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तो मुलायम सिंह दो-दो दलों के मुखिया बन जाएंगे ! शिवपाल यादव ने जैसा कहा था वैसा ही किया भी. यूपी चुनाव के दौरान ही उन्होंने साफ कर दिया था कि नई सरकार बनने के बाद वो नई पार्टी बनाएंगे. भले ही बाद में मुलायम सिंह यादव सामने आये और बोले ऐसा कुछ नहीं होने वाला. अब तो मान लेना चाहिये कि समाजवादी पार्टी के दो टुकड़े हो गये. समाजवादी परिवार में फूट डालने और पार्टी तोड़ने के आरोप अमर सिंह पर लगे थे. अमर सिंह तो समाजवादी पार्टी से कब के निकल चुके, लेकिन उनका मिशन पूरा हुआ अब लगता है. वैसे शिवपाल यादव ने जैसा कहा था वैसा ही किया भी. यूपी चुनाव के दौरान ही उन्होंने साफ कर दिया था कि नई सरकार बनने के बाद वो नई पार्टी बनाएंगे. भले ही बाद में मुलायम सिंह यादव सामने आये और बताया कि शिवपाल कोई पार्टी नहीं बनाने जा रहे. अब तो शिवपाल यादव ने बाकायदा पार्टी के नाम का भी ऐलान कर दिया है - समाजवादी सेक्युलर मोर्चा. यूपी चुनाव के दौरान एक और संगठन भी चर्चा में रहा - मुलायम के लोग. अलग से इसका कार्यालय भी खोला गया था - और काफी संख्या में समाजवादी पार्टी के ही नाराज कार्यकर्ताओं ने इसे ज्वाइन भी किया था. तब ये भी पता चला था कि ये सभी शिवपाल यादव के समर्थक रहे. इटावा और आस पास के इलाकों में मुलायम के लोग के कार्यकर्ता चुनाव में खासे सक्रिय भी रहे. अखिलेश यादव और फिर डिंपल यादव ने भी अपनी रैलियों में ऐसे लोगों से सावधान रहने की बातें कही थीं. दो दो दलों की जिम्मेदारी! अगर यूपी चुनाव के नतीजे अलग होते तो स्वाभाविक था, राजनीति की तस्वीर भी अलग होती. समाजवादी पार्टी की कुछ सीटें और आई होतीं और मायावती सरकार बनाने की स्थिति में होतीं तो मुलायम के लोग कार्यकर्ताओं का भी दबदबा होता. माना जा रहा था कि मुलायम सिंह के कहने पर अखिलेश ने 35-40 लोगों को टिकट दिया था. इनमें से ज्यादातर शिवपाल के समर्थक थे. चुनाव बाद जब समाजवादी पार्टी भी ईवीएम पर मायावती के सुर में सुर मिलाने लगी तो भला 'मुलायम के लोग' को कौन पूछे. . . . और ये 'सेक्युलर मोर्चा' साधना यादव ने तो पहले ही कह दिया था कि आगे से वो अपमान नहीं सहने वाली. बाद में उनकी अपनी बहू और मुलायम परिवार की छोटी बहू अपर्णा यादव ने भी अपनी बातों से संकेत दे दिया था कि वो मुलायम सिंह के अपमान का बदला लेकर रहेंगी. टाइम्स ऑफ इंडिया को दिये अपने इंटरव्यू में अपर्णा ने कहा था, "इसी साल जनवरी में अखिलेश भैया ने वादा किया था कि विधानसभा चुनावों के बाद वो नेताजी को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद वापस कर देंगे. उन्होंने कहा था कि वह अपने वादों को पूरा करते हैं. मुझे लगता है कि अब उन्हें अपने वादे को पूरा करना चाहिए. " अमर सिंह का मिशन पूरा! शिवपाल ने भी नई पार्टी के लिए अखिलेश के उसी बात को आधार बनाया है. नई पार्टी बनाने को लेकर शिवपाल कहते हैं, "मैंने अखिलेश से कहा था कि वो सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद छोड़ दें. मुलायम सिंह पार्टी के नए चीफ होंगे, वरना हम सेक्युलर मोर्चा बना लेंगे. " जब मीडिया ने शिवपाल से पूछा कि क्या नई पार्टी को लेकर उन्होंने मुलायम सिंह की मंजूरी ले ली है? शिवपाल इसका जवाब 'हां' में देते हैं. शिवपाल के मुताबिक नई पार्टी मुलायम के नेतृत्व में ही बनाई जा रही है और वही इसके मुखिया होंगे. महागठबंधन में कौन? शिवपाल की माने तो मुलायम सिंह ही समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के अध्यक्ष होंगे. मुलायम फिलहाल समाजवादी पार्टी के संरक्षक हैं और खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के बावजूद अखिलेश यादव मुलायम सिंह को ही मुखिया बताते हैं. फिर तो मुलायम सिंह यादव दो-दो पार्टियों के मुखिया बन जाएंगे. समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के अध्यक्ष और समाजवादी पार्टी के संरक्षक, जिसके वो संस्थापक अध्यक्ष रहे हैं. खबर है कि सोनिया गांधी ने राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन के लिए मुलायम सिंह यादव से भी बात की है. उस महागठबंधन में यूपी से समाजवादी पार्टी के अलावा मायावती ने भी साथ होने के संकेत दिये हुए हैं. अब सवाल है कि मुलायम सिंह किस पार्टी के साथ महागठबंधन में शामिल होंगे? समाजवादी पार्टी के साथ या फिर नई बनने वाली समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के साथ? ऐसा भी तो हो सकता है कि दोनों ही दल महागठबंधन का हिस्सा बन जाएं. फिर तो ये देखना दिलचस्प होगा कि मुलायम सिंह यादव किसके साथ होते हैं. इन्हें भी पढ़ें :
तो मुलायम सिंह दो-दो दलों के मुखिया बन जाएंगे ! शिवपाल यादव ने जैसा कहा था वैसा ही किया भी. यूपी चुनाव के दौरान ही उन्होंने साफ कर दिया था कि नई सरकार बनने के बाद वो नई पार्टी बनाएंगे. भले ही बाद में मुलायम सिंह यादव सामने आये और बोले ऐसा कुछ नहीं होने वाला. अब तो मान लेना चाहिये कि समाजवादी पार्टी के दो टुकड़े हो गये. समाजवादी परिवार में फूट डालने और पार्टी तोड़ने के आरोप अमर सिंह पर लगे थे. अमर सिंह तो समाजवादी पार्टी से कब के निकल चुके, लेकिन उनका मिशन पूरा हुआ अब लगता है. वैसे शिवपाल यादव ने जैसा कहा था वैसा ही किया भी. यूपी चुनाव के दौरान ही उन्होंने साफ कर दिया था कि नई सरकार बनने के बाद वो नई पार्टी बनाएंगे. भले ही बाद में मुलायम सिंह यादव सामने आये और बताया कि शिवपाल कोई पार्टी नहीं बनाने जा रहे. अब तो शिवपाल यादव ने बाकायदा पार्टी के नाम का भी ऐलान कर दिया है - समाजवादी सेक्युलर मोर्चा. यूपी चुनाव के दौरान एक और संगठन भी चर्चा में रहा - मुलायम के लोग. अलग से इसका कार्यालय भी खोला गया था - और काफी संख्या में समाजवादी पार्टी के ही नाराज कार्यकर्ताओं ने इसे ज्वाइन भी किया था. तब ये भी पता चला था कि ये सभी शिवपाल यादव के समर्थक रहे. इटावा और आस पास के इलाकों में मुलायम के लोग के कार्यकर्ता चुनाव में खासे सक्रिय भी रहे. अखिलेश यादव और फिर डिंपल यादव ने भी अपनी रैलियों में ऐसे लोगों से सावधान रहने की बातें कही थीं. दो दो दलों की जिम्मेदारी! अगर यूपी चुनाव के नतीजे अलग होते तो स्वाभाविक था, राजनीति की तस्वीर भी अलग होती. समाजवादी पार्टी की कुछ सीटें और आई होतीं और मायावती सरकार बनाने की स्थिति में होतीं तो मुलायम के लोग कार्यकर्ताओं का भी दबदबा होता. माना जा रहा था कि मुलायम सिंह के कहने पर अखिलेश ने पैंतीस-चालीस लोगों को टिकट दिया था. इनमें से ज्यादातर शिवपाल के समर्थक थे. चुनाव बाद जब समाजवादी पार्टी भी ईवीएम पर मायावती के सुर में सुर मिलाने लगी तो भला 'मुलायम के लोग' को कौन पूछे. . . . और ये 'सेक्युलर मोर्चा' साधना यादव ने तो पहले ही कह दिया था कि आगे से वो अपमान नहीं सहने वाली. बाद में उनकी अपनी बहू और मुलायम परिवार की छोटी बहू अपर्णा यादव ने भी अपनी बातों से संकेत दे दिया था कि वो मुलायम सिंह के अपमान का बदला लेकर रहेंगी. टाइम्स ऑफ इंडिया को दिये अपने इंटरव्यू में अपर्णा ने कहा था, "इसी साल जनवरी में अखिलेश भैया ने वादा किया था कि विधानसभा चुनावों के बाद वो नेताजी को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद वापस कर देंगे. उन्होंने कहा था कि वह अपने वादों को पूरा करते हैं. मुझे लगता है कि अब उन्हें अपने वादे को पूरा करना चाहिए. " अमर सिंह का मिशन पूरा! शिवपाल ने भी नई पार्टी के लिए अखिलेश के उसी बात को आधार बनाया है. नई पार्टी बनाने को लेकर शिवपाल कहते हैं, "मैंने अखिलेश से कहा था कि वो सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष पद छोड़ दें. मुलायम सिंह पार्टी के नए चीफ होंगे, वरना हम सेक्युलर मोर्चा बना लेंगे. " जब मीडिया ने शिवपाल से पूछा कि क्या नई पार्टी को लेकर उन्होंने मुलायम सिंह की मंजूरी ले ली है? शिवपाल इसका जवाब 'हां' में देते हैं. शिवपाल के मुताबिक नई पार्टी मुलायम के नेतृत्व में ही बनाई जा रही है और वही इसके मुखिया होंगे. महागठबंधन में कौन? शिवपाल की माने तो मुलायम सिंह ही समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के अध्यक्ष होंगे. मुलायम फिलहाल समाजवादी पार्टी के संरक्षक हैं और खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के बावजूद अखिलेश यादव मुलायम सिंह को ही मुखिया बताते हैं. फिर तो मुलायम सिंह यादव दो-दो पार्टियों के मुखिया बन जाएंगे. समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के अध्यक्ष और समाजवादी पार्टी के संरक्षक, जिसके वो संस्थापक अध्यक्ष रहे हैं. खबर है कि सोनिया गांधी ने राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन के लिए मुलायम सिंह यादव से भी बात की है. उस महागठबंधन में यूपी से समाजवादी पार्टी के अलावा मायावती ने भी साथ होने के संकेत दिये हुए हैं. अब सवाल है कि मुलायम सिंह किस पार्टी के साथ महागठबंधन में शामिल होंगे? समाजवादी पार्टी के साथ या फिर नई बनने वाली समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के साथ? ऐसा भी तो हो सकता है कि दोनों ही दल महागठबंधन का हिस्सा बन जाएं. फिर तो ये देखना दिलचस्प होगा कि मुलायम सिंह यादव किसके साथ होते हैं. इन्हें भी पढ़ें :
जींद, 25 अक्तूबर (हप्र) शहर की आर्य समाज संस्थाओं द्वारा कश्मीर घाटी की समस्या व बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे कथित अत्याचार के विरोध में राष्ट्रपति के नाम सोमवार डीसी को ज्ञापन सौपा गया। प्रदर्शन की शुरूआत श्री जयंती देवी पार्क में यज्ञ द्वारा की गई। उसके बाद प्रदर्शन शहर के मुख्य बाजारों से होता हुआ डीसी कार्यालय पहुंचा। इस दौरान रास्तेभर नारेबाजी भी की गयी। ज्ञापन में डीसी के माध्यम से राष्ट्रपति से मांग की गयी की कि सरकार सुरक्षाबलों व आतंकवादियों के बीच चल रही मुठभेड़ को सामान्य मुठभेड़ न मान कर विदेशी आतंकवादियों के साथ विदेशी आतंकवादियों जैसा व्यवहार करें। बांग्लादेश में रह रहे हिन्दुओं की सुरक्षा सरकार अपने बलबूते पर या अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सहयोग से सुनिश्चित करें। बांग्लादेश में हिन्दुओं के मंदिर तोड़ना, बहन-बेटियों की इज्जत लूटना, हत्या, लूटपाट व आगजनी रोकने की पूरी कोशिश करें। विरोध प्रदर्शन में गुरुकुल कालवां, कुम्भाखेड़ा, आर्य समाज शहर, जींद जंक्शन, रामनगर, गौरक्षा दल, गायत्री परिवार व विश्व हिन्दू परिषद् इत्यादि संस्थाएं शामिल हुई।
जींद, पच्चीस अक्तूबर शहर की आर्य समाज संस्थाओं द्वारा कश्मीर घाटी की समस्या व बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे कथित अत्याचार के विरोध में राष्ट्रपति के नाम सोमवार डीसी को ज्ञापन सौपा गया। प्रदर्शन की शुरूआत श्री जयंती देवी पार्क में यज्ञ द्वारा की गई। उसके बाद प्रदर्शन शहर के मुख्य बाजारों से होता हुआ डीसी कार्यालय पहुंचा। इस दौरान रास्तेभर नारेबाजी भी की गयी। ज्ञापन में डीसी के माध्यम से राष्ट्रपति से मांग की गयी की कि सरकार सुरक्षाबलों व आतंकवादियों के बीच चल रही मुठभेड़ को सामान्य मुठभेड़ न मान कर विदेशी आतंकवादियों के साथ विदेशी आतंकवादियों जैसा व्यवहार करें। बांग्लादेश में रह रहे हिन्दुओं की सुरक्षा सरकार अपने बलबूते पर या अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सहयोग से सुनिश्चित करें। बांग्लादेश में हिन्दुओं के मंदिर तोड़ना, बहन-बेटियों की इज्जत लूटना, हत्या, लूटपाट व आगजनी रोकने की पूरी कोशिश करें। विरोध प्रदर्शन में गुरुकुल कालवां, कुम्भाखेड़ा, आर्य समाज शहर, जींद जंक्शन, रामनगर, गौरक्षा दल, गायत्री परिवार व विश्व हिन्दू परिषद् इत्यादि संस्थाएं शामिल हुई।
जब आप खड़े होते हैं या चलते हैं, तो आपके पैर बहुत अधिक भार सहन करते हैं। यही कारण है कि पैरों में दर्द होना एक व्यापक समस्या है। यह एड़ी, तलवों, पैर की उंगलियों और मेहराब सहित पैर के एक या कई हिस्सों में हो सकता है। पैरों में दर्द को कम करना कई अलग-अलग तरीकों से किया जा सकता है, जैसे ओवर-द-काउंटर दर्द दवाएं, आराम या आइस पैक। ये घरेलू उपचार वास्तव में प्रभावी हो सकते हैं और उन लोगों के लिए भी उपयोगी हैं जिनके पैरों में गठिया, संक्रमण या सूजन के कारण जोड़ों का दर्द है। पैर में दर्द के घरेलू उपाय के बारे में हम विस्तार से बात करेंगे। पैरों में दर्द क्यों होता है? पैरों में दर्द कुछ चिकित्सीय बीमारियों या जीवनशैली विकल्पों के कारण हो सकता है। सामान्य कारणों में निम्नलिखित शामिल हैंः पैरों में दर्द का एक बड़ा कारण सही तरह से फिट न होने वाले जूते पहनना भी है। ऊँची एड़ी के जूते पहनने से अक्सर पैरों में दर्द हो सकता है क्योंकि वे पैर की उंगलियों पर भार डालते हैं। यदि आपको उच्च प्रभाव वाले व्यायाम या तीव्र एरोबिक जैसी गतिविधियों के दौरान चोट लगती है तो आप पैर दर्द से पीड़ित हो सकते हैं। पैरों के दर्द से संबंधित कुछ चिकित्सीय मुद्दे हैं। आपके पैर में 33 जोड़ होते हैं, और गठिया उनमें से किसी पर भी प्रभाव डाल सकता है। मधुमेह मेलिटस भी कठिनाइयों और पैरों की कई बीमारियों का परिणाम हो सकता है। मधुमेह से पीड़ित लोग नीचे दी गई पैरों की समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैंः - जिन लोगों को मोटापा, या कोई फ्रैक्चर, मोच या टेंडिनिटिस है, उन्हें पैर में दर्द होने का अधिक खतरा होता है। किसी भी पदार्थ का धूम्रपान आपके रक्त प्रवाह पर प्रभाव डाल सकता है, और यह पैरों की समस्याओं की संभावना को भी बढ़ाता है। धूम्रपान से बचें ताकि आपको और जटिलताओं का सामना न करना पड़े। दैनिक व्यायाम आपके शरीर को आपके रक्त शर्करा के स्तर और मधुमेह को स्वाभाविक रूप से नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। अपने मधुमेह को नियंत्रित करने से आपके पैर की नसों में दर्द के लक्षणों में मदद मिल सकती है। यदि आपको पर्याप्त नींद या आराम नहीं मिल रहा है, तो आपके शरीर के पास पिछले दिन के तनाव से ठीक होने का समय नहीं है। नींद की स्वच्छता आपके शरीर को रात में स्वस्थ नींद के लिए तैयार करने के बारे में है। इस प्रकार, यह तंत्रिका दर्द प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण तत्व है। कैफीन से बचने से लेकर सोने से पहले टीवी या लैपटॉप बंद करने तक सब कुछ इसमें शामिल है। एसेंशियल तेलों से मालिश करने से न्यूरोपैथी से जुड़े पैर दर्द से राहत मिल सकती है। कैमोमाइल, पेपरमिंट, सेंट-वोर्ट, जॉन और अदरक लोकप्रिय तेल हैं। यदि आप आवश्यक तेलों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं, तो आपको तंत्रिका दर्द के लिए आवश्यक तेल देना चाहिए क्योंकि इस विषय पर शोध ने अलग-अलग परिणाम दिखाए हैं। पैरों में दर्द किस कमी से होता है? शोध के अनुसार, विटामिन डी की कमी वाले लोग आमतौर पर पैरों में दर्द का अनुभव करते हैं जिसमें झुनझुनी, सुन्नता और मस्कुलोस्केलेटल दर्द शामिल है। चिकित्सा विशेषज्ञ उसी के लिए विटामिन डी की सप्लीमेंट्स लेने की सलाह देते हैं। शरीर का विटामिन डी 12-20 एनजी/एमएल से कम होने पर कम हो जाता है। सौभाग्य से, विटामिन डी3 और विटामिन डी2 के रूप में विटामिन डी की सप्लीमेंट्स के साथ, आप इसे ठीक कर सकते हैं। नसों में खिंचाव से कोई भी व्यक्ति पीड़ित हो सकता है और ऐसे कई कारक हैं जो आपकी संभावना को बढ़ा सकते हैं। ये लिंग, आयु, जीवन शैली, समग्र भलाई और पारिवारिक इतिहास हो सकते हैं। यह स्थिति बहुत प्रचलित है और लगभग 3 में से 1 वयस्क इससे पीड़ित है। हार्मोन, प्रतिबंधात्मक कपड़े, मोटापा और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया अन्य पैर की नसों में खिंचाव के कारण हैं। इनमें से प्रत्येक उपचार की जटिलताओं और दुष्प्रभावों के बारे में आपको पता होना चाहिए। अगर आपको घरेलू उपचार से राहत नहीं मिल रही है तो सबसे अच्छे पैर की नसों में दर्द का इलाज के लिए नजदीकी डॉक्टर के पास पहुंचें।
जब आप खड़े होते हैं या चलते हैं, तो आपके पैर बहुत अधिक भार सहन करते हैं। यही कारण है कि पैरों में दर्द होना एक व्यापक समस्या है। यह एड़ी, तलवों, पैर की उंगलियों और मेहराब सहित पैर के एक या कई हिस्सों में हो सकता है। पैरों में दर्द को कम करना कई अलग-अलग तरीकों से किया जा सकता है, जैसे ओवर-द-काउंटर दर्द दवाएं, आराम या आइस पैक। ये घरेलू उपचार वास्तव में प्रभावी हो सकते हैं और उन लोगों के लिए भी उपयोगी हैं जिनके पैरों में गठिया, संक्रमण या सूजन के कारण जोड़ों का दर्द है। पैर में दर्द के घरेलू उपाय के बारे में हम विस्तार से बात करेंगे। पैरों में दर्द क्यों होता है? पैरों में दर्द कुछ चिकित्सीय बीमारियों या जीवनशैली विकल्पों के कारण हो सकता है। सामान्य कारणों में निम्नलिखित शामिल हैंः पैरों में दर्द का एक बड़ा कारण सही तरह से फिट न होने वाले जूते पहनना भी है। ऊँची एड़ी के जूते पहनने से अक्सर पैरों में दर्द हो सकता है क्योंकि वे पैर की उंगलियों पर भार डालते हैं। यदि आपको उच्च प्रभाव वाले व्यायाम या तीव्र एरोबिक जैसी गतिविधियों के दौरान चोट लगती है तो आप पैर दर्द से पीड़ित हो सकते हैं। पैरों के दर्द से संबंधित कुछ चिकित्सीय मुद्दे हैं। आपके पैर में तैंतीस जोड़ होते हैं, और गठिया उनमें से किसी पर भी प्रभाव डाल सकता है। मधुमेह मेलिटस भी कठिनाइयों और पैरों की कई बीमारियों का परिणाम हो सकता है। मधुमेह से पीड़ित लोग नीचे दी गई पैरों की समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैंः - जिन लोगों को मोटापा, या कोई फ्रैक्चर, मोच या टेंडिनिटिस है, उन्हें पैर में दर्द होने का अधिक खतरा होता है। किसी भी पदार्थ का धूम्रपान आपके रक्त प्रवाह पर प्रभाव डाल सकता है, और यह पैरों की समस्याओं की संभावना को भी बढ़ाता है। धूम्रपान से बचें ताकि आपको और जटिलताओं का सामना न करना पड़े। दैनिक व्यायाम आपके शरीर को आपके रक्त शर्करा के स्तर और मधुमेह को स्वाभाविक रूप से नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। अपने मधुमेह को नियंत्रित करने से आपके पैर की नसों में दर्द के लक्षणों में मदद मिल सकती है। यदि आपको पर्याप्त नींद या आराम नहीं मिल रहा है, तो आपके शरीर के पास पिछले दिन के तनाव से ठीक होने का समय नहीं है। नींद की स्वच्छता आपके शरीर को रात में स्वस्थ नींद के लिए तैयार करने के बारे में है। इस प्रकार, यह तंत्रिका दर्द प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण तत्व है। कैफीन से बचने से लेकर सोने से पहले टीवी या लैपटॉप बंद करने तक सब कुछ इसमें शामिल है। एसेंशियल तेलों से मालिश करने से न्यूरोपैथी से जुड़े पैर दर्द से राहत मिल सकती है। कैमोमाइल, पेपरमिंट, सेंट-वोर्ट, जॉन और अदरक लोकप्रिय तेल हैं। यदि आप आवश्यक तेलों के प्रति संवेदनशील नहीं हैं, तो आपको तंत्रिका दर्द के लिए आवश्यक तेल देना चाहिए क्योंकि इस विषय पर शोध ने अलग-अलग परिणाम दिखाए हैं। पैरों में दर्द किस कमी से होता है? शोध के अनुसार, विटामिन डी की कमी वाले लोग आमतौर पर पैरों में दर्द का अनुभव करते हैं जिसमें झुनझुनी, सुन्नता और मस्कुलोस्केलेटल दर्द शामिल है। चिकित्सा विशेषज्ञ उसी के लिए विटामिन डी की सप्लीमेंट्स लेने की सलाह देते हैं। शरीर का विटामिन डी बारह-बीस एनजी/एमएल से कम होने पर कम हो जाता है। सौभाग्य से, विटामिन डीतीन और विटामिन डीदो के रूप में विटामिन डी की सप्लीमेंट्स के साथ, आप इसे ठीक कर सकते हैं। नसों में खिंचाव से कोई भी व्यक्ति पीड़ित हो सकता है और ऐसे कई कारक हैं जो आपकी संभावना को बढ़ा सकते हैं। ये लिंग, आयु, जीवन शैली, समग्र भलाई और पारिवारिक इतिहास हो सकते हैं। यह स्थिति बहुत प्रचलित है और लगभग तीन में से एक वयस्क इससे पीड़ित है। हार्मोन, प्रतिबंधात्मक कपड़े, मोटापा और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया अन्य पैर की नसों में खिंचाव के कारण हैं। इनमें से प्रत्येक उपचार की जटिलताओं और दुष्प्रभावों के बारे में आपको पता होना चाहिए। अगर आपको घरेलू उपचार से राहत नहीं मिल रही है तो सबसे अच्छे पैर की नसों में दर्द का इलाज के लिए नजदीकी डॉक्टर के पास पहुंचें।
बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. Priyanka Chopra Nick Jonas First Marriage Anniversary: एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा और अमेरिकन सिंगर निक जोनस आज अपनी शादी की पहली सालगिरह मना रहे हैं. आज 1 दिसंबर को उनकी शादी को पूरा 1 साल हो गया है. प्रियंका और निक ने पिछले साल राजस्थान के जोधपुर में हिंदू और क्रिश्चियन रीति-रिवाज से शादी की. सोशल मीडिया पर उनकी शादी के कई फोटो वीडियो भी वायरल हुए थे. प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस सोशल मीडिया पर अपने प्यार को इजहार करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते हैं. प्रियंका और निक की पहली मुलाकात प्रियंका के शो क्वांटिको के दौरान म्यूचल फ्रेंड एक्टर ग्रैहम रॉजर्स के जरिए हुई. इसके बाद दोनों की दोस्ती हुई. दोस्ती के साथ-साथ दोनों एक-दूसरे की कंपनी भी एंज्वॉय करने लगे और धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई. एक इंटरव्यू के दौरान निक जोनस ने बताया था कि उन्हें पहली ही नजर में प्रियंका चोपड़ा से प्यार हो गया था और तीन डेट के बाद ही उन्होंने प्रियंका को प्रपोज कर दिया. निक जोनस प्रियंका चोपड़ा से करीब 10 साल छोटे हैं, लेकिन प्रियंका उन्हें काफी इंटेलिजेंट मानती हैं. इसलिए वो निक को ओल्ड जोनस भी कहती हैं. प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस सोशल मीडिया पर कई बार एक साथ अपनी रोमांटिक फोटो भी शेयर करते रहते हैं. प्रियंखा चोपड़ा ने अपने बिजी शेड्यूल के बीच विदेश में भी पहला करवा चौथ को पूरे रीति रिवाज के साथ मनाया था. उन्होंने फैंस के साथ अपने पहले करवा चौथ की फोटो फैंस के साथ भी शेयर की. जो फैंस को खूब पसंद आई थी.
बॉलीवुड डेस्क, मुंबई. Priyanka Chopra Nick Jonas First Marriage Anniversary: एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा और अमेरिकन सिंगर निक जोनस आज अपनी शादी की पहली सालगिरह मना रहे हैं. आज एक दिसंबर को उनकी शादी को पूरा एक साल हो गया है. प्रियंका और निक ने पिछले साल राजस्थान के जोधपुर में हिंदू और क्रिश्चियन रीति-रिवाज से शादी की. सोशल मीडिया पर उनकी शादी के कई फोटो वीडियो भी वायरल हुए थे. प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस सोशल मीडिया पर अपने प्यार को इजहार करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते हैं. प्रियंका और निक की पहली मुलाकात प्रियंका के शो क्वांटिको के दौरान म्यूचल फ्रेंड एक्टर ग्रैहम रॉजर्स के जरिए हुई. इसके बाद दोनों की दोस्ती हुई. दोस्ती के साथ-साथ दोनों एक-दूसरे की कंपनी भी एंज्वॉय करने लगे और धीरे-धीरे दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई. एक इंटरव्यू के दौरान निक जोनस ने बताया था कि उन्हें पहली ही नजर में प्रियंका चोपड़ा से प्यार हो गया था और तीन डेट के बाद ही उन्होंने प्रियंका को प्रपोज कर दिया. निक जोनस प्रियंका चोपड़ा से करीब दस साल छोटे हैं, लेकिन प्रियंका उन्हें काफी इंटेलिजेंट मानती हैं. इसलिए वो निक को ओल्ड जोनस भी कहती हैं. प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस सोशल मीडिया पर कई बार एक साथ अपनी रोमांटिक फोटो भी शेयर करते रहते हैं. प्रियंखा चोपड़ा ने अपने बिजी शेड्यूल के बीच विदेश में भी पहला करवा चौथ को पूरे रीति रिवाज के साथ मनाया था. उन्होंने फैंस के साथ अपने पहले करवा चौथ की फोटो फैंस के साथ भी शेयर की. जो फैंस को खूब पसंद आई थी.
अमरावती/दि. 12- विगत बुधवार को राजापेठ रेलवे अंडरपास में स्याही फेंके जाने की घटना का शिकार हुए मनपा आयुक्त डॉ. प्रवीण आष्टीकर से मुलाकात करने और उनका हालचाल जानने हेतु जिले की सांसद नवनीत राणा आज उनके आवास पर पहुंची. किंतु अपनी तबियत खराब रहने तथा डॉक्टर द्वारा आराम करने की सलाह दिये जाने की वजह को आगे करते हुए आयुक्त आष्टीकर ने सांसद नवनीत राणा से मिलने से इन्कार कर दिया. जिसके चलते अपने दर्जनों समर्थकों के साथ आयुक्त आवास पर पहुंची सांसद नवनीत राणा को बाहर से ही उलटे पांव वापिस लौटना पडा. बता दें कि, विगत बुधवार को जब अमरावती में आयुक्त आष्टीकर पर स्याही फेंके जाने की घटना घटित हुई. उस समय संसद की कार्रवाई जारी रहने के चलते सांसद नवनीत राणा राजधानी दिल्ली में थी और आज शनिवार की सुबह ही वे दिल्ली से अमरावती वापिस लौटी. जिसके बाद उन्होंने अपने आवास पर एक पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि, पत्रवार्ता के बाद वे जिले की जिम्मेदार सांसद होने के नाते मनपा आयुक्त से मुलाकात करने और उनका हालचाल लेने हेतु आयुक्त के सरकार आवास पर जा रही है. पश्चात सांसद नवनीत राणा अपने कुछ समर्थकों के साथ कैम्प परिसर स्थित मनपा आयुक्त के सरकारी आवास पर पहुंची. जहां पर मीडिया का भी काफी जमावडा लगा हुआ था. किंतु आयुक्त के आवास पर तैनात सुरक्षा रक्षकों ने किसी को भी भीतर जाने की अनुमति प्रदान नहीं की. वहीं भीतर से यह संदेश दिया गया कि, आयुक्त आष्टीकर की तबियत खराब और डॉक्टर ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है. अतः वे किसी से मिलना नहीं चाहते. इसके बाद सांसद नवनीत राणा अपने समर्थकों के साथ वहां से वापिस लौट गई. आयुक्त आवास से वापिस लौटते समय सांसद नवनीत राणा ने मीडिया कर्मियों के साथ संवाद साधते हुए कहा कि, पार्टी और राजनीति बेहद अलग बात है और आज जिले की एक जिम्मेदार सांसद होने के नाते विगत बुधवार को हुई घटना के मद्देनजर वे मनपा आयुक्त के पद पर विराजमान वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का हालचाल लेने हेतु पहुंची थी. किंतु चूंकि इस समय आयुक्त आष्टीकर जबर्दस्त राजनीतिक दबाव में है और कहीं न कहीं राजनीतिक मोहरा बने हुए है. अतः उन्होंने जिले की सांसद से मिलने से मना कर दिया. यह अकेले नवनीत राणा का अपमान नहीं है, बल्कि मुझे जिले की सांसद चुननेवाले हर एक व्यक्ति का अपमान है. जिसके लिए पूरी तरह से निगमायुक्त प्रशांत रोडे जिम्मेदार है. निगमायुक्त डॉ. प्रवीण आष्टीकर के आवास से वापिस लौटने के बाद सांसद नवनीत राणा राजापेठ पुलिस थाने पहुंची. जहां पर उन्होंने पुलिस उपायुक्त विक्रम साली के साथ मुलाकात करते हुए पूरे मामले को लेकर जानकारी प्राप्त की. थानेदार मनीष ठाकरे के कक्ष में हुई इस चर्चा के दौरान मीडिया को कक्ष के भीतर प्रवेश नहीं दिया गया था. ऐसे में सांसद नवनीत राणा व पुलिस उपायुक्त साली के बीच क्या चर्चा हुई, इसका ब्यौरा फिलहाल उपलब्ध नहीं हुआ है.
अमरावती/दि. बारह- विगत बुधवार को राजापेठ रेलवे अंडरपास में स्याही फेंके जाने की घटना का शिकार हुए मनपा आयुक्त डॉ. प्रवीण आष्टीकर से मुलाकात करने और उनका हालचाल जानने हेतु जिले की सांसद नवनीत राणा आज उनके आवास पर पहुंची. किंतु अपनी तबियत खराब रहने तथा डॉक्टर द्वारा आराम करने की सलाह दिये जाने की वजह को आगे करते हुए आयुक्त आष्टीकर ने सांसद नवनीत राणा से मिलने से इन्कार कर दिया. जिसके चलते अपने दर्जनों समर्थकों के साथ आयुक्त आवास पर पहुंची सांसद नवनीत राणा को बाहर से ही उलटे पांव वापिस लौटना पडा. बता दें कि, विगत बुधवार को जब अमरावती में आयुक्त आष्टीकर पर स्याही फेंके जाने की घटना घटित हुई. उस समय संसद की कार्रवाई जारी रहने के चलते सांसद नवनीत राणा राजधानी दिल्ली में थी और आज शनिवार की सुबह ही वे दिल्ली से अमरावती वापिस लौटी. जिसके बाद उन्होंने अपने आवास पर एक पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए कहा कि, पत्रवार्ता के बाद वे जिले की जिम्मेदार सांसद होने के नाते मनपा आयुक्त से मुलाकात करने और उनका हालचाल लेने हेतु आयुक्त के सरकार आवास पर जा रही है. पश्चात सांसद नवनीत राणा अपने कुछ समर्थकों के साथ कैम्प परिसर स्थित मनपा आयुक्त के सरकारी आवास पर पहुंची. जहां पर मीडिया का भी काफी जमावडा लगा हुआ था. किंतु आयुक्त के आवास पर तैनात सुरक्षा रक्षकों ने किसी को भी भीतर जाने की अनुमति प्रदान नहीं की. वहीं भीतर से यह संदेश दिया गया कि, आयुक्त आष्टीकर की तबियत खराब और डॉक्टर ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है. अतः वे किसी से मिलना नहीं चाहते. इसके बाद सांसद नवनीत राणा अपने समर्थकों के साथ वहां से वापिस लौट गई. आयुक्त आवास से वापिस लौटते समय सांसद नवनीत राणा ने मीडिया कर्मियों के साथ संवाद साधते हुए कहा कि, पार्टी और राजनीति बेहद अलग बात है और आज जिले की एक जिम्मेदार सांसद होने के नाते विगत बुधवार को हुई घटना के मद्देनजर वे मनपा आयुक्त के पद पर विराजमान वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का हालचाल लेने हेतु पहुंची थी. किंतु चूंकि इस समय आयुक्त आष्टीकर जबर्दस्त राजनीतिक दबाव में है और कहीं न कहीं राजनीतिक मोहरा बने हुए है. अतः उन्होंने जिले की सांसद से मिलने से मना कर दिया. यह अकेले नवनीत राणा का अपमान नहीं है, बल्कि मुझे जिले की सांसद चुननेवाले हर एक व्यक्ति का अपमान है. जिसके लिए पूरी तरह से निगमायुक्त प्रशांत रोडे जिम्मेदार है. निगमायुक्त डॉ. प्रवीण आष्टीकर के आवास से वापिस लौटने के बाद सांसद नवनीत राणा राजापेठ पुलिस थाने पहुंची. जहां पर उन्होंने पुलिस उपायुक्त विक्रम साली के साथ मुलाकात करते हुए पूरे मामले को लेकर जानकारी प्राप्त की. थानेदार मनीष ठाकरे के कक्ष में हुई इस चर्चा के दौरान मीडिया को कक्ष के भीतर प्रवेश नहीं दिया गया था. ऐसे में सांसद नवनीत राणा व पुलिस उपायुक्त साली के बीच क्या चर्चा हुई, इसका ब्यौरा फिलहाल उपलब्ध नहीं हुआ है.
कालका - उपमंडल के गांव मंडावाला में चल रहे दिव्य ज्योति चेरिटेबल ट्रस्ट स्कूल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समाजसेवी मानसिंह मुख्य अतिथि रहे कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा ज्योति प्रज्जवलित कर किया गया, वहीं कार्यक्रम में स्कूली बच्चों द्वारा कई प्रकार के नाटक व गीत पेश किए गए। स्कूली बच्चों द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर विशेष नाटिका पेश की गई, जिसे देख समारोह में उपस्थित सभी लोगों ने बच्चों की्र प्रशंसा की। कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि व अतिथियों ने बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की, वहीं स्कूल की प्रधानाचार्य अंबिका महापात्रा ने स्कूली कार्यक्रम को सफ ल बनाने के लिए स्कूली बच्चों व लोगों का धन्यवाद किया और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस मौके पर आसपास क्षेत्र के सभी समाजसेवी व्यक्तियों ने शिरकत की। इस अवसर पर और बद्दी सच्चो फिरोज खान अतिथि से समारोह में आए अतिथियों ने ज्योति प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया, वहीं कार्यक्रम स्कूली बच्चों द्वारा विभिन्न प्रकार के डिस्टर्ब दृश्य नाटक पेश कर लोगों का मन मोह लिया। बच्चों द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर विशेष रूप से इस अवसर पर संस्था के चेयरमैन मानस महापात्रा और भाई चेयरमैन लाल मोहम्मद चौधरी हरदीप सिंह अमर सिंह भूपेंद्र सिंह साबर दीन और समीम उपस्थित रहे।
कालका - उपमंडल के गांव मंडावाला में चल रहे दिव्य ज्योति चेरिटेबल ट्रस्ट स्कूल में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समाजसेवी मानसिंह मुख्य अतिथि रहे कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा ज्योति प्रज्जवलित कर किया गया, वहीं कार्यक्रम में स्कूली बच्चों द्वारा कई प्रकार के नाटक व गीत पेश किए गए। स्कूली बच्चों द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर विशेष नाटिका पेश की गई, जिसे देख समारोह में उपस्थित सभी लोगों ने बच्चों की्र प्रशंसा की। कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथि व अतिथियों ने बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की, वहीं स्कूल की प्रधानाचार्य अंबिका महापात्रा ने स्कूली कार्यक्रम को सफ ल बनाने के लिए स्कूली बच्चों व लोगों का धन्यवाद किया और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस मौके पर आसपास क्षेत्र के सभी समाजसेवी व्यक्तियों ने शिरकत की। इस अवसर पर और बद्दी सच्चो फिरोज खान अतिथि से समारोह में आए अतिथियों ने ज्योति प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया, वहीं कार्यक्रम स्कूली बच्चों द्वारा विभिन्न प्रकार के डिस्टर्ब दृश्य नाटक पेश कर लोगों का मन मोह लिया। बच्चों द्वारा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ पर विशेष रूप से इस अवसर पर संस्था के चेयरमैन मानस महापात्रा और भाई चेयरमैन लाल मोहम्मद चौधरी हरदीप सिंह अमर सिंह भूपेंद्र सिंह साबर दीन और समीम उपस्थित रहे।
Noamundi (Sandip Kumar Prasad) : शुक्रवार को गुवा के नुईयां गांव में घाटकुड़ी आयरन ओर माइंस के मजदूरों की मानसिंह तिरिया जिला परिषद सदस्य सह झारखंड जनरल कामगार यूनियन के जिला अध्यक्ष की अध्यक्षता में बैठक की गई. बैठक में आयरन ओर माइंस के मजदूरों की ग्रेच्युटी के फाइनल हिसाब को लेकर चर्चा की गई. गुवा घाटकुड़ी आयरन ओर माइंस में कार्यरत मजदूरों ने कहा 2002 से 2020 तक हम लोग रुंगटा कंपनी में लगभग 500 मजदूर कार्यरत थे जिसका फाइनल ग्रेच्युटी का हिसाब अब तक नहीं मिला है जिसके कारण हम सभी को आंदोलन करना पड़ रहा है. फुल एंड फाइनल ग्रेच्युटी का मामला सहायक श्रमायुक्त केंद्रीय चाईबासा के समक्ष विचाराधीन है. लगभग 400 मजदूरों ने फॉर्म एन भरकर जमा किया है और 33 मजदूरों का ही विचाराधीन चल रहा है. बाकी मजदूरों का फाइल कहां रुका हुआ है इस बात की जानकारी किसी को नहीं है इसी बात को लेकर मजदूर नाराज हैं. बाकी लोगों का फाइल कब खुलेगा? मजदूरों ने यह भी बताया कि रुंगटा माइंस लीज होने की ओर बढ़ रहा है. जिला अध्यक्ष ने मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक हक के लिए आंदोलन नहीं करेंगे तब तक आपको हक नहीं मिलेगा. मजदूरों की लड़ाई केवल 33 मजदूरों की नहीं है हमारी पहली मांग है कि लगभग 500 मजदूरों का ग्रेच्युटी का हिसाब है. मजदूरों का बकाया ग्रेच्युटी का फाइनल भुगतान करें. खदान खुलने से पूर्व में मजदूरों ने काम किया है. दूसरा खदानें अगर खुलती हैं तो उन्हीं मजदूरों को काम पर रखा जाए जो मजदूर पहले से काम कर रहे थे तथा उनके परिवार से भी चिन्हित कर परिवार को लोगों को ही काम पर रखा जाए. आगामी 19 सितंबर को 33 मजदूरों के बयान पर सभी मजदूर अपना वेज स्लिप, पहचान पत्र, पीएफ आदि लेकर सहायक श्रम आयुक्त चाईबासा जाएंगे. मौके पर प्रधान वोयपाई, सुदेश लोहरा, ठाकुर सोरेन, लक्ष्मण बालमुचु, चरण सोरेन, बजय देवगम, मार्कस सोए आदि महिला पुरुष मजदूर उपस्थित थे.
Noamundi : शुक्रवार को गुवा के नुईयां गांव में घाटकुड़ी आयरन ओर माइंस के मजदूरों की मानसिंह तिरिया जिला परिषद सदस्य सह झारखंड जनरल कामगार यूनियन के जिला अध्यक्ष की अध्यक्षता में बैठक की गई. बैठक में आयरन ओर माइंस के मजदूरों की ग्रेच्युटी के फाइनल हिसाब को लेकर चर्चा की गई. गुवा घाटकुड़ी आयरन ओर माइंस में कार्यरत मजदूरों ने कहा दो हज़ार दो से दो हज़ार बीस तक हम लोग रुंगटा कंपनी में लगभग पाँच सौ मजदूर कार्यरत थे जिसका फाइनल ग्रेच्युटी का हिसाब अब तक नहीं मिला है जिसके कारण हम सभी को आंदोलन करना पड़ रहा है. फुल एंड फाइनल ग्रेच्युटी का मामला सहायक श्रमायुक्त केंद्रीय चाईबासा के समक्ष विचाराधीन है. लगभग चार सौ मजदूरों ने फॉर्म एन भरकर जमा किया है और तैंतीस मजदूरों का ही विचाराधीन चल रहा है. बाकी मजदूरों का फाइल कहां रुका हुआ है इस बात की जानकारी किसी को नहीं है इसी बात को लेकर मजदूर नाराज हैं. बाकी लोगों का फाइल कब खुलेगा? मजदूरों ने यह भी बताया कि रुंगटा माइंस लीज होने की ओर बढ़ रहा है. जिला अध्यक्ष ने मजदूरों को संबोधित करते हुए कहा कि जब तक हक के लिए आंदोलन नहीं करेंगे तब तक आपको हक नहीं मिलेगा. मजदूरों की लड़ाई केवल तैंतीस मजदूरों की नहीं है हमारी पहली मांग है कि लगभग पाँच सौ मजदूरों का ग्रेच्युटी का हिसाब है. मजदूरों का बकाया ग्रेच्युटी का फाइनल भुगतान करें. खदान खुलने से पूर्व में मजदूरों ने काम किया है. दूसरा खदानें अगर खुलती हैं तो उन्हीं मजदूरों को काम पर रखा जाए जो मजदूर पहले से काम कर रहे थे तथा उनके परिवार से भी चिन्हित कर परिवार को लोगों को ही काम पर रखा जाए. आगामी उन्नीस सितंबर को तैंतीस मजदूरों के बयान पर सभी मजदूर अपना वेज स्लिप, पहचान पत्र, पीएफ आदि लेकर सहायक श्रम आयुक्त चाईबासा जाएंगे. मौके पर प्रधान वोयपाई, सुदेश लोहरा, ठाकुर सोरेन, लक्ष्मण बालमुचु, चरण सोरेन, बजय देवगम, मार्कस सोए आदि महिला पुरुष मजदूर उपस्थित थे.
महात्मा कबीर, वाल्मीकि, दादूदयाल और रैदास आदिको जन्मना शुद्र आदि न मानते हुए महात्मा कोटि में मानकर उनका मान करना, भारतीय सभ्यता हमें सिखा रही है । २५ - जो व्यक्ति ब्राह्मणों की तरह विद्या एवं ज्ञान प्राप्त नहीं करता; जो क्षत्रिय की भाँति अवसर आने पर धर्म, समाज, परिवार, स्त्रियों, बालकों की रक्षा नहीं करता; वैश्यों की भाँति जो देश के हानि-लाभ को ध्यान में रखकर कार्य नहीं करता और जो देश की तथा पूज्य पुरुषों की सेवा के लिए शुद्ध की तरह दौड़ नहीं पड़ता, वह असभ्य है । २६ - महापुरुषों का, विद्वानों का, समाज और देश के शुभचिंतक सेवकों का कभी भी निरादर मत करो । इन्हीं के पुण्य-वल पर संसार चल रहा है । जब कभी ऐसे साधु प्रति हृदय में ईर्ष्या या अनादर के भाव जागरित हों तब समझ लो कि सभ्यता ने तुम्हें त्याग दिया है । २७ - विद्वत्ता और साधुता, एक दूसरे पर किताबों में लिखी सामग्री रट लेने से या मस्तिष्क में किसी विषय को हँस लेने से कोई साधु नहीं हो जाता । विद्वत्ता मस्तिष्क है तो साधुता मस्तिष्क और हृदय का पूर्ण विकास हूँ । विद्वान भी नीच हो सकता है और पति भी साधु हो सकता है । विद्या प्राप्त करके दूसरों पर यह सिद्ध करना कि "हम साधु हैं, मजन हैं" विद्या का अनादर करना है । २८ - केवल गेरुण वस्त्र पहिन लेने से, या सिर मुँडा लेने से अथवा जटा रख लेने से कोई व्यक्ति साधु नहीं हो जाता। यह तो वह प्राचीन लिवास है जिसे हमारे प्राचीन त्यागी पुरुषों ने धारण किया था। आजकल जो गे वस्त्र पहनते हैं वे सभी माधु नहीं हैं, और न साधारण दूसरे वस्त्र धारण करने वाले हैं । हृदय में साधुता न होते हुए साधुओं की-सी वेश-भूषा धारण करना, ढोंग और पाखण्ड बनाकर अपनी साधुता का सार्टीफिकेट पेश करना लोगों को धोखा देना है। २६ - इन रँगे सियारों के तुल्य माधुओं और मन्यासियों का आदर करना, उन्हें भोजन-वस्त्र देकर तुष्ट करना ग़लती है । हिन्दू शास्त्रों में आतिथ्य-सत्कार, और दान का माहात्म्य वर्णित है; किन्तु पात्रापात्र का ध्यान न रखकर जो अतिथि सत्कार और दान आदि कार्य करता है वह बड़ी भारी भूल करता है। बिना पात्रापात्र का विचार किये अतिथि को दान देने की दूपित विधि ने ही देश में आलसी भिखमङ्गों की वृद्धि की है । इसका परिणाम जो होना चाहिए वही हुआ भी । लिखा है"अपूज्या यत्र पूज्यन्ते पूजार्हाच व्यतिक्रमः । त्रीणि तत्र भविष्यन्ति दुर्भिक्षं मरणं भयम् ॥" अर्थान जहाँ पूज्यों का आदर और पूज्यों का अनादर होता है. वहाँ दुर्भिक्ष, अकालमृत्यु, और भय का दौर-दौरा बना रहता है। हम इतने नासमझ हो गये हैं कि आगा-पीछा कुछ न सोचकर मूख और आलसियों की केवल ऊपरी वेशभूपा पर से पूजा करते हैं। उसका वह आदर होता है कि किसी भले आदमी का भी नहीं होता । जब मूर्ख और दुष्टों का भी सम्मान होता है तब ज्ञानी और सज्जन होने की आवश्यकता ही क्या रह जाती है । ३० - गाँवों में या बड़े शहरों में पूजास्थान ( मंदिर, मस्जिद) अधिक नहीं बनवाना चाहिए । क्योंकि उपासना के लिए सारे गाँव में एक दो ही स्थल निश्चित होना ठीक हैं। क्योंकि मन्दिर या मस्जिद आदि या तो एक पाटीया गुट्ट अपना अलग बनवाता है या कोई धनी कीर्ति और धर्म लाभ के लिए तैयार कराता है। ये दोनों ही भूल में हैं। धन का सदुपयोग केवल मंदिर या मस्जिद बना देने में ही नहीं हो जाता । मन्दिरों के अलावा बहुत से सार्वजनिक तथा लोकोपकारी कामों में धन का उपयोग हो सकता है । ३१ - बहुतेरे पैसेवाले, अपना नाम कमाने के लिए नये मन्दिर बनवाते हैं। ऐसा करना बहुत अच्छा नहीं है । यह तो दम्भ है । इससे न तो समाज में भक्ति की वृद्धि होती है और न दानी को मुक्ति का मार्ग ही मिलता है। ऐसे लोगों के बनायें मन्दिर उनके मरजाने पर प्रायः अपूज्य होते देखे गये हैं। ३२ - धर्म नामक तत्व, मन्दिरों, मस्जिदों और गिर्जों में निवास नहीं करता । वह तो हृदय की वस्तु है । जिस हृदय में पवित्रता हूँ वहीं धर्मदेव का निवास है। धर्म एकदेशीय हैं या किसी व्यक्ति विशेष की वस्तु है, ऐसा सिद्ध करनेवाले और मानने वाले मूर्खों की दुनिया में रहते हैं । ३३-धर्म के नाम पर धन बटोरना और फिर कार्यों में खर्च न करना धन देनेवालों को साफ धोखा देना है। जो लोग धर्म के नाम पर कुछ लेते हैं, उन्हें उसका व्यय परोपकार में ही करना चाहिए। धर्मस्थानों के संचालक जैसे पुजारी, मठाधीश, महन्त, काज़ी, मुल्ला या पादरी आदि का कर्तव्य है कि धर्म के नाम पर उनको जो दान मिलता है उसका उपयोग केवल लोकोपकारी कार्यों तथा ऐसे ही अन्य अच्छे कामों में करना चाहिए । ३४ - धर्मस्थानों के पास किसी प्रकार का शोरोगुल करना चुरी बात है। इसी तरह उनके आसपास गन्दगी फैलाना या और दूसरे कुकृत्य करना असभ्यता है। धर्मस्थानों के वे अधिकारी बुरा करते हैं जो उन स्थानों को अपने निजी व्यवहार में लाते हैं । सार्वजनिक जगह किसी व्यक्ति विशेष का निवास स्थान नहीं होना चाहिए । ३५ - धर्म के नाम पर एक दूसरे मत-पन्थ के लोगों का में झगड़ा करना जंगलीपन है । जो सभ्य कहलाते हैं वे धर्म के नाम पर कदापि लड़ाई खड़ी नहीं करते । मूर्खों ने धर्म का दायरा संकुचित कर दिया है। यही कारण है कि आए दिन हमारे देश में मन्दिर और मस्जिद के मसले को लेकर सैकड़ों लोग लड़ मरते हैं। वह धर्म ही नहीं जो एक दूसरे से लड़ने और मारपीट करने की आज्ञा दे । धर्म के बहाने मनुष्य जाति का खून बहाना असभ्यता है । वह धर्म नहीं है जो एक भाई पर दूसरे भाई को हाथ उठाने की आज्ञा देता है । ३६ - यह कितनी अभ्यता है कि मन्दिर के शंख और घण्टे-घड़ियाल की ध्वनि से मस्जिद के सर्वव्यापी अल्लाह नाराज़ हो जाते हैं और मस्जिद में की "अल्लाहो अकबर की ध्वनि से भगवान क्षीरसागर की ओर पलायन कर जाते हैं । हिन्दुओं के धार्मिक भावों की रक्षा के लिए ताजिये नहीं सरक कर मुसलमानों के धार्मिक कार्य में अड़नेवाले वृक्ष की टहनी नहीं तोड़ सकते । इस प्रकार के हठ और दुराग्रह को सभ्यता नहीं कहा जा सकता । इस धर्माडम्बर से देश को हानि होरही है । दोनों की असभ्यता दोनों ही के गले की छुरी बन गई है। "हिन्दू वो मुस्लिम एक है दोनोंयानी ये दोनों एशियाई हैं । हमवतन, हमजुवानो हमकिस्मत ---- क्यों न कह दूं कि भाई-भाई हैं । " ३७-सूने मन्दिरों की प्रतिमाओं पर, क़बरों पर तथा किसी के धार्मिक चिन्हों पर थूकना, पेशाब करना, धूल फेंकना, पत्थर मारना तथा किसी अन्य उन्हें नित करना पशुता है। और वह पशु से भी आगे है जो उन्हें नष्ट-भ्रष्ट करता है । ३८ - आर्य सभ्यता ने हमें सोलह संस्कार सिखायें हैं जो हमें सभ्य बनाने के लिए पर्याप्त हैं। इनसे विमुख होकर ही हिन्दुओं ने सभ्यता को खोया है। जो अपनी खोई सभ्यता प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें प्राचीन संस्कारों से प्रेम करना चाहिए । जीवन में जितने
महात्मा कबीर, वाल्मीकि, दादूदयाल और रैदास आदिको जन्मना शुद्र आदि न मानते हुए महात्मा कोटि में मानकर उनका मान करना, भारतीय सभ्यता हमें सिखा रही है । पच्चीस - जो व्यक्ति ब्राह्मणों की तरह विद्या एवं ज्ञान प्राप्त नहीं करता; जो क्षत्रिय की भाँति अवसर आने पर धर्म, समाज, परिवार, स्त्रियों, बालकों की रक्षा नहीं करता; वैश्यों की भाँति जो देश के हानि-लाभ को ध्यान में रखकर कार्य नहीं करता और जो देश की तथा पूज्य पुरुषों की सेवा के लिए शुद्ध की तरह दौड़ नहीं पड़ता, वह असभ्य है । छब्बीस - महापुरुषों का, विद्वानों का, समाज और देश के शुभचिंतक सेवकों का कभी भी निरादर मत करो । इन्हीं के पुण्य-वल पर संसार चल रहा है । जब कभी ऐसे साधु प्रति हृदय में ईर्ष्या या अनादर के भाव जागरित हों तब समझ लो कि सभ्यता ने तुम्हें त्याग दिया है । सत्ताईस - विद्वत्ता और साधुता, एक दूसरे पर किताबों में लिखी सामग्री रट लेने से या मस्तिष्क में किसी विषय को हँस लेने से कोई साधु नहीं हो जाता । विद्वत्ता मस्तिष्क है तो साधुता मस्तिष्क और हृदय का पूर्ण विकास हूँ । विद्वान भी नीच हो सकता है और पति भी साधु हो सकता है । विद्या प्राप्त करके दूसरों पर यह सिद्ध करना कि "हम साधु हैं, मजन हैं" विद्या का अनादर करना है । अट्ठाईस - केवल गेरुण वस्त्र पहिन लेने से, या सिर मुँडा लेने से अथवा जटा रख लेने से कोई व्यक्ति साधु नहीं हो जाता। यह तो वह प्राचीन लिवास है जिसे हमारे प्राचीन त्यागी पुरुषों ने धारण किया था। आजकल जो गे वस्त्र पहनते हैं वे सभी माधु नहीं हैं, और न साधारण दूसरे वस्त्र धारण करने वाले हैं । हृदय में साधुता न होते हुए साधुओं की-सी वेश-भूषा धारण करना, ढोंग और पाखण्ड बनाकर अपनी साधुता का सार्टीफिकेट पेश करना लोगों को धोखा देना है। छब्बीस - इन रँगे सियारों के तुल्य माधुओं और मन्यासियों का आदर करना, उन्हें भोजन-वस्त्र देकर तुष्ट करना ग़लती है । हिन्दू शास्त्रों में आतिथ्य-सत्कार, और दान का माहात्म्य वर्णित है; किन्तु पात्रापात्र का ध्यान न रखकर जो अतिथि सत्कार और दान आदि कार्य करता है वह बड़ी भारी भूल करता है। बिना पात्रापात्र का विचार किये अतिथि को दान देने की दूपित विधि ने ही देश में आलसी भिखमङ्गों की वृद्धि की है । इसका परिणाम जो होना चाहिए वही हुआ भी । लिखा है"अपूज्या यत्र पूज्यन्ते पूजार्हाच व्यतिक्रमः । त्रीणि तत्र भविष्यन्ति दुर्भिक्षं मरणं भयम् ॥" अर्थान जहाँ पूज्यों का आदर और पूज्यों का अनादर होता है. वहाँ दुर्भिक्ष, अकालमृत्यु, और भय का दौर-दौरा बना रहता है। हम इतने नासमझ हो गये हैं कि आगा-पीछा कुछ न सोचकर मूख और आलसियों की केवल ऊपरी वेशभूपा पर से पूजा करते हैं। उसका वह आदर होता है कि किसी भले आदमी का भी नहीं होता । जब मूर्ख और दुष्टों का भी सम्मान होता है तब ज्ञानी और सज्जन होने की आवश्यकता ही क्या रह जाती है । तीस - गाँवों में या बड़े शहरों में पूजास्थान अधिक नहीं बनवाना चाहिए । क्योंकि उपासना के लिए सारे गाँव में एक दो ही स्थल निश्चित होना ठीक हैं। क्योंकि मन्दिर या मस्जिद आदि या तो एक पाटीया गुट्ट अपना अलग बनवाता है या कोई धनी कीर्ति और धर्म लाभ के लिए तैयार कराता है। ये दोनों ही भूल में हैं। धन का सदुपयोग केवल मंदिर या मस्जिद बना देने में ही नहीं हो जाता । मन्दिरों के अलावा बहुत से सार्वजनिक तथा लोकोपकारी कामों में धन का उपयोग हो सकता है । इकतीस - बहुतेरे पैसेवाले, अपना नाम कमाने के लिए नये मन्दिर बनवाते हैं। ऐसा करना बहुत अच्छा नहीं है । यह तो दम्भ है । इससे न तो समाज में भक्ति की वृद्धि होती है और न दानी को मुक्ति का मार्ग ही मिलता है। ऐसे लोगों के बनायें मन्दिर उनके मरजाने पर प्रायः अपूज्य होते देखे गये हैं। बत्तीस - धर्म नामक तत्व, मन्दिरों, मस्जिदों और गिर्जों में निवास नहीं करता । वह तो हृदय की वस्तु है । जिस हृदय में पवित्रता हूँ वहीं धर्मदेव का निवास है। धर्म एकदेशीय हैं या किसी व्यक्ति विशेष की वस्तु है, ऐसा सिद्ध करनेवाले और मानने वाले मूर्खों की दुनिया में रहते हैं । तैंतीस-धर्म के नाम पर धन बटोरना और फिर कार्यों में खर्च न करना धन देनेवालों को साफ धोखा देना है। जो लोग धर्म के नाम पर कुछ लेते हैं, उन्हें उसका व्यय परोपकार में ही करना चाहिए। धर्मस्थानों के संचालक जैसे पुजारी, मठाधीश, महन्त, काज़ी, मुल्ला या पादरी आदि का कर्तव्य है कि धर्म के नाम पर उनको जो दान मिलता है उसका उपयोग केवल लोकोपकारी कार्यों तथा ऐसे ही अन्य अच्छे कामों में करना चाहिए । चौंतीस - धर्मस्थानों के पास किसी प्रकार का शोरोगुल करना चुरी बात है। इसी तरह उनके आसपास गन्दगी फैलाना या और दूसरे कुकृत्य करना असभ्यता है। धर्मस्थानों के वे अधिकारी बुरा करते हैं जो उन स्थानों को अपने निजी व्यवहार में लाते हैं । सार्वजनिक जगह किसी व्यक्ति विशेष का निवास स्थान नहीं होना चाहिए । पैंतीस - धर्म के नाम पर एक दूसरे मत-पन्थ के लोगों का में झगड़ा करना जंगलीपन है । जो सभ्य कहलाते हैं वे धर्म के नाम पर कदापि लड़ाई खड़ी नहीं करते । मूर्खों ने धर्म का दायरा संकुचित कर दिया है। यही कारण है कि आए दिन हमारे देश में मन्दिर और मस्जिद के मसले को लेकर सैकड़ों लोग लड़ मरते हैं। वह धर्म ही नहीं जो एक दूसरे से लड़ने और मारपीट करने की आज्ञा दे । धर्म के बहाने मनुष्य जाति का खून बहाना असभ्यता है । वह धर्म नहीं है जो एक भाई पर दूसरे भाई को हाथ उठाने की आज्ञा देता है । छत्तीस - यह कितनी अभ्यता है कि मन्दिर के शंख और घण्टे-घड़ियाल की ध्वनि से मस्जिद के सर्वव्यापी अल्लाह नाराज़ हो जाते हैं और मस्जिद में की "अल्लाहो अकबर की ध्वनि से भगवान क्षीरसागर की ओर पलायन कर जाते हैं । हिन्दुओं के धार्मिक भावों की रक्षा के लिए ताजिये नहीं सरक कर मुसलमानों के धार्मिक कार्य में अड़नेवाले वृक्ष की टहनी नहीं तोड़ सकते । इस प्रकार के हठ और दुराग्रह को सभ्यता नहीं कहा जा सकता । इस धर्माडम्बर से देश को हानि होरही है । दोनों की असभ्यता दोनों ही के गले की छुरी बन गई है। "हिन्दू वो मुस्लिम एक है दोनोंयानी ये दोनों एशियाई हैं । हमवतन, हमजुवानो हमकिस्मत ---- क्यों न कह दूं कि भाई-भाई हैं । " सैंतीस-सूने मन्दिरों की प्रतिमाओं पर, क़बरों पर तथा किसी के धार्मिक चिन्हों पर थूकना, पेशाब करना, धूल फेंकना, पत्थर मारना तथा किसी अन्य उन्हें नित करना पशुता है। और वह पशु से भी आगे है जो उन्हें नष्ट-भ्रष्ट करता है । अड़तीस - आर्य सभ्यता ने हमें सोलह संस्कार सिखायें हैं जो हमें सभ्य बनाने के लिए पर्याप्त हैं। इनसे विमुख होकर ही हिन्दुओं ने सभ्यता को खोया है। जो अपनी खोई सभ्यता प्राप्त करना चाहते हैं, उन्हें प्राचीन संस्कारों से प्रेम करना चाहिए । जीवन में जितने
Haryana/Alive News : सेवानिवृत की आयु सीमा को 58 साल से बढ़ाकर 60 साल करने की घोषणा के बाद इस माह सेवानिवृत होने वाले कर्मचारी भ्रम की स्थिति में हैं। उनको अभी स्पष्ट तौर पर नहीं पता लग रहा है कि सरकार उनको सेवानिवृत करेगी या नहीं। कर्मचारी यूनियन के नेता भी इस पक्ष में हैं कि सरकार ने घोषणा कर दी है तो अब कर्मचारियों को सेवानिवृत ना किया जाए। मनोहर सरकार ने सत्ता में आते ही पिछली सरकार के फैसले को बदलकर सेवानिवृत करने की आयु सीमा 58 साल कर दी, लेकिन इसी माह सरकार ने घोषणा कर दी कि आयु सीमा 60 वर्ष रहेगी। इसकी समीक्षा करने के लिए वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की अध्यक्षता में एक कमेटी भी बना दी गई। हालांकि कमेटी की अभी रिपोर्ट नहीं आई है। कर्मचारी यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार घोषणा कर चुकी है। ऐसे में 28 फरवरी को सेवानिवृत होने वाले कर्मचारियों की सेवानिवृति पर रोक लगा देनी चाहिए। सरकार एक तरफ तो पहले सेवानिवृत हुए कर्मचारियों को वापिस बुलाने की बात कर रही है। एक तरफ आगे सेवानिवृत होने वाले कर्मचारियों के बारे में अभी कोई फैसला नहीं ले पा रही है। कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। सरकार ने घोषणा कर दी। पर इस बारे में अभी कोई स्पष्ट आदेश नहीं आने से कर्मचारी में तो हैं। फरवरी में सेवानिवृत होने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत करने पर अभी रोक लगा देनी चाहिए। अगर इनको दोबारा वापस बुलाया जाता है तो सरकार पर दोहरा बोझ पड़ेगा।
Haryana/Alive News : सेवानिवृत की आयु सीमा को अट्ठावन साल से बढ़ाकर साठ साल करने की घोषणा के बाद इस माह सेवानिवृत होने वाले कर्मचारी भ्रम की स्थिति में हैं। उनको अभी स्पष्ट तौर पर नहीं पता लग रहा है कि सरकार उनको सेवानिवृत करेगी या नहीं। कर्मचारी यूनियन के नेता भी इस पक्ष में हैं कि सरकार ने घोषणा कर दी है तो अब कर्मचारियों को सेवानिवृत ना किया जाए। मनोहर सरकार ने सत्ता में आते ही पिछली सरकार के फैसले को बदलकर सेवानिवृत करने की आयु सीमा अट्ठावन साल कर दी, लेकिन इसी माह सरकार ने घोषणा कर दी कि आयु सीमा साठ वर्ष रहेगी। इसकी समीक्षा करने के लिए वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की अध्यक्षता में एक कमेटी भी बना दी गई। हालांकि कमेटी की अभी रिपोर्ट नहीं आई है। कर्मचारी यूनियन नेताओं का कहना है कि सरकार घोषणा कर चुकी है। ऐसे में अट्ठाईस फरवरी को सेवानिवृत होने वाले कर्मचारियों की सेवानिवृति पर रोक लगा देनी चाहिए। सरकार एक तरफ तो पहले सेवानिवृत हुए कर्मचारियों को वापिस बुलाने की बात कर रही है। एक तरफ आगे सेवानिवृत होने वाले कर्मचारियों के बारे में अभी कोई फैसला नहीं ले पा रही है। कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। सरकार ने घोषणा कर दी। पर इस बारे में अभी कोई स्पष्ट आदेश नहीं आने से कर्मचारी में तो हैं। फरवरी में सेवानिवृत होने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत करने पर अभी रोक लगा देनी चाहिए। अगर इनको दोबारा वापस बुलाया जाता है तो सरकार पर दोहरा बोझ पड़ेगा।
इस जगत् को भी जानो । हे राम ! यह जो तुमको स्वप्न आता है, उसमें जो पुरुष और पदार्थ हैं, वे भी सत्य हैं, क्योंकि ब्रह्ममत्ता सर्वात्मा है । हे राम । प्रबोध होने से भी स्वप्न के पदार्थ विद्यमान भासते हैं। इसी से कहा है कि स्वप्न, संकल्प औौर जाग्रत् तुल्य हैं। जैसे आगे शुक्र, ब्राह्मण के पुत्र इन्द्र, लवण और गाधि का उदाहरण कहा है। इनको मनोराज्यभ्रम प्रत्यक्ष हुआ है । दीर्घतपा को जिसका उदाहरण भागे कहेंगे, प्रत्यक्ष स्वप्न हुआ है। प्रत्येक जीव की अपनी सृष्टि है। संकल्प अपना-अपना है, इससे सृष्टि भिन्न-भिन्न है । पर सबका अधिष्ठान मात्मसत्ता है। सब सृष्टि का प्रतिबिम्ब आत्मरूपी आदर्श में होता है और सब सृष्टि आत्मा का अनुभव है। जैसे बीज से वृक्ष उत्पन्न होता है और उस वृक्ष से और वृक्ष होते हैं तो भी विचार से देखो कि बीज तो एक ही था और सब वृक्ष आदि उसी बीज से उपजे हैं, वैसे ही एक आत्मा से अनेक सृष्टियाँ प्रकाशित होती हैं, परन्तु स्वरूप से भिन्न कुछ नहीं । जैसे एक पुरुष सोया है और उसको स्वप्न की सृष्टि भासती है और फिर स्वप्पन में जो बहुत जीव भासते हैं उनको भी अपने अपने स्वप्न की सृष्टि भासती है। राम ! जिससे आदि-स्वप्न की सृष्टि भासती है, वह पुरुष एक ही है। उसे एक ही में अनन्त सृष्टियाँ चित्त के फुरने से होती हैं। वैसे ही आत्मसत्ता के आश्रय से अनन्त सृष्टियाँ फुरती हैं। परन्तु स्वरूप से कुछ हुआ नहीं, सब आकाशरूप हैं। जीवों को अपनी-अपनी सृष्टि ज्ञान से भासती है । हे राम । जीवों को अन्य सृष्टि का ज्ञान नहीं होता, वे अपनी ही सृष्टि को जानते हैं, क्योंकि संकल्प भिन्नभिन्न हैं। कितनों के लेखे हम स्वप्नों के नर हैं और कितने ही हमारे लेखे स्वप्न के नर हैं । वे और सृष्टि में सोये हैं और हमारी सृष्टि उसको स्वप्न में दिखती है । तिनके लिए हम स्वप्न के नर हैं। और जो हमारी सृष्टि में सोये हैं, उनको स्वप्न में और सृष्टि भासित हुई है । वे हमारे स्वप्न के नर हैं। हे राम! इस प्रकार आत्मतत्त्व के आश्रय से अनन्त सृष्टि भासती हैं । जो जीव सृष्टि को सत् जानकर विचरते
इस जगत् को भी जानो । हे राम ! यह जो तुमको स्वप्न आता है, उसमें जो पुरुष और पदार्थ हैं, वे भी सत्य हैं, क्योंकि ब्रह्ममत्ता सर्वात्मा है । हे राम । प्रबोध होने से भी स्वप्न के पदार्थ विद्यमान भासते हैं। इसी से कहा है कि स्वप्न, संकल्प औौर जाग्रत् तुल्य हैं। जैसे आगे शुक्र, ब्राह्मण के पुत्र इन्द्र, लवण और गाधि का उदाहरण कहा है। इनको मनोराज्यभ्रम प्रत्यक्ष हुआ है । दीर्घतपा को जिसका उदाहरण भागे कहेंगे, प्रत्यक्ष स्वप्न हुआ है। प्रत्येक जीव की अपनी सृष्टि है। संकल्प अपना-अपना है, इससे सृष्टि भिन्न-भिन्न है । पर सबका अधिष्ठान मात्मसत्ता है। सब सृष्टि का प्रतिबिम्ब आत्मरूपी आदर्श में होता है और सब सृष्टि आत्मा का अनुभव है। जैसे बीज से वृक्ष उत्पन्न होता है और उस वृक्ष से और वृक्ष होते हैं तो भी विचार से देखो कि बीज तो एक ही था और सब वृक्ष आदि उसी बीज से उपजे हैं, वैसे ही एक आत्मा से अनेक सृष्टियाँ प्रकाशित होती हैं, परन्तु स्वरूप से भिन्न कुछ नहीं । जैसे एक पुरुष सोया है और उसको स्वप्न की सृष्टि भासती है और फिर स्वप्पन में जो बहुत जीव भासते हैं उनको भी अपने अपने स्वप्न की सृष्टि भासती है। राम ! जिससे आदि-स्वप्न की सृष्टि भासती है, वह पुरुष एक ही है। उसे एक ही में अनन्त सृष्टियाँ चित्त के फुरने से होती हैं। वैसे ही आत्मसत्ता के आश्रय से अनन्त सृष्टियाँ फुरती हैं। परन्तु स्वरूप से कुछ हुआ नहीं, सब आकाशरूप हैं। जीवों को अपनी-अपनी सृष्टि ज्ञान से भासती है । हे राम । जीवों को अन्य सृष्टि का ज्ञान नहीं होता, वे अपनी ही सृष्टि को जानते हैं, क्योंकि संकल्प भिन्नभिन्न हैं। कितनों के लेखे हम स्वप्नों के नर हैं और कितने ही हमारे लेखे स्वप्न के नर हैं । वे और सृष्टि में सोये हैं और हमारी सृष्टि उसको स्वप्न में दिखती है । तिनके लिए हम स्वप्न के नर हैं। और जो हमारी सृष्टि में सोये हैं, उनको स्वप्न में और सृष्टि भासित हुई है । वे हमारे स्वप्न के नर हैं। हे राम! इस प्रकार आत्मतत्त्व के आश्रय से अनन्त सृष्टि भासती हैं । जो जीव सृष्टि को सत् जानकर विचरते
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक सात साल का बच्चा खेलते-खेलते गायब हो जाता है. घर वाले, पड़ोस वाले, मोहल्ले वाले और यहां तक कि पुलिस वाले उसकी तलाश में पहले ही दिन से जुट जाते हैं. एक हफ्ता बीतता है. दो हफ्ता बीतता. तीसरा और चौथा हफ्ता भी बीत जाता है. मगर न तो किडनैपिंग की कॉल आती है और न ही किसी शव के मिलने की ख़बर. फिर सवा महीने बाद बच्चे के पड़ोस वाले घर से बदबू की शक्ल में सुराग बाहर आता है और ये सुराग न सिर्फ बच्चे का राज खोलता है, बल्कि उसके साथ दरिंदों जैसे बर्ताव करने वाले खूनी अंकल का दिल दहला देने वाला सच भी खोलकर रख देता है. बीती 7 जनवरी की शाम करीब सवा पांच बजे तक मासूम आशीष मोहल्ले की गलियों में ही खेल रहा था. लेकिन पंद्रह मिनट गुज़रते-गुज़रते वो अचानक कहीं गायब हो गया. पहले तो लोगों को उसके गायब होने का पता ही नहीं चला, लेकिन जब तक देर तक किसी ने उसे नहीं देखा तो बेचैनी बढ़ गई. अब पूरा मोहल्ला बच्चे की तलाश में लग गया. और इनमें पड़ोस में रहने वाला उसका मुंहबोला अंकल अवधेश भी शामिल था. और तो और जल्द ही इस सिलसिले में पुलिस से भी शिकायत की गई और पुलिस ने घरवालों और पड़ोसियों के साथ-साथ पड़ोस में रहने वाले बच्चे के मुंहबोले अंकल अवधेश से भी पूछताछ की. लेकिन तब भी पुलिस को एक बार भी इस बात की भनक नहीं लगी कि मासूम आशीष की गुमशुदगी के पीछे अवधेश का ही हाथ हो सकता है. असल में बच्चे के घरवालों से अवधेश के बेहद अच्छे रिश्ते थे. वो ना सिर्फ़ उनके गांव का ही रहने वाला था बल्कि पहले बच्चे के परिवार के साथ ही रहता था. और तो और वो आस-पड़ोस में भी अवधेश ने खुद सीबीआई ऑफ़िसर बता रखा था और कहता था कि वो यूपीएससी की तैयारी कर रहा है. उसने पड़ोस के कई लड़कों को अपनी पहुंच और पावर की बदौलत सरकारी नौकरी लगा देने का झांसा भी दे रखा था. कहने की ज़रूरत नहीं है कि इन हवाबाज़ियों की बदौलत अवधेश की ना सिर्फ़ बच्चे के घर में बल्कि मोहल्ले में भी अच्छी खासी इज्ज़त थी. यहां तक कि बच्चे के गायब होने पर वो बच्चे के पिता के साथ रिपोर्ट लिखवाने थाने भी पहुंचा था. ऐसे में पुलिस स्वरूप नगर से लेकर बिहार में बच्चे के गांव तक की खाक छानती रही. और फिर इस तरह आशीष को गायब हुए करीब महीने भर का वक़्त निकल गया. उधर, अवधेश के कमरे में रखी बच्चे की लाश सड़ने लगी थी. हालांकि पकड़े जाने से बचने के लिए क़ातिल ने तमाम तरह की कोशिशें की थी. उसने लाश को ना सिर्फ़ एक पॉलीथीन के पैकेट में पैक कर रखा था बल्कि उसे एक बड़े से सूटकेस में भरकर अच्छी तरह बंद कर दिया था. लेकिन इसके बावजूद लाश से हर गुज़रते दिन के साथ बदबू बढ़ने लगी. पड़ोसियों को शक ना हो इसलिए वो अपने कमरे में तरह-तरह के परफ्यूम छिड़कता रहा. लेकिन जब बदबू नहीं रुकी तो उसने अपने कमरे से मरे हुए चूहे निकाल कर दिखाए और तो और वो हर दूसरे दिन कमरे में चूहे मार कर छिपाने लगा और बदबू की बात चलते ही मरे हुए चूहे निकाल कर पड़ोसियों को दिखाने लगता. ऐसे में पुलिस क़ातिल और मकतूल के आस-पास होने के बावजूद उन तक नहीं पहुंच पा रही थी. इस सिलसिले में पुलिस ने कई बार अवधेश से पूछताछ की, लेकिन हर बार वो पुलिस को गुमराह करने में भी क़ामयाब रहा. लेकिन करीब सवा महीने गुज़रने के बाद धीरे-धीरे पुलिस के शक की सुई अवधेश पर जाकर ही टिकने लगी. इसकी कई वजहें थीं. अब अवधेश का व्यवहार बदलने लगा था वो अक्सर अपना मोबाइल फ़ोन स्विच्ड ऑफ़ रखने लगा था. एक सीसीटीवी फुटेज में वो बच्चे के साथ जाता हुआ भी दिखा. उसने बच्चे को एक साइकिल दिलाने की भी बात कही थी, लेकिन इसके बारे में घर में किसी को बताने से मना किया था. ये बात बच्चे की बहन ने बाद में अपने घरवालों को बताई. ऐसे में जब पुलिस ने आख़िरी बार अवधेश से पूछताछ की तो वो टूट गया. उसने कुबूल कर लिया कि उसी ने ना सिर्फ़ सात साल के आशीष को अगवा किया था, बल्कि अगवा करने के एक घंटे के अंदर ही गला दबा कर उसकी जान ले ली थी. शव को सूटकेस में पैक कर दिया था. लेकिन इसके बावजूद पकड़े जाने से बचने के लिए वो ना सिर्फ़ उसे ढूंढ़ने का नाटक कर रहा था, बल्कि उसी ने बच्चे के पिता के साथ जाकर एफआईआर भी करवाई थी.
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक सात साल का बच्चा खेलते-खेलते गायब हो जाता है. घर वाले, पड़ोस वाले, मोहल्ले वाले और यहां तक कि पुलिस वाले उसकी तलाश में पहले ही दिन से जुट जाते हैं. एक हफ्ता बीतता है. दो हफ्ता बीतता. तीसरा और चौथा हफ्ता भी बीत जाता है. मगर न तो किडनैपिंग की कॉल आती है और न ही किसी शव के मिलने की ख़बर. फिर सवा महीने बाद बच्चे के पड़ोस वाले घर से बदबू की शक्ल में सुराग बाहर आता है और ये सुराग न सिर्फ बच्चे का राज खोलता है, बल्कि उसके साथ दरिंदों जैसे बर्ताव करने वाले खूनी अंकल का दिल दहला देने वाला सच भी खोलकर रख देता है. बीती सात जनवरी की शाम करीब सवा पांच बजे तक मासूम आशीष मोहल्ले की गलियों में ही खेल रहा था. लेकिन पंद्रह मिनट गुज़रते-गुज़रते वो अचानक कहीं गायब हो गया. पहले तो लोगों को उसके गायब होने का पता ही नहीं चला, लेकिन जब तक देर तक किसी ने उसे नहीं देखा तो बेचैनी बढ़ गई. अब पूरा मोहल्ला बच्चे की तलाश में लग गया. और इनमें पड़ोस में रहने वाला उसका मुंहबोला अंकल अवधेश भी शामिल था. और तो और जल्द ही इस सिलसिले में पुलिस से भी शिकायत की गई और पुलिस ने घरवालों और पड़ोसियों के साथ-साथ पड़ोस में रहने वाले बच्चे के मुंहबोले अंकल अवधेश से भी पूछताछ की. लेकिन तब भी पुलिस को एक बार भी इस बात की भनक नहीं लगी कि मासूम आशीष की गुमशुदगी के पीछे अवधेश का ही हाथ हो सकता है. असल में बच्चे के घरवालों से अवधेश के बेहद अच्छे रिश्ते थे. वो ना सिर्फ़ उनके गांव का ही रहने वाला था बल्कि पहले बच्चे के परिवार के साथ ही रहता था. और तो और वो आस-पड़ोस में भी अवधेश ने खुद सीबीआई ऑफ़िसर बता रखा था और कहता था कि वो यूपीएससी की तैयारी कर रहा है. उसने पड़ोस के कई लड़कों को अपनी पहुंच और पावर की बदौलत सरकारी नौकरी लगा देने का झांसा भी दे रखा था. कहने की ज़रूरत नहीं है कि इन हवाबाज़ियों की बदौलत अवधेश की ना सिर्फ़ बच्चे के घर में बल्कि मोहल्ले में भी अच्छी खासी इज्ज़त थी. यहां तक कि बच्चे के गायब होने पर वो बच्चे के पिता के साथ रिपोर्ट लिखवाने थाने भी पहुंचा था. ऐसे में पुलिस स्वरूप नगर से लेकर बिहार में बच्चे के गांव तक की खाक छानती रही. और फिर इस तरह आशीष को गायब हुए करीब महीने भर का वक़्त निकल गया. उधर, अवधेश के कमरे में रखी बच्चे की लाश सड़ने लगी थी. हालांकि पकड़े जाने से बचने के लिए क़ातिल ने तमाम तरह की कोशिशें की थी. उसने लाश को ना सिर्फ़ एक पॉलीथीन के पैकेट में पैक कर रखा था बल्कि उसे एक बड़े से सूटकेस में भरकर अच्छी तरह बंद कर दिया था. लेकिन इसके बावजूद लाश से हर गुज़रते दिन के साथ बदबू बढ़ने लगी. पड़ोसियों को शक ना हो इसलिए वो अपने कमरे में तरह-तरह के परफ्यूम छिड़कता रहा. लेकिन जब बदबू नहीं रुकी तो उसने अपने कमरे से मरे हुए चूहे निकाल कर दिखाए और तो और वो हर दूसरे दिन कमरे में चूहे मार कर छिपाने लगा और बदबू की बात चलते ही मरे हुए चूहे निकाल कर पड़ोसियों को दिखाने लगता. ऐसे में पुलिस क़ातिल और मकतूल के आस-पास होने के बावजूद उन तक नहीं पहुंच पा रही थी. इस सिलसिले में पुलिस ने कई बार अवधेश से पूछताछ की, लेकिन हर बार वो पुलिस को गुमराह करने में भी क़ामयाब रहा. लेकिन करीब सवा महीने गुज़रने के बाद धीरे-धीरे पुलिस के शक की सुई अवधेश पर जाकर ही टिकने लगी. इसकी कई वजहें थीं. अब अवधेश का व्यवहार बदलने लगा था वो अक्सर अपना मोबाइल फ़ोन स्विच्ड ऑफ़ रखने लगा था. एक सीसीटीवी फुटेज में वो बच्चे के साथ जाता हुआ भी दिखा. उसने बच्चे को एक साइकिल दिलाने की भी बात कही थी, लेकिन इसके बारे में घर में किसी को बताने से मना किया था. ये बात बच्चे की बहन ने बाद में अपने घरवालों को बताई. ऐसे में जब पुलिस ने आख़िरी बार अवधेश से पूछताछ की तो वो टूट गया. उसने कुबूल कर लिया कि उसी ने ना सिर्फ़ सात साल के आशीष को अगवा किया था, बल्कि अगवा करने के एक घंटे के अंदर ही गला दबा कर उसकी जान ले ली थी. शव को सूटकेस में पैक कर दिया था. लेकिन इसके बावजूद पकड़े जाने से बचने के लिए वो ना सिर्फ़ उसे ढूंढ़ने का नाटक कर रहा था, बल्कि उसी ने बच्चे के पिता के साथ जाकर एफआईआर भी करवाई थी.
आगरा। कई वर्षों बाद आखिरकार वह सुखद घड़ी आई है, जब मां यमुना जी हिंडौले पर विराजमान हुईं। आगरा के प्राचीन कैलाश मंदिर घाट पर सोमवार शाम 6 बजे अद्भुत मनोरथ हिंडोले का आयोजन किया गया। इसका आयोजन प्राचीन कैलाश मंदिर के महंत गौरव गिरी, महंत दिलीप गिरी और श्री बांके बिहारी वेलफेयर सोसाइटी अध्यक्ष डॉ मदन मोहन शर्मा द्वारा किया। कार्यक्रम के दौरान मां यमुनाजी की आरती भी घाट पर हुई। महंत गौरव गिरी और डॉ. मदन मोहन शर्मा ने बताया कि सावन का महीना चल रहा है। आगरा में ऐसा पहली बार हुआ है जब मां यमुना को हिंडोले में झूला झूलाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक महेशचंद्र ने आरती की। उन्हें यमुना मां साधक सम्मान से सम्मानित किया गया और मिट्टी का पात्र देकर बेजुबान की सेवा व पौधा भेंट कर पर्यावरण का संकल्प दिलाया। श्री बांके बिहारी वेलफेयर सोसायटी के संस्थापक मदन मोहन शर्मा ने बताया कि यमुना आरती प्रत्येक सोमवार शाम को कैलाश घाट पर आयोजित की जाती है जिसमें शहर भर के यमुना प्रेमियों को आमंत्रित कर यमुना शुद्धिकरण के लिये प्रेरित एवं संकल्प भी करवाया जाता है। सभी को स्वच्छ भारत का संकल्प दिलाते हुये सभी भक्तों से प्रत्येक सोमवार यमुना घाट की सफाई में योगदान देने की भी अपील की जाती है। आरती में संजय यादव, बबीता यादव, सुशील सारस्वत, सुषमा सारस्वत, विनोद यादव, डॉ योगेंश विंदल, अमन सारस्वत, सागर गिरी, नकुल सारस्वत, अभिषेक गर्ग, प्रेम बाबा, विशाल शर्मा, अन्नू गौतम आदि लोग उपस्थित रहे।
आगरा। कई वर्षों बाद आखिरकार वह सुखद घड़ी आई है, जब मां यमुना जी हिंडौले पर विराजमान हुईं। आगरा के प्राचीन कैलाश मंदिर घाट पर सोमवार शाम छः बजे अद्भुत मनोरथ हिंडोले का आयोजन किया गया। इसका आयोजन प्राचीन कैलाश मंदिर के महंत गौरव गिरी, महंत दिलीप गिरी और श्री बांके बिहारी वेलफेयर सोसाइटी अध्यक्ष डॉ मदन मोहन शर्मा द्वारा किया। कार्यक्रम के दौरान मां यमुनाजी की आरती भी घाट पर हुई। महंत गौरव गिरी और डॉ. मदन मोहन शर्मा ने बताया कि सावन का महीना चल रहा है। आगरा में ऐसा पहली बार हुआ है जब मां यमुना को हिंडोले में झूला झूलाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक महेशचंद्र ने आरती की। उन्हें यमुना मां साधक सम्मान से सम्मानित किया गया और मिट्टी का पात्र देकर बेजुबान की सेवा व पौधा भेंट कर पर्यावरण का संकल्प दिलाया। श्री बांके बिहारी वेलफेयर सोसायटी के संस्थापक मदन मोहन शर्मा ने बताया कि यमुना आरती प्रत्येक सोमवार शाम को कैलाश घाट पर आयोजित की जाती है जिसमें शहर भर के यमुना प्रेमियों को आमंत्रित कर यमुना शुद्धिकरण के लिये प्रेरित एवं संकल्प भी करवाया जाता है। सभी को स्वच्छ भारत का संकल्प दिलाते हुये सभी भक्तों से प्रत्येक सोमवार यमुना घाट की सफाई में योगदान देने की भी अपील की जाती है। आरती में संजय यादव, बबीता यादव, सुशील सारस्वत, सुषमा सारस्वत, विनोद यादव, डॉ योगेंश विंदल, अमन सारस्वत, सागर गिरी, नकुल सारस्वत, अभिषेक गर्ग, प्रेम बाबा, विशाल शर्मा, अन्नू गौतम आदि लोग उपस्थित रहे।
Viral Video: सोशल मीडिया (Social Media) पर जानवरों (Animals) से जुड़े अनगिनत वीडियो आए दिन वायरल (Viral Video) होते रहते हैं, जिनमें से कई वीडियो हमारे चेहरे पर मुस्कान लाते हैं, जबकि कई हमें हैरत में भी डाल देते हैं. वहीं कई वीडियो ऐसे भी होते हैं, जिन्हें देखकर इंसानों को भी सीख मिलती है. इसी कड़ी में बकरियों (Goats) का एक दिलचस्प वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बकरियों का एक समूह समझदारी दिखाते हुए बारी-बारी से पानी को पार करता है. हालांकि यहां पर सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि सबसे आगे वाली बकरी (Goat) के नेतृत्व में बाकी की बकरियां आसानी से पानी को पार कर लेती हैं और इस बेजुबान बकरी ने सिखाया है कि लीडरशीप क्या होता है. इस वीडियो को आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा ने ट्विटर पर शेयर किया है. इसके साथ उन्होंने कैप्शन लिखा है- दूसरों को स्थान देकर ही आप आगे बढ़ सकते हैं. शेयर किए जाने के बाद से अब तक इस वीडियो को 1 मिलियन व्यूज मिल चुके हैं. इस पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा है- बिल्कुल सही, जबकि एक अन्य यूजर ने लिखा है- शानदार उदाहरण. यह भी पढ़ेंः बेवजह बैल को छेड़ना बकरे को पड़ा भारी, मिला ऐसा सबक की जिंदगी भर रहेगा याद (Watch Viral Video) दूसरों को स्थान देकर ही, वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि बकरियों का एक झुंड पानी को पार कर रहा है. ये सभी बकरियां कांक्रीट के ब्लॉकों पर ध्यान से कूद रही हैं, क्योंकि उनकी जरा सी चूक उनकी जान को जोखिम में डाल सकती थी. पानी के तेज बहाव पर बने ब्लॉक को बकरियां बड़ी ही समझदारी से पार करती हैं, हालांकि सबसे आगे चल रही बकरी उनका नेतृत्व करती है, जिससे सभी बकरियां आसानी से पानी को पार कर लेती हैं. बकरियों को देखकर लगता है कि अगर लीडरशीप सही रही तो बड़ी से बड़ी समस्या का हल आसानी से निकाला जा सकता है.
Viral Video: सोशल मीडिया पर जानवरों से जुड़े अनगिनत वीडियो आए दिन वायरल होते रहते हैं, जिनमें से कई वीडियो हमारे चेहरे पर मुस्कान लाते हैं, जबकि कई हमें हैरत में भी डाल देते हैं. वहीं कई वीडियो ऐसे भी होते हैं, जिन्हें देखकर इंसानों को भी सीख मिलती है. इसी कड़ी में बकरियों का एक दिलचस्प वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बकरियों का एक समूह समझदारी दिखाते हुए बारी-बारी से पानी को पार करता है. हालांकि यहां पर सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि सबसे आगे वाली बकरी के नेतृत्व में बाकी की बकरियां आसानी से पानी को पार कर लेती हैं और इस बेजुबान बकरी ने सिखाया है कि लीडरशीप क्या होता है. इस वीडियो को आईपीएस अधिकारी दीपांशु काबरा ने ट्विटर पर शेयर किया है. इसके साथ उन्होंने कैप्शन लिखा है- दूसरों को स्थान देकर ही आप आगे बढ़ सकते हैं. शेयर किए जाने के बाद से अब तक इस वीडियो को एक मिलियन व्यूज मिल चुके हैं. इस पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा है- बिल्कुल सही, जबकि एक अन्य यूजर ने लिखा है- शानदार उदाहरण. यह भी पढ़ेंः बेवजह बैल को छेड़ना बकरे को पड़ा भारी, मिला ऐसा सबक की जिंदगी भर रहेगा याद दूसरों को स्थान देकर ही, वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि बकरियों का एक झुंड पानी को पार कर रहा है. ये सभी बकरियां कांक्रीट के ब्लॉकों पर ध्यान से कूद रही हैं, क्योंकि उनकी जरा सी चूक उनकी जान को जोखिम में डाल सकती थी. पानी के तेज बहाव पर बने ब्लॉक को बकरियां बड़ी ही समझदारी से पार करती हैं, हालांकि सबसे आगे चल रही बकरी उनका नेतृत्व करती है, जिससे सभी बकरियां आसानी से पानी को पार कर लेती हैं. बकरियों को देखकर लगता है कि अगर लीडरशीप सही रही तो बड़ी से बड़ी समस्या का हल आसानी से निकाला जा सकता है.
सबसे पहले बात करते हैं वर्ष 2018 की। इस वर्ष राम पोथिनेनी की फिल्म iSmart Shankar रिलीज हुई थी। इस फिल्म का प्रथम पोस्टर जब जारी किया गया तो उस पर बहुत तहलका मचा। दरअसल, पोस्टर में राम पोथिनेनी को बाइक पर सिगरेट पीते हुए दिखाया गया था। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग निदेशालय ने इसे सिगरेट तथा अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम के तहत उल्लंघन करार दिया। इसे लेकर निदेशालय ने स्पष्टीकरण मांगा था, मगर फिल्मकारों की ओर से कोई उत्तर नहीं दिया गया। इस बीच राम को अपने इस पोस्टर कि वजह से ट्विटर पर भी बहुत ट्रोल होना पड़ा। दूसरा विवाद, पिछले साल अगस्त महीने का है, जब विजयवाड़ा के एक कोविड सेंटर में आग लगी थी। आंध्र प्रदेश सरकार ने कोरोना रोगियों के उपचार के लिए स्वर्ण पैलेस होटल में कोविड केयर सेंटर बनवाया था। इस सेंटर को होटल प्रबंधन की अनुमति प्राप्त होने के पश्चात् बनाया गया था। 9 अगस्त को अचानक इस सेंटर में आग लग गई, जिसकी वजह से 10 लोगों की जान चली गई थी और कई गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। इस घटना पर उस वक़्त अधिक लोगों का ध्यान गया जब राम पोथिनेनी ने इस घटना को एक साजिश करार दिया। एक के पश्चात् अपने कई ट्वीट एक में राम पोथिनेनी ने आंध्र प्रदेश सरकार से इस घटना की जांच करने का आग्रह किया था।
सबसे पहले बात करते हैं वर्ष दो हज़ार अट्ठारह की। इस वर्ष राम पोथिनेनी की फिल्म iSmart Shankar रिलीज हुई थी। इस फिल्म का प्रथम पोस्टर जब जारी किया गया तो उस पर बहुत तहलका मचा। दरअसल, पोस्टर में राम पोथिनेनी को बाइक पर सिगरेट पीते हुए दिखाया गया था। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग निदेशालय ने इसे सिगरेट तथा अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम के तहत उल्लंघन करार दिया। इसे लेकर निदेशालय ने स्पष्टीकरण मांगा था, मगर फिल्मकारों की ओर से कोई उत्तर नहीं दिया गया। इस बीच राम को अपने इस पोस्टर कि वजह से ट्विटर पर भी बहुत ट्रोल होना पड़ा। दूसरा विवाद, पिछले साल अगस्त महीने का है, जब विजयवाड़ा के एक कोविड सेंटर में आग लगी थी। आंध्र प्रदेश सरकार ने कोरोना रोगियों के उपचार के लिए स्वर्ण पैलेस होटल में कोविड केयर सेंटर बनवाया था। इस सेंटर को होटल प्रबंधन की अनुमति प्राप्त होने के पश्चात् बनाया गया था। नौ अगस्त को अचानक इस सेंटर में आग लग गई, जिसकी वजह से दस लोगों की जान चली गई थी और कई गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। इस घटना पर उस वक़्त अधिक लोगों का ध्यान गया जब राम पोथिनेनी ने इस घटना को एक साजिश करार दिया। एक के पश्चात् अपने कई ट्वीट एक में राम पोथिनेनी ने आंध्र प्रदेश सरकार से इस घटना की जांच करने का आग्रह किया था।
बीजेपी में उप मुख्यमंत्री पद के लिए ब्राह्मण चेहरा बृजेश पाठक, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और कुर्मी नेता स्वतंत्र देव सिंह और आगरा से चुनाव जीतीं जाटव समाज की बेबी रानी मौर्य का नाम भी उछल रहा है. हालांकि संभावना है कि चुनाव हारने के बावजूद केशव प्रसाद मौर्य को डिप्टी सीएम बनाया जाएगा, वो पार्टी में ओबीसी का बड़ा चेहरा हैं. पार्टी मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरों को भी शामिल कर सकती है. नोएडा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह का नाम भी मंत्रिपद के दावेदारों में बताया जा रहा है. पंकज सिंह ने 1. 81 लाख से ज्यादा वोटों से नोएडा में जीत दर्ज की है. सतीश महाना, सुरेश खन्ना जैसे दिग्गज भी फिर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. सतीश महाना ने आठवीं बार विधानसभा चुनाव जीता है. जबकि सुरेश खन्ना शाहजहांपुर से रिकॉर्ड 9वीं बार चुनाव जीत विधायक बने हैं.
बीजेपी में उप मुख्यमंत्री पद के लिए ब्राह्मण चेहरा बृजेश पाठक, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और कुर्मी नेता स्वतंत्र देव सिंह और आगरा से चुनाव जीतीं जाटव समाज की बेबी रानी मौर्य का नाम भी उछल रहा है. हालांकि संभावना है कि चुनाव हारने के बावजूद केशव प्रसाद मौर्य को डिप्टी सीएम बनाया जाएगा, वो पार्टी में ओबीसी का बड़ा चेहरा हैं. पार्टी मंत्रिमंडल में कुछ नए चेहरों को भी शामिल कर सकती है. नोएडा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह का नाम भी मंत्रिपद के दावेदारों में बताया जा रहा है. पंकज सिंह ने एक. इक्यासी लाख से ज्यादा वोटों से नोएडा में जीत दर्ज की है. सतीश महाना, सुरेश खन्ना जैसे दिग्गज भी फिर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं. सतीश महाना ने आठवीं बार विधानसभा चुनाव जीता है. जबकि सुरेश खन्ना शाहजहांपुर से रिकॉर्ड नौवीं बार चुनाव जीत विधायक बने हैं.
चेन्नई ने टॉस जीतकर मुंबई को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। मुंबई ने तेज शुरुआत की। रोहित और ईशान के बीच पहले विकेट लिए 38 रन की साझेदारी हुई। रोहित 21 रन बनाकर तुषार देशपांडे की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए। नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। आईपीएल के इतिहास का 1000वां मुकाबला चेन्नई सुपरकिंग्स ने मुंबई इंडियंस को सात विकेट से हरा दिया। पहले बल्लेबाज करते हुए मुंबई ने 8 विकेट के नुकसान पर 157 रन बनाए। चेन्नई ने 18. 1 ओवर में तीन विकेट के नुकसान पर 159 रन बनाकर मैच जीत लिया। चेन्नई के लिए रहाणे ने अर्धशतकीय पारी खेली। चेन्नई ने टॉस जीतकर मुंबई को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। मुंबई ने तेज शुरुआत की। रोहित और ईशान के बीच पहले विकेट लिए 38 रन की साझेदारी हुई। रोहित 21 रन बनाकर तुषार देशपांडे की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए। ईशान किशन ने तेजी से रन बनाने के चक्कर में अपना विकेट गंवाया। उन्होंने जडेजा ने आउट किया। इसके बाद कोई भी बल्लेबाज ज्यादा देर तक पिच पर टिक नहीं सके। ग्रीन ने 21 रन बनाए। सूर्या एकबार फिर नाकाम रहे। वह 1 रन बनाकर सेंटनर का शिकार बने। तिलक वर्मा ने 22 और टिम डेविड ने 31 रन का योगदान दिया। जडेजा को तीन विकेट मिले। सेंटनर और तुषार को एक-एक विकेट मिले। वहीं, सिसंडा मगाला को एक विकेट मिला। लक्ष्य का पीछा करते हुए चेन्नई की शुरुआत बेहद खराब रही। डेवोन कॉनवे बिना रन बनाए पहले ही ओवर में आउट हो गए। इसके बाद आए रहाणे ने धागे खोल दिए। चेन्नई के लिए पहला मैच खेल रहे रहाणे ने 19 गेंद पर आईपीएल 2023 की सबसे तेज हाफ सेंचुरी जड़ी। रहाणे ने 27 गेंद पर 61 रन की तूफानी पारी खेली। शिवम दुबे ने 28 रन का योगदान दिया। ऋतुराज गायकवाड़ 40 रन बनाकर अंत तक नाबाद रहे। इंपैक्ट प्लेयर के रूप आए रायडू ने 20 रन बनाए और चौका लगाकर टीम को जीत दिलाई। मुंबई के लिए तीन गेंदबाजों ने एक-एक विकेट हासिल किया। यह मुंबई दूसरी लगातार हार है। वहीं, चेन्नई ने तीन मैच में से 2 में जीत हासिल की है और एक में हार का सामना करना पड़ा है।
चेन्नई ने टॉस जीतकर मुंबई को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। मुंबई ने तेज शुरुआत की। रोहित और ईशान के बीच पहले विकेट लिए अड़तीस रन की साझेदारी हुई। रोहित इक्कीस रन बनाकर तुषार देशपांडे की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए। नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। आईपीएल के इतिहास का एक हज़ारवां मुकाबला चेन्नई सुपरकिंग्स ने मुंबई इंडियंस को सात विकेट से हरा दिया। पहले बल्लेबाज करते हुए मुंबई ने आठ विकेट के नुकसान पर एक सौ सत्तावन रन बनाए। चेन्नई ने अट्ठारह. एक ओवर में तीन विकेट के नुकसान पर एक सौ उनसठ रन बनाकर मैच जीत लिया। चेन्नई के लिए रहाणे ने अर्धशतकीय पारी खेली। चेन्नई ने टॉस जीतकर मुंबई को पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किया। मुंबई ने तेज शुरुआत की। रोहित और ईशान के बीच पहले विकेट लिए अड़तीस रन की साझेदारी हुई। रोहित इक्कीस रन बनाकर तुषार देशपांडे की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए। ईशान किशन ने तेजी से रन बनाने के चक्कर में अपना विकेट गंवाया। उन्होंने जडेजा ने आउट किया। इसके बाद कोई भी बल्लेबाज ज्यादा देर तक पिच पर टिक नहीं सके। ग्रीन ने इक्कीस रन बनाए। सूर्या एकबार फिर नाकाम रहे। वह एक रन बनाकर सेंटनर का शिकार बने। तिलक वर्मा ने बाईस और टिम डेविड ने इकतीस रन का योगदान दिया। जडेजा को तीन विकेट मिले। सेंटनर और तुषार को एक-एक विकेट मिले। वहीं, सिसंडा मगाला को एक विकेट मिला। लक्ष्य का पीछा करते हुए चेन्नई की शुरुआत बेहद खराब रही। डेवोन कॉनवे बिना रन बनाए पहले ही ओवर में आउट हो गए। इसके बाद आए रहाणे ने धागे खोल दिए। चेन्नई के लिए पहला मैच खेल रहे रहाणे ने उन्नीस गेंद पर आईपीएल दो हज़ार तेईस की सबसे तेज हाफ सेंचुरी जड़ी। रहाणे ने सत्ताईस गेंद पर इकसठ रन की तूफानी पारी खेली। शिवम दुबे ने अट्ठाईस रन का योगदान दिया। ऋतुराज गायकवाड़ चालीस रन बनाकर अंत तक नाबाद रहे। इंपैक्ट प्लेयर के रूप आए रायडू ने बीस रन बनाए और चौका लगाकर टीम को जीत दिलाई। मुंबई के लिए तीन गेंदबाजों ने एक-एक विकेट हासिल किया। यह मुंबई दूसरी लगातार हार है। वहीं, चेन्नई ने तीन मैच में से दो में जीत हासिल की है और एक में हार का सामना करना पड़ा है।
Shamshera Trailer Review Entertainment News: रणबीर कपूर ने संजय दत्त का हाथ थामकर एक्शन स्टार बनने की तरफ एक सफल कदम उठाया है। डायरेक्टर करण मल्होत्रा ने रणबीर कपूर को अलग ही अवतार में पेश किया है। Shamshera Trailer Review Entertainment News: बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर ने साल 2007 में डायरेक्टर संजय लीला भंसाली की फिल्म 'सांवरिया' से डेब्यू किया था और देखते ही देखते वो देश के नए 'चॉकलेटी बॉय' बन गए। लड़कियों ने रणबीर कपूर पर जान न्योछावर करना शुरू कर दिया, जो सिलसिला अब तक जारी है। इस दौरान कई लोगों ने रणबीर कपूर से कहा कि उन्हें इस इमेज को तोड़कर एक्शन फिल्मों का रुख करना चाहिए लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी। फिल्म 'संजू' के दौरान रणबीर कपूर की मुलाकात संजय दत्त के साथ हुई। संजू बाबा ने रणबीर कपूर को समझाया कि उन्हें एक्शन फिल्में क्यों करनी चाहिए? बस, फिर क्या था रणबीर कपूर ने अपनी इमेज चेंज करने की ठान ली और एक्शन फिल्में साइन करने लगे। रणबीर कपूर दर्शकों के सामने जल्द ही यशराज बैनर की 'शमशेरा' लेकर आएंगे जिसमें वो जबरदस्त एक्शन करते दिखाई देंगे। इस फिल्म में वो बॉलीवुड के सबसे दमदार अभिनेता संजय दत्त के साथ दो-दो हाथ करते दिखाई देंगे। फिल्म 'शमशेरा' का ट्रेलर दर्शकों के सामने है, जिसे देखकर यही कहा जा सकता है कि रणबीर कपूर ने एक्शन हीरो बनने की तरफ सफल कदम बढ़ा दिया है। डायरेक्टर करण मल्होत्रा ने रणबीर कपूर को अलग ही अंदाज में पेश किया है। रणबीर का ऐसा अवतार दर्शकों ने पहले कभी नहीं देखा है। रणबीर कपूर के किरदार को बड़ा दिखाने के लिए करण मल्होत्रा ने संजय दत्त को खलनायक के किरदार के लिए साइन किया था। उस काम में वो पूरी तरह से सफल हुए हैं। संजय दत्त ने 'अग्निपथ' और 'केजीएफ 2' में खलनायक का किरदार निभाकर इन फिल्मों का स्तर बढ़ा दिया था। 'शमशेरा' का ट्रेलर देखने के बाद ऐसा लग रहा है कि वो अपनी दमदार एक्टिंग से इस फिल्म के स्तर को भी कई गुना बढ़ा देंगे और जब थिएटर में दर्शक उनकी और रणबीर कपूर की टक्कर देखेंगे तो तालियां बजाते नहीं थकेंगे। फिल्म 'शमशेरा' का ट्रेलर देख यह साबित हो गया है कि रणबीर कपूर ने 'चॉकलेटी बॉय' की इमेज छोड़ने की ठान ली है और संजय दत्त का हाथ थामकर सही दिशा में कदम उठाया है। वैसे आपको 'शमशेरा' का ट्रेलर कैसा लगा, हमें कमेंट में जरूर बताएं। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Shamshera Trailer Review Entertainment News: रणबीर कपूर ने संजय दत्त का हाथ थामकर एक्शन स्टार बनने की तरफ एक सफल कदम उठाया है। डायरेक्टर करण मल्होत्रा ने रणबीर कपूर को अलग ही अवतार में पेश किया है। Shamshera Trailer Review Entertainment News: बॉलीवुड अभिनेता रणबीर कपूर ने साल दो हज़ार सात में डायरेक्टर संजय लीला भंसाली की फिल्म 'सांवरिया' से डेब्यू किया था और देखते ही देखते वो देश के नए 'चॉकलेटी बॉय' बन गए। लड़कियों ने रणबीर कपूर पर जान न्योछावर करना शुरू कर दिया, जो सिलसिला अब तक जारी है। इस दौरान कई लोगों ने रणबीर कपूर से कहा कि उन्हें इस इमेज को तोड़कर एक्शन फिल्मों का रुख करना चाहिए लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी। फिल्म 'संजू' के दौरान रणबीर कपूर की मुलाकात संजय दत्त के साथ हुई। संजू बाबा ने रणबीर कपूर को समझाया कि उन्हें एक्शन फिल्में क्यों करनी चाहिए? बस, फिर क्या था रणबीर कपूर ने अपनी इमेज चेंज करने की ठान ली और एक्शन फिल्में साइन करने लगे। रणबीर कपूर दर्शकों के सामने जल्द ही यशराज बैनर की 'शमशेरा' लेकर आएंगे जिसमें वो जबरदस्त एक्शन करते दिखाई देंगे। इस फिल्म में वो बॉलीवुड के सबसे दमदार अभिनेता संजय दत्त के साथ दो-दो हाथ करते दिखाई देंगे। फिल्म 'शमशेरा' का ट्रेलर दर्शकों के सामने है, जिसे देखकर यही कहा जा सकता है कि रणबीर कपूर ने एक्शन हीरो बनने की तरफ सफल कदम बढ़ा दिया है। डायरेक्टर करण मल्होत्रा ने रणबीर कपूर को अलग ही अंदाज में पेश किया है। रणबीर का ऐसा अवतार दर्शकों ने पहले कभी नहीं देखा है। रणबीर कपूर के किरदार को बड़ा दिखाने के लिए करण मल्होत्रा ने संजय दत्त को खलनायक के किरदार के लिए साइन किया था। उस काम में वो पूरी तरह से सफल हुए हैं। संजय दत्त ने 'अग्निपथ' और 'केजीएफ दो' में खलनायक का किरदार निभाकर इन फिल्मों का स्तर बढ़ा दिया था। 'शमशेरा' का ट्रेलर देखने के बाद ऐसा लग रहा है कि वो अपनी दमदार एक्टिंग से इस फिल्म के स्तर को भी कई गुना बढ़ा देंगे और जब थिएटर में दर्शक उनकी और रणबीर कपूर की टक्कर देखेंगे तो तालियां बजाते नहीं थकेंगे। फिल्म 'शमशेरा' का ट्रेलर देख यह साबित हो गया है कि रणबीर कपूर ने 'चॉकलेटी बॉय' की इमेज छोड़ने की ठान ली है और संजय दत्त का हाथ थामकर सही दिशा में कदम उठाया है। वैसे आपको 'शमशेरा' का ट्रेलर कैसा लगा, हमें कमेंट में जरूर बताएं। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
OnePlus 7 Pro का नीबूला ब्लू वेरियंट आज यानि 28 मई 2019 को पहली बार सेल के लिए है। वनप्लस 7 प्रो के नीबूला ब्लू वेरियंट क आज दोपहर 12 बजे अमजेन इंडिया से खरीदा जा सकेगा। इस वेरियंट में आपको 8GB+256GB और 12GB+256GB को खरीदने का मौका मिलेगा। अमेजन के अलावा OnePlus 7 Pro को वनप्लस इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट से भी खरीदा जा सकेगा। बता दें कि वनप्लस 7 प्रो का मिरर ग्रे वेरियंट पहले से ही बाजार में मिल रहा है, वहीं आलमंड वेरियंट अगले महीने आएगा। स्पेसिफिकेशन की बात करें तो वनप्लस 7 प्रो में एंड्रॉयड पाई 9. 0 आधारित OxygenOS मिलेगा। इस फोन में क्वॉड एचडी रिजॉल्यूशन (1440x3120 पिक्सल) मिलेगा। वहीं 2 साल तक सॉफ्टवेयर अपडेट और 3 साल तक सिक्योरिटी अपडेट मिलेगा। वनप्लस 7 प्रो में 6. 67 इंच की फ्लूइड एमोलेड डिस्प्ले मिलेगी जिसका आस्पेक्ट रेशियो 19. 5:9 है। डिस्प्ले पर कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 5 का प्रोटेक्शन मिलेगा। प्रोसेसर की बात करें तो वनप्लस 7 प्रो में क्वॉलकॉम का स्नैपड्रैगन 855 प्रोसेसर मिलेगा जिसमें ग्राफिक्स के लिए एड्रेनो 640 जीपीयू और 12 जीबी तक रैम मिलेगी। इस फोन में 256 जीबी तक की स्टोरेज मिलेगी। कैमरे की बात करें तो OnePlus 7 Pro में रियर पैनल पर 3 कैमरे हैं जिनमें एक 48 मेगापिक्सल का सोनी IMX586 सेंसर वाला प्राइमरी कैमरा है। इसका अपर्चर f/1. 6 है। वहीं कैमरे के साथ ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन और इलेक्ट्रॉनिक इमेज स्टेबलाइजेशन दोनों मिलेगा। फोन में दूसरा कैमरा 16 मेगापिक्सल का f/2. 4 अपर्चर वाला अल्ट्रा वाइड एंगल और तीसरा कैमरा 8 मेगापिक्सल का टेलीफोटो लेंस है जिसके साथ 3x ऑप्टिकल जूम मिलेगा। रियर कैमरे के साथ डुअल एलईडी फ्लैश लाइट मिलेगी और 4के वीडियो रिकॉर्डिंग का भी विकल्प मिलेगा। फ्रंट कैमरे की बात करें तो इसमें 16 मेगापिक्सल का पॉपअप सेल्फी कैमरा है जिसमें सोनी IMX471 सेंसर है। कंपनी ने कहा है कि 5 साल तक कैमरे में कोई खराबी नहीं आएगी।
OnePlus सात Pro का नीबूला ब्लू वेरियंट आज यानि अट्ठाईस मई दो हज़ार उन्नीस को पहली बार सेल के लिए है। वनप्लस सात प्रो के नीबूला ब्लू वेरियंट क आज दोपहर बारह बजे अमजेन इंडिया से खरीदा जा सकेगा। इस वेरियंट में आपको आठGB+दो सौ छप्पनGB और बारहGB+दो सौ छप्पनGB को खरीदने का मौका मिलेगा। अमेजन के अलावा OnePlus सात Pro को वनप्लस इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट से भी खरीदा जा सकेगा। बता दें कि वनप्लस सात प्रो का मिरर ग्रे वेरियंट पहले से ही बाजार में मिल रहा है, वहीं आलमंड वेरियंट अगले महीने आएगा। स्पेसिफिकेशन की बात करें तो वनप्लस सात प्रो में एंड्रॉयड पाई नौ. शून्य आधारित OxygenOS मिलेगा। इस फोन में क्वॉड एचडी रिजॉल्यूशन मिलेगा। वहीं दो साल तक सॉफ्टवेयर अपडेट और तीन साल तक सिक्योरिटी अपडेट मिलेगा। वनप्लस सात प्रो में छः. सरसठ इंच की फ्लूइड एमोलेड डिस्प्ले मिलेगी जिसका आस्पेक्ट रेशियो उन्नीस. पाँच:नौ है। डिस्प्ले पर कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास पाँच का प्रोटेक्शन मिलेगा। प्रोसेसर की बात करें तो वनप्लस सात प्रो में क्वॉलकॉम का स्नैपड्रैगन आठ सौ पचपन प्रोसेसर मिलेगा जिसमें ग्राफिक्स के लिए एड्रेनो छः सौ चालीस जीपीयू और बारह जीबी तक रैम मिलेगी। इस फोन में दो सौ छप्पन जीबी तक की स्टोरेज मिलेगी। कैमरे की बात करें तो OnePlus सात Pro में रियर पैनल पर तीन कैमरे हैं जिनमें एक अड़तालीस मेगापिक्सल का सोनी IMXपाँच सौ छियासी सेंसर वाला प्राइमरी कैमरा है। इसका अपर्चर f/एक. छः है। वहीं कैमरे के साथ ऑप्टिकल इमेज स्टेबलाइजेशन और इलेक्ट्रॉनिक इमेज स्टेबलाइजेशन दोनों मिलेगा। फोन में दूसरा कैमरा सोलह मेगापिक्सल का f/दो. चार अपर्चर वाला अल्ट्रा वाइड एंगल और तीसरा कैमरा आठ मेगापिक्सल का टेलीफोटो लेंस है जिसके साथ तीनx ऑप्टिकल जूम मिलेगा। रियर कैमरे के साथ डुअल एलईडी फ्लैश लाइट मिलेगी और चारके वीडियो रिकॉर्डिंग का भी विकल्प मिलेगा। फ्रंट कैमरे की बात करें तो इसमें सोलह मेगापिक्सल का पॉपअप सेल्फी कैमरा है जिसमें सोनी IMXचार सौ इकहत्तर सेंसर है। कंपनी ने कहा है कि पाँच साल तक कैमरे में कोई खराबी नहीं आएगी।
झारखंड के खूंटी की रहने वाली महिला काम की तलाश में दिल्ली आई थी. जहां उसके मालिक ने उससे शादी कर ली और अपने मकान समेत सारी सम्पत्ति उसके नाम कर दी. झारखंड के खूंटी के रनिया थाना क्षेत्र के खरवागड़ा, तुम्बाटोली के पास करीब तीन महीने पहले कोयल नदी में बालू के नीचे एक अज्ञात शव दबा मिला था (Khunti Murder Case). जिसके बाद पुलिस ने मृतक की पहचान राजेश मल्लिक के रूप में की. इसके साथ हत्याकांड में शामिल उसकी पत्नी समेत अन्य दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. दरअसल काफी कोशिशों के बाद भी मृतक की पहचान नहीं हो पा रही थी. जिसके बाद एसपी आशुतोष शेखर ने तोरपा के एसडीपीओ ओमप्रकाश तिवारी और पुलिस सर्किल इंस्पेक्टर दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई थी. जिसके बाद तकनीकी सहयोग से पुलिस ने मृतक की पहचान की और हत्याकांड में शामिल उसकी पत्नी समेत अन्य दो गिरफ्तार किया. साथ ही हत्या में इस्तेमाल की गई गाड़ी और डंडा भी बरामद कर लिया है. मृतक राजेश मल्लिक पश्चिमी दिल्ली, टैगोर गार्डेन का रहने वाला था. खूंटी के रनिया के उसराम गांव की रहने वाली एक महिला नौकरानी का काम करने दिल्ली गई थी. जहां उसे राकेश मल्लिक के घर में काम मिल गया. राकेश के माता-पिता की मौत हो चुकी थी तो वो एकेले रहते थे. जिसके बाद राकेश का दिल नौकरानी पर आ गया उससे शादी कर ली. उन्होंने अपने मकान समेत सारी सम्पत्ति पत्नी के नाम कर दी. लेकिन महिला पति को घूमने के बहाने खूंटी लेकर आई और दो परिचितों हाबिल कंडुलना और असीम टोपनो के साथ मिलकर डंडे से पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी और खरवागड़ा, तुम्बाटोली के पास कोयल नदी के बालू में दफना दिया. महिला ने पुलिस को बताया कि शादी के बाद उसका पति राकेश मल्लिक हर दिन शराब पीकर आता था, ड्रग्स लेता था और उसके बाद उसे प्रताड़ित करता था. इससे परेशान होकर वो अपने पति को घूमने के बहाने दिल्ली से रांची लेकर आई. यहां महिला पति की हत्या की साजिश रची हाबिल और असीम के साथ मिलकर अपने पति को मौत के घाट उतार दिया.
झारखंड के खूंटी की रहने वाली महिला काम की तलाश में दिल्ली आई थी. जहां उसके मालिक ने उससे शादी कर ली और अपने मकान समेत सारी सम्पत्ति उसके नाम कर दी. झारखंड के खूंटी के रनिया थाना क्षेत्र के खरवागड़ा, तुम्बाटोली के पास करीब तीन महीने पहले कोयल नदी में बालू के नीचे एक अज्ञात शव दबा मिला था . जिसके बाद पुलिस ने मृतक की पहचान राजेश मल्लिक के रूप में की. इसके साथ हत्याकांड में शामिल उसकी पत्नी समेत अन्य दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. दरअसल काफी कोशिशों के बाद भी मृतक की पहचान नहीं हो पा रही थी. जिसके बाद एसपी आशुतोष शेखर ने तोरपा के एसडीपीओ ओमप्रकाश तिवारी और पुलिस सर्किल इंस्पेक्टर दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई थी. जिसके बाद तकनीकी सहयोग से पुलिस ने मृतक की पहचान की और हत्याकांड में शामिल उसकी पत्नी समेत अन्य दो गिरफ्तार किया. साथ ही हत्या में इस्तेमाल की गई गाड़ी और डंडा भी बरामद कर लिया है. मृतक राजेश मल्लिक पश्चिमी दिल्ली, टैगोर गार्डेन का रहने वाला था. खूंटी के रनिया के उसराम गांव की रहने वाली एक महिला नौकरानी का काम करने दिल्ली गई थी. जहां उसे राकेश मल्लिक के घर में काम मिल गया. राकेश के माता-पिता की मौत हो चुकी थी तो वो एकेले रहते थे. जिसके बाद राकेश का दिल नौकरानी पर आ गया उससे शादी कर ली. उन्होंने अपने मकान समेत सारी सम्पत्ति पत्नी के नाम कर दी. लेकिन महिला पति को घूमने के बहाने खूंटी लेकर आई और दो परिचितों हाबिल कंडुलना और असीम टोपनो के साथ मिलकर डंडे से पीट-पीटकर उसकी हत्या कर दी और खरवागड़ा, तुम्बाटोली के पास कोयल नदी के बालू में दफना दिया. महिला ने पुलिस को बताया कि शादी के बाद उसका पति राकेश मल्लिक हर दिन शराब पीकर आता था, ड्रग्स लेता था और उसके बाद उसे प्रताड़ित करता था. इससे परेशान होकर वो अपने पति को घूमने के बहाने दिल्ली से रांची लेकर आई. यहां महिला पति की हत्या की साजिश रची हाबिल और असीम के साथ मिलकर अपने पति को मौत के घाट उतार दिया.
जयपुरः जयपुर में पुलिस अधिकारियों एवं पुलिस कर्मियों को बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने में दक्ष बनाने के लिए नौ माह का ऑनलाइन डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। इस पाठ्यक्रम की शुरुआत सोमवार को राज्य के पुलिस महानिदेशक उमेश मिश्रा ने की। मिश्रा ने कहा कि आज के दौर में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस कर्मियों की तकनीकी दक्षता पर बल दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस 'डिप्लोमा पाठ्यक्रम' से पुलिसकर्मियों में तकनीकी दक्षता बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा। मिश्रा ने इस पाठ्यक्रम के लिए चयनित 50 पुलिस कर्मियों को बधाई दी और कहा कि इससे उनका साइबर ज्ञान बढ़ेगा। डाइनामाइट न्यूज संवाददाता के मुताबिक सरदार पटेल पुलिस विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आलोक त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस कर्मियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यह साइबर सुरक्षा डिप्लोमा पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। पुलिस महानिदेशक (साइबर अपराध व सुरक्षा) डॉ. रवि प्रकाश मेहरड़ा ने बताया कि इस पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करना है।
जयपुरः जयपुर में पुलिस अधिकारियों एवं पुलिस कर्मियों को बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने में दक्ष बनाने के लिए नौ माह का ऑनलाइन डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किया गया है। इस पाठ्यक्रम की शुरुआत सोमवार को राज्य के पुलिस महानिदेशक उमेश मिश्रा ने की। मिश्रा ने कहा कि आज के दौर में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस कर्मियों की तकनीकी दक्षता पर बल दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस 'डिप्लोमा पाठ्यक्रम' से पुलिसकर्मियों में तकनीकी दक्षता बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा। मिश्रा ने इस पाठ्यक्रम के लिए चयनित पचास पुलिस कर्मियों को बधाई दी और कहा कि इससे उनका साइबर ज्ञान बढ़ेगा। डाइनामाइट न्यूज संवाददाता के मुताबिक सरदार पटेल पुलिस विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आलोक त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस कर्मियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यह साइबर सुरक्षा डिप्लोमा पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। पुलिस महानिदेशक डॉ. रवि प्रकाश मेहरड़ा ने बताया कि इस पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करना है।
अजमेर पोएट्स कलेक्टिव जयपुर द्वारा हंगर बीट्स, शिप्रा पथ, मानसरोवर जयपुर के सभागार में बसंती काव्य संध्या, कार्यक्रमों की श्रंखला में एक और यादगार आयोजन के रूप में दर्ज हो गई । कार्यक्रम का शुभारंभ जयपुर के वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं प्रतिष्ठित वक्ता डॉक्टर बजरंग सोनी, वरिष्ठ कवियत्री एवं शिक्षाविद डॉक्टर सुशीला शील, मां शारदे के समक्ष मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं विभिन्न कवियत्रीओ द्वारा सुरीले कंठ से खूबसूरत गीत प्रस्तुत कर मां शारदे की वंदना से की गई। तत्पश्चात अतिथि परिचय एवं स्वागत की परंपरा के निर्वाह के लिए शिवानी शर्मा ने अपनी काव्यात्मक शैली में सभी मंचासीन अतिथियों परिचय करवाया । अजमेर पोएट्स कलेक्टिव एवं टीम बसंती काव्य संध्या द्वारा सभी मंचासीन अतिथियों का माल्यापर्ण कर सम्मान किया गया। बसंती काव्य संध्या के कार्यक्रम की अध्यक्षता जयपुर के वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं प्रतिष्ठित वक्ता डॉक्टर बजरंग सोनी ने की, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कवियत्री एवं शिक्षाविद डॉक्टर सुशीला शील थी। काव्य संगोष्ठी के क्रम में जहां बसंत के रंग बिखरे वहीं रचनाकारों ने प्रेम, विरह, हास्य के रंगों से जज़्बातों के कैनवास रंगीन कर दिए। नारी प्रधान रचनाएं थीं तो सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दे भी रचनाकारों ने अपने अल्फाजों से उठाए। हमें इस कार्यक्रम की संयोजक शिवानी शर्मा ने बताया की कविता एवं साहित्य में नई युवा पीढ़ी की बढती दिलचस्पी को सकारात्मक बताते हुए ऐसे कार्यक्रमों में वरिष्ठ साहित्यकारों एवं कवियों के अनुभवों से युवा पीढ़ी को जागरूक कर अपनी काव्यात्मक शैली में दोहों शेर आदि के उदहारण से प्रशिक्षित एवं प्रेरित करना तथा समय-समय पर इस तरह के आयोजन कर साहित्य के क्षेत्र में देश, विदेश में छुपी प्रतिभाओं को सामने लाना हैं। इसके साथ ही काव्य गोष्ठियों में कुछ सुधार की आवश्यकता है। कार्यक्रम में अजमेर से अमित टंडन, शांतनु बरार, राजीव नसीब, मज़हर साहब, सहर नसीराबादी और श्रीमती मीनू यादव एवं जयपुर से शिवानी, अर्चना जैन, पूनम धाबाई, निरुपमा चतुर्वेदी, विनीता सुराणा, डॉक्टर भावना, मीना सूद, वरिष्ठ रंगमंच कलाकार एवं कवि विजय मिश्र दानिश, हरि भाई, मुकेश शर्मा, अवनीन्द्र मानौर संजीव तिवारी आदि कवियों ने शिरकत की। कार्यक्रम का संचालन शिवानी शर्मा द्वारा अपने मनमोहक अंदाज से किया, जिसके लिए शिवानी शर्मा ने तालियां बटोरीं। अंत में कार्यक्रम की संजोयक शिवानी शर्मा द्वारा सभी उपस्थितजनों का आभार प्रकट कर समारोह का समापन किया गया ।
अजमेर पोएट्स कलेक्टिव जयपुर द्वारा हंगर बीट्स, शिप्रा पथ, मानसरोवर जयपुर के सभागार में बसंती काव्य संध्या, कार्यक्रमों की श्रंखला में एक और यादगार आयोजन के रूप में दर्ज हो गई । कार्यक्रम का शुभारंभ जयपुर के वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं प्रतिष्ठित वक्ता डॉक्टर बजरंग सोनी, वरिष्ठ कवियत्री एवं शिक्षाविद डॉक्टर सुशीला शील, मां शारदे के समक्ष मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं विभिन्न कवियत्रीओ द्वारा सुरीले कंठ से खूबसूरत गीत प्रस्तुत कर मां शारदे की वंदना से की गई। तत्पश्चात अतिथि परिचय एवं स्वागत की परंपरा के निर्वाह के लिए शिवानी शर्मा ने अपनी काव्यात्मक शैली में सभी मंचासीन अतिथियों परिचय करवाया । अजमेर पोएट्स कलेक्टिव एवं टीम बसंती काव्य संध्या द्वारा सभी मंचासीन अतिथियों का माल्यापर्ण कर सम्मान किया गया। बसंती काव्य संध्या के कार्यक्रम की अध्यक्षता जयपुर के वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं प्रतिष्ठित वक्ता डॉक्टर बजरंग सोनी ने की, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ कवियत्री एवं शिक्षाविद डॉक्टर सुशीला शील थी। काव्य संगोष्ठी के क्रम में जहां बसंत के रंग बिखरे वहीं रचनाकारों ने प्रेम, विरह, हास्य के रंगों से जज़्बातों के कैनवास रंगीन कर दिए। नारी प्रधान रचनाएं थीं तो सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दे भी रचनाकारों ने अपने अल्फाजों से उठाए। हमें इस कार्यक्रम की संयोजक शिवानी शर्मा ने बताया की कविता एवं साहित्य में नई युवा पीढ़ी की बढती दिलचस्पी को सकारात्मक बताते हुए ऐसे कार्यक्रमों में वरिष्ठ साहित्यकारों एवं कवियों के अनुभवों से युवा पीढ़ी को जागरूक कर अपनी काव्यात्मक शैली में दोहों शेर आदि के उदहारण से प्रशिक्षित एवं प्रेरित करना तथा समय-समय पर इस तरह के आयोजन कर साहित्य के क्षेत्र में देश, विदेश में छुपी प्रतिभाओं को सामने लाना हैं। इसके साथ ही काव्य गोष्ठियों में कुछ सुधार की आवश्यकता है। कार्यक्रम में अजमेर से अमित टंडन, शांतनु बरार, राजीव नसीब, मज़हर साहब, सहर नसीराबादी और श्रीमती मीनू यादव एवं जयपुर से शिवानी, अर्चना जैन, पूनम धाबाई, निरुपमा चतुर्वेदी, विनीता सुराणा, डॉक्टर भावना, मीना सूद, वरिष्ठ रंगमंच कलाकार एवं कवि विजय मिश्र दानिश, हरि भाई, मुकेश शर्मा, अवनीन्द्र मानौर संजीव तिवारी आदि कवियों ने शिरकत की। कार्यक्रम का संचालन शिवानी शर्मा द्वारा अपने मनमोहक अंदाज से किया, जिसके लिए शिवानी शर्मा ने तालियां बटोरीं। अंत में कार्यक्रम की संजोयक शिवानी शर्मा द्वारा सभी उपस्थितजनों का आभार प्रकट कर समारोह का समापन किया गया ।
चक्रवात बिपरजोय, प्रतीकात्मक तस्वीर ( Image Source : PTI ) Cyclone Biparjoy News Update: अरब सागर में आए चक्रवात 'बिपरजॉय' उत्तर की ओर बढ़ा और गुजरात के तटीय पोरबंदर जिले से करीब 900 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पश्चिम में केंद्रित रहा, इसके कारण मछुआरों को गहरे समुद्र क्षेत्रों से तट पर लौटने के लिए कहा गया है और बंदरगाहों को दूरस्थ चेतावनी संकेत जारी करने का निर्देश दिया गया है. अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी. इस साल अरब सागर में आए पहले चक्रवात से राज्य के तटीय क्षेत्रों में हल्की बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की उम्मीद है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ओर से जारी किए गए ताजा बुलेटिन के मुताबिक पूर्व-मध्य अरब सागर के ऊपर बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान 'बिपरजॉय' वर्तमान में पोरबंदर से 930 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पश्चिम में केंद्रित है और उत्तर-उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ रहा है. अहमदाबाद में आईएमडी के मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती ने कहा, " चक्रवात के कारण 10,11 और 12 जून को हवा की गति 45 से 55 समुद्री मील प्रति घंटे तक जा सकती है. इस दौरान हवा की गति 65 समुद्री मील के निशान को भी छू सकती है. चक्रवात के कारण दक्षिणी गुजरात और सौराष्ट्र सहित तटीय क्षेत्रों में हल्की बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने के आसार हैं. सभी बंदरगाहों को दूरस्थ चेतावनी संकेत जारी करने के लिए कहा गया है. " एक वरिष्ठ नौकरशाह ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 15 और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की 11 टीमों को गुजरात में राहत कार्यों के लिए तैयार रखा गया है. क्या है बिपरजॉय? अरब सागर में बिपरजॉय नाम का चक्रवाती तूफान विकसित हुआ है. गुरुवार (8 जून) दोपहर को, यह गोवा से लगभग 850 किमी पश्चिम में और मुंबई से 900 किमी दक्षिण पश्चिम में स्थित था. चक्रवात के अगले तीन दिनों में ताकत हासिल करने और 13 जून तक एक बहुत ही गंभीर चक्रवाती तूफान में विकसित होने की भविष्यवाणी की गई है. गुरुवार (8 जून) को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की सलाह के अनुसार, चक्रवात के परिणामस्वरूप हवा के साथ तेज मौसम होगा. गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र के समुद्र तट के साथ 35-45 किमी प्रति घंटे की गति तक पहुंचती है. आईएमडी ने अभी तक भारत, ओमान, ईरान और पाकिस्तान सहित अरब सागर से सटे देशों पर किसी बड़े प्रभाव की भविष्यवाणी नहीं की है. ये भी पढ़ेंः PM Modi Degree Row: 2 समन मिलने के बाद भी कोर्ट में पेश नहीं हुए सीएम अरविंद केजरीवाल, जानें क्या है पूरा मामला?
चक्रवात बिपरजोय, प्रतीकात्मक तस्वीर Cyclone Biparjoy News Update: अरब सागर में आए चक्रवात 'बिपरजॉय' उत्तर की ओर बढ़ा और गुजरात के तटीय पोरबंदर जिले से करीब नौ सौ किलोग्राममीटर दक्षिण-दक्षिण पश्चिम में केंद्रित रहा, इसके कारण मछुआरों को गहरे समुद्र क्षेत्रों से तट पर लौटने के लिए कहा गया है और बंदरगाहों को दूरस्थ चेतावनी संकेत जारी करने का निर्देश दिया गया है. अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी. इस साल अरब सागर में आए पहले चक्रवात से राज्य के तटीय क्षेत्रों में हल्की बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने की उम्मीद है. भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से जारी किए गए ताजा बुलेटिन के मुताबिक पूर्व-मध्य अरब सागर के ऊपर बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान 'बिपरजॉय' वर्तमान में पोरबंदर से नौ सौ तीस किलोग्राममीटर दक्षिण-दक्षिण पश्चिम में केंद्रित है और उत्तर-उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ रहा है. अहमदाबाद में आईएमडी के मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती ने कहा, " चक्रवात के कारण दस,ग्यारह और बारह जून को हवा की गति पैंतालीस से पचपन समुद्री मील प्रति घंटे तक जा सकती है. इस दौरान हवा की गति पैंसठ समुद्री मील के निशान को भी छू सकती है. चक्रवात के कारण दक्षिणी गुजरात और सौराष्ट्र सहित तटीय क्षेत्रों में हल्की बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ने के आसार हैं. सभी बंदरगाहों को दूरस्थ चेतावनी संकेत जारी करने के लिए कहा गया है. " एक वरिष्ठ नौकरशाह ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की पंद्रह और राज्य आपदा मोचन बल की ग्यारह टीमों को गुजरात में राहत कार्यों के लिए तैयार रखा गया है. क्या है बिपरजॉय? अरब सागर में बिपरजॉय नाम का चक्रवाती तूफान विकसित हुआ है. गुरुवार दोपहर को, यह गोवा से लगभग आठ सौ पचास किमी पश्चिम में और मुंबई से नौ सौ किमी दक्षिण पश्चिम में स्थित था. चक्रवात के अगले तीन दिनों में ताकत हासिल करने और तेरह जून तक एक बहुत ही गंभीर चक्रवाती तूफान में विकसित होने की भविष्यवाणी की गई है. गुरुवार को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की सलाह के अनुसार, चक्रवात के परिणामस्वरूप हवा के साथ तेज मौसम होगा. गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र के समुद्र तट के साथ पैंतीस-पैंतालीस किमी प्रति घंटे की गति तक पहुंचती है. आईएमडी ने अभी तक भारत, ओमान, ईरान और पाकिस्तान सहित अरब सागर से सटे देशों पर किसी बड़े प्रभाव की भविष्यवाणी नहीं की है. ये भी पढ़ेंः PM Modi Degree Row: दो समन मिलने के बाद भी कोर्ट में पेश नहीं हुए सीएम अरविंद केजरीवाल, जानें क्या है पूरा मामला?
लोग अपने-अपने धर्म के अनुसार किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके मृत शरीर को दफनाते या जलाते हैं। लेकिन दुनिया में एक जनजाति ऐसी भी है जो अपने पूर्वजों के मरने के बाद उनके शव को घर में सजाकर रखती है। क्या आपको पता है कि न्यू गिनी में स्थित पापुआ के पहाड़ों के बीच दानी नामक एक जनजाति रहती है। यह जनजाति अपने पूर्वजों के शरीर को घर में सजाकर रखने के लिए जानी जाती है। पहाड़ो में छिप कर रहने वाली इस जनजाति के लोग अपने बड़े-बूढ़ें घरवालों की मौत के बाद उनके शरीर को घर में ही रख देते हैं। ऐसा करने के लिए उन्हें पूर्वजों के शव के साथ कई दिनों तक बैठे रहना पड़ता है। पहले मृत शरीर को ममी बनाने के लिए शव पर धुआं लगाया जाता है। धुआं शरीर पर तब तक लगाया जाता है जब तक शरीर ममी में न बदल जाए। ऐसा करने से लाश को कई सालों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। पश्चिमी पापुआ के वामेना में स्थित इस गांव को पहली बार साल 1938 में अमरीकन जूलॉजिस्ट रिचर्ड आर्कबोल्ड ने खोजा था।
लोग अपने-अपने धर्म के अनुसार किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके मृत शरीर को दफनाते या जलाते हैं। लेकिन दुनिया में एक जनजाति ऐसी भी है जो अपने पूर्वजों के मरने के बाद उनके शव को घर में सजाकर रखती है। क्या आपको पता है कि न्यू गिनी में स्थित पापुआ के पहाड़ों के बीच दानी नामक एक जनजाति रहती है। यह जनजाति अपने पूर्वजों के शरीर को घर में सजाकर रखने के लिए जानी जाती है। पहाड़ो में छिप कर रहने वाली इस जनजाति के लोग अपने बड़े-बूढ़ें घरवालों की मौत के बाद उनके शरीर को घर में ही रख देते हैं। ऐसा करने के लिए उन्हें पूर्वजों के शव के साथ कई दिनों तक बैठे रहना पड़ता है। पहले मृत शरीर को ममी बनाने के लिए शव पर धुआं लगाया जाता है। धुआं शरीर पर तब तक लगाया जाता है जब तक शरीर ममी में न बदल जाए। ऐसा करने से लाश को कई सालों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। पश्चिमी पापुआ के वामेना में स्थित इस गांव को पहली बार साल एक हज़ार नौ सौ अड़तीस में अमरीकन जूलॉजिस्ट रिचर्ड आर्कबोल्ड ने खोजा था।
अमरावती/ दि. 15- अमरावती विभाग के फासे पारधी आदिवासी, भटके विमुक्त पिछले 75 वर्षों से संवैधानिक सुख, सुविधाओं से वंचित है. वे आज भी जानवरों की तरह जीवन जीने के लिए विवश है. वे जिस जगह पर रह रहे है, वह जमीन उनके नाम पर की जाए और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए, ऐसी मांग को लेकर आदिवासी फासे पारधी समाज संगठना के बैनरतले संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपा. सौंपे ज्ञापन में उन्होंने कहा है कि, उनकी ओर राजनेता व सरकार ध्यान नहीं देती. संवैधानिक दिया अधिकार उन्हें नहीं मिल पा रहा हेै. अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए आदिवासी फासे पारधी संगठना के बैनरतले इर्विन चौक से गर्ल्स हाईस्कूल चौक, जिलाधिकारी कार्यालय, आरटीओ कार्यालय होते हुए विभागीय आयुक्त कार्यालय तक ले जाया गया. मोर्चे के माध्यम से विभागीय आयुक्त को सौंपे ज्ञापन में उन्होंने कहा है कि, पिछले कई पीढियों से वे जिस जगह पर रह रहे है, वन विभाग वह जमीन उनसे छिनने का प्रयास कर रहा है. वह जमीन उनके नाम की जाए, जिनके पास जमीन नहीं है, उन्हें शासन स्तर पर जमीन उपलब्ध करवाये. उन्होंने जो गांव को नाम दिया है, उस गांव को स्वतंत्र दर्जा देकर महसूल विभाग में पंजीयन करवाये, उन्हें गांव में रास्ते, पानी, बिजली, स्कूल, रोजगार, शौचालय, घरकुल, समाजभवन आदि दिये जाए. उन्हें नागरिकता का प्रमाणपत्र देने के लिए विशेष अभियान चलाए, ऐसी मांग करते समय एड. डॉ. अरुण जाधव, बाबूसिंग पवार, संतोष पवार, सागर पवार, प्रमोद वालवे, सलीम घोसले, मनोज सोलंके, अभय पवार, संतोष जाधव, शानदास भोसले समेत अन्य समाजबांधव उपस्थित थे.
अमरावती/ दि. पंद्रह- अमरावती विभाग के फासे पारधी आदिवासी, भटके विमुक्त पिछले पचहत्तर वर्षों से संवैधानिक सुख, सुविधाओं से वंचित है. वे आज भी जानवरों की तरह जीवन जीने के लिए विवश है. वे जिस जगह पर रह रहे है, वह जमीन उनके नाम पर की जाए और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए, ऐसी मांग को लेकर आदिवासी फासे पारधी समाज संगठना के बैनरतले संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपा. सौंपे ज्ञापन में उन्होंने कहा है कि, उनकी ओर राजनेता व सरकार ध्यान नहीं देती. संवैधानिक दिया अधिकार उन्हें नहीं मिल पा रहा हेै. अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए आदिवासी फासे पारधी संगठना के बैनरतले इर्विन चौक से गर्ल्स हाईस्कूल चौक, जिलाधिकारी कार्यालय, आरटीओ कार्यालय होते हुए विभागीय आयुक्त कार्यालय तक ले जाया गया. मोर्चे के माध्यम से विभागीय आयुक्त को सौंपे ज्ञापन में उन्होंने कहा है कि, पिछले कई पीढियों से वे जिस जगह पर रह रहे है, वन विभाग वह जमीन उनसे छिनने का प्रयास कर रहा है. वह जमीन उनके नाम की जाए, जिनके पास जमीन नहीं है, उन्हें शासन स्तर पर जमीन उपलब्ध करवाये. उन्होंने जो गांव को नाम दिया है, उस गांव को स्वतंत्र दर्जा देकर महसूल विभाग में पंजीयन करवाये, उन्हें गांव में रास्ते, पानी, बिजली, स्कूल, रोजगार, शौचालय, घरकुल, समाजभवन आदि दिये जाए. उन्हें नागरिकता का प्रमाणपत्र देने के लिए विशेष अभियान चलाए, ऐसी मांग करते समय एड. डॉ. अरुण जाधव, बाबूसिंग पवार, संतोष पवार, सागर पवार, प्रमोद वालवे, सलीम घोसले, मनोज सोलंके, अभय पवार, संतोष जाधव, शानदास भोसले समेत अन्य समाजबांधव उपस्थित थे.
Baghpat News: बागपत के जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ राजकमल यादव ने 10 फरवरी की सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक अच्छे भविष्य, देश की उन्नति व खुशहाली के लिए समस्त जनपदवासियों से अधिक से अधिक संख्या में मतदान केन्द्र पर पहुॅंचकर वोट डालने की अपील की है। कहा कि अपने वोट को अवश्य डाले और अपने आस-पास रहने वाले लोगो को भी वोट की ताकत से अवगत कराये और अधिक से अधिक संख्या में लोगों को मतदान केन्द्रों पर वोट डलवाने के लिए लेकर आये। वोट डालना हमारा संवैधानिक अधिकार है और प्रथम कर्त्तव्य है। कहा कि वृद्धों, विकलांगों और पहली वार वोट डालने वालों की वोट डलवाने में मद्द करे। बताया कि आम जनता ही निश्चित करती है कि उनका भविष्य किसके हाथ में सुरक्षित है। उन्होंने आम लोगों से कहा कि वह बिल्कुल भी असमंजस में ना पड़े। वे स्वयं जांच पड़ताल करे की सबसे ज्यादा देश व समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को कौन निभा रहा है। ऐसे व्यक्ति को वोट करे जो देश व समाज की सेवा को सर्वोपरि रखता है। कहा कि मतदान हमेशा गुप्त रखें और किसी को भी यह नहीं बताये कि आपने किसको वोट दी। आपका यह कार्य भाईचारा बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान करता है। हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है। हम बहुत खुशनसीब लोग है जिनको वोट देने का अधिकार मिला हुआ है। हम अपना अच्छा भविष्य खुद लिख सकते है और यह तभी सम्भव है जब हम अपने वोट से अच्छे जन प्रतिनिधि का चुनाव करे।
Baghpat News: बागपत के जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ राजकमल यादव ने दस फरवरी की सुबह सात बजे से शाम छः बजे तक अच्छे भविष्य, देश की उन्नति व खुशहाली के लिए समस्त जनपदवासियों से अधिक से अधिक संख्या में मतदान केन्द्र पर पहुॅंचकर वोट डालने की अपील की है। कहा कि अपने वोट को अवश्य डाले और अपने आस-पास रहने वाले लोगो को भी वोट की ताकत से अवगत कराये और अधिक से अधिक संख्या में लोगों को मतदान केन्द्रों पर वोट डलवाने के लिए लेकर आये। वोट डालना हमारा संवैधानिक अधिकार है और प्रथम कर्त्तव्य है। कहा कि वृद्धों, विकलांगों और पहली वार वोट डालने वालों की वोट डलवाने में मद्द करे। बताया कि आम जनता ही निश्चित करती है कि उनका भविष्य किसके हाथ में सुरक्षित है। उन्होंने आम लोगों से कहा कि वह बिल्कुल भी असमंजस में ना पड़े। वे स्वयं जांच पड़ताल करे की सबसे ज्यादा देश व समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को कौन निभा रहा है। ऐसे व्यक्ति को वोट करे जो देश व समाज की सेवा को सर्वोपरि रखता है। कहा कि मतदान हमेशा गुप्त रखें और किसी को भी यह नहीं बताये कि आपने किसको वोट दी। आपका यह कार्य भाईचारा बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान करता है। हमारा देश एक लोकतांत्रिक देश है। हम बहुत खुशनसीब लोग है जिनको वोट देने का अधिकार मिला हुआ है। हम अपना अच्छा भविष्य खुद लिख सकते है और यह तभी सम्भव है जब हम अपने वोट से अच्छे जन प्रतिनिधि का चुनाव करे।
Bareilly Jume Ki Namaz Photo Gallery 2022 जुमे की नमाज को लेकर शहर की गतिविधि जागरण के कैमरे में कुछ इस तरह से कैद हुई। जिसमें अफसर जहां मोर्चा संभालते नजर आए वहीं सड़को पर पुलिस फोर्स का मूवमेंट भी दिखाई दिया। कई स्थानों पर सन्नाटा भी दिखा। बरेली, जेएनएन। Bareilly Photo Gallery 2022: बरेली में जुमे की नमाज से पहले शहर के अफसरों ने मोर्चा संभाल लिया है। बरेली कमिश्नर सेल्वा कुमारी जे सहित आई जी रमित शर्मा, डीएम शिवाकांत द्विवेदी, एसएसपी रोहित सजवाण सहित अन्य अफसरों ने मोर्चा संभाल लिया है। बरेली शहर में रेपिड एक्शन फोर्स सहित पुलिस का मूवमेंट बराबर चल रहा है। शासन के निर्देश पर जुमे की नमाज के पहले शहर की हर स्थिति को सीनियर फोटो ग्राफर अजय शर्मा ने अपने कैमरे में कुछ इस तरह से कैद किया है। किला जामा मस्जिद के पास तैनात पुलिस फाेर्स। रेपिड एक्शन फोर्स के साथ स्वयं माैजूद बरेली डीएम शिवाकांत द्विवेदी। नमाज के पहले शहर के मुख्य बाजार में मूवमेंट करता रेपिड एक्शन फोर्स। नमाज से पहले धार्मिक स्थल के पास मूवमेंट करता रेपिड एक्शन फोर्स। बरेली में नमाज से पहले धार्मिक स्थल के चौराहे पर लोगाें का मूवमेंट।
Bareilly Jume Ki Namaz Photo Gallery दो हज़ार बाईस जुमे की नमाज को लेकर शहर की गतिविधि जागरण के कैमरे में कुछ इस तरह से कैद हुई। जिसमें अफसर जहां मोर्चा संभालते नजर आए वहीं सड़को पर पुलिस फोर्स का मूवमेंट भी दिखाई दिया। कई स्थानों पर सन्नाटा भी दिखा। बरेली, जेएनएन। Bareilly Photo Gallery दो हज़ार बाईस: बरेली में जुमे की नमाज से पहले शहर के अफसरों ने मोर्चा संभाल लिया है। बरेली कमिश्नर सेल्वा कुमारी जे सहित आई जी रमित शर्मा, डीएम शिवाकांत द्विवेदी, एसएसपी रोहित सजवाण सहित अन्य अफसरों ने मोर्चा संभाल लिया है। बरेली शहर में रेपिड एक्शन फोर्स सहित पुलिस का मूवमेंट बराबर चल रहा है। शासन के निर्देश पर जुमे की नमाज के पहले शहर की हर स्थिति को सीनियर फोटो ग्राफर अजय शर्मा ने अपने कैमरे में कुछ इस तरह से कैद किया है। किला जामा मस्जिद के पास तैनात पुलिस फाेर्स। रेपिड एक्शन फोर्स के साथ स्वयं माैजूद बरेली डीएम शिवाकांत द्विवेदी। नमाज के पहले शहर के मुख्य बाजार में मूवमेंट करता रेपिड एक्शन फोर्स। नमाज से पहले धार्मिक स्थल के पास मूवमेंट करता रेपिड एक्शन फोर्स। बरेली में नमाज से पहले धार्मिक स्थल के चौराहे पर लोगाें का मूवमेंट।
KANPUR: कानपुर में मेट्रो ट्रेन दौड़ने की उम्मीदें परवान चढ़ने लगी हैं। को फिर मेट्रो की रिवाइज डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार हो गई है। राइट्स ने इसे कानपुर में मेट्रो दौड़ाने की जिम्मेदारी संभाल रही लखनऊ मेट्रो रेल कार्पोरेशन के ऑफिसर्स को सौंप दी है। एलएमआरसी के ऑफिसर्स ने प्रमुख सचिव के ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद कैबिनेट से डिटेल प्रोजेक्ट पास कराने की तैयारी कर ली है। इसका कैबिनेट नोट तैयार हो गया है। जिससे कि कैबिनेट से रिवाइज डीपीआर पास कराकर सेंट्रल गवनर्1मेंट को भेजी जा सके। कानपुर मेट्रो का डिटेल प्रोजेक्ट वर्ष 2016 में तैयार हो गया था। कैबिनेट से पास होने के बाद 29 मार्च, 2016 को सेंट्रल गवर्नमेंट को भेज दिया गया था। लेकिन सेंट्रल गवर्नमेंट ने मेट्रो को लेकर नई पॉलिसी बना दी, जिसकी कसौटी पर कानपुर मेट्रो प्रोजेक्ट खरा नहीं उतर रहा था। इसके चलते सेंट्रल गवर्नमेंट ने कानपुर मेट्रो की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट रिवाइज करने के लिए लौटा दी थी। इसमें मुख्य रूप से कानपुर मेट्रो की नए सिरे से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर फंडिंग और काम्प्रीहेंसिव मोबिलिटी प्लान शामिल था। करीब तीन महीने पहले स्टेट गवर्नमेंट ने केडीए को 31 दिसंबर,2017 तक मेट्रो की रिवाइज डीपीआर तैयार कराने का टारगेट दिया था। केडीए ने राइट्स और अरबन मास ट्रांजिट कम्पनी को डीपीआर रिवाइज करने की जिम्मेदार सौंपी थी। कानपुर में मेट्रो दौड़ाने की जिम्मेदारी संभाल रहे लखनऊ मेट्रो रेल कार्पोरेशन के एमडी कुमार केशव ने बताया कि कानपुर मेट्रो की रिवाइज डीपीआर मिल गई है। कैबिनेट से रिवाइज डीपीआर पास कराने के लिए कैबिनेट नोट भी तैयार कर लिया गया है। जिससे आगामी स्टेट कैबिनेट की मीटिंग में पास कराकर सेंट्रल गवर्नमेंट को रिवाइज डीपीआर भेजी जा सके। । प्रोजेक्ट कास्ट-- 13721 करोड़(अगस्त,2015 के मुताबिक)
KANPUR: कानपुर में मेट्रो ट्रेन दौड़ने की उम्मीदें परवान चढ़ने लगी हैं। को फिर मेट्रो की रिवाइज डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार हो गई है। राइट्स ने इसे कानपुर में मेट्रो दौड़ाने की जिम्मेदारी संभाल रही लखनऊ मेट्रो रेल कार्पोरेशन के ऑफिसर्स को सौंप दी है। एलएमआरसी के ऑफिसर्स ने प्रमुख सचिव के ग्रीन सिग्नल मिलने के बाद कैबिनेट से डिटेल प्रोजेक्ट पास कराने की तैयारी कर ली है। इसका कैबिनेट नोट तैयार हो गया है। जिससे कि कैबिनेट से रिवाइज डीपीआर पास कराकर सेंट्रल गवनर्एकमेंट को भेजी जा सके। कानपुर मेट्रो का डिटेल प्रोजेक्ट वर्ष दो हज़ार सोलह में तैयार हो गया था। कैबिनेट से पास होने के बाद उनतीस मार्च, दो हज़ार सोलह को सेंट्रल गवर्नमेंट को भेज दिया गया था। लेकिन सेंट्रल गवर्नमेंट ने मेट्रो को लेकर नई पॉलिसी बना दी, जिसकी कसौटी पर कानपुर मेट्रो प्रोजेक्ट खरा नहीं उतर रहा था। इसके चलते सेंट्रल गवर्नमेंट ने कानपुर मेट्रो की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट रिवाइज करने के लिए लौटा दी थी। इसमें मुख्य रूप से कानपुर मेट्रो की नए सिरे से पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर फंडिंग और काम्प्रीहेंसिव मोबिलिटी प्लान शामिल था। करीब तीन महीने पहले स्टेट गवर्नमेंट ने केडीए को इकतीस दिसंबर,दो हज़ार सत्रह तक मेट्रो की रिवाइज डीपीआर तैयार कराने का टारगेट दिया था। केडीए ने राइट्स और अरबन मास ट्रांजिट कम्पनी को डीपीआर रिवाइज करने की जिम्मेदार सौंपी थी। कानपुर में मेट्रो दौड़ाने की जिम्मेदारी संभाल रहे लखनऊ मेट्रो रेल कार्पोरेशन के एमडी कुमार केशव ने बताया कि कानपुर मेट्रो की रिवाइज डीपीआर मिल गई है। कैबिनेट से रिवाइज डीपीआर पास कराने के लिए कैबिनेट नोट भी तैयार कर लिया गया है। जिससे आगामी स्टेट कैबिनेट की मीटिंग में पास कराकर सेंट्रल गवर्नमेंट को रिवाइज डीपीआर भेजी जा सके। । प्रोजेक्ट कास्ट-- तेरह हज़ार सात सौ इक्कीस करोड़
Karabük आयरन एंड स्टील फैक्ट्रीज़ (KARDEMİR) और Karabük श्रम और रोजगार एजेंसी (İŞKUR) के प्रांतीय निदेशालय के बीच हस्ताक्षरित ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण कार्यक्रम के दायरे में, 106 कर्मियों ने उन इकाइयों में काम करना शुरू कर दिया, जो अभिविन्यास के बाद काम करेंगे। प्रशिक्षण। KARDEMİR और Karabük İŞKUR प्रांतीय निदेशालय के बीच हस्ताक्षरित ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण कार्यक्रम के दायरे में, 1 अक्टूबर, 2018 को काम करना शुरू करने वाले 106 कर्मियों को ओरिएंटेशन प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन इकाइयों में भेजा गया जहां वे आज काम करेंगे। 1 अक्टूबर, 2018 तक ओएचएस मॉड्यूल प्रशिक्षण के अलावा; शिक्षा और संस्कृति आज हमारे नए सहयोगियों के साथ जिन्होंने व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली, गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली, सूचना सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली, ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली, पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली, ग्राहक संतुष्टि प्रबंधन प्रणाली, कार्दिमीर सॉफ्टवेयर सिस्टम पर अभिविन्यास प्रशिक्षण पूरा किया और उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा वितरित की गई। उपकरण सामग्री। केंद्र में एक समूह फोटो लिया गया। कंपनी के महाप्रबंधक एर्कुमेंट यूनाल ने अपने नए सहयोगियों को शुभकामनाएं व्यक्त कीं; "मुझे पूरा विश्वास है कि आप सभी अपने काम की रक्षा करेंगे और बलिदान देंगे। निःस्वार्थ होना एक बात है, घर पर आपका इंतजार कर रहे लोगों के प्रति जिम्मेदार होना दूसरी बात है। दुनिया में आर्थिक संकट चल रहे हैं, आप दो साल घाटा उठाते हैं, लेकिन तीसरे साल मुनाफा कमाते हैं, सभी कंपनियों में ऐसा ही है। आप उन दो वर्षों के लिए अपने घाटे को कवर करेंगे। हम उस दो साल के नुकसान को एक साल में कवर कर लेते हैं, लेकिन जब क्षेत्र में घातक कार्य दुर्घटनाएं या अंगों की हानि जैसी कार्य दुर्घटनाएं होती हैं, तो हम ऐसी स्थितियों की भरपाई नहीं कर सकते हैं। आप सभी के पास एक निश्चित विशेषज्ञता, व्यवसाय करने का तरीका और पेशेवर अनुभव है, लेकिन ऐसे नियम और प्रक्रियाएं हैं जिन पर हम यहां ध्यान केंद्रित करते हैं। ये नियम कुछ अनुभवों के परिणामों के आधार पर विकसित की गई प्रक्रियाएँ हैं। आपकी योग्यताओं को ध्यान में रखते हुए, मुझे आपके द्वारा हमें प्रदान किये जाने वाले लाभ के बारे में कोई चिंता नहीं है। आपमें से कुछ लोगों ने ऐसी फ़ैक्टरियों में काम किया होगा। लेकिन जिस मुद्दे पर मैं सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित करता हूं वह है नियम। ये नियम आपका रोडमैप हैं।" उन्होंने उन्हें व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा नियमों का पालन करने की चेतावनी दी।
Karabük आयरन एंड स्टील फैक्ट्रीज़ और Karabük श्रम और रोजगार एजेंसी के प्रांतीय निदेशालय के बीच हस्ताक्षरित ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण कार्यक्रम के दायरे में, एक सौ छः कर्मियों ने उन इकाइयों में काम करना शुरू कर दिया, जो अभिविन्यास के बाद काम करेंगे। प्रशिक्षण। KARDEMİR और Karabük İŞKUR प्रांतीय निदेशालय के बीच हस्ताक्षरित ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण कार्यक्रम के दायरे में, एक अक्टूबर, दो हज़ार अट्ठारह को काम करना शुरू करने वाले एक सौ छः कर्मियों को ओरिएंटेशन प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन इकाइयों में भेजा गया जहां वे आज काम करेंगे। एक अक्टूबर, दो हज़ार अट्ठारह तक ओएचएस मॉड्यूल प्रशिक्षण के अलावा; शिक्षा और संस्कृति आज हमारे नए सहयोगियों के साथ जिन्होंने व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली, गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली, सूचना सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली, ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली, पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली, ग्राहक संतुष्टि प्रबंधन प्रणाली, कार्दिमीर सॉफ्टवेयर सिस्टम पर अभिविन्यास प्रशिक्षण पूरा किया और उन्हें व्यक्तिगत सुरक्षा वितरित की गई। उपकरण सामग्री। केंद्र में एक समूह फोटो लिया गया। कंपनी के महाप्रबंधक एर्कुमेंट यूनाल ने अपने नए सहयोगियों को शुभकामनाएं व्यक्त कीं; "मुझे पूरा विश्वास है कि आप सभी अपने काम की रक्षा करेंगे और बलिदान देंगे। निःस्वार्थ होना एक बात है, घर पर आपका इंतजार कर रहे लोगों के प्रति जिम्मेदार होना दूसरी बात है। दुनिया में आर्थिक संकट चल रहे हैं, आप दो साल घाटा उठाते हैं, लेकिन तीसरे साल मुनाफा कमाते हैं, सभी कंपनियों में ऐसा ही है। आप उन दो वर्षों के लिए अपने घाटे को कवर करेंगे। हम उस दो साल के नुकसान को एक साल में कवर कर लेते हैं, लेकिन जब क्षेत्र में घातक कार्य दुर्घटनाएं या अंगों की हानि जैसी कार्य दुर्घटनाएं होती हैं, तो हम ऐसी स्थितियों की भरपाई नहीं कर सकते हैं। आप सभी के पास एक निश्चित विशेषज्ञता, व्यवसाय करने का तरीका और पेशेवर अनुभव है, लेकिन ऐसे नियम और प्रक्रियाएं हैं जिन पर हम यहां ध्यान केंद्रित करते हैं। ये नियम कुछ अनुभवों के परिणामों के आधार पर विकसित की गई प्रक्रियाएँ हैं। आपकी योग्यताओं को ध्यान में रखते हुए, मुझे आपके द्वारा हमें प्रदान किये जाने वाले लाभ के बारे में कोई चिंता नहीं है। आपमें से कुछ लोगों ने ऐसी फ़ैक्टरियों में काम किया होगा। लेकिन जिस मुद्दे पर मैं सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित करता हूं वह है नियम। ये नियम आपका रोडमैप हैं।" उन्होंने उन्हें व्यावसायिक स्वास्थ्य और सुरक्षा नियमों का पालन करने की चेतावनी दी।
साउथ फिल्म इंडस्ट्री के बादशाह महेश बाबू आज अपना 43वां जन्मदिन मना रहे है। अपने जन्मदिन पर महेश बाबू ने अपनी 25वीं फिल्म 'महर्षि' का फर्स्टलुक और टीजर जारी कर दिया है। 9 अगस्त 1975 को चेन्नई में जन्में महेश ने 1999 में बतौर लीड एक्टर 'राजा कुमारुदु' फिल्म से बॉलीवुड में एक्टिंग की शुरुआत की। अपनी फिल्म 'महर्षि' का फर्स्टलुक ट्वीट करते हुए महेश बाबू ने लिखा, 'महार्षि में ऋषि के तौर पर अपनी नई यात्रा शुरू करने जा रहा हूं।' इस फोटो में महेश बाबू हाथों में लैपटॉप पकड़ें, कॉलर उठाते हुए बहुत ही कैजुअल अंदाज में नजर आ रहे है। ज्यादातर क्लीनशेव नजर आने वाले महेश बाबू इस बार हल्की दाढ़ी में है। वहीं फिल्म के मेकर्स ने 'महार्षि' का टीजर भी जारी कर दिया है। जिसमे महेश बाबू एक हाथ में लैपटॉप थामे हुए एक हाथ से अपने बालों को संवारते हुए किसी कॉलेज के कॉरिडोर में घूमते हुए नजर आ रहे है। टीजर के बैकग्राउंड में बच रही सीटी का म्यूजिक फिल्म के रोमांटिक होने का अंदाजा दे रहा है। खबरों की माने तो 'महर्षि माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नारायण नडेला की जिंदगी पर आधारित है। फिल्म में महेश बाबू के अलावा एलरी नरेश और पूजा हेगड़े भी मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। फिल्म के निर्देशक वामसी पैडिपल्ली है। महेश की पिछली फिल्म 'भारत एएन नेनु' ने बॉक्स ऑफिस पर 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी। महेश सिर्फ साउथ ही नहीं बल्कि विश्वभर में लोगों के बीच खासे लोकप्रिय है। अपनी इंड्रस्टी के प्रति महेश का समर्पण है कि वह बॉलीवुड की फिल्मों से आए ऑफर को स्वीकार नहीं करते है।
साउथ फिल्म इंडस्ट्री के बादशाह महेश बाबू आज अपना तैंतालीसवां जन्मदिन मना रहे है। अपने जन्मदिन पर महेश बाबू ने अपनी पच्चीसवीं फिल्म 'महर्षि' का फर्स्टलुक और टीजर जारी कर दिया है। नौ अगस्त एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर को चेन्नई में जन्में महेश ने एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में बतौर लीड एक्टर 'राजा कुमारुदु' फिल्म से बॉलीवुड में एक्टिंग की शुरुआत की। अपनी फिल्म 'महर्षि' का फर्स्टलुक ट्वीट करते हुए महेश बाबू ने लिखा, 'महार्षि में ऋषि के तौर पर अपनी नई यात्रा शुरू करने जा रहा हूं।' इस फोटो में महेश बाबू हाथों में लैपटॉप पकड़ें, कॉलर उठाते हुए बहुत ही कैजुअल अंदाज में नजर आ रहे है। ज्यादातर क्लीनशेव नजर आने वाले महेश बाबू इस बार हल्की दाढ़ी में है। वहीं फिल्म के मेकर्स ने 'महार्षि' का टीजर भी जारी कर दिया है। जिसमे महेश बाबू एक हाथ में लैपटॉप थामे हुए एक हाथ से अपने बालों को संवारते हुए किसी कॉलेज के कॉरिडोर में घूमते हुए नजर आ रहे है। टीजर के बैकग्राउंड में बच रही सीटी का म्यूजिक फिल्म के रोमांटिक होने का अंदाजा दे रहा है। खबरों की माने तो 'महर्षि माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नारायण नडेला की जिंदगी पर आधारित है। फिल्म में महेश बाबू के अलावा एलरी नरेश और पूजा हेगड़े भी मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। फिल्म के निर्देशक वामसी पैडिपल्ली है। महेश की पिछली फिल्म 'भारत एएन नेनु' ने बॉक्स ऑफिस पर दो सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी। महेश सिर्फ साउथ ही नहीं बल्कि विश्वभर में लोगों के बीच खासे लोकप्रिय है। अपनी इंड्रस्टी के प्रति महेश का समर्पण है कि वह बॉलीवुड की फिल्मों से आए ऑफर को स्वीकार नहीं करते है।
हिमाचल के जिला बिलासपुर में सरकारी डिपो में सस्ते राशन की दुकानों में के राशन को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कर्मचारी मिलीभक्त से अवैध रूप से बेचा जा रहा था. यह गोरख धंधा लम्बे अर्से से फल-फूल रहा है. लोगों ने ऐसा ही एक मामला घुमारवीं के चैहड़ में पकड़ा है. ग्रामीणों ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के गोदाम से बीस बोरी गेहूं की विभागीय कर्मचारियों की मिलीभक्त से अवैध रूप से निजी माल वाहक जीप में चोरी करते हुए रंगें हाथों पकड़ा. ग्रामीणों के पूछने पर चालक कोई भी पत्र सहित बिल नहीं दिखा सका. जब ग्रामीणों ने कड़ाई से पूछा तो इस दौरान साथ आए एक व्यक्ति ने किया स्वीकार मार्केट रेट से थोड़ा कम दाम और दो नंबर में संबंधित विभाग के कर्मचारी उन्हें गेंहू-चावल बेचते हैं. इस गोदाम से अवैध रूप से बड़ी मात्रा में गेंहू, चावल एवं दालों के कट्टे बेचे जाते हैं. ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि खाद्य एवं आपूर्ति घुमारवीं के अनाज भंडारों की जांच करवाई जाए, क्योंकि इस गोरख धंधे में संबंधित विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों सहित व्यापारी भी शामिल हैं. .
हिमाचल के जिला बिलासपुर में सरकारी डिपो में सस्ते राशन की दुकानों में के राशन को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के कर्मचारी मिलीभक्त से अवैध रूप से बेचा जा रहा था. यह गोरख धंधा लम्बे अर्से से फल-फूल रहा है. लोगों ने ऐसा ही एक मामला घुमारवीं के चैहड़ में पकड़ा है. ग्रामीणों ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के गोदाम से बीस बोरी गेहूं की विभागीय कर्मचारियों की मिलीभक्त से अवैध रूप से निजी माल वाहक जीप में चोरी करते हुए रंगें हाथों पकड़ा. ग्रामीणों के पूछने पर चालक कोई भी पत्र सहित बिल नहीं दिखा सका. जब ग्रामीणों ने कड़ाई से पूछा तो इस दौरान साथ आए एक व्यक्ति ने किया स्वीकार मार्केट रेट से थोड़ा कम दाम और दो नंबर में संबंधित विभाग के कर्मचारी उन्हें गेंहू-चावल बेचते हैं. इस गोदाम से अवैध रूप से बड़ी मात्रा में गेंहू, चावल एवं दालों के कट्टे बेचे जाते हैं. ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि खाद्य एवं आपूर्ति घुमारवीं के अनाज भंडारों की जांच करवाई जाए, क्योंकि इस गोरख धंधे में संबंधित विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों सहित व्यापारी भी शामिल हैं. .
मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र, केरल, गुजरात और कर्नाटक से कोविड मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूएई और सिंगापुर जैसे विदेशों से तमिलनाडु पहुंचने वाले लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है। सुब्रमण्यन ने कहा कि विदेशों से राज्य में आने वाले लगभग 30,000 लोगों का प्रत्येक सप्ताह वायरस का परीक्षण किया जा रहा है। तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में ऑक्सीजन बेड उपलब्ध हैं और 2000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन स्टोर करने की क्षमता है। मंत्री ने कहा कि राज्य में अस्पतालों में पर्याप्त बिस्तर हैं और कहा कि राज्य में इस तरह की चिंता की कोई जरूरत नहीं है। सुब्रमण्यन ने लोगों को मास्क पहनने, सामाजिक दूरी का अभ्यास करने और कोविड-19 प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य का स्वास्थ्य विभाग किसी भी स्थिति के लिए तैयार है।
मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र, केरल, गुजरात और कर्नाटक से कोविड मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूएई और सिंगापुर जैसे विदेशों से तमिलनाडु पहुंचने वाले लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है। सुब्रमण्यन ने कहा कि विदेशों से राज्य में आने वाले लगभग तीस,शून्य लोगों का प्रत्येक सप्ताह वायरस का परीक्षण किया जा रहा है। तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में ऑक्सीजन बेड उपलब्ध हैं और दो हज़ार मीट्रिक टन ऑक्सीजन स्टोर करने की क्षमता है। मंत्री ने कहा कि राज्य में अस्पतालों में पर्याप्त बिस्तर हैं और कहा कि राज्य में इस तरह की चिंता की कोई जरूरत नहीं है। सुब्रमण्यन ने लोगों को मास्क पहनने, सामाजिक दूरी का अभ्यास करने और कोविड-उन्नीस प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य का स्वास्थ्य विभाग किसी भी स्थिति के लिए तैयार है।
कानपुर। इंग्लैंड के मैनचेस्टर में विश्व कप के पहले सेमीफाइनल में मंगलवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ भारतीय टीम जब मैदान पर उतरेगी तो देश के करोड़ों क्रिकेटप्रेमियों की तरह 'चाइनामैन' गेंदबाज कुलदीप यादव के गुरु कपिल पांडे भी टेलीविजन स्क्रीन से चिपककर टीम की जीत की दुआ करेंगे। अंतिम 11 में कुलदीप के चयन को लेकर आश्वस्त कपिल ने 55 इंच का बड़ा एलईडी टीवी भी खरीद लिया है ताकि वे अपने शिष्य के बॉलिंग एक्शन को बारीकी से परख सकें। उन्होंने सोमवार को कहा कि न्यूजीलैंड की टीम दबाव में बिखर जाती है। अगर तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह 2-3 विकेट जल्दी निकाल लेते हैं तो विपक्षी टीम पर दबाव बनाया जा सकता है और कुलदीप के लिए न्यूजीलैंड के मध्यक्रम को बिखेरना और आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण मुकाबले में कप्तान विराट कोहली शायद कुलदीप और युजवेन्द्र चहल में एक स्पिनर का चुनाव करें, क्योंकि उनके पास विकल्प के तौर पर रवीन्द्र जडेजा उपलब्ध हैं, जो स्पिन के साथ-साथ बल्लेबाज के तौर पर उपयोगी रहेंगे। लेकिन उन्हें उम्मीद है कि मंगलवार के मैच में कुलदीप को अंतिम 11 में जगह मिलेगी। अगर ऐसा होता है तो कानपुर के क्रिकेटप्रेमियों की खुशी कई गुना बढ़ जाएगी। कपिल ने कहा कि आम क्रिकेट प्रशंसक की तरह मैंने भी भारतीय टीम की जीत के जश्न का पूरा इंतजाम कर रखा है। मैच का पूरा लुत्फ उठाने के लिए 55 इंच का टीवी खरीदकर लाया हूं। जीत के बाद भी रोवर्स क्लब के बच्चों के साथ जमकर जश्न मनाया जाएगा।
कानपुर। इंग्लैंड के मैनचेस्टर में विश्व कप के पहले सेमीफाइनल में मंगलवार को न्यूजीलैंड के खिलाफ भारतीय टीम जब मैदान पर उतरेगी तो देश के करोड़ों क्रिकेटप्रेमियों की तरह 'चाइनामैन' गेंदबाज कुलदीप यादव के गुरु कपिल पांडे भी टेलीविजन स्क्रीन से चिपककर टीम की जीत की दुआ करेंगे। अंतिम ग्यारह में कुलदीप के चयन को लेकर आश्वस्त कपिल ने पचपन इंच का बड़ा एलईडी टीवी भी खरीद लिया है ताकि वे अपने शिष्य के बॉलिंग एक्शन को बारीकी से परख सकें। उन्होंने सोमवार को कहा कि न्यूजीलैंड की टीम दबाव में बिखर जाती है। अगर तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार और जसप्रीत बुमराह दो-तीन विकेट जल्दी निकाल लेते हैं तो विपक्षी टीम पर दबाव बनाया जा सकता है और कुलदीप के लिए न्यूजीलैंड के मध्यक्रम को बिखेरना और आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण मुकाबले में कप्तान विराट कोहली शायद कुलदीप और युजवेन्द्र चहल में एक स्पिनर का चुनाव करें, क्योंकि उनके पास विकल्प के तौर पर रवीन्द्र जडेजा उपलब्ध हैं, जो स्पिन के साथ-साथ बल्लेबाज के तौर पर उपयोगी रहेंगे। लेकिन उन्हें उम्मीद है कि मंगलवार के मैच में कुलदीप को अंतिम ग्यारह में जगह मिलेगी। अगर ऐसा होता है तो कानपुर के क्रिकेटप्रेमियों की खुशी कई गुना बढ़ जाएगी। कपिल ने कहा कि आम क्रिकेट प्रशंसक की तरह मैंने भी भारतीय टीम की जीत के जश्न का पूरा इंतजाम कर रखा है। मैच का पूरा लुत्फ उठाने के लिए पचपन इंच का टीवी खरीदकर लाया हूं। जीत के बाद भी रोवर्स क्लब के बच्चों के साथ जमकर जश्न मनाया जाएगा।
IND vs AUS 3rd Test: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जा रही चार मैचों की टेस्ट सीरीज का तीसरा मैच 1 मार्च 2023 से खेला जाना है। ये मैच इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेला जाएगा। इंदौर में लंबे समय बाद कोई इंटरनेशनल टेस्ट मैच खेला जाएगा ऐसे में जनता में इसे लेकर भारी क्रेज देखने को मिल रहा है। इस मैच में मैदान खचाखच भरे रहने की उम्मीद है क्योंकि सभी टिकट पल भर में ही बिक गई है। इस मैच के लिए मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोशिएशन ने मंगलवार को टिकट खरीदने की विंडो खोली थी। क्रिकेट बोर्ड द्वारा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से टिकट खरीदने की व्यवस्था दी गई थी। इसके शुरू होते ही लोगों ने धराधड़ टिकट खरीदना शुरू कर दिया और सभी टिकट बिक गई। कितने की थी सबसे सस्ती टिकट ? भारत और आस्ट्रेलिया के बीच इंदौर के होलकर स्टेडियम में होने वाले टेस्ट मैच में सबसे सस्ता टिकट 420 रुपये, जबकि सबसे महंगा टिकट 1968 रुपये का होगा। इसकी दर मप्र क्रिकेट संगठन (एमपीसीए) ने घोषित की थी। इंदौर टेस्ट के लिए ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीमः रोहित शर्मा (कप्तान), केएल राहुल, शुभमन गिल, चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली, केएस भरत (विकेटकीपर), इशान किशन (विकेटकीपर), रविचंद्रन अश्विन, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, रवींद्र जडेजा, मो. शमी, मो. सिराज, श्रेयस अय्यर, सूर्यकुमार यादव, उमेश यादव, जयदेव उनादकट।
IND vs AUS तीनrd Test: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जा रही चार मैचों की टेस्ट सीरीज का तीसरा मैच एक मार्च दो हज़ार तेईस से खेला जाना है। ये मैच इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेला जाएगा। इंदौर में लंबे समय बाद कोई इंटरनेशनल टेस्ट मैच खेला जाएगा ऐसे में जनता में इसे लेकर भारी क्रेज देखने को मिल रहा है। इस मैच में मैदान खचाखच भरे रहने की उम्मीद है क्योंकि सभी टिकट पल भर में ही बिक गई है। इस मैच के लिए मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोशिएशन ने मंगलवार को टिकट खरीदने की विंडो खोली थी। क्रिकेट बोर्ड द्वारा ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से टिकट खरीदने की व्यवस्था दी गई थी। इसके शुरू होते ही लोगों ने धराधड़ टिकट खरीदना शुरू कर दिया और सभी टिकट बिक गई। कितने की थी सबसे सस्ती टिकट ? भारत और आस्ट्रेलिया के बीच इंदौर के होलकर स्टेडियम में होने वाले टेस्ट मैच में सबसे सस्ता टिकट चार सौ बीस रुपयापये, जबकि सबसे महंगा टिकट एक हज़ार नौ सौ अड़सठ रुपयापये का होगा। इसकी दर मप्र क्रिकेट संगठन ने घोषित की थी। इंदौर टेस्ट के लिए ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट टीमः रोहित शर्मा , केएल राहुल, शुभमन गिल, चेतेश्वर पुजारा, विराट कोहली, केएस भरत , इशान किशन , रविचंद्रन अश्विन, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, रवींद्र जडेजा, मो. शमी, मो. सिराज, श्रेयस अय्यर, सूर्यकुमार यादव, उमेश यादव, जयदेव उनादकट।
तृतीय समुल्लासः ॥ अर्थ- अत्यन्त कामातुरता और निष्कामता किसी के लिये भी श्रेष्ठ नहीं वेदविहित कर्म किसी से न क्योंकि जो कामना न करे तो वेदों का ज्ञान और होसके इसलिये.. स्वाध्यायेन व्रतै हो मैस्त्रैविद्येनेज्यया सुतैः । महायज्ञैश्च यज्ञैश्च ब्राह्मीयं क्रियते तनुः ।। अर्थ - (स्वाध्याय ) सकल विद्या पढने पढ़ाने ( व्रत ) ब्रह्मचर्य सत्यभाषणादि नियम पालने (होम) अग्निहोत्रादि होम सत्य का ग्रहण असत्य का त्याग और सत्य विद्याओं का दान देने ( त्रैविद्येन ) वेदस्थ कर्मोपासना ज्ञान विद्या के ग्रहण ( इज्यया ) पदि करने ( सुतैः ) सुसन्तानोत्पत्ति ( महायज्ञैः ) ब्रह्म, देव, पितृ, वैश्वदेव और तिथियों के सेवनरूप पंचमहायज्ञ () अग्निष्टोमादि तथा शिल्पविद्या विज्ञानादि यज्ञों के सेवन से इस शरीर को ब्राह्मी अर्थात् वेद और परमेश्वर की भक्ति का आधाररूप ब्राह्मण का शरीर किया जाता है । इतने साधनों के विना ब्राह्मण शरीर नहीं बन सकता : --- इन्द्रियाणां विचरतां विषयेष्वपहारिषु । संयमे यत्नमातिष्ठेद्विद्वान् यन्तेव वाजिनाम् ।। अर्थ - जैसे विद्वान् सारथि घोड़ों को नियम में रखता है वैसे मन और आत्मा को खोटे कामों मे खैचनेवाले विषयों में विचरती हुई इन्द्रियों के निग्रह में प्रयत्न सय प्रकार से करे क्योंकि -- इन्द्रियाणां प्रसङ्गेन दोष मृच्छत्य संशयम् । सन्नियम्य तु तान्येव ततः सिद्धिं नियच्छति ॥ अर्थ - - जीवात्मा इन्द्रियों के वश होके निश्चित बड़े २ दोषो को प्राप्त होता है और जब इन्द्रियो को अपने वश में करता है तभी सिद्धि को प्राप्त होता हैः Now w
तृतीय समुल्लासः ॥ अर्थ- अत्यन्त कामातुरता और निष्कामता किसी के लिये भी श्रेष्ठ नहीं वेदविहित कर्म किसी से न क्योंकि जो कामना न करे तो वेदों का ज्ञान और होसके इसलिये.. स्वाध्यायेन व्रतै हो मैस्त्रैविद्येनेज्यया सुतैः । महायज्ञैश्च यज्ञैश्च ब्राह्मीयं क्रियते तनुः ।। अर्थ - सकल विद्या पढने पढ़ाने ब्रह्मचर्य सत्यभाषणादि नियम पालने अग्निहोत्रादि होम सत्य का ग्रहण असत्य का त्याग और सत्य विद्याओं का दान देने वेदस्थ कर्मोपासना ज्ञान विद्या के ग्रहण पदि करने सुसन्तानोत्पत्ति ब्रह्म, देव, पितृ, वैश्वदेव और तिथियों के सेवनरूप पंचमहायज्ञ अग्निष्टोमादि तथा शिल्पविद्या विज्ञानादि यज्ञों के सेवन से इस शरीर को ब्राह्मी अर्थात् वेद और परमेश्वर की भक्ति का आधाररूप ब्राह्मण का शरीर किया जाता है । इतने साधनों के विना ब्राह्मण शरीर नहीं बन सकता : --- इन्द्रियाणां विचरतां विषयेष्वपहारिषु । संयमे यत्नमातिष्ठेद्विद्वान् यन्तेव वाजिनाम् ।। अर्थ - जैसे विद्वान् सारथि घोड़ों को नियम में रखता है वैसे मन और आत्मा को खोटे कामों मे खैचनेवाले विषयों में विचरती हुई इन्द्रियों के निग्रह में प्रयत्न सय प्रकार से करे क्योंकि -- इन्द्रियाणां प्रसङ्गेन दोष मृच्छत्य संशयम् । सन्नियम्य तु तान्येव ततः सिद्धिं नियच्छति ॥ अर्थ - - जीवात्मा इन्द्रियों के वश होके निश्चित बड़े दो दोषो को प्राप्त होता है और जब इन्द्रियो को अपने वश में करता है तभी सिद्धि को प्राप्त होता हैः Now w
यूपी में मौतों का कहर जारी लगातार मरने की खबर के बाद भी ऑक्सीजन की किल्लत नहीं हो रही कम. रामपुर के जिला अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो गया. इमरजेंसी वार्ड में ऑक्ससीजन सिलेंडर खत्म होने से कल 10 बजे से आज सुबह 5 बजे तक 10 मरीजों की इलाज के दौरान मौत हो गई. वार्ड में मरीजों को तत्काल ऑक्सीजन सिलेंडर चाहिए. वहीँ जिला चिकत्सालय के मुखिया ने कहा कि मेरा बस चलता तो एक भी मौत नहीं होने देता चूँकि आक्सीजन की कोई कमी नहीं है लोग पैनिक ज्यादा है इसलिए ये जाने चली गई. वहीं दोबारा के अपडेट में मिली जानकारी के मुताबिक रामपुर जिला अस्पताल में 24 घंटे में 18 मरीजों की मौत हो गई. जिला अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड में इलाज के दौरान मरने वालों की संख्यां 18, हो चुकी है. सीएमएस ने बातचीत में कहा कि यहाँ सीरियस पेसेंट आ रहें यहां पर इलाज कराने. लिहाजा हम उनको ज्यादा पैनिक होने की वजह से नहीं बचा पा रहे है. हमारे अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है. वहीं गोंडा जनपद में कम ऑक्सीजन लेवल लोगों की जान ले रहा है. बुधवार को अलग-अलग इलाकों में 11 मौतें हो गई. इनमें गांधी विद्यालय के वरिष्ठ प्रवक्ता अशोक सिंह, आवास विकास के दीनानाथ श्रीवास्तव,ग्राम्य विकास अधिकारी ब्रजेश तिवारी,पीआरडी कमांडर जगन्नाथ दुबे, बेलसर आजाद नगर के सिपाही लाल ,निजी स्कूल के शिक्षक धर्मेंद्र सिंह,SCPM में भर्ती पूजा, शिक्षक सुरेश यादव,नवाबगंज नगवा के शिक्षामित्र रविन्द्र ,कटराबाजार के निन्दूरा में पिता-पुत्र की मौत हो गई. बता दें कि गोंडा जनपद में जब पिता पुत्र की अर्थी एक साथ घर से निकली तो कटरा बाजार में हाहाकार मच गया हर आँख में आंसू थे. हर आँख नम थी. वहीं मुहल्ले के बुजुर्ग लोग कह रहे थे कि आखिर ये सब देखने से पहले हमें क्यों नहीं मौत आई.
यूपी में मौतों का कहर जारी लगातार मरने की खबर के बाद भी ऑक्सीजन की किल्लत नहीं हो रही कम. रामपुर के जिला अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो गया. इमरजेंसी वार्ड में ऑक्ससीजन सिलेंडर खत्म होने से कल दस बजे से आज सुबह पाँच बजे तक दस मरीजों की इलाज के दौरान मौत हो गई. वार्ड में मरीजों को तत्काल ऑक्सीजन सिलेंडर चाहिए. वहीँ जिला चिकत्सालय के मुखिया ने कहा कि मेरा बस चलता तो एक भी मौत नहीं होने देता चूँकि आक्सीजन की कोई कमी नहीं है लोग पैनिक ज्यादा है इसलिए ये जाने चली गई. वहीं दोबारा के अपडेट में मिली जानकारी के मुताबिक रामपुर जिला अस्पताल में चौबीस घंटाटे में अट्ठारह मरीजों की मौत हो गई. जिला अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड में इलाज के दौरान मरने वालों की संख्यां अट्ठारह, हो चुकी है. सीएमएस ने बातचीत में कहा कि यहाँ सीरियस पेसेंट आ रहें यहां पर इलाज कराने. लिहाजा हम उनको ज्यादा पैनिक होने की वजह से नहीं बचा पा रहे है. हमारे अस्पताल में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है. वहीं गोंडा जनपद में कम ऑक्सीजन लेवल लोगों की जान ले रहा है. बुधवार को अलग-अलग इलाकों में ग्यारह मौतें हो गई. इनमें गांधी विद्यालय के वरिष्ठ प्रवक्ता अशोक सिंह, आवास विकास के दीनानाथ श्रीवास्तव,ग्राम्य विकास अधिकारी ब्रजेश तिवारी,पीआरडी कमांडर जगन्नाथ दुबे, बेलसर आजाद नगर के सिपाही लाल ,निजी स्कूल के शिक्षक धर्मेंद्र सिंह,SCPM में भर्ती पूजा, शिक्षक सुरेश यादव,नवाबगंज नगवा के शिक्षामित्र रविन्द्र ,कटराबाजार के निन्दूरा में पिता-पुत्र की मौत हो गई. बता दें कि गोंडा जनपद में जब पिता पुत्र की अर्थी एक साथ घर से निकली तो कटरा बाजार में हाहाकार मच गया हर आँख में आंसू थे. हर आँख नम थी. वहीं मुहल्ले के बुजुर्ग लोग कह रहे थे कि आखिर ये सब देखने से पहले हमें क्यों नहीं मौत आई.
नई दिल्लीः उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सीबीआई(CBI) ने दिल्ली शराब घोटाला मामले में करीब आठ घंटे तक चली पूछताछ के बाद रविवार को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी आम आदमी पार्टी के लिए अप्रत्याशित नहीं है क्योंकि सिसोदिया ने आज गिरफ्तारी की आशंका जताई थी. दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल, जिन्होंने सिसोदिया को आश्वासन दिया कि पार्टी उनके परिवार की देखभाल करेगी. मनीष बेक़सूर हैं। उनकी गिरफ़्तारी गंदी राजनीति है। मनीष की गिरफ़्तारी से लोगों में बहुत रोष है। लोग सब देख रहे हैं। लोगों को सब समझ आ रहा है। लोग इसका जवाब देंगे। इस से हमारे हौसले और बढ़ेंगे। हमारा संघर्ष और मज़बूत होगा। आम आदमी पार्टी ने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए काला दिन है. बीजेपी के इशारे पर सीबीआई ने दुनिया के सबसे अच्छे शिक्षा मंत्री को फर्जी केस में गिरफ्तार किया. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
नई दिल्लीः उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सीबीआई ने दिल्ली शराब घोटाला मामले में करीब आठ घंटे तक चली पूछताछ के बाद रविवार को गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी आम आदमी पार्टी के लिए अप्रत्याशित नहीं है क्योंकि सिसोदिया ने आज गिरफ्तारी की आशंका जताई थी. दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल, जिन्होंने सिसोदिया को आश्वासन दिया कि पार्टी उनके परिवार की देखभाल करेगी. मनीष बेक़सूर हैं। उनकी गिरफ़्तारी गंदी राजनीति है। मनीष की गिरफ़्तारी से लोगों में बहुत रोष है। लोग सब देख रहे हैं। लोगों को सब समझ आ रहा है। लोग इसका जवाब देंगे। इस से हमारे हौसले और बढ़ेंगे। हमारा संघर्ष और मज़बूत होगा। आम आदमी पार्टी ने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए काला दिन है. बीजेपी के इशारे पर सीबीआई ने दुनिया के सबसे अच्छे शिक्षा मंत्री को फर्जी केस में गिरफ्तार किया. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
आगरा। पदम भूषण से सम्मानित विख्यात कवि स्वर्गीय गोपाल दास जी नीरज को श्रद्धांजलि देने के लिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आगरा पहुंचे। गौरतलब है कि 19 जुलाई को एम्स में इलाज के दौरान स्व. गोपाल दास जी ने अंतिम सांस ली थी। इसके बाद आज उनका पार्थिव शरीर आगरा बल्केश्वर स्थित निज निवास पर पहुंचा। इस दौरान निवास पर दिवगंत गोपाल दास जी के पार्थिव शरीर के दर्शन को शहर के कई राजनेता और गणमान्य लोग मौजूद थे। अखिलेश यादव में उनके पार्थिव शरीर पर श्रद्धांजलि सुमन अर्पित किए। इस दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि स्व. गोपाल दास जी का समाजवादियों से पुराना रिश्ता रहा है। उनके शब्दों में भाव होते थे और उसी भावना ने समय-समय पर राजनीति और समाज को नई दिशा दी। अखिलेश यादव ने कहा कि सत्ता में आने के बाद वह स्व. गोपालदास जी नीरज की याद में इटावा में ऐसा भव्य स्मारक स्थल बनाएंगे कि जिसे देश और दुनिया देखेगी। स्वर्गीय गोपाल दास जी को मरणोपरांत यश भारती सम्मान दिए जाने के सवाल पर अखिलेश बोले कि अभी यह समय और स्थान सम्मान देने के लिए उपयुक्त नहीं है। वहीं जब विपक्ष द्वारा सदन में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के गिर जाने और भाजपा की जीत पर सवाल किया गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इस दौरान महापौर नवीन जैन, पूर्व मंत्री रामसकल गुर्जर, रामजी लाल सुमन आदि ने स्व. गोपालदास जी के पार्थिव शरीर के दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किए।
आगरा। पदम भूषण से सम्मानित विख्यात कवि स्वर्गीय गोपाल दास जी नीरज को श्रद्धांजलि देने के लिए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आगरा पहुंचे। गौरतलब है कि उन्नीस जुलाई को एम्स में इलाज के दौरान स्व. गोपाल दास जी ने अंतिम सांस ली थी। इसके बाद आज उनका पार्थिव शरीर आगरा बल्केश्वर स्थित निज निवास पर पहुंचा। इस दौरान निवास पर दिवगंत गोपाल दास जी के पार्थिव शरीर के दर्शन को शहर के कई राजनेता और गणमान्य लोग मौजूद थे। अखिलेश यादव में उनके पार्थिव शरीर पर श्रद्धांजलि सुमन अर्पित किए। इस दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि स्व. गोपाल दास जी का समाजवादियों से पुराना रिश्ता रहा है। उनके शब्दों में भाव होते थे और उसी भावना ने समय-समय पर राजनीति और समाज को नई दिशा दी। अखिलेश यादव ने कहा कि सत्ता में आने के बाद वह स्व. गोपालदास जी नीरज की याद में इटावा में ऐसा भव्य स्मारक स्थल बनाएंगे कि जिसे देश और दुनिया देखेगी। स्वर्गीय गोपाल दास जी को मरणोपरांत यश भारती सम्मान दिए जाने के सवाल पर अखिलेश बोले कि अभी यह समय और स्थान सम्मान देने के लिए उपयुक्त नहीं है। वहीं जब विपक्ष द्वारा सदन में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के गिर जाने और भाजपा की जीत पर सवाल किया गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। इस दौरान महापौर नवीन जैन, पूर्व मंत्री रामसकल गुर्जर, रामजी लाल सुमन आदि ने स्व. गोपालदास जी के पार्थिव शरीर के दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किए।
भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान इस समय एक बड़ी प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। पाकिस्तान में भारी के कारण बाढ़ आई हुई है। देश के नागरिकों पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। और अब तक 1000 नागरिकों की मौत हो चुकी है। फ़िलहाल प्राकृतिक आपदा को देखते पाकिस्तान में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया गया है। पाकिस्तान में भारी बारिश जारी है और कई प्रांतों में बाढ़ आ गई है। हर जगह पानी जमा हो गया है और पाकिस्तान के 'डॉन' अखबार की जानकारी के मुताबिक इस आपदा से अब तक पाकिस्तान में 1 हजार लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें 343 बच्चे भी शामिल हैं। पाकिस्तान में भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। बस्तियों में नदी का पानी घुस गया है। पीओके, सिंध, बलूचिस्तान, पंजाब, अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र, स्वात घाटी बाढ़ की चपेट में है। पाकिस्तानी सेना के साथ लोक प्रशासन द्वारा बचाव अभियान जारी है।
भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान इस समय एक बड़ी प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। पाकिस्तान में भारी के कारण बाढ़ आई हुई है। देश के नागरिकों पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। और अब तक एक हज़ार नागरिकों की मौत हो चुकी है। फ़िलहाल प्राकृतिक आपदा को देखते पाकिस्तान में राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया गया है। पाकिस्तान में भारी बारिश जारी है और कई प्रांतों में बाढ़ आ गई है। हर जगह पानी जमा हो गया है और पाकिस्तान के 'डॉन' अखबार की जानकारी के मुताबिक इस आपदा से अब तक पाकिस्तान में एक हजार लोगों की मौत हो चुकी है, जिसमें तीन सौ तैंतालीस बच्चे भी शामिल हैं। पाकिस्तान में भारी बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। बस्तियों में नदी का पानी घुस गया है। पीओके, सिंध, बलूचिस्तान, पंजाब, अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र, स्वात घाटी बाढ़ की चपेट में है। पाकिस्तानी सेना के साथ लोक प्रशासन द्वारा बचाव अभियान जारी है।
Rewa Itwari Train Extension News : विन्ध्य वाशियो के लिए एक बहुत अच्छी और बड़ी खबर है। रीवा से चलकर इतवारी (नागपुर) तक जाने वाली ट्रेन रीवा इतवारी (Rewa-Itwari Train) गाड़ी संख्या 01753 ट्रैन का रूट विस्तार होने जा रहा है। जिससे रीवा समेत पूरे विंध्य वाशियो को फ़ायदा मिलेगा। पश्चिम मध्य रेल जोन जबलपुर के रेल सलाहकार सदस्य प्रकाश शिवनानी (Prakash Shivnani) ने RewaRiyasat न्यूज़ पोर्टल को जानकारी दी की अब यह ट्रेन सतना,कटनी,जबलपूर, बालाघाट, गोंदिया, इतवारी, नागपुर, वर्धा,मु र्तिजापुर, अकोला, नंदुरा, मलकापुर, भुसावल, जलगांव, नांदगाँव, मनमाड़, अहमदनगर, डौन्ड, पुणे, सतारा, भिवंडी, मिराज होते हुए कोल्हापुर तक जाएगी। बड़ी बात यह है को यह ट्रेन प्रतिदिन चलेगी। जानकारी के मुताबिक पूर्व पे चल रही गाड़ी संख्या 01753/0754 रीवा इतवारी (Rewa-Itwari Train) जो कि इतवारी तक जाती थी एवं गाड़ी संख्या 11039/11040 महाराष्ट्र एक्सप्रेस (Maharashtra Express) जो कि कोल्हापुर (Kolhapur) से चलकर इतवारी (Itwari) तक चलती है इनदिनों ट्रेनों को जोड़कर रुट विस्तार किया गया है। रीवा वासियो के लिए इस ट्रेन के विस्तार से गुजरात एवं महाराष्ट्र के कई महत्वपूर्ण शहरो से सीधा संपर्क हो सकेगा खासकर रीवा से पुणे ट्रैन चलाये जाने की महत्वपूर्ण मांग पूरी हो जाएगी।उक्त ट्रैन के विस्तार से पूरे विंध्य का संपर्क महाराष्ट्र के कई बड़े शहरों से सीधा संपर्क होने से पूरे विंध्य के व्यापार में काफी बढ़ोतरी होगी, जिससे कई आर्थिक फायदे आगे चल कर होंगे। पश्चिम मध्य रेल जोन जबलपुर के रेल सलाहकार सदस्य प्रकाश शिवनानी ने रेलवे द्वारा दी जा रही इस बड़ी सौगात के लिए माननीय रेल मंत्री पीयूष गोयल,माननीय रेल महाप्रबंधक पश्चिम मध्य जबलपुर एवं मण्ड़ल रेल प्रम्बधन का आभार प्रकट करते हुए उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया है।
Rewa Itwari Train Extension News : विन्ध्य वाशियो के लिए एक बहुत अच्छी और बड़ी खबर है। रीवा से चलकर इतवारी तक जाने वाली ट्रेन रीवा इतवारी गाड़ी संख्या एक हज़ार सात सौ तिरेपन ट्रैन का रूट विस्तार होने जा रहा है। जिससे रीवा समेत पूरे विंध्य वाशियो को फ़ायदा मिलेगा। पश्चिम मध्य रेल जोन जबलपुर के रेल सलाहकार सदस्य प्रकाश शिवनानी ने RewaRiyasat न्यूज़ पोर्टल को जानकारी दी की अब यह ट्रेन सतना,कटनी,जबलपूर, बालाघाट, गोंदिया, इतवारी, नागपुर, वर्धा,मु र्तिजापुर, अकोला, नंदुरा, मलकापुर, भुसावल, जलगांव, नांदगाँव, मनमाड़, अहमदनगर, डौन्ड, पुणे, सतारा, भिवंडी, मिराज होते हुए कोल्हापुर तक जाएगी। बड़ी बात यह है को यह ट्रेन प्रतिदिन चलेगी। जानकारी के मुताबिक पूर्व पे चल रही गाड़ी संख्या एक हज़ार सात सौ तिरेपन/सात सौ चौवन रीवा इतवारी जो कि इतवारी तक जाती थी एवं गाड़ी संख्या ग्यारह हज़ार उनतालीस/ग्यारह हज़ार चालीस महाराष्ट्र एक्सप्रेस जो कि कोल्हापुर से चलकर इतवारी तक चलती है इनदिनों ट्रेनों को जोड़कर रुट विस्तार किया गया है। रीवा वासियो के लिए इस ट्रेन के विस्तार से गुजरात एवं महाराष्ट्र के कई महत्वपूर्ण शहरो से सीधा संपर्क हो सकेगा खासकर रीवा से पुणे ट्रैन चलाये जाने की महत्वपूर्ण मांग पूरी हो जाएगी।उक्त ट्रैन के विस्तार से पूरे विंध्य का संपर्क महाराष्ट्र के कई बड़े शहरों से सीधा संपर्क होने से पूरे विंध्य के व्यापार में काफी बढ़ोतरी होगी, जिससे कई आर्थिक फायदे आगे चल कर होंगे। पश्चिम मध्य रेल जोन जबलपुर के रेल सलाहकार सदस्य प्रकाश शिवनानी ने रेलवे द्वारा दी जा रही इस बड़ी सौगात के लिए माननीय रेल मंत्री पीयूष गोयल,माननीय रेल महाप्रबंधक पश्चिम मध्य जबलपुर एवं मण्ड़ल रेल प्रम्बधन का आभार प्रकट करते हुए उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया है।
यूपी सरकार में पूर्व में मंत्री रहे और यूपी हज कमेटी के चेयरमैन मोहसिन रजा की ओर से एक वीडियो साझा किया गया है। मोहसिन रजा ने दावा किया है कि वीडियो में बीजेपी और आरएसएस की बर्बादी की दुआ मांगी जा रही है। लखनऊः यूपी हज कमेटी के चेयरमैन और पूर्व मंत्री मोहसिन रजा की ओर से एक वीडियो ट्वीट किया गया है। इस वीडियो में भारत से हज यात्रा (Haj Yatra) करने सऊदी अरब गए कुछ लोगों के द्वारा भाजपा और आरएसएस की बर्बादी की दुआ मांगी जा रही है। मोहसिन रजा की ओर से यह वीडियो साझा कर सुरक्षा एजेंसियों से गुहार लगाई गई की इसकी जांच करवाई जाए। इसी के साथ मामले में ठोस एक्शन की भी मांग की गई है। मोहसिन रजा ने अपने ट्वीट में लिखा कि, 'हज जैसी पवित्र यात्रा और काबा जैसे मुक़द्दस स्थान पर भी देश विरोधी विदेशी ताकतों के हाथ के खिलौने ये चंद लोग जिन्होंने अपनी नकारात्मकता वाली सोच का प्रदर्शन किया है ये लोग देश की भाजपा सरकार और आरएसएस के नाश की बद्दुआ कर रहे हैं। ' इस वीडियो में उनके द्वारा पीएम मोदी, सीएम योगी समेत अन्य लोगों को भी टैग किया गया है। हालांकि एशियानेट न्यूज हिंदी इस वीडियो को लेकर किए जा रहे दावे की पुष्टि नहीं करता है।
यूपी सरकार में पूर्व में मंत्री रहे और यूपी हज कमेटी के चेयरमैन मोहसिन रजा की ओर से एक वीडियो साझा किया गया है। मोहसिन रजा ने दावा किया है कि वीडियो में बीजेपी और आरएसएस की बर्बादी की दुआ मांगी जा रही है। लखनऊः यूपी हज कमेटी के चेयरमैन और पूर्व मंत्री मोहसिन रजा की ओर से एक वीडियो ट्वीट किया गया है। इस वीडियो में भारत से हज यात्रा करने सऊदी अरब गए कुछ लोगों के द्वारा भाजपा और आरएसएस की बर्बादी की दुआ मांगी जा रही है। मोहसिन रजा की ओर से यह वीडियो साझा कर सुरक्षा एजेंसियों से गुहार लगाई गई की इसकी जांच करवाई जाए। इसी के साथ मामले में ठोस एक्शन की भी मांग की गई है। मोहसिन रजा ने अपने ट्वीट में लिखा कि, 'हज जैसी पवित्र यात्रा और काबा जैसे मुक़द्दस स्थान पर भी देश विरोधी विदेशी ताकतों के हाथ के खिलौने ये चंद लोग जिन्होंने अपनी नकारात्मकता वाली सोच का प्रदर्शन किया है ये लोग देश की भाजपा सरकार और आरएसएस के नाश की बद्दुआ कर रहे हैं। ' इस वीडियो में उनके द्वारा पीएम मोदी, सीएम योगी समेत अन्य लोगों को भी टैग किया गया है। हालांकि एशियानेट न्यूज हिंदी इस वीडियो को लेकर किए जा रहे दावे की पुष्टि नहीं करता है।
रायपुर। हाथरस गैंगरेप मामले को लेकर सियासत लगातार गरमाती जा रही है। गुरुवार को दिल्ली से हाथरस के लिए रवाना हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को यूपी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यूपी में राहुल गाँधी से धक्का-मुक्की भी की गई है। इस दौरान धक्का-मुक्की में राहुल गांधी भी ज़मीन पर गिर पड़े। इस मामले को लेकर कांग्रेस विधायक दल की बैठक में निंदा प्रस्ताव पारित किया गया है। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट के माध्यम से दी है। सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट कर लिखा- 'हाथरस में पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे राहुल गांधी जी और प्रियंका गांधी जी को पुलिस ने जिस तरह से रोका, जिस तरह दुर्व्यवहार किया उसके ख़िलाफ़ छत्तीसगढ़ विधायक दल ने एक निंदा प्रस्ताव पारित किया है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का यह अलोकतांत्रिक रवैया निंदनीय व अस्वीकार्य है। ' उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का यह अलोकतांत्रिक रवैया निंदनीय व अस्वीकार्य है। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट कर लिखा "हिटलर की तानाशाही विचारधारा की जर्जर नींव पर टिकी आरएसएस और उसकी संस्था भाजपा यदि भारत में अंग्रेजों की हुकूमत की समाप्ति का अध्ययन करके भी कांग्रेस की वैचारिक ताकत नहीं पहचान पाए, तो सच में तरस के लायक हैं आप। इन गीदड़भकियों को शाखाओं के भीतर ही रखो, सड़क पर तो जनता है" गौरतलब है कि इससे पहले जब पीड़िता की मौत हुई थी, तो प्रियंका गांधी वाड्रा की ओर से यूपी सरकार पर निशाना साधा गया है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि हाथरस जैसी वीभत्स घटना बलरामपुर में घटी, लड़की का बलात्कार कर पैर और कमर तोड़ दी गई। आजमगढ़, बागपत, बुलंदशहर में बच्चियों से दरिंदगी हुई. यूपी में फैले जंगलराज की हद नहीं. मार्केटिंग, भाषणों से कानून व्यवस्था नहीं चलती, ये मुख्यमंत्री की जवाबदेही का वक्त है जनता को जवाब चाहिए.
रायपुर। हाथरस गैंगरेप मामले को लेकर सियासत लगातार गरमाती जा रही है। गुरुवार को दिल्ली से हाथरस के लिए रवाना हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को यूपी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यूपी में राहुल गाँधी से धक्का-मुक्की भी की गई है। इस दौरान धक्का-मुक्की में राहुल गांधी भी ज़मीन पर गिर पड़े। इस मामले को लेकर कांग्रेस विधायक दल की बैठक में निंदा प्रस्ताव पारित किया गया है। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट के माध्यम से दी है। सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट कर लिखा- 'हाथरस में पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे राहुल गांधी जी और प्रियंका गांधी जी को पुलिस ने जिस तरह से रोका, जिस तरह दुर्व्यवहार किया उसके ख़िलाफ़ छत्तीसगढ़ विधायक दल ने एक निंदा प्रस्ताव पारित किया है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का यह अलोकतांत्रिक रवैया निंदनीय व अस्वीकार्य है। ' उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का यह अलोकतांत्रिक रवैया निंदनीय व अस्वीकार्य है। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट कर लिखा "हिटलर की तानाशाही विचारधारा की जर्जर नींव पर टिकी आरएसएस और उसकी संस्था भाजपा यदि भारत में अंग्रेजों की हुकूमत की समाप्ति का अध्ययन करके भी कांग्रेस की वैचारिक ताकत नहीं पहचान पाए, तो सच में तरस के लायक हैं आप। इन गीदड़भकियों को शाखाओं के भीतर ही रखो, सड़क पर तो जनता है" गौरतलब है कि इससे पहले जब पीड़िता की मौत हुई थी, तो प्रियंका गांधी वाड्रा की ओर से यूपी सरकार पर निशाना साधा गया है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि हाथरस जैसी वीभत्स घटना बलरामपुर में घटी, लड़की का बलात्कार कर पैर और कमर तोड़ दी गई। आजमगढ़, बागपत, बुलंदशहर में बच्चियों से दरिंदगी हुई. यूपी में फैले जंगलराज की हद नहीं. मार्केटिंग, भाषणों से कानून व्यवस्था नहीं चलती, ये मुख्यमंत्री की जवाबदेही का वक्त है जनता को जवाब चाहिए.
पटना : छात्र जनशक्ति परिषद द्वारा "राजनीति सीखो, नेतृत्व करो" विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया. जिसमें छात्र जनशक्ति परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजप्रताप यादव ने छात्रों को संघर्ष के रास्ते पर चलने की बात कही. भाषण देते-देते तेजप्रताप यादव ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव को लेकर बड़ा खुलासा किया. साथ ही यूवा आरजेडी के दो लोगों पर गंभीर आरोप लगाया. तेजप्रताप यादव ने कहा कि आरजेडी में 4-5 लोग हैं जो अध्यक्ष बनने का सपना देख रहे हैं. सब जानता है कौन हैं वो लोग, नाम लेने से कोई फायदा नहीं है. मेरे पिता लालू यादव को जेल से निकले काफी वक्त हो गया है. पर मेरे पिता को दिल्ली में रोक के रखा गया है. मैंने पिता जी से बात भी है कि चलिए पटना, हम साथ-साथ रहेंगे. आप रहते थे तो दरबाजा खुला रहता था. ऑउट हाउस में लोगों से मिलते थे. कुछ लोगों ने जनता से मिलने के लिए रस्सा बनवाया. हमारे पिता को दिल्ली में बंधक बनाकर रखा गया है.
पटना : छात्र जनशक्ति परिषद द्वारा "राजनीति सीखो, नेतृत्व करो" विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया. जिसमें छात्र जनशक्ति परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजप्रताप यादव ने छात्रों को संघर्ष के रास्ते पर चलने की बात कही. भाषण देते-देते तेजप्रताप यादव ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव को लेकर बड़ा खुलासा किया. साथ ही यूवा आरजेडी के दो लोगों पर गंभीर आरोप लगाया. तेजप्रताप यादव ने कहा कि आरजेडी में चार-पाँच लोग हैं जो अध्यक्ष बनने का सपना देख रहे हैं. सब जानता है कौन हैं वो लोग, नाम लेने से कोई फायदा नहीं है. मेरे पिता लालू यादव को जेल से निकले काफी वक्त हो गया है. पर मेरे पिता को दिल्ली में रोक के रखा गया है. मैंने पिता जी से बात भी है कि चलिए पटना, हम साथ-साथ रहेंगे. आप रहते थे तो दरबाजा खुला रहता था. ऑउट हाउस में लोगों से मिलते थे. कुछ लोगों ने जनता से मिलने के लिए रस्सा बनवाया. हमारे पिता को दिल्ली में बंधक बनाकर रखा गया है.
अमेरिका में हुए पहली और दूसरी लहर के नारीवादी आंदोलन ने विश्व भर में महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बड़े पैमाने पर इन नारीवादियों की कोशिशों से दुनियाभर में नारीवादी आंदोलन ज़ोर पकड़ने लगा और महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर आवाज़ उठाने लगीं। नारीवादी आंदोलन की पहली धारा में जहां महिलाओं को नागरिक के रूप में 'वोट देने के अधिकार' दिलाने के साथ ही विवाह और संपत्ति से जुड़े अधिकार मिले। वहीं, दूसरी धारा (1960 के बाद) के नारीवादी आंदोलन में पितृसत्तात्मक पुरूष प्रभुत्व वाले समाज में, संस्थागत और सांस्कृतिक रूप से लैंगिकता के आधार पर हो रहे शोषण और भेदभाव जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया। महिलाओं के संदर्भ में 'सेक्सिस्ट' अवधारणा पर सवाल करते हुए पहली नारीवादी आंदोलन की लहर, दूसरी में 'पर्सनल इज पॉलिटिकल' की धारणा के जरिए पारिवारिक संबंधों में मौजूद पितृसत्तात्मक राजनीति पर सवाल खड़े करती नज़र आती है। नारीवाद के दूसरे चरण का अंत आमतौर पर 1980 के दशक को माना जाता है। 1980 के बाद के दौर में नारीवादियों के बीच अलग-अलग मुददों पर असहमतियों के कारण 'लैंगिकता और पोर्नोग्राफी' जैसे मसलों पर नवीन विचारों और विभिन्न रायों से 1990 में नारीवादी आंदोलन की तीसरी धारा की शुरुआत हुई। रेबेका वॉल्कर जो एक अमेरिकी लेखक और नारीवादी थीं, उनके द्वारा मिस मैगज़ीन में लिखे एक लेख 'Becoming the Third Wave(1992) में "I am not a Post Feminism Feminist. I am the Third Wave" वाक्य से थर्ड वेव फेमिनिज़्म की घोषणा मानी जाती है। जो अनीता हिल के यौन उत्पीड़न के मुद्दे से सुर्खियों में आया। पितृसत्ता अपने चंगुल से किसी को आसानी नहीं निकलने देती और वह कोई न कोई नियंत्रण का रास्ता खोज लेती है जैसा कि हम पितृसत्ता के नए चेहरे के रूप नवउदारवादी उपभोक्ता संस्कृति के प्रभाव को नारीवाद पर देखते हैं जिसे 'लिपस्टिक नारीवाद' के नाम से जाना गया, जिसने 'माई बॉडी माई चॉइस' के मुद्दे को नए रूप में परिभाषित किया। नारीवादी आंदोलन की तीसरी लहर में 'माई बॉडी माई चॉइस' मुख्य मुददों में से एक था। ये मुद्दे जो अवैध गर्भसमापन के विरोध में शुरू हुए थे जिसके अंतर्गत महिलाओं ने ये मांग रखी कि ये उनका अपना शरीर है बच्चे को जन्म देना है या नहीं ये उनका निर्णय होना चाहिए। अवैध गर्भपात और गर्भनिरोधक गोलियों के कारण महिलाओं के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लेकिन जैसा कि पहले कहा जा चुका है कि पितृसत्ता अपने चंगुल से किसी को आसानी नहीं निकलने देती और वह कोई न कोई नियंत्रण का रास्ता खोज लेती है जैसा कि हम पितृसत्ता के नए चेहरे के रूप नवउदारवादी उपभोक्ता संस्कृति के प्रभाव को नारीवाद पर देखते हैं जिसे 'लिपस्टिक नारीवाद' के नाम से जाना गया, जिसने 'माई बॉडी माई चॉइस' के मुद्दे को नए रूप में परिभाषित किया। 'लिपस्टिक नारीवाद' महिला सशक्तिकरण में महिला यौन शक्ति के साथ स्त्रीत्व यानी फेमिनिटी की पारंपरिक अवधारणाओं को साथ लेकर चलता है। इन नारीवादियों का मानना है कि मेकअप और सेक्सी कपड़े पहनने से आप किसी नारीवादी से कम नहीं हो जाते। इनका मानना है कि सौन्दर्यशास्त्र के दार्शनिक विचारों को अपनाते हुए कॉस्मेटिक मेकअप, कामुक आकर्षक कपड़े पहनकर मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से महिला को सशक्त बनाया जा सकता। लेकिन क्या इसे नारी मुक्ति या सशक्तिकरण के रूप में देखा जाना चाहिए? और पढ़ें : बेल हुक्स की नज़रों से समझें नारीवाद राजनीतिक क्यों है? Chimamanda Ngozi Adichie का मानना है कि कामुक-आकर्षक कपड़े पहनने,कॉस्मेटिक मेकअप करने और नारीवादी मूल्यों को धारण करने के बीच कोई संघर्ष नहीं होना चाहिए। ये महिलाएं अधिक सुंदर,अधिक सेक्सी दिखने को आत्मविश्वास और सफलता के रूप में देखती हैं। इस धारा की नारीवादियों का कहना है कि नारीवाद की दूसरी धारा के दौरान नारीवादियों ने पूरी तरह से महिलाओं की कानूनी और सामाजिक समानता पर ध्यान केंद्रित किया था और सेक्सुअलिटी को अपनाने से इनकार कर दिया। कुछ तो पुरुषों के विचार से भी घृणा करते थे और अक्सर उन शारीरिक विशेषताओं और व्यक्तित्व को अपना लेते थे जो स्त्रीत्व (फेमिनिटी) की परिभाषिक अवधारणा के दायरे में नहीं आती थीं। जबकि उनके अनुसार इन्हें अपनाकर भी नारीवादी हुआ जा सकता था। लिपस्टिक नारीवाद ग्लैमरस व्यक्तित्व की उपलब्धि को महिला सशक्तिकरण और सफलता की कुंजी के रूप में देखता है जो कि केवल नवउदारवादी उपभोक्ता संस्कृति को बढ़ावा देता है और एक पूरे राजनीतिक नारी मुक्ति आंदोलन को कमज़ोर करने का काम करता है। पितृसत्तात्मक व्यवस्था को बढ़ावा देने और महिला शरीर का वस्तुकरण करने के लिए लिपस्टिक नारीवाद की आलोचना की जाती है, विशेष रूप से मीडिया यानी विभिन्न विज्ञापनों, धारावाहिकों और सिनेमा में किस तरह महिलाओं को 'सेक्सुअल ऑब्जेक्ट' के रूप में दिखाया गया है। 'द आफ्टरमैथ ऑफ फेमिनिज़म' में एंजेला मैक रॉबी ने वर्तमान सांस्कृतिक ताकतों के महिलाओं पर पड़ते प्रभाव के प्रति चिंता व्यक्त की। उन्होंने नवउदारवादी उपभोक्ता संस्कृति के कारण होने वाले परिवर्तनों और महिलाओं पर होने वाले उसके मनोवैज्ञानिक प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा कि उपभोक्तावादी संस्कृति नारीवाद को खत्म करने का काम कर रही है। यह उन महिलाओं में गलतफहमी पैदा करती है कि वे इसके (उपभोक्तावादी संस्कृति) फायदों से अधिक सफल और स्वतंत्र हैं जबकि यह उन्हें उसी पितृसत्तात्मक सामाजिक जेंडर की परिभाषिक सरंचना में वापिस ले जाने का काम करती है। लिपस्टिक नारीवाद का असली खतरा मेकअप के तरीके, उसके पहनावे आदि पर नहीं है, बल्कि नवउदारवाद के साथ उसकी मिलीभगत है। वक्त के साथ-साथ परिवर्तन एक स्वभाविक क्रिया रही है और ये परिवर्तन हरेक युग में अपने पिछले युग से कुछ क्रांतिकारी बदलाव के साथ होता रहा है, फिर चाहे वह संज्ञानात्मक क्रांति (जानवर से मनुष्य बनने की समझ) रही हो, कृषि क्रांति हो या वैज्ञानिक क्रांति। लेकिन पितृसत्तात्मक मानसिकता हर युग में कुछ परिवर्तन के साथ मौजूद रही है। आज हम इन्हें नए नवउदारवादी उपभोक्ता संस्कृति के रूप में देख सकते हैं जो अप्रत्यक्ष रूप से अपना नियंत्रण बनाए रखे हुए है। नारीवादी आंदोलन के संघर्ष के लगभग दो सौ वर्ष से अधिक हो चुके हैं लेकिन आज भी समानता और अधिकारों की लड़ाई जारी है।
अमेरिका में हुए पहली और दूसरी लहर के नारीवादी आंदोलन ने विश्व भर में महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बड़े पैमाने पर इन नारीवादियों की कोशिशों से दुनियाभर में नारीवादी आंदोलन ज़ोर पकड़ने लगा और महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर आवाज़ उठाने लगीं। नारीवादी आंदोलन की पहली धारा में जहां महिलाओं को नागरिक के रूप में 'वोट देने के अधिकार' दिलाने के साथ ही विवाह और संपत्ति से जुड़े अधिकार मिले। वहीं, दूसरी धारा के नारीवादी आंदोलन में पितृसत्तात्मक पुरूष प्रभुत्व वाले समाज में, संस्थागत और सांस्कृतिक रूप से लैंगिकता के आधार पर हो रहे शोषण और भेदभाव जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया। महिलाओं के संदर्भ में 'सेक्सिस्ट' अवधारणा पर सवाल करते हुए पहली नारीवादी आंदोलन की लहर, दूसरी में 'पर्सनल इज पॉलिटिकल' की धारणा के जरिए पारिवारिक संबंधों में मौजूद पितृसत्तात्मक राजनीति पर सवाल खड़े करती नज़र आती है। नारीवाद के दूसरे चरण का अंत आमतौर पर एक हज़ार नौ सौ अस्सी के दशक को माना जाता है। एक हज़ार नौ सौ अस्सी के बाद के दौर में नारीवादियों के बीच अलग-अलग मुददों पर असहमतियों के कारण 'लैंगिकता और पोर्नोग्राफी' जैसे मसलों पर नवीन विचारों और विभिन्न रायों से एक हज़ार नौ सौ नब्बे में नारीवादी आंदोलन की तीसरी धारा की शुरुआत हुई। रेबेका वॉल्कर जो एक अमेरिकी लेखक और नारीवादी थीं, उनके द्वारा मिस मैगज़ीन में लिखे एक लेख 'Becoming the Third Wave में "I am not a Post Feminism Feminist. I am the Third Wave" वाक्य से थर्ड वेव फेमिनिज़्म की घोषणा मानी जाती है। जो अनीता हिल के यौन उत्पीड़न के मुद्दे से सुर्खियों में आया। पितृसत्ता अपने चंगुल से किसी को आसानी नहीं निकलने देती और वह कोई न कोई नियंत्रण का रास्ता खोज लेती है जैसा कि हम पितृसत्ता के नए चेहरे के रूप नवउदारवादी उपभोक्ता संस्कृति के प्रभाव को नारीवाद पर देखते हैं जिसे 'लिपस्टिक नारीवाद' के नाम से जाना गया, जिसने 'माई बॉडी माई चॉइस' के मुद्दे को नए रूप में परिभाषित किया। नारीवादी आंदोलन की तीसरी लहर में 'माई बॉडी माई चॉइस' मुख्य मुददों में से एक था। ये मुद्दे जो अवैध गर्भसमापन के विरोध में शुरू हुए थे जिसके अंतर्गत महिलाओं ने ये मांग रखी कि ये उनका अपना शरीर है बच्चे को जन्म देना है या नहीं ये उनका निर्णय होना चाहिए। अवैध गर्भपात और गर्भनिरोधक गोलियों के कारण महिलाओं के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लेकिन जैसा कि पहले कहा जा चुका है कि पितृसत्ता अपने चंगुल से किसी को आसानी नहीं निकलने देती और वह कोई न कोई नियंत्रण का रास्ता खोज लेती है जैसा कि हम पितृसत्ता के नए चेहरे के रूप नवउदारवादी उपभोक्ता संस्कृति के प्रभाव को नारीवाद पर देखते हैं जिसे 'लिपस्टिक नारीवाद' के नाम से जाना गया, जिसने 'माई बॉडी माई चॉइस' के मुद्दे को नए रूप में परिभाषित किया। 'लिपस्टिक नारीवाद' महिला सशक्तिकरण में महिला यौन शक्ति के साथ स्त्रीत्व यानी फेमिनिटी की पारंपरिक अवधारणाओं को साथ लेकर चलता है। इन नारीवादियों का मानना है कि मेकअप और सेक्सी कपड़े पहनने से आप किसी नारीवादी से कम नहीं हो जाते। इनका मानना है कि सौन्दर्यशास्त्र के दार्शनिक विचारों को अपनाते हुए कॉस्मेटिक मेकअप, कामुक आकर्षक कपड़े पहनकर मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से महिला को सशक्त बनाया जा सकता। लेकिन क्या इसे नारी मुक्ति या सशक्तिकरण के रूप में देखा जाना चाहिए? और पढ़ें : बेल हुक्स की नज़रों से समझें नारीवाद राजनीतिक क्यों है? Chimamanda Ngozi Adichie का मानना है कि कामुक-आकर्षक कपड़े पहनने,कॉस्मेटिक मेकअप करने और नारीवादी मूल्यों को धारण करने के बीच कोई संघर्ष नहीं होना चाहिए। ये महिलाएं अधिक सुंदर,अधिक सेक्सी दिखने को आत्मविश्वास और सफलता के रूप में देखती हैं। इस धारा की नारीवादियों का कहना है कि नारीवाद की दूसरी धारा के दौरान नारीवादियों ने पूरी तरह से महिलाओं की कानूनी और सामाजिक समानता पर ध्यान केंद्रित किया था और सेक्सुअलिटी को अपनाने से इनकार कर दिया। कुछ तो पुरुषों के विचार से भी घृणा करते थे और अक्सर उन शारीरिक विशेषताओं और व्यक्तित्व को अपना लेते थे जो स्त्रीत्व की परिभाषिक अवधारणा के दायरे में नहीं आती थीं। जबकि उनके अनुसार इन्हें अपनाकर भी नारीवादी हुआ जा सकता था। लिपस्टिक नारीवाद ग्लैमरस व्यक्तित्व की उपलब्धि को महिला सशक्तिकरण और सफलता की कुंजी के रूप में देखता है जो कि केवल नवउदारवादी उपभोक्ता संस्कृति को बढ़ावा देता है और एक पूरे राजनीतिक नारी मुक्ति आंदोलन को कमज़ोर करने का काम करता है। पितृसत्तात्मक व्यवस्था को बढ़ावा देने और महिला शरीर का वस्तुकरण करने के लिए लिपस्टिक नारीवाद की आलोचना की जाती है, विशेष रूप से मीडिया यानी विभिन्न विज्ञापनों, धारावाहिकों और सिनेमा में किस तरह महिलाओं को 'सेक्सुअल ऑब्जेक्ट' के रूप में दिखाया गया है। 'द आफ्टरमैथ ऑफ फेमिनिज़म' में एंजेला मैक रॉबी ने वर्तमान सांस्कृतिक ताकतों के महिलाओं पर पड़ते प्रभाव के प्रति चिंता व्यक्त की। उन्होंने नवउदारवादी उपभोक्ता संस्कृति के कारण होने वाले परिवर्तनों और महिलाओं पर होने वाले उसके मनोवैज्ञानिक प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा कि उपभोक्तावादी संस्कृति नारीवाद को खत्म करने का काम कर रही है। यह उन महिलाओं में गलतफहमी पैदा करती है कि वे इसके फायदों से अधिक सफल और स्वतंत्र हैं जबकि यह उन्हें उसी पितृसत्तात्मक सामाजिक जेंडर की परिभाषिक सरंचना में वापिस ले जाने का काम करती है। लिपस्टिक नारीवाद का असली खतरा मेकअप के तरीके, उसके पहनावे आदि पर नहीं है, बल्कि नवउदारवाद के साथ उसकी मिलीभगत है। वक्त के साथ-साथ परिवर्तन एक स्वभाविक क्रिया रही है और ये परिवर्तन हरेक युग में अपने पिछले युग से कुछ क्रांतिकारी बदलाव के साथ होता रहा है, फिर चाहे वह संज्ञानात्मक क्रांति रही हो, कृषि क्रांति हो या वैज्ञानिक क्रांति। लेकिन पितृसत्तात्मक मानसिकता हर युग में कुछ परिवर्तन के साथ मौजूद रही है। आज हम इन्हें नए नवउदारवादी उपभोक्ता संस्कृति के रूप में देख सकते हैं जो अप्रत्यक्ष रूप से अपना नियंत्रण बनाए रखे हुए है। नारीवादी आंदोलन के संघर्ष के लगभग दो सौ वर्ष से अधिक हो चुके हैं लेकिन आज भी समानता और अधिकारों की लड़ाई जारी है।
सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे कई वीडियोज सामने आते है, जो लोगों का ध्यान खींच लेते है. भुबन बड्याकर (काचा बादाम) और रानू मंडल के वीडियोज ने ही उन्हें रातों रात इंटरनेट सेन्सेशन बना दिया था. अब एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बिहार का एक लड़का गाना गाते दिख रहा है. उसकी आवाज पर बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद फिदा हो गए है. उन्होंने वीडियो पर रिएक्ट किया. साथ ही उस लड़के को बड़ा ऑफर दे डाला. बिहार के एक शख्स का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस शख्स का नाम अमरजीत जयकर है. वीडियो में उसने फिल्म मस्ती का गाना दिल दे दिया है गाना ऐसा गाया कि सब उसकी आवाज पर फिदा हो गए. लड़के की आवाज इतनी अच्छी है कि यूजर्स भी उसकी जमकर तारीफ कर रहे. उसके वीडियो पर रिएक्ट करते हुए सोनू सूद ने लिखा, एक बिहारी सौ पे भारी. अब अमरजीत की किस्मत चमक गई है. अमरजीत के मुताबिक सोनू सूद ने उन्हें मुंबई बुलाया है. आजतक की एक रिपोर्ट की मानें तो एक्टर ने उसे फिल्म फतेह में गाने का ऑफर दिया है. अमरजीत ने अपना एक वीडियो पोस्ट कर सोनू को धन्यवाद कहा है. वहीं, बता दें कि सोनू के अलावा एक्ट्रेस नीतू चंद्रा ने भी अमरजीत का वीडियो शेयर करते हुए ट्विटर पर लिखा था कि 'यह लड़का कौन है? शानदार. कृपया मेरे साथ इसका नंबर शेयर करें.' कौन है अमरजीत जयकर? बिहार के समस्तीपुर जिले के पटोरी प्रखंड क्षेत्र के भौआ गांव के रहने वाले अमरजीत जयकर अक्सर अपना गाना गाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते रहते है. अमरजीत गांव में ही अपना वीडियो बनाकर ट्विटर पर पोस्ट करते है. ट्विर पर उनके 10.6K फॉलोअर्स है. उनके पिता पटोरी में सैलून चलाते है.
सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे कई वीडियोज सामने आते है, जो लोगों का ध्यान खींच लेते है. भुबन बड्याकर और रानू मंडल के वीडियोज ने ही उन्हें रातों रात इंटरनेट सेन्सेशन बना दिया था. अब एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बिहार का एक लड़का गाना गाते दिख रहा है. उसकी आवाज पर बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद फिदा हो गए है. उन्होंने वीडियो पर रिएक्ट किया. साथ ही उस लड़के को बड़ा ऑफर दे डाला. बिहार के एक शख्स का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस शख्स का नाम अमरजीत जयकर है. वीडियो में उसने फिल्म मस्ती का गाना दिल दे दिया है गाना ऐसा गाया कि सब उसकी आवाज पर फिदा हो गए. लड़के की आवाज इतनी अच्छी है कि यूजर्स भी उसकी जमकर तारीफ कर रहे. उसके वीडियो पर रिएक्ट करते हुए सोनू सूद ने लिखा, एक बिहारी सौ पे भारी. अब अमरजीत की किस्मत चमक गई है. अमरजीत के मुताबिक सोनू सूद ने उन्हें मुंबई बुलाया है. आजतक की एक रिपोर्ट की मानें तो एक्टर ने उसे फिल्म फतेह में गाने का ऑफर दिया है. अमरजीत ने अपना एक वीडियो पोस्ट कर सोनू को धन्यवाद कहा है. वहीं, बता दें कि सोनू के अलावा एक्ट्रेस नीतू चंद्रा ने भी अमरजीत का वीडियो शेयर करते हुए ट्विटर पर लिखा था कि 'यह लड़का कौन है? शानदार. कृपया मेरे साथ इसका नंबर शेयर करें.' कौन है अमरजीत जयकर? बिहार के समस्तीपुर जिले के पटोरी प्रखंड क्षेत्र के भौआ गांव के रहने वाले अमरजीत जयकर अक्सर अपना गाना गाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते रहते है. अमरजीत गांव में ही अपना वीडियो बनाकर ट्विटर पर पोस्ट करते है. ट्विर पर उनके दस दशमलव छः केल्विन फॉलोअर्स है. उनके पिता पटोरी में सैलून चलाते है.
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 के छठे चरण के अंतर्गत दिल्ली की सभी सात सीटों पर 12 मई को वोटिंग होनी है। इससे पहले यहां के लोकसभा क्षेत्रों से विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी एक दूसरे पर बयानबाजी करने और चुनावी प्रचार करने में लगे हुए हैं। मतदान से पहेल ही यहां की पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी प्रत्याशी आतिशी और भाजपा प्रत्याशी गौतम गंभीर के बीच जबरदस्त संग्राम देखने को मिला है। एक तरफ जहां आप उम्मीदवार आतिशी ने गौतम गंभीर पर आपत्तिजनक पर्चे बंटवाने के आरोप लगाए हैं, तो वहीं गौतम गंभीर ने भी आप नेताओं पर हमला बोल दिया है। गौतम गंभीर ने जहां एक दिन पहले कहा था कि अगर उनके खिलाफ आरोप साबित होते हैं, तो वे अपनी उम्मीदवारी वापस ले लेंगे। वहीं अब उन्होंने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर भी हमला बोला है। गंभीर ने कहा है कि उन्हें शर्म आती है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि आज के समय में अच्छे लोग राजनीति में नहीं आना चाहते हैं, क्योंकि वो अरविंद केजरीवाल जैसे लोगों के सामने खड़े नहीं होना चाहते हैं। इस बीच गंभीर ने सीएम अविरंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आतिशी मारलेना पर मानहानि का नोटिस भी भेजा है। जिसके खिलाफ अब दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उन्होंने भी गंभीर के खिलाफ मानहानि का केस करने की धमकी दी है। बताते चलें कि मनीष सिसोदिया ने गुरवार को आतिशी के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। जिसके जरिए उन्होंने गौतम गंभीर पर आरोप लगाए थे कि गंभीर ने आतिशी के खिलाफ आपत्तिजनक पर्चे पूरे क्षेत्र में बंटवाए हैं। वहीं इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आतिशी भी रो पड़ी थीं।
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस के छठे चरण के अंतर्गत दिल्ली की सभी सात सीटों पर बारह मई को वोटिंग होनी है। इससे पहले यहां के लोकसभा क्षेत्रों से विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी एक दूसरे पर बयानबाजी करने और चुनावी प्रचार करने में लगे हुए हैं। मतदान से पहेल ही यहां की पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी प्रत्याशी आतिशी और भाजपा प्रत्याशी गौतम गंभीर के बीच जबरदस्त संग्राम देखने को मिला है। एक तरफ जहां आप उम्मीदवार आतिशी ने गौतम गंभीर पर आपत्तिजनक पर्चे बंटवाने के आरोप लगाए हैं, तो वहीं गौतम गंभीर ने भी आप नेताओं पर हमला बोल दिया है। गौतम गंभीर ने जहां एक दिन पहले कहा था कि अगर उनके खिलाफ आरोप साबित होते हैं, तो वे अपनी उम्मीदवारी वापस ले लेंगे। वहीं अब उन्होंने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर भी हमला बोला है। गंभीर ने कहा है कि उन्हें शर्म आती है कि अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि आज के समय में अच्छे लोग राजनीति में नहीं आना चाहते हैं, क्योंकि वो अरविंद केजरीवाल जैसे लोगों के सामने खड़े नहीं होना चाहते हैं। इस बीच गंभीर ने सीएम अविरंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आतिशी मारलेना पर मानहानि का नोटिस भी भेजा है। जिसके खिलाफ अब दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उन्होंने भी गंभीर के खिलाफ मानहानि का केस करने की धमकी दी है। बताते चलें कि मनीष सिसोदिया ने गुरवार को आतिशी के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। जिसके जरिए उन्होंने गौतम गंभीर पर आरोप लगाए थे कि गंभीर ने आतिशी के खिलाफ आपत्तिजनक पर्चे पूरे क्षेत्र में बंटवाए हैं। वहीं इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आतिशी भी रो पड़ी थीं।
Posted On: विभिन्न मीडिया में ऐसे समाचार आए हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बी.1.617 को एक वैश्विक चिंता वाले वैरिएंट के रूप में वर्गीकृत किया है। इनमें से कुछ रिपोर्ट में बी.1.617 वैरिएंट का उल्लेख कोरोना वायरस के "भारतीय वैरिएंट" के रूप में किया है। ये मीडिया रिपोर्ट्स निराधार और बेबुनियाद हैं। यह स्पष्ट किया जाता है कि डब्ल्यूएचओ ने अपने 32 पृष्ठ के दस्तावेज में कोरोना वायरस के बी.1.617 वैरिएंट के साथ "भारतीय वैरिएंट" शब्द नहीं जोड़ा है। वास्तव में, इस मामले से जुड़ी रिपोर्ट में "भारतीय" शब्द का ही उपयोग नहीं किया गया है।
Posted On: विभिन्न मीडिया में ऐसे समाचार आए हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बी.एक.छः सौ सत्रह को एक वैश्विक चिंता वाले वैरिएंट के रूप में वर्गीकृत किया है। इनमें से कुछ रिपोर्ट में बी.एक.छः सौ सत्रह वैरिएंट का उल्लेख कोरोना वायरस के "भारतीय वैरिएंट" के रूप में किया है। ये मीडिया रिपोर्ट्स निराधार और बेबुनियाद हैं। यह स्पष्ट किया जाता है कि डब्ल्यूएचओ ने अपने बत्तीस पृष्ठ के दस्तावेज में कोरोना वायरस के बी.एक.छः सौ सत्रह वैरिएंट के साथ "भारतीय वैरिएंट" शब्द नहीं जोड़ा है। वास्तव में, इस मामले से जुड़ी रिपोर्ट में "भारतीय" शब्द का ही उपयोग नहीं किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि काला धन रखने वाले किसी भी आदमी को वो बख्शेंगे नहीं और ईमानदार को किसी तरह की तकलीफ नहीं होगी। इसी नीति के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन पहले गोवा में ऐलान किया था कि अब बेनामी संपत्ति रखने वालों का नंबर आएगा। बेनामी संपत्ति में निवेश करने वालों पर डंडा चलाने में सरकार का बड़ा हथियार वही आधार नंबर बनेगा जो कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में शुरू हुआ था और मोदी सरकार ने उसे जारी रखा। सरकार बेनामी संपत्ति वालों को आधार के जरिए घेरने की तैयारी कर रही है, इसके लिए सभी राज्यों में आधार नंबर को राजस्व रिकॉर्ड से जोड़ने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। आधार नंबर का इस्तेमाल अभी तक सरकारी सब्सिडी सही पात्र तक पहुंचाने के लिए हो रहा था, लेकिन अब ये बेनामी संपत्ति का पता लगा कर सरकार का खजाना भरने के काम भी आएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि काला धन रखने वाले किसी भी आदमी को वो बख्शेंगे नहीं और ईमानदार को किसी तरह की तकलीफ नहीं होगी। इसी नीति के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन पहले गोवा में ऐलान किया था कि अब बेनामी संपत्ति रखने वालों का नंबर आएगा। बेनामी संपत्ति में निवेश करने वालों पर डंडा चलाने में सरकार का बड़ा हथियार वही आधार नंबर बनेगा जो कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में शुरू हुआ था और मोदी सरकार ने उसे जारी रखा। सरकार बेनामी संपत्ति वालों को आधार के जरिए घेरने की तैयारी कर रही है, इसके लिए सभी राज्यों में आधार नंबर को राजस्व रिकॉर्ड से जोड़ने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। आधार नंबर का इस्तेमाल अभी तक सरकारी सब्सिडी सही पात्र तक पहुंचाने के लिए हो रहा था, लेकिन अब ये बेनामी संपत्ति का पता लगा कर सरकार का खजाना भरने के काम भी आएगा।
नई दिल्लीः Realme narzo N55 Price in India: नया स्मार्टफोन अगर सस्ते दाम में मिल जाए तो फिर ये बात हर किसी के लिए भी फायदेमंद हो सकती है। अगर आप सस्ते में फोन खरीदना चाहते हैं तो आपको realme narzo N55 का स्मार्टफोन खरीदने को मिल रहा है। जिसे आप डिस्काउंट ऑफर में खरीदकर पूरा मज़ा लूट सकते है। क्योंकि इस पर आपको अमेजन शॉपिंग साइट की तरफ से धांसू डील ऑफर में लाया गया है। जिसके बाद आप इसे बेहद ही सस्ते प्राइस में खरीद सकते है। लेकिन आज हम आपको बताएंगे कि आप कैसे कई हजार रुपए की बचत कर इस मोबाइल को Amazon Sale में कैसे खरीद सकते हैं। आपको इस फोन में 6.72 इंच का फुल एचडी प्लस डिस्प्ले दिया गया है। जिसका रिफ्रेश रेट 90 हर्ट्ज का है। साथ ही इसमें मीडियाटेक हेलियो जी88 का प्रोसेसर दिया गया है। इसके अलावा इसमें 6 जीबी की रैम और 128 जीबी तक की स्टोरेज दी गई है। जिसे 1 टीबी तक माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए से बढ़ाया भी जा सकता है। फोटोग्राफी के लिए इस फोन में ड्यूल रियर AI कैमरा सेटअप दिया गया है। जिसका पहला कैमरा 64 मेगापिक्सल का, दूसरा 2 मेगापिक्सल का और 8 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा उपलब्ध दिया गया है। बैटरी के लिए इसमें 5000 एमएएच की दमदार बैटरी दी गई है जो 33W के SUPERVOOC चार्ज सपोर्ट के साथ आती है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें 2 नैनो कार्ड स्लॉट, 1 माइक्रो एसडी स्लॉट, वाई-फाई और ब्लूटूथ जैसे फीचर्स भी शामिल किए गए हैं। आपको बता दें कि इस रियल मी फोन के ऑफर्स के बारे में तो इसकी कीमत 12,999 रूपये की है। जिसे अमेजन पर 15 प्रतिशत की छूट के बाद 10,999 रूपये में बेचा जा रहा है। बैंक ऑफर के तहत आपको HSBC बैंक कार्ड से 250 रूपये तक की छूट भी मिलती है। इसके साथ ही 10,250 रूपये का एक्सचेंज ऑफर भी मिल रहा है। साथ ही आप इसे ईएमआई ऑप्शन पर भी खरीद सकते है। अगर आप एक्सचेंज ऑफर का सही से फायदा उठाते है तो आप हजारों रुपयों तक की बचत कर सकते हैं। तो जल्दी से इसे ऑनलाइन ऑर्डर बुक कर आज ही अपने घर मंगवा लीजिए।
नई दिल्लीः Realme narzo Nपचपन Price in India: नया स्मार्टफोन अगर सस्ते दाम में मिल जाए तो फिर ये बात हर किसी के लिए भी फायदेमंद हो सकती है। अगर आप सस्ते में फोन खरीदना चाहते हैं तो आपको realme narzo Nपचपन का स्मार्टफोन खरीदने को मिल रहा है। जिसे आप डिस्काउंट ऑफर में खरीदकर पूरा मज़ा लूट सकते है। क्योंकि इस पर आपको अमेजन शॉपिंग साइट की तरफ से धांसू डील ऑफर में लाया गया है। जिसके बाद आप इसे बेहद ही सस्ते प्राइस में खरीद सकते है। लेकिन आज हम आपको बताएंगे कि आप कैसे कई हजार रुपए की बचत कर इस मोबाइल को Amazon Sale में कैसे खरीद सकते हैं। आपको इस फोन में छः.बहत्तर इंच का फुल एचडी प्लस डिस्प्ले दिया गया है। जिसका रिफ्रेश रेट नब्बे हर्ट्ज का है। साथ ही इसमें मीडियाटेक हेलियो जीअठासी का प्रोसेसर दिया गया है। इसके अलावा इसमें छः जीबी की रैम और एक सौ अट्ठाईस जीबी तक की स्टोरेज दी गई है। जिसे एक टीबी तक माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए से बढ़ाया भी जा सकता है। फोटोग्राफी के लिए इस फोन में ड्यूल रियर AI कैमरा सेटअप दिया गया है। जिसका पहला कैमरा चौंसठ मेगापिक्सल का, दूसरा दो मेगापिक्सल का और आठ मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा उपलब्ध दिया गया है। बैटरी के लिए इसमें पाँच हज़ार एमएएच की दमदार बैटरी दी गई है जो तैंतीस वाट के SUPERVOOC चार्ज सपोर्ट के साथ आती है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें दो नैनो कार्ड स्लॉट, एक माइक्रो एसडी स्लॉट, वाई-फाई और ब्लूटूथ जैसे फीचर्स भी शामिल किए गए हैं। आपको बता दें कि इस रियल मी फोन के ऑफर्स के बारे में तो इसकी कीमत बारह,नौ सौ निन्यानवे रूपये की है। जिसे अमेजन पर पंद्रह प्रतिशत की छूट के बाद दस,नौ सौ निन्यानवे रूपये में बेचा जा रहा है। बैंक ऑफर के तहत आपको HSBC बैंक कार्ड से दो सौ पचास रूपये तक की छूट भी मिलती है। इसके साथ ही दस,दो सौ पचास रूपये का एक्सचेंज ऑफर भी मिल रहा है। साथ ही आप इसे ईएमआई ऑप्शन पर भी खरीद सकते है। अगर आप एक्सचेंज ऑफर का सही से फायदा उठाते है तो आप हजारों रुपयों तक की बचत कर सकते हैं। तो जल्दी से इसे ऑनलाइन ऑर्डर बुक कर आज ही अपने घर मंगवा लीजिए।
1 जनवरी, 2022 को,"ड्रीम आइडेंटिटी प्रोजेक्ट" का उन्नत संस्करण,युवा शैक्षिक सामग्री रचनाकारों का समर्थन करने के लिए एक परियोजना आधिकारिक तौर पर शुरू की गई थी। विकास के हिस्से के रूप में, सामग्री श्रेणियों और रचनाकारों के भाग लेने के तरीके में बड़े बदलाव होंगे। चींटी लोकप्रिय विज्ञान सामग्री के रचनाकारों का समर्थन करने और युवाओं के साथ बातचीत को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। लघु वीडियो प्लेटफॉर्म पर, गहन ज्ञान को जनता के भीतर फैलाया जा सकता है। एक अपलोडर, जिसका नाम "स्ट्रिंग थ्योरी वर्ल्ड" है, ब्रह्मांड विज्ञान, स्ट्रिंग सिद्धांत और क्षेत्र सिद्धांत का अध्ययन करने वाला एक पोस्टडॉक्टरल फेलो है। वह कंपकंपी पर दिलचस्प भौतिकी ज्ञान की व्याख्या करना पसंद करती है, जिसने कई बच्चों का पक्ष जीता है। 2022 में, "मेंगज़ी प्लान" विज्ञान लोकप्रियकरण में निवेश बढ़ाएगा। 2021 में, योजना ने अधिक सामग्री रचनाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए "आनंद विज्ञान शिविर"," लोकप्रिय विज्ञान मौसम "और" अद्भुत विज्ञान और प्रौद्योगिकी संग्रहालय "जैसी कई गतिविधियों का शुभारंभ किया। इसके अलावा, वाइब्रेटिंग यूथ मोड फ़ंक्शन को अपग्रेड करना जारी रहेगा। क्रॉस-डोमेन ज्ञान के साथ गर्म घटनाओं के संयोजन से किशोरों को व्यवस्थित रूप से उपयोगी ज्ञान प्राप्त करते हुए समय के साथ तालमेल रखने में मदद मिल सकती है। युवा लोगों के लिए ऑनलाइन ज्ञान प्राप्त करने के तरीकों में विविधता लाने के लिए, 2022 में, "मेओज़ी प्रोजेक्ट" लाइव प्रसारण के लिए प्रोत्साहन बढ़ाएगा और अधिक सामग्री रचनाकारों को आमंत्रित करेगा। "ड्रीम आइडेंटिटी प्लान" को ऑफ़लाइन अपग्रेड किया जाएगा। बच्चों की रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के लिए तारामंडल, मछलीघर, संग्रहालय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी संग्रहालय और अन्य स्थानों में अभिभावक-बाल-थीम वाली गतिविधियों, लोक कल्याणकारी व्याख्यान और आदान-प्रदान करें।
एक जनवरी, दो हज़ार बाईस को,"ड्रीम आइडेंटिटी प्रोजेक्ट" का उन्नत संस्करण,युवा शैक्षिक सामग्री रचनाकारों का समर्थन करने के लिए एक परियोजना आधिकारिक तौर पर शुरू की गई थी। विकास के हिस्से के रूप में, सामग्री श्रेणियों और रचनाकारों के भाग लेने के तरीके में बड़े बदलाव होंगे। चींटी लोकप्रिय विज्ञान सामग्री के रचनाकारों का समर्थन करने और युवाओं के साथ बातचीत को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेगी। लघु वीडियो प्लेटफॉर्म पर, गहन ज्ञान को जनता के भीतर फैलाया जा सकता है। एक अपलोडर, जिसका नाम "स्ट्रिंग थ्योरी वर्ल्ड" है, ब्रह्मांड विज्ञान, स्ट्रिंग सिद्धांत और क्षेत्र सिद्धांत का अध्ययन करने वाला एक पोस्टडॉक्टरल फेलो है। वह कंपकंपी पर दिलचस्प भौतिकी ज्ञान की व्याख्या करना पसंद करती है, जिसने कई बच्चों का पक्ष जीता है। दो हज़ार बाईस में, "मेंगज़ी प्लान" विज्ञान लोकप्रियकरण में निवेश बढ़ाएगा। दो हज़ार इक्कीस में, योजना ने अधिक सामग्री रचनाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए "आनंद विज्ञान शिविर"," लोकप्रिय विज्ञान मौसम "और" अद्भुत विज्ञान और प्रौद्योगिकी संग्रहालय "जैसी कई गतिविधियों का शुभारंभ किया। इसके अलावा, वाइब्रेटिंग यूथ मोड फ़ंक्शन को अपग्रेड करना जारी रहेगा। क्रॉस-डोमेन ज्ञान के साथ गर्म घटनाओं के संयोजन से किशोरों को व्यवस्थित रूप से उपयोगी ज्ञान प्राप्त करते हुए समय के साथ तालमेल रखने में मदद मिल सकती है। युवा लोगों के लिए ऑनलाइन ज्ञान प्राप्त करने के तरीकों में विविधता लाने के लिए, दो हज़ार बाईस में, "मेओज़ी प्रोजेक्ट" लाइव प्रसारण के लिए प्रोत्साहन बढ़ाएगा और अधिक सामग्री रचनाकारों को आमंत्रित करेगा। "ड्रीम आइडेंटिटी प्लान" को ऑफ़लाइन अपग्रेड किया जाएगा। बच्चों की रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के लिए तारामंडल, मछलीघर, संग्रहालय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी संग्रहालय और अन्य स्थानों में अभिभावक-बाल-थीम वाली गतिविधियों, लोक कल्याणकारी व्याख्यान और आदान-प्रदान करें।
पांच विधानसभा क्षेत्र वाले जिला हमीरपुर में 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की मेवा यानी भोरंज विधानसभा सीट सबसे हॉट होने वाली है। कारण जिस तरह से पिछले चार वर्षों से पूर्व शिक्षा मंत्री स्व. ईश्वर दास धीमान के पुत्र डा. अनिल धीमान को हाशिए पर रखा गया है और पार्टी की ओर से आए दिन कभी उम्र तो कभी परिवारवाद के नाम पर नियम बनाए जा रहे हैं, उसका लावा धीरे-धीरे चिंगारियां छोडऩे लगा है। डा. धीमान की ओर से सोशल मीडिया पर डाली गई पोस्ट से जहां उनकी अनदेखी का दर्द छलका है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार की अनदेखी का दर्द भी उसमें साफ नजर आ रहा है। डा. अनिल धीमान की मानें खुद को विश्व की सबसे बड़ी राजनीतक पार्टी कहने वाली भाजपा ये कैसे नियम बना रही है कि नींव के नायकों को ही दरकिनार किया जा रहा है। जुब्बल कोटखाई में चेतन बरागटा की अनदेखी का जिक्र करते हुए डा. धीमान कहते हैं कि उनके पिता जी ने पूरा जीवन पार्टी की सेवा में लगा दिया और जब बेटे की बात आई, तो परिवारवाद का बैरियर लगा। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता या उसके परिवार से उस विधानसभा क्षेत्र के लोगों को कई उम्मीदें होती हैं, क्योंकि उन्होंने उस नेता को बनाया होता है। ऐसे में यदि पार्टी उनको किनारे करेगी, तो जुब्बल कोटखाई जैसे हालात होना लाजिमी हैं। स्व. आईडी धीमान ने 1990 से लेकर वर्ष 2017 तक लगातार छह बार भोरंज विस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। सरकार चाहे किसी भी पार्टी की रही जनता ने हमेशा धीमान परिवार का साथ दिया। उनके निधन के बाद अप्रैल 2017 में जब उपचुनाव हुआ, तो भी जनता ने उनके बेटे डा. अनिल धीमान को दस हजार के करीब वोटों से जीत दिलाई, लेकिन दिसंबर 2017 के विस चुनावों में डा. धीमान का टिकट काट दिया गया। (एचडीएम) भोरंज जो कभी मेवा विधानसभा के नाम से होता था, उसमें लगभग 60 से 70 हजार वोटर हैं। अनुसूचित जाति बहुत क्षेत्र होने के कारण जिला की यह सीट रिजर्व है। 1990 से लेकर आज तक बीजेपी का ही इस सीट पर वर्चस्व रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं कि इसका श्रेय स्व. आईडी धीमान को जाता है। उन्होंने क्षेत्र की जनता को ऐसा माहौल दिया कि लगातार छह बार उन्हें और सातवीं बार उनके सुपुत्र डा. अनिल धीमान को क्षेत्र की जनता ने विधानसभा तक पहुंचाया।
पांच विधानसभा क्षेत्र वाले जिला हमीरपुर में दो हज़ार बाईस के विधानसभा चुनावों में भाजपा की मेवा यानी भोरंज विधानसभा सीट सबसे हॉट होने वाली है। कारण जिस तरह से पिछले चार वर्षों से पूर्व शिक्षा मंत्री स्व. ईश्वर दास धीमान के पुत्र डा. अनिल धीमान को हाशिए पर रखा गया है और पार्टी की ओर से आए दिन कभी उम्र तो कभी परिवारवाद के नाम पर नियम बनाए जा रहे हैं, उसका लावा धीरे-धीरे चिंगारियां छोडऩे लगा है। डा. धीमान की ओर से सोशल मीडिया पर डाली गई पोस्ट से जहां उनकी अनदेखी का दर्द छलका है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार की अनदेखी का दर्द भी उसमें साफ नजर आ रहा है। डा. अनिल धीमान की मानें खुद को विश्व की सबसे बड़ी राजनीतक पार्टी कहने वाली भाजपा ये कैसे नियम बना रही है कि नींव के नायकों को ही दरकिनार किया जा रहा है। जुब्बल कोटखाई में चेतन बरागटा की अनदेखी का जिक्र करते हुए डा. धीमान कहते हैं कि उनके पिता जी ने पूरा जीवन पार्टी की सेवा में लगा दिया और जब बेटे की बात आई, तो परिवारवाद का बैरियर लगा। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता या उसके परिवार से उस विधानसभा क्षेत्र के लोगों को कई उम्मीदें होती हैं, क्योंकि उन्होंने उस नेता को बनाया होता है। ऐसे में यदि पार्टी उनको किनारे करेगी, तो जुब्बल कोटखाई जैसे हालात होना लाजिमी हैं। स्व. आईडी धीमान ने एक हज़ार नौ सौ नब्बे से लेकर वर्ष दो हज़ार सत्रह तक लगातार छह बार भोरंज विस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। सरकार चाहे किसी भी पार्टी की रही जनता ने हमेशा धीमान परिवार का साथ दिया। उनके निधन के बाद अप्रैल दो हज़ार सत्रह में जब उपचुनाव हुआ, तो भी जनता ने उनके बेटे डा. अनिल धीमान को दस हजार के करीब वोटों से जीत दिलाई, लेकिन दिसंबर दो हज़ार सत्रह के विस चुनावों में डा. धीमान का टिकट काट दिया गया। भोरंज जो कभी मेवा विधानसभा के नाम से होता था, उसमें लगभग साठ से सत्तर हजार वोटर हैं। अनुसूचित जाति बहुत क्षेत्र होने के कारण जिला की यह सीट रिजर्व है। एक हज़ार नौ सौ नब्बे से लेकर आज तक बीजेपी का ही इस सीट पर वर्चस्व रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं कि इसका श्रेय स्व. आईडी धीमान को जाता है। उन्होंने क्षेत्र की जनता को ऐसा माहौल दिया कि लगातार छह बार उन्हें और सातवीं बार उनके सुपुत्र डा. अनिल धीमान को क्षेत्र की जनता ने विधानसभा तक पहुंचाया।
SBI SO Vacancy update: भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India) ने हाल ही में विशेषज्ञ अधिकारी (SO) पदों पर रिक्तियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। SBI SO भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि सोमवार 18 अक्टूबर, 2021 है। उम्मीदवारों का चयन विशेषज्ञ संवर्ग अधिकारी के 606 पदों के लिए किया जाएगा। वे सभी उम्मीदवार जिन्होंने अभी तक इस रिक्ति के लिए आवेदन नहीं किया है, वे अब आधिकारिक वेबसाइट यानी sbi.co.in पर आवेदन कर सकते हैं। प्रबंधक और उप प्रबंधक के रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती 28 सितंबर, 2021 को शुरू किया गया था। आधिकारिक अधिसूचना में उल्लेख किया गया है कि भर्ती 'शॉर्टलिस्टिंग और साक्षात्कार' के माध्यम से की जाएगी। साक्षात्कार के दौर में प्राप्त अंकों या योग्यता के आधार पर अंतिम मेरिट सूची तैयार की जाएगी। महत्वपूर्ण तिथियों के साथ-साथ आवेदन करने के चरणों का उल्लेख नीचे किया गया है। एसबीआई वेल्थ मैनेजमेंट बिजनेस यूनिट भर्ती अधिसूचना के अनुसार, एसबीआई रिलेशनशिप मैनेजर (SBI Relationship Manager) के पद के लिए कुल 314 रिक्तियां हैं। ग्राहक संबंध कार्यकारी (Customer Relationship Executive) के पद के लिए 217 रिक्तियां हैं। रिलेशनशिप मैनेजर (टीम लीड) के पद के लिए 20 रिक्तियां, निवेश अधिकारी पद के लिए 12 रिक्तियां, केंद्रीय अनुसंधान दल (Product Lead) और केंद्रीय अनुसंधान दल (Support) पदों के लिए 2 रिक्तियां हैं। भर्ती संविदा के आधार पर होगी। - भर्ती के लिए आवेदन 28 सितंबर, 2021 को शुरू किया गया था। - पंजीकरण करने की अंतिम तिथि 18 अक्टूबर, 2021 है। - आवेदन पत्र को प्रिंट करने की अंतिम तिथि 2 नवंबर, 2021 है। - ऑनलाइन लिखित परीक्षा अस्थायी रूप से 15 नवंबर, 2021 को आयोजित की जाएगी। - इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट - sbi.co.in या bani.sbi/careers पर जाएं। - होमपेज पर 'Recruitment of Specialist Cadre Officer on Contract Basis' अधिसूचना पर क्लिक करें। - क्लिक करते ही दूसरा पेज खुल जाएगा जहां उन्हें पंजीकरण पर क्लिक करना होगा। - विवरण सही ढंग से भरने के बाद सबमिट विकल्प पर क्लिक करना होगा। - उम्मीदवार भविष्य के लिए इस आवदेन की एक कॉपी भी प्रिंट कर लें तो बेहतर होगा। इस पद के लिए इंडिकेटीव सीटीसी 8 लाख रुपये से 12 लाख रुपये प्रति वर्ष है। उम्मीदवारों को सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के लिए 750 रुपये का आवेदन शुल्क देना होगा। हालांकि, एससी/एसटी/पीडब्ल्यूडी से संबंधित उम्मीदवारों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
SBI SO Vacancy update: भारतीय स्टेट बैंक ने हाल ही में विशेषज्ञ अधिकारी पदों पर रिक्तियों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। SBI SO भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि सोमवार अट्ठारह अक्टूबर, दो हज़ार इक्कीस है। उम्मीदवारों का चयन विशेषज्ञ संवर्ग अधिकारी के छः सौ छः पदों के लिए किया जाएगा। वे सभी उम्मीदवार जिन्होंने अभी तक इस रिक्ति के लिए आवेदन नहीं किया है, वे अब आधिकारिक वेबसाइट यानी sbi.co.in पर आवेदन कर सकते हैं। प्रबंधक और उप प्रबंधक के रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती अट्ठाईस सितंबर, दो हज़ार इक्कीस को शुरू किया गया था। आधिकारिक अधिसूचना में उल्लेख किया गया है कि भर्ती 'शॉर्टलिस्टिंग और साक्षात्कार' के माध्यम से की जाएगी। साक्षात्कार के दौर में प्राप्त अंकों या योग्यता के आधार पर अंतिम मेरिट सूची तैयार की जाएगी। महत्वपूर्ण तिथियों के साथ-साथ आवेदन करने के चरणों का उल्लेख नीचे किया गया है। एसबीआई वेल्थ मैनेजमेंट बिजनेस यूनिट भर्ती अधिसूचना के अनुसार, एसबीआई रिलेशनशिप मैनेजर के पद के लिए कुल तीन सौ चौदह रिक्तियां हैं। ग्राहक संबंध कार्यकारी के पद के लिए दो सौ सत्रह रिक्तियां हैं। रिलेशनशिप मैनेजर के पद के लिए बीस रिक्तियां, निवेश अधिकारी पद के लिए बारह रिक्तियां, केंद्रीय अनुसंधान दल और केंद्रीय अनुसंधान दल पदों के लिए दो रिक्तियां हैं। भर्ती संविदा के आधार पर होगी। - भर्ती के लिए आवेदन अट्ठाईस सितंबर, दो हज़ार इक्कीस को शुरू किया गया था। - पंजीकरण करने की अंतिम तिथि अट्ठारह अक्टूबर, दो हज़ार इक्कीस है। - आवेदन पत्र को प्रिंट करने की अंतिम तिथि दो नवंबर, दो हज़ार इक्कीस है। - ऑनलाइन लिखित परीक्षा अस्थायी रूप से पंद्रह नवंबर, दो हज़ार इक्कीस को आयोजित की जाएगी। - इच्छुक उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट - sbi.co.in या bani.sbi/careers पर जाएं। - होमपेज पर 'Recruitment of Specialist Cadre Officer on Contract Basis' अधिसूचना पर क्लिक करें। - क्लिक करते ही दूसरा पेज खुल जाएगा जहां उन्हें पंजीकरण पर क्लिक करना होगा। - विवरण सही ढंग से भरने के बाद सबमिट विकल्प पर क्लिक करना होगा। - उम्मीदवार भविष्य के लिए इस आवदेन की एक कॉपी भी प्रिंट कर लें तो बेहतर होगा। इस पद के लिए इंडिकेटीव सीटीसी आठ लाख रुपये से बारह लाख रुपये प्रति वर्ष है। उम्मीदवारों को सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के लिए सात सौ पचास रुपयापये का आवेदन शुल्क देना होगा। हालांकि, एससी/एसटी/पीडब्ल्यूडी से संबंधित उम्मीदवारों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
किसी भी युग में फैशन बाल में एक अग्रणी भूमिका निभाई। इनमें से, अविश्वसनीय केशविन्यास का निर्माण किया, curled, पाउडर, चित्रित। यहां तक कि के लिए किसी कारण मुंडा था, तो अभी भी एक विग पहनने के लिए। सौभाग्य से, आधुनिक लड़कियों के ऐसे तरीकों का सहारा लेना नहीं है। हर दिन एक अच्छी तरह से तैयार बाल के लिए पर्याप्त है। सबसे लोकप्रिय है बाल कटवाने मध्यम लंबाई। आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि कैसे मध्यम बालों के लिए एक केश बनाने के लिए व्यक्तिगत रूप से लगभग सभी को पता है। कई महिलाओं के बस उसके कंधों से नीचे बाल आश्चर्य करना पसंद करते हैं - वे खुद को हर तरह की सबसे आसान स्थापना करने के लिए उधार देने के। यहाँ मध्यम बालों के लिए कुछ विकल्प है, जो आप छवि का एक मूलभूत परिवर्तन के लिए केश चुनने के लिए मदद मिलेगी रहे हैं। औसत बाल कटवाने बहुत प्रासंगिक माना जाता है, लेकिन वह यह साधारण नहीं बन जाता है, तो आप हेनतई शैली में बिछाने प्रदान करते हैं। इस छवि के लिए सीधे बनूंगी , मोटी और लंबा होना चाहिए एक आदर्श में - पास भौहें। साइड किस्में एक ऊर्ध्वाधर सर्पिल में मुड़ रहे हैं। बाल पूरी तरह से चिकनी मध्यम और तैयार utjuzhkom में जुदा में बांटा गया है। केश भले ही बाल सीढ़ियों से कम उड़ान कट जाता है, निष्पादन में सरल है। , चेहरे और उच्च cheekbones के अंडाकार आकार के लिए आदर्श यदि आप एक जापानी राजकुमारी की तरह लग रही है। मध्यम बालों के लिए एक केश बनाने के लिए, पूरी तरह से 60 के दशक में पता था। उस युग के सौंदर्य के मानक - Bridzhitt बारदो, एलिजाबेथ टेलर, Dzhina Lollobridzhida - अभी भी सुंदरता और शैली का प्रतीक बना हुआ है। में बाल कटाने बनाने के रेट्रो शैली, कोई ज़रूरत नहीं एक अनुभवी नाई किया जाना है। एक पक्ष विदाई बनाने और उसके कान के पीछे सामने किनारा करना। ताज पर बाल दो भागों में साथ बांटा गया है। कम Nacheshite और अदृश्य के सिरों को सुरक्षित। शीर्ष स्वतंत्र रूप से गिर के लिए छोड़ दिया जा सकता है। समाप्त होता है utjuzhkom खींचा जा सकता है और मोम से सुरक्षित करें। प्रकाश के लिए पतली बाल वार्निश का एक बहुत जरूरत है। छवि का ध्यान केंद्रित एक विषम रंग बैंड हो सकता है। शाम में, स्टैकिंग प्रसिद्ध "बाबेट" में बदला जा सकता। इस प्रयोजन के लिए बालों के शेष मुक्त हिस्सा पहले, यह अंदर कंघी के लिए आवश्यक है और कम, उन्हें ऊन सिर के पीछे में उन्हें ठीक से बंद कर दिया। साइड किनारा मोड़ दोहन और भी पिन पिन करें। फीता या रेशमी दुपट्टा की सजावट पट्टी के लिए उपयुक्त। कई अभिनेत्रियों और कई सत्रों के लिए मॉडल एक केश एक ला "हवा मई" खेल पसंद करते हैं। दरअसल, प्राकृतिक और सहजता मजबूती से समकालीन फैशन में स्थापित किया गया। लेकिन यह न भूलें कि हमारे मूर्तियों सिर्फ बिस्तर से बाहर हो गया नहीं कर रहे हैं और उनके बालों में कंघी करना भूल गया था। यह संभव है यह स्पष्ट लापरवाही से अधिक स्टाइलिस्ट परेशान है। निष्कर्षः समान केश अभी भी करने की जरूरत है। कैसे एक केश बनाने के लिए मध्यम बालों के लिए, इतना है कि यह प्रकृति के ही उत्पाद लग रहा था? अगर आप आज्ञाकारी, घने बाल हैं यह बहुत आसान है। फिर स्थापना के बाद आप एक छोटे से मोम उंगलियों के बीच पूर्व मला केवल थोड़ा उन्हें लागत, व्याकुल होगा। वार्निश की एक बूंद - और आप परमात्मा हैं। जब पतली बाल - यह पेशेवरों पर भरोसा करने के लिए बेहतर है। संरेखण लंबे कर्लिंग प्रतिस्थापित किया है। चिकना स्टाइल पूरी तरह से कुरकुरा सीधी रेखाएं जोर दिया जाता है। यह जुदा किया जा सकता है, पक्ष या जुदाई लाइन धमाके विकास पर। उत्तरार्द्ध मामले में, वापस करने के लिए एक आदर्श लहजे। यह स्टाइल सार्वभौमिक और किसी भी चेहरा आकार के लिए उपयुक्त है। पूरी तरह से, चिकनी मध्यम बालों के लिए एक केश का अनुमान लगाना आसान बनाने के लिए। निष्पादन बहुत सरल हैः केवल एक बाल लोहा मध्यम तापमान तक गर्म की जरूरत है। प्रत्येक पास के अंत में, यह आंतरिक भागों में या पर बाहर कर दिया जाना चाहिए - इच्छित परिणाम पर निर्भर करता है। यह प्रयास करें, प्रयोग और सुंदर होना करने के लिए डर नहीं है!
किसी भी युग में फैशन बाल में एक अग्रणी भूमिका निभाई। इनमें से, अविश्वसनीय केशविन्यास का निर्माण किया, curled, पाउडर, चित्रित। यहां तक कि के लिए किसी कारण मुंडा था, तो अभी भी एक विग पहनने के लिए। सौभाग्य से, आधुनिक लड़कियों के ऐसे तरीकों का सहारा लेना नहीं है। हर दिन एक अच्छी तरह से तैयार बाल के लिए पर्याप्त है। सबसे लोकप्रिय है बाल कटवाने मध्यम लंबाई। आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि कैसे मध्यम बालों के लिए एक केश बनाने के लिए व्यक्तिगत रूप से लगभग सभी को पता है। कई महिलाओं के बस उसके कंधों से नीचे बाल आश्चर्य करना पसंद करते हैं - वे खुद को हर तरह की सबसे आसान स्थापना करने के लिए उधार देने के। यहाँ मध्यम बालों के लिए कुछ विकल्प है, जो आप छवि का एक मूलभूत परिवर्तन के लिए केश चुनने के लिए मदद मिलेगी रहे हैं। औसत बाल कटवाने बहुत प्रासंगिक माना जाता है, लेकिन वह यह साधारण नहीं बन जाता है, तो आप हेनतई शैली में बिछाने प्रदान करते हैं। इस छवि के लिए सीधे बनूंगी , मोटी और लंबा होना चाहिए एक आदर्श में - पास भौहें। साइड किस्में एक ऊर्ध्वाधर सर्पिल में मुड़ रहे हैं। बाल पूरी तरह से चिकनी मध्यम और तैयार utjuzhkom में जुदा में बांटा गया है। केश भले ही बाल सीढ़ियों से कम उड़ान कट जाता है, निष्पादन में सरल है। , चेहरे और उच्च cheekbones के अंडाकार आकार के लिए आदर्श यदि आप एक जापानी राजकुमारी की तरह लग रही है। मध्यम बालों के लिए एक केश बनाने के लिए, पूरी तरह से साठ के दशक में पता था। उस युग के सौंदर्य के मानक - Bridzhitt बारदो, एलिजाबेथ टेलर, Dzhina Lollobridzhida - अभी भी सुंदरता और शैली का प्रतीक बना हुआ है। में बाल कटाने बनाने के रेट्रो शैली, कोई ज़रूरत नहीं एक अनुभवी नाई किया जाना है। एक पक्ष विदाई बनाने और उसके कान के पीछे सामने किनारा करना। ताज पर बाल दो भागों में साथ बांटा गया है। कम Nacheshite और अदृश्य के सिरों को सुरक्षित। शीर्ष स्वतंत्र रूप से गिर के लिए छोड़ दिया जा सकता है। समाप्त होता है utjuzhkom खींचा जा सकता है और मोम से सुरक्षित करें। प्रकाश के लिए पतली बाल वार्निश का एक बहुत जरूरत है। छवि का ध्यान केंद्रित एक विषम रंग बैंड हो सकता है। शाम में, स्टैकिंग प्रसिद्ध "बाबेट" में बदला जा सकता। इस प्रयोजन के लिए बालों के शेष मुक्त हिस्सा पहले, यह अंदर कंघी के लिए आवश्यक है और कम, उन्हें ऊन सिर के पीछे में उन्हें ठीक से बंद कर दिया। साइड किनारा मोड़ दोहन और भी पिन पिन करें। फीता या रेशमी दुपट्टा की सजावट पट्टी के लिए उपयुक्त। कई अभिनेत्रियों और कई सत्रों के लिए मॉडल एक केश एक ला "हवा मई" खेल पसंद करते हैं। दरअसल, प्राकृतिक और सहजता मजबूती से समकालीन फैशन में स्थापित किया गया। लेकिन यह न भूलें कि हमारे मूर्तियों सिर्फ बिस्तर से बाहर हो गया नहीं कर रहे हैं और उनके बालों में कंघी करना भूल गया था। यह संभव है यह स्पष्ट लापरवाही से अधिक स्टाइलिस्ट परेशान है। निष्कर्षः समान केश अभी भी करने की जरूरत है। कैसे एक केश बनाने के लिए मध्यम बालों के लिए, इतना है कि यह प्रकृति के ही उत्पाद लग रहा था? अगर आप आज्ञाकारी, घने बाल हैं यह बहुत आसान है। फिर स्थापना के बाद आप एक छोटे से मोम उंगलियों के बीच पूर्व मला केवल थोड़ा उन्हें लागत, व्याकुल होगा। वार्निश की एक बूंद - और आप परमात्मा हैं। जब पतली बाल - यह पेशेवरों पर भरोसा करने के लिए बेहतर है। संरेखण लंबे कर्लिंग प्रतिस्थापित किया है। चिकना स्टाइल पूरी तरह से कुरकुरा सीधी रेखाएं जोर दिया जाता है। यह जुदा किया जा सकता है, पक्ष या जुदाई लाइन धमाके विकास पर। उत्तरार्द्ध मामले में, वापस करने के लिए एक आदर्श लहजे। यह स्टाइल सार्वभौमिक और किसी भी चेहरा आकार के लिए उपयुक्त है। पूरी तरह से, चिकनी मध्यम बालों के लिए एक केश का अनुमान लगाना आसान बनाने के लिए। निष्पादन बहुत सरल हैः केवल एक बाल लोहा मध्यम तापमान तक गर्म की जरूरत है। प्रत्येक पास के अंत में, यह आंतरिक भागों में या पर बाहर कर दिया जाना चाहिए - इच्छित परिणाम पर निर्भर करता है। यह प्रयास करें, प्रयोग और सुंदर होना करने के लिए डर नहीं है!
इस टोपी को सलाम - गरमी से परेशान हो कर या स्वास्थ्य के लिये पहाड जाने वालो से नैनीताल की रौनक नहीं होती। ऐसे लोग ओठ भींचकर नाक से लम्बी साँस लेने की कोशिश करते, हाथ में छडी लिये सूनी सडको पर चहल कदमी करते दिखाई देगे या अखबार, पुस्तक लिये पलंग या कुर्सी पर पड़े रहेंगे। बहुत हुआ, झील के किनारे जा बेंच पर बैठ, दूसरों का मनोविनोद देख अपना दिल बहला लेंगे । गरमी के मौसिम से गरमी तो होती है। लेकिन साहबियत के रिवाज़ से पहले पहाड कौन जाता था ? अंग्रेजों को गरमी ज्यादा सताती है । इसलिये गरमी से अधिक परेशान होना साहबियत या बडप्पन का चिह्न हो गया है। इसके अलावा नई सभ्यता या साहबियत के विलास वही होगे जहाँ साहब होगे । गरमियो मे साहब और बड़े आदमी दूर-दूर से सिमट कर 'हिल स्टेशनों' ( मंसूरी - नैनीताल ) में इकट्ठे होते हैं और वहाँ साहबियत के विलास के अखाडे बन जाते हैं है । शौक रखने वाले दूर-दूर से आ कर वहाँ जुटते है। बरस भर की
इस टोपी को सलाम - गरमी से परेशान हो कर या स्वास्थ्य के लिये पहाड जाने वालो से नैनीताल की रौनक नहीं होती। ऐसे लोग ओठ भींचकर नाक से लम्बी साँस लेने की कोशिश करते, हाथ में छडी लिये सूनी सडको पर चहल कदमी करते दिखाई देगे या अखबार, पुस्तक लिये पलंग या कुर्सी पर पड़े रहेंगे। बहुत हुआ, झील के किनारे जा बेंच पर बैठ, दूसरों का मनोविनोद देख अपना दिल बहला लेंगे । गरमी के मौसिम से गरमी तो होती है। लेकिन साहबियत के रिवाज़ से पहले पहाड कौन जाता था ? अंग्रेजों को गरमी ज्यादा सताती है । इसलिये गरमी से अधिक परेशान होना साहबियत या बडप्पन का चिह्न हो गया है। इसके अलावा नई सभ्यता या साहबियत के विलास वही होगे जहाँ साहब होगे । गरमियो मे साहब और बड़े आदमी दूर-दूर से सिमट कर 'हिल स्टेशनों' में इकट्ठे होते हैं और वहाँ साहबियत के विलास के अखाडे बन जाते हैं है । शौक रखने वाले दूर-दूर से आ कर वहाँ जुटते है। बरस भर की
देहरादून के श्रीदेवसुमन नगर मित्रलोक कालोनी में सात दिनों बह रही श्रीमद्भागवत की ज्ञान गंगा ने आज विश्राम ले लिया। आचार्य दिनेश उनियाल ने बहुत ही सुंदर और तार्किक ढंग से जीवन में भगवान और भक्ति का महत्व श्रद्धालुओं को समझाया। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने व्यास आचार्य दिनेश उनियाल को शाल ओढ़ाकर स्वागत व अभिनंदन किया। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धस्माना ने कहा कि श्रीमद्भागवत एक ऐसा अदभुत ग्रंथ है जो मनुष्य को यह सिखाता है कि कैसे मर्यादित जीवन जीने के पश्चात मनुष्य को सद्गति प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत मनुष्य के जीवन में वास्तव में मृत्यु का भय समाप्त करती है जिस प्रकार राजा परक्षित का अन्तोगत्वा उद्धार श्रीमद्भागवत सुनने से हुआ और वे बैकुंठधाम पहुंचे श्रीमद्भागवत सुनने के पश्चात। इस अवसर पर मुख्य यजमान प्यारेलाल उनियाल, प्रमोद कुमार गुप्ता, पार्षद श्रीमती संगीता गुप्ता, अनिल नंदा, राजेश उनियाल आदि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
देहरादून के श्रीदेवसुमन नगर मित्रलोक कालोनी में सात दिनों बह रही श्रीमद्भागवत की ज्ञान गंगा ने आज विश्राम ले लिया। आचार्य दिनेश उनियाल ने बहुत ही सुंदर और तार्किक ढंग से जीवन में भगवान और भक्ति का महत्व श्रद्धालुओं को समझाया। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने व्यास आचार्य दिनेश उनियाल को शाल ओढ़ाकर स्वागत व अभिनंदन किया। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धस्माना ने कहा कि श्रीमद्भागवत एक ऐसा अदभुत ग्रंथ है जो मनुष्य को यह सिखाता है कि कैसे मर्यादित जीवन जीने के पश्चात मनुष्य को सद्गति प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत मनुष्य के जीवन में वास्तव में मृत्यु का भय समाप्त करती है जिस प्रकार राजा परक्षित का अन्तोगत्वा उद्धार श्रीमद्भागवत सुनने से हुआ और वे बैकुंठधाम पहुंचे श्रीमद्भागवत सुनने के पश्चात। इस अवसर पर मुख्य यजमान प्यारेलाल उनियाल, प्रमोद कुमार गुप्ता, पार्षद श्रीमती संगीता गुप्ता, अनिल नंदा, राजेश उनियाल आदि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
चुनार तहसील क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम अदलपुरा वाली माता शीतला के धाम में नवरात्रि के पावन महीने में लाखों भक्त श्रद्धालु दर्शन कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, लोगों की मान्यता है कि मां के दरबार में आने के बाद मांगी गई मुरादे पूरी हो जाती है। लगभग 500 वर्ष पूर्व सावन भादव मास के महीने में गंगा में बाढ़ आई हुई थी, इसी गंगा नदी में बह कर आई थी। माता शीतला, गंगा में मछली मार रहे मछुआरे अपनी नाव को गंगा किनारे बांध कर घाट पर सोए थे। तभी अचानक रात्रि में मां शीतला स्वप्न में आकर बोली की हम बड़ी शीतला माता है। हम गंगा के पानी में पड़े हुए हैं, हमें गंगा के पानी से बाहर निकालो हमें यही घाट पर स्थापित कर हमारी पूजा अर्चना पाठ करो, हम तुम सबकी रक्षा करेंगे धन्य धान्य से पुरीत करेंगे। तब मछुआरे अपने रात्रि में आए सपने पर ध्यान नहीं दीया , फिर दूसरे दिवस दोबारा जब मछली पकड़ने के लिए जाल डाल रहे थे। तभी मां शीतला का मुखौटा जाल में फंस गया। मछुआरे अपनी जाल को बाहर निकाल कर उसी समय मां शीतला के मुखौटा को स्थापित कर पूजा पाठ शुरू हुआ। आज भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया। नवरात्रि के पावन महीने में भक्तों की भीड़ बराबर लगी रहती है मां शीतला के दरबार में आने वाले सभी भक्तों की मनोकामना माता पूर्ण करती हैं। मां का प्रिय वस्त्र लाल चुनरी है , पुड़ी हलुआ, गुलगुला,छोटा बतासा, लाचिदाना, नारियल आदि से मां को भोग लगाया जाता है। मां के दरबार में मुंडन संस्कार , व्रतबंध जनेऊ विवाह शादी अन्य मांगलिक कार्यक्रम किया जाता है। मांगलिक कार्यक्रम करने के पश्चात सभी भक्तों मंदिर जाकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसी क्रम में उपजिलाधिकारी चुनार नीरज प्रसाद पटेल, क्षेत्राधिकारी चुनार रामानंद राय, व चुनार कोतवाल गोपाल प्रसाद गुप्ता, मंदिर परिक्षेत्र व परिसर क्षेत्र की सुरक्षा की दृष्टि जायजा लिया, मंदिर में दर्शन कर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
चुनार तहसील क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम अदलपुरा वाली माता शीतला के धाम में नवरात्रि के पावन महीने में लाखों भक्त श्रद्धालु दर्शन कर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, लोगों की मान्यता है कि मां के दरबार में आने के बाद मांगी गई मुरादे पूरी हो जाती है। लगभग पाँच सौ वर्ष पूर्व सावन भादव मास के महीने में गंगा में बाढ़ आई हुई थी, इसी गंगा नदी में बह कर आई थी। माता शीतला, गंगा में मछली मार रहे मछुआरे अपनी नाव को गंगा किनारे बांध कर घाट पर सोए थे। तभी अचानक रात्रि में मां शीतला स्वप्न में आकर बोली की हम बड़ी शीतला माता है। हम गंगा के पानी में पड़े हुए हैं, हमें गंगा के पानी से बाहर निकालो हमें यही घाट पर स्थापित कर हमारी पूजा अर्चना पाठ करो, हम तुम सबकी रक्षा करेंगे धन्य धान्य से पुरीत करेंगे। तब मछुआरे अपने रात्रि में आए सपने पर ध्यान नहीं दीया , फिर दूसरे दिवस दोबारा जब मछली पकड़ने के लिए जाल डाल रहे थे। तभी मां शीतला का मुखौटा जाल में फंस गया। मछुआरे अपनी जाल को बाहर निकाल कर उसी समय मां शीतला के मुखौटा को स्थापित कर पूजा पाठ शुरू हुआ। आज भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया। नवरात्रि के पावन महीने में भक्तों की भीड़ बराबर लगी रहती है मां शीतला के दरबार में आने वाले सभी भक्तों की मनोकामना माता पूर्ण करती हैं। मां का प्रिय वस्त्र लाल चुनरी है , पुड़ी हलुआ, गुलगुला,छोटा बतासा, लाचिदाना, नारियल आदि से मां को भोग लगाया जाता है। मां के दरबार में मुंडन संस्कार , व्रतबंध जनेऊ विवाह शादी अन्य मांगलिक कार्यक्रम किया जाता है। मांगलिक कार्यक्रम करने के पश्चात सभी भक्तों मंदिर जाकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसी क्रम में उपजिलाधिकारी चुनार नीरज प्रसाद पटेल, क्षेत्राधिकारी चुनार रामानंद राय, व चुनार कोतवाल गोपाल प्रसाद गुप्ता, मंदिर परिक्षेत्र व परिसर क्षेत्र की सुरक्षा की दृष्टि जायजा लिया, मंदिर में दर्शन कर माता का आशीर्वाद प्राप्त किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मियाँ शहसवार का दिल दुनिया से तो गिर गया था, मगर जोगिन की उठती जवानी देख कर धुन समाई कि इसको निकाह में लावें। उधर जोगिन ने ठान ली थी कि उम्र भर शादी न करूँगी। जिसके लिए जोगिन हुई, उसी की मुहब्बत का दम भरूँगी। एक दिन शहसवार ने जो सुना कि सिपहआरा कोठे पर से कूद पड़ी, तो दिल बेअख्तियार हो गया। चल खड़े हुए कि देखें, माजरा क्या है? रास्ते में एक मुंशी से मुलाकात हो गई। दोनों आदमी साथ-साथ बैठे और साथ ही साथ उतरे। इत्तफाक से रेल से उतरते ही मुंशी जी को हैजा हो गया। देखते-देखते चल बसे। शहसवार ने जो देखा कि मुंशी के पास दौलत काफी है, तो फौरन उनके बेटे बन गए और सारा माल असबाब ले कर चंपत हो गए। सात हजार की अशर्फियाँ, दस हजार के नोट और कई सौ रुपए हाथ आए। रईस बन बैठे। फौरन जोगिन के पास लौट गए। मियाँ शहसवार का दिल दुनिया से तो गिर गया था, मगर जोगिन की उठती जवानी देख कर धुन समाई कि इसको निकाह में लावें। उधर जोगिन ने ठान ली थी कि उम्र भर शादी न करूँगी। जिसके लिए जोगिन ...Read Moreउसी की मुहब्बत का दम भरूँगी। एक दिन शहसवार ने जो सुना कि सिपहआरा कोठे पर से कूद पड़ी, तो दिल बेअख्तियार हो गया। चल खड़े हुए कि देखें, माजरा क्या है? रास्ते में एक मुंशी से मुलाकात हो गई। दोनों आदमी साथ-साथ बैठे और साथ ही साथ उतरे। इत्तफाक से रेल से उतरते ही मुंशी जी को हैजा हो गया। देखते-देखते चल बसे। शहसवार ने जो देखा कि मुंशी के पास दौलत काफी है, तो फौरन उनके बेटे बन गए और सारा माल असबाब ले कर चंपत हो गए। सात हजार की अशर्फियाँ, दस हजार के नोट और कई सौ रुपए हाथ आए। रईस बन बैठे। फौरन जोगिन के पास लौट गए। कैदखाने से छूटने के बाद मियाँ आजाद को रिसाले में एक ओहदा मिल गया। मगर अब मुश्किल यह पड़ी कि आजाद के पास रुपए न थे। दस हजार रुपए के बगैर तैयारी मुश्किल। अजनबी आदमी, पराया मुल्क, इतने रुपयों ...Read Moreइंतजाम करना आसान न था। इस फिक्र में मियाँ आजाद कई दिन तक गोते खाते रहे। आखिर यही सोचा कि यहाँ कोई नौकरी कर लें और रुपए जमा हो जाने के बाद फौज में जायँ। मन मारे बैठे थे कि मीडा आ कर कुर्सी पर बैठ गई। जिस तपाक के साथ आजाद रोज पेश आया करते थे, उसका आज पता न था! चकरा कर बोली - उदास क्यों हो! मैं तो तुम्हें मुबारकबाद देने आई थी। यह उल्टी बात कैसी? जोगिन शहसवार से जान बचा कर भागी, तो रास्ते में एक वकील साहब मिले। उसे अकेले देखा, तो छेड़ने की सूझी। बोले - हुजूर को आदाब। आप इस अँधेरी रात में अकेले कहाँ जाती हैं? जोगिन - हमें न छे़ड़िए। वकील ...Read Moreशाहजादी हो? नवाबजादी हो? आखिर हो कौन? जोगिन - गरीबजादी हूँ। वकील - लेकिन आवारा। जोगिन - जैसा आप समझिए। वकील - मुझे डर लगता है कि तुम्हें अकेला पा कर कोई दिक न करे। मेरा मकान करीब है, वहीं चल कर आराम से रहो। जमाना भी गिरगिट की तरह रंग बदलता है। वही अलारक्खी जो इधर-उधर ठोकरें खाती-फिरती थी, जो जोगिन बनी हुई एक गाँव में पड़ी थी, आज सुरैया बेगम बनी हुई सरकस के तमाशे में बड़े ठाट से बैठी हुई है। ...Read Moreसब रुपए का खेल है। सुरैया बेगम - क्यों महरी, रोशनी काहे की है? न लैंप, न झाड़, न कँवल और सारा खेमा जगमगा रहा है। महरी - हुजूर, अक्ल काम नहीं करती, जादू का खेल है। बस, दो अंगारे जला दिए और दुनिया भर जगमगाने लगी। हमारे मियाँ आजाद और इस मिरजा आजाद में नाम के सिवा और कोई बात नहीं मिलती थी। वह जितने ही दिलेर, ईमानदार, सच्चे आदमी थे उतने ही यह फरेबी, जालिए और बदनियत थे। बहुत मालदार तो थे नहीं ...Read Moreमगर सवा सौ रुपए वसीके के मिलते थे। अकेला दम, न कोई अजीज, न रिश्तेदार पल्ले सिरे के बदमाश, चोरों के पीर, उठाईगीरों के लँगोटिए यार, डाकुओं के दोस्त, गिरहकटों के साथी। किसी की जान लेना इनके बाएँ हाथ का करतब था। जिससे दोस्ती की, उसी की गरदन काटी। अमीर से मिल-जुल कर रहना और उसकी घुड़की-झिड़की सहना, इनका खास पेशा था। लेकिन जिसके यहाँ दखल पाया, उसको या तो लँगोटी बँधवा दी या कुछ ले-दे के अलग हुए। शाहजादा हुमायूँ फिर कई महीने तक नेपाल की तराई में शिकार खेल कर लौटे तो हुस्नआरा की महरी अब्बासी को बुलवा भेजा। अब्बासी ने शाहजादा के आने की खबर सुनी तो चमकती हुई आई। शाहजादे ने देखा तो फड़क ...Read Moreबोले - आइए, बी महरी साहबा हुस्नआरा बेगम का मिजाज तो अच्छा है? अब्बासी - हाँ, हुजूर! सुरैया बेगम ने आजाद मिरजा के कैद होने की खबर सुनी तो दिल पर बिजली सी गिर पड़ी। पहले तो यकीन न आया, मगर जब खबर सच्ची निकली तो हाय-हाय करने लगी। अब्बासी - हुजूर, कुछ समझ में नहीं आया। ...Read Moreउनके एक अजीज हैं। वह पैरवी करने वाले हैं। रुपए भी खर्च करेंगे। सुरैया बेगम - रुपया निगोड़ा क्या चीज है। तुम जा कर कहो कि जितने रुपयों की जरुरत हो, हमसे लें। अब्बासी आजाद मिरजा के चाचा के पास जा कर बोली - बेगम साहब ने मुझे आपके पास भेजा है और कहा है कि रुपए की जरूरत हो तो हम हाजिर हैं। जितने रुपए कहिए, भेज दें। आजाद अपनी फौज के साथ एक मैदान में पड़े हुए थे कि एक सवार ने फौज में आ कर कहा - अभी बिगुल दो। दुश्मन सिर पर आ पहुँचा। बिगुल की आवाज सुनते ही अफसर, प्यादे, सवार सब चौंक ...Read Moreसवार ऐंठते हुए चले, प्यादे अकड़ते हुए बढ़े। एक बोला - मार लिया है। दूसरे ने कहा - भगा दिया है। मगर अभी तक किसी को मालूम नहीं कि दुश्मन कहाँ है। मुखबिर दौड़ाए गए तो पता चला कि रूस की फौज दरिया के उस पार पैर जमाए खड़ी है। दरिया पर पुल बनाया जा रहा है और अनोखी बात यह थी कि रूसी फौज के साथ एक लेडी, शहसवारों की तरह रान-पटरी जमाए, कमर से तलवार लटकाए, चेहरे पर नकाब से छिपाए, अजब शोखी और बाँकपन के साथ लड़ाई में शरीक होने के लिए आई है। उसके साथ दस जवान औरतें घोड़ों पर सवार चली आ रही हैं। मुखबिर ने इन औरतें की कुछ ऐसी तारीफ की कि लोग सुन कर दंग रह गए। दूसरे दिन आजाद का उस रूसी नाजनीन से मुकाबिला था। आजाद को रातभर नींद नहीं आई। सवेरे उठ कर बाहर आए तो देखा कि दोनों तरफ की फौजें आमने-सामने खड़ी हैं और दोनों तरफ से तोपें चल रही हैं। खोजी ...Read Moreसे एक ऊँचे दरख्त की शाख पर बैठे लड़ाई का रंग देख रहे थे और चिल्ला रहे थे, होशियार, होशियार! यारों, कुछ खबर भी है? हाय! इस वक्त अगर तोड़ेदार बंदूक होती तो परे के परे साफ कर देता। इतने में आजाद पाशा ने देखा कि रूसी फौज के सामने एक हसीना कमर में तलवार लटकाए, हाथ में नेजा लिए, घोड़े पर शान से बैठी सिपाहियों को आगे बढ़ने के लिए ललकार रही है। आजाद की उस पर निगाह पड़ी तो दिल में सोचे, खुदा इसे बुरी नजर से बचाए। यह तो इस काबिल है कि इसकी पूजा करे। यह, और मैदान जंग! हाय-हाय, ऐसा न हो कि उस पर किसी का हाथ पड़ जाय। गजब की चीज है यह हुस्न, इंसान लाख चाहता है, मगर दिल खिंच ही जाता है, तबीयत आ ही जाती है। शाम के वक्त हलकी-फुलकी और साफ-सुथरी छोलदारी में मिस क्लारिसा बनाव-चुनाव करके एक नाजुक आराम-कुर्सी पर बैठी थी। चाँदनी निखरी हुई थी, पेड़ और पत्ते दूध में नहाये हुए और हवा आहिस्ता-आहिस्ता चल रही थी! उधर मियाँ आजाद कैद ...Read Moreपड़े हुए हुस्नआरा को याद करके सिर धुनते थे कि एक आदमी ने आ कर कहा - चलिए, आपको मिस साहब बुलाती हैं। आजाद छोलदारी के करीब पहुँचे तो सोचने लगे, देखें यह किस तरह पेश आती है। मगर कहीं साइबेरिया भेज दिया तो बेमौत ही मर जाएँगे। अंदर जा कर सलाम किया और हाथ बाँध कर खड़े हो गए। क्लारिसा ने तीखी चितवन कर कहा - कहिए मिजाज ठंडा हुआ या नहीं? आजाद तो साइबेरिया की तरफ रवाना हुए, इधर खोजी ने दरख्त पर बैठे-बैठे अफीम की डिबिया निकाली। वहाँ पानी कहाँ? एक आदमी दरख्त के नीचे बैठा था। आपने उससे कहा - भाईजान, जरा पानी पिला दो। उसने ऊपर देखा, ...Read Moreएक बौना बैठा हुआ है। बोला - तुम कौन हो? दिल्लगी यह हुई कि वह फ्रांसीसी था। खोजी उर्दू में बात करते थे, वह फ्रांसीसी में जवाब देता था। बड़ी बेगम का बाग परीखाना बना हुआ है। चारों बहनें रविशों में अठखेलियाँ करती हैं। नाजो-अदा से तौल-तौल कर कदम धरती हैं। अब्बासी फूल तोड़-तोड़ कर झोलियाँ भर रही है। इतने में सिपहआरा ने शोखी के साथ गुलाब का ...Read Moreतोड़ कर गेतीआरा की तरफ फेंका। गेतीआरा ने उछाला तो सिपहआरा की जुल्फ को छूता हुआ नीचे गिरा। हुस्नआरा ने कई फूल तोड़े और जहाँनारा बेगम से गेंद खेलने लगीं। जिस वक्त गेंद फेंकने के लिए हाथ उठाती थीं, सितम ढाती थीं। वह कमर का लचकाना और गेसू का बिखरना, प्यारे-प्यारे हाथों की लोच और मुसकिरा-मुसकिरा कर निशाने बाजी करना अजब लुत्फ दिखाता था। कोठे पर चौका बिछा है और एक नाजुक पलंग पर सुरैया बेगम सादी और हलकी पोशाक पहने आराम से लेटी हैं। अभी हम्माम से आई हैं। कपड़े इत्र में बसे हुए हैं। इधर-उधर फूलों के हार और गजरे रखे ...Read Moreठंडी-ठंडी हवा चल रही है। मगर तब भी महरी पंखा लिए खड़ी है। इतने में एक महरी ने आ कर कहा - दारोगा जी हुजूर से कुछ अर्ज करना चाहते हैं। बेगम साहब ने कहा - अब इस वक्त कौन उठे। कहो, सुबह को आएँ। महरी बोली - हुजूर कहते हैं, बड़ा जरूरी काम है। हुक्म हुआ कि दो औरतें चादर ताने रहें और दारोगा साहब चादर के उस पार बैठें। खोजी आजाद के बाप बन गए तो उनकी इज्जत होने लगी। तुर्की कैदी हरदम उनकी खिदमत करने को मुस्तैद रहते थे। एक दिन एक रूसी फौजी अफसर ने उनकी अनोखी सूरत और माशे-माशे भर के हाथ-पाँव देखे तो जी ...Read Moreकि इनसे बातें करें। एक फारसीदाँ तुर्क को मुतरज्जिम बना कर ख्वाजा साहब से बातें करने लगा। आजाद को साइबेरिया भेज कर मिस क्लारिसा अपने वतन को रवाना हुई और रास्ते में एक नदी के किनारे पड़ाव किया। वहाँ की आब-हवा उसको ऐसी पसंद आई कि कई दिन तक उसी पड़ाव पर शिकार खेलती रही। एक ...Read Moreमिस-कलरिसा ने सुबह को देखा कि उसके खेमे के सामने एक दूसरा बहुत बड़ा खेमा खड़ा हुआ है। हैरत हुई कि या खुदा, यह किसका सामान है। आधी रात तक सन्नाटा था, एकाएक खेमे कहाँ से आ गए! एक औरत को भेजा कि जा कर पता लगाए कि ये कौन लोग है। वह औरत जो खेमे में गई तो क्या देखती है कि एक जवाहिरनिगार तख्त पर एक हूरों को शरमाने वाली शाहजादी बैठी हुई है। देखते ही दंग हो गई। जा कर मिस क्लारिसा से बोली - हुजूर, कुछ न पूछिए, जो कुछ देखा, अगर ख्वाब नहीं तो जादू जरूर है। ऐसी औरत देखी कि परी भी उसकी बलाएँ ले। जिस वक्त खोजी ने पहला गोता खाया तो ऐसे उलझे कि उभरना मुश्किल हो गया। मगर थोड़ी ही देर में तुर्कों ने गोते लगा कर इन्हें ढूँढ़ निकाला। आप किसी कदर पानी पी गए थे। बहुत देर तक तो ...Read Moreही ठिकाने न थे। जब जरा होश आया तो सबको एक सिरे से गालियाँ देना शुरू कीं। सोचे कि दो-एक रोज में जरा टाँठा हो लूँ तो इनसे खूब समझूँ। डेरे पर आ कर आजाद के नाम खत लिखने लगे। उनसे एक आदमी ने कह दिया था कि अगर किसी आदमी के नाम खत भेजना हो और पता न मिलता हो तो खत को पत्तों में लपेट दरिया कि किनारे खड़ा हो और तीन बार 'भेजो-भेजो' कह कर खत को दरिया में डाल दे, खत आप ही आप पहुँच जायगा। खोजी के दिल में यह बात बैठ गई। आजाद के नाम एक खत लिख कर दरिया में डाल आए। उस खत में आपने बहादुरी के कामों की खूब डींगे मारी थीं। खोजी थे तो मसखरे, मगर वफादार थे। उन्हें हमेशा आजाद की धुन सवार रहती थी। बराबर याद किया करते थे। जब उन्हें मालूम हुआ कि आजाद को पोलैंड की शाहजादी ने कैद कर दिया है तो वह आजाद को ...Read Moreनिकले। पूछते-पूछते किसी तरह आजाद के कैदखाने तक पहुँच ही तो गए। आजाद ने उन्हें देखते ही गोद में उठा लिया। इन दोनों शाहजादों में एक का नाम मिस्टर क्लार्क था और दूसरे का हेनरी! दोनों की उठती जवानी थी। निहायत खूबसूरत। शाहजादी दिन के दिन उन्हीं के पास बैठी रहती, उनकी बातें सुनने से उसका जी न भरता था। ...Read Moreआजाद तो मारे जलन के अपने महल से निकलते ही न थे। मगर खोजी टोह लेने के लिए दिन में कई बार यहाँ आ बैठते थे। उन दोनों को भी खोजी की बातों में बड़ा मजा आता। उधर आजाद जब फौज से गायब हुए तो चारों तरफ उनकी तलाश होने लगी। दो सिपाही घूमते-घामते शाहजादी के महल की तरफ आ निकले। इत्तिफाक से खोजी भी अफीम की तलाश में घूम रहे थे। उन दोनों सिपाहियों ने ...Read Moreको आजाद के साथ पहले देखा था। खोजी को देखते ही पकड़ लिया और आजाद का पता पूछने लगे। एक दिन दो घड़ी दिन रहे चारों परियाँ बनाव-चुनाव हँस-खेल रही थीं। सिपहआरा का दुपट्टा हवा के झोंकों से उड़ा जाता था। जहाँनारा मोतिये के इत्र में बसी थीं। गेतीआरा का स्याह रेशमी दुपट्टा खूब खिल रहा था। हुस्नआरा - ...Read Moreयह गरमी के दिन और काला रेशमी दुपट्टा! अब कहने से तो बुरा मानिएगा, जहाँनारा बहन निखरें तो आज दूल्हा भाई आने वाले हैं यह आपने रेशमी दुपट्टा क्या समझ के फड़काया! सुरैया बेगम चोरी के बाद बहुत गमगीन रहने लगीं। एक दिन अब्बासी से बोलीं - अब्बासी, दिल को जरा तकसीन नहीं होती अब हम समझ गए कि जो बात हमारे दिल में है वह हासिल न होगी। साकिया ले तेरी महफिल से चले भर पाया। सारी खुदाई में हमारा कोई नहीं। अब्बासी ने कहा - बीबी, आज तक मेरी समझ में न आया कि वह, जिसके लिए आप रोया करती हैं, कौन हैं? और यह जो आजाद आए थे, यह कौन हैं। एक दिन बाँकी औरत के भेष में आए, एक दिन गोसाई बनके आए। शाहजादा हुमायूँ फर भी शादी की तैयारियाँ करने लगे। सौदागरों की कोठियों में जा-जा कर सामान खरीदना शुरू किया। एक दिन एक नवाब साहब से मुलाकात हो गई। बोले - क्यों हजरत, यह तैयारियाँ! शाहजादा - आपके मारे कोई सौदा ...Read Moreखरीदे? नवाब - जनाब, चितवनों से ताड़ जाना कोई हमसे सीख जाय। शाहजादा - आपको यकीन ही न आए तो क्या इलाज? इधर बड़ी बेगम के यहाँ शादी की तैयारियाँ हो रही थीं, डोमिनियों का गाना हो रहा था। उधर शाहजादा हुमायूँ फर एक दिन दरिया की सैर करने गए। घटा छाई हुई थी। हवा जोरों के साथ चल रही थी। ...Read Moreहोते-होते आँधी आ गई और किश्ती दरिया में चक्कर खा कर डूब गई। मल्लाह ने किश्ती के बचाने की बहुत कोशिश की, मगर मौत से किसी का क्या बस चलता है। घर पर यह खबर आई तो कुहराम मच गया। अभी कल की बात है कि दरवाज पर भाँड़ मुबारकबाद गा रहे थे, आज बैन हो रहा है, कल हुमायूँ फर जामे में फूले नहीं समाते थे कि दूल्हा बनेंगे, आज दरिया में गोते खाते हैं। किसी तरफ से आवाज आती है - हाय मेरे बच्चे! कोई कहता है - हैं, मेरे लाला को क्या हुआ! रोने वाला घर भर और समझाने वाला कोई नहीं। एक पुरानी, मगर उजाड़ बस्ती में कुछ दिनों से दो औरतों ने रहना शुरू किया है। एक का नाम फिरोजा है, दूसरी का फारखुंदा। इस गाँव में कोई डेढ़ हजार घर आबाद होंगे, मगर उन सब में दो ठाकुरों ...Read Moreमकान आलीशान थे। फिरोजा का मकान छोटा था, मगर बहुत खुशनुमा। वह जवान औरत थी, कपड़ेलत्ते भी साफ-सुथरे पहनती थी, लेकिन उसकी बातचीत से उदासी पाई जाती थी। फरखुंदा इतनी हसीन तो न थी, मगर खुशमिजाज थी। गाँववालों को हैरत थी कि यह दोनों औरतें इस गाँव में कैसे आ गईं और कोई मर्द भी साथ नहीं! उनके बारे में लोग तरह-तरह की बातें किया करते थे। गाँव की सिर्फ दो औरतें उनके पास जाती थीं, एक तंबोलिन, दूसरी बेलदारिन। यार लोग टोह में थे कि यहाँ का कुछ भेद खुले, मगर कुछ पता न चलता था। तंबोलिन और बेलदारिन से पूछते थे तो वह भी आँय-बाँय-साँय उड़ा देती थीं। फीरोजा बेगम और फरखुंदा रात के वक्त सो रही थीं कि धमाके की आवाज हुई फरखुंदा की आँख खुल गई। यह धमाका कैसा? मुँह पर से चादर उठाई, मगर अँधेरा देख कर उठने की हिम्मत न पड़ी। इतने में ...Read Moreकी आहट मिली, रोएँ खड़े हो गए। सोची, अगर बोली तो यह सब हलाल कर डालेंगे। दबकी पड़ी रही। चोर ने उसे गोद में उठाया और बाहर ले जा कर बोला - सुनो अब्बासी, हमको तुम खूब पहचानती हो? अगर न पहचान सकी हो, तो अब पहचान लो। खाँ साहब पर मुकदमा तो दायर ही हो गया था उस पर दारोगा जी दुश्मन थे। दो साल की सजा हो गई। तब दारोगा जी ने एक औरत को सुरैया बेगम के मकान पर भेजा। औरत ने आ ...Read Moreसलाम किया और बैठ गई। सुरैया - कौन हो? कुछ काम है यहाँ? औरत - ऐ हुजूर, भला बगैर काम के कोई भी किसी के यहाँ जाता है? हुजूर से कुछ कहना है, आपके हुस्न का दूर-दूर तक शोहरा है। इसका क्या सबब है कि हुजूर इस उम्र में, इस हालत में जिंदगी बसर करती हैं? आध कोस चलने के बाद इन चोरों ने सुरैया बेगम को दो और चोरों के हवाले किया। इनमें एक का नाम बुधसिंह था, दूसरे का हुलास। यह दोनों डाकू दूर-दूर तक मशहूर थे, अच्छे-अच्छे डकैत उनके नाम सुन कर ...Read Moreकान पकड़ते थे। किसी आदमी की जान लेना उनके लिए दिल्लगी थी। सुरैया बेगम काँप रही थी कि देखें आबरू बचती है या नहीं। हुलास बोला, कहो बुद्धसिंह, अब क्या करना चाहिए? सुरैया बेगम ने अब थानेदार के साथ रहना मुनासिब न समझा। रात को जब थानेदार खा पी कर लेटा तो सुरैया बेगम वहाँ से भागी। अभी सोच ही रही थी कि एक चौकीदार मिला। सुरैया बेगम को देख कर ...Read More- आप कहाँ? मैंने आपको पहचान लिया है। आप ही तो थानेदार साहब के साथ उस मकान में ठहरी थीं। मालूम होता है, रूठ कर चली आई हो। मैं खूब जानता हूँ। नेपाल की तराई में रिसायत खैरीगढ़ के पास एक लक व दक जंगल है। वहाँ कई शिकारी शेर का शिकार करने के लिए आए हुए हें। एक हाथी पर दो नौजवान बैठे हुए हैं। एक का सिन बीस-बाईस बरस ...Read Moreहै, दूसरे का मुश्किल से अट्ठारह का। एक का नाम है वजाहत अली, दूसरे का माशूक हुसैन। वजाहत अली दोहरे बदन का मजबूत आदमी है। माशूक हुसैन दुबला-पतला छरहरा आदमी है। उसकी शक्ल-सूरत और चाल-ढाल से ऐसा मालूम होता है कि अगर इसे जनाने कपड़े पहना दिए जायँ, तो बिलकुल औरत मालूम हो। पीछे-पीछे छह हाथी और आते थे। जंगल में पहुँच कर लोगों ने हाथी रोक लिए ताकि शेर का हाल दरियाफ्त कर लिया जाय कि कहाँ है। जब रात को सब लो खा-पी कर लेटे, तो नवाब साहब ने दोनों बंगालियों को बुलाया और बोले - खुदा ने आप दोनों साहबों को बहुत बचाया, वरना शेरनी खा जाती। बोस - हम डरता नहीं थ, हम शाला ईश ...Read Moreका बान को मारना चाहता था कि हम ईश देश का आदमी नहीं है। इस माफिक हमारे को डराने सकता और हाथी को बोदजाती से हिलाने माँगें। जब तो हम लोग बड़ा गुस्सा हुआ कि अरे सब लोग का हाथी हिलने नहीं माँगता, तुम क्यों हिलने माँगता है। और हमसे बोला कि बाबू शाब, अब तो मरेगा। हाथी का पाँव फिसलेगी और तुम मर जायँगे। हम बोला - अरे, जो हाथी की पाँव फिसल जायगी तो तुम शाले का शाला कहाँ बच जायगा? तुम भी तो हमारा एक साथ मरेगा। आज तो कलम की बाँछें खिली जाती हैं। नौजवानों के मिजाज की तरह अठखेलियाँ पर है। सुरैया बेगम खूब निखर के बैठी हैं। लौंडियाँ-महरियाँ बनाव-चुनाव किए घेरे खड़ी हैं। घर में जश्न हो रहा है। न जाने सुरैया बेगम ...Read Moreदौलत कहाँ से लाईं। यह ठाट तो पहले भी नहीं था। महरी - ऐ बी सैदानी, आज तो मिजाज ही नहीं मिलते। इस गुलाबी जोड़े पर इतना इतरा गईं? सैदानी - हाँ, कभी बाबराज काहे को पहना था? आज पहले-पहल मिला है। तुम अपने जोड़े का हाल तो कहो। सुरैया बेगम के यहाँ वही धमाचौकड़ी मची थी। परियों का झुरमुट, हसीनों का जमघट, आपस की चुहल और हँसी से मकान गुलजार बना हुआ था। मजे-मजे की बातें हो रही थीं कि महरी ने आ कर कहा - हुजूर, ...Read Moreसे असगर मियाँ की बीवी आई हैं। अभी-अभी बहली से उतरी हैं। जानी बेगम ने पूछा - असगर मियाँ कौन हैं? कोई देहाती भाई हैं? इस पर हशमत बहू ने कहा, बहन वह कोई हों। अब तो हमारे मेहमान हैं। फीरीजा बेगम बोलीं - हाँ-हाँ तमीज से बात करो, मगर वह जो आई है, उनको नाम क्या है? महरी ने आहिस्ता से कहा - फैजन। इस पर दो-तीन बेगमों ने एक दूसरे की तरफ देखा। आजाद पोलेंड की शाहजादी से रुखसत हो कर रातोंरात भागे। रास्ते में रूसियों की कई फौजें मिलीं। आजाद को गिरफ्तार करने की जोरों से कोशिश हो रही थी, मगर आजाद के साथ शाहजादी का जो आदमी था वह उन्हें ...Read Moreकी नजरें बचा कर ऐसे अनजान रास्तों से ले गया कि किसी को खबर तक न हुई। दोनों आदमी रात को चलते थे और दिन को कहीं छिप कर पड़ रहते थे। एक हफ्ते तक भागा-भाग चलने के बाद आजाद पिलौना पहुँच गए। इस मुकाम को रूसी फौजों ने चारों तरफ से घेर लिया था। आजाद के आने की खबर सुनते ही पिलौने वालों ने कई हजार सवार रवाना किए कि आजाद को रूसी फौजों से बचा कर निकाल लाएँ। शाम होते-होते आजाद पिलौनावालों से जा मिले। जिस दिन आजाद कुस्तुनतुनिया पहुँचे, उनकी बड़ी इज्जत हुई। बादशाह ने उनकी दावत की और उन्हें पाशा का खिताब दिया। शाम का आजाद होटल में पहुँचे और घोड़े से उतरे ही थे कि यह आवाज कान में आई, भला ...Read Moreजाता कहाँ है। आजाद ने कहा - अरे भई, जाने दो। आजाद की आवाज सुन कर खोजी बेकरार हो गए। कमरे से बाहर आए और उनके कदमों पर टोपी रख कर कहा - आजाद, खुदा गवाह है, इस वक्त तुम्हें देख कर कलेजा ठंडा हो गया, मुँह-माँगी मुराद पाई। आजाद, मीडा, क्लारिसा और खोजी जहाज पर सवार हैं। आजाद लेडियों का दिल बहलाने के लिए लतीफें और चुटकुले कह रहे हैं। खोजी भी बीच-बीच में अपना जिक्र छेड़ देते हैं। खोजी - एक दिन का जिक्र है, मैं होली ...Read Moreदिन बाजार निकला। लोगों ने मना किया कि आज बहार न निकलिए, वरना रंग पड़ जायगा। मैं उन दिनों बिलकुल गैंडा बना हुआ था। हाथी की दुम पकड़ ली तो हुमस न सका। चें से बोल कर चाहा कि भागे, मगर क्या मजाल! जिसने देखा, दातों उँगली दबाई कि वाह पट्ठे। सुरैया बेगम का मकान परीखाना बना हुआ था। एक कमरे में वजीर डोमिनी नाच रही थी। दूसरे में शहजादी का मुजरा होता था। फीरोजा - क्यों फैजन बहन, तुमको इस उजड़े हुए शहर की डोमिनियों का गाना काहे को अच्छा ...Read Moreहोगा? जानी बेगम - इनके लिए देहात की मीरासिनें बुलवा दो। फैजन - हाँ, फिर देहाती तो हम हैं ही, इसका कहना क्या? इस फिकरे पर वह कहकहा पड़ा कि घर भर गूँज उठा और फैजन बहुत शरमाईं। जानी बेगम ने कहा - बस यही बात तो हमें अच्छी नहीं लगती। एक तो बेचारी इतनी देर के बाद बोलीं, उस पर भी सबने मिल कर उनको बना डाला। शाहजादा हुमायूँ फर की मौत जिसने सुनी, कलेजा हाथों से थाम लिया। लोगों का खयाल था कि सिपहआरा यह सदमा बरदाश्त न कर सकेगी और सिसक-सिसक कर शाहजादे की याद में जान दे देगी। घर में किसी की हिम्मत ...Read Moreपड़ती थी कि सिपहआरा को समझाए या तसकीन दे, अगर किसी ने डरते-डरते समझाया भी तो वह और रोने लगती और कहती - क्या अब तुम्हारी यह मर्जी है कि मैं रोऊँ भी न, दिल ही में घुट-घुट कर मरूँ। दो-तीन दिन तक वह कब्र पर जा कर फूल चुनती रही, कभी कब्र को चूमती, कभी खुदा से दुआ माँगती कि ऐ खुदा, शाहजादे बहादुर की सूरत दिखा दे, कभी आप ही आप मुसकिराती, कभी कब्र की चट-चट बलाएँ लेती। एक आँख से हँसती, एक आँख से रोती। चौथे दिन वह अपनी बहनों के साथ वहाँ गई। चमन में टहलते-टहलते उसे आजाद की याद आ गई। हुस्नआरा से बोली - बहन, अगर दूल्हा भाई आ जायँ तो हमारे दिल को तसकीन हो। खुदा ने चाहा तो वह दो-चार दिन में आना ही चाहते हैं। नवाब वजाहत हुसैन सुबह को जब दरबार में आए तो नींद से आँखें झुकी पड़ती थीं। दोस्तों मे जो आता था, नवाब साहब को देख कर पहले मुसकिराता था। नवाब साहब भी मुसकिरा देते थे। इन दोस्तों में रौनकदौला ...Read Moreमुबारक हुसैन बहुत बेतकल्लुफ थे। उन्होंने नवाब साहब से कहा - भाई, आज चौथी के दिन नाच न दिखाओगे? कुछ जरूरी है कि जब कोई तायफा बुलवाया जाय तो बदी ही दिल में हो? अरे साहब, गाना सुनिए, नाच देखिए, हँसिए, बोलिए, शादी को दो दिन भी नहीं हुए और हुजूर मुल्ला बन बैठे। मगर यह मौलवीपन हमारे सामने न चलने पाएगा। और दोस्तों ने भी उनकी हाँ में हाँ मिलाई। यहाँ तक कि मुबारक हुसैन जा कर कई तायफे बुला लाए, गाना होने लगा। रौनकदौला ने कहा - कोई फारसी गजल कहिए तो खूब रंग जमे। शाहजादा हुमायूँ फर के जी उठने की खबर घर-घर मशहूर हो गई। अखबारों में जिसका जिक्र होने लगा। एक अखबार ने लिखा, जो लोग इस मामले में कुछ शक करते है उन्हें सोचना चाहिए कि खुदा के लिए किसी ...Read Moreको जिला देना कोई मुश्किल बात नहीं। जब उनकी माँ और बहनों को पूरा यकीन है तो फिर शक की गुंजाइश नहीं रहती। आजाद पाशा को इस्कंदरिया में कई दिन रहना पड़ा। हैजे की वजह से जहाजों का आना-जाना बंद था। एक दिन उन्होंने खोजी से कहा - भाई, अब तो यहाँ से रिहाई पाना मुश्किल है। खोजी - खुदा का शुक्र करो ...Read Moreबचके चले आए, इतनी जल्दी क्या है? आजाद - मगर यार, तुमने वहाँ नाम न किया, अफसोस की बात है। खोजी - क्या खूब, हमने नाम नहीं किया तो क्या तुमने नाम किया? आखिर आपने क्या किया, कुछ मालूम तो हो, कौन गढ़ फतह किया, कौन लड़ाई लड़े! यहाँ तो दुश्मनों को खदेड़-खदेड़ के मारा। आप बस मिसों पर आशिक हुए, और तो कुछ नहीं किया। चौथी के दिन रात को नवाब साहब ने सुरैया बेगम को छेड़ने के लिए कई बार फीरोजा बेगम की तारीफ की। सुरैया बेगम बिगड़ने लगीं और बोली - अजब बेहूदा बातें हैं तुम्हारी, न जाने किन लोगों में रहे ...Read Moreकि ऐसी बातें जबान से निकलती हैं। नवाब - तुम नाहक बिगड़ती हो, मैं तो सिर्फ उनके हुस्न की तारीफ करता हूँ। सुरैया - ऐ, तो कोई ढूँढ़के वैसी ही की होती। नवाब - तुम्हारे यहाँ कभी-कभी आया-जाया करती है? कुछ दिन तो मियाँ आजाद मिस्र में इस तरह रहे जैसे और मुसाफिर रहते हैं, मगर जब कांसल को इनके आने का हाल मालूम हुआ तो उसने उन्हें अपने यहाँ बुला कर ठहराया और बातें होने लगी। कांसल - मुझे ...Read Moreसख्त शिकायत है कि आप यहाँ आए और हमसे न मिले। ऐसा कौन है जो आपके नाम से वाकिफ न हो, जो अखबार आता है उसमें आपका जिक्र जरूर होता है। वह आपके साथ मसखरा कौन है? वह बौना खोजी ? आजाद बंबई से चले तो सबसे पहले जीनत और अख्तर से मुलाकात करने की याद आई। उस कस्बे में पहुँचे तो एक जगह मियाँ खोजी की याद आ गई। आप ही आप हँसने लगे। इत्तिफाक से एक गाड़ी पर ...Read Moreसवारियाँ चली जाती थीं। उनमें से एक ने हँस कर कहा - वाह रे भलेमानस, क्या दिमाग पर गरमी चढ़ गई है क्या आजाद रंगीन मिजाज आदमी तो थे ही। आहिस्ता से बोले - जब ऐसी-ऐसी प्यारी सूरतें नजर आएँ तो आदमी के होश-हवास क्योंकर ठिकाने रहें। इस पर वह नाजनीन तिनक कर बोली - अरे, यह तो देखने को ही दीवाना मालूम होते थे, अपने मतलब के बड़े पक्के निकले। क्यों मियाँ, यह क्या सूरत बनाई है, आधा तीतर और आधा बटेर? खुदा ने तुमको वह चेहरा-मोहरा दिया है कि लाख दो लाख में एक हो। वहाँ दो दिन और रह कर दोनों लेडियों के साथ लखनऊ पहुँचे और उन्हें होटल में छोड़ कर नवाब साहब के मकान पर आए। इधर वह गाड़ी से उतरे, उधर खिदमतगारों ने गुल मचाया कि खुदावंद, मुहम्मद आजाद पाशा ...Read Moreगए। नवाब साहब मुसाहबों के साथ उठ खड़े हुए तो देखा कि आजाद रप-रप करते हुए तुर्की वर्दी डाटे चले आते हैं। नवाब साहब झपट कर उनके गले लिपट गए और बोले - भाईजान, आँखें तुम्हें ढूँढ़ती थीं। आजाद सुरैया बेगम की तलाश में निकले तो क्या देखते हैं कि एक बाग में कुछ लोग एक रईस की सोहबत में बैठे गपें उड़ा रहे हैं। आजाद ने समझा, शायद इन लोगों से सुरैया बेगम के नवाब साहब ...Read Moreकुछ पता चले। आहिस्ता-आहिस्ता उनके करीब गए। आजाद को देखते ही वह रईस चौंक कर खड़ा हो गया और उनकी तरफ देख कर बोला - वल्लाह, आपसे मिलने का बहुत शौक था। शुक्र है कि घर बैठे मुराद पूरी हुई। फर्माइए, आपकी क्या खिदमत करूँ ? बहार बेगम - यह सब दिखाने की बातें हैं। किसी से दो हाथी माँगे, किसी से दो-चार घोड़े कहीं से सिपाही आए, कहीं से बरछी-बरदार! लो साहब, बरात आई है। माँगे-ताँगे की बरात से फायदा? खोजी ने जब देखा कि आजाद की चारों तरफ तारीफ हो रही है, और हमें कोई नहीं पूछता, तो बहुत झल्लाए और कुल शहर के अफीमचियों को जमा करके उन्होंने भी जलसा किया और यों स्पीच दी - भाइयों! ...Read Moreका खयाल है कि अफीम खा कर आदमी किसी काम का नहीं रहता। मैं कहता हूँ, बिलकुल गलत। मैंने रूम की लड़ाई में जैसे-जैसे काम किए, उन पर बड़े से बड़ा सिपाही भी नाज कर सकता है। मैंने अकेले दो-दो लाख आदमियों का मुकाबिला किया है। तोपों के सामने बेधड़क चला गया हूँ। बड़े-बड़े पहलवानों को नीचा दिखा दिया है। और मैं वह आदमी हूँ, जिसके यहाँ सत्तर पुश्तों से लोग अफीम खाते आए हैं। आज बड़ी बेगम का मकान परिस्तान बना हुआ है। जिधर देखिए, सजावट की बहार है। बेगमें धमा-चौकड़ी मचा रही हैं। जानी - दूल्हा के यहाँ तो आज मीरासिनों की धूम है। कहाँ तो मियाँ आजाद को नाच-गाने से इतनी चिढ़ ...Read Moreकि मजाल क्या, कोई डोमिनी घर के अंदर कदम रखने पाए। और आज सुनती हूँ कि तबले पर थाप पड़ रही है और गजलें, ठुमरियाँ, टप्पे गाए जाते हैं। प्रिय पाठक, शास्त्रानुसार नायक और नायिका के संयोग के साथ ही कथा का अंत हो जाता है। इसलिए हम भी अब लेखनी को विश्राम देते हैं। पर कदाचित कुछ पाठकों को यह जानने की इच्छा होगी कि ख्वाजा साहब ...Read Moreक्या हाल हुआ और मिस मीडा और मिस क्लारिसा पर क्या बीती। इन तीनों पात्रों के सिवा हमारे विचार में तो और कोई ऐसा पात्र नहीं है जिसके विषय में कुछ कहना बाकी रह गया हो। अच्छा सुनिए। मियाँ खोजी मरते दम तक आजाद के वफादार दोस्त बने रहे। अफीम की डिबिया और करौली की धुन ने कभी उनका साथ न छोड़ा। मिस मीडा औ मिस क्लारिसा ने उर्दू और हिंदी पढ़ी और दोनो थियासोफिस्ट हो गईं।
मियाँ शहसवार का दिल दुनिया से तो गिर गया था, मगर जोगिन की उठती जवानी देख कर धुन समाई कि इसको निकाह में लावें। उधर जोगिन ने ठान ली थी कि उम्र भर शादी न करूँगी। जिसके लिए जोगिन हुई, उसी की मुहब्बत का दम भरूँगी। एक दिन शहसवार ने जो सुना कि सिपहआरा कोठे पर से कूद पड़ी, तो दिल बेअख्तियार हो गया। चल खड़े हुए कि देखें, माजरा क्या है? रास्ते में एक मुंशी से मुलाकात हो गई। दोनों आदमी साथ-साथ बैठे और साथ ही साथ उतरे। इत्तफाक से रेल से उतरते ही मुंशी जी को हैजा हो गया। देखते-देखते चल बसे। शहसवार ने जो देखा कि मुंशी के पास दौलत काफी है, तो फौरन उनके बेटे बन गए और सारा माल असबाब ले कर चंपत हो गए। सात हजार की अशर्फियाँ, दस हजार के नोट और कई सौ रुपए हाथ आए। रईस बन बैठे। फौरन जोगिन के पास लौट गए। मियाँ शहसवार का दिल दुनिया से तो गिर गया था, मगर जोगिन की उठती जवानी देख कर धुन समाई कि इसको निकाह में लावें। उधर जोगिन ने ठान ली थी कि उम्र भर शादी न करूँगी। जिसके लिए जोगिन ...Read Moreउसी की मुहब्बत का दम भरूँगी। एक दिन शहसवार ने जो सुना कि सिपहआरा कोठे पर से कूद पड़ी, तो दिल बेअख्तियार हो गया। चल खड़े हुए कि देखें, माजरा क्या है? रास्ते में एक मुंशी से मुलाकात हो गई। दोनों आदमी साथ-साथ बैठे और साथ ही साथ उतरे। इत्तफाक से रेल से उतरते ही मुंशी जी को हैजा हो गया। देखते-देखते चल बसे। शहसवार ने जो देखा कि मुंशी के पास दौलत काफी है, तो फौरन उनके बेटे बन गए और सारा माल असबाब ले कर चंपत हो गए। सात हजार की अशर्फियाँ, दस हजार के नोट और कई सौ रुपए हाथ आए। रईस बन बैठे। फौरन जोगिन के पास लौट गए। कैदखाने से छूटने के बाद मियाँ आजाद को रिसाले में एक ओहदा मिल गया। मगर अब मुश्किल यह पड़ी कि आजाद के पास रुपए न थे। दस हजार रुपए के बगैर तैयारी मुश्किल। अजनबी आदमी, पराया मुल्क, इतने रुपयों ...Read Moreइंतजाम करना आसान न था। इस फिक्र में मियाँ आजाद कई दिन तक गोते खाते रहे। आखिर यही सोचा कि यहाँ कोई नौकरी कर लें और रुपए जमा हो जाने के बाद फौज में जायँ। मन मारे बैठे थे कि मीडा आ कर कुर्सी पर बैठ गई। जिस तपाक के साथ आजाद रोज पेश आया करते थे, उसका आज पता न था! चकरा कर बोली - उदास क्यों हो! मैं तो तुम्हें मुबारकबाद देने आई थी। यह उल्टी बात कैसी? जोगिन शहसवार से जान बचा कर भागी, तो रास्ते में एक वकील साहब मिले। उसे अकेले देखा, तो छेड़ने की सूझी। बोले - हुजूर को आदाब। आप इस अँधेरी रात में अकेले कहाँ जाती हैं? जोगिन - हमें न छे़ड़िए। वकील ...Read Moreशाहजादी हो? नवाबजादी हो? आखिर हो कौन? जोगिन - गरीबजादी हूँ। वकील - लेकिन आवारा। जोगिन - जैसा आप समझिए। वकील - मुझे डर लगता है कि तुम्हें अकेला पा कर कोई दिक न करे। मेरा मकान करीब है, वहीं चल कर आराम से रहो। जमाना भी गिरगिट की तरह रंग बदलता है। वही अलारक्खी जो इधर-उधर ठोकरें खाती-फिरती थी, जो जोगिन बनी हुई एक गाँव में पड़ी थी, आज सुरैया बेगम बनी हुई सरकस के तमाशे में बड़े ठाट से बैठी हुई है। ...Read Moreसब रुपए का खेल है। सुरैया बेगम - क्यों महरी, रोशनी काहे की है? न लैंप, न झाड़, न कँवल और सारा खेमा जगमगा रहा है। महरी - हुजूर, अक्ल काम नहीं करती, जादू का खेल है। बस, दो अंगारे जला दिए और दुनिया भर जगमगाने लगी। हमारे मियाँ आजाद और इस मिरजा आजाद में नाम के सिवा और कोई बात नहीं मिलती थी। वह जितने ही दिलेर, ईमानदार, सच्चे आदमी थे उतने ही यह फरेबी, जालिए और बदनियत थे। बहुत मालदार तो थे नहीं ...Read Moreमगर सवा सौ रुपए वसीके के मिलते थे। अकेला दम, न कोई अजीज, न रिश्तेदार पल्ले सिरे के बदमाश, चोरों के पीर, उठाईगीरों के लँगोटिए यार, डाकुओं के दोस्त, गिरहकटों के साथी। किसी की जान लेना इनके बाएँ हाथ का करतब था। जिससे दोस्ती की, उसी की गरदन काटी। अमीर से मिल-जुल कर रहना और उसकी घुड़की-झिड़की सहना, इनका खास पेशा था। लेकिन जिसके यहाँ दखल पाया, उसको या तो लँगोटी बँधवा दी या कुछ ले-दे के अलग हुए। शाहजादा हुमायूँ फिर कई महीने तक नेपाल की तराई में शिकार खेल कर लौटे तो हुस्नआरा की महरी अब्बासी को बुलवा भेजा। अब्बासी ने शाहजादा के आने की खबर सुनी तो चमकती हुई आई। शाहजादे ने देखा तो फड़क ...Read Moreबोले - आइए, बी महरी साहबा हुस्नआरा बेगम का मिजाज तो अच्छा है? अब्बासी - हाँ, हुजूर! सुरैया बेगम ने आजाद मिरजा के कैद होने की खबर सुनी तो दिल पर बिजली सी गिर पड़ी। पहले तो यकीन न आया, मगर जब खबर सच्ची निकली तो हाय-हाय करने लगी। अब्बासी - हुजूर, कुछ समझ में नहीं आया। ...Read Moreउनके एक अजीज हैं। वह पैरवी करने वाले हैं। रुपए भी खर्च करेंगे। सुरैया बेगम - रुपया निगोड़ा क्या चीज है। तुम जा कर कहो कि जितने रुपयों की जरुरत हो, हमसे लें। अब्बासी आजाद मिरजा के चाचा के पास जा कर बोली - बेगम साहब ने मुझे आपके पास भेजा है और कहा है कि रुपए की जरूरत हो तो हम हाजिर हैं। जितने रुपए कहिए, भेज दें। आजाद अपनी फौज के साथ एक मैदान में पड़े हुए थे कि एक सवार ने फौज में आ कर कहा - अभी बिगुल दो। दुश्मन सिर पर आ पहुँचा। बिगुल की आवाज सुनते ही अफसर, प्यादे, सवार सब चौंक ...Read Moreसवार ऐंठते हुए चले, प्यादे अकड़ते हुए बढ़े। एक बोला - मार लिया है। दूसरे ने कहा - भगा दिया है। मगर अभी तक किसी को मालूम नहीं कि दुश्मन कहाँ है। मुखबिर दौड़ाए गए तो पता चला कि रूस की फौज दरिया के उस पार पैर जमाए खड़ी है। दरिया पर पुल बनाया जा रहा है और अनोखी बात यह थी कि रूसी फौज के साथ एक लेडी, शहसवारों की तरह रान-पटरी जमाए, कमर से तलवार लटकाए, चेहरे पर नकाब से छिपाए, अजब शोखी और बाँकपन के साथ लड़ाई में शरीक होने के लिए आई है। उसके साथ दस जवान औरतें घोड़ों पर सवार चली आ रही हैं। मुखबिर ने इन औरतें की कुछ ऐसी तारीफ की कि लोग सुन कर दंग रह गए। दूसरे दिन आजाद का उस रूसी नाजनीन से मुकाबिला था। आजाद को रातभर नींद नहीं आई। सवेरे उठ कर बाहर आए तो देखा कि दोनों तरफ की फौजें आमने-सामने खड़ी हैं और दोनों तरफ से तोपें चल रही हैं। खोजी ...Read Moreसे एक ऊँचे दरख्त की शाख पर बैठे लड़ाई का रंग देख रहे थे और चिल्ला रहे थे, होशियार, होशियार! यारों, कुछ खबर भी है? हाय! इस वक्त अगर तोड़ेदार बंदूक होती तो परे के परे साफ कर देता। इतने में आजाद पाशा ने देखा कि रूसी फौज के सामने एक हसीना कमर में तलवार लटकाए, हाथ में नेजा लिए, घोड़े पर शान से बैठी सिपाहियों को आगे बढ़ने के लिए ललकार रही है। आजाद की उस पर निगाह पड़ी तो दिल में सोचे, खुदा इसे बुरी नजर से बचाए। यह तो इस काबिल है कि इसकी पूजा करे। यह, और मैदान जंग! हाय-हाय, ऐसा न हो कि उस पर किसी का हाथ पड़ जाय। गजब की चीज है यह हुस्न, इंसान लाख चाहता है, मगर दिल खिंच ही जाता है, तबीयत आ ही जाती है। शाम के वक्त हलकी-फुलकी और साफ-सुथरी छोलदारी में मिस क्लारिसा बनाव-चुनाव करके एक नाजुक आराम-कुर्सी पर बैठी थी। चाँदनी निखरी हुई थी, पेड़ और पत्ते दूध में नहाये हुए और हवा आहिस्ता-आहिस्ता चल रही थी! उधर मियाँ आजाद कैद ...Read Moreपड़े हुए हुस्नआरा को याद करके सिर धुनते थे कि एक आदमी ने आ कर कहा - चलिए, आपको मिस साहब बुलाती हैं। आजाद छोलदारी के करीब पहुँचे तो सोचने लगे, देखें यह किस तरह पेश आती है। मगर कहीं साइबेरिया भेज दिया तो बेमौत ही मर जाएँगे। अंदर जा कर सलाम किया और हाथ बाँध कर खड़े हो गए। क्लारिसा ने तीखी चितवन कर कहा - कहिए मिजाज ठंडा हुआ या नहीं? आजाद तो साइबेरिया की तरफ रवाना हुए, इधर खोजी ने दरख्त पर बैठे-बैठे अफीम की डिबिया निकाली। वहाँ पानी कहाँ? एक आदमी दरख्त के नीचे बैठा था। आपने उससे कहा - भाईजान, जरा पानी पिला दो। उसने ऊपर देखा, ...Read Moreएक बौना बैठा हुआ है। बोला - तुम कौन हो? दिल्लगी यह हुई कि वह फ्रांसीसी था। खोजी उर्दू में बात करते थे, वह फ्रांसीसी में जवाब देता था। बड़ी बेगम का बाग परीखाना बना हुआ है। चारों बहनें रविशों में अठखेलियाँ करती हैं। नाजो-अदा से तौल-तौल कर कदम धरती हैं। अब्बासी फूल तोड़-तोड़ कर झोलियाँ भर रही है। इतने में सिपहआरा ने शोखी के साथ गुलाब का ...Read Moreतोड़ कर गेतीआरा की तरफ फेंका। गेतीआरा ने उछाला तो सिपहआरा की जुल्फ को छूता हुआ नीचे गिरा। हुस्नआरा ने कई फूल तोड़े और जहाँनारा बेगम से गेंद खेलने लगीं। जिस वक्त गेंद फेंकने के लिए हाथ उठाती थीं, सितम ढाती थीं। वह कमर का लचकाना और गेसू का बिखरना, प्यारे-प्यारे हाथों की लोच और मुसकिरा-मुसकिरा कर निशाने बाजी करना अजब लुत्फ दिखाता था। कोठे पर चौका बिछा है और एक नाजुक पलंग पर सुरैया बेगम सादी और हलकी पोशाक पहने आराम से लेटी हैं। अभी हम्माम से आई हैं। कपड़े इत्र में बसे हुए हैं। इधर-उधर फूलों के हार और गजरे रखे ...Read Moreठंडी-ठंडी हवा चल रही है। मगर तब भी महरी पंखा लिए खड़ी है। इतने में एक महरी ने आ कर कहा - दारोगा जी हुजूर से कुछ अर्ज करना चाहते हैं। बेगम साहब ने कहा - अब इस वक्त कौन उठे। कहो, सुबह को आएँ। महरी बोली - हुजूर कहते हैं, बड़ा जरूरी काम है। हुक्म हुआ कि दो औरतें चादर ताने रहें और दारोगा साहब चादर के उस पार बैठें। खोजी आजाद के बाप बन गए तो उनकी इज्जत होने लगी। तुर्की कैदी हरदम उनकी खिदमत करने को मुस्तैद रहते थे। एक दिन एक रूसी फौजी अफसर ने उनकी अनोखी सूरत और माशे-माशे भर के हाथ-पाँव देखे तो जी ...Read Moreकि इनसे बातें करें। एक फारसीदाँ तुर्क को मुतरज्जिम बना कर ख्वाजा साहब से बातें करने लगा। आजाद को साइबेरिया भेज कर मिस क्लारिसा अपने वतन को रवाना हुई और रास्ते में एक नदी के किनारे पड़ाव किया। वहाँ की आब-हवा उसको ऐसी पसंद आई कि कई दिन तक उसी पड़ाव पर शिकार खेलती रही। एक ...Read Moreमिस-कलरिसा ने सुबह को देखा कि उसके खेमे के सामने एक दूसरा बहुत बड़ा खेमा खड़ा हुआ है। हैरत हुई कि या खुदा, यह किसका सामान है। आधी रात तक सन्नाटा था, एकाएक खेमे कहाँ से आ गए! एक औरत को भेजा कि जा कर पता लगाए कि ये कौन लोग है। वह औरत जो खेमे में गई तो क्या देखती है कि एक जवाहिरनिगार तख्त पर एक हूरों को शरमाने वाली शाहजादी बैठी हुई है। देखते ही दंग हो गई। जा कर मिस क्लारिसा से बोली - हुजूर, कुछ न पूछिए, जो कुछ देखा, अगर ख्वाब नहीं तो जादू जरूर है। ऐसी औरत देखी कि परी भी उसकी बलाएँ ले। जिस वक्त खोजी ने पहला गोता खाया तो ऐसे उलझे कि उभरना मुश्किल हो गया। मगर थोड़ी ही देर में तुर्कों ने गोते लगा कर इन्हें ढूँढ़ निकाला। आप किसी कदर पानी पी गए थे। बहुत देर तक तो ...Read Moreही ठिकाने न थे। जब जरा होश आया तो सबको एक सिरे से गालियाँ देना शुरू कीं। सोचे कि दो-एक रोज में जरा टाँठा हो लूँ तो इनसे खूब समझूँ। डेरे पर आ कर आजाद के नाम खत लिखने लगे। उनसे एक आदमी ने कह दिया था कि अगर किसी आदमी के नाम खत भेजना हो और पता न मिलता हो तो खत को पत्तों में लपेट दरिया कि किनारे खड़ा हो और तीन बार 'भेजो-भेजो' कह कर खत को दरिया में डाल दे, खत आप ही आप पहुँच जायगा। खोजी के दिल में यह बात बैठ गई। आजाद के नाम एक खत लिख कर दरिया में डाल आए। उस खत में आपने बहादुरी के कामों की खूब डींगे मारी थीं। खोजी थे तो मसखरे, मगर वफादार थे। उन्हें हमेशा आजाद की धुन सवार रहती थी। बराबर याद किया करते थे। जब उन्हें मालूम हुआ कि आजाद को पोलैंड की शाहजादी ने कैद कर दिया है तो वह आजाद को ...Read Moreनिकले। पूछते-पूछते किसी तरह आजाद के कैदखाने तक पहुँच ही तो गए। आजाद ने उन्हें देखते ही गोद में उठा लिया। इन दोनों शाहजादों में एक का नाम मिस्टर क्लार्क था और दूसरे का हेनरी! दोनों की उठती जवानी थी। निहायत खूबसूरत। शाहजादी दिन के दिन उन्हीं के पास बैठी रहती, उनकी बातें सुनने से उसका जी न भरता था। ...Read Moreआजाद तो मारे जलन के अपने महल से निकलते ही न थे। मगर खोजी टोह लेने के लिए दिन में कई बार यहाँ आ बैठते थे। उन दोनों को भी खोजी की बातों में बड़ा मजा आता। उधर आजाद जब फौज से गायब हुए तो चारों तरफ उनकी तलाश होने लगी। दो सिपाही घूमते-घामते शाहजादी के महल की तरफ आ निकले। इत्तिफाक से खोजी भी अफीम की तलाश में घूम रहे थे। उन दोनों सिपाहियों ने ...Read Moreको आजाद के साथ पहले देखा था। खोजी को देखते ही पकड़ लिया और आजाद का पता पूछने लगे। एक दिन दो घड़ी दिन रहे चारों परियाँ बनाव-चुनाव हँस-खेल रही थीं। सिपहआरा का दुपट्टा हवा के झोंकों से उड़ा जाता था। जहाँनारा मोतिये के इत्र में बसी थीं। गेतीआरा का स्याह रेशमी दुपट्टा खूब खिल रहा था। हुस्नआरा - ...Read Moreयह गरमी के दिन और काला रेशमी दुपट्टा! अब कहने से तो बुरा मानिएगा, जहाँनारा बहन निखरें तो आज दूल्हा भाई आने वाले हैं यह आपने रेशमी दुपट्टा क्या समझ के फड़काया! सुरैया बेगम चोरी के बाद बहुत गमगीन रहने लगीं। एक दिन अब्बासी से बोलीं - अब्बासी, दिल को जरा तकसीन नहीं होती अब हम समझ गए कि जो बात हमारे दिल में है वह हासिल न होगी। साकिया ले तेरी महफिल से चले भर पाया। सारी खुदाई में हमारा कोई नहीं। अब्बासी ने कहा - बीबी, आज तक मेरी समझ में न आया कि वह, जिसके लिए आप रोया करती हैं, कौन हैं? और यह जो आजाद आए थे, यह कौन हैं। एक दिन बाँकी औरत के भेष में आए, एक दिन गोसाई बनके आए। शाहजादा हुमायूँ फर भी शादी की तैयारियाँ करने लगे। सौदागरों की कोठियों में जा-जा कर सामान खरीदना शुरू किया। एक दिन एक नवाब साहब से मुलाकात हो गई। बोले - क्यों हजरत, यह तैयारियाँ! शाहजादा - आपके मारे कोई सौदा ...Read Moreखरीदे? नवाब - जनाब, चितवनों से ताड़ जाना कोई हमसे सीख जाय। शाहजादा - आपको यकीन ही न आए तो क्या इलाज? इधर बड़ी बेगम के यहाँ शादी की तैयारियाँ हो रही थीं, डोमिनियों का गाना हो रहा था। उधर शाहजादा हुमायूँ फर एक दिन दरिया की सैर करने गए। घटा छाई हुई थी। हवा जोरों के साथ चल रही थी। ...Read Moreहोते-होते आँधी आ गई और किश्ती दरिया में चक्कर खा कर डूब गई। मल्लाह ने किश्ती के बचाने की बहुत कोशिश की, मगर मौत से किसी का क्या बस चलता है। घर पर यह खबर आई तो कुहराम मच गया। अभी कल की बात है कि दरवाज पर भाँड़ मुबारकबाद गा रहे थे, आज बैन हो रहा है, कल हुमायूँ फर जामे में फूले नहीं समाते थे कि दूल्हा बनेंगे, आज दरिया में गोते खाते हैं। किसी तरफ से आवाज आती है - हाय मेरे बच्चे! कोई कहता है - हैं, मेरे लाला को क्या हुआ! रोने वाला घर भर और समझाने वाला कोई नहीं। एक पुरानी, मगर उजाड़ बस्ती में कुछ दिनों से दो औरतों ने रहना शुरू किया है। एक का नाम फिरोजा है, दूसरी का फारखुंदा। इस गाँव में कोई डेढ़ हजार घर आबाद होंगे, मगर उन सब में दो ठाकुरों ...Read Moreमकान आलीशान थे। फिरोजा का मकान छोटा था, मगर बहुत खुशनुमा। वह जवान औरत थी, कपड़ेलत्ते भी साफ-सुथरे पहनती थी, लेकिन उसकी बातचीत से उदासी पाई जाती थी। फरखुंदा इतनी हसीन तो न थी, मगर खुशमिजाज थी। गाँववालों को हैरत थी कि यह दोनों औरतें इस गाँव में कैसे आ गईं और कोई मर्द भी साथ नहीं! उनके बारे में लोग तरह-तरह की बातें किया करते थे। गाँव की सिर्फ दो औरतें उनके पास जाती थीं, एक तंबोलिन, दूसरी बेलदारिन। यार लोग टोह में थे कि यहाँ का कुछ भेद खुले, मगर कुछ पता न चलता था। तंबोलिन और बेलदारिन से पूछते थे तो वह भी आँय-बाँय-साँय उड़ा देती थीं। फीरोजा बेगम और फरखुंदा रात के वक्त सो रही थीं कि धमाके की आवाज हुई फरखुंदा की आँख खुल गई। यह धमाका कैसा? मुँह पर से चादर उठाई, मगर अँधेरा देख कर उठने की हिम्मत न पड़ी। इतने में ...Read Moreकी आहट मिली, रोएँ खड़े हो गए। सोची, अगर बोली तो यह सब हलाल कर डालेंगे। दबकी पड़ी रही। चोर ने उसे गोद में उठाया और बाहर ले जा कर बोला - सुनो अब्बासी, हमको तुम खूब पहचानती हो? अगर न पहचान सकी हो, तो अब पहचान लो। खाँ साहब पर मुकदमा तो दायर ही हो गया था उस पर दारोगा जी दुश्मन थे। दो साल की सजा हो गई। तब दारोगा जी ने एक औरत को सुरैया बेगम के मकान पर भेजा। औरत ने आ ...Read Moreसलाम किया और बैठ गई। सुरैया - कौन हो? कुछ काम है यहाँ? औरत - ऐ हुजूर, भला बगैर काम के कोई भी किसी के यहाँ जाता है? हुजूर से कुछ कहना है, आपके हुस्न का दूर-दूर तक शोहरा है। इसका क्या सबब है कि हुजूर इस उम्र में, इस हालत में जिंदगी बसर करती हैं? आध कोस चलने के बाद इन चोरों ने सुरैया बेगम को दो और चोरों के हवाले किया। इनमें एक का नाम बुधसिंह था, दूसरे का हुलास। यह दोनों डाकू दूर-दूर तक मशहूर थे, अच्छे-अच्छे डकैत उनके नाम सुन कर ...Read Moreकान पकड़ते थे। किसी आदमी की जान लेना उनके लिए दिल्लगी थी। सुरैया बेगम काँप रही थी कि देखें आबरू बचती है या नहीं। हुलास बोला, कहो बुद्धसिंह, अब क्या करना चाहिए? सुरैया बेगम ने अब थानेदार के साथ रहना मुनासिब न समझा। रात को जब थानेदार खा पी कर लेटा तो सुरैया बेगम वहाँ से भागी। अभी सोच ही रही थी कि एक चौकीदार मिला। सुरैया बेगम को देख कर ...Read More- आप कहाँ? मैंने आपको पहचान लिया है। आप ही तो थानेदार साहब के साथ उस मकान में ठहरी थीं। मालूम होता है, रूठ कर चली आई हो। मैं खूब जानता हूँ। नेपाल की तराई में रिसायत खैरीगढ़ के पास एक लक व दक जंगल है। वहाँ कई शिकारी शेर का शिकार करने के लिए आए हुए हें। एक हाथी पर दो नौजवान बैठे हुए हैं। एक का सिन बीस-बाईस बरस ...Read Moreहै, दूसरे का मुश्किल से अट्ठारह का। एक का नाम है वजाहत अली, दूसरे का माशूक हुसैन। वजाहत अली दोहरे बदन का मजबूत आदमी है। माशूक हुसैन दुबला-पतला छरहरा आदमी है। उसकी शक्ल-सूरत और चाल-ढाल से ऐसा मालूम होता है कि अगर इसे जनाने कपड़े पहना दिए जायँ, तो बिलकुल औरत मालूम हो। पीछे-पीछे छह हाथी और आते थे। जंगल में पहुँच कर लोगों ने हाथी रोक लिए ताकि शेर का हाल दरियाफ्त कर लिया जाय कि कहाँ है। जब रात को सब लो खा-पी कर लेटे, तो नवाब साहब ने दोनों बंगालियों को बुलाया और बोले - खुदा ने आप दोनों साहबों को बहुत बचाया, वरना शेरनी खा जाती। बोस - हम डरता नहीं थ, हम शाला ईश ...Read Moreका बान को मारना चाहता था कि हम ईश देश का आदमी नहीं है। इस माफिक हमारे को डराने सकता और हाथी को बोदजाती से हिलाने माँगें। जब तो हम लोग बड़ा गुस्सा हुआ कि अरे सब लोग का हाथी हिलने नहीं माँगता, तुम क्यों हिलने माँगता है। और हमसे बोला कि बाबू शाब, अब तो मरेगा। हाथी का पाँव फिसलेगी और तुम मर जायँगे। हम बोला - अरे, जो हाथी की पाँव फिसल जायगी तो तुम शाले का शाला कहाँ बच जायगा? तुम भी तो हमारा एक साथ मरेगा। आज तो कलम की बाँछें खिली जाती हैं। नौजवानों के मिजाज की तरह अठखेलियाँ पर है। सुरैया बेगम खूब निखर के बैठी हैं। लौंडियाँ-महरियाँ बनाव-चुनाव किए घेरे खड़ी हैं। घर में जश्न हो रहा है। न जाने सुरैया बेगम ...Read Moreदौलत कहाँ से लाईं। यह ठाट तो पहले भी नहीं था। महरी - ऐ बी सैदानी, आज तो मिजाज ही नहीं मिलते। इस गुलाबी जोड़े पर इतना इतरा गईं? सैदानी - हाँ, कभी बाबराज काहे को पहना था? आज पहले-पहल मिला है। तुम अपने जोड़े का हाल तो कहो। सुरैया बेगम के यहाँ वही धमाचौकड़ी मची थी। परियों का झुरमुट, हसीनों का जमघट, आपस की चुहल और हँसी से मकान गुलजार बना हुआ था। मजे-मजे की बातें हो रही थीं कि महरी ने आ कर कहा - हुजूर, ...Read Moreसे असगर मियाँ की बीवी आई हैं। अभी-अभी बहली से उतरी हैं। जानी बेगम ने पूछा - असगर मियाँ कौन हैं? कोई देहाती भाई हैं? इस पर हशमत बहू ने कहा, बहन वह कोई हों। अब तो हमारे मेहमान हैं। फीरीजा बेगम बोलीं - हाँ-हाँ तमीज से बात करो, मगर वह जो आई है, उनको नाम क्या है? महरी ने आहिस्ता से कहा - फैजन। इस पर दो-तीन बेगमों ने एक दूसरे की तरफ देखा। आजाद पोलेंड की शाहजादी से रुखसत हो कर रातोंरात भागे। रास्ते में रूसियों की कई फौजें मिलीं। आजाद को गिरफ्तार करने की जोरों से कोशिश हो रही थी, मगर आजाद के साथ शाहजादी का जो आदमी था वह उन्हें ...Read Moreकी नजरें बचा कर ऐसे अनजान रास्तों से ले गया कि किसी को खबर तक न हुई। दोनों आदमी रात को चलते थे और दिन को कहीं छिप कर पड़ रहते थे। एक हफ्ते तक भागा-भाग चलने के बाद आजाद पिलौना पहुँच गए। इस मुकाम को रूसी फौजों ने चारों तरफ से घेर लिया था। आजाद के आने की खबर सुनते ही पिलौने वालों ने कई हजार सवार रवाना किए कि आजाद को रूसी फौजों से बचा कर निकाल लाएँ। शाम होते-होते आजाद पिलौनावालों से जा मिले। जिस दिन आजाद कुस्तुनतुनिया पहुँचे, उनकी बड़ी इज्जत हुई। बादशाह ने उनकी दावत की और उन्हें पाशा का खिताब दिया। शाम का आजाद होटल में पहुँचे और घोड़े से उतरे ही थे कि यह आवाज कान में आई, भला ...Read Moreजाता कहाँ है। आजाद ने कहा - अरे भई, जाने दो। आजाद की आवाज सुन कर खोजी बेकरार हो गए। कमरे से बाहर आए और उनके कदमों पर टोपी रख कर कहा - आजाद, खुदा गवाह है, इस वक्त तुम्हें देख कर कलेजा ठंडा हो गया, मुँह-माँगी मुराद पाई। आजाद, मीडा, क्लारिसा और खोजी जहाज पर सवार हैं। आजाद लेडियों का दिल बहलाने के लिए लतीफें और चुटकुले कह रहे हैं। खोजी भी बीच-बीच में अपना जिक्र छेड़ देते हैं। खोजी - एक दिन का जिक्र है, मैं होली ...Read Moreदिन बाजार निकला। लोगों ने मना किया कि आज बहार न निकलिए, वरना रंग पड़ जायगा। मैं उन दिनों बिलकुल गैंडा बना हुआ था। हाथी की दुम पकड़ ली तो हुमस न सका। चें से बोल कर चाहा कि भागे, मगर क्या मजाल! जिसने देखा, दातों उँगली दबाई कि वाह पट्ठे। सुरैया बेगम का मकान परीखाना बना हुआ था। एक कमरे में वजीर डोमिनी नाच रही थी। दूसरे में शहजादी का मुजरा होता था। फीरोजा - क्यों फैजन बहन, तुमको इस उजड़े हुए शहर की डोमिनियों का गाना काहे को अच्छा ...Read Moreहोगा? जानी बेगम - इनके लिए देहात की मीरासिनें बुलवा दो। फैजन - हाँ, फिर देहाती तो हम हैं ही, इसका कहना क्या? इस फिकरे पर वह कहकहा पड़ा कि घर भर गूँज उठा और फैजन बहुत शरमाईं। जानी बेगम ने कहा - बस यही बात तो हमें अच्छी नहीं लगती। एक तो बेचारी इतनी देर के बाद बोलीं, उस पर भी सबने मिल कर उनको बना डाला। शाहजादा हुमायूँ फर की मौत जिसने सुनी, कलेजा हाथों से थाम लिया। लोगों का खयाल था कि सिपहआरा यह सदमा बरदाश्त न कर सकेगी और सिसक-सिसक कर शाहजादे की याद में जान दे देगी। घर में किसी की हिम्मत ...Read Moreपड़ती थी कि सिपहआरा को समझाए या तसकीन दे, अगर किसी ने डरते-डरते समझाया भी तो वह और रोने लगती और कहती - क्या अब तुम्हारी यह मर्जी है कि मैं रोऊँ भी न, दिल ही में घुट-घुट कर मरूँ। दो-तीन दिन तक वह कब्र पर जा कर फूल चुनती रही, कभी कब्र को चूमती, कभी खुदा से दुआ माँगती कि ऐ खुदा, शाहजादे बहादुर की सूरत दिखा दे, कभी आप ही आप मुसकिराती, कभी कब्र की चट-चट बलाएँ लेती। एक आँख से हँसती, एक आँख से रोती। चौथे दिन वह अपनी बहनों के साथ वहाँ गई। चमन में टहलते-टहलते उसे आजाद की याद आ गई। हुस्नआरा से बोली - बहन, अगर दूल्हा भाई आ जायँ तो हमारे दिल को तसकीन हो। खुदा ने चाहा तो वह दो-चार दिन में आना ही चाहते हैं। नवाब वजाहत हुसैन सुबह को जब दरबार में आए तो नींद से आँखें झुकी पड़ती थीं। दोस्तों मे जो आता था, नवाब साहब को देख कर पहले मुसकिराता था। नवाब साहब भी मुसकिरा देते थे। इन दोस्तों में रौनकदौला ...Read Moreमुबारक हुसैन बहुत बेतकल्लुफ थे। उन्होंने नवाब साहब से कहा - भाई, आज चौथी के दिन नाच न दिखाओगे? कुछ जरूरी है कि जब कोई तायफा बुलवाया जाय तो बदी ही दिल में हो? अरे साहब, गाना सुनिए, नाच देखिए, हँसिए, बोलिए, शादी को दो दिन भी नहीं हुए और हुजूर मुल्ला बन बैठे। मगर यह मौलवीपन हमारे सामने न चलने पाएगा। और दोस्तों ने भी उनकी हाँ में हाँ मिलाई। यहाँ तक कि मुबारक हुसैन जा कर कई तायफे बुला लाए, गाना होने लगा। रौनकदौला ने कहा - कोई फारसी गजल कहिए तो खूब रंग जमे। शाहजादा हुमायूँ फर के जी उठने की खबर घर-घर मशहूर हो गई। अखबारों में जिसका जिक्र होने लगा। एक अखबार ने लिखा, जो लोग इस मामले में कुछ शक करते है उन्हें सोचना चाहिए कि खुदा के लिए किसी ...Read Moreको जिला देना कोई मुश्किल बात नहीं। जब उनकी माँ और बहनों को पूरा यकीन है तो फिर शक की गुंजाइश नहीं रहती। आजाद पाशा को इस्कंदरिया में कई दिन रहना पड़ा। हैजे की वजह से जहाजों का आना-जाना बंद था। एक दिन उन्होंने खोजी से कहा - भाई, अब तो यहाँ से रिहाई पाना मुश्किल है। खोजी - खुदा का शुक्र करो ...Read Moreबचके चले आए, इतनी जल्दी क्या है? आजाद - मगर यार, तुमने वहाँ नाम न किया, अफसोस की बात है। खोजी - क्या खूब, हमने नाम नहीं किया तो क्या तुमने नाम किया? आखिर आपने क्या किया, कुछ मालूम तो हो, कौन गढ़ फतह किया, कौन लड़ाई लड़े! यहाँ तो दुश्मनों को खदेड़-खदेड़ के मारा। आप बस मिसों पर आशिक हुए, और तो कुछ नहीं किया। चौथी के दिन रात को नवाब साहब ने सुरैया बेगम को छेड़ने के लिए कई बार फीरोजा बेगम की तारीफ की। सुरैया बेगम बिगड़ने लगीं और बोली - अजब बेहूदा बातें हैं तुम्हारी, न जाने किन लोगों में रहे ...Read Moreकि ऐसी बातें जबान से निकलती हैं। नवाब - तुम नाहक बिगड़ती हो, मैं तो सिर्फ उनके हुस्न की तारीफ करता हूँ। सुरैया - ऐ, तो कोई ढूँढ़के वैसी ही की होती। नवाब - तुम्हारे यहाँ कभी-कभी आया-जाया करती है? कुछ दिन तो मियाँ आजाद मिस्र में इस तरह रहे जैसे और मुसाफिर रहते हैं, मगर जब कांसल को इनके आने का हाल मालूम हुआ तो उसने उन्हें अपने यहाँ बुला कर ठहराया और बातें होने लगी। कांसल - मुझे ...Read Moreसख्त शिकायत है कि आप यहाँ आए और हमसे न मिले। ऐसा कौन है जो आपके नाम से वाकिफ न हो, जो अखबार आता है उसमें आपका जिक्र जरूर होता है। वह आपके साथ मसखरा कौन है? वह बौना खोजी ? आजाद बंबई से चले तो सबसे पहले जीनत और अख्तर से मुलाकात करने की याद आई। उस कस्बे में पहुँचे तो एक जगह मियाँ खोजी की याद आ गई। आप ही आप हँसने लगे। इत्तिफाक से एक गाड़ी पर ...Read Moreसवारियाँ चली जाती थीं। उनमें से एक ने हँस कर कहा - वाह रे भलेमानस, क्या दिमाग पर गरमी चढ़ गई है क्या आजाद रंगीन मिजाज आदमी तो थे ही। आहिस्ता से बोले - जब ऐसी-ऐसी प्यारी सूरतें नजर आएँ तो आदमी के होश-हवास क्योंकर ठिकाने रहें। इस पर वह नाजनीन तिनक कर बोली - अरे, यह तो देखने को ही दीवाना मालूम होते थे, अपने मतलब के बड़े पक्के निकले। क्यों मियाँ, यह क्या सूरत बनाई है, आधा तीतर और आधा बटेर? खुदा ने तुमको वह चेहरा-मोहरा दिया है कि लाख दो लाख में एक हो। वहाँ दो दिन और रह कर दोनों लेडियों के साथ लखनऊ पहुँचे और उन्हें होटल में छोड़ कर नवाब साहब के मकान पर आए। इधर वह गाड़ी से उतरे, उधर खिदमतगारों ने गुल मचाया कि खुदावंद, मुहम्मद आजाद पाशा ...Read Moreगए। नवाब साहब मुसाहबों के साथ उठ खड़े हुए तो देखा कि आजाद रप-रप करते हुए तुर्की वर्दी डाटे चले आते हैं। नवाब साहब झपट कर उनके गले लिपट गए और बोले - भाईजान, आँखें तुम्हें ढूँढ़ती थीं। आजाद सुरैया बेगम की तलाश में निकले तो क्या देखते हैं कि एक बाग में कुछ लोग एक रईस की सोहबत में बैठे गपें उड़ा रहे हैं। आजाद ने समझा, शायद इन लोगों से सुरैया बेगम के नवाब साहब ...Read Moreकुछ पता चले। आहिस्ता-आहिस्ता उनके करीब गए। आजाद को देखते ही वह रईस चौंक कर खड़ा हो गया और उनकी तरफ देख कर बोला - वल्लाह, आपसे मिलने का बहुत शौक था। शुक्र है कि घर बैठे मुराद पूरी हुई। फर्माइए, आपकी क्या खिदमत करूँ ? बहार बेगम - यह सब दिखाने की बातें हैं। किसी से दो हाथी माँगे, किसी से दो-चार घोड़े कहीं से सिपाही आए, कहीं से बरछी-बरदार! लो साहब, बरात आई है। माँगे-ताँगे की बरात से फायदा? खोजी ने जब देखा कि आजाद की चारों तरफ तारीफ हो रही है, और हमें कोई नहीं पूछता, तो बहुत झल्लाए और कुल शहर के अफीमचियों को जमा करके उन्होंने भी जलसा किया और यों स्पीच दी - भाइयों! ...Read Moreका खयाल है कि अफीम खा कर आदमी किसी काम का नहीं रहता। मैं कहता हूँ, बिलकुल गलत। मैंने रूम की लड़ाई में जैसे-जैसे काम किए, उन पर बड़े से बड़ा सिपाही भी नाज कर सकता है। मैंने अकेले दो-दो लाख आदमियों का मुकाबिला किया है। तोपों के सामने बेधड़क चला गया हूँ। बड़े-बड़े पहलवानों को नीचा दिखा दिया है। और मैं वह आदमी हूँ, जिसके यहाँ सत्तर पुश्तों से लोग अफीम खाते आए हैं। आज बड़ी बेगम का मकान परिस्तान बना हुआ है। जिधर देखिए, सजावट की बहार है। बेगमें धमा-चौकड़ी मचा रही हैं। जानी - दूल्हा के यहाँ तो आज मीरासिनों की धूम है। कहाँ तो मियाँ आजाद को नाच-गाने से इतनी चिढ़ ...Read Moreकि मजाल क्या, कोई डोमिनी घर के अंदर कदम रखने पाए। और आज सुनती हूँ कि तबले पर थाप पड़ रही है और गजलें, ठुमरियाँ, टप्पे गाए जाते हैं। प्रिय पाठक, शास्त्रानुसार नायक और नायिका के संयोग के साथ ही कथा का अंत हो जाता है। इसलिए हम भी अब लेखनी को विश्राम देते हैं। पर कदाचित कुछ पाठकों को यह जानने की इच्छा होगी कि ख्वाजा साहब ...Read Moreक्या हाल हुआ और मिस मीडा और मिस क्लारिसा पर क्या बीती। इन तीनों पात्रों के सिवा हमारे विचार में तो और कोई ऐसा पात्र नहीं है जिसके विषय में कुछ कहना बाकी रह गया हो। अच्छा सुनिए। मियाँ खोजी मरते दम तक आजाद के वफादार दोस्त बने रहे। अफीम की डिबिया और करौली की धुन ने कभी उनका साथ न छोड़ा। मिस मीडा औ मिस क्लारिसा ने उर्दू और हिंदी पढ़ी और दोनो थियासोफिस्ट हो गईं।
बारिश से जलालाबाद के आसपास के गांवों में काफी नुकसान हुआ है। नजदीक से गुजरने वाली माइनर में पानी के साथ बड़ी मात्रा में कलाली आ जाने से ओवरफ्लो हो गई, जिससे आधा दर्जन गांवों में पानी भर गया। विभाग द्वारा सार न लिए जाने के पर किसानों ने खुद ही माइनर में उतरकर सफाई कर कलाली निकालने का काम शुरू कर दिया है। किसानों के पास कोई सफाई का बड़ा प्रबंध न होने के कारण बड़ी समस्या तो है, लेकिन किसान लगातार इस माइनर की सफाई में लगे हुए हैं। किसानों का कहना है कि हमने कई बार ड्रेनेज विभाग को सूचित किया, लेकिन किसी ने भी किसानों की इस समस्या पर गौर नहीं किया। अगर समय पर इन नहरों की सफाई विभाग द्वारा करवाई होती तो बारिश के पानी से होने वाली तबाही से बचा जा सकता था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बारिश से जलालाबाद के आसपास के गांवों में काफी नुकसान हुआ है। नजदीक से गुजरने वाली माइनर में पानी के साथ बड़ी मात्रा में कलाली आ जाने से ओवरफ्लो हो गई, जिससे आधा दर्जन गांवों में पानी भर गया। विभाग द्वारा सार न लिए जाने के पर किसानों ने खुद ही माइनर में उतरकर सफाई कर कलाली निकालने का काम शुरू कर दिया है। किसानों के पास कोई सफाई का बड़ा प्रबंध न होने के कारण बड़ी समस्या तो है, लेकिन किसान लगातार इस माइनर की सफाई में लगे हुए हैं। किसानों का कहना है कि हमने कई बार ड्रेनेज विभाग को सूचित किया, लेकिन किसी ने भी किसानों की इस समस्या पर गौर नहीं किया। अगर समय पर इन नहरों की सफाई विभाग द्वारा करवाई होती तो बारिश के पानी से होने वाली तबाही से बचा जा सकता था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सर्दी का मौसम शुरू होने के साथ ही लोगों में सेक्स की इच्छा ज्यादा होने लगती है। लेकिन कई लोग इस मौसम में अपनी लाइफ स्टाइल और मानसिकता की वजह से पूर्ण सेक्स का मजा नहीं ले पाते। आज हम आपको सेक्स की इच्छा में बढ़ोतरी के बारे में कुछ जानकारियां दे रहे हैं। इससे आपके जीवन का आनंद पूर्ण रूप से बरकरार रहेगा। सर्दियों में प्रतिदिन गुनगुने पानी से स्नान करें। इससे आपकी सेहत भी अच्छी रहेगाी और सेक्स के प्रति आपका मूड भी बनेगा। सर्दियों में सेक्स करते समय अपने कपड़ों का पूरा खयाल रखें। कम या बिना कपड़ों के शारीरिक संबंध कायम करना मुसीबत बन सकता है। शराब के सेवन से दूर रहें। अपने पार्टनर के साथ गर्मजोशी से बातें करें और एक-दूसरे को प्यार-भरी गर्माहट का एहसास करवाएं। शराब की कमी को चुंबन और आलिंगन से पूरा करने की कोशिश करें। इससे प्यार में ही इजाफा होगा। रात का भोजन 9 बजे से पहले कर लें, तो बेहतर। भोजन में हरी पत्तीदार सब्जियां जरूर लें। जितनी भूख है उतना ही भोजन करें। सर्दियों में सुबह की सैर और व्यायाम को जारी रखें। सर्दियों में सेहत के और स्वस्थ वैवाहिक जीवन के लिए यह बेहद जरूरी है।
सर्दी का मौसम शुरू होने के साथ ही लोगों में सेक्स की इच्छा ज्यादा होने लगती है। लेकिन कई लोग इस मौसम में अपनी लाइफ स्टाइल और मानसिकता की वजह से पूर्ण सेक्स का मजा नहीं ले पाते। आज हम आपको सेक्स की इच्छा में बढ़ोतरी के बारे में कुछ जानकारियां दे रहे हैं। इससे आपके जीवन का आनंद पूर्ण रूप से बरकरार रहेगा। सर्दियों में प्रतिदिन गुनगुने पानी से स्नान करें। इससे आपकी सेहत भी अच्छी रहेगाी और सेक्स के प्रति आपका मूड भी बनेगा। सर्दियों में सेक्स करते समय अपने कपड़ों का पूरा खयाल रखें। कम या बिना कपड़ों के शारीरिक संबंध कायम करना मुसीबत बन सकता है। शराब के सेवन से दूर रहें। अपने पार्टनर के साथ गर्मजोशी से बातें करें और एक-दूसरे को प्यार-भरी गर्माहट का एहसास करवाएं। शराब की कमी को चुंबन और आलिंगन से पूरा करने की कोशिश करें। इससे प्यार में ही इजाफा होगा। रात का भोजन नौ बजे से पहले कर लें, तो बेहतर। भोजन में हरी पत्तीदार सब्जियां जरूर लें। जितनी भूख है उतना ही भोजन करें। सर्दियों में सुबह की सैर और व्यायाम को जारी रखें। सर्दियों में सेहत के और स्वस्थ वैवाहिक जीवन के लिए यह बेहद जरूरी है।
Jamshedpur (Dharmendra Kumar) : ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ एसोसिएशन (ओशाज) ने बुधवार को सिलिकोसिस पीड़ितों की समस्याओं को लेकर उपायुक्त कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया. इस दौरान ओशाज की ओर से उपायुक्त कार्यालय में मुख्यमंत्री के नाम एक 15 सूत्री मांग पत्र सौंपा गया. इसके माध्यम से कहा गया है कि श्रम कानूनों का संसोधन कर तैयार किया गया चार श्रम कोड को अविलम्ब निरस्त किया जाये. काम का समय 8 घंटा से बढ़ाकर 12 घंटा करने संबंधी कानूनी प्रावधान को तत्काल निरस्त कर पूर्ववत 8 घंटा किया जाये. कारखाना एवं खदानों में मजदूरों की पेशागत सुरक्षा एवं स्वास्थ एवं सामाजिक सुनिशिचत करने के लिए फैक्ट्रीज एक्ट 1948 ईएसआई एक्ट 1948, माइनिंग एक्ट 1952 एवं एम्प्लाइज कंपनसेशन एक्ट 1923 को लागू किया जाये. सरकार एवं ओशाज संस्था की ओर से चिन्हित किये गए सभी सिलिकोसिस आक्रान्त एवं मृतक के परिवारों को हरियाणा सरकार की तर्ज पर सिलिकोसिस से मृत व्यक्ति के आश्रितों को 6 लाख रुपया आर्थिक सहायता राशि एवं सिलिकोसिस आक्रांत मजदूर के लिए पेंशन राशि 6000 रुपया प्रति माह एवं मरणोपरांत उनके आश्रितों के लिए 5500 रुपया, लड़की की शादी के लिए 75 हजार रुपये, लड़का के लिए 35 हजार रुपया एवं शिक्षण खर्च क्लास 6 से प्रति वर्ष 6000 रुपये, 8000 रुपये 10 हजार रुपये के हिसाब से दिया जाये.
Jamshedpur : ऑक्यूपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ एसोसिएशन ने बुधवार को सिलिकोसिस पीड़ितों की समस्याओं को लेकर उपायुक्त कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया. इस दौरान ओशाज की ओर से उपायुक्त कार्यालय में मुख्यमंत्री के नाम एक पंद्रह सूत्री मांग पत्र सौंपा गया. इसके माध्यम से कहा गया है कि श्रम कानूनों का संसोधन कर तैयार किया गया चार श्रम कोड को अविलम्ब निरस्त किया जाये. काम का समय आठ घंटाटा से बढ़ाकर बारह घंटाटा करने संबंधी कानूनी प्रावधान को तत्काल निरस्त कर पूर्ववत आठ घंटाटा किया जाये. कारखाना एवं खदानों में मजदूरों की पेशागत सुरक्षा एवं स्वास्थ एवं सामाजिक सुनिशिचत करने के लिए फैक्ट्रीज एक्ट एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस ईएसआई एक्ट एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस, माइनिंग एक्ट एक हज़ार नौ सौ बावन एवं एम्प्लाइज कंपनसेशन एक्ट एक हज़ार नौ सौ तेईस को लागू किया जाये. सरकार एवं ओशाज संस्था की ओर से चिन्हित किये गए सभी सिलिकोसिस आक्रान्त एवं मृतक के परिवारों को हरियाणा सरकार की तर्ज पर सिलिकोसिस से मृत व्यक्ति के आश्रितों को छः लाख रुपया आर्थिक सहायता राशि एवं सिलिकोसिस आक्रांत मजदूर के लिए पेंशन राशि छः हज़ार रुपयापया प्रति माह एवं मरणोपरांत उनके आश्रितों के लिए पाँच हज़ार पाँच सौ रुपयापया, लड़की की शादी के लिए पचहत्तर हजार रुपये, लड़का के लिए पैंतीस हजार रुपया एवं शिक्षण खर्च क्लास छः से प्रति वर्ष छः हज़ार रुपयापये, आठ हज़ार रुपयापये दस हजार रुपये के हिसाब से दिया जाये.
के साथ कहा-~-महाभाग क्षत्रियो, मैं तुम्हारा स्वागत करता हूँ। महारथी वीरा, मैं तुम्हारा स्वागत करता हूँ । हे वीरो, मैं तुम्हें देखकर बहुत प्रसन्न हुआ । हे भरतश्रेष्ठ, भीष्म का सिर नीचे लटक रहा था। उन्होंने सबका स्वागत करने के वाद कहा - 'हे राजाओ ! मेरा सिर बहुत नीचे लटक रहा है, इसलिए मुझे तक्रिया दो।" राजा लोग और कौरवगण उसी समय वढ़िया कोमल मूल्यवान् तकिये लेकर दौड़े आये; किन्तु भीष्म ने उनके लिए अनिच्छा प्रकट करके हँसकर कहा- "नरपतियो, ये तकिये वीरशय्या के योग्य नहीं हैं।" अब अर्जुन की ओर देखकर कहा - हे महावाहु अर्जुन, मेरा सिर बहुत नीचे लटक रहा है। तुम इस वीरशय्या के योग्य जो तकिया समझते हो, वह मुझे दो । सञ्जय कहते हैं कि महाराज ! तव अर्जुन ने आँखों में आँसू भरकर, श्रेष्ठ गाण्डीव धनुष चढ़ाकर, पितामह को प्रणाम करके कहा- पितामह, मैं आपका आज्ञापालक हूँ। हे धनुर्द्धर४० श्रेष्ठ, कुरुश्रेष्ठ ! आज्ञा दीजिए क्या करूँ ? भीष्म ने कहा - बेटा, मेरा सिर नीचे लटंक रहा है। अर्जुन ! तुम समर्घ, सब धनुर्द्धरों में श्रेष्ठ, क्षत्रिय-धर्म के ज्ञाता और बुद्धिमान हो। तुम सत्व और गुण से सम्पन्न वीर पुरुष हो। इसलिए वीरशय्या के योग्य तकिया मुझे दो । "जो आज्ञा" कहकर, अपना कर्तव्य विचारँकर, शत्रुविजयी अर्जुन ने गाण्डीव को अभिमन्त्रित किया और तीक्ष्ण धारवाले तीन वाण लेकर उस पर चढ़ाये । फिर पितामह को प्रणाम करके वे तीनों बाण मस्तक में मारे । उन बाणों पर तकिये के समान भीष्म का सिर ठहर गया । सुहृदों का आनन्द बढ़ानेवाले अर्जुन ने ठीक तकिया दिया, यह देखकर धर्मात्मा धर्मार्थतन्त्र के ज्ञाता भीष्म उन पर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने अर्जुन का अभिनन्दन करके सव कौरवों की ओर देखकर कहा - हे अर्जुन, तुमने इस वीरशय्या के योग्य तकिया मुझे दिया । तुम यह न देकर और तरह का तकिया देत, तो मैं कुपित होकर तुमको शाप दे देता । हे महावाहु, संग्राम में धर्मनिरत क्षत्रियों के लिए ऐसी ही शय्या और ऐसा ही तकिया चाहिए ।
के साथ कहा-~-महाभाग क्षत्रियो, मैं तुम्हारा स्वागत करता हूँ। महारथी वीरा, मैं तुम्हारा स्वागत करता हूँ । हे वीरो, मैं तुम्हें देखकर बहुत प्रसन्न हुआ । हे भरतश्रेष्ठ, भीष्म का सिर नीचे लटक रहा था। उन्होंने सबका स्वागत करने के वाद कहा - 'हे राजाओ ! मेरा सिर बहुत नीचे लटक रहा है, इसलिए मुझे तक्रिया दो।" राजा लोग और कौरवगण उसी समय वढ़िया कोमल मूल्यवान् तकिये लेकर दौड़े आये; किन्तु भीष्म ने उनके लिए अनिच्छा प्रकट करके हँसकर कहा- "नरपतियो, ये तकिये वीरशय्या के योग्य नहीं हैं।" अब अर्जुन की ओर देखकर कहा - हे महावाहु अर्जुन, मेरा सिर बहुत नीचे लटक रहा है। तुम इस वीरशय्या के योग्य जो तकिया समझते हो, वह मुझे दो । सञ्जय कहते हैं कि महाराज ! तव अर्जुन ने आँखों में आँसू भरकर, श्रेष्ठ गाण्डीव धनुष चढ़ाकर, पितामह को प्रणाम करके कहा- पितामह, मैं आपका आज्ञापालक हूँ। हे धनुर्द्धरचालीस श्रेष्ठ, कुरुश्रेष्ठ ! आज्ञा दीजिए क्या करूँ ? भीष्म ने कहा - बेटा, मेरा सिर नीचे लटंक रहा है। अर्जुन ! तुम समर्घ, सब धनुर्द्धरों में श्रेष्ठ, क्षत्रिय-धर्म के ज्ञाता और बुद्धिमान हो। तुम सत्व और गुण से सम्पन्न वीर पुरुष हो। इसलिए वीरशय्या के योग्य तकिया मुझे दो । "जो आज्ञा" कहकर, अपना कर्तव्य विचारँकर, शत्रुविजयी अर्जुन ने गाण्डीव को अभिमन्त्रित किया और तीक्ष्ण धारवाले तीन वाण लेकर उस पर चढ़ाये । फिर पितामह को प्रणाम करके वे तीनों बाण मस्तक में मारे । उन बाणों पर तकिये के समान भीष्म का सिर ठहर गया । सुहृदों का आनन्द बढ़ानेवाले अर्जुन ने ठीक तकिया दिया, यह देखकर धर्मात्मा धर्मार्थतन्त्र के ज्ञाता भीष्म उन पर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने अर्जुन का अभिनन्दन करके सव कौरवों की ओर देखकर कहा - हे अर्जुन, तुमने इस वीरशय्या के योग्य तकिया मुझे दिया । तुम यह न देकर और तरह का तकिया देत, तो मैं कुपित होकर तुमको शाप दे देता । हे महावाहु, संग्राम में धर्मनिरत क्षत्रियों के लिए ऐसी ही शय्या और ऐसा ही तकिया चाहिए ।
ग्वालियर। जिस तरह से त्रिलोक के पहले पत्रकार देवर्षि नारद ने लोगों की भलाई के लिए काम किया, इसी तरह से समस्याओं को उठाते हुए हमें जनकल्याणकारी पत्रकारिता करना चाहिए। हालांकि विरोधियों ने नारद मुनि के चरित्र को विकृत कर दिया था, लेकिन उनका उद्देश्य हमेशा भलाई रहा। आज पत्रकारों की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया है। पत्रकार का काम सनसनी नहीं समस्या का समाधान कराना है। यह बात उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष हिंदी साहित्य भारती डॉ. रवीन्द्र शुक्ल ने बाल भवन सभागार में आयोजित आद्य पत्रकार देवर्षि नारद जयंती पत्रकारिता सम्मान एवं संवाद कार्यक्रम में मुख्य वक्ता की आसंदी से कही। मामा माणिकचंद वाजपेयी स्मृति सेवा न्यास के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार हरिमोहन शर्मा थे। अध्यक्षता न्यास के अध्यक्ष दीपक सचेती ने की। चयन समिति के अध्यक्ष दिनेश चाकणकर एवं कार्यक्रम संयोजक राजीव अग्रवाल भी मंचासीन थे। मुख्य वक्ता डॉ. शुक्ल ने कहा कि पत्रकार समाज हित में सत्य का साथ दें, लेकिन ऐसी पत्रकारिता न करें जिससे भारत का अहित हो। उन्होंने कहा कि देश में आज जातिवाद, सांप्रदायिकता सहित कई समस्याएं विस्फोटक स्थिति में है। ऐसे में सकारात्मक पत्रकारिता बहुत जरूरी है। श्री शुक्ल ने मनु स्मृति और श्रीमद् भगवत गीता का उद्धरण देते हुए कहा कि मनुष्य जन्म से शूद्र पैदा होता है। कर्म के आधार पर जाति व्यवस्था तय होती थी। उन्होंने रामायण की चौपाई का उदाहरण देते हुए कहा कि ताडऩा का अर्थ प्रताडऩा नहीं है, बल्कि देखभाल करना और विशेषरूप से ध्यान देना है। चयन समिति में शामिल दिनेश चाकणकर, प्रवीण दुबे, बलराम सोनी एवं विनय अग्रवाल को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में सरस्वती वंदना साहित्यकार करुणा सक्सेना ने की। शासकीय उमावि मॉडल डीडी नगर के गौरव तथा अलका कौरव ने गणेश वंदना पर रिदमिक योग की प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। अतिथियों का परिचय वरिष्ठ पत्रकार गोपाल लालवानी ने एवं चयन समिति का परिचय सरिता सिंह ने दिया। प्रस्तावना कार्यक्रम संयोजक राजीव अग्रवाल ने रखी। संचालन राजेश वाधवानी एवं आभार कार्यक्रम सह संयोजक रवि उपाध्याय ने व्यक्त किया। मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार हरिमोहन शर्मा ने कहा कि पत्रकारों को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि वह कैसा काम कर रहे हैं। उनकी समाज मे छवि कैसी है। इसलिए वह अपने साथियों के साथ महीने में एक बार गोष्ठी कर विमर्श करें। उन्होंने कहा कि हमें सामाजिक सरोकार की पत्रकारिता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे दीपक सचेती ने कहा कि हमें अपने अस्तित्व को पहचानकर अपने गौरवशाली इतिहास पर गर्व करना चाहिए। देश में व्याप्त सामाजिक विषमताओं को दूर करें तभी अपनी अस्मिता बची रहेगी। - श्रेष्ठ प्रवासी पत्रकार सम्मान हरीश दिवेकर (द सूत्र), - श्रेष्ठ पत्रकारिता सम्मान हरीश दुबे (स्थानीय संपादक नवभारत) - ,श्रेष्ठ संवाददाता सम्मान जोगेंद्र सेन(नई दुनिया), - श्रेष्ठ सांध्य दैनिक सम्मान बृजमोहन शर्मा(स्थानीय संपादक प्रदेश टुडे), - इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के क्षेत्र में श्रेष्ठ पत्रकारिता सम्मान सर्वेश पुरोहित(आज तक) - ,श्रेष्ठ रेडियो (एफ. एम. ) पत्रकार सम्मान सुरेन्द्र माथुर (स्टेशन हेड रेडियो चस्का), - श्रेष्ठ आंचलिक पत्रकारिता सम्मान अनिमेष शर्मा(दैनिक भास्कर), - श्रेष्ठ लघु समाचार पत्र सम्मान हरीश उपाध्याय (संपादक श्रीराम एक्सप्रेस), - श्रेष्ठ छायाकार सम्मान केदार जैन, - श्रेष्ठ महिला पत्रकार सम्मान रूपाली ठाकुर(दैनिक भास्कर), - श्रेष्ठ पत्रकारिता शिक्षक सम्मान श्याम पाठक, - श्रेष्ठ वेब पोर्टल /डिजिटल मीडिया सम्मान अजय मिश्रा (सांध्य देश), - श्रेष्ठ नागरिक पत्रकारिता सम्मान नितिन शुक्ला, - श्रेष्ठ नवोदित पत्रकार सम्मान राजेंद्र ठाकुर(पत्रिका) - शुभम चौधरी(स्वदेश) को दिया गया।
ग्वालियर। जिस तरह से त्रिलोक के पहले पत्रकार देवर्षि नारद ने लोगों की भलाई के लिए काम किया, इसी तरह से समस्याओं को उठाते हुए हमें जनकल्याणकारी पत्रकारिता करना चाहिए। हालांकि विरोधियों ने नारद मुनि के चरित्र को विकृत कर दिया था, लेकिन उनका उद्देश्य हमेशा भलाई रहा। आज पत्रकारों की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया है। पत्रकार का काम सनसनी नहीं समस्या का समाधान कराना है। यह बात उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष हिंदी साहित्य भारती डॉ. रवीन्द्र शुक्ल ने बाल भवन सभागार में आयोजित आद्य पत्रकार देवर्षि नारद जयंती पत्रकारिता सम्मान एवं संवाद कार्यक्रम में मुख्य वक्ता की आसंदी से कही। मामा माणिकचंद वाजपेयी स्मृति सेवा न्यास के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार हरिमोहन शर्मा थे। अध्यक्षता न्यास के अध्यक्ष दीपक सचेती ने की। चयन समिति के अध्यक्ष दिनेश चाकणकर एवं कार्यक्रम संयोजक राजीव अग्रवाल भी मंचासीन थे। मुख्य वक्ता डॉ. शुक्ल ने कहा कि पत्रकार समाज हित में सत्य का साथ दें, लेकिन ऐसी पत्रकारिता न करें जिससे भारत का अहित हो। उन्होंने कहा कि देश में आज जातिवाद, सांप्रदायिकता सहित कई समस्याएं विस्फोटक स्थिति में है। ऐसे में सकारात्मक पत्रकारिता बहुत जरूरी है। श्री शुक्ल ने मनु स्मृति और श्रीमद् भगवत गीता का उद्धरण देते हुए कहा कि मनुष्य जन्म से शूद्र पैदा होता है। कर्म के आधार पर जाति व्यवस्था तय होती थी। उन्होंने रामायण की चौपाई का उदाहरण देते हुए कहा कि ताडऩा का अर्थ प्रताडऩा नहीं है, बल्कि देखभाल करना और विशेषरूप से ध्यान देना है। चयन समिति में शामिल दिनेश चाकणकर, प्रवीण दुबे, बलराम सोनी एवं विनय अग्रवाल को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में सरस्वती वंदना साहित्यकार करुणा सक्सेना ने की। शासकीय उमावि मॉडल डीडी नगर के गौरव तथा अलका कौरव ने गणेश वंदना पर रिदमिक योग की प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। अतिथियों का परिचय वरिष्ठ पत्रकार गोपाल लालवानी ने एवं चयन समिति का परिचय सरिता सिंह ने दिया। प्रस्तावना कार्यक्रम संयोजक राजीव अग्रवाल ने रखी। संचालन राजेश वाधवानी एवं आभार कार्यक्रम सह संयोजक रवि उपाध्याय ने व्यक्त किया। मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार हरिमोहन शर्मा ने कहा कि पत्रकारों को आत्मनिरीक्षण करना चाहिए कि वह कैसा काम कर रहे हैं। उनकी समाज मे छवि कैसी है। इसलिए वह अपने साथियों के साथ महीने में एक बार गोष्ठी कर विमर्श करें। उन्होंने कहा कि हमें सामाजिक सरोकार की पत्रकारिता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे दीपक सचेती ने कहा कि हमें अपने अस्तित्व को पहचानकर अपने गौरवशाली इतिहास पर गर्व करना चाहिए। देश में व्याप्त सामाजिक विषमताओं को दूर करें तभी अपनी अस्मिता बची रहेगी। - श्रेष्ठ प्रवासी पत्रकार सम्मान हरीश दिवेकर , - श्रेष्ठ पत्रकारिता सम्मान हरीश दुबे - ,श्रेष्ठ संवाददाता सम्मान जोगेंद्र सेन, - श्रेष्ठ सांध्य दैनिक सम्मान बृजमोहन शर्मा, - इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के क्षेत्र में श्रेष्ठ पत्रकारिता सम्मान सर्वेश पुरोहित - ,श्रेष्ठ रेडियो पत्रकार सम्मान सुरेन्द्र माथुर , - श्रेष्ठ आंचलिक पत्रकारिता सम्मान अनिमेष शर्मा, - श्रेष्ठ लघु समाचार पत्र सम्मान हरीश उपाध्याय , - श्रेष्ठ छायाकार सम्मान केदार जैन, - श्रेष्ठ महिला पत्रकार सम्मान रूपाली ठाकुर, - श्रेष्ठ पत्रकारिता शिक्षक सम्मान श्याम पाठक, - श्रेष्ठ वेब पोर्टल /डिजिटल मीडिया सम्मान अजय मिश्रा , - श्रेष्ठ नागरिक पत्रकारिता सम्मान नितिन शुक्ला, - श्रेष्ठ नवोदित पत्रकार सम्मान राजेंद्र ठाकुर - शुभम चौधरी को दिया गया।
दिवाली (Diwali 2021) का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है, यह त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस दिन दिवाली के साथ साथ एक त्योहार मनाया जाता है, वो त्योहार नर्क चतुर्दशी (Narak Chaturdashi) जो दिवाली के दिन मनाया जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि इस त्योहार का तीसरा दिन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है जो दिवाली के रूप में जाना जाता है। दिवाली (Diwali) के दौरान लोग एक साथ प्रकाश के दीये और मीठे व्यंजनों का स्वाद लेने और भगवान से प्रार्थना करने के लिए एक साथ आते हैं। इस दिन की विभिन्न मूल कहानियां हैं जिनमें से मुख्य हैं बुराई पर अच्छाई की जीत। जहां उत्तर भगवान राम और देवी सीता की अयोध्या वापसी का जश्न मनाता है, वहीं इस दिन नरक चतुर्दशी भी मनाई जाती है। बता दें, यह त्योहार नरक चौदस या नर्क चतुर्दशी या नर्का पूजा (Narak Chaturdashi) के नाम से भी प्रसिद्ध है। बता दें कि जिस दिन श्रीकृष्ण (Shri Krishna) ने भौमासुर (Bhaumasur) का वध किया था उस दिन कार्तिक माह क चतुर्दशी थी इसलिए उसे नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi भी कहा जाता है। इस दिन श्रीकृष्ण ने भौमासुर अर्थात नरकासुर का वध किया था और उसकी कैद से लगभग 16 हजार महिलाओं को मुक्त कराया था। इसी खुशी के कारण दीप जलाकर उत्सव मनाया जाता है। इस दिन यम की पूजा की जाए तो अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिल जाती है। इसीलिए इस दिन घर के मुख्य द्वार के बांई ओर अनाज की ढेरी रखें। इस पर सरसों के तेल का एक मुखी दीपक जलाना चाहिए लेकिन दीपक की लौ दक्षिण दिशा की ओर कर दें।
दिवाली का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है, यह त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस दिन दिवाली के साथ साथ एक त्योहार मनाया जाता है, वो त्योहार नर्क चतुर्दशी जो दिवाली के दिन मनाया जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि इस त्योहार का तीसरा दिन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है जो दिवाली के रूप में जाना जाता है। दिवाली के दौरान लोग एक साथ प्रकाश के दीये और मीठे व्यंजनों का स्वाद लेने और भगवान से प्रार्थना करने के लिए एक साथ आते हैं। इस दिन की विभिन्न मूल कहानियां हैं जिनमें से मुख्य हैं बुराई पर अच्छाई की जीत। जहां उत्तर भगवान राम और देवी सीता की अयोध्या वापसी का जश्न मनाता है, वहीं इस दिन नरक चतुर्दशी भी मनाई जाती है। बता दें, यह त्योहार नरक चौदस या नर्क चतुर्दशी या नर्का पूजा के नाम से भी प्रसिद्ध है। बता दें कि जिस दिन श्रीकृष्ण ने भौमासुर का वध किया था उस दिन कार्तिक माह क चतुर्दशी थी इसलिए उसे नरक चतुर्दशी (Narak Chaturdashi भी कहा जाता है। इस दिन श्रीकृष्ण ने भौमासुर अर्थात नरकासुर का वध किया था और उसकी कैद से लगभग सोलह हजार महिलाओं को मुक्त कराया था। इसी खुशी के कारण दीप जलाकर उत्सव मनाया जाता है। इस दिन यम की पूजा की जाए तो अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिल जाती है। इसीलिए इस दिन घर के मुख्य द्वार के बांई ओर अनाज की ढेरी रखें। इस पर सरसों के तेल का एक मुखी दीपक जलाना चाहिए लेकिन दीपक की लौ दक्षिण दिशा की ओर कर दें।
- पताः 6330 पिरान - पिरानो, स्लोवेनिया; - वेबसाइटः टैक्सी-piraneze. si; - फोनः +386 51 607 333; - पर्यटन स्थलों का भ्रमणः वेनिस लॉज, लॉगजिआ, टार्टिनी हाउस, पिरान सिटी हॉल। टार्टिनी स्क्वायर वह जगह है जहां से आप नहीं जाना चाहते हैं। यह पिरान के केंद्र में स्थित है और आश्चर्य और आश्चर्य से भरा है। एक छोटे से क्षेत्र पर कब्जा कर रहा है, यह क्षेत्र मछली पकड़ने वाली नौकाओं के साथ एक पूर्व बंदरगाह है। यह स्मारकों और पैडस्टल पर स्थापित दिलचस्प है। क्षेत्र ढूंढें सरल है - बस सेंट जॉर्ज के चर्च के उत्तर-पश्चिम में जाएं। सूखे से ढके सूखे और गर्मी के कारण बंदरगाह शहर की केंद्रीय जगह में बदल गया था। ऐसे अतीत में, पर्यटकों को संकेत नहीं मिलेगा, क्योंकि वर्तमान समय में सफाई पर वर्ग पर शासन होता है, हर इंच को सोचा जाता है और भू-भाग लिया जाता है। प्रवेश द्वार को दो पैडस्टल द्वारा पहचानना आसान होता है, जिसके लिए फ्लैगपोल संलग्न होते हैं। वे शहर के संरक्षक संत - सेंट जॉर्ज और सेंट मार्क के पंख वाले शेर के सम्मान में बने हैं। दोनों पैडस्टल 15 वीं शताब्दी में वापस आते हैं। उनमें से प्रत्येक पर ध्वज विशेष दिनों में उगता है। सेंट जॉर्ज को दर्शाते हुए, शहर का झंडा उगता है, और दूसरी तरफ - वेनिसियन ध्वज। टार्टिनी स्क्वायर का नाम प्रसिद्ध वायलिनिस्ट और संगीतकार के सम्मान में रखा गया था। इसलिए, पर्यटक सफेद संगमरमर के अंडाकार प्लेटफॉर्म को देख सकते हैं, जिस पर जिएसेपे टार्टिनी की मूर्ति बढ़ जाती है। यह स्थान एक समृद्ध इतिहास, शानदार वास्तुशिल्प ensembles के साथ पर्यटकों को आकर्षित करता है। वर्ग पर दिलचस्प इमारतें हैं जिन्हें न केवल बाहर से, बल्कि अंदर से भी निरीक्षण किया जाना चाहिए, उदाहरण के लिए, वायलिनिस्ट का घर, फिर सेंट पीटर का चर्च। इसकी दीवारें दुनिया भर से प्रतिभाशाली कलाकारों के murals सजाने। अन्य दिलचस्प इमारतों में से निम्नलिखित को ध्यान देने योग्य हैः - वर्ग के उत्तरी भाग में एक विनीशियन घर है , जो अपने प्यारे के लिए एक अमीर व्यापारी द्वारा बनाया गया है। उनके प्यार के बारे में बहुत सारी अफवाहें थीं, जो प्रेमी को बहुत परेशान करती थीं। चूंकि निष्क्रिय अटकलों को वितरित करना बंद करना असंभव था, इसलिए व्यापारी ने गॉथिक शैली में एक सुंदर घर बनाया। अपने मुखौटे पर उन्होंने लैटिन में एक शिलालेख के साथ बेस-रिलीफ करने का आदेश दियाः "उन्हें जितना चाहें उतना बोलने दें। " - वर्ग का एक और दिलचस्प स्थान Loggia है , जहां पुराने समय में शहर के सबसे अमीर लोगों की बैठक आयोजित की गई थी। अब इसमें एक कला गैलरी है, जो पिरान के सबसे अधिक देखी जाने वाली आकर्षणों में से एक है। - स्क्वायर की सबसे पुरानी इमारत गॉथिक शैली में टार्टिनी हाउस है। इसकी बहाली 1 9 85 से 1 99 1 की अवधि के दौरान की गई थी। इमारत इतालवी डायस्पोरा द्वारा संचालित है। ग्राउंड फ्लोर पर जिएसेपे टार्टिनी का घर-संग्रहालय है, जिसका प्रदर्शनी स्पष्ट रूप से दिखाता है कि महान संगीतकार कैसे रहते थे और काम करते थे। - स्क्वायर में पिरान सिटी हॉल भी है , जो एक सुंदर तीन मंजिला हवेली में आधा कॉलम है। इसका मुखौटा सेंट मार्क के शेर से सजी हुई है। टार्टिनी स्क्वायर अपने कैफे और दुकानों के लिए भी प्रसिद्ध है, मांस व्यंजनों और मिठाई, हस्तनिर्मित उत्पादों के साथ खुले काउंटर। वहां कैसे पहुंचे? टार्टिनी स्क्वायर शहर का दिल है, इसलिए सभी मार्ग इसका नेतृत्व करते हैं, आप शहर के किसी भी हिस्से से सार्वजनिक परिवहन से प्रस्थान कर सकते हैं।
- पताः छः हज़ार तीन सौ तीस पिरान - पिरानो, स्लोवेनिया; - वेबसाइटः टैक्सी-piraneze. si; - फोनः +तीन सौ छियासी इक्यावन छः सौ सात तीन सौ तैंतीस; - पर्यटन स्थलों का भ्रमणः वेनिस लॉज, लॉगजिआ, टार्टिनी हाउस, पिरान सिटी हॉल। टार्टिनी स्क्वायर वह जगह है जहां से आप नहीं जाना चाहते हैं। यह पिरान के केंद्र में स्थित है और आश्चर्य और आश्चर्य से भरा है। एक छोटे से क्षेत्र पर कब्जा कर रहा है, यह क्षेत्र मछली पकड़ने वाली नौकाओं के साथ एक पूर्व बंदरगाह है। यह स्मारकों और पैडस्टल पर स्थापित दिलचस्प है। क्षेत्र ढूंढें सरल है - बस सेंट जॉर्ज के चर्च के उत्तर-पश्चिम में जाएं। सूखे से ढके सूखे और गर्मी के कारण बंदरगाह शहर की केंद्रीय जगह में बदल गया था। ऐसे अतीत में, पर्यटकों को संकेत नहीं मिलेगा, क्योंकि वर्तमान समय में सफाई पर वर्ग पर शासन होता है, हर इंच को सोचा जाता है और भू-भाग लिया जाता है। प्रवेश द्वार को दो पैडस्टल द्वारा पहचानना आसान होता है, जिसके लिए फ्लैगपोल संलग्न होते हैं। वे शहर के संरक्षक संत - सेंट जॉर्ज और सेंट मार्क के पंख वाले शेर के सम्मान में बने हैं। दोनों पैडस्टल पंद्रह वीं शताब्दी में वापस आते हैं। उनमें से प्रत्येक पर ध्वज विशेष दिनों में उगता है। सेंट जॉर्ज को दर्शाते हुए, शहर का झंडा उगता है, और दूसरी तरफ - वेनिसियन ध्वज। टार्टिनी स्क्वायर का नाम प्रसिद्ध वायलिनिस्ट और संगीतकार के सम्मान में रखा गया था। इसलिए, पर्यटक सफेद संगमरमर के अंडाकार प्लेटफॉर्म को देख सकते हैं, जिस पर जिएसेपे टार्टिनी की मूर्ति बढ़ जाती है। यह स्थान एक समृद्ध इतिहास, शानदार वास्तुशिल्प ensembles के साथ पर्यटकों को आकर्षित करता है। वर्ग पर दिलचस्प इमारतें हैं जिन्हें न केवल बाहर से, बल्कि अंदर से भी निरीक्षण किया जाना चाहिए, उदाहरण के लिए, वायलिनिस्ट का घर, फिर सेंट पीटर का चर्च। इसकी दीवारें दुनिया भर से प्रतिभाशाली कलाकारों के murals सजाने। अन्य दिलचस्प इमारतों में से निम्नलिखित को ध्यान देने योग्य हैः - वर्ग के उत्तरी भाग में एक विनीशियन घर है , जो अपने प्यारे के लिए एक अमीर व्यापारी द्वारा बनाया गया है। उनके प्यार के बारे में बहुत सारी अफवाहें थीं, जो प्रेमी को बहुत परेशान करती थीं। चूंकि निष्क्रिय अटकलों को वितरित करना बंद करना असंभव था, इसलिए व्यापारी ने गॉथिक शैली में एक सुंदर घर बनाया। अपने मुखौटे पर उन्होंने लैटिन में एक शिलालेख के साथ बेस-रिलीफ करने का आदेश दियाः "उन्हें जितना चाहें उतना बोलने दें। " - वर्ग का एक और दिलचस्प स्थान Loggia है , जहां पुराने समय में शहर के सबसे अमीर लोगों की बैठक आयोजित की गई थी। अब इसमें एक कला गैलरी है, जो पिरान के सबसे अधिक देखी जाने वाली आकर्षणों में से एक है। - स्क्वायर की सबसे पुरानी इमारत गॉथिक शैली में टार्टिनी हाउस है। इसकी बहाली एक नौ पचासी से एक निन्यानवे एक की अवधि के दौरान की गई थी। इमारत इतालवी डायस्पोरा द्वारा संचालित है। ग्राउंड फ्लोर पर जिएसेपे टार्टिनी का घर-संग्रहालय है, जिसका प्रदर्शनी स्पष्ट रूप से दिखाता है कि महान संगीतकार कैसे रहते थे और काम करते थे। - स्क्वायर में पिरान सिटी हॉल भी है , जो एक सुंदर तीन मंजिला हवेली में आधा कॉलम है। इसका मुखौटा सेंट मार्क के शेर से सजी हुई है। टार्टिनी स्क्वायर अपने कैफे और दुकानों के लिए भी प्रसिद्ध है, मांस व्यंजनों और मिठाई, हस्तनिर्मित उत्पादों के साथ खुले काउंटर। वहां कैसे पहुंचे? टार्टिनी स्क्वायर शहर का दिल है, इसलिए सभी मार्ग इसका नेतृत्व करते हैं, आप शहर के किसी भी हिस्से से सार्वजनिक परिवहन से प्रस्थान कर सकते हैं।
किरण ४ वह मेरे पैर दावने लगा और रातके ३ बजे तक दाबता रहा । तीन बजे बोला - पण्डितजी, उठिये आपको यहाँ गाड़ी बदलनी है । हम लोग धनकी चिन्तामे रात दिन व्यग्र होरहे हैं पर व्यग्र होनेमे क्या धरा ? धन रखते हो तो उसकी रक्षाके लिये तैयार रहो। लोग कहते है कि दूसरे लोग भीतर ही भीतर पहलेसे तैयारी करते रहे। अरे तुम्हारे दादाको किसने रोक दिया था ? जैन धर्म यह कब बतलाता है कि तुम नपुंसक बनकर रहो । लोग कहते है कि जैनधर्मने भारतको गारत कर दिया। रं जैनधर्मन भारतको गारत नहीं कर दिया। जबसे लोगोंने जैनधर्म छोड़ा तबसे गारत हो गये । जैनधर्म तो प्राणीमात्रका उपकार चाहता है वह किसीका भी बुरा नहीं सोचता। वहाँ तो यही उपदेश है 'सर्वे सन्तु निरामया" सब निरामय नीरोग रहें । 'नम सर्वप्रजानां' मारी प्रजाका कल्याण हो । जैन"तीर्थकराने छह खण्डकी पृथिवीका राज्य किया, मां क्या कायर बनकर किया ? नपुंसक बनकर किया ? नहीं, जैनक समान तो कोई वीर हो नहीं सकता। उसे कोई घानीमे पल है तो भी अपने आत्मामे च्युत नहीं होता। जिन तो एक आत्मा विशेष का नाम है । जिसने रागादि शत्रुओंको जीन लिया वह जिन है। उसने जिस धर्मका उपदेश दिया वह जैनधर्म है। इसे कायरोंका धर्म कौन कह सकता है ? आज त्याग-धर्म है । मै धनके त्यागका उपदेश नहीं देता । और मेरी समझमे जो धनके त्यागका उपदेश देता है वह वक्ता बेवकूफ है। धन तुम्हारा हूँ ही कहाँ ? वह तो स्पष्ट जुदा पदार्थ है। यह चादर जो मेरे शरीग्पर है न मेरी है न मेरे बाप की है और न मेरी मात पेरीकी है। वह द्रव्य दुसरा है और मैं द्रव्य दूसरा । एक द्रव्यका चतुष्टय जुदा, दूसरे द्रव्यका चतुष्टय जुदा । आप पदार्थको जानते हैं। क्या पदार्थ जाता है?आप पेडा खाते है, मीठा लगता है क्या मीठा रस आपके आत्मामे घुस जाता है ? औरत बड़ी सफाई के साथ रोटी बनाती है क्या उसके हाथ या उसकी अङ्गुलियाँ रोटीरूप होजाती हैं ? कुम्हार मिट्टीका घड़ा बनाता है क्या उसके हाथ-पैर आदि घड़ारूप होजाते है ? नहीं, एक द्रव्यका दूसरे द्रव्यमे प्रवेश त्रिकालमे भी नहीं हो सकता। जब दूसरा द्रव्य हमारा हं ही नही तब उसका त्याग करना कैसा ? यहाँ त्यागसे अर्थ है पर पदार्थोंमे आत्मबुद्धिका छोड़ना । धनका जोड़ना बुरा नही । आपके पास जितना धन है उससे चौगुना अपनी तिजोरियोंम भरलो पर उसमे जो आत्मबुद्धि है उसे छोड दी। जब तक हम किमीको अपना समझते रहेंगे तब तक उसके सुख-दुम्बके कारणों से हम सुम्बीदुग्बी होते रहेंगे । यह नरेन्द्र बैठा है इसे यदि हम अपना मानेगे तो इसपर आपत्ति आनेपर हम स्वय दग्बी हो उठेंगे । इसीलिये तो आचार्य कहते हैं कि आत्मानिरिक्ति किसी भी पदार्थको अपना नही समझो । जिस समय आत्मा ही आत्मबुद्धि रह जायगी उसी समय आप सुखी हो सकेंगे, यह निश्रय है । जैनधर्मका उपदेश मोह घटाने के लिये ही है । आपके त्यागसे किसी पदार्थका त्याग नहीं हो सकता त्याग करके आप उस पदार्थकी सत्ता दुनिया से मिटा नमे समर्थ नहीं है। आप क्या कोई भी समर्थ नही है। उससे केवल मोह ही छोड़ा जा सकता है। जब तक अपने हृदय मे मोह रहता है तब तक ही इस परिग्रहकी चिन्ता रहती हैं। मोह निकल जानेपर कोई भी इसे लेजाओ, इसका कुछ भी होता रहे, इसका विकल्प रक्षमात्र भी नहीं होता। कल आपने वदन्त चक्रवर्तीका कथानक सुना था। जब उसका माह दूर हुआ तब उसके मनमे यह विकल्प नहीं आयकि हमारे इस विशाल राज्यको कौन सँभालेगा ? लड़कोंको राज्य देना चाहा, पर जब उन्होंने लेने से इकार कर दिया तब अनुन्धरीके छह माहके पडरीकको राज्य देकर जङ्गलमे चला गया। निर्माह दशाका कितना अच्छा उदाहरण हैं । चक्रवर्तीक दीक्षा लेनेक बाद उनकी श्री लक्ष्मीमती अपने जमाई वत्रजघको जो कि भगवान आदिनाथ के जीव थे, पत्र लिम्बनी है कि 'पति और पुत्र सभी माधु हागये हैं। जिसपर
किरण चार वह मेरे पैर दावने लगा और रातके तीन बजे तक दाबता रहा । तीन बजे बोला - पण्डितजी, उठिये आपको यहाँ गाड़ी बदलनी है । हम लोग धनकी चिन्तामे रात दिन व्यग्र होरहे हैं पर व्यग्र होनेमे क्या धरा ? धन रखते हो तो उसकी रक्षाके लिये तैयार रहो। लोग कहते है कि दूसरे लोग भीतर ही भीतर पहलेसे तैयारी करते रहे। अरे तुम्हारे दादाको किसने रोक दिया था ? जैन धर्म यह कब बतलाता है कि तुम नपुंसक बनकर रहो । लोग कहते है कि जैनधर्मने भारतको गारत कर दिया। रं जैनधर्मन भारतको गारत नहीं कर दिया। जबसे लोगोंने जैनधर्म छोड़ा तबसे गारत हो गये । जैनधर्म तो प्राणीमात्रका उपकार चाहता है वह किसीका भी बुरा नहीं सोचता। वहाँ तो यही उपदेश है 'सर्वे सन्तु निरामया" सब निरामय नीरोग रहें । 'नम सर्वप्रजानां' मारी प्रजाका कल्याण हो । जैन"तीर्थकराने छह खण्डकी पृथिवीका राज्य किया, मां क्या कायर बनकर किया ? नपुंसक बनकर किया ? नहीं, जैनक समान तो कोई वीर हो नहीं सकता। उसे कोई घानीमे पल है तो भी अपने आत्मामे च्युत नहीं होता। जिन तो एक आत्मा विशेष का नाम है । जिसने रागादि शत्रुओंको जीन लिया वह जिन है। उसने जिस धर्मका उपदेश दिया वह जैनधर्म है। इसे कायरोंका धर्म कौन कह सकता है ? आज त्याग-धर्म है । मै धनके त्यागका उपदेश नहीं देता । और मेरी समझमे जो धनके त्यागका उपदेश देता है वह वक्ता बेवकूफ है। धन तुम्हारा हूँ ही कहाँ ? वह तो स्पष्ट जुदा पदार्थ है। यह चादर जो मेरे शरीग्पर है न मेरी है न मेरे बाप की है और न मेरी मात पेरीकी है। वह द्रव्य दुसरा है और मैं द्रव्य दूसरा । एक द्रव्यका चतुष्टय जुदा, दूसरे द्रव्यका चतुष्टय जुदा । आप पदार्थको जानते हैं। क्या पदार्थ जाता है?आप पेडा खाते है, मीठा लगता है क्या मीठा रस आपके आत्मामे घुस जाता है ? औरत बड़ी सफाई के साथ रोटी बनाती है क्या उसके हाथ या उसकी अङ्गुलियाँ रोटीरूप होजाती हैं ? कुम्हार मिट्टीका घड़ा बनाता है क्या उसके हाथ-पैर आदि घड़ारूप होजाते है ? नहीं, एक द्रव्यका दूसरे द्रव्यमे प्रवेश त्रिकालमे भी नहीं हो सकता। जब दूसरा द्रव्य हमारा हं ही नही तब उसका त्याग करना कैसा ? यहाँ त्यागसे अर्थ है पर पदार्थोंमे आत्मबुद्धिका छोड़ना । धनका जोड़ना बुरा नही । आपके पास जितना धन है उससे चौगुना अपनी तिजोरियोंम भरलो पर उसमे जो आत्मबुद्धि है उसे छोड दी। जब तक हम किमीको अपना समझते रहेंगे तब तक उसके सुख-दुम्बके कारणों से हम सुम्बीदुग्बी होते रहेंगे । यह नरेन्द्र बैठा है इसे यदि हम अपना मानेगे तो इसपर आपत्ति आनेपर हम स्वय दग्बी हो उठेंगे । इसीलिये तो आचार्य कहते हैं कि आत्मानिरिक्ति किसी भी पदार्थको अपना नही समझो । जिस समय आत्मा ही आत्मबुद्धि रह जायगी उसी समय आप सुखी हो सकेंगे, यह निश्रय है । जैनधर्मका उपदेश मोह घटाने के लिये ही है । आपके त्यागसे किसी पदार्थका त्याग नहीं हो सकता त्याग करके आप उस पदार्थकी सत्ता दुनिया से मिटा नमे समर्थ नहीं है। आप क्या कोई भी समर्थ नही है। उससे केवल मोह ही छोड़ा जा सकता है। जब तक अपने हृदय मे मोह रहता है तब तक ही इस परिग्रहकी चिन्ता रहती हैं। मोह निकल जानेपर कोई भी इसे लेजाओ, इसका कुछ भी होता रहे, इसका विकल्प रक्षमात्र भी नहीं होता। कल आपने वदन्त चक्रवर्तीका कथानक सुना था। जब उसका माह दूर हुआ तब उसके मनमे यह विकल्प नहीं आयकि हमारे इस विशाल राज्यको कौन सँभालेगा ? लड़कोंको राज्य देना चाहा, पर जब उन्होंने लेने से इकार कर दिया तब अनुन्धरीके छह माहके पडरीकको राज्य देकर जङ्गलमे चला गया। निर्माह दशाका कितना अच्छा उदाहरण हैं । चक्रवर्तीक दीक्षा लेनेक बाद उनकी श्री लक्ष्मीमती अपने जमाई वत्रजघको जो कि भगवान आदिनाथ के जीव थे, पत्र लिम्बनी है कि 'पति और पुत्र सभी माधु हागये हैं। जिसपर
बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा इन दिनों अपनी लेटेस्ट तस्वीर को लेकर चर्चा में बनी हुईं हैं। परिणीति चोपड़ा ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पर अपनी एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें वह समंदर किनारे बैठी नजर आई आ रहीं हैं। इस फोटो पर कई सितारे कमेंट कर रहे हैं। वहीं इस फोटो को देखकर उनकी बहन और एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा को भी जलन हो गई। परिणीति की फोटो देख प्रियंका को हुई जलनः परिणीति चोपड़ा ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पर अपनी एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें वह समंदर किनारे बैठी नजर आई आ रहीं हैं। इस तस्वीर में उन्होंने ब्लैक बिकिनी पहनी है, जिसमें उनकी फिट बॉडी देखकर फैंस इम्प्रेस हुए। फोटो को शेयर करते हुए परिणीति ने कैप्शन में लिखा है, "इस फोटो से पहले मैं प्रणायाम कर रही थी, ओके ये झूठ है। " जहां सब परिणीति की तारीफ कर रहे थे, वहीं प्रियंका ने कमेंट करते हुए कहा, "मुझे बहुत जलन हो रही है। " प्रियंका के अलावा अन्य सेलेब्स ने भी परिणीति की पोस्ट पर कॉमेंट किए हैं। इन दिनों तुर्की में हैं परिणीतिः हाल ही में परिणीति चोपड़ा से सोशल मीडिया पर सवाल पूछे गए। एक फैन ने पूछा कि, वह कहां हैं जहां से वह इतनी खूबसूरत फोटोज शेयर कर रही हैं, तो उन्होंने बताया वह तुर्की में हैं। परिणीति ने ये भी बताया कि, मैं 1 मार्च से देश से बाहर हूं। मैं खुशनसीब हूं कि, मैं ऐसे मुश्किल समय में फिर से ट्रैवल कर पा रही हूं। कई लोग भारत में ट्रैवल नहीं कर पा रहे हैं, तो मैं इस ब्लेसिंग को मजाक में नहीं लेना चाहती हूं। परिणीति चोपड़ा की आने वाली फिल्मः वहीं अगर परिणीति चोपड़ा वर्क फ्रंट की बात करें, तो परिणीति की हाल ही में तीन फिल्में रिलीज हुई हैं, जिसे दर्शकों से अच्छा रिस्पांस मिला है। एक्ट्रेस की फिल्म 'संदीप और पिंकी फरार', 'सायना' और 'द गर्ल ऑन द ट्रेन' OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई हैं। फिलहाल तो उनकी फिल्में दर्शकों के दिलों पर और बॉक्स ऑफिस में कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकी। वहीं अगर परिणीति चोपड़ा की आने वाली फिल्म की बता करें, तो वो जल्द ही फिल्म 'एनिमल' में एक्टर रणबीर कपूर के साथ नजर आएंगी। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा इन दिनों अपनी लेटेस्ट तस्वीर को लेकर चर्चा में बनी हुईं हैं। परिणीति चोपड़ा ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पर अपनी एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें वह समंदर किनारे बैठी नजर आई आ रहीं हैं। इस फोटो पर कई सितारे कमेंट कर रहे हैं। वहीं इस फोटो को देखकर उनकी बहन और एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा को भी जलन हो गई। परिणीति की फोटो देख प्रियंका को हुई जलनः परिणीति चोपड़ा ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया पर अपनी एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें वह समंदर किनारे बैठी नजर आई आ रहीं हैं। इस तस्वीर में उन्होंने ब्लैक बिकिनी पहनी है, जिसमें उनकी फिट बॉडी देखकर फैंस इम्प्रेस हुए। फोटो को शेयर करते हुए परिणीति ने कैप्शन में लिखा है, "इस फोटो से पहले मैं प्रणायाम कर रही थी, ओके ये झूठ है। " जहां सब परिणीति की तारीफ कर रहे थे, वहीं प्रियंका ने कमेंट करते हुए कहा, "मुझे बहुत जलन हो रही है। " प्रियंका के अलावा अन्य सेलेब्स ने भी परिणीति की पोस्ट पर कॉमेंट किए हैं। इन दिनों तुर्की में हैं परिणीतिः हाल ही में परिणीति चोपड़ा से सोशल मीडिया पर सवाल पूछे गए। एक फैन ने पूछा कि, वह कहां हैं जहां से वह इतनी खूबसूरत फोटोज शेयर कर रही हैं, तो उन्होंने बताया वह तुर्की में हैं। परिणीति ने ये भी बताया कि, मैं एक मार्च से देश से बाहर हूं। मैं खुशनसीब हूं कि, मैं ऐसे मुश्किल समय में फिर से ट्रैवल कर पा रही हूं। कई लोग भारत में ट्रैवल नहीं कर पा रहे हैं, तो मैं इस ब्लेसिंग को मजाक में नहीं लेना चाहती हूं। परिणीति चोपड़ा की आने वाली फिल्मः वहीं अगर परिणीति चोपड़ा वर्क फ्रंट की बात करें, तो परिणीति की हाल ही में तीन फिल्में रिलीज हुई हैं, जिसे दर्शकों से अच्छा रिस्पांस मिला है। एक्ट्रेस की फिल्म 'संदीप और पिंकी फरार', 'सायना' और 'द गर्ल ऑन द ट्रेन' OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई हैं। फिलहाल तो उनकी फिल्में दर्शकों के दिलों पर और बॉक्स ऑफिस में कुछ खास कमाल नहीं दिखा सकी। वहीं अगर परिणीति चोपड़ा की आने वाली फिल्म की बता करें, तो वो जल्द ही फिल्म 'एनिमल' में एक्टर रणबीर कपूर के साथ नजर आएंगी। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
China CPC 2022 चीन में राष्ट्रपति को दो कार्यकाल की ही व्यवस्था थी जिसे वर्ष 2018 में संशोधित कर तीसरा कार्यकाल भी जोड़ने का प्रस्ताव पारित किया गया। बता दें कि चिनफिंग को चीन में माओ त्से तुंग के बाद सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता है। बीजिंग, एजेंसी। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग का एक बार फिर देश का राष्ट्रपति बनना तय माना जा रहा है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन भी किया। इस शक्ति-प्रदर्शन का नजारा उस समय देखने को मिला, जब बीजिंग की सड़कों पर 100 फीट के दायरे में सुरक्षा स्वयंसेवकों की तैनाती की गई। दरअसल, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का 20वां अधिवेशन रविवार से शुरू हो गया है। जो चीन की राजधानी बीजिंग में 22 अक्टूबर तक चलेगा। हालांकि, देश में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को दबाने के लिए सुरक्षा स्वयंसेवकों को तैनात किया गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पूरे बीजिंग को किले में तबदील कर दिया गया है। ताकि कम्युनिस्ट पार्टी के 20वें अधिवेशन के दौरान किसी भी तरह की कोई परेशानी उत्पन्न नहीं हो सके। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कम्युनिस्ट पार्टी के 20वें अधिवेशन के कारण अधिकारियों ने ऐसे किसी भी व्यक्ति को शहर में प्रवेश करने से रोक दिया है, जिसने एक भी बार कोरोना वायरस संक्रमण वाले क्षेत्र का दौरा किया है। इसके अलावा अधिकारियों को ऐसे लोगों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। जो सरकार के खिलाफ किसी भी तरह के षड़यंत्र का हिस्सा हैं। साथ ही अधिकारियों को मेल करने वाले सभी लोगों की आईडी की जांच करने को कहा गया है। ली वेन्गे नाम के एक शख्स ने कहा कि जब तक ये बैठक खत्म नहीं हो जाती, तब तक इन सुरक्षा स्वंयसेवकों की तैनाती यहां रहेगी। उन्होंने बताया की महज 100 फीट या उससे अधिक दूरी पर इन सुरक्षा स्वंयसेवकों की तैनाती की गई है। चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि पिछले महीने अधिकारियों ने जून के अंत तक देश भर में 14 लाख (1. 4 मिलियन) से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। जिससे कम्युनिस्ट पार्टी के 20वें अधिवेशन को सफलतापूर्वक आयोजित करने में मदद मिल रही है। उल्लेखनीय है कि हर पांच वर्ष में होने वाले इस सम्मेलन को सीसीपी की कांग्रेस कहा जाता है। वैश्विक राजनीतिक, कूटनीतिक और सामरिक हितों को चीन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। 16 अक्टूबर से एक सप्ताह के लिए पार्टी के लगभग 2,300 प्रतिनिधि बीजिंग के ग्रेट हाल आफ पीपुल में एकत्र होंगे। इनमें से करीब 200 को कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के लिए चुना जाएगा। यही केंद्रीय समिति कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो के लिए 25 सदस्य चुनेगी। पोलित ब्यूरो द्वारा पोलित ब्यूरो स्थायी समिति का गठन किया जाता है। यह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की सबसे शक्तिशाली इकाई है।
China CPC दो हज़ार बाईस चीन में राष्ट्रपति को दो कार्यकाल की ही व्यवस्था थी जिसे वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में संशोधित कर तीसरा कार्यकाल भी जोड़ने का प्रस्ताव पारित किया गया। बता दें कि चिनफिंग को चीन में माओ त्से तुंग के बाद सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता है। बीजिंग, एजेंसी। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग का एक बार फिर देश का राष्ट्रपति बनना तय माना जा रहा है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन भी किया। इस शक्ति-प्रदर्शन का नजारा उस समय देखने को मिला, जब बीजिंग की सड़कों पर एक सौ फीट के दायरे में सुरक्षा स्वयंसेवकों की तैनाती की गई। दरअसल, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का बीसवां अधिवेशन रविवार से शुरू हो गया है। जो चीन की राजधानी बीजिंग में बाईस अक्टूबर तक चलेगा। हालांकि, देश में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों को दबाने के लिए सुरक्षा स्वयंसेवकों को तैनात किया गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पूरे बीजिंग को किले में तबदील कर दिया गया है। ताकि कम्युनिस्ट पार्टी के बीसवें अधिवेशन के दौरान किसी भी तरह की कोई परेशानी उत्पन्न नहीं हो सके। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कम्युनिस्ट पार्टी के बीसवें अधिवेशन के कारण अधिकारियों ने ऐसे किसी भी व्यक्ति को शहर में प्रवेश करने से रोक दिया है, जिसने एक भी बार कोरोना वायरस संक्रमण वाले क्षेत्र का दौरा किया है। इसके अलावा अधिकारियों को ऐसे लोगों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। जो सरकार के खिलाफ किसी भी तरह के षड़यंत्र का हिस्सा हैं। साथ ही अधिकारियों को मेल करने वाले सभी लोगों की आईडी की जांच करने को कहा गया है। ली वेन्गे नाम के एक शख्स ने कहा कि जब तक ये बैठक खत्म नहीं हो जाती, तब तक इन सुरक्षा स्वंयसेवकों की तैनाती यहां रहेगी। उन्होंने बताया की महज एक सौ फीट या उससे अधिक दूरी पर इन सुरक्षा स्वंयसेवकों की तैनाती की गई है। चीन के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि पिछले महीने अधिकारियों ने जून के अंत तक देश भर में चौदह लाख से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। जिससे कम्युनिस्ट पार्टी के बीसवें अधिवेशन को सफलतापूर्वक आयोजित करने में मदद मिल रही है। उल्लेखनीय है कि हर पांच वर्ष में होने वाले इस सम्मेलन को सीसीपी की कांग्रेस कहा जाता है। वैश्विक राजनीतिक, कूटनीतिक और सामरिक हितों को चीन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। सोलह अक्टूबर से एक सप्ताह के लिए पार्टी के लगभग दो,तीन सौ प्रतिनिधि बीजिंग के ग्रेट हाल आफ पीपुल में एकत्र होंगे। इनमें से करीब दो सौ को कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के लिए चुना जाएगा। यही केंद्रीय समिति कम्युनिस्ट पार्टी के पोलित ब्यूरो के लिए पच्चीस सदस्य चुनेगी। पोलित ब्यूरो द्वारा पोलित ब्यूरो स्थायी समिति का गठन किया जाता है। यह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की सबसे शक्तिशाली इकाई है।
वाराणसीः वराणसी की ज्ञानवापी में पूजा के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 21 जुलाई को सुनवाई होनी है, ये याचिका माँ श्रृंगार गौरी मामले में याचिकाकर्ता महिलाओं ने दाखिल की है। याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि ज्ञानवापी परिसर में हुए सर्वे को चुनौती देने वाली अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमिटी की याचिका पर 21 जुलाई को सुनवाई होनी है। ऐसे में मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले को जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और पीएस नरसिम्हन की बेंच में सुनवाई के लिए लिस्ट कर दिया है। ज्ञानवापी को लेकर इस वक्त वाराणसी के जिला जज भी सुनवाई कर रहे हैं, वही दूसरी तरफ हिंदू पक्ष पूजा करने के संवैधानिक अधिकार के तहत सावन के महीने में ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की पूजा की मांग कर रहा है। इस याचिका मुख्य रूप से तीन मांग उठाई गई हैं। जिसका मकसद श्रावण मास में भगवान शिव के भक्तों की आस्था को ध्यान में रखते हुए शिवलिंग दर्शन की इच्छा को पूरा किया जा सके। 1. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराए जाने का आदेश दिया जाए ये आदेश प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत दिया जाए. याचिका में दलील दी गई है कि कार्बन डेटिंग से पता चलेगा कि शिवलिंग कितना प्राचीन है। 2. इसके साथ ही याचिका में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को शिवलिंग मिलने वाले स्थान का उचित सर्वेक्षण का आदेश देने या फिर जीपीआर यानी ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार सिस्टम के जरिए भूमिगत परिस्थिति का पता लगाने का आदेश देने की मांग की गई हैं। ये भी कहा गया है कि अगर उस जगह के नीचे किसी तरह के निर्माण का पता लगाने के लिए खुदाई की जरूरत हो तो वो भी करवाई जाए। 3. याचिका में तीसरी मांग है कि शिवभक्तों की आसानी के लिए 16 मई के कोर्ट कमिश्नर सर्वे में सामने आए शिवलिंगम के दर्शन के लिए लाइन स्ट्रीमिंग की व्यवस्था की जाए और इसका सजीव प्रसारण काशी विश्वनाथ ट्रस्ट की वेबसाइट पर किया जाए। इससे भक्त शिवलिंग से 83 फीट की दूरी पर मौजूद नंदी के पास खड़े होकर वर्चुअल दर्शन कर सकें। Times Now Navbharat पर पढ़ें India News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
वाराणसीः वराणसी की ज्ञानवापी में पूजा के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट में इक्कीस जुलाई को सुनवाई होनी है, ये याचिका माँ श्रृंगार गौरी मामले में याचिकाकर्ता महिलाओं ने दाखिल की है। याचिकाकर्ता के वकील विष्णु शंकर जैन ने सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी कि ज्ञानवापी परिसर में हुए सर्वे को चुनौती देने वाली अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमिटी की याचिका पर इक्कीस जुलाई को सुनवाई होनी है। ऐसे में मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले को जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और पीएस नरसिम्हन की बेंच में सुनवाई के लिए लिस्ट कर दिया है। ज्ञानवापी को लेकर इस वक्त वाराणसी के जिला जज भी सुनवाई कर रहे हैं, वही दूसरी तरफ हिंदू पक्ष पूजा करने के संवैधानिक अधिकार के तहत सावन के महीने में ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की पूजा की मांग कर रहा है। इस याचिका मुख्य रूप से तीन मांग उठाई गई हैं। जिसका मकसद श्रावण मास में भगवान शिव के भक्तों की आस्था को ध्यान में रखते हुए शिवलिंग दर्शन की इच्छा को पूरा किया जा सके। एक. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग कराए जाने का आदेश दिया जाए ये आदेश प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन के तहत दिया जाए. याचिका में दलील दी गई है कि कार्बन डेटिंग से पता चलेगा कि शिवलिंग कितना प्राचीन है। दो. इसके साथ ही याचिका में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को शिवलिंग मिलने वाले स्थान का उचित सर्वेक्षण का आदेश देने या फिर जीपीआर यानी ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार सिस्टम के जरिए भूमिगत परिस्थिति का पता लगाने का आदेश देने की मांग की गई हैं। ये भी कहा गया है कि अगर उस जगह के नीचे किसी तरह के निर्माण का पता लगाने के लिए खुदाई की जरूरत हो तो वो भी करवाई जाए। तीन. याचिका में तीसरी मांग है कि शिवभक्तों की आसानी के लिए सोलह मई के कोर्ट कमिश्नर सर्वे में सामने आए शिवलिंगम के दर्शन के लिए लाइन स्ट्रीमिंग की व्यवस्था की जाए और इसका सजीव प्रसारण काशी विश्वनाथ ट्रस्ट की वेबसाइट पर किया जाए। इससे भक्त शिवलिंग से तिरासी फीट की दूरी पर मौजूद नंदी के पास खड़े होकर वर्चुअल दर्शन कर सकें। Times Now Navbharat पर पढ़ें India News in Hindi, साथ ही ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें ।
विभाजन से पहले का सामाजिक और मानसिक वातावरण, फिर विभाजन के बाद का वातावरण, दंगों, साम्प्रदायिकता और साम्प्रदायिक दंगों में उलझी हुई हिन्दू-मुस्लिम राजनीति - इन सब की तरफ़ 'मक़्तल' की कहानियों में कहीं स्पष्ट तो कहीं धुँधले इशारे मिलते हैं।...मंटो के अपने सरोकार राजनीति और अराजनीतिक के फेर में पड़ने की बजाय अपने गहरे मानव-प्रेम और नैतिक क्षेत्र के माध्यम से एक विशिष्ट-बोध को अभिव्यक्त करते हैं। मंटो हर यथार्थ को बिना किसी फेर-बदल के एक नया यथार्थ बना देते हैं।...ब्रिटिश-भारत के अंतिम चरण, फिर स्वतंत्रता, विभाजन और दंगों की भयावहता और उस पूरे युग के त्रासद तत्वों का प्रेक्षण मंटो ने इतिहास की प्रयोगशाला के रूप में नहीं किया था।...कोई भी राजनीतिक घटना मंटो के लिए केवल राजनीतिक नहीं थी। मंटो ने मानवीय-अस्तित्व और उसके फैलाव में समाई हुई सच्चाइयों की समग्रता के साथ-साथ एक सच्चे मानव-प्रेमी साहित्यकार के 'विज़न' की व्यपकता के मानदण्ड को हमेशा सामने और सुरक्षित रखा। ऐसा न होता तो 'सियाह हाशिये' के अँधेरों से उजाले की किसी भी लकीर का फूटना असम्भव था। विभाजन ने मंटो के दिलो-दिमाग को इस बुरी तरह झकझोरा था कि उन्होंने 'जब कभी 1947 का जिक्र किया, वतन की आज़ादी के ताल्लुक से नहीं किया। उन्होंने हमेशा 1947 का ज़िक्र 'तक़सीम' और 'बँटवारे' के ताल्लुक से किया। मंटो के लेखकीय चरित्र को समझने के लिए यह जानना भी जरूरी है कि 'पहला अफ़साना उसने बउनवान 'तमाशा' लिखा, जो जलियाँवाले बाग के खूनी-हादिसे से मुतअल्लिक था। यह अफ़साना उसने अपने नाम से न छपवाया। यही वज़ह है कि वह पुलिस की दस्तबुजी(हत्थे चढ़ने) से बच गया। अपने आखिरी बरसों में मंटो ने बेतहाशा लिखा। सच्चा साहित्य तो उसी स्थिति में लिखा जा सकता है, जब लिखने वाला हिन्दू-जुल्म, मुसलमान-जुल्म, या कांग्रेस की राजनीति और मुस्लिम लीग की राजनीति, या हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के फेर में पड़े बिना, उस अनुभव पर हाथ डाल सके जिसका सरोकार इस सवाल से हो कि सामूहिक पागलपन के उस युग में इंसान के हाथों इंसान पर क्या बीती? उस इंसान का नाम और धर्म और सम्प्रदाय, ये सारी बातें गौण हैं। मैं 18 अगस्त, 1954 को लिखी उनकी एक ऐसी रचना का जिक्र करना बहुत मुनासिब समझता हूँ जिसको अक्सर उनकी रचनाओं में गिना ही नहीं जाता है; और जो उनकी जिन्दादिली का अनुपम नमूना हैः यहाँ सआदत हसन मंटो दफ़न है। कि वह बड़ा अफ़सानानिगार है या खुदा। क्या यह चौंकाने वाला तथ्य नहीं है कि यह 'कत्बा' लिखने के ठीक 5 माह बाद 18 जनवरी, 1955 को सुबह साढ़े-दस बजे मंटो को लेकर एंबुलेंस जब लाहौर के मेयो अस्पताल के पोर्च में पहुँची; डाक्टर लपके - लेकिन...शरीर को मनों मिट्टी के नीचे दफ़्न कर देने की खातिर मंटो की पवित्र-आत्मा उसे छोड़कर बहुत दूर जा चुकी थी। मंटो ने भी दंगों के बारे में कुछ लिखा है, यानी ये लतीफ़े या छोटे-छोटे अफ़साने जमा किये हैं। दरअसल, मैंने बड़ा ग़लत वाक्य इस्तेमाल किया है। ये अफ़साने दंगों के बारे में नहीं हैं बल्कि इन्सानों के बारे में हैं। मंटों के अफ़सानों में आप इन्सानों को अलग-अलग शक्लों में देखते रहते हैं। इन्सान वेश्या के रूप में, इन्सान तमाशबीन के रूप में वगैरा-वगैरा। इन अफ़सानों में भी आप इन्सान ही देखेंगे। फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि यहाँ इन्सान को 'ज़ालिम' (जिसने ज़ुल्म किया हो) या 'मज़लूम' (जिस पर जुल्म किया गया हो) के रूप में पेश किया गया है। और झगड़ों की विशेष परिस्थितियों में समाजी मक़सद का तो मंटो ने झगड़ा ही नहीं पाला। अगर उपदेश से आदमी सुधर जाया करते तो मिस्टर गाँधी की जान ही क्यों जाती और मंटो को अफ़सानों के असर के बारे में न तो ज्यादा ग़लतफहमियाँ हैं, न ही उन्होंने ऐसी जिम्मेदारी अपने सिर ली है जिसे साहित्य पूरी कर ही नहीं सकता। मंटो ने अपने अफ़सानों में वही किया है, जो एक ईमानदार (राजनीतिक मामलों में ईमानदार नहीं, बल्कि साहित्यिक के रूप में ईमानदार) और असली साहित्यिक को उन हालात में और ऐसी वाक़यों के इतने थोड़े समय बाद लिखते हुए करना चाहिए था। उन्होंने नेक व बद के सवाल को बहस-मुबाहिसों से परे करार दे दिया है। उनका नज़रिया न राजनीतिक है, न सामाजिक, न नैतिक बल्कि साहित्यिक और सृजनात्मक है। मंटो ने तो सिर्फ़ यह देखने की कोशिश की है कि ज़ालिम या मज़लूम के व्यक्तित्व के अलग-अलग बिन्दुओं से ज़ालिमाना कर्मों का क्या रिश्ता है? जुल्म करने की तबियत के अलावा जालिम के अन्दर और कौन-कौन सी प्रवृत्तियाँ काम कर रही हैं। इन्सानी दिमाग़ में जुल्म कितनी जगह घेरता है। ज़िन्दग़ी की दूसरी दिलचस्पियाँ बाक़ी रहती हैं या नहीं। मंटो ने न तो रहम के जज्बात भड़काये हैं, न गुस्से के, न नफ़रत के। वह तो आपको केवल इन्सानी दिमाग, इन्सानी चरित्र और व्यक्तित्व पर साहित्यिक और सृजनात्मक ढंग से ग़ौर करने की दावत देते हैं। अगर वह कोई जज्बा पैदा करने की फ़िक्र में हैं तो केवल वही जज्बा, जो एक कलाकार को समुचित रूप में पैदा करना चाहिए। यानी ज़िन्दग़ी के बारे में अथाह जिज्ञासा और आश्चर्य। दंगों के बारे में जितना भी लिखा गया है, उसमें अगर कोई चीज़ इन्सानी दस्तावेज़ कहलाने के लायक है, तो ये अफ़साने हैं। चूँकि मंटो के अफ़साने सच्ची साहित्यिक कृतियाँ हैं, इसलिए ये अफ़साने हमें नैतिक रूप से भी चौंकाते हैं। हालाँकि मंटो का बुनायादी मक़सद यह नहीं था, बल्कि केवल सृजन था। असामान्य हालात में अगर कोई चीज़ चौंका सकती है तो वह असामान्य घटनाएँ या कर्म नहीं बल्कि बिल्कुल सामान्य और रोज़मर्रा की-सी बातें। ...लेकिन असामान्य काम करते हुए साधारण बातों की तरफ़ ध्यान हमें इन्सान के बारे में एक ज्यादा गहरी और ज्यादा बुनियादी बात बताता है - वह यह कि इन्सान हर वक़्त और एक वक़्त इन्सान भी होता है और हैवान भी। इसमें खौफ़ का पहलू यह है कि इन्सानियत के एहसास के बावजूद इन्सान हैवान बनना कैसे गवारा कर लेता है और सन्तोष का पहलू यह है कि वहशी से वहशी बन जाने के बाद भी इन्सान अपनी इन्सानियत से पीछा नहीं छुड़ा सकता। मंटो के इन अफ़सानों में दोनों पहलू मौज़ूद हैं - खौफ़ भी और दिलासा भी। इन लतीफ़ों में इन्सान अपनी बुनियादी बेचारगियों, हिमाक़तों, नफासतों और पवित्रताओं समेत नज़र आता है। मंटो के कहकहे में बड़ा ज़हर है, मगर यह कहकहा हमें तसल्ली भी बहुत दिलाता है। असामान्य हालात में यह कहना कि इन्सान की मामूली दिलचस्पियाँ और मामूली आदतें किसी के दबाये नहीं दब सकतीं, बड़ी बात है। मंटो न तो किसी को शर्मिंदा करता है, न किसी को अच्छी राह पर लाना चाहता है। वह तो बड़ी व्यंग्यपूर्ण मुस्कान के साथ इन्सानों से यह कहता है कि अगर तुम चाहो भी तो भटककर ज्यादा दूर नहीं जा सकते। इस विश्वास से मंटो का इन्सानी स्वभाव पर कहीं ज्यादा भरोसा नज़र आता है। दूसरे लोग इन्सान को एक खास रंग में देखना चाहते हैं। वे इन्सान को कबूल करने से पहले चन्द शर्तें लगाते हैं। मंटो को इन्सान अपनी असली शक्ल ही में कबूल है, भले ही वह कैसी भी हो। वह देख चुका है कि इन्सान की इन्सानियत ऐसी मज़बूत है कि उसकी बर्बरता भी इन्सान को खत्म नहीं कर सकती। मंटो को ऐसी इन्सानियत पर भरोसा है। दंगों के बारे में जितने भी अफ़साने लिखे गये हैं, उनमें मंटो के ये छोटे-छोटे लतीफ़े सबसे ज्यादा डरावने और उम्मीदभरे हैं। मंटो की दहशत और मंटो की उम्मीदपरस्ती राजनीतिक लोगों या इन्सानियत के नेकदिल सेवकों की दहशत और उम्मीदपरस्ती नहीं है बल्कि एक कलाकार की दहशत और उम्मीदपरस्ती है। इसका तआल्लुक बहस-मुबाहिसों, विश्लेषणों या विचारों से नहीं, बल्कि ठोस सृजनात्मक तज़ुर्बे से है। यही मंटो के इन अफ़सानों की इकलौती खूबी है। जिसने अपनी खूँरेज़ियों का ज़िक्र करते हुए कहाः तो मुझे ऐसा लगा, मुझसे क़त्ल हो गया...! नई दिल्ली, जनवरी 31 (एपी): खबर मिली है कि महात्मा गाँधी मी मौत पर खुशी ज़ाहिर करने के लिए अमृतसर, ग्वालियर और बंबई में कई जगह लोगों में मिठाई बाँटी गयी। लूट-खसोट का बाज़ार गर्म था। फिर चारों ओर आग भड़कने लगी। गर्मी में बढ़ोत्तरी गयी। एक आदमी हारमोनियम की पेटी उठाये ख़ुश-ख़ुश गाता जा रहा थाः एक छोटी उम्र का लड़का झोली में पापड़ों का अम्बार डाले भागा जा रहा था। ठोकर लगी तो पापड़ों की एक गड्डी उसकी झोली में से गिर पड़ी। बाज़ार में धप्प से एक भरी हुई बोरी गिरी। एक शख़्स ने जल्दी से बढ़कर अपने छुरे से उसका पेट चाक किया। आँतों की बजाय शक्कर...सफेद- सफेद दानोंवाली शक्कर बाहर निकल आयी। लोग जमा हो गये और अपनी-अपनी झोलियाँ भरने लगे। एक आदमी कुरते के बिना था। उसने जल्दी-से अपना तैमद खोला और मुट्ठीयाँ भर-भरकर उसमें डालने लगा। "हट जाओ...हट जाओ..." एक ताँगा ताज़ा-ताज़ा रौग़न की हुई अलमारियों से लदा गुज़र गया। ऊँचे मकान की खिड़की में से मलमल का थान फड़फड़ाता हुआ बाहर निकला। शोले की ज़ुबान ने हौले-से उसे चाटा। सड़क तक पहुँचा, तो वह राख का एक ढेर था। लोहे का एक सेफ़ दस-पंद्रह आदमियों ने मिलकर बाहर निकाला और लाठियों की मदद से उसे खोलना शुरू कर दिया। 'काऊ एंड गोट' दूध के कई टिन दोनों हाथों में थामे और अपनी ठोड़ी से उनको सहारा दिये एक आदमी दुकान से बाहर निकला और आहिस्ता-आहिस्ता बाज़ार में चलने लगा। गले में मोटर का टायर डाले हुए आदमी ने बढ़कर दो बोतलें उठाईं और शुक्रिया अदा किये बग़ैर चल दिया। इस सलाह की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। लूट-खसोट का बाज़ार इसी तरह गर्म रहा, और चारों तरफ भड़कती हुई आग उस गर्मी को बढ़ाती रही। फिर बहुत देर के बाद तड़-तड़ की आवाज़ आयी। गोलियाँ चलने लगीं। पुलिस को बाज़ार ख़ाली नज़र आया; लेकिन दूर, धुएँ में लिपटे मोड़ के पास एक साया-सा था। सिपाही सीटियाँ बजाते उस तरफ़ लपके। साया तेज़ी से धुएँ के अंदर घुस गया। सिपाही भी पीछा करने में लगे रहे। धुएँ का इलाक़ा ख़त्म हुआ तो सिपाहियों ने देखा कि एक कश्मीरी मज़दूर पीठ पर वज़नी बोरी उठाये भागा चला जा रहा है! सीटियों के गले ख़ुश्क हो गये मगर वह कश्मीरी न रुका। उसकी पीठ पर वज़न था। मामूली वज़न नहीं, एक भरी हुई बोरी थी लेकिन वह यूँ दौड़ रहा था जैसे उसकी पीठ पर कुछ है ही नहीं। सिपाही हाँफने लगे। एक ने तंग आकर पिस्तौल निकाला और दाग़ दिया। गोली कश्मीरी मज़दूर की पिंडली में लगी। बोरी उसकी पीठ पर से गिर पड़ी। घबराकर उसने अपने पीछे आहिस्ता-आहिस्ता बढ़ते हुए सिपाहियों को देखा, पिंडली से बहते हुए खून की तरफ भी उसने ग़ौर किया। फिर एक ही झटके से बोरी उठाई, पीठ पर लादी और लँगड़ाते-लँगड़ाते भागने लगा। थके हुए सिपाहियों ने सोचा - जाए जहन्नुम में...! उसी समय कश्मीरी मज़दूर लड़खड़ाया और गिर पड़ा। बोरी उसके ऊपर आ पड़ी। अब थके-हारे सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया। फिर बोरी को उस पर लादकर थाने की तरफ चलने लगे। लेकिन उसकी एक न सुनी गयी।
विभाजन से पहले का सामाजिक और मानसिक वातावरण, फिर विभाजन के बाद का वातावरण, दंगों, साम्प्रदायिकता और साम्प्रदायिक दंगों में उलझी हुई हिन्दू-मुस्लिम राजनीति - इन सब की तरफ़ 'मक़्तल' की कहानियों में कहीं स्पष्ट तो कहीं धुँधले इशारे मिलते हैं।...मंटो के अपने सरोकार राजनीति और अराजनीतिक के फेर में पड़ने की बजाय अपने गहरे मानव-प्रेम और नैतिक क्षेत्र के माध्यम से एक विशिष्ट-बोध को अभिव्यक्त करते हैं। मंटो हर यथार्थ को बिना किसी फेर-बदल के एक नया यथार्थ बना देते हैं।...ब्रिटिश-भारत के अंतिम चरण, फिर स्वतंत्रता, विभाजन और दंगों की भयावहता और उस पूरे युग के त्रासद तत्वों का प्रेक्षण मंटो ने इतिहास की प्रयोगशाला के रूप में नहीं किया था।...कोई भी राजनीतिक घटना मंटो के लिए केवल राजनीतिक नहीं थी। मंटो ने मानवीय-अस्तित्व और उसके फैलाव में समाई हुई सच्चाइयों की समग्रता के साथ-साथ एक सच्चे मानव-प्रेमी साहित्यकार के 'विज़न' की व्यपकता के मानदण्ड को हमेशा सामने और सुरक्षित रखा। ऐसा न होता तो 'सियाह हाशिये' के अँधेरों से उजाले की किसी भी लकीर का फूटना असम्भव था। विभाजन ने मंटो के दिलो-दिमाग को इस बुरी तरह झकझोरा था कि उन्होंने 'जब कभी एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस का जिक्र किया, वतन की आज़ादी के ताल्लुक से नहीं किया। उन्होंने हमेशा एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस का ज़िक्र 'तक़सीम' और 'बँटवारे' के ताल्लुक से किया। मंटो के लेखकीय चरित्र को समझने के लिए यह जानना भी जरूरी है कि 'पहला अफ़साना उसने बउनवान 'तमाशा' लिखा, जो जलियाँवाले बाग के खूनी-हादिसे से मुतअल्लिक था। यह अफ़साना उसने अपने नाम से न छपवाया। यही वज़ह है कि वह पुलिस की दस्तबुजी से बच गया। अपने आखिरी बरसों में मंटो ने बेतहाशा लिखा। सच्चा साहित्य तो उसी स्थिति में लिखा जा सकता है, जब लिखने वाला हिन्दू-जुल्म, मुसलमान-जुल्म, या कांग्रेस की राजनीति और मुस्लिम लीग की राजनीति, या हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के फेर में पड़े बिना, उस अनुभव पर हाथ डाल सके जिसका सरोकार इस सवाल से हो कि सामूहिक पागलपन के उस युग में इंसान के हाथों इंसान पर क्या बीती? उस इंसान का नाम और धर्म और सम्प्रदाय, ये सारी बातें गौण हैं। मैं अट्ठारह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ चौवन को लिखी उनकी एक ऐसी रचना का जिक्र करना बहुत मुनासिब समझता हूँ जिसको अक्सर उनकी रचनाओं में गिना ही नहीं जाता है; और जो उनकी जिन्दादिली का अनुपम नमूना हैः यहाँ सआदत हसन मंटो दफ़न है। कि वह बड़ा अफ़सानानिगार है या खुदा। क्या यह चौंकाने वाला तथ्य नहीं है कि यह 'कत्बा' लिखने के ठीक पाँच माह बाद अट्ठारह जनवरी, एक हज़ार नौ सौ पचपन को सुबह साढ़े-दस बजे मंटो को लेकर एंबुलेंस जब लाहौर के मेयो अस्पताल के पोर्च में पहुँची; डाक्टर लपके - लेकिन...शरीर को मनों मिट्टी के नीचे दफ़्न कर देने की खातिर मंटो की पवित्र-आत्मा उसे छोड़कर बहुत दूर जा चुकी थी। मंटो ने भी दंगों के बारे में कुछ लिखा है, यानी ये लतीफ़े या छोटे-छोटे अफ़साने जमा किये हैं। दरअसल, मैंने बड़ा ग़लत वाक्य इस्तेमाल किया है। ये अफ़साने दंगों के बारे में नहीं हैं बल्कि इन्सानों के बारे में हैं। मंटों के अफ़सानों में आप इन्सानों को अलग-अलग शक्लों में देखते रहते हैं। इन्सान वेश्या के रूप में, इन्सान तमाशबीन के रूप में वगैरा-वगैरा। इन अफ़सानों में भी आप इन्सान ही देखेंगे। फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि यहाँ इन्सान को 'ज़ालिम' या 'मज़लूम' के रूप में पेश किया गया है। और झगड़ों की विशेष परिस्थितियों में समाजी मक़सद का तो मंटो ने झगड़ा ही नहीं पाला। अगर उपदेश से आदमी सुधर जाया करते तो मिस्टर गाँधी की जान ही क्यों जाती और मंटो को अफ़सानों के असर के बारे में न तो ज्यादा ग़लतफहमियाँ हैं, न ही उन्होंने ऐसी जिम्मेदारी अपने सिर ली है जिसे साहित्य पूरी कर ही नहीं सकता। मंटो ने अपने अफ़सानों में वही किया है, जो एक ईमानदार और असली साहित्यिक को उन हालात में और ऐसी वाक़यों के इतने थोड़े समय बाद लिखते हुए करना चाहिए था। उन्होंने नेक व बद के सवाल को बहस-मुबाहिसों से परे करार दे दिया है। उनका नज़रिया न राजनीतिक है, न सामाजिक, न नैतिक बल्कि साहित्यिक और सृजनात्मक है। मंटो ने तो सिर्फ़ यह देखने की कोशिश की है कि ज़ालिम या मज़लूम के व्यक्तित्व के अलग-अलग बिन्दुओं से ज़ालिमाना कर्मों का क्या रिश्ता है? जुल्म करने की तबियत के अलावा जालिम के अन्दर और कौन-कौन सी प्रवृत्तियाँ काम कर रही हैं। इन्सानी दिमाग़ में जुल्म कितनी जगह घेरता है। ज़िन्दग़ी की दूसरी दिलचस्पियाँ बाक़ी रहती हैं या नहीं। मंटो ने न तो रहम के जज्बात भड़काये हैं, न गुस्से के, न नफ़रत के। वह तो आपको केवल इन्सानी दिमाग, इन्सानी चरित्र और व्यक्तित्व पर साहित्यिक और सृजनात्मक ढंग से ग़ौर करने की दावत देते हैं। अगर वह कोई जज्बा पैदा करने की फ़िक्र में हैं तो केवल वही जज्बा, जो एक कलाकार को समुचित रूप में पैदा करना चाहिए। यानी ज़िन्दग़ी के बारे में अथाह जिज्ञासा और आश्चर्य। दंगों के बारे में जितना भी लिखा गया है, उसमें अगर कोई चीज़ इन्सानी दस्तावेज़ कहलाने के लायक है, तो ये अफ़साने हैं। चूँकि मंटो के अफ़साने सच्ची साहित्यिक कृतियाँ हैं, इसलिए ये अफ़साने हमें नैतिक रूप से भी चौंकाते हैं। हालाँकि मंटो का बुनायादी मक़सद यह नहीं था, बल्कि केवल सृजन था। असामान्य हालात में अगर कोई चीज़ चौंका सकती है तो वह असामान्य घटनाएँ या कर्म नहीं बल्कि बिल्कुल सामान्य और रोज़मर्रा की-सी बातें। ...लेकिन असामान्य काम करते हुए साधारण बातों की तरफ़ ध्यान हमें इन्सान के बारे में एक ज्यादा गहरी और ज्यादा बुनियादी बात बताता है - वह यह कि इन्सान हर वक़्त और एक वक़्त इन्सान भी होता है और हैवान भी। इसमें खौफ़ का पहलू यह है कि इन्सानियत के एहसास के बावजूद इन्सान हैवान बनना कैसे गवारा कर लेता है और सन्तोष का पहलू यह है कि वहशी से वहशी बन जाने के बाद भी इन्सान अपनी इन्सानियत से पीछा नहीं छुड़ा सकता। मंटो के इन अफ़सानों में दोनों पहलू मौज़ूद हैं - खौफ़ भी और दिलासा भी। इन लतीफ़ों में इन्सान अपनी बुनियादी बेचारगियों, हिमाक़तों, नफासतों और पवित्रताओं समेत नज़र आता है। मंटो के कहकहे में बड़ा ज़हर है, मगर यह कहकहा हमें तसल्ली भी बहुत दिलाता है। असामान्य हालात में यह कहना कि इन्सान की मामूली दिलचस्पियाँ और मामूली आदतें किसी के दबाये नहीं दब सकतीं, बड़ी बात है। मंटो न तो किसी को शर्मिंदा करता है, न किसी को अच्छी राह पर लाना चाहता है। वह तो बड़ी व्यंग्यपूर्ण मुस्कान के साथ इन्सानों से यह कहता है कि अगर तुम चाहो भी तो भटककर ज्यादा दूर नहीं जा सकते। इस विश्वास से मंटो का इन्सानी स्वभाव पर कहीं ज्यादा भरोसा नज़र आता है। दूसरे लोग इन्सान को एक खास रंग में देखना चाहते हैं। वे इन्सान को कबूल करने से पहले चन्द शर्तें लगाते हैं। मंटो को इन्सान अपनी असली शक्ल ही में कबूल है, भले ही वह कैसी भी हो। वह देख चुका है कि इन्सान की इन्सानियत ऐसी मज़बूत है कि उसकी बर्बरता भी इन्सान को खत्म नहीं कर सकती। मंटो को ऐसी इन्सानियत पर भरोसा है। दंगों के बारे में जितने भी अफ़साने लिखे गये हैं, उनमें मंटो के ये छोटे-छोटे लतीफ़े सबसे ज्यादा डरावने और उम्मीदभरे हैं। मंटो की दहशत और मंटो की उम्मीदपरस्ती राजनीतिक लोगों या इन्सानियत के नेकदिल सेवकों की दहशत और उम्मीदपरस्ती नहीं है बल्कि एक कलाकार की दहशत और उम्मीदपरस्ती है। इसका तआल्लुक बहस-मुबाहिसों, विश्लेषणों या विचारों से नहीं, बल्कि ठोस सृजनात्मक तज़ुर्बे से है। यही मंटो के इन अफ़सानों की इकलौती खूबी है। जिसने अपनी खूँरेज़ियों का ज़िक्र करते हुए कहाः तो मुझे ऐसा लगा, मुझसे क़त्ल हो गया...! नई दिल्ली, जनवरी इकतीस : खबर मिली है कि महात्मा गाँधी मी मौत पर खुशी ज़ाहिर करने के लिए अमृतसर, ग्वालियर और बंबई में कई जगह लोगों में मिठाई बाँटी गयी। लूट-खसोट का बाज़ार गर्म था। फिर चारों ओर आग भड़कने लगी। गर्मी में बढ़ोत्तरी गयी। एक आदमी हारमोनियम की पेटी उठाये ख़ुश-ख़ुश गाता जा रहा थाः एक छोटी उम्र का लड़का झोली में पापड़ों का अम्बार डाले भागा जा रहा था। ठोकर लगी तो पापड़ों की एक गड्डी उसकी झोली में से गिर पड़ी। बाज़ार में धप्प से एक भरी हुई बोरी गिरी। एक शख़्स ने जल्दी से बढ़कर अपने छुरे से उसका पेट चाक किया। आँतों की बजाय शक्कर...सफेद- सफेद दानोंवाली शक्कर बाहर निकल आयी। लोग जमा हो गये और अपनी-अपनी झोलियाँ भरने लगे। एक आदमी कुरते के बिना था। उसने जल्दी-से अपना तैमद खोला और मुट्ठीयाँ भर-भरकर उसमें डालने लगा। "हट जाओ...हट जाओ..." एक ताँगा ताज़ा-ताज़ा रौग़न की हुई अलमारियों से लदा गुज़र गया। ऊँचे मकान की खिड़की में से मलमल का थान फड़फड़ाता हुआ बाहर निकला। शोले की ज़ुबान ने हौले-से उसे चाटा। सड़क तक पहुँचा, तो वह राख का एक ढेर था। लोहे का एक सेफ़ दस-पंद्रह आदमियों ने मिलकर बाहर निकाला और लाठियों की मदद से उसे खोलना शुरू कर दिया। 'काऊ एंड गोट' दूध के कई टिन दोनों हाथों में थामे और अपनी ठोड़ी से उनको सहारा दिये एक आदमी दुकान से बाहर निकला और आहिस्ता-आहिस्ता बाज़ार में चलने लगा। गले में मोटर का टायर डाले हुए आदमी ने बढ़कर दो बोतलें उठाईं और शुक्रिया अदा किये बग़ैर चल दिया। इस सलाह की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। लूट-खसोट का बाज़ार इसी तरह गर्म रहा, और चारों तरफ भड़कती हुई आग उस गर्मी को बढ़ाती रही। फिर बहुत देर के बाद तड़-तड़ की आवाज़ आयी। गोलियाँ चलने लगीं। पुलिस को बाज़ार ख़ाली नज़र आया; लेकिन दूर, धुएँ में लिपटे मोड़ के पास एक साया-सा था। सिपाही सीटियाँ बजाते उस तरफ़ लपके। साया तेज़ी से धुएँ के अंदर घुस गया। सिपाही भी पीछा करने में लगे रहे। धुएँ का इलाक़ा ख़त्म हुआ तो सिपाहियों ने देखा कि एक कश्मीरी मज़दूर पीठ पर वज़नी बोरी उठाये भागा चला जा रहा है! सीटियों के गले ख़ुश्क हो गये मगर वह कश्मीरी न रुका। उसकी पीठ पर वज़न था। मामूली वज़न नहीं, एक भरी हुई बोरी थी लेकिन वह यूँ दौड़ रहा था जैसे उसकी पीठ पर कुछ है ही नहीं। सिपाही हाँफने लगे। एक ने तंग आकर पिस्तौल निकाला और दाग़ दिया। गोली कश्मीरी मज़दूर की पिंडली में लगी। बोरी उसकी पीठ पर से गिर पड़ी। घबराकर उसने अपने पीछे आहिस्ता-आहिस्ता बढ़ते हुए सिपाहियों को देखा, पिंडली से बहते हुए खून की तरफ भी उसने ग़ौर किया। फिर एक ही झटके से बोरी उठाई, पीठ पर लादी और लँगड़ाते-लँगड़ाते भागने लगा। थके हुए सिपाहियों ने सोचा - जाए जहन्नुम में...! उसी समय कश्मीरी मज़दूर लड़खड़ाया और गिर पड़ा। बोरी उसके ऊपर आ पड़ी। अब थके-हारे सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया। फिर बोरी को उस पर लादकर थाने की तरफ चलने लगे। लेकिन उसकी एक न सुनी गयी।
बिग बॉस 12 (Bigg Boss 12) की रोशमी बानिक (Roshmi Banik) टीवी शो 'इश्क सुभान अल्लाह' के स्पिन ऑफ में नज़र आ सकती हैं। बिग बॉस 12 (Bigg Boss 12) की रोशमी बानिक (Roshmi Banik) टीवी शो 'इश्क सुभान अल्लाह' के स्पिन ऑफ में नज़र आ सकती हैं। cannes 2019: कान फिल्म फेस्टिवल से हिना खान की एक नई तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर में हिना खान के साथ प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस भी मौजूद हैं। शिल्पा शेट्टी, शाहिद कपूर, करण जौहर की तरह करीना कपूर खान भी जल्द अपना बॉलीवुड डेब्यू करने वाली हैं। एकता कपूर शो 'कसम तेरे प्यार की' का फेमस टीवी स्टार अंश अरोड़ा की यूपी पुलिस ने पिटाई कर दी। जानते हैं कुछ ऐसे टीवी एक्टर्स के बारे में जिनकी शादी, सगाई या अफेयर पिछले एक साल में टूट गई और जिनके अलगाव ने बहुत सुर्खियां भी बटोरीं। 'बिग बॉस 12' में सृष्टि रोड (Srishty Rode) और रोहित सुचांती (Rohit Suchanti) की दोस्ती काफी चर्चा में थी। रोहित ने शो के दौरान ही कह दिया था कि वह सृष्टि को पसंद करते हैं। एक्टर करण ओबेरॉय पर रेप का आरोप लगाया गया है। जिसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में हैं। उनके सपोर्ट में एक्ट्रेस माहिका शर्मा आई हैं। सीरियल 'इश्कबाज़' में नज़र आईं एक्ट्रेस मानसी श्रीवास्तव (Mansi Srivastava) ने एक्टर मोहित अबरोल (Mohit Abrol) संग अपना 6 साल पुराना रिश्ता तोड़ दिया है। 'कसौटी जिंदगी के' में जल्द ही मिस्टर बजाज की एंट्री होने वाली है। इस रोल को करण वाही की जगह अब करण सिंह ग्रोवर निभाते नजर आएंगे। भिनेता-फिल्म निर्माता-राजनीतिज्ञ कमल हासन, मशहूर तमिल रिएलिटी शो 'बिग बॉस' के तीसरे सीजन में होस्ट के रूप में अपनी वापसी कर रहे हैं। करण वाही, श्रद्धा आर्या, शरद मल्होत्रा और सुमित व्यास जैसे सितारे बॉक्स क्रिकेट लीग का हिस्सा हैं। रमजान के महीने में बिकिनी वीडियो शेयर करने पर बिग बॉस की पूर्व कंटेस्टेंट मंदाना करीमी को ट्रोल किया जा रहा है। अभिनेत्री छवि मित्तल दोबारा मां बन गई हैं। उन्होंने अपने नवजात बेटे का नाम अरहाम हुसैन रखा है। टीवी एक्ट्रेस माही विज शादी के 8 साल बाद प्रेग्नेंट है। जिसकी वजह से उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाई हुई है। 'कसौटी जिंदगी के' (Kasautii Zindagii Kay) से कोमोलिका यानि हिना खान (Hina Khan) की जर्नी खत्म हो गई है। हालांकि कहा जा रहा है कि हिना फिर शो में वापस आएंगी, लेकिन तब तक फैंस उन्हें बहुत मिस करेंगे।
बिग बॉस बारह की रोशमी बानिक टीवी शो 'इश्क सुभान अल्लाह' के स्पिन ऑफ में नज़र आ सकती हैं। बिग बॉस बारह की रोशमी बानिक टीवी शो 'इश्क सुभान अल्लाह' के स्पिन ऑफ में नज़र आ सकती हैं। cannes दो हज़ार उन्नीस: कान फिल्म फेस्टिवल से हिना खान की एक नई तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर में हिना खान के साथ प्रियंका चोपड़ा और निक जोनस भी मौजूद हैं। शिल्पा शेट्टी, शाहिद कपूर, करण जौहर की तरह करीना कपूर खान भी जल्द अपना बॉलीवुड डेब्यू करने वाली हैं। एकता कपूर शो 'कसम तेरे प्यार की' का फेमस टीवी स्टार अंश अरोड़ा की यूपी पुलिस ने पिटाई कर दी। जानते हैं कुछ ऐसे टीवी एक्टर्स के बारे में जिनकी शादी, सगाई या अफेयर पिछले एक साल में टूट गई और जिनके अलगाव ने बहुत सुर्खियां भी बटोरीं। 'बिग बॉस बारह' में सृष्टि रोड और रोहित सुचांती की दोस्ती काफी चर्चा में थी। रोहित ने शो के दौरान ही कह दिया था कि वह सृष्टि को पसंद करते हैं। एक्टर करण ओबेरॉय पर रेप का आरोप लगाया गया है। जिसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में हैं। उनके सपोर्ट में एक्ट्रेस माहिका शर्मा आई हैं। सीरियल 'इश्कबाज़' में नज़र आईं एक्ट्रेस मानसी श्रीवास्तव ने एक्टर मोहित अबरोल संग अपना छः साल पुराना रिश्ता तोड़ दिया है। 'कसौटी जिंदगी के' में जल्द ही मिस्टर बजाज की एंट्री होने वाली है। इस रोल को करण वाही की जगह अब करण सिंह ग्रोवर निभाते नजर आएंगे। भिनेता-फिल्म निर्माता-राजनीतिज्ञ कमल हासन, मशहूर तमिल रिएलिटी शो 'बिग बॉस' के तीसरे सीजन में होस्ट के रूप में अपनी वापसी कर रहे हैं। करण वाही, श्रद्धा आर्या, शरद मल्होत्रा और सुमित व्यास जैसे सितारे बॉक्स क्रिकेट लीग का हिस्सा हैं। रमजान के महीने में बिकिनी वीडियो शेयर करने पर बिग बॉस की पूर्व कंटेस्टेंट मंदाना करीमी को ट्रोल किया जा रहा है। अभिनेत्री छवि मित्तल दोबारा मां बन गई हैं। उन्होंने अपने नवजात बेटे का नाम अरहाम हुसैन रखा है। टीवी एक्ट्रेस माही विज शादी के आठ साल बाद प्रेग्नेंट है। जिसकी वजह से उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाई हुई है। 'कसौटी जिंदगी के' से कोमोलिका यानि हिना खान की जर्नी खत्म हो गई है। हालांकि कहा जा रहा है कि हिना फिर शो में वापस आएंगी, लेकिन तब तक फैंस उन्हें बहुत मिस करेंगे।
नई दिल्ली। नोटंबदी पर सरकार पर विपक्षों दलों को घेराव जारी है। सरकार को संसद से सड़क घेरने की मुहिम लगातार विकराल रुप लेती दिखाई दे रही है। आज संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने मोदी सरकार पर फिर से वार किया है और नोटबंदी के फैसले का खामियाजा भुगतने की बात भी कही। बहन जी ने अपने तेवर को धारधार करते हुए मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, नोटबंदी पर किसानों की हालत खराब है वो कैश की किल्लत से परेशान है। सरकार किसानों का कर्जा माफ करें ,बीएसपी कालेधन के पक्ष में नहीं है। 2014 के आम चुनाव में भाजपा को बुहमत मिला था लेकिन जनता से किए गए वादे अभी तक पूरे नहीं किए गए जिसकी वजह से सरकार ने आगामी उत्तर प्रदेश और अन्य राज्योंं के चुनावो को देखते हुए जल्दबाजी में फैसला लिया। इस जल्दबाजी का नतीजा सरकार को चुनावों में यूपी की जनता देगी। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि बीएसपी सुप्रीमो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया हो इससे पहले भी बुधवार को उन्होंने सरकार पर तीखी टिप्पणी की थी। बता दें कि संसद में विपक्ष के तेवर काफी तीखे है नोटबंदी पर जहां अब तक विपक्ष सरकार को घेरने का प्रयास कर रहा था तो वहीं अब सत्ता पक्ष ने भी अपनी रणनीति के तहत कांग्रेस को अगस्ता वेस्टलैंड मामले पर घेराव किया जिसकी वजह से संसद के शुरुआत में ही हंगामा देखने को मिला।
नई दिल्ली। नोटंबदी पर सरकार पर विपक्षों दलों को घेराव जारी है। सरकार को संसद से सड़क घेरने की मुहिम लगातार विकराल रुप लेती दिखाई दे रही है। आज संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने मोदी सरकार पर फिर से वार किया है और नोटबंदी के फैसले का खामियाजा भुगतने की बात भी कही। बहन जी ने अपने तेवर को धारधार करते हुए मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा, नोटबंदी पर किसानों की हालत खराब है वो कैश की किल्लत से परेशान है। सरकार किसानों का कर्जा माफ करें ,बीएसपी कालेधन के पक्ष में नहीं है। दो हज़ार चौदह के आम चुनाव में भाजपा को बुहमत मिला था लेकिन जनता से किए गए वादे अभी तक पूरे नहीं किए गए जिसकी वजह से सरकार ने आगामी उत्तर प्रदेश और अन्य राज्योंं के चुनावो को देखते हुए जल्दबाजी में फैसला लिया। इस जल्दबाजी का नतीजा सरकार को चुनावों में यूपी की जनता देगी। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि बीएसपी सुप्रीमो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया हो इससे पहले भी बुधवार को उन्होंने सरकार पर तीखी टिप्पणी की थी। बता दें कि संसद में विपक्ष के तेवर काफी तीखे है नोटबंदी पर जहां अब तक विपक्ष सरकार को घेरने का प्रयास कर रहा था तो वहीं अब सत्ता पक्ष ने भी अपनी रणनीति के तहत कांग्रेस को अगस्ता वेस्टलैंड मामले पर घेराव किया जिसकी वजह से संसद के शुरुआत में ही हंगामा देखने को मिला।
दक्षिण अफ़्रीका में आज नयी संसद और प्रांतीय एसेंबली के लिए मतदान हो रहा है. रंगभेद के ख़ात्मे के बाद यह तीसरा लोकतांत्रिक चुनाव है. अफ़्रीकी नेशनल काँग्रेस के लिए 1994 से शुरू हुआ जीत का सिलसिला इस चुनाव में भी जारी रहने की उम्मीद है. आज सुबह से मतदान में हिस्सा लेने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी हैं. चुनावी अधिकारियों ने भी उम्मीद जताई है कि लोग बड़ी संख्या में मतदान में हिस्सा लेंगे. उम्मीद जताई जा रही है कि थाबो एम्बेकी दूसरी बार राष्ट्रपति का पद संभालने में सफल हो जाएँगे. एम्बेकी ने अपने पहले कार्यकाल में अपनी सरकार के कामकाज का हवाला देते हुए कहा है कि उनकी सरकार ने आर्थिक स्थिरता के लिए काम किया और ग़रीब लोगों के जीवन स्तर को उठाने की कोशिश की. हालाँकि एम्बेकी पर एचआईवी एड्स, ग़रीबी और बेरोज़गारी से निपटने में नाकामी के भी आरोप लगे हैं. जोहानेसबर्ग से बीबीसी संवाददाता बार्नबी फिलिप्स ने कहा है कि इन सभी समस्याओं के बावजूद विपक्षी पार्टियों को अश्वेत लोगों का कम ही समर्थन मिल रहा है. उनका कहना है कि रंगभेद के ख़ात्मे के बावजूद दक्षिण अफ़्रीका में अभी भी जाति और रंग के आधार पर मतदान होते हैं. इस बार आम चुनाव में 100 से ज़्यादा राजनीतिक पार्टियाँ हिस्सा ले रही हैं. मुख्य चुनावी लड़ाई क्वाज़ुलू नटाल में है जहाँ अफ़्रीकी नेशनल पार्टी ज़ुलू नेशनलिस्ट इन्काथा फ़्रीडम पार्टी से सत्ता हासिल करना चाहती है. यहाँ स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान के लिए 20 हज़ार से ज़्यादा पुलिस और सैन्य बलों को तैनात किया गया है. पिछले चुनावों में यहाँ हिंसा की घटनाएँ हुई थी. पिछले सप्ताह भी यहाँ चुनावी हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई. क्वाज़ुलू नटाल के अलावा वेस्टर्न केप में भी तगड़ा मुक़ाबला होने की उम्मीद है. लेकिन दूसरे इलाक़ों में अफ़्रीकी नेशनल काँग्रेस को बढ़त हासिल है. राष्ट्रपति थाबो एम्बेकी ने इन चुनावों के लिए जम कर प्रचार किया है. बीबीसी के साथ एक बातचीत में एम्बेकी ने माना है कि ज़्यादातर लोगों के जीवन स्तर में सुधार नहीं हो पाया है. लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि मतदाताओं को बदलाव की बयार महसूस हो रही है और देश के सभी नागरिकों में सकारात्मक सोच बनी है.
दक्षिण अफ़्रीका में आज नयी संसद और प्रांतीय एसेंबली के लिए मतदान हो रहा है. रंगभेद के ख़ात्मे के बाद यह तीसरा लोकतांत्रिक चुनाव है. अफ़्रीकी नेशनल काँग्रेस के लिए एक हज़ार नौ सौ चौरानवे से शुरू हुआ जीत का सिलसिला इस चुनाव में भी जारी रहने की उम्मीद है. आज सुबह से मतदान में हिस्सा लेने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी हैं. चुनावी अधिकारियों ने भी उम्मीद जताई है कि लोग बड़ी संख्या में मतदान में हिस्सा लेंगे. उम्मीद जताई जा रही है कि थाबो एम्बेकी दूसरी बार राष्ट्रपति का पद संभालने में सफल हो जाएँगे. एम्बेकी ने अपने पहले कार्यकाल में अपनी सरकार के कामकाज का हवाला देते हुए कहा है कि उनकी सरकार ने आर्थिक स्थिरता के लिए काम किया और ग़रीब लोगों के जीवन स्तर को उठाने की कोशिश की. हालाँकि एम्बेकी पर एचआईवी एड्स, ग़रीबी और बेरोज़गारी से निपटने में नाकामी के भी आरोप लगे हैं. जोहानेसबर्ग से बीबीसी संवाददाता बार्नबी फिलिप्स ने कहा है कि इन सभी समस्याओं के बावजूद विपक्षी पार्टियों को अश्वेत लोगों का कम ही समर्थन मिल रहा है. उनका कहना है कि रंगभेद के ख़ात्मे के बावजूद दक्षिण अफ़्रीका में अभी भी जाति और रंग के आधार पर मतदान होते हैं. इस बार आम चुनाव में एक सौ से ज़्यादा राजनीतिक पार्टियाँ हिस्सा ले रही हैं. मुख्य चुनावी लड़ाई क्वाज़ुलू नटाल में है जहाँ अफ़्रीकी नेशनल पार्टी ज़ुलू नेशनलिस्ट इन्काथा फ़्रीडम पार्टी से सत्ता हासिल करना चाहती है. यहाँ स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान के लिए बीस हज़ार से ज़्यादा पुलिस और सैन्य बलों को तैनात किया गया है. पिछले चुनावों में यहाँ हिंसा की घटनाएँ हुई थी. पिछले सप्ताह भी यहाँ चुनावी हिंसा में तीन लोगों की मौत हो गई. क्वाज़ुलू नटाल के अलावा वेस्टर्न केप में भी तगड़ा मुक़ाबला होने की उम्मीद है. लेकिन दूसरे इलाक़ों में अफ़्रीकी नेशनल काँग्रेस को बढ़त हासिल है. राष्ट्रपति थाबो एम्बेकी ने इन चुनावों के लिए जम कर प्रचार किया है. बीबीसी के साथ एक बातचीत में एम्बेकी ने माना है कि ज़्यादातर लोगों के जीवन स्तर में सुधार नहीं हो पाया है. लेकिन उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि मतदाताओं को बदलाव की बयार महसूस हो रही है और देश के सभी नागरिकों में सकारात्मक सोच बनी है.
रही है । क्या उनके पूर्व कोई कवि हिन्दी में वसन्त का संदेश लेकर उपस्थित हुआ था ? जिसने अपने पंचम स्वर में देश को वसन्त के आगमन का प्रथम संवाद सुनाया हो; जिसने आह्वान किया हो : यह वसन्त का सन्देश वाहक कौन है ? वह कवि कौन था जिसने हिन्दी के विख्यात महाप्राण श्री निराला की भाववस्तु पर इतना गहन प्रभाव डाला ? जो निराला जी को निरालापन दे गया । ये कवि हैं पंडित गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही', जिनकी सिद्धि 'मैदान में ' स्वीकार करने के बाद भी साहित्यकार सकुचाते हैं। जिनकी तुलना अपने किसी समकालीन कवि से नहीं की जा सकती; जो अपने ढंग के सर्वथा निराले, सर्वथा अप्रतिम और बेजोड़ कवि हैं । अप्रतिहत आत्मतेज से दीप्त, मानव-मंगल की भूमि पर आत्मोत्सर्ग की भावना से आकण्ठ-आपूरित उनके समकक्ष दूसरा कवि नहीं । यही कवि है, जो प्रथम चरण धरता है और जिसका नतमस्तक अनुवर्तन करती है परवर्ती पीढ़ी : प्रसाद और निराला, हितैषी और महादेवी । लेकिन श्री सनेही केवल कवि नहीं हैं । वे आधुनिक हिन्दी कविता की नयी परम्परा के प्रवर्तक मात्र नहीं हैं । वे केवल साहित्य के कवि नहीं है । वे आधुनिक भारत की ऐसी महान् विभूति हैं जिसका निर्णय इतिहास संभवतः शताब्दियों बाद करेगा । जैसाकि पूर्व कहा गया है - वे उन कृती महात्मा पुरुषों में से है जो प्रकाश बिम्ब की तरह अपने युग के आगे-आगे चलते हैं। और युग ? वे कविता में नहीं जन्मते । उनमें कविता जन्मा करती हैं। अपने युग का अनुवर्तन सभी साहित्यकार किया करते हैं । कौन-सा साहित्यकार है जो अपने युग की अभिव्यक्ति नहीं करता । युग-युगान्तर का साहित्य इसी से भरा पड़ा है । लेकिन कुछ साहित्यकार ऐसे भी होते हैं जो युग के अनुवर्ती नहीं होते - जो युग को जन्म देते हैं । जो राजनीतियों के पीछे नहीं चलते, वरन् राजनीतिज्ञ जिनके पीछे चलते हैं । जिनका असीम शक्तिशाली और तेजस्वी व्यक्तित्व मानो पुकार-पुकार कर साहित्यकार के स्वतंत्र अस्तित्व और व्यक्तित्व का स्वर निनादित कर रहा है । राजनीति उनके पीछे चलती है। उनका अनुवर्तन करती है। यही तो वह भूमि है जहाँ साहित्यकार के व्यक्तित्व की कसौटी पर कसा जाता है । महाकाल की परीक्षाग्नि इसी को कहते हैं । कलाकार की अन्तर्दृष्टि किसे कहते हैं ? उनकी दृष्टि क्या है ? वह जो काल की सीमा पार कर सके । लोकनायकत्व का प्रश्न इसी से जुड़ा है । साहित्य में लोकनायकत्व का आशय क्या है ? यों तो कुछ लोग आज कल इस शब्द का प्रयोग म्युनिसिपल कमेटी के वार्ड मेम्बर के लिए करने लगे हैं । लेकिन डॉ० ग्रियर्सन के उस कथन का क्या अभिप्राय था जिसमें उन्होंने तुलसीदास को बुद्ध के बाद भारत का सबसे बड़ा लोकनायक कहा था । यह तो ५. हिन्दी साहित्य का इतिहास, पं० रामचन्द्र शुक्ल । पौष - मार्गशीर्ष : शक १६०४ ] स्पष्ट ही है कि ग्रियर्सन की दृष्टि में राजनीति न थी । बुद्ध और तुलसीदास दोनों ही राजनैतिक नेता न थे । स्पष्ट ही ग्रियर्सन की दृष्टि संस्कृति और केवल संस्कृति पर ही केन्द्रित थी । संस्कृति के विकास की गति मंद हुआ करती है । नवीन जीवन-दृष्टियां आती हैं, जीवन में घुलती हैं, पचती है और फिर सामाजिक जीवन में व्यापक परिवर्तन उपस्थित करती हैं। बुद्ध और तुलसीदास ऐसी ही दृष्टियां लेकर उपस्थित हुए थे तथा उन्होंने परवर्ती युगों के सांस्कृतिक जीवन पर दीर्घकाल व्यापी प्रभाव डाला । अतः उनका लोकनायकत्व 'काल-बद्ध' नहीं है । वे लगातार कई पीढ़ियों पर अपना प्रभाव डालते हैं । क्रमशः मनामाभिभूत समाज निर्मित होता चला जाता है । वे मात्र समकालीन लोक के नायक नहीं है । वे तो उस लोक के नायक हैं जो कालातीत है । जो अनेक काल खण्डों में सतत वर्धमान है । बुद्ध और तुलसी के लोकनायकत्व के रहस्य को इसी सन्दर्भ में समझा जा सकता है । तत्कालीन युग के सीमित आवागमन के साधनों के सन्दर्भ में तो उस कथन का मूलभूत अभिप्राय ही खो जाएगा। कालातीत लोक के प्राणों में सतत विकासमान भाव या विचार की परम्परा के विकास एवं संवर्धन में ही लोकनायकत्व का गम्भीर आशय निहित है। श्री सनेही इसी सन्दर्भ में आधुनिक भारत के सबसे बड़े लोकनायक हैं । आज का भारत, समाजवाद और साम्यवाद की कल्पना का भारत है । हमारे देश का जीवन प्रवाह इस विशिष्ट दिशा की ओर ही गतिशील है । यह प्रवाह आज भारतीय राष्ट्र का सर्वाधिक शक्तिशाली प्रवाह है। पंडित जवाहर लाल नेहरू का व्यक्तित्व इस महाप्रवाह की एक उत्तुंग तरंग की तरह रहा है। हमारे राष्ट्रीय जीवन का वह महाप्रवाह श्री सनेही जी के तेजस्वी एवं प्रभावपूर्ण व्यक्तित्व से ही आविर्भूत हुआ था । वे इस विराट् जीवन-प्रवाह के आरम्भ-बिन्दु थे । वे केवल कवि नहीं हैं, वरन् हमारे राष्ट्रीय जीवन और संस्कृति के केन्द्र में साम्यवाद की भाव-भूमिका निर्मित करने वाले प्रथम राष्ट्रीय सांस्कृतिक जन-नायक हैं। उन्होंने ही सर्वप्रथम हमारे राष्ट्रीय-जीवन, स्वाधीनता और साम्यवाद को एक योगसूत्र में अनस्यूत किया था । आधुनिक हिन्दी की क्रान्तिकारी काव्य-परम्परा के तो वे एक रससिद्ध कवीश्वर हैं ही, भारतीय जीवन तथा राष्ट्र के के शिल्पी भी हैं। हमारे साम्प्रतिक राष्ट्रीय मानस का निर्माण उन्हीं की भाव-चेतना की तूलिका द्वारा हुआ है। आश्चर्य की बात है कि हिन्दी की शोध-पोथियों में बच्चे बेधड़क यह लिखते हैं कि इस देश की प्रगतिशील और क्रांतिकारी कविता का जन्म तब हुआ जब पं० नेहरू १६२७ में रूस यात्रा कर आए अथवा जब श्री एम० एन० राय आदि ने साम्यवादी दल गठित ने किया। उसके दस बरस बाद पं सुमित्रानन्दन पन्त को स्फूर्ति हुई तब प्रगतिशील कविता जनमो । ताज्जुब होता है शोधग्रन्थों में ऐसी बेसिर पैर की बातें पढ़ कर । इससे भी बढ़कर ताज्जुब तब होता है जब पता चलता है कि इन शोधग्रन्थों का परीक्षण बूढ़े लोगों द्वारा किया गया है और फिर भी ये भ्रान्तियां विद्यमान हैं। हिन्दी कविता ने क्रान्ति का [ भाग ६६ : संख्या १-४.
रही है । क्या उनके पूर्व कोई कवि हिन्दी में वसन्त का संदेश लेकर उपस्थित हुआ था ? जिसने अपने पंचम स्वर में देश को वसन्त के आगमन का प्रथम संवाद सुनाया हो; जिसने आह्वान किया हो : यह वसन्त का सन्देश वाहक कौन है ? वह कवि कौन था जिसने हिन्दी के विख्यात महाप्राण श्री निराला की भाववस्तु पर इतना गहन प्रभाव डाला ? जो निराला जी को निरालापन दे गया । ये कवि हैं पंडित गयाप्रसाद शुक्ल 'सनेही', जिनकी सिद्धि 'मैदान में ' स्वीकार करने के बाद भी साहित्यकार सकुचाते हैं। जिनकी तुलना अपने किसी समकालीन कवि से नहीं की जा सकती; जो अपने ढंग के सर्वथा निराले, सर्वथा अप्रतिम और बेजोड़ कवि हैं । अप्रतिहत आत्मतेज से दीप्त, मानव-मंगल की भूमि पर आत्मोत्सर्ग की भावना से आकण्ठ-आपूरित उनके समकक्ष दूसरा कवि नहीं । यही कवि है, जो प्रथम चरण धरता है और जिसका नतमस्तक अनुवर्तन करती है परवर्ती पीढ़ी : प्रसाद और निराला, हितैषी और महादेवी । लेकिन श्री सनेही केवल कवि नहीं हैं । वे आधुनिक हिन्दी कविता की नयी परम्परा के प्रवर्तक मात्र नहीं हैं । वे केवल साहित्य के कवि नहीं है । वे आधुनिक भारत की ऐसी महान् विभूति हैं जिसका निर्णय इतिहास संभवतः शताब्दियों बाद करेगा । जैसाकि पूर्व कहा गया है - वे उन कृती महात्मा पुरुषों में से है जो प्रकाश बिम्ब की तरह अपने युग के आगे-आगे चलते हैं। और युग ? वे कविता में नहीं जन्मते । उनमें कविता जन्मा करती हैं। अपने युग का अनुवर्तन सभी साहित्यकार किया करते हैं । कौन-सा साहित्यकार है जो अपने युग की अभिव्यक्ति नहीं करता । युग-युगान्तर का साहित्य इसी से भरा पड़ा है । लेकिन कुछ साहित्यकार ऐसे भी होते हैं जो युग के अनुवर्ती नहीं होते - जो युग को जन्म देते हैं । जो राजनीतियों के पीछे नहीं चलते, वरन् राजनीतिज्ञ जिनके पीछे चलते हैं । जिनका असीम शक्तिशाली और तेजस्वी व्यक्तित्व मानो पुकार-पुकार कर साहित्यकार के स्वतंत्र अस्तित्व और व्यक्तित्व का स्वर निनादित कर रहा है । राजनीति उनके पीछे चलती है। उनका अनुवर्तन करती है। यही तो वह भूमि है जहाँ साहित्यकार के व्यक्तित्व की कसौटी पर कसा जाता है । महाकाल की परीक्षाग्नि इसी को कहते हैं । कलाकार की अन्तर्दृष्टि किसे कहते हैं ? उनकी दृष्टि क्या है ? वह जो काल की सीमा पार कर सके । लोकनायकत्व का प्रश्न इसी से जुड़ा है । साहित्य में लोकनायकत्व का आशय क्या है ? यों तो कुछ लोग आज कल इस शब्द का प्रयोग म्युनिसिपल कमेटी के वार्ड मेम्बर के लिए करने लगे हैं । लेकिन डॉशून्य ग्रियर्सन के उस कथन का क्या अभिप्राय था जिसमें उन्होंने तुलसीदास को बुद्ध के बाद भारत का सबसे बड़ा लोकनायक कहा था । यह तो पाँच. हिन्दी साहित्य का इतिहास, पंशून्य रामचन्द्र शुक्ल । पौष - मार्गशीर्ष : शक एक हज़ार छः सौ चार ] स्पष्ट ही है कि ग्रियर्सन की दृष्टि में राजनीति न थी । बुद्ध और तुलसीदास दोनों ही राजनैतिक नेता न थे । स्पष्ट ही ग्रियर्सन की दृष्टि संस्कृति और केवल संस्कृति पर ही केन्द्रित थी । संस्कृति के विकास की गति मंद हुआ करती है । नवीन जीवन-दृष्टियां आती हैं, जीवन में घुलती हैं, पचती है और फिर सामाजिक जीवन में व्यापक परिवर्तन उपस्थित करती हैं। बुद्ध और तुलसीदास ऐसी ही दृष्टियां लेकर उपस्थित हुए थे तथा उन्होंने परवर्ती युगों के सांस्कृतिक जीवन पर दीर्घकाल व्यापी प्रभाव डाला । अतः उनका लोकनायकत्व 'काल-बद्ध' नहीं है । वे लगातार कई पीढ़ियों पर अपना प्रभाव डालते हैं । क्रमशः मनामाभिभूत समाज निर्मित होता चला जाता है । वे मात्र समकालीन लोक के नायक नहीं है । वे तो उस लोक के नायक हैं जो कालातीत है । जो अनेक काल खण्डों में सतत वर्धमान है । बुद्ध और तुलसी के लोकनायकत्व के रहस्य को इसी सन्दर्भ में समझा जा सकता है । तत्कालीन युग के सीमित आवागमन के साधनों के सन्दर्भ में तो उस कथन का मूलभूत अभिप्राय ही खो जाएगा। कालातीत लोक के प्राणों में सतत विकासमान भाव या विचार की परम्परा के विकास एवं संवर्धन में ही लोकनायकत्व का गम्भीर आशय निहित है। श्री सनेही इसी सन्दर्भ में आधुनिक भारत के सबसे बड़े लोकनायक हैं । आज का भारत, समाजवाद और साम्यवाद की कल्पना का भारत है । हमारे देश का जीवन प्रवाह इस विशिष्ट दिशा की ओर ही गतिशील है । यह प्रवाह आज भारतीय राष्ट्र का सर्वाधिक शक्तिशाली प्रवाह है। पंडित जवाहर लाल नेहरू का व्यक्तित्व इस महाप्रवाह की एक उत्तुंग तरंग की तरह रहा है। हमारे राष्ट्रीय जीवन का वह महाप्रवाह श्री सनेही जी के तेजस्वी एवं प्रभावपूर्ण व्यक्तित्व से ही आविर्भूत हुआ था । वे इस विराट् जीवन-प्रवाह के आरम्भ-बिन्दु थे । वे केवल कवि नहीं हैं, वरन् हमारे राष्ट्रीय जीवन और संस्कृति के केन्द्र में साम्यवाद की भाव-भूमिका निर्मित करने वाले प्रथम राष्ट्रीय सांस्कृतिक जन-नायक हैं। उन्होंने ही सर्वप्रथम हमारे राष्ट्रीय-जीवन, स्वाधीनता और साम्यवाद को एक योगसूत्र में अनस्यूत किया था । आधुनिक हिन्दी की क्रान्तिकारी काव्य-परम्परा के तो वे एक रससिद्ध कवीश्वर हैं ही, भारतीय जीवन तथा राष्ट्र के के शिल्पी भी हैं। हमारे साम्प्रतिक राष्ट्रीय मानस का निर्माण उन्हीं की भाव-चेतना की तूलिका द्वारा हुआ है। आश्चर्य की बात है कि हिन्दी की शोध-पोथियों में बच्चे बेधड़क यह लिखते हैं कि इस देश की प्रगतिशील और क्रांतिकारी कविता का जन्म तब हुआ जब पंशून्य नेहरू एक हज़ार छः सौ सत्ताईस में रूस यात्रा कर आए अथवा जब श्री एमशून्य एनशून्य राय आदि ने साम्यवादी दल गठित ने किया। उसके दस बरस बाद पं सुमित्रानन्दन पन्त को स्फूर्ति हुई तब प्रगतिशील कविता जनमो । ताज्जुब होता है शोधग्रन्थों में ऐसी बेसिर पैर की बातें पढ़ कर । इससे भी बढ़कर ताज्जुब तब होता है जब पता चलता है कि इन शोधग्रन्थों का परीक्षण बूढ़े लोगों द्वारा किया गया है और फिर भी ये भ्रान्तियां विद्यमान हैं। हिन्दी कविता ने क्रान्ति का [ भाग छयासठ : संख्या एक-चार.
सवाहिर किरणावको छठा भाग इन महाराज के द्वारा अपना प्रार्थनापत्र द्वारका क्यों नहीं भेज देती ? रुक्मिणी-मुआ, जरा विचार तो करो, ये वृद्ध महाराज सेना के बीच से कैसे निकल सकेंगे और द्वारका कितने दिन में पहुँचेंगे ? विवाह का दिन समीप ही है। इतने थोडे समय में न तो ये महाराज द्वारका पहुँच ही सकते हैं, न द्वारका से श्रीकृष्ण ही यहाँ पहुँच सकते हैं। ऐसी दशा में इन्हें व्यर्थ ही सकट में डालने से क्या लाभ ? भुआ-रुक्मिणी, तू सत्य का प्रत्यक्ष प्रभाव देख कर मी उसके विषय में सन्देह कर रही है । तू इन्हे पत्र तो देसम्भव है, कि तेरा पत्र समय पर श्रीकृष्ण के पास पहुँच जावे, और वे भी समय पर ही आ जावें । रुक्मिणी से यह कह कर भुआ, कुशल से कहने लगीकुशळ महाराज, यदि आप रुक्मिणी की सहायता करना ही चाहते हैं, तो इसका एक मंत्र द्वारकानाथ के पास शीघ्र से शीघ्र पहुँचा दीजिये । परन्तु यह विचार लीजिये, कि महल और नगर के आस पास सैनिक पहरा है। यदि पत्र ले जाते हुए पकड़ लिये गये, तो शिशुपाल और रुक्म आपको मृत्यु से कम घराढ न देंगे। कुशल ~ राजभगिनि, इसकी किचिन भी चिवों न फरिये ।
सवाहिर किरणावको छठा भाग इन महाराज के द्वारा अपना प्रार्थनापत्र द्वारका क्यों नहीं भेज देती ? रुक्मिणी-मुआ, जरा विचार तो करो, ये वृद्ध महाराज सेना के बीच से कैसे निकल सकेंगे और द्वारका कितने दिन में पहुँचेंगे ? विवाह का दिन समीप ही है। इतने थोडे समय में न तो ये महाराज द्वारका पहुँच ही सकते हैं, न द्वारका से श्रीकृष्ण ही यहाँ पहुँच सकते हैं। ऐसी दशा में इन्हें व्यर्थ ही सकट में डालने से क्या लाभ ? भुआ-रुक्मिणी, तू सत्य का प्रत्यक्ष प्रभाव देख कर मी उसके विषय में सन्देह कर रही है । तू इन्हे पत्र तो देसम्भव है, कि तेरा पत्र समय पर श्रीकृष्ण के पास पहुँच जावे, और वे भी समय पर ही आ जावें । रुक्मिणी से यह कह कर भुआ, कुशल से कहने लगीकुशळ महाराज, यदि आप रुक्मिणी की सहायता करना ही चाहते हैं, तो इसका एक मंत्र द्वारकानाथ के पास शीघ्र से शीघ्र पहुँचा दीजिये । परन्तु यह विचार लीजिये, कि महल और नगर के आस पास सैनिक पहरा है। यदि पत्र ले जाते हुए पकड़ लिये गये, तो शिशुपाल और रुक्म आपको मृत्यु से कम घराढ न देंगे। कुशल ~ राजभगिनि, इसकी किचिन भी चिवों न फरिये ।
हो राष्ट्रसघ ने आयोग (कमीशन) नियुक्त किया जो कराची पहुँचा। मुझसे इससे कोई विशेष प्रयोजन नही था । उन लोगो की धीमी और जटिल श्रौपचारिक कार्रवाइयो से न भारत प्रसन्न हुआ न पाकिस्तान । पन्द्रह वर्ष के बीतने पर भी कोई मामला आगे नही बढा है । एक रेखा मानी गयी जिसके पार गोलावारी नही हो सकती थी, पर इस रेखा के ही सम्बन्ध में भारत और पाकिस्तान के बीच मतभेद बना रहा । प्रयोग के सदस्य बहुत दिनो तक कराची मे रहे । उनसे मेरी कभी-कभी मुलाकात होती थी, पर अधिक सम्पर्क नही था । वास्तव मे दिल्ली के विदेशी मन्त्रालय ने मुझे प्रादेश दिया था कि मैं उनसे कोई सम्बन्ध न रखूं । आयोग के कराची पहुँचने के कुछ ही घंटे बाद उसके सचिव मुझसे मिलने आये । मुझे याद है कि अपने प्रधान मन्त्री के इच्छानुसार प्रयोग के अध्यक्ष से मिलने उनके होटल मे एक दिन प्रात काल गया, और उनसे कहा कि दिल्ली की संसद् मे उपस्थित करने के लिए जो विवरण वे देने वाले थे उसे जल्दी दे क्योकि वहुत देर हो रही है । ससद् का सत्र समाप्त हो रहा हे । राष्ट्रसघ की उपयोगिता के सम्बन्ध मे लोगो का जो कुछ विचार हो, पर इसमे सदेह नहीं कि ससार मे उसके अस्तित्व के कारण बहुत कुछ मारकाट बचायी जा सकी। कभी-कभी तो ऐसा प्रतीत होता था कि युद्ध छिड ही जायगा पर राष्ट्रसघ के हस्तक्षेप से इसका निवारण किया जा सका । इसके द्वारा लोगो को स्थिति पर पुनर्विचार करने का श्रवसर मिलता है और इससे बहुत ही लाभ होता है । सम्भव है कि पाकिस्तान और हमारे वीच के कश्मीर सम्बन्धी मामले और भी जटिल हो गये होते यदि आयोग बीच मे न पडा होता । सन् १९४८ की ग्रीष्म ऋतु मे श्रीनगर मे वार्षिक जशन ( उत्सव ) हुआ । उस समय के कश्मीर के मुख्य मंत्री शेख अब्दुल्ला ने उसके लिए मुझे आमन्त्रित किया था। मै जाने वाला नही था पर उसी समय सयोगवश मै दिल्ली में था, और अपने प्रधान मन्त्री तथा रफी अहमद किदवई के आग्रह पर मै भी वहाँ गया। मैने उस समय झेलम नदी पर वडा सुन्दर जुलूस देखा और शेर-ए-कश्मीर कहे
हो राष्ट्रसघ ने आयोग नियुक्त किया जो कराची पहुँचा। मुझसे इससे कोई विशेष प्रयोजन नही था । उन लोगो की धीमी और जटिल श्रौपचारिक कार्रवाइयो से न भारत प्रसन्न हुआ न पाकिस्तान । पन्द्रह वर्ष के बीतने पर भी कोई मामला आगे नही बढा है । एक रेखा मानी गयी जिसके पार गोलावारी नही हो सकती थी, पर इस रेखा के ही सम्बन्ध में भारत और पाकिस्तान के बीच मतभेद बना रहा । प्रयोग के सदस्य बहुत दिनो तक कराची मे रहे । उनसे मेरी कभी-कभी मुलाकात होती थी, पर अधिक सम्पर्क नही था । वास्तव मे दिल्ली के विदेशी मन्त्रालय ने मुझे प्रादेश दिया था कि मैं उनसे कोई सम्बन्ध न रखूं । आयोग के कराची पहुँचने के कुछ ही घंटे बाद उसके सचिव मुझसे मिलने आये । मुझे याद है कि अपने प्रधान मन्त्री के इच्छानुसार प्रयोग के अध्यक्ष से मिलने उनके होटल मे एक दिन प्रात काल गया, और उनसे कहा कि दिल्ली की संसद् मे उपस्थित करने के लिए जो विवरण वे देने वाले थे उसे जल्दी दे क्योकि वहुत देर हो रही है । ससद् का सत्र समाप्त हो रहा हे । राष्ट्रसघ की उपयोगिता के सम्बन्ध मे लोगो का जो कुछ विचार हो, पर इसमे सदेह नहीं कि ससार मे उसके अस्तित्व के कारण बहुत कुछ मारकाट बचायी जा सकी। कभी-कभी तो ऐसा प्रतीत होता था कि युद्ध छिड ही जायगा पर राष्ट्रसघ के हस्तक्षेप से इसका निवारण किया जा सका । इसके द्वारा लोगो को स्थिति पर पुनर्विचार करने का श्रवसर मिलता है और इससे बहुत ही लाभ होता है । सम्भव है कि पाकिस्तान और हमारे वीच के कश्मीर सम्बन्धी मामले और भी जटिल हो गये होते यदि आयोग बीच मे न पडा होता । सन् एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस की ग्रीष्म ऋतु मे श्रीनगर मे वार्षिक जशन हुआ । उस समय के कश्मीर के मुख्य मंत्री शेख अब्दुल्ला ने उसके लिए मुझे आमन्त्रित किया था। मै जाने वाला नही था पर उसी समय सयोगवश मै दिल्ली में था, और अपने प्रधान मन्त्री तथा रफी अहमद किदवई के आग्रह पर मै भी वहाँ गया। मैने उस समय झेलम नदी पर वडा सुन्दर जुलूस देखा और शेर-ए-कश्मीर कहे
मुजफ्फरनगर। जिले में गैर इरादतन हत्या के 8 साल पुराने मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराया। कोर्ट ने तीनों दोषियों को 10 साल कैद की सजा सुनाई। सजा पाने वालों में पिता-पुत्र सहित तीन लोग शामिल है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नीरजकांत मलिक और अरुण जावला ने बताया कि थाना खतौली के गांव तिगाई में 8 वर्ष पूर्व एक किसान के साथ परिवार के ही लोगों ने मारपीट की थी। मारपीट में एक महिला सहित दो सगे भाई गंभीर घायल हुए थे। उपचार के दौरान एक घायल व्यक्ति की मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि गांव तिगाई निवासी रेखा ने मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया था कि उसका पति मुकेश कुमार और जेठ जवाहरलाल पुत्रगण भुल्लन खेत पर गोबर ढो रहे थे। बताया कि उसका पति मुकेश 6 फरवरी 2015 को गोबर लेकर लौटा तो फावड़ा खेत पर ही भूल गया। रेखा ने मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया कि जब पति मुकेश खेत पर वापस गया तो वह भी उसके साथ चली गई। आरोप है कि वहां उसके पति मुकेश और वहां मौजूद जेठ जवाहरलाल के साथ 3 लोगों ने मारपीट की, जिससे वह गंभीर घायल हो गए। आरोप था कि मारपीट करने वालों में रामगोपाल पुत्र भुल्लन, अविनाश उर्फ मिंटू पुत्र रामगोपाल और नीरज उर्फ नीरव पुत्र दयानंद निवासी गण गांव तिगाई थाना खतौली शामिल थे। पुलिस ने इस मामले में तीनों आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। उधर उपचार के दौरान जवाहरलाल की मृत्यु हो गई थी। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नीरज कांत मलिक और अरुण जावला ने बताया कि घटना के मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या 6 शाकिर हसन ने की। उन्होंने बताया कि कोर्ट में घटना साबित करने के लिए अभियोजन की ओर से 13 गवाह पेश किए गए। दोनों पक्ष की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गैर इरादतन हत्या के मामले में तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10 साल कैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने तीनों दोषियों पर 28500 रुपए का जुर्माना भी लगाया।
मुजफ्फरनगर। जिले में गैर इरादतन हत्या के आठ साल पुराने मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने तीन आरोपियों को दोषी ठहराया। कोर्ट ने तीनों दोषियों को दस साल कैद की सजा सुनाई। सजा पाने वालों में पिता-पुत्र सहित तीन लोग शामिल है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नीरजकांत मलिक और अरुण जावला ने बताया कि थाना खतौली के गांव तिगाई में आठ वर्ष पूर्व एक किसान के साथ परिवार के ही लोगों ने मारपीट की थी। मारपीट में एक महिला सहित दो सगे भाई गंभीर घायल हुए थे। उपचार के दौरान एक घायल व्यक्ति की मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि गांव तिगाई निवासी रेखा ने मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया था कि उसका पति मुकेश कुमार और जेठ जवाहरलाल पुत्रगण भुल्लन खेत पर गोबर ढो रहे थे। बताया कि उसका पति मुकेश छः फरवरी दो हज़ार पंद्रह को गोबर लेकर लौटा तो फावड़ा खेत पर ही भूल गया। रेखा ने मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया कि जब पति मुकेश खेत पर वापस गया तो वह भी उसके साथ चली गई। आरोप है कि वहां उसके पति मुकेश और वहां मौजूद जेठ जवाहरलाल के साथ तीन लोगों ने मारपीट की, जिससे वह गंभीर घायल हो गए। आरोप था कि मारपीट करने वालों में रामगोपाल पुत्र भुल्लन, अविनाश उर्फ मिंटू पुत्र रामगोपाल और नीरज उर्फ नीरव पुत्र दयानंद निवासी गण गांव तिगाई थाना खतौली शामिल थे। पुलिस ने इस मामले में तीनों आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। उधर उपचार के दौरान जवाहरलाल की मृत्यु हो गई थी। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नीरज कांत मलिक और अरुण जावला ने बताया कि घटना के मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट संख्या छः शाकिर हसन ने की। उन्होंने बताया कि कोर्ट में घटना साबित करने के लिए अभियोजन की ओर से तेरह गवाह पेश किए गए। दोनों पक्ष की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गैर इरादतन हत्या के मामले में तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए दस साल कैद की सजा सुनाई। कोर्ट ने तीनों दोषियों पर अट्ठाईस हज़ार पाँच सौ रुपयापए का जुर्माना भी लगाया।
किये जायेंगे। जरूरी योग्यता : इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सोसाइटी एंड कल्चर प्रोग्राम में आवेदन करने के लिए आवेदकों के पास किसी भी सब्जेक्ट में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक की डिग्री होनी अनिवार्य है। इसके अलावा जो स्टूडेंट्स अपनी बैचलर्स डिग्री के अंतिम वर्ष या सेमेस्टर के रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं या जिनकी स्नातक डिग्री 2017-2018 के शैक्षणिक सत्र में पूरी होनी है, वह भी आवेदन कर सकते हैं। वे भी इसके लिए योग्य हैं। एससी/ एसटी/ओबीसी आवेदकों के लिए योग्यता मानक यूजीसी/सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर ही होंगे। चयन का आधार : आवेदन फॉर्म भरने के बाद सभी आवेदकों को लिखित परीक्षा से गुजरना होगा। इसके बार इसमें से चयनित अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जायेगा। चयन का अंतिम निर्णय अकादमिक प्रमाण पत्रों, एप्टीट्यूड, लिखित परीक्षा और इंटरव्यू सभी के आधार पर लिया जाएगा। लिखित परीक्षा और इंटरव्यू आईआईटी गांधीनगर में ही आयोजित होंगे। इसके लिए देश में कहीं और सेंटर्स नहीं बनाये जायेंगे। महत्वपूर्ण तिथियां : एमए के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 15 जनवरी 2018 निर्धारित की गई है। शॉर्टलिस्ट किए गए आवेदकों की लिस्ट 22 जनवरी 2018 को आएगी। एडमिशन टेस्ट और इंटरव्यू 10 व 11 मार्च 2018 को आयोजित होंगे। चुने गए स्टूडेंट्स की घोषणा 19 मार्च 2018 को होगी। चयनित आवेदकों को 19 अप्रैल 2018 तक फीस जमा करनी होगी। इसके बाद शैक्षणिक गतिविधियां शुरू हो जाएंगी।
किये जायेंगे। जरूरी योग्यता : इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सोसाइटी एंड कल्चर प्रोग्राम में आवेदन करने के लिए आवेदकों के पास किसी भी सब्जेक्ट में न्यूनतम पचपन प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक की डिग्री होनी अनिवार्य है। इसके अलावा जो स्टूडेंट्स अपनी बैचलर्स डिग्री के अंतिम वर्ष या सेमेस्टर के रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं या जिनकी स्नातक डिग्री दो हज़ार सत्रह-दो हज़ार अट्ठारह के शैक्षणिक सत्र में पूरी होनी है, वह भी आवेदन कर सकते हैं। वे भी इसके लिए योग्य हैं। एससी/ एसटी/ओबीसी आवेदकों के लिए योग्यता मानक यूजीसी/सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर ही होंगे। चयन का आधार : आवेदन फॉर्म भरने के बाद सभी आवेदकों को लिखित परीक्षा से गुजरना होगा। इसके बार इसमें से चयनित अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जायेगा। चयन का अंतिम निर्णय अकादमिक प्रमाण पत्रों, एप्टीट्यूड, लिखित परीक्षा और इंटरव्यू सभी के आधार पर लिया जाएगा। लिखित परीक्षा और इंटरव्यू आईआईटी गांधीनगर में ही आयोजित होंगे। इसके लिए देश में कहीं और सेंटर्स नहीं बनाये जायेंगे। महत्वपूर्ण तिथियां : एमए के लिए आवेदन की अंतिम तारीख पंद्रह जनवरी दो हज़ार अट्ठारह निर्धारित की गई है। शॉर्टलिस्ट किए गए आवेदकों की लिस्ट बाईस जनवरी दो हज़ार अट्ठारह को आएगी। एडमिशन टेस्ट और इंटरव्यू दस व ग्यारह मार्च दो हज़ार अट्ठारह को आयोजित होंगे। चुने गए स्टूडेंट्स की घोषणा उन्नीस मार्च दो हज़ार अट्ठारह को होगी। चयनित आवेदकों को उन्नीस अप्रैल दो हज़ार अट्ठारह तक फीस जमा करनी होगी। इसके बाद शैक्षणिक गतिविधियां शुरू हो जाएंगी।
Patna Junction Porn Video Viral: बिहार रेलवे स्टेशन अश्लील वीडियो कांड (Bihar railway station obscene video scandal) के बाद पोर्न स्टार केंड्रा लस्ट ने अब इंटरनेट पर ऐसा स्टंट किया है, जिससे वह फिर से ट्रोल हो रही हैं. इंटरनेट उपयोगकर्ता विशेष रूप (Patna Junction Porn Star Kendra Lust Porn Video Viral) से भारतीय नेटिज़न्स ट्रोलिंग में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं. बता दें कि पटना रेलवे स्टेशन के एक कर्मचारी ने गलती से एक वीडियो के लिए स्क्रीन पर तीन मिनट तक पोर्न चला दिया था. इस घटना के बाद Porn Star Kendra Lust ने अपनी एक तस्वीर साझा की और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह उनका वीडियो था. वायरल घटना के बाद उन्होंने इंडियन ड्रेस में (Patna Junction Porn Star Kendra Lust Porn Video Viral) अपनी एक तस्वीर भी शेयर की. इसके बाद से वह लगातार भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड कर रही हैं. एक बार फिर Kendra Lust ने अपनी एक एडिटेड तस्वीर शेयर की है, जिसमें वह पटना जंक्शन पर खड़ी देखी जा सकती हैं, जिसे कहा जा रहा है कि केंड्रा लस्ट पटना जंक्शन पहुंच गई है, जबकि ऐसा नहीं है, केंड्रा लस्ट का एडिट फोटो वायरल हो रही है. इस हफ्ते केंड्रा लस्ट ने यह भी खुलासा किया कि वह भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी (Patna Junction Porn Star Kendra Lust Porn Video Viral) से मिलने की उम्मीद करती हैं. देसी ड्रेस में केंड्रा लस्ट (Porn Star Kendra Lust) की एक फोटो पर एक ट्विटर यूजर ने पूछा, 'मोहम्मद शमी से कब मिल रहे हो? जिस पर पोर्न फिल्म स्टार ने जवाब दिया- "जल्द ही मिलने की उम्मीद है. मैं उनकी फैन हूं. " मोहम्मद शमी को लेकर केंद्र लस्ट के पुराने ट्वीट्स के साथ ही यह जवाब अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहा है. - छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें,
Patna Junction Porn Video Viral: बिहार रेलवे स्टेशन अश्लील वीडियो कांड के बाद पोर्न स्टार केंड्रा लस्ट ने अब इंटरनेट पर ऐसा स्टंट किया है, जिससे वह फिर से ट्रोल हो रही हैं. इंटरनेट उपयोगकर्ता विशेष रूप से भारतीय नेटिज़न्स ट्रोलिंग में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं. बता दें कि पटना रेलवे स्टेशन के एक कर्मचारी ने गलती से एक वीडियो के लिए स्क्रीन पर तीन मिनट तक पोर्न चला दिया था. इस घटना के बाद Porn Star Kendra Lust ने अपनी एक तस्वीर साझा की और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह उनका वीडियो था. वायरल घटना के बाद उन्होंने इंडियन ड्रेस में अपनी एक तस्वीर भी शेयर की. इसके बाद से वह लगातार भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड कर रही हैं. एक बार फिर Kendra Lust ने अपनी एक एडिटेड तस्वीर शेयर की है, जिसमें वह पटना जंक्शन पर खड़ी देखी जा सकती हैं, जिसे कहा जा रहा है कि केंड्रा लस्ट पटना जंक्शन पहुंच गई है, जबकि ऐसा नहीं है, केंड्रा लस्ट का एडिट फोटो वायरल हो रही है. इस हफ्ते केंड्रा लस्ट ने यह भी खुलासा किया कि वह भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी से मिलने की उम्मीद करती हैं. देसी ड्रेस में केंड्रा लस्ट की एक फोटो पर एक ट्विटर यूजर ने पूछा, 'मोहम्मद शमी से कब मिल रहे हो? जिस पर पोर्न फिल्म स्टार ने जवाब दिया- "जल्द ही मिलने की उम्मीद है. मैं उनकी फैन हूं. " मोहम्मद शमी को लेकर केंद्र लस्ट के पुराने ट्वीट्स के साथ ही यह जवाब अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहा है. - छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें,
अगस्त में देश में सामान्य से 24 प्रतिशत कम बारिश हुई, जो कि महीने के लिए आईएमडी की भविष्यवाणियों से एक बड़ा विचलन है, लेकिन नवीनतम पूर्वानुमानों का कहना है कि सितंबर में सामान्य से अधिक होने की उम्मीद है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बुधवार को कहा कि सितंबर में मध्य भारत के कई हिस्सों में सामान्य से सामान्य बारिश की संभावना है। उन्होंने कहा कि आईएमडी ने मौसम के लिए समग्र वर्षा पूर्वानुमान को भी "अपडेट" किया है और अब यह सामान्य वर्षा के निचले छोर के आसपास होने की संभावना है। यह तीसरी बार है जब आईएमडी द्वारा मानसून के पूर्वानुमान को संशोधित किया गया है। 16 अप्रैल को, दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए पहली लंबी दूरी के पूर्वानुमान में कहा गया है कि वर्षा 5 प्रतिशत की त्रुटि के साथ लंबी अवधि के औसत (एलपीए) का 98 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। 1961-2010 की अवधि के लिए पूरे देश में मौसम की वर्षा का एलपीए 88 सेमी है। IMD ने 1 जून को अपने दूसरे लॉन्ग रेंज फोरकास्ट में प्लस या माइनस 4 प्रतिशत की मॉडल त्रुटि के साथ इसे लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के 101 प्रतिशत तक बढ़ा दिया। महापात्र ने कहा कि उत्तर और पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण भारत के दक्षिणी हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। महापात्र ने कहा कि मानसून की कमी अब नौ प्रतिशत पर है और सितंबर के दौरान अच्छी बारिश के कारण इसके कम होने की उम्मीद है। मौसम विभाग के अनुसार जुलाई में सात प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी, जबकि जून में 10 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई थी। अगस्त में देश में सामान्य से 24 फीसदी कम बारिश हुई। आईएमडी के चार मौसम विभाग में से मध्य भारत मंडल में 39 प्रतिशत कम प्राप्त हुआ। इस डिवीजन में महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के क्षेत्र का एक बड़ा क्षेत्र शामिल है। उत्तर पश्चिमी भारत के डिवीजन में, जिसमें उत्तरी भारतीय राज्य शामिल हैं, 30 प्रतिशत की कमी थी। दक्षिण प्रायद्वीप में यह कमी 10 प्रतिशत थी जबकि पूर्व और उत्तर पूर्व संभागों में सामान्य से 2 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। आईएमडी ने भविष्यवाणी की थी कि अगस्त के दौरान बारिश की गतिविधि सामान्य रहने की उम्मीद थी। पूर्वानुमान के गलत होने के कारणों के बारे में पूछे जाने पर, महापात्र ने कहा कि नकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुवीय स्थितियां जो भारतीय मानसून के लिए प्रतिकूल हैं, महीने के दौरान बनी रहीं। ज्यादातर अगस्त की वर्षा की कमी अल नीनो/नकारात्मक आईओडी घटनाओं से जुड़ी होती है। यह 1965 के बाद से 15 में से नौ वर्षों में मनाया गया था, उन्होंने कहा। लेकिन एक नकारात्मक आईओडी स्थिति ही मानसून को प्रभावित करने वाला एकमात्र कारक नहीं है, उन्होंने कहा। अल नीनो प्रशांत जल के गर्म होने से जुड़ा है जबकि एक नकारात्मक आईओडी हिंद महासागर के पानी के गर्म होने से जुड़ा है। साथ ही मॉनसून डिप्रेशन का भी अभाव था। महापात्र ने कहा कि आम तौर पर अगस्त के महीने में मानसून के दो दबाव बनते हैं। उन्होंने कहा कि चार (16-18 अगस्त और 28-30 अगस्त) के मुकाबले केवल दो कम दबाव के क्षेत्र बने हैं। महापात्र ने कहा कि नवीनतम वैश्विक मॉडल पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि मौजूदा ईएनएसओ (अल नीनो) की स्थिति भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर और सितंबर के दौरान हिंद महासागर क्षेत्र में नकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुवीय स्थितियों के जारी रहने की संभावना है। हालांकि, मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान (एसएसटी) ठंडा होने के संकेत दे रहा है और मानसून के मौसम के अंत में या उसके बाद ला नीना की स्थिति फिर से उभरने की संभावना है, आईएमडी प्रमुख ने कहा . जैसा कि प्रशांत और हिंद महासागरों पर एसएसटी की स्थिति भारतीय मानसून पर मजबूत प्रभाव के लिए जानी जाती है, आईएमडी इन महासागरीय घाटियों पर समुद्र की सतह की स्थिति के विकास की सावधानीपूर्वक निगरानी कर रहा है, महापात्र ने कहा। उत्तर पश्चिम भारत से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सितंबर के पहले दो सप्ताह तक इस क्षेत्र में सामान्य वर्षा की गतिविधि की संभावना है। दक्षिण पश्चिम मानसून 17 सितंबर से उत्तर पश्चिम भारत से पीछे हटना शुरू कर देता है। लेकिन उन्होंने उत्तर पश्चिम भारत से मानसून के देरी से लौटने की प्रवृत्ति की ओर इशारा किया।
अगस्त में देश में सामान्य से चौबीस प्रतिशत कम बारिश हुई, जो कि महीने के लिए आईएमडी की भविष्यवाणियों से एक बड़ा विचलन है, लेकिन नवीनतम पूर्वानुमानों का कहना है कि सितंबर में सामान्य से अधिक होने की उम्मीद है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बुधवार को कहा कि सितंबर में मध्य भारत के कई हिस्सों में सामान्य से सामान्य बारिश की संभावना है। उन्होंने कहा कि आईएमडी ने मौसम के लिए समग्र वर्षा पूर्वानुमान को भी "अपडेट" किया है और अब यह सामान्य वर्षा के निचले छोर के आसपास होने की संभावना है। यह तीसरी बार है जब आईएमडी द्वारा मानसून के पूर्वानुमान को संशोधित किया गया है। सोलह अप्रैल को, दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए पहली लंबी दूरी के पूर्वानुमान में कहा गया है कि वर्षा पाँच प्रतिशत की त्रुटि के साथ लंबी अवधि के औसत का अट्ठानवे प्रतिशत रहने की उम्मीद है। एक हज़ार नौ सौ इकसठ-दो हज़ार दस की अवधि के लिए पूरे देश में मौसम की वर्षा का एलपीए अठासी सेमी है। IMD ने एक जून को अपने दूसरे लॉन्ग रेंज फोरकास्ट में प्लस या माइनस चार प्रतिशत की मॉडल त्रुटि के साथ इसे लॉन्ग पीरियड एवरेज के एक सौ एक प्रतिशत तक बढ़ा दिया। महापात्र ने कहा कि उत्तर और पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण भारत के दक्षिणी हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। महापात्र ने कहा कि मानसून की कमी अब नौ प्रतिशत पर है और सितंबर के दौरान अच्छी बारिश के कारण इसके कम होने की उम्मीद है। मौसम विभाग के अनुसार जुलाई में सात प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी, जबकि जून में दस प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई थी। अगस्त में देश में सामान्य से चौबीस फीसदी कम बारिश हुई। आईएमडी के चार मौसम विभाग में से मध्य भारत मंडल में उनतालीस प्रतिशत कम प्राप्त हुआ। इस डिवीजन में महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के क्षेत्र का एक बड़ा क्षेत्र शामिल है। उत्तर पश्चिमी भारत के डिवीजन में, जिसमें उत्तरी भारतीय राज्य शामिल हैं, तीस प्रतिशत की कमी थी। दक्षिण प्रायद्वीप में यह कमी दस प्रतिशत थी जबकि पूर्व और उत्तर पूर्व संभागों में सामान्य से दो प्रतिशत अधिक वर्षा हुई। आईएमडी ने भविष्यवाणी की थी कि अगस्त के दौरान बारिश की गतिविधि सामान्य रहने की उम्मीद थी। पूर्वानुमान के गलत होने के कारणों के बारे में पूछे जाने पर, महापात्र ने कहा कि नकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुवीय स्थितियां जो भारतीय मानसून के लिए प्रतिकूल हैं, महीने के दौरान बनी रहीं। ज्यादातर अगस्त की वर्षा की कमी अल नीनो/नकारात्मक आईओडी घटनाओं से जुड़ी होती है। यह एक हज़ार नौ सौ पैंसठ के बाद से पंद्रह में से नौ वर्षों में मनाया गया था, उन्होंने कहा। लेकिन एक नकारात्मक आईओडी स्थिति ही मानसून को प्रभावित करने वाला एकमात्र कारक नहीं है, उन्होंने कहा। अल नीनो प्रशांत जल के गर्म होने से जुड़ा है जबकि एक नकारात्मक आईओडी हिंद महासागर के पानी के गर्म होने से जुड़ा है। साथ ही मॉनसून डिप्रेशन का भी अभाव था। महापात्र ने कहा कि आम तौर पर अगस्त के महीने में मानसून के दो दबाव बनते हैं। उन्होंने कहा कि चार के मुकाबले केवल दो कम दबाव के क्षेत्र बने हैं। महापात्र ने कहा कि नवीनतम वैश्विक मॉडल पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि मौजूदा ईएनएसओ की स्थिति भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर और सितंबर के दौरान हिंद महासागर क्षेत्र में नकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुवीय स्थितियों के जारी रहने की संभावना है। हालांकि, मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान ठंडा होने के संकेत दे रहा है और मानसून के मौसम के अंत में या उसके बाद ला नीना की स्थिति फिर से उभरने की संभावना है, आईएमडी प्रमुख ने कहा . जैसा कि प्रशांत और हिंद महासागरों पर एसएसटी की स्थिति भारतीय मानसून पर मजबूत प्रभाव के लिए जानी जाती है, आईएमडी इन महासागरीय घाटियों पर समुद्र की सतह की स्थिति के विकास की सावधानीपूर्वक निगरानी कर रहा है, महापात्र ने कहा। उत्तर पश्चिम भारत से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सितंबर के पहले दो सप्ताह तक इस क्षेत्र में सामान्य वर्षा की गतिविधि की संभावना है। दक्षिण पश्चिम मानसून सत्रह सितंबर से उत्तर पश्चिम भारत से पीछे हटना शुरू कर देता है। लेकिन उन्होंने उत्तर पश्चिम भारत से मानसून के देरी से लौटने की प्रवृत्ति की ओर इशारा किया।
कीर्थिक रचना ही इस ढंग की है कि वह हमेशा फाकेकशी की सरहद पर बना रहता है। आप जिन चीज़ों का उपयोग करना चाहते हैं उनको पैदा नहीं कर सकते और जो चीजें आपको पैदा करनी पड़ती हैं उसका आप उपयोग नहीं कर सकते । अपना माल बेचने तथा आपकी भोजन-सामग्री के लिए कच्चा माल इकट्ठा करने के लिए बाजारों का ढूंढ़ना, आपके लिए जीवन-मरण ३ का प्रश्न है । चीन एक ऐसा बाजार है या हो सकता है। और पिछले कुछ वरसों के आपके हमारे व्यवहार में हमने यह देख लिया कि आप हमारे बाजार ही खुले कराना • चाहते हैं । इस हेतु को यदि आप छिपाना भी चाहें तो इससे क्या ? यहां पर इस बात का विवेचन नहीं करूंगा कि इस नीति में न्याय और धर्म कहांतक है । तो स्वार्थान्ध हैं 1. अतः आपके सामने इस बात की सैद्धान्तिक चर्चा करना व्यर्थ है । इसलिए मेरा प्रयत्न तो यही होगा कि मैं दू' कि आज की परिस्थिति के विषय में हमारा क्या ख्याल है तथा हम आपके आक्रमणों से क्यों चिढ़ते हैं । एक मामूली ब्रिटिश व्यापारी को यह बात जरूर ही विचित्र दिखाई देती है कि जिस बात को वह हमारो राष्ट्रीय साधनसमृद्धि का विकास कहता है उसी में हम बाधा क्यों उपस्थित कर, रहे हैं ? उसे तो वस्तुमात्र को लाभ और हानि के दृष्टिकोण से देखने की आदत हो गई है न ? और इस दृष्टि से देखते हुए वह मानता है कि यदि यह साबित किया जा सकता है कि फलां रास्ते पर चलने से आर्थिक उन्नति जरूर ही होगी तब तो उस मार्ग का अवलम्बन करने के विषय में कोई कही न हानी चाहिए । वह मानता है कि यदि चीन का प्रदेश उसकी पू'जी तथा व्यापार के लिए खुल जाय तो उसका यह हेतु सफल हो सकता है। इसलिए वह और आगे बढ़ कर यह भी मान लेता है कि उसके साहस का विरोध करने के बदले स्वागत करने ही में हमारा भी लाभ है । शायद उसका यह ख़्याल उसकी अपनी दृष्टि से ठीक होगा। पर उसकी दृष्टि कहीं हमारी दृष्टि तो है नहीं । हमारी तो यह चाल है कि इसके विपरीत किसी भी गम्भीर और महत्वपूर्ण काम को करने के पहले हम केवल यही देख कर नहीं रुक जाते कि हमारी सम्पत्ति पर उसका क्या असर गिरता है, बल्कि यह भी देखते हैं कि इससे हमारे राष्ट्र का क्या कल्याण होगा, ( क्योंकि इसे हम एक बिल्कुल जुदी चीज समझते हैं । ) आप हमेशा जोवन की सुख-सामग्री का विचार करते हैं, तहां हम जीवन के सौरभ का विचार करते हैं। और जब आप हमें कहते हैं ( हां, आपके कहने के मानो यही हैं ) कि हमें अपने समस्त समाज में कायापलट कर देना चाहिए, किसानों का राष्ट्र न रह कर व्यापारियों और कारखाने वालों का राष्ट्र बन जाना चाहिए, काल्पनिक सम्पत्ति के लिए हमें अपनी आर्थिक और राजनैतिक स्वाधीनता को तिलाञ्जलि दे देनी चाहिए और हमारे उद्यम को ही नहीं, बल्कि समस्त रीति-रवाजों तथा नीति और समाजसंस्थाओं तक को नये सांचे में ढाल लेना चाहिए - जब आप यह कहते हैं - तब हम ज़रा इस बात को सूक्ष्म नजर से देख लें तो क्षमा कीजिए कि जिन चीजों को आप चीन में प्रविष्ट कर वाना चाहते हैं उनका खुद आपके समाज पर क्या परिणाम हुआ है ।
कीर्थिक रचना ही इस ढंग की है कि वह हमेशा फाकेकशी की सरहद पर बना रहता है। आप जिन चीज़ों का उपयोग करना चाहते हैं उनको पैदा नहीं कर सकते और जो चीजें आपको पैदा करनी पड़ती हैं उसका आप उपयोग नहीं कर सकते । अपना माल बेचने तथा आपकी भोजन-सामग्री के लिए कच्चा माल इकट्ठा करने के लिए बाजारों का ढूंढ़ना, आपके लिए जीवन-मरण तीन का प्रश्न है । चीन एक ऐसा बाजार है या हो सकता है। और पिछले कुछ वरसों के आपके हमारे व्यवहार में हमने यह देख लिया कि आप हमारे बाजार ही खुले कराना • चाहते हैं । इस हेतु को यदि आप छिपाना भी चाहें तो इससे क्या ? यहां पर इस बात का विवेचन नहीं करूंगा कि इस नीति में न्याय और धर्म कहांतक है । तो स्वार्थान्ध हैं एक. अतः आपके सामने इस बात की सैद्धान्तिक चर्चा करना व्यर्थ है । इसलिए मेरा प्रयत्न तो यही होगा कि मैं दू' कि आज की परिस्थिति के विषय में हमारा क्या ख्याल है तथा हम आपके आक्रमणों से क्यों चिढ़ते हैं । एक मामूली ब्रिटिश व्यापारी को यह बात जरूर ही विचित्र दिखाई देती है कि जिस बात को वह हमारो राष्ट्रीय साधनसमृद्धि का विकास कहता है उसी में हम बाधा क्यों उपस्थित कर, रहे हैं ? उसे तो वस्तुमात्र को लाभ और हानि के दृष्टिकोण से देखने की आदत हो गई है न ? और इस दृष्टि से देखते हुए वह मानता है कि यदि यह साबित किया जा सकता है कि फलां रास्ते पर चलने से आर्थिक उन्नति जरूर ही होगी तब तो उस मार्ग का अवलम्बन करने के विषय में कोई कही न हानी चाहिए । वह मानता है कि यदि चीन का प्रदेश उसकी पू'जी तथा व्यापार के लिए खुल जाय तो उसका यह हेतु सफल हो सकता है। इसलिए वह और आगे बढ़ कर यह भी मान लेता है कि उसके साहस का विरोध करने के बदले स्वागत करने ही में हमारा भी लाभ है । शायद उसका यह ख़्याल उसकी अपनी दृष्टि से ठीक होगा। पर उसकी दृष्टि कहीं हमारी दृष्टि तो है नहीं । हमारी तो यह चाल है कि इसके विपरीत किसी भी गम्भीर और महत्वपूर्ण काम को करने के पहले हम केवल यही देख कर नहीं रुक जाते कि हमारी सम्पत्ति पर उसका क्या असर गिरता है, बल्कि यह भी देखते हैं कि इससे हमारे राष्ट्र का क्या कल्याण होगा, आप हमेशा जोवन की सुख-सामग्री का विचार करते हैं, तहां हम जीवन के सौरभ का विचार करते हैं। और जब आप हमें कहते हैं कि हमें अपने समस्त समाज में कायापलट कर देना चाहिए, किसानों का राष्ट्र न रह कर व्यापारियों और कारखाने वालों का राष्ट्र बन जाना चाहिए, काल्पनिक सम्पत्ति के लिए हमें अपनी आर्थिक और राजनैतिक स्वाधीनता को तिलाञ्जलि दे देनी चाहिए और हमारे उद्यम को ही नहीं, बल्कि समस्त रीति-रवाजों तथा नीति और समाजसंस्थाओं तक को नये सांचे में ढाल लेना चाहिए - जब आप यह कहते हैं - तब हम ज़रा इस बात को सूक्ष्म नजर से देख लें तो क्षमा कीजिए कि जिन चीजों को आप चीन में प्रविष्ट कर वाना चाहते हैं उनका खुद आपके समाज पर क्या परिणाम हुआ है ।
Ranchi: झारखंड में बुधवार को अनलॉक-टू का एलान कर दिया गया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आज सीएम सचिवालय में हुई आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक में यह निर्णय लिया गया. बैठक के बाद पाबंदियों और छूट की सूची जारी कर दी गयी. 1. पूर्वी सिंहभूम को छोड़ कर सब जिलों में सभी दुकानें 4 बजे अपराह्न तक खुल सकेंगी. - पूर्वी सिंहभूम जिले में कपड़ा, जूता, cosmetic और आभूषण की दुकानों को छोड़ कर बाकी सब दुकानें 4 बजे अपराह्न तक खुल सकेंगी. - सभी सरकारी एवं निजी कार्यालय 1/3 मानव संसाधन के साथ 4 बजे अपराह्न तक खुल सकेंगे. - शनिवार की शाम 4 बजे से सोमवार के सुबह 6 बजे तक सभी दुकानें ( सब्जी-फल- किराना की दुकान सहित) बंद रहेंगी. स्वास्थ्य सेवा से संबंधित प्रतिष्ठान खुले रहेंगे. - रेस्तरां से भोजन की होम delivery के साथ take away की भी अनुमति प्रदान की गई. - शॉपिंग माल, सिनेमा हॉल, क्लब, बार, banquet हॉल, मल्टीप्लेक्स, Departmental स्टोर बंद रहेंगे. - स्टेडियम, gymnasium, स्विमिंग पूल और पार्क बंद रहेंगे. - समस्त शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे. - आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहेंगे पर लाभुकों को घर पर खाद्य सामग्री उपलब्ध करायी जायेगी. - 5 व्यक्ति से अधिक के इकठ्ठा होने पर प्रतिबंध रहेगा. 11. विवाह में अधिकतम 11 व्यक्ति शामिल हो सकते हैं और अंतिम संस्कार में अधिकतम 20 व्यक्ति. - धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे. - जुलूस पर रोक जारी रहेगी. - बस परिवहन पर रोक जारी रहेगी. - राज्य के द्वारा कराने वाली परीक्षा स्थगित रहेंगी. - मेला और प्रदर्शनी पर रोक जारी रहेगी. - निजी वाहन से एक जिले से दूसरे जिले जाने के लिए, दूसरे राज्य से झारखंड आने के लिए या झारखंड से दूसरे राज्य जाने के लिए ई पास आवश्यक होगा. - कुछ अपवाद को छोड़कर दूसरे राज्य से झारखंड आने वाले को 7 दिन का होम quarantine अनिवार्य होगा. - सार्वजानिक स्थान पर मास्क पहनना और सामजिक दूरी बनाए रखना अनिवार्य है. - आदेश के उल्लंघन की स्थिति में आपदा प्रबंधन अधिनियम की सुसंगत धारा अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कर कार्यवाही की जाएगी.
Ranchi: झारखंड में बुधवार को अनलॉक-टू का एलान कर दिया गया. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आज सीएम सचिवालय में हुई आपदा प्रबंधन प्राधिकार की बैठक में यह निर्णय लिया गया. बैठक के बाद पाबंदियों और छूट की सूची जारी कर दी गयी. एक. पूर्वी सिंहभूम को छोड़ कर सब जिलों में सभी दुकानें चार बजे अपराह्न तक खुल सकेंगी. - पूर्वी सिंहभूम जिले में कपड़ा, जूता, cosmetic और आभूषण की दुकानों को छोड़ कर बाकी सब दुकानें चार बजे अपराह्न तक खुल सकेंगी. - सभी सरकारी एवं निजी कार्यालय एक/तीन मानव संसाधन के साथ चार बजे अपराह्न तक खुल सकेंगे. - शनिवार की शाम चार बजे से सोमवार के सुबह छः बजे तक सभी दुकानें बंद रहेंगी. स्वास्थ्य सेवा से संबंधित प्रतिष्ठान खुले रहेंगे. - रेस्तरां से भोजन की होम delivery के साथ take away की भी अनुमति प्रदान की गई. - शॉपिंग माल, सिनेमा हॉल, क्लब, बार, banquet हॉल, मल्टीप्लेक्स, Departmental स्टोर बंद रहेंगे. - स्टेडियम, gymnasium, स्विमिंग पूल और पार्क बंद रहेंगे. - समस्त शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे. - आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहेंगे पर लाभुकों को घर पर खाद्य सामग्री उपलब्ध करायी जायेगी. - पाँच व्यक्ति से अधिक के इकठ्ठा होने पर प्रतिबंध रहेगा. ग्यारह. विवाह में अधिकतम ग्यारह व्यक्ति शामिल हो सकते हैं और अंतिम संस्कार में अधिकतम बीस व्यक्ति. - धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे. - जुलूस पर रोक जारी रहेगी. - बस परिवहन पर रोक जारी रहेगी. - राज्य के द्वारा कराने वाली परीक्षा स्थगित रहेंगी. - मेला और प्रदर्शनी पर रोक जारी रहेगी. - निजी वाहन से एक जिले से दूसरे जिले जाने के लिए, दूसरे राज्य से झारखंड आने के लिए या झारखंड से दूसरे राज्य जाने के लिए ई पास आवश्यक होगा. - कुछ अपवाद को छोड़कर दूसरे राज्य से झारखंड आने वाले को सात दिन का होम quarantine अनिवार्य होगा. - सार्वजानिक स्थान पर मास्क पहनना और सामजिक दूरी बनाए रखना अनिवार्य है. - आदेश के उल्लंघन की स्थिति में आपदा प्रबंधन अधिनियम की सुसंगत धारा अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज कर कार्यवाही की जाएगी.
शिमला. मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पुलिस महानिदेशक को कोटखाई क्षेत्र में हुए 'गुड़िया' हत्या मामले में जल्द से जल्द अपराधियों की धर-पकड़ के सख्त आदेश दिए हैं. उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक को इस संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं. इस मामले में किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. गुड़िया के मुल्जिमों के साथ किसी प्रकार की नरमी सहन नहीं होगी और दोषी शीघ्र सलाखों के पीछे होंगे. उन्होनें कहा कि वह गुड़िया के परिवार के दुःख को समझते हैं और वह पूरी तरह उनके साथ हैं. दोषी जल्द पकड़े जाएं, इसके लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन भी किया गया है.
शिमला. मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पुलिस महानिदेशक को कोटखाई क्षेत्र में हुए 'गुड़िया' हत्या मामले में जल्द से जल्द अपराधियों की धर-पकड़ के सख्त आदेश दिए हैं. उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक को इस संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं. इस मामले में किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. गुड़िया के मुल्जिमों के साथ किसी प्रकार की नरमी सहन नहीं होगी और दोषी शीघ्र सलाखों के पीछे होंगे. उन्होनें कहा कि वह गुड़िया के परिवार के दुःख को समझते हैं और वह पूरी तरह उनके साथ हैं. दोषी जल्द पकड़े जाएं, इसके लिए विशेष जांच दल का गठन भी किया गया है.
मध्य प्रदेश के मंदसौर में 8 साल की बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म की घटना ने लोगों को हिलाकर रख दिया है। आरोपी ने स्कूल से बच्ची को अगवा कर लिया और इसके बाद उसे किसी सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस बीच बीजेपी विधायक सुदर्शन गुप्ता का चौकाने वाला व्यवहार सामने आया है। बीजेपी विधायक सुदर्शन गुप्ता ने रेप पीड़िता के माता-पिता से स्थानीय सांसद को धन्यवाद बोलने के लिए कहा। ये बात कहते हुए शर्म भी नही आयी, आपको बता दे की नेता का कहना है कि सांसद इंदौर के अस्पताल में पीड़िता का हाल जानने के लिए आए थे, इसलिए उनको धन्यवाद कहा जाए। बीजेपी के विधायक सुदर्शन गुप्ता इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में ये बात बोलते हुए कैमरे में कैद हो गए। अब देखना यह हैं अब बीजेपी इस बात पर अपनी क्या प्रतिक्रिया करती हैं। या ऐसे ही रेप होते रहेंगे और बाद में नेता लोगों के आने पर पीड़िता के माता-पिता से धन्यवाद बोलने का आग्रह किया जायेगा। तो इस बात पर गुस्साए लोगो ने कुछ इस तरह कमेंट कर अपना गुस्सा जाहिर किया हैं.
मध्य प्रदेश के मंदसौर में आठ साल की बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म की घटना ने लोगों को हिलाकर रख दिया है। आरोपी ने स्कूल से बच्ची को अगवा कर लिया और इसके बाद उसे किसी सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। इस बीच बीजेपी विधायक सुदर्शन गुप्ता का चौकाने वाला व्यवहार सामने आया है। बीजेपी विधायक सुदर्शन गुप्ता ने रेप पीड़िता के माता-पिता से स्थानीय सांसद को धन्यवाद बोलने के लिए कहा। ये बात कहते हुए शर्म भी नही आयी, आपको बता दे की नेता का कहना है कि सांसद इंदौर के अस्पताल में पीड़िता का हाल जानने के लिए आए थे, इसलिए उनको धन्यवाद कहा जाए। बीजेपी के विधायक सुदर्शन गुप्ता इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में ये बात बोलते हुए कैमरे में कैद हो गए। अब देखना यह हैं अब बीजेपी इस बात पर अपनी क्या प्रतिक्रिया करती हैं। या ऐसे ही रेप होते रहेंगे और बाद में नेता लोगों के आने पर पीड़िता के माता-पिता से धन्यवाद बोलने का आग्रह किया जायेगा। तो इस बात पर गुस्साए लोगो ने कुछ इस तरह कमेंट कर अपना गुस्सा जाहिर किया हैं.
कड़कड़ाती सर्दी में हर कोई ठंड से कांप रहा है। ठंड से बचने को लोग तरह-तरह के यत्न कर रहे हैं। मथुरा में नगर निगम प्रशासन ने बेसहारा लोगों को हाड़ कंपा देने वाली सर्दी में खुले आसमान के नीचे न सोना पड़े, इसके लिए रैन बसेरा बनवाए हैं। इन रैन बसेरा की स्थिति क्या है, इसका आधी रात को दैनिक भास्कर की टीम ने रियलिटी टेस्ट किया। रात 11 बजे घना कोहरा रहा। कोहरा भी ऐसा कि 20 मीटर आगे क्या है कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। वृंदावन परिक्रमा मार्ग में सड़क किनारे सोते हुए लोग नजर आए। यहां किसी ने कई कंबल डाल रखे थे तो किसी ने अपने को ठंड से बचाने के लिए प्लास्टिक डाल रखी थी। कड़कड़ाती ठंड और कोहरे के बीच सर्द रातों में खुले में सो रहे लोगों के बीच एक महिला अपने दो बच्चों के साथ अलाव जलाकर बैठी मिली। इस महिला से जब सर्द रातों में खुले आसमान के नीचे रहने के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसे यहां सोने से कंबल मिल जाएगा। तीर्थ नगरी होने के कारण सर्द रातों में कई श्रद्धालु आते हैं और वह सड़क किनारे सो रहे लोगों को कंबल ओढ़ाकर चले जाते हैं। कंबल मिलने की आस में हम लोग खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे हैं। परिक्रमा मार्ग में आगे बढ़े तो कालिदह पर एक अस्थायी रैन बसेरा नजर आया। अस्थायी रैन बसेरे में अंदर टीम पहुंची तो पता चला कि यह नगर निगम ने बनवाया है। लोगों के सोने के लिए बेहतर इंतजाम थे। सोने के लिए अस्थायी बैड लगाए गए जिन पर रजाई थीं। 30 बेड के इस रैन बसेरा में 16 लोग सोते मिले। लेकिन, यहां लगाया रूम हीटर बंद था। केयर टेकर ने बताया कि इसमें कुछ खराबी आ गई है। कालिदह रैन बसेरा के बाद हम 11 बजे पहुंचे परशुराम पार्क में बने स्थायी रैन बसेरा पर। यहां गेट बंद था, लेकिन जब अंदर जा कर देखा तो नगर निगम के दावे सही साबित हुए। नगर निगम ने यहां दो हिस्सों में रैन बसेरा बांट रखा है। 15 बेड के इस रैन बसेरा में 12 बेड पुरुषों के लिए हैं जबकि 3 बेड का अलग रूम महिलाओं के लिए हैं। रैन बसेरा में किसी को सर्दी न लगे इसके लिए रूम हीटर जल रहा है तो मनोरंजन के लिए टीवी चलता मिला। यही हाल अटल्ला चुंगी पर बने रैन बसेरा का था। यहां भी इंतजाम बेहतर थे। तीन रैन बसेरों का रियलिटी टेस्ट करने के बाद दैनिक भास्कर की टीम लक्ष्मण शहीद पर बने अस्थायी रैन बसेरा पर पहुंची। यहां नगर निगम ने दो हीटर लगाए हैं। एक बिजली से चल रहा था तो दूसरा गैस हीटर। यहां 15 लोगों के रुकने की व्यवस्था है। यहां 9 लोग सोते मिले। रियलिटी टेस्ट के दौरान सबसे खास बात जो नजर आई, वह यह थी कि सभी रैन बसेरा को दो हिस्सों में बांटा गया था। एक पुरुषों के लिए दूसरा महिलाओं के लिए। पुरुषों के लिए बनाए गए हिस्सों में तो लोग सोते हुए मिले। लेकिन, महिलाओं के लिए बनाए गए रूम सभी जगह खाली थे। मथुरा वृंदावन ने 350 लोगों के सोने के लिए 10 रैन बसेरा बनाए है। इनमें 3 स्थायी हैं तो 7 अस्थायी। इसके अलावा 25 चौराहा पर गैस हीटर लगाए गए हैं। नगर आयुक्त अनुनय झा ने बताया कि एनजीटी के आदेश का पालन करते हुए किसी भी जगह अलाव नहीं जलवाए गए। इसके स्थान पर गैस हीटर लगाए गए हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन के सहयोग से कंबल भी वितरित किए जा रहे हैं। सर्द रातों में खुले में रात गुजारने वाले बेसहारा लोगों की मदद करने के लिए सीआईएसएफ की आईओसीएल यूनिट आगे आई। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों ने उप कमांडेंट अभिषेक साहू के नेतृत्व में मथुरा जंक्शन के आसपास झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले लोगों को गर्म कपड़े और कंबल वितरित किए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
कड़कड़ाती सर्दी में हर कोई ठंड से कांप रहा है। ठंड से बचने को लोग तरह-तरह के यत्न कर रहे हैं। मथुरा में नगर निगम प्रशासन ने बेसहारा लोगों को हाड़ कंपा देने वाली सर्दी में खुले आसमान के नीचे न सोना पड़े, इसके लिए रैन बसेरा बनवाए हैं। इन रैन बसेरा की स्थिति क्या है, इसका आधी रात को दैनिक भास्कर की टीम ने रियलिटी टेस्ट किया। रात ग्यारह बजे घना कोहरा रहा। कोहरा भी ऐसा कि बीस मीटर आगे क्या है कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। वृंदावन परिक्रमा मार्ग में सड़क किनारे सोते हुए लोग नजर आए। यहां किसी ने कई कंबल डाल रखे थे तो किसी ने अपने को ठंड से बचाने के लिए प्लास्टिक डाल रखी थी। कड़कड़ाती ठंड और कोहरे के बीच सर्द रातों में खुले में सो रहे लोगों के बीच एक महिला अपने दो बच्चों के साथ अलाव जलाकर बैठी मिली। इस महिला से जब सर्द रातों में खुले आसमान के नीचे रहने के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसे यहां सोने से कंबल मिल जाएगा। तीर्थ नगरी होने के कारण सर्द रातों में कई श्रद्धालु आते हैं और वह सड़क किनारे सो रहे लोगों को कंबल ओढ़ाकर चले जाते हैं। कंबल मिलने की आस में हम लोग खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे हैं। परिक्रमा मार्ग में आगे बढ़े तो कालिदह पर एक अस्थायी रैन बसेरा नजर आया। अस्थायी रैन बसेरे में अंदर टीम पहुंची तो पता चला कि यह नगर निगम ने बनवाया है। लोगों के सोने के लिए बेहतर इंतजाम थे। सोने के लिए अस्थायी बैड लगाए गए जिन पर रजाई थीं। तीस बेड के इस रैन बसेरा में सोलह लोग सोते मिले। लेकिन, यहां लगाया रूम हीटर बंद था। केयर टेकर ने बताया कि इसमें कुछ खराबी आ गई है। कालिदह रैन बसेरा के बाद हम ग्यारह बजे पहुंचे परशुराम पार्क में बने स्थायी रैन बसेरा पर। यहां गेट बंद था, लेकिन जब अंदर जा कर देखा तो नगर निगम के दावे सही साबित हुए। नगर निगम ने यहां दो हिस्सों में रैन बसेरा बांट रखा है। पंद्रह बेड के इस रैन बसेरा में बारह बेड पुरुषों के लिए हैं जबकि तीन बेड का अलग रूम महिलाओं के लिए हैं। रैन बसेरा में किसी को सर्दी न लगे इसके लिए रूम हीटर जल रहा है तो मनोरंजन के लिए टीवी चलता मिला। यही हाल अटल्ला चुंगी पर बने रैन बसेरा का था। यहां भी इंतजाम बेहतर थे। तीन रैन बसेरों का रियलिटी टेस्ट करने के बाद दैनिक भास्कर की टीम लक्ष्मण शहीद पर बने अस्थायी रैन बसेरा पर पहुंची। यहां नगर निगम ने दो हीटर लगाए हैं। एक बिजली से चल रहा था तो दूसरा गैस हीटर। यहां पंद्रह लोगों के रुकने की व्यवस्था है। यहां नौ लोग सोते मिले। रियलिटी टेस्ट के दौरान सबसे खास बात जो नजर आई, वह यह थी कि सभी रैन बसेरा को दो हिस्सों में बांटा गया था। एक पुरुषों के लिए दूसरा महिलाओं के लिए। पुरुषों के लिए बनाए गए हिस्सों में तो लोग सोते हुए मिले। लेकिन, महिलाओं के लिए बनाए गए रूम सभी जगह खाली थे। मथुरा वृंदावन ने तीन सौ पचास लोगों के सोने के लिए दस रैन बसेरा बनाए है। इनमें तीन स्थायी हैं तो सात अस्थायी। इसके अलावा पच्चीस चौराहा पर गैस हीटर लगाए गए हैं। नगर आयुक्त अनुनय झा ने बताया कि एनजीटी के आदेश का पालन करते हुए किसी भी जगह अलाव नहीं जलवाए गए। इसके स्थान पर गैस हीटर लगाए गए हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन के सहयोग से कंबल भी वितरित किए जा रहे हैं। सर्द रातों में खुले में रात गुजारने वाले बेसहारा लोगों की मदद करने के लिए सीआईएसएफ की आईओसीएल यूनिट आगे आई। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों ने उप कमांडेंट अभिषेक साहू के नेतृत्व में मथुरा जंक्शन के आसपास झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले लोगों को गर्म कपड़े और कंबल वितरित किए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
JEE Main 2022 Exam: जेईई-मेन, 2022 के पहले चरण के लिए आवेदन एक मार्च से प्रारंभ हो गए हैं और इसकी आखिरी तिथि 31 मार्च, 2022 है। परीक्षा का आयोजन हिंदी और अंग्रेजी के अलावा गुजराती, असमी, बंगाली, कन्नड़, मलयालम, मराठी, ओड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु और उर्दू भाषाओं में किया जाएगा। इंजीनियरिंग कालेजों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा-मुख्य (जेईई-मेन) के पहले चरण का आयोजन अप्रैल और दूसरे चरण का आयोजन मई में होगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा के पहले चरण का आयोजन 16 से 21 अप्रैल तक होगा और दूसरे चरण का आयोजन 24 मई से 29 मई तक होगा। संयुक्त प्रवेश परीक्षा-मुख्य में दो पेपर शामिल होते हैं। पहले पेपर का आयोजन एनआइटी, ट्रिपल आइटी व अन्य केंद्र पोषित तकनीकी संस्थानों और राज्य सरकारों द्वारा पोषित एवं मान्यता प्राप्त संस्थानों व विश्वविद्यालयों में बीई एवं बीटेक के स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए किया जाता है। यह जेईई (एडवांस) के लिए भी पात्रता परीक्षा है जिसका आयोजन आइआइटी में प्रवेश के लिए किया जाता है। दूसरे पेपर का आयोजन बी. आर्क और बी. प्लानिंग पाठ्यक्रमों के लिए किया जाता है। जिन छात्रों ने वर्ष 2020-2021 में कक्षा 12 या इसके समकक्ष परीक्षा पूरी की है या 2022 में कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा दे रहे हैं, वे जेईई मेन 2022 के लिए आवेदन करने के पात्र हैं। जेईई मेन में सफलतापूर्वक उत्तीर्ण होने वाले और शीर्ष 2. 5 उम्मीदवारों में रैंक करने वाले आवेदक जेईई एडवांस 2022 के पात्र होंगे। जेईई (मुख्य) - 2022 में उपस्थित होने के लिए उम्मीदवारों के लिए कोई आयु सीमा नहीं है। जिन उम्मीदवारों ने 2020-2021 में कक्षा 12 / समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण की है, या 2022 में अपनी उम्र के बावजूद उपस्थित हो रहे हैं, वे जेईई (मुख्य) - 2022 परीक्षा में उपस्थित हो सकते हैं। हालांकि, उम्मीदवारों को संस्थान (संस्थानों) के आयु मानदंड को पूरा करने की आवश्यकता हो सकती है जिसमें वे प्रवेश लेने के इच्छुक हैं।
JEE Main दो हज़ार बाईस Exam: जेईई-मेन, दो हज़ार बाईस के पहले चरण के लिए आवेदन एक मार्च से प्रारंभ हो गए हैं और इसकी आखिरी तिथि इकतीस मार्च, दो हज़ार बाईस है। परीक्षा का आयोजन हिंदी और अंग्रेजी के अलावा गुजराती, असमी, बंगाली, कन्नड़, मलयालम, मराठी, ओड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु और उर्दू भाषाओं में किया जाएगा। इंजीनियरिंग कालेजों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा-मुख्य के पहले चरण का आयोजन अप्रैल और दूसरे चरण का आयोजन मई में होगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा के पहले चरण का आयोजन सोलह से इक्कीस अप्रैल तक होगा और दूसरे चरण का आयोजन चौबीस मई से उनतीस मई तक होगा। संयुक्त प्रवेश परीक्षा-मुख्य में दो पेपर शामिल होते हैं। पहले पेपर का आयोजन एनआइटी, ट्रिपल आइटी व अन्य केंद्र पोषित तकनीकी संस्थानों और राज्य सरकारों द्वारा पोषित एवं मान्यता प्राप्त संस्थानों व विश्वविद्यालयों में बीई एवं बीटेक के स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए किया जाता है। यह जेईई के लिए भी पात्रता परीक्षा है जिसका आयोजन आइआइटी में प्रवेश के लिए किया जाता है। दूसरे पेपर का आयोजन बी. आर्क और बी. प्लानिंग पाठ्यक्रमों के लिए किया जाता है। जिन छात्रों ने वर्ष दो हज़ार बीस-दो हज़ार इक्कीस में कक्षा बारह या इसके समकक्ष परीक्षा पूरी की है या दो हज़ार बाईस में कक्षा बारह की बोर्ड परीक्षा दे रहे हैं, वे जेईई मेन दो हज़ार बाईस के लिए आवेदन करने के पात्र हैं। जेईई मेन में सफलतापूर्वक उत्तीर्ण होने वाले और शीर्ष दो. पाँच उम्मीदवारों में रैंक करने वाले आवेदक जेईई एडवांस दो हज़ार बाईस के पात्र होंगे। जेईई - दो हज़ार बाईस में उपस्थित होने के लिए उम्मीदवारों के लिए कोई आयु सीमा नहीं है। जिन उम्मीदवारों ने दो हज़ार बीस-दो हज़ार इक्कीस में कक्षा बारह / समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण की है, या दो हज़ार बाईस में अपनी उम्र के बावजूद उपस्थित हो रहे हैं, वे जेईई - दो हज़ार बाईस परीक्षा में उपस्थित हो सकते हैं। हालांकि, उम्मीदवारों को संस्थान के आयु मानदंड को पूरा करने की आवश्यकता हो सकती है जिसमें वे प्रवेश लेने के इच्छुक हैं।
Don't Miss! रणदीप ने आलिया को जड़ा चांटा, क्यों? करण जौहर की खोज खूबसूरत-सेक्सी आलिया भट्ट को महेश भट्ट के चहेते अभिनेता रणदीप हुड्डा ने एक जोरदार थप्पड़ रसीद कर दिया वो भी सरेआम सबके सामने जिसको देखकर हर कोई हैरान रह गया। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो रणदीप हुड्डा के पांचों उंगली का निशान आलिया के गाल पर देखा जा सकता था लेकिन आलिया ने रणदीप की इस हरकत पर चूं तक नहीं किया। यह सब कुछ हुआ इम्तियाज अली की फिल्म हाईवे के सेट पर जहां पर कहानी के मुताबिक रणदीप को आलिया के गाल पर एक चांटा रसीद करना था। जिसमें सजीवता लाने के लिए रणदीप ने तेजी से हाथ चला दिया जो कि आलिया के गाल को पूरी तरह से लाल कर गया। आलिया भी शर्म और कहानी के कारण चूं तक नहीं कर पायी और हंसते-हंसते रणदीप के जोरदार थप्पड़ को सह गयीं। फिलहाल दोनों लोग अभी भी हाईवे की शूटिंग में बिजी हैं। इम्तियाज ने इससे पहले रॉक्स्टार जैसी सुपरहिट फिल्म देकर लोगों को अपना मुरीद बनाया है।
Don't Miss! रणदीप ने आलिया को जड़ा चांटा, क्यों? करण जौहर की खोज खूबसूरत-सेक्सी आलिया भट्ट को महेश भट्ट के चहेते अभिनेता रणदीप हुड्डा ने एक जोरदार थप्पड़ रसीद कर दिया वो भी सरेआम सबके सामने जिसको देखकर हर कोई हैरान रह गया। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो रणदीप हुड्डा के पांचों उंगली का निशान आलिया के गाल पर देखा जा सकता था लेकिन आलिया ने रणदीप की इस हरकत पर चूं तक नहीं किया। यह सब कुछ हुआ इम्तियाज अली की फिल्म हाईवे के सेट पर जहां पर कहानी के मुताबिक रणदीप को आलिया के गाल पर एक चांटा रसीद करना था। जिसमें सजीवता लाने के लिए रणदीप ने तेजी से हाथ चला दिया जो कि आलिया के गाल को पूरी तरह से लाल कर गया। आलिया भी शर्म और कहानी के कारण चूं तक नहीं कर पायी और हंसते-हंसते रणदीप के जोरदार थप्पड़ को सह गयीं। फिलहाल दोनों लोग अभी भी हाईवे की शूटिंग में बिजी हैं। इम्तियाज ने इससे पहले रॉक्स्टार जैसी सुपरहिट फिल्म देकर लोगों को अपना मुरीद बनाया है।
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कोरोना वायरस का कहर थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है। आए दिन कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। इसी बीच यूपी के सभी 75 जिले कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। बुधवार को कोरोना की चपेट से बचे चंदौली में एक केस सामने आ गया। जिसके बाद से सूबे के 75 के 75 जिले वायरस के शिकंजे में आ गए। तंजानिया के राष्ट्रपति जॉन मागुफुली ने चीन से आई कोरोना किट को कहा 'खराब', जाने क्यों? बुधवार को कोरोना के 116 नए मरीज सामने आए जिसमें से अकेले राजधानी लखनऊ के 15 मरीज हैं। राज्य में अब तक कुल 3,758 मरीज सामने आ चुके हैं। वहीं पिछले 24 घंटे में 92 संक्रमित मरीज ठीक हुए जिसके बाद कोरोना के मुंह से बाहर निकलने वाले मरीजों की संख्या दो हजार के करीब पहुंच गई। यूपी में अब तक कुल 86 लोगों ने जान गंवाई है। इन 86 मौतों में सबसे अधिक मौत आगरा का है। दुनिया को कोरोना की लड़ाई में व्यस्त कर चीन बढ़ा रहा है अपनी शक्ति, जानिए अब तक क्या-क्या किया? देश में दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, चेन्नई समेत गांव तक अपनी पैठ बना चुके कोरोना वायरस संक्रमण रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक अबतक कोरोना संक्रमण के 78,059 मामले सामने आए हैं, जिसमें से 49,089 मामले सक्रिय है। वहीं ठीक होने वालों की संख्या 26,414 हो चुकी है जबकि इस खतरनाक वायरस से अब तक पूरे देश में 2,551 लोगों की मौत हो चुकी हैं। बीते 24 घंटे में कोरोना के 3,722 नए मामले सामने आए है वहीं 134 लोगों की मौत हुई है और 1894 इलाज के बाद ठीक हुए।
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कोरोना वायरस का कहर थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है। आए दिन कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। इसी बीच यूपी के सभी पचहत्तर जिले कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। बुधवार को कोरोना की चपेट से बचे चंदौली में एक केस सामने आ गया। जिसके बाद से सूबे के पचहत्तर के पचहत्तर जिले वायरस के शिकंजे में आ गए। तंजानिया के राष्ट्रपति जॉन मागुफुली ने चीन से आई कोरोना किट को कहा 'खराब', जाने क्यों? बुधवार को कोरोना के एक सौ सोलह नए मरीज सामने आए जिसमें से अकेले राजधानी लखनऊ के पंद्रह मरीज हैं। राज्य में अब तक कुल तीन,सात सौ अट्ठावन मरीज सामने आ चुके हैं। वहीं पिछले चौबीस घंटाटे में बानवे संक्रमित मरीज ठीक हुए जिसके बाद कोरोना के मुंह से बाहर निकलने वाले मरीजों की संख्या दो हजार के करीब पहुंच गई। यूपी में अब तक कुल छियासी लोगों ने जान गंवाई है। इन छियासी मौतों में सबसे अधिक मौत आगरा का है। दुनिया को कोरोना की लड़ाई में व्यस्त कर चीन बढ़ा रहा है अपनी शक्ति, जानिए अब तक क्या-क्या किया? देश में दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, चेन्नई समेत गांव तक अपनी पैठ बना चुके कोरोना वायरस संक्रमण रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक अबतक कोरोना संक्रमण के अठहत्तर,उनसठ मामले सामने आए हैं, जिसमें से उनचास,नवासी मामले सक्रिय है। वहीं ठीक होने वालों की संख्या छब्बीस,चार सौ चौदह हो चुकी है जबकि इस खतरनाक वायरस से अब तक पूरे देश में दो,पाँच सौ इक्यावन लोगों की मौत हो चुकी हैं। बीते चौबीस घंटाटे में कोरोना के तीन,सात सौ बाईस नए मामले सामने आए है वहीं एक सौ चौंतीस लोगों की मौत हुई है और एक हज़ार आठ सौ चौरानवे इलाज के बाद ठीक हुए।
भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा अपने बोल्ड और ग्लैमरस अंदाज के लिए जानी जाती हैं। सोशल मीडिया पर वो काफी एक्टिव रहती हैं। अपनी फोटोज और वीडियो वो लगभग रो इंस्टाग्राम पर शेयर करती हैं। फिलहाल उनके एक फोटोशूट ने सोशल मीडिया पर लहलका मचा रखा है। इस फोटोशूट में वो ब्राइडल लुक में नजर आ रही हैं और बेहद खूबसूरत लग रही हैं। मोनालिसा ने खुद फोटोशूट कई तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर की हैं। गोल्डन कलर का लंहगा, हैवी ज्वैलिरी और सिर पर दुपट्टा... एक्ट्रेस इस लुक में खूबसूरत ब्राइड लग रही हैं। फोटोज शेयर करते हुए मोना ने लिखा, ब्राइडल लुक किसी महिला को बेहद सबसे ज्यादा खूबसूरत बना सकता है। इस लुक के लिए मोनालिसा का मेकअप नेहा अध्विक महाजन ने किया है और उनका खूबसूरत आउटफिट नीरू सिंध्या ने तैयार किया है। वैसे सोशल मीडिया पर मोनालिसा की फोटोज वोयरल होना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले उनका एक वीडियो काफी वायरल हुआ था जिसमें वो अपनी चोटी से बोतल कैप चैलेंच पूरा करती नजर आ रही थीं।
भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा अपने बोल्ड और ग्लैमरस अंदाज के लिए जानी जाती हैं। सोशल मीडिया पर वो काफी एक्टिव रहती हैं। अपनी फोटोज और वीडियो वो लगभग रो इंस्टाग्राम पर शेयर करती हैं। फिलहाल उनके एक फोटोशूट ने सोशल मीडिया पर लहलका मचा रखा है। इस फोटोशूट में वो ब्राइडल लुक में नजर आ रही हैं और बेहद खूबसूरत लग रही हैं। मोनालिसा ने खुद फोटोशूट कई तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर की हैं। गोल्डन कलर का लंहगा, हैवी ज्वैलिरी और सिर पर दुपट्टा... एक्ट्रेस इस लुक में खूबसूरत ब्राइड लग रही हैं। फोटोज शेयर करते हुए मोना ने लिखा, ब्राइडल लुक किसी महिला को बेहद सबसे ज्यादा खूबसूरत बना सकता है। इस लुक के लिए मोनालिसा का मेकअप नेहा अध्विक महाजन ने किया है और उनका खूबसूरत आउटफिट नीरू सिंध्या ने तैयार किया है। वैसे सोशल मीडिया पर मोनालिसा की फोटोज वोयरल होना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले उनका एक वीडियो काफी वायरल हुआ था जिसमें वो अपनी चोटी से बोतल कैप चैलेंच पूरा करती नजर आ रही थीं।
बिजुआ, लखीमपुर खीरी, 23 जुलाईः उत्तर प्रदेश सरकार सूबे के गन्ना किसानों को सस्ती दर पर खाद और अन्य सुविधाएँ उपलब्ध करा रही है, वहीं सूबे की चीनी मिलें भी गन्ना किसानों की फ़सल अच्छी हो और उत्पादन बढ़े, इसके लिए सहयोग कर रही है। गन्ने की फ़सल में अक्सर कीट पतंगाे का प्रकोप हो जाता है तो किसान परेशान हो जाते है। किसानों की इस समस्या को देखते हुए लखीमपुर खीरी के बिजुआ स्थित गुलारिया चीनी मिल के प्रबंधन ने कृषि विशेषज्ञों की मदद से किसानों के खेतों मे जाकर गन्ने की फसल में कीटों के प्रकोप को रोकने के उपाय बताये जा रहे है साथ ही किसानों को कीटनाशक के स्प्रे की सलाह भी दी जा रही है। यही नहीं चीनी मिल द्वारा किसानों को स्प्रे करने के लिए कीटनाशक भी उपलब्ध कराया गया है। चीनी मिल प्रबंधन बीते दो महिने से इस संबंध में कृषि विशेषज्ञों से किसानों का संवाद भी कराया है। सीएसए कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ ओंकार सिंह ने बताया कि चीनी मिल प्रबंधन ने हमें गन्ने में कीटों के प्रकोप की समस्या से अवगत कराया तो हम बिजुआ आए है और गन्ने की फ़सल में कीटनाशकों का स्प्रे करने की सलाह दे रहे है। डॉ ओंकार सिंह ने कहा कि चीनी मिल प्रबंधन के आग्रह पर इससे पूर्व भी हम दो बार आ चुके है। डॉ. सिंह ने किसानों को गन्ने के खेतों में कांफीडोर 100 मिली, एक किग्रा जिंक सल्फेट, 250 ग्राम बोरोन, पांच किग्रा यूरिया का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर गन्ने की फसल पर स्प्रे करने का सलाह दी है। इस घोल का एक एकड़ खेत में किसान भाइयों ने स्प्रे किया और गन्ने की फ़सल पर कीटों के प्रकोप में काफ़ी कमी आई है। कृषि वैज्ञानिक डॉ सिंह ने बताया कि अगर गन्ने की फ़सल मे बॉरोन की कमी आ जाती है तो गन्ने की बढवार पर असर पड़ता है। साथ ही पत्तियों पर भी नकारात्मक असर होता है एवं पत्तियाँ पीली पड़ जाती है। इसी प्रकार जिंक सल्फेट की कमी से पत्तियाँ हल्की पीली धारियों मे बदल जाती है। जो गन्ने की फ़सल के लिए नुक़सानदायक है। गुलरिया चीनी मिल के महाप्रबंधक सुरेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि गर्मी के दिनों में गन्ने की फ़सल में ब्लैक बग तथा मिलीबग का प्रकोप ज्यादा होता है। ये कीट पौधों की पत्तियों से रस चूस लेते है और फ़सल पीली हो जाती है और गन्ने की फ़सल को भारी नुक़सान होता है। इन कीटों की रोकथाम के लिए किसान भाई गन्ना की फसल में कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार छिड़काव करें इससे कीट नियंत्रण के साथ पौधों की बढ़वार अधिक होगी, पौधों का मोटाई में इज़ाफ़ा होगा और गन्ने का उत्पादन भी बढ़ेगा। बिजुआ के गन्ना किसान रमतीराम ने कहा कि चीनी मिल के अधिकारी आये थे उन्होने गन्ने की फ़सल पर कीटनाशकों का छिड़काव करने के लिए कीटनाशक दवा उपलब्ध कराई थी। शुरु मे तो कीट के हमले से फ़सल को काफ़ी नुक़सान हुआ पत्तियाँ पीली पड़ रही थी लेकिन स्प्रे करने के बाद तीन दिन में ही सब ठीक हो गया, अभी फ़सल ठीक है। गुलारिया चीनी मिल के अधिकारियों का धन्यवाद जिनकी वजह से हमारी गन्ने की फ़सल बर्बाद होने से बच गयी।
बिजुआ, लखीमपुर खीरी, तेईस जुलाईः उत्तर प्रदेश सरकार सूबे के गन्ना किसानों को सस्ती दर पर खाद और अन्य सुविधाएँ उपलब्ध करा रही है, वहीं सूबे की चीनी मिलें भी गन्ना किसानों की फ़सल अच्छी हो और उत्पादन बढ़े, इसके लिए सहयोग कर रही है। गन्ने की फ़सल में अक्सर कीट पतंगाे का प्रकोप हो जाता है तो किसान परेशान हो जाते है। किसानों की इस समस्या को देखते हुए लखीमपुर खीरी के बिजुआ स्थित गुलारिया चीनी मिल के प्रबंधन ने कृषि विशेषज्ञों की मदद से किसानों के खेतों मे जाकर गन्ने की फसल में कीटों के प्रकोप को रोकने के उपाय बताये जा रहे है साथ ही किसानों को कीटनाशक के स्प्रे की सलाह भी दी जा रही है। यही नहीं चीनी मिल द्वारा किसानों को स्प्रे करने के लिए कीटनाशक भी उपलब्ध कराया गया है। चीनी मिल प्रबंधन बीते दो महिने से इस संबंध में कृषि विशेषज्ञों से किसानों का संवाद भी कराया है। सीएसए कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक डॉ ओंकार सिंह ने बताया कि चीनी मिल प्रबंधन ने हमें गन्ने में कीटों के प्रकोप की समस्या से अवगत कराया तो हम बिजुआ आए है और गन्ने की फ़सल में कीटनाशकों का स्प्रे करने की सलाह दे रहे है। डॉ ओंकार सिंह ने कहा कि चीनी मिल प्रबंधन के आग्रह पर इससे पूर्व भी हम दो बार आ चुके है। डॉ. सिंह ने किसानों को गन्ने के खेतों में कांफीडोर एक सौ मिली, एक किग्रा जिंक सल्फेट, दो सौ पचास ग्राम बोरोन, पांच किग्रा यूरिया का दो सौ लीटरटर पानी में घोल बनाकर गन्ने की फसल पर स्प्रे करने का सलाह दी है। इस घोल का एक एकड़ खेत में किसान भाइयों ने स्प्रे किया और गन्ने की फ़सल पर कीटों के प्रकोप में काफ़ी कमी आई है। कृषि वैज्ञानिक डॉ सिंह ने बताया कि अगर गन्ने की फ़सल मे बॉरोन की कमी आ जाती है तो गन्ने की बढवार पर असर पड़ता है। साथ ही पत्तियों पर भी नकारात्मक असर होता है एवं पत्तियाँ पीली पड़ जाती है। इसी प्रकार जिंक सल्फेट की कमी से पत्तियाँ हल्की पीली धारियों मे बदल जाती है। जो गन्ने की फ़सल के लिए नुक़सानदायक है। गुलरिया चीनी मिल के महाप्रबंधक सुरेन्द्र उपाध्याय ने बताया कि गर्मी के दिनों में गन्ने की फ़सल में ब्लैक बग तथा मिलीबग का प्रकोप ज्यादा होता है। ये कीट पौधों की पत्तियों से रस चूस लेते है और फ़सल पीली हो जाती है और गन्ने की फ़सल को भारी नुक़सान होता है। इन कीटों की रोकथाम के लिए किसान भाई गन्ना की फसल में कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार छिड़काव करें इससे कीट नियंत्रण के साथ पौधों की बढ़वार अधिक होगी, पौधों का मोटाई में इज़ाफ़ा होगा और गन्ने का उत्पादन भी बढ़ेगा। बिजुआ के गन्ना किसान रमतीराम ने कहा कि चीनी मिल के अधिकारी आये थे उन्होने गन्ने की फ़सल पर कीटनाशकों का छिड़काव करने के लिए कीटनाशक दवा उपलब्ध कराई थी। शुरु मे तो कीट के हमले से फ़सल को काफ़ी नुक़सान हुआ पत्तियाँ पीली पड़ रही थी लेकिन स्प्रे करने के बाद तीन दिन में ही सब ठीक हो गया, अभी फ़सल ठीक है। गुलारिया चीनी मिल के अधिकारियों का धन्यवाद जिनकी वजह से हमारी गन्ने की फ़सल बर्बाद होने से बच गयी।
गुजरात के गांधी धाम से दिल्ली राजपथ तक कांग्रेस सेवा दल कार्यकर्ताओ द्वारा निकाली जा रही आजादी की गौरव यात्रा दूदू के राजीव गांधी भवन कार्यालय प्रांगण पहुंचने पर सोमवार देर शाम 8 बजे जनसभा का आयोजन किया गया। पदयात्रियों का राजीव गांधी कार्यालय पर विधायक बाबूलाल नागर ने अगुवानी करते हुए फूल मालाओं ओर साफा पहना कर स्वागत किया गया। जनसभा में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने संबोधन देते हुए बीजेपी और कांग्रेस पर निशाना साधा गया। डोटासरा ने कहा कि देश में संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही है। जगह जगह दंगे करवाकर हनुमान चालीसा पढ़ा जा रहा है। देश में महंगाई चरम पर है। भाजपा वाले महात्मा गांधी को याद तो करते हैं लेकिन उनके पद चिन्हों पर नहीं चलते हैं। RTDC चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ ने सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस और आर. एस. एस पर निशाना साधते हुए कहा कि गौरव यात्रा आग बुझाने का काम करती है। RSS आग लगाने का काम करती है। सभा के दौरान कांग्रेस सेवा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी देसाई, मंत्री शकुंतला रावत, ग्रह और उच्च शिक्षा मंत्री राजेंद्र यादव, कैबिनेट मंत्री ममता भूपेश, राजस्व मंत्री रामलाल जाट, कृषि मंत्री लालचंद कटारिया,अजमेर डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी,उप जिला प्रमुख मोहन डागर,नसीम अख्तर जनसभा में बतौर अतिथि पहुचे। आपको बता दें कि 6 अप्रैल को गुजरात से दूदू तक 34 दिन में 800 किलोमीटर का सफर तय किया गौरव पद यात्रा गर्मी और तपती धूप में सफर तय कर रही है। वहीं दूदू को नगरपालिका और जिला बनाने की मांग पर पीसीसी चीफ डोटासरा ने कहा कि हम 9 मंत्री, मुख्यमंत्री के सामने जिला बनाने की पुरजोर वकालत करेंगे। दूदू पंचायत समिति उप प्रधान कैलाश चंद जाट के नेतृत्व में ग्राम पंचायत उप सरपंच अमित जोशी वार्ड पंच पुरुषोत्तम स्वामी द्वारा दूदू को ग्राम पंचायत से नगर पालिका बनाने की मांग को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा गया। वहीं आजादी की गौरव यात्रा के दूदू पहुंचने पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा जनसभा को संबोधित करने का तय कार्यक्रम था। लेकिन मुख्यमंत्री के अचानक दिल्ली सीडब्ल्यूसी की मीटिंग में पहुंचने के चलते दूदू में नहीं पहुंचने से लोगों में निराशा छा गई। मुख्यमंत्री को विधायक बाबूलाल नागर द्वारा जिला बनाने की मांग का ज्ञापन सौंपा जाना था। लेकिन सीएम के नहीं आने के बाद विधायक ने अपना ज्ञापन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को सौंपा। आजादी की गौरव यात्रा के दूदू पहुंचने के दौरान जनसभा में दूदू पंचायत समिति प्रधान रवि चौधरी, विधायक पुत्र विकास नागर, दूदू सरपंच संघ अध्यक्ष भंवरी देवी भाकर, मोजमाबाद सरपंच संघ अध्यक्ष शिवजीराम खुरडिया, युवा कांग्रेस के नेता बीसी भाकर, सरदार कांटवा, एडवोकेट त्रिलोक सिंह चौधरी,प्रधान चौधरी, महिला कांग्रेस के नेता मीनू जैन,पंचायत समिति सदस्य रूपाली नागर,कांग्रेस नेता रामनिवास घटियाली, गजराज सिंह राजावत, सहित कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे। कांग्रेस पार्टी द्वारा आजादी गौरव यात्रा दूदू में पहुंचने के दौरान जनसभा में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन के अधिकारी मुस्तैद नजर आए। अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजेंद्र सिंह शेखावत, एसडीम भूपेंद्र सिंह यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिनेश शर्मा, डीएसपी अशोक चौहान, थानाधिकारी चेतराम डागर, फागी थाना अधिकारी भंवरलाल वैष्णव,नरेना थाना अधिकारी हनुमान सहाय,फुलेरा थानाधिकारी रघुवीर सिंह राठौड़ सहित ग्रामीणों का अतिरिक्त पुलिस जाब्ता भी सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात रहा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
गुजरात के गांधी धाम से दिल्ली राजपथ तक कांग्रेस सेवा दल कार्यकर्ताओ द्वारा निकाली जा रही आजादी की गौरव यात्रा दूदू के राजीव गांधी भवन कार्यालय प्रांगण पहुंचने पर सोमवार देर शाम आठ बजे जनसभा का आयोजन किया गया। पदयात्रियों का राजीव गांधी कार्यालय पर विधायक बाबूलाल नागर ने अगुवानी करते हुए फूल मालाओं ओर साफा पहना कर स्वागत किया गया। जनसभा में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने संबोधन देते हुए बीजेपी और कांग्रेस पर निशाना साधा गया। डोटासरा ने कहा कि देश में संविधान की धज्जियां उड़ाई जा रही है। जगह जगह दंगे करवाकर हनुमान चालीसा पढ़ा जा रहा है। देश में महंगाई चरम पर है। भाजपा वाले महात्मा गांधी को याद तो करते हैं लेकिन उनके पद चिन्हों पर नहीं चलते हैं। RTDC चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ ने सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस और आर. एस. एस पर निशाना साधते हुए कहा कि गौरव यात्रा आग बुझाने का काम करती है। RSS आग लगाने का काम करती है। सभा के दौरान कांग्रेस सेवा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी देसाई, मंत्री शकुंतला रावत, ग्रह और उच्च शिक्षा मंत्री राजेंद्र यादव, कैबिनेट मंत्री ममता भूपेश, राजस्व मंत्री रामलाल जाट, कृषि मंत्री लालचंद कटारिया,अजमेर डेयरी अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी,उप जिला प्रमुख मोहन डागर,नसीम अख्तर जनसभा में बतौर अतिथि पहुचे। आपको बता दें कि छः अप्रैल को गुजरात से दूदू तक चौंतीस दिन में आठ सौ किलोग्राममीटर का सफर तय किया गौरव पद यात्रा गर्मी और तपती धूप में सफर तय कर रही है। वहीं दूदू को नगरपालिका और जिला बनाने की मांग पर पीसीसी चीफ डोटासरा ने कहा कि हम नौ मंत्री, मुख्यमंत्री के सामने जिला बनाने की पुरजोर वकालत करेंगे। दूदू पंचायत समिति उप प्रधान कैलाश चंद जाट के नेतृत्व में ग्राम पंचायत उप सरपंच अमित जोशी वार्ड पंच पुरुषोत्तम स्वामी द्वारा दूदू को ग्राम पंचायत से नगर पालिका बनाने की मांग को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा गया। वहीं आजादी की गौरव यात्रा के दूदू पहुंचने पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा जनसभा को संबोधित करने का तय कार्यक्रम था। लेकिन मुख्यमंत्री के अचानक दिल्ली सीडब्ल्यूसी की मीटिंग में पहुंचने के चलते दूदू में नहीं पहुंचने से लोगों में निराशा छा गई। मुख्यमंत्री को विधायक बाबूलाल नागर द्वारा जिला बनाने की मांग का ज्ञापन सौंपा जाना था। लेकिन सीएम के नहीं आने के बाद विधायक ने अपना ज्ञापन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को सौंपा। आजादी की गौरव यात्रा के दूदू पहुंचने के दौरान जनसभा में दूदू पंचायत समिति प्रधान रवि चौधरी, विधायक पुत्र विकास नागर, दूदू सरपंच संघ अध्यक्ष भंवरी देवी भाकर, मोजमाबाद सरपंच संघ अध्यक्ष शिवजीराम खुरडिया, युवा कांग्रेस के नेता बीसी भाकर, सरदार कांटवा, एडवोकेट त्रिलोक सिंह चौधरी,प्रधान चौधरी, महिला कांग्रेस के नेता मीनू जैन,पंचायत समिति सदस्य रूपाली नागर,कांग्रेस नेता रामनिवास घटियाली, गजराज सिंह राजावत, सहित कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे। कांग्रेस पार्टी द्वारा आजादी गौरव यात्रा दूदू में पहुंचने के दौरान जनसभा में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस प्रशासन के अधिकारी मुस्तैद नजर आए। अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजेंद्र सिंह शेखावत, एसडीम भूपेंद्र सिंह यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिनेश शर्मा, डीएसपी अशोक चौहान, थानाधिकारी चेतराम डागर, फागी थाना अधिकारी भंवरलाल वैष्णव,नरेना थाना अधिकारी हनुमान सहाय,फुलेरा थानाधिकारी रघुवीर सिंह राठौड़ सहित ग्रामीणों का अतिरिक्त पुलिस जाब्ता भी सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात रहा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
आपको पूरी स्क्वता रहेगी। एक टलिफोन-गम बी । घंटे सर इमरनगर की बातचीत के अनन्सर वह बोली- मौर तो सब ठीक है। पर आपको मृत्तो सीमना ही पडेना। हमारे यहां इस कला का काम हो गया है। राजम जब सीता को हरण करने बाया था तब यह किस तरह उनको जोर और जबरदस्ती से उठा ले गया होगा अगर आप नृत्य में इस भाग का प्रदर्शन कर सके तो भर मे मैं कहती है विदित बन जाइ माप प्रसिद्ध हो जाय 1 आप मुझे फाड़ो कर रही ईन ? तो एसा बीजिये जाप तीन बम हमारे माफिस में मा जाइये। काम तो हमारा परम इजा रहेगा इसलिए थोड़ी देर गपशप और चाय में वीरा हुआ करके माप हमारे साथ बसी चमगी। फिर सब ठीक हो जायगा। पर आपकी मह इकमाई बिकटाई काम न बेगी। उस वक्त आपको जारगेट की साड़ी पहनकर माना होमा। और भी बोचक बातें हैं जिन्हें म बापको ठीक अवसर पर बतला दूंगी । अर्चना को मारूस ना कि म सब देबिया अपने-अपने वेगवाओं को साथ लेकर एक बार कनाट फेस का चक्कर अवस्य गाती है। इसलिए कई दिन तक सायंकाल सात बजे के कमभग नही चक्कर काटती रही। उसके साथ एक अध्यापिका ने पूछा भी कि आपको खरीबना है क्या? तब मर्चमा नेक बिया वरीदना तो है पर मै उसके क्मि एक फ़की कर रही हूँ ? उसने पूछा- कौन फड ? मर्चमा आप उनमो नही जानती। बहू पर भाप नाम वा उमका बता ही सकती है। अर्थता- रामम नाम है उनका । बह- क्या काम करते है ? बर्षना-देसायार का । वह फीडर है ? नाम है उन सामन लीडर या केवल भविष्य का स्वप्न दलवे छ । पर वे ऐसे बौर प है कि परिणामों पर विचार किये बिना स्वप्नों को चरितार्थ करके देखते है । बह- आप मजान कर रही है ।
आपको पूरी स्क्वता रहेगी। एक टलिफोन-गम बी । घंटे सर इमरनगर की बातचीत के अनन्सर वह बोली- मौर तो सब ठीक है। पर आपको मृत्तो सीमना ही पडेना। हमारे यहां इस कला का काम हो गया है। राजम जब सीता को हरण करने बाया था तब यह किस तरह उनको जोर और जबरदस्ती से उठा ले गया होगा अगर आप नृत्य में इस भाग का प्रदर्शन कर सके तो भर मे मैं कहती है विदित बन जाइ माप प्रसिद्ध हो जाय एक आप मुझे फाड़ो कर रही ईन ? तो एसा बीजिये जाप तीन बम हमारे माफिस में मा जाइये। काम तो हमारा परम इजा रहेगा इसलिए थोड़ी देर गपशप और चाय में वीरा हुआ करके माप हमारे साथ बसी चमगी। फिर सब ठीक हो जायगा। पर आपकी मह इकमाई बिकटाई काम न बेगी। उस वक्त आपको जारगेट की साड़ी पहनकर माना होमा। और भी बोचक बातें हैं जिन्हें म बापको ठीक अवसर पर बतला दूंगी । अर्चना को मारूस ना कि म सब देबिया अपने-अपने वेगवाओं को साथ लेकर एक बार कनाट फेस का चक्कर अवस्य गाती है। इसलिए कई दिन तक सायंकाल सात बजे के कमभग नही चक्कर काटती रही। उसके साथ एक अध्यापिका ने पूछा भी कि आपको खरीबना है क्या? तब मर्चमा नेक बिया वरीदना तो है पर मै उसके क्मि एक फ़की कर रही हूँ ? उसने पूछा- कौन फड ? मर्चमा आप उनमो नही जानती। बहू पर भाप नाम वा उमका बता ही सकती है। अर्थता- रामम नाम है उनका । बह- क्या काम करते है ? बर्षना-देसायार का । वह फीडर है ? नाम है उन सामन लीडर या केवल भविष्य का स्वप्न दलवे छ । पर वे ऐसे बौर प है कि परिणामों पर विचार किये बिना स्वप्नों को चरितार्थ करके देखते है । बह- आप मजान कर रही है ।
पके आम के फायदों के बारे में तो हम पहले ही बता चुके हैं. अब बारी है कच्चे आमों के फायदों के बारे में जानने की. आम भारत में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले फलों में शुमार है. कुछ लोग इसे कच्चा तो कुछ लोग पका खाना पसंद करते हैं. कच्चा आम अलग-अलग पोषक तत्वों का एक बेहतरीन सोर्स माना जाता है. इसमें विटामिन, मिनरल्स, डाइटरी फाइबर और कैरोटीनॉयड पाया जाता है. कच्चा आम चिलचिलाती गर्मी को मात देने का एक अचूक इलाज है. आम पन्ना कच्चे आम से बना एक फ्रेश ड्रिंक है, जिसका सेवन लोग अक्सर गर्मियों के मौसम में करते हैं. कच्चे आम हीट स्ट्रोक से बचाने में मददगार है. विटामिन सी का अच्छा सोर्स होने की वजह से कच्चे आम रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं और बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं. चूंकि कच्चे आम में कैलोरी की मात्रा कम होती है. बाकी फलों की तुलना में कच्चे आम में नेचुरल शुगर की मात्रा बहुत कम होती है. यही वजह है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए यह फायदेमंद है. इसका सेवन करने से ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है. कच्चे आम खाने से इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिल सकती है. क्योंकि इसमें इम्युनिटी को बढ़ाने वाले जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. कुछ अध्ययनों की मानें तो कच्चे आम के रस का एक कप विटामिन A की रोजाना कुल जरूरत का 10 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता है. कच्चे आम विटामिन C से भी भरपूर होते हैं. आम में पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो दिल को हेल्दी रखने और ब्लड फ्लो को बनाए रखने में हेल्प करते हैं. ये पोषक तत्व आपके ब्लड वैसल्स को रेस्ट में भी मददगार हैं. इसके अलाना, लो ब्लड प्रेशर की समस्या भी दूर कर सकते हैं. कच्चा आम मैंगफेरिन से भी भरपूर होता है. कच्चे आम में मौजूद पॉलीफेनोल्स की वजह से यह फल कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से भी लड़ सकता है. कच्चे आम में एंटी-कैंसर गुण होते हैं, जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, पॉलीफेनोल्स अलग-अलग कैंसर सेल्स को पैदा होने से रोकते हैं, जैसे- ल्यूकेमिया, कोलन, फेफड़े, प्रोस्टेट और ब्रेस्ट का कैंसर.
पके आम के फायदों के बारे में तो हम पहले ही बता चुके हैं. अब बारी है कच्चे आमों के फायदों के बारे में जानने की. आम भारत में सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले फलों में शुमार है. कुछ लोग इसे कच्चा तो कुछ लोग पका खाना पसंद करते हैं. कच्चा आम अलग-अलग पोषक तत्वों का एक बेहतरीन सोर्स माना जाता है. इसमें विटामिन, मिनरल्स, डाइटरी फाइबर और कैरोटीनॉयड पाया जाता है. कच्चा आम चिलचिलाती गर्मी को मात देने का एक अचूक इलाज है. आम पन्ना कच्चे आम से बना एक फ्रेश ड्रिंक है, जिसका सेवन लोग अक्सर गर्मियों के मौसम में करते हैं. कच्चे आम हीट स्ट्रोक से बचाने में मददगार है. विटामिन सी का अच्छा सोर्स होने की वजह से कच्चे आम रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं और बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं. चूंकि कच्चे आम में कैलोरी की मात्रा कम होती है. बाकी फलों की तुलना में कच्चे आम में नेचुरल शुगर की मात्रा बहुत कम होती है. यही वजह है कि डायबिटीज के मरीजों के लिए यह फायदेमंद है. इसका सेवन करने से ब्लड शुगर के लेवल को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है. कच्चे आम खाने से इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद मिल सकती है. क्योंकि इसमें इम्युनिटी को बढ़ाने वाले जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. कुछ अध्ययनों की मानें तो कच्चे आम के रस का एक कप विटामिन A की रोजाना कुल जरूरत का दस प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता है. कच्चे आम विटामिन C से भी भरपूर होते हैं. आम में पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो दिल को हेल्दी रखने और ब्लड फ्लो को बनाए रखने में हेल्प करते हैं. ये पोषक तत्व आपके ब्लड वैसल्स को रेस्ट में भी मददगार हैं. इसके अलाना, लो ब्लड प्रेशर की समस्या भी दूर कर सकते हैं. कच्चा आम मैंगफेरिन से भी भरपूर होता है. कच्चे आम में मौजूद पॉलीफेनोल्स की वजह से यह फल कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से भी लड़ सकता है. कच्चे आम में एंटी-कैंसर गुण होते हैं, जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, पॉलीफेनोल्स अलग-अलग कैंसर सेल्स को पैदा होने से रोकते हैं, जैसे- ल्यूकेमिया, कोलन, फेफड़े, प्रोस्टेट और ब्रेस्ट का कैंसर.
तरबूज कॉर्न सलाद रेसिपी (Watermelon Corn Salad Recipe): गर्मी के मौसम में तरबूज खाना तो सभी पसंद करते हैं। इस सीजन में तरबूज से बना सलाद भी काफी पसंद किया जाता है। तरबूज और कॉर्न के साथ तैयार किया जाने वाला सलाद न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। पोषक तत्वों से भरपूर तरबूज-कॉर्न का सलाद गर्मी के सीजन में पेट में ठंडक बनाए रखता है। इसे नियमित खाने से पेट की गर्मी नहीं बढ़ती है। इसके साथ ही तरबूज में 90 फीसदी से अधिक पानी होता है जो कि तेज गर्मी और लू के बीच भी शरीर को डिहाइड्रेट नहीं होने देता है। तरबूज-कॉर्न का सलाद बनाना काफी आसान है और ये मिनटों में बनकर तैयार हो जाता है। इस सलाद को हर उम्र के लोग खा सकते हैं और ये सभी की स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में सहायता करता है। लंच या डिनर के साथ भी तरबूज-कॉर्न सलाद को परोसा जा सकता है। आइए जानते हैं तरबूज-कॉर्न सलाद बनाने की आसान विधि। तरबूज-कॉर्न सलाद बनाने के लिए सबसे पहले तरबूज को काटें और उसके ऊपर की मोटी हरी परत अलग कर दें। इसके बाद तरबूज के टुकड़े काट लें और बीज निकाल लें। अब तरबूज के टुकड़े एक बड़े बर्तन में रख दें। इसके बाद स्वीट कॉर्न को प्रेशर कुकर में डालें और उसमें आधा कप पानी डालकर ढक्कन लगाकर पकाएं। 1 सीटी आने के बाद गैस बंद कर दें और कुकर का प्रेशर रिलीज होने दें। कुकर का प्रेशर रिलीज हो जाए तो स्वीट कॉर्न को एक बाउल में निकालकर ठंडे होने के लिए रख दें। अब तरबूज के बर्तन में स्वीट कॉर्न को डालें और अच्छे से मिक्स कर कुछ देर तक फ्रिज में रख दें। इस दौरान तुलसी पत्ते, पुदीना पत्ते बारीक-बारीक काट लें। इसके बाद मिक्सर ग्राइंडर में तुलसी, पुदीना पत्ते, काली मिर्च पाउडर, ऑलिव ऑयल, नींबू रस और थोड़ा सा नमक डालकर ग्राइंड करें और पेस्ट तैयार कर लें। तैयार पेस्ट को एक बाउल में निकाल लें। इसके बाद फ्रिज से तरबूज-कॉर्न के मिश्रण को निकालें और उसमें तैयार किया गया पेस्ट डालकर अच्छी तरह से मिला लें। स्वादिष्ट और हेल्दी तरबूज-कॉर्न का सलाद बनकर तैयार है। इसे लंच या डिनर के साथ सर्व किया जा सकता है।
तरबूज कॉर्न सलाद रेसिपी : गर्मी के मौसम में तरबूज खाना तो सभी पसंद करते हैं। इस सीजन में तरबूज से बना सलाद भी काफी पसंद किया जाता है। तरबूज और कॉर्न के साथ तैयार किया जाने वाला सलाद न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। पोषक तत्वों से भरपूर तरबूज-कॉर्न का सलाद गर्मी के सीजन में पेट में ठंडक बनाए रखता है। इसे नियमित खाने से पेट की गर्मी नहीं बढ़ती है। इसके साथ ही तरबूज में नब्बे फीसदी से अधिक पानी होता है जो कि तेज गर्मी और लू के बीच भी शरीर को डिहाइड्रेट नहीं होने देता है। तरबूज-कॉर्न का सलाद बनाना काफी आसान है और ये मिनटों में बनकर तैयार हो जाता है। इस सलाद को हर उम्र के लोग खा सकते हैं और ये सभी की स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में सहायता करता है। लंच या डिनर के साथ भी तरबूज-कॉर्न सलाद को परोसा जा सकता है। आइए जानते हैं तरबूज-कॉर्न सलाद बनाने की आसान विधि। तरबूज-कॉर्न सलाद बनाने के लिए सबसे पहले तरबूज को काटें और उसके ऊपर की मोटी हरी परत अलग कर दें। इसके बाद तरबूज के टुकड़े काट लें और बीज निकाल लें। अब तरबूज के टुकड़े एक बड़े बर्तन में रख दें। इसके बाद स्वीट कॉर्न को प्रेशर कुकर में डालें और उसमें आधा कप पानी डालकर ढक्कन लगाकर पकाएं। एक सीटी आने के बाद गैस बंद कर दें और कुकर का प्रेशर रिलीज होने दें। कुकर का प्रेशर रिलीज हो जाए तो स्वीट कॉर्न को एक बाउल में निकालकर ठंडे होने के लिए रख दें। अब तरबूज के बर्तन में स्वीट कॉर्न को डालें और अच्छे से मिक्स कर कुछ देर तक फ्रिज में रख दें। इस दौरान तुलसी पत्ते, पुदीना पत्ते बारीक-बारीक काट लें। इसके बाद मिक्सर ग्राइंडर में तुलसी, पुदीना पत्ते, काली मिर्च पाउडर, ऑलिव ऑयल, नींबू रस और थोड़ा सा नमक डालकर ग्राइंड करें और पेस्ट तैयार कर लें। तैयार पेस्ट को एक बाउल में निकाल लें। इसके बाद फ्रिज से तरबूज-कॉर्न के मिश्रण को निकालें और उसमें तैयार किया गया पेस्ट डालकर अच्छी तरह से मिला लें। स्वादिष्ट और हेल्दी तरबूज-कॉर्न का सलाद बनकर तैयार है। इसे लंच या डिनर के साथ सर्व किया जा सकता है।
कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी पर जूता फेंकने की कोशिश हुई. उत्तराखंड में देहरादून के विकासनगर में य़े घटना हुई. राहुल रैली में थे और भाषण दे रहे थे तभी दर्शकों की तरफ से एक जूता उछला और सुरक्षा के लिए बने डी में आकर गिरा. राहुल ने कहा है कि ये जूता बीजेपी का है. दिग्विजय का दावा है कि संघ के इशारे पर रामदेव की साजिश है.
कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी पर जूता फेंकने की कोशिश हुई. उत्तराखंड में देहरादून के विकासनगर में य़े घटना हुई. राहुल रैली में थे और भाषण दे रहे थे तभी दर्शकों की तरफ से एक जूता उछला और सुरक्षा के लिए बने डी में आकर गिरा. राहुल ने कहा है कि ये जूता बीजेपी का है. दिग्विजय का दावा है कि संघ के इशारे पर रामदेव की साजिश है.
फेक न्यूज़ का खुलासा करने वाली वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के साथ हमारी पार्टनरशिप शुरू! देखते रहिए और पढ़ते रहिए, किस तरह से फ़र्ज़ी ख़बरों का बजेगा बैंड! नमो इंडिया क्लब नामक पेज ने यह विडियो इन शब्दों के साथ 19 जून को शेयर किया है जिसे अबतक 80000 से ज्यादा बार देखा जा चूका है। इस पेज के 11 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। यह संदेश पर्सनल यूजर्स द्वारा शेयर किया जा रहा है, साथ ही यह व्हात्सप्प पर भी फ़ैल रहा है। एक ट्विटर यूजर आनंद ने भी इसी संदेश के साथ यह विडियो शेयर किया है। सच क्या है? ऑल्ट न्यूज़ ने एक साल पहले ही इस विडियो की सच्चाई बताई थी। उस समय भी यह विडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से फैलाया जा रहा था। विडियो में दिख रही कुस्तीबाज पाकिस्तान की नहीं बल्कि भारतीय है। उनका नाम बीबी बुलबुल है। वह भारत की पहली पेशेवर रेसलर है। भगवा रंग की सलवार कमीज़ में दिख रही महिला का नाम कविता देवी है। देवी मिक्स्ड मार्शल आर्टस (MMA-Mixed Martial Arts) की फाइटर और हरयाणा की पूर्व वेट लिफ्टर हैं। उन्होंने हाल ही में इतिहास बनाया जब वह डब्ल्यूडब्ल्यूई (WWE) में शामिल होने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी। द न्यूज़ मिनट की एक रिपोर्ट के अनुसार जालंधर में 2016 में कॉन्टिनेंटल रेसलिंग एंटरटेनमेंट द्वारा यह आयोजित किया गया था। सीडब्ल्यूई (CWE) एक भारतीय प्रोफेशनल कुश्ती प्रशिक्षण अकादमी है जिसे भारतीय-अमेरिकी प्रोफेशनल पहलवान द ग्रेट खली ने स्थापित किया है। सीडब्ल्यूई के यूट्यूब चैनल पर वही वीडियो देखा जा सकता है। अमर उजाला ने भी इस खबर को रिपोर्ट किया था। इसके अलावा दुर्गा वाहिनी विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की महिला शाखा है नाकि आरएसएस की, जैसा इस वायरल पोस्ट में दावा किया गया है। अक्सर यह देखा जाता है कि राष्ट्रवाद नकली खबर फ़ैलाने वालों का पसंदीदा विषय होता है जो तस्वीरों या विडियो के माध्यम से लोगों की भावनाओं को उत्तेजित करना चाहते हैं। यह एक और ऐसा उदाहरण है जिसमें मनोरंजन के लिए बनाए गए प्रतिस्पर्धा के इस विडियो को राष्ट्रवाद का मोड़ दिया गया है।
फेक न्यूज़ का खुलासा करने वाली वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ के साथ हमारी पार्टनरशिप शुरू! देखते रहिए और पढ़ते रहिए, किस तरह से फ़र्ज़ी ख़बरों का बजेगा बैंड! नमो इंडिया क्लब नामक पेज ने यह विडियो इन शब्दों के साथ उन्नीस जून को शेयर किया है जिसे अबतक अस्सी हज़ार से ज्यादा बार देखा जा चूका है। इस पेज के ग्यारह लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। यह संदेश पर्सनल यूजर्स द्वारा शेयर किया जा रहा है, साथ ही यह व्हात्सप्प पर भी फ़ैल रहा है। एक ट्विटर यूजर आनंद ने भी इसी संदेश के साथ यह विडियो शेयर किया है। सच क्या है? ऑल्ट न्यूज़ ने एक साल पहले ही इस विडियो की सच्चाई बताई थी। उस समय भी यह विडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से फैलाया जा रहा था। विडियो में दिख रही कुस्तीबाज पाकिस्तान की नहीं बल्कि भारतीय है। उनका नाम बीबी बुलबुल है। वह भारत की पहली पेशेवर रेसलर है। भगवा रंग की सलवार कमीज़ में दिख रही महिला का नाम कविता देवी है। देवी मिक्स्ड मार्शल आर्टस की फाइटर और हरयाणा की पूर्व वेट लिफ्टर हैं। उन्होंने हाल ही में इतिहास बनाया जब वह डब्ल्यूडब्ल्यूई में शामिल होने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी। द न्यूज़ मिनट की एक रिपोर्ट के अनुसार जालंधर में दो हज़ार सोलह में कॉन्टिनेंटल रेसलिंग एंटरटेनमेंट द्वारा यह आयोजित किया गया था। सीडब्ल्यूई एक भारतीय प्रोफेशनल कुश्ती प्रशिक्षण अकादमी है जिसे भारतीय-अमेरिकी प्रोफेशनल पहलवान द ग्रेट खली ने स्थापित किया है। सीडब्ल्यूई के यूट्यूब चैनल पर वही वीडियो देखा जा सकता है। अमर उजाला ने भी इस खबर को रिपोर्ट किया था। इसके अलावा दुर्गा वाहिनी विश्व हिंदू परिषद की महिला शाखा है नाकि आरएसएस की, जैसा इस वायरल पोस्ट में दावा किया गया है। अक्सर यह देखा जाता है कि राष्ट्रवाद नकली खबर फ़ैलाने वालों का पसंदीदा विषय होता है जो तस्वीरों या विडियो के माध्यम से लोगों की भावनाओं को उत्तेजित करना चाहते हैं। यह एक और ऐसा उदाहरण है जिसमें मनोरंजन के लिए बनाए गए प्रतिस्पर्धा के इस विडियो को राष्ट्रवाद का मोड़ दिया गया है।
upcoming Smartphones: पिछले कुछ सालों से स्मार्टफोन निर्माता कंपनी कम बजट सेगमेंट में फोन को पेश कर रही है। आगामी स्मार्टफोन्स भी कम कीमत में आने के लिए तैयार है जिनमें आपको फीचर्स भी काफी अच्छे देखने को मिल सकते हैं। आज यानी 6 सितंबर को एक या दो नहीं बल्कि तीन स्मार्टफोन (upcoming Smartphones in India) लॉन्च होने के लिए तैयार है। रेडमी और रियलमी अपने लेटेस्ट मॉडल को लॉन्च करने वाले हैं। इनमें रेडमी के दो स्मार्टफोन रेडमी ऐ1 (Redmi A1) और रेडमी प्राइम 11 (Redmi 11 Prime) शामिल हैं। वहीं, रियलमी अपने सी सरीज में रियलमी सी33 (Realme C33) को पेश करने वाला है। तीनों ही स्मार्टफोन 20 हजार रुपये से कम कीमत में आएंगे। आइए रियलमी सी33, रेडमी ए1 और रेडमी 11 प्राइम के बारे में बताते हैं। - रेडमी A1 में मीडियाटेक प्रोसेसर होगा। - इसमें 5000mAh की बैटरी होगी। - इसके तीन कलर ऑप्शन लॉन्च होंगे। - फोन के बैक में डुअल कैमरा सेटअप होगा। - फ्रंट कैमरा वाटरनॉच के साथ होगा। - इसका लॉन्च प्राइस 10000 रुपये से कम हो सकता है। - रेडमी 11 प्राइम 4जी और 5जी सपोर्ट के साथ लॉन्च होगा। - इसके 5जी सपोर्ट में MediaTek Dimensity 700 चिपसेट होगा। - इसमें ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप होगा जिसमें 50MP का मेन कैमरा होगा। - फोन में फास्ट चार्जिंग सपोर्ट वाली 5000mAh की बैटरी होगी। - फोन के 4जी सपोर्ट में MediaTek Helio G99 चिपसेट होगा। - इसका डिस्प्ले 6. 58-inch के 90Hz रिफ्रेश रेट के साथ होगा। - रियलमी सी33 में 5000mAh की बैटरी होगी। - फुल चार्जिंग पर इसकी बैटरी 37 दिन तक चल सकती है। - फोन में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप होगा जिसमें 50MP का मेन कैमरा होगा। - इसकी कीमत 10 हजार रुपये से कम हो सकती है। - फ्लिपकार्ट पर रियलमी सी33 को लॉन्च किया जाएगा।
upcoming Smartphones: पिछले कुछ सालों से स्मार्टफोन निर्माता कंपनी कम बजट सेगमेंट में फोन को पेश कर रही है। आगामी स्मार्टफोन्स भी कम कीमत में आने के लिए तैयार है जिनमें आपको फीचर्स भी काफी अच्छे देखने को मिल सकते हैं। आज यानी छः सितंबर को एक या दो नहीं बल्कि तीन स्मार्टफोन लॉन्च होने के लिए तैयार है। रेडमी और रियलमी अपने लेटेस्ट मॉडल को लॉन्च करने वाले हैं। इनमें रेडमी के दो स्मार्टफोन रेडमी ऐएक और रेडमी प्राइम ग्यारह शामिल हैं। वहीं, रियलमी अपने सी सरीज में रियलमी सीतैंतीस को पेश करने वाला है। तीनों ही स्मार्टफोन बीस हजार रुपये से कम कीमत में आएंगे। आइए रियलमी सीतैंतीस, रेडमी एएक और रेडमी ग्यारह प्राइम के बारे में बताते हैं। - रेडमी Aएक में मीडियाटेक प्रोसेसर होगा। - इसमें पाँच हज़ारmAh की बैटरी होगी। - इसके तीन कलर ऑप्शन लॉन्च होंगे। - फोन के बैक में डुअल कैमरा सेटअप होगा। - फ्रंट कैमरा वाटरनॉच के साथ होगा। - इसका लॉन्च प्राइस दस हज़ार रुपयापये से कम हो सकता है। - रेडमी ग्यारह प्राइम चारजी और पाँचजी सपोर्ट के साथ लॉन्च होगा। - इसके पाँचजी सपोर्ट में MediaTek Dimensity सात सौ चिपसेट होगा। - इसमें ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप होगा जिसमें पचासMP का मेन कैमरा होगा। - फोन में फास्ट चार्जिंग सपोर्ट वाली पाँच हज़ारmAh की बैटरी होगी। - फोन के चारजी सपोर्ट में MediaTek Helio Gनिन्यानवे चिपसेट होगा। - इसका डिस्प्ले छः. अट्ठावन-inch के नब्बे हर्ट्ज़ रिफ्रेश रेट के साथ होगा। - रियलमी सीतैंतीस में पाँच हज़ारmAh की बैटरी होगी। - फुल चार्जिंग पर इसकी बैटरी सैंतीस दिन तक चल सकती है। - फोन में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप होगा जिसमें पचासMP का मेन कैमरा होगा। - इसकी कीमत दस हजार रुपये से कम हो सकती है। - फ्लिपकार्ट पर रियलमी सीतैंतीस को लॉन्च किया जाएगा।
मौसम विभाग के मुताबिक रविवार से बादल और बारिश से तापमान में कमी और गर्मी से राहत के आसार बन रहे हैं। ताजनगरी शनिवार को सूबे में सबसे गर्म शहर रही। शुक्रवार को मेरठ सबसे गर्म शहर रहा था लेकिन उससे पहले लगातार चार दिन तक आगरा प्रदेश में सबसे गर्म रहा। महज एक दिन बाद ही आगरा फिर से सूबे का सबसे गर्म शहर बन गया, जहां दिन और रात में तापमान सामान्य से तीन डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। मौसम विभाग के मुताबिक रविवार से बादल और बारिश से तापमान में कमी और गर्मी से राहत के आसार बन रहे हैं। शनिवार को अधिकतम तापमान 36. 4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 3 डिग्री ऊपर है। यही हाल रात के तापमान का भी है, जो 27. 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दोपहर में तेज कड़ी धूप लोगों को बेहाल करती रही लेकिन अपराह्न चार बजे से मौसम में बदलाव आया और काले बादल घिर आए। एक बार को लगा कि झमाझम बारिश होने वाली है लेकिन शाम तक बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग के पूर्वानुमान केंद्र के मुताबिक अगले तीन दिनों तक बादलों की लुकाछिपी और बारिश, बूंदाबांदी के आसार बन रहे हैं। एक सितंबर तक मानसून के बादल बरसने के आसार हैं। इससे दिन के तापमान में दो से तीन डिग्री तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
मौसम विभाग के मुताबिक रविवार से बादल और बारिश से तापमान में कमी और गर्मी से राहत के आसार बन रहे हैं। ताजनगरी शनिवार को सूबे में सबसे गर्म शहर रही। शुक्रवार को मेरठ सबसे गर्म शहर रहा था लेकिन उससे पहले लगातार चार दिन तक आगरा प्रदेश में सबसे गर्म रहा। महज एक दिन बाद ही आगरा फिर से सूबे का सबसे गर्म शहर बन गया, जहां दिन और रात में तापमान सामान्य से तीन डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। मौसम विभाग के मुताबिक रविवार से बादल और बारिश से तापमान में कमी और गर्मी से राहत के आसार बन रहे हैं। शनिवार को अधिकतम तापमान छत्तीस. चार डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से तीन डिग्री ऊपर है। यही हाल रात के तापमान का भी है, जो सत्ताईस. सात डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दोपहर में तेज कड़ी धूप लोगों को बेहाल करती रही लेकिन अपराह्न चार बजे से मौसम में बदलाव आया और काले बादल घिर आए। एक बार को लगा कि झमाझम बारिश होने वाली है लेकिन शाम तक बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग के पूर्वानुमान केंद्र के मुताबिक अगले तीन दिनों तक बादलों की लुकाछिपी और बारिश, बूंदाबांदी के आसार बन रहे हैं। एक सितंबर तक मानसून के बादल बरसने के आसार हैं। इससे दिन के तापमान में दो से तीन डिग्री तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
हैदराबाद, 12 जुलाई इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) टीम हैदराबाद एफसी ने 2020-21 सत्र से पहले स्पेन के खिलाड़ी एडवर्डो एडु गार्सिया के साथ अनुबंध किया है। इस फुटबॉल क्लब ने सोमवार को यह घोषणा की। अनुभवी आक्रामक मिडफील्डर गार्सिया कई भूमिकाओं में खेल सकते हैं। वह पिछले साल के उप विजेता एटीके मोहन बागान को छोड़कर हैदराबाद की टीम से जुड़े हैं। हैदराबाद एफसी के साथ गार्सिया का अनुबंध एक साल का है। उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि हैदराबाद एफसी अंक तालिका में अधिक से अधिक ऊपर जगह बनाए और इसके लिए हम कड़ी मेहनत करेंगे। कोच जो मेरे से चाहते हैं उसे देकर मैं टीम की मदद करने का प्रयास करूंगा। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
हैदराबाद, बारह जुलाई इंडियन सुपर लीग टीम हैदराबाद एफसी ने दो हज़ार बीस-इक्कीस सत्र से पहले स्पेन के खिलाड़ी एडवर्डो एडु गार्सिया के साथ अनुबंध किया है। इस फुटबॉल क्लब ने सोमवार को यह घोषणा की। अनुभवी आक्रामक मिडफील्डर गार्सिया कई भूमिकाओं में खेल सकते हैं। वह पिछले साल के उप विजेता एटीके मोहन बागान को छोड़कर हैदराबाद की टीम से जुड़े हैं। हैदराबाद एफसी के साथ गार्सिया का अनुबंध एक साल का है। उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि हैदराबाद एफसी अंक तालिका में अधिक से अधिक ऊपर जगह बनाए और इसके लिए हम कड़ी मेहनत करेंगे। कोच जो मेरे से चाहते हैं उसे देकर मैं टीम की मदद करने का प्रयास करूंगा। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
कई वर्षों के लिए व्यापक बाल कटवाने नहीं हैअपनी प्रासंगिकता खो देता है अपने अस्तित्व के लंबे इतिहास में, यह कई पेशेवर "क्रांतियों" से गुजर चुका है, जिसके कारण यह कई किस्मों का अधिग्रहण कर चुका है और अधिक परिपूर्ण बन गया है। इस बाल कटवाने का मुख्य लाभ यह है कि यह चेहरे और सिर के लगभग किसी भी आकार को फिट बैठता है, और इसलिए सभी महिलाएं इसे पहन सकती हैं। अपने लिए एक बाल कटवाने का चयन, याद रखें कि सफलयह केवल तभी होगा जब यह एक पेशेवर मास्टर द्वारा किया जाता है जो न केवल "कदम" के साथ अपने बाल कटौती करता है, बल्कि यह बाल के प्रकार को ध्यान में रखते हुए भी करता है आखिरकार, किलों की लंबाई कितनी अच्छी तरह से मेल खाती है, यह भी घर पर आगे बिछाने की आसानी पर निर्भर करता है। कैस्केडिंग बाल कटवाने में बहुत अच्छा लग रहा हैकिसी भी मोटाई के बाल, लेकिन अभी भी इस केश बालों के लिए दुर्लभ - एक असली मोक्ष। इसके अलावा, झरना की तीव्रता भी अलग हो सकता हैः उदाहरण के लिए, आप चिकनी स्तर, यह पूरी लंबाई के साथ "rvanku" हो सकता है बनाने के लिए सभी बाल "सीढ़ी" कटौती कर सकते हैं, और यह युक्तियों पर एक "कदम" बनाने के लिए संभव है। चेहरे क्षेत्र एक कदम रखा किस्में और मिल्ड प्रकार बैंग्स रूप में तैयार किए जा सकते हैं। कैसे शैली "कैस्केड"? मुख्य लाभ जिसमें एक कैस्केडिंग हेयरकट है वह यह है कि यह लंबे और छोटे बाल दोनों पर किया जा सकता है। बिछाने के तरीके भी अलग हो सकते हैंः - एक हेयर ड्रायर के साथ; - कर्लर्स या स्टाइलिंग पेंसर्स पर घुमाकर; - "इस्त्री" की मदद से; - सामने के तारों की रिहाई के साथ पूंछ या उच्च केश विन्यास में। उत्तरार्द्ध विकल्प विशेष रूप से लोकप्रिय है। इस मामले में, किसी भी अतिरिक्त साधन के उपयोग के बिना विभिन्न प्रकार के हेयर स्टाइल बनाने के लिए कैस्केड एक उत्कृष्ट आधार है। बाल कटवाने कौन कर रहे हैं? मुख्य रूप से केश विन्यास कास्केड की सिफारिश की जाती हैएक महिला के बाद पतली बाल या बाल होते हैं। ऐसा बाल कटवाने दृष्टि से बाल की मात्रा बनाने में मदद करेगा, और कर्ल अधिक स्वस्थ और मजबूत दिखेंगे। इसके अतिरिक्त, यदि आप चेहरे पर किसी भी प्रकार की त्रुटियों को छिपाना या नरम करना चाहते हैं, तो ऐसे बाल कटवाने इसे अधिक अभिव्यक्त बना देंगे। यह विशेष रूप से कम माथे वाले महिलाओं के लिए सच है, क्योंकि इस तरह की हेयर स्टाइल दृष्टि से चेहरे को खींचती है। लेकिन पहले से ही लंबे चेहरे के साथ महिलाओं की सिफारिश नहीं की जाती है।
कई वर्षों के लिए व्यापक बाल कटवाने नहीं हैअपनी प्रासंगिकता खो देता है अपने अस्तित्व के लंबे इतिहास में, यह कई पेशेवर "क्रांतियों" से गुजर चुका है, जिसके कारण यह कई किस्मों का अधिग्रहण कर चुका है और अधिक परिपूर्ण बन गया है। इस बाल कटवाने का मुख्य लाभ यह है कि यह चेहरे और सिर के लगभग किसी भी आकार को फिट बैठता है, और इसलिए सभी महिलाएं इसे पहन सकती हैं। अपने लिए एक बाल कटवाने का चयन, याद रखें कि सफलयह केवल तभी होगा जब यह एक पेशेवर मास्टर द्वारा किया जाता है जो न केवल "कदम" के साथ अपने बाल कटौती करता है, बल्कि यह बाल के प्रकार को ध्यान में रखते हुए भी करता है आखिरकार, किलों की लंबाई कितनी अच्छी तरह से मेल खाती है, यह भी घर पर आगे बिछाने की आसानी पर निर्भर करता है। कैस्केडिंग बाल कटवाने में बहुत अच्छा लग रहा हैकिसी भी मोटाई के बाल, लेकिन अभी भी इस केश बालों के लिए दुर्लभ - एक असली मोक्ष। इसके अलावा, झरना की तीव्रता भी अलग हो सकता हैः उदाहरण के लिए, आप चिकनी स्तर, यह पूरी लंबाई के साथ "rvanku" हो सकता है बनाने के लिए सभी बाल "सीढ़ी" कटौती कर सकते हैं, और यह युक्तियों पर एक "कदम" बनाने के लिए संभव है। चेहरे क्षेत्र एक कदम रखा किस्में और मिल्ड प्रकार बैंग्स रूप में तैयार किए जा सकते हैं। कैसे शैली "कैस्केड"? मुख्य लाभ जिसमें एक कैस्केडिंग हेयरकट है वह यह है कि यह लंबे और छोटे बाल दोनों पर किया जा सकता है। बिछाने के तरीके भी अलग हो सकते हैंः - एक हेयर ड्रायर के साथ; - कर्लर्स या स्टाइलिंग पेंसर्स पर घुमाकर; - "इस्त्री" की मदद से; - सामने के तारों की रिहाई के साथ पूंछ या उच्च केश विन्यास में। उत्तरार्द्ध विकल्प विशेष रूप से लोकप्रिय है। इस मामले में, किसी भी अतिरिक्त साधन के उपयोग के बिना विभिन्न प्रकार के हेयर स्टाइल बनाने के लिए कैस्केड एक उत्कृष्ट आधार है। बाल कटवाने कौन कर रहे हैं? मुख्य रूप से केश विन्यास कास्केड की सिफारिश की जाती हैएक महिला के बाद पतली बाल या बाल होते हैं। ऐसा बाल कटवाने दृष्टि से बाल की मात्रा बनाने में मदद करेगा, और कर्ल अधिक स्वस्थ और मजबूत दिखेंगे। इसके अतिरिक्त, यदि आप चेहरे पर किसी भी प्रकार की त्रुटियों को छिपाना या नरम करना चाहते हैं, तो ऐसे बाल कटवाने इसे अधिक अभिव्यक्त बना देंगे। यह विशेष रूप से कम माथे वाले महिलाओं के लिए सच है, क्योंकि इस तरह की हेयर स्टाइल दृष्टि से चेहरे को खींचती है। लेकिन पहले से ही लंबे चेहरे के साथ महिलाओं की सिफारिश नहीं की जाती है।
Mumbai Traffic Rule: राजधानी मुंबई में ट्रैफिक पुलिस विभाग द्वारा बाइक पर पीछे बैठनेवालों यात्रियो के लिए भी हेलमेट को अनिवार्य कर दिया गया है। ट्रैफिक पुलिस ने ऐसे लोगों पर कार्रवाई भी शुरु कर दी है जो इन नियमों का पालन नहीं कर रहे। हालांकी इसके साथ ही कांदिवली ट्रैफिक पुलिस द्वारा जरुरतमंद और बच्चों को मुफ्त में हेलमेट वितरित भी किया जा रहा है। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस नियम का पालन करने में आसानी हो सके। मुंबई पुलिस ने सभी वाहन चालकों को एक समय सीमा दी हुई थी। इस समय सीमा में सभी को हेलमेट अनिवार्य कर दिया गया था, खासकर बाइक पर पीछे बैठने वाले व्यक्ति के लिए भी। उसी नियम को पालन करवाने के लिए ट्रैफिक पुलिस सख्त से सख्त कदम उठाने को भी तैयार रह रही है। इसी क्रम में जिसको हेलमेट की जरूरत है उन्हें ये मुफ्त में दिया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार कांदिवली ट्रैफिक पुलिस की ओर से एक कॉलेज कांदिवली पश्चिम के ट्रस्टी ब्रिजल दत्तानी और एक चैरिटेबल ट्रस्ट के गणेश पवार के सहयोग से कांदिवली परिवहन विभाग ने अवर लेडी स्कूल पॉइज़र के गेट के सामने स्कूल की प्रिंसिपल श्रीमती एनी जॉर्ज और सहायक पुलिस आयुक्त अश्विनी पाटिल की ओर से जरुरतमंदों को हेलमेट दिया गया। इस दौरान बच्चों को भी मुफ्त में ही हेलमेट वितरण किया। इस कार्यक्रम के दौरान लोगों से ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए कहा गया। जिनको हेलमेट दिया गया उनको इससे सुरक्षा और फायदे बताए गए। जानकारी के लिए बता दें कि कांदिवली ट्रैफिक पुलिस निरिक्षक सुरेश रोकड़े ने बताया की " पुलिस कमिश्नर संजय पांडे के आदेश के तहत पीछे सीट पर बैठनेवाले यात्रियों के लिए हेलमेंट अनिवार्य होने के बाद अब तक उनके इलाके में इस नियम का पालन ना करनेवाले 1500 से भी अधिक लोगों पर कार्रवाई हो चुकी है, इसके साथ ही गलत साइड गाड़ी चलाने के मामले में भी 620 और ऑपरेशन खटारा के तहत 600 से अभी अधिक वाहनों पर कार्रवाई की जा चुकी है।
Mumbai Traffic Rule: राजधानी मुंबई में ट्रैफिक पुलिस विभाग द्वारा बाइक पर पीछे बैठनेवालों यात्रियो के लिए भी हेलमेट को अनिवार्य कर दिया गया है। ट्रैफिक पुलिस ने ऐसे लोगों पर कार्रवाई भी शुरु कर दी है जो इन नियमों का पालन नहीं कर रहे। हालांकी इसके साथ ही कांदिवली ट्रैफिक पुलिस द्वारा जरुरतमंद और बच्चों को मुफ्त में हेलमेट वितरित भी किया जा रहा है। जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस नियम का पालन करने में आसानी हो सके। मुंबई पुलिस ने सभी वाहन चालकों को एक समय सीमा दी हुई थी। इस समय सीमा में सभी को हेलमेट अनिवार्य कर दिया गया था, खासकर बाइक पर पीछे बैठने वाले व्यक्ति के लिए भी। उसी नियम को पालन करवाने के लिए ट्रैफिक पुलिस सख्त से सख्त कदम उठाने को भी तैयार रह रही है। इसी क्रम में जिसको हेलमेट की जरूरत है उन्हें ये मुफ्त में दिया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार कांदिवली ट्रैफिक पुलिस की ओर से एक कॉलेज कांदिवली पश्चिम के ट्रस्टी ब्रिजल दत्तानी और एक चैरिटेबल ट्रस्ट के गणेश पवार के सहयोग से कांदिवली परिवहन विभाग ने अवर लेडी स्कूल पॉइज़र के गेट के सामने स्कूल की प्रिंसिपल श्रीमती एनी जॉर्ज और सहायक पुलिस आयुक्त अश्विनी पाटिल की ओर से जरुरतमंदों को हेलमेट दिया गया। इस दौरान बच्चों को भी मुफ्त में ही हेलमेट वितरण किया। इस कार्यक्रम के दौरान लोगों से ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए कहा गया। जिनको हेलमेट दिया गया उनको इससे सुरक्षा और फायदे बताए गए। जानकारी के लिए बता दें कि कांदिवली ट्रैफिक पुलिस निरिक्षक सुरेश रोकड़े ने बताया की " पुलिस कमिश्नर संजय पांडे के आदेश के तहत पीछे सीट पर बैठनेवाले यात्रियों के लिए हेलमेंट अनिवार्य होने के बाद अब तक उनके इलाके में इस नियम का पालन ना करनेवाले एक हज़ार पाँच सौ से भी अधिक लोगों पर कार्रवाई हो चुकी है, इसके साथ ही गलत साइड गाड़ी चलाने के मामले में भी छः सौ बीस और ऑपरेशन खटारा के तहत छः सौ से अभी अधिक वाहनों पर कार्रवाई की जा चुकी है।
प्रोफेसर फ्रायड ने कलम को नीचे रखा और, खिड़की की तरफ देखा, जिसे बार-बार ग्रिल द्वारा उठाया गया था, रिमझिम बारिश में, सोचाः "मैडहाउस"। और अंतिम निष्कर्ष निकालने के बाद, मैंने आदेश दियाः "बहन, वार्ड नं। XXUMX में, शामक के तीन घन हैं। प्रत्येक . . . हाँ, और रोगी को पिगलेट जगाओ - उसके भ्रम मुझे ध्यान केंद्रित करने से रोकते हैं। " उपरोक्त सभी कथा साहित्य में नहीं है। इसके विपरीत, लहजे को नरम करने का प्रयास और यह कहने के लिए नहीं कि यह एक मनोरोग अस्पताल का सामान्य वातावरण है, जिसमें प्रत्येक रोगी को तुरंत नेपोलियन, स्पिनोज़ा और मार्गरेट थैचर - एक बोतल में तीन। अस्पताल, आधा मिलियन वर्ग किलोमीटर के आकार का। जिसमें "रब पहनने वाला पहला डॉक्टर है। " और सबसे ज्यादा हिंसक मरीज थे। जो शुक्रवार को (हालांकि 13 नहीं, लेकिन 15, संख्या) एक उत्कृष्ट भाषण के द्वारा दिया गया था, शराब के कारण बढ़े हुए मनोविकार के अलावा, मुख्य चिकित्सक की कुर्सी पर बैठ गया। यह पहले से ही स्पष्ट है कि तब से वह सूख नहीं गया है - सेंट माइकल के चमत्कार की रात (सितंबर 19) "गारंटर" मैंने लिखा о полумиллиарде долларов, выделенных США на закупку летального оружия. Плюс разведтехника, плюс деньги на ремонт киборгов. Видимо воздух свободы и пары алкоголя поразили неустойчивую психику пациента. और वह एक बहुत ही उपयुक्त जगह पर शुरू हुआ - "याल्टा यूरोपीय रणनीति" की बैठक में, यल्टा की कमी के लिए, "बेसरबका" में आयोजित - कीव के केंद्र में बाजार। उनमें से ज्यादातर वहाँ - बाजार में। रेडियो Svoboda के एक उत्साही पत्रकार, याना पॉलयन्स्काया ने कहा, "रूडी महिलाएं बाल्क, वाइन और कॉकटेल डाल रही हैं। विदेशी मेहमान इकट्ठा हो रहे हैं। " अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के स्थल का आकलन करने का कोई मतलब नहीं है - आखिरकार, आयोजक के बयान और इस शो के मुख्य मसखरे कम आश्चर्यजनक नहीं हैं। कीव शासन के प्रमुख ने तुरंत घोषित किया कि, उनके बुद्धिमान नेतृत्व में, कीव द्वारा नियंत्रित यूक्रेन का एक हिस्सा संयुक्त यूरोप की सीमा है। किसके द्वारा और कब एकजुट हुआ, मैं स्पष्ट करना भूल गया। और यह तथ्य कि एक निश्चित "ब्रिक्सिट" था, और दो सप्ताह में कैटेलोनिया की राज्य स्वतंत्रता पर एक जनमत संग्रह आयोजित किया जाना था, स्पीकर को स्पष्ट रूप से पता नहीं था। लेकिन, पहले मैदान के अध्यक्ष, पान Yushchenko के नक्शेकदम पर चलते हुए, जो दुश्मनों द्वारा उकसाया गया था, उसके खूनी पुनर्जन्म ने घोषणा की कि पौराणिक यूक्रेन में "हजार-वर्षीय मिशन है। " जाहिर तौर पर, मिलेनियल रीच की थीम पर अवचेतन गठबंधन। कुछ नहीं के लिए, और नारे एक ही हैं - "राष्ट्र सब से ऊपर" और अन्य नाजी ब्रेडियातिना। हिटलर ने यूरोप को "लाल रूस" से बचाया, यह रूस से बस बचाता है। यह भूलते हुए कि इस वर्ष 28% पर उनके शासन ने न केवल यूरोप के साथ व्यापार बढ़ाया, बल्कि रूस के साथ, राष्ट्र के नेता ने बेकन के एक टुकड़े पर कसम खाई कि यूरोप के लिए रूसी सड़क उनके लिए अवरुद्ध थी। यूरोप आसान हो सकता है! "यूक्रेन वास्तव में एकजुट यूरोप का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया है। आज, फिर से, हम पूर्व से आने वाले खतरों से हमारे आम यूरोपीय घर की रक्षा के लिए अपने हजार साल के मिशन को पूरा कर रहे हैं। मास्को के साथ, आपको हमेशा सबसे बुरे के लिए तैयार रहना चाहिए। " यही कारण है कि उन्होंने सबसे बुरे के लिए तत्परता के बारे में बात की, कि मैं वास्तव में रूसियों पर शूट करना चाहता हूं। और कुछ भी रक्षात्मक नहीं है, जैसे कि ज्वेलिन एंटी-टैंक कॉम्प्लेक्स, जो कि साल यांकियों से मांगा गया है, लेकिन एक आक्रामक, आधुनिक। सामरिक मिसाइलें ठीक हैं। "मुझे उम्मीद है कि यह सिर्फ रक्षा हथियार नहीं होगा, हालांकि यह हमारे बचाव को काफी बढ़ाएगा। हम नहीं चाहते हैं, हम दुश्मन पर हमला करने के विचार से नफरत करते हैं। हम सिर्फ इस तथ्य की पुष्टि करना चाहते हैं कि अगर वह मिन्स्क समझौतों का उल्लंघन करता है तो हमलावर बहुत अधिक कीमत चुकाएगा। और मेरे सैनिकों पर हमला करने के लिए, यह बिल्कुल उचित है। लेकिन हम शांति चाहते हैं और मैं दुनिया का राष्ट्रपति हूं। " दुनिया के राष्ट्रपति नोबेल पुरस्कार में संकेत कर रहे हैं। और क्या - यासर अराफात के बगल में यह बिल्कुल सही लगेगा। और गोर्बाचेव दाहिने हाथ पर है। यह उनकी "विशलिस्ट" और सीमा होगी। आखिरकार, यूरोपीय लोग शांत हैं, कीव के "सरपट" के लिए बेहिसाब। वे यूरोप में सरपट दौड़ रहे हैं। लेकिन नहीं, "और यहां ओस्ताप को चोट लगी": "यूक्रेन के प्यारे दोस्तों, हम यूरोपीय संघ में पूर्ण सदस्यता और नाटो में पूर्ण सदस्यता की ओर बढ़ रहे हैं। हाल के वर्षों ने दिखाया है कि यह यूक्रेनी स्वतंत्रता, संप्रभुता और समृद्धि की एक उचित गारंटी है। हमारी सभ्यता यूरोपीय सभ्यता की पूर्वी सीमा बन गई है और अंतर्राष्ट्रीय यूरोपीय सहयोग में हमारा योगदान है। "हम महाद्वीपीय अर्थव्यवस्था के इंजन बन जाएंगे। " मैं कल्पना करता हूं कि न केवल जर्मन फ्रांसीसी के साथ खुश थे, बल्कि चेक के साथ डंडे भी थे। "इंजन" के बारे में सुनकर। नहीं, पुराने लोगों को याद हो सकता है कि यूक्रेनी SSR 25 में दुनिया के सबसे आर्थिक रूप से शक्तिशाली देशों में से एक था। लेकिन यह एक, आधे सेवारत वक्ता की अध्यक्षता में . . ! पूरी तरह से ऋण और अनुदान सहायता के माध्यम से सभी को बचाना - धन से लेकर प्रयुक्त एम्बुलेंस तक। पूरे सोवियत विरासत को लूट लिया। सभी पूर्वजों की पीढ़ियों द्वारा बनाई गई। अंतरिक्ष, विमान निर्माण, बख़्तरबंद और हजारों अन्य उद्योग, एक नियंत्रित क्षेत्र में बेसबोर्ड के नीचे रहने के मानक को गिराते हुए। उसने लाखों नागरिकों को खो दिया है, जो रूस में, कि यूरोपीय संघ के लिए - अगर वह केवल यहां से और हमेशा के लिए दूर हो सकता है, चला जाता है। डॉक्टर को बुलाया जाना चाहिए था, लेकिन मेहमानों को भी बुफे द्वारा ले जाया गया। और पोरोशेंको नाइटिंगेल को पता है। यह पता चला है कि मित्रों का झुंड क्रीमिया के "डे-ऑक्यूपेशन" के लिए बनाया जाने वाला है, जो एक साथ हाथ पकड़ते हैं, सभी विनम्र लोगों को अपने बीयर टमी के साथ बाहर निकालते हैं। हाँ, यह पहले से ही था। उन्होंने सुनाः "क्रीमिया यूक्रेनी या निर्जन होगा। " मैं पोरोशेंको को भूल गया, जैसा कि एक्सएनयूएमएक्स में, क्रीमिया में "डे-कब्जे" के लिए आया था। और जिसने अपने महान यूरोपीय मित्र के शब्दों के बारे में बीमारी को याद दिलाया होगा (वैसे, यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष) जीन-क्लाउड जुनकर, जिन्होंने अगस्त के एक्सएनयूएमएक्स के रूप में कहा था कि निम्नलिखित शब्द हैंः "अब दुनिया में युद्ध हो रहे हैं, और यूरोप में कोई नहीं है," यूक्रेन। लेकिन यूक्रेन यूरोपीय संघ से संबंधित होने के अर्थ में एक यूरोपीय देश नहीं है। मैंने अपने मित्र राष्ट्रपति पोरोशेंको को कुछ दिन पहले कहा था कि देखो, यूक्रेन लगभग यूरोपीय संघ और नाटो है। हालांकि, फिलहाल यह नहीं है। दूसरों के लिए नहीं और यह महत्वपूर्ण है कि सभी वे समझ गए। " इस पागलखाने की तुलना में वार्ड संख्या XXUMX में क्या हो रहा है, इस पर सहमति दें - सामान्यता का एक नमूना।
प्रोफेसर फ्रायड ने कलम को नीचे रखा और, खिड़की की तरफ देखा, जिसे बार-बार ग्रिल द्वारा उठाया गया था, रिमझिम बारिश में, सोचाः "मैडहाउस"। और अंतिम निष्कर्ष निकालने के बाद, मैंने आदेश दियाः "बहन, वार्ड नं। XXUMX में, शामक के तीन घन हैं। प्रत्येक . . . हाँ, और रोगी को पिगलेट जगाओ - उसके भ्रम मुझे ध्यान केंद्रित करने से रोकते हैं। " उपरोक्त सभी कथा साहित्य में नहीं है। इसके विपरीत, लहजे को नरम करने का प्रयास और यह कहने के लिए नहीं कि यह एक मनोरोग अस्पताल का सामान्य वातावरण है, जिसमें प्रत्येक रोगी को तुरंत नेपोलियन, स्पिनोज़ा और मार्गरेट थैचर - एक बोतल में तीन। अस्पताल, आधा मिलियन वर्ग किलोमीटर के आकार का। जिसमें "रब पहनने वाला पहला डॉक्टर है। " और सबसे ज्यादा हिंसक मरीज थे। जो शुक्रवार को एक उत्कृष्ट भाषण के द्वारा दिया गया था, शराब के कारण बढ़े हुए मनोविकार के अलावा, मुख्य चिकित्सक की कुर्सी पर बैठ गया। यह पहले से ही स्पष्ट है कि तब से वह सूख नहीं गया है - सेंट माइकल के चमत्कार की रात "गारंटर" मैंने लिखा о полумиллиарде долларов, выделенных США на закупку летального оружия. Плюс разведтехника, плюс деньги на ремонт киборгов. Видимо воздух свободы и пары алкоголя поразили неустойчивую психику пациента. और वह एक बहुत ही उपयुक्त जगह पर शुरू हुआ - "याल्टा यूरोपीय रणनीति" की बैठक में, यल्टा की कमी के लिए, "बेसरबका" में आयोजित - कीव के केंद्र में बाजार। उनमें से ज्यादातर वहाँ - बाजार में। रेडियो Svoboda के एक उत्साही पत्रकार, याना पॉलयन्स्काया ने कहा, "रूडी महिलाएं बाल्क, वाइन और कॉकटेल डाल रही हैं। विदेशी मेहमान इकट्ठा हो रहे हैं। " अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के स्थल का आकलन करने का कोई मतलब नहीं है - आखिरकार, आयोजक के बयान और इस शो के मुख्य मसखरे कम आश्चर्यजनक नहीं हैं। कीव शासन के प्रमुख ने तुरंत घोषित किया कि, उनके बुद्धिमान नेतृत्व में, कीव द्वारा नियंत्रित यूक्रेन का एक हिस्सा संयुक्त यूरोप की सीमा है। किसके द्वारा और कब एकजुट हुआ, मैं स्पष्ट करना भूल गया। और यह तथ्य कि एक निश्चित "ब्रिक्सिट" था, और दो सप्ताह में कैटेलोनिया की राज्य स्वतंत्रता पर एक जनमत संग्रह आयोजित किया जाना था, स्पीकर को स्पष्ट रूप से पता नहीं था। लेकिन, पहले मैदान के अध्यक्ष, पान Yushchenko के नक्शेकदम पर चलते हुए, जो दुश्मनों द्वारा उकसाया गया था, उसके खूनी पुनर्जन्म ने घोषणा की कि पौराणिक यूक्रेन में "हजार-वर्षीय मिशन है। " जाहिर तौर पर, मिलेनियल रीच की थीम पर अवचेतन गठबंधन। कुछ नहीं के लिए, और नारे एक ही हैं - "राष्ट्र सब से ऊपर" और अन्य नाजी ब्रेडियातिना। हिटलर ने यूरोप को "लाल रूस" से बचाया, यह रूस से बस बचाता है। यह भूलते हुए कि इस वर्ष अट्ठाईस% पर उनके शासन ने न केवल यूरोप के साथ व्यापार बढ़ाया, बल्कि रूस के साथ, राष्ट्र के नेता ने बेकन के एक टुकड़े पर कसम खाई कि यूरोप के लिए रूसी सड़क उनके लिए अवरुद्ध थी। यूरोप आसान हो सकता है! "यूक्रेन वास्तव में एकजुट यूरोप का सबसे बड़ा हिस्सा बन गया है। आज, फिर से, हम पूर्व से आने वाले खतरों से हमारे आम यूरोपीय घर की रक्षा के लिए अपने हजार साल के मिशन को पूरा कर रहे हैं। मास्को के साथ, आपको हमेशा सबसे बुरे के लिए तैयार रहना चाहिए। " यही कारण है कि उन्होंने सबसे बुरे के लिए तत्परता के बारे में बात की, कि मैं वास्तव में रूसियों पर शूट करना चाहता हूं। और कुछ भी रक्षात्मक नहीं है, जैसे कि ज्वेलिन एंटी-टैंक कॉम्प्लेक्स, जो कि साल यांकियों से मांगा गया है, लेकिन एक आक्रामक, आधुनिक। सामरिक मिसाइलें ठीक हैं। "मुझे उम्मीद है कि यह सिर्फ रक्षा हथियार नहीं होगा, हालांकि यह हमारे बचाव को काफी बढ़ाएगा। हम नहीं चाहते हैं, हम दुश्मन पर हमला करने के विचार से नफरत करते हैं। हम सिर्फ इस तथ्य की पुष्टि करना चाहते हैं कि अगर वह मिन्स्क समझौतों का उल्लंघन करता है तो हमलावर बहुत अधिक कीमत चुकाएगा। और मेरे सैनिकों पर हमला करने के लिए, यह बिल्कुल उचित है। लेकिन हम शांति चाहते हैं और मैं दुनिया का राष्ट्रपति हूं। " दुनिया के राष्ट्रपति नोबेल पुरस्कार में संकेत कर रहे हैं। और क्या - यासर अराफात के बगल में यह बिल्कुल सही लगेगा। और गोर्बाचेव दाहिने हाथ पर है। यह उनकी "विशलिस्ट" और सीमा होगी। आखिरकार, यूरोपीय लोग शांत हैं, कीव के "सरपट" के लिए बेहिसाब। वे यूरोप में सरपट दौड़ रहे हैं। लेकिन नहीं, "और यहां ओस्ताप को चोट लगी": "यूक्रेन के प्यारे दोस्तों, हम यूरोपीय संघ में पूर्ण सदस्यता और नाटो में पूर्ण सदस्यता की ओर बढ़ रहे हैं। हाल के वर्षों ने दिखाया है कि यह यूक्रेनी स्वतंत्रता, संप्रभुता और समृद्धि की एक उचित गारंटी है। हमारी सभ्यता यूरोपीय सभ्यता की पूर्वी सीमा बन गई है और अंतर्राष्ट्रीय यूरोपीय सहयोग में हमारा योगदान है। "हम महाद्वीपीय अर्थव्यवस्था के इंजन बन जाएंगे। " मैं कल्पना करता हूं कि न केवल जर्मन फ्रांसीसी के साथ खुश थे, बल्कि चेक के साथ डंडे भी थे। "इंजन" के बारे में सुनकर। नहीं, पुराने लोगों को याद हो सकता है कि यूक्रेनी SSR पच्चीस में दुनिया के सबसे आर्थिक रूप से शक्तिशाली देशों में से एक था। लेकिन यह एक, आधे सेवारत वक्ता की अध्यक्षता में . . ! पूरी तरह से ऋण और अनुदान सहायता के माध्यम से सभी को बचाना - धन से लेकर प्रयुक्त एम्बुलेंस तक। पूरे सोवियत विरासत को लूट लिया। सभी पूर्वजों की पीढ़ियों द्वारा बनाई गई। अंतरिक्ष, विमान निर्माण, बख़्तरबंद और हजारों अन्य उद्योग, एक नियंत्रित क्षेत्र में बेसबोर्ड के नीचे रहने के मानक को गिराते हुए। उसने लाखों नागरिकों को खो दिया है, जो रूस में, कि यूरोपीय संघ के लिए - अगर वह केवल यहां से और हमेशा के लिए दूर हो सकता है, चला जाता है। डॉक्टर को बुलाया जाना चाहिए था, लेकिन मेहमानों को भी बुफे द्वारा ले जाया गया। और पोरोशेंको नाइटिंगेल को पता है। यह पता चला है कि मित्रों का झुंड क्रीमिया के "डे-ऑक्यूपेशन" के लिए बनाया जाने वाला है, जो एक साथ हाथ पकड़ते हैं, सभी विनम्र लोगों को अपने बीयर टमी के साथ बाहर निकालते हैं। हाँ, यह पहले से ही था। उन्होंने सुनाः "क्रीमिया यूक्रेनी या निर्जन होगा। " मैं पोरोशेंको को भूल गया, जैसा कि एक्सएनयूएमएक्स में, क्रीमिया में "डे-कब्जे" के लिए आया था। और जिसने अपने महान यूरोपीय मित्र के शब्दों के बारे में बीमारी को याद दिलाया होगा जीन-क्लाउड जुनकर, जिन्होंने अगस्त के एक्सएनयूएमएक्स के रूप में कहा था कि निम्नलिखित शब्द हैंः "अब दुनिया में युद्ध हो रहे हैं, और यूरोप में कोई नहीं है," यूक्रेन। लेकिन यूक्रेन यूरोपीय संघ से संबंधित होने के अर्थ में एक यूरोपीय देश नहीं है। मैंने अपने मित्र राष्ट्रपति पोरोशेंको को कुछ दिन पहले कहा था कि देखो, यूक्रेन लगभग यूरोपीय संघ और नाटो है। हालांकि, फिलहाल यह नहीं है। दूसरों के लिए नहीं और यह महत्वपूर्ण है कि सभी वे समझ गए। " इस पागलखाने की तुलना में वार्ड संख्या XXUMX में क्या हो रहा है, इस पर सहमति दें - सामान्यता का एक नमूना।