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वहीँ अजय देवगन ने गुस्से भरे लहजे में ट्विटर पर लिखा, 'भयानक और घिनौना कृत्य, गुस्से को शब्दों में बयान नहीं कर सकता'. सिर्फ अजय और अभिषेक ही नहीं लगभग पूरा बॉलीवुड ही कश्मीर में हुए इस आतंकी हमले की कड़ी निंदा कर रहा है. एक्टर रितेश देशमुख, अक्षय कुमार, अनुपन खेर से लेकर फिल्ममेकर करण जौहर ने इस हमले पर सोशल मीडिया पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी हैं.
एक्टर अनुपम खेर अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखते हैं, 'पुलवामा में हुए इस कायराना आतंकी हमले की खबर से मुझे बहुत दुःख हुआ है साथ ही बेहद गुस्से में हूं, मेरा दिल आज उन परिजनों के लिए रो रहा है जिन्होंने आज अपने बेटे, भाई, पिता और पति को खोया है, मैं घायलों के लिए दुआ करता हूं ईश्वर उन्हें जल्द स्वस्थ करें'.
| वहीँ अजय देवगन ने गुस्से भरे लहजे में ट्विटर पर लिखा, 'भयानक और घिनौना कृत्य, गुस्से को शब्दों में बयान नहीं कर सकता'. सिर्फ अजय और अभिषेक ही नहीं लगभग पूरा बॉलीवुड ही कश्मीर में हुए इस आतंकी हमले की कड़ी निंदा कर रहा है. एक्टर रितेश देशमुख, अक्षय कुमार, अनुपन खेर से लेकर फिल्ममेकर करण जौहर ने इस हमले पर सोशल मीडिया पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी हैं. एक्टर अनुपम खेर अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखते हैं, 'पुलवामा में हुए इस कायराना आतंकी हमले की खबर से मुझे बहुत दुःख हुआ है साथ ही बेहद गुस्से में हूं, मेरा दिल आज उन परिजनों के लिए रो रहा है जिन्होंने आज अपने बेटे, भाई, पिता और पति को खोया है, मैं घायलों के लिए दुआ करता हूं ईश्वर उन्हें जल्द स्वस्थ करें'. |
लखनऊ। अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी (वरिष्ठ आईएएस) को यूपी जूडो एसोसिएशन की रविवार को पीएसी ऑफिसर्स मेस, महानगर में हुई आम सभा में चेयरमैन चुना गया। वहीं आईएएस महेश गुप्ता (आईएएस) और जावीद अहमद (आईपीएस) को-चेयरमैन चुने गए। आज हुई बैठक में आगामी चार साल के कार्यक्रमों पर भी विचार-विमर्श भी हुआ। इस बैठक में सभी पदों पर निर्विरोध निर्वाचन हुए। इस बैठक में सुधीर हलवासिया अध्यक्ष, श्रीमती आयषा मुनव्वर महासचिव तथा अनूप गुरनानी कोषाध्यक्ष चुने गये। यह जानकारी यूपी जूडो एसोसिएशन के सीईओ मुनव्वर अंजार ने एक प्रेस विज्ञप्ति में दी।
चेयरमैनः अवनीश कुमार अवस्थी, को-चेयरमैनः महेश गुप्ता, जावीद अहमद, आजीवन अध्यक्षः केएल गुप्ता, अध्यक्ष सुधीर हलवासिया, वरिष्ठ उपाध्यक्षः विवेक बंसल, प्रकाश चंद्रा, सैफ अली नकवी, उपाध्यक्षः डा. अशोक रैना, फरहत बेग, हुमाँयु नईम खान, शाह फैसल, महासचिवः श्रीमती आयशा मुनव्वर, सीईओः मुनव्वर अंजार, संयुक्त सचिवः दिलशाद सिद्दीकी, सुहैल अहमद, संजय गुप्ता, अनीस उर रहमान, कोषाध्यक्षः अनूप गुरनानी, तकनीकी समिति चेयरमैनः उमेश कुमार सिंह, तकनीकी सचिवः दीपक गुप्ता, रेफरिंग डायरेक्टरः संजय गिरि, स्पोट्र्स डायरेक्टरः पीआर पाण्डेय, आफिस चेयरमैनः दानिश, मुख्य कोचः लाल कुमार।
| लखनऊ। अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी को यूपी जूडो एसोसिएशन की रविवार को पीएसी ऑफिसर्स मेस, महानगर में हुई आम सभा में चेयरमैन चुना गया। वहीं आईएएस महेश गुप्ता और जावीद अहमद को-चेयरमैन चुने गए। आज हुई बैठक में आगामी चार साल के कार्यक्रमों पर भी विचार-विमर्श भी हुआ। इस बैठक में सभी पदों पर निर्विरोध निर्वाचन हुए। इस बैठक में सुधीर हलवासिया अध्यक्ष, श्रीमती आयषा मुनव्वर महासचिव तथा अनूप गुरनानी कोषाध्यक्ष चुने गये। यह जानकारी यूपी जूडो एसोसिएशन के सीईओ मुनव्वर अंजार ने एक प्रेस विज्ञप्ति में दी। चेयरमैनः अवनीश कुमार अवस्थी, को-चेयरमैनः महेश गुप्ता, जावीद अहमद, आजीवन अध्यक्षः केएल गुप्ता, अध्यक्ष सुधीर हलवासिया, वरिष्ठ उपाध्यक्षः विवेक बंसल, प्रकाश चंद्रा, सैफ अली नकवी, उपाध्यक्षः डा. अशोक रैना, फरहत बेग, हुमाँयु नईम खान, शाह फैसल, महासचिवः श्रीमती आयशा मुनव्वर, सीईओः मुनव्वर अंजार, संयुक्त सचिवः दिलशाद सिद्दीकी, सुहैल अहमद, संजय गुप्ता, अनीस उर रहमान, कोषाध्यक्षः अनूप गुरनानी, तकनीकी समिति चेयरमैनः उमेश कुमार सिंह, तकनीकी सचिवः दीपक गुप्ता, रेफरिंग डायरेक्टरः संजय गिरि, स्पोट्र्स डायरेक्टरः पीआर पाण्डेय, आफिस चेयरमैनः दानिश, मुख्य कोचः लाल कुमार। |
यूरोप की कहानियाँ
ताज़ी हवा बह रही थी । श्राज टिड्डी-दल नहीं था। नदी की नन्ही नन्ही लहरों की सर्मर-ध्वनि मात्र तट के झाड़ियों से बात कर रही थी। नदी में एक नाव बढ़ी चलो आ रही थी ।
वह वृद्धा स्त्री नदी के किनारे खड़ी थी। उस युवती की ओर अपना जादू-टोना फेंकते ही वह बेहोश हो गई थी। उस भयानक चित्तविकार- र अथवा पड़ोस में आए हुए नए डाक्टर के कारण रोग कुछ - शान्त होगया था। कुछ महीने तक उसकी हालत सुधरती रही और बाद में वह पूर्णतया स्वस्थ भी हो गई । निरोगिता के आनन्द में वह पागल-सी होगई, पर वह आनन्द थोड़े दिन ही रह सका। उसका चित्त उदास, दुःखी और निराशा- पूर्ण रहने लगा। उसकी आँखों के आगे रातदिन नाव वाली उस युवती की सूरत नाचती रहती । अन्त में वह कल्पना तो विलीन हो गई, किन्तु उसे मानो वही सब प्रत्यक्ष दिखाई देने लगा । युवती दिन रात रो रही है, कभी चुप भी हो जाती है, तो आँखों के प्रकल नहीं होती । एक सपना-सा उसके आगे बना ही रहता - आँखे फाड़-फाड़कर वह उसकी ओर घूर रही है ।
आज वह नदी तट पर आकर खड़ी हो गई थी। उसके हाथ में एक लकड़ी थी, जिससे वह नदी के कीचड़ में 'क्रास' का चिन्ह बना रही थी। बीच-बीच में कान खड़े करके सुनती और 'कास' बनाती जातो । उसी समय गिरजाघर के घंटे बज उठे ।
बड़ी सावधानी से उसने अंतिम 'क्रास' बनाया । लकड़ी फेंक दी और घुटने टेककर वह प्रार्थना करने लगी। धीरे से उठकर वह नदी में घुस गई । बग़ल तक पानी में पहुँचकर उसने हाथ जोड़ लिए और नदो के | यूरोप की कहानियाँ ताज़ी हवा बह रही थी । श्राज टिड्डी-दल नहीं था। नदी की नन्ही नन्ही लहरों की सर्मर-ध्वनि मात्र तट के झाड़ियों से बात कर रही थी। नदी में एक नाव बढ़ी चलो आ रही थी । वह वृद्धा स्त्री नदी के किनारे खड़ी थी। उस युवती की ओर अपना जादू-टोना फेंकते ही वह बेहोश हो गई थी। उस भयानक चित्तविकार- र अथवा पड़ोस में आए हुए नए डाक्टर के कारण रोग कुछ - शान्त होगया था। कुछ महीने तक उसकी हालत सुधरती रही और बाद में वह पूर्णतया स्वस्थ भी हो गई । निरोगिता के आनन्द में वह पागल-सी होगई, पर वह आनन्द थोड़े दिन ही रह सका। उसका चित्त उदास, दुःखी और निराशा- पूर्ण रहने लगा। उसकी आँखों के आगे रातदिन नाव वाली उस युवती की सूरत नाचती रहती । अन्त में वह कल्पना तो विलीन हो गई, किन्तु उसे मानो वही सब प्रत्यक्ष दिखाई देने लगा । युवती दिन रात रो रही है, कभी चुप भी हो जाती है, तो आँखों के प्रकल नहीं होती । एक सपना-सा उसके आगे बना ही रहता - आँखे फाड़-फाड़कर वह उसकी ओर घूर रही है । आज वह नदी तट पर आकर खड़ी हो गई थी। उसके हाथ में एक लकड़ी थी, जिससे वह नदी के कीचड़ में 'क्रास' का चिन्ह बना रही थी। बीच-बीच में कान खड़े करके सुनती और 'कास' बनाती जातो । उसी समय गिरजाघर के घंटे बज उठे । बड़ी सावधानी से उसने अंतिम 'क्रास' बनाया । लकड़ी फेंक दी और घुटने टेककर वह प्रार्थना करने लगी। धीरे से उठकर वह नदी में घुस गई । बग़ल तक पानी में पहुँचकर उसने हाथ जोड़ लिए और नदो के |
मोदी सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में 13वें रोस्टर पर एक समीक्षा याचिका दायर की थी जिसे खारिज कर दिया गया है, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक इस पर अध्यादेश लाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। इस मुद्दे पर सभी विपक्षी दलों और 'पिछड़े-अतिपिछडे' एससी-एसटी के लोग इस मुद्दे पर लगातार विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में खारिज होने के बाद बिहार की सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा है कि मोदी सरकार जल्द ही इस पर अध्यादेश लाये।
मोदी सरकार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चेतावनी दी है कि सरकार ने उच्च शिक्षा में लगभग आरक्षण समाप्त कर दिया है। 13 प्वाइंट रोस्टर मामले में सुप्रीम कोर्ट में सरकार द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज करने के बावजूद सरकार अध्यादेश भी नहीं ला रही है। यदि सरकार बिना देर किए अध्यादेश नहीं लाती है, तो SC/ST/OBC एक साथ होकर इस जातिवादी सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे।
| मोदी सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में तेरहवें रोस्टर पर एक समीक्षा याचिका दायर की थी जिसे खारिज कर दिया गया है, लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक इस पर अध्यादेश लाने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। इस मुद्दे पर सभी विपक्षी दलों और 'पिछड़े-अतिपिछडे' एससी-एसटी के लोग इस मुद्दे पर लगातार विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में खारिज होने के बाद बिहार की सियासत तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा है कि मोदी सरकार जल्द ही इस पर अध्यादेश लाये। मोदी सरकार को नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चेतावनी दी है कि सरकार ने उच्च शिक्षा में लगभग आरक्षण समाप्त कर दिया है। तेरह प्वाइंट रोस्टर मामले में सुप्रीम कोर्ट में सरकार द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज करने के बावजूद सरकार अध्यादेश भी नहीं ला रही है। यदि सरकार बिना देर किए अध्यादेश नहीं लाती है, तो SC/ST/OBC एक साथ होकर इस जातिवादी सरकार की ईंट से ईंट बजा देंगे। |
PATNA : बिहार में रामनवमी के जुलस को लेकर उठी हिंसा की आग तीन दिनों के बाद हल्की- हल्की कम पड़ती हुई नजर आ रही है। हालांकि, अभी भी इन इलाकों में इंटनेट की सेवा बंद है और लोगों को महज आठ घंटों के लिए छूट प्रदान की गई है। इस बीच अब राज्य में पनपे इस माहौल को लेकर विकासशील इंसान पार्टी ने तरफ से लोगों से शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की गयी है।
दरअसल, बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता देव ज्योति ने बिहार में फैली हिंसा को लेकर राज्यवासियों से निवेदन करते हुए कहा कि, बिहार शांति, समर्पण, त्याग, बलिदान और ज्ञान की धरती है। इस धरती पर इस तरह की घटनाएं होने अच्छी बात नहीं है। जहां-जहां भी सामाजिक माहौल को बिगाड़ने वाली घटनाएं हुई हैं, वहां प्रशासन पूरी मुस्तैदी से शांति व्यवस्था कायम रखने का कार्य कर रहा है।
देव ज्योति ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी समाज के तमाम वर्गों और लोगों से कानून को हाथ में न लेने और सामाजिक समरसता को बनाए रखने की अपील करती है। राज्य के प्रत्येक निवासियों का यह कर्तव्य है कि सब एक होकर बिहार को प्रगति के पथ पर निरंतर अग्रसर होने में अपना अहम योगदान दें।
वहीं, राजनीति करने वाली पार्टियों के ऊपर भी हमला करते हुए कहा कि संवेदनशील मामलों पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। ऐसे मामलों में जल्द से जल्द कैसे शांति व्यवस्था जल्द से जल्द इस पर कार्य करने की जरूरत होती है। उन्होंने प्रशासन से यह भी अपील की की ऐसे मामलों में जिंदगी भी संलिप्तता पाई जाती है उनके ऊपर कठोर कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो और कानून व्यवस्था को हाथ में लेने से पहले दंगाई प्रवृत्ति के लोग सौ बार सोचे।
| PATNA : बिहार में रामनवमी के जुलस को लेकर उठी हिंसा की आग तीन दिनों के बाद हल्की- हल्की कम पड़ती हुई नजर आ रही है। हालांकि, अभी भी इन इलाकों में इंटनेट की सेवा बंद है और लोगों को महज आठ घंटों के लिए छूट प्रदान की गई है। इस बीच अब राज्य में पनपे इस माहौल को लेकर विकासशील इंसान पार्टी ने तरफ से लोगों से शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की गयी है। दरअसल, बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता देव ज्योति ने बिहार में फैली हिंसा को लेकर राज्यवासियों से निवेदन करते हुए कहा कि, बिहार शांति, समर्पण, त्याग, बलिदान और ज्ञान की धरती है। इस धरती पर इस तरह की घटनाएं होने अच्छी बात नहीं है। जहां-जहां भी सामाजिक माहौल को बिगाड़ने वाली घटनाएं हुई हैं, वहां प्रशासन पूरी मुस्तैदी से शांति व्यवस्था कायम रखने का कार्य कर रहा है। देव ज्योति ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी समाज के तमाम वर्गों और लोगों से कानून को हाथ में न लेने और सामाजिक समरसता को बनाए रखने की अपील करती है। राज्य के प्रत्येक निवासियों का यह कर्तव्य है कि सब एक होकर बिहार को प्रगति के पथ पर निरंतर अग्रसर होने में अपना अहम योगदान दें। वहीं, राजनीति करने वाली पार्टियों के ऊपर भी हमला करते हुए कहा कि संवेदनशील मामलों पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। ऐसे मामलों में जल्द से जल्द कैसे शांति व्यवस्था जल्द से जल्द इस पर कार्य करने की जरूरत होती है। उन्होंने प्रशासन से यह भी अपील की की ऐसे मामलों में जिंदगी भी संलिप्तता पाई जाती है उनके ऊपर कठोर कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो और कानून व्यवस्था को हाथ में लेने से पहले दंगाई प्रवृत्ति के लोग सौ बार सोचे। |
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली इस समय दुनिया भर में बच्चे के जन्म के बाद होने वाले हियरिंग टेस्ट (सुनने की क्षमता की जांच) के प्रति जागररुकता फैलाने में लगे हुए हैं। इसी क्रम में ब्रेट ली ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी के गंगा राम अस्पताल में आयोजित न्यू बॉर्न हियरिंग स्क्रीनिंग में हिस्सा लिया।
ली के इस मिशन से जुड़ने का कारण थोड़ा व्यक्तिगत भी है। दरअसल, पांच साल की उम्र में ली के बेटे ने गिर जाने के कारण अपनी सुनने की क्षमता खो दी थी। हालांकि, खुशनसीबी यह थी की उनके बेटे की परेशानी बिना सर्जरी ठीक हो गई, लेकिन इसने ली को सोचने को मजबूर कर दिया और जब उन्हें हियरिंग मशीन बनाने वाली कंपनी कोकले के ब्रैंड एम्बेसडर बनने का मौका मिला तो उन्होंने तुरंत हामी भर दी।
| ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली इस समय दुनिया भर में बच्चे के जन्म के बाद होने वाले हियरिंग टेस्ट के प्रति जागररुकता फैलाने में लगे हुए हैं। इसी क्रम में ब्रेट ली ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी के गंगा राम अस्पताल में आयोजित न्यू बॉर्न हियरिंग स्क्रीनिंग में हिस्सा लिया। ली के इस मिशन से जुड़ने का कारण थोड़ा व्यक्तिगत भी है। दरअसल, पांच साल की उम्र में ली के बेटे ने गिर जाने के कारण अपनी सुनने की क्षमता खो दी थी। हालांकि, खुशनसीबी यह थी की उनके बेटे की परेशानी बिना सर्जरी ठीक हो गई, लेकिन इसने ली को सोचने को मजबूर कर दिया और जब उन्हें हियरिंग मशीन बनाने वाली कंपनी कोकले के ब्रैंड एम्बेसडर बनने का मौका मिला तो उन्होंने तुरंत हामी भर दी। |
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Superfoods For Healthy Living: ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवर और फिटनेस आइकॉन एक्ट्रेस छवि मित्तल अब अपनी हेल्थ, डाइट और लाइफस्टाइल को लेकर अधिक कंसर्न्ड हो गयी हैं और वे अपने फैंस को भी हेल्थ के प्रति गम्भीर बनने की सलाह देती हैं। बॉलीवुड और टीवी अभिनेत्री छवि मित्तल (Bollywood Actress Chhavi Mittal) ने हाल ही में एक वीडियो शेयर किया जिसमें उन्होंने अपनी डाइट के बारे में कुछ सीक्रेट्स शेयर किए। छवि ने कुछ ऐसे सुपरफूड्स के बारे में बात की जो हेल्थ के लिए बहुत लाभकारी हैं और ये हमारे देश में आसानी से मिल जाते हैं। छवि ने बताया कि वह अपनी डेली डाइट में इन सभी चीजों को शामिल करती हैं और साथ ही इसके सेवन के इंट्रेस्टिंग तरीकों के बारे में बात की। आइए जानें क्या हैं छवि मित्तल के डाइट सीक्रेट्स और दिन भर में इन फूड्स का सेवन किस तरह करती हैं।
अभिनेत्री ने बताया कि वह सुबह उठते ही वे खाली पेट आंवले का जूस(benefits of drinking amla juice on empty stomach) पीती हैं। आंवला एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर एक फल है, जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है। यह हेयर फॉल की समस्या से आराम दिलाता है और एसिडिटी भी कम करता है।
छवि मित्तल कहती हैं कि वे हर दिन नट्स और ड्राईफ्रूट्स का सेवन करती हैं और यह उनके लिए एक हेल्दी स्नैक ऑप्शन का काम करता है। नियमित नट्स का सेवन करने से शरीर की मेटाबॉलिक रेट बेहतर होती है और इससे शरीर को पर्याप्त मात्रा में डाइटरी फाइबर,मिनरल्स और हेल्दी फैट्स मिल पाते हैं। छवि रोजाना बादाम (Almonds), अखरोट (Walnuts), अंजीर (Anjeer), काली किशमिश (Back Raisins) और खजूर (dates) खाने की सलाह देती हैं।
एक्ट्रेस छवि मित्तल मानती हैं कि लोगों को अपनी डाइट में बेरीज को जरूर शामिल करना चाहिए। क्योकि, इनमें एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-एजिंग तत्व होते हैं, जो स्किन, इम्यून सिस्टम और ओवरऑल हेल्थ को फायदा पहुंचाता है।
अभिनेत्री के अनुसार, योगर्टएक लो-कैलोरी फूड होने के साथ-साथ कैल्शियम का सेवन हेल्थ के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसीलिए, डेली डाइट में इसे अलग-अलग तरीकों से शामिल कर सकते हैं। (Yogurt Health benefits)
हेल्दी फाइबर, प्रोटीन, आयरन और अन्य कई पोषक तत्वों से भरपूर सत्तू का सेवन भी एक हेल्दी डिसिजन साबित हो सकता है। छवि भी सत्तू (sattu) का सेवन करती हैं और सत्तू से बने लड्डू (Laddoo) और पैनकेक खाती हैं।
| Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! Superfoods For Healthy Living: ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवर और फिटनेस आइकॉन एक्ट्रेस छवि मित्तल अब अपनी हेल्थ, डाइट और लाइफस्टाइल को लेकर अधिक कंसर्न्ड हो गयी हैं और वे अपने फैंस को भी हेल्थ के प्रति गम्भीर बनने की सलाह देती हैं। बॉलीवुड और टीवी अभिनेत्री छवि मित्तल ने हाल ही में एक वीडियो शेयर किया जिसमें उन्होंने अपनी डाइट के बारे में कुछ सीक्रेट्स शेयर किए। छवि ने कुछ ऐसे सुपरफूड्स के बारे में बात की जो हेल्थ के लिए बहुत लाभकारी हैं और ये हमारे देश में आसानी से मिल जाते हैं। छवि ने बताया कि वह अपनी डेली डाइट में इन सभी चीजों को शामिल करती हैं और साथ ही इसके सेवन के इंट्रेस्टिंग तरीकों के बारे में बात की। आइए जानें क्या हैं छवि मित्तल के डाइट सीक्रेट्स और दिन भर में इन फूड्स का सेवन किस तरह करती हैं। अभिनेत्री ने बताया कि वह सुबह उठते ही वे खाली पेट आंवले का जूस पीती हैं। आंवला एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर एक फल है, जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाता है। यह हेयर फॉल की समस्या से आराम दिलाता है और एसिडिटी भी कम करता है। छवि मित्तल कहती हैं कि वे हर दिन नट्स और ड्राईफ्रूट्स का सेवन करती हैं और यह उनके लिए एक हेल्दी स्नैक ऑप्शन का काम करता है। नियमित नट्स का सेवन करने से शरीर की मेटाबॉलिक रेट बेहतर होती है और इससे शरीर को पर्याप्त मात्रा में डाइटरी फाइबर,मिनरल्स और हेल्दी फैट्स मिल पाते हैं। छवि रोजाना बादाम , अखरोट , अंजीर , काली किशमिश और खजूर खाने की सलाह देती हैं। एक्ट्रेस छवि मित्तल मानती हैं कि लोगों को अपनी डाइट में बेरीज को जरूर शामिल करना चाहिए। क्योकि, इनमें एंटीऑक्सिडेंट और एंटी-एजिंग तत्व होते हैं, जो स्किन, इम्यून सिस्टम और ओवरऑल हेल्थ को फायदा पहुंचाता है। अभिनेत्री के अनुसार, योगर्टएक लो-कैलोरी फूड होने के साथ-साथ कैल्शियम का सेवन हेल्थ के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसीलिए, डेली डाइट में इसे अलग-अलग तरीकों से शामिल कर सकते हैं। हेल्दी फाइबर, प्रोटीन, आयरन और अन्य कई पोषक तत्वों से भरपूर सत्तू का सेवन भी एक हेल्दी डिसिजन साबित हो सकता है। छवि भी सत्तू का सेवन करती हैं और सत्तू से बने लड्डू और पैनकेक खाती हैं। |
हाल ही में जुहू होटल में हिट फिल्म 'साजन चले ससुराल' की न सिर्फ वर्षगांठ मनाई गई बल्कि उसका सीक्वल भी एनाउंस किया गया। फिल्म के निर्माता मंसूर अहमद सिद्दिकी बॉलीवुड के नामचीन प्रोडयूसर रहे हैं । उनके नाम दर्जनों हिट फिल्में हैं लेकिन ये फिल्म उनके हमेशा से करीब रही है लिहाजा अब उन्होंने इसका सीक्वल बनाने का एलान किया । फिल्म के डायरेक्टर एन एन सिद्दिकी हैं जो इससे पहले मराठी फिल्में बना चुके हैं जल्द ही उनकी मराठी फिल्म हीरो रिलीज होने जा रही है । उनका फिल्म के बारे में कहना है कि जंहा साजन..... खत्म होती है वहां से इसका सीक्वल साजन चले ससुराल टू शुरू होती है । अभी फिल्म की कास्टिंग होना बाकी है, फिलहाल वो टेबल वर्क से गुजर रही है । इसी फिल्म के साथ मंसूर अहमद ने मराठी फिल्म 'राधे मुरारी' का भी एलान किया इस फिल्म के निर्देशक भी एन एन सिद्दिकी होगें । इस फिल्म में काम कर रहे सितारों के नाम हैं अमित रायन पाटिल, गौरव घाटनेकर,उदय टिकेकर, दीपाली सयैद तथा आरती अदरकर आदि ।
| हाल ही में जुहू होटल में हिट फिल्म 'साजन चले ससुराल' की न सिर्फ वर्षगांठ मनाई गई बल्कि उसका सीक्वल भी एनाउंस किया गया। फिल्म के निर्माता मंसूर अहमद सिद्दिकी बॉलीवुड के नामचीन प्रोडयूसर रहे हैं । उनके नाम दर्जनों हिट फिल्में हैं लेकिन ये फिल्म उनके हमेशा से करीब रही है लिहाजा अब उन्होंने इसका सीक्वल बनाने का एलान किया । फिल्म के डायरेक्टर एन एन सिद्दिकी हैं जो इससे पहले मराठी फिल्में बना चुके हैं जल्द ही उनकी मराठी फिल्म हीरो रिलीज होने जा रही है । उनका फिल्म के बारे में कहना है कि जंहा साजन..... खत्म होती है वहां से इसका सीक्वल साजन चले ससुराल टू शुरू होती है । अभी फिल्म की कास्टिंग होना बाकी है, फिलहाल वो टेबल वर्क से गुजर रही है । इसी फिल्म के साथ मंसूर अहमद ने मराठी फिल्म 'राधे मुरारी' का भी एलान किया इस फिल्म के निर्देशक भी एन एन सिद्दिकी होगें । इस फिल्म में काम कर रहे सितारों के नाम हैं अमित रायन पाटिल, गौरव घाटनेकर,उदय टिकेकर, दीपाली सयैद तथा आरती अदरकर आदि । |
Aaj Ka Mesh Rashifal 15 December 2022, Aries Horoscope Today in Hindi: आपको जमीन जायदाद में निवेश करने का मौका मिल सकता है। लेकिन यह समय प्रॉपर्टी में निवेश के लिए अनुकूल नहीं है। इसके लिए आपको योजना बनानी होगी तभी कोई फैसला कर सकते हैं। वरना जल्दबाजी में कोई नुकसान हो सकता है।
Rashtravad: Topic छोड़ इधर-उधर की बात करने लगे Anurag Bhadouria, Rakesh ने जमकर लगा दी क्लास!
Four Ka Fire: मिशन राजस्थान. . . पीएम मोदी का आरंभ प्रचंड !
| Aaj Ka Mesh Rashifal पंद्रह दिसंबरember दो हज़ार बाईस, Aries Horoscope Today in Hindi: आपको जमीन जायदाद में निवेश करने का मौका मिल सकता है। लेकिन यह समय प्रॉपर्टी में निवेश के लिए अनुकूल नहीं है। इसके लिए आपको योजना बनानी होगी तभी कोई फैसला कर सकते हैं। वरना जल्दबाजी में कोई नुकसान हो सकता है। Rashtravad: Topic छोड़ इधर-उधर की बात करने लगे Anurag Bhadouria, Rakesh ने जमकर लगा दी क्लास! Four Ka Fire: मिशन राजस्थान. . . पीएम मोदी का आरंभ प्रचंड ! |
शाहरुख खान की फिल्म पठान 25 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। इस फिल्म में दीपिका पादुकोण और जॉन अब्राहम भी नजर आएंगे।
पठान से एक हॉलीवुड एक्ट्रेस भी बॉलीवुड में कदम रखने जा रही हैं। इस एक्ट्रेस का नाम रेचल ऐन मुलिंस हैं। रेचल को 'हैप्पी एंडिंग्स' और 'द लीग' जैसे कई अंतरराष्ट्रीय शो के लिए जाना जाता है।
रेचल ने कहा, जिस समय मैंने पठान के लिए ऑडिशन दिया तब मैं दिल्ली में थी। मैंने ऑडिशन दिया और सिलेक्ट हो गई। मैंने क्रिसमस भी इंडिया में ही सेलिब्रेट किया है।
फिल्म में रेचल का रोल एक बिंदास और दबंग लड़की का है। रेचल एक्ट्रेस के साथ-साथ बिकिनी मॉडल भी रह चुकी हैं। रेचल सोशल मीडिया पर अपनी बिकिनी तस्वीरों को लेकर फेमस हैं।
रेचल अपनी बोल्डनेस से फिल्म में दीपिका को जबरदस्त टक्कर देने वाली हैं। रेचल भारतीय वेब सीरीज Chutzpah में भी काम कर चुकी हैं।
| शाहरुख खान की फिल्म पठान पच्चीस जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। इस फिल्म में दीपिका पादुकोण और जॉन अब्राहम भी नजर आएंगे। पठान से एक हॉलीवुड एक्ट्रेस भी बॉलीवुड में कदम रखने जा रही हैं। इस एक्ट्रेस का नाम रेचल ऐन मुलिंस हैं। रेचल को 'हैप्पी एंडिंग्स' और 'द लीग' जैसे कई अंतरराष्ट्रीय शो के लिए जाना जाता है। रेचल ने कहा, जिस समय मैंने पठान के लिए ऑडिशन दिया तब मैं दिल्ली में थी। मैंने ऑडिशन दिया और सिलेक्ट हो गई। मैंने क्रिसमस भी इंडिया में ही सेलिब्रेट किया है। फिल्म में रेचल का रोल एक बिंदास और दबंग लड़की का है। रेचल एक्ट्रेस के साथ-साथ बिकिनी मॉडल भी रह चुकी हैं। रेचल सोशल मीडिया पर अपनी बिकिनी तस्वीरों को लेकर फेमस हैं। रेचल अपनी बोल्डनेस से फिल्म में दीपिका को जबरदस्त टक्कर देने वाली हैं। रेचल भारतीय वेब सीरीज Chutzpah में भी काम कर चुकी हैं। |
Sri Lanka Crisis : पड़ोसी देश श्रीलंका में स्थितियां सुधरती हुई नहीं दिख रही हैं। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने शुक्रवार को पांच सप्ताह में दूसरी बार आपातकाल की घोषणा की है। सुरक्षा बलों को व्यापक अधिकार दिए गए हैं क्योंकि उनके इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी हड़ताल ने देश को ठप कर दिया है। इससे पहले शुक्रवार को पुलिस ने राजपक्षे के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद में धावा बोलने की कोशिश कर रहे छात्रों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछार की।
आपातकाल सुरक्षा बलों को न्यायिक पर्यवेक्षण के बिना लंबी अवधि के लिए संदिग्धों को गिरफ्तार करने और हिरासत में रखने के लिए व्यापक अधिकार देता है। यह पुलिस के अलावा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सैनिकों की तैनाती की भी अनुमति देता है। राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने कहा कि कानून शुक्रवार मध्यरात्रि से लागू होंगे। राष्ट्रपति के मीडिया प्रभाग के मुताबिक, राजपक्षे का यह निर्णय जनता की सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं को बरकरार रखने के लिए है ताकि देश का सुचारू रूप से संचालन सुनिश्चित हो सके।
राजधानी में हजारों प्रदर्शनकारियों द्वारा निजी घर में धावा बोलने के प्रयास के एक दिन बाद राजपक्षे ने 1 अप्रैल को आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी थी। उस आपातकाल को 14 अप्रैल को समाप्त होने दिया गया था। लेकिन तब से विरोध तेज हो गया है। श्रीलंका अपनी आजादी के बाद से सबसे बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रहा है और लोगों को आवश्यक वस्तुओं की कमी के साथ ही भारी बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।
| Sri Lanka Crisis : पड़ोसी देश श्रीलंका में स्थितियां सुधरती हुई नहीं दिख रही हैं। श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने शुक्रवार को पांच सप्ताह में दूसरी बार आपातकाल की घोषणा की है। सुरक्षा बलों को व्यापक अधिकार दिए गए हैं क्योंकि उनके इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी हड़ताल ने देश को ठप कर दिया है। इससे पहले शुक्रवार को पुलिस ने राजपक्षे के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद में धावा बोलने की कोशिश कर रहे छात्रों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और पानी की बौछार की। आपातकाल सुरक्षा बलों को न्यायिक पर्यवेक्षण के बिना लंबी अवधि के लिए संदिग्धों को गिरफ्तार करने और हिरासत में रखने के लिए व्यापक अधिकार देता है। यह पुलिस के अलावा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सैनिकों की तैनाती की भी अनुमति देता है। राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने कहा कि कानून शुक्रवार मध्यरात्रि से लागू होंगे। राष्ट्रपति के मीडिया प्रभाग के मुताबिक, राजपक्षे का यह निर्णय जनता की सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं को बरकरार रखने के लिए है ताकि देश का सुचारू रूप से संचालन सुनिश्चित हो सके। राजधानी में हजारों प्रदर्शनकारियों द्वारा निजी घर में धावा बोलने के प्रयास के एक दिन बाद राजपक्षे ने एक अप्रैल को आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी थी। उस आपातकाल को चौदह अप्रैल को समाप्त होने दिया गया था। लेकिन तब से विरोध तेज हो गया है। श्रीलंका अपनी आजादी के बाद से सबसे बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रहा है और लोगों को आवश्यक वस्तुओं की कमी के साथ ही भारी बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। |
ऊना - ऊना सदर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस नेता डा. सुभाष शर्मा व एडवोकेट अनिल कपिला ने भाजपा का दामन थाम लिया है। रविवार को ऊना मुख्यालय पर इंदिरा मैदान में पीएम नरेंद्र मोदी की परिवर्तन रैली में भाजपा नेता प्रेम कुमार धूमल व प्रदेश भाजपाध्यक्ष एवं ऊना सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी सतपाल सिंह सत्ती ने डा. सुभाष शर्मा व एडवोकेट अनिल कपिला को भगवा पटका पहनाकर पार्टी में शामिल किया। प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि पार्टी में शामिल हुए नेताओं का उचित मान-सम्मान किया जाएगा। ऊना सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि भाजपा की नीतियों व कार्यक्रमों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में लोग पार्टी से जुड़ रहे है। उन्होंने कहा कि डा. सुभाष शर्मा व एडवोकेट अनिल कपिला ऊना शहर के प्रतिष्ठित नागरिक हैं तथा विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों के माध्यम से समाज की भलाई के कार्यो में लगे हुए हैं। इनके भाजपा में आने से पार्टी को लाभ मिलेगा। वहीं, डा. सुभाष शर्मा व अनिल कपिला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देश के प्रति प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्होंने भाजपा ज्वाइन करने का निर्णय किया। उन्होंने कहा कि ऊना सदर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के जुझारू प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती की जीत को सुनिश्चित करने के लिए रात-दिन एक कर देंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रत्याशी सतपाल सिंह सत्ती ईमानदार व साफ-सुथरी छवि वाले नेता हैं।
डा. सुभाष शर्मा व अनिल कपिला के भाजपा में आने का प्रदेश भाजपा सदस्य हरिओम भनोट, जिलाध्यक्ष बलवीर बग्गा, एडवोकेट खड़ग सिंह, मंडल अध्यक्ष रमेश भड़ौलिया, जोनल रेलवे के सदस्य सुमित शर्मा, सुरजीत सैणी, नवीन पुरी, राज कुमार पठानिया, हरि सिंह ठाकुर, विनय आंगरा, सागरदत्त भारद्वाज, पूर्व पार्षद मदन पूरी, पुष्पा देवी, शिवानी पुरी, खामोश जैतिक सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है।
| ऊना - ऊना सदर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस नेता डा. सुभाष शर्मा व एडवोकेट अनिल कपिला ने भाजपा का दामन थाम लिया है। रविवार को ऊना मुख्यालय पर इंदिरा मैदान में पीएम नरेंद्र मोदी की परिवर्तन रैली में भाजपा नेता प्रेम कुमार धूमल व प्रदेश भाजपाध्यक्ष एवं ऊना सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी सतपाल सिंह सत्ती ने डा. सुभाष शर्मा व एडवोकेट अनिल कपिला को भगवा पटका पहनाकर पार्टी में शामिल किया। प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि पार्टी में शामिल हुए नेताओं का उचित मान-सम्मान किया जाएगा। ऊना सदर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि भाजपा की नीतियों व कार्यक्रमों से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में लोग पार्टी से जुड़ रहे है। उन्होंने कहा कि डा. सुभाष शर्मा व एडवोकेट अनिल कपिला ऊना शहर के प्रतिष्ठित नागरिक हैं तथा विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों के माध्यम से समाज की भलाई के कार्यो में लगे हुए हैं। इनके भाजपा में आने से पार्टी को लाभ मिलेगा। वहीं, डा. सुभाष शर्मा व अनिल कपिला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देश के प्रति प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्होंने भाजपा ज्वाइन करने का निर्णय किया। उन्होंने कहा कि ऊना सदर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के जुझारू प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती की जीत को सुनिश्चित करने के लिए रात-दिन एक कर देंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रत्याशी सतपाल सिंह सत्ती ईमानदार व साफ-सुथरी छवि वाले नेता हैं। डा. सुभाष शर्मा व अनिल कपिला के भाजपा में आने का प्रदेश भाजपा सदस्य हरिओम भनोट, जिलाध्यक्ष बलवीर बग्गा, एडवोकेट खड़ग सिंह, मंडल अध्यक्ष रमेश भड़ौलिया, जोनल रेलवे के सदस्य सुमित शर्मा, सुरजीत सैणी, नवीन पुरी, राज कुमार पठानिया, हरि सिंह ठाकुर, विनय आंगरा, सागरदत्त भारद्वाज, पूर्व पार्षद मदन पूरी, पुष्पा देवी, शिवानी पुरी, खामोश जैतिक सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है। |
नई दिल्ली। बेनज़ीर ,बेमिसाल Kashmir ,जिसकी वादियों में जन्नत है, जो हमारे देश का ताज है। जिसकी सुंदरता के बारे में कभी किसी फारसी कवि ने कहा था "गर फिरदौस बर रूये ज़मी अस्त/ हमी अस्तो ,हमी अस्तो ,हमी अस्त" यानि कि धरती पर अगर कहीं फिरदौस यानि स्वर्ग है, तो यहीं है, यहीं है। सचमुच में कश्मीर से दो चार होते ही ऐसा महसूस होता है कि ऐसी खूबसूरती तो कल्पनाओं में ही सोची जा सकती है। चारों ओर बिछी हुई बर्फ की सफेद चादर, देवदार, चीड़ के पेड़। उन पेड़ों की पत्तियों से धीमे-धीमे गिरते बर्फ के नन्हें-नन्हें टुकड़े यहां आने वालों को नई दुनिया का आभास कराते हैं। जिधर नजर दौड़ाएं, बस बर्फ ही बर्फ की सफेद अनछुई चादर बिछी दिखती हैं।
कम ही लोग जानते होंगे कि कश्मीर का नाम कश्यप ऋषि के नाम पर रखा गया था। सुप्रसिद्ध कवि, नाटककार और इतिहासकार कल्हण ने 'राजतरंगणी' में कश्मीर का इतिहास लिखा है । कश्मीर की खूबसूरती और दिलकश अंदाज इसकी आबोहवा में घुल सा गया है।
कश्मीरियत से रंगे पुते लोग कश्मीर के एहसास को दोगुना कर देते हैं । कश्मीर की लोक संस्कृति, सदियों से अनेक तहजीबों के मेल से बनी है जिसे आज हम कश्मीरियत कहते हैं वो बेहद निराली है। कश्मीर में ऐसी कई जगहें हैं जहां दुनिया भर के कोने-कोने से आए सैलानी इसकी खूबसूरती निहारने आते हैं। चश्मा-ए-शाही, शालीमार बाग, डल झील, गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग और अमरनाथ की पर्वत गुफा तथा जम्मू के निकट वैष्णो देवी मंदिर,पटनी टाप यहां के प्रमुख पर्यटन केंद्र हैं। गुलमर्ग में आइस स्केटिंग केन्द्र, जो बारामूला के दक्षिण में पीर पंजाल श्रेणी में स्थित है और पहलगाम, जो लिद्दर नदी के किनारे स्थित है। कश्मीर आने वाला हर पर्यटक एक बार डल झील की बोट सवारी का मौका लेने से नहीं चूकता। कभी आप भी डल झील की सैर करिए और इस जगह के नजारों का लुत्फ उठाइए।
हमारा बॉलीवुड भी कश्मीर की इन वादियों से कैसे महरूम रहता। उसे तो इस जन्नत में आना ही था और तो और वो इस जन्नत की खूबसूरती के बेमिसाल रंगों को दर्शकों के सामने लेकर आया जिसमें कश्मीर का वो नजारा था जिसमें हर कोई खो जाना चाहता था,कभी ये लोगों के इश्क का गवाह बना तो कभी जन्नत की वो हकीकत बना जिसने लोगों की पहली चाहत में उन्हें कश्मीर ही दिखा दिया। फिल्में हमेशा से ही हमारे समाज का दर्पण रही हैं। यह अमूमन ही होता है कि अपनी थकान और चिंता को दूर करने के लिए आदमी किसी सुंदर मनोहारी जगह की सैर करता है और उसे सुकून मिलता है।
इस बात को ध्यान में रखते हुए फिल्मों के निर्माता निर्देशकों को यह ख्याल आया कि सिनेमा हॉल पहुंचे दर्शकों को उनकी परेशानी दूर करने के लिए प्राकृतिक नजारों के अच्छे गीत-संगीत से सुकून पहुंचाया जाए। या यूं कहें कि चल फिल्मों की शुरुआत से ही निर्देशकों ने दर्शकों की इस नब्ज को पकड़ लिया था और एक से बढ़कर एक खूबसूरत दृश्यों को सिनेमा के कैमरे में कैद करना शुरू कर दिया। ऐसे में कश्मीर की खूबसूरती सिनेमा के निर्देशकों, कलाकारों आदि से कैसे बचती और कब तक बचती और इस तरह फिल्मों से कश्मीर से संबंधों की शुरुआत हुई।
1963 में आयी "आज और कल" फिल्म का वो खूबसूरत गाना "ये वादियां ये फिजाएं बुला रही हैं" जो कश्मीर की हसीं वादियों में फिल्माया गया। साहिर की कलम से निकला गीत और रफी की आवाज में जैसे कह रहा हो कि खामोशियों की सदाए बुला रही हैं तुम्हें। फिर तो सिलसिला चल पड़ा। हिन्दी फिल्मों का हर निर्माता निर्देशक अपनी फिल्मों के लिए आउटडोर शूटिंग लोकेशन की लिस्ट में कश्मीर का नाम सबसे उपर रखते। गर्मियों में जब पूरे हिंदुस्तान में चिलचिलाती गर्मियों होती हैं तो उस वक्त कश्मीर उस गर्मी से बिलकुल अछूता रहता है। ऐसे में सितारों की विशेष डिमांड होने लगी कि उनकी आउटडोर शूटिंग कश्मीर में ही हो। इसका फायदा भी हुआ।
कश्मीर में फिल्माए गए दृश्य फिल्मों की जान होते थे। गाने जो कश्मीर की डल झील में फिल्माए गए या फिर उसके सदाबहार बागों में फिल्माए जाते उसे देखते वक्त दर्शकों को लगता था मानो मुफ्त में कश्मीर की सैर पे आए हों। ऐसी फिल्में हिट भी काफी हुई। "कश्मीर की कली" का गाना "दीवाना हुआ बादल" और "चांद सा रोशन चेहरा" देखकर तो हर किसी का दिल कश्मीर के नजारों में खो जाने के लिये मचलने लगा तो वहीं "जब-जब फूल खिले" का गाना "ये समां समां है प्यार का"। नये जोड़े की पहली तमन्ना बन गया कि वो अपने नये जीवन की शुरूआत इन्हीं हसीं और खूबसूरत वादियों से करें। बॉलीवुड में एक वक्त तो ऐसा आया कि हर दूसरी फिल्म का थोड़ा या ज्यादा हिस्सा कश्मीर की खूबसूरत वादियों में जरूर फिल्माया जाने लगा। इससे कश्मीर का पर्यटन भी काफी फला-फूला। भारतीय सिनेमा को तो फायदा हुआ ही।
इस तरह सिनेमा ने देश के अन्य हिस्से के लोगों को भी कश्मीर और कश्मीरियत से अनायास ही जोड़ दिया। दर्शकों के दिलो दिमाग में कश्मीर की खूबसूरती का आलम ही था कि एक दौर वह भी आया कि हर नया शादीशुदा जोड़ा हनीमून के लिए कश्मीर जाने लगा। 60-से 70 के दशक में कश्मीर के हर नजारे को अपने कैमरे में कैद करने के लिये बॉलीवुड हमेशा ही बेताब दिखा। उस समय के सभी डायरेक्टर्स की पहली पसन्द ही कश्मीर की खूबसूरत वादियां ही हुआ करती थीं। "जंगली" ,"कश्मीर की कली" कई ऐसी कई फिल्में आयी जिसमें न केवल वहां की वादियों को बल्कि कश्मीर की रवायतों और वहां के बर्फीले हुस्न को दिखाने की भी कामयाब कोशिश की गयी जो ओस की बूंद की तरह खूबसूरत और नायाब था लेकिन जिस डायरेक्टर ने कश्मीर की हर फिजा में प्यार की रूमानियत को घोला वो थे यश चोपड़ा।
उन्होंने कश्मीर को उस शायर की गज़ल की तरह पेश किया जो बेनजीर और बेमिसाल थी।
सत्तर के दशक में बॉलीवुड में रुमानियत का काफी जोर रहा। रोमांस पर आधारित फिल्मों का बोलबाला शुरू हो गया। राजेश खन्ना जैसे सुपर स्टार इसी दौर की पैदाइश रहे। रोमांटिक फिल्में बनाने वाले भी एक से एक धुरंधर हुए। यश चोपड़ा को तो परदे पर प्यार के अलग-अलग पहलुओं को फिल्माने में महारत हासिल थी और ऐसे सभी फिल्मकारों की पसंदीदा जगह कश्मीर ही थी। इस दौर की शायद ही कोई ऐसी फिल्म हो जिसकी यूनिट कश्मीर में शूटिंग करने ना पहुंची हो।
यश चोपड़ा को तो कश्मीर का एक्सपर्ट माना जाने लगा। नूरी फिल्म का गाना "आजा रे नूरी" ने सभी के दिलों के छुआ और बेहद हिट रहा। सत्तर के दशक के दौर में ही जब रोमांटिक फिल्में चरम पर थी उसी दौर में अमिताभ की एंट्री हुई। एक एंग्री यंग मैन के रूप में परदे पर आग बरसाती अमिताभ की छवि ने सिनेमा के नए प्रतिमान गढ़े। लेकिन कहानी की डिमांड हो या पूरी फिल्म ही हो, दो दिलों के प्यार के उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाली फिल्म हो तो परदे पर अमिताभ रोमांस भी जबरदस्त करते और उनके ऐसे दृश्यों में इस दौर में भला कश्मीर कैसे दूर रहता।
साहिर का "कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है" गाना जब अमिताभ और राखी पर फिल्माया गया तो हर कोई वहां के रोमांटिक नजारों का मुरीद हो गया और हर युवा की कल्पनाओं का संसार मानों जैसे साहिर के अल्फाजों और कश्मीर के नजारों को बुनने लगा। फिल्म "सिलसिला" का गाना "ये कहां आ गए हम" में अमिताभ और यश चोपड़ा के करिश्माई मेल ने कश्मीर के लोकेशनों की प्रसिद्धि को चरम पर पहुंचा दिया।
श्री देवी जो अब हमारे बीच नहीं है को भी कश्मीर की खूबसूरती खूब रास आती थी। उन्होंने भी यश चोपड़ा के साथ कई फिल्मों में काम किया था और कहते हैं कि वो काम इस शर्त पर करती थीं कि फिल्मों की अधिकांश शूटिंग कश्मीर में ही की जाएगी। आज यह सच है कि चोपड़ा की चांदनी जैसी फिल्म यदि कश्मीर में शूट नहीं होती तो अधूरी सी लगती। इस दौर में हालांकि कई निर्माता निर्देशक और कुछ नए की तलाश में विदेश जाने लगे लेकिन बॉलीवुड में कश्मीर के प्रति क्रेज जरा भी कम नहीं हुआ।
पूरी की पूरी फिल्म यूनिट्स यहां पहुंचती रही। रणवीर कपूर और दीपिका पादुकोण जैसे नई पीढ़ी के कलाकार भी कश्मीर की खूबसूरती के कायल हो गए हैं और कई फिल्मों के गाने यहाँ फिल्माए गये। हम कह सकते है कि कश्मीर और इसकी खूबसूरती एक शराब की पुरानी बोतल की तरह है, जो जितनी पुरानी होते जाती है , सुरूर उतना ही खूब चढ़ता है।
हिंदी फिल्मों की कश्मीर के साथ इस प्रेम कहानी में खलनायक की एंट्री भी हुई । 80 के दशक तक आते- आते कश्मीर में धीरे-धीरे आतंकवाद ने पैर पसारना शुरू कर दिया और इसका असर कश्मीर के साथ-साथ बॉलीवुड में भी दिखना शुरू हो गया। अब लोगों के सामने कश्मीर की एक अलग तस्वीर थी जो बेहद खतरनाक और डरावनी थी यहां के मासूमों को कुछ नापाक इरादों ने गलत राह दिखाकर यहां की फिज़ा में आतंकवाद का जहर घोलना शुरू कर दिया और इसी के साथ शुरू हुई उस स्वर्ग को खत्म करने की गहरी साजिश,हमारी फिल्मों ने इस पहलू को भी दिखाया और लोगों को ये संदेश देने की कोशिश की कि नफरत और हिंसा से कभी भी सही रास्ता नहीं मिलता है।
रास्ता अगर मिलता है तो वो शान्ति और सही राह पर चलने से ही मिलता है। कश्मीर और कश्मीरियत का शेष भारत के साथ घुलना-मिलना पाक में बैठे कुछ इस्लाम के ठेकेदारों को रास नहीं आ रहा था और फिर उनके नापाक इरादों ने कश्मीर की फिजा में जहर घोलने की शुरुआत की। जैसा कि हम आपको शुरुआत में ही बता चुके है कि बॉलीवुड की फिल्में हमेशा से समाज की सच्चाई को सामने लाती रही हैं। ऐसे में बदलते कश्मीर की तस्वीर भी बॉलीवुड के फिल्मों के जरिए दर्शको के सामने आने लगी।
इस कड़ी में जो सबसे पहले फिल्म हमारे जेहन में आती है वो है मणि रत्नम की रोजा। वैसे "रोजा" थी तो एक लव स्टोरी लेकिन इसमें कश्मीर में पैर पसारते आतंकवाद की जो झलक दिखाई गई उससे देशवासियों का दिल दहल गया। रोजा के बाद फिजा, मिशन कश्मीर जैसी फिल्में भी बड़ी गहराई और शिद्दत से आतंकवाद से लहूलुहान हुए कश्मीर के छलनी सीने को हमारे सामने दिखाती रहीं। इन सब के बीच कश्मीरियत कहीं खोता हुआ नजर आयी।
इस्लाम के नाम पर अलग कश्मीर की मांग उठने लगी। पाकिस्तान ने कश्मीर के भोले-भाले नौजवानों को भारत के खिलाफ भड़काना जारी रखा। कश्मीर में माहौल खराब करने के लिए अपने इलाके में इन नौजवानों के लिए कैंप भी लगाए। ऋतिक रौशन और संजय दत्त की फिल्म"मिशन कश्मीर"कश्मीर के बिगड़ते हालात के इस पहलू को बखूबी बयान करती है । फिल्म तहानका जिक्र भी ज़रूरी है जिसमें कश्मीर की एक कड़वी सच्चाई सामने आती है जब फिल्म का हीरो 8 साल का बच्चा आतंकियों के षडयंत्र का हिस्सा बन जाता है।
ये फिल्म इस बात को काफी करीब से दिखाती है कि कश्मीर के नाम पर भले ही वहां पर राजनैतिक सियासत काफी लम्बे वक्त से चली आ रही हो पर कश्मीर में बच्चों को आतंकवाद की क्या कीमत चुकानी पड़ रही है ये इस फिल्म के ज़रिये समझा जा सकता है, आतंकवाक की लड़ाई में मासूम बच्चों को आतंकवादी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। आमिर खान और काजोल की फिल्म 'फना' भी एक कश्मीर के आतंकी की कहानी है जो एक कश्मीरी अंधी लड़की के प्यार में बदलने लगता है। आमिर खान और काजोल देवगन की इस फिल्म में कश्मीरी युवा और फिदायीन आतंकवाद को दिखाया गया है। कुछ इसी तरह की हकीकत बयां करती फिल्म लम्हा भी थी जिसमें कश्मीर की समस्या को बड़ी गहराई से दिखाया गया है और यही नहीं कश्मीर में सेना के प्रति नफरत फैलाने वालों की सच्चाई को भी यहाँ फिल्म में बड़ी गहराई से दिखाया गया है कई बार तो ऐसा लगा कि कश्मीर में क्या कभी अमन शांति भी आएगी लेकिन भारतीय सेना का जज्बा कहिए या जूनून।
पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को हर बार रणनीति बना कर ईंट का जवाब पत्थर से दिया गया। भारतीय सेना के इस पहलू को भी हमारी सिनेमा में बखूबी दिखाया गया। जान देकर भी उन्होंने कश्मीर की एक एक इंच भूमि की रक्षा की। कारगिल फिल्म हो या लक्ष्य सभी में हमारे जांबाज़ सेना के शौर्य औऱ बलिदान को बखूबी दिखाया गया । यह हमारी सेनाओं का ही मनोबल है कि अब फिर से कश्मीर में कई फिल्म निर्देशक आउटडोर शूटिंग करने आ रहे हैं। अब कश्मीर की फिजाओं में रौनक लौट रही है। धीरे-धीरे हमारी सरकार और सेना के अथक प्रयासों के जरिये आतंकवाद पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है और यही वजह है कि फिल्मों में फिर से कश्मीर की खूबसूरत वादियों के खूबसूरत नज़ारों को एक बार फिर से देखने का मौका मिल रहा है जिसमें कश्मीर में लोगों के प्रति सबकी सोच भी बदल रही है अब वहाँ देशभर से डायरेक्टर अपनी फिल्मों को शूट करने आ रहे हैं और कश्मीर के उस अमनो चैन को दिखाने की कोशिश कर रहे हैं जो कभी वहाँ की फिज़ाओं और वादियों में सुनाई दे रहा था।
इसी के साथ एक बार फिर हम बेनज़ीर बेमिसाल कश्मीर से रूबरू हो रहे हैं वाकई में ये तार्रूफ ही असली कश्मीर की पहचान है जहाँ पर कश्मीर की कश्मीरियत आज भी ज़िन्दा है। 2018 मे आयी मेघना गुलज़ार की फिल्म राज़ी ने एक बार फिर कश्मीर की वादियों के उस पहलू से लोगों को रूबरू कराया जिसमें अपने वतन के लिये जज़्बा है मोहब्बत है। इसकी कहानी एक स्पाई थ्रिलर की है की जिसमें दिखाया गया है कि आज भी कश्मीर के लोगों को अपने वतन भारत से बेहद प्यार है और इसके लिये वो कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं वहीं बजरंगी भाईजान में भी फिल्म का क्लाईमेक्स सोनमर्ग में शूट किया गया । जो दिखाता है कि इंसानियत का रिश्ता सबसे बड़ा है । रॉक स्टार का खूबसूरत गाना एक बार फिर हमें उसी पुराने कश्मीर की याद दिलाता है जो आज भी हमारी यादो में बसा हुआ है।
हालांकि यश चोपड़ा आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी फिल्म "जब तक है जान" का जिक्र तो लाजिमी है 2012 में बनी "जब तक है जान" फिल्म में एक बार फिर यश चोपड़ा का वो मैजिक दिखा जिसके लिये लोग उन्हें जानते हैं और इसके लिये भी उन्होने उसी खूबसूरत वादियों का सहारा लिया जिसकी फिज़ाओं में इश्क की अलग रोमानियत नज़र आती है 2012 में आयी फितूर में भी कश्मीर की खूबसूरत वादियों में बेपनाह मोहब्बत के सुरूर को जवाँ होते हुये दिखाया गया है जिसमें कश्मीर के नज़ारे तो लोगों का दिल जीत लेते हैं इसी के साथ कई और फिल्में हैं जो कश्मीर की फिज़ाओं में शूट हुयी और हिट भी रही। जिनमे ये जवानी है दिवानी ,हाईवे ,अय्यारी, students of the year फिल्में खास तौर से हैं।
जिन्होने एक बार फिर कश्मीर की उन्हीं खूबसूरत वादियों में खो जाने के लिये और बर्फ की सफेद चादर में लिपट जाने के लिये मजबूर कर देती हैं और पुराने दिनों की याद दिलाती है कि धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है तो वो कश्मीर है तो कई ऐसी फिल्में भी रहीं जिन्होनें कश्मीर के दर्द और उस हिस्से को दिखाया जिसे पूरे विश्व को जानना ज़रूरी था।
विवेक अग्निहोत्री की The Kashmir Files और विदू विनोद चोपड़ा की फिल्म "शिकारा" में कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार और नरसंहार को बड़े मार्मिक तरह से दिखाया गया है कि किस तरह आतंकवाद के दंश ने कई हंसते खेलते परिवार को तबाह कर दिया । आज कश्मीर में एक बार फिर से पुराने दिन लौट रहे हैं और वहाँ की फिज़ा में इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत की सुगंध पूरे कश्मीर में महकेगी।
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| नई दिल्ली। बेनज़ीर ,बेमिसाल Kashmir ,जिसकी वादियों में जन्नत है, जो हमारे देश का ताज है। जिसकी सुंदरता के बारे में कभी किसी फारसी कवि ने कहा था "गर फिरदौस बर रूये ज़मी अस्त/ हमी अस्तो ,हमी अस्तो ,हमी अस्त" यानि कि धरती पर अगर कहीं फिरदौस यानि स्वर्ग है, तो यहीं है, यहीं है। सचमुच में कश्मीर से दो चार होते ही ऐसा महसूस होता है कि ऐसी खूबसूरती तो कल्पनाओं में ही सोची जा सकती है। चारों ओर बिछी हुई बर्फ की सफेद चादर, देवदार, चीड़ के पेड़। उन पेड़ों की पत्तियों से धीमे-धीमे गिरते बर्फ के नन्हें-नन्हें टुकड़े यहां आने वालों को नई दुनिया का आभास कराते हैं। जिधर नजर दौड़ाएं, बस बर्फ ही बर्फ की सफेद अनछुई चादर बिछी दिखती हैं। कम ही लोग जानते होंगे कि कश्मीर का नाम कश्यप ऋषि के नाम पर रखा गया था। सुप्रसिद्ध कवि, नाटककार और इतिहासकार कल्हण ने 'राजतरंगणी' में कश्मीर का इतिहास लिखा है । कश्मीर की खूबसूरती और दिलकश अंदाज इसकी आबोहवा में घुल सा गया है। कश्मीरियत से रंगे पुते लोग कश्मीर के एहसास को दोगुना कर देते हैं । कश्मीर की लोक संस्कृति, सदियों से अनेक तहजीबों के मेल से बनी है जिसे आज हम कश्मीरियत कहते हैं वो बेहद निराली है। कश्मीर में ऐसी कई जगहें हैं जहां दुनिया भर के कोने-कोने से आए सैलानी इसकी खूबसूरती निहारने आते हैं। चश्मा-ए-शाही, शालीमार बाग, डल झील, गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग और अमरनाथ की पर्वत गुफा तथा जम्मू के निकट वैष्णो देवी मंदिर,पटनी टाप यहां के प्रमुख पर्यटन केंद्र हैं। गुलमर्ग में आइस स्केटिंग केन्द्र, जो बारामूला के दक्षिण में पीर पंजाल श्रेणी में स्थित है और पहलगाम, जो लिद्दर नदी के किनारे स्थित है। कश्मीर आने वाला हर पर्यटक एक बार डल झील की बोट सवारी का मौका लेने से नहीं चूकता। कभी आप भी डल झील की सैर करिए और इस जगह के नजारों का लुत्फ उठाइए। हमारा बॉलीवुड भी कश्मीर की इन वादियों से कैसे महरूम रहता। उसे तो इस जन्नत में आना ही था और तो और वो इस जन्नत की खूबसूरती के बेमिसाल रंगों को दर्शकों के सामने लेकर आया जिसमें कश्मीर का वो नजारा था जिसमें हर कोई खो जाना चाहता था,कभी ये लोगों के इश्क का गवाह बना तो कभी जन्नत की वो हकीकत बना जिसने लोगों की पहली चाहत में उन्हें कश्मीर ही दिखा दिया। फिल्में हमेशा से ही हमारे समाज का दर्पण रही हैं। यह अमूमन ही होता है कि अपनी थकान और चिंता को दूर करने के लिए आदमी किसी सुंदर मनोहारी जगह की सैर करता है और उसे सुकून मिलता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए फिल्मों के निर्माता निर्देशकों को यह ख्याल आया कि सिनेमा हॉल पहुंचे दर्शकों को उनकी परेशानी दूर करने के लिए प्राकृतिक नजारों के अच्छे गीत-संगीत से सुकून पहुंचाया जाए। या यूं कहें कि चल फिल्मों की शुरुआत से ही निर्देशकों ने दर्शकों की इस नब्ज को पकड़ लिया था और एक से बढ़कर एक खूबसूरत दृश्यों को सिनेमा के कैमरे में कैद करना शुरू कर दिया। ऐसे में कश्मीर की खूबसूरती सिनेमा के निर्देशकों, कलाकारों आदि से कैसे बचती और कब तक बचती और इस तरह फिल्मों से कश्मीर से संबंधों की शुरुआत हुई। एक हज़ार नौ सौ तिरेसठ में आयी "आज और कल" फिल्म का वो खूबसूरत गाना "ये वादियां ये फिजाएं बुला रही हैं" जो कश्मीर की हसीं वादियों में फिल्माया गया। साहिर की कलम से निकला गीत और रफी की आवाज में जैसे कह रहा हो कि खामोशियों की सदाए बुला रही हैं तुम्हें। फिर तो सिलसिला चल पड़ा। हिन्दी फिल्मों का हर निर्माता निर्देशक अपनी फिल्मों के लिए आउटडोर शूटिंग लोकेशन की लिस्ट में कश्मीर का नाम सबसे उपर रखते। गर्मियों में जब पूरे हिंदुस्तान में चिलचिलाती गर्मियों होती हैं तो उस वक्त कश्मीर उस गर्मी से बिलकुल अछूता रहता है। ऐसे में सितारों की विशेष डिमांड होने लगी कि उनकी आउटडोर शूटिंग कश्मीर में ही हो। इसका फायदा भी हुआ। कश्मीर में फिल्माए गए दृश्य फिल्मों की जान होते थे। गाने जो कश्मीर की डल झील में फिल्माए गए या फिर उसके सदाबहार बागों में फिल्माए जाते उसे देखते वक्त दर्शकों को लगता था मानो मुफ्त में कश्मीर की सैर पे आए हों। ऐसी फिल्में हिट भी काफी हुई। "कश्मीर की कली" का गाना "दीवाना हुआ बादल" और "चांद सा रोशन चेहरा" देखकर तो हर किसी का दिल कश्मीर के नजारों में खो जाने के लिये मचलने लगा तो वहीं "जब-जब फूल खिले" का गाना "ये समां समां है प्यार का"। नये जोड़े की पहली तमन्ना बन गया कि वो अपने नये जीवन की शुरूआत इन्हीं हसीं और खूबसूरत वादियों से करें। बॉलीवुड में एक वक्त तो ऐसा आया कि हर दूसरी फिल्म का थोड़ा या ज्यादा हिस्सा कश्मीर की खूबसूरत वादियों में जरूर फिल्माया जाने लगा। इससे कश्मीर का पर्यटन भी काफी फला-फूला। भारतीय सिनेमा को तो फायदा हुआ ही। इस तरह सिनेमा ने देश के अन्य हिस्से के लोगों को भी कश्मीर और कश्मीरियत से अनायास ही जोड़ दिया। दर्शकों के दिलो दिमाग में कश्मीर की खूबसूरती का आलम ही था कि एक दौर वह भी आया कि हर नया शादीशुदा जोड़ा हनीमून के लिए कश्मीर जाने लगा। साठ-से सत्तर के दशक में कश्मीर के हर नजारे को अपने कैमरे में कैद करने के लिये बॉलीवुड हमेशा ही बेताब दिखा। उस समय के सभी डायरेक्टर्स की पहली पसन्द ही कश्मीर की खूबसूरत वादियां ही हुआ करती थीं। "जंगली" ,"कश्मीर की कली" कई ऐसी कई फिल्में आयी जिसमें न केवल वहां की वादियों को बल्कि कश्मीर की रवायतों और वहां के बर्फीले हुस्न को दिखाने की भी कामयाब कोशिश की गयी जो ओस की बूंद की तरह खूबसूरत और नायाब था लेकिन जिस डायरेक्टर ने कश्मीर की हर फिजा में प्यार की रूमानियत को घोला वो थे यश चोपड़ा। उन्होंने कश्मीर को उस शायर की गज़ल की तरह पेश किया जो बेनजीर और बेमिसाल थी। सत्तर के दशक में बॉलीवुड में रुमानियत का काफी जोर रहा। रोमांस पर आधारित फिल्मों का बोलबाला शुरू हो गया। राजेश खन्ना जैसे सुपर स्टार इसी दौर की पैदाइश रहे। रोमांटिक फिल्में बनाने वाले भी एक से एक धुरंधर हुए। यश चोपड़ा को तो परदे पर प्यार के अलग-अलग पहलुओं को फिल्माने में महारत हासिल थी और ऐसे सभी फिल्मकारों की पसंदीदा जगह कश्मीर ही थी। इस दौर की शायद ही कोई ऐसी फिल्म हो जिसकी यूनिट कश्मीर में शूटिंग करने ना पहुंची हो। यश चोपड़ा को तो कश्मीर का एक्सपर्ट माना जाने लगा। नूरी फिल्म का गाना "आजा रे नूरी" ने सभी के दिलों के छुआ और बेहद हिट रहा। सत्तर के दशक के दौर में ही जब रोमांटिक फिल्में चरम पर थी उसी दौर में अमिताभ की एंट्री हुई। एक एंग्री यंग मैन के रूप में परदे पर आग बरसाती अमिताभ की छवि ने सिनेमा के नए प्रतिमान गढ़े। लेकिन कहानी की डिमांड हो या पूरी फिल्म ही हो, दो दिलों के प्यार के उतार-चढ़ाव को दर्शाने वाली फिल्म हो तो परदे पर अमिताभ रोमांस भी जबरदस्त करते और उनके ऐसे दृश्यों में इस दौर में भला कश्मीर कैसे दूर रहता। साहिर का "कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है" गाना जब अमिताभ और राखी पर फिल्माया गया तो हर कोई वहां के रोमांटिक नजारों का मुरीद हो गया और हर युवा की कल्पनाओं का संसार मानों जैसे साहिर के अल्फाजों और कश्मीर के नजारों को बुनने लगा। फिल्म "सिलसिला" का गाना "ये कहां आ गए हम" में अमिताभ और यश चोपड़ा के करिश्माई मेल ने कश्मीर के लोकेशनों की प्रसिद्धि को चरम पर पहुंचा दिया। श्री देवी जो अब हमारे बीच नहीं है को भी कश्मीर की खूबसूरती खूब रास आती थी। उन्होंने भी यश चोपड़ा के साथ कई फिल्मों में काम किया था और कहते हैं कि वो काम इस शर्त पर करती थीं कि फिल्मों की अधिकांश शूटिंग कश्मीर में ही की जाएगी। आज यह सच है कि चोपड़ा की चांदनी जैसी फिल्म यदि कश्मीर में शूट नहीं होती तो अधूरी सी लगती। इस दौर में हालांकि कई निर्माता निर्देशक और कुछ नए की तलाश में विदेश जाने लगे लेकिन बॉलीवुड में कश्मीर के प्रति क्रेज जरा भी कम नहीं हुआ। पूरी की पूरी फिल्म यूनिट्स यहां पहुंचती रही। रणवीर कपूर और दीपिका पादुकोण जैसे नई पीढ़ी के कलाकार भी कश्मीर की खूबसूरती के कायल हो गए हैं और कई फिल्मों के गाने यहाँ फिल्माए गये। हम कह सकते है कि कश्मीर और इसकी खूबसूरती एक शराब की पुरानी बोतल की तरह है, जो जितनी पुरानी होते जाती है , सुरूर उतना ही खूब चढ़ता है। हिंदी फिल्मों की कश्मीर के साथ इस प्रेम कहानी में खलनायक की एंट्री भी हुई । अस्सी के दशक तक आते- आते कश्मीर में धीरे-धीरे आतंकवाद ने पैर पसारना शुरू कर दिया और इसका असर कश्मीर के साथ-साथ बॉलीवुड में भी दिखना शुरू हो गया। अब लोगों के सामने कश्मीर की एक अलग तस्वीर थी जो बेहद खतरनाक और डरावनी थी यहां के मासूमों को कुछ नापाक इरादों ने गलत राह दिखाकर यहां की फिज़ा में आतंकवाद का जहर घोलना शुरू कर दिया और इसी के साथ शुरू हुई उस स्वर्ग को खत्म करने की गहरी साजिश,हमारी फिल्मों ने इस पहलू को भी दिखाया और लोगों को ये संदेश देने की कोशिश की कि नफरत और हिंसा से कभी भी सही रास्ता नहीं मिलता है। रास्ता अगर मिलता है तो वो शान्ति और सही राह पर चलने से ही मिलता है। कश्मीर और कश्मीरियत का शेष भारत के साथ घुलना-मिलना पाक में बैठे कुछ इस्लाम के ठेकेदारों को रास नहीं आ रहा था और फिर उनके नापाक इरादों ने कश्मीर की फिजा में जहर घोलने की शुरुआत की। जैसा कि हम आपको शुरुआत में ही बता चुके है कि बॉलीवुड की फिल्में हमेशा से समाज की सच्चाई को सामने लाती रही हैं। ऐसे में बदलते कश्मीर की तस्वीर भी बॉलीवुड के फिल्मों के जरिए दर्शको के सामने आने लगी। इस कड़ी में जो सबसे पहले फिल्म हमारे जेहन में आती है वो है मणि रत्नम की रोजा। वैसे "रोजा" थी तो एक लव स्टोरी लेकिन इसमें कश्मीर में पैर पसारते आतंकवाद की जो झलक दिखाई गई उससे देशवासियों का दिल दहल गया। रोजा के बाद फिजा, मिशन कश्मीर जैसी फिल्में भी बड़ी गहराई और शिद्दत से आतंकवाद से लहूलुहान हुए कश्मीर के छलनी सीने को हमारे सामने दिखाती रहीं। इन सब के बीच कश्मीरियत कहीं खोता हुआ नजर आयी। इस्लाम के नाम पर अलग कश्मीर की मांग उठने लगी। पाकिस्तान ने कश्मीर के भोले-भाले नौजवानों को भारत के खिलाफ भड़काना जारी रखा। कश्मीर में माहौल खराब करने के लिए अपने इलाके में इन नौजवानों के लिए कैंप भी लगाए। ऋतिक रौशन और संजय दत्त की फिल्म"मिशन कश्मीर"कश्मीर के बिगड़ते हालात के इस पहलू को बखूबी बयान करती है । फिल्म तहानका जिक्र भी ज़रूरी है जिसमें कश्मीर की एक कड़वी सच्चाई सामने आती है जब फिल्म का हीरो आठ साल का बच्चा आतंकियों के षडयंत्र का हिस्सा बन जाता है। ये फिल्म इस बात को काफी करीब से दिखाती है कि कश्मीर के नाम पर भले ही वहां पर राजनैतिक सियासत काफी लम्बे वक्त से चली आ रही हो पर कश्मीर में बच्चों को आतंकवाद की क्या कीमत चुकानी पड़ रही है ये इस फिल्म के ज़रिये समझा जा सकता है, आतंकवाक की लड़ाई में मासूम बच्चों को आतंकवादी हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। आमिर खान और काजोल की फिल्म 'फना' भी एक कश्मीर के आतंकी की कहानी है जो एक कश्मीरी अंधी लड़की के प्यार में बदलने लगता है। आमिर खान और काजोल देवगन की इस फिल्म में कश्मीरी युवा और फिदायीन आतंकवाद को दिखाया गया है। कुछ इसी तरह की हकीकत बयां करती फिल्म लम्हा भी थी जिसमें कश्मीर की समस्या को बड़ी गहराई से दिखाया गया है और यही नहीं कश्मीर में सेना के प्रति नफरत फैलाने वालों की सच्चाई को भी यहाँ फिल्म में बड़ी गहराई से दिखाया गया है कई बार तो ऐसा लगा कि कश्मीर में क्या कभी अमन शांति भी आएगी लेकिन भारतीय सेना का जज्बा कहिए या जूनून। पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को हर बार रणनीति बना कर ईंट का जवाब पत्थर से दिया गया। भारतीय सेना के इस पहलू को भी हमारी सिनेमा में बखूबी दिखाया गया। जान देकर भी उन्होंने कश्मीर की एक एक इंच भूमि की रक्षा की। कारगिल फिल्म हो या लक्ष्य सभी में हमारे जांबाज़ सेना के शौर्य औऱ बलिदान को बखूबी दिखाया गया । यह हमारी सेनाओं का ही मनोबल है कि अब फिर से कश्मीर में कई फिल्म निर्देशक आउटडोर शूटिंग करने आ रहे हैं। अब कश्मीर की फिजाओं में रौनक लौट रही है। धीरे-धीरे हमारी सरकार और सेना के अथक प्रयासों के जरिये आतंकवाद पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है और यही वजह है कि फिल्मों में फिर से कश्मीर की खूबसूरत वादियों के खूबसूरत नज़ारों को एक बार फिर से देखने का मौका मिल रहा है जिसमें कश्मीर में लोगों के प्रति सबकी सोच भी बदल रही है अब वहाँ देशभर से डायरेक्टर अपनी फिल्मों को शूट करने आ रहे हैं और कश्मीर के उस अमनो चैन को दिखाने की कोशिश कर रहे हैं जो कभी वहाँ की फिज़ाओं और वादियों में सुनाई दे रहा था। इसी के साथ एक बार फिर हम बेनज़ीर बेमिसाल कश्मीर से रूबरू हो रहे हैं वाकई में ये तार्रूफ ही असली कश्मीर की पहचान है जहाँ पर कश्मीर की कश्मीरियत आज भी ज़िन्दा है। दो हज़ार अट्ठारह मे आयी मेघना गुलज़ार की फिल्म राज़ी ने एक बार फिर कश्मीर की वादियों के उस पहलू से लोगों को रूबरू कराया जिसमें अपने वतन के लिये जज़्बा है मोहब्बत है। इसकी कहानी एक स्पाई थ्रिलर की है की जिसमें दिखाया गया है कि आज भी कश्मीर के लोगों को अपने वतन भारत से बेहद प्यार है और इसके लिये वो कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हैं वहीं बजरंगी भाईजान में भी फिल्म का क्लाईमेक्स सोनमर्ग में शूट किया गया । जो दिखाता है कि इंसानियत का रिश्ता सबसे बड़ा है । रॉक स्टार का खूबसूरत गाना एक बार फिर हमें उसी पुराने कश्मीर की याद दिलाता है जो आज भी हमारी यादो में बसा हुआ है। हालांकि यश चोपड़ा आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी फिल्म "जब तक है जान" का जिक्र तो लाजिमी है दो हज़ार बारह में बनी "जब तक है जान" फिल्म में एक बार फिर यश चोपड़ा का वो मैजिक दिखा जिसके लिये लोग उन्हें जानते हैं और इसके लिये भी उन्होने उसी खूबसूरत वादियों का सहारा लिया जिसकी फिज़ाओं में इश्क की अलग रोमानियत नज़र आती है दो हज़ार बारह में आयी फितूर में भी कश्मीर की खूबसूरत वादियों में बेपनाह मोहब्बत के सुरूर को जवाँ होते हुये दिखाया गया है जिसमें कश्मीर के नज़ारे तो लोगों का दिल जीत लेते हैं इसी के साथ कई और फिल्में हैं जो कश्मीर की फिज़ाओं में शूट हुयी और हिट भी रही। जिनमे ये जवानी है दिवानी ,हाईवे ,अय्यारी, students of the year फिल्में खास तौर से हैं। जिन्होने एक बार फिर कश्मीर की उन्हीं खूबसूरत वादियों में खो जाने के लिये और बर्फ की सफेद चादर में लिपट जाने के लिये मजबूर कर देती हैं और पुराने दिनों की याद दिलाती है कि धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है तो वो कश्मीर है तो कई ऐसी फिल्में भी रहीं जिन्होनें कश्मीर के दर्द और उस हिस्से को दिखाया जिसे पूरे विश्व को जानना ज़रूरी था। विवेक अग्निहोत्री की The Kashmir Files और विदू विनोद चोपड़ा की फिल्म "शिकारा" में कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार और नरसंहार को बड़े मार्मिक तरह से दिखाया गया है कि किस तरह आतंकवाद के दंश ने कई हंसते खेलते परिवार को तबाह कर दिया । आज कश्मीर में एक बार फिर से पुराने दिन लौट रहे हैं और वहाँ की फिज़ा में इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत की सुगंध पूरे कश्मीर में महकेगी। संबंधित खबरेंः |
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नई दिल्ली. TBSE Tripura Board 10th 12th Result 2023: त्रिपुरा बोर्ड 10वीं 12वीं की परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के लिए जरूरी अपडेट है. दरअसल, बोर्ड परीक्षा में शामिल स्टूडेंट्स को रिजल्ट का इंतजार है. इसके लिए डेट फाइनल कर दी गई है. बोर्ड रिजल्ट की घोषणा आधिकारिक वेबसाइट tbse. tripura. gov. in पर की जाएगी. 10वीं और 12वीं का रिजल्ट चेक करने के लिए स्टूडेट्स को अपने एडमिट कार्ड तैयार रखने होंगे.
मीडिया रिपोर्ट की माने तो त्रिपुरा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड 5 जून 2023 को कक्षा हाईस्कूल व इंटर का रिजल्ट जारी कर सकता है. इस परीक्षा में पास होने के लिए स्टूडेंट्स को कम से कम 35 प्रतिशत अंक स्कोर करना होगा. दो सब्जेक्ट में 35 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले फेल घोषित माने जाएंगे. खास बात यह है कि रिजल्ट के साथ टॉपर्स लिस्ट भी जारी की जाएगी.
बता दें इस बार त्रिपुरा बोर्ड 12वीं की परीक्षाएं 15 मार्च से 19 अप्रैल 2023 तक आयोजित की गई थी. इन परीक्षाओं के लिए 6 लाख से ज्यादा स्टूडेंट ने रजिस्ट्रेशन कराया था. अब इन स्टूडेंट को रिजल्ट का इंतजार है. 10वीं और 12वीं का रिजल्ट चेक करने के लिए स्टेप वाय स्टेप जानकारी नीचे दी गई है. मार्कशीट की हार्ड कॉपी जून के लास्ट में स्कूलों से प्राप्त कर सकेंगे.
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| नई दिल्ली. TBSE Tripura Board दसth बारहth Result दो हज़ार तेईस: त्रिपुरा बोर्ड दसवीं बारहवीं की परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के लिए जरूरी अपडेट है. दरअसल, बोर्ड परीक्षा में शामिल स्टूडेंट्स को रिजल्ट का इंतजार है. इसके लिए डेट फाइनल कर दी गई है. बोर्ड रिजल्ट की घोषणा आधिकारिक वेबसाइट tbse. tripura. gov. in पर की जाएगी. दसवीं और बारहवीं का रिजल्ट चेक करने के लिए स्टूडेट्स को अपने एडमिट कार्ड तैयार रखने होंगे. मीडिया रिपोर्ट की माने तो त्रिपुरा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड पाँच जून दो हज़ार तेईस को कक्षा हाईस्कूल व इंटर का रिजल्ट जारी कर सकता है. इस परीक्षा में पास होने के लिए स्टूडेंट्स को कम से कम पैंतीस प्रतिशत अंक स्कोर करना होगा. दो सब्जेक्ट में पैंतीस प्रतिशत से कम अंक पाने वाले फेल घोषित माने जाएंगे. खास बात यह है कि रिजल्ट के साथ टॉपर्स लिस्ट भी जारी की जाएगी. बता दें इस बार त्रिपुरा बोर्ड बारहवीं की परीक्षाएं पंद्रह मार्च से उन्नीस अप्रैल दो हज़ार तेईस तक आयोजित की गई थी. इन परीक्षाओं के लिए छः लाख से ज्यादा स्टूडेंट ने रजिस्ट्रेशन कराया था. अब इन स्टूडेंट को रिजल्ट का इंतजार है. दसवीं और बारहवीं का रिजल्ट चेक करने के लिए स्टेप वाय स्टेप जानकारी नीचे दी गई है. मार्कशीट की हार्ड कॉपी जून के लास्ट में स्कूलों से प्राप्त कर सकेंगे. . |
Jamshedpur: निजी स्कूलों को आरटीइ (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) की मान्यता देने से पहले उन स्कूलों की 1956 से ऑडिट कराने की मांग बाल मजदूर मुक्ति सेवा संस्थान के मुख्य संयोजक सदन ठाकुर ने की है. इस संबंध में उन्होंने एक पत्र झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव से की है. भेजे गए पत्र में उन्होंने कहा है कि जमशेदपुर में निजी स्कूलों की अपनी कोई जमीन नहीं है. सदन ठाकुर ने बताया कि निजी स्कूल सरकार से जमीन न्यूनतम दर पर शिक्षा का प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से लेते हैं. लेकिन उनका मकसद सिर्फ पैसा कमाना होता है. शिकायत की प्रति राष्ट्रपति एवं झारखंड के राज्यपाल को भी भेजी गई है.
| Jamshedpur: निजी स्कूलों को आरटीइ की मान्यता देने से पहले उन स्कूलों की एक हज़ार नौ सौ छप्पन से ऑडिट कराने की मांग बाल मजदूर मुक्ति सेवा संस्थान के मुख्य संयोजक सदन ठाकुर ने की है. इस संबंध में उन्होंने एक पत्र झारखंड सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव से की है. भेजे गए पत्र में उन्होंने कहा है कि जमशेदपुर में निजी स्कूलों की अपनी कोई जमीन नहीं है. सदन ठाकुर ने बताया कि निजी स्कूल सरकार से जमीन न्यूनतम दर पर शिक्षा का प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से लेते हैं. लेकिन उनका मकसद सिर्फ पैसा कमाना होता है. शिकायत की प्रति राष्ट्रपति एवं झारखंड के राज्यपाल को भी भेजी गई है. |
Palwal/Alive News: जिलाधिकारी मथुरा नवनीत सिंह ने बताया कि कोविड वैश्विक महामारी के चलते इस वर्ष गोवर्धन क्षेत्र के परंपरागत राजकीय मुड़िया पूर्नो मेला को निरस्त कर दिया गया है। इस वर्ष 20 जुलाई से 24 जुलाई, 2021 तक लगने वाले विश्व प्रसिद्घ इस मुड़िया पूर्नो मेला के आयोजन को लोक स्वास्थ्य व जनहित के दृष्टिगत बाहर से आने वाली भीड़ को प्रतिबंधित करने के उद्देश्य से इस मेला का आयोजन निरस्त किया गया है।
वर्तमान में देश-विदेश में कोविड वैश्विक महामारी का प्रकोप है। इस महामारी से मथुरा जनपद भी प्रभावित है तथा इस जिला में आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 एवं महामारी अधिनियम 1897 के प्रावधान भी वर्तमान में लागू हैं। इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोवर्धन, क्षेत्राधिकारी गोवर्धन, उप जिलाधिकारी गोवर्धन, सहायक मेलाधिकारी व अपर जिलाधिकारी प्रशासन व मेलाधिकारी की संयुक्त समिति से आख्या प्राप्त की गई है।
जिसमें उल्लेख किया गया है कि मेला के आयोजन के संबंध में स्थानीय मंदिरों जैसे दानघाटी, मानसी गंगा, मुखारविन्द , जतीपुरा, मुखारबिन्द के सेवायतो एवं इस मेले से संबंधित मुख्य संतों एवं धर्माचार्यों से वार्ता भी की गई। सभी के द्वारा एक स्वर में कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस वर्ष मुडिय़ा पूनों मेला निरस्त किए जाने का अनुरोध किया था।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के जनपद मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले परम्परागत राजकीय मुडिय़ा पूर्नो मेला जो आषाढ़ माह की एकादशी से पूर्णिमा तक तहसील गोवर्धन में आयोजित होता है, जिसमें देश-विदेश के विभिन्न क्षेत्रों से लाखों श्रद्घालु प्रतिवर्ष पूजा व परिक्रमा करने आते हैं।
| Palwal/Alive News: जिलाधिकारी मथुरा नवनीत सिंह ने बताया कि कोविड वैश्विक महामारी के चलते इस वर्ष गोवर्धन क्षेत्र के परंपरागत राजकीय मुड़िया पूर्नो मेला को निरस्त कर दिया गया है। इस वर्ष बीस जुलाई से चौबीस जुलाई, दो हज़ार इक्कीस तक लगने वाले विश्व प्रसिद्घ इस मुड़िया पूर्नो मेला के आयोजन को लोक स्वास्थ्य व जनहित के दृष्टिगत बाहर से आने वाली भीड़ को प्रतिबंधित करने के उद्देश्य से इस मेला का आयोजन निरस्त किया गया है। वर्तमान में देश-विदेश में कोविड वैश्विक महामारी का प्रकोप है। इस महामारी से मथुरा जनपद भी प्रभावित है तथा इस जिला में आपदा प्रबंधन अधिनियम, दो हज़ार पाँच एवं महामारी अधिनियम एक हज़ार आठ सौ सत्तानवे के प्रावधान भी वर्तमान में लागू हैं। इस संबंध में चिकित्सा अधीक्षक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोवर्धन, क्षेत्राधिकारी गोवर्धन, उप जिलाधिकारी गोवर्धन, सहायक मेलाधिकारी व अपर जिलाधिकारी प्रशासन व मेलाधिकारी की संयुक्त समिति से आख्या प्राप्त की गई है। जिसमें उल्लेख किया गया है कि मेला के आयोजन के संबंध में स्थानीय मंदिरों जैसे दानघाटी, मानसी गंगा, मुखारविन्द , जतीपुरा, मुखारबिन्द के सेवायतो एवं इस मेले से संबंधित मुख्य संतों एवं धर्माचार्यों से वार्ता भी की गई। सभी के द्वारा एक स्वर में कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस वर्ष मुडिय़ा पूनों मेला निरस्त किए जाने का अनुरोध किया था। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के जनपद मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले परम्परागत राजकीय मुडिय़ा पूर्नो मेला जो आषाढ़ माह की एकादशी से पूर्णिमा तक तहसील गोवर्धन में आयोजित होता है, जिसमें देश-विदेश के विभिन्न क्षेत्रों से लाखों श्रद्घालु प्रतिवर्ष पूजा व परिक्रमा करने आते हैं। |
तिरुवनंतपुरम। मलयालम फिल्मों एवं रंगमंच के जाने माने अभिनेता कोचु प्रेमन का शनिवार को एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 68 वर्ष के थे। प्रेमन के परिवार के सदस्यों ने उनके निधन की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि अभिनेता का फेफड़ों से संबंधित बीमारी का इलाज चल रहा था। संवाद अदायगी और चेहरे के भावों की अपनी अनूठी शैली के लिए जाने जाने वाले प्रेमन ने अपने दशकों लंबे करियर में 250 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया।
प्रेमन ने 1979 में रिलीज हुई फिल्म 'एझु निरंगल' के माध्यम से फिल्म उद्योग में प्रवेश किया था।
| तिरुवनंतपुरम। मलयालम फिल्मों एवं रंगमंच के जाने माने अभिनेता कोचु प्रेमन का शनिवार को एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह अड़सठ वर्ष के थे। प्रेमन के परिवार के सदस्यों ने उनके निधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभिनेता का फेफड़ों से संबंधित बीमारी का इलाज चल रहा था। संवाद अदायगी और चेहरे के भावों की अपनी अनूठी शैली के लिए जाने जाने वाले प्रेमन ने अपने दशकों लंबे करियर में दो सौ पचास से अधिक फिल्मों में अभिनय किया। प्रेमन ने एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में रिलीज हुई फिल्म 'एझु निरंगल' के माध्यम से फिल्म उद्योग में प्रवेश किया था। |
अस्पताल के काम को पूरा करनी चाहती है। उसे अधिक रुपयो की आवश्यकता पडती है किन्तु वह अपनी मा से नही कहती । जव उसकी मा को गाँववालो के माध्यम से यह समाचार मिलता है तो उसे लगता है कि उसकी बेटी नेक काम कर रही है जिसमे उसे भी सहयोग करना चाहिए । इसी भावना से प्रेरित होकर, वह पचास हजार रुपये लेकर, उसके पास आती है - "बेटा, जे धरो तुम। पूरे पचास हजार है। तुम्हारे है, तुम्हारे पिता के । अपनी मरजी से खर्च कर लेना। सुनी है, कि तुम जे अस्पताल को चलावे की सोच रही हो । नेक काम है बेटा । बाप अधूरा छोड गये है, तुम पूरा करने की कोसिस करो। बस हमे माफी दे देना । मदा मा की छाती से लगी तो सम्पूर्ण तन शीलत-छाव मे उतरन लगा।" मा के स्नेहिल - स्पर्श से उसका रोम-रोम तृप्त हो उठता है। दादी द्वारा मा साथ दुव्यवहार
करने पर मदा मा के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कर कहती है -"मै क्या करूँ बऊ ? खाना भी कैसे खाऊँ ? बुरी है, अच्छी है ऊँच है, नीच है, मेरी तो वह माँ है । यह नाता तो उचित अनुचित, मान मर्यादा, अमीरी-गरीबी, रूप- कुरुप और हानि-लाभ के परे होता है। 12
इसी प्रकार सुगना की मा के कोई बडा बेटा नही है किन्तु सुगना इस कमी को महसूस नही होने देती वह व्याभिचारी पिता के दुर्व्यवहार से मा को बचाती है और एक जिम्मेदार पुत्र की तरह घर के सारे दायित्व निभाती है। सुगना की मा अपनी बेटी की प्रशसा करते हुए भावुक होकर कहती है- "मदा, आज को हमारा इतना बड़ा बेटा होता तो लो इतेक ख्याल करता भी कि नहीं? नीचट करे जा की है हमारे बिटिया । हिम्मतवर धीर बॅधाती है हमारी / समझाती है कि अम्मा, अब हम बडे हो गये है तुम फिकर न करियो । 23 इस प्रकार पति के आतक एव गैर-जिम्मेदारी से पीडित मा, अपनी बेटी की हिम्मत के कारण सामान्य जीवन जीने में सफल हो जाती है।
निष्कर्षत यह कहा जासकता है कि नारी के स्वभावगत बदलते हुए मूल्यो ने जहाँ एक ओर मा-पुत्री के सबध को और दृढता प्रदान किया है, आत्मनिर्भर होने के कारण पुत्री मा को आर्थिक सरक्षण देने मे सफल हो रही है वही दूसरी ओर मा द्वारा परम्परागत रुढियो को मान्यता देने के कारण उनके मध्य ईर्ष्या और घृणा का जन्म हुआ है।
पुरुष स्वेच्छा चारी प्रवृत्ति का होता है उसके सयम के लिए कोई नियमकानून नही है। उसकी इच्छा ही सर्वोपरि होती है। कभी-कभी इन प्रवृत्तियों के कारण पति-पत्नी के बीच तनाव पैदा हो जाता है । जव पति सिर्फ अपने सुख-सतोष के विषय मे ही सोचता हे और पत्नी के विषय मे लापरवाह हो जाता है, तो पत्नी सत्रास की स्थिति से गुजरती है। वाना, भावना प्रधान नारी है, वह चाहती है कि उसका पति 'शिवेश' उसकी भावनाओ को समझ कर ही कोई काम करे, किन्तु होता इसके विपरीत है। दिन भर काम करने के बाद जब वह रात मे विस्तर पर जाती है तो वहाँ भी उसे अपनी इच्छानुसार आराम करने नही मिलता। 'शिवेश' अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए उसकी शारीरिक एव मानसिक-स्थिति की अनदेखी करता है। इस सवेदनाशून्य होने के कारण उसके भीतर आक्रोश पनपने लगता है किन्तु वह टकराव की स्थिति से बचने के लिए समर्पण कर देती है पर अपनी असहायता पर उसे खीझ भी होती है । वह स्वयं को बिल्कुल अकेला महसूस करती है - " "वह लहरो को पत्थर की दीवार से आ आकर टकराते हुए सुनती है । यह सब आए दिन- जब भी शिवेश की इच्छा हो तब चाहे वह थकी हो, सिर दुख रहा हो । अब मुझसे यह सब बर्दाश्त नही होता। पर आगे कोई रास्ता नही है। नदी मे डूबकर मर जाने का समय नहीं है। वाना उठकर बैठ गई। घुटनो को वाहो से घेरे मन ही मन अपने जीवन के सुख को दोहराती है। 14 इस तरह से पत्नी के पति के बीच उत्पन्न असामन्जस्य की स्थिति उनके सबधो को सामान्य नही रहने देती।
प्राय पत्नी - पति के मध्य तनाव का कारण पुरुष का अह होता है परन्तु यदा-कदा पत्नी भी अह का शिकार हो जाती है। 'नीलिमा' ऐसी ही एक पत्नी है वह अपने खानदान एव जॉतिपाँति के सस्कारो मे जकडी एक अहकारी नारी है जब विवाहोपरान्त उसे पता चलता है कि उसने जिस व्यक्ति से प्रेम विवाह किया है वह हरिजन जाति का है तो उसका राजपूत रक्त उबल पडता है। प्यार की मदहोशी मे उसने इशू के व्यक्तित्व एव पद को देखकर विवाह कर लिया था। किन्तु वास्तविकता जानने के बाद वह उसके प्रति घृणा से भर उठती है। और उसकी समस्त योग्यताओ एव
उसके पवित्र प्यार को नकार कर सिर्फ जाति को महत्व देती है। 'इशू' उसे बहुत समझाता है किन्तु
वह अपनी जॉतिगत श्रेष्ठता के अह में उसकी भावनाओ एव सातफेरो की पवित्रता को ठुकरा देती
है और उसके साथ सबध विच्छेद भी कर लेती है। वह उससे अलग हो कर अर्थोपार्जन करती है और अकेले रह कर अपनी जिंदगी जीने का निर्णय लेती है। इस प्रकार सिर्फ अह के कारण बना बनाया घर वीरान हो जाता है। कभी साथ जीने-मरने की हद तक एक-दूसरे को प्यार करने वाले दोनो पतिपत्नी, कभी भी एक दूसरे का मुँह न देखने की कसमे ले लेते है। उनके इस जीवन से दुखी होकर, नीलिमा की मा उसे समझाकर कहती है -" क्या नहीं था तुम्हारे पास । लायक पति पद- सम्मान । अधिकार और प्रतिष्ठा! और क्या चाहिए बेटी इस दुनिया मे। उसकी सारी अच्छाइयाँ खत्म करके तराजू पर सिर्फ उसकी जॉति रख दी। 15 नीलिमा मा की बात से प्रभावित होती है और अपने पति के प्रति सहृदय हो जाती है।
जब पति-पत्नी एक-दूसरे की भावनाओं को समझकर कोई काम करते है तो उनमे सामजस्य भी बना रहता है और सबधो में पारदर्शिता भी । किन्तु जब पति अपनी एकतरफा इच्छाए पत्नी पर थोपने लगता है तो वह छिपाव का रास्ता अपनाती है और यही से दोनो के मध्य दरार पडनी आरभ हो जाती है। 'वाना' दो बच्चो की मा है, वह तीसरा बच्चा नही चाहती। जबकि उसका पति शिवेश हर वर्ष एक बच्चे के आगमन की इच्छा रखता है। अत वाना उससे छुपकर 'सारिका' द्वारा लायी गयी 'गर्भ निरोधक गोलियो का प्रयोग करती है - "कैसा बडा लालच । शिवेश के खिलाफ कदम या अनचाहा बच्चा। उसने गोलियाँ रसोई में छिपा दी है। अब वह रोज गोली खायेगी "वाना सोचती है कितनी आसान है शिवेश से चोरी । वह तो प्रसन्न है कि वाना अब उतना ना-नू नही करती, जब भी खीचो बिना प्रतिवाद किये झुक जाती है।
'नमिता' अपने माता-पिता के कटुतापूर्ण सबधो के कारण विवाह के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण अपना लेती है। पत्नी के मन मे पति के लिए कोई कोमल भावनाए नही है इसलिए अपने असमर्थ पति के प्रति उसे कोई सहानुभूति भी नहीं है। पति को 'सेरीब्रेल अटैक', पड़ जाता है वह उसे तुरन्त अस्पताल ले जाने की बजाय रूपयो की चिता करने लगती है। और बेटी द्वारा, पिता को | अस्पताल के काम को पूरा करनी चाहती है। उसे अधिक रुपयो की आवश्यकता पडती है किन्तु वह अपनी मा से नही कहती । जव उसकी मा को गाँववालो के माध्यम से यह समाचार मिलता है तो उसे लगता है कि उसकी बेटी नेक काम कर रही है जिसमे उसे भी सहयोग करना चाहिए । इसी भावना से प्रेरित होकर, वह पचास हजार रुपये लेकर, उसके पास आती है - "बेटा, जे धरो तुम। पूरे पचास हजार है। तुम्हारे है, तुम्हारे पिता के । अपनी मरजी से खर्च कर लेना। सुनी है, कि तुम जे अस्पताल को चलावे की सोच रही हो । नेक काम है बेटा । बाप अधूरा छोड गये है, तुम पूरा करने की कोसिस करो। बस हमे माफी दे देना । मदा मा की छाती से लगी तो सम्पूर्ण तन शीलत-छाव मे उतरन लगा।" मा के स्नेहिल - स्पर्श से उसका रोम-रोम तृप्त हो उठता है। दादी द्वारा मा साथ दुव्यवहार करने पर मदा मा के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कर कहती है -"मै क्या करूँ बऊ ? खाना भी कैसे खाऊँ ? बुरी है, अच्छी है ऊँच है, नीच है, मेरी तो वह माँ है । यह नाता तो उचित अनुचित, मान मर्यादा, अमीरी-गरीबी, रूप- कुरुप और हानि-लाभ के परे होता है। बारह इसी प्रकार सुगना की मा के कोई बडा बेटा नही है किन्तु सुगना इस कमी को महसूस नही होने देती वह व्याभिचारी पिता के दुर्व्यवहार से मा को बचाती है और एक जिम्मेदार पुत्र की तरह घर के सारे दायित्व निभाती है। सुगना की मा अपनी बेटी की प्रशसा करते हुए भावुक होकर कहती है- "मदा, आज को हमारा इतना बड़ा बेटा होता तो लो इतेक ख्याल करता भी कि नहीं? नीचट करे जा की है हमारे बिटिया । हिम्मतवर धीर बॅधाती है हमारी / समझाती है कि अम्मा, अब हम बडे हो गये है तुम फिकर न करियो । तेईस इस प्रकार पति के आतक एव गैर-जिम्मेदारी से पीडित मा, अपनी बेटी की हिम्मत के कारण सामान्य जीवन जीने में सफल हो जाती है। निष्कर्षत यह कहा जासकता है कि नारी के स्वभावगत बदलते हुए मूल्यो ने जहाँ एक ओर मा-पुत्री के सबध को और दृढता प्रदान किया है, आत्मनिर्भर होने के कारण पुत्री मा को आर्थिक सरक्षण देने मे सफल हो रही है वही दूसरी ओर मा द्वारा परम्परागत रुढियो को मान्यता देने के कारण उनके मध्य ईर्ष्या और घृणा का जन्म हुआ है। पुरुष स्वेच्छा चारी प्रवृत्ति का होता है उसके सयम के लिए कोई नियमकानून नही है। उसकी इच्छा ही सर्वोपरि होती है। कभी-कभी इन प्रवृत्तियों के कारण पति-पत्नी के बीच तनाव पैदा हो जाता है । जव पति सिर्फ अपने सुख-सतोष के विषय मे ही सोचता हे और पत्नी के विषय मे लापरवाह हो जाता है, तो पत्नी सत्रास की स्थिति से गुजरती है। वाना, भावना प्रधान नारी है, वह चाहती है कि उसका पति 'शिवेश' उसकी भावनाओ को समझ कर ही कोई काम करे, किन्तु होता इसके विपरीत है। दिन भर काम करने के बाद जब वह रात मे विस्तर पर जाती है तो वहाँ भी उसे अपनी इच्छानुसार आराम करने नही मिलता। 'शिवेश' अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए उसकी शारीरिक एव मानसिक-स्थिति की अनदेखी करता है। इस सवेदनाशून्य होने के कारण उसके भीतर आक्रोश पनपने लगता है किन्तु वह टकराव की स्थिति से बचने के लिए समर्पण कर देती है पर अपनी असहायता पर उसे खीझ भी होती है । वह स्वयं को बिल्कुल अकेला महसूस करती है - " "वह लहरो को पत्थर की दीवार से आ आकर टकराते हुए सुनती है । यह सब आए दिन- जब भी शिवेश की इच्छा हो तब चाहे वह थकी हो, सिर दुख रहा हो । अब मुझसे यह सब बर्दाश्त नही होता। पर आगे कोई रास्ता नही है। नदी मे डूबकर मर जाने का समय नहीं है। वाना उठकर बैठ गई। घुटनो को वाहो से घेरे मन ही मन अपने जीवन के सुख को दोहराती है। चौदह इस तरह से पत्नी के पति के बीच उत्पन्न असामन्जस्य की स्थिति उनके सबधो को सामान्य नही रहने देती। प्राय पत्नी - पति के मध्य तनाव का कारण पुरुष का अह होता है परन्तु यदा-कदा पत्नी भी अह का शिकार हो जाती है। 'नीलिमा' ऐसी ही एक पत्नी है वह अपने खानदान एव जॉतिपाँति के सस्कारो मे जकडी एक अहकारी नारी है जब विवाहोपरान्त उसे पता चलता है कि उसने जिस व्यक्ति से प्रेम विवाह किया है वह हरिजन जाति का है तो उसका राजपूत रक्त उबल पडता है। प्यार की मदहोशी मे उसने इशू के व्यक्तित्व एव पद को देखकर विवाह कर लिया था। किन्तु वास्तविकता जानने के बाद वह उसके प्रति घृणा से भर उठती है। और उसकी समस्त योग्यताओ एव उसके पवित्र प्यार को नकार कर सिर्फ जाति को महत्व देती है। 'इशू' उसे बहुत समझाता है किन्तु वह अपनी जॉतिगत श्रेष्ठता के अह में उसकी भावनाओ एव सातफेरो की पवित्रता को ठुकरा देती है और उसके साथ सबध विच्छेद भी कर लेती है। वह उससे अलग हो कर अर्थोपार्जन करती है और अकेले रह कर अपनी जिंदगी जीने का निर्णय लेती है। इस प्रकार सिर्फ अह के कारण बना बनाया घर वीरान हो जाता है। कभी साथ जीने-मरने की हद तक एक-दूसरे को प्यार करने वाले दोनो पतिपत्नी, कभी भी एक दूसरे का मुँह न देखने की कसमे ले लेते है। उनके इस जीवन से दुखी होकर, नीलिमा की मा उसे समझाकर कहती है -" क्या नहीं था तुम्हारे पास । लायक पति पद- सम्मान । अधिकार और प्रतिष्ठा! और क्या चाहिए बेटी इस दुनिया मे। उसकी सारी अच्छाइयाँ खत्म करके तराजू पर सिर्फ उसकी जॉति रख दी। पंद्रह नीलिमा मा की बात से प्रभावित होती है और अपने पति के प्रति सहृदय हो जाती है। जब पति-पत्नी एक-दूसरे की भावनाओं को समझकर कोई काम करते है तो उनमे सामजस्य भी बना रहता है और सबधो में पारदर्शिता भी । किन्तु जब पति अपनी एकतरफा इच्छाए पत्नी पर थोपने लगता है तो वह छिपाव का रास्ता अपनाती है और यही से दोनो के मध्य दरार पडनी आरभ हो जाती है। 'वाना' दो बच्चो की मा है, वह तीसरा बच्चा नही चाहती। जबकि उसका पति शिवेश हर वर्ष एक बच्चे के आगमन की इच्छा रखता है। अत वाना उससे छुपकर 'सारिका' द्वारा लायी गयी 'गर्भ निरोधक गोलियो का प्रयोग करती है - "कैसा बडा लालच । शिवेश के खिलाफ कदम या अनचाहा बच्चा। उसने गोलियाँ रसोई में छिपा दी है। अब वह रोज गोली खायेगी "वाना सोचती है कितनी आसान है शिवेश से चोरी । वह तो प्रसन्न है कि वाना अब उतना ना-नू नही करती, जब भी खीचो बिना प्रतिवाद किये झुक जाती है। 'नमिता' अपने माता-पिता के कटुतापूर्ण सबधो के कारण विवाह के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण अपना लेती है। पत्नी के मन मे पति के लिए कोई कोमल भावनाए नही है इसलिए अपने असमर्थ पति के प्रति उसे कोई सहानुभूति भी नहीं है। पति को 'सेरीब्रेल अटैक', पड़ जाता है वह उसे तुरन्त अस्पताल ले जाने की बजाय रूपयो की चिता करने लगती है। और बेटी द्वारा, पिता को |
Health Benefits Of Eating Poha: जब भी सुबह लेट हो रहे होते है या समझ नहीं आ रहा होता है कि क्या बनाएं जो हैल्थी भी हो और जल्दी भी बन जाएं तो सबको इंस्टेंट बनने वाला नास्ता "पोहा" की याद आती है। स्वाद में तो कोई भी इसे नापसंद नहीं कर सकता। बच्चों का तो यह फेवरट शाम के स्नैक भी है। सब के पसंदीदा पोहा के सेहत पर क्या फायदे है आईए जानते है।
पोहा में आयरन भरपूर मात्रा में होता है जो शरीर में हेमोग्लोबिन को बढ़ाता हैं, शरीर में खून की कमी दूर होती है। प्रेगनेंसी के समय महिलाओं में अक्सर खून की कमी हो जाती है ऐसे में उन्हें पोहा खाने की सलाह दी जाती है। माँ और बच्चे के शरीर में यह आयरन की पूर्ति कर खून में वृद्धि लाता है।
पोहा में कार्बोहाइड्रेट्स होता है जो शरीर को ऊर्जावान बनाता है, शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। नाश्ते में पोहा खाने से दिन भर काम करने की एनर्जी बनी रहती है। सुबह जिन लोगों को काम करने में आलस आता है, थकान महसूस होती है उन्हें नाश्ते में पोहा खाने से इंस्टेंट एनर्जी मिलेगी।
पोहा में चावल के मुकाबले कैलोरीज कम होती है और सब्ज़ी डालकर बनाने से यह पौष्टिक आहार बन जाता हैं जिसे खाने के बाद जल्दी भूख नहीं लगती। जो लोग वज़न कम करना चाहते है या कंट्रोल करना चाहते है, वो अपनी डाइट में पोहे को अवश्य शामिल करें।
इसमें विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट की पर्याप्त मात्रा होती है जो कसरत के समय शरीर को शक्ति प्रदान करती है। पोहा खाने से डायबिटीज कंट्रोल में रहती है क्योंकि इसमें चावल के मुकाबले शुगर लेवल कम होता है जो डायबिटीज मरीज के लिए हैल्थी ऑप्शन है। हाई ब्लड प्रेशर के मरीज को डॉक्टर की सलाह से नाश्ते में पोहा ले सकते है, यह ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में भी मदद करता है।
पोहा पाचन तंत्र के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह जल्दी पच जाता है। पेट में गैस, कब्ज़, अपच की समस्या नहीं होती जिस से मेटाबोलिज्म भी स्ट्रांग रहता है। पाचन क्रिया व इम्युनिटी सिस्टम में तेज़ी आती है और पेट संबंधी बीमारियाँ नहीं होती।
| Health Benefits Of Eating Poha: जब भी सुबह लेट हो रहे होते है या समझ नहीं आ रहा होता है कि क्या बनाएं जो हैल्थी भी हो और जल्दी भी बन जाएं तो सबको इंस्टेंट बनने वाला नास्ता "पोहा" की याद आती है। स्वाद में तो कोई भी इसे नापसंद नहीं कर सकता। बच्चों का तो यह फेवरट शाम के स्नैक भी है। सब के पसंदीदा पोहा के सेहत पर क्या फायदे है आईए जानते है। पोहा में आयरन भरपूर मात्रा में होता है जो शरीर में हेमोग्लोबिन को बढ़ाता हैं, शरीर में खून की कमी दूर होती है। प्रेगनेंसी के समय महिलाओं में अक्सर खून की कमी हो जाती है ऐसे में उन्हें पोहा खाने की सलाह दी जाती है। माँ और बच्चे के शरीर में यह आयरन की पूर्ति कर खून में वृद्धि लाता है। पोहा में कार्बोहाइड्रेट्स होता है जो शरीर को ऊर्जावान बनाता है, शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। नाश्ते में पोहा खाने से दिन भर काम करने की एनर्जी बनी रहती है। सुबह जिन लोगों को काम करने में आलस आता है, थकान महसूस होती है उन्हें नाश्ते में पोहा खाने से इंस्टेंट एनर्जी मिलेगी। पोहा में चावल के मुकाबले कैलोरीज कम होती है और सब्ज़ी डालकर बनाने से यह पौष्टिक आहार बन जाता हैं जिसे खाने के बाद जल्दी भूख नहीं लगती। जो लोग वज़न कम करना चाहते है या कंट्रोल करना चाहते है, वो अपनी डाइट में पोहे को अवश्य शामिल करें। इसमें विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट की पर्याप्त मात्रा होती है जो कसरत के समय शरीर को शक्ति प्रदान करती है। पोहा खाने से डायबिटीज कंट्रोल में रहती है क्योंकि इसमें चावल के मुकाबले शुगर लेवल कम होता है जो डायबिटीज मरीज के लिए हैल्थी ऑप्शन है। हाई ब्लड प्रेशर के मरीज को डॉक्टर की सलाह से नाश्ते में पोहा ले सकते है, यह ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में भी मदद करता है। पोहा पाचन तंत्र के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है क्योंकि यह जल्दी पच जाता है। पेट में गैस, कब्ज़, अपच की समस्या नहीं होती जिस से मेटाबोलिज्म भी स्ट्रांग रहता है। पाचन क्रिया व इम्युनिटी सिस्टम में तेज़ी आती है और पेट संबंधी बीमारियाँ नहीं होती। |
वक्तों से ही होता है ।
दस-पन्द्रह गील चल कर ट्रए फिर एक धुएं से काली दुकान के आगे खड़ा हो गया। यहां सड़क के किनारे हमारे पहाड़ी पदेशों की तरह तर पांच-सात मीत पर दो-तीन दुकानें नहीं दिखाई दे जाती । दूर दिखाई देते गावों में तो दुकाने होगी ही । जावो में दुकान प्रायः अफगान हिन्दु या शिख ही करते हैं । सड़क किनारे ढक्का से चलने के बाद यही दुकान मिली । सान के लिये तुरंभ एक बड़ा पलंग बिछ गया । मे और प्रकाशवती ट्रक पर ही बैठे रहे । शेष राव लोग खान के प्रति आदर में ट्रक से उत्तर कार पलंग के चारों ओर कुछ अंतर से खड़े हो गये । कुछ खरबूजे लाये गये । खान ने जेब से चातु निकाला और खरबूजे तराशे । पहले दो फाके प्रकाशवती और गुझे भेंट की गई। इसके बाद खात से चार-पांच फांकों के ऊपर का बहुत नरम भाग स्वयं खाया । कुछ फांके दो-तीन और लोगों को दी और उठ गये । दोष बचे खरबुजे लोगों ने बांट लिये और ट्रक वचा ।
खूब अंधेरा हो गया। सड़क की लकीर पर ट्रक का प्रकाश कुछ दूर तक आगे-आगे चल रहा था । कभी ही कोई गया सनार मार्ग पर दिखाई दे जाना । ट्रक पत्थर की सड़क पर नहीं उखड़े बिखरे पत्थरों पर चल रहा था तो हिचकोलो की क्या शिकायत होती । पश्चिम से अच्छी ठंडी तेज हवा चलने लगी थी । ट्रक की छड़ पकड़े हाथों में छाले पड़े और फूट गये । जेब से रुमाल निकाल छड़ पर रख कर सहारे के लिये पकड़ लिया। हाथ बदलते समय रुमाल हवा के झोंके में कटी पतंग की तरह उड़ गया । सर जी ने पुकारा--"रोको ! कपड़ा उड़ गया ! " मैंने तुरंत कहा, "नहीं, रुकिये नहीं बोयड़ा था ! " सोच रहा था किसी तरह यह रास्ता समाप्त तो हो ।
रात दस बजे के लगभग जलालाबाद पहुंचे। घने अंधेरे में कहीं-कहीं हरीकेन लालटेन जनते दिखाई दिये। चारदिवारी से घिरे कुछ बंगले भी मालूग पड़े परन्तु प्रकाश नहीं था । अंधेरे में भी वायु में नमी, नालियों में बहते जल के शब्द और वृक्षों से स्थान के सूब हरे - गरे होने का अनुमान हो रहा था । बस्ती एक मंजिने छोटे-छोटे घरों की थी। बाजार में एक जगह गैस भी दिखाई दिया। ट्रक सहा । तीन-चार शिव सरदार जी की अगवानी के लिये मौजूद थे । सरदार जी का सामान और परिवार उत्तरा तो हम भी उत्तर जाना चाहते थे कि उन्हीं के सहारे कहीं रक्त काट लें। में एक बार पहले योहा और रूस हो
आया था । जानता था वहां बिस्तरा साथ लेकर यात्रा का रिवाय नहीं है । रेल, होटल में सब जगह बिस्तर मिलता है इसलिये विस्तर साथ नहीं थे ।
सरदार जी ने कहा- "आप लोग ट्रक में बैटिये माग आपके लिये इंतजाम कर देंगे ।" खान कैसा इंतजाम कर देंगे इसका अनुमान नहीं था परन्तु इतना तो स्पष्ट था कि सरदार जी अब हमारा स्वागत नहीं कर रहे थे । प्रकाशवती की इच्छा रात हिन्दू-सिख परिवार के साथ ही बिता सकने की थी परन्तु मजदूरी में चुप रहे, जो होगा देखा जायगा ।
ट्रक बन्द हो चुके बाजार से कुछ दूर दोनों ओर ऊंचे सफेदों से घिरी सूनी सड़क पर चला और एक प्रकाशमान ऊंची इमारत के होते में प्रवेश किया । प्रकाश बहुत मध्यम था परन्तु या बिजली के बल्यो का । सान ने हाथ मिला कर कहा -- "यह शाही मेहमानखाना है। यहां आराम कीजिये ।" खान तो भं हो बोले । अनुवाद एक समीप खड़े आदमी ने किया ।
मेहमानखाने में भारत की ओर जाने वाले दो अमीर अफगान व्यापारी भी ठहरे हुए थे । सब कमरों में और बीच की दीर्घिका में भी कालीन बिछे हुए थे। बेरे ने आकर पूछा--"खाना किस किस्म का खाइयेगा ? "
उत्तर दिया- "जिग किस्म का तैयार हो ।" भूख तो लगी थी और मसहरीदार पलंग देख कर एकदम लेट जाने की इच्छा उस से भी बलवती थी ।
गुसलखाने में गरम पानी था । पलक्ष का प्रबन्ध था । खाने के लिये नान और मुर्ग मिला परन्तु प्लेटों में कांटे-बुरी के साथ ।
अफगान सौदागरों से मालूम हो गया कि जलालाबाद और काबुल के बीच बहुत अच्छी सड़क है और लगातार बस भी चलती है पर सुबह तड़के ही बस का प्रबन्ध कर लेना उचित होगा ।
सुबह जल्दी ही नाश्ते के पश्चात वैरे ने दस्तख़्त के लिए बिल पेश किया । बिल था लगभग पचहत्तर रुपये का । तेरे को आशा थी, हमें मेहमानखाने में लाने वाले खान स्वयं बिल चुकायेंगे परन्तु मैंने बिल स्वयं चुका कर उस पर 'चुकता' लिख देने का आग्रह किया ताके बिल खान के सामने न पेश किया जा सके ।
पेशावर में काबुल के भारतीय राजदूतावास के हवल्दार लक्ष्मणसिंह से अफगान और भारतीय रुपयों के विनिमय दर के विषय में सूचना मिल चुकी थी । पेशावर के विनिमय के व्यापारी एक भारतीय या पाकिस्तानी रुपये के
चार अफगानो देना चाहते थे । लक्ष्मण सिंह से और सरदार जी ने भी हमें बता दिया कि सरकारी भाव तो एफ और बार का ही है परन्तु वास्तव में एक भारतीय रुपये के सात, आठ, नौ अफगानी बाजार में मिल सकेंगे । पेशावर में लक्ष्मणसिंह से भारतीय बीग रुपये देकर एक सौ चालीग ने लिये थे । इस भाव से पचहत्तर भी कुछ अधिक नही जं। वैरे को दस गुपये बख्शीश देने पर लम्बी सलाम भी मिली ।
जलालाबाद से काबुल सो गील है । सुक ही जाकर बस में ड्राइवर के साथ की दोनों सीटें खरीद लीं। ड्राटवर ने शायद मेरी पतलून और हैट की वजह से या साथ शाही मेहमानवाने का वैरा देख कर कहा- "गवासी रुपये होंगे।" स्वीकार कर लिया ।
हमारे पीछे लारी में कितने आदमी थे, यह गित पाना सम्भव न था। कुछ छत पर भी बैठे थे। भीड़ के कारण किसी को आपत्ति न थी। हमारे देश में मोटर के बोझ खेंच सकने की शक्ति की एक सीमा समझी जाती है । अफगानिस्तान में ऐसा कोई मिथ्या संस्कार नहीं है ।
काबुल नदी तक जलालाबाद की घाटी बहुत हरी-भरी है। यहां एक चीनी मिल भी है और गर्ने की खेती भी होती है। सड़क किनारे क्यारियों में टमाटर और दूसरी चीजें भी दिखाई दीं ।
काबुल के आगे गड़क बहुत दूर तक बिलकुल नदी तट के साथ-साथ जाती है । आस-पाग रेगिस्तान नहीं । नदी के दोनों ओर पहाड़ ही हैं परन्तु खेती के चिन्ह कहीं-कहीं ही दिखाई दिये। कुछ दूर जाकर नदी का साथ छूट जाता है परन्तु शनै-शनै पहाड़ों की ऊंचाई बढ़ती जाती है । म्खी, नंगी चट्टानें, जिन पर घास या बनस्पति का एक पत्ता भी नहीं । चट्टानें एक से दूसरी बढ़ कर नीले आकाश की ओर उठती जाती हैं। हर अगली चट्टान या पहाड़ पहले से ऊंचा । आश्चर्यजनक मात्रा में बोझ लिये बस ऊपर चढ़ती चली जा रही थी । यह इसलिये सम्भव था कि सड़क तारकोल की बहुत अच्छी बनी हुई है । जलालाबाद से पेशावर तक अच्छी सड़क अफ़गान सरकार ने शायद इस दूरदर्शिता के कारण नहीं बनाई थी कि शत्रु को देश में प्रवेश की सुविधा हो जायगी । उस समय यह नहीं सोचा गया कि सीमा पर शत्रु को रोकने के लिये वहां भी अच्छी सड़क होना आवश्यक है । अस्तु, अब तो सड़कें बनाने का काम जोर से
चल रहा था ।
इन रुखे नंगे, धूरार, काले पहाड़ों की ऊंवाई समुदत से कितनी है कह नहीं सकता परन्तु वे गहरे नीले आकाश में चुभ गये से जान पड़ते हैं। भारत या योरुप अथवा काकेशस के पहाड़ों की तरह इन पहाड़ों में कहीं जल रिसना नहीं दिखाई देता । हम तो आधुनिक यंत्रवाहन की गहायता से इस राह पर अठारह-बीस मील प्रति घंटे की चानले जा रहे थे । मोटर की अनुपस्थिति में गयो, घोड़ों, ऊंटों पर इतना सफर एक दिन के कड़े परिग का फल होता होगा परन्तु दर्रा खैबर से काबुल, कंबार, गजती का यह मार्ग तो प्राग ऐतिहासिक काल से बलता ही आया है । तब भी व्यापारियों के काफिले टन मार्गों से भारत आने-जाते थे । तब इन खुश्क बीहड़ सस्तों पर यात्रा में कितने पशु और मनुष्य बलिदान होते होगे ? तब तो यहां तारकोल बिली बढ़िया सड़कों की भी कल्पना नहीं की जा सकती थी। सड़क बनाने की आवश्यकता किये थी ? केवल मार्ग का चिन्ह गात्र रहा होगा। मनुष्य को ऐसे किस धन का लोभ था जिस के लिये वह अपने प्राण जोखिम में डालता था । यदि पेट की ज्वाला के कारण व्याकुल मनुष्यों के इन मार्गों को पार करने की कल्पना की जाये तो एक बात है परन्तु सिकन्दर यदि इस मार्ग से आया होगा तो उगने लूट और साम्राज्य विस्तार के प्रलोभन का क्या मूल्य दिया होगा ! मौर्य सम्राटों की सेनायें तो कपिजा (काबुल ) को विजय कर सोवियत की सीमा पर बंधु नदी, जिसे अब दरिया आमू कलने है, किस लिये पहुंची थीं ? वह कौन ऐसा धन था जिस के बिना मौर्य सम्राटों का पाटलीपुत्र में निर्वाह नहीं हो सकता था ? उन्हीं भार्गो से मुहम्मद गजनवी और बाबर भी आये । निश्चय ही साढ़े तीन हाथ के प्राणी-मनुष्य की राहा शक्ति और साहस की कोई सीमा नहीं । उग़ का साग किसी भी दिशा में जा सकता है ।
काबुल नदी तो काबुल नगर में से होकर प्रकृति द्वारा दिये मार्ग में ही पाकिस्तान में सिंधु नदी में मिलने जाती है परन्तु मनुष्य इतने लम्बे मार्ग में समय नष्ट नहीं करना चाहता । बहुधा सड़क नदी का साथ छोड़ कर पहाड़ों को काटती, लांघती आगे बढ़ जाती है । जलालाबाद से साठ गोल लगभग इन पहाड़ों में विचित्र दृश्य दिखाई देता है । रेल की छोटी-छोटी पटरियां बिछी हैं और बिजली से चलने वाले यंत्रों के शब्द से आकाश गूंजता रहता है । यहां काबुल नदी की धार को बांध कर विजली पैदा की जा रही है। यह काम प्रायः जर्मन इंजीनियरों के हाथ में है। कुछ मील आगे एक नये ढंग के बंगलेनुमा
मकानों की वस्ती कछुए की पीठ जैसी पहाड़ी पर बसा दी गई है। यहां से काबुल तक खूब ऊंचे बिजली के खम्भे नये गये है। १९५५ के जून में लोगों को आशा थी कि तीन-चार मास में सम्पूर्ण काबुल बिजली से जगमगा उठेगा और जल का संकट भी न रहेगा ।
इस स्थान से सटक और नदी का साथ छूट जाता है। सड़क चट्टानों के पहाड़ पर से नहीं बल्कि कंकरीली मिट्टी के पहाड़ पर की पीठ पर से गुजरती के है । यह पहाड़ भी कम ऊंचा नही । ऊंचाई के कारण वायु में कुछ विरलता अनुभव होती है । दूर से समतल पर हिमराशियां दिखाई देती हैं । पहाड़ की ऊंचाई के कारण हो या इस मिट्टी की प्रकृति के कारण, वृक्ष कहीं नहीं हैं । केवल हाथ-हाथ भर ऊंची घास है। शिगला और कुल्लू के बीच के पहाड़ों का मेरा अनुभव है कि समुद्र तल से दस ग्यारह हजार फुट ऊंचे चले जाने पर प्रायः वृक्ष नहीं मिलते । सम्भव है यहां भी इतनी उंचाई हो ।
दोपहर का सवा बज रहा था । बस मजनू के पेड़ों की छाया में बहती जल की नाली के समीप बनी दुकान के सामने ठहरी । ठहरने का कारण भूख के समय का विचार था या नमाज के वक्त का कह नहीं सकता । ड्राइवर और अधिकांश लोगों ने नाली के पानी में हाथ-मुंह-पांव धोये और नमाज अदा करने लगे । इसी नाली का जल लोग पी भी रहे थे । दो अफगान सिख जवान भी इस बस से काबुल जा रहे थे । हमें यह जल लेते हिचकते देख उन्होंने विश्वास दिलाया कि जल बहुत ठंडा और मीठा है, यह जल गुणकारी भी है । हमारी हिचक का कारण समझ एक नौजवान कुछ दूर ऊपर जाकर हमारे लिये जल ले आया । नाली जाने कितने खेतों को लांघ कर आ रही थी । बस से उतरे लोग निपटने के लिये उसी ओर जा रहे थे ।
यात्रियों में अधिकांश अपनी रोटी साथ बांधे थे। कुछ ने एक-एक बड़ी रोटी दुकान से खरीद ली । रोटी प्रायः रूखी ही खाई जा रही थी। कुछ लोगों ने रोटी भिगोने के लिये बिना दूध और चीनी का एक-एक प्याला कहवा से लिया । कुल मिला कर यात्री पचास से कम न रहे होंगे। दुकान पर एक छोटे वर्तन में मुर्ग का सालन मौजूद था। हमारे अतिरिक्त किसी दूसरे यात्री ने वह नहीं खरीदा। अफगानिस्तान में सर्वसाधारण के भोजन का यही स्तर है।
काबुल नगर पहाड़ की पीठ पर है। चुंगी घर पहाड़ी के नीचे छोटा-मोटा किला ही समझिये । बस को किले के भीतर लेकर फाटक बन्द कर लिया गया
तो जान पड़ा कि एक-एक कपड़े की परत उधेड़ी जायगी। हुआ यह कि ड्राइवर और पांच-गात मुसाफिरों ने जाकर चुगी के अधिकारियों से बातचीत की और परवाने लेकर लोट आये और बस को मार्ग देने के लिये किले का दूसरा फाटक खुल गया ।
काबुल नगर में तीन बजे के लगभग पहुंच गये। भाड़ा चुकाने के लिये मेरी जेब में अफगानी रुपये कुछ कम पड़ रहे थे । ड्राइवर ने जिद्द कि पाकिस्तानी रुपया तो वह हरगिज नहीं लेगा । हिन्दुस्तानी रुपया ले सकता है परन्तु सरकारी निरख अर्थात् एक और चार के भाव से ही लेगा । मैं आसपास रुपया बदलने वाले का पता पूछ रहा था कि एक बहुत मैले-फटे से कपड़े पहने सरदार जी ने नये आये भारतीय की पहचान कर पुछा - "क्या परेशानी है ?"
सरदार जी से रुपया बदलवा देने की राहायता पंजाबी में मांगी -- "आप भी क्या बातें करते है ।" सरदार जी ने पंजाबी में उत्तर दिया। एक सौ अफगानी रुपये के नोट जेब से निकाल कर मेरे हाथ में थमा दिये, "इस समय अपना काम चलाइये ।"
सरदार जी को अपना नाम बता कर कहा--"हम होटल काबुल में ठहरेंगे। आप कल अपना रुपया जरूर ले जाइयेगा । मेरे लिये आप को ढूंढ़ना कठिन होगा ।"
सरदार जी ने बेपरवाही से कहा- "वादशाओ, क्या बात है । आ जायगा रुपया क्या जल्दी है ।" और एक टांगा हमारे लिये बुला दिया ।
काबुल में विदेशी लोगों, विशेष कर योरुपियनों के लिये एक ही होटल है, होटल काबुल । होटल सरकारी है। प्रतिदिन का खर्चा सब मिला कर प्रति व्यक्ति साठ-सठ अफगानी हो जाता है। होटल में कोई अफगानी नहीं ठहरता । भारतीय हिन्दू व्यापारी प्रायः गुरुद्वारे में या किसी हिन्दू के यहां ही ठहरते हैं । होटल अच्छा ही है । बिजली और फ्लश का प्रबन्ध जरूर है । खाना भारतीय और योरुपियन ढंग का मिला-जुला है । परोसने का ढंग योरुपियन है । मैंने अफगानी ढंग के खाने की मांग की तो बैरे ने लजा कर उत्तर दिया- "हुजूर, यहां सिर्फ विलायती खाना बनता हूँ ।
होटल के सब बैरे हिन्दुस्तानी बोल लेते हैं । लाहौर, दिल्ली या बम्बई ट्रेंड होने का गर्व करते हैं । होटल का मैनेजर हिन्दुस्तानी या अंग्रेजी नहीं समझता
था । यह पश्तो, फारसी और फ्रेंच ही जानता था काबुल में अंग्रेजी की अपेक्षा फ्रेंच का चलन अधिक है । अंग्रेजी और जर्मन प्रायः बरावरही चलती है। कुछ लोग रूसी भी जानते हैं । सरकार की ओर से फ्रेंच को ही प्रश्रय दिया जाता रहा है । काबुल में इन भाषाओं के समान रूप से चलने का कारण यह है कि यहां शिक्षा का काम फ्रेंच, जर्मन, अंग्रेज पदारियों द्वारा ही किया गया है । अफगान सरकार किसी भी विदेशी शक्ति को अधिक अवसर देने की नीति के विरुद्ध थी । अफगान सामन्ती और रईस परिवार सांस्कृतिक दृष्टि से फ्रांस की और वैज्ञानिक दृष्टि से जर्मनी को इगलैंड की अपेक्षा श्रेष्ठ समझते थे । भारतीय सीमा से ब्रिटेन के आकाण की आशंका बनी रहने से इन्हें उन से कुछ चिढ़ भी थी ।
काबुल दो है या कहिये काबुल दो भागो में बंटा हुआ है । एक पुराना काबुल और दूसरा नया काबुन मी या बादशाह के गढ़ल शहर से दूर हैं । काबुल नदी शहर के बीचो बढ़ती चली गई है। काबुल नदी से काटी गई छोटी-छोटी नहरें या नानियां शहर की सड़कों के साथ बहती है। यह जल ही काबुल नगर के जीवन का मुख्य आधार है । लोग इन्हीं नालियों में कपड़े और वर्तन धो लेते थे और यही जल गीने के लिये भी ले लेते थे । पगमान से जल लाकर भी कुछ गन लगाये गये हैं। होटल काबुल में यह बताया गया था कि होटल में जल उबाल कर और रेल में छान कर दिया जाता है परन्तु हमारे पड़ोस के कमरे में ठहरी हुई जर्मन इंजीनियर की पत्नी ने हमें सावधान कर दिया था - "में गात वर्ष से अफगानिस्तान में हैं। जब के उबालने के विषय में अपनी आंख के अतिरिक्त किसी के कहने का विश्वास न करना ।" हम ने जल न पी कर कहा पीने का ही नियम बना लिया था । अफगानिस्तान में अफगान प्रजा के लिये कानूनन शराब का निषेध है क्योंकि राराव इस्लाम में हराम है । विदेशी विशेष आशा से शराब रख सकते हैं परन्तु इस कानून के बारे में विशेष सिरदर्जी नहीं की जाती । अफीम, भांग और गांजे के प्रयोग का विरोध नहीं है ।
१९५५ जून में गये बने काबुल का कुछ भाग तो रस-बरा गया था । शेप तेजी से बन रहा था। इस वर्ष प्रकाशवती फिर काबुल के रास्ते मास्को गई थीं । उन का कहना है कि अब यह भाग पूरा बस गया है और सड़कों भी अच्छी बन गई हैं। पुराने काबुल नगर में बाजार और गलियां बहुत तग है जैसी कि हमारे यहां किसी पुराने गैले नगर में हो सकती हैं। आमने-सामने से आतेजाते लांगों का फंसे बिना निकल जाना सम्भव नहीं ।
काबुल में पुराने रहने वाले हिन्दू प्रायः सब हिन्दू गुजर ( हिन्दुओं के लिये शरण स्थान ) मुहल्ले में रहते हैं। सब हिन्दु परिवारों के घर एक साथ खूब तंग गलियों में है क्योकि सब हिन्दुओं का एक साथ सिमिट कर रहना आवश्यक था । नाक पर रुमाल रखे बिना इन गलियों से गुजर जाना कठिन है । यह मुहल्ला दूसरे मुहल्लों से माफ रामझा जाता है। यहां बीच मे आंगन छोड़ कर चारों ओर मकान बनाये जाते हैं। मुख्य दरवाजा बहुत छोटा रहता है । आंगन के भीतर की दीवारें और खिड़कियां सब लकड़ी की होती हैं। मकान चाहे तिमंगला हो बाहर से दीवारें मिट्टी की ही दिखाई देंगी । भीतर चाहे दीवारें और पर्श कीमती कालीनों से ढके हो पर सकानों का बाहिरी रंग-ढंग दीनता सूचक बनाये रखने का प्रयोजन लूट-मार के भय से समृद्धि का प्रदर्शन न करता है ।
बहुत से हिन्दू परिवार काबुल में मुहम्मदगीरी के समय से बसे हुए हैं । गुहम्मदगोरी कम लोगो को अफगानिस्तान के व्यापार के विकास के लिये साथ ले गया था। यह लोग जब-तब पंजाब में आकर भी शादी व्याह कर जाते हैं, अधिकांश में काबुल में ही सम्बंध हो जाते हैं। पिछले अढ़ाई-तीन सौ वर्ष में इन हिन्दुओं के साथ कोई फिसाद या लूटमार नहीं हुई परन्तु आतंक अब भी बना है। लोग परलो भी अपनी मातृभाषा की तरह ही वोलते हैं परन्तु इनके घरों में अब तक पंजाबी बोली जाती है। अधिकांश हिन्दू कैश और दाढ़ी न रखने पर भी सिख धर्म के अनुयायी हैं और उन के धार्मिक विश्वास बहुत कट्टर हैं। हिन्दू गुजर सुहल्ले में दो गुरुद्वारे और मन्दिर भी हैं। सब हिन्दू पंजाबी परिवारों के बच्चे इन गुरुद्वारों में लय से गुरुमुखी रटते रहते है और किसी अतिथि के आने पर बहुत लम्बी पुकार लगाते हैं -- " जी बोले सो निहाल, रात्त सिरी अकाल । बाहू गुरुजी का खालसा, वाह गुरूजी की फते ! " व्यापार अधिकांश में हिन्दुओं और सिखों के ही हाथ में है। यह लोग केवल काबुल में ही नहीं, गजनी कंधार और हैरात आदि शहरों में और देहात में भी बसे हुए हैं।
किसी समय हिन्दू के हिन्दू गुजर मुहल्ले में ही रह सकते थे और पुराने समय में उनके लिये सदा लाल पगड़ी बांधने की सरकारी आशा थी । अब यह प्रतिबंध नहीं है । अनेक हिन्दू नये काबुल के खुले आधुनिक मकानों में भी आ बसे हैं ।
काबुल में म्युनिसिपल कमेटी की तरफ से मकानों की गन्दगी नगर से बाहर ले जाने की कोई व्यवस्था अब भी नहीं हैं । काबुल में भंगी या मेहतर का पेशा करने वाले लोग साधारणतः है ही नहीं । मकानों में संडास प्रायः नहीं होते । काबुल नदी की पतली धार के दोनों ओर नदी के सूखे में ही लोग निवृत्ति ले लेते है । जो लोग सुविधा या पर्दे के विचार से घर में संडारा बना लेते हैं उन्हें दुर्गंध भी सहनी पड़ती है। संडास के सुख जाने के अतिरिक्त कोई मार्ग नहीं इसलिये प्रायः दुर्गव बहुत रहती है । इस्लामी मल्तनत में इस गंदगी को समेट लेने वाले जीव सुअर भी नहीं है । मार्च में पहाड़ों पर बरफ गिगलने पर नदी में बाढ़ आती है तो सफाई हो जाती है। सड़कें ख़ास कर नये काबुल की सड़कों पर झाड़ और सफाई की हो जाती है । इस सरकारी काम के लिये बेगार ली जाती है । कानूनन इस सरकारी बेगार से किसी भी साधारण नागरिक को छूट नहीं हैं। इस विषय में अमीरी गरीबी और वंश का भी भेद नहीं है । क्रम से जिन लोगों का नाम आ जाय, उन्हें यह काम निबाहना ही पड़ता है। यह नियुक्ति छः मास के लिये होती है। इस काम के लिये एवजी दी जा सकती है । पैसा दे सकने वाले लोग अपनी एवज में कोई आदमी नौकर रख कर सरकार को दे देते है ।
भारत में पठान और अफगान एक ही बात समझी जाती है परन्तु यह दो भिन्न-भिन्न जानिया है। पठान लोग पाकिस्तान और अफगानिस्तान के वीच के प्रदेश में बराते है । अफगानों के रूप-रंग पर मंगोल प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है । यह लोग स्वाभाव से शांति प्रिय होते हैं। देश में कोई उद्योग-धंधा न होने के कारण आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है । व्यवस्था अभी तक सामन्ती ढंग पर ही है। अफगानिस्तान का समुद्री मार्गों से कहीं सम्बन्ध नहीं है इसलिये वह अंतर्राष्ट्रीय प्रभावों से ओर संसार में हो चुके औद्योगिक और सांस्कृतिक विकास से कुछ हद तक अछूता रह गया है। रााधारण अफगान कहवा रोटी या प्याज रोटी से संतुष्ट हो जाता है परन्तु सामन्ती धरानों का स्तर बहुत ऊंचा है । उन के यहां पूर्वी और पश्चिमी दोनों ढंग के बैठकखानों का प्रबंध रहता है । एक रईस के यहां निमंत्रण पाने में सफलता हुई थी । चाय के साथ केक-पेस्ट्री और आइसक्रीम भी मौजूद थी । अफगान रोना के सिपाही को पचास अफगानी रुपये-- भारतीय पांच-छः माहवार और लगभग तीन पाव आटा रोजाना के हिसाब से तनखाह मिलती है । अच्छी न कम ही दिखाई देती हैं ।
पेशावरी पठानों और काबुली अफगानों के पहावे-पोशाक और व्यवहार में बहुत अंतर है । कंधार, गजनी के लोग तो पठानों की तरह कुल्हा-पगड़ी, सलवार वगैरा पहने दिखाई देते हैं परन्तु काबुल में ऐसी पोशाक बहुत कम नजर आती है । साधारण स्थिति के लोग प्रायः कोट-गतलून पहने ही दिखाई देते है । सिर पर मेमने की खाल की नीची दबी हुई-सी टोपी रहती है ।
लाहौर के अनेक बाजारों में घूमने पर हमें तीन-चार स्त्रियां ही दिखाई दी थीं । पेशावर में तो एक भी नहीं । काबुल के बाजारों में खास कर नये वसे काबुल मे स्त्रियां प्रायः ही आती-जाती और बाजार करती दिखाई देती हैं । स्कूलों से आती-जाती लड़कियों के झुण्ड भी दिखाई देते हैं। यह सभी स्त्रियां और लड़कियां योरुपियन स्त्रियों की पोशाक में अर्थात् घुटनों से कुछ नीचे नीचे तक के फाक, पारदर्शी मोजे और ऊंची एड़ी के जूते पहने थीं । अलबत्ता चेहरे पर नकाब या पोशाक पर बुरका जरूर था । खुले चेहरे स्त्रियां केवल योरुपियन राजदूतावासों या कभी भारतीय राजदूतावास की ही दिखाई दे सकती हैं । काबुल में बसे हुये हिन्दू परिवारों की स्त्रियां बिना बुरके के बाहर नहीं जा सकतीं। यदि कोई स्त्री मुंह उघाड़े खिड़की में कुछ देर खड़ी रहे तो नीचे सड़क पर मेला लग जायगा । यहां के सर्व साधारण स्त्री को खुले मुंह देख कर विस्मित और उत्तेजित हुये बिना नहीं रह सकते ।
प्रकाशपती और मैं एक दुकान पर भारतीय रुपया बदलवा रहे थे । एक काबुली स्त्री फाक पर बुरका पढ़ने आई । सौदे के दाम के विषय में निस्संकोच बहस की। दुकानदार अफगान हिन्दू था । प्रकाशवती ने उस से कहा यहां तीन दिन में मैंने एक भी अफगान स्त्री का चेहरा नहीं देखा। यह तो मालूम मालूम हो कि यहां की स्त्रियों का चेहरा-मोहरा कैसा होता है। इन्हें मुझ से तो कोई पर्दा नहीं होना चाहिये ।
दुकानदार ने प्रकाशवती की बात पश्तो में बुरकापोश अफगान स्त्री को समझा दी। स्त्री ने प्रस्ताव किया- बेशक औरत से क्या पर्दा । यह स्त्री आलसारी के पीछे आ जाये मैं इसे अपना चेहरा दिखा दूंगी । इस के पश्चात् एक आधुनिक विचार अफगान के घर जाने पर उस की स्त्री और बहिन को बिना बुरके के केवल फाक पहने ही देखा । इस परिवार की लड़कियां पेरिस में शिक्षा पाई हुई थीं ।
फाक और बुर्के के मेल के रूप में आधुनिकता और रूढ़िवाद के समन्वय | वक्तों से ही होता है । दस-पन्द्रह गील चल कर ट्रए फिर एक धुएं से काली दुकान के आगे खड़ा हो गया। यहां सड़क के किनारे हमारे पहाड़ी पदेशों की तरह तर पांच-सात मीत पर दो-तीन दुकानें नहीं दिखाई दे जाती । दूर दिखाई देते गावों में तो दुकाने होगी ही । जावो में दुकान प्रायः अफगान हिन्दु या शिख ही करते हैं । सड़क किनारे ढक्का से चलने के बाद यही दुकान मिली । सान के लिये तुरंभ एक बड़ा पलंग बिछ गया । मे और प्रकाशवती ट्रक पर ही बैठे रहे । शेष राव लोग खान के प्रति आदर में ट्रक से उत्तर कार पलंग के चारों ओर कुछ अंतर से खड़े हो गये । कुछ खरबूजे लाये गये । खान ने जेब से चातु निकाला और खरबूजे तराशे । पहले दो फाके प्रकाशवती और गुझे भेंट की गई। इसके बाद खात से चार-पांच फांकों के ऊपर का बहुत नरम भाग स्वयं खाया । कुछ फांके दो-तीन और लोगों को दी और उठ गये । दोष बचे खरबुजे लोगों ने बांट लिये और ट्रक वचा । खूब अंधेरा हो गया। सड़क की लकीर पर ट्रक का प्रकाश कुछ दूर तक आगे-आगे चल रहा था । कभी ही कोई गया सनार मार्ग पर दिखाई दे जाना । ट्रक पत्थर की सड़क पर नहीं उखड़े बिखरे पत्थरों पर चल रहा था तो हिचकोलो की क्या शिकायत होती । पश्चिम से अच्छी ठंडी तेज हवा चलने लगी थी । ट्रक की छड़ पकड़े हाथों में छाले पड़े और फूट गये । जेब से रुमाल निकाल छड़ पर रख कर सहारे के लिये पकड़ लिया। हाथ बदलते समय रुमाल हवा के झोंके में कटी पतंग की तरह उड़ गया । सर जी ने पुकारा--"रोको ! कपड़ा उड़ गया ! " मैंने तुरंत कहा, "नहीं, रुकिये नहीं बोयड़ा था ! " सोच रहा था किसी तरह यह रास्ता समाप्त तो हो । रात दस बजे के लगभग जलालाबाद पहुंचे। घने अंधेरे में कहीं-कहीं हरीकेन लालटेन जनते दिखाई दिये। चारदिवारी से घिरे कुछ बंगले भी मालूग पड़े परन्तु प्रकाश नहीं था । अंधेरे में भी वायु में नमी, नालियों में बहते जल के शब्द और वृक्षों से स्थान के सूब हरे - गरे होने का अनुमान हो रहा था । बस्ती एक मंजिने छोटे-छोटे घरों की थी। बाजार में एक जगह गैस भी दिखाई दिया। ट्रक सहा । तीन-चार शिव सरदार जी की अगवानी के लिये मौजूद थे । सरदार जी का सामान और परिवार उत्तरा तो हम भी उत्तर जाना चाहते थे कि उन्हीं के सहारे कहीं रक्त काट लें। में एक बार पहले योहा और रूस हो आया था । जानता था वहां बिस्तरा साथ लेकर यात्रा का रिवाय नहीं है । रेल, होटल में सब जगह बिस्तर मिलता है इसलिये विस्तर साथ नहीं थे । सरदार जी ने कहा- "आप लोग ट्रक में बैटिये माग आपके लिये इंतजाम कर देंगे ।" खान कैसा इंतजाम कर देंगे इसका अनुमान नहीं था परन्तु इतना तो स्पष्ट था कि सरदार जी अब हमारा स्वागत नहीं कर रहे थे । प्रकाशवती की इच्छा रात हिन्दू-सिख परिवार के साथ ही बिता सकने की थी परन्तु मजदूरी में चुप रहे, जो होगा देखा जायगा । ट्रक बन्द हो चुके बाजार से कुछ दूर दोनों ओर ऊंचे सफेदों से घिरी सूनी सड़क पर चला और एक प्रकाशमान ऊंची इमारत के होते में प्रवेश किया । प्रकाश बहुत मध्यम था परन्तु या बिजली के बल्यो का । सान ने हाथ मिला कर कहा -- "यह शाही मेहमानखाना है। यहां आराम कीजिये ।" खान तो भं हो बोले । अनुवाद एक समीप खड़े आदमी ने किया । मेहमानखाने में भारत की ओर जाने वाले दो अमीर अफगान व्यापारी भी ठहरे हुए थे । सब कमरों में और बीच की दीर्घिका में भी कालीन बिछे हुए थे। बेरे ने आकर पूछा--"खाना किस किस्म का खाइयेगा ? " उत्तर दिया- "जिग किस्म का तैयार हो ।" भूख तो लगी थी और मसहरीदार पलंग देख कर एकदम लेट जाने की इच्छा उस से भी बलवती थी । गुसलखाने में गरम पानी था । पलक्ष का प्रबन्ध था । खाने के लिये नान और मुर्ग मिला परन्तु प्लेटों में कांटे-बुरी के साथ । अफगान सौदागरों से मालूम हो गया कि जलालाबाद और काबुल के बीच बहुत अच्छी सड़क है और लगातार बस भी चलती है पर सुबह तड़के ही बस का प्रबन्ध कर लेना उचित होगा । सुबह जल्दी ही नाश्ते के पश्चात वैरे ने दस्तख़्त के लिए बिल पेश किया । बिल था लगभग पचहत्तर रुपये का । तेरे को आशा थी, हमें मेहमानखाने में लाने वाले खान स्वयं बिल चुकायेंगे परन्तु मैंने बिल स्वयं चुका कर उस पर 'चुकता' लिख देने का आग्रह किया ताके बिल खान के सामने न पेश किया जा सके । पेशावर में काबुल के भारतीय राजदूतावास के हवल्दार लक्ष्मणसिंह से अफगान और भारतीय रुपयों के विनिमय दर के विषय में सूचना मिल चुकी थी । पेशावर के विनिमय के व्यापारी एक भारतीय या पाकिस्तानी रुपये के चार अफगानो देना चाहते थे । लक्ष्मण सिंह से और सरदार जी ने भी हमें बता दिया कि सरकारी भाव तो एफ और बार का ही है परन्तु वास्तव में एक भारतीय रुपये के सात, आठ, नौ अफगानी बाजार में मिल सकेंगे । पेशावर में लक्ष्मणसिंह से भारतीय बीग रुपये देकर एक सौ चालीग ने लिये थे । इस भाव से पचहत्तर भी कुछ अधिक नही जं। वैरे को दस गुपये बख्शीश देने पर लम्बी सलाम भी मिली । जलालाबाद से काबुल सो गील है । सुक ही जाकर बस में ड्राइवर के साथ की दोनों सीटें खरीद लीं। ड्राटवर ने शायद मेरी पतलून और हैट की वजह से या साथ शाही मेहमानवाने का वैरा देख कर कहा- "गवासी रुपये होंगे।" स्वीकार कर लिया । हमारे पीछे लारी में कितने आदमी थे, यह गित पाना सम्भव न था। कुछ छत पर भी बैठे थे। भीड़ के कारण किसी को आपत्ति न थी। हमारे देश में मोटर के बोझ खेंच सकने की शक्ति की एक सीमा समझी जाती है । अफगानिस्तान में ऐसा कोई मिथ्या संस्कार नहीं है । काबुल नदी तक जलालाबाद की घाटी बहुत हरी-भरी है। यहां एक चीनी मिल भी है और गर्ने की खेती भी होती है। सड़क किनारे क्यारियों में टमाटर और दूसरी चीजें भी दिखाई दीं । काबुल के आगे गड़क बहुत दूर तक बिलकुल नदी तट के साथ-साथ जाती है । आस-पाग रेगिस्तान नहीं । नदी के दोनों ओर पहाड़ ही हैं परन्तु खेती के चिन्ह कहीं-कहीं ही दिखाई दिये। कुछ दूर जाकर नदी का साथ छूट जाता है परन्तु शनै-शनै पहाड़ों की ऊंचाई बढ़ती जाती है । म्खी, नंगी चट्टानें, जिन पर घास या बनस्पति का एक पत्ता भी नहीं । चट्टानें एक से दूसरी बढ़ कर नीले आकाश की ओर उठती जाती हैं। हर अगली चट्टान या पहाड़ पहले से ऊंचा । आश्चर्यजनक मात्रा में बोझ लिये बस ऊपर चढ़ती चली जा रही थी । यह इसलिये सम्भव था कि सड़क तारकोल की बहुत अच्छी बनी हुई है । जलालाबाद से पेशावर तक अच्छी सड़क अफ़गान सरकार ने शायद इस दूरदर्शिता के कारण नहीं बनाई थी कि शत्रु को देश में प्रवेश की सुविधा हो जायगी । उस समय यह नहीं सोचा गया कि सीमा पर शत्रु को रोकने के लिये वहां भी अच्छी सड़क होना आवश्यक है । अस्तु, अब तो सड़कें बनाने का काम जोर से चल रहा था । इन रुखे नंगे, धूरार, काले पहाड़ों की ऊंवाई समुदत से कितनी है कह नहीं सकता परन्तु वे गहरे नीले आकाश में चुभ गये से जान पड़ते हैं। भारत या योरुप अथवा काकेशस के पहाड़ों की तरह इन पहाड़ों में कहीं जल रिसना नहीं दिखाई देता । हम तो आधुनिक यंत्रवाहन की गहायता से इस राह पर अठारह-बीस मील प्रति घंटे की चानले जा रहे थे । मोटर की अनुपस्थिति में गयो, घोड़ों, ऊंटों पर इतना सफर एक दिन के कड़े परिग का फल होता होगा परन्तु दर्रा खैबर से काबुल, कंबार, गजती का यह मार्ग तो प्राग ऐतिहासिक काल से बलता ही आया है । तब भी व्यापारियों के काफिले टन मार्गों से भारत आने-जाते थे । तब इन खुश्क बीहड़ सस्तों पर यात्रा में कितने पशु और मनुष्य बलिदान होते होगे ? तब तो यहां तारकोल बिली बढ़िया सड़कों की भी कल्पना नहीं की जा सकती थी। सड़क बनाने की आवश्यकता किये थी ? केवल मार्ग का चिन्ह गात्र रहा होगा। मनुष्य को ऐसे किस धन का लोभ था जिस के लिये वह अपने प्राण जोखिम में डालता था । यदि पेट की ज्वाला के कारण व्याकुल मनुष्यों के इन मार्गों को पार करने की कल्पना की जाये तो एक बात है परन्तु सिकन्दर यदि इस मार्ग से आया होगा तो उगने लूट और साम्राज्य विस्तार के प्रलोभन का क्या मूल्य दिया होगा ! मौर्य सम्राटों की सेनायें तो कपिजा को विजय कर सोवियत की सीमा पर बंधु नदी, जिसे अब दरिया आमू कलने है, किस लिये पहुंची थीं ? वह कौन ऐसा धन था जिस के बिना मौर्य सम्राटों का पाटलीपुत्र में निर्वाह नहीं हो सकता था ? उन्हीं भार्गो से मुहम्मद गजनवी और बाबर भी आये । निश्चय ही साढ़े तीन हाथ के प्राणी-मनुष्य की राहा शक्ति और साहस की कोई सीमा नहीं । उग़ का साग किसी भी दिशा में जा सकता है । काबुल नदी तो काबुल नगर में से होकर प्रकृति द्वारा दिये मार्ग में ही पाकिस्तान में सिंधु नदी में मिलने जाती है परन्तु मनुष्य इतने लम्बे मार्ग में समय नष्ट नहीं करना चाहता । बहुधा सड़क नदी का साथ छोड़ कर पहाड़ों को काटती, लांघती आगे बढ़ जाती है । जलालाबाद से साठ गोल लगभग इन पहाड़ों में विचित्र दृश्य दिखाई देता है । रेल की छोटी-छोटी पटरियां बिछी हैं और बिजली से चलने वाले यंत्रों के शब्द से आकाश गूंजता रहता है । यहां काबुल नदी की धार को बांध कर विजली पैदा की जा रही है। यह काम प्रायः जर्मन इंजीनियरों के हाथ में है। कुछ मील आगे एक नये ढंग के बंगलेनुमा मकानों की वस्ती कछुए की पीठ जैसी पहाड़ी पर बसा दी गई है। यहां से काबुल तक खूब ऊंचे बिजली के खम्भे नये गये है। एक हज़ार नौ सौ पचपन के जून में लोगों को आशा थी कि तीन-चार मास में सम्पूर्ण काबुल बिजली से जगमगा उठेगा और जल का संकट भी न रहेगा । इस स्थान से सटक और नदी का साथ छूट जाता है। सड़क चट्टानों के पहाड़ पर से नहीं बल्कि कंकरीली मिट्टी के पहाड़ पर की पीठ पर से गुजरती के है । यह पहाड़ भी कम ऊंचा नही । ऊंचाई के कारण वायु में कुछ विरलता अनुभव होती है । दूर से समतल पर हिमराशियां दिखाई देती हैं । पहाड़ की ऊंचाई के कारण हो या इस मिट्टी की प्रकृति के कारण, वृक्ष कहीं नहीं हैं । केवल हाथ-हाथ भर ऊंची घास है। शिगला और कुल्लू के बीच के पहाड़ों का मेरा अनुभव है कि समुद्र तल से दस ग्यारह हजार फुट ऊंचे चले जाने पर प्रायः वृक्ष नहीं मिलते । सम्भव है यहां भी इतनी उंचाई हो । दोपहर का सवा बज रहा था । बस मजनू के पेड़ों की छाया में बहती जल की नाली के समीप बनी दुकान के सामने ठहरी । ठहरने का कारण भूख के समय का विचार था या नमाज के वक्त का कह नहीं सकता । ड्राइवर और अधिकांश लोगों ने नाली के पानी में हाथ-मुंह-पांव धोये और नमाज अदा करने लगे । इसी नाली का जल लोग पी भी रहे थे । दो अफगान सिख जवान भी इस बस से काबुल जा रहे थे । हमें यह जल लेते हिचकते देख उन्होंने विश्वास दिलाया कि जल बहुत ठंडा और मीठा है, यह जल गुणकारी भी है । हमारी हिचक का कारण समझ एक नौजवान कुछ दूर ऊपर जाकर हमारे लिये जल ले आया । नाली जाने कितने खेतों को लांघ कर आ रही थी । बस से उतरे लोग निपटने के लिये उसी ओर जा रहे थे । यात्रियों में अधिकांश अपनी रोटी साथ बांधे थे। कुछ ने एक-एक बड़ी रोटी दुकान से खरीद ली । रोटी प्रायः रूखी ही खाई जा रही थी। कुछ लोगों ने रोटी भिगोने के लिये बिना दूध और चीनी का एक-एक प्याला कहवा से लिया । कुल मिला कर यात्री पचास से कम न रहे होंगे। दुकान पर एक छोटे वर्तन में मुर्ग का सालन मौजूद था। हमारे अतिरिक्त किसी दूसरे यात्री ने वह नहीं खरीदा। अफगानिस्तान में सर्वसाधारण के भोजन का यही स्तर है। काबुल नगर पहाड़ की पीठ पर है। चुंगी घर पहाड़ी के नीचे छोटा-मोटा किला ही समझिये । बस को किले के भीतर लेकर फाटक बन्द कर लिया गया तो जान पड़ा कि एक-एक कपड़े की परत उधेड़ी जायगी। हुआ यह कि ड्राइवर और पांच-गात मुसाफिरों ने जाकर चुगी के अधिकारियों से बातचीत की और परवाने लेकर लोट आये और बस को मार्ग देने के लिये किले का दूसरा फाटक खुल गया । काबुल नगर में तीन बजे के लगभग पहुंच गये। भाड़ा चुकाने के लिये मेरी जेब में अफगानी रुपये कुछ कम पड़ रहे थे । ड्राइवर ने जिद्द कि पाकिस्तानी रुपया तो वह हरगिज नहीं लेगा । हिन्दुस्तानी रुपया ले सकता है परन्तु सरकारी निरख अर्थात् एक और चार के भाव से ही लेगा । मैं आसपास रुपया बदलने वाले का पता पूछ रहा था कि एक बहुत मैले-फटे से कपड़े पहने सरदार जी ने नये आये भारतीय की पहचान कर पुछा - "क्या परेशानी है ?" सरदार जी से रुपया बदलवा देने की राहायता पंजाबी में मांगी -- "आप भी क्या बातें करते है ।" सरदार जी ने पंजाबी में उत्तर दिया। एक सौ अफगानी रुपये के नोट जेब से निकाल कर मेरे हाथ में थमा दिये, "इस समय अपना काम चलाइये ।" सरदार जी को अपना नाम बता कर कहा--"हम होटल काबुल में ठहरेंगे। आप कल अपना रुपया जरूर ले जाइयेगा । मेरे लिये आप को ढूंढ़ना कठिन होगा ।" सरदार जी ने बेपरवाही से कहा- "वादशाओ, क्या बात है । आ जायगा रुपया क्या जल्दी है ।" और एक टांगा हमारे लिये बुला दिया । काबुल में विदेशी लोगों, विशेष कर योरुपियनों के लिये एक ही होटल है, होटल काबुल । होटल सरकारी है। प्रतिदिन का खर्चा सब मिला कर प्रति व्यक्ति साठ-सठ अफगानी हो जाता है। होटल में कोई अफगानी नहीं ठहरता । भारतीय हिन्दू व्यापारी प्रायः गुरुद्वारे में या किसी हिन्दू के यहां ही ठहरते हैं । होटल अच्छा ही है । बिजली और फ्लश का प्रबन्ध जरूर है । खाना भारतीय और योरुपियन ढंग का मिला-जुला है । परोसने का ढंग योरुपियन है । मैंने अफगानी ढंग के खाने की मांग की तो बैरे ने लजा कर उत्तर दिया- "हुजूर, यहां सिर्फ विलायती खाना बनता हूँ । होटल के सब बैरे हिन्दुस्तानी बोल लेते हैं । लाहौर, दिल्ली या बम्बई ट्रेंड होने का गर्व करते हैं । होटल का मैनेजर हिन्दुस्तानी या अंग्रेजी नहीं समझता था । यह पश्तो, फारसी और फ्रेंच ही जानता था काबुल में अंग्रेजी की अपेक्षा फ्रेंच का चलन अधिक है । अंग्रेजी और जर्मन प्रायः बरावरही चलती है। कुछ लोग रूसी भी जानते हैं । सरकार की ओर से फ्रेंच को ही प्रश्रय दिया जाता रहा है । काबुल में इन भाषाओं के समान रूप से चलने का कारण यह है कि यहां शिक्षा का काम फ्रेंच, जर्मन, अंग्रेज पदारियों द्वारा ही किया गया है । अफगान सरकार किसी भी विदेशी शक्ति को अधिक अवसर देने की नीति के विरुद्ध थी । अफगान सामन्ती और रईस परिवार सांस्कृतिक दृष्टि से फ्रांस की और वैज्ञानिक दृष्टि से जर्मनी को इगलैंड की अपेक्षा श्रेष्ठ समझते थे । भारतीय सीमा से ब्रिटेन के आकाण की आशंका बनी रहने से इन्हें उन से कुछ चिढ़ भी थी । काबुल दो है या कहिये काबुल दो भागो में बंटा हुआ है । एक पुराना काबुल और दूसरा नया काबुन मी या बादशाह के गढ़ल शहर से दूर हैं । काबुल नदी शहर के बीचो बढ़ती चली गई है। काबुल नदी से काटी गई छोटी-छोटी नहरें या नानियां शहर की सड़कों के साथ बहती है। यह जल ही काबुल नगर के जीवन का मुख्य आधार है । लोग इन्हीं नालियों में कपड़े और वर्तन धो लेते थे और यही जल गीने के लिये भी ले लेते थे । पगमान से जल लाकर भी कुछ गन लगाये गये हैं। होटल काबुल में यह बताया गया था कि होटल में जल उबाल कर और रेल में छान कर दिया जाता है परन्तु हमारे पड़ोस के कमरे में ठहरी हुई जर्मन इंजीनियर की पत्नी ने हमें सावधान कर दिया था - "में गात वर्ष से अफगानिस्तान में हैं। जब के उबालने के विषय में अपनी आंख के अतिरिक्त किसी के कहने का विश्वास न करना ।" हम ने जल न पी कर कहा पीने का ही नियम बना लिया था । अफगानिस्तान में अफगान प्रजा के लिये कानूनन शराब का निषेध है क्योंकि राराव इस्लाम में हराम है । विदेशी विशेष आशा से शराब रख सकते हैं परन्तु इस कानून के बारे में विशेष सिरदर्जी नहीं की जाती । अफीम, भांग और गांजे के प्रयोग का विरोध नहीं है । एक हज़ार नौ सौ पचपन जून में गये बने काबुल का कुछ भाग तो रस-बरा गया था । शेप तेजी से बन रहा था। इस वर्ष प्रकाशवती फिर काबुल के रास्ते मास्को गई थीं । उन का कहना है कि अब यह भाग पूरा बस गया है और सड़कों भी अच्छी बन गई हैं। पुराने काबुल नगर में बाजार और गलियां बहुत तग है जैसी कि हमारे यहां किसी पुराने गैले नगर में हो सकती हैं। आमने-सामने से आतेजाते लांगों का फंसे बिना निकल जाना सम्भव नहीं । काबुल में पुराने रहने वाले हिन्दू प्रायः सब हिन्दू गुजर मुहल्ले में रहते हैं। सब हिन्दु परिवारों के घर एक साथ खूब तंग गलियों में है क्योकि सब हिन्दुओं का एक साथ सिमिट कर रहना आवश्यक था । नाक पर रुमाल रखे बिना इन गलियों से गुजर जाना कठिन है । यह मुहल्ला दूसरे मुहल्लों से माफ रामझा जाता है। यहां बीच मे आंगन छोड़ कर चारों ओर मकान बनाये जाते हैं। मुख्य दरवाजा बहुत छोटा रहता है । आंगन के भीतर की दीवारें और खिड़कियां सब लकड़ी की होती हैं। मकान चाहे तिमंगला हो बाहर से दीवारें मिट्टी की ही दिखाई देंगी । भीतर चाहे दीवारें और पर्श कीमती कालीनों से ढके हो पर सकानों का बाहिरी रंग-ढंग दीनता सूचक बनाये रखने का प्रयोजन लूट-मार के भय से समृद्धि का प्रदर्शन न करता है । बहुत से हिन्दू परिवार काबुल में मुहम्मदगीरी के समय से बसे हुए हैं । गुहम्मदगोरी कम लोगो को अफगानिस्तान के व्यापार के विकास के लिये साथ ले गया था। यह लोग जब-तब पंजाब में आकर भी शादी व्याह कर जाते हैं, अधिकांश में काबुल में ही सम्बंध हो जाते हैं। पिछले अढ़ाई-तीन सौ वर्ष में इन हिन्दुओं के साथ कोई फिसाद या लूटमार नहीं हुई परन्तु आतंक अब भी बना है। लोग परलो भी अपनी मातृभाषा की तरह ही वोलते हैं परन्तु इनके घरों में अब तक पंजाबी बोली जाती है। अधिकांश हिन्दू कैश और दाढ़ी न रखने पर भी सिख धर्म के अनुयायी हैं और उन के धार्मिक विश्वास बहुत कट्टर हैं। हिन्दू गुजर सुहल्ले में दो गुरुद्वारे और मन्दिर भी हैं। सब हिन्दू पंजाबी परिवारों के बच्चे इन गुरुद्वारों में लय से गुरुमुखी रटते रहते है और किसी अतिथि के आने पर बहुत लम्बी पुकार लगाते हैं -- " जी बोले सो निहाल, रात्त सिरी अकाल । बाहू गुरुजी का खालसा, वाह गुरूजी की फते ! " व्यापार अधिकांश में हिन्दुओं और सिखों के ही हाथ में है। यह लोग केवल काबुल में ही नहीं, गजनी कंधार और हैरात आदि शहरों में और देहात में भी बसे हुए हैं। किसी समय हिन्दू के हिन्दू गुजर मुहल्ले में ही रह सकते थे और पुराने समय में उनके लिये सदा लाल पगड़ी बांधने की सरकारी आशा थी । अब यह प्रतिबंध नहीं है । अनेक हिन्दू नये काबुल के खुले आधुनिक मकानों में भी आ बसे हैं । काबुल में म्युनिसिपल कमेटी की तरफ से मकानों की गन्दगी नगर से बाहर ले जाने की कोई व्यवस्था अब भी नहीं हैं । काबुल में भंगी या मेहतर का पेशा करने वाले लोग साधारणतः है ही नहीं । मकानों में संडास प्रायः नहीं होते । काबुल नदी की पतली धार के दोनों ओर नदी के सूखे में ही लोग निवृत्ति ले लेते है । जो लोग सुविधा या पर्दे के विचार से घर में संडारा बना लेते हैं उन्हें दुर्गंध भी सहनी पड़ती है। संडास के सुख जाने के अतिरिक्त कोई मार्ग नहीं इसलिये प्रायः दुर्गव बहुत रहती है । इस्लामी मल्तनत में इस गंदगी को समेट लेने वाले जीव सुअर भी नहीं है । मार्च में पहाड़ों पर बरफ गिगलने पर नदी में बाढ़ आती है तो सफाई हो जाती है। सड़कें ख़ास कर नये काबुल की सड़कों पर झाड़ और सफाई की हो जाती है । इस सरकारी काम के लिये बेगार ली जाती है । कानूनन इस सरकारी बेगार से किसी भी साधारण नागरिक को छूट नहीं हैं। इस विषय में अमीरी गरीबी और वंश का भी भेद नहीं है । क्रम से जिन लोगों का नाम आ जाय, उन्हें यह काम निबाहना ही पड़ता है। यह नियुक्ति छः मास के लिये होती है। इस काम के लिये एवजी दी जा सकती है । पैसा दे सकने वाले लोग अपनी एवज में कोई आदमी नौकर रख कर सरकार को दे देते है । भारत में पठान और अफगान एक ही बात समझी जाती है परन्तु यह दो भिन्न-भिन्न जानिया है। पठान लोग पाकिस्तान और अफगानिस्तान के वीच के प्रदेश में बराते है । अफगानों के रूप-रंग पर मंगोल प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है । यह लोग स्वाभाव से शांति प्रिय होते हैं। देश में कोई उद्योग-धंधा न होने के कारण आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है । व्यवस्था अभी तक सामन्ती ढंग पर ही है। अफगानिस्तान का समुद्री मार्गों से कहीं सम्बन्ध नहीं है इसलिये वह अंतर्राष्ट्रीय प्रभावों से ओर संसार में हो चुके औद्योगिक और सांस्कृतिक विकास से कुछ हद तक अछूता रह गया है। रााधारण अफगान कहवा रोटी या प्याज रोटी से संतुष्ट हो जाता है परन्तु सामन्ती धरानों का स्तर बहुत ऊंचा है । उन के यहां पूर्वी और पश्चिमी दोनों ढंग के बैठकखानों का प्रबंध रहता है । एक रईस के यहां निमंत्रण पाने में सफलता हुई थी । चाय के साथ केक-पेस्ट्री और आइसक्रीम भी मौजूद थी । अफगान रोना के सिपाही को पचास अफगानी रुपये-- भारतीय पांच-छः माहवार और लगभग तीन पाव आटा रोजाना के हिसाब से तनखाह मिलती है । अच्छी न कम ही दिखाई देती हैं । पेशावरी पठानों और काबुली अफगानों के पहावे-पोशाक और व्यवहार में बहुत अंतर है । कंधार, गजनी के लोग तो पठानों की तरह कुल्हा-पगड़ी, सलवार वगैरा पहने दिखाई देते हैं परन्तु काबुल में ऐसी पोशाक बहुत कम नजर आती है । साधारण स्थिति के लोग प्रायः कोट-गतलून पहने ही दिखाई देते है । सिर पर मेमने की खाल की नीची दबी हुई-सी टोपी रहती है । लाहौर के अनेक बाजारों में घूमने पर हमें तीन-चार स्त्रियां ही दिखाई दी थीं । पेशावर में तो एक भी नहीं । काबुल के बाजारों में खास कर नये वसे काबुल मे स्त्रियां प्रायः ही आती-जाती और बाजार करती दिखाई देती हैं । स्कूलों से आती-जाती लड़कियों के झुण्ड भी दिखाई देते हैं। यह सभी स्त्रियां और लड़कियां योरुपियन स्त्रियों की पोशाक में अर्थात् घुटनों से कुछ नीचे नीचे तक के फाक, पारदर्शी मोजे और ऊंची एड़ी के जूते पहने थीं । अलबत्ता चेहरे पर नकाब या पोशाक पर बुरका जरूर था । खुले चेहरे स्त्रियां केवल योरुपियन राजदूतावासों या कभी भारतीय राजदूतावास की ही दिखाई दे सकती हैं । काबुल में बसे हुये हिन्दू परिवारों की स्त्रियां बिना बुरके के बाहर नहीं जा सकतीं। यदि कोई स्त्री मुंह उघाड़े खिड़की में कुछ देर खड़ी रहे तो नीचे सड़क पर मेला लग जायगा । यहां के सर्व साधारण स्त्री को खुले मुंह देख कर विस्मित और उत्तेजित हुये बिना नहीं रह सकते । प्रकाशपती और मैं एक दुकान पर भारतीय रुपया बदलवा रहे थे । एक काबुली स्त्री फाक पर बुरका पढ़ने आई । सौदे के दाम के विषय में निस्संकोच बहस की। दुकानदार अफगान हिन्दू था । प्रकाशवती ने उस से कहा यहां तीन दिन में मैंने एक भी अफगान स्त्री का चेहरा नहीं देखा। यह तो मालूम मालूम हो कि यहां की स्त्रियों का चेहरा-मोहरा कैसा होता है। इन्हें मुझ से तो कोई पर्दा नहीं होना चाहिये । दुकानदार ने प्रकाशवती की बात पश्तो में बुरकापोश अफगान स्त्री को समझा दी। स्त्री ने प्रस्ताव किया- बेशक औरत से क्या पर्दा । यह स्त्री आलसारी के पीछे आ जाये मैं इसे अपना चेहरा दिखा दूंगी । इस के पश्चात् एक आधुनिक विचार अफगान के घर जाने पर उस की स्त्री और बहिन को बिना बुरके के केवल फाक पहने ही देखा । इस परिवार की लड़कियां पेरिस में शिक्षा पाई हुई थीं । फाक और बुर्के के मेल के रूप में आधुनिकता और रूढ़िवाद के समन्वय |
फ्रांस के प्रशांत सागरीय क्षेत्र न्यू कैलेडोनिया के मतदाताओं ने रविवार को फ्रांस के साथ बने रहने के पक्ष में मतदान किया। हालांकि स्वतंत्रता समर्थक शक्तियों ने इस जनमत संग्रह का बहिष्कार किया। फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुअल मैक्रों ने (जनमत संग्रह के) इस परिणाम को हिंद प्रशांत क्षेत्र में फ्रांस की भूमिका पर शानदार मुहर बताया एवं इस क्षेत्र के भावी दर्जे पर चर्चा करने की घोषणा की। हालांकि, अलगाववादी कार्यकर्ताओं ने निराशा प्रकट की। न्यू कैलेडोनिया में तेजी से प्रभाव बढ़ा रहे चीन के लिए भी इसे झटका माना जा रहा है।
अलगाववादी कार्यकर्ताओं ने महामारी के चलते जनमत संग्रह में देरी करने की अपील की थी। वे नाराज हैं और उनका आरोप है कि फ्रांस सरकार ने अभियान को प्रभावित करने का प्रयास किया। इसलिए उन्होंने अपने समर्थकों से मतदान केंद्रों से दूर रहने का आह्वान किया था। ऐसा हुआ भी। बड़ी संख्या में स्वतंत्रता के समर्थक लोगों ने जनमत संग्रह का बहिष्कार किया।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जितने लोगों ने मतदान किया, उनमें 96 फीसद ने फ्रांस के साथ ही रहने का फैसला किया। वैसे मतदान का प्रतिशत महज 42 रहा। यह आंकड़ा पिछले स्वतंत्रता संबंधी जनमत संग्रह में जुटे मतदाताओं के आधे से भी कम है। तब जनमत संग्रह में फ्रांस से अलग होने के पक्ष में 46. 7 फीसद मतदाता थे। सदर्न प्रोविंस क्षेत्र की अध्यक्ष सोनिया बैक्स ने कहा कि आज रात, हम फ्रांसीसी हैं और हम ऐसा ही बने रहेंगे। मतदान संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में हुआ।
उपनिवेश की मुक्ति के वैश्विक प्रयास तथा इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच यह जनमत संग्रह कराया गया। न्यू कैलेडोनिया एक द्वीपसमूह है जिसे 19वीं सदी में नेपोलियन के भतीजे ने उपनिवेश बनाया था। इस क्षेत्र में 2,70,000 लोग रहते हैं। मैक्रों ने टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में कहा कि आज रात फ्रांस और सुंदर हो गया है क्योंकि न्यू कैलेडोनिया ने (फ्रांस के साथ) बने रहने का फैसला किया है।
रविवार का मतदान तीन दशक से चल रही उपनिवेश मुक्ति प्रक्रिया का तीसरा एवं आखिरी चरण था। यह प्रक्रिया 1988 की हिंसा से शुरू हुई थी। तब फ्रांस ने नौमिया समझौते के तहत न्यू कैलेडोनिया को व्यापक स्वायत्तता दी थी। हालांकि, यह प्रक्रिया इस आखिरी जनमत संग्रह के साथ समाप्त नहीं हुई है। अब फ्रांस, अलगाववादियों एवं गैर अलगाववादियों के पास नए दर्जे पर वार्ता करने के लिए 18 महीने हैं। इस द्वीपसमूह के 307 मतदान केंद्रों पर लोगों के सामने प्रश्न रखा गया कि क्या आप न्यू कैलेडोनिया को पूर्ण संप्रभुता प्राप्त करते एवं स्वतंत्र होते हुए देखना चाहते हैं?
| फ्रांस के प्रशांत सागरीय क्षेत्र न्यू कैलेडोनिया के मतदाताओं ने रविवार को फ्रांस के साथ बने रहने के पक्ष में मतदान किया। हालांकि स्वतंत्रता समर्थक शक्तियों ने इस जनमत संग्रह का बहिष्कार किया। फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुअल मैक्रों ने इस परिणाम को हिंद प्रशांत क्षेत्र में फ्रांस की भूमिका पर शानदार मुहर बताया एवं इस क्षेत्र के भावी दर्जे पर चर्चा करने की घोषणा की। हालांकि, अलगाववादी कार्यकर्ताओं ने निराशा प्रकट की। न्यू कैलेडोनिया में तेजी से प्रभाव बढ़ा रहे चीन के लिए भी इसे झटका माना जा रहा है। अलगाववादी कार्यकर्ताओं ने महामारी के चलते जनमत संग्रह में देरी करने की अपील की थी। वे नाराज हैं और उनका आरोप है कि फ्रांस सरकार ने अभियान को प्रभावित करने का प्रयास किया। इसलिए उन्होंने अपने समर्थकों से मतदान केंद्रों से दूर रहने का आह्वान किया था। ऐसा हुआ भी। बड़ी संख्या में स्वतंत्रता के समर्थक लोगों ने जनमत संग्रह का बहिष्कार किया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जितने लोगों ने मतदान किया, उनमें छियानवे फीसद ने फ्रांस के साथ ही रहने का फैसला किया। वैसे मतदान का प्रतिशत महज बयालीस रहा। यह आंकड़ा पिछले स्वतंत्रता संबंधी जनमत संग्रह में जुटे मतदाताओं के आधे से भी कम है। तब जनमत संग्रह में फ्रांस से अलग होने के पक्ष में छियालीस. सात फीसद मतदाता थे। सदर्न प्रोविंस क्षेत्र की अध्यक्ष सोनिया बैक्स ने कहा कि आज रात, हम फ्रांसीसी हैं और हम ऐसा ही बने रहेंगे। मतदान संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में हुआ। उपनिवेश की मुक्ति के वैश्विक प्रयास तथा इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच यह जनमत संग्रह कराया गया। न्यू कैलेडोनिया एक द्वीपसमूह है जिसे उन्नीसवीं सदी में नेपोलियन के भतीजे ने उपनिवेश बनाया था। इस क्षेत्र में दो,सत्तर,शून्य लोग रहते हैं। मैक्रों ने टेलीविजन पर प्रसारित अपने संबोधन में कहा कि आज रात फ्रांस और सुंदर हो गया है क्योंकि न्यू कैलेडोनिया ने बने रहने का फैसला किया है। रविवार का मतदान तीन दशक से चल रही उपनिवेश मुक्ति प्रक्रिया का तीसरा एवं आखिरी चरण था। यह प्रक्रिया एक हज़ार नौ सौ अठासी की हिंसा से शुरू हुई थी। तब फ्रांस ने नौमिया समझौते के तहत न्यू कैलेडोनिया को व्यापक स्वायत्तता दी थी। हालांकि, यह प्रक्रिया इस आखिरी जनमत संग्रह के साथ समाप्त नहीं हुई है। अब फ्रांस, अलगाववादियों एवं गैर अलगाववादियों के पास नए दर्जे पर वार्ता करने के लिए अट्ठारह महीने हैं। इस द्वीपसमूह के तीन सौ सात मतदान केंद्रों पर लोगों के सामने प्रश्न रखा गया कि क्या आप न्यू कैलेडोनिया को पूर्ण संप्रभुता प्राप्त करते एवं स्वतंत्र होते हुए देखना चाहते हैं? |
Dragon new maneuver over Tibet: चीन तिब्बत और निर्वासित दलाई लामा के प्रति आक्रामकता दिखाना जारी रखता है। दो गुप्त आंतरिक चीनी दस्तावेजों ने हाल ही में एक विशेष रणनीति का खुलासा किया है। यह दिखाता है कि कैसे वह अपने व्यक्ति को 14वें दलाई लामा के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।
धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को समर्पित एक पत्रिका के प्रधान संपादक मार्को रेस्पिंटी का कहना है कि रिपोर्ट दो अनदेखी और महत्वपूर्ण चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) नीति दस्तावेजों पर आधारित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये दस्तावेज चीन में प्रभावशाली और कुशल तिब्बती खोजकर्ताओं को भेजे गए थे।
इससे पता चलता है कि चीनी सरकार दलाई लामा के बाद के युग के लिए व्यापक तैयारी कर रही है। हाल ही में दलाई लामा ने घोषणा की कि वह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के हस्तक्षेप और पुनर्जन्म प्रणाली को बचाने के लिए तिब्बती बौद्ध धर्म का पुनर्जन्म नहीं करेंगे।
एक पत्रिका के अनुसार, 30 पन्नों की एक नई रिपोर्ट इस संभावना की पुष्टि करती है। तिब्बत, दलाई लामा और पुनर्जन्म की भू-राजनीति शीर्षक वाली रिपोर्ट, अंतर्राष्ट्रीय तिब्बत नेटवर्क (ITN) और तिब्बत न्याय केंद्र द्वारा जारी की गई थी।
दस्तावेज़ से पता चलता है कि कैसे चीनी शासन तिब्बती बौद्ध धर्म के 14वें दलाई लामा के युग में परम पावन के रूप में पुनर्जन्म की प्रथा का पालन करने के लिए विस्तृत योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी ला रहा है, और तिब्बती संस्कृति के इस अग्रदूत को अपनी मौजूदा सरकारी मशीनरी में शामिल करने की रणनीति को आगे बढ़ा रहा है। .
| Dragon new maneuver over Tibet: चीन तिब्बत और निर्वासित दलाई लामा के प्रति आक्रामकता दिखाना जारी रखता है। दो गुप्त आंतरिक चीनी दस्तावेजों ने हाल ही में एक विशेष रणनीति का खुलासा किया है। यह दिखाता है कि कैसे वह अपने व्यक्ति को चौदहवें दलाई लामा के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को समर्पित एक पत्रिका के प्रधान संपादक मार्को रेस्पिंटी का कहना है कि रिपोर्ट दो अनदेखी और महत्वपूर्ण चीनी कम्युनिस्ट पार्टी नीति दस्तावेजों पर आधारित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये दस्तावेज चीन में प्रभावशाली और कुशल तिब्बती खोजकर्ताओं को भेजे गए थे। इससे पता चलता है कि चीनी सरकार दलाई लामा के बाद के युग के लिए व्यापक तैयारी कर रही है। हाल ही में दलाई लामा ने घोषणा की कि वह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के हस्तक्षेप और पुनर्जन्म प्रणाली को बचाने के लिए तिब्बती बौद्ध धर्म का पुनर्जन्म नहीं करेंगे। एक पत्रिका के अनुसार, तीस पन्नों की एक नई रिपोर्ट इस संभावना की पुष्टि करती है। तिब्बत, दलाई लामा और पुनर्जन्म की भू-राजनीति शीर्षक वाली रिपोर्ट, अंतर्राष्ट्रीय तिब्बत नेटवर्क और तिब्बत न्याय केंद्र द्वारा जारी की गई थी। दस्तावेज़ से पता चलता है कि कैसे चीनी शासन तिब्बती बौद्ध धर्म के चौदहवें दलाई लामा के युग में परम पावन के रूप में पुनर्जन्म की प्रथा का पालन करने के लिए विस्तृत योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी ला रहा है, और तिब्बती संस्कृति के इस अग्रदूत को अपनी मौजूदा सरकारी मशीनरी में शामिल करने की रणनीति को आगे बढ़ा रहा है। . |
प्रदेश के बाद कर्नाटक में कांग्रेस को मिली आशातीत जीत से गदगद कांग्रेस नेताओं को अब दिल्ली की गद्दी नजर आने लगी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व मंत्री कुलदीप कुमार ने कहा कि प्रदेश से कांग्रेस के लिए जीत की जो शुभ शुरूआत हुई थी वह दक्षिण भारत तक पहुंच गई और कर्नाटक में भी कांग्रेस ने शानदार जीत दर्ज कर साबित कर दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पदयात्रा का जनता में ऐसा असर रहा कि अब जनता भी भाजपा की चाल को समझने लगी है और भाजपा के अब चारों खाने चित होने लगे है। उन्होंने इस जीत का श्रेय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी व प्रियंका गांधी के साथ मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को देते हुए कहा कि सुखविंदर सिंह सुक्खू जीत का जो बीज मंत्र लेकर कर्नाटक पहुंचे उसका भी असर है कि कांग्रेस को सम्मानजनक जीत मिली है।
प्रेस विज्ञप्ति में कुलदीप कुमार ने कहा कि आखिर एक दिन तो भाजपा की नफरत की राजनीति का अंत होना ही था। इस जीत का श्रेय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को देते हुए कहा कि दरअसल कांग्रेसी की शानदार वापसी की शुरूआत प्रदेश से ही हुई। इसके बाद अब कांग्रेस का शानदार प्रदर्शन लगातार सुधर रहा है। कांग्रेस सरकार ने जनता के साथ किए वादों को जिस प्रकार पूरा करने की दिशा में कदम उठाया है, उससे लोगों का विश्वास पूरे देश में कांग्रेस के प्रति बढ़ा है।
| प्रदेश के बाद कर्नाटक में कांग्रेस को मिली आशातीत जीत से गदगद कांग्रेस नेताओं को अब दिल्ली की गद्दी नजर आने लगी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व मंत्री कुलदीप कुमार ने कहा कि प्रदेश से कांग्रेस के लिए जीत की जो शुभ शुरूआत हुई थी वह दक्षिण भारत तक पहुंच गई और कर्नाटक में भी कांग्रेस ने शानदार जीत दर्ज कर साबित कर दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पदयात्रा का जनता में ऐसा असर रहा कि अब जनता भी भाजपा की चाल को समझने लगी है और भाजपा के अब चारों खाने चित होने लगे है। उन्होंने इस जीत का श्रेय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी व प्रियंका गांधी के साथ मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को देते हुए कहा कि सुखविंदर सिंह सुक्खू जीत का जो बीज मंत्र लेकर कर्नाटक पहुंचे उसका भी असर है कि कांग्रेस को सम्मानजनक जीत मिली है। प्रेस विज्ञप्ति में कुलदीप कुमार ने कहा कि आखिर एक दिन तो भाजपा की नफरत की राजनीति का अंत होना ही था। इस जीत का श्रेय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को देते हुए कहा कि दरअसल कांग्रेसी की शानदार वापसी की शुरूआत प्रदेश से ही हुई। इसके बाद अब कांग्रेस का शानदार प्रदर्शन लगातार सुधर रहा है। कांग्रेस सरकार ने जनता के साथ किए वादों को जिस प्रकार पूरा करने की दिशा में कदम उठाया है, उससे लोगों का विश्वास पूरे देश में कांग्रेस के प्रति बढ़ा है। |
आईपीएल के सीजन 12 का 51वां मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच खेला जायेगा। जिसमें मुंबई प्लेऑफ में जाने के लिए हैदराबाद को हराना चाहेगी। वहीं फैंस की नजरे एक बार फिर शानदार फॉर्म में चल रहे हार्दिक पंड्या पर होंगी। जो इस समय कातिलाना अंदाज में 200 के आस-पास के तूफानी स्ट्राइक रेट के साथ बल्लेबाजी कर रहे हैं। ऐसे में हैदराबाद ने आज हार्दिक के तूफ़ान को रोकने के लिए एक ख़ास प्लान तैयार किया है। जिस पर अम्ल कर वो मुंबई इंडियंस के इस खतरनाक फिनिशर को रोकना चाहेंगे।
सनराइजर्स हैदराबाद के कोच टॉम मूडी का मानना है कि हार्दिक पांड्या जैसे खतरनाक खिलाड़ी को जल्द से जल्द आउट करने की जरूरत है। अन्यथा वह कभी भी मैच का पासा पलट सकते हैं।
इस तरह मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, "टूर्नामेंट में हार्दिक जैसे कई खिलाड़ी हैं, वे प्रभावशाली खिलाड़ी हैं, खतरनाक खिलाड़ी हैं। आपको उन्हें जल्द से जल्द बाहर भेजने की आवश्यकता है क्योंकि यदि वह बीच में समय बिताते हैं, तो वे आपको चोट पहुंचाने वाले हैं। "
मुंबई इंडियंस और सनराइजर्स हैदराबाद की नजरें प्लेऑफ पर टिकी हुई हैं। मुंबई 12 मैचों में 14 अंकों के साथ पॉइंट्स टेबल में तीसरे स्थान पर है वहीं हैदराबाद के 12 मैचों में 12 अंक हैं और वह चौथे स्थान पर है।
मुंबई की टीम आज के मैच में जीत हासिल करती है तो प्लेऑफ में उसका स्थान पक्का हो जायेगा। वहीं दूसरी तरफ हैदराबाद इस मैच को जीतने के बाद प्लेऑफ के काफी करीब पहुंचन चाहेगी। हैदराबाद के भले ही 14 अंक हैं लेकिन उनका रनरेट सभी टीमों से काफी बेहतर है।
| आईपीएल के सीजन बारह का इक्यावनवां मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में मुंबई इंडियंस और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच खेला जायेगा। जिसमें मुंबई प्लेऑफ में जाने के लिए हैदराबाद को हराना चाहेगी। वहीं फैंस की नजरे एक बार फिर शानदार फॉर्म में चल रहे हार्दिक पंड्या पर होंगी। जो इस समय कातिलाना अंदाज में दो सौ के आस-पास के तूफानी स्ट्राइक रेट के साथ बल्लेबाजी कर रहे हैं। ऐसे में हैदराबाद ने आज हार्दिक के तूफ़ान को रोकने के लिए एक ख़ास प्लान तैयार किया है। जिस पर अम्ल कर वो मुंबई इंडियंस के इस खतरनाक फिनिशर को रोकना चाहेंगे। सनराइजर्स हैदराबाद के कोच टॉम मूडी का मानना है कि हार्दिक पांड्या जैसे खतरनाक खिलाड़ी को जल्द से जल्द आउट करने की जरूरत है। अन्यथा वह कभी भी मैच का पासा पलट सकते हैं। इस तरह मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, "टूर्नामेंट में हार्दिक जैसे कई खिलाड़ी हैं, वे प्रभावशाली खिलाड़ी हैं, खतरनाक खिलाड़ी हैं। आपको उन्हें जल्द से जल्द बाहर भेजने की आवश्यकता है क्योंकि यदि वह बीच में समय बिताते हैं, तो वे आपको चोट पहुंचाने वाले हैं। " मुंबई इंडियंस और सनराइजर्स हैदराबाद की नजरें प्लेऑफ पर टिकी हुई हैं। मुंबई बारह मैचों में चौदह अंकों के साथ पॉइंट्स टेबल में तीसरे स्थान पर है वहीं हैदराबाद के बारह मैचों में बारह अंक हैं और वह चौथे स्थान पर है। मुंबई की टीम आज के मैच में जीत हासिल करती है तो प्लेऑफ में उसका स्थान पक्का हो जायेगा। वहीं दूसरी तरफ हैदराबाद इस मैच को जीतने के बाद प्लेऑफ के काफी करीब पहुंचन चाहेगी। हैदराबाद के भले ही चौदह अंक हैं लेकिन उनका रनरेट सभी टीमों से काफी बेहतर है। |
शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें।
मोबाइल नंबर पर OTP भेज दिया गया है।
Bihar School Examination Board (BSEB) also conducts Inter vocational exam. BSEB inter vocational exam 2020 will be held in the month of February. BSEB inter vocational result 2020 will be declared in the month of April. BSEB also provides the students with an opportunity for compartmental exam and Re-evaluation - Rechecking. Students can check the results of Board Examination on www. livehindustan. com. Apart from this, the results can be checked on the official website of the Board.
बिहार स्कूल ऑफ एजुकेशन बोर्ड इंटर (12वीं) आर्ट्स वोकेशनल की परीक्षा आयोजित कराता है। हर वर्ष बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट्स वोकेश्नल की परीक्षाएं फरवरी माह में आयोजित करता है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति इंटर वोकेश्नल का रिजल्ट मार्च माह में जारी कर सकती है। बिहार बोर्ड स्टूडेंट्स को कंपार्टमेंटल एग्जाम व उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की रीचेकिंग कराने का भी अवसर देता है। विद्यार्थी अपना रिजल्ट www. livehindustan. com पर चेक कर सकेंगे। इसके अलावा विद्यार्थी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर भी अपना रिजल्ट चेक कर सकेंगे।
विद्यार्थियों के लिए जरूरी नोटः लाइवहिन्दुस्तानडॉटकॉम पर बोर्ड के नतीजे उपलब्ध कराने का मकसद विद्यार्थियों तक तुरंत और आसानी से जानकारी पहुंचाना है। नतीजों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए यहां हर संभव कोशिश की गई है। हालांकि, छात्रों को जरूरी सलाह दी जाती है कि वे अपने बोर्ड से मिलने वाली आधिकारिक हार्ड कॉपी से वेबसाइट पर उपलब्ध नतीजों की पुष्टि अवश्य कर लें। किसी भी तरह की त्रुटि के लिए वेबसाइट जिम्मेदार नहीं होगी।
| शायद आप ऐड ब्लॉकर का इस्तेमाल कर रहे हैं। पढ़ना जारी रखने के लिए ऐड ब्लॉकर को बंद करके पेज रिफ्रेश करें। मोबाइल नंबर पर OTP भेज दिया गया है। Bihar School Examination Board also conducts Inter vocational exam. BSEB inter vocational exam दो हज़ार बीस will be held in the month of February. BSEB inter vocational result दो हज़ार बीस will be declared in the month of April. BSEB also provides the students with an opportunity for compartmental exam and Re-evaluation - Rechecking. Students can check the results of Board Examination on www. livehindustan. com. Apart from this, the results can be checked on the official website of the Board. बिहार स्कूल ऑफ एजुकेशन बोर्ड इंटर आर्ट्स वोकेशनल की परीक्षा आयोजित कराता है। हर वर्ष बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट्स वोकेश्नल की परीक्षाएं फरवरी माह में आयोजित करता है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति इंटर वोकेश्नल का रिजल्ट मार्च माह में जारी कर सकती है। बिहार बोर्ड स्टूडेंट्स को कंपार्टमेंटल एग्जाम व उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की रीचेकिंग कराने का भी अवसर देता है। विद्यार्थी अपना रिजल्ट www. livehindustan. com पर चेक कर सकेंगे। इसके अलावा विद्यार्थी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर भी अपना रिजल्ट चेक कर सकेंगे। विद्यार्थियों के लिए जरूरी नोटः लाइवहिन्दुस्तानडॉटकॉम पर बोर्ड के नतीजे उपलब्ध कराने का मकसद विद्यार्थियों तक तुरंत और आसानी से जानकारी पहुंचाना है। नतीजों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए यहां हर संभव कोशिश की गई है। हालांकि, छात्रों को जरूरी सलाह दी जाती है कि वे अपने बोर्ड से मिलने वाली आधिकारिक हार्ड कॉपी से वेबसाइट पर उपलब्ध नतीजों की पुष्टि अवश्य कर लें। किसी भी तरह की त्रुटि के लिए वेबसाइट जिम्मेदार नहीं होगी। |
प्रधानमंत्री के विशेष विमान से, (भाषा)। भारत ने आज उम्मीद जताई की कि विश्व व्यापार संग"न (डब्ल्यूटीओ) की बाली बै"क में खाद्य सुरक्षा और व्यापार सुविधा से जुड़े मुद्दों का समाधान निकाल लिया जायेगा। डब्ल्यूटीओ की अगली मंत्रिस्तरीय बै"क दिसंबर में इंडोनेशिया में बाली में होगी। शर्मा ने कहा, डब्ल्यूटीओ के मंच पर खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर फिर से विचार करना जरूरी हो गया है और मैं बराबर यह उम्मीद बनाये हुए हूं कि बहुपक्षीय व्यापार से जुड़े सभी मुद्दों को हम हल कर लेंगे। शर्मा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ इंडोनेशिया से लौटते हुए विशेष विमान में संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। डब्ल्यूटीओ के नये महानिदेशक रोबर्तो एजेवेदो ने हाल में कहा था कि भारत का खाद्य सुरक्षा कानून सब्सिडी बढ़ाने वाला है और इस मुद्दे को सकारात्मक ढंग से हल करने की जरुरत है। भारत गरीबों को सस्ते दर से अनाज देने के अपने कार्यक्रम को डब्ल्यूटीओ में मान्यता दिलाने के लिए उत्सुक है और वह इस मुद्दे पर बाली में बातचीत कर सकता है। शर्मा ने कहा कि जी. 33 के देशों में यह प्रस्ताव पहले ही रख रखा है कि देशों को अपनी जनता की खाद्य सुरक्षा के लिए कानून बनाने की छूट होनी चाहिये। वाणिज्य मंत्री ने कहा, w हमने समान राय कायम करने और बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं। w उन्होंने कहा कि भारत व्यापार को और सुविधाजनक बनाने के मुद्दे पर वार्ता को तैयार हैं। भारत की खाद्य सुरक्षा कानून के तहत देश की 82 करोड़ आबादी को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो अनाज 1. . 3 रुपये किलो की सस्ती दर पर उपलब्ध कराने की कानूनी गारंटी प्रदान की गई है। भारतीय कंपनियों ने इंडोनेशिया में 15 अरब डालर का निवेश किया है तथा उनकी 15-16 अरब डालर और निवेश की योजना है। शर्मा ने कहा, s इंडोनिशया में भारत का निवेश 12-15 अरब डालर का है. . 15-16 अरब डालर का और निवेश प्रस्तावित है। इससे इंडोनेशिया में कुल भारतीय निवेश बढ़कर 26-31 अरब डालर हो जाएगा। शर्मा ने इंडोनेशिया की दो दिन की यात्रा से लौटते समय संवाददाताओं को बताया कि दोनों देशों ने फिल्म निर्माण सहित नये क्षेत्रों में सहयोग बढाने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा, हमने संयुक्त निर्माण के लिए मिलकर काम करने के साथ साथ हमारे फिल्म संस्थान व एनिमेशन स्टोडियो इंडोनेशियाई फर्में के लिए उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई में यह प्रतिनिधि मंडल इंडोनेशिया गया हुआ था। इसमें विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद भी शामिल थे। शर्मा ने कहा कि बहुब्रांड खुदरा बाजार में निवेश करने वाली विदेशी कंपनियें के लिए स्थानीय खरीद की शतो' में और ढील नहीं दी जाएगी। उन्होंने साथ ही विश्वास जताया कि इस क्षेत्र में विदेशी कंपनियां जरूर आयेंगी पर इस संबंध में बनायी गई नीति के तहत विदेशी निवेश आने में कुछ समय लग सकता है। उन्होंने कहा, एकल ब्रांड खुदरा बाजार में भी वास्तविक निवेश आने में करीब एक साल लग गया था। हमें विश्वास है कि बहुब्रांड खुदरा बाजार में भी विदेशी निवेशक आयेंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेशकों को आकषित करने के लिए उन्हें कुछ और रियायत दे सकती है तो उन्होंने कहा, किसी भी नीति को निवेश की दृष्टि से सफल होने में कुछ समय लगता ही है। wआनंद शर्मा ने कहा कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में हाल के संकट में भारत को सबसे ज्यादा धक्का लगा था लेकिन अब देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति `सबसे तेजी' से सुधर रही है शर्मा ने कहा, पिछले कुछ महीने में तमाम उ"ा पटक के बावजूद हमारे बाजारों की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ है। लग रहा था कि हम सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं पर हमने अपनी स्थिति को, चाहे वह पूंजी बाजार हो या विदेशी विनिमय बाजार हो, सबसे तेजी के साथ सुधारा है। उन्होंने कहा कि भारत की स्थिति में सबसे तेज सुधार हुआ है पर इसकी चर्चा नहीं की जा रही है। गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व वैश्विक बाजार के अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी डालर के मुकाबले रुपया लुढ़ककर 70 के करीब पहुंच गया था। इस दौरान पूंजी बाजार में भी भारी उ"ा पटक चल रही थी। रुपये की दर अब 60 रुपये प्रति डालर के आसपास आ गई है और पूंजी बाजार भी कमोबेश बेहतर स्थिति में है। इस दौरान सरकार ने अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कई उपाय लागू किये हैं। शर्मा ने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह भी मजबूत है। पिछले केवल चार साल में 174 अरब डालर एफडीआई आया है जबकि 2000 से अब तक कुल एफडीआई निवेश 296 अरब डालर का हुआ है। उन्होंने कहा कि चालू खाते की स्थिति बेहतर होगी। यह पूछे जाने पर कि क्या उद्योगों के लिए कर्ज सस्ता किया जायेगा, उन्होंने कहा कि यह कई बातों पर निर्भर करता है और इसका फैसला रिजर्व बैंक को करना है। लेकिन उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे प्राथमिक क्षेत्रों की सूची का विस्तार कर रही है जिन्हें ब्याज सहायता दी जाती है। उन्होंने कहा कि इस तरह से ब्याज की समस्या का समाधान दूसरे ढंग से निकाला जा सकता है। शर्मा ने कहा कि महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए धन की कमी नहीं है। औद्योगिक वृद्धि के ताजा आंकड़ों के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि धारणा में सुधार और विनिर्माण क्षेत्र के पुनः जोर पकड़ने में थोड़ा समय लग सकता है। गौरतलब है कि कल जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त में औद्योगिक वृद्धि दर घटकर मात्र 0. 6 प्रतिशत रह गई।
| प्रधानमंत्री के विशेष विमान से, । भारत ने आज उम्मीद जताई की कि विश्व व्यापार संग"न की बाली बै"क में खाद्य सुरक्षा और व्यापार सुविधा से जुड़े मुद्दों का समाधान निकाल लिया जायेगा। डब्ल्यूटीओ की अगली मंत्रिस्तरीय बै"क दिसंबर में इंडोनेशिया में बाली में होगी। शर्मा ने कहा, डब्ल्यूटीओ के मंच पर खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर फिर से विचार करना जरूरी हो गया है और मैं बराबर यह उम्मीद बनाये हुए हूं कि बहुपक्षीय व्यापार से जुड़े सभी मुद्दों को हम हल कर लेंगे। शर्मा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ इंडोनेशिया से लौटते हुए विशेष विमान में संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। डब्ल्यूटीओ के नये महानिदेशक रोबर्तो एजेवेदो ने हाल में कहा था कि भारत का खाद्य सुरक्षा कानून सब्सिडी बढ़ाने वाला है और इस मुद्दे को सकारात्मक ढंग से हल करने की जरुरत है। भारत गरीबों को सस्ते दर से अनाज देने के अपने कार्यक्रम को डब्ल्यूटीओ में मान्यता दिलाने के लिए उत्सुक है और वह इस मुद्दे पर बाली में बातचीत कर सकता है। शर्मा ने कहा कि जी. तैंतीस के देशों में यह प्रस्ताव पहले ही रख रखा है कि देशों को अपनी जनता की खाद्य सुरक्षा के लिए कानून बनाने की छूट होनी चाहिये। वाणिज्य मंत्री ने कहा, w हमने समान राय कायम करने और बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं। w उन्होंने कहा कि भारत व्यापार को और सुविधाजनक बनाने के मुद्दे पर वार्ता को तैयार हैं। भारत की खाद्य सुरक्षा कानून के तहत देश की बयासी करोड़ आबादी को प्रति व्यक्ति प्रति माह पाँच किलो अनाज एक. . तीन रुपयापये किलो की सस्ती दर पर उपलब्ध कराने की कानूनी गारंटी प्रदान की गई है। भारतीय कंपनियों ने इंडोनेशिया में पंद्रह अरब डालर का निवेश किया है तथा उनकी पंद्रह-सोलह अरब डालर और निवेश की योजना है। शर्मा ने कहा, s इंडोनिशया में भारत का निवेश बारह-पंद्रह अरब डालर का है. . पंद्रह-सोलह अरब डालर का और निवेश प्रस्तावित है। इससे इंडोनेशिया में कुल भारतीय निवेश बढ़कर छब्बीस-इकतीस अरब डालर हो जाएगा। शर्मा ने इंडोनेशिया की दो दिन की यात्रा से लौटते समय संवाददाताओं को बताया कि दोनों देशों ने फिल्म निर्माण सहित नये क्षेत्रों में सहयोग बढाने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा, हमने संयुक्त निर्माण के लिए मिलकर काम करने के साथ साथ हमारे फिल्म संस्थान व एनिमेशन स्टोडियो इंडोनेशियाई फर्में के लिए उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुवाई में यह प्रतिनिधि मंडल इंडोनेशिया गया हुआ था। इसमें विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद भी शामिल थे। शर्मा ने कहा कि बहुब्रांड खुदरा बाजार में निवेश करने वाली विदेशी कंपनियें के लिए स्थानीय खरीद की शतो' में और ढील नहीं दी जाएगी। उन्होंने साथ ही विश्वास जताया कि इस क्षेत्र में विदेशी कंपनियां जरूर आयेंगी पर इस संबंध में बनायी गई नीति के तहत विदेशी निवेश आने में कुछ समय लग सकता है। उन्होंने कहा, एकल ब्रांड खुदरा बाजार में भी वास्तविक निवेश आने में करीब एक साल लग गया था। हमें विश्वास है कि बहुब्रांड खुदरा बाजार में भी विदेशी निवेशक आयेंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार बहुब्रांड खुदरा क्षेत्र में विदेशी निवेशकों को आकषित करने के लिए उन्हें कुछ और रियायत दे सकती है तो उन्होंने कहा, किसी भी नीति को निवेश की दृष्टि से सफल होने में कुछ समय लगता ही है। wआनंद शर्मा ने कहा कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में हाल के संकट में भारत को सबसे ज्यादा धक्का लगा था लेकिन अब देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति `सबसे तेजी' से सुधर रही है शर्मा ने कहा, पिछले कुछ महीने में तमाम उ"ा पटक के बावजूद हमारे बाजारों की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ है। लग रहा था कि हम सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं पर हमने अपनी स्थिति को, चाहे वह पूंजी बाजार हो या विदेशी विनिमय बाजार हो, सबसे तेजी के साथ सुधारा है। उन्होंने कहा कि भारत की स्थिति में सबसे तेज सुधार हुआ है पर इसकी चर्चा नहीं की जा रही है। गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व वैश्विक बाजार के अनिश्चितताओं के बीच अमेरिकी डालर के मुकाबले रुपया लुढ़ककर सत्तर के करीब पहुंच गया था। इस दौरान पूंजी बाजार में भी भारी उ"ा पटक चल रही थी। रुपये की दर अब साठ रुपयापये प्रति डालर के आसपास आ गई है और पूंजी बाजार भी कमोबेश बेहतर स्थिति में है। इस दौरान सरकार ने अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कई उपाय लागू किये हैं। शर्मा ने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह भी मजबूत है। पिछले केवल चार साल में एक सौ चौहत्तर अरब डालर एफडीआई आया है जबकि दो हज़ार से अब तक कुल एफडीआई निवेश दो सौ छियानवे अरब डालर का हुआ है। उन्होंने कहा कि चालू खाते की स्थिति बेहतर होगी। यह पूछे जाने पर कि क्या उद्योगों के लिए कर्ज सस्ता किया जायेगा, उन्होंने कहा कि यह कई बातों पर निर्भर करता है और इसका फैसला रिजर्व बैंक को करना है। लेकिन उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे प्राथमिक क्षेत्रों की सूची का विस्तार कर रही है जिन्हें ब्याज सहायता दी जाती है। उन्होंने कहा कि इस तरह से ब्याज की समस्या का समाधान दूसरे ढंग से निकाला जा सकता है। शर्मा ने कहा कि महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए धन की कमी नहीं है। औद्योगिक वृद्धि के ताजा आंकड़ों के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि धारणा में सुधार और विनिर्माण क्षेत्र के पुनः जोर पकड़ने में थोड़ा समय लग सकता है। गौरतलब है कि कल जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार अगस्त में औद्योगिक वृद्धि दर घटकर मात्र शून्य. छः प्रतिशत रह गई। |
सुजॉय,इस समय तेजी से अपने समान समेट रहा था। वह जल्दी से अपने सरकारी मकान को खाली कर अपने घर नादिया लौट जाना चाहता था। यहां,उसकी बड़ी पैतृक संपत्ति थी। पिता और भाई का बड़ा कपड़े का कारोबार था। पुलिस में भर्ती वह अपने सोच को साकार रूप देने के लिए हुआ था की न्याय और अपराध में जीत हमेशा न्याय की होती है। इसी समय,दरवाजे पर दस्तक की आवाज सुनकर वह चौका। आगे बढ़ कर दरवाजा खोला तो उसने सामने एसपी अजित मेनन को खड़ा पा कर हड़बड़ा गया। उसने जल्दी से सेल्यूट मारते हुए पूछा - स सर,आप यहां? हाँ मैं यहां। तुम्हारे घर। कमरे के अंदर एक नजर डालते हुए एसपी ने कहा - तो,वापस जाने की तैयारी चल रही है। ठीक है। लेकिन,तुम्हारी ट्रेन तो कल रात की है ना घोष। सुजॉय ने कहा - य...यस सर। बिना उसकी ओर देखे एसपी ने कहा-तो चलो आज, आखिरी बार,मेरे साथ भोजन करो। मेरी ओर से फेयर वेल समझो। ले लेकिन सर। सुजॉय ने कहने की कोशिश की। लेकिन उसकी बात को काटते हुए एसपी मेनन ने कहा- कोई लेकिन नहीं,मैं नीचे गाड़ी में तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ। चंद मिनटों में सुजॉय तैयार हो कर नीचे आया। बाहर एसपी मेनन अपने सफेद रंग के क्रेटा कार में बैठे हुए थे। एसपी ने हाथ आगे बढ़ा कर,कार का दरवाजा खोलते हुए कहा - आओ सुजॉय,बैठो। सुजॉय अनिर्णय की स्थिति में खड़ा रहा। अरे! डोंट वरी। अब तुम मेरे मातहत नहीं हो। इसलिए,आराम से बैठो। कम आन। एसपी के कहने पर,सुजॉय,आगे बढ़ कर कार पर सवार हो गया। दरवाजा बंद होते ही,ड्राइवर ने कार आगे बढ़ा दी। हल्की फुल्की बातें करते हुए,लगभग 1 घण्टे की सफर के बाद कार रुकी। एसपी मेनन के उतरते ही सुजॉय दूसरी ओर से कार से बाहर निकला। सामने केशलापुर थाना था। एसपी मेनन को आगे बढ़ते हुए देख,सुजॉय भी उनके पीछे चल पड़ा। थाना के प्रवेश द्वार पार कर,जैसे ही आगे बढ़ा,एक वृद्ध महिला और उसके साथ एक जवान महिला को एसपी के सामने बिलखते हुए पाया। वृद्ध महिला कह रही थी - साहब,मेरी बच्ची ने किसी का क्या बिगाड़ा था? उसकी हाथों में मेहंदी लगे हुए एक सप्ताह ही तो हुए थे। वह तो अपने ससुराल वालों से ठीक से मिल भी नहीं पाई थी। फिर,भला उसका किसी से क्या दुश्मनी हो सकती है? मेरी बेटी को किसने मारा साहब? क्यो मारा? एसपी ने तसल्ली भरे स्वर में कहा - चिंता मत कीजिए माता जी। आपको,सारे सवाल के जवाब मिलेगा और आपकी बेटी को न्याय भी। हत्यारा जो कोई भी हो,वो यहां,उस सलाखों के पीछे होगा। थाने के बैरक की ओर इशारा करते हुए एसपी ने कहा। इसी समय,थाना प्रभारी विजय प्रताप आ पहुँचा। उसने एसपी को सैल्यूट मारा और एलर्ट हो कर खड़ा हो गया। एसपी ने सुजॉय को आने का इशारा करते हुए,थाना प्रभारी के चेम्बर की ओर बढ़ गया। एसपी के पीछे जा रहा रहा सुजॉय,बुरी तरह से सिसक सिसक कर रो रही,वृद्ध महिला के पास ठिठका। उसने साथ मे खड़ी हुई महिला से पूछा - मृतिका से आपका क्या सम्बन्ध था? फफक फफक कर रोते हुए उस महिला ने कहा - मेरी छोटी बहन थी सर। सिर्फ 20 साल की थी। पढाई पूरी कर वकील बनना चाहती थी। लेकिन,हमने उस पर दबाव डाल कर उसकी शादी करा दी। और....और देखिए क्या हो गया? महिला की बात सुन कर,वृद्धा जोर जोर से रोने लगी। सुजॉय ने उन्हें सम्हाल कर,बेंच में बैठाते हुए कहा - क्या नाम था,आपकी बेटी का? सुजाता,सुजाता मेहर। बगल में खड़ी हुई महिला ने जवाब दिया और मैं उसकी बड़ी बहन माया। सुजॉय ने कहा - सुजाता को न्याय जरूर मिलेगा मां,जरूर मिलेगा। इतना कहते हुए,सुजॉय उठ कर,एसपी की ओर आगे बढ़ा। कमरे में अंदर घुसते ही,रिवालविंग चेयर में बैठे हुए एसपी मेनन ने कहा - अरे! आओ सुजॉय,कहाँ रुक गए थे? सामने रखी हुई कुर्सी की ओर इशारा करते हुए कहा - बैठे,बस दो मिनट,मैं जरा केस की प्रोग्रेस देख लूं,फिर चलते हैं। फिर एसपी ने सामने खड़े हुए इंस्पेक्टर विजय से कहा - हाँ तो विजय,दुल्हन के हत्यारे के मामले में अब तक प्रोग्रेस शून्य है। मृतको की पहचान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अलावा तुम्हारे पास कुछ नहीं है। विजय प्रताप ने हकलाते हुए कहा - य....यस सर। एसपी ने भड़कते हुए कहा - क्या यस सर? मुझे प्रोग्रेस चाहिए,विजय प्रताप प्रोग्रेस। बाहर देखो जा कर,कैसे एक यंग लेडी की बूढ़ी मां रो रही है। इंसाफ मांग रही है,इंसाफ। हम उसे क्या दिखाएंगे? ये ....ये पोस्टमार्टम रिपोर्ट? ये पंचनामा की कापियां। नहीं,ऐसा नहीं चलेगा। मुझे हत्यारा चाहिए,किसी भी कीमत पर। तुम्हे 72 घण्टे का समय देता हूँ,हत्यारे को गिरफ्तार करो,नहीं तो तुम्हारा ट्रांसफर नहीं होगा,सीधे सस्पेंड कर दूंगा। अंडर स्टैंड। विजय ने सम्मान पूर्वक कहा - यस सर। इस बीच शांत बैठे हुए सुजॉय ने कहा - आपकी अनुमति हो तो मैं फाइल देख सकता हूँ सर। एसपी ने फाइल उसकी ओर बढाते हुए कहा - श्योर। फाइल लेकर,सुजॉय,उसके पन्ने पलटते हुए,गौर से पढ़ने लगा। फाइल में लगे हुए फोटोग्राफ्स को टेबल में फैला कर सुजॉय एक एक फोटो को देख रहा था। एसपी मेनन की नजरें,सुजॉय पर टिकी हुई थी। इसी बीच,थाना के बाहर जोर जोर से शोर होने लगा। एसपी ने विजय प्रताप को कहा - जाओ,जाकर देखो,क्या मामला है? एसपी का आदेश सुनते ही ,विजय तेजी से बाहर चला गया। सुजॉय को फोटो में उलझा हुआ देख एसपी ने उसे टोकते हुए कहा - कुछ मिला क्या सुजॉय? सुजॉय ने बिना सिर उठाए ही कहा - यस सर। कत्ल किसी भारी धारदार हथियार से किया गया है। हत्यारे ने एक ही झटके में सिर को धड़ से अलग कर दिया है। मेरा अनुमान है कि हत्यारा खब्बू (उल्टे हाथ का प्रयोग करने वाला) है। एसपी ने कहा - ये तुमने कैसे जाना? सर,मृतको के गर्दन पर जो कटने का निशान है,वह उल्टा है।घाव को देख पता चल रहा है कि हत्या के समय सभी मृतिका होश में नही थीं। उन्हें बेहोशी की हालत में मारा गया है। हत्या करने से पहले किसी प्रकार के सेक्सुअल एसाल्ट (दुष्कर्म) नहीं किया गया है। हालांकि सभी को अपहरण के बाद तीन से चार दिन तक बंधक बना कर जरूर रखा गया है। कुछ और खास है क्या,इन तस्वीरों में? एसपी ने पूछा - जी हां,सर,मृतिको के होंठ में एक ही रंग की लिपिस्टिक लगी हुई है। नाखूनों के नेल पॉलिश के रंग भी समान है। पैरों के पायल और करधनी सुनहरे रंग की है। इस बीच,बाहर का शोर बढ़ने लगा। अंदर कमरे तक पुलिस प्रशासन हाय हाय की आवाजें आने लगीं। इंस्पेक्टर विजय प्रताप ने आ कर कहा - सर,विधायक गोरखनाथ और नगर प्रमुख देवेंद्र बहादुर,भीड़ लेकर आएं हुए हैं। वे आपसे बात करना चाहते हैं। लेकिन अंदर आने के लिए तैयार नहीं हैं। आपको बाहर बुला रहे हैं। चलों,बाहर चल कर देखतें हैं। कह कर एसपी मेनन उठे और कमरे से बाहर निकल गए। उसके पीछे पीछे विजय भी लपका। लेकिन सुजॉय,एक बार फिर फाईल और फोटो में व्यस्त हो गया। बाहर,एसपी मेनन ने नारेबाजी कर रहे लोगो को शांत कराया। विधायक गोरखनाथ ने कहा - आखिर कब पकड़ा जाएगा हत्यारा? केशलापुर को कब इस आतंक से मुक्ति मिलेगी एसपी साहब? चार चार नव विवाहित स्त्रियों की हत्या हो चुकी है। लोग डर से दिन में घर से बाहर निकलने में डर रहे हैं। आखिर कब तक यह दहशत का राज कायम रहेगा? क्या कर रही है,पुलिस? एसपी ने कहा - पुलिस अपना काम कर रही है,विधायक साहब। मैंने यहां के थाना इंचार्ज को 72 घण्टे का अल्टीमेटम दिया है,हत्यारे को गिरफ्तार करने के लिए। इस बीच नगर प्रधान देवेंद्र ने कहा - लेकिन,इन 72 घण्टो में और कोई मासूम नव ब्याहता की हत्या नहीं होगी इसकी क्या गारंटी है? अगर,72 घण्टे में ही हत्यारा पकड़ा जा सक्तक है तो उसे अब तक क्यो नहीं पकड़ा गया है? हमे बहलाने की कोशिश न करें। इस बीच,सुजॉय ने बाहर आकर कहा - 72 नहीं 48 घण्टे में पकड़ा जाएगा हत्यारा। और,आप लोग चिंता न करें। इस बीच हत्यारा कुछ नहीं करेगा। वह एक खास दिन ही हत्या करता है और इन दो दिनों के अंदर वह खास दिन नहीं है। आप सब इत्मीनान रखे,हत्यरा दो दिन में ईसी थाने के लॉक अप में नजर आएगा। विधायक गोरखनाथ ने सुजॉय की ओर देखते हुए कहा आप कौन? जवाब में एसपी की आवाज गूंजी- पुलिस विभाग का होनहार डीएसपी सुजॉय घोष। क्राइम ब्रांच का अफसर और इस केस की एसआईटी का हेड। आप चिंता न कीजिए विधायक महोदय,हत्यारा,अब चंद घण्टो का मेहमान है। उसकी उल्टी गिनती शुरू हो गई है।
| सुजॉय,इस समय तेजी से अपने समान समेट रहा था। वह जल्दी से अपने सरकारी मकान को खाली कर अपने घर नादिया लौट जाना चाहता था। यहां,उसकी बड़ी पैतृक संपत्ति थी। पिता और भाई का बड़ा कपड़े का कारोबार था। पुलिस में भर्ती वह अपने सोच को साकार रूप देने के लिए हुआ था की न्याय और अपराध में जीत हमेशा न्याय की होती है। इसी समय,दरवाजे पर दस्तक की आवाज सुनकर वह चौका। आगे बढ़ कर दरवाजा खोला तो उसने सामने एसपी अजित मेनन को खड़ा पा कर हड़बड़ा गया। उसने जल्दी से सेल्यूट मारते हुए पूछा - स सर,आप यहां? हाँ मैं यहां। तुम्हारे घर। कमरे के अंदर एक नजर डालते हुए एसपी ने कहा - तो,वापस जाने की तैयारी चल रही है। ठीक है। लेकिन,तुम्हारी ट्रेन तो कल रात की है ना घोष। सुजॉय ने कहा - य...यस सर। बिना उसकी ओर देखे एसपी ने कहा-तो चलो आज, आखिरी बार,मेरे साथ भोजन करो। मेरी ओर से फेयर वेल समझो। ले लेकिन सर। सुजॉय ने कहने की कोशिश की। लेकिन उसकी बात को काटते हुए एसपी मेनन ने कहा- कोई लेकिन नहीं,मैं नीचे गाड़ी में तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ। चंद मिनटों में सुजॉय तैयार हो कर नीचे आया। बाहर एसपी मेनन अपने सफेद रंग के क्रेटा कार में बैठे हुए थे। एसपी ने हाथ आगे बढ़ा कर,कार का दरवाजा खोलते हुए कहा - आओ सुजॉय,बैठो। सुजॉय अनिर्णय की स्थिति में खड़ा रहा। अरे! डोंट वरी। अब तुम मेरे मातहत नहीं हो। इसलिए,आराम से बैठो। कम आन। एसपी के कहने पर,सुजॉय,आगे बढ़ कर कार पर सवार हो गया। दरवाजा बंद होते ही,ड्राइवर ने कार आगे बढ़ा दी। हल्की फुल्की बातें करते हुए,लगभग एक घण्टे की सफर के बाद कार रुकी। एसपी मेनन के उतरते ही सुजॉय दूसरी ओर से कार से बाहर निकला। सामने केशलापुर थाना था। एसपी मेनन को आगे बढ़ते हुए देख,सुजॉय भी उनके पीछे चल पड़ा। थाना के प्रवेश द्वार पार कर,जैसे ही आगे बढ़ा,एक वृद्ध महिला और उसके साथ एक जवान महिला को एसपी के सामने बिलखते हुए पाया। वृद्ध महिला कह रही थी - साहब,मेरी बच्ची ने किसी का क्या बिगाड़ा था? उसकी हाथों में मेहंदी लगे हुए एक सप्ताह ही तो हुए थे। वह तो अपने ससुराल वालों से ठीक से मिल भी नहीं पाई थी। फिर,भला उसका किसी से क्या दुश्मनी हो सकती है? मेरी बेटी को किसने मारा साहब? क्यो मारा? एसपी ने तसल्ली भरे स्वर में कहा - चिंता मत कीजिए माता जी। आपको,सारे सवाल के जवाब मिलेगा और आपकी बेटी को न्याय भी। हत्यारा जो कोई भी हो,वो यहां,उस सलाखों के पीछे होगा। थाने के बैरक की ओर इशारा करते हुए एसपी ने कहा। इसी समय,थाना प्रभारी विजय प्रताप आ पहुँचा। उसने एसपी को सैल्यूट मारा और एलर्ट हो कर खड़ा हो गया। एसपी ने सुजॉय को आने का इशारा करते हुए,थाना प्रभारी के चेम्बर की ओर बढ़ गया। एसपी के पीछे जा रहा रहा सुजॉय,बुरी तरह से सिसक सिसक कर रो रही,वृद्ध महिला के पास ठिठका। उसने साथ मे खड़ी हुई महिला से पूछा - मृतिका से आपका क्या सम्बन्ध था? फफक फफक कर रोते हुए उस महिला ने कहा - मेरी छोटी बहन थी सर। सिर्फ बीस साल की थी। पढाई पूरी कर वकील बनना चाहती थी। लेकिन,हमने उस पर दबाव डाल कर उसकी शादी करा दी। और....और देखिए क्या हो गया? महिला की बात सुन कर,वृद्धा जोर जोर से रोने लगी। सुजॉय ने उन्हें सम्हाल कर,बेंच में बैठाते हुए कहा - क्या नाम था,आपकी बेटी का? सुजाता,सुजाता मेहर। बगल में खड़ी हुई महिला ने जवाब दिया और मैं उसकी बड़ी बहन माया। सुजॉय ने कहा - सुजाता को न्याय जरूर मिलेगा मां,जरूर मिलेगा। इतना कहते हुए,सुजॉय उठ कर,एसपी की ओर आगे बढ़ा। कमरे में अंदर घुसते ही,रिवालविंग चेयर में बैठे हुए एसपी मेनन ने कहा - अरे! आओ सुजॉय,कहाँ रुक गए थे? सामने रखी हुई कुर्सी की ओर इशारा करते हुए कहा - बैठे,बस दो मिनट,मैं जरा केस की प्रोग्रेस देख लूं,फिर चलते हैं। फिर एसपी ने सामने खड़े हुए इंस्पेक्टर विजय से कहा - हाँ तो विजय,दुल्हन के हत्यारे के मामले में अब तक प्रोग्रेस शून्य है। मृतको की पहचान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अलावा तुम्हारे पास कुछ नहीं है। विजय प्रताप ने हकलाते हुए कहा - य....यस सर। एसपी ने भड़कते हुए कहा - क्या यस सर? मुझे प्रोग्रेस चाहिए,विजय प्रताप प्रोग्रेस। बाहर देखो जा कर,कैसे एक यंग लेडी की बूढ़ी मां रो रही है। इंसाफ मांग रही है,इंसाफ। हम उसे क्या दिखाएंगे? ये ....ये पोस्टमार्टम रिपोर्ट? ये पंचनामा की कापियां। नहीं,ऐसा नहीं चलेगा। मुझे हत्यारा चाहिए,किसी भी कीमत पर। तुम्हे बहत्तर घण्टे का समय देता हूँ,हत्यारे को गिरफ्तार करो,नहीं तो तुम्हारा ट्रांसफर नहीं होगा,सीधे सस्पेंड कर दूंगा। अंडर स्टैंड। विजय ने सम्मान पूर्वक कहा - यस सर। इस बीच शांत बैठे हुए सुजॉय ने कहा - आपकी अनुमति हो तो मैं फाइल देख सकता हूँ सर। एसपी ने फाइल उसकी ओर बढाते हुए कहा - श्योर। फाइल लेकर,सुजॉय,उसके पन्ने पलटते हुए,गौर से पढ़ने लगा। फाइल में लगे हुए फोटोग्राफ्स को टेबल में फैला कर सुजॉय एक एक फोटो को देख रहा था। एसपी मेनन की नजरें,सुजॉय पर टिकी हुई थी। इसी बीच,थाना के बाहर जोर जोर से शोर होने लगा। एसपी ने विजय प्रताप को कहा - जाओ,जाकर देखो,क्या मामला है? एसपी का आदेश सुनते ही ,विजय तेजी से बाहर चला गया। सुजॉय को फोटो में उलझा हुआ देख एसपी ने उसे टोकते हुए कहा - कुछ मिला क्या सुजॉय? सुजॉय ने बिना सिर उठाए ही कहा - यस सर। कत्ल किसी भारी धारदार हथियार से किया गया है। हत्यारे ने एक ही झटके में सिर को धड़ से अलग कर दिया है। मेरा अनुमान है कि हत्यारा खब्बू है। एसपी ने कहा - ये तुमने कैसे जाना? सर,मृतको के गर्दन पर जो कटने का निशान है,वह उल्टा है।घाव को देख पता चल रहा है कि हत्या के समय सभी मृतिका होश में नही थीं। उन्हें बेहोशी की हालत में मारा गया है। हत्या करने से पहले किसी प्रकार के सेक्सुअल एसाल्ट नहीं किया गया है। हालांकि सभी को अपहरण के बाद तीन से चार दिन तक बंधक बना कर जरूर रखा गया है। कुछ और खास है क्या,इन तस्वीरों में? एसपी ने पूछा - जी हां,सर,मृतिको के होंठ में एक ही रंग की लिपिस्टिक लगी हुई है। नाखूनों के नेल पॉलिश के रंग भी समान है। पैरों के पायल और करधनी सुनहरे रंग की है। इस बीच,बाहर का शोर बढ़ने लगा। अंदर कमरे तक पुलिस प्रशासन हाय हाय की आवाजें आने लगीं। इंस्पेक्टर विजय प्रताप ने आ कर कहा - सर,विधायक गोरखनाथ और नगर प्रमुख देवेंद्र बहादुर,भीड़ लेकर आएं हुए हैं। वे आपसे बात करना चाहते हैं। लेकिन अंदर आने के लिए तैयार नहीं हैं। आपको बाहर बुला रहे हैं। चलों,बाहर चल कर देखतें हैं। कह कर एसपी मेनन उठे और कमरे से बाहर निकल गए। उसके पीछे पीछे विजय भी लपका। लेकिन सुजॉय,एक बार फिर फाईल और फोटो में व्यस्त हो गया। बाहर,एसपी मेनन ने नारेबाजी कर रहे लोगो को शांत कराया। विधायक गोरखनाथ ने कहा - आखिर कब पकड़ा जाएगा हत्यारा? केशलापुर को कब इस आतंक से मुक्ति मिलेगी एसपी साहब? चार चार नव विवाहित स्त्रियों की हत्या हो चुकी है। लोग डर से दिन में घर से बाहर निकलने में डर रहे हैं। आखिर कब तक यह दहशत का राज कायम रहेगा? क्या कर रही है,पुलिस? एसपी ने कहा - पुलिस अपना काम कर रही है,विधायक साहब। मैंने यहां के थाना इंचार्ज को बहत्तर घण्टे का अल्टीमेटम दिया है,हत्यारे को गिरफ्तार करने के लिए। इस बीच नगर प्रधान देवेंद्र ने कहा - लेकिन,इन बहत्तर घण्टो में और कोई मासूम नव ब्याहता की हत्या नहीं होगी इसकी क्या गारंटी है? अगर,बहत्तर घण्टे में ही हत्यारा पकड़ा जा सक्तक है तो उसे अब तक क्यो नहीं पकड़ा गया है? हमे बहलाने की कोशिश न करें। इस बीच,सुजॉय ने बाहर आकर कहा - बहत्तर नहीं अड़तालीस घण्टे में पकड़ा जाएगा हत्यारा। और,आप लोग चिंता न करें। इस बीच हत्यारा कुछ नहीं करेगा। वह एक खास दिन ही हत्या करता है और इन दो दिनों के अंदर वह खास दिन नहीं है। आप सब इत्मीनान रखे,हत्यरा दो दिन में ईसी थाने के लॉक अप में नजर आएगा। विधायक गोरखनाथ ने सुजॉय की ओर देखते हुए कहा आप कौन? जवाब में एसपी की आवाज गूंजी- पुलिस विभाग का होनहार डीएसपी सुजॉय घोष। क्राइम ब्रांच का अफसर और इस केस की एसआईटी का हेड। आप चिंता न कीजिए विधायक महोदय,हत्यारा,अब चंद घण्टो का मेहमान है। उसकी उल्टी गिनती शुरू हो गई है। |
फरीदकोट,18 मई (वार्ता) आयकर विभाग ने गुरुवार को शराब कारोबारी और फरीदकोट से शिरोमणि अकाली दल के पूर्व विधायक दीप मल्होत्रा के आवास एवं कार्यालय पर छापे मारे।
सूत्रों के अनुसार छापे सुबह साढ़े सात बजे के करीब शुरू हुए छापों का आधिकारिक तौर पर कोई विवरण नहीं दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि पिछले साल अक्टूबर में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब में श्री मल्होत्रा से संबंधित दो ठिकानों पर छापे मारे थे, जो कार्रवाई ईडी की दिल्ली सरकार की आबकारी नीति में मनी लांड्रिंग जांच से संबंधित थी। ईडी ने दिल्ली शराब घोटाले में श्री मल्होत्रा के पुत्र गौतम को भी कुछ महीने पहले गिरफ्तार किया था।
| फरीदकोट,अट्ठारह मई आयकर विभाग ने गुरुवार को शराब कारोबारी और फरीदकोट से शिरोमणि अकाली दल के पूर्व विधायक दीप मल्होत्रा के आवास एवं कार्यालय पर छापे मारे। सूत्रों के अनुसार छापे सुबह साढ़े सात बजे के करीब शुरू हुए छापों का आधिकारिक तौर पर कोई विवरण नहीं दिया गया है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल अक्टूबर में प्रवर्तन निदेशालय ने पंजाब में श्री मल्होत्रा से संबंधित दो ठिकानों पर छापे मारे थे, जो कार्रवाई ईडी की दिल्ली सरकार की आबकारी नीति में मनी लांड्रिंग जांच से संबंधित थी। ईडी ने दिल्ली शराब घोटाले में श्री मल्होत्रा के पुत्र गौतम को भी कुछ महीने पहले गिरफ्तार किया था। |
नई दिल्ली. पहले से ही मंदी की मार झेल रहे भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में पिछले वित्त वर्ष में संस्थागत निवेश भी कम रहा है। अमेरिका की प्रॉपर्टी कंसल्टेंट फर्म वेस्टियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020 में भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश 12 फीसदी घटकर 4. 48 बिलियन डॉलर यानी करीब 33,800 करोड़ रुपए रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, धीमी आर्थिक ग्रोथ और कोरोना महामारी के कारण पैदा हुई अनिश्चितता के कारण निवेश में कमी आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बीते वित्त वर्ष की अंतिम और चौथी तिमाही में रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश में 44 फीसदी की गिरावट रही है। इस अवधि में केवल 727 मिलियन डॉलर यानी 5490 करोड़ रुपए का निवेश मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019-20 में पिछले पांच सालों के मुकाबले सबसे कम मात्रा में संस्थागत निवेश मिला है। वेस्टियन के मुताबिक, पूरे साल सख्त आर्थिक हालात और चौथी तिमाही में कोरोना संकट सामने आने के कारण यह गिरावट आई है।
वित्त वर्ष 2020 में कुल निवेश में से कमर्शियल सेगमेंट में 81 फीसदी यानी 3636 मिलियन डॉलर का निवेश मिला है। इसी प्रकार से रेजिडेंशियल सेगमेंट को 13 फीसदी यानी 565 मिलियन डॉलर का संस्थागत निवेश मिला है। यदि शहरों के अनुसार बात करें तो पिछले साल मुंबई, बेंगलुरु और पुणे को कुल निवेश का 90 फीसदी हिस्सा मिला है। इसमें मुंबई को 42 फीसदी और बेंगलुरु को कुल निवेश का 37 फीसदी हिस्सा मिला है।
निवेश करने वाले देशों की बात करें तो इसमें अमेरिका सबसे आगे है। इसके बाद सिंगापुर, हॉन्गकॉन्ग और जापान का नंबर आता है। कुल संस्थागत निवेश में अमेरिका के निवेशकों की हिस्सेदारी 67 फीसदी है। कंसल्टेंट फर्म वेस्टियन का कहना है कि कोविड-19 के रियल एस्टेट सेक्टर प्रभाव को देखते हुए कमर्शियल सेगमेंट को उबरने में 2-3 तिमाही का समय लग सकता है। वहीं रेजिडेंशियल सेगमेंट को उबरने में लंबा समय लग सकता है।
| नई दिल्ली. पहले से ही मंदी की मार झेल रहे भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में पिछले वित्त वर्ष में संस्थागत निवेश भी कम रहा है। अमेरिका की प्रॉपर्टी कंसल्टेंट फर्म वेस्टियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष दो हज़ार बीस में भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश बारह फीसदी घटकर चार. अड़तालीस बिलियन डॉलर यानी करीब तैंतीस,आठ सौ करोड़ रुपए रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, धीमी आर्थिक ग्रोथ और कोरोना महामारी के कारण पैदा हुई अनिश्चितता के कारण निवेश में कमी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, बीते वित्त वर्ष की अंतिम और चौथी तिमाही में रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेश में चौंतालीस फीसदी की गिरावट रही है। इस अवधि में केवल सात सौ सत्ताईस मिलियन डॉलर यानी पाँच हज़ार चार सौ नब्बे करोड़ रुपए का निवेश मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस में पिछले पांच सालों के मुकाबले सबसे कम मात्रा में संस्थागत निवेश मिला है। वेस्टियन के मुताबिक, पूरे साल सख्त आर्थिक हालात और चौथी तिमाही में कोरोना संकट सामने आने के कारण यह गिरावट आई है। वित्त वर्ष दो हज़ार बीस में कुल निवेश में से कमर्शियल सेगमेंट में इक्यासी फीसदी यानी तीन हज़ार छः सौ छत्तीस मिलियन डॉलर का निवेश मिला है। इसी प्रकार से रेजिडेंशियल सेगमेंट को तेरह फीसदी यानी पाँच सौ पैंसठ मिलियन डॉलर का संस्थागत निवेश मिला है। यदि शहरों के अनुसार बात करें तो पिछले साल मुंबई, बेंगलुरु और पुणे को कुल निवेश का नब्बे फीसदी हिस्सा मिला है। इसमें मुंबई को बयालीस फीसदी और बेंगलुरु को कुल निवेश का सैंतीस फीसदी हिस्सा मिला है। निवेश करने वाले देशों की बात करें तो इसमें अमेरिका सबसे आगे है। इसके बाद सिंगापुर, हॉन्गकॉन्ग और जापान का नंबर आता है। कुल संस्थागत निवेश में अमेरिका के निवेशकों की हिस्सेदारी सरसठ फीसदी है। कंसल्टेंट फर्म वेस्टियन का कहना है कि कोविड-उन्नीस के रियल एस्टेट सेक्टर प्रभाव को देखते हुए कमर्शियल सेगमेंट को उबरने में दो-तीन तिमाही का समय लग सकता है। वहीं रेजिडेंशियल सेगमेंट को उबरने में लंबा समय लग सकता है। |
केंद्र सरकार द्वारा सशस्त्र बलों में युवाओं की भर्ती के लिए घोषित 'अग्निपथ' योजना ऐतिहासिक व अभिनव है, जिससे देश के युवाओं के लिए अवसरों के अनेक द्वार खुलेंगे और उनके उज्जवल भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा. इस योजना के माध्यम से कुशल मानव संसाधन बड़ी मात्रा में विकसित होगा, जो देश के लिए एक बड़ी ताकत रहेगा. यह बात कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कही.
केंद्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि यह योजना एक तरह से युवाओं को कुशल मानव संसाधन बनाने का एक महाभियान है. चार साल के लिए जो अग्निवीर नामांकित होंगे, उन्हें सेनाओं में लागू जोखिम व कठिनाई भत्ते के साथ आकर्षक मासिक पैकेज दिया जाएगा, वहीं कार्यावधि पश्चात एकमुश्त 'सेवा निधि' पैकेज में 11. 71 लाख रु. का भुगतान किया जाएगा, जिसे आयकर से छूट रहेगी. अग्निवीरों को 48 लाख रुपये का गैर-अंशदायी जीवन बीमा कवर प्रदान किया जाएगा, वहीं प्राप्त कौशल को बायोडाटा का हिस्सा बनने के लिए प्रमाणपत्र में मान्यता दी जाएगी.
उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना के तहत चयनित युवा चार साल में स्किल्ड हो जाएंगे, जिससे उन्हें इस कार्यावधि के बाद देश में ही अच्छे कैरियर के रूप में अनेक अवसर प्राप्त होंगे. अग्निवीरों में से ही युवाओं को सेना में भर्ती का अवसर भी मिलेगा, वहीं ट्रेनिंग के कारण उन्हें अन्य नौकरियों में प्राथमिकता मिलेगी, जिसके लिए गृह मंत्रालय, शिक्षा व दूरसंचार सहित अनेक केंद्रीय मंत्रालयों के साथ ही अनेक राज्य सरकारों ने घोषणा भी कर दी है. नौकरी पाने के इच्छुक युवाओं को सुरक्षा बल व पुलिस में प्राथमिकता दी जाएगी तथा अन्य क्षेत्रों में भी उनके लिए कई रास्ते खोले जा रहे हैं.
अनुकूलित पैकेज (मासिक)
हाथ में (70%)
अग्निवीर कॉर्पस फंड में योगदान (30%)
सभी आंकड़े रुपये में (मासिक अंशदान)
(उपरोक्त राशि पर लागू ब्याज दरों के अनुसार संचित ब्याज सहित) का भी भुगतान किया जाएगा.
| केंद्र सरकार द्वारा सशस्त्र बलों में युवाओं की भर्ती के लिए घोषित 'अग्निपथ' योजना ऐतिहासिक व अभिनव है, जिससे देश के युवाओं के लिए अवसरों के अनेक द्वार खुलेंगे और उनके उज्जवल भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा. इस योजना के माध्यम से कुशल मानव संसाधन बड़ी मात्रा में विकसित होगा, जो देश के लिए एक बड़ी ताकत रहेगा. यह बात कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कही. केंद्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि यह योजना एक तरह से युवाओं को कुशल मानव संसाधन बनाने का एक महाभियान है. चार साल के लिए जो अग्निवीर नामांकित होंगे, उन्हें सेनाओं में लागू जोखिम व कठिनाई भत्ते के साथ आकर्षक मासिक पैकेज दिया जाएगा, वहीं कार्यावधि पश्चात एकमुश्त 'सेवा निधि' पैकेज में ग्यारह. इकहत्तर लाख रु. का भुगतान किया जाएगा, जिसे आयकर से छूट रहेगी. अग्निवीरों को अड़तालीस लाख रुपये का गैर-अंशदायी जीवन बीमा कवर प्रदान किया जाएगा, वहीं प्राप्त कौशल को बायोडाटा का हिस्सा बनने के लिए प्रमाणपत्र में मान्यता दी जाएगी. उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना के तहत चयनित युवा चार साल में स्किल्ड हो जाएंगे, जिससे उन्हें इस कार्यावधि के बाद देश में ही अच्छे कैरियर के रूप में अनेक अवसर प्राप्त होंगे. अग्निवीरों में से ही युवाओं को सेना में भर्ती का अवसर भी मिलेगा, वहीं ट्रेनिंग के कारण उन्हें अन्य नौकरियों में प्राथमिकता मिलेगी, जिसके लिए गृह मंत्रालय, शिक्षा व दूरसंचार सहित अनेक केंद्रीय मंत्रालयों के साथ ही अनेक राज्य सरकारों ने घोषणा भी कर दी है. नौकरी पाने के इच्छुक युवाओं को सुरक्षा बल व पुलिस में प्राथमिकता दी जाएगी तथा अन्य क्षेत्रों में भी उनके लिए कई रास्ते खोले जा रहे हैं. अनुकूलित पैकेज हाथ में अग्निवीर कॉर्पस फंड में योगदान सभी आंकड़े रुपये में का भी भुगतान किया जाएगा. |
अम्बेडकरनगर, संवाददाता। केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है केन्द्र की नरेन्द्र मोदी की सरकार के नौ साल सेवा, सुशासन और जन कल्याण के रहे हैं। बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल विकास की ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा हुआ है। महज नौ साल में देश की नई गाथा तो लिखी ही है, अगले 10 वर्ष की बनी योजना का धन भी आवंटित की निश्चित अवधि में कार्य को पूरा करने को निश्चय भी किया है।
केंद्रीय कृषि मंत्री एवं कृषक कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर जिले में तीन दिनी प्रवास पर हैं। प्रवास के अंतिम दिन बुधवार को न्यू सक्रिट हाउस में मीडिया से संवाद किया। संवाद में केन्द्र के साथ प्रदेश की भी सरकार की उपलब्धि गिनाई। कहा कि डबल इंजन की सरकार ने विकास की गंगा बहाई है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि 11 करोड़ किसानों के बैंक खाते में ढाई करोड़ लाख रुपए सीधे जमा किया है। 2024 तक सभी के पास अपना पक्का मकान हो यह तय किया है। कहा कि गांवों और गरीबों की तस्वीर बदल गई है तथा किसानों के जीवन में बदलाव आया है। उत्पाद की गुणवत्ता सुधरी है तथा सैन्य क्षेत्र की रक्षा उपकरण भारतीय हो इस पर तेजी से कार्य हो रहा है। एक्सप्रेस वे, हाइवे, राज्यमार्ग, जनपदीय मार्ग वर्ड क्लास के बनाए जा रहे हैं। मोदी के विकास की दृष्टि दूरदर्शी और पारदर्शी है। सोच सबकी सुरक्षा, संपन्नता और समृद्धि की हैं।
| अम्बेडकरनगर, संवाददाता। केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है केन्द्र की नरेन्द्र मोदी की सरकार के नौ साल सेवा, सुशासन और जन कल्याण के रहे हैं। बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल विकास की ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा हुआ है। महज नौ साल में देश की नई गाथा तो लिखी ही है, अगले दस वर्ष की बनी योजना का धन भी आवंटित की निश्चित अवधि में कार्य को पूरा करने को निश्चय भी किया है। केंद्रीय कृषि मंत्री एवं कृषक कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर जिले में तीन दिनी प्रवास पर हैं। प्रवास के अंतिम दिन बुधवार को न्यू सक्रिट हाउस में मीडिया से संवाद किया। संवाद में केन्द्र के साथ प्रदेश की भी सरकार की उपलब्धि गिनाई। कहा कि डबल इंजन की सरकार ने विकास की गंगा बहाई है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि ग्यारह करोड़ किसानों के बैंक खाते में ढाई करोड़ लाख रुपए सीधे जमा किया है। दो हज़ार चौबीस तक सभी के पास अपना पक्का मकान हो यह तय किया है। कहा कि गांवों और गरीबों की तस्वीर बदल गई है तथा किसानों के जीवन में बदलाव आया है। उत्पाद की गुणवत्ता सुधरी है तथा सैन्य क्षेत्र की रक्षा उपकरण भारतीय हो इस पर तेजी से कार्य हो रहा है। एक्सप्रेस वे, हाइवे, राज्यमार्ग, जनपदीय मार्ग वर्ड क्लास के बनाए जा रहे हैं। मोदी के विकास की दृष्टि दूरदर्शी और पारदर्शी है। सोच सबकी सुरक्षा, संपन्नता और समृद्धि की हैं। |
लखनऊ। राजधानी में सीतापुर रोड़ स्थित एसआर ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशन में गुरुवार को बॉलीवुड फिल्म लखनऊ जंक्शन का पोस्टर और ट्रेलर रिलीज किया गया इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। उप्र के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि लखनऊ जंक्शन फिल्म का पोस्टर और ट्रेलर रिलीज किया।
इस फिल्म के माध्यम से उत्तर प्रदेश पुलिस की सकारात्मक भूमिका को दर्शाया गया है एवं उत्तर प्रदेश के पर्यटक स्थलों को फिल्म के माध्यम से दिखाया गया है।
फिल्म के निर्देशक विजय पाल सिंह ने बताया की फिल्म समाज का आइना होती हैं और इस फिल्म के माध्यम से हमने लोगों से जुड़ी हुई भावनाओं को दिखाने का काम किया गया है।
ट्रेलर और पोस्टर लांच करने के बाद ओपी सिंह ने बताया कि यह फिल्म पुलिस की सकारात्मक भूमिका को दिखाएगी और लोगों के दिलों में छाप छोड़ेगी।
फिल्म में बॉलीवुड स्टार राहुल रॉय डीजीपी की भूमिका में हैं। अमित बहल ने मुख्यमंत्री की भूमिका निभाई है। कुमार शशि वर्धन ने नेता विपक्ष की भूमिका अदा की है। हाल ही में सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुई अलीना राय के साथ केशव अरोड़ा नजर आएंगे। साथ ही जाकिर हुसैन मुख्य विलेन के किरदार में हैं। फिल्म में गीत और संगीत अनुपमा राग का है।
| लखनऊ। राजधानी में सीतापुर रोड़ स्थित एसआर ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशन में गुरुवार को बॉलीवुड फिल्म लखनऊ जंक्शन का पोस्टर और ट्रेलर रिलीज किया गया इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। उप्र के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि लखनऊ जंक्शन फिल्म का पोस्टर और ट्रेलर रिलीज किया। इस फिल्म के माध्यम से उत्तर प्रदेश पुलिस की सकारात्मक भूमिका को दर्शाया गया है एवं उत्तर प्रदेश के पर्यटक स्थलों को फिल्म के माध्यम से दिखाया गया है। फिल्म के निर्देशक विजय पाल सिंह ने बताया की फिल्म समाज का आइना होती हैं और इस फिल्म के माध्यम से हमने लोगों से जुड़ी हुई भावनाओं को दिखाने का काम किया गया है। ट्रेलर और पोस्टर लांच करने के बाद ओपी सिंह ने बताया कि यह फिल्म पुलिस की सकारात्मक भूमिका को दिखाएगी और लोगों के दिलों में छाप छोड़ेगी। फिल्म में बॉलीवुड स्टार राहुल रॉय डीजीपी की भूमिका में हैं। अमित बहल ने मुख्यमंत्री की भूमिका निभाई है। कुमार शशि वर्धन ने नेता विपक्ष की भूमिका अदा की है। हाल ही में सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुई अलीना राय के साथ केशव अरोड़ा नजर आएंगे। साथ ही जाकिर हुसैन मुख्य विलेन के किरदार में हैं। फिल्म में गीत और संगीत अनुपमा राग का है। |
अक्सर सभी लोग कहते हैं कि हरी सब्जियां खानी चाहिए और हम उनकी बात टाल देते हैं, लेकिन जब हम बड़े होते हैं हम खुद ही समझ जाते हैं कि ये हरी सब्जियां हमारे लिए कितनी जरूरी और स्वास्थ्यवर्धक हैं। इन सब्जियों में भरपूर माञा मेँ विटामिन, प्रोटीन और कई मिनरल्स होते हैं जो हमें कई रोगों से बचाती हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती हैं। इन सब्जियों को खाने से खून भी बढ़ता है जिससे हमारा चेहरा भी ग्लो करने लगता है।
अगरआप खूब व्यायाम करते हैं तब भी आपका वजन नहीं घट रहा है तो आपको तेल और मसालेदार सब्जियों की जगह हरी सब्जियां खाना चाहिए, इससे आपके शरीर की चर्बी घटेगी और वजन भी, पेट का वसा भी हरी सब्जियों से कम होता है। इसमें कैलोरी बहुत कम होती है और इसको खाने से पेट जल्दी भर जाता है,फिर आपको कम भूख लगती है। हरी सब्जियों में भरपूर माञा मेँ आयरन होता है, जब आयरन कम होता है तो खून कम बनता है इसलिए हमेँ पालक-मूली के पत्ते, सरसों, मेथी आदि के साग खाने चाहिए,इन साग में आयरन भरपूर मात्रा में होता है। आजकल कैंसर बहुत आम हो गया है, और गुर्दो की बीमारी से भी लोग परेशान रहते हैं,
अगर आप इन बीमारियों से बचना चाहते हैं तो अपने खाने में हरी सब्जियों को शामिल कर लीजिए। हरी सब्जियों में फाइबर,आयरन,मिनरल्स और कैल्शियम होते हैं जो कैंसर जैसे रोगों से हमारे शरीर को बचाते हैं। साथ ही गुर्दे में एसिड भी नहीं जमा होने देती हैं। हरी सब्जियों से आंखोँ की रोशनी भी मजबूत होती हैं। यदि आप रोजाना हरी सब्जियां खाते हैं तो यह आपके चेहरे का ग्लो बहुत हद तक बढ़ाने में बहुत काम करती है। हरी सब्जियों में विटामिन के होता है जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। तो बस हर रोज खाइए एक कटोरी हरी सब्जियां और रहिए कई बीमारियोँ से दूर। आपको रोज कम से कम 2. 5 कप हरी पत्तेदार सब्जियाँ खानी चाहिए.
इसके साथ ही आपको रोज 2. 3 कप हरी सब्जियों का भी सेवन करना चाहिए,इस तरह आपको रोजाना कम से कम 5 कप हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए. इसमें हरी पत्तेदार सब्जी में आपको पालक, केला, पत्ता गोभी, सलाद, सरसों का साग,अजमोद,पुदीना,फूल गोभी आदि शामिल करनी चाहिए. यदि आप हरी सब्जियों का सेवन कर रहेँ हैं, तो इस बात का ध्यान जरूर रखें कि सब्जी को अधिक न पकाएं. इससे सिर्फ सब्जी का स्वाद नही खराब होता है, बल्कि ज्यादा पकने की वजह से इसमे मौजूद जरूरी पोषक तत्व और मिनरल का असर भी कम हो जाता है, इसलिए ही हरी सब्जियों को उबालकर या फिर कच्चे सब्जी खाने की आदत डालें.
| अक्सर सभी लोग कहते हैं कि हरी सब्जियां खानी चाहिए और हम उनकी बात टाल देते हैं, लेकिन जब हम बड़े होते हैं हम खुद ही समझ जाते हैं कि ये हरी सब्जियां हमारे लिए कितनी जरूरी और स्वास्थ्यवर्धक हैं। इन सब्जियों में भरपूर माञा मेँ विटामिन, प्रोटीन और कई मिनरल्स होते हैं जो हमें कई रोगों से बचाती हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाती हैं। इन सब्जियों को खाने से खून भी बढ़ता है जिससे हमारा चेहरा भी ग्लो करने लगता है। अगरआप खूब व्यायाम करते हैं तब भी आपका वजन नहीं घट रहा है तो आपको तेल और मसालेदार सब्जियों की जगह हरी सब्जियां खाना चाहिए, इससे आपके शरीर की चर्बी घटेगी और वजन भी, पेट का वसा भी हरी सब्जियों से कम होता है। इसमें कैलोरी बहुत कम होती है और इसको खाने से पेट जल्दी भर जाता है,फिर आपको कम भूख लगती है। हरी सब्जियों में भरपूर माञा मेँ आयरन होता है, जब आयरन कम होता है तो खून कम बनता है इसलिए हमेँ पालक-मूली के पत्ते, सरसों, मेथी आदि के साग खाने चाहिए,इन साग में आयरन भरपूर मात्रा में होता है। आजकल कैंसर बहुत आम हो गया है, और गुर्दो की बीमारी से भी लोग परेशान रहते हैं, अगर आप इन बीमारियों से बचना चाहते हैं तो अपने खाने में हरी सब्जियों को शामिल कर लीजिए। हरी सब्जियों में फाइबर,आयरन,मिनरल्स और कैल्शियम होते हैं जो कैंसर जैसे रोगों से हमारे शरीर को बचाते हैं। साथ ही गुर्दे में एसिड भी नहीं जमा होने देती हैं। हरी सब्जियों से आंखोँ की रोशनी भी मजबूत होती हैं। यदि आप रोजाना हरी सब्जियां खाते हैं तो यह आपके चेहरे का ग्लो बहुत हद तक बढ़ाने में बहुत काम करती है। हरी सब्जियों में विटामिन के होता है जिससे हड्डियां मजबूत बनती हैं। तो बस हर रोज खाइए एक कटोरी हरी सब्जियां और रहिए कई बीमारियोँ से दूर। आपको रोज कम से कम दो. पाँच कप हरी पत्तेदार सब्जियाँ खानी चाहिए. इसके साथ ही आपको रोज दो. तीन कप हरी सब्जियों का भी सेवन करना चाहिए,इस तरह आपको रोजाना कम से कम पाँच कप हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए. इसमें हरी पत्तेदार सब्जी में आपको पालक, केला, पत्ता गोभी, सलाद, सरसों का साग,अजमोद,पुदीना,फूल गोभी आदि शामिल करनी चाहिए. यदि आप हरी सब्जियों का सेवन कर रहेँ हैं, तो इस बात का ध्यान जरूर रखें कि सब्जी को अधिक न पकाएं. इससे सिर्फ सब्जी का स्वाद नही खराब होता है, बल्कि ज्यादा पकने की वजह से इसमे मौजूद जरूरी पोषक तत्व और मिनरल का असर भी कम हो जाता है, इसलिए ही हरी सब्जियों को उबालकर या फिर कच्चे सब्जी खाने की आदत डालें. |
हापुड़ः पुलिस ने एक बड़े शातिर गैंग का खुलासा करते हुए करोड़ो रूपये के नए वाहनों को बरामद किया है पुलिस ने शातिर ठगो के पास से करोड़ो रूपये के 5 ट्रैक्टर, तीन कार और दो ट्रको को बरामद किया है पकड़े गए शातिर ठग बड़े शातिर तरिके से पहले तो वाहनों को चोरी होना दिखाया करते थे ।
और फिर उनके फर्जी तरिके से थानों में अभियोग पंजीकृत कराकर बीमा कम्पनियो से करोड़ो रूपये का क्लेम ले लिया करते थे और फिर उन वाहनों पर फर्जी तरिके से नंबर प्लेट, चैसिस नंबर और कागजात बनवा लिया करते थे जिनको पुलिस ने शातिर ठगो के पास से बरामद कर लिया।
पुलिस अधिकारियो के अनुसार थाना हाफिजपुर पुलिस ने एक ऐसे गैंग के आठ अभियुक्तों मासूक अली, परवेज, कामरान, साजिद, नौखिल, आसिफ, ताहिर और दिलशाद को गिरफ्तार किया है जोकि फर्जी तरिके से पहले तो वाहनों को चोरी होना दिखाया करते थे और फिर उनका अलग अलग थानों में अभियोग पंजीकृत कराकर बीमा कम्पनियो से करोड़ो रूपये का क्लेम ले लिया करते थे और जब उनपर रूपये खत्म हो जाया करते तथे तो फिर उसी अंदाज में वो वाहनों को चोरी होना दिखाया करते थे और फिर कम्पनियो से क्लेम ले लिया करते थे और फिर उन वाहनों को कही छिपाकर कुछ दिनों बाद उनपर बड़े शातिर तरिके से उन वाहनों पर फर्जी नंबर प्लेट, फर्जी चेसिस नंबर और कागजात बनवाकर चलवाया करते थे।
जिला जज और एसएसपी के औचक निरीक्षण से जेल में हड़कम्प!
| हापुड़ः पुलिस ने एक बड़े शातिर गैंग का खुलासा करते हुए करोड़ो रूपये के नए वाहनों को बरामद किया है पुलिस ने शातिर ठगो के पास से करोड़ो रूपये के पाँच ट्रैक्टर, तीन कार और दो ट्रको को बरामद किया है पकड़े गए शातिर ठग बड़े शातिर तरिके से पहले तो वाहनों को चोरी होना दिखाया करते थे । और फिर उनके फर्जी तरिके से थानों में अभियोग पंजीकृत कराकर बीमा कम्पनियो से करोड़ो रूपये का क्लेम ले लिया करते थे और फिर उन वाहनों पर फर्जी तरिके से नंबर प्लेट, चैसिस नंबर और कागजात बनवा लिया करते थे जिनको पुलिस ने शातिर ठगो के पास से बरामद कर लिया। पुलिस अधिकारियो के अनुसार थाना हाफिजपुर पुलिस ने एक ऐसे गैंग के आठ अभियुक्तों मासूक अली, परवेज, कामरान, साजिद, नौखिल, आसिफ, ताहिर और दिलशाद को गिरफ्तार किया है जोकि फर्जी तरिके से पहले तो वाहनों को चोरी होना दिखाया करते थे और फिर उनका अलग अलग थानों में अभियोग पंजीकृत कराकर बीमा कम्पनियो से करोड़ो रूपये का क्लेम ले लिया करते थे और जब उनपर रूपये खत्म हो जाया करते तथे तो फिर उसी अंदाज में वो वाहनों को चोरी होना दिखाया करते थे और फिर कम्पनियो से क्लेम ले लिया करते थे और फिर उन वाहनों को कही छिपाकर कुछ दिनों बाद उनपर बड़े शातिर तरिके से उन वाहनों पर फर्जी नंबर प्लेट, फर्जी चेसिस नंबर और कागजात बनवाकर चलवाया करते थे। जिला जज और एसएसपी के औचक निरीक्षण से जेल में हड़कम्प! |
आपको याद होगा कि सुब्रमण्यम स्वामी ने कुछ दिनों पहले एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि "सार्वजनिक क्षेत्र में सबसे बड़े एनपीए बकाएदार गौतम अडाणी हैं। समय आ गया है कि इसके लिए उनकी जिम्मेदारी तय की जाए, नहीं तो जनहित याचिका दायर की जाएगी।"
दरअसल आरबीआई ने फरवरी में बैंकों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके तहत बड़े कर्जदार के लोन चुकाने में एक दिन की भी देरी होती है तो बैंकों को इसकी जानकारी देनी होगी। साथ ही डिफॉल्ट के मामलों को 180 दिन में निपटाना होगा।
लेकिन पावर सेक्टर की बात ही अलग है, जब उनकी बात आती है तो बैंक वाले अजीब सी खामोशी ओढ़ लेते हैं। आपको जानना चाहिए कि रिजर्व बैंक के डेटा के मुताबिक, भारतीय बैंकों ने पावर सेक्टर को अप्रैल के अंत तक 5.19 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया हुआ था।
उपरोक्त नियम सबसे पहले पावर सेक्टर पर ही लागू होता है, क्योंकि देश में सबसे ज्यादा बेड लोन बिजली कंपनियों पर ही है, यह भारत के स्टील सेक्टर से राइट ऑफ किए गए बैड लोन से चार गुने से भी ज्यादा है। भारत की पावर कम्पनियों को जनवरी 2014 से सितम्बर 2017 के बीच 3.79 लाख करोड़ से भी अधिक का लोन देशी विदेशी बैंकों ने दिया है।
लेकिन इसी महीने के शुरू में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पावर सेक्टर में आरबीआई के एनपीए के सर्कुलर पर रोक लगा दी। इस फैसले में कहा गया कि विलफुल डिफॉल्टर को छोड़ किसी भी पावर कंपनी पर कार्रवाई नहीं की जाए।
अब इस केस में अडानी का रोल समझिये, पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े खिलाड़ी अडानी पावर है। उन्होंने पिछले साल में अनिल अंबानी की रिलायंस पावर को खरीद कर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।
एसबीआई ने अडानी और टाटा पावर को दिए लोन पर चिंता जताई है। ऐसा खुद बिजली मंत्री बता रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक, जिसका एनपीए 1.86 लाख करोड़ रुपये है, उसने 56,000 करोड़ रुपये से भी अधिक इन कम्पनियों में जनवरी 2014 से सितंबर 2017 के बीच लोन, बॉण्ड व शेयर के रूप में लगा दिए हैं।
लेकिन मजाल है जो मोदी जी खासमखास उद्योगपति को कोई तिरछी निगाह से भी देख ले। अडानी पावर ने टाटा पावर जैसी अन्य निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ मिलकर नया पैंतरा फेंका है। उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि अगर उनके ऊपर बकाया बैंकों के कर्ज का 70 फीसद तक माफ कर दिया जाए तो वह स्वयं ही ऐसी परियोजनाओं को नए सिरे से चालू कर सकते हैं, जिन पर काम पूरा हो गया है। लेकिन आगे की पूंजी नहीं होने की वजह से इनसे उत्पादन नहीं हो पा रहा है। यह साफ साफ सरकार को ब्लैकमेल करने की कोशिश है, लेकिन 'जब सैंया भये कोतवाल फिर डर काहे का'
साफ है कि 'न खाऊंगा न खाने दूंगा' वाली मोदी सरकार जमकर देश की जनता की गाढ़ी कमाई के दम पर टिके बैंकों से लोन दिलवा कर अडानी - अम्बानी जैसे पूंजीपतियों की मदद कर रही है।
| आपको याद होगा कि सुब्रमण्यम स्वामी ने कुछ दिनों पहले एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि "सार्वजनिक क्षेत्र में सबसे बड़े एनपीए बकाएदार गौतम अडाणी हैं। समय आ गया है कि इसके लिए उनकी जिम्मेदारी तय की जाए, नहीं तो जनहित याचिका दायर की जाएगी।" दरअसल आरबीआई ने फरवरी में बैंकों के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके तहत बड़े कर्जदार के लोन चुकाने में एक दिन की भी देरी होती है तो बैंकों को इसकी जानकारी देनी होगी। साथ ही डिफॉल्ट के मामलों को एक सौ अस्सी दिन में निपटाना होगा। लेकिन पावर सेक्टर की बात ही अलग है, जब उनकी बात आती है तो बैंक वाले अजीब सी खामोशी ओढ़ लेते हैं। आपको जानना चाहिए कि रिजर्व बैंक के डेटा के मुताबिक, भारतीय बैंकों ने पावर सेक्टर को अप्रैल के अंत तक पाँच.उन्नीस लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया हुआ था। उपरोक्त नियम सबसे पहले पावर सेक्टर पर ही लागू होता है, क्योंकि देश में सबसे ज्यादा बेड लोन बिजली कंपनियों पर ही है, यह भारत के स्टील सेक्टर से राइट ऑफ किए गए बैड लोन से चार गुने से भी ज्यादा है। भारत की पावर कम्पनियों को जनवरी दो हज़ार चौदह से सितम्बर दो हज़ार सत्रह के बीच तीन.उन्यासी लाख करोड़ से भी अधिक का लोन देशी विदेशी बैंकों ने दिया है। लेकिन इसी महीने के शुरू में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पावर सेक्टर में आरबीआई के एनपीए के सर्कुलर पर रोक लगा दी। इस फैसले में कहा गया कि विलफुल डिफॉल्टर को छोड़ किसी भी पावर कंपनी पर कार्रवाई नहीं की जाए। अब इस केस में अडानी का रोल समझिये, पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े खिलाड़ी अडानी पावर है। उन्होंने पिछले साल में अनिल अंबानी की रिलायंस पावर को खरीद कर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। एसबीआई ने अडानी और टाटा पावर को दिए लोन पर चिंता जताई है। ऐसा खुद बिजली मंत्री बता रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक, जिसका एनपीए एक.छियासी लाख करोड़ रुपये है, उसने छप्पन,शून्य करोड़ रुपये से भी अधिक इन कम्पनियों में जनवरी दो हज़ार चौदह से सितंबर दो हज़ार सत्रह के बीच लोन, बॉण्ड व शेयर के रूप में लगा दिए हैं। लेकिन मजाल है जो मोदी जी खासमखास उद्योगपति को कोई तिरछी निगाह से भी देख ले। अडानी पावर ने टाटा पावर जैसी अन्य निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ मिलकर नया पैंतरा फेंका है। उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि अगर उनके ऊपर बकाया बैंकों के कर्ज का सत्तर फीसद तक माफ कर दिया जाए तो वह स्वयं ही ऐसी परियोजनाओं को नए सिरे से चालू कर सकते हैं, जिन पर काम पूरा हो गया है। लेकिन आगे की पूंजी नहीं होने की वजह से इनसे उत्पादन नहीं हो पा रहा है। यह साफ साफ सरकार को ब्लैकमेल करने की कोशिश है, लेकिन 'जब सैंया भये कोतवाल फिर डर काहे का' साफ है कि 'न खाऊंगा न खाने दूंगा' वाली मोदी सरकार जमकर देश की जनता की गाढ़ी कमाई के दम पर टिके बैंकों से लोन दिलवा कर अडानी - अम्बानी जैसे पूंजीपतियों की मदद कर रही है। |
आदरणीय मित्रों !
'चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता' अंक -११ में आप सभी का हार्दिक स्वागत है !
दोस्तों !
छिपा है प्यार दिल में मिला इनको करीने से,
नहीं पतवार हाथों में , मजा मौजों में जीने से.
बुजुर्गों की मदद करके सुकूं से जिंदगी गुज़रे,
दुआ इनकी मिले जिनको दमक जायें नगीने से.
आइये तो उठा लें आज अपनी-अपनी कलम, और कर डालें इस चित्र का काव्यात्मक चित्रण !
Replies are closed for this discussion.
दादी करती याद है, गये दिनों की बात,
नदी किनारे घूमना, धर दादा का हाथ,
रहे सलामत सदा ,युगल हंसों का जोड़ा..
पहले जैसा आज भी, क्या करती हो प्यार,
क्या आता है याद, तुम्हें भी गया जमाना ?.
दादी शरमा कर जरा, मंद मंद मुस्काय,
काट चिकोटी लात पर , हाँ में सर डोलाय,
पहले सी है लचक, अजी ! बूढ़ी पाँखों में.
प्यार अगर है आज भी, कल्लुआ की अम्मा,
जल्दी से अब दे मुझे, गाल पे इक चुम्मा,
किया प्रमाणित प्यार, यही है प्रेम समर् पण..
दादी बोली ये उमर, और गज़ब है हाल,
बैठी दादा के बगल, दादी चूमे गाल,
बागी जी की मधुर मधुर बहती कविताई.
जवाब नहीं आपके दोहों का भी आदरणीय अरुण कुमार निगम जी, सादर साधुवाद.
मै भी भाई रवि जी से सहमत हूँ !
आय -हाय - हाय !! .. . क्या ही मुलायम चित्र चस्पां किया है. वाह - वाह ! ..
बहुत सुंदर दोहे आदरणीय बागी जी ..... हार्दिक बधाई स्वीकारे ...:
| आदरणीय मित्रों ! 'चित्र से काव्य तक प्रतियोगिता' अंक -ग्यारह में आप सभी का हार्दिक स्वागत है ! दोस्तों ! छिपा है प्यार दिल में मिला इनको करीने से, नहीं पतवार हाथों में , मजा मौजों में जीने से. बुजुर्गों की मदद करके सुकूं से जिंदगी गुज़रे, दुआ इनकी मिले जिनको दमक जायें नगीने से. आइये तो उठा लें आज अपनी-अपनी कलम, और कर डालें इस चित्र का काव्यात्मक चित्रण ! Replies are closed for this discussion. दादी करती याद है, गये दिनों की बात, नदी किनारे घूमना, धर दादा का हाथ, रहे सलामत सदा ,युगल हंसों का जोड़ा.. पहले जैसा आज भी, क्या करती हो प्यार, क्या आता है याद, तुम्हें भी गया जमाना ?. दादी शरमा कर जरा, मंद मंद मुस्काय, काट चिकोटी लात पर , हाँ में सर डोलाय, पहले सी है लचक, अजी ! बूढ़ी पाँखों में. प्यार अगर है आज भी, कल्लुआ की अम्मा, जल्दी से अब दे मुझे, गाल पे इक चुम्मा, किया प्रमाणित प्यार, यही है प्रेम समर् पण.. दादी बोली ये उमर, और गज़ब है हाल, बैठी दादा के बगल, दादी चूमे गाल, बागी जी की मधुर मधुर बहती कविताई. जवाब नहीं आपके दोहों का भी आदरणीय अरुण कुमार निगम जी, सादर साधुवाद. मै भी भाई रवि जी से सहमत हूँ ! आय -हाय - हाय !! .. . क्या ही मुलायम चित्र चस्पां किया है. वाह - वाह ! .. बहुत सुंदर दोहे आदरणीय बागी जी ..... हार्दिक बधाई स्वीकारे ...: |
बॉबी देओल (Bobby Deol) की फिल्मों में एंट्री की शुरुआत ही गड़बड़ हो गई थी, हालांकि उनकी डेब्यू फिल्म सुपरहिट रही थी। लेकिन असल में बॉबी की डेब्यू फिल्म बरसात (Barsat) से पहले दूसरी थी, जो बीच में ही बंद हो गई थी। शेखर कपूर (Shekhar Kapoor) की फिल्म से बॉबी का डेब्यू होने वाला था, लेकिन फिल्म कुछ दिन शूट होने के बाद बंद हो गई थी। धर्मेंद्र (Dharmendra) के बेटे बॉबी कि किस्मत केवल यहीं नहीं चकराई थी, बल्कि एक बार डायरेक्टर इम्तियाज अली (Imtiaz Ali) के धोखे से उनके हाथ से एक सुपरहिट फिल्म निकल गई थी। इस बात का अफसोस बॉबी को हमेशा रहा है। उनके करियर में दस साल का वनवास भी उनकी खराब किस्मत का ही नमूना था। तो चलिए जानें कि इम्तियाज अली के साथ बॉबी ने ऐसा क्या किया था कि सनी देओल (Sunny Deol) के भाई खुद को ठगा महसूस कर रहे थे।
| बॉबी देओल की फिल्मों में एंट्री की शुरुआत ही गड़बड़ हो गई थी, हालांकि उनकी डेब्यू फिल्म सुपरहिट रही थी। लेकिन असल में बॉबी की डेब्यू फिल्म बरसात से पहले दूसरी थी, जो बीच में ही बंद हो गई थी। शेखर कपूर की फिल्म से बॉबी का डेब्यू होने वाला था, लेकिन फिल्म कुछ दिन शूट होने के बाद बंद हो गई थी। धर्मेंद्र के बेटे बॉबी कि किस्मत केवल यहीं नहीं चकराई थी, बल्कि एक बार डायरेक्टर इम्तियाज अली के धोखे से उनके हाथ से एक सुपरहिट फिल्म निकल गई थी। इस बात का अफसोस बॉबी को हमेशा रहा है। उनके करियर में दस साल का वनवास भी उनकी खराब किस्मत का ही नमूना था। तो चलिए जानें कि इम्तियाज अली के साथ बॉबी ने ऐसा क्या किया था कि सनी देओल के भाई खुद को ठगा महसूस कर रहे थे। |
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ऐलान किया है कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ राजग की तरफ से उप-राष्ट्रपति के उम्मीदवार हैं।
इस सफलता तक पहुँचने में हमारे लाखों कोरोना वॉरियर्स का सम्पूर्ण समर्पण शामिल है। उन्होंने देशवासियों की सुरक्षा हेतु अपना बलिदान तक दे दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UP के जालौन में 296 KM लम्बे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करते हुए इसे देशव्यापी विकास का एक हिस्सा बताया।
SIT ने दावा किया है कि गुजरात दंगों के दौरान तीस्ता सीतलवाड़ ने भाजपा नेताओं को फँसाने के लिए अहमद पटेल के इशारे पर रची थी साजिश।
पीएफआई के डॉक्यूमेंट से पता चला है कि वह सत्ता में आने के बाद भारत को इस्लामी राष्ट्र घोषित करेगा और हिंदुओं का सफाया करेगा।
साल 1989 के अपहरण के मामले में महबूबा मुफ्ती की बहन रूबैया सईद ने कोर्ट में अपहरणकर्ताओं की पहचान की है, जिसमें यासीन मलिक भी शामिल है।
पीएफआई ने लक्ष्य रखा है कि हर मुस्लिम परिवार उसका सदस्य होना चाहिए। कार्यपालिका और न्यायपालिका में भी उसकी घुसपैठ होनी चाहिए।
PFI के खतरनाक डॉक्यूमेंट से यह बात सामने आई है कि वह ST/SC/OBC को RSS से दूर कर इस्लामी शासन स्थापित करने के लिए अपने साथ लाना चाहता है।
PFI की तुलना RSS से करने वाले पटना के एसएसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों को मुंगेर से हाई कोर्ट की फटकार के बाद हटाया गया था।
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में सिख नेता रिपुदमन सिंह मलिक की गुरुवार (14 जुलाई 2022) सुबह 9: 30 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई।
| भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ऐलान किया है कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ राजग की तरफ से उप-राष्ट्रपति के उम्मीदवार हैं। इस सफलता तक पहुँचने में हमारे लाखों कोरोना वॉरियर्स का सम्पूर्ण समर्पण शामिल है। उन्होंने देशवासियों की सुरक्षा हेतु अपना बलिदान तक दे दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UP के जालौन में दो सौ छियानवे KM लम्बे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करते हुए इसे देशव्यापी विकास का एक हिस्सा बताया। SIT ने दावा किया है कि गुजरात दंगों के दौरान तीस्ता सीतलवाड़ ने भाजपा नेताओं को फँसाने के लिए अहमद पटेल के इशारे पर रची थी साजिश। पीएफआई के डॉक्यूमेंट से पता चला है कि वह सत्ता में आने के बाद भारत को इस्लामी राष्ट्र घोषित करेगा और हिंदुओं का सफाया करेगा। साल एक हज़ार नौ सौ नवासी के अपहरण के मामले में महबूबा मुफ्ती की बहन रूबैया सईद ने कोर्ट में अपहरणकर्ताओं की पहचान की है, जिसमें यासीन मलिक भी शामिल है। पीएफआई ने लक्ष्य रखा है कि हर मुस्लिम परिवार उसका सदस्य होना चाहिए। कार्यपालिका और न्यायपालिका में भी उसकी घुसपैठ होनी चाहिए। PFI के खतरनाक डॉक्यूमेंट से यह बात सामने आई है कि वह ST/SC/OBC को RSS से दूर कर इस्लामी शासन स्थापित करने के लिए अपने साथ लाना चाहता है। PFI की तुलना RSS से करने वाले पटना के एसएसपी मानवजीत सिंह ढिल्लों को मुंगेर से हाई कोर्ट की फटकार के बाद हटाया गया था। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया में सिख नेता रिपुदमन सिंह मलिक की गुरुवार सुबह नौ: तीस बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई। |
PATNA : जिले के पालीगंज थाना अंतर्गत दरियापुर अनन्त गांव में बीती रात चोरो ने एक किसान के घर को अपना निशाना बनाया। छत के रास्ते घर के अंदर घुसे चोर घर में रखे 1. 5 लाख नकद के साथ-साथ तकरीबन 5 लाख की संपत्ति ले उड़े। वहीं घर के अंदर सोये लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
बताया जा रहा है कि घटना की जानकारी उस वक्त हुई जब घर के मालिक किसान किसान अशोक सिंह प्रतिदिन की तरह सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए घर से 4 बजे बाहर जाने के लिये मेन गेट के पास पहुंचे तो गेट को खुला देखा।
गेट खुला देखकर अशोक सिंह के घर के सदस्यों को जगाया और जब घर के अंदर गए नजारा देखकर दंग रह गए। घर के अंदर सारा सामान बिखरा पड़ा था।
बतौर अशोक सिंह चोर सीढ़ी लगाकर छत के रास्ते घर के अंदर घुसे थे और घर में रखे 1. 5 लाख रुपये नगद समेत तकरबीन 5 लाख की संपत्ति पर हाथ साफ कर गए है।
इस बावत नौबतपुर थाना में मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस मामले की जांच और चोरो की धर-पकड़ के लिए छापेमारी कर रही है।
बता दें कि नौबतपुर थाना क्षेत्र में इनदिनों चोरों के आतंक के लोग परेशान है। बीती रात ही चोरो ने नौबतपुर थाना क्षेत्र के रामपुर स्थित स्टेट बैंक के ग्राहक सेवा केन्द्र को अपना निशाना बनाया है।
| PATNA : जिले के पालीगंज थाना अंतर्गत दरियापुर अनन्त गांव में बीती रात चोरो ने एक किसान के घर को अपना निशाना बनाया। छत के रास्ते घर के अंदर घुसे चोर घर में रखे एक. पाँच लाख नकद के साथ-साथ तकरीबन पाँच लाख की संपत्ति ले उड़े। वहीं घर के अंदर सोये लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी। बताया जा रहा है कि घटना की जानकारी उस वक्त हुई जब घर के मालिक किसान किसान अशोक सिंह प्रतिदिन की तरह सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए घर से चार बजे बाहर जाने के लिये मेन गेट के पास पहुंचे तो गेट को खुला देखा। गेट खुला देखकर अशोक सिंह के घर के सदस्यों को जगाया और जब घर के अंदर गए नजारा देखकर दंग रह गए। घर के अंदर सारा सामान बिखरा पड़ा था। बतौर अशोक सिंह चोर सीढ़ी लगाकर छत के रास्ते घर के अंदर घुसे थे और घर में रखे एक. पाँच लाख रुपये नगद समेत तकरबीन पाँच लाख की संपत्ति पर हाथ साफ कर गए है। इस बावत नौबतपुर थाना में मामला दर्ज कराया गया है। पुलिस मामले की जांच और चोरो की धर-पकड़ के लिए छापेमारी कर रही है। बता दें कि नौबतपुर थाना क्षेत्र में इनदिनों चोरों के आतंक के लोग परेशान है। बीती रात ही चोरो ने नौबतपुर थाना क्षेत्र के रामपुर स्थित स्टेट बैंक के ग्राहक सेवा केन्द्र को अपना निशाना बनाया है। |
'बिग बॉस-6' से सुर्खियों में आईं सना खान को सलमान खान की फिल्म 'जय हो' में भी देखा गया लेकिन इसके बाद वो सिल्वर स्क्रीन और छोटे पर्दे गायब सी हो गईं. सही फिल्म के इंतजार में सना खान गायब हो गईं. लेकिन अब अफवाह ये है कि वो हॉलीवुड का रुख कर रही हैं.
सूत्रों की माने तो तमिल, तेलुगू और कन्नड़ फिल्में कर चुकीं सना ने हॉलीवुड के एक धारावाहिक निर्देशक के साथ काम करने के लिए हां कर दी है. सूत्र ने बताया कि सना इस सीरियल में रानी की मुख्य भूमिका निभाएंगी, जो तत्कालीन हैदराबाद के शाही समय और जिंदगी से संबद्ध है.
आइटम गानों में नजर आ चुकीं सना अब अपनी भूमिका के लिए तैयारी कर रही हैं. सूत्र ने कहा, 'वह जिम में ज्यादा समय बिता रही हैं. '
| 'बिग बॉस-छः' से सुर्खियों में आईं सना खान को सलमान खान की फिल्म 'जय हो' में भी देखा गया लेकिन इसके बाद वो सिल्वर स्क्रीन और छोटे पर्दे गायब सी हो गईं. सही फिल्म के इंतजार में सना खान गायब हो गईं. लेकिन अब अफवाह ये है कि वो हॉलीवुड का रुख कर रही हैं. सूत्रों की माने तो तमिल, तेलुगू और कन्नड़ फिल्में कर चुकीं सना ने हॉलीवुड के एक धारावाहिक निर्देशक के साथ काम करने के लिए हां कर दी है. सूत्र ने बताया कि सना इस सीरियल में रानी की मुख्य भूमिका निभाएंगी, जो तत्कालीन हैदराबाद के शाही समय और जिंदगी से संबद्ध है. आइटम गानों में नजर आ चुकीं सना अब अपनी भूमिका के लिए तैयारी कर रही हैं. सूत्र ने कहा, 'वह जिम में ज्यादा समय बिता रही हैं. ' |
सैम ने कहा कि मैं नंबर-4 पर बल्लेबाजी करना पसंद करता हूं। मुझे मध्य ओवरों में स्पिनरों को खेलना अच्छा लगता है और मैं इसका आनंद लेता हूं। इस क्रम पर मैं बल्लेबाजी करने में सहज हूं जहां मैं काफी आसानी से बल्लेबाजी कर सकता हूं।
कोलकाता नाइटराइडर्स (केकेआर) के इंग्लिश विकेटकीपर बल्लेबाज सैम बिलिंग्स लंबे समय से इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा रहे हैं। वह आइपीएल के इस सत्र में केकेआर के लिए खेल रहे हैं। उनके अनुसार आइपीएल ऐसा मंच है जहां वह अपने कौशल का प्रदर्शन आसानी से कर सकते हैं। केकेआर और इंग्लैंड की टी-20 टीम इस समय किसी भी समय आक्रामक खेल खेलने की रणनीति पर चल रही है। बिलिंग्स ने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि केकेआर के मुख्य कोच ब्रेंडन मैकुलम और इंग्लिश कप्तान इयोन मोर्गन की सोच एक जैसी है। मोर्गन पिछले सत्र में केकेआर के कप्तान भी थे। आइपीएल और इंग्लिश टीम से जुड़े मामलों पर अभिषेक त्रिपाठी ने सैम बिलिंग्स से की खास बातचीत, पेश हैं मुख्य अंश :
-- केकेआर टीम के इंग्लैंड की तरह मैच की स्थिति की परवाह किए बिना आक्रमक होकर खेलने के बारे में बताएं। क्या ये कोच ब्रेंडन मैकुलम की सोच है? अगर यह रणनीति उलटी पड़ जाती है, तो आपकी जवाबी योजना क्या है? जैसा कि आरसीबी के खिलाफ हुआ।
-हाहाहा, मेरे ख्याल से मैकुलम और इयोन मोर्गन (इंग्लैंड के कप्तान) के बीच काफी समानताएं हैं। यह दोनों काफी करीबी मित्र भी हैं। दोनों की सोच एक जैसी है। हम सभी प्रशंसकों के लिए बेहतरीन क्रिकेट खेलना चाहते हैं जिससे हमें इस टूर्नामेंट में जीत मिले। टीम के सभी खिलाड़ी इसी कोशिश में हैं और सभी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं। टीम में सभी अपना योगदान देने की कोशिश करते हैं।
-- केकेआर के बल्लेबाजी क्रम में आपके अनुसार बल्लेबाजी करने के लिए आपकी आदर्श स्थिति क्या है?
- मैं नंबर-4 पर बल्लेबाजी करना पसंद करता हूं। मुझे मध्य ओवरों में स्पिनरों को खेलना अच्छा लगता है और मैं इसका आनंद लेता हूं। इस क्रम पर मैं बल्लेबाजी करने में सहज हूं जहां मैं काफी आसानी से बल्लेबाजी कर सकता हूं।
-- आंद्रे रसेल ने पंजाब किंग्स के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी की थी। आप उनके साथ दूसरे छोर पर थे। उस अनुभव के बारे में बताएं?
- रसेल ने उस दिन बेहतरीन बल्लेबाजी की। मैं दूसरे छोर से उनके साथ था। लेकिन जिस तरह वह छक्के जड़ रहे थे उसे देखना बेहद सुखद था। उनकी मिस हिट भी छक्के की ओर जा रही थी। रसेल ने अविश्वसनीय पारी खेली जिसे देखकर मजा आ गया। ऐसा कम वही कर सकते हैं। उनके जैसा दूसरा कोई नहीं है।
-- यह साल इंग्लैंड के लिए काफी व्यस्त होने वाला है, जहां आस्ट्रेलिया में टी-20 विश्व कप का आयोजन भी होना है। ऐसे में आप इसमें अपनी संभावनाएं कैसे देखते हैं?
- हां, जरूर मैं इसमें अपनी संभावनाएं देखता हूं और ऐसा कोई कारण नहीं है जिसके कारण मैं ऐसा नहीं सोचूं। मैं अब लंबे समय से इंग्लिश टीम का हिस्सा हूं और लगातार रन भी बना रहा हूं। मुझे लगता है कि आइपीएल ने हमें वो प्लेटफार्म दिया है जहां मैं खुद के कौशल का प्रदर्शन सही तरह से कर सकता हूं। मैं आस्ट्रेलिया में इस सत्र में बिग बैश लीग में खेलने की तैयारी भी कर रहा हूं जिससे टी-20 विश्व कप के लिए सही तैयारी हो सके।
| सैम ने कहा कि मैं नंबर-चार पर बल्लेबाजी करना पसंद करता हूं। मुझे मध्य ओवरों में स्पिनरों को खेलना अच्छा लगता है और मैं इसका आनंद लेता हूं। इस क्रम पर मैं बल्लेबाजी करने में सहज हूं जहां मैं काफी आसानी से बल्लेबाजी कर सकता हूं। कोलकाता नाइटराइडर्स के इंग्लिश विकेटकीपर बल्लेबाज सैम बिलिंग्स लंबे समय से इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा रहे हैं। वह आइपीएल के इस सत्र में केकेआर के लिए खेल रहे हैं। उनके अनुसार आइपीएल ऐसा मंच है जहां वह अपने कौशल का प्रदर्शन आसानी से कर सकते हैं। केकेआर और इंग्लैंड की टी-बीस टीम इस समय किसी भी समय आक्रामक खेल खेलने की रणनीति पर चल रही है। बिलिंग्स ने कहा कि ऐसा इसलिए है क्योंकि केकेआर के मुख्य कोच ब्रेंडन मैकुलम और इंग्लिश कप्तान इयोन मोर्गन की सोच एक जैसी है। मोर्गन पिछले सत्र में केकेआर के कप्तान भी थे। आइपीएल और इंग्लिश टीम से जुड़े मामलों पर अभिषेक त्रिपाठी ने सैम बिलिंग्स से की खास बातचीत, पेश हैं मुख्य अंश : -- केकेआर टीम के इंग्लैंड की तरह मैच की स्थिति की परवाह किए बिना आक्रमक होकर खेलने के बारे में बताएं। क्या ये कोच ब्रेंडन मैकुलम की सोच है? अगर यह रणनीति उलटी पड़ जाती है, तो आपकी जवाबी योजना क्या है? जैसा कि आरसीबी के खिलाफ हुआ। -हाहाहा, मेरे ख्याल से मैकुलम और इयोन मोर्गन के बीच काफी समानताएं हैं। यह दोनों काफी करीबी मित्र भी हैं। दोनों की सोच एक जैसी है। हम सभी प्रशंसकों के लिए बेहतरीन क्रिकेट खेलना चाहते हैं जिससे हमें इस टूर्नामेंट में जीत मिले। टीम के सभी खिलाड़ी इसी कोशिश में हैं और सभी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर रहे हैं। टीम में सभी अपना योगदान देने की कोशिश करते हैं। -- केकेआर के बल्लेबाजी क्रम में आपके अनुसार बल्लेबाजी करने के लिए आपकी आदर्श स्थिति क्या है? - मैं नंबर-चार पर बल्लेबाजी करना पसंद करता हूं। मुझे मध्य ओवरों में स्पिनरों को खेलना अच्छा लगता है और मैं इसका आनंद लेता हूं। इस क्रम पर मैं बल्लेबाजी करने में सहज हूं जहां मैं काफी आसानी से बल्लेबाजी कर सकता हूं। -- आंद्रे रसेल ने पंजाब किंग्स के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी की थी। आप उनके साथ दूसरे छोर पर थे। उस अनुभव के बारे में बताएं? - रसेल ने उस दिन बेहतरीन बल्लेबाजी की। मैं दूसरे छोर से उनके साथ था। लेकिन जिस तरह वह छक्के जड़ रहे थे उसे देखना बेहद सुखद था। उनकी मिस हिट भी छक्के की ओर जा रही थी। रसेल ने अविश्वसनीय पारी खेली जिसे देखकर मजा आ गया। ऐसा कम वही कर सकते हैं। उनके जैसा दूसरा कोई नहीं है। -- यह साल इंग्लैंड के लिए काफी व्यस्त होने वाला है, जहां आस्ट्रेलिया में टी-बीस विश्व कप का आयोजन भी होना है। ऐसे में आप इसमें अपनी संभावनाएं कैसे देखते हैं? - हां, जरूर मैं इसमें अपनी संभावनाएं देखता हूं और ऐसा कोई कारण नहीं है जिसके कारण मैं ऐसा नहीं सोचूं। मैं अब लंबे समय से इंग्लिश टीम का हिस्सा हूं और लगातार रन भी बना रहा हूं। मुझे लगता है कि आइपीएल ने हमें वो प्लेटफार्म दिया है जहां मैं खुद के कौशल का प्रदर्शन सही तरह से कर सकता हूं। मैं आस्ट्रेलिया में इस सत्र में बिग बैश लीग में खेलने की तैयारी भी कर रहा हूं जिससे टी-बीस विश्व कप के लिए सही तैयारी हो सके। |
अमेरिका ने 35 देशों वाली ओपन स्काई संधि से निकलने की धमकी दी है। इस संधि के तहत सदस्य देश एक-दूसरे के वायु क्षेत्र में निगरानी के लिए उड़ान भर सकते हैं। ट्रंप प्रशासन रूस पर संधि का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहा है।
वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि संधि से औपचारिक तौर पर बाहर आने में 6 महीने का समय लग सकता है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूरे मामले को रूस पर डाल दिया है। उन्होंने कहा कि मैं समझता हूं कि रूस के साथ हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं। लेकिन रूस इस संधि का पालन नहीं कर रहा है तो जब तक वह ऐसा नहीं करता, तब तक हम इससे बाहर रहेंगे। इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन कई अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों से बाहर निकल चुका है।
क्या है संधि?
ओपन स्काई संधि का प्रस्ताव सबसे पहले 1955 में अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आईजनहावर ने रखा था। इस पर आखिरकार 1992 में दस्तखत हुए और 2002 से इस पर अमल शुरू हुआ। इसका मकसद सदस्य देशों को एक-दूसरे के वायुक्षेत्र में निगरानी उड़ानों की अनुमति देना है ताकि उनमें आपसी विश्वास मजबूत हो सके।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि रूस लगातार 1 साल से पड़ोसी जॉर्जिया और बाल्टिक तट पर रूसी इलाके कालिनिनग्राद में अमेरिकी उड़ानों के लिए अड़चनें पैदा कर रहा है। इसके अलावा उनका यह भी कहना है कि रूस अमेरिकी और यूरोपीय क्षेत्र में अपनी उड़ानों का इस्तेमाल संवेदनशील अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर की पहचान करने के लिए कर रहा है जिसे कि युद्ध की स्थिति में निशाना बनाया जा सके।
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका अगर इस संधि से निकलता है तो फिर ऐसी रूसी उड़ानें अमेरिकी वायु क्षेत्र में संभव नहीं हो पाएंगी। इसके बाद रूस भी समझौते से हट सकता है और फिर अन्य सदस्य देश भी रूसी उड़ानों के लिए अपने आकाश को बंद कर सकते हैं। इससे पूरे यूरोपीय क्षेत्र की सुरक्षा प्रभावित होगी, खासकर ऐसे समय में जब रूस समर्थित अलगाववादी यूक्रेन और जॉर्जिया के कुछ इलाकों पर नियंत्रण किए हुए हैं।
वॉशिंगटन स्थित आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के प्रमुख डेरिल किमबॉल का कहना है कि संधि को छोड़ने का ट्रंप का फैसला अपरिपक्व और गैरजिम्मेदाराना है। नाटो सदस्यों के साथ-साथ यूक्रेन जैसे देश अमेरिका पर ओपन स्काई संधि को न छोड़ने का दबाव डाल रहे हैं। इसके तहत निगरानी उड़ानें सदस्य देशों को औचक सैन्य हमलों जैसी गतिविधियों की जानकारी देती हैं।
रूस की राजधानी मॉस्को में सरकारी समाचार एजेंसी रिया ने रूसी विदेश उपमंत्री एलेक्सांदर ग्रुशको के हवाले से कहा है कि उनके देश ने संधि का उल्लंघन नहीं किया है और वह उन तकनीकी मुद्दों पर बात करने को तैयार है जिन्हें अमेरिका संधि का उल्लंघन बता रहा है।
ट्रंप के ताजा कदम से इस बात को लेकर भी संदेह पैदा हो गए हैं कि क्या अमेरिका 2010 की नई स्टार्ट संधि को आगे बढ़ाएगा? यह संधि परमाणु हथियारों की तैनाती को सीमित करती है। इसके तहत अमेरिका और रूस अपने-अपने 1,550 से ज्यादा रणनीतिक परमाणु हथियारों की तैनाती नहीं कर सकते। नई स्टार्ट संधि अगले साल फरवरी में खत्म हो रही है।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी का कहना है कि हाल के दिनों में अमेरिकी अधिकारियों ने रूसी अधिकारियों से परमाणु हथियार वार्ताओं के नए दौर की शुरुआत की है ताकि परमाणु हथियारों के नियंत्रण के लिए नए उपायों का मसौदा तैयार करने की प्रकिया शुरू की जा सके।
ट्रंप नई स्टार्ट संधि के स्थान पर एक दूसरी संधि लाना चाहते हैं और परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की संधि में वे चीन को भी शामिल करना चाहते हैं। हालांकि चीन इससे इंकार कर चुका है जिसके पास लगभग 300 परमाणु हथियार हैं। व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ'ब्रायन ने फॉक्स न्यूज को बताया कि उन्हें नहीं लगता कि अमेरिका नई स्टार्ट संधि को छोड़ेगा।
ओपन स्काई संधि को लेकर अमेरिका का फैसला 6 महीने की समीक्षा के बाद आया है। इसमें अधिकारियों ने पाया कि रूस ने कई बार संधि का पालन नहीं किया। पिछले साल अमेरिकी प्रशासन रूस के साथ मध्यम दूरी के परमाणु हथियारों से जुड़ी संधि से बाहर निकल गया।
एके/आरपी (रॉयटर्स, एएफपी)
| अमेरिका ने पैंतीस देशों वाली ओपन स्काई संधि से निकलने की धमकी दी है। इस संधि के तहत सदस्य देश एक-दूसरे के वायु क्षेत्र में निगरानी के लिए उड़ान भर सकते हैं। ट्रंप प्रशासन रूस पर संधि का उल्लंघन करने का आरोप लगा रहा है। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि संधि से औपचारिक तौर पर बाहर आने में छः महीने का समय लग सकता है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूरे मामले को रूस पर डाल दिया है। उन्होंने कहा कि मैं समझता हूं कि रूस के साथ हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं। लेकिन रूस इस संधि का पालन नहीं कर रहा है तो जब तक वह ऐसा नहीं करता, तब तक हम इससे बाहर रहेंगे। इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन कई अंतरराष्ट्रीय संधियों और समझौतों से बाहर निकल चुका है। क्या है संधि? ओपन स्काई संधि का प्रस्ताव सबसे पहले एक हज़ार नौ सौ पचपन में अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आईजनहावर ने रखा था। इस पर आखिरकार एक हज़ार नौ सौ बानवे में दस्तखत हुए और दो हज़ार दो से इस पर अमल शुरू हुआ। इसका मकसद सदस्य देशों को एक-दूसरे के वायुक्षेत्र में निगरानी उड़ानों की अनुमति देना है ताकि उनमें आपसी विश्वास मजबूत हो सके। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि रूस लगातार एक साल से पड़ोसी जॉर्जिया और बाल्टिक तट पर रूसी इलाके कालिनिनग्राद में अमेरिकी उड़ानों के लिए अड़चनें पैदा कर रहा है। इसके अलावा उनका यह भी कहना है कि रूस अमेरिकी और यूरोपीय क्षेत्र में अपनी उड़ानों का इस्तेमाल संवेदनशील अमेरिकी इंफ्रास्ट्रक्चर की पहचान करने के लिए कर रहा है जिसे कि युद्ध की स्थिति में निशाना बनाया जा सके। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका अगर इस संधि से निकलता है तो फिर ऐसी रूसी उड़ानें अमेरिकी वायु क्षेत्र में संभव नहीं हो पाएंगी। इसके बाद रूस भी समझौते से हट सकता है और फिर अन्य सदस्य देश भी रूसी उड़ानों के लिए अपने आकाश को बंद कर सकते हैं। इससे पूरे यूरोपीय क्षेत्र की सुरक्षा प्रभावित होगी, खासकर ऐसे समय में जब रूस समर्थित अलगाववादी यूक्रेन और जॉर्जिया के कुछ इलाकों पर नियंत्रण किए हुए हैं। वॉशिंगटन स्थित आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के प्रमुख डेरिल किमबॉल का कहना है कि संधि को छोड़ने का ट्रंप का फैसला अपरिपक्व और गैरजिम्मेदाराना है। नाटो सदस्यों के साथ-साथ यूक्रेन जैसे देश अमेरिका पर ओपन स्काई संधि को न छोड़ने का दबाव डाल रहे हैं। इसके तहत निगरानी उड़ानें सदस्य देशों को औचक सैन्य हमलों जैसी गतिविधियों की जानकारी देती हैं। रूस की राजधानी मॉस्को में सरकारी समाचार एजेंसी रिया ने रूसी विदेश उपमंत्री एलेक्सांदर ग्रुशको के हवाले से कहा है कि उनके देश ने संधि का उल्लंघन नहीं किया है और वह उन तकनीकी मुद्दों पर बात करने को तैयार है जिन्हें अमेरिका संधि का उल्लंघन बता रहा है। ट्रंप के ताजा कदम से इस बात को लेकर भी संदेह पैदा हो गए हैं कि क्या अमेरिका दो हज़ार दस की नई स्टार्ट संधि को आगे बढ़ाएगा? यह संधि परमाणु हथियारों की तैनाती को सीमित करती है। इसके तहत अमेरिका और रूस अपने-अपने एक,पाँच सौ पचास से ज्यादा रणनीतिक परमाणु हथियारों की तैनाती नहीं कर सकते। नई स्टार्ट संधि अगले साल फरवरी में खत्म हो रही है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी का कहना है कि हाल के दिनों में अमेरिकी अधिकारियों ने रूसी अधिकारियों से परमाणु हथियार वार्ताओं के नए दौर की शुरुआत की है ताकि परमाणु हथियारों के नियंत्रण के लिए नए उपायों का मसौदा तैयार करने की प्रकिया शुरू की जा सके। ट्रंप नई स्टार्ट संधि के स्थान पर एक दूसरी संधि लाना चाहते हैं और परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की संधि में वे चीन को भी शामिल करना चाहते हैं। हालांकि चीन इससे इंकार कर चुका है जिसके पास लगभग तीन सौ परमाणु हथियार हैं। व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ'ब्रायन ने फॉक्स न्यूज को बताया कि उन्हें नहीं लगता कि अमेरिका नई स्टार्ट संधि को छोड़ेगा। ओपन स्काई संधि को लेकर अमेरिका का फैसला छः महीने की समीक्षा के बाद आया है। इसमें अधिकारियों ने पाया कि रूस ने कई बार संधि का पालन नहीं किया। पिछले साल अमेरिकी प्रशासन रूस के साथ मध्यम दूरी के परमाणु हथियारों से जुड़ी संधि से बाहर निकल गया। एके/आरपी |
यूक्रेन के प्रधानमंत्री आर्सेनी यात्सेनुक ने टेलीविजन पर एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि यूक्रेनी नागरिकों को अपने घरों को गर्म करने और अपने हीटिंग सिस्टम को बदलने की आवश्यकता है।
"हमें यथासंभव कम गैस, ऊर्जा और अन्य प्रकार के ईंधन का उपयोग करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। हमारे हीटिंग सिस्टम को सोवियत काल में वापस बनाया गया था, "आरआईए ने उसे कहा। "समाचार".
राजनेता ने उल्लेख किया कि यूक्रेन को ऊर्जा आधुनिकीकरण की आवश्यकता है, अर्थात्, "बॉयलरों को बदल दें जो बहुत अधिक गैस का उपभोग करते हैं, जो घर को अच्छी तरह से गर्म नहीं करते हैं और जिसके कारण बिल बहुत अधिक मात्रा में आते हैं। " उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे उपयोगिताओं में Ukrainians की लागत कम हो जाएगी।
उनके अनुसार, हर कोई जो घरों को बदलना और बॉयलर बदलना चाहता है, उसे मुआवजा और ऋण मिलेगा।
| यूक्रेन के प्रधानमंत्री आर्सेनी यात्सेनुक ने टेलीविजन पर एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि यूक्रेनी नागरिकों को अपने घरों को गर्म करने और अपने हीटिंग सिस्टम को बदलने की आवश्यकता है। "हमें यथासंभव कम गैस, ऊर्जा और अन्य प्रकार के ईंधन का उपयोग करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। हमारे हीटिंग सिस्टम को सोवियत काल में वापस बनाया गया था, "आरआईए ने उसे कहा। "समाचार". राजनेता ने उल्लेख किया कि यूक्रेन को ऊर्जा आधुनिकीकरण की आवश्यकता है, अर्थात्, "बॉयलरों को बदल दें जो बहुत अधिक गैस का उपभोग करते हैं, जो घर को अच्छी तरह से गर्म नहीं करते हैं और जिसके कारण बिल बहुत अधिक मात्रा में आते हैं। " उन्होंने जोर देकर कहा कि इससे उपयोगिताओं में Ukrainians की लागत कम हो जाएगी। उनके अनुसार, हर कोई जो घरों को बदलना और बॉयलर बदलना चाहता है, उसे मुआवजा और ऋण मिलेगा। |
भाग III -~-खण्ड 4]
(ख) जहां प्राधिकरण द्वारा की गई ऐसी जांच के तुरन्त बाद बुलाई गई बैठक में प्राधिकरण को जांच करने की आवश्यकता है।
जहां प्राधिकरण को जांच करने की आवश्यकता है, वहां जिला स्तर की समिति अथवा राज्य स्तर की समिति से आवेदन की प्राप्ति की तारीख से दो मास के भीतर ऐसी जांच पूरी की जाएगी।
अध्याय - VI
नमूने लेने की प्रक्रिया
14. (1) निम्नलिखित संस्थाओं अथवा प्रयोगशालाओं को नमूनों की जांच तथा विश्लेषण करने के लिए मान्यता तथा अनुमोदन प्रदान किए गए हैं, अर्थात् -
(क) भारत सरकार की प्रयोगशालाएं;
( ख ) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की प्रयोगशालाएं;
(ग) वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की प्रयोगशालाएं;
(घ) समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण की प्रयोगशालाएं; (ड) विशेषज्ञ जांच एजेंसी की प्रयोगशालाएं;
(च) राज्य सरकार की राष्ट्रीय परीक्षण एवं मापन संबंधी अधिकृत बोर्ड की प्रयोगशालाएं;
(छ) परीक्षण एवं मापन प्रयोगशालाओं संबंधी राष्ट्रीय अधिकृत बोर्ड की अधिकृत प्रयोगशालाएं।
( 2 ) प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत अधिकारी तटीय जलकृषि फार्म के अधिभोगी अथवा उसके एजेंट अथवा फार्म के प्रभारी व्यक्ति को नमूने विश्लेषित कराने के अपने आशय की अनुसूची-II में दिया गया प्ररूप-1 में दिया गया नोटिस तामील करेगा।
(3) नमूने लेने के लिए प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत अधिकारी पर्याप्त मात्रा में नमूने एकत्र करेगा और उन्हें दो समान हिस्सों में बांटेगा, उन पर सील और निशान लगाएगा तथा वह अधिकारी उस व्यक्ति को जिससे वह नमूने एकत्र किए गए हैं इस प्रकार सील एवं निशान लगे सभी नमूनों अथवा कुछ नमूनों पर अपनी मोहर अथवा निशान लगाने की अनुमति देगा।
[ भाग III-खण्डः4
(4) यदि, नमूने कंटेनर अथवा कम मात्रा में लिए गए हैं और उन्हें खोलने पर उनके खराब होने अथवा क्षतिग्रस्त होने की संभावना हो तो अधिकारी कंटेनर को खोले बिना उसके दो नमूने ले लेगा और उस पर उसी रीति में सील तथा निशान लगा देगा।
नमूने लेने वाला अधिकारी,
(क) नमूने के एक हिस्से को उस व्यक्ति की इच्छा पर उसे सौंपेगा जिससे वह नमूना लिया गया है और उससे पावती लेगा, तथा वह उसे किसी अनुमोदित प्रयोगशाला को विश्लेषण के लिए भेजेगा।
(ख) नमूने के दूसरे हिस्से को अनुसूची-II में दिए गए प्ररूप-II के साथ पंजीकृत डाक अथवा विशेष संवाहक द्वारा तुरन्त किसी अभिहित प्रयोगशाला को विश्लेषण के लिए भेजेगा।
(ग) जिस व्यक्ति से नमूना लिया गया है, यदि उसके फार्म की कोई मोहर अथवा निशान है तो उसकी नमूना निशानी सहित उक्त प्ररूपII की प्रति को अलग से मुहरबंद लिफाफे में पंजीकृत डाक अथवा विशेष संवाहक द्वारा अभिहित प्रयोगशाला को भेजेगा।
(6) विश्लेषण के परिणाम का अनुसूची-II में दिए गए प्ररूप- III में तीन प्रतियों में अभिलिखित किया जाएगा और उस पर विश्लेषक द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे तथा उसे उस अधिकारी के पास भेजा जाएगा जिससे विश्लेषण के लिए नमूना प्राप्त हुआ था।
(7) विश्लेषक की रिपोर्ट प्राप्त होने पर, वह अधिकारी, उस रिपोर्ट की एक प्रति तुरन्त उस व्यक्ति को भेज देगा जिससे नमूना लिया गया था, उसकी एक प्रति यदि आवश्यक हुआ तो न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए अपने पास रखेगा और एक प्रति प्राधिकरण को भेजगा।
(8) जहां संस्थान अथवा प्रयोगशाला द्वारा किए गए विश्लेषण की रिपोर्ट से अधिनियम, नियमों, विनियमों के किन्हीं उपबंधों अथवा पंजीकरण की शर्तों के उल्लंघन का पता चलता है तो प्राधिकरण किसी भी अन्य कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना फार्म का पंजीकरण रद्द कर सकेगा।
अर्पित कैशले अरविन्द कौशल
संयुक्त सचिव (मात्स्यिकी) | भाग III -~-खण्ड चार] जहां प्राधिकरण द्वारा की गई ऐसी जांच के तुरन्त बाद बुलाई गई बैठक में प्राधिकरण को जांच करने की आवश्यकता है। जहां प्राधिकरण को जांच करने की आवश्यकता है, वहां जिला स्तर की समिति अथवा राज्य स्तर की समिति से आवेदन की प्राप्ति की तारीख से दो मास के भीतर ऐसी जांच पूरी की जाएगी। अध्याय - VI नमूने लेने की प्रक्रिया चौदह. निम्नलिखित संस्थाओं अथवा प्रयोगशालाओं को नमूनों की जांच तथा विश्लेषण करने के लिए मान्यता तथा अनुमोदन प्रदान किए गए हैं, अर्थात् - भारत सरकार की प्रयोगशालाएं; भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की प्रयोगशालाएं; वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की प्रयोगशालाएं; समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण की प्रयोगशालाएं; विशेषज्ञ जांच एजेंसी की प्रयोगशालाएं; राज्य सरकार की राष्ट्रीय परीक्षण एवं मापन संबंधी अधिकृत बोर्ड की प्रयोगशालाएं; परीक्षण एवं मापन प्रयोगशालाओं संबंधी राष्ट्रीय अधिकृत बोर्ड की अधिकृत प्रयोगशालाएं। प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत अधिकारी तटीय जलकृषि फार्म के अधिभोगी अथवा उसके एजेंट अथवा फार्म के प्रभारी व्यक्ति को नमूने विश्लेषित कराने के अपने आशय की अनुसूची-II में दिया गया प्ररूप-एक में दिया गया नोटिस तामील करेगा। नमूने लेने के लिए प्राधिकरण द्वारा प्राधिकृत अधिकारी पर्याप्त मात्रा में नमूने एकत्र करेगा और उन्हें दो समान हिस्सों में बांटेगा, उन पर सील और निशान लगाएगा तथा वह अधिकारी उस व्यक्ति को जिससे वह नमूने एकत्र किए गए हैं इस प्रकार सील एवं निशान लगे सभी नमूनों अथवा कुछ नमूनों पर अपनी मोहर अथवा निशान लगाने की अनुमति देगा। [ भाग III-खण्डःचार यदि, नमूने कंटेनर अथवा कम मात्रा में लिए गए हैं और उन्हें खोलने पर उनके खराब होने अथवा क्षतिग्रस्त होने की संभावना हो तो अधिकारी कंटेनर को खोले बिना उसके दो नमूने ले लेगा और उस पर उसी रीति में सील तथा निशान लगा देगा। नमूने लेने वाला अधिकारी, नमूने के एक हिस्से को उस व्यक्ति की इच्छा पर उसे सौंपेगा जिससे वह नमूना लिया गया है और उससे पावती लेगा, तथा वह उसे किसी अनुमोदित प्रयोगशाला को विश्लेषण के लिए भेजेगा। नमूने के दूसरे हिस्से को अनुसूची-II में दिए गए प्ररूप-II के साथ पंजीकृत डाक अथवा विशेष संवाहक द्वारा तुरन्त किसी अभिहित प्रयोगशाला को विश्लेषण के लिए भेजेगा। जिस व्यक्ति से नमूना लिया गया है, यदि उसके फार्म की कोई मोहर अथवा निशान है तो उसकी नमूना निशानी सहित उक्त प्ररूपII की प्रति को अलग से मुहरबंद लिफाफे में पंजीकृत डाक अथवा विशेष संवाहक द्वारा अभिहित प्रयोगशाला को भेजेगा। विश्लेषण के परिणाम का अनुसूची-II में दिए गए प्ररूप- III में तीन प्रतियों में अभिलिखित किया जाएगा और उस पर विश्लेषक द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे तथा उसे उस अधिकारी के पास भेजा जाएगा जिससे विश्लेषण के लिए नमूना प्राप्त हुआ था। विश्लेषक की रिपोर्ट प्राप्त होने पर, वह अधिकारी, उस रिपोर्ट की एक प्रति तुरन्त उस व्यक्ति को भेज देगा जिससे नमूना लिया गया था, उसकी एक प्रति यदि आवश्यक हुआ तो न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए अपने पास रखेगा और एक प्रति प्राधिकरण को भेजगा। जहां संस्थान अथवा प्रयोगशाला द्वारा किए गए विश्लेषण की रिपोर्ट से अधिनियम, नियमों, विनियमों के किन्हीं उपबंधों अथवा पंजीकरण की शर्तों के उल्लंघन का पता चलता है तो प्राधिकरण किसी भी अन्य कार्रवाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना फार्म का पंजीकरण रद्द कर सकेगा। अर्पित कैशले अरविन्द कौशल संयुक्त सचिव |
उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच एक बार फिर तकरार बढ़ गई है। अपने शासक किम जोंग उन को 'रॉकेटमैन' कहने पर उत्तर कोरिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर बुरी तरह भड़क गया। उत्तर कोरिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि उकसाने वाले बयानों का जवाब दिया है।
उत्तर कोरिया ने कहा कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति इसी तरह उकसाने वाली बयानबाजी करते रहेंगे तो उनका फिर से अपमान करते हुए उन्हें 'सठियाया' हुआ कहा जाता रहेगा। उत्तर कोरिया की प्रथम उप विदेश मंत्री चोई सोन-होई ने उत्तर कोरिया के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के ट्रंप के बयान और किम को रॉकेटमैन के नाम से पुकारने के बदले यह चेतावनी दी।
क्या था अमेरिकी राष्ट्रपति ने?
| उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच एक बार फिर तकरार बढ़ गई है। अपने शासक किम जोंग उन को 'रॉकेटमैन' कहने पर उत्तर कोरिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर बुरी तरह भड़क गया। उत्तर कोरिया ने चेतावनी देते हुए कहा कि उकसाने वाले बयानों का जवाब दिया है। उत्तर कोरिया ने कहा कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति इसी तरह उकसाने वाली बयानबाजी करते रहेंगे तो उनका फिर से अपमान करते हुए उन्हें 'सठियाया' हुआ कहा जाता रहेगा। उत्तर कोरिया की प्रथम उप विदेश मंत्री चोई सोन-होई ने उत्तर कोरिया के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के ट्रंप के बयान और किम को रॉकेटमैन के नाम से पुकारने के बदले यह चेतावनी दी। क्या था अमेरिकी राष्ट्रपति ने? |
गाय घाट रिमांड होम की सुपरिटेंडेंट और महिला थाना में दर्ज रेप के दो केस की मुख्य आरोपी वंदना गुप्ता को गुरुवार को भी राहत नहीं मिली। पटना सिविल कोर्ट में उनकी एंटी सिपेट्री बेल की याचिका पर सुनवाई थी। उन्हें और उनके वकील को उम्मीद थी की आज कोर्ट से जमानत मिल जाएगी। पर ऐसा हुआ नहीं। दरअसल, इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने SIT से केस डायरी मांगी थी। पर आज हुई सुनवाई से पहले तक कोर्ट को केस डायरी मिली ही नहीं।
दोनों रेप केस में पीड़िता की वकील मीनू कुमारी भी कोर्ट में मौजूद थीं। वो वंदना गुप्ता को मिलने वाली जमानत का विरोध करने गई थीं। इस बारे में मीनू ने बताया कि आज ADJ-1 की कोर्ट में वंदना गुप्ता के बेल पर सुनवाई थी। जो केस डायरी नहीं आने की वजह से पूरी नहीं हुई। इस कारण वंदना गुप्ता को बेल नहीं मिली। कोर्ट केस डायरी को पढ़ना चाहती है। इसका अवलोकन करना चाहती है। लेकिन, यहां पर SIT पूरी तरह से फेल साबित हो रही है।
जांच टीम ने अब तक केस डायरी कोर्ट में सबमिट नहीं की। जितनी बड़ी बातें जांच के दरम्यान SIT ने की थी कि CCTV खंगाला गया, उसका DVR है। इन सब बातों को केस डायरी के जरिए सामने लाना चाहिए था। मगर, अब तक ऐसा हुआ नहीं। इस केस में SIT ने कितना काम किया? यह सब दिखने लगा है। यहां पर पूरी तरह से SIT का फेल्योरेंस सामने आया है। वंदना गुप्ता की जमानत को लेकर आज चौथी बार सुनवाई हुई थी।
कोर्ट में केस डायरी सबमिट क्यों नहीं किया गया? इसका क्या कारण हो सकता है? इस सवाल पर वकील मीनू कुमारी ने गंभीर आरोप लगाया और कहा कि बिहार पुलिस के तरफ से गाय घाट रिमांड होम की सुपरिटेंडेंट वंदना गुप्ता को बचाने का अभियान चल रहा है।
हाल ही में मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी गाय घाट रिमांड होम की जांच को लेकर तल्ख टिप्पणी की थी। गाय घाट रिमांड होम के मामले में पटना हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। सारी बातों इनके सामने रखा जाएगा।
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| गाय घाट रिमांड होम की सुपरिटेंडेंट और महिला थाना में दर्ज रेप के दो केस की मुख्य आरोपी वंदना गुप्ता को गुरुवार को भी राहत नहीं मिली। पटना सिविल कोर्ट में उनकी एंटी सिपेट्री बेल की याचिका पर सुनवाई थी। उन्हें और उनके वकील को उम्मीद थी की आज कोर्ट से जमानत मिल जाएगी। पर ऐसा हुआ नहीं। दरअसल, इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने SIT से केस डायरी मांगी थी। पर आज हुई सुनवाई से पहले तक कोर्ट को केस डायरी मिली ही नहीं। दोनों रेप केस में पीड़िता की वकील मीनू कुमारी भी कोर्ट में मौजूद थीं। वो वंदना गुप्ता को मिलने वाली जमानत का विरोध करने गई थीं। इस बारे में मीनू ने बताया कि आज ADJ-एक की कोर्ट में वंदना गुप्ता के बेल पर सुनवाई थी। जो केस डायरी नहीं आने की वजह से पूरी नहीं हुई। इस कारण वंदना गुप्ता को बेल नहीं मिली। कोर्ट केस डायरी को पढ़ना चाहती है। इसका अवलोकन करना चाहती है। लेकिन, यहां पर SIT पूरी तरह से फेल साबित हो रही है। जांच टीम ने अब तक केस डायरी कोर्ट में सबमिट नहीं की। जितनी बड़ी बातें जांच के दरम्यान SIT ने की थी कि CCTV खंगाला गया, उसका DVR है। इन सब बातों को केस डायरी के जरिए सामने लाना चाहिए था। मगर, अब तक ऐसा हुआ नहीं। इस केस में SIT ने कितना काम किया? यह सब दिखने लगा है। यहां पर पूरी तरह से SIT का फेल्योरेंस सामने आया है। वंदना गुप्ता की जमानत को लेकर आज चौथी बार सुनवाई हुई थी। कोर्ट में केस डायरी सबमिट क्यों नहीं किया गया? इसका क्या कारण हो सकता है? इस सवाल पर वकील मीनू कुमारी ने गंभीर आरोप लगाया और कहा कि बिहार पुलिस के तरफ से गाय घाट रिमांड होम की सुपरिटेंडेंट वंदना गुप्ता को बचाने का अभियान चल रहा है। हाल ही में मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने भी गाय घाट रिमांड होम की जांच को लेकर तल्ख टिप्पणी की थी। गाय घाट रिमांड होम के मामले में पटना हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। सारी बातों इनके सामने रखा जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
इस हैरतअंगेज़ मालूमात
नयां घोड़ा "मसजः" था इसे एक देहाती से दस ऊँट के बदले
सरोदा था।
दसवा घोड़ा "बहर" नाम का था। इस घोड़े को उन ताजिरों से खरीदा जो यमन से आए थे। उस घोड़े पर तीन मर्तबा मुसाबिकृत फरमाई । और तीनों मर्तवा यह साबिक यानी आगे रहा। इस पर हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपना दस्ते मुबारक उसकी पेशानी पर फेरकर मायाः तू दरिया है मैंने तेरा नाम "बहर" रखा। यह घोड़ा सफेद था। इने असीर ने कहा वह कमियत था।
ये हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दस घोड़े हैं जो कि अक्सर सैर में लिखे हैं। बाज़ ने और नाम भी बयान किए हैं जैस उबलक, हुत अकाल, जुल लममा, मुरतजल, तरादेह, सरहान, यअसूय, नहीव, अदहम, सजा, सजल, तरफ और मंदूब वगैरह। (मदारिजुन्नबुब्चत 2/1031 ) उस घोड़े का नाम क्या है जो सबसे पहले हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मिल्कियत में आया?
जवाबः "सकब" नामी घोड़ा पहला घोड़ा है जो हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मिल्कियत में आया था। (मदारिजुन्नयुब्बत 2/1051 ) सवालः हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास खच्चर कितने थे?
जवाबः हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खच्चर बहुत से थे। एक नगम "दलदल" था। उसे मक्रूकुल शाह स्कंदरिया ने हदिए में भेजा था। यह पहला खच्चर या जो अहदे इस्लाम सवारी में लाए दूसरा खच्चर जिसका नाम "फुज्ज़ा" था। इसे फरवा दिन अम्र हज़ामी ने हदिए में भेजा था वाज़ कहते हैं कि दलदल और फुज्ज़ा एक ही था तीसरा बच्चर जिसे इब्ने अला साहब ऐला ने भेजा था और उस खच्चर को "ऐलिया" कहते थे। एक खच्चर दौमतुल जिंदल से आया था और एक सच्चर नजाशी शाह हब्शा के पास से भी आया था।
( मदारिजुन्नबुब्बत 2/1037 ) सवालः हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास कितने गधे
जवाबः हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तीन गधे थे एक नाम | इस हैरतअंगेज़ मालूमात नयां घोड़ा "मसजः" था इसे एक देहाती से दस ऊँट के बदले सरोदा था। दसवा घोड़ा "बहर" नाम का था। इस घोड़े को उन ताजिरों से खरीदा जो यमन से आए थे। उस घोड़े पर तीन मर्तबा मुसाबिकृत फरमाई । और तीनों मर्तवा यह साबिक यानी आगे रहा। इस पर हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपना दस्ते मुबारक उसकी पेशानी पर फेरकर मायाः तू दरिया है मैंने तेरा नाम "बहर" रखा। यह घोड़ा सफेद था। इने असीर ने कहा वह कमियत था। ये हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दस घोड़े हैं जो कि अक्सर सैर में लिखे हैं। बाज़ ने और नाम भी बयान किए हैं जैस उबलक, हुत अकाल, जुल लममा, मुरतजल, तरादेह, सरहान, यअसूय, नहीव, अदहम, सजा, सजल, तरफ और मंदूब वगैरह। उस घोड़े का नाम क्या है जो सबसे पहले हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मिल्कियत में आया? जवाबः "सकब" नामी घोड़ा पहला घोड़ा है जो हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मिल्कियत में आया था। सवालः हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास खच्चर कितने थे? जवाबः हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के खच्चर बहुत से थे। एक नगम "दलदल" था। उसे मक्रूकुल शाह स्कंदरिया ने हदिए में भेजा था। यह पहला खच्चर या जो अहदे इस्लाम सवारी में लाए दूसरा खच्चर जिसका नाम "फुज्ज़ा" था। इसे फरवा दिन अम्र हज़ामी ने हदिए में भेजा था वाज़ कहते हैं कि दलदल और फुज्ज़ा एक ही था तीसरा बच्चर जिसे इब्ने अला साहब ऐला ने भेजा था और उस खच्चर को "ऐलिया" कहते थे। एक खच्चर दौमतुल जिंदल से आया था और एक सच्चर नजाशी शाह हब्शा के पास से भी आया था। सवालः हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास कितने गधे जवाबः हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के तीन गधे थे एक नाम |
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कोयला मंत्रालय 15 मई 2023 को मुंबई में भारत की जी20 अध्यक्षता के तहत कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के सहयोग से जस्ट ट्रांजिशन रोडमैप पर एक सेमिनार आयोजित करेगा। यह सेमिनार जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में भारत की जी20 अध्यक्षता के तहत तीसरी ईटीडब्ल्यूजी बैठक के साइड इवेंट के रूप में आयोजित किया जायेगा। कोयला मंत्रालय जी20 के ईटीडब्लयूजी विचार-विमर्श में भाग लेने वाले मंत्रालयों में से एक है।
ईटीडब्ल्यूजी की पहली बैठक फरवरी में बेंगलुरु में और दूसरी गांधीनगर, गुजरात में अप्रैल, 2023 में आयोजित की गई थी। मुंबई में तीसरी ईटीडब्ल्यूजी की 15 से 17 मई 2023 तक होने वाली बैठक में ऊर्जा ट्रांजिशन संबंधी मुद्दों पर विचार-विमर्श जारी रहेगा। जस्ट ट्रांजिशन रोडमैप पर संगोष्ठी में दो सत्र होंगे। उद्घाटन सत्र के बाद पैनल चर्चा सत्र होगा। कोयला सचिव श्री अमृत लाल मीणा पैनल चर्चा और उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता और संचालन करेंगे।
संगोष्ठी के दौरान विश्व बैंक और सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआई) भी जस्ट ट्रांजिशन पहलुओं पर प्रस्तुतियां देंगे। संगोष्ठी का उद्देश्य प्रमुख हितधारकों के बीच एक समावेशी संवाद की सुविधा प्रदान करना है। स्थिरता की दिशा में एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए, यह संगोष्ठी देश की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता किए बिना जीवाश्म ईंधन विशेष रूप से कोयले पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं से अधिक टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों के लिए एक सुचारू और समान ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के लिए रणनीतियों और पहलों का पता लगाएगी।
संगोष्ठी के दौरान, कोयला क्षेत्र में सतत और पर्यावरण के अनुकूल पहलों पर प्रकाश डालने वाला एक वीडियो दिखाया जाएगा। कोयला क्षेत्र में न्यायोचित परिवर्तन के लिए सर्वश्रेष्ठ वैश्विक प्रथाओं पर अध्ययन रिपोर्ट और जैव पुनर्प्राप्ति/वृक्षारोपण, इको-पार्क/खान पर्यटन पर तीन पुस्तिकाएं और जस्ट ट्रांजिशन पर माइनटेक का जी20 विशेष संस्करण भी जारी किया जाएगा। संगोष्ठी भारत और विदेशों के विशेषज्ञों को अपनी अंतर्दृष्टि, अनुभव और जस्ट ट्रांजिशन से संबंधित सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए सही मंच प्रदान करेगी।
प्रतिभागी संवाद सत्र और पैनल चर्चा में शामिल होंगे। संगोष्ठी सरकारी अधिकारियों, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, उद्योग के अगुआ और प्रसिद्ध शिक्षाविदों सहित गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति का गवाह बनेगी। यह आयोजन हरित और अधिक टिकाऊ विकास की दिशा में सामूहिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिभागियों के बीच मजबूत चर्चा, ज्ञान साझा करने और सहयोग को प्रोत्साहित करेगा। आधिकारिक यूट्यूब लिंकः https://youtube.com/live/QOB3xd3Xtrk? feature=share का उपयोग करके वर्चुअल रूप से संगोष्ठी में भाग लिया जा सकता है।
| Posted On: कोयला मंत्रालय पंद्रह मई दो हज़ार तेईस को मुंबई में भारत की जीबीस अध्यक्षता के तहत कोल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से जस्ट ट्रांजिशन रोडमैप पर एक सेमिनार आयोजित करेगा। यह सेमिनार जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में भारत की जीबीस अध्यक्षता के तहत तीसरी ईटीडब्ल्यूजी बैठक के साइड इवेंट के रूप में आयोजित किया जायेगा। कोयला मंत्रालय जीबीस के ईटीडब्लयूजी विचार-विमर्श में भाग लेने वाले मंत्रालयों में से एक है। ईटीडब्ल्यूजी की पहली बैठक फरवरी में बेंगलुरु में और दूसरी गांधीनगर, गुजरात में अप्रैल, दो हज़ार तेईस में आयोजित की गई थी। मुंबई में तीसरी ईटीडब्ल्यूजी की पंद्रह से सत्रह मई दो हज़ार तेईस तक होने वाली बैठक में ऊर्जा ट्रांजिशन संबंधी मुद्दों पर विचार-विमर्श जारी रहेगा। जस्ट ट्रांजिशन रोडमैप पर संगोष्ठी में दो सत्र होंगे। उद्घाटन सत्र के बाद पैनल चर्चा सत्र होगा। कोयला सचिव श्री अमृत लाल मीणा पैनल चर्चा और उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता और संचालन करेंगे। संगोष्ठी के दौरान विश्व बैंक और सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट भी जस्ट ट्रांजिशन पहलुओं पर प्रस्तुतियां देंगे। संगोष्ठी का उद्देश्य प्रमुख हितधारकों के बीच एक समावेशी संवाद की सुविधा प्रदान करना है। स्थिरता की दिशा में एक संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए, यह संगोष्ठी देश की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता किए बिना जीवाश्म ईंधन विशेष रूप से कोयले पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं से अधिक टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों के लिए एक सुचारू और समान ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के लिए रणनीतियों और पहलों का पता लगाएगी। संगोष्ठी के दौरान, कोयला क्षेत्र में सतत और पर्यावरण के अनुकूल पहलों पर प्रकाश डालने वाला एक वीडियो दिखाया जाएगा। कोयला क्षेत्र में न्यायोचित परिवर्तन के लिए सर्वश्रेष्ठ वैश्विक प्रथाओं पर अध्ययन रिपोर्ट और जैव पुनर्प्राप्ति/वृक्षारोपण, इको-पार्क/खान पर्यटन पर तीन पुस्तिकाएं और जस्ट ट्रांजिशन पर माइनटेक का जीबीस विशेष संस्करण भी जारी किया जाएगा। संगोष्ठी भारत और विदेशों के विशेषज्ञों को अपनी अंतर्दृष्टि, अनुभव और जस्ट ट्रांजिशन से संबंधित सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने के लिए सही मंच प्रदान करेगी। प्रतिभागी संवाद सत्र और पैनल चर्चा में शामिल होंगे। संगोष्ठी सरकारी अधिकारियों, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों, उद्योग के अगुआ और प्रसिद्ध शिक्षाविदों सहित गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति का गवाह बनेगी। यह आयोजन हरित और अधिक टिकाऊ विकास की दिशा में सामूहिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिभागियों के बीच मजबूत चर्चा, ज्ञान साझा करने और सहयोग को प्रोत्साहित करेगा। आधिकारिक यूट्यूब लिंकः https://youtube.com/live/QOBतीनxdतीनXtrk? feature=share का उपयोग करके वर्चुअल रूप से संगोष्ठी में भाग लिया जा सकता है। |
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Chhattisgarh News: दिल्ली में श्रद्धा मर्डर केस अभी किसी के जहन से गया नहीं था कि तभी छत्तीसगढ़ से एक और मामला सामने आ गया है।
Bihar News: समता पार्टी के अध्यक्ष उदय मंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर बिहार के शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की है।
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MSTC Limited Recruitment Jobs Naukri 2023: एमएसटीसी लिमिटेड ने मैनेजमेंट ट्रेनी और असिस्टेंट मैनेजर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन प्रक्रिया 27 मई से शुरू हो गई थी।
MSTC Limited Recruitment 2023: एमएसटीसी लिमिटेड ने मैनेजमेंट ट्रेनी और असिस्टेंट मैनेजर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन प्रक्रिया 27 मई से शुरू हो गई थी और आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 11 जून है। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट www. mstcindia. co. in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
एमएसटीसी लिमिटेड भर्ती 2023 पदों का विवरणः इस भर्ती अभियान के तहत MSTC लिमिटेड में मैनेजमेंट ट्रेनी और असिस्टेंट मैनेजर के 52 पदों को भरा जाएगा।
एमएसटीसी लिमिटेड भर्ती 2023 आवेदन शुल्कः उम्मीदवारों को ₹500 के आवेदन शुल्क का भुगतान करना होगा। अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / पीडब्ल्यूडी श्रेणियों से संबंधित उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क के भुगतान से छूट दी गई है।
एमएसटीसी लिमिटेड भर्ती 2023 चयन प्रक्रियाः कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) के आधार पर चयन किया जाएगा।
- आधिकारिक वेबसाइट www. mstcindia. co. in पर जाएं।
- होमपेज पर, कैरियर टैब पर क्लिक करें।
- इसके बाद अप्लाई लिंक पर क्लिक करें।
- आवेदन पत्र भरें।
- आवेदन शुल्क का भुगतान करें।
- फॉर्म जमा करें और भविष्य के संदर्भ के लिए प्रिंट ले लें।
| MSTC Limited Recruitment Jobs Naukri दो हज़ार तेईस: एमएसटीसी लिमिटेड ने मैनेजमेंट ट्रेनी और असिस्टेंट मैनेजर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन प्रक्रिया सत्ताईस मई से शुरू हो गई थी। MSTC Limited Recruitment दो हज़ार तेईस: एमएसटीसी लिमिटेड ने मैनेजमेंट ट्रेनी और असिस्टेंट मैनेजर पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन प्रक्रिया सत्ताईस मई से शुरू हो गई थी और आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि ग्यारह जून है। इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट www. mstcindia. co. in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। एमएसटीसी लिमिटेड भर्ती दो हज़ार तेईस पदों का विवरणः इस भर्ती अभियान के तहत MSTC लिमिटेड में मैनेजमेंट ट्रेनी और असिस्टेंट मैनेजर के बावन पदों को भरा जाएगा। एमएसटीसी लिमिटेड भर्ती दो हज़ार तेईस आवेदन शुल्कः उम्मीदवारों को पाँच सौ रुपया के आवेदन शुल्क का भुगतान करना होगा। अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / पीडब्ल्यूडी श्रेणियों से संबंधित उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क के भुगतान से छूट दी गई है। एमएसटीसी लिमिटेड भर्ती दो हज़ार तेईस चयन प्रक्रियाः कंप्यूटर आधारित टेस्ट के आधार पर चयन किया जाएगा। - आधिकारिक वेबसाइट www. mstcindia. co. in पर जाएं। - होमपेज पर, कैरियर टैब पर क्लिक करें। - इसके बाद अप्लाई लिंक पर क्लिक करें। - आवेदन पत्र भरें। - आवेदन शुल्क का भुगतान करें। - फॉर्म जमा करें और भविष्य के संदर्भ के लिए प्रिंट ले लें। |
इंग्लैंड के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज जेम्स फोस्टर ने मौजूदा काउंटी सीजन के बाद पेशेवर क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया है।
फोस्टर काउंटी में एसेक्स टीम की ओर से खेलते हैं। एसेक्स ने इस विकेटकीपर का कॉन्ट्रेक्ट रिन्यू नहीं किया है। 38 साल के फोस्टर ने इंग्लैंड की ओर से 7 टेस्ट और 11 वनडे इंटरनेशनल और 5 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले हैं।
उन्होंने इसके बाद वर्ष 2000 में काउंटी में वापसी की। इस सीजन वो एसेक्स की ओर से लिमिटेड ओवर मैच में दिखाई दिए। एसेक्स ने एडम व्हीटर को अपना पहला विकेटकीपर विकल्प रखा है जबकि उनके बैकअप के रूप में माइकल पीपर हैं।
फोस्टर ने मई से अब तक अपने क्लब के लिए केवल 4 प्रतिस्पर्धी मैच खेले हैं। इस सत्र के बाद उनका कॉन्ट्रेक्ट खत्म होने वाला है। यही वजह है कि जेम्स ने क्रिकेट छोड़ने का फैसला कर लिया है। फोस्टर ने 2001 में इंग्लैंड के लिए अपना डेब्यू किया था और अपना अंतिम इंटरनेशनल मैच 2009 में खेला था।
फोस्टर अब बिग बैश टीम सिडनी थंडर के साथ कोच के रूप में जुड़ेंगे।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में फोस्टर का रिकॉर्ड शानदार रहा है। फोस्टर ने 289 प्रथम श्रेणी मैचों में 13,761 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से 23 शतक और 70 अर्धशतक भी निकले हैं।
| इंग्लैंड के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज जेम्स फोस्टर ने मौजूदा काउंटी सीजन के बाद पेशेवर क्रिकेट को अलविदा कहने का फैसला किया है। फोस्टर काउंटी में एसेक्स टीम की ओर से खेलते हैं। एसेक्स ने इस विकेटकीपर का कॉन्ट्रेक्ट रिन्यू नहीं किया है। अड़तीस साल के फोस्टर ने इंग्लैंड की ओर से सात टेस्ट और ग्यारह वनडे इंटरनेशनल और पाँच टी-बीस इंटरनेशनल मैच खेले हैं। उन्होंने इसके बाद वर्ष दो हज़ार में काउंटी में वापसी की। इस सीजन वो एसेक्स की ओर से लिमिटेड ओवर मैच में दिखाई दिए। एसेक्स ने एडम व्हीटर को अपना पहला विकेटकीपर विकल्प रखा है जबकि उनके बैकअप के रूप में माइकल पीपर हैं। फोस्टर ने मई से अब तक अपने क्लब के लिए केवल चार प्रतिस्पर्धी मैच खेले हैं। इस सत्र के बाद उनका कॉन्ट्रेक्ट खत्म होने वाला है। यही वजह है कि जेम्स ने क्रिकेट छोड़ने का फैसला कर लिया है। फोस्टर ने दो हज़ार एक में इंग्लैंड के लिए अपना डेब्यू किया था और अपना अंतिम इंटरनेशनल मैच दो हज़ार नौ में खेला था। फोस्टर अब बिग बैश टीम सिडनी थंडर के साथ कोच के रूप में जुड़ेंगे। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में फोस्टर का रिकॉर्ड शानदार रहा है। फोस्टर ने दो सौ नवासी प्रथम श्रेणी मैचों में तेरह,सात सौ इकसठ रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से तेईस शतक और सत्तर अर्धशतक भी निकले हैं। |
नई दिल्लीः
पंजाब में अमरिंदर सरकार की ओर से सभी विधायकों के लिए डोप टेस्ट अनिवार्य कराए जाने के बाद उन्हीं के दो विधायक मुश्किल में पड़ गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करतारपुर के कांग्रेस विधायक सुरिंदर सिंह चौधरी डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए। उनके यूरीन सैंपल में नशीली दवा बेंजोडाइजेपिन के अंश पाए गए।
हालांकि कांग्रेस विधायक ने किसी भी प्रकार का नशा लेने की बात से इंकार किया है।
चौधरी का कहना है कि उन्होंने दिमाग को रिलेक्स करने वाली दवा का सेवन डॉक्टर से पूछने के बाद किया था।
पंजाब के इतिहास में किसी नेता डोप टेस्ट पॉजिटिव आना बड़ी बात नहीं है। इससे पहले विधायक बावा हैनरी, रजिंदर बेरी ,सांसद चौधरी संतोख सिंह, विपक्ष के नेता सुखपाल सिंह खैहरा जैसे बड़े नेताओं का डोप टेस्ट भा पॉजिटिव आ चुका है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्स्टेंस (एनडीपीएस) कानून, 1985 में संशोधन के जरिए ड्रग की तस्करी करने के लिए मौत की सजा के प्रवधान की सिफारिश करने का फैसला लिया गया था।
जिसके तहत पंजाब में 3. 5 लाख सरकारी कर्मचारी के डोप टेस्ट होंगे. इस नियम के बाद अब नेताओं में भी डोप टेस्ट कराने की होड़ लगी हुई है।
| नई दिल्लीः पंजाब में अमरिंदर सरकार की ओर से सभी विधायकों के लिए डोप टेस्ट अनिवार्य कराए जाने के बाद उन्हीं के दो विधायक मुश्किल में पड़ गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करतारपुर के कांग्रेस विधायक सुरिंदर सिंह चौधरी डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए। उनके यूरीन सैंपल में नशीली दवा बेंजोडाइजेपिन के अंश पाए गए। हालांकि कांग्रेस विधायक ने किसी भी प्रकार का नशा लेने की बात से इंकार किया है। चौधरी का कहना है कि उन्होंने दिमाग को रिलेक्स करने वाली दवा का सेवन डॉक्टर से पूछने के बाद किया था। पंजाब के इतिहास में किसी नेता डोप टेस्ट पॉजिटिव आना बड़ी बात नहीं है। इससे पहले विधायक बावा हैनरी, रजिंदर बेरी ,सांसद चौधरी संतोख सिंह, विपक्ष के नेता सुखपाल सिंह खैहरा जैसे बड़े नेताओं का डोप टेस्ट भा पॉजिटिव आ चुका है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्स्टेंस कानून, एक हज़ार नौ सौ पचासी में संशोधन के जरिए ड्रग की तस्करी करने के लिए मौत की सजा के प्रवधान की सिफारिश करने का फैसला लिया गया था। जिसके तहत पंजाब में तीन. पाँच लाख सरकारी कर्मचारी के डोप टेस्ट होंगे. इस नियम के बाद अब नेताओं में भी डोप टेस्ट कराने की होड़ लगी हुई है। |
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने मंगलवार को बताया कि वाहनों में सीट बेल्ट पहनने के क़ानूनी प्रावधान को अनिवार्य बनाए जाने के बाद से, लाखों लोगों की ज़िन्दगियों की रक्षा सुनिश्चित कर पाना सम्भव हुआ है. विश्व भर में, वाहन सम्बन्धी सुरक्षा क़ानूनों के पाँच दशक पूरा होने के अवसर पर, इन उपायों की अहमियत को रेखांकित किया गया है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी (WHO) के अनुसार, आगे की सीट पर बैठने वाले यात्रियों द्वारा सुरक्षा बेल्ट पहनने से, घातक रूप से ज़ख़्मी होने और मौत होने की आशंका में 45 से 50 फ़ीसदी की कमी लाई जा सकती है.
वहीं, पीछे की सीट पर बैठने वाले यात्रियों को गम्भीर चोटों में 25 प्रतिशत की कमी आने की सम्भावना होती है.
संयुक्त राष्ट्र की नियामन संख्या 16 के तहत, वाहनों में सीट बेल्ट लगाए जाने और उसे पहने जाने की तकनीकी जानकारी दी गई है, और यह वर्ष 1970 में लागू की गई थी.
इसके बाद के वर्षों में, वाहनों में सीट बेल्ट के इस्तेमाल के लिए क़ानूनी प्रावधान वाले देशों की संख्या में वृद्धि हुई.
सड़क सुरक्षा पर यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, फ़िलहाल, 105 देशों में सर्वोत्तम रक्षा उपायों के अनुरूप, सीट बेल्ट क़ानूनों अपनाए गए हैं.
योरोप के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक आयोग (UNECE) का कहना है कि यात्रियों को किसी दुर्घटना में गम्भीर रूप से घायल होने से बचाने या वाहन से बाहर निकलने से बचाने के लिए सीट बेल्ट, सर्वोत्तम सुरक्षा उपाय है.
इस आयोग द्वारा, सड़क सुरक्षा के लिए यूएन के विशेष दूत के कार्यालय और न्यास कोष की मेज़बानी की जाती है, जो वर्ष 2018 में शुरू किया गया था.
UNECE का कहना है कि पिछले अनेक दशकों में, नियामन और उपभोक्ता मांग से उच्च-आय वाले देशों में कारें पहले से अधिक सुरक्षित हुई हैं. सड़कों पर कम संख्या में लोग हताहत हो रहे हैं.
उदाहरण स्वरूप, योरोप में वर्ष 2000 और 2010 के बीच सड़क हादसों में मृतकों या घायलों की संख्या में 25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, और 2010 से 2019 तक इसमें 15 प्रतिशत की कमी आई.
सड़क सुरक्षा पर अन्तरराष्ट्रीय परिवहन फ़ोरम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2010 से 2019 की अवधि में, विकसित देशों की सड़कों पर कार में बैठे व्यक्तियों की मौतों की संख्या में गिरावट नज़र आई, विशेष रूप से ग्रीस में जहाँ, मृतक व घायलों की संख्या में 63 प्रतिशत की कमी आई.
कोरिया गणराज्य के लिए यह आँकड़ा 51 प्रतिशत आँका गया है.
रिपोर्ट बताती है कि 13 अन्य देशों में हताहतों की संख्या में 30 प्रतिशत या उससे अधिक की कमी दर्ज की गई हैः अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, डेनमार्क, आयरलैंड, लक्ज़मबर्ग, लिथुएनिया, पोर्तुगल, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन, और स्विट्ज़रलैंड.
यूएन आयोग का कहना है कि अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे देश हैं, जहाँ उपयुक्त क़ानूनी प्रावधानों की आवश्यकता होगी, ताकि वाहन चालकों और यात्रियों के लिए सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य बनाया जा सके और उनका सख़्ती से पालन सम्भव हो.
सड़कों पर हर वर्ष 13 लाख से अधिक लोगों की मौत होती है. वाहनों से जुड़ी घटनाओं में होने वाली 93 प्रतिशत मौतें विकासशील देशों में होती हैं.
यूएन के विशेष दूत ने देशों की सरकारों और उद्योग जगत के सभी हितधारकों के साथ मिलकर प्रयास किए जाने पर बल दिया है, ताकि विकासशील जगत में भी लोगों को, विकसित देशों के समान स्तर पर सुरक्षा मिल सके.
इसका अर्थ होगाः अन्तरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप क़ानूनों को अपनाया व लागू किया जाना, और नए व इस्तेमाल किए गए वाहनों में सीट बेल्ट की उपयुक्त व्यवस्था किया जाना.
संयुक्त राष्ट्र नियामन संख्या 16, वाहनों में सीट बेल्ट के इस्तेमाल के लिए एकमात्र अन्तरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त उपाय है.
यह कारगर सीट बेल्ट से जुड़ी अहर्ताओं को निर्धारित करने के अलावा, उनके परीक्षण व प्रमाणन परीक्षण को सुनिश्चित करता है, जिससे वाहन चालकों व यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है.
नियामन संख्या 16 के अन्तर्गत, स्वीकृति प्राप्त सीट बेल्ट का बेहद सख़्त परिस्थितियों में परीक्षण किया जाता है, ताकि उनकी सहन करने और यर बैग जैसी अन्य सुरक्षा प्रणालियों के साथ काम करने की क्षमता को मापा जा सके.
फ़िलहाल 52 देश, पहियों वाले वाहनों के लिए यूएन तकनीकी नियामन पर वर्ष 1958 में हुए समझौते में शामिल हैं, जोकि नियामन संख्या 16 को, राष्ट्रीय क़ानून में तब्दील करता है. वहीं, अनेक अन्य देशों ने कुछ बदलावों के साथ इस नियामन को लागू किया है.
सीट बेल्ट से इतर, वाहन यात्रियों और सड़क पर अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र नियामन के तहत एयर बैग, इलैक्ट्रॉनिक स्थिरता नियंत्रण, राहगीर सुरक्षा और बच्चों को नियंत्रण में रखने समेत अन्य उपाय हैं.
| संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने मंगलवार को बताया कि वाहनों में सीट बेल्ट पहनने के क़ानूनी प्रावधान को अनिवार्य बनाए जाने के बाद से, लाखों लोगों की ज़िन्दगियों की रक्षा सुनिश्चित कर पाना सम्भव हुआ है. विश्व भर में, वाहन सम्बन्धी सुरक्षा क़ानूनों के पाँच दशक पूरा होने के अवसर पर, इन उपायों की अहमियत को रेखांकित किया गया है. यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, आगे की सीट पर बैठने वाले यात्रियों द्वारा सुरक्षा बेल्ट पहनने से, घातक रूप से ज़ख़्मी होने और मौत होने की आशंका में पैंतालीस से पचास फ़ीसदी की कमी लाई जा सकती है. वहीं, पीछे की सीट पर बैठने वाले यात्रियों को गम्भीर चोटों में पच्चीस प्रतिशत की कमी आने की सम्भावना होती है. संयुक्त राष्ट्र की नियामन संख्या सोलह के तहत, वाहनों में सीट बेल्ट लगाए जाने और उसे पहने जाने की तकनीकी जानकारी दी गई है, और यह वर्ष एक हज़ार नौ सौ सत्तर में लागू की गई थी. इसके बाद के वर्षों में, वाहनों में सीट बेल्ट के इस्तेमाल के लिए क़ानूनी प्रावधान वाले देशों की संख्या में वृद्धि हुई. सड़क सुरक्षा पर यूएन स्वास्थ्य एजेंसी की वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, फ़िलहाल, एक सौ पाँच देशों में सर्वोत्तम रक्षा उपायों के अनुरूप, सीट बेल्ट क़ानूनों अपनाए गए हैं. योरोप के लिए संयुक्त राष्ट्र आर्थिक आयोग का कहना है कि यात्रियों को किसी दुर्घटना में गम्भीर रूप से घायल होने से बचाने या वाहन से बाहर निकलने से बचाने के लिए सीट बेल्ट, सर्वोत्तम सुरक्षा उपाय है. इस आयोग द्वारा, सड़क सुरक्षा के लिए यूएन के विशेष दूत के कार्यालय और न्यास कोष की मेज़बानी की जाती है, जो वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में शुरू किया गया था. UNECE का कहना है कि पिछले अनेक दशकों में, नियामन और उपभोक्ता मांग से उच्च-आय वाले देशों में कारें पहले से अधिक सुरक्षित हुई हैं. सड़कों पर कम संख्या में लोग हताहत हो रहे हैं. उदाहरण स्वरूप, योरोप में वर्ष दो हज़ार और दो हज़ार दस के बीच सड़क हादसों में मृतकों या घायलों की संख्या में पच्चीस प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, और दो हज़ार दस से दो हज़ार उन्नीस तक इसमें पंद्रह प्रतिशत की कमी आई. सड़क सुरक्षा पर अन्तरराष्ट्रीय परिवहन फ़ोरम की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, दो हज़ार दस से दो हज़ार उन्नीस की अवधि में, विकसित देशों की सड़कों पर कार में बैठे व्यक्तियों की मौतों की संख्या में गिरावट नज़र आई, विशेष रूप से ग्रीस में जहाँ, मृतक व घायलों की संख्या में तिरेसठ प्रतिशत की कमी आई. कोरिया गणराज्य के लिए यह आँकड़ा इक्यावन प्रतिशत आँका गया है. रिपोर्ट बताती है कि तेरह अन्य देशों में हताहतों की संख्या में तीस प्रतिशत या उससे अधिक की कमी दर्ज की गई हैः अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, डेनमार्क, आयरलैंड, लक्ज़मबर्ग, लिथुएनिया, पोर्तुगल, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन, और स्विट्ज़रलैंड. यूएन आयोग का कहना है कि अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे देश हैं, जहाँ उपयुक्त क़ानूनी प्रावधानों की आवश्यकता होगी, ताकि वाहन चालकों और यात्रियों के लिए सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य बनाया जा सके और उनका सख़्ती से पालन सम्भव हो. सड़कों पर हर वर्ष तेरह लाख से अधिक लोगों की मौत होती है. वाहनों से जुड़ी घटनाओं में होने वाली तिरानवे प्रतिशत मौतें विकासशील देशों में होती हैं. यूएन के विशेष दूत ने देशों की सरकारों और उद्योग जगत के सभी हितधारकों के साथ मिलकर प्रयास किए जाने पर बल दिया है, ताकि विकासशील जगत में भी लोगों को, विकसित देशों के समान स्तर पर सुरक्षा मिल सके. इसका अर्थ होगाः अन्तरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप क़ानूनों को अपनाया व लागू किया जाना, और नए व इस्तेमाल किए गए वाहनों में सीट बेल्ट की उपयुक्त व्यवस्था किया जाना. संयुक्त राष्ट्र नियामन संख्या सोलह, वाहनों में सीट बेल्ट के इस्तेमाल के लिए एकमात्र अन्तरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त उपाय है. यह कारगर सीट बेल्ट से जुड़ी अहर्ताओं को निर्धारित करने के अलावा, उनके परीक्षण व प्रमाणन परीक्षण को सुनिश्चित करता है, जिससे वाहन चालकों व यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है. नियामन संख्या सोलह के अन्तर्गत, स्वीकृति प्राप्त सीट बेल्ट का बेहद सख़्त परिस्थितियों में परीक्षण किया जाता है, ताकि उनकी सहन करने और यर बैग जैसी अन्य सुरक्षा प्रणालियों के साथ काम करने की क्षमता को मापा जा सके. फ़िलहाल बावन देश, पहियों वाले वाहनों के लिए यूएन तकनीकी नियामन पर वर्ष एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन में हुए समझौते में शामिल हैं, जोकि नियामन संख्या सोलह को, राष्ट्रीय क़ानून में तब्दील करता है. वहीं, अनेक अन्य देशों ने कुछ बदलावों के साथ इस नियामन को लागू किया है. सीट बेल्ट से इतर, वाहन यात्रियों और सड़क पर अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र नियामन के तहत एयर बैग, इलैक्ट्रॉनिक स्थिरता नियंत्रण, राहगीर सुरक्षा और बच्चों को नियंत्रण में रखने समेत अन्य उपाय हैं. |
देश की आजादी के लिए अपनी जान देने वाले शहीदों का अपमान करते हुए दक्षिणपंथी संगठन हिंदू सेना ने मंगलवार को 200 साल तक देश को गुलाम बनाने वाले ब्रिटिश शासन की क्वीन विक्टोरिया को 118वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। ये सब कुछ कथित तौर पर मुस्लिम नफरत के चलते किया गया।
यादव ने कहा, 'ब्रिटिश शासकों ने दूसरों की तरह हमारे मंदिरों को तबाह नहीं किया। उन्होंने हमें वो कानून दिए जिसका हम आज तक पालन करते हैं। ' उन्होंने कहा, 'महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू जैसे नेता आवाज इसलिए उठा पाए क्योंकि ये निरंकुश सरकार नहीं थी। उनके जरिए ही भारतीयों ने आजादी का पहली बार स्वाद चखा जब अंग्रेजों ने 1882 में स्थानीय तौर पर स्वशासन की इजाजत दी। ' यादव ने यह भी दावा किया कि शाही सेना ने भारत की सभी जातियों के बीच समानता का संदेश फैलाया।
बता दें कि हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने 2011 में आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यालय में प्रशांत भूषण पर हमला किया था। साथ ही जून 2017 में, हिंदू सेना ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का जन्मदिन 7. 1 किलोग्राम केक के साथ मनाया था।
| देश की आजादी के लिए अपनी जान देने वाले शहीदों का अपमान करते हुए दक्षिणपंथी संगठन हिंदू सेना ने मंगलवार को दो सौ साल तक देश को गुलाम बनाने वाले ब्रिटिश शासन की क्वीन विक्टोरिया को एक सौ अट्ठारहवीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। ये सब कुछ कथित तौर पर मुस्लिम नफरत के चलते किया गया। यादव ने कहा, 'ब्रिटिश शासकों ने दूसरों की तरह हमारे मंदिरों को तबाह नहीं किया। उन्होंने हमें वो कानून दिए जिसका हम आज तक पालन करते हैं। ' उन्होंने कहा, 'महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू जैसे नेता आवाज इसलिए उठा पाए क्योंकि ये निरंकुश सरकार नहीं थी। उनके जरिए ही भारतीयों ने आजादी का पहली बार स्वाद चखा जब अंग्रेजों ने एक हज़ार आठ सौ बयासी में स्थानीय तौर पर स्वशासन की इजाजत दी। ' यादव ने यह भी दावा किया कि शाही सेना ने भारत की सभी जातियों के बीच समानता का संदेश फैलाया। बता दें कि हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने दो हज़ार ग्यारह में आम आदमी पार्टी के कार्यालय में प्रशांत भूषण पर हमला किया था। साथ ही जून दो हज़ार सत्रह में, हिंदू सेना ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का जन्मदिन सात. एक किलोग्रामग्राम केक के साथ मनाया था। |
Republic Day 2023: भारत आज 26 जनवरी को अपना 74वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। 26 जनवरी साल 1950 को हमारा संविधान लागू हुआ था जिसकी खुशी में हर साल 26 जनवरी को ही रिपब्लिक डे के रुप में मनाया जाता है। इस दिन भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया गया था। इस मौके पर कई बॉलीवुड हस्तियों ने अपने फैंस को शुभकामनाएं दी हैं। आइए देखते है सितारों के पोस्ट. .
बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए लिखा- सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। हमारी गौरवशाली विरासत का आज बड़ा दिन। इस साल यह दिन मेरे लिए सबसे खास होने वाला है जय हिंद।
अभिनेत्री करीना कपूर खान ने राष्ट्रीय ध्वज की फोटो पोस्ट करते हुए लिखा, 'हैप्पी रिपब्लिक डे'।
करीना कपूर के अलावा सिंगर ए आर रहमान ने भी तमाम देशवासियों को रिपब्लिक डे की बधाई दी है.
सिंगर गुरु रंधावा ने भी ट्वीट कर फैंस को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी हैं.
इन सेलेब्स के अलावा बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर, अजय देवगन और अमिताभ बच्चन ने सभी देशवासियों को रिपब्लिक डे (Republic Day 2023) की बधाईयां दी हैं.
यह भी पढ़ेंः
Republic Day 2023 LIVE: देश मना रहा 74वां गणतंत्र दिवस, PM मोदी समेत कई नेताओं ने दी देशवासियों को बधाई. .
| Republic Day दो हज़ार तेईस: भारत आज छब्बीस जनवरी को अपना चौहत्तरवां गणतंत्र दिवस मना रहा है। छब्बीस जनवरी साल एक हज़ार नौ सौ पचास को हमारा संविधान लागू हुआ था जिसकी खुशी में हर साल छब्बीस जनवरी को ही रिपब्लिक डे के रुप में मनाया जाता है। इस दिन भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया गया था। इस मौके पर कई बॉलीवुड हस्तियों ने अपने फैंस को शुभकामनाएं दी हैं। आइए देखते है सितारों के पोस्ट. . बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए लिखा- सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। हमारी गौरवशाली विरासत का आज बड़ा दिन। इस साल यह दिन मेरे लिए सबसे खास होने वाला है जय हिंद। अभिनेत्री करीना कपूर खान ने राष्ट्रीय ध्वज की फोटो पोस्ट करते हुए लिखा, 'हैप्पी रिपब्लिक डे'। करीना कपूर के अलावा सिंगर ए आर रहमान ने भी तमाम देशवासियों को रिपब्लिक डे की बधाई दी है. सिंगर गुरु रंधावा ने भी ट्वीट कर फैंस को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी हैं. इन सेलेब्स के अलावा बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर, अजय देवगन और अमिताभ बच्चन ने सभी देशवासियों को रिपब्लिक डे की बधाईयां दी हैं. यह भी पढ़ेंः Republic Day दो हज़ार तेईस LIVE: देश मना रहा चौहत्तरवां गणतंत्र दिवस, PM मोदी समेत कई नेताओं ने दी देशवासियों को बधाई. . |
ग्राभूषण जहाँ धनियों के शृंगार हैं, वहाँ वे निर्धनों के लिए प्राधार भी हैं । १२. राजनैतिक चेतना - राजस्थान की जनता राज्य के डर से बहुत त्रस्त और आशंकित रहा करती थी । राजा की बात सुनने वाले को राजा के शब्दोच्चारण के पूर्व ही कम्पन हो प्राता था । राजा न जाने क्या हुक्म दे दे, इसका डर हमेशा बना रहता था। कचहरी से कोई बुलावा भ्रा जाता था तो वह यम के बुलावे से भी बदतर समझा जाता था । इसलिए एक कहावत में कहा गया है.
"जम रो बुलायो प्राइजो पण राज से बुलावो मत प्राइजो ।"
अर्थात् यम का बुलावा भले ही प्रा जाय, राज्य का बुलावा न श्रावे । अगर घर के किसी व्यक्ति को कोई जागीरदार बुलाता तो सारे घर में उदासी का वाताचरण छा जाता था ।
"जमींदार के बावन हात हवं" यह भी एक राजस्थानी कहावत है जिसका तात्पर्य यह है कि जमींदार एक विविध साधन-सम्पन्न व्यक्ति होता है। उसकी साधनसम्पन्नता के कारण भी लोग जमींदार से भयभीत रहा करते थे ।
किन्तु अब देश के स्वतन्त्र हो जाने के बाद राजस्थान में जागीरदारी प्रथा समाप्त हो गई है और प्राशा की जाती है कि राजस्थानी प्रजा के दिन फिरेंगे और सुख-शांतिपूर्वक वह अपना जीवन बसर कर सकेंगी ।
४. शिक्षा, ज्ञान और साहित्य (क) शिक्षा सम्बन्धी कहावतें
पातंजल महाभाष्य में कहा गया है - में
सामूर्तः पाणिभिघ्नन्ति गुरवो न विषोक्षितैः लालनाश्रयणो दोषास्ताडनाअयिरणो गुणाः ॥
अर्थात् अमृत भरे हाथों से गुरु शिष्यों को पीटते हैं, विष-सिक्त हाथों से नहीं । शिष्य लाड़-चाव से बिगड़ जाते हैं, ताड़ना से उनका सुधार होता है। राजस्थानी भाषा की निम्नलिखित कहावतों में भी इसी प्रकार की बात कही गई हैगुरु की चोट, विद्या की पोट ।
अर्थात् गुरु की चोट से विद्या प्राप्त होती है ।
सोटी बाजे चमचम, विद्या प्रावै धमषम ।
अर्थात् सोटी चमचम बजती है, तभी विद्या धमधम करती हुई प्राती है।
किसी अंश में तो यह सच है कि ताड़ना के डर से विद्यार्थी कुछ पढ़ जाते हैं किन्तु भाजकल के मनोवैज्ञानिकों और शिक्षण-शास्त्रियों के मतानुसार विद्या के प्रति सच्चा अनुराग तो प्रेम द्वारा ही जागृत किया जा सकता है। कुछ पुराने गुरु तो अपने शिष्यों को यहाँ तक पीटते थे कि जिसे देखकर जी दहल जाय । एक छात्र के लिए कहा जाता है कि जब वह चटशाला नहीं गया तो गुरुजी ने कुछ विद्यार्थियों को उसे लाने के लिए भेजा किन्तु विद्यार्थी जब इसमें कृतकार्य न हो सके तो गुरुजी स्वयं उसके घर पहुँचे । छात्र उस समय भोजन कर रहा था। गुरुजी को देखते ही डर केः
मारे छत पर जा चढ़ा । गुरुजी भी उसके पीछे-पीछे छत पर जा पहुँचे। विद्यार्थी गुरु के डर से छत पर से कूद पड़ा जिससे उसका प्रारणान्त हो गया !
पातंजल महाभाष्य के श्लोकों में जिन गुरुत्रों का उल्लेख किया गया है, निश्चय ही वे इतने श्रमानुषिक कदापि नहीं रहे होंगे और जैसा कि कबीर ने कहा है -
"गुर कुम्हार सिष कुम्भ है, गढि गढि काढै खोट ।
भीतर हाथ सहार दे, बाहर बाहर चोट ॥"
सच्चे गुरु की चोट के मूल में भी शिष्य का हित ही निहित रहता है किन्तु इस प्रकार की कहावतों का कभी-कभी दुरुपयोग भी देखा जाता है। शिक्षा मनोविज्ञान के साथ-साथ ग्राज हमारी धारणामों में भी परिवर्तन हो रहा है किन्तु कहावतें प्रशिक्षितों के मानस पट पर कभी-कभी इस प्रकार अंकित हो जाती है कि उनसे पिण्ड छुड़ाना मुश्किल हो जाता है। गाँवों में शिक्षा का प्रकाश या तो पहुँचता ही नहीं, या देर से पहुँचता है, इसलिए विकसित होते हुए शिक्षा मनोविज्ञान के अनुकूल कहावतों का निर्माण नहीं हो पाता ।
कुछ कहावतें राजस्थान में ऐसी भी हैं जिनसे यहाँ की पर प्रकाश पड़ता है। इस सम्बन्ध में दो कहावतें लीजिये -
१. श्रोनामासी धम, बाप पढ्या न हम ।
इस कहावत का "बोनामासी धम" "ॐ नमः सिद्धम्" का अपभ्रष्ट रूप है । प्राचीन शिक्षा पद्धति द्वारा जिन्होंने शिक्षा प्राप्त की है, वे भली भाँति जानते हैं कि राजस्थान में "सिद्धों" द्वारा किस प्रकार वर्गों का अभ्यास कराया जाता था। जो छात्र इस प्ररणाली द्वारा वर्ण-ज्ञान प्राप्त करते थे, वे पंक्तियों को केवल रटते थे, वे यह नहीं समझते थे कि इन पंक्तियों का तात्पर्य क्या है । गुरुजी एक पंक्ति को गाकर बोलते और छात्र उनके पीछे गाते हुए से श्रावृत्ति करते जाते थे। 'सिद्धों' की पद्धति जब पहले-पहल चली होगी तत्र संस्कृत पंक्तियों का अर्थ भी छात्रों को हृदयंगम कराया जाता होगा, कालान्तर में संस्कृत - ज्ञान के प्रभाव से लोग शुद्ध रूप को भूल गये और केवल पुरानी लकीर को पीटना रह गया ।
प्राचीन शिक्षा पद्धति
२. "ढलग्यो नामोनोरै तो क्यू हलियो टेरें ।"
इस कहावत का "नामोनोरं" सारस्वत व्याकरण के सूत्र "नामिनोरः" का प्रप्रभ्रंश रूप है । इससे पता चलता है कि इस प्रान्त में कभी सारस्वत व्याकरण पढ़ने का अच्छा प्रचार था ।
आज तो "सिद्धो-पद्धति" लुप्त है और सारस्वत व्याकरण के स्थान में भी "लघुसिद्धान्त कौमुदी" का ही सर्वत्र जयजयकार हो रहा है ।
कई वर्षों पहले प्राचीन प्रणाली के अनुसार शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के मुख से सुनाई पड़ता था "पडवा पाटी फोड़ बतररणो" अर्थात् प्रतिपदा को पट्टी, बतरना, स्लेट और पेंसिल फोड़ दो। इस प्रकार की पाठशालाओं में रविवार को छुट्टी न होकर प्रतिपदा को छुट्टी हुआ करती थी क्योंकि "पड़वा पाठ बिवर्जिता" के अनुसार प्रतिपदा के दिन पढ़ना अनिष्टकारक समझा जाता था। इसी प्रकार एक दूसरी उक्ति | ग्राभूषण जहाँ धनियों के शृंगार हैं, वहाँ वे निर्धनों के लिए प्राधार भी हैं । बारह. राजनैतिक चेतना - राजस्थान की जनता राज्य के डर से बहुत त्रस्त और आशंकित रहा करती थी । राजा की बात सुनने वाले को राजा के शब्दोच्चारण के पूर्व ही कम्पन हो प्राता था । राजा न जाने क्या हुक्म दे दे, इसका डर हमेशा बना रहता था। कचहरी से कोई बुलावा भ्रा जाता था तो वह यम के बुलावे से भी बदतर समझा जाता था । इसलिए एक कहावत में कहा गया है. "जम रो बुलायो प्राइजो पण राज से बुलावो मत प्राइजो ।" अर्थात् यम का बुलावा भले ही प्रा जाय, राज्य का बुलावा न श्रावे । अगर घर के किसी व्यक्ति को कोई जागीरदार बुलाता तो सारे घर में उदासी का वाताचरण छा जाता था । "जमींदार के बावन हात हवं" यह भी एक राजस्थानी कहावत है जिसका तात्पर्य यह है कि जमींदार एक विविध साधन-सम्पन्न व्यक्ति होता है। उसकी साधनसम्पन्नता के कारण भी लोग जमींदार से भयभीत रहा करते थे । किन्तु अब देश के स्वतन्त्र हो जाने के बाद राजस्थान में जागीरदारी प्रथा समाप्त हो गई है और प्राशा की जाती है कि राजस्थानी प्रजा के दिन फिरेंगे और सुख-शांतिपूर्वक वह अपना जीवन बसर कर सकेंगी । चार. शिक्षा, ज्ञान और साहित्य शिक्षा सम्बन्धी कहावतें पातंजल महाभाष्य में कहा गया है - में सामूर्तः पाणिभिघ्नन्ति गुरवो न विषोक्षितैः लालनाश्रयणो दोषास्ताडनाअयिरणो गुणाः ॥ अर्थात् अमृत भरे हाथों से गुरु शिष्यों को पीटते हैं, विष-सिक्त हाथों से नहीं । शिष्य लाड़-चाव से बिगड़ जाते हैं, ताड़ना से उनका सुधार होता है। राजस्थानी भाषा की निम्नलिखित कहावतों में भी इसी प्रकार की बात कही गई हैगुरु की चोट, विद्या की पोट । अर्थात् गुरु की चोट से विद्या प्राप्त होती है । सोटी बाजे चमचम, विद्या प्रावै धमषम । अर्थात् सोटी चमचम बजती है, तभी विद्या धमधम करती हुई प्राती है। किसी अंश में तो यह सच है कि ताड़ना के डर से विद्यार्थी कुछ पढ़ जाते हैं किन्तु भाजकल के मनोवैज्ञानिकों और शिक्षण-शास्त्रियों के मतानुसार विद्या के प्रति सच्चा अनुराग तो प्रेम द्वारा ही जागृत किया जा सकता है। कुछ पुराने गुरु तो अपने शिष्यों को यहाँ तक पीटते थे कि जिसे देखकर जी दहल जाय । एक छात्र के लिए कहा जाता है कि जब वह चटशाला नहीं गया तो गुरुजी ने कुछ विद्यार्थियों को उसे लाने के लिए भेजा किन्तु विद्यार्थी जब इसमें कृतकार्य न हो सके तो गुरुजी स्वयं उसके घर पहुँचे । छात्र उस समय भोजन कर रहा था। गुरुजी को देखते ही डर केः मारे छत पर जा चढ़ा । गुरुजी भी उसके पीछे-पीछे छत पर जा पहुँचे। विद्यार्थी गुरु के डर से छत पर से कूद पड़ा जिससे उसका प्रारणान्त हो गया ! पातंजल महाभाष्य के श्लोकों में जिन गुरुत्रों का उल्लेख किया गया है, निश्चय ही वे इतने श्रमानुषिक कदापि नहीं रहे होंगे और जैसा कि कबीर ने कहा है - "गुर कुम्हार सिष कुम्भ है, गढि गढि काढै खोट । भीतर हाथ सहार दे, बाहर बाहर चोट ॥" सच्चे गुरु की चोट के मूल में भी शिष्य का हित ही निहित रहता है किन्तु इस प्रकार की कहावतों का कभी-कभी दुरुपयोग भी देखा जाता है। शिक्षा मनोविज्ञान के साथ-साथ ग्राज हमारी धारणामों में भी परिवर्तन हो रहा है किन्तु कहावतें प्रशिक्षितों के मानस पट पर कभी-कभी इस प्रकार अंकित हो जाती है कि उनसे पिण्ड छुड़ाना मुश्किल हो जाता है। गाँवों में शिक्षा का प्रकाश या तो पहुँचता ही नहीं, या देर से पहुँचता है, इसलिए विकसित होते हुए शिक्षा मनोविज्ञान के अनुकूल कहावतों का निर्माण नहीं हो पाता । कुछ कहावतें राजस्थान में ऐसी भी हैं जिनसे यहाँ की पर प्रकाश पड़ता है। इस सम्बन्ध में दो कहावतें लीजिये - एक. श्रोनामासी धम, बाप पढ्या न हम । इस कहावत का "बोनामासी धम" "ॐ नमः सिद्धम्" का अपभ्रष्ट रूप है । प्राचीन शिक्षा पद्धति द्वारा जिन्होंने शिक्षा प्राप्त की है, वे भली भाँति जानते हैं कि राजस्थान में "सिद्धों" द्वारा किस प्रकार वर्गों का अभ्यास कराया जाता था। जो छात्र इस प्ररणाली द्वारा वर्ण-ज्ञान प्राप्त करते थे, वे पंक्तियों को केवल रटते थे, वे यह नहीं समझते थे कि इन पंक्तियों का तात्पर्य क्या है । गुरुजी एक पंक्ति को गाकर बोलते और छात्र उनके पीछे गाते हुए से श्रावृत्ति करते जाते थे। 'सिद्धों' की पद्धति जब पहले-पहल चली होगी तत्र संस्कृत पंक्तियों का अर्थ भी छात्रों को हृदयंगम कराया जाता होगा, कालान्तर में संस्कृत - ज्ञान के प्रभाव से लोग शुद्ध रूप को भूल गये और केवल पुरानी लकीर को पीटना रह गया । प्राचीन शिक्षा पद्धति दो. "ढलग्यो नामोनोरै तो क्यू हलियो टेरें ।" इस कहावत का "नामोनोरं" सारस्वत व्याकरण के सूत्र "नामिनोरः" का प्रप्रभ्रंश रूप है । इससे पता चलता है कि इस प्रान्त में कभी सारस्वत व्याकरण पढ़ने का अच्छा प्रचार था । आज तो "सिद्धो-पद्धति" लुप्त है और सारस्वत व्याकरण के स्थान में भी "लघुसिद्धान्त कौमुदी" का ही सर्वत्र जयजयकार हो रहा है । कई वर्षों पहले प्राचीन प्रणाली के अनुसार शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों के मुख से सुनाई पड़ता था "पडवा पाटी फोड़ बतररणो" अर्थात् प्रतिपदा को पट्टी, बतरना, स्लेट और पेंसिल फोड़ दो। इस प्रकार की पाठशालाओं में रविवार को छुट्टी न होकर प्रतिपदा को छुट्टी हुआ करती थी क्योंकि "पड़वा पाठ बिवर्जिता" के अनुसार प्रतिपदा के दिन पढ़ना अनिष्टकारक समझा जाता था। इसी प्रकार एक दूसरी उक्ति |
नई दिल्लीः इंडिया क्रिकेट टीम के कोच अनिल कुंबले ने कप्तान विराट कोहली और पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की जमकर तारीफे की, नीचे पढ़िए क्या कहाँ कुंबले ने.
तो वही टेस्ट मैचों में 600 से ज़्यादा विकेट लेने वाले पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की तारीफ करते हुए कुंबले ने कहां कि, "और ऐसा ही धोनी के साथ है, रांची से आकर, किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि कोई रांची से आकर देश का नेतृत्व करेगा. और जिस तरह उसने टीम की अगुआई की, कप्तान के रूप में 10 साल, यह बेहद मुश्किल था. लेकिन 10 साल तक भारतीय कप्तान बनना ऐसी चीज थी जिसके बारे में नहीं सुना गया था और उसने जिस तरह टीम के कप्तान के रूप में समय बिताया उसे सलाम है. वह खेल का परफेक्त दूत है.
| नई दिल्लीः इंडिया क्रिकेट टीम के कोच अनिल कुंबले ने कप्तान विराट कोहली और पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की जमकर तारीफे की, नीचे पढ़िए क्या कहाँ कुंबले ने. तो वही टेस्ट मैचों में छः सौ से ज़्यादा विकेट लेने वाले पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की तारीफ करते हुए कुंबले ने कहां कि, "और ऐसा ही धोनी के साथ है, रांची से आकर, किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि कोई रांची से आकर देश का नेतृत्व करेगा. और जिस तरह उसने टीम की अगुआई की, कप्तान के रूप में दस साल, यह बेहद मुश्किल था. लेकिन दस साल तक भारतीय कप्तान बनना ऐसी चीज थी जिसके बारे में नहीं सुना गया था और उसने जिस तरह टीम के कप्तान के रूप में समय बिताया उसे सलाम है. वह खेल का परफेक्त दूत है. |
दिव्य हिमाचल ब्यूरो-बीबीएन।
नगर परिषद बद्दी में भाजपा सर्मथित अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव कें मुददे ने प्रशासन से लेकर प्रदेश सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर दी है, बीते एक माह से भाजपा व कांग्रेस के बीच इस मसले पर छिड़ी वर्चस्व की जंग बुधवार को विधानसभा तक पहुंच गई।
कांगे्रस जहंा लगातार इस मसले पर आक्रामक रूख अपनाए हुए है वहीं भाजपा कोई बड़ा पलटवार नही कर पाई है। अब तक सोलन जिला तक सिमटा यह मुददा बुधवार को विधानसभा में भी गूंजा। बता दें कि बीते मंगलवार को जहां कांग्रेस ने बद्दी और नालागढ़ में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुतला दहन किया था। वहीं बुधवार को कांग्रेस के विधायक राजेंद्र राणा ने इस मुद्दे को विधानसभा में जोरशोर से उठाते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया। विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि 2 फरवरी को नगर परिषद बददी में नप अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दाखिल हुआ। पार्षद खुद प्रत्यक्ष तौर पर डीसी सोलन के समक्ष पेश हुए, जिस पर प्रशाासन को कानूनन 15 दिन के अंदर नप में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को बहुमत साबित करने का नोटिस जारी करना चाहिए था। लेकिन सरकार के दबाब में अधिकारी इस मसले को लटकाने में जुट गए। राणा ने कहा कि पिछले 1 महीने से अधिक का समय हो गया सरकार नप बद्दी में भाजपा की साख बचाने के लिए मामले को लटका रही है।
विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि जिस पार्षद की सदस्यता रद्द करने की आड़ में मामले को लटकाने का प्रयास किया जा रहा है उस पार्षद की सदस्यता किसी भी तरीके से रद्द नहीं हो सकती। नियमानुसार तीन बैठकों से गैर हाजिर रहने की बात भाजपा पार्षदों ने कही है लेकिन जिन बैठकों का हवाला दिया गया है उनमें से दो बैठकों में तो कोरम भी पुरा नही था, ऐसे में वह बैठकें मानी ही नही जा सकती। कांग्रेस विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि जिस तरह से भाजपा से बागी हुए पार्षद तरसेम चौधरी की सदस्यता रद्द करने का हवाला दिया जा रहा है उस हिसाब से तो वार्ड-4 की पार्षद तो लगातार 4 बैठकों में उपस्थित ही नहीं हुई थी, इसका बाकायदा पुरा रिकार्ड है, लेकिन उनकी सदस्यता रद्द क्यों नहीं की जा रही है। सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि बड़़े शर्म की बात है कि सरकार अविश्वास प्रस्ताव जैसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भी साख और नाक बचाने का प्रयास कर रही है। प्रदेश सरकार के इस रवैये के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ता ही नही आमजन भी सड$कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहा है, काले झंडे दिखाए जा रहे हैं। सरकार और प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लग रहे हैं पुतले जलाए जा रहे हैं। लेकिन सरकार अपनी फजीहत से बचने के लिए कुछ नही कर रही। उन्होंने कहा कि नप में बैठके न होने से जनता के काम भी ठप्प पड़े है। विधायक राजेंद्र राणा ने विस सत्र में इस मामले को उठाकर प्रदेश सरकार व शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज से जल्द संज्ञान लेने की बात कही।
| दिव्य हिमाचल ब्यूरो-बीबीएन। नगर परिषद बद्दी में भाजपा सर्मथित अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव कें मुददे ने प्रशासन से लेकर प्रदेश सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर दी है, बीते एक माह से भाजपा व कांग्रेस के बीच इस मसले पर छिड़ी वर्चस्व की जंग बुधवार को विधानसभा तक पहुंच गई। कांगे्रस जहंा लगातार इस मसले पर आक्रामक रूख अपनाए हुए है वहीं भाजपा कोई बड़ा पलटवार नही कर पाई है। अब तक सोलन जिला तक सिमटा यह मुददा बुधवार को विधानसभा में भी गूंजा। बता दें कि बीते मंगलवार को जहां कांग्रेस ने बद्दी और नालागढ़ में जोरदार विरोध प्रदर्शन कर सरकार व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुतला दहन किया था। वहीं बुधवार को कांग्रेस के विधायक राजेंद्र राणा ने इस मुद्दे को विधानसभा में जोरशोर से उठाते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया। विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि दो फरवरी को नगर परिषद बददी में नप अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दाखिल हुआ। पार्षद खुद प्रत्यक्ष तौर पर डीसी सोलन के समक्ष पेश हुए, जिस पर प्रशाासन को कानूनन पंद्रह दिन के अंदर नप में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को बहुमत साबित करने का नोटिस जारी करना चाहिए था। लेकिन सरकार के दबाब में अधिकारी इस मसले को लटकाने में जुट गए। राणा ने कहा कि पिछले एक महीने से अधिक का समय हो गया सरकार नप बद्दी में भाजपा की साख बचाने के लिए मामले को लटका रही है। विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि जिस पार्षद की सदस्यता रद्द करने की आड़ में मामले को लटकाने का प्रयास किया जा रहा है उस पार्षद की सदस्यता किसी भी तरीके से रद्द नहीं हो सकती। नियमानुसार तीन बैठकों से गैर हाजिर रहने की बात भाजपा पार्षदों ने कही है लेकिन जिन बैठकों का हवाला दिया गया है उनमें से दो बैठकों में तो कोरम भी पुरा नही था, ऐसे में वह बैठकें मानी ही नही जा सकती। कांग्रेस विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि जिस तरह से भाजपा से बागी हुए पार्षद तरसेम चौधरी की सदस्यता रद्द करने का हवाला दिया जा रहा है उस हिसाब से तो वार्ड-चार की पार्षद तो लगातार चार बैठकों में उपस्थित ही नहीं हुई थी, इसका बाकायदा पुरा रिकार्ड है, लेकिन उनकी सदस्यता रद्द क्यों नहीं की जा रही है। सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा ने कहा कि बड़़े शर्म की बात है कि सरकार अविश्वास प्रस्ताव जैसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भी साख और नाक बचाने का प्रयास कर रही है। प्रदेश सरकार के इस रवैये के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ता ही नही आमजन भी सड$कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहा है, काले झंडे दिखाए जा रहे हैं। सरकार और प्रशासन के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लग रहे हैं पुतले जलाए जा रहे हैं। लेकिन सरकार अपनी फजीहत से बचने के लिए कुछ नही कर रही। उन्होंने कहा कि नप में बैठके न होने से जनता के काम भी ठप्प पड़े है। विधायक राजेंद्र राणा ने विस सत्र में इस मामले को उठाकर प्रदेश सरकार व शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज से जल्द संज्ञान लेने की बात कही। |
इसके लिए पुलिस ने 400 लोगों को नोटिस भेजा था एक अधिकारी ने बताया कि एसआईटी और स्थानीय पुलिस को इस संबंध में निर्देश दिए जा चुके हैं .
नुकसान का आकलन करने के लिए नगर निगम और दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए। एसआईटी की दो टीमें इस हिंसा की जांच कर रही हैं।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा के दौरान मौजपुर, जाफराबाद, मुस्तफाबाद, शिव विहार, भजनपुरा, करावल नगर, गोकुलपुरी, सीलमपुर और आसपास के इलाकों में दंगाइयों ने कई घरों को आग के हवाले कर दिया, कई दुकानों को जला दिया जबकि इस दौरान कई वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया। एसआईटी उन लोगों की पहचान कर रही है .
जिन्होंने हिंसा के दौरान आगजनी, लूटपाट और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया है। उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक और निजी संपत्ति का नुकसान हुआ है।
इस हिंसा में अबतक 42 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 250 से अधिक लोग घायल हैं। दिल्ली पुलिस ने हिंसा के विभिन्न मामलों में 123 एफआईआर दर्ज की है जबकि हिंसा से जुड़े मामलों में 630 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने यूपी पुलिस की तर्ज पर एक अहम फैसला किया है।
दिल्ली पुलिस निजी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले दंगाइयों की संपत्ति कुर्क करेगी। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने नाम ना छापने की शर्त पर ये जानकारी दी कि दंगाइयों की संपत्ति कुर्क की जाएगी।
बता दें कि यूपी पुलिस ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सख्त कदम उठाया था और उपद्रवियों की संपत्ति कुर्क करने का फैसला किया था।
| इसके लिए पुलिस ने चार सौ लोगों को नोटिस भेजा था एक अधिकारी ने बताया कि एसआईटी और स्थानीय पुलिस को इस संबंध में निर्देश दिए जा चुके हैं . नुकसान का आकलन करने के लिए नगर निगम और दिल्ली सरकार के अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित किया जाए। एसआईटी की दो टीमें इस हिंसा की जांच कर रही हैं। उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा के दौरान मौजपुर, जाफराबाद, मुस्तफाबाद, शिव विहार, भजनपुरा, करावल नगर, गोकुलपुरी, सीलमपुर और आसपास के इलाकों में दंगाइयों ने कई घरों को आग के हवाले कर दिया, कई दुकानों को जला दिया जबकि इस दौरान कई वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया। एसआईटी उन लोगों की पहचान कर रही है . जिन्होंने हिंसा के दौरान आगजनी, लूटपाट और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया है। उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक और निजी संपत्ति का नुकसान हुआ है। इस हिंसा में अबतक बयालीस लोगों की जान जा चुकी है, जबकि दो सौ पचास से अधिक लोग घायल हैं। दिल्ली पुलिस ने हिंसा के विभिन्न मामलों में एक सौ तेईस एफआईआर दर्ज की है जबकि हिंसा से जुड़े मामलों में छः सौ तीस लोगों की गिरफ्तारी हुई है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने यूपी पुलिस की तर्ज पर एक अहम फैसला किया है। दिल्ली पुलिस निजी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले दंगाइयों की संपत्ति कुर्क करेगी। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने नाम ना छापने की शर्त पर ये जानकारी दी कि दंगाइयों की संपत्ति कुर्क की जाएगी। बता दें कि यूपी पुलिस ने नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सख्त कदम उठाया था और उपद्रवियों की संपत्ति कुर्क करने का फैसला किया था। |
अमनदीप अस्पताल की संक्रमित महिला डॉक्टर के पति की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई है, जबकि बेटे, बेटी और मकान मालिक सहित कुल 7 लोगों की रि-सैंपलिंग की गई। महिला डॉक्टर अमनदीप अस्पताल की ओपीडी, आईसीयू में ड्यूटी देती थीं। ऐसे में उन दिनों अस्पताल आने वालों की लिस्ट को सेहत विभाग खंगाल रहा है।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
| अमनदीप अस्पताल की संक्रमित महिला डॉक्टर के पति की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई है, जबकि बेटे, बेटी और मकान मालिक सहित कुल सात लोगों की रि-सैंपलिंग की गई। महिला डॉक्टर अमनदीप अस्पताल की ओपीडी, आईसीयू में ड्यूटी देती थीं। ऐसे में उन दिनों अस्पताल आने वालों की लिस्ट को सेहत विभाग खंगाल रहा है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi. |
मुंबईः कार्तिक आर्यन और सारा अली खान स्टारर फिल्म 'लव आज कल' 14 फरवरी को वैलेंटाइन्स डे के मौके पर रिलीज हुई। फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स भी मिला है। इम्तियाज अली की इस फिल्म ने पहले दिन 12. 40 करोड़ का बिजनेस किया है।
#LoveAajKal packs a solid total on Day 1... Got a boost due to #ValentinesDay2020... Metros excellent, contribute to the big total... Tier-2 cities and mass belt ordinary/low... Will it collect in double digits on Day 2 and 3, is the big question... Fri ₹ 12. 40 cr. #India biz.
बात करें फिल्म की कहानी कि इम्तियाज अली इससे पहले साल 2009 में लव आज कल फिल्म लेकर आए थे, जिसमें दीपिका पादुकोण और सैफ अली खान मुख्य भूमिका में थे। फिल्म को काफी पसंद किया गया था। अब अली एक बार फिर उसी नाम पर नए चेहरों और नए अंदाज के साथ नई फिल्म लेकर आए हैं। फिल्म मॉर्डन लव स्टोरी से प्रेरित है। बाकी इस फिल्म में सारा-कार्तिक की केमिस्ट्री के अलावा और क्या कुछ खास है, इसके लिए तो आपको सिनेमाघरों का रुख करना होगा।
| मुंबईः कार्तिक आर्यन और सारा अली खान स्टारर फिल्म 'लव आज कल' चौदह फरवरी को वैलेंटाइन्स डे के मौके पर रिलीज हुई। फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स भी मिला है। इम्तियाज अली की इस फिल्म ने पहले दिन बारह. चालीस करोड़ का बिजनेस किया है। #LoveAajKal packs a solid total on Day एक... Got a boost due to #ValentinesDayदो हज़ार बीस... Metros excellent, contribute to the big total... Tier-दो cities and mass belt ordinary/low... Will it collect in double digits on Day दो and तीन, is the big question... Fri बारह रुपया. चालीस cr. #India biz. बात करें फिल्म की कहानी कि इम्तियाज अली इससे पहले साल दो हज़ार नौ में लव आज कल फिल्म लेकर आए थे, जिसमें दीपिका पादुकोण और सैफ अली खान मुख्य भूमिका में थे। फिल्म को काफी पसंद किया गया था। अब अली एक बार फिर उसी नाम पर नए चेहरों और नए अंदाज के साथ नई फिल्म लेकर आए हैं। फिल्म मॉर्डन लव स्टोरी से प्रेरित है। बाकी इस फिल्म में सारा-कार्तिक की केमिस्ट्री के अलावा और क्या कुछ खास है, इसके लिए तो आपको सिनेमाघरों का रुख करना होगा। |
सिरोही। नगर परिषद सभापति पद के चुनावों में सिरोही में कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी महेन्द्र मेवाड़ा उर्फ मनु मेवाड़ा को सभापति निर्वाचित घोषित किया गया। मेवाड़ा के समर्थकों द्वारा जुलूस में मैं हूं डॉन गाने पर बीजेपी समर्थकों ने आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष ने इसकी जानकारी से इनकार किया है।भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष हेमंत पुरोहित ने कहा कि सिरोही के अन्दर आज भ्रष्टाचार की शरुआत हुई है। सिरोही की जनता को एक सेवक चाहिए था लेकिन उन्होंने मनु मेवाड़ा के रूप एक डॉन दे दिया। उन्होंने कहा देश मुम्बई हमले में काल कवलित हुए लोगों को श्रद्धांजलि दे रहा है और यहां पर इस तरह के नाटक हो रहे हैं।
मेवाड़ा 2014 में भी सभापति के चुनाव के लिए कांग्रेस की तरफ से खड़े हुए थे, लेकिन उनको भाजपा के ताराराम माली से हार का सामना कर पड़ता था। उस वक्त वह निराश थे लेकिन इस बार उन्हें सफलता हाथ लगी।
मेवाड़ा 2014 में भी सभापति के चुनाव के लिए कांग्रेस की तरफ से खड़े हुए थे, लेकिन उनको भाजपा के ताराराम माली से हार का सामना कर पड़ता था। उस वक्त वह निराश थे लेकिन इस बार उन्हें सफलता हाथ लगी।
| सिरोही। नगर परिषद सभापति पद के चुनावों में सिरोही में कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी महेन्द्र मेवाड़ा उर्फ मनु मेवाड़ा को सभापति निर्वाचित घोषित किया गया। मेवाड़ा के समर्थकों द्वारा जुलूस में मैं हूं डॉन गाने पर बीजेपी समर्थकों ने आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष ने इसकी जानकारी से इनकार किया है।भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष हेमंत पुरोहित ने कहा कि सिरोही के अन्दर आज भ्रष्टाचार की शरुआत हुई है। सिरोही की जनता को एक सेवक चाहिए था लेकिन उन्होंने मनु मेवाड़ा के रूप एक डॉन दे दिया। उन्होंने कहा देश मुम्बई हमले में काल कवलित हुए लोगों को श्रद्धांजलि दे रहा है और यहां पर इस तरह के नाटक हो रहे हैं। मेवाड़ा दो हज़ार चौदह में भी सभापति के चुनाव के लिए कांग्रेस की तरफ से खड़े हुए थे, लेकिन उनको भाजपा के ताराराम माली से हार का सामना कर पड़ता था। उस वक्त वह निराश थे लेकिन इस बार उन्हें सफलता हाथ लगी। मेवाड़ा दो हज़ार चौदह में भी सभापति के चुनाव के लिए कांग्रेस की तरफ से खड़े हुए थे, लेकिन उनको भाजपा के ताराराम माली से हार का सामना कर पड़ता था। उस वक्त वह निराश थे लेकिन इस बार उन्हें सफलता हाथ लगी। |
ओखला औद्योगिक क्षेत्र इलाके में 19 मई को ईएसआईसी अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक को एक तेज रफ्तार आरटीवी ने कुचल दिया। 20 मई की सुबह चिकित्सक की उपचार के दौरान मौत हो गई। आरोपित की निशानदेही पर पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल आरटीवी को जब्त कर लिया है।
नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। ओखला औद्योगिक क्षेत्र इलाके में 19 मई को ईएसआईसी अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक को एक तेज रफ्तार आरटीवी ने कुचल दिया। 20 मई की सुबह चिकित्सक की उपचार के दौरान मौत हो गई।
मामले की सूचना के बाद पहुंची ओखला औद्यागिक क्षेत्र थाना पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद स्वजन को सौंप दिया है। पुलिस ने संबंधित धारा में मामला दर्ज कर आरोपित सोनू को गिरफ्तार लिया है और आरटीवी को जब्त कर लिया है।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि मृतक 30 वर्षीय चिकित्सक यासीन अपने परिवार के साथ तुगलकाबाद एक्सटेंशन गोविंदपुरी इलाके में रहता था। डॉ. यासीन ओखला स्थित ईएसआईसी अस्पताल में कार्यरत थे। 19 मई को डा. यासीन अपनी स्कूटी से ड्यूटी पर अस्पताल जा रहे थे।
इसी दौरान क्राउन प्लाजा लाल बत्ती पर एक तेज रफ्तार आरटीवी ने उन्हें पीछे से टक्कर मारी और उसके बाद आरटीवी चालक मौके से भागने के चक्कर में उन्हें कुचलकर फरार हो गया। राहगीरों ने उन्हें अपोलो अस्पताल पहुंचाया और पुलिस को वारदात की सूचना दी।
अस्पताल में 20 मई की सुबह डा. यासीन की मौत हो गई। ओखला औद्यागिक क्षेत्र थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले में आइपीसी एक्ट की धारा 304ए के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस टीम ने घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपित सोनू की पहचान कर उसे ओखला स्थित उसके रिश्तेदार के घर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपित की निशानदेही पर पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल आरटीवी को जब्त कर लिया है।
| ओखला औद्योगिक क्षेत्र इलाके में उन्नीस मई को ईएसआईसी अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक को एक तेज रफ्तार आरटीवी ने कुचल दिया। बीस मई की सुबह चिकित्सक की उपचार के दौरान मौत हो गई। आरोपित की निशानदेही पर पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल आरटीवी को जब्त कर लिया है। नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। ओखला औद्योगिक क्षेत्र इलाके में उन्नीस मई को ईएसआईसी अस्पताल में कार्यरत चिकित्सक को एक तेज रफ्तार आरटीवी ने कुचल दिया। बीस मई की सुबह चिकित्सक की उपचार के दौरान मौत हो गई। मामले की सूचना के बाद पहुंची ओखला औद्यागिक क्षेत्र थाना पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद स्वजन को सौंप दिया है। पुलिस ने संबंधित धारा में मामला दर्ज कर आरोपित सोनू को गिरफ्तार लिया है और आरटीवी को जब्त कर लिया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि मृतक तीस वर्षीय चिकित्सक यासीन अपने परिवार के साथ तुगलकाबाद एक्सटेंशन गोविंदपुरी इलाके में रहता था। डॉ. यासीन ओखला स्थित ईएसआईसी अस्पताल में कार्यरत थे। उन्नीस मई को डा. यासीन अपनी स्कूटी से ड्यूटी पर अस्पताल जा रहे थे। इसी दौरान क्राउन प्लाजा लाल बत्ती पर एक तेज रफ्तार आरटीवी ने उन्हें पीछे से टक्कर मारी और उसके बाद आरटीवी चालक मौके से भागने के चक्कर में उन्हें कुचलकर फरार हो गया। राहगीरों ने उन्हें अपोलो अस्पताल पहुंचाया और पुलिस को वारदात की सूचना दी। अस्पताल में बीस मई की सुबह डा. यासीन की मौत हो गई। ओखला औद्यागिक क्षेत्र थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले में आइपीसी एक्ट की धारा तीन सौ चारए के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस टीम ने घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपित सोनू की पहचान कर उसे ओखला स्थित उसके रिश्तेदार के घर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपित की निशानदेही पर पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल आरटीवी को जब्त कर लिया है। |
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बेले एट सेबेस्टियनः नोवेल जेनरेशन एक फ्रांसीसी फिल्म है, जो 10 वर्षीय सेबेस्टियन और अपने मालिक से प्रताड़ित एक कुत्ते बेले की कहानी कहती है। इस फिल्म का प्रीमियर भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) के 53वें संस्करण में किया गया।
इस साल आईएफएफआई- 53 में फ्रांस को फोकस देश के रूप में चुना गया है। इससे पहले इस साल की शुरुआत में देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर कान्स फिल्म फेस्टिवल के मार्चे डू सिनेमा में भारत को कंट्री ऑफ ऑनर के रूप नामित किया गया था।
निदेशक-निर्माता पियरे कोरे ने पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की आयोजित 'आईएफएफआई टेबल वार्ता' में कहा कि उन पर इन पात्रों के साथ फिल्म बनाने को लेकर एक बड़ा दबाव था, क्योंकि बेले और सेबेस्टियन फ्रांस में बहुत प्रसिद्ध पात्र हैं, जिन्हें 60 के दशक के कई टीवी शो और यहां तक कि जापानी एनीमेशन में भी चित्रित किया गया था। उन्होंने कहा, "यह एक घरेलू मास्टर-पालतू पशु का संबंध नहीं है, बल्कि एक दोस्त और एक विकसित मानव- पशु संबंध है।"
अभिनेता और एक प्रख्यात स्क्रीन दिग्गज ऑरेलियन रिकोइंग ने अपने अनुभवों और इस परियोजना के साथ जुड़ने के निर्णय को याद किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र फिल्में करने के बाद वे इस प्रस्ताव को पाकर बहुत प्रसन्न थे। रिकोइंग ने कहा, "यह एक बड़ी बात है। एक अभिनेता के लिए एक पारिवारिक फिल्म करना एक सपना है।" बेले एट सेबेस्टियन विभिन्न विषयों- परिवार, एकल महिलाओं के संघर्ष और मानव जीवन व मृत्यु की जटिलताओं के बीच संघर्ष पर आधारित है।
"मैं पिता हूं। मैं ट्रेलर में नहीं हूं।" इस दिग्गज अभिनेता ने अपनी टिप्पणी पर टिप्पणी पर हंसते हुए कहा। उन्होंने आगे कहा, "मैं फिल्म में एक बड़ा आश्चर्य हूं। मेरी भूमिका एक बुरे आदमी के रूप में चित्रित की गई है, जो इलाका चाहता है। यह एक लड़ाई है। यह फिल्म को जंगल और पहाड़ों से भी आगे धकेलती है। यह परिवार, पिता और पुत्र के बीच के रिश्ते का एक मजबूत चित्रण है।
दर्शकों के लिए बेले एट सेबेस्टियन का नया संस्करण कैसे अलग होगा, इस बारे में मीडिया के एक सवाल के जवाब में निर्देशक ने साफ किया कि इसे समकालीन समय में ढाला गया है। इस फिल्म में इकोलॉजी नया विचार है और यह इसे पिछले संस्करणों से अलग बनाता है।
उन्होंने इस उम्मीद पर अपने संबोधन का समापन किया कि भारत एक बहुत बड़ा देश है और भारतीय दर्शकों का इस फिल्म को देखना बहुत अच्छा होगा।
बेले एट सेबेस्टियनः नोवेल जेनरेशन एक बच्चे सेबेस्टियन की कहानी है, जो अपनी दादी और चाची के साथ पहाड़ों में छुट्टियां बिता रहा है। जब तक एक विशाल कुत्ता बेले के साथ उसकी मुलाकात नहीं होती है, जिसके उसके मालिक ने बुरा व्यवहार किया था, तब तक भेड़ों के साथ अपनी दादी और चाची की सहायता करने में उसके जैसे शहरी लड़के के लिए मुश्किल से ही कोई रोमांचक संभावना हो। अन्याय से लड़ने और अपने नए मित्र की रक्षा के लिए कुछ भी करने को तैयार सेबेस्टियन अपने जीवन की सबसे उत्साहपूर्ण गर्मी की छुट्टी बिताएगा।
| Posted On: बेले एट सेबेस्टियनः नोवेल जेनरेशन एक फ्रांसीसी फिल्म है, जो दस वर्षीय सेबेस्टियन और अपने मालिक से प्रताड़ित एक कुत्ते बेले की कहानी कहती है। इस फिल्म का प्रीमियर भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के तिरेपनवें संस्करण में किया गया। इस साल आईएफएफआई- तिरेपन में फ्रांस को फोकस देश के रूप में चुना गया है। इससे पहले इस साल की शुरुआत में देश की आजादी की पचहत्तरवीं वर्षगांठ के अवसर पर कान्स फिल्म फेस्टिवल के मार्चे डू सिनेमा में भारत को कंट्री ऑफ ऑनर के रूप नामित किया गया था। निदेशक-निर्माता पियरे कोरे ने पत्र सूचना कार्यालय की आयोजित 'आईएफएफआई टेबल वार्ता' में कहा कि उन पर इन पात्रों के साथ फिल्म बनाने को लेकर एक बड़ा दबाव था, क्योंकि बेले और सेबेस्टियन फ्रांस में बहुत प्रसिद्ध पात्र हैं, जिन्हें साठ के दशक के कई टीवी शो और यहां तक कि जापानी एनीमेशन में भी चित्रित किया गया था। उन्होंने कहा, "यह एक घरेलू मास्टर-पालतू पशु का संबंध नहीं है, बल्कि एक दोस्त और एक विकसित मानव- पशु संबंध है।" अभिनेता और एक प्रख्यात स्क्रीन दिग्गज ऑरेलियन रिकोइंग ने अपने अनुभवों और इस परियोजना के साथ जुड़ने के निर्णय को याद किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र फिल्में करने के बाद वे इस प्रस्ताव को पाकर बहुत प्रसन्न थे। रिकोइंग ने कहा, "यह एक बड़ी बात है। एक अभिनेता के लिए एक पारिवारिक फिल्म करना एक सपना है।" बेले एट सेबेस्टियन विभिन्न विषयों- परिवार, एकल महिलाओं के संघर्ष और मानव जीवन व मृत्यु की जटिलताओं के बीच संघर्ष पर आधारित है। "मैं पिता हूं। मैं ट्रेलर में नहीं हूं।" इस दिग्गज अभिनेता ने अपनी टिप्पणी पर टिप्पणी पर हंसते हुए कहा। उन्होंने आगे कहा, "मैं फिल्म में एक बड़ा आश्चर्य हूं। मेरी भूमिका एक बुरे आदमी के रूप में चित्रित की गई है, जो इलाका चाहता है। यह एक लड़ाई है। यह फिल्म को जंगल और पहाड़ों से भी आगे धकेलती है। यह परिवार, पिता और पुत्र के बीच के रिश्ते का एक मजबूत चित्रण है। दर्शकों के लिए बेले एट सेबेस्टियन का नया संस्करण कैसे अलग होगा, इस बारे में मीडिया के एक सवाल के जवाब में निर्देशक ने साफ किया कि इसे समकालीन समय में ढाला गया है। इस फिल्म में इकोलॉजी नया विचार है और यह इसे पिछले संस्करणों से अलग बनाता है। उन्होंने इस उम्मीद पर अपने संबोधन का समापन किया कि भारत एक बहुत बड़ा देश है और भारतीय दर्शकों का इस फिल्म को देखना बहुत अच्छा होगा। बेले एट सेबेस्टियनः नोवेल जेनरेशन एक बच्चे सेबेस्टियन की कहानी है, जो अपनी दादी और चाची के साथ पहाड़ों में छुट्टियां बिता रहा है। जब तक एक विशाल कुत्ता बेले के साथ उसकी मुलाकात नहीं होती है, जिसके उसके मालिक ने बुरा व्यवहार किया था, तब तक भेड़ों के साथ अपनी दादी और चाची की सहायता करने में उसके जैसे शहरी लड़के के लिए मुश्किल से ही कोई रोमांचक संभावना हो। अन्याय से लड़ने और अपने नए मित्र की रक्षा के लिए कुछ भी करने को तैयार सेबेस्टियन अपने जीवन की सबसे उत्साहपूर्ण गर्मी की छुट्टी बिताएगा। |
औरैया। जिले के सहायल क्षेत्र में टैम्पू पलटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि मां-बेटी घायल हो गई है। पुलिस क्षेत्राधिकारी सदर सुरेन्द्र नाथ ने बुधवार को यहां यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि थाना क्षेत्र के गांव अधारा निवासी अशोक अली (40) अपने परिवार के साथ टैम्पू से घर जा रहे थे। टैम्पू जैसे ही नवीमोहन के पास पहुंचा तभी अनियंत्रित होकर पलट गया जिससे अशोक अली के सिर में गंभीर चोट लगने मौके पर मौत हो गई जबकि परिवार की शवाना (28) व उसकी पुत्री रिजवाना (9) घायल हो गयीं।
दोनों घायलों को उपचार हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सहार में भर्ती कराया गया है, जहां वह खतरे से बाहर हैं। जबकि अशोक अली का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
| औरैया। जिले के सहायल क्षेत्र में टैम्पू पलटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि मां-बेटी घायल हो गई है। पुलिस क्षेत्राधिकारी सदर सुरेन्द्र नाथ ने बुधवार को यहां यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि थाना क्षेत्र के गांव अधारा निवासी अशोक अली अपने परिवार के साथ टैम्पू से घर जा रहे थे। टैम्पू जैसे ही नवीमोहन के पास पहुंचा तभी अनियंत्रित होकर पलट गया जिससे अशोक अली के सिर में गंभीर चोट लगने मौके पर मौत हो गई जबकि परिवार की शवाना व उसकी पुत्री रिजवाना घायल हो गयीं। दोनों घायलों को उपचार हेतु सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सहार में भर्ती कराया गया है, जहां वह खतरे से बाहर हैं। जबकि अशोक अली का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और वैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है। |
विन्सेन्ट आर्थर स्मिथ (अंग्रेज़ीः Vincent Arthur Smith, जन्म- 3 जून, 1848; मृत्यु- 6 फ़रवरी, 1920) ब्रिटिश इतिहासकार थे। भारत के इतिहास पर उन्होंने बहुत कुछ लिखा है। भारत के कई इतिहासकारों ने उनके इतिहास लेखन को पक्षपातपूर्ण कहा है।
- सन 1871 में विन्सेन्ट आर्थर स्मिथ ने भारतीय सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और फिर भारत में संयुक्त प्रांत बनने पर नियुक्त किया गया।
- विन्सेन्ट आर्थर स्मिथ को 1871-1900 के बीच विभिन्न न्यायिक और कार्यकारी पदों पर काम करने के लिए जाना जाता है।
- ज़िला और सत्र न्यायाधीश के रूप में भी उन्होंने कार्य किया और अंततः जुलाई, 1900 में आयुक्त के रूप में सेवानिवृत्त हो गए।
| विन्सेन्ट आर्थर स्मिथ ब्रिटिश इतिहासकार थे। भारत के इतिहास पर उन्होंने बहुत कुछ लिखा है। भारत के कई इतिहासकारों ने उनके इतिहास लेखन को पक्षपातपूर्ण कहा है। - सन एक हज़ार आठ सौ इकहत्तर में विन्सेन्ट आर्थर स्मिथ ने भारतीय सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की और फिर भारत में संयुक्त प्रांत बनने पर नियुक्त किया गया। - विन्सेन्ट आर्थर स्मिथ को एक हज़ार आठ सौ इकहत्तर-एक हज़ार नौ सौ के बीच विभिन्न न्यायिक और कार्यकारी पदों पर काम करने के लिए जाना जाता है। - ज़िला और सत्र न्यायाधीश के रूप में भी उन्होंने कार्य किया और अंततः जुलाई, एक हज़ार नौ सौ में आयुक्त के रूप में सेवानिवृत्त हो गए। |
टेरर फंडिंग मामले में यासीन मलिक को दोषी करार दिए जाने के बाद बलिदानी स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना की पत्नी ने कहा है कि यह आतंकी उस मामले में भी नहीं बच पाएगा।
नागपुर स्थित RSS मुख्यालय की रेकी के मामले में कश्मीर से जैश आतंकी को गिरफ्तार किया गया है। रेकी कर इस आतंकी ने वीडियो पाकिस्तान स्थित अपने हैंडलर को भेजा था।
जम्मू कश्मीर पुलिस ने सुरक्षाबलों के साथ मिलकर बांदीपोरा जिले में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है।
प्रोफेसर अल्ताफ हुसैन पंडित ने 1990 में सीमा पार से हथियार चलाने की ट्रेनिंग ली थी, बाद में JKLF का सक्रिय आतंकी बन गया था।
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया है। वहीं, सरकार ने राहुल भट की पत्नी को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है।
13 मई की सुबह दहशतगर्दों ने एक पुलिसकर्मी रियाज अहमद ठोकर के घर में घुसकर उन्हें गोली मार दी। अस्पताल भर्ती ठोकर की हालत गंभीर बनी हुई है।
आतंकवादियों ने 5 दिन पहले एक पुलिसकर्मी को गोली मारकर घायल कर दिया था। घायल कांस्टेबल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
करनाल पुलिस ने 4 संदिग्ध खालिस्तानी आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इन आतंकियों के पास से 1 पिस्टल 31 कारतूस, 3 IED और कैश बरामद किया गया है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बांग्लादेश के आतंकवादी समूह के कई मॉड्यूल पर नकेल कसने के लिए असम पुलिस की सराहना की। 16 आतंकी गिरफ्तार।
NDTV की रिपोर्टर आरोपित अंसार के लिए 'आप, उन्होंने, उनके और अंसार जी' जैसे शब्दों का प्रयोग करती हुई नजर आईं। जहाँगीरपुरी के दंगाई का बचाव।
| टेरर फंडिंग मामले में यासीन मलिक को दोषी करार दिए जाने के बाद बलिदानी स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना की पत्नी ने कहा है कि यह आतंकी उस मामले में भी नहीं बच पाएगा। नागपुर स्थित RSS मुख्यालय की रेकी के मामले में कश्मीर से जैश आतंकी को गिरफ्तार किया गया है। रेकी कर इस आतंकी ने वीडियो पाकिस्तान स्थित अपने हैंडलर को भेजा था। जम्मू कश्मीर पुलिस ने सुरक्षाबलों के साथ मिलकर बांदीपोरा जिले में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। प्रोफेसर अल्ताफ हुसैन पंडित ने एक हज़ार नौ सौ नब्बे में सीमा पार से हथियार चलाने की ट्रेनिंग ली थी, बाद में JKLF का सक्रिय आतंकी बन गया था। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया है। वहीं, सरकार ने राहुल भट की पत्नी को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है। तेरह मई की सुबह दहशतगर्दों ने एक पुलिसकर्मी रियाज अहमद ठोकर के घर में घुसकर उन्हें गोली मार दी। अस्पताल भर्ती ठोकर की हालत गंभीर बनी हुई है। आतंकवादियों ने पाँच दिन पहले एक पुलिसकर्मी को गोली मारकर घायल कर दिया था। घायल कांस्टेबल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। करनाल पुलिस ने चार संदिग्ध खालिस्तानी आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इन आतंकियों के पास से एक पिस्टल इकतीस कारतूस, तीन IED और कैश बरामद किया गया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बांग्लादेश के आतंकवादी समूह के कई मॉड्यूल पर नकेल कसने के लिए असम पुलिस की सराहना की। सोलह आतंकी गिरफ्तार। NDTV की रिपोर्टर आरोपित अंसार के लिए 'आप, उन्होंने, उनके और अंसार जी' जैसे शब्दों का प्रयोग करती हुई नजर आईं। जहाँगीरपुरी के दंगाई का बचाव। |
जो वर्णन करता है उसे प्रत्येक हिन्दू घमण्ड से पढ़ सकता है । " वे बड़े सुख से रहते हैं और बड़े सीधे-सादे और कम खर्चीले होते हैं । वे यज्ञों को छोड़ कर और कभी-शराव. नहीं पीते । उनकी शराब जौ के बदले चावल से बनाई जाती है और उनका मुख्य हर चावल ही होता है उनका सीधापन और उनकी प्रतिज्ञा इसी से समझ लीजिये कि वे बहुत ही कम न्यायाधीश के पास जाते हैं । गिरवी रखने अथवा के विषय में उनका कभी दावा नहीं होता और न उनको मोहर अथवा गवाहों की आवश्यकता होती है। वे मानत रख देते हैं और एक-दूसरे का विश्वास रखते हैं । वे अपने गृह और सम्पत्ति को बहुधा रक्षित छोड़ देते हैं । इन बातों से उनका धीरज स्वभाव विदित होता है । वे सत्यता और धर्म को समान दर की दृष्ट से देखते हैं । इसीलिये वे वृद्धों को यदि उनमें विशेष बुद्धि न हो तो कोई विशेष अधिकार नहीं देते ।" इसके अतिरिक्त मेगास्थनीज कहता है कि हिन्दू लोग विदेशियों को भी गुलाम नहीं बनाते, स्वदेशियों को तो भला वे क्यो बनाने लगे । उनमें चोरी बिरले ही कभी होती थी । उनमें न्याय जवानी होता था और वे लिखना नहीं जानते थे । नियार्कस से हम लोगों । को विदित होता है कि भारतवर्ष में दार्शनिक काल में लोग लिखना जानते थे । मेमास्थनीज के वर्णन से केवल यह समझा जाना चाहिए कि लिखने का प्रचार कम रहा होगा अर्थात् पाठशालाओं में बालकों को शिक्षा जवानी ही दी जाती थी और जवानी ही वे अपना धर्म पाठ कण्ठाग्र करते थे । न्यायालयों के विद्वान न्यायाधीश लोग भी धर्मसूत्रों को कंटस्थ रख कर उनके अनुसार न्याय करते थे ।
एरियन ने नियार्कस का एक वाक्य उद्धृत किया है और वह कहता है कि "भारतवासी नीचे रूई का एक वस्त्र पहनते हैं जो घुटने के नीचे आंांधी दूर तक रहता है और उसके ऊपर एक दूसरा वस्त्र पहनते हैं जिसे कुछ तो वे कन्धों पर रखते हैं और कुछ अपने के चारों ओर लपेट लेते हैं ... ...। वे सफेद चमड़े के जूते पहनते है 'और ये बहुत ही अच्छे बने हुए होते हैं। उनके तल्ले चित्र विचित्र तरह के तथा वड़े -मोटे होते हैं ।" भारतवर्ष के अधिकांश लोग नखाकर रहते है और भूमि जोतते बोते हैं परन्तु इसमें पहाड़ी लोग सम्मिलित नहीं हैं जो कि शिकारी जन्तुओं के मांस खाते हैं । हमारा सच्चा हाल वतलाने वाला मेगास्थनीज प्राचीन भारतवर्ष की खेती का भी वृत्तान्त लिखता है जो कि प्रायः की खेती को रीति से मिलता है । मेगास्थनीज
• ने जाड़े की वृष्टि को लगातार वृष्टि समझ कर लिखा है कि वर्ष में दो बार वृष्टि होती थी । वह कहता कि यहां "बहुत से बड़े-बड़े उपजाऊ और सुहावने मैदान थे और सब में बहुत सी नदियां वहती थीं । भूमि का अधिक भाग सिंचाई में था और इस कारण वर्ष में दो फसल होतो थी । उसके साथ ही उसमें सव भांति के पशु, खेत के चौपाए
राज्य - प्रबन्ध, खेती और शिल्प
और भिन्न-भिन्न आकार की चिड़ियां बहुतायत से होती थीं । इसके अतिरिक्त वहाँ वड़े वड़े हाथो भी अधिक के अतिरिक्त भारतवर्ष में वाजरा भी बहुतायत
से होता और वह नदियों के अधिक होने के कारण अच्छी तरह सींचा जाता है । वहां कई प्रकार की दाल और गेहूँ और "वासपोरम" तथा खाने के लिये दूसरे बहुत से पेड़ होते हैं जिनमें से बहुतेरे उगते हैं। इसके सिवाय इस भूमि में जानवरों के से खाने योग्य बहुत प्रकार की चीजें होती हैं जिनका व्योरा लिखना कठिन है । कहा जाता है कि भारतवर्ष में अकाल कभी नहीं और कभी खाने की चीजों की मँहगी नहीं हुई । इसका कारण यह हैं कि वर्ष में दो बार वृष्टि होती है - अर्थात् एक तो जाड़े में गेहूं बोने के समय जैसा कि अन्य देशों में होता है और दूसरी गर्मी में जब कि चावल "बासपोरम", बाजरा और तिल वोने का ठीक समय है -- भारतवर्ष के लोग प्रायः सदा ही वर्ष में दो फसल काटते हैं और यदि एक फसल कुछ खराव हो जाय तो उनको सदा निश्चय रहता है दूसरी फसल अच्छी होगी। इसके सिवाय ग्रापसे होने वाले वृक्षों के फल और खाने योग्य कन्द जो कि नम जगहों में भिन्न-भिन्न मिठास के होते हैं, मनुष्यों के खाने के लिये बहुतायत से है । "
आज कल किसी हिन्दू के लिये सम्भव है कि वह दो हजार वर्ष पहले की हिन्दुओं के समय की भारतवर्ष की इस भाग्यवती दशा का वृत्तान्त जो कि इस बुद्धिमान और योग्य विदेशी ने पक्षपात रहित होकर लिखा है, विना घमण्ड के न पढ़े । सुन्दर गाँवो में परिश्रमी और शान्त खेती करने वाले रहते थे और वे विस्तृत उपजाऊ खेतों को सावधानी और परिश्रम के साथ जोतते बोते और सींचते थे । नगर के शिल्पकार वड़ी हो उत्तमता के साथ भांति-भांति की वस्तुएँ वनाते थे । यह विचारना सम्भव है कि ये सब फल राज्य की सावधानी र सुप्रन्ध के बिना ही जान और माल की उत्तम रक्षा केविना और उचित और उत्तम कानून की सहायता के बिना हो गये हों और जब कभी राजा लोगों में परस्पर युद्ध भी होता था और लड़ाके क्षत्री सरदार लोग रणभूमि में होते थे उस समय भी भारतवर्ष में एक ऐसी दयालु रीति प्रचलित थी जिसने कि युद्ध की भवानकता को कम कर दिया था और शान्त गाँव के रहने वालों एवं परिश्रमी खेती करने वालों को उपद्रव विपत्ति से रक्षित रक्खा था । यह रीति प्राचीन समय में और कहीं प्रचलित नहीं थी ।
भारतवर्ष को उत्तम शिल्प की वस्तुएं ईसा के बहुत पहले फिनेशिया के व्यापारियों और पश्चिमी एशिया तथा इंजिन के बाजारों में परिचित थीं। मेगास्थिनीज कहता है कि "भारतवासी शिल्प में वड़े चतुर थे जैसे कि स्वच्छ वायु में रहने वाले | जो वर्णन करता है उसे प्रत्येक हिन्दू घमण्ड से पढ़ सकता है । " वे बड़े सुख से रहते हैं और बड़े सीधे-सादे और कम खर्चीले होते हैं । वे यज्ञों को छोड़ कर और कभी-शराव. नहीं पीते । उनकी शराब जौ के बदले चावल से बनाई जाती है और उनका मुख्य हर चावल ही होता है उनका सीधापन और उनकी प्रतिज्ञा इसी से समझ लीजिये कि वे बहुत ही कम न्यायाधीश के पास जाते हैं । गिरवी रखने अथवा के विषय में उनका कभी दावा नहीं होता और न उनको मोहर अथवा गवाहों की आवश्यकता होती है। वे मानत रख देते हैं और एक-दूसरे का विश्वास रखते हैं । वे अपने गृह और सम्पत्ति को बहुधा रक्षित छोड़ देते हैं । इन बातों से उनका धीरज स्वभाव विदित होता है । वे सत्यता और धर्म को समान दर की दृष्ट से देखते हैं । इसीलिये वे वृद्धों को यदि उनमें विशेष बुद्धि न हो तो कोई विशेष अधिकार नहीं देते ।" इसके अतिरिक्त मेगास्थनीज कहता है कि हिन्दू लोग विदेशियों को भी गुलाम नहीं बनाते, स्वदेशियों को तो भला वे क्यो बनाने लगे । उनमें चोरी बिरले ही कभी होती थी । उनमें न्याय जवानी होता था और वे लिखना नहीं जानते थे । नियार्कस से हम लोगों । को विदित होता है कि भारतवर्ष में दार्शनिक काल में लोग लिखना जानते थे । मेमास्थनीज के वर्णन से केवल यह समझा जाना चाहिए कि लिखने का प्रचार कम रहा होगा अर्थात् पाठशालाओं में बालकों को शिक्षा जवानी ही दी जाती थी और जवानी ही वे अपना धर्म पाठ कण्ठाग्र करते थे । न्यायालयों के विद्वान न्यायाधीश लोग भी धर्मसूत्रों को कंटस्थ रख कर उनके अनुसार न्याय करते थे । एरियन ने नियार्कस का एक वाक्य उद्धृत किया है और वह कहता है कि "भारतवासी नीचे रूई का एक वस्त्र पहनते हैं जो घुटने के नीचे आंांधी दूर तक रहता है और उसके ऊपर एक दूसरा वस्त्र पहनते हैं जिसे कुछ तो वे कन्धों पर रखते हैं और कुछ अपने के चारों ओर लपेट लेते हैं ... ...। वे सफेद चमड़े के जूते पहनते है 'और ये बहुत ही अच्छे बने हुए होते हैं। उनके तल्ले चित्र विचित्र तरह के तथा वड़े -मोटे होते हैं ।" भारतवर्ष के अधिकांश लोग नखाकर रहते है और भूमि जोतते बोते हैं परन्तु इसमें पहाड़ी लोग सम्मिलित नहीं हैं जो कि शिकारी जन्तुओं के मांस खाते हैं । हमारा सच्चा हाल वतलाने वाला मेगास्थनीज प्राचीन भारतवर्ष की खेती का भी वृत्तान्त लिखता है जो कि प्रायः की खेती को रीति से मिलता है । मेगास्थनीज • ने जाड़े की वृष्टि को लगातार वृष्टि समझ कर लिखा है कि वर्ष में दो बार वृष्टि होती थी । वह कहता कि यहां "बहुत से बड़े-बड़े उपजाऊ और सुहावने मैदान थे और सब में बहुत सी नदियां वहती थीं । भूमि का अधिक भाग सिंचाई में था और इस कारण वर्ष में दो फसल होतो थी । उसके साथ ही उसमें सव भांति के पशु, खेत के चौपाए राज्य - प्रबन्ध, खेती और शिल्प और भिन्न-भिन्न आकार की चिड़ियां बहुतायत से होती थीं । इसके अतिरिक्त वहाँ वड़े वड़े हाथो भी अधिक के अतिरिक्त भारतवर्ष में वाजरा भी बहुतायत से होता और वह नदियों के अधिक होने के कारण अच्छी तरह सींचा जाता है । वहां कई प्रकार की दाल और गेहूँ और "वासपोरम" तथा खाने के लिये दूसरे बहुत से पेड़ होते हैं जिनमें से बहुतेरे उगते हैं। इसके सिवाय इस भूमि में जानवरों के से खाने योग्य बहुत प्रकार की चीजें होती हैं जिनका व्योरा लिखना कठिन है । कहा जाता है कि भारतवर्ष में अकाल कभी नहीं और कभी खाने की चीजों की मँहगी नहीं हुई । इसका कारण यह हैं कि वर्ष में दो बार वृष्टि होती है - अर्थात् एक तो जाड़े में गेहूं बोने के समय जैसा कि अन्य देशों में होता है और दूसरी गर्मी में जब कि चावल "बासपोरम", बाजरा और तिल वोने का ठीक समय है -- भारतवर्ष के लोग प्रायः सदा ही वर्ष में दो फसल काटते हैं और यदि एक फसल कुछ खराव हो जाय तो उनको सदा निश्चय रहता है दूसरी फसल अच्छी होगी। इसके सिवाय ग्रापसे होने वाले वृक्षों के फल और खाने योग्य कन्द जो कि नम जगहों में भिन्न-भिन्न मिठास के होते हैं, मनुष्यों के खाने के लिये बहुतायत से है । " आज कल किसी हिन्दू के लिये सम्भव है कि वह दो हजार वर्ष पहले की हिन्दुओं के समय की भारतवर्ष की इस भाग्यवती दशा का वृत्तान्त जो कि इस बुद्धिमान और योग्य विदेशी ने पक्षपात रहित होकर लिखा है, विना घमण्ड के न पढ़े । सुन्दर गाँवो में परिश्रमी और शान्त खेती करने वाले रहते थे और वे विस्तृत उपजाऊ खेतों को सावधानी और परिश्रम के साथ जोतते बोते और सींचते थे । नगर के शिल्पकार वड़ी हो उत्तमता के साथ भांति-भांति की वस्तुएँ वनाते थे । यह विचारना सम्भव है कि ये सब फल राज्य की सावधानी र सुप्रन्ध के बिना ही जान और माल की उत्तम रक्षा केविना और उचित और उत्तम कानून की सहायता के बिना हो गये हों और जब कभी राजा लोगों में परस्पर युद्ध भी होता था और लड़ाके क्षत्री सरदार लोग रणभूमि में होते थे उस समय भी भारतवर्ष में एक ऐसी दयालु रीति प्रचलित थी जिसने कि युद्ध की भवानकता को कम कर दिया था और शान्त गाँव के रहने वालों एवं परिश्रमी खेती करने वालों को उपद्रव विपत्ति से रक्षित रक्खा था । यह रीति प्राचीन समय में और कहीं प्रचलित नहीं थी । भारतवर्ष को उत्तम शिल्प की वस्तुएं ईसा के बहुत पहले फिनेशिया के व्यापारियों और पश्चिमी एशिया तथा इंजिन के बाजारों में परिचित थीं। मेगास्थिनीज कहता है कि "भारतवासी शिल्प में वड़े चतुर थे जैसे कि स्वच्छ वायु में रहने वाले |
वाराणसी के चेतसिंह किला परिसर में मंगलवार को हनुमान चालीसा की शूटिंग के दौरान कलाकारों द्वारा जूता पहनने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर भी जूता पहनकर हनुमान चालीसा की शूटिंग का पोस्ट वायरल हुआ। कोरोना काल के बाद अब वाराणसी में शूटिंग का दौर फिर से शुरू हो गया है।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
| वाराणसी के चेतसिंह किला परिसर में मंगलवार को हनुमान चालीसा की शूटिंग के दौरान कलाकारों द्वारा जूता पहनने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर भी जूता पहनकर हनुमान चालीसा की शूटिंग का पोस्ट वायरल हुआ। कोरोना काल के बाद अब वाराणसी में शूटिंग का दौर फिर से शुरू हो गया है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi. |
नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीति आयोग की 7वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में केंद्र तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सहयोग- समन्वय बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ।
फसल विविधीकरण तथा तिलहन, दलहन और अन्य कृषि उत्पादों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन और शहरी प्रशासन का विषय भी बैठक के एजेंडे में शामिल हैं। शासी परिषद प्रत्येक विषय पर कार्य योजना और कार्रवाई योजना को अंतिम रूप देगी।
जुलाई 2019 के बाद से नीति आयोग की शासी परिषद की यह पहली प्रत्यक्ष बैठक होगी। यह परिषद राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के सक्रिय भागीदारी के साथ राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और रणनीतियों के बारे में साझा दृष्टिकोण विकसित करने वाली प्रमुख संस्था है। यह परिषद अन्तर क्षेत्रीय, अंतर विभागीय और संघीय मुद्दों पर चर्चा करने का एक मंच प्रदान करता है। बैठक की कार्यसूची में कौशल विविधिकरण और तिलहन, दलहन तथा कृषि समुदाय के आत्मनिर्भर बनने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति का कार्यान्वयन और शहरी शासन शामिल है। यह परिषद प्रत्येक विषय पर परिणाम आधारित कार्य योजना को अंतिम रूप देने का प्रयास करेगा। दीपेन्द्र कुमार, आकाशवाणी समाचार, दिल्ली।
| नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीति आयोग की सातवीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में केंद्र तथा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सहयोग- समन्वय बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ। फसल विविधीकरण तथा तिलहन, दलहन और अन्य कृषि उत्पादों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन और शहरी प्रशासन का विषय भी बैठक के एजेंडे में शामिल हैं। शासी परिषद प्रत्येक विषय पर कार्य योजना और कार्रवाई योजना को अंतिम रूप देगी। जुलाई दो हज़ार उन्नीस के बाद से नीति आयोग की शासी परिषद की यह पहली प्रत्यक्ष बैठक होगी। यह परिषद राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों के सक्रिय भागीदारी के साथ राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और रणनीतियों के बारे में साझा दृष्टिकोण विकसित करने वाली प्रमुख संस्था है। यह परिषद अन्तर क्षेत्रीय, अंतर विभागीय और संघीय मुद्दों पर चर्चा करने का एक मंच प्रदान करता है। बैठक की कार्यसूची में कौशल विविधिकरण और तिलहन, दलहन तथा कृषि समुदाय के आत्मनिर्भर बनने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति का कार्यान्वयन और शहरी शासन शामिल है। यह परिषद प्रत्येक विषय पर परिणाम आधारित कार्य योजना को अंतिम रूप देने का प्रयास करेगा। दीपेन्द्र कुमार, आकाशवाणी समाचार, दिल्ली। |
एआईसीसी महासचिव और असम प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सीपी जोशी के मुताबिक देश में तकलीफ की हवा चल रही है। उसमें भाजपा की सारी गलतफहमियां हवा हो जाएंगी।
गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनावों से इसका शंखनाद हो जाएगा। यहां प्रदेश कांग्रेस पदाधिकारियों और विधायकों की बैठक के बाद मीडिया के एक वर्ग के सामने आपनी संक्षिप्त टिप्पणी में उन्होंने यह राय जताई।
उनके अनुसार चुनाव आयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दबाव में आकर गुजरात में विधानसभा चुनावों की घोषणा में देरी कर रहा है। जनता सब समझ रही है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जिस तरह से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के प्रति लोगों का उत्साह उमड़ रहा है, उसके चलते प्रधानमंत्री मोदी सहित समूचे भाजपा नेतृत्व की नींद उड़ गई है। उन्हें भरोसा है कि गुजरात में जनता भाजपा को कड़ा सबक देगी।
| एआईसीसी महासचिव और असम प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सीपी जोशी के मुताबिक देश में तकलीफ की हवा चल रही है। उसमें भाजपा की सारी गलतफहमियां हवा हो जाएंगी। गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनावों से इसका शंखनाद हो जाएगा। यहां प्रदेश कांग्रेस पदाधिकारियों और विधायकों की बैठक के बाद मीडिया के एक वर्ग के सामने आपनी संक्षिप्त टिप्पणी में उन्होंने यह राय जताई। उनके अनुसार चुनाव आयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दबाव में आकर गुजरात में विधानसभा चुनावों की घोषणा में देरी कर रहा है। जनता सब समझ रही है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जिस तरह से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के प्रति लोगों का उत्साह उमड़ रहा है, उसके चलते प्रधानमंत्री मोदी सहित समूचे भाजपा नेतृत्व की नींद उड़ गई है। उन्हें भरोसा है कि गुजरात में जनता भाजपा को कड़ा सबक देगी। |
रात रात में ये ख़बर शहर के इस कोने से उस कोने तक फैल गई कि अतातुर्क कमाल मर गया है। रेडियो की थरथराती हुई ज़बान से ये सनसनी फैलाने वाली ख़बर ईरानी होटलों में सट्टे बाज़ों ने सुनी जो चाय की प्यालियां सामने रखे आने वाले नंबर के बारे में क़ियास दौड़ा रहे थे और वो सब कुछ भूल कर कमाल अतातुर्क की बड़ाई में गुम हो गए।
इस ख़याल को बाद में उस ने मुस्तफ़ा कमाल पाशा की शानदार मुस्लमानी और इस बड़ाई में तहलील कर दिया।
ये बात एक राहगीर ने सुन ली, उस ने दूसरे चौक में अपने दोस्तों से कही और एक घंटे में इन सब लोगों को जो दिन को सोने और रात को बाज़ारों में जागते रहने के आदी हैं, मालूम हो गया कि सुबह हड़ताल हो रही है।
अब्बू क़साई रात को दो बजे अपनी खोली में आया। उस ने आते ही ताक़ में से बहुत सी चीज़ों को इधर उधर उलट पलट करने के बाद एक पुड़िया निकाली और एक देगची में पानी भर कर उस को इस में डाल कर घोलना शुरू कर दिया।
"हाँ आ गया हूँ।" ये कह कर अब्बू ने अपनी क़मीज़ उतार कर देगची में डाल दी और उसे पानी के अंदर मसलना शुरू कर दिया।
"जाने मेरी बला यह बड़ा आदमी कौन है........ पर ये तू क्या कर रहा है?" बीवी ने पूछा "सोता क्यों नहीं है!" क़मीज़ को काला रंग दे रहा हूँ.... सुबह हमें हड़ताल कराने जाना है।" ये कह कर उस ने क़मीज़ निचोड़ कर दो कीलों के साथ लटका दी जो दीवार में गड़ी हुई थीं।
दूसरे रोज़ सुबह को स्याह पोश मुस्लमानों की टोलियां काले झंडे लिए बाज़ारों में चक्कर लगा रही थीं। ये स्याह पोश मुस्लमान दुकानदारों की दुकानें बंद करा रहे थे और ये नारे लगा रहे थे। इन्क़िलाब ज़िंदाबाद। इन्क़िलाब ज़िंदाबाद!
एक हिंदू ने जो अपनी दुकान खोलने के लिए जा रहा था ये नारे सुने और नारे लगाने वालों को देखा तो चुपचाप ट्राम में बैठ कर वहां से खिसक गया। दूसरे हिंदू और पार्सी दुकानदारों ने जब मुस्लमानों के एक गिरोह को चीख़ते चिल्लाते और नारे मारते देखा तो उन्हों ने झटपट अपनी दुकानें बंद कर लीं।
दस पंद्रह स्याह पोश गप्पें हांकते एक बाज़ार से गुज़र रहे थे। एक ने अपने साथी से कहा। दोस्त हड़ताल हुई तो ख़ूब ही पर वैसी नहीं हुई जैसी मोहम्मद अली के टीम पर हुई थी.... ट्रामें तो इसी तरह चल रही हैं।
इस टोली में जो सब से ज़्यादा जोशीला था और जिस के हाथ में स्याह झंडा था तिनक कर बोला। "आज भी नहीं चलेंगी! ये कह कर वो इस ट्राम की तरफ़ बढ़ा जो लकड़ी के एक शेड के नीचे मुसाफ़िरों को उतार रही थी। टोली के बाक़ी आदमियों ने उस का साथ दिया और एक लम्हा के अंदर सब के सब ट्राम की सुर्ख़ गाड़ी के इर्दगिर्द थे। सब मुसाफ़िर ज़बरदस्ती उतार दिए गए।
शाम को एक वसी मैदान में मातमी जलसा हुआ। शहर के सब हंगामा-पसंद जमा थे। ख़वांचा-फ़रोश और पान बीड़ी वाले चल फिर कर अपना सौदा बेच रहे थे। जल्सा-गाह के बाहर आरज़ी दुकानों के पास एक मेला लगा हुआ था, चाट के चुनूं और उबले हुए आलूओं की ख़ूब बिक्री हो रही थी।
"नहीं, नहीं। कमाल सोप अच्छा रहेगा........ भाई मुस्तफ़ा कमाल इस से बड़ा आदमी है।" ये कह कर उस ने अपने साथी के कांधे पर हाथ रखा। "आओ चलें जल्सा शुरू होने वाला है।" वो दोनों जल्सा-गाह की तरफ़ चल दिए।
जल्सा शुरू हुआ।
आग़ाज़ में नज़्में गाई गईं जिन में मुस्तफ़ा कमाल की बड़ाई का ज़िक्र था फिर एक साहब तक़रीर करने के लिए उठे। आप ने कमाल अतातुर्क की अज़मत बड़ी बलंद बाँग लफ़्ज़ों में बयान करना शुरू की। हाज़िरीन-ए-जल्सा इस तक़रीर को ख़ामोशी से सुनते रहे। जब कभी मुक़र्रिर के ये अल्फ़ाज़ गूंजते "मुस्तफ़ा कमाल ने दर्रा-ए-दानयाल से अंग्रेज़ों को लात मार के बाहर निकाल दिया।" या "कमाल ने यूनानी भेड़ों को इस्लामी ख़ंजर से ज़बह कर डाला।" तो "इस्लाम ज़िंदाबाद" के नारों से मैदान काँप काँप उठता।
ये नारे मुक़र्रिर की क़ुव्वत-ए-गोयाई को और तेज़ कर देते और वो ज़्यादा जोश से अतातुर्क कमाल की अज़ीमुश्शान शख़्सियत पर रौशनी डालना शुरू कर देता।
मुक़र्रिर का एक एक लफ़्ज़ हाज़िरीन-ए-जल्सा के दिलों में एक जोश-ओ-ख़रोश पैदा कर रहा था।
जब ये अल्फ़ाज़ जल्सा-गाह में बुलंद हुए तो "इन्क़िलाब ज़िंदाबाद, इन्क़िलाब ज़िंदाबाद" के नारे पाँच मिनट तक मुतवातिर बुलंद होते रहे।
"ये कुफ़्र बकता है।" जल्सा-गाह में एक शख़्स की आवाज़ बुलंद हुई और फ़ौरन ही सब लोग मुज़्तरिब हो गए।
"ये काफ़िर है झूट बोलता है।" के नारों में मुक़र्रिर की आवाज़ ग़ुम हो गई। पेशतर इस के कि वो अपना माफी-अल-ज़मीर बयान करता उस के माथे पर एक पत्थर लगा और वो चकरा कर स्टेज पर गिर पड़ा। जल्से में एक भगदड़ मच गई।
| रात रात में ये ख़बर शहर के इस कोने से उस कोने तक फैल गई कि अतातुर्क कमाल मर गया है। रेडियो की थरथराती हुई ज़बान से ये सनसनी फैलाने वाली ख़बर ईरानी होटलों में सट्टे बाज़ों ने सुनी जो चाय की प्यालियां सामने रखे आने वाले नंबर के बारे में क़ियास दौड़ा रहे थे और वो सब कुछ भूल कर कमाल अतातुर्क की बड़ाई में गुम हो गए। इस ख़याल को बाद में उस ने मुस्तफ़ा कमाल पाशा की शानदार मुस्लमानी और इस बड़ाई में तहलील कर दिया। ये बात एक राहगीर ने सुन ली, उस ने दूसरे चौक में अपने दोस्तों से कही और एक घंटे में इन सब लोगों को जो दिन को सोने और रात को बाज़ारों में जागते रहने के आदी हैं, मालूम हो गया कि सुबह हड़ताल हो रही है। अब्बू क़साई रात को दो बजे अपनी खोली में आया। उस ने आते ही ताक़ में से बहुत सी चीज़ों को इधर उधर उलट पलट करने के बाद एक पुड़िया निकाली और एक देगची में पानी भर कर उस को इस में डाल कर घोलना शुरू कर दिया। "हाँ आ गया हूँ।" ये कह कर अब्बू ने अपनी क़मीज़ उतार कर देगची में डाल दी और उसे पानी के अंदर मसलना शुरू कर दिया। "जाने मेरी बला यह बड़ा आदमी कौन है........ पर ये तू क्या कर रहा है?" बीवी ने पूछा "सोता क्यों नहीं है!" क़मीज़ को काला रंग दे रहा हूँ.... सुबह हमें हड़ताल कराने जाना है।" ये कह कर उस ने क़मीज़ निचोड़ कर दो कीलों के साथ लटका दी जो दीवार में गड़ी हुई थीं। दूसरे रोज़ सुबह को स्याह पोश मुस्लमानों की टोलियां काले झंडे लिए बाज़ारों में चक्कर लगा रही थीं। ये स्याह पोश मुस्लमान दुकानदारों की दुकानें बंद करा रहे थे और ये नारे लगा रहे थे। इन्क़िलाब ज़िंदाबाद। इन्क़िलाब ज़िंदाबाद! एक हिंदू ने जो अपनी दुकान खोलने के लिए जा रहा था ये नारे सुने और नारे लगाने वालों को देखा तो चुपचाप ट्राम में बैठ कर वहां से खिसक गया। दूसरे हिंदू और पार्सी दुकानदारों ने जब मुस्लमानों के एक गिरोह को चीख़ते चिल्लाते और नारे मारते देखा तो उन्हों ने झटपट अपनी दुकानें बंद कर लीं। दस पंद्रह स्याह पोश गप्पें हांकते एक बाज़ार से गुज़र रहे थे। एक ने अपने साथी से कहा। दोस्त हड़ताल हुई तो ख़ूब ही पर वैसी नहीं हुई जैसी मोहम्मद अली के टीम पर हुई थी.... ट्रामें तो इसी तरह चल रही हैं। इस टोली में जो सब से ज़्यादा जोशीला था और जिस के हाथ में स्याह झंडा था तिनक कर बोला। "आज भी नहीं चलेंगी! ये कह कर वो इस ट्राम की तरफ़ बढ़ा जो लकड़ी के एक शेड के नीचे मुसाफ़िरों को उतार रही थी। टोली के बाक़ी आदमियों ने उस का साथ दिया और एक लम्हा के अंदर सब के सब ट्राम की सुर्ख़ गाड़ी के इर्दगिर्द थे। सब मुसाफ़िर ज़बरदस्ती उतार दिए गए। शाम को एक वसी मैदान में मातमी जलसा हुआ। शहर के सब हंगामा-पसंद जमा थे। ख़वांचा-फ़रोश और पान बीड़ी वाले चल फिर कर अपना सौदा बेच रहे थे। जल्सा-गाह के बाहर आरज़ी दुकानों के पास एक मेला लगा हुआ था, चाट के चुनूं और उबले हुए आलूओं की ख़ूब बिक्री हो रही थी। "नहीं, नहीं। कमाल सोप अच्छा रहेगा........ भाई मुस्तफ़ा कमाल इस से बड़ा आदमी है।" ये कह कर उस ने अपने साथी के कांधे पर हाथ रखा। "आओ चलें जल्सा शुरू होने वाला है।" वो दोनों जल्सा-गाह की तरफ़ चल दिए। जल्सा शुरू हुआ। आग़ाज़ में नज़्में गाई गईं जिन में मुस्तफ़ा कमाल की बड़ाई का ज़िक्र था फिर एक साहब तक़रीर करने के लिए उठे। आप ने कमाल अतातुर्क की अज़मत बड़ी बलंद बाँग लफ़्ज़ों में बयान करना शुरू की। हाज़िरीन-ए-जल्सा इस तक़रीर को ख़ामोशी से सुनते रहे। जब कभी मुक़र्रिर के ये अल्फ़ाज़ गूंजते "मुस्तफ़ा कमाल ने दर्रा-ए-दानयाल से अंग्रेज़ों को लात मार के बाहर निकाल दिया।" या "कमाल ने यूनानी भेड़ों को इस्लामी ख़ंजर से ज़बह कर डाला।" तो "इस्लाम ज़िंदाबाद" के नारों से मैदान काँप काँप उठता। ये नारे मुक़र्रिर की क़ुव्वत-ए-गोयाई को और तेज़ कर देते और वो ज़्यादा जोश से अतातुर्क कमाल की अज़ीमुश्शान शख़्सियत पर रौशनी डालना शुरू कर देता। मुक़र्रिर का एक एक लफ़्ज़ हाज़िरीन-ए-जल्सा के दिलों में एक जोश-ओ-ख़रोश पैदा कर रहा था। जब ये अल्फ़ाज़ जल्सा-गाह में बुलंद हुए तो "इन्क़िलाब ज़िंदाबाद, इन्क़िलाब ज़िंदाबाद" के नारे पाँच मिनट तक मुतवातिर बुलंद होते रहे। "ये कुफ़्र बकता है।" जल्सा-गाह में एक शख़्स की आवाज़ बुलंद हुई और फ़ौरन ही सब लोग मुज़्तरिब हो गए। "ये काफ़िर है झूट बोलता है।" के नारों में मुक़र्रिर की आवाज़ ग़ुम हो गई। पेशतर इस के कि वो अपना माफी-अल-ज़मीर बयान करता उस के माथे पर एक पत्थर लगा और वो चकरा कर स्टेज पर गिर पड़ा। जल्से में एक भगदड़ मच गई। |
सरकार एक बार फिर भारत के विनिर्माण उद्योग में उत्साह का संचार करने का प्रयास कर रही है। इससे पहले भी देश के कई प्रधानमंत्री इस मोर्चे पर प्रयास कर चुके हैं और उन्हें सफलता भी मिली, लेकिन यह सीमित रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में एक के बाद एक नीतिगत सुधारों की घोषणाएं की गई हैं। कोविड-19 महामारी से उत्पन्न परिस्थितियों के बीच मोदी सरकार के लिए अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए ये उपाय करना और लाजिमी हो गया था। सरकार ने जिन उपायों की अब तक घोषणाएं की हैं उनमें घरेलू विनिर्माताओं के हितों की रक्षा के लिए शुल्कों में वृद्धि, कुछ खास किस्म के आयात के लिए लाइसेंस एवं कोटा के प्रावधान, श्रम कानूनों में बदलाव और हाल में विभिन्न क्षेत्रों के लिए उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना (पीएलआई) आदि शामिल हैं। घरेलू विनिर्माताओं को बाहरी प्रतिस्पद्र्धा से बचाने के लिए सरकार ने पिछले वर्ष क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसेप) से अलग रहने की घोषणा की थी। सरकार के इन कदमों को मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिली हैं। इसकी वजह यह है कि ऐसे उपाय पहले भी किए जा चुके हैं, जिनके उत्साहजनक नतीजे नहीं मिले हैं। संरक्षणवाद और कोटा से संबंधित प्रावधानों से मांग-आपूर्ति असंतुलन, ऊंची कीमतों और निम्र गुणवत्ता वाले उत्पादों को बढ़ावा मिला है। अधिक शुल्क लगाने से घरेलू उद्योगों को फायदे के बजाय नुकसान ही हुआ है और इससे देश से होने वाले निर्यात को चोट पहुंची है। उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन का इस्तेमाल कारोबारी अपने लाभ के लिए कर सकते हैं। श्रम कानूनों में बदलाव से कामगारों के हित प्रभावित हुए हैं और इनसे विनिर्माताओं को भी बहुत लाभ नहीं मिल रहा है। लघु एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) के लिए आसान ऋण सुविधा और भविष्य निधि की अनिवार्यताओं के साथ उनकी मदद करने की कोशिश की गई है, लेकिन सरकार ने इसके साथ कई शर्तें भी जोड़ दी हैं। फिलहाल इन योजनाओं से जुड़ी सभी महीन बातें सामने नहीं आई हैं और कुछ समय बाद ही इनके असर का अंदाजा लगाया जा सकेगा। इसमें कोई शक नहीं कि सरकार आने वाले दिनों में कई और घोषणाएं कर सकती है। हालांकि ऐसा करने से पहले सरकार को उन तीन पहलुओं को समझने की जरूरत होगी, जो वैश्विक स्तर पर विनिर्माण को प्रभावित कर रहे हैं। कई लोगों ने ऐसी संभावनाएं जताई हैं कि कोविड-19 महामारी से आपूर्ति तंत्र को हुए नुकसान और चीन के साथ दुनिया के अन्य देशों के बिगड़ते संबंधों के बाद कई बड़े उत्पादक वहां (चीन) से बाहर आ जाएंगे और भारत का रुख करेंगे। इस बात को लेकर कोई शक नहीं कि महामारी से आपूर्ति तंत्र को नुकसान पहुंचा है और चीन से कंपनियों का मोह भंग हुआ है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। कई बड़ी कंपनियों ने चीन पर आवश्यकता से अधिक निर्भरता कम करने की कोशिश शुरू कर दी है, लेकिन उन्होंने चीन से बाहर अपने संयंत्र ले जाने की योजना नहीं बनाई है। ये कंपनियां विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही हैं। मलेशिया, इंडोनेशिया और वियतनाम एशिया में विनिर्माण केंद्रों के तौर पर अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। यूरोप में पोलैंड, चेक गणराज्य, स्लोवाकिया और हंगरी विनिर्माण में नवाचार आजमाने के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं और कई पश्चिमी यूरोपीय देश उनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसकी वजह यह है कि ये देश पश्चिमी यूरोपीय देशों के लिए नजदीक होंगे। अफ्रीका में इथियोपिया और केन्या कुछ हद तक चीन की मदद से कम लागत वाले विनिर्माण केंद्र के तौर पर अपनी पहचान स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। भारत के पक्ष में एक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यह मोबाइल फोन एवं इलेक्ट्रॉनिक सामान के लिए असीम संभावनाओं वाला बाजार है। कई नकारात्मक पहलू भी हैं। मसलन अनुबंध लागू करने में दिक्कतें, अधिकारियों का जरूरत से अधिक हस्तक्षेप एवं हर जगह व्याप्त भ्रष्टाचार, भारतीय कामगारों की कम कार्य उत्पादकता, कमजोर ढांचागत सुविधा और नीतिगत अस्थिरता विनिर्माण केंद्र बनने की भारत की संभावनाओं पर दाग लगा रहे हैं। इन तमाम नकारात्मक पहलुओं को साधने की जरूरत होगी। ऐसा देखा गया है कि 50 वर्ष या इससे अधिक समय में विनिर्माण गतिविधियां कम श्रम लागत की पेशकश करने वाले एक देश से दूसरे देश में स्थानांतरित हुआ है। विकसित देश हमेशा से कम उत्पादन लागत वाले केंद्र की तलाश में रहे हैं। हालांकि अब केवल इसी पहलू पर विचार नहीं किया जाता है। इसका कारण यह है कि नए विनिर्माण संयंत्र लागत कम करने, विश्वसनीयता बढ़ाने और वेतन मद में कटौती के लिए स्वचालन, रोबोट के इस्तेमाल और डिजिटलीकरण की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। अब विनिर्माण में तकनीक के इस्तेमाल की महत्ता बढ़ गई है। चीन शुरू में सस्ते श्रम उपलब्ध कराने की खूबी के कारण एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र बना था, लेकिन इसने औद्योगिक कार्यों में मशीनों एवं रोबोट के अधिक से अधिक इस्तेमाल और संयंत्र स्वचालन में बड़े पैमाने पर निवेश कर अपनी प्रतिस्पद्र्धी क्षमता बरकरार रखी। चीन ने प्रचुर श्रम संसाधन और कम लागत वाले देश के तौर पर अपनी पहचान खोई है, लेकिन पिछले पिछले कई वर्षों से यह औद्योगिक रोबोटिक्स का सबसे बड़ा खरीदार रहा है, इसका एक मतलब यह भी है कि अगर भारत दुनिया का विनिर्माण केंद्र बनना चाहता है तो उसे इस धारणा पर विचार करना होगा कि परंपरागत एसएमई विनिर्माण उद्योग की बुनियाद होंगे। वास्तव में एसएमई को आवश्यक पूंजी और तकनीक नहीं मिली और इनका कारोबार नहीं बढ़ा तो वे काफी नुकसान में रहेंगे। पहले ऐसी मान्यता थी कि विनिर्माण ऐसे रोजगारों का सृजन करती है, जिससे लोग कृषि से कारखानों की तरफ कूच करने लगते हैं। हालांकि अब भविष्य में यह रुझान कमजोर होता जाएगा। रोजगार के अवसर जरूर सृजित होंगे, लेकिन यह कारखानों में ही होगा यह जरूरी नहीं। अब कारखानों में विभिन्न कार्यों में तकनीक का इस्तेमाल खासा बढ़ गया है और वहां अब ऐसे रोजगार सृजित होंगे जिनमें अधिक आईटी एवं डिजिटल कौशल की जरू रत होगी। भविष्य में संयंत्र स्वचालन, डिजिटलीकरण, रोबोटिक प्रोग्रामिंग, डिजिटल रखरखाव, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और अन्य दूसरे खंडों में रोजगार आएंगे। नए विनिर्माण की मदद करने के लिए सभी तरह की सहायक सेवाएं एवं कंपनियां खड़ी होंगी। सरकार को एकीकृत नीतियां बनाते समय इस बात का ध्यान रखना होगा। भारत में कुछ ही सरकारों ने दीर्घ अवधि को जेहन में रखते हुए नीतियां बनाई है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि देश में जितनी भी प्रगति हुई है उनमें ज्यादातर उन सुधारों की वजह से हुई है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों में हमारे लिए जरूरी हो गए थे। देश लगातार लंबे समय तक आगे बढऩे में निरंतरता भी बरकरार नहीं रख पाया है। यह स्थिति बदलनी जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो विनिर्माण के कमजोर एवं सुस्त केंद्र होने के लिए भारत की आलोचना होती रहेगी। (लेखक बिज़नेस टुडे और बिज़नेसवर्ल्ड के पूर्व संपादक और संपादकीय सलाहकार संस्था प्रोजैइकव्यू के संस्थापक एवं संपादक हैं। )
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| सरकार एक बार फिर भारत के विनिर्माण उद्योग में उत्साह का संचार करने का प्रयास कर रही है। इससे पहले भी देश के कई प्रधानमंत्री इस मोर्चे पर प्रयास कर चुके हैं और उन्हें सफलता भी मिली, लेकिन यह सीमित रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में एक के बाद एक नीतिगत सुधारों की घोषणाएं की गई हैं। कोविड-उन्नीस महामारी से उत्पन्न परिस्थितियों के बीच मोदी सरकार के लिए अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए ये उपाय करना और लाजिमी हो गया था। सरकार ने जिन उपायों की अब तक घोषणाएं की हैं उनमें घरेलू विनिर्माताओं के हितों की रक्षा के लिए शुल्कों में वृद्धि, कुछ खास किस्म के आयात के लिए लाइसेंस एवं कोटा के प्रावधान, श्रम कानूनों में बदलाव और हाल में विभिन्न क्षेत्रों के लिए उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना आदि शामिल हैं। घरेलू विनिर्माताओं को बाहरी प्रतिस्पद्र्धा से बचाने के लिए सरकार ने पिछले वर्ष क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी से अलग रहने की घोषणा की थी। सरकार के इन कदमों को मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिली हैं। इसकी वजह यह है कि ऐसे उपाय पहले भी किए जा चुके हैं, जिनके उत्साहजनक नतीजे नहीं मिले हैं। संरक्षणवाद और कोटा से संबंधित प्रावधानों से मांग-आपूर्ति असंतुलन, ऊंची कीमतों और निम्र गुणवत्ता वाले उत्पादों को बढ़ावा मिला है। अधिक शुल्क लगाने से घरेलू उद्योगों को फायदे के बजाय नुकसान ही हुआ है और इससे देश से होने वाले निर्यात को चोट पहुंची है। उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन का इस्तेमाल कारोबारी अपने लाभ के लिए कर सकते हैं। श्रम कानूनों में बदलाव से कामगारों के हित प्रभावित हुए हैं और इनसे विनिर्माताओं को भी बहुत लाभ नहीं मिल रहा है। लघु एवं मझोले उद्यमों के लिए आसान ऋण सुविधा और भविष्य निधि की अनिवार्यताओं के साथ उनकी मदद करने की कोशिश की गई है, लेकिन सरकार ने इसके साथ कई शर्तें भी जोड़ दी हैं। फिलहाल इन योजनाओं से जुड़ी सभी महीन बातें सामने नहीं आई हैं और कुछ समय बाद ही इनके असर का अंदाजा लगाया जा सकेगा। इसमें कोई शक नहीं कि सरकार आने वाले दिनों में कई और घोषणाएं कर सकती है। हालांकि ऐसा करने से पहले सरकार को उन तीन पहलुओं को समझने की जरूरत होगी, जो वैश्विक स्तर पर विनिर्माण को प्रभावित कर रहे हैं। कई लोगों ने ऐसी संभावनाएं जताई हैं कि कोविड-उन्नीस महामारी से आपूर्ति तंत्र को हुए नुकसान और चीन के साथ दुनिया के अन्य देशों के बिगड़ते संबंधों के बाद कई बड़े उत्पादक वहां से बाहर आ जाएंगे और भारत का रुख करेंगे। इस बात को लेकर कोई शक नहीं कि महामारी से आपूर्ति तंत्र को नुकसान पहुंचा है और चीन से कंपनियों का मोह भंग हुआ है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। कई बड़ी कंपनियों ने चीन पर आवश्यकता से अधिक निर्भरता कम करने की कोशिश शुरू कर दी है, लेकिन उन्होंने चीन से बाहर अपने संयंत्र ले जाने की योजना नहीं बनाई है। ये कंपनियां विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही हैं। मलेशिया, इंडोनेशिया और वियतनाम एशिया में विनिर्माण केंद्रों के तौर पर अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। यूरोप में पोलैंड, चेक गणराज्य, स्लोवाकिया और हंगरी विनिर्माण में नवाचार आजमाने के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं और कई पश्चिमी यूरोपीय देश उनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसकी वजह यह है कि ये देश पश्चिमी यूरोपीय देशों के लिए नजदीक होंगे। अफ्रीका में इथियोपिया और केन्या कुछ हद तक चीन की मदद से कम लागत वाले विनिर्माण केंद्र के तौर पर अपनी पहचान स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। भारत के पक्ष में एक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यह मोबाइल फोन एवं इलेक्ट्रॉनिक सामान के लिए असीम संभावनाओं वाला बाजार है। कई नकारात्मक पहलू भी हैं। मसलन अनुबंध लागू करने में दिक्कतें, अधिकारियों का जरूरत से अधिक हस्तक्षेप एवं हर जगह व्याप्त भ्रष्टाचार, भारतीय कामगारों की कम कार्य उत्पादकता, कमजोर ढांचागत सुविधा और नीतिगत अस्थिरता विनिर्माण केंद्र बनने की भारत की संभावनाओं पर दाग लगा रहे हैं। इन तमाम नकारात्मक पहलुओं को साधने की जरूरत होगी। ऐसा देखा गया है कि पचास वर्ष या इससे अधिक समय में विनिर्माण गतिविधियां कम श्रम लागत की पेशकश करने वाले एक देश से दूसरे देश में स्थानांतरित हुआ है। विकसित देश हमेशा से कम उत्पादन लागत वाले केंद्र की तलाश में रहे हैं। हालांकि अब केवल इसी पहलू पर विचार नहीं किया जाता है। इसका कारण यह है कि नए विनिर्माण संयंत्र लागत कम करने, विश्वसनीयता बढ़ाने और वेतन मद में कटौती के लिए स्वचालन, रोबोट के इस्तेमाल और डिजिटलीकरण की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। अब विनिर्माण में तकनीक के इस्तेमाल की महत्ता बढ़ गई है। चीन शुरू में सस्ते श्रम उपलब्ध कराने की खूबी के कारण एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र बना था, लेकिन इसने औद्योगिक कार्यों में मशीनों एवं रोबोट के अधिक से अधिक इस्तेमाल और संयंत्र स्वचालन में बड़े पैमाने पर निवेश कर अपनी प्रतिस्पद्र्धी क्षमता बरकरार रखी। चीन ने प्रचुर श्रम संसाधन और कम लागत वाले देश के तौर पर अपनी पहचान खोई है, लेकिन पिछले पिछले कई वर्षों से यह औद्योगिक रोबोटिक्स का सबसे बड़ा खरीदार रहा है, इसका एक मतलब यह भी है कि अगर भारत दुनिया का विनिर्माण केंद्र बनना चाहता है तो उसे इस धारणा पर विचार करना होगा कि परंपरागत एसएमई विनिर्माण उद्योग की बुनियाद होंगे। वास्तव में एसएमई को आवश्यक पूंजी और तकनीक नहीं मिली और इनका कारोबार नहीं बढ़ा तो वे काफी नुकसान में रहेंगे। पहले ऐसी मान्यता थी कि विनिर्माण ऐसे रोजगारों का सृजन करती है, जिससे लोग कृषि से कारखानों की तरफ कूच करने लगते हैं। हालांकि अब भविष्य में यह रुझान कमजोर होता जाएगा। रोजगार के अवसर जरूर सृजित होंगे, लेकिन यह कारखानों में ही होगा यह जरूरी नहीं। अब कारखानों में विभिन्न कार्यों में तकनीक का इस्तेमाल खासा बढ़ गया है और वहां अब ऐसे रोजगार सृजित होंगे जिनमें अधिक आईटी एवं डिजिटल कौशल की जरू रत होगी। भविष्य में संयंत्र स्वचालन, डिजिटलीकरण, रोबोटिक प्रोग्रामिंग, डिजिटल रखरखाव, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और अन्य दूसरे खंडों में रोजगार आएंगे। नए विनिर्माण की मदद करने के लिए सभी तरह की सहायक सेवाएं एवं कंपनियां खड़ी होंगी। सरकार को एकीकृत नीतियां बनाते समय इस बात का ध्यान रखना होगा। भारत में कुछ ही सरकारों ने दीर्घ अवधि को जेहन में रखते हुए नीतियां बनाई है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि देश में जितनी भी प्रगति हुई है उनमें ज्यादातर उन सुधारों की वजह से हुई है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों में हमारे लिए जरूरी हो गए थे। देश लगातार लंबे समय तक आगे बढऩे में निरंतरता भी बरकरार नहीं रख पाया है। यह स्थिति बदलनी जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो विनिर्माण के कमजोर एवं सुस्त केंद्र होने के लिए भारत की आलोचना होती रहेगी। Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक ! डिज्नी का कारोबार खरीदने में प्राइवेट इक्विटी कंपनियों की रुचि! |
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यह एक कृत्रिम (artificial) उपकरण है जिसका इस्तेमाल पार्टनर के न होने पर भी सेक्स का चरम सुख प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इसके साथ ही अपने पार्टनर के साथ सेक्स सम्बन्ध को और मजेदार बनाने के लिए भी इनकी मदद ली जा सकती है। कभी-कभी सिर्फ मास्टरबेशन या हस्तमैथुन (musterbation) से ही ऑर्गेज्म का मजा नहीं आता है, इस स्थिति में चरम सुख का मजा लेने के लिए लोग सेक्स टॉय का सहारा लेते हैं। सेक्स टॉय आजकल बहुत आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन कुछ लोग शर्म (hesitation) के कारण इसे ऑनलाइन खरीदना पसंद करते हैं।
पेनिल सेक्स टॉय - यह एक कृत्रिम योनि की तरह होता है जिसे पॉकेट पुस्सी (pocket pussies) या मेल मास्टरबेटर के नाम से भी जाना जाता है। यह एक कोमल ट्यूब होता है जिसमें पेनिस प्रवेश कराने से यह उसमें उत्तेजना (stimulation) पैदा करता है। अंदर से यह एक कैनाल की तरह होता है और आमतौर पर पेनिस को उत्तेजित करने का काम करता है।
निप्पल टॉय - यह एक ऐसा सेक्स टॉय है जो निप्पल को उत्तेजित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसकी सहायता से अलग-अलग कोणों से निप्पल पर दबाव डाला जाता है। यह आमतौर पर रबर का बना होता है इसलिए इसके उपयोग से दर्द नहीं होता है।
वाइब्रेटर - वाइब्रेटर सेक्स टॉय लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है। यह एक ऐसी डिवाइस है जो सेक्स के लिए पूरे शरीर में उत्तेजना पैदा करती है। वाइब्रेटर अलग-अलग आकार और दामों में उपलब्ध है जिसका इस्तेमाल आंतरिक और वाह्य अंगों दोनों को उत्तेजित करने के लिए किया जाता है। पेनिट्रेटिव वाइब्रेटर इसी का एक प्रकार है जो 12 से 18 सेंटीमीटर का होता है और इसकी सहायता से सेक्स करने पर पुरुष के पेनिस जैसा अनुभव होता है।
ग्लास सेक्स टॉय - ग्लास सेक्स टॉय आमतौर पर बोरोसिलिकेट ग्लास से बनाया जाता है और इसका उपयोग करना पूरी तरह से सुरक्षित होता है। इसकी बनावट ऐसी होती है कि इसे दोबारा इस्तेमाल करने पर किसी तरह का इंफेक्शन नहीं होता है और इसे आसानी से साफ भी किया जा सकता है।
एनल टॉय - यह एक ऐसा सेक्स टॉय है जिसे गुदा (Anal) में प्रवेश कराकर सेक्स किया जाता है। यह नीचे की ओर फैला होता है और मलाशय (rectum) को नुकसान नहीं पहुंचाता है और पूरी तरह से सुरक्षित होता है।
| Don't Miss Out on the Latest Updates. Subscribe to Our Newsletter Today! यह एक कृत्रिम उपकरण है जिसका इस्तेमाल पार्टनर के न होने पर भी सेक्स का चरम सुख प्राप्त करने के लिए किया जाता है। इसके साथ ही अपने पार्टनर के साथ सेक्स सम्बन्ध को और मजेदार बनाने के लिए भी इनकी मदद ली जा सकती है। कभी-कभी सिर्फ मास्टरबेशन या हस्तमैथुन से ही ऑर्गेज्म का मजा नहीं आता है, इस स्थिति में चरम सुख का मजा लेने के लिए लोग सेक्स टॉय का सहारा लेते हैं। सेक्स टॉय आजकल बहुत आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन कुछ लोग शर्म के कारण इसे ऑनलाइन खरीदना पसंद करते हैं। पेनिल सेक्स टॉय - यह एक कृत्रिम योनि की तरह होता है जिसे पॉकेट पुस्सी या मेल मास्टरबेटर के नाम से भी जाना जाता है। यह एक कोमल ट्यूब होता है जिसमें पेनिस प्रवेश कराने से यह उसमें उत्तेजना पैदा करता है। अंदर से यह एक कैनाल की तरह होता है और आमतौर पर पेनिस को उत्तेजित करने का काम करता है। निप्पल टॉय - यह एक ऐसा सेक्स टॉय है जो निप्पल को उत्तेजित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसकी सहायता से अलग-अलग कोणों से निप्पल पर दबाव डाला जाता है। यह आमतौर पर रबर का बना होता है इसलिए इसके उपयोग से दर्द नहीं होता है। वाइब्रेटर - वाइब्रेटर सेक्स टॉय लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है। यह एक ऐसी डिवाइस है जो सेक्स के लिए पूरे शरीर में उत्तेजना पैदा करती है। वाइब्रेटर अलग-अलग आकार और दामों में उपलब्ध है जिसका इस्तेमाल आंतरिक और वाह्य अंगों दोनों को उत्तेजित करने के लिए किया जाता है। पेनिट्रेटिव वाइब्रेटर इसी का एक प्रकार है जो बारह से अट्ठारह सेंटीमीटर का होता है और इसकी सहायता से सेक्स करने पर पुरुष के पेनिस जैसा अनुभव होता है। ग्लास सेक्स टॉय - ग्लास सेक्स टॉय आमतौर पर बोरोसिलिकेट ग्लास से बनाया जाता है और इसका उपयोग करना पूरी तरह से सुरक्षित होता है। इसकी बनावट ऐसी होती है कि इसे दोबारा इस्तेमाल करने पर किसी तरह का इंफेक्शन नहीं होता है और इसे आसानी से साफ भी किया जा सकता है। एनल टॉय - यह एक ऐसा सेक्स टॉय है जिसे गुदा में प्रवेश कराकर सेक्स किया जाता है। यह नीचे की ओर फैला होता है और मलाशय को नुकसान नहीं पहुंचाता है और पूरी तरह से सुरक्षित होता है। |
मुट्टम (മുട്ടം) भारत के केरल राज्य के इडुक्कि ज़िले में तोडुपुज़ा तालुका के अंतर्गत एक ग्राम पंचायत है। यह गाँव कोच्चि से 66 किलोमीटर दूर दक्षिण-पूर्व की ओर बसा है। यहां हिंदु, ईसाई और मुस्लीम जमात के लोगों मिल जुल के रहते है। .
13 संबंधोंः तोडुपुज़ा, पंचायत, पंचायती राज, भारत, मलयालम भाषा, हिन्दी, इडुक्कि ज़िला, कण्णूर, कन्याकुमारी, केरल, कोच्चि, कोयंबतूर, अंग्रेज़ी भाषा।
तोडुपुज़ा "तोडुपुज़ा" (थोडुपुझा)(തൊടുപുഴ केरल राज्य में इडुक्की जिले में एक नगरपालिका और व्यावसायिक केंद्र है। यह शहर कोच्चि से 62 किलोमीटर पूर्व दक्षिण में बसा हुआ है। पी.जे. जोसेफ तोडुपुज़ा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से सातवीं बार के लिए निर्वाचित हुए. वह केरल कांग्रेस (एम) पार्टी के अध्यक्ष है। लोकप्रिय फिल्म अभिनेत्री असिन परिवार तोडुपुज़ा से है। मलयालम फिल्म अभिनेता आसिफ अली और निषान्त सागर तोडुपुज़ा से हैं। .
भारत की पंचायती राज प्रणाली में गाँव या छोटे कस्बे के स्तर पर ग्राम पंचायत या ग्राम सभा होती है जो भारत के स्थानीय स्वशासन का प्रमुख अवयव है। सरपंच, ग्राम सभा का चुना हुआ सर्वोच्च प्रतिनिधि होता है। प्राचीन काल से ही भारतवर्ष के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक जीवन में पंचायत का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। सार्वजनिक जीवन का प्रत्येक पहलू इसी के द्वारा संचालित होता था। .
पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम, तालुका और जिला आते हैं। भारत में प्राचीन काल से ही पंचायती राज व्यवस्था आस्तित्व में रही हैं। आधुनिक भारत में प्रथम बार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी गाँव में 2 अक्टूबर 1959 को पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई। .
भारत (आधिकारिक नामः भारत गणराज्य, Republic of India) दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गों और बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायोंः हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने १८वीं और १९वीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। १८५७ के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद १५ अगस्त १९४७ को आज़ादी पाई। १९५० में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को २९ राज्यों और ७ संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद 1991 के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है। ३३ लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधार पर विश्व की तीसरी और मानक मूल्यों के आधार पर विश्व की दसवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। १९९१ के बाज़ार-आधारित सुधारों के बाद भारत विश्व की सबसे तेज़ विकसित होती बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक हो गया है और इसे एक नव-औद्योगिकृत राष्ट्र माना जाता है। परंतु भारत के सामने अभी भी गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य-सेवा और आतंकवाद की चुनौतियां हैं। आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति है। .
मलयालं (മലയാളം, मलयालम्) या कैरली (കൈരളി, कैरलि) भारत के केरल प्रान्त में बोली जाने वाली प्रमुख भाषा है। ये द्रविड़ भाषा-परिवार में आती है। केरल के अलावा ये तमिलनाडु के कन्याकुमारी तथा उत्तर में कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिला, लक्षद्वीप तथा अन्य कई देशों में बसे मलयालियों द्वारा बोली जाती है। मलयालं, भाषा और लिपि के विचार से तमिल भाषा के काफी निकट है। इस पर संस्कृत का प्रभाव ईसा के पूर्व पहली सदी से हुआ है। संस्कृत शब्दों को मलयालम शैली के अनुकूल बनाने के लिए संस्कृत से अवतरित शब्दों को संशोधित किया गया है। अरबों के साथ सदियों से व्यापार संबंध अंग्रेजी तथा पुर्तगाली उपनिवेशवाद का असर भी भाषा पर पड़ा है। .
हिन्दी या भारतीय विश्व की एक प्रमुख भाषा है एवं भारत की राजभाषा है। केंद्रीय स्तर पर दूसरी आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है। यह हिन्दुस्तानी भाषा की एक मानकीकृत रूप है जिसमें संस्कृत के तत्सम तथा तद्भव शब्द का प्रयोग अधिक हैं और अरबी-फ़ारसी शब्द कम हैं। हिन्दी संवैधानिक रूप से भारत की प्रथम राजभाषा और भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। हालांकि, हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है क्योंकि भारत का संविधान में कोई भी भाषा को ऐसा दर्जा नहीं दिया गया था। चीनी के बाद यह विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा भी है। विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार यह विश्व की दस शक्तिशाली भाषाओं में से एक है। हिन्दी और इसकी बोलियाँ सम्पूर्ण भारत के विविध राज्यों में बोली जाती हैं। भारत और अन्य देशों में भी लोग हिन्दी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं। फ़िजी, मॉरिशस, गयाना, सूरीनाम की और नेपाल की जनता भी हिन्दी बोलती है।http://www.ethnologue.com/language/hin 2001 की भारतीय जनगणना में भारत में ४२ करोड़ २० लाख लोगों ने हिन्दी को अपनी मूल भाषा बताया। भारत के बाहर, हिन्दी बोलने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका में 648,983; मॉरीशस में ६,८५,१७०; दक्षिण अफ्रीका में ८,९०,२९२; यमन में २,३२,७६०; युगांडा में १,४७,०००; सिंगापुर में ५,०००; नेपाल में ८ लाख; जर्मनी में ३०,००० हैं। न्यूजीलैंड में हिन्दी चौथी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसके अलावा भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों में १४ करोड़ १० लाख लोगों द्वारा बोली जाने वाली उर्दू, मौखिक रूप से हिन्दी के काफी सामान है। लोगों का एक विशाल बहुमत हिन्दी और उर्दू दोनों को ही समझता है। भारत में हिन्दी, विभिन्न भारतीय राज्यों की १४ आधिकारिक भाषाओं और क्षेत्र की बोलियों का उपयोग करने वाले लगभग १ अरब लोगों में से अधिकांश की दूसरी भाषा है। हिंदी हिंदी बेल्ट का लिंगुआ फ़्रैंका है, और कुछ हद तक पूरे भारत (आमतौर पर एक सरल या पिज्जाइज्ड किस्म जैसे बाजार हिंदुस्तान या हाफ्लोंग हिंदी में)। भाषा विकास क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी हिन्दी प्रेमियों के लिए बड़ी सन्तोषजनक है कि आने वाले समय में विश्वस्तर पर अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व की जो चन्द भाषाएँ होंगी उनमें हिन्दी भी प्रमुख होगी। 'देशी', 'भाखा' (भाषा), 'देशना वचन' (विद्यापति), 'हिन्दवी', 'दक्खिनी', 'रेखता', 'आर्यभाषा' (स्वामी दयानन्द सरस्वती), 'हिन्दुस्तानी', 'खड़ी बोली', 'भारती' आदि हिन्दी के अन्य नाम हैं जो विभिन्न ऐतिहासिक कालखण्डों में एवं विभिन्न सन्दर्भों में प्रयुक्त हुए हैं। .
इदुक्की जिला तथा शहर की स्थिति इदुक्की भारतीय राज्य केरल का एक ज़िला है।.
कन्नूर केरल के उत्तरी सिर में स्थित एक छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत तटवर्ती नगर है। शहरी भागदौड़ से परेशान हो चुके पर्यटकों को कन्नूर काफी रास आता है। प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण इस नगर के पश्चिमी तट पर फैले रेत को लक्षद्वीप सागर चूमता है और तट के दूसरी तरफ ऊंचे-ऊंचे ताड़ के पेड़ वातावरण को और मनोरम बनाते हैं। सांस्कृतिक विरासत और कला से संपन्न इस नगर से अनेक किस्से जुड़े हुए हैं। माना जाता है कि राजा सोलोमन का जहाज मंदिर बनवाने हेतु लकड़ियां एकत्रित करने यहीं आया था। यहां की थय्यम नृत्य परंपरा विश्व प्रसिद्ध है। अतीत की याद दिलाती यहां की अनेक इमारतें जैसे मस्जिद, मंदिर और चर्च अपनी कहानी स्वयं कहते प्रतीत होते हैं। .
कन्या कुमारी तमिलनाडु प्रान्त के सुदूर दक्षिण तट पर बसा एक शहर है। यह हिन्द महासागर, बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर का संगम स्थल है, जहां भिन्न सागर अपने विभिन्न रंगो से मनोरम छटा बिखेरते हैं। भारत के सबसे दक्षिण छोर पर बसा कन्याकुमारी वर्षो से कला, संस्कृति, सभ्यता का प्रतीक रहा है। भारत के पर्यटक स्थल के रूप में भी इस स्थान का अपना ही महत्च है। दूर-दूर फैले समुद्र के विशाल लहरों के बीच यहां का सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा बेहद आकर्षक लगता हैं। समुद्र बीच पर फैले रंग बिरंगी रेत इसकी सुंदरता में चार चांद लगा देता है। .
केरल (मलयालमः കേരളം, केरळम्) भारत का एक प्रान्त है। इसकी राजधानी तिरुवनन्तपुरम (त्रिवेन्द्रम) है। मलयालम (മലയാളം, मलयाळम्) यहां की मुख्य भाषा है। हिन्दुओं तथा मुसलमानों के अलावा यहां ईसाई भी बड़ी संख्या में रहते हैं। भारत की दक्षिण-पश्चिमी सीमा पर अरब सागर और सह्याद्रि पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य एक खूबसूरत भूभाग स्थित है, जिसे केरल के नाम से जाना जाता है। इस राज्य का क्षेत्रफल 38863 वर्ग किलोमीटर है और यहाँ मलयालम भाषा बोली जाती है। अपनी संस्कृति और भाषा-वैशिष्ट्य के कारण पहचाने जाने वाले भारत के दक्षिण में स्थित चार राज्यों में केरल प्रमुख स्थान रखता है। इसके प्रमुख पड़ोसी राज्य तमिलनाडु और कर्नाटक हैं। पुदुच्चेरी (पांडिचेरि) राज्य का मय्यष़ि (माहि) नाम से जाता जाने वाला भूभाग भी केरल राज्य के अन्तर्गत स्थित है। अरब सागर में स्थित केन्द्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप का भी भाषा और संस्कृति की दृष्टि से केरल के साथ अटूट संबन्ध है। स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व केरल में राजाओं की रियासतें थीं। जुलाई 1949 में तिरुवितांकूर और कोच्चिन रियासतों को जोड़कर 'तिरुकोच्चि' राज्य का गठन किया गया। उस समय मलाबार प्रदेश मद्रास राज्य (वर्तमान तमिलनाडु) का एक जिला मात्र था। नवंबर 1956 में तिरुकोच्चि के साथ मलाबार को भी जोड़ा गया और इस तरह वर्तमान केरल की स्थापना हुई। इस प्रकार 'ऐक्य केरलम' के गठन के द्वारा इस भूभाग की जनता की दीर्घकालीन अभिलाषा पूर्ण हुई। * केरल में शिशुओं की मृत्यु दर भारत के राज्यों में सबसे कम है और स्त्रियों की संख्या पुरुषों से अधिक है (2001 की जनगणना के आधार पर)।.
कोच्चि, जिसे कोचीन भी कहा जाता था, लक्षद्वीप सागर के दक्षिण-पश्चिम तटरेखा पर स्थित एक बड़ा बंदरगाह शहर है, जो भारतीय राज्य केरल के एर्नाकुलम जिले का एक भाग है। कोच्चि को काफ़ी समय से प्रायः एर्नाकुलम भी कहा जाता है, जिसका अर्थ नगर का मुख्यभूमि भाग इंगित करता है। कोच्चि नगर निगम के अधीनस्थ (जनसंख्या ६,०१,५७४) ये राज्य का दूसरा सर्वाधिक जनसंख्या वाला शहर है। ये कोच्चि महानगरीय क्षेत्र के विस्तार सहित (जनसंख्या २१ लाख) केरल राज्य का सबसे बड़ा शहरी आबादी क्षेत्र है। कोच्चि नगर ग्रेटर कोच्चि क्षेत्र का ही एक भाग है, और इसे भारत सरकार द्वारा द्वितीय दर्जे वाला शहर वर्गीकृत किया गया है। नगर की देख-रेख व अनुरक्षण दायित्त्व १९६७ में स्थापित हुआ कोच्चि नगर निगम देखता है। इसके अलावा पूरे क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का भार ग्रेटर कोचीन डवलपमेंट अथॉरिटी (GCDA) एवं गोश्री आईलैण्ड डवलपमेंट अथॉरिटी (GIDA) पर है। कोच्चि १४वीं शताब्दी से ही भारत की पश्चिमी तटरेखा का मसालों का व्यापार केन्द्र रहा है और इसे अरब सागर की रानी के नाम से जाना जाता था। १५०३ में यहां पुर्तगालियों का आधिपत्य हुआ और यह उपनिवेशीय भारत की प्रथम यूरोपीय कालोनी बना और १५३० में गोवा के चुने जाने तक ये पुर्तगालियों का यहां का प्रधान शक्ति केन्द्र रहा था।क्कालांतर में कोच्चि राज्य के रजवाड़े में परिवर्तित होने के क्साथ ही ये डच एवं ब्रिटिश के नियन्त्रण में आ गया। आज केरल में कुल अन्तर्देशीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटकों के आगमन संख्या में प्रथम स्थान बनाये हुए है। नीलसन कम्पनी के आउटलुक ट्रैवलर पत्रिका के लिये किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार कोच्चि आज भी भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटक आकर्षणों में छठवें स्थान पर बना हुआ है। मैकिन्से ग्लोबल संस्थान द्वारा किये गए एक शोध के अनुसार, कोच्चि २०२५ तक के विश्व के सकल घरेलु उत्पाद में ५०% योगदान देने वाले ४४० उभरते हुए शहरों में से एक था। भारतीय नौसेना के दक्षिणी नौसैनिक कमान का केन्द्र तथा भारतीय तटरक्षक का राज्य मुख्यालय भी इसी शहर में स्थित है, जिसमें एयर स्क्वैड्रन ७४७ नाम की एक वायु टुकड़ी भी जुड़ी है। नगर के वाणिज्यिक सागरीय गतिविधियों से सम्बन्धित सुविधाओं में कोच्चि बंदरगाह, अन्तर्राष्ट्रीय कण्टेनर ट्रांस्शिपमेण्ट टर्मिनल, कोचीन शिपयार्ड, कोच्चि रिफ़ाइनरीज़ का अपतटीय (ऑफ़शोर) सिंगल बॉय मूरिंग (एस.पी.एम), एवं कोच्चि मैरीना भी हैं। कोच्चि में ही कोचीन विनिमय एक्स्चेंज, इंटरनेशनल पॅपर एक्स्चेंज भी स्थित हैं, तथा हिन्दुस्तान मशीन टूल्स (एच.एम.टी), सायबर सिटी, एवं किन्फ़्रा हाई-टेक पाक एवं बड़ी रासायनिक निर्माणियां जैसे फ़र्टिलाइज़र्स एण्ड कैमिकल्स त्रावणकौर (फ़ैक्ट), त्रावणकौर कोचीन कैमिकल्स (टीसीसी), इण्डियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड (आई.आर.ई.एल), हिन्दुस्तान ऑर्गैनिक कैमिकल्स लिमिटेड (एच.ओ.सी.एल) कोच्चि रिफ़ाइनरीज़ के साथ साथ ही कई विद्युत कंपनियां जैसे टी.ई.एल.के एवं औद्योगिक पार्क भी बने हैं जिनमें कोचीन एपेशल इकॉनोमिक ज़ोन एवं इन्फ़ोपार्क कोच्चि प्रमुख हैं। कोच्चि में ही प्रमुख राज्य न्यायपीठ केरल एवं लक्षद्वीप उच्च न्यायालय एवं कोचीन युनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी भी स्थापित हैं। इसी नगर में केरल का नेशनल लॉ स्कूल, नेशनल युनिवर्सिटी ऑफ़ एडवांस्ड लीगल स्टडीज़ को भी स्थान मिला है। .
कोयंबतूर या कोयंबटूर तमिलनाडु प्रान्त का एक शहर है। कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा पर बसा शहर मुख्य रूप से एक औद्योगिक नगरी है। शहर रेल और सड़क और वायु मार्ग से अच्छी तरह पूरे भारत से जुड़ा है। कोयंबटूर एक महत्वपूर्ण औद्योगिक शहर है। दक्षिण भारत के मैनचेस्टर के नाम से प्रसिद्ध कोयंबटूर एक प्रमुख कपड़ा उत्पादन केंद्र है। नीलगिरी की तराई में स्थित यह शहर पूरे साल सुहावने मौसम का अहसास कराता है। दक्षिण से नीलगिरी की यात्रा करने वाले पर्यटक कोयंबटूर को आधार शिविर की तरह प्रयोग करते हैं। कपड़ा उत्पादन कारखानों के अतिरिक्त भी यहां बहुत कुछ है जहां सैलानी घूम-फिर सकते हैं। यहां का जैविक उद्यान, कृषि विश्वविद्यालय संग्रहालय और वीओसी पार्क विशेष रूप से पर्यटकों को आकर्षित करता है। कोयंबटूर में बहुत सारे मंदिर भी हैं जो इस शहर के महत्व को और भी बढ़ाते हैं। .
अंग्रेज़ी भाषा (अंग्रेज़ीः English हिन्दी उच्चारणः इंग्लिश) हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार में आती है और इस दृष्टि से हिंदी, उर्दू, फ़ारसी आदि के साथ इसका दूर का संबंध बनता है। ये इस परिवार की जर्मनिक शाखा में रखी जाती है। इसे दुनिया की सर्वप्रथम अन्तरराष्ट्रीय भाषा माना जाता है। ये दुनिया के कई देशों की मुख्य राजभाषा है और आज के दौर में कई देशों में (मुख्यतः भूतपूर्व ब्रिटिश उपनिवेशों में) विज्ञान, कम्प्यूटर, साहित्य, राजनीति और उच्च शिक्षा की भी मुख्य भाषा है। अंग्रेज़ी भाषा रोमन लिपि में लिखी जाती है। यह एक पश्चिम जर्मेनिक भाषा है जिसकी उत्पत्ति एंग्लो-सेक्सन इंग्लैंड में हुई थी। संयुक्त राज्य अमेरिका के 19 वीं शताब्दी के पूर्वार्ध और ब्रिटिश साम्राज्य के 18 वीं, 19 वीं और 20 वीं शताब्दी के सैन्य, वैज्ञानिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव के परिणाम स्वरूप यह दुनिया के कई भागों में सामान्य (बोलचाल की) भाषा बन गई है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और राष्ट्रमंडल देशों में बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल एक द्वितीय भाषा और अधिकारिक भाषा के रूप में होता है। ऐतिहासिक दृष्टि से, अंग्रेजी भाषा की उत्पत्ति ५वीं शताब्दी की शुरुआत से इंग्लैंड में बसने वाले एंग्लो-सेक्सन लोगों द्वारा लायी गयी अनेक बोलियों, जिन्हें अब पुरानी अंग्रेजी कहा जाता है, से हुई है। वाइकिंग हमलावरों की प्राचीन नोर्स भाषा का अंग्रेजी भाषा पर गहरा प्रभाव पड़ा है। नॉर्मन विजय के बाद पुरानी अंग्रेजी का विकास मध्य अंग्रेजी के रूप में हुआ, इसके लिए नॉर्मन शब्दावली और वर्तनी के नियमों का भारी मात्र में उपयोग हुआ। वहां से आधुनिक अंग्रेजी का विकास हुआ और अभी भी इसमें अनेक भाषाओँ से विदेशी शब्दों को अपनाने और साथ ही साथ नए शब्दों को गढ़ने की प्रक्रिया निरंतर जारी है। एक बड़ी मात्र में अंग्रेजी के शब्दों, खासकर तकनीकी शब्दों, का गठन प्राचीन ग्रीक और लैटिन की जड़ों पर आधारित है। .
| मुट्टम भारत के केरल राज्य के इडुक्कि ज़िले में तोडुपुज़ा तालुका के अंतर्गत एक ग्राम पंचायत है। यह गाँव कोच्चि से छयासठ किलोग्राममीटर दूर दक्षिण-पूर्व की ओर बसा है। यहां हिंदु, ईसाई और मुस्लीम जमात के लोगों मिल जुल के रहते है। . तेरह संबंधोंः तोडुपुज़ा, पंचायत, पंचायती राज, भारत, मलयालम भाषा, हिन्दी, इडुक्कि ज़िला, कण्णूर, कन्याकुमारी, केरल, कोच्चि, कोयंबतूर, अंग्रेज़ी भाषा। तोडुपुज़ा "तोडुपुज़ा" पार्टी के अध्यक्ष है। लोकप्रिय फिल्म अभिनेत्री असिन परिवार तोडुपुज़ा से है। मलयालम फिल्म अभिनेता आसिफ अली और निषान्त सागर तोडुपुज़ा से हैं। . भारत की पंचायती राज प्रणाली में गाँव या छोटे कस्बे के स्तर पर ग्राम पंचायत या ग्राम सभा होती है जो भारत के स्थानीय स्वशासन का प्रमुख अवयव है। सरपंच, ग्राम सभा का चुना हुआ सर्वोच्च प्रतिनिधि होता है। प्राचीन काल से ही भारतवर्ष के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक जीवन में पंचायत का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। सार्वजनिक जीवन का प्रत्येक पहलू इसी के द्वारा संचालित होता था। . पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम, तालुका और जिला आते हैं। भारत में प्राचीन काल से ही पंचायती राज व्यवस्था आस्तित्व में रही हैं। आधुनिक भारत में प्रथम बार तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी गाँव में दो अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ उनसठ को पंचायती राज व्यवस्था लागू की गई। . भारत दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गों और बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायोंः हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने अट्ठारहवीं और उन्नीसवीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद पंद्रह अगस्त एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को आज़ादी पाई। एक हज़ार नौ सौ पचास में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को उनतीस राज्यों और सात संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है। तैंतीस लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधार पर विश्व की तीसरी और मानक मूल्यों के आधार पर विश्व की दसवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के बाज़ार-आधारित सुधारों के बाद भारत विश्व की सबसे तेज़ विकसित होती बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक हो गया है और इसे एक नव-औद्योगिकृत राष्ट्र माना जाता है। परंतु भारत के सामने अभी भी गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य-सेवा और आतंकवाद की चुनौतियां हैं। आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति है। . मलयालं या कैरली भारत के केरल प्रान्त में बोली जाने वाली प्रमुख भाषा है। ये द्रविड़ भाषा-परिवार में आती है। केरल के अलावा ये तमिलनाडु के कन्याकुमारी तथा उत्तर में कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिला, लक्षद्वीप तथा अन्य कई देशों में बसे मलयालियों द्वारा बोली जाती है। मलयालं, भाषा और लिपि के विचार से तमिल भाषा के काफी निकट है। इस पर संस्कृत का प्रभाव ईसा के पूर्व पहली सदी से हुआ है। संस्कृत शब्दों को मलयालम शैली के अनुकूल बनाने के लिए संस्कृत से अवतरित शब्दों को संशोधित किया गया है। अरबों के साथ सदियों से व्यापार संबंध अंग्रेजी तथा पुर्तगाली उपनिवेशवाद का असर भी भाषा पर पड़ा है। . हिन्दी या भारतीय विश्व की एक प्रमुख भाषा है एवं भारत की राजभाषा है। केंद्रीय स्तर पर दूसरी आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है। यह हिन्दुस्तानी भाषा की एक मानकीकृत रूप है जिसमें संस्कृत के तत्सम तथा तद्भव शब्द का प्रयोग अधिक हैं और अरबी-फ़ारसी शब्द कम हैं। हिन्दी संवैधानिक रूप से भारत की प्रथम राजभाषा और भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। हालांकि, हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है क्योंकि भारत का संविधान में कोई भी भाषा को ऐसा दर्जा नहीं दिया गया था। चीनी के बाद यह विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा भी है। विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार यह विश्व की दस शक्तिशाली भाषाओं में से एक है। हिन्दी और इसकी बोलियाँ सम्पूर्ण भारत के विविध राज्यों में बोली जाती हैं। भारत और अन्य देशों में भी लोग हिन्दी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं। फ़िजी, मॉरिशस, गयाना, सूरीनाम की और नेपाल की जनता भी हिन्दी बोलती है।http://www.ethnologue.com/language/hin दो हज़ार एक की भारतीय जनगणना में भारत में बयालीस करोड़ बीस लाख लोगों ने हिन्दी को अपनी मूल भाषा बताया। भारत के बाहर, हिन्दी बोलने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका में छः सौ अड़तालीस,नौ सौ तिरासी; मॉरीशस में छः,पचासी,एक सौ सत्तर; दक्षिण अफ्रीका में आठ,नब्बे,दो सौ बानवे; यमन में दो,बत्तीस,सात सौ साठ; युगांडा में एक,सैंतालीस,शून्य; सिंगापुर में पाँच,शून्य; नेपाल में आठ लाख; जर्मनी में तीस,शून्य हैं। न्यूजीलैंड में हिन्दी चौथी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसके अलावा भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों में चौदह करोड़ दस लाख लोगों द्वारा बोली जाने वाली उर्दू, मौखिक रूप से हिन्दी के काफी सामान है। लोगों का एक विशाल बहुमत हिन्दी और उर्दू दोनों को ही समझता है। भारत में हिन्दी, विभिन्न भारतीय राज्यों की चौदह आधिकारिक भाषाओं और क्षेत्र की बोलियों का उपयोग करने वाले लगभग एक अरब लोगों में से अधिकांश की दूसरी भाषा है। हिंदी हिंदी बेल्ट का लिंगुआ फ़्रैंका है, और कुछ हद तक पूरे भारत । भाषा विकास क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी हिन्दी प्रेमियों के लिए बड़ी सन्तोषजनक है कि आने वाले समय में विश्वस्तर पर अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व की जो चन्द भाषाएँ होंगी उनमें हिन्दी भी प्रमुख होगी। 'देशी', 'भाखा' , 'देशना वचन' , 'हिन्दवी', 'दक्खिनी', 'रेखता', 'आर्यभाषा' , 'हिन्दुस्तानी', 'खड़ी बोली', 'भारती' आदि हिन्दी के अन्य नाम हैं जो विभिन्न ऐतिहासिक कालखण्डों में एवं विभिन्न सन्दर्भों में प्रयुक्त हुए हैं। . इदुक्की जिला तथा शहर की स्थिति इदुक्की भारतीय राज्य केरल का एक ज़िला है।. कन्नूर केरल के उत्तरी सिर में स्थित एक छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत तटवर्ती नगर है। शहरी भागदौड़ से परेशान हो चुके पर्यटकों को कन्नूर काफी रास आता है। प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण इस नगर के पश्चिमी तट पर फैले रेत को लक्षद्वीप सागर चूमता है और तट के दूसरी तरफ ऊंचे-ऊंचे ताड़ के पेड़ वातावरण को और मनोरम बनाते हैं। सांस्कृतिक विरासत और कला से संपन्न इस नगर से अनेक किस्से जुड़े हुए हैं। माना जाता है कि राजा सोलोमन का जहाज मंदिर बनवाने हेतु लकड़ियां एकत्रित करने यहीं आया था। यहां की थय्यम नृत्य परंपरा विश्व प्रसिद्ध है। अतीत की याद दिलाती यहां की अनेक इमारतें जैसे मस्जिद, मंदिर और चर्च अपनी कहानी स्वयं कहते प्रतीत होते हैं। . कन्या कुमारी तमिलनाडु प्रान्त के सुदूर दक्षिण तट पर बसा एक शहर है। यह हिन्द महासागर, बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर का संगम स्थल है, जहां भिन्न सागर अपने विभिन्न रंगो से मनोरम छटा बिखेरते हैं। भारत के सबसे दक्षिण छोर पर बसा कन्याकुमारी वर्षो से कला, संस्कृति, सभ्यता का प्रतीक रहा है। भारत के पर्यटक स्थल के रूप में भी इस स्थान का अपना ही महत्च है। दूर-दूर फैले समुद्र के विशाल लहरों के बीच यहां का सूर्योदय और सूर्यास्त का नजारा बेहद आकर्षक लगता हैं। समुद्र बीच पर फैले रंग बिरंगी रेत इसकी सुंदरता में चार चांद लगा देता है। . केरल भारत का एक प्रान्त है। इसकी राजधानी तिरुवनन्तपुरम है। मलयालम यहां की मुख्य भाषा है। हिन्दुओं तथा मुसलमानों के अलावा यहां ईसाई भी बड़ी संख्या में रहते हैं। भारत की दक्षिण-पश्चिमी सीमा पर अरब सागर और सह्याद्रि पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य एक खूबसूरत भूभाग स्थित है, जिसे केरल के नाम से जाना जाता है। इस राज्य का क्षेत्रफल अड़तीस हज़ार आठ सौ तिरेसठ वर्ग किलोमीटर है और यहाँ मलयालम भाषा बोली जाती है। अपनी संस्कृति और भाषा-वैशिष्ट्य के कारण पहचाने जाने वाले भारत के दक्षिण में स्थित चार राज्यों में केरल प्रमुख स्थान रखता है। इसके प्रमुख पड़ोसी राज्य तमिलनाडु और कर्नाटक हैं। पुदुच्चेरी राज्य का मय्यष़ि नाम से जाता जाने वाला भूभाग भी केरल राज्य के अन्तर्गत स्थित है। अरब सागर में स्थित केन्द्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप का भी भाषा और संस्कृति की दृष्टि से केरल के साथ अटूट संबन्ध है। स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व केरल में राजाओं की रियासतें थीं। जुलाई एक हज़ार नौ सौ उनचास में तिरुवितांकूर और कोच्चिन रियासतों को जोड़कर 'तिरुकोच्चि' राज्य का गठन किया गया। उस समय मलाबार प्रदेश मद्रास राज्य का एक जिला मात्र था। नवंबर एक हज़ार नौ सौ छप्पन में तिरुकोच्चि के साथ मलाबार को भी जोड़ा गया और इस तरह वर्तमान केरल की स्थापना हुई। इस प्रकार 'ऐक्य केरलम' के गठन के द्वारा इस भूभाग की जनता की दीर्घकालीन अभिलाषा पूर्ण हुई। * केरल में शिशुओं की मृत्यु दर भारत के राज्यों में सबसे कम है और स्त्रियों की संख्या पुरुषों से अधिक है ।. कोच्चि, जिसे कोचीन भी कहा जाता था, लक्षद्वीप सागर के दक्षिण-पश्चिम तटरेखा पर स्थित एक बड़ा बंदरगाह शहर है, जो भारतीय राज्य केरल के एर्नाकुलम जिले का एक भाग है। कोच्चि को काफ़ी समय से प्रायः एर्नाकुलम भी कहा जाता है, जिसका अर्थ नगर का मुख्यभूमि भाग इंगित करता है। कोच्चि नगर निगम के अधीनस्थ ये राज्य का दूसरा सर्वाधिक जनसंख्या वाला शहर है। ये कोच्चि महानगरीय क्षेत्र के विस्तार सहित केरल राज्य का सबसे बड़ा शहरी आबादी क्षेत्र है। कोच्चि नगर ग्रेटर कोच्चि क्षेत्र का ही एक भाग है, और इसे भारत सरकार द्वारा द्वितीय दर्जे वाला शहर वर्गीकृत किया गया है। नगर की देख-रेख व अनुरक्षण दायित्त्व एक हज़ार नौ सौ सरसठ में स्थापित हुआ कोच्चि नगर निगम देखता है। इसके अलावा पूरे क्षेत्र के सर्वांगीण विकास का भार ग्रेटर कोचीन डवलपमेंट अथॉरिटी एवं गोश्री आईलैण्ड डवलपमेंट अथॉरिटी पर है। कोच्चि चौदहवीं शताब्दी से ही भारत की पश्चिमी तटरेखा का मसालों का व्यापार केन्द्र रहा है और इसे अरब सागर की रानी के नाम से जाना जाता था। एक हज़ार पाँच सौ तीन में यहां पुर्तगालियों का आधिपत्य हुआ और यह उपनिवेशीय भारत की प्रथम यूरोपीय कालोनी बना और एक हज़ार पाँच सौ तीस में गोवा के चुने जाने तक ये पुर्तगालियों का यहां का प्रधान शक्ति केन्द्र रहा था।क्कालांतर में कोच्चि राज्य के रजवाड़े में परिवर्तित होने के क्साथ ही ये डच एवं ब्रिटिश के नियन्त्रण में आ गया। आज केरल में कुल अन्तर्देशीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटकों के आगमन संख्या में प्रथम स्थान बनाये हुए है। नीलसन कम्पनी के आउटलुक ट्रैवलर पत्रिका के लिये किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार कोच्चि आज भी भारत के सर्वश्रेष्ठ पर्यटक आकर्षणों में छठवें स्थान पर बना हुआ है। मैकिन्से ग्लोबल संस्थान द्वारा किये गए एक शोध के अनुसार, कोच्चि दो हज़ार पच्चीस तक के विश्व के सकल घरेलु उत्पाद में पचास% योगदान देने वाले चार सौ चालीस उभरते हुए शहरों में से एक था। भारतीय नौसेना के दक्षिणी नौसैनिक कमान का केन्द्र तथा भारतीय तटरक्षक का राज्य मुख्यालय भी इसी शहर में स्थित है, जिसमें एयर स्क्वैड्रन सात सौ सैंतालीस नाम की एक वायु टुकड़ी भी जुड़ी है। नगर के वाणिज्यिक सागरीय गतिविधियों से सम्बन्धित सुविधाओं में कोच्चि बंदरगाह, अन्तर्राष्ट्रीय कण्टेनर ट्रांस्शिपमेण्ट टर्मिनल, कोचीन शिपयार्ड, कोच्चि रिफ़ाइनरीज़ का अपतटीय सिंगल बॉय मूरिंग , एवं कोच्चि मैरीना भी हैं। कोच्चि में ही कोचीन विनिमय एक्स्चेंज, इंटरनेशनल पॅपर एक्स्चेंज भी स्थित हैं, तथा हिन्दुस्तान मशीन टूल्स , सायबर सिटी, एवं किन्फ़्रा हाई-टेक पाक एवं बड़ी रासायनिक निर्माणियां जैसे फ़र्टिलाइज़र्स एण्ड कैमिकल्स त्रावणकौर , त्रावणकौर कोचीन कैमिकल्स , इण्डियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड , हिन्दुस्तान ऑर्गैनिक कैमिकल्स लिमिटेड कोच्चि रिफ़ाइनरीज़ के साथ साथ ही कई विद्युत कंपनियां जैसे टी.ई.एल.के एवं औद्योगिक पार्क भी बने हैं जिनमें कोचीन एपेशल इकॉनोमिक ज़ोन एवं इन्फ़ोपार्क कोच्चि प्रमुख हैं। कोच्चि में ही प्रमुख राज्य न्यायपीठ केरल एवं लक्षद्वीप उच्च न्यायालय एवं कोचीन युनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी भी स्थापित हैं। इसी नगर में केरल का नेशनल लॉ स्कूल, नेशनल युनिवर्सिटी ऑफ़ एडवांस्ड लीगल स्टडीज़ को भी स्थान मिला है। . कोयंबतूर या कोयंबटूर तमिलनाडु प्रान्त का एक शहर है। कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा पर बसा शहर मुख्य रूप से एक औद्योगिक नगरी है। शहर रेल और सड़क और वायु मार्ग से अच्छी तरह पूरे भारत से जुड़ा है। कोयंबटूर एक महत्वपूर्ण औद्योगिक शहर है। दक्षिण भारत के मैनचेस्टर के नाम से प्रसिद्ध कोयंबटूर एक प्रमुख कपड़ा उत्पादन केंद्र है। नीलगिरी की तराई में स्थित यह शहर पूरे साल सुहावने मौसम का अहसास कराता है। दक्षिण से नीलगिरी की यात्रा करने वाले पर्यटक कोयंबटूर को आधार शिविर की तरह प्रयोग करते हैं। कपड़ा उत्पादन कारखानों के अतिरिक्त भी यहां बहुत कुछ है जहां सैलानी घूम-फिर सकते हैं। यहां का जैविक उद्यान, कृषि विश्वविद्यालय संग्रहालय और वीओसी पार्क विशेष रूप से पर्यटकों को आकर्षित करता है। कोयंबटूर में बहुत सारे मंदिर भी हैं जो इस शहर के महत्व को और भी बढ़ाते हैं। . अंग्रेज़ी भाषा हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार में आती है और इस दृष्टि से हिंदी, उर्दू, फ़ारसी आदि के साथ इसका दूर का संबंध बनता है। ये इस परिवार की जर्मनिक शाखा में रखी जाती है। इसे दुनिया की सर्वप्रथम अन्तरराष्ट्रीय भाषा माना जाता है। ये दुनिया के कई देशों की मुख्य राजभाषा है और आज के दौर में कई देशों में विज्ञान, कम्प्यूटर, साहित्य, राजनीति और उच्च शिक्षा की भी मुख्य भाषा है। अंग्रेज़ी भाषा रोमन लिपि में लिखी जाती है। यह एक पश्चिम जर्मेनिक भाषा है जिसकी उत्पत्ति एंग्लो-सेक्सन इंग्लैंड में हुई थी। संयुक्त राज्य अमेरिका के उन्नीस वीं शताब्दी के पूर्वार्ध और ब्रिटिश साम्राज्य के अट्ठारह वीं, उन्नीस वीं और बीस वीं शताब्दी के सैन्य, वैज्ञानिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव के परिणाम स्वरूप यह दुनिया के कई भागों में सामान्य भाषा बन गई है। कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और राष्ट्रमंडल देशों में बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल एक द्वितीय भाषा और अधिकारिक भाषा के रूप में होता है। ऐतिहासिक दृष्टि से, अंग्रेजी भाषा की उत्पत्ति पाँचवीं शताब्दी की शुरुआत से इंग्लैंड में बसने वाले एंग्लो-सेक्सन लोगों द्वारा लायी गयी अनेक बोलियों, जिन्हें अब पुरानी अंग्रेजी कहा जाता है, से हुई है। वाइकिंग हमलावरों की प्राचीन नोर्स भाषा का अंग्रेजी भाषा पर गहरा प्रभाव पड़ा है। नॉर्मन विजय के बाद पुरानी अंग्रेजी का विकास मध्य अंग्रेजी के रूप में हुआ, इसके लिए नॉर्मन शब्दावली और वर्तनी के नियमों का भारी मात्र में उपयोग हुआ। वहां से आधुनिक अंग्रेजी का विकास हुआ और अभी भी इसमें अनेक भाषाओँ से विदेशी शब्दों को अपनाने और साथ ही साथ नए शब्दों को गढ़ने की प्रक्रिया निरंतर जारी है। एक बड़ी मात्र में अंग्रेजी के शब्दों, खासकर तकनीकी शब्दों, का गठन प्राचीन ग्रीक और लैटिन की जड़ों पर आधारित है। . |
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि बैठक के दौरान इन संगठनों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी लाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने आगे कहा, यह तय किया गया था कि जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इन्सानियत फाउंडेशन को आंतरिक मंत्रालय द्वारा अभियोजित संगठनों के रूप में अधिसूचित किया जाएगा।
इससे पहले, दोनों संगठनों को आंतरिक मंत्रालय की निगरानी सूची में रखा गया था। बता दें कि इन संगठनों पहले भी प्रतिबंध लग चुके हैं, लेकिन बार-बार उन्हें छूट दे दी जाती है।
इस बैठक से पूर्व उन्होंने सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा के साथ मुलाकात की, जिसमें उन्होंने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की। इसके बाद एनएससी की बैठक में बाजवा, खुफिया एजेंसियों के प्रमुख, सुरक्षा अधिकारी और वित्त, रक्षा, विदेशी मामलों और आंतरिक मामलों के संघीय और राज्य मंत्रियों ने भाग लिया।
प्रधानमंत्री इमरान खान ने सेना से कहा कि वह भारत द्वारा की गई किसी भी कार्रवाई का निर्णायक रूप से जवाब दें। एनएससी की बैठक की अध्यक्षता के दौरान इमरान ने यह बात कही। एनएससी ने बैठक के बाद बयान जारी कर यह जानकारी दी।
| पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि बैठक के दौरान इन संगठनों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी लाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने आगे कहा, यह तय किया गया था कि जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इन्सानियत फाउंडेशन को आंतरिक मंत्रालय द्वारा अभियोजित संगठनों के रूप में अधिसूचित किया जाएगा। इससे पहले, दोनों संगठनों को आंतरिक मंत्रालय की निगरानी सूची में रखा गया था। बता दें कि इन संगठनों पहले भी प्रतिबंध लग चुके हैं, लेकिन बार-बार उन्हें छूट दे दी जाती है। इस बैठक से पूर्व उन्होंने सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा के साथ मुलाकात की, जिसमें उन्होंने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की। इसके बाद एनएससी की बैठक में बाजवा, खुफिया एजेंसियों के प्रमुख, सुरक्षा अधिकारी और वित्त, रक्षा, विदेशी मामलों और आंतरिक मामलों के संघीय और राज्य मंत्रियों ने भाग लिया। प्रधानमंत्री इमरान खान ने सेना से कहा कि वह भारत द्वारा की गई किसी भी कार्रवाई का निर्णायक रूप से जवाब दें। एनएससी की बैठक की अध्यक्षता के दौरान इमरान ने यह बात कही। एनएससी ने बैठक के बाद बयान जारी कर यह जानकारी दी। |
मौजूदा पटरियों पर गति बढ़ाने के लिए इन ट्रेनों के डिजाइन में सुधार की योजना पर रेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि भारत को 2025-26 तक टिल्टिंग तकनीक वाली ट्रेनों का पहला सेट मिल जाएगा। पहले से ही स्वीकृत 475 में से लगभग 100 वंदे भारत ट्रेनों में इस तकनीक का यूज होगा। इससे ट्रेनों को उच्च गति पर मोड़ने में मदद मिलेगी।
हाल ही में वैष्णव ने कहा था कि अगले तीन साल में देश में 475 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें पटरियों पर दौड़ने लगेंगी। उन्होंने साथ ही कहा कि देश की पहली बुलेट ट्रेन (Bullet Train) 2026 तक शुरू हो जाएगी। अभी देश में पांच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं। इसका आगाज 2019 में नई दिल्ली और वाराणसी के बीच शुरू हुई वंदे भारत से हुआ था। हाल में नई पीढ़ी की ऐसी तीन ट्रेनें शुरू की गई हैं। इन ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 180 किमी प्रति घंटे है। लेकिन फिलहाल इसे 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जा रहा है। पहली बुलेट ट्रेन परियोजना गांधीनगर और मुंबई के बीच बनाई जा रही है। बुलेट ट्रेन की रफ्तार 320 किमी प्रति घंटे होगी।
| मौजूदा पटरियों पर गति बढ़ाने के लिए इन ट्रेनों के डिजाइन में सुधार की योजना पर रेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि भारत को दो हज़ार पच्चीस-छब्बीस तक टिल्टिंग तकनीक वाली ट्रेनों का पहला सेट मिल जाएगा। पहले से ही स्वीकृत चार सौ पचहत्तर में से लगभग एक सौ वंदे भारत ट्रेनों में इस तकनीक का यूज होगा। इससे ट्रेनों को उच्च गति पर मोड़ने में मदद मिलेगी। हाल ही में वैष्णव ने कहा था कि अगले तीन साल में देश में चार सौ पचहत्तर वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें पटरियों पर दौड़ने लगेंगी। उन्होंने साथ ही कहा कि देश की पहली बुलेट ट्रेन दो हज़ार छब्बीस तक शुरू हो जाएगी। अभी देश में पांच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं। इसका आगाज दो हज़ार उन्नीस में नई दिल्ली और वाराणसी के बीच शुरू हुई वंदे भारत से हुआ था। हाल में नई पीढ़ी की ऐसी तीन ट्रेनें शुरू की गई हैं। इन ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार एक सौ अस्सी किमी प्रति घंटे है। लेकिन फिलहाल इसे एक सौ तीस किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जा रहा है। पहली बुलेट ट्रेन परियोजना गांधीनगर और मुंबई के बीच बनाई जा रही है। बुलेट ट्रेन की रफ्तार तीन सौ बीस किमी प्रति घंटे होगी। |
Manoj Bajpayee (Photo Credit: Social Media)
नई दिल्ली :
मनोज बाजपेयी (Manoj Bajpayee) एक शानदार एक्टर हैं. वो अपनी एक्टिंग के चलते आज हर एक दिल में राज करते हैं. इन दिनों एक्टर अपनी फिल्म 'सिर्फ एक बंदा काफी है' की सफलता को एंजॉय कर रहे हैं. लेकिन आज उनके खबरों में आने की वजह कुछ और है. दरअसल, एक्टर का एक लेटेस्ट इंटरव्यू काफी वायरल हो रहा है, जिसमें उनसे ये पूछा गया है कि ऐसी एक सलाह बताइए जो आज तक आपको याद है? एक्टर ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा था, ' जब पत्नी शबाना रजा (Shabana Raza) उनकी एक फिल्म थिएटर में देखने गई थीं और उसे देखने के बाद उन्होंने उन्हें पैसे के लिए फिल्में बंद करने के लिए डांटा था. एक्टर के अनुसार,यह असल में एक शानदार सलाह थी. '
आपको बता दें कि एक्टर की पत्नी (Shabana Raza) ने आगे कहा था, 'आप रोल और स्क्रिप्ट देखकर चुनें, ऐसी फिल्में नहीं, आपको कुछ और साबित करने की जरूरत नहीं है. ' एक्टर (Manoj Bajpayee)का ये लेटेस्ट इंटरव्यू काफी ज्यादा वायरल हो रहा है, जिसपर लोग अपनी प्रतिक्रिया भी शेयर कर रहे हैं. जानकारी के लिए बता दें एक्टर अक्सर ऐसे खुलासे करते हैं, जिससे लोग खुदको उनसे जोड़ पाते हैं.
मनोज बाजपेयी को आखिरी बार 'सिर्फ एक बंदा काफी है' में देखा गया था, जो 23 मई को रिलीज हुई थी. इससे पहले, एक्टर शर्मिला टैगोर के साथ 'गुलमोहर' में दिखाई दिए थे, जो इस साल मार्च में आई थी. इसके अलावा उनकी झोली में 'सूप', 'डिस्पैच' और 'जोरम' जैसी फिल्में शामिल हैं, जिसका इंतजार उनके दर्शकों को बेसब्री से है.
| Manoj Bajpayee नई दिल्ली : मनोज बाजपेयी एक शानदार एक्टर हैं. वो अपनी एक्टिंग के चलते आज हर एक दिल में राज करते हैं. इन दिनों एक्टर अपनी फिल्म 'सिर्फ एक बंदा काफी है' की सफलता को एंजॉय कर रहे हैं. लेकिन आज उनके खबरों में आने की वजह कुछ और है. दरअसल, एक्टर का एक लेटेस्ट इंटरव्यू काफी वायरल हो रहा है, जिसमें उनसे ये पूछा गया है कि ऐसी एक सलाह बताइए जो आज तक आपको याद है? एक्टर ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा था, ' जब पत्नी शबाना रजा उनकी एक फिल्म थिएटर में देखने गई थीं और उसे देखने के बाद उन्होंने उन्हें पैसे के लिए फिल्में बंद करने के लिए डांटा था. एक्टर के अनुसार,यह असल में एक शानदार सलाह थी. ' आपको बता दें कि एक्टर की पत्नी ने आगे कहा था, 'आप रोल और स्क्रिप्ट देखकर चुनें, ऐसी फिल्में नहीं, आपको कुछ और साबित करने की जरूरत नहीं है. ' एक्टर का ये लेटेस्ट इंटरव्यू काफी ज्यादा वायरल हो रहा है, जिसपर लोग अपनी प्रतिक्रिया भी शेयर कर रहे हैं. जानकारी के लिए बता दें एक्टर अक्सर ऐसे खुलासे करते हैं, जिससे लोग खुदको उनसे जोड़ पाते हैं. मनोज बाजपेयी को आखिरी बार 'सिर्फ एक बंदा काफी है' में देखा गया था, जो तेईस मई को रिलीज हुई थी. इससे पहले, एक्टर शर्मिला टैगोर के साथ 'गुलमोहर' में दिखाई दिए थे, जो इस साल मार्च में आई थी. इसके अलावा उनकी झोली में 'सूप', 'डिस्पैच' और 'जोरम' जैसी फिल्में शामिल हैं, जिसका इंतजार उनके दर्शकों को बेसब्री से है. |
।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद )
नाला (राजकीय सम्पत्ति)भाग -2 / . / .
सड़क (राजकीय सम्पत्ति)भाग -2 / . / .
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो।
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो ।
सींलिग भूमि / . / .
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद)
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम)
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन।
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ ।
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ ।
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि।
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो।
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
| ।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । नाला भाग -दो / . / . सड़क भाग -दो / . / . ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । सींलिग भूमि / . / . ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है। |
अलेक्जेंडर जॉर्जिविच स्पिरकिन एक सोवियत और बाद में रूसी दार्शनिक है, जिनकी पुस्तकों ने विश्वविद्यालय के छात्रों और पाठकों के बीच दोनों ही लोकप्रिय हो गए हैं जो अपने क्षितिज को विस्तृत करना चाहते हैं। इस तथ्य के बावजूद कि लेखक ने पिछली सदी के साठ के दशक में अपने प्रसिद्ध पुस्तिकाएं लिखी हैं, फिर भी वे प्रासंगिकता खो नहीं गए हैं अनुशासन, जो उनके जीवन के लिए समर्पित था अलेक्जेंडर स्पार्किन - दर्शन लेकिन विचारक किसी विशेष क्षेत्र में अनुसंधान के लिए नहीं जाना जाता है। उन्होंने इस विषय का अध्ययन करने और समझने वालों के लिए अपने इतिहास के दर्शन और मील के पत्तों की बुनियादी अवधारणाओं को संक्षेप में और सही तरीके से तैयार करने की कोशिश की है। आइए हमारी शिक्षा और आध्यात्मिक विकास के लिए इसके मूल्य का मूल्यांकन करने के लिए इस पाठ्यपुस्तक को चिह्नित करने का प्रयास करें।
स्पाइक्रिन एजी, जिसका "फिलॉसफी" पहले सोवियत छात्रों और वैज्ञानिकों के कई संदर्भ पुस्तक बन गया, और फिर सीआईएस देशों के युवा लोगों ने एक मुश्किल लेकिन दिलचस्प जीवन जीता। उनका जन्म 1 9 18 में सेराटोव क्षेत्र में हुआ था, लेकिन पहले वे अपनी जिंदगी को दवा में समर्पित करना चाहते थे। भविष्य के दार्शनिक ने युद्ध से ठीक पहले मॉस्को इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेफोलॉजी से स्नातक किया, लेकिन फिर, उनकी पीढ़ी के कई बुद्धिमान लोगों की तरह, उन्हें झूठे आरोपों से गिरफ्तार किया गया और 1 9 45 तक शिविर में थे। वहां वह "बुद्धि के प्यार" में दिलचस्पी रखता था।
अपनी रिहाई के बाद, अलेक्जेंडर स्पिरकिन ने पहली बार अपनी विशेषज्ञता में काम करने की कोशिश की, लेकिन बाद में सोवियत संघ के एकेडमी ऑफ साइंसेज के संस्थान के दर्शन संस्थान में एक शोधक बन गया। उन्होंने प्लेखानोव के सामाजिक मनोविज्ञान पर अपने उम्मीदवार के सिद्धांत का बचाव किया, और चेतना के उद्गम पर उनकी डॉक्टरेट की शोध प्रबंध 1 9 70 में, महान सेवाओं के लिए, वह 1 9 74 में सोवियत संघ के एकेडमी ऑफ साइंसेज के एक सदस्य के रूप में प्रोफेसर बने। अगर एक युवा युग में दार्शनिक द्वंद्वात्मक भौतिकवाद की समस्याओं में अधिक दिलचस्पी थी, साठ के दशक से वह कृत्रिम बुद्धि के सिद्धांतों और साइबरनेटिक्स के विचारों का शौक है।
अलेक्जेंडर स्पार्किन ने मास्को में विभिन्न शैक्षिक संस्थानों में दर्शन सिखाना शुरू किया। बीसवीं सदी के पचासवें वर्ष के अंत तक उन्होंने एक पांडुलिपि बनाकर छात्रों की शिक्षा की अपनी अवधारणा और अपने नोटों से लेकर उनकी कल्पना की थी। वह पाठ्यपुस्तकों को अपने आधार पर लिखने के इच्छुक थे। विचारक ने अपनी पांडुलिपि को "मूल सिद्धांतों का दर्शन" कहा स्पिरकिन ने विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए ऑल-यूनियन पाठपुस्तक प्रतियोगिता में इसे प्रस्तुत किया, और उन्हें पुरस्कार मिला। इस पांडुलिपि के आधार पर, दार्शनिक ने कई मैनुअल प्रकाशित किए, जो तुरंत असामान्य रूप से लोकप्रिय हो गया। यहां तक कि पेर्रिस्ट्रिका के युग में और सोवियत संघ के पतन के बाद, स्पिंकिन की पाठ्यपुस्तक बहुत लोकप्रिय बने रहे। 1 99 0 में, उनके प्रसिद्ध "मूल सिद्धांतों का दर्शन" अंग्रेजी में प्रकाशित किया गया था "प्रगति" प्रकाशन घर पाठ्यपुस्तक के पिछले संस्करण 2002 में छपा हुआ था, और फिर 2005 में। संशोधित रूप में इसे प्रकाशन गृह "गार्डरीकी" द्वारा प्रकाशित किया गया था। पुरानी विचारधारा से छुटकारा पाने के लिए "दर्शनशास्त्र" स्पार्किन काफी सरलता से था, मूल रूप से सामग्री को आसानी से और ब्याज के साथ पढ़ा जाता है।
दर्शन विज्ञान पर उनकी पुस्तक इस क्षेत्र में मानव जाति द्वारा एकत्र ज्ञान के संग्रह के रूप में कल्पना की गई। यह साधारण मानव भाषा में लिखा जाता है, यहां तक कि कुछ हद तक प्रस्तुतिकरण की कलात्मक तरीके से, कई अवधारणाओं को आसानी से समझाया जाता है उन्हें अक्सर दर्शन के रहस्यमय समुद्र के लिए एक मार्गदर्शक कहा जाता था। पाठ्यपुस्तक में चार भागों होते हैं यह प्रारंभिक शब्द, जहां दार्शनिक ज्ञान के इस क्षेत्र की परिभाषा देता है, और विश्वव्यापी से इसके अंतर को भी समझता है। फिर दर्शन के इतिहास पर एक खंड का अनुसरण करता है।
अगले भाग सामान्य दार्शनिक समस्याओं को समझता है, जैसे कि ज्ञान, और कारण। तीसरा खंड सामाजिक दर्शन के साथ पेश करता है लेखक संक्षेप में, लेकिन व्यापक रूप से समाज का एक विचार, उसके विकास और प्रवृत्तियों, साथ ही साथ अपने आध्यात्मिक जीवन की विशेषताएं भी देता है। यह पाठ्यपुस्तक लोकप्रिय थी, खासकर पिछली शताब्दी के 60-80 के दशक में, न केवल छात्रों के बीच, बल्कि विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों के बीच भी। प्रकाशन गृह "गार्डरीकी" में वह काफी कम फार्म में आया था। लेकिन रूसी संघ के शिक्षा मंत्रालय ने छात्रों के लिए अनुदान के रूप में सिफारिश की है।
अलेक्जेंडर स्पार्किन दर्शन मुख्य रूप से एक तरह के ज्ञान को सामान्यकृत करने में रुचि रखते थे जो आपको विभिन्न प्रकार के विज्ञान और संस्कृति के बीच समान रूप से जुड़ने और ढूंढने की अनुमति देता है। अपनी पाठ्यपुस्तक की शुरूआत में, वह मानव जाति के आध्यात्मिक जीवन का सार कहता है। उनका मानना है कि रहस्य के सार को समझने की इच्छा से सोचने का यह तरीका उभरा है। एक व्यक्ति दुनिया के बारे में आंशिक विचारों से संतुष्ट नहीं हो सकता है, उसे एक समग्र धारणा की जरूरत है। जीवन के अर्थ और हमारे अस्तित्व में एक उचित लक्ष्य के अस्तित्व के सवाल हमेशा लोगों को दिलचस्पी रखते हैं अन्य विज्ञानों के विपरीत, जो हमें भद्दा, विभेदित जानकारी प्रदान करता है, दर्शन ने हमारे ज्ञान को एकीकृत करना संभव बना दिया है, उन्हें सिस्टम में डाल दिया है। यह हमारे विश्वदृष्टि के विभिन्न पक्षों के बीच आंतरिक संबंधों को भी परिभाषित करता है लेखक ने दार्शनिक ज्ञान की संरचना का संक्षेप में वर्णन किया है, पर जोर दिया कि यह न केवल वैज्ञानिकों के लिए उपलब्ध है, बल्कि किसी भी रचनात्मक और रचनात्मक लोगों के लिए है।
पाठ्यपुस्तक का पहला खंड सबसे बड़ा है इसमें आठ अध्याय हैं ऐतिहासिक हिस्से में स्पाइर्किन का "दर्शन" पाठक को अतीत के विचारकों की विरासत के सभी धन की अवधारणा देता है। एक खंड प्राचीन लेखकों के साथ शुरू होता है, जहां पाइथागोरस, थेल्स, हेराक्लिटस, डेमोक्रिटस के साथ-साथ प्लेटो और अरस्तू की व्यवस्था भी माना जाता है। इस भाग से आप सीख सकते हैं कि ब्रह्मांड की सद्भाव, आत्मा की अमरता और यहां तक कि एक शरीर से दूसरे स्थानांतरित होने के विचार प्राचीन यूनानियों में भी मौजूद थे।
बहुत विचारशील लेखक अलेक्जेंडर स्पार्किन थे "फिलॉसफी", और विशेष रूप से ऐतिहासिक खंड, इस सबूत है उन्होंने 17 वीं -18 वीं सदी में यूरोपीय विचारों के गठन पर विशेष ध्यान दिया। यह इस समय था कि बहुत बड़ी प्रतिभाओं का जन्म हुआ, जो न केवल दुनिया का विचार बदल गया, बल्कि सामाजिक जीवन को भी बदल दिया। इस तरह के प्रमुख विचारकों ने डेसकार्टेस और ह्यूम के रूप में शुरू किया था, फिर फ्रांसीसी एनलाइटमेंट - वोल्टेयर, डिडरोट, रूसो के आंकड़ों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था, जिन्होंने प्रगति के लिए प्यार का माहौल बनाया। इस खंड का मुख्य लक्ष्य जर्मन शास्त्रीय दर्शन के दिग्गजों - कांत, हेगेल, फिच, स्कील्गिंग, फ्यूरबाक पर केंद्रित है। ऐसे पश्चिमी यूरोपीय विचारकों को नीत्शे, स्कोपनहाउर और अन्य के रूप में बहुत ध्यान दिया जाता है रूसी अध्यात्म के लिए भी एक अध्याय है - लोमोनोव और रामिशचेव से दस्तोवेस्की और सोलोवॉव तक।
नौवीं से बारहवीं अध्याय तक, स्पिरकिन एजी। ("फिलॉसफी", पाठ्यपुस्तक) बुनियादी अवधारणाओं और शब्दों के बारे में बताती है हम क्या सीख रहे हैं (जो विचारक वास्तविकता के साथ पहचानता है), कैसे बात, गति, स्थान और समय एक दूसरे से संबंधित हैं अनुभूति, इसके तरीकों और सिद्धांतों के बारे में बहुत कुछ कहा जाता है, और इसके बारे में भी कि क्या कोई व्यक्ति उसके चारों ओर दुनिया को समझ सकता है या वह हमेशा गोपनीयता के घूंघट में रहता है। अनन्त सवाल भी चेतना और अस्तित्व की प्राथमिकता और संबंध के बारे में उठाए जाते हैं। सब के बाद, यह एक दार्शनिक बहस थी, और विरोधियों ने अपने भाले तोड़ दिए। इन सवालों के जवाब से दुनिया में मनुष्य के स्थान के प्रति दृष्टिकोण का पालन किया गया। पाठ्यपुस्तक के लेखक भी उद्देश्य और व्यक्ति ("मैं" की धारणा) होने के बीच में अंतर करता है। उदाहरण के लिए, आधुनिक मनुष्य के लिए कई अप्रत्याशित और दिलचस्प प्रश्न, जो कि ज्ञान और विश्वास के संबंध, जानवरों के कारणों के अस्तित्व की संभावना, सच्चाई की समस्या, अंतर्ज्ञान की भूमिका और अनुभूति में बुद्धि भी इस पुस्तक में परिलक्षित होते हैं।
मार्क्सवादी द्वंद्वात्मक तड़के के एक विद्वान होने के नाते, उच्च विद्यालयों के लिए अपनी पाठ्यपुस्तक "दर्शनशास्त्र" में, स्पार्किन समाज के जीवन के लिए समर्पित एक विशेष भाग को अकेला बनाती है। उन्होंने छात्रों के इतिहास और समाज के विकास की समझ के बुनियादी सिद्धांत का सारांश दिया। लेखक बताता है कि समाज मानव जाति के लिए क्या है, इसका आर्थिक और राजनीतिक विश्लेषण क्या है, और इसके अलग-अलग समूह - वर्ग, स्तर, राष्ट्र, राष्ट्र, परिवार आदि क्या हैं। इस खंड में, स्पार्किन दर्शन के इतिहास पर लौटता है, दिखाता है कि सामाजिक समय की चेतना और मानव समाज का अर्थ कैसे पैदा हुआ, जब आदर्श के लिए खोज शुरू हुई और प्रगति की अवधारणा प्रकट हुई। वह इतिहास में यादृच्छिकता की समस्या, सामूहिक आंदोलनों और व्यक्तियों की भूमिका की जांच करता है, और समाज के विकास में कानूनों और प्रवृत्तियों पर अलग-अलग विचार भी देता है। लेखक ने व्यक्ति और उसके अधिकारों के संबंध में नैतिकता, मानवतावाद, संस्कृति, शक्ति की दुविधा और राज्य के मुद्दों पर भी चर्चा की।
छात्रों की कई पीढ़ी अलेक्जेंडर स्पाइक्रिन के कामों के आधार पर लिखे गए पुस्तकों से सीखा है। उन्होंने न केवल ज्ञान, इसके इतिहास और मुख्य श्रेणियों को ही सीखा, बल्कि तर्क, तत्वमीमांसा, सौंदर्यशास्त्र की खोज भी की। इस तथ्य के बावजूद कि इसके मुख्य भाग में पांडुलिपि सोवियत काल में वापस बनाया गया था, पुराने प्रकाशनों में भी, लेखक विचारधारा से तथ्यों पर और अधिक ध्यान देता है, और इस तरह उनके सहयोगियों से अलग-अलग रूप से भिन्न होता है। उन्होंने अन्य पाठ्यपुस्तकों के समान विषयों को निर्धारित किया है, लेकिन वह हमेशा नई वास्तविकताओं और प्रवृत्तियों को ध्यान में रखते हैं, और यहां तक कि बहुत सुगम रूप में भी।
जिन छात्रों ने इस पुस्तक के दर्शन का अध्ययन किया और परीक्षाएं और परीक्षा लेने की तैयारी कर रहे थे, बहुत प्रशंसा करते हैं। वे लिखते हैं कि पाठ्यपुस्तक में सभी अवधारणाओं, पदों और सबसे जटिल प्रश्न और समस्याएं केवल साधारण मानव भाषा में नहीं हैं, बल्कि एक अच्छी साहित्यिक शैली में, रोमांचक और रोमांचक हैं मैनुअल एक सांस में पढ़ा जाता है, और इसके अलावा, यह प्राप्त ज्ञान को व्यवस्थित करने और उन्हें अलमारियों पर व्यवस्थित करने में मदद करता है। सामग्री की प्रस्तुति जीवन की विभिन्न कहानियों और उदाहरणों से स्पष्ट होती है, जो केवल जानकारी को समझने में सहायता करती है। और जो लोग लोकप्रिय विज्ञान साहित्य के शौकीन हैं, आश्वस्त करते हैं कि यह पुस्तक, यदि आप इसे देखते हैं, तो कई चीजों के बारे में पाठक का विचार बदलता है, आपको लगता है कि जीवन में दर्शन आवश्यक है या नहीं।
| अलेक्जेंडर जॉर्जिविच स्पिरकिन एक सोवियत और बाद में रूसी दार्शनिक है, जिनकी पुस्तकों ने विश्वविद्यालय के छात्रों और पाठकों के बीच दोनों ही लोकप्रिय हो गए हैं जो अपने क्षितिज को विस्तृत करना चाहते हैं। इस तथ्य के बावजूद कि लेखक ने पिछली सदी के साठ के दशक में अपने प्रसिद्ध पुस्तिकाएं लिखी हैं, फिर भी वे प्रासंगिकता खो नहीं गए हैं अनुशासन, जो उनके जीवन के लिए समर्पित था अलेक्जेंडर स्पार्किन - दर्शन लेकिन विचारक किसी विशेष क्षेत्र में अनुसंधान के लिए नहीं जाना जाता है। उन्होंने इस विषय का अध्ययन करने और समझने वालों के लिए अपने इतिहास के दर्शन और मील के पत्तों की बुनियादी अवधारणाओं को संक्षेप में और सही तरीके से तैयार करने की कोशिश की है। आइए हमारी शिक्षा और आध्यात्मिक विकास के लिए इसके मूल्य का मूल्यांकन करने के लिए इस पाठ्यपुस्तक को चिह्नित करने का प्रयास करें। स्पाइक्रिन एजी, जिसका "फिलॉसफी" पहले सोवियत छात्रों और वैज्ञानिकों के कई संदर्भ पुस्तक बन गया, और फिर सीआईएस देशों के युवा लोगों ने एक मुश्किल लेकिन दिलचस्प जीवन जीता। उनका जन्म एक नौ अट्ठारह में सेराटोव क्षेत्र में हुआ था, लेकिन पहले वे अपनी जिंदगी को दवा में समर्पित करना चाहते थे। भविष्य के दार्शनिक ने युद्ध से ठीक पहले मॉस्को इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेफोलॉजी से स्नातक किया, लेकिन फिर, उनकी पीढ़ी के कई बुद्धिमान लोगों की तरह, उन्हें झूठे आरोपों से गिरफ्तार किया गया और एक नौ पैंतालीस तक शिविर में थे। वहां वह "बुद्धि के प्यार" में दिलचस्पी रखता था। अपनी रिहाई के बाद, अलेक्जेंडर स्पिरकिन ने पहली बार अपनी विशेषज्ञता में काम करने की कोशिश की, लेकिन बाद में सोवियत संघ के एकेडमी ऑफ साइंसेज के संस्थान के दर्शन संस्थान में एक शोधक बन गया। उन्होंने प्लेखानोव के सामाजिक मनोविज्ञान पर अपने उम्मीदवार के सिद्धांत का बचाव किया, और चेतना के उद्गम पर उनकी डॉक्टरेट की शोध प्रबंध एक नौ सत्तर में, महान सेवाओं के लिए, वह एक नौ चौहत्तर में सोवियत संघ के एकेडमी ऑफ साइंसेज के एक सदस्य के रूप में प्रोफेसर बने। अगर एक युवा युग में दार्शनिक द्वंद्वात्मक भौतिकवाद की समस्याओं में अधिक दिलचस्पी थी, साठ के दशक से वह कृत्रिम बुद्धि के सिद्धांतों और साइबरनेटिक्स के विचारों का शौक है। अलेक्जेंडर स्पार्किन ने मास्को में विभिन्न शैक्षिक संस्थानों में दर्शन सिखाना शुरू किया। बीसवीं सदी के पचासवें वर्ष के अंत तक उन्होंने एक पांडुलिपि बनाकर छात्रों की शिक्षा की अपनी अवधारणा और अपने नोटों से लेकर उनकी कल्पना की थी। वह पाठ्यपुस्तकों को अपने आधार पर लिखने के इच्छुक थे। विचारक ने अपनी पांडुलिपि को "मूल सिद्धांतों का दर्शन" कहा स्पिरकिन ने विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए ऑल-यूनियन पाठपुस्तक प्रतियोगिता में इसे प्रस्तुत किया, और उन्हें पुरस्कार मिला। इस पांडुलिपि के आधार पर, दार्शनिक ने कई मैनुअल प्रकाशित किए, जो तुरंत असामान्य रूप से लोकप्रिय हो गया। यहां तक कि पेर्रिस्ट्रिका के युग में और सोवियत संघ के पतन के बाद, स्पिंकिन की पाठ्यपुस्तक बहुत लोकप्रिय बने रहे। एक निन्यानवे शून्य में, उनके प्रसिद्ध "मूल सिद्धांतों का दर्शन" अंग्रेजी में प्रकाशित किया गया था "प्रगति" प्रकाशन घर पाठ्यपुस्तक के पिछले संस्करण दो हज़ार दो में छपा हुआ था, और फिर दो हज़ार पाँच में। संशोधित रूप में इसे प्रकाशन गृह "गार्डरीकी" द्वारा प्रकाशित किया गया था। पुरानी विचारधारा से छुटकारा पाने के लिए "दर्शनशास्त्र" स्पार्किन काफी सरलता से था, मूल रूप से सामग्री को आसानी से और ब्याज के साथ पढ़ा जाता है। दर्शन विज्ञान पर उनकी पुस्तक इस क्षेत्र में मानव जाति द्वारा एकत्र ज्ञान के संग्रह के रूप में कल्पना की गई। यह साधारण मानव भाषा में लिखा जाता है, यहां तक कि कुछ हद तक प्रस्तुतिकरण की कलात्मक तरीके से, कई अवधारणाओं को आसानी से समझाया जाता है उन्हें अक्सर दर्शन के रहस्यमय समुद्र के लिए एक मार्गदर्शक कहा जाता था। पाठ्यपुस्तक में चार भागों होते हैं यह प्रारंभिक शब्द, जहां दार्शनिक ज्ञान के इस क्षेत्र की परिभाषा देता है, और विश्वव्यापी से इसके अंतर को भी समझता है। फिर दर्शन के इतिहास पर एक खंड का अनुसरण करता है। अगले भाग सामान्य दार्शनिक समस्याओं को समझता है, जैसे कि ज्ञान, और कारण। तीसरा खंड सामाजिक दर्शन के साथ पेश करता है लेखक संक्षेप में, लेकिन व्यापक रूप से समाज का एक विचार, उसके विकास और प्रवृत्तियों, साथ ही साथ अपने आध्यात्मिक जीवन की विशेषताएं भी देता है। यह पाठ्यपुस्तक लोकप्रिय थी, खासकर पिछली शताब्दी के साठ-अस्सी के दशक में, न केवल छात्रों के बीच, बल्कि विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों के बीच भी। प्रकाशन गृह "गार्डरीकी" में वह काफी कम फार्म में आया था। लेकिन रूसी संघ के शिक्षा मंत्रालय ने छात्रों के लिए अनुदान के रूप में सिफारिश की है। अलेक्जेंडर स्पार्किन दर्शन मुख्य रूप से एक तरह के ज्ञान को सामान्यकृत करने में रुचि रखते थे जो आपको विभिन्न प्रकार के विज्ञान और संस्कृति के बीच समान रूप से जुड़ने और ढूंढने की अनुमति देता है। अपनी पाठ्यपुस्तक की शुरूआत में, वह मानव जाति के आध्यात्मिक जीवन का सार कहता है। उनका मानना है कि रहस्य के सार को समझने की इच्छा से सोचने का यह तरीका उभरा है। एक व्यक्ति दुनिया के बारे में आंशिक विचारों से संतुष्ट नहीं हो सकता है, उसे एक समग्र धारणा की जरूरत है। जीवन के अर्थ और हमारे अस्तित्व में एक उचित लक्ष्य के अस्तित्व के सवाल हमेशा लोगों को दिलचस्पी रखते हैं अन्य विज्ञानों के विपरीत, जो हमें भद्दा, विभेदित जानकारी प्रदान करता है, दर्शन ने हमारे ज्ञान को एकीकृत करना संभव बना दिया है, उन्हें सिस्टम में डाल दिया है। यह हमारे विश्वदृष्टि के विभिन्न पक्षों के बीच आंतरिक संबंधों को भी परिभाषित करता है लेखक ने दार्शनिक ज्ञान की संरचना का संक्षेप में वर्णन किया है, पर जोर दिया कि यह न केवल वैज्ञानिकों के लिए उपलब्ध है, बल्कि किसी भी रचनात्मक और रचनात्मक लोगों के लिए है। पाठ्यपुस्तक का पहला खंड सबसे बड़ा है इसमें आठ अध्याय हैं ऐतिहासिक हिस्से में स्पाइर्किन का "दर्शन" पाठक को अतीत के विचारकों की विरासत के सभी धन की अवधारणा देता है। एक खंड प्राचीन लेखकों के साथ शुरू होता है, जहां पाइथागोरस, थेल्स, हेराक्लिटस, डेमोक्रिटस के साथ-साथ प्लेटो और अरस्तू की व्यवस्था भी माना जाता है। इस भाग से आप सीख सकते हैं कि ब्रह्मांड की सद्भाव, आत्मा की अमरता और यहां तक कि एक शरीर से दूसरे स्थानांतरित होने के विचार प्राचीन यूनानियों में भी मौजूद थे। बहुत विचारशील लेखक अलेक्जेंडर स्पार्किन थे "फिलॉसफी", और विशेष रूप से ऐतिहासिक खंड, इस सबूत है उन्होंने सत्रह वीं -अट्ठारह वीं सदी में यूरोपीय विचारों के गठन पर विशेष ध्यान दिया। यह इस समय था कि बहुत बड़ी प्रतिभाओं का जन्म हुआ, जो न केवल दुनिया का विचार बदल गया, बल्कि सामाजिक जीवन को भी बदल दिया। इस तरह के प्रमुख विचारकों ने डेसकार्टेस और ह्यूम के रूप में शुरू किया था, फिर फ्रांसीसी एनलाइटमेंट - वोल्टेयर, डिडरोट, रूसो के आंकड़ों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था, जिन्होंने प्रगति के लिए प्यार का माहौल बनाया। इस खंड का मुख्य लक्ष्य जर्मन शास्त्रीय दर्शन के दिग्गजों - कांत, हेगेल, फिच, स्कील्गिंग, फ्यूरबाक पर केंद्रित है। ऐसे पश्चिमी यूरोपीय विचारकों को नीत्शे, स्कोपनहाउर और अन्य के रूप में बहुत ध्यान दिया जाता है रूसी अध्यात्म के लिए भी एक अध्याय है - लोमोनोव और रामिशचेव से दस्तोवेस्की और सोलोवॉव तक। नौवीं से बारहवीं अध्याय तक, स्पिरकिन एजी। बुनियादी अवधारणाओं और शब्दों के बारे में बताती है हम क्या सीख रहे हैं , कैसे बात, गति, स्थान और समय एक दूसरे से संबंधित हैं अनुभूति, इसके तरीकों और सिद्धांतों के बारे में बहुत कुछ कहा जाता है, और इसके बारे में भी कि क्या कोई व्यक्ति उसके चारों ओर दुनिया को समझ सकता है या वह हमेशा गोपनीयता के घूंघट में रहता है। अनन्त सवाल भी चेतना और अस्तित्व की प्राथमिकता और संबंध के बारे में उठाए जाते हैं। सब के बाद, यह एक दार्शनिक बहस थी, और विरोधियों ने अपने भाले तोड़ दिए। इन सवालों के जवाब से दुनिया में मनुष्य के स्थान के प्रति दृष्टिकोण का पालन किया गया। पाठ्यपुस्तक के लेखक भी उद्देश्य और व्यक्ति होने के बीच में अंतर करता है। उदाहरण के लिए, आधुनिक मनुष्य के लिए कई अप्रत्याशित और दिलचस्प प्रश्न, जो कि ज्ञान और विश्वास के संबंध, जानवरों के कारणों के अस्तित्व की संभावना, सच्चाई की समस्या, अंतर्ज्ञान की भूमिका और अनुभूति में बुद्धि भी इस पुस्तक में परिलक्षित होते हैं। मार्क्सवादी द्वंद्वात्मक तड़के के एक विद्वान होने के नाते, उच्च विद्यालयों के लिए अपनी पाठ्यपुस्तक "दर्शनशास्त्र" में, स्पार्किन समाज के जीवन के लिए समर्पित एक विशेष भाग को अकेला बनाती है। उन्होंने छात्रों के इतिहास और समाज के विकास की समझ के बुनियादी सिद्धांत का सारांश दिया। लेखक बताता है कि समाज मानव जाति के लिए क्या है, इसका आर्थिक और राजनीतिक विश्लेषण क्या है, और इसके अलग-अलग समूह - वर्ग, स्तर, राष्ट्र, राष्ट्र, परिवार आदि क्या हैं। इस खंड में, स्पार्किन दर्शन के इतिहास पर लौटता है, दिखाता है कि सामाजिक समय की चेतना और मानव समाज का अर्थ कैसे पैदा हुआ, जब आदर्श के लिए खोज शुरू हुई और प्रगति की अवधारणा प्रकट हुई। वह इतिहास में यादृच्छिकता की समस्या, सामूहिक आंदोलनों और व्यक्तियों की भूमिका की जांच करता है, और समाज के विकास में कानूनों और प्रवृत्तियों पर अलग-अलग विचार भी देता है। लेखक ने व्यक्ति और उसके अधिकारों के संबंध में नैतिकता, मानवतावाद, संस्कृति, शक्ति की दुविधा और राज्य के मुद्दों पर भी चर्चा की। छात्रों की कई पीढ़ी अलेक्जेंडर स्पाइक्रिन के कामों के आधार पर लिखे गए पुस्तकों से सीखा है। उन्होंने न केवल ज्ञान, इसके इतिहास और मुख्य श्रेणियों को ही सीखा, बल्कि तर्क, तत्वमीमांसा, सौंदर्यशास्त्र की खोज भी की। इस तथ्य के बावजूद कि इसके मुख्य भाग में पांडुलिपि सोवियत काल में वापस बनाया गया था, पुराने प्रकाशनों में भी, लेखक विचारधारा से तथ्यों पर और अधिक ध्यान देता है, और इस तरह उनके सहयोगियों से अलग-अलग रूप से भिन्न होता है। उन्होंने अन्य पाठ्यपुस्तकों के समान विषयों को निर्धारित किया है, लेकिन वह हमेशा नई वास्तविकताओं और प्रवृत्तियों को ध्यान में रखते हैं, और यहां तक कि बहुत सुगम रूप में भी। जिन छात्रों ने इस पुस्तक के दर्शन का अध्ययन किया और परीक्षाएं और परीक्षा लेने की तैयारी कर रहे थे, बहुत प्रशंसा करते हैं। वे लिखते हैं कि पाठ्यपुस्तक में सभी अवधारणाओं, पदों और सबसे जटिल प्रश्न और समस्याएं केवल साधारण मानव भाषा में नहीं हैं, बल्कि एक अच्छी साहित्यिक शैली में, रोमांचक और रोमांचक हैं मैनुअल एक सांस में पढ़ा जाता है, और इसके अलावा, यह प्राप्त ज्ञान को व्यवस्थित करने और उन्हें अलमारियों पर व्यवस्थित करने में मदद करता है। सामग्री की प्रस्तुति जीवन की विभिन्न कहानियों और उदाहरणों से स्पष्ट होती है, जो केवल जानकारी को समझने में सहायता करती है। और जो लोग लोकप्रिय विज्ञान साहित्य के शौकीन हैं, आश्वस्त करते हैं कि यह पुस्तक, यदि आप इसे देखते हैं, तो कई चीजों के बारे में पाठक का विचार बदलता है, आपको लगता है कि जीवन में दर्शन आवश्यक है या नहीं। |
इराक़ के प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी ने सऊदियों को संबोधित करते हुए कहा है कि होशियार रहो दाइश का अगला लक्ष्य तुम ही हो।
बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मुखिया मायावती ने रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के बयान की निंदा करते हुए सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को सेना का अपमान बताया।
सीरिया के हलब नगर में इस देश की सेना और रूस की ओर से आतंकवादियों पर किये जाने वाले हमले रोक दिये गए।
फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध आन्दोलन हमास ने इस्राईल के साथ वार्ता का खण्डन किया है।
इराक़ की सरकार ने घोषणा की है कि हमारे सुरक्षाबल मूसिल को स्वतंत्रत कराके ही दम लेंगे।
ट्यूनीशिया के विदेशमंत्री ने कहा है कि क्षेत्र और विश्व में ईरान की महत्वपूर्ण स्थिति के दृष्टिगत उनका देश इस्लामी गणतंत्र ईरान के साथ संबन्धों के विस्तार का इच्छुक है।
यमन पर सऊदी अरब के आक्रमण में आठ हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं।
| इराक़ के प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी ने सऊदियों को संबोधित करते हुए कहा है कि होशियार रहो दाइश का अगला लक्ष्य तुम ही हो। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मुखिया मायावती ने रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के बयान की निंदा करते हुए सर्जिकल स्ट्राइक का श्रेय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को सेना का अपमान बताया। सीरिया के हलब नगर में इस देश की सेना और रूस की ओर से आतंकवादियों पर किये जाने वाले हमले रोक दिये गए। फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध आन्दोलन हमास ने इस्राईल के साथ वार्ता का खण्डन किया है। इराक़ की सरकार ने घोषणा की है कि हमारे सुरक्षाबल मूसिल को स्वतंत्रत कराके ही दम लेंगे। ट्यूनीशिया के विदेशमंत्री ने कहा है कि क्षेत्र और विश्व में ईरान की महत्वपूर्ण स्थिति के दृष्टिगत उनका देश इस्लामी गणतंत्र ईरान के साथ संबन्धों के विस्तार का इच्छुक है। यमन पर सऊदी अरब के आक्रमण में आठ हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। |
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री नबाम तुकी ने आज पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेन्द्र प्रधान से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने विभिन्न मुद्दों के साथ राज्य के लिए राजस्व पर केन्द्रीय मंत्री से चर्चा की। श्री प्रधान ने उन्हें विश्वास दिलाया कि सरकार सहयोगात्मक संघीय ढांचे के प्रति प्रतिबद्ध है साथ ही पूर्वेात्तर राज्यों का विकास उसकी प्राथमिकता में शामिल हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अरुणाचल प्रदेश को उसका हक मिलेगा।
पेट्रोलियम मंत्री ने श्री तुकी को राज्य में एक नर्सिंग कॉलेज के निर्माण में सहायता का भी आश्वासन दिया।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव, विशेष सचिव और मुख्य प्रबंध निदेशक भी इस बैठक के दौरान उपस्थित थे।
| अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री नबाम तुकी ने आज पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने विभिन्न मुद्दों के साथ राज्य के लिए राजस्व पर केन्द्रीय मंत्री से चर्चा की। श्री प्रधान ने उन्हें विश्वास दिलाया कि सरकार सहयोगात्मक संघीय ढांचे के प्रति प्रतिबद्ध है साथ ही पूर्वेात्तर राज्यों का विकास उसकी प्राथमिकता में शामिल हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अरुणाचल प्रदेश को उसका हक मिलेगा। पेट्रोलियम मंत्री ने श्री तुकी को राज्य में एक नर्सिंग कॉलेज के निर्माण में सहायता का भी आश्वासन दिया। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव, विशेष सचिव और मुख्य प्रबंध निदेशक भी इस बैठक के दौरान उपस्थित थे। |
लंदन, (भाषा)। हॉलीवुड की शर्मीली अभिनेत्री डकोटा फैनिंग डेटिंग से दूर रहती हैं। डकोटा रोमांस से तब तक दूर रहेंगी जब तक उन्हें अपने लिए उपयुक्त लड़का नहीं मिल जाता है। वर्ष 2001 में `आई एम सैम' से एक बाल कलाकार के तौर पर प्रसिद्धि हासिल करने वाली 18 वर्षीय लड़की ने बताया कि उनके माता-पिता स्टीवेन और हीथर के बीच बालपन का प्यार था। उनलोगों ने उस समय शादी की जब उनकी कॉलेज की शिक्षा-दीक्षा समाप्त हो गई और वह अपने रिश्ते को बरकरार रखना चाहते थे। उन्होंने बताया कि वह वास्तव में डेटिंग नहीं करती हैं। रिश्ते को लेकर उनकी एक अजीब दृष्टि है क्योंकि मेरे माता-पिता एक दूसरे को दूसरी कक्षा से जानते थे और उन्होंने कॉलेज से निकलने के बाद शादी की। फैनिंग ने हमेशा सोचा है कि उसका जीवन साथी कैसा होना चाहिए और अगर ऐसा नहीं होता है तो वह अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहती हैं।
| लंदन, । हॉलीवुड की शर्मीली अभिनेत्री डकोटा फैनिंग डेटिंग से दूर रहती हैं। डकोटा रोमांस से तब तक दूर रहेंगी जब तक उन्हें अपने लिए उपयुक्त लड़का नहीं मिल जाता है। वर्ष दो हज़ार एक में `आई एम सैम' से एक बाल कलाकार के तौर पर प्रसिद्धि हासिल करने वाली अट्ठारह वर्षीय लड़की ने बताया कि उनके माता-पिता स्टीवेन और हीथर के बीच बालपन का प्यार था। उनलोगों ने उस समय शादी की जब उनकी कॉलेज की शिक्षा-दीक्षा समाप्त हो गई और वह अपने रिश्ते को बरकरार रखना चाहते थे। उन्होंने बताया कि वह वास्तव में डेटिंग नहीं करती हैं। रिश्ते को लेकर उनकी एक अजीब दृष्टि है क्योंकि मेरे माता-पिता एक दूसरे को दूसरी कक्षा से जानते थे और उन्होंने कॉलेज से निकलने के बाद शादी की। फैनिंग ने हमेशा सोचा है कि उसका जीवन साथी कैसा होना चाहिए और अगर ऐसा नहीं होता है तो वह अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहती हैं। |
(जी. एन. एस. ) ता 6 देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने टपकेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नई लिफ्ट समेत साढ़े 15 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। लिफ्ट उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री ने नदी किनारे घाट के काम का जायजा लिया और टपकेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना भी की। टपकेश्वर मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में एमडीडीए के कुल 474. 16 लाख के 17 कार्यों का शिलान्यास,
| ता छः देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने टपकेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नई लिफ्ट समेत साढ़े पंद्रह करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। लिफ्ट उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री ने नदी किनारे घाट के काम का जायजा लिया और टपकेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना भी की। टपकेश्वर मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में एमडीडीए के कुल चार सौ चौहत्तर. सोलह लाख के सत्रह कार्यों का शिलान्यास, |
तेलंगाना सरकार के खिलाफ दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रही वाइएस शर्मिला को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. शर्मिला ने तेलंगाना में एक सिचाई परियोजना में अनियमितता का आरोप लगाया है.
तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की सरकार का विरोध कर रहीं वाईएसआर तेलंगाना पार्टी की प्रमुख वाईएस शर्मिला को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. शर्मिला आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाइएस जगनमोहन रेड्डी की छोटी बहन हैं. शर्मिला दिल्ली में तेलंगाना सरकार का विरोध कर रही थीं.
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शर्मिला ने सोमवार को कहा था कि वो तेलंगाना के कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना में कथित अनियमितताओं को उजागर करने के लिए जंतर-मंतर से संसद तक शांतिपूर्ण मार्च करने की योजना बनाई हैं. जिसके बाद आज वो विरोध कर रही थीं.
उन्होंने कहा कि भूपालपल्ली जिले में गोदावरी नदी पर सिचाई के उद्देश्य से परियोजना को अमल में लाया गया है उसमें कई खामियां हैं. सोमवार को शर्मिला ने प्रोजेक्ट में अनियमितताओं को लेकर अधिकारियों पर निशाना साधा और कहा कि उनके इस विरोध के पीछे संसद और देश का ध्यान आकर्षित कराना है.
शर्मिला ने कहा था, मैं जंतर-मंतर से संसद तक चलूंगी ताकि पूरे देश को घोटाले की और पिछले दो सालों से चल रही हमारी लड़ाई का एहसास हो सके. परियोजना की लागत 38.500 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 1.20 लाख करोड़ रुपए कर दी गई थी, लेकिन कल बीआरएस मंत्री ने दावा किया कि केवल 1.5 लाख एकड़ भूमि की ही सिचाई की गई. इससे पता चलता है कि कालेश्वरम सरकार का सबसे बड़ा फ्लॉप शो है.
दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन करने से पहले शर्मिला ने पिछले हफ्ते राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध को लेकर हैदराबाद शहर के टैंक बूंद रोड पर स्थित एक मूर्ति के पास मौन रखकर विरोध किया था. हालांकि, विरोध के दौरान नियमों के उल्लंघन को लेकर पुलिस वाईएसआरटीपी प्रमुख शर्मिला को उनके आवास भेज दिया था जबकि उनके समर्थकों को तीतर-बितर कर दिया गया था.
| तेलंगाना सरकार के खिलाफ दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रही वाइएस शर्मिला को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. शर्मिला ने तेलंगाना में एक सिचाई परियोजना में अनियमितता का आरोप लगाया है. तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की सरकार का विरोध कर रहीं वाईएसआर तेलंगाना पार्टी की प्रमुख वाईएस शर्मिला को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है. शर्मिला आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाइएस जगनमोहन रेड्डी की छोटी बहन हैं. शर्मिला दिल्ली में तेलंगाना सरकार का विरोध कर रही थीं. हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शर्मिला ने सोमवार को कहा था कि वो तेलंगाना के कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना में कथित अनियमितताओं को उजागर करने के लिए जंतर-मंतर से संसद तक शांतिपूर्ण मार्च करने की योजना बनाई हैं. जिसके बाद आज वो विरोध कर रही थीं. उन्होंने कहा कि भूपालपल्ली जिले में गोदावरी नदी पर सिचाई के उद्देश्य से परियोजना को अमल में लाया गया है उसमें कई खामियां हैं. सोमवार को शर्मिला ने प्रोजेक्ट में अनियमितताओं को लेकर अधिकारियों पर निशाना साधा और कहा कि उनके इस विरोध के पीछे संसद और देश का ध्यान आकर्षित कराना है. शर्मिला ने कहा था, मैं जंतर-मंतर से संसद तक चलूंगी ताकि पूरे देश को घोटाले की और पिछले दो सालों से चल रही हमारी लड़ाई का एहसास हो सके. परियोजना की लागत अड़तीस.पाँच सौ करोड़ रुपए से बढ़ाकर एक.बीस लाख करोड़ रुपए कर दी गई थी, लेकिन कल बीआरएस मंत्री ने दावा किया कि केवल एक.पाँच लाख एकड़ भूमि की ही सिचाई की गई. इससे पता चलता है कि कालेश्वरम सरकार का सबसे बड़ा फ्लॉप शो है. दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन करने से पहले शर्मिला ने पिछले हफ्ते राज्य में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध को लेकर हैदराबाद शहर के टैंक बूंद रोड पर स्थित एक मूर्ति के पास मौन रखकर विरोध किया था. हालांकि, विरोध के दौरान नियमों के उल्लंघन को लेकर पुलिस वाईएसआरटीपी प्रमुख शर्मिला को उनके आवास भेज दिया था जबकि उनके समर्थकों को तीतर-बितर कर दिया गया था. |
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए गुरुवार को पहली सूची जारी कर दी। भाजपा की केन्द्रीय चुनाव समिति के सचिव एवं केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने यहां पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहली सूची में 184 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की। इस 184 सीटों में से 16 सीट महाराष्ट्र की है। महाराष्ट्र के उम्मीदवारों की सूची।
| नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनावों के लिए गुरुवार को पहली सूची जारी कर दी। भाजपा की केन्द्रीय चुनाव समिति के सचिव एवं केन्द्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने यहां पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहली सूची में एक सौ चौरासी उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की। इस एक सौ चौरासी सीटों में से सोलह सीट महाराष्ट्र की है। महाराष्ट्र के उम्मीदवारों की सूची। |
यहां प्रदान की गई जानकारी हमारी सर्वोत्तम क्षमताओं के अनुसार है और इसे यथार्थ और विश्वसनीय बनाने के लिए पेशेवरों की एक टीम द्वारा समीक्षा के बाद प्रकाशित किया जाता है। यह जानकारी पूरी तरह से उत्पाद पर एक सामान्य अवलोकन प्रदान करने के लिए है और इसका उपयोग केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। आपको यहां दी गई जानकारी का उपयोग किसी स्वास्थ्य समस्या के निदान, रोकथाम या इलाज के लिए नहीं करना चाहिए। इस साइट पर मौजूद किसी भी चीज़ का उद्देश्य किसी डाक्टर के चिकित्सा उपचार/सलाह या परामर्श को बदलना या प्रतिस्थापित करना नहीं है। किसी भी दवा के बारे में किसी भी जानकारी या चेतावनी की अनुपस्थिति को एक निहित आश्वासन के रूप में नहीं माना जाएगा। हम अत्यधिक अनुशंसा करते हैं कि आप अपनी चिकित्सा स्थिति से संबंधित सभी प्रश्नों या संदेहों के लिए अपने डाक्टर से परामर्श लें। आप इस बात से सहमत हैं कि आप यह साइट में मौजूद किसी भी चीज़ के आधार पर संपूर्ण या आंशिक रूप से स्वास्थ्य या चिकित्सा संबंधी कोई निर्णय नहीं लेंगे। कृपया विस्तृत नियम एवं शर्तों के लिए यहां क्लिक करें।
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सानो स्वामी मिळो माला है। दोबारमझमूं? तो आई है।
परी बाजी। स्वामसुन्दर बाबू बिशा दोविभाग के अस्वीफे के सम्बन्ध में उन्हें कि आशाम को बजे मुझसे मेरे काम पर अवसि । देमी-भट्ठी मित्रा हो। बहुत बकरी कर देना जोर डरायो ।
चिमाज शर्मा बदमा
हो हो । प
कमका बुझाइमा-पू
बड़ी में स्क्रन पांच बयो । श्यामसुन्दर बनौ । पर दिल जोर नमक-मोटरसाठीक हूँ और श्यामसुन्दर का दरमा ।
नहीं!म्हाजावड-मोमिदा कोवनी बोडियो ।
माम ! भार वयप वामदर या पूछियो ।
बचाउ !
बिना कारण यो रो ठीक है पद्म
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बनी है सागराची नेहमी पाही पोरी दी। पत्र मा यो बांबी म भर में श्री बाबी।
चालपोते की सारी पारियाना गा पर चार
पर सरकार रोमी मर मरीच मायोरी भाष विस्कार पोपी पूर है। सां
रारा है-रामसुंदर बाबी। की सागे बाल-बा पिपरिचय बोकिया था म्हारो बेदी है। कर माझे पर बासु बैठहै, बड डाक घर भया है। पर दो से
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मायो बजीज सोचा है ?"
सो ? म | सानो स्वामी मिळो माला है। दोबारमझमूं? तो आई है। परी बाजी। स्वामसुन्दर बाबू बिशा दोविभाग के अस्वीफे के सम्बन्ध में उन्हें कि आशाम को बजे मुझसे मेरे काम पर अवसि । देमी-भट्ठी मित्रा हो। बहुत बकरी कर देना जोर डरायो । चिमाज शर्मा बदमा हो हो । प कमका बुझाइमा-पू बड़ी में स्क्रन पांच बयो । श्यामसुन्दर बनौ । पर दिल जोर नमक-मोटरसाठीक हूँ और श्यामसुन्दर का दरमा । नहीं!म्हाजावड-मोमिदा कोवनी बोडियो । माम ! भार वयप वामदर या पूछियो । बचाउ ! बिना कारण यो रो ठीक है पद्म बोहोरी स बनी है सागराची नेहमी पाही पोरी दी। पत्र मा यो बांबी म भर में श्री बाबी। चालपोते की सारी पारियाना गा पर चार पर सरकार रोमी मर मरीच मायोरी भाष विस्कार पोपी पूर है। सां रारा है-रामसुंदर बाबी। की सागे बाल-बा पिपरिचय बोकिया था म्हारो बेदी है। कर माझे पर बासु बैठहै, बड डाक घर भया है। पर दो से नमस्कार की । ही सभी मायो बजीज सोचा है ?" सो ? म |
विश्वास न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में पाया कि भारतीय संविधान में कोई अनुच्छेद 30 (A) नहीं है जो कि गीता और रामायण को पढ़ने से रोकता है।
नई दिल्ली (विश्वास टीम) सोशल मीडिया पर एक टेक्स्ट पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 30 (A) कहता है कि भगवद् गीता और रामायण को स्कूलों में नहीं पढ़ाया जा सकता है। पोस्ट में इस अनुच्छेद को हटाने की मांग की गयी है। विश्वास न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में पाया कि भारत के संविधान में कोई अनुच्छेद 30 (A) नहीं है जो कि गीता और रामायण को पढ़ने से रोकता है। यह दावा गलत है।
क्या हो रहा है वायरल?
इस पोस्ट का आर्काइव वर्जन यहाँ पढ़ा जा सकता है।
हमे सबसे पहले कीवर्ड की मदद से जांच की। जब पड़ताल की तो पाया कि 30A नाम का कोई आर्टिकल है ही नहीं, बल्कि आर्टिकल 30 को तीन भागों में बांटा गया है। आर्टिकल 30(1), 30(1A), 30(2)।
आर्टिकल 30 में शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन के लिए अल्पसंख्यकों के अधिकार की बात कही गयी है। इस आर्टिकल में 3 प्वाइंट्स लिखे हैंः
(1) सभी अल्पसंख्यक, चाहे वे धर्म के आधार पर हों या भाषा के, उन्हें अपनी पसंद के शैक्षिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा।
(1 ए) किसी भी अल्पसंख्यक द्वारा स्थापित और प्रशासित शैक्षणिक संस्थान की किसी भी संपत्ति के अनिवार्य अधिग्रहण के लिए प्रदान करने वाले किसी भी कानून को खंड (1) में निर्दिष्ट करने पर, राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि इस तरह के कानून के तहत निर्धारित राशि पर दी जाये, जो उस खंड के तहत सही हो।
(2) राज्य शैक्षणिक संस्थानों को सहायता देने में, किसी भी शिक्षण संस्थान के खिलाफ इस आधार पर भेदभाव नहीं करेगा कि वह अल्पसंख्यक के प्रबंधन के अधीन है, चाहे वह धर्म पर आधारित हो या भाषा पर।
इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर कई लोग शेयर कर रहे हैं। इन्हीं में से एक है bjp_army नाम का इंस्टाग्राम यूजर। इस यूजर के 25.2 फ़ॉलोअर्स हैं।
निष्कर्षः विश्वास न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में पाया कि भारतीय संविधान में कोई अनुच्छेद 30 (A) नहीं है जो कि गीता और रामायण को पढ़ने से रोकता है।
कॉरपोरेट और राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर सत्ता को हमेशा आइना दिखाने वाली फैक्ट चेक जर्नलिज्म सिर्फ और सिर्फ आपके सहयोग से संभव है। इस मुहिम में हमें आपके साथ और सहयोगी की जरूरत है। फर्जी और गुमराह करने वाली खबर के खिलाफ जारी इस लड़ाई में हमारी मदद करें और कृपया हमें आर्थिक सहयोग दें।
| विश्वास न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में पाया कि भारतीय संविधान में कोई अनुच्छेद तीस नहीं है जो कि गीता और रामायण को पढ़ने से रोकता है। नई दिल्ली सोशल मीडिया पर एक टेक्स्ट पोस्ट वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद तीस कहता है कि भगवद् गीता और रामायण को स्कूलों में नहीं पढ़ाया जा सकता है। पोस्ट में इस अनुच्छेद को हटाने की मांग की गयी है। विश्वास न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में पाया कि भारत के संविधान में कोई अनुच्छेद तीस नहीं है जो कि गीता और रामायण को पढ़ने से रोकता है। यह दावा गलत है। क्या हो रहा है वायरल? इस पोस्ट का आर्काइव वर्जन यहाँ पढ़ा जा सकता है। हमे सबसे पहले कीवर्ड की मदद से जांच की। जब पड़ताल की तो पाया कि तीस एम्पीयर नाम का कोई आर्टिकल है ही नहीं, बल्कि आर्टिकल तीस को तीन भागों में बांटा गया है। आर्टिकल तीस, तीस, तीस। आर्टिकल तीस में शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन के लिए अल्पसंख्यकों के अधिकार की बात कही गयी है। इस आर्टिकल में तीन प्वाइंट्स लिखे हैंः सभी अल्पसंख्यक, चाहे वे धर्म के आधार पर हों या भाषा के, उन्हें अपनी पसंद के शैक्षिक संस्थानों की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा। किसी भी अल्पसंख्यक द्वारा स्थापित और प्रशासित शैक्षणिक संस्थान की किसी भी संपत्ति के अनिवार्य अधिग्रहण के लिए प्रदान करने वाले किसी भी कानून को खंड में निर्दिष्ट करने पर, राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि इस तरह के कानून के तहत निर्धारित राशि पर दी जाये, जो उस खंड के तहत सही हो। राज्य शैक्षणिक संस्थानों को सहायता देने में, किसी भी शिक्षण संस्थान के खिलाफ इस आधार पर भेदभाव नहीं करेगा कि वह अल्पसंख्यक के प्रबंधन के अधीन है, चाहे वह धर्म पर आधारित हो या भाषा पर। इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर कई लोग शेयर कर रहे हैं। इन्हीं में से एक है bjp_army नाम का इंस्टाग्राम यूजर। इस यूजर के पच्चीस.दो फ़ॉलोअर्स हैं। निष्कर्षः विश्वास न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में पाया कि भारतीय संविधान में कोई अनुच्छेद तीस नहीं है जो कि गीता और रामायण को पढ़ने से रोकता है। कॉरपोरेट और राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर सत्ता को हमेशा आइना दिखाने वाली फैक्ट चेक जर्नलिज्म सिर्फ और सिर्फ आपके सहयोग से संभव है। इस मुहिम में हमें आपके साथ और सहयोगी की जरूरत है। फर्जी और गुमराह करने वाली खबर के खिलाफ जारी इस लड़ाई में हमारी मदद करें और कृपया हमें आर्थिक सहयोग दें। |
मूलपयडिअणुभागडदीरणाप कालो अंतरं च
जह० एगस०, उक्क० अंतोमु० । अवाट्ट० जह० एमस०, उक्क० संखेज्जा समया । अवत० जह० उक्क० एगसमओ । एवं मणुसतिये । एवं सव्वणेरड्य-सव्यतिरिक्खमणुसअपज्ज० - सव्वदेवा ति । णवरि अवच० णत्थि । एवं जाव० ।
६६७. अंतराणु० दुविहो णि०-ओषेण आदेसेण य । ओघेण पंचवड्ढि- हाणि - अवढि० जह० एगस०, उक्क० असंखेज्जा लोगा। अणंतगुणवड्डि-हाणि० जह• एगसमओ, उक्क० अंतोमु० । अवत० भुज० भंगो । एवं तिरिक्खा० । णवरि अवत० पत्थि ।
S६८. आदेसेण णेरइय० पंचवाडि हाणि अवट्ठि० जह० एगस०, उक्क० - तेचीमं सागरो० देसूणाणि । अणंतगुणवड्डि-हाणि० ओघं । एवं सच्चणेग्य० । णवरि सगडिदी देसूणा । पंचिंदियतिरिक्खतिये पंचवड्डि-हाणि-अवडि० जह० एगस०, उक्क० सगट्ठिदी देसू० । अणंतगुणवाड-हाणि० ओघं । एवं मणुसतिए । णवरि अवत० भुज०भंगो । पंचि० तिग्विखअप० - मणुसअप० छवढि हा० - अवट्टि० जह०
ख्यातवें भागप्रमाण हैं। अनन्त गुणवृद्धि और अनन्तगुणहानिका जघन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल अन्तर्मुहूर्त है। अवस्थित पदका जघन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल संख्यात समय है । अवक्तव्य पदका जघन्य और उत्कृष्ट काल एक समय है। इसी प्रकार मनुष्यचिकमें जानना चाहिए । इसी प्रकार सब नारकी, सब तिर्यञ्च, मनुष्य अपर्याप्त और सब देवोंमें जानना चाहिए । इतनी विशेषता है कि इनमें अवक्तव्य पद नहीं है। इसी प्रकार अनाहारक मार्गणा तक जानना चाहिए ।
६६७. अन्तरानुगमकी अपेक्षा निर्देश दो प्रकारका है- ओघ और आदेश । ओघसे पाँच वृद्धि, पाँच हानि और अवस्थितपदका जघन्य अन्तरकाल एक समय है और उत्कृष्ट अन्तरकाल असंख्यात लोकप्रमाण है। अनन्त गुणवृद्धि और अनन्त गुणहानिका जघन्य अन्तर काल एक समय है और उत्कृष्ट अन्तरकाल अन्तमुहूर्त है । अवक्तव्य पदका भंग भुजगारके समान है। इसी प्रकार तिर्यञ्चोंमें जानना चाहिए। इतनी विशेषता है कि इनमें अवक्तव्य पद नही है ।
$ ६८. आदेशसे नारकियोंमें पाँच वृद्धि, पाँच हानि और अवस्थित पड़का जघन्य अन्तरकाल एक समय है और उत्कृष्ट अन्तरकाल कुछ कम तेतीस सागरप्रमाण है । अनन्त गुणवृद्धि और अनन्तगुणहानिका भंग ओघके समान है। इसी प्रकार सब नारकियोंमें जानना चाहिए । इतनी विशेषता है कि कुछ कम अपनी-अपनी स्थिति करनी चाहिए । पञ्चेन्द्रिय तिर्यञ्चत्रिक में पाँच वृद्धि, पाँच हानि और अवस्थित पदका जघन्य अन्तरकाल एक समय है और उत्कृष्ट अन्तरकाल कुछ कम अपनी-अपनी स्थितिप्रमाण है। अनन्त गुणबृद्धि और अनन्त गुणहानिका भंग आंघके समान है। इसी प्रकार मनुष्यत्रिक में जानना चाहिए । इतनी विशेषता है कि इनमें अवतव्यपदका भंग भुजगारके समान है। पञ्चेन्द्रिय तिर्यञ्च अपर्याप्त और मनुष्य अपर्याप्तकों में छह वृद्धि, छह हानि और अवस्थितपढ़का जघन्य अन्तरकाल एक समय है और उत्कृष्ट अन्तरकाल अन्तमुहूर्त है। देवोंमें नारकियोंके | मूलपयडिअणुभागडदीरणाप कालो अंतरं च जहशून्य एगसशून्य, उक्कशून्य अंतोमुशून्य । अवाट्टशून्य जहशून्य एमसशून्य, उक्कशून्य संखेज्जा समया । अवतशून्य जहशून्य उक्कशून्य एगसमओ । एवं मणुसतिये । एवं सव्वणेरड्य-सव्यतिरिक्खमणुसअपज्जशून्य - सव्वदेवा ति । णवरि अवचशून्य णत्थि । एवं जावशून्य । छः सौ सरसठ. अंतराणुशून्य दुविहो णिशून्य-ओषेण आदेसेण य । ओघेण पंचवड्ढि- हाणि - अवढिशून्य जहशून्य एगसशून्य, उक्कशून्य असंखेज्जा लोगा। अणंतगुणवड्डि-हाणिशून्य जह• एगसमओ, उक्कशून्य अंतोमुशून्य । अवतशून्य भुजशून्य भंगो । एवं तिरिक्खाशून्य । णवरि अवतशून्य पत्थि । Sअड़सठ. आदेसेण णेरइयशून्य पंचवाडि हाणि अवट्ठिशून्य जहशून्य एगसशून्य, उक्कशून्य - तेचीमं सागरोशून्य देसूणाणि । अणंतगुणवड्डि-हाणिशून्य ओघं । एवं सच्चणेग्यशून्य । णवरि सगडिदी देसूणा । पंचिंदियतिरिक्खतिये पंचवड्डि-हाणि-अवडिशून्य जहशून्य एगसशून्य, उक्कशून्य सगट्ठिदी देसूशून्य । अणंतगुणवाड-हाणिशून्य ओघं । एवं मणुसतिए । णवरि अवतशून्य भुजशून्यभंगो । पंचिशून्य तिग्विखअपशून्य - मणुसअपशून्य छवढि हाशून्य - अवट्टिशून्य जहशून्य ख्यातवें भागप्रमाण हैं। अनन्त गुणवृद्धि और अनन्तगुणहानिका जघन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल अन्तर्मुहूर्त है। अवस्थित पदका जघन्य काल एक समय है और उत्कृष्ट काल संख्यात समय है । अवक्तव्य पदका जघन्य और उत्कृष्ट काल एक समय है। इसी प्रकार मनुष्यचिकमें जानना चाहिए । इसी प्रकार सब नारकी, सब तिर्यञ्च, मनुष्य अपर्याप्त और सब देवोंमें जानना चाहिए । इतनी विशेषता है कि इनमें अवक्तव्य पद नहीं है। इसी प्रकार अनाहारक मार्गणा तक जानना चाहिए । छः सौ सरसठ. अन्तरानुगमकी अपेक्षा निर्देश दो प्रकारका है- ओघ और आदेश । ओघसे पाँच वृद्धि, पाँच हानि और अवस्थितपदका जघन्य अन्तरकाल एक समय है और उत्कृष्ट अन्तरकाल असंख्यात लोकप्रमाण है। अनन्त गुणवृद्धि और अनन्त गुणहानिका जघन्य अन्तर काल एक समय है और उत्कृष्ट अन्तरकाल अन्तमुहूर्त है । अवक्तव्य पदका भंग भुजगारके समान है। इसी प्रकार तिर्यञ्चोंमें जानना चाहिए। इतनी विशेषता है कि इनमें अवक्तव्य पद नही है । अड़सठ डॉलर. आदेशसे नारकियोंमें पाँच वृद्धि, पाँच हानि और अवस्थित पड़का जघन्य अन्तरकाल एक समय है और उत्कृष्ट अन्तरकाल कुछ कम तेतीस सागरप्रमाण है । अनन्त गुणवृद्धि और अनन्तगुणहानिका भंग ओघके समान है। इसी प्रकार सब नारकियोंमें जानना चाहिए । इतनी विशेषता है कि कुछ कम अपनी-अपनी स्थिति करनी चाहिए । पञ्चेन्द्रिय तिर्यञ्चत्रिक में पाँच वृद्धि, पाँच हानि और अवस्थित पदका जघन्य अन्तरकाल एक समय है और उत्कृष्ट अन्तरकाल कुछ कम अपनी-अपनी स्थितिप्रमाण है। अनन्त गुणबृद्धि और अनन्त गुणहानिका भंग आंघके समान है। इसी प्रकार मनुष्यत्रिक में जानना चाहिए । इतनी विशेषता है कि इनमें अवतव्यपदका भंग भुजगारके समान है। पञ्चेन्द्रिय तिर्यञ्च अपर्याप्त और मनुष्य अपर्याप्तकों में छह वृद्धि, छह हानि और अवस्थितपढ़का जघन्य अन्तरकाल एक समय है और उत्कृष्ट अन्तरकाल अन्तमुहूर्त है। देवोंमें नारकियोंके |
बहुचर्चित PCS अधिकारी ज्योति मौर्य और उनके पति आलोक से संबंधित विवाद में अब एक नया मोड़ आ गया है। ज्योति की जेठानी ने मीडिया से बात करते हुए आलोक के परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जेठानी शुभ्रा ने भी आलोक के परिवार पर FIR दर्ज करवाने का एलान किया है।
शुभ्रा मौर्य पेशे से सरकारी टीचर हैं। उन्होंने आलोक के भाई (अपने पति) पर नशेड़ी होने और खुद को टॉर्चर करने का आरोप लगाया है। 'आज तक' ने ज्योति मौर्य की जेठानी शुभ्रा का इंटरव्यू 19 जुलाई (बुधवार) को प्रकाशित किया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने खुद को पीड़िता बताया है।
शुभ्रा आलोक के भाई विनोद मौर्य की बीवी हैं। इन्होंने बताया कि उनके पति विनोद GST विभाग में नौकरी करते हैं। शुभ्रा ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पति ने भी शादी से पहले खुद को इंटेलिजेंस ब्यूरो का अधिकारी बताया था।
अपनी शादी से जुड़े झूठ को धोखाधड़ी बताते हुए शुभ्रा ने आलोक की शादी वाले कार्ड का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि खुद को ग्राम विकास अधिकारी बता कर ज्योति से शादी करने वाली बात सही है। हालाँकि ज्योति और आलोक के बीच हो रहे विवाद को शुभ्रा ने पति-पत्नी का झगड़ा बताते हुए आगे कॉमेंट करने से मना कर दिया।
शुभ्रा का दावा है कि आलोक का परिवार सिर्फ पैसों का भूखा है। इन्होंने अपने साथ हो रही प्रताड़ना की वजह 2 बेटियों का जन्म होना बताया। पुलिस की कार्रवाई को भी कटघरे में खड़ा करते हुए ज्योति मौर्य की जेठानी ने कहा कि उन्होंने अपने साथ हुए टॉर्चर की साल 2018 में शिकायत दर्ज करवाई थी लेकिन उस पर कोई एक्शन नहीं हुआ था।
शुभ्रा मौर्य ने आगे बताया कि उनके मायके वालों ने प्रयागराज में एक घर खरीद कर दिया था। इस घर को बिकवाने का दबाव उनके ससुराल वालों द्वारा लगातार बनाया गया। विनोद मौर्य अपनी बीवी शुभ्रा को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए आत्महत्या करने की धमकी भी दिया करता था। शुभ्रा ने कहा है कि अब वो अपने ससुराल वालों के खिलाफ FIR दर्ज करवाने जा रही हैं।
10 जुलाई 2023 को शुभ्रा ने अपने ससुराली जनों के खिलाफ केस दर्ज करवाने का प्रयास किया था लेकिन FIR दर्ज नहीं हो पाई। इसके पाँच दिन बाद 15 जुलाई को शुभ्रा के पति और परिजनों ने हंगामा किया था, जिसके चलते उन्हें पुलिस बुलानी पड़ी थी। शुभ्रा अभी तक अपनी ससुराल में रह रहीं थी लेकिन उनका आरोप है कि ससुराल वालों द्वारा अब इतना टॉर्चर कर दिया गया है कि उनका रहना मुश्किल हो चुका है।
| बहुचर्चित PCS अधिकारी ज्योति मौर्य और उनके पति आलोक से संबंधित विवाद में अब एक नया मोड़ आ गया है। ज्योति की जेठानी ने मीडिया से बात करते हुए आलोक के परिवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। जेठानी शुभ्रा ने भी आलोक के परिवार पर FIR दर्ज करवाने का एलान किया है। शुभ्रा मौर्य पेशे से सरकारी टीचर हैं। उन्होंने आलोक के भाई पर नशेड़ी होने और खुद को टॉर्चर करने का आरोप लगाया है। 'आज तक' ने ज्योति मौर्य की जेठानी शुभ्रा का इंटरव्यू उन्नीस जुलाई को प्रकाशित किया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने खुद को पीड़िता बताया है। शुभ्रा आलोक के भाई विनोद मौर्य की बीवी हैं। इन्होंने बताया कि उनके पति विनोद GST विभाग में नौकरी करते हैं। शुभ्रा ने यह भी आरोप लगाया कि उनके पति ने भी शादी से पहले खुद को इंटेलिजेंस ब्यूरो का अधिकारी बताया था। अपनी शादी से जुड़े झूठ को धोखाधड़ी बताते हुए शुभ्रा ने आलोक की शादी वाले कार्ड का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि खुद को ग्राम विकास अधिकारी बता कर ज्योति से शादी करने वाली बात सही है। हालाँकि ज्योति और आलोक के बीच हो रहे विवाद को शुभ्रा ने पति-पत्नी का झगड़ा बताते हुए आगे कॉमेंट करने से मना कर दिया। शुभ्रा का दावा है कि आलोक का परिवार सिर्फ पैसों का भूखा है। इन्होंने अपने साथ हो रही प्रताड़ना की वजह दो बेटियों का जन्म होना बताया। पुलिस की कार्रवाई को भी कटघरे में खड़ा करते हुए ज्योति मौर्य की जेठानी ने कहा कि उन्होंने अपने साथ हुए टॉर्चर की साल दो हज़ार अट्ठारह में शिकायत दर्ज करवाई थी लेकिन उस पर कोई एक्शन नहीं हुआ था। शुभ्रा मौर्य ने आगे बताया कि उनके मायके वालों ने प्रयागराज में एक घर खरीद कर दिया था। इस घर को बिकवाने का दबाव उनके ससुराल वालों द्वारा लगातार बनाया गया। विनोद मौर्य अपनी बीवी शुभ्रा को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए आत्महत्या करने की धमकी भी दिया करता था। शुभ्रा ने कहा है कि अब वो अपने ससुराल वालों के खिलाफ FIR दर्ज करवाने जा रही हैं। दस जुलाई दो हज़ार तेईस को शुभ्रा ने अपने ससुराली जनों के खिलाफ केस दर्ज करवाने का प्रयास किया था लेकिन FIR दर्ज नहीं हो पाई। इसके पाँच दिन बाद पंद्रह जुलाई को शुभ्रा के पति और परिजनों ने हंगामा किया था, जिसके चलते उन्हें पुलिस बुलानी पड़ी थी। शुभ्रा अभी तक अपनी ससुराल में रह रहीं थी लेकिन उनका आरोप है कि ससुराल वालों द्वारा अब इतना टॉर्चर कर दिया गया है कि उनका रहना मुश्किल हो चुका है। |
चंडीगढ़ के सेक्टर-34 में बीती रात हुए सड़क हादसे में एक ऑटो चालक की मौत हो गई है। चंडीगढ़ नंबर की फोर्ड गाड़ी और ऑटो में टक्कर हुई। हादसे में ऑटो चालक को गंभीर चोटें आईं, जिसके चलते उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने ऑटो-कार जब्त कर लिया।
मृतक की पहचान शिव प्रकाश दुबे के रूप में हुई है। वह मूलरूपप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला था। हादसे के तुरंत बाद घायल को सेक्टर-32 के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल(GMCH-32) में ले जाया गया था, लेकिन बचाया नहीं जा सके।
मिली जानकारी के मुताबिक, कार चालक को सेक्टर-34 थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, लेकिन उसे जमानत मिल गई। आरोपी कार चालक के खिलाफ उतावलेपन में और लापरवाही से ड्राइविंग करके जान लेने की धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है।
मृतक उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले का रहने वाला था। मृतक का एक भाई कैंबवाला में रहता है। वहीं दो भाई और हैं। GMCH-32 में शव को रखवा दिया गया है। मृतक का परिवार पोस्टमॉर्टम का इंतजार कर रहा है।
परिवार के मुताबिक, शव का संस्कार पैतृक गांव में ही किया जाएगा। मृतक के छोटे भाई पवन दूबे ने बताया कि उनका भाई अपने पीछे पत्नी और 4 बच्चे छोड़ गया है।
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| चंडीगढ़ के सेक्टर-चौंतीस में बीती रात हुए सड़क हादसे में एक ऑटो चालक की मौत हो गई है। चंडीगढ़ नंबर की फोर्ड गाड़ी और ऑटो में टक्कर हुई। हादसे में ऑटो चालक को गंभीर चोटें आईं, जिसके चलते उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने ऑटो-कार जब्त कर लिया। मृतक की पहचान शिव प्रकाश दुबे के रूप में हुई है। वह मूलरूपप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला था। हादसे के तुरंत बाद घायल को सेक्टर-बत्तीस के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में ले जाया गया था, लेकिन बचाया नहीं जा सके। मिली जानकारी के मुताबिक, कार चालक को सेक्टर-चौंतीस थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, लेकिन उसे जमानत मिल गई। आरोपी कार चालक के खिलाफ उतावलेपन में और लापरवाही से ड्राइविंग करके जान लेने की धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है। मृतक उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले का रहने वाला था। मृतक का एक भाई कैंबवाला में रहता है। वहीं दो भाई और हैं। GMCH-बत्तीस में शव को रखवा दिया गया है। मृतक का परिवार पोस्टमॉर्टम का इंतजार कर रहा है। परिवार के मुताबिक, शव का संस्कार पैतृक गांव में ही किया जाएगा। मृतक के छोटे भाई पवन दूबे ने बताया कि उनका भाई अपने पीछे पत्नी और चार बच्चे छोड़ गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
दीया मिर्जा और वैभव रेखी को 14 मई को बेटा हुआ था जिसकी जानकारी दीया ने आज यानी की 14 जुलाई को दी है। इसका कारण था कि उन्हें एक प्रीमेच्योर बेबी हुआ था जिसके पैदा होने के बाद आईसीयू में रखा गया था। दीया मिर्जा ने सोशल मीडिया पर अपने बेटे के हाथ की तस्वीर शेयर की है। साथ ही अपनी भावनाएं वक्त की है। उन्होंने लिखा- "एलिजाबेथ स्टोन को पैराफ्रेश करने के लिए, एक बच्चा का आपकी जिंदगी में होना ऐसा है जैसे अपने दिल को शरीर के बाहर घूमते देखना। ये शब्द अभी वैभव और मेरी भावनाओं को पूरी तरह से दर्शाते हैं। हमारे दिल की धड़कन, हमारे बेटे अव्यान आज़ाद रेखी का जन्म 14 मई को हुआ था। प्रीमेच्योर होने के कारण उसे आईसीयू में नर्सों और डॉक्टरों की देखभाल में रखा गया था।"उन्होंने आगे लिखा- "मेरी गर्भावस्था के दौरान अचानक एपेंडेक्टोमी और बाद में बेकटेरिया इंफेक्शन से सेप्सिस हो सकता था और यह जीवन के लिए खतरा साबित हो सकता था। शुक्र है, हमारे डॉक्टर द्वारा समय पर देखभाल ने इंमरजेंसी सी-सेक्शन के माध्यम से हमारे बच्चे का सुरक्षित जन्म सुनिश्चित किया।" दीया ने और भी कई बाते लिखी हैं, आप पोस्ट में पढ़ सकते हैं। आपको बता दें कि दीया और वैभव ने फरवरी 2021 में एक दूसरे से शादी की थी। दीया मिर्जा की ये दूसरी शादी थी।
| दीया मिर्जा और वैभव रेखी को चौदह मई को बेटा हुआ था जिसकी जानकारी दीया ने आज यानी की चौदह जुलाई को दी है। इसका कारण था कि उन्हें एक प्रीमेच्योर बेबी हुआ था जिसके पैदा होने के बाद आईसीयू में रखा गया था। दीया मिर्जा ने सोशल मीडिया पर अपने बेटे के हाथ की तस्वीर शेयर की है। साथ ही अपनी भावनाएं वक्त की है। उन्होंने लिखा- "एलिजाबेथ स्टोन को पैराफ्रेश करने के लिए, एक बच्चा का आपकी जिंदगी में होना ऐसा है जैसे अपने दिल को शरीर के बाहर घूमते देखना। ये शब्द अभी वैभव और मेरी भावनाओं को पूरी तरह से दर्शाते हैं। हमारे दिल की धड़कन, हमारे बेटे अव्यान आज़ाद रेखी का जन्म चौदह मई को हुआ था। प्रीमेच्योर होने के कारण उसे आईसीयू में नर्सों और डॉक्टरों की देखभाल में रखा गया था।"उन्होंने आगे लिखा- "मेरी गर्भावस्था के दौरान अचानक एपेंडेक्टोमी और बाद में बेकटेरिया इंफेक्शन से सेप्सिस हो सकता था और यह जीवन के लिए खतरा साबित हो सकता था। शुक्र है, हमारे डॉक्टर द्वारा समय पर देखभाल ने इंमरजेंसी सी-सेक्शन के माध्यम से हमारे बच्चे का सुरक्षित जन्म सुनिश्चित किया।" दीया ने और भी कई बाते लिखी हैं, आप पोस्ट में पढ़ सकते हैं। आपको बता दें कि दीया और वैभव ने फरवरी दो हज़ार इक्कीस में एक दूसरे से शादी की थी। दीया मिर्जा की ये दूसरी शादी थी। |
हाल ही में किस बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की पहली स्वतंत्र महिला निदेशक कौन बनीं?
प्रोफेशनल चार्टर्ड अकाउंटेंट एम. जयश्री व्यास को हाल ही में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया गया है, वे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में स्वतंत्र निदेशक बनने वाली पहली महिला हैं। कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुसार एक विशेष श्रेणी की कंपनियों में कम से कम एक महिला निदेशक होनी चाहिए। सेबी ने अक्टूबर, 2014 से बोर्ड में कम से कम एक महिला निदेशक को नियुक्त किया जाना अनिवार्य किया है।
| हाल ही में किस बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की पहली स्वतंत्र महिला निदेशक कौन बनीं? प्रोफेशनल चार्टर्ड अकाउंटेंट एम. जयश्री व्यास को हाल ही में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया गया है, वे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में स्वतंत्र निदेशक बनने वाली पहली महिला हैं। कंपनी अधिनियम, दो हज़ार तेरह के अनुसार एक विशेष श्रेणी की कंपनियों में कम से कम एक महिला निदेशक होनी चाहिए। सेबी ने अक्टूबर, दो हज़ार चौदह से बोर्ड में कम से कम एक महिला निदेशक को नियुक्त किया जाना अनिवार्य किया है। |
प्राप्ति हो गई है। इस विचार के अनुसार जब वह दीक्षित हो गया तो उसके लिए इन नियमों का पालन करना नितान्त आवश्यक है, तभी वह भिक्षु कहला सकेगा। इसीलिए भिक्षु के निम्नलिखित नियम उक्त गाथा में बताए गए है। यथादर्शनादि से युक्त होना, अर्थात् तत्वार्थ में पूर्ण श्रद्धा रखने वाला होना, माया अर्थात् कपट से रहित होकर क्रियानुष्ठान करना, किन्तु उसका जो भी क्रियानुष्ठान हो वह सब निदान से रहित हो और सस्तव का त्याग करना। संस्तव का अर्थ है पारिवारिक जनों से सम्बन्ध । पूर्वसंस्तव माता, पिता आदि का और पश्चात् सस्तव श्वसुरादि का तथा मित्रवर्ग का होता है। इस प्रकार के सस्तवों का त्याग करने वाला ही भिक्षु कहला सकता है।
जो विषयों की कामना को छोड़कर मोक्ष की अभिलाषा रखने वाला हो तथा जो भिक्षा के लिए अपनी तपश्चर्या को न बताता हो ओर प्रतिबन्धरहित होकर विचरने वाला हो जो इन नियमों के पालन करने वाला हो, वह भिक्षु कहलाता है।
यद्यपि वृत्तिकारों ने अज्ञातैषी' का अर्थ अपने गुणा को बता कर भिक्षा न लेने वाला किया है, परन्तु दशाश्रुतस्कध के पांचवे अध्ययन मे श्रावक की प्रतिज्ञा के अधिकार में ऐसा वर्णन प्राप्त होता है कि- 'प्रतिजाधारी श्रावक ज्ञातकुल की गोचरी करे, अर्थात् अपनी जाति के घरो में गाचरी कर, क्योंकि उसमे अभी ममत्व का भाव शेष रहता है। जब वह साधु बन गया, तब उसका समार से ममत्व सर्वथा छूट जाता है, तब उसके लिए ज्ञातकुल की गोचरी उचित नहीं रह जाती । इसलिए साधु के लिए अज्ञातकुल की गोचरी का विधान है, इस वर्णन से 'अज्ञातैषी' का ज्ञात कुल से भिक्षा न लेने वाला - यह अर्थ भी संगत प्रतीत होता है ।
उक्त गाथा के समुच्चय भाव पर दृष्टि डालने से प्रतीत होता है कि दीक्षित पुरुष सिह की तरह निर्भय होकर रहे और सिह की तरह ही विचरे ।
'नियाणछिन्ने' में 'छिन्न' शब्द का परनिपात प्राकृत व्याकरण के नियमानुसार हुआ है। अब भिक्षु के स्वरूप वर्णन में उसके अन्य गुणों का वर्णन करते हैं, यथाराओवरयं चरेज्ज लाढे, विरए वेयवियायरखिए । पन्ने अभिभूय सव्वदंसी, जे कम्हिवि न मुच्छिए स भिक्खू ॥ २ ॥ रागोपरतश्चरेल्लाढः, विरतो वेदविदात्मरक्षितः ।
प्राज्ञोऽभिभूय सर्वदर्शी, यः कस्मिन्नपि न मूर्च्छितः स भिक्षुः ॥ २ ॥ पदार्थान्वयः-राओवरयं-राग से रहित, लाढे - सदनुष्ठान से युक्त, चरेज्ज - विचरे, विरए - विरतियुक्त, वेयविय- सिद्धान्त का वेत्ता, आयरक्खिए- आत्मरक्षक, पन्नेप्रज्ञावान्, | प्राप्ति हो गई है। इस विचार के अनुसार जब वह दीक्षित हो गया तो उसके लिए इन नियमों का पालन करना नितान्त आवश्यक है, तभी वह भिक्षु कहला सकेगा। इसीलिए भिक्षु के निम्नलिखित नियम उक्त गाथा में बताए गए है। यथादर्शनादि से युक्त होना, अर्थात् तत्वार्थ में पूर्ण श्रद्धा रखने वाला होना, माया अर्थात् कपट से रहित होकर क्रियानुष्ठान करना, किन्तु उसका जो भी क्रियानुष्ठान हो वह सब निदान से रहित हो और सस्तव का त्याग करना। संस्तव का अर्थ है पारिवारिक जनों से सम्बन्ध । पूर्वसंस्तव माता, पिता आदि का और पश्चात् सस्तव श्वसुरादि का तथा मित्रवर्ग का होता है। इस प्रकार के सस्तवों का त्याग करने वाला ही भिक्षु कहला सकता है। जो विषयों की कामना को छोड़कर मोक्ष की अभिलाषा रखने वाला हो तथा जो भिक्षा के लिए अपनी तपश्चर्या को न बताता हो ओर प्रतिबन्धरहित होकर विचरने वाला हो जो इन नियमों के पालन करने वाला हो, वह भिक्षु कहलाता है। यद्यपि वृत्तिकारों ने अज्ञातैषी' का अर्थ अपने गुणा को बता कर भिक्षा न लेने वाला किया है, परन्तु दशाश्रुतस्कध के पांचवे अध्ययन मे श्रावक की प्रतिज्ञा के अधिकार में ऐसा वर्णन प्राप्त होता है कि- 'प्रतिजाधारी श्रावक ज्ञातकुल की गोचरी करे, अर्थात् अपनी जाति के घरो में गाचरी कर, क्योंकि उसमे अभी ममत्व का भाव शेष रहता है। जब वह साधु बन गया, तब उसका समार से ममत्व सर्वथा छूट जाता है, तब उसके लिए ज्ञातकुल की गोचरी उचित नहीं रह जाती । इसलिए साधु के लिए अज्ञातकुल की गोचरी का विधान है, इस वर्णन से 'अज्ञातैषी' का ज्ञात कुल से भिक्षा न लेने वाला - यह अर्थ भी संगत प्रतीत होता है । उक्त गाथा के समुच्चय भाव पर दृष्टि डालने से प्रतीत होता है कि दीक्षित पुरुष सिह की तरह निर्भय होकर रहे और सिह की तरह ही विचरे । 'नियाणछिन्ने' में 'छिन्न' शब्द का परनिपात प्राकृत व्याकरण के नियमानुसार हुआ है। अब भिक्षु के स्वरूप वर्णन में उसके अन्य गुणों का वर्णन करते हैं, यथाराओवरयं चरेज्ज लाढे, विरए वेयवियायरखिए । पन्ने अभिभूय सव्वदंसी, जे कम्हिवि न मुच्छिए स भिक्खू ॥ दो ॥ रागोपरतश्चरेल्लाढः, विरतो वेदविदात्मरक्षितः । प्राज्ञोऽभिभूय सर्वदर्शी, यः कस्मिन्नपि न मूर्च्छितः स भिक्षुः ॥ दो ॥ पदार्थान्वयः-राओवरयं-राग से रहित, लाढे - सदनुष्ठान से युक्त, चरेज्ज - विचरे, विरए - विरतियुक्त, वेयविय- सिद्धान्त का वेत्ता, आयरक्खिए- आत्मरक्षक, पन्नेप्रज्ञावान्, |
ALLAHABAD: माध्यमिक शिक्षा परिषद बोर्ड परीक्षाओं का कार्यक्रम शुक्रवार को जारी करेगा। शासन की ओर से नए साल के सार्वजनिक अवकाश की सूची जारी करने के बाद बोर्ड की ओर से परीक्षा कार्यक्रम फाइनल कर दिया गया है। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं छह फरवरी 2018 से प्रस्तावित हैं। हालांकि अभी तक बोर्ड की परीक्षा का कार्यक्रम दिसंबर माह में जारी होता था, लेकिन इस बार डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा के निर्देश पर बोर्ड की ओर से अक्टूबर माह में ही परीक्षा कार्यक्रम जारी किया जा रहा है।
सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद शिक्षा के क्षेत्र में कई बदलाव हुए। इन्हीं में से बोर्ड परीक्षा को लेकर भी हुए बदलाव की बानगी दिखने लगी। इस बार बार डिप्टी सीएम के निर्देश पर अक्टूबर में परीक्षा का कार्यक्रम जारी किया जा रहा है। डिप्टी सीएम का मानना है कि परीक्षा कार्यक्रम पहले जारी करने से स्टूडेंट्स परीक्षा की तैयारियों में अधिक समय देने लगेगे। यहीं कारण है कि बोर्ड इस बार पिछले सालों के मुकाबले जल्दी परीक्षा कार्यक्रम जारी कर रहा है। बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव ने बताया कि शुक्रवार को दो बजे परिषद कार्यालय में वह औपचारिक विस्तृत परीक्षा कार्यक्रम घोषित करेंगी। इसकी सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
| ALLAHABAD: माध्यमिक शिक्षा परिषद बोर्ड परीक्षाओं का कार्यक्रम शुक्रवार को जारी करेगा। शासन की ओर से नए साल के सार्वजनिक अवकाश की सूची जारी करने के बाद बोर्ड की ओर से परीक्षा कार्यक्रम फाइनल कर दिया गया है। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं छह फरवरी दो हज़ार अट्ठारह से प्रस्तावित हैं। हालांकि अभी तक बोर्ड की परीक्षा का कार्यक्रम दिसंबर माह में जारी होता था, लेकिन इस बार डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा के निर्देश पर बोर्ड की ओर से अक्टूबर माह में ही परीक्षा कार्यक्रम जारी किया जा रहा है। सूबे में सत्ता परिवर्तन के बाद शिक्षा के क्षेत्र में कई बदलाव हुए। इन्हीं में से बोर्ड परीक्षा को लेकर भी हुए बदलाव की बानगी दिखने लगी। इस बार बार डिप्टी सीएम के निर्देश पर अक्टूबर में परीक्षा का कार्यक्रम जारी किया जा रहा है। डिप्टी सीएम का मानना है कि परीक्षा कार्यक्रम पहले जारी करने से स्टूडेंट्स परीक्षा की तैयारियों में अधिक समय देने लगेगे। यहीं कारण है कि बोर्ड इस बार पिछले सालों के मुकाबले जल्दी परीक्षा कार्यक्रम जारी कर रहा है। बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव ने बताया कि शुक्रवार को दो बजे परिषद कार्यालय में वह औपचारिक विस्तृत परीक्षा कार्यक्रम घोषित करेंगी। इसकी सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। |
देवरियाः देश की राजधानी दिल्ली से चलने वाले हिंदी और अंग्रेजी भाषा के राष्ट्रीय न्यूज़ पोर्टल डाइनामाइट न्यूज़ के स्थापना की आज छठवीं वर्षगांठ है। देश भर के साथ ही उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में भी डाइनामाइट न्यूज़ डे का शानदार आयोजन किया गया और कई गणमान्य लोगों ने डाइनामाइट न्यूज समूह को बधाई दी।
देलरिया में डाइनामाइट न्यूज की छठवीं वर्षगांठ के मौके पर केशव सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्या मंदिर, रूद्रपुर देवरिया के प्रांगण में शानदार कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
डाइनामाइट न्यूज डे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रधानाचार्य रामदयाल सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्ष 2015 में 16 अक्टूबर यानि आज ही के दिन अंग्रेजी डाइनामाइट न्यूज पोर्टल की शुरुआत देश की राजधानी दिल्ली के करोल बाग से हुई। अंग्रेजी के बाद फरवरी 2017 में हिंदी डाइनामाइट न्यूज को लांच किया गया। अंग्रेजी और हिंदी भाषा में डाइनामाइट न्यूज की अपार सफलता कै बाद डाइनामाइट न्यूज ने युवाओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए युवा डायनामाइट की भी लांचिंग की और इसे भी अपार सफलता मिल रही है।
पुख्ता, विश्वसनीय और जनसरोकारों से जुड़ी खबरों के प्रकाशन के कारण ही आज डाइनामाइट न्यूज मीडिया जगत में शीर्ष पर बना हुआ है। उन्होंने कहा कि आज के परिवेश में लोगों की उम्मीद मीडिया संस्थानों से ज्यादा बढ़ गयी है। डाइनामाइट लोगों की अपेक्षाओं पर पिछले 6 वर्षों से खरा उतर रहा है।
विशिष्ट अतिथि प्रतिष्ठा वर्मा ने कहा कि जब लोग निराश होने लगते हैं तो मीडिया मुखर होने लगता है। ऐसे में डाइनामाइट न्यूज़ अपने कर्तब्यों व दायित्वों को बखूबी निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि निरन्तर सफलता के कीर्तिमान स्थापित करते हुए डाइनामाइट न्यूज अपनी स्थापना के उद्देश्य पूरे करेगा और जनता का सशक्त आवाज बना रहेगा।
आचार्य नाथू ने डाइनामाइट न्यूज को शुभकामनाएं देते हुए मीडिया की भूमिका पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता गौरीशंकर जायसवाल ने की। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने डाइनामाइट न्यूज परिवार को छठवीं वर्षगांठ पर बधाई और भविष्य के लिये शुभकामनाएं दी।
| देवरियाः देश की राजधानी दिल्ली से चलने वाले हिंदी और अंग्रेजी भाषा के राष्ट्रीय न्यूज़ पोर्टल डाइनामाइट न्यूज़ के स्थापना की आज छठवीं वर्षगांठ है। देश भर के साथ ही उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में भी डाइनामाइट न्यूज़ डे का शानदार आयोजन किया गया और कई गणमान्य लोगों ने डाइनामाइट न्यूज समूह को बधाई दी। देलरिया में डाइनामाइट न्यूज की छठवीं वर्षगांठ के मौके पर केशव सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्या मंदिर, रूद्रपुर देवरिया के प्रांगण में शानदार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डाइनामाइट न्यूज डे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रधानाचार्य रामदयाल सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्ष दो हज़ार पंद्रह में सोलह अक्टूबर यानि आज ही के दिन अंग्रेजी डाइनामाइट न्यूज पोर्टल की शुरुआत देश की राजधानी दिल्ली के करोल बाग से हुई। अंग्रेजी के बाद फरवरी दो हज़ार सत्रह में हिंदी डाइनामाइट न्यूज को लांच किया गया। अंग्रेजी और हिंदी भाषा में डाइनामाइट न्यूज की अपार सफलता कै बाद डाइनामाइट न्यूज ने युवाओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए युवा डायनामाइट की भी लांचिंग की और इसे भी अपार सफलता मिल रही है। पुख्ता, विश्वसनीय और जनसरोकारों से जुड़ी खबरों के प्रकाशन के कारण ही आज डाइनामाइट न्यूज मीडिया जगत में शीर्ष पर बना हुआ है। उन्होंने कहा कि आज के परिवेश में लोगों की उम्मीद मीडिया संस्थानों से ज्यादा बढ़ गयी है। डाइनामाइट लोगों की अपेक्षाओं पर पिछले छः वर्षों से खरा उतर रहा है। विशिष्ट अतिथि प्रतिष्ठा वर्मा ने कहा कि जब लोग निराश होने लगते हैं तो मीडिया मुखर होने लगता है। ऐसे में डाइनामाइट न्यूज़ अपने कर्तब्यों व दायित्वों को बखूबी निभा रहा है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि निरन्तर सफलता के कीर्तिमान स्थापित करते हुए डाइनामाइट न्यूज अपनी स्थापना के उद्देश्य पूरे करेगा और जनता का सशक्त आवाज बना रहेगा। आचार्य नाथू ने डाइनामाइट न्यूज को शुभकामनाएं देते हुए मीडिया की भूमिका पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता गौरीशंकर जायसवाल ने की। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने डाइनामाइट न्यूज परिवार को छठवीं वर्षगांठ पर बधाई और भविष्य के लिये शुभकामनाएं दी। |
दक्षिण अफ्रीका दौरे पर जाने के लिए भारतीय टीम की तमाम तैयारियों के बीच बुधवार को एक बुरी खबर यह रही कि ओपनर बल्लेबाज शिखर धवन को टीम की रवानगी से पहले एडी में चोट लग गई। ऐसे में टीम इंडिया के इस स्टार बैट्समैन का पांच जनवरी से शुरू होने वाले पहले टेस्ट मैच में खेलना खटाई में पड़ता दिख रहा है।
बता दें कि भारतीय क्रिकेट टीम को दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर तीन टेस्ट, छह वनडे और तीन टी-20 मैच खेलना है। ऐसे में ओपनर शिखर धवन का चोटिल होना बड़े झटके के समान है। टीम इंडिया के दक्षिण अफ्रीका रवाना होने से पहले धवन को होटल में लंगड़ाते हुए देखा गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक धवन के बायीं एडी में पट्टियां बंधी हुई थीं। फिजियो पैट्रिक फरहार्ट उनकी देखरेख कर रहे थे। उनका एमआरआई स्कैन भी कराया गया है।
बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि फिजियो का ध्यान धवन पर है और अभी उन्होंने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को कोई रिपोर्ट नहीं सौंपी है। फिलहाल शिखर धवन टीम इंडिया के साथ दक्षिण अफ्रीका रवाना हो चुके हैं। हालांकि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि वह पहले मैच के लिए उपलब्ध होंगे या नहीं। अगर धवन पहले टेस्ट मैच में नहीं खेल पाते हैं तो केएल राहुल को मुरली विजय के साथ ओपनिंग के लिए भेजा जा सकता है।
| दक्षिण अफ्रीका दौरे पर जाने के लिए भारतीय टीम की तमाम तैयारियों के बीच बुधवार को एक बुरी खबर यह रही कि ओपनर बल्लेबाज शिखर धवन को टीम की रवानगी से पहले एडी में चोट लग गई। ऐसे में टीम इंडिया के इस स्टार बैट्समैन का पांच जनवरी से शुरू होने वाले पहले टेस्ट मैच में खेलना खटाई में पड़ता दिख रहा है। बता दें कि भारतीय क्रिकेट टीम को दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर तीन टेस्ट, छह वनडे और तीन टी-बीस मैच खेलना है। ऐसे में ओपनर शिखर धवन का चोटिल होना बड़े झटके के समान है। टीम इंडिया के दक्षिण अफ्रीका रवाना होने से पहले धवन को होटल में लंगड़ाते हुए देखा गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक धवन के बायीं एडी में पट्टियां बंधी हुई थीं। फिजियो पैट्रिक फरहार्ट उनकी देखरेख कर रहे थे। उनका एमआरआई स्कैन भी कराया गया है। बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि फिजियो का ध्यान धवन पर है और अभी उन्होंने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को कोई रिपोर्ट नहीं सौंपी है। फिलहाल शिखर धवन टीम इंडिया के साथ दक्षिण अफ्रीका रवाना हो चुके हैं। हालांकि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि वह पहले मैच के लिए उपलब्ध होंगे या नहीं। अगर धवन पहले टेस्ट मैच में नहीं खेल पाते हैं तो केएल राहुल को मुरली विजय के साथ ओपनिंग के लिए भेजा जा सकता है। |
Indian Railways Rules: रेलवे की तरफ से यात्रियों को कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं। रेलवे में प्रत्येक दिन लाखों की संख्या में यात्री यात्रा करते हैं, लेकिन अब रेलवे ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों से परेशान हो गया है। रेलवे एसी कोच में यात्रा करने वाले यात्रियों को चादर, तौलिए और तकिए की सुविधा देता है, लेकिन आजकल यात्री रेलवे के इस सामान को भी अपने साथ घर ले जाते हैं। रेलवे ने अब से नियमों में बड़ा परिवर्तन कर दिया है। रेलवे ने बताया है कि यदि अब से कोई भी यात्री किसी भी सामान को चोरी करता है तो उसको सजा मिलेगा।
रेलवे ने इसको लेकर पूरी गाइडलाइन भी जारी कर दी है। रेलवे ने एसी कोच में यात्रा करने वालों के लिए यह गाइडलाइन जारी की है। यात्रियों की इन सभी हरकतों से रेलवे काफी परेशान है।
आपको बता दें यात्रियों की इन आदतों की वजह से रेलवे को इस वर्ष लाखों रुपये का चूना लग गया है। रेलवे ने बताया है कि चादर, कंबल के अतिरिक्त यात्री चम्मच, केतली, नल, टॉयलेट में लगी टोटियां तक चोरी करके ले जाते हैं, जिसकी वजह से रेलवे को भारी हानि उठाना पड़ता है।
किस रूट पर अधिक गायब होता है सामान?
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जोन के ट्रेनों में लोग जमकर रेलवे के सामानों की चोरी कर रहे हैं। बिलासपुर और दुर्ग से चलने वाली लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों में कंबल, चादर, तकिया कवर, फेस टॉवेल की लगातार चोरी हो रही है।
रेलवे ने जानकारी देते हुए बताया है बिलासपुर जोन से चलने वाली ट्रेनों में पिछले 4 महीनों में अब तक करीब 55 लाख रुपये का सामान चोरी हो चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले चार महीने में लगभग 55 लाख 97 हजार 406 रुपए के सामान चोरी हुए हैं।
बता दें पिछले चार महीने में 12886 फेस टॉवेल की चोरी हुई है, जिसकी मूल्य 559381 रुपये है। वहीं, एसी से यात्रा करने वाले यात्रियों ने 4 महीने में 18208 चादर चोरी हुई हैं। इसकी मूल्य करीब 2816231 रुपये है। इसके अतिरिक्त 19767 तकिए के कवर चोरी हुए हैं, जिसकी मूल्य 1014837 रुपये, 2796 कंबल की मूल्य 1171999 रुपये, 312 तकियों की मूल्य 34956 रुपये है।
रेलवे ने जानकारी देते हुए बताया है कि इस तरह से सामान की चोरी करना कानूनी रूप से गलत है। रेलवे ने रेलवे प्रोपर्टी एक्ट 1966 के अनुसार इस तरह के यात्रियों पर कार्रवाई की जाएगी। इसमें यात्रियों पर जुर्माना लगने के साथ ही सजा भी मिलेगी। इसमें आपको अधिकतम 5 वर्ष की कारागार का प्रावधान है और जुर्माना भी रेलवे की तरफ से लगाया जाता है।
| Indian Railways Rules: रेलवे की तरफ से यात्रियों को कई तरह की सुविधाएं दी जाती हैं। रेलवे में प्रत्येक दिन लाखों की संख्या में यात्री यात्रा करते हैं, लेकिन अब रेलवे ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों से परेशान हो गया है। रेलवे एसी कोच में यात्रा करने वाले यात्रियों को चादर, तौलिए और तकिए की सुविधा देता है, लेकिन आजकल यात्री रेलवे के इस सामान को भी अपने साथ घर ले जाते हैं। रेलवे ने अब से नियमों में बड़ा परिवर्तन कर दिया है। रेलवे ने बताया है कि यदि अब से कोई भी यात्री किसी भी सामान को चोरी करता है तो उसको सजा मिलेगा। रेलवे ने इसको लेकर पूरी गाइडलाइन भी जारी कर दी है। रेलवे ने एसी कोच में यात्रा करने वालों के लिए यह गाइडलाइन जारी की है। यात्रियों की इन सभी हरकतों से रेलवे काफी परेशान है। आपको बता दें यात्रियों की इन आदतों की वजह से रेलवे को इस वर्ष लाखों रुपये का चूना लग गया है। रेलवे ने बताया है कि चादर, कंबल के अतिरिक्त यात्री चम्मच, केतली, नल, टॉयलेट में लगी टोटियां तक चोरी करके ले जाते हैं, जिसकी वजह से रेलवे को भारी हानि उठाना पड़ता है। किस रूट पर अधिक गायब होता है सामान? छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जोन के ट्रेनों में लोग जमकर रेलवे के सामानों की चोरी कर रहे हैं। बिलासपुर और दुर्ग से चलने वाली लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों में कंबल, चादर, तकिया कवर, फेस टॉवेल की लगातार चोरी हो रही है। रेलवे ने जानकारी देते हुए बताया है बिलासपुर जोन से चलने वाली ट्रेनों में पिछले चार महीनों में अब तक करीब पचपन लाख रुपये का सामान चोरी हो चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले चार महीने में लगभग पचपन लाख सत्तानवे हजार चार सौ छः रुपयापए के सामान चोरी हुए हैं। बता दें पिछले चार महीने में बारह हज़ार आठ सौ छियासी फेस टॉवेल की चोरी हुई है, जिसकी मूल्य पाँच लाख उनसठ हज़ार तीन सौ इक्यासी रुपयापये है। वहीं, एसी से यात्रा करने वाले यात्रियों ने चार महीने में अट्ठारह हज़ार दो सौ आठ चादर चोरी हुई हैं। इसकी मूल्य करीब अट्ठाईस लाख सोलह हज़ार दो सौ इकतीस रुपयापये है। इसके अतिरिक्त उन्नीस हज़ार सात सौ सरसठ तकिए के कवर चोरी हुए हैं, जिसकी मूल्य दस लाख चौदह हज़ार आठ सौ सैंतीस रुपयापये, दो हज़ार सात सौ छियानवे कंबल की मूल्य ग्यारह लाख इकहत्तर हज़ार नौ सौ निन्यानवे रुपयापये, तीन सौ बारह तकियों की मूल्य चौंतीस हज़ार नौ सौ छप्पन रुपयापये है। रेलवे ने जानकारी देते हुए बताया है कि इस तरह से सामान की चोरी करना कानूनी रूप से गलत है। रेलवे ने रेलवे प्रोपर्टी एक्ट एक हज़ार नौ सौ छयासठ के अनुसार इस तरह के यात्रियों पर कार्रवाई की जाएगी। इसमें यात्रियों पर जुर्माना लगने के साथ ही सजा भी मिलेगी। इसमें आपको अधिकतम पाँच वर्ष की कारागार का प्रावधान है और जुर्माना भी रेलवे की तरफ से लगाया जाता है। |
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