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यूपीएससी से जारी सूची में आयशा नाम की लड़की का नाम 184वीं नंबर पर है। रिजल्ट आते ही दो परिवारों में जश्न शुरू हो गया। इनमें से एक परिवार देवास का है। आयशा फातिमा नाम की युवती का दावा है कि उसे 184वीं रैंक मिली है। दूसरा परिवार अलीराजपुर जिले की आयशा मकरानी का है। उसका भी दावा है कि उसे 184वीं रैंक मिली है।
ताज्जुब ये है कि आयशा नाम की दोनों लड़कियों के रोल नंबर एक हैं। दोनों के एडमिट कार्ड पर 7811744 रोल नंबर लिखा है। दोनों को एक रोल नंबर मिलना संभव है या नहीं, यह यूपीएससी ही बता सकता है। हालांकि, दोनों युवतियां लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में शामिल होने के दावे कर रही हैं। इसके लिए दोनों अपने-अपने सबूत भी पेश कर रही हैं।
देवास की आयशा फातिमा के पिता का नाम नजीरूद्दीन है। उनका तर्क है कि यूपीएससी ऐसी गलती नहीं कर सकता। वे अपनी बेटी का सिलेक्शन होने का दावा कर रहे हैं। दूसरी ओर, अलीराजपुर की आयशा मकरानी के पिता का नाम सलीमुद्दीन है। उसके सिविल इंजीनियर भाई का दावा है कि आयशा ने इस कामयाबी के लिए काफी मेहनत की थी। वे इस मामले को लेकर कोर्ट जाने को भी तैयार हैं।
दोनों युवतियों ने सोशल मीडिया पर अपने एडमिट कार्ड और परीक्षा में शामिल होने से संबंधित सबूत पेश किए हैं। देवास की आयशा फातिमा के एडमिड कार्ड पर इंटरव्यू की तारी 25 अप्रैल और दिन मंगलवार लिखा है। अलीराजपुर की आयशा मकरानी के एडमिट कार्ड पर भी तारी 25 अप्रैल ही है, लेकिन दिन गुरुवार लिखा है। वास्तव में 25 अप्रैल को मंगलवार ही था। आयशा फातिमा के एडमिट कार्ड पर यूपीएससी का वाटर मार्क और क्यूआर कोड है। क्यूआर कोड स्कैन करने पर वही जानकारी सामने आ रही है जो एडमिट कार्ड पर दर्ज है। आयशा मकरानी के एडमिट कार्ड पर ना तो वाटर मार्क है और ना ही क्यूआर कोड।
| यूपीएससी से जारी सूची में आयशा नाम की लड़की का नाम एक सौ चौरासीवीं नंबर पर है। रिजल्ट आते ही दो परिवारों में जश्न शुरू हो गया। इनमें से एक परिवार देवास का है। आयशा फातिमा नाम की युवती का दावा है कि उसे एक सौ चौरासीवीं रैंक मिली है। दूसरा परिवार अलीराजपुर जिले की आयशा मकरानी का है। उसका भी दावा है कि उसे एक सौ चौरासीवीं रैंक मिली है। ताज्जुब ये है कि आयशा नाम की दोनों लड़कियों के रोल नंबर एक हैं। दोनों के एडमिट कार्ड पर अठहत्तर लाख ग्यारह हज़ार सात सौ चौंतालीस रोल नंबर लिखा है। दोनों को एक रोल नंबर मिलना संभव है या नहीं, यह यूपीएससी ही बता सकता है। हालांकि, दोनों युवतियां लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में शामिल होने के दावे कर रही हैं। इसके लिए दोनों अपने-अपने सबूत भी पेश कर रही हैं। देवास की आयशा फातिमा के पिता का नाम नजीरूद्दीन है। उनका तर्क है कि यूपीएससी ऐसी गलती नहीं कर सकता। वे अपनी बेटी का सिलेक्शन होने का दावा कर रहे हैं। दूसरी ओर, अलीराजपुर की आयशा मकरानी के पिता का नाम सलीमुद्दीन है। उसके सिविल इंजीनियर भाई का दावा है कि आयशा ने इस कामयाबी के लिए काफी मेहनत की थी। वे इस मामले को लेकर कोर्ट जाने को भी तैयार हैं। दोनों युवतियों ने सोशल मीडिया पर अपने एडमिट कार्ड और परीक्षा में शामिल होने से संबंधित सबूत पेश किए हैं। देवास की आयशा फातिमा के एडमिड कार्ड पर इंटरव्यू की तारी पच्चीस अप्रैल और दिन मंगलवार लिखा है। अलीराजपुर की आयशा मकरानी के एडमिट कार्ड पर भी तारी पच्चीस अप्रैल ही है, लेकिन दिन गुरुवार लिखा है। वास्तव में पच्चीस अप्रैल को मंगलवार ही था। आयशा फातिमा के एडमिट कार्ड पर यूपीएससी का वाटर मार्क और क्यूआर कोड है। क्यूआर कोड स्कैन करने पर वही जानकारी सामने आ रही है जो एडमिट कार्ड पर दर्ज है। आयशा मकरानी के एडमिट कार्ड पर ना तो वाटर मार्क है और ना ही क्यूआर कोड। |
पिछले कुछ दिनों में तालिबान ने अफगानिस्तान के सात सूबों की राजधानियों पर कब्जा कर लिया है। उत्तर में कुंदुज, सर-ए-पोल और तालोकान पर तालिबान ने कब्जा कर लिया। ये शहर अपने ही नाम के प्रांतों की राजधानियां हैं। दक्षिण में ईरान की सीमा से लगे निमरोज़ की राजधानी जरांज पर कब्जा कर लिया है। उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान सीमा से लगे नोवज्जान प्रांत की राजधानी शबरग़ान पर भी तालिबान का कब्जा हो गया है। मंगलवार की शाम को उत्तर के बागलान प्रांत की राजधानी पुल-ए-खुमरी पर तालिबान का कब्जा हो गया। ईयू के एक प्रवक्ता के अनुसार देश के 65% हिस्से पर या तो तालिबान का कब्जा है या उसके साथ लड़ाई चल रही है।
उधर खबरें यह भी हैं कि अफगान सुरक्षा बलों ने पिछले शुक्रवार को हेरात प्रांत के करुख जिले पर जवाबी कार्रवाई करते हुए फिर से कब्जा कर लिया। तालिबान ने पिछले एक महीने में हेरात प्रांत के एक दर्जन से अधिक जिलों पर कब्जा कर लिया था। हेरात में इस्माइल खान का ताकतवर कबीला सरकार के साथ है। उसने तालिबान को रोक रखा है। फराह प्रांत में अफगान वायुसेना ने तालिबान के ठिकानों पर बम गिराए। अमेरिका के बम वर्षक विमान बी-52 भी इन हवाई हमलों में अफगान सेना की मदद कर रहे हैं। तालिबान ने इन हवाई हमलों को लेकर कहा है, कि इनके माध्यम से आम अफगान लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। उधर अमेरिका का कहना है कि हमारा सैनिक अभियान 31 अगस्त को समाप्त हो जाएगा। उसके बाद देश की रक्षा करने की जिम्मेदारी अफगान सेना की है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि अफगानिस्तान के नेताओं को अपनी भूमि की रक्षा के लिए अब निकल कर आना चाहिए।
हवाई हमलों के बावजूद तालिबान की रफ्तार थमी नहीं है। इस दौरान सवाल उठाया जा रहा है कि अफगान सेना तालिबान के मुकाबले लड़ क्यों नहीं पा रही है? कहा यह भी जा रहा है कि अमेरिकी सेना को कम से कम एक साल तक और अफगानिस्तान में रहना चाहिए था। कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि अमेरिकी सेना को हटना ही था, तो पहले देश में उन कबीलों के साथ मोर्चा बनाना चाहिए था, जो तालिबान के खिलाफ खड़े हैं।
| पिछले कुछ दिनों में तालिबान ने अफगानिस्तान के सात सूबों की राजधानियों पर कब्जा कर लिया है। उत्तर में कुंदुज, सर-ए-पोल और तालोकान पर तालिबान ने कब्जा कर लिया। ये शहर अपने ही नाम के प्रांतों की राजधानियां हैं। दक्षिण में ईरान की सीमा से लगे निमरोज़ की राजधानी जरांज पर कब्जा कर लिया है। उज्बेकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान सीमा से लगे नोवज्जान प्रांत की राजधानी शबरग़ान पर भी तालिबान का कब्जा हो गया है। मंगलवार की शाम को उत्तर के बागलान प्रांत की राजधानी पुल-ए-खुमरी पर तालिबान का कब्जा हो गया। ईयू के एक प्रवक्ता के अनुसार देश के पैंसठ% हिस्से पर या तो तालिबान का कब्जा है या उसके साथ लड़ाई चल रही है। उधर खबरें यह भी हैं कि अफगान सुरक्षा बलों ने पिछले शुक्रवार को हेरात प्रांत के करुख जिले पर जवाबी कार्रवाई करते हुए फिर से कब्जा कर लिया। तालिबान ने पिछले एक महीने में हेरात प्रांत के एक दर्जन से अधिक जिलों पर कब्जा कर लिया था। हेरात में इस्माइल खान का ताकतवर कबीला सरकार के साथ है। उसने तालिबान को रोक रखा है। फराह प्रांत में अफगान वायुसेना ने तालिबान के ठिकानों पर बम गिराए। अमेरिका के बम वर्षक विमान बी-बावन भी इन हवाई हमलों में अफगान सेना की मदद कर रहे हैं। तालिबान ने इन हवाई हमलों को लेकर कहा है, कि इनके माध्यम से आम अफगान लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। उधर अमेरिका का कहना है कि हमारा सैनिक अभियान इकतीस अगस्त को समाप्त हो जाएगा। उसके बाद देश की रक्षा करने की जिम्मेदारी अफगान सेना की है। अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा है कि अफगानिस्तान के नेताओं को अपनी भूमि की रक्षा के लिए अब निकल कर आना चाहिए। हवाई हमलों के बावजूद तालिबान की रफ्तार थमी नहीं है। इस दौरान सवाल उठाया जा रहा है कि अफगान सेना तालिबान के मुकाबले लड़ क्यों नहीं पा रही है? कहा यह भी जा रहा है कि अमेरिकी सेना को कम से कम एक साल तक और अफगानिस्तान में रहना चाहिए था। कुछ पर्यवेक्षकों का कहना है कि अमेरिकी सेना को हटना ही था, तो पहले देश में उन कबीलों के साथ मोर्चा बनाना चाहिए था, जो तालिबान के खिलाफ खड़े हैं। |
आईसीसी ने इस हफ्ते की ताज़ा रैंकिंग जारी कर दी है। जिसमें टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ी सूर्यकुमार यादव दुनिया के नंबर-1 टी-20 बल्लेबाज बने हुए हैं। वे पिछले हफ्ते भी टॉप पर थे। इस बार उनके रेटिंग पॉइंट में इजाफा हुआ है और अब सूर्या के 890 रेटिंग पॉइंट्स हैं। पिछले सप्ताह उनके 859 पॉइंट्स थे। सूर्यकुमार यादव ने न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ थे। 2 मुकाबलों में उनके बल्ले से 124 रन निकले थे। इसमें एक शतक भी शामिल है। सूर्यकुमार ने दूसरे टी20 मुकाबले में 111 रन तूफानी पारी खेली थी। यह उनके करियर का दूसरा शतक था। वहीँ विराट कोहली को दो स्थान का नुकसान हुआ है।
अगर बल्लेबाज़ों की रैंकिंग की बात करें तो सूर्यकुमार के बाद पाकिस्तान के मोहम्मद रिजवान 836 रेटिंग पॉइंट्स के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इसके बाद न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ डिवॉन कॉनवे को एक स्थान का फायदा हुआ है और वो चौथे स्थान से तीसरे स्थान पर पहुंच गए है कॉनवे के 788 रेटिंग पॉइंट्स है। भारत के खिलाफ आखिरी मैच में कॉनवे ने अर्धशतकीय पारी खेली थी। बाबर आज़म अब चौथे स्थान पर पहुंच गए है और न्यूज़ीलैंड के ग्लेन फिलिप्स भी एक स्थान के फायदे से सातवें स्थान पर पहुंच गए है। वहीँ विराट कोहली को दो स्थान का नुकशान हुआ है और वो अब 13वे स्थान पर पहुंच गए है।
गेंदबाजी रैंकिंग में ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिला है। श्रीलंका के वानिंदु हसारंगा नंबर-1 पर हैं और अफ़ग़ानिस्तान के रशीद खान दूसरे स्थान पर। वहीँ भुवनेश्वर कुमार 647 पॉइंट्स के साथ 13वें स्थान पर हैं। वे सबसे ऊंची रैंकिंग वाले भारतीय गेंदबाज हैं। अर्शदीप सिंह 616 अंकों के साथ 21वें और रविचंद्रन अश्विन 606 अंकों के साथ 21वें नंबर पर हैं। युजवेंद्र चहल 532 पॉइंट्स के साथ 43वें स्थान पर हैं।
| आईसीसी ने इस हफ्ते की ताज़ा रैंकिंग जारी कर दी है। जिसमें टीम इंडिया के स्टार खिलाड़ी सूर्यकुमार यादव दुनिया के नंबर-एक टी-बीस बल्लेबाज बने हुए हैं। वे पिछले हफ्ते भी टॉप पर थे। इस बार उनके रेटिंग पॉइंट में इजाफा हुआ है और अब सूर्या के आठ सौ नब्बे रेटिंग पॉइंट्स हैं। पिछले सप्ताह उनके आठ सौ उनसठ पॉइंट्स थे। सूर्यकुमार यादव ने न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-बीस सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ थे। दो मुकाबलों में उनके बल्ले से एक सौ चौबीस रन निकले थे। इसमें एक शतक भी शामिल है। सूर्यकुमार ने दूसरे टीबीस मुकाबले में एक सौ ग्यारह रन तूफानी पारी खेली थी। यह उनके करियर का दूसरा शतक था। वहीँ विराट कोहली को दो स्थान का नुकसान हुआ है। अगर बल्लेबाज़ों की रैंकिंग की बात करें तो सूर्यकुमार के बाद पाकिस्तान के मोहम्मद रिजवान आठ सौ छत्तीस रेटिंग पॉइंट्स के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इसके बाद न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ डिवॉन कॉनवे को एक स्थान का फायदा हुआ है और वो चौथे स्थान से तीसरे स्थान पर पहुंच गए है कॉनवे के सात सौ अठासी रेटिंग पॉइंट्स है। भारत के खिलाफ आखिरी मैच में कॉनवे ने अर्धशतकीय पारी खेली थी। बाबर आज़म अब चौथे स्थान पर पहुंच गए है और न्यूज़ीलैंड के ग्लेन फिलिप्स भी एक स्थान के फायदे से सातवें स्थान पर पहुंच गए है। वहीँ विराट कोहली को दो स्थान का नुकशान हुआ है और वो अब तेरहवे स्थान पर पहुंच गए है। गेंदबाजी रैंकिंग में ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिला है। श्रीलंका के वानिंदु हसारंगा नंबर-एक पर हैं और अफ़ग़ानिस्तान के रशीद खान दूसरे स्थान पर। वहीँ भुवनेश्वर कुमार छः सौ सैंतालीस पॉइंट्स के साथ तेरहवें स्थान पर हैं। वे सबसे ऊंची रैंकिंग वाले भारतीय गेंदबाज हैं। अर्शदीप सिंह छः सौ सोलह अंकों के साथ इक्कीसवें और रविचंद्रन अश्विन छः सौ छः अंकों के साथ इक्कीसवें नंबर पर हैं। युजवेंद्र चहल पाँच सौ बत्तीस पॉइंट्स के साथ तैंतालीसवें स्थान पर हैं। |
केंद्र सरकार ने प्लास्टिक पर बैन लगाया हुआ है, इसका फायदा आप बिजनेस में उठा सकते हैं, आप पेपर कप का बिजनेस शुरू कर सकते है। बता दें इन दिनों पेपर कप बिजनेस की काफी डिमांड है।
नई दिल्ली। देश भर में इस समय कोरोना वायरस की वजह से महामारी फैली हुई है। नौकरी करनेवाले हों या अपना खुद का बिजनेस करनेवाले हों सभी पर इस घातक बीमारी की वजह से गाज गिरी है। ऐसी स्थिति में अगर आप खुद का नया बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं तो हम आपको एक ऐसे बिजनेस के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें कम इन्वेंस्टमेंट (Investment) में ज्यादा मुनाफा (Profit) हो सकता है। जिस तरह देश में प्रदूषण ने सरकार की चिंता बढ़ाई हुई है। ऐसे में केंद्र सरकार ने प्लास्टिक पर बैन लगाया हुआ है, इसका फायदा आप बिजनेस में उठा सकते हैं, आप पेपर कप का बिजनेस शुरू कर सकते है। बता दें इन दिनों पेपर कप बिजनेस की काफी डिमांड है। इसके अलावा इस बिजनेस में आप कम पैसे में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। खास बात यह है कि पेपर कप मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए सरकार भी मुद्रा योजना के तहत हेल्प कर रही है। बता दें केंद्र सरकार की ओर से प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी तैयार की गई है, जिसमें बिजनेस शुरू करने में आने वाले खर्च से लेकर होने वाले मुनाफे का पूरा कैलकुलेशन दिया गया है।
इस बिजनेस को करने के लिए आपको 500 वर्गफीट एरिया की जरूरत पड़ेगी। मशीनरी, इक्विपमेंट फिस इक्विपमेंट व फर्नीचर, डाई, इलेक्ट्रिफिकेशन, इंस्टालेशन और प्री आपरेटिव के लिए खर्च लगभग 10 लाख तक का खर्च हो सकता है। जो ज्यादा घाटे का सौदा नहीं है।
अगर आप इस बिजनेस को शुरू करते हैं और साल के 300 दिन काम करते हैं तो आप करीब 300 दिनों में 2. 20 करोड़ यूनिट पेपर कप तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा आप प्रति कप या ग्लास को करीब 30 पैसे के हिसाब से बेच सकते हैं।
बता दें केंद्र सरकार के मुद्रा लोन की तरफ से इस बिजनेस में मदद भी मिलती है। यानी आप लोन लेकर भी ये बिजनेस शुरू कर सकते हैं। मुद्रा लोन के तहत सरकार ब्याज पर सब्सिडी देती है। इस योजना के तहत कुल प्रोजेक्ट कास्ट का 25 फीसदी आपको खुद के पास से निवेश करना होगा। मुद्रा योजना के तहत 75 फीसदी लोन सरकार देगी।
| केंद्र सरकार ने प्लास्टिक पर बैन लगाया हुआ है, इसका फायदा आप बिजनेस में उठा सकते हैं, आप पेपर कप का बिजनेस शुरू कर सकते है। बता दें इन दिनों पेपर कप बिजनेस की काफी डिमांड है। नई दिल्ली। देश भर में इस समय कोरोना वायरस की वजह से महामारी फैली हुई है। नौकरी करनेवाले हों या अपना खुद का बिजनेस करनेवाले हों सभी पर इस घातक बीमारी की वजह से गाज गिरी है। ऐसी स्थिति में अगर आप खुद का नया बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं तो हम आपको एक ऐसे बिजनेस के बारे में बताने जा रहे हैं जिसमें कम इन्वेंस्टमेंट में ज्यादा मुनाफा हो सकता है। जिस तरह देश में प्रदूषण ने सरकार की चिंता बढ़ाई हुई है। ऐसे में केंद्र सरकार ने प्लास्टिक पर बैन लगाया हुआ है, इसका फायदा आप बिजनेस में उठा सकते हैं, आप पेपर कप का बिजनेस शुरू कर सकते है। बता दें इन दिनों पेपर कप बिजनेस की काफी डिमांड है। इसके अलावा इस बिजनेस में आप कम पैसे में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। खास बात यह है कि पेपर कप मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने के लिए सरकार भी मुद्रा योजना के तहत हेल्प कर रही है। बता दें केंद्र सरकार की ओर से प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी तैयार की गई है, जिसमें बिजनेस शुरू करने में आने वाले खर्च से लेकर होने वाले मुनाफे का पूरा कैलकुलेशन दिया गया है। इस बिजनेस को करने के लिए आपको पाँच सौ वर्गफीट एरिया की जरूरत पड़ेगी। मशीनरी, इक्विपमेंट फिस इक्विपमेंट व फर्नीचर, डाई, इलेक्ट्रिफिकेशन, इंस्टालेशन और प्री आपरेटिव के लिए खर्च लगभग दस लाख तक का खर्च हो सकता है। जो ज्यादा घाटे का सौदा नहीं है। अगर आप इस बिजनेस को शुरू करते हैं और साल के तीन सौ दिन काम करते हैं तो आप करीब तीन सौ दिनों में दो. बीस करोड़ यूनिट पेपर कप तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा आप प्रति कप या ग्लास को करीब तीस पैसे के हिसाब से बेच सकते हैं। बता दें केंद्र सरकार के मुद्रा लोन की तरफ से इस बिजनेस में मदद भी मिलती है। यानी आप लोन लेकर भी ये बिजनेस शुरू कर सकते हैं। मुद्रा लोन के तहत सरकार ब्याज पर सब्सिडी देती है। इस योजना के तहत कुल प्रोजेक्ट कास्ट का पच्चीस फीसदी आपको खुद के पास से निवेश करना होगा। मुद्रा योजना के तहत पचहत्तर फीसदी लोन सरकार देगी। |
योग का मूल स्रोत वेद है। वेद की अन्य शाखाओं में विस्तृत रूप से फैला हुआ योग आज भारतीय संस्कृति और जीवन शैली की सुगंधि को संपूर्ण विश्व में शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर स्थापित कर चुका है। विश्व में जहां भी योग पहुंचा, वहां योग दर्शन पहुंच गया और योग दर्शन का प्रत्यक्ष संबंध वैदिक संहिताओं से है। विश्व के सभी देशों ने योग को अपनी सुविधा और जरूरत के हिसाब से अपनाने में कोई हिचकिचाहट महसूस नहीं की। कुछ वर्ष पहले यह सवाल बार-बार सामने आया कि योग का उद्गम कहां से है? योग कितना पुराना है? विश्व ने योग को अपना तो लिया, लेकिन हम भारतीय उसकी उत्पत्ति और समय को लेकर दूसरों को बताने से सदा ही सकुचाते रहे कि क्या विश्व को यह बता कर कि योग का मूल स्रोत वेद है, कहीं योग के विस्तार में बाधक तो नहीं होगा? क्या विश्व योग की प्रामाणिकता पर प्रश्नचिह्न तो नहीं लगा देगा? अनेक प्रश्न हो सकते हैं अगर योग को वैदिक धर्म से जोड़ कर विश्व के सामने प्रस्तुत किया जाए।
प्रत्यक्ष या परोक्ष योग के प्रचार-प्रसार तथा शिक्षण से जुड़े भारतीय बुद्धिजीवियों ने योग को वेद से न जोड़ कर केवल अधिक से अधिक योग दर्शन, घेरंड संहिता, गोरक्ष संहिता से जोड़ कर लगभग तीन से पांच हजार वर्ष पुराना ही माना है। भारतीय बुद्धिजीवियों या फिर योग से जुड़े हुए आचार्यों में कहीं न कहीं दूरदर्शिता का अभाव था या फिर हीन भावना से ग्रस्त होने के कारण योग का संबंध वेद से स्थापित करने में हिचकिचाते रहे या इसे यों भी कह सकते हैं कि नवीन भारतीय योग आचार्यों का स्वाध्याय योग दर्शन, घेरंड संहिता, गोरक्ष संहिता और गीता से दूर या उसके मूल तक नहीं पहुंच पाया था।
अष्टांग योग के आठ अंग और पहले दो अंग यम और नियम के पांच-पांच अंगों का विस्तृत वर्णन वेद में और वैदिक संहिताओं में उपलब्ध है। विश्व की सबसे प्राचीन परंपरा योग आज आधुनिक युग में मानव समाज को सुखी और स्वस्थ बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। संपूर्ण विश्व में योग अपनी उपस्थिति बनाए हुए है। विश्व का कोई भी देश योग से अछूता नहीं है। वेद भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान-विज्ञान का मूल स्रोत है।
'वेदोऽखिलो : धर्म मूलम्' अर्थात वेदों में सभी विद्याओं के सूत्र विद्यमान हैं, जैसे देव विद्या, निधि विद्या, ब्रह्मविद्या, राशि विद्या, नक्षत्र विद्या, राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र, भूगोल, आयुर्वेद, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, वाणिज्य, दर्शन एवं योग संसार की कोई भी ऐसी विद्या नहीं है, जिसका वर्णन ऋग्वेद में न हुआ हो। इन सभी विद्याओं में योग विद्या दुख निवृत्ति का हेतु है। योग मानव के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करता है। योग कई प्रकार का है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से आत्मा से परमात्मा का मिलन ही योग है।
महर्षि पतंजलि के अनुसार 'योगाशचित्त वृत्ति निरोधः' यानी अपनी चित्त की वृत्तियों को जब रोक दिया जाए, तब 'तदाद्रष्टुस्वरूपेवस्थानं' यानी आत्मा का अपने सही स्वरूप में स्थापित हो जाना ही योग है। 'यस्मादृते न सिद्धयति यज्ञो विपश्चितश्चन स धीनां योगमिन्वति। ' (ऋग. ) यानी जिन देवताओं के बिना प्रकाश पूर्ण ज्ञानी का जीवन भी सफल नहीं होता, उसी में ज्ञानियों को अपनी बुद्धि एवं कर्मों का योग करना चाहिए। ऐसा करने से ज्ञानियों की बुद्धि देवों की बुद्धि के साथ मिल कर सत्य को प्रकट कर लेती है। योग केवल साधन न होकर साध्य भी है। अथर्ववेद का कहना है कि योगाभ्यास अर्थात ध्यान के लिए उग्र श्रद्धा, लगन, अभ्यास एवं उग्र वैराग्य आदि साधनों की जरूरत होती है।
'यथा-यतपुरुषेण हविषा देवा यज्ञमतनवत॥ ' (अथर्व. ) स्पष्ट है जिस मानस ज्ञान को वितरित करते हुए ध्यानी या विद्वान अभ्यासी सर्व दृष्टा परमात्मा को हृदय से बांधते हैं वह फिर इंद्रियों की धारणा योग के नाम से जानी जाती है। योग्यजन आत्माओं का अर्थ गति हुआ करती है तो सांसारिक जन की अधोगति हुआ करती है अर्थात उन्हें नीचे की ओर पृथ्वी पर आना पड़ता है। 'यथा नाकसय पृष्ठात दिवमुत पतिषयन॥ ' (अथर्व. ) योग की सिद्धि में ईश्वर अनुकंपा आवश्यक है।
'स धा नो योग आभूवत् सराये स पुरध्याम।
गमद् वाजेभिरा स नः। ' (ऋग. 2/5/3, साम. 1/10/2/3, अथर्व 20/59/1)
'युंजते मन उत युंजते धियो विप्रा विप्रस्यबृहतो विपश्चितः।
वि होत्रा दधे वयुनाविदेक इन्मही देवस्य सवितुः परितुष्टिः। ' (ऋग. 5/81/1)
योग का संबंध मनुष्य के साथ अनंत काल से है। योग के बिना परम आत्मिक आनंद नहीं मिल सकता है। मनुष्य जितना भौतिक जगत में उलझा हुआ रहेगा, उतना ही दुखी रहेगा इसलिए परम सुख की प्राप्ति तो योगाभ्यास द्वारा ही संभव है। शरीर के तल पर भोगे जाने वाले सुखों की सीमा होती है। मन के तल पर भोगे जाने वाले सुखों की सीमा शरीर के सुखों से लंबी होती है, लेकिन फिर भी सीमा होती है। लेकिन जो सुख आत्मा के तल पर भोगा जाता है उसकी कोई सीमा नहीं होती, उसका आनंद अनंत होता है, क्योंकि परमात्मा सुख के साधन में आत्मा का आधार होता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने परमात्मा की प्राप्ति का साधन ध्यान और योगाभ्यास बताया है। परम सुख की प्राप्ति परमात्मा की गोद में बैठ कर ही अनुभव की जा सकती है। जन्म मरण के बंधन से छूट कर योगाभ्यास द्वारा परमात्मा का दर्शन ही आत्मा का लक्ष्य है।
वैदिक साहित्य से लेकर उपनिषद काल तक और उपनिषद काल से लेकर आधुनिक काल तक जहां कहीं भी हम योग शब्द सुनते हैं, उसका आधार वैदिक वांग्मय ही है। वेदों में योग पूर्णता निहित है। वेदांत दर्शन और उपनिषद आदि वेद को सरलता पूर्वक जानने के साधन हैं। वेद में योग मंत्रों का विस्तार से विवेचन है। वेदांत दर्शन एवं उपनिषदों के माध्यम से साधक जन तक पहुंचाने में हमारे ऋषियों की अहम भूमिका रही है। महर्षि पतंजलि ने योग की बहुत ही सरल विधि योग साधकों तक पहुंचाई है। उत्तर उत्तरोत्तर काल में जब वेद का पढ़ना-पढ़ाना कम होता गया तब वेद के ज्ञान को सरल तरीके से समझाने के लिए वेदांग का सहारा लिया जाने लगा। आज समूचे विश्व में योग की धूम मची हुई है। विश्व का कोई भी समाज तथा राष्ट्र योग से अछूता नहीं है तथा इसके महत्त्व एवं लाभ को देखते हुए यूएनओ ने और अधिक जन-जन तक पहुंचाने के लिए योग दिवस मनाने का निर्णय किया।
योग से संबंधित भारत में अनेक ग्रंथ विद्यमान हैं, जो प्रामाणिक हैं। इन सभी ग्रंथों में योग दर्शन सर्वमान्य एवं सबसे प्राचीन माना जाता है। ऋषि पतंजलि का योग दर्शन योग के आठ अंग में विभाजित किया यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि इन सभी अंगों का वर्णन अलग-अलग स्थान पर वेदों में उपलब्ध है। इस कारण वेद ही योग का मूल है और वेद ही सत्य सनातन धर्म का मूल है।
| योग का मूल स्रोत वेद है। वेद की अन्य शाखाओं में विस्तृत रूप से फैला हुआ योग आज भारतीय संस्कृति और जीवन शैली की सुगंधि को संपूर्ण विश्व में शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर स्थापित कर चुका है। विश्व में जहां भी योग पहुंचा, वहां योग दर्शन पहुंच गया और योग दर्शन का प्रत्यक्ष संबंध वैदिक संहिताओं से है। विश्व के सभी देशों ने योग को अपनी सुविधा और जरूरत के हिसाब से अपनाने में कोई हिचकिचाहट महसूस नहीं की। कुछ वर्ष पहले यह सवाल बार-बार सामने आया कि योग का उद्गम कहां से है? योग कितना पुराना है? विश्व ने योग को अपना तो लिया, लेकिन हम भारतीय उसकी उत्पत्ति और समय को लेकर दूसरों को बताने से सदा ही सकुचाते रहे कि क्या विश्व को यह बता कर कि योग का मूल स्रोत वेद है, कहीं योग के विस्तार में बाधक तो नहीं होगा? क्या विश्व योग की प्रामाणिकता पर प्रश्नचिह्न तो नहीं लगा देगा? अनेक प्रश्न हो सकते हैं अगर योग को वैदिक धर्म से जोड़ कर विश्व के सामने प्रस्तुत किया जाए। प्रत्यक्ष या परोक्ष योग के प्रचार-प्रसार तथा शिक्षण से जुड़े भारतीय बुद्धिजीवियों ने योग को वेद से न जोड़ कर केवल अधिक से अधिक योग दर्शन, घेरंड संहिता, गोरक्ष संहिता से जोड़ कर लगभग तीन से पांच हजार वर्ष पुराना ही माना है। भारतीय बुद्धिजीवियों या फिर योग से जुड़े हुए आचार्यों में कहीं न कहीं दूरदर्शिता का अभाव था या फिर हीन भावना से ग्रस्त होने के कारण योग का संबंध वेद से स्थापित करने में हिचकिचाते रहे या इसे यों भी कह सकते हैं कि नवीन भारतीय योग आचार्यों का स्वाध्याय योग दर्शन, घेरंड संहिता, गोरक्ष संहिता और गीता से दूर या उसके मूल तक नहीं पहुंच पाया था। अष्टांग योग के आठ अंग और पहले दो अंग यम और नियम के पांच-पांच अंगों का विस्तृत वर्णन वेद में और वैदिक संहिताओं में उपलब्ध है। विश्व की सबसे प्राचीन परंपरा योग आज आधुनिक युग में मानव समाज को सुखी और स्वस्थ बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। संपूर्ण विश्व में योग अपनी उपस्थिति बनाए हुए है। विश्व का कोई भी देश योग से अछूता नहीं है। वेद भारतीय संस्कृति एवं ज्ञान-विज्ञान का मूल स्रोत है। 'वेदोऽखिलो : धर्म मूलम्' अर्थात वेदों में सभी विद्याओं के सूत्र विद्यमान हैं, जैसे देव विद्या, निधि विद्या, ब्रह्मविद्या, राशि विद्या, नक्षत्र विद्या, राजनीति शास्त्र, अर्थशास्त्र, भूगोल, आयुर्वेद, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, वाणिज्य, दर्शन एवं योग संसार की कोई भी ऐसी विद्या नहीं है, जिसका वर्णन ऋग्वेद में न हुआ हो। इन सभी विद्याओं में योग विद्या दुख निवृत्ति का हेतु है। योग मानव के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करता है। योग कई प्रकार का है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से आत्मा से परमात्मा का मिलन ही योग है। महर्षि पतंजलि के अनुसार 'योगाशचित्त वृत्ति निरोधः' यानी अपनी चित्त की वृत्तियों को जब रोक दिया जाए, तब 'तदाद्रष्टुस्वरूपेवस्थानं' यानी आत्मा का अपने सही स्वरूप में स्थापित हो जाना ही योग है। 'यस्मादृते न सिद्धयति यज्ञो विपश्चितश्चन स धीनां योगमिन्वति। ' यानी जिन देवताओं के बिना प्रकाश पूर्ण ज्ञानी का जीवन भी सफल नहीं होता, उसी में ज्ञानियों को अपनी बुद्धि एवं कर्मों का योग करना चाहिए। ऐसा करने से ज्ञानियों की बुद्धि देवों की बुद्धि के साथ मिल कर सत्य को प्रकट कर लेती है। योग केवल साधन न होकर साध्य भी है। अथर्ववेद का कहना है कि योगाभ्यास अर्थात ध्यान के लिए उग्र श्रद्धा, लगन, अभ्यास एवं उग्र वैराग्य आदि साधनों की जरूरत होती है। 'यथा-यतपुरुषेण हविषा देवा यज्ञमतनवत॥ ' स्पष्ट है जिस मानस ज्ञान को वितरित करते हुए ध्यानी या विद्वान अभ्यासी सर्व दृष्टा परमात्मा को हृदय से बांधते हैं वह फिर इंद्रियों की धारणा योग के नाम से जानी जाती है। योग्यजन आत्माओं का अर्थ गति हुआ करती है तो सांसारिक जन की अधोगति हुआ करती है अर्थात उन्हें नीचे की ओर पृथ्वी पर आना पड़ता है। 'यथा नाकसय पृष्ठात दिवमुत पतिषयन॥ ' योग की सिद्धि में ईश्वर अनुकंपा आवश्यक है। 'स धा नो योग आभूवत् सराये स पुरध्याम। गमद् वाजेभिरा स नः। ' 'युंजते मन उत युंजते धियो विप्रा विप्रस्यबृहतो विपश्चितः। वि होत्रा दधे वयुनाविदेक इन्मही देवस्य सवितुः परितुष्टिः। ' योग का संबंध मनुष्य के साथ अनंत काल से है। योग के बिना परम आत्मिक आनंद नहीं मिल सकता है। मनुष्य जितना भौतिक जगत में उलझा हुआ रहेगा, उतना ही दुखी रहेगा इसलिए परम सुख की प्राप्ति तो योगाभ्यास द्वारा ही संभव है। शरीर के तल पर भोगे जाने वाले सुखों की सीमा होती है। मन के तल पर भोगे जाने वाले सुखों की सीमा शरीर के सुखों से लंबी होती है, लेकिन फिर भी सीमा होती है। लेकिन जो सुख आत्मा के तल पर भोगा जाता है उसकी कोई सीमा नहीं होती, उसका आनंद अनंत होता है, क्योंकि परमात्मा सुख के साधन में आत्मा का आधार होता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने परमात्मा की प्राप्ति का साधन ध्यान और योगाभ्यास बताया है। परम सुख की प्राप्ति परमात्मा की गोद में बैठ कर ही अनुभव की जा सकती है। जन्म मरण के बंधन से छूट कर योगाभ्यास द्वारा परमात्मा का दर्शन ही आत्मा का लक्ष्य है। वैदिक साहित्य से लेकर उपनिषद काल तक और उपनिषद काल से लेकर आधुनिक काल तक जहां कहीं भी हम योग शब्द सुनते हैं, उसका आधार वैदिक वांग्मय ही है। वेदों में योग पूर्णता निहित है। वेदांत दर्शन और उपनिषद आदि वेद को सरलता पूर्वक जानने के साधन हैं। वेद में योग मंत्रों का विस्तार से विवेचन है। वेदांत दर्शन एवं उपनिषदों के माध्यम से साधक जन तक पहुंचाने में हमारे ऋषियों की अहम भूमिका रही है। महर्षि पतंजलि ने योग की बहुत ही सरल विधि योग साधकों तक पहुंचाई है। उत्तर उत्तरोत्तर काल में जब वेद का पढ़ना-पढ़ाना कम होता गया तब वेद के ज्ञान को सरल तरीके से समझाने के लिए वेदांग का सहारा लिया जाने लगा। आज समूचे विश्व में योग की धूम मची हुई है। विश्व का कोई भी समाज तथा राष्ट्र योग से अछूता नहीं है तथा इसके महत्त्व एवं लाभ को देखते हुए यूएनओ ने और अधिक जन-जन तक पहुंचाने के लिए योग दिवस मनाने का निर्णय किया। योग से संबंधित भारत में अनेक ग्रंथ विद्यमान हैं, जो प्रामाणिक हैं। इन सभी ग्रंथों में योग दर्शन सर्वमान्य एवं सबसे प्राचीन माना जाता है। ऋषि पतंजलि का योग दर्शन योग के आठ अंग में विभाजित किया यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि इन सभी अंगों का वर्णन अलग-अलग स्थान पर वेदों में उपलब्ध है। इस कारण वेद ही योग का मूल है और वेद ही सत्य सनातन धर्म का मूल है। |
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। इस समय फिल्मों से ज्यादा लोग वेब सीरीज को पसंद कर रहे हैं। कई सीरीज ऐसी भी हो जो काफी ज्यादा पॉपुलर है। इसी में से एक सीरीज है 'बिग बैंग थ्योरी'। नेटफ्लिक्स पर इस सीरीज को काफी पसंद किया जा रहा है। लेकिन अब इसके एक सीन में कुछ ऐसा दिखा दिया गया है, जिससे ये कानूनी पचड़े में पड़ गई है।
सीरीज के इस सीन नें बॉलीवुड एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित को लेकर अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया गया है। जिसकी वजह से ये सीरीज विवादों में आ गई है। इतना ही नहीं राइटर और पॉलीटिकल एनालिस्ट मिथुन विजय कुमार ने नेटफ्लिक्स को लीगल नोटिस भेजा है। दरअसल, सीरीज के इस सीन में दिखाया गया है कि, जिसमें जिम पारसन्स कहते हैं ऐश्वर्या राय 'पूअर मैन की माधुरी दीक्षित' हैं। इसके जवाब में राज कुथरापल्ली का किरदार निभा रहे कुणाल नायर कहते हैं कि ऐश्वर्या राय देवी की तरह हैं, और उनकी तुलना में माधुरी दीक्षित एक वैश्या।
माधुरी दीक्षित के बारे में ये शब्द सुनने के बाद मिथुन वियज कुमार ने इस तरह के एपिसोड को महिलाओं के प्रति द्वेष भावना को बढ़ाने जैसा बताया है। इस नोटिस में कुमार ने कहा कि उस एपिसोड को हटाया जाए, जिसमें माधुरी दीक्षित का अपमान दिखाया गया है। मिथुन ने कहा है कि अगर इस मामले में उन्हं कोई जवाब नहीं मिलता है तो या फिर नोटिस में की गई मांगों का पालन नहीं किया जाता, तो वह नेटफ्लिक्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।
| नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। इस समय फिल्मों से ज्यादा लोग वेब सीरीज को पसंद कर रहे हैं। कई सीरीज ऐसी भी हो जो काफी ज्यादा पॉपुलर है। इसी में से एक सीरीज है 'बिग बैंग थ्योरी'। नेटफ्लिक्स पर इस सीरीज को काफी पसंद किया जा रहा है। लेकिन अब इसके एक सीन में कुछ ऐसा दिखा दिया गया है, जिससे ये कानूनी पचड़े में पड़ गई है। सीरीज के इस सीन नें बॉलीवुड एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित को लेकर अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल किया गया है। जिसकी वजह से ये सीरीज विवादों में आ गई है। इतना ही नहीं राइटर और पॉलीटिकल एनालिस्ट मिथुन विजय कुमार ने नेटफ्लिक्स को लीगल नोटिस भेजा है। दरअसल, सीरीज के इस सीन में दिखाया गया है कि, जिसमें जिम पारसन्स कहते हैं ऐश्वर्या राय 'पूअर मैन की माधुरी दीक्षित' हैं। इसके जवाब में राज कुथरापल्ली का किरदार निभा रहे कुणाल नायर कहते हैं कि ऐश्वर्या राय देवी की तरह हैं, और उनकी तुलना में माधुरी दीक्षित एक वैश्या। माधुरी दीक्षित के बारे में ये शब्द सुनने के बाद मिथुन वियज कुमार ने इस तरह के एपिसोड को महिलाओं के प्रति द्वेष भावना को बढ़ाने जैसा बताया है। इस नोटिस में कुमार ने कहा कि उस एपिसोड को हटाया जाए, जिसमें माधुरी दीक्षित का अपमान दिखाया गया है। मिथुन ने कहा है कि अगर इस मामले में उन्हं कोई जवाब नहीं मिलता है तो या फिर नोटिस में की गई मांगों का पालन नहीं किया जाता, तो वह नेटफ्लिक्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। |
बीटा एक मे तीज उत्सव के उपलक्ष्य मे रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहाँ ग्रेटर नोएडा के विभिन्न सेक्टरस से आयी महिलाओ ने बढ़ चढ कर भाग लिया।कार्यक्रम का आयोजन (समाज सेविका)अंजू पुंडीर , मनीषा शर्मा और कविता जादौंन द्वारा किया गया ।
कार्यक्रम मे अपनी संस्कृति की भरपूर छटा बरसायी गयी।सभी महिलाओं ने लोकगीत ,सावन के गीत व नृत्य का आनंद लिया। खूबसूरत् महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों मे यू रैमूपवाक किया मानो हिन्दू इतिहास की अप्सरायें ही मंचस्थल पर उतर आयी हो।चूँकि यह महामारी आपदा का समय है इसलिए पिछले सालो की तरह इसे बड़े स्तर पर नही रखा गया । केवल 40 महिलाओं ने भाग लिया । तंबोला , शब्द अंताक्षरी , इसमें खूब सारे सरप्राइज़ गेम कराए गए ।सभी को प्राइज़ और उपहार भी दिए गए । ज्योति बशिष्ठ ( बीटा 1 ) मिसेज तीज़ चुनी गयी । इस अवसर पर पिंकी कसाना , अंजलि , श्रुति , स्वेता , सुमन शर्मा , प्रियंका , कीर्ति, चंचल , नीरू , शिल्पी वीनू मुद्गल , नेहा , सरोज आदि महिलायें उपस्थित रही ।
| बीटा एक मे तीज उत्सव के उपलक्ष्य मे रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहाँ ग्रेटर नोएडा के विभिन्न सेक्टरस से आयी महिलाओ ने बढ़ चढ कर भाग लिया।कार्यक्रम का आयोजन अंजू पुंडीर , मनीषा शर्मा और कविता जादौंन द्वारा किया गया । कार्यक्रम मे अपनी संस्कृति की भरपूर छटा बरसायी गयी।सभी महिलाओं ने लोकगीत ,सावन के गीत व नृत्य का आनंद लिया। खूबसूरत् महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों मे यू रैमूपवाक किया मानो हिन्दू इतिहास की अप्सरायें ही मंचस्थल पर उतर आयी हो।चूँकि यह महामारी आपदा का समय है इसलिए पिछले सालो की तरह इसे बड़े स्तर पर नही रखा गया । केवल चालीस महिलाओं ने भाग लिया । तंबोला , शब्द अंताक्षरी , इसमें खूब सारे सरप्राइज़ गेम कराए गए ।सभी को प्राइज़ और उपहार भी दिए गए । ज्योति बशिष्ठ मिसेज तीज़ चुनी गयी । इस अवसर पर पिंकी कसाना , अंजलि , श्रुति , स्वेता , सुमन शर्मा , प्रियंका , कीर्ति, चंचल , नीरू , शिल्पी वीनू मुद्गल , नेहा , सरोज आदि महिलायें उपस्थित रही । |
रूपमाश्रितः । कोट्यरूपंता निधनं गतौ ॥ ॥३॥ तदा ब्रह्मा भयान्मुक्तः स्तुत्वोवाच विभुं तदा ॥ कोट्य कैश स्वरूपं ते भुवि संस्थाप्यते मया ॥ ४ ॥ साभ्रमत्यास्तटे रम्ये गुर्जरे विषये महत् ॥ तत्र त्वं वस देवेश कृपां कृत्वा ममोपरि ॥ ५ ॥ कोट्यक इति नाम्ना वै सर्वलोकेषु विश्रुतः श्रीभगवानुवाच ॥ ॥ त्वया तु चिन्तितं कार्यं तत्र सर्वे भविव्यति ॥ ६ ॥ साभ्रमत्यास्तटेऽत्रैव सन्निधानं मया कृतम् ।। कोट्यर्क इति नाम्ना त्वं मन्मूर्ति स्थापयादारात् ॥ ७ ॥ वेताननां श्वेतभुजां स्वेतमाल्यानुलेपनाम् ।। आद्यस्य तु युगयैव स्वं मूर्तिपरिकल्पय ॥ ८ ॥ पार्षदौ तत्र संस्थाप्यौ सुनन्दनंदनावुभौ ॥ कार्तिक शुद्धपक्षे तु एकादश्यां शुभ दिने ।। ॥ ९ ॥ सूर्यवारे सुनक्षत्रे ह्यहं जातस्तदाब्जज ॥ द्वादश्यां तावुभौ दैत्यो मत्तो निधनमापतुः ।। १० ।। अतः सा द्वादशी श्रेष्ठा वैष्णवी तिथिरुच्यते ।। महोत्सवस्तत्र कार्योमत्पूजा च सुविस्तरात् ॥ ११ ॥ एवं विष्णो र्वचः श्रुत्वा तथैव कृतवान् विधिः ॥ ॥ सूत उवाच ॥ धारण किया वो कोट्यर्करूप देखतेही वे दोनों दैत्य नाश पाये ॥ ३ ॥ उस बखत ब्रह्माभय से मुक्त होयके विष्णुको नमस्कार करके कहनेलगे हो कोट्यर्केश ! यह तुम्हारा स्वरूप पृथ्वीमें मेरे करके स्थापन होता है ॥ ४ ॥ गुजरात देशमें साभ्रमतीके तट ऊपर वहां आप कृपाकरके वास करना ॥ ५ ॥ कोव्यर्क ( कोटारकु ) नामसे सब लोकोंमें विख्यात हो । श्रीभगवान् कहनेलगे कि ब्रह्मा ! तुमने जो विचार किया है सो सब होवेगा ।।६।। साभ्रमतर्क तट ऊपर मैंने अपना अंश रखा है । तुम कोट्यर्क नामसे मेरी मूर्तिका स्थापन करो ॥ ७ ॥ श्वेतवर्णका मुखारविंद श्वेत चंदनसे चर्चित ऐसी सत्ययुगकी मूर्तिकी कल्पना करो ॥ ८ ॥ और मेरे द्वार के पास दोनों तरफ नंदसुनंद पार्षदगणको स्थापन करो कार्तिक शुद्ध एकादशी के दिन ॥ ९ ॥ रविवार शुभ नक्षत्र में में प्रकट भयाहूं और द्वादशी के दिन वे मधुकैटभ दोनों दैत्य नाश पाये हैं ॥ १० ॥ इसवास्ते वह द्वादशी वैष्णवी तिथि उत्तम कहते हैं । उस दिन बडा उत्सव और विस्तारसे मेरी पूजा कराना ॥ ११ ॥ ऐसा विष्णुका वचन सुनके ब्रह्माने कोट्यर्केशकी बडी पूजा कियी। सूत कहनेलगे
ब्राह्मणोत्सान्तमार्तण्ड ।
ततः कदाचित्ततीर्थ मानवा समुपागताः ॥ १२ ॥ तैस्तु स्नानं कृतं तत्र कोट्यशो नमस्कृतः ॥ ततो विमानसंघस्तु तान्नेतुं समुपस्थितः ।। १३ ।। तवा महदाश्वर्य राक्षसाः समुपस्थिताः ॥ ते सर्वे मद्भुता दिग्भ्यो विमानाकर्षणोत्सुकाः ।। १४ ।। तांस्तु दृष्ट्वा महोत्पातानस्मरन्गणपं च ते ॥ ततो गणेशः संप्राप्तो हतवात्राक्षसांच तान् ।। १५ ।। विमानस्था नगः सर्वे स्तुत्वा तं गणनायकम् ।। प्रासादे स्थापयामाससुर्गणेशं दुःखनाशकम् ॥ १६ ॥ ततस्तुतो गणेशस्तु मया स्थातव्यमत्र हि ।। इत्युक्त्वा स्वर्गगान्तान्वै तत्रैवांतर धीयत । ॥ १७ । तत्र कृता महापूजा कोटयर्कस्य महात्मनः ॥ खंड पूर्वद्विजेः सर्वेवैष्णवैश्च महात्मभिः ॥ १८॥ ततस्तस्मि न्महातीर्थे हनुमान भुवि संस्थितः ॥ पुरा वै ब्राह्मणः कश्चि द्वेदशति विश्रुतः ॥ १९ ॥ तीर्थयात्रा प्रकुर्वाणः प्राप्तः सारस्वतं तटम् ॥ तस्मिन्सरस्वतीतीरं दुर्गामंबां प्रपूज्य च ॥ ।।२०।। ततो लोकमुखाच्छ्रुत्वा कोट्य के तीर्थमुत्तमम् ॥ तत्र
हे शौनक ! उस उपरान्त किसी समयमें उस तीर्थ में अनेक मनुष्य आये ॥ १२ ॥ मनुष्योंने स्नान करके कोट्यकेशको नमस्कार किया । उस बखत उनको लेने के वास्ते विमानसमूह प्राप्तभया ।। १३ ।। वह आश्चर्य देखके राक्षस विमानोंको खेंचनेवाले प्राप्तभये - दश दिशाओं में दौडने लगे ॥ १४ ॥ तब राक्षसोंको देखके वे मानव सब गणपतिका स्मरण करतेभये । उस बखत गणपति प्रकट होयके राक्षसोंको मारतेभये ॥ ५१ ॥ विमानों में बैठे हुए मानव सच उन गणपतिका स्तवन करके प्रासाद ( मंदिर ) में स्थापन करतेभये ॥ १६ ॥ तव गणपति स्वर्ग में जानेवाले मानवों को इस क्षेत्र में मैं रहूंगा ऐसा कहके गुप्तभये ॥ १७ ॥ वहां खंडशब्द है पहिले जिनको ऐसे जो खडायत ब्राह्मण और वैष्णव बनियोंने कोट्यर्ककी महापूजा किया ॥१८॥ उस उपरांत उस महातीर्थ में हनुमान्जी रहते भये । पहिले एक चेदशर्म्मा नामकरके ब्राह्मण था ॥ १९ ॥ वह तीर्थ यात्रा करते करते सरस्वती नदीके तट ऊपर आया वहां दुर्गादेवीकी पूजा करके ॥ २० ॥ पीछे लोगोंके मुखसे कोट्यर्क तीर्थ की महिमा श्रवणकरके जो बारह योजन दूर है वहां जाने
भाषाटीकासमत ।
गंतुं मनचक्रे दूरं द्वादशयोजनम् ।।२१।। पादयोनीस्ति मे मे शक्तिः किं कर्तव्यमतः परम् ॥ या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।।२२।। सा देवी मन्मनोवाच्छापूर्ति कर्तुमिहार्हति ॥ इत्थं तेन स्मृता देवी हनुमंतमचिंतयत् ॥ २३॥ स्मृतमात्रो हि हनुमान् प्रणम्य चाग्रतः स्थितः ॥ ।। देव्युवाच ।। हनुमच्छृणु मद्राक्यं वेदशर्मा द्विजोत्तमः ॥ २४ ॥ पादयोवलहीनश्च तं गृहीत्वा द्विजोत्तमम् ॥ कोट्यर्कतीर्थ संप्राप्य त्वया स्थातव्यमेव च ॥ २५ ॥ तत्र त्वां पूजयिष्यंति तेषां कार्य भविष्यति ॥ इत्युक्त्वा सा भगवती तत्रैवांतरधीत ।। ॥ २६ ॥ ततो हनुमान् परमानुभावो विप्रं गृहीत्वा परमप्रहृष्टः ।। क्षणेन वं प्राप्य ततो हि वेगात्कोट्यर्कतीर्थ सहसा जगाम ॥ २७ ॥ वेदशर्मा तु संप्राप्य नत्वा कोटयर्कमद्भुतम् ॥ हनुमंतं प्रणम्याथ प्रतिष्ठामकरोद्विजः ।।२८।। तत्रैव स्थापितः शंभुः कपालेश्वरसंज्ञकः ॥ विष्णुना यत्र शंभुव मुक्तो ब्रह्मकपालतः ॥ २९ ॥ कपालेशप्रसादेन दीक्षितो नाम
का उत्साह किया ॥२१॥ परंतु पांव में शक्ति नहीं है कैसा करना जो देवी सर्वप्राणि मात्रके बीच में शक्तिरूपसे रहती हैं ।।२२।। वे देवी मेरी मनकी वाञ्छा पूर्ण करनेको • योग्य हैं ऐसा देवीका स्तवन करते देवीने हनुमानको स्मरण किया ॥२३॥ तब हनुमान् नमस्कार करके सामने आयके खडेरहे तब देवी कहती हैं है हनुमान् ! मेरे वचन श्रवणकर वेदशर्मा जो ब्राह्मण है ।।२४।। वह पांवसे वलहीन हैं इसवास्ते उस ब्राह्मणो त्तमको लेके कोट्यर्क तीर्थमें स्थापनकरो। और तुमभी वहां रहो ॥ २६ ॥ उस तीर्थ में जो तुम्हारी पूजा करेंगे उनके कार्य सिद्ध होवेंगे। ऐसा कहके देवी अंतर्धान भई॥ २६ ॥ तब हनुमानजी प्रसन्न होयके वेदशर्मा ब्राह्मणको लेके क्षणमात्रमें कोट्यर्क तीर्थमें आये ॥ २७ ॥ वेदशर्मा वहां तीर्थ में आके कोट्यर्क भगवान्को नमस्कार करके बाद हनुमान्को नमस्कार करके हनुमान्जीकी मूर्तिकी प्रतिष्ठा कियी ॥२८॥ और उसी ठिकाने विष्णुने कपालेश्वर महादेवका स्थापन किया जिस ठिकाने शिव ब्रह्मकपालसे मुक्त भये ।। २९ ।। इसवास्ते कपालेश्वर नाम भया ॥ वो कपालेश्वरके अनु ग्रह दीक्षित नाम करके ब्राह्मण रोगसे मुक्त होयके धनवान् भया और दूसरी कथा
बामणोपनिमाड ।
ब्राह्मणः ।। रोगको पनी जातः कथामन्यां वदामि ते ॥ ।। ३० ।। मृत उवाच ।। पुरा कश्चिद्विजो धीर आसीच्च ब्रह्मवित्तमः ।। स कदाचिज्जगामाथ चमत्कारपुरं द्विजः ।। ॥ ३१ ॥ नागरैत्रां ह्मणेय वेदशास्त्रार्थपरः ॥ नीतिशास्त्रेषु कुशलेराचाराणां प्रवर्तकः ।।३२।। तान्सर्वान्नागरान्नत्वा धीरोवे ब्राह्मणः स्थितः ।। तत्र यात्राविधिं कृत्वा हाटकेशं प्रपूज्यच३३॥ ततस्तोत्रं चकाराथ स धीरो ब्राह्मणोत्तमः ॥ हाटकेश महादेव प्रपन्नभयभंजन ॥ ३४ ॥ दारिद्र्येणाभिभूतोऽस्मि निद्रां नैव लभे निशि ॥ पुत्रादिभिः पीडितश्च क्षुत्पिपासाकुलैः सदा ।। ॥ ३५ ॥ ॥ अस्माकं ज्ञातिभिः साई विरोधो हि महानभूव ।। विद्यावादेन भो देव बुद्धिर्नष्टा मनीषिणाम् ॥ ३६॥ बुद्धिनाशाक्ततो भ्रष्टा वयं सर्वे महेश्वर ॥ एतस्मात्कारणाद्ब्रह्मंस्त्वामहं शरणं गतः ।। ३७ ॥ सूत उवाच ॥ ॥ एतच्छ्रुत्वा महादेवो भगवान्भक्तवत्सलः ॥ उवाच भोभो ब्रह्मर्षे मत्प्रसादात्सुखंतव ॥ ३८ ॥ कोट्यर्कतीर्थे भवतां समागमो ह्यष्टादशानां हि मया कृतः पुरा ॥ तस्मिन्समाजे मम यज्ञद्देतौ मया ततश्चोक्तमिदं कहता हूं ।।३०।। सूत कहते हैं हे शौनक ! पहले कोई एक धीरकरके ब्राह्मण था सो एक समय में वडनगर करके ग्राम हैं वहां आया ॥३१॥ वेदशास्त्र के जाननेवालों नीति में कुशल आचार संपन्न ऐसे नागर ब्राह्मणोंसे वह नगर व्याप्त है ।॥ ३२ ॥ और धीर ब्राह्मण सब नागरोंको नमस्कार करके यात्राकी विधिकरके हाटकेश्वर महादेवकी पूजा करके ॥ ३३ ॥ स्तुति करता है । हे हाटकेश्वर ! तुम शरणागतके भय दूरं करनेवाले हो ॥ ३४ ॥ मैं दारिद्र्यसे व्याप्तभयाहूं रात्रीमें निद्रा नहीं है । क्षुधातुर पुत्रादिकों से मैं सदा पीडित हूं ॥ ३५ ॥ और ज्ञातिसे भी बडा विरोध भया है । विद्याविवाद से अच्छे मनुष्यों की बुद्धि नष्ट होती है । ३६ ।। बुद्धिनाशके योगसे हम सब नष्ट हुए हैं इसवास्ते हे भगवन् ! आपके शरणागत हैं ।। ३७ ॥ सूत कहने लगे ऐसा धीर ब्राह्मणका वचन सुनके महादेव कहते भये हे ब्राह्मण ! मेरे अनुग्रह से तुझे सुख होवेगा ॥ ३८ ॥ कोट्यर्क तीर्थमें पहिले तुम अठारह ब्राह्मणोंका समागम मैंने किया और उस सभामें यज्ञकरनेके वास्ते
वचो महत् ॥ ३९ ॥ कोट्यर्कतीर्थे मम हत्या यज्ञः कृतस्तेन विनाशमागता ।। त्वदाज्ञया यज्ञविधिः कृतो महान्प्रस नचित्तेन मया पुरारिणा ॥ ४० ॥ उक्तं मया वसे युक्तो त्रियतां तु यथेप्सितम् ॥ ततो भवतः सर्वेऽपि विचायव स्थिताचिरम् ॥॥४१॥ ततस्ते ब्राह्मणाः सर्वे स्त्रियः प्रष्टुं गृहे गताः ।। ताभिः साई खट्टपटे प्रवर्ते पुनः पुनः ॥ ४२ ॥ ततः सर्वे द्विजा जाता खडायतेति संज्ञया । तस्माद्भवद्वंशजानां खडायतेति नाम च ॥४३॥ अष्टादशानां विप्राणां द्रौद्रौ तु परिचारकौ ॥ वडनगरादानीय दत्तावित्यर्थः ॥ सच्छूद्रों सेवको प्रोक्तौ ह्येकैकस्य द्विजस्य च ॥ ४४ ॥ खडायतास्तु सच्छुद्रा मया प्रोक्ताः पिनाकिना । सच्छूद्राणां च तेषां वै विवादे विधिरुच्यते ॥ ४५ ॥ पौराणिकैर्महामंत्रैः कर्तव्यं सर्वमेव हि ॥ इयान्विशेषस्तु मयैव कथ्यते खडा यतानां द्विजसेवकानाम् ॥ निष्पावखंडैस्तु चरुर्विधेयो ग्रहप्रपूजा हवनं न चैव ॥ ४६ ॥ सुमंगलीकन्यकाया ग्रामे
मैंने वचन कहा ॥ ३९ ॥ हे धीर ब्राह्मण ! कोट्यकतीर्थमं तेरी आज्ञासे मैंने प्रसन्न चित्तसे यज्ञविधि किया उससे मेरी ब्रह्महत्या नाश भई ॥ ४० ॥ पीछे मैने तुमको कहा कि इच्छित वरदान मांगो उस बखत तुम सच विचार करके थोडी बखत वहां बैठे ॥ ४१ ॥ · बाद सब ब्राह्मण अपनी अपनी स्त्रियोंको पूछनेके वास्ते घर गये । स्त्रियों के साथ वारंवार खटपट करनेलगे । परन्तु मांगनेका निश्चय नहीं किया ।॥ ४२ ॥ उस कारणसे खडायते नाम करके ब्राह्मणभये । इस वास्ते तुम्हारे वंश में जो उत्पन्न होवेंगे वे खडायते नाम से विख्यात होवेंगे ॥ ४३ ॥ तुम जो. अठारह ब्राह्मण हो सो तुम्हारे सेवक सच्छूद्र एकएक ब्राह्मणका दो दो बडनगरसे बुलायके देता हूं ऐसा कहके दिये ॥ ४४ ॥ और कहनेलगे कि ये जो तुमको मैंने सच्छूद्र सेवक दिये हैं वे भी खडायते बनिये कहे जाते हैं और खडायते बनियोंमें जो विवाहमें विधि होती है सो कहता हूँ ॥ ४५ ॥ वह बानियोंका सब कर्म पुराणोक्त मन्त्रोंसे करना और इतना विशेष है ॥ ४६ ॥ विवाह चतुर्थी कर्ममें चरु भक्षणकी बखत बालनामक जो धान्य है उसकी दालका चरु बनाना ग्रहशांति
ब्राह्मणोत्पत्तिमात्र्त्तण्ड ।
पर्यटनं न च ॥४७॥ ततस्तत्र विजश्रेष्ट नगरं निर्मितं मया ॥ विश्वकर्मा मयाजतो नगरं तच्च कारयत ॥४८॥ तस्मिन्सुनगरे रम्ये दुःखदारिद्र्यनाशके ।। मया दत्ते द्विजद्राणां तस्मिनेव वस द्विज ॥४९॥ यस्मिन्काले मया विप्र वरो दत्तो द्विजन्मनाम् ॥ तस्मिन्काले त्वया तत्र न श्रुतं वचनं महत् ।।२०।। तस्मात्तत्रैव वस्तव्यं कपालेश्वरसन्निधौ ॥ तत्र ते दुःखदारिद्र्यं सर्वे नश्यति तत्क्षणात् ॥ ५१ ।। इत्युक्त्वा तु महादेवस्तत्रैवांतरधीयत ।। स धीरो ब्राह्मणस्तस्मात्कोट्यर्केशं गतस्तदा ।। ॥ ५२ ।। कोट्यर्कस्य समीपे तु कार्तिक व्रतयोगतः ॥ विष्णुदासादयः सर्वे जग्मुर्वैकुंठमुत्तमम् ॥ ५३ ॥ अत्रैव नीलकं ठाख्यो महादेवश्च संस्थितः ।। ।। शौनक उवाच ॥ ॥ खडायतानां गोत्राणि कथं जातानि तद्वद ॥ ५४ ॥ कति गोत्राणि तान्येव तेषु गोत्रेषु के मताः ! उवाच ॥ ॥ जनकः कृष्णात्रेयश्च कौशिकस्तु तृतीयकः ॥ ॥ ५५ ॥ वसिष्ठश्च भरद्वाजो गार्यो वत्सश्च सप्तमः ॥ एतानि गोत्राणि द्विजर्षभाणां खडायतानां हि कृतानि तेन ॥ ५६ ॥ पूजा हवन करना नहीं सुमंगल कन्याकी घाटडी गांवमें फिराना नहीं । कोई रामेश्वरकी पूजा करतेहैं ॥ ४७ ॥ तदनन्तर हे धीर ब्राह्मण ! उस क्षेत्र में विश्वकर्माको बुलायके मैंने नगर निर्माण किया ॥ ४८ ॥ वह रमणीक दुःख दारिद्रय नाशक नगर मैंने अठारह ब्राह्मणोंको दिया । उसमें वासकरः ॥४९॥ जिस बखत उन ब्राह्मणाको मन वरदान दिया उस समय तुमने मेरा वचन सुना नहीं ।।५०।। इस वास्ते उत कोटचंर्क क्षेत्रमें कपालेश्वर महादेव के समीप निवास करना वहां सब दुःख दारिद्रय तत्काल नाश पावेगा ।॥५१॥ इतना कहके शिव अंतर्धान हुए । धीर ब्राह्मण कोट्य शके समीप गया ॥ ५२ ॥ कोटारकर्जाके नजदीक कार्त्तिकमासके व्रत करनेसे विष्णुदासादिक वैकुंठको जातेभये ॥ ५३ ।। इसी क्षेत्रमें नीलकंठ महादेव स्थित हैं । शौनक पूछनेलगे कि हे सूत । खडायते ब्राह्मणोंके गोत्र कितने हैं नाम क्या है ? सो कहो । सूत बोले हे शौनक ! जनक ९कृष्णात्रेय २ कौशिक ३ वासष्ठ ४ भरद्वाज ५ मार्ग६वत्स ७ यह सात गोत्र खडायते ब्राह्मणोंके शिवने स्थापन किये हैं।॥ ४४-५६॥
कोटयर्कदेवेन तथा शिवेन कपालनाथेन महेश्वरेण ॥ अथ देवीः प्रवक्ष्यामि तेषां चैव यथाक्रमम् ॥ ५७ ॥ पूर्व वाराहि नामा तु द्वितीया तु खरानना । चामुंडा बालगौरी च बंधुदेवी तु पंचमी ॥ ५८ ॥ षष्ठी च सौरभी नाम ह्यात्मच्छंदा हि सप्तमी ॥ वणिजां च प्रवक्ष्यामि गोत्राणि विविधानि च ॥ ॥ ५९ ॥ गुंदानुगोत्रं नांदोलुमिंदियाणु तृतीयकम् ॥ नानु नरसाणु ५ वैश्याणु ६ मेवाणु सप्तमं तथा ॥ ६० ॥ भटस्याणु साचेलाणु सालिस्याणु तथैव हि ॥ कागराणु तथा गोत्रमित्थं तेषां प्रकीर्तितम् ॥ ६३ ॥ देव्यश्च द्वादश प्रोक्तास्तत्राद्या नेषुसंज्ञका ॥ ततो गुणमयी प्रोक्ता नरेश्वरी तृतीयका ।।६२।। तुर्या नित्यानंदिनी तु नरसिंही च पंचमी । पष्टी विश्वेश्वरी प्रोक्ता सप्तमी महिपालिनी ॥ ६३ ॥ भंडोदर्यष्टमी देवी शंकरी नवमी तथा ॥ सुरेश्वरी च कामाक्षी देव्यो ह्येकादशः स्मृताः ।। ६४ ।। द्वादशं च तथा प्रोक्तं गोत्रं कल्याणमेव हि ॥ तथा कल्याणिनीयं वै द्वादशी तु प्रकीर्तिता ॥ ।। ६५ ।। इति तेषां तु गोत्राणि देव्यश्च परिकीर्तिता ।। कोट्य संस्थितिस्तेषां वणिजां च द्विजन्मनाम् ।। ६६ ।।
अब वेत्रेय सात गोत्रोंकी कुलदेवता क्रमसे कहते हैं ॥ ५७ ।। प्रथम बराही १ खरानना २ चामुंडा ३ बालगौरी ४ बंधुदेवी ५ सौरभी ६ आत्मच्छंदा ७ अब खडायते बनियोंके गोत्र कहते हैं ॥ ५८ ॥ ५९ ॥ गुंदाणु गोत्र १ नांदोलु गोत्र २ मिंदियाणु गोत्र ३ नानु गोत्र ४ नरसाणु गोत्र ५ वैश्याणु गोत्र ६ मेर्वाणु गोत्र ७ ॥ ६० ॥ भटस्याणु गोत्र ८ साचेलाणु गोत्र ९ सालिस्याणु गोत्र १० कागराणु, गोत्र ११ कल्याणगोत्र १२ ऐसे बारह गोत्र बानेयोंके कहे ।। ६१ ॥ अब बारह कुलदेवी कहते हैं-नेषुदेवी १ गुणमयी २ नरेश्वरी ३ तुर्या नित्या नंदिनी ४ नरसिंही ५ विश्वेश्वरी ६ महिपालिनी ७ ॥ ६२ ॥ ६३ ।। भंडोदरी ८ शंकरी ९ सुरेश्वरी १० कामाक्षी ११ कल्याणिनी १२ ॥ ६४ ॥ ६५ ।। ऐसे खडायते बनियोंके
खडायतानां सर्वेषां कोट्यको मुक्तिदायकः ।। कपालेशो महादेवः नीलकंटस्तथैव च ॥ ६७ ॥ चर्मक्षेत्र तथा सूर्यक्षेत्रं श्रीनलिनेश्वरम ।। शकलेशं तथा तीर्थ वाल्मीकेराश्रमस्तथा ॥६८॥ यत्र पूर्वे तु गमेण सीता त्यक्ता महात्मना ॥ तस्याः सुती समुत्पन्नौ कुशी लव इति स्मृतौ ॥ ६९ ॥ याभ्यां पूर्व हतं सर्वे श्रीगमस्य बलं महत् ।। अश्वमेधसमारंभे श्रीरामस्य महात्मनः ॥ ७० ॥ गजासुरं यत्र इत्वा गजचर्मधगे हरः ।। चर्मक्षेत्रं तु तजातं यत्र श्रीशंकरेण च ॥ ७१ ॥ गजचर्म धृतं रक्तं तेन श्रीगलितेश्वरः ॥ ७२ ॥ तेनैव रक्तेन तदुद्भवेन नदी तदा रक्तवती बभूव ।। श्रीसाभ्रमत्या सलिलेन मिश्रिता पापामलानां प्रशमं चकार ॥ ७३ ॥ कृते कृतवती नाम त्रेतायां मणिकर्णिका । द्वापरे चंद्रभागा च कलौ साभ्रमती स्मृता ॥ ७४ । कणिकाख्ये महातीर्थे कोटचकें कुलदेवता ॥ ब्रह्मस्थानं च तत्प्रोक्तं खंडाख्यं पुरमीरितम् ॥७३॥ दधीचेराश्रमस्तत्र महापुण्यफलप्रदः ॥ दुग्धेश्वरो महादेवः सप्तश्रोतेश्वरस्तथा ॥७६।। बकदाल्भ्यो ऋषिस्तत्र ह्यश्विनाख्यो बारह गोत्र बाग्द कुलंदवी वर्णन किये ।। ६६ ॥ यह खडायते ब्राह्मण और बनि योकी मुक्ति देनेवाला कोटारक देव हैं और इस कोट्य में कपालेश्वर नीलकंटेश्वर चर्मक्षेत्र सूर्यक्षेत्र श्रीगलितेश्वर शकलेश तीर्थ वाल्मउसका आश्रम यह सच इस क्षेत्र में हैं ।। ६७ ॥ ६८ । जिस क्षेत्र में पहिले रा दुःख दाताका परित्याग किया । पीछे सीताके दो पुत्र कुश, लव जहां उत्पन्न हो जाये ।।६९।। जिन कुशलवाने अश्वमेधके बखत इस जगह रामचंद्रकी सेना बहुत नाश किया ॥ ७० ॥ जिस ठिकाने शिवने गजासुरको मारके गजचर्म अंगमें धारण किया उससे चर्मक्षेत्र भया ॥ ७१ ॥ और चर्म धारण करके उसमेंसे जो रक्त गल्ति भया उससे बडी नदी भई । उसका श्रीसाभ्रमती संगम भया और गलितेश्वर महादेव भये ।॥ ७२ ॥ ।। ७३ ।। साभ्रमतीके युगपरत्वकरके चार नाम हैं । सत्ययुगमें कृतवती त्रेतायुगमें मणिकर्णिका । द्वापर में चंद्रभागा कलियुगमें साश्रमती नाम है ॥ ७४ ॥ कर्णिकारूप जो कोट्यर्क तीर्थ उसमें ब्राह्मणोंके स्थानके और खंडपुर नाम कड़ा ।। ७५ ॥ उसके नजदीक दधीचऋषिका आश्रम है दुग्धेश्वर महादेव और | रूपमाश्रितः । कोट्यरूपंता निधनं गतौ ॥ ॥तीन॥ तदा ब्रह्मा भयान्मुक्तः स्तुत्वोवाच विभुं तदा ॥ कोट्य कैश स्वरूपं ते भुवि संस्थाप्यते मया ॥ चार ॥ साभ्रमत्यास्तटे रम्ये गुर्जरे विषये महत् ॥ तत्र त्वं वस देवेश कृपां कृत्वा ममोपरि ॥ पाँच ॥ कोट्यक इति नाम्ना वै सर्वलोकेषु विश्रुतः श्रीभगवानुवाच ॥ ॥ त्वया तु चिन्तितं कार्यं तत्र सर्वे भविव्यति ॥ छः ॥ साभ्रमत्यास्तटेऽत्रैव सन्निधानं मया कृतम् ।। कोट्यर्क इति नाम्ना त्वं मन्मूर्ति स्थापयादारात् ॥ सात ॥ वेताननां श्वेतभुजां स्वेतमाल्यानुलेपनाम् ।। आद्यस्य तु युगयैव स्वं मूर्तिपरिकल्पय ॥ आठ ॥ पार्षदौ तत्र संस्थाप्यौ सुनन्दनंदनावुभौ ॥ कार्तिक शुद्धपक्षे तु एकादश्यां शुभ दिने ।। ॥ नौ ॥ सूर्यवारे सुनक्षत्रे ह्यहं जातस्तदाब्जज ॥ द्वादश्यां तावुभौ दैत्यो मत्तो निधनमापतुः ।। दस ।। अतः सा द्वादशी श्रेष्ठा वैष्णवी तिथिरुच्यते ।। महोत्सवस्तत्र कार्योमत्पूजा च सुविस्तरात् ॥ ग्यारह ॥ एवं विष्णो र्वचः श्रुत्वा तथैव कृतवान् विधिः ॥ ॥ सूत उवाच ॥ धारण किया वो कोट्यर्करूप देखतेही वे दोनों दैत्य नाश पाये ॥ तीन ॥ उस बखत ब्रह्माभय से मुक्त होयके विष्णुको नमस्कार करके कहनेलगे हो कोट्यर्केश ! यह तुम्हारा स्वरूप पृथ्वीमें मेरे करके स्थापन होता है ॥ चार ॥ गुजरात देशमें साभ्रमतीके तट ऊपर वहां आप कृपाकरके वास करना ॥ पाँच ॥ कोव्यर्क नामसे सब लोकोंमें विख्यात हो । श्रीभगवान् कहनेलगे कि ब्रह्मा ! तुमने जो विचार किया है सो सब होवेगा ।।छः।। साभ्रमतर्क तट ऊपर मैंने अपना अंश रखा है । तुम कोट्यर्क नामसे मेरी मूर्तिका स्थापन करो ॥ सात ॥ श्वेतवर्णका मुखारविंद श्वेत चंदनसे चर्चित ऐसी सत्ययुगकी मूर्तिकी कल्पना करो ॥ आठ ॥ और मेरे द्वार के पास दोनों तरफ नंदसुनंद पार्षदगणको स्थापन करो कार्तिक शुद्ध एकादशी के दिन ॥ नौ ॥ रविवार शुभ नक्षत्र में में प्रकट भयाहूं और द्वादशी के दिन वे मधुकैटभ दोनों दैत्य नाश पाये हैं ॥ दस ॥ इसवास्ते वह द्वादशी वैष्णवी तिथि उत्तम कहते हैं । उस दिन बडा उत्सव और विस्तारसे मेरी पूजा कराना ॥ ग्यारह ॥ ऐसा विष्णुका वचन सुनके ब्रह्माने कोट्यर्केशकी बडी पूजा कियी। सूत कहनेलगे ब्राह्मणोत्सान्तमार्तण्ड । ततः कदाचित्ततीर्थ मानवा समुपागताः ॥ बारह ॥ तैस्तु स्नानं कृतं तत्र कोट्यशो नमस्कृतः ॥ ततो विमानसंघस्तु तान्नेतुं समुपस्थितः ।। तेरह ।। तवा महदाश्वर्य राक्षसाः समुपस्थिताः ॥ ते सर्वे मद्भुता दिग्भ्यो विमानाकर्षणोत्सुकाः ।। चौदह ।। तांस्तु दृष्ट्वा महोत्पातानस्मरन्गणपं च ते ॥ ततो गणेशः संप्राप्तो हतवात्राक्षसांच तान् ।। पंद्रह ।। विमानस्था नगः सर्वे स्तुत्वा तं गणनायकम् ।। प्रासादे स्थापयामाससुर्गणेशं दुःखनाशकम् ॥ सोलह ॥ ततस्तुतो गणेशस्तु मया स्थातव्यमत्र हि ।। इत्युक्त्वा स्वर्गगान्तान्वै तत्रैवांतर धीयत । ॥ सत्रह । तत्र कृता महापूजा कोटयर्कस्य महात्मनः ॥ खंड पूर्वद्विजेः सर्वेवैष्णवैश्च महात्मभिः ॥ अट्ठारह॥ ततस्तस्मि न्महातीर्थे हनुमान भुवि संस्थितः ॥ पुरा वै ब्राह्मणः कश्चि द्वेदशति विश्रुतः ॥ उन्नीस ॥ तीर्थयात्रा प्रकुर्वाणः प्राप्तः सारस्वतं तटम् ॥ तस्मिन्सरस्वतीतीरं दुर्गामंबां प्रपूज्य च ॥ ।।बीस।। ततो लोकमुखाच्छ्रुत्वा कोट्य के तीर्थमुत्तमम् ॥ तत्र हे शौनक ! उस उपरान्त किसी समयमें उस तीर्थ में अनेक मनुष्य आये ॥ बारह ॥ मनुष्योंने स्नान करके कोट्यकेशको नमस्कार किया । उस बखत उनको लेने के वास्ते विमानसमूह प्राप्तभया ।। तेरह ।। वह आश्चर्य देखके राक्षस विमानोंको खेंचनेवाले प्राप्तभये - दश दिशाओं में दौडने लगे ॥ चौदह ॥ तब राक्षसोंको देखके वे मानव सब गणपतिका स्मरण करतेभये । उस बखत गणपति प्रकट होयके राक्षसोंको मारतेभये ॥ इक्यावन ॥ विमानों में बैठे हुए मानव सच उन गणपतिका स्तवन करके प्रासाद में स्थापन करतेभये ॥ सोलह ॥ तव गणपति स्वर्ग में जानेवाले मानवों को इस क्षेत्र में मैं रहूंगा ऐसा कहके गुप्तभये ॥ सत्रह ॥ वहां खंडशब्द है पहिले जिनको ऐसे जो खडायत ब्राह्मण और वैष्णव बनियोंने कोट्यर्ककी महापूजा किया ॥अट्ठारह॥ उस उपरांत उस महातीर्थ में हनुमान्जी रहते भये । पहिले एक चेदशर्म्मा नामकरके ब्राह्मण था ॥ उन्नीस ॥ वह तीर्थ यात्रा करते करते सरस्वती नदीके तट ऊपर आया वहां दुर्गादेवीकी पूजा करके ॥ बीस ॥ पीछे लोगोंके मुखसे कोट्यर्क तीर्थ की महिमा श्रवणकरके जो बारह योजन दूर है वहां जाने भाषाटीकासमत । गंतुं मनचक्रे दूरं द्वादशयोजनम् ।।इक्कीस।। पादयोनीस्ति मे मे शक्तिः किं कर्तव्यमतः परम् ॥ या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता ।।बाईस।। सा देवी मन्मनोवाच्छापूर्ति कर्तुमिहार्हति ॥ इत्थं तेन स्मृता देवी हनुमंतमचिंतयत् ॥ तेईस॥ स्मृतमात्रो हि हनुमान् प्रणम्य चाग्रतः स्थितः ॥ ।। देव्युवाच ।। हनुमच्छृणु मद्राक्यं वेदशर्मा द्विजोत्तमः ॥ चौबीस ॥ पादयोवलहीनश्च तं गृहीत्वा द्विजोत्तमम् ॥ कोट्यर्कतीर्थ संप्राप्य त्वया स्थातव्यमेव च ॥ पच्चीस ॥ तत्र त्वां पूजयिष्यंति तेषां कार्य भविष्यति ॥ इत्युक्त्वा सा भगवती तत्रैवांतरधीत ।। ॥ छब्बीस ॥ ततो हनुमान् परमानुभावो विप्रं गृहीत्वा परमप्रहृष्टः ।। क्षणेन वं प्राप्य ततो हि वेगात्कोट्यर्कतीर्थ सहसा जगाम ॥ सत्ताईस ॥ वेदशर्मा तु संप्राप्य नत्वा कोटयर्कमद्भुतम् ॥ हनुमंतं प्रणम्याथ प्रतिष्ठामकरोद्विजः ।।अट्ठाईस।। तत्रैव स्थापितः शंभुः कपालेश्वरसंज्ञकः ॥ विष्णुना यत्र शंभुव मुक्तो ब्रह्मकपालतः ॥ उनतीस ॥ कपालेशप्रसादेन दीक्षितो नाम का उत्साह किया ॥इक्कीस॥ परंतु पांव में शक्ति नहीं है कैसा करना जो देवी सर्वप्राणि मात्रके बीच में शक्तिरूपसे रहती हैं ।।बाईस।। वे देवी मेरी मनकी वाञ्छा पूर्ण करनेको • योग्य हैं ऐसा देवीका स्तवन करते देवीने हनुमानको स्मरण किया ॥तेईस॥ तब हनुमान् नमस्कार करके सामने आयके खडेरहे तब देवी कहती हैं है हनुमान् ! मेरे वचन श्रवणकर वेदशर्मा जो ब्राह्मण है ।।चौबीस।। वह पांवसे वलहीन हैं इसवास्ते उस ब्राह्मणो त्तमको लेके कोट्यर्क तीर्थमें स्थापनकरो। और तुमभी वहां रहो ॥ छब्बीस ॥ उस तीर्थ में जो तुम्हारी पूजा करेंगे उनके कार्य सिद्ध होवेंगे। ऐसा कहके देवी अंतर्धान भई॥ छब्बीस ॥ तब हनुमानजी प्रसन्न होयके वेदशर्मा ब्राह्मणको लेके क्षणमात्रमें कोट्यर्क तीर्थमें आये ॥ सत्ताईस ॥ वेदशर्मा वहां तीर्थ में आके कोट्यर्क भगवान्को नमस्कार करके बाद हनुमान्को नमस्कार करके हनुमान्जीकी मूर्तिकी प्रतिष्ठा कियी ॥अट्ठाईस॥ और उसी ठिकाने विष्णुने कपालेश्वर महादेवका स्थापन किया जिस ठिकाने शिव ब्रह्मकपालसे मुक्त भये ।। उनतीस ।। इसवास्ते कपालेश्वर नाम भया ॥ वो कपालेश्वरके अनु ग्रह दीक्षित नाम करके ब्राह्मण रोगसे मुक्त होयके धनवान् भया और दूसरी कथा बामणोपनिमाड । ब्राह्मणः ।। रोगको पनी जातः कथामन्यां वदामि ते ॥ ।। तीस ।। मृत उवाच ।। पुरा कश्चिद्विजो धीर आसीच्च ब्रह्मवित्तमः ।। स कदाचिज्जगामाथ चमत्कारपुरं द्विजः ।। ॥ इकतीस ॥ नागरैत्रां ह्मणेय वेदशास्त्रार्थपरः ॥ नीतिशास्त्रेषु कुशलेराचाराणां प्रवर्तकः ।।बत्तीस।। तान्सर्वान्नागरान्नत्वा धीरोवे ब्राह्मणः स्थितः ।। तत्र यात्राविधिं कृत्वा हाटकेशं प्रपूज्यचतैंतीस॥ ततस्तोत्रं चकाराथ स धीरो ब्राह्मणोत्तमः ॥ हाटकेश महादेव प्रपन्नभयभंजन ॥ चौंतीस ॥ दारिद्र्येणाभिभूतोऽस्मि निद्रां नैव लभे निशि ॥ पुत्रादिभिः पीडितश्च क्षुत्पिपासाकुलैः सदा ।। ॥ पैंतीस ॥ ॥ अस्माकं ज्ञातिभिः साई विरोधो हि महानभूव ।। विद्यावादेन भो देव बुद्धिर्नष्टा मनीषिणाम् ॥ छत्तीस॥ बुद्धिनाशाक्ततो भ्रष्टा वयं सर्वे महेश्वर ॥ एतस्मात्कारणाद्ब्रह्मंस्त्वामहं शरणं गतः ।। सैंतीस ॥ सूत उवाच ॥ ॥ एतच्छ्रुत्वा महादेवो भगवान्भक्तवत्सलः ॥ उवाच भोभो ब्रह्मर्षे मत्प्रसादात्सुखंतव ॥ अड़तीस ॥ कोट्यर्कतीर्थे भवतां समागमो ह्यष्टादशानां हि मया कृतः पुरा ॥ तस्मिन्समाजे मम यज्ञद्देतौ मया ततश्चोक्तमिदं कहता हूं ।।तीस।। सूत कहते हैं हे शौनक ! पहले कोई एक धीरकरके ब्राह्मण था सो एक समय में वडनगर करके ग्राम हैं वहां आया ॥इकतीस॥ वेदशास्त्र के जाननेवालों नीति में कुशल आचार संपन्न ऐसे नागर ब्राह्मणोंसे वह नगर व्याप्त है ।॥ बत्तीस ॥ और धीर ब्राह्मण सब नागरोंको नमस्कार करके यात्राकी विधिकरके हाटकेश्वर महादेवकी पूजा करके ॥ तैंतीस ॥ स्तुति करता है । हे हाटकेश्वर ! तुम शरणागतके भय दूरं करनेवाले हो ॥ चौंतीस ॥ मैं दारिद्र्यसे व्याप्तभयाहूं रात्रीमें निद्रा नहीं है । क्षुधातुर पुत्रादिकों से मैं सदा पीडित हूं ॥ पैंतीस ॥ और ज्ञातिसे भी बडा विरोध भया है । विद्याविवाद से अच्छे मनुष्यों की बुद्धि नष्ट होती है । छत्तीस ।। बुद्धिनाशके योगसे हम सब नष्ट हुए हैं इसवास्ते हे भगवन् ! आपके शरणागत हैं ।। सैंतीस ॥ सूत कहने लगे ऐसा धीर ब्राह्मणका वचन सुनके महादेव कहते भये हे ब्राह्मण ! मेरे अनुग्रह से तुझे सुख होवेगा ॥ अड़तीस ॥ कोट्यर्क तीर्थमें पहिले तुम अठारह ब्राह्मणोंका समागम मैंने किया और उस सभामें यज्ञकरनेके वास्ते वचो महत् ॥ उनतालीस ॥ कोट्यर्कतीर्थे मम हत्या यज्ञः कृतस्तेन विनाशमागता ।। त्वदाज्ञया यज्ञविधिः कृतो महान्प्रस नचित्तेन मया पुरारिणा ॥ चालीस ॥ उक्तं मया वसे युक्तो त्रियतां तु यथेप्सितम् ॥ ततो भवतः सर्वेऽपि विचायव स्थिताचिरम् ॥॥इकतालीस॥ ततस्ते ब्राह्मणाः सर्वे स्त्रियः प्रष्टुं गृहे गताः ।। ताभिः साई खट्टपटे प्रवर्ते पुनः पुनः ॥ बयालीस ॥ ततः सर्वे द्विजा जाता खडायतेति संज्ञया । तस्माद्भवद्वंशजानां खडायतेति नाम च ॥तैंतालीस॥ अष्टादशानां विप्राणां द्रौद्रौ तु परिचारकौ ॥ वडनगरादानीय दत्तावित्यर्थः ॥ सच्छूद्रों सेवको प्रोक्तौ ह्येकैकस्य द्विजस्य च ॥ चौंतालीस ॥ खडायतास्तु सच्छुद्रा मया प्रोक्ताः पिनाकिना । सच्छूद्राणां च तेषां वै विवादे विधिरुच्यते ॥ पैंतालीस ॥ पौराणिकैर्महामंत्रैः कर्तव्यं सर्वमेव हि ॥ इयान्विशेषस्तु मयैव कथ्यते खडा यतानां द्विजसेवकानाम् ॥ निष्पावखंडैस्तु चरुर्विधेयो ग्रहप्रपूजा हवनं न चैव ॥ छियालीस ॥ सुमंगलीकन्यकाया ग्रामे मैंने वचन कहा ॥ उनतालीस ॥ हे धीर ब्राह्मण ! कोट्यकतीर्थमं तेरी आज्ञासे मैंने प्रसन्न चित्तसे यज्ञविधि किया उससे मेरी ब्रह्महत्या नाश भई ॥ चालीस ॥ पीछे मैने तुमको कहा कि इच्छित वरदान मांगो उस बखत तुम सच विचार करके थोडी बखत वहां बैठे ॥ इकतालीस ॥ · बाद सब ब्राह्मण अपनी अपनी स्त्रियोंको पूछनेके वास्ते घर गये । स्त्रियों के साथ वारंवार खटपट करनेलगे । परन्तु मांगनेका निश्चय नहीं किया ।॥ बयालीस ॥ उस कारणसे खडायते नाम करके ब्राह्मणभये । इस वास्ते तुम्हारे वंश में जो उत्पन्न होवेंगे वे खडायते नाम से विख्यात होवेंगे ॥ तैंतालीस ॥ तुम जो. अठारह ब्राह्मण हो सो तुम्हारे सेवक सच्छूद्र एकएक ब्राह्मणका दो दो बडनगरसे बुलायके देता हूं ऐसा कहके दिये ॥ चौंतालीस ॥ और कहनेलगे कि ये जो तुमको मैंने सच्छूद्र सेवक दिये हैं वे भी खडायते बनिये कहे जाते हैं और खडायते बनियोंमें जो विवाहमें विधि होती है सो कहता हूँ ॥ पैंतालीस ॥ वह बानियोंका सब कर्म पुराणोक्त मन्त्रोंसे करना और इतना विशेष है ॥ छियालीस ॥ विवाह चतुर्थी कर्ममें चरु भक्षणकी बखत बालनामक जो धान्य है उसकी दालका चरु बनाना ग्रहशांति ब्राह्मणोत्पत्तिमात्र्त्तण्ड । पर्यटनं न च ॥सैंतालीस॥ ततस्तत्र विजश्रेष्ट नगरं निर्मितं मया ॥ विश्वकर्मा मयाजतो नगरं तच्च कारयत ॥अड़तालीस॥ तस्मिन्सुनगरे रम्ये दुःखदारिद्र्यनाशके ।। मया दत्ते द्विजद्राणां तस्मिनेव वस द्विज ॥उनचास॥ यस्मिन्काले मया विप्र वरो दत्तो द्विजन्मनाम् ॥ तस्मिन्काले त्वया तत्र न श्रुतं वचनं महत् ।।बीस।। तस्मात्तत्रैव वस्तव्यं कपालेश्वरसन्निधौ ॥ तत्र ते दुःखदारिद्र्यं सर्वे नश्यति तत्क्षणात् ॥ इक्यावन ।। इत्युक्त्वा तु महादेवस्तत्रैवांतरधीयत ।। स धीरो ब्राह्मणस्तस्मात्कोट्यर्केशं गतस्तदा ।। ॥ बावन ।। कोट्यर्कस्य समीपे तु कार्तिक व्रतयोगतः ॥ विष्णुदासादयः सर्वे जग्मुर्वैकुंठमुत्तमम् ॥ तिरेपन ॥ अत्रैव नीलकं ठाख्यो महादेवश्च संस्थितः ।। ।। शौनक उवाच ॥ ॥ खडायतानां गोत्राणि कथं जातानि तद्वद ॥ चौवन ॥ कति गोत्राणि तान्येव तेषु गोत्रेषु के मताः ! उवाच ॥ ॥ जनकः कृष्णात्रेयश्च कौशिकस्तु तृतीयकः ॥ ॥ पचपन ॥ वसिष्ठश्च भरद्वाजो गार्यो वत्सश्च सप्तमः ॥ एतानि गोत्राणि द्विजर्षभाणां खडायतानां हि कृतानि तेन ॥ छप्पन ॥ पूजा हवन करना नहीं सुमंगल कन्याकी घाटडी गांवमें फिराना नहीं । कोई रामेश्वरकी पूजा करतेहैं ॥ सैंतालीस ॥ तदनन्तर हे धीर ब्राह्मण ! उस क्षेत्र में विश्वकर्माको बुलायके मैंने नगर निर्माण किया ॥ अड़तालीस ॥ वह रमणीक दुःख दारिद्रय नाशक नगर मैंने अठारह ब्राह्मणोंको दिया । उसमें वासकरः ॥उनचास॥ जिस बखत उन ब्राह्मणाको मन वरदान दिया उस समय तुमने मेरा वचन सुना नहीं ।।पचास।। इस वास्ते उत कोटचंर्क क्षेत्रमें कपालेश्वर महादेव के समीप निवास करना वहां सब दुःख दारिद्रय तत्काल नाश पावेगा ।॥इक्यावन॥ इतना कहके शिव अंतर्धान हुए । धीर ब्राह्मण कोट्य शके समीप गया ॥ बावन ॥ कोटारकर्जाके नजदीक कार्त्तिकमासके व्रत करनेसे विष्णुदासादिक वैकुंठको जातेभये ॥ तिरेपन ।। इसी क्षेत्रमें नीलकंठ महादेव स्थित हैं । शौनक पूछनेलगे कि हे सूत । खडायते ब्राह्मणोंके गोत्र कितने हैं नाम क्या है ? सो कहो । सूत बोले हे शौनक ! जनक नौकृष्णात्रेय दो कौशिक तीन वासष्ठ चार भरद्वाज पाँच मार्गछःवत्स सात यह सात गोत्र खडायते ब्राह्मणोंके शिवने स्थापन किये हैं।॥ चौंतालीस-छप्पन॥ कोटयर्कदेवेन तथा शिवेन कपालनाथेन महेश्वरेण ॥ अथ देवीः प्रवक्ष्यामि तेषां चैव यथाक्रमम् ॥ सत्तावन ॥ पूर्व वाराहि नामा तु द्वितीया तु खरानना । चामुंडा बालगौरी च बंधुदेवी तु पंचमी ॥ अट्ठावन ॥ षष्ठी च सौरभी नाम ह्यात्मच्छंदा हि सप्तमी ॥ वणिजां च प्रवक्ष्यामि गोत्राणि विविधानि च ॥ ॥ उनसठ ॥ गुंदानुगोत्रं नांदोलुमिंदियाणु तृतीयकम् ॥ नानु नरसाणु पाँच वैश्याणु छः मेवाणु सप्तमं तथा ॥ साठ ॥ भटस्याणु साचेलाणु सालिस्याणु तथैव हि ॥ कागराणु तथा गोत्रमित्थं तेषां प्रकीर्तितम् ॥ तिरेसठ ॥ देव्यश्च द्वादश प्रोक्तास्तत्राद्या नेषुसंज्ञका ॥ ततो गुणमयी प्रोक्ता नरेश्वरी तृतीयका ।।बासठ।। तुर्या नित्यानंदिनी तु नरसिंही च पंचमी । पष्टी विश्वेश्वरी प्रोक्ता सप्तमी महिपालिनी ॥ तिरेसठ ॥ भंडोदर्यष्टमी देवी शंकरी नवमी तथा ॥ सुरेश्वरी च कामाक्षी देव्यो ह्येकादशः स्मृताः ।। चौंसठ ।। द्वादशं च तथा प्रोक्तं गोत्रं कल्याणमेव हि ॥ तथा कल्याणिनीयं वै द्वादशी तु प्रकीर्तिता ॥ ।। पैंसठ ।। इति तेषां तु गोत्राणि देव्यश्च परिकीर्तिता ।। कोट्य संस्थितिस्तेषां वणिजां च द्विजन्मनाम् ।। छयासठ ।। अब वेत्रेय सात गोत्रोंकी कुलदेवता क्रमसे कहते हैं ॥ सत्तावन ।। प्रथम बराही एक खरानना दो चामुंडा तीन बालगौरी चार बंधुदेवी पाँच सौरभी छः आत्मच्छंदा सात अब खडायते बनियोंके गोत्र कहते हैं ॥ अट्ठावन ॥ उनसठ ॥ गुंदाणु गोत्र एक नांदोलु गोत्र दो मिंदियाणु गोत्र तीन नानु गोत्र चार नरसाणु गोत्र पाँच वैश्याणु गोत्र छः मेर्वाणु गोत्र सात ॥ साठ ॥ भटस्याणु गोत्र आठ साचेलाणु गोत्र नौ सालिस्याणु गोत्र दस कागराणु, गोत्र ग्यारह कल्याणगोत्र बारह ऐसे बारह गोत्र बानेयोंके कहे ।। इकसठ ॥ अब बारह कुलदेवी कहते हैं-नेषुदेवी एक गुणमयी दो नरेश्वरी तीन तुर्या नित्या नंदिनी चार नरसिंही पाँच विश्वेश्वरी छः महिपालिनी सात ॥ बासठ ॥ तिरेसठ ।। भंडोदरी आठ शंकरी नौ सुरेश्वरी दस कामाक्षी ग्यारह कल्याणिनी बारह ॥ चौंसठ ॥ पैंसठ ।। ऐसे खडायते बनियोंके खडायतानां सर्वेषां कोट्यको मुक्तिदायकः ।। कपालेशो महादेवः नीलकंटस्तथैव च ॥ सरसठ ॥ चर्मक्षेत्र तथा सूर्यक्षेत्रं श्रीनलिनेश्वरम ।। शकलेशं तथा तीर्थ वाल्मीकेराश्रमस्तथा ॥अड़सठ॥ यत्र पूर्वे तु गमेण सीता त्यक्ता महात्मना ॥ तस्याः सुती समुत्पन्नौ कुशी लव इति स्मृतौ ॥ उनहत्तर ॥ याभ्यां पूर्व हतं सर्वे श्रीगमस्य बलं महत् ।। अश्वमेधसमारंभे श्रीरामस्य महात्मनः ॥ सत्तर ॥ गजासुरं यत्र इत्वा गजचर्मधगे हरः ।। चर्मक्षेत्रं तु तजातं यत्र श्रीशंकरेण च ॥ इकहत्तर ॥ गजचर्म धृतं रक्तं तेन श्रीगलितेश्वरः ॥ बहत्तर ॥ तेनैव रक्तेन तदुद्भवेन नदी तदा रक्तवती बभूव ।। श्रीसाभ्रमत्या सलिलेन मिश्रिता पापामलानां प्रशमं चकार ॥ तिहत्तर ॥ कृते कृतवती नाम त्रेतायां मणिकर्णिका । द्वापरे चंद्रभागा च कलौ साभ्रमती स्मृता ॥ चौहत्तर । कणिकाख्ये महातीर्थे कोटचकें कुलदेवता ॥ ब्रह्मस्थानं च तत्प्रोक्तं खंडाख्यं पुरमीरितम् ॥तिहत्तर॥ दधीचेराश्रमस्तत्र महापुण्यफलप्रदः ॥ दुग्धेश्वरो महादेवः सप्तश्रोतेश्वरस्तथा ॥छिहत्तर।। बकदाल्भ्यो ऋषिस्तत्र ह्यश्विनाख्यो बारह गोत्र बाग्द कुलंदवी वर्णन किये ।। छयासठ ॥ यह खडायते ब्राह्मण और बनि योकी मुक्ति देनेवाला कोटारक देव हैं और इस कोट्य में कपालेश्वर नीलकंटेश्वर चर्मक्षेत्र सूर्यक्षेत्र श्रीगलितेश्वर शकलेश तीर्थ वाल्मउसका आश्रम यह सच इस क्षेत्र में हैं ।। सरसठ ॥ अड़सठ । जिस क्षेत्र में पहिले रा दुःख दाताका परित्याग किया । पीछे सीताके दो पुत्र कुश, लव जहां उत्पन्न हो जाये ।।उनहत्तर।। जिन कुशलवाने अश्वमेधके बखत इस जगह रामचंद्रकी सेना बहुत नाश किया ॥ सत्तर ॥ जिस ठिकाने शिवने गजासुरको मारके गजचर्म अंगमें धारण किया उससे चर्मक्षेत्र भया ॥ इकहत्तर ॥ और चर्म धारण करके उसमेंसे जो रक्त गल्ति भया उससे बडी नदी भई । उसका श्रीसाभ्रमती संगम भया और गलितेश्वर महादेव भये ।॥ बहत्तर ॥ ।। तिहत्तर ।। साभ्रमतीके युगपरत्वकरके चार नाम हैं । सत्ययुगमें कृतवती त्रेतायुगमें मणिकर्णिका । द्वापर में चंद्रभागा कलियुगमें साश्रमती नाम है ॥ चौहत्तर ॥ कर्णिकारूप जो कोट्यर्क तीर्थ उसमें ब्राह्मणोंके स्थानके और खंडपुर नाम कड़ा ।। पचहत्तर ॥ उसके नजदीक दधीचऋषिका आश्रम है दुग्धेश्वर महादेव और |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साल 2018 के सियोल शांति पुरस्कार से नवाजा गया है। यह ऐलान द सियोल पीस प्राइज कल्चरल फाउंडेशन ने किया, जिसके अध्यक्ष नॉन ई-ह्यॉक हैं। 68 वर्षीय पीएम मोदी को यह सम्मान भारत और अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं के विकास, 'मोदीनॉमिक्स' के जरिए अमीर-गरीब के बीच की सामाजिक व आर्थिक असमानता कम करने, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में सुधार लाने, वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास में वृद्धि करने, भारतवासियों के जीवन स्तर में परिवर्तन करने और लोकतंत्र का विकास करने के लिए दिया गया है।
शांति पुरस्कार से जुड़ी चयन समिति के अध्यक्ष चो चुंग हो के मुताबिक, सियोल शांति पुरस्कार के लिए दुनिया भर के तकरीबन 100 लोगों के बीच टक्कर थी। सूची में कई देशों के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष, राजनेता, कारोबारी, धार्मिक नेता, शोधार्थी, पत्रकार, कलाकार, एथलीट्स और अंतर्राष्ट्रीय संगठन तक शामिल थे। उन्होंने आगे बताया कि शांति पुरस्कार से जुड़ी चयन समिति में 12 लोग शामिल थे, जिनके लिए विजेता का नाम तय करना बेहद कठिन रहा।
समिति ने भारतीय पीएम को इस पुरस्कार के लिए 'परफेक्ट कैंडिडेट' बताया। वह यह पुरस्कार जीतने वाली 14वीं शख्सियत हैं। समिति ने न सिर्फ पीएम को पुरस्कार से सम्मानित किया, बल्कि सरकार और तंत्र की सफाई व उसे सुचारू ढंग से चलाने के लिए मोदी द्वारा शुरू किए गए अभियानों की सराहना भी की, जिसमें नोटबंदी भी शामिल है।
पीएम मोदी को इस सम्मान के साथ पुरस्कार राशि के रूप में तकरीबन एक करोड़ छियालीस लाख तेंतालीस हजार रुपए (200,000 डॉलर्स) दिए जांएंगे जाएगी। उनसे पहले यह सम्मान पाने वालों में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष जुआन एंटोनियो समरान्च, अमेरिकी सेक्रेट्री ऑफ स्टेट प्रैट शुल्ट्ज, डॉक्टर्स विदआउट बॉर्डर्स (गैर सरकारी संस्था), नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डेनिस मुक्वेग और संयुक्त राष्ट्र सचिव- जनरल कोफी अन्नान और बान की मून शामिल हैं। इससे पहले, तीन अक्टूबर को उन्हें यूएन ने पर्यावरण क्षेत्र के सर्वोच्च पुरस्कार- चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्ड दिया था।
| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साल दो हज़ार अट्ठारह के सियोल शांति पुरस्कार से नवाजा गया है। यह ऐलान द सियोल पीस प्राइज कल्चरल फाउंडेशन ने किया, जिसके अध्यक्ष नॉन ई-ह्यॉक हैं। अड़सठ वर्षीय पीएम मोदी को यह सम्मान भारत और अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं के विकास, 'मोदीनॉमिक्स' के जरिए अमीर-गरीब के बीच की सामाजिक व आर्थिक असमानता कम करने, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में सुधार लाने, वैश्विक स्तर पर आर्थिक विकास में वृद्धि करने, भारतवासियों के जीवन स्तर में परिवर्तन करने और लोकतंत्र का विकास करने के लिए दिया गया है। शांति पुरस्कार से जुड़ी चयन समिति के अध्यक्ष चो चुंग हो के मुताबिक, सियोल शांति पुरस्कार के लिए दुनिया भर के तकरीबन एक सौ लोगों के बीच टक्कर थी। सूची में कई देशों के पूर्व राष्ट्राध्यक्ष, राजनेता, कारोबारी, धार्मिक नेता, शोधार्थी, पत्रकार, कलाकार, एथलीट्स और अंतर्राष्ट्रीय संगठन तक शामिल थे। उन्होंने आगे बताया कि शांति पुरस्कार से जुड़ी चयन समिति में बारह लोग शामिल थे, जिनके लिए विजेता का नाम तय करना बेहद कठिन रहा। समिति ने भारतीय पीएम को इस पुरस्कार के लिए 'परफेक्ट कैंडिडेट' बताया। वह यह पुरस्कार जीतने वाली चौदहवीं शख्सियत हैं। समिति ने न सिर्फ पीएम को पुरस्कार से सम्मानित किया, बल्कि सरकार और तंत्र की सफाई व उसे सुचारू ढंग से चलाने के लिए मोदी द्वारा शुरू किए गए अभियानों की सराहना भी की, जिसमें नोटबंदी भी शामिल है। पीएम मोदी को इस सम्मान के साथ पुरस्कार राशि के रूप में तकरीबन एक करोड़ छियालीस लाख तेंतालीस हजार रुपए दिए जांएंगे जाएगी। उनसे पहले यह सम्मान पाने वालों में अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष जुआन एंटोनियो समरान्च, अमेरिकी सेक्रेट्री ऑफ स्टेट प्रैट शुल्ट्ज, डॉक्टर्स विदआउट बॉर्डर्स , नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डेनिस मुक्वेग और संयुक्त राष्ट्र सचिव- जनरल कोफी अन्नान और बान की मून शामिल हैं। इससे पहले, तीन अक्टूबर को उन्हें यूएन ने पर्यावरण क्षेत्र के सर्वोच्च पुरस्कार- चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्ड दिया था। |
दलीप ट्रॉफी 2023 के दूसरे दिन टीमों के बीच रोचक मुकाबले देखने को मिले। नॉर्थ जोन ने नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ पहली पारी में शानदार बल्लेबाजी करते हुए पहाड़ सा स्कोर खड़ा कर दिया। सेंट्रल जोन और ईस्ट जोन के बीच खेले जा रहे दूसरे मुकाबले में गेंदबाजों का बोलबाला दिखाई दिया। पहली पारी में दोनों टीमें 200 से कम रनों पर ढेर हो गई। आइए दूसरे दिन के खेल पर एक नजर डालते हैं।
पहले दिन जमकर रन बटोरने वाली नॉर्थ जोन की टीम ने दूसरे दिन भी रनों की बारिश बरकरार रखी। टीम ने 136 ओवर बल्लेबाजी करने के बाद 8 विकेट खोकर 540 रन बनाते हुए पारी घोषित की। दूसरे दिन युवा ऑलराउंडर निशांत सिद्धू (150) और हर्षित राणा (122*) ने शानदार शतकीय पारियां खेलते हुए टीम को मजबूत करने का काम किया। स्टंप के समय नॉर्थ ईस्ट जोन ने पहली पारी में 3 विकेट खोकर 65 रन बना लिए थे।
बाएं हाथ के बल्लेबाज निशांत ने शानदार पारी खेलते हुए रन गति को तेजी से जारी रखते हुए दमदार पारी खेली। 19 साल के निशांत के फर्स्ट क्लास करियर का यह तीसरा शतक रहा और इसे उन्होंने 166 गेंदों में पूरा किया। उन्होंने 61. 22 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए 245 गेंदों में 150 रन बनाए। उन्होंने 18 चौके और 3 छक्के भी जमाए। निशांत ने 7वें विकेट के लिए पुलकित नारंग के साथ 130 रनों की साझेदारी निभाई।
21 वर्षीय युवा ऑलराउंडर हर्षित ने भी अपनी बल्लेबाजी क्षमता का अद्भुत नमूना पेश करते हुए शानदार पारी खेली। हर्षित के फर्स्ट क्लास करियर का यह पहला शतक रहा और इसे पूरा करने के लिए उन्होंने 75 गेंदों का सामना किया। उन्होंने 141. 86 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए केवल 86 गेंदों में 122 रन ठोक दिए। उन्होंने इस पारी में 12 चौके और 9 छक्के भी जमाए।
| दलीप ट्रॉफी दो हज़ार तेईस के दूसरे दिन टीमों के बीच रोचक मुकाबले देखने को मिले। नॉर्थ जोन ने नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ पहली पारी में शानदार बल्लेबाजी करते हुए पहाड़ सा स्कोर खड़ा कर दिया। सेंट्रल जोन और ईस्ट जोन के बीच खेले जा रहे दूसरे मुकाबले में गेंदबाजों का बोलबाला दिखाई दिया। पहली पारी में दोनों टीमें दो सौ से कम रनों पर ढेर हो गई। आइए दूसरे दिन के खेल पर एक नजर डालते हैं। पहले दिन जमकर रन बटोरने वाली नॉर्थ जोन की टीम ने दूसरे दिन भी रनों की बारिश बरकरार रखी। टीम ने एक सौ छत्तीस ओवर बल्लेबाजी करने के बाद आठ विकेट खोकर पाँच सौ चालीस रन बनाते हुए पारी घोषित की। दूसरे दिन युवा ऑलराउंडर निशांत सिद्धू और हर्षित राणा ने शानदार शतकीय पारियां खेलते हुए टीम को मजबूत करने का काम किया। स्टंप के समय नॉर्थ ईस्ट जोन ने पहली पारी में तीन विकेट खोकर पैंसठ रन बना लिए थे। बाएं हाथ के बल्लेबाज निशांत ने शानदार पारी खेलते हुए रन गति को तेजी से जारी रखते हुए दमदार पारी खेली। उन्नीस साल के निशांत के फर्स्ट क्लास करियर का यह तीसरा शतक रहा और इसे उन्होंने एक सौ छयासठ गेंदों में पूरा किया। उन्होंने इकसठ. बाईस की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए दो सौ पैंतालीस गेंदों में एक सौ पचास रन बनाए। उन्होंने अट्ठारह चौके और तीन छक्के भी जमाए। निशांत ने सातवें विकेट के लिए पुलकित नारंग के साथ एक सौ तीस रनों की साझेदारी निभाई। इक्कीस वर्षीय युवा ऑलराउंडर हर्षित ने भी अपनी बल्लेबाजी क्षमता का अद्भुत नमूना पेश करते हुए शानदार पारी खेली। हर्षित के फर्स्ट क्लास करियर का यह पहला शतक रहा और इसे पूरा करने के लिए उन्होंने पचहत्तर गेंदों का सामना किया। उन्होंने एक सौ इकतालीस. छियासी की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए केवल छियासी गेंदों में एक सौ बाईस रन ठोक दिए। उन्होंने इस पारी में बारह चौके और नौ छक्के भी जमाए। |
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार पात्रता तिथि 1-01-2022 के आधार पर अंतिम प्रकाशित फोटोयुक्त मतदाता सूची की हार्ड कॉपी (फोटो के साथ) और सॉफ्ट कॉपी का एक सेट। जिले में तीन विधानसभा क्षेत्र के सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्षों-सचिवों को (बिना फोटो) उपलब्ध करवाने के लिए विशेष बैठक की गई। इसकी अध्यक्षता संयम अग्रवाल उपायुक्त सह जिला निर्वाचन अधिकारी पठानकोट ने की। इस अवसर पर सरबजीत सिंह तहसीलदार निर्वाचन पठानकोट, राम लुभाया जिला जनसंपर्क अधिकारी पठानकोट एवं राजनीतिक दलों के अध्यक्ष-सचिवध्सचिव उपस्थित थे। इस अवसर पर संयम अग्रवाल उपायुक्त-सह-जिला चुनाव अधिकारी पठानकोट ने राजनीतिक दलों के अध्यक्ष-सचिव-अन्य प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए कहा कि पात्रता तिथि 01-01-2022 के आधार पर उनकी हार्ड कॉपी का एक सेट अंतिम प्रकाशित फोटो मतदाता सूची (फोटो के साथ) और सॉफ्ट कॉपी की सीडी (बिना फोटो) आप को सौंपा जा रहा है।
| भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार पात्रता तिथि एक जनवरी दो हज़ार बाईस के आधार पर अंतिम प्रकाशित फोटोयुक्त मतदाता सूची की हार्ड कॉपी और सॉफ्ट कॉपी का एक सेट। जिले में तीन विधानसभा क्षेत्र के सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्षों-सचिवों को उपलब्ध करवाने के लिए विशेष बैठक की गई। इसकी अध्यक्षता संयम अग्रवाल उपायुक्त सह जिला निर्वाचन अधिकारी पठानकोट ने की। इस अवसर पर सरबजीत सिंह तहसीलदार निर्वाचन पठानकोट, राम लुभाया जिला जनसंपर्क अधिकारी पठानकोट एवं राजनीतिक दलों के अध्यक्ष-सचिवध्सचिव उपस्थित थे। इस अवसर पर संयम अग्रवाल उपायुक्त-सह-जिला चुनाव अधिकारी पठानकोट ने राजनीतिक दलों के अध्यक्ष-सचिव-अन्य प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए कहा कि पात्रता तिथि एक जनवरी दो हज़ार बाईस के आधार पर उनकी हार्ड कॉपी का एक सेट अंतिम प्रकाशित फोटो मतदाता सूची और सॉफ्ट कॉपी की सीडी आप को सौंपा जा रहा है। |
भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रहे वेंकैया नायडू देश के 13वें राष्ट्रपति बन गए हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एक भव्य समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। दक्षिण भारत के तेलुगु भाषी वेंकैया ने हिंदी में शपथ ली।
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| भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रहे वेंकैया नायडू देश के तेरहवें राष्ट्रपति बन गए हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एक भव्य समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। दक्षिण भारत के तेलुगु भाषी वेंकैया ने हिंदी में शपथ ली। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi. |
TM24 NEWS:
मीरजापुर। अब योगी सरकार हर परिवार को रोजगार से जोड़ेगी। इससे गरीबी दूर होगी ही, शिक्षित व बेरोजगार युवाओं को नौकरी के लिए भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे स्वावलंबी बन परिवार के साथ खुशहाल जीवन जी सकेंगे। समाज भी सशक्त होगा। यही नहीं, एक परिवार-एक पहचान योजना के तहत फैमिली आईडी व फैमिली पासबुक से अलग पहचान होगी। वहीं फैमिली पासबुक सरकारी सुविधाओं के सरलीकरण में सहायक होगा और एक क्लिक पर लाभार्थियों का पूरा विवरण उपलब्ध होगा।
प्रदेश का कोई भी परिवार एक परिवार-एक योजना से वंचित न रहे, ऐसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है। योजना के तहत परिवार इकाईयों का एक लाइव व्यापक डेटाबेस स्थापित होगा। डेटाबेस योजनाओं के बेहतर प्रबंधन, समयबद्ध लक्ष्यीकरण व सरकारी सुविधाओं के सरलीकरण में सहायक होगा। साथ ही फैमिली आईडी से प्राप्त एकीकृत डेटाबेस के आधार पर रोजगार से वंचित परिवारों का चिन्हांकन कर उन्हें रोजगार के समुचित अवसर प्राथमिकता पर उपलब्ध कराए जा सकेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का निर्देश है कि एक परिवार-एक पहचान योजना का अधिकाधिक प्रचार-प्रसार किया जाए।
फैमिली आईडी के लिए पोर्टल पर करना होगा पंजीयनः
इन परिवारों की राशनकार्ड संख्या ही फैमिली आईडी होगी। जबकि ऐसे परिवार जो राशन कार्डधारक नहीं हैं, वह निर्धारित पोर्टल http://familyid. up. gov. in पर पंजीयन कर फैमिली आईडी प्राप्त कर सकेंगे। योजना के तहत परिवार की पासबुक भी तैयार कराई जाएगी। साथ ही हर एक परिवार को मिल रहे शासकीय योजनाओं के लाभ का पूरा विवरण दर्शाते हुए पासबुक और परिवार आईडी जारी करने से पूर्व परिवार के संबंध में सभी जानकारी को विधिवत प्रमाणित किया जाएगा।
फैमिली आईडी से लिंक होंगी लाभार्थीपरक योजनाएंः
फैमिली आईडी से राज्य सरकार की ओर से संचालित सभी लाभार्थीपरक योजनाओं को लिंक किया जाएगा। वहीं आईटीआई, पालीटेक्निक एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में नए प्रवेश का आधार परिवार आईडी से लिंक किया जाएगा। इससे हर परिवार के स्वावलंबन और सशक्तिकरण का अभियान साकार होगा।
शासनादेश आते ही योजना से आच्छादित किए जाएंगे हर परिवार, होगा प्रचार-प्रसार वर्तमान में मीरजापुर में चार लाख 54 हजार परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ पा रहे हैं। जिला पूर्ति अधिकारी उमेश चंद ने बताया कि एक परिवार-एक पहचान योजना को लेकर अभी तक मीरजापुर कोई शासनादेश नहीं आया है। शासनादेश आते ही हर परिवार को योजना से आच्छादित किया जाएगा। जानकारी के अभाव में कोई परिवार योजना से वंचित न रहे, इसके लिए प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा।
| TMचौबीस NEWS: मीरजापुर। अब योगी सरकार हर परिवार को रोजगार से जोड़ेगी। इससे गरीबी दूर होगी ही, शिक्षित व बेरोजगार युवाओं को नौकरी के लिए भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे स्वावलंबी बन परिवार के साथ खुशहाल जीवन जी सकेंगे। समाज भी सशक्त होगा। यही नहीं, एक परिवार-एक पहचान योजना के तहत फैमिली आईडी व फैमिली पासबुक से अलग पहचान होगी। वहीं फैमिली पासबुक सरकारी सुविधाओं के सरलीकरण में सहायक होगा और एक क्लिक पर लाभार्थियों का पूरा विवरण उपलब्ध होगा। प्रदेश का कोई भी परिवार एक परिवार-एक योजना से वंचित न रहे, ऐसी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है। योजना के तहत परिवार इकाईयों का एक लाइव व्यापक डेटाबेस स्थापित होगा। डेटाबेस योजनाओं के बेहतर प्रबंधन, समयबद्ध लक्ष्यीकरण व सरकारी सुविधाओं के सरलीकरण में सहायक होगा। साथ ही फैमिली आईडी से प्राप्त एकीकृत डेटाबेस के आधार पर रोजगार से वंचित परिवारों का चिन्हांकन कर उन्हें रोजगार के समुचित अवसर प्राथमिकता पर उपलब्ध कराए जा सकेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का निर्देश है कि एक परिवार-एक पहचान योजना का अधिकाधिक प्रचार-प्रसार किया जाए। फैमिली आईडी के लिए पोर्टल पर करना होगा पंजीयनः इन परिवारों की राशनकार्ड संख्या ही फैमिली आईडी होगी। जबकि ऐसे परिवार जो राशन कार्डधारक नहीं हैं, वह निर्धारित पोर्टल http://familyid. up. gov. in पर पंजीयन कर फैमिली आईडी प्राप्त कर सकेंगे। योजना के तहत परिवार की पासबुक भी तैयार कराई जाएगी। साथ ही हर एक परिवार को मिल रहे शासकीय योजनाओं के लाभ का पूरा विवरण दर्शाते हुए पासबुक और परिवार आईडी जारी करने से पूर्व परिवार के संबंध में सभी जानकारी को विधिवत प्रमाणित किया जाएगा। फैमिली आईडी से लिंक होंगी लाभार्थीपरक योजनाएंः फैमिली आईडी से राज्य सरकार की ओर से संचालित सभी लाभार्थीपरक योजनाओं को लिंक किया जाएगा। वहीं आईटीआई, पालीटेक्निक एवं अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में नए प्रवेश का आधार परिवार आईडी से लिंक किया जाएगा। इससे हर परिवार के स्वावलंबन और सशक्तिकरण का अभियान साकार होगा। शासनादेश आते ही योजना से आच्छादित किए जाएंगे हर परिवार, होगा प्रचार-प्रसार वर्तमान में मीरजापुर में चार लाख चौवन हजार परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ पा रहे हैं। जिला पूर्ति अधिकारी उमेश चंद ने बताया कि एक परिवार-एक पहचान योजना को लेकर अभी तक मीरजापुर कोई शासनादेश नहीं आया है। शासनादेश आते ही हर परिवार को योजना से आच्छादित किया जाएगा। जानकारी के अभाव में कोई परिवार योजना से वंचित न रहे, इसके लिए प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा। |
के लिए लोग उमड़ पड़े और फ़िल्म 25 सप्ताह चली । अभिनय में उनका मुकाबला करने स्वयं बलराज साहनी इस बार हीरो बनकर आये । नये किस्म का हीरो, जो आश्रम चलाने वाला एक सीधा-सादा, नेक-दिल पर आदर्श नियम का पाबंद, पुख़्ता उम्र का आदमी था। उसी के प्यार और हमदर्दी से लड़की में परिवर्तन आता और वह जिंदगी को सही नज़र से देखने लगती है, बेशक काफ़ी टकराव संघर्ष के बाद नायिका में मनोवैज्ञानिक बदलाव आना भी एक नयी बात थी नूतन ने इसे खूब विकसित किया ।
कुछ व्यावसायिक फ़िल्में आई, जिनमें नूतन के पात्र कुछ हद तक अनोखे से थे, जैसे देवआनंद के साथ बारिश और राजकपूर के साथ अनाड़ी और छलिया। नूतन के व्यक्तित्व में कुछ ऐसा था कि मामूली चीज़ को भी वह गैर-मामूली करके दिखाती थीं। उनके अभिनय में एक कशिश थी, जो फ़िल्म देखने के बाद भी याद
आती रहती थी । वह अपने साधारण पात्र में भी कुछ नये ढंग भर देती थीं । अगर नूतन ने व्ही. शांताराम, हिमांशु राय, पी.सी. बरूआ, नितिन बोस, मेहबूब खान, देवकी बोस, सोहराब मोदी और गुरुदत्त जैसे फ़िल्मकारों के साथ कुछ अनू फ़िल्में की होतीं, तो फ़िल्म इतिहास में कुछ सुनहरे पन्ने जुड़ जाते। हाँ, वैसे अमि चक्रवर्ती बॉम्बे टॉकीज की ही देन थे । नूतन का सबसे सुखद अरसा औ कला का निखार बिमल राय के साथ हुआ जो न्यू थिएटर्स जैसी महान संस्था क विरासत लेकर बंबई आये थे। यह जुगलबन्दी सुजाता में सामने आई। काश नूतन ने दो बीघा ज़मीन, परिणीता, बिराज बहू जैसी फिल्मों में काम किया हो जब बिमल राय की सृजन शक्ति भी चरमसीमा पर थी। दुनिया न माने, अछू कन्या, आदमी, पड़ोसी, देवदास, विद्यापति आदि की तो हम बात ही नहीं क
सकते क्योंकि नूतन का कलात्मक जन्म तब नहीं हुआ था। इस बीच शाहिद लतीफ़ और इस्मत चुग़ताई के दिमाग से निकली सोने की चिड़िया भी आई। यह एक फ़िल्म अभिनेत्री की मार्मिक और अर्ध-वास्तविक कहानी थी। कहा गया है कि उस ज़माने की एक चोटी की अदाकारा के निजी जीवन से इसकी प्रेरणा मिली थी। किस तरह वह दिन-रात शूटिंग में जानलेवा मेहनत करती है, जिससे उसके माँ, भाई आदि ऐश कर सकें और बेतुकी फ़िल्में भी बनाते रहे, कैसे वह खुद पैसे-पैसे की मोहताज थी, अपने अरमानों को पूरा नहीं कर सकी, अपने प्रेम में असफल रही क्योंकि उसका प्रेमी जो एक सफ़ल हीरो था वह अपनी पत्नी को छोड़ने को तैयार नहीं था, कैसे वह अक्सर बीमार बेहोश होती थी आदि । यह पात्रनूतन के हिस्से में आया ।
हालाँकि फ़िल्म इतनी बढ़िया और पुरअसर नहीं बनी। कुछ हिचकिचाहट भी थी, वास्तविक पात्र के बहुत नज़दीक जाने में। फिर बॉक्स आफिस के भी कुछ तकाज़े और दबाव थे। फिर भी नूतन ने एक संवेदनशील चरित्र का सच्चाई से चित्रण किया। खुद इस अभिनेत्री की वेदना महसूस की और उभार कर दिखाई । उसको धोखा देने वाला प्रेमी हीरो बना था तलत मेहमूद और उसको आश्रय सांत्वना देने के लिये फिर बलराज साहनी थे। इस फ़िल्म में भी नूतन का अभिनय ग़ौर करने के क़ाबिल है।
सुजाता की तो बात ही कुछ और थी। बिमल राय एक नये ढंग की अछूती प्रस्तुति करना चाहते थे। मध्यमवर्गी परिवार में सुख से पली-बसी बेटी जैसी ही (बेटी नहीं) हर तरह से सुशील और काबिल, फिर भी अछूत ही । जैसे छूत-अछूत की एक अदृश्य चादर उसके ऊपर गिरी हुई थी। नूतन ने इस पात्र को भाँप लिया, उसकी सूक्ष्म भावनाएँ समझ ली। वह काली-कलूटी, सहमी-सी, दबी-दबी सी एक ऐसी लड़की बन गई जो फ़िल्म इतिहास में एक अमर पात्र बनकर रह गया है । बिमल राय की विचार धारा गहरी थी । हम अछूत को अपनों की तरह रखकर लालन-पालन परवरिश कर सकते हैं। लेकिन हमारे दिल और दिमाग में तो वह अछूत ही रहती है। वह घर की हर चीज़ को छू सकती है, लेकिन ऊँची जाति की मानसिक पाबंदी को नहीं हिला सकती। और जब परिवार पर बन आती है, उन्हीं की असली लड़की का होने वाला पति सुजाता की ओर खिंचा चला जाता
है तब यह दीवार और भी सख्त हो जाती है। सुजाता में ऐसे कई दृश्य हैं, जिनमें कोई दूसरी साधारण अभिनेत्री होती तो मजबूर हो जाती और रिवायती अभिनय के सिवा कुछ नहीं कर पाती। पर नूतन ने गहरा अध्ययन किया और फिर बिमलरॉय हर कदम पर अपनी नोतुन को राह दिखाते रहे। इसी तरह बनती है ऊँची कोटि की फ़िल्में। सुजाता का पात्र ऐसा था कि सदियों का दुख, ज़ुल्म और अन्याय एक अनदेखा बोझ बनकर उस पर हावी था। कानून और संविधान के सारे साधनों से यह समस्या नहीं सुलझ सकती। इसके लिये चाहिये प्रेम, त्याग और अपने अस्तित्व को कायम रखने का मज़बूत इरादा । उसे एक पूरे सिस्टम से लड़ना है, लेकिन नारे लगाकर, झंडा उठाकर या आन्दोलन करके नहीं। केवल शांति, प्रेम और अपने आपको मिटाने की अहिंसक भावना से । इसमें वह सफ़ल होती है और अपनी मनचाही मंजिल भी उसे मिलती है। इसमें सुनील दत्त का अभिनय भी ऊँचे दरज़े
खूबसूरती का एक और चरित्र आया सूरत और सीरत में। नूतन की माताजी शोभना हुई। बाहरी बदसूरती और अंदरूनी समर्थ ने फिर निर्माण में हाथ डालकर, उसके पति रजनीश बहल को निर्देशन का श्रेय भी दिलवाया। धर्मेन्द्र के साथ बनी यह फ़िल्म बहुत खूबियाँ लिए हुई थी। • नूतन की अदाकारी बेशक इसका मुख्य अंग थी। एक काली, सादी, कुरूप सी लड़की जिसे एक अंधा नौजवान प्यार करता है, सिर्फ़ उसकी आवाज़, गुण और अच्छे बर्ताव से। लेकिन वह शारीरिक सुन्दरता का दीवाना है और इसलिये जब आँखें खुलती है तब तूफान आता है। लेकिन फ़िल्म का विषय गंभीर था और आम लोगों की समझ के बाहर । मनोरंजन का रिवायती मसाला भी नहीं । फ़िल्म बुरी तरह असफल रही और नूतन के परिवार का प्रयत्न बेकार गया।
आखिर बिमल राय के ही साथ नूतन की कला अपनी बुलंदी पर पहुँची। बतौर नायिका यह करीब-करीब उसकी आखिरी फ़िल्म थी और राय के निर्देशन का भी अंतिम चरण बंदिनी। फिर वही बंगाली पसमंजर उपन्यास को लेकर बनी एक भावनात्मक कृति थी जिसको मध्यमवर्ग के ज्ञानी - दिमाग्री लोगों ने बहुत पसंद किया। वैसे इस दर्शक वर्ग की समाप्ति भी इन्हीं कालों में आरंभ हुई। इस फ़िल्म में नूतन के पात्र के विविध पहलू थे। पहले तो एक भोली-भाली सुन्दर सी ग्राम्य-कन्या, जो एक आज़ादी आन्दोलन के आतंकवादी से प्यार करने लगती है। मगर वह उसे छोड़कर चला जाता है फिर ठुकराई हुई दुखी लड़की जिसको पता चलता है कि जिसको वह पति मान बैठी थी उसने किसी ओर से शादी कर ली है। इस सदमे से उसके पिता का देहांत होता है और गाँव में खलबली । अब उसके भाग्य में बनना है एक तूफ़ान घिरी नाव । इस मायूसी के माहौलको नूतन ने खूब उभारा । वह बनती है अस्पताल की एंक कर्मचारी, जहाँ उसे एक बड़े ही नीच स्वभाव की औरत की सेवा करनी पड़ती है। उसे पता चलता है कि यह वही औरत है जिसने उसके प्रेमी और होने वाले पति से शादी कर ली है। अतः नूतनं एक कठोर, डरावनी बन जाती है और मौका मिलने पर उस औरत को ज़हर दे
देती है। नूतन का अगला रूप एक बंदिनी का है जो खून के आरोप में सजा काट रही है। एक दयालु जेलर धीरे-धीरे उसकी कहानी उसकी कलम से निकलवाता है। जेल में फिर नूतन को प्रेमिका बनने का सौभाग्य - दुर्भाग्य प्राप्त होता है, जब वहाँ का नौजवान डॉक्टर उससे हमदर्दी-प्यार करने लगता है। सज़ा खत्म होने पर वह और उसके घरवाले फिर नूतन को दुल्हन बनाने की तैयारी करते हैं। लेकिन अब उसका आखिरी इम्तिहान आता है। उसकी मुलाकात अपने पहले पिया के साथ होती है जिसकी वह बंदिनी है। बीमार हालत में वह अपनी दुख और मजबूरी से भरी कहानी सुनाता है।
अब नायिका के सामने दो रास्ते हैं। रेल में डॉक्टर के साथ जाकर एक नयी जिंदगी बसर करना या जहाज़ में अपने असली प्रेमी-पति का साथ देकर बाकी जीवन उसकी सेवा में बिताना। यह कश्मकश और दुविधा का चित्रण नूतन ने अपने चेहरे की मुद्रा और शारीरिक भाषा (body language) से इतना उभरे ढंग से किया कि वे दृश्य आज भी भुलाये नहीं जाते। इस फ़िल्म से नूतन के ऊपर फिर तारीफ़ के फूल बरसने लगे, सम्मान और इनाम से वह घिर गई ।
इसके बाद एक अर्ध-व्यावसायिक परंतु ऊँचे स्तर की फ़िल्म मिलन और फ़िर सरस्वतीचंद्र ने नूतन का हीरोइन वाला अध्याय समाप्त किया। गोविंद सरैया की, गुजराती महा- उपन्यास पर आधारित फ़िल्म सरस्वतीचंद्र ने फिर नूतन को वह मौका दिया जो बहुत कम अभिनेत्रियों को नसीब होता है। प्रेम और त्याग के फ़लसफ़े की इस कृति में नूतन ने अपने पात्र को चार चाँद लगाये । एक भोली-भाली सुंदरी, प्रेम का स्वस्थ्य अनुभव करने वाली प्रेमिका, फिर एक बदचलन आदमी की पत्नि और फिर सांसारिक बंधनों से ऊपर उठने वाली औरत, जो अपने प्रेमी को सही रास्ता दिखाती
एक बात रह जाती है जो आश्चर्य भी पैदा करती है और अफ़सोस भी वह यह कि नूतन को कलात्मक अभिनेत्री का ऊँचा स्थान या एवार्ड नहीं मिला। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी कद्र या सम्मान नहीं हुआ। वह संपूर्ण कला- फ़िल्म से वंचित रह गई। बंगाल या केरल के विश्व विख्यात निर्देशकों ने उन्हें कभी नहीं बुलाया । कदाचित उनकी फ़िल्मों द्वारा नूतन को भारत के बाहर अग्रणी देशों में वह प्रशंसा सम्मान मिल पाता जिसके लिये वह जीवन भर तरसतीं रहीं। हाँ, उन्होंने दो कला-फ़िल्मों में काम करने की हिम्मत की। कस्तूरी और ग्रहण दोनों औसत दर्जे की अधकचरी फ़िल्में थी, जो विदेशों में मुश्किल से दिखायीं गयीं पर जिन्होंने कोई असर नहीं छोड़ा। नूतन ने जो झंडे गाड़े वे बंबई की बेहतर किस्म की फ़िल्मों तक सीमित रह गये, जिनमें फिर भी नाच-गाने ड्रामा आदि रिवायती क़िस्म के थे। ग़ौर से देखा जाये तो नूतन का फ़िल्मों में आगमन और शोहरत की सीढ़ियाँ चढ़ना,
इन सब कमज़ोरियों की बुनियाद पहले ही डाले हुए थे। 1950 में माँ शोभना समर्थ ने हमारी बेटी बनाकर नूतन को उद्योग को और दर्शकों को भेंट किया। यह एक चमक-दमक वाली व्यावसायिक फ़िल्म थी। फ़िल्म चली नहीं पर नूतन का भविष्य बना गयी। इसके बाद दलसुख पंचोली की नगीना आई गीत, रोमांच, रहस्य कारण सिल्वर जुबली हिट हो गई। नई हीरोइन भी बहुत पसंद की गई । नूतन स्टार बन गई और हमेशा हर फ़िल्म में वह पहले स्टार रही और फिर अभिनेत्री । क्योंकि उसके नाम पर अर्धव्यावसायिक और कला फ़िल्में बेची और देखी गई। बिमल राय जैसे निर्देशकों को छोड़कर वह फ़िल्मों पर ज़्यादा हावी रही। इसी कारण सत्यजीत राय, मृणाल सेन, अडूर गोपालकृष्णन, जी. अरविंदन, श्याम बेनेगल यहाँ तक कि गुरुदत्त ने भी उसे पसंद नहीं किया।
नूतन की कलात्मक फ़िल्में जिस मात्रा में थी. उससे कई गुना उसकी कमर्शियल और बॉक्स-ऑफ़िस फ़िल्में थी। उन्होंने अपने ज़माने के सब लोकप्रिय नायकों के साथ सफ़ल फ़िल्मों में सफ़लताओं से काम किया। विदेश से तालीम और भरी भूरी सुंदरता लेकर जब वह वापस आयीं (पहली तीन फ़िल्मों के बाद) तो उद्योग ने उनको गले लगा लिया और उन्होंने भी उद्योग के कलपुर्जों को अच्छी तरह समझ लिया और हॉलीवुड की मशीनी सिस्टम में डूब सी गई। मालकिन, हंगामा, पर्वत, निर्मोही, लाइट हाऊस जैसी कई फ़िल्में आयीं और गयीं। कुछ गिनी-चुनी अच्छी भी थी जैसे कि शबाब जिसमें लुभावनी क्लासिकल धुनें थीं। ऊपरी स्तर की वह नायिका तव बनी जब देवआनंद के साथ बारिश और राजकपूर के साथ अनाड़ी खूब चली । दिलीप के साथ उनकी कोई फ़िल्म बन नहीं पायी और शिकवा अधूरी छोड़ दी गई । बरसों बाद सुभाष घई की कर्मा में दोनों कलाकार साथ-साथ चमके चरित्र कलाकार (माँ-बाप) बनकर । कुल मिलाकर नृतन ने लगभग 80 फ़िल्मों में काम किया जिनमें से बढ़िया स्तर की केवल 12-15 थीं। अन्य चलचित्रों में उन्होंने हर किस्म के हल्के-फुल्के, आशिकाना, शरारती सेक्सी और नाटकीय पात्र निभाये । दिल्ली का ठग में उन्होंने पहली बार स्वीमिंग सूट पहना और अंग प्रदर्शन किया जो आज के हिसाब से तो बेशक कुछ भी नहीं था । लेकिन एक नया दौर हीरोइनों के लिये खुल गया, जिससे बाद में नायिकाओं ने बहुत फायदा उठाया । लाट साहब में उन्होंने शम्मीकपूर के साथ काफी प्रणय दृश्य किये, जैसे कि एक-दूसरे से लिपटकर एक छोटी पहाड़ी पर गिरते हुए नीचे आना। कुछ फ़िल्मों में उन्होंने स्वयं गाने गाये और बाकी फ़िल्मों से परदे पर गीत गाये और कई किस्म के नाच भी किये । देवआनंद के साथ उनकी अच्छी ट्यूनिंग रही और बारिश, पेइंगगेस्ट आदि बहुत कामयाब रहीं। देव ने अपने बैनर की फ़िल्मों में भी उनको साइन किया और कुछ मज़ेदार फ़िल्में बनी जैसे कि तेरे घर के सामने राजकपूर के साथ दिल ही तो । लेकिन आर. के. बैनर के लिये उनको नहीं बुलाया गया। एक विचित्र घटना जो बहुत कम लोग जानते हैं। जब 1959 में नूतन ने रजनीश बहल से शादी की तो उन्होंने अचानक निश्चय किया कि फ़िल्मों को अलविदा कह देंगी ।
कुछ दिनों तक उन्होंने फ़िल्में साइन करना छोड़ दिया और उस जमाने की एक मशहूर पत्रिका में अपना इस्तीफा-नामा इस प्रकार लिखा :
अब मैं एक समुद्री अफ़सर की पत्नी हूँ, अब मुझसे कारोबारी काम नहीं किया जायेगा । फ़िर मैं पुराने ख़्यालात की हूँ और यह मानती हूँ कि एक औरत की सही जगह उसका घर है। फ़िल्मी दुनिया में मैंने जो साल बिताये, उनमें मैंने बहुत से घरों को इसी कारण उजड़ते देखा। आप या तो एक अच्छी फ़िल्म स्टार बन सकती हैं या एक अच्छी गृहिणी । मैं फ़िल्म जगत से दूर जा रही हूँ पर मैं हमेशा इसके नज़दीक रहूँगी। मैं अपने दोस्तों को, सह-कलाकारों को और आलोचकों को गुडबाय कहती हूँ। मुझे आशा है कि वे सब लोग कम से कम मुझे "हलो" कहते रहें और मुझसे किनारा नहीं करेंगे क्योंकि मैं फ़िल्मों से बाहर जा चुकी हूँ। इसके बाद 30 बरसों तक नूतन ने दर्जनों फ़िल्मों में काम किया और काफ़ी सम्मान | के लिए लोग उमड़ पड़े और फ़िल्म पच्चीस सप्ताह चली । अभिनय में उनका मुकाबला करने स्वयं बलराज साहनी इस बार हीरो बनकर आये । नये किस्म का हीरो, जो आश्रम चलाने वाला एक सीधा-सादा, नेक-दिल पर आदर्श नियम का पाबंद, पुख़्ता उम्र का आदमी था। उसी के प्यार और हमदर्दी से लड़की में परिवर्तन आता और वह जिंदगी को सही नज़र से देखने लगती है, बेशक काफ़ी टकराव संघर्ष के बाद नायिका में मनोवैज्ञानिक बदलाव आना भी एक नयी बात थी नूतन ने इसे खूब विकसित किया । कुछ व्यावसायिक फ़िल्में आई, जिनमें नूतन के पात्र कुछ हद तक अनोखे से थे, जैसे देवआनंद के साथ बारिश और राजकपूर के साथ अनाड़ी और छलिया। नूतन के व्यक्तित्व में कुछ ऐसा था कि मामूली चीज़ को भी वह गैर-मामूली करके दिखाती थीं। उनके अभिनय में एक कशिश थी, जो फ़िल्म देखने के बाद भी याद आती रहती थी । वह अपने साधारण पात्र में भी कुछ नये ढंग भर देती थीं । अगर नूतन ने व्ही. शांताराम, हिमांशु राय, पी.सी. बरूआ, नितिन बोस, मेहबूब खान, देवकी बोस, सोहराब मोदी और गुरुदत्त जैसे फ़िल्मकारों के साथ कुछ अनू फ़िल्में की होतीं, तो फ़िल्म इतिहास में कुछ सुनहरे पन्ने जुड़ जाते। हाँ, वैसे अमि चक्रवर्ती बॉम्बे टॉकीज की ही देन थे । नूतन का सबसे सुखद अरसा औ कला का निखार बिमल राय के साथ हुआ जो न्यू थिएटर्स जैसी महान संस्था क विरासत लेकर बंबई आये थे। यह जुगलबन्दी सुजाता में सामने आई। काश नूतन ने दो बीघा ज़मीन, परिणीता, बिराज बहू जैसी फिल्मों में काम किया हो जब बिमल राय की सृजन शक्ति भी चरमसीमा पर थी। दुनिया न माने, अछू कन्या, आदमी, पड़ोसी, देवदास, विद्यापति आदि की तो हम बात ही नहीं क सकते क्योंकि नूतन का कलात्मक जन्म तब नहीं हुआ था। इस बीच शाहिद लतीफ़ और इस्मत चुग़ताई के दिमाग से निकली सोने की चिड़िया भी आई। यह एक फ़िल्म अभिनेत्री की मार्मिक और अर्ध-वास्तविक कहानी थी। कहा गया है कि उस ज़माने की एक चोटी की अदाकारा के निजी जीवन से इसकी प्रेरणा मिली थी। किस तरह वह दिन-रात शूटिंग में जानलेवा मेहनत करती है, जिससे उसके माँ, भाई आदि ऐश कर सकें और बेतुकी फ़िल्में भी बनाते रहे, कैसे वह खुद पैसे-पैसे की मोहताज थी, अपने अरमानों को पूरा नहीं कर सकी, अपने प्रेम में असफल रही क्योंकि उसका प्रेमी जो एक सफ़ल हीरो था वह अपनी पत्नी को छोड़ने को तैयार नहीं था, कैसे वह अक्सर बीमार बेहोश होती थी आदि । यह पात्रनूतन के हिस्से में आया । हालाँकि फ़िल्म इतनी बढ़िया और पुरअसर नहीं बनी। कुछ हिचकिचाहट भी थी, वास्तविक पात्र के बहुत नज़दीक जाने में। फिर बॉक्स आफिस के भी कुछ तकाज़े और दबाव थे। फिर भी नूतन ने एक संवेदनशील चरित्र का सच्चाई से चित्रण किया। खुद इस अभिनेत्री की वेदना महसूस की और उभार कर दिखाई । उसको धोखा देने वाला प्रेमी हीरो बना था तलत मेहमूद और उसको आश्रय सांत्वना देने के लिये फिर बलराज साहनी थे। इस फ़िल्म में भी नूतन का अभिनय ग़ौर करने के क़ाबिल है। सुजाता की तो बात ही कुछ और थी। बिमल राय एक नये ढंग की अछूती प्रस्तुति करना चाहते थे। मध्यमवर्गी परिवार में सुख से पली-बसी बेटी जैसी ही हर तरह से सुशील और काबिल, फिर भी अछूत ही । जैसे छूत-अछूत की एक अदृश्य चादर उसके ऊपर गिरी हुई थी। नूतन ने इस पात्र को भाँप लिया, उसकी सूक्ष्म भावनाएँ समझ ली। वह काली-कलूटी, सहमी-सी, दबी-दबी सी एक ऐसी लड़की बन गई जो फ़िल्म इतिहास में एक अमर पात्र बनकर रह गया है । बिमल राय की विचार धारा गहरी थी । हम अछूत को अपनों की तरह रखकर लालन-पालन परवरिश कर सकते हैं। लेकिन हमारे दिल और दिमाग में तो वह अछूत ही रहती है। वह घर की हर चीज़ को छू सकती है, लेकिन ऊँची जाति की मानसिक पाबंदी को नहीं हिला सकती। और जब परिवार पर बन आती है, उन्हीं की असली लड़की का होने वाला पति सुजाता की ओर खिंचा चला जाता है तब यह दीवार और भी सख्त हो जाती है। सुजाता में ऐसे कई दृश्य हैं, जिनमें कोई दूसरी साधारण अभिनेत्री होती तो मजबूर हो जाती और रिवायती अभिनय के सिवा कुछ नहीं कर पाती। पर नूतन ने गहरा अध्ययन किया और फिर बिमलरॉय हर कदम पर अपनी नोतुन को राह दिखाते रहे। इसी तरह बनती है ऊँची कोटि की फ़िल्में। सुजाता का पात्र ऐसा था कि सदियों का दुख, ज़ुल्म और अन्याय एक अनदेखा बोझ बनकर उस पर हावी था। कानून और संविधान के सारे साधनों से यह समस्या नहीं सुलझ सकती। इसके लिये चाहिये प्रेम, त्याग और अपने अस्तित्व को कायम रखने का मज़बूत इरादा । उसे एक पूरे सिस्टम से लड़ना है, लेकिन नारे लगाकर, झंडा उठाकर या आन्दोलन करके नहीं। केवल शांति, प्रेम और अपने आपको मिटाने की अहिंसक भावना से । इसमें वह सफ़ल होती है और अपनी मनचाही मंजिल भी उसे मिलती है। इसमें सुनील दत्त का अभिनय भी ऊँचे दरज़े खूबसूरती का एक और चरित्र आया सूरत और सीरत में। नूतन की माताजी शोभना हुई। बाहरी बदसूरती और अंदरूनी समर्थ ने फिर निर्माण में हाथ डालकर, उसके पति रजनीश बहल को निर्देशन का श्रेय भी दिलवाया। धर्मेन्द्र के साथ बनी यह फ़िल्म बहुत खूबियाँ लिए हुई थी। • नूतन की अदाकारी बेशक इसका मुख्य अंग थी। एक काली, सादी, कुरूप सी लड़की जिसे एक अंधा नौजवान प्यार करता है, सिर्फ़ उसकी आवाज़, गुण और अच्छे बर्ताव से। लेकिन वह शारीरिक सुन्दरता का दीवाना है और इसलिये जब आँखें खुलती है तब तूफान आता है। लेकिन फ़िल्म का विषय गंभीर था और आम लोगों की समझ के बाहर । मनोरंजन का रिवायती मसाला भी नहीं । फ़िल्म बुरी तरह असफल रही और नूतन के परिवार का प्रयत्न बेकार गया। आखिर बिमल राय के ही साथ नूतन की कला अपनी बुलंदी पर पहुँची। बतौर नायिका यह करीब-करीब उसकी आखिरी फ़िल्म थी और राय के निर्देशन का भी अंतिम चरण बंदिनी। फिर वही बंगाली पसमंजर उपन्यास को लेकर बनी एक भावनात्मक कृति थी जिसको मध्यमवर्ग के ज्ञानी - दिमाग्री लोगों ने बहुत पसंद किया। वैसे इस दर्शक वर्ग की समाप्ति भी इन्हीं कालों में आरंभ हुई। इस फ़िल्म में नूतन के पात्र के विविध पहलू थे। पहले तो एक भोली-भाली सुन्दर सी ग्राम्य-कन्या, जो एक आज़ादी आन्दोलन के आतंकवादी से प्यार करने लगती है। मगर वह उसे छोड़कर चला जाता है फिर ठुकराई हुई दुखी लड़की जिसको पता चलता है कि जिसको वह पति मान बैठी थी उसने किसी ओर से शादी कर ली है। इस सदमे से उसके पिता का देहांत होता है और गाँव में खलबली । अब उसके भाग्य में बनना है एक तूफ़ान घिरी नाव । इस मायूसी के माहौलको नूतन ने खूब उभारा । वह बनती है अस्पताल की एंक कर्मचारी, जहाँ उसे एक बड़े ही नीच स्वभाव की औरत की सेवा करनी पड़ती है। उसे पता चलता है कि यह वही औरत है जिसने उसके प्रेमी और होने वाले पति से शादी कर ली है। अतः नूतनं एक कठोर, डरावनी बन जाती है और मौका मिलने पर उस औरत को ज़हर दे देती है। नूतन का अगला रूप एक बंदिनी का है जो खून के आरोप में सजा काट रही है। एक दयालु जेलर धीरे-धीरे उसकी कहानी उसकी कलम से निकलवाता है। जेल में फिर नूतन को प्रेमिका बनने का सौभाग्य - दुर्भाग्य प्राप्त होता है, जब वहाँ का नौजवान डॉक्टर उससे हमदर्दी-प्यार करने लगता है। सज़ा खत्म होने पर वह और उसके घरवाले फिर नूतन को दुल्हन बनाने की तैयारी करते हैं। लेकिन अब उसका आखिरी इम्तिहान आता है। उसकी मुलाकात अपने पहले पिया के साथ होती है जिसकी वह बंदिनी है। बीमार हालत में वह अपनी दुख और मजबूरी से भरी कहानी सुनाता है। अब नायिका के सामने दो रास्ते हैं। रेल में डॉक्टर के साथ जाकर एक नयी जिंदगी बसर करना या जहाज़ में अपने असली प्रेमी-पति का साथ देकर बाकी जीवन उसकी सेवा में बिताना। यह कश्मकश और दुविधा का चित्रण नूतन ने अपने चेहरे की मुद्रा और शारीरिक भाषा से इतना उभरे ढंग से किया कि वे दृश्य आज भी भुलाये नहीं जाते। इस फ़िल्म से नूतन के ऊपर फिर तारीफ़ के फूल बरसने लगे, सम्मान और इनाम से वह घिर गई । इसके बाद एक अर्ध-व्यावसायिक परंतु ऊँचे स्तर की फ़िल्म मिलन और फ़िर सरस्वतीचंद्र ने नूतन का हीरोइन वाला अध्याय समाप्त किया। गोविंद सरैया की, गुजराती महा- उपन्यास पर आधारित फ़िल्म सरस्वतीचंद्र ने फिर नूतन को वह मौका दिया जो बहुत कम अभिनेत्रियों को नसीब होता है। प्रेम और त्याग के फ़लसफ़े की इस कृति में नूतन ने अपने पात्र को चार चाँद लगाये । एक भोली-भाली सुंदरी, प्रेम का स्वस्थ्य अनुभव करने वाली प्रेमिका, फिर एक बदचलन आदमी की पत्नि और फिर सांसारिक बंधनों से ऊपर उठने वाली औरत, जो अपने प्रेमी को सही रास्ता दिखाती एक बात रह जाती है जो आश्चर्य भी पैदा करती है और अफ़सोस भी वह यह कि नूतन को कलात्मक अभिनेत्री का ऊँचा स्थान या एवार्ड नहीं मिला। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी कद्र या सम्मान नहीं हुआ। वह संपूर्ण कला- फ़िल्म से वंचित रह गई। बंगाल या केरल के विश्व विख्यात निर्देशकों ने उन्हें कभी नहीं बुलाया । कदाचित उनकी फ़िल्मों द्वारा नूतन को भारत के बाहर अग्रणी देशों में वह प्रशंसा सम्मान मिल पाता जिसके लिये वह जीवन भर तरसतीं रहीं। हाँ, उन्होंने दो कला-फ़िल्मों में काम करने की हिम्मत की। कस्तूरी और ग्रहण दोनों औसत दर्जे की अधकचरी फ़िल्में थी, जो विदेशों में मुश्किल से दिखायीं गयीं पर जिन्होंने कोई असर नहीं छोड़ा। नूतन ने जो झंडे गाड़े वे बंबई की बेहतर किस्म की फ़िल्मों तक सीमित रह गये, जिनमें फिर भी नाच-गाने ड्रामा आदि रिवायती क़िस्म के थे। ग़ौर से देखा जाये तो नूतन का फ़िल्मों में आगमन और शोहरत की सीढ़ियाँ चढ़ना, इन सब कमज़ोरियों की बुनियाद पहले ही डाले हुए थे। एक हज़ार नौ सौ पचास में माँ शोभना समर्थ ने हमारी बेटी बनाकर नूतन को उद्योग को और दर्शकों को भेंट किया। यह एक चमक-दमक वाली व्यावसायिक फ़िल्म थी। फ़िल्म चली नहीं पर नूतन का भविष्य बना गयी। इसके बाद दलसुख पंचोली की नगीना आई गीत, रोमांच, रहस्य कारण सिल्वर जुबली हिट हो गई। नई हीरोइन भी बहुत पसंद की गई । नूतन स्टार बन गई और हमेशा हर फ़िल्म में वह पहले स्टार रही और फिर अभिनेत्री । क्योंकि उसके नाम पर अर्धव्यावसायिक और कला फ़िल्में बेची और देखी गई। बिमल राय जैसे निर्देशकों को छोड़कर वह फ़िल्मों पर ज़्यादा हावी रही। इसी कारण सत्यजीत राय, मृणाल सेन, अडूर गोपालकृष्णन, जी. अरविंदन, श्याम बेनेगल यहाँ तक कि गुरुदत्त ने भी उसे पसंद नहीं किया। नूतन की कलात्मक फ़िल्में जिस मात्रा में थी. उससे कई गुना उसकी कमर्शियल और बॉक्स-ऑफ़िस फ़िल्में थी। उन्होंने अपने ज़माने के सब लोकप्रिय नायकों के साथ सफ़ल फ़िल्मों में सफ़लताओं से काम किया। विदेश से तालीम और भरी भूरी सुंदरता लेकर जब वह वापस आयीं तो उद्योग ने उनको गले लगा लिया और उन्होंने भी उद्योग के कलपुर्जों को अच्छी तरह समझ लिया और हॉलीवुड की मशीनी सिस्टम में डूब सी गई। मालकिन, हंगामा, पर्वत, निर्मोही, लाइट हाऊस जैसी कई फ़िल्में आयीं और गयीं। कुछ गिनी-चुनी अच्छी भी थी जैसे कि शबाब जिसमें लुभावनी क्लासिकल धुनें थीं। ऊपरी स्तर की वह नायिका तव बनी जब देवआनंद के साथ बारिश और राजकपूर के साथ अनाड़ी खूब चली । दिलीप के साथ उनकी कोई फ़िल्म बन नहीं पायी और शिकवा अधूरी छोड़ दी गई । बरसों बाद सुभाष घई की कर्मा में दोनों कलाकार साथ-साथ चमके चरित्र कलाकार बनकर । कुल मिलाकर नृतन ने लगभग अस्सी फ़िल्मों में काम किया जिनमें से बढ़िया स्तर की केवल बारह-पंद्रह थीं। अन्य चलचित्रों में उन्होंने हर किस्म के हल्के-फुल्के, आशिकाना, शरारती सेक्सी और नाटकीय पात्र निभाये । दिल्ली का ठग में उन्होंने पहली बार स्वीमिंग सूट पहना और अंग प्रदर्शन किया जो आज के हिसाब से तो बेशक कुछ भी नहीं था । लेकिन एक नया दौर हीरोइनों के लिये खुल गया, जिससे बाद में नायिकाओं ने बहुत फायदा उठाया । लाट साहब में उन्होंने शम्मीकपूर के साथ काफी प्रणय दृश्य किये, जैसे कि एक-दूसरे से लिपटकर एक छोटी पहाड़ी पर गिरते हुए नीचे आना। कुछ फ़िल्मों में उन्होंने स्वयं गाने गाये और बाकी फ़िल्मों से परदे पर गीत गाये और कई किस्म के नाच भी किये । देवआनंद के साथ उनकी अच्छी ट्यूनिंग रही और बारिश, पेइंगगेस्ट आदि बहुत कामयाब रहीं। देव ने अपने बैनर की फ़िल्मों में भी उनको साइन किया और कुछ मज़ेदार फ़िल्में बनी जैसे कि तेरे घर के सामने राजकपूर के साथ दिल ही तो । लेकिन आर. के. बैनर के लिये उनको नहीं बुलाया गया। एक विचित्र घटना जो बहुत कम लोग जानते हैं। जब एक हज़ार नौ सौ उनसठ में नूतन ने रजनीश बहल से शादी की तो उन्होंने अचानक निश्चय किया कि फ़िल्मों को अलविदा कह देंगी । कुछ दिनों तक उन्होंने फ़िल्में साइन करना छोड़ दिया और उस जमाने की एक मशहूर पत्रिका में अपना इस्तीफा-नामा इस प्रकार लिखा : अब मैं एक समुद्री अफ़सर की पत्नी हूँ, अब मुझसे कारोबारी काम नहीं किया जायेगा । फ़िर मैं पुराने ख़्यालात की हूँ और यह मानती हूँ कि एक औरत की सही जगह उसका घर है। फ़िल्मी दुनिया में मैंने जो साल बिताये, उनमें मैंने बहुत से घरों को इसी कारण उजड़ते देखा। आप या तो एक अच्छी फ़िल्म स्टार बन सकती हैं या एक अच्छी गृहिणी । मैं फ़िल्म जगत से दूर जा रही हूँ पर मैं हमेशा इसके नज़दीक रहूँगी। मैं अपने दोस्तों को, सह-कलाकारों को और आलोचकों को गुडबाय कहती हूँ। मुझे आशा है कि वे सब लोग कम से कम मुझे "हलो" कहते रहें और मुझसे किनारा नहीं करेंगे क्योंकि मैं फ़िल्मों से बाहर जा चुकी हूँ। इसके बाद तीस बरसों तक नूतन ने दर्जनों फ़िल्मों में काम किया और काफ़ी सम्मान |
Bollywood Most Famous Villain Amrish Puri: बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार अमरीश पुरी की शानदार एक्टिंग के आज भी लोग दीवाने हैं। उनका खलनायक का किरदार आज भी लोगों के दिमाग में ताजा है। आइए आज हम आपको एक्टर से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें बताते हैं।
Bollywood Most Famous Villain Amrish Puri: 'मोगैंबो खुश हुआ' ये सुनकर कुछ याद आया? जी हां, यह डायलॉग अमरीश पुरी की फिल्म 'मिस्टर इंडिया' का है। आज भी जब लोग यह डायलॉग सुनते हैं, तो दिमाग में अमरीश पुरी की कई फिल्में सामने आ जाती हैं, जिनमें उन्होंने खलनायक का किरदार निभाया था। एक्टर ने अपने करियर में कई शानदार फिल्में दी हैं, लेकिन अमरीश पुरी अपने नेगेटिव शेड्स के लिए काफी पॉपुलर रहे हैं। भले वो आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आज भी लोग उनकी फिल्में देखना खूब पसंद करते हैं।
अमरीश पुरी ने 1960 के दशक में रंगमंच की दुनिया से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। शुरुआत में अमरीश ने कई फिल्मों में ट्राई किया, ऑडिशन दिया, लेकिन फिल्ममेकर उन्हें यह कहकर मना कर देते थे कि उनका चेहरा एक्टिंग के लिए नहीं है। एक-दो फिल्ममेकर के मुंह से यही बात सुनने के बाद एक्टर ने एक बीमा कंपनी में जॉब करना शुरू कर दिया था, लेकिन अमरीश में एक्टिंग का जुनून इतना था कि उन्होंने एक्टिंग कभी नहीं छोड़ी। वह नौकरी के साथ-साथ पृथ्वी थियेटर से जुड़े रहे और एक्टिंग में खुद को बेहतर करते रहे।
'देर से सही, लेकिन मेहनत रंग जरुर लाती है' और ऐसा ही कुछ अमरीश पुरी के साथ भी हुआ। अमरीश पुरी को उनकी पहली फिल्म साल 1971 में मिली, जिसका नाम था 'रेशमा और शेरा' इस फिल्म में उनके साथ सुनील दत्त और वहीदा रहमान भी थे। बस यह वही फिल्म थी, जिसने अमरीश पुरी की किस्मत चमका दी। फिर क्या था अमरीश पुरी ने इस फिल्म के बाद एक से बढ़कर एक रोल किए। हालांकि, उन्हें पॉप्युलैरिटी मिली नेगेटिव शेड्स से।
कैसे अमरीश पुरी को हीरो से मिला खलनायक का रोल?
अमरीश पुरी ने 1980 के दशक तक कई फिल्में की, लेकिन उन्हें जो कामयाबी नेगेटिव किरदारों से मिली वह शायद ही उन्हें उनकी किसी फिल्म से मिली हो। इनमें से सबसे मशहूर रोल 1987 में आई अनिल कपूर और श्री देवी स्टारर फिल्म 'मिस्टर इंडिया' थी, जिसमें अमरीश ने मोगैंबो का किरदार निभाया था। इस फिल्म में उनके डायलॉग 'मोगैंबो खुश हुआ' आज भी लोगों की जुबान पर है और लोग उन्हें खूब याद करते हैं। इसके अलावा, भी अमरीश पुरी ने कई नेगेटिव रोल किए जिनमें बाबा भैरोनाथ, जनरल डॉन्ग, राजा साहब, करन-अर्जुन, परदेस, ग़दर एक प्रेम कथा जैसी फिल्में शामिल हैं। हालांकि, ऐसा नहीं था कि लोगों को अमरीश पुरी के बाकी किरदार पसंद नहीं आते थे। खलनायक के अलावा भी उनके कई ऐसे रोल थे, जो लोगों के दिमाग में आज भी जिंदा है। इनमें दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे, मुझसे शादी करोगी, घायल और विरासत जैसी फिल्में शामिल हैं।
अमरीश पुरी ने 35 साल के अपने करियर में करीब 400 फिल्मों में काम किया था। आखिरी बार उन्हें फिल्म 'किसना' में देखा गया था। 22 जनवरी 2005 को अमरीश पुरी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। आज भले ही वह हमारे बीच न हो, लेकिन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उनका शानदार योगदान आज भी लोगों के दिलो में जिंदा है और रहेगा। आज भी जब टॉप नेगेटिव शेड्स की बात की जाती है, तो अमरीश पुरी का नाम सबसे पहले आता है।
| Bollywood Most Famous Villain Amrish Puri: बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार अमरीश पुरी की शानदार एक्टिंग के आज भी लोग दीवाने हैं। उनका खलनायक का किरदार आज भी लोगों के दिमाग में ताजा है। आइए आज हम आपको एक्टर से जुड़ी कुछ अनसुनी बातें बताते हैं। Bollywood Most Famous Villain Amrish Puri: 'मोगैंबो खुश हुआ' ये सुनकर कुछ याद आया? जी हां, यह डायलॉग अमरीश पुरी की फिल्म 'मिस्टर इंडिया' का है। आज भी जब लोग यह डायलॉग सुनते हैं, तो दिमाग में अमरीश पुरी की कई फिल्में सामने आ जाती हैं, जिनमें उन्होंने खलनायक का किरदार निभाया था। एक्टर ने अपने करियर में कई शानदार फिल्में दी हैं, लेकिन अमरीश पुरी अपने नेगेटिव शेड्स के लिए काफी पॉपुलर रहे हैं। भले वो आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आज भी लोग उनकी फिल्में देखना खूब पसंद करते हैं। अमरीश पुरी ने एक हज़ार नौ सौ साठ के दशक में रंगमंच की दुनिया से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। शुरुआत में अमरीश ने कई फिल्मों में ट्राई किया, ऑडिशन दिया, लेकिन फिल्ममेकर उन्हें यह कहकर मना कर देते थे कि उनका चेहरा एक्टिंग के लिए नहीं है। एक-दो फिल्ममेकर के मुंह से यही बात सुनने के बाद एक्टर ने एक बीमा कंपनी में जॉब करना शुरू कर दिया था, लेकिन अमरीश में एक्टिंग का जुनून इतना था कि उन्होंने एक्टिंग कभी नहीं छोड़ी। वह नौकरी के साथ-साथ पृथ्वी थियेटर से जुड़े रहे और एक्टिंग में खुद को बेहतर करते रहे। 'देर से सही, लेकिन मेहनत रंग जरुर लाती है' और ऐसा ही कुछ अमरीश पुरी के साथ भी हुआ। अमरीश पुरी को उनकी पहली फिल्म साल एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में मिली, जिसका नाम था 'रेशमा और शेरा' इस फिल्म में उनके साथ सुनील दत्त और वहीदा रहमान भी थे। बस यह वही फिल्म थी, जिसने अमरीश पुरी की किस्मत चमका दी। फिर क्या था अमरीश पुरी ने इस फिल्म के बाद एक से बढ़कर एक रोल किए। हालांकि, उन्हें पॉप्युलैरिटी मिली नेगेटिव शेड्स से। कैसे अमरीश पुरी को हीरो से मिला खलनायक का रोल? अमरीश पुरी ने एक हज़ार नौ सौ अस्सी के दशक तक कई फिल्में की, लेकिन उन्हें जो कामयाबी नेगेटिव किरदारों से मिली वह शायद ही उन्हें उनकी किसी फिल्म से मिली हो। इनमें से सबसे मशहूर रोल एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में आई अनिल कपूर और श्री देवी स्टारर फिल्म 'मिस्टर इंडिया' थी, जिसमें अमरीश ने मोगैंबो का किरदार निभाया था। इस फिल्म में उनके डायलॉग 'मोगैंबो खुश हुआ' आज भी लोगों की जुबान पर है और लोग उन्हें खूब याद करते हैं। इसके अलावा, भी अमरीश पुरी ने कई नेगेटिव रोल किए जिनमें बाबा भैरोनाथ, जनरल डॉन्ग, राजा साहब, करन-अर्जुन, परदेस, ग़दर एक प्रेम कथा जैसी फिल्में शामिल हैं। हालांकि, ऐसा नहीं था कि लोगों को अमरीश पुरी के बाकी किरदार पसंद नहीं आते थे। खलनायक के अलावा भी उनके कई ऐसे रोल थे, जो लोगों के दिमाग में आज भी जिंदा है। इनमें दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे, मुझसे शादी करोगी, घायल और विरासत जैसी फिल्में शामिल हैं। अमरीश पुरी ने पैंतीस साल के अपने करियर में करीब चार सौ फिल्मों में काम किया था। आखिरी बार उन्हें फिल्म 'किसना' में देखा गया था। बाईस जनवरी दो हज़ार पाँच को अमरीश पुरी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। आज भले ही वह हमारे बीच न हो, लेकिन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उनका शानदार योगदान आज भी लोगों के दिलो में जिंदा है और रहेगा। आज भी जब टॉप नेगेटिव शेड्स की बात की जाती है, तो अमरीश पुरी का नाम सबसे पहले आता है। |
श्र० ६ उ० २
रचर्याकाल माना जाता है। और फिर उनकी साधनाको सिद्धि हुई और फिर वे पूर्णज्ञानको पाते हैं । जिसे केवलज्ञान कहा जाता है । केवलज्ञान प्राप्त होनेके पश्चात् श्रीमहावीर साधु, साध्वी, श्रावक और श्राविका इस प्रकार चार तीर्थसंघकी स्थापना करते हैं । इसीसे इन्हें महावीर, तीर्थकर, जिनभगवान् लोकनाथ, सर्वज्ञ और दीर्घतपस्वी के नामसे पहचानते हैं ।
( ५ ) प्रिय जंबू ! ये अप्रमत्त महावीर साधना मार्ग में थे तब भी प्रमादपूर्वक निद्राका कभी सेवन नहीं करते थे ( दिनरात ध्यानसमाधिमें इतने एकाग्रचित्त रहते कि मानसिक सुख प्राप्त करने के लिए सामान्यतया निद्राकी जो श्रावश्यकता रहा करती है वह इन्हें अल्प रहती थी ) कदाचित सुषुप्ति आ भी जाती तो भी वे आत्माभिमुख होकर फिर आत्माके के लिए तुरंत जागृत हो जाते थे । उनका शयन भी अप्रमत्त दशा जैसा हो था ।
विशेष - इसी आचारांग में एक सूत्र आ चुका है कि "जिसका आत्मा जागृत हो गया है; उसकी निद्रा प्रभादमय नहीं होती, वह सोते हुए भी जागृत रह सकता है ।" यद्यपि यह वस्तु अनुभवगोचर है । परंतु इससे प्रांतर जागृती होनी चाहिए, 'बाह्यजागृतीकी क्या आवश्यकता है यह मानकर शायद कोई इसवाक्यका दुरुपयोग न कर बैठे ! बाह्य जागृती भी आंतर जागृती जगानेका एक प्रवल साधन है और जिसकी आंतर जागृती हो गई है वह बाहर न जागता हो यह न समझलिया | श्रशून्य छः उशून्य दो रचर्याकाल माना जाता है। और फिर उनकी साधनाको सिद्धि हुई और फिर वे पूर्णज्ञानको पाते हैं । जिसे केवलज्ञान कहा जाता है । केवलज्ञान प्राप्त होनेके पश्चात् श्रीमहावीर साधु, साध्वी, श्रावक और श्राविका इस प्रकार चार तीर्थसंघकी स्थापना करते हैं । इसीसे इन्हें महावीर, तीर्थकर, जिनभगवान् लोकनाथ, सर्वज्ञ और दीर्घतपस्वी के नामसे पहचानते हैं । प्रिय जंबू ! ये अप्रमत्त महावीर साधना मार्ग में थे तब भी प्रमादपूर्वक निद्राका कभी सेवन नहीं करते थे कदाचित सुषुप्ति आ भी जाती तो भी वे आत्माभिमुख होकर फिर आत्माके के लिए तुरंत जागृत हो जाते थे । उनका शयन भी अप्रमत्त दशा जैसा हो था । विशेष - इसी आचारांग में एक सूत्र आ चुका है कि "जिसका आत्मा जागृत हो गया है; उसकी निद्रा प्रभादमय नहीं होती, वह सोते हुए भी जागृत रह सकता है ।" यद्यपि यह वस्तु अनुभवगोचर है । परंतु इससे प्रांतर जागृती होनी चाहिए, 'बाह्यजागृतीकी क्या आवश्यकता है यह मानकर शायद कोई इसवाक्यका दुरुपयोग न कर बैठे ! बाह्य जागृती भी आंतर जागृती जगानेका एक प्रवल साधन है और जिसकी आंतर जागृती हो गई है वह बाहर न जागता हो यह न समझलिया |
Election Result: पुडुचेरी में भाजपा ने 2016 में 12 सीट पर जीत दर्ज की थी लेकिन इस बार 4 सीटें ज्यादा जीतकर वह बहुमत के आंकड़े को पार कर गई है और राज्य में उसके पास विधानसभा में 16 सीटें हो गई हैं।
नई दिल्ली। 5 राज्यों केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम घोषित हो चुके हैं। इन परिणामों में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पूरे चुनाव परिणाम पर एक बार गौर करें तो पता चलेगा कि देश की एक समय की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस का एक तरह से दक्षिण से पूरब तक सफाया हो गया है। पुडुचेरी में कांग्रेस की सरकार थी तो वहां भाजपा ने सत्ता पर कब्जा कर लिया है। असम में कांग्रेस को उम्मीद लग रही थी तो वहां कांग्रेस को एक बार फिर भाजपा के हाथों शिकस्त खानी पड़ी है। तमिलनाडु में डीएमके ने 10 साल बाद सत्ता में वापसी की है लेकिन एक सहयोगी के तौर पर यहां भी कांग्रेस का प्रदर्शन औसत दर्जे का रहा है। केरल से कांग्रेस उम्मीद लगाए बैठी थी लेकिन वहां 40 साल बाद एक नया इतिहास एलडीएफ ने सत्ता में पुनः वापसी कर लिख दिया है। पश्चिम बंगाल जहां कांग्रेस लगातार 34 साल लेफ्ट और 20 साल कांग्रेस ने राज किया वहां इन दोनों ने साथ लड़कर भी एक सीट पर जीत दर्ज नहीं की।
वहीं आपको बता दें कि दक्षिण में तमिलनाडु में भले भाजपा का वर्चस्व नहीं तैयार हो पाया हो लेकिन उसके वोट शेयर में इजाफा हुआ है। केरल में भाजपा के हाथ खाली रह गए। लेकिन असम में भाजपा ने पांच साल के शासनकाल के बाद एक बार फिर से इतिहास रच दिया है। पिछली बार के मुकाबले भाजपा ने एक सीट ज्यादा जीती है और इस बार उसका आंकड़ा 2016 के 74 सीटों के मुकाबले 2021 में 75 है।
वहीं पुडुचेरी में भाजपा ने 2016 में 12 सीट पर जीत दर्ज की थी लेकिन इस बार 4 सीटें ज्यादा जीतकर वह बहुमत के आंकड़े को पार कर गई है और राज्य में उसके पास विधानसभा में 16 सीटें हो गई हैं। वहीं पश्चिम बंगाल जहां की भाजपा को लग रहा था कि सत्ता विरोधी लहर है वह वहां की जनता का मन भांपने में विफल रही और इसी का नतीजा हुआ कि भाजपा को सोच के अनुरूप यहां सफलता नहीं मिली लेकिन भाजपा ने 2016 के 3 सीट के मुकाबले 73 सीटों की बढ़त लेते हुए 76 सीटें जीत ली है।
सबसे बड़ी बात यह है कि जिन राज्यों में भाजपा का जनाधार असम को छोड़कर 2011 में नाम मात्र का था, यहां भाजपा को कुल मिलाकर 5 सीटें हासिल हुई थी। वह 2016 में बढ़कर 64 और 2021 में 147 सीट हो गई है। इस तरह पार्टी का शनै-शनै इन राज्यों में बढ़ता जनाधार कई पार्टियों के लिए चिंता का पर्याय बन गई है।
| Election Result: पुडुचेरी में भाजपा ने दो हज़ार सोलह में बारह सीट पर जीत दर्ज की थी लेकिन इस बार चार सीटें ज्यादा जीतकर वह बहुमत के आंकड़े को पार कर गई है और राज्य में उसके पास विधानसभा में सोलह सीटें हो गई हैं। नई दिल्ली। पाँच राज्यों केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम घोषित हो चुके हैं। इन परिणामों में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पूरे चुनाव परिणाम पर एक बार गौर करें तो पता चलेगा कि देश की एक समय की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस का एक तरह से दक्षिण से पूरब तक सफाया हो गया है। पुडुचेरी में कांग्रेस की सरकार थी तो वहां भाजपा ने सत्ता पर कब्जा कर लिया है। असम में कांग्रेस को उम्मीद लग रही थी तो वहां कांग्रेस को एक बार फिर भाजपा के हाथों शिकस्त खानी पड़ी है। तमिलनाडु में डीएमके ने दस साल बाद सत्ता में वापसी की है लेकिन एक सहयोगी के तौर पर यहां भी कांग्रेस का प्रदर्शन औसत दर्जे का रहा है। केरल से कांग्रेस उम्मीद लगाए बैठी थी लेकिन वहां चालीस साल बाद एक नया इतिहास एलडीएफ ने सत्ता में पुनः वापसी कर लिख दिया है। पश्चिम बंगाल जहां कांग्रेस लगातार चौंतीस साल लेफ्ट और बीस साल कांग्रेस ने राज किया वहां इन दोनों ने साथ लड़कर भी एक सीट पर जीत दर्ज नहीं की। वहीं आपको बता दें कि दक्षिण में तमिलनाडु में भले भाजपा का वर्चस्व नहीं तैयार हो पाया हो लेकिन उसके वोट शेयर में इजाफा हुआ है। केरल में भाजपा के हाथ खाली रह गए। लेकिन असम में भाजपा ने पांच साल के शासनकाल के बाद एक बार फिर से इतिहास रच दिया है। पिछली बार के मुकाबले भाजपा ने एक सीट ज्यादा जीती है और इस बार उसका आंकड़ा दो हज़ार सोलह के चौहत्तर सीटों के मुकाबले दो हज़ार इक्कीस में पचहत्तर है। वहीं पुडुचेरी में भाजपा ने दो हज़ार सोलह में बारह सीट पर जीत दर्ज की थी लेकिन इस बार चार सीटें ज्यादा जीतकर वह बहुमत के आंकड़े को पार कर गई है और राज्य में उसके पास विधानसभा में सोलह सीटें हो गई हैं। वहीं पश्चिम बंगाल जहां की भाजपा को लग रहा था कि सत्ता विरोधी लहर है वह वहां की जनता का मन भांपने में विफल रही और इसी का नतीजा हुआ कि भाजपा को सोच के अनुरूप यहां सफलता नहीं मिली लेकिन भाजपा ने दो हज़ार सोलह के तीन सीट के मुकाबले तिहत्तर सीटों की बढ़त लेते हुए छिहत्तर सीटें जीत ली है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिन राज्यों में भाजपा का जनाधार असम को छोड़कर दो हज़ार ग्यारह में नाम मात्र का था, यहां भाजपा को कुल मिलाकर पाँच सीटें हासिल हुई थी। वह दो हज़ार सोलह में बढ़कर चौंसठ और दो हज़ार इक्कीस में एक सौ सैंतालीस सीट हो गई है। इस तरह पार्टी का शनै-शनै इन राज्यों में बढ़ता जनाधार कई पार्टियों के लिए चिंता का पर्याय बन गई है। |
Knoll Cetrizine डॉक्टर द्वारा लिखी जाने वाली दवा है, जो सिरप के रूप में उपलब्ध है। इस दवा का उपयोग विशेष रूप से एलर्जी, अर्टिकेरिया पिगमेंटोसा, सर्दी जुकाम का इलाज करने के लिए किया जाता है। Knoll Cetrizine का उपयोग कुछ अन्य स्थितियों के लिए भी किया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है।
मरीज की उम्र, लिंग व स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी के आधार पर ही Knoll Cetrizine की खुराक निर्धारित की जाती है। इसकी सही मात्रा इस पर भी निर्भर करती है, कि मरीज की मुख्य समस्या क्या है और उसे किस तरीके से दवा दी जा रही है। इस बारे में और अधिक जानने के लिए खुराक वाले खंड में पढ़ें।
इन दुष्परिणामों के अलावा Knoll Cetrizine के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। Knoll Cetrizine के दुष्प्रभाव जल्दी ही खत्म हो जाते हैं और इलाज के बाद जारी नहीं रहते। अपने डॉक्टर से संपर्क करें अगर ये साइड इफेक्ट और ज्यादा बदतर हो जाते हैं या फिर लंबे समय तक रहते हैं।
इसके अलावा Knoll Cetrizine को गर्भावस्था के दौरान लेने पर प्रभाव सुरक्षित होता है और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए इसका प्रभाव हल्का है। आगे Knoll Cetrizine से जुड़ी चेतावनियों के सेक्शन में बताया गया है कि Knoll Cetrizine का लिवर, हार्ट, किडनी पर क्या असर होता है।
इनके आलावा, अगर नीचे दिए गए सेक्शन में मौजूद समस्याओं में से कोई भी समस्या आपको है, तो आप Knoll Cetrizine को न लें।
साथ ही, Knoll Cetrizine को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। ऐसी दवाओं की पूरी सूची आगे इस लेख में दी गयी है।
ऊपर बताई गई सावधानियों के अलावा यह भी ध्यान में रखें कि वाहन चलाते वक्त Knoll Cetrizine लेना असुरक्षित है, साथ ही इसकी लत नहीं पड़ सकती है।
यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Knoll Cetrizine की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Knoll Cetrizine की खुराक अलग हो सकती है।
।बच्चे(2 से 12 वर्ष)
क्या Knoll Cetrizine का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है?
गर्भवती महिलाओं के लिए Knoll Cetrizine सुरक्षित है।
क्या Knoll Cetrizine का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है?
डॉक्टर की सलाह के बिना Knoll Cetrizine का सेवन किया जा सकता। स्तनपान करवाने वाली महिला पर इसका विपरीत असर बहुत हल्का ही होता है।
Knoll Cetrizine का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है?
Knoll Cetrizine का बुरा प्रभाव किडनी पर कम होता है, क्योंकि ये नुकसानदायक नहीं है।
Knoll Cetrizine का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है?
Knoll Cetrizine आप ले सकते हैं। इसका विपरीत असर आपके लीवर पर बहुत कम पड़ता है।
क्या ह्रदय पर Knoll Cetrizine का प्रभाव पड़ता है?
Knoll Cetrizine हृदय के लिए पूरी तरह से अनुकूल है।
क्या Knoll Cetrizine आदत या लत बन सकती है?
नहीं, Knoll Cetrizine को लेने के बाद आपको इसकी आदत नहीं पड़ती है।
क्या Knoll Cetrizine को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है?
किसी मशीन के अलावा वाहन को चलाने में दिमागी सक्रियता की बेहद जरूरत होती है। लेकिन Knoll Cetrizine को खाने से आपको नींद व थकान होने लगती है। इसलिए इन कामों को करने से बचें।
क्या Knoll Cetrizine को लेना सुरखित है?
हां, लेकिन डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Knoll Cetrizine इस्तेमाल की जा सकती है?
नहीं, Knoll Cetrizine किसी भी तरह के दिमागी विकार का इलाज नहीं कर पाती है।
क्या Knoll Cetrizine को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है?
कई दवाओं को खाने के साथ ही लिया जाता है। Knoll Cetrizine को भी आप भोजन के साथ ले सकते हैं।
जब Knoll Cetrizine ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या?
शराब के साथ Knoll Cetrizine लेने से आपकी सेहत पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है।
हां, Knoll Cetrizine के कारण पेट खराब हो सकता है। ये इस दवा का एक सामान्य हानिकारक प्रभाव है। अगर Knoll Cetrizine लेने के बाद आपका पेट बहुत ज्यादा खराब हो रहा है तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
Knoll Cetrizine के कारण वजन नहीं बढ़ता है। हालांकि, लंबे समय तक Knoll Cetrizine के इस्तेमाल से वजन बढ़ सकता है लेकिन ऐसा दुर्लभ ही होता है। अगर Knoll Cetrizine लेने के दौरान वजन बढ़ रहा है तो अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करें।
Knoll Cetrizine के साथ फिनयलफ्रिन ले सकते हैं। इन दोनों दवाओं को एक साथ लेने पर अब तक कोई भी दुष्प्रभाव सामने नहीं आए हैं। अगर आपको Knoll Cetrizine के साथ फिनयलफ्रिन खाने के बाद कोई हानिकारक प्रभाव महसूस हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा और निर्दिष्ट समय तक Knoll Cetrizine खानी सुरक्षित है। हालांकि, इसके कुछ साइड भी होते हैं जिनमें सुस्ती महसूस होना, दस्त लगना, कब्ज, कमजोरी और थकान शामिल हैं।
अपनी मर्जी से Knoll Cetrizine लेना बंद करने से आपको इसके हानिकारक प्रभाव झेलने पड़ सकते हैं और बीमारी के लक्षण भी वापिस आने की संभावना रहती है। Knoll Cetrizine बंद करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना जरूरी है।
| Knoll Cetrizine डॉक्टर द्वारा लिखी जाने वाली दवा है, जो सिरप के रूप में उपलब्ध है। इस दवा का उपयोग विशेष रूप से एलर्जी, अर्टिकेरिया पिगमेंटोसा, सर्दी जुकाम का इलाज करने के लिए किया जाता है। Knoll Cetrizine का उपयोग कुछ अन्य स्थितियों के लिए भी किया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है। मरीज की उम्र, लिंग व स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी के आधार पर ही Knoll Cetrizine की खुराक निर्धारित की जाती है। इसकी सही मात्रा इस पर भी निर्भर करती है, कि मरीज की मुख्य समस्या क्या है और उसे किस तरीके से दवा दी जा रही है। इस बारे में और अधिक जानने के लिए खुराक वाले खंड में पढ़ें। इन दुष्परिणामों के अलावा Knoll Cetrizine के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। Knoll Cetrizine के दुष्प्रभाव जल्दी ही खत्म हो जाते हैं और इलाज के बाद जारी नहीं रहते। अपने डॉक्टर से संपर्क करें अगर ये साइड इफेक्ट और ज्यादा बदतर हो जाते हैं या फिर लंबे समय तक रहते हैं। इसके अलावा Knoll Cetrizine को गर्भावस्था के दौरान लेने पर प्रभाव सुरक्षित होता है और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए इसका प्रभाव हल्का है। आगे Knoll Cetrizine से जुड़ी चेतावनियों के सेक्शन में बताया गया है कि Knoll Cetrizine का लिवर, हार्ट, किडनी पर क्या असर होता है। इनके आलावा, अगर नीचे दिए गए सेक्शन में मौजूद समस्याओं में से कोई भी समस्या आपको है, तो आप Knoll Cetrizine को न लें। साथ ही, Knoll Cetrizine को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। ऐसी दवाओं की पूरी सूची आगे इस लेख में दी गयी है। ऊपर बताई गई सावधानियों के अलावा यह भी ध्यान में रखें कि वाहन चलाते वक्त Knoll Cetrizine लेना असुरक्षित है, साथ ही इसकी लत नहीं पड़ सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Knoll Cetrizine की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Knoll Cetrizine की खुराक अलग हो सकती है। ।बच्चे क्या Knoll Cetrizine का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? गर्भवती महिलाओं के लिए Knoll Cetrizine सुरक्षित है। क्या Knoll Cetrizine का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? डॉक्टर की सलाह के बिना Knoll Cetrizine का सेवन किया जा सकता। स्तनपान करवाने वाली महिला पर इसका विपरीत असर बहुत हल्का ही होता है। Knoll Cetrizine का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Knoll Cetrizine का बुरा प्रभाव किडनी पर कम होता है, क्योंकि ये नुकसानदायक नहीं है। Knoll Cetrizine का जिगर पर क्या असर होता है? Knoll Cetrizine आप ले सकते हैं। इसका विपरीत असर आपके लीवर पर बहुत कम पड़ता है। क्या ह्रदय पर Knoll Cetrizine का प्रभाव पड़ता है? Knoll Cetrizine हृदय के लिए पूरी तरह से अनुकूल है। क्या Knoll Cetrizine आदत या लत बन सकती है? नहीं, Knoll Cetrizine को लेने के बाद आपको इसकी आदत नहीं पड़ती है। क्या Knoll Cetrizine को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? किसी मशीन के अलावा वाहन को चलाने में दिमागी सक्रियता की बेहद जरूरत होती है। लेकिन Knoll Cetrizine को खाने से आपको नींद व थकान होने लगती है। इसलिए इन कामों को करने से बचें। क्या Knoll Cetrizine को लेना सुरखित है? हां, लेकिन डॉक्टर से सलाह जरूर लें। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Knoll Cetrizine इस्तेमाल की जा सकती है? नहीं, Knoll Cetrizine किसी भी तरह के दिमागी विकार का इलाज नहीं कर पाती है। क्या Knoll Cetrizine को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? कई दवाओं को खाने के साथ ही लिया जाता है। Knoll Cetrizine को भी आप भोजन के साथ ले सकते हैं। जब Knoll Cetrizine ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? शराब के साथ Knoll Cetrizine लेने से आपकी सेहत पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है। हां, Knoll Cetrizine के कारण पेट खराब हो सकता है। ये इस दवा का एक सामान्य हानिकारक प्रभाव है। अगर Knoll Cetrizine लेने के बाद आपका पेट बहुत ज्यादा खराब हो रहा है तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। Knoll Cetrizine के कारण वजन नहीं बढ़ता है। हालांकि, लंबे समय तक Knoll Cetrizine के इस्तेमाल से वजन बढ़ सकता है लेकिन ऐसा दुर्लभ ही होता है। अगर Knoll Cetrizine लेने के दौरान वजन बढ़ रहा है तो अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करें। Knoll Cetrizine के साथ फिनयलफ्रिन ले सकते हैं। इन दोनों दवाओं को एक साथ लेने पर अब तक कोई भी दुष्प्रभाव सामने नहीं आए हैं। अगर आपको Knoll Cetrizine के साथ फिनयलफ्रिन खाने के बाद कोई हानिकारक प्रभाव महसूस हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा और निर्दिष्ट समय तक Knoll Cetrizine खानी सुरक्षित है। हालांकि, इसके कुछ साइड भी होते हैं जिनमें सुस्ती महसूस होना, दस्त लगना, कब्ज, कमजोरी और थकान शामिल हैं। अपनी मर्जी से Knoll Cetrizine लेना बंद करने से आपको इसके हानिकारक प्रभाव झेलने पड़ सकते हैं और बीमारी के लक्षण भी वापिस आने की संभावना रहती है। Knoll Cetrizine बंद करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना जरूरी है। |
जिला प्रमुख हरलाल सहारण। फाइल फोटो।
चूरू जिला प्रमुख हरलाल सहारण को फर्जी दस्तावेज के आधार पर चुनाव लड़ने के मामले में जेल भेज दिया गया है. सहारण को दो दिन के पुलिस रिमांड की अवधि समाप्त होने पर बुधवार को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया. वहां से कोर्ट ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया. जिला प्रमुख के अधिवक्ता की ओर से लगाई गई जमानत याचिका को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया है.
जिला प्रमुख हरलाल सहारण को एसपी की स्पेशल टीम ने गत 19 मई को जयपुर के जालुपूरा से गिरफ्तार किया था. हरलाल सहारण पर फर्जी दस्तावेज लगाकर चुनाव लड़ने का आरोप है. इस संबंध में कोतवाली थाने में आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 120- बी में मामला दर्ज हुआ था.
मामले में पुलिस ने जिला प्रमुख को गिरफ्तार 20 मई को सरदारशहर एसीजेएम कोर्ट में पेशकर पांच दिन का रिमांड मांगा था. लेकिन कोर्ट ने दो दिन का ही रिमांड दिया था. दो दिन की रिमांड अवधि पूरी होने पर बुधवार को सहारण को फिर कोर्ट में पेश किया गया. वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. उसके बाद सहारण को जिला कारागृह ले जाया गया.
उल्लेखनीय है कि सहारण की गिरफ्तारी के बाद चूरू में बीजेपी लामबंद हो गई थी. उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ के नेृत्तव में पार्टी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को सभा कर प्रदर्शन किया था. उसके बाद मंगलवार को चूरू बंद का आह्वान किया गया था. सहारण के अधिवक्ता बीरबल सिंह लांबा ने बताया कि अब जिला एवं सेशन कोर्ट में जमानत याचिका लगाई जाएगी.
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| जिला प्रमुख हरलाल सहारण। फाइल फोटो। चूरू जिला प्रमुख हरलाल सहारण को फर्जी दस्तावेज के आधार पर चुनाव लड़ने के मामले में जेल भेज दिया गया है. सहारण को दो दिन के पुलिस रिमांड की अवधि समाप्त होने पर बुधवार को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया. वहां से कोर्ट ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया. जिला प्रमुख के अधिवक्ता की ओर से लगाई गई जमानत याचिका को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया है. जिला प्रमुख हरलाल सहारण को एसपी की स्पेशल टीम ने गत उन्नीस मई को जयपुर के जालुपूरा से गिरफ्तार किया था. हरलाल सहारण पर फर्जी दस्तावेज लगाकर चुनाव लड़ने का आरोप है. इस संबंध में कोतवाली थाने में आईपीसी की धारा चार सौ बीस, चार सौ सरसठ, चार सौ अड़सठ, चार सौ इकहत्तर, एक सौ बीस- बी में मामला दर्ज हुआ था. मामले में पुलिस ने जिला प्रमुख को गिरफ्तार बीस मई को सरदारशहर एसीजेएम कोर्ट में पेशकर पांच दिन का रिमांड मांगा था. लेकिन कोर्ट ने दो दिन का ही रिमांड दिया था. दो दिन की रिमांड अवधि पूरी होने पर बुधवार को सहारण को फिर कोर्ट में पेश किया गया. वहां से उन्हें जेल भेज दिया गया. उसके बाद सहारण को जिला कारागृह ले जाया गया. उल्लेखनीय है कि सहारण की गिरफ्तारी के बाद चूरू में बीजेपी लामबंद हो गई थी. उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ के नेृत्तव में पार्टी कार्यकर्ताओं ने सोमवार को सभा कर प्रदर्शन किया था. उसके बाद मंगलवार को चूरू बंद का आह्वान किया गया था. सहारण के अधिवक्ता बीरबल सिंह लांबा ने बताया कि अब जिला एवं सेशन कोर्ट में जमानत याचिका लगाई जाएगी. . |
* प्रस्तावना :
'हीरक प्रवचन' पाठकों के कर-कमलों में है। प्रस्तुत पुस्तक दिवंगत पूज्य श्री खूबचन्दजी महाराज के अन्यतम शिष्य पण्डित मुनि श्री हीरालालजी म० के प्रवचनों का प्रथम भाग है। मुनि श्र ने बिगत वर्ष बैंगलोर श्री संघ की प्रार्थना स्वीकार कर वहां चौमासा किया । जब आपके प्रवचन प्रारंभ हुए तो वे श्रोताओं को अत्यन्त उपयोगी और प्रभावशाली प्रतीत हुए और उन्हें लिपिबद्ध कराने का निर्णय किया गया। तदनुसार श्री धर्मपालजी महता को बुलाया गया और उन्होंने संकेत लिपि में उन्हें लिख डाला । तत्पश्चात् सर्वसाधारण जनता उनसे लाभ उठा सके, इम उदात्त और परहितमयी भावना से प्रेरित होकर उनको मुद्रित कराने की व्यवस्था की गई उसी व्यवस्था के फलस्वरूप 'होरक प्रवचन' का प्रथम भाग पाठकों के समक्ष उपस्थित हो सका है।
पिछले कुछ वर्षों से स्थानकवासी समाज में मनीषी मुनिराजों के प्रवचन- साहित्य के प्रकाशन को एक परम्परा-सी प्रचलित होगई है अब तक पूज्य श्री जवाहरलालजी म०, जैन दिवाकर श्री चौथमलजी म०, उपाचार्य श्री गणेशीलालजी म०, उपाध्याय श्री श्रमरमुनिजी म०, पं०के० मंत्री मुनि श्री प्रेमचन्दजी म०, प्र०व० श्री सौभाग्यमलजी म०, उपाध्याय श्री हस्तीमलजो म० श्रादि संतों के तथा प्रवर्तिनो श्री उज्जवकुमारीजी म० पंजाब की विदुषो महासती श्री चंदाजी म० आदि साध्वियों के प्रवचन प्रकाश में आये है । वास्तव में यह एक प्रशस्त परम्परा है और इससे अनेक जिज्ञासु जनों को अपने जीवन
का उत्कर्ष सिद्ध करने में अवश्य सहायता मिली होगी । कइयों को विचारशोधन का भी अवसर मिला होगा। यह परम्परा जितनी अधिक अग्रसर हो कल्याणकर ही है।
मगर एक बात ध्यान में रहनी चाहिए। आज हमारा देश और समाज शिक्षण एवं चिन्तन-मनन के क्षेत्र में अच्छी प्रगति कर चुका है और हमारे साहित्य का स्तर भी ऊंचा उठ रहा है। इस तथ्य को सामने रख कर ही प्रवचन साहित्य और इतर साहित्य अगर सामने आएगा तो वह स्पृहणीय होगा और उससे जैन समाज के गौरव की वृद्धि होगी। यह सत्य है कि मूलभूत तथ्य तो चिर पुरातन ही होंगे, मगर उन्हें अभिव्यक्त करते की शैली युगानुकूल गंभीर, प्रांजल और विशद होनी चाहिए और इसमें चिन्तन की गम्भीरता परिलक्षित होनी चाहिए। जितनी जल्दी हमारा ध्यान इस ओर आकृष्ट हो, उतना ही अच्छा ।
प्रस्तुत पुस्तक में अनेक विषयों पर विचार व्यक्त किये गये हैं। घौषध, समय का सदुपयोग, ज्ञान की उपासना, ब्रह्मचर्य, प्रार्थना का महत्व, सुपात्रदान महात्मय आदि विषयों के साथ ऋषभचरित्र तथा सुबाहुकुमार की सुप्रसद्धि कथा का भी इसमें समावेश है। आशा है सर्व साधारण पाठकों के लिए यह प्रवचन उपयोगी सिद्ध होंगे।
ज्ञात हुआ है कि 'हीरक प्रवचन' के अगले भाग भी क्रमशः सम्पादित और प्रकाशित होने वाले हैं। भावों की समीचीनता एवं भाषा शुद्धि पर अधिक ध्यान देने से, आशा है अगले भाग और भी सुपाठ्य होंगे। इस साहित्य को पाठकों के समक्ष उपस्थित करने में जो जो महानुभाव निमित्त बने हैं, उनकी उदार भावना आदरणीय है। - शोभाचन्द्र भारिल्ल | * प्रस्तावना : 'हीरक प्रवचन' पाठकों के कर-कमलों में है। प्रस्तुत पुस्तक दिवंगत पूज्य श्री खूबचन्दजी महाराज के अन्यतम शिष्य पण्डित मुनि श्री हीरालालजी मशून्य के प्रवचनों का प्रथम भाग है। मुनि श्र ने बिगत वर्ष बैंगलोर श्री संघ की प्रार्थना स्वीकार कर वहां चौमासा किया । जब आपके प्रवचन प्रारंभ हुए तो वे श्रोताओं को अत्यन्त उपयोगी और प्रभावशाली प्रतीत हुए और उन्हें लिपिबद्ध कराने का निर्णय किया गया। तदनुसार श्री धर्मपालजी महता को बुलाया गया और उन्होंने संकेत लिपि में उन्हें लिख डाला । तत्पश्चात् सर्वसाधारण जनता उनसे लाभ उठा सके, इम उदात्त और परहितमयी भावना से प्रेरित होकर उनको मुद्रित कराने की व्यवस्था की गई उसी व्यवस्था के फलस्वरूप 'होरक प्रवचन' का प्रथम भाग पाठकों के समक्ष उपस्थित हो सका है। पिछले कुछ वर्षों से स्थानकवासी समाज में मनीषी मुनिराजों के प्रवचन- साहित्य के प्रकाशन को एक परम्परा-सी प्रचलित होगई है अब तक पूज्य श्री जवाहरलालजी मशून्य, जैन दिवाकर श्री चौथमलजी मशून्य, उपाचार्य श्री गणेशीलालजी मशून्य, उपाध्याय श्री श्रमरमुनिजी मशून्य, पंशून्यकेशून्य मंत्री मुनि श्री प्रेमचन्दजी मशून्य, प्रशून्यवशून्य श्री सौभाग्यमलजी मशून्य, उपाध्याय श्री हस्तीमलजो मशून्य श्रादि संतों के तथा प्रवर्तिनो श्री उज्जवकुमारीजी मशून्य पंजाब की विदुषो महासती श्री चंदाजी मशून्य आदि साध्वियों के प्रवचन प्रकाश में आये है । वास्तव में यह एक प्रशस्त परम्परा है और इससे अनेक जिज्ञासु जनों को अपने जीवन का उत्कर्ष सिद्ध करने में अवश्य सहायता मिली होगी । कइयों को विचारशोधन का भी अवसर मिला होगा। यह परम्परा जितनी अधिक अग्रसर हो कल्याणकर ही है। मगर एक बात ध्यान में रहनी चाहिए। आज हमारा देश और समाज शिक्षण एवं चिन्तन-मनन के क्षेत्र में अच्छी प्रगति कर चुका है और हमारे साहित्य का स्तर भी ऊंचा उठ रहा है। इस तथ्य को सामने रख कर ही प्रवचन साहित्य और इतर साहित्य अगर सामने आएगा तो वह स्पृहणीय होगा और उससे जैन समाज के गौरव की वृद्धि होगी। यह सत्य है कि मूलभूत तथ्य तो चिर पुरातन ही होंगे, मगर उन्हें अभिव्यक्त करते की शैली युगानुकूल गंभीर, प्रांजल और विशद होनी चाहिए और इसमें चिन्तन की गम्भीरता परिलक्षित होनी चाहिए। जितनी जल्दी हमारा ध्यान इस ओर आकृष्ट हो, उतना ही अच्छा । प्रस्तुत पुस्तक में अनेक विषयों पर विचार व्यक्त किये गये हैं। घौषध, समय का सदुपयोग, ज्ञान की उपासना, ब्रह्मचर्य, प्रार्थना का महत्व, सुपात्रदान महात्मय आदि विषयों के साथ ऋषभचरित्र तथा सुबाहुकुमार की सुप्रसद्धि कथा का भी इसमें समावेश है। आशा है सर्व साधारण पाठकों के लिए यह प्रवचन उपयोगी सिद्ध होंगे। ज्ञात हुआ है कि 'हीरक प्रवचन' के अगले भाग भी क्रमशः सम्पादित और प्रकाशित होने वाले हैं। भावों की समीचीनता एवं भाषा शुद्धि पर अधिक ध्यान देने से, आशा है अगले भाग और भी सुपाठ्य होंगे। इस साहित्य को पाठकों के समक्ष उपस्थित करने में जो जो महानुभाव निमित्त बने हैं, उनकी उदार भावना आदरणीय है। - शोभाचन्द्र भारिल्ल |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
खबर के अनुसार दरभंगा एयरपोर्ट इस मामले में ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर और छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को भी पीछे छोड़ दिया है। इस एयरपोर्ट से प्रतिदिन मुंबई, कोलकाता, पुणे, बंगलुरु, हैदराबाद के लिए एयर सेवा शुरू की गई हैं।
बता दें की अप्रैल के महीने में ही दरभंगा एयरपोर्ट से 320 फ्लाइट की लैंडिंग और टेकऑफ हो चुकी है। सबसे बड़ी बात यह है की दरभंगा एयरपोर्ट से 8 नवंबर 2020 से 22 मई 2021 के बीच 2,21,414 यात्रियों की आवाजाही दर्ज हुई है।
सूचना एवं जनसंपर्क सह जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने इस सन्दर्भ में जानकारी देते हुए कहा है की 16 से 22 मई के बीच यात्रियों की आवाजाही में दरभंगा एयरपोर्ट ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर और छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को भी पीछे छोड़ा हैं।
| खबर के अनुसार दरभंगा एयरपोर्ट इस मामले में ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर और छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को भी पीछे छोड़ दिया है। इस एयरपोर्ट से प्रतिदिन मुंबई, कोलकाता, पुणे, बंगलुरु, हैदराबाद के लिए एयर सेवा शुरू की गई हैं। बता दें की अप्रैल के महीने में ही दरभंगा एयरपोर्ट से तीन सौ बीस फ्लाइट की लैंडिंग और टेकऑफ हो चुकी है। सबसे बड़ी बात यह है की दरभंगा एयरपोर्ट से आठ नवंबर दो हज़ार बीस से बाईस मई दो हज़ार इक्कीस के बीच दो,इक्कीस,चार सौ चौदह यात्रियों की आवाजाही दर्ज हुई है। सूचना एवं जनसंपर्क सह जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा ने इस सन्दर्भ में जानकारी देते हुए कहा है की सोलह से बाईस मई के बीच यात्रियों की आवाजाही में दरभंगा एयरपोर्ट ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर और छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को भी पीछे छोड़ा हैं। |
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में शनिवार को रिक्टर पैमाने पर 4. 8 तीव्रता के भूकंप के झटके आए। हालांकि, इसका असर सिर्फ श्रीनगर शहर और आसपास के इलाकों में ही महसूस किया गया। मौसम विभाग के अधिकारियों ने कहा कि भूकंप अपराह्न 12. 02 बजे आया और इसका केंद्र जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में रहा।
मौसम विभाग के एक अधिकारी ने कहा, यह 34. 86 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 74. 06 डिग्री पूर्वी देशांतर पर आया। इसेस पहले, शुक्रवार को रिक्टर पैमाने पर 5. 4 तीव्रता वाला भूकंप जम्मू-कश्मीर में आाय था और इसका केंद्र लद्दाख-तिब्बत बॉर्डर था।
| श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में शनिवार को रिक्टर पैमाने पर चार. आठ तीव्रता के भूकंप के झटके आए। हालांकि, इसका असर सिर्फ श्रीनगर शहर और आसपास के इलाकों में ही महसूस किया गया। मौसम विभाग के अधिकारियों ने कहा कि भूकंप अपराह्न बारह. दो बजे आया और इसका केंद्र जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में रहा। मौसम विभाग के एक अधिकारी ने कहा, यह चौंतीस. छियासी डिग्री उत्तरी अक्षांश और चौहत्तर. छः डिग्री पूर्वी देशांतर पर आया। इसेस पहले, शुक्रवार को रिक्टर पैमाने पर पाँच. चार तीव्रता वाला भूकंप जम्मू-कश्मीर में आाय था और इसका केंद्र लद्दाख-तिब्बत बॉर्डर था। |
नई दिल्ली। किसान आंदोलन को लेकर आठ दिसंबर को भारत बंद के मद्देनजर मंगलवार को उस्मानिया यूनिवर्सिटी की सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। यूनिवर्सिटी ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि 9 दिसंबर से होने वाली परीक्षाएं अपने शेड्यूल के मुताबिक ही आयोजित की जाएंगी।
जल्द ही स्तगित हो गई परीक्षाओं का शेड्यूल स्टूडेंट्स के लिए जारी कर दिया जाएगा। उस्मानिया यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक का कहना है कि 8 दिसबर को शेड्यूल सभी परीक्षाओं को स्थगित किया जाता है। 9 दिसंबर को होने वाली परीक्षाएं अपने शेड्यूल के मुताबिक ही आयोजित की जाएंगी।
आपको बता दें कि भारत बंद के कारण पटना विश्वविद्यालय ने कई परीक्षाओं की तारीख में बदलाव किया है। मंगलवार और बुधवार को होने वाली पीजी सेमेस्टर टू, सेमेस्टर फोर, बीएड, बीलिब, एमलिब, वोकेशनल, सेल्फ फाइनेंस सहित कई परीक्षाओं को स्थगित कर दिया गया है।
| नई दिल्ली। किसान आंदोलन को लेकर आठ दिसंबर को भारत बंद के मद्देनजर मंगलवार को उस्मानिया यूनिवर्सिटी की सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। यूनिवर्सिटी ने एक आधिकारिक बयान में कहा है कि नौ दिसंबर से होने वाली परीक्षाएं अपने शेड्यूल के मुताबिक ही आयोजित की जाएंगी। जल्द ही स्तगित हो गई परीक्षाओं का शेड्यूल स्टूडेंट्स के लिए जारी कर दिया जाएगा। उस्मानिया यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक का कहना है कि आठ दिसबर को शेड्यूल सभी परीक्षाओं को स्थगित किया जाता है। नौ दिसंबर को होने वाली परीक्षाएं अपने शेड्यूल के मुताबिक ही आयोजित की जाएंगी। आपको बता दें कि भारत बंद के कारण पटना विश्वविद्यालय ने कई परीक्षाओं की तारीख में बदलाव किया है। मंगलवार और बुधवार को होने वाली पीजी सेमेस्टर टू, सेमेस्टर फोर, बीएड, बीलिब, एमलिब, वोकेशनल, सेल्फ फाइनेंस सहित कई परीक्षाओं को स्थगित कर दिया गया है। |
स्मार्टफ़ोन कंपनी विवो (Vivo) ने आज भारत में Vivo 20 Pro 5G को लॉन्च कर दिया है। डाइनामाइट न्यूज़ की इस रिपोर्ट में पढ़ें इसके शानदार फीचर्स और कीमत के बारे में।
नई दिल्लीः स्मार्टफ़ोन कंपनी विवो (Vivo) ने आज भारत में Vivo 20 Pro 5G को लॉन्च कर दिया है। बता दें कि Vivo V20 Pro 5G सबसे पतले 5G स्मार्टफोन्स में से एक है।
अगर इस फोन के फीचर की बात करें तो फोन में ड्यूल सेल्फी और ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। साथ ही स्नैपड्रैगन 765G प्रोसेसर है जो कि एक 5जी प्रोसेसर है। वहीं इसमें 8GB रैम और 128GB स्टोरेज है। Vivo V20 Pro 33वॉट की फास्ट चार्जिंग के साथ आता है।
बता दें कि इस फ़ोन की सेल आज से ही शुरू है। वहीं कीमत कंपनी ने 29,990 रुपए रखी गई है। इस फोन को इसी साल सितंबर में Vivo V20 के साथ थाईलैंड में लॉन्च किया गया था।
| स्मार्टफ़ोन कंपनी विवो ने आज भारत में Vivo बीस Pro पाँचG को लॉन्च कर दिया है। डाइनामाइट न्यूज़ की इस रिपोर्ट में पढ़ें इसके शानदार फीचर्स और कीमत के बारे में। नई दिल्लीः स्मार्टफ़ोन कंपनी विवो ने आज भारत में Vivo बीस Pro पाँचG को लॉन्च कर दिया है। बता दें कि Vivo Vबीस Pro पाँचG सबसे पतले पाँचG स्मार्टफोन्स में से एक है। अगर इस फोन के फीचर की बात करें तो फोन में ड्यूल सेल्फी और ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप दिया गया है। साथ ही स्नैपड्रैगन सात सौ पैंसठG प्रोसेसर है जो कि एक पाँचजी प्रोसेसर है। वहीं इसमें आठGB रैम और एक सौ अट्ठाईसGB स्टोरेज है। Vivo Vबीस Pro तैंतीसवॉट की फास्ट चार्जिंग के साथ आता है। बता दें कि इस फ़ोन की सेल आज से ही शुरू है। वहीं कीमत कंपनी ने उनतीस,नौ सौ नब्बे रुपयापए रखी गई है। इस फोन को इसी साल सितंबर में Vivo Vबीस के साथ थाईलैंड में लॉन्च किया गया था। |
अगर आप बालकनी या फिर बाथरूम के फर्श पर कपड़े धोते हैं तो इस पर साबुन का पानी जमा हो जाता है, जो नियमित सफाई के बावजूद साफ नहीं हो पता है। इस कारण फर्श काफी गंदा और बदरंग नजर आता है। यही नहीं, इससे फिसलने का भी डर बना रहता है। आइए आज हम आपको कुछ ऐसी असरदार टिप्स देते हैं, जिन्हें अपनाकर आप फर्श पर जमे साबुन के पानी को आसानी से साफ कर सकते हैं।
अगर आपके पास सीक वाली झाड़ू है तो आप इसके इस्तेमाल फर्श पर जमे साबुन के पानी को आसानी से साफ कर सकते हैं। बेशक वाइपर और पोंछे से भी यह काम किया जा सकता है, लेकिन इनसे जिद्दी दाग नहीं हटेंगे। इसके लिए सबसे पहले फर्श पर फिनाइल वाला पानी डालें और फिर इस पर सीक वाली झाड़ू अच्छे से फेरें। इससे न सिर्फ फर्श की गंदगी साफ होगी बल्कि इसकी चिकनाहट भी कम होने लगेगी।
फर्श पर जमे साबुन के पानी को साफ करने में सिरका भी आपके बेहद काम आ सकता है। इसके लिए पहले एक बाल्टी पानी में एक कप सिरका डालकर अच्छे से मिलाएं। अब इस मिश्रण को स्पंज या फ्लैट क्लॉथ मॉप पर डालकर फर्श की सफाई करें। अगर आप चाहें को इस मिश्रण का इस्तेमाल एक लंबे हैंडल वाले मॉप के साथ भी कर सकते हैं। सिरका आपके फर्श पर चमक लाएगा और फिसलन को भी कम करेगा।
फर्श पर जमे साबुन के पानी को साफ करने के लिए आप बेकिंग सोडा का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आपको चिकने दागों से प्रभावित फर्श के हिस्से पर बेकिंग सोडे का छिड़काव करें और उसे 5-10 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें और फिर एक कपड़े को गर्म पानी में डूबोकर उससे फर्श को पोंछ लें। ऐसा करने से फर्श की फिसलन आसानी से दूर हो जाएगी।
| अगर आप बालकनी या फिर बाथरूम के फर्श पर कपड़े धोते हैं तो इस पर साबुन का पानी जमा हो जाता है, जो नियमित सफाई के बावजूद साफ नहीं हो पता है। इस कारण फर्श काफी गंदा और बदरंग नजर आता है। यही नहीं, इससे फिसलने का भी डर बना रहता है। आइए आज हम आपको कुछ ऐसी असरदार टिप्स देते हैं, जिन्हें अपनाकर आप फर्श पर जमे साबुन के पानी को आसानी से साफ कर सकते हैं। अगर आपके पास सीक वाली झाड़ू है तो आप इसके इस्तेमाल फर्श पर जमे साबुन के पानी को आसानी से साफ कर सकते हैं। बेशक वाइपर और पोंछे से भी यह काम किया जा सकता है, लेकिन इनसे जिद्दी दाग नहीं हटेंगे। इसके लिए सबसे पहले फर्श पर फिनाइल वाला पानी डालें और फिर इस पर सीक वाली झाड़ू अच्छे से फेरें। इससे न सिर्फ फर्श की गंदगी साफ होगी बल्कि इसकी चिकनाहट भी कम होने लगेगी। फर्श पर जमे साबुन के पानी को साफ करने में सिरका भी आपके बेहद काम आ सकता है। इसके लिए पहले एक बाल्टी पानी में एक कप सिरका डालकर अच्छे से मिलाएं। अब इस मिश्रण को स्पंज या फ्लैट क्लॉथ मॉप पर डालकर फर्श की सफाई करें। अगर आप चाहें को इस मिश्रण का इस्तेमाल एक लंबे हैंडल वाले मॉप के साथ भी कर सकते हैं। सिरका आपके फर्श पर चमक लाएगा और फिसलन को भी कम करेगा। फर्श पर जमे साबुन के पानी को साफ करने के लिए आप बेकिंग सोडा का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए आपको चिकने दागों से प्रभावित फर्श के हिस्से पर बेकिंग सोडे का छिड़काव करें और उसे पाँच-दस मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें और फिर एक कपड़े को गर्म पानी में डूबोकर उससे फर्श को पोंछ लें। ऐसा करने से फर्श की फिसलन आसानी से दूर हो जाएगी। |
कितने ही मनुष्य अपने प्रियंवद मित्रों की अपेक्षा अपने कड़े शत्रुओं के अधिकतर कृतज्ञ होते हैं; क्योंकि शत्रुओं के मुख से तो उन को सत्य के श्रवण करने का अवसर प्रायः मिल भी जाता है, परन्तु मित्रों के मुख से कदापि नहीं मिलता । सारांश यह है कि मनुष्यों की रुचि और अरुचि प्रायः अयोग्य विषयों में हुआ करती है। उपदेश को अरुचिकर और अधर्म को रुचिकर समझते हैं। परन्तु वास्तव में इस का प्रतिकूल व्यवहार ही श्रेयस्कर है।
उपदेश का देना और ग्रहण करना भी सच्ची मिलता के वास्तविक अंग हैं। उपदेशक का धर्म है कि जो उपदेश दे वह निर्भय होकर स्वाधीनत पूर्वक दे, परन्तु कठोरता और निष्ठुरता का प्रयोग कदापि न करे। इसी प्रकार ग्रहण करनेवाले क कर्तव्य यह है कि मित्र के उपदेश को शहनशीलत और शान्तभाव के साथ ही ग्रहण करे, यो किंचिन्मात्र भी अनिच्छा और अरुचि प्रगट : करे । चाटुभाषण और मिथ्या प्रशंसा मैत्री के लिये सब से बढकर हानिकारक हैं। में इस विषय के विस्तारपूर्वक इसलिये वर्णन करता हूं कि कितने | कितने ही मनुष्य अपने प्रियंवद मित्रों की अपेक्षा अपने कड़े शत्रुओं के अधिकतर कृतज्ञ होते हैं; क्योंकि शत्रुओं के मुख से तो उन को सत्य के श्रवण करने का अवसर प्रायः मिल भी जाता है, परन्तु मित्रों के मुख से कदापि नहीं मिलता । सारांश यह है कि मनुष्यों की रुचि और अरुचि प्रायः अयोग्य विषयों में हुआ करती है। उपदेश को अरुचिकर और अधर्म को रुचिकर समझते हैं। परन्तु वास्तव में इस का प्रतिकूल व्यवहार ही श्रेयस्कर है। उपदेश का देना और ग्रहण करना भी सच्ची मिलता के वास्तविक अंग हैं। उपदेशक का धर्म है कि जो उपदेश दे वह निर्भय होकर स्वाधीनत पूर्वक दे, परन्तु कठोरता और निष्ठुरता का प्रयोग कदापि न करे। इसी प्रकार ग्रहण करनेवाले क कर्तव्य यह है कि मित्र के उपदेश को शहनशीलत और शान्तभाव के साथ ही ग्रहण करे, यो किंचिन्मात्र भी अनिच्छा और अरुचि प्रगट : करे । चाटुभाषण और मिथ्या प्रशंसा मैत्री के लिये सब से बढकर हानिकारक हैं। में इस विषय के विस्तारपूर्वक इसलिये वर्णन करता हूं कि कितने |
Sinking Joshimath: उत्तराखंड (Uttarakhand) के जोशीमठ (Joshimath) को बचाने के लिए प्रदेश सरकार, विपक्ष, राज्य और केंद्र सरकार की सभी एजेंसियां जुट गई हैं। रविवार को प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) के प्रधान सचिव पीके मिश्रा (Principal Secretary to Prime Minister PK Mishra) की ओर से जोशीमठ की स्थिति को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की गई है।
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक के दौरान उत्तराखंड के मुख्य सचिव ने जोशीमठ से पीएओ को जानकारी दी। वहीं सीमा प्रबंधन सचिव और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य सोमवार को उत्तराखंड का दौरा करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी के प्रधान सचिव पीके मिश्रा को जोशीमठ समीक्षा बैठक में बताया गया कि भारत सरकार की एजेंसियां, विशेषज्ञ समेत अन्य पक्ष राज्य सरकार की सहायता कर रहे हैं। एनडीआरएफ की एक टीम और एसडीआरएफ की चार टीमें पहले ही जोशीमठ पहुंच चुकी हैं।
Team of experts from National Disaster Mgmt Authority, National Institute of Disaster Mgmt, Geological Survey of India, IIT Roorkee, Wadia Institute of Himalayan Geology, National Institute of Hydrology & Central Building Research Institute to study & give recommendations.
इस बैठक के बाद तय हुआ है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, आईआईटी रुड़की, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी एंड सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों की टीमें अध्ययन के बाद अपनी सिफारिशें देंगी।
इसके अलावा उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने बताया कि जोशीमठ के अस्तित्व, निवासियों के जीवन और आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है। हम उनके साथ खड़े हैं। इसके अलावा हम इस चुनौती में सरकार और मुख्यमंत्री के साथ हैं। इसमें थोड़ी देरी हुई है, लेकिन अगर हम तत्परता से काम करते हैं और केंद्र अपनी पूरी ताकत लगाता है तो निश्चित तौर पर सफलता मिलेगी। जोशीमठ को बचाना राष्ट्रीय मिशन होना चाहिए।
रावत ने बताया कि यदि विशेषज्ञ कहते हैं कि सुरंग या अन्य कारक इसके कारण हैं, तो उन्हें तत्काल रोका जाना चाहिए। चीजों को नए सिरे से उठाया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों की समिति बनाई जानी चाहिए और सभी के साथ निरंतर परामर्श से सुधार किया जाना चाहिए।
उत्तराखंड मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बताया गया है कि पीएम मोदी ने सीएम पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात की है। प्रभावित लोगों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए उठाए गए कदमों और समस्या के समाधान के लिए तत्काल और दीर्घकालिक कार्य योजना की प्रगति के बारे में जानकारी ली।
कार्यालय की ओर से बताया गया है कि प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से जोशीमठ की स्थिति और सरकार की ओर से किए जा रहे सुरक्षा कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। साथ ही जोशीमठ को बचाने के लिए हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।
| Sinking Joshimath: उत्तराखंड के जोशीमठ को बचाने के लिए प्रदेश सरकार, विपक्ष, राज्य और केंद्र सरकार की सभी एजेंसियां जुट गई हैं। रविवार को प्रधानमंत्री मोदी के प्रधान सचिव पीके मिश्रा की ओर से जोशीमठ की स्थिति को लेकर एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की गई है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक के दौरान उत्तराखंड के मुख्य सचिव ने जोशीमठ से पीएओ को जानकारी दी। वहीं सीमा प्रबंधन सचिव और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य सोमवार को उत्तराखंड का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के प्रधान सचिव पीके मिश्रा को जोशीमठ समीक्षा बैठक में बताया गया कि भारत सरकार की एजेंसियां, विशेषज्ञ समेत अन्य पक्ष राज्य सरकार की सहायता कर रहे हैं। एनडीआरएफ की एक टीम और एसडीआरएफ की चार टीमें पहले ही जोशीमठ पहुंच चुकी हैं। Team of experts from National Disaster Mgmt Authority, National Institute of Disaster Mgmt, Geological Survey of India, IIT Roorkee, Wadia Institute of Himalayan Geology, National Institute of Hydrology & Central Building Research Institute to study & give recommendations. इस बैठक के बाद तय हुआ है कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण, आईआईटी रुड़की, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी एंड सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों की टीमें अध्ययन के बाद अपनी सिफारिशें देंगी। इसके अलावा उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने बताया कि जोशीमठ के अस्तित्व, निवासियों के जीवन और आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है। हम उनके साथ खड़े हैं। इसके अलावा हम इस चुनौती में सरकार और मुख्यमंत्री के साथ हैं। इसमें थोड़ी देरी हुई है, लेकिन अगर हम तत्परता से काम करते हैं और केंद्र अपनी पूरी ताकत लगाता है तो निश्चित तौर पर सफलता मिलेगी। जोशीमठ को बचाना राष्ट्रीय मिशन होना चाहिए। रावत ने बताया कि यदि विशेषज्ञ कहते हैं कि सुरंग या अन्य कारक इसके कारण हैं, तो उन्हें तत्काल रोका जाना चाहिए। चीजों को नए सिरे से उठाया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों की समिति बनाई जानी चाहिए और सभी के साथ निरंतर परामर्श से सुधार किया जाना चाहिए। उत्तराखंड मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बताया गया है कि पीएम मोदी ने सीएम पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात की है। प्रभावित लोगों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए उठाए गए कदमों और समस्या के समाधान के लिए तत्काल और दीर्घकालिक कार्य योजना की प्रगति के बारे में जानकारी ली। कार्यालय की ओर से बताया गया है कि प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से जोशीमठ की स्थिति और सरकार की ओर से किए जा रहे सुरक्षा कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। साथ ही जोशीमठ को बचाने के लिए हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। |
"जल्दी इधर आओ, देखो न्यूज पर क्या चल रहा है"
उसे मार देना कोई उपाय नहीं है क्योंकि दुश्मन अरविंद नहीं "द टूथ ओफ डेविल " है जब तक इसका कुछ नहीं होगा शैतान फिर आयेगा!!!
उसने दूसरी गोली मार दी और अरविंद को इंजेक्शन लगाकर वहाँ से ले जाने लगा और कहा - "मैं जानता हूँ कि तुम मुझसे कहीं ज्यादा ताकतवर हो और... "
वो सामने देखता है वहाँ एक पूरी आर्मी खङी थी "ये कुछ ठीक नहीं है ,लगता है सब को इससे बदला लेना है "
आदित्य अजीब सा चेहरा बनाकर उसकी तरफ देखता है और सोचता है "कहीं तो इसे देखा है"
गुस्से से चिल्लाते हुए " तुमने मुझे पहचाना नहीं ,लारा!! लारा!! "
"क्या!!! तुम तो बङी हो गयी"
लारा- वो सब छोङो रितु कहाँ है?
लारा-"वो अब एक ए.आइ. हैं"
| "जल्दी इधर आओ, देखो न्यूज पर क्या चल रहा है" उसे मार देना कोई उपाय नहीं है क्योंकि दुश्मन अरविंद नहीं "द टूथ ओफ डेविल " है जब तक इसका कुछ नहीं होगा शैतान फिर आयेगा!!! उसने दूसरी गोली मार दी और अरविंद को इंजेक्शन लगाकर वहाँ से ले जाने लगा और कहा - "मैं जानता हूँ कि तुम मुझसे कहीं ज्यादा ताकतवर हो और... " वो सामने देखता है वहाँ एक पूरी आर्मी खङी थी "ये कुछ ठीक नहीं है ,लगता है सब को इससे बदला लेना है " आदित्य अजीब सा चेहरा बनाकर उसकी तरफ देखता है और सोचता है "कहीं तो इसे देखा है" गुस्से से चिल्लाते हुए " तुमने मुझे पहचाना नहीं ,लारा!! लारा!! " "क्या!!! तुम तो बङी हो गयी" लारा- वो सब छोङो रितु कहाँ है? लारा-"वो अब एक ए.आइ. हैं" |
व्यायाम की आयुर्वेद में बड़ी तारीफ़ की गयी है। कहा जाता है कि व्यायाम करने वालो को कोई भी बीमारी इतनी आसानी से नहीं जकड़ सकती है।
इसे करने से तीनो दोष यानी वात, पित्त और कफ का संतुलन बना रहता है लेकिन व्यायाम करने के भी कुछ नियम है।
आचार्य जी कहते है, हमेशा व्यायाम करने से पहले मालिश करनी चाहिए। तेज शरीर में अच्छी तरफ प्रवेश कर जाए ताकि शरीर पुष्ट हो सके।
व्यायाम से कार्य शक्ति बढ़ती है, शरीर बलवान हो जाता है, पाचन शक्ति अच्छी हो जाती है। मनुष्य भारी से भारी कार्य कर सकता है।
उचित मात्रा में रोज़ व्यायाम उचित है क्यूंकि वो शक्ति को बढ़ा देता है। आचार्य जी कहते है कि जबरदस्ती व्यायाम नहीं करना चाहिए।
जितनी आपकी सहन शक्ति है उतना ही व्यायाम करें। अगर आप अधिक व्यायाम करते है तो आपको खूब प्यास लगेगी और दमे की समस्या हो सकती है।
आपको बुखार आ सकता है। मांसपेशियां टूट सकती है। इसलिए व्यायाम करते समय सावधानी रखे। आहार का भी संतुलन बनाना चाहिए।
| व्यायाम की आयुर्वेद में बड़ी तारीफ़ की गयी है। कहा जाता है कि व्यायाम करने वालो को कोई भी बीमारी इतनी आसानी से नहीं जकड़ सकती है। इसे करने से तीनो दोष यानी वात, पित्त और कफ का संतुलन बना रहता है लेकिन व्यायाम करने के भी कुछ नियम है। आचार्य जी कहते है, हमेशा व्यायाम करने से पहले मालिश करनी चाहिए। तेज शरीर में अच्छी तरफ प्रवेश कर जाए ताकि शरीर पुष्ट हो सके। व्यायाम से कार्य शक्ति बढ़ती है, शरीर बलवान हो जाता है, पाचन शक्ति अच्छी हो जाती है। मनुष्य भारी से भारी कार्य कर सकता है। उचित मात्रा में रोज़ व्यायाम उचित है क्यूंकि वो शक्ति को बढ़ा देता है। आचार्य जी कहते है कि जबरदस्ती व्यायाम नहीं करना चाहिए। जितनी आपकी सहन शक्ति है उतना ही व्यायाम करें। अगर आप अधिक व्यायाम करते है तो आपको खूब प्यास लगेगी और दमे की समस्या हो सकती है। आपको बुखार आ सकता है। मांसपेशियां टूट सकती है। इसलिए व्यायाम करते समय सावधानी रखे। आहार का भी संतुलन बनाना चाहिए। |
जयपुर, [नरेन्द्र शर्मा]। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार से जाटों की नाराजगी ने कांग्रेस आलाकमान की चिंता बढ़ा दी है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी सहित अन्य आला नेता जाटों को खुश करने की पूरी कोशिश कर चुके, लेकिन जाट समाज की गहलोत सरकार से नाराजगी दूर नहीं हो पा रही। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमण्डल में हुए फेरबदल में 85 वर्षीय शीशराम ओला को कैबिनेट मंत्री बनाने के बावजूद भी जाटों की नाराजगी दूर नहीं होती देखकर अब पार्टी आलाकमान ने हरियाणा के दिग्गज जाट नेता चौधरी वीरेन्द्र सिंह को राजस्थान विधानसभा चुनाव अभियान की जिम्मेदारी सौंपना तय किया गया है।
वीरेन्द्र सिंह का जाट समाज में प्रभाव माना जाता है, उनके नाना सर छोटू राम का राजस्थान, हरियाणा सहित आसपास के जाट समाज में काफी सम्मान था। जाटों में प्रभाव को देखते हुए ही कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें पिछले विधानसभा चुनाव में राजस्थान के उम्मीदवार तय करने वाली छानबीन समिति का सदस्य बनाया था। राजस्थान के जाट समाज में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रति नाराजगी कम करने को लेकर कांग्रेस ने पिछले कुछ माह से प्रयास तेज किए है। इसके तहत राज्य के वरिष्ठ नेता शीशराम ओला को केन्द्रीय मंत्री बनाया गया, वहीं सांसद हरीश चौधरी को कांग्रेस का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया।
वहीं जाटों में संदेश देने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पिछले सप्ताह अपनी राजस्थान यात्रा के दौरान वीरेन्द्र सिंह को साथ लेकर आई और उनकी यहां तारीफ भी की। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रभान एवं राज्य के प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव गुरदास कामत को इस बात की जानकारी दे दी है कि वीरेन्द्र सिंह को इस साल के अंत में होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव के अभियान से जोड़ा जाएगा, उनकी अगुवाई में चुनाव अभियान समिति बनाकर वरिष्ठ नेताओं को उसमें जोड़ा जाएगा।
गौरतलब है कि राज्य का जाट समाज गहलोत से काफी समय से नाराज है, हालांकि गहलोत ने जाटों की नाराजगी दूर करने के काफी प्रयास किए, लेकिन उन्हें अब तक सफलता नहीं मिल पा रही है। प्रदेश के दिग्गज जाट नेता स्व.परसराम मदेरणा के बेटे पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा के सीडी कांड को भी जाट समाज गहलोत के इशारे पर हुआ मामला मान रहा है। इसके अतिरिक्त कांग्रेसी जाट विधायक कर्नल सोनाराम, पूर्व मंत्री राजेन्द्र चौधरी खुलकर गहलोत की मुखालफत में लगे है, इन नेताओं ने आलाकमान को साफ कहा कि जाट अभी कांग्रेस के साथ नहीं है। दो दिन पहले जयपुर में हुई प्रदेश कांग्रेस की बैठक में राष्ट्रीय महासचिव गुरदास कामत, सी.पी.जोशी, मोहन प्रकाश, मुख्यमंत्री के सामने कर्नल सोनाराम सहित कई जाट नेताओं ने मौजूदा व्यवस्था की खुलकर आलोचना की।
| जयपुर, [नरेन्द्र शर्मा]। राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार से जाटों की नाराजगी ने कांग्रेस आलाकमान की चिंता बढ़ा दी है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी सहित अन्य आला नेता जाटों को खुश करने की पूरी कोशिश कर चुके, लेकिन जाट समाज की गहलोत सरकार से नाराजगी दूर नहीं हो पा रही। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमण्डल में हुए फेरबदल में पचासी वर्षीय शीशराम ओला को कैबिनेट मंत्री बनाने के बावजूद भी जाटों की नाराजगी दूर नहीं होती देखकर अब पार्टी आलाकमान ने हरियाणा के दिग्गज जाट नेता चौधरी वीरेन्द्र सिंह को राजस्थान विधानसभा चुनाव अभियान की जिम्मेदारी सौंपना तय किया गया है। वीरेन्द्र सिंह का जाट समाज में प्रभाव माना जाता है, उनके नाना सर छोटू राम का राजस्थान, हरियाणा सहित आसपास के जाट समाज में काफी सम्मान था। जाटों में प्रभाव को देखते हुए ही कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें पिछले विधानसभा चुनाव में राजस्थान के उम्मीदवार तय करने वाली छानबीन समिति का सदस्य बनाया था। राजस्थान के जाट समाज में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रति नाराजगी कम करने को लेकर कांग्रेस ने पिछले कुछ माह से प्रयास तेज किए है। इसके तहत राज्य के वरिष्ठ नेता शीशराम ओला को केन्द्रीय मंत्री बनाया गया, वहीं सांसद हरीश चौधरी को कांग्रेस का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। वहीं जाटों में संदेश देने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पिछले सप्ताह अपनी राजस्थान यात्रा के दौरान वीरेन्द्र सिंह को साथ लेकर आई और उनकी यहां तारीफ भी की। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चंद्रभान एवं राज्य के प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव गुरदास कामत को इस बात की जानकारी दे दी है कि वीरेन्द्र सिंह को इस साल के अंत में होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव के अभियान से जोड़ा जाएगा, उनकी अगुवाई में चुनाव अभियान समिति बनाकर वरिष्ठ नेताओं को उसमें जोड़ा जाएगा। गौरतलब है कि राज्य का जाट समाज गहलोत से काफी समय से नाराज है, हालांकि गहलोत ने जाटों की नाराजगी दूर करने के काफी प्रयास किए, लेकिन उन्हें अब तक सफलता नहीं मिल पा रही है। प्रदेश के दिग्गज जाट नेता स्व.परसराम मदेरणा के बेटे पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा के सीडी कांड को भी जाट समाज गहलोत के इशारे पर हुआ मामला मान रहा है। इसके अतिरिक्त कांग्रेसी जाट विधायक कर्नल सोनाराम, पूर्व मंत्री राजेन्द्र चौधरी खुलकर गहलोत की मुखालफत में लगे है, इन नेताओं ने आलाकमान को साफ कहा कि जाट अभी कांग्रेस के साथ नहीं है। दो दिन पहले जयपुर में हुई प्रदेश कांग्रेस की बैठक में राष्ट्रीय महासचिव गुरदास कामत, सी.पी.जोशी, मोहन प्रकाश, मुख्यमंत्री के सामने कर्नल सोनाराम सहित कई जाट नेताओं ने मौजूदा व्यवस्था की खुलकर आलोचना की। |
Ajinkya Rahane Wife Heart Touching Post WTC Final 2023 विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच में भारतीय टीम की स्थिति खराब नजर आ रही है। ऑस्ट्रलियाई टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए 469 रन पर सिमट गई थी। इसके जवाब में भारतीय टीम ने पहली पारी में 296 रन बनाए।
नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। Ajinkya Rahane Wife Heart touching Post WTC Final 2023। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच में भारतीय टीम की स्थिति खराब नजर आ रही है। ऑस्ट्रलियाई टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए 469 रन पर सिमट गई थी। इसके जवाब में भारतीय टीम ने पहली पारी में 296 रन पर ढेर हो गई। टीम इंडिया की तरफ से अंजिंक्य रहाणे ने कमाल का प्रदर्शन किया।
18 महीने बाद टेस्ट टीम में वापसी करने वाले अजिंक्य रहाणे की पहली पारी के दौरान उंगली में चोट लग गई थी। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने बल्लेबाजी करना नहीं छोड़ा और 89 रनों की अहम पारी खेली। रहाणे के इस जज्बे को सिर्फ साथी खिलाड़ी, फैंस ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी राधा रहाणे ने भी सराहा।
दरअसल, अजिंक्य रहाणे (Ajinkya Rahane) ने पहली पारी में भारतीय टीम की तरफ से शार्दुल ठाकुर के साथ मिलकर 7वें विकेट के लिए 109 रन की साझेदारी की। रहाणे ने शार्दुल के साथ मिलकर टीम इंडिया को फॉलोओन खेलने से बचा लिया।
पहली पारी के दौरान पैट कमिंस (Pat Cummins) की एक गेंद सीधा उनके अंगूठे में भी लगी थी और वह दर्द से जूझते हुए नजर आए, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। उनके इस जज्बे को न केवल टीम इंडिया के साथी खिलाड़ियों ने सराहा, बल्कि उनकी पत्नी राधिका धोपावकर ने भी उन्हें सलाम किया।
रहाणे की इस पारी को लेकर उनकी पत्नी राधिका धोपावकर (Radhika Dhopavkar) ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर तस्वीरें शेयर की है और मुश्किल परिस्थितियों में खेली गई रहाणे की इस पारी की जमकर सराहना की। उन्होंने चोटिल अंगूठे के साथ रहाणे की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा,
'आपकी उंगली सूजी हुई थी, लेकिन इसके बावजूद, आपने अपनी मानसिकता में कमी नहीं आने दी और इसलिए स्कैन करने से भी मना कर दिया। आपका ये जज्बा देख हर कोई आपसे इंप्रेस हो गया है। लव यू हमेशा के लिए। '
| Ajinkya Rahane Wife Heart Touching Post WTC Final दो हज़ार तेईस विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच में भारतीय टीम की स्थिति खराब नजर आ रही है। ऑस्ट्रलियाई टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए चार सौ उनहत्तर रन पर सिमट गई थी। इसके जवाब में भारतीय टीम ने पहली पारी में दो सौ छियानवे रन बनाए। नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। Ajinkya Rahane Wife Heart touching Post WTC Final दो हज़ार तेईस। विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल मैच में भारतीय टीम की स्थिति खराब नजर आ रही है। ऑस्ट्रलियाई टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए चार सौ उनहत्तर रन पर सिमट गई थी। इसके जवाब में भारतीय टीम ने पहली पारी में दो सौ छियानवे रन पर ढेर हो गई। टीम इंडिया की तरफ से अंजिंक्य रहाणे ने कमाल का प्रदर्शन किया। अट्ठारह महीने बाद टेस्ट टीम में वापसी करने वाले अजिंक्य रहाणे की पहली पारी के दौरान उंगली में चोट लग गई थी। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने बल्लेबाजी करना नहीं छोड़ा और नवासी रनों की अहम पारी खेली। रहाणे के इस जज्बे को सिर्फ साथी खिलाड़ी, फैंस ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी राधा रहाणे ने भी सराहा। दरअसल, अजिंक्य रहाणे ने पहली पारी में भारतीय टीम की तरफ से शार्दुल ठाकुर के साथ मिलकर सातवें विकेट के लिए एक सौ नौ रन की साझेदारी की। रहाणे ने शार्दुल के साथ मिलकर टीम इंडिया को फॉलोओन खेलने से बचा लिया। पहली पारी के दौरान पैट कमिंस की एक गेंद सीधा उनके अंगूठे में भी लगी थी और वह दर्द से जूझते हुए नजर आए, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। उनके इस जज्बे को न केवल टीम इंडिया के साथी खिलाड़ियों ने सराहा, बल्कि उनकी पत्नी राधिका धोपावकर ने भी उन्हें सलाम किया। रहाणे की इस पारी को लेकर उनकी पत्नी राधिका धोपावकर ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम अकाउंट पर तस्वीरें शेयर की है और मुश्किल परिस्थितियों में खेली गई रहाणे की इस पारी की जमकर सराहना की। उन्होंने चोटिल अंगूठे के साथ रहाणे की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, 'आपकी उंगली सूजी हुई थी, लेकिन इसके बावजूद, आपने अपनी मानसिकता में कमी नहीं आने दी और इसलिए स्कैन करने से भी मना कर दिया। आपका ये जज्बा देख हर कोई आपसे इंप्रेस हो गया है। लव यू हमेशा के लिए। ' |
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Wifi Tricks For User: आपने देखा होगा कि कई बार Wifi में कोई प्रॉब्लम न होने के बावजूद यह प्रॉब्लम करने लगता है। ऐसे में वाईफाई यूजर्स को काफी परेशानी होने लगती है। जब ऐसा होता है तो आप समझ नहीं पाते हैं कि समस्या क्या है और आप परेशान होते रहते हैं।
इतना ही नहीं आप कई बार सर्विस भी बदलते हैं और नई सर्विस में भी काफी पैसा खर्च करते हैं। अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि ऐसा क्यों होता है और आप इस समस्या को कैसे ठीक कर सकते हैं।
वाईफाई के लिए सिग्नल में उतार-चढ़ाव एक आम समस्या है लेकिन अगर यह समस्या बनी रहती है तो इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि वाईफाई का पासवर्ड हैक हो गया है। ऐसे में आपको सबसे पहले वाईफाई को रीसेट करना चाहिए और उसका पासवर्ड बदल लेना चाहिए।
अगर आपके वाईफाई की नेटवर्क स्ट्रेंथ कम हो जाती है तो हो सकता है कि किसी ने आपके वाईफाई को हैक कर लिया हो और ऐसे में आपको सबसे पहले वाईफाई रीसेट करने और पासवर्ड को और मजबूत बनाने के लिए ऐप की मदद की जरूरत है।
अगर आपके घर में लगे वाईफाई के सिग्नल पूरी तरह से डेड हो गए हैं तो इस बात की काफी संभावना है कि आपका वाईफाई हैक हो गया है। अगर कस्टमर केयर भी इस समस्या को ठीक करने में असमर्थ है, तो पहले आप वाईफाई को बंद करें, फिर आप इसे रीसेट करें और पासवर्ड बदलें।
कई बार जब आपके वाईफाई की बिजली गुल होने लगती है और आपको इसकी सही वजह का पता नहीं होता है तो इस बात की काफी संभावना होती है कि वाईफाई हैक हो गया हो। ऐसे में आपको कस्टमर केयर की मदद लेनी चाहिए।
विशेषज्ञों ने खुलासा किया कि आधुनिक वाईफ़ाई दो फ्रीक्वेंसी, 2. 4Ghz और 5. 0Ghz पर काम करता है। 2. 4GHz थोड़ा धीमा है लेकिन लंबी दूरी पर बेहतर प्रदर्शन करता है और दीवारों से अधिक आसानी से गुजरता है। जबकि फ्रीक्वेंसी को आमतौर पर ऑटोमैटिक रूप से चुना जाता है, कभी-कभी यह गलत हो जाता है, इसलिए यह देखने के लायक है कि आपके घर के लिए सही फ्रीक्वेंसी चुनी गई है या नहीं।
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अयोध्याकाण्डे सर्गः ३१.
हो, धोरज धरने वालेहो, अच्छे मार्ग पर चलने वालेहो, और मुझे अपने प्राणोंकी समान प्यारेहो, मेरे वंश में हो और मेरे सखाहो ॥ १० ॥ हे सौमित्रे ! तुमभी यदि आज हमारे साथ वनको चलोगे तब फिर यशस्विनी जननी कौशल्या व सुमित्राजीके प्रति पालन करनेका भार कौन अपने शिर लेगा ॥ ११ ॥ जैसेकि पृथ्वीसे भाफ निकलती है, उससे मेघ वनते हैं, फिर उसी पृथ्वी पर वह वर्षा करते हैं, वैसेही महा तेजवान नरनाथ कामके दास वशहो कैकेयीके ऊपर आसक्त हुए हैं इस कारण जो कैकेयी कहेंगी पिताजी वही करेंगे फिर हमारी माताओंकी कामना कैसे पूर्णहोगी ? अर्थात् इनकी कौन खवर लेगा ॥ १२ ॥ कैकय राज नन्दिनि कैकेयी यह राज्य जब पालेगी तब महा दुःखित कौशल्यादि सपत्नियोंके साथ बुराईके अतिरिक्त भलाई न करेंगी । और हमारो माताओंको महाकेश मिलेगा ॥ १३ ॥ जब भरत राज्य पालेंगे तब वह निश्चयही अपनी माता कैकेयीके वशहो जननी कौशल्या व सुमित्रा को सम्पूर्ण भूल जांयेंगे । भला फिर इन विचारियोंकी कौन खबर लेगा ? ॥ १४ ॥ हे भइया ! तुमसे इसीकारणसे कहताहूं कि तुम स्वयं या राजाके अनुग्रहसे, जिस प्रकार सेमीही यहाँ रहकर माता ओंका भरण पोपण करो, हेभाई! यह मेरा वचन तुमको पूरा करना उचित है ॥ १५ ॥ हे धर्मज्ञ ! इस प्रकारका कार्य करनेसे मेरे प्रति तुम्हारी परम भक्ति प्र काशित होगी, जान रक्खोकि माता पिता गुरु जनोंकी सेवा करनेसे विशेष धर्म लाभ होता है ॥ १६ ॥ हे वत्स ! तुम हमारे कहनेसे हमारी माता ओंके लालन पालन करनेका भार ग्रहणकरो, यदि हमभी उनका कुछ ध्यान न कर उनको छोड वनको चले जांयगे तब फिर उनके दुःखकी सीमा नहीं रहेगी ॥ १७ ॥ वाक्य विशारद रामचंद्रजीने जब इस प्रकार मधुर वचन लक्ष्मणजीसे कहे तब चतुर लक्ष्मणजी विनीत भावसे रामचंद्रजीसे बोले ॥ १८ ॥ आर्य । भरतजी आपके प्रतापसे प्रकम्पि ! तहो सदाही माता कौशल्या और सुमित्राका प्रतिपालन करेंगे यह निश्चय है इसमें किसी प्रकारका सन्देह नहीं है ॥ १९ ॥ यदि भरतजी यह राज्य पाकर खोटे रस्तेपर चलें यदि भरत खोटी मति करकै गर्वके वशीभूतही कौशल्या व सुमित्रा मातांकी रक्षा व सेवा न क( २९६ )
रैं ॥ २० ॥ तो मैं उस नीचाशय क्रूरका प्राण अवश्यही संहार करूंगा पिताजीकी तौ क्याबात चाहे त्रिलोकी एकत्र होकर उनकी ओर खडी होजाय तब भी मैं उन सबको मारडालने में किसी प्रकारकी कसर नहीं रक्खूंगा ।।२१।। जिन्होंने अनुगत नेगाचारियों को असंख्य ग्राम दान करके देदिये वही हमारी माता कौशल्याजी हम ऐसे हजारों मनुष्यों को विना परीश्रम पालन पोषण कर सकेंगी ॥ २२ ॥ ऐसी अवस्था में आई. कौशल्याजी अपने लिये और माता सुमित्राजीके पालन पोषण करनेके लिये असमर्थ होंगी यह नितान्तही अलीक वार्ता है वह अवश्यही अ पना और सुमित्राजीका पालन पोषण करने में समर्थ हैं ॥ २३ ॥ अतएव यह प्रार्थना है कि आप हमें अपने साथ वनको लेचलनेकी आज्ञा दीजिये, महाराज ! मेरे चलनेसे किसी प्रकारका अधर्म नहीं होगा वरन इससे मैंतो कृतार्थ होजाऊंगा और आपका हितहोगा, हित यही होगा कि आ पको वनसे तोडकर पुष्प, कंद, मूल, फल लादिया करूंगा ॥ २४ ॥ व नके हिंसक जन्तु ओंसे रक्षा करनेके लिये प्रत्यंचा चढाया हुआ धनुष हाथ में लिये, व फल पुष्पादि लेनेके वास्ते एक पिटारी और कुदाल लिये आपके आगे २ मार्ग दिखाता हुआ चलूंगा ॥ २५ ॥ मैं आपके लिये प्रतिदिन तपस्वियोंके भोजन करनेके योग्य वनसे कंद, मूल, फल ले आया करूंगा ॥ २६ ॥ आप देवी जानकी जीके सहित पर्वतोंके कूँगूरों पर वा कन्दराओं में विहार करते रहैं आप जानें कि मैं जागते सोते सब समयही सब प्रकार आपकी रक्षा करूंगा और सब कार्य आपके सा धन करूंगा ॥ २७ ॥ रामचंद्रजी लक्ष्मणजीके इस प्रकार विनय युक्त व चन सुन अति प्रसन्नहो उनसे बोलेकि हे भइया ! तुम माता सुमित्रा और सव सुहृद जनोंसे पूछ पांछ हमारे संग वनको चलो ॥ २८ ॥ महात्मा वरुणजीने राजर्पि जनक जीके यज्ञ में प्रसन्न होकर भयानक आकार वा ले दो धनुप राजा जनकजीको दियेथे ॥ २९ ॥ व दो अभेद कवच, दो दिव्य तरकस, जिनमेंसे चाहे जितने वाण निकाल कर छोडे जाओ और वह कभी निवडैही नहीं, और सूर्यको प्रभाकी समान चमकते हुये सुव र्ण को लज़ाने वाले दो खग ॥ ३० ॥ यह सर्व अस्त्र शस्त्रादि महाराज जनकजीने हमें दहेजमें दियेथे, व हमनें आदर पूर्वक उनको ग्रहण कर
गुरुजीके घर उन सबको रख दियाथा हे लक्ष्मण ! इस समय तुम उन सब अस्त्र शस्त्रोंको गुरुजीके घरसे लाकर जल्दी यहां चले आओ ॥ ३१॥ धनुप धारी लक्ष्मणजी रामचंद्रजीकी आज्ञा शिरमाथे चढा वनजाने में स्थिर मति करते हुये और जल्दीसे अपने सत्र सुहृदोंसे विदालेली, * फिर गुरूजीके यहां जाकर प्रथम कहे हुये सब दिव्यास्त्र लेकर रामचंद्रजी के निकट चले आये ॥ ३२ ॥ और रामचंद्रजीको दिव्यमाला शोभित चन्दन अक्षत आदि चढे हुये यह सब अद्भुत आयुध लक्ष्मणजीनें दिखलाये ॥ ३३ ॥ रामचंद्रजीने उन सब अस्त्र शस्त्रोंको देख दाखकर लक्ष्मणजीसे प्रसन्न होकर कहाकि है लक्ष्मण । तुम भले समय पर आ ये ॥ ३४ ॥ हे परंतप ! मेरा जो कुछ धन रत्न आदि वह इस समय में तुम्हारे सहित ब्राह्मण और तपस्वियोंको दान करूंगा ॥ ३५ ॥ मेरे आश्रम में गुरु भक्ति परायण अनेक ब्राह्मण रहते हैं. उनको और सब नोकरों चाकरों को धनदेना कर्तव्य है ॥ ३६ ॥
वसिष्टपुत्रंतुसुयज्ञमार्यत्वमानयाशुप्रवरं द्विजानाम् ॥ अपिप्रयास्यामिवनं समस्ता मभ्यर्च्यशिष्टानपरानूद्विजातीन् ॥ ३७॥ तुम इस समय द्विज श्रेष्ठ वशिष्ट पुत्र आर्य सुयज्ञको यहां पर ले आओ हम सब उनकी पूजा व द्विजाति गणोंका यथाविधि आदर सन्मान पूजा अर्चनाकर वनको चले जायेंगे ।। ३७ ।। इ० श्रीम० वा०आ०अ० एकत्रिंशः सर्गः ॥ ३१ ॥
द्वात्रिंशः सर्गः ॥
ततःशासनमाज्ञायभ्रातुः प्रियकरंहितम् ॥ गत्वासप्रविवेशाशुसुयज्ञस्यनिवेशनम् ॥ १ ॥
*चौ० - उस समय सुमित्रा बोलीं ॥ तात तुम्हारि मातु वैदेही । पिताराम सबभांति सनेही ॥ जेहिन राम वन लहहिं कलेश । सुत सोइ करहु इहै उपदेशू । पुत्रवती युवती जग सोई । रघुवर भक्त जासु सुत होई ॥ जोपै सीय राम वन जाहीं । अवध तुम्हार काज कछु नाहीं । जाहु सुखेन वनहिं बलिजाऊँ । करि अनाथ जन परिजनगाऊं ॥ दोहा - भूरिभाग्य भाजन भयउ, मोहि समेत बलिजाउं ॥ जो तुमरे मन छांडि छल, कीन राम. पद ठाउँ ॥
तदनन्तर आता रामचंद्रजो की हित करने वाली आज्ञासे लक्ष्मणजी शीघ्रता से गुरुपुत्र सुयज्ञके आश्रम में गये ॥ १ ॥ वहां पहुँचकर देखा कि ऋषिश्रेष्ठ अग्निहोत्र के गृहमें बैठे पूजा कर रहेहैं तब लक्ष्मणजीनें उन्हें प्रणामकर कहा कि हे सखे । भ्राता रामचन्द्र सब राज्याभिषेक को त्यागकर वनको जाते हैं सो उन्होंने आपको बुलाया है, आप शीत्र चलिये देखिये तो सही वह कैसा दुष्कर्म कर रहेहैं ॥ २ ॥ अनन्तर ऋषि श्रेष्ठ सुयज्ञजी यथाविधि संध्या वन्दनादि समाप्त करके लक्ष्मणजीके साथ लक्ष्मी युक्त रमणीय राम मन्दिरमें पहुँचे ॥ ३ ॥ सब वेद वेदान्तके जानने वाले, जलती हुई अग्रिके समान दिपते हुये सुयज्ञजीको आयेहुये देख जानकीजीके सहित जानकीनाथ हाथ जोड खडे होगये ॥४॥ और जो भूषण मणि जटित सुवर्णके बाजू, कुंडल, जंजीर, मोतियोंकी माला, कंठा, कंकण आदि जो कुछ आप पहरे हुयेथे सब सुयज्ञजीको पहरा दिये ॥ ५ ॥ इनके सिवाय और भी बहुत रत्नादिक रामचंद्रजीने दिये, तब जानकी जीने रामचन्द्रजीसे कहाकि आपने तो अपने भूषण सुयज्ञजीको देदिये, मैंभी इनकी स्त्रोको जो कि मेरी सखीहै अपने भूषण दिया चाहतीहूं यह सुन रामचन्द्रजी सुयज्ञ जीसेबोले हे सौम्या तुम अपनी सह धर्मिणी के लिये यह हार यहमाला लेते जाओ मेरे साथ वनको जानेवाली यह तुम्हारी स्त्रीकोदेना चाहती हैं ।।६।।७।। इनके अति• रिक्त यह चन्द्रहार, यह विचित्र बाजू, और बहुत अच्छे केयूर मेखला यह सब अपनी सखी तुम्हारी स्त्रीको देकर मेरे साथ वनको जाना चाहती हैं सो तुम इन सबको लेते जाओ ॥ ८ ॥ सोनेका पलँगभी जिसके पायों में व पट्टियोंमें बडे २ मोलके हीरे पन्ने आदि जड़ेंहैं वह जिसके ऊपर बड़ी मोलकी तैयारीका विछोना विछाहै यहभी जनककन्या आपको देती हैं. क्योंकि वैसे भूषण पहिरे आप दोनों इसी प्रकारकी सेजपर सुशोभित होगे ।। ९ ।। हे ब्राह्मणश्रेष्ठ ! हमें हमारे मामाने जो शत्रुञ्जय नामक हाथी दिया है. वह तुमको मैं हजार निष्क दक्षिणा देकर दान करताहूं तुम उसको ग्रहणकरो ॥ १० ॥ इसप्रकार जब सुयज्ञजीसे कहागया तब उन ऋषिकुमारने सब धन रत्न ग्रहण करके प्रसन्न अंतःकरणसे रामचन्द्र सीता व लक्ष्मण तीनों जनोंको आशीर्वाद दिया ॥ ११॥ अनन्तर प्रजापति -
ह्माजीने जिसप्रकार इन्द्रसे कहाथा वैसेही श्री रामचन्द्रजीने प्यारे बोलने वाले आलस्यरहित प्यारे लक्ष्मणजीसे कहा ॥ १२ ॥ भइया अब तुम जाकर महर्षि अगस्त्य और विश्वामित्र जीको बुलाकर लेआओ वृष्टि होनेसे जिस प्रकार अन्नकी उत्पत्ति होती है वैसेही तुम धन रत्नादि देकर इनको सुखीकरो ॥ १३ ॥ हे महाबाहो ! तुम इनको हजार गायें और सोना, चांदी, मणि, मुक्ता और बहुत धन देकर प्रसन्न करो ॥ १४ ॥ जो ब्राह्मणकि जननी कौशल्याजीको नित्य आशीर्वाद दिया करता है और यजुर्वेदको तैत्तिरीय शाखाओंका आचार्य है व सब वेद वेदांतका जानने वाला है और नित्य कौशल्याजीको यज्ञ कराता है ॥ १५ ॥ तिस ब्राह्मणोंको रेशमी वस्त्र सवारियें और दास दासियों और धनको देकर प्रसन्न करो ॥ १६ ॥ आर्य चित्ररथ जो कि हमारे मंत्री व सारथिहैं और अब बूढे होगये हैं अब उनको वडे २ कीमती कपडे गहने धन और रत्न देकर तृप्त करो ॥ १७ ॥ वह हमारे निकट संबंधी शाखाओं के पढ़ने वाले जो सब ब्रह्मचारीहैं तुम उनको सबको दश हजार गायें और अनेक प्रकारके यज्ञ संबंधीय पशु देदो ॥ १८ ॥ उन सबको दान देनेका एक मुख्य आशय यही है कि वह सदा वेद पढ़ा करते हैं. इस कारण और कार्यों के ऊपर वह कुछ ध्यान नहीं देते यद्यपि उनका भिक्षा करनेमें स्वभाव आलकसी है किन्तु अच्छे सवादवाले भोजन करनेको उनकी वडी इच्छा रहती है उनका तप करना सर्व सम्मत है ॥ १९ ॥ तुम उन सब महात्माओंको रत्न भारसे लदे हुये अस्सी हजार ऊंट बडे २ गाडोमें चलने वाले एक हजार दोसै बैल उनको देदो ॥ २०॥ सब प्रकारके अन चना, मूंग आदिके व्यंजन बनानेको घी, दधि आदिके लिये बहुत अच्छी बहुतसी गायें देदो, व माता कौशल्याजोके पास जो नित्य मेखला पहरे ब्रह्मवादी ब्रह्मचारियोंके समूह रहते हैं ॥ २१ ॥ हे लक्ष्मण ! तुम उनमें से प्रत्येकको सहस्र निष्क, सहस्र २ गाय देदो. और अधिक वया कहूं जि तना दान देने से माता कौशल्याजी आनन्दितहों उतना २ धन उन सब ब्राह्मणको दो ॥ २२ ॥ रामचन्द्रजीके यह कहनेपर पुरुष श्रेष्ठ लक्ष्मणजीनें स्वयं वह समस्तधन रत्नादि धनाधिपकी समान ब्राह्मणों को देदिये जैसाकि उनको देना चाहिये ॥ २३ ॥ जैसे कुबेर किसीको धन लुटा(३०० )
वे जब इस प्रकारसे लक्ष्मणजी सबको धनदे चुके फिर सव ॥ २४ ॥ बहुतसा धन औरभो नोकरों चाकरोंको जो कि आंसू भरे खडेथे उनको दे उनसे बोले कि लक्ष्मणके व हमारे मंदिरमें जबतक कि हम वनसे लौट कर न आवें तब तक !॥ २५ ॥ तुम रहना इन भवनोंको खाली न पडे रहने देना, जितने तुम अब रहतेहो तितनेही रहना जबतक कि हम वनसे लौटकर घर न आवें रामचंद्रजीसे यह वात्ती श्रवण कर सब नौकर चाकर दुःखसे रुदन करने लगे ।।२६।।राजकुमार श्रीरामचंद्रजी इस प्रकार आदेश देकर खजाञ्चीको सेवक सहित बुला उसे धन लानेंके लिये हुकुम दिया हुकुम पातेही खजाचीके सेवक दौड गये और थोडीही देरमें वहां धनकी राशि लग गई ॥ २७ ॥ वह सब धनके ढेरके ढेर देखकर श्री पुरुपसिंह श्रीरामचंद्रजी उस धनको लक्ष्मणजी के सहित ब्राह्मणोंके बालकोंको वृद्धोंको, व अति दोन मनुष्योंको सब देने लगे, उन्हीं दिनोंमें उस देशमें गर्ग गोती ब्राह्मण जिसका शरीर बिलकुल पीला पड गयाथा. और त्रिजट उसका नामथा ।।२८।।२९।।वह फावडा, कुदाल व हलसे खोद खादकर अपने दिन व्यतीत करताथा तवभी कभी २ उपवास होजाया करता था। उसकी स्त्री पूर्ण युवतीथी, परन्तु दरिद्रता के दुःखसे बहुतही दुबली होगईथी। उसने जब सुनाकि रामचंद्रजी बहुत धन बांट रहेहैं तब वालकोंको संग लेकर ॥ ३० ॥ तब उसको स्त्री देवता स्वरूप अपने स्वामीसे वोली कि स्त्रियोंके स्वामीही देवता होते हैं इसकारण तुमभी मेरा वचन मानो कि तुम फावडा और कुहाडी तो फेंकदो और जो मैं कहूं उसको ध्यान लगाकर सुनो ॥ ३१ ॥ कि यदि इस समय तुम रामचन्द्र राजकुमारके पास जाओगे, तो अवश्यही थोडा बहुत धन तुम्हारे हाथ लगेगा, वह ब्राह्मण अपनी स्त्रीसे ऐसा सुनकर एक बहुत फटे दुपट्टेसे अपने शरीरको ढक ॥ ३२ ॥ राम मंदिर की ओर चला उसका तेज अंगिरा और भृगु ऋपिको समानथा, वह त्रिजट रामचन्द्रजीके पासको गमन करने ल गा ॥ ३३ ॥ पांच ड्योढियोंके पार होगया परन्तु किसीने उस जाते हुयेको नहीं रोका अनन्तर ब्राह्मण श्रेष्ठ त्रिजट रामचन्द्रजीके समीप पहुँचा और बोला ॥ ३४॥ कि हे राजकुमार महावलो! मैं बहुतही दरिद्र और बाल बच्चे मेरे कई एकहैं ब्राह्मणोंके कुलमें पैदा होकर मुझको खेतीवाडी
• की वृद्धिके हेतु रामचंद्रजीको बहुतही आशीर्वाद देताहुता चला ग
या ॥ ४४ ॥ त्रिजटके चले जानेपर प्रवल पौरुषवान रामचंद्रजी अपने
धर्म व बलसे इकट्ठा किया हुआ धन रत्नादिक ब्राह्मण व सुहृदोंको नौकर चाकरोंको और मंगताओंको आदर सहित दान करने लगे ॥ ४५ ॥
अयोध्याकाण्डे सर्गः ३२.
करके जीविका करनी पडती है, अतएव यही प्रार्थनाहै कि मेरे ऊपर कृया करिये ॥ ३५ ॥ रामचन्द्रजी उस ब्राह्मणकी ऐसी वार्त्ता सुन हँसकरें बोले कि हे विप्रवर । हमारे पास असंख्य गायें हैं सो अभीतो उनमें से एक हजारभी नहीं बाँटी गईहैं ॥ ३६ ।। इस समय तुम जहांतक यह अपना डँडा फेंक सकोगे वहाँ तकके घेरमें जितनी गायें होंगी मैं वह सबही तुमको देदूंगा, यह सुनकर त्रिजट ब्राह्मणने तुरंत अपना फटा चादरा कमरमें बांध ॥ ३७ ॥ और डँडा हाथमें ले और उसको अपने पूरे बलके साथ घुमाकर फेंका उसके हाथ से फेंका हुआ डंडा देखते २ सरयू नदीके दूसरी पार गिरा ॥ ३८ ॥ जहां बहुतसी हजारों गायों व बैलोंका गोठ इकट्ठाथा यह देखकर धर्मात्मा श्रीरामचन्द्रजीने उसे हृदयसे लगाया और सरयूके किनारेकी ॥ ३९ ॥ जितनेमें सब सजी सजाई गायेंथीं उन सबको त्रिजटके पास उसके आश्रम में भेजदों और उस ब्राह्मणको छातीसे लिपटायलिया और उस गार्गको समझाते हुये बोले ॥४०॥ हेब्राह्मण श्रेष्ठ! तुम कुछ हमपर क्रोध न करना मैंनें डंडा फेंकनेको कहाथा वहतो केवल हँसीथी ॥४१॥ तुममें दूरतक डंडा फेंकने की शक्तिहैया नहीं इसकीही परीक्षा क रने को मैंने तुमसे यह कार्य कराया था। अब यह पूछताहूं कि इतनी गायेंतो तुम्हारे स्थान में पहुँच गई, अब इन गायोंके सिवाय जो कुछ और चाहिये सो मुझसे कहो ॥ ४२ ॥ मैं सत्य सत्यही कहता हूं कि तुम इस वातमें कुछभी शोच संकोच नकरो मैं जितनें धन सम्पत्तिका अधिकारीहूं यदि वह तुम सरीखे ब्राह्मणोंको दे दियाजाय, तबतो मेरे यशकी सोमा न रहेगी, धन दान करने से ही सफल होताहै न कि गाड दैनेसे ॥ ४३ ॥ तब द्विज श्रेष्ठ त्रिजट अपनी स्त्री और बालकों समेत प्रमुदित मनसे औरभी असंख्य धेनु ग्रहण करके, बल, यश, प्रीति और सुख1
चरणश्चयोभवेत् ॥ नतन्त्रकश्चिन्नवभूवताप तोयथार्हसंमाननदान संभ्रमैः ॥ ४६ ॥
उन श्रीरामचंद्रजीके दान देने को कहांतक वर्णन किया जाय कि, जितने, ब्राह्मण जितने सुहृद, जितने नौकर चाकर थे और जितने फकीर फुकरेथे सबही मन माना धन और आदर पाकर परम प्रसन्न होगये, वहां पर ऐसा कोई नहींथा जिसका भली भांति दान सन्मानसे आदर न किया गयाहो ॥ ४६ ॥ इत्यापें श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये अयोध्या कांडे द्वात्रिंशः सर्गः ॥ ३२ ॥
त्रयस्त्रिंशः सर्गः । दत्वातुसहवैदेह्याब्राह्मणेभ्योधनंबहु ॥ जग्मतुः पितरंद्रष्टुंसीतयासहराघवौ ॥ १ ॥
अनन्तर रामचंद्रजी व लक्ष्मणजी समस्तधन समस्त ब्राह्मणादिकोंको दानकर सीताजीको संगले पिताजी के दर्शन करनेको चले ॥ १ ॥ देवी सीताजीनें अपने हाथ से जो सब अस्त्र माला चन्दनादि द्वारा सजायेथे उनको उठाकर दासियोंको दिये उन सबको दो परिचारिका हाथमें लेकर रामचंद्रजीके पीछे २ चलीं ॥ २ ॥ उस समय सब मनुष्य मार्गमें जाते हुये रामचंद्रजीको धवरहर व अटारियें और विमानों पर बैठ २ दीन नेत्र और निरुत्साह मनसे देखने लगे ॥ ३ ॥ भीडके मारे राजमार्गमें चलना फिरना बहुतही कठिन हुआ इसीकारणसे दीन जन धवरहर आदिक ऊंचे स्थानों पर चढकर रामचंद्रजीको देखतेथे ॥ ४ ॥ उस समय रामचंद्रजीको छोटे भाई लक्ष्मण और प्राण सम प्रिया जानकीके सहित पैदल जाते देख कर सब मनुष्य शोकसे व्याकुल होकर कहने लगे ॥ ५ ॥ जिन रामचंद्रजीके कहीं जानेके समय चतुरङ्गिनी सेना साथ जाती थी, वही सीताजीके सहित पैदल इकले चले जा रहें हैं और पीछे २ उनके लक्ष्मणजी जाते हैं ॥ ६ ॥ जो रामचंद्रजी सब ऐश्वर्य के सुखोंको जानने वाले और विलासके आकार स्थान और सब अथकी कामना पूर्ण करने वाले हैं वही आज धर्मको प्रतिष्ठा से वंध कर पिताके
अयोध्याकाण्डे सर्गः ३३
वचनोंको नहीं तोड़ सकते ॥ ७ ॥ जिन सीता जीको वाले प्राणि जनभी नहीं देखतेथे हाय ! आज उनको राजमार्ग में जाने वाले अनाथ सबकी समान देखते हैं ॥ ८ ॥ जो जानकी जी सदा अंगराग और लाल चन्दनादि सुगन्धित वस्तुयें अपने शरीर में लगातीथीं, अब उनकोही ग्रीष्मकी गरमी वर्षा की जल धारा और दुसह शीतका कोप पीला करदेगा ॥ ९ ॥ हमारी समझमें ऐसा आता है कि महाराज दशरथ जीको तो निश्चयही भूत पिशाच लगा है, यदि ऐसा न होता तो प्राणों से प्यारे बुढौती में पाये हुये प्रिय पुत्रको वनवास क्यों देते ॥१० ।। भइया ! आश्चर्य्य है कि जिन रामचंद्रजीके आचरणोंकी सव एक वाणीसे प्रशंसा करते हैं उनकी बात तो एक ओर रही कोई निर्गुण पुत्र केभी साथ ऐसा निठुर व्यवहार नहीं करता ॥ ११ ॥ अहिंसा करना दुयाकरना भली भांति शास्त्रोंका पढना सुशीलता इन्द्रियोंको अपने वश में रखना, शान्त चित्त रहना, यह छओं गुण पुरुप श्रेष्ठ रामचंद्रजी में विद्यमान हैं ॥ १२ ॥ हम यह भली भांति जानते हैं कि ऐसे श्रीरामचंद्रजी के वन जानेसे जिस प्रकार प्रवल गरमीके तापसे तालाव का पानो सूखजाने पर उसमें ज ल जीव नहीं रह सकते वैसेही बिना रामचन्द्रजीके प्रजा बहुत दुःखी होगी, ॥ १३ ॥ जगत्पति रामचन्द्रजीके वनवांस से सवहीको दुःखहोगा। जिस प्रकार जड़ कट जाने से फल फूल पत्ते सूख जाते हैं सोही अवस्था सांरी प्रजाकी रामचन्द्र के विना होगी ॥ १४ ॥ धार्मिक चूडामणि महा कान्तिमान् महात्मा रामचन्द्रजी ही तो सब मनुष्यों के मूलहैं व और दूसरे सब मनुष्य फूल फल पत्ते व शाखा ॥ १५ ॥ अतएव लक्ष्मणजी जिस प्रकार साथ जाते हैं, हम भी सब जहां रामचन्द्रजी जायँगे वहीं पर गमन करेंगे क्योंकि पेडकी जड़ बिना फूल फल पत्ते किस प्रकार रह सक्ते हैं ? ॥ १६ ॥ हम सबको रमणीय फुलवाडी, खेत और घरका कुछ प्र योजन नहींहै, हम इन सबको छोड छोडकर धार्मिक रामचन्द्रजीके दुःख में दुःखी, सुख में सुखी रह कर उनके ही साथ चले जाँयगे ॥ १७ ॥ अब जितना हमारा जो सब धन आदि पृथ्वी में गड़ा रक्खा है, वह उखड जावे, गायें धन धान्यादि सर्वशः छीन लिये जाँय ॥ १८ ॥ गृहके सब देवता भी घरको छोड जावें, घरमें सबही जगह धूल छाईहो और कूडा क
कंट पडाहो, चूहे इधर इधर कलावतियें खाते हों और सब जगह भट्टक विल हो जाय ॥ १९ ॥ जल का नाम निशान नहीं रहेगा व धुआंहीन बिना तुम्हारे बटोरे बलि वैश्वदेव यज्ञ हीन, मंत्र होमयज्ञादि शून्य ॥ २० ॥ अकाल पडनेके समान टूटे फूटे घर और हमारे टूटे फूटे ब र्त्तन भजन और अनेक प्रकारके उत्पात प्रगट होंगे हम सब लोग जब इस पुरी को छोड़कर चले जायँगे तब कैकेयी ऐसी पुरीका राज्य करै-:. गी ।। २१ ।। हमारी भगवानसे यही प्रार्थना है कि हे नारायण ! जिस चनमें रामचन्द्रजी जाँय वहाँतो नगर वस जाय और हमारी यह छोडो हुई अयोध्या पुरी वन होजाय ॥ २२ ॥ सर्प गुण हमारे डरसे डरकर अपने २ विल, मृग पक्षी गण पहाडोंकी चोटी, और हाथी व शेर व न भूमिको छोडदें ॥ २३ ॥ हम सब जिस स्थानको छोडे जाते हैं वह सब मृग़ पक्षी गण आदिक यहां आकर अधिकार करें तृण मांस फलादि होन वन होजाय देशमें ठौर २ सर्प पक्षी व मृग गण विचरण करें ॥ २४ ॥ हम इस समय मनकी प्रसन्नता पूर्वक घर वारको छोड रामचन्द्रजीके संग वनवास करेंगे कैकेयो पुत्र और अपने बन्धु बान्धवों सहित इस पुरो का पालन करती रहै ॥ २५ ॥ यद्यपि रामचन्द्रजीनें यह और भी अनेक प्रकारकी वातें नगर वासियोंके मुखसे सुनी तथापि उनका मन च लाय मान नहीं हुआ और न उन्होंने कुछ शोकही किया ॥ २६ ॥ महा राज रामचन्द्रजी क्रम २ से मतवाले हाथोकी समान विक्रम वाली चालसे कैलास पहाड़ की समान पिताजीके भवनकी ओर जाने लगे ॥ २७ ॥ भवनके द्वार पर विनीत वीर पुरुष पहरे दारी कर रहेथे । रामचन्द्रजी उनके पास होते हुए आगे बढे तब थोडीही दूरपर दीन दशाको प्राप्त हुये सुमंत्रजीको देखा ॥ २८ ॥ रामचन्द्रजी, पिताजीकी आज्ञा पालन करनेके लिये वनके जाने को तैयार हो प्रसन्न मनसे हँसते हुये से पिता के चरणारविन्द दर्शन करने की आशासे द्वार पर उपस्थित हुए वहां पर देखा तो सबही नोकर चाकर व दूसरे आदमी बहुतही दुःखितथे ॥ २९॥ धर्म वत्सल रामचन्द्रजी पिताके सत्य पालनेको स्थिर निश्चय हो कर उनके चरणों में विदा लेने की आशासे द्वारपर उपस्थित हुये और सुमंत्र | अयोध्याकाण्डे सर्गः इकतीस. हो, धोरज धरने वालेहो, अच्छे मार्ग पर चलने वालेहो, और मुझे अपने प्राणोंकी समान प्यारेहो, मेरे वंश में हो और मेरे सखाहो ॥ दस ॥ हे सौमित्रे ! तुमभी यदि आज हमारे साथ वनको चलोगे तब फिर यशस्विनी जननी कौशल्या व सुमित्राजीके प्रति पालन करनेका भार कौन अपने शिर लेगा ॥ ग्यारह ॥ जैसेकि पृथ्वीसे भाफ निकलती है, उससे मेघ वनते हैं, फिर उसी पृथ्वी पर वह वर्षा करते हैं, वैसेही महा तेजवान नरनाथ कामके दास वशहो कैकेयीके ऊपर आसक्त हुए हैं इस कारण जो कैकेयी कहेंगी पिताजी वही करेंगे फिर हमारी माताओंकी कामना कैसे पूर्णहोगी ? अर्थात् इनकी कौन खवर लेगा ॥ बारह ॥ कैकय राज नन्दिनि कैकेयी यह राज्य जब पालेगी तब महा दुःखित कौशल्यादि सपत्नियोंके साथ बुराईके अतिरिक्त भलाई न करेंगी । और हमारो माताओंको महाकेश मिलेगा ॥ तेरह ॥ जब भरत राज्य पालेंगे तब वह निश्चयही अपनी माता कैकेयीके वशहो जननी कौशल्या व सुमित्रा को सम्पूर्ण भूल जांयेंगे । भला फिर इन विचारियोंकी कौन खबर लेगा ? ॥ चौदह ॥ हे भइया ! तुमसे इसीकारणसे कहताहूं कि तुम स्वयं या राजाके अनुग्रहसे, जिस प्रकार सेमीही यहाँ रहकर माता ओंका भरण पोपण करो, हेभाई! यह मेरा वचन तुमको पूरा करना उचित है ॥ पंद्रह ॥ हे धर्मज्ञ ! इस प्रकारका कार्य करनेसे मेरे प्रति तुम्हारी परम भक्ति प्र काशित होगी, जान रक्खोकि माता पिता गुरु जनोंकी सेवा करनेसे विशेष धर्म लाभ होता है ॥ सोलह ॥ हे वत्स ! तुम हमारे कहनेसे हमारी माता ओंके लालन पालन करनेका भार ग्रहणकरो, यदि हमभी उनका कुछ ध्यान न कर उनको छोड वनको चले जांयगे तब फिर उनके दुःखकी सीमा नहीं रहेगी ॥ सत्रह ॥ वाक्य विशारद रामचंद्रजीने जब इस प्रकार मधुर वचन लक्ष्मणजीसे कहे तब चतुर लक्ष्मणजी विनीत भावसे रामचंद्रजीसे बोले ॥ अट्ठारह ॥ आर्य । भरतजी आपके प्रतापसे प्रकम्पि ! तहो सदाही माता कौशल्या और सुमित्राका प्रतिपालन करेंगे यह निश्चय है इसमें किसी प्रकारका सन्देह नहीं है ॥ उन्नीस ॥ यदि भरतजी यह राज्य पाकर खोटे रस्तेपर चलें यदि भरत खोटी मति करकै गर्वके वशीभूतही कौशल्या व सुमित्रा मातांकी रक्षा व सेवा न क रैं ॥ बीस ॥ तो मैं उस नीचाशय क्रूरका प्राण अवश्यही संहार करूंगा पिताजीकी तौ क्याबात चाहे त्रिलोकी एकत्र होकर उनकी ओर खडी होजाय तब भी मैं उन सबको मारडालने में किसी प्रकारकी कसर नहीं रक्खूंगा ।।इक्कीस।। जिन्होंने अनुगत नेगाचारियों को असंख्य ग्राम दान करके देदिये वही हमारी माता कौशल्याजी हम ऐसे हजारों मनुष्यों को विना परीश्रम पालन पोषण कर सकेंगी ॥ बाईस ॥ ऐसी अवस्था में आई. कौशल्याजी अपने लिये और माता सुमित्राजीके पालन पोषण करनेके लिये असमर्थ होंगी यह नितान्तही अलीक वार्ता है वह अवश्यही अ पना और सुमित्राजीका पालन पोषण करने में समर्थ हैं ॥ तेईस ॥ अतएव यह प्रार्थना है कि आप हमें अपने साथ वनको लेचलनेकी आज्ञा दीजिये, महाराज ! मेरे चलनेसे किसी प्रकारका अधर्म नहीं होगा वरन इससे मैंतो कृतार्थ होजाऊंगा और आपका हितहोगा, हित यही होगा कि आ पको वनसे तोडकर पुष्प, कंद, मूल, फल लादिया करूंगा ॥ चौबीस ॥ व नके हिंसक जन्तु ओंसे रक्षा करनेके लिये प्रत्यंचा चढाया हुआ धनुष हाथ में लिये, व फल पुष्पादि लेनेके वास्ते एक पिटारी और कुदाल लिये आपके आगे दो मार्ग दिखाता हुआ चलूंगा ॥ पच्चीस ॥ मैं आपके लिये प्रतिदिन तपस्वियोंके भोजन करनेके योग्य वनसे कंद, मूल, फल ले आया करूंगा ॥ छब्बीस ॥ आप देवी जानकी जीके सहित पर्वतोंके कूँगूरों पर वा कन्दराओं में विहार करते रहैं आप जानें कि मैं जागते सोते सब समयही सब प्रकार आपकी रक्षा करूंगा और सब कार्य आपके सा धन करूंगा ॥ सत्ताईस ॥ रामचंद्रजी लक्ष्मणजीके इस प्रकार विनय युक्त व चन सुन अति प्रसन्नहो उनसे बोलेकि हे भइया ! तुम माता सुमित्रा और सव सुहृद जनोंसे पूछ पांछ हमारे संग वनको चलो ॥ अट्ठाईस ॥ महात्मा वरुणजीने राजर्पि जनक जीके यज्ञ में प्रसन्न होकर भयानक आकार वा ले दो धनुप राजा जनकजीको दियेथे ॥ उनतीस ॥ व दो अभेद कवच, दो दिव्य तरकस, जिनमेंसे चाहे जितने वाण निकाल कर छोडे जाओ और वह कभी निवडैही नहीं, और सूर्यको प्रभाकी समान चमकते हुये सुव र्ण को लज़ाने वाले दो खग ॥ तीस ॥ यह सर्व अस्त्र शस्त्रादि महाराज जनकजीने हमें दहेजमें दियेथे, व हमनें आदर पूर्वक उनको ग्रहण कर गुरुजीके घर उन सबको रख दियाथा हे लक्ष्मण ! इस समय तुम उन सब अस्त्र शस्त्रोंको गुरुजीके घरसे लाकर जल्दी यहां चले आओ ॥ इकतीस॥ धनुप धारी लक्ष्मणजी रामचंद्रजीकी आज्ञा शिरमाथे चढा वनजाने में स्थिर मति करते हुये और जल्दीसे अपने सत्र सुहृदोंसे विदालेली, * फिर गुरूजीके यहां जाकर प्रथम कहे हुये सब दिव्यास्त्र लेकर रामचंद्रजी के निकट चले आये ॥ बत्तीस ॥ और रामचंद्रजीको दिव्यमाला शोभित चन्दन अक्षत आदि चढे हुये यह सब अद्भुत आयुध लक्ष्मणजीनें दिखलाये ॥ तैंतीस ॥ रामचंद्रजीने उन सब अस्त्र शस्त्रोंको देख दाखकर लक्ष्मणजीसे प्रसन्न होकर कहाकि है लक्ष्मण । तुम भले समय पर आ ये ॥ चौंतीस ॥ हे परंतप ! मेरा जो कुछ धन रत्न आदि वह इस समय में तुम्हारे सहित ब्राह्मण और तपस्वियोंको दान करूंगा ॥ पैंतीस ॥ मेरे आश्रम में गुरु भक्ति परायण अनेक ब्राह्मण रहते हैं. उनको और सब नोकरों चाकरों को धनदेना कर्तव्य है ॥ छत्तीस ॥ वसिष्टपुत्रंतुसुयज्ञमार्यत्वमानयाशुप्रवरं द्विजानाम् ॥ अपिप्रयास्यामिवनं समस्ता मभ्यर्च्यशिष्टानपरानूद्विजातीन् ॥ सैंतीस॥ तुम इस समय द्विज श्रेष्ठ वशिष्ट पुत्र आर्य सुयज्ञको यहां पर ले आओ हम सब उनकी पूजा व द्विजाति गणोंका यथाविधि आदर सन्मान पूजा अर्चनाकर वनको चले जायेंगे ।। सैंतीस ।। इशून्य श्रीमशून्य वाशून्यआशून्यअशून्य एकत्रिंशः सर्गः ॥ इकतीस ॥ द्वात्रिंशः सर्गः ॥ ततःशासनमाज्ञायभ्रातुः प्रियकरंहितम् ॥ गत्वासप्रविवेशाशुसुयज्ञस्यनिवेशनम् ॥ एक ॥ *चौशून्य - उस समय सुमित्रा बोलीं ॥ तात तुम्हारि मातु वैदेही । पिताराम सबभांति सनेही ॥ जेहिन राम वन लहहिं कलेश । सुत सोइ करहु इहै उपदेशू । पुत्रवती युवती जग सोई । रघुवर भक्त जासु सुत होई ॥ जोपै सीय राम वन जाहीं । अवध तुम्हार काज कछु नाहीं । जाहु सुखेन वनहिं बलिजाऊँ । करि अनाथ जन परिजनगाऊं ॥ दोहा - भूरिभाग्य भाजन भयउ, मोहि समेत बलिजाउं ॥ जो तुमरे मन छांडि छल, कीन राम. पद ठाउँ ॥ तदनन्तर आता रामचंद्रजो की हित करने वाली आज्ञासे लक्ष्मणजी शीघ्रता से गुरुपुत्र सुयज्ञके आश्रम में गये ॥ एक ॥ वहां पहुँचकर देखा कि ऋषिश्रेष्ठ अग्निहोत्र के गृहमें बैठे पूजा कर रहेहैं तब लक्ष्मणजीनें उन्हें प्रणामकर कहा कि हे सखे । भ्राता रामचन्द्र सब राज्याभिषेक को त्यागकर वनको जाते हैं सो उन्होंने आपको बुलाया है, आप शीत्र चलिये देखिये तो सही वह कैसा दुष्कर्म कर रहेहैं ॥ दो ॥ अनन्तर ऋषि श्रेष्ठ सुयज्ञजी यथाविधि संध्या वन्दनादि समाप्त करके लक्ष्मणजीके साथ लक्ष्मी युक्त रमणीय राम मन्दिरमें पहुँचे ॥ तीन ॥ सब वेद वेदान्तके जानने वाले, जलती हुई अग्रिके समान दिपते हुये सुयज्ञजीको आयेहुये देख जानकीजीके सहित जानकीनाथ हाथ जोड खडे होगये ॥चार॥ और जो भूषण मणि जटित सुवर्णके बाजू, कुंडल, जंजीर, मोतियोंकी माला, कंठा, कंकण आदि जो कुछ आप पहरे हुयेथे सब सुयज्ञजीको पहरा दिये ॥ पाँच ॥ इनके सिवाय और भी बहुत रत्नादिक रामचंद्रजीने दिये, तब जानकी जीने रामचन्द्रजीसे कहाकि आपने तो अपने भूषण सुयज्ञजीको देदिये, मैंभी इनकी स्त्रोको जो कि मेरी सखीहै अपने भूषण दिया चाहतीहूं यह सुन रामचन्द्रजी सुयज्ञ जीसेबोले हे सौम्या तुम अपनी सह धर्मिणी के लिये यह हार यहमाला लेते जाओ मेरे साथ वनको जानेवाली यह तुम्हारी स्त्रीकोदेना चाहती हैं ।।छः।।सात।। इनके अति• रिक्त यह चन्द्रहार, यह विचित्र बाजू, और बहुत अच्छे केयूर मेखला यह सब अपनी सखी तुम्हारी स्त्रीको देकर मेरे साथ वनको जाना चाहती हैं सो तुम इन सबको लेते जाओ ॥ आठ ॥ सोनेका पलँगभी जिसके पायों में व पट्टियोंमें बडे दो मोलके हीरे पन्ने आदि जड़ेंहैं वह जिसके ऊपर बड़ी मोलकी तैयारीका विछोना विछाहै यहभी जनककन्या आपको देती हैं. क्योंकि वैसे भूषण पहिरे आप दोनों इसी प्रकारकी सेजपर सुशोभित होगे ।। नौ ।। हे ब्राह्मणश्रेष्ठ ! हमें हमारे मामाने जो शत्रुञ्जय नामक हाथी दिया है. वह तुमको मैं हजार निष्क दक्षिणा देकर दान करताहूं तुम उसको ग्रहणकरो ॥ दस ॥ इसप्रकार जब सुयज्ञजीसे कहागया तब उन ऋषिकुमारने सब धन रत्न ग्रहण करके प्रसन्न अंतःकरणसे रामचन्द्र सीता व लक्ष्मण तीनों जनोंको आशीर्वाद दिया ॥ ग्यारह॥ अनन्तर प्रजापति - ह्माजीने जिसप्रकार इन्द्रसे कहाथा वैसेही श्री रामचन्द्रजीने प्यारे बोलने वाले आलस्यरहित प्यारे लक्ष्मणजीसे कहा ॥ बारह ॥ भइया अब तुम जाकर महर्षि अगस्त्य और विश्वामित्र जीको बुलाकर लेआओ वृष्टि होनेसे जिस प्रकार अन्नकी उत्पत्ति होती है वैसेही तुम धन रत्नादि देकर इनको सुखीकरो ॥ तेरह ॥ हे महाबाहो ! तुम इनको हजार गायें और सोना, चांदी, मणि, मुक्ता और बहुत धन देकर प्रसन्न करो ॥ चौदह ॥ जो ब्राह्मणकि जननी कौशल्याजीको नित्य आशीर्वाद दिया करता है और यजुर्वेदको तैत्तिरीय शाखाओंका आचार्य है व सब वेद वेदांतका जानने वाला है और नित्य कौशल्याजीको यज्ञ कराता है ॥ पंद्रह ॥ तिस ब्राह्मणोंको रेशमी वस्त्र सवारियें और दास दासियों और धनको देकर प्रसन्न करो ॥ सोलह ॥ आर्य चित्ररथ जो कि हमारे मंत्री व सारथिहैं और अब बूढे होगये हैं अब उनको वडे दो कीमती कपडे गहने धन और रत्न देकर तृप्त करो ॥ सत्रह ॥ वह हमारे निकट संबंधी शाखाओं के पढ़ने वाले जो सब ब्रह्मचारीहैं तुम उनको सबको दश हजार गायें और अनेक प्रकारके यज्ञ संबंधीय पशु देदो ॥ अट्ठारह ॥ उन सबको दान देनेका एक मुख्य आशय यही है कि वह सदा वेद पढ़ा करते हैं. इस कारण और कार्यों के ऊपर वह कुछ ध्यान नहीं देते यद्यपि उनका भिक्षा करनेमें स्वभाव आलकसी है किन्तु अच्छे सवादवाले भोजन करनेको उनकी वडी इच्छा रहती है उनका तप करना सर्व सम्मत है ॥ उन्नीस ॥ तुम उन सब महात्माओंको रत्न भारसे लदे हुये अस्सी हजार ऊंट बडे दो गाडोमें चलने वाले एक हजार दोसै बैल उनको देदो ॥ बीस॥ सब प्रकारके अन चना, मूंग आदिके व्यंजन बनानेको घी, दधि आदिके लिये बहुत अच्छी बहुतसी गायें देदो, व माता कौशल्याजोके पास जो नित्य मेखला पहरे ब्रह्मवादी ब्रह्मचारियोंके समूह रहते हैं ॥ इक्कीस ॥ हे लक्ष्मण ! तुम उनमें से प्रत्येकको सहस्र निष्क, सहस्र दो गाय देदो. और अधिक वया कहूं जि तना दान देने से माता कौशल्याजी आनन्दितहों उतना दो धन उन सब ब्राह्मणको दो ॥ बाईस ॥ रामचन्द्रजीके यह कहनेपर पुरुष श्रेष्ठ लक्ष्मणजीनें स्वयं वह समस्तधन रत्नादि धनाधिपकी समान ब्राह्मणों को देदिये जैसाकि उनको देना चाहिये ॥ तेईस ॥ जैसे कुबेर किसीको धन लुटा वे जब इस प्रकारसे लक्ष्मणजी सबको धनदे चुके फिर सव ॥ चौबीस ॥ बहुतसा धन औरभो नोकरों चाकरोंको जो कि आंसू भरे खडेथे उनको दे उनसे बोले कि लक्ष्मणके व हमारे मंदिरमें जबतक कि हम वनसे लौट कर न आवें तब तक !॥ पच्चीस ॥ तुम रहना इन भवनोंको खाली न पडे रहने देना, जितने तुम अब रहतेहो तितनेही रहना जबतक कि हम वनसे लौटकर घर न आवें रामचंद्रजीसे यह वात्ती श्रवण कर सब नौकर चाकर दुःखसे रुदन करने लगे ।।छब्बीस।।राजकुमार श्रीरामचंद्रजी इस प्रकार आदेश देकर खजाञ्चीको सेवक सहित बुला उसे धन लानेंके लिये हुकुम दिया हुकुम पातेही खजाचीके सेवक दौड गये और थोडीही देरमें वहां धनकी राशि लग गई ॥ सत्ताईस ॥ वह सब धनके ढेरके ढेर देखकर श्री पुरुपसिंह श्रीरामचंद्रजी उस धनको लक्ष्मणजी के सहित ब्राह्मणोंके बालकोंको वृद्धोंको, व अति दोन मनुष्योंको सब देने लगे, उन्हीं दिनोंमें उस देशमें गर्ग गोती ब्राह्मण जिसका शरीर बिलकुल पीला पड गयाथा. और त्रिजट उसका नामथा ।।अट्ठाईस।।उनतीस।।वह फावडा, कुदाल व हलसे खोद खादकर अपने दिन व्यतीत करताथा तवभी कभी दो उपवास होजाया करता था। उसकी स्त्री पूर्ण युवतीथी, परन्तु दरिद्रता के दुःखसे बहुतही दुबली होगईथी। उसने जब सुनाकि रामचंद्रजी बहुत धन बांट रहेहैं तब वालकोंको संग लेकर ॥ तीस ॥ तब उसको स्त्री देवता स्वरूप अपने स्वामीसे वोली कि स्त्रियोंके स्वामीही देवता होते हैं इसकारण तुमभी मेरा वचन मानो कि तुम फावडा और कुहाडी तो फेंकदो और जो मैं कहूं उसको ध्यान लगाकर सुनो ॥ इकतीस ॥ कि यदि इस समय तुम रामचन्द्र राजकुमारके पास जाओगे, तो अवश्यही थोडा बहुत धन तुम्हारे हाथ लगेगा, वह ब्राह्मण अपनी स्त्रीसे ऐसा सुनकर एक बहुत फटे दुपट्टेसे अपने शरीरको ढक ॥ बत्तीस ॥ राम मंदिर की ओर चला उसका तेज अंगिरा और भृगु ऋपिको समानथा, वह त्रिजट रामचन्द्रजीके पासको गमन करने ल गा ॥ तैंतीस ॥ पांच ड्योढियोंके पार होगया परन्तु किसीने उस जाते हुयेको नहीं रोका अनन्तर ब्राह्मण श्रेष्ठ त्रिजट रामचन्द्रजीके समीप पहुँचा और बोला ॥ चौंतीस॥ कि हे राजकुमार महावलो! मैं बहुतही दरिद्र और बाल बच्चे मेरे कई एकहैं ब्राह्मणोंके कुलमें पैदा होकर मुझको खेतीवाडी • की वृद्धिके हेतु रामचंद्रजीको बहुतही आशीर्वाद देताहुता चला ग या ॥ चौंतालीस ॥ त्रिजटके चले जानेपर प्रवल पौरुषवान रामचंद्रजी अपने धर्म व बलसे इकट्ठा किया हुआ धन रत्नादिक ब्राह्मण व सुहृदोंको नौकर चाकरोंको और मंगताओंको आदर सहित दान करने लगे ॥ पैंतालीस ॥ अयोध्याकाण्डे सर्गः बत्तीस. करके जीविका करनी पडती है, अतएव यही प्रार्थनाहै कि मेरे ऊपर कृया करिये ॥ पैंतीस ॥ रामचन्द्रजी उस ब्राह्मणकी ऐसी वार्त्ता सुन हँसकरें बोले कि हे विप्रवर । हमारे पास असंख्य गायें हैं सो अभीतो उनमें से एक हजारभी नहीं बाँटी गईहैं ॥ छत्तीस ।। इस समय तुम जहांतक यह अपना डँडा फेंक सकोगे वहाँ तकके घेरमें जितनी गायें होंगी मैं वह सबही तुमको देदूंगा, यह सुनकर त्रिजट ब्राह्मणने तुरंत अपना फटा चादरा कमरमें बांध ॥ सैंतीस ॥ और डँडा हाथमें ले और उसको अपने पूरे बलके साथ घुमाकर फेंका उसके हाथ से फेंका हुआ डंडा देखते दो सरयू नदीके दूसरी पार गिरा ॥ अड़तीस ॥ जहां बहुतसी हजारों गायों व बैलोंका गोठ इकट्ठाथा यह देखकर धर्मात्मा श्रीरामचन्द्रजीने उसे हृदयसे लगाया और सरयूके किनारेकी ॥ उनतालीस ॥ जितनेमें सब सजी सजाई गायेंथीं उन सबको त्रिजटके पास उसके आश्रम में भेजदों और उस ब्राह्मणको छातीसे लिपटायलिया और उस गार्गको समझाते हुये बोले ॥चालीस॥ हेब्राह्मण श्रेष्ठ! तुम कुछ हमपर क्रोध न करना मैंनें डंडा फेंकनेको कहाथा वहतो केवल हँसीथी ॥इकतालीस॥ तुममें दूरतक डंडा फेंकने की शक्तिहैया नहीं इसकीही परीक्षा क रने को मैंने तुमसे यह कार्य कराया था। अब यह पूछताहूं कि इतनी गायेंतो तुम्हारे स्थान में पहुँच गई, अब इन गायोंके सिवाय जो कुछ और चाहिये सो मुझसे कहो ॥ बयालीस ॥ मैं सत्य सत्यही कहता हूं कि तुम इस वातमें कुछभी शोच संकोच नकरो मैं जितनें धन सम्पत्तिका अधिकारीहूं यदि वह तुम सरीखे ब्राह्मणोंको दे दियाजाय, तबतो मेरे यशकी सोमा न रहेगी, धन दान करने से ही सफल होताहै न कि गाड दैनेसे ॥ तैंतालीस ॥ तब द्विज श्रेष्ठ त्रिजट अपनी स्त्री और बालकों समेत प्रमुदित मनसे औरभी असंख्य धेनु ग्रहण करके, बल, यश, प्रीति और सुखएक चरणश्चयोभवेत् ॥ नतन्त्रकश्चिन्नवभूवताप तोयथार्हसंमाननदान संभ्रमैः ॥ छियालीस ॥ उन श्रीरामचंद्रजीके दान देने को कहांतक वर्णन किया जाय कि, जितने, ब्राह्मण जितने सुहृद, जितने नौकर चाकर थे और जितने फकीर फुकरेथे सबही मन माना धन और आदर पाकर परम प्रसन्न होगये, वहां पर ऐसा कोई नहींथा जिसका भली भांति दान सन्मानसे आदर न किया गयाहो ॥ छियालीस ॥ इत्यापें श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये अयोध्या कांडे द्वात्रिंशः सर्गः ॥ बत्तीस ॥ त्रयस्त्रिंशः सर्गः । दत्वातुसहवैदेह्याब्राह्मणेभ्योधनंबहु ॥ जग्मतुः पितरंद्रष्टुंसीतयासहराघवौ ॥ एक ॥ अनन्तर रामचंद्रजी व लक्ष्मणजी समस्तधन समस्त ब्राह्मणादिकोंको दानकर सीताजीको संगले पिताजी के दर्शन करनेको चले ॥ एक ॥ देवी सीताजीनें अपने हाथ से जो सब अस्त्र माला चन्दनादि द्वारा सजायेथे उनको उठाकर दासियोंको दिये उन सबको दो परिचारिका हाथमें लेकर रामचंद्रजीके पीछे दो चलीं ॥ दो ॥ उस समय सब मनुष्य मार्गमें जाते हुये रामचंद्रजीको धवरहर व अटारियें और विमानों पर बैठ दो दीन नेत्र और निरुत्साह मनसे देखने लगे ॥ तीन ॥ भीडके मारे राजमार्गमें चलना फिरना बहुतही कठिन हुआ इसीकारणसे दीन जन धवरहर आदिक ऊंचे स्थानों पर चढकर रामचंद्रजीको देखतेथे ॥ चार ॥ उस समय रामचंद्रजीको छोटे भाई लक्ष्मण और प्राण सम प्रिया जानकीके सहित पैदल जाते देख कर सब मनुष्य शोकसे व्याकुल होकर कहने लगे ॥ पाँच ॥ जिन रामचंद्रजीके कहीं जानेके समय चतुरङ्गिनी सेना साथ जाती थी, वही सीताजीके सहित पैदल इकले चले जा रहें हैं और पीछे दो उनके लक्ष्मणजी जाते हैं ॥ छः ॥ जो रामचंद्रजी सब ऐश्वर्य के सुखोंको जानने वाले और विलासके आकार स्थान और सब अथकी कामना पूर्ण करने वाले हैं वही आज धर्मको प्रतिष्ठा से वंध कर पिताके अयोध्याकाण्डे सर्गः तैंतीस वचनोंको नहीं तोड़ सकते ॥ सात ॥ जिन सीता जीको वाले प्राणि जनभी नहीं देखतेथे हाय ! आज उनको राजमार्ग में जाने वाले अनाथ सबकी समान देखते हैं ॥ आठ ॥ जो जानकी जी सदा अंगराग और लाल चन्दनादि सुगन्धित वस्तुयें अपने शरीर में लगातीथीं, अब उनकोही ग्रीष्मकी गरमी वर्षा की जल धारा और दुसह शीतका कोप पीला करदेगा ॥ नौ ॥ हमारी समझमें ऐसा आता है कि महाराज दशरथ जीको तो निश्चयही भूत पिशाच लगा है, यदि ऐसा न होता तो प्राणों से प्यारे बुढौती में पाये हुये प्रिय पुत्रको वनवास क्यों देते ॥दस ।। भइया ! आश्चर्य्य है कि जिन रामचंद्रजीके आचरणोंकी सव एक वाणीसे प्रशंसा करते हैं उनकी बात तो एक ओर रही कोई निर्गुण पुत्र केभी साथ ऐसा निठुर व्यवहार नहीं करता ॥ ग्यारह ॥ अहिंसा करना दुयाकरना भली भांति शास्त्रोंका पढना सुशीलता इन्द्रियोंको अपने वश में रखना, शान्त चित्त रहना, यह छओं गुण पुरुप श्रेष्ठ रामचंद्रजी में विद्यमान हैं ॥ बारह ॥ हम यह भली भांति जानते हैं कि ऐसे श्रीरामचंद्रजी के वन जानेसे जिस प्रकार प्रवल गरमीके तापसे तालाव का पानो सूखजाने पर उसमें ज ल जीव नहीं रह सकते वैसेही बिना रामचन्द्रजीके प्रजा बहुत दुःखी होगी, ॥ तेरह ॥ जगत्पति रामचन्द्रजीके वनवांस से सवहीको दुःखहोगा। जिस प्रकार जड़ कट जाने से फल फूल पत्ते सूख जाते हैं सोही अवस्था सांरी प्रजाकी रामचन्द्र के विना होगी ॥ चौदह ॥ धार्मिक चूडामणि महा कान्तिमान् महात्मा रामचन्द्रजी ही तो सब मनुष्यों के मूलहैं व और दूसरे सब मनुष्य फूल फल पत्ते व शाखा ॥ पंद्रह ॥ अतएव लक्ष्मणजी जिस प्रकार साथ जाते हैं, हम भी सब जहां रामचन्द्रजी जायँगे वहीं पर गमन करेंगे क्योंकि पेडकी जड़ बिना फूल फल पत्ते किस प्रकार रह सक्ते हैं ? ॥ सोलह ॥ हम सबको रमणीय फुलवाडी, खेत और घरका कुछ प्र योजन नहींहै, हम इन सबको छोड छोडकर धार्मिक रामचन्द्रजीके दुःख में दुःखी, सुख में सुखी रह कर उनके ही साथ चले जाँयगे ॥ सत्रह ॥ अब जितना हमारा जो सब धन आदि पृथ्वी में गड़ा रक्खा है, वह उखड जावे, गायें धन धान्यादि सर्वशः छीन लिये जाँय ॥ अट्ठारह ॥ गृहके सब देवता भी घरको छोड जावें, घरमें सबही जगह धूल छाईहो और कूडा क कंट पडाहो, चूहे इधर इधर कलावतियें खाते हों और सब जगह भट्टक विल हो जाय ॥ उन्नीस ॥ जल का नाम निशान नहीं रहेगा व धुआंहीन बिना तुम्हारे बटोरे बलि वैश्वदेव यज्ञ हीन, मंत्र होमयज्ञादि शून्य ॥ बीस ॥ अकाल पडनेके समान टूटे फूटे घर और हमारे टूटे फूटे ब र्त्तन भजन और अनेक प्रकारके उत्पात प्रगट होंगे हम सब लोग जब इस पुरी को छोड़कर चले जायँगे तब कैकेयी ऐसी पुरीका राज्य करै-:. गी ।। इक्कीस ।। हमारी भगवानसे यही प्रार्थना है कि हे नारायण ! जिस चनमें रामचन्द्रजी जाँय वहाँतो नगर वस जाय और हमारी यह छोडो हुई अयोध्या पुरी वन होजाय ॥ बाईस ॥ सर्प गुण हमारे डरसे डरकर अपने दो विल, मृग पक्षी गण पहाडोंकी चोटी, और हाथी व शेर व न भूमिको छोडदें ॥ तेईस ॥ हम सब जिस स्थानको छोडे जाते हैं वह सब मृग़ पक्षी गण आदिक यहां आकर अधिकार करें तृण मांस फलादि होन वन होजाय देशमें ठौर दो सर्प पक्षी व मृग गण विचरण करें ॥ चौबीस ॥ हम इस समय मनकी प्रसन्नता पूर्वक घर वारको छोड रामचन्द्रजीके संग वनवास करेंगे कैकेयो पुत्र और अपने बन्धु बान्धवों सहित इस पुरो का पालन करती रहै ॥ पच्चीस ॥ यद्यपि रामचन्द्रजीनें यह और भी अनेक प्रकारकी वातें नगर वासियोंके मुखसे सुनी तथापि उनका मन च लाय मान नहीं हुआ और न उन्होंने कुछ शोकही किया ॥ छब्बीस ॥ महा राज रामचन्द्रजी क्रम दो से मतवाले हाथोकी समान विक्रम वाली चालसे कैलास पहाड़ की समान पिताजीके भवनकी ओर जाने लगे ॥ सत्ताईस ॥ भवनके द्वार पर विनीत वीर पुरुष पहरे दारी कर रहेथे । रामचन्द्रजी उनके पास होते हुए आगे बढे तब थोडीही दूरपर दीन दशाको प्राप्त हुये सुमंत्रजीको देखा ॥ अट्ठाईस ॥ रामचन्द्रजी, पिताजीकी आज्ञा पालन करनेके लिये वनके जाने को तैयार हो प्रसन्न मनसे हँसते हुये से पिता के चरणारविन्द दर्शन करने की आशासे द्वार पर उपस्थित हुए वहां पर देखा तो सबही नोकर चाकर व दूसरे आदमी बहुतही दुःखितथे ॥ उनतीस॥ धर्म वत्सल रामचन्द्रजी पिताके सत्य पालनेको स्थिर निश्चय हो कर उनके चरणों में विदा लेने की आशासे द्वारपर उपस्थित हुये और सुमंत्र |
चुनाव आयोग ने कहा कि मिजोरम (Mizoram) के सेरछिप विधानसभा सीट पर 17 अप्रैल को उप चुनाव होंगे. इस चुनाव के लिए मैदान में छह उम्मीदवार हैं. पांच राजनीतिक दलों के पांच उम्मीदवार और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने पर्चा दाखिल किया.
चुनाव आयोग ने कहा कि मिजोरम में सेरछिप विधानसभा उपचुनाव पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार 17 अप्रैल को ही होगा और मतगणना दो मई को होगी. उपचुनाव के कार्यक्रम की घोषणा 16 मार्च को की गई थी. मुख्यमंत्री जोरामथांगा, विपक्षी पार्टी जोराम पीपुल्स मूवमेंट और सेंवेंथ-डे एडवेंटिस्ट चर्च को लिखे पत्रों में चुनाव आयोग ने कहा कि मतदान और मतगणना की तारीखों को आगे बढ़ाने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं को स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि ये तारीखें कई चीजों पर गौर करने के बाद निर्धारित की गई थी.
चुनाव आयोग के सचिव मधुसूदन गुप्ता के हस्ताक्षर वाले इन पत्रों में कहा गया है कि उपचुनाव 17 अप्रैल को होगा और मतगणना दो मई को होगी. मतदान और मतगणना की तारीखें ईसाई समुदाय के महत्वपूर्ण दिनों में पड़ने के कारण इन्हें टालने का पिछले महीने अनुरोध किया गया था.
मिजोरम के सेरछिप विधानसभा सीट पर 17 अप्रैल को होने वाले उपचुनाव के लिए एक निर्दलीय समेत छह उम्मीदवार मैदान में हैं. चुनाव के लिए पांच राजनीतिक दलों के पांच उम्मीदवार और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने पर्चा दाखिल किया है. इस उपचुनाव के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं.
इस सीट से मौजूदा विधायक लालदुहोमा को नवंबर 2020 में दलबदल रोधी कानून के तहत अयोग्य करार दिये जाने चलते उपचुनाव कराने की जरूरत पड़ी है.
| चुनाव आयोग ने कहा कि मिजोरम के सेरछिप विधानसभा सीट पर सत्रह अप्रैल को उप चुनाव होंगे. इस चुनाव के लिए मैदान में छह उम्मीदवार हैं. पांच राजनीतिक दलों के पांच उम्मीदवार और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने पर्चा दाखिल किया. चुनाव आयोग ने कहा कि मिजोरम में सेरछिप विधानसभा उपचुनाव पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार सत्रह अप्रैल को ही होगा और मतगणना दो मई को होगी. उपचुनाव के कार्यक्रम की घोषणा सोलह मार्च को की गई थी. मुख्यमंत्री जोरामथांगा, विपक्षी पार्टी जोराम पीपुल्स मूवमेंट और सेंवेंथ-डे एडवेंटिस्ट चर्च को लिखे पत्रों में चुनाव आयोग ने कहा कि मतदान और मतगणना की तारीखों को आगे बढ़ाने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं को स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि ये तारीखें कई चीजों पर गौर करने के बाद निर्धारित की गई थी. चुनाव आयोग के सचिव मधुसूदन गुप्ता के हस्ताक्षर वाले इन पत्रों में कहा गया है कि उपचुनाव सत्रह अप्रैल को होगा और मतगणना दो मई को होगी. मतदान और मतगणना की तारीखें ईसाई समुदाय के महत्वपूर्ण दिनों में पड़ने के कारण इन्हें टालने का पिछले महीने अनुरोध किया गया था. मिजोरम के सेरछिप विधानसभा सीट पर सत्रह अप्रैल को होने वाले उपचुनाव के लिए एक निर्दलीय समेत छह उम्मीदवार मैदान में हैं. चुनाव के लिए पांच राजनीतिक दलों के पांच उम्मीदवार और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने पर्चा दाखिल किया है. इस उपचुनाव के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं. इस सीट से मौजूदा विधायक लालदुहोमा को नवंबर दो हज़ार बीस में दलबदल रोधी कानून के तहत अयोग्य करार दिये जाने चलते उपचुनाव कराने की जरूरत पड़ी है. |
पिछले 10 सालों में 25 साल की उम्र के युवाओं सेक्सुअली ट्रांसमेटेड डिजीज (एसटीडी) में 50 फीसदी का इजाफा हुआ है।
पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड में प्रकाशित इस रिपोर्ट के मुताबिक, 2012 में सेक्सुअली ट्रांसमेटेड इंफेक्शन के तकरीबन 448,422 मामले सामने आए हैं। जिसमें क्लैमाइडिया (जननांग रोग), हर्पीज़ (दाद) और जेनिटल वॉर्ट (जननांग मस्सा) जैसे इफेक्शन भी शामिल हैं।
जब आंकड़े इकट्ठे किए गए तो पाया गया कि पिछले साल की तुलना में इन बीमारियों में 5 फीसदी की वृद्धि हुई है जो कि 2003 के मुकाबले 46 फीसदी ज्यादा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, टीनेजर्स और युवाओं में एसटीडी बढ़ने का मुख्य कारण है असुरक्षित सेक्स। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले तीन सालों में एसटीडी इंफेक्शन के बढ़ने का कारण, सरकार की सेक्स एजुकेशन पॉलिसी भी है।
द पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के आंकड़ों के मुताबिक, इंग्लैंड में लगातार एसटीडी रेट्स बढ़ने का कारण है कि बहुत से लोग अभी भी अनसेफ सेक्स करते हैं। खासतौर पर युवा और वे पुरुष जो पुरुष के साथ सेक्स करते हैं।
ये बहुत जरूरी हो जाता है कि 25 साल की उम्र के युवाओं को कैजुअल पार्टनर्स के साथ सेफ सेक्स करना चाहिए और सेक्सुअल हेल्थ क्लीनिक में लगातार चेकअप कराना चाहिए।
| पिछले दस सालों में पच्चीस साल की उम्र के युवाओं सेक्सुअली ट्रांसमेटेड डिजीज में पचास फीसदी का इजाफा हुआ है। पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड में प्रकाशित इस रिपोर्ट के मुताबिक, दो हज़ार बारह में सेक्सुअली ट्रांसमेटेड इंफेक्शन के तकरीबन चार सौ अड़तालीस,चार सौ बाईस मामले सामने आए हैं। जिसमें क्लैमाइडिया , हर्पीज़ और जेनिटल वॉर्ट जैसे इफेक्शन भी शामिल हैं। जब आंकड़े इकट्ठे किए गए तो पाया गया कि पिछले साल की तुलना में इन बीमारियों में पाँच फीसदी की वृद्धि हुई है जो कि दो हज़ार तीन के मुकाबले छियालीस फीसदी ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक, टीनेजर्स और युवाओं में एसटीडी बढ़ने का मुख्य कारण है असुरक्षित सेक्स। आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले तीन सालों में एसटीडी इंफेक्शन के बढ़ने का कारण, सरकार की सेक्स एजुकेशन पॉलिसी भी है। द पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड के आंकड़ों के मुताबिक, इंग्लैंड में लगातार एसटीडी रेट्स बढ़ने का कारण है कि बहुत से लोग अभी भी अनसेफ सेक्स करते हैं। खासतौर पर युवा और वे पुरुष जो पुरुष के साथ सेक्स करते हैं। ये बहुत जरूरी हो जाता है कि पच्चीस साल की उम्र के युवाओं को कैजुअल पार्टनर्स के साथ सेफ सेक्स करना चाहिए और सेक्सुअल हेल्थ क्लीनिक में लगातार चेकअप कराना चाहिए। |
मिलिए दुनिया के सबसे बड़े मॉडल रेलवे सेः ब्रूस ज़ैकैग्निनो से मिलिए यह आदमी दुनिया के सबसे बड़े मॉडल रेलवे या नॉर्थलैंड्स का निर्माता है।
यह मॉडल रेलवे, जो लगभग 15 किलोमीटर लंबा है, संयुक्त राज्य अमेरिका के फिलाडेल्फिया क्षेत्र में स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि ब्रूस ज़ैकैग्निनो ने इस रेलवे के निर्माण में ठीक 16 साल बिताए। नॉर्थलैंड्ज़ नाम का मॉडल रेलवे 4830 वर्ग मीटर के क्षेत्र में बनाया गया है। Zaccagnino, जिन्होंने मॉडल पर 10-मीटर ऊंचे पहाड़ों को बनाने के लिए लगभग 10 टन प्लास्टर का उपयोग किया था, अब कला के काम में बदल गया है।
मॉडल शहर पर 12 पुल हैं, जिनमें से सबसे बड़ा 400 मीटर है।
दुनिया का सबसे बड़ा मॉडल रेलवे, जिसमें कई इमारतें शामिल हैं जैसे कि पीर, शहर और खदानें और साथ ही ऐतिहासिक पुनर्निर्माण, फिलाडेल्फिया, अमेरिका में एक संग्रहालय के रूप में कार्य करता है। दूसरी ओर, नॉर्थलैंड अब सोनी के "सेपरेट टुगेदर" प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इस परियोजना के हिस्से के रूप में, सोनी ने QX100 लेंस का उपयोग करके नॉर्थलैंडज़ की पहले की अनदेखी छवियों को शूट किया और साझा किया। यहाँ इन चित्रों का प्रचार वीडियो है।
| मिलिए दुनिया के सबसे बड़े मॉडल रेलवे सेः ब्रूस ज़ैकैग्निनो से मिलिए यह आदमी दुनिया के सबसे बड़े मॉडल रेलवे या नॉर्थलैंड्स का निर्माता है। यह मॉडल रेलवे, जो लगभग पंद्रह किलोग्राममीटर लंबा है, संयुक्त राज्य अमेरिका के फिलाडेल्फिया क्षेत्र में स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि ब्रूस ज़ैकैग्निनो ने इस रेलवे के निर्माण में ठीक सोलह साल बिताए। नॉर्थलैंड्ज़ नाम का मॉडल रेलवे चार हज़ार आठ सौ तीस वर्ग मीटर के क्षेत्र में बनाया गया है। Zaccagnino, जिन्होंने मॉडल पर दस-मीटर ऊंचे पहाड़ों को बनाने के लिए लगभग दस टन प्लास्टर का उपयोग किया था, अब कला के काम में बदल गया है। मॉडल शहर पर बारह पुल हैं, जिनमें से सबसे बड़ा चार सौ मीटर है। दुनिया का सबसे बड़ा मॉडल रेलवे, जिसमें कई इमारतें शामिल हैं जैसे कि पीर, शहर और खदानें और साथ ही ऐतिहासिक पुनर्निर्माण, फिलाडेल्फिया, अमेरिका में एक संग्रहालय के रूप में कार्य करता है। दूसरी ओर, नॉर्थलैंड अब सोनी के "सेपरेट टुगेदर" प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इस परियोजना के हिस्से के रूप में, सोनी ने QXएक सौ लेंस का उपयोग करके नॉर्थलैंडज़ की पहले की अनदेखी छवियों को शूट किया और साझा किया। यहाँ इन चित्रों का प्रचार वीडियो है। |
इस बार 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 15 अगस्त को देश के अलग अलग हिस्सों में तैयारियां हो रही हैं। खासतौर पर यूपी की राजधानी लखनऊ पहले की तरह एक बार फिर जगमगाएगी। जिला प्रशासन और व्यापारियों की पहल के तहत, लखनऊ के 75 से अधिक बाजारों को उत्सव के दौरान तिरंगे की रोशनी और 75,000 राष्ट्रीय झंडों से सजाया जाएगा। जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार ने कहा कि प्रशासन स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के समारोह में समाज के सभी वर्गो के लोगों को शामिल करना चाहता है।
इस अवसर पर उन्होंने कहा, 'तिरंगा सभी आवासीय और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लगाया जाएगा। हम हजरतगंज, अमीनाबाद, आलमबाग, चारबाग, चौक और भूतनाथ सहित मुख्य बाजारों को सजाना चाहते हैं। हमने 75 बाजारों के व्यापारियों से बात की है और उन्होंने हमारे साथ सहयोग करने का वादा किया है। ' लखनऊ व्यापार मंडल के सदस्य बाजारों को सजाएंगे, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पौधरोपण और अन्य कार्यक्रम बाजार में आयोजित करेंगे, जबकि प्रशासन टूटी सड़कों और नालों की सफाई और मरम्मत सुनिश्चित करेगा।
वही, बुधवार शाम व्यापारियों के साथ संभागायुक्त व जिलाधिकारी की बैठक में यह निर्णय लिया गया। लखनऊ व्यापार मंडल के वरिष्ठ महासचिव अमरनाथ मिश्रा ने कहा, 'व्यापारी 75,000 से अधिक झंडे लगाएंगे और बाजारों को तिरंगे की रोशनी से सजाएंगे। व्यापारी स्वच्छता कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित करेंगे जो बाजार को साफ रखने में हमारी मदद करते हैं। वे अनाथालयों, वृद्धाश्रम और अस्पतालों में भोजन और मिठाई भी वितरित करेंगे। '
इसी के साथ हजरतगंज ट्रेडर्स एसोसिएशन के एक सदस्य विनोद पंजाबी ने कहा, 'हजरतगंज में व्यापारियों ने एक समान साइनेज लगाने पर सहमति जताई है। बाजार को एक समान रोशनी से सजाया जाएगा। ' उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने कहा, 'शहर में दो लाख से अधिक व्यापारी और आश्रित हैं और वे सभी जिला प्रशासन के साथ सहयोग करेंगे। हम एलईडी स्क्रीन लगाएंगे और कार्यक्रम में लोगों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। '
| इस बार पचहत्तरवें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पंद्रह अगस्त को देश के अलग अलग हिस्सों में तैयारियां हो रही हैं। खासतौर पर यूपी की राजधानी लखनऊ पहले की तरह एक बार फिर जगमगाएगी। जिला प्रशासन और व्यापारियों की पहल के तहत, लखनऊ के पचहत्तर से अधिक बाजारों को उत्सव के दौरान तिरंगे की रोशनी और पचहत्तर,शून्य राष्ट्रीय झंडों से सजाया जाएगा। जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार ने कहा कि प्रशासन स्वतंत्रता की पचहत्तरवीं वर्षगांठ के समारोह में समाज के सभी वर्गो के लोगों को शामिल करना चाहता है। इस अवसर पर उन्होंने कहा, 'तिरंगा सभी आवासीय और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर लगाया जाएगा। हम हजरतगंज, अमीनाबाद, आलमबाग, चारबाग, चौक और भूतनाथ सहित मुख्य बाजारों को सजाना चाहते हैं। हमने पचहत्तर बाजारों के व्यापारियों से बात की है और उन्होंने हमारे साथ सहयोग करने का वादा किया है। ' लखनऊ व्यापार मंडल के सदस्य बाजारों को सजाएंगे, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पौधरोपण और अन्य कार्यक्रम बाजार में आयोजित करेंगे, जबकि प्रशासन टूटी सड़कों और नालों की सफाई और मरम्मत सुनिश्चित करेगा। वही, बुधवार शाम व्यापारियों के साथ संभागायुक्त व जिलाधिकारी की बैठक में यह निर्णय लिया गया। लखनऊ व्यापार मंडल के वरिष्ठ महासचिव अमरनाथ मिश्रा ने कहा, 'व्यापारी पचहत्तर,शून्य से अधिक झंडे लगाएंगे और बाजारों को तिरंगे की रोशनी से सजाएंगे। व्यापारी स्वच्छता कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित करेंगे जो बाजार को साफ रखने में हमारी मदद करते हैं। वे अनाथालयों, वृद्धाश्रम और अस्पतालों में भोजन और मिठाई भी वितरित करेंगे। ' इसी के साथ हजरतगंज ट्रेडर्स एसोसिएशन के एक सदस्य विनोद पंजाबी ने कहा, 'हजरतगंज में व्यापारियों ने एक समान साइनेज लगाने पर सहमति जताई है। बाजार को एक समान रोशनी से सजाया जाएगा। ' उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने कहा, 'शहर में दो लाख से अधिक व्यापारी और आश्रित हैं और वे सभी जिला प्रशासन के साथ सहयोग करेंगे। हम एलईडी स्क्रीन लगाएंगे और कार्यक्रम में लोगों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। ' |
ट� ��लीविजन रियलिटी शो 'मास्टरशेफ इंडिया 4' की विजेता एनआरआई निकिता गांधी अब एक पाक कला शिक्षण स्कूल शुरू करना चाहती हैं और अंत में अपना खुद का रेस्तरां खोलना चाहती हैं. निकिता अबू धाबी में रहती हैं. शुरुआत में हर युवक-युवती की तरह उनके मन में भी करियर को लेकर असमंजस की स्थिति थी. वह यह तय नहीं कर पा रही थी कि वह खाना बनाने के अपने जुनून को करियर के रूप में चुनें या किसी अन्य सुरक्षित करियर का रुख करें. 'मास्टरशेफ इंडिया 4' का समापन रविवार को हो गया. इसमें निकिता (21) को भारत की शीर्ष शाकाहारी शेफ का खिताब दिया गया. वह कहती हैं कि उनमें बचपन से ही कुकिंग को लेकर एक जुनून है.
उन्होंने कहा, "जिस उम्र में जब अन्य बच्चे कार्टून देखा करते हैं, मैं उस उम्र में अपनी मां को रसोई में खाना बनाते देखा करती थी. मैंने आठ साल की उम्र में खुद खाना बनाना शुरू किया. निकिता हमेशा से एक पाक-कला शिक्षण स्कूल में पढ़ना और कुकिंग को करियर के रूप में चुनना चाहती थीं. उन्होंने बताया, लेकिन जब मैं कॉलेज आई तो मन में एक दुविधा थी कि 'मुझे नहीं पता कि मैं एक पाक कला शिक्षण स्कूल में जाना चाहती हूं या मैं बिजनेस की पढ़ाई करना चाहती हूं. इन सारी दुविधा के बाद मैंने एक सुरक्षित विकल्प चुना. यह विकल्प बिजनेस या वित्त की पढ़ाई थी.
'मास्टरशेफ इंडिया 4' की विजेता के रूप में निकिता ने एक करोड़ रुपये जीते. उन्होंने कहा, "मैंने सोचा कि यह मेरे करियर को झटपट बदलने का सर्वश्रेष्ठ मंच है. निकिता का कहना है कि वह विजेता के रूप में मिली धनराशि का इस्तेमाल एक पाक कला शिक्षण स्कूल में दाखिला लेने के लिए अपनी फीस के रूप में करेंगी. वह भविष्य में एक रेस्तरां खोलना चाहती हैं, लेकिन इससे पहले पाक कला शिक्षण स्कूल में दाखिल लेकर इस क्षेत्र में अपनी नींव को थोड़ा और मजबूत करना चाहती हैं. निकिता ने कहा, "मैं भविष्य में यकीनन एक रेस्तरां खोलना चाहूंगी, लेकिन मुझे लगता है कि मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है. मैंने 'मास्टरशेफ' में बहुत कुछ सीखा, लेकिन मेरा मानना है कि सीखना कभी खत्म नहीं होता.
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| ट� ��लीविजन रियलिटी शो 'मास्टरशेफ इंडिया चार' की विजेता एनआरआई निकिता गांधी अब एक पाक कला शिक्षण स्कूल शुरू करना चाहती हैं और अंत में अपना खुद का रेस्तरां खोलना चाहती हैं. निकिता अबू धाबी में रहती हैं. शुरुआत में हर युवक-युवती की तरह उनके मन में भी करियर को लेकर असमंजस की स्थिति थी. वह यह तय नहीं कर पा रही थी कि वह खाना बनाने के अपने जुनून को करियर के रूप में चुनें या किसी अन्य सुरक्षित करियर का रुख करें. 'मास्टरशेफ इंडिया चार' का समापन रविवार को हो गया. इसमें निकिता को भारत की शीर्ष शाकाहारी शेफ का खिताब दिया गया. वह कहती हैं कि उनमें बचपन से ही कुकिंग को लेकर एक जुनून है. उन्होंने कहा, "जिस उम्र में जब अन्य बच्चे कार्टून देखा करते हैं, मैं उस उम्र में अपनी मां को रसोई में खाना बनाते देखा करती थी. मैंने आठ साल की उम्र में खुद खाना बनाना शुरू किया. निकिता हमेशा से एक पाक-कला शिक्षण स्कूल में पढ़ना और कुकिंग को करियर के रूप में चुनना चाहती थीं. उन्होंने बताया, लेकिन जब मैं कॉलेज आई तो मन में एक दुविधा थी कि 'मुझे नहीं पता कि मैं एक पाक कला शिक्षण स्कूल में जाना चाहती हूं या मैं बिजनेस की पढ़ाई करना चाहती हूं. इन सारी दुविधा के बाद मैंने एक सुरक्षित विकल्प चुना. यह विकल्प बिजनेस या वित्त की पढ़ाई थी. 'मास्टरशेफ इंडिया चार' की विजेता के रूप में निकिता ने एक करोड़ रुपये जीते. उन्होंने कहा, "मैंने सोचा कि यह मेरे करियर को झटपट बदलने का सर्वश्रेष्ठ मंच है. निकिता का कहना है कि वह विजेता के रूप में मिली धनराशि का इस्तेमाल एक पाक कला शिक्षण स्कूल में दाखिला लेने के लिए अपनी फीस के रूप में करेंगी. वह भविष्य में एक रेस्तरां खोलना चाहती हैं, लेकिन इससे पहले पाक कला शिक्षण स्कूल में दाखिल लेकर इस क्षेत्र में अपनी नींव को थोड़ा और मजबूत करना चाहती हैं. निकिता ने कहा, "मैं भविष्य में यकीनन एक रेस्तरां खोलना चाहूंगी, लेकिन मुझे लगता है कि मुझे अभी बहुत कुछ सीखना है. मैंने 'मास्टरशेफ' में बहुत कुछ सीखा, लेकिन मेरा मानना है कि सीखना कभी खत्म नहीं होता. Disclaimer : The views, opinions, positions or strategies expressed by the authors and those providing comments are theirs alone, and do not necessarily reflect the views, opinions, positions or strategies of NTIPL, www. newstracklive. com or any employee thereof. NTIPL makes no representations as to accuracy, completeness, correctness, suitability, or validity of any information on this site and will not be liable for any errors, omissions, or delays in this information or any losses, injuries, or damages arising from its display or use. NTIPL reserves the right to delete, edit, or alter in any manner it sees fit comments that it, in its sole discretion, deems to be obscene, offensive, defamatory, threatening, in violation of trademark, copyright or other laws, or is otherwise unacceptable. NTIPL reserves the right to delete, edit, or alter in any manner it sees fit comments that it, in its sole discretion, deems to be obscene, offensive, defamatory, threatening, in violation of trademark, copyright or other laws, or is otherwise unacceptable. |
भारतीय टीम के दिग्गज खिलाड़ी हरभजन सिंह का हालिया पोस्ट अब फैंस के बीच तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें भज्जी संन्यास लेने के संकेत देते हुए नजर आ रहे हैं. हालांकि अभी तक उन्होंने कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी नहीं की है, लेकिन उनका इंस्टाग्राम पोस्ट अब तेजी से वायरल हो रहा है. जिसे देखकर कई फैंस ट्विटर पर भावुक होते हुए नजर आ रहे हैं.
दरअसल हरभजन सिंह ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर जो वीडियो साझा की है, वो ये कयास लगाने पर मजबूर कर रही है कि, आने वाले दिनों में हरभजन सिंह क्रिकेट करियर को अलविदा कह सकते हैं. उनके इंस्टाग्राम के वीडियो से हरभजन सिंह के इस मूड का अंदाजा लगाया जा सकता है, जिसमें वो हर फॉर्मेट की जर्सी में नजर आ रहे हैं. वीडियो के अंत में 'OUT' शब्द भी लिखा आ रहा है, जो संकेत देने के लिए काफी लग रहा है.
कुछ सेकंड के इस वीडियो में उनके आउट शब्द को देखकर ये कयास लगने लगे हैं कि अब हरभजन सिंह शायद संन्यास लेने की तैयारी में हैं. उनके पोस्ट को देखने के बाद ट्विटर पर भी उनके रिटायरमेंट की खबर तेजी से वायरल फैल रही हें. कई यूजर्स हरभजन सिंह को टैग करते हुए यही सवाल पूछ रहे हैं कि, क्या आप संन्यास ले रहे हैं? तो वहीं कई फैंस उनके इस पोस्ट को लेकर काफी इमोशनल भी नजर आ रहे हैं.
Suggestion for harbhajan Singh : time 2 say bye to Cricket so please announce the retairment.......
#HarbhajanSingh #retirement @harbhajan_singh kya sanyas le rahe hai aap?
| भारतीय टीम के दिग्गज खिलाड़ी हरभजन सिंह का हालिया पोस्ट अब फैंस के बीच तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें भज्जी संन्यास लेने के संकेत देते हुए नजर आ रहे हैं. हालांकि अभी तक उन्होंने कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट जारी नहीं की है, लेकिन उनका इंस्टाग्राम पोस्ट अब तेजी से वायरल हो रहा है. जिसे देखकर कई फैंस ट्विटर पर भावुक होते हुए नजर आ रहे हैं. दरअसल हरभजन सिंह ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम पर जो वीडियो साझा की है, वो ये कयास लगाने पर मजबूर कर रही है कि, आने वाले दिनों में हरभजन सिंह क्रिकेट करियर को अलविदा कह सकते हैं. उनके इंस्टाग्राम के वीडियो से हरभजन सिंह के इस मूड का अंदाजा लगाया जा सकता है, जिसमें वो हर फॉर्मेट की जर्सी में नजर आ रहे हैं. वीडियो के अंत में 'OUT' शब्द भी लिखा आ रहा है, जो संकेत देने के लिए काफी लग रहा है. कुछ सेकंड के इस वीडियो में उनके आउट शब्द को देखकर ये कयास लगने लगे हैं कि अब हरभजन सिंह शायद संन्यास लेने की तैयारी में हैं. उनके पोस्ट को देखने के बाद ट्विटर पर भी उनके रिटायरमेंट की खबर तेजी से वायरल फैल रही हें. कई यूजर्स हरभजन सिंह को टैग करते हुए यही सवाल पूछ रहे हैं कि, क्या आप संन्यास ले रहे हैं? तो वहीं कई फैंस उनके इस पोस्ट को लेकर काफी इमोशनल भी नजर आ रहे हैं. Suggestion for harbhajan Singh : time दो say bye to Cricket so please announce the retairment....... #HarbhajanSingh #retirement @harbhajan_singh kya sanyas le rahe hai aap? |
यह आपकी सोच को कुछ भ्रमित कर देगा और आप अनिश्चित, स्वच्छंद और जिद्दी हो सकते हैं। आप घुमावदार बीमारियों और विस्फोटों से पीड़ित हो सकते हैं। आप भावनात्मक रूप से परेशान हो सकते हैं और तनाव की स्थिति में रह सकते हैं। यदि आपको अपनी आंखों की दृष्टि से कोई असुविधा है, तो आपको चिकित्सकीय / नेत्र संबंधी सलाह लेनी चाहिए। आपके परिवार के सदस्यों के साथ संबंध तनाव में आ सकते हैं जिसके लिए आप दुखी महसूस कर सकते हैं।
| यह आपकी सोच को कुछ भ्रमित कर देगा और आप अनिश्चित, स्वच्छंद और जिद्दी हो सकते हैं। आप घुमावदार बीमारियों और विस्फोटों से पीड़ित हो सकते हैं। आप भावनात्मक रूप से परेशान हो सकते हैं और तनाव की स्थिति में रह सकते हैं। यदि आपको अपनी आंखों की दृष्टि से कोई असुविधा है, तो आपको चिकित्सकीय / नेत्र संबंधी सलाह लेनी चाहिए। आपके परिवार के सदस्यों के साथ संबंध तनाव में आ सकते हैं जिसके लिए आप दुखी महसूस कर सकते हैं। |
Koderma: डीसी आदित्य रंजन शुक्रवार को सदर अस्पताल पहुंचे. उन्होंने अस्पताल को ऑपेरशन थियेटर में इस्तेमाल होने वाली सामग्री दी. यह सामग्री हैंड इन हैंड इंडिया संस्था द्वारा उपलब्ध कराया गया था. डीसी ने इसे सिविल सर्जन डॉ डीपी सक्सेना और उपाधीक्षक डॉ अमरेंद्र कुमार सिन्हा को सौंप दिये.
इस अवसर पर डीसी ने हैंड इंडिया के कार्य और प्रयास की सराहना की. उन्होंने कहा कि मदद के लिए आगे आने वाले हर हाथ का जिला प्रशासन स्वागत करता है. इस दौरान DC ने सदर अस्पताल का जायजा लिया. इलाज कराने आए मरीजों और उनके परिजनों से बात की. मरीजों ने अस्पताल में दी जा रही स्वास्थ्य सेवा को पहले से बेहतर बताया. इस अवसर पर हैंड इंडिया के समन्वयक रवि रंजन ने कहा कि आगे जब भी शल्य कक्ष में कुछ भी आवश्यकता हो तो उनकी संस्था सारे सामान उपलब्ध कराने की कोशिश करेगी.
समन्वयक ने कहा कि जिले के छह सरकारी शिक्षण संस्थानों में स्मार्ट क्लास के लिए भी जरूरत के सभी सामान उपलब्ध कराये जाएंगे. कहा कि पहले भी इस संस्था ने गर्भवती महिलाओं के लिए संतुलित आहार और दवा दी है. इस कार्यक्रम में वरीय दंत चिकित्सा पदाधिकारी डॉ शरद कुमार, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ विशाल कुमार, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ सुनील कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक तब्बसुम नाज़ और जिला कार्यक्रम समन्वयक आयुष्मान सुमित कुमार सिंह सहित कई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे.
| Koderma: डीसी आदित्य रंजन शुक्रवार को सदर अस्पताल पहुंचे. उन्होंने अस्पताल को ऑपेरशन थियेटर में इस्तेमाल होने वाली सामग्री दी. यह सामग्री हैंड इन हैंड इंडिया संस्था द्वारा उपलब्ध कराया गया था. डीसी ने इसे सिविल सर्जन डॉ डीपी सक्सेना और उपाधीक्षक डॉ अमरेंद्र कुमार सिन्हा को सौंप दिये. इस अवसर पर डीसी ने हैंड इंडिया के कार्य और प्रयास की सराहना की. उन्होंने कहा कि मदद के लिए आगे आने वाले हर हाथ का जिला प्रशासन स्वागत करता है. इस दौरान DC ने सदर अस्पताल का जायजा लिया. इलाज कराने आए मरीजों और उनके परिजनों से बात की. मरीजों ने अस्पताल में दी जा रही स्वास्थ्य सेवा को पहले से बेहतर बताया. इस अवसर पर हैंड इंडिया के समन्वयक रवि रंजन ने कहा कि आगे जब भी शल्य कक्ष में कुछ भी आवश्यकता हो तो उनकी संस्था सारे सामान उपलब्ध कराने की कोशिश करेगी. समन्वयक ने कहा कि जिले के छह सरकारी शिक्षण संस्थानों में स्मार्ट क्लास के लिए भी जरूरत के सभी सामान उपलब्ध कराये जाएंगे. कहा कि पहले भी इस संस्था ने गर्भवती महिलाओं के लिए संतुलित आहार और दवा दी है. इस कार्यक्रम में वरीय दंत चिकित्सा पदाधिकारी डॉ शरद कुमार, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ विशाल कुमार, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ सुनील कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक तब्बसुम नाज़ और जिला कार्यक्रम समन्वयक आयुष्मान सुमित कुमार सिंह सहित कई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद थे. |
राज्य सरकार की 10 योजनाओं से आमजन को लाभान्वित करने के लिए शुरू किए गए महंगाई राहत कैंप में क्षेत्रवासियों की भागीदारी बढ़ती जा रही है। वहीं जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार कैंप का निरीक्षण और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया बढ़ाने के लिए निर्देशित कर रहे है।
विधायक भरोसीलाल जाटव शुक्रवार को हिंडौन नगर परिषद में कैंप का निरीक्षण करने पहुंचे। वहां मौजूद लोगों से बातचीत की। इसी के साथ लाभार्थियों के लिए कैंप स्थल पर छाया-पानी व्यवस्था पर विशेष जोर दिया। इस दौरान सभापति बृजेश जाटव, प्रधान विनोद जाटव भी कैंप स्थल पर मौजूद रहे।
उन्होंने रजिस्ट्रेशन के बाद लाभार्थियों को दिए जाने वाले स्लिप के साथ महंगाई राहत रिपोर्ट कार्ड भी देने के लिए कहा। इससे पहले कलेक्टर अंकित कुमार सिंह, एसपी नारायण टोंगस ने भी महू खास और महू इब्राहिमपुर में चल रहे कैंप का निरीक्षण किया। हिंडौन में स्थाई कैंप नगर परिषद, पंचायत समिति, जिला अस्पताल, जाटव बस्ती, वर्धमान नगर के अलावा अस्थाई कैंप नई मंडी पार्क में आज से शुरू हुआ है। वहीं लाभार्थियों के रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में इंटरनेट की धीमी गति और स्लिप प्रिंट के लिए कैंप स्थल पर एक प्रिंटर होने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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| राज्य सरकार की दस योजनाओं से आमजन को लाभान्वित करने के लिए शुरू किए गए महंगाई राहत कैंप में क्षेत्रवासियों की भागीदारी बढ़ती जा रही है। वहीं जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार कैंप का निरीक्षण और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया बढ़ाने के लिए निर्देशित कर रहे है। विधायक भरोसीलाल जाटव शुक्रवार को हिंडौन नगर परिषद में कैंप का निरीक्षण करने पहुंचे। वहां मौजूद लोगों से बातचीत की। इसी के साथ लाभार्थियों के लिए कैंप स्थल पर छाया-पानी व्यवस्था पर विशेष जोर दिया। इस दौरान सभापति बृजेश जाटव, प्रधान विनोद जाटव भी कैंप स्थल पर मौजूद रहे। उन्होंने रजिस्ट्रेशन के बाद लाभार्थियों को दिए जाने वाले स्लिप के साथ महंगाई राहत रिपोर्ट कार्ड भी देने के लिए कहा। इससे पहले कलेक्टर अंकित कुमार सिंह, एसपी नारायण टोंगस ने भी महू खास और महू इब्राहिमपुर में चल रहे कैंप का निरीक्षण किया। हिंडौन में स्थाई कैंप नगर परिषद, पंचायत समिति, जिला अस्पताल, जाटव बस्ती, वर्धमान नगर के अलावा अस्थाई कैंप नई मंडी पार्क में आज से शुरू हुआ है। वहीं लाभार्थियों के रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में इंटरनेट की धीमी गति और स्लिप प्रिंट के लिए कैंप स्थल पर एक प्रिंटर होने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
सूरिपद से बागरा में प्रथम चातुर्मास और तत्पश्चात् प्रतिष्ठायें एव दोक्षायें [ १९१ श्री प्रेमविजयजी, न्यायविजयजी और नीतिविजयजी को तथा साध्वीजी श्री मोती श्रीजी, विशालश्रीजी, विनोदश्रीजी और लावण्यश्रीजी को बड़ी दीक्षा प्रदान की ।
श्रीकोटतिथि में विस्थापना एवं प्राण-प्रतिष्ठा
सियाणा से आपश्री ने दीक्षोत्सव समाप्त करके कुछ ही दिनों के पश्चात् श्री कोर्टाजीतीर्थ की ओर प्रयाण कर दिया, कारण कि श्री कोर्टाजी तीर्थ के ऊपर दण्डध्वजारोहण करवाना था तथा जिनेश्वर - प्रतिमाओं एवं गुरुप्रतिमाओं की प्रतिष्ठा करनी थी । सियाणा से आपश्री आहोर, गुढा, तखतगढ़, भूति आदि ग्रामों में विहार करते हुये अनुक्रम से श्रीकोर्टाजी तीर्थ में पधारे । कोर्टा के संघ नेपी का भव्य स्वागत किया। प्रतिष्ठा की तैयारिया
की जाने लगीं और तीर्थ के वाह्योद्यान में मण्डप की सुन्दर रचना की गई । वि०सं० १९९६ वै० शुक्ला ७ बुधवार को शुभ मुहूत्त में दो जिन प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा तथा चार दण्डध्वज और गुरुवर्य श्रीमद् राजेन्द्रसूरीश्वरजी महाराज सा० की दो सुन्दर प्रतिमाओं की अञ्जनशलाका की गई ।
यहाँ से चरितनायक ने रोवाडाग्राम ( सिरोही राज्य ) की ओर
प्रयाण किया ।
रोवाड़ा (सिरोही - राज्य) में गुरु-प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा वि० स १९९६
जब चरितनायक अपनी साधु-मण्डली के सहित कोर्टाजी तीर्थ से विहार करके रोवाडा में पधारे तो रोवाडा के श्रीघ ने आपश्री का शोभा एव सज्जा के उपकरणों के सहित समारोहपूर्वक स्वागत किया । वि०सं० १६६६ ज्ये०कृ० ९ को अष्टोत्तरशत-स्नात्र पूजा के सहित गुरुवर्य
* 'श्री घाणसा-प्रतिष्ठा महोत्सव' नामक पुस्तक के प्रतिष्ठा प्रकरण में रोबाढ़ा की प्रतिष्ठा का दिन ज्ये० शु० २ रविवार छपा है, उसकी जगह ज्ये० ० ९ चाहिए ।
भीम विजययतीब्रसूरि जीवन परिव
श्रीमद् राजेन्द्रसरिजी की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की । रोवाड़ा से आपभी विहार करके फताहपुरा पधारे।
फवाहपुरा में प्राम-प्रतिष्ठा वि० से १९९६
चरिवनायक रोवाया से शुभ मुहूर्श में विहार करके फवाहपुरा पारे । फवाहपुरा के सप ने आपभी का अति ही मम्य स्वागत किया । [वि॰सं॰ १९६६ न्पे०शु० ९ मनिश्चर को शुभ मुहूच में श्री राजेन्द्रसर भरनी महाराज साइप और उनके शिष्य मुनिवर श्री हिम्मतविजयजी के चरण-मुगलों की भापग्री ने प्रविष्ठाखमशलाका की। इस अवसर पर फवाद पुरा के श्रीसेष न अड्डाई महोत्सव का सुन्दर भायोजन किया था। नव दिनों में अलग २ सयभावकों एवं सप की ओर से नव नवकारझियाँ की गई थीं । प्रतिष्ठा से निवृत होकर घरितनायक सळोदरिया पधारे।
सोदरिया में प्रतिष्ठा बि सं १९९६
भरितनायक फताहपुरा से बिहार करके सीधे सलोदरिया पधारे। यहाँ संघ ने आपनी का अति दी सराहनोय विधि से स्वागत किया। आपभी मे वि० सम्वत् १९९६ म्येव सु १४ गुरुवार को झुम मुहू च में श्री पार्श्वनाथ की प्रतिष्ठा की। इस विस्थापनोत्सव के उपलक्ष में सलादरिया के श्रीसम ने तीन दिवस पर्यंत उत्सव उजमा था।
यहाँ से चरितनायक शिवर्गज, सन्दरी होते हुये लघुतीर्ण भी बाकोड़ा के दर्शन करके सायडेराव, कौशीलाव, पाषा में होते हुये तथा एक-एक और कहीं अधिक दिनों का विनाम करते हुये चातुर्मासार्थ भावाड़ झु० १४ का मूति में प्रसिद्ध हुये ।
३३ वि सं १९९६ में भूति में बस और गुरु प्रतिमा की भाचार्यत्री ने मुनि श्री विजयजी, पलभविजयजी, विद्या विजयजी, सागरविजयजी, प्रेमजी, न्यायविजयजी आदि 8 साधुओं के
सूरिपद से बागरा में प्रथम चातुर्मास और तत्पश्चात् प्रतिष्ठायें एवं दीक्षायें [ १९३ साथ में भूति में चातुर्मास किया । व्याख्यान में 'श्री उत्तराध्ययनसूत्र' और भावनाधिकार में 'श्री विक्रम-चरित्र' का वाचन किया। चारों मास तप, व्रत, पौषध आदि की सराहनीय उन्नति रही । विशेष दिन एवं त्योहारों पर व्याख्यान के पश्चात् प्रभावनायें वितरित की गई । आचार्यश्री के दर्शन करने के लिये वागरा, आहर, हरजी, भीनमाल, वाली, शिवगंज, पावा, जालोर, सियाणा श्रादि ग्राम-नगरों से तथा मालवा, नेमाड, कच्छ-प्रान्तों से अनेक सद्गृहस्थ श्रावक आये थे । श्रीसंघ-भूति ने गंतुक दर्शक एवं अतिथियों का अच्छा आदर-सत्कार किया था । चातुर्मास पूर्ण होने पर चरितनायक को भूति-संघ ने श्री राजेन्द्रसूरि प्रतिमा की स्थापना करवाने की विनती की । फलतः श्रुति धूम-धाम एवं महोत्सवपूर्वक वि० सं० १६६५ पौष शु० ९ को शुभ मुहूर्त्त में समारोहपूर्वक श्रीमद् विजयराजेन्द्रसूरिजी की प्रतिमा की आपने प्राण-प्रतिष्ठा करके स्थापना की तथा मुनि श्री लावण्यविजयजी को भी दीक्षा इसी शुभावसर पर प्रदान की गई ।
मेरी नेमाड़ यात्रा - रचना वि० सं० १९६४ । काऊन १६ पृष्ठीय । पृ०सं० ८४ । सादी जिल्द । यह एक गवेषणापूर्वक लिखी गयी ऐतिहासिक एवं भौगोलिक दृष्टियों से सग्रहणीय एवं पठनीय पुस्तक है । इसमें नेमाड़प्रान्त, जिसमें प्रसिद्ध ऐतिहासिक नगर माडू, धार, घढ़वारणी, लक्ष्मणीतीर्थ और लीराजपुर, कुक्षी आदि के प्रदेश सम्मिलित हैं, उन सर्व का यथाप्राप्त भूगोल, इतिहास वर्णित है । इसको भूति ( मरुधर ) निवासी जोशी रावल सूरतिंगजी वन्नाजी ने स० १९९६ में श्री आनन्द - प्रिं० - प्रेस, भावनगर में छपवा कर प्रसिद्ध किया ।
गुरु-चरणयुगल की अंजनशलाका वि० सं० १९९७
चरितनायक ने शरद् ऋतु भूति में ही स्थिरता रख कर व्यतीत की । तत्पश्चात् आपश्री वहा से विहार करके मार्ग में पडते हुये ग्राम, नगरों में धर्मोपदेश देते हुये आहोर पधारे । वि० सं० १९९७ वै० शु० १४ के दिन शुभ मुहूर्त में आपश्री ने स्वर्णकलश एव दण्डध्वजे की प्रतिष्ठाजनेशलाका करके
श्रीमद् विजयी- मावन चरित
उनको त्रिश्चिस्वरी श्री महावीर मिनालय के ऊपर चबाय। इस उत्सव पर अड्डाई महोत्सव साह रखनाजी भूताजी मिश्रीमत की ओर से उजमा गया था। इसी शुभ दिवस पर गुरुवर्य श्रीमद् राजेन्द्र रिमी की दो प्रतिमाओं की अमनअक्षाफा भी की गई थी। यहां भापश्री कुछ दिन स्थिर-वास रहे और तस्पमात् पापभी ने धातुर्मासार्थ जालोर की भोर प्रयाप्य किया
३४ वि०स० १९९७ में मान्मेर में चातुर्मास और गुरु-पतिमा की अंजनामाका - प्राधायभी ने मुनिवर भी सीनियनी, भगतविजयजी, पहम विजयजी, विद्याविनयजी, सागरविजयजी, भारित्रविजयजी, प्रेमविजयजी, नीतिषिमयजी, न्याययिअमजी, लाघरायषिजयजी, रंगविजयजी के साथ जाखोर में चातुर्मास किया। चातुर्मास-प्पास्यान में 'सूपगडानसूत्र और भावनाधिकार में 'जयानन्द केवली- चरित्र का वाचन किया। जालोर में जैन घरों की भी संख्या है और प्रायः सर्व दी सम्प्रदाय के घर छ) परन्तु आापक्षी सार गर्मित एवं ओजस्वी प्यास्थानों का लाभ सर्व ही सम्प्रदाय के सदगृहस्थों मे लिया। इस भातुर्मास में भी राजेन्द्र मैन गुरुकुल, नागरा की समीतसंगीत-अम्पापक मास्टर सालिगरामजी की अध्यक्षता में भरितनायक के दर्शन और प्रभु-कीर्तन करने के लिये बाजार में भेजी गई थी। बागरा की संगीत का कार्य और कौशल रखकर सर्व दर्शकगण में उसकी मूरि २ प्रशसा की और घरितनायक के शुभाशीवाद से उस समय से वापरा की संगीत मयबती की स्पाति बड़ी और वह अपने समय में कांगत एव अन्य प्रान्तों की सर्व जैन संगीत-मण्डक्षियों में भीरे २ महितीय गिनी जाने लगी। चातुर्मास में अगणित तप, व्रत और कई अड्डाई-महारसव हुप तथा आभार्गणी के दर्शन करने के लिये मिन्न २ प्रान्तों के ४४-६० नगरों से भाषक और भाविकायें आई, जिनकी बालोर-मीसंघ ने भोजन, भयनादि की समुचित सुविधाओं से एवं योम्प सरकार से अच्छी सेवा की। भातुमास के सानन्द पूर्ण हो जाने पर श्रीसभ बातोर ने गुरुदय के समय श्री राजेन्द्रहरि महाराज साइन की तीन प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा कराने की प्रार्थना की। फलस्वरूप आचार्यश्री को नहीं ठहरना पड़ा और अहाई-महोत्सव के साथ वि० सं० १९९७ मार्ग० शु० १० सोमवार को आासनात्यातीय अबुहालीय गोकलपनाजी | सूरिपद से बागरा में प्रथम चातुर्मास और तत्पश्चात् प्रतिष्ठायें एव दोक्षायें [ एक सौ इक्यानवे श्री प्रेमविजयजी, न्यायविजयजी और नीतिविजयजी को तथा साध्वीजी श्री मोती श्रीजी, विशालश्रीजी, विनोदश्रीजी और लावण्यश्रीजी को बड़ी दीक्षा प्रदान की । श्रीकोटतिथि में विस्थापना एवं प्राण-प्रतिष्ठा सियाणा से आपश्री ने दीक्षोत्सव समाप्त करके कुछ ही दिनों के पश्चात् श्री कोर्टाजीतीर्थ की ओर प्रयाण कर दिया, कारण कि श्री कोर्टाजी तीर्थ के ऊपर दण्डध्वजारोहण करवाना था तथा जिनेश्वर - प्रतिमाओं एवं गुरुप्रतिमाओं की प्रतिष्ठा करनी थी । सियाणा से आपश्री आहोर, गुढा, तखतगढ़, भूति आदि ग्रामों में विहार करते हुये अनुक्रम से श्रीकोर्टाजी तीर्थ में पधारे । कोर्टा के संघ नेपी का भव्य स्वागत किया। प्रतिष्ठा की तैयारिया की जाने लगीं और तीर्थ के वाह्योद्यान में मण्डप की सुन्दर रचना की गई । विशून्यसंशून्य एक हज़ार नौ सौ छियानवे वैशून्य शुक्ला सात बुधवार को शुभ मुहूत्त में दो जिन प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा तथा चार दण्डध्वज और गुरुवर्य श्रीमद् राजेन्द्रसूरीश्वरजी महाराज साशून्य की दो सुन्दर प्रतिमाओं की अञ्जनशलाका की गई । यहाँ से चरितनायक ने रोवाडाग्राम की ओर प्रयाण किया । रोवाड़ा में गुरु-प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा विशून्य स एक हज़ार नौ सौ छियानवे जब चरितनायक अपनी साधु-मण्डली के सहित कोर्टाजी तीर्थ से विहार करके रोवाडा में पधारे तो रोवाडा के श्रीघ ने आपश्री का शोभा एव सज्जा के उपकरणों के सहित समारोहपूर्वक स्वागत किया । विशून्यसंशून्य एक हज़ार छः सौ छयासठ ज्येशून्यकृशून्य नौ को अष्टोत्तरशत-स्नात्र पूजा के सहित गुरुवर्य * 'श्री घाणसा-प्रतिष्ठा महोत्सव' नामक पुस्तक के प्रतिष्ठा प्रकरण में रोबाढ़ा की प्रतिष्ठा का दिन ज्येशून्य शुशून्य दो रविवार छपा है, उसकी जगह ज्येशून्य शून्य नौ चाहिए । भीम विजययतीब्रसूरि जीवन परिव श्रीमद् राजेन्द्रसरिजी की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की । रोवाड़ा से आपभी विहार करके फताहपुरा पधारे। फवाहपुरा में प्राम-प्रतिष्ठा विशून्य से एक हज़ार नौ सौ छियानवे चरिवनायक रोवाया से शुभ मुहूर्श में विहार करके फवाहपुरा पारे । फवाहपुरा के सप ने आपभी का अति ही मम्य स्वागत किया । [वि॰सं॰ एक हज़ार नौ सौ छयासठ न्पेशून्यशुशून्य नौ मनिश्चर को शुभ मुहूच में श्री राजेन्द्रसर भरनी महाराज साइप और उनके शिष्य मुनिवर श्री हिम्मतविजयजी के चरण-मुगलों की भापग्री ने प्रविष्ठाखमशलाका की। इस अवसर पर फवाद पुरा के श्रीसेष न अड्डाई महोत्सव का सुन्दर भायोजन किया था। नव दिनों में अलग दो सयभावकों एवं सप की ओर से नव नवकारझियाँ की गई थीं । प्रतिष्ठा से निवृत होकर घरितनायक सळोदरिया पधारे। सोदरिया में प्रतिष्ठा बि सं एक हज़ार नौ सौ छियानवे भरितनायक फताहपुरा से बिहार करके सीधे सलोदरिया पधारे। यहाँ संघ ने आपनी का अति दी सराहनोय विधि से स्वागत किया। आपभी मे विशून्य सम्वत् एक हज़ार नौ सौ छियानवे म्येव सु चौदह गुरुवार को झुम मुहू च में श्री पार्श्वनाथ की प्रतिष्ठा की। इस विस्थापनोत्सव के उपलक्ष में सलादरिया के श्रीसम ने तीन दिवस पर्यंत उत्सव उजमा था। यहाँ से चरितनायक शिवर्गज, सन्दरी होते हुये लघुतीर्ण भी बाकोड़ा के दर्शन करके सायडेराव, कौशीलाव, पाषा में होते हुये तथा एक-एक और कहीं अधिक दिनों का विनाम करते हुये चातुर्मासार्थ भावाड़ झुशून्य चौदह का मूति में प्रसिद्ध हुये । तैंतीस वि सं एक हज़ार नौ सौ छियानवे में भूति में बस और गुरु प्रतिमा की भाचार्यत्री ने मुनि श्री विजयजी, पलभविजयजी, विद्या विजयजी, सागरविजयजी, प्रेमजी, न्यायविजयजी आदि आठ साधुओं के सूरिपद से बागरा में प्रथम चातुर्मास और तत्पश्चात् प्रतिष्ठायें एवं दीक्षायें [ एक सौ तिरानवे साथ में भूति में चातुर्मास किया । व्याख्यान में 'श्री उत्तराध्ययनसूत्र' और भावनाधिकार में 'श्री विक्रम-चरित्र' का वाचन किया। चारों मास तप, व्रत, पौषध आदि की सराहनीय उन्नति रही । विशेष दिन एवं त्योहारों पर व्याख्यान के पश्चात् प्रभावनायें वितरित की गई । आचार्यश्री के दर्शन करने के लिये वागरा, आहर, हरजी, भीनमाल, वाली, शिवगंज, पावा, जालोर, सियाणा श्रादि ग्राम-नगरों से तथा मालवा, नेमाड, कच्छ-प्रान्तों से अनेक सद्गृहस्थ श्रावक आये थे । श्रीसंघ-भूति ने गंतुक दर्शक एवं अतिथियों का अच्छा आदर-सत्कार किया था । चातुर्मास पूर्ण होने पर चरितनायक को भूति-संघ ने श्री राजेन्द्रसूरि प्रतिमा की स्थापना करवाने की विनती की । फलतः श्रुति धूम-धाम एवं महोत्सवपूर्वक विशून्य संशून्य एक हज़ार छः सौ पैंसठ पौष शुशून्य नौ को शुभ मुहूर्त्त में समारोहपूर्वक श्रीमद् विजयराजेन्द्रसूरिजी की प्रतिमा की आपने प्राण-प्रतिष्ठा करके स्थापना की तथा मुनि श्री लावण्यविजयजी को भी दीक्षा इसी शुभावसर पर प्रदान की गई । मेरी नेमाड़ यात्रा - रचना विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ चौंसठ । काऊन सोलह पृष्ठीय । पृशून्यसंशून्य चौरासी । सादी जिल्द । यह एक गवेषणापूर्वक लिखी गयी ऐतिहासिक एवं भौगोलिक दृष्टियों से सग्रहणीय एवं पठनीय पुस्तक है । इसमें नेमाड़प्रान्त, जिसमें प्रसिद्ध ऐतिहासिक नगर माडू, धार, घढ़वारणी, लक्ष्मणीतीर्थ और लीराजपुर, कुक्षी आदि के प्रदेश सम्मिलित हैं, उन सर्व का यथाप्राप्त भूगोल, इतिहास वर्णित है । इसको भूति निवासी जोशी रावल सूरतिंगजी वन्नाजी ने सशून्य एक हज़ार नौ सौ छियानवे में श्री आनन्द - प्रिंशून्य - प्रेस, भावनगर में छपवा कर प्रसिद्ध किया । गुरु-चरणयुगल की अंजनशलाका विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे चरितनायक ने शरद् ऋतु भूति में ही स्थिरता रख कर व्यतीत की । तत्पश्चात् आपश्री वहा से विहार करके मार्ग में पडते हुये ग्राम, नगरों में धर्मोपदेश देते हुये आहोर पधारे । विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे वैशून्य शुशून्य चौदह के दिन शुभ मुहूर्त में आपश्री ने स्वर्णकलश एव दण्डध्वजे की प्रतिष्ठाजनेशलाका करके श्रीमद् विजयी- मावन चरित उनको त्रिश्चिस्वरी श्री महावीर मिनालय के ऊपर चबाय। इस उत्सव पर अड्डाई महोत्सव साह रखनाजी भूताजी मिश्रीमत की ओर से उजमा गया था। इसी शुभ दिवस पर गुरुवर्य श्रीमद् राजेन्द्र रिमी की दो प्रतिमाओं की अमनअक्षाफा भी की गई थी। यहां भापश्री कुछ दिन स्थिर-वास रहे और तस्पमात् पापभी ने धातुर्मासार्थ जालोर की भोर प्रयाप्य किया चौंतीस विशून्यसशून्य एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में मान्मेर में चातुर्मास और गुरु-पतिमा की अंजनामाका - प्राधायभी ने मुनिवर भी सीनियनी, भगतविजयजी, पहम विजयजी, विद्याविनयजी, सागरविजयजी, भारित्रविजयजी, प्रेमविजयजी, नीतिषिमयजी, न्याययिअमजी, लाघरायषिजयजी, रंगविजयजी के साथ जाखोर में चातुर्मास किया। चातुर्मास-प्पास्यान में 'सूपगडानसूत्र और भावनाधिकार में 'जयानन्द केवली- चरित्र का वाचन किया। जालोर में जैन घरों की भी संख्या है और प्रायः सर्व दी सम्प्रदाय के घर छ) परन्तु आापक्षी सार गर्मित एवं ओजस्वी प्यास्थानों का लाभ सर्व ही सम्प्रदाय के सदगृहस्थों मे लिया। इस भातुर्मास में भी राजेन्द्र मैन गुरुकुल, नागरा की समीतसंगीत-अम्पापक मास्टर सालिगरामजी की अध्यक्षता में भरितनायक के दर्शन और प्रभु-कीर्तन करने के लिये बाजार में भेजी गई थी। बागरा की संगीत का कार्य और कौशल रखकर सर्व दर्शकगण में उसकी मूरि दो प्रशसा की और घरितनायक के शुभाशीवाद से उस समय से वापरा की संगीत मयबती की स्पाति बड़ी और वह अपने समय में कांगत एव अन्य प्रान्तों की सर्व जैन संगीत-मण्डक्षियों में भीरे दो महितीय गिनी जाने लगी। चातुर्मास में अगणित तप, व्रत और कई अड्डाई-महारसव हुप तथा आभार्गणी के दर्शन करने के लिये मिन्न दो प्रान्तों के चौंतालीस-साठ नगरों से भाषक और भाविकायें आई, जिनकी बालोर-मीसंघ ने भोजन, भयनादि की समुचित सुविधाओं से एवं योम्प सरकार से अच्छी सेवा की। भातुमास के सानन्द पूर्ण हो जाने पर श्रीसभ बातोर ने गुरुदय के समय श्री राजेन्द्रहरि महाराज साइन की तीन प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा कराने की प्रार्थना की। फलस्वरूप आचार्यश्री को नहीं ठहरना पड़ा और अहाई-महोत्सव के साथ विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे मार्गशून्य शुशून्य दस सोमवार को आासनात्यातीय अबुहालीय गोकलपनाजी |
न्यूज इंडस्ट्री से जुड़े इन दोनों निकायों की ओर से इस मामले में केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को एक लेटर भी भेजा गया है।
भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेदप्रताप वैदिक के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
वरिष्ठ पत्रकार डाॅ. वेदप्रताप वैदिक के आकस्मिक निधन पर वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
अलेक्जेंडर हाल ही में अपने बिजनेस मीडिया स्टार्टअप 'फाउंडरइंडिया' से अलग हुए हैं। डिजिटल बिजनेस चैनल करेंगे लॉन्च।
'सोनी' और 'जी' दोनों ही बड़े ब्रैंड्स हैं। ऐसे में इन दोनों का विलय देश की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक ऐसे बड़े नाम और ब्रैंड का निर्माण करेगा, जो धमाल मचा देगा।
Asianet की एक याचिका पर केरल हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि चैनल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हिंसक हो जाता है तो प्रभावी पुलिस को उसे सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए।
पिछले महीने ही लॉन्च हुए हिंदी न्यूज चैनल 'भारत एक्सप्रेस' (Bharat Express) ने खोजी पत्रकारिता की दिशा में कदम बढ़ाते हुए शनिवार को एक 'स्टिंग ऑपरेशन' (Sting Operation) किया है।
यह पहली बार होगा जब आईपीएल मैच 'फ्रीडिश' (Free Dish) पर प्रसारित किए जाएंगे। इस कदम से ग्रामीण बाजार में 'डिज्नी स्टार' की दर्शक संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
मनीषा सिंह इससे पहले 'नेटवर्क18' (Network 18) समूह से जुड़ी हुई थीं।
गुजरात की विधानसभा ने सर्वसम्मति से जैसा प्रस्ताव पारित किया है, वैसा देश की हर विधानसभा को करना चाहिए।
रविवार देर शाम बाइक सवार बदमाशों ने एक पत्रकार को गोली मार दी। पुलिस ने घायल पत्रकार को जिला अस्पताल भिजवाया।
यह जानकारी भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की वित्त वर्ष 2021-22 की वार्षिक रिपोर्ट से सामने आयी है।
| न्यूज इंडस्ट्री से जुड़े इन दोनों निकायों की ओर से इस मामले में केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को एक लेटर भी भेजा गया है। भारतीय जन संचार संस्थान के महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेदप्रताप वैदिक के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। वरिष्ठ पत्रकार डाॅ. वेदप्रताप वैदिक के आकस्मिक निधन पर वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। अलेक्जेंडर हाल ही में अपने बिजनेस मीडिया स्टार्टअप 'फाउंडरइंडिया' से अलग हुए हैं। डिजिटल बिजनेस चैनल करेंगे लॉन्च। 'सोनी' और 'जी' दोनों ही बड़े ब्रैंड्स हैं। ऐसे में इन दोनों का विलय देश की मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में एक ऐसे बड़े नाम और ब्रैंड का निर्माण करेगा, जो धमाल मचा देगा। Asianet की एक याचिका पर केरल हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि चैनल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हिंसक हो जाता है तो प्रभावी पुलिस को उसे सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। पिछले महीने ही लॉन्च हुए हिंदी न्यूज चैनल 'भारत एक्सप्रेस' ने खोजी पत्रकारिता की दिशा में कदम बढ़ाते हुए शनिवार को एक 'स्टिंग ऑपरेशन' किया है। यह पहली बार होगा जब आईपीएल मैच 'फ्रीडिश' पर प्रसारित किए जाएंगे। इस कदम से ग्रामीण बाजार में 'डिज्नी स्टार' की दर्शक संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। मनीषा सिंह इससे पहले 'नेटवर्कअट्ठारह' समूह से जुड़ी हुई थीं। गुजरात की विधानसभा ने सर्वसम्मति से जैसा प्रस्ताव पारित किया है, वैसा देश की हर विधानसभा को करना चाहिए। रविवार देर शाम बाइक सवार बदमाशों ने एक पत्रकार को गोली मार दी। पुलिस ने घायल पत्रकार को जिला अस्पताल भिजवाया। यह जानकारी भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण की वित्त वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस की वार्षिक रिपोर्ट से सामने आयी है। |
चेन्नई टेस्ट में भारत को 227 रनों से शिकस्त मिली थी. इस मैदान पर भारत को 1999 के बाद पहली बार किसी टेस्ट में हार झेलनी पड़ी.
चेन्नई (Chennai) के मैदान में करीब 22 साल बाद मिली पहली हार ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को सकते में डाल दिया है. इंग्लैंड (England) के खिलाफ टेस्ट सीरीज के पहले मैच में भारतीय टीम (Indian Team) को 227 रनों से करारी हार झेलनी पड़ी थी. इसके बाद से ही जहां भारतीय टीम इसी मैदान पर होने वाले दूसरे टेस्ट की तैयारियों में लगी है, तो वहीं BCCI ने एक चौंकाने वाले फैसला लेते हुए पिच के क्यूरेटर को ही हटा दिया है. अब दूसरे टेस्ट के लिए पिच की तैयारी का जिम्मा एमए चिदंबरम स्टेडियम (MA Chidambaram Stadium) के एक ऐसे ग्राउंड्समैन को सौंपा गया है, जिसे आज तक फर्स्ट क्लास मैचों के लिए भी पिच तैयार करने का अनुभव नहीं है.
चेन्नई टेस्ट के पहले 2 दिन पिच से भारतीय स्पिनरों को कोई मदद नहीं मिली और इंग्लैंड ने 578 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया. हालांकि, तीसरे दिन के बाद पिच से गेंदबाजों को कुछ मदद मिली, लेकिन इसका नुकसान आखिर टीम इंडिया को ही हुआ. इसके बाद से ही भारतीय टीम इस पिच से खुश नहीं थी. कप्तान विराट कोहली ने भी मैच के बाद कहा था कि पिच में शुरुआती दिनों में गेंदबाजों के लिए कुछ नहीं था.
भारत और इंग्लैंड के बीच सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच शनिवार 13 फरवरी से शुरू होना है. उससे ठीक पहले BCCI ने मुख्य पिच क्यूरेटर तपोश चटर्जी को वापस भेज दिया. समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल जोन के क्यूरेटर चटर्जी को पहले मैच के समाप्त होने के तुरंत बाद वापस भेज दिया गया और विजय हजारे ट्रॉफी मैचों के लिए पिचों की तैयारी की देखरेख करने का काम सौंपा गया.
अब, दूसरे मैच के लिए भारतीय टीम प्रबंधन मुख्य स्थानीय ग्राउंड्समैन वी. रमेश कुमार के साथ पिच की तैयारी की देखरेख कर रहा है. रमेश कुमार के पास फर्स्ट क्लास मैचों के लिए पिच तैयार करने तक का भी अनुभव नहीं था. BCCI के पास देशभर में कई अनुभवी क्यूरेटर हैं, जिसके चलते इस तरह का फैसला चौंकाने वाला है.
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय टीम मैनेजमेंट ही अपनी देखरेख में दूसरे टेस्ट के लिए विकेट तैयार करवा रहा है. पहले टेस्ट के लिए पिच में लाल मिट्टी का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन इस बार पिच में काली मिट्टी है.
IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, तपोश को क्यूरेटर्स के एलीट पैनल में शामिल किया गया था. उनके अलावा आशीष भौमिक, जो इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे और चौथे टेस्ट के लिए मोटेरा स्टेडियम की विकेट तैयार करेंगे, प्रशांत के, सुनील चौहान, और प्रकाश अधव इस पैनल में शामिल हैं.
चेपॉक स्टेडियम में लंबे समय से कोई नियमित क्यूरेटर नहीं है. इससे पहले, हेड ग्राउंड्समैन के. पार्थसारथी इसकी देखरेख कर रहे थे, लेकिन वह पिछले कुछ वर्षों में नियमित नहीं रहे हैं.
| चेन्नई टेस्ट में भारत को दो सौ सत्ताईस रनों से शिकस्त मिली थी. इस मैदान पर भारत को एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे के बाद पहली बार किसी टेस्ट में हार झेलनी पड़ी. चेन्नई के मैदान में करीब बाईस साल बाद मिली पहली हार ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को सकते में डाल दिया है. इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के पहले मैच में भारतीय टीम को दो सौ सत्ताईस रनों से करारी हार झेलनी पड़ी थी. इसके बाद से ही जहां भारतीय टीम इसी मैदान पर होने वाले दूसरे टेस्ट की तैयारियों में लगी है, तो वहीं BCCI ने एक चौंकाने वाले फैसला लेते हुए पिच के क्यूरेटर को ही हटा दिया है. अब दूसरे टेस्ट के लिए पिच की तैयारी का जिम्मा एमए चिदंबरम स्टेडियम के एक ऐसे ग्राउंड्समैन को सौंपा गया है, जिसे आज तक फर्स्ट क्लास मैचों के लिए भी पिच तैयार करने का अनुभव नहीं है. चेन्नई टेस्ट के पहले दो दिन पिच से भारतीय स्पिनरों को कोई मदद नहीं मिली और इंग्लैंड ने पाँच सौ अठहत्तर रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया. हालांकि, तीसरे दिन के बाद पिच से गेंदबाजों को कुछ मदद मिली, लेकिन इसका नुकसान आखिर टीम इंडिया को ही हुआ. इसके बाद से ही भारतीय टीम इस पिच से खुश नहीं थी. कप्तान विराट कोहली ने भी मैच के बाद कहा था कि पिच में शुरुआती दिनों में गेंदबाजों के लिए कुछ नहीं था. भारत और इंग्लैंड के बीच सीरीज का दूसरा टेस्ट मैच शनिवार तेरह फरवरी से शुरू होना है. उससे ठीक पहले BCCI ने मुख्य पिच क्यूरेटर तपोश चटर्जी को वापस भेज दिया. समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल जोन के क्यूरेटर चटर्जी को पहले मैच के समाप्त होने के तुरंत बाद वापस भेज दिया गया और विजय हजारे ट्रॉफी मैचों के लिए पिचों की तैयारी की देखरेख करने का काम सौंपा गया. अब, दूसरे मैच के लिए भारतीय टीम प्रबंधन मुख्य स्थानीय ग्राउंड्समैन वी. रमेश कुमार के साथ पिच की तैयारी की देखरेख कर रहा है. रमेश कुमार के पास फर्स्ट क्लास मैचों के लिए पिच तैयार करने तक का भी अनुभव नहीं था. BCCI के पास देशभर में कई अनुभवी क्यूरेटर हैं, जिसके चलते इस तरह का फैसला चौंकाने वाला है. सूत्रों के मुताबिक, भारतीय टीम मैनेजमेंट ही अपनी देखरेख में दूसरे टेस्ट के लिए विकेट तैयार करवा रहा है. पहले टेस्ट के लिए पिच में लाल मिट्टी का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन इस बार पिच में काली मिट्टी है. IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, तपोश को क्यूरेटर्स के एलीट पैनल में शामिल किया गया था. उनके अलावा आशीष भौमिक, जो इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे और चौथे टेस्ट के लिए मोटेरा स्टेडियम की विकेट तैयार करेंगे, प्रशांत के, सुनील चौहान, और प्रकाश अधव इस पैनल में शामिल हैं. चेपॉक स्टेडियम में लंबे समय से कोई नियमित क्यूरेटर नहीं है. इससे पहले, हेड ग्राउंड्समैन के. पार्थसारथी इसकी देखरेख कर रहे थे, लेकिन वह पिछले कुछ वर्षों में नियमित नहीं रहे हैं. |
उपर्युक्त विषय में एजेंसी कमीशन का दावा करने से संबंधित 1 जुलाई 2017 के एजेसी बैंकों द्वारा सरकारी व्यवसाय करना- एजेंसी कमीशन का भुगतान संबंधी हमारे मास्टर परिपत्र के पैरा 15 का संदर्भ देखें।
"एजेंसी बैंकों को राज्य सरकार के लेनदेनों से संबंधित अपने एजेंसी कमीशन के दावे भारतीय रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय और केंद्रीय सरकार के लेनदेनों से संबंधित अपने एजेंसी कमीशन के दावे सीएएस नागपुर को निहित प्रारूप में प्रस्तुत करने होते हैं। तथापि जीएसटी की प्राप्ति संबंधी लेनदेनों से संबंधित एजेंसी कमीशन के दावों का निपटान केवल भारतीय रिज़र्व बैंक के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय में किया जाएगा और तदनुसार जीएसटी का संग्रह करने के लिए प्राधिकृत एजेंसी बैंकों को सूचित किया जाता है कि वे जीएसटी की प्राप्ति संबंधी लेनदेनों से संबंधित एजेंसी कमीशन केअपने दावे केवल मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय में ही प्रस्तुत करें। सभी एजेंसी बैंकों के लिए एजेंसी कमीशन का दावा प्रस्तुत करने संबंधी संशोधित प्रारूप और शाखा के अधिकारियों और सनदी लेखाकारों द्वारा हस्ताक्षर किए जाने वाले अलग और विशिष्ट प्रमाणपत्रों के सेट अनुबंध-2 में दिए गए हैं। ये प्रमाणपत्र, कार्यकारी निदेशक/ मुख्य महाप्रबंधक (सरकारी कारोबार के प्रभारी)
3. उक्त मास्टर परिपत्र के अन्य सभी अनुदेश अपरिवर्तित रहेंगे।
(पार्था चौधुरी)
| उपर्युक्त विषय में एजेंसी कमीशन का दावा करने से संबंधित एक जुलाई दो हज़ार सत्रह के एजेसी बैंकों द्वारा सरकारी व्यवसाय करना- एजेंसी कमीशन का भुगतान संबंधी हमारे मास्टर परिपत्र के पैरा पंद्रह का संदर्भ देखें। "एजेंसी बैंकों को राज्य सरकार के लेनदेनों से संबंधित अपने एजेंसी कमीशन के दावे भारतीय रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय और केंद्रीय सरकार के लेनदेनों से संबंधित अपने एजेंसी कमीशन के दावे सीएएस नागपुर को निहित प्रारूप में प्रस्तुत करने होते हैं। तथापि जीएसटी की प्राप्ति संबंधी लेनदेनों से संबंधित एजेंसी कमीशन के दावों का निपटान केवल भारतीय रिज़र्व बैंक के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय में किया जाएगा और तदनुसार जीएसटी का संग्रह करने के लिए प्राधिकृत एजेंसी बैंकों को सूचित किया जाता है कि वे जीएसटी की प्राप्ति संबंधी लेनदेनों से संबंधित एजेंसी कमीशन केअपने दावे केवल मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय में ही प्रस्तुत करें। सभी एजेंसी बैंकों के लिए एजेंसी कमीशन का दावा प्रस्तुत करने संबंधी संशोधित प्रारूप और शाखा के अधिकारियों और सनदी लेखाकारों द्वारा हस्ताक्षर किए जाने वाले अलग और विशिष्ट प्रमाणपत्रों के सेट अनुबंध-दो में दिए गए हैं। ये प्रमाणपत्र, कार्यकारी निदेशक/ मुख्य महाप्रबंधक तीन. उक्त मास्टर परिपत्र के अन्य सभी अनुदेश अपरिवर्तित रहेंगे। |
Bharwa Turai Sabji Recipe: तोरई का नाम सुनते ही ज्यादातर परिवारों में लोग नाक-मुंह सिकोड़ने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं तोरई सेहत के लिए कितनी फायदेमंद होती है? तोरई में एंटी इंफ्लेमेटरी, एनाल्जेसिक, एंटी बैक्टीरियल, कॉपर, कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम सहित विटामिन A, B, C, फ्लोरिन और आयोडीन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए बेहद गुणकारी माने जाते हैं। अगर आप भी अपने परिवार को तोरई के फायदे पहुंचाना चाहते हैं तो ट्राई करें सिंपल नहीं भरवां तोरई की सब्जी। यह सब्जी न सिर्फ खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होती है बल्कि इसे बनाने में काफी टाइम भी नहीं लगता है। तो आइए बिना देर किए जान लेते हैं कैसे बनाई जाती है भरवां तोरई।
भरवां तोरई बनाने के लिए सबसे पहले तोरई को धोकर उसके छिलके उतार लें। अब एक कटोरी में सौंफ-धनिया डालकर पीस लें। इसके बाद कढ़ाही में मसाले डालकर तोरई के लिए मिश्रण तैयार कर लें। जब मसाला भून जाए तो एक-एक करके तोरई के अंदर मसाला भर दें। तोरई में मसाला भरने के बाद इन्हें 10 मिनट फ्राई करें। आपकी टेस्टी भरवां तोरई बनकर तैयार है। आप इस रेसिपी को चावल और रोटी दोनों के साथ सर्व कर सकते हैं।
| Bharwa Turai Sabji Recipe: तोरई का नाम सुनते ही ज्यादातर परिवारों में लोग नाक-मुंह सिकोड़ने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं तोरई सेहत के लिए कितनी फायदेमंद होती है? तोरई में एंटी इंफ्लेमेटरी, एनाल्जेसिक, एंटी बैक्टीरियल, कॉपर, कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम सहित विटामिन A, B, C, फ्लोरिन और आयोडीन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए बेहद गुणकारी माने जाते हैं। अगर आप भी अपने परिवार को तोरई के फायदे पहुंचाना चाहते हैं तो ट्राई करें सिंपल नहीं भरवां तोरई की सब्जी। यह सब्जी न सिर्फ खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होती है बल्कि इसे बनाने में काफी टाइम भी नहीं लगता है। तो आइए बिना देर किए जान लेते हैं कैसे बनाई जाती है भरवां तोरई। भरवां तोरई बनाने के लिए सबसे पहले तोरई को धोकर उसके छिलके उतार लें। अब एक कटोरी में सौंफ-धनिया डालकर पीस लें। इसके बाद कढ़ाही में मसाले डालकर तोरई के लिए मिश्रण तैयार कर लें। जब मसाला भून जाए तो एक-एक करके तोरई के अंदर मसाला भर दें। तोरई में मसाला भरने के बाद इन्हें दस मिनट फ्राई करें। आपकी टेस्टी भरवां तोरई बनकर तैयार है। आप इस रेसिपी को चावल और रोटी दोनों के साथ सर्व कर सकते हैं। |
मारुति सुजुकी 2020 में अपनी पहली फुल हाइब्रिड कार लॉन्च कर सकती है। यह 4 मीटर से बड़ी कार होगी। उम्मीद की जा रही है कि इसे सुजुकी और टोयोटा के बीच हुए समझौते के तहत बनाया जा सकता है। यह टोयोटा कोरोला सेडान पर बेस्ड मारुति की पहली फुल-हरब्रिड कार होगी।
सुजुकी और टोयोटा दोनों भारत के लिए हाइब्रिड तकनीक के विकास पर काम कर रही हैं। मारुति सुजुकी के अनुसार कंपनी की हाइब्रिड पावरट्रेन, पेट्रोल इंजन की तुलना में 30 % ज्यादा फ्यूल इफ़िशन्सी देगी। देश में अप्रैल 2020 से भारत स्टेज-6 मानदंड लागू होने है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि बी. एस. -6 डीज़ल कारें, बी. एस. -6 पेट्रोल कारों की तुलना में 2. 5 लाख रुपए महंगी हो जाएगी। जिसे देखते हुए कंपनी ने ग्राहकों का डीज़ल कारों से पेट्रोल कारों की ओर शिफ्ट होने का अंदाजा लगाया है।
कंपनी डीज़ल पावरट्रेन की पेशकश के साथ पेट्रोल-हाइब्रिड पावरट्रेन पर भी दांव लगा रही है। हालांकि पेट्रोल-हाइब्रिड पावरट्रेन की कीमत पेट्रोल वर्ज़न से 2. 5 लाख से भी ज्यादा हो सकती है। गौरतलब है कि कंपनी की पेट्रोल-हाइब्रिड कार इसके पेट्रोल विकल्प की तुलना में 30 % ज्यादा फ्यूल इफ़िशॅन्ट होगी, ऐसे में इसके उपयोग पर होने वाला खर्च डीज़ल इंजन के बराबर ही होगा। दिल्ली जैसी जगहों पर पेट्रोल-हाइब्रिड कारें ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है, क्योंकि यहां एक डीज़ल कार का रजिस्ट्रेशन केवल 10 वर्षों के लिए मान्य है वहीं पेट्रोल-हाइब्रिड कार को 15 साल के लिए रजिस्टर करवाया जा सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार हाइब्रिड कारों को प्रोत्साहित करने पर भी विचार कर रही है। ऐसे में मारुति सुजुकी को इसका लाभ मिल सकता है। इसके अलावा अपने पोर्टफोलियो में हाइब्रिड कार होने से मारुति सुजुकी को 2022 में लागू होने वाले "कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (सी. ए. एफ. ई. )" मानदंडों पर खड़ा उतरने में भी मदद मिलेगी।
मारुति की इस अपकमिंग हाइब्रिड कार की कीमत के बारे में अभी कुछ कहना मुश्किल है। यदि कंपनी कोरोला सेडान बेस्ड हाइब्रिड कार लाने का फैसला करती है, तो हम उम्मीद करते है इसकी कीमत 20 लाख रुपए के आसपास होगी। इस लिहाज़ से इसका मुकाबला होंडा की अपकमिंग सिविक सेडान, स्कोडा ऑक्टेविया, हुंडई एलांट्रा और टोयोटा कोरोला एल्टिस से होगा।
| मारुति सुजुकी दो हज़ार बीस में अपनी पहली फुल हाइब्रिड कार लॉन्च कर सकती है। यह चार मीटर से बड़ी कार होगी। उम्मीद की जा रही है कि इसे सुजुकी और टोयोटा के बीच हुए समझौते के तहत बनाया जा सकता है। यह टोयोटा कोरोला सेडान पर बेस्ड मारुति की पहली फुल-हरब्रिड कार होगी। सुजुकी और टोयोटा दोनों भारत के लिए हाइब्रिड तकनीक के विकास पर काम कर रही हैं। मारुति सुजुकी के अनुसार कंपनी की हाइब्रिड पावरट्रेन, पेट्रोल इंजन की तुलना में तीस % ज्यादा फ्यूल इफ़िशन्सी देगी। देश में अप्रैल दो हज़ार बीस से भारत स्टेज-छः मानदंड लागू होने है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि बी. एस. -छः डीज़ल कारें, बी. एस. -छः पेट्रोल कारों की तुलना में दो. पाँच लाख रुपए महंगी हो जाएगी। जिसे देखते हुए कंपनी ने ग्राहकों का डीज़ल कारों से पेट्रोल कारों की ओर शिफ्ट होने का अंदाजा लगाया है। कंपनी डीज़ल पावरट्रेन की पेशकश के साथ पेट्रोल-हाइब्रिड पावरट्रेन पर भी दांव लगा रही है। हालांकि पेट्रोल-हाइब्रिड पावरट्रेन की कीमत पेट्रोल वर्ज़न से दो. पाँच लाख से भी ज्यादा हो सकती है। गौरतलब है कि कंपनी की पेट्रोल-हाइब्रिड कार इसके पेट्रोल विकल्प की तुलना में तीस % ज्यादा फ्यूल इफ़िशॅन्ट होगी, ऐसे में इसके उपयोग पर होने वाला खर्च डीज़ल इंजन के बराबर ही होगा। दिल्ली जैसी जगहों पर पेट्रोल-हाइब्रिड कारें ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है, क्योंकि यहां एक डीज़ल कार का रजिस्ट्रेशन केवल दस वर्षों के लिए मान्य है वहीं पेट्रोल-हाइब्रिड कार को पंद्रह साल के लिए रजिस्टर करवाया जा सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार हाइब्रिड कारों को प्रोत्साहित करने पर भी विचार कर रही है। ऐसे में मारुति सुजुकी को इसका लाभ मिल सकता है। इसके अलावा अपने पोर्टफोलियो में हाइब्रिड कार होने से मारुति सुजुकी को दो हज़ार बाईस में लागू होने वाले "कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी " मानदंडों पर खड़ा उतरने में भी मदद मिलेगी। मारुति की इस अपकमिंग हाइब्रिड कार की कीमत के बारे में अभी कुछ कहना मुश्किल है। यदि कंपनी कोरोला सेडान बेस्ड हाइब्रिड कार लाने का फैसला करती है, तो हम उम्मीद करते है इसकी कीमत बीस लाख रुपए के आसपास होगी। इस लिहाज़ से इसका मुकाबला होंडा की अपकमिंग सिविक सेडान, स्कोडा ऑक्टेविया, हुंडई एलांट्रा और टोयोटा कोरोला एल्टिस से होगा। |
राखी के त्योहार पर सरकार ने महिलाओं को फ्री यात्रा की सौगात दी है। लेकिन छोटे कस्बों में जाने वाली महिलाओं के लिए ये सौगात परेशानी बन गई। हालांकि भीड़ को देखते हुए रोडवेज प्रशासन ने नयापुरा बस स्टैंड पर 12 अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की थी। जिनमें सुबह की पारी में 8 बसों को रवाना किया। अब दोपहर की पारी में 4 बसे लगाई गई है। बस स्टैंड पर इतनी भीड़ है कि यात्रियों को बस में बैठने की जगह तक नहीं मिल पा रही।
नयापुरा रोडवेज बस स्टैंड प्रभारी नासिर ने बताया कि रात 12 बजे के बाद से ही महिला यात्रियों की भीड़ लगना शुरू हो गई थी। यात्रियों की सुविधा को देखते हुए 12 अतिरिक्त बसे लगाई गई है। अब तक 8 बसे रवाना हो चुकी है। अजमेर,जयपुर, पुष्कर, सवारियां जी, बारां, झालावाड़ रूट पर यात्री भार ज्यादा है। नासिर ने बताया कि इस बार महिलाओं की भीड़ ज्यादा है। इस कारण थोड़ी परेशानी हो रही है। वैसे हर आधे घंटे में बस उपलब्ध हो रही है। जरूरत पड़ने पर ओर बसें लगाई जाएगी।
महिला यात्री भूली बाई ने बताया कि उन्हें राखी मनाने अंता से मानपुरा जाना था। वो बारां रूट पर जाने वाली बस में बैठ गई। लेकिन उसे उतरना पड़ा। बस चालक ने सीधा बारां जाने को कहां। अंता में गाड़ी रोकने से मना कर दिया। अनुराधा शर्मा का कहना है कि वो राखी बांधने इटावा जा रही है। बस स्टैंड पर गाड़ी नहीं है। 4 बजे गाड़ी आने की बात कहीं है। अब 4 बजे यहां से रवाना होंगे तो त्योहार कब मनायेंगे। यहीं पीड़ा कृष्णा ने भी बताई। कृष्णा देवली से इटावा जा रही है। नयापुरा बस स्टैंड पर इटावा जाने वाली बस के इंतजार में खड़ी है। उसको नहीं पता बस कितने बजे लगेगी।
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| राखी के त्योहार पर सरकार ने महिलाओं को फ्री यात्रा की सौगात दी है। लेकिन छोटे कस्बों में जाने वाली महिलाओं के लिए ये सौगात परेशानी बन गई। हालांकि भीड़ को देखते हुए रोडवेज प्रशासन ने नयापुरा बस स्टैंड पर बारह अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की थी। जिनमें सुबह की पारी में आठ बसों को रवाना किया। अब दोपहर की पारी में चार बसे लगाई गई है। बस स्टैंड पर इतनी भीड़ है कि यात्रियों को बस में बैठने की जगह तक नहीं मिल पा रही। नयापुरा रोडवेज बस स्टैंड प्रभारी नासिर ने बताया कि रात बारह बजे के बाद से ही महिला यात्रियों की भीड़ लगना शुरू हो गई थी। यात्रियों की सुविधा को देखते हुए बारह अतिरिक्त बसे लगाई गई है। अब तक आठ बसे रवाना हो चुकी है। अजमेर,जयपुर, पुष्कर, सवारियां जी, बारां, झालावाड़ रूट पर यात्री भार ज्यादा है। नासिर ने बताया कि इस बार महिलाओं की भीड़ ज्यादा है। इस कारण थोड़ी परेशानी हो रही है। वैसे हर आधे घंटे में बस उपलब्ध हो रही है। जरूरत पड़ने पर ओर बसें लगाई जाएगी। महिला यात्री भूली बाई ने बताया कि उन्हें राखी मनाने अंता से मानपुरा जाना था। वो बारां रूट पर जाने वाली बस में बैठ गई। लेकिन उसे उतरना पड़ा। बस चालक ने सीधा बारां जाने को कहां। अंता में गाड़ी रोकने से मना कर दिया। अनुराधा शर्मा का कहना है कि वो राखी बांधने इटावा जा रही है। बस स्टैंड पर गाड़ी नहीं है। चार बजे गाड़ी आने की बात कहीं है। अब चार बजे यहां से रवाना होंगे तो त्योहार कब मनायेंगे। यहीं पीड़ा कृष्णा ने भी बताई। कृष्णा देवली से इटावा जा रही है। नयापुरा बस स्टैंड पर इटावा जाने वाली बस के इंतजार में खड़ी है। उसको नहीं पता बस कितने बजे लगेगी। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
Sidharth Malhotra Ott Debut: अजय देवगन, रणवीर सिंह और अक्षय कुमार के बाद रोहित शेट्टी के कॉप यूनिवर्स में अब सिद्धार्थ मल्होत्रा की एंट्री हुई है। शेरशाह में आर्मी ऑफिसर का रोल निभाने के बाद सिद्धार्थ मल्होत्रा अब रोहित शेट्टी की फिल्म से अपना ओटीटी डेब्यू करने जा रहे हैं। सिद्धार्थ मल्होत्रा ने सोशल मीडिया पर फर्स्ट लुक शेयर किया है।
सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल पर फोटो शेयर की है। फोटो के साथ सिड (Sidharth Malhotra) ने लिखा, 'रोहित शेट्टी का कॉप यूनिवर्स कल सुबह 11 बजे डिजिटल में कदम रख रहा है। ' फोटो में सिद्धार्थ मल्होत्रा खाकी वर्दी में नजर आ रहे हैं। उन्होंने केवल अपनी पीठ दिखाई है। पिंकविला की रिपोर्ट के मुताबिक इस फिल्म को सुशांत प्रकाश डायरेक्ट करने जा रहे हैं। रोहित इसके प्रोड्यूसर होंगे। फिल्म की थीम पुलिस ऑफिसर के ईर्द-गिर्द होगी लेकिन, इसका टोन और ट्रीटमेंट काफी अलग होगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक रोहित शेट्टी के अगले पुलिस ऑफिसर के रोल के लिए विक्की कौशल और टाइगर श्रॉफ भी रेस में थे। आखिर में ये रोल सिद्धार्थ मल्होत्रा की झोली में गिरा। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सिद्धार्थ मल्होत्रा ने शूटिंग शुरू कर दी है। फिल्म मुंबई की अलग-अलग लोकेशन में शूट की जाएगी। सुशांत प्रकाश इसके जरिए बतौर डायरेक्टर डेब्यू करने जा रहे हैं। सुशांत इससे पहले रोहित शेट्टी की फिल्म सिंबा और दिलवाले में भी काम कर चुके हैं।
वर्कफ्रंट की बात करें तो सिद्धार्थ मल्होत्रा की आखिरी फिल्म शेरशाह थी। अब सिद्धार्थ फिल्म मिशन मजनू में नजर आएंगे। इस फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा के अपोजिट पुष्पा फिल्म की लीड एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना होंगी।
सिद्धार्थ मल्होत्रा इसके अलावा करण जौहर की फिल्म योद्धा में भी नजर आएंगे। फिल्म में सिद्धार्थ के साथ दिशा पाटनी लीड रोल में होंगी। इसके अलावा एक्टर रकुलप्रीत सिंह और अजय देवगन की फिल्म थैंक गॉड में काम करेंगे। फिल्म में वह एक पुलिस ऑफिसर के रोल में होंगे।
Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
| Sidharth Malhotra Ott Debut: अजय देवगन, रणवीर सिंह और अक्षय कुमार के बाद रोहित शेट्टी के कॉप यूनिवर्स में अब सिद्धार्थ मल्होत्रा की एंट्री हुई है। शेरशाह में आर्मी ऑफिसर का रोल निभाने के बाद सिद्धार्थ मल्होत्रा अब रोहित शेट्टी की फिल्म से अपना ओटीटी डेब्यू करने जा रहे हैं। सिद्धार्थ मल्होत्रा ने सोशल मीडिया पर फर्स्ट लुक शेयर किया है। सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अपने ऑफिशियल इंस्टाग्राम हैंडल पर फोटो शेयर की है। फोटो के साथ सिड ने लिखा, 'रोहित शेट्टी का कॉप यूनिवर्स कल सुबह ग्यारह बजे डिजिटल में कदम रख रहा है। ' फोटो में सिद्धार्थ मल्होत्रा खाकी वर्दी में नजर आ रहे हैं। उन्होंने केवल अपनी पीठ दिखाई है। पिंकविला की रिपोर्ट के मुताबिक इस फिल्म को सुशांत प्रकाश डायरेक्ट करने जा रहे हैं। रोहित इसके प्रोड्यूसर होंगे। फिल्म की थीम पुलिस ऑफिसर के ईर्द-गिर्द होगी लेकिन, इसका टोन और ट्रीटमेंट काफी अलग होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक रोहित शेट्टी के अगले पुलिस ऑफिसर के रोल के लिए विक्की कौशल और टाइगर श्रॉफ भी रेस में थे। आखिर में ये रोल सिद्धार्थ मल्होत्रा की झोली में गिरा। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सिद्धार्थ मल्होत्रा ने शूटिंग शुरू कर दी है। फिल्म मुंबई की अलग-अलग लोकेशन में शूट की जाएगी। सुशांत प्रकाश इसके जरिए बतौर डायरेक्टर डेब्यू करने जा रहे हैं। सुशांत इससे पहले रोहित शेट्टी की फिल्म सिंबा और दिलवाले में भी काम कर चुके हैं। वर्कफ्रंट की बात करें तो सिद्धार्थ मल्होत्रा की आखिरी फिल्म शेरशाह थी। अब सिद्धार्थ फिल्म मिशन मजनू में नजर आएंगे। इस फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा के अपोजिट पुष्पा फिल्म की लीड एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना होंगी। सिद्धार्थ मल्होत्रा इसके अलावा करण जौहर की फिल्म योद्धा में भी नजर आएंगे। फिल्म में सिद्धार्थ के साथ दिशा पाटनी लीड रोल में होंगी। इसके अलावा एक्टर रकुलप्रीत सिंह और अजय देवगन की फिल्म थैंक गॉड में काम करेंगे। फिल्म में वह एक पुलिस ऑफिसर के रोल में होंगे। Times Now Navbharat पर पढ़ें Entertainment News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें । |
कांगड़ा केंद्रीय सहकारी समिति बैंक की ओर से चेयरमैन डाक्टर राजीव भारद्वाज ने जोनल अस्पताल के लिए दस ऑटोमैटिक सेनेटाइजर मशीनें व 50 लीटर सेनेटाईजर सीएमओ गुरदर्शन तथा चिकित्सा अधीक्षक डा. राजेश गुलेरी को भेंट की गई। इस अवसर पर केसीसीबी बैंक के चेयरमैन डाक्टर राजीव भारद्वाज ने कहा कि कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक समिति कोविड महामारी के इस दौर में आमजनमानस को जागरूक करने के लिए भी सार्थक कदम उठा रही है।
बैंक के कर्मचारियों के माध्यम से भी लोगों को कोविड से बचाव का संदेश प्रसारित किया जा रहा है। कोविड महामारी से बचाव के लिए सरकार को भी बैंक प्रबंधन की ओर से पूरा सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इस अवसर पर बैंक निदेशक रणजीत राणा, एमडी विनय कुमार, एजीएम नवनीत शर्मा तथा प्रबंधक योगेश गुप्ता भी उपस्थित थे।
| कांगड़ा केंद्रीय सहकारी समिति बैंक की ओर से चेयरमैन डाक्टर राजीव भारद्वाज ने जोनल अस्पताल के लिए दस ऑटोमैटिक सेनेटाइजर मशीनें व पचास लीटरटर सेनेटाईजर सीएमओ गुरदर्शन तथा चिकित्सा अधीक्षक डा. राजेश गुलेरी को भेंट की गई। इस अवसर पर केसीसीबी बैंक के चेयरमैन डाक्टर राजीव भारद्वाज ने कहा कि कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक समिति कोविड महामारी के इस दौर में आमजनमानस को जागरूक करने के लिए भी सार्थक कदम उठा रही है। बैंक के कर्मचारियों के माध्यम से भी लोगों को कोविड से बचाव का संदेश प्रसारित किया जा रहा है। कोविड महामारी से बचाव के लिए सरकार को भी बैंक प्रबंधन की ओर से पूरा सहयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इस अवसर पर बैंक निदेशक रणजीत राणा, एमडी विनय कुमार, एजीएम नवनीत शर्मा तथा प्रबंधक योगेश गुप्ता भी उपस्थित थे। |
रांची । दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रांची में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट मैच में भारतीय टीम जीत से दो विकेट दूर है। तीसरे दिन का खेल खत्म होने पर दक्षिण अफ्रीका ने अपनी दूसरी पारी में 8 विकेट पर 132 रन बना लिए हैं। दक्षिण अफ्रीका की टीम को पारी की हार से बचने के लिए अभी भी 203 रनों की जरूरत है। भारत ने पहली पारी में 9 विकेट पर 497 रन बनाकर पारी घोषित की थी, जिसके जवाब में दक्षिण अफ्रीका की पहली पारी 162 रनों पर सिमट गई थी।
इससे पहले अपने दक्षिण अफ्रीका की टीम आज अपने कल के स्कोर नौ रन पर दो विकेट के साथ खेलने उतरी। टीम का आज पहला झटका उमेश यादव ने दिया। उमेश की गेंद पर कप्तान डू प्लेसिस बोल्ड हो गए। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका के विकेट लगातार गिरते रहे और पूरी टीम 162 रनों पर सिमट गई। दक्षिण अफ्रीका के लिए जुबैर हामजा ही कुछ संघर्ष कर सके। उन्होंने शानदार अर्धशतक लगाते हुए सर्वाधिक 62 रन बनाए। हामजा के अलावा तेम्बा बावूमा ने 32 और जार्ज लिंडा ने 37 रन बनाए। भारत की तरफ से उमेश यादव ने तीन,मोहम्मद शमी, रवीन्द्र जडेजा और शाहबाज नदीम ने दो-दो विकेट लिया।
इसके बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली ने दक्षिण अफ्रीका को फॉलोआन दिया। यह इस श्रृंखला में दूसरी बार था, जब भारतीय टीम ने मेहमान टीम को फॉलोआन दिया। पहली पारी की तरह दूसरी पारी में दक्षिण अफ्रीका की शुरूआत खराब रही और केवल 36 रनों तक भारतीय तेज गेंदबाजों मोहम्मद शमी और उमेश यादव ने दक्षिण अफ्रीका के पांच बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखा दी। इस दौरान उमेश की गेंद पर दक्षिण अफ्रीका के सलामी बल्लेबाज डीन एल्गर बल्लेबाज चोटिल होकर रिटॉयर्ड हर्ट हुए। दिन का खेल खत्म होने पर दक्षिण अफ्रीका ने 8 विकेट पर 132 रन बना लिए हैं। डी ब्रॉयन 30 और एनरिक नोर्तजे पांच रन बनाकर नाबाद हैं।
इस मुकाबले में भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। भारत की शुरूआत खराब रही और बल्लेबाज मयंक अग्रवाल 10 रन बनाकर 12 रनों के कुल योग पर कागिसो रबाडा की गेद पर डीन एल्गर को कैच देकर चलते बने।
तेज गेंदबाज कागिसो रबाडा ने 16 के कुल स्कोर पर भारत को दूसरा झटका दिया। चेतेश्वर पुजारा अपना खाता भी नहीं खोल पाए और रबाडा का शिकार बने। चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए कोहली भी ज्यादा देर क्रीज पर टिक नहीं पाए और 39 के कुल स्कोर पर 12 के निजी स्कोर पर एनरिक नोर्टजे ने पवेलियन की राह दिखाई। इसके बाद रोहित और रहाणे ने कोई औऱ नुकसान नहीं होने दिया और टीम का स्कोर 300 के पार ले गए।
इन दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए 267 रनों की साझेदारी की। 306 रनों के कुल स्कोर पर अजिंक्या रहाणे 115 रन बनाकर जॉर्ज लिंडे की गेंद पर हेनरी क्लासेन को कैच देकर आउट हुए। 370 के कुल स्कोर पर रोहित शर्मा 255 गेंदों में 212 रन बनाकर आउट हो गए। इस पारी में रोहित ने 28 चौके और 6 छक्के जड़े। रोहित रबाडा की गेंद पर लुंगी एन्गिडी को कैच देकर आउट हुए।
इसके बाद ऋद्धिमान साहा और रवीन्द्र जडेजा ने भारतीय पारी को आगे बढ़ाया और टीम का स्कोर चार सौ के पार ले गए। इन दोनों ने छठें विकेट के लिए 47 रनों की साझेदारी की। 417 कुल स्कोर पर साहा 24 रन बनाकर लिंडे की गेंद पर बोल्ड हो गए। 450 के कुल स्कोर पर जडेजा 51 रन बनाकर लिंडे की गेंद पर क्लासेन को कैच दे बैठे।
आर अश्विन के रूप में भारत को आठवां झटका लगा। अश्विन 14 रन बनाकर डेन पीड्ट की गेंद पर आउट हुए। उमेश यादव ने 10 गेंदों पर 31 रन की तूफानी पारी खेली और स्कोर 480 के पार पहुंचाया। इस दौरान उमेश ने पांच छक्के लगाए। 482 के स्कोर पर उमेश लिंडेके चौथे शिकार बने। टीम का स्कोर 497 रनों पर पहुंचने पर कोहली ने पारी घोषित कर दी। नदीम 1 और मोहम्मद शमी 10 रन बनाकर नाबाद लौटे।
| रांची । दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रांची में खेले जा रहे तीसरे टेस्ट मैच में भारतीय टीम जीत से दो विकेट दूर है। तीसरे दिन का खेल खत्म होने पर दक्षिण अफ्रीका ने अपनी दूसरी पारी में आठ विकेट पर एक सौ बत्तीस रन बना लिए हैं। दक्षिण अफ्रीका की टीम को पारी की हार से बचने के लिए अभी भी दो सौ तीन रनों की जरूरत है। भारत ने पहली पारी में नौ विकेट पर चार सौ सत्तानवे रन बनाकर पारी घोषित की थी, जिसके जवाब में दक्षिण अफ्रीका की पहली पारी एक सौ बासठ रनों पर सिमट गई थी। इससे पहले अपने दक्षिण अफ्रीका की टीम आज अपने कल के स्कोर नौ रन पर दो विकेट के साथ खेलने उतरी। टीम का आज पहला झटका उमेश यादव ने दिया। उमेश की गेंद पर कप्तान डू प्लेसिस बोल्ड हो गए। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका के विकेट लगातार गिरते रहे और पूरी टीम एक सौ बासठ रनों पर सिमट गई। दक्षिण अफ्रीका के लिए जुबैर हामजा ही कुछ संघर्ष कर सके। उन्होंने शानदार अर्धशतक लगाते हुए सर्वाधिक बासठ रन बनाए। हामजा के अलावा तेम्बा बावूमा ने बत्तीस और जार्ज लिंडा ने सैंतीस रन बनाए। भारत की तरफ से उमेश यादव ने तीन,मोहम्मद शमी, रवीन्द्र जडेजा और शाहबाज नदीम ने दो-दो विकेट लिया। इसके बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली ने दक्षिण अफ्रीका को फॉलोआन दिया। यह इस श्रृंखला में दूसरी बार था, जब भारतीय टीम ने मेहमान टीम को फॉलोआन दिया। पहली पारी की तरह दूसरी पारी में दक्षिण अफ्रीका की शुरूआत खराब रही और केवल छत्तीस रनों तक भारतीय तेज गेंदबाजों मोहम्मद शमी और उमेश यादव ने दक्षिण अफ्रीका के पांच बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखा दी। इस दौरान उमेश की गेंद पर दक्षिण अफ्रीका के सलामी बल्लेबाज डीन एल्गर बल्लेबाज चोटिल होकर रिटॉयर्ड हर्ट हुए। दिन का खेल खत्म होने पर दक्षिण अफ्रीका ने आठ विकेट पर एक सौ बत्तीस रन बना लिए हैं। डी ब्रॉयन तीस और एनरिक नोर्तजे पांच रन बनाकर नाबाद हैं। इस मुकाबले में भारतीय टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। भारत की शुरूआत खराब रही और बल्लेबाज मयंक अग्रवाल दस रन बनाकर बारह रनों के कुल योग पर कागिसो रबाडा की गेद पर डीन एल्गर को कैच देकर चलते बने। तेज गेंदबाज कागिसो रबाडा ने सोलह के कुल स्कोर पर भारत को दूसरा झटका दिया। चेतेश्वर पुजारा अपना खाता भी नहीं खोल पाए और रबाडा का शिकार बने। चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने आए कोहली भी ज्यादा देर क्रीज पर टिक नहीं पाए और उनतालीस के कुल स्कोर पर बारह के निजी स्कोर पर एनरिक नोर्टजे ने पवेलियन की राह दिखाई। इसके बाद रोहित और रहाणे ने कोई औऱ नुकसान नहीं होने दिया और टीम का स्कोर तीन सौ के पार ले गए। इन दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए दो सौ सरसठ रनों की साझेदारी की। तीन सौ छः रनों के कुल स्कोर पर अजिंक्या रहाणे एक सौ पंद्रह रन बनाकर जॉर्ज लिंडे की गेंद पर हेनरी क्लासेन को कैच देकर आउट हुए। तीन सौ सत्तर के कुल स्कोर पर रोहित शर्मा दो सौ पचपन गेंदों में दो सौ बारह रन बनाकर आउट हो गए। इस पारी में रोहित ने अट्ठाईस चौके और छः छक्के जड़े। रोहित रबाडा की गेंद पर लुंगी एन्गिडी को कैच देकर आउट हुए। इसके बाद ऋद्धिमान साहा और रवीन्द्र जडेजा ने भारतीय पारी को आगे बढ़ाया और टीम का स्कोर चार सौ के पार ले गए। इन दोनों ने छठें विकेट के लिए सैंतालीस रनों की साझेदारी की। चार सौ सत्रह कुल स्कोर पर साहा चौबीस रन बनाकर लिंडे की गेंद पर बोल्ड हो गए। चार सौ पचास के कुल स्कोर पर जडेजा इक्यावन रन बनाकर लिंडे की गेंद पर क्लासेन को कैच दे बैठे। आर अश्विन के रूप में भारत को आठवां झटका लगा। अश्विन चौदह रन बनाकर डेन पीड्ट की गेंद पर आउट हुए। उमेश यादव ने दस गेंदों पर इकतीस रन की तूफानी पारी खेली और स्कोर चार सौ अस्सी के पार पहुंचाया। इस दौरान उमेश ने पांच छक्के लगाए। चार सौ बयासी के स्कोर पर उमेश लिंडेके चौथे शिकार बने। टीम का स्कोर चार सौ सत्तानवे रनों पर पहुंचने पर कोहली ने पारी घोषित कर दी। नदीम एक और मोहम्मद शमी दस रन बनाकर नाबाद लौटे। |
एक सुरुचिपूर्ण और चुपचाप कमांडिंग व्यक्तित्व, सिडनी पोइटीर अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता जीतने वाले पहले अफ्रीकी अमेरिकी बने। काले सिद्धांतों के रूढ़िवादी चित्रण से बचने वाले भूमिकाओं को लेने पर उनके सिद्धांतों और उनके आग्रह से समझौता करने से इनकार करने के कारण। Poitier दर्शकों और उनके साथियों का सम्मान अर्जित किया, और साथ ही गरिमा शब्द परिभाषित करने के लिए आया था।
1 9 40 के दशक में जैकी रॉबिन्सन के साथ मेजर लीग बेसबॉल में, पोइटीयर ने 1 9 50 और 1 9 60 के दशक में बाधाओं को तोड़ दिया, जिससे दूसरों का अनुसरण करने का मार्ग प्रशस्त हो गया। इसने चोट नहीं पहुंचाई कि वह स्क्रीन पर एक बेहद प्रतिभाशाली कलाकार और मोहक उपस्थिति थी, जिसने उन्हें 1 9 67 में नंबर एक बॉक्स ऑफिस ड्रा बनाने में मदद की। यहां सात सर्वकालिक क्लासिक सिडनी पोइटियर फिल्में हैं।
1 9 55 के ब्लैकबोर्ड जंगल और 1 9 57 के एज ऑफ द सिटी में मजबूत प्रदर्शन के साथ अपना निशान बनाने के बाद, पोइटीर टोनी कर्टिस के विपरीत इस प्रदर्शन के आधार पर एक बड़ा सितारा बन गया। दोनों पुरुषों ने दो भागने वाले अभियुक्तों को खेला जो रन पर जाते हैं और एक श्रृंखला से एक साथ बंधने के लिए एक साथ रहना चाहते हैं। स्वाभाविक रूप से, कर्टिस का चरित्र काले लोगों और पोइटीयर के घृणाओं से नफरत करता है। लेकिन आजादी की उनकी परेशान यात्रा एक दूसरे के लिए अपनी शत्रुता को दूर करती है, क्योंकि वे एक साथ काम करना सीखते हैं और अंत में दोस्त बन जाते हैं।
पोइटियर ने इतिहास के प्रति अपना पहला कदम उठाया जब वह सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए ऑस्कर नामांकन प्राप्त करने वाले पहले अफ्रीकी-अमेरिकी पुरुष बने लेकिन आखिरकार डेविड निवेन से हार गए।
उत्पादन के दौरान पीछे के दृश्यों के लिए सबसे अच्छी तरह से जाना जाता है, पोर्गी और बेस उन कुछ फिल्मों में से एक थे जहां पोइटियर ने खुद को एक भूमिका निभाने में दबाव डालने की इजाजत दी जो वह जानता था कि उसके नीचे था। कई अफ्रीकी-अमेरिकियों ने महसूस किया कि जॉर्ज गेर्शविन के लोक ओपेरा ने ड्रग्स, वेश्यावृत्ति और हिंसा पर ध्यान केंद्रित करने के साथ काले रूढ़िवादों को कायम रखा है। मित्र हैरी बेलाफोंटे ने पोरगी की भूमिका निभाई, जैसा पोइटीयर ने स्वयं किया था। लेकिन चूंकि उन्होंने सोचा कि निर्माता सैमुअल गोल्डविन उन्हें भविष्य की भूमिकाओं के लिए ब्लैकलिस्ट कर सकते हैं, पोइटीयर जल्द ही अपने प्रारंभिक गलतफहमी के बावजूद चिंतित थे। अभिनेता ने अपने फैसले पर खेद व्यक्त किया, भले ही उनके प्रदर्शन ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए गोल्डन ग्लोब नामांकन दिया।
सफल 1 9 5 9 ब्रॉडवे प्ले से अपनी भूमिका को दोबारा पेश करते हुए, पोइटियर एक दक्षिण अफ्रीका-अमेरिकी परिवार के उज्ज्वल बेटे थे, जो अमेरिकी साइड पर अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे थे, उनके दक्षिण-पश्चिम शिकागो अपार्टमेंट की दीवारों के बाहर और अंदर दोनों कठिनाइयों के बावजूद। लेकिन तंग बुनाई परिवार अलग हो जाना शुरू होता है जब उनके कुलपति पास हो जाते हैं और उनके बचे हुए लोग अपने व्यक्तिगत सपने को साकार करने के लिए बीमा राशि कैसे खर्च करते हैं। चूंकि फिल्म में मूल ब्रॉडवे कास्ट शामिल था, इसलिए हर कोई अपनी भूमिकाओं में सहज था और मजबूत प्रदर्शन प्रदान करता था। लेकिन यह Poitier था जो महत्वाकांक्षी वाल्टर ली यंगर के रूप में बाहर खड़ा था।
होमर स्मिथ के रूप में पोइटियर का प्रदर्शन, एक उद्देश्यहीन काम करने वाला जो अपने एरिजोना फार्म में नन के समूह की मदद करता है, पूरी तरह से फिल्म से काफी दूर है, जो धार्मिक जीवन के महत्व के बारे में एक औपचारिक कहानी है।
यह उन कुछ पोइटीयर फिल्मों में से एक था, जो नस्लीय मुद्दों पर कुछ भी ध्यान केंद्रित करते थे, जिसने अभिनेता बनाने के इतिहास को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए ऑस्कर जीतने वाले पहले अफ्रीकी-अमेरिकी के रूप में रास्ता बनाने में मदद की थी। यद्यपि स्क्रीन पर उनका प्रदर्शन उनके करियर के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के रूप में है, लेकिन इस कारक ने अपनी जीत में कोई संदेह नहीं किया है कि 40 साल पहले लोगों ने कितनी अलग दौड़ देखी थी। एक श्वासहीन और बीमिंग पोइटीयर ने एक छोटा, लेकिन मीठा स्वीकृति भाषण दिया और सिनेमा के इतिहास में अपनी जगह सीमेंट की।
सर, लव के साथ (1 9 67)
अपनी ब्रेकआउट फिल्म, ब्लैकबोर्ड जंगल में , पोइटियर ने एक एंटी-सोशल हाईस्कूल छात्र खेला जो ऑर्डर स्थापित करने की कोशिश कर रहे एक आदर्शवादी शिक्षक के साथ संघर्ष करता है। यहां, सर में, प्यार के साथ, भूमिकाओं को उलट दिया जाता है और यह Poitier शिक्षक खेल रहा है। हालांकि, इस बार, वह लंदन के किसी न किसी ईस्ट एंड स्लम में विद्रोही बच्चों से निपटने वाला एक अमेरिकी है। एक इंजीनियरिंग प्रोफेसर के रूप में काम खोजने में असमर्थ, वह मुख्य रूप से सफेद पड़ोस में माध्यमिक विद्यालय की नौकरी लेता है जब तक कि वह कुछ बेहतर न पा सके। लेकिन वह अपनी भूमिका को गंभीरता से लेता है और परेशान बच्चों को अच्छी तरह से व्यवहार करने वाले युवा वयस्कों को आकार देने, रास्ते में अपना सम्मान और दोस्ती कमाते हुए अपरंपरागत तरीकों का उपयोग करता है।
नॉर्मन ज्यूरिसन द्वारा निर्देशित, द हीट ऑफ द नाइट ने पोइटेयर को अपनी व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त भूमिका की पेशकश की, फिलाडेल्फिया के एक हत्यारे विशेषज्ञ डिटेक्टीव वर्जिन टिब्स, जिनकी पिछली गिरफ्तारी मिसिसिपी शहर में एक हत्यारे संदिग्ध के रूप में प्रारंभिक गिरफ्तारी एक जातिवादी स्थानीय शेरिफ के साथ एक असहज साझेदारी की ओर ले जाती है (रॉड स्टीगर)।
फिल्म को नागरिक अधिकार आंदोलन के लिए एक रूपरेखा के रूप में देखा गया था, खासतौर से उस दृश्य में जहां एक अमीर वृक्षारोपण मालिक (लैरी गेट्स) टिब्स को थप्पड़ मारता है, केवल तुरंत खुद को थप्पड़ मारता है। किंवदंती यह है कि Poitier फिल्म पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया जब तक कि उसके चरित्र वापस हिट नहीं किया।
द हीट ऑफ द नाइट में एक बड़ी वित्तीय हिट थी और दुर्लभ समय में से एक जहां पोइटियर का अनुकरणीय प्रदर्शन सह-कलाकार द्वारा छायांकित किया गया था; स्टीगर की पिच-परिपूर्ण शेरिफ पर ले जाती है जो अपने साथी को दोस्त के रूप में स्वीकार करने के लिए आता है, उसे अकादमी पुरस्कार मिला।
Poitier एक बार फिर खुद को एक नस्लीय आरोप लगाया नाटक के केंद्र के रूप में पाया, इस बार एक पुराने तलाकशुदा डॉक्टर खेल रहा है जो एक छोटी सफेद महिला (कैथरीन हौटन) से शादी करने के लिए जुड़ा हुआ है और अपने उदारता से दिमागी माता-पिता (कैथरीन हेपबर्न और स्पेंसर ट्रेसी ) शादी करने के अपने इरादे की घोषणा। जबकि दुल्हन सभी शामिल लोगों से गलतफहमी के बावजूद आगे बढ़ना चाहता है, पोइटीयर अपने माता-पिता से अपर्याप्त अनुमोदन चाहता है, जो संघ के लिए भी ऑब्जेक्ट करता है।
अमेरिकी इतिहास में अस्थिर समय के दौरान जारी, गेज हूज़ आ रहा है डिनर पोइटीयर के लिए एक बड़ी हिट थी और अपने सबसे सफल वर्ष को कैप्चर किया। फिल्म ट्रेसी द्वारा बनाई गई आखिरी फिल्म होने के लिए उल्लेखनीय थी, जिसने फिल्मांकन समाप्त होने के कुछ देर बाद निधन नहीं किया।
| एक सुरुचिपूर्ण और चुपचाप कमांडिंग व्यक्तित्व, सिडनी पोइटीर अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता जीतने वाले पहले अफ्रीकी अमेरिकी बने। काले सिद्धांतों के रूढ़िवादी चित्रण से बचने वाले भूमिकाओं को लेने पर उनके सिद्धांतों और उनके आग्रह से समझौता करने से इनकार करने के कारण। Poitier दर्शकों और उनके साथियों का सम्मान अर्जित किया, और साथ ही गरिमा शब्द परिभाषित करने के लिए आया था। एक नौ चालीस के दशक में जैकी रॉबिन्सन के साथ मेजर लीग बेसबॉल में, पोइटीयर ने एक नौ पचास और एक नौ साठ के दशक में बाधाओं को तोड़ दिया, जिससे दूसरों का अनुसरण करने का मार्ग प्रशस्त हो गया। इसने चोट नहीं पहुंचाई कि वह स्क्रीन पर एक बेहद प्रतिभाशाली कलाकार और मोहक उपस्थिति थी, जिसने उन्हें एक नौ सरसठ में नंबर एक बॉक्स ऑफिस ड्रा बनाने में मदद की। यहां सात सर्वकालिक क्लासिक सिडनी पोइटियर फिल्में हैं। एक नौ पचपन के ब्लैकबोर्ड जंगल और एक नौ सत्तावन के एज ऑफ द सिटी में मजबूत प्रदर्शन के साथ अपना निशान बनाने के बाद, पोइटीर टोनी कर्टिस के विपरीत इस प्रदर्शन के आधार पर एक बड़ा सितारा बन गया। दोनों पुरुषों ने दो भागने वाले अभियुक्तों को खेला जो रन पर जाते हैं और एक श्रृंखला से एक साथ बंधने के लिए एक साथ रहना चाहते हैं। स्वाभाविक रूप से, कर्टिस का चरित्र काले लोगों और पोइटीयर के घृणाओं से नफरत करता है। लेकिन आजादी की उनकी परेशान यात्रा एक दूसरे के लिए अपनी शत्रुता को दूर करती है, क्योंकि वे एक साथ काम करना सीखते हैं और अंत में दोस्त बन जाते हैं। पोइटियर ने इतिहास के प्रति अपना पहला कदम उठाया जब वह सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए ऑस्कर नामांकन प्राप्त करने वाले पहले अफ्रीकी-अमेरिकी पुरुष बने लेकिन आखिरकार डेविड निवेन से हार गए। उत्पादन के दौरान पीछे के दृश्यों के लिए सबसे अच्छी तरह से जाना जाता है, पोर्गी और बेस उन कुछ फिल्मों में से एक थे जहां पोइटियर ने खुद को एक भूमिका निभाने में दबाव डालने की इजाजत दी जो वह जानता था कि उसके नीचे था। कई अफ्रीकी-अमेरिकियों ने महसूस किया कि जॉर्ज गेर्शविन के लोक ओपेरा ने ड्रग्स, वेश्यावृत्ति और हिंसा पर ध्यान केंद्रित करने के साथ काले रूढ़िवादों को कायम रखा है। मित्र हैरी बेलाफोंटे ने पोरगी की भूमिका निभाई, जैसा पोइटीयर ने स्वयं किया था। लेकिन चूंकि उन्होंने सोचा कि निर्माता सैमुअल गोल्डविन उन्हें भविष्य की भूमिकाओं के लिए ब्लैकलिस्ट कर सकते हैं, पोइटीयर जल्द ही अपने प्रारंभिक गलतफहमी के बावजूद चिंतित थे। अभिनेता ने अपने फैसले पर खेद व्यक्त किया, भले ही उनके प्रदर्शन ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए गोल्डन ग्लोब नामांकन दिया। सफल एक नौ पाँच नौ ब्रॉडवे प्ले से अपनी भूमिका को दोबारा पेश करते हुए, पोइटियर एक दक्षिण अफ्रीका-अमेरिकी परिवार के उज्ज्वल बेटे थे, जो अमेरिकी साइड पर अच्छा प्रदर्शन करने की कोशिश कर रहे थे, उनके दक्षिण-पश्चिम शिकागो अपार्टमेंट की दीवारों के बाहर और अंदर दोनों कठिनाइयों के बावजूद। लेकिन तंग बुनाई परिवार अलग हो जाना शुरू होता है जब उनके कुलपति पास हो जाते हैं और उनके बचे हुए लोग अपने व्यक्तिगत सपने को साकार करने के लिए बीमा राशि कैसे खर्च करते हैं। चूंकि फिल्म में मूल ब्रॉडवे कास्ट शामिल था, इसलिए हर कोई अपनी भूमिकाओं में सहज था और मजबूत प्रदर्शन प्रदान करता था। लेकिन यह Poitier था जो महत्वाकांक्षी वाल्टर ली यंगर के रूप में बाहर खड़ा था। होमर स्मिथ के रूप में पोइटियर का प्रदर्शन, एक उद्देश्यहीन काम करने वाला जो अपने एरिजोना फार्म में नन के समूह की मदद करता है, पूरी तरह से फिल्म से काफी दूर है, जो धार्मिक जीवन के महत्व के बारे में एक औपचारिक कहानी है। यह उन कुछ पोइटीयर फिल्मों में से एक था, जो नस्लीय मुद्दों पर कुछ भी ध्यान केंद्रित करते थे, जिसने अभिनेता बनाने के इतिहास को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए ऑस्कर जीतने वाले पहले अफ्रीकी-अमेरिकी के रूप में रास्ता बनाने में मदद की थी। यद्यपि स्क्रीन पर उनका प्रदर्शन उनके करियर के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के रूप में है, लेकिन इस कारक ने अपनी जीत में कोई संदेह नहीं किया है कि चालीस साल पहले लोगों ने कितनी अलग दौड़ देखी थी। एक श्वासहीन और बीमिंग पोइटीयर ने एक छोटा, लेकिन मीठा स्वीकृति भाषण दिया और सिनेमा के इतिहास में अपनी जगह सीमेंट की। सर, लव के साथ अपनी ब्रेकआउट फिल्म, ब्लैकबोर्ड जंगल में , पोइटियर ने एक एंटी-सोशल हाईस्कूल छात्र खेला जो ऑर्डर स्थापित करने की कोशिश कर रहे एक आदर्शवादी शिक्षक के साथ संघर्ष करता है। यहां, सर में, प्यार के साथ, भूमिकाओं को उलट दिया जाता है और यह Poitier शिक्षक खेल रहा है। हालांकि, इस बार, वह लंदन के किसी न किसी ईस्ट एंड स्लम में विद्रोही बच्चों से निपटने वाला एक अमेरिकी है। एक इंजीनियरिंग प्रोफेसर के रूप में काम खोजने में असमर्थ, वह मुख्य रूप से सफेद पड़ोस में माध्यमिक विद्यालय की नौकरी लेता है जब तक कि वह कुछ बेहतर न पा सके। लेकिन वह अपनी भूमिका को गंभीरता से लेता है और परेशान बच्चों को अच्छी तरह से व्यवहार करने वाले युवा वयस्कों को आकार देने, रास्ते में अपना सम्मान और दोस्ती कमाते हुए अपरंपरागत तरीकों का उपयोग करता है। नॉर्मन ज्यूरिसन द्वारा निर्देशित, द हीट ऑफ द नाइट ने पोइटेयर को अपनी व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त भूमिका की पेशकश की, फिलाडेल्फिया के एक हत्यारे विशेषज्ञ डिटेक्टीव वर्जिन टिब्स, जिनकी पिछली गिरफ्तारी मिसिसिपी शहर में एक हत्यारे संदिग्ध के रूप में प्रारंभिक गिरफ्तारी एक जातिवादी स्थानीय शेरिफ के साथ एक असहज साझेदारी की ओर ले जाती है । फिल्म को नागरिक अधिकार आंदोलन के लिए एक रूपरेखा के रूप में देखा गया था, खासतौर से उस दृश्य में जहां एक अमीर वृक्षारोपण मालिक टिब्स को थप्पड़ मारता है, केवल तुरंत खुद को थप्पड़ मारता है। किंवदंती यह है कि Poitier फिल्म पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया जब तक कि उसके चरित्र वापस हिट नहीं किया। द हीट ऑफ द नाइट में एक बड़ी वित्तीय हिट थी और दुर्लभ समय में से एक जहां पोइटियर का अनुकरणीय प्रदर्शन सह-कलाकार द्वारा छायांकित किया गया था; स्टीगर की पिच-परिपूर्ण शेरिफ पर ले जाती है जो अपने साथी को दोस्त के रूप में स्वीकार करने के लिए आता है, उसे अकादमी पुरस्कार मिला। Poitier एक बार फिर खुद को एक नस्लीय आरोप लगाया नाटक के केंद्र के रूप में पाया, इस बार एक पुराने तलाकशुदा डॉक्टर खेल रहा है जो एक छोटी सफेद महिला से शादी करने के लिए जुड़ा हुआ है और अपने उदारता से दिमागी माता-पिता शादी करने के अपने इरादे की घोषणा। जबकि दुल्हन सभी शामिल लोगों से गलतफहमी के बावजूद आगे बढ़ना चाहता है, पोइटीयर अपने माता-पिता से अपर्याप्त अनुमोदन चाहता है, जो संघ के लिए भी ऑब्जेक्ट करता है। अमेरिकी इतिहास में अस्थिर समय के दौरान जारी, गेज हूज़ आ रहा है डिनर पोइटीयर के लिए एक बड़ी हिट थी और अपने सबसे सफल वर्ष को कैप्चर किया। फिल्म ट्रेसी द्वारा बनाई गई आखिरी फिल्म होने के लिए उल्लेखनीय थी, जिसने फिल्मांकन समाप्त होने के कुछ देर बाद निधन नहीं किया। |
समर्पण 95
आचार्य श्री होते हुए जो विनय-विभूति है । पूज्य श्री होते हुए जो प्रभुता से पर है । शिरोमणी होते हुए जो संत के सेवक हैं । गुरुवर्य होते हुए जो शिष्य के भी शिष्य हैं । ज्ञान मूर्ति होते हुए जो नम्रता की मूर्ति है तपो मूर्ति होते हुए जो क्षमा के
परम करुणासागर, दयालुदेव, जैनाचार्य, तपोधनी, तपस्वीदेव, तपोमूर्ति
पूज्य श्री १०८ श्री देवजी ऋषिजी महाराज श्रीजी की पुनीत सेवा में त्रिकाल वंदन !
दानवीर श्री सरदारमलजी पुँगलिया ( नागपुर) की प्रेरणा से श्रीजी की छत्र छाया में
प्रथित आगम-वाटिका के पुष्पों की माला स्वरूप यह सेवक की पामर सेवा रूप लघु पुस्तिका सविनय समर्पण
रुपया सवा लाख जितना दान करने वाले दानवीर सेठ सरदारमलजी साहब पुगलिया ( नागपुर )
है जब
FAP Press Ajmer
• Ma
आपने श्री जैन गुरुकुल, व्यावर को 'देवभवन' निर्माण हेतु १८०००) रुपये की उदार भेंट जाहिर की है।
अ० सो० धर्मप्रेमी श्रीमती मगनदेवी की तरफ से अपनी वर्गीमा पुधी
श्री जमनायाई की पुण्य स्मृति में सादर रूम मेट ।
रुपया सवा लाख जितना दान करने वाले दानवीर सेठ सरदारमलजी साहब पुइलिया ( नागपुर )
आपने श्री जैन गुरुकुल, व्यावर को 'देवभवन' निर्माण हेतु १८००० ) रुपये की उदार भेंट जाहिर की है । | समर्पण पचानवे आचार्य श्री होते हुए जो विनय-विभूति है । पूज्य श्री होते हुए जो प्रभुता से पर है । शिरोमणी होते हुए जो संत के सेवक हैं । गुरुवर्य होते हुए जो शिष्य के भी शिष्य हैं । ज्ञान मूर्ति होते हुए जो नम्रता की मूर्ति है तपो मूर्ति होते हुए जो क्षमा के परम करुणासागर, दयालुदेव, जैनाचार्य, तपोधनी, तपस्वीदेव, तपोमूर्ति पूज्य श्री एक सौ आठ श्री देवजी ऋषिजी महाराज श्रीजी की पुनीत सेवा में त्रिकाल वंदन ! दानवीर श्री सरदारमलजी पुँगलिया की प्रेरणा से श्रीजी की छत्र छाया में प्रथित आगम-वाटिका के पुष्पों की माला स्वरूप यह सेवक की पामर सेवा रूप लघु पुस्तिका सविनय समर्पण रुपया सवा लाख जितना दान करने वाले दानवीर सेठ सरदारमलजी साहब पुगलिया है जब FAP Press Ajmer • Ma आपने श्री जैन गुरुकुल, व्यावर को 'देवभवन' निर्माण हेतु अट्ठारह हज़ार) रुपये की उदार भेंट जाहिर की है। अशून्य सोशून्य धर्मप्रेमी श्रीमती मगनदेवी की तरफ से अपनी वर्गीमा पुधी श्री जमनायाई की पुण्य स्मृति में सादर रूम मेट । रुपया सवा लाख जितना दान करने वाले दानवीर सेठ सरदारमलजी साहब पुइलिया आपने श्री जैन गुरुकुल, व्यावर को 'देवभवन' निर्माण हेतु अट्ठारह हज़ार ) रुपये की उदार भेंट जाहिर की है । |
मंत्री पर लगा रेप का आरोप, मंत्री ने बयान में कहा शिकायत करने वाली महिला के बहन से था.....
एक बार फिर किसी मंत्री पर खुलकर किसी ने रेप का आरोप लगाया है। आरोप लगाने वाली महिला का कहना है कि मंत्री जी वर्ष 2006 से उसके साथ रेप कर रहे हैं। वहीं मंत्री पर आरोप लगने के बाद वह भी सफाई देने सामने आये और कहा कि आरोप लगाने वाली महिला से उनका कोई सम्बंध नही है। उस महिला की बडी बहन के रिलेशन में रहे हैं। इसके द्वारा लगाया गया आरोप निराधार है। यह आरोप पैसा एंेठने के लिए ब्लैकमेलिंग है।
जानकारी के अनुसार उद्धव ठाकरे सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री धनंजय मुंडे बीजेपी के पूर्व नेता स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे के भतीजे हैं। इन पर मुंबई की एक सिंगर महिला ने रेप का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि मंत्री धनंजय मंुडे उसके साथ वर्ष 2006 से बलातकार कर रहे हैं। यह जानकारी सिंगर ने ट्वीट कर दी। साथ ही सिंगर का कहना है कि पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रही है।
रीवाः सरकार का रवैया किसानों के पक्ष में नही, अब न्यायालय को आना पड़ रहा आगे, किसान सम्मेलन में रखी बात..
महिला के आरोपों को खारिच करते हुए मंत्री धनंजय मुंडे ने कहा कि उस महिला से उनका कोई सम्बंध नही है। उसकी बहन के साथ 2003 में सम्पर्क मंे थे। इस बात की जानकारी उनके परिवार को भी हैं और उन दोनांे के दो बच्चे भी है। लेकिन इस महिला का आरोप निराधार है और यह सब पैसा एंेठन के लिए कर रही है। मेरे पास सबूत हैं कि इन्होंने पैसे के मुझे मैसेज भेजे।
एमपीः कोरोना वैक्सीन कल पहुंचेगी भोपाल, 16 से लगाई जायेगी दवा, इन्हे लगेगी सबसे पहले वैक्सीन..
धनंजय मुंडे उद्धव ठाकरे सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री है। 2019 के विधानसभा चुनाव मे वह अपनी चचेरी बहन पंकजा मुंडे को हराया है। यह बीजेपी के पूर्व नेता स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे के भतीजे हैं। इन्होने बहुत पहले ही गोपीनाथ मुंडे का साथ छोडकर एनसीपी ज्वाइन कर लिया था।
| मंत्री पर लगा रेप का आरोप, मंत्री ने बयान में कहा शिकायत करने वाली महिला के बहन से था..... एक बार फिर किसी मंत्री पर खुलकर किसी ने रेप का आरोप लगाया है। आरोप लगाने वाली महिला का कहना है कि मंत्री जी वर्ष दो हज़ार छः से उसके साथ रेप कर रहे हैं। वहीं मंत्री पर आरोप लगने के बाद वह भी सफाई देने सामने आये और कहा कि आरोप लगाने वाली महिला से उनका कोई सम्बंध नही है। उस महिला की बडी बहन के रिलेशन में रहे हैं। इसके द्वारा लगाया गया आरोप निराधार है। यह आरोप पैसा एंेठने के लिए ब्लैकमेलिंग है। जानकारी के अनुसार उद्धव ठाकरे सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री धनंजय मुंडे बीजेपी के पूर्व नेता स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे के भतीजे हैं। इन पर मुंबई की एक सिंगर महिला ने रेप का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि मंत्री धनंजय मंुडे उसके साथ वर्ष दो हज़ार छः से बलातकार कर रहे हैं। यह जानकारी सिंगर ने ट्वीट कर दी। साथ ही सिंगर का कहना है कि पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रही है। रीवाः सरकार का रवैया किसानों के पक्ष में नही, अब न्यायालय को आना पड़ रहा आगे, किसान सम्मेलन में रखी बात.. महिला के आरोपों को खारिच करते हुए मंत्री धनंजय मुंडे ने कहा कि उस महिला से उनका कोई सम्बंध नही है। उसकी बहन के साथ दो हज़ार तीन में सम्पर्क मंे थे। इस बात की जानकारी उनके परिवार को भी हैं और उन दोनांे के दो बच्चे भी है। लेकिन इस महिला का आरोप निराधार है और यह सब पैसा एंेठन के लिए कर रही है। मेरे पास सबूत हैं कि इन्होंने पैसे के मुझे मैसेज भेजे। एमपीः कोरोना वैक्सीन कल पहुंचेगी भोपाल, सोलह से लगाई जायेगी दवा, इन्हे लगेगी सबसे पहले वैक्सीन.. धनंजय मुंडे उद्धव ठाकरे सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री है। दो हज़ार उन्नीस के विधानसभा चुनाव मे वह अपनी चचेरी बहन पंकजा मुंडे को हराया है। यह बीजेपी के पूर्व नेता स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे के भतीजे हैं। इन्होने बहुत पहले ही गोपीनाथ मुंडे का साथ छोडकर एनसीपी ज्वाइन कर लिया था। |
कुछ महीनों पहले सोशल मीडिया की दुनिया में उस वक्त भूचाल आ गया जब स्वीडन के हेल्थ मिनिस्टर गैबरियल विकस्टॉर्म से एक शख्स ने टि्वटर पर अपने पड़ोसियों की शिकायत की थी। उस शख्स का कहना था कि उसके पड़ोसी शारीरिक संबंध बनाते वक्त आवाजें करते हैं। हेल्थ मिनिस्टर ने कहा था, ' मुझे लगता है कि यह उनके (पड़ोसियों) लिए अच्छा है। यह उनके भले और जनता की सेहत के लिए भी ठीक है। ' लेकिन इस तरह का मुखर सेक्स किसी भी तरह से अच्छा कैसे हो सकता है? साइंस का इसके बारे में क्या कहना है? यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स के रिसर्चरों की एक स्टडी अर्काइव्स ऑफ सेक्शुअल बिहेवियर में छपी है। इसके मुताबिक, ज्यादा आनंद की अनुभूति और संभोग सुख को जाहिर करने की प्रवृत्ति में सीधा रिश्ता है। यह आपकी सेहत के लिए अच्छा है।
स्टडी में हिस्सा लेने वाले 92 पर्सेंट लोगों ने कहा कि रतिक्रिया के दौरान आवाजें करना साथी के अंदर कॉन्फिडेंस पैदा करता है। यह भी पाया गया कि महिलाएं संबंध बनाते वक्त आवाजें निकालकर अपने पार्टनर का उत्साह बढ़ाती हैं। दरअसल, ऐसा कई स्टडीज में जाहिर हो चुका है कि जो महिलाएं सेक्स के दौरान मुखर होती हैं, वे अपने साथी को यह जाहिर करना चाहती हैं कि खुद के आनंद को जाहिर करने से ज्यादा उनके लिए चरमोत्कर्ष हासिल करना बेहतर है।
इससे एक बात और पता चलती है। महिलाएं संबंध बनाने के दौरान पुरुषों के मुकाबले ज्यादा 'मुखर' होती हैं। यह सही है कि महिलाएं अपने साथी की आवाजों से कामोत्तेजित हो जाती हैं। कुछ स्टडीज में यह पाया गया कि पुरुष महिलाओं के मुकाबले 94 फीसदी कम आवाजें करते हैं। हालांकि, क्या यह मानव प्रवृत्ति जैविक विकास की प्रक्रिया से जुड़ी हुई है अथवा यह सामाजिक माहौल का असर है कि मेनस्ट्रीम मीडिया और पोर्न के जरिए मुखर होने के लिए प्रेरित करता है।
सेक्स एक्सपर्ट ट्रेसी कॉक्स का कहना है कि बेडरूम में महिलाओं पर इस बात का दबाव होता है कि वे मुखर हों या यह जाहिर करें कि उन्हें आनंद आ रहा है। उन्हें इस बात पर संशय है कि संबंध बनाने के दौरान ज्यादा शोर बेहतर सेक्स की निशानी है।
हालांकि, हमें यह पता है कि सिर्फ महिलाएं ही ऐसी नहीं हैं जो सेक्स के दौरान मुखर होती हैं। जानवरों पर हुए रिसर्च से इस बात का खुलासा हुआ है कि मादा लंगूर में भी ऐसी ही प्रवृत्ति पाई जाती है। इससे ये संकेत मिलता है कि मुखर सेक्स के पीछे सामाजिक असर की ज्यादा कोई भूमिका नहीं होती। ऐसे में यह कोई मायने नहीं रखता कि आप कैसे संबंध बनाते हैं या इस दौरान कितने मुखर होते हैं। यह सब कुछ मानव के अनुभवों का हिस्सा है। इसलिए आगे बढ़ें, संबंध बनाने के दौरान मुखर बनें। यह आपकी सेहत के लिए अच्छा है।
| कुछ महीनों पहले सोशल मीडिया की दुनिया में उस वक्त भूचाल आ गया जब स्वीडन के हेल्थ मिनिस्टर गैबरियल विकस्टॉर्म से एक शख्स ने टि्वटर पर अपने पड़ोसियों की शिकायत की थी। उस शख्स का कहना था कि उसके पड़ोसी शारीरिक संबंध बनाते वक्त आवाजें करते हैं। हेल्थ मिनिस्टर ने कहा था, ' मुझे लगता है कि यह उनके लिए अच्छा है। यह उनके भले और जनता की सेहत के लिए भी ठीक है। ' लेकिन इस तरह का मुखर सेक्स किसी भी तरह से अच्छा कैसे हो सकता है? साइंस का इसके बारे में क्या कहना है? यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स के रिसर्चरों की एक स्टडी अर्काइव्स ऑफ सेक्शुअल बिहेवियर में छपी है। इसके मुताबिक, ज्यादा आनंद की अनुभूति और संभोग सुख को जाहिर करने की प्रवृत्ति में सीधा रिश्ता है। यह आपकी सेहत के लिए अच्छा है। स्टडी में हिस्सा लेने वाले बानवे पर्सेंट लोगों ने कहा कि रतिक्रिया के दौरान आवाजें करना साथी के अंदर कॉन्फिडेंस पैदा करता है। यह भी पाया गया कि महिलाएं संबंध बनाते वक्त आवाजें निकालकर अपने पार्टनर का उत्साह बढ़ाती हैं। दरअसल, ऐसा कई स्टडीज में जाहिर हो चुका है कि जो महिलाएं सेक्स के दौरान मुखर होती हैं, वे अपने साथी को यह जाहिर करना चाहती हैं कि खुद के आनंद को जाहिर करने से ज्यादा उनके लिए चरमोत्कर्ष हासिल करना बेहतर है। इससे एक बात और पता चलती है। महिलाएं संबंध बनाने के दौरान पुरुषों के मुकाबले ज्यादा 'मुखर' होती हैं। यह सही है कि महिलाएं अपने साथी की आवाजों से कामोत्तेजित हो जाती हैं। कुछ स्टडीज में यह पाया गया कि पुरुष महिलाओं के मुकाबले चौरानवे फीसदी कम आवाजें करते हैं। हालांकि, क्या यह मानव प्रवृत्ति जैविक विकास की प्रक्रिया से जुड़ी हुई है अथवा यह सामाजिक माहौल का असर है कि मेनस्ट्रीम मीडिया और पोर्न के जरिए मुखर होने के लिए प्रेरित करता है। सेक्स एक्सपर्ट ट्रेसी कॉक्स का कहना है कि बेडरूम में महिलाओं पर इस बात का दबाव होता है कि वे मुखर हों या यह जाहिर करें कि उन्हें आनंद आ रहा है। उन्हें इस बात पर संशय है कि संबंध बनाने के दौरान ज्यादा शोर बेहतर सेक्स की निशानी है। हालांकि, हमें यह पता है कि सिर्फ महिलाएं ही ऐसी नहीं हैं जो सेक्स के दौरान मुखर होती हैं। जानवरों पर हुए रिसर्च से इस बात का खुलासा हुआ है कि मादा लंगूर में भी ऐसी ही प्रवृत्ति पाई जाती है। इससे ये संकेत मिलता है कि मुखर सेक्स के पीछे सामाजिक असर की ज्यादा कोई भूमिका नहीं होती। ऐसे में यह कोई मायने नहीं रखता कि आप कैसे संबंध बनाते हैं या इस दौरान कितने मुखर होते हैं। यह सब कुछ मानव के अनुभवों का हिस्सा है। इसलिए आगे बढ़ें, संबंध बनाने के दौरान मुखर बनें। यह आपकी सेहत के लिए अच्छा है। |
देर बाद उसने करवट ही बदल ली।
तूफ़ान, कड़कती धूप या बहती वर्षा में क्या कोई सो सकता है?
कोई व्यक्ति एक-दो सप्ताह तो निकाल सकता है, लेकिन दो-तीन साल!
हरगिज़ नहीं।
दिया जाए।
थी - सो जाओ कृष्णा। लेकिन वह तो ...।
लिए कृष्ण क्यों नहीं हो सकता?
गीता के घर पर उसके माँ-बाप से मिलने आया हुआ था।
गीता ने क्रिस को कृष्ण पुकारा तो क्रिस ने एतराज़ किया।
"मुझे वह पसंद नहीं है।"
सब हँसे थे।
कहीं के।"
"अरे तुम नहीं नाचोगे। नाचते तो कृष्ण के लिए उसके भक्त हैं।
उसकी गोपियाँ हैं। सब ने समझाया।"
रथ पर सारथी थे और अर्जुन उनके पीछे गांडीव धारण किये खड़ा था।
"गोपियां कहां हैं?"
का मैदान है भाई। यहाँ महाभारत हुआ था।"
"अर्जुन लड़ने के लिए तैयार नहीं था।"
" ओह। द कोन्शेंनश्यस डिस्सेंटर।"
" हाँ, शायद इतिहास में सबसे पहला।"
कुछ कहा, वह बोलते-बोलते कुछ सँभल गए, फिर अगला श्लोक बोला,
"कर्मणयेवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन, मा कर्म फल हेतुर्भ।"
नहीं, डिटैचमेंट की भावना के साथ काम करो। निर्लिप्त रहो।
मुझ पर छोड़ दो। "
"तो असली कमांडर कृष्णा है? "
क्रिस रायन हो, उसके लिए तो क्रिस कृष्णा ही बन गया। रंग काला,
मुस्कान मीठी, चौड़े कंधे, पेट अंदर, अंग-अंग मानों तराशा हुआ,
फौलाद में ढला शरीर, किंतु स्पर्श कोमल।
देख पा रही थी, क्यों कि कमरे में लगभग अंधेरा था।
चाहता। मैं उसे भूल जाना चाहता हूँ ..।"
प्यारभरी आवाज़ में धीरे-धीरे उसका बातें करना..।
तो क्या यह दो वर्षों तक सहवास न होने के कारण?
ऐसी हो गई थी जैसे कोई गला घोट रहा हो। फिर बोलने लगा,
गीता ने बत्ती जलायी, उसे झकझोरा। "कृष्ण क्या बात है? कृष्ण!
पूछा, "क्या बात है? कोई बुरा सपना देखा?"
कुछ हुआ?"
"तुम नींद में बोल रहे थे।"
जैसे उसने पिछली रात किया था।
हुए झटक मुँह दूसरी तरफ़ कर लिया।
रहा। उन्हें मॉल ले गया। ढेरों खिलौने और डीवीडी ख़रीद दिए।
चाकलेट टाफियाँ ले दीं। उनके साथ टेलीविज़न देखता रहा।
बारे में पूछे। युद्ध की कोई घटना क्या सपने में आ गई?
मनोरंजन हो, कोई खेल। कोई इतना अमानवीय किस तरह हो सकता है?
हमारी कैसी दुर्गत करगें।
नहीं। सच क्या है पता नहीं चलता। तुम क्या कहते हो?
पहले उसने पूछा था, "तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है?"
कर चुकी होऊँगी।"
सारा काम-काज अलग।"
चल रहा है। भविष्य उज्जवल नज़र आए तो इतनी परेशानी नहीं होती।
हाथी निकल गया अब तो पूँछ ही रह गई है।"
ठीक रहेगा। मुझे अपने परमात्मा में पूरा विश्वास है।"
मगर सुबह तीन बजे ही उठ बैठा वह। गीता पहले से ही जाग रही थी।
अपने करीब खींच लेगा, पिछली बार की तरह। फिर शुरू होंगी बातें।
स्पर्श वह अपने शरीर के अंग-अंग पर महसूस कर सकती हो।
क्रिस खड़ा हो गया।
"क्या वह बाथरूम की तरफ़ जा रहा है?"
"या बच्चों के बैड़रूम की तरफ़?"
उठा कर, इधर-उधर रख रहा है।
कृष्ण ने पलट के देखा तो बोली, "क्या नींद नहीं आ रही?"
"मैं ठीक हूँ।" उसने एक पुराना-सा बक्सा उठाते हुए कहा।
चूमा और न छूआ ही।
"बहुत जल्दी जाग गए।"
"कुछ परेशानी है?"
वह कुछ रुकते हुए बोला, "मैं विवाहित नहीं रहना चाहता।"
| देर बाद उसने करवट ही बदल ली। तूफ़ान, कड़कती धूप या बहती वर्षा में क्या कोई सो सकता है? कोई व्यक्ति एक-दो सप्ताह तो निकाल सकता है, लेकिन दो-तीन साल! हरगिज़ नहीं। दिया जाए। थी - सो जाओ कृष्णा। लेकिन वह तो ...। लिए कृष्ण क्यों नहीं हो सकता? गीता के घर पर उसके माँ-बाप से मिलने आया हुआ था। गीता ने क्रिस को कृष्ण पुकारा तो क्रिस ने एतराज़ किया। "मुझे वह पसंद नहीं है।" सब हँसे थे। कहीं के।" "अरे तुम नहीं नाचोगे। नाचते तो कृष्ण के लिए उसके भक्त हैं। उसकी गोपियाँ हैं। सब ने समझाया।" रथ पर सारथी थे और अर्जुन उनके पीछे गांडीव धारण किये खड़ा था। "गोपियां कहां हैं?" का मैदान है भाई। यहाँ महाभारत हुआ था।" "अर्जुन लड़ने के लिए तैयार नहीं था।" " ओह। द कोन्शेंनश्यस डिस्सेंटर।" " हाँ, शायद इतिहास में सबसे पहला।" कुछ कहा, वह बोलते-बोलते कुछ सँभल गए, फिर अगला श्लोक बोला, "कर्मणयेवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन, मा कर्म फल हेतुर्भ।" नहीं, डिटैचमेंट की भावना के साथ काम करो। निर्लिप्त रहो। मुझ पर छोड़ दो। " "तो असली कमांडर कृष्णा है? " क्रिस रायन हो, उसके लिए तो क्रिस कृष्णा ही बन गया। रंग काला, मुस्कान मीठी, चौड़े कंधे, पेट अंदर, अंग-अंग मानों तराशा हुआ, फौलाद में ढला शरीर, किंतु स्पर्श कोमल। देख पा रही थी, क्यों कि कमरे में लगभग अंधेरा था। चाहता। मैं उसे भूल जाना चाहता हूँ ..।" प्यारभरी आवाज़ में धीरे-धीरे उसका बातें करना..। तो क्या यह दो वर्षों तक सहवास न होने के कारण? ऐसी हो गई थी जैसे कोई गला घोट रहा हो। फिर बोलने लगा, गीता ने बत्ती जलायी, उसे झकझोरा। "कृष्ण क्या बात है? कृष्ण! पूछा, "क्या बात है? कोई बुरा सपना देखा?" कुछ हुआ?" "तुम नींद में बोल रहे थे।" जैसे उसने पिछली रात किया था। हुए झटक मुँह दूसरी तरफ़ कर लिया। रहा। उन्हें मॉल ले गया। ढेरों खिलौने और डीवीडी ख़रीद दिए। चाकलेट टाफियाँ ले दीं। उनके साथ टेलीविज़न देखता रहा। बारे में पूछे। युद्ध की कोई घटना क्या सपने में आ गई? मनोरंजन हो, कोई खेल। कोई इतना अमानवीय किस तरह हो सकता है? हमारी कैसी दुर्गत करगें। नहीं। सच क्या है पता नहीं चलता। तुम क्या कहते हो? पहले उसने पूछा था, "तुम्हारी पढ़ाई कैसी चल रही है?" कर चुकी होऊँगी।" सारा काम-काज अलग।" चल रहा है। भविष्य उज्जवल नज़र आए तो इतनी परेशानी नहीं होती। हाथी निकल गया अब तो पूँछ ही रह गई है।" ठीक रहेगा। मुझे अपने परमात्मा में पूरा विश्वास है।" मगर सुबह तीन बजे ही उठ बैठा वह। गीता पहले से ही जाग रही थी। अपने करीब खींच लेगा, पिछली बार की तरह। फिर शुरू होंगी बातें। स्पर्श वह अपने शरीर के अंग-अंग पर महसूस कर सकती हो। क्रिस खड़ा हो गया। "क्या वह बाथरूम की तरफ़ जा रहा है?" "या बच्चों के बैड़रूम की तरफ़?" उठा कर, इधर-उधर रख रहा है। कृष्ण ने पलट के देखा तो बोली, "क्या नींद नहीं आ रही?" "मैं ठीक हूँ।" उसने एक पुराना-सा बक्सा उठाते हुए कहा। चूमा और न छूआ ही। "बहुत जल्दी जाग गए।" "कुछ परेशानी है?" वह कुछ रुकते हुए बोला, "मैं विवाहित नहीं रहना चाहता।" |
Saraikela : सरायकेला के टाउन हॉल में आदिवासी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सरकार के आदिवासी कल्याण सह परिवहन मंत्री चंपाई सोरेन ने आदिवासियों के बीच केसीसी कार्ड व परिसंपत्ति का वितरण किया. इसके बाद मंत्री सोरेन ने कहा कि आदिवासियों ने कभी किसी से समझौता नहीं किया है. आदिवासी समाज खेती व पशुधन को अपनी आजिविका बनाते हैं. पशु धन से कृषि कार्य में सहायता मिलती है. अन्य पशु पालन से आजिविका में सहयोग मिलता है. राज्य के युवा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में आदिवासी दिवस पर कृषि उपकरण के साथ-साथ पशु पालन, कुक्कुट पालन, बतख चुजा, खेती हेतु केसीसी ऋण का वितरण किया जा रहा है.
डीसी अरवा राजकमल ने कहा कि जिला में 77000 किसान हैं, जिसमें से 69000 किसानों को केसीसी कार्ड का लाभ दिया गया है. बाकि बचे 8000 किसानों को भी केसीसी कार्ड योजना से जोड़ना है. कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी विजय कुमार कुजुर ने अतिथियों का स्वागत किया. कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. मौके पर डीडीसी प्रवीण कुमार, एडीसी सुबोध कुमार, आईटीडीए निदेशक संदीप कुमार दोराईबुरू, एसडीओ रामकृष्ण कुमार, परियोजना उपनिदेशक विजय कुमार, झामुमो प्रखंड अध्यक्ष सोनाराम बोदरा के अलावे कई लोग मौजूद थे.
| Saraikela : सरायकेला के टाउन हॉल में आदिवासी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सरकार के आदिवासी कल्याण सह परिवहन मंत्री चंपाई सोरेन ने आदिवासियों के बीच केसीसी कार्ड व परिसंपत्ति का वितरण किया. इसके बाद मंत्री सोरेन ने कहा कि आदिवासियों ने कभी किसी से समझौता नहीं किया है. आदिवासी समाज खेती व पशुधन को अपनी आजिविका बनाते हैं. पशु धन से कृषि कार्य में सहायता मिलती है. अन्य पशु पालन से आजिविका में सहयोग मिलता है. राज्य के युवा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में आदिवासी दिवस पर कृषि उपकरण के साथ-साथ पशु पालन, कुक्कुट पालन, बतख चुजा, खेती हेतु केसीसी ऋण का वितरण किया जा रहा है. डीसी अरवा राजकमल ने कहा कि जिला में सतहत्तर हज़ार किसान हैं, जिसमें से उनहत्तर हज़ार किसानों को केसीसी कार्ड का लाभ दिया गया है. बाकि बचे आठ हज़ार किसानों को भी केसीसी कार्ड योजना से जोड़ना है. कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी विजय कुमार कुजुर ने अतिथियों का स्वागत किया. कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया. मौके पर डीडीसी प्रवीण कुमार, एडीसी सुबोध कुमार, आईटीडीए निदेशक संदीप कुमार दोराईबुरू, एसडीओ रामकृष्ण कुमार, परियोजना उपनिदेशक विजय कुमार, झामुमो प्रखंड अध्यक्ष सोनाराम बोदरा के अलावे कई लोग मौजूद थे. |
बिग बॉस 15 (Bigg Boss 15) के घर में अब बॉटम 6 के घर से बाहर होने का सिलसिला शुरू हो गया है. इस प्रक्रिया में मीडिया द्वारा चुने गए टॉप 5 कंटेस्टेंट्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
कलर्स टीवी (Colors Tv) का पॉपुलर रियलिटी शो बिग बॉस 15 (Bigg Boss 15) अब एक दिलचस्प मोड़ पर आ गया है. एक तरफ जहा जल्द ही बतौर वाइल्ड कार्ड रश्मि देसाई (Rashmi Desai), देवोलीना भट्टाचार्जी (Devoleena Bhattacharjee) और अभिजीत बिचुकले (Abhijeet Bichukale) की बिग बॉस के घर में एंट्री होना लगभग तय हो गया है, वहीं दूसरी तरफ इस घर में मीडिया ने तय किए हुए बॉटम 6 कंटेस्टेंट्स में से एक कंटेस्टेंट घर से बाहर हो गया है. जी हां, शक्ति एक अस्तित्व के एहसास की फेम एक्टर सिंबा नागपाल (Simba Nagpal) बिग बॉस के घर से बाहर हो गए हैं.
बिग बॉस द्वारा यह घोषित किया गया कि बॉटम 6 कंटेस्टेंट्स में से कोई एक कंटेस्टेंट्स बाहर होने वाला है. इससे पहले सभी घरवालों को एक टास्क दिया गया. इस टास्क में टॉप 5 सदस्य को उनके कनेक्शन का बचाव करने का मौका दिया गया. सिंबा नागपाल, जय भानुशाली, नेहा भसीन, उमर रियाज, विशाल कोटियन और नेहा भसीन बॉटम 6 में आए थे. घर के टॉप 5 कंटेस्टेंट्स ने अपने पसंदीदा 5 घरवालों का साथ दिया लेकिन सिंबा के बचाव में कोई भी घरवाले आगे नहीं आया.
जय भानुशाली को निशांत भट ने बचाया तो शमिता शेट्टी ने अपनी दोस्त सिंगर नेहा भसीन को बचाया. प्रतीक सहजपाल ने अपने दोस्त राजीव को बचाया. तेजस्वी ने विशाल कोटियन का साथ दिया तो करण कुंद्रा उमर रियाज के बचाव में आगे आए. हालांकि इस दौरान सिंबा नागपाल के सपोर्ट में कोई भी आगे नहीं आया. और इसलिए सिंबा घर से बाहर हो गए. 'वीकेंड का वार' में कुछ हफ्ते पहले, सलमान खान ने शो में सिम्बा को शांत रहने और अच्छा खेलने के लिए अप्रिशिएट किया था.
सलमान (Salman Khan) ने कहा था कि सिंबा बाकियों की तरह हायपर नहीं है. फिर भी उन्होंने दिल जीतकर एक मिसाल कायम की है. सलमान खान इशारे मे यह भी बोले कि "सिंबा के दूसरे लोगों की तरह बिग बॉस 15 में दुश्मन नहीं हैं और वह घर में स्ट्रॉन्ग रिलेशन बनाने में भी कामयाब रहे हैं". हालांकि सिंबा ने बनाए हुए यह दोस्त आज उनकी मदद के लिए आगे नहीं आए और इसलिए उन्हें शो से बाहर जाना पड़ा. इससे पहले भी सिंबा एम टीवी के रियलिटी शो 'स्प्लिट्सविला' में नजर आए थे.
| बिग बॉस पंद्रह के घर में अब बॉटम छः के घर से बाहर होने का सिलसिला शुरू हो गया है. इस प्रक्रिया में मीडिया द्वारा चुने गए टॉप पाँच कंटेस्टेंट्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. कलर्स टीवी का पॉपुलर रियलिटी शो बिग बॉस पंद्रह अब एक दिलचस्प मोड़ पर आ गया है. एक तरफ जहा जल्द ही बतौर वाइल्ड कार्ड रश्मि देसाई , देवोलीना भट्टाचार्जी और अभिजीत बिचुकले की बिग बॉस के घर में एंट्री होना लगभग तय हो गया है, वहीं दूसरी तरफ इस घर में मीडिया ने तय किए हुए बॉटम छः कंटेस्टेंट्स में से एक कंटेस्टेंट घर से बाहर हो गया है. जी हां, शक्ति एक अस्तित्व के एहसास की फेम एक्टर सिंबा नागपाल बिग बॉस के घर से बाहर हो गए हैं. बिग बॉस द्वारा यह घोषित किया गया कि बॉटम छः कंटेस्टेंट्स में से कोई एक कंटेस्टेंट्स बाहर होने वाला है. इससे पहले सभी घरवालों को एक टास्क दिया गया. इस टास्क में टॉप पाँच सदस्य को उनके कनेक्शन का बचाव करने का मौका दिया गया. सिंबा नागपाल, जय भानुशाली, नेहा भसीन, उमर रियाज, विशाल कोटियन और नेहा भसीन बॉटम छः में आए थे. घर के टॉप पाँच कंटेस्टेंट्स ने अपने पसंदीदा पाँच घरवालों का साथ दिया लेकिन सिंबा के बचाव में कोई भी घरवाले आगे नहीं आया. जय भानुशाली को निशांत भट ने बचाया तो शमिता शेट्टी ने अपनी दोस्त सिंगर नेहा भसीन को बचाया. प्रतीक सहजपाल ने अपने दोस्त राजीव को बचाया. तेजस्वी ने विशाल कोटियन का साथ दिया तो करण कुंद्रा उमर रियाज के बचाव में आगे आए. हालांकि इस दौरान सिंबा नागपाल के सपोर्ट में कोई भी आगे नहीं आया. और इसलिए सिंबा घर से बाहर हो गए. 'वीकेंड का वार' में कुछ हफ्ते पहले, सलमान खान ने शो में सिम्बा को शांत रहने और अच्छा खेलने के लिए अप्रिशिएट किया था. सलमान ने कहा था कि सिंबा बाकियों की तरह हायपर नहीं है. फिर भी उन्होंने दिल जीतकर एक मिसाल कायम की है. सलमान खान इशारे मे यह भी बोले कि "सिंबा के दूसरे लोगों की तरह बिग बॉस पंद्रह में दुश्मन नहीं हैं और वह घर में स्ट्रॉन्ग रिलेशन बनाने में भी कामयाब रहे हैं". हालांकि सिंबा ने बनाए हुए यह दोस्त आज उनकी मदद के लिए आगे नहीं आए और इसलिए उन्हें शो से बाहर जाना पड़ा. इससे पहले भी सिंबा एम टीवी के रियलिटी शो 'स्प्लिट्सविला' में नजर आए थे. |
रोमन दीवार (इग्ड में ) तर, जो उस समय मे विलुप्त रोमा साम्रा मा एवं मार प्राचीर घा वाम दे रहा था । रोम से आत्मा होते हुए उत्तर-पश्चिम तर सारी सुविधा मरे, राई धे बाँये तट पर सनिव सीमा स्थापित करने और दक्षिणी ब्रिटेन यो अपर राज्य में मिलाार, रोमनो ने यूरोप घे आल्प्स ये पार ये देगा यो अपने साम्राज्य में मिला लिया था। यद्यपि यह साम्राज्य इस विषय भाग पो छोड पर विशेष मध्य सागर मे क्षेत्र में ही थी। इस प्रकार लोथेयर वे पहले हो लोयरिंजिया पो सीमा राम शाम्राज्य में रागटन में सम्मिलित हो गयी थी और उसके पश्चात् पश्चिमी समाज में विन्दु रोमन साम्राम में और बाद में पश्चिमी समाज में इस क्षेत्र के पाय भिन्न भिन्न थे। रामन साम्राज्य में यह सीमा मात्र था । पश्चिमी समाज में यह दोना ओर विस्तार यो रेपा थी । सन् ३७१-६७५ मे गुगुप्त माल में जब रामन साम्राज्य छिन भिन्न हो गया और अव्यवस्थित दना से पश्चिमी यूरोप का नमन विभाग हुआ, पुराने समाज का ही एवं अनिल वर उसो मानव था नय समाज मे रूप में निर्माण हुआ। ७७५ वप वे पहले वे पश्चिमी समाज वे जीवन या इतिहास विलाम ढंग से देखन से स्पष्ट है कि वह जीवन पश्चिमी समाज वा नही अपितु रोमन साम्राज्य में जिस प्रकार का समाज था, उसका था । हम यह भी प्रमाणित कर सकते है कि पश्चिमी समाज व इतिहास का कोई तत्त्व यदि पहले के समाज में था तो उसका वृत्य दोना समाजा में अलग-अलग था।
लोथेयर वाला भाग पश्चिमी समाज का आधार था क्यावि ईसाई धर्म के अनुयायी रामन सीमा की ओर बढ़े चले आ रह थे और उनको इसी सीमा पर बबर जातिया से मुठभेड हुई जो अवातर भूमि से आ रहे थे । इस मिलन से नये समाज का जन्म हुआ । इसलिए पश्चिमी समाज का इतिहासकार यदि इस वाल से पूर्व समय तप का इस समाज के मूल का इतिहास ये खोजगा तो उसे ईसाई धर्म और बबरा के इतिहास का अध्ययन करना होगा। और वह इस इतिहास की शृखला २०० ई० पू० तक जो सामाजिक आर्थिक तथा राजनीतिक परिवर्तन होते रहे उनमें पायेगा । जिस काल में निबल के युद्धा के आघात से ग्रीव रोमन समाज नष्ट हो गया, रोम ने उत्तर-पश्चिम को अपनी लम्बी भुजा क्यो पलायो और आल्प्स के आगे वे यूरोपवा भाग अपन साम्राज्य में क्यो मिलाया ? क्याकि उसी ओर उसे वारथेज वालो से जीवन-मरण वा युद्ध करना पड़ा । आल्प्स पार करने के पश्चात् वह राइन पर ही क्या रक गया ? क्योकि आगस्टीन के काल में दो शतियों के थका देने वाले युद्ध तथा ऋातिया के कारण उसकी जीवनी शक्ति समाप्त हो गयी थी। अत में बबर क्या विजयी हुए ? क्याकि जब ऊंची और कम साधना वाला में सघप होता है और कोई एक दूसरे की सीमा पर पूर्ण विजय नहीं प्राप्त कर पाता तब ऐसा नहीं होता कि दोना की सभ्यता का बराबर अश समाज में आये । बल्कि समय के साथ साथ पिछडी सभ्यता की ओर समाज झुक जाता है । जब बबरा ने सीमा तोडी तो धार्मिक समुदाय से उनका सामना क्या हुआ ? इसका मुख्य कारण यह था हैनिबली युद्ध के परिणामस्वरूप जो आर्थिक और सामाजिक शान्तिया हुई और पश्चिम के क्षेत्र उजाड हो गये उन पर काय करने के लिए पूरव से दासा का समूह लाया गया । इस प्रकार जवरदस्ती जो मजदूर आये उसके कारण तिपूण पूर्वी धर्मों का प्रवेश ग्रीक रोमन समाज में हुआ । इन धर्मों में परलोक में मुक्ति की जो भावना थी उसके कारण उन प्रबल अल्प संख्या की आत्मा की ऊसर भूमि में उसे बीज बोने का अच्छा अवसर मिला जो ग्रीक रोमन समाज के कल्याण की रक्षा इस लोक में नही पा सको।
ग्रोव-रोमन इतिहास के विद्यार्थी के लिए, ईसाई तथा बबर दोना विदेशी तत्त्व जान पडेगे । उहें वह ग्रीक रोमन अथवा और अच्छे शब्द मे 'हेलेनी' समाज की जतिम अवस्था का देशी तथा विदेशी सवहारा' कह सकते हैं । वह विद्यार्थी कहेगा कि हेलेनी संस्कृति के जो महान मुखिया थे, महा तक कि मारक्स आरीलियस ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। वह यही बतायेगा कि ईसाई धर्मावलम्बी और चवर योद्धा दोना ही विवृत मन स्थिति वाले थे और हेलेनी समाज में उनका प्रवेग उसी समय हुआ जब यह समाज हैनिबली युद्ध के कारण जजर हो गया था ।
इस खोज से पश्चिमी समाज के पूर्व काल के सम्बंध में हम एक निश्चित निष्क्प पर पहुँचे है । यद्यपि इस समाज का जीवन वाल इसी समाज के जय राष्ट्रा से अधिक था, फिर भी उतना अधिक नहीं था जितना उतन ही काल में उस समाज के और उपवर्गों वा था। इस समाज के उदभव के इतिहास का अध्ययन करते समय हमें एक दूसरे समाज की अतिम अवस्था का पता चलता है । इस दूसरे समाज का आरम्भ स्पष्टत और भी पहले था । यह जो कहा जाता है कि इतिहास का सूत्र अविच्छित होता है, वह व्यक्ति के जीवन के समान अविच्छिन नहीं होता । यह सून अनेक पीढिया के जीवन से बना होता है। यह उसी प्रकार का कहा जा सकता है जैसी अविच्छिनता पिता और पुत्र की होती है ।
इस अध्याय में जा तक उपस्थित किये गये ह यदि वे माय है तो यह मानना होगा कि ऐतिहासिक अध्ययन की सुबोध इकाई राष्ट्र राज्य अथवा मानव जाति नहीं हो सकती, अपितु मानव जाति का वह समूह हो सकता है जिसे हम समाज कहते है । आज ऐसे पाच समाजो का पता है और कुछ समाजा का भी जो निर्जीव और समाप्त हो गये ह । इनमें से एक समाज का अर्थात अपने (पश्चिम यूरोप) समाज के मूल की खोज में हमें ऐसे महत्त्वपूर्ण समाज की मत्यु का भी पता चला है जिसका हमारा समाज स तानस्वरूप है। जिससे हमारा पैतृक सम्बन्ध है । दूसरे अध्याय मे हम ऐसे कुछ समाजा की सूची उपस्थित करने की चेष्टा करेगे जो इस धरती पर रही है और उनका परस्पर क्या सम्बध है ।
१ सवहारा शब्द यहाँ और जागे भी उस समाज या समूह के लिए प्रयोग किया गया है जो किसी समाज के इतिहास के किसी वाल में समाज के अंदर है, वितु उस समाज का नहीं है । -लेखक ।
२ सभ्यताओ का तुलनात्मक अध्ययन
हमने अभी देखा है कि पश्चिमी समाज (यूरोप पा) अथवा सभ्यता पूववर्ती सभ्यता से सम्बंधित है। इसी प्रकार आगे अनुसन्धान परन ये लिए यह देखना होगा कि एक ही जाति ( स्पीसीज ) जो समाज में है अर्थात् पूर्वी ईसाई समाज (आरथोडायस त्रिश्चियन), त्रिश्चियन), इस्लामी समाज, हिंदू समाज और सुदूर पूर्वी समाज ( फार ईस्टन), उनपे भो भोई पूवजह गया ? किन्तु इसके पहले कि हम उनकी खोज करें हमारे मन में स्पष्ट होना चाहिए कि हम क्या घोज रहे ह । अर्थात वे कौन चिह्न ह जिहें हम इस पतृव सम्बन्ध का उचित प्रमाण मान सकते हैं । इस प्रकार के सम्बन्ध का कौन सवेत हमें अपने पश्चिमी समाज तथा हेलेनी समाज का मिला है ?
पहली बात तो यह मिलती है कि रोमन साम्राज्य का एव सावभौम राज्य था जिसमें हेलेनी इतिहास की अतिम अवस्था में सारा हेलनी समाज एक राजनीतिक समुदाय था। यह बात महत्त्व की है क्योकि रोमन साम्राज्य के पहले हेलेनी समाज अनेक छोटे राज्य में विभक्त या और उसके बाद आज भी पश्चिमी समाज अनेक राज्या में विभाजित है। हमने यह भी देखा कि रोमन साम्राज्य स्थापित होने के ठीक पहले 'उपद्रव वा वाल' था जो हैनिवलीय भुद्ध से आरम्भ हुआ । इस समय हेलेनी समाज में सजनात्मक शक्ति नहीं रह गयी थी बल्वि वह पतनो मुख था । इस ह्रास को रोमन साम्राज्य ने कुछ समय तक तो रोवा, किन्तु अन्त में यह असाध्य रोग निक्ला । इसने हेलेनी समाज और साथ ही रोमन साम्राज्य को भी नष्ट कर दिया । रोमन साम्राज्य के विनाश के बाद हेलेनी समाज के लोप हो जाने और पश्चिमी समाज के प्रक्ट होने के बीच एक मध्यवर्ती काल था ।
इस मध्यवर्ती काल में दो सस्थाएँ बहुत त्रियाशील थी । एक तो ईसाई धम जो रोमन साम्राज्य में स्थापित हुआ था और अब तक बच गया था और दूसरे वे छोटे छोटे तथा सामयिक राज्य जो रोमन साम्राज्य में से उन बबर जातियो ने बना लिये थे जो साम्राज्य की सीमा के बाहर से जन रेला में आयी थी । इन दोनो शक्तिया को हमने हैल्नी समाज के दो स्वरूप बताये ह । यह है आन्तरिक सवहारा वग और बाह्य सवहारा वग। इन दोना वर्गों म भेद तो अनेक थे, किन्तु एक बात में ये समान थे । हेलेनी समाज के प्रमुख अल्पसंख्यक वग के दोनो विरोधी थे । यह अल्पसंख्यक वग प्रमुख था, किन्तु इसमें नेतत्व की शक्ति नहीं रह गयी थी । साम्राज्य तो नष्ट हो गया परन्तु ईसाई समुदाय बच गया क्याकि इस समुदाय ने नेतत्व ग्रहण किया और लोग इसके भक्त भी थे । साम्राज्य दो में से एक भी न स्थापित कर सका । ईसाई समुदाय मरते समाज का अवशेष था इसी ने नये समाज का जम दिया ।
इस बीच वे काल की जो दूसरी विशेषता थी, जनरेला उसका क्या प्रभाव हमारे समाज इस जनरेला में पुराने समाज की सीमा के बाहर से सबहारा दल झुड वा झुड आया । उत्तरी यूरोप के जगलो से जरमन और स्लाव आये, यूरेशियाई स्टेप से सरमाशियन और हूण
आये, अरब से मुसलमान (सारासिक ) आये और एटल्स तथा सहारा प्रदेश से बबर आये । इन जातियों के उत्तराधिकारियो द्वारा जो अल्पकालिक राज्य स्थापित हुए उनका ईसाइयों के साथ बीच के काल में जिसे 'वीर काल' भी कहते हैं, ऐतिहासिक रगमच पर अभिनय होता रहा । ईसाइयो की तुलना में इनकी देन नगण्य और शूय थी। बीच वे काल की समाप्ति के पहले ही घल्पूवर सब नष्ट कर दिये गये । रोमन साम्राज्य पर जो हमले हुए उन्ही के द्वारा बडाल और आस्ट्रोगथ पराजित हो गये । साम्राज्य की अन्तिम विलमिलाती लो इन्हें राख कर देने के लिए पर्याप्त थी । दूसरे आपसी लडाइया से नष्ट हो गये । उदाहरण के लिए, विसिगोथा पर पहले फावो ने आक्रमण किया और अन्त में अरबा ने उन्हें समाप्त कर दिया । इन लडाकू जातियो में से जो बचे-खुचे रह गये थे उनका पतन होना गया और वे कुछ दिनो तक अवमण्य रूप से जीवित रही और अंत में नयी राजनीतिक शक्तिया द्वारा, जिनमें रचनात्मक बल था, इनवा विनाश हो गया । इस प्रकार मेरोविजियन तथा लोम्वाड वश शालमान के साम्राज्य के निमाताओ द्वारा समाप्त कर दिये गये । रोमन साम्राज्य के इन बबर उत्तराधिकारी राज्यो म दो हो ऐसे वच गये है जिनका वतमान यूरोप के राष्ट्रीय राज्यों से कुछ सम्बन्ध स्थापित किया जा सकता है । एक शालमान का 'फ्राक्शि आस्ट्रेशिया' और दूसरा आल्फ्रेड का बसेक्स' ।
इस प्रकार हम देखते ह कि जनरेता और उसके अल्पकालिक राज्य ईमाई सम्प्रदाय और रोमन साम्राज्य के समान पश्चिमी समाज के हेलेनी समाज के सम्बंध के चिह्न मात्र है । साम्राज्य के समान और ईसाई सम्प्रदाय से भिन वह केवल प्रतीक ही है और कुछ नही । लक्षणो का अध्ययन छोड़ कर जब हम कारणा का अध्ययन करते हैं तब हमको मालूम होता है कि ईसाई सम्प्रदाय है भूतकाल में था और भविष्य में भी उसको सम्भावना थी । परन्तु बबर उत्तराधिकारी राज्य तथा रोमन साम्राज्य भूतकाल के ही धरोहर थे । उनका उत्पप साम्राज्य के पतन का एक पहलू था और साम्राज्य का पतन उनके पतन का पूर्वाभास था ।
हमारे पश्चिमी समाज को बबरो की देन इतनी महत्त्वहीन जानवर कुछ पश्चिमी इतिहासकारा (जसे कीमैन) को ठेस लगी होगी । वह समझते थे कि उत्तरदायी ससदीय शासन उनके एक प्रकार के स्वायत शासन (सेल्फ गवनमेंट) का विकास था जो ट्यूटानिक क्वीले अवातर प्रदेश से अपने साथ लाये थे । विन्तु ये आदिम ट्यूटानिक सस्थाएँ यदि सचमुच रही हो तो आदिम मनुष्यों के आचार के समान सब जगह और सब समय नितान्त प्रारम्भिक रहो हागी और वह जनरैला के साथ ही समाप्त हो गयी होगी। बबर जत्यो के नेता साहमी योद्धा मात्र थे और इनके उत्तराधिकारी राज्य उस समय के रोमन राज्य के समान निरखुश थे जिनमें बीच-बीच मे पातियाँ होती रहती थी । आज जिसे हम ससदीय संस्थाएँ कहते हु उस नयी करपना के शर्तिया पहले बबरा वा अन्तिम राज्य समाप्त हो चुका था ।
पश्चिमी समाज के जीवन में बबरा को देन का बखान जो आज बढा चडावर किया जाता है उसका कारण एक और मिथ्या धारणा है कि सामाजिक उनति में जातिया के कुछ जमजात गुण सन्निहित होते ह । भौतिक विज्ञान द्वारा जो घटना घटती है उसी के मिथ्या साम्य के आधार पर पिछली पीढी के इतिहासकार जातियों को रासायनिक 'तत्त्व समझने लगे और जाति मिश्रण
रासायनिक प्रतिक्रिया, जिससे गुप्त शक्तियाँ प्रक्ट होती है और जिसके कारण अचलता और निश्चेष्टता के स्था पर परिवतन और स्फूर्ति उत्पन्न होती है । इतिहासकारो ने श्रमवा यह
मान लिया है कि बवरा वे मिलने से जो जातीय प्रभाव पड़ा, जिसे ये नये रक्ताचार बहते थे, उसी के परिणामस्वरूप इतिहास में हम पश्चिमी सामाजिन जीवन और विकास पाते हैं । यह सक्त किया गया कि बबर विजेताओ वा खा विशुद्ध था उसमें शशि थी और इसके कारण उनके तथाकथित वश उन्नतिशील हुए t
सच बात यह है कि बवर लोग हमारी आत्मिय उसति ये सण नहीं थे । असल में ये हैलेनी समाज के मरणकाल में आये । वितु इस समाज के नाम का श्रम उहँ नही है । जिस समय ये आये हेलेनी समाज गतिया पहल से अपने ही किये धावा से भरणामन था। चोरवाल हेलेनी इतिहास का उपसहार था, हमारे इतिहास की भूमिया नहीं ।
पुराने समाज से नये समाज के परिवतन वे तोन वारण है। पुराने समाज का अन्तिम रूप अर्थात सावभौम राज्य, पुराने समाज में विवसित ईसाई धार्मिक समुदाय जिसब द्वारा नये समाज वा जम हुआ, और बबर वीरवाल की अव्यवस्था । इनमें दूसरा सबसे अधिक और तीसरा सबसे कम महत्त्व का है ।
दूसरे नवजात समाजो की खोज के पहले हमें हेलेनी तथा पश्चिमी समाज द्वारा उत्पन्न समाज वे एक लक्षण को ओर ध्यान देना चाहिए । वह यह है कि नये समाज का जमस्थान वही नही रह गया जो उसके पूववर्ती समाज वा था । न यह समाज का केंद्र बना जो पुराने समाज की सीमा थी ।
इस समाज की उत्पत्ति के अध्ययन से किसी नये वग का पता नही चलेगा क्यापि यह और हमारा पश्चिमी समाज हेलेनी समाज के जुड़वाँ बच्चे ह । मेवल उत्तर पश्चिम जाने के बजाय वे यह उत्तर-पूरव की ओर गये । इनका मूल स्थान बैजन्तिया में अनेतोलिया था । गतिया तक् यह इस्लामो समाज के विस्तार के कारण दबा हुआ था । अन्त में इसे रूस तथा साइवीरिया में से उत्तर तथा पूरव में बनने का अवसर मिला। इस्लामी जगत् को पीछे छोडते यह सुदूर पूर्व की ओर बढ़ गया । पश्चिमी और परम्परावादी ईसाई समाज दो बसे हो गये ? इसवा कारण यह है कि एक ही मूल क्यालिक घमतत्र (चच ) से दा गाखाएँ उत्पन्न हुई । रोमन क्यालिक धमतत्र (रोमन कैथोलिक चच) और परम्परावादी धमतत्र ( आरथोडाक्स चच ) दाना के अलग-अलग स्वरूप होने में तीन गतियाँ लगी। आठवी गती के मूर्तिपूजा विरोधी मतभेद -से आरम्भ होकर सन् १०५४ में धार्मिक विवाद पर यह भेद पूर्ण रूप से स्थापित हो गया । इसी बीच दोना सम्प्रदाया की राजनीतिक धारणाएँ भी भिन हो गया। पश्चिम वे क्यालिक सम्प्रदाय ने माध्यमिक युग के पोप के शासन में स्वतन्त्र सत्ता प्राप्त कर ली और परम्परावादी सम्प्रदाय बजन्तिया राज्य वा छोटा विभाग मात्र बन गया ।
ईरानी और अरबी समाज तथा सोरियाई समाज
जिम दूमर मजीवन समाज को हमें देखना है वह है इस्लामी समाज । जब हम इस्लामी समाज के विकास की पृष्ठभूमि की छानबीन करते है तब हमें पता लगता है कि वहाँ सावदेशिक धार्मिक समाज था । वहाँ भी जनरेला था यद्यपि वह पश्चिमी और परम्परावादी ईसाई समाज वाला न था किन्तु उससे मिलना-जुना था । इस्लामी सावभौम राज्य वगलाद की अब्बासी
खिलाफत (वैलिफेट) वा था । सारा मुसलिम समाज ही इस्लाम है। जो जनरेला खिलाफ्त के पतन के समय आया और उसन खलीफा के राज्य का तहस-नहस कर दिया। वह यूरेशिया वे स्टेप वे सुर्वी और मगोल खानाबदोशा का, उत्तरी अफ्रीका के बबर खानाबदोशा का तथा अरव प्रायद्वीप के खानाबदोशो वा था । इरा खानाबदोशों का प्रभाव लगभग तीन सौ साल तक अर्थात् सन् ९७५ ई० से १२७५ ई० रहा । आज जिस रूप में इस्लामी समाज है उसका आरम्भ इसी अतिम तिथि से समझना चाहिए ।
यहाँ तक तो सब स्पष्ट है। किन्तु और खाज करने मे परिस्थिति जटिल हो जाती है। पहली बात यह है कि इस्लामी समाज के पूर्वज (जिसका अभी पता नही है) एक सन्तान वे नहीं, बटिव दी जुड़वा सन्ताना के जनक थे और इस रूप में वे बिलकुल हेलेनी समाज के समान थे । इन जुड़वाँ सन्ताना वा आचरण समान नही था । पश्चिमी समाज और परम्परावादी ईसाई समाज हजार वर्ष से ऊपर साथ साथ रहे । जनव समाज की एक सन्तान जिसका पता लगाने की हम चेप्टा कर रहे ह दूसरी सतान का निगल गयी और उसने उसे अपने में मिला लिया। इस दोना मुसलिम समाजा को हम ईरानी और अरबी के नाम से पुकारेंगे ।
जिस प्रकार हेलेनी समाज की सालाना में धार्मिक अन्तर था उस प्रकार का जतर इस अनात इस्लामी समाज की दोना सताना में नहीं था । यद्यपि इस्लाम में भी शिया और सुनी दा फिरके हो गये थे, जसे इसाई समाज में वथोलिक और परम्परावादी ईमाई समाज हो गया था, किन्तु यह धार्मिक अन्तर अभी इरानी इस्लामी और अरबी इस्लामी समाज के अन्तर के रूप में नही था । यद्यपि सत्रहवी शती के पहले चतुग्रास में जब फारस में शिया सम्प्रदाय का बाहुल्य हुआ तब ईरानी इस्लामी समाज छिन भिन होने लगा । और शिया सम्प्रदाय ईरानी इस्लामी समाज की मुख्य धुरी वा (जो अफगानिस्तान से अनातोलिया तक फैली हुई है) बद्र बन गया और सुनी सम्प्रदाय ईरानी जगत की दोना सीमाओं पर तथा दक्षिण और पश्चिम में अरबी प्रदेशों में रह गया ।
जब हम इस्लाम के दोनो समाजा और ईसाई धम के दोना समाजा की तुलना करते हैं तब हम देखते ह कि ईरानी प्रदेश (जिसे हम फारसी-तुर्वी भी वह सकते ह) और पश्चिमी समाज में कुछ समानता है । और अरवी प्रदेश के इस्लामी और परम्परावादा ईसाई समाज में कुछ समानता है । उदाहरण के लिए, बगदाद की खिलाफ्त की छाया, जिसे तेरहवी शता दी में, जब वों के ममकाने बगदाद के खलीपा के भूत को फिर से सजीव वरने की चेष्टा की थी, उसी प्रकार था जसा आठवी शती में वस्तुनतुनिया में सीरिया के लियो ने रोमन साम्राज्य के भूत को सजीव करने की चेष्टा की थी। ममलूकों वा राजनीतिक संगठन लिया के सगठन के समान सरल था जो निक्ट के ही ईरानी प्रदेश की तुलना में स्थिर और प्रभावशाली था । पड़ोस के ईरानी प्रदेश वातमूर का साम्राज्य विस्तत और अस्पष्ट और अस्थिर था जो पश्चिम के शालमन के साम्राज्य की भांति था जो बनता और बिगडता रहा । अरब प्रदेश में उनकी संस्कृति का क्लासिकल भाषा
१ बाद के करो वे अग्यासी खोपे बगदाद के खलीफो के छाया मात्र थे । अर्थात् 'दुर्यो रोमन साम्राज्य' और 'पावन रोमन साम्राज्य की ही भाति थे। तोनो अवस्थाओं में ऐसा समाज बना जो पुराने समान को छाया मात्र रह गया ।
मान लिया है कि ववरा के मिलने से जो जातीय प्रभाव पड़ा, जिसे वे नये रक्त का संचार कहते थे, उसी के परिणामस्वरूप इतिहास में हम पश्चिमी सामाजिक जीवन और विकास पाते है । यह सवेत किया गया कि वबर विजेताओं का रक्त विशुद्ध था, उसमे शक्ति थी और इसके कारण उनके तथाकथित वश उन्नतिशील हुए 1
सच बात यह है कि बबर लोग हमारी आत्मिक उन्नति के स्रष्टा नही थे । जसल में वे हैलेनी समाज वे मरणकाल में आये। किन्तु इस समाज के नाश का श्रेय उन्हें नहीं है । जिस समय ये आये हेलेन समाज शतियो पहले के अपने ही किये घावो से मरणासन था। वीरवाल हेलेनी इतिहास का उपसहार था हमारे इतिहास की भूमिका नही ।
पुराने समाज से नये समाज के परिवर्तन के तीन कारण है। पुराने समाज का अंतिम स्प अर्थात् सावभौम राज्य पुराने समाज में विकसित ईसाई धार्मिक समुदाय जिसके द्वारा नये समाज का जम हुआ और बबर वीरवाल की अव्यवस्था। इनमें दूसरा सबसे अधिक और तीमरा सबसे कम महत्त्व का है ।
दूमर नवजात समाजा की खोज के पहले हमें हेलेनी तथा पश्चिमी समाज द्वारा उत्पन्न समाज मे एक लक्षण की आर ध्यान देना चाहिए । वह यह है कि नये समाज का जमस्थान वही नही रह गया जो उसके पूर्ववर्ती समाज का था । न यह समाज का केंद्र बना जो पुराने समाज की सोमा थी ।
इम समाज की उत्पत्ति के अध्ययन से किसी नये वग का पता नही चलेगा क्याकि यह और हमारा पश्चिमी समाज हेलेनी समाज के जुड़वाँ बच्चे ह । वेवल उत्तर-पश्चिम जाने के बजाय यह उत्तर-पूरव की ओर गये । इनका मूल स्थान बजन्तिया में अनेतोलिया था। तियो त यह इस्लामी समाज के विस्तार के कारण दवा हुआ था । अन्त में इसे रस तथा साइवोरिया में में उत्तर तथा पूरन में बढ़ने का अवसर मिला। इस्लामी जगत् को पीछे छोड़ते यह सुदूर पूर्व की ओर बढ़ गया। पश्चिमी और परम्परावादी ईमाई समाज दो वस हो गये ? इसका कारण यह है कि एक ही मूठ क्यालि धमतत्र (चच) से दा गाखाएँ उत्पन्न हुइ । रोमन क्यालिन धमतत्र (रामन स्थारिक चच) और परम्परा धमतत्र (आरथोडाक्म चच) दाना - स्वरूप हाने में तीन पनियाँ लगा । आठवा गती के मूर्तिपूजा विरोधो भतभेद --से जारम्भ होर गन् १०५४ में धामिक विवाद पर यह पूर्ण रूप से स्थापित हो गया। इसी बाचदाना को राजनीतिन धारणाएँ भी भिन्न हो गया। पश्चिम व क्यालिव सम्प्रदाय न माध्यम युग में सत्ता प्राप्त कर ली और परम्परावादी सम्प्रदाय बजलिया राज्य माछा विभाग मात्र बन गया ईरानी और अरनी समाज तथा सीरियाई समाज
जिस दूगर गजीवन समाज का हमें देखना है वह है समाज । जब हम इस्लामी गम के विरुवा पृष्ठभूमि शनवरत है तब हमें पता लगता है कि वहाँ गावदगिर मान पाव भी था पति व पश्चिमी और परम्परावा ईसाई समाज थाहा था। राज्य ग | रोमन दीवार तर, जो उस समय मे विलुप्त रोमा साम्रा मा एवं मार प्राचीर घा वाम दे रहा था । रोम से आत्मा होते हुए उत्तर-पश्चिम तर सारी सुविधा मरे, राई धे बाँये तट पर सनिव सीमा स्थापित करने और दक्षिणी ब्रिटेन यो अपर राज्य में मिलाार, रोमनो ने यूरोप घे आल्प्स ये पार ये देगा यो अपने साम्राज्य में मिला लिया था। यद्यपि यह साम्राज्य इस विषय भाग पो छोड पर विशेष मध्य सागर मे क्षेत्र में ही थी। इस प्रकार लोथेयर वे पहले हो लोयरिंजिया पो सीमा राम शाम्राज्य में रागटन में सम्मिलित हो गयी थी और उसके पश्चात् पश्चिमी समाज में विन्दु रोमन साम्राम में और बाद में पश्चिमी समाज में इस क्षेत्र के पाय भिन्न भिन्न थे। रामन साम्राज्य में यह सीमा मात्र था । पश्चिमी समाज में यह दोना ओर विस्तार यो रेपा थी । सन् तीन सौ इकहत्तर-छः सौ पचहत्तर मे गुगुप्त माल में जब रामन साम्राज्य छिन भिन्न हो गया और अव्यवस्थित दना से पश्चिमी यूरोप का नमन विभाग हुआ, पुराने समाज का ही एवं अनिल वर उसो मानव था नय समाज मे रूप में निर्माण हुआ। सात सौ पचहत्तर वप वे पहले वे पश्चिमी समाज वे जीवन या इतिहास विलाम ढंग से देखन से स्पष्ट है कि वह जीवन पश्चिमी समाज वा नही अपितु रोमन साम्राज्य में जिस प्रकार का समाज था, उसका था । हम यह भी प्रमाणित कर सकते है कि पश्चिमी समाज व इतिहास का कोई तत्त्व यदि पहले के समाज में था तो उसका वृत्य दोना समाजा में अलग-अलग था। लोथेयर वाला भाग पश्चिमी समाज का आधार था क्यावि ईसाई धर्म के अनुयायी रामन सीमा की ओर बढ़े चले आ रह थे और उनको इसी सीमा पर बबर जातिया से मुठभेड हुई जो अवातर भूमि से आ रहे थे । इस मिलन से नये समाज का जन्म हुआ । इसलिए पश्चिमी समाज का इतिहासकार यदि इस वाल से पूर्व समय तप का इस समाज के मूल का इतिहास ये खोजगा तो उसे ईसाई धर्म और बबरा के इतिहास का अध्ययन करना होगा। और वह इस इतिहास की शृखला दो सौ ईशून्य पूशून्य तक जो सामाजिक आर्थिक तथा राजनीतिक परिवर्तन होते रहे उनमें पायेगा । जिस काल में निबल के युद्धा के आघात से ग्रीव रोमन समाज नष्ट हो गया, रोम ने उत्तर-पश्चिम को अपनी लम्बी भुजा क्यो पलायो और आल्प्स के आगे वे यूरोपवा भाग अपन साम्राज्य में क्यो मिलाया ? क्याकि उसी ओर उसे वारथेज वालो से जीवन-मरण वा युद्ध करना पड़ा । आल्प्स पार करने के पश्चात् वह राइन पर ही क्या रक गया ? क्योकि आगस्टीन के काल में दो शतियों के थका देने वाले युद्ध तथा ऋातिया के कारण उसकी जीवनी शक्ति समाप्त हो गयी थी। अत में बबर क्या विजयी हुए ? क्याकि जब ऊंची और कम साधना वाला में सघप होता है और कोई एक दूसरे की सीमा पर पूर्ण विजय नहीं प्राप्त कर पाता तब ऐसा नहीं होता कि दोना की सभ्यता का बराबर अश समाज में आये । बल्कि समय के साथ साथ पिछडी सभ्यता की ओर समाज झुक जाता है । जब बबरा ने सीमा तोडी तो धार्मिक समुदाय से उनका सामना क्या हुआ ? इसका मुख्य कारण यह था हैनिबली युद्ध के परिणामस्वरूप जो आर्थिक और सामाजिक शान्तिया हुई और पश्चिम के क्षेत्र उजाड हो गये उन पर काय करने के लिए पूरव से दासा का समूह लाया गया । इस प्रकार जवरदस्ती जो मजदूर आये उसके कारण तिपूण पूर्वी धर्मों का प्रवेश ग्रीक रोमन समाज में हुआ । इन धर्मों में परलोक में मुक्ति की जो भावना थी उसके कारण उन प्रबल अल्प संख्या की आत्मा की ऊसर भूमि में उसे बीज बोने का अच्छा अवसर मिला जो ग्रीक रोमन समाज के कल्याण की रक्षा इस लोक में नही पा सको। ग्रोव-रोमन इतिहास के विद्यार्थी के लिए, ईसाई तथा बबर दोना विदेशी तत्त्व जान पडेगे । उहें वह ग्रीक रोमन अथवा और अच्छे शब्द मे 'हेलेनी' समाज की जतिम अवस्था का देशी तथा विदेशी सवहारा' कह सकते हैं । वह विद्यार्थी कहेगा कि हेलेनी संस्कृति के जो महान मुखिया थे, महा तक कि मारक्स आरीलियस ने भी इस पर ध्यान नहीं दिया। वह यही बतायेगा कि ईसाई धर्मावलम्बी और चवर योद्धा दोना ही विवृत मन स्थिति वाले थे और हेलेनी समाज में उनका प्रवेग उसी समय हुआ जब यह समाज हैनिबली युद्ध के कारण जजर हो गया था । इस खोज से पश्चिमी समाज के पूर्व काल के सम्बंध में हम एक निश्चित निष्क्प पर पहुँचे है । यद्यपि इस समाज का जीवन वाल इसी समाज के जय राष्ट्रा से अधिक था, फिर भी उतना अधिक नहीं था जितना उतन ही काल में उस समाज के और उपवर्गों वा था। इस समाज के उदभव के इतिहास का अध्ययन करते समय हमें एक दूसरे समाज की अतिम अवस्था का पता चलता है । इस दूसरे समाज का आरम्भ स्पष्टत और भी पहले था । यह जो कहा जाता है कि इतिहास का सूत्र अविच्छित होता है, वह व्यक्ति के जीवन के समान अविच्छिन नहीं होता । यह सून अनेक पीढिया के जीवन से बना होता है। यह उसी प्रकार का कहा जा सकता है जैसी अविच्छिनता पिता और पुत्र की होती है । इस अध्याय में जा तक उपस्थित किये गये ह यदि वे माय है तो यह मानना होगा कि ऐतिहासिक अध्ययन की सुबोध इकाई राष्ट्र राज्य अथवा मानव जाति नहीं हो सकती, अपितु मानव जाति का वह समूह हो सकता है जिसे हम समाज कहते है । आज ऐसे पाच समाजो का पता है और कुछ समाजा का भी जो निर्जीव और समाप्त हो गये ह । इनमें से एक समाज का अर्थात अपने समाज के मूल की खोज में हमें ऐसे महत्त्वपूर्ण समाज की मत्यु का भी पता चला है जिसका हमारा समाज स तानस्वरूप है। जिससे हमारा पैतृक सम्बन्ध है । दूसरे अध्याय मे हम ऐसे कुछ समाजा की सूची उपस्थित करने की चेष्टा करेगे जो इस धरती पर रही है और उनका परस्पर क्या सम्बध है । एक सवहारा शब्द यहाँ और जागे भी उस समाज या समूह के लिए प्रयोग किया गया है जो किसी समाज के इतिहास के किसी वाल में समाज के अंदर है, वितु उस समाज का नहीं है । -लेखक । दो सभ्यताओ का तुलनात्मक अध्ययन हमने अभी देखा है कि पश्चिमी समाज अथवा सभ्यता पूववर्ती सभ्यता से सम्बंधित है। इसी प्रकार आगे अनुसन्धान परन ये लिए यह देखना होगा कि एक ही जाति जो समाज में है अर्थात् पूर्वी ईसाई समाज , त्रिश्चियन), इस्लामी समाज, हिंदू समाज और सुदूर पूर्वी समाज , उनपे भो भोई पूवजह गया ? किन्तु इसके पहले कि हम उनकी खोज करें हमारे मन में स्पष्ट होना चाहिए कि हम क्या घोज रहे ह । अर्थात वे कौन चिह्न ह जिहें हम इस पतृव सम्बन्ध का उचित प्रमाण मान सकते हैं । इस प्रकार के सम्बन्ध का कौन सवेत हमें अपने पश्चिमी समाज तथा हेलेनी समाज का मिला है ? पहली बात तो यह मिलती है कि रोमन साम्राज्य का एव सावभौम राज्य था जिसमें हेलेनी इतिहास की अतिम अवस्था में सारा हेलनी समाज एक राजनीतिक समुदाय था। यह बात महत्त्व की है क्योकि रोमन साम्राज्य के पहले हेलेनी समाज अनेक छोटे राज्य में विभक्त या और उसके बाद आज भी पश्चिमी समाज अनेक राज्या में विभाजित है। हमने यह भी देखा कि रोमन साम्राज्य स्थापित होने के ठीक पहले 'उपद्रव वा वाल' था जो हैनिवलीय भुद्ध से आरम्भ हुआ । इस समय हेलेनी समाज में सजनात्मक शक्ति नहीं रह गयी थी बल्वि वह पतनो मुख था । इस ह्रास को रोमन साम्राज्य ने कुछ समय तक तो रोवा, किन्तु अन्त में यह असाध्य रोग निक्ला । इसने हेलेनी समाज और साथ ही रोमन साम्राज्य को भी नष्ट कर दिया । रोमन साम्राज्य के विनाश के बाद हेलेनी समाज के लोप हो जाने और पश्चिमी समाज के प्रक्ट होने के बीच एक मध्यवर्ती काल था । इस मध्यवर्ती काल में दो सस्थाएँ बहुत त्रियाशील थी । एक तो ईसाई धम जो रोमन साम्राज्य में स्थापित हुआ था और अब तक बच गया था और दूसरे वे छोटे छोटे तथा सामयिक राज्य जो रोमन साम्राज्य में से उन बबर जातियो ने बना लिये थे जो साम्राज्य की सीमा के बाहर से जन रेला में आयी थी । इन दोनो शक्तिया को हमने हैल्नी समाज के दो स्वरूप बताये ह । यह है आन्तरिक सवहारा वग और बाह्य सवहारा वग। इन दोना वर्गों म भेद तो अनेक थे, किन्तु एक बात में ये समान थे । हेलेनी समाज के प्रमुख अल्पसंख्यक वग के दोनो विरोधी थे । यह अल्पसंख्यक वग प्रमुख था, किन्तु इसमें नेतत्व की शक्ति नहीं रह गयी थी । साम्राज्य तो नष्ट हो गया परन्तु ईसाई समुदाय बच गया क्याकि इस समुदाय ने नेतत्व ग्रहण किया और लोग इसके भक्त भी थे । साम्राज्य दो में से एक भी न स्थापित कर सका । ईसाई समुदाय मरते समाज का अवशेष था इसी ने नये समाज का जम दिया । इस बीच वे काल की जो दूसरी विशेषता थी, जनरेला उसका क्या प्रभाव हमारे समाज इस जनरेला में पुराने समाज की सीमा के बाहर से सबहारा दल झुड वा झुड आया । उत्तरी यूरोप के जगलो से जरमन और स्लाव आये, यूरेशियाई स्टेप से सरमाशियन और हूण आये, अरब से मुसलमान आये और एटल्स तथा सहारा प्रदेश से बबर आये । इन जातियों के उत्तराधिकारियो द्वारा जो अल्पकालिक राज्य स्थापित हुए उनका ईसाइयों के साथ बीच के काल में जिसे 'वीर काल' भी कहते हैं, ऐतिहासिक रगमच पर अभिनय होता रहा । ईसाइयो की तुलना में इनकी देन नगण्य और शूय थी। बीच वे काल की समाप्ति के पहले ही घल्पूवर सब नष्ट कर दिये गये । रोमन साम्राज्य पर जो हमले हुए उन्ही के द्वारा बडाल और आस्ट्रोगथ पराजित हो गये । साम्राज्य की अन्तिम विलमिलाती लो इन्हें राख कर देने के लिए पर्याप्त थी । दूसरे आपसी लडाइया से नष्ट हो गये । उदाहरण के लिए, विसिगोथा पर पहले फावो ने आक्रमण किया और अन्त में अरबा ने उन्हें समाप्त कर दिया । इन लडाकू जातियो में से जो बचे-खुचे रह गये थे उनका पतन होना गया और वे कुछ दिनो तक अवमण्य रूप से जीवित रही और अंत में नयी राजनीतिक शक्तिया द्वारा, जिनमें रचनात्मक बल था, इनवा विनाश हो गया । इस प्रकार मेरोविजियन तथा लोम्वाड वश शालमान के साम्राज्य के निमाताओ द्वारा समाप्त कर दिये गये । रोमन साम्राज्य के इन बबर उत्तराधिकारी राज्यो म दो हो ऐसे वच गये है जिनका वतमान यूरोप के राष्ट्रीय राज्यों से कुछ सम्बन्ध स्थापित किया जा सकता है । एक शालमान का 'फ्राक्शि आस्ट्रेशिया' और दूसरा आल्फ्रेड का बसेक्स' । इस प्रकार हम देखते ह कि जनरेता और उसके अल्पकालिक राज्य ईमाई सम्प्रदाय और रोमन साम्राज्य के समान पश्चिमी समाज के हेलेनी समाज के सम्बंध के चिह्न मात्र है । साम्राज्य के समान और ईसाई सम्प्रदाय से भिन वह केवल प्रतीक ही है और कुछ नही । लक्षणो का अध्ययन छोड़ कर जब हम कारणा का अध्ययन करते हैं तब हमको मालूम होता है कि ईसाई सम्प्रदाय है भूतकाल में था और भविष्य में भी उसको सम्भावना थी । परन्तु बबर उत्तराधिकारी राज्य तथा रोमन साम्राज्य भूतकाल के ही धरोहर थे । उनका उत्पप साम्राज्य के पतन का एक पहलू था और साम्राज्य का पतन उनके पतन का पूर्वाभास था । हमारे पश्चिमी समाज को बबरो की देन इतनी महत्त्वहीन जानवर कुछ पश्चिमी इतिहासकारा को ठेस लगी होगी । वह समझते थे कि उत्तरदायी ससदीय शासन उनके एक प्रकार के स्वायत शासन का विकास था जो ट्यूटानिक क्वीले अवातर प्रदेश से अपने साथ लाये थे । विन्तु ये आदिम ट्यूटानिक सस्थाएँ यदि सचमुच रही हो तो आदिम मनुष्यों के आचार के समान सब जगह और सब समय नितान्त प्रारम्भिक रहो हागी और वह जनरैला के साथ ही समाप्त हो गयी होगी। बबर जत्यो के नेता साहमी योद्धा मात्र थे और इनके उत्तराधिकारी राज्य उस समय के रोमन राज्य के समान निरखुश थे जिनमें बीच-बीच मे पातियाँ होती रहती थी । आज जिसे हम ससदीय संस्थाएँ कहते हु उस नयी करपना के शर्तिया पहले बबरा वा अन्तिम राज्य समाप्त हो चुका था । पश्चिमी समाज के जीवन में बबरा को देन का बखान जो आज बढा चडावर किया जाता है उसका कारण एक और मिथ्या धारणा है कि सामाजिक उनति में जातिया के कुछ जमजात गुण सन्निहित होते ह । भौतिक विज्ञान द्वारा जो घटना घटती है उसी के मिथ्या साम्य के आधार पर पिछली पीढी के इतिहासकार जातियों को रासायनिक 'तत्त्व समझने लगे और जाति मिश्रण रासायनिक प्रतिक्रिया, जिससे गुप्त शक्तियाँ प्रक्ट होती है और जिसके कारण अचलता और निश्चेष्टता के स्था पर परिवतन और स्फूर्ति उत्पन्न होती है । इतिहासकारो ने श्रमवा यह मान लिया है कि बवरा वे मिलने से जो जातीय प्रभाव पड़ा, जिसे ये नये रक्ताचार बहते थे, उसी के परिणामस्वरूप इतिहास में हम पश्चिमी सामाजिन जीवन और विकास पाते हैं । यह सक्त किया गया कि बबर विजेताओ वा खा विशुद्ध था उसमें शशि थी और इसके कारण उनके तथाकथित वश उन्नतिशील हुए t सच बात यह है कि बवर लोग हमारी आत्मिय उसति ये सण नहीं थे । असल में ये हैलेनी समाज के मरणकाल में आये । वितु इस समाज के नाम का श्रम उहँ नही है । जिस समय ये आये हेलेनी समाज गतिया पहल से अपने ही किये धावा से भरणामन था। चोरवाल हेलेनी इतिहास का उपसहार था, हमारे इतिहास की भूमिया नहीं । पुराने समाज से नये समाज के परिवतन वे तोन वारण है। पुराने समाज का अन्तिम रूप अर्थात सावभौम राज्य, पुराने समाज में विवसित ईसाई धार्मिक समुदाय जिसब द्वारा नये समाज वा जम हुआ, और बबर वीरवाल की अव्यवस्था । इनमें दूसरा सबसे अधिक और तीसरा सबसे कम महत्त्व का है । दूसरे नवजात समाजो की खोज के पहले हमें हेलेनी तथा पश्चिमी समाज द्वारा उत्पन्न समाज वे एक लक्षण को ओर ध्यान देना चाहिए । वह यह है कि नये समाज का जमस्थान वही नही रह गया जो उसके पूववर्ती समाज वा था । न यह समाज का केंद्र बना जो पुराने समाज की सीमा थी । इस समाज की उत्पत्ति के अध्ययन से किसी नये वग का पता नही चलेगा क्यापि यह और हमारा पश्चिमी समाज हेलेनी समाज के जुड़वाँ बच्चे ह । मेवल उत्तर पश्चिम जाने के बजाय वे यह उत्तर-पूरव की ओर गये । इनका मूल स्थान बैजन्तिया में अनेतोलिया था । गतिया तक् यह इस्लामो समाज के विस्तार के कारण दबा हुआ था । अन्त में इसे रूस तथा साइवीरिया में से उत्तर तथा पूरव में बनने का अवसर मिला। इस्लामी जगत् को पीछे छोडते यह सुदूर पूर्व की ओर बढ़ गया । पश्चिमी और परम्परावादी ईसाई समाज दो बसे हो गये ? इसवा कारण यह है कि एक ही मूल क्यालिक घमतत्र से दा गाखाएँ उत्पन्न हुई । रोमन क्यालिक धमतत्र और परम्परावादी धमतत्र दाना के अलग-अलग स्वरूप होने में तीन गतियाँ लगी। आठवी गती के मूर्तिपूजा विरोधी मतभेद -से आरम्भ होकर सन् एक हज़ार चौवन में धार्मिक विवाद पर यह भेद पूर्ण रूप से स्थापित हो गया । इसी बीच दोना सम्प्रदाया की राजनीतिक धारणाएँ भी भिन हो गया। पश्चिम वे क्यालिक सम्प्रदाय ने माध्यमिक युग के पोप के शासन में स्वतन्त्र सत्ता प्राप्त कर ली और परम्परावादी सम्प्रदाय बजन्तिया राज्य वा छोटा विभाग मात्र बन गया । ईरानी और अरबी समाज तथा सोरियाई समाज जिम दूमर मजीवन समाज को हमें देखना है वह है इस्लामी समाज । जब हम इस्लामी समाज के विकास की पृष्ठभूमि की छानबीन करते है तब हमें पता लगता है कि वहाँ सावदेशिक धार्मिक समाज था । वहाँ भी जनरेला था यद्यपि वह पश्चिमी और परम्परावादी ईसाई समाज वाला न था किन्तु उससे मिलना-जुना था । इस्लामी सावभौम राज्य वगलाद की अब्बासी खिलाफत वा था । सारा मुसलिम समाज ही इस्लाम है। जो जनरेला खिलाफ्त के पतन के समय आया और उसन खलीफा के राज्य का तहस-नहस कर दिया। वह यूरेशिया वे स्टेप वे सुर्वी और मगोल खानाबदोशा का, उत्तरी अफ्रीका के बबर खानाबदोशा का तथा अरव प्रायद्वीप के खानाबदोशो वा था । इरा खानाबदोशों का प्रभाव लगभग तीन सौ साल तक अर्थात् सन् नौ सौ पचहत्तर ईशून्य से एक हज़ार दो सौ पचहत्तर ईशून्य रहा । आज जिस रूप में इस्लामी समाज है उसका आरम्भ इसी अतिम तिथि से समझना चाहिए । यहाँ तक तो सब स्पष्ट है। किन्तु और खाज करने मे परिस्थिति जटिल हो जाती है। पहली बात यह है कि इस्लामी समाज के पूर्वज एक सन्तान वे नहीं, बटिव दी जुड़वा सन्ताना के जनक थे और इस रूप में वे बिलकुल हेलेनी समाज के समान थे । इन जुड़वाँ सन्ताना वा आचरण समान नही था । पश्चिमी समाज और परम्परावादी ईसाई समाज हजार वर्ष से ऊपर साथ साथ रहे । जनव समाज की एक सन्तान जिसका पता लगाने की हम चेप्टा कर रहे ह दूसरी सतान का निगल गयी और उसने उसे अपने में मिला लिया। इस दोना मुसलिम समाजा को हम ईरानी और अरबी के नाम से पुकारेंगे । जिस प्रकार हेलेनी समाज की सालाना में धार्मिक अन्तर था उस प्रकार का जतर इस अनात इस्लामी समाज की दोना सताना में नहीं था । यद्यपि इस्लाम में भी शिया और सुनी दा फिरके हो गये थे, जसे इसाई समाज में वथोलिक और परम्परावादी ईमाई समाज हो गया था, किन्तु यह धार्मिक अन्तर अभी इरानी इस्लामी और अरबी इस्लामी समाज के अन्तर के रूप में नही था । यद्यपि सत्रहवी शती के पहले चतुग्रास में जब फारस में शिया सम्प्रदाय का बाहुल्य हुआ तब ईरानी इस्लामी समाज छिन भिन होने लगा । और शिया सम्प्रदाय ईरानी इस्लामी समाज की मुख्य धुरी वा बद्र बन गया और सुनी सम्प्रदाय ईरानी जगत की दोना सीमाओं पर तथा दक्षिण और पश्चिम में अरबी प्रदेशों में रह गया । जब हम इस्लाम के दोनो समाजा और ईसाई धम के दोना समाजा की तुलना करते हैं तब हम देखते ह कि ईरानी प्रदेश और पश्चिमी समाज में कुछ समानता है । और अरवी प्रदेश के इस्लामी और परम्परावादा ईसाई समाज में कुछ समानता है । उदाहरण के लिए, बगदाद की खिलाफ्त की छाया, जिसे तेरहवी शता दी में, जब वों के ममकाने बगदाद के खलीपा के भूत को फिर से सजीव वरने की चेष्टा की थी, उसी प्रकार था जसा आठवी शती में वस्तुनतुनिया में सीरिया के लियो ने रोमन साम्राज्य के भूत को सजीव करने की चेष्टा की थी। ममलूकों वा राजनीतिक संगठन लिया के सगठन के समान सरल था जो निक्ट के ही ईरानी प्रदेश की तुलना में स्थिर और प्रभावशाली था । पड़ोस के ईरानी प्रदेश वातमूर का साम्राज्य विस्तत और अस्पष्ट और अस्थिर था जो पश्चिम के शालमन के साम्राज्य की भांति था जो बनता और बिगडता रहा । अरब प्रदेश में उनकी संस्कृति का क्लासिकल भाषा एक बाद के करो वे अग्यासी खोपे बगदाद के खलीफो के छाया मात्र थे । अर्थात् 'दुर्यो रोमन साम्राज्य' और 'पावन रोमन साम्राज्य की ही भाति थे। तोनो अवस्थाओं में ऐसा समाज बना जो पुराने समान को छाया मात्र रह गया । मान लिया है कि ववरा के मिलने से जो जातीय प्रभाव पड़ा, जिसे वे नये रक्त का संचार कहते थे, उसी के परिणामस्वरूप इतिहास में हम पश्चिमी सामाजिक जीवन और विकास पाते है । यह सवेत किया गया कि वबर विजेताओं का रक्त विशुद्ध था, उसमे शक्ति थी और इसके कारण उनके तथाकथित वश उन्नतिशील हुए एक सच बात यह है कि बबर लोग हमारी आत्मिक उन्नति के स्रष्टा नही थे । जसल में वे हैलेनी समाज वे मरणकाल में आये। किन्तु इस समाज के नाश का श्रेय उन्हें नहीं है । जिस समय ये आये हेलेन समाज शतियो पहले के अपने ही किये घावो से मरणासन था। वीरवाल हेलेनी इतिहास का उपसहार था हमारे इतिहास की भूमिका नही । पुराने समाज से नये समाज के परिवर्तन के तीन कारण है। पुराने समाज का अंतिम स्प अर्थात् सावभौम राज्य पुराने समाज में विकसित ईसाई धार्मिक समुदाय जिसके द्वारा नये समाज का जम हुआ और बबर वीरवाल की अव्यवस्था। इनमें दूसरा सबसे अधिक और तीमरा सबसे कम महत्त्व का है । दूमर नवजात समाजा की खोज के पहले हमें हेलेनी तथा पश्चिमी समाज द्वारा उत्पन्न समाज मे एक लक्षण की आर ध्यान देना चाहिए । वह यह है कि नये समाज का जमस्थान वही नही रह गया जो उसके पूर्ववर्ती समाज का था । न यह समाज का केंद्र बना जो पुराने समाज की सोमा थी । इम समाज की उत्पत्ति के अध्ययन से किसी नये वग का पता नही चलेगा क्याकि यह और हमारा पश्चिमी समाज हेलेनी समाज के जुड़वाँ बच्चे ह । वेवल उत्तर-पश्चिम जाने के बजाय यह उत्तर-पूरव की ओर गये । इनका मूल स्थान बजन्तिया में अनेतोलिया था। तियो त यह इस्लामी समाज के विस्तार के कारण दवा हुआ था । अन्त में इसे रस तथा साइवोरिया में में उत्तर तथा पूरन में बढ़ने का अवसर मिला। इस्लामी जगत् को पीछे छोड़ते यह सुदूर पूर्व की ओर बढ़ गया। पश्चिमी और परम्परावादी ईमाई समाज दो वस हो गये ? इसका कारण यह है कि एक ही मूठ क्यालि धमतत्र से दा गाखाएँ उत्पन्न हुइ । रोमन क्यालिन धमतत्र और परम्परा धमतत्र दाना - स्वरूप हाने में तीन पनियाँ लगा । आठवा गती के मूर्तिपूजा विरोधो भतभेद --से जारम्भ होर गन् एक हज़ार चौवन में धामिक विवाद पर यह पूर्ण रूप से स्थापित हो गया। इसी बाचदाना को राजनीतिन धारणाएँ भी भिन्न हो गया। पश्चिम व क्यालिव सम्प्रदाय न माध्यम युग में सत्ता प्राप्त कर ली और परम्परावादी सम्प्रदाय बजलिया राज्य माछा विभाग मात्र बन गया ईरानी और अरनी समाज तथा सीरियाई समाज जिस दूगर गजीवन समाज का हमें देखना है वह है समाज । जब हम इस्लामी गम के विरुवा पृष्ठभूमि शनवरत है तब हमें पता लगता है कि वहाँ गावदगिर मान पाव भी था पति व पश्चिमी और परम्परावा ईसाई समाज थाहा था। राज्य ग |
होते थे, तथापि निश्चित रूपसे नहीं कहा जा सकता है कि लेखक श्रीर चित्रकार एक नहीं होते थे । श्राज भी कुछ ऐसे सावु हैं, जिनका चित्रात्मक प्रतिकृतियोंमें सिद्धान्ततः विश्वास नहीं है; पर वे चित्र सुन्दर बना लेते हैं, इसलिए कि विचारविहीन मानव उन्हें देखकर फँस जायें । इसे तेरापन्थी श्वेताम्बर सम्प्रदाय कहते हैं । कभी-कभी ऐसा देखा गया है, लिखनेवाला चित्रके प्रधान स्थानको छोड़ देता था । प्रतिका लेखनकार्य धारावाहिक रूपसे चलता था । चितारेकी स्मृतिके लिए कहीं-कहीं पर प्रसंगसूचक शब्द भी लिख देते थे । चितारे सर्वप्रथम मोटे र भद्दे रूपमें सफ़ेद, नीला और यदि स्वर्णकी स्याहीका काम बताना हो तो पीला आदि रंगोंसे चित्रकी विशेष प्रकारकी पृष्ठभूमि तैयार कर लेते थे, जिसमें रक्त वर्णकी प्रधानता रहती थी । वादमें उसपर सुन्दर सूक्ष्म तूलिकाओ (जहाँतक मेरा ध्यान है, प्राचीनकालमें चूहेके या गिलहरी की पूंछोके चूलोंकी वारीकसे वारीक तूलिकाएँ बनती थीं) वारीक रेखाएँ खींचकर उनमें यथोचित रंग भर देते थे। उनमें स्त्रियों और पुरुषोंकी
'प्राचीन परम्पराके लेखक और चित्रकार गिलहरीको विशेष ढंगसे पकड़ते थे । एक विशाल वस्त्र विछाकर उसपर विभिन्न प्रकारके अन्नकण या परिपक्व खाद्य विखेर दिये जाते थे, एवं एक बड़ी चलनीमें लकड़ी फँसा कर उसे पतली रस्सीसे बाँधकर एक आदमी दूर रस्सी पकड़े बैठ जाता था । ज्योंही गिलहरी खाद्यके लोभसे चलनीके नीचे आती, त्योंही रस्सी खींच लेते थे, जिससे वह चलनीमें गिरफ्तार हो जाती थी । वादमें आदमी उसकी पूँछके बाल काटकर पाँच मिनटके भीतर ही उसे छोड़े देता था । चालोंको एकत्रकर मयूर पंखके अग्रिम भागमें रस्सीसे बांध दिया जाता था । यही सूक्ष्म तूलिका निर्माण - विधान है । आजतक कहीं-कहीं इसी प्रयोगसे काम चलता है । यह तो सूक्ष्म-से-सूक्ष्म तूलिकाको बात है बड़ी तूलिका बनानेके लिए अश्व-पूँछके बाल काममें लाये जाते थे ।
मुखाकृतियोंपर विशेष ध्यान दिया जाता था । वस्त्रों एवं आभूषणोपर भी कम ध्यान नहीं दिया जाता था। नासिकापर अधिकतर लाल रंगका उपयोग होता था । जैन सावुके वस्त्र मोतीवत् श्वेत दिखाए जाते थे । प्राचीन चित्रोंके अवलोकनके बाद में इस निश्चयपर पहुंचा कि इन चित्रोंमें पाँच प्रकारके रंगोंका प्रयोग होता था । शरीरकी भव्यता, शृंगारिक विलक्षणता, विशिष्ट शैलीकी भाव-भंगिमा, शारीरिक गठन प्रयंका समीचीन उठाव, नीले रंगके विभिन्न शैलीके हाशियेपर चित्रित जंगली जानवरोके भव्य चित्र - जैनाश्रित चित्रकलाकी ये कुछ विशेषताएँ हैं।
काग़जकी पोथियाँ इस प्रकार भी चित्रित की जाती थीं । सर्वप्रथम कश्मीरके काग्रजको सुन्दर ढंगसे कतरकर उसे नमक के पानी में डुबोकर निकाल लिया जाता था, जिससे उसकी उम्र बड़े और घुटाईमें चमक भी आये । वादमें उसपर इच्छित रंगका लेपकर स्निग्ध पापाणसे खूब घुटाई होती थी, ताकि सलवटें निकल जायें और रंगोंकी चमक भी निखर उठें। चारों ओर वोर्डर अलगसे खींचा जाता था। लाल और वदली रंग विशेषरूप से व्यवहृत होते थे । उसपर स्वर्ण या रजतकी त्याही से लिखी हुई लिपि चमक उठती थी । अव्यात्मतत्व वेदी श्रीमद्देवचन्द्रजीको अध्यात्मगीताकी दो प्रतियाँ मुझे प्राप्त हुई हैं, जिनकी लेखन एवं चित्रकला उपर्युक्त ढंगकी है। उनके हाशियोंपर प्रकृतिका तादृश चित्र मनोहर और भव्य है। चित्रकला ही श्राव्यात्मिक भावोंकी धारा बहाने लगती विषय तो वही है । उभय सामंजस्य
यद्यपि यह कृति १९वों शती की चित्रित है, पर भावोंकी दृष्टि से बहुत महत्त्व - पूर्ण हैं । प्राकृतिक चित्रोंका इतना अच्छा संकलन, इस शताब्दीकी अन्य कृतियों नहीं मिलता, इसमें 'भारंड' पक्षीका अंकन विशेष आकर्षणको लिये हुए हैं। इससे पता चलता है कि उन दिनों वह भारत में अवश्य हो रहा होगा । १८वीं शताब्दीकी एक आयुर्वेदिक कृति मेरे संग्रहमें है, इसमें
भारंड पक्षीके अंडोंके छिलकोंका प्रयोग चक्षु-ज्योति वृद्धयर्थ आया है और अनुभूत प्रयोग है । अतः यह मानना पड़ता है, तबतक वह यहाँ था । अव तो पता नहीं लगता।
ताड़पत्रीय चित्र ( प्रथम भाग, वि० सं० ११५७-१३५६ ) अद्याववि जो प्राचीन जैन साहित्य उपलब्ध हुआ है, उसका अधिकांश भाग ताड़पत्रोपरि लिखित है । जैनेतर साहित्य यों तो भूर्जपत्रपर भी लिखा हुआ प्राप्त हुआ है; पर जैन-भण्डारोंमें कुछ ऐसे मूल्यवान् ग्रन्थ मिले हैं, जो ताड़पत्रोंपर उल्लिखित होनेके साथ उनकी लिपिकी मरोड़ भी शुद्ध जैन है। प्राचीनकालीन लेखन - विषयक उपकरणोंपर दृष्टिपात करनेसे विदित होता है कि उस समय अपने देशमें काग़जका प्रचलन नहीं था। मध्य एशियासे मुसलमानों द्वारा इसका आगमन भारत में हुआ । उनके साथ काग़ज़ भी स्थायी व्यवहारकी वस्तु वन गया । आज भी भारतके कुछ भागोंमें ताड़के पत्र ग्रंथ - लेखनके काम में आते हैं; पर कलाकी दृष्टि से उनका महत्त्व नहीं । यों तो ताड़के वृक्ष कई प्रकारके होते हैं; पर उन सबमें 'श्रीताल' मज़बूत, स्निग्ध और सुन्दर होता है, जो मलवारसे प्राता था । अतः इसीपर लिखित सैकड़ों ग्रन्थ मिले हैं । १५वीं शताब्दीतक जैनोंने लेखनमें इनका व्यवहार किया ।
भारतीय चित्रकलाका विकास ताड़पत्रोंपर भी खूब हुआ । स्पष्ट कहा जाय, तो ताड़पत्रोंपर जो चित्रकला अवतरित हुई और विकसित होते-होते श्राजतक यत्कचित् अंश सुरक्षित रह सकी है, उसका सम्पूर्ण श्रेय जैनोंको ही मिलना चाहिए; क्योंकि उन्होंने अपने द्रव्यको वहाकर कलाकारोंकी समस्त आवश्यकता पूर्तिकर उच्चश्रेणीकी कलाकृतियाँ सर्जित करवाईं । मैं गर्वके साथ कह सकता हूँ कि भारतीय मव्यकालीन चित्रकलाके नमूने इनको छोड़कर अन्यत्र नहींके वरावर मिलते हैं। इनके अव्ययनके विना भारतीय चित्रकलाका अध्ययन अपूर्ण रहेगा।
जैन-धर्मके इतिहास-पटपर दृष्टि केन्द्रित करनेसे विदित होता है
कि दक्षिण भारत में दिगम्बर और पश्चिम भारत में वेताम्बर जैनोंका आधिपत्य था और वर्त्तमानमें भी है। जिस कालकी ताड़पत्रीय चित्रकलाका उल्लेख यहाँपर किया जा रहा है, वह युग जैनोंके लिए स्वर्णका था। चालुक्य और बघेले राजा जैन वर्मको आदरकी दृष्टिते ही नहीं देखते थे; अपितु उनके राज-काल में शासनके ऊँचे से ऊँचे पदोंपर जैन ही नियुक्त थे। वे न केवल शासक ही थे, अपितु कई तो उच्च श्रेणीके विद्वान्, ग्रन्थकार और कलाके उपासक भी थे । स्वाभाविक रूपसे चालुक्य राजा शिल्पादि ललित कलाओं में बहुत अभिरुचि रखते थे। परमार्हत श्रीकुमारपाल राजाने जो कार्य कलाके उन्नयनमें किया है, वह द्वितीय है। इतः पूर्व गुजरातमें ज्ञानभण्डार थे या नहीं, यह एक प्रश्न है, परन्तु इतना अवश्य कहना पड़ेगा कि कुमारपालने सर्वप्रथम अपनी राजवानी में जानागार खुलवाया और ताड़पत्र मँगा सैकड़ों ग्रन्थ लिखाकर विद्वानोंकी सुविधाके लिए वितरण कराये ।
वि० सं० ११५७की चित्रित एक निशोथचूण्णिको सचित्र प्रति मिली है, जो महाराज जयसिंहके राज्य में लिखी गई । ज्ञाताधर्मकथा आदि तीन सूत्र भी इस कालकी सचित्र कृतियाँ हैं । महाराज कुमारपालके राज्यकी ओघनियुक्ति (वि० सं० १२१८) और ६ अन्य ग्रन्थ चित्रित उपलव्य हुए हैं। उनमेसे प्रथम ग्रन्थमें स्वयं कुमारपालका भी एक चित्र है, जो इतिहासकी दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। अन्य ग्रन्थों पौराणिक शासन देवियोंके चित्र हैं, जो भारतीय शिल्प और प्रतिमा निर्माणकी दृष्टि से विशेष उपयोगी हैं। सौभाग्यको वात है कि चित्र साफ़ है । श्वेतांवर ताड़चित्रके और भी नमूने उपलब्ध है; पुरातत्त्वाचार्य श्रीमान् जिनविजयजी "चित्रकलाकी दृष्टिसे ताड़पत्रीय पुस्तकोंका आकर्षण" शीर्षकमें अपने विचार इन पंक्तियोंमें व्यक्त करते हैं -
"पुरातन इतिहासके उपादानको दृष्टिसे इन ताड़पत्रीय पुस्तकोंका क्या महत्त्व है, यह तो संक्षेपमें हमनें ऊपर बताया ही है । इसके तिवा
एक और सांस्कृतिक उपादानकी दृष्टिसे कुछ ताड़पत्रीय पुस्तकोंका अधिक आकर्षण है । वह है चित्रकलाकी दृष्टिसे । ताड़पत्रीय पुस्तकों से किसीकिसीमें कुछ चित्र भी अंकित किये हुए उपलब्ध होते हैं । यद्यपि इन चित्रोंमें विशेषकर जैन-उपास्य देव तीर्थंकरोंके प्रतिविम्व होते हैं; पर साथमें कुछ और और दृश्योंके चित्र कहीं-कहीं मिल जाते हैं । ऐसे दृश्योंमें प्रधानतया जैनाचार्योंको धर्मोपदेशके स्वरूपको अवस्थाका आलेखन किया. हुआ मिलता है । इस आलेखनमें आचार्य सभापीठपर बैठे हुए घर्मोपदेश करते वतलाये जाते हैं और उनके सम्मुख श्रावक और श्राविकागण भावभक्तिपूर्ण उपदेश श्रवण करते दिखाये जाते हैं । कहीं कुछ ऐसे ही और भी अन्यान्य प्रसंगोचित दृश्य अंकित किये हुए दृष्टिगोचर होते हैं । गुफाओंके भित्ति चित्रोंके अतिरिक्त ऐसे छोटे, परन्तु विविध रंगोंसे सज्जित, इतने पुरानें चित्र हमारे देशमें और कोई नहीं मिलते। इसलिए चित्र कलाके इतिहास और अध्ययनको दृष्टिसे ताड़पत्रकी ये संचित्र पुस्तकें वड़ी मूल्यवान् और आकर्षणीय वस्तु हैं " ।
पश्चिम- भारतकी भाँति दक्षिण भारतके जैन-भंडारोंका परिशीलन द्याववि समुचित रूपेण नहीं हुआ। अतः कुछ लोगोंने मान लिया कि दिगम्बर जैन चित्रकलाके नमूने नहीं मिलते। सच वात तो यह है कि दिगम्बर जैन विद्वानोंने अभीतक अपने पूर्वजों द्वारा संरक्षित विपुलतम ज्ञानराशिका समीचीन पर्यवेक्षण ही नहीं किया। देशी और विदेशी विद्वानोंने इन चित्रोंपर जो कुछ कार्य किया है, उससे हमें विश्वास हो जाता है कि दक्षिण- भारतके जैनोंने ताड़पत्रीय ग्रन्थोंको तो सचित्र बनाया ही है, पर साथ-ही-साथ अन्य चित्रोंकी भी कलात्मक सृष्टि करनेमें पश्चात्पाद नहीं रहे । मद्रास गवर्नमेण्ट म्यूजियमसे Tirupatti Kunram' (१९३४) नामक अत्यन्त मूल्यवान् ग्रन्थ मि० टी० एन० " जैन पुस्तक प्रशस्ति-संग्रह, प्रस्तावना, पृ० २० ।
रामचन्द्रम् द्वारा लिखित प्रकाशित हुआ है । इसमें प्रकाशित चित्रों दक्षिण- भारतकी जैन- चित्रकला-पद्धतिका सामान्य आभास मिलता है । इनमें से अधिकांश चित्र भगवान् ऋषभदेव और महावीरकी जीवनघटनात्रोंपर प्रकाश डालते हैं; परन्तु फिर भी उस समयके पहनाव, नृत्यकला (प्लेट ५३-५४-५५-५६-५७-५८-६०-६१) के तत्त्वोंका परिज्ञान हो जाता है। इसमें सन्देह नहीं कि इनमेंस सभीको उत्कृष्ट कला श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, तथापि इनका अपना वैशिष्ट्य है ।
श्रीघवलाका स्थान दि० साहित्यमें महत्वका है। मूवित्रीमें इसकी एक प्रति लिखी हुई मिली है, जो सचित्र है । पट्खण्डागम भाग में कुछ चित्रोंका प्रकाशन हुआ है । इनमेसे ऊपर उभय चित्र वड़े भावपूर्ण हैं । तीर्थकरोंकी पद्मासनावस्या, वीतरागमुद्रा और यक्ष-यक्षिणीके मुखसौरभ विस्मयकारक भव्यताको लिये हुए हैं । द्वितीय चित्र दिगम्बनचार्योंके प्रतीत होते हैं। एक चित्र - जो दाहिनी चोर है ~~ आचार्य हेमचन्द्र सूरिजीके प्रमुख ताड़पत्रीय चित्रका स्मरण करा देता है । उभय-साम्य स्पष्ट है। शेष पत्रोंमें बाहुवली स्वामी और अन्य तीर्थकर परमात्माके भावोंके अंकनके दाद अन्तिम पत्रमें जैनोके भौगोलिक इतिहाससे सम्बन्धित चित्र हैं। इन चित्रोके मध्य भागमें कमलाकर चक सुन्दररूपसे चित्रित है । खेद इस वातका है कि जहाँपर चित्र प्रकट किये गये हैं, वहाँ उनको कला एवं समयसूचक विवरण नहीं है । अतः मूल चित्रके भावनें निश्चित निर्माण समय कैसे किया जा सकता है ।
जैसलमेरकी चित्र समृद्धि
भारतीय चित्रकलाके संरक्षण में खरतरगच्छीय आचार्य श्रीजिनभद्र सूरिजीका स्थान सबसे आगे है । श्रापने जैसलमेर जैनज्ञानभंडारकी स्थापना कर भारतीय संस्कृतिके मूल्यवान् सावनोंकी रक्षा की । यदि आप उन दिनों इस महत्त्वपूर्ण संरक्षणपर ध्यान न देते तो श्राज हमें,
चित्रकलाकी महत्त्वपूर्ण सामग्री से वंचित रह जाना पड़ता । अभीतक जैसलमेरकी ख्याति तालपत्रीय प्रतोके कारण थी, पर मुनि पुण्यविजयजीकी गवेपणाने प्रमाणित कर दिया कि मध्यकालीन भारतीय कलाके इतिहासपर प्रकाश डालनेवाली मौलिक सामग्रीका भी वह अनुपम संग्रह है। आपने चौदह काष्ठफलक और ताड़पत्रके चित्र खोज निकाले । इनमें से कुछ एकका प्रकाशन उपर्युक्त शीर्षक सूचित ग्रन्थमें हुआ है । शेष भविष्य में प्रकट होंगे । ऐसी आशा है ।
काष्ठपर चित्र
रूपनिर्माण में जैनाश्रित कलाकारोंने अद्वितीय नैपुण्यका जो सुपरिचय दिया है, वह स्पर्द्धाकी वस्तु है । कलाकारोंने रूपावारके लिए कोई निश्चित निर्णय नहीं किया है, वे किसी भी प्रकारके आवारसे अन्तः सौंदर्यको 'रूपदान' देनेको सक्षम थे । कवि कोट्सने मृण्पात्रमें शिल्पनैपुण्यका प्रतीक देखकर उस अमर रचनाकी प्रेरणा पाई, जो सौंदर्य विवेचकोंके लिए मन्त्ररूप है --- "न्यूटी इज ट्रुथ, ट्रुथ इज व्यूटी" । कलाका विचार आवारसे नहीं, पर पात्रगत आवेयसे होता है । उपादानसे कला धन्य होती है, कलाकारके नैपुण्य, उसकी अन्तर्मुखी दृष्टि-वृत्ति एवं प्रतिभासे । प्रसिद्ध चित्रकार माइकेल ऐंजेलों ठीक ही तो कहा करता था कि "पत्थरके हर टुकड़ेमें मूर्ति है, भास्कर उसके अनावश्यक अंशोंको तराशकर मूर्तिको प्रकाशमें ला देता है, जो लोकचक्षुके अन्तरालमें है।" श्रीरवीन्द्र - नायका मन्तव्य है कि उच्च कोटिकी कलाके उपादान सर्वत्र भरे पड़े हैं । पर हैं कितने व्यक्ति ऐसे जो विखरे हुए अमूर्त तथ्योंको एकत्र कर सत्यकी ओर, जनताको उत्प्रेरित कर सके और कलाकी अन्तः वाणीके उन्नत आदर्श - को समझ सके । जिस प्रकार रसज्ञता दैवी वरदान है, उसी प्रकार रूपदान भी । रूपशिल्प या चित्रमें महानताका प्रभाव नहीं, अभाव होता है कुशल
कलाकारका ।
उपर्युक्त शीर्षकसे वहुतोंको आश्चर्य होगा कि लकड़ीपर भी चित्र हो सकते हैं ? पर इसमें विस्मयकी कोई बात नहीं है। सामान्य आवारके सहारे सुन्दर रससृष्टि करना ही तो कलाकारकी कुशलता है। इस विषयपर में अन्यत्र स्वतंत्र रूपसे विचार कर चुका हूँ। अतः यहाँ तो प्रासंगिक रूपसे इतना ही कहूँगा कि जैनाश्रित कलामें २५०० वर्ष पूर्व काळका व्यवहार, कलाकारोंने सफलतापूर्वक किया है । जैनागम एवं तदुत्तरवर्ती साहित्यिक ग्रन्थोंसे भी इसका समर्थन होता है। यहाँ मैं केवल चित्रकलाविषयक काकीही चर्चा करना उचित समझता हूँ ।
भोजत्रपर लिखे ग्रन्थोंकी सुरक्षाका नेपाल व कश्मीरियोंने, क्या और कैसा प्रवन्ध किया था, यह तो नहीं बता सकता, पर जैनोंने ताइपयोंपर लिखित ग्रन्य-रक्षाकी जो व्यवस्था की थी, वह हमारे सम्मुख है। कलात्मक कृतियोंकी रक्षाके उपादान भी तो कलापूर्ण होने चाहिएँ न ? लेखनकार्यमें उपयोगी तांडपत्र स्वभावतः ढाई-तीन फुटसे कम लम्बे नहीं होते । अतः उनको सुरक्षित रखनेके लिए मव्य-भागमें तीन या श्रावश्यकतानुसार ऋविक, छिद्र वनाकर मजबूत रस्सीम पिरोकर काष्ठफलकोंमें कसकर वाँवे जाते थे, जैसे कोई शत्रुको बाँवता हो । ऐसे फलकोंके भीतरी भागको खूव स्वच्छ-स्निग्धकर, पृष्ठभूमि निमित्त कोई रंगसे पॉलिसकर, तदुपरि क्याप्रसंगको स्पष्ट करनेवाले तत्कालीन ऐतिहासिक घटनाओंपर वैक प्रकाश डालनेवाले, तीर्यकरोके या महान् शासन प्रभावक प्राचार्य के सांस्कृतिक कार्यसि सम्वद्ध, या प्रकृतिके सौंदर्यका प्रतिनिधित्व करनेवाले आकर्षक चित्र अंकित किये जाते थे। इस प्रयाका पालन ब्रह्मदेश, तिव्बत तथा चीनमें भी किया जाता था ।
उपर्युक्त पंक्ति वर्णित काळफलकोंका पता सर्वप्रथम जैसलमेर में तव लगा, जब स्वर्गीय आचार्य श्री जिनकृपाचन्द्रसूरजी अपने उपाध्याय
'भारतीय शिल्प एवं चित्रकलाम काठका उपयोग, पृष्ठ ११९ । ३
खोजकी पगडंडियाँ.
मुनि सुखसागरजी आदि सुयोग्य शिष्यों सहित वहाँके जिनभद्रसूरि स्थापित ज्ञानभंडारका अन्वेषण कर रहे थे । यही प्रथम जैनाचार्य थे, जिनने श्रीसंघका विश्वास प्राप्तकर, प्राचीन साहित्यका जीर्णोद्धार किया । आपके साथ १८ तो मात्र लिपिक ही थे । यह घटना वि० सं० १९८२ की है। आपको यहाँपर जैनसाहित्यान्वेषण करते समय दो काष्ठफलक सचित्र दृष्टिगोचर हुए। इनको आपने, वहाँके पुरातन विचारके लोगोंको समझा-बुझाकर उन्हें वड़ौदा स्टैट फ़ोटोके लिए भेजा, जो बादमें " गायकवाड़ ऑरियण्टल सीरिज़" के अपभ्रंश काव्यत्रयीमें प्रकाशित हुए। इन फलकोंपर तात्कालिक प्राकृत भाषाके उद्भट कवि व उत्कृष्ठ क्रिया पात्र श्रीजिनवल्लभसूर और अपभ्रंश भाषाके लोक कवि श्रोजिनदत्त सूरिजीके
'विश्वास शब्दका प्रयोग में सकारण ही कर रहा हूँ । इतःपूर्व वहांपर जैन मुनि पहुँचे थे, वे वहाँफे लोगोंको धार्मिक भावनाका अनुचित लाभ उठाकर, भंडारसे बहुमूल्य पुस्तकें चुरा लाये थे, जो आज गुजरातके प्रसिद्ध ज्ञानभंडारकी शोभा है। विद्वानोंमें न जाने यह दोष क्यों आ गया है । स्व० वाबू पूर्णचन्द्रजी नाहर भी बताते थे, उन्होंने एक अति प्रसिद्ध विद्वान्को रागमालाके चित्रोंका एलबम अवलोकनार्य दिया, उन्होंने वर्षोंतक रखा, बहुत तक़ाजेके बाद जब एलबम वापिस मिला तो वे चित्र ही नदारत थे । नाहरजी जहरका घूंट पीकर रह गये । इन पंक्तियों के लेखकका भी ऐसा हो अनुभव है । जब वह कलकत्तामें था, तब एक विद्वान् - को, कवि जामीके हजके वर्णनका एक हस्तलिखित ग्रन्य, केवल एक सप्ताह के लिए दिया, इसमें विशुद्ध ईरानी कलमके पाँच चित्र थे । स्वर्णको भूमिपर काली रेखाओंमें चित्र थे । कला और सौंदर्यकी दृष्टिसे तो अमूल्य थे ही, पर साथ ही इंसपर जहाँगोरके कुतुबखानेकी मुहर भी लगी थी । मैंने बहुत प्रयास किया, पर प्राप्त करनेमें अभी तक असफल रहा। अभी भी हमारा राष्ट्रिय चरित्र कितने निम्न स्तरपर है
ऐतिहासिक चित्र अंकित हैं । ये चित्र जव प्रकाशित हुए, तव इनपर कलालोचकोंका व्यान नहीं गया, वल्कि साम्प्रदायिक समझकर उपेक्षित कर दिये ।
१९४२के भीषण राष्ट्रिय आन्दोलनके समय, भारतका एक प्रतिभा सम्पन्न और गवेषणाके कार्यमें, लोकसेवामें सम्पूर्ण जीवन देनेवाले महान् संशोधक, सदलवल जैसलमेर पहुँचा और पाँच माहतक प्रविरत भावसे रक्तशोषक श्रमकर वहाँके पुरातन ज्ञानभंडारोंको छान डाला, वह वयोवृद्ध व्यक्ति और कोई नहीं, भारतीय विद्याभवन (वम्बई ) के भूतपूर्व आचार्य और राजस्थान पुरातत्त्व विभागके वर्तमान अवैतनिक संचालक श्रद्धेय पुरातत्त्वाचार्य मुनि जिनविजयजी थे । आपने दो काष्ठफलक और खोज निकाले, जो भारतीय मव्यकालीन इतिहास और चित्रकलाकी दृष्टिसे महत्त्वपूर्ण हैं । इन फलकोंका प्रकाशन भारतीयविद्या - सिंधीस्मृतिअंक हुआ है।
इन फलक - चित्रोंका धार्मिक महत्त्व तो निविवाद है ही, पर इससे प्रविक मूल्य है चित्रकलाकी दृष्टिसे । परिचय देते हुए मुनिश्रीने लिखा है"चित्रपट्टिकाके रंग आकर्षक व रेखाएं सुन्दर, सुभग और तुमाजित हैं । स्त्री, पुरुष और यतिमुनियोंकी माकृतियाँ अच्छी बनी हुई होनेके कारण उनका अंगविन्यास सम्यक् रीत्या मरोड़वाला बनाया गया है। स्त्रियोंके कर्णकुंडल ध्यान आकृष्ट कर सकें, वैसे हैं । स्तनमंडलका उन्नत वर्तुलाकार तो अजंताके चित्रांकनकी हो परम्पराका प्रत्यक्ष परिचय देता है । इनसे हमें यह भी आभास मिल सकता है कि अजंताकी चित्रकला और गुजरातराजस्थान अर्थात् पश्चिम भारतकी चित्रकलाका परस्पर ऐतिहासिक सम्बन्ध रहा है । ""
इस विषयपर सुप्रसिद्ध कलाविद् श्रीनानालाल चमनलाल म्हेता
'भारतीयविद्या भा० ३, पृ० २३५ ।
विस्तारसे लिख रहे हैं। मैं केवल इतना ही कहूँगा कि ये चित्र उस समयकी सामाजिक व संगीत तथा नाट्यपद्धतिपर भी अच्छा प्रकाश डालते हैं । इनके निरीक्षण से स्पष्ट हो जाता है कि ये एलोराकी कलासे खूब प्रभावित हैं । उस समयका कलाकार स्थिर भावोंका अंकन तो करता ही था, पर गतिमय भावोंको भी सफलताके साथ तूलिकामें लपेट लेनेमें भी सक्षम था। डॉ० मोतीचन्द इन फलकोंपर लिखते हैं'उन्हें देखकर मुझे यह पता चला कि ताड़पत्रपर लिखे चित्र मध्यकालीन भारतीय पश्चिमकलाके जिन अंगोंपर प्रकाश डालनेमें अक्षम हैं, वह प्रकाश इन पहलियोंसे मिलता है ।'
मुनि श्री जिन विजयजीके बाद मुनिराज श्रीपुण्य विजयजी जैसलमेर पहुँचे और आपने १४ सचित्र काष्ठफलक ढूंढ़ निकाले । इनसे पश्चिम भारतीय चित्रकलापर पर्याप्त प्रकाश पड़ता है । ये सव प्रायः वारहवीं शतीके आसपासके हैं, जैसा कि उनमें चित्रित कमलवेलसे सिद्ध है । इन फलकोंमें सापेक्षतः वैशिष्ट्य है, वह यह कि 'गैंडा' व 'जिराफ़'का अंकन डॉ० मोतीचन्दका अभिमत है कि भारतीय चित्रकलामें शायद् यह प्रथम अंकन है। यों तो विश्वविख्यात कोणार्क (उड़ीसा) मंदिरके थरमें जिराफ़ है, पर वह अंकन १३वीं शतीके मध्यका है ।
प्राचीन शिल्पके प्रकाशमें इनको देखें तो पता चलेगा कि कलाकारने उससे जो प्रेरणा ली है वह वैयक्तिक है या पारम्परिक । मुझे पारम्परिक ही जान पड़ती है। क़मलवेल तो अमरावती, साँची और मथुरा शैलीका अनुकरण स्वरूप जान पड़ती है।
श्रीयुत साराभाई नवावके संग्रह में भी एक कलापूर्ण काष्ठफलक है । इसपर भरत और वाहुवलिके चित्र है । वि० सं० १४२५ की दो काळ पट्टिकाएँ पुष्पमालावृत्तिकी प्रतिमें पाई गई हैं, जो ३३+३
' जैसलमेर नो चित्र समृद्धि प्राक्कथन ।
इंच है। दोनोंपर भगवान् पाश्र्वनायके १० पूर्वभव एवं पंचकल्याणकोंका है । काम वहुत सूक्ष्म है । पर असावधानीसे वहुत-सा भाग नष्ट हो गया है। सौभाग्य इतना ही है कि रेखाएँ बच गई हैं । सं० १४५४ को सूत्रकृतांग पर भी एक पटली मिली है। इसपर भगवान् महावीरके कुछ भव व दूसरी ओर कल्याण कोक भाव हैं । चित्र बहुत स्पष्ट व सुरक्षित है । यदि दूसरी पटिका भी उपलब्ध हुई होती तो और भी प्रकाश मिलता। लेखनका निर्देश होनेसे इनका विशेष महत्त्व है।
१५वीं शतीतक तो तालपत्रोंका रिवाज था पर वादमें इनका स्थान काग़जने लिया और काष्ठफलकोंका स्थान पेटियोंने या पुट्ठोंने लिया । पर हाँ काष्ठ - चित्र परम्पराका प्रवाह प्रकारान्तरसे चलता रहा । अव हस्तलिखित ग्रन्थोंके लिए तदाकार वक्स वनने लगे थे। इनपर भी सुन्दर चित्रकारी मिलती है। ऐसे नमूने मेरे संग्रहमें हैं। एकपर सरस्वतीका चित्र है, एकपर गणेश का ।
१६वीं शताब्दीके बाद काष्ठचित्र परम्पराका अच्छा विस्तार हुआ जान पड़ता है। जो प्रसंग काष्ठफलकोंपर चित्रित किये जाते थे, अव उनने वृहत्तर रूप धारण किया । जैनमंदिरोंकी काष्ठछतों व दीवालोंपर जैनसंस्कृतिसे सम्बद्ध अनेक भावोंका अंकन पश्चिम भारत में हुआ, इस परिवर्तनसे स्पष्ट ज्ञात होता है कि उनकी लोकरुचि कलाकी घोर झुकी हुई थी।
जैनाश्रित काष्ठ चित्रकलाका विकसित भाग अभीतक विद्वज्जगत्को
'पुराने बहीखातोंके काग्रजोंको कूटकर प्रताकार पुट्ठे बनाये जाते ये । इनमें भी श्रमणोंका फलाकौशल परिलक्षित होता है। इनकी फटाई इतनी सुन्दर व भावपूर्ण होती थी कि स्वयं चित्रके रूपमें बदल जाती थी। बादमें फिर चाँदीके पुट्ठे भी वनने लगे थे । इस कलापर ध्यान देना जरूरी है ।
इसका चित्र "भारतीय विद्याभवन" परिचयपत्र प्रदर्शित है।
अपनी ओर आकृष्ट नहीं कर सका है। मैंने ऐसे कुछ चित्र सूरत व अहंमदाचादके जैनमंदिरोंमें देखे हैं । मुग़लकलाके पूर्व इतिहासपर ये चित्र अच्छा प्रकाश डाल सकते हैं, कारण एक प्रकारसे में इन्हें वयःसन्वि कालीन चित्र मानता हूँ । राजपूत और मुग़ल चित्रकी वीचकी कड़ियाँ इन्हींमें विखरी हैं। भारतीय चित्रकला मर्मज्ञोंका में साग्रह इस ओर ध्यान आकृष्ट करता हूँ । अहमदावाद, सूरत, राधनपुर, पाटन और खंभातके मंदिरोंमें इनका अच्छा संग्रह है। मुझे सखेद लिखना पड़ता है, कि हमारे मंदिरोंके कलाशून्य हृदयवाले व्यवस्थापकों द्वारा ऐसी मूल्यवान् सामग्रीका बहुत वड़ा भाग तो नष्ट हो चुका । अवशिष्ट भागकी सुरक्षाका वैज्ञानिक प्रवन्ध अपेक्षित है ।
ताड़पत्रीय चित्रकला
अव दूसरा विभाग अल्लाउद्दीन खिल्जीके आक्रमणके वाद आरम्भ होता है। प्रथम विभागकी अपेक्षा इस श्रेणीके ताड़पत्रीय चित्र (वि० सं० १३५७ - १५०० ) अत्यन्त सुन्दर उपलव्ध हुए हैं । रंगों और रेखाओंका विकास उन दिनों उन्नत पथपर था, जैसा कि तात्कालिक चित्रोंकी सजीवतासे जान पड़ता है। सिद्धहमव्याकरण (वि० सं० १४२७) के कल्पसूत्र और कालक-कथाकी अनेक प्रतियाँ भी प्राप्त हैं । उपर्युक्त विभागोंकी चित्रित प्रतियोंका यहाँ केवल उल्लेख ही करना उचित है । इनमेसे कुछ चित्रोंका प्रकाशन श्रीजैन- चित्र कल्पद्रुममें हुआ है ।
वस्त्रोंपर चित्र
भारतवर्षके विभिन्न भागों और तिव्वत में कपड़ोंपर भी अपनेअपने मनोभावोंके अनुकूल चित्र और लेखन कार्य होते थे । वस्त्रोके उभय भागोंके छिद्रोंको वन्द करनेके लिए गेहूँ या चावलका विशेष रूपसे माँड़ तैयार करके लेप कर दिया जाता था । सूखनेके अनन्तर मोहरेसे
वस्त्रोंकी खूव घुटाई होती थी । प्राचीन जैन-ज्ञान-भण्डारों वस्त्रपर चित्रित और लिखित बहुत-सी सामग्री प्राप्त हो चुकी है; परन्तु उनपर कलात्मक अध्ययन उचित रीतिले अद्याववि नहीं हो पाया है। विक्रम संवत् १४०८की एक प्राचीन वस्त्र - चित्रकृति मिली है, जिसपर माता सरस्वतीका भव्य चित्र अंकित है। एक पंचतीर्थी पट भी मिला है, जो इतिहासकी दृष्टिसे महत्त्वपूर्ण है । मि० एन० सो० मेहताने इसका परिचय इण्डियन आर्ट एण्ड लेटर्स ( १९३२ ) में दिया है; पर वह अनेक ऐतिहासिक भूलोंसे भरा पड़ा है। उदाहरण के लिए वनराजके परिपालनमें पूर्णरूपसे सहायक श्रीशीलगुणसूरिको उनका गृह मन्त्री बताया गया है ।
वि० सं० १९३९ में वम्बईमें आचार्य श्रीपूज्यजी श्रोजिनचन्द्रसूरिजीने एक विज्ञप्तिपत्र मुझे दिखाया था, जो २२ हाय लम्बा और १॥ हाय चौड़ा रहा होगा। उसपर चित्र तो नहीं है; पर दोनों तरफ़के वोर्डर बहुत अच्छे रंगोंसे सुसज्जित है । उसका लेखनकाल वि० सं० १४३१ है । वह पट सिंघी- सिरीजमें छप भी चुका है। इस प्रकारके विज्ञप्तिपत्र विषयक पट प्रायः वस्त्रोंपर ही पाये जाते हैं, जिनका भौगोलिक दृष्टि से बहुत बड़ा महत्त्व है । ऐसे पटोंका एक संग्रह भी एण्डयेण्ट विज्ञप्तिपत्राज' (डॉ०
'विज्ञप्तिपत्रको जैनाश्रित चित्रकला भारतीय कलामें अपना स्वतन्त्र और गौरवपूर्ण स्थान रखती हैं। कहना न होगा कि यह जैनोंको बहुत वड़ी मौलिकता है । वे भारतीय इतिहास, रेवेन्यु विभाग एवं म्यूनिसिपैलिटीके स्थान-निर्णयमें विशेष सहायक प्रमाणित हुए हैं । जैन धर्मगुरुओंको प्रत्येक गाँवोंका समूह अपने यहाँ पधारनेके लिए विशिष्ट शैलीमें उनके गुणोंको वर्णना करते हुए विज्ञप्तिपत्र भेजा करता था। उस पत्रमें गांवके प्रधान चौराहे, वाजार, राजा-महाराजाओंके प्रासाद एवं धनी गृहत्योंके विशाल महल, धर्मस्थानों के चित्र (जिनमें मस्जिदें भी सम्मिलित हो जाती थीं), प्रसिद्ध वापिकाएँ एवं वहाँको स्त्री, पुरुष तथा रीति-रिवाज आदिका सुन्दर सजीव चित्रण किया जाता था । वोकानेर लोर उदयपुरके
हीरानन्द शास्त्रीके सम्पादकत्व में ) नामसे निकला है । वसंतविलास भी एक जैनाश्रित चित्रकलाका उत्कृष्टतम वस्त्र - चित्रात्मक उदाहरण है । संसारमें यह अपने ढंगकी वेजोड़ कृति है । लेखन-काल वि० सं० १५०८ अहमदावाद है। विशेषके लिए 'रूपम् ' ( अंक २२-२३) देखना चाहिए । विदेशके कला मर्मज्ञोंकी तीक्ष्ण दृष्टिसे यह पट वच न सका। आर्थिक लोभके पीछे वह आज फेयर गैलेरी आर्ट, वाशिंग्टनकी शोभा वढ़ा रहा है ।
इनके अतिरिक्त जैनतान्त्रिक साहित्य वस्त्रपर अधिकतर मिलता है। सूरिमन्त्र, वर्द्धमान विद्या, चौंसठ योगिनी, ह्रींकार, ऋषिमण्डल, नवपदमण्डल, हनुमानपताका, पंचांगुली एवं ज्वालामालिनी देवियोंके वस्त्रोपरि चित्रित पट प्रचुर परिमाण में उपलव्व होते हैं। तान्त्रिक पटोंकी परम्पराका विकास न केवल भारत में हुआ, वल्कि तन्निकटवर्ती तिव्वत और नेपालमें भी हो रहा था । हाल ही में तिव्वतीय चित्रकलाका एक उत्कृष्टतम उदाहरण - स्पष्ट कहा जाय तो सत्रहवीं शतीकी कलाका प्रतिनिधित्व करनेवाला एक वस्त्रपट - - मेरे देखने आया है, जो धारिणी और बोधिसत्वकी विभिन्न मुद्रा सम्वन्वित है । यों तो पटमें लाल, भूरा, बैंगनी, हरा, श्याम, गेरुआ आदि कई रंगोंका व्यवहार कलाकारने
विज्ञप्तिपत्र उपलब्ध विज्ञप्तिपत्रोंमें सबसे बड़े क्रमशः १०८ और ७२ फुट लम्बे हैं । इन पटोंमें प्रमुख दुकानोंके नाम, मकानोंके नाम एवं राज्यके विभिन्न महकमें बहुत सुन्दर रूपसे वर्णित हैं । उस समयके राजस्थानकी सामाजिक एवं ऐतिहासिक विशाल सामग्री इन पटोंमें है। सैकड़ों विज्ञप्तिपत्र ऐसे भी मिले हैं, जो शिष्यों द्वारा अपने गुरुओंको प्रेषित किये गये हैं । उनसे भारतका भौगोलिक वर्णन एवं चित्र काव्यादिका वैशिष्ट्य प्रस्फुटित होता है। भारतीय चित्र एवं वर्णनकी दृष्टिसे इन पटोंका स्थान महत्त्व - पूर्ण है। मैं आशा करता हूँ कि कला-प्रेमी अपनी उपेक्षितं मनोवृत्तिका परित्याग कर इस महान् सामग्रीकी ओर भी ध्यान देगा ।
उत्तम ढंगसे किया है, फिर भी नीले रंगकी पट-पृष्ठभूमिमें जो तादृश्य लक्षण भासित होते हैं, सम्भवतः वे प्रन्यत्र न मिलेंगे। चारों घोर उठे हुए वादल, सरोवरमें खिले कमल, पटका प्राकृतिक सौन्दर्य और भी बढ़ा देते हैं। गौतम बुद्धकी भिन्न-भिन्न प्रकारकी प्रचलित मुद्रात १८ प्रवान मुद्राओं सजीव परिचय उसमें अंकित है । ऐसे ही कुछ बौद्ध एवं जैनपट मेरे निजी संग्रह एवं स्वर्गीय पूरणचन्दजी नाहर, स्व० बहादुरसिंहजी तिघी, मर्द्धन्दुकुमार गांगुलीके संग्रहालयों में तथा प्रोविन्शियल म्यूजियम लखनऊ, इंडियन म्यूजियम कलकत्ता आदिम सुरक्षित है । आजतक वस्त्रचित्र जैसा विषय कला-समालोचकोंके सम्मुख समुचित रूपसे नहीं आया था।
सोलहवीं शतीके प्रथम चरण में जैन साहित्यके महान् संरक्षक श्रीजिनभद्रसूरिजीके समयका एक विशाल चित्रपट - जैन-तन्त्रशास्त्रोंपर प्रकाश डालनेवाला - पालनपुर निवासी श्रीयुत नायालालभाई छगनलालके पास या, जिसपर अतीव सुन्दर सूक्ष्मातिसूक्ष्म अंकन किया गया था । वह पट मुग़ल-राजपूत पूर्व कलाकृतियों में सर्वश्रेष्ठ या; परन्तु वर्तमान में इस पट द्वारा ब्रिटिश म्यूजियम सुशोभित हो रहा है। इसी आचार्य समयका एक और पंचतीर्थी वस्त्रपट बीकानेरके प्राचार्य गच्छीय ज्ञानभंडारकी पेटियोंमें वन्द पड़ा है, जिसे क्षणिक मुक्तिका सौभाग्य शायद ही प्राप्त होता हो । सौभाग्यकी बात है कि उपर्युक्त पट ऐतिहासिक प्रशस्तिसे अलंकृत है । इससे ८० वर्ष पूर्वका एक पट वकाने रके नाहटा-कला-भवन में है, जिसपर हिन्दी गद्य साहित्यके आदि निर्माता श्रीतरुणप्रसूरिका ऐतिहासिक चित्र अंकित है ।
सतरहवीं शतीके प्रन्तिम चरणके कुछ ऐसे वस्य मैंने देखे हैं, जिनपर जैन धर्मके मुख्य सिद्धान्त एवं प्रधान मन्त्र - जैने अहिंसा परमोधर्म, णमो अरिहंताणं-विशेष रंगके सूत्रसे इस ढंगसे बनाये गये हैं, नानी वस्त्र बुनते समय ही विशेष रूपसे ग्रथित सूत्र-तन्तुसेवन गये हों। | होते थे, तथापि निश्चित रूपसे नहीं कहा जा सकता है कि लेखक श्रीर चित्रकार एक नहीं होते थे । श्राज भी कुछ ऐसे सावु हैं, जिनका चित्रात्मक प्रतिकृतियोंमें सिद्धान्ततः विश्वास नहीं है; पर वे चित्र सुन्दर बना लेते हैं, इसलिए कि विचारविहीन मानव उन्हें देखकर फँस जायें । इसे तेरापन्थी श्वेताम्बर सम्प्रदाय कहते हैं । कभी-कभी ऐसा देखा गया है, लिखनेवाला चित्रके प्रधान स्थानको छोड़ देता था । प्रतिका लेखनकार्य धारावाहिक रूपसे चलता था । चितारेकी स्मृतिके लिए कहीं-कहीं पर प्रसंगसूचक शब्द भी लिख देते थे । चितारे सर्वप्रथम मोटे र भद्दे रूपमें सफ़ेद, नीला और यदि स्वर्णकी स्याहीका काम बताना हो तो पीला आदि रंगोंसे चित्रकी विशेष प्रकारकी पृष्ठभूमि तैयार कर लेते थे, जिसमें रक्त वर्णकी प्रधानता रहती थी । वादमें उसपर सुन्दर सूक्ष्म तूलिकाओ वारीक रेखाएँ खींचकर उनमें यथोचित रंग भर देते थे। उनमें स्त्रियों और पुरुषोंकी 'प्राचीन परम्पराके लेखक और चित्रकार गिलहरीको विशेष ढंगसे पकड़ते थे । एक विशाल वस्त्र विछाकर उसपर विभिन्न प्रकारके अन्नकण या परिपक्व खाद्य विखेर दिये जाते थे, एवं एक बड़ी चलनीमें लकड़ी फँसा कर उसे पतली रस्सीसे बाँधकर एक आदमी दूर रस्सी पकड़े बैठ जाता था । ज्योंही गिलहरी खाद्यके लोभसे चलनीके नीचे आती, त्योंही रस्सी खींच लेते थे, जिससे वह चलनीमें गिरफ्तार हो जाती थी । वादमें आदमी उसकी पूँछके बाल काटकर पाँच मिनटके भीतर ही उसे छोड़े देता था । चालोंको एकत्रकर मयूर पंखके अग्रिम भागमें रस्सीसे बांध दिया जाता था । यही सूक्ष्म तूलिका निर्माण - विधान है । आजतक कहीं-कहीं इसी प्रयोगसे काम चलता है । यह तो सूक्ष्म-से-सूक्ष्म तूलिकाको बात है बड़ी तूलिका बनानेके लिए अश्व-पूँछके बाल काममें लाये जाते थे । मुखाकृतियोंपर विशेष ध्यान दिया जाता था । वस्त्रों एवं आभूषणोपर भी कम ध्यान नहीं दिया जाता था। नासिकापर अधिकतर लाल रंगका उपयोग होता था । जैन सावुके वस्त्र मोतीवत् श्वेत दिखाए जाते थे । प्राचीन चित्रोंके अवलोकनके बाद में इस निश्चयपर पहुंचा कि इन चित्रोंमें पाँच प्रकारके रंगोंका प्रयोग होता था । शरीरकी भव्यता, शृंगारिक विलक्षणता, विशिष्ट शैलीकी भाव-भंगिमा, शारीरिक गठन प्रयंका समीचीन उठाव, नीले रंगके विभिन्न शैलीके हाशियेपर चित्रित जंगली जानवरोके भव्य चित्र - जैनाश्रित चित्रकलाकी ये कुछ विशेषताएँ हैं। काग़जकी पोथियाँ इस प्रकार भी चित्रित की जाती थीं । सर्वप्रथम कश्मीरके काग्रजको सुन्दर ढंगसे कतरकर उसे नमक के पानी में डुबोकर निकाल लिया जाता था, जिससे उसकी उम्र बड़े और घुटाईमें चमक भी आये । वादमें उसपर इच्छित रंगका लेपकर स्निग्ध पापाणसे खूब घुटाई होती थी, ताकि सलवटें निकल जायें और रंगोंकी चमक भी निखर उठें। चारों ओर वोर्डर अलगसे खींचा जाता था। लाल और वदली रंग विशेषरूप से व्यवहृत होते थे । उसपर स्वर्ण या रजतकी त्याही से लिखी हुई लिपि चमक उठती थी । अव्यात्मतत्व वेदी श्रीमद्देवचन्द्रजीको अध्यात्मगीताकी दो प्रतियाँ मुझे प्राप्त हुई हैं, जिनकी लेखन एवं चित्रकला उपर्युक्त ढंगकी है। उनके हाशियोंपर प्रकृतिका तादृश चित्र मनोहर और भव्य है। चित्रकला ही श्राव्यात्मिक भावोंकी धारा बहाने लगती विषय तो वही है । उभय सामंजस्य यद्यपि यह कृति उन्नीसवों शती की चित्रित है, पर भावोंकी दृष्टि से बहुत महत्त्व - पूर्ण हैं । प्राकृतिक चित्रोंका इतना अच्छा संकलन, इस शताब्दीकी अन्य कृतियों नहीं मिलता, इसमें 'भारंड' पक्षीका अंकन विशेष आकर्षणको लिये हुए हैं। इससे पता चलता है कि उन दिनों वह भारत में अवश्य हो रहा होगा । अट्ठारहवीं शताब्दीकी एक आयुर्वेदिक कृति मेरे संग्रहमें है, इसमें भारंड पक्षीके अंडोंके छिलकोंका प्रयोग चक्षु-ज्योति वृद्धयर्थ आया है और अनुभूत प्रयोग है । अतः यह मानना पड़ता है, तबतक वह यहाँ था । अव तो पता नहीं लगता। ताड़पत्रीय चित्र अद्याववि जो प्राचीन जैन साहित्य उपलब्ध हुआ है, उसका अधिकांश भाग ताड़पत्रोपरि लिखित है । जैनेतर साहित्य यों तो भूर्जपत्रपर भी लिखा हुआ प्राप्त हुआ है; पर जैन-भण्डारोंमें कुछ ऐसे मूल्यवान् ग्रन्थ मिले हैं, जो ताड़पत्रोंपर उल्लिखित होनेके साथ उनकी लिपिकी मरोड़ भी शुद्ध जैन है। प्राचीनकालीन लेखन - विषयक उपकरणोंपर दृष्टिपात करनेसे विदित होता है कि उस समय अपने देशमें काग़जका प्रचलन नहीं था। मध्य एशियासे मुसलमानों द्वारा इसका आगमन भारत में हुआ । उनके साथ काग़ज़ भी स्थायी व्यवहारकी वस्तु वन गया । आज भी भारतके कुछ भागोंमें ताड़के पत्र ग्रंथ - लेखनके काम में आते हैं; पर कलाकी दृष्टि से उनका महत्त्व नहीं । यों तो ताड़के वृक्ष कई प्रकारके होते हैं; पर उन सबमें 'श्रीताल' मज़बूत, स्निग्ध और सुन्दर होता है, जो मलवारसे प्राता था । अतः इसीपर लिखित सैकड़ों ग्रन्थ मिले हैं । पंद्रहवीं शताब्दीतक जैनोंने लेखनमें इनका व्यवहार किया । भारतीय चित्रकलाका विकास ताड़पत्रोंपर भी खूब हुआ । स्पष्ट कहा जाय, तो ताड़पत्रोंपर जो चित्रकला अवतरित हुई और विकसित होते-होते श्राजतक यत्कचित् अंश सुरक्षित रह सकी है, उसका सम्पूर्ण श्रेय जैनोंको ही मिलना चाहिए; क्योंकि उन्होंने अपने द्रव्यको वहाकर कलाकारोंकी समस्त आवश्यकता पूर्तिकर उच्चश्रेणीकी कलाकृतियाँ सर्जित करवाईं । मैं गर्वके साथ कह सकता हूँ कि भारतीय मव्यकालीन चित्रकलाके नमूने इनको छोड़कर अन्यत्र नहींके वरावर मिलते हैं। इनके अव्ययनके विना भारतीय चित्रकलाका अध्ययन अपूर्ण रहेगा। जैन-धर्मके इतिहास-पटपर दृष्टि केन्द्रित करनेसे विदित होता है कि दक्षिण भारत में दिगम्बर और पश्चिम भारत में वेताम्बर जैनोंका आधिपत्य था और वर्त्तमानमें भी है। जिस कालकी ताड़पत्रीय चित्रकलाका उल्लेख यहाँपर किया जा रहा है, वह युग जैनोंके लिए स्वर्णका था। चालुक्य और बघेले राजा जैन वर्मको आदरकी दृष्टिते ही नहीं देखते थे; अपितु उनके राज-काल में शासनके ऊँचे से ऊँचे पदोंपर जैन ही नियुक्त थे। वे न केवल शासक ही थे, अपितु कई तो उच्च श्रेणीके विद्वान्, ग्रन्थकार और कलाके उपासक भी थे । स्वाभाविक रूपसे चालुक्य राजा शिल्पादि ललित कलाओं में बहुत अभिरुचि रखते थे। परमार्हत श्रीकुमारपाल राजाने जो कार्य कलाके उन्नयनमें किया है, वह द्वितीय है। इतः पूर्व गुजरातमें ज्ञानभण्डार थे या नहीं, यह एक प्रश्न है, परन्तु इतना अवश्य कहना पड़ेगा कि कुमारपालने सर्वप्रथम अपनी राजवानी में जानागार खुलवाया और ताड़पत्र मँगा सैकड़ों ग्रन्थ लिखाकर विद्वानोंकी सुविधाके लिए वितरण कराये । विशून्य संशून्य एक हज़ार एक सौ सत्तावनकी चित्रित एक निशोथचूण्णिको सचित्र प्रति मिली है, जो महाराज जयसिंहके राज्य में लिखी गई । ज्ञाताधर्मकथा आदि तीन सूत्र भी इस कालकी सचित्र कृतियाँ हैं । महाराज कुमारपालके राज्यकी ओघनियुक्ति और छः अन्य ग्रन्थ चित्रित उपलव्य हुए हैं। उनमेसे प्रथम ग्रन्थमें स्वयं कुमारपालका भी एक चित्र है, जो इतिहासकी दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। अन्य ग्रन्थों पौराणिक शासन देवियोंके चित्र हैं, जो भारतीय शिल्प और प्रतिमा निर्माणकी दृष्टि से विशेष उपयोगी हैं। सौभाग्यको वात है कि चित्र साफ़ है । श्वेतांवर ताड़चित्रके और भी नमूने उपलब्ध है; पुरातत्त्वाचार्य श्रीमान् जिनविजयजी "चित्रकलाकी दृष्टिसे ताड़पत्रीय पुस्तकोंका आकर्षण" शीर्षकमें अपने विचार इन पंक्तियोंमें व्यक्त करते हैं - "पुरातन इतिहासके उपादानको दृष्टिसे इन ताड़पत्रीय पुस्तकोंका क्या महत्त्व है, यह तो संक्षेपमें हमनें ऊपर बताया ही है । इसके तिवा एक और सांस्कृतिक उपादानकी दृष्टिसे कुछ ताड़पत्रीय पुस्तकोंका अधिक आकर्षण है । वह है चित्रकलाकी दृष्टिसे । ताड़पत्रीय पुस्तकों से किसीकिसीमें कुछ चित्र भी अंकित किये हुए उपलब्ध होते हैं । यद्यपि इन चित्रोंमें विशेषकर जैन-उपास्य देव तीर्थंकरोंके प्रतिविम्व होते हैं; पर साथमें कुछ और और दृश्योंके चित्र कहीं-कहीं मिल जाते हैं । ऐसे दृश्योंमें प्रधानतया जैनाचार्योंको धर्मोपदेशके स्वरूपको अवस्थाका आलेखन किया. हुआ मिलता है । इस आलेखनमें आचार्य सभापीठपर बैठे हुए घर्मोपदेश करते वतलाये जाते हैं और उनके सम्मुख श्रावक और श्राविकागण भावभक्तिपूर्ण उपदेश श्रवण करते दिखाये जाते हैं । कहीं कुछ ऐसे ही और भी अन्यान्य प्रसंगोचित दृश्य अंकित किये हुए दृष्टिगोचर होते हैं । गुफाओंके भित्ति चित्रोंके अतिरिक्त ऐसे छोटे, परन्तु विविध रंगोंसे सज्जित, इतने पुरानें चित्र हमारे देशमें और कोई नहीं मिलते। इसलिए चित्र कलाके इतिहास और अध्ययनको दृष्टिसे ताड़पत्रकी ये संचित्र पुस्तकें वड़ी मूल्यवान् और आकर्षणीय वस्तु हैं " । पश्चिम- भारतकी भाँति दक्षिण भारतके जैन-भंडारोंका परिशीलन द्याववि समुचित रूपेण नहीं हुआ। अतः कुछ लोगोंने मान लिया कि दिगम्बर जैन चित्रकलाके नमूने नहीं मिलते। सच वात तो यह है कि दिगम्बर जैन विद्वानोंने अभीतक अपने पूर्वजों द्वारा संरक्षित विपुलतम ज्ञानराशिका समीचीन पर्यवेक्षण ही नहीं किया। देशी और विदेशी विद्वानोंने इन चित्रोंपर जो कुछ कार्य किया है, उससे हमें विश्वास हो जाता है कि दक्षिण- भारतके जैनोंने ताड़पत्रीय ग्रन्थोंको तो सचित्र बनाया ही है, पर साथ-ही-साथ अन्य चित्रोंकी भी कलात्मक सृष्टि करनेमें पश्चात्पाद नहीं रहे । मद्रास गवर्नमेण्ट म्यूजियमसे Tirupatti Kunram' नामक अत्यन्त मूल्यवान् ग्रन्थ मिशून्य टीशून्य एनशून्य " जैन पुस्तक प्रशस्ति-संग्रह, प्रस्तावना, पृशून्य बीस । रामचन्द्रम् द्वारा लिखित प्रकाशित हुआ है । इसमें प्रकाशित चित्रों दक्षिण- भारतकी जैन- चित्रकला-पद्धतिका सामान्य आभास मिलता है । इनमें से अधिकांश चित्र भगवान् ऋषभदेव और महावीरकी जीवनघटनात्रोंपर प्रकाश डालते हैं; परन्तु फिर भी उस समयके पहनाव, नृत्यकला के तत्त्वोंका परिज्ञान हो जाता है। इसमें सन्देह नहीं कि इनमेंस सभीको उत्कृष्ट कला श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, तथापि इनका अपना वैशिष्ट्य है । श्रीघवलाका स्थान दिशून्य साहित्यमें महत्वका है। मूवित्रीमें इसकी एक प्रति लिखी हुई मिली है, जो सचित्र है । पट्खण्डागम भाग में कुछ चित्रोंका प्रकाशन हुआ है । इनमेसे ऊपर उभय चित्र वड़े भावपूर्ण हैं । तीर्थकरोंकी पद्मासनावस्या, वीतरागमुद्रा और यक्ष-यक्षिणीके मुखसौरभ विस्मयकारक भव्यताको लिये हुए हैं । द्वितीय चित्र दिगम्बनचार्योंके प्रतीत होते हैं। एक चित्र - जो दाहिनी चोर है ~~ आचार्य हेमचन्द्र सूरिजीके प्रमुख ताड़पत्रीय चित्रका स्मरण करा देता है । उभय-साम्य स्पष्ट है। शेष पत्रोंमें बाहुवली स्वामी और अन्य तीर्थकर परमात्माके भावोंके अंकनके दाद अन्तिम पत्रमें जैनोके भौगोलिक इतिहाससे सम्बन्धित चित्र हैं। इन चित्रोके मध्य भागमें कमलाकर चक सुन्दररूपसे चित्रित है । खेद इस वातका है कि जहाँपर चित्र प्रकट किये गये हैं, वहाँ उनको कला एवं समयसूचक विवरण नहीं है । अतः मूल चित्रके भावनें निश्चित निर्माण समय कैसे किया जा सकता है । जैसलमेरकी चित्र समृद्धि भारतीय चित्रकलाके संरक्षण में खरतरगच्छीय आचार्य श्रीजिनभद्र सूरिजीका स्थान सबसे आगे है । श्रापने जैसलमेर जैनज्ञानभंडारकी स्थापना कर भारतीय संस्कृतिके मूल्यवान् सावनोंकी रक्षा की । यदि आप उन दिनों इस महत्त्वपूर्ण संरक्षणपर ध्यान न देते तो श्राज हमें, चित्रकलाकी महत्त्वपूर्ण सामग्री से वंचित रह जाना पड़ता । अभीतक जैसलमेरकी ख्याति तालपत्रीय प्रतोके कारण थी, पर मुनि पुण्यविजयजीकी गवेपणाने प्रमाणित कर दिया कि मध्यकालीन भारतीय कलाके इतिहासपर प्रकाश डालनेवाली मौलिक सामग्रीका भी वह अनुपम संग्रह है। आपने चौदह काष्ठफलक और ताड़पत्रके चित्र खोज निकाले । इनमें से कुछ एकका प्रकाशन उपर्युक्त शीर्षक सूचित ग्रन्थमें हुआ है । शेष भविष्य में प्रकट होंगे । ऐसी आशा है । काष्ठपर चित्र रूपनिर्माण में जैनाश्रित कलाकारोंने अद्वितीय नैपुण्यका जो सुपरिचय दिया है, वह स्पर्द्धाकी वस्तु है । कलाकारोंने रूपावारके लिए कोई निश्चित निर्णय नहीं किया है, वे किसी भी प्रकारके आवारसे अन्तः सौंदर्यको 'रूपदान' देनेको सक्षम थे । कवि कोट्सने मृण्पात्रमें शिल्पनैपुण्यका प्रतीक देखकर उस अमर रचनाकी प्रेरणा पाई, जो सौंदर्य विवेचकोंके लिए मन्त्ररूप है --- "न्यूटी इज ट्रुथ, ट्रुथ इज व्यूटी" । कलाका विचार आवारसे नहीं, पर पात्रगत आवेयसे होता है । उपादानसे कला धन्य होती है, कलाकारके नैपुण्य, उसकी अन्तर्मुखी दृष्टि-वृत्ति एवं प्रतिभासे । प्रसिद्ध चित्रकार माइकेल ऐंजेलों ठीक ही तो कहा करता था कि "पत्थरके हर टुकड़ेमें मूर्ति है, भास्कर उसके अनावश्यक अंशोंको तराशकर मूर्तिको प्रकाशमें ला देता है, जो लोकचक्षुके अन्तरालमें है।" श्रीरवीन्द्र - नायका मन्तव्य है कि उच्च कोटिकी कलाके उपादान सर्वत्र भरे पड़े हैं । पर हैं कितने व्यक्ति ऐसे जो विखरे हुए अमूर्त तथ्योंको एकत्र कर सत्यकी ओर, जनताको उत्प्रेरित कर सके और कलाकी अन्तः वाणीके उन्नत आदर्श - को समझ सके । जिस प्रकार रसज्ञता दैवी वरदान है, उसी प्रकार रूपदान भी । रूपशिल्प या चित्रमें महानताका प्रभाव नहीं, अभाव होता है कुशल कलाकारका । उपर्युक्त शीर्षकसे वहुतोंको आश्चर्य होगा कि लकड़ीपर भी चित्र हो सकते हैं ? पर इसमें विस्मयकी कोई बात नहीं है। सामान्य आवारके सहारे सुन्दर रससृष्टि करना ही तो कलाकारकी कुशलता है। इस विषयपर में अन्यत्र स्वतंत्र रूपसे विचार कर चुका हूँ। अतः यहाँ तो प्रासंगिक रूपसे इतना ही कहूँगा कि जैनाश्रित कलामें दो हज़ार पाँच सौ वर्ष पूर्व काळका व्यवहार, कलाकारोंने सफलतापूर्वक किया है । जैनागम एवं तदुत्तरवर्ती साहित्यिक ग्रन्थोंसे भी इसका समर्थन होता है। यहाँ मैं केवल चित्रकलाविषयक काकीही चर्चा करना उचित समझता हूँ । भोजत्रपर लिखे ग्रन्थोंकी सुरक्षाका नेपाल व कश्मीरियोंने, क्या और कैसा प्रवन्ध किया था, यह तो नहीं बता सकता, पर जैनोंने ताइपयोंपर लिखित ग्रन्य-रक्षाकी जो व्यवस्था की थी, वह हमारे सम्मुख है। कलात्मक कृतियोंकी रक्षाके उपादान भी तो कलापूर्ण होने चाहिएँ न ? लेखनकार्यमें उपयोगी तांडपत्र स्वभावतः ढाई-तीन फुटसे कम लम्बे नहीं होते । अतः उनको सुरक्षित रखनेके लिए मव्य-भागमें तीन या श्रावश्यकतानुसार ऋविक, छिद्र वनाकर मजबूत रस्सीम पिरोकर काष्ठफलकोंमें कसकर वाँवे जाते थे, जैसे कोई शत्रुको बाँवता हो । ऐसे फलकोंके भीतरी भागको खूव स्वच्छ-स्निग्धकर, पृष्ठभूमि निमित्त कोई रंगसे पॉलिसकर, तदुपरि क्याप्रसंगको स्पष्ट करनेवाले तत्कालीन ऐतिहासिक घटनाओंपर वैक प्रकाश डालनेवाले, तीर्यकरोके या महान् शासन प्रभावक प्राचार्य के सांस्कृतिक कार्यसि सम्वद्ध, या प्रकृतिके सौंदर्यका प्रतिनिधित्व करनेवाले आकर्षक चित्र अंकित किये जाते थे। इस प्रयाका पालन ब्रह्मदेश, तिव्बत तथा चीनमें भी किया जाता था । उपर्युक्त पंक्ति वर्णित काळफलकोंका पता सर्वप्रथम जैसलमेर में तव लगा, जब स्वर्गीय आचार्य श्री जिनकृपाचन्द्रसूरजी अपने उपाध्याय 'भारतीय शिल्प एवं चित्रकलाम काठका उपयोग, पृष्ठ एक सौ उन्नीस । तीन खोजकी पगडंडियाँ. मुनि सुखसागरजी आदि सुयोग्य शिष्यों सहित वहाँके जिनभद्रसूरि स्थापित ज्ञानभंडारका अन्वेषण कर रहे थे । यही प्रथम जैनाचार्य थे, जिनने श्रीसंघका विश्वास प्राप्तकर, प्राचीन साहित्यका जीर्णोद्धार किया । आपके साथ अट्ठारह तो मात्र लिपिक ही थे । यह घटना विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ बयासी की है। आपको यहाँपर जैनसाहित्यान्वेषण करते समय दो काष्ठफलक सचित्र दृष्टिगोचर हुए। इनको आपने, वहाँके पुरातन विचारके लोगोंको समझा-बुझाकर उन्हें वड़ौदा स्टैट फ़ोटोके लिए भेजा, जो बादमें " गायकवाड़ ऑरियण्टल सीरिज़" के अपभ्रंश काव्यत्रयीमें प्रकाशित हुए। इन फलकोंपर तात्कालिक प्राकृत भाषाके उद्भट कवि व उत्कृष्ठ क्रिया पात्र श्रीजिनवल्लभसूर और अपभ्रंश भाषाके लोक कवि श्रोजिनदत्त सूरिजीके 'विश्वास शब्दका प्रयोग में सकारण ही कर रहा हूँ । इतःपूर्व वहांपर जैन मुनि पहुँचे थे, वे वहाँफे लोगोंको धार्मिक भावनाका अनुचित लाभ उठाकर, भंडारसे बहुमूल्य पुस्तकें चुरा लाये थे, जो आज गुजरातके प्रसिद्ध ज्ञानभंडारकी शोभा है। विद्वानोंमें न जाने यह दोष क्यों आ गया है । स्वशून्य वाबू पूर्णचन्द्रजी नाहर भी बताते थे, उन्होंने एक अति प्रसिद्ध विद्वान्को रागमालाके चित्रोंका एलबम अवलोकनार्य दिया, उन्होंने वर्षोंतक रखा, बहुत तक़ाजेके बाद जब एलबम वापिस मिला तो वे चित्र ही नदारत थे । नाहरजी जहरका घूंट पीकर रह गये । इन पंक्तियों के लेखकका भी ऐसा हो अनुभव है । जब वह कलकत्तामें था, तब एक विद्वान् - को, कवि जामीके हजके वर्णनका एक हस्तलिखित ग्रन्य, केवल एक सप्ताह के लिए दिया, इसमें विशुद्ध ईरानी कलमके पाँच चित्र थे । स्वर्णको भूमिपर काली रेखाओंमें चित्र थे । कला और सौंदर्यकी दृष्टिसे तो अमूल्य थे ही, पर साथ ही इंसपर जहाँगोरके कुतुबखानेकी मुहर भी लगी थी । मैंने बहुत प्रयास किया, पर प्राप्त करनेमें अभी तक असफल रहा। अभी भी हमारा राष्ट्रिय चरित्र कितने निम्न स्तरपर है ऐतिहासिक चित्र अंकित हैं । ये चित्र जव प्रकाशित हुए, तव इनपर कलालोचकोंका व्यान नहीं गया, वल्कि साम्प्रदायिक समझकर उपेक्षित कर दिये । एक हज़ार नौ सौ बयालीसके भीषण राष्ट्रिय आन्दोलनके समय, भारतका एक प्रतिभा सम्पन्न और गवेषणाके कार्यमें, लोकसेवामें सम्पूर्ण जीवन देनेवाले महान् संशोधक, सदलवल जैसलमेर पहुँचा और पाँच माहतक प्रविरत भावसे रक्तशोषक श्रमकर वहाँके पुरातन ज्ञानभंडारोंको छान डाला, वह वयोवृद्ध व्यक्ति और कोई नहीं, भारतीय विद्याभवन के भूतपूर्व आचार्य और राजस्थान पुरातत्त्व विभागके वर्तमान अवैतनिक संचालक श्रद्धेय पुरातत्त्वाचार्य मुनि जिनविजयजी थे । आपने दो काष्ठफलक और खोज निकाले, जो भारतीय मव्यकालीन इतिहास और चित्रकलाकी दृष्टिसे महत्त्वपूर्ण हैं । इन फलकोंका प्रकाशन भारतीयविद्या - सिंधीस्मृतिअंक हुआ है। इन फलक - चित्रोंका धार्मिक महत्त्व तो निविवाद है ही, पर इससे प्रविक मूल्य है चित्रकलाकी दृष्टिसे । परिचय देते हुए मुनिश्रीने लिखा है"चित्रपट्टिकाके रंग आकर्षक व रेखाएं सुन्दर, सुभग और तुमाजित हैं । स्त्री, पुरुष और यतिमुनियोंकी माकृतियाँ अच्छी बनी हुई होनेके कारण उनका अंगविन्यास सम्यक् रीत्या मरोड़वाला बनाया गया है। स्त्रियोंके कर्णकुंडल ध्यान आकृष्ट कर सकें, वैसे हैं । स्तनमंडलका उन्नत वर्तुलाकार तो अजंताके चित्रांकनकी हो परम्पराका प्रत्यक्ष परिचय देता है । इनसे हमें यह भी आभास मिल सकता है कि अजंताकी चित्रकला और गुजरातराजस्थान अर्थात् पश्चिम भारतकी चित्रकलाका परस्पर ऐतिहासिक सम्बन्ध रहा है । "" इस विषयपर सुप्रसिद्ध कलाविद् श्रीनानालाल चमनलाल म्हेता 'भारतीयविद्या भाशून्य तीन, पृशून्य दो सौ पैंतीस । विस्तारसे लिख रहे हैं। मैं केवल इतना ही कहूँगा कि ये चित्र उस समयकी सामाजिक व संगीत तथा नाट्यपद्धतिपर भी अच्छा प्रकाश डालते हैं । इनके निरीक्षण से स्पष्ट हो जाता है कि ये एलोराकी कलासे खूब प्रभावित हैं । उस समयका कलाकार स्थिर भावोंका अंकन तो करता ही था, पर गतिमय भावोंको भी सफलताके साथ तूलिकामें लपेट लेनेमें भी सक्षम था। डॉशून्य मोतीचन्द इन फलकोंपर लिखते हैं'उन्हें देखकर मुझे यह पता चला कि ताड़पत्रपर लिखे चित्र मध्यकालीन भारतीय पश्चिमकलाके जिन अंगोंपर प्रकाश डालनेमें अक्षम हैं, वह प्रकाश इन पहलियोंसे मिलता है ।' मुनि श्री जिन विजयजीके बाद मुनिराज श्रीपुण्य विजयजी जैसलमेर पहुँचे और आपने चौदह सचित्र काष्ठफलक ढूंढ़ निकाले । इनसे पश्चिम भारतीय चित्रकलापर पर्याप्त प्रकाश पड़ता है । ये सव प्रायः वारहवीं शतीके आसपासके हैं, जैसा कि उनमें चित्रित कमलवेलसे सिद्ध है । इन फलकोंमें सापेक्षतः वैशिष्ट्य है, वह यह कि 'गैंडा' व 'जिराफ़'का अंकन डॉशून्य मोतीचन्दका अभिमत है कि भारतीय चित्रकलामें शायद् यह प्रथम अंकन है। यों तो विश्वविख्यात कोणार्क मंदिरके थरमें जिराफ़ है, पर वह अंकन तेरहवीं शतीके मध्यका है । प्राचीन शिल्पके प्रकाशमें इनको देखें तो पता चलेगा कि कलाकारने उससे जो प्रेरणा ली है वह वैयक्तिक है या पारम्परिक । मुझे पारम्परिक ही जान पड़ती है। क़मलवेल तो अमरावती, साँची और मथुरा शैलीका अनुकरण स्वरूप जान पड़ती है। श्रीयुत साराभाई नवावके संग्रह में भी एक कलापूर्ण काष्ठफलक है । इसपर भरत और वाहुवलिके चित्र है । विशून्य संशून्य एक हज़ार चार सौ पच्चीस की दो काळ पट्टिकाएँ पुष्पमालावृत्तिकी प्रतिमें पाई गई हैं, जो तैंतीस+तीन ' जैसलमेर नो चित्र समृद्धि प्राक्कथन । इंच है। दोनोंपर भगवान् पाश्र्वनायके दस पूर्वभव एवं पंचकल्याणकोंका है । काम वहुत सूक्ष्म है । पर असावधानीसे वहुत-सा भाग नष्ट हो गया है। सौभाग्य इतना ही है कि रेखाएँ बच गई हैं । संशून्य एक हज़ार चार सौ चौवन को सूत्रकृतांग पर भी एक पटली मिली है। इसपर भगवान् महावीरके कुछ भव व दूसरी ओर कल्याण कोक भाव हैं । चित्र बहुत स्पष्ट व सुरक्षित है । यदि दूसरी पटिका भी उपलब्ध हुई होती तो और भी प्रकाश मिलता। लेखनका निर्देश होनेसे इनका विशेष महत्त्व है। पंद्रहवीं शतीतक तो तालपत्रोंका रिवाज था पर वादमें इनका स्थान काग़जने लिया और काष्ठफलकोंका स्थान पेटियोंने या पुट्ठोंने लिया । पर हाँ काष्ठ - चित्र परम्पराका प्रवाह प्रकारान्तरसे चलता रहा । अव हस्तलिखित ग्रन्थोंके लिए तदाकार वक्स वनने लगे थे। इनपर भी सुन्दर चित्रकारी मिलती है। ऐसे नमूने मेरे संग्रहमें हैं। एकपर सरस्वतीका चित्र है, एकपर गणेश का । सोलहवीं शताब्दीके बाद काष्ठचित्र परम्पराका अच्छा विस्तार हुआ जान पड़ता है। जो प्रसंग काष्ठफलकोंपर चित्रित किये जाते थे, अव उनने वृहत्तर रूप धारण किया । जैनमंदिरोंकी काष्ठछतों व दीवालोंपर जैनसंस्कृतिसे सम्बद्ध अनेक भावोंका अंकन पश्चिम भारत में हुआ, इस परिवर्तनसे स्पष्ट ज्ञात होता है कि उनकी लोकरुचि कलाकी घोर झुकी हुई थी। जैनाश्रित काष्ठ चित्रकलाका विकसित भाग अभीतक विद्वज्जगत्को 'पुराने बहीखातोंके काग्रजोंको कूटकर प्रताकार पुट्ठे बनाये जाते ये । इनमें भी श्रमणोंका फलाकौशल परिलक्षित होता है। इनकी फटाई इतनी सुन्दर व भावपूर्ण होती थी कि स्वयं चित्रके रूपमें बदल जाती थी। बादमें फिर चाँदीके पुट्ठे भी वनने लगे थे । इस कलापर ध्यान देना जरूरी है । इसका चित्र "भारतीय विद्याभवन" परिचयपत्र प्रदर्शित है। अपनी ओर आकृष्ट नहीं कर सका है। मैंने ऐसे कुछ चित्र सूरत व अहंमदाचादके जैनमंदिरोंमें देखे हैं । मुग़लकलाके पूर्व इतिहासपर ये चित्र अच्छा प्रकाश डाल सकते हैं, कारण एक प्रकारसे में इन्हें वयःसन्वि कालीन चित्र मानता हूँ । राजपूत और मुग़ल चित्रकी वीचकी कड़ियाँ इन्हींमें विखरी हैं। भारतीय चित्रकला मर्मज्ञोंका में साग्रह इस ओर ध्यान आकृष्ट करता हूँ । अहमदावाद, सूरत, राधनपुर, पाटन और खंभातके मंदिरोंमें इनका अच्छा संग्रह है। मुझे सखेद लिखना पड़ता है, कि हमारे मंदिरोंके कलाशून्य हृदयवाले व्यवस्थापकों द्वारा ऐसी मूल्यवान् सामग्रीका बहुत वड़ा भाग तो नष्ट हो चुका । अवशिष्ट भागकी सुरक्षाका वैज्ञानिक प्रवन्ध अपेक्षित है । ताड़पत्रीय चित्रकला अव दूसरा विभाग अल्लाउद्दीन खिल्जीके आक्रमणके वाद आरम्भ होता है। प्रथम विभागकी अपेक्षा इस श्रेणीके ताड़पत्रीय चित्र अत्यन्त सुन्दर उपलव्ध हुए हैं । रंगों और रेखाओंका विकास उन दिनों उन्नत पथपर था, जैसा कि तात्कालिक चित्रोंकी सजीवतासे जान पड़ता है। सिद्धहमव्याकरण के कल्पसूत्र और कालक-कथाकी अनेक प्रतियाँ भी प्राप्त हैं । उपर्युक्त विभागोंकी चित्रित प्रतियोंका यहाँ केवल उल्लेख ही करना उचित है । इनमेसे कुछ चित्रोंका प्रकाशन श्रीजैन- चित्र कल्पद्रुममें हुआ है । वस्त्रोंपर चित्र भारतवर्षके विभिन्न भागों और तिव्वत में कपड़ोंपर भी अपनेअपने मनोभावोंके अनुकूल चित्र और लेखन कार्य होते थे । वस्त्रोके उभय भागोंके छिद्रोंको वन्द करनेके लिए गेहूँ या चावलका विशेष रूपसे माँड़ तैयार करके लेप कर दिया जाता था । सूखनेके अनन्तर मोहरेसे वस्त्रोंकी खूव घुटाई होती थी । प्राचीन जैन-ज्ञान-भण्डारों वस्त्रपर चित्रित और लिखित बहुत-सी सामग्री प्राप्त हो चुकी है; परन्तु उनपर कलात्मक अध्ययन उचित रीतिले अद्याववि नहीं हो पाया है। विक्रम संवत् एक हज़ार चार सौ आठकी एक प्राचीन वस्त्र - चित्रकृति मिली है, जिसपर माता सरस्वतीका भव्य चित्र अंकित है। एक पंचतीर्थी पट भी मिला है, जो इतिहासकी दृष्टिसे महत्त्वपूर्ण है । मिशून्य एनशून्य सोशून्य मेहताने इसका परिचय इण्डियन आर्ट एण्ड लेटर्स में दिया है; पर वह अनेक ऐतिहासिक भूलोंसे भरा पड़ा है। उदाहरण के लिए वनराजके परिपालनमें पूर्णरूपसे सहायक श्रीशीलगुणसूरिको उनका गृह मन्त्री बताया गया है । विशून्य संशून्य एक हज़ार नौ सौ उनतालीस में वम्बईमें आचार्य श्रीपूज्यजी श्रोजिनचन्द्रसूरिजीने एक विज्ञप्तिपत्र मुझे दिखाया था, जो बाईस हाय लम्बा और एक॥ हाय चौड़ा रहा होगा। उसपर चित्र तो नहीं है; पर दोनों तरफ़के वोर्डर बहुत अच्छे रंगोंसे सुसज्जित है । उसका लेखनकाल विशून्य संशून्य एक हज़ार चार सौ इकतीस है । वह पट सिंघी- सिरीजमें छप भी चुका है। इस प्रकारके विज्ञप्तिपत्र विषयक पट प्रायः वस्त्रोंपर ही पाये जाते हैं, जिनका भौगोलिक दृष्टि से बहुत बड़ा महत्त्व है । ऐसे पटोंका एक संग्रह भी एण्डयेण्ट विज्ञप्तिपत्राज' , प्रसिद्ध वापिकाएँ एवं वहाँको स्त्री, पुरुष तथा रीति-रिवाज आदिका सुन्दर सजीव चित्रण किया जाता था । वोकानेर लोर उदयपुरके हीरानन्द शास्त्रीके सम्पादकत्व में ) नामसे निकला है । वसंतविलास भी एक जैनाश्रित चित्रकलाका उत्कृष्टतम वस्त्र - चित्रात्मक उदाहरण है । संसारमें यह अपने ढंगकी वेजोड़ कृति है । लेखन-काल विशून्य संशून्य एक हज़ार पाँच सौ आठ अहमदावाद है। विशेषके लिए 'रूपम् ' देखना चाहिए । विदेशके कला मर्मज्ञोंकी तीक्ष्ण दृष्टिसे यह पट वच न सका। आर्थिक लोभके पीछे वह आज फेयर गैलेरी आर्ट, वाशिंग्टनकी शोभा वढ़ा रहा है । इनके अतिरिक्त जैनतान्त्रिक साहित्य वस्त्रपर अधिकतर मिलता है। सूरिमन्त्र, वर्द्धमान विद्या, चौंसठ योगिनी, ह्रींकार, ऋषिमण्डल, नवपदमण्डल, हनुमानपताका, पंचांगुली एवं ज्वालामालिनी देवियोंके वस्त्रोपरि चित्रित पट प्रचुर परिमाण में उपलव्व होते हैं। तान्त्रिक पटोंकी परम्पराका विकास न केवल भारत में हुआ, वल्कि तन्निकटवर्ती तिव्वत और नेपालमें भी हो रहा था । हाल ही में तिव्वतीय चित्रकलाका एक उत्कृष्टतम उदाहरण - स्पष्ट कहा जाय तो सत्रहवीं शतीकी कलाका प्रतिनिधित्व करनेवाला एक वस्त्रपट - - मेरे देखने आया है, जो धारिणी और बोधिसत्वकी विभिन्न मुद्रा सम्वन्वित है । यों तो पटमें लाल, भूरा, बैंगनी, हरा, श्याम, गेरुआ आदि कई रंगोंका व्यवहार कलाकारने विज्ञप्तिपत्र उपलब्ध विज्ञप्तिपत्रोंमें सबसे बड़े क्रमशः एक सौ आठ और बहत्तर फुट लम्बे हैं । इन पटोंमें प्रमुख दुकानोंके नाम, मकानोंके नाम एवं राज्यके विभिन्न महकमें बहुत सुन्दर रूपसे वर्णित हैं । उस समयके राजस्थानकी सामाजिक एवं ऐतिहासिक विशाल सामग्री इन पटोंमें है। सैकड़ों विज्ञप्तिपत्र ऐसे भी मिले हैं, जो शिष्यों द्वारा अपने गुरुओंको प्रेषित किये गये हैं । उनसे भारतका भौगोलिक वर्णन एवं चित्र काव्यादिका वैशिष्ट्य प्रस्फुटित होता है। भारतीय चित्र एवं वर्णनकी दृष्टिसे इन पटोंका स्थान महत्त्व - पूर्ण है। मैं आशा करता हूँ कि कला-प्रेमी अपनी उपेक्षितं मनोवृत्तिका परित्याग कर इस महान् सामग्रीकी ओर भी ध्यान देगा । उत्तम ढंगसे किया है, फिर भी नीले रंगकी पट-पृष्ठभूमिमें जो तादृश्य लक्षण भासित होते हैं, सम्भवतः वे प्रन्यत्र न मिलेंगे। चारों घोर उठे हुए वादल, सरोवरमें खिले कमल, पटका प्राकृतिक सौन्दर्य और भी बढ़ा देते हैं। गौतम बुद्धकी भिन्न-भिन्न प्रकारकी प्रचलित मुद्रात अट्ठारह प्रवान मुद्राओं सजीव परिचय उसमें अंकित है । ऐसे ही कुछ बौद्ध एवं जैनपट मेरे निजी संग्रह एवं स्वर्गीय पूरणचन्दजी नाहर, स्वशून्य बहादुरसिंहजी तिघी, मर्द्धन्दुकुमार गांगुलीके संग्रहालयों में तथा प्रोविन्शियल म्यूजियम लखनऊ, इंडियन म्यूजियम कलकत्ता आदिम सुरक्षित है । आजतक वस्त्रचित्र जैसा विषय कला-समालोचकोंके सम्मुख समुचित रूपसे नहीं आया था। सोलहवीं शतीके प्रथम चरण में जैन साहित्यके महान् संरक्षक श्रीजिनभद्रसूरिजीके समयका एक विशाल चित्रपट - जैन-तन्त्रशास्त्रोंपर प्रकाश डालनेवाला - पालनपुर निवासी श्रीयुत नायालालभाई छगनलालके पास या, जिसपर अतीव सुन्दर सूक्ष्मातिसूक्ष्म अंकन किया गया था । वह पट मुग़ल-राजपूत पूर्व कलाकृतियों में सर्वश्रेष्ठ या; परन्तु वर्तमान में इस पट द्वारा ब्रिटिश म्यूजियम सुशोभित हो रहा है। इसी आचार्य समयका एक और पंचतीर्थी वस्त्रपट बीकानेरके प्राचार्य गच्छीय ज्ञानभंडारकी पेटियोंमें वन्द पड़ा है, जिसे क्षणिक मुक्तिका सौभाग्य शायद ही प्राप्त होता हो । सौभाग्यकी बात है कि उपर्युक्त पट ऐतिहासिक प्रशस्तिसे अलंकृत है । इससे अस्सी वर्ष पूर्वका एक पट वकाने रके नाहटा-कला-भवन में है, जिसपर हिन्दी गद्य साहित्यके आदि निर्माता श्रीतरुणप्रसूरिका ऐतिहासिक चित्र अंकित है । सतरहवीं शतीके प्रन्तिम चरणके कुछ ऐसे वस्य मैंने देखे हैं, जिनपर जैन धर्मके मुख्य सिद्धान्त एवं प्रधान मन्त्र - जैने अहिंसा परमोधर्म, णमो अरिहंताणं-विशेष रंगके सूत्रसे इस ढंगसे बनाये गये हैं, नानी वस्त्र बुनते समय ही विशेष रूपसे ग्रथित सूत्र-तन्तुसेवन गये हों। |
इंडियन मार्केट में स्मार्टफोन्स की बाढ़ सी आ चुकी है. यदि आपका बजट 20 हजार रुपये है और इस प्राइज प्वाइंट में अच्छा 5जी स्मार्टफोन खरीदना चाह रहे है तो आप निराश नहीं होंगे. मार्केट में कई बेहतरीन 5G फोन्स आए हैं, इसमें धांसू कैमरा, तगड़ी बैटरी और जबरदस्त फीचर्स भी दिए जा रहे है.
Samsung Galaxy M33 5g: Samsung Galaxy M33 5G बहुत पॉपुलर और ट्रेंड में रहने वाला फोन भी है. फोन में 6000mAh की तगड़ी बैटरी भी दी जा रही है, जो नॉर्मल यूज पर आराम से 2 दिन तक चल सकती है. फोन में 8GB RAM मिल रही है, इसका 8GB तक एक्सपेंड किया जा सकता है. जिसके साथ साथ फोन में 64MP का प्राइमरी कैमरा और कई गजब फीचर्स भी दिया जा रहा है.
OnePlus Nord CE 3 Lite 5G: OnePlus Nord CE 3 Lite 5G में 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ 6. 7-इंच का LCD डिस्प्ले भी दिया जा रहा है. यह क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 695 चिपसेट के साथ संचालित कर सकते है. जिसके साथ साथ फोन 8GB + 256GB स्टोरेज विकल्प में भी उपलब्ध है.
realme narzo 50 5G: realme narzo 50 5G सबसे किफायती और धांसू फीचर्स के साथ साथ दिए जा रहे है. यह स्मार्टफोन उन लोगों के लिए एक बढ़िया विकल्प है जो सबसे अच्छे 5G फोन की तलाश में हैं जिनकी कीमत 20,000 रुपये से अधिक नहीं होने वाली है.
Redmi Note 12 5G: Redmi Note 12 स्नैपड्रैगन 4 Gen 1 चिपसेट द्वारा संचालित है. जिसमे 5,000mAh की बैटरी है, जो किफायती फोन में आम है, और 33W चार्जिंग को सपोर्ट भी कर रही है, जो पूरी तरह से चार्ज होने में एक घंटे से अधिक का वक़्त लेती है. स्मूथ स्क्रॉलिंग के लिए फोन में 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ 6. 7 इंच की AMOLED स्क्रीन है.
Oppo A78 5G: यह कंपनी का हाई-एंड स्मार्टफोन है, जो मल्टीटास्किंग को सपोर्ट कर रहा है. फोन में 33W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ 5000mAh की बैटरी मिलती है. फोन में 90Hz का रिफ्रेश रेट मिलता है, जो ब्राउजिंग और स्ट्रीमिंग को जबरदस्त बना देता है.
| इंडियन मार्केट में स्मार्टफोन्स की बाढ़ सी आ चुकी है. यदि आपका बजट बीस हजार रुपये है और इस प्राइज प्वाइंट में अच्छा पाँचजी स्मार्टफोन खरीदना चाह रहे है तो आप निराश नहीं होंगे. मार्केट में कई बेहतरीन पाँचG फोन्स आए हैं, इसमें धांसू कैमरा, तगड़ी बैटरी और जबरदस्त फीचर्स भी दिए जा रहे है. Samsung Galaxy Mतैंतीस पाँच ग्राम: Samsung Galaxy Mतैंतीस पाँचG बहुत पॉपुलर और ट्रेंड में रहने वाला फोन भी है. फोन में छः हज़ारmAh की तगड़ी बैटरी भी दी जा रही है, जो नॉर्मल यूज पर आराम से दो दिन तक चल सकती है. फोन में आठGB RAM मिल रही है, इसका आठGB तक एक्सपेंड किया जा सकता है. जिसके साथ साथ फोन में चौंसठMP का प्राइमरी कैमरा और कई गजब फीचर्स भी दिया जा रहा है. OnePlus Nord CE तीन Lite पाँचG: OnePlus Nord CE तीन Lite पाँचG में एक सौ बीस हर्ट्ज़ रिफ्रेश रेट के साथ छः. सात-इंच का LCD डिस्प्ले भी दिया जा रहा है. यह क्वालकॉम स्नैपड्रैगन छः सौ पचानवे चिपसेट के साथ संचालित कर सकते है. जिसके साथ साथ फोन आठGB + दो सौ छप्पनGB स्टोरेज विकल्प में भी उपलब्ध है. realme narzo पचास पाँचG: realme narzo पचास पाँचG सबसे किफायती और धांसू फीचर्स के साथ साथ दिए जा रहे है. यह स्मार्टफोन उन लोगों के लिए एक बढ़िया विकल्प है जो सबसे अच्छे पाँचG फोन की तलाश में हैं जिनकी कीमत बीस,शून्य रुपयापये से अधिक नहीं होने वाली है. Redmi Note बारह पाँचG: Redmi Note बारह स्नैपड्रैगन चार Gen एक चिपसेट द्वारा संचालित है. जिसमे पाँच,शून्यmAh की बैटरी है, जो किफायती फोन में आम है, और तैंतीस वाट चार्जिंग को सपोर्ट भी कर रही है, जो पूरी तरह से चार्ज होने में एक घंटे से अधिक का वक़्त लेती है. स्मूथ स्क्रॉलिंग के लिए फोन में एक सौ बीस हर्ट्ज़ रिफ्रेश रेट के साथ छः. सात इंच की AMOLED स्क्रीन है. Oppo Aअठहत्तर पाँचG: यह कंपनी का हाई-एंड स्मार्टफोन है, जो मल्टीटास्किंग को सपोर्ट कर रहा है. फोन में तैंतीस वाट फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ पाँच हज़ारmAh की बैटरी मिलती है. फोन में नब्बे हर्ट्ज़ का रिफ्रेश रेट मिलता है, जो ब्राउजिंग और स्ट्रीमिंग को जबरदस्त बना देता है. |
कोलकाता, 19 जून तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार को आरोप लगाया कि राज्यपाल जगदीप धनखड़ चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को चुनने को लेकर बंगाल की जनता को चुनाव बाद हिंसा के मुद्दे पर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, साथ ही पार्टी ने धनखड़ को उनके पद से हटाने की मांग उठायी। हाल ही में बंगाल के राज्यपाल पांच दिवसीय दौरे पर दिल्ली गए थे।
राज्यसभा में टीएमसी के मुख्य सचेतक सुखेंदु शेखर राय ने यह भी आरोप लगाया कि धनखड़ "छिटपुट घटनाओं" को चुनाव बाद की हिंसा करार देकर दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य केंद्रीय नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं जोकि बेहद गहरी राजनीतिक साजिश है।
धनखड़ ने बृहस्पतिवार और शनिवार को शाह से मुलाकात की थी और माना जा रहा है कि बैठक के दौरान उन्होंने गृह मंत्री को राज्य की कानून-व्यवस्था के बारे में अवगत कराया।
राय ने संवाददाताओं से कहा, " राज्यपाल दिल्ली में शाह के दरबार में चक्कर लगा रहे हैं। ऐसा करके वह राज्य और इसके लोगों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी को चुना है। "
उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव में 200 से अधिक सीटें जीतने का दावा नाकाम होने पर भाजपा साजिश रचने में व्यस्त है और राज्यपाल भगवा खेमे के भोंपू की तरह बर्ताव कर रहे हैं।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| कोलकाता, उन्नीस जून तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार को आरोप लगाया कि राज्यपाल जगदीप धनखड़ चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को चुनने को लेकर बंगाल की जनता को चुनाव बाद हिंसा के मुद्दे पर बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, साथ ही पार्टी ने धनखड़ को उनके पद से हटाने की मांग उठायी। हाल ही में बंगाल के राज्यपाल पांच दिवसीय दौरे पर दिल्ली गए थे। राज्यसभा में टीएमसी के मुख्य सचेतक सुखेंदु शेखर राय ने यह भी आरोप लगाया कि धनखड़ "छिटपुट घटनाओं" को चुनाव बाद की हिंसा करार देकर दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य केंद्रीय नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं जोकि बेहद गहरी राजनीतिक साजिश है। धनखड़ ने बृहस्पतिवार और शनिवार को शाह से मुलाकात की थी और माना जा रहा है कि बैठक के दौरान उन्होंने गृह मंत्री को राज्य की कानून-व्यवस्था के बारे में अवगत कराया। राय ने संवाददाताओं से कहा, " राज्यपाल दिल्ली में शाह के दरबार में चक्कर लगा रहे हैं। ऐसा करके वह राज्य और इसके लोगों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी को चुना है। " उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव में दो सौ से अधिक सीटें जीतने का दावा नाकाम होने पर भाजपा साजिश रचने में व्यस्त है और राज्यपाल भगवा खेमे के भोंपू की तरह बर्ताव कर रहे हैं। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
इंडियन मेडिकल कॉलेज ने भी गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग की है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, जूनियर डॉक्टर के एक फोरम के प्रवक्ता डॉक्टर अरिंदम दत्ता ने कहा, 'जिस तरह गुरुवार को सीएम ममता बनर्जी ने डॉक्टरों से बात की, वैसी बात नहीं करनी चाहिए थी. ' बता दें कि ममता बनर्जी ने अपने भाषण में बाहरी लोगों का जिक्र करते हुए बीजेपी और सीपीआई पर इस मुद्दे को भड़काने का आरोप लगाया था.
पश्चिम बंगाल में जूनियर डॉक्टर के साथ मारपीट के बाद शुरू हुई हड़ताल की आंच अब दिल्ली समेत बाकी राज्यों तक पहुंच गई है. बंगाल के डॉक्टर्स के सपोर्ट में दिल्ली के साथ ही मुंबई, पंजाब, केरल, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश में भी डॉक्टरों ने काम करने से इनकार कर दिया है. यहां के अस्पतालों में ओपीडी बंद होने से मरीजों का बुरा हाल है. वहीं, बंगाल में ममता सरकार से नाराज़ होकर अब तक 43 डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं. पश्चिम बंगाल में चल रही डॉक्टरों की हड़ताल के बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार को कहा है कि वह तुरंत हड़ताल कर रहे डॉक्टरों से बातचीत करे और मामले को सुलझाए.
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन (DMA) ने हड़ताल बुलाई है, जिसका असर AIIMS जैसे बड़े अस्पतालों में देखने को मिल रहा है. एम्स के बाहर मरीजों और तीमारदारों का जमावड़ा लगा है. इसके अलावा मुंबई में भी डॉक्टरों ने काम करने से इनकार कर दिया है. मुंबई के डॉक्टरों का कहना है कि वह साइलेंट प्रोटेस्ट कर रहे हैं. हालांकि, ये डॉक्टर्स इमजेंसी केस हैंडल कर रहे हैं.
बता दें कि पश्चिम बंगाल के डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चार घंटे में हड़ताल खत्म करने के अल्टीमेटम दिए जाने के बावजूद अपनी हड़ताल खत्म करने से इनकार कर दिया. डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री पर धमकी देने का आरोप लगाया है, जिसके बाद ममता ने डॉक्टरों से मरीजों की देखभाल करने का निवेदन किया है.
| इंडियन मेडिकल कॉलेज ने भी गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग की है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, जूनियर डॉक्टर के एक फोरम के प्रवक्ता डॉक्टर अरिंदम दत्ता ने कहा, 'जिस तरह गुरुवार को सीएम ममता बनर्जी ने डॉक्टरों से बात की, वैसी बात नहीं करनी चाहिए थी. ' बता दें कि ममता बनर्जी ने अपने भाषण में बाहरी लोगों का जिक्र करते हुए बीजेपी और सीपीआई पर इस मुद्दे को भड़काने का आरोप लगाया था. पश्चिम बंगाल में जूनियर डॉक्टर के साथ मारपीट के बाद शुरू हुई हड़ताल की आंच अब दिल्ली समेत बाकी राज्यों तक पहुंच गई है. बंगाल के डॉक्टर्स के सपोर्ट में दिल्ली के साथ ही मुंबई, पंजाब, केरल, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश में भी डॉक्टरों ने काम करने से इनकार कर दिया है. यहां के अस्पतालों में ओपीडी बंद होने से मरीजों का बुरा हाल है. वहीं, बंगाल में ममता सरकार से नाराज़ होकर अब तक तैंतालीस डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं. पश्चिम बंगाल में चल रही डॉक्टरों की हड़ताल के बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार को कहा है कि वह तुरंत हड़ताल कर रहे डॉक्टरों से बातचीत करे और मामले को सुलझाए. दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने हड़ताल बुलाई है, जिसका असर AIIMS जैसे बड़े अस्पतालों में देखने को मिल रहा है. एम्स के बाहर मरीजों और तीमारदारों का जमावड़ा लगा है. इसके अलावा मुंबई में भी डॉक्टरों ने काम करने से इनकार कर दिया है. मुंबई के डॉक्टरों का कहना है कि वह साइलेंट प्रोटेस्ट कर रहे हैं. हालांकि, ये डॉक्टर्स इमजेंसी केस हैंडल कर रहे हैं. बता दें कि पश्चिम बंगाल के डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चार घंटे में हड़ताल खत्म करने के अल्टीमेटम दिए जाने के बावजूद अपनी हड़ताल खत्म करने से इनकार कर दिया. डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री पर धमकी देने का आरोप लगाया है, जिसके बाद ममता ने डॉक्टरों से मरीजों की देखभाल करने का निवेदन किया है. |
Suppression of Im- KARTIKA 30, 1900 (SAKA) moral Traffic in Women & Girls (Amdt.) Bill
माननीय मंत्री बंगाल से भाते हैं, उन्हें तो काफी ज्ञान होगा 0 साल से, 15 साल तक की बहुत विधवाएं हैं, उनका कोई स्थान समाज में नहीं है, कोई सम्मान नहीं है वह शादी और विवाहों में शामिल नहीं हो सकतीं। अगर वे किसी पर्व में चली जायें, तो उसको पाप माना जाता है। अगर उन में लज्जा होती है, तो वे घर से निकल कर मथुरा, वृंदावन या काशी चली जाती हैं, नहीं तो उनके लिए एक मार्ग था -- वेश्यालय में जाना, और अगर किसी विधर्मी की शरण मिल जाये, तो वहां चली जाती हैं ।
हस का दूसरा बड़ा कारण है गरीबी, निर्धनता के कारण लोग-बाग बहनों को ले जाते हैं । भाज भी - प्राजादी के तीस साल बाद भी - - हमार जो सब से गरीब भाई ट्राइबल एरिया में रहते हैं, चाहे वह केरल हो, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश या उड़ीसा हो, लोग उन की लड़कियों को प्रलोभन के बल पर, उन की गरीबी का नाजायज फायदा उठा कर ले भाते हैं और बाकायदा गाय-भैस और बकरियों की तरह बाजार में उन की बिक्री हो रही है । और केवल भारतीय बाजार में ही नहीं, भारतवर्ष की नारी विदेशों के बाजार में भी बेची जा रही है, इससे ज्यादा शर्म की बात हमारे लिए क्या होगी ? बम्बई और हैदराबाद में विदेशी धनी लोग अपनी थैलियां ले कर जाते हैं, शादी का ड्रामा होता है, और लड़कियों को कहीं ले जा कर विदेशों में बेचा जाता है। लड़कियों को करल से सीधे यरोप में ले जाया जाता है । हम ने सरकार से कई बार कहा है कि वह यह पता लगाने के लिए कमीशन नियुक्त करें कि वे लड़कियां कहां जा रही हैं। नौकरी के नाम पर, परमिट ले कर, लड़कियों को यहां से एक्सपोर्ट किया जा रहा है । जिस देश की लड़कियां बाहर बिकें, उस देश में इस प्रकार का लंगड़ा-लूला विधेयक आये, यह देख कर मुझे हादिक वेदना हुई है । रुलिंग पार्टी का सदस्य होने के नाते मैं इस विधेयक की भावना का समर्थन कर रहा
। इस की भावना तो प्रच्छी है, मरकार का इरादा तो है, लेकिन बह इरादा पूरा हो सकेगा, मुझे इस में संदेह हे ।
समाचारपत्नों में बयान भाये हैं कि देहरावून से भागे तो बाकायदा लड़कियां बिकती हैं। वेश्याओं के दलाल वहां जाते हैं और लड़कियों को खरीद कर ले भाते हैं । क्या सरकार को इन बातों की जानकारी नहीं है ? अगर सरकार को इस बात की जानकारी नहीं है, भौर साधारण सामाजिक कार्यकर्तामों को जानकारी है, तो मैं समझता हूं कि सरकार की मशीनरी में दोष है, और उस दोष का सुधार सब से पहले होना चाहिए ।
अभी बम्बई की एक कहानी सामने आई है कि इस देश में कुछ गिरोह घूम रहे हैं, जो सड़क पर खेलती हुई लड़कियों को उठा कर ले जाते हैं, बम्बई में उन को घर में पालते हैं और नौजवान होने पर वे लड़कियां बाजार में fast के लिए
चली जाती हैं, जैसे हरियाणा से छोटे बछड़े को ले जाते हैं और बड़ा होने पर, उसको बेच देते हैं। इस प्रकार जिन लड़कियों का किडनेपिंग होता है, वे सब बेश्यालयों में चली जाती हैं ।
देश में अब नये वेश्यालय बने हैं, क्या सरकार को उनका ज्ञान है ? डिफेंस कालोनी, फ्रेंड्स कालोनी, बड़ी बड़ी पोश कालोनीज में लोगों ने वाकायदा मकान किराये पर लिए हुए हैं । वहा॑ पर भले घरों की लड़कियों को बहका बहका कर लोग ले जाते हैं और वह लोग जो अपने सो-कारुड नेता, सो-काल्ड धनी या समाज के बड़े भारी अगुवा कहलाते हैं वह वहां जाते हैं । यह सब जानकारी पुलिस को है, पेपर्स में यह बात प्रा रही है । तो आप इन नये वेश्यालयों का क्या करेंगे ? हिन्दुस्तान टाइम्स में एक बार काल-गर्ल्स के बारे में निकला । श्राप को जानकारी होगी काल-गर्ल्स के बारे में । कालेज की लड़कियां होती हैं, बाकायदा यह कहा जाता है कि विशेष फोन नम्बर पर उन को काल कीजिए और होटल में बुला लीजिए । वहां से बाकायदा संकेत मिलता है कि फलां रंग की साड़ी पहने होगी और उस की यह ड्रेस होगी । काल गर्ल का काम करने वाली उन लड़कियों से प्रेस रेप्रेजेन्टेटिव्ज ने बाकायदा इंटरव्यू लिया कि तुम को यह शौक क्यों है ? कुछ ने कहा कि गरीबी के कारण वह ऐसा करती हैं । कालेज का खर्च प्रदा नहीं कर सकती, इसलिए वह काल गर्ल बनीं । कुछ ने कहा कि हम शौक से बनीं । हम बड़े घर की लड़कियां हैं, हमें पैसे की कमी नहीं, लेकिन हमें शौक है नये नये लड़कों से मिलने का । इस प्रकार से ये काल गर्ल्स वेश्याओं का कार्य कर रही हैं ।
एक जानकारी और देदं आप को बड़े बड़े होटलों में पैसे वाले जिन्होंने ब्लैक मार्केटिंग का पैसा जमा किया है, कमरे रिजर्व कर के रखते हैं और वहां पर ले जाते हैं लड़कियों को । हिन्दुस्तान टाइम्स में एक बार निकला था -- सेकेंड वाइब्ज । मंत्री महोदय जानते हैं यह सेकेंड वाइब्ज कौन हैं ? दिल्ली में मेकेंड वाइफ स्टेनों के नाम पर प्राइवेट सेक्रेट के नाम पर लोग रखे हुए हैं । बेचारी गरीब घरों की लड़कियां मजबूर हो कर चली जाती हैं
श्री मही लाल (बिजनौर) : त्यागी जी, गरीबों को अपमानित मत करो ।
श्री प्रोम प्रकाश त्यागो : यही हो रहा है । मैं यही कह रहा हूँ कि मजबूरी में ये लड़कियां जा कर वहां काम करती हैं । (व्यवधान).. जरा एक मिनट ठहरिए, मैंने जीवन निकाल दिया है इसी में ।
मैं यह कहना चाहता हूं कि जो ये कारण हैं इन कारणों को दूर किए बिना सरकार इस दोष को खत्म नहीं कर सकती ।
| Suppression of Im- KARTIKA तीस, एक हज़ार नौ सौ moral Traffic in Women & Girls Bill माननीय मंत्री बंगाल से भाते हैं, उन्हें तो काफी ज्ञान होगा शून्य साल से, पंद्रह साल तक की बहुत विधवाएं हैं, उनका कोई स्थान समाज में नहीं है, कोई सम्मान नहीं है वह शादी और विवाहों में शामिल नहीं हो सकतीं। अगर वे किसी पर्व में चली जायें, तो उसको पाप माना जाता है। अगर उन में लज्जा होती है, तो वे घर से निकल कर मथुरा, वृंदावन या काशी चली जाती हैं, नहीं तो उनके लिए एक मार्ग था -- वेश्यालय में जाना, और अगर किसी विधर्मी की शरण मिल जाये, तो वहां चली जाती हैं । हस का दूसरा बड़ा कारण है गरीबी, निर्धनता के कारण लोग-बाग बहनों को ले जाते हैं । भाज भी - प्राजादी के तीस साल बाद भी - - हमार जो सब से गरीब भाई ट्राइबल एरिया में रहते हैं, चाहे वह केरल हो, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश या उड़ीसा हो, लोग उन की लड़कियों को प्रलोभन के बल पर, उन की गरीबी का नाजायज फायदा उठा कर ले भाते हैं और बाकायदा गाय-भैस और बकरियों की तरह बाजार में उन की बिक्री हो रही है । और केवल भारतीय बाजार में ही नहीं, भारतवर्ष की नारी विदेशों के बाजार में भी बेची जा रही है, इससे ज्यादा शर्म की बात हमारे लिए क्या होगी ? बम्बई और हैदराबाद में विदेशी धनी लोग अपनी थैलियां ले कर जाते हैं, शादी का ड्रामा होता है, और लड़कियों को कहीं ले जा कर विदेशों में बेचा जाता है। लड़कियों को करल से सीधे यरोप में ले जाया जाता है । हम ने सरकार से कई बार कहा है कि वह यह पता लगाने के लिए कमीशन नियुक्त करें कि वे लड़कियां कहां जा रही हैं। नौकरी के नाम पर, परमिट ले कर, लड़कियों को यहां से एक्सपोर्ट किया जा रहा है । जिस देश की लड़कियां बाहर बिकें, उस देश में इस प्रकार का लंगड़ा-लूला विधेयक आये, यह देख कर मुझे हादिक वेदना हुई है । रुलिंग पार्टी का सदस्य होने के नाते मैं इस विधेयक की भावना का समर्थन कर रहा । इस की भावना तो प्रच्छी है, मरकार का इरादा तो है, लेकिन बह इरादा पूरा हो सकेगा, मुझे इस में संदेह हे । समाचारपत्नों में बयान भाये हैं कि देहरावून से भागे तो बाकायदा लड़कियां बिकती हैं। वेश्याओं के दलाल वहां जाते हैं और लड़कियों को खरीद कर ले भाते हैं । क्या सरकार को इन बातों की जानकारी नहीं है ? अगर सरकार को इस बात की जानकारी नहीं है, भौर साधारण सामाजिक कार्यकर्तामों को जानकारी है, तो मैं समझता हूं कि सरकार की मशीनरी में दोष है, और उस दोष का सुधार सब से पहले होना चाहिए । अभी बम्बई की एक कहानी सामने आई है कि इस देश में कुछ गिरोह घूम रहे हैं, जो सड़क पर खेलती हुई लड़कियों को उठा कर ले जाते हैं, बम्बई में उन को घर में पालते हैं और नौजवान होने पर वे लड़कियां बाजार में fast के लिए चली जाती हैं, जैसे हरियाणा से छोटे बछड़े को ले जाते हैं और बड़ा होने पर, उसको बेच देते हैं। इस प्रकार जिन लड़कियों का किडनेपिंग होता है, वे सब बेश्यालयों में चली जाती हैं । देश में अब नये वेश्यालय बने हैं, क्या सरकार को उनका ज्ञान है ? डिफेंस कालोनी, फ्रेंड्स कालोनी, बड़ी बड़ी पोश कालोनीज में लोगों ने वाकायदा मकान किराये पर लिए हुए हैं । वहा॑ पर भले घरों की लड़कियों को बहका बहका कर लोग ले जाते हैं और वह लोग जो अपने सो-कारुड नेता, सो-काल्ड धनी या समाज के बड़े भारी अगुवा कहलाते हैं वह वहां जाते हैं । यह सब जानकारी पुलिस को है, पेपर्स में यह बात प्रा रही है । तो आप इन नये वेश्यालयों का क्या करेंगे ? हिन्दुस्तान टाइम्स में एक बार काल-गर्ल्स के बारे में निकला । श्राप को जानकारी होगी काल-गर्ल्स के बारे में । कालेज की लड़कियां होती हैं, बाकायदा यह कहा जाता है कि विशेष फोन नम्बर पर उन को काल कीजिए और होटल में बुला लीजिए । वहां से बाकायदा संकेत मिलता है कि फलां रंग की साड़ी पहने होगी और उस की यह ड्रेस होगी । काल गर्ल का काम करने वाली उन लड़कियों से प्रेस रेप्रेजेन्टेटिव्ज ने बाकायदा इंटरव्यू लिया कि तुम को यह शौक क्यों है ? कुछ ने कहा कि गरीबी के कारण वह ऐसा करती हैं । कालेज का खर्च प्रदा नहीं कर सकती, इसलिए वह काल गर्ल बनीं । कुछ ने कहा कि हम शौक से बनीं । हम बड़े घर की लड़कियां हैं, हमें पैसे की कमी नहीं, लेकिन हमें शौक है नये नये लड़कों से मिलने का । इस प्रकार से ये काल गर्ल्स वेश्याओं का कार्य कर रही हैं । एक जानकारी और देदं आप को बड़े बड़े होटलों में पैसे वाले जिन्होंने ब्लैक मार्केटिंग का पैसा जमा किया है, कमरे रिजर्व कर के रखते हैं और वहां पर ले जाते हैं लड़कियों को । हिन्दुस्तान टाइम्स में एक बार निकला था -- सेकेंड वाइब्ज । मंत्री महोदय जानते हैं यह सेकेंड वाइब्ज कौन हैं ? दिल्ली में मेकेंड वाइफ स्टेनों के नाम पर प्राइवेट सेक्रेट के नाम पर लोग रखे हुए हैं । बेचारी गरीब घरों की लड़कियां मजबूर हो कर चली जाती हैं श्री मही लाल : त्यागी जी, गरीबों को अपमानित मत करो । श्री प्रोम प्रकाश त्यागो : यही हो रहा है । मैं यही कह रहा हूँ कि मजबूरी में ये लड़कियां जा कर वहां काम करती हैं । .. जरा एक मिनट ठहरिए, मैंने जीवन निकाल दिया है इसी में । मैं यह कहना चाहता हूं कि जो ये कारण हैं इन कारणों को दूर किए बिना सरकार इस दोष को खत्म नहीं कर सकती । |
कोलकाता (ईएमएस)। कप्तान रहे महेन्द्र सिंह धोनी ने विजय हजारे ट्रॉफी में अपनी टीम झारखंड को पहली बार जीत दिलाई है। धोनी की शानदार पारी की सहायता से झारखंड ने छत्तीसगढ़ को 78 रनों से हराया। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी झारखंड की टीम को कठिन हालातों से निकालकर धोनी ने एक अच्छे स्कोर तक पहुंचाया।
जब वह बल्लेबाजी करने आये थे तब टीम का स्कोर 14 ओवरों में 43 रनों पर चार विकेट था। इसके बाद धोनी ने केवल 107 गेंदों में 129 रन बनाकर हालात बदल दिये। इस दौरान शाहबाज नदीम के साथ उनकी 151 रनों की शाझेदारी हुई। वहीं नदीम ने 53 रन बनाये। एस गुप्ता के एक ओवर में तो धोनी ने दो छक्के और दो चौके की सहायता से 23 रन बनाये। निर्धारित 50 ओवरों में नौ विकेट के नुकसान पर झारखंड ने 243 रन बनाये। इसके बाद जीत के लिए 244 रनों का पीछा करने उतरी छत्तीसगढ़ की पूरी टीम 38. 4 ओवरों में 165 रनों पर ही सिमट गई।
वरुण ऐरन और शाहबाज नदीम ने 3-3 विकेट लिये जबकि विकास सिंह और राहुल शुक्ला को 1-1 विकेट मिला। छत्तीसगढ़ के कप्तान मोहम्मद कैफ और शुभम अग्रवाल रन आउट हुए। छत्तीसगढ़ की ओर से सबसे ज्यादा 24 रन अभुदय कांत सिंह ने बनाये। मैच के दौरान धोनी की एक झलक पाने के लिए क्रिकेटप्रेमी उमड़ पड़े।
| कोलकाता । कप्तान रहे महेन्द्र सिंह धोनी ने विजय हजारे ट्रॉफी में अपनी टीम झारखंड को पहली बार जीत दिलाई है। धोनी की शानदार पारी की सहायता से झारखंड ने छत्तीसगढ़ को अठहत्तर रनों से हराया। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी झारखंड की टीम को कठिन हालातों से निकालकर धोनी ने एक अच्छे स्कोर तक पहुंचाया। जब वह बल्लेबाजी करने आये थे तब टीम का स्कोर चौदह ओवरों में तैंतालीस रनों पर चार विकेट था। इसके बाद धोनी ने केवल एक सौ सात गेंदों में एक सौ उनतीस रन बनाकर हालात बदल दिये। इस दौरान शाहबाज नदीम के साथ उनकी एक सौ इक्यावन रनों की शाझेदारी हुई। वहीं नदीम ने तिरेपन रन बनाये। एस गुप्ता के एक ओवर में तो धोनी ने दो छक्के और दो चौके की सहायता से तेईस रन बनाये। निर्धारित पचास ओवरों में नौ विकेट के नुकसान पर झारखंड ने दो सौ तैंतालीस रन बनाये। इसके बाद जीत के लिए दो सौ चौंतालीस रनों का पीछा करने उतरी छत्तीसगढ़ की पूरी टीम अड़तीस. चार ओवरों में एक सौ पैंसठ रनों पर ही सिमट गई। वरुण ऐरन और शाहबाज नदीम ने तीन-तीन विकेट लिये जबकि विकास सिंह और राहुल शुक्ला को एक-एक विकेट मिला। छत्तीसगढ़ के कप्तान मोहम्मद कैफ और शुभम अग्रवाल रन आउट हुए। छत्तीसगढ़ की ओर से सबसे ज्यादा चौबीस रन अभुदय कांत सिंह ने बनाये। मैच के दौरान धोनी की एक झलक पाने के लिए क्रिकेटप्रेमी उमड़ पड़े। |
परीक्षण इलेक्ट्रॉनिक चारा BriteCloud 218 F-16 सेनानी डेनिश वायु सेना पर पारित हुआ। विमान की रक्षा प्रणालियों ने पाया कि यह सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल मार्गदर्शन प्रणाली पर स्थित है। उसके बाद, विमान से एक गलत लक्ष्य जारी किया गया, और मिसाइल मार्गदर्शन प्रणाली "ब्राइटक्लाउड एक्सएनयूएमएक्स" पर स्विच किया गया।
लियोनार्डो इंगित करता है कि BriteCloud 218 पहली झूठी इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य प्रणाली है जिसे फ़ील्ड परीक्षण किया गया है। अपने छोटे आकार के कारण, "लालच" झूठे थर्मल लक्ष्यों के लिए मानक लॉन्चर के साथ संगत है और इसके लिए लड़ाकू प्रणालियों के संशोधन की आवश्यकता नहीं है। जब एक BriteCloud विमान से अलग हो जाता है, तो 218 शक्तिशाली रेडियो संकेतों का उत्सर्जन करना शुरू कर देता है, और मिसाइल मार्गदर्शन प्रणालियों को इसे पुनर्निर्देशित किया जाता है।
यह देखते हुए कि F-16 फाइटर जेट F-15 के समान झूठे लक्ष्य के लिए एक ही प्रकार के लांचर का उपयोग करते हैं, साथ ही साथ कई अन्य विमान भी हैं, लियोनार्डो को Briteiteoud 218 के लिए बड़ी मात्रा में ऑर्डर प्राप्त होने की उम्मीद है।
| परीक्षण इलेक्ट्रॉनिक चारा BriteCloud दो सौ अट्ठारह F-सोलह सेनानी डेनिश वायु सेना पर पारित हुआ। विमान की रक्षा प्रणालियों ने पाया कि यह सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल मार्गदर्शन प्रणाली पर स्थित है। उसके बाद, विमान से एक गलत लक्ष्य जारी किया गया, और मिसाइल मार्गदर्शन प्रणाली "ब्राइटक्लाउड एक्सएनयूएमएक्स" पर स्विच किया गया। लियोनार्डो इंगित करता है कि BriteCloud दो सौ अट्ठारह पहली झूठी इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य प्रणाली है जिसे फ़ील्ड परीक्षण किया गया है। अपने छोटे आकार के कारण, "लालच" झूठे थर्मल लक्ष्यों के लिए मानक लॉन्चर के साथ संगत है और इसके लिए लड़ाकू प्रणालियों के संशोधन की आवश्यकता नहीं है। जब एक BriteCloud विमान से अलग हो जाता है, तो दो सौ अट्ठारह शक्तिशाली रेडियो संकेतों का उत्सर्जन करना शुरू कर देता है, और मिसाइल मार्गदर्शन प्रणालियों को इसे पुनर्निर्देशित किया जाता है। यह देखते हुए कि F-सोलह फाइटर जेट F-पंद्रह के समान झूठे लक्ष्य के लिए एक ही प्रकार के लांचर का उपयोग करते हैं, साथ ही साथ कई अन्य विमान भी हैं, लियोनार्डो को Briteiteoud दो सौ अट्ठारह के लिए बड़ी मात्रा में ऑर्डर प्राप्त होने की उम्मीद है। |
राग बनकर पूर्ण वैराग्य से परोपकार होता है, फिर जय और हार से हर्प-शोक नहीं होता। उस वक्त आनरेरी काम होता है। ईश्वरीय प्रेरणा से ही सब कुछ हुआ करता है । पर जब तक ऐसी अवस्था न आये, शास्त्रानुसार कर्म करते हुए उसके फल को प्रभु-अर्पण करते रहो, धीरे-धीरे सब भेद खुल जावेंगे । चित्त पवित्र होने पर लीलाधार प्रभु का क्रीड़ास्थल वन जावेगा ।
स्वामोजी महाराज का स्वास्थ्य बिगड़ा हुआ था, जुकाम सुधरने में नहीं आ रहा था । स्थान और जलवायु परिवर्तन करने के लिये स्वामी नारायणहरिजी और अन्य सत्संगी कहते रहते थे। लाचार, सितम्बर मास में दशहरा के लगभग चल पड़े । चलने से पहले, कई एक राज-कर्मचारी महाराजजी से महाराजा साहब के दर्शनों के आने की आज्ञा माँगते रहे। पहले तो स्वामीजी कहते रहे कि, 'उनके यहाँ आने से क्या लाभ होगा, ' फिर जिस दिन चलना था उस दिन कह दिया कि "यदि हम रुक गये तो महाराजा साहब कला सकते हैं । " पर आप उसही दिन वहाँ से चल दिये। दशहरा के दिनों में रावलपिण्डी में रहे । यहाँ एक साधु-स्थान पर भी सत्संगियों सहित पहुँचे । महाराजजी ने, बड़ी नम्रता से सबको जाकर प्रणाम किया, मानां खुद भी गृहस्थी हैं। चुपचाप बैठकर दर्शन करके चले ये भी गरमी तो थी, पर शरीर को सुधारने के विचार से शीघ्र जालन्धर को चल दिये ।
उन्नीसवाँ प्रकरण (चित्र)
स्वास्थ्य के बिगड़े रहने से इस बार आपका चित्त बहुत सुस्त था । एक पत्र में अपने प्रो० सदानन्दजी को कश्मीर से लिखा था - " व चित्त रिटायर होने को करता है ; लोग चात भी नहीं समझते । यही चित्त चाहता है कि बद्रीनारायण की तरफ जाकर शरीर छूटने तक निर्वाह करता रहूँ ; पर होना वही है, जो ईश्वर को मनजूर है, सो मनोराज्य करना निरर्थक है। जैसा प्रारब्ध है, वैसा ही भोगना पड़ेगा ।" ऐसी ही धारणा को आप सदैव मन में धारण किये हुए थे । इसी के अनुसार ही यहाँ आए थे । मुलतान के सत्संगो मुलतान आने के लिये बहुत प्रेरणा कर रहे थे, पर मुलतान के नाम से ही चित्त में घृणा के भाव पैदा होते थे । वहाँ के वायु-मण्डल में घृणा पैदा करनेवाले चिन्ह नजर आते थे । कुछ भयानक और भद्दे दृश्य भी दिखाई दिये, मानों कोई पशु अथवा मनुष्य खून में लिथड़े पड़े हैं। आपका निर्मल चित्त किसी श्रगामी अनिष्ट की सूचना दे रहा था । प्रो० सदानन्दजी को जब यह सब वृत्तांत ज्ञात हुआ, तो उन्होंने भी मुलतान न आने की राय दी । थोड़े दिन पोछे मुलतान में भयानक रूप से प्लेग फूट पड़ी, ऐसी आशंका तो पहले ही थी। प्रो० कृष्णकुमारजी कानपुर के लिये. प्रार्थना कर रहे थे, पर वहाँ की स्मृति से भी चित्त सुस्त हो जाता था । ला० कर्मचन्दजी, जब स्वामीजी अभी कश्मीर में ही थे, तो जालन्धर आकर ठहरने की याचना कर रहे थे । लाचार, शरीर का भोग जान, इधर के सत्संगियों के अनुरोध पर आपने यहीं रहने का निश्चय कर लिया । | राग बनकर पूर्ण वैराग्य से परोपकार होता है, फिर जय और हार से हर्प-शोक नहीं होता। उस वक्त आनरेरी काम होता है। ईश्वरीय प्रेरणा से ही सब कुछ हुआ करता है । पर जब तक ऐसी अवस्था न आये, शास्त्रानुसार कर्म करते हुए उसके फल को प्रभु-अर्पण करते रहो, धीरे-धीरे सब भेद खुल जावेंगे । चित्त पवित्र होने पर लीलाधार प्रभु का क्रीड़ास्थल वन जावेगा । स्वामोजी महाराज का स्वास्थ्य बिगड़ा हुआ था, जुकाम सुधरने में नहीं आ रहा था । स्थान और जलवायु परिवर्तन करने के लिये स्वामी नारायणहरिजी और अन्य सत्संगी कहते रहते थे। लाचार, सितम्बर मास में दशहरा के लगभग चल पड़े । चलने से पहले, कई एक राज-कर्मचारी महाराजजी से महाराजा साहब के दर्शनों के आने की आज्ञा माँगते रहे। पहले तो स्वामीजी कहते रहे कि, 'उनके यहाँ आने से क्या लाभ होगा, ' फिर जिस दिन चलना था उस दिन कह दिया कि "यदि हम रुक गये तो महाराजा साहब कला सकते हैं । " पर आप उसही दिन वहाँ से चल दिये। दशहरा के दिनों में रावलपिण्डी में रहे । यहाँ एक साधु-स्थान पर भी सत्संगियों सहित पहुँचे । महाराजजी ने, बड़ी नम्रता से सबको जाकर प्रणाम किया, मानां खुद भी गृहस्थी हैं। चुपचाप बैठकर दर्शन करके चले ये भी गरमी तो थी, पर शरीर को सुधारने के विचार से शीघ्र जालन्धर को चल दिये । उन्नीसवाँ प्रकरण स्वास्थ्य के बिगड़े रहने से इस बार आपका चित्त बहुत सुस्त था । एक पत्र में अपने प्रोशून्य सदानन्दजी को कश्मीर से लिखा था - " व चित्त रिटायर होने को करता है ; लोग चात भी नहीं समझते । यही चित्त चाहता है कि बद्रीनारायण की तरफ जाकर शरीर छूटने तक निर्वाह करता रहूँ ; पर होना वही है, जो ईश्वर को मनजूर है, सो मनोराज्य करना निरर्थक है। जैसा प्रारब्ध है, वैसा ही भोगना पड़ेगा ।" ऐसी ही धारणा को आप सदैव मन में धारण किये हुए थे । इसी के अनुसार ही यहाँ आए थे । मुलतान के सत्संगो मुलतान आने के लिये बहुत प्रेरणा कर रहे थे, पर मुलतान के नाम से ही चित्त में घृणा के भाव पैदा होते थे । वहाँ के वायु-मण्डल में घृणा पैदा करनेवाले चिन्ह नजर आते थे । कुछ भयानक और भद्दे दृश्य भी दिखाई दिये, मानों कोई पशु अथवा मनुष्य खून में लिथड़े पड़े हैं। आपका निर्मल चित्त किसी श्रगामी अनिष्ट की सूचना दे रहा था । प्रोशून्य सदानन्दजी को जब यह सब वृत्तांत ज्ञात हुआ, तो उन्होंने भी मुलतान न आने की राय दी । थोड़े दिन पोछे मुलतान में भयानक रूप से प्लेग फूट पड़ी, ऐसी आशंका तो पहले ही थी। प्रोशून्य कृष्णकुमारजी कानपुर के लिये. प्रार्थना कर रहे थे, पर वहाँ की स्मृति से भी चित्त सुस्त हो जाता था । लाशून्य कर्मचन्दजी, जब स्वामीजी अभी कश्मीर में ही थे, तो जालन्धर आकर ठहरने की याचना कर रहे थे । लाचार, शरीर का भोग जान, इधर के सत्संगियों के अनुरोध पर आपने यहीं रहने का निश्चय कर लिया । |
भारत की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी रिलायंस जियो ने अपने यूजर्स को बड़ी समाचार देते हुए घोषणा की है कि इसके JioCinema प्लेटफॉर्म पर भारतीय प्रीमियर लीग (IPL) 2023 का सीधा प्रसारण किया जाएगा. 31 मार्च से प्रारम्भ हो रहे क्रिकेट वर्ल्ड के इस बड़े आयोजन को रिलायंस जियो यूजर्स 4K (UltraHD) रेजॉल्यूशन में स्ट्रीम कर सकेंगे. इससे पहले तक IPL के स्ट्रीमिंग राइट्स Disney+ Hotstar के पास थे और IPL मैच देखने के लिए भुगतान करना पड़ता था.
JioCinema ने बीते दिनों FIFA World Cup का सीधा प्रसारण अपने प्लेटफॉर्म पर किया था और इस दौरान हुए मैच यूजर्स भिन्न-भिन्न कैमरा एंगल्स से देख सकते थे. दिलचस्प बात यह है कि जिन यूजर्स के पास JioPhone फीचर टेलीफोन है, वे उसमें भी IPL देख पाएंगे क्योंकि जियोफोन में पहले ही जियोसिनेमा ऐप का सपोर्ट दिया गया है. यूजर्स को बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के IPL देखने का मौका मिलेगा और वे बड़ी स्क्रीन पर भी 4K क्वॉलिटी में स्ट्रीमिंग कर सकेंगे.
कंपनी ने घोषणा की है कि JioCinema यूजर्स को 12 भाषाओं में IPL की स्ट्रीमिंग का विकल्प दिया जाएगा, जिनमें अंग्रेजी, तमिल, हिंदी, तेलुगु, मराठी, गुजराती, बंगाली और भोजपुरी वगैरह शामिल हैं. अपनी पसंद की भाषा चुनने पर ना केवल कॉमेंट्री उस भाषा में सुनाई देगी बल्कि स्क्रीन पर दिखने वाली जानकारी और आंकड़े भी चुनी गए भाषा में ही दिखने लगेंगे. JioCinema को मोबाइल डिवाइसेज के अतिरिक्त कंप्यूटर और स्मार्ट टीवी जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी ऐक्सेस किया जा सकता है.
संकेत मिले हैं कि कंपनी अगले कुछ हफ्ते में कंपनी अपना स्ट्रीमिंग एक्सेसरी भी लॉन्च कर सकती है. इसकी सहायता से उन नॉन-स्मार्ट टीवी में टेलीफोन की सहायता से कंटेंट स्ट्रीम किया जा सकेगा, जिनमें HDMI पोर्ट नहीं मिलता. कंपनी ने इस डिवाइस के बारे में कुछ कन्फर्म नहीं किया है लेकिन इसकी मूल्य 2,000 रुपये से कम रखी जा सकती है. इसके अतिरिक्त जियो खास वर्चुअल रिएलिटी ग्लासेज JioGlass पर भी काम कर रही है, जिनकी लॉन्च टाइमलाइन सामने नहीं आई है.
| भारत की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी रिलायंस जियो ने अपने यूजर्स को बड़ी समाचार देते हुए घोषणा की है कि इसके JioCinema प्लेटफॉर्म पर भारतीय प्रीमियर लीग दो हज़ार तेईस का सीधा प्रसारण किया जाएगा. इकतीस मार्च से प्रारम्भ हो रहे क्रिकेट वर्ल्ड के इस बड़े आयोजन को रिलायंस जियो यूजर्स चार केल्विन रेजॉल्यूशन में स्ट्रीम कर सकेंगे. इससे पहले तक IPL के स्ट्रीमिंग राइट्स Disney+ Hotstar के पास थे और IPL मैच देखने के लिए भुगतान करना पड़ता था. JioCinema ने बीते दिनों FIFA World Cup का सीधा प्रसारण अपने प्लेटफॉर्म पर किया था और इस दौरान हुए मैच यूजर्स भिन्न-भिन्न कैमरा एंगल्स से देख सकते थे. दिलचस्प बात यह है कि जिन यूजर्स के पास JioPhone फीचर टेलीफोन है, वे उसमें भी IPL देख पाएंगे क्योंकि जियोफोन में पहले ही जियोसिनेमा ऐप का सपोर्ट दिया गया है. यूजर्स को बिना किसी अतिरिक्त भुगतान के IPL देखने का मौका मिलेगा और वे बड़ी स्क्रीन पर भी चार केल्विन क्वॉलिटी में स्ट्रीमिंग कर सकेंगे. कंपनी ने घोषणा की है कि JioCinema यूजर्स को बारह भाषाओं में IPL की स्ट्रीमिंग का विकल्प दिया जाएगा, जिनमें अंग्रेजी, तमिल, हिंदी, तेलुगु, मराठी, गुजराती, बंगाली और भोजपुरी वगैरह शामिल हैं. अपनी पसंद की भाषा चुनने पर ना केवल कॉमेंट्री उस भाषा में सुनाई देगी बल्कि स्क्रीन पर दिखने वाली जानकारी और आंकड़े भी चुनी गए भाषा में ही दिखने लगेंगे. JioCinema को मोबाइल डिवाइसेज के अतिरिक्त कंप्यूटर और स्मार्ट टीवी जैसे प्लेटफॉर्म्स पर भी ऐक्सेस किया जा सकता है. संकेत मिले हैं कि कंपनी अगले कुछ हफ्ते में कंपनी अपना स्ट्रीमिंग एक्सेसरी भी लॉन्च कर सकती है. इसकी सहायता से उन नॉन-स्मार्ट टीवी में टेलीफोन की सहायता से कंटेंट स्ट्रीम किया जा सकेगा, जिनमें HDMI पोर्ट नहीं मिलता. कंपनी ने इस डिवाइस के बारे में कुछ कन्फर्म नहीं किया है लेकिन इसकी मूल्य दो,शून्य रुपयापये से कम रखी जा सकती है. इसके अतिरिक्त जियो खास वर्चुअल रिएलिटी ग्लासेज JioGlass पर भी काम कर रही है, जिनकी लॉन्च टाइमलाइन सामने नहीं आई है. |
महाराष्ट्र के पुणे में रविवार को पुलिस और वारकरी भक्तों के बीच बहस हो गई। इसके बाद आरोप लगे कि पुलिस ने भक्तों पर लाठीचार्ज किया है। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
महाराष्ट्र पुलिस ने सड़क हादसों से जुड़ी एक रिपोर्ट साझा की है, जिसमें बताया गया है कि 2023 के शुरूआती 4 महीनों में 4,922 लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं।
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के किराडपुरा इलाके में बुधवार रात दो पक्षों में झड़प हो गई। इस दौरान लोगों ने एक-दूसरे पर पथराव किया और कई वाहनों में आग लगा दी।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने एक महिला कपड़ों की डिजाइनर अनिक्षा के खिलाफ FIR दर्ज कराई है।
महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में 48 वर्षीय पत्रकार शशिकांत वारिशे को थार से कुचलने के मामले में लोगों की नाराजगी बढ़ती दिख रही है।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को आतंकी हमले की धमकी भरा ईमेल मिला है। ईमेल में कहा गया है कि तालिबान से जुड़ा एक व्यक्ति जल्द ही मुंबई में हमले को अंजाम देगा।
महाराष्ट्र के औरंगाबाद क्राइम ब्रांच के एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) पर नशे की हालत में एक महिला के घर में घुसकर उसे छेड़ने और उसके पति और सास को पीटने का आरोप लगा है।
महाराष्ट्र के वाशिम जिले में मुगल शासक औरंगजेब की तस्वीर के साथ डांस करने पर सोमवार को आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले बढ़ रहे हैं। ताजा मामला महाराष्ट्र के पालघर जिले का है, जहां एक 16 वर्षीय नाबालिग के साथ गैंगरेप हुआ है।
सोशल मीडिया ट्रोलिंग बॉलीवुड सितारों के लिए नया नहीं है। हालांकि, बीते कुछ दिनों में ट्रोलिंग ने मानसिक उत्पीड़न और हिंसा का भी रूप ले लिया है।
इस साल जून में सलमान खान को जान से मारने की धमकी दी गई थी जिसके बाद उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
महाराष्ट्र के पालघर में गरबा कार्यक्रम में डांस करते समय एक युवक बेहोश हो गया। आनन-फानन में युवक को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने युवक को मृत घोषित कर दिया।
महाराष्ट्र के सांगली में पालघर जैसी घटना सामने आई है। वहां बच्चा चोरी करने के शक में भीड़ ने चार साधुओं की बेहरमी से पिटाई कर दी।
महाराष्ट्र के पुणे से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला को उसके पति और ससुराल वालों ने खुले में नग्न नहाने के लिए मजबूर किया।
महाराष्ट्र के रायगढ़ के समुद्र तट पर एक संदिग्ध नाव मिलने से हलचल मच गई है। हरिहरेश्वर तट पर मिली इस नाव से AK-47 राइफलें और गोलियां बरामद की गई हैं।
आयकर विभाग की टीम ने महाराष्ट्र के जालना में स्टील और कपड़ा उत्पादन सहित रियल एस्टेट से जुड़े उद्योगपतियों के ठिकानों पर छापेमारी करते हुए कुल 390 करोड़ रुपये की बेहिसाब संपत्ति जब्त की है।
महाराष्ट्र के भंडारा जिले में एक 35 वर्षीय महिला के साथ गैंगरेप का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी रेप के बाद महिला को निर्वस्त्र कर सड़क पर छोड़कर फरार हो गए।
भाजपा की पूर्व नेता नुपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल द्वारा पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणी को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।
पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ विवादित टिप्पणी कर सुर्खियों में आईं पूर्व भाजपा प्रवक्ता नुपुर शर्मा को लगातार धमकियां मिल रही हैं।
महाराष्ट्र के नांदेड जिलें में एक महिला द्वारा भूख से बिलखते अपने दो मासूम बच्चों की गला घोंटकर हत्या करने का दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है।
महाराष्ट्र के चंद्रपुर में दिल दहलाने वाला हादसा हुआ है। गुरुवार रात को डीजल से भरे टैंकर और लकड़ी ले जा रहे ट्रक के बीच हुई आमने-सामने की भिड़ंत के बाद लगी भीषण आग में चालक सहित नौ लोगों की जलकर मौत हो गई।
महाराष्ट्र पुलिस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार के खिलाफ आपत्तिजनकर टिप्पणी पोस्ट करने के आरोप में एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।
महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी (MVA) सरकार में भागीदार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने को लेकर NCP कार्यकर्ताओं के शनिवार को भाजपा प्रवक्ता विनायक आंबेकर के साथ मारपीट और अभद्रता करने का मामला सामने आया है।
महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित एक स्टील कंपनी के 100 से अधिक श्रमिकों ने अपनी मांगे पूरी नहीं होने को लेकर शनिवार को कंपनी की फैक्ट्री पर हमला बोल दिया।
महाराष्ट्र के ठाणे में एक बुजुर्ग के महज नाश्ता परोसने में देरी करने पर अपनी बहू की गोली मारकर हत्या करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। वारदात के बाद से आरोपी फरार है।
24 Mar 2022केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)
सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह से संबंधित मामलों को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को ट्रांसफर कर दिया है। सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ये आदेश दिया।
महाराष्ट्र पुलिस में कार्यरत महिला पुलिसकर्मियों के लिए बड़ी ही राहत की खबर आई है।
महाराष्ट्र के नागपुर में अपने प्रेमी से शादी करने के लिए एक 19 वर्षीय युवती द्वारा अपने ही गैंगरेप की झूठी कहानी रचने का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है।
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में 15 वर्षीय नाबालिग से गैंगरेप का बड़ा ही हैरान और शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को थप्पड़ जड़ने संबंधी अपने बयान के कारण कानूनी पचड़ों में फंसे केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को पुलिस ने अगले हफ्ते उसके सामने पेश होने को कहा है।
महाराष्ट्र के नांदेड़ में कोरोना वायरस महामारी के प्रसार को रोकने के लिए होला-मोहल्ला जुलूस निकालने की इजाजत नहीं देना पुलिस को भारी पड़ गया।
महाराष्ट्र की एक अदालत ने चार वर्षीय मासूम का यौन शोषण करने के मामले में दोषी पाए गए एक 80 वर्षीय बुजुर्ग दंपित को 10 साल जेल की सजा सुनाई है।
महाराष्ट्र सरकार ने जलगांव के पुलिसकर्मियों पर लगे लड़कियों से जबरदस्ती स्ट्रिप डांस (कपड़े उतरवाकर डांस) कराने के आरोपों को गलत बताया है।
महाराष्ट्र के पालघर में एक प्रेम कहानी का खौफनाक अंत सामने आया है। एक प्रेमी ने उसके साथ घर बसाने का सपना लेकर आई प्रेमिका की न केवल हत्या की, बल्कि पुलिस से बचने के लिए उसे शव को खुद के फ्लैट की दीवार में चुनवा दिया।
नागपुर में ऑनलाइन धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है।
इंटीरियर डिजाइनर को कथित रूप से आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में गिरफ्तार किए गए रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी को अलीबाग की एक अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में बड़ी घटना सामने आई है। सोमवार शाम को यहां पांच मंजिला इमारत की तीन मंजिले भ्रभराकर गिर गई।
शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और परीक्षा में नकल रोकने के लिए विभिन्न राज्यों की ओर से प्रतिवर्ष व्यवस्थाओं पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन कुछ राज्यों में लोग भारी सुरक्षा के बाद भी विद्यार्थियों को नकल कराने से नहीं चूकते हैं।
मालेगांव ब्लास्ट की जांच के दौरान वर्तमान में भोपाल से सांसद प्रज्ञा ठाकुर को गिरफ्तार करने के बाद चर्चा में आए 1988 बैच के IPS अधिकारी परमबीर सिंह ने शनिवार को मुंबई के नए पुलिस कमिश्नर की कमान संभाल ली है।
महाराष्ट्र के पुणे में एक ढोंगी धर्मगरू द्वारा धार्मिक अनुष्ठान के नाम पर युवती से दुष्कर्म करने और उसकी चार नाबालिग बहनों से छेड़छाड़ करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
महाराष्ट्र के वर्धा में प्यार के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करने से नाराज युवक द्वारा सात दिन पहले जिंदा जलाई गई एक 24 वर्षीय महिला लेक्चरर ने सोमवार सुबह दम तोड़ दिया।
डॉक्टर को भगवान का रूप माना जाता है और लोग बीमार होने पर इसी उम्मीद से उनके पास जाते हैं कि वह उन्हें स्वस्थ कर देंगे। इसी आस्था और विश्वास का फायदा उठाकर कुछ लोग न केवल कमाई करने में जुटे हैं बल्कि उनके स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ कर रहे हैं।
महाराष्ट्र के पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे की ओर से गत शनिवार को मुंबई की नाइटलाइफ के लिए दुकानें, मॉल और रेस्त्रां को 24 घंटे खोले जाने की घोषणा के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
1993 के मुंबई सीरियल बस धमाकों के आरोप में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा आरोपी डॉक्टर जलीस अंसरी उर्फ डॉक्टर बम गुरुवार को मुंबई से फरार हो गया।
महाराष्ट्र के ठाणे में चार व्यक्तियों ने गांजा पीने से रोकने के लिए एक व्यक्ति की हत्या कर दी।
सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।
महाराष्ट्र में 10 वर्षीय लड़की के साथ महीनों बलात्कार और उसके गर्भवती होने का मामला सामने आया है।
| महाराष्ट्र के पुणे में रविवार को पुलिस और वारकरी भक्तों के बीच बहस हो गई। इसके बाद आरोप लगे कि पुलिस ने भक्तों पर लाठीचार्ज किया है। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। महाराष्ट्र पुलिस ने सड़क हादसों से जुड़ी एक रिपोर्ट साझा की है, जिसमें बताया गया है कि दो हज़ार तेईस के शुरूआती चार महीनों में चार,नौ सौ बाईस लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा चुके हैं। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के किराडपुरा इलाके में बुधवार रात दो पक्षों में झड़प हो गई। इस दौरान लोगों ने एक-दूसरे पर पथराव किया और कई वाहनों में आग लगा दी। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने एक महिला कपड़ों की डिजाइनर अनिक्षा के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में अड़तालीस वर्षीय पत्रकार शशिकांत वारिशे को थार से कुचलने के मामले में लोगों की नाराजगी बढ़ती दिख रही है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में राष्ट्रीय जांच एजेंसी को आतंकी हमले की धमकी भरा ईमेल मिला है। ईमेल में कहा गया है कि तालिबान से जुड़ा एक व्यक्ति जल्द ही मुंबई में हमले को अंजाम देगा। महाराष्ट्र के औरंगाबाद क्राइम ब्रांच के एक सहायक पुलिस आयुक्त पर नशे की हालत में एक महिला के घर में घुसकर उसे छेड़ने और उसके पति और सास को पीटने का आरोप लगा है। महाराष्ट्र के वाशिम जिले में मुगल शासक औरंगजेब की तस्वीर के साथ डांस करने पर सोमवार को आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले बढ़ रहे हैं। ताजा मामला महाराष्ट्र के पालघर जिले का है, जहां एक सोलह वर्षीय नाबालिग के साथ गैंगरेप हुआ है। सोशल मीडिया ट्रोलिंग बॉलीवुड सितारों के लिए नया नहीं है। हालांकि, बीते कुछ दिनों में ट्रोलिंग ने मानसिक उत्पीड़न और हिंसा का भी रूप ले लिया है। इस साल जून में सलमान खान को जान से मारने की धमकी दी गई थी जिसके बाद उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। महाराष्ट्र के पालघर में गरबा कार्यक्रम में डांस करते समय एक युवक बेहोश हो गया। आनन-फानन में युवक को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने युवक को मृत घोषित कर दिया। महाराष्ट्र के सांगली में पालघर जैसी घटना सामने आई है। वहां बच्चा चोरी करने के शक में भीड़ ने चार साधुओं की बेहरमी से पिटाई कर दी। महाराष्ट्र के पुणे से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक महिला को उसके पति और ससुराल वालों ने खुले में नग्न नहाने के लिए मजबूर किया। महाराष्ट्र के रायगढ़ के समुद्र तट पर एक संदिग्ध नाव मिलने से हलचल मच गई है। हरिहरेश्वर तट पर मिली इस नाव से AK-सैंतालीस राइफलें और गोलियां बरामद की गई हैं। आयकर विभाग की टीम ने महाराष्ट्र के जालना में स्टील और कपड़ा उत्पादन सहित रियल एस्टेट से जुड़े उद्योगपतियों के ठिकानों पर छापेमारी करते हुए कुल तीन सौ नब्बे करोड़ रुपये की बेहिसाब संपत्ति जब्त की है। महाराष्ट्र के भंडारा जिले में एक पैंतीस वर्षीय महिला के साथ गैंगरेप का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी रेप के बाद महिला को निर्वस्त्र कर सड़क पर छोड़कर फरार हो गए। भाजपा की पूर्व नेता नुपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल द्वारा पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ की गई विवादित टिप्पणी को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ विवादित टिप्पणी कर सुर्खियों में आईं पूर्व भाजपा प्रवक्ता नुपुर शर्मा को लगातार धमकियां मिल रही हैं। महाराष्ट्र के नांदेड जिलें में एक महिला द्वारा भूख से बिलखते अपने दो मासूम बच्चों की गला घोंटकर हत्या करने का दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के चंद्रपुर में दिल दहलाने वाला हादसा हुआ है। गुरुवार रात को डीजल से भरे टैंकर और लकड़ी ले जा रहे ट्रक के बीच हुई आमने-सामने की भिड़ंत के बाद लगी भीषण आग में चालक सहित नौ लोगों की जलकर मौत हो गई। महाराष्ट्र पुलिस ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार के खिलाफ आपत्तिजनकर टिप्पणी पोस्ट करने के आरोप में एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार में भागीदार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने को लेकर NCP कार्यकर्ताओं के शनिवार को भाजपा प्रवक्ता विनायक आंबेकर के साथ मारपीट और अभद्रता करने का मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के पालघर जिले में स्थित एक स्टील कंपनी के एक सौ से अधिक श्रमिकों ने अपनी मांगे पूरी नहीं होने को लेकर शनिवार को कंपनी की फैक्ट्री पर हमला बोल दिया। महाराष्ट्र के ठाणे में एक बुजुर्ग के महज नाश्ता परोसने में देरी करने पर अपनी बहू की गोली मारकर हत्या करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। वारदात के बाद से आरोपी फरार है। चौबीस मार्च दो हज़ार बाईसकेंद्रीय जांच ब्यूरो सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह से संबंधित मामलों को केंद्रीय जांच ब्यूरो को ट्रांसफर कर दिया है। सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ये आदेश दिया। महाराष्ट्र पुलिस में कार्यरत महिला पुलिसकर्मियों के लिए बड़ी ही राहत की खबर आई है। महाराष्ट्र के नागपुर में अपने प्रेमी से शादी करने के लिए एक उन्नीस वर्षीय युवती द्वारा अपने ही गैंगरेप की झूठी कहानी रचने का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के ठाणे जिले में पंद्रह वर्षीय नाबालिग से गैंगरेप का बड़ा ही हैरान और शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को थप्पड़ जड़ने संबंधी अपने बयान के कारण कानूनी पचड़ों में फंसे केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को पुलिस ने अगले हफ्ते उसके सामने पेश होने को कहा है। महाराष्ट्र के नांदेड़ में कोरोना वायरस महामारी के प्रसार को रोकने के लिए होला-मोहल्ला जुलूस निकालने की इजाजत नहीं देना पुलिस को भारी पड़ गया। महाराष्ट्र की एक अदालत ने चार वर्षीय मासूम का यौन शोषण करने के मामले में दोषी पाए गए एक अस्सी वर्षीय बुजुर्ग दंपित को दस साल जेल की सजा सुनाई है। महाराष्ट्र सरकार ने जलगांव के पुलिसकर्मियों पर लगे लड़कियों से जबरदस्ती स्ट्रिप डांस कराने के आरोपों को गलत बताया है। महाराष्ट्र के पालघर में एक प्रेम कहानी का खौफनाक अंत सामने आया है। एक प्रेमी ने उसके साथ घर बसाने का सपना लेकर आई प्रेमिका की न केवल हत्या की, बल्कि पुलिस से बचने के लिए उसे शव को खुद के फ्लैट की दीवार में चुनवा दिया। नागपुर में ऑनलाइन धोखाधड़ी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इंटीरियर डिजाइनर को कथित रूप से आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में गिरफ्तार किए गए रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी को अलीबाग की एक अदालत ने चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में बड़ी घटना सामने आई है। सोमवार शाम को यहां पांच मंजिला इमारत की तीन मंजिले भ्रभराकर गिर गई। शिक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और परीक्षा में नकल रोकने के लिए विभिन्न राज्यों की ओर से प्रतिवर्ष व्यवस्थाओं पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन कुछ राज्यों में लोग भारी सुरक्षा के बाद भी विद्यार्थियों को नकल कराने से नहीं चूकते हैं। मालेगांव ब्लास्ट की जांच के दौरान वर्तमान में भोपाल से सांसद प्रज्ञा ठाकुर को गिरफ्तार करने के बाद चर्चा में आए एक हज़ार नौ सौ अठासी बैच के IPS अधिकारी परमबीर सिंह ने शनिवार को मुंबई के नए पुलिस कमिश्नर की कमान संभाल ली है। महाराष्ट्र के पुणे में एक ढोंगी धर्मगरू द्वारा धार्मिक अनुष्ठान के नाम पर युवती से दुष्कर्म करने और उसकी चार नाबालिग बहनों से छेड़छाड़ करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के वर्धा में प्यार के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करने से नाराज युवक द्वारा सात दिन पहले जिंदा जलाई गई एक चौबीस वर्षीय महिला लेक्चरर ने सोमवार सुबह दम तोड़ दिया। डॉक्टर को भगवान का रूप माना जाता है और लोग बीमार होने पर इसी उम्मीद से उनके पास जाते हैं कि वह उन्हें स्वस्थ कर देंगे। इसी आस्था और विश्वास का फायदा उठाकर कुछ लोग न केवल कमाई करने में जुटे हैं बल्कि उनके स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ कर रहे हैं। महाराष्ट्र के पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे की ओर से गत शनिवार को मुंबई की नाइटलाइफ के लिए दुकानें, मॉल और रेस्त्रां को चौबीस घंटाटे खोले जाने की घोषणा के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक हज़ार नौ सौ तिरानवे के मुंबई सीरियल बस धमाकों के आरोप में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा आरोपी डॉक्टर जलीस अंसरी उर्फ डॉक्टर बम गुरुवार को मुंबई से फरार हो गया। महाराष्ट्र के ठाणे में चार व्यक्तियों ने गांजा पीने से रोकने के लिए एक व्यक्ति की हत्या कर दी। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। महाराष्ट्र में दस वर्षीय लड़की के साथ महीनों बलात्कार और उसके गर्भवती होने का मामला सामने आया है। |
महोदय/ महोदया,
कृपया भारतीय रिज़र्व बैंक (प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में बैंकों द्वारा राहत उपाय) निदेश, 2017 पर दिनांक 5 जुलाई 2017 के हमारे मास्टर निदेश विसविवि.केंका.एफएसडी.बीसी.8/05.10.001/2017-18 को देखें।
2. इस संबंध में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने केंद्रीकृत प्रणाली के माध्यम से तत्काल (रियल टाइम) आधार पर प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित डेटा के संग्रह और संकलन हेतु एक समर्पित पोर्टल (https://dbie.rbi.org.in/DCP/) का विकास किया है।
3. पोर्टल, जिसका आपके प्रतिनिधि द्वारा इसके बनने की प्रक्रिया के दौरान पूर्वालोकन किया गया था, में बैंकों द्वारा दिए गए राहत उपायों से संबंधित डेटा फाइल तथा प्राकृतिक आपदाओं के संबंध में राज्य सरकारों द्वारा जारी अधिसूचना को अपलोड करने की सुविधा दी गई है। यह पोर्टल 20 जुलाई 2017 से कार्य कर रहा है।
4. अतः आपसे अनुरोध है कि आप संबंधित विभागों को निर्देश दे कि वे अप्रैल से जून 2017 के दौरान दिए गए राहत उपायों से संबंधित वास्तविक डेटा को तत्काल अपलोड करें तथा जुलाई 2017 के बाद प्रत्येक महीने के लिए अगले महीने की 10 तारीख तक डेटा अपलोड करें।
5. एसएलबीसी संयोजक बैंकों से अनुरोध है कि वे प्राकृतिक आपदाओं की घोषणा से संबंधित राज्य/जिला प्राधिकरण द्वारा जारी की गई अधिसूचनाओं, जिनके लिए एसएलबीसी/बैंकों द्वारा अप्रैल 2017 से राहत उपायों को लागू किया गया था, को अपलोड करें। बाद के अधिसूचनाओं को, अधिसूचना जारी होते ही उसे उसे तुरंत अपलोड किया जाए।
6. आपके मार्गदर्शन हेतु वेब पोर्टल से संबंधित उपयोगकर्ता पुस्तिका संलग्न है।
(अजय कुमार मिश्र)
| महोदय/ महोदया, कृपया भारतीय रिज़र्व बैंक निदेश, दो हज़ार सत्रह पर दिनांक पाँच जुलाई दो हज़ार सत्रह के हमारे मास्टर निदेश विसविवि.केंका.एफएसडी.बीसी.आठ/पाँच.दस.एक/दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह को देखें। दो. इस संबंध में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने केंद्रीकृत प्रणाली के माध्यम से तत्काल आधार पर प्राकृतिक आपदाओं से संबंधित डेटा के संग्रह और संकलन हेतु एक समर्पित पोर्टल का विकास किया है। तीन. पोर्टल, जिसका आपके प्रतिनिधि द्वारा इसके बनने की प्रक्रिया के दौरान पूर्वालोकन किया गया था, में बैंकों द्वारा दिए गए राहत उपायों से संबंधित डेटा फाइल तथा प्राकृतिक आपदाओं के संबंध में राज्य सरकारों द्वारा जारी अधिसूचना को अपलोड करने की सुविधा दी गई है। यह पोर्टल बीस जुलाई दो हज़ार सत्रह से कार्य कर रहा है। चार. अतः आपसे अनुरोध है कि आप संबंधित विभागों को निर्देश दे कि वे अप्रैल से जून दो हज़ार सत्रह के दौरान दिए गए राहत उपायों से संबंधित वास्तविक डेटा को तत्काल अपलोड करें तथा जुलाई दो हज़ार सत्रह के बाद प्रत्येक महीने के लिए अगले महीने की दस तारीख तक डेटा अपलोड करें। पाँच. एसएलबीसी संयोजक बैंकों से अनुरोध है कि वे प्राकृतिक आपदाओं की घोषणा से संबंधित राज्य/जिला प्राधिकरण द्वारा जारी की गई अधिसूचनाओं, जिनके लिए एसएलबीसी/बैंकों द्वारा अप्रैल दो हज़ार सत्रह से राहत उपायों को लागू किया गया था, को अपलोड करें। बाद के अधिसूचनाओं को, अधिसूचना जारी होते ही उसे उसे तुरंत अपलोड किया जाए। छः. आपके मार्गदर्शन हेतु वेब पोर्टल से संबंधित उपयोगकर्ता पुस्तिका संलग्न है। |
मेरठ (उप्र)। मेरठ के शास्त्री नगर इलाके में एक दंपति अपने घर में मृत पाए गए हैं।
प्रमोद कर्णवाल और उनकी पत्नी ममता, दोनों की 50 साल की उम्र थीं। उनके शव घर के ऊपरी मंजिल वाले बेडरूम में खून से लथपथ मिले और उनका गला रेता गया था।
ममता एक स्थानीय स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम करती थीं, जबकि उनके पति एक आयरन ट्रेडिंग फर्म में थे।
सिविल लाइंस के सीओ अरविंद चौरसिया ने कहा, हमें कुछ सुराग मिले हैं। जांच जारी है। सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।
मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए कई टीमों का गठन किया गया है।
पुलिस इस बात की जांच करने की कोशिश कर रही है कि हत्यारे घर में कैसे घुसे और फिर चुपचाप निकल गए। (आईएएनएस)
| मेरठ । मेरठ के शास्त्री नगर इलाके में एक दंपति अपने घर में मृत पाए गए हैं। प्रमोद कर्णवाल और उनकी पत्नी ममता, दोनों की पचास साल की उम्र थीं। उनके शव घर के ऊपरी मंजिल वाले बेडरूम में खून से लथपथ मिले और उनका गला रेता गया था। ममता एक स्थानीय स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम करती थीं, जबकि उनके पति एक आयरन ट्रेडिंग फर्म में थे। सिविल लाइंस के सीओ अरविंद चौरसिया ने कहा, हमें कुछ सुराग मिले हैं। जांच जारी है। सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए कई टीमों का गठन किया गया है। पुलिस इस बात की जांच करने की कोशिश कर रही है कि हत्यारे घर में कैसे घुसे और फिर चुपचाप निकल गए। |
कॉलेजियम को लेकर क़ानून मंत्री की टिप्पणियों के बीच एक चैनल से बातचीत में वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय क़ानून मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि सारे सार्वजनिक संस्थानों पर मौजूदा सरकार का नियंत्रण है और यदि वह 'अपने जज' नियुक्त कर न्यायपालिका भी कब्ज़ा लेती है, तो यह लोकतंत्र के लिए ख़तरनाक होगा.
नई दिल्लीः वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने एक समाचार चैनल के साथ साक्षात्कार में कहा कि भले ही कॉलेजियम प्रणाली परफेक्ट नहीं है लेकिन यह सरकार द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति पर पूर्ण नियंत्रण होने से तो बेहतर है.
लाइव लॉ के अनुसार, उन्होंने कहा कि इस समय सारे सार्वजनिक संस्थानों पर मौजूदा सरकार का नियंत्रण है और यदि वह 'अपने न्यायाधीशों' की नियुक्ति करके न्यायपालिका पर भी कब्जा कर लेती है, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक होगा.
सिब्बल ने कहा कि मौजूदा सरकार के पास इतना बहुमत है कि वह सोचती थी कि वह कुछ भी कर सकती है. हालांकि, सिब्बल ने भी मौजूदा कॉलेजियम प्रणाली पर को लेकर चिंता जताई. , लेकिन यह भी जोड़ा कि यह प्रणाली सही नहीं है फिर भी सरकार द्वारा न्यायाधीश नियुक्त करने से बेहतर है.
सिब्बल ने कॉलेजियम प्रणाली पर केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू की हालिया टिप्पणियों पर असहमति व्यक्त की.
गौरतलब है कि संसद के दोनों सदनों ने 2014 के अगस्त माह में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग के प्रावधान वाला 99वां संविधान संशोधन सर्वसम्मति से पारित किया था, जिसमें जजों द्वारा जजों की नियुक्ति की 22 साल पुरानी कॉलेजियम प्रणाली की जगह उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति में कार्यपालिका को एक प्रमुख भूमिका दी गई थी.
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2015 में इस कानून को संविधान के बुनियादी ढांचे के अनुरूप न बताते हुए इसे खारिज कर दिया था.
न्यायपालिका पर अपने लगातार हमलों की कड़ी में इसका हवाला देते हुए रिजिजू ने बीते हफ्ते कहा था कि संसद ने सर्वसम्मति से विधेयक पारित किया था, लेकिन 2015 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इसे रद्द कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की वर्तमान कॉलेजियम प्रणाली जनता और सदन की भावनाओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है.
हालांकि, उससे पहले इसी महीने एनजेएसी से जुड़े एक सवाल पर स्वयं कानून मंत्री ने ही राज्यसभा में कहा था कि सरकार का इसे फिर से लाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है.
कॉलेजियम प्रणाली संबंधी चिंताओं को लेकर सिब्बल ने कहा कि यह गैर-पारदर्शी था, इसमें बहुत अधिक 'भाईचारा' था. (उनका इशारा इस बात की ओर लगता है कि अक्सर नियुक्तियां निजी रिश्तों के आधार पर होती हैं. )
हालांकि उन्होंने दोहराया कि वे फिर भी नियुक्तियों कब्जाने वाली सरकार की तुलना में कॉलेजियम प्रणाली को ही तरजीह देंगे.
उल्लेखनीय है कि किरेन रिजिजू की अदालत और कॉलेजियम संबंधी हालिया टिप्पणियों पर कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी ने भी सवाल उठाया था. उन्होंने पूछा था कि क्या सरकार न्यायपालिका से टकराने का प्रयास कर रही है.
बीते हफ्तेभर में रिजिजू संसद में सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत अर्ज़ियां और 'दुर्भावनापूर्ण' जनहित याचिकाएं न सुनने को कह चुके हैं, इसके बाद उन्होंने अदालत की छुट्टियों पर टिप्पणी की और कोर्ट में लंबित मामलों को जजों की नियुक्ति से जोड़ते हुए कॉलेजियम के स्थान पर नई प्रणाली लाने की बात दोहराई थी.
कॉलेजियम प्रणाली बीते कुछ समय से सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के बीच गतिरोध का विषय है. कानून मंत्री रिजिजू लगातार मौके-बेमौके कॉलेजियम प्रणाली पर निशाना साधते रहे हैं.
रिजिजू के अलावा बीते 7 दिसंबर को उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने अपने पहले संसदीय संबोधन में एनजेएसी कानून को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने को लेकर अदालत पर निशाना साधा था. उनका कहना था कि यह 'संसदीय संप्रभुता से गंभीर समझौता' और उस जनादेश का 'अनादर' है, जिसके संरक्षक उच्च सदन एवं लोकसभा हैं.
यह पहला अवसर नहीं था जब धनखड़ ने उपराष्ट्रपति बनने के बाद एनजेएसी को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की आलोचना की हो.
बीते 2 दिसंबर को उन्होंने कहा था कि वह 'हैरान' थे कि शीर्ष अदालत द्वारा एनजेएसी कानून को रद्द किए जाने के बाद संसद में कोई चर्चा नहीं हुई. उससे पहले उन्होंने संविधान दिवस (26 नवंबर) के अवसर पर हुए एक कार्यक्रम में भी ऐसी ही टिप्पणी की थी.
इससे पहले रिजिजू कुछ समय से न्यायपालिका, सुप्रीम कोर्ट और कॉलेजियम प्रणाली को लेकर आलोचनात्मक बयान देते रहे हैं.
नवंबर महीने में किरेन रिजिजू ने कॉलेजियम व्यवस्था को 'अपारदर्शी और एलियन' बताया था. उनकी टिप्पणी को लेकर शीर्ष अदालत ने नाराजगी भी जाहिर की थी.
सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम की विभिन्न सिफारिशों पर सरकार के 'बैठे रहने' संबंधी आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए रिजिजू ने कहा था कि ऐसा कभी नहीं कहा जाना चाहिए कि सरकार फाइलों पर बैठी हुई है.
नवंबर 2022 में ही सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि सरकार का कॉलेजियम द्वारा भेजे गए नाम रोके रखना अस्वीकार्य है. कॉलेजियम प्रणाली के बचाव में इसके बाद सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि संवैधानिक लोकतंत्र में कोई भी संस्था परफेक्ट नहीं है.
| कॉलेजियम को लेकर क़ानून मंत्री की टिप्पणियों के बीच एक चैनल से बातचीत में वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय क़ानून मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि सारे सार्वजनिक संस्थानों पर मौजूदा सरकार का नियंत्रण है और यदि वह 'अपने जज' नियुक्त कर न्यायपालिका भी कब्ज़ा लेती है, तो यह लोकतंत्र के लिए ख़तरनाक होगा. नई दिल्लीः वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने एक समाचार चैनल के साथ साक्षात्कार में कहा कि भले ही कॉलेजियम प्रणाली परफेक्ट नहीं है लेकिन यह सरकार द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति पर पूर्ण नियंत्रण होने से तो बेहतर है. लाइव लॉ के अनुसार, उन्होंने कहा कि इस समय सारे सार्वजनिक संस्थानों पर मौजूदा सरकार का नियंत्रण है और यदि वह 'अपने न्यायाधीशों' की नियुक्ति करके न्यायपालिका पर भी कब्जा कर लेती है, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक होगा. सिब्बल ने कहा कि मौजूदा सरकार के पास इतना बहुमत है कि वह सोचती थी कि वह कुछ भी कर सकती है. हालांकि, सिब्बल ने भी मौजूदा कॉलेजियम प्रणाली पर को लेकर चिंता जताई. , लेकिन यह भी जोड़ा कि यह प्रणाली सही नहीं है फिर भी सरकार द्वारा न्यायाधीश नियुक्त करने से बेहतर है. सिब्बल ने कॉलेजियम प्रणाली पर केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू की हालिया टिप्पणियों पर असहमति व्यक्त की. गौरतलब है कि संसद के दोनों सदनों ने दो हज़ार चौदह के अगस्त माह में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग के प्रावधान वाला निन्यानवेवां संविधान संशोधन सर्वसम्मति से पारित किया था, जिसमें जजों द्वारा जजों की नियुक्ति की बाईस साल पुरानी कॉलेजियम प्रणाली की जगह उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति में कार्यपालिका को एक प्रमुख भूमिका दी गई थी. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर दो हज़ार पंद्रह में इस कानून को संविधान के बुनियादी ढांचे के अनुरूप न बताते हुए इसे खारिज कर दिया था. न्यायपालिका पर अपने लगातार हमलों की कड़ी में इसका हवाला देते हुए रिजिजू ने बीते हफ्ते कहा था कि संसद ने सर्वसम्मति से विधेयक पारित किया था, लेकिन दो हज़ार पंद्रह में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इसे रद्द कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की वर्तमान कॉलेजियम प्रणाली जनता और सदन की भावनाओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है. हालांकि, उससे पहले इसी महीने एनजेएसी से जुड़े एक सवाल पर स्वयं कानून मंत्री ने ही राज्यसभा में कहा था कि सरकार का इसे फिर से लाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है. कॉलेजियम प्रणाली संबंधी चिंताओं को लेकर सिब्बल ने कहा कि यह गैर-पारदर्शी था, इसमें बहुत अधिक 'भाईचारा' था. हालांकि उन्होंने दोहराया कि वे फिर भी नियुक्तियों कब्जाने वाली सरकार की तुलना में कॉलेजियम प्रणाली को ही तरजीह देंगे. उल्लेखनीय है कि किरेन रिजिजू की अदालत और कॉलेजियम संबंधी हालिया टिप्पणियों पर कांग्रेस के सांसद मनीष तिवारी ने भी सवाल उठाया था. उन्होंने पूछा था कि क्या सरकार न्यायपालिका से टकराने का प्रयास कर रही है. बीते हफ्तेभर में रिजिजू संसद में सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत अर्ज़ियां और 'दुर्भावनापूर्ण' जनहित याचिकाएं न सुनने को कह चुके हैं, इसके बाद उन्होंने अदालत की छुट्टियों पर टिप्पणी की और कोर्ट में लंबित मामलों को जजों की नियुक्ति से जोड़ते हुए कॉलेजियम के स्थान पर नई प्रणाली लाने की बात दोहराई थी. कॉलेजियम प्रणाली बीते कुछ समय से सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के बीच गतिरोध का विषय है. कानून मंत्री रिजिजू लगातार मौके-बेमौके कॉलेजियम प्रणाली पर निशाना साधते रहे हैं. रिजिजू के अलावा बीते सात दिसंबर को उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने अपने पहले संसदीय संबोधन में एनजेएसी कानून को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने को लेकर अदालत पर निशाना साधा था. उनका कहना था कि यह 'संसदीय संप्रभुता से गंभीर समझौता' और उस जनादेश का 'अनादर' है, जिसके संरक्षक उच्च सदन एवं लोकसभा हैं. यह पहला अवसर नहीं था जब धनखड़ ने उपराष्ट्रपति बनने के बाद एनजेएसी को खत्म करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की आलोचना की हो. बीते दो दिसंबर को उन्होंने कहा था कि वह 'हैरान' थे कि शीर्ष अदालत द्वारा एनजेएसी कानून को रद्द किए जाने के बाद संसद में कोई चर्चा नहीं हुई. उससे पहले उन्होंने संविधान दिवस के अवसर पर हुए एक कार्यक्रम में भी ऐसी ही टिप्पणी की थी. इससे पहले रिजिजू कुछ समय से न्यायपालिका, सुप्रीम कोर्ट और कॉलेजियम प्रणाली को लेकर आलोचनात्मक बयान देते रहे हैं. नवंबर महीने में किरेन रिजिजू ने कॉलेजियम व्यवस्था को 'अपारदर्शी और एलियन' बताया था. उनकी टिप्पणी को लेकर शीर्ष अदालत ने नाराजगी भी जाहिर की थी. सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम की विभिन्न सिफारिशों पर सरकार के 'बैठे रहने' संबंधी आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए रिजिजू ने कहा था कि ऐसा कभी नहीं कहा जाना चाहिए कि सरकार फाइलों पर बैठी हुई है. नवंबर दो हज़ार बाईस में ही सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि सरकार का कॉलेजियम द्वारा भेजे गए नाम रोके रखना अस्वीकार्य है. कॉलेजियम प्रणाली के बचाव में इसके बाद सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि संवैधानिक लोकतंत्र में कोई भी संस्था परफेक्ट नहीं है. |
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संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक व सांस्कृतिक संगठन, शिक्षा सूचना सेवाःयह संगठन के शैक्षिक परियोजना व प्रकाशन से संबंधित महत्वपूर्ण आँकड़े प्रदान करता है। इंटरनेट पर उपलब्ध अन्य शिक्षा सर्वर का लिंक जैसे यूनेस्को का शिक्षा में सहयोगी का लिंक प्रदान करता है। यह वेबसाइट काफी वृहद् है एवं इसे नियमित रूप से अद्यतन किया जाता है।
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ईएफए फास्ट ट्रैक पहल : एक "लोक हितकारी" वेबसाइट एफटीआई ढ़ाँचा, दस्तावेज, प्रेस विज्ञप्ति, एफटीआई दाताओं की बैठक और एफटीआई समर्थित कुछ राष्ट्रीय प्रस्ताव से संबंधित प्रतिवेदन के साथ चुनिंदा सूचना के उपयोग की सुविधा प्रदान करती है। साथ ही, इस पर फीचर समाचार व आगामी आयोजन के बारे में जानकारी होती है।
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यूनीसेफ की स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रेन रिपोर्ट 2004 : यह, देश के विकास एजेंडा को आगे बढ़ाने और लड़के व लड़कियों के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए रणनीतिक रूप से बालिका शिक्षा पर निवेश करने के लिए, सहायक आँकड़े व सांख्यिकी सहित बहु-स्तरीय स्थिति प्रस्तुत करता है।
विश्व बैंक की शिक्षा माइक्रोसाइट : यह विश्व बैंक प्रकाशन का पूर्ण पाठ, शैक्षिक संसाधन सामग्री एवं टूल किट, बच्चों के प्रारंभिक शिक्षा पर विश्व बैंक के शिक्षा कार्य पर सूचना, लिंग, प्रभावी विद्यालय एवं शिक्षक, प्रौढ़ शिक्षा एवं विद्यालय स्वास्थ्य, शिक्षा सांख्यिकी, बहुत सारे देशों के शिक्षा रणनीति का विवरण, क्षेत्रीय सूचनाएँ एवं बहुत सारे संबंधित लिंक की जानकारी प्रदान करता है।
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२२१ पत्र उपनिवेश सचिवको
जोहानिसबग अक्टूबर ७, १९०७
मेरे सघकी समितिने मुझे निर्देश दिया है कि मैं आपके उस भाषण के बारेमे आपको अत्यत विनयपूर्वक कुछ शब्द लिखू जो आपने अपने निर्वाचकोके सामने दिया था और जिसमे आपने एशियाई कानून संशोधन अधिनियमका उल्लेख किया था । यदि पत्रोमे छपा हुआ विवरण ठीक है तो मेरी नम्र रायमे उसमे तथ्योके सम्बधमे कई गलत बयानिया है ।
मेरे सघको इस बात से बहुत दु ख पहुँचा हे कि आप एक ऐसे उत्तरदायित्वपूर्ण पदपर आसीन होकर भी मदीके कारणके बारेमे जन साधारणमे प्रचलित भ्रातिका ही प्रचार करे। व्यापार करनेवाले इस बातको जोर देकर कह चुके है कि इस भारी मन्दीका कारण कुछ और है। कुछ भी हो, उसका प्रभाव भारतीयोपर उतना ही पडा है जितना यूरोपीयोपर ।
मेरा सघ इस वक्तव्यका पूर्णतया खण्डन करता है कि इस समय उपनिवेशमे १५,००० भारतीय है। मेरे सघको अकोका जो विश्लेषण प्राप्त हुआ है, वह शीघ्र ही आपको भेज दिया जायेगा । उससे आपको पता चलेगा कि इस समय ट्रासवालमे ७,००० से अधिक भारतीय नही है ।
आपने यह कहनेकी कृपा की है कि पुराने कानूनके अतगत जो प्रमाणपत्र जारी किये गये थे उनकी दूसरी जाली प्रतिया तैयार करके उनको बेचा गया है और बम्बई, जोहानिसबग और डबनमे ऐसे स्थान मौजूद है जहा ऐसे जाली प्रमाणपत्र अमुक रकम देकर खरीदे जा सकते हैं । मेरा सघ आपके इस वक्तव्यका पूरी तरह खण्डन करता है और विनयपूवक निवेदन करता है कि इस मामलेकी सावजनिक जाच की जाये । किन्तु मेरे सघको इस बातका पता है कि पंजीयन कार्यालयका एक मुशी जाली अनुमतिपत्रोका व्यवसाय करता था और उसने नि सदेह कुछ भारतीयोको, जिनको न तो अपनी राष्ट्रीयताका और न अपने सम्मानका ध्यान था, अपना साधन बनाया । परन्तु वह बात, आपने जनताके सामने जो कुछ रखा है उससे, बिलकुल अलग है ।
आपने यह भी कहनेकी कृपा की है कि भारतीयोने अँगुलियोके निशानोके कारण इस अधिनियमका विरोध किया है। मेरा सघ सरकारसे कई बार निवेदन कर चुका है कि भारतीयोके विरोधका मौलिक कारण अँगुलियोका निशान नहीं, बल्कि अनिवायताका सिद्धान्त तथा कानूनका वह सम्पूर्ण उद्देश्य है जो भारतीयोको अपराधी करार देता है। इस कानूनके खिलाफ जब पहलेपहल एतराज पेश किये गये थे तब अँगुलियोके निशानोका जिक्र तक नही किया गया था । साथ ही मै यह भी बताना चाहता हूँ कि जो भारतीय ट्रान्सवाल आये है उनसे भारतमे
पत्र उपनिवेश सचिवको
कभी भी न तो अँगुलियोके और न ही अँगूठोके निशान लगवाये गये थे । भारतमे निश्चय ही कुछ मामलोमे अँगूठोके निशान लिये जाते है, किंतु उनका सम्बंध अपराधोसे नही होता । अँगुलियोके निशान केवल अपराधियोसे अथवा उनसे ही लिये जाते है, जिनका अपराधोसे कोई सम्बध होता है । अँगूठेका निशान जहा लिया जाता है वहा वह नियम केवल निरक्षरोपर ही लागू होता है ।
मेरे सघको सरकारकी इस इच्छाका हमेशा ही पता रहा है कि वह इस कानूनको पूरी तरह और कठोरतासे अमलमे लाना चाहती है । किंतु मुझे एक बार फिर यह कहनेकी अनुमति दी जाये कि इस कानूनके सामने झुकने तथा सोच विचार कर की गई अपनी शपथको तोडनेसे हमारे समाजका जो पतन होगा, उसके मुकाबले कानूनका कठोरसे कठोर प्रशासन भी कुछ नही है। मेरा सघ यह अनुभव करता है कि यद्यपि आपने यह घोषणा कर दी है कि आपने इस प्रश्नके भारतीय दष्टिकोणका विशेष रूपसे अध्ययन किया है, फिर भी विरोधकी मूल भावना और साथ ही मेरे सघ द्वारा उठाये हुए अत्यन्त महत्वपूर्ण मुद्दोपर आपने बिलकुल ही ध्यान नहीं दिया ।
अन्तमे मै इस बातको फिर दोहरा देना चाहता हूँ कि भारतीयोके अत्यधिक संख्यामे आव्रजन तथा व्यापारमे अनियत्रित प्रतियोगिता के विरुद्ध आपके एतराजकी मेरे सघने सदा ही कद्र की हे । और समाजकी नेकनीयती प्रकट करनेकी दृष्टिसे उसने विनम्रतापूवक ऐसे प्रस्ताव पेश किये है, जिनसे दोनो एतराज दूर हो जाये । किन्तु, भारतीयोके लिए यह असम्भव हे कि वे इस कानूनको स्वीकार कर अपना रहा सहा सम्मान भी खो बैठे, क्योकि यह कानून सही वस्तुस्थितिसे अनभिज्ञता के कारण बनाया गया है, कायरूपमे एक हद तक दमनकारी है और मेरा सघ जिस समाजका प्रतिनिधित्व करता है उसकी धार्मिक भावनाओको चोट पहुँचाता है।
अध्यक्ष, ब्रिटिश भारतीय संघ
[' रड डेली मेल' जोहानिसबर्ग ]
२२२ पत्र 'रैड डेली मेल' को
जोहानिसबग अक्तूबर ९, [१९०७ ]
आपने श्री सुलेमान मगा' तथा पूनिया नामक एक भारतीय महिलाके, जिनके साथ घोर दुव्यवहार किया गया था, मामलोको उत्साहपूर्वक उठा लेनेकी कृपा की थी । मै आपका ध्यान एक तीसरे मामलेकी ओर आकर्षित करता हूँ, जो मेरे देखनेमे आया है। इस मामलेमे जो अकारण अपमान किया गया है, वह पहले दोनो मामलोसे अधिक नहीं, तो कम भी नही है ।
श्री ए थनी पीटस जन्मत भारतीय ईसाई और नेटालके एक पुराने सरकारी नौकर है । इस समय वे पीटरमरित्सबगके मुख्य न्यायाधीशकी अदालतमे दुभाषियेका काम कर रहे ह । रविवारकी बात है, वे शनिवारको पीटरमैरित्सबगसे चलनेवाली जोहानिसबग मेलसे जोहानिसबग जा रहे थे। उनके पास रियायती टिकट और रेलवेकी ओरसे मिला हुआ एक प्रमाणपत्र था, जिसमे उनके सरकारी पदका विवरण था । फोक्सरस्टमे जाच करनेवाले पुलिस अधिकारीने उनसे कडी जिरह की । श्री पीटसने अपना अनुमतिपत्र दिखलाया, जो उहे भारतीयाके स्वेच्छया अँगूठा निशान देनेसे पहले दिया गया था। इससे अधिकारीको सतोष नही हुआ । अत श्री पीटसने वह रियायती टिकट दिखलाया, जिसका मने उल्लेख किया है, अपने हस्ताक्षर देनेका प्रस्ताव किया, किन्तु कोई फायदा नहीं हुआ। और अधिकारीने उनका यह कहकर अपमान किया कि शायद आप और किसीका रियायती टिकट लेकर आये है । इसपर श्री पीटसने अपनी छडी तक दिखलाई, जिसपर उनके नामके प्रथम अक्षर अकित थे । फिर, उन्होने अपनी कमीज भी दिखलाई, जिसपर उनका पूरा नाम था । किन्तु यह भी सन्तोषजनक नही समझा गया । तब उन्होने तीन दिन बाद लौटनेकी जमानतके लिए रुपया जमा करनेका प्रस्ताव किया, कितु अधिकारीने एक काफिर पुलिसको आज्ञा दी कि वह श्री पीटसको अक्षरश डिब्बेसे बाहर घसीट ले । जब श्री पीटसको सार्जेंट मैसफील्डके सामने पेश किया गया तो उसने उस भयकर गलतीको अनुभव करते हुए माफी मागी और उनको छोड़ दिया। लेकिन इतनेसे ही भला सन्तोष कैसे होता ? इस अपमानके अलावा उहे फोक्सरस्टमे, जहा वे किसीका जानते नही थे, लम्बी तथा थका देनेवाली प्रतीक्षा करनी पडी और साथ ही उनकी तीन दिनकी छोटी सी छुट्टीका भी बडा सा हिस्सा बेकार गया। श्री पीटस आज रातको नौकरीपर लौटेगे। इस घटनाके बारेमे मुझे टिप्पणी करनेकी आवश्यकता नही है । मुझे केवल यही कहना है कि इस देशमे
१ देखिए खण्ड ५, पृष्ठ २८८८९ और २९४ । २ वही, पृष्ठ ४६३६४ ।
यात्रा करने में भी अनेक सम्मानित भारतीयोको जो कुछ सहन करना पड़ता है, यह उसका एक नमूना है । यहा साधारण कानून बनानेका प्रश्न नही है, एशियाइयोका बडी सख्यामे आनेका भी प्रश्न नहीं है, बल्कि मनुष्य और मनुष्यके बीचमे साधारण शिष्टता तथा यायका प्रश्न है । अथवा, 'ग्लासगो हेरल्ड' में उस दिन लिखनेवाली श्रीमती वॉगलके शब्दोमे, क्या रगदार चमडी होना ट्रान्सवालमे श्वेत लोगोके विरुद्ध जुम है ?
२२३ केपके भारतीय
केपके सर्वोच्च यायालयमे प्रवासी कानूनसे उत्पन्न एक महत्त्वपूर्ण परीक्षणात्मक मुकदमेकी सुनवाई हुई थी, जिसका विवरण' 'केप टाइम्स' ने प्रकाशित किया था । कुछ विलम्ब हो जानेपर भी हम उसे इस अकमे अयत्र उद्धत कर रहे है । केपकी ससदमे जब प्रवासी अधिनियम पास किया जा रहा था उस समय वहाके प्रमुख भारतीयोने जो सुस्ती दिखाई उसपर हम पहले भी खेद प्रकट कर चुके है । हमे विश्वास है कि फरियाद की जाती तो इस प्रकारके कानूनमे निश्चय ही काफी संशोधन कर दिया जाता । यद्यपि मुकदमेके तथ्योको उक्त विवरणमे पूरी तरहसे दिया गया है, तथापि हम दुबारा उनको यहा दे रहे है । केपमे बसा हुआ एक भारतीय, जिसकी वहा कुछ जमीन जायदाद थी, और जो १८९७ से वहा सामान्य विक्रेताका रोजगार करता था, भारत जाना चाहता था, और भारतसे लौटते समय होनेवाली असुविधासे बचने के इरादेसे एक निश्चित अवधि तक उस उपनिवेशसे अनुपस्थित रहनेका अनुमतिपत्र चाहता था । प्रवासी अधिकारीने ऐसा अनुमतिपत्र देनेसे इनकार कर दिया और ऐसा अनुमतिपत्र देना चाहा जिसकी अवधिका निश्चय वह स्वय करता । यहा प्रश्न यह नहीं है कि प्रवासी अधिकारीका निणय उचित था या नहीं, क्योकि एक ओरसे अधिकार पानेका तथा दूसरी ओरसे उसे न देनेका प्रयत्न किया जा रहा था । प्रवासी अधिकारीका कहना था कि एक एशियाईको उपनिवेशसे अनुपस्थित रहनेका अनुमति - पत्र देना एक रियायत है । किन्तु एशियाईका कहना था कि यह उसका अधिकार है । अब सर्वोच्च यायालयने यह निर्णय दिया है कि कानूनके अनुसार एशियाइयोको अनुपस्थितिका अनुमतिपत्र पानेका निहित अधिकार नही है । साराश यह कि यह मामला निरा स्वाग है, क्योकि इससे एशियाइयोको दासताकी अवस्थामे पहुँचा दिया गया है, जिसके लिए वहाके प्रमुख भारतीयोके अलावा और किसीको दोष नही दिया जा सकता । इसके अलावा, दलीलोमें उठाया गया सबसे दिलचस्प मुद्दा अनिश्चित ही छोड़ दिया गया है। प्रवासी अधिनियमकी पहली धारा १९०२ के प्रवासी अधिनियम के द्वारा दिये गये अधिकारोकी रक्षा करती हुई
१ विवरण यहाँ नही दिया जा रहा है । | दो सौ इक्कीस पत्र उपनिवेश सचिवको जोहानिसबग अक्टूबर सात, एक हज़ार नौ सौ सात मेरे सघकी समितिने मुझे निर्देश दिया है कि मैं आपके उस भाषण के बारेमे आपको अत्यत विनयपूर्वक कुछ शब्द लिखू जो आपने अपने निर्वाचकोके सामने दिया था और जिसमे आपने एशियाई कानून संशोधन अधिनियमका उल्लेख किया था । यदि पत्रोमे छपा हुआ विवरण ठीक है तो मेरी नम्र रायमे उसमे तथ्योके सम्बधमे कई गलत बयानिया है । मेरे सघको इस बात से बहुत दु ख पहुँचा हे कि आप एक ऐसे उत्तरदायित्वपूर्ण पदपर आसीन होकर भी मदीके कारणके बारेमे जन साधारणमे प्रचलित भ्रातिका ही प्रचार करे। व्यापार करनेवाले इस बातको जोर देकर कह चुके है कि इस भारी मन्दीका कारण कुछ और है। कुछ भी हो, उसका प्रभाव भारतीयोपर उतना ही पडा है जितना यूरोपीयोपर । मेरा सघ इस वक्तव्यका पूर्णतया खण्डन करता है कि इस समय उपनिवेशमे पंद्रह,शून्य भारतीय है। मेरे सघको अकोका जो विश्लेषण प्राप्त हुआ है, वह शीघ्र ही आपको भेज दिया जायेगा । उससे आपको पता चलेगा कि इस समय ट्रासवालमे सात,शून्य से अधिक भारतीय नही है । आपने यह कहनेकी कृपा की है कि पुराने कानूनके अतगत जो प्रमाणपत्र जारी किये गये थे उनकी दूसरी जाली प्रतिया तैयार करके उनको बेचा गया है और बम्बई, जोहानिसबग और डबनमे ऐसे स्थान मौजूद है जहा ऐसे जाली प्रमाणपत्र अमुक रकम देकर खरीदे जा सकते हैं । मेरा सघ आपके इस वक्तव्यका पूरी तरह खण्डन करता है और विनयपूवक निवेदन करता है कि इस मामलेकी सावजनिक जाच की जाये । किन्तु मेरे सघको इस बातका पता है कि पंजीयन कार्यालयका एक मुशी जाली अनुमतिपत्रोका व्यवसाय करता था और उसने नि सदेह कुछ भारतीयोको, जिनको न तो अपनी राष्ट्रीयताका और न अपने सम्मानका ध्यान था, अपना साधन बनाया । परन्तु वह बात, आपने जनताके सामने जो कुछ रखा है उससे, बिलकुल अलग है । आपने यह भी कहनेकी कृपा की है कि भारतीयोने अँगुलियोके निशानोके कारण इस अधिनियमका विरोध किया है। मेरा सघ सरकारसे कई बार निवेदन कर चुका है कि भारतीयोके विरोधका मौलिक कारण अँगुलियोका निशान नहीं, बल्कि अनिवायताका सिद्धान्त तथा कानूनका वह सम्पूर्ण उद्देश्य है जो भारतीयोको अपराधी करार देता है। इस कानूनके खिलाफ जब पहलेपहल एतराज पेश किये गये थे तब अँगुलियोके निशानोका जिक्र तक नही किया गया था । साथ ही मै यह भी बताना चाहता हूँ कि जो भारतीय ट्रान्सवाल आये है उनसे भारतमे पत्र उपनिवेश सचिवको कभी भी न तो अँगुलियोके और न ही अँगूठोके निशान लगवाये गये थे । भारतमे निश्चय ही कुछ मामलोमे अँगूठोके निशान लिये जाते है, किंतु उनका सम्बंध अपराधोसे नही होता । अँगुलियोके निशान केवल अपराधियोसे अथवा उनसे ही लिये जाते है, जिनका अपराधोसे कोई सम्बध होता है । अँगूठेका निशान जहा लिया जाता है वहा वह नियम केवल निरक्षरोपर ही लागू होता है । मेरे सघको सरकारकी इस इच्छाका हमेशा ही पता रहा है कि वह इस कानूनको पूरी तरह और कठोरतासे अमलमे लाना चाहती है । किंतु मुझे एक बार फिर यह कहनेकी अनुमति दी जाये कि इस कानूनके सामने झुकने तथा सोच विचार कर की गई अपनी शपथको तोडनेसे हमारे समाजका जो पतन होगा, उसके मुकाबले कानूनका कठोरसे कठोर प्रशासन भी कुछ नही है। मेरा सघ यह अनुभव करता है कि यद्यपि आपने यह घोषणा कर दी है कि आपने इस प्रश्नके भारतीय दष्टिकोणका विशेष रूपसे अध्ययन किया है, फिर भी विरोधकी मूल भावना और साथ ही मेरे सघ द्वारा उठाये हुए अत्यन्त महत्वपूर्ण मुद्दोपर आपने बिलकुल ही ध्यान नहीं दिया । अन्तमे मै इस बातको फिर दोहरा देना चाहता हूँ कि भारतीयोके अत्यधिक संख्यामे आव्रजन तथा व्यापारमे अनियत्रित प्रतियोगिता के विरुद्ध आपके एतराजकी मेरे सघने सदा ही कद्र की हे । और समाजकी नेकनीयती प्रकट करनेकी दृष्टिसे उसने विनम्रतापूवक ऐसे प्रस्ताव पेश किये है, जिनसे दोनो एतराज दूर हो जाये । किन्तु, भारतीयोके लिए यह असम्भव हे कि वे इस कानूनको स्वीकार कर अपना रहा सहा सम्मान भी खो बैठे, क्योकि यह कानून सही वस्तुस्थितिसे अनभिज्ञता के कारण बनाया गया है, कायरूपमे एक हद तक दमनकारी है और मेरा सघ जिस समाजका प्रतिनिधित्व करता है उसकी धार्मिक भावनाओको चोट पहुँचाता है। अध्यक्ष, ब्रिटिश भारतीय संघ [' रड डेली मेल' जोहानिसबर्ग ] दो सौ बाईस पत्र 'रैड डेली मेल' को जोहानिसबग अक्तूबर नौ, [एक हज़ार नौ सौ सात ] आपने श्री सुलेमान मगा' तथा पूनिया नामक एक भारतीय महिलाके, जिनके साथ घोर दुव्यवहार किया गया था, मामलोको उत्साहपूर्वक उठा लेनेकी कृपा की थी । मै आपका ध्यान एक तीसरे मामलेकी ओर आकर्षित करता हूँ, जो मेरे देखनेमे आया है। इस मामलेमे जो अकारण अपमान किया गया है, वह पहले दोनो मामलोसे अधिक नहीं, तो कम भी नही है । श्री ए थनी पीटस जन्मत भारतीय ईसाई और नेटालके एक पुराने सरकारी नौकर है । इस समय वे पीटरमरित्सबगके मुख्य न्यायाधीशकी अदालतमे दुभाषियेका काम कर रहे ह । रविवारकी बात है, वे शनिवारको पीटरमैरित्सबगसे चलनेवाली जोहानिसबग मेलसे जोहानिसबग जा रहे थे। उनके पास रियायती टिकट और रेलवेकी ओरसे मिला हुआ एक प्रमाणपत्र था, जिसमे उनके सरकारी पदका विवरण था । फोक्सरस्टमे जाच करनेवाले पुलिस अधिकारीने उनसे कडी जिरह की । श्री पीटसने अपना अनुमतिपत्र दिखलाया, जो उहे भारतीयाके स्वेच्छया अँगूठा निशान देनेसे पहले दिया गया था। इससे अधिकारीको सतोष नही हुआ । अत श्री पीटसने वह रियायती टिकट दिखलाया, जिसका मने उल्लेख किया है, अपने हस्ताक्षर देनेका प्रस्ताव किया, किन्तु कोई फायदा नहीं हुआ। और अधिकारीने उनका यह कहकर अपमान किया कि शायद आप और किसीका रियायती टिकट लेकर आये है । इसपर श्री पीटसने अपनी छडी तक दिखलाई, जिसपर उनके नामके प्रथम अक्षर अकित थे । फिर, उन्होने अपनी कमीज भी दिखलाई, जिसपर उनका पूरा नाम था । किन्तु यह भी सन्तोषजनक नही समझा गया । तब उन्होने तीन दिन बाद लौटनेकी जमानतके लिए रुपया जमा करनेका प्रस्ताव किया, कितु अधिकारीने एक काफिर पुलिसको आज्ञा दी कि वह श्री पीटसको अक्षरश डिब्बेसे बाहर घसीट ले । जब श्री पीटसको सार्जेंट मैसफील्डके सामने पेश किया गया तो उसने उस भयकर गलतीको अनुभव करते हुए माफी मागी और उनको छोड़ दिया। लेकिन इतनेसे ही भला सन्तोष कैसे होता ? इस अपमानके अलावा उहे फोक्सरस्टमे, जहा वे किसीका जानते नही थे, लम्बी तथा थका देनेवाली प्रतीक्षा करनी पडी और साथ ही उनकी तीन दिनकी छोटी सी छुट्टीका भी बडा सा हिस्सा बेकार गया। श्री पीटस आज रातको नौकरीपर लौटेगे। इस घटनाके बारेमे मुझे टिप्पणी करनेकी आवश्यकता नही है । मुझे केवल यही कहना है कि इस देशमे एक देखिए खण्ड पाँच, पृष्ठ अट्ठाईस हज़ार आठ सौ नवासी और दो सौ चौरानवे । दो वही, पृष्ठ छियालीस हज़ार तीन सौ चौंसठ । यात्रा करने में भी अनेक सम्मानित भारतीयोको जो कुछ सहन करना पड़ता है, यह उसका एक नमूना है । यहा साधारण कानून बनानेका प्रश्न नही है, एशियाइयोका बडी सख्यामे आनेका भी प्रश्न नहीं है, बल्कि मनुष्य और मनुष्यके बीचमे साधारण शिष्टता तथा यायका प्रश्न है । अथवा, 'ग्लासगो हेरल्ड' में उस दिन लिखनेवाली श्रीमती वॉगलके शब्दोमे, क्या रगदार चमडी होना ट्रान्सवालमे श्वेत लोगोके विरुद्ध जुम है ? दो सौ तेईस केपके भारतीय केपके सर्वोच्च यायालयमे प्रवासी कानूनसे उत्पन्न एक महत्त्वपूर्ण परीक्षणात्मक मुकदमेकी सुनवाई हुई थी, जिसका विवरण' 'केप टाइम्स' ने प्रकाशित किया था । कुछ विलम्ब हो जानेपर भी हम उसे इस अकमे अयत्र उद्धत कर रहे है । केपकी ससदमे जब प्रवासी अधिनियम पास किया जा रहा था उस समय वहाके प्रमुख भारतीयोने जो सुस्ती दिखाई उसपर हम पहले भी खेद प्रकट कर चुके है । हमे विश्वास है कि फरियाद की जाती तो इस प्रकारके कानूनमे निश्चय ही काफी संशोधन कर दिया जाता । यद्यपि मुकदमेके तथ्योको उक्त विवरणमे पूरी तरहसे दिया गया है, तथापि हम दुबारा उनको यहा दे रहे है । केपमे बसा हुआ एक भारतीय, जिसकी वहा कुछ जमीन जायदाद थी, और जो एक हज़ार आठ सौ सत्तानवे से वहा सामान्य विक्रेताका रोजगार करता था, भारत जाना चाहता था, और भारतसे लौटते समय होनेवाली असुविधासे बचने के इरादेसे एक निश्चित अवधि तक उस उपनिवेशसे अनुपस्थित रहनेका अनुमतिपत्र चाहता था । प्रवासी अधिकारीने ऐसा अनुमतिपत्र देनेसे इनकार कर दिया और ऐसा अनुमतिपत्र देना चाहा जिसकी अवधिका निश्चय वह स्वय करता । यहा प्रश्न यह नहीं है कि प्रवासी अधिकारीका निणय उचित था या नहीं, क्योकि एक ओरसे अधिकार पानेका तथा दूसरी ओरसे उसे न देनेका प्रयत्न किया जा रहा था । प्रवासी अधिकारीका कहना था कि एक एशियाईको उपनिवेशसे अनुपस्थित रहनेका अनुमति - पत्र देना एक रियायत है । किन्तु एशियाईका कहना था कि यह उसका अधिकार है । अब सर्वोच्च यायालयने यह निर्णय दिया है कि कानूनके अनुसार एशियाइयोको अनुपस्थितिका अनुमतिपत्र पानेका निहित अधिकार नही है । साराश यह कि यह मामला निरा स्वाग है, क्योकि इससे एशियाइयोको दासताकी अवस्थामे पहुँचा दिया गया है, जिसके लिए वहाके प्रमुख भारतीयोके अलावा और किसीको दोष नही दिया जा सकता । इसके अलावा, दलीलोमें उठाया गया सबसे दिलचस्प मुद्दा अनिश्चित ही छोड़ दिया गया है। प्रवासी अधिनियमकी पहली धारा एक हज़ार नौ सौ दो के प्रवासी अधिनियम के द्वारा दिये गये अधिकारोकी रक्षा करती हुई एक विवरण यहाँ नही दिया जा रहा है । |
19 के पांच नए मामले सामने आए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने रविवार को कहा कि झारखंड में पहली बार एच3एन2 इन्फ्लूएंजा के दो नए मामले सामने आए हैं, इसके अलावा सीओवीआईडी -19 के पांच नए मामले सामने आए हैं।
अधिकारी ने कहा कि एक 68 वर्षीय महिला, जिसे गुरुवार को ठंड और बुखार के लक्षणों के साथ जमशेदपुर के टाटा मेन अस्पताल (टीएमएच) में भर्ती कराया गया था, शनिवार को इन्फ्लूएंजा वायरस एच3एन2 के लिए सकारात्मक परीक्षण किया गया।
रिपोर्ट की पुष्टि करते हुए पूर्वी सिंहभूम जिले के सिविल सर्जन डॉ. जुझार मांझी ने कहा कि पीड़िता को आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है और उसकी निगरानी की जा रही है. उन्होंने कहा कि पीड़ित का कोई यात्रा इतिहास नहीं था।
दूसरा मामला रांची के रानी अस्पताल में सामने आया। अस्पताल के प्रमुख डॉ. राजेश सिंह ने पीटीआई-भाषा को बताया, चार साल के एक बच्चे में शनिवार को इन्फ्लूएंजा वायरस एच3एन2 की पुष्टि हुई है। बच्चे को निमोनिया के लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रांची स्थित माइक्रोप्रैक्सिस लैब ने रिपोर्ट की पुष्टि की। " इस बीच, शनिवार को रिपोर्ट किए गए रोग के पांच नए मामलों के साथ राज्य के कुल सक्रिय सीओवीआईडी -19 मामले 10 तक पहुंच गए।
रांची और पश्चिमी सिंहभूम जिलों ने दो-दो मामले दर्ज किए हैं, जबकि देवघर में शनिवार को एक मामला दर्ज किया गया। इससे पहले, देवघर, पूर्वी सिंहभूम और लातेहार जिलों में एक-एक मामला दर्ज किया गया था, जबकि रांची में दो, स्वास्थ्य विभाग के कोविद बुलेटिन के अनुसार।
ताजा मामलों को जोड़ने के साथ, बीमारी के प्रकोप के बाद से झारखंड का कोरोनवायरस केसलोएड बढ़कर 4,42,589 हो गया। अब तक 4,37,247 लोग इस बीमारी से ठीक हो चुके हैं, जबकि 5,332 लोगों की मौत हो चुकी है।
बुलेटिन में कहा गया है कि झारखंड ने पिछले 24 घंटों में सीओवीआईडी -19 के लिए 926 नमूनों का परीक्षण किया है।
हालांकि, डॉक्टरों के एक वर्ग ने दावा किया कि अगर परीक्षण बढ़ाया गया तो मामलों की संख्या बढ़ सकती है।
शीर्षक को छोड़कर, इस कहानी को द टेलीग्राफ ऑनलाइन के कर्मचारियों द्वारा संपादित नहीं किया गया है और इसे एक सिंडिकेट फीड से प्रकाशित किया गया है।
| उन्नीस के पांच नए मामले सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने रविवार को कहा कि झारखंड में पहली बार एचतीनएनदो इन्फ्लूएंजा के दो नए मामले सामने आए हैं, इसके अलावा सीओवीआईडी -उन्नीस के पांच नए मामले सामने आए हैं। अधिकारी ने कहा कि एक अड़सठ वर्षीय महिला, जिसे गुरुवार को ठंड और बुखार के लक्षणों के साथ जमशेदपुर के टाटा मेन अस्पताल में भर्ती कराया गया था, शनिवार को इन्फ्लूएंजा वायरस एचतीनएनदो के लिए सकारात्मक परीक्षण किया गया। रिपोर्ट की पुष्टि करते हुए पूर्वी सिंहभूम जिले के सिविल सर्जन डॉ. जुझार मांझी ने कहा कि पीड़िता को आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है और उसकी निगरानी की जा रही है. उन्होंने कहा कि पीड़ित का कोई यात्रा इतिहास नहीं था। दूसरा मामला रांची के रानी अस्पताल में सामने आया। अस्पताल के प्रमुख डॉ. राजेश सिंह ने पीटीआई-भाषा को बताया, चार साल के एक बच्चे में शनिवार को इन्फ्लूएंजा वायरस एचतीनएनदो की पुष्टि हुई है। बच्चे को निमोनिया के लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रांची स्थित माइक्रोप्रैक्सिस लैब ने रिपोर्ट की पुष्टि की। " इस बीच, शनिवार को रिपोर्ट किए गए रोग के पांच नए मामलों के साथ राज्य के कुल सक्रिय सीओवीआईडी -उन्नीस मामले दस तक पहुंच गए। रांची और पश्चिमी सिंहभूम जिलों ने दो-दो मामले दर्ज किए हैं, जबकि देवघर में शनिवार को एक मामला दर्ज किया गया। इससे पहले, देवघर, पूर्वी सिंहभूम और लातेहार जिलों में एक-एक मामला दर्ज किया गया था, जबकि रांची में दो, स्वास्थ्य विभाग के कोविद बुलेटिन के अनुसार। ताजा मामलों को जोड़ने के साथ, बीमारी के प्रकोप के बाद से झारखंड का कोरोनवायरस केसलोएड बढ़कर चार,बयालीस,पाँच सौ नवासी हो गया। अब तक चार,सैंतीस,दो सौ सैंतालीस लोग इस बीमारी से ठीक हो चुके हैं, जबकि पाँच,तीन सौ बत्तीस लोगों की मौत हो चुकी है। बुलेटिन में कहा गया है कि झारखंड ने पिछले चौबीस घंटाटों में सीओवीआईडी -उन्नीस के लिए नौ सौ छब्बीस नमूनों का परीक्षण किया है। हालांकि, डॉक्टरों के एक वर्ग ने दावा किया कि अगर परीक्षण बढ़ाया गया तो मामलों की संख्या बढ़ सकती है। शीर्षक को छोड़कर, इस कहानी को द टेलीग्राफ ऑनलाइन के कर्मचारियों द्वारा संपादित नहीं किया गया है और इसे एक सिंडिकेट फीड से प्रकाशित किया गया है। |
SL vs NED ICC World T20, 2021 मैच डिटेल्सः
SL vs NED के बीच इस टूर्नामेंट का 12वाँ मैच 22 अक्टूबर को Sheikh Zayed Stadium, Abu Dhabi, United Arab Emirates पर खेला जाएगा। यह मैच 07:30 PM पर शुरू होगा। इन दोनों मैच का सीधा प्रसारण Fancode App और cricketaddictor. com वैबसाइट पर उपलब्ध रहेगा।
SL vs NED ICC World T20, 2021 मैच प्रीव्यूः
श्रीलंका टीम पिछले मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए आयरलैंड को 70 रन से हराकर इस ग्रुप में क्वालीफाई करने वाली पहली टीम बन गई है। श्रीलंका टीम की तरफ से पिछले मैच में टीम के स्टार ऑलराउंडर वनिन्दु हसरंगा और टीम के सलामी बल्लेबाज पथुम निसानका ने काफी बेहतरीन प्रदर्शन किया है इस मैच में भी टीम को उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।
वहीं दूसरी ओर NED टीम को पिछले मैच में NAM के खिलाफ 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा है और वह अंकतालिका में अंतिम स्थान पर है। NED टीम के तरफ से मैक्स ओ'डॉड को छोड़कर बाकी सब बल्लेबाज काफी संघर्ष करते हुए नजर आए हैं। इस मैच में टीम को बाकी खिलाड़ियों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। श्रीलंका टीम इस मैच में अपनी जीत की लय को कायम रखते हुए इस मैच में जीत दर्ज करने के इरादे से मैदान में उतरेगी वहीं नीदरलैंड टीम इस टूर्नामेंट में अपनी पहली जीत दर्ज करना चाहेगी।
SL vs NED ICC World T20, 2021 मौसम रिपोर्टः
आसमान बिल्कुल साफ रहेगा हम बिना रुकावट मैच होने की आशा करते हैं। तापमान 34 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है।
SL vs NED ICC World T20, 2021 पिच रिपोर्टः
इस पिच पर गेंदबाजों को मदद प्राप्त होती है। इस पिच पर टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करना एक सही निर्णय रहेगा।
पहली पारी का औसत स्कोरः
यहां पहली पारी का औसत स्कोर 131 रन के आस पास का रहा है।
लक्ष्य का पीछा करते हुए रिकार्डः
दूसरी पारी में बल्लेबाजी करना थोड़ा मुश्किल नजर आया है, इसीलिए लक्ष्य का पीछा करते हुए यहां पर सिर्फ 40 प्रतिशत मुकाबले जीते गए हैं।
संभावित एकादश SL:
संभावित एकादश NED:
SL vs NED ICC World T20, 2021 ड्रीम टीम टॉप पिक्सः
पथुम निसानका; इन्होंने पिछले मैच में श्रीलंका टीम के तरफ से शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए 61 रन की पारी खेली जिसके बदौलत टीम 171 रन का विशाल स्कोर खड़ा करने में कामयाब रही इस मैच में भी टीम को इनसे अच्छी शुरुआत की उम्मीद है।
महेश थीक्षाना; श्रीलंका टीम के युवा तेज गेंदबाज है इन्होंने पिछले मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 विकेट लिए इस मैच में भी टीम को इनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है।
वनिन्दु हसरंगा; ये काफी बेहतरीन स्पिन गेंदबाज है तथा अंतिम ओवरों में विस्फोटक बल्लेबाजी करने में भी पूरी तरह सक्षम है पिछले मैच में इन्होंने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए 71 रन बनाए और 1 विकेट लिया इस पिच पर स्पिन गेंदबाजों को काफी मदद प्राप्त होती है ऐसे में इनका ड्रीम टीम में होना आवश्यक है।
मैक्स ओ'डॉड; पिछले मैच में NED टीम के तरफ से शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए इन्होंने 70 रन बनाए इस टूर्नामेंट में यह अभी तक 2 अर्धशतक जमा चुके हैं इस मैच में भी यह बल्लेबाजी से ड्रीम टीम में अच्छे पॉइंट दिला सकते हैं।
पीटर सीलार ; इस टूर्नामेंट में इन्होंने अभी तक 21 रन बनाए और 2 विकेट लिया इस मैच में भी ये बल्ले और गेंद दोनों से अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं।
रूलोफ वैन डेर मेर्वे; NED टीम के सबसे प्रमुख खिलाड़ी है ये अपने दम से मैच जिताने की काबिलियत रखते हैं इस मैच में यह अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं ड्रीम टीम में यह कप्तान और उपकप्तान के तौर पर एक अच्छा विकल्प रहेंगे।
SL vs NED ICC World T20, 2021 कप्तान/उपकप्तान विकल्पः
SL vs NED ICC World T20, 2021 विशेषज्ञ सलाहः
यह पिच गेंदबाजों के अनुकूल है, इसलिए इस मैच में 1-3-4-3 के कंबीनेशन के साथ जाना एक सही निर्णय रहेगा। ग्रैंड अविष्का फर्नांडो,वनिन्दु हसरंगा टीम में कप्तान और उपकप्तान के लिए एक अच्छे विकल्प साबित हो सकते हैं।
SL vs NED ICC World T20, 2021 संभावित विजेताः
SL के मैच जीतने की संभावना ज्यादा है।
| SL vs NED ICC World Tबीस, दो हज़ार इक्कीस मैच डिटेल्सः SL vs NED के बीच इस टूर्नामेंट का बारहवाँ मैच बाईस अक्टूबर को Sheikh Zayed Stadium, Abu Dhabi, United Arab Emirates पर खेला जाएगा। यह मैच सात:तीस PM पर शुरू होगा। इन दोनों मैच का सीधा प्रसारण Fancode App और cricketaddictor. com वैबसाइट पर उपलब्ध रहेगा। SL vs NED ICC World Tबीस, दो हज़ार इक्कीस मैच प्रीव्यूः श्रीलंका टीम पिछले मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए आयरलैंड को सत्तर रन से हराकर इस ग्रुप में क्वालीफाई करने वाली पहली टीम बन गई है। श्रीलंका टीम की तरफ से पिछले मैच में टीम के स्टार ऑलराउंडर वनिन्दु हसरंगा और टीम के सलामी बल्लेबाज पथुम निसानका ने काफी बेहतरीन प्रदर्शन किया है इस मैच में भी टीम को उनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। वहीं दूसरी ओर NED टीम को पिछले मैच में NAM के खिलाफ छः विकेट से हार का सामना करना पड़ा है और वह अंकतालिका में अंतिम स्थान पर है। NED टीम के तरफ से मैक्स ओ'डॉड को छोड़कर बाकी सब बल्लेबाज काफी संघर्ष करते हुए नजर आए हैं। इस मैच में टीम को बाकी खिलाड़ियों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। श्रीलंका टीम इस मैच में अपनी जीत की लय को कायम रखते हुए इस मैच में जीत दर्ज करने के इरादे से मैदान में उतरेगी वहीं नीदरलैंड टीम इस टूर्नामेंट में अपनी पहली जीत दर्ज करना चाहेगी। SL vs NED ICC World Tबीस, दो हज़ार इक्कीस मौसम रिपोर्टः आसमान बिल्कुल साफ रहेगा हम बिना रुकावट मैच होने की आशा करते हैं। तापमान चौंतीस डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है। SL vs NED ICC World Tबीस, दो हज़ार इक्कीस पिच रिपोर्टः इस पिच पर गेंदबाजों को मदद प्राप्त होती है। इस पिच पर टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करना एक सही निर्णय रहेगा। पहली पारी का औसत स्कोरः यहां पहली पारी का औसत स्कोर एक सौ इकतीस रन के आस पास का रहा है। लक्ष्य का पीछा करते हुए रिकार्डः दूसरी पारी में बल्लेबाजी करना थोड़ा मुश्किल नजर आया है, इसीलिए लक्ष्य का पीछा करते हुए यहां पर सिर्फ चालीस प्रतिशत मुकाबले जीते गए हैं। संभावित एकादश SL: संभावित एकादश NED: SL vs NED ICC World Tबीस, दो हज़ार इक्कीस ड्रीम टीम टॉप पिक्सः पथुम निसानका; इन्होंने पिछले मैच में श्रीलंका टीम के तरफ से शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए इकसठ रन की पारी खेली जिसके बदौलत टीम एक सौ इकहत्तर रन का विशाल स्कोर खड़ा करने में कामयाब रही इस मैच में भी टीम को इनसे अच्छी शुरुआत की उम्मीद है। महेश थीक्षाना; श्रीलंका टीम के युवा तेज गेंदबाज है इन्होंने पिछले मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन विकेट लिए इस मैच में भी टीम को इनसे अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। वनिन्दु हसरंगा; ये काफी बेहतरीन स्पिन गेंदबाज है तथा अंतिम ओवरों में विस्फोटक बल्लेबाजी करने में भी पूरी तरह सक्षम है पिछले मैच में इन्होंने शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए इकहत्तर रन बनाए और एक विकेट लिया इस पिच पर स्पिन गेंदबाजों को काफी मदद प्राप्त होती है ऐसे में इनका ड्रीम टीम में होना आवश्यक है। मैक्स ओ'डॉड; पिछले मैच में NED टीम के तरफ से शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए इन्होंने सत्तर रन बनाए इस टूर्नामेंट में यह अभी तक दो अर्धशतक जमा चुके हैं इस मैच में भी यह बल्लेबाजी से ड्रीम टीम में अच्छे पॉइंट दिला सकते हैं। पीटर सीलार ; इस टूर्नामेंट में इन्होंने अभी तक इक्कीस रन बनाए और दो विकेट लिया इस मैच में भी ये बल्ले और गेंद दोनों से अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। रूलोफ वैन डेर मेर्वे; NED टीम के सबसे प्रमुख खिलाड़ी है ये अपने दम से मैच जिताने की काबिलियत रखते हैं इस मैच में यह अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं ड्रीम टीम में यह कप्तान और उपकप्तान के तौर पर एक अच्छा विकल्प रहेंगे। SL vs NED ICC World Tबीस, दो हज़ार इक्कीस कप्तान/उपकप्तान विकल्पः SL vs NED ICC World Tबीस, दो हज़ार इक्कीस विशेषज्ञ सलाहः यह पिच गेंदबाजों के अनुकूल है, इसलिए इस मैच में एक-तीन-चार-तीन के कंबीनेशन के साथ जाना एक सही निर्णय रहेगा। ग्रैंड अविष्का फर्नांडो,वनिन्दु हसरंगा टीम में कप्तान और उपकप्तान के लिए एक अच्छे विकल्प साबित हो सकते हैं। SL vs NED ICC World Tबीस, दो हज़ार इक्कीस संभावित विजेताः SL के मैच जीतने की संभावना ज्यादा है। |
।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद )
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो।
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद )
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद)
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद )
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद )
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि।
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो।
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
| ।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है। |
हाल ही में ब्रिटेन में रहने वाली एक भारतीय महिला की वीडियो वायरल हुई है जिसने संबलपुरी हथकरघा साड़ी पहनकर मैराथन में हिस्सा लिया। आप भी यह वीडियो जरूर देखें।
सोशल मीडिया पर अक्सर वीडियो और फोटो वायरल होती रहती हैं। हाल ही में ब्रिटेन में रहने वाली एक भारतीय महिला की वीडियो वायरल हुई है, संबलपुरी हथकरघा साड़ी पहनकर मैराथन में हिस्सा लिया। इस महिला की वीडियो देखकर ट्विटर पर यूजर्स तरह-तरह से महिला की तारीफ कर रहे हैं और उन्हें देश के सभी लोगों के लिए प्रेरणा भी बता रहे हैं।
आपको बता दें कि ब्रिटेन में रहने वाली भारतीय महिला मधुस्मिता जेना दास की उम्र 41 साल है। मधुस्मिता ने मैनचेस्टर रेस के दौरान सुंदर संबलपुरी हथकरघा साड़ी पहनी हुई थी और स्नीकर्स भी पहने थे। उन्होंने मैनचेस्टर में 42. 5 किलोमीटर की मैराथन को 4 घंटे 50 मिनट में पूर किया। इस दौरान उनकी साड़ी में सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। एक ट्विटर यूजर ने मैराथन की फोटो शेयर की, जिसमें मधुस्मिता अन्य प्रतिभागियों के साथ मैराथन में दौड़ लगाती दिख रही थी।
ट्वीट में यूजर ने लिखा है कि यूके के मैनचेस्टर में रहने वाली एक उड़िया ने संबलपुरी साड़ी पहनकर ब्रिटेन के दूसरे सबसे बड़े मैनचेस्टर मैराथन 2023 में दौड़ लगाई है. . वाकई यह कितना अच्छा इशारा है हम सभी के लिए। (80 साल की बुजुर्ग महिला ने की पैराग्लाइडिंग, वीडियो देखकर आप भी करेंगी उनके जज्बे को सलाम)आपकी स्पिरिट को सलाम। संबलपुर आपकी एक सांस्कृतिक पहचान है जो सदियों से आदिवासी और लोक समुदायों के मजबूत जुड़ाव से उत्पन्न होती है। यह एक कठिन दौर है, आइए शांति और सद्भाव बनाए रखें।
इसे भी पढ़ें- जानिए कौन थीं भारत की पहली महिला पायलट सरला ठकराल?
आधिकारिक ट्विटर अकाउंट फ्रेंड्स ऑफ इंडिया सोसाइटी इंटल यूके ने भी मैराथन का एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो में यह नजर आ रहा है कि मधुस्मिता संबलपुरी साड़ी पहनने के बावजूद आराम से दौड़ रही हैं। रेस के दौरान उनके दोस्त और परिवार वाले उनका हौसला भी बढ़ा रहे हैं। वीडियो पर लोगों ने कई सारे ट्वीट भी किए हैं। एक यूजर ने लिखा है की यह बहुत गर्व की बात है। (भारतीय सिनेमा में पहली बार नजर आई थीं एक्ट्रेस दुर्गाबाई कामत)
वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा है कि कितनी अच्छी तस्वीर है और यह हमारी संस्कृति को दुनिया के सामने दिखा रही है।
आपको बता दें कि मैराथन दौड़ में मधुस्मिता दास की ये पहली एंट्री नहीं है और वह इससे दुनिया भर में कई मैराथन और अल्ट्रा-मैराथन दौड़ चुकी हैं, लेकिन उन्होंने साड़ी पहनकर पहली बार मैराथन में दौड़ लगाई है। मधुस्मिता के पति सचिन दास मिस्र में काम करते हैं और उनके पिता नीरेंद्र मोहन जेना और दो बेटे उनकी इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं।
मधुस्मिता की वीडियो देखकर आपको कैसा लगा हमें जरूर बताएं। साथ ही, अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
| हाल ही में ब्रिटेन में रहने वाली एक भारतीय महिला की वीडियो वायरल हुई है जिसने संबलपुरी हथकरघा साड़ी पहनकर मैराथन में हिस्सा लिया। आप भी यह वीडियो जरूर देखें। सोशल मीडिया पर अक्सर वीडियो और फोटो वायरल होती रहती हैं। हाल ही में ब्रिटेन में रहने वाली एक भारतीय महिला की वीडियो वायरल हुई है, संबलपुरी हथकरघा साड़ी पहनकर मैराथन में हिस्सा लिया। इस महिला की वीडियो देखकर ट्विटर पर यूजर्स तरह-तरह से महिला की तारीफ कर रहे हैं और उन्हें देश के सभी लोगों के लिए प्रेरणा भी बता रहे हैं। आपको बता दें कि ब्रिटेन में रहने वाली भारतीय महिला मधुस्मिता जेना दास की उम्र इकतालीस साल है। मधुस्मिता ने मैनचेस्टर रेस के दौरान सुंदर संबलपुरी हथकरघा साड़ी पहनी हुई थी और स्नीकर्स भी पहने थे। उन्होंने मैनचेस्टर में बयालीस. पाँच किलोग्राममीटर की मैराथन को चार घंटाटे पचास मिनट में पूर किया। इस दौरान उनकी साड़ी में सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। एक ट्विटर यूजर ने मैराथन की फोटो शेयर की, जिसमें मधुस्मिता अन्य प्रतिभागियों के साथ मैराथन में दौड़ लगाती दिख रही थी। ट्वीट में यूजर ने लिखा है कि यूके के मैनचेस्टर में रहने वाली एक उड़िया ने संबलपुरी साड़ी पहनकर ब्रिटेन के दूसरे सबसे बड़े मैनचेस्टर मैराथन दो हज़ार तेईस में दौड़ लगाई है. . वाकई यह कितना अच्छा इशारा है हम सभी के लिए। आपकी स्पिरिट को सलाम। संबलपुर आपकी एक सांस्कृतिक पहचान है जो सदियों से आदिवासी और लोक समुदायों के मजबूत जुड़ाव से उत्पन्न होती है। यह एक कठिन दौर है, आइए शांति और सद्भाव बनाए रखें। इसे भी पढ़ें- जानिए कौन थीं भारत की पहली महिला पायलट सरला ठकराल? आधिकारिक ट्विटर अकाउंट फ्रेंड्स ऑफ इंडिया सोसाइटी इंटल यूके ने भी मैराथन का एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो में यह नजर आ रहा है कि मधुस्मिता संबलपुरी साड़ी पहनने के बावजूद आराम से दौड़ रही हैं। रेस के दौरान उनके दोस्त और परिवार वाले उनका हौसला भी बढ़ा रहे हैं। वीडियो पर लोगों ने कई सारे ट्वीट भी किए हैं। एक यूजर ने लिखा है की यह बहुत गर्व की बात है। वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा है कि कितनी अच्छी तस्वीर है और यह हमारी संस्कृति को दुनिया के सामने दिखा रही है। आपको बता दें कि मैराथन दौड़ में मधुस्मिता दास की ये पहली एंट्री नहीं है और वह इससे दुनिया भर में कई मैराथन और अल्ट्रा-मैराथन दौड़ चुकी हैं, लेकिन उन्होंने साड़ी पहनकर पहली बार मैराथन में दौड़ लगाई है। मधुस्मिता के पति सचिन दास मिस्र में काम करते हैं और उनके पिता नीरेंद्र मोहन जेना और दो बेटे उनकी इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं। मधुस्मिता की वीडियो देखकर आपको कैसा लगा हमें जरूर बताएं। साथ ही, अगर आपको यह लेख अच्छा लगा हो तो इसे शेयर जरूर करें व इसी तरह के अन्य लेख पढ़ने के लिए जुड़ी रहें आपकी अपनी वेबसाइट हरजिन्दगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें। |
Single Shot Covid Vaccine in India: भारत में तेजी से चल रहे टीकाकरण अभियान को लेकर एक और बड़ी खुशखबरी आयी है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने रविवार को सिंगल डोज स्पूतनिक लाइट वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की अनुमति दे दी है। इसकी जानकारी खुद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने ट्वीट करके दी है। इसके बाद देश में स्वीकृत कोरोना वैक्सीन की संख्या 9 हो गई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर मनसुख मंडाविया ने ट्वीट कर लिखा कि DCGI ने भारत में सिंगल-डोज स्पुतनिक लाइट कोरोना वैक्सीन के लिए आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी है। ये देश की 9वीं वैक्सीन है, जो लोगों को दी जाएगी। साथ ही ये महामारी के खिलाफ देश की सामूहिक लड़ाई को और मजबूत करेगी। वैसे रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी को सरकार ने पिछले साल ही मंजूरी दी थी, जिसकी दो डोज लोगों को लगाई जा रही है।
गौरतलब है कि, DCGI की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने 2 दिन पहले ही स्पूतनिक लाइट सिंगल डोज वाली वैक्सीन के इस्तेमाल के लिए सिफारिश की थी। स्पूतनिक लाइट वैक्सीन रूस में विकसित हुई वैक्सीन है। अब तक देश में जिन आठ वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा था वो सभी डबल डोज हैं। बता दें कि, देश में अब तक 8 कोरोना वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें कोविशील्ड, कोवैक्सीन, कोवोवैक्स के साथ ही कॉबेवैक्स, मॉडर्ना, जॉनसन एंड जॉनसन जी-कोव-डी शामिल हैं। रूस की स्पूतनिक-वी वैक्सीन का भी इस्तेमाल देश में पहले से ही हो रहा है।
जानिए कितनी है प्रभावी और क्या होंगे फायदें?
द लैंसेट की एक रिपोर्ट के मुताबिक स्पुतनिक लाइट कोरोना के खिलाफ 78. 6-83. 7 फीसदी सक्षम है जोकि कोरोना की दो वैक्सीन की तुलना में बेहतर है। इसके इस्तेमाल से कोरोना के मरीज की अस्पताल में भर्ती होने की संभावना 82. 1-87. 6 फीसदी तक कम हो जाती है। स्पुतनिक वी और स्पुतनिक लाइट में बहुत फर्क है। मौजूदा वक्त में भारत में स्पुतनिक वी की दो डोज लोगों को दी जा रही है, जबकि स्पुतनिक लाइट की एक ही डोज कोरोना के खिलाफ काफी है। इसकी मंजूरी के बाद कम खर्च में लोगों का टीकाकरण होगा और स्वास्थ्य केंद्रों पर लोगों की भीड़ भी कम हो जाएगी।
| Single Shot Covid Vaccine in India: भारत में तेजी से चल रहे टीकाकरण अभियान को लेकर एक और बड़ी खुशखबरी आयी है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने रविवार को सिंगल डोज स्पूतनिक लाइट वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की अनुमति दे दी है। इसकी जानकारी खुद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने ट्वीट करके दी है। इसके बाद देश में स्वीकृत कोरोना वैक्सीन की संख्या नौ हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर मनसुख मंडाविया ने ट्वीट कर लिखा कि DCGI ने भारत में सिंगल-डोज स्पुतनिक लाइट कोरोना वैक्सीन के लिए आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी है। ये देश की नौवीं वैक्सीन है, जो लोगों को दी जाएगी। साथ ही ये महामारी के खिलाफ देश की सामूहिक लड़ाई को और मजबूत करेगी। वैसे रूसी वैक्सीन स्पुतनिक वी को सरकार ने पिछले साल ही मंजूरी दी थी, जिसकी दो डोज लोगों को लगाई जा रही है। गौरतलब है कि, DCGI की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने दो दिन पहले ही स्पूतनिक लाइट सिंगल डोज वाली वैक्सीन के इस्तेमाल के लिए सिफारिश की थी। स्पूतनिक लाइट वैक्सीन रूस में विकसित हुई वैक्सीन है। अब तक देश में जिन आठ वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा था वो सभी डबल डोज हैं। बता दें कि, देश में अब तक आठ कोरोना वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इनमें कोविशील्ड, कोवैक्सीन, कोवोवैक्स के साथ ही कॉबेवैक्स, मॉडर्ना, जॉनसन एंड जॉनसन जी-कोव-डी शामिल हैं। रूस की स्पूतनिक-वी वैक्सीन का भी इस्तेमाल देश में पहले से ही हो रहा है। जानिए कितनी है प्रभावी और क्या होंगे फायदें? द लैंसेट की एक रिपोर्ट के मुताबिक स्पुतनिक लाइट कोरोना के खिलाफ अठहत्तर. छः-तिरासी. सात फीसदी सक्षम है जोकि कोरोना की दो वैक्सीन की तुलना में बेहतर है। इसके इस्तेमाल से कोरोना के मरीज की अस्पताल में भर्ती होने की संभावना बयासी. एक-सत्तासी. छः फीसदी तक कम हो जाती है। स्पुतनिक वी और स्पुतनिक लाइट में बहुत फर्क है। मौजूदा वक्त में भारत में स्पुतनिक वी की दो डोज लोगों को दी जा रही है, जबकि स्पुतनिक लाइट की एक ही डोज कोरोना के खिलाफ काफी है। इसकी मंजूरी के बाद कम खर्च में लोगों का टीकाकरण होगा और स्वास्थ्य केंद्रों पर लोगों की भीड़ भी कम हो जाएगी। |
देवदार का पेड़ इसकी उपस्थिति में क्रोकस की तरह दिखता है, हालांकि यह शरद ऋतु में खिलता है, लेकिन वसंत में नहीं। इस प्रकार, वह वसंत की उज्ज्वल यादें रखता है और आने वाली सर्दी के बाद आने वाली नई गर्मी की उम्मीद के साथ आत्मा को वार करता है।
देवदार-कोल्चिकम का दूसरा नाम कोलचिकम है। यह लंबे समय तक फूल उत्पादकों के लिए जाना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, पहला फूल प्रोमेथियस के खून पर बढ़ गया। इसका नाम कोल्किस नाम से लिया गया था (आज यह जॉर्जिया का क्षेत्र है)। रूस में इन फूलों को शरद ऋतु, कालातीत कहा जाता था। यूरोप में उन्हें केसर के रूप में जाना जाता है।
कोल्चिकम जीनस संख्या 65 से अधिक किस्मों, जिनमें से अधिकांश भूमध्यसागरीय क्षेत्र में बढ़ती हैं। बगीचे में एक ही प्रजाति वितरित की जाती हैः
- पतझड़ शरद ऋतु - सबसे मशहूर प्रजातियां, सफेद बड़े (7 सेमी तक) फूल 10 सेमी ऊंची होती हैं;
- देवदार-पेड़ शानदार है - गुलाबी-लिलाक रंग के उच्च (20-30 सेमी) रंगों के साथ, बड़ी संख्या में किस्में हैं, जिनमें से बहुत रोचक हैं, उदाहरण के लिए, धारीदार या शतरंज के रंग के साथ;
- कोल्चिकम variegated - काले नसों के साथ गुलाबी और बैंगनी फूल;
- अजेय देवदार - 15 सेमी तक बढ़ता है, रंग के मोटल स्पॉट के साथ गुलाबी है;
- क्रोकस पीले - पीले फूलों के साथ 10 सेमी ऊंचाई;
- सेडरबेरी बीजान्टिन - गुलाबी और बैंगनी फूल 10 सेमी ऊंचे।
सेसपूल के लिए रोपण और देखभाल काफी सरल है। वे किसी भी मिट्टी में उगते हैं, हालांकि वे ढीले और अच्छी तरह से सूखा भूमि में अधिक तीव्रता से खिलते हैं जिसमें खाद या आर्द्रता होती है।
कोल्चिकम लगाने के लिएः पौधे को आराम की अवधि में लगाने के लिए वांछनीय है। परिपक्व बीज काटा जाता है और एक अलग बिस्तर पर लगाया जाता है, लेकिन वे 6-7 साल बाद तक खिल नहीं पाएंगे। इसलिए, बेटी बल्बों के साथ उन्हें विकसित करना बेहतर है। यह आसान, और तेज़ है।
पहले वर्ष के लिए एक बड़ा बल्ब खिल सकता है। विस्मरण के लिए जगह धूप या एक छोटे से Penumbra में चुना जाना चाहिए। उन्हें पेड़ से मोटी छाया पसंद नहीं है, खासकर जब से उन्हें स्लग द्वारा हमला किया जाता है ।
"पड़ोसी" चुनने के लिए सही ढंग से एक गोपनीयता के लिए यह महत्वपूर्ण है। आदर्श रूप से, जूनियर, पेनी और हेलेबोर इस भूमिका के लिए उपयुक्त हैं। आप तालाब में या चट्टान के बगीचे में कोल्चिकम छोड़ सकते हैं, जहां इसे फूल के बाद एक पेरिविंकल, एक विविपेंट और अन्य रोपण संयंत्रों से ढकाया जाएगा।
एक कोल्चिकम प्रत्यारोपण कब करें?
एक स्थान पर 6-7 साल की वृद्धि के बाद, सेसपूल को प्रत्यारोपित किया जाना चाहिए, क्योंकि घोंसला में कंद गिर जाते हैं और फूल छोटे होते हैं।
प्रत्यारोपण अगस्त में लगभग बाकी अवधि के दौरान किया जाता है। यदि कंद बड़े होते हैं, तो वे 15 सेमी की गहराई पर और एक-दूसरे से 25 सेमी की दूरी पर लगाए जाते हैं। छोटे लोगों को गहराई की आवश्यकता नहीं है - यह 6-8 सेमी पर्याप्त है, अंतराल 10-15 सेमी होगा।
रोपण और प्रत्यारोपण से पहले, राख और सुपरफॉस्फेट के साथ मिट्टी को उर्वरित करें - इससे जड़ों के विकास में तेजी आएगी, सर्दियों की सुविधा होगी और प्रचुर मात्रा में फूलों को बढ़ावा मिलेगा।
सेलियाक की देखभाल कैसे करें?
देखभाल कोल्चिकम न्यूनतम और सरल है। फूल बल्कि सार्थक है। वसंत में coevals मजबूत पत्तियों के निर्माण के लिए नाइट्रिक उर्वरकों फ़ीड और अधिक गहन विकास और फूल के लिए उपयोगी पदार्थों के साथ बल्ब संतृप्त किया है।
सर्दी के लिए बल्ब खोदना जरूरी नहीं है - वे पूरी तरह से जमीन में सर्दियों। अपवाद टेरी किस्मों है, वे अधिक नरम और खराब सहनशील ठंढ हैं। लेकिन उन्हें खोला नहीं जा सकता है, लेकिन केवल सर्दियों के लिए पत्ते को ढकते हैं।
आपको पानी कोल्चिकम की आवश्यकता नहीं है। अतिरिक्त नमी में, उन्हें केवल रोपण / प्रत्यारोपण की अवधि की आवश्यकता होती है।
फूलों के लिए कीटों में से स्लग और घोंघे का खतरा होता है। वे जाल पर डाल रहे हैं या molluscicides के साथ लड़ाई।
| देवदार का पेड़ इसकी उपस्थिति में क्रोकस की तरह दिखता है, हालांकि यह शरद ऋतु में खिलता है, लेकिन वसंत में नहीं। इस प्रकार, वह वसंत की उज्ज्वल यादें रखता है और आने वाली सर्दी के बाद आने वाली नई गर्मी की उम्मीद के साथ आत्मा को वार करता है। देवदार-कोल्चिकम का दूसरा नाम कोलचिकम है। यह लंबे समय तक फूल उत्पादकों के लिए जाना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, पहला फूल प्रोमेथियस के खून पर बढ़ गया। इसका नाम कोल्किस नाम से लिया गया था । रूस में इन फूलों को शरद ऋतु, कालातीत कहा जाता था। यूरोप में उन्हें केसर के रूप में जाना जाता है। कोल्चिकम जीनस संख्या पैंसठ से अधिक किस्मों, जिनमें से अधिकांश भूमध्यसागरीय क्षेत्र में बढ़ती हैं। बगीचे में एक ही प्रजाति वितरित की जाती हैः - पतझड़ शरद ऋतु - सबसे मशहूर प्रजातियां, सफेद बड़े फूल दस सेमी ऊंची होती हैं; - देवदार-पेड़ शानदार है - गुलाबी-लिलाक रंग के उच्च रंगों के साथ, बड़ी संख्या में किस्में हैं, जिनमें से बहुत रोचक हैं, उदाहरण के लिए, धारीदार या शतरंज के रंग के साथ; - कोल्चिकम variegated - काले नसों के साथ गुलाबी और बैंगनी फूल; - अजेय देवदार - पंद्रह सेमी तक बढ़ता है, रंग के मोटल स्पॉट के साथ गुलाबी है; - क्रोकस पीले - पीले फूलों के साथ दस सेमी ऊंचाई; - सेडरबेरी बीजान्टिन - गुलाबी और बैंगनी फूल दस सेमी ऊंचे। सेसपूल के लिए रोपण और देखभाल काफी सरल है। वे किसी भी मिट्टी में उगते हैं, हालांकि वे ढीले और अच्छी तरह से सूखा भूमि में अधिक तीव्रता से खिलते हैं जिसमें खाद या आर्द्रता होती है। कोल्चिकम लगाने के लिएः पौधे को आराम की अवधि में लगाने के लिए वांछनीय है। परिपक्व बीज काटा जाता है और एक अलग बिस्तर पर लगाया जाता है, लेकिन वे छः-सात साल बाद तक खिल नहीं पाएंगे। इसलिए, बेटी बल्बों के साथ उन्हें विकसित करना बेहतर है। यह आसान, और तेज़ है। पहले वर्ष के लिए एक बड़ा बल्ब खिल सकता है। विस्मरण के लिए जगह धूप या एक छोटे से Penumbra में चुना जाना चाहिए। उन्हें पेड़ से मोटी छाया पसंद नहीं है, खासकर जब से उन्हें स्लग द्वारा हमला किया जाता है । "पड़ोसी" चुनने के लिए सही ढंग से एक गोपनीयता के लिए यह महत्वपूर्ण है। आदर्श रूप से, जूनियर, पेनी और हेलेबोर इस भूमिका के लिए उपयुक्त हैं। आप तालाब में या चट्टान के बगीचे में कोल्चिकम छोड़ सकते हैं, जहां इसे फूल के बाद एक पेरिविंकल, एक विविपेंट और अन्य रोपण संयंत्रों से ढकाया जाएगा। एक कोल्चिकम प्रत्यारोपण कब करें? एक स्थान पर छः-सात साल की वृद्धि के बाद, सेसपूल को प्रत्यारोपित किया जाना चाहिए, क्योंकि घोंसला में कंद गिर जाते हैं और फूल छोटे होते हैं। प्रत्यारोपण अगस्त में लगभग बाकी अवधि के दौरान किया जाता है। यदि कंद बड़े होते हैं, तो वे पंद्रह सेमी की गहराई पर और एक-दूसरे से पच्चीस सेमी की दूरी पर लगाए जाते हैं। छोटे लोगों को गहराई की आवश्यकता नहीं है - यह छः-आठ सेमी पर्याप्त है, अंतराल दस-पंद्रह सेमी होगा। रोपण और प्रत्यारोपण से पहले, राख और सुपरफॉस्फेट के साथ मिट्टी को उर्वरित करें - इससे जड़ों के विकास में तेजी आएगी, सर्दियों की सुविधा होगी और प्रचुर मात्रा में फूलों को बढ़ावा मिलेगा। सेलियाक की देखभाल कैसे करें? देखभाल कोल्चिकम न्यूनतम और सरल है। फूल बल्कि सार्थक है। वसंत में coevals मजबूत पत्तियों के निर्माण के लिए नाइट्रिक उर्वरकों फ़ीड और अधिक गहन विकास और फूल के लिए उपयोगी पदार्थों के साथ बल्ब संतृप्त किया है। सर्दी के लिए बल्ब खोदना जरूरी नहीं है - वे पूरी तरह से जमीन में सर्दियों। अपवाद टेरी किस्मों है, वे अधिक नरम और खराब सहनशील ठंढ हैं। लेकिन उन्हें खोला नहीं जा सकता है, लेकिन केवल सर्दियों के लिए पत्ते को ढकते हैं। आपको पानी कोल्चिकम की आवश्यकता नहीं है। अतिरिक्त नमी में, उन्हें केवल रोपण / प्रत्यारोपण की अवधि की आवश्यकता होती है। फूलों के लिए कीटों में से स्लग और घोंघे का खतरा होता है। वे जाल पर डाल रहे हैं या molluscicides के साथ लड़ाई। |
SPIDER MAN No Way Home : इस समय सिनेमाघरों की हालत खराब है। सूर्यवंशी के बाद आई कोई सी भी फिल्म खास नहीं चली। अंतिम, सत्यमेव जयते 2, तड़प, चंडीगढ़ करे आशिकी से बॉलीवुड को आशाएं थीं, लेकिन कलेक्शन उम्मीद से कम रहे। अब सारी उम्मीद स्पाइडर मैन : नो वे होम से है। यह हॉलीवुड मूवी 16 दिसम्बर को भारत में कई भाषाओं में डब होकर रिलीज हो रही है। इस फिल्म का जबरदस्त क्रेज है और रिकॉर्डतोड़ एडवांस बुकिंग हुई है। ऐसी बुकिंग तो सूर्यवंशी की भी नहीं हुई थी।
फिल्म का इतना जबरदस्त क्रेज है कि सिनेमाघर वाले इसका पूरा फायदा उठाने में लगे हुए हैं। मुंबई में सुबह 4 बजे से फिल्म के शो शुरू हो जाएंगे तो ठाणे में 5 बजे से। ऐसा ही क्रेज दिल्ली, इंदौर, चेन्नई, कोलकाता और अन्य शहरों में भी है।
जिस तरह से एडवांस बुकिंग हुई है उसे देख माना जा सकता है कि फिल्म कई रिकॉर्ड तोड़ सकती है। हालांकि महाराष्ट्र में सिनेमा अभी भी 50 प्रतिशत कैपिसिटी से चल रहे हैं और कोविड का भी डर दर्शकों के मन में है, फिर भी उम्मीद कायम है।
हॉलीवुड मूवी की बात की जाए तो एवेंजर्स इन्फिनिटी वॉर ने पहले दिन 31. 30 करोड़ रुपये का कलेक्शन भारत में किया था। एवेंजर्स एंडगेम ने 53. 10 करोड़ रुपये का कलेक्शन भारत में पहले दिन किया था। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह प्री-कोविड दौर था।
फिर भी माना जा सकता है कि स्पाइडरमैन इनसे आगे निकल सकती है। भारत ही नहीं पूरी दुनिया में इस फिल्म का जबरदस्त क्रेज है और पहले दिन के कलेक्शन जबरदस्त होने वाले हैं।
| SPIDER MAN No Way Home : इस समय सिनेमाघरों की हालत खराब है। सूर्यवंशी के बाद आई कोई सी भी फिल्म खास नहीं चली। अंतिम, सत्यमेव जयते दो, तड़प, चंडीगढ़ करे आशिकी से बॉलीवुड को आशाएं थीं, लेकिन कलेक्शन उम्मीद से कम रहे। अब सारी उम्मीद स्पाइडर मैन : नो वे होम से है। यह हॉलीवुड मूवी सोलह दिसम्बर को भारत में कई भाषाओं में डब होकर रिलीज हो रही है। इस फिल्म का जबरदस्त क्रेज है और रिकॉर्डतोड़ एडवांस बुकिंग हुई है। ऐसी बुकिंग तो सूर्यवंशी की भी नहीं हुई थी। फिल्म का इतना जबरदस्त क्रेज है कि सिनेमाघर वाले इसका पूरा फायदा उठाने में लगे हुए हैं। मुंबई में सुबह चार बजे से फिल्म के शो शुरू हो जाएंगे तो ठाणे में पाँच बजे से। ऐसा ही क्रेज दिल्ली, इंदौर, चेन्नई, कोलकाता और अन्य शहरों में भी है। जिस तरह से एडवांस बुकिंग हुई है उसे देख माना जा सकता है कि फिल्म कई रिकॉर्ड तोड़ सकती है। हालांकि महाराष्ट्र में सिनेमा अभी भी पचास प्रतिशत कैपिसिटी से चल रहे हैं और कोविड का भी डर दर्शकों के मन में है, फिर भी उम्मीद कायम है। हॉलीवुड मूवी की बात की जाए तो एवेंजर्स इन्फिनिटी वॉर ने पहले दिन इकतीस. तीस करोड़ रुपये का कलेक्शन भारत में किया था। एवेंजर्स एंडगेम ने तिरेपन. दस करोड़ रुपये का कलेक्शन भारत में पहले दिन किया था। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह प्री-कोविड दौर था। फिर भी माना जा सकता है कि स्पाइडरमैन इनसे आगे निकल सकती है। भारत ही नहीं पूरी दुनिया में इस फिल्म का जबरदस्त क्रेज है और पहले दिन के कलेक्शन जबरदस्त होने वाले हैं। |
मथुराः कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा आजकल लगातार यूपी का दौरा कर रहीं है। आम जनता से मिलने के अलावा वह एक के बाद एक किसान पंचायतों को संबोधित कर रही है और केंद्र के नये कृषि कानूनों को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोल रहीं है। इसी क्रम में प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार को मथुरा के पालीखेड़ा में किसानों की महापंचायत को संबोधित किया और पीएम मोदी पर निशाना साधा।
किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि पता नहीं कि पीएम मोदी की किसानों से कौन सी दुश्मनी है। पीएम मोदी संसद में भी किसानों का अपमान करते हैं। सरकार में शामिल मंत्री भी किसानों को आतंकवादी बोलते हैं, जब राहुल गांधी ने संसद में मौन रखा तो सरकार ने उसमें हिस्सा नहीं लिया। पीएम मोदी और उनकी सरकार की गलत नीतियों के कारण देश का किसान आज बर्बाद हो रहा है। पीएम सिर्फ अहंकारी ही नहीं बल्कि कायर भी हैं।
प्रियंका गांधी ने कहा कि ये मथुरा की धरती अहंकार को तोड़ती है। यहां श्री कृष्ण जी इंद्र भगवान के अहंकार को तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत लेकर आए थे। 90 दिनों से देश के किसान अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार ने उनकी पिटाई की लेकिन उनकी सुनवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि इस सरकार का विवेक मर चुका है, भगवान कृष्ण इनका भी अहंकार तोड़ेंगे। कांग्रेस महासचिव ने कहा, 'दिनकर ने कहा था " जब नाश मनुष्य पर छाता है तो पहले विवेक मर जाता है"। भगवान इनका भी अहंकार तोड़ेंगे।
कृषि कानूनों का जिक्र करते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहा कि सरकार ने क़ानून बनाते वक्त किसी किसान से नहीं पूंछा। ये कानून नोटों की खेती करने वाले ने बनाये है। ये क़ानून खरबपतियों के लिए बनाया गया है। प्रियंका ने कहा कि आप मथुरा वाले अपने गोवर्धन पर्वत को संभाल कर रखिए, कहीं वो न बेच दें। 'इनके' मित्रों के लाखों करोड़ों का क़र्ज़ माफ़ हुआ लेकिन किसान का एक रुपया माफ़ नहीं हुआ। किसानों की सुनवाई नहीं हो रही है, आपका मज़ाक़ उड़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'डीज़ल पेट्रोल पर टैक्स लगाया जा रहा है।
संबोधन के आखिर में प्रियंका ने किसान आंदोलन में मारे गए किसानों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखने का भी आग्रह किया।
| मथुराः कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा आजकल लगातार यूपी का दौरा कर रहीं है। आम जनता से मिलने के अलावा वह एक के बाद एक किसान पंचायतों को संबोधित कर रही है और केंद्र के नये कृषि कानूनों को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोल रहीं है। इसी क्रम में प्रियंका गांधी वाड्रा ने मंगलवार को मथुरा के पालीखेड़ा में किसानों की महापंचायत को संबोधित किया और पीएम मोदी पर निशाना साधा। किसान महापंचायत को संबोधित करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि पता नहीं कि पीएम मोदी की किसानों से कौन सी दुश्मनी है। पीएम मोदी संसद में भी किसानों का अपमान करते हैं। सरकार में शामिल मंत्री भी किसानों को आतंकवादी बोलते हैं, जब राहुल गांधी ने संसद में मौन रखा तो सरकार ने उसमें हिस्सा नहीं लिया। पीएम मोदी और उनकी सरकार की गलत नीतियों के कारण देश का किसान आज बर्बाद हो रहा है। पीएम सिर्फ अहंकारी ही नहीं बल्कि कायर भी हैं। प्रियंका गांधी ने कहा कि ये मथुरा की धरती अहंकार को तोड़ती है। यहां श्री कृष्ण जी इंद्र भगवान के अहंकार को तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत लेकर आए थे। नब्बे दिनों से देश के किसान अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार ने उनकी पिटाई की लेकिन उनकी सुनवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि इस सरकार का विवेक मर चुका है, भगवान कृष्ण इनका भी अहंकार तोड़ेंगे। कांग्रेस महासचिव ने कहा, 'दिनकर ने कहा था " जब नाश मनुष्य पर छाता है तो पहले विवेक मर जाता है"। भगवान इनका भी अहंकार तोड़ेंगे। कृषि कानूनों का जिक्र करते हुए कांग्रेस महासचिव ने कहा कि सरकार ने क़ानून बनाते वक्त किसी किसान से नहीं पूंछा। ये कानून नोटों की खेती करने वाले ने बनाये है। ये क़ानून खरबपतियों के लिए बनाया गया है। प्रियंका ने कहा कि आप मथुरा वाले अपने गोवर्धन पर्वत को संभाल कर रखिए, कहीं वो न बेच दें। 'इनके' मित्रों के लाखों करोड़ों का क़र्ज़ माफ़ हुआ लेकिन किसान का एक रुपया माफ़ नहीं हुआ। किसानों की सुनवाई नहीं हो रही है, आपका मज़ाक़ उड़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'डीज़ल पेट्रोल पर टैक्स लगाया जा रहा है। संबोधन के आखिर में प्रियंका ने किसान आंदोलन में मारे गए किसानों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखने का भी आग्रह किया। |
रांगेय राघव ।
भले ही घृणा करे, किन्तु मैं सो मनुष्य से घृणा नहीं करती, जो अकेली बने रहने की तपस्या का बोझ अपने कंधों पर रख कर छटपटाऊँ, और उस यातना को आदर्श बना कर सत्तास्वार्थियों को एक और मौका दूँ कि वे अपने पापों पर धूल उछाल कर उसे ढँक दें और अपनी अच्छाइयों की झूठी झलक को सबके ऊपर का घरें !'
'और मैंने देखा वह शान्त थी। कोई डर न था उसे । कोई शंका नहीं थी उसके मुख पर । आज मैंने देखा कि स्त्री भी पुरुष की तरह यात्म-सम्मान की आग में तप कर प्रांजादी माँग रही थी, और सारे संसार का अन्धकार भरा पाप उसपर घृणा से लांछन लगा रहा था, उसे बरबाद कर देना चाहता था, पर वह अडिग खड़ी थी ।"
कल्ला चुप हो गया । सिद्दी और चंदू ने भारी पलकों को उठाया । रात बहुत बीत गई थी ।
सिद्दी ने कम्बल को और अच्छी तरह लपेट लिया। तीनों इस समय गंभीर थे ।
कल्ला के मुख पर एक शक्ति दमन रही थी, क्योंकि उसने उस नारी की जीवित मानव की हुंकार सुनी थी, उसने नारी का वह विक्षोभ देख था, जिसके सामने रूदियों की चिता धू धूत जल रही थी I
एक सौ दस- | रांगेय राघव । भले ही घृणा करे, किन्तु मैं सो मनुष्य से घृणा नहीं करती, जो अकेली बने रहने की तपस्या का बोझ अपने कंधों पर रख कर छटपटाऊँ, और उस यातना को आदर्श बना कर सत्तास्वार्थियों को एक और मौका दूँ कि वे अपने पापों पर धूल उछाल कर उसे ढँक दें और अपनी अच्छाइयों की झूठी झलक को सबके ऊपर का घरें !' 'और मैंने देखा वह शान्त थी। कोई डर न था उसे । कोई शंका नहीं थी उसके मुख पर । आज मैंने देखा कि स्त्री भी पुरुष की तरह यात्म-सम्मान की आग में तप कर प्रांजादी माँग रही थी, और सारे संसार का अन्धकार भरा पाप उसपर घृणा से लांछन लगा रहा था, उसे बरबाद कर देना चाहता था, पर वह अडिग खड़ी थी ।" कल्ला चुप हो गया । सिद्दी और चंदू ने भारी पलकों को उठाया । रात बहुत बीत गई थी । सिद्दी ने कम्बल को और अच्छी तरह लपेट लिया। तीनों इस समय गंभीर थे । कल्ला के मुख पर एक शक्ति दमन रही थी, क्योंकि उसने उस नारी की जीवित मानव की हुंकार सुनी थी, उसने नारी का वह विक्षोभ देख था, जिसके सामने रूदियों की चिता धू धूत जल रही थी I एक सौ दस- |
Alsi ki chutney: महिलाओं को अक्सर हार्मोनल मूड स्विंग्स परेशान करते हैं। ऐसे में अलसी के बीजों से बनी ये चटनी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है। कैसे, जानते हैं।
स्वामी रामदेव ने आज इंडिाय टीवी पर आधी आबादी यानी कि महिलाओं की समस्याओं पर बात की और तमाम योगासन बताएं जिनसे ये समस्याएं हमेशा के लिए दूर हो जाएंगी।
डरहम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की मानें तो जिन पुरूषों का बचपन अधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में गुजरता है जैसे कि जहां बहुत अधिक संक्रामक रोगों का खतरा होता है, आगे के जीवन में उनके टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम रहने की संभावना होती है। उनकी तुलना में उन पुरूषों का टेस्टोस्टेरोन का स्तर ज्यादा होता है जिनका बचपन स्वस्थ माहौल में गुजरा।
यह बात सामने आई है कि दिन में काम करने वालो की तुलना में रात की शिफ्ट में काम करने वालों के पेशाब में सक्रिय डीएनए ऊतकों की मरम्मत करने वाले रसायन का उत्पादन कम होता है। इस रसायन को 8-ओएच-डीजी कहते हैं। . .
| Alsi ki chutney: महिलाओं को अक्सर हार्मोनल मूड स्विंग्स परेशान करते हैं। ऐसे में अलसी के बीजों से बनी ये चटनी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकती है। कैसे, जानते हैं। स्वामी रामदेव ने आज इंडिाय टीवी पर आधी आबादी यानी कि महिलाओं की समस्याओं पर बात की और तमाम योगासन बताएं जिनसे ये समस्याएं हमेशा के लिए दूर हो जाएंगी। डरहम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की मानें तो जिन पुरूषों का बचपन अधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में गुजरता है जैसे कि जहां बहुत अधिक संक्रामक रोगों का खतरा होता है, आगे के जीवन में उनके टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम रहने की संभावना होती है। उनकी तुलना में उन पुरूषों का टेस्टोस्टेरोन का स्तर ज्यादा होता है जिनका बचपन स्वस्थ माहौल में गुजरा। यह बात सामने आई है कि दिन में काम करने वालो की तुलना में रात की शिफ्ट में काम करने वालों के पेशाब में सक्रिय डीएनए ऊतकों की मरम्मत करने वाले रसायन का उत्पादन कम होता है। इस रसायन को आठ-ओएच-डीजी कहते हैं। . . |
आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 85 वें दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्राओं को स्वस्थ और सशक्त बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक बेटियां स्वस्थ नहीं होंगी, तब तक देश कुपोषण मुक्त नहीं हो सकता। समारोह में उन्होंने 108 मेधावियों को 121 मेडल प्रदान किए।
विश्वविद्यालय द्वारा 650 छात्राओं का हिमोग्लोबिन टेस्ट कराया गया था। इसमें से 22 फीसदी छात्राओं के खून में हिमोग्लोबिन 10 फीसदी से भी कम है। इस पर उन्होंने चिंता जाहिर की। कहा कि जब हमारी बेटियां ही स्वस्थ नहीं होगी तो आने वाली पीढ़ी स्वस्थ कैसे हो सकती है।
आनंदीबेन ने कहा कि देश अभी कुपोषण मुक्त नहीं है। देश को कुपोषण से मुक्त कराने के लिए बच्चे के गर्भ में आने से लेकर उसके जन्म लेने तक केंद्र व राज्य सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। ताकि स्वस्थ बच्चा जन्म ले। मगर, जब तक बेटियों के स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखा जाएगा, तब तक देश कुपोषण मुक्त नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि नए भारत के निर्माण में मेधावी छात्र-छात्राएं अपना योगदान दें। बाल विवाह जैसी कुरीति के खिलाफ युवा खड़े हों। अपने परिवार में नाबालिग भाई या बहन के विवाह का विरोध करें। जब सामूहिक विवाह के माध्यम से प्रदेश सरकार बेटी के विवाह का पूरा खर्च उठा रही है तो बाल विवाह की आवश्यकता क्या है।
राज्यपाल ने भ्रूण हत्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गुजरात में लिंगानुपात सुधार के लिए वर्ष 2003 से काम हो रहा है। युवाओं को भ्रूण हत्या के खिलाफ जागरूकता की अलख जगानी होगी। राज्यपाल ने 80 फीसदी मेडल छात्राओं के मिलने पर खुशी जाहिर की।
| आगरा के डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पचासी वें दीक्षांत समारोह में शुक्रवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्राओं को स्वस्थ और सशक्त बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक बेटियां स्वस्थ नहीं होंगी, तब तक देश कुपोषण मुक्त नहीं हो सकता। समारोह में उन्होंने एक सौ आठ मेधावियों को एक सौ इक्कीस मेडल प्रदान किए। विश्वविद्यालय द्वारा छः सौ पचास छात्राओं का हिमोग्लोबिन टेस्ट कराया गया था। इसमें से बाईस फीसदी छात्राओं के खून में हिमोग्लोबिन दस फीसदी से भी कम है। इस पर उन्होंने चिंता जाहिर की। कहा कि जब हमारी बेटियां ही स्वस्थ नहीं होगी तो आने वाली पीढ़ी स्वस्थ कैसे हो सकती है। आनंदीबेन ने कहा कि देश अभी कुपोषण मुक्त नहीं है। देश को कुपोषण से मुक्त कराने के लिए बच्चे के गर्भ में आने से लेकर उसके जन्म लेने तक केंद्र व राज्य सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। ताकि स्वस्थ बच्चा जन्म ले। मगर, जब तक बेटियों के स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखा जाएगा, तब तक देश कुपोषण मुक्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि नए भारत के निर्माण में मेधावी छात्र-छात्राएं अपना योगदान दें। बाल विवाह जैसी कुरीति के खिलाफ युवा खड़े हों। अपने परिवार में नाबालिग भाई या बहन के विवाह का विरोध करें। जब सामूहिक विवाह के माध्यम से प्रदेश सरकार बेटी के विवाह का पूरा खर्च उठा रही है तो बाल विवाह की आवश्यकता क्या है। राज्यपाल ने भ्रूण हत्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि गुजरात में लिंगानुपात सुधार के लिए वर्ष दो हज़ार तीन से काम हो रहा है। युवाओं को भ्रूण हत्या के खिलाफ जागरूकता की अलख जगानी होगी। राज्यपाल ने अस्सी फीसदी मेडल छात्राओं के मिलने पर खुशी जाहिर की। |
लविवि के छात्र सोशल मीडिया पर जता रहे गुस्सा। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
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लखनऊ विश्वविद्यालय में बीएससी पहले सेमेस्टर के विद्यार्थी जहां परिणाम को लेकर नाराज हैं वहीं, बीए पहले सेमेस्टर के विद्यार्थी परिणाम न आने से परेशान हैं। इसे लेकर छात्र ट्विटर पर नाराजगी जता रहे हैं।
वहीं, विवि प्रशासन ने परिणाम जल्द जारी करने की बात कही है। विवि ने अप्रैल में स्नातक प्रथम व अन्य सेमेस्टर की परीक्षाएं कराई थीं।
इसमें काफी कोर्सों के परिणाम आ चुके हैं, लेकिन प्रथम सेमेस्टर के परिणाम फंसे हुए हैं। प्रथम सेमेस्टर में वैसे ही विद्यार्थी अधिक होते हैं।
वहीं इस साल से रायबरेली, लखीमपुर खीरी, सीतापुर व हरदोई के कॉलेज भी विवि से जुड़ गए हैं। ऐसे में प्रथम वर्ष में विद्यार्थियों की संख्या और बढ़ गई है।
इससे स्नातक कोर्सों की परीक्षाओं का परिणाम नहीं जारी हो पाया है। बीएससी पहले सेमेस्टर का परिणाम जारी हुआ तो इसमें भी विवाद हो गया।
छात्रों ने ट्वीट कर कहा है कि विवि नैक में अच्छी ग्रेडिंग लाया है, लेकिन बीए पहले सेमेस्टर का परिणाम 100 दिन बाद भी नहीं आया है। यही हाल रहा तो परिणाम आने में साल लग जाएंगे। विवि प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव ने कहा कि परिणाम लगभग तैयार है। इसे जल्द ही जारी कर दिया जाएगा।
छात्रों का यह भी कहना है कि विवि में पीजी में दूसरे सेमेस्टर की परीक्षाओं का कार्यक्रम जारी किया जाने लगा है। जल्द ही यूजी की भी दूसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं प्रस्तावित की जाएंगी। इससे विद्यार्थी परेशान हैं। उनका कहना है कि अभी पहले सेमेस्टर का परिणाम ही नहीं पता तो अगली परीक्षा की तैयारी कैसे करें।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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| लविवि के छात्र सोशल मीडिया पर जता रहे गुस्सा। - फोटो : ? ? ? ? ? ? ? ? लखनऊ विश्वविद्यालय में बीएससी पहले सेमेस्टर के विद्यार्थी जहां परिणाम को लेकर नाराज हैं वहीं, बीए पहले सेमेस्टर के विद्यार्थी परिणाम न आने से परेशान हैं। इसे लेकर छात्र ट्विटर पर नाराजगी जता रहे हैं। वहीं, विवि प्रशासन ने परिणाम जल्द जारी करने की बात कही है। विवि ने अप्रैल में स्नातक प्रथम व अन्य सेमेस्टर की परीक्षाएं कराई थीं। इसमें काफी कोर्सों के परिणाम आ चुके हैं, लेकिन प्रथम सेमेस्टर के परिणाम फंसे हुए हैं। प्रथम सेमेस्टर में वैसे ही विद्यार्थी अधिक होते हैं। वहीं इस साल से रायबरेली, लखीमपुर खीरी, सीतापुर व हरदोई के कॉलेज भी विवि से जुड़ गए हैं। ऐसे में प्रथम वर्ष में विद्यार्थियों की संख्या और बढ़ गई है। इससे स्नातक कोर्सों की परीक्षाओं का परिणाम नहीं जारी हो पाया है। बीएससी पहले सेमेस्टर का परिणाम जारी हुआ तो इसमें भी विवाद हो गया। छात्रों ने ट्वीट कर कहा है कि विवि नैक में अच्छी ग्रेडिंग लाया है, लेकिन बीए पहले सेमेस्टर का परिणाम एक सौ दिन बाद भी नहीं आया है। यही हाल रहा तो परिणाम आने में साल लग जाएंगे। विवि प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश श्रीवास्तव ने कहा कि परिणाम लगभग तैयार है। इसे जल्द ही जारी कर दिया जाएगा। छात्रों का यह भी कहना है कि विवि में पीजी में दूसरे सेमेस्टर की परीक्षाओं का कार्यक्रम जारी किया जाने लगा है। जल्द ही यूजी की भी दूसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं प्रस्तावित की जाएंगी। इससे विद्यार्थी परेशान हैं। उनका कहना है कि अभी पहले सेमेस्टर का परिणाम ही नहीं पता तो अगली परीक्षा की तैयारी कैसे करें। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
परस्ती और अख़्लाक़ का कोई वजन न था - यह हाल था कि अल्लाह तआला की रहमत जाहिर हुई और उसने अपने महबूब जनाब हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को भेजा। हुज़ूर सल्ल० ने अल्लाह के दीन और उस की भेजी हुई हिदायत की नेमत की अल्लाह के बंदों को जानकारी दी, उन्हें अल्लाह के बारे में सही इल्म की रोशनी से मालामाल किया, नेकी और बदी का फ़र्क़ करना सिखाया, भलों को हमेशा की कामियाबी की खुशखबरी दी और बुरों को उन के अंजाम से
डरायाआहज़रत सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अखलाक के एतबार से तमाम इंसानों में सब से बेहतर थे, लोगों के लिए बेहतरीन दुख-दर्द में काम आने वाले और सब का भला चाहने वाले, हर लम्हा उनकी हिदायत और निजात के लिए बेचैन रहने वाले, दुनिया को हिदायत की रोशनी आप के दम से मिली, कुफ़ और शिर्क की लानत दूर हुई और अंध विश्वास और जिहालत के पर्दे चाक हुए । दरूद व सलाम हो प्यारे नबी सल्ल• पर और अल्लाह की अनगिनत रहमतें और बरकतें हों हुज़ूर सल्ल० की जाते
गरामी पर ।
प्यारे भाइयो ! अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने लोगों को तौहीद की तरफ़ बुलाया, दर-दर की ठोकरें खाने वाले इंसान को हर एक की गुलामी से निकाल कर सिर्फ़ अल्लाह का बंदा बनाया, तमाम शाहियों, सरदारियों और खुदाइयों को मिटा कर सिर्फ़ एक अल्लाह का क़ानून चलाया, अल्लाह के सिवा हर माबूद की इबादत से हटा कर इंसान को सिर्फ़ अल्लाह की इबादत पर जमाया, यह काम कुछ आसान न था । तौहीद की दावत को थोड़े ही लोगों ने क़ुबूल लिया । तेरह साल तक मक्के में यही काम होता रहा, लेकिन आप के साथियों की तायदाद ज्यादा न हो सकी, लोगों ने आप को झुठलाया जादूगर और काहिन कहा, मज़ाक़ उड़ाया और फिर तरह-तरह सताने लगे, मक्के में रहना दूभर कर दिया। आप और आपके साथी बे-इंतिहा सताए गए, कुफ़ और शिर्क के हामियों ने मिल कर आप का मुक़ाबला किया। अल्लाह की हिदायत की रोशनी को बुझा देने पर तुल गये, लेकिन अल्लाह का तो फ़ैसला हो चुका था कि वह इस की रोशनी को फैला कर रहेगा, चाहे मुश्रिक कितना ही नां-पसन्द करें । अल्लाह ने मुहिरकों की चालों को बेकार कर दिया। उन्होंने अल्लाह रमूल को कत्ल कर देने का मंसूत्रा बनाया । वे इस में कामियाब न हो | परस्ती और अख़्लाक़ का कोई वजन न था - यह हाल था कि अल्लाह तआला की रहमत जाहिर हुई और उसने अपने महबूब जनाब हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को भेजा। हुज़ूर सल्लशून्य ने अल्लाह के दीन और उस की भेजी हुई हिदायत की नेमत की अल्लाह के बंदों को जानकारी दी, उन्हें अल्लाह के बारे में सही इल्म की रोशनी से मालामाल किया, नेकी और बदी का फ़र्क़ करना सिखाया, भलों को हमेशा की कामियाबी की खुशखबरी दी और बुरों को उन के अंजाम से डरायाआहज़रत सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अखलाक के एतबार से तमाम इंसानों में सब से बेहतर थे, लोगों के लिए बेहतरीन दुख-दर्द में काम आने वाले और सब का भला चाहने वाले, हर लम्हा उनकी हिदायत और निजात के लिए बेचैन रहने वाले, दुनिया को हिदायत की रोशनी आप के दम से मिली, कुफ़ और शिर्क की लानत दूर हुई और अंध विश्वास और जिहालत के पर्दे चाक हुए । दरूद व सलाम हो प्यारे नबी सल्ल• पर और अल्लाह की अनगिनत रहमतें और बरकतें हों हुज़ूर सल्लशून्य की जाते गरामी पर । प्यारे भाइयो ! अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने लोगों को तौहीद की तरफ़ बुलाया, दर-दर की ठोकरें खाने वाले इंसान को हर एक की गुलामी से निकाल कर सिर्फ़ अल्लाह का बंदा बनाया, तमाम शाहियों, सरदारियों और खुदाइयों को मिटा कर सिर्फ़ एक अल्लाह का क़ानून चलाया, अल्लाह के सिवा हर माबूद की इबादत से हटा कर इंसान को सिर्फ़ अल्लाह की इबादत पर जमाया, यह काम कुछ आसान न था । तौहीद की दावत को थोड़े ही लोगों ने क़ुबूल लिया । तेरह साल तक मक्के में यही काम होता रहा, लेकिन आप के साथियों की तायदाद ज्यादा न हो सकी, लोगों ने आप को झुठलाया जादूगर और काहिन कहा, मज़ाक़ उड़ाया और फिर तरह-तरह सताने लगे, मक्के में रहना दूभर कर दिया। आप और आपके साथी बे-इंतिहा सताए गए, कुफ़ और शिर्क के हामियों ने मिल कर आप का मुक़ाबला किया। अल्लाह की हिदायत की रोशनी को बुझा देने पर तुल गये, लेकिन अल्लाह का तो फ़ैसला हो चुका था कि वह इस की रोशनी को फैला कर रहेगा, चाहे मुश्रिक कितना ही नां-पसन्द करें । अल्लाह ने मुहिरकों की चालों को बेकार कर दिया। उन्होंने अल्लाह रमूल को कत्ल कर देने का मंसूत्रा बनाया । वे इस में कामियाब न हो |
घर में कोई स्पेशल फंक्शन हो तो Basmati Rice On Amazon से बनी डिश के बिना अधूरा लगता है। इसलिए Amazon आपके लिए लाया है कई तरह की Basmati Rice, जिसे आप आज ही किफ़ायती कीमत में ऑर्डर कर मंगवा सकते हैं।
प्लेन चावल पकाना हो या जीरा राइस या फिर पुलाव, बिरयानी ही क्यों न, अगर बेस्ट क्वालिटी की Basmati Rice On Amazon हो तो स्वाद कई गुणा अधिक बढ़ जाता है। चाहे घर पर अपने लिए पकाना हो या मेहमानों की खातिरदारी के लिए, बेहतरीन Basmati Rice तो चाहिए ही। इससे न सिर्फ पेट भरता है बल्कि आत्मा भी तृप्त हो जाती है। ऐसे ही कई बेस्ट ब्रांड्स के 5 Kg Basmati Rice के पैक लेकर आया है Amazon, जिसे आप बेस्ट डिस्काउंट पर यहां से खरीद सकते हैं।
Note: Amazon पर अन्य सामानों की शॉपिंग करने के लिए यहां क्लिककरें।
Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
| घर में कोई स्पेशल फंक्शन हो तो Basmati Rice On Amazon से बनी डिश के बिना अधूरा लगता है। इसलिए Amazon आपके लिए लाया है कई तरह की Basmati Rice, जिसे आप आज ही किफ़ायती कीमत में ऑर्डर कर मंगवा सकते हैं। प्लेन चावल पकाना हो या जीरा राइस या फिर पुलाव, बिरयानी ही क्यों न, अगर बेस्ट क्वालिटी की Basmati Rice On Amazon हो तो स्वाद कई गुणा अधिक बढ़ जाता है। चाहे घर पर अपने लिए पकाना हो या मेहमानों की खातिरदारी के लिए, बेहतरीन Basmati Rice तो चाहिए ही। इससे न सिर्फ पेट भरता है बल्कि आत्मा भी तृप्त हो जाती है। ऐसे ही कई बेस्ट ब्रांड्स के पाँच Kg Basmati Rice के पैक लेकर आया है Amazon, जिसे आप बेस्ट डिस्काउंट पर यहां से खरीद सकते हैं। Note: Amazon पर अन्य सामानों की शॉपिंग करने के लिए यहां क्लिककरें। Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं। |
घर का निर्माण करते समय वास्तु के नियमों को ध्यान में रखना बहुत आवश्यक होता है। वास्तु में हर स्थान का निर्माण करने के लिए सही दिशा और स्थान बताया गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार बनाया गया मकान आपके जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आता है तो वहीं वास्तु के नियमों की अनदेखी करने पर आपको कई तरह की पेरशानियां हो सकती हैं। प्रत्येक घर की रसोई बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। घर की महिलाओं का ज्यादातर समय रसोई में काम करते हुए गुजरता है। रसोई एक ऐसा स्थान है जहां पर पूरे परिवार के सदस्यों के लिए खाना बनाता है, इसलिए रसोई में किसी प्रकार का दोष होने पर महिलाओं पर तो इसका खराब प्रभाव पड़ता ही है साथ ही पूरा परिवार भी प्रभावित होता है। वास्तु के अनुसार बने हुए रसोई में बना हुआ भोजन पूरे परिवार के लिए अच्छी सेहत और सौभाग्य लेकर आता है। तो चलिए जानते हैं रसोई से संबंधित किन बातों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है।
Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi.
| घर का निर्माण करते समय वास्तु के नियमों को ध्यान में रखना बहुत आवश्यक होता है। वास्तु में हर स्थान का निर्माण करने के लिए सही दिशा और स्थान बताया गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार बनाया गया मकान आपके जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आता है तो वहीं वास्तु के नियमों की अनदेखी करने पर आपको कई तरह की पेरशानियां हो सकती हैं। प्रत्येक घर की रसोई बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। घर की महिलाओं का ज्यादातर समय रसोई में काम करते हुए गुजरता है। रसोई एक ऐसा स्थान है जहां पर पूरे परिवार के सदस्यों के लिए खाना बनाता है, इसलिए रसोई में किसी प्रकार का दोष होने पर महिलाओं पर तो इसका खराब प्रभाव पड़ता ही है साथ ही पूरा परिवार भी प्रभावित होता है। वास्तु के अनुसार बने हुए रसोई में बना हुआ भोजन पूरे परिवार के लिए अच्छी सेहत और सौभाग्य लेकर आता है। तो चलिए जानते हैं रसोई से संबंधित किन बातों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है। Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi. |
नोकिया ने भारत में अपना फीचर फोन नोकिया 3310 मंगलवार 16 मई को लॉन्च कर दिया है. एचएमडी ग्लोबल ने इस फोन सबसे पहले मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस 2017 में पेश किया था.
लंबे इंतजार के के बाद अब फोन फाइनली भारत में आ चुका है. यह 18 मई से बिक्री के लिए उपलब्ध होगा. इस फोन की खास बात यह है कि इसकी कीमत भी कंपनी ने 3310 रुपए ही रखी गई है.
नोकिया 3310 फीचर फोन कई नए फीचर्स के साथ आता है. वहीं फोन में कई पुराने फीचर्स भी दिए गए हैं, जो कि क्लासिक नोकिया 3310 की याद दिलाते हैं. नोकिया 3310 फोन 4 कलर वेरिएंट में पेश होंगे- वार्म रेड और येलो कलर ग्लॉस फिनिश के साथ जबकि डार्क ब्लू और ग्रे कलर मैट फिनिश के साथ उपलब्ध होंगे.
एचएमडी ग्लोबल के भारत के वाइस प्रेसिडेंट, अजय मेहता ने बताया कि, "एक बार चार्ज करने पर पूरा दिन बातें करें, टेस्ट्स सेंड करें, फोटो खींचे, अपनी जेब में में आसानी से फिट हो जाने वाले फोन में FM रेडियो और MP3 का आनंद लें. एचएमडी ग्लोबल ने जानकारी देते हुए बताया है कि फोन ऑफलाइन रिटेलर्स के जरिए उपलब्ध होगा.
| नोकिया ने भारत में अपना फीचर फोन नोकिया तीन हज़ार तीन सौ दस मंगलवार सोलह मई को लॉन्च कर दिया है. एचएमडी ग्लोबल ने इस फोन सबसे पहले मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस दो हज़ार सत्रह में पेश किया था. लंबे इंतजार के के बाद अब फोन फाइनली भारत में आ चुका है. यह अट्ठारह मई से बिक्री के लिए उपलब्ध होगा. इस फोन की खास बात यह है कि इसकी कीमत भी कंपनी ने तीन हज़ार तीन सौ दस रुपयापए ही रखी गई है. नोकिया तीन हज़ार तीन सौ दस फीचर फोन कई नए फीचर्स के साथ आता है. वहीं फोन में कई पुराने फीचर्स भी दिए गए हैं, जो कि क्लासिक नोकिया तीन हज़ार तीन सौ दस की याद दिलाते हैं. नोकिया तीन हज़ार तीन सौ दस फोन चार कलर वेरिएंट में पेश होंगे- वार्म रेड और येलो कलर ग्लॉस फिनिश के साथ जबकि डार्क ब्लू और ग्रे कलर मैट फिनिश के साथ उपलब्ध होंगे. एचएमडी ग्लोबल के भारत के वाइस प्रेसिडेंट, अजय मेहता ने बताया कि, "एक बार चार्ज करने पर पूरा दिन बातें करें, टेस्ट्स सेंड करें, फोटो खींचे, अपनी जेब में में आसानी से फिट हो जाने वाले फोन में FM रेडियो और MPतीन का आनंद लें. एचएमडी ग्लोबल ने जानकारी देते हुए बताया है कि फोन ऑफलाइन रिटेलर्स के जरिए उपलब्ध होगा. |
रवि सिंह,
UP: भारतीय स्टेट बैंक अपना 65वां स्थापना दिवस मना रहा है. इस वर्ष बैंक ने सांस्कृतिक व अन्य कार्यक्रम आयोजित करने के स्थान पर उस पर व्यय होनेवाली राशि का सदुपयोग करते हुये कोरोना संक्रमित मरीजों की शीघ्र उपचार हेतु लगभग 20 लाख की लागतवाली दो उच्च गुणवत्तायुक्त जीवनदायिनी वेंटिलेटर सेटबीआरडी मेडिकल कालेज को सौंपा.
जिसे आज तारामंडल स्थित स्टेट बैंक प्रशासनिक कार्यालय भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में बैंक के उप महाप्रबंधक पीसी बरोड़ ने जिलाधिकारी के विजयेन्द्र पांडियन एवं मुख्य चिकित्साधिकारी श्रीकांत तिवारी की उपस्थिति में बीआरडी मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ गणेश कुमार को प्रदान किया गया.
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में गोरखपुर के जिलाधिकारी के विजयेन्द्र पांडियन ने अपने उद्बोधन में एसबीआई का धन्यवाद देते हुये कहा कि गोरखपुर में बढ़ते कोरोना संक्रमित मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण गोरखपुर के अस्पतालों में वेंटिलेटर की काफी कमी है. आज एसबीआई द्वारा वेंटिलेटर प्रदान किए जाने पर हमें मरीजों का उपचार करने में काफी मदद मिलेगी. इसके लिए हम बैंक के आभारी हैं.
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप अपने वक्तव्य में गोरखपुर के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ श्रीकांत तिवारी ने कहा कि एसबीआई ने हाल ही में 16 जून को लगभग 4 लाख रूपये की लागत से 200 किट उच्च गुणवत्तायुक्त सिट्रा सर्टिफायड जिला प्रशासन को सौपे उससे पूर्व भी बैंक ने कई तरह से हामारे मदद की है इसके लिए बैंक का बहुत बहुत धन्यवाद. हमें उम्मीद है कि आगे भी जनहित कार्यों में हमें इसी तरह स्टेट बैंक से सहाता मिलती रहेगी. बीआरडी मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ गणेश कुमार ने भी इस पुनित कार्य हेतु बैंक का आभार जताया.
इस अवसर पर गोरखपुर मुख्य शाखा में वृक्षारोपण भी किया गया और बैंक द्वारा 5000 मास्क भी वितरित किए गए.
भारतीय स्टेट बैंक, प्रशासनिक कार्यालय मठपाल, रामाधार व प्रशासनिक कार्यालय गोरखपुर के अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहें.
| रवि सिंह, UP: भारतीय स्टेट बैंक अपना पैंसठवां स्थापना दिवस मना रहा है. इस वर्ष बैंक ने सांस्कृतिक व अन्य कार्यक्रम आयोजित करने के स्थान पर उस पर व्यय होनेवाली राशि का सदुपयोग करते हुये कोरोना संक्रमित मरीजों की शीघ्र उपचार हेतु लगभग बीस लाख की लागतवाली दो उच्च गुणवत्तायुक्त जीवनदायिनी वेंटिलेटर सेटबीआरडी मेडिकल कालेज को सौंपा. जिसे आज तारामंडल स्थित स्टेट बैंक प्रशासनिक कार्यालय भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में बैंक के उप महाप्रबंधक पीसी बरोड़ ने जिलाधिकारी के विजयेन्द्र पांडियन एवं मुख्य चिकित्साधिकारी श्रीकांत तिवारी की उपस्थिति में बीआरडी मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ गणेश कुमार को प्रदान किया गया. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में गोरखपुर के जिलाधिकारी के विजयेन्द्र पांडियन ने अपने उद्बोधन में एसबीआई का धन्यवाद देते हुये कहा कि गोरखपुर में बढ़ते कोरोना संक्रमित मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण गोरखपुर के अस्पतालों में वेंटिलेटर की काफी कमी है. आज एसबीआई द्वारा वेंटिलेटर प्रदान किए जाने पर हमें मरीजों का उपचार करने में काफी मदद मिलेगी. इसके लिए हम बैंक के आभारी हैं. इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप अपने वक्तव्य में गोरखपुर के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ श्रीकांत तिवारी ने कहा कि एसबीआई ने हाल ही में सोलह जून को लगभग चार लाख रूपये की लागत से दो सौ किट उच्च गुणवत्तायुक्त सिट्रा सर्टिफायड जिला प्रशासन को सौपे उससे पूर्व भी बैंक ने कई तरह से हामारे मदद की है इसके लिए बैंक का बहुत बहुत धन्यवाद. हमें उम्मीद है कि आगे भी जनहित कार्यों में हमें इसी तरह स्टेट बैंक से सहाता मिलती रहेगी. बीआरडी मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ गणेश कुमार ने भी इस पुनित कार्य हेतु बैंक का आभार जताया. इस अवसर पर गोरखपुर मुख्य शाखा में वृक्षारोपण भी किया गया और बैंक द्वारा पाँच हज़ार मास्क भी वितरित किए गए. भारतीय स्टेट बैंक, प्रशासनिक कार्यालय मठपाल, रामाधार व प्रशासनिक कार्यालय गोरखपुर के अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहें. |
अंतरराष्ट्रीय रामलीला उत्सव, दीपोत्सव मेला एवं व्यंजन मेला भीः फिजी के श्री सत्संग रामायण ग्रुप द्वारा श्रीरामकथा और सतना के श्री आदर्श रामलीला मंडल द्वारा लक्ष्मण शक्ति, मेघनाथ रावण वध और श्रीराम राज्याभिषेक प्रसंग मंचित करेंगे।
कल यहां हिन्दू प्रचार केंद्र, त्रिनिदाद एंड टोबैगो के कलाकार द्वारा श्रीरामकथा, श्रीरघुनाथजी लीला प्रचार समिति, पुरी (उड़ीसा) द्वारा श्रीराम-सुग्रीव मित्रता, हनुमान-रावण संवाद एवं लंका दहन प्रसंग की प्रस्तुति दी गई थी।
यह भी खासः
संकट मोचन चित्र प्रदर्शनीः श्रीहनुमान कथा की चौपाइयों और दोहों को 40 चित्रों में समेटा गया है। इन सभी चित्रों को पहली बार 'संकट मोचन' प्रदर्शनी के माध्यम से रवीन्द्र भवन परिसर में प्रदर्शित किया जा रहा है।
फूड फेस्टिवलः स्वाद- व्यंजन मेला में 09 व्यंजनकार बघेली, बुंदेली, राजस्थानी, मराठी, सिंधी एवं जनजातीय समुदाय के व्यंजन उपलब्ध रहेंगे।
लोकरागः रूद्रकांत ठाकुर एवं साथी, सिवनी द्वारा भक्ति गायन एवं स्वेता अग्रवाल एवं साथी रीवा द्वारा अहिराई नृत्य प्रस्तुति होगी।
| अंतरराष्ट्रीय रामलीला उत्सव, दीपोत्सव मेला एवं व्यंजन मेला भीः फिजी के श्री सत्संग रामायण ग्रुप द्वारा श्रीरामकथा और सतना के श्री आदर्श रामलीला मंडल द्वारा लक्ष्मण शक्ति, मेघनाथ रावण वध और श्रीराम राज्याभिषेक प्रसंग मंचित करेंगे। कल यहां हिन्दू प्रचार केंद्र, त्रिनिदाद एंड टोबैगो के कलाकार द्वारा श्रीरामकथा, श्रीरघुनाथजी लीला प्रचार समिति, पुरी द्वारा श्रीराम-सुग्रीव मित्रता, हनुमान-रावण संवाद एवं लंका दहन प्रसंग की प्रस्तुति दी गई थी। यह भी खासः संकट मोचन चित्र प्रदर्शनीः श्रीहनुमान कथा की चौपाइयों और दोहों को चालीस चित्रों में समेटा गया है। इन सभी चित्रों को पहली बार 'संकट मोचन' प्रदर्शनी के माध्यम से रवीन्द्र भवन परिसर में प्रदर्शित किया जा रहा है। फूड फेस्टिवलः स्वाद- व्यंजन मेला में नौ व्यंजनकार बघेली, बुंदेली, राजस्थानी, मराठी, सिंधी एवं जनजातीय समुदाय के व्यंजन उपलब्ध रहेंगे। लोकरागः रूद्रकांत ठाकुर एवं साथी, सिवनी द्वारा भक्ति गायन एवं स्वेता अग्रवाल एवं साथी रीवा द्वारा अहिराई नृत्य प्रस्तुति होगी। |
आलिया भट्ट और रणबीर कपूर की मोस्ट अवेटेड फिल्म ब्रह्मास्त्र का ट्रेलर रिलीज हो गया है। सामने आया फिल्म का ट्रेलर काफी धमाकेदार है।
एंटरटेनमेंट डेस्क. रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) और आलिया भट्ट (Alia Bhatt) की फिल्म ब्रह्मास्त्र (Brahmastra) का ट्रेलर आज यानी 15 जून को रिलीज किया गया। सामने आया फिल्म का ट्रेलर काफी धमाकेदार है। इसमें रणबीर-आलिया के बीच जबदस्त रोमांटिक कैमिस्ट्री देखने को मिल रही है। बता दें कि इस फिल्म के डायरेक्टर अयान मुखर्जी (Ayan Mukerji) है। इसमें रणबीर-आलिया के अलावा अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan), नागार्जुन (Nagarjuna) और मौनी रॉय (Mouni Roy) भी लीड रोल में है। ये फिल्म इसी साल 9 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। ट्रेलर के शुरुआत में बिग बी की आवाज सुनाई दे रही है। वे कहते है- जल, वायु, अग्नि प्राचीन काल से हमारे बीच कुछ ऐसी शक्तियां है, जो अस्त्रों में भरी हुई है। ये कहानी है सारे अस्त्रों के देवता ब्रह्मास्त्र की और एक ऐसे नौजवान की जो इस बात से अंजान है कि वो ब्रह्मास्त्र की किस्मत का सिकंदर है शिवा।
रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की फिल्म ब्रह्मास्त्र यानी महाबली और सर्व शक्तिशाली अस्त्र की कहानी है। फिल्म के ट्रेलर में देखा जा सकता है कि इसमें रोमांस के साथ थ्रीलर, एक्शन और सस्पेंस भरा हुआ है। फिल्म की कहानी शिवा यानी रणबीर कपूर के आसपास बुनी गई है, जिसके पास सुपरनैचुरल पावर है और इसके बारे में उसे खुद को भी नहीं पता है। शिवा की लव स्टोरी ईशा यानी आलिया भट्ट के साथ मुलाकात से शुरू होती है। और दोनों की रोमांटिक स्टोरी के बीच ही शिवा को अपनी पावर का आहसास होता है। आलिया ने फिल्म का ट्रेलर अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। वीडियो शेयर कर उन्होंने लिखा- हमारे दिल का टुकड़ा- ब्रह्मास्त्र। देखें 9 सितंबर को।
सामने आए ट्रेलर को कहा जा सकता है कि फिल्म ब्रह्मास्त्र में शानदार तरीके से वीएफएक्स का यूज किया गया है। बता दें कि इस फिल्म की शूटिंग पिछले 5 साल से की जा रही थी। बीच में कोरोना लॉकडाउन के कारण इसपर ब्रेक भी लगाना पड़ा था। फिल्म को देश के साथ ही विदेशों की कई लोकेशन पर शूट किया गया है। ये फिल्म का पहला पार्ट है, इसका दूसरा पार्ट भी जल्द ही तैयार किया जाएगा। रणबीर-आलिया की ये पहली फिल्म है। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों एक-दूसरे के करीब आए और इसी साल 14 अप्रैल को दोनों शादी के बंधन में बंधे।
| आलिया भट्ट और रणबीर कपूर की मोस्ट अवेटेड फिल्म ब्रह्मास्त्र का ट्रेलर रिलीज हो गया है। सामने आया फिल्म का ट्रेलर काफी धमाकेदार है। एंटरटेनमेंट डेस्क. रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की फिल्म ब्रह्मास्त्र का ट्रेलर आज यानी पंद्रह जून को रिलीज किया गया। सामने आया फिल्म का ट्रेलर काफी धमाकेदार है। इसमें रणबीर-आलिया के बीच जबदस्त रोमांटिक कैमिस्ट्री देखने को मिल रही है। बता दें कि इस फिल्म के डायरेक्टर अयान मुखर्जी है। इसमें रणबीर-आलिया के अलावा अमिताभ बच्चन , नागार्जुन और मौनी रॉय भी लीड रोल में है। ये फिल्म इसी साल नौ सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। ट्रेलर के शुरुआत में बिग बी की आवाज सुनाई दे रही है। वे कहते है- जल, वायु, अग्नि प्राचीन काल से हमारे बीच कुछ ऐसी शक्तियां है, जो अस्त्रों में भरी हुई है। ये कहानी है सारे अस्त्रों के देवता ब्रह्मास्त्र की और एक ऐसे नौजवान की जो इस बात से अंजान है कि वो ब्रह्मास्त्र की किस्मत का सिकंदर है शिवा। रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की फिल्म ब्रह्मास्त्र यानी महाबली और सर्व शक्तिशाली अस्त्र की कहानी है। फिल्म के ट्रेलर में देखा जा सकता है कि इसमें रोमांस के साथ थ्रीलर, एक्शन और सस्पेंस भरा हुआ है। फिल्म की कहानी शिवा यानी रणबीर कपूर के आसपास बुनी गई है, जिसके पास सुपरनैचुरल पावर है और इसके बारे में उसे खुद को भी नहीं पता है। शिवा की लव स्टोरी ईशा यानी आलिया भट्ट के साथ मुलाकात से शुरू होती है। और दोनों की रोमांटिक स्टोरी के बीच ही शिवा को अपनी पावर का आहसास होता है। आलिया ने फिल्म का ट्रेलर अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। वीडियो शेयर कर उन्होंने लिखा- हमारे दिल का टुकड़ा- ब्रह्मास्त्र। देखें नौ सितंबर को। सामने आए ट्रेलर को कहा जा सकता है कि फिल्म ब्रह्मास्त्र में शानदार तरीके से वीएफएक्स का यूज किया गया है। बता दें कि इस फिल्म की शूटिंग पिछले पाँच साल से की जा रही थी। बीच में कोरोना लॉकडाउन के कारण इसपर ब्रेक भी लगाना पड़ा था। फिल्म को देश के साथ ही विदेशों की कई लोकेशन पर शूट किया गया है। ये फिल्म का पहला पार्ट है, इसका दूसरा पार्ट भी जल्द ही तैयार किया जाएगा। रणबीर-आलिया की ये पहली फिल्म है। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान दोनों एक-दूसरे के करीब आए और इसी साल चौदह अप्रैल को दोनों शादी के बंधन में बंधे। |
नई दिल्लीः पदोन्नति में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद राष्ट्रीय जनता दल (राजद) चीफ लालू प्रसाद ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर हमला बोला है। लालू यादव ने आरक्षण समाप्त करने की बात करने वालों को नसीहत देते हुए कहा है कि आरक्षण समाप्त करने की बात करने वाले जातियां खत्म करने की बात क्यों नहीं करते? राजद प्रमुख के इस विचार की अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखक व मोटिवेशनल स्पीकर चेतन भगत ने प्रशंसा की है।
चर्चित चारा घोटाले के कई मामलों में सजा काट रहे बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद के ट्विटर हैंडल से सोमवार को लिखा गया कि, 'आरक्षण समाप्त करने की बात करने वाले लोग जातियां खत्म करने की बात क्यों नहीं करते? इसलिए कि जातियां उन्हें श्रेष्ठ बनाती हैं, ऊंची जगह देकर अकारण उन्हें स्वयं पर अहंकार करने का मौका देती है। हम कहते हैं कि पहले बीमारी समाप्त करो, लेकिन वो कहते हैं कि नहीं, पहले उपचार खत्म करो। '
लालू के इस ट्वीट को री-ट्वीट करते हुए लेखक चेतन भगत ने लिखा कि, 'जाति हटाओ। सरल और महान विचार। ' सजा काट रहे लालू इन दिनों बीमारी की वजह से रांची के एक अस्पताल में भर्ती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पदोन्नति में आरक्षण का दावा करना कोई मौलिक अधिकार नहीं है और राज्य नियुक्तियों में आरक्षण देने के लिए विवश नहीं हैं।
Delhi Results Live: जानिए क्या है प्रमुख सीट का हाल, कहीं चली 'झाड़ू' तो कहीं खिला 'कमल'
| नई दिल्लीः पदोन्नति में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद राष्ट्रीय जनता दल चीफ लालू प्रसाद ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर हमला बोला है। लालू यादव ने आरक्षण समाप्त करने की बात करने वालों को नसीहत देते हुए कहा है कि आरक्षण समाप्त करने की बात करने वाले जातियां खत्म करने की बात क्यों नहीं करते? राजद प्रमुख के इस विचार की अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखक व मोटिवेशनल स्पीकर चेतन भगत ने प्रशंसा की है। चर्चित चारा घोटाले के कई मामलों में सजा काट रहे बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद के ट्विटर हैंडल से सोमवार को लिखा गया कि, 'आरक्षण समाप्त करने की बात करने वाले लोग जातियां खत्म करने की बात क्यों नहीं करते? इसलिए कि जातियां उन्हें श्रेष्ठ बनाती हैं, ऊंची जगह देकर अकारण उन्हें स्वयं पर अहंकार करने का मौका देती है। हम कहते हैं कि पहले बीमारी समाप्त करो, लेकिन वो कहते हैं कि नहीं, पहले उपचार खत्म करो। ' लालू के इस ट्वीट को री-ट्वीट करते हुए लेखक चेतन भगत ने लिखा कि, 'जाति हटाओ। सरल और महान विचार। ' सजा काट रहे लालू इन दिनों बीमारी की वजह से रांची के एक अस्पताल में भर्ती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पदोन्नति में आरक्षण का दावा करना कोई मौलिक अधिकार नहीं है और राज्य नियुक्तियों में आरक्षण देने के लिए विवश नहीं हैं। Delhi Results Live: जानिए क्या है प्रमुख सीट का हाल, कहीं चली 'झाड़ू' तो कहीं खिला 'कमल' |
नहि नि कर्मन मकि त्रिवेश । राम नाम अरन्दन एकू !! कालनेति कलि कपट नियानू । राम मुमति समरथ हनुमानू ॥ डोहानाम नाम नर बेरी, कपुि कलि काल । नापक जन प्रह्लाद जिनि पालहिं दलि सुरमाल । भाव कुमाव अनम कालबहू । नाम जपत मंगल दिशि दशहू ॥ मुमिरि सो राम नान गुरुगाया। करी नाह रघुनायहिं माया ।। मोरि सुधारहि सो मौनी खानुकृता नहि कृपा पानी ।। राम मुम्बानि दुसेवक मोसे । निज दिशि देखि दयानिधि पोते ॥ लोकवेद माहेब गीतो । विनय मुनत नहिचानत प्रोती ।। गनी गरीब ग्राम नर नागर । पनि मूद मलीन उजागर ।। मुकवि कुऋरि निजमति अनुसारी । नृहि सराहत सुध नर नारी ।। साधु सुवान मुशाल नृपाला । ईय श्रश भर परम कृपाला ।। मुनि सनमानदि मदन सुवानी । मदित अति मति गति पहिचानो ॥ यह प्राकृत महिगल स्वमाऊ । जानि शिरोमणि कौशल राऊ ॥ रोमन राम सनेह निमोने को जग मन्द मलिन मति मोते ॥ दोश-राट सेवक को प्रीति रुचि, रखिइहिं राम कृपालु । उपल किये चलयान जेहि सचिव सुमति कपि भालु ॥ हमहुँ कहावत सच कहत, राम सहउ उपहास 1 साहेब सीवानाय से, क्षेत्रक तुलसीदास ।।
अति चदि मोरि ढिठाई खोरी । सुनि श्रघ नरकहु नाक सिहोरी ।। समुझि सहमि मोहिं हर अपने सो सुधि राम कोन्ह नहि सपने ॥ सुनिकि मुनि चतु चाही। भक्ति मोरि मति स्वामि सराही ॥ कहत नशा होइ श्रति नीकी । रोमन राम जानि बन दी की ॥ लहत न प्रभु चित चूक किये की करत सुरत सो बार दिये की ।। जोहेमियाली र सुक सोइ कीन्ह कुचाली ॥ सोइ करतूतमीण केरी सग्नेहु सो न राम हिय हेरी ॥ वे भरतहि मॅटव सनमाने । राजसमा रघुवीर बखाने ।। दोहा - प्रभु तक तर कपि द्वार पर, ते किय ग्राम समान । तुलसी बहूँ न राम से, साहब शील निधान ! | नहि नि कर्मन मकि त्रिवेश । राम नाम अरन्दन एकू !! कालनेति कलि कपट नियानू । राम मुमति समरथ हनुमानू ॥ डोहानाम नाम नर बेरी, कपुि कलि काल । नापक जन प्रह्लाद जिनि पालहिं दलि सुरमाल । भाव कुमाव अनम कालबहू । नाम जपत मंगल दिशि दशहू ॥ मुमिरि सो राम नान गुरुगाया। करी नाह रघुनायहिं माया ।। मोरि सुधारहि सो मौनी खानुकृता नहि कृपा पानी ।। राम मुम्बानि दुसेवक मोसे । निज दिशि देखि दयानिधि पोते ॥ लोकवेद माहेब गीतो । विनय मुनत नहिचानत प्रोती ।। गनी गरीब ग्राम नर नागर । पनि मूद मलीन उजागर ।। मुकवि कुऋरि निजमति अनुसारी । नृहि सराहत सुध नर नारी ।। साधु सुवान मुशाल नृपाला । ईय श्रश भर परम कृपाला ।। मुनि सनमानदि मदन सुवानी । मदित अति मति गति पहिचानो ॥ यह प्राकृत महिगल स्वमाऊ । जानि शिरोमणि कौशल राऊ ॥ रोमन राम सनेह निमोने को जग मन्द मलिन मति मोते ॥ दोश-राट सेवक को प्रीति रुचि, रखिइहिं राम कृपालु । उपल किये चलयान जेहि सचिव सुमति कपि भालु ॥ हमहुँ कहावत सच कहत, राम सहउ उपहास एक साहेब सीवानाय से, क्षेत्रक तुलसीदास ।। अति चदि मोरि ढिठाई खोरी । सुनि श्रघ नरकहु नाक सिहोरी ।। समुझि सहमि मोहिं हर अपने सो सुधि राम कोन्ह नहि सपने ॥ सुनिकि मुनि चतु चाही। भक्ति मोरि मति स्वामि सराही ॥ कहत नशा होइ श्रति नीकी । रोमन राम जानि बन दी की ॥ लहत न प्रभु चित चूक किये की करत सुरत सो बार दिये की ।। जोहेमियाली र सुक सोइ कीन्ह कुचाली ॥ सोइ करतूतमीण केरी सग्नेहु सो न राम हिय हेरी ॥ वे भरतहि मॅटव सनमाने । राजसमा रघुवीर बखाने ।। दोहा - प्रभु तक तर कपि द्वार पर, ते किय ग्राम समान । तुलसी बहूँ न राम से, साहब शील निधान ! |
लखनऊ। उर्दू भाषा और साहित्य के विकास और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए साल 1972 में स्थापित की गई उत्तर प्रदेश उर्दू एकेडमी वर्तमान अध्यक्ष चौधरी कैफुलवरा के कार्यकाल में बदहाली के दौर से गुज़र रही है. उर्दू एकेडमी की बदहाली का खुलासा राजधानी लखनऊ के राजाजीपुरम निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा की आरटीआई अर्जी पर एकेडमी के जन सूचना अधिकारी आमिर द्वारा बीती 30 सितम्बर को दिए गए जबाव से हुआ है।
संजय बताते हैं कि बीते साल के सितम्बर महीने की 10 तारीख को चौधरी कैफुलवरा को एकेडमी का अध्यक्ष बनाया बनाया गया था इसीलिए उन्होंने कैफुलवरा के कार्यकाल की बीती अगस्त माह की 29 तारीख तक की सूचनाएं मांगीं थीं।
आमिर ने संजय को जो सूचना दी है उससे इस बात का खुलासा हुआ है कि उर्दू एकेडमी के वर्तमान अध्यक्ष चौधरी कैफुलवरा के अब तक के कार्यकाल में उर्दू भाषा का संरक्षण करने, उर्दू को बढाने और उर्दू का विकास करने से सम्बंधित कोई भी सूचना एकेडमी में नहीं है।
आमिर ने संजय को यह भी बताया है कि इस कालखंड में प्रकाशित होने वाली साहित्यिक और अकादमिक योग्यता की मूल रचनाएँ और उर्दू में लोकप्रिय और बच्चों की किताबें लिखने वाले लेखकों के नामों की सूचना भी एकेडमी में नहीं है. इस अवधि में साहित्यिक और वैज्ञानिक कार्यों के साथ-साथ अन्य विषयों की उर्दू भाषा में अनुवादित कार्यों की सूचना एकेडमी में नहीं होने की बात भी आमिर ने संजय को बताई है. आमिर ने संजय को यह भी लिखकर दिया है कि उपरोक्त अवधि के दौरान उर्दू में तैयार और प्रकाशित संदर्भ कार्यों के और प्रकाशित कराये गए पुराने उर्दू साहित्य के वैज्ञानिक रूप से संपादित ग्रंथों के नामों की भी कोई सूचना एकेडमी के रिकॉर्ड में नहीं है।
इस अवधि में एकेडमी में व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किए गए प्रख्यात विद्वानों और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों के नामों के साथ-साथ एकेडमी द्वारा अर्जित की गई चल एवं अचल संपत्ति की सूचना भी एकेडमी में नहीं होने की बात भी संजय को बताई गई है. संजय का कहना है कि उनको दी गई सूचना से यह बात सीधे सीधे सामने आ रही है चौधरी कैफुलवरा के कार्यकाल में उर्दू अकादमी अपने संस्थापन प्रलेख (मेमोरंडम ऑफ एसोसिएशन) में दिए गए अनेकों प्रमुख कार्यों और उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए कोई भी काम नहीं कर सकी है।
आमिर ने संजय को बताया है कि इस अवधि में 6 पुस्तकें अप्रकाशित हैं जिनका प्रकाशन किया जाना है. आमिर द्वारा दी गई सूचना के अनुसार इस अवधि में उर्दू के 19 लेखकों की पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आर्थिक सहायता दी गई है जिनका पूरा व्योरा भी आमिर ने संजय को दिया है. इस अवधि में साल 2020 की पुस्तकों पर पुरस्कार भी दिए गए हैं जिनकी 9 पेजों की उर्दू में लिखी सूची भी आमिर ने संजय को दी है. इस अवधि में 125 से अधिक बूढ़े, जरूरतमंद लेखकों को मासिक सहायता देने के साथ-साथ कक्षा 6 से पीएचडी तक के 2301 छात्रों को मेरिट के आधार पर 76 लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति दिए जाने की बात भी आमिर ने संजय को बताई है।
आमिर ने यह भी बताया है कि इस अवधि में मुशायरा,सेमिनार, शाम-ए-ग़ज़ल,उर्दू ड्रामा,दास्तान-गोई,बैत-बाजी के 62 कार्यक्रम कराये गए हैं. इस अवधि में उर्दू अकादमी ने मासिक खबरनामा, त्रैमासिक अकादमी और मासिक बागीचा नाम की 3 पत्रिकाओं का प्रकाशन करने के साथ-साथ सेल डिपो से पुस्तकें बेंचकर 7 लाख से अधिक की आय भी प्राप्त की है. संजय ने चौधरी कैफुलवरा से सार्वजनिक अपील की है कि वे उर्दू अकादमी के मेमोरंडम ऑफ एसोसिएशन में दिए गए सभी कार्यों और उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए काम करें ताकि उर्दू अकादमी अपने गठन के उद्देश्यों को पूरा कर सके।
| लखनऊ। उर्दू भाषा और साहित्य के विकास और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए साल एक हज़ार नौ सौ बहत्तर में स्थापित की गई उत्तर प्रदेश उर्दू एकेडमी वर्तमान अध्यक्ष चौधरी कैफुलवरा के कार्यकाल में बदहाली के दौर से गुज़र रही है. उर्दू एकेडमी की बदहाली का खुलासा राजधानी लखनऊ के राजाजीपुरम निवासी कंसलटेंट इंजीनियर संजय शर्मा की आरटीआई अर्जी पर एकेडमी के जन सूचना अधिकारी आमिर द्वारा बीती तीस सितम्बर को दिए गए जबाव से हुआ है। संजय बताते हैं कि बीते साल के सितम्बर महीने की दस तारीख को चौधरी कैफुलवरा को एकेडमी का अध्यक्ष बनाया बनाया गया था इसीलिए उन्होंने कैफुलवरा के कार्यकाल की बीती अगस्त माह की उनतीस तारीख तक की सूचनाएं मांगीं थीं। आमिर ने संजय को जो सूचना दी है उससे इस बात का खुलासा हुआ है कि उर्दू एकेडमी के वर्तमान अध्यक्ष चौधरी कैफुलवरा के अब तक के कार्यकाल में उर्दू भाषा का संरक्षण करने, उर्दू को बढाने और उर्दू का विकास करने से सम्बंधित कोई भी सूचना एकेडमी में नहीं है। आमिर ने संजय को यह भी बताया है कि इस कालखंड में प्रकाशित होने वाली साहित्यिक और अकादमिक योग्यता की मूल रचनाएँ और उर्दू में लोकप्रिय और बच्चों की किताबें लिखने वाले लेखकों के नामों की सूचना भी एकेडमी में नहीं है. इस अवधि में साहित्यिक और वैज्ञानिक कार्यों के साथ-साथ अन्य विषयों की उर्दू भाषा में अनुवादित कार्यों की सूचना एकेडमी में नहीं होने की बात भी आमिर ने संजय को बताई है. आमिर ने संजय को यह भी लिखकर दिया है कि उपरोक्त अवधि के दौरान उर्दू में तैयार और प्रकाशित संदर्भ कार्यों के और प्रकाशित कराये गए पुराने उर्दू साहित्य के वैज्ञानिक रूप से संपादित ग्रंथों के नामों की भी कोई सूचना एकेडमी के रिकॉर्ड में नहीं है। इस अवधि में एकेडमी में व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किए गए प्रख्यात विद्वानों और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों के नामों के साथ-साथ एकेडमी द्वारा अर्जित की गई चल एवं अचल संपत्ति की सूचना भी एकेडमी में नहीं होने की बात भी संजय को बताई गई है. संजय का कहना है कि उनको दी गई सूचना से यह बात सीधे सीधे सामने आ रही है चौधरी कैफुलवरा के कार्यकाल में उर्दू अकादमी अपने संस्थापन प्रलेख में दिए गए अनेकों प्रमुख कार्यों और उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए कोई भी काम नहीं कर सकी है। आमिर ने संजय को बताया है कि इस अवधि में छः पुस्तकें अप्रकाशित हैं जिनका प्रकाशन किया जाना है. आमिर द्वारा दी गई सूचना के अनुसार इस अवधि में उर्दू के उन्नीस लेखकों की पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आर्थिक सहायता दी गई है जिनका पूरा व्योरा भी आमिर ने संजय को दिया है. इस अवधि में साल दो हज़ार बीस की पुस्तकों पर पुरस्कार भी दिए गए हैं जिनकी नौ पेजों की उर्दू में लिखी सूची भी आमिर ने संजय को दी है. इस अवधि में एक सौ पच्चीस से अधिक बूढ़े, जरूरतमंद लेखकों को मासिक सहायता देने के साथ-साथ कक्षा छः से पीएचडी तक के दो हज़ार तीन सौ एक छात्रों को मेरिट के आधार पर छिहत्तर लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति दिए जाने की बात भी आमिर ने संजय को बताई है। आमिर ने यह भी बताया है कि इस अवधि में मुशायरा,सेमिनार, शाम-ए-ग़ज़ल,उर्दू ड्रामा,दास्तान-गोई,बैत-बाजी के बासठ कार्यक्रम कराये गए हैं. इस अवधि में उर्दू अकादमी ने मासिक खबरनामा, त्रैमासिक अकादमी और मासिक बागीचा नाम की तीन पत्रिकाओं का प्रकाशन करने के साथ-साथ सेल डिपो से पुस्तकें बेंचकर सात लाख से अधिक की आय भी प्राप्त की है. संजय ने चौधरी कैफुलवरा से सार्वजनिक अपील की है कि वे उर्दू अकादमी के मेमोरंडम ऑफ एसोसिएशन में दिए गए सभी कार्यों और उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए काम करें ताकि उर्दू अकादमी अपने गठन के उद्देश्यों को पूरा कर सके। |
ग्वालियर। शहर के बड़ा Gwalior Road Accident गांव हाइवे पर एक mp breaking news भीषण सड़क हादसा हुआ। जिसमें mp news पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि दो लोगों घायल बताए जा रहे हैं। गुस्साए लोगों ने चक्काजाम कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना ग्वालियर में बड़ा गांव हाइवे के पास की बताई जा रही है। जहां एक 5 लोग एक फलदान कार्यक्रम से लौट कर वाहन का इंतजार कर रहे थे। जहां तेज रफ्तार चार पहिया वाहन ने आकर इन्हें जोरदार टक्कर मार दी। जिसके बाद 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। दो घायल बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार मृतकों में सास, बहू, दाे बच्चे और एक युवक शामिल हैं। आरोपित ड्रायवर को पकड़ लिया गया है।
| ग्वालियर। शहर के बड़ा Gwalior Road Accident गांव हाइवे पर एक mp breaking news भीषण सड़क हादसा हुआ। जिसमें mp news पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि दो लोगों घायल बताए जा रहे हैं। गुस्साए लोगों ने चक्काजाम कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना ग्वालियर में बड़ा गांव हाइवे के पास की बताई जा रही है। जहां एक पाँच लोग एक फलदान कार्यक्रम से लौट कर वाहन का इंतजार कर रहे थे। जहां तेज रफ्तार चार पहिया वाहन ने आकर इन्हें जोरदार टक्कर मार दी। जिसके बाद पाँच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। दो घायल बताए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार मृतकों में सास, बहू, दाे बच्चे और एक युवक शामिल हैं। आरोपित ड्रायवर को पकड़ लिया गया है। |
इंडिया न्यूज़, TV News (Mumbai) :
टीवी के मोस्ट कॉन्ट्रोवर्सियल शो 'बिग बॉस' के 16वें सीजन का फैंस को बेसब्री से इंतजार है। वहीं इस शो को लेकर हर रोज अपडेट देखने को मिल रहा है। ऐसे में इस शो के होस्ट सलमान खान को बिग बॉस के 16वें सीजन की शूटिंग के लिए मुंबई की फिल्म सिटी में स्पॉट किया गया है। बता दें कि एक्टर की तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर छा गई हैं।
वैसे रिपोर्ट के अनुसार इन वायरल फोटो को लेकर दावा किया जा रहा है कि सलमान खान फिल्म सिटी में 'बिग बॉस 16' के प्रोमो की शूटिंग करने पहुंचे थे। इस दौरान एक्टर का ऑल ब्लैक लुक देखने को मिला। साथ ही तस्वीरों में भाईजान का स्वैग भरा अंदाज फैंस को काफी पसंद आ रहा है। फोटोज को देखने के बाद फैंस का बज पहले से भी ज्यादा हाई हो गया है। बताते चलें कि सलमान खान को लेकर ये भी खबरें सामने आ चुकी हैं कि वो 'बिग बॉस 16' को होस्ट करने के लिए 1000 करोड़ रुपए से ज्यादा रकम चार्ज करने जा रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सलमान खान का यह शो अपने पिछले सीजन से काफी अलग होने वाला है और इस बार यह दर्शकों को खूब एंटरटेन करने वाले हैं। बताया जा रहा है कि सलमान खान का शो बिग बॉस 16 अक्टूबर के महीने से शुरू होने वाला है। इस बार ऐसा माना जा रहा है कि एक्वा थीम पर शो बेस्ड होगा।
| इंडिया न्यूज़, TV News : टीवी के मोस्ट कॉन्ट्रोवर्सियल शो 'बिग बॉस' के सोलहवें सीजन का फैंस को बेसब्री से इंतजार है। वहीं इस शो को लेकर हर रोज अपडेट देखने को मिल रहा है। ऐसे में इस शो के होस्ट सलमान खान को बिग बॉस के सोलहवें सीजन की शूटिंग के लिए मुंबई की फिल्म सिटी में स्पॉट किया गया है। बता दें कि एक्टर की तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर छा गई हैं। वैसे रिपोर्ट के अनुसार इन वायरल फोटो को लेकर दावा किया जा रहा है कि सलमान खान फिल्म सिटी में 'बिग बॉस सोलह' के प्रोमो की शूटिंग करने पहुंचे थे। इस दौरान एक्टर का ऑल ब्लैक लुक देखने को मिला। साथ ही तस्वीरों में भाईजान का स्वैग भरा अंदाज फैंस को काफी पसंद आ रहा है। फोटोज को देखने के बाद फैंस का बज पहले से भी ज्यादा हाई हो गया है। बताते चलें कि सलमान खान को लेकर ये भी खबरें सामने आ चुकी हैं कि वो 'बिग बॉस सोलह' को होस्ट करने के लिए एक हज़ार करोड़ रुपए से ज्यादा रकम चार्ज करने जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सलमान खान का यह शो अपने पिछले सीजन से काफी अलग होने वाला है और इस बार यह दर्शकों को खूब एंटरटेन करने वाले हैं। बताया जा रहा है कि सलमान खान का शो बिग बॉस सोलह अक्टूबर के महीने से शुरू होने वाला है। इस बार ऐसा माना जा रहा है कि एक्वा थीम पर शो बेस्ड होगा। |
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