए गए NASA के लाइव वीडियो में देख सकते हैं।
पुस्तक माला भाग - 2 (दूसरी जमातै आस्तै) संपादक मंडल प्रो. चम्पा शर्मा प्रो. वीणा गुप्ता डॉ. शशि पठानिया श्री कुलदीप वैद © जम्मू कश्मीर स्टेट बोर्ड ऑफ़ स्कूल एजूकेशन, सरकारी स्कूलें च मुफ्त बंडने आस्तै चित्रकार : टी.एस. बत्रा कम्प्यूटर टाईप सैटिंग :- कोहली ग्राफिक्स, कच्ची छावनी, जम्मू। सैक्रेटरी, जम्मू-कश्मीर स्टेट बोर्ड ऑफ़ स्कूल एजूकेशन पासेआ प्रकाशत कल्याण एंटरप्राइजेस D-20 सेक्टर बी २ टोलिका दो शब्द डोगरी रियासत जम्मू-कश्मीर दी दूई प्रमुख भाशा ऐ ते जम्मू खित्ते दी मातृभाशा रियासत च विधानक तौरा पर मानता प्राप्त भाशाएं दे विकास लेई राजनैतक स्तर उप्पर प्रयास शुरू कीते गे न ते इस सिलसले च स्कूली स्तर उप्पर डोगरी भाशा गी पढ़ाने दी जिम्मेदारी रियासती स्कूली शिक्षा बोर्ड गी सौंपी गेई ऐ। बोर्ड दे इ'नें प्रयासें दे फलसरूप डोगरी पुस्तकमाला (भाग-1) पैहली जमाता लेई ते डोगरी पुस्तकमाला (भाग-2) दूसरी जमाता लेई त्यार कीतियां गेइयां न। दूसरी जमाता गितै पाठ्य-पुस्तक बनाने आलें च प्रो. चम्पा शर्मा, प्रो. वीणा गुप्ता, डॉ. शशि पठानिया ते श्री कुलदीप वैद होरें अपना सक्रिय योगदान दिंदे होई वैज्ञानिक ढंग-तरीके कन्नै इसदी पाठ्यसमग्री त्यार कीती ते इसदा संकलन कीता। इस पुस्तक गी छापने ते मजूदा सरूप देने आस्तै अपने सैहयोगियें डॉ० फारूख अहमद पीर (डायरैक्टर अकैडमिक), डॉ० यासिर हमीद सरवाल (असिस्टैंट डायरैक्टर) ते सी.डी.आर. विंग दे कर्मचारियें दी धन्नवादी आं जि'नें इस पुस्तक गी बेल्ले सिर त्यार करने च अपना पूरा सैहयोग दित्ता । संपादक मंडल दे सदस्यें दी में खास तौरा पर धन्नवादी आं, जिं दी लगन ते योगदान दे बगैर एह् पुस्तक विद्यार्थियें तगर पुज्जनी संभव नेईं ही । मिगी पूरा विश्वास ऐ जे डोगरी पुस्तक माला (भाग-2) डोगरी पढ़ने ते पढ़ाने आहले विद्यार्थियें ते अध्यापकें लेई उपयोगी सिद्ध होग। प्रो० वीणा पंडिता
पुस्तक माला भाग - दो संपादक मंडल प्रो. चम्पा शर्मा प्रो. वीणा गुप्ता डॉ. शशि पठानिया श्री कुलदीप वैद © जम्मू कश्मीर स्टेट बोर्ड ऑफ़ स्कूल एजूकेशन, सरकारी स्कूलें च मुफ्त बंडने आस्तै चित्रकार : टी.एस. बत्रा कम्प्यूटर टाईप सैटिंग :- कोहली ग्राफिक्स, कच्ची छावनी, जम्मू। सैक्रेटरी, जम्मू-कश्मीर स्टेट बोर्ड ऑफ़ स्कूल एजूकेशन पासेआ प्रकाशत कल्याण एंटरप्राइजेस D-बीस सेक्टर बी दो टोलिका दो शब्द डोगरी रियासत जम्मू-कश्मीर दी दूई प्रमुख भाशा ऐ ते जम्मू खित्ते दी मातृभाशा रियासत च विधानक तौरा पर मानता प्राप्त भाशाएं दे विकास लेई राजनैतक स्तर उप्पर प्रयास शुरू कीते गे न ते इस सिलसले च स्कूली स्तर उप्पर डोगरी भाशा गी पढ़ाने दी जिम्मेदारी रियासती स्कूली शिक्षा बोर्ड गी सौंपी गेई ऐ। बोर्ड दे इ'नें प्रयासें दे फलसरूप डोगरी पुस्तकमाला पैहली जमाता लेई ते डोगरी पुस्तकमाला दूसरी जमाता लेई त्यार कीतियां गेइयां न। दूसरी जमाता गितै पाठ्य-पुस्तक बनाने आलें च प्रो. चम्पा शर्मा, प्रो. वीणा गुप्ता, डॉ. शशि पठानिया ते श्री कुलदीप वैद होरें अपना सक्रिय योगदान दिंदे होई वैज्ञानिक ढंग-तरीके कन्नै इसदी पाठ्यसमग्री त्यार कीती ते इसदा संकलन कीता। इस पुस्तक गी छापने ते मजूदा सरूप देने आस्तै अपने सैहयोगियें डॉशून्य फारूख अहमद पीर , डॉशून्य यासिर हमीद सरवाल ते सी.डी.आर. विंग दे कर्मचारियें दी धन्नवादी आं जि'नें इस पुस्तक गी बेल्ले सिर त्यार करने च अपना पूरा सैहयोग दित्ता । संपादक मंडल दे सदस्यें दी में खास तौरा पर धन्नवादी आं, जिं दी लगन ते योगदान दे बगैर एह् पुस्तक विद्यार्थियें तगर पुज्जनी संभव नेईं ही । मिगी पूरा विश्वास ऐ जे डोगरी पुस्तक माला डोगरी पढ़ने ते पढ़ाने आहले विद्यार्थियें ते अध्यापकें लेई उपयोगी सिद्ध होग। प्रोशून्य वीणा पंडिता
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल का 20वां प्रांतीय चुनाव रविवार को लखनऊ में संपन्न हुआ। कौशाम्बी के व्यापारी नेता रमेश अग्रहरि को वरिष्ठ प्रांतीय महामंत्री चुना गया है। इसकी जानकारी होते ही व्यापारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। व्यापारियों ने मिठाई बांटी। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के 20 वें प्रांतीय चुनाव में रमेश अग्रहरि ने वरिष्ठ प्रांतीय महामंत्री के लिए अपना नामांकन किया था। उनके साथ जनपद के बड़ी संख्या में व्यापारी चुनाव में शामिल होने गए थे। रविवार को चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई। प्रदेश के सभी जिलों से व्यापारी मतदान के लिए गए थे। रमेश अग्रहरि वरिष्ठ प्रांतीय महामंत्री पद पर चुन लिए गए हैं। इसकी घोषणा होते ही व्यापारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। मंझनपुर में अंशुल केसरवानी, अनुराग केसरवानी, राजू वर्मा आदि लोगों ने जश्न मनाया। पश्चिमशरीरा में विपिन केसरवानी के नेतृत्व में व्यापारियों ने खुशी का इजहार किया। इसी तरह भरवारी, अजुहा, सरायअकिल, मनौरी आदि बाजारों में जश्न मनाया गया। रमेश अग्रहरि प्रांतीय अध्यक्ष बनवारी लाल कंछल ने बधाई दी है।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल का बीसवां प्रांतीय चुनाव रविवार को लखनऊ में संपन्न हुआ। कौशाम्बी के व्यापारी नेता रमेश अग्रहरि को वरिष्ठ प्रांतीय महामंत्री चुना गया है। इसकी जानकारी होते ही व्यापारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। व्यापारियों ने मिठाई बांटी। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के बीस वें प्रांतीय चुनाव में रमेश अग्रहरि ने वरिष्ठ प्रांतीय महामंत्री के लिए अपना नामांकन किया था। उनके साथ जनपद के बड़ी संख्या में व्यापारी चुनाव में शामिल होने गए थे। रविवार को चुनाव प्रक्रिया संपन्न हुई। प्रदेश के सभी जिलों से व्यापारी मतदान के लिए गए थे। रमेश अग्रहरि वरिष्ठ प्रांतीय महामंत्री पद पर चुन लिए गए हैं। इसकी घोषणा होते ही व्यापारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। मंझनपुर में अंशुल केसरवानी, अनुराग केसरवानी, राजू वर्मा आदि लोगों ने जश्न मनाया। पश्चिमशरीरा में विपिन केसरवानी के नेतृत्व में व्यापारियों ने खुशी का इजहार किया। इसी तरह भरवारी, अजुहा, सरायअकिल, मनौरी आदि बाजारों में जश्न मनाया गया। रमेश अग्रहरि प्रांतीय अध्यक्ष बनवारी लाल कंछल ने बधाई दी है।
झारखंड में 1754 किलोमीटर सड़क का होगा निर्माण, केंद्र सरकार ने दी मंजूरी (सांकेतिक तस्वीर) रांची. नए साल के आगमन से पहले झारखंड की सड़कें चकाचक हो जाएंगी. फरारी से लेकर मर्सीडीज बेंज और बीएमडब्ल्यू तक की कारें फार्राटा भर सकेंगी. दरअसल, झाखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने सड़कों को दुरुस्त और उसे मजबूत करने के लिए मेगा मेंटेनेंस प्रोजेक्ट शुरू करने को हरी झंडी दे दी है. प्रदेश सरकार ने इसके लिए 2000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं. इनमें से 150 करोड़ रुपए से ज्यादा राजधानी रांची की सड़कों को चकाचक करने पर खर्च किए जाएंगे. इस प्रोजेक्ट को अगले 2 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. सड़क निर्माण विभाग इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी कर चुका है. अब जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा. कोरोना संक्रमण के कारण पिछले दो वित्त वर्षों से पूरे प्रदेश में सड़कों की हालत खस्ता हो रही थी. प्रदेश सरकार ने अब आधारभूत संरचना को दुरुस्त करने का फैसला किया है. इसके तहत सड़कों को दुरुस्त किया जाएगा. प्रदेश सरकार ने इसके लिए 2000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं. जानकारी के अनुसार, राज्य के सभी हिस्सों में प्रमुख सड़कों को दुरुस्त करने और उसे मजबूत बनाने के लिए काम शुरू किया गया है. इसके साथ ही ओवरब्रिज और दूसरे पुलों का भी निर्माण किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट के तहत सिर्फ रांची में ही 163 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सड़कों को दुरुस्त किया जाना है. इस पर कुल 154 करोड़ रुपए खर्च आने का अनुमान है. इसके अलावा प्रदेश के प्रमुख शहरों की सड़कों की भी मरम्मत की जाएगी, ताकि आवागमन में परेशानी न हो और लोगों को जाम की समस्या से भी निजात मिल सके. बता दें कि झारखंड सरकार ने आधारभूत संरचना खासकर सड़कों की दशा को सुधारने की बात कही थी. अब उसी पर अमल किया जा रहा है. दरअसल, कोरोना काल में राजस्व में कमी के साथ ही सरकार का पूरा ध्यान इस विषम परिस्थिति से प्रदेश को उबारना था. कोरोना संक्रमण के हालात में सुधार के बाद अब सरकार का ध्यान एक बार फिर से इंफ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त करने पर गया है. .
झारखंड में एक हज़ार सात सौ चौवन किलोग्राममीटर सड़क का होगा निर्माण, केंद्र सरकार ने दी मंजूरी रांची. नए साल के आगमन से पहले झारखंड की सड़कें चकाचक हो जाएंगी. फरारी से लेकर मर्सीडीज बेंज और बीएमडब्ल्यू तक की कारें फार्राटा भर सकेंगी. दरअसल, झाखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने सड़कों को दुरुस्त और उसे मजबूत करने के लिए मेगा मेंटेनेंस प्रोजेक्ट शुरू करने को हरी झंडी दे दी है. प्रदेश सरकार ने इसके लिए दो हज़ार करोड़ रुपए आवंटित किए हैं. इनमें से एक सौ पचास करोड़ रुपए से ज्यादा राजधानी रांची की सड़कों को चकाचक करने पर खर्च किए जाएंगे. इस प्रोजेक्ट को अगले दो महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. सड़क निर्माण विभाग इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी कर चुका है. अब जल्द ही काम शुरू कर दिया जाएगा. कोरोना संक्रमण के कारण पिछले दो वित्त वर्षों से पूरे प्रदेश में सड़कों की हालत खस्ता हो रही थी. प्रदेश सरकार ने अब आधारभूत संरचना को दुरुस्त करने का फैसला किया है. इसके तहत सड़कों को दुरुस्त किया जाएगा. प्रदेश सरकार ने इसके लिए दो हज़ार करोड़ रुपए आवंटित किए हैं. जानकारी के अनुसार, राज्य के सभी हिस्सों में प्रमुख सड़कों को दुरुस्त करने और उसे मजबूत बनाने के लिए काम शुरू किया गया है. इसके साथ ही ओवरब्रिज और दूसरे पुलों का भी निर्माण किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट के तहत सिर्फ रांची में ही एक सौ तिरेसठ किलोग्राममीटर से ज्यादा लंबी सड़कों को दुरुस्त किया जाना है. इस पर कुल एक सौ चौवन करोड़ रुपए खर्च आने का अनुमान है. इसके अलावा प्रदेश के प्रमुख शहरों की सड़कों की भी मरम्मत की जाएगी, ताकि आवागमन में परेशानी न हो और लोगों को जाम की समस्या से भी निजात मिल सके. बता दें कि झारखंड सरकार ने आधारभूत संरचना खासकर सड़कों की दशा को सुधारने की बात कही थी. अब उसी पर अमल किया जा रहा है. दरअसल, कोरोना काल में राजस्व में कमी के साथ ही सरकार का पूरा ध्यान इस विषम परिस्थिति से प्रदेश को उबारना था. कोरोना संक्रमण के हालात में सुधार के बाद अब सरकार का ध्यान एक बार फिर से इंफ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त करने पर गया है. .
हर्षवर्धन का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब कुछ ही घंटे बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले मंत्रिपरिषद में महत्वपूर्ण फेरबदल व इसका विस्तार होने जा रहा है। मंत्रिपरिषद में 43 नये सदस्यों के शामिल होने की संभावना है । सूत्रों ने बताया कि मंत्रिपरिषद में फेरबदल से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, रसायन एवं उर्वरक मंत्री सदानंद गौड़ा, श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष कुमार गंगवार, शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री देबश्री चौधरी, पर्यावरण राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो आदि ने इस्तीफा दिया है । डा. हर्षवर्धन स्वयं एक चिकित्सक हैं और उनके पास स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अलावा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का भी प्रभार था । कोविड-19 महामारी के दौरान कुछ टिप्पणियों को लेकर हर्षवर्धन को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा । इस दौरान उन्होंने स्थिति से निपटने के तरीके को लेकर सरकार का पुरजोर बचाव किया था ।
हर्षवर्धन का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब कुछ ही घंटे बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले मंत्रिपरिषद में महत्वपूर्ण फेरबदल व इसका विस्तार होने जा रहा है। मंत्रिपरिषद में तैंतालीस नये सदस्यों के शामिल होने की संभावना है । सूत्रों ने बताया कि मंत्रिपरिषद में फेरबदल से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, रसायन एवं उर्वरक मंत्री सदानंद गौड़ा, श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री संतोष कुमार गंगवार, शिक्षा राज्य मंत्री संजय धोत्रे, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री देबश्री चौधरी, पर्यावरण राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो आदि ने इस्तीफा दिया है । डा. हर्षवर्धन स्वयं एक चिकित्सक हैं और उनके पास स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अलावा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का भी प्रभार था । कोविड-उन्नीस महामारी के दौरान कुछ टिप्पणियों को लेकर हर्षवर्धन को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा । इस दौरान उन्होंने स्थिति से निपटने के तरीके को लेकर सरकार का पुरजोर बचाव किया था ।
माफिया तत्वों और गुंडों ने सरकार और सत्ताधारी दल द्वारा खुलेआम चलाई गई चार निर्वाचन क्षेत्रों के विभिन्न हिस्सों में अपनी आतंकवादी गतिविधियों को जारी रखा है, जहां 23 जून को 4 विधानसभा परमतदान हुआ था। कई घरों पर हमला किया गया है और तोड़फोड़ की गई है और कई लोग घायल हुए हैं। ताजा घटना में 46-सुरमा विधानसभा क्षेत्र में माकपा के पोलिंग एजेंट नंटू दास की मोटरसाइकिल कल रात उनके घर में जलकर खाक हो गई. बीती रात वह घर से गायब था। कमालपुर में बड़ी संख्या में भाजपा के गुंडों और बदमाशों ने उनके घर पर धावा बोल दिया था और आंगन में खड़ी उनकी मोटरसाइकिल में पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी. इससे पहले कि नंटू के परिवार के लोग आग पर काबू पाते, बाइक जलकर राख हो गई। शिकायत के बावजूद गिरफ्तारी नहीं हो रही है।
माफिया तत्वों और गुंडों ने सरकार और सत्ताधारी दल द्वारा खुलेआम चलाई गई चार निर्वाचन क्षेत्रों के विभिन्न हिस्सों में अपनी आतंकवादी गतिविधियों को जारी रखा है, जहां तेईस जून को चार विधानसभा परमतदान हुआ था। कई घरों पर हमला किया गया है और तोड़फोड़ की गई है और कई लोग घायल हुए हैं। ताजा घटना में छियालीस-सुरमा विधानसभा क्षेत्र में माकपा के पोलिंग एजेंट नंटू दास की मोटरसाइकिल कल रात उनके घर में जलकर खाक हो गई. बीती रात वह घर से गायब था। कमालपुर में बड़ी संख्या में भाजपा के गुंडों और बदमाशों ने उनके घर पर धावा बोल दिया था और आंगन में खड़ी उनकी मोटरसाइकिल में पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी. इससे पहले कि नंटू के परिवार के लोग आग पर काबू पाते, बाइक जलकर राख हो गई। शिकायत के बावजूद गिरफ्तारी नहीं हो रही है।
बांदा (उप्र), 14 मई (आईएएनएस)। प्रवासी मजदूरों की घर वापसी का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में लॉकडाउन की वजह से गुजरात के सूरत महानगर में फंसे 1,690 प्रवासी मजदूरों को लेकर गुरुवार तड़के तीसरी विशेष श्रमिक ट्रेन बांदा पहुंची है। इसके पहले दो श्रमिक ट्रेनें यहां आ चुकी हैं। अब तक गुजरात से लौटे प्रवासी मजदूरों की संख्या 4,468 हो गयी है।
बांदा , चौदह मई । प्रवासी मजदूरों की घर वापसी का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में लॉकडाउन की वजह से गुजरात के सूरत महानगर में फंसे एक,छः सौ नब्बे प्रवासी मजदूरों को लेकर गुरुवार तड़के तीसरी विशेष श्रमिक ट्रेन बांदा पहुंची है। इसके पहले दो श्रमिक ट्रेनें यहां आ चुकी हैं। अब तक गुजरात से लौटे प्रवासी मजदूरों की संख्या चार,चार सौ अड़सठ हो गयी है।
मुंबई। जी -20 (G-20) को लेकर विविध देश से आए प्रतिनिधि ने सोमवार को पुणे के सावित्रीबाई फुले विद्यापीठ (Savitribai Phule Vidyapith) परिसर में छत्रपति शिवाजी महाराज गार्डेन में वृक्षा रोपण (tree planting) किया। इस मौके पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के संयुक्त सचिव सोलोमन अरोकिराज, मंडलायुक्त सौरभ राव, कुलपति डॉ. करभरी काले, नगर निगम आयुक्त विक्रम कुमार, कलेक्टर डॉ. राजेश देशमुख, उपायुक्त श्रीमती वर्षा लाढा आदि मौजूद रहीं। इस मौके पर केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री नारायण राणे ने जी-20 बैठक स्थल पर प्रदर्शनी हॉल का दौरा किया। उन्होंने विभिन्न हॉल में प्रदर्शित विषयों के बारे में पूछताछ की। सरकार 'विश्व मोटा अनाज वर्ष- 2023' के अवसर पर मोटे अनाज जैसे बाजरा, ज्वार, नाचनी आदि जिनमें अधिक पौष्टिक तत्व होते हैं, का महत्व वैश्विक स्तर पर बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इसके अनुसार जी-20 बैठक स्थल पर मोटे अनाज के महत्व की जानकारी भी प्रदर्शित की गई है। मंत्री श्री राणे ने मोटे अनाज और उनसे बने प्रसंस्कृत उत्पादों की विशेष जानकारी ली। उन्होंने राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महाराष्ट्र पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा नियोजित पर्यटन गतिविधियों, टूर पैकेज आदि पर एक प्रस्तुति भी देखी। इस अवसर पर मंडलायुक्त सौरभ राव, पुणे मनपा आयुक्त विक्रम कुमार, जिलाधिकारी डॉ. राजेश देशमुख आदि मौजूद थे।
मुंबई। जी -बीस को लेकर विविध देश से आए प्रतिनिधि ने सोमवार को पुणे के सावित्रीबाई फुले विद्यापीठ परिसर में छत्रपति शिवाजी महाराज गार्डेन में वृक्षा रोपण किया। इस मौके पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के संयुक्त सचिव सोलोमन अरोकिराज, मंडलायुक्त सौरभ राव, कुलपति डॉ. करभरी काले, नगर निगम आयुक्त विक्रम कुमार, कलेक्टर डॉ. राजेश देशमुख, उपायुक्त श्रीमती वर्षा लाढा आदि मौजूद रहीं। इस मौके पर केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री नारायण राणे ने जी-बीस बैठक स्थल पर प्रदर्शनी हॉल का दौरा किया। उन्होंने विभिन्न हॉल में प्रदर्शित विषयों के बारे में पूछताछ की। सरकार 'विश्व मोटा अनाज वर्ष- दो हज़ार तेईस' के अवसर पर मोटे अनाज जैसे बाजरा, ज्वार, नाचनी आदि जिनमें अधिक पौष्टिक तत्व होते हैं, का महत्व वैश्विक स्तर पर बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इसके अनुसार जी-बीस बैठक स्थल पर मोटे अनाज के महत्व की जानकारी भी प्रदर्शित की गई है। मंत्री श्री राणे ने मोटे अनाज और उनसे बने प्रसंस्कृत उत्पादों की विशेष जानकारी ली। उन्होंने राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए महाराष्ट्र पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा नियोजित पर्यटन गतिविधियों, टूर पैकेज आदि पर एक प्रस्तुति भी देखी। इस अवसर पर मंडलायुक्त सौरभ राव, पुणे मनपा आयुक्त विक्रम कुमार, जिलाधिकारी डॉ. राजेश देशमुख आदि मौजूद थे।
नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं, जबकि इस बार राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद संसद में संयुक्त सत्र को संबोधित कर रहे थे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर आलोचकों के निशाने पर आ गए हैं। इस समय मुद्दा यह था कि, राहुल गांधी,भारत के राष्ट्रपति द्वारा आज लोकसभा के संयुक्त सत्र में किए अभिभाषण की ओर दुर्लक्ष करते हुए वह मोबाइल में व्यस्त थे। जानकारी के अनुसार,राहुल गांधी राष्ट्रपति के एक घंटे के भाषण के दौरान लगभग 24 मिनट तक मोबाइल फोन पर उलझे रहे। राष्ट्रपति कोविंद ने गुरुवार को संसद के दोनों सदनों - राज्यसभा (उच्च सदन) और लोकसभा (निचले सदन) में संयुक्त भाषण दिया, जिसमें आशा, दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति के साथ एक नए और बेहतर भारत के लिए भाषण दिया गया। जब राष्ट्रपति का अभिभाषण चल रहा था, राहुल की नज़रें फोन पर टिकी हुई थी। युपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी सिर्फ संबोधन सुन रही थीं, और उन्होंने आवेदन का जवाब भी दिया। राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान उठाए गए सवालों का जवाब नहीं दिया। अन्यथा, जब राष्ट्रपति कोविंद पांच वर्षों के दौरान किए गए कार्यों के बारे में जानकारी दे रहे थे, तो राहुल गांधी ने लोकसभा की तस्वीरें लीं और लगभग 20 मिनट सोनिया गांधी से बात की। जब राष्ट्रपति ने उरी सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट स्ट्राइक के बारे में बताया, तो पूरे सदन और सोनिया गांधी ने इशारे से जवाब दिया, लेकिन इस समय राहुल गांधी ने नीचे मोबाइल की ओर देखना नहीं छोड़ा। भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा ने एक वीडियो ट्वीट किया जिसमें राहुल को अपने फोन पर व्यस्त दिखाया गया। संसद सत्र का समापन 16 जुलाई को होगा। सत्र के दौरान, सरकार 4 जुलाई को आर्थिक सर्वेक्षण के बाद 5 जुलाई को केंद्रीय बजट 2019-20 पेश करेगी। राज्यसभा ने आज सत्र का पहला दिन शुरू किया। इस बीच, कयास लगाए जा रहे हैं कि राहुल 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद पार्टी अध्यक्ष पद से हट सकते हैं। हालांकि वह छोड़ने पर अड़े हैं, लेकिन कांग्रेस वर्किंग कमेटी उन्हें जाने देने को तैयार नहीं है।
नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं, जबकि इस बार राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद संसद में संयुक्त सत्र को संबोधित कर रहे थे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी एक बार फिर आलोचकों के निशाने पर आ गए हैं। इस समय मुद्दा यह था कि, राहुल गांधी,भारत के राष्ट्रपति द्वारा आज लोकसभा के संयुक्त सत्र में किए अभिभाषण की ओर दुर्लक्ष करते हुए वह मोबाइल में व्यस्त थे। जानकारी के अनुसार,राहुल गांधी राष्ट्रपति के एक घंटे के भाषण के दौरान लगभग चौबीस मिनट तक मोबाइल फोन पर उलझे रहे। राष्ट्रपति कोविंद ने गुरुवार को संसद के दोनों सदनों - राज्यसभा और लोकसभा में संयुक्त भाषण दिया, जिसमें आशा, दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति के साथ एक नए और बेहतर भारत के लिए भाषण दिया गया। जब राष्ट्रपति का अभिभाषण चल रहा था, राहुल की नज़रें फोन पर टिकी हुई थी। युपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी सिर्फ संबोधन सुन रही थीं, और उन्होंने आवेदन का जवाब भी दिया। राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान उठाए गए सवालों का जवाब नहीं दिया। अन्यथा, जब राष्ट्रपति कोविंद पांच वर्षों के दौरान किए गए कार्यों के बारे में जानकारी दे रहे थे, तो राहुल गांधी ने लोकसभा की तस्वीरें लीं और लगभग बीस मिनट सोनिया गांधी से बात की। जब राष्ट्रपति ने उरी सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट स्ट्राइक के बारे में बताया, तो पूरे सदन और सोनिया गांधी ने इशारे से जवाब दिया, लेकिन इस समय राहुल गांधी ने नीचे मोबाइल की ओर देखना नहीं छोड़ा। भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा ने एक वीडियो ट्वीट किया जिसमें राहुल को अपने फोन पर व्यस्त दिखाया गया। संसद सत्र का समापन सोलह जुलाई को होगा। सत्र के दौरान, सरकार चार जुलाई को आर्थिक सर्वेक्षण के बाद पाँच जुलाई को केंद्रीय बजट दो हज़ार उन्नीस-बीस पेश करेगी। राज्यसभा ने आज सत्र का पहला दिन शुरू किया। इस बीच, कयास लगाए जा रहे हैं कि राहुल दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के बाद पार्टी अध्यक्ष पद से हट सकते हैं। हालांकि वह छोड़ने पर अड़े हैं, लेकिन कांग्रेस वर्किंग कमेटी उन्हें जाने देने को तैयार नहीं है।
प्रयागराज। नए शिक्षा सेवा चयन आयोग के गठन से संबंधित विधेयक को पारित हुए माहभर हो गए हैं, लेकिन आयोग के गठन की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं की गई। यह साल बीतने में सिर्फ साढ़े तीन माह बाकी है और अगले वर्ष लोकसभा के चुनाव हैं। अगर आयोग जल्द क्रियाशील नहीं हुआ तो आगामी शिक्षक भर्तियों में चुनाव आचार संहिता का अड़ंगा लग सकता है। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक (टीजीटी) / प्रवक्ता (पीजीटी) के 4163 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया अगस्त 2022 में शुरू हो चुकी है। नए आयोग के गठन के इंतजार में यह भर्ती फंसी हुई है। भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, इसलिए आचार संहिता का इस पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन आचार संहिता लागू होने के बाद नई भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं किया जा सकता। अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों जितने पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है, उससे तीन गुना अधिक पद रिक्त पड़े हैं। अगर पूर्व की भांति माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग के पास ही इस भर्ती की जिम्मेदारी होती तो अब तक वर्ष 2022 की भर्ती पूरी हो गई होती और नए पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन भी जारी हो गया होता। आयोग का गठन समय से नहीं हुआ तो नई भर्ती के लिए लंबा इंतजार करना होगा। यही हाल अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों का भी है। अशासकीय महाविद्यालयों में भी असिस्टेंट प्रोफेसर के 1017 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया अगस्त 2022 में पूरी हो चुकी है। पिछले साल और इस वर्ष जून में बड़ी संख्या में शिक्षकों के रिटायर होने के बाद सैकड़ों पद खाली हुए हैं. युवा मंच के अध्यक्ष अनिल सिंह सहित रामबहादुर पटेल, अमित द्विवेदी, अजीत कुमार, ज्ञान प्रकाश सिंह ने सीएम को ज्ञापन देकर जल्द आयोग को जल्द क्रिया शील करने की मांग की है।
प्रयागराज। नए शिक्षा सेवा चयन आयोग के गठन से संबंधित विधेयक को पारित हुए माहभर हो गए हैं, लेकिन आयोग के गठन की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं की गई। यह साल बीतने में सिर्फ साढ़े तीन माह बाकी है और अगले वर्ष लोकसभा के चुनाव हैं। अगर आयोग जल्द क्रियाशील नहीं हुआ तो आगामी शिक्षक भर्तियों में चुनाव आचार संहिता का अड़ंगा लग सकता है। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक / प्रवक्ता के चार हज़ार एक सौ तिरेसठ पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया अगस्त दो हज़ार बाईस में शुरू हो चुकी है। नए आयोग के गठन के इंतजार में यह भर्ती फंसी हुई है। भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, इसलिए आचार संहिता का इस पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन आचार संहिता लागू होने के बाद नई भर्ती का विज्ञापन जारी नहीं किया जा सकता। अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों जितने पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है, उससे तीन गुना अधिक पद रिक्त पड़े हैं। अगर पूर्व की भांति माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग के पास ही इस भर्ती की जिम्मेदारी होती तो अब तक वर्ष दो हज़ार बाईस की भर्ती पूरी हो गई होती और नए पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन भी जारी हो गया होता। आयोग का गठन समय से नहीं हुआ तो नई भर्ती के लिए लंबा इंतजार करना होगा। यही हाल अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों का भी है। अशासकीय महाविद्यालयों में भी असिस्टेंट प्रोफेसर के एक हज़ार सत्रह पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की प्रक्रिया अगस्त दो हज़ार बाईस में पूरी हो चुकी है। पिछले साल और इस वर्ष जून में बड़ी संख्या में शिक्षकों के रिटायर होने के बाद सैकड़ों पद खाली हुए हैं. युवा मंच के अध्यक्ष अनिल सिंह सहित रामबहादुर पटेल, अमित द्विवेदी, अजीत कुमार, ज्ञान प्रकाश सिंह ने सीएम को ज्ञापन देकर जल्द आयोग को जल्द क्रिया शील करने की मांग की है।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय समाज के लिए सिख गुरुओं की महान सीख और त्याग का उल्लेख करते हुए गुरुओं के सपनों की पूर्ति के लिए देश के लोगों से एकजुटता बनाए रखने का आह्वान किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरुओं ने देश को जिन खतरों से आगाह किया था, वे खतरे आज भी बने हुए हैं और उनके प्रति सावधान रहने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे गुरु जिन खतरों से देश को आगाह करते रहे थे, वे खतरे आज भी वैसे ही हैं और उनसे देश की सुरक्षा करनी है। मोदी शनिवार को गुरुपर्व समारोहों के उपलक्ष्य में गुजरात के कच्छ जिले के गुरुद्वारा लखपत साहिब में आयोजित एक समारोह को वीडिया-सम्मेलन के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। मोदी ने कहा कि आज देश का लक्ष्य है-'एक समर्थ भारत का पुनरोदय। आज देश की नीति है-हर गरीब की सेवा, हर वंचित काे प्राथमिकता। ' उन्होंने कहा कि इसलिए सभी का दायित्व है कि ऐसे महत्वपूर्ण समय में, कोई हमारे सपनों पर, देश की एकजुटता पर आंच न ला सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे गुरू, जिन सपनों के लिए जिए, जिन सपनों के लिए उन्होंने अपना जीवन खपा दिया, उनकी पूर्ति के लिए हम सभी एकजुट होकर चलें, हमारे बीच एकजुटता बहुत अनिवार्य है। 'हमारे गुरु, जिन खतरों से देश को आगाह करते थे, वे आज भी वैसे ही हैं। इसलिए हमें सतर्क भी रहना है और देश की सुरक्षा भी करनी है। उन्होंने कहा कि आज देश के हर प्रयास का, हर योजना का लाभ देश के हर हिस्से को समान रूप से मिल रहा है। इन प्रयासों की सिद्धि समरस भारत को मजबूत, गुरु नानकदेव जी की शिक्षाओं को चरितार्थ करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समय आज़ादी के अमृत महोत्सव का है। आज जब देश अपने स्वाधीनता संग्राम से, अपने अतीत से प्रेरणा ले रहा है, तो हमारे गुरुओं के आदर्श हमारे लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। आज देश जो प्रयास कर रहा है, जो संकल्प ले रहा है, उन सबमें वही सपने हैं जो सदियों से देश पूरे होते देखना चाह रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह गुरु नानकदेव जी ने 'मानव जात' का पाठ हमें सिखाया था, उसी पर चलते हुये आज देश 'सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास' के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। ' उन्होंने भरोसा जताया कि गुरु नानक देव के आशीर्वाद से इन संकल्पों को जरूर पूरा करेंगे और देश नई ऊंचाई तक पहुंचेगा। मोदी ने इस अवसर पर यह भी कहा कि गुरुनानक देव जी के बाद आए हमारे सिख गुरुओं ने देश और धर्म के लिए प्राणों की बाजी लगाने में भी संकोच नहीं किया। इस समय देश गुरु तेगबहादुर जी का 400वां प्रकाश उत्सव मना रहा है। जिस तरह देश ने उन्हें 'हिन्द की चादर' की पदवी दी, वह हमें सिख परंपरा के प्रति हर एक भारतवासी के जुड़ाव को दिखाता है। उन्होंने कहा कि औरंगज़ेब के खिलाफ गुरु तेग बहादुर का पराक्रम और उनका बलिदान हमें सिखाता है कि आतंक और मजहबी कट्टरता से देश कैसे लड़ता है। मोदी ने कहा कि जिस समय गुरु नानक देव जी ने अवतार लिया था, उस समय भारतीय समाज तमाम विडंबनाओं और रूढ़ियों से घिरा था। गुरु नानक देव जी और उनके बाद हमारे अलग-अलग गुरुओं ने भारत की चेतना को तो प्रज्वलित रखा ही, भारत को भी सुरक्षित रखने का मार्ग बनाया। जब देश जात-पात और मत-मतांतर के नाम पर कमजोर पड़ रहा था तब गुरु नानक देव जी ने कहा था कि जाणहु जोति न पूछहु जाती, आगे जात न हे। अर्थात्, सभी में भगवान के प्रकाश को देखें, उसे पहचानें। किसी की जाति न पूछिए, क्योंकि जाति से किसी की पहचान नहीं होती, न जीवन के बाद की यात्रा में किसी की कोई जाति होती है। मोदी ने कहा कि हमारे गुरुओं का योगदान केवल समाज और अध्यात्म तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हमारा राष्ट्र, राष्ट्र का चिंतन, राष्ट्र की आस्था और अखंडता अगर आज सुरक्षित है, तो उसके भी मूल में सिख गुरुओं की महान तपस्या है।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय समाज के लिए सिख गुरुओं की महान सीख और त्याग का उल्लेख करते हुए गुरुओं के सपनों की पूर्ति के लिए देश के लोगों से एकजुटता बनाए रखने का आह्वान किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरुओं ने देश को जिन खतरों से आगाह किया था, वे खतरे आज भी बने हुए हैं और उनके प्रति सावधान रहने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे गुरु जिन खतरों से देश को आगाह करते रहे थे, वे खतरे आज भी वैसे ही हैं और उनसे देश की सुरक्षा करनी है। मोदी शनिवार को गुरुपर्व समारोहों के उपलक्ष्य में गुजरात के कच्छ जिले के गुरुद्वारा लखपत साहिब में आयोजित एक समारोह को वीडिया-सम्मेलन के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। मोदी ने कहा कि आज देश का लक्ष्य है-'एक समर्थ भारत का पुनरोदय। आज देश की नीति है-हर गरीब की सेवा, हर वंचित काे प्राथमिकता। ' उन्होंने कहा कि इसलिए सभी का दायित्व है कि ऐसे महत्वपूर्ण समय में, कोई हमारे सपनों पर, देश की एकजुटता पर आंच न ला सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे गुरू, जिन सपनों के लिए जिए, जिन सपनों के लिए उन्होंने अपना जीवन खपा दिया, उनकी पूर्ति के लिए हम सभी एकजुट होकर चलें, हमारे बीच एकजुटता बहुत अनिवार्य है। 'हमारे गुरु, जिन खतरों से देश को आगाह करते थे, वे आज भी वैसे ही हैं। इसलिए हमें सतर्क भी रहना है और देश की सुरक्षा भी करनी है। उन्होंने कहा कि आज देश के हर प्रयास का, हर योजना का लाभ देश के हर हिस्से को समान रूप से मिल रहा है। इन प्रयासों की सिद्धि समरस भारत को मजबूत, गुरु नानकदेव जी की शिक्षाओं को चरितार्थ करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समय आज़ादी के अमृत महोत्सव का है। आज जब देश अपने स्वाधीनता संग्राम से, अपने अतीत से प्रेरणा ले रहा है, तो हमारे गुरुओं के आदर्श हमारे लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। आज देश जो प्रयास कर रहा है, जो संकल्प ले रहा है, उन सबमें वही सपने हैं जो सदियों से देश पूरे होते देखना चाह रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह गुरु नानकदेव जी ने 'मानव जात' का पाठ हमें सिखाया था, उसी पर चलते हुये आज देश 'सबका साथ-सबका विकास और सबका विश्वास' के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। ' उन्होंने भरोसा जताया कि गुरु नानक देव के आशीर्वाद से इन संकल्पों को जरूर पूरा करेंगे और देश नई ऊंचाई तक पहुंचेगा। मोदी ने इस अवसर पर यह भी कहा कि गुरुनानक देव जी के बाद आए हमारे सिख गुरुओं ने देश और धर्म के लिए प्राणों की बाजी लगाने में भी संकोच नहीं किया। इस समय देश गुरु तेगबहादुर जी का चार सौवां प्रकाश उत्सव मना रहा है। जिस तरह देश ने उन्हें 'हिन्द की चादर' की पदवी दी, वह हमें सिख परंपरा के प्रति हर एक भारतवासी के जुड़ाव को दिखाता है। उन्होंने कहा कि औरंगज़ेब के खिलाफ गुरु तेग बहादुर का पराक्रम और उनका बलिदान हमें सिखाता है कि आतंक और मजहबी कट्टरता से देश कैसे लड़ता है। मोदी ने कहा कि जिस समय गुरु नानक देव जी ने अवतार लिया था, उस समय भारतीय समाज तमाम विडंबनाओं और रूढ़ियों से घिरा था। गुरु नानक देव जी और उनके बाद हमारे अलग-अलग गुरुओं ने भारत की चेतना को तो प्रज्वलित रखा ही, भारत को भी सुरक्षित रखने का मार्ग बनाया। जब देश जात-पात और मत-मतांतर के नाम पर कमजोर पड़ रहा था तब गुरु नानक देव जी ने कहा था कि जाणहु जोति न पूछहु जाती, आगे जात न हे। अर्थात्, सभी में भगवान के प्रकाश को देखें, उसे पहचानें। किसी की जाति न पूछिए, क्योंकि जाति से किसी की पहचान नहीं होती, न जीवन के बाद की यात्रा में किसी की कोई जाति होती है। मोदी ने कहा कि हमारे गुरुओं का योगदान केवल समाज और अध्यात्म तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हमारा राष्ट्र, राष्ट्र का चिंतन, राष्ट्र की आस्था और अखंडता अगर आज सुरक्षित है, तो उसके भी मूल में सिख गुरुओं की महान तपस्या है।
मेरठ के थाना परतापुर क्षेत्र में मारुति के राधा गोविंद शोरूम पर कार मालिक और उसके साथियों ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान मालिक ने शोरूम में अंडे, टमाटर और जूते भी फेंके। इससे शोरूम में हड़कंप मच गया और कर्मचारियों ने पीछे के दरवाजे से भागकर जान बचाई। बता दें कि दिल्ली रोड पर मारुति के राधा गोविंद शोरूम में मारुति स्विफ्ट कार मालिक सुशील पुत्र यशपाल निवासी सुपरटेक और उनके एक दर्जन साथियों ने हंगामा करते हुए शोरूम में अंडे, टमाटर और जूते फेंके। कार मालिक ने बताया कि उन्होंने मार्च के महीने में राधा गोविंद शोरूम से स्विफ्ट कार खरीदी थी जिसका इंश्योरेंस भी शोरूम द्वारा किया गया था। कुछ ही दिन बाद गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया। इसके बाद उन्होंने कार को शोरूम में ठीक होने के लिए दे दिया। आरोप है कि ढाई महीने से भी ज्यादा बीत जाने के बाद शोरूम कर्मचारी स्विफ्ट कार को ठीक नहीं करा पाए। इससे आक्रोशित होकर कार मालिक सुशील बुधवार को अपने साथियों के साथ शोरूम में पहुंच गया। इस दौरान उन्होंने कार को बाहर निकालकर आग लगाने की बात कही। लेकिन जब कार शोरूम से बाहर नहीं निकल पाई तो उन्होंने अंडे, टमाटर और जूतों की शोरूम में बरसात कर दी। वहीं हंगामा बढ़ता देख शोरूम में काम करने वाले कर्मचारी शोरूम को छोड़कर पीछे से भाग खड़े हुए। सूचना के बाद मौके पर पहुंची परतापुर पुलिस को कार मालिक ने बताया कि इस शोरूम में आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिलता है। ढाई महीने से कार ठीक कराने के लिए दिन प्रतिदिन चक्कर काट रहे हैं। लेकिन आज तक कार को ठीक नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि शोरूम कर्मचारियों की मनमानी के चलते यह कदम उठाया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही कार को ठीक करके नहीं दिया गया तो वह कार को बाहर निकालकर उसमें आग लगा देंगे। नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
मेरठ के थाना परतापुर क्षेत्र में मारुति के राधा गोविंद शोरूम पर कार मालिक और उसके साथियों ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान मालिक ने शोरूम में अंडे, टमाटर और जूते भी फेंके। इससे शोरूम में हड़कंप मच गया और कर्मचारियों ने पीछे के दरवाजे से भागकर जान बचाई। बता दें कि दिल्ली रोड पर मारुति के राधा गोविंद शोरूम में मारुति स्विफ्ट कार मालिक सुशील पुत्र यशपाल निवासी सुपरटेक और उनके एक दर्जन साथियों ने हंगामा करते हुए शोरूम में अंडे, टमाटर और जूते फेंके। कार मालिक ने बताया कि उन्होंने मार्च के महीने में राधा गोविंद शोरूम से स्विफ्ट कार खरीदी थी जिसका इंश्योरेंस भी शोरूम द्वारा किया गया था। कुछ ही दिन बाद गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया। इसके बाद उन्होंने कार को शोरूम में ठीक होने के लिए दे दिया। आरोप है कि ढाई महीने से भी ज्यादा बीत जाने के बाद शोरूम कर्मचारी स्विफ्ट कार को ठीक नहीं करा पाए। इससे आक्रोशित होकर कार मालिक सुशील बुधवार को अपने साथियों के साथ शोरूम में पहुंच गया। इस दौरान उन्होंने कार को बाहर निकालकर आग लगाने की बात कही। लेकिन जब कार शोरूम से बाहर नहीं निकल पाई तो उन्होंने अंडे, टमाटर और जूतों की शोरूम में बरसात कर दी। वहीं हंगामा बढ़ता देख शोरूम में काम करने वाले कर्मचारी शोरूम को छोड़कर पीछे से भाग खड़े हुए। सूचना के बाद मौके पर पहुंची परतापुर पुलिस को कार मालिक ने बताया कि इस शोरूम में आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिलता है। ढाई महीने से कार ठीक कराने के लिए दिन प्रतिदिन चक्कर काट रहे हैं। लेकिन आज तक कार को ठीक नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि शोरूम कर्मचारियों की मनमानी के चलते यह कदम उठाया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही कार को ठीक करके नहीं दिया गया तो वह कार को बाहर निकालकर उसमें आग लगा देंगे। नोट- इन खबरों के बारे आपकी क्या राय हैं। हमें फेसबुक पर कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
मंत्री के अनुसार, नॉर्ड स्ट्रीम-एक्सएनयूएमएक्स को आज "व्हिपिंग बॉय" में बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज तक, "कई किलोमीटर तक समुद्र में पाइप रखे गए हैं। " संघीय सरकार निर्माण प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगी, क्योंकि इसके लिए कोई कानूनी आधार नहीं है,अल्तमेयर ने कहा। उन्हें कैबिनेट में उनके सहयोगी, विदेश मंत्री हेइको मास द्वारा समर्थित किया गया था, जिन्होंने कहा था कि अमेरिकी प्रतिबंधों के खतरे के कारण भी, गैस पाइपलाइन को रोका नहीं जाना चाहिए। पिछले हफ्ते, जर्मनी के संघीय गणराज्य में अमेरिकी राजदूत के कार्यों, जिन्होंने प्रतिबंध लगाने की धमकियों के साथ जर्मन कंपनियों को पत्र भेजा था, सीडीयू पार्टी के नेता, एनेग्रेट क्रैम्प-कर्रेनबायर द्वारा निंदा की गई थी। याद रखें कि जनवरी 12 पर बर्लिन में अमेरिकी राजदूत रिचर्ड ग्रेनेल ने जर्मन की बड़ी कंपनियों के नेताओं को पत्र भेजे थे, जिसमें उन्होंने "आपकी प्रतिष्ठा और आपके भविष्य के बारे में सोचने का प्रस्ताव दिया था। " राजदूत ने उन कंपनियों को प्रतिबंधों की धमकी दी जो भाग लेते हैं या अन्यथा नॉर्ड स्ट्रीम-एक्सएनयूएमएक्स के निर्माण का समर्थन करते हैं। उसी समय, ग्रेनेला के प्रतिनिधि ने बाद में कहा कि राजनयिक केवल वाशिंगटन की आधिकारिक स्थिति को व्यवसायियों तक पहुंचाना चाहते थे। प्राकृतिक रूप से यूरोपीय देशों को प्राकृतिक ईंधन प्रदान करने के लिए रूसी तट से जर्मनी तक बाल्टिक सागर के नीचे एक नई गैस पाइपलाइन बिछाई गई है। संयुक्त राज्य अमेरिका, पोलैंड, यूक्रेन और बाल्टिक देश गैस पाइपलाइन के निर्माण के लिए सबसे अधिक सक्रिय रूप से विरोध कर रहे हैं।
मंत्री के अनुसार, नॉर्ड स्ट्रीम-एक्सएनयूएमएक्स को आज "व्हिपिंग बॉय" में बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज तक, "कई किलोमीटर तक समुद्र में पाइप रखे गए हैं। " संघीय सरकार निर्माण प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगी, क्योंकि इसके लिए कोई कानूनी आधार नहीं है,अल्तमेयर ने कहा। उन्हें कैबिनेट में उनके सहयोगी, विदेश मंत्री हेइको मास द्वारा समर्थित किया गया था, जिन्होंने कहा था कि अमेरिकी प्रतिबंधों के खतरे के कारण भी, गैस पाइपलाइन को रोका नहीं जाना चाहिए। पिछले हफ्ते, जर्मनी के संघीय गणराज्य में अमेरिकी राजदूत के कार्यों, जिन्होंने प्रतिबंध लगाने की धमकियों के साथ जर्मन कंपनियों को पत्र भेजा था, सीडीयू पार्टी के नेता, एनेग्रेट क्रैम्प-कर्रेनबायर द्वारा निंदा की गई थी। याद रखें कि जनवरी बारह पर बर्लिन में अमेरिकी राजदूत रिचर्ड ग्रेनेल ने जर्मन की बड़ी कंपनियों के नेताओं को पत्र भेजे थे, जिसमें उन्होंने "आपकी प्रतिष्ठा और आपके भविष्य के बारे में सोचने का प्रस्ताव दिया था। " राजदूत ने उन कंपनियों को प्रतिबंधों की धमकी दी जो भाग लेते हैं या अन्यथा नॉर्ड स्ट्रीम-एक्सएनयूएमएक्स के निर्माण का समर्थन करते हैं। उसी समय, ग्रेनेला के प्रतिनिधि ने बाद में कहा कि राजनयिक केवल वाशिंगटन की आधिकारिक स्थिति को व्यवसायियों तक पहुंचाना चाहते थे। प्राकृतिक रूप से यूरोपीय देशों को प्राकृतिक ईंधन प्रदान करने के लिए रूसी तट से जर्मनी तक बाल्टिक सागर के नीचे एक नई गैस पाइपलाइन बिछाई गई है। संयुक्त राज्य अमेरिका, पोलैंड, यूक्रेन और बाल्टिक देश गैस पाइपलाइन के निर्माण के लिए सबसे अधिक सक्रिय रूप से विरोध कर रहे हैं।
इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला ने गांव गोरीवाला में संविधान निर्माता बाबा साहिब भीम राव अम्बेडकर की मूर्ति पर नमन करने के बाद गोरीवाला चौक में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ लोग समाज का सद्भाव बिगाडऩे का काम कर रहे है लेकिन इनेलो पार्टी का काम समाज का सद्भाव बना कर रखना व 36 बिरादरी के भाईचारा बना कर रखना है। उन्होंने कहा कि इनेलो व इनसो पार्टी तो बाबा साहिब की सोच पर पहरा दे रही है। चौ. देवीलाल की सोच को आगे लेकर हम समाज को जोडऩे का काम करते हैं। उन्होंने भाजपा के कुछ नेता सीएम मनोहर लाल खट्टर के इशारे पर इनेलो व इनसो पर आरोप लगा रहे है लेकिन आज देश व प्रदेश में भाजपा की सरकार है तो क्यों नहीं सरकार मामले की सी. बी. आई. या अन्य किसी एजेंसी से निष्पक्ष जांच करवाते। इनसो नेता ने कहा कि गोरीवाला मामले में उनका या उनके संगठन का कोई भी रोल पाया जाए तो वह राजनीति छोड़ देंगे लेकिन अगर उनका रोल नहीं पाया जाता तो भाजपा के नेता सार्वजनिक रूप से इनेलो पार्टी व आमजन से माफी मांगे। उन्होंने कहा कि उनका काम लोगों को जोडऩा है जबकि भाजपा का काम लोगों का भाईचारा खत्म करना है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी चौटाला परिवार को महम कांड, चौटाला डबल मर्डर मामला, कालुआना सरपंच की मौत के मामले में, जाट आरक्षण के समय प्रकाश कमेटी की रिपोर्ट में सांसद दुष्यंत चौटाला का गलत नियत से नाम डालना सहित अनेक मामलों में कांग्रेस व भाजपा नेताओं ने चौटाला परिवार को झूठ बोलकर बदनाम करने के प्रयास किए है। लेकिन एक भी मामले में कुछ भी साबित नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि चौ. देवीलाल की मूर्ति को नुकसान जाट आंदोलन के दौरान भाजपा के सांसद राजकुमार सैनी द्वारा करवाने का प्रयास किया गया था तब ये भाजपा नेता कुछ नहीं बोले। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि समाज को तोडऩे का काम भाजपा व कांग्रेस करती है। उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि सरकार पता नही कब सविंधान निर्माता की मूर्ति के लिए कमेटी को आर्थिक सहायता दे लेकिन वो घोषणा करते हैं कि बाबा साहेब की दोबारा नई मूर्ति की स्थापना पर जो भी खर्च आएगा उसको वह अपने निजी कोष से बनवाएंगे और भी किसी भी प्रकार की जो डिमांड यहां की कमेटी करेगी, उसको पूरा करते हुए बाबा साहेब के चौक को भव्य रूप दिया जाएगा। गांव गंगा में इनेलो को उस समय भारी लाभ हुआ जब इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में प्रिंस इंसा व जोनी इंसा ने अपने दर्जनों साथियों के साथ अधिकारिक तौर पर इनेलो में शामिल हुए। दिग्विजय ने उनके गले में हरे पटके डाल स्वागत किया और उनको इनेलो में आस्था जताने पर पूरा मान-सम्मान दिए जाने का भरोसा दिया। पूर्व विधायक डॉ सीता राम, बसपा के लोक सभा प्रभारी लीलू राम ने भी कार्यकर्ताओ को संबोधित किया।
इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला ने गांव गोरीवाला में संविधान निर्माता बाबा साहिब भीम राव अम्बेडकर की मूर्ति पर नमन करने के बाद गोरीवाला चौक में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ लोग समाज का सद्भाव बिगाडऩे का काम कर रहे है लेकिन इनेलो पार्टी का काम समाज का सद्भाव बना कर रखना व छत्तीस बिरादरी के भाईचारा बना कर रखना है। उन्होंने कहा कि इनेलो व इनसो पार्टी तो बाबा साहिब की सोच पर पहरा दे रही है। चौ. देवीलाल की सोच को आगे लेकर हम समाज को जोडऩे का काम करते हैं। उन्होंने भाजपा के कुछ नेता सीएम मनोहर लाल खट्टर के इशारे पर इनेलो व इनसो पर आरोप लगा रहे है लेकिन आज देश व प्रदेश में भाजपा की सरकार है तो क्यों नहीं सरकार मामले की सी. बी. आई. या अन्य किसी एजेंसी से निष्पक्ष जांच करवाते। इनसो नेता ने कहा कि गोरीवाला मामले में उनका या उनके संगठन का कोई भी रोल पाया जाए तो वह राजनीति छोड़ देंगे लेकिन अगर उनका रोल नहीं पाया जाता तो भाजपा के नेता सार्वजनिक रूप से इनेलो पार्टी व आमजन से माफी मांगे। उन्होंने कहा कि उनका काम लोगों को जोडऩा है जबकि भाजपा का काम लोगों का भाईचारा खत्म करना है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी चौटाला परिवार को महम कांड, चौटाला डबल मर्डर मामला, कालुआना सरपंच की मौत के मामले में, जाट आरक्षण के समय प्रकाश कमेटी की रिपोर्ट में सांसद दुष्यंत चौटाला का गलत नियत से नाम डालना सहित अनेक मामलों में कांग्रेस व भाजपा नेताओं ने चौटाला परिवार को झूठ बोलकर बदनाम करने के प्रयास किए है। लेकिन एक भी मामले में कुछ भी साबित नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि चौ. देवीलाल की मूर्ति को नुकसान जाट आंदोलन के दौरान भाजपा के सांसद राजकुमार सैनी द्वारा करवाने का प्रयास किया गया था तब ये भाजपा नेता कुछ नहीं बोले। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि समाज को तोडऩे का काम भाजपा व कांग्रेस करती है। उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि सरकार पता नही कब सविंधान निर्माता की मूर्ति के लिए कमेटी को आर्थिक सहायता दे लेकिन वो घोषणा करते हैं कि बाबा साहेब की दोबारा नई मूर्ति की स्थापना पर जो भी खर्च आएगा उसको वह अपने निजी कोष से बनवाएंगे और भी किसी भी प्रकार की जो डिमांड यहां की कमेटी करेगी, उसको पूरा करते हुए बाबा साहेब के चौक को भव्य रूप दिया जाएगा। गांव गंगा में इनेलो को उस समय भारी लाभ हुआ जब इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में प्रिंस इंसा व जोनी इंसा ने अपने दर्जनों साथियों के साथ अधिकारिक तौर पर इनेलो में शामिल हुए। दिग्विजय ने उनके गले में हरे पटके डाल स्वागत किया और उनको इनेलो में आस्था जताने पर पूरा मान-सम्मान दिए जाने का भरोसा दिया। पूर्व विधायक डॉ सीता राम, बसपा के लोक सभा प्रभारी लीलू राम ने भी कार्यकर्ताओ को संबोधित किया।
चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब बचाने का अभियान शुरू करने से पहले टीम इंडिया के लिए बुरी खबर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय टीम के मुख्य कोच अनिल कुंबले और भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली के बीच मनमुटाव चल रहा है। खबरों की मानें तो इस मनमुटाव की वजह कुंबले का टीम को गाइड करने का तरीका है। दरअसल कोहली सहित कई सीनियर खिलाड़ी भी कुंबले से उनके व्यवहार को लेकर नाराज हैं। गौरतलब है कि टीम इंडिया 4 जून को पाकिस्तान के साथ मुकाबले को लेकर तैयारी कर रही है। ऐसे में कोच और कप्तान के बीच मनमुटाव की खबर से टीम को झटका लग सकता है। आपको बता दें कि मुख्य कोच अनिल कुंबले का कार्यकाल चैंपियंस ट्रॉफी के बाद समाप्त हो रहा है। यहां तक कि बीसीसीआई ने नए कोच के लिए विज्ञप्ति भी जारी की है। और आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 31 मई है। ज्ञात हो कि नए कोच के सिलेक्शन के लिए इंटरव्यू सचिन तेंदुलकर, सौरभ गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण करेंगे। ऐसे में खबरें ये भी आ रही हैं कि कुंबले का कार्यकाल और बढ़ाया जा सकता है। क्योंकि पिछले एक साल से कुंबले के कोच रहते टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन किया है। खबरों की मानें तो नए कोच के सिलेक्शन का जिम्मा संभालने वाले सचिन तेंदुलकर, सौरभ गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण चाहते हैं कि कुंबले का कार्यकाल बढ़ाकर 2019 विश्वकप तक किया जाए। हालांकि खबरें ये भी आ रहीं हैं कि कप्तान कोहली अब कुंबले के साथ काम करने इच्छुक नहीं हैं।
चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब बचाने का अभियान शुरू करने से पहले टीम इंडिया के लिए बुरी खबर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय टीम के मुख्य कोच अनिल कुंबले और भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली के बीच मनमुटाव चल रहा है। खबरों की मानें तो इस मनमुटाव की वजह कुंबले का टीम को गाइड करने का तरीका है। दरअसल कोहली सहित कई सीनियर खिलाड़ी भी कुंबले से उनके व्यवहार को लेकर नाराज हैं। गौरतलब है कि टीम इंडिया चार जून को पाकिस्तान के साथ मुकाबले को लेकर तैयारी कर रही है। ऐसे में कोच और कप्तान के बीच मनमुटाव की खबर से टीम को झटका लग सकता है। आपको बता दें कि मुख्य कोच अनिल कुंबले का कार्यकाल चैंपियंस ट्रॉफी के बाद समाप्त हो रहा है। यहां तक कि बीसीसीआई ने नए कोच के लिए विज्ञप्ति भी जारी की है। और आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख इकतीस मई है। ज्ञात हो कि नए कोच के सिलेक्शन के लिए इंटरव्यू सचिन तेंदुलकर, सौरभ गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण करेंगे। ऐसे में खबरें ये भी आ रही हैं कि कुंबले का कार्यकाल और बढ़ाया जा सकता है। क्योंकि पिछले एक साल से कुंबले के कोच रहते टीम इंडिया ने शानदार प्रदर्शन किया है। खबरों की मानें तो नए कोच के सिलेक्शन का जिम्मा संभालने वाले सचिन तेंदुलकर, सौरभ गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण चाहते हैं कि कुंबले का कार्यकाल बढ़ाकर दो हज़ार उन्नीस विश्वकप तक किया जाए। हालांकि खबरें ये भी आ रहीं हैं कि कप्तान कोहली अब कुंबले के साथ काम करने इच्छुक नहीं हैं।
Esha Deol Photos: बॉलीवुड एक्ट्रेस ईशा देओल अपनी हाल ही में रिलीज हुई सीरीज 'हंटर- टूटेगा नहीं तोड़ेगा' को लेकर सुर्खियों में छाई हुई हैं. ईशा के किरदार की काफी तारीफ भी हो रही है. (Pic Credit: Esha Deol/Instagram) ईशा देओल काफी वक्त बाद किसी प्रोजेक्ट में नजर आ रही हैं. एक्ट्रेस ने शादी के बाद अपनी पर्सनल लाइफ को पूरा वक्त दिया है. हालांकि शादी और दो बच्चों के बाद ईशा एक बार फिर से फिट हो गई हैं. ईशा अपनी फिटनेस का पूरा ध्यान रखती हैं. (Pic Credit: Esha Deol/Instagram) इस बाद का सबूत ईशा देओल की लेटेस्ट तस्वीरें हैं. एक्ट्रेस की नई तस्वीरों में उनका ग्लैमर लुक साफ-साफ देखा जा सकता है. ईशा इन तस्वीरों में क्रॉप टॉप और शॉर्ट्स पहने हुए नजर आ रही हैं. इन तस्वीरों को देख फैंस को एक बार फिर धूम वाइव आ रही हैं. (Pic Credit: Esha Deol/Instagram) बता दें, भले ही एक्टिंग की दुनिया में ईशा कम एक्टिंव हो लेकिन उन्हें रियलिटी शोज में देखा जाता रहता है. ईशा ने अपने इंस्टा पर अपनी फिटनेस से जुड़ी कई सारी तस्वीरें और वीडियोज़ पोस्ट की हैं. (Pic Credit: Esha Deol/Instagram) ईशा अपने फैंस को फिट रहने के लिए मोटीवेट करती रहती हैं. ईशा देओल सोशल मीडिया पर अपने फैंस के साथ जुड़ी रहती हैं, वह अपने बच्चों और पति के साथ भी तस्वीरें पोस्ट करती रहती हैं. (Pic Credit: Esha Deol/Instagram)
Esha Deol Photos: बॉलीवुड एक्ट्रेस ईशा देओल अपनी हाल ही में रिलीज हुई सीरीज 'हंटर- टूटेगा नहीं तोड़ेगा' को लेकर सुर्खियों में छाई हुई हैं. ईशा के किरदार की काफी तारीफ भी हो रही है. ईशा देओल काफी वक्त बाद किसी प्रोजेक्ट में नजर आ रही हैं. एक्ट्रेस ने शादी के बाद अपनी पर्सनल लाइफ को पूरा वक्त दिया है. हालांकि शादी और दो बच्चों के बाद ईशा एक बार फिर से फिट हो गई हैं. ईशा अपनी फिटनेस का पूरा ध्यान रखती हैं. इस बाद का सबूत ईशा देओल की लेटेस्ट तस्वीरें हैं. एक्ट्रेस की नई तस्वीरों में उनका ग्लैमर लुक साफ-साफ देखा जा सकता है. ईशा इन तस्वीरों में क्रॉप टॉप और शॉर्ट्स पहने हुए नजर आ रही हैं. इन तस्वीरों को देख फैंस को एक बार फिर धूम वाइव आ रही हैं. बता दें, भले ही एक्टिंग की दुनिया में ईशा कम एक्टिंव हो लेकिन उन्हें रियलिटी शोज में देखा जाता रहता है. ईशा ने अपने इंस्टा पर अपनी फिटनेस से जुड़ी कई सारी तस्वीरें और वीडियोज़ पोस्ट की हैं. ईशा अपने फैंस को फिट रहने के लिए मोटीवेट करती रहती हैं. ईशा देओल सोशल मीडिया पर अपने फैंस के साथ जुड़ी रहती हैं, वह अपने बच्चों और पति के साथ भी तस्वीरें पोस्ट करती रहती हैं.
केरल में आंगनवाड़ी केंद्रों और पुस्तकालयों में आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। शिक्षा विभाग ने आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए यह पहली की है। यह पहल इसलिए की गई है क्योंकि सूबे में चल रही आभासी कक्षाओं में भाग लेने के लिए कई विद्यार्थियों ने संसाधनों का प्रबंधन करने में असमर्थता जताई थी। शिक्षा विभाग का कहना है कि आर्थिक तौर पर पिछड़े विद्यार्थियों को आभासी कक्षाओं में शामिल होने में दिक्कत हो रही थी। सूबे के सहायक शिक्षा अधिकारी का कहना है कि इस साल स्कूल खोलना कुछ हद तक असंभव है लेकिन सूबे की सरकार ने ऑनलाइन सीखने का नया तरीका पेश किया है। एक जून से ही ऑनलाइन लर्निंग का ट्रायल चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक तौर पर पिछड़े विद्यार्थियों के घरों में स्मार्टफोन और टीवी सेट की अनुपलब्धता के कारण विभाग द्वारा स्थापित केंद्रों तक गरीब और पिछड़े समुदायों के छात्र शिक्षा लेने के लिए पहुंच रहे हैं। दरअसल ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लेने के लिए संसाधनों की अनुपलब्धता की वजह से सूबे में आत्महत्या का मामला सामने आने के बाद सरकार इसे लेकर अतिरिक्त सचेत हुई है। एक शिक्षक का कहना है कि आदिवासियों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं की सुविधा के लिए कोझीकोड के मारुथोंकरा में एक कक्षा है। इस कक्षा में लैपटॉप, प्रोजेक्टर और स्क्रीन की सुविधा प्रदान की गई है। यह सुविधा मारुथोंकरा ग्राम पंचायत द्वारा प्रदान की गई है। बता दें कि सूबे के शिक्षा विभाग द्वारा अपने चैनल विक्टर्स के जरिए विद्यार्थियों के लिए कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। इसके जरिए हर रोज सुबह दस बजे से लेकर शाम 5 बजे तक विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
केरल में आंगनवाड़ी केंद्रों और पुस्तकालयों में आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े छात्रों के लिए ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। शिक्षा विभाग ने आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए यह पहली की है। यह पहल इसलिए की गई है क्योंकि सूबे में चल रही आभासी कक्षाओं में भाग लेने के लिए कई विद्यार्थियों ने संसाधनों का प्रबंधन करने में असमर्थता जताई थी। शिक्षा विभाग का कहना है कि आर्थिक तौर पर पिछड़े विद्यार्थियों को आभासी कक्षाओं में शामिल होने में दिक्कत हो रही थी। सूबे के सहायक शिक्षा अधिकारी का कहना है कि इस साल स्कूल खोलना कुछ हद तक असंभव है लेकिन सूबे की सरकार ने ऑनलाइन सीखने का नया तरीका पेश किया है। एक जून से ही ऑनलाइन लर्निंग का ट्रायल चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आर्थिक तौर पर पिछड़े विद्यार्थियों के घरों में स्मार्टफोन और टीवी सेट की अनुपलब्धता के कारण विभाग द्वारा स्थापित केंद्रों तक गरीब और पिछड़े समुदायों के छात्र शिक्षा लेने के लिए पहुंच रहे हैं। दरअसल ऑनलाइन कक्षाओं में भाग लेने के लिए संसाधनों की अनुपलब्धता की वजह से सूबे में आत्महत्या का मामला सामने आने के बाद सरकार इसे लेकर अतिरिक्त सचेत हुई है। एक शिक्षक का कहना है कि आदिवासियों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं की सुविधा के लिए कोझीकोड के मारुथोंकरा में एक कक्षा है। इस कक्षा में लैपटॉप, प्रोजेक्टर और स्क्रीन की सुविधा प्रदान की गई है। यह सुविधा मारुथोंकरा ग्राम पंचायत द्वारा प्रदान की गई है। बता दें कि सूबे के शिक्षा विभाग द्वारा अपने चैनल विक्टर्स के जरिए विद्यार्थियों के लिए कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। इसके जरिए हर रोज सुबह दस बजे से लेकर शाम पाँच बजे तक विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
Ranchi : झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के प्रधान कार्यालय में योग दिवस के अवसर पर योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया. बोर्ड में कार्यरत पदाधिकारी व कर्मचारियों समेत बच्चों ने भी योगाभ्यास किया. बोर्ड ने अपने अधिकारियों, कर्मचारियों और बुनकरों समेत अन्य लोगों से कहा कि प्रतिदिन सुबह-सुबह सभी को योगाभ्यास करनी चाहिए. योग करने से हमारा शरीर स्वस्थ रहता है और मन को भी शांति मिलती है. योग स्वस्थ जीवन का आधार है. बता दें कि आज आठवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है. 2 सालों से कोविड-19 के कारण योग दिवस सार्वजनिक तौर पर नहीं मनाया जा रहा था. पूर्वी क्षेत्र के खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के सदस्य मनोज कुमार सिंह, पूर्वी क्षेत्र के उप मुख्य पदाधिकारी एएल मीणा, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल के निदेशक, झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के निदेशक राखल चंद्र बेसरा और अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे.
Ranchi : झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के प्रधान कार्यालय में योग दिवस के अवसर पर योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया. बोर्ड में कार्यरत पदाधिकारी व कर्मचारियों समेत बच्चों ने भी योगाभ्यास किया. बोर्ड ने अपने अधिकारियों, कर्मचारियों और बुनकरों समेत अन्य लोगों से कहा कि प्रतिदिन सुबह-सुबह सभी को योगाभ्यास करनी चाहिए. योग करने से हमारा शरीर स्वस्थ रहता है और मन को भी शांति मिलती है. योग स्वस्थ जीवन का आधार है. बता दें कि आज आठवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है. दो सालों से कोविड-उन्नीस के कारण योग दिवस सार्वजनिक तौर पर नहीं मनाया जा रहा था. पूर्वी क्षेत्र के खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के सदस्य मनोज कुमार सिंह, पूर्वी क्षेत्र के उप मुख्य पदाधिकारी एएल मीणा, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल के निदेशक, झारखंड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग के निदेशक राखल चंद्र बेसरा और अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे.
मित्र बनाऊँगा मैं तुझको, बोल करेगा प्यार न मुझको ? और सुनाएगा न मुझे निज गायन भी एकाध ? संशकित नयनों से मत देख 19 मनुष्य अपनी निराशावादी मन स्थिति में जिस प्रकार प्रकृति तक अपनी समवेदना का विस्तार करता है उसी प्रकार प्रकृति से भी समवेदना अथवा सांत्वना प्राप्त करना चाहता है। प्रकृति से समवेदना प्राप्त करने की गीतों में व्यक्त की गई है। कवि का हृदय प्रकृति से सात्वना प्राप्त करने की उसी समय अभिलाषा करता है जब समाज में वह अपने को बिल्कुल अकेला और एकाकी पाता है। रात्रि के सन्नाटे में चन्द्रमा बच्चन को सांत्वना देता हैमुझसे चाँद कहा करता है - तू तो है लघु मानव केवल, पृथ्वीतल का बासी निर्वल, तारों का समर्थ अश्रु भी नभ से नित्य ढहा करता है। इतने विवेचन से स्पष्ट है कि मानव हृदय को जब अपने समाज से समवेदनको आशा नहीं रहती तब वह उसके अभाव की पूर्ति के लिए प्रकृति की ओर मुड़ता है। छायावादी कवियों ने इस मनोवृत्ति की सफलतापूर्वक अभिव्यक्ति की है । (118) प्रकृति पर निराशावादी मनसा का आरोपछायावादी युग आत्मानुभूति का चित्रण करने वाले गीतो का युग है, अत इस युग में प्रकृति का वस्तुगत ( Objective ) चित्रण मिलना कठिन है । आत्मानुभूति के साथ निराशावाद का भी युग होने के कारण छायावादी गीतो में कवियों ने अपनी निराशावादी मनसा का प्रकृति के अपर प्राय आरोप किया है। निर्झरिणी के कल कल नाद को सुनकर सुमित्रानन्दन पंत कल्पना करते हैंअलि । यह क्या केवल दिखलावा, मूक-व्यथा का मुखर-भुलाव ? १ - एकान्त सगीत ( १९३८-३६ ई० ) गीत-सख्या ५६, पृ० ७५ । २ - निशा - निमन्त्रण ( १९३७-३८ ई० ) गीत-सख्या ३३, पृ० ५७ १
मित्र बनाऊँगा मैं तुझको, बोल करेगा प्यार न मुझको ? और सुनाएगा न मुझे निज गायन भी एकाध ? संशकित नयनों से मत देख उन्नीस मनुष्य अपनी निराशावादी मन स्थिति में जिस प्रकार प्रकृति तक अपनी समवेदना का विस्तार करता है उसी प्रकार प्रकृति से भी समवेदना अथवा सांत्वना प्राप्त करना चाहता है। प्रकृति से समवेदना प्राप्त करने की गीतों में व्यक्त की गई है। कवि का हृदय प्रकृति से सात्वना प्राप्त करने की उसी समय अभिलाषा करता है जब समाज में वह अपने को बिल्कुल अकेला और एकाकी पाता है। रात्रि के सन्नाटे में चन्द्रमा बच्चन को सांत्वना देता हैमुझसे चाँद कहा करता है - तू तो है लघु मानव केवल, पृथ्वीतल का बासी निर्वल, तारों का समर्थ अश्रु भी नभ से नित्य ढहा करता है। इतने विवेचन से स्पष्ट है कि मानव हृदय को जब अपने समाज से समवेदनको आशा नहीं रहती तब वह उसके अभाव की पूर्ति के लिए प्रकृति की ओर मुड़ता है। छायावादी कवियों ने इस मनोवृत्ति की सफलतापूर्वक अभिव्यक्ति की है । प्रकृति पर निराशावादी मनसा का आरोपछायावादी युग आत्मानुभूति का चित्रण करने वाले गीतो का युग है, अत इस युग में प्रकृति का वस्तुगत चित्रण मिलना कठिन है । आत्मानुभूति के साथ निराशावाद का भी युग होने के कारण छायावादी गीतो में कवियों ने अपनी निराशावादी मनसा का प्रकृति के अपर प्राय आरोप किया है। निर्झरिणी के कल कल नाद को सुनकर सुमित्रानन्दन पंत कल्पना करते हैंअलि । यह क्या केवल दिखलावा, मूक-व्यथा का मुखर-भुलाव ? एक - एकान्त सगीत गीत-सख्या छप्पन, पृशून्य पचहत्तर । दो - निशा - निमन्त्रण गीत-सख्या तैंतीस, पृशून्य सत्तावन एक
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जम्मू कश्मीर के कुलगाम में सेना और आतंकियों के बीच सुबह शुरु हुई मुठभेड़ खत्म हो गई है। इस मठभेड़ में तीन आतंकी ढेर हो गए है और दो जवान जख्मी हुए है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मारे गए आतंकवादियों की पहचान की जा रही है। उन्होंने बताया कि दक्षिण कश्मीर के लर्रू इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद इलाके की घेराबंदी की गई और खोज अभियान चलाया। अधिकारी ने बताया कि जब सुरक्षाबल तलाशी अभियान में लगे थे तब आतंकवादियों ने उन पर गोलियां चलानी शुरू कर दी जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। सुबह सेना ने इलाके को चारों ओस से घेर लिया था। दोनों ओर से जबर्दस्त फायरिंग हो रही थी। फायरिंग के दौरान ही सेना के दो जवानों को गाली लगी थी। स्थानीय अस्पताल में उनका इलाज किया जा रहा है। सेना ने घटनास्थल पर वाहनों के गुजरने पर रोक लगा दी थी। #JammuAndKashmir : Encounter underway between terrorists & security forces in Larro area of Kulgam district of South Kashmir. One or two terrorists are hiding in a house. More details awaited. #JammuAndKashmir : Encounter underway between terrorists & security forces in Larro area of Kulgam district of South Kashmir. One or two terrorists are hiding in a house. More details awaited. जम्मू कश्मीर पुलिस ने कहा कि लर्रु इलाके में पुलिस पहले तलाशी अभियान चला रही थी। जम्मू कश्मीर पुलिस ने कहा कि लर्रू इलाके में पुलिस पहले तलाशी अभियान चला रही थी, तभी यहां पर आतंकियों की ओर से फायरिंग शुरू हो गई। इसके बाद सेना और सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला। हाल ही जम्मू कश्मीर में सेना के साथ एनकाउंटर में आंतकी और एएमयू के पीएचडी स्कॉलर रहे मन्नान वानी मारा गया था। इसके बाद वहां आतंकी घटनाओं में लगातार इजाफा हुआ है। Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जम्मू कश्मीर के कुलगाम में सेना और आतंकियों के बीच सुबह शुरु हुई मुठभेड़ खत्म हो गई है। इस मठभेड़ में तीन आतंकी ढेर हो गए है और दो जवान जख्मी हुए है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मारे गए आतंकवादियों की पहचान की जा रही है। उन्होंने बताया कि दक्षिण कश्मीर के लर्रू इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद इलाके की घेराबंदी की गई और खोज अभियान चलाया। अधिकारी ने बताया कि जब सुरक्षाबल तलाशी अभियान में लगे थे तब आतंकवादियों ने उन पर गोलियां चलानी शुरू कर दी जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। सुबह सेना ने इलाके को चारों ओस से घेर लिया था। दोनों ओर से जबर्दस्त फायरिंग हो रही थी। फायरिंग के दौरान ही सेना के दो जवानों को गाली लगी थी। स्थानीय अस्पताल में उनका इलाज किया जा रहा है। सेना ने घटनास्थल पर वाहनों के गुजरने पर रोक लगा दी थी। #JammuAndKashmir : Encounter underway between terrorists & security forces in Larro area of Kulgam district of South Kashmir. One or two terrorists are hiding in a house. More details awaited. #JammuAndKashmir : Encounter underway between terrorists & security forces in Larro area of Kulgam district of South Kashmir. One or two terrorists are hiding in a house. More details awaited. जम्मू कश्मीर पुलिस ने कहा कि लर्रु इलाके में पुलिस पहले तलाशी अभियान चला रही थी। जम्मू कश्मीर पुलिस ने कहा कि लर्रू इलाके में पुलिस पहले तलाशी अभियान चला रही थी, तभी यहां पर आतंकियों की ओर से फायरिंग शुरू हो गई। इसके बाद सेना और सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभाला। हाल ही जम्मू कश्मीर में सेना के साथ एनकाउंटर में आंतकी और एएमयू के पीएचडी स्कॉलर रहे मन्नान वानी मारा गया था। इसके बाद वहां आतंकी घटनाओं में लगातार इजाफा हुआ है। Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
आखिर में टीवी से बॉलीवुड में एंट्री मारने वाले एक्टर करण सिंह ग्रोवर को फाइनल किया गया। छोटे पर्दे का मशहूर शो 'कसौटी ज़िन्दगी की 2' पिछले कई दिनों से 'मिस्टर बजाज' की भूमिका का लिए सुर्खियों में बना हुआ है। इस किरदार के लिए कई कलाकारों के नाम सामने आए। लेकिन आखिर में टीवी से बॉलीवुड में एंट्री मारने वाले एक्टर करण सिंह ग्रोवर को फाइनल किया गया। सीरियल में करण सिंह ग्रोवर की एंट्री के साथ ही बहुत बड़ा ट्विस्ट देखने मिलेगा। आपको बता दें, शो में करण सिंह ग्रोवर 'मिस्टर बजाज' की भूमिका में नजर आएंगे। इस सीरियल की शूटिंग करण ने शुरू कर दी हैं। इसके बाद अब इस शो में करण सिंह ग्रोवर का लुक किस तरह का होगा। इसकी पहली झलक सामने आ गई है। आपको बता दें, आने वाले हफ्ते से करण सिंह ग्रोवर 'कसौटी जिंदगी की 2' का हिस्सा बनते दिखाई देंगे। इस शो के साथ करण फिर से एक बाद छोटे पर्दे पर वापसी करेंगे। इस शो की शूटिंग शुरू करने से पहले कई बार करण सिंह ग्रोवर 'कसौटी जिंदगी की 2' के सेट पर देखे गए। आपको बता दें, शो में एरिका फर्नांडीस 'प्रेरणा' और पार्थ समथान 'अनुराग' की भूमिका ने दिखाई दे रहे हैं। इस दोनों को इस शो में काफी पसंद किया जा रहा हैं। छोटे पर्दे ही ये एक हिट जोड़ी के तौर पर सामने आ रहे हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर चैनल ने एक प्रोमो रिलीज किया है। जिसमें अनुराग और प्रेरणा की शादी दिखाई जा रही हैं। इसके साथ ही इसमें मिस्टर बजाज यानी करण सिंह ग्रोवर की एंट्री भी दिखाई गयी है। आपको बता दें, मिस्टर बजाज के आने से प्रेरणा और अनुराग की लव स्टोरी का ट्रैक को बदलने वाली है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
आखिर में टीवी से बॉलीवुड में एंट्री मारने वाले एक्टर करण सिंह ग्रोवर को फाइनल किया गया। छोटे पर्दे का मशहूर शो 'कसौटी ज़िन्दगी की दो' पिछले कई दिनों से 'मिस्टर बजाज' की भूमिका का लिए सुर्खियों में बना हुआ है। इस किरदार के लिए कई कलाकारों के नाम सामने आए। लेकिन आखिर में टीवी से बॉलीवुड में एंट्री मारने वाले एक्टर करण सिंह ग्रोवर को फाइनल किया गया। सीरियल में करण सिंह ग्रोवर की एंट्री के साथ ही बहुत बड़ा ट्विस्ट देखने मिलेगा। आपको बता दें, शो में करण सिंह ग्रोवर 'मिस्टर बजाज' की भूमिका में नजर आएंगे। इस सीरियल की शूटिंग करण ने शुरू कर दी हैं। इसके बाद अब इस शो में करण सिंह ग्रोवर का लुक किस तरह का होगा। इसकी पहली झलक सामने आ गई है। आपको बता दें, आने वाले हफ्ते से करण सिंह ग्रोवर 'कसौटी जिंदगी की दो' का हिस्सा बनते दिखाई देंगे। इस शो के साथ करण फिर से एक बाद छोटे पर्दे पर वापसी करेंगे। इस शो की शूटिंग शुरू करने से पहले कई बार करण सिंह ग्रोवर 'कसौटी जिंदगी की दो' के सेट पर देखे गए। आपको बता दें, शो में एरिका फर्नांडीस 'प्रेरणा' और पार्थ समथान 'अनुराग' की भूमिका ने दिखाई दे रहे हैं। इस दोनों को इस शो में काफी पसंद किया जा रहा हैं। छोटे पर्दे ही ये एक हिट जोड़ी के तौर पर सामने आ रहे हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर चैनल ने एक प्रोमो रिलीज किया है। जिसमें अनुराग और प्रेरणा की शादी दिखाई जा रही हैं। इसके साथ ही इसमें मिस्टर बजाज यानी करण सिंह ग्रोवर की एंट्री भी दिखाई गयी है। आपको बता दें, मिस्टर बजाज के आने से प्रेरणा और अनुराग की लव स्टोरी का ट्रैक को बदलने वाली है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
देहरादून, आजखबर। औद्योगिक क्षेत्र सेलाकुई में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था न होने से बाजार में जगह-जगह पर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। गंदगी के ढेर लगे होने से लोगों को दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। औद्योगिक क्षेत्र सेलाकुई में तीन सौ से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं, लेकिन यहां अभी तक कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था सरकार द्वारा नहीं की गई है। फैक्ट्रियों और घरों का कूड़ा सड़क पर पड़ा रहता है। बरसात में कूड़े के सड़ने से दुर्गंध के चलते आस-पास के लोगों के लिए रहना मुश्किल हो जाता है। सेलाकुई में औद्योगिक इकाइयों के अलावा दो दर्जन से अधिक शिक्षण संस्थान व अन्य इंस्टीट्यूट हैं। शिक्षण संस्थानों में पड़ने के लिए यहां बाहर से सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं आते हैं, जगह-जगह पर कूड़े के ढेर लगे होने से छात्रों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सेलाकुई ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण यहां सफाई व्यवस्था का जिम्मा ग्रामपंचायत के पास है, लेकिन ग्रामपंचायत के पास सीमित संसाधन होने के कारण वह सफाई व्यवस्था की ओर ध्यान नहीं दे पाती है। नेशनल हाइवे के किनारे जो नालियां बनी हुई हैं वे सफाई के अभाव में कूड़े से अटी पड़ी हुई हैं, जिस कारण बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पाती है। बारिश के पानी की निकासी न हो पाने के कारण सारा पानी सड़क पर जमा हो जाता है, जिस कारण लोगों के लिए वहां से निकलना दुभर हो जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता राजेश शर्मा का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र सेलाकुई में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था की जानी चाहिए। उनका कहना है कि कुछ औद्योगिक इकाइयों द्वारा सारा कूड़ा सारणा नदी में डाला जा रहा है, जिस कारण नदी के आस-पास रहने वाले लोगों को गंदगी का सामना करना पड़ रहा है। सेलाकुई बाजार में कूड़ा डालने के लिए कूड़ादान तक की व्यवस्था नहीं है। वहीं, ग्राम पधान विजय पाल सिंह का कहना है कि ग्रामपंचायत के पास सफाई के लिए कोई बजट नहीं आता है, जिस कारण ग्रामपंचायत सफाई की व्यवस्था नहीं कर सकती है।
देहरादून, आजखबर। औद्योगिक क्षेत्र सेलाकुई में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था न होने से बाजार में जगह-जगह पर कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। गंदगी के ढेर लगे होने से लोगों को दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। औद्योगिक क्षेत्र सेलाकुई में तीन सौ से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं, लेकिन यहां अभी तक कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था सरकार द्वारा नहीं की गई है। फैक्ट्रियों और घरों का कूड़ा सड़क पर पड़ा रहता है। बरसात में कूड़े के सड़ने से दुर्गंध के चलते आस-पास के लोगों के लिए रहना मुश्किल हो जाता है। सेलाकुई में औद्योगिक इकाइयों के अलावा दो दर्जन से अधिक शिक्षण संस्थान व अन्य इंस्टीट्यूट हैं। शिक्षण संस्थानों में पड़ने के लिए यहां बाहर से सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राएं आते हैं, जगह-जगह पर कूड़े के ढेर लगे होने से छात्रों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सेलाकुई ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण यहां सफाई व्यवस्था का जिम्मा ग्रामपंचायत के पास है, लेकिन ग्रामपंचायत के पास सीमित संसाधन होने के कारण वह सफाई व्यवस्था की ओर ध्यान नहीं दे पाती है। नेशनल हाइवे के किनारे जो नालियां बनी हुई हैं वे सफाई के अभाव में कूड़े से अटी पड़ी हुई हैं, जिस कारण बारिश के पानी की निकासी नहीं हो पाती है। बारिश के पानी की निकासी न हो पाने के कारण सारा पानी सड़क पर जमा हो जाता है, जिस कारण लोगों के लिए वहां से निकलना दुभर हो जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता राजेश शर्मा का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र सेलाकुई में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था की जानी चाहिए। उनका कहना है कि कुछ औद्योगिक इकाइयों द्वारा सारा कूड़ा सारणा नदी में डाला जा रहा है, जिस कारण नदी के आस-पास रहने वाले लोगों को गंदगी का सामना करना पड़ रहा है। सेलाकुई बाजार में कूड़ा डालने के लिए कूड़ादान तक की व्यवस्था नहीं है। वहीं, ग्राम पधान विजय पाल सिंह का कहना है कि ग्रामपंचायत के पास सफाई के लिए कोई बजट नहीं आता है, जिस कारण ग्रामपंचायत सफाई की व्यवस्था नहीं कर सकती है।
बांदा। कनवारा गांव में केन नदी किनारे जंगल में महिला का अधजला शव मिला। चरवाहों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव शिनाख्त कराने का प्रयास किया, लेकिन शिनाख्त नहीं हो पाई। फील्ड यूनिट ने घटनास्थल का मौका मुआयना कर साक्ष्य जुटाए। आशंका है कि महिला की हत्या कर शव जलाया गया है। शहर कोतवाली क्षेत्र के कनवारा गांव में केन नदी किनारे बीहड़ जंगल में झाड़ियों के बीच एक 25 वर्षीय अज्ञात महिला का अधजला शव पड़ा मिला। शनिवार को सुबह जंगल में जानवर चराने गए चरवाहों ने पुलिस को सूचना दी। अपर पुलिस अधीक्षक लक्ष्मी निवास मिश्र, सीओ सिटी अंबुजा त्रिवेदी और शहर कोतवाल श्याम बाबू शुक्ला मौके पर पहुंचे। अपर एसपी ने फील्ड यूनिट बुलाकर घटनास्थल का मौका मुआयना किया। पुलिस ने तकरीबन दो घंटे तक जंगल का चप्पा-चप्पा छाना। नतीजा कुछ नहीं निकला। फील्ड यूनिट ने कुछ साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस अधिकारियों ने आसपास गांवों के ग्रामीणों को बुलाकर शिनाख्त के प्रयास कराए, लेकिन शिनाख्त नहीं हो सकी। एएसपी ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला हत्या का है। शव के शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। आशंका है कि यह महिला किसी दूसरे जिले की हो सकती है। आसपास के जनपदों में भी फोटो भेजकर शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। शव को मोर्चरी में रखाया गया है। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल के आसपास की मिट्टी का नमूना लिया। डॉग स्क्वायड भी घटनास्थल से कुछ दूरी तक गया, फिर लौट आया। शहर कोतवाल श्यामबाबू शुक्ला ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है। आशंका है कि महिला को कहीं और से लाकर यहां मारा गया है और शव की शिनाख्त मिटाने के लिए जला दिया है। शव लगभग 75 फीसदी जला हुआ है।
बांदा। कनवारा गांव में केन नदी किनारे जंगल में महिला का अधजला शव मिला। चरवाहों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव शिनाख्त कराने का प्रयास किया, लेकिन शिनाख्त नहीं हो पाई। फील्ड यूनिट ने घटनास्थल का मौका मुआयना कर साक्ष्य जुटाए। आशंका है कि महिला की हत्या कर शव जलाया गया है। शहर कोतवाली क्षेत्र के कनवारा गांव में केन नदी किनारे बीहड़ जंगल में झाड़ियों के बीच एक पच्चीस वर्षीय अज्ञात महिला का अधजला शव पड़ा मिला। शनिवार को सुबह जंगल में जानवर चराने गए चरवाहों ने पुलिस को सूचना दी। अपर पुलिस अधीक्षक लक्ष्मी निवास मिश्र, सीओ सिटी अंबुजा त्रिवेदी और शहर कोतवाल श्याम बाबू शुक्ला मौके पर पहुंचे। अपर एसपी ने फील्ड यूनिट बुलाकर घटनास्थल का मौका मुआयना किया। पुलिस ने तकरीबन दो घंटे तक जंगल का चप्पा-चप्पा छाना। नतीजा कुछ नहीं निकला। फील्ड यूनिट ने कुछ साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस अधिकारियों ने आसपास गांवों के ग्रामीणों को बुलाकर शिनाख्त के प्रयास कराए, लेकिन शिनाख्त नहीं हो सकी। एएसपी ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला हत्या का है। शव के शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। आशंका है कि यह महिला किसी दूसरे जिले की हो सकती है। आसपास के जनपदों में भी फोटो भेजकर शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। शव को मोर्चरी में रखाया गया है। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल के आसपास की मिट्टी का नमूना लिया। डॉग स्क्वायड भी घटनास्थल से कुछ दूरी तक गया, फिर लौट आया। शहर कोतवाल श्यामबाबू शुक्ला ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है। आशंका है कि महिला को कहीं और से लाकर यहां मारा गया है और शव की शिनाख्त मिटाने के लिए जला दिया है। शव लगभग पचहत्तर फीसदी जला हुआ है।
मुख्य विपक्षी दल सीपीएन (यूएमएल) ने प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल के इस्तीफे की मांग करते हुए आज नेशनल असेंबली की बैठक को बाधित कर दिया है. प्रधानमंत्री दहल के कुछ दिन पहले दिए गए बयान के कारण यूएमएल ने नेशनल असेंबली की बैठक में बाधा डाली. यूएमएल सांसद भैरव सुंदर श्रेष्ठ ने कहा कि प्रधानमंत्री दहल का यह बयान कि सरदार प्रीतम सिंह खुद को प्रधानमंत्री बनाने के लिए कई बार भारत गए थे, ने नेपाल के राष्ट्रीय गौरव और राष्ट्रीय स्वतंत्रता को ठेस पहुंचाई है. उन्होंने नेशनल असेंबली के अध्यक्ष को सूचित किया कि जब तक प्रधानमंत्री इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक संसद को चलने नहीं दिया जाएगा। यूएमएल सांसदों का विरोध जारी रहने के कारण नेशनल असेंबली की बैठक स्थगित कर दी गई है और यह शुक्रवार को होगी।
मुख्य विपक्षी दल सीपीएन ने प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल के इस्तीफे की मांग करते हुए आज नेशनल असेंबली की बैठक को बाधित कर दिया है. प्रधानमंत्री दहल के कुछ दिन पहले दिए गए बयान के कारण यूएमएल ने नेशनल असेंबली की बैठक में बाधा डाली. यूएमएल सांसद भैरव सुंदर श्रेष्ठ ने कहा कि प्रधानमंत्री दहल का यह बयान कि सरदार प्रीतम सिंह खुद को प्रधानमंत्री बनाने के लिए कई बार भारत गए थे, ने नेपाल के राष्ट्रीय गौरव और राष्ट्रीय स्वतंत्रता को ठेस पहुंचाई है. उन्होंने नेशनल असेंबली के अध्यक्ष को सूचित किया कि जब तक प्रधानमंत्री इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक संसद को चलने नहीं दिया जाएगा। यूएमएल सांसदों का विरोध जारी रहने के कारण नेशनल असेंबली की बैठक स्थगित कर दी गई है और यह शुक्रवार को होगी।
कर्नाटक में हुबली हिंसा की जांच में दंगाइयों द्वारा पुलिसकर्मियों को मारने की कोशिश का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने गुरुवार को कहा कि हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार लोगों की संख्या बढ़कर 126 हो गई है। कसाबा पुलिस थाने के कांस्टेबल अनिल कांडेकर और मंजूनाथ ने अपनी शिकायत में कहा है कि दंगाइयों ने उनपर हमला करने की कोशिश की, जिसमें वह बाल-बाल बचे। शनिवार की रात हिंसा के दौरान पथराव किया गया। वाहनों को आग लगा दी गई। इस बीच जब दंगाइयों को रोकने की कोशिश की गई तो उन्होंने उल्टा पुलिसकर्मियों पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। कांस्टेबल इस हमले से जैसे-तैसे जान बचाकर भागे। हिंसा के आरोपियों को पकड़ने के लिए विशेष टीमों ने अभियान को तेज कर दिया है। अब तक 126 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन अभी भी मौलवी वसीम पठान की तलाश जारी है। इस बीच, जेएमएफसी अदालत ने आरोपी युवक अभिषेक हिरेमठ को 22 अप्रैल से शुरू होने वाली दूसरी पीयूसी परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दे दी है। उसे सुरक्षा घेरे में परीक्षा केंद्र ले जाया जाएगा। पढ़ने के लिए जेल में पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। इस घटना को लेकर विपक्षी नेताओं ने आरएसएस, विहिप और सनातन संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। सत्तारूढ़ बीजेपी नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर लोग शांति से नहीं रहते हैं, तो उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। कर्नाटक पुलिस ने शहर में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए हुबली शहर में कर्फ्यू को 23 अप्रैल तक बढ़ा दिया है। सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक पोस्ट के बाद शनिवार देर रात हुबली में हिंसा भड़की। जिसे रोकने के लिए पुलिस विभाग को अपनी पूरी ताकत लगानी पड़ी। इस दौरान 12 पुलिस कर्मी घायल हो गए। हिंसक भीड़ ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और वाहनों को आग लगा दी।
कर्नाटक में हुबली हिंसा की जांच में दंगाइयों द्वारा पुलिसकर्मियों को मारने की कोशिश का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पुलिस ने गुरुवार को कहा कि हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार लोगों की संख्या बढ़कर एक सौ छब्बीस हो गई है। कसाबा पुलिस थाने के कांस्टेबल अनिल कांडेकर और मंजूनाथ ने अपनी शिकायत में कहा है कि दंगाइयों ने उनपर हमला करने की कोशिश की, जिसमें वह बाल-बाल बचे। शनिवार की रात हिंसा के दौरान पथराव किया गया। वाहनों को आग लगा दी गई। इस बीच जब दंगाइयों को रोकने की कोशिश की गई तो उन्होंने उल्टा पुलिसकर्मियों पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। कांस्टेबल इस हमले से जैसे-तैसे जान बचाकर भागे। हिंसा के आरोपियों को पकड़ने के लिए विशेष टीमों ने अभियान को तेज कर दिया है। अब तक एक सौ छब्बीस लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन अभी भी मौलवी वसीम पठान की तलाश जारी है। इस बीच, जेएमएफसी अदालत ने आरोपी युवक अभिषेक हिरेमठ को बाईस अप्रैल से शुरू होने वाली दूसरी पीयूसी परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दे दी है। उसे सुरक्षा घेरे में परीक्षा केंद्र ले जाया जाएगा। पढ़ने के लिए जेल में पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। इस घटना को लेकर विपक्षी नेताओं ने आरएसएस, विहिप और सनातन संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। सत्तारूढ़ बीजेपी नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर लोग शांति से नहीं रहते हैं, तो उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। कर्नाटक पुलिस ने शहर में कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए हुबली शहर में कर्फ्यू को तेईस अप्रैल तक बढ़ा दिया है। सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक पोस्ट के बाद शनिवार देर रात हुबली में हिंसा भड़की। जिसे रोकने के लिए पुलिस विभाग को अपनी पूरी ताकत लगानी पड़ी। इस दौरान बारह पुलिस कर्मी घायल हो गए। हिंसक भीड़ ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और वाहनों को आग लगा दी।
हाल ही में रूस में दिखाई दियामेरा व्यवसाय नामक एक संबद्ध कार्यक्रम, जिसका मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन अकाउंटिंग को लागू करना है यह उत्पाद अधिक लोकप्रिय हो रहा है, और इसके अस्तित्व के दौरान पहले से ही सैकड़ों हद तक अनुयायी जीतने में कामयाब हो गया है। और यह आश्चर्य की बात नहीं है आखिरकार, सिस्टम संपूर्ण लेखा पद्धति को पूरा करने में सक्षम है, साथ ही वर्तमान उपयोगकर्ता को वर्तमान विशेषज्ञ सलाह और सेवाएं प्रदान करता है। "माय केस" नामक सेवा का इतिहास शुरू हुआवर्ष 200 9 में कंपनी की स्थापना आईटी प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में काम कर रहे दो व्यापारियों द्वारा की गई - मैक्सिम यारेमको और सेर्गेई पैनोव पहले से ही 2010 में उनके वंश ने "अर्थशास्त्र और व्यवसाय" के क्षेत्र में रूसी इंटरनेट के विकास में इस तरह का एक महत्वपूर्ण योगदान दिया था, जो प्रतिष्ठित "रननेट अवार्ड" के विजेता बन गया। 2011 में, कंपनी को "विशेषज्ञ ऑनलाइन" के क्षेत्र में शीर्ष पांच में सबसे अधिक आशाजनक में शामिल किया गया था। ऑनलाइन लेखा "मेरा व्यवसाय" क्या ऑफर करता है? प्रयोक्ता टिप्पणियाँ, तर्क है कि क्लाउड सेवा उन्हें सचमुच कुछ ही क्लिक करों और योगदान के भुगतान बनाने के लिए करने के लिए, इंटरनेट के माध्यम से किसी भी बयान लेने, कार्य करता है, अनुबंध, बिल, चालान के रूप में और इतने पर .. इसके अलावा की अनुमति देता है इस तरह के बड़े रूसी बैंकों के साथ सेवा एकीकरण के लिए धन्यवाद "Promsvyazbank" और "अल्फा-बैंक", "एसडीएम-बैंक" और "द लोको-बैंक", ग्राहक चालान-प्रक्रिया से स्वचालित रूप से उपयोगकर्ता के इंटरनेट लेखांकन के लिए डाउनलोड करता है के रूप में "मेरा काम।" ग्राहक की निजी कैबिनेट, जिसमें व्यवसायी कर सकते हैंइलेक्ट्रॉनिक कुंजी का उपयोग कर दर्ज करें, बचाता है और प्राप्त सभी डेटा प्रदर्शित करता है। साथ ही, आय और व्यय मदों से नकदी प्रवाह का एक स्वचालित वितरण होता है, राशियों पर करों की गणना होती है, आदि। इंटरनेट अकाउंटेंसी "माय बिज़नेस" उद्यमी को आकर्षित करती है छोटे व्यापार मालिकों से विशेष रूप से, जो अपनी रिपोर्ट बनाए रखते हैं, उनका मानना है कि यह उनके काम को सरल करता है। तिथि करने के लिए, रूसी बाजार पर सेवा के मुख्य लाभ हैंः - "एक खिड़की" मोड का उपयोग, जो एक सेवा में सब कुछ जोड़ रहा है जो लेखांकन और कर्मियों के रिकॉर्ड के लिए जरूरी है; - प्रत्येक अंक की विस्तृत व्याख्या के साथ गणना की पारदर्शिता, जिसमें कैलकुलेटर पर अतिरिक्त सत्यापन शामिल नहीं है; - पेशेवर परामर्शों का कार्यान्वयन, जो कि इंटरनेट अकाउंटेंसी "मेरा व्यवसाय" द्वारा अपने उपयोगकर्ताओं को मुफ्त में दिया जाता है; - कंप्यूटर पर विशेष सॉफ्टवेयर को स्थापित किए बिना, इंटरनेट के माध्यम से एफएसएस, फेडरल टैक्स सर्विस, रोजस्टेट और पेंशन फंड को रिपोर्ट भेजना। ऑनलाइन लेखा कैसे गोपनीय है"मेरा व्यवसाय"? विशेषज्ञों की समीक्षा जिन्होंने सेवा दावे को बनाया है, ग्राहक के लिए डेटा हानि का कोई खतरा नहीं है। स्थानांतरण के सभी दस्तावेजों को सबसे बड़े बैंकों में उपयोग किए गए SSL कोड के साथ एन्क्रिप्ट किया गया है। इसके अलावा, सभी क्लाइंट सूचना यूरोप में विशेष सर्वर पर संग्रहीत की जाती है, और वित्तीय क्षति पूरी तरह से बीमा है। आज, मौजूदा कानून के अनुसार,कंपनी खुद को कई संगठनात्मक और कानूनी रूपों और कराधान की व्यवस्था में से एक चुन सकती है। हालांकि, शुरुआती व्यवसायियों की एक विस्तृत सूची से, एक नियम के रूप में, चुनेंः - व्यक्तिगत उद्यमिता; - एलएलसी - सीमित देयता कंपनी; - एनसीओ संगठन का एक गैर-लाभकारी प्रकार है; - नगरपालिका एकात्मक उद्यम - एक नगर निगम एकात्मक उद्यम का रूप। किस संगठन के लिए ऑनलाइन अकाउंटिंग कार्य होता है"मेरा व्यवसाय"? सेवा सेवाएं केवल एलएलसी और आईपी के लिए हैं जो भी इस कार्यक्रम के माध्यम से अपने मामलों के प्रबंधन में रुचि रखते हैं, वह इस सूचना को संगठनात्मक और कानूनी रूप चुनने के स्तर पर लेना चाहिए। कंपनियों के बीच मतभेद हैंकराधान प्रणाली उनमें से केवल दो हैं यह एक सामान्य प्रणाली (ओएसएस) और सरलीकृत है - (यूएसएन)। उनमें से सबसे पहले संगठन को अपने शास्त्रीय रूप में लेखांकन रखना चाहिए। यह शासन छोटी कंपनियों के लिए लाभहीन है, लेकिन बड़े संगठन इसे मना नहीं कर सकते सरलीकृत कराधान प्रणाली के साथ, उद्यम में कम कर का बोझ होता है ऐसे शासन को कानूनी रूप से छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों के लिए निर्धारित किया गया है और इनमें चार किस्म हैंः यूएसएन 6%, 15%, साथ ही यूटीआईआई और यूएससीएन। नया इंटरनेट अकाउंटेंट कौन है? एसटीएस आईपी के लिए पहले तीन प्रकार ये सिस्टम हैंः - "एसटीएस आय", जब कर की रिपोर्टिंग अवधि के लिए राजस्व की मात्रा का 6% की दर से भुगतान किया जाता है; - आय की मात्रा और लागत की मात्रा के बीच अंतर के 15% की राशि में कराधान के आवेदन के साथ "आय से कम व्यय"; मेरी कंपनी अपने ग्राहकों को किस तरह का भुगतान करती है?(ऑनलाइन अकाउंटिंग)? सेवाओं के लिए टैरिफ अलग-अलग हैं वे प्रत्येक उपयोगकर्ता द्वारा अलग-अलग चुना जाता है और प्रस्तुत आवश्यकताओं और वित्तीय संभावनाओं पर निर्भर करते हैं। उदाहरण के लिए, किसी आईपी के लिए ऑनलाइन अकाउंटिंग, कर्मचारियों के बिना काम करना, 333 rubles प्रति माह खर्च होगा। यह सबसे सस्ता सेवा योजना है अधिक बड़े आईपी और एलएलसी "माय केस" (छोटे व्यवसायों के लिए इंटरनेट अकाउंटिंग) सेवाओं की एक अधिक विस्तृत सूची प्रदान करता है, जिसकी लागत 1499 रूबल होगी। प्रति माह यह सबसे महंगी प्रणाली टैरिफ योजना है इन सेवाओं के लिए न्यूनतम सदस्यता अवधि 12 महीने की अवधि है। ग्राहकों की समीक्षाओं के अनुसार, "मेरा व्यवसाय" नामक एक सेवा शुरुआती कारोबार के लिए बहुत ही लाभप्रद ऑनलाइन लेखा है, जो उद्यमियों को रिकॉर्ड रखने के लिए समय और पैसा बचाने की अनुमति देता है। यह सेवा खोलने का अवसर प्रदान करती हैखुद के व्यवसाय मिनटों में और किसी भी समय। यह हमारे देश में कहीं से भी किया जा सकता है, और पूरी तरह से मुक्त है। ऐसा करने के लिए, आपको उपयुक्त निर्देश सीखने और इसे व्यवहार में लागू करने की आवश्यकता है। 15 मिनट के लिए अपना खुद का व्यवसाय खुला होगा! ऐसी सेवा प्रदान की गई है जिन्होंने आईपी या एलएलसी खोलने का फैसला किया था। उपयोगकर्ता प्रतिक्रिया के अनुसार, साइट का इंटरफ़ेस, परजो छोटे व्यवसायों के लिए जिम्मेदार है, काम में काफी सरल और सुविधाजनक है। इसकी रंग योजना इस तरह से चुनी जाती है कि यह आंखों को परेशान नहीं करती है। ग्राहकों द्वारा और आसानी से निर्मित साइट नेविगेशन चिह्नित। सभी वस्तुओं का एक स्पष्ट और तार्किक विभाजन है। कार्यक्रम की आंतरिक संरचना भी trifles के माध्यम से सोचा है। ऐसे अवसरों और लाभों पर ग्राहकों की प्रतिक्रिया जो कि ऑनलाइन बहीखाता पद्धति प्रदान करता है, कार्यक्रम के मुख्य पृष्ठ पर पाई जा सकती है। आईपी और छोटे व्यापार प्रस्तावों के लिए इंटरनेट अकाउंटिंगः - "मेघ" में दस्तावेज़ बनाएं और संचालन करें कार्यक्रम में कुछ ही क्लिक में, बिल और अनुबंध, चालान और प्रमाण पत्र, और मजदूरी की गणना भी है। - करों की गणना, रिपोर्ट भेजें, ऑनलाइन फीस का भुगतान करें, और मनसे निरीक्षण के साथ जांच करें। - निपटान खाते पर स्वचालित रूप से भुगतान आदेश और विवरण का आदान प्रदान करें। - आलेख और आरेखों का उपयोग करके व्यावसायिक विश्लेषण करें। शुरुआती उद्यमियों की सेवा "मेरा व्यवसाय"(ऑनलाइन अकाउंटिंग) का परीक्षण मुफ्त में किया जा सकता है। ऐसा करने के लिए, आपको कार्यक्रम के मुख्य पृष्ठ पर एक सरल पंजीकरण प्रक्रिया के माध्यम से जाना होगा। एक साधारण डेटा प्लेट में भरना, आपको बस "निः शुल्क के लिए प्रयास करें" बटन पर क्लिक करना होगा उसके बाद, व्यवसाय करने और आवश्यक कराधान प्रणाली का रूप चुना जाता है। सर्वर के साथ काम करने के बारे में विस्तृत जानकारी संलग्न वीडियो में प्राप्त की जा सकती है। इंटरनेट अकाउंटेंसी "मेरा व्यवसाय" कैसे काम करता है? निजी कैबिनेट के प्रथम पृष्ठ का विवरण, जहां उपयोगकर्ता पहले प्रवेश करता है, काफी आसान और समझ में आता है। "होम" और "धन", "दस्तावेज़" और "स्टॉक", "कॉन्ट्रैक्ट्स" और "कैशियर", "काउंटरपेरिस्ट" और "वेतन", "कर्मचारी" और "बैंक", "Analytics "और" वेबिनार " अधिक विवरण में इन सभी टैब की कार्यक्षमता पर विचार करें। इस टैब में ऐसी सेवाएं शामिल हैंः 1. क्रियाएँ इस टैब के साथ, उपयोगकर्ता प्राथमिक दस्तावेज बनाता है और अपने प्रतिपक्षों के बारे में जानकारी में प्रवेश करता है। 2. कर कैलेंडर। रिपोर्ट तैयार करने और उन पर भुगतान करने के लिए आवश्यक है। 4. इलेक्ट्रॉनिक रिपोर्टिंग इस टैब की सहायता से, इंटरनेट के माध्यम से भेजे गए उन रिपोर्टों के आंकड़े संकलित किए गए हैं। यह टैब संगठन के वित्तीय लेनदेन के कार्यान्वयन और लेखांकन के लिए एक उपकरण है। इसमें शामिल हैंः 1. नकदी किताब का कुदर और नकली अप ये दस्तावेज़ किसी भी समय डाउनलोड और मुद्रित किए जा सकते हैं। नकद पुस्तक संगठन द्वारा की गई नकद प्राप्तियां और जबरन वसूली की राशि को रिकॉर्ड करती है। कुडिर (आय और खर्च के लेखांकन पर किताब) सभी आईपी और यूएसएन के साथ संगठनों द्वारा आयोजित किया जाता है। इस दस्तावेज़ में कालानुक्रमिक क्रम इस रिपोर्टिंग अवधि में हुई आर्थिक कार्रवाइयों को दर्शाता है। 2. उपलब्ध आय और व्यय पर जानकारी। यह या तो मैन्युअल रूप से या बैंक स्टेटमेंट का उपयोग कर किया जाता है। 3. भुगतान आदेश भेजने की सेवा। इस टैब का प्रयोग, उपयोगकर्ताचालान और कार्य, चालान इत्यादि बनाने की संभावना प्रदान की जाती है। दस्तावेज़ बनाने के लिए, आपको सूची में से किसी एक को चिह्नित करने की आवश्यकता है, और फिर कार्रवाई एल्गोरिदम का चयन करें। इसके बाद, फॉर्म हो सकता हैः - डाउनलोड, मुद्रित और संचरित; - ग्राहक को ई-मेल भेजा गया; - यांडेक्स मनी की मदद से या बैंक कार्ड द्वारा भुगतान के संदर्भ के साथ खुलासा किया गया है। यह टैब भुगतान के लिए जरूरी चालान स्थापित करने, सामग्रियों या सामानों को स्वीकार करने या जहाज भेजने, वेयरहाउस से वेयरहाउस में उत्पादों को स्थानांतरित करने का अवसर प्रदान करता है। साथ ही, उपयोगकर्ता के आगमन और व्यय के साथ-साथ उस समय शेष सूची पर जानकारी भी होती है। यह टैब कई विकल्प प्रदान करता है। इस पर आप एक टेम्पलेट डाउनलोड कर सकते हैं, अनुबंध बना सकते हैं और किए गए सौदों पर आंकड़े देख सकते हैं। नया दस्तावेज़ बनाने के लिए, क्लाइंट का चयन किया जाता है। साथ ही, आपको ड्रॉप-डाउन सूची से आवश्यक अनुबंध टेम्पलेट का चयन करना होगा। यह स्वचालित रूप से भर जाएगा। ग्राहक विभिन्न अनुबंधों के उन्नीस टेम्पलेट उपलब्ध कराता है, जो सेवा विशेषज्ञों द्वारा बनाए गए थे। दस्तावेज़ के अपने संस्करण को भी प्रोग्राम में लोड किया जा सकता है। यह टैब ड्राफ्ट के रूप में काम करता है। यहां "मनी" सेवा से जानकारी बहती है। यहां, मसौदा आय और निपटारे नकद आदेश बनाया जा सकता है। यह टैब प्रवेश के लिए हैग्राहकों और भागीदारों पर जानकारी। यहां, राज्य रजिस्टर स्टेटमेंट के माध्यम से प्रतिपक्षियों की जांच की जाती है, साथ ही सांख्यिकी उन सभी संगठनों के लिए संकलित की जाती है जिनके साथ उत्पादों की आपूर्ति या बिक्री के लिए अनुबंध समाप्त हो चुके हैं। इस टैब पर, आप कंपनी के कर्मचारियों को नकदी मुआवजे के भुगतान पर सभी जानकारी देख सकते हैं। अर्थात्ः - पूरी तरह से गणना; - प्रत्येक कर्मचारी के लिए गणना; - निपटान चादरें; - समय पत्रक; - करों और योगदान पर बयान; - मौद्रिक मुआवजे का भुगतान। इस टैब के साथ आप अस्पताल और छुट्टी की गणना कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए, आपको केवल कर्मचारी की अनुपस्थिति की तारीखों को ध्यान में रखना होगा। गणना सूत्र और देय कुल रकम स्क्रीन पर दिखाई देगी। यह टैब, जिसमें "मेरा व्यवसाय" सेवा शामिल है(इंटरनेट एकाउंटिंग), उद्यमियों के जीवन को बहुत सरल बनाता है। कार्यक्रम का उपयोग करके, वे इस रूप में प्रभावी रूप से प्रपत्रों के रूपों को भरते हैं, उनकी प्रासंगिकता के बारे में सोचने के बिना। उपयोगकर्ताओं के निपटान में 2000 से अधिक विभिन्न नमूने हैं, जिनमें से एक को सही चुनना आसान है। इस टैब का उपयोग करके, उपयोगकर्ता अपनी आय, व्यय, साथ ही लाभ के आंकड़े देख सकता है। और आप इसे महीनों तक टूटने में विभिन्न अवधि के लिए कर सकते हैं। इस टैब में वे वीडियो हैं जो आपको दिखाते हैं कि कैसे करेंकानून में परिवर्तन यहां वीडियो निर्देश दिए गए हैं, जो आपके व्यक्तिगत कैबिनेट के साथ काम करने में अमूल्य सहायता प्रदान करते हैं। इसके अलावा, उपयोगकर्ता विशेषज्ञों और सफल व्यवसायियों के साथ विभिन्न साक्षात्कार देख सकते हैं। इन टैबों में सेवा "मेरा व्यवसाय" - इंटरनेट एकाउंटिंग शामिल है। हालांकि, उनमें से प्रत्येक ग्राहक के लिए उपलब्ध नहीं है। खोलने के लिए टैब की संख्या चयनित टैरिफ पर निर्भर करती है। "मेरा व्यवसाय" - छोटे के लिए ऑनलाइन लेखांकनव्यापार - वास्तव में एक अद्वितीय प्रणाली है। कार्यक्रम अतिरिक्त सेवाओं तक पहुंच खोलता है, जिसके माध्यम से ग्राहक अपने ग्राहकों की संख्या में वृद्धि कर सकता है और तदनुसार लाभ। तो, मामले के उद्घाटन के बाद, व्यवसायियों की शुरुआतलेखांकन के ऑटोसोरिंग का उपयोग कर सकते हैं। यह गलत दस्तावेज के जोखिम को कम करेगा और एक विशेषज्ञ को आकर्षित करने के लिए पैसे बचाएगा।
हाल ही में रूस में दिखाई दियामेरा व्यवसाय नामक एक संबद्ध कार्यक्रम, जिसका मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन अकाउंटिंग को लागू करना है यह उत्पाद अधिक लोकप्रिय हो रहा है, और इसके अस्तित्व के दौरान पहले से ही सैकड़ों हद तक अनुयायी जीतने में कामयाब हो गया है। और यह आश्चर्य की बात नहीं है आखिरकार, सिस्टम संपूर्ण लेखा पद्धति को पूरा करने में सक्षम है, साथ ही वर्तमान उपयोगकर्ता को वर्तमान विशेषज्ञ सलाह और सेवाएं प्रदान करता है। "माय केस" नामक सेवा का इतिहास शुरू हुआवर्ष दो सौ नौ में कंपनी की स्थापना आईटी प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में काम कर रहे दो व्यापारियों द्वारा की गई - मैक्सिम यारेमको और सेर्गेई पैनोव पहले से ही दो हज़ार दस में उनके वंश ने "अर्थशास्त्र और व्यवसाय" के क्षेत्र में रूसी इंटरनेट के विकास में इस तरह का एक महत्वपूर्ण योगदान दिया था, जो प्रतिष्ठित "रननेट अवार्ड" के विजेता बन गया। दो हज़ार ग्यारह में, कंपनी को "विशेषज्ञ ऑनलाइन" के क्षेत्र में शीर्ष पांच में सबसे अधिक आशाजनक में शामिल किया गया था। ऑनलाइन लेखा "मेरा व्यवसाय" क्या ऑफर करता है? प्रयोक्ता टिप्पणियाँ, तर्क है कि क्लाउड सेवा उन्हें सचमुच कुछ ही क्लिक करों और योगदान के भुगतान बनाने के लिए करने के लिए, इंटरनेट के माध्यम से किसी भी बयान लेने, कार्य करता है, अनुबंध, बिल, चालान के रूप में और इतने पर .. इसके अलावा की अनुमति देता है इस तरह के बड़े रूसी बैंकों के साथ सेवा एकीकरण के लिए धन्यवाद "Promsvyazbank" और "अल्फा-बैंक", "एसडीएम-बैंक" और "द लोको-बैंक", ग्राहक चालान-प्रक्रिया से स्वचालित रूप से उपयोगकर्ता के इंटरनेट लेखांकन के लिए डाउनलोड करता है के रूप में "मेरा काम।" ग्राहक की निजी कैबिनेट, जिसमें व्यवसायी कर सकते हैंइलेक्ट्रॉनिक कुंजी का उपयोग कर दर्ज करें, बचाता है और प्राप्त सभी डेटा प्रदर्शित करता है। साथ ही, आय और व्यय मदों से नकदी प्रवाह का एक स्वचालित वितरण होता है, राशियों पर करों की गणना होती है, आदि। इंटरनेट अकाउंटेंसी "माय बिज़नेस" उद्यमी को आकर्षित करती है छोटे व्यापार मालिकों से विशेष रूप से, जो अपनी रिपोर्ट बनाए रखते हैं, उनका मानना है कि यह उनके काम को सरल करता है। तिथि करने के लिए, रूसी बाजार पर सेवा के मुख्य लाभ हैंः - "एक खिड़की" मोड का उपयोग, जो एक सेवा में सब कुछ जोड़ रहा है जो लेखांकन और कर्मियों के रिकॉर्ड के लिए जरूरी है; - प्रत्येक अंक की विस्तृत व्याख्या के साथ गणना की पारदर्शिता, जिसमें कैलकुलेटर पर अतिरिक्त सत्यापन शामिल नहीं है; - पेशेवर परामर्शों का कार्यान्वयन, जो कि इंटरनेट अकाउंटेंसी "मेरा व्यवसाय" द्वारा अपने उपयोगकर्ताओं को मुफ्त में दिया जाता है; - कंप्यूटर पर विशेष सॉफ्टवेयर को स्थापित किए बिना, इंटरनेट के माध्यम से एफएसएस, फेडरल टैक्स सर्विस, रोजस्टेट और पेंशन फंड को रिपोर्ट भेजना। ऑनलाइन लेखा कैसे गोपनीय है"मेरा व्यवसाय"? विशेषज्ञों की समीक्षा जिन्होंने सेवा दावे को बनाया है, ग्राहक के लिए डेटा हानि का कोई खतरा नहीं है। स्थानांतरण के सभी दस्तावेजों को सबसे बड़े बैंकों में उपयोग किए गए SSL कोड के साथ एन्क्रिप्ट किया गया है। इसके अलावा, सभी क्लाइंट सूचना यूरोप में विशेष सर्वर पर संग्रहीत की जाती है, और वित्तीय क्षति पूरी तरह से बीमा है। आज, मौजूदा कानून के अनुसार,कंपनी खुद को कई संगठनात्मक और कानूनी रूपों और कराधान की व्यवस्था में से एक चुन सकती है। हालांकि, शुरुआती व्यवसायियों की एक विस्तृत सूची से, एक नियम के रूप में, चुनेंः - व्यक्तिगत उद्यमिता; - एलएलसी - सीमित देयता कंपनी; - एनसीओ संगठन का एक गैर-लाभकारी प्रकार है; - नगरपालिका एकात्मक उद्यम - एक नगर निगम एकात्मक उद्यम का रूप। किस संगठन के लिए ऑनलाइन अकाउंटिंग कार्य होता है"मेरा व्यवसाय"? सेवा सेवाएं केवल एलएलसी और आईपी के लिए हैं जो भी इस कार्यक्रम के माध्यम से अपने मामलों के प्रबंधन में रुचि रखते हैं, वह इस सूचना को संगठनात्मक और कानूनी रूप चुनने के स्तर पर लेना चाहिए। कंपनियों के बीच मतभेद हैंकराधान प्रणाली उनमें से केवल दो हैं यह एक सामान्य प्रणाली और सरलीकृत है - । उनमें से सबसे पहले संगठन को अपने शास्त्रीय रूप में लेखांकन रखना चाहिए। यह शासन छोटी कंपनियों के लिए लाभहीन है, लेकिन बड़े संगठन इसे मना नहीं कर सकते सरलीकृत कराधान प्रणाली के साथ, उद्यम में कम कर का बोझ होता है ऐसे शासन को कानूनी रूप से छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों के लिए निर्धारित किया गया है और इनमें चार किस्म हैंः यूएसएन छः%, पंद्रह%, साथ ही यूटीआईआई और यूएससीएन। नया इंटरनेट अकाउंटेंट कौन है? एसटीएस आईपी के लिए पहले तीन प्रकार ये सिस्टम हैंः - "एसटीएस आय", जब कर की रिपोर्टिंग अवधि के लिए राजस्व की मात्रा का छः% की दर से भुगतान किया जाता है; - आय की मात्रा और लागत की मात्रा के बीच अंतर के पंद्रह% की राशि में कराधान के आवेदन के साथ "आय से कम व्यय"; मेरी कंपनी अपने ग्राहकों को किस तरह का भुगतान करती है?? सेवाओं के लिए टैरिफ अलग-अलग हैं वे प्रत्येक उपयोगकर्ता द्वारा अलग-अलग चुना जाता है और प्रस्तुत आवश्यकताओं और वित्तीय संभावनाओं पर निर्भर करते हैं। उदाहरण के लिए, किसी आईपी के लिए ऑनलाइन अकाउंटिंग, कर्मचारियों के बिना काम करना, तीन सौ तैंतीस rubles प्रति माह खर्च होगा। यह सबसे सस्ता सेवा योजना है अधिक बड़े आईपी और एलएलसी "माय केस" सेवाओं की एक अधिक विस्तृत सूची प्रदान करता है, जिसकी लागत एक हज़ार चार सौ निन्यानवे रूबल होगी। प्रति माह यह सबसे महंगी प्रणाली टैरिफ योजना है इन सेवाओं के लिए न्यूनतम सदस्यता अवधि बारह महीने की अवधि है। ग्राहकों की समीक्षाओं के अनुसार, "मेरा व्यवसाय" नामक एक सेवा शुरुआती कारोबार के लिए बहुत ही लाभप्रद ऑनलाइन लेखा है, जो उद्यमियों को रिकॉर्ड रखने के लिए समय और पैसा बचाने की अनुमति देता है। यह सेवा खोलने का अवसर प्रदान करती हैखुद के व्यवसाय मिनटों में और किसी भी समय। यह हमारे देश में कहीं से भी किया जा सकता है, और पूरी तरह से मुक्त है। ऐसा करने के लिए, आपको उपयुक्त निर्देश सीखने और इसे व्यवहार में लागू करने की आवश्यकता है। पंद्रह मिनट के लिए अपना खुद का व्यवसाय खुला होगा! ऐसी सेवा प्रदान की गई है जिन्होंने आईपी या एलएलसी खोलने का फैसला किया था। उपयोगकर्ता प्रतिक्रिया के अनुसार, साइट का इंटरफ़ेस, परजो छोटे व्यवसायों के लिए जिम्मेदार है, काम में काफी सरल और सुविधाजनक है। इसकी रंग योजना इस तरह से चुनी जाती है कि यह आंखों को परेशान नहीं करती है। ग्राहकों द्वारा और आसानी से निर्मित साइट नेविगेशन चिह्नित। सभी वस्तुओं का एक स्पष्ट और तार्किक विभाजन है। कार्यक्रम की आंतरिक संरचना भी trifles के माध्यम से सोचा है। ऐसे अवसरों और लाभों पर ग्राहकों की प्रतिक्रिया जो कि ऑनलाइन बहीखाता पद्धति प्रदान करता है, कार्यक्रम के मुख्य पृष्ठ पर पाई जा सकती है। आईपी और छोटे व्यापार प्रस्तावों के लिए इंटरनेट अकाउंटिंगः - "मेघ" में दस्तावेज़ बनाएं और संचालन करें कार्यक्रम में कुछ ही क्लिक में, बिल और अनुबंध, चालान और प्रमाण पत्र, और मजदूरी की गणना भी है। - करों की गणना, रिपोर्ट भेजें, ऑनलाइन फीस का भुगतान करें, और मनसे निरीक्षण के साथ जांच करें। - निपटान खाते पर स्वचालित रूप से भुगतान आदेश और विवरण का आदान प्रदान करें। - आलेख और आरेखों का उपयोग करके व्यावसायिक विश्लेषण करें। शुरुआती उद्यमियों की सेवा "मेरा व्यवसाय" का परीक्षण मुफ्त में किया जा सकता है। ऐसा करने के लिए, आपको कार्यक्रम के मुख्य पृष्ठ पर एक सरल पंजीकरण प्रक्रिया के माध्यम से जाना होगा। एक साधारण डेटा प्लेट में भरना, आपको बस "निः शुल्क के लिए प्रयास करें" बटन पर क्लिक करना होगा उसके बाद, व्यवसाय करने और आवश्यक कराधान प्रणाली का रूप चुना जाता है। सर्वर के साथ काम करने के बारे में विस्तृत जानकारी संलग्न वीडियो में प्राप्त की जा सकती है। इंटरनेट अकाउंटेंसी "मेरा व्यवसाय" कैसे काम करता है? निजी कैबिनेट के प्रथम पृष्ठ का विवरण, जहां उपयोगकर्ता पहले प्रवेश करता है, काफी आसान और समझ में आता है। "होम" और "धन", "दस्तावेज़" और "स्टॉक", "कॉन्ट्रैक्ट्स" और "कैशियर", "काउंटरपेरिस्ट" और "वेतन", "कर्मचारी" और "बैंक", "Analytics "और" वेबिनार " अधिक विवरण में इन सभी टैब की कार्यक्षमता पर विचार करें। इस टैब में ऐसी सेवाएं शामिल हैंः एक. क्रियाएँ इस टैब के साथ, उपयोगकर्ता प्राथमिक दस्तावेज बनाता है और अपने प्रतिपक्षों के बारे में जानकारी में प्रवेश करता है। दो. कर कैलेंडर। रिपोर्ट तैयार करने और उन पर भुगतान करने के लिए आवश्यक है। चार. इलेक्ट्रॉनिक रिपोर्टिंग इस टैब की सहायता से, इंटरनेट के माध्यम से भेजे गए उन रिपोर्टों के आंकड़े संकलित किए गए हैं। यह टैब संगठन के वित्तीय लेनदेन के कार्यान्वयन और लेखांकन के लिए एक उपकरण है। इसमें शामिल हैंः एक. नकदी किताब का कुदर और नकली अप ये दस्तावेज़ किसी भी समय डाउनलोड और मुद्रित किए जा सकते हैं। नकद पुस्तक संगठन द्वारा की गई नकद प्राप्तियां और जबरन वसूली की राशि को रिकॉर्ड करती है। कुडिर सभी आईपी और यूएसएन के साथ संगठनों द्वारा आयोजित किया जाता है। इस दस्तावेज़ में कालानुक्रमिक क्रम इस रिपोर्टिंग अवधि में हुई आर्थिक कार्रवाइयों को दर्शाता है। दो. उपलब्ध आय और व्यय पर जानकारी। यह या तो मैन्युअल रूप से या बैंक स्टेटमेंट का उपयोग कर किया जाता है। तीन. भुगतान आदेश भेजने की सेवा। इस टैब का प्रयोग, उपयोगकर्ताचालान और कार्य, चालान इत्यादि बनाने की संभावना प्रदान की जाती है। दस्तावेज़ बनाने के लिए, आपको सूची में से किसी एक को चिह्नित करने की आवश्यकता है, और फिर कार्रवाई एल्गोरिदम का चयन करें। इसके बाद, फॉर्म हो सकता हैः - डाउनलोड, मुद्रित और संचरित; - ग्राहक को ई-मेल भेजा गया; - यांडेक्स मनी की मदद से या बैंक कार्ड द्वारा भुगतान के संदर्भ के साथ खुलासा किया गया है। यह टैब भुगतान के लिए जरूरी चालान स्थापित करने, सामग्रियों या सामानों को स्वीकार करने या जहाज भेजने, वेयरहाउस से वेयरहाउस में उत्पादों को स्थानांतरित करने का अवसर प्रदान करता है। साथ ही, उपयोगकर्ता के आगमन और व्यय के साथ-साथ उस समय शेष सूची पर जानकारी भी होती है। यह टैब कई विकल्प प्रदान करता है। इस पर आप एक टेम्पलेट डाउनलोड कर सकते हैं, अनुबंध बना सकते हैं और किए गए सौदों पर आंकड़े देख सकते हैं। नया दस्तावेज़ बनाने के लिए, क्लाइंट का चयन किया जाता है। साथ ही, आपको ड्रॉप-डाउन सूची से आवश्यक अनुबंध टेम्पलेट का चयन करना होगा। यह स्वचालित रूप से भर जाएगा। ग्राहक विभिन्न अनुबंधों के उन्नीस टेम्पलेट उपलब्ध कराता है, जो सेवा विशेषज्ञों द्वारा बनाए गए थे। दस्तावेज़ के अपने संस्करण को भी प्रोग्राम में लोड किया जा सकता है। यह टैब ड्राफ्ट के रूप में काम करता है। यहां "मनी" सेवा से जानकारी बहती है। यहां, मसौदा आय और निपटारे नकद आदेश बनाया जा सकता है। यह टैब प्रवेश के लिए हैग्राहकों और भागीदारों पर जानकारी। यहां, राज्य रजिस्टर स्टेटमेंट के माध्यम से प्रतिपक्षियों की जांच की जाती है, साथ ही सांख्यिकी उन सभी संगठनों के लिए संकलित की जाती है जिनके साथ उत्पादों की आपूर्ति या बिक्री के लिए अनुबंध समाप्त हो चुके हैं। इस टैब पर, आप कंपनी के कर्मचारियों को नकदी मुआवजे के भुगतान पर सभी जानकारी देख सकते हैं। अर्थात्ः - पूरी तरह से गणना; - प्रत्येक कर्मचारी के लिए गणना; - निपटान चादरें; - समय पत्रक; - करों और योगदान पर बयान; - मौद्रिक मुआवजे का भुगतान। इस टैब के साथ आप अस्पताल और छुट्टी की गणना कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए, आपको केवल कर्मचारी की अनुपस्थिति की तारीखों को ध्यान में रखना होगा। गणना सूत्र और देय कुल रकम स्क्रीन पर दिखाई देगी। यह टैब, जिसमें "मेरा व्यवसाय" सेवा शामिल है, उद्यमियों के जीवन को बहुत सरल बनाता है। कार्यक्रम का उपयोग करके, वे इस रूप में प्रभावी रूप से प्रपत्रों के रूपों को भरते हैं, उनकी प्रासंगिकता के बारे में सोचने के बिना। उपयोगकर्ताओं के निपटान में दो हज़ार से अधिक विभिन्न नमूने हैं, जिनमें से एक को सही चुनना आसान है। इस टैब का उपयोग करके, उपयोगकर्ता अपनी आय, व्यय, साथ ही लाभ के आंकड़े देख सकता है। और आप इसे महीनों तक टूटने में विभिन्न अवधि के लिए कर सकते हैं। इस टैब में वे वीडियो हैं जो आपको दिखाते हैं कि कैसे करेंकानून में परिवर्तन यहां वीडियो निर्देश दिए गए हैं, जो आपके व्यक्तिगत कैबिनेट के साथ काम करने में अमूल्य सहायता प्रदान करते हैं। इसके अलावा, उपयोगकर्ता विशेषज्ञों और सफल व्यवसायियों के साथ विभिन्न साक्षात्कार देख सकते हैं। इन टैबों में सेवा "मेरा व्यवसाय" - इंटरनेट एकाउंटिंग शामिल है। हालांकि, उनमें से प्रत्येक ग्राहक के लिए उपलब्ध नहीं है। खोलने के लिए टैब की संख्या चयनित टैरिफ पर निर्भर करती है। "मेरा व्यवसाय" - छोटे के लिए ऑनलाइन लेखांकनव्यापार - वास्तव में एक अद्वितीय प्रणाली है। कार्यक्रम अतिरिक्त सेवाओं तक पहुंच खोलता है, जिसके माध्यम से ग्राहक अपने ग्राहकों की संख्या में वृद्धि कर सकता है और तदनुसार लाभ। तो, मामले के उद्घाटन के बाद, व्यवसायियों की शुरुआतलेखांकन के ऑटोसोरिंग का उपयोग कर सकते हैं। यह गलत दस्तावेज के जोखिम को कम करेगा और एक विशेषज्ञ को आकर्षित करने के लिए पैसे बचाएगा।
जिला चित्रकूट। बुन्देलखण्ड में महिलायें हर काम में आगे दिखती है तौ परिवार का पेट पालने के लिए कुछ न कुछ काम करती रहती है। इसी तरह चित्रकूट जिले के पहाड़ी ब्लाक के गांव नोनार की धनपतिया नाम की महिला है। जो कांसा, मूंज और पन्नी के धागों से सिकौला, गगरी, टेपार और डोलची बनाती है। यह काम वह पिछले दस वर्षो से कर रही है। धनपतिया बताती हैं 'मुझे ये काम सिखने का बहुत शौक था। लोगों की बनाते देख देख कर हीे यह काम सीखा है।' आज लोग शादीयों में इनके बनाए सामान लेने के लिए धनपतिया का नाम लेकर ढूढ़ते ढूढ़ते उसके घर पहुचते है। धनजति टेपार को किराये पर भी देती हैं। टेपार का एक रात का किराया दस रूपए है। जिला चित्रकूट। बुन्देलखण्ड में महिलायें हर काम में आगे दिखती है तौ परिवार का पेट पालने के लिए कुछ न कुछ काम करती रहती है।
जिला चित्रकूट। बुन्देलखण्ड में महिलायें हर काम में आगे दिखती है तौ परिवार का पेट पालने के लिए कुछ न कुछ काम करती रहती है। इसी तरह चित्रकूट जिले के पहाड़ी ब्लाक के गांव नोनार की धनपतिया नाम की महिला है। जो कांसा, मूंज और पन्नी के धागों से सिकौला, गगरी, टेपार और डोलची बनाती है। यह काम वह पिछले दस वर्षो से कर रही है। धनपतिया बताती हैं 'मुझे ये काम सिखने का बहुत शौक था। लोगों की बनाते देख देख कर हीे यह काम सीखा है।' आज लोग शादीयों में इनके बनाए सामान लेने के लिए धनपतिया का नाम लेकर ढूढ़ते ढूढ़ते उसके घर पहुचते है। धनजति टेपार को किराये पर भी देती हैं। टेपार का एक रात का किराया दस रूपए है। जिला चित्रकूट। बुन्देलखण्ड में महिलायें हर काम में आगे दिखती है तौ परिवार का पेट पालने के लिए कुछ न कुछ काम करती रहती है।
आलिया भट्ट इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ब्रह्मास्त्र की शूटिंग में बिजी हैं। उनके साथ इस फिल्म में रणबीर कपूर और अमिताभ बच्चन भी हैं। इस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बॉलीवुड में दो बड़ी फिल्म 'गोल्ड' और 'सत्यमेव जयते' रिलीज हुई. दोनों ही फिल्मों के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की रिपोर्ट आ चुकी है. वहीं रिद्धि मान साहा की बेटी ने गाया ए वतन मेरे वतन. .
आलिया भट्ट इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म ब्रह्मास्त्र की शूटिंग में बिजी हैं। उनके साथ इस फिल्म में रणबीर कपूर और अमिताभ बच्चन भी हैं। इस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बॉलीवुड में दो बड़ी फिल्म 'गोल्ड' और 'सत्यमेव जयते' रिलीज हुई. दोनों ही फिल्मों के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की रिपोर्ट आ चुकी है. वहीं रिद्धि मान साहा की बेटी ने गाया ए वतन मेरे वतन. .
विधायक का कहना है कि सामाजिक विषय पर बनी इस फिल्म के प्रदेश के सिनेमाघरों में शो ना के बराबर चल रहे हैं। जनपद में 10 से ज्यादा मल्टीप्लेक्स होने के बावजूद किसी में भी यह फिल्म नहीं लगी है। गाजियाबाद जिले की साहिबाबाद सीट से भाजपा विधायक सुनील शर्मा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर 'लव जिहाद' (Love Jihad) पर बनी फिल्म 'द कनवर्जन' (The Conversion) को सिनेमाघरों में अनिवार्य रूप से चलाने की मांग की है। उन्होंने सरकार से इस फिल्म को टैक्स फ्री करने की मांग भी की है। दरअसल, गैर धर्म में शादी पर बनी फिल्म 'द कनवर्जन' छह मई को रिलीज हुई है। साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा का कहना है कि जिस तरह एक धर्म के युवकों द्वारा हिन्दु युवतियों को प्रेम जाल में फंसाकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है और उन्हें यातनाएं दी जा रही है, यह फिल्म उन सभी सच्चाइयों को उजागर कर रही है। उन्होंने कहा कि फिल्म के निर्माता और निर्देशकों ने बड़ी ही हिम्मत दिखाई और इस फिल्म को जनता के बीच पहुंचाने का एक प्रयास किया। इस काम के लिए फिल्म की समस्त टीम प्रशंसा की पात्र है। विधायक सुनील शर्मा ने आज ट्वीट कर कहा, "लव जिहाद पर बनी फिल्म 'द कन्वर्जन' को यूपी में टैक्स फ़्री किया जाए। कलावे की आड़ में टोपी वाला चेहरा छुपाना चाहता है। वो सलीम, मोहन बनकर राधा को चुराना चाहता है। रोज जिस रंग को ओढ़कर सूरज की किरणें आती हैं, कट्टरपंथ की तलवार से उस भगवे को झुकाना चाहते हैं कुछ लोग। " विधायक का कहना है कि सामाजिक विषय पर बनी इस फिल्म के प्रदेश के सिनेमाघरों में शो ना के बराबर चल रहे हैं। जनपद में 10 से ज्यादा मल्टीप्लेक्स होने के बावजूद किसी में भी यह फिल्म नहीं लगी है। विधायक का आरोप है कि बॉलीवुड माफिया द्वारा सोची-समझी साजिश के तहत ऐसा किया जा रहा है, क्योंकि इस फिल्म को देखकर हिन्दू समाज में एक जागृति आएगी, हिन्दू बहन-बेटियां इस सच्चाई से से अवगत होंगी और इनका पर्दाफाश हो जाएगा। इसी से इन माफियाओं के द्वारा फिल्म के शो प्रसारित नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस फिल्म को तत्काल टैक्स फ्री करने और फिल्म को सिनेमाघरों में अनिवार्य रूप से चलाने की मांग की है।
विधायक का कहना है कि सामाजिक विषय पर बनी इस फिल्म के प्रदेश के सिनेमाघरों में शो ना के बराबर चल रहे हैं। जनपद में दस से ज्यादा मल्टीप्लेक्स होने के बावजूद किसी में भी यह फिल्म नहीं लगी है। गाजियाबाद जिले की साहिबाबाद सीट से भाजपा विधायक सुनील शर्मा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर 'लव जिहाद' पर बनी फिल्म 'द कनवर्जन' को सिनेमाघरों में अनिवार्य रूप से चलाने की मांग की है। उन्होंने सरकार से इस फिल्म को टैक्स फ्री करने की मांग भी की है। दरअसल, गैर धर्म में शादी पर बनी फिल्म 'द कनवर्जन' छह मई को रिलीज हुई है। साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा का कहना है कि जिस तरह एक धर्म के युवकों द्वारा हिन्दु युवतियों को प्रेम जाल में फंसाकर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है और उन्हें यातनाएं दी जा रही है, यह फिल्म उन सभी सच्चाइयों को उजागर कर रही है। उन्होंने कहा कि फिल्म के निर्माता और निर्देशकों ने बड़ी ही हिम्मत दिखाई और इस फिल्म को जनता के बीच पहुंचाने का एक प्रयास किया। इस काम के लिए फिल्म की समस्त टीम प्रशंसा की पात्र है। विधायक सुनील शर्मा ने आज ट्वीट कर कहा, "लव जिहाद पर बनी फिल्म 'द कन्वर्जन' को यूपी में टैक्स फ़्री किया जाए। कलावे की आड़ में टोपी वाला चेहरा छुपाना चाहता है। वो सलीम, मोहन बनकर राधा को चुराना चाहता है। रोज जिस रंग को ओढ़कर सूरज की किरणें आती हैं, कट्टरपंथ की तलवार से उस भगवे को झुकाना चाहते हैं कुछ लोग। " विधायक का कहना है कि सामाजिक विषय पर बनी इस फिल्म के प्रदेश के सिनेमाघरों में शो ना के बराबर चल रहे हैं। जनपद में दस से ज्यादा मल्टीप्लेक्स होने के बावजूद किसी में भी यह फिल्म नहीं लगी है। विधायक का आरोप है कि बॉलीवुड माफिया द्वारा सोची-समझी साजिश के तहत ऐसा किया जा रहा है, क्योंकि इस फिल्म को देखकर हिन्दू समाज में एक जागृति आएगी, हिन्दू बहन-बेटियां इस सच्चाई से से अवगत होंगी और इनका पर्दाफाश हो जाएगा। इसी से इन माफियाओं के द्वारा फिल्म के शो प्रसारित नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस फिल्म को तत्काल टैक्स फ्री करने और फिल्म को सिनेमाघरों में अनिवार्य रूप से चलाने की मांग की है।
रायपुर, 17 सितंबर छत्तीसगढ़ में पिछले 24 घंटों के दौरान कोरोना वायरस से 26 और लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही राज्य में शुक्रवार तक कोविड-19 की चपेट में आने वालों की कुल संख्या 10,05,014 हो गई है। राज्य में शुक्रवार को 13 मरीजों को संक्रमण मुक्त होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी दी गई है, जबकि 18 मरीजों ने घर में पृथकवास की अवधि पूरी की। राज्य में शुक्रवार को कोरोना वायरस के एक मरीज की मृत्यु हुई। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि आज दुर्ग से एक, राजनांदगांव से एक, बलौदाबाजार से एक, महासमुंद से तीन, गरियाबंद से एक, बिलासपुर से दो, कोरबा से तीन, जांजगीर - चांपा से दो, कोरिया से चार, जशपुर से एक, बस्तर से एक, दंतेवाड़ा से दो, कांकेर से एक और बीजापुर से तीन मामले सामने आये हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में अब तक 10,05,014 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है, जिनमें से 9,91,108 मरीज संक्रमण मुक्त हो गए हैं। फिलहाल 346 मरीज उपचाराधीन हैं। राज्य में 13,560 मरीजों की मौत हुई है। राज्य के रायपुर जिले में सबसे अधिक 1,57,907 लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि की गई है। जिले में कोरोना वायरस संक्रमित 3,139 लोगों की मौत हुई है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
रायपुर, सत्रह सितंबर छत्तीसगढ़ में पिछले चौबीस घंटाटों के दौरान कोरोना वायरस से छब्बीस और लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही राज्य में शुक्रवार तक कोविड-उन्नीस की चपेट में आने वालों की कुल संख्या दस,पाँच,चौदह हो गई है। राज्य में शुक्रवार को तेरह मरीजों को संक्रमण मुक्त होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी दी गई है, जबकि अट्ठारह मरीजों ने घर में पृथकवास की अवधि पूरी की। राज्य में शुक्रवार को कोरोना वायरस के एक मरीज की मृत्यु हुई। राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि आज दुर्ग से एक, राजनांदगांव से एक, बलौदाबाजार से एक, महासमुंद से तीन, गरियाबंद से एक, बिलासपुर से दो, कोरबा से तीन, जांजगीर - चांपा से दो, कोरिया से चार, जशपुर से एक, बस्तर से एक, दंतेवाड़ा से दो, कांकेर से एक और बीजापुर से तीन मामले सामने आये हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में अब तक दस,पाँच,चौदह लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है, जिनमें से नौ,इक्यानवे,एक सौ आठ मरीज संक्रमण मुक्त हो गए हैं। फिलहाल तीन सौ छियालीस मरीज उपचाराधीन हैं। राज्य में तेरह,पाँच सौ साठ मरीजों की मौत हुई है। राज्य के रायपुर जिले में सबसे अधिक एक,सत्तावन,नौ सौ सात लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि की गई है। जिले में कोरोना वायरस संक्रमित तीन,एक सौ उनतालीस लोगों की मौत हुई है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में रविवार को आग लगने से अफरा-तफरी मच गयी. हालांकि इस दौरान किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. यह आग सीटी स्कैन रीजनल में लगी थी. आग की सूचना पाते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया. बताया जा रहा है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी और अस्पताल में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है. उल्लेखनीय है कि इससे पहले शनिवार को सरदार वल्लभभाई पटेल पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ पीडियाट्रिक्स (शिशु भवन) में आग लगी थी. यहां भी आग शॉर्ट सर्किट से लगी थी. घटना के तुरंत बाद ही आग पर काबू पा लिया गया था. शिशु भवन अस्पताल में संपत्ति को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है. हालांकि, कुछ बिजली के तार आग में जल गए. विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई एसएनसीयू वार्ड के पास एक इलेक्ट्रिक बोर्ड में स्पार्किंग हुई थी.
एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में रविवार को आग लगने से अफरा-तफरी मच गयी. हालांकि इस दौरान किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. यह आग सीटी स्कैन रीजनल में लगी थी. आग की सूचना पाते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया. बताया जा रहा है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी और अस्पताल में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है. उल्लेखनीय है कि इससे पहले शनिवार को सरदार वल्लभभाई पटेल पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ पीडियाट्रिक्स में आग लगी थी. यहां भी आग शॉर्ट सर्किट से लगी थी. घटना के तुरंत बाद ही आग पर काबू पा लिया गया था. शिशु भवन अस्पताल में संपत्ति को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है. हालांकि, कुछ बिजली के तार आग में जल गए. विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई एसएनसीयू वार्ड के पास एक इलेक्ट्रिक बोर्ड में स्पार्किंग हुई थी.
रंगहीनता एक प्रकार का आनुवंशिक विकार है, जो बहुत ही कम मामलों में देखा जाता है। यह त्वचा संबंधी विकार होता है, जिसके कारण त्वचा, आंखें और बाल पूरी तरह से रंगहीन हो जाते हैं या फिर बहुत ही कम रंग रहता है। रंगहीनता के साथ देखने संबंधी समस्याएं भी होने लग जाती हैं। यह विकार किसी को भी हो सकता है, लेकिन इसके मामले कुछ क्षेत्रों में कम तो कुछ क्षेत्रों में अधिक देखे गए हैं। रंगहीनता पुरुष, महिलाओं और सभी जाति व समुदाय के लोगों को समान रूप से प्रभावित करती है। आंख संबंधी कई नसों का निर्माण करने में मेलेनिन की आवश्यकता पड़ती है, इसलिए रंगहीनता के कारण आंख सामान्य रूप से विकसित नहीं हो पाती या फिर देखने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। आपके शरीर में मौजूद मेलेनिन के प्रकार व मात्रा के अनुसार ही आपके बालों, त्वचा और आंखों का रंग निर्धारित होता है। (और पढ़ें - त्वचा विकार के लक्षण) रंगहीनता के लक्षणों में त्वचा का रंग हल्का होना या बिगड़ जाना, बालों का रंग सफेद या ब्राउन हो जाना, आंखों का रंग हल्का नीला या ब्राउन हो जाना आदि शामिल हैं। थोड़ी रौशनी होने पर आंखों का रंग लाल दिखने लग जाता है और उम्र के साथ बदल भी जाता है। एल्बिनिज्म से ग्रस्त व्यक्ति धूप से अतिसंवेदनशील हो जाता है और उसमें स्किन कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। डॉक्टर मरीज की त्वचा व आंखों की जांच के आधार पर ही रंगहीनता का परीक्षण करते हैं। रंगहीनता की रोकथाम करना संभव नहीं है, क्योंकि यह एक आनुवंशिक विकार है। (और पढ़ें - त्वचा के कैंसर की सर्जरी कैसे होता है) रंगहीनता एक ऐसा विकार है, जिसके लिए बहुत अधिक इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि आंख व त्वचा की पूरी तरह से देखभाल करना बहुत जरूरी होता है। एल्बिनिज्म से ग्रस्त व्यक्ति को नियमित रूप से अपनी आंखों की जांच करवाते रहना चाहिए और जरूरत हो तो चश्मा लगा लेना चाहिए। इतना ही नहीं इस विकार से ग्रस्त लोगों को नियमित रूप से अपनी त्वचा की जांच करवाते रहना चाहिए ताकि स्किन कैंसर से बचाव किया जा सके। (और पढ़ें - चश्मा उतारने हटाने के उपाय)
रंगहीनता एक प्रकार का आनुवंशिक विकार है, जो बहुत ही कम मामलों में देखा जाता है। यह त्वचा संबंधी विकार होता है, जिसके कारण त्वचा, आंखें और बाल पूरी तरह से रंगहीन हो जाते हैं या फिर बहुत ही कम रंग रहता है। रंगहीनता के साथ देखने संबंधी समस्याएं भी होने लग जाती हैं। यह विकार किसी को भी हो सकता है, लेकिन इसके मामले कुछ क्षेत्रों में कम तो कुछ क्षेत्रों में अधिक देखे गए हैं। रंगहीनता पुरुष, महिलाओं और सभी जाति व समुदाय के लोगों को समान रूप से प्रभावित करती है। आंख संबंधी कई नसों का निर्माण करने में मेलेनिन की आवश्यकता पड़ती है, इसलिए रंगहीनता के कारण आंख सामान्य रूप से विकसित नहीं हो पाती या फिर देखने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। आपके शरीर में मौजूद मेलेनिन के प्रकार व मात्रा के अनुसार ही आपके बालों, त्वचा और आंखों का रंग निर्धारित होता है। रंगहीनता के लक्षणों में त्वचा का रंग हल्का होना या बिगड़ जाना, बालों का रंग सफेद या ब्राउन हो जाना, आंखों का रंग हल्का नीला या ब्राउन हो जाना आदि शामिल हैं। थोड़ी रौशनी होने पर आंखों का रंग लाल दिखने लग जाता है और उम्र के साथ बदल भी जाता है। एल्बिनिज्म से ग्रस्त व्यक्ति धूप से अतिसंवेदनशील हो जाता है और उसमें स्किन कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। डॉक्टर मरीज की त्वचा व आंखों की जांच के आधार पर ही रंगहीनता का परीक्षण करते हैं। रंगहीनता की रोकथाम करना संभव नहीं है, क्योंकि यह एक आनुवंशिक विकार है। रंगहीनता एक ऐसा विकार है, जिसके लिए बहुत अधिक इलाज उपलब्ध नहीं है। हालांकि आंख व त्वचा की पूरी तरह से देखभाल करना बहुत जरूरी होता है। एल्बिनिज्म से ग्रस्त व्यक्ति को नियमित रूप से अपनी आंखों की जांच करवाते रहना चाहिए और जरूरत हो तो चश्मा लगा लेना चाहिए। इतना ही नहीं इस विकार से ग्रस्त लोगों को नियमित रूप से अपनी त्वचा की जांच करवाते रहना चाहिए ताकि स्किन कैंसर से बचाव किया जा सके।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देश के मशहूर उद्योगपति रतन टाटा एक बार फिर से फेक न्यूज से इतना परेशान हो गए हैं कि उन्हें बार बार आकर अपने ट्विटर हैंडल पर सफाई देनी पड़ रही है। ये कोई पहली बार नहीं है। जब फेक न्यूज के लिए रतन टाटा ने ट्वीट किया हो इससे पहले भी उनको लेकर फेक न्यूज आती रही हैं। ताजा मामला 3 मई का है। उन्होंने रविवार को अपने ट्विटर हैंडल पर एक न्यूज पेपर की कटिंग लगाते हुए कहा कि इसमें लिखी हुई कोई भी बात मैंने नहीं कहीं। इससे मेरा दूर दूर तक कोई नाता नहीं है। मैं लगातार फर्जी खबरों को उजाकर करने का प्रयास कर रहा हूं और आगे भी करुंगा। मै बस इतना कहना चाहता हूं कि अगर मेरी तस्वीर के साथ कुछ लिखा हुआ है इसका मतलब ये नहीं है कि ये सब मैने कहा है। आपको बता दें कि इससे पहले भी रतन टाटा ने अप्रैल के महीने में एक ऐसी ही न्यूज क्लिप के बारे में ट्वीट करके बताया था।
नई दिल्ली/टीम डिजिटल। देश के मशहूर उद्योगपति रतन टाटा एक बार फिर से फेक न्यूज से इतना परेशान हो गए हैं कि उन्हें बार बार आकर अपने ट्विटर हैंडल पर सफाई देनी पड़ रही है। ये कोई पहली बार नहीं है। जब फेक न्यूज के लिए रतन टाटा ने ट्वीट किया हो इससे पहले भी उनको लेकर फेक न्यूज आती रही हैं। ताजा मामला तीन मई का है। उन्होंने रविवार को अपने ट्विटर हैंडल पर एक न्यूज पेपर की कटिंग लगाते हुए कहा कि इसमें लिखी हुई कोई भी बात मैंने नहीं कहीं। इससे मेरा दूर दूर तक कोई नाता नहीं है। मैं लगातार फर्जी खबरों को उजाकर करने का प्रयास कर रहा हूं और आगे भी करुंगा। मै बस इतना कहना चाहता हूं कि अगर मेरी तस्वीर के साथ कुछ लिखा हुआ है इसका मतलब ये नहीं है कि ये सब मैने कहा है। आपको बता दें कि इससे पहले भी रतन टाटा ने अप्रैल के महीने में एक ऐसी ही न्यूज क्लिप के बारे में ट्वीट करके बताया था।
माइक्रोसॉफ्ट ने अपने नए ओएस विंडोज 10 की लॉन्चिंग के वक्त यूजर्स से वादा किया था। कि वह विंडोज 10 ओएस पर एंड्रायड और आईओएस एप पोर्ट करने वाला टूल बनाएगी। जिससे कि सभी विंडोज यूजर्स एंड्रायड और आईओएस एप को एक्सेस कर सकें। लेकिन प्रोजेक्ट में हुई देरी के चलते कंपनी ने एंड्रायड पोर्ट टूल को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया है। हालांकि कंपनी आईओएस एप टूल को लेकर अभी वर्क कर रही है। और उम्मीद है कि इसे जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, माइक्रोसॉफ्ट के इस एंड्रायड एप पोर्ट टूल को लेकर डेवलपर्स ने पहले ही हाथ खड़े कर दिए थे। दरअसल माइक्रोसॉफ्ट एक एपीके फाइल बिल्ड करना चाहता था जिसके जरिए एंड्रायड एप को रन किया जाए। ऐसे में डेवलपर्स के लिए ज्यादा कुछ करने के लिए बचा ही नहीं। क्योंकि इनका कहना है कि इससे एप प्राइवेसी को लेकर काफी मुश्किलें आ सकती थीं। यही नहीं जब परफॉर्मेंस रिलेटेड कई इश्यू सामने आने लगे तो कंपनी ने इस प्रोजेक्ट को बंद करने का फैसला ले लिया।
माइक्रोसॉफ्ट ने अपने नए ओएस विंडोज दस की लॉन्चिंग के वक्त यूजर्स से वादा किया था। कि वह विंडोज दस ओएस पर एंड्रायड और आईओएस एप पोर्ट करने वाला टूल बनाएगी। जिससे कि सभी विंडोज यूजर्स एंड्रायड और आईओएस एप को एक्सेस कर सकें। लेकिन प्रोजेक्ट में हुई देरी के चलते कंपनी ने एंड्रायड पोर्ट टूल को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया है। हालांकि कंपनी आईओएस एप टूल को लेकर अभी वर्क कर रही है। और उम्मीद है कि इसे जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, माइक्रोसॉफ्ट के इस एंड्रायड एप पोर्ट टूल को लेकर डेवलपर्स ने पहले ही हाथ खड़े कर दिए थे। दरअसल माइक्रोसॉफ्ट एक एपीके फाइल बिल्ड करना चाहता था जिसके जरिए एंड्रायड एप को रन किया जाए। ऐसे में डेवलपर्स के लिए ज्यादा कुछ करने के लिए बचा ही नहीं। क्योंकि इनका कहना है कि इससे एप प्राइवेसी को लेकर काफी मुश्किलें आ सकती थीं। यही नहीं जब परफॉर्मेंस रिलेटेड कई इश्यू सामने आने लगे तो कंपनी ने इस प्रोजेक्ट को बंद करने का फैसला ले लिया।