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इसी तरह बारी-बारी से सात गठरियाँ नीचे उतारी गई इसके बाद वह नकाबपोश जो सबसे पहिले नीचे उतरा था उसी कमन्द के सहारे ऊपर चढ़ गया और खिडकी बन्द हो गई।
जिस समय राजा गोपालसिह खास बाग के दर्वाजे पर पहुचे उस समय उनके दीवान साहब भी वहाँ हाजिर थे। नकली रामदीन अर्थात लीला इनके हवाले कर दी गई। भेरासिह के सवाल करने पर उन्होंने कहा कि इस लीला ने चार आदमियों को खास बाग के अन्दर पहुचाया है मगर हम नहीं कह सकते कि वास्तव में वे कौन थे । अस्तु राजा साहब और भैरोसिह को यह तो मालूम हो गया कि चार आदमी भी इस बाग के अन्दर घुसे हैं जो हमार दुश्मन ही होंगे मगर उन्हें उन पॉच सौ फौजी सिपाहियों की शायद ही खबर हो जिन्हें मायारानी ने गुप्त रीति से बाग के अन्दर कर लिया था । पहिली दफे जब मायारानी को गापालसिह ने छकाया था तब खुले तौर पर बाग में रहती थी मगर अबकी दफ तो वह उस भूल भूलैया बाग में जाकर ऐसा गायब हुई है कि उसका पता लगाना भी कठिन होगा। दीवान साहब ने पूछा भी कि अगर हुक्म हो तो बाग में तलाशी ली जाय और उन आदमियों का पता लगाया जाय जिन्हें लीला ने इस बाग में पहुचाया है मगर राजा साहब ने इसके जवाब में सिर हिला कर जाहिर कर दिया कि यह बात उन्हें स्वीकार नहीं है।
कुछ दिन रहते ही राजा गोपालसिह बाग के दूसरे दर्जे में केवल भैरोसिह को साथ लेकर गये और बाग के अन्दर चारों तरफ सन्नाटा पाया। इस समय भैरोसिह और राजा गोपालसिह दोनों ही के साथ में तिलिस्मी खजर मौजूद थे। खास बाग के दूसर दर्जे में दा कुऍ थे जिनमें पानी बहुत ज्यादे रहता था यहाँ तक कि इस बाग के पेड पत्तों सींचने और छिडकाव का काम इन दोनों में से किसी एक कुएँ ही से चल सकता था मगर सींचने के समय दूर और नजदीक का ख्याल करके या शायद और किसी सबब से बनवाने वाले ने दो बड़े बड़े जगी कूए बनवाये थे, परन्तु ये दोनों कूऍ भी कारीगरी और ऐयारी से खाली न थे।
भैरोसिह और गोपालसिह छिपते और घूमते हुए पूरब तरफ वाले कूऍ पर पहुचे जिसका घेरा बहुत बड़ा था और नीचे उतरने तथा चढने के लिए कूऍ की दीवार में लोहे की कड़ियाँ लगी हुई थीं। भैरोसिह और गोपालसिह दोनों आदमी कड़ियों के सहारे इस कूऍ में उतर गये ।
किसी ठिकाने छिपी हुए मायारानी इस तमाशे को देख रही थी। गोपालसिह और भैरोसिह को आते देख वह बहुत खुश हुई और उसे निश्चय हो गया कि अब हम लाग गोपालसिह को मार लेगे। जिस जगह वह बैठी हुई थी वहाँ पर माधवी कुबेरसिह भीमसेन और ऐयारों के अतिरिक्त बोस आदमी फौजी सिपाहियों में से भी मौजूद थे और बाकी फौजी सिपाही तहखानों में छिपाये हुए थे। पहिले तो मायारानी ने चाहा कि केवल हम हो लाग बीस सिपाहियों के साथ जाकर गोपालसिह को गिरफ्तार कर लें मगर जब उसे कृष्णाजिन्न वाली बात याद आई और यह ख्याल हुआ कि गोपालसिह के पास वह तिलिस्मी खजर और कवच जरुर होगा जो कि रोहतासगढ में उनके पास उस समय मौजूद था जब शेरअली और दारोगा के साथ हम लोग वहाँ गये थे तब उसकी हिम्मत टूट गई और बिना कुल फौजी सिपाहियों को साथ लिए गोपालसिह के पास जाना उचित न जाना। इसी बीच में उसके देखते-देखते गोपालसिह कूऍ के अन्दर चले गये।
इस तिलिस्मी बाग के अन्दर आने तथा यहाॅ से बाहर जाने वाला दवांजा जिस तरह बन्द होता है इसका हाल उस समय लिखा जा चुका है जब पहिले दफा इस बाग में मायारानी के ऊपर आफत आई थी और मायारानी ने सिपाहियों के बागी हो जाने पर बाहर जाने का रास्ता बन्द कर दिया था अस्तु इस समय भी उसी ढंग से मायारानी ने बाग का दरवाजा बन्द कर दिया और इसके बाद कुल सिपाहियों को तहखान में से निकाल कर माधवी भीमसेन और कुबेरसिह तथा ऐयारों को साथ लिए उस कुऍ पर पहुची, जिसके अन्दर भैरोसिह को साथ लिए हुए राजा गोपालसिह उतर गए ચે 1
मायारानी ने सोचा था कि आखिर गोपालसिह उस कुएँ से बाहर निकलेंगे ही, उस समय हम लोग उन्हें सहज ही में मार लेंगे बल्कि कूऍ से बाहर निकलने की मोहलत ही न देंगेइत्यादि मगर जब बहुत देर हो गई और रात हो जाने पर भी गोपालसिह कुऍ के बाहर न निकले तो उसे बड़ा ही ताज्जुब हुआ। यह खुद कूऍ के अन्दर झॉक कर देखने लगी और उसी समय चौक करमाधवी से बोलीमाया- क्यों बहिन आज ही तुमने भी देखा था कि इस कूऍ में पानी कितना ज्यादा था । माधवी-बशक मैने देखा था कि बीस हाथ से ज्यादे दूरी पर पानी नहीं है तो क्या इस समय पानी कम जान
पडता है ? | इसी तरह बारी-बारी से सात गठरियाँ नीचे उतारी गई इसके बाद वह नकाबपोश जो सबसे पहिले नीचे उतरा था उसी कमन्द के सहारे ऊपर चढ़ गया और खिडकी बन्द हो गई। जिस समय राजा गोपालसिह खास बाग के दर्वाजे पर पहुचे उस समय उनके दीवान साहब भी वहाँ हाजिर थे। नकली रामदीन अर्थात लीला इनके हवाले कर दी गई। भेरासिह के सवाल करने पर उन्होंने कहा कि इस लीला ने चार आदमियों को खास बाग के अन्दर पहुचाया है मगर हम नहीं कह सकते कि वास्तव में वे कौन थे । अस्तु राजा साहब और भैरोसिह को यह तो मालूम हो गया कि चार आदमी भी इस बाग के अन्दर घुसे हैं जो हमार दुश्मन ही होंगे मगर उन्हें उन पॉच सौ फौजी सिपाहियों की शायद ही खबर हो जिन्हें मायारानी ने गुप्त रीति से बाग के अन्दर कर लिया था । पहिली दफे जब मायारानी को गापालसिह ने छकाया था तब खुले तौर पर बाग में रहती थी मगर अबकी दफ तो वह उस भूल भूलैया बाग में जाकर ऐसा गायब हुई है कि उसका पता लगाना भी कठिन होगा। दीवान साहब ने पूछा भी कि अगर हुक्म हो तो बाग में तलाशी ली जाय और उन आदमियों का पता लगाया जाय जिन्हें लीला ने इस बाग में पहुचाया है मगर राजा साहब ने इसके जवाब में सिर हिला कर जाहिर कर दिया कि यह बात उन्हें स्वीकार नहीं है। कुछ दिन रहते ही राजा गोपालसिह बाग के दूसरे दर्जे में केवल भैरोसिह को साथ लेकर गये और बाग के अन्दर चारों तरफ सन्नाटा पाया। इस समय भैरोसिह और राजा गोपालसिह दोनों ही के साथ में तिलिस्मी खजर मौजूद थे। खास बाग के दूसर दर्जे में दा कुऍ थे जिनमें पानी बहुत ज्यादे रहता था यहाँ तक कि इस बाग के पेड पत्तों सींचने और छिडकाव का काम इन दोनों में से किसी एक कुएँ ही से चल सकता था मगर सींचने के समय दूर और नजदीक का ख्याल करके या शायद और किसी सबब से बनवाने वाले ने दो बड़े बड़े जगी कूए बनवाये थे, परन्तु ये दोनों कूऍ भी कारीगरी और ऐयारी से खाली न थे। भैरोसिह और गोपालसिह छिपते और घूमते हुए पूरब तरफ वाले कूऍ पर पहुचे जिसका घेरा बहुत बड़ा था और नीचे उतरने तथा चढने के लिए कूऍ की दीवार में लोहे की कड़ियाँ लगी हुई थीं। भैरोसिह और गोपालसिह दोनों आदमी कड़ियों के सहारे इस कूऍ में उतर गये । किसी ठिकाने छिपी हुए मायारानी इस तमाशे को देख रही थी। गोपालसिह और भैरोसिह को आते देख वह बहुत खुश हुई और उसे निश्चय हो गया कि अब हम लाग गोपालसिह को मार लेगे। जिस जगह वह बैठी हुई थी वहाँ पर माधवी कुबेरसिह भीमसेन और ऐयारों के अतिरिक्त बोस आदमी फौजी सिपाहियों में से भी मौजूद थे और बाकी फौजी सिपाही तहखानों में छिपाये हुए थे। पहिले तो मायारानी ने चाहा कि केवल हम हो लाग बीस सिपाहियों के साथ जाकर गोपालसिह को गिरफ्तार कर लें मगर जब उसे कृष्णाजिन्न वाली बात याद आई और यह ख्याल हुआ कि गोपालसिह के पास वह तिलिस्मी खजर और कवच जरुर होगा जो कि रोहतासगढ में उनके पास उस समय मौजूद था जब शेरअली और दारोगा के साथ हम लोग वहाँ गये थे तब उसकी हिम्मत टूट गई और बिना कुल फौजी सिपाहियों को साथ लिए गोपालसिह के पास जाना उचित न जाना। इसी बीच में उसके देखते-देखते गोपालसिह कूऍ के अन्दर चले गये। इस तिलिस्मी बाग के अन्दर आने तथा यहाॅ से बाहर जाने वाला दवांजा जिस तरह बन्द होता है इसका हाल उस समय लिखा जा चुका है जब पहिले दफा इस बाग में मायारानी के ऊपर आफत आई थी और मायारानी ने सिपाहियों के बागी हो जाने पर बाहर जाने का रास्ता बन्द कर दिया था अस्तु इस समय भी उसी ढंग से मायारानी ने बाग का दरवाजा बन्द कर दिया और इसके बाद कुल सिपाहियों को तहखान में से निकाल कर माधवी भीमसेन और कुबेरसिह तथा ऐयारों को साथ लिए उस कुऍ पर पहुची, जिसके अन्दर भैरोसिह को साथ लिए हुए राजा गोपालसिह उतर गए ચે एक मायारानी ने सोचा था कि आखिर गोपालसिह उस कुएँ से बाहर निकलेंगे ही, उस समय हम लोग उन्हें सहज ही में मार लेंगे बल्कि कूऍ से बाहर निकलने की मोहलत ही न देंगेइत्यादि मगर जब बहुत देर हो गई और रात हो जाने पर भी गोपालसिह कुऍ के बाहर न निकले तो उसे बड़ा ही ताज्जुब हुआ। यह खुद कूऍ के अन्दर झॉक कर देखने लगी और उसी समय चौक करमाधवी से बोलीमाया- क्यों बहिन आज ही तुमने भी देखा था कि इस कूऍ में पानी कितना ज्यादा था । माधवी-बशक मैने देखा था कि बीस हाथ से ज्यादे दूरी पर पानी नहीं है तो क्या इस समय पानी कम जान पडता है ? |
उतने महत्वपूर्ण आयाम नही हैं जितने कि अन्तरापारिवारिक सम्बन्ध हैं। वह मानता है कि जब नातेदारी (kunship) सम्बन्धी दो परिवार अलग-अलग रहते हों लेकिन एक ही व्यक्ति के आधीन कार्य करते हों, तब इसे सयुक्त परिवार कहा जायेगा । इसे वह 'प्रकार्यात्मक सयुक्त परिवार कहता है। पारम्परिक संयुक्त परिवार वह उसे कहता है जिसमें तीन या अधिक पीढियाँ निहित हों। दो पीढी परिवार को वह 'सीमान्त (marginal) संयुक्त परिवार' कहता है। रामकृष्ण मुखर्जी (1962 352-98) पाँच प्रकार के सम्बन्ध बताते हुए सयुक्त परिवार को परिभाषित करता है। ये सबध है दाम्पत्य मूलक (conjugal) सबध, माता-पिता व सन्तान के सम्बन्ध, अन्तर सहोदर सबध, समरेखीय (lineal) सबंध और विवाह सबधी (affinal) सबध । उनके अनुसार "संयुक्त परिवार समान निवास (co-resident) और सह-भोजी (commensal) नातेदारी समूह है जिसमें प्रथम तीन प्रकार के सम्बन्धों में से एक या एक से अधिक सम्बन्ध तथा इसके अलावा समरेखीय या वैवाहिक सम्बन्ध भी होते हैं ।
आई पो देसाई ने पाच प्रकार के परिवार बताए हैं एकल, प्रकार्यात्मक रूप से सयुक्त, प्रकार्यात्मक तथा धन के आधार पर सयुक्त (सम्पत्ति के अर्थ में), सीमान्त सयुक्त, और पारम्परिक संयुक्त । के एम कापडिया (1959 74) ने भी पाँच प्रकार के परिवार बताए है एकल परिवार (पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे), एकल परिवार विवाहित पुत्रों के साथ (जिसे आईपी देसाई सीमान्त सयुक्त और एलीन रॉस लघु सयुक्त परिवार कहते हैं) एकरेखीय (lineal) वशज सयुक्त, भिन्नशाखीय संयुक्त और आश्रित व्यक्ति के साथ वाला एकल परिवार (विधवा बहिन, आदि) । एलीन रॉस (1966 34) ने चार प्रकार के परिवार बताए है वृहत् सयुक्त, लघु सयुक्त, एकल, और आश्रितों सहित सयुक्त ।
इन सभी प्रकार के परिवारों को एक साथ देखने पर सयुक्त परिवार की परिभाषा इस प्रकार से दी जा सकती है "वशावलि की विविधता से सम्बन्धित ( multiplicaty of geneologically related) एकल परिवार जो निवास और सह भोजी सबधों में सयुक्त हो और जो एक ही व्यक्ति के आधीन कार्य करते हों" । एम एस गोरे (1968 : 6-7) ने कहा है कि संयुक्त परिवार को "समानाशी ( co-parceners) तथा उनके आश्रितों के परिवार के रूप में देखना चाहिए, न कि एकल परिवारों के बहुत्व (multiplicity) के रूप में। वह मानता है कि एक एकल परिवार में दाम्पत्य मूलक (conjugal) सम्बन्धों पर बल दिया जाता है जबकि संयुक्त परिवार में सतानीय (filial) और भ्रातृक (fraternal) सम्बन्धों पर बल दिया जाता है। गोरे के अनुसार संयुक्त परिवार तीन प्रकार के होते हैं सतानीय (filial) सयुक्त परिवार, (माता पिता व उनके विवाहित बेटे अपनी सतति के साथ), भ्रातृक संयुक्त परिवार (दो विवाहित भाई और उनके बच्चे), और सतानीय तथा भ्रातृक (मिश्रित) संयुक्त परिवार ।
मैं उस एकल परिवार को 'विखण्डित' (fisstoned) परिवार मानता हूँ जो अपने पिता के या विवाहित भाइयों के परिवार से अलग हो गया हो। यह चिखण्डित परिवार किसी प्रकार की नातेदारी से सम्बन्धित अन्य एकल परिवार पर निर्भर भी हो सकता है तो स्वतंत्र भी। दूसरी ओर मैंने नातेदारों (kin) के प्रकार के सदर्भ में (प्राथमिक, द्वैतियक, तृतीयक, और टूर का) सयुक्त परिवार का वर्गीकरण किया है। इस प्रकार, मैं निम्निलिखित पाँच प्रकार के परिवार मानता हूँ : | उतने महत्वपूर्ण आयाम नही हैं जितने कि अन्तरापारिवारिक सम्बन्ध हैं। वह मानता है कि जब नातेदारी सम्बन्धी दो परिवार अलग-अलग रहते हों लेकिन एक ही व्यक्ति के आधीन कार्य करते हों, तब इसे सयुक्त परिवार कहा जायेगा । इसे वह 'प्रकार्यात्मक सयुक्त परिवार कहता है। पारम्परिक संयुक्त परिवार वह उसे कहता है जिसमें तीन या अधिक पीढियाँ निहित हों। दो पीढी परिवार को वह 'सीमान्त संयुक्त परिवार' कहता है। रामकृष्ण मुखर्जी पाँच प्रकार के सम्बन्ध बताते हुए सयुक्त परिवार को परिभाषित करता है। ये सबध है दाम्पत्य मूलक सबध, माता-पिता व सन्तान के सम्बन्ध, अन्तर सहोदर सबध, समरेखीय सबंध और विवाह सबधी सबध । उनके अनुसार "संयुक्त परिवार समान निवास और सह-भोजी नातेदारी समूह है जिसमें प्रथम तीन प्रकार के सम्बन्धों में से एक या एक से अधिक सम्बन्ध तथा इसके अलावा समरेखीय या वैवाहिक सम्बन्ध भी होते हैं । आई पो देसाई ने पाच प्रकार के परिवार बताए हैं एकल, प्रकार्यात्मक रूप से सयुक्त, प्रकार्यात्मक तथा धन के आधार पर सयुक्त , सीमान्त सयुक्त, और पारम्परिक संयुक्त । के एम कापडिया ने भी पाँच प्रकार के परिवार बताए है एकल परिवार , एकल परिवार विवाहित पुत्रों के साथ एकरेखीय वशज सयुक्त, भिन्नशाखीय संयुक्त और आश्रित व्यक्ति के साथ वाला एकल परिवार । एलीन रॉस ने चार प्रकार के परिवार बताए है वृहत् सयुक्त, लघु सयुक्त, एकल, और आश्रितों सहित सयुक्त । इन सभी प्रकार के परिवारों को एक साथ देखने पर सयुक्त परिवार की परिभाषा इस प्रकार से दी जा सकती है "वशावलि की विविधता से सम्बन्धित एकल परिवार जो निवास और सह भोजी सबधों में सयुक्त हो और जो एक ही व्यक्ति के आधीन कार्य करते हों" । एम एस गोरे ने कहा है कि संयुक्त परिवार को "समानाशी तथा उनके आश्रितों के परिवार के रूप में देखना चाहिए, न कि एकल परिवारों के बहुत्व के रूप में। वह मानता है कि एक एकल परिवार में दाम्पत्य मूलक सम्बन्धों पर बल दिया जाता है जबकि संयुक्त परिवार में सतानीय और भ्रातृक सम्बन्धों पर बल दिया जाता है। गोरे के अनुसार संयुक्त परिवार तीन प्रकार के होते हैं सतानीय सयुक्त परिवार, , भ्रातृक संयुक्त परिवार , और सतानीय तथा भ्रातृक संयुक्त परिवार । मैं उस एकल परिवार को 'विखण्डित' परिवार मानता हूँ जो अपने पिता के या विवाहित भाइयों के परिवार से अलग हो गया हो। यह चिखण्डित परिवार किसी प्रकार की नातेदारी से सम्बन्धित अन्य एकल परिवार पर निर्भर भी हो सकता है तो स्वतंत्र भी। दूसरी ओर मैंने नातेदारों के प्रकार के सदर्भ में सयुक्त परिवार का वर्गीकरण किया है। इस प्रकार, मैं निम्निलिखित पाँच प्रकार के परिवार मानता हूँ : |
ओदइया बंधयरा उवसम-खय-मिस्सया य मोक्खयरा। भावो दु पारिणमिओ करणोभयवज्जिओ होइ ।।८।। (कसायपाहुड, भा० १, पृ० ५४ ) अर्थात्- अध्यात्म में या आत्मगत जो भाव बन्ध के कारण हैं और जो मोक्ष के कारण हैं, उन को जान लेना चाहिए। इसी प्रकार जो भाव, बन्ध और मोक्ष दोनो के कारण नहीं हैं, उनको भी जान लेना चाहिए। विशेष यह है कि गति, जाति आदि सभी औदयिक भाव बन्ध के कारण नहीं हैं, किन्तु जिन मिथ्यात्व आदि औदयिक भावो के साथ बन्ध का अन्वय-व्यतिरेक देखा जाता है, वे ही बन्ध के कारण समेझना चाहिए। मिथ्यात्वकर्म का बन्धकारक मिथ्यात्वभावयह पहले ही कहा जा चुका है कि सभी औदयिक भावो से बन्ध नहीं होता। यथार्थ मे कर्मबन्ध की प्रक्रिया मे मिथ्यात्व गुणस्थान मे मिथ्यात्व ही बन्धकारक है। आचार्य वीरसेन स्वामी का कथन है कि मिथ्यात्वकर्म के उदय से उत्पन्न होने वाला मिथ्यात्व परिणाम कर्मोदयजनित है, इसलिये औदयिक है। यद्यपि मिथ्यादृष्टि के गति, लिग, आदिक साधारण भाव भी पाए जाते हैं, किन्तु वे मिथ्यादृष्टित्व के कारण नहीं होते हैं। एक मिथ्यात्व का उदय ही मिथ्यादृष्टित्व का कारण है, इसलिए 'मिथ्यादृष्टि' यह भाव औदयिक कहा गया है। (धवला, पु० ५, पृ० १६६) इसी अभिप्राय को स्पष्ट करते हुए आचार्य आगे के पृष्ठो मे कहते हैं कि जो जिससे नियमत उत्पन्न होता है, वह उसका कारण होता है। यदि ऐसा न माना जाए तो अनवस्था दोष का प्रसग आता है। प. राजमलजी तो "पचाध्यायी" में यहाँ तक कहते हैं कि यह बात आगम मे प्रसिद्ध है कि दर्शनमोहनीय कर्म का बन्ध, उत्कर्ष, आदि दर्शनमोहनीय कर्म के उदय से ही नियम से होता है। किसी अन्य (चारित्रमोह) के उदय से दर्शनमोहनीय का बन्ध, उत्कर्ष, उदय कुछ नहीं होता। जिस कार्य का जो कारण नियत है, उसी कारण से वह कार्य सिद्ध होता है। यदि कार्य-कारण पद्धति को उड़ा दिया जाए, तो किसी भी कार्य की सिद्धि नहीं हो सकती है। इसके सिवाय संकर, अनवस्था दोष भी आ जाते हैं। (पचाध्यायी, भा. २. श्लोक ६२१-६२३) आचार्य वीरसेन के शब्दों मे "जदि मिच्छत्तुप्पज्जणकाले विज्जमाणा तक्कारणत्तं पडिवज्जति तो
णाण-दसण असंजमादओ वि तक्कारणं होति । ण चेवं, तहाविहववहाराभावा। मिच्छादिडीए पुण मिच्छत्तुदओ कारण, तेण विणा तदणुप्पत्तीए । अर्थात् यदि यह कहा जाए कि मिथ्यात्व के उत्पन्न होने के काल मे जो भाव विद्यमान हैं, वे उसके कारणपने को प्राप्त होते हैं, तो फिर ज्ञान, दर्शन, असयम आदि भी मिथ्यात्व के कारण हो जायेंगे। किन्तु ऐसा नहीं है, क्योंकि उस प्रकार का व्यवहार नहीं पाया जाता है। इसलिए यही सिद्ध होता है कि मिथ्यादृष्टि के बन्ध का कारण मिथ्यात्व का उदय ही है, क्योंकि उसके बिना मिथ्यात्व भाव की उत्पत्ति नहीं होती है। (धवला, पु० ५ पृ० २०७)
आगम से यह सिद्ध ही है कि जीव के मिथ्यात्व रागादि परिणाम का निमित्त पा कर पुराने कर्मों के साथ नए कर्म बॅध जाते हैं। (पचास्ति० गा० १३४) सिद्धान्तकारो ने प्रथम गुणस्थान में दर्शनमोहनीय का उदय कहा है। मिथ्यात्व का स्वोदय मे बन्ध होता है। यदि किसी दूसरे कर्म के उदय से दर्शनमोह का बन्ध होने लगे, तब तो सदा प्रथम गुणस्थान रहेगा या गुणस्थानों की श्रृंखला विच्छिन्न हो जाएगी। (पचाध्यायी, २,६२३) जो मिथ्यात्व को अधिकरण मान कर 'कषाय' को मिथ्यात्व प्रकृति का बन्धक कहते हैं, वे यह भूल जाते हैं कि मिथ्यात्व के उदय के बिना मिथ्यात्व का बन्ध नहीं होता, भले ही कषाय का कैसा भी उदय होनियम तो यही है । (धवला, पु० ६, शास्त्राकार, पृ० ४५) प जवाहरलाल जैन, भीण्डर के शब्दों मे "यदि अप्रत्याख्यानावरणादि कषाय को मिथ्यात्व प्रकृति का बन्धक कहा जाता है, तो हम कहते हैं कि तब ये ही अप्रत्याख्यानावरणादि कषाये सासादनादि जीवो के भी मिथ्यात्व की बन्धक माननी पड़ेगी जो कि आगमविरुद्ध है। अतः जो मिथ्यात्व को मिथ्यात्व आदि के बन्ध का कारण नहीं मानते, वे बन्धतत्त्व विषयक भूल करते हैं।" (करणदशक, पृ० २४) फिर, मिथ्यादृष्टि होने का कारण कषाय नहीं है, मिथ्यात्व ही है। आचार्य यतिवृषभ का कथन है- "मिच्छाइट्ठी चेव दसणमोहणीयस्स मिच्छत्तस्सेव बधगो होदि त्ति भणिदो।' (जयधवला. भाग १२, पृ० ३१३) अर्थात् मिथ्यादृष्टि जीव ही दर्शनमोहनीय का - मिथ्यात्व के निमित्त से बन्धक होता है, अन्य नहीं। जिस प्रकार मिथ्यादृष्टि जीव मिथ्यात्व के उदय से मिथ्यात्व का ही बन्धक होता है। | ओदइया बंधयरा उवसम-खय-मिस्सया य मोक्खयरा। भावो दु पारिणमिओ करणोभयवज्जिओ होइ ।।आठ।। अर्थात्- अध्यात्म में या आत्मगत जो भाव बन्ध के कारण हैं और जो मोक्ष के कारण हैं, उन को जान लेना चाहिए। इसी प्रकार जो भाव, बन्ध और मोक्ष दोनो के कारण नहीं हैं, उनको भी जान लेना चाहिए। विशेष यह है कि गति, जाति आदि सभी औदयिक भाव बन्ध के कारण नहीं हैं, किन्तु जिन मिथ्यात्व आदि औदयिक भावो के साथ बन्ध का अन्वय-व्यतिरेक देखा जाता है, वे ही बन्ध के कारण समेझना चाहिए। मिथ्यात्वकर्म का बन्धकारक मिथ्यात्वभावयह पहले ही कहा जा चुका है कि सभी औदयिक भावो से बन्ध नहीं होता। यथार्थ मे कर्मबन्ध की प्रक्रिया मे मिथ्यात्व गुणस्थान मे मिथ्यात्व ही बन्धकारक है। आचार्य वीरसेन स्वामी का कथन है कि मिथ्यात्वकर्म के उदय से उत्पन्न होने वाला मिथ्यात्व परिणाम कर्मोदयजनित है, इसलिये औदयिक है। यद्यपि मिथ्यादृष्टि के गति, लिग, आदिक साधारण भाव भी पाए जाते हैं, किन्तु वे मिथ्यादृष्टित्व के कारण नहीं होते हैं। एक मिथ्यात्व का उदय ही मिथ्यादृष्टित्व का कारण है, इसलिए 'मिथ्यादृष्टि' यह भाव औदयिक कहा गया है। इसी अभिप्राय को स्पष्ट करते हुए आचार्य आगे के पृष्ठो मे कहते हैं कि जो जिससे नियमत उत्पन्न होता है, वह उसका कारण होता है। यदि ऐसा न माना जाए तो अनवस्था दोष का प्रसग आता है। प. राजमलजी तो "पचाध्यायी" में यहाँ तक कहते हैं कि यह बात आगम मे प्रसिद्ध है कि दर्शनमोहनीय कर्म का बन्ध, उत्कर्ष, आदि दर्शनमोहनीय कर्म के उदय से ही नियम से होता है। किसी अन्य के उदय से दर्शनमोहनीय का बन्ध, उत्कर्ष, उदय कुछ नहीं होता। जिस कार्य का जो कारण नियत है, उसी कारण से वह कार्य सिद्ध होता है। यदि कार्य-कारण पद्धति को उड़ा दिया जाए, तो किसी भी कार्य की सिद्धि नहीं हो सकती है। इसके सिवाय संकर, अनवस्था दोष भी आ जाते हैं। आचार्य वीरसेन के शब्दों मे "जदि मिच्छत्तुप्पज्जणकाले विज्जमाणा तक्कारणत्तं पडिवज्जति तो णाण-दसण असंजमादओ वि तक्कारणं होति । ण चेवं, तहाविहववहाराभावा। मिच्छादिडीए पुण मिच्छत्तुदओ कारण, तेण विणा तदणुप्पत्तीए । अर्थात् यदि यह कहा जाए कि मिथ्यात्व के उत्पन्न होने के काल मे जो भाव विद्यमान हैं, वे उसके कारणपने को प्राप्त होते हैं, तो फिर ज्ञान, दर्शन, असयम आदि भी मिथ्यात्व के कारण हो जायेंगे। किन्तु ऐसा नहीं है, क्योंकि उस प्रकार का व्यवहार नहीं पाया जाता है। इसलिए यही सिद्ध होता है कि मिथ्यादृष्टि के बन्ध का कारण मिथ्यात्व का उदय ही है, क्योंकि उसके बिना मिथ्यात्व भाव की उत्पत्ति नहीं होती है। आगम से यह सिद्ध ही है कि जीव के मिथ्यात्व रागादि परिणाम का निमित्त पा कर पुराने कर्मों के साथ नए कर्म बॅध जाते हैं। सिद्धान्तकारो ने प्रथम गुणस्थान में दर्शनमोहनीय का उदय कहा है। मिथ्यात्व का स्वोदय मे बन्ध होता है। यदि किसी दूसरे कर्म के उदय से दर्शनमोह का बन्ध होने लगे, तब तो सदा प्रथम गुणस्थान रहेगा या गुणस्थानों की श्रृंखला विच्छिन्न हो जाएगी। जो मिथ्यात्व को अधिकरण मान कर 'कषाय' को मिथ्यात्व प्रकृति का बन्धक कहते हैं, वे यह भूल जाते हैं कि मिथ्यात्व के उदय के बिना मिथ्यात्व का बन्ध नहीं होता, भले ही कषाय का कैसा भी उदय होनियम तो यही है । प जवाहरलाल जैन, भीण्डर के शब्दों मे "यदि अप्रत्याख्यानावरणादि कषाय को मिथ्यात्व प्रकृति का बन्धक कहा जाता है, तो हम कहते हैं कि तब ये ही अप्रत्याख्यानावरणादि कषाये सासादनादि जीवो के भी मिथ्यात्व की बन्धक माननी पड़ेगी जो कि आगमविरुद्ध है। अतः जो मिथ्यात्व को मिथ्यात्व आदि के बन्ध का कारण नहीं मानते, वे बन्धतत्त्व विषयक भूल करते हैं।" फिर, मिथ्यादृष्टि होने का कारण कषाय नहीं है, मिथ्यात्व ही है। आचार्य यतिवृषभ का कथन है- "मिच्छाइट्ठी चेव दसणमोहणीयस्स मिच्छत्तस्सेव बधगो होदि त्ति भणिदो।' अर्थात् मिथ्यादृष्टि जीव ही दर्शनमोहनीय का - मिथ्यात्व के निमित्त से बन्धक होता है, अन्य नहीं। जिस प्रकार मिथ्यादृष्टि जीव मिथ्यात्व के उदय से मिथ्यात्व का ही बन्धक होता है। |
उसने इतना मारा था कि वह बेहोश हो गई थी । वह तब कुछ सोच समझकर उसे हास्पिटल ले गया । एक सप्ताह भर वहाँ रही, तब कहीं स्वस्थ हुई । सुरेश ने उससे क्षमा माँगी। क्योंकि वह मानता है कि स्त्री को मारना एक तरह की पशुता है। और आदमी होकर जो व्यक्ति पशु हो जाता है, वह तब आदमी कहाँ रह पाता
। उसे तो फिर पशु ही बना देना चाहिए। वह भी उस योनि में जाकर अपने जो की मुराद पूरी करले।
उस घटना के पश्चात् रागिनी अनेक वर्षों तक जीवित रही । सुरेश को अपनी उस दिन की बात कभी नहीं भूली । वह उस दिन का बराबर स्मरण कर लेता, और फिर, बार-बार, उससे क्षमा माँगता । रागिनी के दाड़िम-दशन झलकने लगते । वह हँस देती ।' कहती - अजीब क़िस्म के आदमी हो ! बार-बार वही बात । मुझे और उलटे शर्मिंदा करते हो ! कितनी बार कहूँ कि मैं उस दिन को भूल गई, भूल गई, सर्वथा भूल गई, सदा के लिये भूल गई । कोई बात ही न हुई थी। तुम्हीं भूल रहे हो, जो सोचते हो कि हुई थी ।
सुरेश रागिनी के पास आकर उसे छूता हुआ पास, बिलकुल पास, बैठ जाता। उसकी आँखों में अपनी आँखें भर देता । उसके एक हाथ को अपने दोनों हाथों मे दबा लेता, और कहता - "तुम कितनी मधुर हो रागिनी ! कितनी प्राणमयी !! तुम मुझे कभी धोखा तो न दोगी ? जीवनांत तक मेरे उर के तार-तार में भंकृत रहोगी न ? तुम्हें
कष्ट तो नहीं है तुम्हें ? तुमने बहुत दिनों से मुझसे कोई फ़रमाइश नहीं की। तुम मुझसे नाराज़ तो नहीं हो ? तुमने मुझे माफ़ कर दिया न ? बताओ, बोलो बोलो !"
कहते-कहते उसकी आँखें भर आतीं। उसका कंठ-स्वर तक
भौग उठता ।
रागिनी उसकी इस अत्यधिक भावुकता से तंग आ गई थी । तब वह अनिच्छा पूर्वक अनावश्यक वस्तुओं की माँग पेश कर देती, और किसी तरह उससे अपना पीछा छुड़ाती, क्योंकि वह जानती थो कि उनका भ्रम इस तरह दूर न होगा ।
कभी वह कहती-"तो फिर मेरे लिये तीन दर्जन साड़ियाँ ला दो। मैं रोजाना साड़ी बदलूँगी ।"
सुरेश का मुख प्रसन्नता के आलोक से चमक उठता । कहता - "वाह ! कितनी अच्छी माँग तुमने की है ? वह-वा-वा ! क्योंकि मैं सुरेश हूँ, सुरेश ! रोज़ाना साड़ी नहीं बदलोगी; तो मैं यह कैसे समझँगा कि मैं सुरेश हूँ।"
वह तब अपने को सँभाल न सकता । उसे अपनी भुजाओं में भर लेता, और तब रागिनी मुँह बिचकाकर अपने को छुड़ाती हुईसी कह देती - "बड़े चालाक हो ! इसीलिये यह सब तमाशा किया था ? "
सुरेश रो रहा है । उसका तकिया भीग गया है।
झरना है कि पावस का नर्तन ! और फिर वह छिपा कहाँ रहा
अब तक, जो इसी समय ऐसा उद्वेलित हो उठा है ?
बात यह है कि ग़लती रागिनी की नहीं थी। उसे उसने व्यर्थ ही में मारा था । उसने अनेक बार सोवा था कि वह उस दिन के भेद को खोल दे, वास्तविक बात प्रकट ही कर दे, लेकिन कुछ सोच-सोचकर वह उसे टालता हो रहा । क्योंकि अभी तक तो वह यही समझती है कि नोट खो ही गया था। पीछे से कुछ और समझेगी, तो उसके हृदय को कैसी पीड़ा पहुँचेगी ! तब वह उससे उस बात को कैसे प्रकट करे ! न, वह उससे इस विषय में कुछ भी कह न सकेगा । यही एक बात ऐसी है, जिसे वह उससे छिपाएगा, जिसे उससे छिपाना ही श्रेयस्कर है।
तो फिर उस नोट के चुराए जाने का संदेह ही उसने रागिनी पर क्यों किया था ? क्योंकि वह जानता था कि वह जब कभी कहीं कोई नोट भूल से छोड़ गया है, नौकरों द्वारा चोरी हो जाने के भय से उसे रागिनी ने ही उठाकर रख लिया है । तब उस दिन भी उसी ने रख छोड़ा है, और वह उसे स्वीकार क्यों नहीं कर रही है ? क्यों वह उससे झूठ बोल रही है, जो उसका स्वामी है, स्वामी !
लेकिन मान लो, उसने उसे उठाकर रख ही लिया है, और उसे वह बात छिपाना ही भीष्ट है। माना कि वह नहीं स्वीकार करना चाहती इस बार इस नोट को । तो क्या इसी एक क्षुद्र बात के लिये उसे उस नारी - उस के व्यक्तित्व - के प्रति हिंसक बनने की आवश्यकता है ? कैसा पिशाच हो गया था वह उस समय ! उसने अपना सारा विवेक ही खो दिया था ।
एक दिन जब सुरेश ने फिर आंदोलित पश्चात्ताप में डूबकर रागिनी को तंग कर डाला, तो उसने भी ऐसी बात कह दी, जिसे सुरेश पूर्ण न कर सका । उसने कह दिया - ' बहुत मुझे तंग करते हो। अगर मैं ऐसी वस्तु माँग बैठूं, जिसे तुम न दे सको, तो ?"
सुरेश उत्साहित होकर बोला - "मेरी सामर्थ्य के भीतर माँगने की शर्त है । शक्ति के परे कैसे दे सकूँगा ?
वह बोली - "पर इसका निर्णय कौन करेगा कि तुममें उसे देने की शक्ति है या नहीं ?
सुरेश ने कहाँ - "इस विषय में मैं तुम्हारे साथ झगड़ा न करूँगा हम दोनों मिलकर उसे तय कर लेंगे ।"
गिना न ताव, कह दिया - "तो मुझे एक खिलौना चाहिए - ऐसा, जिससे हम लोगों की आत्मा का संबंध हो । " वह बोला - "यह ईश्वरीय विधान है। इसमें मेरा वश काम न देगा।"
"लेकिन पश्चिमीय विद्वान् तो इसे नहीं मानते । उनका तो कहना है कि हम अपने भविष्य के निर्माता हैं। और इस विषय में उन्होंने अपने आपको बहुत कुछ सफल भी सिद्ध कर दिया है । " " उनकी सफलता भी तक जीवन और जीवन - जन्म और मरण - के सम्बन्ध में पूर्ववत् सीमित है। ईश्वरीय विधान में वे भी दखल नहीं दे पाये ।"
रागिनी कुछ सोचकर चुप रह गई । इस बात को और आगे बढ़ाने के लिये इस समय वह तैयार न थी । और, उसका मौन ही
तब सुरेश के लिये एक उत्तर बन गया । वह खुद ही सोचने ला कि संतानोत्पत्ति के विषय में ईश्वरीय विधान को अटका देना भी कोई ध्रुव, निश्चित न्याय नहीं है ।
सुरेश के आँसू बंद नहीं हुए हैं, क्योंकि रागिनी की इसयाचना की भी एक अलग कहानी बन गई है। कालांतर में सुरेश रागिनी की इच्छा पूर्ण करने में सफल हुआ । किन्तु तब वह रागिनी ही प्रशांत हो गई । वही उसे ग्रहण न कर सकी । उस खिलौने को प्राप्त करते-करते वह स्वतः अंतर्धान हो गई ।
लो, रागिनी भी चली गई, और वह उससे उस बात को भी स्पष्ट रूप से न कह सका ।
सुरेश रो रहा था । इतने में आ गया जयंत, उसका एक मात्र पुत्र । देखते ही बोला - "अरे, तुम तो रो रहे हो ! यह तुम्हारी बहुत खराब आदत है। इस तरह कैसे निभेगा ? मुझे इस तरह चलना क़तई स्वीकार नहीं । यह तो एक तरह से मेरा बुरा चेतना है- मुझे असमय निराश्रित कर जाने के लिये तत्पर हो जाना । मैं अभी चार आदमियों को बुलाकर तुम्हें क्वायल करूँगा । जब देखो, तब सोचना सोचना, रोनी-सी चेष्टा बनाए रखना और मौक़े बेमौक़े जब देखो, तब चुपचाप रोते रहना। -- यह भी कोई मनुष्यता है ! यह तो कोई ऊँचा आदर्श नहीं है। चलो उठो, मुँह तो धो लो । अच्छा, यहीं धो लो । अरे मक्खन, पानी एक गिलास ले आना ।"
नौकर पानी ले आया ।
मुँह धोकर, आँखें पोछकर, कुछ शांत होकर सुरेश बोला"यह जागेश्वर साला बड़ा दुष्ट है, अपनी स्त्री को बहुत बेदर्दी से मारता है । इससे कह देना होगा कि अब मुझे तुम्हारे खिलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करनी पड़ेगी ! मुहल्ले-भर की शांति भंग करने का वह कारण बन जाता है । जव देखो तब उस बेचारी अस्थियों की माला बनी स्त्री को रुई की तरह धुनकने लगता है। बिल्कुल जंगली है वह, बे सींग पूँछ का जानवर; क़साई !
जयंत उसी समय जाने लगा । तब सुरेश ने फिर कहा - "और सुनो जयंत । तुम्हें मैंने कभी बतलाया नहीं। बतलाने का कोई वैसा प्रसंग भी नहीं आया । जानना चाहते हो, मुझे इस समय क्यों रोना पड़ा ?"
जयंत बोला - " बताओो ।"
बात यह है जयंत कि दुनिया की सारी घटनाएँ किसी-न-किसी भ्रम-वश होती है। और, भ्रम के लिये किसी को दोषी ठहराना
अन्याय है। क्योंकि भ्रम तो अज्ञानता का द्योतक
होता है न ?
मुझे भी एक दिन ऐसा ही भ्रम हो गया था। मैं भी तुम्हारी मा को मार बैठा था । उसी का पश्चात्ताप अभी तक चल रहा है । समझता था कि मेरा सौ रुपए का एक नोट लिया है, और वह उसे बतलाती नहीं है । गया । पर बात कुछ और थो । उसे मैंने एक लिफ़ाफ़े में रख छोड़ा था । वह लिफ़ाफ़ा रक्खा था एक पुस्तक में। और वह पुस्तक थी | उसने इतना मारा था कि वह बेहोश हो गई थी । वह तब कुछ सोच समझकर उसे हास्पिटल ले गया । एक सप्ताह भर वहाँ रही, तब कहीं स्वस्थ हुई । सुरेश ने उससे क्षमा माँगी। क्योंकि वह मानता है कि स्त्री को मारना एक तरह की पशुता है। और आदमी होकर जो व्यक्ति पशु हो जाता है, वह तब आदमी कहाँ रह पाता । उसे तो फिर पशु ही बना देना चाहिए। वह भी उस योनि में जाकर अपने जो की मुराद पूरी करले। उस घटना के पश्चात् रागिनी अनेक वर्षों तक जीवित रही । सुरेश को अपनी उस दिन की बात कभी नहीं भूली । वह उस दिन का बराबर स्मरण कर लेता, और फिर, बार-बार, उससे क्षमा माँगता । रागिनी के दाड़िम-दशन झलकने लगते । वह हँस देती ।' कहती - अजीब क़िस्म के आदमी हो ! बार-बार वही बात । मुझे और उलटे शर्मिंदा करते हो ! कितनी बार कहूँ कि मैं उस दिन को भूल गई, भूल गई, सर्वथा भूल गई, सदा के लिये भूल गई । कोई बात ही न हुई थी। तुम्हीं भूल रहे हो, जो सोचते हो कि हुई थी । सुरेश रागिनी के पास आकर उसे छूता हुआ पास, बिलकुल पास, बैठ जाता। उसकी आँखों में अपनी आँखें भर देता । उसके एक हाथ को अपने दोनों हाथों मे दबा लेता, और कहता - "तुम कितनी मधुर हो रागिनी ! कितनी प्राणमयी !! तुम मुझे कभी धोखा तो न दोगी ? जीवनांत तक मेरे उर के तार-तार में भंकृत रहोगी न ? तुम्हें कष्ट तो नहीं है तुम्हें ? तुमने बहुत दिनों से मुझसे कोई फ़रमाइश नहीं की। तुम मुझसे नाराज़ तो नहीं हो ? तुमने मुझे माफ़ कर दिया न ? बताओ, बोलो बोलो !" कहते-कहते उसकी आँखें भर आतीं। उसका कंठ-स्वर तक भौग उठता । रागिनी उसकी इस अत्यधिक भावुकता से तंग आ गई थी । तब वह अनिच्छा पूर्वक अनावश्यक वस्तुओं की माँग पेश कर देती, और किसी तरह उससे अपना पीछा छुड़ाती, क्योंकि वह जानती थो कि उनका भ्रम इस तरह दूर न होगा । कभी वह कहती-"तो फिर मेरे लिये तीन दर्जन साड़ियाँ ला दो। मैं रोजाना साड़ी बदलूँगी ।" सुरेश का मुख प्रसन्नता के आलोक से चमक उठता । कहता - "वाह ! कितनी अच्छी माँग तुमने की है ? वह-वा-वा ! क्योंकि मैं सुरेश हूँ, सुरेश ! रोज़ाना साड़ी नहीं बदलोगी; तो मैं यह कैसे समझँगा कि मैं सुरेश हूँ।" वह तब अपने को सँभाल न सकता । उसे अपनी भुजाओं में भर लेता, और तब रागिनी मुँह बिचकाकर अपने को छुड़ाती हुईसी कह देती - "बड़े चालाक हो ! इसीलिये यह सब तमाशा किया था ? " सुरेश रो रहा है । उसका तकिया भीग गया है। झरना है कि पावस का नर्तन ! और फिर वह छिपा कहाँ रहा अब तक, जो इसी समय ऐसा उद्वेलित हो उठा है ? बात यह है कि ग़लती रागिनी की नहीं थी। उसे उसने व्यर्थ ही में मारा था । उसने अनेक बार सोवा था कि वह उस दिन के भेद को खोल दे, वास्तविक बात प्रकट ही कर दे, लेकिन कुछ सोच-सोचकर वह उसे टालता हो रहा । क्योंकि अभी तक तो वह यही समझती है कि नोट खो ही गया था। पीछे से कुछ और समझेगी, तो उसके हृदय को कैसी पीड़ा पहुँचेगी ! तब वह उससे उस बात को कैसे प्रकट करे ! न, वह उससे इस विषय में कुछ भी कह न सकेगा । यही एक बात ऐसी है, जिसे वह उससे छिपाएगा, जिसे उससे छिपाना ही श्रेयस्कर है। तो फिर उस नोट के चुराए जाने का संदेह ही उसने रागिनी पर क्यों किया था ? क्योंकि वह जानता था कि वह जब कभी कहीं कोई नोट भूल से छोड़ गया है, नौकरों द्वारा चोरी हो जाने के भय से उसे रागिनी ने ही उठाकर रख लिया है । तब उस दिन भी उसी ने रख छोड़ा है, और वह उसे स्वीकार क्यों नहीं कर रही है ? क्यों वह उससे झूठ बोल रही है, जो उसका स्वामी है, स्वामी ! लेकिन मान लो, उसने उसे उठाकर रख ही लिया है, और उसे वह बात छिपाना ही भीष्ट है। माना कि वह नहीं स्वीकार करना चाहती इस बार इस नोट को । तो क्या इसी एक क्षुद्र बात के लिये उसे उस नारी - उस के व्यक्तित्व - के प्रति हिंसक बनने की आवश्यकता है ? कैसा पिशाच हो गया था वह उस समय ! उसने अपना सारा विवेक ही खो दिया था । एक दिन जब सुरेश ने फिर आंदोलित पश्चात्ताप में डूबकर रागिनी को तंग कर डाला, तो उसने भी ऐसी बात कह दी, जिसे सुरेश पूर्ण न कर सका । उसने कह दिया - ' बहुत मुझे तंग करते हो। अगर मैं ऐसी वस्तु माँग बैठूं, जिसे तुम न दे सको, तो ?" सुरेश उत्साहित होकर बोला - "मेरी सामर्थ्य के भीतर माँगने की शर्त है । शक्ति के परे कैसे दे सकूँगा ? वह बोली - "पर इसका निर्णय कौन करेगा कि तुममें उसे देने की शक्ति है या नहीं ? सुरेश ने कहाँ - "इस विषय में मैं तुम्हारे साथ झगड़ा न करूँगा हम दोनों मिलकर उसे तय कर लेंगे ।" गिना न ताव, कह दिया - "तो मुझे एक खिलौना चाहिए - ऐसा, जिससे हम लोगों की आत्मा का संबंध हो । " वह बोला - "यह ईश्वरीय विधान है। इसमें मेरा वश काम न देगा।" "लेकिन पश्चिमीय विद्वान् तो इसे नहीं मानते । उनका तो कहना है कि हम अपने भविष्य के निर्माता हैं। और इस विषय में उन्होंने अपने आपको बहुत कुछ सफल भी सिद्ध कर दिया है । " " उनकी सफलता भी तक जीवन और जीवन - जन्म और मरण - के सम्बन्ध में पूर्ववत् सीमित है। ईश्वरीय विधान में वे भी दखल नहीं दे पाये ।" रागिनी कुछ सोचकर चुप रह गई । इस बात को और आगे बढ़ाने के लिये इस समय वह तैयार न थी । और, उसका मौन ही तब सुरेश के लिये एक उत्तर बन गया । वह खुद ही सोचने ला कि संतानोत्पत्ति के विषय में ईश्वरीय विधान को अटका देना भी कोई ध्रुव, निश्चित न्याय नहीं है । सुरेश के आँसू बंद नहीं हुए हैं, क्योंकि रागिनी की इसयाचना की भी एक अलग कहानी बन गई है। कालांतर में सुरेश रागिनी की इच्छा पूर्ण करने में सफल हुआ । किन्तु तब वह रागिनी ही प्रशांत हो गई । वही उसे ग्रहण न कर सकी । उस खिलौने को प्राप्त करते-करते वह स्वतः अंतर्धान हो गई । लो, रागिनी भी चली गई, और वह उससे उस बात को भी स्पष्ट रूप से न कह सका । सुरेश रो रहा था । इतने में आ गया जयंत, उसका एक मात्र पुत्र । देखते ही बोला - "अरे, तुम तो रो रहे हो ! यह तुम्हारी बहुत खराब आदत है। इस तरह कैसे निभेगा ? मुझे इस तरह चलना क़तई स्वीकार नहीं । यह तो एक तरह से मेरा बुरा चेतना है- मुझे असमय निराश्रित कर जाने के लिये तत्पर हो जाना । मैं अभी चार आदमियों को बुलाकर तुम्हें क्वायल करूँगा । जब देखो, तब सोचना सोचना, रोनी-सी चेष्टा बनाए रखना और मौक़े बेमौक़े जब देखो, तब चुपचाप रोते रहना। -- यह भी कोई मनुष्यता है ! यह तो कोई ऊँचा आदर्श नहीं है। चलो उठो, मुँह तो धो लो । अच्छा, यहीं धो लो । अरे मक्खन, पानी एक गिलास ले आना ।" नौकर पानी ले आया । मुँह धोकर, आँखें पोछकर, कुछ शांत होकर सुरेश बोला"यह जागेश्वर साला बड़ा दुष्ट है, अपनी स्त्री को बहुत बेदर्दी से मारता है । इससे कह देना होगा कि अब मुझे तुम्हारे खिलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करनी पड़ेगी ! मुहल्ले-भर की शांति भंग करने का वह कारण बन जाता है । जव देखो तब उस बेचारी अस्थियों की माला बनी स्त्री को रुई की तरह धुनकने लगता है। बिल्कुल जंगली है वह, बे सींग पूँछ का जानवर; क़साई ! जयंत उसी समय जाने लगा । तब सुरेश ने फिर कहा - "और सुनो जयंत । तुम्हें मैंने कभी बतलाया नहीं। बतलाने का कोई वैसा प्रसंग भी नहीं आया । जानना चाहते हो, मुझे इस समय क्यों रोना पड़ा ?" जयंत बोला - " बताओो ।" बात यह है जयंत कि दुनिया की सारी घटनाएँ किसी-न-किसी भ्रम-वश होती है। और, भ्रम के लिये किसी को दोषी ठहराना अन्याय है। क्योंकि भ्रम तो अज्ञानता का द्योतक होता है न ? मुझे भी एक दिन ऐसा ही भ्रम हो गया था। मैं भी तुम्हारी मा को मार बैठा था । उसी का पश्चात्ताप अभी तक चल रहा है । समझता था कि मेरा सौ रुपए का एक नोट लिया है, और वह उसे बतलाती नहीं है । गया । पर बात कुछ और थो । उसे मैंने एक लिफ़ाफ़े में रख छोड़ा था । वह लिफ़ाफ़ा रक्खा था एक पुस्तक में। और वह पुस्तक थी |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
रूसी रॉकेट और अंतरिक्ष उद्योग दुनिया के नेताओं की सूची में बना हुआ है, लेकिन इसका प्रदर्शन वांछित से बहुत दूर है। इसलिए, 2020 में, हमारे लॉन्च वाहनों ने केवल 17 बार उड़ान भरी - पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम। इसी समय, दुनिया में लॉन्च की कुल संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो समग्र आंकड़ों में रूसी उद्योग की हिस्सेदारी को और कम कर देती है।
2020 में, विश्व कॉस्मोनॉटिक्स ने सभी मौजूदा प्रकारों के वाहक रॉकेटों की कुल 114 लॉन्चिंग की। 104 शुरुआत को सफल माना गया। सामान्य शब्दों में, पिछले साल 2019 से थोड़ा आगे निकल गया, जब 102 लॉन्च हुए, जिनमें से 96 सफल रहे। इसी समय, 2020 आम तौर पर 2018 लॉन्च और 114 सफल लॉन्च के साथ 111 के समान है।
पिछले साल, चीनी अंतरिक्ष उद्योग सबसे अधिक सक्रिय था। चीन में, 39 प्रक्षेपण किए गए, जिनमें से 35 को सफल माना गया। 37 शुरुआत और 34 सफल मिशनों के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा दूसरा स्थान लिया गया था। तीसरी पंक्ति रोजकोस्मोस के उद्यमों द्वारा कब्जा कर ली गई है, जिसने 17 लॉन्च किए, इंक्लोज किए। एक परीक्षण। सभी रूसी शुरुआत सफल रही। अन्य देश और अंतर्राष्ट्रीय संगठन पिछले साल 10 लॉन्च लाइन को पार करने में असमर्थ थे।
एक बार फिर, अमेरिकी कंपनी SpaseX ने बड़ी सफलता दिखाई। इसने पिछले एक साल में अपने फाल्कन 25 लॉन्च वाहन के 9 लॉन्च पूरे किए हैं - सभी सफल। वाहक रॉकेटों के बीच दूसरे स्थान पर सोयुज -2 परिवार के उत्पाद हैं - सोयूज -2. 1 ए / बी और सोयुज-एसटी-ए। तीन संशोधनों के चीनी चांगझेंग -11 मिसाइलों के 2 सफल प्रक्षेपणों पर ध्यान देना भी आवश्यक है।
14 दिसंबर, 2020 को सबसे महत्वपूर्ण घटना हुई इतिहास रूसी कॉस्मोनॉटिक्स। एक एंगारा-ए 5 लॉन्च वाहन जिसमें ब्रीज़-एम ऊपरी चरण है और एक बड़े आकार और पेलोड मॉडल ने प्लेसेटेक कॉस्मोड्रोम से उड़ान भरी। यह नए भारी प्रक्षेपण यान के उड़ान डिजाइन परीक्षणों के ढांचे में दूसरा प्रक्षेपण होगा। लॉन्च को सफल के रूप में मान्यता दी गई थी, जो आगे के परीक्षण की अनुमति देता है और पूर्ण संचालन की शुरुआत को करीब लाता है।
प्रोटॉन-एम रॉकेट का संचालन पूरा होने वाला है, और उनके लॉन्च की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है। पिछले साल केवल एक प्रोटॉन-एम ने उड़ान भरी थी। 30 जुलाई को बैकोनूर से इस तरह के रॉकेट को लॉन्च किया गया था और दो संचार उपग्रहों को भूस्थैतिक कक्षा में रखा गया था।
मुख्य कार्य को फिर से सोयुज -2 श्रृंखला के लॉन्च वाहनों द्वारा लिया गया। फरवरी की शुरुआत से दिसंबर के अंत तक उनकी लॉन्चिंग की गई। रोसकोसमोस ने बैकोनूर कोस्मोड्रोम में छह लॉन्च किए, और वही नंबर प्लेसेत्स्क से किया गया था। 18 दिसंबर को, वोस्टोचन से एकमात्र लॉन्च हुआ, और दिसंबर में दो गयाना स्पेस सेंटर की साइट पर प्रदर्शन किया गया।
सोयूज-2. 1 बी लॉन्च वाहन का सबसे अधिक सक्रिय रूप से दोहन किया गया था - पूरे वर्ष में आठ लॉन्च। मिशन की विशेषताओं और पेलोड के आधार पर, ऊपरी चरणों "फ्रीगैट" और "फ्रीगैट-एम" का उपयोग इसके साथ किया गया था। सोयूज-2. 1 ए मिसाइलों ने केवल पांच उड़ानों का प्रदर्शन किया और चार में आईएसएस को अंतरिक्ष यान वितरित किया। दो बार मिसाइलों को "सोयूज-एमएस" और दो बार कार्गो "प्रोग्रेस" द्वारा ले जाया गया। पहले की तरह, सोयूज-एसटी-ए-विशेष के वाहक को कुरु ब्रह्मांड से लॉन्च किया गया था।
प्रयोगात्मक अंगारा-ए 5 के अपवाद के साथ, पिछले साल सभी रूसी लॉन्च वाहनों ने विभिन्न कार्गो को कक्षा में पहुंचाया। इस प्रकार, आईएसएस कार्यक्रम के ढांचे के भीतर, चार मिशनों को मानवयुक्त और मालवाहक जहाजों के रूप में कार्गो के साथ किया गया था। अन्य सभी प्रक्षेपणों का कार्य अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण था।
पिछले साल के कुछ प्रक्षेपण सैन्य या दोहरे उद्देश्यों के लिए थे। वर्ष के दौरान, सोयुज -2 को दो ग्लोनैस-एम / के नेविगेशन उपग्रहों, टुंड्रा एकीकृत अंतरिक्ष प्रणाली के एक उपकरण और मेरिडियन-एम संचार उपग्रह में भेजा गया। केवल प्रयोगात्मक नैनोसेटेलाइट प्लेटफॉर्म "एरा -1" या "कॉसमॉस -2548" के लॉन्च पर ध्यान देना भी आवश्यक है।
कई बार रूसी वाहक ने घरेलू और विदेशी वाहनों की एक पूरी श्रृंखला की परिक्रमा की है। इसलिए, 28 सितंबर को, फ्रीगैट यूनिट के साथ सोयुज-2. 1 बी ने अंतरिक्ष में तीन नए गोनेट्स-एम संचार उपग्रहों को भेजा, और उनके साथ कई घरेलू उत्पादों सहित सात देशों के 19 शावक शामिल थे। 3 दिसंबर को, गोनेट्स-एम प्रणाली के समूह को इसी तरह से फिर से भर दिया गया था, और प्रयोगात्मक इरु -1 को बाहर लाया गया था। पिछले साल के एकमात्र "प्रोटॉन-एम" ने "एक्सप्रेस" श्रृंखला के दो उपग्रहों को चलाया।
2020 में, वनवे उपग्रह तारामंडल की पूर्ण तैनाती रूसी मिसाइलों की मदद से शुरू हुई। 7 फरवरी और 21 मार्च को, 34 वाहनों को एक साथ कक्षा में कक्षा में भेजा गया। दिसंबर के मध्य में अन्य 36 को वापस ले लिया गया।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि वनवेब उपग्रहों की वापसी की योजना पूरी तरह से लागू होने से दूर थी। वर्ष के दौरान, प्रत्येक रॉकेट पर 12-30 उपग्रहों के साथ 36 प्रक्षेपण करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, पिछले वर्ष की सामान्य संकट की घटनाओं और वनवेब के अस्थायी दिवालियापन की प्रक्रियाओं ने योजनाओं में तेज कमी ला दी। हालांकि, निकट भविष्य में, लॉन्च को फिर से शुरू किया जाएगा और, शायद, पहले से अपनाए गए शेड्यूल के साथ पकड़ने की अनुमति देगा।
कई प्रतियोगियों की पृष्ठभूमि के खिलाफ, पिछले साल रूसी रॉकेट और अंतरिक्ष उद्योग की गतिविधियां बहुत योग्य दिखती हैं। हालांकि, गतिशीलता में, रोस्कोस्मोस के संकेतक खराब दिखते हैं और नीचे की ओर रुझान दिखाते हैं। देखी गई नकारात्मक प्रक्रियाओं के विभिन्न प्रकार के कई मुख्य कारण हैं।
राज्य संरचनाएं, सबसे पहले, सैन्य विभाग, अंतरिक्ष उद्योग के लिए हमेशा स्थिर और लाभदायक ग्राहक हैं। विकसित देशों में, सैन्य उपग्रहों के प्रक्षेपणों की कुल संख्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह प्रवृत्ति रूस में भी देखी गई है, लेकिन सेना के आदेशों की मात्रा छोटी है। पिछले साल, हमारी सेना ने केवल पांच अंतरिक्ष यान निकाले, जिसमें एक प्रायोगिक भी शामिल था।
रूसी कॉस्मोनॉटिक्स अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन कार्यक्रम में एक अग्रणी भूमिका रखता है। पिछले साल, आईएसएस के लिए 11 उड़ानें थीं, और 4 रूसी प्रौद्योगिकी का उपयोग करके किया गया था। उसी समय, कई नए अंतरिक्ष यान की उपस्थिति से प्रगति और सोयूज पर भार में कुछ कमी आई। तुलना के लिए, 2019 में 14 मिशनों में से 7 रूसी जहाजों द्वारा प्रदान किए गए थे।
हाल के वर्षों में, लॉन्च वाहनों और अंतरिक्ष यान में सामान्य अग्रिमों से जुड़े वाणिज्यिक लॉन्च बाजार में लगातार वृद्धि हुई है। बाजार सहभागियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज है, पैरवी और अन्य विशिष्ट कारक हैं। नतीजतन, बाजार की संरचना बदल रही है, और एक महत्वपूर्ण हिस्सा सिर्फ एक वाणिज्यिक ठेकेदार को जाता है।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि पिछले साल रूसी कॉस्मोनॉटिक्स के संख्यात्मक और वित्तीय संकेतक काफी अधिक हो सकते थे। पहले, इसे वनवेब के हितों में 12 वाणिज्यिक लॉन्च करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन इसकी समस्याओं के कारण, यह केवल 3 को पूरा करना संभव था। अगर ग्राहक कंपनी ने अपनी गतिविधियों को बाधित नहीं किया, तो रूस 25-26 को पूरा करने में सक्षम होगा। लॉन्च - और तदनुसार इसके राजस्व में वृद्धि।
पिछले वर्ष की घटनाओं और सामान्य रूप से इसके परिणामों को पिछले कई वर्षों में देखे गए प्रसिद्ध रुझानों का एक और प्रकटन माना जा सकता है। अंतरिक्ष प्रक्षेपण बाजार लगातार बढ़ रहा है, दोनों नए ग्राहकों के साथ और विकासशील ठेकेदारों की भागीदारी के साथ। इसी समय, उद्योग के सभी उद्यम लाभ कमाने के उद्देश्य से हैं और सभी उपलब्ध उपाय कर रहे हैं।
रूसी अंतरिक्ष उद्योग इस स्थिति को समझता है, जिसके परिणामस्वरूप नई परियोजनाएं विकसित और प्रस्तावित की जा रही हैं। Roskosmos उद्यम होनहार लॉन्च वाहनों का निर्माण और परीक्षण करते हैं, और अगली पीढ़ी के परिसरों की उपस्थिति का भी काम करते हैं। दुर्भाग्य से, इन कार्यों के वास्तविक परिणाम केवल निकट भविष्य में प्राप्त किए जाएंगे। इस समय तक अंतरिक्ष के प्रक्षेपण के क्षेत्र में स्थिति कैसे बदल जाएगी यह अज्ञात है।
- लेखकः
- इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
| रूसी रॉकेट और अंतरिक्ष उद्योग दुनिया के नेताओं की सूची में बना हुआ है, लेकिन इसका प्रदर्शन वांछित से बहुत दूर है। इसलिए, दो हज़ार बीस में, हमारे लॉन्च वाहनों ने केवल सत्रह बार उड़ान भरी - पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम। इसी समय, दुनिया में लॉन्च की कुल संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो समग्र आंकड़ों में रूसी उद्योग की हिस्सेदारी को और कम कर देती है। दो हज़ार बीस में, विश्व कॉस्मोनॉटिक्स ने सभी मौजूदा प्रकारों के वाहक रॉकेटों की कुल एक सौ चौदह लॉन्चिंग की। एक सौ चार शुरुआत को सफल माना गया। सामान्य शब्दों में, पिछले साल दो हज़ार उन्नीस से थोड़ा आगे निकल गया, जब एक सौ दो लॉन्च हुए, जिनमें से छियानवे सफल रहे। इसी समय, दो हज़ार बीस आम तौर पर दो हज़ार अट्ठारह लॉन्च और एक सौ चौदह सफल लॉन्च के साथ एक सौ ग्यारह के समान है। पिछले साल, चीनी अंतरिक्ष उद्योग सबसे अधिक सक्रिय था। चीन में, उनतालीस प्रक्षेपण किए गए, जिनमें से पैंतीस को सफल माना गया। सैंतीस शुरुआत और चौंतीस सफल मिशनों के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा दूसरा स्थान लिया गया था। तीसरी पंक्ति रोजकोस्मोस के उद्यमों द्वारा कब्जा कर ली गई है, जिसने सत्रह लॉन्च किए, इंक्लोज किए। एक परीक्षण। सभी रूसी शुरुआत सफल रही। अन्य देश और अंतर्राष्ट्रीय संगठन पिछले साल दस लॉन्च लाइन को पार करने में असमर्थ थे। एक बार फिर, अमेरिकी कंपनी SpaseX ने बड़ी सफलता दिखाई। इसने पिछले एक साल में अपने फाल्कन पच्चीस लॉन्च वाहन के नौ लॉन्च पूरे किए हैं - सभी सफल। वाहक रॉकेटों के बीच दूसरे स्थान पर सोयुज -दो परिवार के उत्पाद हैं - सोयूज -दो. एक ए / बी और सोयुज-एसटी-ए। तीन संशोधनों के चीनी चांगझेंग -ग्यारह मिसाइलों के दो सफल प्रक्षेपणों पर ध्यान देना भी आवश्यक है। चौदह दिसंबर, दो हज़ार बीस को सबसे महत्वपूर्ण घटना हुई इतिहास रूसी कॉस्मोनॉटिक्स। एक एंगारा-ए पाँच लॉन्च वाहन जिसमें ब्रीज़-एम ऊपरी चरण है और एक बड़े आकार और पेलोड मॉडल ने प्लेसेटेक कॉस्मोड्रोम से उड़ान भरी। यह नए भारी प्रक्षेपण यान के उड़ान डिजाइन परीक्षणों के ढांचे में दूसरा प्रक्षेपण होगा। लॉन्च को सफल के रूप में मान्यता दी गई थी, जो आगे के परीक्षण की अनुमति देता है और पूर्ण संचालन की शुरुआत को करीब लाता है। प्रोटॉन-एम रॉकेट का संचालन पूरा होने वाला है, और उनके लॉन्च की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है। पिछले साल केवल एक प्रोटॉन-एम ने उड़ान भरी थी। तीस जुलाई को बैकोनूर से इस तरह के रॉकेट को लॉन्च किया गया था और दो संचार उपग्रहों को भूस्थैतिक कक्षा में रखा गया था। मुख्य कार्य को फिर से सोयुज -दो श्रृंखला के लॉन्च वाहनों द्वारा लिया गया। फरवरी की शुरुआत से दिसंबर के अंत तक उनकी लॉन्चिंग की गई। रोसकोसमोस ने बैकोनूर कोस्मोड्रोम में छह लॉन्च किए, और वही नंबर प्लेसेत्स्क से किया गया था। अट्ठारह दिसंबर को, वोस्टोचन से एकमात्र लॉन्च हुआ, और दिसंबर में दो गयाना स्पेस सेंटर की साइट पर प्रदर्शन किया गया। सोयूज-दो. एक बी लॉन्च वाहन का सबसे अधिक सक्रिय रूप से दोहन किया गया था - पूरे वर्ष में आठ लॉन्च। मिशन की विशेषताओं और पेलोड के आधार पर, ऊपरी चरणों "फ्रीगैट" और "फ्रीगैट-एम" का उपयोग इसके साथ किया गया था। सोयूज-दो. एक ए मिसाइलों ने केवल पांच उड़ानों का प्रदर्शन किया और चार में आईएसएस को अंतरिक्ष यान वितरित किया। दो बार मिसाइलों को "सोयूज-एमएस" और दो बार कार्गो "प्रोग्रेस" द्वारा ले जाया गया। पहले की तरह, सोयूज-एसटी-ए-विशेष के वाहक को कुरु ब्रह्मांड से लॉन्च किया गया था। प्रयोगात्मक अंगारा-ए पाँच के अपवाद के साथ, पिछले साल सभी रूसी लॉन्च वाहनों ने विभिन्न कार्गो को कक्षा में पहुंचाया। इस प्रकार, आईएसएस कार्यक्रम के ढांचे के भीतर, चार मिशनों को मानवयुक्त और मालवाहक जहाजों के रूप में कार्गो के साथ किया गया था। अन्य सभी प्रक्षेपणों का कार्य अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण था। पिछले साल के कुछ प्रक्षेपण सैन्य या दोहरे उद्देश्यों के लिए थे। वर्ष के दौरान, सोयुज -दो को दो ग्लोनैस-एम / के नेविगेशन उपग्रहों, टुंड्रा एकीकृत अंतरिक्ष प्रणाली के एक उपकरण और मेरिडियन-एम संचार उपग्रह में भेजा गया। केवल प्रयोगात्मक नैनोसेटेलाइट प्लेटफॉर्म "एरा -एक" या "कॉसमॉस -दो हज़ार पाँच सौ अड़तालीस" के लॉन्च पर ध्यान देना भी आवश्यक है। कई बार रूसी वाहक ने घरेलू और विदेशी वाहनों की एक पूरी श्रृंखला की परिक्रमा की है। इसलिए, अट्ठाईस सितंबर को, फ्रीगैट यूनिट के साथ सोयुज-दो. एक बी ने अंतरिक्ष में तीन नए गोनेट्स-एम संचार उपग्रहों को भेजा, और उनके साथ कई घरेलू उत्पादों सहित सात देशों के उन्नीस शावक शामिल थे। तीन दिसंबर को, गोनेट्स-एम प्रणाली के समूह को इसी तरह से फिर से भर दिया गया था, और प्रयोगात्मक इरु -एक को बाहर लाया गया था। पिछले साल के एकमात्र "प्रोटॉन-एम" ने "एक्सप्रेस" श्रृंखला के दो उपग्रहों को चलाया। दो हज़ार बीस में, वनवे उपग्रह तारामंडल की पूर्ण तैनाती रूसी मिसाइलों की मदद से शुरू हुई। सात फरवरी और इक्कीस मार्च को, चौंतीस वाहनों को एक साथ कक्षा में कक्षा में भेजा गया। दिसंबर के मध्य में अन्य छत्तीस को वापस ले लिया गया। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि वनवेब उपग्रहों की वापसी की योजना पूरी तरह से लागू होने से दूर थी। वर्ष के दौरान, प्रत्येक रॉकेट पर बारह-तीस उपग्रहों के साथ छत्तीस प्रक्षेपण करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, पिछले वर्ष की सामान्य संकट की घटनाओं और वनवेब के अस्थायी दिवालियापन की प्रक्रियाओं ने योजनाओं में तेज कमी ला दी। हालांकि, निकट भविष्य में, लॉन्च को फिर से शुरू किया जाएगा और, शायद, पहले से अपनाए गए शेड्यूल के साथ पकड़ने की अनुमति देगा। कई प्रतियोगियों की पृष्ठभूमि के खिलाफ, पिछले साल रूसी रॉकेट और अंतरिक्ष उद्योग की गतिविधियां बहुत योग्य दिखती हैं। हालांकि, गतिशीलता में, रोस्कोस्मोस के संकेतक खराब दिखते हैं और नीचे की ओर रुझान दिखाते हैं। देखी गई नकारात्मक प्रक्रियाओं के विभिन्न प्रकार के कई मुख्य कारण हैं। राज्य संरचनाएं, सबसे पहले, सैन्य विभाग, अंतरिक्ष उद्योग के लिए हमेशा स्थिर और लाभदायक ग्राहक हैं। विकसित देशों में, सैन्य उपग्रहों के प्रक्षेपणों की कुल संख्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह प्रवृत्ति रूस में भी देखी गई है, लेकिन सेना के आदेशों की मात्रा छोटी है। पिछले साल, हमारी सेना ने केवल पांच अंतरिक्ष यान निकाले, जिसमें एक प्रायोगिक भी शामिल था। रूसी कॉस्मोनॉटिक्स अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन कार्यक्रम में एक अग्रणी भूमिका रखता है। पिछले साल, आईएसएस के लिए ग्यारह उड़ानें थीं, और चार रूसी प्रौद्योगिकी का उपयोग करके किया गया था। उसी समय, कई नए अंतरिक्ष यान की उपस्थिति से प्रगति और सोयूज पर भार में कुछ कमी आई। तुलना के लिए, दो हज़ार उन्नीस में चौदह मिशनों में से सात रूसी जहाजों द्वारा प्रदान किए गए थे। हाल के वर्षों में, लॉन्च वाहनों और अंतरिक्ष यान में सामान्य अग्रिमों से जुड़े वाणिज्यिक लॉन्च बाजार में लगातार वृद्धि हुई है। बाजार सहभागियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज है, पैरवी और अन्य विशिष्ट कारक हैं। नतीजतन, बाजार की संरचना बदल रही है, और एक महत्वपूर्ण हिस्सा सिर्फ एक वाणिज्यिक ठेकेदार को जाता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि पिछले साल रूसी कॉस्मोनॉटिक्स के संख्यात्मक और वित्तीय संकेतक काफी अधिक हो सकते थे। पहले, इसे वनवेब के हितों में बारह वाणिज्यिक लॉन्च करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन इसकी समस्याओं के कारण, यह केवल तीन को पूरा करना संभव था। अगर ग्राहक कंपनी ने अपनी गतिविधियों को बाधित नहीं किया, तो रूस पच्चीस-छब्बीस को पूरा करने में सक्षम होगा। लॉन्च - और तदनुसार इसके राजस्व में वृद्धि। पिछले वर्ष की घटनाओं और सामान्य रूप से इसके परिणामों को पिछले कई वर्षों में देखे गए प्रसिद्ध रुझानों का एक और प्रकटन माना जा सकता है। अंतरिक्ष प्रक्षेपण बाजार लगातार बढ़ रहा है, दोनों नए ग्राहकों के साथ और विकासशील ठेकेदारों की भागीदारी के साथ। इसी समय, उद्योग के सभी उद्यम लाभ कमाने के उद्देश्य से हैं और सभी उपलब्ध उपाय कर रहे हैं। रूसी अंतरिक्ष उद्योग इस स्थिति को समझता है, जिसके परिणामस्वरूप नई परियोजनाएं विकसित और प्रस्तावित की जा रही हैं। Roskosmos उद्यम होनहार लॉन्च वाहनों का निर्माण और परीक्षण करते हैं, और अगली पीढ़ी के परिसरों की उपस्थिति का भी काम करते हैं। दुर्भाग्य से, इन कार्यों के वास्तविक परिणाम केवल निकट भविष्य में प्राप्त किए जाएंगे। इस समय तक अंतरिक्ष के प्रक्षेपण के क्षेत्र में स्थिति कैसे बदल जाएगी यह अज्ञात है। - लेखकः - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः |
सञ्जय उवाच - दुर्योधनो महाराज सुदर्शश्चापि ते सुतः ।
[ १ शल्याभिषेकप
हतशेषौ तदा संख्ये वाजिमध्ये व्यवस्थितौ ॥ १ ॥ ततो दुर्योधनं दृष्ट्वा वाजिमध्ये व्यवस्थितम् । उवाच देवकीपुत्रः कुन्तीपुत्रं धनञ्जयम् शत्रवो हतभूयिष्ठा ज्ञातयः परिपालिताः । गृहीत्वा सञ्जयं चासौ निवृत्तः शिनिपुङ्गवः ॥ ३ ॥ ॥३॥ परिश्रान्तश्च नकुलः सहदेवश्व भारत । योधयित्वा रणे पापान्धार्त्तराष्ट्रान्सहानुगान ।॥ ४ ॥ दुर्योधनमभित्यज्य यत्र एते व्यवस्थिताः । कृपश्च कृतवर्मा च द्रौणिश्चैव महारथ! असौ तिष्ठति पाञ्चाल्यः श्रिया परमया युतः । दुर्योधनवलं हत्वा सह सर्वेः प्रभद्रक असौ दुर्योधनः पार्थ वाजिमध्ये व्यवस्थितः । छन्त्रेण प्रियमाणेन प्रेक्षमाणो मुहुर्मुहुः प्रतिव्यूह्य बलं सर्व रणमध्ये व्यवस्थितः । एनं हत्वा शितैर्बाणैः : कृतकृत्यो भविष्यसि ॥ ८ ॥ गजानीकं हतं दृष्ट्वा त्वां च प्राप्तमरिन्दम ।
शल्यपर्व में सत्ताइस अध्याय ।
सञ्जय बोले, हे महाराज ! उस समय तुम्हारे पुत्रों में से केवल दुर्योधन
और सुदर्शन ही मरने से बचे थे, ये दोनों अश्वसेन में खड़े थे, उनको देख श्रीकृष्ण अर्जुन से बोले । हे अर्जुन ! शत्रु मरनेसे थोडे शेप हैं, तुम अपनी जाति की रक्षा करो । ये देखो सञ्जयको पकडे हुए सात्यकी युद्ध से लौटे आते हैं, देखो पापी धृतराष्ट्र के पुत्रोंसे लडते लडते नकुल और महदेव भी थक गये है ।
यह देखो दुर्योधनको छोडकर कृतवर्मा,
कृपाचार्य और महारथ अश्वत्थामा खडे हैं । (१-५)
यह देखो हमारे प्रधान सेनापति महातेजस्वी पृष्टद्युम्न सब दुर्योधन की सेनाका नाश करके प्रभद्रकवंशी क्षत्रियोंके सहित युद्धभूमिमें खडे है । यह देखो जिनके शिरपर छत्र लगा हैं, जो बार बार चारों ओर देख रहे हैं, जो व्यूह बनाये घुडचढी सेनाके पीचमें खडे है वही महाराज दुर्योधन है। तुम तेज वाणोंसे इनका नाश करके कृतकृत्य होंगे । ( ६-८ ) | सञ्जय उवाच - दुर्योधनो महाराज सुदर्शश्चापि ते सुतः । [ एक शल्याभिषेकप हतशेषौ तदा संख्ये वाजिमध्ये व्यवस्थितौ ॥ एक ॥ ततो दुर्योधनं दृष्ट्वा वाजिमध्ये व्यवस्थितम् । उवाच देवकीपुत्रः कुन्तीपुत्रं धनञ्जयम् शत्रवो हतभूयिष्ठा ज्ञातयः परिपालिताः । गृहीत्वा सञ्जयं चासौ निवृत्तः शिनिपुङ्गवः ॥ तीन ॥ ॥तीन॥ परिश्रान्तश्च नकुलः सहदेवश्व भारत । योधयित्वा रणे पापान्धार्त्तराष्ट्रान्सहानुगान ।॥ चार ॥ दुर्योधनमभित्यज्य यत्र एते व्यवस्थिताः । कृपश्च कृतवर्मा च द्रौणिश्चैव महारथ! असौ तिष्ठति पाञ्चाल्यः श्रिया परमया युतः । दुर्योधनवलं हत्वा सह सर्वेः प्रभद्रक असौ दुर्योधनः पार्थ वाजिमध्ये व्यवस्थितः । छन्त्रेण प्रियमाणेन प्रेक्षमाणो मुहुर्मुहुः प्रतिव्यूह्य बलं सर्व रणमध्ये व्यवस्थितः । एनं हत्वा शितैर्बाणैः : कृतकृत्यो भविष्यसि ॥ आठ ॥ गजानीकं हतं दृष्ट्वा त्वां च प्राप्तमरिन्दम । शल्यपर्व में सत्ताइस अध्याय । सञ्जय बोले, हे महाराज ! उस समय तुम्हारे पुत्रों में से केवल दुर्योधन और सुदर्शन ही मरने से बचे थे, ये दोनों अश्वसेन में खड़े थे, उनको देख श्रीकृष्ण अर्जुन से बोले । हे अर्जुन ! शत्रु मरनेसे थोडे शेप हैं, तुम अपनी जाति की रक्षा करो । ये देखो सञ्जयको पकडे हुए सात्यकी युद्ध से लौटे आते हैं, देखो पापी धृतराष्ट्र के पुत्रोंसे लडते लडते नकुल और महदेव भी थक गये है । यह देखो दुर्योधनको छोडकर कृतवर्मा, कृपाचार्य और महारथ अश्वत्थामा खडे हैं । यह देखो हमारे प्रधान सेनापति महातेजस्वी पृष्टद्युम्न सब दुर्योधन की सेनाका नाश करके प्रभद्रकवंशी क्षत्रियोंके सहित युद्धभूमिमें खडे है । यह देखो जिनके शिरपर छत्र लगा हैं, जो बार बार चारों ओर देख रहे हैं, जो व्यूह बनाये घुडचढी सेनाके पीचमें खडे है वही महाराज दुर्योधन है। तुम तेज वाणोंसे इनका नाश करके कृतकृत्य होंगे । |
कतिपय ग्रन्थ अवश्य उपलब्ध हैं जिनमें भाचार्य का जीवनवृत्त गद्य में, वा पद्य में निबद्ध किया गया है, परन्तु ये सब शङ्कर के माविर्भाव के बहुत पीछे लिखे गये थे . कहा जाता है कि उनके साक्षात् शिष्य पद्मपादाचार्य ने अपने गुरु के दिग्विजय, का वृत्तान्त लिपिवद्ध किया था । यदि यह ग्रन्थ कही उपलब्ध होता तो यह हमारे बड़े काम का होता । पद्मपाद आचार्य के केवल प्रथम शिष्य ही न थे, प्रत्युत उनके दिग्विजयो में सदा उनके सहचर भी थे। आदि से लेकर अन्त तक वे प्राचार्य साथ में ही थे, वे उनके नितान्त अन्तरङ्ग थे । वे उनके उद्देश तथा प्रचार कार्य से भलो-भांति परिचित थे। ऐसे व्यक्ति के द्वारा लिखा गया चरित अवश्य हो प्रामाणिक तथा उपादेय होता परन्तु हम उस कराल काल को क्या कहें जिसने इस मूल्यवान् ग्रन्थ को कवलित कर श्राचार्य के चरित को अन्धकारमय बनाने में विशेष योग दिया। प्रपरोक्ष सामग्री का प्रभाव चरित लिखने में बड़ा भारी बाधक होता है। इस बाधा को दूर करने के साधन-ग्रन्थ अवश्य विद्यमान हैं जिन्हें हम शङ्करदिग्विजय के नाम से अभिहित करते हैं, परंतु इनमें से कोई भी ग्रन्थ प्राचार्य का समसामयिक नहीं है । ये अनेक शताब्दियो के मनन्तर निबद्ध हुए थे। इनके स्वरूप की समीक्षा हम आगे चल कर करेंगे । यहाँ इतना ही कहना पर्याप्त होगा कि आजकल श्राचार्य के विषय में हमारी जो कुछ भी जानकारी है, वह इन्हो ग्रन्थों पर भवलम्बित है ।
श्राचार्य शङ्कर ने अपने धर्मोद्धारक कार्य को मधुरा बनाये रखने के लिए भारतवर्ष के चारो सुप्रसिद्ध धामो में अपने चार प्रधान पोठो को स्थापना की है । दक्षिण में मैसूर रियासत में गेम है जिसे प्राचार्य के द्वारा स्थापित पीठो में प्रथम पीठ होने का गौरव प्राप्त है। प्रत्य धामो में स्थापित मठों के नाम ये हैं - गोवर्धनमठ (जगायपुरी), शारदामठ ( ढारिवा), ज्योतिमंठ (बदरिकाश्रम, जो भाजाल 'जोशीमठ' नाम से प्रसिद्ध है ) मठों की स्थापना कर शङ्कराचार्य ने अपने पट्टशिष्यो को इनका प्रध्यक्ष बना दिया । ज्योतिमंठ की माचार्य परम्परा तो बीच में उच्छिन्न हो गयी थो पर भन्य तीनों मठो के भध्यक्षो को परम्परा भाज भो मधुराण रूप से विद्यमान है । कोका कामकोटिपोड अपने वो भाचार्य के द्वारा प्रतिष्ठापित होने की घोषणा करता है । इन मों में शङ्कराचार्य का जोवन-चरित परम्परागत उपलब्ध होता है । जिसअनुसरण विभिन्न दिग्विजयो में किया गया है, परन्तु यह कुछ कम माश्चर्य को बात नहीं है कि इन सब मटों में एक हो परम्परा मधुराण रूप से प्रचलित नहीं मिलती यदि मिलती तो किसो प्रकार का सङ्कट हो नही होता पार्थषय यहाँ तक है कि याचार्य के भावा-पिता, जन्मस्थान, विशेषान | कतिपय ग्रन्थ अवश्य उपलब्ध हैं जिनमें भाचार्य का जीवनवृत्त गद्य में, वा पद्य में निबद्ध किया गया है, परन्तु ये सब शङ्कर के माविर्भाव के बहुत पीछे लिखे गये थे . कहा जाता है कि उनके साक्षात् शिष्य पद्मपादाचार्य ने अपने गुरु के दिग्विजय, का वृत्तान्त लिपिवद्ध किया था । यदि यह ग्रन्थ कही उपलब्ध होता तो यह हमारे बड़े काम का होता । पद्मपाद आचार्य के केवल प्रथम शिष्य ही न थे, प्रत्युत उनके दिग्विजयो में सदा उनके सहचर भी थे। आदि से लेकर अन्त तक वे प्राचार्य साथ में ही थे, वे उनके नितान्त अन्तरङ्ग थे । वे उनके उद्देश तथा प्रचार कार्य से भलो-भांति परिचित थे। ऐसे व्यक्ति के द्वारा लिखा गया चरित अवश्य हो प्रामाणिक तथा उपादेय होता परन्तु हम उस कराल काल को क्या कहें जिसने इस मूल्यवान् ग्रन्थ को कवलित कर श्राचार्य के चरित को अन्धकारमय बनाने में विशेष योग दिया। प्रपरोक्ष सामग्री का प्रभाव चरित लिखने में बड़ा भारी बाधक होता है। इस बाधा को दूर करने के साधन-ग्रन्थ अवश्य विद्यमान हैं जिन्हें हम शङ्करदिग्विजय के नाम से अभिहित करते हैं, परंतु इनमें से कोई भी ग्रन्थ प्राचार्य का समसामयिक नहीं है । ये अनेक शताब्दियो के मनन्तर निबद्ध हुए थे। इनके स्वरूप की समीक्षा हम आगे चल कर करेंगे । यहाँ इतना ही कहना पर्याप्त होगा कि आजकल श्राचार्य के विषय में हमारी जो कुछ भी जानकारी है, वह इन्हो ग्रन्थों पर भवलम्बित है । श्राचार्य शङ्कर ने अपने धर्मोद्धारक कार्य को मधुरा बनाये रखने के लिए भारतवर्ष के चारो सुप्रसिद्ध धामो में अपने चार प्रधान पोठो को स्थापना की है । दक्षिण में मैसूर रियासत में गेम है जिसे प्राचार्य के द्वारा स्थापित पीठो में प्रथम पीठ होने का गौरव प्राप्त है। प्रत्य धामो में स्थापित मठों के नाम ये हैं - गोवर्धनमठ , शारदामठ , ज्योतिमंठ मठों की स्थापना कर शङ्कराचार्य ने अपने पट्टशिष्यो को इनका प्रध्यक्ष बना दिया । ज्योतिमंठ की माचार्य परम्परा तो बीच में उच्छिन्न हो गयी थो पर भन्य तीनों मठो के भध्यक्षो को परम्परा भाज भो मधुराण रूप से विद्यमान है । कोका कामकोटिपोड अपने वो भाचार्य के द्वारा प्रतिष्ठापित होने की घोषणा करता है । इन मों में शङ्कराचार्य का जोवन-चरित परम्परागत उपलब्ध होता है । जिसअनुसरण विभिन्न दिग्विजयो में किया गया है, परन्तु यह कुछ कम माश्चर्य को बात नहीं है कि इन सब मटों में एक हो परम्परा मधुराण रूप से प्रचलित नहीं मिलती यदि मिलती तो किसो प्रकार का सङ्कट हो नही होता पार्थषय यहाँ तक है कि याचार्य के भावा-पिता, जन्मस्थान, विशेषान |
आर्थिक मामलों से सम्बद्ध मंत्रिमंडलीय समिति ने 2013 के मौसम में 'मिलिंग खोपरा' और 'बॉल खोपरा' की निष्पक्ष औसतन गुणवत्ता के लिए क्रमशः 5250/- रूपए प्रति क्विंटल और 5500/- रूपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को स्वीकृति दे दी है। यह पिछले मौसम में 'मिलिंग और बॉल खोपरा' दोनों के लिए सरकार द्वारा घोषित एमएसपी से 150/- रूपए प्रति क्विटंल अधिक है। खोपरा के एमएसपी में वृद्धि से किसानों को नारियल की खेती में निवेश करने को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है जिससे देश में उत्पादन और उत्पादकता में भी वृद्धि होगी।
भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारिता विपणन संघ लिमिटेड (नेफेड) नारियल की खेती वाले राज्यों में न्यूनतम समर्थन मूल्यों के मूल्य समर्थन कार्य करने के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य जारी रखेगा।
| आर्थिक मामलों से सम्बद्ध मंत्रिमंडलीय समिति ने दो हज़ार तेरह के मौसम में 'मिलिंग खोपरा' और 'बॉल खोपरा' की निष्पक्ष औसतन गुणवत्ता के लिए क्रमशः पाँच हज़ार दो सौ पचास/- रूपए प्रति क्विंटल और पाँच हज़ार पाँच सौ/- रूपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य को स्वीकृति दे दी है। यह पिछले मौसम में 'मिलिंग और बॉल खोपरा' दोनों के लिए सरकार द्वारा घोषित एमएसपी से एक सौ पचास/- रूपए प्रति क्विटंल अधिक है। खोपरा के एमएसपी में वृद्धि से किसानों को नारियल की खेती में निवेश करने को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है जिससे देश में उत्पादन और उत्पादकता में भी वृद्धि होगी। भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारिता विपणन संघ लिमिटेड नारियल की खेती वाले राज्यों में न्यूनतम समर्थन मूल्यों के मूल्य समर्थन कार्य करने के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य जारी रखेगा। |
CM Shivraj Singh Chouhan आज Guna जाएंगे. लाडली बहना सम्मेलन में शामिल होंगे. साथ ही विकास कार्यों की CM Shivraj सौगात देंगे.
बिहारः बेगूसराय में मणिपुर जैसी घटना,चीखती रही नाबालिग और मर चुकी संवेदना!
| CM Shivraj Singh Chouhan आज Guna जाएंगे. लाडली बहना सम्मेलन में शामिल होंगे. साथ ही विकास कार्यों की CM Shivraj सौगात देंगे. बिहारः बेगूसराय में मणिपुर जैसी घटना,चीखती रही नाबालिग और मर चुकी संवेदना! |
इस दुनिया में प्रकृति सबसे अधिक सुन्दर है। वृक्ष हजारों वर्षों से अस्तित्व में हैं, वे मानव जाति और वन्यजीव को जीवित रहने में मदद करते हैं। पेड़-पौधे हमें बिना किसी झिझक के सुंदर फूल, पौष्टिक फल, हर्बल दवाएं, ऑक्सीजन आदि प्रदान करते हैं। लेकिन मनुष्यों की प्रवृत्ति बिगड़ गयी है और इसके द्वारा किये गए कार्य पृथ्वी के लिए हानिकारक साभित हो रहे हैं, प्रदूषण के साथ पर्यावरण बिगड़ रहा है और घरों को बनाने के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं आदि।
जंगल में पेड़ों की कमी से नदी सूख जाती है और जंगल में रहने वाली प्रजातियों के प्राकृतिक आवास को नुकसान होता है। तेलंगाना सरकार ने नुकसान की भरपाई और मरम्मत के लिए तेलंगाना सरकार द्वारा "तेलंगाना कू हरिता हरम" आंदोलन की योजना बनाई, जो तेलंगाना राज्य के प्रत्येक और हर जिले में ट्री काउंट या ट्री कवरेज क्षेत्र को बढ़ाने के लिए समर्पित है।
इस लेख में, हमने तेलंगाना राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई हरित हरम पहल के बारे में जानकारी प्रदान की है। भारत भर में कई स्कूल और कॉलेज एक निबंध, भाषण, वाद-विवाद प्रतियोगिता जैसी कई प्रतियोगिताओं का आयोजन करते हैं। हरिताम हराम प्लांटेशन पहल अब तेलंगाना में ट्रेंडिंग टॉपिक्स में से एक है, इसे अच्छा प्रिंट मीडिया और न्यूज मीडिया कवरेज मिल रहा है।
जंगल, पेड़ हमारे जीवन के लिए आवश्यक है क्योंकि यह स्थिर जलवायु को प्रोत्साहित करता है, जल जीवन चक्र में सुधार करता है और यह कीड़े से जानवरों तक विभिन्न जीवन रूपों को आश्रय प्रदान करता है। किसी राष्ट्र या राज्य के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह अपने भौगोलिक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली प्रकृति की रक्षा करे।
चूंकि केवल 24% वन क्षेत्र हरे रंग में आते हैं, इसलिए यह बेहतर पर्यावरण और वातावरण के लिए अपर्याप्त है; इसलिए तेलंगाना के राज्य मंत्रियों ने स्थायी स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के लिए हरियाली को 24% से बढ़ाकर 33% करने की योजना बनाई।
तेलंगाना हरिता हरम कार्यक्रम 5 जुलाई 2015 को 4 वर्षों में 230 करोड़ पौधे लगाने और पोषण करने की योजना के साथ शुरू किया गया था, ताकि तेलंगाना राज्य को हरे रंग में ढंकने के लक्ष्य तक पहुंच सके, इसे हासिल करने के लिए न केवल धन की आवश्यकता है, बल्कि लोगों के योगदान की भी आवश्यकता है जोकि तेलंगाना राज्य में रहते हैं।
वृक्षारोपण के लिए आवश्यक तत्वों को एकत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री कलवकुंतला चंद्रशेखर राव ने सुझाव दिया कि वन संरक्षण, नष्ट हुए जंगलों की मरम्मत जैसे कार्यों या गतिविधियों को करने के लिए धन लिया जा सकता है। लेकिन 230 करोड़ पौधे लगाने के लिए वांछित संख्या में पौधे लगाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा, तेलंगाना सरकार द्वारा मीडिया जागरूकता और प्रयासों के साथ, लोगों को हरिता हरम के महत्व के बारे में पता चला और इसलिए एनजीओ, आम आदमी से समर्थन और मदद मिली।
मातृ प्रकृति के लिए एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाली सरकार तेलंगाना की नियति को बदल सकती है। मुख्यमंत्री कलवाकुंतला चंद्रशेखर राव ने 2016 में नलगोंडा जिले के चीतल के पास गुंडरमपल्ली में पौधे लगाकर दो सप्ताह का लंबा अभियान चलाया।
यह ज्ञात है कि सरकार द्वारा पहले चरण में हरियाली बढ़ाने के लिए 25 लाख से अधिक पौधे लगाए गए थे। सरकार ने सराहना की और इस सम्मानजनक कदम के साथ कंपनियों के बढ़ने का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें मशहूर हस्तियों से लेकर आम आदमी तक हर कोई तेलंगाना की सेनाओं में शामिल होकर "तेलंगाना हरिता हरम" के दूसरे चरण में मदद कर रहा था।
ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (जीएचएमसी) से 21 करोड़ के दान के साथ नदियों को पानी से भरने, पारिस्थितिकी तंत्र और आवासों को बेहतर बनाने, जल क्षेत्रों की रक्षा करने, हवा को शुद्ध करने, मिट्टी को समृद्ध करने, जल चक्र को विनियमित करने के लिए हरीथा ग्राम परियोजना योजना के ये लाभ हैं।
आंदोलन को आगे बढ़ाने और "हरिता हरम के साथ हरियाली" के अंतिम लक्ष्य को महसूस करने के लिए पर्याप्त है। मिशन काकतीय तेलंगाना सरकार द्वारा राज्य में पानी के भंडारण और झीलों को बहाल करने के लिए शुरू की गई एक ऐसी पहल है। मिशन काकतीय 'नाम को काकतीय शासकों की याद और श्रद्धांजलि में दिया गया है, जिन्होंने बड़ी संख्या में सिंचाई टैंक विकसित किए।
इस आधुनिक दुनिया में जहां देश तेजी से बढ़ते हैं, सड़क, इमारतें बनाने के लिए पेड़ों को काटते हैं, पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले उद्योगों को रोकते हैं, ऐसी चीजों को रोकना संभव नहीं है लेकिन नियंत्रित किया जा सकता है।
पारिस्थितिक संतुलन के लिए हरिता हराम का योगदान एक आंख खोलने वाला हो सकता है, जो पर्यावरण की उपेक्षा करने वाले और ग्लोबल वार्मिंग, एसिड रेन जैसी पर्यावरणीय समस्याएं पैदा करने वालों के लिए एक रोल मॉडल हो सकता है, न केवल सूखे की वजह से ये समस्याएं हरितम हराम के फायदे को बेहतर कर सकती हैं, बल्कि इससे बेहतर अर्थव्यवस्था बन सकती है।
खेती और वानिकी में नौकरियों की संख्या बढ़ने के कारण सामाजिक कल्याण भी होगा। लोग पर्यावरण का सम्मान और सुरक्षा करेंगे क्योंकि भविष्य में पार्क और पेड़ शहरी जीवन के सबसे महत्वपूर्ण घटक बन जाएंगे। अन्य भारतीय राज्यों या उस विषय के लिए हमारे प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी को देशव्यापी वृक्षारोपण अभियान चलाना चाहिए।
भारत ने पिछले 5000 वर्षों से सभी रूपों में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया, सभ्यताएं इन प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न हुईं। लेकिन समय के साथ यह हमारे जैसे स्वार्थी मानव द्वारा खराब कर दिया गया था। अब समय आ गया है की हम अपनी आँखें खोले और प्रकृति को और खराब होने से बचाएं।
हमने सीखा कि मनुष्य ने प्राकृतिक संसाधनों का बुरे तरीके से प्रयोग किया लेकिन इसके परिणामस्वरूप प्रकृति ने भी ग्लोबल वार्मिंग, बाढ़, सूखे के रूप में अपना प्रदर्शन दिखाते हुए मनुष्य को इसका अहसास कराया। पेड़ों की कटाई से हुए नुक्सान की भरपाई में दशकों का समय लगेगा। लेकिन अभी या बाद में हमें प्रकृति के लिए कार्य करने होंगे और इसकी लूट को रोकना होगा।
हरीथा हरम एक अच्छी पहल है, हरिता हरम के महत्व को लोगों और मशहूर हस्तियों से भी ध्यान आकर्षित कर रहा है। यदि यह सफल होता है तो ऐसे दुसरे अभियान भी चलाए जायंगे। हमें इसमें भाग लेना चाहिए और इसे बढ़ावा देना चाहिए ताकि इससे प्रकृति का भला हो।
तेलंगाना के हरिता हरम या हरीथा हरम राज्य में पेड़ों की मात्रा को 24% से बढ़ाकर 33% करने के लिए तेलंगाना सरकार द्वारा कार्यान्वित एक बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कार्यक्रम है।
कार्यक्रम का शुभारंभ 3 जुलाई 2015 को तेलंगाना के मुख्यमंत्री कलवकुंतला चंद्रशेखर राव द्वारा किया गया था। यह जंगलों को ख़राब करने, तस्करी, अतिक्रमण, आग और चराई जैसे खतरों से बचाने के लिए तेलंगाना फ्लैगशिप कार्यक्रमों में से एक है। वाटरशेड दृष्टिकोण के आधार पर इसने गहन मिट्टी और नमी संरक्षण उपायों को अपनाया।
मौजूदा जंगल के बाहर के क्षेत्रों में, बड़े पैमाने पर रोपण गतिविधियों को ऐसे क्षेत्रों में किया जाना था; सड़क के किनारे के रास्ते, नदी और नहर के किनारे, बंजर पहाड़ियाँ, टंकी के बाँध और फ़र्श वाले क्षेत्र, संस्थागत परिसर, धार्मिक स्थल, आवास कॉलोनियाँ, सामुदायिक भूमि, नगरपालिकाएँ और औद्योगिक पार्क।
भारत की राष्ट्रीय वन नीति पर्यावरणीय स्थिरता और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने के लिए वन आवरण के तहत कुल भौगोलिक क्षेत्र का न्यूनतम 33% की परिकल्पना करती है, जो सभी जीवन-रूपों के निर्वाह के लिए महत्वपूर्ण है, चाहे वह मानव हो, पशु हो या वनस्पति हो।
विशिष्ट कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को अलग-अलग समितियों को सौंपा जाता है। ये समितियाँ नियमित रूप से क्षेत्र निरीक्षण कर रही हैं और चल रहे वृक्षारोपण और नर्सरी कार्यों की निगरानी कर रही हैं। समितियां राज्य स्तरीय संचालन समिति और जिला स्तरीय निगरानी और समन्वय समिति हैं।
ग्राम स्तर पर, ग्राम सरपंच की अध्यक्षता में कार्यक्रम की निगरानी के लिए हरिता रक्षा समितियों का गठन किया गया था।जियो-टैगिंग के माध्यम से रोपाई की निगरानी की जाती है। वन विभाग विभाग की वेबसाइट पर उत्तरजीविता प्रतिशत विवरण पोस्ट करता है।
कार्यक्रम कई रोपण मॉडल का उपयोग करता हैः
एवेन्यू प्लांटेशन - पौधों को राष्ट्रीय राजमार्ग सड़कों, राज्य राजमार्ग सड़कों और गांवों और कस्बों की सड़कों पर लगाया जाएगा। प्रजाति में सिल्वर ओक, कानूनगो, नीम, रावी, मैरिड, नेरेडु, रेन ट्री, गुलमोहर, उम और स्पैथोडिया शामिल हैं।
ब्लॉक वृक्षारोपण - बंजर भूमि, सामान्य भूमि और पंचायती भूमि में रोपण का प्रयास किया जाएगा। ये वृक्षारोपण ईंधन, चारा और एमएफपी [स्पष्टीकरण की जरूरत] जरूरतों को पूरा करने के लिए गांवों के आसपास के क्षेत्रों में उठाए जाएंगे।
प्रजाति में अल्बिजिया, बबूल, सिसो, नेरेडु, सुंदरा, चिंडुगा, सुबबूल और ग्लिसरिडिया शामिल हैं। संबंधित विभागों द्वारा पौधरोपण किया जाएगा। पौधे लगाने के बाद रखरखाव के लिए ग्राम पंचायत को सौंप दिया जाएगा।
संस्थागत वृक्षारोपण - स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों, अस्पतालों, कब्रिस्तानों और निजी संस्थानों और उद्योगों में रोपण किया जाएगा। प्रजातियां में नीम, कानूनगो, नेरेडू, मरेडु, रिले, गुलमोहर, रेंट्री, बादम और पेल्फोथोरम शामिल हैं। संबंधित विभागों द्वारा पौधरोपण किया जाएगा। संरक्षण और पानी देना सबसे अच्छे संस्थान की जिम्मेदारी होगी।
टैंक फोर शोर प्लांटेशन - प्लांटिंग टैंक फॉर शोर तटों पर होगा। प्रजाति में नल्ला थम्मा, कानूनगो, नेरेडु और अर्जुन शामिल हैं। मंडल के प्रभारी विभागों द्वारा पौधारोपण किया जाएगा। पौधे लगाने के बाद रखरखाव के लिए ग्राम पंचायत को सौंप दिया जाएगा।
होमस्टेड वृक्षारोपण - घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए घरों और कॉलोनियों के आसपास रोपण किया जाएगा। प्रजातियों में नेरेडू, सीथफाल, उसरी, पपीता, गुवा, नीम, मरेडु, सोपटन, बादाम, मुनगा और औषधीय पौधे शामिल हैं। रोपण और रखरखाव निवासियों द्वारा किया जाएगा।
कृषि वानिकी रोपण - रोपण खेत पर होगा। प्रजातियों में सागौन, लाल सांडर्स, इमली, मुनगा, बॉम्बैक्स, नीलगिरी, बांस और सुबबूल शामिल हैं। किसान रोपण और रखरखाव करेंगे।
बंजर पहाड़ी रोपण - बंजर पहाड़ी पर रोपण होगा। प्रजातियों में सिसो, बबूल, नेमाली नारा और कानूनगो जैसे हार्डी पौधे शामिल हैं। संबंधित विभागों द्वारा पौधरोपण किया जाएगा। ग्राम पंचायतों द्वारा रखरखाव किया जाएगा।
निम्नलिखित नुसार :
वन विभाग की उपलब्धियांः
प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने और सफल कार्यान्वयन को मान्यता देने के लिए, सरकार ने व्यक्तियों, जनप्रतिनिधियों, गैर सरकारी संगठनों, सरकारी संगठनों, कॉर्पोरेट, ग्रामीण और शहरी निकायों सहित हितधारकों को पुरस्कृत करने के लिए "तेलंगाना हरित मित्र पुरस्कार" की स्थापना की।
पहले पुरस्कार 15 अगस्त 2016 को वितरित किए गए थे। सरकार ने सिविल सेवकों द्वारा प्रदान की गई अनुकरणीय सार्वजनिक सेवा को मान्यता देने के लिए "तेलंगाना राज्य उत्कृष्टता पुरस्कार (टी-पूर्व पुरस्कार)" की स्थापना की। राज्य सरकार ने निम्नलिखित श्रेणियों के लिए "तेलंगाना हरिता मित्र पुरस्कार" प्रस्तावित कियाः
- संस्थान / संगठन - सर्वश्रेष्ठ जिला, सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत, सर्वश्रेष्ठ नगर पालिका, सर्वोत्तम निगम, सर्वश्रेष्ठ मंडल, सर्वश्रेष्ठ प्राथमिक विद्यालय, सर्वश्रेष्ठ उच्च विद्यालय, बेस्ट डिग्री कॉलेज, बेस्ट टेक्निकल कॉलेज, सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय, सर्वश्रेष्ठ कॉर्पोरेट निकाय, सर्वश्रेष्ठ सरकारी विभाग आदि।
इस लेख से सम्बंधित अपने सवाल और सुझाव आप नीचे कमेंट में लिख सकते हैं।
| इस दुनिया में प्रकृति सबसे अधिक सुन्दर है। वृक्ष हजारों वर्षों से अस्तित्व में हैं, वे मानव जाति और वन्यजीव को जीवित रहने में मदद करते हैं। पेड़-पौधे हमें बिना किसी झिझक के सुंदर फूल, पौष्टिक फल, हर्बल दवाएं, ऑक्सीजन आदि प्रदान करते हैं। लेकिन मनुष्यों की प्रवृत्ति बिगड़ गयी है और इसके द्वारा किये गए कार्य पृथ्वी के लिए हानिकारक साभित हो रहे हैं, प्रदूषण के साथ पर्यावरण बिगड़ रहा है और घरों को बनाने के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं आदि। जंगल में पेड़ों की कमी से नदी सूख जाती है और जंगल में रहने वाली प्रजातियों के प्राकृतिक आवास को नुकसान होता है। तेलंगाना सरकार ने नुकसान की भरपाई और मरम्मत के लिए तेलंगाना सरकार द्वारा "तेलंगाना कू हरिता हरम" आंदोलन की योजना बनाई, जो तेलंगाना राज्य के प्रत्येक और हर जिले में ट्री काउंट या ट्री कवरेज क्षेत्र को बढ़ाने के लिए समर्पित है। इस लेख में, हमने तेलंगाना राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई हरित हरम पहल के बारे में जानकारी प्रदान की है। भारत भर में कई स्कूल और कॉलेज एक निबंध, भाषण, वाद-विवाद प्रतियोगिता जैसी कई प्रतियोगिताओं का आयोजन करते हैं। हरिताम हराम प्लांटेशन पहल अब तेलंगाना में ट्रेंडिंग टॉपिक्स में से एक है, इसे अच्छा प्रिंट मीडिया और न्यूज मीडिया कवरेज मिल रहा है। जंगल, पेड़ हमारे जीवन के लिए आवश्यक है क्योंकि यह स्थिर जलवायु को प्रोत्साहित करता है, जल जीवन चक्र में सुधार करता है और यह कीड़े से जानवरों तक विभिन्न जीवन रूपों को आश्रय प्रदान करता है। किसी राष्ट्र या राज्य के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह अपने भौगोलिक क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली प्रकृति की रक्षा करे। चूंकि केवल चौबीस% वन क्षेत्र हरे रंग में आते हैं, इसलिए यह बेहतर पर्यावरण और वातावरण के लिए अपर्याप्त है; इसलिए तेलंगाना के राज्य मंत्रियों ने स्थायी स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के लिए हरियाली को चौबीस% से बढ़ाकर तैंतीस% करने की योजना बनाई। तेलंगाना हरिता हरम कार्यक्रम पाँच जुलाई दो हज़ार पंद्रह को चार वर्षों में दो सौ तीस करोड़ पौधे लगाने और पोषण करने की योजना के साथ शुरू किया गया था, ताकि तेलंगाना राज्य को हरे रंग में ढंकने के लक्ष्य तक पहुंच सके, इसे हासिल करने के लिए न केवल धन की आवश्यकता है, बल्कि लोगों के योगदान की भी आवश्यकता है जोकि तेलंगाना राज्य में रहते हैं। वृक्षारोपण के लिए आवश्यक तत्वों को एकत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री कलवकुंतला चंद्रशेखर राव ने सुझाव दिया कि वन संरक्षण, नष्ट हुए जंगलों की मरम्मत जैसे कार्यों या गतिविधियों को करने के लिए धन लिया जा सकता है। लेकिन दो सौ तीस करोड़ पौधे लगाने के लिए वांछित संख्या में पौधे लगाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा, तेलंगाना सरकार द्वारा मीडिया जागरूकता और प्रयासों के साथ, लोगों को हरिता हरम के महत्व के बारे में पता चला और इसलिए एनजीओ, आम आदमी से समर्थन और मदद मिली। मातृ प्रकृति के लिए एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाली सरकार तेलंगाना की नियति को बदल सकती है। मुख्यमंत्री कलवाकुंतला चंद्रशेखर राव ने दो हज़ार सोलह में नलगोंडा जिले के चीतल के पास गुंडरमपल्ली में पौधे लगाकर दो सप्ताह का लंबा अभियान चलाया। यह ज्ञात है कि सरकार द्वारा पहले चरण में हरियाली बढ़ाने के लिए पच्चीस लाख से अधिक पौधे लगाए गए थे। सरकार ने सराहना की और इस सम्मानजनक कदम के साथ कंपनियों के बढ़ने का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें मशहूर हस्तियों से लेकर आम आदमी तक हर कोई तेलंगाना की सेनाओं में शामिल होकर "तेलंगाना हरिता हरम" के दूसरे चरण में मदद कर रहा था। ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से इक्कीस करोड़ के दान के साथ नदियों को पानी से भरने, पारिस्थितिकी तंत्र और आवासों को बेहतर बनाने, जल क्षेत्रों की रक्षा करने, हवा को शुद्ध करने, मिट्टी को समृद्ध करने, जल चक्र को विनियमित करने के लिए हरीथा ग्राम परियोजना योजना के ये लाभ हैं। आंदोलन को आगे बढ़ाने और "हरिता हरम के साथ हरियाली" के अंतिम लक्ष्य को महसूस करने के लिए पर्याप्त है। मिशन काकतीय तेलंगाना सरकार द्वारा राज्य में पानी के भंडारण और झीलों को बहाल करने के लिए शुरू की गई एक ऐसी पहल है। मिशन काकतीय 'नाम को काकतीय शासकों की याद और श्रद्धांजलि में दिया गया है, जिन्होंने बड़ी संख्या में सिंचाई टैंक विकसित किए। इस आधुनिक दुनिया में जहां देश तेजी से बढ़ते हैं, सड़क, इमारतें बनाने के लिए पेड़ों को काटते हैं, पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले उद्योगों को रोकते हैं, ऐसी चीजों को रोकना संभव नहीं है लेकिन नियंत्रित किया जा सकता है। पारिस्थितिक संतुलन के लिए हरिता हराम का योगदान एक आंख खोलने वाला हो सकता है, जो पर्यावरण की उपेक्षा करने वाले और ग्लोबल वार्मिंग, एसिड रेन जैसी पर्यावरणीय समस्याएं पैदा करने वालों के लिए एक रोल मॉडल हो सकता है, न केवल सूखे की वजह से ये समस्याएं हरितम हराम के फायदे को बेहतर कर सकती हैं, बल्कि इससे बेहतर अर्थव्यवस्था बन सकती है। खेती और वानिकी में नौकरियों की संख्या बढ़ने के कारण सामाजिक कल्याण भी होगा। लोग पर्यावरण का सम्मान और सुरक्षा करेंगे क्योंकि भविष्य में पार्क और पेड़ शहरी जीवन के सबसे महत्वपूर्ण घटक बन जाएंगे। अन्य भारतीय राज्यों या उस विषय के लिए हमारे प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी को देशव्यापी वृक्षारोपण अभियान चलाना चाहिए। भारत ने पिछले पाँच हज़ार वर्षों से सभी रूपों में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया, सभ्यताएं इन प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न हुईं। लेकिन समय के साथ यह हमारे जैसे स्वार्थी मानव द्वारा खराब कर दिया गया था। अब समय आ गया है की हम अपनी आँखें खोले और प्रकृति को और खराब होने से बचाएं। हमने सीखा कि मनुष्य ने प्राकृतिक संसाधनों का बुरे तरीके से प्रयोग किया लेकिन इसके परिणामस्वरूप प्रकृति ने भी ग्लोबल वार्मिंग, बाढ़, सूखे के रूप में अपना प्रदर्शन दिखाते हुए मनुष्य को इसका अहसास कराया। पेड़ों की कटाई से हुए नुक्सान की भरपाई में दशकों का समय लगेगा। लेकिन अभी या बाद में हमें प्रकृति के लिए कार्य करने होंगे और इसकी लूट को रोकना होगा। हरीथा हरम एक अच्छी पहल है, हरिता हरम के महत्व को लोगों और मशहूर हस्तियों से भी ध्यान आकर्षित कर रहा है। यदि यह सफल होता है तो ऐसे दुसरे अभियान भी चलाए जायंगे। हमें इसमें भाग लेना चाहिए और इसे बढ़ावा देना चाहिए ताकि इससे प्रकृति का भला हो। तेलंगाना के हरिता हरम या हरीथा हरम राज्य में पेड़ों की मात्रा को चौबीस% से बढ़ाकर तैंतीस% करने के लिए तेलंगाना सरकार द्वारा कार्यान्वित एक बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कार्यक्रम है। कार्यक्रम का शुभारंभ तीन जुलाई दो हज़ार पंद्रह को तेलंगाना के मुख्यमंत्री कलवकुंतला चंद्रशेखर राव द्वारा किया गया था। यह जंगलों को ख़राब करने, तस्करी, अतिक्रमण, आग और चराई जैसे खतरों से बचाने के लिए तेलंगाना फ्लैगशिप कार्यक्रमों में से एक है। वाटरशेड दृष्टिकोण के आधार पर इसने गहन मिट्टी और नमी संरक्षण उपायों को अपनाया। मौजूदा जंगल के बाहर के क्षेत्रों में, बड़े पैमाने पर रोपण गतिविधियों को ऐसे क्षेत्रों में किया जाना था; सड़क के किनारे के रास्ते, नदी और नहर के किनारे, बंजर पहाड़ियाँ, टंकी के बाँध और फ़र्श वाले क्षेत्र, संस्थागत परिसर, धार्मिक स्थल, आवास कॉलोनियाँ, सामुदायिक भूमि, नगरपालिकाएँ और औद्योगिक पार्क। भारत की राष्ट्रीय वन नीति पर्यावरणीय स्थिरता और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने के लिए वन आवरण के तहत कुल भौगोलिक क्षेत्र का न्यूनतम तैंतीस% की परिकल्पना करती है, जो सभी जीवन-रूपों के निर्वाह के लिए महत्वपूर्ण है, चाहे वह मानव हो, पशु हो या वनस्पति हो। विशिष्ट कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को अलग-अलग समितियों को सौंपा जाता है। ये समितियाँ नियमित रूप से क्षेत्र निरीक्षण कर रही हैं और चल रहे वृक्षारोपण और नर्सरी कार्यों की निगरानी कर रही हैं। समितियां राज्य स्तरीय संचालन समिति और जिला स्तरीय निगरानी और समन्वय समिति हैं। ग्राम स्तर पर, ग्राम सरपंच की अध्यक्षता में कार्यक्रम की निगरानी के लिए हरिता रक्षा समितियों का गठन किया गया था।जियो-टैगिंग के माध्यम से रोपाई की निगरानी की जाती है। वन विभाग विभाग की वेबसाइट पर उत्तरजीविता प्रतिशत विवरण पोस्ट करता है। कार्यक्रम कई रोपण मॉडल का उपयोग करता हैः एवेन्यू प्लांटेशन - पौधों को राष्ट्रीय राजमार्ग सड़कों, राज्य राजमार्ग सड़कों और गांवों और कस्बों की सड़कों पर लगाया जाएगा। प्रजाति में सिल्वर ओक, कानूनगो, नीम, रावी, मैरिड, नेरेडु, रेन ट्री, गुलमोहर, उम और स्पैथोडिया शामिल हैं। ब्लॉक वृक्षारोपण - बंजर भूमि, सामान्य भूमि और पंचायती भूमि में रोपण का प्रयास किया जाएगा। ये वृक्षारोपण ईंधन, चारा और एमएफपी [स्पष्टीकरण की जरूरत] जरूरतों को पूरा करने के लिए गांवों के आसपास के क्षेत्रों में उठाए जाएंगे। प्रजाति में अल्बिजिया, बबूल, सिसो, नेरेडु, सुंदरा, चिंडुगा, सुबबूल और ग्लिसरिडिया शामिल हैं। संबंधित विभागों द्वारा पौधरोपण किया जाएगा। पौधे लगाने के बाद रखरखाव के लिए ग्राम पंचायत को सौंप दिया जाएगा। संस्थागत वृक्षारोपण - स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों, अस्पतालों, कब्रिस्तानों और निजी संस्थानों और उद्योगों में रोपण किया जाएगा। प्रजातियां में नीम, कानूनगो, नेरेडू, मरेडु, रिले, गुलमोहर, रेंट्री, बादम और पेल्फोथोरम शामिल हैं। संबंधित विभागों द्वारा पौधरोपण किया जाएगा। संरक्षण और पानी देना सबसे अच्छे संस्थान की जिम्मेदारी होगी। टैंक फोर शोर प्लांटेशन - प्लांटिंग टैंक फॉर शोर तटों पर होगा। प्रजाति में नल्ला थम्मा, कानूनगो, नेरेडु और अर्जुन शामिल हैं। मंडल के प्रभारी विभागों द्वारा पौधारोपण किया जाएगा। पौधे लगाने के बाद रखरखाव के लिए ग्राम पंचायत को सौंप दिया जाएगा। होमस्टेड वृक्षारोपण - घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए घरों और कॉलोनियों के आसपास रोपण किया जाएगा। प्रजातियों में नेरेडू, सीथफाल, उसरी, पपीता, गुवा, नीम, मरेडु, सोपटन, बादाम, मुनगा और औषधीय पौधे शामिल हैं। रोपण और रखरखाव निवासियों द्वारा किया जाएगा। कृषि वानिकी रोपण - रोपण खेत पर होगा। प्रजातियों में सागौन, लाल सांडर्स, इमली, मुनगा, बॉम्बैक्स, नीलगिरी, बांस और सुबबूल शामिल हैं। किसान रोपण और रखरखाव करेंगे। बंजर पहाड़ी रोपण - बंजर पहाड़ी पर रोपण होगा। प्रजातियों में सिसो, बबूल, नेमाली नारा और कानूनगो जैसे हार्डी पौधे शामिल हैं। संबंधित विभागों द्वारा पौधरोपण किया जाएगा। ग्राम पंचायतों द्वारा रखरखाव किया जाएगा। निम्नलिखित नुसार : वन विभाग की उपलब्धियांः प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने और सफल कार्यान्वयन को मान्यता देने के लिए, सरकार ने व्यक्तियों, जनप्रतिनिधियों, गैर सरकारी संगठनों, सरकारी संगठनों, कॉर्पोरेट, ग्रामीण और शहरी निकायों सहित हितधारकों को पुरस्कृत करने के लिए "तेलंगाना हरित मित्र पुरस्कार" की स्थापना की। पहले पुरस्कार पंद्रह अगस्त दो हज़ार सोलह को वितरित किए गए थे। सरकार ने सिविल सेवकों द्वारा प्रदान की गई अनुकरणीय सार्वजनिक सेवा को मान्यता देने के लिए "तेलंगाना राज्य उत्कृष्टता पुरस्कार " की स्थापना की। राज्य सरकार ने निम्नलिखित श्रेणियों के लिए "तेलंगाना हरिता मित्र पुरस्कार" प्रस्तावित कियाः - संस्थान / संगठन - सर्वश्रेष्ठ जिला, सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत, सर्वश्रेष्ठ नगर पालिका, सर्वोत्तम निगम, सर्वश्रेष्ठ मंडल, सर्वश्रेष्ठ प्राथमिक विद्यालय, सर्वश्रेष्ठ उच्च विद्यालय, बेस्ट डिग्री कॉलेज, बेस्ट टेक्निकल कॉलेज, सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय, सर्वश्रेष्ठ कॉर्पोरेट निकाय, सर्वश्रेष्ठ सरकारी विभाग आदि। इस लेख से सम्बंधित अपने सवाल और सुझाव आप नीचे कमेंट में लिख सकते हैं। |
IAS प्रोन्नत मंच में अध्यक्ष/महासचिव ने संगठन के अफ़सरो से आगे आकर CM कोष में मदद करने को कहा है। आपको बता दे IAS मानवेंद्र सिंह DM फरुखाबाद 2 साल वेतन का 20 फीसदी हिस्सा राहत कोष में देंगे।
IAS उमेश प्रताप सिंह निदेशक सूडा भी 2 साल तक देगे CM कोष में मदद। IAS मानवेन्द्र सिंह IAS प्रोन्नत संघ के है अध्यक्ष और IAS उमेश प्रताप सिंह IAS प्रोन्नत मंच के है महासचिव।
इससे पहले आपको बताते चले, UP पुलिसकर्मिंयों का 50 लाख का इंश्योरेंस किया गया है, सीएम योगी का पुलिस को इंश्योरेंस तोहफा दिया गया।
अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने यह जानकारी दी और सफाई कर्मचारियों को 50 लाख की हेल्थ इंश्योरेंस की गयी।
आज इसके अलावा HC के न्यायधीशों ने PM फंड में सहायता राशि दी, 3,31,68940 रुपए PM फंड में सहायता राशि दी, मुख्य न्यायाधीश UP ने 1 लाख CM फंड में दिए।
| IAS प्रोन्नत मंच में अध्यक्ष/महासचिव ने संगठन के अफ़सरो से आगे आकर CM कोष में मदद करने को कहा है। आपको बता दे IAS मानवेंद्र सिंह DM फरुखाबाद दो साल वेतन का बीस फीसदी हिस्सा राहत कोष में देंगे। IAS उमेश प्रताप सिंह निदेशक सूडा भी दो साल तक देगे CM कोष में मदद। IAS मानवेन्द्र सिंह IAS प्रोन्नत संघ के है अध्यक्ष और IAS उमेश प्रताप सिंह IAS प्रोन्नत मंच के है महासचिव। इससे पहले आपको बताते चले, UP पुलिसकर्मिंयों का पचास लाख का इंश्योरेंस किया गया है, सीएम योगी का पुलिस को इंश्योरेंस तोहफा दिया गया। अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने यह जानकारी दी और सफाई कर्मचारियों को पचास लाख की हेल्थ इंश्योरेंस की गयी। आज इसके अलावा HC के न्यायधीशों ने PM फंड में सहायता राशि दी, तीन,इकतीस,अड़सठ हज़ार नौ सौ चालीस रुपयापए PM फंड में सहायता राशि दी, मुख्य न्यायाधीश UP ने एक लाख CM फंड में दिए। |
बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनी राजदान का 25 अक्टोबर को जन्मदिन है। सोनी राजदान ने हालांकि फिल्मों में काम करना कम कर दिया है लेकिन वे हाल ही में अपनी बेटी आलिया भट्ट के साथ फिल्म 'राज़ी' में नज़र आई थीं।
ऑन-स्क्रीन मां-बेटी की जोड़ी कमाल की थी। वहीं ऑफ-स्क्रीन भी दोनों की बांडिंग कम नहीं है। बॉलीवुड की बेस्ट मां-बेटी जोड़ी में एक नाम सोनी राजदान और आलिया भट्ट का भी आता है।
आलिया पूरा तरह अपनी मां जैसी भी दिखती हैं। मां के जन्मदिन पर आलिया भट्ट ने सोशल मीडिया पर उन्हें विश किया है। खास बात यह है कि आलिया ने अपनी मां का एक पुराना पिक्चर शेयर किया है जिसमें वे बहुत खूबसूरत लग रही हैं। आलिया ने इंस्टाग्राम पर अपनी मां और पापा की एक पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट पिक्चर पोस्ट की।
आलिया ने इस प्यारे पिक्चर पर कैप्शन दिया कि हैप्पी बर्थडे मेरी प्यारी खूबसूरत मां. . हर तरह से सुंदरता का एक शानदार उदाहरण होने के लिए धन्यवाद. . मैं शब्दों से बयां नहीं कर सकती कि मैं आपके जैसी मां, दोस्त, पार्टनर जो साथ में डाइट करने की कोशिश करता हो, को पाकर कितनी खुशनसीब हूं. . आई लव यू।
इसमें सोनी राजदान वाकई बहुत ही खूबसूरत लग रही हैं। उनके पति फिल्ममेकर महेश भट्ट भी फोटो में किसी से कुछ कहते नज़र आ रहे हैं और सोनी बहुत ही मासूमियत से खड़ी हुई हैं। सोनी राजदान का आज 62वां जन्मदिन है। सोनी राजदान को जन्मदिन की बहुत बधाई।
| बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनी राजदान का पच्चीस अक्टोबर को जन्मदिन है। सोनी राजदान ने हालांकि फिल्मों में काम करना कम कर दिया है लेकिन वे हाल ही में अपनी बेटी आलिया भट्ट के साथ फिल्म 'राज़ी' में नज़र आई थीं। ऑन-स्क्रीन मां-बेटी की जोड़ी कमाल की थी। वहीं ऑफ-स्क्रीन भी दोनों की बांडिंग कम नहीं है। बॉलीवुड की बेस्ट मां-बेटी जोड़ी में एक नाम सोनी राजदान और आलिया भट्ट का भी आता है। आलिया पूरा तरह अपनी मां जैसी भी दिखती हैं। मां के जन्मदिन पर आलिया भट्ट ने सोशल मीडिया पर उन्हें विश किया है। खास बात यह है कि आलिया ने अपनी मां का एक पुराना पिक्चर शेयर किया है जिसमें वे बहुत खूबसूरत लग रही हैं। आलिया ने इंस्टाग्राम पर अपनी मां और पापा की एक पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट पिक्चर पोस्ट की। आलिया ने इस प्यारे पिक्चर पर कैप्शन दिया कि हैप्पी बर्थडे मेरी प्यारी खूबसूरत मां. . हर तरह से सुंदरता का एक शानदार उदाहरण होने के लिए धन्यवाद. . मैं शब्दों से बयां नहीं कर सकती कि मैं आपके जैसी मां, दोस्त, पार्टनर जो साथ में डाइट करने की कोशिश करता हो, को पाकर कितनी खुशनसीब हूं. . आई लव यू। इसमें सोनी राजदान वाकई बहुत ही खूबसूरत लग रही हैं। उनके पति फिल्ममेकर महेश भट्ट भी फोटो में किसी से कुछ कहते नज़र आ रहे हैं और सोनी बहुत ही मासूमियत से खड़ी हुई हैं। सोनी राजदान का आज बासठवां जन्मदिन है। सोनी राजदान को जन्मदिन की बहुत बधाई। |
श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। उन्होंने राज्य में दो अलग-अलग जगहों से छह संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है. सुरक्षा बलों के साथ मिलकर मध्य कश्मीर के बडगाम जिले से प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के तीन आतंकवादी सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया है।
इसके साथ ही बारामूला पुलिस और सेना के संयुक्त ऑपरेशन के दौरान उरी से तीन आतंकी साथियों को भी गिरफ्तार किया गया है. सुरक्षा बलों ने कश्मीर घाटी में आतंकरोधी अभियान जारी रखते हुए कुल 6 आतंकी सहयोगियों को गिरफ्तार किया है.
आतंकी सहयोगियों के पास से कई हथियार भी बरामद हुए हैं. जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने सेना (62 आरआर) के साथ मिलकर जिला बडगाम के खानसाहिब इलाके में 3 आतंकी साथियों को गिरफ्तार किया है। उनकी पहचान करमशोरा निवासी कैसर अहमद डार, वागर निवासी ताहिर अहमद डार और वागर निवासी आकिब रशीद गनी के रूप में हुई है।
उनके पास से पांच ग्रेनेड, असॉल्ट राइफल की दो मैगजीन और 57 कारतूस, एक पिस्तौल और अन्य सामान बरामद किया गया है। गिरफ्तार ओवरग्राउंड वर्करों ने बताया कि उनके पास से बरामद ग्रेनेड और पिस्तौल को उनके आकाओं ने कुछ सक्रिय आतंकियों तक पहुंचाने का काम सौंपा था. इन हथियारों का इस्तेमाल स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा बलों के अलावा भीड़भाड़ वाले इलाकों में हमले के लिए किया जाना था।
बडगाम से गिरफ्तार आतंकियों के साथियों के पास से एक चीनी हैंड ग्रेनेड, दो मैगजीन और 57 जिंदा कारतूस बरामद हुए थे. इस बीच, बारामूला जिले में सेना की 16 ट्रेनिंग रेजिमेंट और पुलिस के संयुक्त गश्ती दल ने नियंत्रण रेखा के पास चारुंडा उरी में एक संदिग्ध को देखा। गश्ती दल को देखकर संदिग्ध युवक ने भागने की कोशिश की लेकिन जवानों ने उसे खदेड़ कर पकड़ लिया.
उसकी तलाशी लेने पर उसके पास से दो ग्रेनेड बरामद हुए। जब उससे पूछताछ की गई तो उसने अपने दो अन्य साथियों अहमद दीन और मुहम्मद सादिक खटाना के बारे में बताया. अहमद दीन और सादिक को भी सुरक्षा बलों ने उनके ठिकानों से पकड़ लिया. उनके पास से दो ग्रेनेड, एक चीनी पिस्तौल, एक मैगजीन और चार कारतूस बरामद किए गए हैं।
गिरफ्तार ओवरग्राउंड वर्करों ने संबंधित अधिकारियों को बताया कि उनके पास से बरामद ग्रेनेड और पिस्तौल उनके आकाओं ने कुछ सक्रिय आतंकवादियों को सौंप दिए थे। इन हथियारों का इस्तेमाल स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा बलों के अलावा भीड़भाड़ वाले इलाकों में हमले के लिए किया जाना था। फिलहाल इन सभी से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है.
| श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। उन्होंने राज्य में दो अलग-अलग जगहों से छह संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है. सुरक्षा बलों के साथ मिलकर मध्य कश्मीर के बडगाम जिले से प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकवादी सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही बारामूला पुलिस और सेना के संयुक्त ऑपरेशन के दौरान उरी से तीन आतंकी साथियों को भी गिरफ्तार किया गया है. सुरक्षा बलों ने कश्मीर घाटी में आतंकरोधी अभियान जारी रखते हुए कुल छः आतंकी सहयोगियों को गिरफ्तार किया है. आतंकी सहयोगियों के पास से कई हथियार भी बरामद हुए हैं. जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने सेना के साथ मिलकर जिला बडगाम के खानसाहिब इलाके में तीन आतंकी साथियों को गिरफ्तार किया है। उनकी पहचान करमशोरा निवासी कैसर अहमद डार, वागर निवासी ताहिर अहमद डार और वागर निवासी आकिब रशीद गनी के रूप में हुई है। उनके पास से पांच ग्रेनेड, असॉल्ट राइफल की दो मैगजीन और सत्तावन कारतूस, एक पिस्तौल और अन्य सामान बरामद किया गया है। गिरफ्तार ओवरग्राउंड वर्करों ने बताया कि उनके पास से बरामद ग्रेनेड और पिस्तौल को उनके आकाओं ने कुछ सक्रिय आतंकियों तक पहुंचाने का काम सौंपा था. इन हथियारों का इस्तेमाल स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा बलों के अलावा भीड़भाड़ वाले इलाकों में हमले के लिए किया जाना था। बडगाम से गिरफ्तार आतंकियों के साथियों के पास से एक चीनी हैंड ग्रेनेड, दो मैगजीन और सत्तावन जिंदा कारतूस बरामद हुए थे. इस बीच, बारामूला जिले में सेना की सोलह ट्रेनिंग रेजिमेंट और पुलिस के संयुक्त गश्ती दल ने नियंत्रण रेखा के पास चारुंडा उरी में एक संदिग्ध को देखा। गश्ती दल को देखकर संदिग्ध युवक ने भागने की कोशिश की लेकिन जवानों ने उसे खदेड़ कर पकड़ लिया. उसकी तलाशी लेने पर उसके पास से दो ग्रेनेड बरामद हुए। जब उससे पूछताछ की गई तो उसने अपने दो अन्य साथियों अहमद दीन और मुहम्मद सादिक खटाना के बारे में बताया. अहमद दीन और सादिक को भी सुरक्षा बलों ने उनके ठिकानों से पकड़ लिया. उनके पास से दो ग्रेनेड, एक चीनी पिस्तौल, एक मैगजीन और चार कारतूस बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार ओवरग्राउंड वर्करों ने संबंधित अधिकारियों को बताया कि उनके पास से बरामद ग्रेनेड और पिस्तौल उनके आकाओं ने कुछ सक्रिय आतंकवादियों को सौंप दिए थे। इन हथियारों का इस्तेमाल स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा बलों के अलावा भीड़भाड़ वाले इलाकों में हमले के लिए किया जाना था। फिलहाल इन सभी से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है. |
लखनऊः पांच राज्यों समेत उत्तर प्रदेश आगामी विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है. ऐसे में राजनीतिक पार्टियां चुनाव की तैयारियों में लग चुकी है. बीएसपी ने चुनाव को लेकर बहुत बड़ा ऐलान किया है. बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने बताया कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने यूपी विधान सभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है और सतीश चंद्र मिश्रा ने बताया की वो खुद भी इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे.
बहुजन समाज पार्टी के नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती चुनाव लड़ने नहीं बल्कि लड़वाने का काम करेंगी. मैं भी यूपी विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ूंगा. मेरी पत्नी कल्पना मिश्रा और मेरा बेटा कपिल मिश्रा भी चुनाव नहीं लड़ेगा. मायावती के भतीजे आकाश आनंद भी चुनाव नहीं लड़ेंगे.
इसके आगे सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनने जा रही है. बीजेपी और समाजवादी पार्टी दूसरे और तीसरे नंबर के लिए लड़ाई कर रहे हैं. चुनाव से पहले और ना ही बाद में किसी के साथ बीएसपी का गठबंधन होगा.
चुनाव आयोग ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 7, मणिपुर में 2, पंजाब-उत्तराखंड और गोवा में 1-1 चरण में होगा मतदान, 10 मार्च को आएंगे नतीजे.
UP Election 2022 Date: यूपी में 7 चरणों में होगा चुनाव. पहला चरण 10 फरवरी, दूसरा चरण 14 फरवरी, तीसरा चरण 20 फरवरी, चौथा चरण 23 फरवरी, पांचवा चरण 27 फरवरी, छठा चरण 3 मार्च, सातवां चरण 7 मार्च.
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| लखनऊः पांच राज्यों समेत उत्तर प्रदेश आगामी विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है. ऐसे में राजनीतिक पार्टियां चुनाव की तैयारियों में लग चुकी है. बीएसपी ने चुनाव को लेकर बहुत बड़ा ऐलान किया है. बीएसपी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ने बताया कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने यूपी विधान सभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है और सतीश चंद्र मिश्रा ने बताया की वो खुद भी इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे. बहुजन समाज पार्टी के नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती चुनाव लड़ने नहीं बल्कि लड़वाने का काम करेंगी. मैं भी यूपी विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ूंगा. मेरी पत्नी कल्पना मिश्रा और मेरा बेटा कपिल मिश्रा भी चुनाव नहीं लड़ेगा. मायावती के भतीजे आकाश आनंद भी चुनाव नहीं लड़ेंगे. इसके आगे सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकार बनने जा रही है. बीजेपी और समाजवादी पार्टी दूसरे और तीसरे नंबर के लिए लड़ाई कर रहे हैं. चुनाव से पहले और ना ही बाद में किसी के साथ बीएसपी का गठबंधन होगा. चुनाव आयोग ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सात, मणिपुर में दो, पंजाब-उत्तराखंड और गोवा में एक-एक चरण में होगा मतदान, दस मार्च को आएंगे नतीजे. UP Election दो हज़ार बाईस Date: यूपी में सात चरणों में होगा चुनाव. पहला चरण दस फरवरी, दूसरा चरण चौदह फरवरी, तीसरा चरण बीस फरवरी, चौथा चरण तेईस फरवरी, पांचवा चरण सत्ताईस फरवरी, छठा चरण तीन मार्च, सातवां चरण सात मार्च. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future. |
IPL 2022 के 59वें मुकाबले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए सीएसके (CSK) की पूरी टीम 97 रनों पर सिमट गयी। वैसे देखा जाये तो CSK मुंबई इंडियंस के खिलाफ तीसरी बार इतने कम स्कोर पर ऑल आउट हुई है। इससे पहले साल 2013 में वानखेड़े स्टेडियम में CSK 79 पर ऑल आउट हुई थी। फिर साल 2019 में चेपॉक स्टेडियम में 109 पर और आज यानी कि 2022 में वानखेड़े में ही CSK 97 रन पर ऑलआउट हो गयी। CSK की बल्लेबाजी के दौरान ओपनर डेवॉन कॉन्वे, मोईन अली और महीष तीक्षणा बिना खाता खोले ही पवेलियन लौट गये। वहीं धोनी एक बार फिर अपनी टीम के लिए सर्वाधिक 36 रन बनाकर नाबाद रहे।
CSK का कोई भी बल्लेबाज मुंबई इंडियंस के गेंदबाज के सामने ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया वहीं मुंबई इंडियंस की तरफ से डेनियल सैम्स ने 3 तो रिले मेरेदिथ और कुमार कार्तिकेय ने 2-2 विकेट चटकाये, इसके अलावा जसप्रीत बुमराह और रमनदीप सिंह को 1-1 विकेट मिला। CSK की पारी खत्म होने के बाद रिले मेरेदिथ ने बातचीत करते हुए क्या कहा, चलिए आगे जानते हैं।
| IPL दो हज़ार बाईस के उनसठवें मुकाबले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए सीएसके की पूरी टीम सत्तानवे रनों पर सिमट गयी। वैसे देखा जाये तो CSK मुंबई इंडियंस के खिलाफ तीसरी बार इतने कम स्कोर पर ऑल आउट हुई है। इससे पहले साल दो हज़ार तेरह में वानखेड़े स्टेडियम में CSK उन्यासी पर ऑल आउट हुई थी। फिर साल दो हज़ार उन्नीस में चेपॉक स्टेडियम में एक सौ नौ पर और आज यानी कि दो हज़ार बाईस में वानखेड़े में ही CSK सत्तानवे रन पर ऑलआउट हो गयी। CSK की बल्लेबाजी के दौरान ओपनर डेवॉन कॉन्वे, मोईन अली और महीष तीक्षणा बिना खाता खोले ही पवेलियन लौट गये। वहीं धोनी एक बार फिर अपनी टीम के लिए सर्वाधिक छत्तीस रन बनाकर नाबाद रहे। CSK का कोई भी बल्लेबाज मुंबई इंडियंस के गेंदबाज के सामने ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया वहीं मुंबई इंडियंस की तरफ से डेनियल सैम्स ने तीन तो रिले मेरेदिथ और कुमार कार्तिकेय ने दो-दो विकेट चटकाये, इसके अलावा जसप्रीत बुमराह और रमनदीप सिंह को एक-एक विकेट मिला। CSK की पारी खत्म होने के बाद रिले मेरेदिथ ने बातचीत करते हुए क्या कहा, चलिए आगे जानते हैं। |
बीआरए बिहार यूनिवर्सिटी में स्नातक पार्ट थ्री की परीक्षा के लिए शुक्रवार को दोपहर से प्रवेश पत्र मिलने लगेंगे। छात्र-छात्राएं संबंधित कॉलेज से कांटेक्ट कर प्रवेश पत्र प्राप्त कर सकते हैं। परीक्षा नियंत्रक डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि प्रवेश पत्र तैयार हो गए है। शुक्रवार की प्रातः से इसे कॉलेजों को भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि कुछ कॉलेजों की तरफ से अबतक छात्रों का सत्यापित परीक्षा फॉर्म उपलब्ध नहीं कराया गया है। यह गंभीर मामला है। 27 नवंबर तक अगर एडमिट कार्ड सेक्शन में इस फॉर्म को नहीं जमा कराया जाता है तथा इसके पश्चात् कोई छात्र परीक्षा से वंचित होंगे तो कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन इसके लिए जिम्मेवार होगा।
उन्होंने कहा कि संबंधित कॉलेज के प्राचार्य से इस सबंध में स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। तीन बार रिमाइंडर देने के पश्चात् भी कॉलेज इसे नहीं भेज रहे हैं। इन कॉलेजों की तरफ से प्रायोगिक परीक्षा का अंक भी नहीं भेजा गया है। जबकि, कॉलेजों को इसबार प्रायोगिक परीक्षा का आयोजन किए बिना ही आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर प्रायोगिक का अंक भेजने को कहा गया था। इसमें छात्र के बीते दो सालों के प्रायोगिक विषयों में अंक तथा कक्षा में परफॉर्मेंस को आधार बनाया जा सकता है।
स्नातक पार्ट थ्री की एग्जाम में मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, शिवहर तथा मोतिहारी के 65 हजार छात्र सम्मिलित होंगे। परीक्षा दो दिसंबर से 10 दिसंबर तक दो पालियों में संचालित की जाएगी। COVID-19 संकट के पश्चात् विश्वविद्यालय की तरफ से पहली बड़ी परीक्षा संचालित हो रही है जिसमें 50 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं सम्मिलित होंगे। ऐसे में COVID-19 के संक्रमण से बचाने के लिए भी व्यवस्था की जा रही हैं। परीक्षा केंद्रों को सैनिटाइज करने के साथ-साथ केंद्रों के बाहर तथा परीक्षा भवन में भी सैनिटाइजर के इंतजाम किए जा रहे है। वीक्षक तथा परीक्षार्थी दोनों मास्क लगाकर एंट्री करेंगे।
| बीआरए बिहार यूनिवर्सिटी में स्नातक पार्ट थ्री की परीक्षा के लिए शुक्रवार को दोपहर से प्रवेश पत्र मिलने लगेंगे। छात्र-छात्राएं संबंधित कॉलेज से कांटेक्ट कर प्रवेश पत्र प्राप्त कर सकते हैं। परीक्षा नियंत्रक डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि प्रवेश पत्र तैयार हो गए है। शुक्रवार की प्रातः से इसे कॉलेजों को भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि कुछ कॉलेजों की तरफ से अबतक छात्रों का सत्यापित परीक्षा फॉर्म उपलब्ध नहीं कराया गया है। यह गंभीर मामला है। सत्ताईस नवंबर तक अगर एडमिट कार्ड सेक्शन में इस फॉर्म को नहीं जमा कराया जाता है तथा इसके पश्चात् कोई छात्र परीक्षा से वंचित होंगे तो कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन इसके लिए जिम्मेवार होगा। उन्होंने कहा कि संबंधित कॉलेज के प्राचार्य से इस सबंध में स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। तीन बार रिमाइंडर देने के पश्चात् भी कॉलेज इसे नहीं भेज रहे हैं। इन कॉलेजों की तरफ से प्रायोगिक परीक्षा का अंक भी नहीं भेजा गया है। जबकि, कॉलेजों को इसबार प्रायोगिक परीक्षा का आयोजन किए बिना ही आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर प्रायोगिक का अंक भेजने को कहा गया था। इसमें छात्र के बीते दो सालों के प्रायोगिक विषयों में अंक तथा कक्षा में परफॉर्मेंस को आधार बनाया जा सकता है। स्नातक पार्ट थ्री की एग्जाम में मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, शिवहर तथा मोतिहारी के पैंसठ हजार छात्र सम्मिलित होंगे। परीक्षा दो दिसंबर से दस दिसंबर तक दो पालियों में संचालित की जाएगी। COVID-उन्नीस संकट के पश्चात् विश्वविद्यालय की तरफ से पहली बड़ी परीक्षा संचालित हो रही है जिसमें पचास हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं सम्मिलित होंगे। ऐसे में COVID-उन्नीस के संक्रमण से बचाने के लिए भी व्यवस्था की जा रही हैं। परीक्षा केंद्रों को सैनिटाइज करने के साथ-साथ केंद्रों के बाहर तथा परीक्षा भवन में भी सैनिटाइजर के इंतजाम किए जा रहे है। वीक्षक तथा परीक्षार्थी दोनों मास्क लगाकर एंट्री करेंगे। |
विल्लुपुरम चिन्नैयापिल्लई गणेशन का जन्म 1 अक्टूबर, 1927 में हुआ था। ये मुख्य रूप से शिवाजी गणेशन नाम से प्रसिद्ध हैं। तमिल सिनेमा की प्रमुख हस्तियों में से एक शिवाजी गणेशन संवाद अदायगी से दर्शकों को मुग्ध कर देने वाले सुपरस्टार थे।
शिवाजी गणेशन ने रंगमंच के साथ-साथ फ़िल्मों में भी अपने अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। वहीं बाद की पीढ़ी के अभिनेताओं को भी अपनी अभिनय शैली से प्रेरित किया। दक्षिण भारत के कई सितारों ने स्वीकार किया है कि उनकी अभिनय शैली शिवाजी गणेशन से प्रभावित थी।
शिवाजी गणेशन का मूल नाम विल्लुपुरम चिन्नैयापिल्लई गणेशन था और उन्होंने सी. एन. अन्ना दुरै द्वारा लिखित,' शिवाजी कांड हिन्दू राज्यम' नाटक में छत्रपति शिवाजी की भूमिका निभायी।
इस नाटक में उनके अभिनय की काफ़ी सराहना हुई और उन्हें 'शिवाजी गणेशन' का नाम मिल गया। इनकी मृत्यु 21 जुलाई 2001 में हुई।
1969 - अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग एवं एडविन एल्ड्रिन चन्द्रमा पर उतरे।
2004 - संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने भारी बहुमत से पश्चिमी किनारे के फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों से इस्रायल को बाढ़ हटाने का प्रस्ताव पारित किया।
2007 - वांशिगटन में चार दिनों तक चले विचार-विमर्श के बाद भारत-अमेरिका परमाणु समझौते का प्रारूप तैयार किया गया।
2008 - नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भारतीय मूल के रामबरन यादव को नेपाल का पहला राष्ट्रपति चुना गया।
1988 - इन्सैट-1सी को इन्सैट प्रणाली को पूर्ण रूप से सक्षम बनाने के लिए 93. 5° पूर्व स्थिति के लिए कोरू से 21 जुलाई, 1988 को प्रमोचित किया गया था।
1972 - जिग्मे दोरजी वांग्चुक - भूटान के तीसरे राजा थे।
2009 - गंगूबाई हंगल - 'भारतीय शास्त्रीय संगीत' की प्रसिद्ध गायिका।
| विल्लुपुरम चिन्नैयापिल्लई गणेशन का जन्म एक अक्टूबर, एक हज़ार नौ सौ सत्ताईस में हुआ था। ये मुख्य रूप से शिवाजी गणेशन नाम से प्रसिद्ध हैं। तमिल सिनेमा की प्रमुख हस्तियों में से एक शिवाजी गणेशन संवाद अदायगी से दर्शकों को मुग्ध कर देने वाले सुपरस्टार थे। शिवाजी गणेशन ने रंगमंच के साथ-साथ फ़िल्मों में भी अपने अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया। वहीं बाद की पीढ़ी के अभिनेताओं को भी अपनी अभिनय शैली से प्रेरित किया। दक्षिण भारत के कई सितारों ने स्वीकार किया है कि उनकी अभिनय शैली शिवाजी गणेशन से प्रभावित थी। शिवाजी गणेशन का मूल नाम विल्लुपुरम चिन्नैयापिल्लई गणेशन था और उन्होंने सी. एन. अन्ना दुरै द्वारा लिखित,' शिवाजी कांड हिन्दू राज्यम' नाटक में छत्रपति शिवाजी की भूमिका निभायी। इस नाटक में उनके अभिनय की काफ़ी सराहना हुई और उन्हें 'शिवाजी गणेशन' का नाम मिल गया। इनकी मृत्यु इक्कीस जुलाई दो हज़ार एक में हुई। एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर - अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग एवं एडविन एल्ड्रिन चन्द्रमा पर उतरे। दो हज़ार चार - संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने भारी बहुमत से पश्चिमी किनारे के फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों से इस्रायल को बाढ़ हटाने का प्रस्ताव पारित किया। दो हज़ार सात - वांशिगटन में चार दिनों तक चले विचार-विमर्श के बाद भारत-अमेरिका परमाणु समझौते का प्रारूप तैयार किया गया। दो हज़ार आठ - नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भारतीय मूल के रामबरन यादव को नेपाल का पहला राष्ट्रपति चुना गया। एक हज़ार नौ सौ अठासी - इन्सैट-एकसी को इन्सैट प्रणाली को पूर्ण रूप से सक्षम बनाने के लिए तिरानवे. पाँच° पूर्व स्थिति के लिए कोरू से इक्कीस जुलाई, एक हज़ार नौ सौ अठासी को प्रमोचित किया गया था। एक हज़ार नौ सौ बहत्तर - जिग्मे दोरजी वांग्चुक - भूटान के तीसरे राजा थे। दो हज़ार नौ - गंगूबाई हंगल - 'भारतीय शास्त्रीय संगीत' की प्रसिद्ध गायिका। |
नयी दिल्ली 22 मई गायत्री हाईवेज लिमिटेड ने एचकेआर रोडवेज के मौजूदा शेयरधारकों से कंपनी की 13 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा जताई है।
गायत्री हाईवेज ने शनिवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि एचकेआर रोडवेज के मौजूदा शेयरधारकों ने उसे 10 रुपये के अंकित मूल्य के 6,03,498 पूर्ण चुकता शेयरों की बिक्री की सहमति व्यक्त की है। ये शेयर कुल मिलाकर 60,34,980 रुपये के हैं।
एचकेआर रोडवेज को वित्त वर्ष 2019-20 में 187. 44 करोड़ रुपये की आय हुई थी। उसने कहा कि यह अधिग्रहण एचकेआर रोडवेज के शेयरधारकों की मंजूरी की तिथि से 60 दिनों के भीतर पूरा किया जाने की उम्मीद है।
एचकेआर रोडवेज तेलंगाना में सरकारी निजी कंपनी भागीदारी के तहत चार लेन कं राजमार्ग का निर्माण कर रही है।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| नयी दिल्ली बाईस मई गायत्री हाईवेज लिमिटेड ने एचकेआर रोडवेज के मौजूदा शेयरधारकों से कंपनी की तेरह प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की इच्छा जताई है। गायत्री हाईवेज ने शनिवार को शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि एचकेआर रोडवेज के मौजूदा शेयरधारकों ने उसे दस रुपयापये के अंकित मूल्य के छः,तीन,चार सौ अट्ठानवे पूर्ण चुकता शेयरों की बिक्री की सहमति व्यक्त की है। ये शेयर कुल मिलाकर साठ,चौंतीस,नौ सौ अस्सी रुपयापये के हैं। एचकेआर रोडवेज को वित्त वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस में एक सौ सत्तासी. चौंतालीस करोड़ रुपये की आय हुई थी। उसने कहा कि यह अधिग्रहण एचकेआर रोडवेज के शेयरधारकों की मंजूरी की तिथि से साठ दिनों के भीतर पूरा किया जाने की उम्मीद है। एचकेआर रोडवेज तेलंगाना में सरकारी निजी कंपनी भागीदारी के तहत चार लेन कं राजमार्ग का निर्माण कर रही है। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
इक्कीस दिन के लॉकडाउन की सफलता और उसे आगामी तीन मई तक बढ़ाने के फैसले ने केंद्र और राज्य सरकारों के सामने जांच की सुविधा बढ़ाने, वायरस के प्रसार के पैटर्न को परखने, असंगठित क्षेत्र में रोजगार खो चुके 40 करोड़ लोगों को सुरक्षा देने, डॉक्टरों तथा चिकित्साकर्मियों की सुरक्षा करने, लघु तथा मध्यम स्तर की औद्योगिक इकाइयों के लिए पैकेज की घोषणा करने, कट चुकी 80 फीसदी रबी फसल का प्रबंधन करने, दूसरी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों का इलाज करने तथा पंजाब में फंसे 80,000 अनिवासी भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने जैसी कई चुनौतियां पेश की हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में स्पष्ट किया कि लॉकडाउन बढ़ाने के मामले पर सर्वसम्मति बनने के बाद ही यह फैसला लिया गया तथा कई राज्यों ने अपने स्तर पर यह कदम पहले ही उठा लिया, पर केंद्र सरकार हॉटस्पॉट्स पर 20 अप्रैल तक नजर रखेगी, जिसके बाद कुछ और छूटों की घोषणा की जाएगी। प्रधानमंत्री ने नए पैकेज की घोषणा नहीं की, पर सात सूत्री सुझावों का पालन करने पर जोर दिया।
विश्लेषकों का मानना है कि राज्यों द्वारा एक तरह की नीति अपनाने तथा प्रधानमंत्री का सर्वसहमति बनाने के लिए सक्रियता दिखाने के कारण भारत ने अब तक कोरोना वायरस को सामुदायिक स्तर पर फैलने से रोक दिया है। लॉकडाउन बढ़ाने समेत दूसरी रणनीतियों पर सहमति बनाने के लिए पहले के अपने रुख से परे हटकर प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं से बात की।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, अगर 24 मार्च से लॉकडाउन लागू करने का समयोचित फैसला नहीं लिया जाता, तो 14 अप्रैल तक देश में कोरोना से मौत का आंकड़ा 8. 20 लाख को पार कर जाता। उनका यह भी कहना है कि बीसीजी के टीके के कारण भी हमारे यहां इस वायरस से लड़ने की इम्युनिटी है, जबकि विकसित देशों में यह टीका नहीं लगाया जाता।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का यह भी दावा भी उम्मीद जताने वाला है कि देश में अब तक इस वायरस के सामुदायिक स्तर पर फैलने का कोई संकेत नहीं है। वैश्विक स्तर पर दृश्य दूसरे हैं, तथा संक्रमण तथा मौत के निरंतर बढ़ते आंकड़ों से अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, स्पेन आदि खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
विशेषज्ञ लॉकडाउन के बढ़ाए जाने को सकारात्मक मान रहे हैं, क्योंकि इससे राज्यों को संक्रमण के नए मामलों की जांच का अवसर मिल जाएगा, जिससे इस बारे में जानकारी मिल सकेगी कि समुदाय के स्तर पर वायरस के फैलने की आशंका कितनी है। नीति नियंताओं और राज्य सरकारों की चिंता का बड़ा कारण यही है।
महाराष्ट्र ने बड़े पैमाने पर जांच शुरू की है। मध्य प्रदेश ने प्रवासी मजदूरों तक जांच का पैमाना बढ़ा दिया है। उत्तर प्रदेश ने पूल टेस्टिंग समेत बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है। बिहार ने आउटडोर मरीजों के लिए दरवाजे खोले हैं और घर-घर जांच हो रही है। पश्चिम बंगाल ने लॉकडाउन को मानवीय चेहरा देने की कोशिश की है।
तेलंगाना ने जरूरी चीजों के वितरण पर जोर दिया है, तो हरियाणा औद्योगिक गतिविधियां शुरू करना चाहता है। तमिलनाडु और पंजाब वायरस को रोकने के लिए सख्ती बरत रहे हैं, तो राजस्थान ने अपनी गतिविधियां हॉटस्पॉट्स पर केंद्रित रखी हैं। केरल, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश आदि राज्य कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।
लॉकडाउन बढ़ा देने के बाद केंद्र और राज्य सरकारों के सामने असली चुनौती है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती जांच का दायरा बढ़ाने की है, ताकि संक्रमितों की सही संख्या का पता चल सके। राज्यों को जांच के लिए प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ानी होगी, और इस मामले में धन की कमी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि केंद्र पर्याप्त मदद कर रहा है।
दूसरी बड़ी प्राथमिकता डॉक्टरों और दूसरे चिकित्साकर्मियों की सुरक्षा होनी चाहिए। वे जोखिम उठा रहे हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा के साथ पीपीई की खरीद, पर्याप्त बेड और वेंटिलेटर्स का इंतजाम होना चाहिए। कोरोना के खिलाफ जंग में लगे डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों पर हाल में हुए हमले बेहद गंभीर हैं, लिहाजा केंद्र को ऐसे हमलों पर सख्त सजा के प्रावधान वाला अध्यादेश लाना चाहिए।
तीसरी बात यह कि लॉकडाउन के बाद की रणनीति पर काम करने के लिए प्रधानमंत्री को एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स गठित करना चाहिए, जिसमें शीर्ष अर्थशास्त्री हों। देश में अस्पतालों के बंद होने से अनेक गंभीर मरीजों का जीवन खतरे में पड़ गया है। इनमें रोज डायलिसिस कराने वाले हैं, तो कीमोथैरेपी कराने वाले कैंसर के मरीज भी, अविलंब ऑपरेशन की जरूरत वाले दिल के रोगी भी, तो गंभीर स्थिति में पहुंची गर्भवती महिलाएं भी।
ऐसे ही, प्रधानमंत्री का नया नारा, 'जान भी है और जहान भी' पहले के नारे 'जान है, तो जहान है' से आगे की रणनीति का संकेत देता है। ऐसे में, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए योजना की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने कहा है कि असंगठित क्षेत्र के 40 करोड़ कर्मचारी गरीबी के दायरे में आ जाएंगे। इनका अस्तित्व बचाने के लिए सरकार को बजट में 10 लाख करोड़ रुपये का आवंटन करना होगा।
अमेरिका में एच-1 वीजा प्राप्त हजारों भारतीय सड़कों पर आ जाने वाले हैं, क्योंकि उनके वीजा नवीकरण की कोई संभावना नहीं है। ऐसे ही, कोरोना के कारण पंजाब में फंसे करीब 80,000 अनिवासी भारतीयों को ब्रिटेन, अमेरिका और दूसरे देशों में भेजने की समस्या भी बड़ी है। कोरोना के खिलाफ जंग में राजस्थान के भीलवाड़ा मॉडल की देश-दुनिया में तारीफ हुई है। लिहाजा जांच पर जोर देने और लॉकडाउन को सख्ती से लागू करने के इस मॉडल को दूसरे राज्य और केंद्र सरकार लागू करें, यही तार्किक है।
दक्षिण कोरिया के इंटरनेशनल वैक्सीन इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. जेरेमी एच किम के मुताबिक, कोरोना की वैक्सीन शायद 2021 में उपलब्ध हो। उन्होंने कहा है कि संक्रमण के बारे में जानने के लिए भारत को जांच का दायरा व्यापक करना होगा, जिससे सामुदायिक स्तर पर वायरस के फैलने के खिलाफ रणनीति बनाई जा सकती है। (लेखक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हैं। )
| इक्कीस दिन के लॉकडाउन की सफलता और उसे आगामी तीन मई तक बढ़ाने के फैसले ने केंद्र और राज्य सरकारों के सामने जांच की सुविधा बढ़ाने, वायरस के प्रसार के पैटर्न को परखने, असंगठित क्षेत्र में रोजगार खो चुके चालीस करोड़ लोगों को सुरक्षा देने, डॉक्टरों तथा चिकित्साकर्मियों की सुरक्षा करने, लघु तथा मध्यम स्तर की औद्योगिक इकाइयों के लिए पैकेज की घोषणा करने, कट चुकी अस्सी फीसदी रबी फसल का प्रबंधन करने, दूसरी गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों का इलाज करने तथा पंजाब में फंसे अस्सी,शून्य अनिवासी भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने जैसी कई चुनौतियां पेश की हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में स्पष्ट किया कि लॉकडाउन बढ़ाने के मामले पर सर्वसम्मति बनने के बाद ही यह फैसला लिया गया तथा कई राज्यों ने अपने स्तर पर यह कदम पहले ही उठा लिया, पर केंद्र सरकार हॉटस्पॉट्स पर बीस अप्रैल तक नजर रखेगी, जिसके बाद कुछ और छूटों की घोषणा की जाएगी। प्रधानमंत्री ने नए पैकेज की घोषणा नहीं की, पर सात सूत्री सुझावों का पालन करने पर जोर दिया। विश्लेषकों का मानना है कि राज्यों द्वारा एक तरह की नीति अपनाने तथा प्रधानमंत्री का सर्वसहमति बनाने के लिए सक्रियता दिखाने के कारण भारत ने अब तक कोरोना वायरस को सामुदायिक स्तर पर फैलने से रोक दिया है। लॉकडाउन बढ़ाने समेत दूसरी रणनीतियों पर सहमति बनाने के लिए पहले के अपने रुख से परे हटकर प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं से बात की। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, अगर चौबीस मार्च से लॉकडाउन लागू करने का समयोचित फैसला नहीं लिया जाता, तो चौदह अप्रैल तक देश में कोरोना से मौत का आंकड़ा आठ. बीस लाख को पार कर जाता। उनका यह भी कहना है कि बीसीजी के टीके के कारण भी हमारे यहां इस वायरस से लड़ने की इम्युनिटी है, जबकि विकसित देशों में यह टीका नहीं लगाया जाता। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का यह भी दावा भी उम्मीद जताने वाला है कि देश में अब तक इस वायरस के सामुदायिक स्तर पर फैलने का कोई संकेत नहीं है। वैश्विक स्तर पर दृश्य दूसरे हैं, तथा संक्रमण तथा मौत के निरंतर बढ़ते आंकड़ों से अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, स्पेन आदि खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। विशेषज्ञ लॉकडाउन के बढ़ाए जाने को सकारात्मक मान रहे हैं, क्योंकि इससे राज्यों को संक्रमण के नए मामलों की जांच का अवसर मिल जाएगा, जिससे इस बारे में जानकारी मिल सकेगी कि समुदाय के स्तर पर वायरस के फैलने की आशंका कितनी है। नीति नियंताओं और राज्य सरकारों की चिंता का बड़ा कारण यही है। महाराष्ट्र ने बड़े पैमाने पर जांच शुरू की है। मध्य प्रदेश ने प्रवासी मजदूरों तक जांच का पैमाना बढ़ा दिया है। उत्तर प्रदेश ने पूल टेस्टिंग समेत बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है। बिहार ने आउटडोर मरीजों के लिए दरवाजे खोले हैं और घर-घर जांच हो रही है। पश्चिम बंगाल ने लॉकडाउन को मानवीय चेहरा देने की कोशिश की है। तेलंगाना ने जरूरी चीजों के वितरण पर जोर दिया है, तो हरियाणा औद्योगिक गतिविधियां शुरू करना चाहता है। तमिलनाडु और पंजाब वायरस को रोकने के लिए सख्ती बरत रहे हैं, तो राजस्थान ने अपनी गतिविधियां हॉटस्पॉट्स पर केंद्रित रखी हैं। केरल, छत्तीसगढ़, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश आदि राज्य कोविड-उन्नीस के खिलाफ लड़ाई में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। लॉकडाउन बढ़ा देने के बाद केंद्र और राज्य सरकारों के सामने असली चुनौती है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती जांच का दायरा बढ़ाने की है, ताकि संक्रमितों की सही संख्या का पता चल सके। राज्यों को जांच के लिए प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ानी होगी, और इस मामले में धन की कमी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि केंद्र पर्याप्त मदद कर रहा है। दूसरी बड़ी प्राथमिकता डॉक्टरों और दूसरे चिकित्साकर्मियों की सुरक्षा होनी चाहिए। वे जोखिम उठा रहे हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा के साथ पीपीई की खरीद, पर्याप्त बेड और वेंटिलेटर्स का इंतजाम होना चाहिए। कोरोना के खिलाफ जंग में लगे डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों पर हाल में हुए हमले बेहद गंभीर हैं, लिहाजा केंद्र को ऐसे हमलों पर सख्त सजा के प्रावधान वाला अध्यादेश लाना चाहिए। तीसरी बात यह कि लॉकडाउन के बाद की रणनीति पर काम करने के लिए प्रधानमंत्री को एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स गठित करना चाहिए, जिसमें शीर्ष अर्थशास्त्री हों। देश में अस्पतालों के बंद होने से अनेक गंभीर मरीजों का जीवन खतरे में पड़ गया है। इनमें रोज डायलिसिस कराने वाले हैं, तो कीमोथैरेपी कराने वाले कैंसर के मरीज भी, अविलंब ऑपरेशन की जरूरत वाले दिल के रोगी भी, तो गंभीर स्थिति में पहुंची गर्भवती महिलाएं भी। ऐसे ही, प्रधानमंत्री का नया नारा, 'जान भी है और जहान भी' पहले के नारे 'जान है, तो जहान है' से आगे की रणनीति का संकेत देता है। ऐसे में, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए योजना की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने कहा है कि असंगठित क्षेत्र के चालीस करोड़ कर्मचारी गरीबी के दायरे में आ जाएंगे। इनका अस्तित्व बचाने के लिए सरकार को बजट में दस लाख करोड़ रुपये का आवंटन करना होगा। अमेरिका में एच-एक वीजा प्राप्त हजारों भारतीय सड़कों पर आ जाने वाले हैं, क्योंकि उनके वीजा नवीकरण की कोई संभावना नहीं है। ऐसे ही, कोरोना के कारण पंजाब में फंसे करीब अस्सी,शून्य अनिवासी भारतीयों को ब्रिटेन, अमेरिका और दूसरे देशों में भेजने की समस्या भी बड़ी है। कोरोना के खिलाफ जंग में राजस्थान के भीलवाड़ा मॉडल की देश-दुनिया में तारीफ हुई है। लिहाजा जांच पर जोर देने और लॉकडाउन को सख्ती से लागू करने के इस मॉडल को दूसरे राज्य और केंद्र सरकार लागू करें, यही तार्किक है। दक्षिण कोरिया के इंटरनेशनल वैक्सीन इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. जेरेमी एच किम के मुताबिक, कोरोना की वैक्सीन शायद दो हज़ार इक्कीस में उपलब्ध हो। उन्होंने कहा है कि संक्रमण के बारे में जानने के लिए भारत को जांच का दायरा व्यापक करना होगा, जिससे सामुदायिक स्तर पर वायरस के फैलने के खिलाफ रणनीति बनाई जा सकती है। |
मैकाइवर एव पेज के अनुसार, "समाजशास्त्री होने के नाते हमारी रुचि सामाजिक सम्बन्धों में है। केवल इन सामाजिक सम्बन्धों में होने वाले परिवर्तन को ही सामाजिक परिवर्तन कहते हैं । "
जेन्सन के मत में, "सामाजिक परिवर्तन को लोगो के कार्य करने तथा विचार करने के तरीकों में होने वाले रुपान्तरण के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। "
वोटोमोर के अनुसार, सामाजिक परिवर्तन के अन्तर्गत उन परिवर्तनों को सम्मिलित किया जा सकता है जो सामाजिक संरचना, सामाजिक संस्थाओं अथवा उनके पारस्परिक सम्बन्धों में घटित होते हैं।
गिलिन एवं गिलिन के अनुसार, सामाजिक परिवर्तन जीवन को मानी हुई रोतिथो में परिवर्तन को कहते हैं। चाहे ये परिवर्तन भौगोलिक दशाओं में परिवर्तन से हुए हो या सास्कृतिक साधनो, जनसंख्या की रचना या विचारधारा के परिवर्तन से अथवा समूह के अन्दर ही आविष्कारों के फलस्वरूप हुए हो। "
गिन्सवर्ग के अनुसार, "सामाजिक परिवर्तन का अर्थ सामाजिक ढांचे में परिवर्तन से है अर्थात् समाज के आकार, इसके विभिन्न अगो अथवा इसके संगठन के प्रकारों को बनावट एवं सन्तुलन मे होने वाले परिवर्तनो को सामाजिक परिवर्तन कहा जाता है।"
जोन्स के शब्दों में, "सामाजिक परिवर्तन वह शब्द है जो सामाजिक प्रक्रियाओं, सामाजिक प्रतिमानो, सामाजिक अन्तः क्रियाओं अथवा सामाजिक संगठन के किसी भाग में गठित होने वाले हेर-फेर या संशोधनों के लिए प्रयोग किया जाता है। "
मैरिल एवं एल्ड्रिन के अनुसार, "जब मानव-व्यवहार रूपान्तरण को प्रक्रिया में होता है तब हम उसी को दूसरे रूप में इस प्रकार कहते हैं कि सामाजिक परिवर्तन हो रहा है। " इस प्रकार इन्होंने मानव-क्रियाओं में होने वाले परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन
कहा है।
उपर्युक्त सभी परिभाषाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि सामाजिक परिवर्तन मे वे परिवर्तन सम्मिलित होते हैं जो मानवीय क्रियाओं, सामाजिक प्रक्रियाओं, व्यवहारों, संस्थाओं, प्रथाओं, प्रकार्यों अथवा सामाजिक ढाँचे अर्थात् सामाजिक संगठन और समाज के आकारों आदि में होते हैं। सामाजिक परिवर्तन में निम्नलिखित तथ्यों को लिया जा सकता है(1) सामाजिक परिवर्तन समाज को संरचना एवं उसके प्रकार्यों में परिवर्तन को
कहते हैं ।
(2) सामाजिक परिवर्तन व्यक्ति विशेष अथवा कुछ ही व्यक्तियों में आए परिवर्तन से नहीं माना जाता, बल्कि समाज के अधिकांश अथवा सभी व्यक्तियों द्वारा उसे जीवन-विधि व विश्वासों में स्वीकार किए जाने पर माना जाता है।
(4) सामाजिक परिवर्तन मानव के सामाजिक सम्बन्धो में परिवर्तन से सम्बन्धित है।
सामाजिक परिवर्तन की विशेषतायें
(Characteristics of Social Change) विभिन्न विद्वानों ने सामाजिक परिवर्तन की अनेक विशेषताएँ बताई हैं जो इसकी अवधारणा को और अधिक स्पष्ट करती हैं। ये विशेषताएँ अग्रलिखित हैं1. सामाजिक प्रकृति (Social nature) - सामाजिक परिवर्तन का सम्बन्ध सम्पूर्ण समाज में होने वाले परिवर्तन से होता है न कि व्यक्तिगत स्तर पर हुए परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन कहा जा सकता है। अर्थात् जब सम्पूर्ण समाज की इकाइयों; जैसे-जाति, वर्ग, समूह, समुदाय आदि के स्तर पर परिवर्तन आता है तभी उसे सामाजिक परिवर्तन की संज्ञा दी जाती है । किसी एक इकाई में होने वाले परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन नहीं कह सकते।
2. सार्वभौमिक प्रघटना ( Universal phenornenon) सामाजिक परिवर्तन सार्वकालिक एवं सार्वभौमिक है। विश्व का कोई ऐसा समाज नहीं जहाँ परिवर्तन न हुआ हो। यद्यपि विभिन्न समाजों में परिवर्तन की गति एवं स्वरूप भिन्न हो सकता है क्योंकि कोई भी दो समाज एक जैसे नहीं होते हैं। उनके इतिहास, संस्कृति, प्रकृति आदि में इतनी भिन्नता होती है कि कोई एक-दूसरे का प्रतिरूप नहीं हो सकता, परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत सत्य है अतः समाज के स्तर पर यह सभी कालों में व सभी समाजों में किसी न किसी रूप में होता अवश्य है ।
3. स्वाभाविक एवं अवश्यम्भावी (Natural and inevitable)- परिवर्तन चूँकि प्रकृति का शाश्वत सत्य है, आवश्यक रूप से होता है अतः यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया कही जा सकती है। समाज भी स्वाभाविक रूप से परिवर्तित होता रहता है। प्रायः मानव स्वभाव परिवर्तन का विरोधी होता है लेकिन फिर भी परिवर्तन तो होता ही है क्योकि व्यक्ति की आवश्यकताएँ, इच्छाएँ, परिस्थितियाँ स्वाभाविक रूप से परिवर्तन के लिए उत्तरदायी होती हैं। मानव अपनी बदलती परिस्थिति से समायोजन करने के लिए अनिवार्य रूप से परिवर्तन को स्वीकार कर लेता है। यह एक स्वाभाविक घटना है।
4. तुलनात्मक एवं असमान गति (Comparative and unequal speed) - सामाजिक परिवर्तन सभी समाजों में पाया जाता है किन्तु सभी समाजों में इसकी गति अलग-अलग होती है। ग्रामीण समाजों में परिवर्तन बड़ी मन्द गति से आता है। इसका कारण यह होता है कि वहाँ पर परिवर्तन लाने वाले कारक भिन्न प्रकार के होते हैं जबकि शहरी समाज में परिवर्तन तेज गति से आता है। इन दोनों स्थानों में आए परिवर्तन को तुलना द्वारा ही बताया जा सकता है कि किस स्थान पर कितना परिवर्तन आया उदाहरण के लिए आदिम समाजों को तुलना में शहरी समाज में सामाजिक परिवर्तन तीव्र गति से होता है। शहरी क्षेत्र में तकनीकी विकास आदिम क्षेत्र की तुलना में तीव्र गति से हो रहा है। यहाँ हम दोनों समाजों में हुए सामाजिक परिवर्तन की तुलना करके ही उनकी असमान गति का अनुमान लगा पा रहे हैं ।
5. जटिल प्रघटना (Complex phenomenon) - दो समाजो में हुए परिवर्तनों को तुलना के आधार पर यह स्पष्ट हो जाता है कि सामाजिक परिवर्तन हुआ है किन्तु कितना या किस
स्तर का ? इसकी माप-तोल सम्भव नहीं होती। उदाहरण के लिए आज के विचार, मूल्य, परम्पराएँ, रीतिरिवाज प्राचीन समय से भिन्नता लिए हुए हैं लेकिन कितना अन्तर है इसको मापा नहीं जा सकता क्योंकि परिवर्तन गुणात्मक रूप में होता है। अतः सामाजिक परिवर्तन की विशेषता यह है कि यह एक जटिल तथ्य है, सरलता से इसका रूप नहीं समझा जा सकता।
6 भविष्यवाणी असम्भव (Prediction is impossible) - परिवर्तन होता तो अवश्य है लेकिन वह किस दिशा में होगा' किस रूप में होगा ? किस स्थान पर होगा आदि स्पष्ट नहीं होता । उदाहरण के लिए तकनीकी विकास का प्रभाव सम्पूर्ण देश पर पड़ा है। रहन-सहन, भोजन-व्यवस्था, आवागमन, भौतिक सुख-सुविधा आदि अनेक क्षेत्र इससे प्रभावित हैं लेकिन व्यक्तियों के विचार, विश्वास, मूल्य किस सीमा तक इससे प्रभावित हैं और होगे इसकी भविष्यवाणी असम्भव नहीं तो दुष्कर कार्य अवश्य है । औद्योगीकरण और नगरीकरण ने संयुक्त परिवार, विवाह, जाति प्रथा आदि अनेक क्षेत्रों को प्रभावित किया है जिसके सम्पूर्ण प्रभाव के विषय मे निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। केवल पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
विल्बर्ट मूर ने अपनी पुस्तक 'सोशियल चेन्ज' में सामाजिक परिवर्तन को निम्नलिखित विशेषताओं को बताया है -
(1) अनिवार्य नियम - सामाजिक परिवर्तन अनिवार्य नियम है अर्थात् सामाजिक संरचना के किसी-न-किसी अंश अथवा सम्पूर्ण अंश में परिवर्तन अवश्य होता है। सामाजिक पुनर्निर्माण की अवधि में यह सर्वाधिक तीव्र गति से होता है।
(2) आधुनिक समाजों में अधिक - आधुनिक समाजों में सामाजिक परिवर्तन अधिक होते हैं जिन्हे स्पष्टतया देखा भी जा सकता है। प्राचीन समाजो में परिवर्तन बहुत कम व अस्पष्ट होता था।
(3) भौतिक वस्तुओं में तीव्र- अभौतिक रूप (विचार मूल्य, परम्परा आदि) को तुलना में भौतिक वस्तुओं (मकान, औजार आदि) मे सामाजिक परिवर्तन की गति तीव्र होती है । यद्यपि परिवर्तन सभी क्षेत्रों में हो होता है।
(4) सामान्य गति व स्वाभाविक ढंग - जो सामाजिक परिवर्तन सामान्य गति एवं स्वाभाविक ढंग से होता है उसका प्रभाव सम्पूर्ण सामाजिक संरचना व विचारों पर अधिक पड़ता है।
(5) भविष्य वाणी कठिन- सामाजिक परिवर्तन के विषय में भविष्यवाणी नहीं की जा सकती केवल अनुमान लगाया जा सकता है कि परिवर्तन किस रूप में होगा।
(6) गुणात्मक - सामाजिक परिवर्तन गुणात्मक होता है - इसमें एक स्थिति दूसरी स्थिति को परिवर्तित करती रहती है और इस प्रकार सम्पूर्ण समाज पर सामाजिक परिवर्तन का प्रभाव हो जाता है।
(7) नियंत्रण सम्भव - सामाजिक परिवर्तन नियोजित ढंग से होता है - इच्छित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ही इसे क्रियाशील बनाया जा सकता है व नियन्त्रित भी किया जा सकता है।
सामाजिक परिवर्तन के विभिन्न प्रतिमान
(Various Patterns of Social Change )
सामाजिक परिवर्तन का स्वरूप भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न प्रकार का होता है। यह परिवर्तन निरन्तर होता रहता है तथा अनेक दिशाओं में होता है जिसके विषय में पूर्वानुमान लगाना भी कठिन होता है। मैकाइवर तथा पेज ने सामाजिक परिवर्तन के तीन प्रतिमान बताए हैं
प्रथम प्रतिमान-कभी-कभी परिवर्तन यकायक प्रकट हो जाते हैं और वे आगे और भी परिवर्तनो को उत्पन्न करते रहते हैं और ये परिवर्तन तब तक होते रहते हैं जब तक किसी नवीन परिवर्तन को जन्म नहीं दे देते - इस प्रकार के परिवर्तन को रेखीय परिवर्तन (Linear Change) कह सकते हैं। इस श्रेणी में आविष्कारों से उत्पन्न परिवर्तनों को लिया जा सकता है। रेडियो, टेलीफोन, वायुयान आदि के आविष्कारों के कारण उत्पन्न परिवर्तन तब तक होते रहते हैं जब तक कि किसी अच्छे एवं नवीन उपकरण का आविष्कार नहीं हो जाता। इस प्रकार के परिवर्तन एक ही दिशा या रेखा में होते हैं इसलिए इन्हें रेखीय परिवर्तन कहा जाता है। यह परिवर्तन का प्रथम प्रतिमान है। ये परिवर्तन मनुष्य के बौद्धिक विकास का परिणाम होते हैं और ये सामाजिक परिवर्तन को एक निश्चित पूर्व निर्धारित रूप में देखते हैं। प्रौद्योगिकी के परिवर्तन इसी प्रकार के उदाहरण हैं।
द्वितीय प्रतिमान - परिवर्तन का दूसरा प्रतिमान वह है जिसमें कुछ समय परिवर्तन प्रगति की ओर होता है फिर कुछ समय पश्चात् ह्रास की ओर हो जाता है अर्थात् परिवर्तन पहले ऊपर की ओर होता है फिर नीचे की ओर इसलिए इस परिवर्तन को उतार-चढ़ाव वाला परिवर्तन' कहा जा सकता है। 'जनसंख्या सम्बन्धी परिवर्तन एवं आर्थिक क्रियाओं के परिवर्तन' इसमे सम्मिलित हो सकते हैं। राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में उन्नति व अवनति होती रहती है - अर्थात् इस प्रकार के परिवर्तन में यह निश्चित नहीं होता कि परिवर्तन की दिशा ऊर्ध्वगामी होगी या अधोगामी - एक निश्चित दिशा नहीं होती जबकि प्रथम प्रतिमान में परिवर्तन एक हो रेखा या दिशा में होता है।
तृतीय प्रतिमान - इस परिवर्तन को चक्रीय परिवर्तन कहा जा सकता है, क्योंकि विद्वानों के अनुसार परिवर्तन का एक चक्र चलता है। उदाहरण के लिए फैशन का रूप देखेंप्राचीन समय में महिलाएँ सीधा पल्ला लेकर साड़ी पहनती थीं - बाद में इसे घर-गृहस्थी वालो महिलाओं का प्रतीक माना गया क्योंकि पढ़ी-लिखी महिलाएँ या व्यावसायिक महिलाएँ उल्टा पल्ला लेकर साड़ी पहनने लगीं। आधुनिक समय में सीधा पल्ला लेना अत्याधुनिक महिलाओं का प्रतीक बन गया है--- जहाँ पार्टी आदि में महिलाएँ इस प्रकार की साड़ी पहिनकर जाती हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि जिस प्रकार सर्दी-गर्मीबरसात का एक क्रम चलता रहता है या दिन-रात का चक्र चलता है वैसे ही इस प्रकार का परिवर्तन चक्र रूप में चलता रहता है । मानवीय क्रियाएँ राजनैतिक आन्दोलन, सामाजिक मूल्य, अलंकरण, सौन्दर्य प्रसाधन आदि के क्षेत्र में ऐसा ही प्रतिमान पाया जाता है - जिसमें एक के बाद दूसरा, तीसरा और पुनः वही चक्र दोहराया जाता है और पुनः वहीं लौटकर आ जाते हैं जहाँ से परिवर्तन का प्रारम्भ हुआ था। | मैकाइवर एव पेज के अनुसार, "समाजशास्त्री होने के नाते हमारी रुचि सामाजिक सम्बन्धों में है। केवल इन सामाजिक सम्बन्धों में होने वाले परिवर्तन को ही सामाजिक परिवर्तन कहते हैं । " जेन्सन के मत में, "सामाजिक परिवर्तन को लोगो के कार्य करने तथा विचार करने के तरीकों में होने वाले रुपान्तरण के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। " वोटोमोर के अनुसार, सामाजिक परिवर्तन के अन्तर्गत उन परिवर्तनों को सम्मिलित किया जा सकता है जो सामाजिक संरचना, सामाजिक संस्थाओं अथवा उनके पारस्परिक सम्बन्धों में घटित होते हैं। गिलिन एवं गिलिन के अनुसार, सामाजिक परिवर्तन जीवन को मानी हुई रोतिथो में परिवर्तन को कहते हैं। चाहे ये परिवर्तन भौगोलिक दशाओं में परिवर्तन से हुए हो या सास्कृतिक साधनो, जनसंख्या की रचना या विचारधारा के परिवर्तन से अथवा समूह के अन्दर ही आविष्कारों के फलस्वरूप हुए हो। " गिन्सवर्ग के अनुसार, "सामाजिक परिवर्तन का अर्थ सामाजिक ढांचे में परिवर्तन से है अर्थात् समाज के आकार, इसके विभिन्न अगो अथवा इसके संगठन के प्रकारों को बनावट एवं सन्तुलन मे होने वाले परिवर्तनो को सामाजिक परिवर्तन कहा जाता है।" जोन्स के शब्दों में, "सामाजिक परिवर्तन वह शब्द है जो सामाजिक प्रक्रियाओं, सामाजिक प्रतिमानो, सामाजिक अन्तः क्रियाओं अथवा सामाजिक संगठन के किसी भाग में गठित होने वाले हेर-फेर या संशोधनों के लिए प्रयोग किया जाता है। " मैरिल एवं एल्ड्रिन के अनुसार, "जब मानव-व्यवहार रूपान्तरण को प्रक्रिया में होता है तब हम उसी को दूसरे रूप में इस प्रकार कहते हैं कि सामाजिक परिवर्तन हो रहा है। " इस प्रकार इन्होंने मानव-क्रियाओं में होने वाले परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन कहा है। उपर्युक्त सभी परिभाषाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकलता है कि सामाजिक परिवर्तन मे वे परिवर्तन सम्मिलित होते हैं जो मानवीय क्रियाओं, सामाजिक प्रक्रियाओं, व्यवहारों, संस्थाओं, प्रथाओं, प्रकार्यों अथवा सामाजिक ढाँचे अर्थात् सामाजिक संगठन और समाज के आकारों आदि में होते हैं। सामाजिक परिवर्तन में निम्नलिखित तथ्यों को लिया जा सकता है सामाजिक परिवर्तन समाज को संरचना एवं उसके प्रकार्यों में परिवर्तन को कहते हैं । सामाजिक परिवर्तन व्यक्ति विशेष अथवा कुछ ही व्यक्तियों में आए परिवर्तन से नहीं माना जाता, बल्कि समाज के अधिकांश अथवा सभी व्यक्तियों द्वारा उसे जीवन-विधि व विश्वासों में स्वीकार किए जाने पर माना जाता है। सामाजिक परिवर्तन मानव के सामाजिक सम्बन्धो में परिवर्तन से सम्बन्धित है। सामाजिक परिवर्तन की विशेषतायें विभिन्न विद्वानों ने सामाजिक परिवर्तन की अनेक विशेषताएँ बताई हैं जो इसकी अवधारणा को और अधिक स्पष्ट करती हैं। ये विशेषताएँ अग्रलिखित हैंएक. सामाजिक प्रकृति - सामाजिक परिवर्तन का सम्बन्ध सम्पूर्ण समाज में होने वाले परिवर्तन से होता है न कि व्यक्तिगत स्तर पर हुए परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन कहा जा सकता है। अर्थात् जब सम्पूर्ण समाज की इकाइयों; जैसे-जाति, वर्ग, समूह, समुदाय आदि के स्तर पर परिवर्तन आता है तभी उसे सामाजिक परिवर्तन की संज्ञा दी जाती है । किसी एक इकाई में होने वाले परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन नहीं कह सकते। दो. सार्वभौमिक प्रघटना सामाजिक परिवर्तन सार्वकालिक एवं सार्वभौमिक है। विश्व का कोई ऐसा समाज नहीं जहाँ परिवर्तन न हुआ हो। यद्यपि विभिन्न समाजों में परिवर्तन की गति एवं स्वरूप भिन्न हो सकता है क्योंकि कोई भी दो समाज एक जैसे नहीं होते हैं। उनके इतिहास, संस्कृति, प्रकृति आदि में इतनी भिन्नता होती है कि कोई एक-दूसरे का प्रतिरूप नहीं हो सकता, परिवर्तन प्रकृति का शाश्वत सत्य है अतः समाज के स्तर पर यह सभी कालों में व सभी समाजों में किसी न किसी रूप में होता अवश्य है । तीन. स्वाभाविक एवं अवश्यम्भावी - परिवर्तन चूँकि प्रकृति का शाश्वत सत्य है, आवश्यक रूप से होता है अतः यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया कही जा सकती है। समाज भी स्वाभाविक रूप से परिवर्तित होता रहता है। प्रायः मानव स्वभाव परिवर्तन का विरोधी होता है लेकिन फिर भी परिवर्तन तो होता ही है क्योकि व्यक्ति की आवश्यकताएँ, इच्छाएँ, परिस्थितियाँ स्वाभाविक रूप से परिवर्तन के लिए उत्तरदायी होती हैं। मानव अपनी बदलती परिस्थिति से समायोजन करने के लिए अनिवार्य रूप से परिवर्तन को स्वीकार कर लेता है। यह एक स्वाभाविक घटना है। चार. तुलनात्मक एवं असमान गति - सामाजिक परिवर्तन सभी समाजों में पाया जाता है किन्तु सभी समाजों में इसकी गति अलग-अलग होती है। ग्रामीण समाजों में परिवर्तन बड़ी मन्द गति से आता है। इसका कारण यह होता है कि वहाँ पर परिवर्तन लाने वाले कारक भिन्न प्रकार के होते हैं जबकि शहरी समाज में परिवर्तन तेज गति से आता है। इन दोनों स्थानों में आए परिवर्तन को तुलना द्वारा ही बताया जा सकता है कि किस स्थान पर कितना परिवर्तन आया उदाहरण के लिए आदिम समाजों को तुलना में शहरी समाज में सामाजिक परिवर्तन तीव्र गति से होता है। शहरी क्षेत्र में तकनीकी विकास आदिम क्षेत्र की तुलना में तीव्र गति से हो रहा है। यहाँ हम दोनों समाजों में हुए सामाजिक परिवर्तन की तुलना करके ही उनकी असमान गति का अनुमान लगा पा रहे हैं । पाँच. जटिल प्रघटना - दो समाजो में हुए परिवर्तनों को तुलना के आधार पर यह स्पष्ट हो जाता है कि सामाजिक परिवर्तन हुआ है किन्तु कितना या किस स्तर का ? इसकी माप-तोल सम्भव नहीं होती। उदाहरण के लिए आज के विचार, मूल्य, परम्पराएँ, रीतिरिवाज प्राचीन समय से भिन्नता लिए हुए हैं लेकिन कितना अन्तर है इसको मापा नहीं जा सकता क्योंकि परिवर्तन गुणात्मक रूप में होता है। अतः सामाजिक परिवर्तन की विशेषता यह है कि यह एक जटिल तथ्य है, सरलता से इसका रूप नहीं समझा जा सकता। छः भविष्यवाणी असम्भव - परिवर्तन होता तो अवश्य है लेकिन वह किस दिशा में होगा' किस रूप में होगा ? किस स्थान पर होगा आदि स्पष्ट नहीं होता । उदाहरण के लिए तकनीकी विकास का प्रभाव सम्पूर्ण देश पर पड़ा है। रहन-सहन, भोजन-व्यवस्था, आवागमन, भौतिक सुख-सुविधा आदि अनेक क्षेत्र इससे प्रभावित हैं लेकिन व्यक्तियों के विचार, विश्वास, मूल्य किस सीमा तक इससे प्रभावित हैं और होगे इसकी भविष्यवाणी असम्भव नहीं तो दुष्कर कार्य अवश्य है । औद्योगीकरण और नगरीकरण ने संयुक्त परिवार, विवाह, जाति प्रथा आदि अनेक क्षेत्रों को प्रभावित किया है जिसके सम्पूर्ण प्रभाव के विषय मे निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। केवल पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। विल्बर्ट मूर ने अपनी पुस्तक 'सोशियल चेन्ज' में सामाजिक परिवर्तन को निम्नलिखित विशेषताओं को बताया है - अनिवार्य नियम - सामाजिक परिवर्तन अनिवार्य नियम है अर्थात् सामाजिक संरचना के किसी-न-किसी अंश अथवा सम्पूर्ण अंश में परिवर्तन अवश्य होता है। सामाजिक पुनर्निर्माण की अवधि में यह सर्वाधिक तीव्र गति से होता है। आधुनिक समाजों में अधिक - आधुनिक समाजों में सामाजिक परिवर्तन अधिक होते हैं जिन्हे स्पष्टतया देखा भी जा सकता है। प्राचीन समाजो में परिवर्तन बहुत कम व अस्पष्ट होता था। भौतिक वस्तुओं में तीव्र- अभौतिक रूप को तुलना में भौतिक वस्तुओं मे सामाजिक परिवर्तन की गति तीव्र होती है । यद्यपि परिवर्तन सभी क्षेत्रों में हो होता है। सामान्य गति व स्वाभाविक ढंग - जो सामाजिक परिवर्तन सामान्य गति एवं स्वाभाविक ढंग से होता है उसका प्रभाव सम्पूर्ण सामाजिक संरचना व विचारों पर अधिक पड़ता है। भविष्य वाणी कठिन- सामाजिक परिवर्तन के विषय में भविष्यवाणी नहीं की जा सकती केवल अनुमान लगाया जा सकता है कि परिवर्तन किस रूप में होगा। गुणात्मक - सामाजिक परिवर्तन गुणात्मक होता है - इसमें एक स्थिति दूसरी स्थिति को परिवर्तित करती रहती है और इस प्रकार सम्पूर्ण समाज पर सामाजिक परिवर्तन का प्रभाव हो जाता है। नियंत्रण सम्भव - सामाजिक परिवर्तन नियोजित ढंग से होता है - इच्छित उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ही इसे क्रियाशील बनाया जा सकता है व नियन्त्रित भी किया जा सकता है। सामाजिक परिवर्तन के विभिन्न प्रतिमान सामाजिक परिवर्तन का स्वरूप भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न प्रकार का होता है। यह परिवर्तन निरन्तर होता रहता है तथा अनेक दिशाओं में होता है जिसके विषय में पूर्वानुमान लगाना भी कठिन होता है। मैकाइवर तथा पेज ने सामाजिक परिवर्तन के तीन प्रतिमान बताए हैं प्रथम प्रतिमान-कभी-कभी परिवर्तन यकायक प्रकट हो जाते हैं और वे आगे और भी परिवर्तनो को उत्पन्न करते रहते हैं और ये परिवर्तन तब तक होते रहते हैं जब तक किसी नवीन परिवर्तन को जन्म नहीं दे देते - इस प्रकार के परिवर्तन को रेखीय परिवर्तन कह सकते हैं। इस श्रेणी में आविष्कारों से उत्पन्न परिवर्तनों को लिया जा सकता है। रेडियो, टेलीफोन, वायुयान आदि के आविष्कारों के कारण उत्पन्न परिवर्तन तब तक होते रहते हैं जब तक कि किसी अच्छे एवं नवीन उपकरण का आविष्कार नहीं हो जाता। इस प्रकार के परिवर्तन एक ही दिशा या रेखा में होते हैं इसलिए इन्हें रेखीय परिवर्तन कहा जाता है। यह परिवर्तन का प्रथम प्रतिमान है। ये परिवर्तन मनुष्य के बौद्धिक विकास का परिणाम होते हैं और ये सामाजिक परिवर्तन को एक निश्चित पूर्व निर्धारित रूप में देखते हैं। प्रौद्योगिकी के परिवर्तन इसी प्रकार के उदाहरण हैं। द्वितीय प्रतिमान - परिवर्तन का दूसरा प्रतिमान वह है जिसमें कुछ समय परिवर्तन प्रगति की ओर होता है फिर कुछ समय पश्चात् ह्रास की ओर हो जाता है अर्थात् परिवर्तन पहले ऊपर की ओर होता है फिर नीचे की ओर इसलिए इस परिवर्तन को उतार-चढ़ाव वाला परिवर्तन' कहा जा सकता है। 'जनसंख्या सम्बन्धी परिवर्तन एवं आर्थिक क्रियाओं के परिवर्तन' इसमे सम्मिलित हो सकते हैं। राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में उन्नति व अवनति होती रहती है - अर्थात् इस प्रकार के परिवर्तन में यह निश्चित नहीं होता कि परिवर्तन की दिशा ऊर्ध्वगामी होगी या अधोगामी - एक निश्चित दिशा नहीं होती जबकि प्रथम प्रतिमान में परिवर्तन एक हो रेखा या दिशा में होता है। तृतीय प्रतिमान - इस परिवर्तन को चक्रीय परिवर्तन कहा जा सकता है, क्योंकि विद्वानों के अनुसार परिवर्तन का एक चक्र चलता है। उदाहरण के लिए फैशन का रूप देखेंप्राचीन समय में महिलाएँ सीधा पल्ला लेकर साड़ी पहनती थीं - बाद में इसे घर-गृहस्थी वालो महिलाओं का प्रतीक माना गया क्योंकि पढ़ी-लिखी महिलाएँ या व्यावसायिक महिलाएँ उल्टा पल्ला लेकर साड़ी पहनने लगीं। आधुनिक समय में सीधा पल्ला लेना अत्याधुनिक महिलाओं का प्रतीक बन गया है--- जहाँ पार्टी आदि में महिलाएँ इस प्रकार की साड़ी पहिनकर जाती हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि जिस प्रकार सर्दी-गर्मीबरसात का एक क्रम चलता रहता है या दिन-रात का चक्र चलता है वैसे ही इस प्रकार का परिवर्तन चक्र रूप में चलता रहता है । मानवीय क्रियाएँ राजनैतिक आन्दोलन, सामाजिक मूल्य, अलंकरण, सौन्दर्य प्रसाधन आदि के क्षेत्र में ऐसा ही प्रतिमान पाया जाता है - जिसमें एक के बाद दूसरा, तीसरा और पुनः वही चक्र दोहराया जाता है और पुनः वहीं लौटकर आ जाते हैं जहाँ से परिवर्तन का प्रारम्भ हुआ था। |
चयनित उम्मीदवारो को 15000 रुपये प्रति माह वेतन मिलेगा.
इस पोस्ट के लिए आवेदन करना हो तो अभ्यर्थी को मान्यता प्राप्त विश्वविध्यालय से ITI सर्टिफिकेट प्राप्त होना ज़रूरी है.
इस पोस्ट के लिए आयु सीमा 27 वर्ष रखी गई हैं.
इच्छुक उम्मीदवार अपने सभी दस्तावेजो के साथ 26 अक्टूबर 2018 को साक्षात्कार के लिए 11 बजे Indian Institute of Oilseeds Research, Rajendranagar, Hyderabad इस पते आवेदन कर सकते हैं.
| चयनित उम्मीदवारो को पंद्रह हज़ार रुपयापये प्रति माह वेतन मिलेगा. इस पोस्ट के लिए आवेदन करना हो तो अभ्यर्थी को मान्यता प्राप्त विश्वविध्यालय से ITI सर्टिफिकेट प्राप्त होना ज़रूरी है. इस पोस्ट के लिए आयु सीमा सत्ताईस वर्ष रखी गई हैं. इच्छुक उम्मीदवार अपने सभी दस्तावेजो के साथ छब्बीस अक्टूबर दो हज़ार अट्ठारह को साक्षात्कार के लिए ग्यारह बजे Indian Institute of Oilseeds Research, Rajendranagar, Hyderabad इस पते आवेदन कर सकते हैं. |
दिल्ली. दिल्ली जनता कर्फ्यू पर रविवार को एप बुकिंग वाली टैक्सी सर्विस में रहेगी लेकिन इन कंपनियों ने लोगों से अपील की है कि घर से बाहर निकलने से बचें। ओला ने ट्वीट करके जानकारी दी है कि यात्रियों और ड्राइवर के कुशल को लेकर अगले आदेश तक शेयर कैब बुकिंग निलंबित रखने का फैसला किया है। वहीं उबर के प्रवक्ता ने कहा है कि पब्लिक के जनता कर्फ्यू में घर रहने की अपील करते हैं। लेकिन आवश्यक और तत्काल सर्विस की जरूरत को देखते हुए सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।
दूसरी तरफ दिल्ली की लोकल ऑटो-टैक्सी सेवा से जुड़े संगठनों ने कहा है कि पीएम की जनता कर्फ्यू की अपील को देखते हुए ऑटो-टैक्सी की सामान्य सेवाएं बंद रखेंगे। दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ और दिल्ली टैक्सी यूनियन के राजेंद्र सोनी ने कहा है कि ऑटो-टैक्सी चालकों से अपील की है कि अपनी और यात्रियों की सुरक्षा के लिए रविवार को घर में रहें। इमरजेंसी सर्विस जारी रखेंगे। ऑल दिल्ली ऑटो-टैक्सी ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अध्यक्ष किशन वर्मा का कहना है कि संगठन से जुड़े सभी ऑटो-टैक्सी चालक जनता कर्फ्यू पर सेवाएं ऑफ रोड रखेंगे। जरूरत पड़ी तो सेवाएं लॉकडाउन भी करने को तैयार हैं।
ऑल इंडिया लग्जरी बस यूनियन के अध्यक्ष श्यामलाल गोली और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर एंड लेबल वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय बाटला ने भास्कर से बताया कि रविवार को जनता कर्फ्यू को देखते हुए आरटीवी, ग्रामीण सेवा, मेट्रो फीड, इको फ्रेंडली, फटफट सेवा सहित 8657 पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़े वाहन सड़क पर नहीं उतरेंगे। ये फैसला सभी संगठनों ने मिलकर लिया है।
दिल्ली में कई जगह शेयर ऑटो रिक्शा चलाए जा रहे हैं। तमाम मेट्रो स्टेशन के अलावा बॉर्डर क्षेत्र, सीलमपुर, लोनी रोड, पटपड़गंज, गाजीपुर, खजूरी चौक पर चलाए जा रहे हैं। दिल्ली सरकार ने एकसाथ 5 या उससे अधिक लोगों के एकत्रित होने पर प्रतिबंध लगाया है और अगर ऐसी दशा नहीं बनती है तो एक मीटर की दूरी बनानी जरूरी है। लेकिन ग्रामीण सेवा वाहन में 5-8 यात्री बैठ रहे हैं।
| दिल्ली. दिल्ली जनता कर्फ्यू पर रविवार को एप बुकिंग वाली टैक्सी सर्विस में रहेगी लेकिन इन कंपनियों ने लोगों से अपील की है कि घर से बाहर निकलने से बचें। ओला ने ट्वीट करके जानकारी दी है कि यात्रियों और ड्राइवर के कुशल को लेकर अगले आदेश तक शेयर कैब बुकिंग निलंबित रखने का फैसला किया है। वहीं उबर के प्रवक्ता ने कहा है कि पब्लिक के जनता कर्फ्यू में घर रहने की अपील करते हैं। लेकिन आवश्यक और तत्काल सर्विस की जरूरत को देखते हुए सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। दूसरी तरफ दिल्ली की लोकल ऑटो-टैक्सी सेवा से जुड़े संगठनों ने कहा है कि पीएम की जनता कर्फ्यू की अपील को देखते हुए ऑटो-टैक्सी की सामान्य सेवाएं बंद रखेंगे। दिल्ली ऑटो रिक्शा संघ और दिल्ली टैक्सी यूनियन के राजेंद्र सोनी ने कहा है कि ऑटो-टैक्सी चालकों से अपील की है कि अपनी और यात्रियों की सुरक्षा के लिए रविवार को घर में रहें। इमरजेंसी सर्विस जारी रखेंगे। ऑल दिल्ली ऑटो-टैक्सी ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के अध्यक्ष किशन वर्मा का कहना है कि संगठन से जुड़े सभी ऑटो-टैक्सी चालक जनता कर्फ्यू पर सेवाएं ऑफ रोड रखेंगे। जरूरत पड़ी तो सेवाएं लॉकडाउन भी करने को तैयार हैं। ऑल इंडिया लग्जरी बस यूनियन के अध्यक्ष श्यामलाल गोली और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर एंड लेबल वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय बाटला ने भास्कर से बताया कि रविवार को जनता कर्फ्यू को देखते हुए आरटीवी, ग्रामीण सेवा, मेट्रो फीड, इको फ्रेंडली, फटफट सेवा सहित आठ हज़ार छः सौ सत्तावन पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जुड़े वाहन सड़क पर नहीं उतरेंगे। ये फैसला सभी संगठनों ने मिलकर लिया है। दिल्ली में कई जगह शेयर ऑटो रिक्शा चलाए जा रहे हैं। तमाम मेट्रो स्टेशन के अलावा बॉर्डर क्षेत्र, सीलमपुर, लोनी रोड, पटपड़गंज, गाजीपुर, खजूरी चौक पर चलाए जा रहे हैं। दिल्ली सरकार ने एकसाथ पाँच या उससे अधिक लोगों के एकत्रित होने पर प्रतिबंध लगाया है और अगर ऐसी दशा नहीं बनती है तो एक मीटर की दूरी बनानी जरूरी है। लेकिन ग्रामीण सेवा वाहन में पाँच-आठ यात्री बैठ रहे हैं। |
योग्य उम्मीदवार बीईएल की ऑफिशियल वेबसाइट bel-india. in के जरिए ऑनलाइन अप्लीकेशन फॉर्म भरें.
नई दिल्ली. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने गाजियाबाद स्थित कॉम्पलेक्स में भर्ती के लिए 16 दिसंबर 2020 को विज्ञापन जारी किया है. विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन के अनुसार ट्रेनी इंजीनियर, ट्रेनी ऑफिसर और प्रोजेक्ट इंजीनियर के पदों पर भर्ती की जाएगी. योग्य उम्मीदवार बीईएल की ऑफिशियल वेबसाइट bel-india. in के जरिए ऑनलाइन अप्लीकेशन फॉर्म भरें.
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड में इन भर्तियों के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 16 दिसंबर से शुरू और 26 दिसंबर को खत्म होगी.
ट्रेनी इंजीनियर के पद के लिए अप्लाई करने वाले कैंडिडेट्स के पास प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय/संस्थान से सम्बन्धित ट्रेड में प्रथम श्रेणी में बीई/बीटेक/बीएससी इंजीनिरिंग डिग्री हो. साथ ही, सम्बन्धित कार्य का एक साल का अनुभव.
अधिकतम आयु सीमा 30 नवंबर 2020 को 25 वर्ष.
ट्रेनी ऑफिसर (फाइनेंस) पद के लिए अप्लाई करने वाले कैंडिडेट्स के पास प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय/संस्थान से फाइनेंस में दो साल की एमबीए डिग्री. साथ ही, सम्बन्धित कार्य का एक साल का अनुभव हो.
अधिकतम आयु सीमा 30 नवंबर 2020 को 25 वर्ष.
प्रोजेक्ट इंजीनियर पद के लिए अप्लाई करने वाले कैंडिडेट्स के पास प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय/संस्थान से सम्बन्धित ट्रेड में प्रथम श्रेणी में बीई/बीटेक/बीएससी इंजीनिरिंग डिग्री. साथ ही, सम्बन्धित कार्य का 2 वर्षों का अनुभव.
अधिकतम आयु सीमा 30 नवंबर 2020 को 28 वर्ष.
उम्मीदवारों का चयन क्वालिफाईंग एग्जाम के मार्क्स, सम्बन्धित कार्य का अनुभव और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से आयोजित किये जाने वाले इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा.
चयन प्रक्रिया के लिए 100 अंक निर्धारित हैं. इनमें से क्वालीफाईंग एग्जाम के लिए 75 अंक, कार्य अनुभव के लिए 10 अंक और वीडियो इंटरव्यू के लिए 15 अंक निर्धारित हैं.
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| योग्य उम्मीदवार बीईएल की ऑफिशियल वेबसाइट bel-india. in के जरिए ऑनलाइन अप्लीकेशन फॉर्म भरें. नई दिल्ली. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने गाजियाबाद स्थित कॉम्पलेक्स में भर्ती के लिए सोलह दिसंबर दो हज़ार बीस को विज्ञापन जारी किया है. विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन के अनुसार ट्रेनी इंजीनियर, ट्रेनी ऑफिसर और प्रोजेक्ट इंजीनियर के पदों पर भर्ती की जाएगी. योग्य उम्मीदवार बीईएल की ऑफिशियल वेबसाइट bel-india. in के जरिए ऑनलाइन अप्लीकेशन फॉर्म भरें. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड में इन भर्तियों के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया सोलह दिसंबर से शुरू और छब्बीस दिसंबर को खत्म होगी. ट्रेनी इंजीनियर के पद के लिए अप्लाई करने वाले कैंडिडेट्स के पास प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय/संस्थान से सम्बन्धित ट्रेड में प्रथम श्रेणी में बीई/बीटेक/बीएससी इंजीनिरिंग डिग्री हो. साथ ही, सम्बन्धित कार्य का एक साल का अनुभव. अधिकतम आयु सीमा तीस नवंबर दो हज़ार बीस को पच्चीस वर्ष. ट्रेनी ऑफिसर पद के लिए अप्लाई करने वाले कैंडिडेट्स के पास प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय/संस्थान से फाइनेंस में दो साल की एमबीए डिग्री. साथ ही, सम्बन्धित कार्य का एक साल का अनुभव हो. अधिकतम आयु सीमा तीस नवंबर दो हज़ार बीस को पच्चीस वर्ष. प्रोजेक्ट इंजीनियर पद के लिए अप्लाई करने वाले कैंडिडेट्स के पास प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय/संस्थान से सम्बन्धित ट्रेड में प्रथम श्रेणी में बीई/बीटेक/बीएससी इंजीनिरिंग डिग्री. साथ ही, सम्बन्धित कार्य का दो वर्षों का अनुभव. अधिकतम आयु सीमा तीस नवंबर दो हज़ार बीस को अट्ठाईस वर्ष. उम्मीदवारों का चयन क्वालिफाईंग एग्जाम के मार्क्स, सम्बन्धित कार्य का अनुभव और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से आयोजित किये जाने वाले इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा. चयन प्रक्रिया के लिए एक सौ अंक निर्धारित हैं. इनमें से क्वालीफाईंग एग्जाम के लिए पचहत्तर अंक, कार्य अनुभव के लिए दस अंक और वीडियो इंटरव्यू के लिए पंद्रह अंक निर्धारित हैं. . |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
कॉर्न सलाद बनाने के लिए सबसे पहले ताजा मकई के दानों को उबाल लें, ताकि वो थोड़े नरम हो जाएं। इसके लिए आप प्रेशर कुकर, स्टीमर या इलेक्ट्रिक कुकर में भाप भी दे सकते हैं। अगर आप चाहते हैं कि मकई के दानों के पोषक तत्व न निकले, तो कम पानी में कम समय के लिए उबालना ठीक रहेगा।
अब एक बाउल में उबले हुए मकई के दाने डालें। अब इसमें बारीक कटा हुआ प्याज, बारीक कटा हुआ खीरा और कटा हरा धनिया डालें। फिर इसमें लाल मिर्च पाउडर , काली मिर्च भुना जीरा पाउडर छिड़कें। इन सब सामग्रियों को अच्छे से मिलाने के बाद इस पर ऊपर से नींबू का रस छिड़कें। अब एक बार फिर इन सभी चीजों को अच्छे से मिक्स कर लें और लीजिए तैयार है आपकी कॉर्न सलाद। अब आप इसे नाश्ते या हल्की-फुल्की भूख में खा सकते हैं। पोषक तत्वों से भरपूर ये सलाद आपके वजन को कंट्रोल करने में मदद करेगी।
| कॉर्न सलाद बनाने के लिए सबसे पहले ताजा मकई के दानों को उबाल लें, ताकि वो थोड़े नरम हो जाएं। इसके लिए आप प्रेशर कुकर, स्टीमर या इलेक्ट्रिक कुकर में भाप भी दे सकते हैं। अगर आप चाहते हैं कि मकई के दानों के पोषक तत्व न निकले, तो कम पानी में कम समय के लिए उबालना ठीक रहेगा। अब एक बाउल में उबले हुए मकई के दाने डालें। अब इसमें बारीक कटा हुआ प्याज, बारीक कटा हुआ खीरा और कटा हरा धनिया डालें। फिर इसमें लाल मिर्च पाउडर , काली मिर्च भुना जीरा पाउडर छिड़कें। इन सब सामग्रियों को अच्छे से मिलाने के बाद इस पर ऊपर से नींबू का रस छिड़कें। अब एक बार फिर इन सभी चीजों को अच्छे से मिक्स कर लें और लीजिए तैयार है आपकी कॉर्न सलाद। अब आप इसे नाश्ते या हल्की-फुल्की भूख में खा सकते हैं। पोषक तत्वों से भरपूर ये सलाद आपके वजन को कंट्रोल करने में मदद करेगी। |
प्रायिकता सिद्धांत (Probability theory) गणित की शाखा है जो यादृच्छ (रैंडम) परिघटनाओं के विश्लेषण से संबन्धित है। .
5 संबंधोंः प्रायिकता, मानक विचलन, रीमान जीटा फलन, सांख्यिकीय भौतिकी, क्रमचय-संचय।
किसी घटना के होने की सम्भावना (likelihood or chance) को प्रायिकता या संभाव्यता (Probability) कहते हैं। सांख्यिकी, गणित, विज्ञान, दर्शनशास्त्र आदि क्षेत्रों में इसका बहुतायत से प्रयोग होता है। .
एक डाटा सेट जिसका मध्यमान 50 (नीले रंग में प्रदर्शित) और मानक विचलन (σ) 20 है। एक सामान्य वितरण (या घंटी वक्र) का एक भूखंडप्रत्येक रंग की पट्टी की चौड़ाई एक मानक विचलन है। प्रायिकता सिद्धांत और सांख्यिकी में, किसी सांख्यिकीय जनसंख्या, डाटा सेट या प्रायिकता वितरण के प्रसरण के वर्गमूल को मानक विचलन (स्टैण्डर्ड देविएशन) कहते हैं। मानक विचलन, व्यापक रूप से प्रयोग होने वाला एक मापदंड है प्रकीर्णन की माप करता है कि आंकड़े कितने 'फैले हुए' हैं। मानक विचलन बीजगणित की दृष्टि से अधिक सुविधाजनक है यद्यपि व्यावहारिक रूप से प्रत्याशित विचलन या औसत निरपेक्ष विचलन की तुलना में यह कम सुदृढ़ होता है। इससे पता चलता है कि यहां "औसत" (मध्यमान) से कितनी भिन्नता है। इसे वितरण के मध्यमान से अंकों के औसत अंतर के रूप में माना जा सकता है कि वे मध्यमान से कितनी दूर हैं। एक निम्न मानक विचलन इंगित करता है कि डाटा के अंक मध्यमान के बहुत समीप होते हैं जबकि उच्च मानक विचलन इंगित करता है कि डाटा, मानों की एक बहुत बड़ी श्रेणी पर फैला हुआ है। उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका में वयस्क पुरुषों की औसत ऊंचाई है और इसके साथ ही साथ इनका मानक विचलन लगभग है। इसका मतलब है कि अधिकांश पुरुषों (एक सामान्य वितरण की कल्पना के आधार पर लगभग 68 प्रतिशत) की ऊंचाई मध्यमान के के भीतर - एक मानक विचलन है जबकि लगभग सभी पुरुषों (लगभग 95%) की ऊंचाई मध्यमान के के भीतर - 2 मानक विचलन है। यदि मानक विचलन शून्य होता, तो सभी पुरुष वास्तव में ऊंचे होते.
रीमान जीटा फलन अथवा आयलर-रीमान जीटा फलन, ζ(s), उन सम्मिश्र चर s का फलन है जो अनन्त श्रेणी के संकलन में वैश्लेषिक हैं जो s के वास्तविक मान के 1 से अधिक होने पर अभिसारी होती है। सभी s के लिए ζ(s) व्यापक निरूपण नीचे दिया गया है। रीमान जीटा फलन विश्लेषी संख्या सिद्धान्त में मुख्य फलन के रूप में प्रयुक्त होता है और इसके अनुप्रयोग भौतिकी, प्रायिकता सिद्धांत और अनुप्रयुक्त सांख्यिकी में मिलते हैं। वास्तविक तर्क के फलन के रूप में, यह फलन १८वीं सदी के पूर्वार्द्ध में सम्मिश्र विश्लेषण का उपयोग किये बिना (क्योंकि उस समय यह उपलब्ध नहीं थी) पहली बार लियोनार्ड आयलर ने किया था। बर्नहार्ड रीमान ने 1859 में प्रकाशित अपने लेख "दिये गये परिमाण से छोटी अभाज्य संख्याओं पर" (मूल जर्मनः Ueber die Anzahl der Primzahlen unter einer gegebenen Grösse) आयलर की परिभाषा सम्मिश्र चरों के लिए विस्तारित किया तथा फलनिक समीकरण और अनंतकी अनुवर्ती सिद्ध किया एवं शून्य व अभाज्य संख्याओं के बंटन में सम्बन्ध स्थापित किया। धनात्मक सम संख्याओं पर रीमान जीटा फलन के मान आयलर द्वारा अभिकलित किये गये। इनमें प्रथम ζ(2) बेसल समस्या का हल प्रदान करता है। सन् १९७९ में एपेरी ने "ζ"(3) की अपरिमेयता सिद्ध की। नकारात्मक पूर्णांक बिन्दुओं के लिए भी आयलर के अनुसार परिमेय संख्यायें प्रतिरूपक के रूप में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं। डीरिख्ले श्रेणी, डीरिख्ले एल-फलन और एल-फलन के रूप में रीमान जीटा फलन के विभिन्न व्यापकीकरण ज्ञात हैं। .
सांख्यिकीय भौतिकी, भौतिकी की वह शाखा है जिसमें भौतिक समस्याओं के समाधान के लिये प्रायिकता सिद्धांत एवं सांख्यिकी का उपयोगकिया जाता है। इसके द्वारा अनेकानेक क्षेत्रों का वर्णन किया जा सकता है जो मूलतः स्टॉकैस्टिक (stochastic) प्रकृति के होते हैं। श्रेणीःसांख्यिकीय यांत्रिकी.
दोहराव के साथ क्रमपरिवर्तन। क्रमचय-संचय (Combinatorics) गणित की शाखा है जिसमें गिनने योग्य विवर्त (discrete) संरचनाओं (structures) का अध्ययन किया जाता है। शुद्ध गणित, बीजगणित, प्रायिकता सिद्धांत, टोपोलोजी तथा ज्यामिति आदि गणित के विभिन्न क्षेत्रों में क्रमचय-संचय से संबन्धित समस्याये पैदा होतीं हैं। इसके अलावा क्रमचय-संचय का उपयोग इष्टतमीकरण (आप्टिमाइजेशन), संगणक विज्ञान, एर्गोडिक सिद्धांत (ergodic theory) तथा सांख्यिकीय भौतिकी में भी होता है। ग्राफ सिद्धांत, क्रमचय-संचय के सबसे पुराने एवं सर्वाधिक प्रयुक्त भागों में से है। ऐतिहासिक रूप से क्रमचय-संचय के बहुत से प्रश्न विलगित रूप में उठते रहे थे और उनके तदर्थ हल प्रस्तुत किये जाते रहे। किन्तु बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में शक्तिशाली एवं सामान्य सैद्धांतिक विधियाँ विकसित हुईं और क्रमचय-संचय गणित की स्वतंत्र शाखा बनकर उभरा। .
| प्रायिकता सिद्धांत गणित की शाखा है जो यादृच्छ परिघटनाओं के विश्लेषण से संबन्धित है। . पाँच संबंधोंः प्रायिकता, मानक विचलन, रीमान जीटा फलन, सांख्यिकीय भौतिकी, क्रमचय-संचय। किसी घटना के होने की सम्भावना को प्रायिकता या संभाव्यता कहते हैं। सांख्यिकी, गणित, विज्ञान, दर्शनशास्त्र आदि क्षेत्रों में इसका बहुतायत से प्रयोग होता है। . एक डाटा सेट जिसका मध्यमान पचास और मानक विचलन बीस है। एक सामान्य वितरण का एक भूखंडप्रत्येक रंग की पट्टी की चौड़ाई एक मानक विचलन है। प्रायिकता सिद्धांत और सांख्यिकी में, किसी सांख्यिकीय जनसंख्या, डाटा सेट या प्रायिकता वितरण के प्रसरण के वर्गमूल को मानक विचलन कहते हैं। मानक विचलन, व्यापक रूप से प्रयोग होने वाला एक मापदंड है प्रकीर्णन की माप करता है कि आंकड़े कितने 'फैले हुए' हैं। मानक विचलन बीजगणित की दृष्टि से अधिक सुविधाजनक है यद्यपि व्यावहारिक रूप से प्रत्याशित विचलन या औसत निरपेक्ष विचलन की तुलना में यह कम सुदृढ़ होता है। इससे पता चलता है कि यहां "औसत" से कितनी भिन्नता है। इसे वितरण के मध्यमान से अंकों के औसत अंतर के रूप में माना जा सकता है कि वे मध्यमान से कितनी दूर हैं। एक निम्न मानक विचलन इंगित करता है कि डाटा के अंक मध्यमान के बहुत समीप होते हैं जबकि उच्च मानक विचलन इंगित करता है कि डाटा, मानों की एक बहुत बड़ी श्रेणी पर फैला हुआ है। उदाहरण के लिए, संयुक्त राज्य अमेरिका में वयस्क पुरुषों की औसत ऊंचाई है और इसके साथ ही साथ इनका मानक विचलन लगभग है। इसका मतलब है कि अधिकांश पुरुषों की ऊंचाई मध्यमान के के भीतर - एक मानक विचलन है जबकि लगभग सभी पुरुषों की ऊंचाई मध्यमान के के भीतर - दो मानक विचलन है। यदि मानक विचलन शून्य होता, तो सभी पुरुष वास्तव में ऊंचे होते. रीमान जीटा फलन अथवा आयलर-रीमान जीटा फलन, ζ, उन सम्मिश्र चर s का फलन है जो अनन्त श्रेणी के संकलन में वैश्लेषिक हैं जो s के वास्तविक मान के एक से अधिक होने पर अभिसारी होती है। सभी s के लिए ζ व्यापक निरूपण नीचे दिया गया है। रीमान जीटा फलन विश्लेषी संख्या सिद्धान्त में मुख्य फलन के रूप में प्रयुक्त होता है और इसके अनुप्रयोग भौतिकी, प्रायिकता सिद्धांत और अनुप्रयुक्त सांख्यिकी में मिलते हैं। वास्तविक तर्क के फलन के रूप में, यह फलन अट्ठारहवीं सदी के पूर्वार्द्ध में सम्मिश्र विश्लेषण का उपयोग किये बिना पहली बार लियोनार्ड आयलर ने किया था। बर्नहार्ड रीमान ने एक हज़ार आठ सौ उनसठ में प्रकाशित अपने लेख "दिये गये परिमाण से छोटी अभाज्य संख्याओं पर" आयलर की परिभाषा सम्मिश्र चरों के लिए विस्तारित किया तथा फलनिक समीकरण और अनंतकी अनुवर्ती सिद्ध किया एवं शून्य व अभाज्य संख्याओं के बंटन में सम्बन्ध स्थापित किया। धनात्मक सम संख्याओं पर रीमान जीटा फलन के मान आयलर द्वारा अभिकलित किये गये। इनमें प्रथम ζ बेसल समस्या का हल प्रदान करता है। सन् एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में एपेरी ने "ζ" की अपरिमेयता सिद्ध की। नकारात्मक पूर्णांक बिन्दुओं के लिए भी आयलर के अनुसार परिमेय संख्यायें प्रतिरूपक के रूप में महत्त्वपूर्ण स्थान रखती हैं। डीरिख्ले श्रेणी, डीरिख्ले एल-फलन और एल-फलन के रूप में रीमान जीटा फलन के विभिन्न व्यापकीकरण ज्ञात हैं। . सांख्यिकीय भौतिकी, भौतिकी की वह शाखा है जिसमें भौतिक समस्याओं के समाधान के लिये प्रायिकता सिद्धांत एवं सांख्यिकी का उपयोगकिया जाता है। इसके द्वारा अनेकानेक क्षेत्रों का वर्णन किया जा सकता है जो मूलतः स्टॉकैस्टिक प्रकृति के होते हैं। श्रेणीःसांख्यिकीय यांत्रिकी. दोहराव के साथ क्रमपरिवर्तन। क्रमचय-संचय गणित की शाखा है जिसमें गिनने योग्य विवर्त संरचनाओं का अध्ययन किया जाता है। शुद्ध गणित, बीजगणित, प्रायिकता सिद्धांत, टोपोलोजी तथा ज्यामिति आदि गणित के विभिन्न क्षेत्रों में क्रमचय-संचय से संबन्धित समस्याये पैदा होतीं हैं। इसके अलावा क्रमचय-संचय का उपयोग इष्टतमीकरण , संगणक विज्ञान, एर्गोडिक सिद्धांत तथा सांख्यिकीय भौतिकी में भी होता है। ग्राफ सिद्धांत, क्रमचय-संचय के सबसे पुराने एवं सर्वाधिक प्रयुक्त भागों में से है। ऐतिहासिक रूप से क्रमचय-संचय के बहुत से प्रश्न विलगित रूप में उठते रहे थे और उनके तदर्थ हल प्रस्तुत किये जाते रहे। किन्तु बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में शक्तिशाली एवं सामान्य सैद्धांतिक विधियाँ विकसित हुईं और क्रमचय-संचय गणित की स्वतंत्र शाखा बनकर उभरा। . |
जैन आचार-ग्रन्थः ५५
जलाशय की उपमा दी गई है । छठे उद्देश में उन्मार्ग एवं रागद्वेष के परित्याग का उपदेश दिया गया है। षष्ठ अध्ययन का नाम धूत है । इसमें बाह्य व आन्तरिक पदार्थों के परित्याग तथा आत्मतत्त्व की परिशुद्धि का उपदेश दिया गया है अतः इसका धूत ( फटक कर धोया हुआ - शुद्ध किया हुआ ) नाम सार्थक है। इसके प्रथम उद्देश में स्वजन, द्वितीय में कर्म, तृतीय में उपकरण और शरीर, चतुर्थ में गौरव तथा पंचम में उपसर्ग और सन्मान के परित्याग का उपदेश है। महापरिज्ञा नामक सप्तम अध्ययन विच्छिन्न है - लुप्त है। इसकी नियुक्ति भी उपलब्ध नहीं है। नियुक्तिकार ने प्रारम्भ में इसके विषय का मोहजन्य परीषह व उपसर्ग के रूप में निर्देश किया है : मोहसमुत्था परीसहुवसग्गा । इससे प्रतीत होता है कि इस अध्ययन में नाना प्रकार के मोहजन्य परीषहों और उपसर्गों को सहन करने के विषय में प्रकाश डाला गया होगा। विमोक्ष नामक अष्टम अध्ययन में आठ उद्देश हैं। प्रथम उद्देश में असमनोज्ञ अर्थात् असमान आचार वाले के परित्याग का उपदेश है। द्वितीय उद्देश में अकल्प्य अर्थात् अग्राह्य वस्तु के ग्रहण का प्रतिषेध किया गया है। अंगचेष्टा से सम्बन्धित कथन या शंका का निवारण तृतीय उद्देश का विषय है। आगे के उद्देशों में सामान्यतः भिक्षु के वस्त्राचार का वर्णन है किन्तु विशेषतः चतुर्थ में वैखानस एवं गार्द्धपृष्ठ मरण, पंचम में रोग एवं भक्तपरिज्ञा, षष्ठ में एकत्वभावना एवं इंगिनीमरण, सप्तम में प्रतिमा एवं पादपोपगमन मरण तथा अष्टम में वयःप्राप्त श्रमणों के भक्तपरिज्ञा, इंगिनीमरण एवं पादपोपगमन मरण की चर्चा है। नवम अध्ययन का नाम उपधानश्रुत है। इसमें
५६ : जैन आचार
वर्तमान जैनाचार के प्ररूपक अन्तिम तीर्थंकर श्रमणभगवान् महावीर की तपस्या का वर्णन है। प्रस्तुत अध्ययन में भगवान् महावीर के साधकजीवन अर्थात् श्रमणजीवन की सर्वाधिक प्राचीन एवं विश्वसनीय सामग्री उपलब्ध है। इसके चार उद्देशों में से प्रथम में श्रमणभगवान् की चर्या अर्थात् विहार, द्वितीय में शय्या अर्थात् वसति, तृतीय में परीषह अर्थात् उपसर्ग तथा चतुर्थ में आतंक व तद्विषयक चिकित्सा का वर्णन है। इन सब कियाओं में उपधान अर्थात् तप प्रधान रूप से रहता है अतः इस अध्ययन का उपधानश्रुत नाम सार्थक है। इसमें महावीर के लिए 'श्रमणभग" वान्', 'ज्ञातपुत्र', 'मेधावी', 'ब्राह्मण', 'भिक्षु', 'अबहुवादी' आदि विशेषणों का प्रयोग किया गया है। प्रत्येक उद्देश के अन्त में उन्हें मतिमान् ब्राह्मण एवं भगवान् कहा गया है ।
द्वितीय श्रुतस्कन्ध की पाँच चूलाओं में से अन्तिम चूला आचारप्रकल्प अथवा निशीथ को आचारांग से किसी समय पृथक् कर दिया गया जिससे आचारांग में अब केवल चार चूलाएं हो रह गई हैं। प्रथम श्रुतस्कन्ध में आने वाले विविध विषयों को एकत्र करके शिष्यहितार्थ चुलाओं में संगृहीत कर स्पष्ट किया गया। इनमें कुछ अनुक्त विषयों का भी समावेश कर दिया गया। इस प्रकार इन चूलाओं के पीछे दो प्रयोजन थेः उक्त विषयों का स्पष्टीकरण तथा अनुक्त विषयों का ग्रहण । प्रथम चूला में सात अध्ययन हैंः १. पिण्डैषणा, २. शय्यैषणा, ३. ईर्या, ४. भाषाजात, ५. वस्त्रे - षणा, ६. पात्रैषणा, ७. अवग्रहप्रतिमा । द्वितीय चूला में भी सात अध्ययन हैं : १. स्थान, २. निषोधिका, ३. उच्चारप्रस्रवण;
जैन आचार-प्रन्थ : ५७
४. शब्द, ५. रूप, ६. परक्रिया, ७. अन्योन्यक्रिया । तृतीय चूला भावना अध्ययन के रूप में है। चतुर्थ चूला विमुक्ति अध्ययनरूप है। प्रथम चूला का प्रथम अध्ययन ग्यारह उद्देशों में विभक्त है। इनमें भिक्षु- भिक्षुणी की पिण्डैषणा अर्थात् आहार की गवेषणा के विषय में विधि-निषेधों का निरूपण है। शय्यैषणा नामक द्वितीय अध्ययन में श्रमण -श्रमणी के रहने के स्थान अर्थात् वसति की गवेषणा के विषय में प्रकाश डाला गया है। इस अध्ययन में तीन उद्देश हैं। ईर्या नामक तृतीय अध्ययन में साधु-साध्वी की ईर्या अर्थात् गमनागमनरूप क्रिया की शुद्धि-अशुद्धि का विचार किया गया है। इसमें तीन उद्देश हैं। भाषाजात नामक चतुर्थ अध्ययन के दो उद्देश हैं जिनमें भिक्षुभिक्षुणी की वाणी का विचार किया गया है। प्रथम उद्देश में सोलह प्रकार की वचनविभक्ति तथा द्वितीय में कषायजनक वचनप्रयोग की व्याख्या है। पंचम अध्ययन वस्त्रैषणा के भी दो उद्देश हैं। इनमें से प्रथम में वस्त्रग्रहणसम्बन्धी तथा द्वितीय में वस्त्रधारणसम्बन्धी चर्चा है । षष्ठ अध्ययन पात्रे - षणा के भी दो उद्देश हैं जिनमें अलाबु, काप्त व मिट्टी के पात्र के गवेषण एवं धारण की चर्चा है । अवग्रहप्रतिमा नामक सप्तम अध्ययन भी दो उद्देशों में विभक्त है जिनमें बिना अनुमति के किसी भी वस्तु को ग्रहण करने का निषेध किया गया है। द्वितीय चूला के प्रथम अध्ययन स्थान में शरीर की हलन चलनरूप क्रिया का नियमन करने वाली चार प्रकार की प्रतिमाएँ अर्थात् प्रतिज्ञाएँ वर्णित हैं जिनमें संयमी की स्थिति अपेक्षित है । द्वितीय अध्ययन निषोधिका में स्वाध्यायभूमि के सम्बन्ध में चर्चा है ।
५८ : जैन आचार
उच्चार-प्रस्रवण नामक तृतीय अध्ययन में मल-मूत्र के त्याग की अहिंसक विधि बतलाई गई है। शब्द नामक चतुर्थ अध्ययन में विविध वाद्यों, गीतों, नृत्यों, उत्सवों आदि के शब्दों को सुनने की लालसा से यत्र-तत्र जाने का निषेध किया गया है। रूप नामक पंचम अध्ययन में विविध प्रकार के रूपों को देखने की लालसा का प्रतिषेध किया गया है। षष्ठ अध्ययन परक्रिया में अन्य द्वारा शारीरिक संस्कार, चिकित्सा आदि करवाने का निषेध किया गया है । सप्तम अध्ययन अन्योन्यक्रिया में परस्पर चिकित्सा आदि करने-करवाने का प्रतिषेध किया गया है। भावना नामक तृतीय चुला में पांच महाव्रतों की भावनाओं के साथ ही तदुपदेशक भगवान् महावीर का जीवन भी दिया गया है। विमुक्ति नामक चतुर्थ चूला में मोक्ष की चर्चा है । मुनि को आंशिक एवं सिद्ध को पूर्ण मोक्ष होता है । समुद्र के समान यह संसार दुस्तर है । जो मुनि इसे पार कर लेते हैं वे अन्तकृत - विमुक्त कहे जाते हैं। इस प्रकार आचारांग सूत्र निःसंदेह भगवान् महावीर द्वारा प्रतिपा दित आचारशास्त्र का उत्कृष्टतम ग्रंथ है। इसमें अनगारघमं अर्थात् श्रमणाचार के समस्त महत्त्वपूर्ण पक्षों का सारगर्भित निरूपण है ।
उपासकदशांग :
श्रावकाचार अर्थात् सागारधर्म का प्रतिपादक उपासकदशांग सातवां अंगसूत्र है । इसमें भगवान् महावीर के दस प्रधान उपासकों - श्रावकों के आदर्श चरित्र दिये गये हैं। इनके नाम इस प्रकार हैंः १. आनन्द, २. कामदेव, ३. चुलनीपिता, ४. सुरा | जैन आचार-ग्रन्थः पचपन जलाशय की उपमा दी गई है । छठे उद्देश में उन्मार्ग एवं रागद्वेष के परित्याग का उपदेश दिया गया है। षष्ठ अध्ययन का नाम धूत है । इसमें बाह्य व आन्तरिक पदार्थों के परित्याग तथा आत्मतत्त्व की परिशुद्धि का उपदेश दिया गया है अतः इसका धूत नाम सार्थक है। इसके प्रथम उद्देश में स्वजन, द्वितीय में कर्म, तृतीय में उपकरण और शरीर, चतुर्थ में गौरव तथा पंचम में उपसर्ग और सन्मान के परित्याग का उपदेश है। महापरिज्ञा नामक सप्तम अध्ययन विच्छिन्न है - लुप्त है। इसकी नियुक्ति भी उपलब्ध नहीं है। नियुक्तिकार ने प्रारम्भ में इसके विषय का मोहजन्य परीषह व उपसर्ग के रूप में निर्देश किया है : मोहसमुत्था परीसहुवसग्गा । इससे प्रतीत होता है कि इस अध्ययन में नाना प्रकार के मोहजन्य परीषहों और उपसर्गों को सहन करने के विषय में प्रकाश डाला गया होगा। विमोक्ष नामक अष्टम अध्ययन में आठ उद्देश हैं। प्रथम उद्देश में असमनोज्ञ अर्थात् असमान आचार वाले के परित्याग का उपदेश है। द्वितीय उद्देश में अकल्प्य अर्थात् अग्राह्य वस्तु के ग्रहण का प्रतिषेध किया गया है। अंगचेष्टा से सम्बन्धित कथन या शंका का निवारण तृतीय उद्देश का विषय है। आगे के उद्देशों में सामान्यतः भिक्षु के वस्त्राचार का वर्णन है किन्तु विशेषतः चतुर्थ में वैखानस एवं गार्द्धपृष्ठ मरण, पंचम में रोग एवं भक्तपरिज्ञा, षष्ठ में एकत्वभावना एवं इंगिनीमरण, सप्तम में प्रतिमा एवं पादपोपगमन मरण तथा अष्टम में वयःप्राप्त श्रमणों के भक्तपरिज्ञा, इंगिनीमरण एवं पादपोपगमन मरण की चर्चा है। नवम अध्ययन का नाम उपधानश्रुत है। इसमें छप्पन : जैन आचार वर्तमान जैनाचार के प्ररूपक अन्तिम तीर्थंकर श्रमणभगवान् महावीर की तपस्या का वर्णन है। प्रस्तुत अध्ययन में भगवान् महावीर के साधकजीवन अर्थात् श्रमणजीवन की सर्वाधिक प्राचीन एवं विश्वसनीय सामग्री उपलब्ध है। इसके चार उद्देशों में से प्रथम में श्रमणभगवान् की चर्या अर्थात् विहार, द्वितीय में शय्या अर्थात् वसति, तृतीय में परीषह अर्थात् उपसर्ग तथा चतुर्थ में आतंक व तद्विषयक चिकित्सा का वर्णन है। इन सब कियाओं में उपधान अर्थात् तप प्रधान रूप से रहता है अतः इस अध्ययन का उपधानश्रुत नाम सार्थक है। इसमें महावीर के लिए 'श्रमणभग" वान्', 'ज्ञातपुत्र', 'मेधावी', 'ब्राह्मण', 'भिक्षु', 'अबहुवादी' आदि विशेषणों का प्रयोग किया गया है। प्रत्येक उद्देश के अन्त में उन्हें मतिमान् ब्राह्मण एवं भगवान् कहा गया है । द्वितीय श्रुतस्कन्ध की पाँच चूलाओं में से अन्तिम चूला आचारप्रकल्प अथवा निशीथ को आचारांग से किसी समय पृथक् कर दिया गया जिससे आचारांग में अब केवल चार चूलाएं हो रह गई हैं। प्रथम श्रुतस्कन्ध में आने वाले विविध विषयों को एकत्र करके शिष्यहितार्थ चुलाओं में संगृहीत कर स्पष्ट किया गया। इनमें कुछ अनुक्त विषयों का भी समावेश कर दिया गया। इस प्रकार इन चूलाओं के पीछे दो प्रयोजन थेः उक्त विषयों का स्पष्टीकरण तथा अनुक्त विषयों का ग्रहण । प्रथम चूला में सात अध्ययन हैंः एक. पिण्डैषणा, दो. शय्यैषणा, तीन. ईर्या, चार. भाषाजात, पाँच. वस्त्रे - षणा, छः. पात्रैषणा, सात. अवग्रहप्रतिमा । द्वितीय चूला में भी सात अध्ययन हैं : एक. स्थान, दो. निषोधिका, तीन. उच्चारप्रस्रवण; जैन आचार-प्रन्थ : सत्तावन चार. शब्द, पाँच. रूप, छः. परक्रिया, सात. अन्योन्यक्रिया । तृतीय चूला भावना अध्ययन के रूप में है। चतुर्थ चूला विमुक्ति अध्ययनरूप है। प्रथम चूला का प्रथम अध्ययन ग्यारह उद्देशों में विभक्त है। इनमें भिक्षु- भिक्षुणी की पिण्डैषणा अर्थात् आहार की गवेषणा के विषय में विधि-निषेधों का निरूपण है। शय्यैषणा नामक द्वितीय अध्ययन में श्रमण -श्रमणी के रहने के स्थान अर्थात् वसति की गवेषणा के विषय में प्रकाश डाला गया है। इस अध्ययन में तीन उद्देश हैं। ईर्या नामक तृतीय अध्ययन में साधु-साध्वी की ईर्या अर्थात् गमनागमनरूप क्रिया की शुद्धि-अशुद्धि का विचार किया गया है। इसमें तीन उद्देश हैं। भाषाजात नामक चतुर्थ अध्ययन के दो उद्देश हैं जिनमें भिक्षुभिक्षुणी की वाणी का विचार किया गया है। प्रथम उद्देश में सोलह प्रकार की वचनविभक्ति तथा द्वितीय में कषायजनक वचनप्रयोग की व्याख्या है। पंचम अध्ययन वस्त्रैषणा के भी दो उद्देश हैं। इनमें से प्रथम में वस्त्रग्रहणसम्बन्धी तथा द्वितीय में वस्त्रधारणसम्बन्धी चर्चा है । षष्ठ अध्ययन पात्रे - षणा के भी दो उद्देश हैं जिनमें अलाबु, काप्त व मिट्टी के पात्र के गवेषण एवं धारण की चर्चा है । अवग्रहप्रतिमा नामक सप्तम अध्ययन भी दो उद्देशों में विभक्त है जिनमें बिना अनुमति के किसी भी वस्तु को ग्रहण करने का निषेध किया गया है। द्वितीय चूला के प्रथम अध्ययन स्थान में शरीर की हलन चलनरूप क्रिया का नियमन करने वाली चार प्रकार की प्रतिमाएँ अर्थात् प्रतिज्ञाएँ वर्णित हैं जिनमें संयमी की स्थिति अपेक्षित है । द्वितीय अध्ययन निषोधिका में स्वाध्यायभूमि के सम्बन्ध में चर्चा है । अट्ठावन : जैन आचार उच्चार-प्रस्रवण नामक तृतीय अध्ययन में मल-मूत्र के त्याग की अहिंसक विधि बतलाई गई है। शब्द नामक चतुर्थ अध्ययन में विविध वाद्यों, गीतों, नृत्यों, उत्सवों आदि के शब्दों को सुनने की लालसा से यत्र-तत्र जाने का निषेध किया गया है। रूप नामक पंचम अध्ययन में विविध प्रकार के रूपों को देखने की लालसा का प्रतिषेध किया गया है। षष्ठ अध्ययन परक्रिया में अन्य द्वारा शारीरिक संस्कार, चिकित्सा आदि करवाने का निषेध किया गया है । सप्तम अध्ययन अन्योन्यक्रिया में परस्पर चिकित्सा आदि करने-करवाने का प्रतिषेध किया गया है। भावना नामक तृतीय चुला में पांच महाव्रतों की भावनाओं के साथ ही तदुपदेशक भगवान् महावीर का जीवन भी दिया गया है। विमुक्ति नामक चतुर्थ चूला में मोक्ष की चर्चा है । मुनि को आंशिक एवं सिद्ध को पूर्ण मोक्ष होता है । समुद्र के समान यह संसार दुस्तर है । जो मुनि इसे पार कर लेते हैं वे अन्तकृत - विमुक्त कहे जाते हैं। इस प्रकार आचारांग सूत्र निःसंदेह भगवान् महावीर द्वारा प्रतिपा दित आचारशास्त्र का उत्कृष्टतम ग्रंथ है। इसमें अनगारघमं अर्थात् श्रमणाचार के समस्त महत्त्वपूर्ण पक्षों का सारगर्भित निरूपण है । उपासकदशांग : श्रावकाचार अर्थात् सागारधर्म का प्रतिपादक उपासकदशांग सातवां अंगसूत्र है । इसमें भगवान् महावीर के दस प्रधान उपासकों - श्रावकों के आदर्श चरित्र दिये गये हैं। इनके नाम इस प्रकार हैंः एक. आनन्द, दो. कामदेव, तीन. चुलनीपिता, चार. सुरा |
चेन्नई निगम में आगामी पार्षद चुनाव के लिए अन्नाद्रमुक और भाजपा ने ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है। तमिलनाडु में शहरी स्थानीय निकाय के लिए हो रहे चुनावों के लिए मतदान 19 फरवरी को होगा।
सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवने ने गुरुवार को कहा कि पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा (LOC) पर संघर्ष विराम जारी है, क्योंकि भारत ने मजबूत स्थिति से बातचीत की है।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के काफिले पर गुरुवार को उत्तर प्रदेश के मेरठ में हमला किया गया। ओवैसी ने चुनाव आयोग से मामले की स्वतंत्र जांच कराने का आग्रह किया है।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-मुस्लिमीन के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी की कार पर उत्तर प्रदेश के मेरठ के छिजारसी टोल प्लाजा के पास हुई फायरिंग की CCTV फुटेज सामने आ गई है।
जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में गुरुवार को हुए एक भीषण सड़क हादसे में छह लोगों की मौत हो गई। पांच लोगों की मौत घटनास्थल पर हो गई। एक व्यक्ति ने अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में दम तोड़ दिया।
चीन इस आयोजन को राजनीति से दूर रखने का वादा निभाने में नाकाम रहा है। चीन ने इस आयोजन यानी विंटर टॉर्च ओलंपिक रिले(Winter Olympics Torch Relay) का एक मशाल वाहक(torchbearer) उस सैन्य अधिकारी को भी बनाया गया, जो गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प में बुरी तरह घायल हुआ था।
नटवर सिंह के साथ ही पूर्व राजनयिक कंवल सिब्बल ने भी राहुल की बात का समर्थन नहीं किया है। कंवल सिब्बल कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल के भाई हैं। उन्होंने कहा कि चीन-पाकिस्तान गठबंधन भारत में भाजपा के सत्ता में आने से बहुत पहले शुरू हो गया था। 1962 के युद्ध के बाद चीन और पाकिस्तान ने अपने संबंध मजबूत किए।
Covid 19 Live Update : देश के 34 राज्यों में कोरोना के मामले कम हो रहे हैं। पॉजिटिविटी रेट में भी कमी आई है। हालांकि केरल और मिजोरम ऐसे राज्य हैं, जहां कोरोना के मामले और पॉजिटिविटी रेट दोनों में वृद्धि हुई है। 21 जनवरी को देश में 3. 74 लाख मामले आए थे, जबकि 2 फरवरी को इनकी संख्या घटकर आधी यानी 1. 72 लाख ही रह गई है।
Road rage case : 27 दिसंबर 1988 को नवजोत सिंह सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह संधू पटियाला में कहीं गए थे। इस दौरान कार पार्किंग को लेकर उनकी गुरनाम सिंह नाम के बुजुर्ग से विवाद हो गया। हाथापाई में गुरनाम की मौत हो गई। इसी मामले को लेकर सिद्धू और उनके दोस्त पर धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) के तहत केस दर्ज किया गया था।
Parliament Budget session : AAI ने 31 मई 2021 और 29 अक्टूबर 2021 को 5 हवाई अड्डों पर स्थापित होने वाले 9 एफटीओ के लिए आदेश जारी किए हैं। इनमें से दो बेलगावी (कर्नाटक) में, दो जलगांव (महाराष्ट्र), दो कलबुर्गी (कर्नाटक), दो खजुराहो (मध्य प्रदेश) और एक लीलाबारी (असम) में बनेगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय में राज्य मंत्री वीके सिंह ने आज लोकसभा में यह जानकारी दी।
| चेन्नई निगम में आगामी पार्षद चुनाव के लिए अन्नाद्रमुक और भाजपा ने ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा है। तमिलनाडु में शहरी स्थानीय निकाय के लिए हो रहे चुनावों के लिए मतदान उन्नीस फरवरी को होगा। सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवने ने गुरुवार को कहा कि पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम जारी है, क्योंकि भारत ने मजबूत स्थिति से बातचीत की है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के काफिले पर गुरुवार को उत्तर प्रदेश के मेरठ में हमला किया गया। ओवैसी ने चुनाव आयोग से मामले की स्वतंत्र जांच कराने का आग्रह किया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-मुस्लिमीन के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी की कार पर उत्तर प्रदेश के मेरठ के छिजारसी टोल प्लाजा के पास हुई फायरिंग की CCTV फुटेज सामने आ गई है। जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में गुरुवार को हुए एक भीषण सड़क हादसे में छह लोगों की मौत हो गई। पांच लोगों की मौत घटनास्थल पर हो गई। एक व्यक्ति ने अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में दम तोड़ दिया। चीन इस आयोजन को राजनीति से दूर रखने का वादा निभाने में नाकाम रहा है। चीन ने इस आयोजन यानी विंटर टॉर्च ओलंपिक रिले का एक मशाल वाहक उस सैन्य अधिकारी को भी बनाया गया, जो गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प में बुरी तरह घायल हुआ था। नटवर सिंह के साथ ही पूर्व राजनयिक कंवल सिब्बल ने भी राहुल की बात का समर्थन नहीं किया है। कंवल सिब्बल कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल के भाई हैं। उन्होंने कहा कि चीन-पाकिस्तान गठबंधन भारत में भाजपा के सत्ता में आने से बहुत पहले शुरू हो गया था। एक हज़ार नौ सौ बासठ के युद्ध के बाद चीन और पाकिस्तान ने अपने संबंध मजबूत किए। Covid उन्नीस Live Update : देश के चौंतीस राज्यों में कोरोना के मामले कम हो रहे हैं। पॉजिटिविटी रेट में भी कमी आई है। हालांकि केरल और मिजोरम ऐसे राज्य हैं, जहां कोरोना के मामले और पॉजिटिविटी रेट दोनों में वृद्धि हुई है। इक्कीस जनवरी को देश में तीन. चौहत्तर लाख मामले आए थे, जबकि दो फरवरी को इनकी संख्या घटकर आधी यानी एक. बहत्तर लाख ही रह गई है। Road rage case : सत्ताईस दिसंबर एक हज़ार नौ सौ अठासी को नवजोत सिंह सिद्धू और उनके दोस्त रुपिंदर सिंह संधू पटियाला में कहीं गए थे। इस दौरान कार पार्किंग को लेकर उनकी गुरनाम सिंह नाम के बुजुर्ग से विवाद हो गया। हाथापाई में गुरनाम की मौत हो गई। इसी मामले को लेकर सिद्धू और उनके दोस्त पर धारा तीन सौ चार के तहत केस दर्ज किया गया था। Parliament Budget session : AAI ने इकतीस मई दो हज़ार इक्कीस और उनतीस अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस को पाँच हवाई अड्डों पर स्थापित होने वाले नौ एफटीओ के लिए आदेश जारी किए हैं। इनमें से दो बेलगावी में, दो जलगांव , दो कलबुर्गी , दो खजुराहो और एक लीलाबारी में बनेगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय में राज्य मंत्री वीके सिंह ने आज लोकसभा में यह जानकारी दी। |
उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने बाताया कि अबतक किसी तरह की जनहानि की कोई खबर नहीं है. घटना की जानकारी मिलते ही एसडीआरएफ की टीम मौके के लिए रवाना हो गई है.
उत्तराखंड के टिहरी गढवाल (Tehri Garhwal)जिले के देवप्रयाग में मांगलवार देर शाम बादल फटने (Cloudburst in Devprayag) से भारी तबाही मच गई है. बादल फटने से इलाके का एक गदेरा उफान पर आ गया जिससे थाना देवप्रयाग कस्बा क्षेत्र के अंतर्गत बाजार में बड़े-बड़े बोल्डरों और पानी ने कई दुकानों और घरों को नुकसान पहुंचाया है. हालांकि अबतक किसी जनहानि की कोई खबर नहीं है. उत्तराखंड पुलिस के डीजीपी अशोक कुमार ने बाताया कि घटना की जानकारी मिलते ही एसडीआरएफ की टीम मौके के लिए रवाना हो गई है.
थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए क्षतिग्रस्त इमारतों के आसपास के लोगों को मौके से हटाया गया है. थाना प्रभारी देवप्रयाग महिपाल रावत ने बताया कि करीब पांच बजे दशरथ आंचल पर्वत पर बादल फटा. जिससे शांता गदेरा उफान पर आ गया. मलबा आने से देवप्रयाग मुख्य बाजार में भी दुकानों को नुकसान हुआ है. डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि अबतक किसी तरह की जनहानि की कोई खबर नहीं है.
देवप्रयाग में बादल फटने की घटना को लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से बात की. गृहमंत्री ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि उत्तराखंड को केंद्र सरकार हर जरूरी मदद मुहैया कराएगी. अब से कुछ ही दिन पहले तीन मई को चमोली जिले के घाट ब्लाक में अलग-अलग जगहों पर बादल फटने की घटना से घाट बाजार में तबाही मच गई थी. जिसमें कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे और कई दुकानों में मलबा घुसने से लाखों का सामान नष्ट हो गया था. इसके कुछ ही दिन बाद सात मई को नई टिहरी में जाखणीधार ब्लॉक के पिपोला में भी बादल फटने की वजह से भारी नुकसान हुआ था.
| उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने बाताया कि अबतक किसी तरह की जनहानि की कोई खबर नहीं है. घटना की जानकारी मिलते ही एसडीआरएफ की टीम मौके के लिए रवाना हो गई है. उत्तराखंड के टिहरी गढवाल जिले के देवप्रयाग में मांगलवार देर शाम बादल फटने से भारी तबाही मच गई है. बादल फटने से इलाके का एक गदेरा उफान पर आ गया जिससे थाना देवप्रयाग कस्बा क्षेत्र के अंतर्गत बाजार में बड़े-बड़े बोल्डरों और पानी ने कई दुकानों और घरों को नुकसान पहुंचाया है. हालांकि अबतक किसी जनहानि की कोई खबर नहीं है. उत्तराखंड पुलिस के डीजीपी अशोक कुमार ने बाताया कि घटना की जानकारी मिलते ही एसडीआरएफ की टीम मौके के लिए रवाना हो गई है. थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए क्षतिग्रस्त इमारतों के आसपास के लोगों को मौके से हटाया गया है. थाना प्रभारी देवप्रयाग महिपाल रावत ने बताया कि करीब पांच बजे दशरथ आंचल पर्वत पर बादल फटा. जिससे शांता गदेरा उफान पर आ गया. मलबा आने से देवप्रयाग मुख्य बाजार में भी दुकानों को नुकसान हुआ है. डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि अबतक किसी तरह की जनहानि की कोई खबर नहीं है. देवप्रयाग में बादल फटने की घटना को लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत से बात की. गृहमंत्री ने मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया कि उत्तराखंड को केंद्र सरकार हर जरूरी मदद मुहैया कराएगी. अब से कुछ ही दिन पहले तीन मई को चमोली जिले के घाट ब्लाक में अलग-अलग जगहों पर बादल फटने की घटना से घाट बाजार में तबाही मच गई थी. जिसमें कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे और कई दुकानों में मलबा घुसने से लाखों का सामान नष्ट हो गया था. इसके कुछ ही दिन बाद सात मई को नई टिहरी में जाखणीधार ब्लॉक के पिपोला में भी बादल फटने की वजह से भारी नुकसान हुआ था. |
पिछले साल, Bajaj ने आखिरकार भारतीय बाजार में बहुप्रतीक्षित Pulsar 250 को लॉन्च किया। अब, मोटरसाइकिल के दो परीक्षण mule फिर से सड़क पर देखे गए हैं। वीडियो YouTube पर Car Blogger द्वारा अपलोड किया गया है और यह एक छोटा वीडियो है। अपलोडर का मानना है कि परीक्षण mule Pulsar N390 और Pulsar F390 के थे।
अगर ऐसा है, तो नई मोटरसाइकिलों को Pulsar N400 और Pulsar F400 कहा जाएगा। क्योंकि Bajaj Dominar के साथ भी 373 सीसी इंजन को 400 के रूप में दर्शाता है। Pulsar 250 और देखे गए नए परीक्षण mule के बीच कोई प्रमुख कॉस्मेटिक अंतर नहीं हैं।
अगर ये मोटरसाइकिलें बड़ा इंजन चला रही हैं तो ग्रिप लेवल को बढ़ाने के लिए उन्हें कम से कम चौड़े टायर्स मिलने चाहिए। इंजन KTM के 373 सीसी इंजन से लिया जाएगा जो वर्तमान में आरसी390, Duke 390 और Adventure 390 में उपयोग किया जा रहा है।
KTM की 373 cc यूनिट एक लिक्विड-कूल्ड, सिंगल-सिलेंडर इंजन है जो अधिकतम 43.5 PS की पावर और 37 Nm का पीक टॉर्क पैदा करता है। यह स्लिप और असिस्ट क्लच के साथ 6-स्पीड गियरबॉक्स के साथ आता है। KTM एक द्वि-दिशात्मक त्वरित-शिफ्टर भी प्रदान करता है।
Bajaj ने मध्यम और निम्न-अंत टोक़ के लिए इंजन को भारी रूप से बदला। KTM की इकाई से बिजली निकालने के लिए आपको इंजन को रेव रेंज के शीर्ष छोर तक ले जाना होगा। इसके अलावा, शहर के यातायात में इंजन गर्म हो जाएगा। Bajaj के इस इंजन का वर्जन भी 373 सीसी का है और लिक्विड-कूल्ड भी है। इसमें एक डीओएचसी सेटअप है और Bajaj की ट्रिपल स्पार्क तकनीक का उपयोग करता है। इंजन 40 पीएस की अधिकतम पावर और 35 एनएम की पीक टॉर्क पैदा करता है। KTM के विपरीत, इस इंजन से टॉर्क बहुत पहले आता है और पूरे रेव रेंज में फैला होता है। इस वजह से सवार को इंजन को घुमाने की जरूरत नहीं पड़ती।
यदि देखा गया परीक्षण mule में बड़ा इंजन है तो यह Dominar 400 के इंजन का कुछ पुनरावृत्ति होगा। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि Bajaj ने अभी तक भारत में आने वाली अधिक शक्तिशाली पल्सर के बारे में कोई जानकारी जारी नहीं की है।
Pulsar 250 के लॉन्च के साथ Bajaj ने अब दिग्गज पल्सर 220F को बंद कर दिया है। धीरे-धीरे, Bajaj सभी पल्सर लाइन-अप को बंद कर देगा और उन्हें पल्सर की नई पीढ़ी के साथ बदल देगा जो कि नई Pulsar 250 के समान प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी।
Bajaj ने Pulsar 250 को भारी रूप से फिर से डिज़ाइन किया लेकिन फिर भी कुछ डिज़ाइन तत्वों को समान रखा ताकि मोटरसाइकिल अभी भी पल्सर के रूप में पहचानी जा सके। Bajaj ने आखिरकार पल्सर के इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर को भी अपडेट कर दिया। इसे अब "इन्फिनिटी डिस्प्ले कंसोल" कहा जाता है और यह अभी भी बीच में एक टैकोमीटर के साथ आता है।
इंजन बिल्कुल नया है। यह 2 वॉल्व, 250 सीसी, सिंगल-सिलेंडर, फ्यूल-इंजेक्टेड इंजन है। यह एयर-ऑयल कूल्ड है और इसमें Bajaj की DTS-i तकनीक भी है। इंजन 24.5 पीएस की अधिकतम पावर और 21.5 एनएम का पीक टॉर्क आउटपुट देता है। यह स्लिप और असिस्ट के साथ 5-स्पीड गियरबॉक्स के साथ आता है।
इंजन में भरपूर टॉर्क है और आपको गियरबॉक्स का ज्यादा इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है। सवारी की गुणवत्ता बहुत अच्छी है। यह न ज्यादा सख्त है और न ज्यादा मुलायम। Bajaj अभी भी Pulsar 250 के साथ डुअल-चैनल एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम नहीं दे रहा है।
| पिछले साल, Bajaj ने आखिरकार भारतीय बाजार में बहुप्रतीक्षित Pulsar दो सौ पचास को लॉन्च किया। अब, मोटरसाइकिल के दो परीक्षण mule फिर से सड़क पर देखे गए हैं। वीडियो YouTube पर Car Blogger द्वारा अपलोड किया गया है और यह एक छोटा वीडियो है। अपलोडर का मानना है कि परीक्षण mule Pulsar Nतीन सौ नब्बे और Pulsar Fतीन सौ नब्बे के थे। अगर ऐसा है, तो नई मोटरसाइकिलों को Pulsar Nचार सौ और Pulsar Fचार सौ कहा जाएगा। क्योंकि Bajaj Dominar के साथ भी तीन सौ तिहत्तर सीसी इंजन को चार सौ के रूप में दर्शाता है। Pulsar दो सौ पचास और देखे गए नए परीक्षण mule के बीच कोई प्रमुख कॉस्मेटिक अंतर नहीं हैं। अगर ये मोटरसाइकिलें बड़ा इंजन चला रही हैं तो ग्रिप लेवल को बढ़ाने के लिए उन्हें कम से कम चौड़े टायर्स मिलने चाहिए। इंजन KTM के तीन सौ तिहत्तर सीसी इंजन से लिया जाएगा जो वर्तमान में आरसीतीन सौ नब्बे, Duke तीन सौ नब्बे और Adventure तीन सौ नब्बे में उपयोग किया जा रहा है। KTM की तीन सौ तिहत्तर cc यूनिट एक लिक्विड-कूल्ड, सिंगल-सिलेंडर इंजन है जो अधिकतम तैंतालीस.पाँच PS की पावर और सैंतीस Nm का पीक टॉर्क पैदा करता है। यह स्लिप और असिस्ट क्लच के साथ छः-स्पीड गियरबॉक्स के साथ आता है। KTM एक द्वि-दिशात्मक त्वरित-शिफ्टर भी प्रदान करता है। Bajaj ने मध्यम और निम्न-अंत टोक़ के लिए इंजन को भारी रूप से बदला। KTM की इकाई से बिजली निकालने के लिए आपको इंजन को रेव रेंज के शीर्ष छोर तक ले जाना होगा। इसके अलावा, शहर के यातायात में इंजन गर्म हो जाएगा। Bajaj के इस इंजन का वर्जन भी तीन सौ तिहत्तर सीसी का है और लिक्विड-कूल्ड भी है। इसमें एक डीओएचसी सेटअप है और Bajaj की ट्रिपल स्पार्क तकनीक का उपयोग करता है। इंजन चालीस पीएस की अधिकतम पावर और पैंतीस एनएम की पीक टॉर्क पैदा करता है। KTM के विपरीत, इस इंजन से टॉर्क बहुत पहले आता है और पूरे रेव रेंज में फैला होता है। इस वजह से सवार को इंजन को घुमाने की जरूरत नहीं पड़ती। यदि देखा गया परीक्षण mule में बड़ा इंजन है तो यह Dominar चार सौ के इंजन का कुछ पुनरावृत्ति होगा। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि Bajaj ने अभी तक भारत में आने वाली अधिक शक्तिशाली पल्सर के बारे में कोई जानकारी जारी नहीं की है। Pulsar दो सौ पचास के लॉन्च के साथ Bajaj ने अब दिग्गज पल्सर दो सौ बीसF को बंद कर दिया है। धीरे-धीरे, Bajaj सभी पल्सर लाइन-अप को बंद कर देगा और उन्हें पल्सर की नई पीढ़ी के साथ बदल देगा जो कि नई Pulsar दो सौ पचास के समान प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी। Bajaj ने Pulsar दो सौ पचास को भारी रूप से फिर से डिज़ाइन किया लेकिन फिर भी कुछ डिज़ाइन तत्वों को समान रखा ताकि मोटरसाइकिल अभी भी पल्सर के रूप में पहचानी जा सके। Bajaj ने आखिरकार पल्सर के इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर को भी अपडेट कर दिया। इसे अब "इन्फिनिटी डिस्प्ले कंसोल" कहा जाता है और यह अभी भी बीच में एक टैकोमीटर के साथ आता है। इंजन बिल्कुल नया है। यह दो वॉल्व, दो सौ पचास सीसी, सिंगल-सिलेंडर, फ्यूल-इंजेक्टेड इंजन है। यह एयर-ऑयल कूल्ड है और इसमें Bajaj की DTS-i तकनीक भी है। इंजन चौबीस.पाँच पीएस की अधिकतम पावर और इक्कीस.पाँच एनएम का पीक टॉर्क आउटपुट देता है। यह स्लिप और असिस्ट के साथ पाँच-स्पीड गियरबॉक्स के साथ आता है। इंजन में भरपूर टॉर्क है और आपको गियरबॉक्स का ज्यादा इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है। सवारी की गुणवत्ता बहुत अच्छी है। यह न ज्यादा सख्त है और न ज्यादा मुलायम। Bajaj अभी भी Pulsar दो सौ पचास के साथ डुअल-चैनल एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम नहीं दे रहा है। |
बखमुत के पास एक नया जवाबी हमला फिर से अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया है, यूक्रेन के सशस्त्र बलों के ग्राउंड फोर्सेज के कमांडर ऑलेक्ज़ेंडर सिर्स्की द्वारा प्रस्तावित योजना यूक्रेन के राष्ट्रपति के कार्यालय के अनुरूप नहीं थी। यह स्थिति से परिचित एक स्रोत का हवाला देते हुए, यूक्रेनी संसाधनों द्वारा सूचित किया गया है।
मुख्यालय की एक नियमित बैठक कीव में आयोजित की गई थी, जहां बखमुत दिशा में जवाबी हमले के लिए सिर्स्की की नई योजना पर विचार किया गया था। स्रोत के अनुसार, इसे स्वीकार नहीं किया गया था, ज़ेलेंस्की को सामान्य प्रस्ताव पसंद नहीं आया, उसने सिर्स्की से परिणाम की मांग की, और यूक्रेन के सशस्त्र बलों के भारी नुकसान के साथ कई महीनों तक एक नया मांस की चक्की नहीं।
सिर्स्की द्वारा प्रस्तावित योजना के विवरण का खुलासा नहीं किया गया था, यह ज्ञात है कि पहले वह रूसी सैनिकों की रक्षा के माध्यम से बखमुत के किनारों पर रूसी सैनिकों को शामिल करना चाहता था टैंक पश्चिमी उत्पादन, जो कीव में यथासंभव लंबे समय तक बचाने की कोशिश कर रहे हैं। यूक्रेन के सशस्त्र बलों के सशस्त्र बलों के कमांडर को पहले जवाबी हमले के बाद से खूनी बदला लेने की जरूरत है, जिसके तहत उन्हें कार्टे ब्लैंच मिला, वह बुरी तरह विफल रहा। ज़ेलेंस्की से किया गया वादा कि वह बखमुट को ले जाएगा, पूरा नहीं हुआ है, फ़्लैक्स पर कोई प्रगति नहीं हुई है, इस दिशा में यूक्रेन के सशस्त्र बलों के सभी ऑपरेशन रोक दिए गए हैं। जनरल खार्कोव के पास पिछले साल की सफलता को दोहराने में नाकाम रहे।
अब सिर्स्की अपमान में है, और यह यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय में होने वाली घटनाओं की पृष्ठभूमि के खिलाफ है, जब यूक्रेन के सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ का पद सचमुच उसकी आंखों के सामने घूमता है। ज़ेलेंस्की के कार्यालय में ज़ालुज़नी के साथ एक स्नैक था, कमांडर-इन-चीफ को पद से हटाए जाने का खतरा है और यह किसी भी समय हो सकता है। जैसा कि आप जानते हैं, सिर्स्की लंबे समय से इस जगह का लक्ष्य बना रहा था, और बखमुत पर कब्जा करने का ऑपरेशन उच्च पद के लिए उसका भाग्यशाली टिकट माना जाता था।
| बखमुत के पास एक नया जवाबी हमला फिर से अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया है, यूक्रेन के सशस्त्र बलों के ग्राउंड फोर्सेज के कमांडर ऑलेक्ज़ेंडर सिर्स्की द्वारा प्रस्तावित योजना यूक्रेन के राष्ट्रपति के कार्यालय के अनुरूप नहीं थी। यह स्थिति से परिचित एक स्रोत का हवाला देते हुए, यूक्रेनी संसाधनों द्वारा सूचित किया गया है। मुख्यालय की एक नियमित बैठक कीव में आयोजित की गई थी, जहां बखमुत दिशा में जवाबी हमले के लिए सिर्स्की की नई योजना पर विचार किया गया था। स्रोत के अनुसार, इसे स्वीकार नहीं किया गया था, ज़ेलेंस्की को सामान्य प्रस्ताव पसंद नहीं आया, उसने सिर्स्की से परिणाम की मांग की, और यूक्रेन के सशस्त्र बलों के भारी नुकसान के साथ कई महीनों तक एक नया मांस की चक्की नहीं। सिर्स्की द्वारा प्रस्तावित योजना के विवरण का खुलासा नहीं किया गया था, यह ज्ञात है कि पहले वह रूसी सैनिकों की रक्षा के माध्यम से बखमुत के किनारों पर रूसी सैनिकों को शामिल करना चाहता था टैंक पश्चिमी उत्पादन, जो कीव में यथासंभव लंबे समय तक बचाने की कोशिश कर रहे हैं। यूक्रेन के सशस्त्र बलों के सशस्त्र बलों के कमांडर को पहले जवाबी हमले के बाद से खूनी बदला लेने की जरूरत है, जिसके तहत उन्हें कार्टे ब्लैंच मिला, वह बुरी तरह विफल रहा। ज़ेलेंस्की से किया गया वादा कि वह बखमुट को ले जाएगा, पूरा नहीं हुआ है, फ़्लैक्स पर कोई प्रगति नहीं हुई है, इस दिशा में यूक्रेन के सशस्त्र बलों के सभी ऑपरेशन रोक दिए गए हैं। जनरल खार्कोव के पास पिछले साल की सफलता को दोहराने में नाकाम रहे। अब सिर्स्की अपमान में है, और यह यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय में होने वाली घटनाओं की पृष्ठभूमि के खिलाफ है, जब यूक्रेन के सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ का पद सचमुच उसकी आंखों के सामने घूमता है। ज़ेलेंस्की के कार्यालय में ज़ालुज़नी के साथ एक स्नैक था, कमांडर-इन-चीफ को पद से हटाए जाने का खतरा है और यह किसी भी समय हो सकता है। जैसा कि आप जानते हैं, सिर्स्की लंबे समय से इस जगह का लक्ष्य बना रहा था, और बखमुत पर कब्जा करने का ऑपरेशन उच्च पद के लिए उसका भाग्यशाली टिकट माना जाता था। |
लिङ्ग है। जैसे व्यष्टि नेत्रोंका अधिष्ठाता समष्टिदेव सूर्य है, वैसे ही व्यष्टि प्रजननशक्तियोंमें व्याप्त शिवतत्त्वका समष्टिस्वरूपं शिवलिङ्ग है। जैसे व्यष्टि नेत्रको उपासना न होकर समष्टिनेत्र सूर्यको ही आराधना होती है और प्रतिमा भी उन्हींको बनती है, वैसे ही समष्टि शिवमूर्तिकी ही उपासना और प्रतिमा होती है। जैसे जाग्रत्, स्वप्नकी उत्पत्ति और लय सौपुप्त तमसे ही होते हैं, वैसे ही तमसे सबका उद्भव और उसीमें सबका लय होता है। तमको वशमें रखकर उसके अधिष्ठाता शिव ही सर्वकारण है। कार्योको कारणका पता आद्यन्त नहीं लगता।
यह कहा जा चुका है कि समस्त योनियोंका समष्टि रूप प्रकृति है, वही शिवलिङ्गका पीठ या जलहरी है। योनिमें प्रतिष्ठित लिङ्ग आनन्दप्रधान, आनन्दमय होता है। जैसे
समस्त रूपोंका आश्रय चक्षु, समस्त गन्धोंका आश्रय - एकायतन घ्राण है, वैसे ही समस्त आनन्दोंका एकायतन लिङ्गयोनिरूप उपस्थ है। अतएव, प्रकृतिविशिष्ट दृक्-रूप परमात्मा आनन्दमय कहलाता है। सुषुप्तिमें भी उसीके अंशंभूत व्यष्टि आनन्दमयका उपलम्भ होता है। प्रिय, मोद, प्रमोद, आनन्द - ये आनन्दमयके अवयव है, शुद्ध ब्रह्म इन सबका आधार है। जब अनन्तग्रह्माण्डोत्पादिनी प्रकृति समष्टि योनि है, तब अनन्तब्रह्माण्डनायक परमात्मा ही समष्टि लिङ्ग है और अनन्त ब्रह्माण्ड प्रपञ्च ही उनसे उत्पन्न सृष्टि है। इसीलिये परमप्रकाशमय, अखण्ड, अनन्त शिवतत्त्व हो वास्तविक लिग है और वह परम प्रकृतिरूप योनिजलहरोमें प्रतिष्ठित है। उसोको प्रतिकृति पापाणमयी धातुमयी जलहरी और लिङ्गरूपमें बनायी जाती है।
अदीर्घदर्शी अज्ञ प्राणीके लिये सांसारिक सुखोंमें सर्वाधिक सुख प्रिया प्रियतम परिष्वङ्ग-मैथुनमें है। अतः उसके उदाहरणसे भी श्रुतियोंने अनन्त, अखण्ड, परमानन्द ब्रह्म और प्रकृतिके आनन्दमय स्वरूपको दिखलाया है। कहीं-कहीं जोवात्माके परमात्मसंम्मिलन सुखको इसी दृष्टान्तसुखसे दिखलाया गया हैतद् यथा प्रियया स्त्रिया सम्परिष्वक्तो
न वाहां किञ्चन वेद वेद नान्तरम् । .एवमेवायें पुरुषः प्राज्ञेनात्मना सम्परिष्वक्तो
बाह्यं किञ्चन वेद नान्तरम् ॥
(बृहदारण्यक० ४।३।२१) जैसे प्रियतमाके परिरम्भणमें कामुकको आनन्दोद्रेकसे बाह्य, आभ्यन्तर विश्व विस्मृत होता है, वैसे ही जीवकोः परमात्माके सम्मिलनमें प्रपञ्चका विस्मरण होता है। श्रुतियों एवं पुराणोमें आध्यात्मिक, आधिदैविक तत्त्वोंका हो लौकिक' भाषामें वर्णन किया जाता है, जिससे कभी-कभी अशोको उसमें अश्लीलता झलकने लगती है। गोलोकधाममें एक पूर्णतम पुरुषोत्तम श्रीकृष्णाने अकेले अरमणके कारण अपनेआपको दो रूपमें प्रकट किया -- एक श्याम तेज, दूसरा गौर तेज । गौर तेज राधिकामें श्यामल तेज कृष्णसे गर्भाधान - होनेपर महत्तत्त्वप्रधान हिरण्यगर्भ उत्पन्न हुए। यह भी : प्रकृति पुरुषके संयोगसे महत्तत्त्वादि प्रपञ्चकी उत्पत्ति रूपक कही गयी है।
इसीको यों भी समझ सकते हैं - जाग्रत, स्वप्नके अभिमानी विश्व, तैजस और विराट्, हिरण्यगर्भ - ये सभी. सावयव हैं। किंतु सर्वलयाधिकरण ईश्वर निरवयव है, वह मायासे आवृत होता है। अविद्याके भीतर ही रहनेवाला तो जीव है, परंतु जो 'अत्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम् के सिद्धान्तानुसार अविद्याका अतिक्रमण कर स्थित है, वही ईश्वर है। निरावरण तत्त्व शिव है । ईश्वरभाव मायासे आवृत और शिवभाव. अनावृत है । माया जलहरी है और उसके भीतर आवृत ईश्वर है, जलहरोके बाहर निकला हुआ शिवलिङ्ग निरावरण ईश्वर है। जिसका पृथक्-पृथक् अङ्ग न व्यक्त हो, वह पिण्डके हो रूपमें रहेगा। सुषुप्तिमें प्रतीयमान विशिष्ट आत्मभावका सूचक पिण्डी है। शिवके सम्बन्धमात्र से प्रकृति स्वयं विकाररूपमें प्रवाहित होती है। इसलिये अर्घा गोल नहीं, किंतु दीर्घ होता है । लिङ्गके मूलमें ब्रह्मा, मध्यमे विष्णु, ऊपर प्रणवात्मक शंकर हैं। लिङ्ग महेश्वर, अर्घा महादेवी हैमूले ब्रह्मा तथा मध्ये विष्णुस्त्रिभुवनेश्वरः ।... रुद्रोपरि महादेवः प्रणवाख्यः सदाशिवः ॥ : लिङ्गवेदी महादेवी लिङ्गं साक्षान्महेश्वरः । तयोः सम्पूजनान्नित्यं देवी देवश्च पूजितौ ॥, (लिङ्गपुराण) चैतन्यरूप लिङ्ग सत्ता और प्रकृतिसे ही ब्रह्माण्डको रचना | लिङ्ग है। जैसे व्यष्टि नेत्रोंका अधिष्ठाता समष्टिदेव सूर्य है, वैसे ही व्यष्टि प्रजननशक्तियोंमें व्याप्त शिवतत्त्वका समष्टिस्वरूपं शिवलिङ्ग है। जैसे व्यष्टि नेत्रको उपासना न होकर समष्टिनेत्र सूर्यको ही आराधना होती है और प्रतिमा भी उन्हींको बनती है, वैसे ही समष्टि शिवमूर्तिकी ही उपासना और प्रतिमा होती है। जैसे जाग्रत्, स्वप्नकी उत्पत्ति और लय सौपुप्त तमसे ही होते हैं, वैसे ही तमसे सबका उद्भव और उसीमें सबका लय होता है। तमको वशमें रखकर उसके अधिष्ठाता शिव ही सर्वकारण है। कार्योको कारणका पता आद्यन्त नहीं लगता। यह कहा जा चुका है कि समस्त योनियोंका समष्टि रूप प्रकृति है, वही शिवलिङ्गका पीठ या जलहरी है। योनिमें प्रतिष्ठित लिङ्ग आनन्दप्रधान, आनन्दमय होता है। जैसे समस्त रूपोंका आश्रय चक्षु, समस्त गन्धोंका आश्रय - एकायतन घ्राण है, वैसे ही समस्त आनन्दोंका एकायतन लिङ्गयोनिरूप उपस्थ है। अतएव, प्रकृतिविशिष्ट दृक्-रूप परमात्मा आनन्दमय कहलाता है। सुषुप्तिमें भी उसीके अंशंभूत व्यष्टि आनन्दमयका उपलम्भ होता है। प्रिय, मोद, प्रमोद, आनन्द - ये आनन्दमयके अवयव है, शुद्ध ब्रह्म इन सबका आधार है। जब अनन्तग्रह्माण्डोत्पादिनी प्रकृति समष्टि योनि है, तब अनन्तब्रह्माण्डनायक परमात्मा ही समष्टि लिङ्ग है और अनन्त ब्रह्माण्ड प्रपञ्च ही उनसे उत्पन्न सृष्टि है। इसीलिये परमप्रकाशमय, अखण्ड, अनन्त शिवतत्त्व हो वास्तविक लिग है और वह परम प्रकृतिरूप योनिजलहरोमें प्रतिष्ठित है। उसोको प्रतिकृति पापाणमयी धातुमयी जलहरी और लिङ्गरूपमें बनायी जाती है। अदीर्घदर्शी अज्ञ प्राणीके लिये सांसारिक सुखोंमें सर्वाधिक सुख प्रिया प्रियतम परिष्वङ्ग-मैथुनमें है। अतः उसके उदाहरणसे भी श्रुतियोंने अनन्त, अखण्ड, परमानन्द ब्रह्म और प्रकृतिके आनन्दमय स्वरूपको दिखलाया है। कहीं-कहीं जोवात्माके परमात्मसंम्मिलन सुखको इसी दृष्टान्तसुखसे दिखलाया गया हैतद् यथा प्रियया स्त्रिया सम्परिष्वक्तो न वाहां किञ्चन वेद वेद नान्तरम् । .एवमेवायें पुरुषः प्राज्ञेनात्मना सम्परिष्वक्तो बाह्यं किञ्चन वेद नान्तरम् ॥ जैसे प्रियतमाके परिरम्भणमें कामुकको आनन्दोद्रेकसे बाह्य, आभ्यन्तर विश्व विस्मृत होता है, वैसे ही जीवकोः परमात्माके सम्मिलनमें प्रपञ्चका विस्मरण होता है। श्रुतियों एवं पुराणोमें आध्यात्मिक, आधिदैविक तत्त्वोंका हो लौकिक' भाषामें वर्णन किया जाता है, जिससे कभी-कभी अशोको उसमें अश्लीलता झलकने लगती है। गोलोकधाममें एक पूर्णतम पुरुषोत्तम श्रीकृष्णाने अकेले अरमणके कारण अपनेआपको दो रूपमें प्रकट किया -- एक श्याम तेज, दूसरा गौर तेज । गौर तेज राधिकामें श्यामल तेज कृष्णसे गर्भाधान - होनेपर महत्तत्त्वप्रधान हिरण्यगर्भ उत्पन्न हुए। यह भी : प्रकृति पुरुषके संयोगसे महत्तत्त्वादि प्रपञ्चकी उत्पत्ति रूपक कही गयी है। इसीको यों भी समझ सकते हैं - जाग्रत, स्वप्नके अभिमानी विश्व, तैजस और विराट्, हिरण्यगर्भ - ये सभी. सावयव हैं। किंतु सर्वलयाधिकरण ईश्वर निरवयव है, वह मायासे आवृत होता है। अविद्याके भीतर ही रहनेवाला तो जीव है, परंतु जो 'अत्यतिष्ठद्दशाङ्गुलम् के सिद्धान्तानुसार अविद्याका अतिक्रमण कर स्थित है, वही ईश्वर है। निरावरण तत्त्व शिव है । ईश्वरभाव मायासे आवृत और शिवभाव. अनावृत है । माया जलहरी है और उसके भीतर आवृत ईश्वर है, जलहरोके बाहर निकला हुआ शिवलिङ्ग निरावरण ईश्वर है। जिसका पृथक्-पृथक् अङ्ग न व्यक्त हो, वह पिण्डके हो रूपमें रहेगा। सुषुप्तिमें प्रतीयमान विशिष्ट आत्मभावका सूचक पिण्डी है। शिवके सम्बन्धमात्र से प्रकृति स्वयं विकाररूपमें प्रवाहित होती है। इसलिये अर्घा गोल नहीं, किंतु दीर्घ होता है । लिङ्गके मूलमें ब्रह्मा, मध्यमे विष्णु, ऊपर प्रणवात्मक शंकर हैं। लिङ्ग महेश्वर, अर्घा महादेवी हैमूले ब्रह्मा तथा मध्ये विष्णुस्त्रिभुवनेश्वरः ।... रुद्रोपरि महादेवः प्रणवाख्यः सदाशिवः ॥ : लिङ्गवेदी महादेवी लिङ्गं साक्षान्महेश्वरः । तयोः सम्पूजनान्नित्यं देवी देवश्च पूजितौ ॥, चैतन्यरूप लिङ्ग सत्ता और प्रकृतिसे ही ब्रह्माण्डको रचना |
(६) बाद में, फिर उसे गरम करना पड़ता है और दबाकर मनोनुकूल आकृति में झुकाने का प्रयास करना पड़ता है ।
( १० ) इस तरह क्रमागत प्रयास जारी रखना चाहिए, जबतक बाँस पूर्णरूप से मनोनुकूल आकृति के रूप में न आ जाय ।
(११) मनोनुकूल आकृति देने के लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि गरम लोहे के दबाव से काम लिया जाय ।
( चित्र ८७ )
साफ करने के लिए पहले मोटे सैंड पेपर व्यवहृत करते हैं, उपयोग किया जाता है ।
(१२) लोहे के दाब को लकड़ी के कोयले पर गरम करना चाहिए ।
(१३) बाद में सैंड पेपर ( Sand paper) से सामान को साफ करना पड़ता है । बाद में महीन सैंड पेपर का
(१४) सबसे अन्त में रंग देने के लिए लाह या चपड़े का व्यवहार होता है । भींगी विधि में इस बात की पूर्ण रूप से आवश्यकता है कि बाँस को अच्छी तरह गरम पानी में उबाल लेने पर मान को लोहे के दाब में लगभग बारह घंटे तक दबाये रखना जरूरी होता है। प्रेसर से दबाकर सीधा किया गया सामान चित्र ८७ में दिखाया गया है ।
बाँस के सामानों को साटने के लिए लेई या लेप
इस काम के लिए तो अनेक प्रकार के लेप या लेई हैं; पर इन लेइयों या लेपों में यह दोष पाया गया है कि पानी लगने पर इनके द्वारा साटे गये सामान अलग हो जाते हैं । इसलिए, यहाँ ऐसे लेप या लेइयों के बनाने की विधि दी जाती है, जो किसी भी दशा में न धुल सकती है या न सटा सामान अलग हो सकता है । विधि इस प्रकार है(१) चिनियाबादाम में एक प्रकार का चिपचिपा तरल पदार्थ होता है, जो साटने के काम में उपयोगी होता है। पहले चिनियावादाम के बीज को खूब महीन पीस लेते हैं और तब अलकली (Alkali) सॉल्युसन उसमें फेंटकर अच्छी तरह मिला देते हैं । अलकली सॉल्युसन पानी तथा चूना और तरल अममोनियम (Ammonium) को मिलाकर बनाते हैं। यह लेप बाँस या लकड़ी के सामानों को साटने में स्थायी होता है ।
(२) पहले दूध का खोआ बना लेना चाहिए। जितना खोआ हो, उसके परिमाण के अनुसार उसमें ५% से १०% एसिड एसिलेटेड ( Acid accelated) मिलाना चाहिए और तब उसे कपड़छान करना चाहिए । बाद, इसे धूप में सुखाकर पाउडर बना लेना चाहिए । सामानों के साटने के समय में इस पाउडर को उपयुक्त रीति | बाद में, फिर उसे गरम करना पड़ता है और दबाकर मनोनुकूल आकृति में झुकाने का प्रयास करना पड़ता है । इस तरह क्रमागत प्रयास जारी रखना चाहिए, जबतक बाँस पूर्णरूप से मनोनुकूल आकृति के रूप में न आ जाय । मनोनुकूल आकृति देने के लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि गरम लोहे के दबाव से काम लिया जाय । साफ करने के लिए पहले मोटे सैंड पेपर व्यवहृत करते हैं, उपयोग किया जाता है । लोहे के दाब को लकड़ी के कोयले पर गरम करना चाहिए । बाद में सैंड पेपर से सामान को साफ करना पड़ता है । बाद में महीन सैंड पेपर का सबसे अन्त में रंग देने के लिए लाह या चपड़े का व्यवहार होता है । भींगी विधि में इस बात की पूर्ण रूप से आवश्यकता है कि बाँस को अच्छी तरह गरम पानी में उबाल लेने पर मान को लोहे के दाब में लगभग बारह घंटे तक दबाये रखना जरूरी होता है। प्रेसर से दबाकर सीधा किया गया सामान चित्र सत्तासी में दिखाया गया है । बाँस के सामानों को साटने के लिए लेई या लेप इस काम के लिए तो अनेक प्रकार के लेप या लेई हैं; पर इन लेइयों या लेपों में यह दोष पाया गया है कि पानी लगने पर इनके द्वारा साटे गये सामान अलग हो जाते हैं । इसलिए, यहाँ ऐसे लेप या लेइयों के बनाने की विधि दी जाती है, जो किसी भी दशा में न धुल सकती है या न सटा सामान अलग हो सकता है । विधि इस प्रकार है चिनियाबादाम में एक प्रकार का चिपचिपा तरल पदार्थ होता है, जो साटने के काम में उपयोगी होता है। पहले चिनियावादाम के बीज को खूब महीन पीस लेते हैं और तब अलकली सॉल्युसन उसमें फेंटकर अच्छी तरह मिला देते हैं । अलकली सॉल्युसन पानी तथा चूना और तरल अममोनियम को मिलाकर बनाते हैं। यह लेप बाँस या लकड़ी के सामानों को साटने में स्थायी होता है । पहले दूध का खोआ बना लेना चाहिए। जितना खोआ हो, उसके परिमाण के अनुसार उसमें पाँच% से दस% एसिड एसिलेटेड मिलाना चाहिए और तब उसे कपड़छान करना चाहिए । बाद, इसे धूप में सुखाकर पाउडर बना लेना चाहिए । सामानों के साटने के समय में इस पाउडर को उपयुक्त रीति |
बध्नाति, नित्यमेवा कर्तृकत्वान्नवानि न बघ्नन् सदवस्थानि पूर्वबद्धानि ज्ञानस्वभावत्वात्केवलमेव जानाति ।। १६६ ।।
अथ रागद्वेषमोहानामास्त्रवत्वं नियमयति -
भावो रागादिजुदो जीवेण कदो दु बंधगो भणिदो । रागादिविप्पमुक्को अबधगो जाणगो णवरि ।। १६७ ।।
भावो रागादियुतो जीवेन कृतस्तु बधको भणित । रागादिविप्रमुक्तोऽबधको ज्ञायक केवलम् ।। १६७ ।।
इह खलु रागद्वेषमोहसंपर्कजोऽज्ञानमय एव भावः, अयस्कांतोपलसंपर्कज इव कालायससूच कर्म कर्तुमात्मानं चोदयति । तद्विवेकजस्तु ज्ञानमयः, अयस्कांतोषज्ञानीके जो रागादि होता है वह विद्यमान होने पर भी अविद्यमान जैसा ही है। वह भागामी सामान्य-संसारका बन्ध नहीं करता मात्र अल्पस्थिति अनुभागवाला बंध करता है। ऐसे अल्पबंधको यहाँ नहीं गिना है।
इसप्रकार ज्ञान के आासूब न होनेसे बन्ध नहीं होता ।। १६६ ।। अब, राग, द्वेष, मोह ही आसव है ऐसा नियम करते हैं
गाथा १६७
अन्वयार्थ : -[ जीवेन कृतः ] जीवकृत [ रागादियुतः ] रागादियुक्त [ भावः तु ] भाव [ बंधकः भणितः ] बधक ( नवीन कर्मोका बन्ध करनेवाला ) कहा गया है। [ रागादिविप्रमुक्तः ] रागादिसे रहित भाव [ अबंधकः ] बंधक नहीं है, [ केवलं ज्ञायकः ] वह मात्र ज्ञायक ही है ।
टीकाः- जैसे लोहचुम्बक पाषाण के साथ ससस ( लोहेकी सुईमे) उत्पन्न हुआ भाव लोहेकी सुईको (गति करने के लिये ) प्ररित करता है उसी प्रकार रागद्वेषमोहके साथ मिश्रित होने से (आत्मामे ) उत्पन्न हुआ अज्ञानमयभाव ही आत्मकर्म करने के लिये प्रेरित करता है, और जैसे लोह चुम्बक पाषाणके असर्ग ( सुईमे) उत्पन्न हुआ भाग खोडेकी सुईको ( गति न करनरूप ) स्वभाव में ही स्थापित करता है उसी प्रकार रागद्वेष मोइके
रागादियुत जो भाव जिवकृत उसहि को बंधक कहा। रागादिसे प्रविमुक्त ज्ञायक मात्र, बंधक नहि रहा ॥ १६७ ।।
आलूब अधिकार
सविवेकज इव कालायससूच अकर्मकरणोत्सुक्यमात्मानं स्वभावैनैव स्थापयति । ततो रागादिसंकीर्णोऽज्ञानमय एव कर्तृत्वे चोदकत्वाद्बंधकः । तदसंकीर्णस्तु स्वभावोद्वासकत्वात्केवलं ज्ञायक एव, न मनागपि बंधकः ।। १६७ ।। अथ रागाद्यसंकीर्णभावसंभवं दर्शयति-
पक्के फलमि पडिए अह ण फलं बज्झए पुणो विंटे। जीवस्स कम्मभाषे पडिए ण पुणोदयमुबेई ।। १६८ ।।
पक्के फले पतिते यथा न फलं बध्यते पुनर्वृतैः ।
जीवस्य कर्मभावे पतिते न पुनरुदयमुपैति ॥ १६८ ।।
यथा खलु पक्वं फलं वृन्तात्सकृद्विश्लिष्टं सत्, न पुनर्वृतसंबंधमुपैति तथा
साथ मिश्रित नहीं होनेसे (आत्मा में ) उत्पन्न हुआ ज्ञानमय भाव, जिसे कर्म करनेकी उत्सुकता नहीं है ( अर्थात् कर्म करनेका जिसका स्वभाव नहीं है) ऐसे आत्माको स्वभाव में ही स्थापित करता है; इसलिये रागादिके साथ मिश्रित अज्ञानमय भाव ही कर्तृत्व में प्रेरित करता है अतः वह बंधक है, और रागादिके साथ अमिश्रित भाग स्वभावका प्रकाशक होनेसे मात्र ज्ञायक ही है, किंचितूमात्र भी बंधक नहीं है।
भावार्थः- रागादिके साथ मिश्रित अज्ञानमयभाव ही बंधका कर्ता है, और रागादि के साथ अमिश्रित ज्ञानमय भाव बंधका कर्ता नहीं है. यह नियम है ।। १६७ ।। अब, रागादिके साथ अमिश्रित भावकी उत्पत्ति बतलाते हैंःगाथा १६८
यथा -[ यथा ] जैसे [ पके फले ] पके हुए फलके [ पतिते ] गिरने पर [ पुनः ] फिरसे [ फलं ] वह फल [ वृंतैः ] उस डटलके साथ [ म बध्यते ] नहीं जुड़ता, उसीप्रकार [ जीवस्य ] जीवके [ कर्मभावे ] कर्मभाव [ पतिते ] खिर जानेपर वह [ पुनः ] फिरसे [ उदयं न उपैति ] उत्पन्न नहीं होता, ( अर्थात् वह कर्मभाव जीवके साथ पुन, नहीं जुड़ता ) ।
टीकाः- जैसे पका हुआ फल एक बार डठलसे गिर जाने पर फिर बह उसके साथ संबंध को प्राप्त नहीं होता इसी प्रकार कर्मोदयसे उत्पन्न होनेबाला भाव जीवभावसे एक बार
फल पक खिरता, वृन्तसह संबंध फिर पाता नहीं ।
स्यों कर्मभान खिरा, पुनः जिसमें उदय पाता नहीं ।। १६८ ॥ | बध्नाति, नित्यमेवा कर्तृकत्वान्नवानि न बघ्नन् सदवस्थानि पूर्वबद्धानि ज्ञानस्वभावत्वात्केवलमेव जानाति ।। एक सौ छयासठ ।। अथ रागद्वेषमोहानामास्त्रवत्वं नियमयति - भावो रागादिजुदो जीवेण कदो दु बंधगो भणिदो । रागादिविप्पमुक्को अबधगो जाणगो णवरि ।। एक सौ सरसठ ।। भावो रागादियुतो जीवेन कृतस्तु बधको भणित । रागादिविप्रमुक्तोऽबधको ज्ञायक केवलम् ।। एक सौ सरसठ ।। इह खलु रागद्वेषमोहसंपर्कजोऽज्ञानमय एव भावः, अयस्कांतोपलसंपर्कज इव कालायससूच कर्म कर्तुमात्मानं चोदयति । तद्विवेकजस्तु ज्ञानमयः, अयस्कांतोषज्ञानीके जो रागादि होता है वह विद्यमान होने पर भी अविद्यमान जैसा ही है। वह भागामी सामान्य-संसारका बन्ध नहीं करता मात्र अल्पस्थिति अनुभागवाला बंध करता है। ऐसे अल्पबंधको यहाँ नहीं गिना है। इसप्रकार ज्ञान के आासूब न होनेसे बन्ध नहीं होता ।। एक सौ छयासठ ।। अब, राग, द्वेष, मोह ही आसव है ऐसा नियम करते हैं गाथा एक सौ सरसठ अन्वयार्थ : -[ जीवेन कृतः ] जीवकृत [ रागादियुतः ] रागादियुक्त [ भावः तु ] भाव [ बंधकः भणितः ] बधक कहा गया है। [ रागादिविप्रमुक्तः ] रागादिसे रहित भाव [ अबंधकः ] बंधक नहीं है, [ केवलं ज्ञायकः ] वह मात्र ज्ञायक ही है । टीकाः- जैसे लोहचुम्बक पाषाण के साथ ससस उत्पन्न हुआ भाव लोहेकी सुईको प्ररित करता है उसी प्रकार रागद्वेषमोहके साथ मिश्रित होने से उत्पन्न हुआ अज्ञानमयभाव ही आत्मकर्म करने के लिये प्रेरित करता है, और जैसे लोह चुम्बक पाषाणके असर्ग उत्पन्न हुआ भाग खोडेकी सुईको स्वभाव में ही स्थापित करता है उसी प्रकार रागद्वेष मोइके रागादियुत जो भाव जिवकृत उसहि को बंधक कहा। रागादिसे प्रविमुक्त ज्ञायक मात्र, बंधक नहि रहा ॥ एक सौ सरसठ ।। आलूब अधिकार सविवेकज इव कालायससूच अकर्मकरणोत्सुक्यमात्मानं स्वभावैनैव स्थापयति । ततो रागादिसंकीर्णोऽज्ञानमय एव कर्तृत्वे चोदकत्वाद्बंधकः । तदसंकीर्णस्तु स्वभावोद्वासकत्वात्केवलं ज्ञायक एव, न मनागपि बंधकः ।। एक सौ सरसठ ।। अथ रागाद्यसंकीर्णभावसंभवं दर्शयति- पक्के फलमि पडिए अह ण फलं बज्झए पुणो विंटे। जीवस्स कम्मभाषे पडिए ण पुणोदयमुबेई ।। एक सौ अड़सठ ।। पक्के फले पतिते यथा न फलं बध्यते पुनर्वृतैः । जीवस्य कर्मभावे पतिते न पुनरुदयमुपैति ॥ एक सौ अड़सठ ।। यथा खलु पक्वं फलं वृन्तात्सकृद्विश्लिष्टं सत्, न पुनर्वृतसंबंधमुपैति तथा साथ मिश्रित नहीं होनेसे उत्पन्न हुआ ज्ञानमय भाव, जिसे कर्म करनेकी उत्सुकता नहीं है ऐसे आत्माको स्वभाव में ही स्थापित करता है; इसलिये रागादिके साथ मिश्रित अज्ञानमय भाव ही कर्तृत्व में प्रेरित करता है अतः वह बंधक है, और रागादिके साथ अमिश्रित भाग स्वभावका प्रकाशक होनेसे मात्र ज्ञायक ही है, किंचितूमात्र भी बंधक नहीं है। भावार्थः- रागादिके साथ मिश्रित अज्ञानमयभाव ही बंधका कर्ता है, और रागादि के साथ अमिश्रित ज्ञानमय भाव बंधका कर्ता नहीं है. यह नियम है ।। एक सौ सरसठ ।। अब, रागादिके साथ अमिश्रित भावकी उत्पत्ति बतलाते हैंःगाथा एक सौ अड़सठ यथा -[ यथा ] जैसे [ पके फले ] पके हुए फलके [ पतिते ] गिरने पर [ पुनः ] फिरसे [ फलं ] वह फल [ वृंतैः ] उस डटलके साथ [ म बध्यते ] नहीं जुड़ता, उसीप्रकार [ जीवस्य ] जीवके [ कर्मभावे ] कर्मभाव [ पतिते ] खिर जानेपर वह [ पुनः ] फिरसे [ उदयं न उपैति ] उत्पन्न नहीं होता, । टीकाः- जैसे पका हुआ फल एक बार डठलसे गिर जाने पर फिर बह उसके साथ संबंध को प्राप्त नहीं होता इसी प्रकार कर्मोदयसे उत्पन्न होनेबाला भाव जीवभावसे एक बार फल पक खिरता, वृन्तसह संबंध फिर पाता नहीं । स्यों कर्मभान खिरा, पुनः जिसमें उदय पाता नहीं ।। एक सौ अड़सठ ॥ |
वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप का छठे दिन मनीष कौषिक ने भी प्री क्वार्टरफ़ाइनल में जगह बना ली है। जबकि आशीष कुमार को हार का सामना करना पड़ा। शनिवार भारत के लिए मिला जुला रहा, तीन भारतीय मुक्केबाज़ों का वर्ल्ड बॉक्सिंग में मुक़ाबला था, जिसमें दो में भारत को जीत मिली तो एक में हार का सामना करना पड़ा।
दिन में खेले गए मुक़ाबले में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद अमित पंघल ने चाइनीस तायपेई के मुक्केबाज़ तू पो वेई को 5 :0 से शिकस्त देकर प्री क्वार्टर में जगह बनाई थी।
इसके बाद शाम में भारत के मुक्केबाज़ मनीष कौषिक ने एकतरफ़ा मुक़ाबले में नीदरलैंड्स के एनरिको लकरूज़ को 5-0 से शिकस्त दी। मनीष ने ये मुक़ाबला 29-28, 30-27, 29-28, 30-27 और 30-27 से अपने नाम किया।
इस जीत के बाद मनीष भी प्री क्वार्टरफ़ाइनल में पहुंच गए हैं, हालांकि शनिवार के आख़िरी मुक़ाबले में भारत को हार का सामना करना पड़ा। जब हिमाचल प्रदेश के मुक्केबाज़ आशीष कुमार को चाइना के मुक्केबाज़ तंगलातिहान तुहेतारबिके ने 2-3 से शिकस्त दे दी।
भारत की वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में ये पहली हार है, इससे पहले भारत के सभी मुक्केबाज़ों ने अपने अपने मुक़ाबले जीते थे या फिर उन्हें पहले दौर में बाई मिला था।
रविवार को भारतीय चुनौतीः
रविवार को भारत के तीन मुक्केबाज़ों की परीक्षा होगी, पहले मैच में जहां मुक्केबाज़ कविंदर सिंह बिश्त का मुक़ाबला चाइना के चेन ज़िहाक़ से होगा। कविंदर इस प्रतियोगिता में पांचवीं सीडेड हैं, तो दूसरे मैच में रविवार को ही भारत के बृजेश यादव की टक्कर तुर्की के बेरम मलकन से होगी। जबकि एक और मुक़ाबले में सनजीत का सामना स्कॉटलैंड के स्कॉट फ़ॉरेस्ट के ख़िलाफ़ होगा।
| वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप का छठे दिन मनीष कौषिक ने भी प्री क्वार्टरफ़ाइनल में जगह बना ली है। जबकि आशीष कुमार को हार का सामना करना पड़ा। शनिवार भारत के लिए मिला जुला रहा, तीन भारतीय मुक्केबाज़ों का वर्ल्ड बॉक्सिंग में मुक़ाबला था, जिसमें दो में भारत को जीत मिली तो एक में हार का सामना करना पड़ा। दिन में खेले गए मुक़ाबले में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद अमित पंघल ने चाइनीस तायपेई के मुक्केबाज़ तू पो वेई को पाँच :शून्य से शिकस्त देकर प्री क्वार्टर में जगह बनाई थी। इसके बाद शाम में भारत के मुक्केबाज़ मनीष कौषिक ने एकतरफ़ा मुक़ाबले में नीदरलैंड्स के एनरिको लकरूज़ को पाँच-शून्य से शिकस्त दी। मनीष ने ये मुक़ाबला उनतीस-अट्ठाईस, तीस-सत्ताईस, उनतीस-अट्ठाईस, तीस-सत्ताईस और तीस-सत्ताईस से अपने नाम किया। इस जीत के बाद मनीष भी प्री क्वार्टरफ़ाइनल में पहुंच गए हैं, हालांकि शनिवार के आख़िरी मुक़ाबले में भारत को हार का सामना करना पड़ा। जब हिमाचल प्रदेश के मुक्केबाज़ आशीष कुमार को चाइना के मुक्केबाज़ तंगलातिहान तुहेतारबिके ने दो-तीन से शिकस्त दे दी। भारत की वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में ये पहली हार है, इससे पहले भारत के सभी मुक्केबाज़ों ने अपने अपने मुक़ाबले जीते थे या फिर उन्हें पहले दौर में बाई मिला था। रविवार को भारतीय चुनौतीः रविवार को भारत के तीन मुक्केबाज़ों की परीक्षा होगी, पहले मैच में जहां मुक्केबाज़ कविंदर सिंह बिश्त का मुक़ाबला चाइना के चेन ज़िहाक़ से होगा। कविंदर इस प्रतियोगिता में पांचवीं सीडेड हैं, तो दूसरे मैच में रविवार को ही भारत के बृजेश यादव की टक्कर तुर्की के बेरम मलकन से होगी। जबकि एक और मुक़ाबले में सनजीत का सामना स्कॉटलैंड के स्कॉट फ़ॉरेस्ट के ख़िलाफ़ होगा। |
नोटबंदी के 50 दिन बाद नए साल पर सरकार ने लोगों को बड़ी राहत दी, लेकिन नई मुसीबत के साथ। देख लिजिए ये वार्निंग, कहीं पछताना न पड़ जाए।
चंडीगढ़ में एक नई समस्या देखने को मिली है। बीते दिन पुराने नोट बैंकों में जमा कराने की तारीख खत्म हो गई, लेकिन बहुत से लोग ऐसे हैं जो किसी किसी वजह या व्यक्तिगत समस्याओं के चलते पुराने नोट जमा नहीं करा सके हैं।
हालांकि समस्या का समाधान मिला, लेकिन उससे भी लोग टेंशन में हैं। दरअसल, लोग 31 मार्च तक आरबीआई के निर्धारित काउंटरों पर पुराने नोट जमा करा सकते हैं लेकिन इसके लिए उन्हें देरी से नोट जमा करने और नोटों का पूरा विवरण और स्पष्टीकरण देना होगा।
हुआ यूं कि नोटबंदी के बाद पुराने नोट जमा कराने का सिलसिला जारी था, पर बीते दिन अंतिम तारीख खत्म हो गई। कैश लिमिट बढ़ाने के साथ बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 31 दिसंबर के बाद पुराने नोट बैंकों में न रखें। ऐसे में जो लोग पुराने नोट जमा नहीं करा पाए, वे काफी परेशान नजर आए।
बता दें कि शनिवार को काफी संख्या में लोग पुराने नोट जमा कराने के लिए बैंक पहुंचे, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। सभी लोग पैसे जमा नहीं करा पाए। ऐसे में नया साल भी लोगों के लिए सुकून लेकर नहीं आया। राहत भी मिली, लेकिन नई मुसीबत के साथ।
| नोटबंदी के पचास दिन बाद नए साल पर सरकार ने लोगों को बड़ी राहत दी, लेकिन नई मुसीबत के साथ। देख लिजिए ये वार्निंग, कहीं पछताना न पड़ जाए। चंडीगढ़ में एक नई समस्या देखने को मिली है। बीते दिन पुराने नोट बैंकों में जमा कराने की तारीख खत्म हो गई, लेकिन बहुत से लोग ऐसे हैं जो किसी किसी वजह या व्यक्तिगत समस्याओं के चलते पुराने नोट जमा नहीं करा सके हैं। हालांकि समस्या का समाधान मिला, लेकिन उससे भी लोग टेंशन में हैं। दरअसल, लोग इकतीस मार्च तक आरबीआई के निर्धारित काउंटरों पर पुराने नोट जमा करा सकते हैं लेकिन इसके लिए उन्हें देरी से नोट जमा करने और नोटों का पूरा विवरण और स्पष्टीकरण देना होगा। हुआ यूं कि नोटबंदी के बाद पुराने नोट जमा कराने का सिलसिला जारी था, पर बीते दिन अंतिम तारीख खत्म हो गई। कैश लिमिट बढ़ाने के साथ बैंकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इकतीस दिसंबर के बाद पुराने नोट बैंकों में न रखें। ऐसे में जो लोग पुराने नोट जमा नहीं करा पाए, वे काफी परेशान नजर आए। बता दें कि शनिवार को काफी संख्या में लोग पुराने नोट जमा कराने के लिए बैंक पहुंचे, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही। सभी लोग पैसे जमा नहीं करा पाए। ऐसे में नया साल भी लोगों के लिए सुकून लेकर नहीं आया। राहत भी मिली, लेकिन नई मुसीबत के साथ। |
बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस को 200 करोड़ के ठगी मामले में बड़ी राहत मिल गई है। एक्ट्रेस को पटियाला हाउस कोर्ट से 50 हजार के निजी मुचकले पर जमानत मिली है। हाल ही में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने एक्ट्रेस से 15 घंटे तक पूछताछ की थी। ईडी से हुई पूछताछ के बाद ये दावा और पुख्ता हो गया कि सुकेश और जैकलीन का सॉलिड कनेक्शन है, जिसके बाद पटियाला कोर्ट को भी मामले में दखल देना पड़ा और जैकलीन को कोर्ट में पेश होने के लिए समन भेजा गया। जिसके बाद जैकलीन आज कोर्ट में पेश हुई थीं।
200 करोड़ के ठगी मामले में जैकलीन फर्नाडीज का नाम बुरी तरह फंसा हुआ है। इस मामले में जैकलीन से लगातार पूछताछ हो रही है। इतना ही नहीं, इस मामले की तह तक जाने के लिए जांच की आंच अभिनेत्री की स्टाइलिस्ट लीपाक्षी तक पहुंच गई थी। इन सभी पूछताछ के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी दावा कर दिया कि जैकलीन का सुकेश चंद्रशेकर के साथ कनेक्शन है, जिसके बाद अभिनेत्री को पटियाला हाउस कोर्ट ने तलब किया। वहीं, अब जैकलीन पटियाला हाउस कोर्ट पहुंच गई हैं।
200 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई की अगली तारीख 22 अक्टूबर तय की गई है। आज एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडीज अपनी जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए वकील के ड्रेस में पटियाला हाउस कोर्ट में पहुंची। इस मामले में आरोपी पिंकी ईरानी भी पटियाला हाउस कोर्ट में मौजूद रहीं। पिंकी ईरानी को पहले ही जमानत मिली हुई है। आज जैकलीन फर्नांडीज को चार्जशीट की कॉपी दी गई। जैकलीन फर्नांडीज के मामले में 22 अक्टूबर को पटियाला हाउस कोर्ट दोपहर 2 बजे सुनवाई करेगी।
| बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस को दो सौ करोड़ के ठगी मामले में बड़ी राहत मिल गई है। एक्ट्रेस को पटियाला हाउस कोर्ट से पचास हजार के निजी मुचकले पर जमानत मिली है। हाल ही में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने एक्ट्रेस से पंद्रह घंटाटे तक पूछताछ की थी। ईडी से हुई पूछताछ के बाद ये दावा और पुख्ता हो गया कि सुकेश और जैकलीन का सॉलिड कनेक्शन है, जिसके बाद पटियाला कोर्ट को भी मामले में दखल देना पड़ा और जैकलीन को कोर्ट में पेश होने के लिए समन भेजा गया। जिसके बाद जैकलीन आज कोर्ट में पेश हुई थीं। दो सौ करोड़ के ठगी मामले में जैकलीन फर्नाडीज का नाम बुरी तरह फंसा हुआ है। इस मामले में जैकलीन से लगातार पूछताछ हो रही है। इतना ही नहीं, इस मामले की तह तक जाने के लिए जांच की आंच अभिनेत्री की स्टाइलिस्ट लीपाक्षी तक पहुंच गई थी। इन सभी पूछताछ के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने भी दावा कर दिया कि जैकलीन का सुकेश चंद्रशेकर के साथ कनेक्शन है, जिसके बाद अभिनेत्री को पटियाला हाउस कोर्ट ने तलब किया। वहीं, अब जैकलीन पटियाला हाउस कोर्ट पहुंच गई हैं। दो सौ करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई की अगली तारीख बाईस अक्टूबर तय की गई है। आज एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडीज अपनी जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए वकील के ड्रेस में पटियाला हाउस कोर्ट में पहुंची। इस मामले में आरोपी पिंकी ईरानी भी पटियाला हाउस कोर्ट में मौजूद रहीं। पिंकी ईरानी को पहले ही जमानत मिली हुई है। आज जैकलीन फर्नांडीज को चार्जशीट की कॉपी दी गई। जैकलीन फर्नांडीज के मामले में बाईस अक्टूबर को पटियाला हाउस कोर्ट दोपहर दो बजे सुनवाई करेगी। |
नई दिल्ली। जम्मू और कश्मीर के शोपियां में सुरक्षाबलों ने मंगलवार सुबह एनकाउंटर में ISIS से जुड़े दो आतंकियों को मार गिराया है। शोपियां के अवनीरा इलाके में सुबह-सुबह हुए एनकाउंटर में मारे गए दोनों आतंकियों के पास से बड़ी मात्रा में हथियार बरामद हुए हैं। एनकाउंटर के बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है।
बताया जा रहा है कि सुरक्षाबलों को इलाके में कुछ आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने इनकी तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया। इसी बीच आतंकियों की ओर से की गई गोलीबारी का सुरक्षाबलों ने मुंहतोड़ जवाब दिया। इसमें 2 आतंकी मारे गए। इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है।
| नई दिल्ली। जम्मू और कश्मीर के शोपियां में सुरक्षाबलों ने मंगलवार सुबह एनकाउंटर में ISIS से जुड़े दो आतंकियों को मार गिराया है। शोपियां के अवनीरा इलाके में सुबह-सुबह हुए एनकाउंटर में मारे गए दोनों आतंकियों के पास से बड़ी मात्रा में हथियार बरामद हुए हैं। एनकाउंटर के बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है। बताया जा रहा है कि सुरक्षाबलों को इलाके में कुछ आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने इनकी तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया। इसी बीच आतंकियों की ओर से की गई गोलीबारी का सुरक्षाबलों ने मुंहतोड़ जवाब दिया। इसमें दो आतंकी मारे गए। इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है। |
UPTET Admit Card 2021 @updeled. gov. in: उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET 2021) के एडमिट कार्ड कल 17 नवंबर को जारी किए जाने थे, मगर वेबसाइट पर अभी तक कॉल लेटर रिलीज़ नहीं किए गए हैं. जिन उम्मीदवारों ने परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन किया है वे आधिकारिक वेबसाइट updeled. gov. in पर एडमिट कार्ड के लिए नज़र बनाकर रखें. एडमिट कार्ड आज 18 नवंबर को रिलीज़ हो सकते हैं. परीक्षा 28 नवंबर को आयोजित की जानी है.
उम्मीदवारों को अपने रजिस्ट्रेशन नंबर की मदद से वेबसाइट पर लॉगिन करना होगा और एडमिट कार्ड डाउनलोड करना होगा. इसके लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट updeled. gov. in पर जाना होगा और होमपेज को स्क्रॉल कर UP TET के सेक्शन पर पहुंचना होगा. एडमिट कार्ड जारी होने के बाद नया पेज लाइव हो जाएगा. इसे पेज पर अपने लॉगिन डिटेल्स दर्ज कर सब्मिट करना होगा. एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा जिसे कैंडिडेट डाउनलोड कर सकेंगे. बता दें कि एडमिट कार्ड के प्रिंट आउट के साथ ही एग्जाम सेंटर पर एंट्री मिलेगी.
| UPTET Admit Card दो हज़ार इक्कीस @updeled. gov. in: उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा के एडमिट कार्ड कल सत्रह नवंबर को जारी किए जाने थे, मगर वेबसाइट पर अभी तक कॉल लेटर रिलीज़ नहीं किए गए हैं. जिन उम्मीदवारों ने परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन किया है वे आधिकारिक वेबसाइट updeled. gov. in पर एडमिट कार्ड के लिए नज़र बनाकर रखें. एडमिट कार्ड आज अट्ठारह नवंबर को रिलीज़ हो सकते हैं. परीक्षा अट्ठाईस नवंबर को आयोजित की जानी है. उम्मीदवारों को अपने रजिस्ट्रेशन नंबर की मदद से वेबसाइट पर लॉगिन करना होगा और एडमिट कार्ड डाउनलोड करना होगा. इसके लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट updeled. gov. in पर जाना होगा और होमपेज को स्क्रॉल कर UP TET के सेक्शन पर पहुंचना होगा. एडमिट कार्ड जारी होने के बाद नया पेज लाइव हो जाएगा. इसे पेज पर अपने लॉगिन डिटेल्स दर्ज कर सब्मिट करना होगा. एडमिट कार्ड स्क्रीन पर दिखाई देगा जिसे कैंडिडेट डाउनलोड कर सकेंगे. बता दें कि एडमिट कार्ड के प्रिंट आउट के साथ ही एग्जाम सेंटर पर एंट्री मिलेगी. |
Lok Sabha Election 2019 के लिए गाजियाबाद से कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में रोड शो पर निकलीं प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने गांधी-नेहरू परिवार पर पीएम के बयानों का जिक्र करते हुए कहा, 'मोदी जी की एक सनक है मेरे परिवार के साथ। ' लोकसभा चुनाव के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी बनाई गईं प्रियंका ने अपने रोड शो में एक बार फिर प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर तंज कसा।
पीएम पर यूं बरसीं प्रियंका गांधीः गाजियाबाद में कांग्रेस प्रत्याशी डोली शर्मा के लिए चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा, 'मोदीजी की एक सनक है मेरे परिवार के साथ। नेहरू जी ने किया, इंदिरा गांधी ने ये किया। अरे मैं पूछती हूं मोदी जी आपने क्या किया। ' इसके बाद प्रियंका ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं को निशाने पर लिया।
विदेश यात्राओं पर निशानाः उन्होंने कहा, 'दुनियाभर घूम आए हैं। जापान गए वहां गले लगे, पाकिस्तान गए वहां बिरयानी खाई, चीन गए वहां गले लगे, लेकिन क्या आपने उन्हें वाराणसी के एक गरीब परिवार के साथ गले लगते देखा है? ' गाजियाबाद से बीजेपी की तरफ से पिछले चुनाव में रिकॉर्ड जीत दर्ज करने वाले वीके सिंह को एक बार फिर मौका दिया गया है।
प्रियंका गांधी को इस चुनाव में कांग्रेस के लिए ट्रंप कार्ड माना जा रहा है। पिछले चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को सिर्फ अमेठी और रायबरेली सीट पर जीत मिली थी। ऐसे में इस बार कांग्रेस समर्थक उनके आने से हालत में सुधार होने की उम्मीद लगा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव के लिए मतदान की शुरुआत में अब एक हफ्ता भी नहीं बचा है। 11 अप्रैल को पहले चरण का मतदान होना है। उत्तर प्रदेश में सातों चरणों में मतदान होगा। अंतिम चरण का मतदान 19 मई को होगा, वहीं नतीजे 23 मई को घोषित किए जाएंगे।
| Lok Sabha Election दो हज़ार उन्नीस के लिए गाजियाबाद से कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में रोड शो पर निकलीं प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने गांधी-नेहरू परिवार पर पीएम के बयानों का जिक्र करते हुए कहा, 'मोदी जी की एक सनक है मेरे परिवार के साथ। ' लोकसभा चुनाव के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी बनाई गईं प्रियंका ने अपने रोड शो में एक बार फिर प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर तंज कसा। पीएम पर यूं बरसीं प्रियंका गांधीः गाजियाबाद में कांग्रेस प्रत्याशी डोली शर्मा के लिए चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा, 'मोदीजी की एक सनक है मेरे परिवार के साथ। नेहरू जी ने किया, इंदिरा गांधी ने ये किया। अरे मैं पूछती हूं मोदी जी आपने क्या किया। ' इसके बाद प्रियंका ने प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं को निशाने पर लिया। विदेश यात्राओं पर निशानाः उन्होंने कहा, 'दुनियाभर घूम आए हैं। जापान गए वहां गले लगे, पाकिस्तान गए वहां बिरयानी खाई, चीन गए वहां गले लगे, लेकिन क्या आपने उन्हें वाराणसी के एक गरीब परिवार के साथ गले लगते देखा है? ' गाजियाबाद से बीजेपी की तरफ से पिछले चुनाव में रिकॉर्ड जीत दर्ज करने वाले वीके सिंह को एक बार फिर मौका दिया गया है। प्रियंका गांधी को इस चुनाव में कांग्रेस के लिए ट्रंप कार्ड माना जा रहा है। पिछले चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को सिर्फ अमेठी और रायबरेली सीट पर जीत मिली थी। ऐसे में इस बार कांग्रेस समर्थक उनके आने से हालत में सुधार होने की उम्मीद लगा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव के लिए मतदान की शुरुआत में अब एक हफ्ता भी नहीं बचा है। ग्यारह अप्रैल को पहले चरण का मतदान होना है। उत्तर प्रदेश में सातों चरणों में मतदान होगा। अंतिम चरण का मतदान उन्नीस मई को होगा, वहीं नतीजे तेईस मई को घोषित किए जाएंगे। |
कानपुर-सागर हाईवे पर रोडवेज बस की टक्कर ने बाइक सवार युवक को टक्कर मार दी। हेलमेट नहीं लगाए होने से सिर में गंभीर चोट आने से युवक की मौके पर मौत हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर स्वजन से संपर्क कर घटना की जानकारी दी।
जागरण संवाददाता, महोबाः कानपुर-सागर हाईवे पर रोडवेज बस की टक्कर ने बाइक सवार युवक को टक्कर मार दी। हेलमेट नहीं लगाए होने से सिर में गंभीर चोट आने से युवक की मौके पर मौत हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर युवक के पास मिले आधार की मदद से उसके स्वजन से संपर्क कर घटना की जानकारी दी।
थाना मंगलपुर जिला कानपुर देहात के ग्राम इकरामपुर निवासी 31 वर्षीय शैलेंद्र पुत्र हाकिम सिंह बाइक से कपड़ों की फेरी लगाता था। रविवार को वह अपने क्षेत्र के ही पांच-छह साथियों के साथ बाइक से महोबा फेरी लगाते हुए पहुंचा था। उसके साथी छतरपुर मप्र फेरी लगाने के लिए चले गए थे। वह अकेले बाइक से अलीपुरा गांव के पास कपड़ों की बिक्री करने के लिए रुका था।
यहां से पूर्वाह्न करीब 11 बजे कानपुर-हाईवे पर वह भी लवकुश नगर मप्र जाने के लिए निकला था। कुछ दूर ही निकला था कि पीछे से आ रही रोडवेज बस की टक्कर लगने से वह उछल कर करीब पांच मीटर दूर जा गिरा। कपड़ों की गठरी सहित बाइक रोड किनारे खाई में जा गिरी।
युवक रोड पर ही गिर गया और उसके सिर पर गंभीर चोट आने से काफी ब्लड बहने लगा। राहगीरों की सूचना पर कबरई थाना प्रभारी बीरेंद्र प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे, युवक को अस्पताल ले जाते लेकिन उससे पहले ही उसकी मौत हो गई। शव को महोबा अस्पताल भिजवाया गया।
| कानपुर-सागर हाईवे पर रोडवेज बस की टक्कर ने बाइक सवार युवक को टक्कर मार दी। हेलमेट नहीं लगाए होने से सिर में गंभीर चोट आने से युवक की मौके पर मौत हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर स्वजन से संपर्क कर घटना की जानकारी दी। जागरण संवाददाता, महोबाः कानपुर-सागर हाईवे पर रोडवेज बस की टक्कर ने बाइक सवार युवक को टक्कर मार दी। हेलमेट नहीं लगाए होने से सिर में गंभीर चोट आने से युवक की मौके पर मौत हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर युवक के पास मिले आधार की मदद से उसके स्वजन से संपर्क कर घटना की जानकारी दी। थाना मंगलपुर जिला कानपुर देहात के ग्राम इकरामपुर निवासी इकतीस वर्षीय शैलेंद्र पुत्र हाकिम सिंह बाइक से कपड़ों की फेरी लगाता था। रविवार को वह अपने क्षेत्र के ही पांच-छह साथियों के साथ बाइक से महोबा फेरी लगाते हुए पहुंचा था। उसके साथी छतरपुर मप्र फेरी लगाने के लिए चले गए थे। वह अकेले बाइक से अलीपुरा गांव के पास कपड़ों की बिक्री करने के लिए रुका था। यहां से पूर्वाह्न करीब ग्यारह बजे कानपुर-हाईवे पर वह भी लवकुश नगर मप्र जाने के लिए निकला था। कुछ दूर ही निकला था कि पीछे से आ रही रोडवेज बस की टक्कर लगने से वह उछल कर करीब पांच मीटर दूर जा गिरा। कपड़ों की गठरी सहित बाइक रोड किनारे खाई में जा गिरी। युवक रोड पर ही गिर गया और उसके सिर पर गंभीर चोट आने से काफी ब्लड बहने लगा। राहगीरों की सूचना पर कबरई थाना प्रभारी बीरेंद्र प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे, युवक को अस्पताल ले जाते लेकिन उससे पहले ही उसकी मौत हो गई। शव को महोबा अस्पताल भिजवाया गया। |
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी को फेकू पार्टी बताते हुए कहा वह सिर्फ लोगों को बंदूक का डर दिखाकर धर्म के नाम पर आपस में बांटती और आतंकित करती है। नदिया जिले के कृष्णानगर में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर पर निशाना साधा और कहा कि असंवैधानिक बात बोलने के बावजूद एक केंद्रीय मंत्री अब भी सत्ता में बैठा है। उन्होंने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान की भी निंदा की, जिसमें उन्होंने 'गोली बनाम बोली' की बात कही थी।
उन्होने कहा कि बीजेपी मोहम्मद बिल तुगलक की वंशज है। लोगों का आह्वान किया कि देश को इससे बचाने के लिए सबको एकजुट हो जाना चाहिए। ममता बनर्जी ने 'महाभारत' और भारत के इतिहास के जरिए अपनी प्रतिद्वंद्वी भाजपा पर मंगलवार को जोरदार हमला बोला और देश बचाने के लिए लोगों से साथ आने की गुजारिश की। बनर्जी ने भाजपा को 'दुशासनों की पार्टी' और 'मोहम्मद बिन तुगलक का वंशज' कहा। 'महाभारत' में दुर्योधन का भाई दुशासन था, जबकि मोहम्मद बिन तुगलक 1325-1351 तक दिल्ली का सुल्तान था। उसे इतिहास में अटपटे फैसलों के लिए जाना जाता है।
उन्होंने कहा कि चाहे जो कुर्बानी देनी पड़े, टीएमसी देश में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) और राष्ट्रीय आबादी रजिस्टर (एनपीआर) लागू नहीं होने देगी। उन्होंने जनता से अपील की कि वह इसके खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध करें।
| पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीजेपी को फेकू पार्टी बताते हुए कहा वह सिर्फ लोगों को बंदूक का डर दिखाकर धर्म के नाम पर आपस में बांटती और आतंकित करती है। नदिया जिले के कृष्णानगर में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर पर निशाना साधा और कहा कि असंवैधानिक बात बोलने के बावजूद एक केंद्रीय मंत्री अब भी सत्ता में बैठा है। उन्होंने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान की भी निंदा की, जिसमें उन्होंने 'गोली बनाम बोली' की बात कही थी। उन्होने कहा कि बीजेपी मोहम्मद बिल तुगलक की वंशज है। लोगों का आह्वान किया कि देश को इससे बचाने के लिए सबको एकजुट हो जाना चाहिए। ममता बनर्जी ने 'महाभारत' और भारत के इतिहास के जरिए अपनी प्रतिद्वंद्वी भाजपा पर मंगलवार को जोरदार हमला बोला और देश बचाने के लिए लोगों से साथ आने की गुजारिश की। बनर्जी ने भाजपा को 'दुशासनों की पार्टी' और 'मोहम्मद बिन तुगलक का वंशज' कहा। 'महाभारत' में दुर्योधन का भाई दुशासन था, जबकि मोहम्मद बिन तुगलक एक हज़ार तीन सौ पच्चीस-एक हज़ार तीन सौ इक्यावन तक दिल्ली का सुल्तान था। उसे इतिहास में अटपटे फैसलों के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि चाहे जो कुर्बानी देनी पड़े, टीएमसी देश में नागरिकता संशोधन कानून , राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर और राष्ट्रीय आबादी रजिस्टर लागू नहीं होने देगी। उन्होंने जनता से अपील की कि वह इसके खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध करें। |
हैं ? जो लोग पुनर्जन्म को नहीं मानते वह इस रहस्य को समझ ही नहीं सकते। उनको पग रग पर ठोकरें खानी पड़ती हैं। उनको समझ में ही नहीं प्रा सकता कि एक छोटे से जीवन में मनुष्य भरने अन्तिम उद्देश्य की कैसे पूर्ति कर सकता है ? वह जान ही नहीं सकते कि सृष्टि एक बहुत बड़ी पाठशाला के हो समान है जिसमें जीव को शिक्षा देने के लिये भिन : श्रेणियाँ हैं । वस्तुतः लाखों प्रकार की ये। तयाँ जो संसार में देखी जाती हैं वह इस पाठशाला की कायें हैं और इनको इस प्रकार से रचा गया है कि प्रत्येक जीव चाहे वह श्रथम से अधम या उच्च से उच्च क्यों न हो "किसी न किसी श्रेणी के अवश्य योग्य हो सके। सृष्टि अपने किसी विद्यार्थी को इस शाला से बहिष्कृत नहीं करती और "न योग्य विद्यार्थियों को एक ही कक्षा में रखनी है। जिस प्रकार हमारे स्कूलों में बुरे और भले दोनों प्रकार के विद्यार्थी मिलकर एक दूसरे को हानि पहुंचाते हैं; यदि बुरों के अनु कूल पाठ दिया जाता है तो भलों का समय न होता है, यदि भलों के अनुकूल पाठ पढ़ाया जाता है तो बुरे समझते नहीं, इस प्रकार की अवस्था सृष्टि में नहीं है। प्रत्येक योग्यता के जीव के लिये एक श्रेणी है, इन्हीं का नाम योनियाँ हैं । हिन्दुओं में तो चौरासी लाख योनियां बताई जाती हैं । वालेस ने "जीवन जगत्" के ६२ वॅ पृष्ट पर ए. ई. शिपले ( A. E. Shipley ) एफ. आर. एस. के एक व्याख्यान के आधार पर जो उन्होंने २६०६ ई० में दिया था जीवित प्राणियों की ७
लाख ६० हजार ५ सो ३३ श्रेणियां गिनाई हैं। हम पाठकों के मनोविनोदार्थ उनको यहां दिये देते हैं | हैं ? जो लोग पुनर्जन्म को नहीं मानते वह इस रहस्य को समझ ही नहीं सकते। उनको पग रग पर ठोकरें खानी पड़ती हैं। उनको समझ में ही नहीं प्रा सकता कि एक छोटे से जीवन में मनुष्य भरने अन्तिम उद्देश्य की कैसे पूर्ति कर सकता है ? वह जान ही नहीं सकते कि सृष्टि एक बहुत बड़ी पाठशाला के हो समान है जिसमें जीव को शिक्षा देने के लिये भिन : श्रेणियाँ हैं । वस्तुतः लाखों प्रकार की ये। तयाँ जो संसार में देखी जाती हैं वह इस पाठशाला की कायें हैं और इनको इस प्रकार से रचा गया है कि प्रत्येक जीव चाहे वह श्रथम से अधम या उच्च से उच्च क्यों न हो "किसी न किसी श्रेणी के अवश्य योग्य हो सके। सृष्टि अपने किसी विद्यार्थी को इस शाला से बहिष्कृत नहीं करती और "न योग्य विद्यार्थियों को एक ही कक्षा में रखनी है। जिस प्रकार हमारे स्कूलों में बुरे और भले दोनों प्रकार के विद्यार्थी मिलकर एक दूसरे को हानि पहुंचाते हैं; यदि बुरों के अनु कूल पाठ दिया जाता है तो भलों का समय न होता है, यदि भलों के अनुकूल पाठ पढ़ाया जाता है तो बुरे समझते नहीं, इस प्रकार की अवस्था सृष्टि में नहीं है। प्रत्येक योग्यता के जीव के लिये एक श्रेणी है, इन्हीं का नाम योनियाँ हैं । हिन्दुओं में तो चौरासी लाख योनियां बताई जाती हैं । वालेस ने "जीवन जगत्" के बासठ वॅ पृष्ट पर ए. ई. शिपले एफ. आर. एस. के एक व्याख्यान के आधार पर जो उन्होंने दो हज़ार छः सौ छः ईशून्य में दिया था जीवित प्राणियों की सात लाख साठ हजार पाँच सो तैंतीस श्रेणियां गिनाई हैं। हम पाठकों के मनोविनोदार्थ उनको यहां दिये देते हैं |
उर्वशी रौतेला (Urvashi Rautela) की फिल्म वर्जिन भानुप्रिया (Virgin Bhanupriya) को दर्शकों ने काफी पसंद किया था. अब इस फिल्म के लिए उर्वशी को अवॉर्ड से नवाजा गया है.
बॉलीवुड की सबसे कम उम्र की सुपरस्टार उर्वशी रौतेला (Urvashi Rautela) अपनी शानदार एक्टिंग, अपने डांस मूव्स, ट्रेंडी आउटफिट, अद्भुत व्यक्तित्व और फिटनेस के प्रति अभिनेत्री ने विसमित करने में कभी असफल नहीं हुईं. उर्वशी रौतेला के सोशल मीडिया पर बहुत बड़ी फैन फॉलोइंग है वह अपने प्रशंसकों को अपनी सफताओ और काम के बारे में अपडेट करती रहती हैं.
उर्वशी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर 2020 में रिलीजज हुई अपनी फिल्म 'वर्जिन भानुप्रिया' के लिए 'इंटरनेशनल आइकॉनिक च्वाइस अवार्ड्स 2021' से 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री क्रिटिक्स च्वाइस अवार्ड' मिलने पर अपने दर्शको का धन्यवाद किया. उर्वशी ने फिल्म में भानुप्रिया अवस्थी (भानु) की भूमिका निभाई थी. जिसके लिए उर्वशी रौतेला को पुरस्कार से नवाज़ा गया. अभिनेत्री ने दर्शकों के प्रति अपना प्यार व्यक्त करते हुए कहा की मैं अपने आप को भाग्यशाली समझती हूं कि लोगो ने मेरे काम को सराया.
अभिनेत्री उर्वशी रौतेला ने धन्यवाद देते हुए वीडियो को कैप्शन दिया, मेरी फिल्म वर्जिन भानुप्रिया के लिए बेस्ट एक्ट्रेस क्रिटिक्स च्वाइस अवॉर्ड 2021 के लिए शुक्रिया. इंटरनेशनल आइकॉनिक अवॉर्ड 2021 आपका शुक्रिया. आई लव यू ऑल. फैंस उर्वशी के पोस्ट पर कमेंट करके उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं.
वर्कफ्रंट की बात करें तो उर्वशी रौतेला एक बड़े बजट की सायंस-फिक्शन तमिल फिल्म के साथ अपना तमिल डेब्यू करेंगी, जिसमें वह एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट और एक आईआईटीयन की भूमिका निभाएंगी, और बाद में वह एक ड्यूल लैंग्वेज थ्रिलर में दिखाई देने वाली हैं. 'ब्लैक रोज़' के साथ-साथ "थिरुतु पायले २" के हिंदी रीमेक के साथ में दिखाई देंगी. अभिनेत्री को हाल ही में गुरु रंधावा के साथ उनके गीत "डूब गए" और मोहम्मद रमजान के साथ "वर्साचे बेबी" के लिए एक ब्लॉकबस्टर रिस्पांस मिला. उर्वशी रौतेला जियो स्टूडियो की वेब सिरिस "इंस्पेक्टर अविनाश" में रणदीप हुड्डा के साथ मुख्य भूमिका निभा रही हैं, जो सुपर कॉप अविनाश मिश्रा और पूनम मिश्रा की सच्ची कहानी पर आधारित एक बायोपिक है.
अजय देवगन ने की अक्षय कुमार की फिल्म 'बेल बॉटम' की तारीफ, बोले- थिएटर में फिल्म रिलीज करने का फैसला....
| उर्वशी रौतेला की फिल्म वर्जिन भानुप्रिया को दर्शकों ने काफी पसंद किया था. अब इस फिल्म के लिए उर्वशी को अवॉर्ड से नवाजा गया है. बॉलीवुड की सबसे कम उम्र की सुपरस्टार उर्वशी रौतेला अपनी शानदार एक्टिंग, अपने डांस मूव्स, ट्रेंडी आउटफिट, अद्भुत व्यक्तित्व और फिटनेस के प्रति अभिनेत्री ने विसमित करने में कभी असफल नहीं हुईं. उर्वशी रौतेला के सोशल मीडिया पर बहुत बड़ी फैन फॉलोइंग है वह अपने प्रशंसकों को अपनी सफताओ और काम के बारे में अपडेट करती रहती हैं. उर्वशी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर दो हज़ार बीस में रिलीजज हुई अपनी फिल्म 'वर्जिन भानुप्रिया' के लिए 'इंटरनेशनल आइकॉनिक च्वाइस अवार्ड्स दो हज़ार इक्कीस' से 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री क्रिटिक्स च्वाइस अवार्ड' मिलने पर अपने दर्शको का धन्यवाद किया. उर्वशी ने फिल्म में भानुप्रिया अवस्थी की भूमिका निभाई थी. जिसके लिए उर्वशी रौतेला को पुरस्कार से नवाज़ा गया. अभिनेत्री ने दर्शकों के प्रति अपना प्यार व्यक्त करते हुए कहा की मैं अपने आप को भाग्यशाली समझती हूं कि लोगो ने मेरे काम को सराया. अभिनेत्री उर्वशी रौतेला ने धन्यवाद देते हुए वीडियो को कैप्शन दिया, मेरी फिल्म वर्जिन भानुप्रिया के लिए बेस्ट एक्ट्रेस क्रिटिक्स च्वाइस अवॉर्ड दो हज़ार इक्कीस के लिए शुक्रिया. इंटरनेशनल आइकॉनिक अवॉर्ड दो हज़ार इक्कीस आपका शुक्रिया. आई लव यू ऑल. फैंस उर्वशी के पोस्ट पर कमेंट करके उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं. वर्कफ्रंट की बात करें तो उर्वशी रौतेला एक बड़े बजट की सायंस-फिक्शन तमिल फिल्म के साथ अपना तमिल डेब्यू करेंगी, जिसमें वह एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट और एक आईआईटीयन की भूमिका निभाएंगी, और बाद में वह एक ड्यूल लैंग्वेज थ्रिलर में दिखाई देने वाली हैं. 'ब्लैक रोज़' के साथ-साथ "थिरुतु पायले दो" के हिंदी रीमेक के साथ में दिखाई देंगी. अभिनेत्री को हाल ही में गुरु रंधावा के साथ उनके गीत "डूब गए" और मोहम्मद रमजान के साथ "वर्साचे बेबी" के लिए एक ब्लॉकबस्टर रिस्पांस मिला. उर्वशी रौतेला जियो स्टूडियो की वेब सिरिस "इंस्पेक्टर अविनाश" में रणदीप हुड्डा के साथ मुख्य भूमिका निभा रही हैं, जो सुपर कॉप अविनाश मिश्रा और पूनम मिश्रा की सच्ची कहानी पर आधारित एक बायोपिक है. अजय देवगन ने की अक्षय कुमार की फिल्म 'बेल बॉटम' की तारीफ, बोले- थिएटर में फिल्म रिलीज करने का फैसला.... |
शादी में सजना-संवरना हर किसी का शौक होता है। खास करके दुल्हनों के लिए, लेकिन कई बार पैसे की तंगी उनके अरमानों पर पानी फेर देती है। चाहकर भी दुल्हनें मन मुताबिक श्रृंगार नहीं कर पातीं, वो महंगे पार्लर का खर्च नहीं उठा पाती हैं। इन परेशानियों को देखकर सूरत के एक ब्यूटीशियन केतन हीरपरा ने नई पहल की है। उन्होंने अपना पार्लर खोला है, जहां बहुत ही कम कीमत में दुल्हनें अपना मेकअप करा सकती हैं। इसके लिए उन्हें सिर्फ 320 रुपए खर्च करने होंगे। सूरत के ज्यादातर इलाकों की लड़कियां अब उनके पार्लर में आती हैं। कम रेट रखने के बाद भी केतन सालाना 6 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं।
केतन कहते हैं कि बेटियों की दिली इच्छा होती है कि शादी के समय वे सुंदर कपड़े, मेकअप और अच्छी हेयर स्टाइल के साथ मंडप में पहुंचें, लेकिन आमतौर पर दुल्हन का मेकअप ब्यूटी पार्लर में इतना महंगा होता है कि कई बेटियां इसका खर्च उठा ही नहीं सकतीं। इसलिए मैंने सोचा कि इन बेटियों के लिए कुछ किया जाए। तीन साल पहले मैंने इसको लेकर काम करना शुरू किया।
केतन बताते हैं- हमारे यहां मात्र 320 रुपए में दुल्हन का परफेक्ट मेकअप किया जाता है। हेयर स्टाइल के लिए सिर्फ 1 रुपए लिए जाते हैं। इतना ही नहीं, वे किराए पर ड्रेस भी उपलब्ध कराते हैं। वे कहते हैं कि हमारे यहां से महंगे लहंगा-चोली भी सिर्फ 250 रुपए में किराए पर लिए जा सकते हैं। हमारी सबसे खास बात यह भी है कि किराए पर दिए जाने वाले दुल्हन के कपड़े यहीं के एक फैशन डिजाइनर द्वारा तैयार किए जाते हैं। इन प्रयासों के चलते हमारी संस्था को ISO द्वारा सर्टिफाई भी किया जा चुका है, जिसका हमें बहुत गर्व है।
केतन पिछले तीन सालों यह काम कर रहे हैं। वे बताते हैं कि महज एक रुपए कीमत पर चार हजार लड़कियों के हेयर सेट कर चुके हैं। इसके साथ ही एक हजार से ज्यादा लड़कियों का वे मेकअप भी कर चुके हैं। हेयर सेट करने और मेकअप के साथ ही केतन लड़कियों को ब्यूटीशियन की ट्रेनिंग भी बहुत ही कम फीस पर देते हैं। वे अभी तक 350-400 लड़कियों को ब्यूटीशियन की ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना चुके हैं। उन्होंने पांच लड़कियों को रोजगार भी दिया है। ये उन्हीं के पार्लर से ब्यूटीशियन का कोर्स कर वहां काम कर रही हैं।
केतन हीरपरा अपने काम से खुश हैं। वे बताते हैं कि यहां लड़कियों-महिलाओं की हर समय भीड़ रहती है। वे हमारे काम की तारीफ भी करती हैं। इससे हमें सिर्फ सूरत में ही नहीं बल्कि पूरे गुजरात में पहचान मिली है। अब तो देश में भी लोग हमें जानने लगे हैं। हमारी खास पहचान यही बन गई है कि यहां मात्र 1 रुपए में हेयर कट किए जाते हैं। जिससे यहां आने वाले कस्टमर्स की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| शादी में सजना-संवरना हर किसी का शौक होता है। खास करके दुल्हनों के लिए, लेकिन कई बार पैसे की तंगी उनके अरमानों पर पानी फेर देती है। चाहकर भी दुल्हनें मन मुताबिक श्रृंगार नहीं कर पातीं, वो महंगे पार्लर का खर्च नहीं उठा पाती हैं। इन परेशानियों को देखकर सूरत के एक ब्यूटीशियन केतन हीरपरा ने नई पहल की है। उन्होंने अपना पार्लर खोला है, जहां बहुत ही कम कीमत में दुल्हनें अपना मेकअप करा सकती हैं। इसके लिए उन्हें सिर्फ तीन सौ बीस रुपयापए खर्च करने होंगे। सूरत के ज्यादातर इलाकों की लड़कियां अब उनके पार्लर में आती हैं। कम रेट रखने के बाद भी केतन सालाना छः लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं। केतन कहते हैं कि बेटियों की दिली इच्छा होती है कि शादी के समय वे सुंदर कपड़े, मेकअप और अच्छी हेयर स्टाइल के साथ मंडप में पहुंचें, लेकिन आमतौर पर दुल्हन का मेकअप ब्यूटी पार्लर में इतना महंगा होता है कि कई बेटियां इसका खर्च उठा ही नहीं सकतीं। इसलिए मैंने सोचा कि इन बेटियों के लिए कुछ किया जाए। तीन साल पहले मैंने इसको लेकर काम करना शुरू किया। केतन बताते हैं- हमारे यहां मात्र तीन सौ बीस रुपयापए में दुल्हन का परफेक्ट मेकअप किया जाता है। हेयर स्टाइल के लिए सिर्फ एक रुपयापए लिए जाते हैं। इतना ही नहीं, वे किराए पर ड्रेस भी उपलब्ध कराते हैं। वे कहते हैं कि हमारे यहां से महंगे लहंगा-चोली भी सिर्फ दो सौ पचास रुपयापए में किराए पर लिए जा सकते हैं। हमारी सबसे खास बात यह भी है कि किराए पर दिए जाने वाले दुल्हन के कपड़े यहीं के एक फैशन डिजाइनर द्वारा तैयार किए जाते हैं। इन प्रयासों के चलते हमारी संस्था को ISO द्वारा सर्टिफाई भी किया जा चुका है, जिसका हमें बहुत गर्व है। केतन पिछले तीन सालों यह काम कर रहे हैं। वे बताते हैं कि महज एक रुपए कीमत पर चार हजार लड़कियों के हेयर सेट कर चुके हैं। इसके साथ ही एक हजार से ज्यादा लड़कियों का वे मेकअप भी कर चुके हैं। हेयर सेट करने और मेकअप के साथ ही केतन लड़कियों को ब्यूटीशियन की ट्रेनिंग भी बहुत ही कम फीस पर देते हैं। वे अभी तक तीन सौ पचास-चार सौ लड़कियों को ब्यूटीशियन की ट्रेनिंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बना चुके हैं। उन्होंने पांच लड़कियों को रोजगार भी दिया है। ये उन्हीं के पार्लर से ब्यूटीशियन का कोर्स कर वहां काम कर रही हैं। केतन हीरपरा अपने काम से खुश हैं। वे बताते हैं कि यहां लड़कियों-महिलाओं की हर समय भीड़ रहती है। वे हमारे काम की तारीफ भी करती हैं। इससे हमें सिर्फ सूरत में ही नहीं बल्कि पूरे गुजरात में पहचान मिली है। अब तो देश में भी लोग हमें जानने लगे हैं। हमारी खास पहचान यही बन गई है कि यहां मात्र एक रुपयापए में हेयर कट किए जाते हैं। जिससे यहां आने वाले कस्टमर्स की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
किशोरावस्था में बच्चों को समझना मुश्किल होता है। इस उम्र में माता-पिता को बच्चों को संभालने में परेशानी होती है। क्योंकि इस दौरान उनका मन अक्सर बदलता रहता है। वे हमेशा कुछ नया खोजने की कोशिश कर रहे हैं। इस उम्र में भी उनके प्यार में पड़ने की संभावना है। ऐसे में कई लोग अपने माता-पिता को अपने किशोर बच्चों के निजी जीवन में प्रवेश करना पसंद नहीं करते हैं।
लेकिन टीनएज बच्चे इस उम्र में माता-पिता उन पर नजर रखते हैं। वे निश्चित रूप से उनके व्यक्तिगत मुद्दों के बारे में पूछेंगे। लेकिन कई बच्चों को यह पसंद नहीं आता। इसके अलावा, यह राशि निश्चित रूप से माता-पिता को अपने निजी जीवन में दिलचस्पी दिखाना पसंद नहीं करती है। तो आइए जानते हैं कौन है वह राशि।
राशि वाले अकेले रहना पसंद करते हैं। ये अपने आसपास के विचारों को खुद ही समझना पसंद करते हैं। इस बीच, तीसरे पक्ष ने उनकी नाक में दम कर दिया और उन्हें यह पसंद नहीं आया। चाहे वह माता-पिता हों या कोई और। इसलिए उन्हें अकेला छोड़ दें। यह उनके धैर्य को बढ़ाने में मदद करता है।
राशि के लोग तर्कसंगत लोग होते हैं जो अपनी सोच और काम में विश्वास रखते हैं। वह किसी भी विचार के बारे में बहुत सोचते हैं और निर्णय लेते हैं। इस वजह से उन्हें अपना समय चाहिए। अगर माता-पिता इस मामले में हस्तक्षेप करते हैं तो उन्हें यह पसंद नहीं है। वे अपने लिए जगह चाहते हैं।
के जातक अकेले रहना पसंद करते हैं। किसी भी विचार या भावना को समझने के लिए उन्हें काफी समय चाहिए होता है। किशोरावस्था में भी उन्हें लगता है कि उन्हें अपना निजी समय चाहिए। इसलिए वह अपनी निजी जिंदगी किसी और के सामने जाहिर नहीं करते हैं।
के जातकों का एक ही मुद्दे पर अलग नज़रिया होता है। उन्हें इन सभी दृष्टिकोणों और उनके और उनके सामाजिक जीवन के आसपास चल रही बातचीत को समझने के लिए समय चाहिए। वह एक विचारक है और सभी मामलों में शांति चाहता है।
राशि के जातक अत्यधिक आध्यात्मिक, गहन विचारक और अंतर्मुखी होते हैं। वह कुछ ही लोगों के साथ अंतरंग है। इन्हें ज्यादा लोगों से जुड़ना पसंद नहीं होता है। दूसरों के लिए उनकी भावनाओं को समझना मुश्किल होता है। वह अपने मन की बात किसी से शेयर नहीं करते।
| किशोरावस्था में बच्चों को समझना मुश्किल होता है। इस उम्र में माता-पिता को बच्चों को संभालने में परेशानी होती है। क्योंकि इस दौरान उनका मन अक्सर बदलता रहता है। वे हमेशा कुछ नया खोजने की कोशिश कर रहे हैं। इस उम्र में भी उनके प्यार में पड़ने की संभावना है। ऐसे में कई लोग अपने माता-पिता को अपने किशोर बच्चों के निजी जीवन में प्रवेश करना पसंद नहीं करते हैं। लेकिन टीनएज बच्चे इस उम्र में माता-पिता उन पर नजर रखते हैं। वे निश्चित रूप से उनके व्यक्तिगत मुद्दों के बारे में पूछेंगे। लेकिन कई बच्चों को यह पसंद नहीं आता। इसके अलावा, यह राशि निश्चित रूप से माता-पिता को अपने निजी जीवन में दिलचस्पी दिखाना पसंद नहीं करती है। तो आइए जानते हैं कौन है वह राशि। राशि वाले अकेले रहना पसंद करते हैं। ये अपने आसपास के विचारों को खुद ही समझना पसंद करते हैं। इस बीच, तीसरे पक्ष ने उनकी नाक में दम कर दिया और उन्हें यह पसंद नहीं आया। चाहे वह माता-पिता हों या कोई और। इसलिए उन्हें अकेला छोड़ दें। यह उनके धैर्य को बढ़ाने में मदद करता है। राशि के लोग तर्कसंगत लोग होते हैं जो अपनी सोच और काम में विश्वास रखते हैं। वह किसी भी विचार के बारे में बहुत सोचते हैं और निर्णय लेते हैं। इस वजह से उन्हें अपना समय चाहिए। अगर माता-पिता इस मामले में हस्तक्षेप करते हैं तो उन्हें यह पसंद नहीं है। वे अपने लिए जगह चाहते हैं। के जातक अकेले रहना पसंद करते हैं। किसी भी विचार या भावना को समझने के लिए उन्हें काफी समय चाहिए होता है। किशोरावस्था में भी उन्हें लगता है कि उन्हें अपना निजी समय चाहिए। इसलिए वह अपनी निजी जिंदगी किसी और के सामने जाहिर नहीं करते हैं। के जातकों का एक ही मुद्दे पर अलग नज़रिया होता है। उन्हें इन सभी दृष्टिकोणों और उनके और उनके सामाजिक जीवन के आसपास चल रही बातचीत को समझने के लिए समय चाहिए। वह एक विचारक है और सभी मामलों में शांति चाहता है। राशि के जातक अत्यधिक आध्यात्मिक, गहन विचारक और अंतर्मुखी होते हैं। वह कुछ ही लोगों के साथ अंतरंग है। इन्हें ज्यादा लोगों से जुड़ना पसंद नहीं होता है। दूसरों के लिए उनकी भावनाओं को समझना मुश्किल होता है। वह अपने मन की बात किसी से शेयर नहीं करते। |
छह वर्ष पहले प्रदेश के गन्ना किसानों को पर्ची के लिए परेशान होना पड़ता था। उनकी पर्ची की चोरी के साथ गन्ने की तौलाई में घटतौली होती थी। ऐसे में वह आंदोलन करने को मजबूर होते थे। साथ ही चीनी मिल के असमय बंद होने से किसानों को परेशान होना पड़ता था।
रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (डब्ल्यूएफआई) के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह ने सोमवार को आरोप लगाया कि जो ताकतें शाहीन बाग, किसान आंदोलन में सक्रिय थीं वही आज दिखाई दे रही हैं।
| छह वर्ष पहले प्रदेश के गन्ना किसानों को पर्ची के लिए परेशान होना पड़ता था। उनकी पर्ची की चोरी के साथ गन्ने की तौलाई में घटतौली होती थी। ऐसे में वह आंदोलन करने को मजबूर होते थे। साथ ही चीनी मिल के असमय बंद होने से किसानों को परेशान होना पड़ता था। रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह ने सोमवार को आरोप लगाया कि जो ताकतें शाहीन बाग, किसान आंदोलन में सक्रिय थीं वही आज दिखाई दे रही हैं। |
बॉलीवुड में #MeToo की आंच अभी थमी नहीं है। मुन्ना भाई एमबीबीएस, 3 इडियट्स, पीके और संजू जैसी फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर राजकुमार हिरानी पर अब इसकी गाज गिरी है। दरअसल, संजू फिल्म की एक असिस्टेंट ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि 'संजू' फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन के 6 महीने के दौरान (मार्च से लेकर सितंबर तक) उनका यौन शोषण हुआ था। वैसे ये खबर तब सामने आई है। हाल ही में मुन्नाभाई सीरीज की तीसरी फिल्म आने की घोषणा करते हुए इसी हफ्ते अरशद वारसी ने कहा था कि फिल्म की स्क्रिप्ट रेडी है, शूटिंग इस साल शुरू हो जाएगी। जाहिर है कि हिरानी ही फिल्म का निर्देशन करेंगे। ऐसे में जिस तरह के आरोप उन पर लगे हैं, उससे साफ है कि ये मामला जल्द नतीजे तक नहीं पहुंचने वाला। जाहिर है कि फिल्म दो ही सूरत में बन सकती है या तो हिरानी की जगह इसका निर्देशन कोई और करे, या फिर लंबे समय के लिए फिल्म को टाल दिया जाए। वैसे हिरानी अकेले ऐसे डायरेक्टर नहीं हैं जो यौन शोषण के आरोप में फंसे हो, इससे पहले भी कई डायरेक्टर्स पर इस तरह के आरोप लग चुके हैं।
डायरेक्टर और स्क्रिप्ट राइटर हैं। 'हे बेबी', 'हाउसफुल' फ्रेंचाइज़ी और 'हमशकल्स' जैसी फिल्में डायरेक्ट कर चुके हैं। डायरेक्टर और कोरियॉग्राफर फराह खान के भाई हैं। पत्रकार करिश्मा उपाध्याय का आरोप है कि एक इंटरव्यू के दौरान साजिद ने उनका यौन उत्पीड़न किया था। साजिद ने प्राइवेट पार्ट्स की लंबाई और औरत को संतुष्ट करने जैसी बातें की। एक्ट्रेस सलोनी चोपड़ा का आरोप है कि जब वह साजिद की असिस्टेंट थीं, तो साजिद ने कई महीनों तक उन्हें सेक्सुअली और मेंटली हैरस किया।
डायरेक्टर , प्रोड्यूसर और स्क्रीनराइटर हैं। 'कालीचरन', 'विश्वनाथ', 'राम लखन', 'सौदागर', 'खलनायक' और 'ताल' जैसी फिल्में डायरेक्ट करने के लिए जाने जाते हैं। 2006 में नेशनल फिल्म अवॉर्ड की 'बेस्ट फिल्म ऑन सोशल ईशूज़' कैटेगरी में 'इकबाल' फिल्म को चुना गया था, जिसके प्रोड्यूसर सुभाष थे। कमीडियन उत्सव चक्रवर्ती पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिमा कुकरेजा ने एक महिला के साथ बातचीत के स्क्रीनशॉट शेयर किए, जिसमें उस महिला ने सुभाष घई पर रेप का आरोप लगाया।
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| बॉलीवुड में #MeToo की आंच अभी थमी नहीं है। मुन्ना भाई एमबीबीएस, तीन इडियट्स, पीके और संजू जैसी फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर राजकुमार हिरानी पर अब इसकी गाज गिरी है। दरअसल, संजू फिल्म की एक असिस्टेंट ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि 'संजू' फिल्म के पोस्ट प्रोडक्शन के छः महीने के दौरान उनका यौन शोषण हुआ था। वैसे ये खबर तब सामने आई है। हाल ही में मुन्नाभाई सीरीज की तीसरी फिल्म आने की घोषणा करते हुए इसी हफ्ते अरशद वारसी ने कहा था कि फिल्म की स्क्रिप्ट रेडी है, शूटिंग इस साल शुरू हो जाएगी। जाहिर है कि हिरानी ही फिल्म का निर्देशन करेंगे। ऐसे में जिस तरह के आरोप उन पर लगे हैं, उससे साफ है कि ये मामला जल्द नतीजे तक नहीं पहुंचने वाला। जाहिर है कि फिल्म दो ही सूरत में बन सकती है या तो हिरानी की जगह इसका निर्देशन कोई और करे, या फिर लंबे समय के लिए फिल्म को टाल दिया जाए। वैसे हिरानी अकेले ऐसे डायरेक्टर नहीं हैं जो यौन शोषण के आरोप में फंसे हो, इससे पहले भी कई डायरेक्टर्स पर इस तरह के आरोप लग चुके हैं। डायरेक्टर और स्क्रिप्ट राइटर हैं। 'हे बेबी', 'हाउसफुल' फ्रेंचाइज़ी और 'हमशकल्स' जैसी फिल्में डायरेक्ट कर चुके हैं। डायरेक्टर और कोरियॉग्राफर फराह खान के भाई हैं। पत्रकार करिश्मा उपाध्याय का आरोप है कि एक इंटरव्यू के दौरान साजिद ने उनका यौन उत्पीड़न किया था। साजिद ने प्राइवेट पार्ट्स की लंबाई और औरत को संतुष्ट करने जैसी बातें की। एक्ट्रेस सलोनी चोपड़ा का आरोप है कि जब वह साजिद की असिस्टेंट थीं, तो साजिद ने कई महीनों तक उन्हें सेक्सुअली और मेंटली हैरस किया। डायरेक्टर , प्रोड्यूसर और स्क्रीनराइटर हैं। 'कालीचरन', 'विश्वनाथ', 'राम लखन', 'सौदागर', 'खलनायक' और 'ताल' जैसी फिल्में डायरेक्ट करने के लिए जाने जाते हैं। दो हज़ार छः में नेशनल फिल्म अवॉर्ड की 'बेस्ट फिल्म ऑन सोशल ईशूज़' कैटेगरी में 'इकबाल' फिल्म को चुना गया था, जिसके प्रोड्यूसर सुभाष थे। कमीडियन उत्सव चक्रवर्ती पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिमा कुकरेजा ने एक महिला के साथ बातचीत के स्क्रीनशॉट शेयर किए, जिसमें उस महिला ने सुभाष घई पर रेप का आरोप लगाया। Read More: |
थ्री-डी टच का मज़ा एंड्रॉयड फ़ोन पर वो भी मुफ़्त!
ऐपल के नए आईफ़ोन के लॉन्च के साथ थ्री-डी टच को लेकर ग्राहक ख़ासे उत्साहित लग रहे हैं.
ये थ्री-डी टच नए मैकबुक और ऐपल वाच में भी मौजूद है.
जब आप स्क्रीन को दबाते हैं तो स्क्रीन पर कुछ और करने का विकल्प आ जाता है.
नए आईफोन के भारत में साल के अंत में आने की उम्मीद की जा रही है.
ऐसी खबरें हैं कि भारत में लॉन्च होने से पहले आईफोन का नया वर्जन एक लाख रुपए का बिक रहा है.
लेकिन अगर एंड्रॉयड फ़ोन पर आपको थ्री-डी टच चाहिए तो उसके लिए आपको पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे.
बस फ़ोन की सेटिंग में थोड़ा बदलाव कीजिए और आपके फ़ोन पर थ्री-डी टच शुरू हो जाएगा.
इसके लिए आपको एक रूटेड एंड्रॉयड डिवाइस चाहिए, जिस पर एक्सपोज्ड फ्रेमवर्क इन्स्टॉल होना चाहिए और अननोन सोर्सेज से डाउनलोड की इजाज़त होनी चाहिए.
लेकिन चूंकि ये अभी-अभी डेवेलप किया गया है और बीटा स्टेज में है, इसलिए ऐसा हो सकता है कि सभी एंड्रॉयड डिवाइस पर काम न करे.
अपने एक्सपोज्ड इंस्टालर ऐप के डाउनलोड वाले हिस्से में जाकर 'सिस्टम वाइड फोर्स टच' को ढूँढिए.
इस पर टैप करने से आपको 'वर्जन' का टैब मिलेगा जिसके बाद डाउनलोड पर टैप कीजिए.
आपके स्क्रीन पर 'इंस्टॉलर' दिखाई देगा जिससे इसे इन्स्टॉल कर लीजिए. इसके बाद फ़ोन को ऑफ करके ऑन करना पड़ेगा.
उसके बाद आपको Force टच को कैलिब्रेट करना होगा.
अपने स्क्रीन के ऊपरी हिस्से में पांच-सात बार प्रेस करने से आपकी स्क्रीन पर कुछ आंकड़े आएंगे.
ये आंकड़े आपको बताएंगे कि कितना ज़ोर लगाकर आप स्क्रीन पर प्रेस कर सकते हैं.
एक बार ये सेटिंग पूरी हो जाए, उसके बाद फ़ोन को फिर से ऑफ करके ऑन करना पड़ेगा.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं. )
| थ्री-डी टच का मज़ा एंड्रॉयड फ़ोन पर वो भी मुफ़्त! ऐपल के नए आईफ़ोन के लॉन्च के साथ थ्री-डी टच को लेकर ग्राहक ख़ासे उत्साहित लग रहे हैं. ये थ्री-डी टच नए मैकबुक और ऐपल वाच में भी मौजूद है. जब आप स्क्रीन को दबाते हैं तो स्क्रीन पर कुछ और करने का विकल्प आ जाता है. नए आईफोन के भारत में साल के अंत में आने की उम्मीद की जा रही है. ऐसी खबरें हैं कि भारत में लॉन्च होने से पहले आईफोन का नया वर्जन एक लाख रुपए का बिक रहा है. लेकिन अगर एंड्रॉयड फ़ोन पर आपको थ्री-डी टच चाहिए तो उसके लिए आपको पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे. बस फ़ोन की सेटिंग में थोड़ा बदलाव कीजिए और आपके फ़ोन पर थ्री-डी टच शुरू हो जाएगा. इसके लिए आपको एक रूटेड एंड्रॉयड डिवाइस चाहिए, जिस पर एक्सपोज्ड फ्रेमवर्क इन्स्टॉल होना चाहिए और अननोन सोर्सेज से डाउनलोड की इजाज़त होनी चाहिए. लेकिन चूंकि ये अभी-अभी डेवेलप किया गया है और बीटा स्टेज में है, इसलिए ऐसा हो सकता है कि सभी एंड्रॉयड डिवाइस पर काम न करे. अपने एक्सपोज्ड इंस्टालर ऐप के डाउनलोड वाले हिस्से में जाकर 'सिस्टम वाइड फोर्स टच' को ढूँढिए. इस पर टैप करने से आपको 'वर्जन' का टैब मिलेगा जिसके बाद डाउनलोड पर टैप कीजिए. आपके स्क्रीन पर 'इंस्टॉलर' दिखाई देगा जिससे इसे इन्स्टॉल कर लीजिए. इसके बाद फ़ोन को ऑफ करके ऑन करना पड़ेगा. उसके बाद आपको Force टच को कैलिब्रेट करना होगा. अपने स्क्रीन के ऊपरी हिस्से में पांच-सात बार प्रेस करने से आपकी स्क्रीन पर कुछ आंकड़े आएंगे. ये आंकड़े आपको बताएंगे कि कितना ज़ोर लगाकर आप स्क्रीन पर प्रेस कर सकते हैं. एक बार ये सेटिंग पूरी हो जाए, उसके बाद फ़ोन को फिर से ऑफ करके ऑन करना पड़ेगा. |
Chatra : जिले की परतापुर थाना पुलिस ने मोरहर नदी स्थित श्मशान घाट से एक युवती का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए चतरा भेजा. युवती की पहचान नेभी गांव निवासी प्रमोद साव की पंद्रह वर्षीय पुत्री सुषमा कुमारी के रुप की गयी है.
इस संबंध में प्रतापपुर थाना प्रभारी नईम अंसारी ने बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली कि प्रमोद साव की पुत्री को जहर देकर मारा गया है. और शव को आनन-फानन में जलाने के लिए श्मशान घाट ले जाया गया है.
पुलिस ने त्वरीत कार्रवाई करते हुए मौके शव को कब्जे में लिया. मौके से पुलिस ने 5-6 लीटर किरोसीन तेल भी बरामद किया.
मृतका के पिता से इस संबंध में पूछताछ की जा रही है. युवती के मामा अमोद कुमार ने अपने भांजी की मौत का आरोप उसके सौतेली मां पर लगाया है. माम ने जहर देकर मारने का आरोप लगाया है.
युवती के मामा ने बताया कि मेरी बहन मंजू देवी की मौत 2008 में हो गयी थी. उससे एक पुत्री और एक पुत्री हैं. बाद में मेरे बहनोई ने दूसरी शादी कर ली. सौतेली मां का व्यवहार हमारे भांजा एवं भगिनी के प्रति बुरा था.
गुरुवार को सुषमा कुमारी की मृत्यु तथा उसके बाद दाह संस्कार का कोई सूचना इन लोगों ने मुझे नहीं दी. सुषमा की मौत तथा दाह संस्कार करने की जानकारी हमे दूसरों से मिली.
जिसके बाद मैंने अपने बहनोई से मेरे आने तक दाह संस्कार नहीं करने के लिए आग्रह किया. लेकिन वे लोग आनन-फानन में दाह संस्कार करने के लिए श्मशान घाट ले आए.
| Chatra : जिले की परतापुर थाना पुलिस ने मोरहर नदी स्थित श्मशान घाट से एक युवती का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए चतरा भेजा. युवती की पहचान नेभी गांव निवासी प्रमोद साव की पंद्रह वर्षीय पुत्री सुषमा कुमारी के रुप की गयी है. इस संबंध में प्रतापपुर थाना प्रभारी नईम अंसारी ने बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली कि प्रमोद साव की पुत्री को जहर देकर मारा गया है. और शव को आनन-फानन में जलाने के लिए श्मशान घाट ले जाया गया है. पुलिस ने त्वरीत कार्रवाई करते हुए मौके शव को कब्जे में लिया. मौके से पुलिस ने पाँच-छः लीटरटर किरोसीन तेल भी बरामद किया. मृतका के पिता से इस संबंध में पूछताछ की जा रही है. युवती के मामा अमोद कुमार ने अपने भांजी की मौत का आरोप उसके सौतेली मां पर लगाया है. माम ने जहर देकर मारने का आरोप लगाया है. युवती के मामा ने बताया कि मेरी बहन मंजू देवी की मौत दो हज़ार आठ में हो गयी थी. उससे एक पुत्री और एक पुत्री हैं. बाद में मेरे बहनोई ने दूसरी शादी कर ली. सौतेली मां का व्यवहार हमारे भांजा एवं भगिनी के प्रति बुरा था. गुरुवार को सुषमा कुमारी की मृत्यु तथा उसके बाद दाह संस्कार का कोई सूचना इन लोगों ने मुझे नहीं दी. सुषमा की मौत तथा दाह संस्कार करने की जानकारी हमे दूसरों से मिली. जिसके बाद मैंने अपने बहनोई से मेरे आने तक दाह संस्कार नहीं करने के लिए आग्रह किया. लेकिन वे लोग आनन-फानन में दाह संस्कार करने के लिए श्मशान घाट ले आए. |
आपके सपने में दस्ताने की उपस्थिति में बहुत अलग मूल्य हो सकते हैं, इसलिए घटनाओं के हर विवरण और संदर्भ को याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है।
वास्तव में, यदि आपसे पूछा जाता है कि दस्ताने पहने हुए हैं, तो आप कह सकते हैं कि उनका मुख्य महत्व आपके लिए महत्वपूर्ण किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंधों का प्रतीक है। अक्सर, कपड़ों का यह टुकड़ा विपरीत लिंग की भावनाओं को कम करने का संकेत देता है, लेकिन इसमें अन्य अर्थ भी हो सकते हैं।
महिलाओं के दस्ताने का उद्देश्य क्या है?
अगर एक आदमी ने सपना देखा कि वह इस सहायक को खरीद रहा था, तो यह कहता है कि उसे अपनी इच्छाओं का उद्देश्य खुश करने का मौका है।
और महिलाओं के दस्ताने को उपवास करना मतलब है कि जल्द ही एक व्यक्ति आपके जीवन में दिखाई देगा जो खतरे और ब्लैकमेल के प्रयासों की मदद से आपसे कुछ मांगेगा।
मैं चमड़े के दस्ताने क्यों पहनूं?
यदि, एक सपने में, आप चमड़े के दस्ताने पहनते हैं, तो आप सफल होंगे। यह असंभव है, हालांकि, यह निर्धारित करने के लिए कि किस क्षेत्र में यह प्रकट होगा।
इस तरह के एक सपने के बाद, लड़ाई जारी रखना बहुत महत्वपूर्ण है, अन्यथा इससे पहले किए गए सभी प्रयासों को बर्बाद कर दिया जाएगा।
मैं काले दस्ताने क्यों पहनूं?
यदि आप काले दस्ताने के साथ किसी भी मामले में अपने सपने में व्यस्त थे, तो यह आपके मामलों की तेज़ी से गिरावट के लिए है। देखी गई घटनाओं के संदर्भ पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण है। यदि आप, उदाहरण के लिए, इस टुकड़े को फेंक दिया, मामले को पूरा नहीं किया है, तो भविष्य में समस्याओं से बचने का अभी भी एक मौका है।
मैं सफेद दस्ताने क्यों पहनूं?
एक सपने में देखा जाने वाला सफेद दस्ताने छुट्टियों के लिए भविष्य के निमंत्रण का संकेत है या करीबी दोस्तों की कंपनी में बस एक अच्छा विश्राम है।
यदि आपके हाथों पर सफेद दस्ताने हैं, तो प्रतिस्पर्धी पर त्वरित जीत होगी।
| आपके सपने में दस्ताने की उपस्थिति में बहुत अलग मूल्य हो सकते हैं, इसलिए घटनाओं के हर विवरण और संदर्भ को याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है। वास्तव में, यदि आपसे पूछा जाता है कि दस्ताने पहने हुए हैं, तो आप कह सकते हैं कि उनका मुख्य महत्व आपके लिए महत्वपूर्ण किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंधों का प्रतीक है। अक्सर, कपड़ों का यह टुकड़ा विपरीत लिंग की भावनाओं को कम करने का संकेत देता है, लेकिन इसमें अन्य अर्थ भी हो सकते हैं। महिलाओं के दस्ताने का उद्देश्य क्या है? अगर एक आदमी ने सपना देखा कि वह इस सहायक को खरीद रहा था, तो यह कहता है कि उसे अपनी इच्छाओं का उद्देश्य खुश करने का मौका है। और महिलाओं के दस्ताने को उपवास करना मतलब है कि जल्द ही एक व्यक्ति आपके जीवन में दिखाई देगा जो खतरे और ब्लैकमेल के प्रयासों की मदद से आपसे कुछ मांगेगा। मैं चमड़े के दस्ताने क्यों पहनूं? यदि, एक सपने में, आप चमड़े के दस्ताने पहनते हैं, तो आप सफल होंगे। यह असंभव है, हालांकि, यह निर्धारित करने के लिए कि किस क्षेत्र में यह प्रकट होगा। इस तरह के एक सपने के बाद, लड़ाई जारी रखना बहुत महत्वपूर्ण है, अन्यथा इससे पहले किए गए सभी प्रयासों को बर्बाद कर दिया जाएगा। मैं काले दस्ताने क्यों पहनूं? यदि आप काले दस्ताने के साथ किसी भी मामले में अपने सपने में व्यस्त थे, तो यह आपके मामलों की तेज़ी से गिरावट के लिए है। देखी गई घटनाओं के संदर्भ पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण है। यदि आप, उदाहरण के लिए, इस टुकड़े को फेंक दिया, मामले को पूरा नहीं किया है, तो भविष्य में समस्याओं से बचने का अभी भी एक मौका है। मैं सफेद दस्ताने क्यों पहनूं? एक सपने में देखा जाने वाला सफेद दस्ताने छुट्टियों के लिए भविष्य के निमंत्रण का संकेत है या करीबी दोस्तों की कंपनी में बस एक अच्छा विश्राम है। यदि आपके हाथों पर सफेद दस्ताने हैं, तो प्रतिस्पर्धी पर त्वरित जीत होगी। |
स्विस एयर ट्रैकिंग इंडेक्स IQAir जो की एक रीयल-टाइम वायु गुणवत्ता मॉनिटर के अनुसार, मुंबई को 29 जनवरी से 8 फरवरी के बीच एक सप्ताह के भीतर भारत में सबसे प्रदूषित शहर और विश्व स्तर पर दूसरा सबसे प्रदूषित शहर के रूप में स्थान दिया गया है।(MUMBAI AIR QUALITY NEWS)
29 जनवरी को मुंबई को सबसे खराब स्थान की रैंकिंग (Mumbai air quality poor) में 10वां स्थान मिला था। पिछले कुछ दिनो से मुंबई की हवा और भी खराब होती जा रही है जिसके कारण अब इस लिस्ट मे मुंबई दूसरे नंबर पर आ गई है। 13 फरवरी को मुंबई ने दिल्ली को भारत के सबसे प्रदूषित शहर के रूप में पछाड़ दिया और दुनिया भर में वायु गुणवत्ता के मामले में दुनिया भर में तीसरा सबसे अस्वास्थ्यकर शहर बन गया।
CPCB के आंकड़ों के मुताबिक इस साल नवंबर और जनवरी के बीच मुंबई में 'खराब' और 'बेहद खराब' दिन पिछली तीन सर्दियों की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा थे। राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI) और IIT-बॉम्बे के 2020 के शोध के अनुसार, मुंबई की हवा में 71% से अधिक पार्टिकुलेट मैटर लोड का कारण सड़क या अन्य निर्माण कार्य की धूल है। कारखानों, बिजली संयंत्रों, हवाई अड्डों और कचरे के ढेर ने मुंबई की हवा को सांस लेने के लिए सबसे गंदी बनाने में योगदान दिया है।
दुनिया भर के शीर्ष 10 सबसे प्रदूषित शहर (रैंकिंग के अनुसार)
| स्विस एयर ट्रैकिंग इंडेक्स IQAir जो की एक रीयल-टाइम वायु गुणवत्ता मॉनिटर के अनुसार, मुंबई को उनतीस जनवरी से आठ फरवरी के बीच एक सप्ताह के भीतर भारत में सबसे प्रदूषित शहर और विश्व स्तर पर दूसरा सबसे प्रदूषित शहर के रूप में स्थान दिया गया है। उनतीस जनवरी को मुंबई को सबसे खराब स्थान की रैंकिंग में दसवां स्थान मिला था। पिछले कुछ दिनो से मुंबई की हवा और भी खराब होती जा रही है जिसके कारण अब इस लिस्ट मे मुंबई दूसरे नंबर पर आ गई है। तेरह फरवरी को मुंबई ने दिल्ली को भारत के सबसे प्रदूषित शहर के रूप में पछाड़ दिया और दुनिया भर में वायु गुणवत्ता के मामले में दुनिया भर में तीसरा सबसे अस्वास्थ्यकर शहर बन गया। CPCB के आंकड़ों के मुताबिक इस साल नवंबर और जनवरी के बीच मुंबई में 'खराब' और 'बेहद खराब' दिन पिछली तीन सर्दियों की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा थे। राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान और IIT-बॉम्बे के दो हज़ार बीस के शोध के अनुसार, मुंबई की हवा में इकहत्तर% से अधिक पार्टिकुलेट मैटर लोड का कारण सड़क या अन्य निर्माण कार्य की धूल है। कारखानों, बिजली संयंत्रों, हवाई अड्डों और कचरे के ढेर ने मुंबई की हवा को सांस लेने के लिए सबसे गंदी बनाने में योगदान दिया है। दुनिया भर के शीर्ष दस सबसे प्रदूषित शहर |
ग्लोबल मार्केट में गिरावट के बावजूद बृहस्पतिवार को सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल दिखा. सोना बड़ी बढ़त के साथ एक बार फिर 51 हजार की ओर चल दिया है, जबकि चांदी 61 हजार के ऊपर बिक रही. सोने-चांदी के भाव में फिर से उतार- चढ़ाव हुआ है। कई माह के बाद सोने का भाव 52 हजार के नीचे आया है।
सोने की तर्ज पर आज चांदी की कीमतों में भी तेज उछाल दिखा. एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव 363 रुपये चढ़कर 61,060 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया. मालूम हो कि लग्न का सीजन होने के कारण लोग सोने-चांदी के आभूषणों की भी खूब खरीदारी कर रहे हैं। ऐसे में लोगों के अंदर सोने-चांद के भाव को लेकर भी काफी उत्सुकता है।
इससे बाजारों पर असर पड़ा। एमसीएक्स पर सोना वायदा लगभग 0. 40 फीसदी या 202 रुपये की तेजी के साथ 50,640 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। हालांकि चांदी वायदा (Silver Price) 0. 70 फीसदी या 424 रुपये की तेजी के साथ 61,121 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई।
अभी कुछ दिन पहले पहले ही अक्षय तृतीया पर वाराणसी में सोने के आभूषणों की रिकार्ड तोड़ बिक्री हुई थी। इससे पहले चांदी में ट्रेडिंग की शुरुआत 61,233 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से हुई थी, लेकिन मांग में कमजोरी आने से वायदा भाव कुछ नीचे आ गया.
| ग्लोबल मार्केट में गिरावट के बावजूद बृहस्पतिवार को सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल दिखा. सोना बड़ी बढ़त के साथ एक बार फिर इक्यावन हजार की ओर चल दिया है, जबकि चांदी इकसठ हजार के ऊपर बिक रही. सोने-चांदी के भाव में फिर से उतार- चढ़ाव हुआ है। कई माह के बाद सोने का भाव बावन हजार के नीचे आया है। सोने की तर्ज पर आज चांदी की कीमतों में भी तेज उछाल दिखा. एमसीएक्स पर चांदी का वायदा भाव तीन सौ तिरेसठ रुपयापये चढ़कर इकसठ,साठ रुपयापये प्रति किलोग्राम पहुंच गया. मालूम हो कि लग्न का सीजन होने के कारण लोग सोने-चांदी के आभूषणों की भी खूब खरीदारी कर रहे हैं। ऐसे में लोगों के अंदर सोने-चांद के भाव को लेकर भी काफी उत्सुकता है। इससे बाजारों पर असर पड़ा। एमसीएक्स पर सोना वायदा लगभग शून्य. चालीस फीसदी या दो सौ दो रुपयापये की तेजी के साथ पचास,छः सौ चालीस रुपयापये प्रति दस ग्राम पर कारोबार कर रहा था। हालांकि चांदी वायदा शून्य. सत्तर फीसदी या चार सौ चौबीस रुपयापये की तेजी के साथ इकसठ,एक सौ इक्कीस रुपयापये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। अभी कुछ दिन पहले पहले ही अक्षय तृतीया पर वाराणसी में सोने के आभूषणों की रिकार्ड तोड़ बिक्री हुई थी। इससे पहले चांदी में ट्रेडिंग की शुरुआत इकसठ,दो सौ तैंतीस रुपयापये प्रति किलोग्राम के भाव से हुई थी, लेकिन मांग में कमजोरी आने से वायदा भाव कुछ नीचे आ गया. |
शिमला, 7 मई (निस)
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में निर्माणाधीन टीडोंग पनबिजली परियोजना की सुरंग में शनिवार को रोप-वे की ट्रॉली टूटने से 2 मजदूरों की मौत हो गयी, जबकि गंभीर 3 घायल हो गए। घायलों में से 2 का रामपुर के खनेरी अस्पताल में इलाज चल रहा है। एक घायल को क्षेत्रीय अस्पताल रिकांगपिओ में भर्ती कराया गया है।
हादसे में मारे गए श्रमिकों की पहचान झारखंड के जेवियर सूरेन और हमीरपुर के चमन लाल के रूप में हुई है। सभी घायल झारखंड के हैं। किन्नौर के एसपी अशोक रत्न ने कहा कि दोनों मृतक मजदूरों के शव उनके संबंधियों को सौंप दिए हैं। इस बीच, किन्नौर के डीसी आबिद हुसैन सादिक ने हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हादसे दुर्घटना के शिकार हुए सभी मजदूर परियोजना निर्माण में लगी स्टेट क्राफ्ट कंपनी के हैं। घायलों तथा मृतकों को सेना, आईटीबीपी, आपदा प्रबंधन के जवानों और स्थानीय पुलिस की मदद से रेस्क्यू किया गया। अतिरिक्ति जिला दंडाधिकारी पूह अश्वनी कुमार हादसे की न्यायिक जांच करेंगे तथा एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देंगे। डीसी ने बताया कि मामले को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है।
| शिमला, सात मई हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में निर्माणाधीन टीडोंग पनबिजली परियोजना की सुरंग में शनिवार को रोप-वे की ट्रॉली टूटने से दो मजदूरों की मौत हो गयी, जबकि गंभीर तीन घायल हो गए। घायलों में से दो का रामपुर के खनेरी अस्पताल में इलाज चल रहा है। एक घायल को क्षेत्रीय अस्पताल रिकांगपिओ में भर्ती कराया गया है। हादसे में मारे गए श्रमिकों की पहचान झारखंड के जेवियर सूरेन और हमीरपुर के चमन लाल के रूप में हुई है। सभी घायल झारखंड के हैं। किन्नौर के एसपी अशोक रत्न ने कहा कि दोनों मृतक मजदूरों के शव उनके संबंधियों को सौंप दिए हैं। इस बीच, किन्नौर के डीसी आबिद हुसैन सादिक ने हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हादसे दुर्घटना के शिकार हुए सभी मजदूर परियोजना निर्माण में लगी स्टेट क्राफ्ट कंपनी के हैं। घायलों तथा मृतकों को सेना, आईटीबीपी, आपदा प्रबंधन के जवानों और स्थानीय पुलिस की मदद से रेस्क्यू किया गया। अतिरिक्ति जिला दंडाधिकारी पूह अश्वनी कुमार हादसे की न्यायिक जांच करेंगे तथा एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देंगे। डीसी ने बताया कि मामले को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है। |
मुंबई, 8 जनवरी (CRICKETNMORE)। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज और न्यूजीलैंड के साथ टी-20 सीरीज के लिए भारतीय गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को आराम दिया गया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इन दोनों सीरीज के लिए बुमराह के साथ वनडे सीरीज के लिए मोहम्मद सिराज को भारतीय टीम में शामिल किया गया है।
बोर्ड ने कहा, "बीसीसीआई ने बुमराह को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले जाने वाली वनडे सीरीज के लिए और न्यूजीलैंड के लिए टी-20 सीरीज के लिए भी आराम देने का फैसला किया है। भारतीय गेंदबाज के काम के भार को देखते हुए उन्हें इन दोनों सीरीज के लिए आराम देने का फैसला किया है।"
| मुंबई, आठ जनवरी । ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज और न्यूजीलैंड के साथ टी-बीस सीरीज के लिए भारतीय गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को आराम दिया गया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इन दोनों सीरीज के लिए बुमराह के साथ वनडे सीरीज के लिए मोहम्मद सिराज को भारतीय टीम में शामिल किया गया है। बोर्ड ने कहा, "बीसीसीआई ने बुमराह को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले जाने वाली वनडे सीरीज के लिए और न्यूजीलैंड के लिए टी-बीस सीरीज के लिए भी आराम देने का फैसला किया है। भारतीय गेंदबाज के काम के भार को देखते हुए उन्हें इन दोनों सीरीज के लिए आराम देने का फैसला किया है।" |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले के गढा थाना क्षेत्र में एक शराबी पति ने अपनी गर्भवती पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार त्रिपुरी चौक पुरवा स्थित कुम्हार मोहल्ला में एक शराबी युवक ने पत्नी पर हसिया और चाकू से गर्दन, सिर और सीने में आधा दर्जन वार किए थे। हमले के बाद आरोपी घर बंद करके भाग निकला। परिजनों के अनुसार मृतका ढाई माह की गर्भवती भी थी। जिसके कारण मां के साथ दुनिया में आने से पहले बच्चे की भी मौत हो गई। घटना की जानकारी मृतका के भाई-भाभी के घर पहुंचने पर पता चली।
| जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले के गढा थाना क्षेत्र में एक शराबी पति ने अपनी गर्भवती पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार त्रिपुरी चौक पुरवा स्थित कुम्हार मोहल्ला में एक शराबी युवक ने पत्नी पर हसिया और चाकू से गर्दन, सिर और सीने में आधा दर्जन वार किए थे। हमले के बाद आरोपी घर बंद करके भाग निकला। परिजनों के अनुसार मृतका ढाई माह की गर्भवती भी थी। जिसके कारण मां के साथ दुनिया में आने से पहले बच्चे की भी मौत हो गई। घटना की जानकारी मृतका के भाई-भाभी के घर पहुंचने पर पता चली। |
ताड़ता है। ३. दुष्ट सज्जनों को तंग करते हैं । ४. वह मुझसे पुस्तक माँगता है । ५. भगवान भक्तों के दुखों को दूर करते हैं । ६. वह शत्रुओं को पराजित करता है । ७. वह मुझे अपने घर ले गया । ८. मै दो कोस चल कर किसी वृक्ष की छाया में विश्राम करने के लिए एक शिला पर बैठ गया (अधि / आस्) । ६ वह राजर्पि इस तपोवन में रहता है (उप / वसू)। १० उसने मुझसे उद्यान का मार्ग पूछा । ११. डाकुओं ने यात्रियों का सारा धन लूट लिया ( / मुप् 9P with द्वितीया ) । १२. मित्र, मेरी प्रतीक्षा करो। मै भी तुम्हारे पीछे आया (use लट्) । १३. सरोवर का निर्मल शीतल जल पीकर पथिक को बहुत तृप्ति हुए । १४. सीता राम को उस अवस्था मे देख कर विपाद को प्राप्त हुई । १५ धीरे-धीरे उस अतिव्ययी का प्रभूत धन क्षय को प्राप्त हुआ । १६. प्रभो । मेरा जन्म सफल हो ( - सफलता को प्राप्त हो, सफलता Vव्रज) ।
अभ्यास ३३
(द्वितीया - उपपढ़)
१. सड़क के दोनों ओर ऊँचे तथा घनी छाया वाले (= प्रच्छाय Adj) वृक्ष खडे हैं । २ वेदी के चारों ओर फूल बिखरे पड़े है । ३. उसके और मेरे घर के बीच एक चौंडी सडक है । ४. आपने किस उद्देश्य से मेरे पास ये फन्त और मिठाई भेजी । मैं किसी प्रकार की रिश्वत नहीं लेता। ५, वह शकुन्तला के बारे मे कह रहा है न कि तुम्हारे बारे मे ( Use अधिकृत्य) । ६. पिताजी, मेरे विदेश जाने के बारे में क्या निर्णय किया है ( Use प्रांत) । ७. सौन्दर्य के आकर्षक होने के बारे मे भला किसे सन्देह होगा। अपराव किये बिना किसी को दण्ड न मिलना चाहिए । ६ मन्दिर के समीप ही एक सुन्दर कमल सरोवर है । १०. ऐसे क्रूर और अन्यायी राजा को विक्कार है ।
सरल अनुवाद - शिक्षा तृतीया विभक्ति
नियम - ( १ ) करणकारक निम्नलिखित के सम्बन्ध में प्रयुक्त होता है६६
(क) कार्य करने का साधन (शरीरका अथवा अन्य वस्तु), (ख) यान (Conveyance) रथ आदि जिस पर बैठकर कहीं जाना हो, (ग) मार्ग वा दिशा जिसमें जाना हो, (घ) कर्मवाच्य में, भाववाच्य में तथा तान्त और विधिकृदन्त का कर्ता तृतीया में होता है ।
( २ ) तृतीया उपपद निम्नलिखित के सम्बन्ध में प्रयुक्त होता है(क) कार्य को पूरा करने में जितना समय लगे, (ख) शरीर के जिस अंग मे विकार हो, (ग) जिस चिह्न से किसी की पहचान हो, (घ) जिस कारण के उपस्थित होने पर अथवा जिस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कोई कार्य किया जाय, (ड) जिस बात में किसी की किसी से समानता (Resemblance) हो या तुलना ( Comparison) की जाय, (च) जिस बात में कोई किसी से बढ़कर हो, (छ) जिसकी शपथ खाई जाय, (ज) जिस बात से संतोप या प्रसन्नता हो, (झ) जितने मूल्य मे कुछ खरीदा या बेचा जाय, (ञ) जिससे सयोग या वियोग हो, (ट) प्रकृति, व्याज, बुद्धि आदि शब्दों के योग में, (ठ) किं, कार्य, प्रयोजनं, अर्थ, गुण, हीन, न्यून, रहित आदि के योग में, अलं, कृत आदि के योग में, सह, साकं, सार्धं, समं, विना आदि के योग में, (ड) जब किसी शब्द को क्रिया - विशेषरण के रूप प्रयुक्त किया जाय तो उसे तृतीया में रखा जाता है । | ताड़ता है। तीन. दुष्ट सज्जनों को तंग करते हैं । चार. वह मुझसे पुस्तक माँगता है । पाँच. भगवान भक्तों के दुखों को दूर करते हैं । छः. वह शत्रुओं को पराजित करता है । सात. वह मुझे अपने घर ले गया । आठ. मै दो कोस चल कर किसी वृक्ष की छाया में विश्राम करने के लिए एक शिला पर बैठ गया । छः वह राजर्पि इस तपोवन में रहता है । दस उसने मुझसे उद्यान का मार्ग पूछा । ग्यारह. डाकुओं ने यात्रियों का सारा धन लूट लिया । बारह. मित्र, मेरी प्रतीक्षा करो। मै भी तुम्हारे पीछे आया । तेरह. सरोवर का निर्मल शीतल जल पीकर पथिक को बहुत तृप्ति हुए । चौदह. सीता राम को उस अवस्था मे देख कर विपाद को प्राप्त हुई । पंद्रह धीरे-धीरे उस अतिव्ययी का प्रभूत धन क्षय को प्राप्त हुआ । सोलह. प्रभो । मेरा जन्म सफल हो । अभ्यास तैंतीस एक. सड़क के दोनों ओर ऊँचे तथा घनी छाया वाले वृक्ष खडे हैं । दो वेदी के चारों ओर फूल बिखरे पड़े है । तीन. उसके और मेरे घर के बीच एक चौंडी सडक है । चार. आपने किस उद्देश्य से मेरे पास ये फन्त और मिठाई भेजी । मैं किसी प्रकार की रिश्वत नहीं लेता। पाँच, वह शकुन्तला के बारे मे कह रहा है न कि तुम्हारे बारे मे । छः. पिताजी, मेरे विदेश जाने के बारे में क्या निर्णय किया है । सात. सौन्दर्य के आकर्षक होने के बारे मे भला किसे सन्देह होगा। अपराव किये बिना किसी को दण्ड न मिलना चाहिए । छः मन्दिर के समीप ही एक सुन्दर कमल सरोवर है । दस. ऐसे क्रूर और अन्यायी राजा को विक्कार है । सरल अनुवाद - शिक्षा तृतीया विभक्ति नियम - करणकारक निम्नलिखित के सम्बन्ध में प्रयुक्त होता हैछयासठ कार्य करने का साधन , यान रथ आदि जिस पर बैठकर कहीं जाना हो, मार्ग वा दिशा जिसमें जाना हो, कर्मवाच्य में, भाववाच्य में तथा तान्त और विधिकृदन्त का कर्ता तृतीया में होता है । तृतीया उपपद निम्नलिखित के सम्बन्ध में प्रयुक्त होता है कार्य को पूरा करने में जितना समय लगे, शरीर के जिस अंग मे विकार हो, जिस चिह्न से किसी की पहचान हो, जिस कारण के उपस्थित होने पर अथवा जिस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए कोई कार्य किया जाय, जिस बात में किसी की किसी से समानता हो या तुलना की जाय, जिस बात में कोई किसी से बढ़कर हो, जिसकी शपथ खाई जाय, जिस बात से संतोप या प्रसन्नता हो, जितने मूल्य मे कुछ खरीदा या बेचा जाय, जिससे सयोग या वियोग हो, प्रकृति, व्याज, बुद्धि आदि शब्दों के योग में, किं, कार्य, प्रयोजनं, अर्थ, गुण, हीन, न्यून, रहित आदि के योग में, अलं, कृत आदि के योग में, सह, साकं, सार्धं, समं, विना आदि के योग में, जब किसी शब्द को क्रिया - विशेषरण के रूप प्रयुक्त किया जाय तो उसे तृतीया में रखा जाता है । |
Kmsraj51 की कलम से.....
दुनिया सारी मौन खड़ी,
तालिबानी - अफ़गान चढे!
माता - बच्चे - बहना सारी,
दहशत के माहौल में है पड़े।
अफरा-तफरी चारों तरफ,
अफगान के नागरिकों काे,
बुरे समय में नामी हस्तियां,
काबुल छोड़कर भाग रही।
महिला मेकर सारा करीमी,
फिल्मी मेकर जान बचाने की,
दुनिया से गुहार लगाने लगी,
कौन करेगा मदद दुखी सभी।
अफगानी है, के साथ वहां,
दुर्व्यवहार किया जा रहा!
मदद करो - मदद करो मेरी,
चारों तरफ हाहाकार मचा।
मानवता सारी नो - नो चुकी,
अफगानी लड़कियां दिखी।
तालिबानी सेना लडाके उनको,
उठा, उठा कर लेकर जा रहे।
मनमानी करते हैं उनके साथ,
बच्चियां बिल्कुल यही कह रहीं।
विरोध गर उनका कोई करता,
उनकी आंखे वह सब नोच रहे।
नन्हें - नन्नी बच्चे भूखे - प्यासे,
दूध पीने के लिए वह नहीं पा रहे।
उनकी जान बचेगी अथवा नहीं,
आगे बढ़कर कोई नहीं आ रहा।
अफ़गानी बैंक में भारी खड़ी,
पैसा आया था अपना पाने को!
हाथ खड़ा कर दिए बैंक सभी,
दिल थाम सारी जनता खड़ी।
भाग रहा था सारा समाज हित,
अपनी अपनी जान बचाने को!
कुछ अमरीकी विमान पर चढ़े,
लापरवाही, से गिर धरा मर गए।
नागरिकों को नहीं बचाने वाला है?
अफगानी सेना नतमस्तक वाली।
पहले ही तालीबानी अवस्था देखी,
उनका अत्याचार जनता थी सहती।
- "सुखमंगल सिंह जी" ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में - वर्तमान समय में तालिबान के लड़ाकों या यूँ कहे इंसानियत के दुश्मन आतंकवादियों द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा और उनकी बर्बरता लूट, बलात्कार, हत्या, और खून खराबा को दर्शाया है।
यह कविता (अफगानी - दुर्दशा।) "सुखमंगल सिंह जी" की रचना है। KMSRAJ51.COM - के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से।
अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए - ईमेल सब्सक्राइब करें - It's Free !!
ज़रूर पढ़ेंः अफगान में तालीबानी।
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"सफलता का सबसे बड़ा सूत्र"(KMSRAJ51)
| Kmsrajइक्यावन की कलम से..... दुनिया सारी मौन खड़ी, तालिबानी - अफ़गान चढे! माता - बच्चे - बहना सारी, दहशत के माहौल में है पड़े। अफरा-तफरी चारों तरफ, अफगान के नागरिकों काे, बुरे समय में नामी हस्तियां, काबुल छोड़कर भाग रही। महिला मेकर सारा करीमी, फिल्मी मेकर जान बचाने की, दुनिया से गुहार लगाने लगी, कौन करेगा मदद दुखी सभी। अफगानी है, के साथ वहां, दुर्व्यवहार किया जा रहा! मदद करो - मदद करो मेरी, चारों तरफ हाहाकार मचा। मानवता सारी नो - नो चुकी, अफगानी लड़कियां दिखी। तालिबानी सेना लडाके उनको, उठा, उठा कर लेकर जा रहे। मनमानी करते हैं उनके साथ, बच्चियां बिल्कुल यही कह रहीं। विरोध गर उनका कोई करता, उनकी आंखे वह सब नोच रहे। नन्हें - नन्नी बच्चे भूखे - प्यासे, दूध पीने के लिए वह नहीं पा रहे। उनकी जान बचेगी अथवा नहीं, आगे बढ़कर कोई नहीं आ रहा। अफ़गानी बैंक में भारी खड़ी, पैसा आया था अपना पाने को! हाथ खड़ा कर दिए बैंक सभी, दिल थाम सारी जनता खड़ी। भाग रहा था सारा समाज हित, अपनी अपनी जान बचाने को! कुछ अमरीकी विमान पर चढ़े, लापरवाही, से गिर धरा मर गए। नागरिकों को नहीं बचाने वाला है? अफगानी सेना नतमस्तक वाली। पहले ही तालीबानी अवस्था देखी, उनका अत्याचार जनता थी सहती। - "सुखमंगल सिंह जी" ने, बहुत ही सरल शब्दों में सुंदर तरीके से इस कविता में - वर्तमान समय में तालिबान के लड़ाकों या यूँ कहे इंसानियत के दुश्मन आतंकवादियों द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जा और उनकी बर्बरता लूट, बलात्कार, हत्या, और खून खराबा को दर्शाया है। यह कविता "सुखमंगल सिंह जी" की रचना है। KMSRAJइक्यावन.COM - के पाठकों के लिए। आपकी कवितायें / लेख सरल शब्दो में दिल की गहराइयों तक उतर कर जीवन बदलने वाली होती है। मुझे पूर्ण विश्वास है आपकी कविताओं और लेख से जनमानस का कल्याण होगा। आपकी कविताओं और लेख से आने वाली पीढ़ी के दिलो दिमाग में हिंदी साहित्य के प्रति प्रेम बना रहेगा। आपकी लेखन क्रिया यूं ही चलती रहे, बाबा विश्वनाथ की कृपा से। अपने विचार Comments कर जरूर बताये, और हमेशा नए Post को अपने ईमेल पर पाने के लिए - ईमेल सब्सक्राइब करें - It's Free !! ज़रूर पढ़ेंः अफगान में तालीबानी। Please share your comments. यदि आपके पास हिंदी या अंग्रेजी में कोई Article, Inspirational Story, Poetry या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Idहैःkmsrajइक्यावन@hotmail.com.पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thanks!! "सफलता का सबसे बड़ा सूत्र" |
सपना चौधरी जो की हरयाणा की एक मशहूर डांसर और गाईक के रूप में जानी जाती हैं, उनकी कार दुर्घटना हुई है और उनकी जान बाल बाल बची है। यह दुर्घटना गुरुग्राम में हुई है। सपना चौधरी को सबसे अधिक लोकप्रियता कलर्स टीवी के रियलिटी शो 'बिग बॉस 11' में भाग लेने के बाद मिली थी।
एक रिपोर्ट के मुताबिक सपना का कार एक्सीडेंट गुरूवार की रात को गुरुग्राम के 'हीरो हौंडा चौक' के पास हुआ है। सपने के लिए यह एक बहुत ही खतरनाक हसदा था, जिसमें की वह बाल बाल बची हैं। सपना अपनी शॉपिंग पूरी करके अपनी कार से वापिस जा रही थी की तभी पीछे से एक कार ने उनकी कार को टक्कर मारी थी, जिसके कारण सपना कुछ समय के लिए समझ नहीं पाई की हुआ क्या है। जैसे तैसे सपना के ड्राइवर ने खुदको और अपनी गाडी को तो सम्हाल लिया था, लेकिन सपना को चोटें आई हैं।
सपना अपनी सफ़ेद रंग की फॉर्चूनर में पीछे बैठी थी और आगे उनके ड्राइवर गाडी चला रहे थे। उसी दौरान पीछे से एक गाडी ने सपनी की फॉर्चूनर को बहुत ज़ोर से टक्कर मारी थी, जिसकी वजह से उनकी गाडी का नंबर प्लेट पूरी तरह टूट गया है। सपना की फॉर्चूनर पीछे की तरफ से बहुत खराब हालत में हैं। सपना जो की पीछे की सीट पर बैठी थीं, उन्हें कुछ गंभीर चोटें आई हैं। फिलहाल सपना खतरे से बाहर है। सपना ने अभी तक उस गाडी के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई है।
सपना जिन्हे बिग्ग बॉस 11 में देखा गया था, इसके बाद से उन्हें अक्सर कई सारे शोज में देखा जाता रहा है। बिग बॉस के घर के अंदर सपना और हिना खान की लड़ाइयों की वजह से दोनों पुरे शो के दौरान सुर्ख़ियों में सुनाई देते रहते थे। सपना खुद भी बिग बॉस के शो की बहुत बड़ी फैन हैं और वो रोज़ाना बिग बॉस शो को फॉलो भी करती हैं।
| सपना चौधरी जो की हरयाणा की एक मशहूर डांसर और गाईक के रूप में जानी जाती हैं, उनकी कार दुर्घटना हुई है और उनकी जान बाल बाल बची है। यह दुर्घटना गुरुग्राम में हुई है। सपना चौधरी को सबसे अधिक लोकप्रियता कलर्स टीवी के रियलिटी शो 'बिग बॉस ग्यारह' में भाग लेने के बाद मिली थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक सपना का कार एक्सीडेंट गुरूवार की रात को गुरुग्राम के 'हीरो हौंडा चौक' के पास हुआ है। सपने के लिए यह एक बहुत ही खतरनाक हसदा था, जिसमें की वह बाल बाल बची हैं। सपना अपनी शॉपिंग पूरी करके अपनी कार से वापिस जा रही थी की तभी पीछे से एक कार ने उनकी कार को टक्कर मारी थी, जिसके कारण सपना कुछ समय के लिए समझ नहीं पाई की हुआ क्या है। जैसे तैसे सपना के ड्राइवर ने खुदको और अपनी गाडी को तो सम्हाल लिया था, लेकिन सपना को चोटें आई हैं। सपना अपनी सफ़ेद रंग की फॉर्चूनर में पीछे बैठी थी और आगे उनके ड्राइवर गाडी चला रहे थे। उसी दौरान पीछे से एक गाडी ने सपनी की फॉर्चूनर को बहुत ज़ोर से टक्कर मारी थी, जिसकी वजह से उनकी गाडी का नंबर प्लेट पूरी तरह टूट गया है। सपना की फॉर्चूनर पीछे की तरफ से बहुत खराब हालत में हैं। सपना जो की पीछे की सीट पर बैठी थीं, उन्हें कुछ गंभीर चोटें आई हैं। फिलहाल सपना खतरे से बाहर है। सपना ने अभी तक उस गाडी के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई है। सपना जिन्हे बिग्ग बॉस ग्यारह में देखा गया था, इसके बाद से उन्हें अक्सर कई सारे शोज में देखा जाता रहा है। बिग बॉस के घर के अंदर सपना और हिना खान की लड़ाइयों की वजह से दोनों पुरे शो के दौरान सुर्ख़ियों में सुनाई देते रहते थे। सपना खुद भी बिग बॉस के शो की बहुत बड़ी फैन हैं और वो रोज़ाना बिग बॉस शो को फॉलो भी करती हैं। |
कॉर्निलोव विद्रोह एक असफल रहा हैरूस में सैन्य तानाशाही शुरू करने का प्रयास, अगस्त 1 9 17 के अंत में जनरल लैव जॉर्जिएविच कोर्निलोव ने किया, जिसने उस समय रूसी सेना की अध्यक्षता की थी।
जुलाई 1 9 17 में, रूस तेजी से बढ़ गया थालड़ने "दक्षिणपंथी" और सत्ता में राजनीतिक ताकतों का "छोड़"। दक्षिणपंथी ताकतों था, जिसमें शाही, पादरी शामिल है और अधिकारियों का मानना था कि देश में स्थापित 'क्रांतिकारी अराजकता, "यह खत्म करने के लिए समय है, इसलिए सैन्य तानाशाही की शुरूआत और सोवियत संघ के उन्मूलन का स्वागत किया। एक "छोड़" - बोल्शेविक पार्टी - अस्थायी सरकार को उखाड़ फेंकने और देश में अपनी सत्ता के अंतिम स्थापना के लिए एक मजबूत प्रतिबद्धता है।
समग्र स्थिति लगातार खराब हो रही थी। किसानों ने वादा किए गए देश की प्रतीक्षा नहीं की, और मजदूरों के बीच असंतोष बढ़ रहा था। यूक्रेन और फिनलैंड पूर्ण स्वायत्तता की ओर बढ़ गया। सैनिकों और नाविकों को बड़े पैमाने पर एक वर्ग क्रांति के विचार से दूर ले जाया गया। देश को अकाल से धमकी दी गई थी।
इन स्थितियों में, रूसी समाज की तरह थाएक पाउडर किग जो किसी भी समय विस्फोट कर सकता है। अनंतिम सरकार ने महसूस किया कि केवल एक नई मजबूत सरकार और सैन्य तानाशाही राज्य को अंतिम पतन से बचा सकता है। जनरल कॉर्निलोव तानाशाह के रूप में चुने गए थे। उन्होंने सैनिकों और अधिकारियों के बीच बहुत सम्मान किया, वह अधिकार, दृढ़ संकल्प और क्रूरता का एक आदमी था। खतरे की परिस्थितियों में, उन्होंने पूर्ण सभ्यता, मातृभूमि की भक्ति और उनकी मजबूत इच्छा के सभी बेहतरीन गुण दिखाए।
इसके बजाय कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया जा रहा हैजनरल ब्रूसिलोव, उन्होंने मोर्चे पर रैलियों पर प्रतिबंध लगाया, विलंब के लिए शूटिंग निर्धारित की, सैनिकों की समितियों के अधिकारों और अधिकारों को काफी सीमित कर दिया। सरकार से, उन्होंने रेलवे और रक्षा उद्यमों के सैन्यीकरण की मांग की।
12 अगस्त, 1 9 17 को, अनंतिम के प्रमुखकेरेन्स्की ने एक राज्य सम्मेलन बुलाया जिसमें भूमि मालिक, बुर्जुआ के प्रतिनिधियों, अधिकारियों, कोसाक्स और पादरी के प्रमुख, जनरलों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में, मौत की सजा लगाने, किसानों के खिलाफ नरसंहार, भूमिगत लोगों की भूमि को अनधिकृत रूप से जब्त करने, श्रमिकों को उत्पादन के मामलों में हस्तक्षेप करने और रैलियों और बैठकों को प्रतिबंधित करने पर प्रतिबंधों पर चर्चा की गई।
जनरल कोर्निलोव ने एक लोहे की स्थापना की मांग कीअनुशासन, मौत की सजा और सोवियत के पूर्ण उन्मूलन की अनुमति। उन्होंने कुछ हद तक पर्दा उठाया कि क्रांति और बोल्शेविकों के खिलाफ लड़ने के लिए वह रीगा को जर्मन सैनिकों के सामने आत्मसमर्पण कर देंगे, ताकि क्रांतिकारी बलों के गढ़ पेत्रोग्राद के लिए उनके लिए रास्ता खुल सके।
बैठक के अधिकांश प्रतिभागी गर्म हैंसामान्य के बयानों का समर्थन किया। कोर्निलोव को पूरा भरोसा था कि अगर वह तख्तापलट शुरू करता है तो सैनिक उसका समर्थन करेंगे। सम्मेलन की पूर्व संध्या पर, उन्होंने सार्वजनिक रूप से सेंट जॉर्ज कैवलियर्स के संघ, कोसैक फोर्सेस और कई अन्य संघों के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया।
और 21 अगस्त को, जर्मन सैनिकों ने रीगा पर कब्जा कर लिया, जिसके बारे में कोर्निलोव ने चेतावनी दी। ऐसा लगता था कि तख्तापलट और तानाशाही की स्थापना के लिए स्थिति सबसे अनुकूल है।
राज्य सम्मेलन के बाद, जनरल कोर्निलोववह मुख्यालय लौट आया और अनंतिम सरकार के फैसले और केरेन्स्की के समझौते से निर्देशित होकर अपने सैनिकों को अवैध रूप से पेत्रोग्राद में भेजना शुरू कर दिया। उन्होंने 3 कैवेलरी कोर और "वाइल्ड" (मूल) डिवीजन को लेफ्टिनेंट-जनरल क्रिमोव की अध्यक्षता में राजधानी में भेजा।
इस समय, केरेन्स्की अपना खेल खेल रहा था। 27 अगस्त को, उन्होंने कोर्निलोव को कमांडर-इन-चीफ के रूप में इस्तीफा देने का आदेश दिया, और जनरल के प्राकृतिक आदेश को मानने से इनकार करने के बाद, विद्रोही होने की घोषणा की। दरअसल, केरेन्स्की को उम्मीद नहीं थी कि कोर्निलोव उनकी बात मानेंगे। वास्तव में, यह स्वयं केरेंस्की की शक्ति को मजबूत करने के उद्देश्य से एक बहुत बड़ा उकसाव था।
तो, केरेन्स्की उलझन में नेतृत्व करना शुरू कर देता हैस्टाका के साथ बातचीत, मध्यस्थ जिसमें लविवि का राजकुमार काम करता है। वह कोर्निलोव को बदनाम करने के लिए हर तरह से कोशिश कर रहा है, लेकिन प्रांतीय सरकार अभी भी उसे विद्रोही के रूप में पहचानने से इनकार करती है। जवाब में, केरेन्स्की ने सरकार को खारिज कर दिया और असाधारण तानाशाही शक्तियों को मान लिया। वह कोर्निलोव को व्यक्तिगत रूप से अपने पद से बर्खास्त कर देता है, हालांकि यह एक बिल्कुल अवैध कार्य है। इसी समय, वह पेट्रोग्रेड के खिलाफ कोर्निलोव के "वाइल्ड डिवीजन" के आक्रमण को रोकने की कोशिश कर रहा है।
कोर्निलोव, केरेन्स्की को प्रस्तुत करने से इनकार करते हुए,वह अपनी संपूर्णता में शक्ति को मानता है और लोगों और सेना के लिए अपील जारी करना शुरू करता है। विशेष रूप से, वह "ग्रेट रूस को बचाने" का वादा करता है, संविधान सभा के दीक्षांत समारोह को प्राप्त करने के लिए, जर्मनी के साथ मिलकर बोल्शेविकों पर आरोप लगाता है, लोगों से सरकार का पालन नहीं करने का आह्वान करता है। कोर्निलोव के भाषणों को कई संगठनों और सैन्य संघों द्वारा समर्थित किया गया था। लेकिन, चूंकि वे पहले कोर्निलोव के संघर्ष में शामिल नहीं थे, केवल नैतिक समर्थन प्रदान कर सकते थे।
केरेन्स्की इस समय बुखार में किसी भी कोशिश कर रहा हैकोर्निलोव को रोकने के तरीके। उन्होंने टेलीग्राम भेजकर उन्हें तुरंत पीटर्सबर्ग जाने का आदेश दिया, लेकिन कोर्निलोव ने केरेंस्की की बात मानने से इंकार कर दिया। जवाब में, वह खुले तौर पर अपनी मांगों को उजागर करता हैः सरकार से उन मंत्रियों को बाहर करने के लिए, जो खुद कोर्निलोव के अनुसार, मातृभूमि के गद्दार हैं, और देश में एक दृढ़ और मजबूत शक्ति स्थापित करने के लिए।
जंगली विभाजन पेत्रोग्राद के करीब जा रहा है। स्टेशन Antropshino में वे पेट्रोग्रैड गैरीसन के साथ आग के आदान-प्रदान की व्यवस्था करते हैं, इससे पहले लुगा पर कब्जा कर लेते हैं और स्थानीय गैरीसन को निरस्त्र कर देते हैं। अंतरिम सरकार समझती है कि यह कोर्निलोव के साथ सामना करने में असमर्थ है, और इसलिए बोल्शेविकों से मदद मांगता है। वे अपने आंदोलनकारियों को कोर्निलोव की सेना में भेजते हैं, और पेत्रोग्राद के कार्यकर्ताओं को आधिकारिक रूप से हथियार सौंप दिए जाते हैं, जो बाद में अक्टूबर क्रांति में बोल्शेविकों की जीत में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
29 अगस्त को कोर्निलोव के सैनिकों को रोकना संभव था। तोड़फोड़ करने वालों ने रेलवे ट्रैक को ध्वस्त कर दिया, और आंदोलनकारियों ने सैनिकों को हथियार डालने और आत्मसमर्पण करने के लिए मना लिया। क्रिमोव ने अपनी सेना छोड़ दी और पेत्रोग्राद चले गए। उसने धोखा महसूस किया, इसलिए उसी दिन केरेन्स्की के साथ बातचीत के बाद उसने खुद को सीने में गोली मारकर घायल कर लिया।
कोर्निलोव ने मुख्यालय से भागने से इनकार कर दिया, हालांकि उन्हें ऐसा अवसर दिया गया था। 1 सितंबर को, सामान्य और उसके निकटतम लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जनरल कोर्निलोव के विद्रोह को दबा दिया गया था।
रूस के इतिहास में, इस घटना ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाईभूमिका। केरेन्स्की ने अपनी शक्ति को मजबूत करने की कोशिश की, और इसके बजाय बोल्शेविकों के हाथों में खेला गया। उन्हें हथियार चलाने का बिल्कुल कानूनी मौका मिला। रेड गार्ड की नई इकाइयों का गहन गठन शुरू किया। "दक्षिणपंथियों" के शिविर को अनिवार्य रूप से अपने आप में विभाजित किया गया था, जिसका अर्थ है कि इसने अपनी शक्ति को धारण करने और मजबूत करने की क्षमता खो दी।
| कॉर्निलोव विद्रोह एक असफल रहा हैरूस में सैन्य तानाशाही शुरू करने का प्रयास, अगस्त एक नौ सत्रह के अंत में जनरल लैव जॉर्जिएविच कोर्निलोव ने किया, जिसने उस समय रूसी सेना की अध्यक्षता की थी। जुलाई एक नौ सत्रह में, रूस तेजी से बढ़ गया थालड़ने "दक्षिणपंथी" और सत्ता में राजनीतिक ताकतों का "छोड़"। दक्षिणपंथी ताकतों था, जिसमें शाही, पादरी शामिल है और अधिकारियों का मानना था कि देश में स्थापित 'क्रांतिकारी अराजकता, "यह खत्म करने के लिए समय है, इसलिए सैन्य तानाशाही की शुरूआत और सोवियत संघ के उन्मूलन का स्वागत किया। एक "छोड़" - बोल्शेविक पार्टी - अस्थायी सरकार को उखाड़ फेंकने और देश में अपनी सत्ता के अंतिम स्थापना के लिए एक मजबूत प्रतिबद्धता है। समग्र स्थिति लगातार खराब हो रही थी। किसानों ने वादा किए गए देश की प्रतीक्षा नहीं की, और मजदूरों के बीच असंतोष बढ़ रहा था। यूक्रेन और फिनलैंड पूर्ण स्वायत्तता की ओर बढ़ गया। सैनिकों और नाविकों को बड़े पैमाने पर एक वर्ग क्रांति के विचार से दूर ले जाया गया। देश को अकाल से धमकी दी गई थी। इन स्थितियों में, रूसी समाज की तरह थाएक पाउडर किग जो किसी भी समय विस्फोट कर सकता है। अनंतिम सरकार ने महसूस किया कि केवल एक नई मजबूत सरकार और सैन्य तानाशाही राज्य को अंतिम पतन से बचा सकता है। जनरल कॉर्निलोव तानाशाह के रूप में चुने गए थे। उन्होंने सैनिकों और अधिकारियों के बीच बहुत सम्मान किया, वह अधिकार, दृढ़ संकल्प और क्रूरता का एक आदमी था। खतरे की परिस्थितियों में, उन्होंने पूर्ण सभ्यता, मातृभूमि की भक्ति और उनकी मजबूत इच्छा के सभी बेहतरीन गुण दिखाए। इसके बजाय कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया जा रहा हैजनरल ब्रूसिलोव, उन्होंने मोर्चे पर रैलियों पर प्रतिबंध लगाया, विलंब के लिए शूटिंग निर्धारित की, सैनिकों की समितियों के अधिकारों और अधिकारों को काफी सीमित कर दिया। सरकार से, उन्होंने रेलवे और रक्षा उद्यमों के सैन्यीकरण की मांग की। बारह अगस्त, एक नौ सत्रह को, अनंतिम के प्रमुखकेरेन्स्की ने एक राज्य सम्मेलन बुलाया जिसमें भूमि मालिक, बुर्जुआ के प्रतिनिधियों, अधिकारियों, कोसाक्स और पादरी के प्रमुख, जनरलों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में, मौत की सजा लगाने, किसानों के खिलाफ नरसंहार, भूमिगत लोगों की भूमि को अनधिकृत रूप से जब्त करने, श्रमिकों को उत्पादन के मामलों में हस्तक्षेप करने और रैलियों और बैठकों को प्रतिबंधित करने पर प्रतिबंधों पर चर्चा की गई। जनरल कोर्निलोव ने एक लोहे की स्थापना की मांग कीअनुशासन, मौत की सजा और सोवियत के पूर्ण उन्मूलन की अनुमति। उन्होंने कुछ हद तक पर्दा उठाया कि क्रांति और बोल्शेविकों के खिलाफ लड़ने के लिए वह रीगा को जर्मन सैनिकों के सामने आत्मसमर्पण कर देंगे, ताकि क्रांतिकारी बलों के गढ़ पेत्रोग्राद के लिए उनके लिए रास्ता खुल सके। बैठक के अधिकांश प्रतिभागी गर्म हैंसामान्य के बयानों का समर्थन किया। कोर्निलोव को पूरा भरोसा था कि अगर वह तख्तापलट शुरू करता है तो सैनिक उसका समर्थन करेंगे। सम्मेलन की पूर्व संध्या पर, उन्होंने सार्वजनिक रूप से सेंट जॉर्ज कैवलियर्स के संघ, कोसैक फोर्सेस और कई अन्य संघों के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया। और इक्कीस अगस्त को, जर्मन सैनिकों ने रीगा पर कब्जा कर लिया, जिसके बारे में कोर्निलोव ने चेतावनी दी। ऐसा लगता था कि तख्तापलट और तानाशाही की स्थापना के लिए स्थिति सबसे अनुकूल है। राज्य सम्मेलन के बाद, जनरल कोर्निलोववह मुख्यालय लौट आया और अनंतिम सरकार के फैसले और केरेन्स्की के समझौते से निर्देशित होकर अपने सैनिकों को अवैध रूप से पेत्रोग्राद में भेजना शुरू कर दिया। उन्होंने तीन कैवेलरी कोर और "वाइल्ड" डिवीजन को लेफ्टिनेंट-जनरल क्रिमोव की अध्यक्षता में राजधानी में भेजा। इस समय, केरेन्स्की अपना खेल खेल रहा था। सत्ताईस अगस्त को, उन्होंने कोर्निलोव को कमांडर-इन-चीफ के रूप में इस्तीफा देने का आदेश दिया, और जनरल के प्राकृतिक आदेश को मानने से इनकार करने के बाद, विद्रोही होने की घोषणा की। दरअसल, केरेन्स्की को उम्मीद नहीं थी कि कोर्निलोव उनकी बात मानेंगे। वास्तव में, यह स्वयं केरेंस्की की शक्ति को मजबूत करने के उद्देश्य से एक बहुत बड़ा उकसाव था। तो, केरेन्स्की उलझन में नेतृत्व करना शुरू कर देता हैस्टाका के साथ बातचीत, मध्यस्थ जिसमें लविवि का राजकुमार काम करता है। वह कोर्निलोव को बदनाम करने के लिए हर तरह से कोशिश कर रहा है, लेकिन प्रांतीय सरकार अभी भी उसे विद्रोही के रूप में पहचानने से इनकार करती है। जवाब में, केरेन्स्की ने सरकार को खारिज कर दिया और असाधारण तानाशाही शक्तियों को मान लिया। वह कोर्निलोव को व्यक्तिगत रूप से अपने पद से बर्खास्त कर देता है, हालांकि यह एक बिल्कुल अवैध कार्य है। इसी समय, वह पेट्रोग्रेड के खिलाफ कोर्निलोव के "वाइल्ड डिवीजन" के आक्रमण को रोकने की कोशिश कर रहा है। कोर्निलोव, केरेन्स्की को प्रस्तुत करने से इनकार करते हुए,वह अपनी संपूर्णता में शक्ति को मानता है और लोगों और सेना के लिए अपील जारी करना शुरू करता है। विशेष रूप से, वह "ग्रेट रूस को बचाने" का वादा करता है, संविधान सभा के दीक्षांत समारोह को प्राप्त करने के लिए, जर्मनी के साथ मिलकर बोल्शेविकों पर आरोप लगाता है, लोगों से सरकार का पालन नहीं करने का आह्वान करता है। कोर्निलोव के भाषणों को कई संगठनों और सैन्य संघों द्वारा समर्थित किया गया था। लेकिन, चूंकि वे पहले कोर्निलोव के संघर्ष में शामिल नहीं थे, केवल नैतिक समर्थन प्रदान कर सकते थे। केरेन्स्की इस समय बुखार में किसी भी कोशिश कर रहा हैकोर्निलोव को रोकने के तरीके। उन्होंने टेलीग्राम भेजकर उन्हें तुरंत पीटर्सबर्ग जाने का आदेश दिया, लेकिन कोर्निलोव ने केरेंस्की की बात मानने से इंकार कर दिया। जवाब में, वह खुले तौर पर अपनी मांगों को उजागर करता हैः सरकार से उन मंत्रियों को बाहर करने के लिए, जो खुद कोर्निलोव के अनुसार, मातृभूमि के गद्दार हैं, और देश में एक दृढ़ और मजबूत शक्ति स्थापित करने के लिए। जंगली विभाजन पेत्रोग्राद के करीब जा रहा है। स्टेशन Antropshino में वे पेट्रोग्रैड गैरीसन के साथ आग के आदान-प्रदान की व्यवस्था करते हैं, इससे पहले लुगा पर कब्जा कर लेते हैं और स्थानीय गैरीसन को निरस्त्र कर देते हैं। अंतरिम सरकार समझती है कि यह कोर्निलोव के साथ सामना करने में असमर्थ है, और इसलिए बोल्शेविकों से मदद मांगता है। वे अपने आंदोलनकारियों को कोर्निलोव की सेना में भेजते हैं, और पेत्रोग्राद के कार्यकर्ताओं को आधिकारिक रूप से हथियार सौंप दिए जाते हैं, जो बाद में अक्टूबर क्रांति में बोल्शेविकों की जीत में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। उनतीस अगस्त को कोर्निलोव के सैनिकों को रोकना संभव था। तोड़फोड़ करने वालों ने रेलवे ट्रैक को ध्वस्त कर दिया, और आंदोलनकारियों ने सैनिकों को हथियार डालने और आत्मसमर्पण करने के लिए मना लिया। क्रिमोव ने अपनी सेना छोड़ दी और पेत्रोग्राद चले गए। उसने धोखा महसूस किया, इसलिए उसी दिन केरेन्स्की के साथ बातचीत के बाद उसने खुद को सीने में गोली मारकर घायल कर लिया। कोर्निलोव ने मुख्यालय से भागने से इनकार कर दिया, हालांकि उन्हें ऐसा अवसर दिया गया था। एक सितंबर को, सामान्य और उसके निकटतम लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जनरल कोर्निलोव के विद्रोह को दबा दिया गया था। रूस के इतिहास में, इस घटना ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाईभूमिका। केरेन्स्की ने अपनी शक्ति को मजबूत करने की कोशिश की, और इसके बजाय बोल्शेविकों के हाथों में खेला गया। उन्हें हथियार चलाने का बिल्कुल कानूनी मौका मिला। रेड गार्ड की नई इकाइयों का गहन गठन शुरू किया। "दक्षिणपंथियों" के शिविर को अनिवार्य रूप से अपने आप में विभाजित किया गया था, जिसका अर्थ है कि इसने अपनी शक्ति को धारण करने और मजबूत करने की क्षमता खो दी। |
पूर्वी चंपारण जिले में पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि गांव के बगल के पानी लगे चंवर के बीच काफी मात्रा में अवैध शराब का निर्माण किया जा रहा है. जिसके बाद छापेमारी की गई.
बिहार (Bihar) में जहरीली शराब (Poisonous liquor) से होती मौतों (Death) के पुलिस चौकस हो गयी है. इसी कड़ी में बुधवार को पूर्वी चंपारण (East Champaran) में जिला पुलिस ने एक में छापामारी कर लगभग 3,000 लीटर निर्मित देशी शराब और अर्द्धनिर्मित शराब को जब्त कर उसे नष्ट किया. पुलिस ने साथ ही कई शराब की भट्ठियों को भी ध्वस्त किया.
हाल ही में मुजफ्फरपुर में जहरीली शराब से मौत के मामला सामने आया था. यहां चार लोगों की मौत जहरीली शराब पीने की वजह से हो गई थी. इससे पहले भी कई इलाकों में जहरीली शराब से मौतें हुई हैं. जिसके बाद से पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है. इसी के तहत पूर्वी चंपारण जिला पुलिस ने दामोवृति गांव के चंवर में छापामारी की. पुलिस ने यहां लगभग 3,000 लीटर निर्मित देशी शराब और अर्द्धनिर्मित शराब को जब्त कर उसे नष्ट किया.
दरअसल हरसिद्धि थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि गांव के बगल के पानी लगे चंवर के बीच काफी मात्रा में अवैध शराब का निर्माण किया जा रहा है. इस पर ग्रामीण चौकीदार और दफादार ने बताए गए जगह पर छापामारी की. उन्हें आता देख शराब बनाने के धंधे में शामिल कारोबारी भाग खड़े हुए. इसके बाद चौकीदार और दफादारों ने शराब भट्ठियों को ध्वस्त कर दिया. साथ ही वहां से बरामद अर्द्धनिर्मित शराब को भी नष्ट करने का काम किया. इस मामले में हरसिद्धि थाना में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज किया गया है और शराब कारोबारियों को चिन्हित करने में पुलिस जुटी हुई है.
हाल ही में मुजफ्फरपुर में जहरीली शराब से मौत के मामला सामने आया था. यहां चार लोगों की मौत जहरीली शराब पीने की वजह से हो गई है. मामला सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया था. यहां जिन लोगों की मौत हुई है उनके परिजनों का कहना है कि सभी की मौत शराब पीने की वजह से हुई है.
| पूर्वी चंपारण जिले में पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि गांव के बगल के पानी लगे चंवर के बीच काफी मात्रा में अवैध शराब का निर्माण किया जा रहा है. जिसके बाद छापेमारी की गई. बिहार में जहरीली शराब से होती मौतों के पुलिस चौकस हो गयी है. इसी कड़ी में बुधवार को पूर्वी चंपारण में जिला पुलिस ने एक में छापामारी कर लगभग तीन,शून्य लीटरटर निर्मित देशी शराब और अर्द्धनिर्मित शराब को जब्त कर उसे नष्ट किया. पुलिस ने साथ ही कई शराब की भट्ठियों को भी ध्वस्त किया. हाल ही में मुजफ्फरपुर में जहरीली शराब से मौत के मामला सामने आया था. यहां चार लोगों की मौत जहरीली शराब पीने की वजह से हो गई थी. इससे पहले भी कई इलाकों में जहरीली शराब से मौतें हुई हैं. जिसके बाद से पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है. इसी के तहत पूर्वी चंपारण जिला पुलिस ने दामोवृति गांव के चंवर में छापामारी की. पुलिस ने यहां लगभग तीन,शून्य लीटरटर निर्मित देशी शराब और अर्द्धनिर्मित शराब को जब्त कर उसे नष्ट किया. दरअसल हरसिद्धि थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि गांव के बगल के पानी लगे चंवर के बीच काफी मात्रा में अवैध शराब का निर्माण किया जा रहा है. इस पर ग्रामीण चौकीदार और दफादार ने बताए गए जगह पर छापामारी की. उन्हें आता देख शराब बनाने के धंधे में शामिल कारोबारी भाग खड़े हुए. इसके बाद चौकीदार और दफादारों ने शराब भट्ठियों को ध्वस्त कर दिया. साथ ही वहां से बरामद अर्द्धनिर्मित शराब को भी नष्ट करने का काम किया. इस मामले में हरसिद्धि थाना में प्राथमिकी दर्ज किया गया है और शराब कारोबारियों को चिन्हित करने में पुलिस जुटी हुई है. हाल ही में मुजफ्फरपुर में जहरीली शराब से मौत के मामला सामने आया था. यहां चार लोगों की मौत जहरीली शराब पीने की वजह से हो गई है. मामला सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया था. यहां जिन लोगों की मौत हुई है उनके परिजनों का कहना है कि सभी की मौत शराब पीने की वजह से हुई है. |
आगामी 10 वर्ष तक जलनिगम ही वाटर ट्रीटमेंट की देखभाल करेगा। प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार ने निरीक्षण के बाद यह निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। इसके अलावा उन्होंने आश्वस्त किया कि निर्माणाधीन सीवरेज प्लांट के लिए जल्द ही धनराशि अवमुक्त की जाएगी।
प्रमुख सचिव नगर विकास ने नगर की पेयजलापूर्ति व्यवस्थाओं को परखा। प्रमुख सचिव ने सबसे पहले सैलई स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में हर गतिविधि को बारीकी से देखा तथा मौके पर मौजूद तकनीशियनों से जानकारी हासिल की। नहर से आने वाले पानी को भी उन्होंने देखा। इसके बाद प्रमुख सचिव ने नंदपुर में निर्माणाधीन रिजर्व वायर टैंक और सेटलिंग बेसन को भी देखा। इस मौके पर प्रमुख सचिव ने जल निगम के उच्चाधिकारियों से कहा कि वह आगामी 10 वर्ष तक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की देखभाल करेंगे। इस पर होने वाले खर्चें का पूरा हिसाब भी रखेंगे। इसके बाद प्रमुख सचिव सोफीपुर स्थित निर्माणाधीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पहुंचे। नगर आयुक्त विजय कुमार द्वारा बताया गया कि धनाभाव के कारण फिलहाल यहां कार्य बंद हैं। इस पर प्रमुख सचिव अधिकारियों को आश्वस्त किया कि जल्द ही इसके लिए धनराशि अवमुक्त कर दी जाएगी। निरीक्षण के समय उनके साथ नगर मजिस्ट्रेट अजय कुमार तिवारी, एसडीएम सदर राजेश कुमार, जलकल विभाग के महाप्रबंधक सुरेशचंद्र, अपर नगर आयुक्त चंदनसिंह, जलनिगम के अधिशासी अभियंता राकेश कुमार के अलावा कई अधिकारीगण मौजूद थे।
नंदपुर स्थित निर्माणाधीन रिजर्व वायर टैंक एक ऐसी झील है जो आपातकालीन स्थिति में सात दिन तक शहर को पानी मुहैया कराती रहेगी। इसका लाभ गर्मियों के दिनों में उस समय मिलेगा जब नहर से अचानक गंगाजल की आपूर्ति रोक दी जाती है।
| आगामी दस वर्ष तक जलनिगम ही वाटर ट्रीटमेंट की देखभाल करेगा। प्रमुख सचिव नगर विकास मनोज कुमार ने निरीक्षण के बाद यह निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। इसके अलावा उन्होंने आश्वस्त किया कि निर्माणाधीन सीवरेज प्लांट के लिए जल्द ही धनराशि अवमुक्त की जाएगी। प्रमुख सचिव नगर विकास ने नगर की पेयजलापूर्ति व्यवस्थाओं को परखा। प्रमुख सचिव ने सबसे पहले सैलई स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में हर गतिविधि को बारीकी से देखा तथा मौके पर मौजूद तकनीशियनों से जानकारी हासिल की। नहर से आने वाले पानी को भी उन्होंने देखा। इसके बाद प्रमुख सचिव ने नंदपुर में निर्माणाधीन रिजर्व वायर टैंक और सेटलिंग बेसन को भी देखा। इस मौके पर प्रमुख सचिव ने जल निगम के उच्चाधिकारियों से कहा कि वह आगामी दस वर्ष तक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की देखभाल करेंगे। इस पर होने वाले खर्चें का पूरा हिसाब भी रखेंगे। इसके बाद प्रमुख सचिव सोफीपुर स्थित निर्माणाधीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पहुंचे। नगर आयुक्त विजय कुमार द्वारा बताया गया कि धनाभाव के कारण फिलहाल यहां कार्य बंद हैं। इस पर प्रमुख सचिव अधिकारियों को आश्वस्त किया कि जल्द ही इसके लिए धनराशि अवमुक्त कर दी जाएगी। निरीक्षण के समय उनके साथ नगर मजिस्ट्रेट अजय कुमार तिवारी, एसडीएम सदर राजेश कुमार, जलकल विभाग के महाप्रबंधक सुरेशचंद्र, अपर नगर आयुक्त चंदनसिंह, जलनिगम के अधिशासी अभियंता राकेश कुमार के अलावा कई अधिकारीगण मौजूद थे। नंदपुर स्थित निर्माणाधीन रिजर्व वायर टैंक एक ऐसी झील है जो आपातकालीन स्थिति में सात दिन तक शहर को पानी मुहैया कराती रहेगी। इसका लाभ गर्मियों के दिनों में उस समय मिलेगा जब नहर से अचानक गंगाजल की आपूर्ति रोक दी जाती है। |
केंद्रीय बिजली सचिव आलोक कुमार और सभी केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव समीक्षा बैठक में शामिल हुए।
मुख्य सचिव अरूण कुमार मेहता ने जम्मू कश्मीर का प्रतिनिधित्व किया।
बैठक में भल्ला ने कहा कि 2021-22 के बजट में घोषित संशोधित वितरण क्षेत्र योजना क जोर क्षेत्र में सुधारों पर है।
उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति तथा वित्तीय एवं परिचालन रूप से कुशल वितरण क्षेत्र सुनिश्चित करना है।
बैठक में बिजली मंत्रालय ने केंद्र शासित पदेशों में स्मार्ट मीटर के क्षेत्र में हुई प्रगति के बारे में जानकारी दी।
| केंद्रीय बिजली सचिव आलोक कुमार और सभी केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव समीक्षा बैठक में शामिल हुए। मुख्य सचिव अरूण कुमार मेहता ने जम्मू कश्मीर का प्रतिनिधित्व किया। बैठक में भल्ला ने कहा कि दो हज़ार इक्कीस-बाईस के बजट में घोषित संशोधित वितरण क्षेत्र योजना क जोर क्षेत्र में सुधारों पर है। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति तथा वित्तीय एवं परिचालन रूप से कुशल वितरण क्षेत्र सुनिश्चित करना है। बैठक में बिजली मंत्रालय ने केंद्र शासित पदेशों में स्मार्ट मीटर के क्षेत्र में हुई प्रगति के बारे में जानकारी दी। |
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान युवक की मौत मामले में मधेपुरा के चौसा के रहने वाले मनोज राणा ने रविवार को डॉ. सीएम सिन्हा के खिलाफ बरारी थाने में लापरवाही की रिपोर्ट दर्ज कराई है। 26 अक्टूबर को बाइक दुर्घटना में घायल मनोज राणा के पुत्र वनवारी कुमार उर्फ हंसराज राणा (18) की मौत हो गई थी। बरारी पुलिस घटना की जांच कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मधेपुरा जिले के चौसा थाना क्षेत्र के सहौड़ा टोला के मनोज राणा के पुत्र हंसराज 25 अक्टूबर की सुबह बाइक दुर्घटना में घायल हो गया था। चौसा में प्राथमिक इलाज के बाद उसे भागलपुर स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन 26 अक्टूबर की सुबह युवक का अल्ट्रासाउंड किया गया। उसके पेट और मुंह में चोट लगी थी। आवेदन में मनोज राणा ने कहा है कि अल्ट्रासाउंड के बाद डॉक्टर सीएम सिन्हा ने दो यूनिट ब्लड की व्यवस्था करने को कहा।
मैंने कहा कि ठीक है अपने लोगों से बात करते हैं। इसी बीच पत्नी के मना करने के बाद भी डॉक्टर हंसराज को ओटी में ऑपरेशन के लिए लेकर चले गए। डॉक्टर ने भाई को डराकर कहा कि एक घंटे में अगर ऑपरेशन नहीं होगा तो लड़के की मौत हो जाएगी। भाई ने ऑपरेशन पेपर पर दस्तखत कर दिया। बेटा ऑपरेशन के पहले बातचीत कर रहा था। चल फिर भी रहा था। बिना खून चढ़ाए डॉक्टर ने ऑपरेशन कर दिया और पूछने पर कहा कि पेट में तीन जगह छेद हो गया है, लेकिन ऑपरेशन में लापरवाही के कारण 50 मिनट के अंदर उसकी मौत हो गई।
बरारी थानाध्यक्ष ने कहा कि घटना की जांच की जा रही है। जांच के बाद वरीय अधिकारी के निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल में हंसराज की मौत के बाद परिवारवालों ने जमकर हंगामा किया था। परिजन अधीक्षक कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए थे। पीड़ित परिवार दोषी डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। अधीक्षक डॉ. रामचरित्र मंडल ने घटना की निष्पक्ष जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन दोषी के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर डॉक्टर और उसके सहयोगियों के खिलाफ बरारी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
| जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान युवक की मौत मामले में मधेपुरा के चौसा के रहने वाले मनोज राणा ने रविवार को डॉ. सीएम सिन्हा के खिलाफ बरारी थाने में लापरवाही की रिपोर्ट दर्ज कराई है। छब्बीस अक्टूबर को बाइक दुर्घटना में घायल मनोज राणा के पुत्र वनवारी कुमार उर्फ हंसराज राणा की मौत हो गई थी। बरारी पुलिस घटना की जांच कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, मधेपुरा जिले के चौसा थाना क्षेत्र के सहौड़ा टोला के मनोज राणा के पुत्र हंसराज पच्चीस अक्टूबर की सुबह बाइक दुर्घटना में घायल हो गया था। चौसा में प्राथमिक इलाज के बाद उसे भागलपुर स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन छब्बीस अक्टूबर की सुबह युवक का अल्ट्रासाउंड किया गया। उसके पेट और मुंह में चोट लगी थी। आवेदन में मनोज राणा ने कहा है कि अल्ट्रासाउंड के बाद डॉक्टर सीएम सिन्हा ने दो यूनिट ब्लड की व्यवस्था करने को कहा। मैंने कहा कि ठीक है अपने लोगों से बात करते हैं। इसी बीच पत्नी के मना करने के बाद भी डॉक्टर हंसराज को ओटी में ऑपरेशन के लिए लेकर चले गए। डॉक्टर ने भाई को डराकर कहा कि एक घंटे में अगर ऑपरेशन नहीं होगा तो लड़के की मौत हो जाएगी। भाई ने ऑपरेशन पेपर पर दस्तखत कर दिया। बेटा ऑपरेशन के पहले बातचीत कर रहा था। चल फिर भी रहा था। बिना खून चढ़ाए डॉक्टर ने ऑपरेशन कर दिया और पूछने पर कहा कि पेट में तीन जगह छेद हो गया है, लेकिन ऑपरेशन में लापरवाही के कारण पचास मिनट के अंदर उसकी मौत हो गई। बरारी थानाध्यक्ष ने कहा कि घटना की जांच की जा रही है। जांच के बाद वरीय अधिकारी के निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल में हंसराज की मौत के बाद परिवारवालों ने जमकर हंगामा किया था। परिजन अधीक्षक कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए थे। पीड़ित परिवार दोषी डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। अधीक्षक डॉ. रामचरित्र मंडल ने घटना की निष्पक्ष जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन दोषी के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने पर डॉक्टर और उसके सहयोगियों के खिलाफ बरारी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। |
क्या आपने कभी सोचा है लाइव प्रोग्राम के दौरान आपका दांत निकलकर बाहर आ जाए तो आप क्या करेंगे? घबरा जाएंगे या फिर प्रोग्राम छोड़कर वहां से भाग जाएंगे। इनमें से कोई एक ख्याल आपके दिमाग में जरूर आ रहा होगा। लेकिन हाल में यही हादसा लाइव न्यूज बुलेटेन के दौरान एक एंकर के साथ हुआ। एंकर न्यूज पढ़ ही रही थी कि अचानक उसका दांत निकलकर हाथ में आ गया इसके बाद जो हुआ उसे देखकर आपको बिल्कुल भी यकीन नहीं होगा।
सोशल मीडिया पर यूक्रेन की एक न्यूज एंकर का वीडियो वायरल हो रहा है। 7 न्यूज के अनुसार मारिचा पडलको के साथ ये हादसा असल जिंदगी में हुआ। इस वीडियो में आप देखेंगे कि मारिचा लाइव बुलेटेन पढ़ रही थीं। अचानक पढ़ते-पढ़ते उसे एहसास हुआ कि उसका सामने वाला दांत गिरने वाला है। तुरंत एंकर मुंह के आगे हाथ लाई और गिरने वाले दांत को हाथ से पकड़ लिया। इसके बाद भी वो लगातार अपना बुलेटिन पढ़ती रहीं।
मारिचा मीडिया में कई साल से सक्रिय हैं। मारिचा ने ये वीडियो खुद इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। मारिचा ने इंस्टाग्राम पर लिखा- '20 साल से बतौर न्यूज एंकर काम कर रही हूं लेकिन ये अब तक का सबसे अजीब अनुभव रहा। '
| क्या आपने कभी सोचा है लाइव प्रोग्राम के दौरान आपका दांत निकलकर बाहर आ जाए तो आप क्या करेंगे? घबरा जाएंगे या फिर प्रोग्राम छोड़कर वहां से भाग जाएंगे। इनमें से कोई एक ख्याल आपके दिमाग में जरूर आ रहा होगा। लेकिन हाल में यही हादसा लाइव न्यूज बुलेटेन के दौरान एक एंकर के साथ हुआ। एंकर न्यूज पढ़ ही रही थी कि अचानक उसका दांत निकलकर हाथ में आ गया इसके बाद जो हुआ उसे देखकर आपको बिल्कुल भी यकीन नहीं होगा। सोशल मीडिया पर यूक्रेन की एक न्यूज एंकर का वीडियो वायरल हो रहा है। सात न्यूज के अनुसार मारिचा पडलको के साथ ये हादसा असल जिंदगी में हुआ। इस वीडियो में आप देखेंगे कि मारिचा लाइव बुलेटेन पढ़ रही थीं। अचानक पढ़ते-पढ़ते उसे एहसास हुआ कि उसका सामने वाला दांत गिरने वाला है। तुरंत एंकर मुंह के आगे हाथ लाई और गिरने वाले दांत को हाथ से पकड़ लिया। इसके बाद भी वो लगातार अपना बुलेटिन पढ़ती रहीं। मारिचा मीडिया में कई साल से सक्रिय हैं। मारिचा ने ये वीडियो खुद इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। मारिचा ने इंस्टाग्राम पर लिखा- 'बीस साल से बतौर न्यूज एंकर काम कर रही हूं लेकिन ये अब तक का सबसे अजीब अनुभव रहा। ' |
नई दिल्लीः पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी (Shahid Afridi) की बड़ी बेटी अक्सा शादी के बंधन में बंध गई है। अक्सा की शादी नसीर नासिर (Naseer Nasir) नाम के शख्स के साथ शादी हुई। साल के अंत में शाहिद अफरीदी के घर में खुशियों ने दस्तक दी है। एक तरफ उनकी सबसे बड़ी बेटी की शादी हुई। वहीं, दूसरी तरफ उन्हें पीसीबी (PCB) का चीफ सेलेक्टर भी बनाया गया है।
शाहिद अफरीदी की बड़ी बेटी अक्सा की शादी शुक्रवार (30 दिसंबर) को कराची में हुई। इस मौके पर उनके दूसरी बेटी के होने वाले शौहर शाहीन अफरीदी (Shaheen Afridi) भी मौजूद रहे।
शाहिद अफरीदी को 5 बेटियां हैं, जिनमें से अक्सा (Aqsa) सबसे बड़ी हैं। शादी में दोनों परिवार के करीबी लोग ही शामिल हुए थे। इसीबीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में शाहीन अफरीदी अपने होने वाले ससुर के साथ खड़े होकर निकाह की रस्में देख रहे हैं।
शाहिद अफरीदी की दूसरी बेटी का नाम अन्शा है, जिसका निकाह शाहीन अफरीदी से होना है। शाहीन और अन्शा (Ansha) की सगाई पिछले साल हुई थी। दोनों 10 फरवरी 2023 को शादी के बंधन में बंधेंगे। बता दें कि, शाहीन वर्तमान में पाकिस्तान के सबसे बेहतरीन तेज गेंदबाजों में से एक हैं।
| नई दिल्लीः पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी की बड़ी बेटी अक्सा शादी के बंधन में बंध गई है। अक्सा की शादी नसीर नासिर नाम के शख्स के साथ शादी हुई। साल के अंत में शाहिद अफरीदी के घर में खुशियों ने दस्तक दी है। एक तरफ उनकी सबसे बड़ी बेटी की शादी हुई। वहीं, दूसरी तरफ उन्हें पीसीबी का चीफ सेलेक्टर भी बनाया गया है। शाहिद अफरीदी की बड़ी बेटी अक्सा की शादी शुक्रवार को कराची में हुई। इस मौके पर उनके दूसरी बेटी के होने वाले शौहर शाहीन अफरीदी भी मौजूद रहे। शाहिद अफरीदी को पाँच बेटियां हैं, जिनमें से अक्सा सबसे बड़ी हैं। शादी में दोनों परिवार के करीबी लोग ही शामिल हुए थे। इसीबीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में शाहीन अफरीदी अपने होने वाले ससुर के साथ खड़े होकर निकाह की रस्में देख रहे हैं। शाहिद अफरीदी की दूसरी बेटी का नाम अन्शा है, जिसका निकाह शाहीन अफरीदी से होना है। शाहीन और अन्शा की सगाई पिछले साल हुई थी। दोनों दस फरवरी दो हज़ार तेईस को शादी के बंधन में बंधेंगे। बता दें कि, शाहीन वर्तमान में पाकिस्तान के सबसे बेहतरीन तेज गेंदबाजों में से एक हैं। |
RANCHI: रांची यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई शुरू करने को इच्छुक स्टूडेंट्स के लिए खुशखबरी है। यूनिवर्सिटी में जल्द ही एलएलबी की पढ़ाई शुरू होने वाली है। आरयू के मोरहाबादी कैंपस में इसके लिए जगह भी आइडेंटिफाई कर ली गई है। वीसी डॉ रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि एलएलबी की पढ़ाई शुरू करने के लिए मान्यता देने हेतु बार काउंसिल ऑफ इंडिया को प्रस्ताव दिया गया है। जल्द ही बीसीआई इसका इंस्पेक्शन करेगी और मान्यता मिलने के बाद हम पढ़ाई शुरू कर देंगे।
रांची यूनिवर्सिटी की प्रो-वीसी डॉ कामिनी कुमार ने बताया कि एलएलबी की पढ़ाई के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया को प्रस्ताव भेजा गया है। बीसीआई की मान्यता मिलने के बाद यहां कोर्स शुरू होगा। कितनी सीटों पर पढ़ाई शुरू होगी यह बीसीआई से मान्यता मिलने पर तय होगा। इधर, रांची कॉलेज के एलएलएम कोर्स के को-आर्डिनेटर डॉ पंकज वत्सल ने बताया कि अभी स्थानीय स्तर पर केवल छोटानागपुर लॉ कॉलेज में एलएलबी की पढ़ाई होती है।
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में भी पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स की पढ़ाई होती है। पर इसके लिए स्टूडेंट का सेलेक्शन नेशनल लेबल पर होता है और इसकी फीस बहुत ज्यादा है। ऐसे में स्थानीय स्टूडेंट्स को इससे बहुत ज्यादा फायदा नहीं होता था। रांची यूनिवर्सिटी में एलएलबी की पढ़ाई शुरू होने से लोकल स्टूडेंट को बहुत फायदा होगा। अभी उनके पास सिर्फ छोटानागपुर लॉ कॉलेज का ऑप्शन है। इससे लॉ की पढ़ाई के ऑप्शन बढ़ेंगे।
वर्तमान में रांची यूनिवर्सिटी से एफिलिएटेड एकमात्र कॉलेज जहां एलएलबी कोर्स की पढ़ाई होती है वह छोटानागपुर लॉ कॉलेज है। इसकी स्थापना वर्ष क्9भ्ब् में हुई थी। यहां फाइव इयर्स इंटीग्रेटेड बीए एलएलबी कोर्स, तीन वर्षीय एलएलबी कोर्स और दो वर्षीय एलएलएम कोर्स की पढ़ाई होती है। इसकी स्थापना लंदन से वकालत की पढ़ाई करके आये बैरिस्टर एसके सहाय ने लब्ध प्रतिष्ठित समाज सेवियों की मदद से की थी।
गौरतलब हो कि अभी छोटानागपुर लॉ कॉलेज के अलावा रांची कॉलेज में ही लॉ की पढ़ाई होती है। रांची कॉलेज में भी सिर्फ एलएलएम की पढ़ाई होती है। इसके लिए ब्ब् सीटें हैं और यह एक सेल्फ फाइनेंस कोर्स है। इनमें चार सीटें पेड हैं और इसकी फीस प्रति सेमेस्टर ख्0 हजार रुपए है। पूरा कोर्स चार सेमेस्टर में बंटा है।
रांची यूनिवर्सिटी में एलएलबी की पढ़ाई शुरू होगी। कोर्स को मान्यता देने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया को प्रस्ताव दिया गया है। मान्यता मिलते ही यहां एलएलबी की पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी।
| RANCHI: रांची यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई शुरू करने को इच्छुक स्टूडेंट्स के लिए खुशखबरी है। यूनिवर्सिटी में जल्द ही एलएलबी की पढ़ाई शुरू होने वाली है। आरयू के मोरहाबादी कैंपस में इसके लिए जगह भी आइडेंटिफाई कर ली गई है। वीसी डॉ रमेश कुमार पांडेय ने बताया कि एलएलबी की पढ़ाई शुरू करने के लिए मान्यता देने हेतु बार काउंसिल ऑफ इंडिया को प्रस्ताव दिया गया है। जल्द ही बीसीआई इसका इंस्पेक्शन करेगी और मान्यता मिलने के बाद हम पढ़ाई शुरू कर देंगे। रांची यूनिवर्सिटी की प्रो-वीसी डॉ कामिनी कुमार ने बताया कि एलएलबी की पढ़ाई के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया को प्रस्ताव भेजा गया है। बीसीआई की मान्यता मिलने के बाद यहां कोर्स शुरू होगा। कितनी सीटों पर पढ़ाई शुरू होगी यह बीसीआई से मान्यता मिलने पर तय होगा। इधर, रांची कॉलेज के एलएलएम कोर्स के को-आर्डिनेटर डॉ पंकज वत्सल ने बताया कि अभी स्थानीय स्तर पर केवल छोटानागपुर लॉ कॉलेज में एलएलबी की पढ़ाई होती है। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में भी पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स की पढ़ाई होती है। पर इसके लिए स्टूडेंट का सेलेक्शन नेशनल लेबल पर होता है और इसकी फीस बहुत ज्यादा है। ऐसे में स्थानीय स्टूडेंट्स को इससे बहुत ज्यादा फायदा नहीं होता था। रांची यूनिवर्सिटी में एलएलबी की पढ़ाई शुरू होने से लोकल स्टूडेंट को बहुत फायदा होगा। अभी उनके पास सिर्फ छोटानागपुर लॉ कॉलेज का ऑप्शन है। इससे लॉ की पढ़ाई के ऑप्शन बढ़ेंगे। वर्तमान में रांची यूनिवर्सिटी से एफिलिएटेड एकमात्र कॉलेज जहां एलएलबी कोर्स की पढ़ाई होती है वह छोटानागपुर लॉ कॉलेज है। इसकी स्थापना वर्ष क्नौभ्ब् में हुई थी। यहां फाइव इयर्स इंटीग्रेटेड बीए एलएलबी कोर्स, तीन वर्षीय एलएलबी कोर्स और दो वर्षीय एलएलएम कोर्स की पढ़ाई होती है। इसकी स्थापना लंदन से वकालत की पढ़ाई करके आये बैरिस्टर एसके सहाय ने लब्ध प्रतिष्ठित समाज सेवियों की मदद से की थी। गौरतलब हो कि अभी छोटानागपुर लॉ कॉलेज के अलावा रांची कॉलेज में ही लॉ की पढ़ाई होती है। रांची कॉलेज में भी सिर्फ एलएलएम की पढ़ाई होती है। इसके लिए ब्ब् सीटें हैं और यह एक सेल्फ फाइनेंस कोर्स है। इनमें चार सीटें पेड हैं और इसकी फीस प्रति सेमेस्टर ख्शून्य हजार रुपए है। पूरा कोर्स चार सेमेस्टर में बंटा है। रांची यूनिवर्सिटी में एलएलबी की पढ़ाई शुरू होगी। कोर्स को मान्यता देने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया को प्रस्ताव दिया गया है। मान्यता मिलते ही यहां एलएलबी की पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी। |
कई आधुनिक नागरिक जो स्थानांतरित करना चाहते हैंप्रकृति के करीब, निजी घरों में चले जाएं और उनमें से कुछ तैयार किए गए आवास नहीं खरीदना पसंद करते हैं, लेकिन इसे अपने स्वयं के स्वाद के लिए सब कुछ करने के लिए खरोंच से बनाना इसलिए, एक निश्चित अवस्था में, भविष्य के मालिकों के सवाल का सामना करना पड़ता है कि बाहरी सजावट के लिए मुखौटे वाली सामग्री इस या उस मामले में उपयुक्त होती है।
आधुनिक निर्माण बाजार मेंइसी तरह के उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला उनमें से सभी के पास अलग-अलग डिज़ाइन, एप्लीकेशन टेक्नोलॉजी और प्रदर्शन विशेषताओं है। तिथि करने के लिए, मुखौटा सामग्री का सबसे लोकप्रिय प्रकार हैंः
चुनाव का निर्धारण करने के लिए, आपको इन सामग्रियों में से प्रत्येक के गुणों के बारे में अधिक जानने की आवश्यकता है, क्योंकि उन सभी की अपनी योग्यताएं और दोष हैं।
ये अपेक्षाकृत सस्ती हाई-टेकघर के मुखौटा सजावट के लिए सामग्री प्राकृतिक पत्थर में निहित सभी फायदे हैं वे मिट्टी और संगमरमर चिप्स दबाकर उत्पादन किया जाता है। इस प्रकार प्राप्त प्लेटें विशेष भट्टियों में निकाल दी जाती हैं, जो तापमान 1200-1400 डिग्री तक पहुंचता है। यह इस इलाज के लिए धन्यवाद है कि सिरेमिक ग्रेनाइट में उच्च शक्ति है। यह विभाजन करना लगभग असंभव है दीवार पर चढ़ने वाली प्लेटें मज़बूती से यांत्रिक क्षति से रक्षा करती हैं। इस सामग्री का एकमात्र महत्वपूर्ण दोष एक बहुत ही सौन्दर्य उपस्थिति नहीं है।
अक्सर यह सजावट के लिए प्रयोग किया जाता हैकॉर्पोरेट, कार्यालय, आर्थिक और प्रशासनिक भवनों। निजी निर्माण में यह व्यावहारिक रूप से प्रयोग नहीं किया जाता है। उपरोक्त सभी के बावजूद, समान मुखौटा सामग्री एक महाद्वीपीय जलवायु वाले क्षेत्रों में स्थित इमारतों को परिष्करण के लिए उपयुक्त हैं।
यह सबसे आम तरीकों में से एक हैइमारत के बाहरी की सजावट। इस तरह की मुखौटा सामग्री विभिन्न प्रकार की बनावट सतहों को बनाने की अनुमति देती है, जिसे बाद में चित्रित किया जा सकता है। प्लास्टर का मुख्य कार्य दीवारों का स्तर है। हालांकि, यह कोटिंग एक हीटर है और बाहरी कारकों के प्रतिकूल प्रभावों के खिलाफ एक विश्वसनीय सुरक्षा है। सजावटी प्लास्टर का एकमात्र महत्वपूर्ण नुकसान अपने आवेदन की श्रमिकता है। इस प्रक्रिया में बहुत समय लगता है और कुछ कौशल की आवश्यकता होती है।
निर्माण से बाहरी मतभेदों के बावजूदएनालॉग, इस तरह की मुखौटा सामग्री जला नहीं है और गर्मी को पूरी तरह से बरकरार रखती है। वे घर को एक पूर्ण रूप देते हैं, जो इसे अभिजात वर्ग की कुलीनता के हवेली की तरह दिखते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि सामना करने वाली ईंट अधिक नमी को अवशोषित नहीं करती है, नींव के क्षैतिज जलरोधक की उपस्थिति सुनिश्चित करना आवश्यक है। इमारत, जिसका मुखौटा इसी तरह की सामग्री से सजाया गया है, न केवल उपस्थिति में प्रस्तुत किया जा सकता है, बल्कि अंदर भी गर्म होगा।
ईंटों का सामना करना पड़ता हैविशेष भट्टियों में मिट्टी के थर्मल उपचार। यह असीमित जीवनकाल के साथ एक काफी मजबूत सामग्री है। इसके बिछाने के लिए, सामान्य सीमेंट मोर्टार का उपयोग किया जाता है।
यह अपेक्षाकृत नई मुखौटा सजावट सामग्री है। हालांकि, वे पहले से ही घरेलू उपभोक्ताओं के बीच एक निश्चित लोकप्रियता हासिल करने में कामयाब रहे हैं। ऐसे उत्पाद क्लिंकर बेस, प्लास्टिक और फोम से युक्त एक जटिल प्रणाली हैं।
अपेक्षाकृत सस्ती क्लिंकर पैनलों में हैकई महत्वपूर्ण कमियों। इसलिए, वे अक्सर देश के घरों के facades सजाने के लिए उपयोग किया जाता है। इस सामग्री के मुख्य नुकसानों में से एक तथ्य यह है कि समय के साथ एक संघनित रूप बनता है, इमारत की दीवार में प्रवेश करता है और मोल्ड और कवक की उपस्थिति में योगदान देता है।
इस समूह में काफी महंगा हैक्वार्टजाइट, बलुआ पत्थर, टफ, ग्रेनाइट, स्लेट और संगमरमर सहित फेकाडे सामग्री। उन सभी को जटिल रखरखाव की आवश्यकता नहीं है और असीमित जीवनकाल है। इसलिए, चूना पत्थर की कुछ किस्में असर दीवारों के निर्माण के लिए उपयोग की जाती हैं, दूसरों को उनके चेहरे के लिए। एकमात्र चीज वे एक-दूसरे से भिन्न होती हैं। एक प्राकृतिक पत्थर उन कुछ सामग्रियों में से एक माना जाता है जिनमें त्रुटियां नहीं होती हैं।
ग्रेनाइट या संगमरमर के साथ मुखौटा खत्म करनाबल्कि एक श्रमिक और बहुत महंगी प्रक्रिया है। कोटिंग की सौंदर्यशास्त्र और स्थायित्व काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि सामना करने वाले कार्यों को कितनी अच्छी तरह से किया गया था। फिनिशिंग, तकनीकी प्रक्रिया के उल्लंघन में प्रदर्शन किया जाता है, अंत में संरचना का आंशिक विनाश, और कभी-कभी दीवारों का क्षय हो जाता है, exfoliate शुरू होता है। जो लोग एक आर्द्र जलवायु वाले क्षेत्रों में रहते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि पत्थर की चोटी की कुछ किस्में दिखाई दे सकती हैं। हालांकि, यह सामग्री की संरचना को प्रभावित नहीं करता है।
यह सबसे सरल और सबसे सुलभ तरीकों में से एक हैfacades की सजावट। इसकी मदद से साइडिंग के रंगों और बनावट की विविधता के कारण, आप किसी भी, यहां तक कि सबसे साहसी डिजाइन विचारों को भी महसूस कर सकते हैं। वह न केवल आपके घर को सजाएगा, बल्कि बारिश और हवा से भरोसेमंद भी रक्षा करेगा।
आज मांग में सबसे ज्यादा मांगविनाइल साइडिंग माना जाता है। इस तथ्य के बावजूद कि दृष्टिहीन रूप से यह सामग्री मुखौटा cladding के लिए बोर्ड जैसा दिखता है, यह अधिक टिकाऊ और पहनने के प्रतिरोधी है। साइडिंग को साफ करना आसान है, जला नहीं जाता है, सड़ नहीं जाता है और संक्षारण के प्रभाव में बिगड़ता नहीं है। इसके अलावा, यह लगभग गंदगी के लिए चिपक नहीं है।
| कई आधुनिक नागरिक जो स्थानांतरित करना चाहते हैंप्रकृति के करीब, निजी घरों में चले जाएं और उनमें से कुछ तैयार किए गए आवास नहीं खरीदना पसंद करते हैं, लेकिन इसे अपने स्वयं के स्वाद के लिए सब कुछ करने के लिए खरोंच से बनाना इसलिए, एक निश्चित अवस्था में, भविष्य के मालिकों के सवाल का सामना करना पड़ता है कि बाहरी सजावट के लिए मुखौटे वाली सामग्री इस या उस मामले में उपयुक्त होती है। आधुनिक निर्माण बाजार मेंइसी तरह के उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला उनमें से सभी के पास अलग-अलग डिज़ाइन, एप्लीकेशन टेक्नोलॉजी और प्रदर्शन विशेषताओं है। तिथि करने के लिए, मुखौटा सामग्री का सबसे लोकप्रिय प्रकार हैंः चुनाव का निर्धारण करने के लिए, आपको इन सामग्रियों में से प्रत्येक के गुणों के बारे में अधिक जानने की आवश्यकता है, क्योंकि उन सभी की अपनी योग्यताएं और दोष हैं। ये अपेक्षाकृत सस्ती हाई-टेकघर के मुखौटा सजावट के लिए सामग्री प्राकृतिक पत्थर में निहित सभी फायदे हैं वे मिट्टी और संगमरमर चिप्स दबाकर उत्पादन किया जाता है। इस प्रकार प्राप्त प्लेटें विशेष भट्टियों में निकाल दी जाती हैं, जो तापमान एक हज़ार दो सौ-एक हज़ार चार सौ डिग्री तक पहुंचता है। यह इस इलाज के लिए धन्यवाद है कि सिरेमिक ग्रेनाइट में उच्च शक्ति है। यह विभाजन करना लगभग असंभव है दीवार पर चढ़ने वाली प्लेटें मज़बूती से यांत्रिक क्षति से रक्षा करती हैं। इस सामग्री का एकमात्र महत्वपूर्ण दोष एक बहुत ही सौन्दर्य उपस्थिति नहीं है। अक्सर यह सजावट के लिए प्रयोग किया जाता हैकॉर्पोरेट, कार्यालय, आर्थिक और प्रशासनिक भवनों। निजी निर्माण में यह व्यावहारिक रूप से प्रयोग नहीं किया जाता है। उपरोक्त सभी के बावजूद, समान मुखौटा सामग्री एक महाद्वीपीय जलवायु वाले क्षेत्रों में स्थित इमारतों को परिष्करण के लिए उपयुक्त हैं। यह सबसे आम तरीकों में से एक हैइमारत के बाहरी की सजावट। इस तरह की मुखौटा सामग्री विभिन्न प्रकार की बनावट सतहों को बनाने की अनुमति देती है, जिसे बाद में चित्रित किया जा सकता है। प्लास्टर का मुख्य कार्य दीवारों का स्तर है। हालांकि, यह कोटिंग एक हीटर है और बाहरी कारकों के प्रतिकूल प्रभावों के खिलाफ एक विश्वसनीय सुरक्षा है। सजावटी प्लास्टर का एकमात्र महत्वपूर्ण नुकसान अपने आवेदन की श्रमिकता है। इस प्रक्रिया में बहुत समय लगता है और कुछ कौशल की आवश्यकता होती है। निर्माण से बाहरी मतभेदों के बावजूदएनालॉग, इस तरह की मुखौटा सामग्री जला नहीं है और गर्मी को पूरी तरह से बरकरार रखती है। वे घर को एक पूर्ण रूप देते हैं, जो इसे अभिजात वर्ग की कुलीनता के हवेली की तरह दिखते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि सामना करने वाली ईंट अधिक नमी को अवशोषित नहीं करती है, नींव के क्षैतिज जलरोधक की उपस्थिति सुनिश्चित करना आवश्यक है। इमारत, जिसका मुखौटा इसी तरह की सामग्री से सजाया गया है, न केवल उपस्थिति में प्रस्तुत किया जा सकता है, बल्कि अंदर भी गर्म होगा। ईंटों का सामना करना पड़ता हैविशेष भट्टियों में मिट्टी के थर्मल उपचार। यह असीमित जीवनकाल के साथ एक काफी मजबूत सामग्री है। इसके बिछाने के लिए, सामान्य सीमेंट मोर्टार का उपयोग किया जाता है। यह अपेक्षाकृत नई मुखौटा सजावट सामग्री है। हालांकि, वे पहले से ही घरेलू उपभोक्ताओं के बीच एक निश्चित लोकप्रियता हासिल करने में कामयाब रहे हैं। ऐसे उत्पाद क्लिंकर बेस, प्लास्टिक और फोम से युक्त एक जटिल प्रणाली हैं। अपेक्षाकृत सस्ती क्लिंकर पैनलों में हैकई महत्वपूर्ण कमियों। इसलिए, वे अक्सर देश के घरों के facades सजाने के लिए उपयोग किया जाता है। इस सामग्री के मुख्य नुकसानों में से एक तथ्य यह है कि समय के साथ एक संघनित रूप बनता है, इमारत की दीवार में प्रवेश करता है और मोल्ड और कवक की उपस्थिति में योगदान देता है। इस समूह में काफी महंगा हैक्वार्टजाइट, बलुआ पत्थर, टफ, ग्रेनाइट, स्लेट और संगमरमर सहित फेकाडे सामग्री। उन सभी को जटिल रखरखाव की आवश्यकता नहीं है और असीमित जीवनकाल है। इसलिए, चूना पत्थर की कुछ किस्में असर दीवारों के निर्माण के लिए उपयोग की जाती हैं, दूसरों को उनके चेहरे के लिए। एकमात्र चीज वे एक-दूसरे से भिन्न होती हैं। एक प्राकृतिक पत्थर उन कुछ सामग्रियों में से एक माना जाता है जिनमें त्रुटियां नहीं होती हैं। ग्रेनाइट या संगमरमर के साथ मुखौटा खत्म करनाबल्कि एक श्रमिक और बहुत महंगी प्रक्रिया है। कोटिंग की सौंदर्यशास्त्र और स्थायित्व काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि सामना करने वाले कार्यों को कितनी अच्छी तरह से किया गया था। फिनिशिंग, तकनीकी प्रक्रिया के उल्लंघन में प्रदर्शन किया जाता है, अंत में संरचना का आंशिक विनाश, और कभी-कभी दीवारों का क्षय हो जाता है, exfoliate शुरू होता है। जो लोग एक आर्द्र जलवायु वाले क्षेत्रों में रहते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि पत्थर की चोटी की कुछ किस्में दिखाई दे सकती हैं। हालांकि, यह सामग्री की संरचना को प्रभावित नहीं करता है। यह सबसे सरल और सबसे सुलभ तरीकों में से एक हैfacades की सजावट। इसकी मदद से साइडिंग के रंगों और बनावट की विविधता के कारण, आप किसी भी, यहां तक कि सबसे साहसी डिजाइन विचारों को भी महसूस कर सकते हैं। वह न केवल आपके घर को सजाएगा, बल्कि बारिश और हवा से भरोसेमंद भी रक्षा करेगा। आज मांग में सबसे ज्यादा मांगविनाइल साइडिंग माना जाता है। इस तथ्य के बावजूद कि दृष्टिहीन रूप से यह सामग्री मुखौटा cladding के लिए बोर्ड जैसा दिखता है, यह अधिक टिकाऊ और पहनने के प्रतिरोधी है। साइडिंग को साफ करना आसान है, जला नहीं जाता है, सड़ नहीं जाता है और संक्षारण के प्रभाव में बिगड़ता नहीं है। इसके अलावा, यह लगभग गंदगी के लिए चिपक नहीं है। |
राजस्थान रॉयल्स ने आईपीएल के पहले सीजन का खिताब जीता था. शेन वॉर्न की अगुवाई में इस टीम ने आईपीएल के पहले सीजन का खिताब जीतकर सबको चौंका दिया था. इसकी सबसे बड़ी वजह ये थी कि उस टीम में ज्यादा स्टार खिलाड़ी नहीं थे. वहीं अब टीम में एक से एक धुरंधर खिलाड़ी मौजूद हैं.
हालाँकि इस टीम की गेंदबाजी सबसे बड़ी कमजोरी है. इसकी वजह से इस बार भी टीम प्ले-ऑफ़ में शायद नहीं जाएगी. स्टीव स्मिथ, बेन स्टोक्स और जोस बटलर जैसे खिलाड़ी टीम में है लेकिन गेंदबाजी में कोई दम नहीं है. कृष्णप्पा गौतम जैसा ऑल राउंडर भी टीम से रिलीज किया जा चुका है. ऐसे में आईपीएल 2020 में इस टीम की प्ले-ऑफ़ की संभावनाएं काफी कम हो जाती है.
| राजस्थान रॉयल्स ने आईपीएल के पहले सीजन का खिताब जीता था. शेन वॉर्न की अगुवाई में इस टीम ने आईपीएल के पहले सीजन का खिताब जीतकर सबको चौंका दिया था. इसकी सबसे बड़ी वजह ये थी कि उस टीम में ज्यादा स्टार खिलाड़ी नहीं थे. वहीं अब टीम में एक से एक धुरंधर खिलाड़ी मौजूद हैं. हालाँकि इस टीम की गेंदबाजी सबसे बड़ी कमजोरी है. इसकी वजह से इस बार भी टीम प्ले-ऑफ़ में शायद नहीं जाएगी. स्टीव स्मिथ, बेन स्टोक्स और जोस बटलर जैसे खिलाड़ी टीम में है लेकिन गेंदबाजी में कोई दम नहीं है. कृष्णप्पा गौतम जैसा ऑल राउंडर भी टीम से रिलीज किया जा चुका है. ऐसे में आईपीएल दो हज़ार बीस में इस टीम की प्ले-ऑफ़ की संभावनाएं काफी कम हो जाती है. |
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द स्वतंत्रता के बाद बताया गया सबसे बड़ा झूठ है. इस शब्द ने देश को क्षति पहुंचाई है. सीएम योगी ने कहा कि इतिहास से छेड़छाड़ भी किसी राजद्रोह से कम अपराध नहीं है. योगी ने यह भी दावा किया कि यूरोप में इस्तेमाल किया गया 'पाकी' शब्द सबसे बड़ा अपमान था.
'कोई व्यवस्था धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकती'
रायपुर में एक अखबार द्वारा आयोजित एक समारोह में पहुंचे योगी ने सांप्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता पर एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, "मेरा मानना है कि आजादी के बाद सबसे बड़ा झूठ धर्मनिरपेक्ष शब्द है. नागरिकों के साथ, भारत के लोगों के साथ. . . उन लोगों को माफी चाहिए, जिन्होंने इस शब्द को जन्म दिया और जो ये शब्द इस्तेमाल करते हैं. कोई व्यवस्था धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकती, राजनीतिक व्यवस्था पंथनिरपेक्ष हो सकती है. "
'पंथनिरपेक्ष हूं, धर्मनिरपेक्ष नहीं'
आदित्यनाथ ने कहा कि अगर कोई हमसे कहेगा कि शासन उस उपासना विधि से चलना चाहिए, तो नहीं चल सकती. यूपी के अंदर देखुंगा तो 22 करोड़ लोगों को देखना होगा. मैं इन लोगों की सुरक्षा के प्रति, उनकी भावनाओं के प्रति जवाबदेह हूं. लेकिन एक समुदाय का दुष्टिकरण करने के लिए नहीं बैठा हूं. पंथनिरपेक्ष हूं लेकिन धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकता.
'पाकी शब्द अपमानजनक'
बातचीत के दौरान भारत के पश्चिमी संदर्भ में आदित्यनाथ ने दावा किया कि "पाकिस्तान" और "पाकी" शब्द का इस्तेमाल यूरोप में अपमानजनक था. उन्होंमे कहा, यूरोप में सबसे बड़ी अपमानजनक शब्द है पाकिस्तान शब्द ही गाली का पर्याय हो गया है.
'इतिहास से छेड़छाड़ किसी राजद्रोह से कम नहीं'
बातचीत के दौरान इतिहास पर योगी ने कहा कि, इतिहास को तोड़-मरोड़ के प्रस्तुत करना किसी राष्ट्रद्रोह से कम नहीं है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने रायपुर में इनडोर स्टेडियम में आयोजित एक सम्मानित समारोह में भी भाग लिया. जहां उन्होंने देश के कुछ हिस्सों में गलतियां करने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा.
'कांग्रेस ने देश की मूलभावनाओं के साथ खिलवाड़ किया'
योगी ने कहा, कांग्रेस ने इस देश की मूलभावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है. अपने स्वार्थ के लिए देश को जाति के नाम पर, भाषा के नाम पर और क्षेत्र के नाम पर विभाजित किया. देश में कहीं आतंकवाद, कहीं नक्सलवाद, कहीं अलगाववाद को जन्म दिया. उसकी कीमत ये देश आज भी चुका रहा है. हमारे लिए संपूर्ण भारत एक परिवार है.
'प्रधानमंत्री लोगों की पीड़ा को समझते हैं'
नरेंद्र मोदी सरकार की तुलना 'रामराज्य' करने पर योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी लोगों की पीड़ा को समझते हैं, कांग्रेस नहीं समझती.
आदित्यनाथ ने छत्तीसगढ़ भाजपा कार्यकर्ताओं को चुनाव की तैयारी शुरू करने के लिए कहा. यहां भाजपा ने पूरी शक्ति से 'जय श्री राम' के नारे लगाए और मंत्रियों ने आदित्यनाथ के पैर छूकर उन्हें माला पहनाई.
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| उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि 'धर्मनिरपेक्ष' शब्द स्वतंत्रता के बाद बताया गया सबसे बड़ा झूठ है. इस शब्द ने देश को क्षति पहुंचाई है. सीएम योगी ने कहा कि इतिहास से छेड़छाड़ भी किसी राजद्रोह से कम अपराध नहीं है. योगी ने यह भी दावा किया कि यूरोप में इस्तेमाल किया गया 'पाकी' शब्द सबसे बड़ा अपमान था. 'कोई व्यवस्था धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकती' रायपुर में एक अखबार द्वारा आयोजित एक समारोह में पहुंचे योगी ने सांप्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता पर एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, "मेरा मानना है कि आजादी के बाद सबसे बड़ा झूठ धर्मनिरपेक्ष शब्द है. नागरिकों के साथ, भारत के लोगों के साथ. . . उन लोगों को माफी चाहिए, जिन्होंने इस शब्द को जन्म दिया और जो ये शब्द इस्तेमाल करते हैं. कोई व्यवस्था धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकती, राजनीतिक व्यवस्था पंथनिरपेक्ष हो सकती है. " 'पंथनिरपेक्ष हूं, धर्मनिरपेक्ष नहीं' आदित्यनाथ ने कहा कि अगर कोई हमसे कहेगा कि शासन उस उपासना विधि से चलना चाहिए, तो नहीं चल सकती. यूपी के अंदर देखुंगा तो बाईस करोड़ लोगों को देखना होगा. मैं इन लोगों की सुरक्षा के प्रति, उनकी भावनाओं के प्रति जवाबदेह हूं. लेकिन एक समुदाय का दुष्टिकरण करने के लिए नहीं बैठा हूं. पंथनिरपेक्ष हूं लेकिन धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकता. 'पाकी शब्द अपमानजनक' बातचीत के दौरान भारत के पश्चिमी संदर्भ में आदित्यनाथ ने दावा किया कि "पाकिस्तान" और "पाकी" शब्द का इस्तेमाल यूरोप में अपमानजनक था. उन्होंमे कहा, यूरोप में सबसे बड़ी अपमानजनक शब्द है पाकिस्तान शब्द ही गाली का पर्याय हो गया है. 'इतिहास से छेड़छाड़ किसी राजद्रोह से कम नहीं' बातचीत के दौरान इतिहास पर योगी ने कहा कि, इतिहास को तोड़-मरोड़ के प्रस्तुत करना किसी राष्ट्रद्रोह से कम नहीं है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने रायपुर में इनडोर स्टेडियम में आयोजित एक सम्मानित समारोह में भी भाग लिया. जहां उन्होंने देश के कुछ हिस्सों में गलतियां करने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा. 'कांग्रेस ने देश की मूलभावनाओं के साथ खिलवाड़ किया' योगी ने कहा, कांग्रेस ने इस देश की मूलभावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है. अपने स्वार्थ के लिए देश को जाति के नाम पर, भाषा के नाम पर और क्षेत्र के नाम पर विभाजित किया. देश में कहीं आतंकवाद, कहीं नक्सलवाद, कहीं अलगाववाद को जन्म दिया. उसकी कीमत ये देश आज भी चुका रहा है. हमारे लिए संपूर्ण भारत एक परिवार है. 'प्रधानमंत्री लोगों की पीड़ा को समझते हैं' नरेंद्र मोदी सरकार की तुलना 'रामराज्य' करने पर योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी लोगों की पीड़ा को समझते हैं, कांग्रेस नहीं समझती. आदित्यनाथ ने छत्तीसगढ़ भाजपा कार्यकर्ताओं को चुनाव की तैयारी शुरू करने के लिए कहा. यहां भाजपा ने पूरी शक्ति से 'जय श्री राम' के नारे लगाए और मंत्रियों ने आदित्यनाथ के पैर छूकर उन्हें माला पहनाई. . |
बिलासपुर - जनमंच कार्यक्रम से लोक शिकायतों के निवारण में सहायता मिलेगी। जनमंच कार्यक्रम से न केवल आमजन के हित के लिए आरंभ जन कल्याणकारी योजनाओं व कार्यक्रमों का समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा अपितु इसके माध्यम से वांछित सुखद परिणाम भी मिल रहे है। घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के विधायक राजेंद्र गर्ग ने हटवाड़ पंचायत में आयोजित होने वाले तीसरे जनमंच कार्यक्रम के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सूचना एवं जन संपर्क विभाग के प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के उपरांत जानकारी देते हुए कहा कि जनमंच कार्यक्रम जनता की समस्याओं के समाधान में पारदर्शी एवं साथ कदम है। उन्होंने बताया कि पांच अगस्त को दस बजे घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र की हटवाड़ पंचायत में होने वाले जनमंच कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज करेंगे। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि जनमंच प्रचार वाहन घुमारवीं विधानसभा क्षे़त्र की विभिन्न पंचायतों में पांच अगस्त को आयोजित किए जाने वाले जनमंच कार्यक्रम के संदर्भ में लोगों को जागरूक करेगा। उन्होंने कहा कि जनमंच प्रचार वाहन मुख्यतः आठ पंचायतों जिनमें कोट, हटवाड़, बम्म, पंतेहड़ा, मरहाणा, घंडालवीं, हंबोट, सलाओं इत्यादि गांवों के लोगों को जागरूक करेगा तथा पांच अगस्त को हटवाड़ पंचायत की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हटवाड़ में आयोजित होने वाले जनमंच कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग अपनी समस्याओं व शिकायतों के समाधान के लिए कार्यक्रम स्थल पर पंहुचे। उन्होंने जिला के सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जनमंच कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना सुनिश्चित बनाएं ताकि लोगों की समस्याओं का निपटारा मौके पर ही सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने बताया कि जनमंच कार्यक्रम में लोगों को प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ उठाने के लिए विभिन्न विभागों द्वारा अपने स्टाल स्थापित किए जाएंगे तथा लोगों को योजनाओं का लाभ उठाने के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया को भी मौके पर पूरा करेंगे। उन्होंने बताया कि इस दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और आयुर्वेदिक विभाग द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरोंं का भी आयोजन किया जाएगा। जिसमें लोगों के स्वास्थ्य जांच के अतिरिक्त निःशुल्क दवाइयां भी उपलब्ध करवाई जाएंगी। इस अवसर पर घुमारवीं क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहें।
| बिलासपुर - जनमंच कार्यक्रम से लोक शिकायतों के निवारण में सहायता मिलेगी। जनमंच कार्यक्रम से न केवल आमजन के हित के लिए आरंभ जन कल्याणकारी योजनाओं व कार्यक्रमों का समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित होगा अपितु इसके माध्यम से वांछित सुखद परिणाम भी मिल रहे है। घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र के विधायक राजेंद्र गर्ग ने हटवाड़ पंचायत में आयोजित होने वाले तीसरे जनमंच कार्यक्रम के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सूचना एवं जन संपर्क विभाग के प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने के उपरांत जानकारी देते हुए कहा कि जनमंच कार्यक्रम जनता की समस्याओं के समाधान में पारदर्शी एवं साथ कदम है। उन्होंने बताया कि पांच अगस्त को दस बजे घुमारवीं विधानसभा क्षेत्र की हटवाड़ पंचायत में होने वाले जनमंच कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज करेंगे। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि जनमंच प्रचार वाहन घुमारवीं विधानसभा क्षे़त्र की विभिन्न पंचायतों में पांच अगस्त को आयोजित किए जाने वाले जनमंच कार्यक्रम के संदर्भ में लोगों को जागरूक करेगा। उन्होंने कहा कि जनमंच प्रचार वाहन मुख्यतः आठ पंचायतों जिनमें कोट, हटवाड़, बम्म, पंतेहड़ा, मरहाणा, घंडालवीं, हंबोट, सलाओं इत्यादि गांवों के लोगों को जागरूक करेगा तथा पांच अगस्त को हटवाड़ पंचायत की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हटवाड़ में आयोजित होने वाले जनमंच कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी उपलब्ध करवाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग अपनी समस्याओं व शिकायतों के समाधान के लिए कार्यक्रम स्थल पर पंहुचे। उन्होंने जिला के सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जनमंच कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना सुनिश्चित बनाएं ताकि लोगों की समस्याओं का निपटारा मौके पर ही सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने बताया कि जनमंच कार्यक्रम में लोगों को प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ उठाने के लिए विभिन्न विभागों द्वारा अपने स्टाल स्थापित किए जाएंगे तथा लोगों को योजनाओं का लाभ उठाने के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया को भी मौके पर पूरा करेंगे। उन्होंने बताया कि इस दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और आयुर्वेदिक विभाग द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरोंं का भी आयोजन किया जाएगा। जिसमें लोगों के स्वास्थ्य जांच के अतिरिक्त निःशुल्क दवाइयां भी उपलब्ध करवाई जाएंगी। इस अवसर पर घुमारवीं क्षेत्र के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहें। |
एएनएम न्यूज़, ब्यूरो : अगर आप सरकारी क्षेत्र में नौकरी की तलाश कर रहे हैं, तो यहां कई छोटी से लेकर बड़ी भर्तियों की जानकारी के लिए हमेसा नजर रखिए एएनएम न्यूज के पेज पर। एएनएम न्यूज आपको हर वक्त छोटी से लेकर बड़ी भर्तियों की जानकारी देंगे। सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां हालही में हजारों नौकरियों की पेशकश करने जा रही है।
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने राजस्व उप निरीक्षक (पटवारी / लेखपाल) परीक्षा -2022 के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिया है। उम्मीदवार अपने यूकेपीएससी प्रवेश पत्र वेबसाइट ukpsc. net. in पर डाउनलोड कर सकते हैं। इधर, नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन काॅर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से सीनियर प्रोजेक्ट एग्जीक्यूटिव एवं अन्य पदों पर भर्ती शुरू की गई है और आवेदन की अंतिम तिथि 15 फरवरी है। आवेदन के इच्छुक उम्मीदवार nbccindia. com पर जाकर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
UPPSC की ओर से उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा सिविल जज (जूनियर डिवीजन) भर्ती 2022 की परीक्षा 12 फरवरी, 2023 को दो पारियों में आयोजित की जानी है। इधर,ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन के एडमिट कार्ड जारी कर दिए गए हैं। परीक्षा के प्रवेश-पत्र अपनी आधिकारिक परीक्षा वेबसाइट allindiabarexamination. com पर जारी की हैं।
| एएनएम न्यूज़, ब्यूरो : अगर आप सरकारी क्षेत्र में नौकरी की तलाश कर रहे हैं, तो यहां कई छोटी से लेकर बड़ी भर्तियों की जानकारी के लिए हमेसा नजर रखिए एएनएम न्यूज के पेज पर। एएनएम न्यूज आपको हर वक्त छोटी से लेकर बड़ी भर्तियों की जानकारी देंगे। सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां हालही में हजारों नौकरियों की पेशकश करने जा रही है। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने राजस्व उप निरीक्षक परीक्षा -दो हज़ार बाईस के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिया है। उम्मीदवार अपने यूकेपीएससी प्रवेश पत्र वेबसाइट ukpsc. net. in पर डाउनलोड कर सकते हैं। इधर, नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन काॅर्पोरेशन लिमिटेड की ओर से सीनियर प्रोजेक्ट एग्जीक्यूटिव एवं अन्य पदों पर भर्ती शुरू की गई है और आवेदन की अंतिम तिथि पंद्रह फरवरी है। आवेदन के इच्छुक उम्मीदवार nbccindia. com पर जाकर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। UPPSC की ओर से उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा सिविल जज भर्ती दो हज़ार बाईस की परीक्षा बारह फरवरी, दो हज़ार तेईस को दो पारियों में आयोजित की जानी है। इधर,ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन के एडमिट कार्ड जारी कर दिए गए हैं। परीक्षा के प्रवेश-पत्र अपनी आधिकारिक परीक्षा वेबसाइट allindiabarexamination. com पर जारी की हैं। |
प्रतापगढ़।प्रयागराज और वाराणसी की तर्ज पर हाईटेक लाइटो से रोशन होगा प्रतापगढ़ शहर।विक्टोरिया लाइट से जगमगाएगा अब शहर।लाखो की लगत से शहर में नगर पालिका लगवाएगा विक्टोरिया लाइट।अम्बेडकर चौराहे से चौक,स्टेशन रोड पर भी लगेगा विक्टोरिया लाइट।शहर के सभी पोल पर अब लगेगा एलईडी लाइट।सभी प्रमुख चौराहो पर आधुनिक लाइट लगा कर चौराहो की होगी साजसज्जा।करोडो की लगत से शहर को मार्डन बनाने की तैयारी शुरू।शासन ने शहर को आधुनिक बनाने की योजनाओ के प्रस्ताव को दी मंजूरी।नगर पालिका अध्यक्ष प्रेमलता सिंह की पैरवी पर जल्द ही महानगर वाली लाइट से जगमग और हाईटेक होगा शहर।
| प्रतापगढ़।प्रयागराज और वाराणसी की तर्ज पर हाईटेक लाइटो से रोशन होगा प्रतापगढ़ शहर।विक्टोरिया लाइट से जगमगाएगा अब शहर।लाखो की लगत से शहर में नगर पालिका लगवाएगा विक्टोरिया लाइट।अम्बेडकर चौराहे से चौक,स्टेशन रोड पर भी लगेगा विक्टोरिया लाइट।शहर के सभी पोल पर अब लगेगा एलईडी लाइट।सभी प्रमुख चौराहो पर आधुनिक लाइट लगा कर चौराहो की होगी साजसज्जा।करोडो की लगत से शहर को मार्डन बनाने की तैयारी शुरू।शासन ने शहर को आधुनिक बनाने की योजनाओ के प्रस्ताव को दी मंजूरी।नगर पालिका अध्यक्ष प्रेमलता सिंह की पैरवी पर जल्द ही महानगर वाली लाइट से जगमग और हाईटेक होगा शहर। |
उत्तराखंड । । यूपी और उत्तराखंड के पूर्व सीएम स्व. ND तिवारी के बेटे रोहित शेखर की हत्या के मामले में 9 दिन बाद दिल्ली पुलिस ने शेखर की पत्नी अपूर्वा को अरेस्ट कर लिया है। क्राइम ब्रांच का कहना है कि रोहित के साथ शादीशुदा जिंदगी से अपूर्वा शुक्ला तिवारी खुश नहीं थी।
यही कारण है कि अपूर्वा ने रोहित को अकेले गला व मुंह दबाकर मारा। क्राइम ब्रांच का ये भी कहना है कि इस हत्या में कोई और अन्य शामिल नहीं था। इससे पहले पुलिस की शक की सुई 3 लोगों रोहित की पत्नी, उसके ड्राइवर और नौकर पर थी। पुलिस ने अपूर्वा को अरेस्ट करने से पहले उससे तीन दिन की पूछताछ की।
सूत्रों की मानें तो पुलिस को दिए बयान में पत्नी ने दावा किया था की रात वो शेखर के साथ अंतरंग थी और हो सकता है कि मुंह और गला दबा गया हो। रोहित शेखर हत्याकांड में पुलिस के सामने रोहित शेखर की पत्नी ने जो दावा किया वो चौकानें वाला था। सूत्रों के मानें तो अपूर्वा ने बताया कि 15-16 अप्रैल की रात वो रोहित के कमरे में गई थी। वो रोहित के साथ अंतरंग थी। हो सकता है कि रोहित का गला और मुंह दब गया हो जिससे उसकी मौत हो गई हो।
बता दें, रोहित शेखर की मौत की वजह पहले हार्ट अटैक या ब्रेन हेमरेज बताई गई थी। लेकिन पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि शेखर की मौत इन वजहों से नहीं बल्कि उनकी गला दबाकर हत्या की गई है। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
| उत्तराखंड । । यूपी और उत्तराखंड के पूर्व सीएम स्व. ND तिवारी के बेटे रोहित शेखर की हत्या के मामले में नौ दिन बाद दिल्ली पुलिस ने शेखर की पत्नी अपूर्वा को अरेस्ट कर लिया है। क्राइम ब्रांच का कहना है कि रोहित के साथ शादीशुदा जिंदगी से अपूर्वा शुक्ला तिवारी खुश नहीं थी। यही कारण है कि अपूर्वा ने रोहित को अकेले गला व मुंह दबाकर मारा। क्राइम ब्रांच का ये भी कहना है कि इस हत्या में कोई और अन्य शामिल नहीं था। इससे पहले पुलिस की शक की सुई तीन लोगों रोहित की पत्नी, उसके ड्राइवर और नौकर पर थी। पुलिस ने अपूर्वा को अरेस्ट करने से पहले उससे तीन दिन की पूछताछ की। सूत्रों की मानें तो पुलिस को दिए बयान में पत्नी ने दावा किया था की रात वो शेखर के साथ अंतरंग थी और हो सकता है कि मुंह और गला दबा गया हो। रोहित शेखर हत्याकांड में पुलिस के सामने रोहित शेखर की पत्नी ने जो दावा किया वो चौकानें वाला था। सूत्रों के मानें तो अपूर्वा ने बताया कि पंद्रह-सोलह अप्रैल की रात वो रोहित के कमरे में गई थी। वो रोहित के साथ अंतरंग थी। हो सकता है कि रोहित का गला और मुंह दब गया हो जिससे उसकी मौत हो गई हो। बता दें, रोहित शेखर की मौत की वजह पहले हार्ट अटैक या ब्रेन हेमरेज बताई गई थी। लेकिन पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि शेखर की मौत इन वजहों से नहीं बल्कि उनकी गला दबाकर हत्या की गई है। इसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। |
अंकुर तिवारी, धमतरी। कोरोना संक्रमण काल में शिक्षक ड्यूटी कर रहे हैं. पढ़ाई बंद होने पर सूखा राशन वितरण के साथ-साथ जागरूकता अभियान में भी ड्यूटी लगाई गई है. इसी बीच कुरुद क्षेत्र में शिक्षक के साथ सरपंच-उपसरपंच की दबंगई सामने आई है. दोनों ने शिक्षक के साथ जमकर मारपीट कर दी. शिक्षक का सिर फोड़ दिया. जनप्रतिनिधियों के इस दुर्व्यवहार से शिक्षा जगत में रोष व्याप्त है.
भोथली स्कूल में पदस्थ शिक्षक अभिषेक ने कुरुद थाने में सरपंच-उपसरपंच की दबंगई की रिपोर्ट दर्ज कराई है. पुलिस को बताया 21 मई की सुबह 10 बजे मैं प्राथमिक शाला भोथली राशन पैंकिग तथा शासकीय कार्य के लिए स्कूल गया था. सहायक शिक्षक डूमनलाल बंजारे एवं सफाई कर्मचारी कृष्णा यादव स्कूल में मध्यान्ह भोजन का चावल पैंकिग कर रहे थे. इसी बीच करीब 12 बजे ग्राम भोथली सरपंच धर्मेन्द्र नेताम तथा उपसरपंच क्रांति चन्द्राकर, राकेश दीवान एवं अन्य कुछ लोग कार्यालय में आकर धमकी दी. कहा कि आज तुम्हें जान से मार डालेंगे कहते हुए मां बहन की अश्लील गाली गलौच की. इसके बाद तीनों मारपीट करने लगे.
ऑफिस में रखे कम्यूटर, मॉनिटर, सीपीयू, टेबल कांच को तोडफोड़ कर शासकीय सम्पत्ति को भी क्षति पहुंचाएं है. जिससे करीब 30 हजार रुपए की शासकीय सम्पत्ति की क्षति हुई है तथा शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाये है. मारपीट से मेरा सिर, बांए कंधा, पैर मे चोट आकर सिर के बायी ओर से खून निकल रहा है. मेरा सहकर्मी सहायक शिक्षक डूमनलाल बंजारे, नहुश कुमार कुर्रे एवं सफाई कर्मचारी कृष्णा यादव लोग घटना को देखे सुने एवं बीच बचाव किए है.
थाना कुरुद में अभिषेक सिंह की रिपोर्ट पर सरपंच धर्मेंद्र नेताम उप सरपंच क्रांति चंद्राकर और राकेश दीवान के खिलाफ धारा 294 323 34 353 427 506 के तहत अपराध दर्ज कर लिया है. फिलहाल पुलिस द्वारा आगे की कार्यवाही की जा रही है.
| अंकुर तिवारी, धमतरी। कोरोना संक्रमण काल में शिक्षक ड्यूटी कर रहे हैं. पढ़ाई बंद होने पर सूखा राशन वितरण के साथ-साथ जागरूकता अभियान में भी ड्यूटी लगाई गई है. इसी बीच कुरुद क्षेत्र में शिक्षक के साथ सरपंच-उपसरपंच की दबंगई सामने आई है. दोनों ने शिक्षक के साथ जमकर मारपीट कर दी. शिक्षक का सिर फोड़ दिया. जनप्रतिनिधियों के इस दुर्व्यवहार से शिक्षा जगत में रोष व्याप्त है. भोथली स्कूल में पदस्थ शिक्षक अभिषेक ने कुरुद थाने में सरपंच-उपसरपंच की दबंगई की रिपोर्ट दर्ज कराई है. पुलिस को बताया इक्कीस मई की सुबह दस बजे मैं प्राथमिक शाला भोथली राशन पैंकिग तथा शासकीय कार्य के लिए स्कूल गया था. सहायक शिक्षक डूमनलाल बंजारे एवं सफाई कर्मचारी कृष्णा यादव स्कूल में मध्यान्ह भोजन का चावल पैंकिग कर रहे थे. इसी बीच करीब बारह बजे ग्राम भोथली सरपंच धर्मेन्द्र नेताम तथा उपसरपंच क्रांति चन्द्राकर, राकेश दीवान एवं अन्य कुछ लोग कार्यालय में आकर धमकी दी. कहा कि आज तुम्हें जान से मार डालेंगे कहते हुए मां बहन की अश्लील गाली गलौच की. इसके बाद तीनों मारपीट करने लगे. ऑफिस में रखे कम्यूटर, मॉनिटर, सीपीयू, टेबल कांच को तोडफोड़ कर शासकीय सम्पत्ति को भी क्षति पहुंचाएं है. जिससे करीब तीस हजार रुपए की शासकीय सम्पत्ति की क्षति हुई है तथा शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाये है. मारपीट से मेरा सिर, बांए कंधा, पैर मे चोट आकर सिर के बायी ओर से खून निकल रहा है. मेरा सहकर्मी सहायक शिक्षक डूमनलाल बंजारे, नहुश कुमार कुर्रे एवं सफाई कर्मचारी कृष्णा यादव लोग घटना को देखे सुने एवं बीच बचाव किए है. थाना कुरुद में अभिषेक सिंह की रिपोर्ट पर सरपंच धर्मेंद्र नेताम उप सरपंच क्रांति चंद्राकर और राकेश दीवान के खिलाफ धारा दो सौ चौरानवे तीन सौ तेईस चौंतीस तीन सौ तिरेपन चार सौ सत्ताईस पाँच सौ छः के तहत अपराध दर्ज कर लिया है. फिलहाल पुलिस द्वारा आगे की कार्यवाही की जा रही है. |
- शासन ने जारी किया संशोधित कार्यक्रम,
लखनऊ। प्राइमरी स्कूलों में 15 हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के संबंध में पूर्व में जारी कार्यक्रम में फेरबदल कर दिया गया है। संशोधित कार्यक्रम के मुताबिक जिलेवार विज्ञापन प्रकाशित कराने की तिथि पूर्व की तरह 13 दिसंबर ही रहेगी, लेकिन ऑनलाइन आवेदन अब 5 मार्च 2015 तक किए जा सकेंगे। पहले आवेदन की अंतिम तिथि 10 जनवरी रखी गई थी। सचिव बेसिक शिक्षा एचएल गुप्ता ने मंगलवार को संशोधित शासनादेश जारी कर दिया है। जानकारों की माने तो कार्यक्रम में संशोधन बीटीसी-2012 के प्रशिक्षितों को चयन प्रक्रिया में शामिल करने के लिए किया गया है।
सचिव बेसिक शिक्षा परिषद संजय सिन्हा ने 29 नवंबर को प्राइमरी स्कूलों में 15 हजार सहायक अध्यापक भर्ती संबंधी कार्यक्रम जारी किया था। इसमें 13 दिसंबर को विज्ञापन प्रकाशित कराते हुए आवेदन लेने की अंतिम तिथि 10 जनवरी रखी गई थी। सूत्रों का कहना है कि इस बीच बीटीसी 2012 के प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी से गुहार लगाते हुए आवेदन लेने की अंतिम तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया था। उनका कहना है कि जनवरी 2015 तक उनका परीक्षा परिणाम आ जाएगा और तब तक आवेदन लेने की अंतिम तिथि समाप्त हो जाएगी, इसके चलते वे चयन प्रक्रिया में शामिल होने से वंचित हो जाएंगे। इसके आधार पर ही भर्ती के लिए आवेदन लेने संबंधी कार्यक्रम में फेरबदल किया है।
सचिव बेसिक शिक्षा एचएल गुप्ता ने 15 हजार सहायक अध्यापक भर्ती के लिए आवेदन शुल्क तय करते हुए शासनादेश जारी कर दिया है। अभ्यर्थी मनचाहे जिलों में आवेदन कर सकेंगे और उन्हें केवल एक जिले में आवेदन शुल्क जमा करना होगा। सामान्य व पिछड़े वर्ग से 500 व अनुसूचित जाति, जनजाति के अभ्यर्थियों से 200 रुपये आवेदन शुल्क लिया जाएगा। निशक्तों को कोई शुल्क नहीं देना होगा। इसके अलावा बैंकों से ई-चालान बनाने पर लगने वाले 30 रुपये शुल्क को भी कम कराने पर बातचीत चल रही है।
15 हजार शिक्षक भर्ती : 5 मार्च तक भरे जा सकेंगे फॉर्म; बीटीसी 2012 वालों को भी मिलेगा मौका, जारी हुआ संशोधित कार्यक्रम Reviewed by प्रवीण त्रिवेदी on 8:08 AM Rating:
| - शासन ने जारी किया संशोधित कार्यक्रम, लखनऊ। प्राइमरी स्कूलों में पंद्रह हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के संबंध में पूर्व में जारी कार्यक्रम में फेरबदल कर दिया गया है। संशोधित कार्यक्रम के मुताबिक जिलेवार विज्ञापन प्रकाशित कराने की तिथि पूर्व की तरह तेरह दिसंबर ही रहेगी, लेकिन ऑनलाइन आवेदन अब पाँच मार्च दो हज़ार पंद्रह तक किए जा सकेंगे। पहले आवेदन की अंतिम तिथि दस जनवरी रखी गई थी। सचिव बेसिक शिक्षा एचएल गुप्ता ने मंगलवार को संशोधित शासनादेश जारी कर दिया है। जानकारों की माने तो कार्यक्रम में संशोधन बीटीसी-दो हज़ार बारह के प्रशिक्षितों को चयन प्रक्रिया में शामिल करने के लिए किया गया है। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद संजय सिन्हा ने उनतीस नवंबर को प्राइमरी स्कूलों में पंद्रह हजार सहायक अध्यापक भर्ती संबंधी कार्यक्रम जारी किया था। इसमें तेरह दिसंबर को विज्ञापन प्रकाशित कराते हुए आवेदन लेने की अंतिम तिथि दस जनवरी रखी गई थी। सूत्रों का कहना है कि इस बीच बीटीसी दो हज़ार बारह के प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी से गुहार लगाते हुए आवेदन लेने की अंतिम तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया था। उनका कहना है कि जनवरी दो हज़ार पंद्रह तक उनका परीक्षा परिणाम आ जाएगा और तब तक आवेदन लेने की अंतिम तिथि समाप्त हो जाएगी, इसके चलते वे चयन प्रक्रिया में शामिल होने से वंचित हो जाएंगे। इसके आधार पर ही भर्ती के लिए आवेदन लेने संबंधी कार्यक्रम में फेरबदल किया है। सचिव बेसिक शिक्षा एचएल गुप्ता ने पंद्रह हजार सहायक अध्यापक भर्ती के लिए आवेदन शुल्क तय करते हुए शासनादेश जारी कर दिया है। अभ्यर्थी मनचाहे जिलों में आवेदन कर सकेंगे और उन्हें केवल एक जिले में आवेदन शुल्क जमा करना होगा। सामान्य व पिछड़े वर्ग से पाँच सौ व अनुसूचित जाति, जनजाति के अभ्यर्थियों से दो सौ रुपयापये आवेदन शुल्क लिया जाएगा। निशक्तों को कोई शुल्क नहीं देना होगा। इसके अलावा बैंकों से ई-चालान बनाने पर लगने वाले तीस रुपयापये शुल्क को भी कम कराने पर बातचीत चल रही है। पंद्रह हजार शिक्षक भर्ती : पाँच मार्च तक भरे जा सकेंगे फॉर्म; बीटीसी दो हज़ार बारह वालों को भी मिलेगा मौका, जारी हुआ संशोधित कार्यक्रम Reviewed by प्रवीण त्रिवेदी on आठ:आठ AM Rating: |
करनाल, इशिका ठाकुरः
President Of The Cultural Council Of Kurukshetra: करनाल, डीएवी पीजी कॉलेज करनाल के प्रिसिंपल डॉ रामपाल सैनी को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र की सांस्कृतिक परिषद का अध्यक्ष चुना गया। चुनाव मंगलवार को केयूके के सीनेट हॉल में चुनाव अधिकारी प्रो डीएस राणा के निर्देशन में हुआ। जिसमें डॉ रामपाल सैनी को सर्वसम्मति से केयूके की सांस्कृतिक परिषद का अध्यक्ष चुना गया।
हरियाणवी संस्कृति का भी देश में प्रचार प्रसार (President Of The Cultural Council Of Kurukshetra)
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सोमनाथ सचदेवा ने डॉ रामपाल सैनी को बधाई देते हुए कहा कि उनके चयन से जहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों को गति मिलेगी वहीं दूसरी ओर हरियाणवी संस्कृति का भी देश में प्रचार प्रसार होगा। प्रिसिंपल डॉ आरपी सैनी ने केयूके के कुलपति प्रो सोमनाथ सचदेवा का आभार प्रकट किया और कहा कि वह हरियाणवी संस्कृति को न केवल देश अपितु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने का निरंतर प्रयास करेंगे।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का नाम अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में गुंजे (President Of The Cultural Council Of Kurukshetra)
इसके अलावा सांस्कृतिक गतिविधियों में निरंतर सुधार की ओर कदम बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि उनका यही प्रयास निरंतर रहेगा कि किस प्रकार कालेज व विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को हरियाणवी संस्कृति के साथ जोड़ा जाए और निरंतर उनकी भागीदारी से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का नाम अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में गुंजे। प्राचार्य ने भरोसा दिलाया कि वह पुरी ईमानदारी ,जिम्मेदारी व कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने कार्य का निर्वहन करते हुए सांस्कृतिक परिषद के उद्देश्यों को हासिल करेंगे। उनके चयन का समाचार सुनते ही शहर की सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों, स्थानीय कॉलेज के प्रोफेसर्स व स्टाफ सदस्यों का बधाई देने के लिए तांता लगा रहा।
इस मौके पर हरियाणा कला परिषद के ये सभी निदेशक रहे मौजूद (President Of The Cultural Council Of Kurukshetra)
इस मौके पर हरियाणा कला परिषद के निदेशक संजय भसीन, सांस्कृतिक विभाग निदेशक केयूके डॉ महासिंह पूनिया, डा गुरचरन, डॉ कामदेव झां , प्रिन्सिपल डॉ एच एस काँग , प्रो रामविरंजन सिंह, डॉ आरती श्योकंद, प्रो डेजी वालिया, डॉ विवेक कोहली, डॉ प्रवीन वर्मा, डॉ सुनीता अरोड़ा, डॉ श्रीप्रकाश, डॉ अशोक अत्री, डॉ रामनिवास मौजूद थे।
| करनाल, इशिका ठाकुरः President Of The Cultural Council Of Kurukshetra: करनाल, डीएवी पीजी कॉलेज करनाल के प्रिसिंपल डॉ रामपाल सैनी को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र की सांस्कृतिक परिषद का अध्यक्ष चुना गया। चुनाव मंगलवार को केयूके के सीनेट हॉल में चुनाव अधिकारी प्रो डीएस राणा के निर्देशन में हुआ। जिसमें डॉ रामपाल सैनी को सर्वसम्मति से केयूके की सांस्कृतिक परिषद का अध्यक्ष चुना गया। हरियाणवी संस्कृति का भी देश में प्रचार प्रसार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सोमनाथ सचदेवा ने डॉ रामपाल सैनी को बधाई देते हुए कहा कि उनके चयन से जहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों को गति मिलेगी वहीं दूसरी ओर हरियाणवी संस्कृति का भी देश में प्रचार प्रसार होगा। प्रिसिंपल डॉ आरपी सैनी ने केयूके के कुलपति प्रो सोमनाथ सचदेवा का आभार प्रकट किया और कहा कि वह हरियाणवी संस्कृति को न केवल देश अपितु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने का निरंतर प्रयास करेंगे। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का नाम अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में गुंजे इसके अलावा सांस्कृतिक गतिविधियों में निरंतर सुधार की ओर कदम बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि उनका यही प्रयास निरंतर रहेगा कि किस प्रकार कालेज व विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को हरियाणवी संस्कृति के साथ जोड़ा जाए और निरंतर उनकी भागीदारी से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का नाम अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में गुंजे। प्राचार्य ने भरोसा दिलाया कि वह पुरी ईमानदारी ,जिम्मेदारी व कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपने कार्य का निर्वहन करते हुए सांस्कृतिक परिषद के उद्देश्यों को हासिल करेंगे। उनके चयन का समाचार सुनते ही शहर की सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों, स्थानीय कॉलेज के प्रोफेसर्स व स्टाफ सदस्यों का बधाई देने के लिए तांता लगा रहा। इस मौके पर हरियाणा कला परिषद के ये सभी निदेशक रहे मौजूद इस मौके पर हरियाणा कला परिषद के निदेशक संजय भसीन, सांस्कृतिक विभाग निदेशक केयूके डॉ महासिंह पूनिया, डा गुरचरन, डॉ कामदेव झां , प्रिन्सिपल डॉ एच एस काँग , प्रो रामविरंजन सिंह, डॉ आरती श्योकंद, प्रो डेजी वालिया, डॉ विवेक कोहली, डॉ प्रवीन वर्मा, डॉ सुनीता अरोड़ा, डॉ श्रीप्रकाश, डॉ अशोक अत्री, डॉ रामनिवास मौजूद थे। |
आज जस्टिन चेम्बर्स - प्रसिद्ध हॉलीवुडअभिनेता। वैसे, दुनिया भर में मान्यता लोकप्रिय श्रृंखला "ग्रेज़ एनाटॉमी" में डॉ। एलेक्स केयरव की भूमिका के लिए धन्यवाद। उनकी प्रतिभा के प्रशंसकों की संख्या हर साल बढ़ रही है, और उनमें से प्रत्येक न केवल अभिनेता के करियर में बल्कि अपने जीवनी डेटा और व्यक्तिगत जीवन के साथ भी रूचि रखती है।
युवा व्यक्ति का करियर पूरी तरह से शुरू हुआअप्रत्याशित रूप से खुद के लिए - मेट्रो स्टेशनों में से एक में पेरिस के चारों ओर एक यात्रा के दौरान उन्हें मॉडलिंग एजेंसियों में से एक के कर्मचारी ने मुलाकात की और उन्हें नौकरी की पेशकश की। तो जस्टिन चेम्बर्स एक लोकप्रिय और प्रसिद्ध मॉडल बन गया।
अपने करियर के दौरान, वह अलग-अलग काम करने में कामयाब रहेफर्मों और दुनिया को देखें - शूटिंग और स्क्रीनिंग न केवल संयुक्त राज्य अमेरिका में बल्कि जापान और यूरोपीय देशों में भी की जाती थीं। अभिनेता के सभी प्रशंसकों को पता नहीं है कि एक समय में वह एक विज्ञापन अभियान कैल्विन क्लेन का चेहरा था। फिर उन्होंने कम प्रसिद्ध ब्रांडों के साथ सहयोग किया - यह डॉल्से और गब्बाना और अरमानी है।
मॉडलिंग व्यवसाय, जस्टिन में सफलता के बावजूदचैंबर ने अभी भी अभिनय करियर का सपना देखा। यही कारण है कि वह न्यूयॉर्क चले गए और एचबी स्टूडियो अभिनय स्कूल में पढ़ाई की। वैसे, उन्होंने चार साल तक अपनी प्रतिभा छोड़ दी। 1 99 4 में, लड़के ने एंट्स मार्चिंग गीत के लिए एक वीडियो के लिए अभिनय किया।
उनकी पहली भूमिका सुंदर में से एक का चरित्र थालोकप्रिय दिन साबुन ओपेरा द अदर वर्ल्ड, जहां उन्होंने निकोलस हडसन खेला। उसी वर्ष उन्होंने "पॉलिचेस्की कवर के तहत" एपिसोड में से एक में निक निको के अधिकारी की एपिसोडिक भूमिका विरासत में ली। अगले कुछ वर्षों में वह समय-समय पर विभिन्न प्रकार की टेलीविज़न फिल्मों और टीवी शो में स्क्रीन पर दिखाई दिए।
उदाहरण के लिए, 1 99 6 में उन्होंने जॉर्ज में खेला"द फायर हार्वेस्ट"। उसी वर्ष उन्हें "जस्टिस फॉर स्विफ्ट" श्रृंखला में रिक के लिए एक छोटी भूमिका मिली। और 1 99 7 में, वह रोमांटिक पश्चिमी "रोज हिल" में काउबॉय कोल क्लेबर्न की छवि में दर्शकों के सामने दिखाई दिए।
1 99 8 में, उन्हें कालेब की नियमित भूमिका मिलीनई श्रृंखला में "चार कोनों।" दुर्भाग्यवश, श्रृंखला को पहले दो एपिसोड के बाद बंद कर दिया गया था, इसलिए इस परियोजना ने प्रसिद्धि नहीं लाई। एक साल बाद, अभिनेता की फिल्मोग्राफी को एक और टेलीविजन फिल्म के साथ भर दिया गया - जस्टिन चेम्बर्स ने "द टाइम ऑफ लव" में हॉकिंग खेला।
1 999 में, अभिनेता ने बड़ी स्क्रीन पर अपनी शुरुआत कीफिल्म "हाइट्स ऑफ फ्रीडम", जहां उन्हें ट्रे की भूमिका मिली। 2001 एक प्रतिभाशाली लेकिन अभी भी कम ज्ञात अभिनेता के लिए काफी सफल था। इस समय उन्होंने रोमांटिक कॉमेडी "वेडिंग प्लानर" में मुख्य किरदार के दूल्हे मासिमो खेला, जहां उनके साथी जेनिफर लोपेज़ थे। उसी वर्ष उन्हें प्रसिद्ध उपन्यास "द मस्किटियर" के अनुकूलन में से एक में डी 'आर्टगनन की मुख्य भूमिका मिली।
2002 में, उन्होंने नाटक "लियो" में रयान एडम्स खेला। उसी वर्ष उन्हें "हिस्टोरिकल अंधापन" नामक एक और नाटक में रिक की भूमिका मिली। एक साल बाद, जस्टिन चेम्बर्स को बेहद लोकप्रिय टीवी श्रृंखला "डिटेक्टीव रश" में एक छोटी भूमिका मिली - वह क्रिस लसिंग की छवि में तीन एपिसोड में दिखाई दिए।
इस श्रृंखला में, अभिनेता ने भूमिका निभाईएलेक्सा करवा नरसंहारवादी, व्यंग्यात्मक लोवेलेस, जो एक असफल परिवार में बड़े हुए, जो जैस्पर द्वारा किए गए अपने प्रयासों के कारण पूरी तरह से डॉक्टर बन गए, वे अनूठा हो गए। वैसे, निश्चित रूप से श्रृंखला में उनके साथी कैथरीन हेग्ल बन गए। स्क्रीन पर, कलाकारों ने कड़ी मेहनत और दर्दनाक रिश्तों को निभाया, कड़ी मेहनत और स्वास्थ्य समस्याओं से जटिल। फिर भी, श्रृंखला के कई प्रशंसकों के लिए, कैथरीन हेग्ल और जस्टिन चेम्बर्स एक आदर्श जोड़े बन गए। लेकिन अभिनेत्री जिन्होंने आईजी स्टीवंस खेला, अंततः परियोजना छोड़ दी।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह एलेक्स करव की भूमिका हैअभिनेता को न केवल संयुक्त राज्य अमेरिका में बल्कि दुनिया भर में लोकप्रिय और मशहूर बना दिया। इस परियोजना में, जैस्पर इस दिन काम करता है।
बेशक, जस्टिन की श्रृंखला की सफलता के बादप्राप्त करें और अन्य सुझाव। 2005 में, उन्होंने रोमांटिक कॉमेडी "दक्षिणी सुंदरियों" में अन्ना फरीस के साथ अभिनय किया, जहां उन्होंने एक पुलिस अधिकारी रीट बटलर खेला। उसी वर्ष उन्होंने वास्तविक घटना के आधार पर जासूसी फिल्म "राशि चक्र" में इंस्पेक्टर मैट पैरिश की मुख्य भूमिका निभाई और सबसे क्रूर धारावाहिक हत्यारों में से एक के लिए खोज की कहानी सुनाई।
2013 में, अभिनेता को सफल आपराधिक नाटक "द सिटी ऑफ वाइस" में रयान ब्लेक की भूमिका की पेशकश की गई, जहां जैस्पर ने रसेल क्रो और मार्क वाल्बर्ग के साथ काम किया।
मॉडलिंग एजेंसी जस्टिन में काम करते समय भीमंडलों अपनी भावी पत्नी, Keisha से मुलाकात की। और युवा लोगों के 1993 में शादी कर ली। अब प्रसिद्ध अभिनेता पाँच बच्चे हैं। 1994 में जोड़ी एक बेटी है, इसाबेला, 1997 में वे के जुड़वा बच्चों माया और कायला माता-पिता बन गया था, 1999 में, यह एक और बेटी ईवा प्रकाश में आया था, और 2002 में - एक लंबे समय से प्रतीक्षित बेटे जेसन नाम दिया है। वैसे, जस्टिन चेम्बर्स और उनकी पत्नी कभी नहीं के रूप में कई बच्चे पैदा करने की योजना बनाई है। फिर भी, जोड़ी उनके जीवन के साथ काफी खुश, समय-समय पर उन्हें आश्चर्य के साथ पेश करने के लिए है।
| आज जस्टिन चेम्बर्स - प्रसिद्ध हॉलीवुडअभिनेता। वैसे, दुनिया भर में मान्यता लोकप्रिय श्रृंखला "ग्रेज़ एनाटॉमी" में डॉ। एलेक्स केयरव की भूमिका के लिए धन्यवाद। उनकी प्रतिभा के प्रशंसकों की संख्या हर साल बढ़ रही है, और उनमें से प्रत्येक न केवल अभिनेता के करियर में बल्कि अपने जीवनी डेटा और व्यक्तिगत जीवन के साथ भी रूचि रखती है। युवा व्यक्ति का करियर पूरी तरह से शुरू हुआअप्रत्याशित रूप से खुद के लिए - मेट्रो स्टेशनों में से एक में पेरिस के चारों ओर एक यात्रा के दौरान उन्हें मॉडलिंग एजेंसियों में से एक के कर्मचारी ने मुलाकात की और उन्हें नौकरी की पेशकश की। तो जस्टिन चेम्बर्स एक लोकप्रिय और प्रसिद्ध मॉडल बन गया। अपने करियर के दौरान, वह अलग-अलग काम करने में कामयाब रहेफर्मों और दुनिया को देखें - शूटिंग और स्क्रीनिंग न केवल संयुक्त राज्य अमेरिका में बल्कि जापान और यूरोपीय देशों में भी की जाती थीं। अभिनेता के सभी प्रशंसकों को पता नहीं है कि एक समय में वह एक विज्ञापन अभियान कैल्विन क्लेन का चेहरा था। फिर उन्होंने कम प्रसिद्ध ब्रांडों के साथ सहयोग किया - यह डॉल्से और गब्बाना और अरमानी है। मॉडलिंग व्यवसाय, जस्टिन में सफलता के बावजूदचैंबर ने अभी भी अभिनय करियर का सपना देखा। यही कारण है कि वह न्यूयॉर्क चले गए और एचबी स्टूडियो अभिनय स्कूल में पढ़ाई की। वैसे, उन्होंने चार साल तक अपनी प्रतिभा छोड़ दी। एक निन्यानवे चार में, लड़के ने एंट्स मार्चिंग गीत के लिए एक वीडियो के लिए अभिनय किया। उनकी पहली भूमिका सुंदर में से एक का चरित्र थालोकप्रिय दिन साबुन ओपेरा द अदर वर्ल्ड, जहां उन्होंने निकोलस हडसन खेला। उसी वर्ष उन्होंने "पॉलिचेस्की कवर के तहत" एपिसोड में से एक में निक निको के अधिकारी की एपिसोडिक भूमिका विरासत में ली। अगले कुछ वर्षों में वह समय-समय पर विभिन्न प्रकार की टेलीविज़न फिल्मों और टीवी शो में स्क्रीन पर दिखाई दिए। उदाहरण के लिए, एक निन्यानवे छः में उन्होंने जॉर्ज में खेला"द फायर हार्वेस्ट"। उसी वर्ष उन्हें "जस्टिस फॉर स्विफ्ट" श्रृंखला में रिक के लिए एक छोटी भूमिका मिली। और एक निन्यानवे सात में, वह रोमांटिक पश्चिमी "रोज हिल" में काउबॉय कोल क्लेबर्न की छवि में दर्शकों के सामने दिखाई दिए। एक निन्यानवे आठ में, उन्हें कालेब की नियमित भूमिका मिलीनई श्रृंखला में "चार कोनों।" दुर्भाग्यवश, श्रृंखला को पहले दो एपिसोड के बाद बंद कर दिया गया था, इसलिए इस परियोजना ने प्रसिद्धि नहीं लाई। एक साल बाद, अभिनेता की फिल्मोग्राफी को एक और टेलीविजन फिल्म के साथ भर दिया गया - जस्टिन चेम्बर्स ने "द टाइम ऑफ लव" में हॉकिंग खेला। एक नौ सौ निन्यानवे में, अभिनेता ने बड़ी स्क्रीन पर अपनी शुरुआत कीफिल्म "हाइट्स ऑफ फ्रीडम", जहां उन्हें ट्रे की भूमिका मिली। दो हज़ार एक एक प्रतिभाशाली लेकिन अभी भी कम ज्ञात अभिनेता के लिए काफी सफल था। इस समय उन्होंने रोमांटिक कॉमेडी "वेडिंग प्लानर" में मुख्य किरदार के दूल्हे मासिमो खेला, जहां उनके साथी जेनिफर लोपेज़ थे। उसी वर्ष उन्हें प्रसिद्ध उपन्यास "द मस्किटियर" के अनुकूलन में से एक में डी 'आर्टगनन की मुख्य भूमिका मिली। दो हज़ार दो में, उन्होंने नाटक "लियो" में रयान एडम्स खेला। उसी वर्ष उन्हें "हिस्टोरिकल अंधापन" नामक एक और नाटक में रिक की भूमिका मिली। एक साल बाद, जस्टिन चेम्बर्स को बेहद लोकप्रिय टीवी श्रृंखला "डिटेक्टीव रश" में एक छोटी भूमिका मिली - वह क्रिस लसिंग की छवि में तीन एपिसोड में दिखाई दिए। इस श्रृंखला में, अभिनेता ने भूमिका निभाईएलेक्सा करवा नरसंहारवादी, व्यंग्यात्मक लोवेलेस, जो एक असफल परिवार में बड़े हुए, जो जैस्पर द्वारा किए गए अपने प्रयासों के कारण पूरी तरह से डॉक्टर बन गए, वे अनूठा हो गए। वैसे, निश्चित रूप से श्रृंखला में उनके साथी कैथरीन हेग्ल बन गए। स्क्रीन पर, कलाकारों ने कड़ी मेहनत और दर्दनाक रिश्तों को निभाया, कड़ी मेहनत और स्वास्थ्य समस्याओं से जटिल। फिर भी, श्रृंखला के कई प्रशंसकों के लिए, कैथरीन हेग्ल और जस्टिन चेम्बर्स एक आदर्श जोड़े बन गए। लेकिन अभिनेत्री जिन्होंने आईजी स्टीवंस खेला, अंततः परियोजना छोड़ दी। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह एलेक्स करव की भूमिका हैअभिनेता को न केवल संयुक्त राज्य अमेरिका में बल्कि दुनिया भर में लोकप्रिय और मशहूर बना दिया। इस परियोजना में, जैस्पर इस दिन काम करता है। बेशक, जस्टिन की श्रृंखला की सफलता के बादप्राप्त करें और अन्य सुझाव। दो हज़ार पाँच में, उन्होंने रोमांटिक कॉमेडी "दक्षिणी सुंदरियों" में अन्ना फरीस के साथ अभिनय किया, जहां उन्होंने एक पुलिस अधिकारी रीट बटलर खेला। उसी वर्ष उन्होंने वास्तविक घटना के आधार पर जासूसी फिल्म "राशि चक्र" में इंस्पेक्टर मैट पैरिश की मुख्य भूमिका निभाई और सबसे क्रूर धारावाहिक हत्यारों में से एक के लिए खोज की कहानी सुनाई। दो हज़ार तेरह में, अभिनेता को सफल आपराधिक नाटक "द सिटी ऑफ वाइस" में रयान ब्लेक की भूमिका की पेशकश की गई, जहां जैस्पर ने रसेल क्रो और मार्क वाल्बर्ग के साथ काम किया। मॉडलिंग एजेंसी जस्टिन में काम करते समय भीमंडलों अपनी भावी पत्नी, Keisha से मुलाकात की। और युवा लोगों के एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में शादी कर ली। अब प्रसिद्ध अभिनेता पाँच बच्चे हैं। एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में जोड़ी एक बेटी है, इसाबेला, एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में वे के जुड़वा बच्चों माया और कायला माता-पिता बन गया था, एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में, यह एक और बेटी ईवा प्रकाश में आया था, और दो हज़ार दो में - एक लंबे समय से प्रतीक्षित बेटे जेसन नाम दिया है। वैसे, जस्टिन चेम्बर्स और उनकी पत्नी कभी नहीं के रूप में कई बच्चे पैदा करने की योजना बनाई है। फिर भी, जोड़ी उनके जीवन के साथ काफी खुश, समय-समय पर उन्हें आश्चर्य के साथ पेश करने के लिए है। |
जिला विकलांगता पुनर्वास केंद्र (डीडीआरसी) की स्थापना को लेकर उपायुक्त कार्यालय कक्ष में सोमवार को जिला पुनर्वास प्रबंधन समिति बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त डीसी राणा ने की। बैठक में विकलांगता पुनर्वास केंद्र की स्थापना को लेकर विस्तृत रूप से चर्चा की गई। उपायुक्त डीसी राणा ने कहा कि चूंकि पुनर्वास केंद्र के माध्यम से अक्षम व्यक्तियों को चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता, यूडीआईडी कार्ड, फिजियो और स्पीच थैरेपी और प्रोस्थेटिक सहायता, परामर्श, चिकित्सा सहायता और अन्य सेवाएं प्राप्त होंगी।
ऐसे में सभी संबंधित अधिकारी विकलांगता पुनर्वास केंद्र शुरू करने को लेकर आवश्यक कदम उठाएं। उन्होंने पुनर्वास केंद्र के भवन को चिंहित करने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी, उपनिदेशक एवं परियोजना अधिकारी ग्रामीण विकास अभिकरण और जिला कल्याण अधिकारी की संयुक्त कमेटी गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह निर्देश भी दिए कि कमेटी एक सप्ताह के भीतर व्यवस्था करना सुनिश्चित बनाए। बैठक के दौरान डीडीआरसी के सुचारू कामकाज के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं को नामित किया गया। उन्होंने जिला कल्याण अधिकारी को विकलांगता पुनर्वास केंद्र के सुचारू कार्यान्वयन के लिए गैर सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) से प्रस्ताव आमंत्रित करने को भी कहा। बैठक में सहायक आयुक्त मनीष चौधरी, जिला लोक संपर्क अधिकारी सुभाष चंद कटोच, जिला कल्याण अधिकारी अनिल पुरी, उप निदेशक एवं परियोजना अधिकारी चंद्रवीर सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग राकेश कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी स्वास्थ्य डा. हरित पुरी सहित सचिव जिला रेडक्रास सोसायटी नीना सहगल मौजूद रही।
| जिला विकलांगता पुनर्वास केंद्र की स्थापना को लेकर उपायुक्त कार्यालय कक्ष में सोमवार को जिला पुनर्वास प्रबंधन समिति बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त डीसी राणा ने की। बैठक में विकलांगता पुनर्वास केंद्र की स्थापना को लेकर विस्तृत रूप से चर्चा की गई। उपायुक्त डीसी राणा ने कहा कि चूंकि पुनर्वास केंद्र के माध्यम से अक्षम व्यक्तियों को चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता, यूडीआईडी कार्ड, फिजियो और स्पीच थैरेपी और प्रोस्थेटिक सहायता, परामर्श, चिकित्सा सहायता और अन्य सेवाएं प्राप्त होंगी। ऐसे में सभी संबंधित अधिकारी विकलांगता पुनर्वास केंद्र शुरू करने को लेकर आवश्यक कदम उठाएं। उन्होंने पुनर्वास केंद्र के भवन को चिंहित करने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी, उपनिदेशक एवं परियोजना अधिकारी ग्रामीण विकास अभिकरण और जिला कल्याण अधिकारी की संयुक्त कमेटी गठित करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह निर्देश भी दिए कि कमेटी एक सप्ताह के भीतर व्यवस्था करना सुनिश्चित बनाए। बैठक के दौरान डीडीआरसी के सुचारू कामकाज के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं को नामित किया गया। उन्होंने जिला कल्याण अधिकारी को विकलांगता पुनर्वास केंद्र के सुचारू कार्यान्वयन के लिए गैर सरकारी संस्थाओं से प्रस्ताव आमंत्रित करने को भी कहा। बैठक में सहायक आयुक्त मनीष चौधरी, जिला लोक संपर्क अधिकारी सुभाष चंद कटोच, जिला कल्याण अधिकारी अनिल पुरी, उप निदेशक एवं परियोजना अधिकारी चंद्रवीर सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग राकेश कुमार, जिला कार्यक्रम अधिकारी स्वास्थ्य डा. हरित पुरी सहित सचिव जिला रेडक्रास सोसायटी नीना सहगल मौजूद रही। |
सम्राटो ने किया। इनके शासन काल में सरस साहित्य तथा ललित कला के पुनरुद्वार की वह प्रबल धारा वह निकली जिसका स्रोत अनेक शताब्दियों के बाद तक नहीं सूख सका। इस स्वर्ण युग का निर्माण कर इन्होंने वह अलौकिक कार्य कर दिखाया जो दूसरे भारतीय नरेशो के लिए असंभव था । यदि हम इस सुवर्णयुग की उपमा ग्रीमइतिहास के "लेक्लियन एज' से दे तो इसमें कुछ भी अत्युक्ति न होगी। इन्होंने भारतीय इतिहास के रंगमच पर वह अलौकिक अभिनय किया जिसका वर्णन करना मेरी इस जड़ लेखनी की शक्ति के बाहर है। इन्ही प्रातःस्मरणीय, ग्रार्य सभ्यता तथा संस्कृति के संस्थापक, 'स्वर्णयुग' के निर्माणकर्ता, एकछत्र सम्राट्, भारतीय इतिहास-नाटक के सूत्रधार, राष्ट्रनिर्माता गुप्त सम्राटों का पवित्र इतिहास आगे के अध्यायों में
लिखा जायगा ।
गुप्त सम्राटों के तिथिक्रम से क्रमबद्ध इतिहास देने के पूर्व यह समुचित प्रतीत होता है कि इनका वर्ण निर्णय कर लिया जाय । ऐसे प्रतापी, सभ्यता के सस्थापक गुप्त नरेश कौन थे, उनका वर्ण क्या था, इसे जानने की किसे समुत्कण्ठा न होगी ? अतः इसी विषय पर यहाँ सम्यक विचार किया जायगा ।
गुप्ता के वर्ण निर्णय के संबंध में विद्वानों में गहरा मतभेद है। सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक श्री जायसवाल इन गुप्ता को शूद्र जाति का बतलाते हैं तथा प्रसिद्ध इतिहास वेत्ता म० म० गौरीशङ्कर ओझा इन्हे क्षत्रिय मानते हैं । जायसवाल महोदय ने इन गुप्ता का, निम्नाकित तर्कों के द्वारा, शूद्र जाति का होना सिद्ध किया है।
सर्वप्रथम श्री जायसवाल ने 'कौमुदी महोत्सव नामक नाटक के आधार पर गुप्तों को शुद्ध सिद्ध करने का प्रयत्न किया है । इस ऐतिहासिक नाटक की विद्वान् लेखिका ने एक पात्र ( श्रार्य ) के मुख से चंद्रसेन ( चण्डसेन ) को कारस्कर कहलाया है तथा ऐसे नीच जाति के पुरुष को राजा होने के अयोग्य बतलाया है । श्रीजायसवाल चद्र१ - यह नाटक दक्षिण भारत में मिला है तथा यह दक्षिण भारतीय ग्रन्थमाला स० ८ मद्रास से प्रकाशित हुआ हैं । इसका सक्षिप्त कथानक निम्न प्रकार का है, - नाटक के चतुर्थीक में मगध के - क्षत्रिय राजा नु दग्वर्मन् का वर्णन है । इस राजा को कोई पुत्र नहीं या अतः इसने चण्डसेन नामक व्यक्ति को गोद लिया । परन्तु गोढ लेने के पश्चात्र राजा को कल्याणवर्मन् नामक पुत्र पैदा हुआ । चण्डसेन ने राज्यलोभ के कारण लिच्छवियों से वैवाहिक संबंध स्थापित कर उनकी सहायता से सुन्डरवर्मन् पर चढाई कर दो, उसे मार डाला तथा स्वय राजा बन बैठा । राजा का मन्त्री मन्त्रगृत राजकुमार को लेकर भाग निकला तथा उसने विव्यपर्वत की शरण ली । उसने कालातर में दुष्ट चंद्रसेन को मार कर कव्यायवर्मन को राजा बनाया । चण्डसेन के प्रजापीडक होने के कारण जनता ने इस राजा का साथ दिया। इसी कल्याणवर्मन् के सिहासनार होने के समय यह नाटक अभिनीत हुआ था । लेखिका एक विदुषी ली है ।
२. कहि एरित वर्णस्स से राअसिरि ।
का म. प्र | सम्राटो ने किया। इनके शासन काल में सरस साहित्य तथा ललित कला के पुनरुद्वार की वह प्रबल धारा वह निकली जिसका स्रोत अनेक शताब्दियों के बाद तक नहीं सूख सका। इस स्वर्ण युग का निर्माण कर इन्होंने वह अलौकिक कार्य कर दिखाया जो दूसरे भारतीय नरेशो के लिए असंभव था । यदि हम इस सुवर्णयुग की उपमा ग्रीमइतिहास के "लेक्लियन एज' से दे तो इसमें कुछ भी अत्युक्ति न होगी। इन्होंने भारतीय इतिहास के रंगमच पर वह अलौकिक अभिनय किया जिसका वर्णन करना मेरी इस जड़ लेखनी की शक्ति के बाहर है। इन्ही प्रातःस्मरणीय, ग्रार्य सभ्यता तथा संस्कृति के संस्थापक, 'स्वर्णयुग' के निर्माणकर्ता, एकछत्र सम्राट्, भारतीय इतिहास-नाटक के सूत्रधार, राष्ट्रनिर्माता गुप्त सम्राटों का पवित्र इतिहास आगे के अध्यायों में लिखा जायगा । गुप्त सम्राटों के तिथिक्रम से क्रमबद्ध इतिहास देने के पूर्व यह समुचित प्रतीत होता है कि इनका वर्ण निर्णय कर लिया जाय । ऐसे प्रतापी, सभ्यता के सस्थापक गुप्त नरेश कौन थे, उनका वर्ण क्या था, इसे जानने की किसे समुत्कण्ठा न होगी ? अतः इसी विषय पर यहाँ सम्यक विचार किया जायगा । गुप्ता के वर्ण निर्णय के संबंध में विद्वानों में गहरा मतभेद है। सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक श्री जायसवाल इन गुप्ता को शूद्र जाति का बतलाते हैं तथा प्रसिद्ध इतिहास वेत्ता मशून्य मशून्य गौरीशङ्कर ओझा इन्हे क्षत्रिय मानते हैं । जायसवाल महोदय ने इन गुप्ता का, निम्नाकित तर्कों के द्वारा, शूद्र जाति का होना सिद्ध किया है। सर्वप्रथम श्री जायसवाल ने 'कौमुदी महोत्सव नामक नाटक के आधार पर गुप्तों को शुद्ध सिद्ध करने का प्रयत्न किया है । इस ऐतिहासिक नाटक की विद्वान् लेखिका ने एक पात्र के मुख से चंद्रसेन को कारस्कर कहलाया है तथा ऐसे नीच जाति के पुरुष को राजा होने के अयोग्य बतलाया है । श्रीजायसवाल चद्रएक - यह नाटक दक्षिण भारत में मिला है तथा यह दक्षिण भारतीय ग्रन्थमाला सशून्य आठ मद्रास से प्रकाशित हुआ हैं । इसका सक्षिप्त कथानक निम्न प्रकार का है, - नाटक के चतुर्थीक में मगध के - क्षत्रिय राजा नु दग्वर्मन् का वर्णन है । इस राजा को कोई पुत्र नहीं या अतः इसने चण्डसेन नामक व्यक्ति को गोद लिया । परन्तु गोढ लेने के पश्चात्र राजा को कल्याणवर्मन् नामक पुत्र पैदा हुआ । चण्डसेन ने राज्यलोभ के कारण लिच्छवियों से वैवाहिक संबंध स्थापित कर उनकी सहायता से सुन्डरवर्मन् पर चढाई कर दो, उसे मार डाला तथा स्वय राजा बन बैठा । राजा का मन्त्री मन्त्रगृत राजकुमार को लेकर भाग निकला तथा उसने विव्यपर्वत की शरण ली । उसने कालातर में दुष्ट चंद्रसेन को मार कर कव्यायवर्मन को राजा बनाया । चण्डसेन के प्रजापीडक होने के कारण जनता ने इस राजा का साथ दिया। इसी कल्याणवर्मन् के सिहासनार होने के समय यह नाटक अभिनीत हुआ था । लेखिका एक विदुषी ली है । दो. कहि एरित वर्णस्स से राअसिरि । का म. प्र |
बीजिंग। चीन ने मंगलवार को भारत द्वारा लद्दाख को केन्द्र शासित प्रदेश बनाए जाने का विरोध किया और कहा कि इस कदम ने उसकी क्षेत्रीय संप्रभुता को कमतर किया है। नयी दिल्ली ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए बीजिंग से उसके "आंतरिक मामलों" पर टिप्पणी नहीं करने को कहा। भारत सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर को दो केन्द्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख में बांटने के बीच, चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि चीन ने हमेशा चीन-भारत सीमा के पश्चिमी क्षेत्र में चीन की सरजमीं को भारत द्वारा अपने प्रशासनिक क्षेत्राधिकार में शामिल करने का विरोध किया है।
हुआ ने कहा, "हाल में भारत ने अपने कानूनों में एकपक्षीय तरीके से संशोधन कर चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता को निरंतर कमतर किया है। यह कदम अस्वीकार्य हैं तथा इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। "उन्होंने भारत से "सीमा मुद्दे पर अपने शब्दों और कदमों को लेकर बहुत सतर्क रहने, दोनों पक्षों के बीच हाल में हुए समझौतों का कड़ाई से पालन करने तथा सीमा मुद्दे को और जटिल बनाने वाले किसी कदम से बचने का" अनुरोध किया।
कुमार ने कहा कि भारत और चीन 'सीमा से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए राजनीतिक मानकों और मार्गदर्शक सिद्धांत' के आधार पर संबंधित सीमा के निष्पक्ष, तार्किक और आपसी रूप से स्वीकार्य समझौते पर सहमत हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह का समझौता होने तक, दोनों पक्ष संबंधित समझौतों के आधार पर सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं अमन-चैन कायम रखने पर सहमत हुए हैं। इस बीच, खबरें हैं कि चीन ने इस सप्ताह कैलाश मानसरोवर यात्रा की योजना बना रहे भारतीयों के एक समूह का वीजा नामंजूर कर दिया है। हालांकि इस बात की भारत या चीन की तरफ से आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
नियंत्रण रेखा पर भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच गोलाबारी तथा जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म करने के भारत सरकार के कदम पर बयान देते हुए हुआ ने भारत और पाकिस्तान से यथास्थिति को "एकपक्षीय" तरीके से बदलने वाले तथा दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाने वाले कदमों से बचने को कहा। भारत और पाकिस्तान से संयम बरतने का आह्वान करने के साथ ही चीन ने मंगलवार को कश्मीर की स्थिति पर "गंभीर चिंता" जताई।
हुआ ने बीजिंग में कश्मीर पर चीन के रुख को "स्पष्ट और एकरूप" बताया और कहा कि यह मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच इतिहास की विरासत से आया है जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी आमसहमति है। उन्होंने कहा, "संबंधित पक्षों को संयम बरतना चाहिए और समझदारी से कदम उठाने चाहिए। खासकर, उन्हें यथास्थिति को एकतरफा तरीके से बदलने वाले तथा तनाव बढाने वाले कदमों से बचना चाहिए। " उन्होंने कहा, "हम भारत और पाकिस्तान दोनों से बातचीत एवं सलाह मशविरा के जरिये संबंधित विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने तथा क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता का संरक्षण करने का आह्वान करते हैं। " चीन द्वारा हालिया समय में कश्मीर मुद्दे पर जारी यह दूसरा बयान है।
चीन ने 26 जुलाई को कहा था कि भारत और पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे तथा अन्य विवादों को बातचीत के जरिये शांतिपूर्ण ढंग से निपटाना चाहिए। चीन ने दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने में "रचनात्मक भूमिका" निभाने में अमेरिका सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति समर्थन जाहिर किया था। यह बयान वाशिंगटन में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के प्रस्ताव के जवाब में जारी किया गया। भारत ने ट्रंप के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा था कि कश्मीर द्विपक्षीय मुद्दा है।
| बीजिंग। चीन ने मंगलवार को भारत द्वारा लद्दाख को केन्द्र शासित प्रदेश बनाए जाने का विरोध किया और कहा कि इस कदम ने उसकी क्षेत्रीय संप्रभुता को कमतर किया है। नयी दिल्ली ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए बीजिंग से उसके "आंतरिक मामलों" पर टिप्पणी नहीं करने को कहा। भारत सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर को दो केन्द्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख में बांटने के बीच, चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि चीन ने हमेशा चीन-भारत सीमा के पश्चिमी क्षेत्र में चीन की सरजमीं को भारत द्वारा अपने प्रशासनिक क्षेत्राधिकार में शामिल करने का विरोध किया है। हुआ ने कहा, "हाल में भारत ने अपने कानूनों में एकपक्षीय तरीके से संशोधन कर चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता को निरंतर कमतर किया है। यह कदम अस्वीकार्य हैं तथा इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। "उन्होंने भारत से "सीमा मुद्दे पर अपने शब्दों और कदमों को लेकर बहुत सतर्क रहने, दोनों पक्षों के बीच हाल में हुए समझौतों का कड़ाई से पालन करने तथा सीमा मुद्दे को और जटिल बनाने वाले किसी कदम से बचने का" अनुरोध किया। कुमार ने कहा कि भारत और चीन 'सीमा से जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए राजनीतिक मानकों और मार्गदर्शक सिद्धांत' के आधार पर संबंधित सीमा के निष्पक्ष, तार्किक और आपसी रूप से स्वीकार्य समझौते पर सहमत हुए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह का समझौता होने तक, दोनों पक्ष संबंधित समझौतों के आधार पर सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं अमन-चैन कायम रखने पर सहमत हुए हैं। इस बीच, खबरें हैं कि चीन ने इस सप्ताह कैलाश मानसरोवर यात्रा की योजना बना रहे भारतीयों के एक समूह का वीजा नामंजूर कर दिया है। हालांकि इस बात की भारत या चीन की तरफ से आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं हुई है। नियंत्रण रेखा पर भारत और पाकिस्तान की सेनाओं के बीच गोलाबारी तथा जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद तीन सौ सत्तर को खत्म करने के भारत सरकार के कदम पर बयान देते हुए हुआ ने भारत और पाकिस्तान से यथास्थिति को "एकपक्षीय" तरीके से बदलने वाले तथा दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाने वाले कदमों से बचने को कहा। भारत और पाकिस्तान से संयम बरतने का आह्वान करने के साथ ही चीन ने मंगलवार को कश्मीर की स्थिति पर "गंभीर चिंता" जताई। हुआ ने बीजिंग में कश्मीर पर चीन के रुख को "स्पष्ट और एकरूप" बताया और कहा कि यह मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच इतिहास की विरासत से आया है जिस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी आमसहमति है। उन्होंने कहा, "संबंधित पक्षों को संयम बरतना चाहिए और समझदारी से कदम उठाने चाहिए। खासकर, उन्हें यथास्थिति को एकतरफा तरीके से बदलने वाले तथा तनाव बढाने वाले कदमों से बचना चाहिए। " उन्होंने कहा, "हम भारत और पाकिस्तान दोनों से बातचीत एवं सलाह मशविरा के जरिये संबंधित विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने तथा क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता का संरक्षण करने का आह्वान करते हैं। " चीन द्वारा हालिया समय में कश्मीर मुद्दे पर जारी यह दूसरा बयान है। चीन ने छब्बीस जुलाई को कहा था कि भारत और पाकिस्तान को कश्मीर मुद्दे तथा अन्य विवादों को बातचीत के जरिये शांतिपूर्ण ढंग से निपटाना चाहिए। चीन ने दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने में "रचनात्मक भूमिका" निभाने में अमेरिका सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय के प्रति समर्थन जाहिर किया था। यह बयान वाशिंगटन में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के प्रस्ताव के जवाब में जारी किया गया। भारत ने ट्रंप के प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा था कि कश्मीर द्विपक्षीय मुद्दा है। |
पंजाब के अमृतसर के वल्ला थानाक्षेत्र में स्थित गुरुद्वारा जीवन सिंह के प्रधान के घर के बाहर नशे में धुत्त कुछ युवकों ने तोड़फोड़ की वारदात को अंजाम दिया। युवकों को ऐसा करने से रोके जाने पर उन्होंने ईंटों से हमला कर दिया। तोड़फोड़ की यह घटना सीसीटीवी में कैद हो गई।
हालांकि इसमें किसी के जख्मी होने की जानकारी नहीं मगर इस वारदात में गुरुद्वारा के प्रधान के घर के बाहर खड़ी कार काफी क्षतिग्रस्त हुई है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज लेकर हमलावरों की पहचान व मामले में जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक वल्ला थानाक्षेत्र में पत्ती बाबा जीवन सिंह जी निवासी गुरुद्वारा बाबा जीवन सिंह के प्रधान व समाज सेवक कश्मीर सिंह काकू के घर के बाहर कुछ युवक शराबी हालत में पहुंचे। युवकों ने घर के बाहर खड़ी कार के शीशे तोड़ दिए। हमलावरों ने समाज सेवक के भतीजे के घर के बाहर दरवाजे पर ईंटे मारी, क्योंकि उन्होंने आरोपियों को झगड़ा करने से रोका था। घटना रात करीब 11. 15 बजे की है, जो सीसीटीवी में कैद हो गई।
वहीं एसीपी पूर्वी गुरप्रताप सिंह सहोता ने बताया कि पुरानी रंजिश का मामला है। हमले केे बाबत सीसीटीवी की पूरी फुटेज लेकर जांच की जा रही है। एसीपी ने बताया कि हमलावरों की पहचान के बाद उनके खिलाफ बनती कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
| पंजाब के अमृतसर के वल्ला थानाक्षेत्र में स्थित गुरुद्वारा जीवन सिंह के प्रधान के घर के बाहर नशे में धुत्त कुछ युवकों ने तोड़फोड़ की वारदात को अंजाम दिया। युवकों को ऐसा करने से रोके जाने पर उन्होंने ईंटों से हमला कर दिया। तोड़फोड़ की यह घटना सीसीटीवी में कैद हो गई। हालांकि इसमें किसी के जख्मी होने की जानकारी नहीं मगर इस वारदात में गुरुद्वारा के प्रधान के घर के बाहर खड़ी कार काफी क्षतिग्रस्त हुई है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज लेकर हमलावरों की पहचान व मामले में जांच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक वल्ला थानाक्षेत्र में पत्ती बाबा जीवन सिंह जी निवासी गुरुद्वारा बाबा जीवन सिंह के प्रधान व समाज सेवक कश्मीर सिंह काकू के घर के बाहर कुछ युवक शराबी हालत में पहुंचे। युवकों ने घर के बाहर खड़ी कार के शीशे तोड़ दिए। हमलावरों ने समाज सेवक के भतीजे के घर के बाहर दरवाजे पर ईंटे मारी, क्योंकि उन्होंने आरोपियों को झगड़ा करने से रोका था। घटना रात करीब ग्यारह. पंद्रह बजे की है, जो सीसीटीवी में कैद हो गई। वहीं एसीपी पूर्वी गुरप्रताप सिंह सहोता ने बताया कि पुरानी रंजिश का मामला है। हमले केे बाबत सीसीटीवी की पूरी फुटेज लेकर जांच की जा रही है। एसीपी ने बताया कि हमलावरों की पहचान के बाद उनके खिलाफ बनती कानूनी कार्रवाई की जाएगी। |
Government Job: लवे सुरक्षा बल (RPF) द्वारा कॉन्स्टेबल और सहायक उपनिरीक्षक ASI के कई पदों पर भर्ती के लिए योग्य आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी इन पदों पर आवेदन करने के लिए आरपीएफ की अधिकारिक वेबसाइट @rpf. indianrailways. gov. in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
Cyber Crime: दरअसल, एक महिला कांस्टेबल इस ठगी का शिकार हुई है। असम राइफल्स में तैनात इस महिला कांस्टेबल को भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक से शादी करने की तमन्ना के चक्कर में 60 लाख रुपये की ठगी का शिकार होना पड़ा। जिसके बाद इस महिला ने नोएडा के सेक्टर 36 स्थित साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने नाइजीरियन व्यक्ति को दिल्ली के वसंत कुंज से गिरफ्तार कर लिया है।
ड्यूटी के प्रति समर्पित और कोरोना जैसी घातक महामारी से भी न डरने वाली 26 साल की महिला सिपाही मौसम यादव दक्षिणी दिल्ली जिले के महरौली थाने में तैनात हैं।
| Government Job: लवे सुरक्षा बल द्वारा कॉन्स्टेबल और सहायक उपनिरीक्षक ASI के कई पदों पर भर्ती के लिए योग्य आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी इन पदों पर आवेदन करने के लिए आरपीएफ की अधिकारिक वेबसाइट @rpf. indianrailways. gov. in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। Cyber Crime: दरअसल, एक महिला कांस्टेबल इस ठगी का शिकार हुई है। असम राइफल्स में तैनात इस महिला कांस्टेबल को भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक से शादी करने की तमन्ना के चक्कर में साठ लाख रुपये की ठगी का शिकार होना पड़ा। जिसके बाद इस महिला ने नोएडा के सेक्टर छत्तीस स्थित साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने नाइजीरियन व्यक्ति को दिल्ली के वसंत कुंज से गिरफ्तार कर लिया है। ड्यूटी के प्रति समर्पित और कोरोना जैसी घातक महामारी से भी न डरने वाली छब्बीस साल की महिला सिपाही मौसम यादव दक्षिणी दिल्ली जिले के महरौली थाने में तैनात हैं। |
कठुआ। सामाजिक और धार्मिक सुधार के अग्रदूत राजाराम मोहन राय की जयंती पर राजकीय जिला पुस्तकालय कठुआ द्वारा महिला अधिकारिता रैली का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न स्कूलों की छात्राओं, पुस्तकालय के पाठकों व स्टाफ ने भाग लेकर महिला शिक्षा और उन्हें सशक्त बनाने के लिए अपनी आवाज बुलंद की। महिलाओं को शिक्षित व सशक्त बनाओ के नारे लगाए।
जिला पुस्तकालय परिसर से शुरू होने वाली रैली को जिला विकास परिषद के उपचेयरमैन रघुनंदन सिंह बबलू और नगरी ब्लॉक से जिला विकास परिषद के सदस्य संदीप मजोत्रा ने झंडी दिखा कर रवाना किया। इसके बाद रैली में शामिल प्रतिभागियों ने शहीदी चौक, कृष्णा कॉलोनी, कैप्टन सुनील चौधरी चौक होते हुए वापस जिला पुस्तकालय परिसर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने महिलाओं को शिक्षित करो, महिलाओं को सशक्त बनाओ का नारा देकर समाज के निर्माण में उनकी सशक्त भागीदारी को बढ़ाने पर बल दिया। इस मौके पर जिला विकास परिषद के उपचेयरमैन रघुनंदन सिंह बबलू ने राजाराम मोहन राय की 250 वीं जयंती पर इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए पुस्तकालय के प्रयास की सराहना की। वहीं, लाइब्रेरियन डॉ़ दीपा शर्मा ने कार्यक्रम विवरण देते हुए इसके उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। वहीं वक्ताओं ने राजाराम मोहन राय के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने बाल-विवाह, सती प्रथा, जातिवाद, कर्मकांड, पर्दा प्रथा आदि बुराइयों में जकड़े हमारे तत्कालीन समाज को निकालने के जो काम किया, वह सराहनीय है। अंत में मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष सभ्या रानी ने सभी अतिथियों का आभार जताया।
| कठुआ। सामाजिक और धार्मिक सुधार के अग्रदूत राजाराम मोहन राय की जयंती पर राजकीय जिला पुस्तकालय कठुआ द्वारा महिला अधिकारिता रैली का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न स्कूलों की छात्राओं, पुस्तकालय के पाठकों व स्टाफ ने भाग लेकर महिला शिक्षा और उन्हें सशक्त बनाने के लिए अपनी आवाज बुलंद की। महिलाओं को शिक्षित व सशक्त बनाओ के नारे लगाए। जिला पुस्तकालय परिसर से शुरू होने वाली रैली को जिला विकास परिषद के उपचेयरमैन रघुनंदन सिंह बबलू और नगरी ब्लॉक से जिला विकास परिषद के सदस्य संदीप मजोत्रा ने झंडी दिखा कर रवाना किया। इसके बाद रैली में शामिल प्रतिभागियों ने शहीदी चौक, कृष्णा कॉलोनी, कैप्टन सुनील चौधरी चौक होते हुए वापस जिला पुस्तकालय परिसर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने महिलाओं को शिक्षित करो, महिलाओं को सशक्त बनाओ का नारा देकर समाज के निर्माण में उनकी सशक्त भागीदारी को बढ़ाने पर बल दिया। इस मौके पर जिला विकास परिषद के उपचेयरमैन रघुनंदन सिंह बबलू ने राजाराम मोहन राय की दो सौ पचास वीं जयंती पर इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए पुस्तकालय के प्रयास की सराहना की। वहीं, लाइब्रेरियन डॉ़ दीपा शर्मा ने कार्यक्रम विवरण देते हुए इसके उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। वहीं वक्ताओं ने राजाराम मोहन राय के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने बाल-विवाह, सती प्रथा, जातिवाद, कर्मकांड, पर्दा प्रथा आदि बुराइयों में जकड़े हमारे तत्कालीन समाज को निकालने के जो काम किया, वह सराहनीय है। अंत में मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष सभ्या रानी ने सभी अतिथियों का आभार जताया। |
Kieron Pollard: किरोन पोलार्ड ने 600 टी-20 मैचों में 31. 34 की औसत से 11,723 रन बनाए हैं और इस दौरान उन्होंने एक शतक व 56 अर्धशतक भी लगाए हैं। इस कैरेबियाई हरफनमौला खिलाड़ी का गेंदबाजी में भी शानदार रिकार्ड है।
बीते साल दिसंबर में संन्यास से वापस लौटने के बाद आयरलैंड के खिलाफ खेली जाने वाली टी-20 सीरीज के लिए वेस्टइंडीज की टीम में चुने गए हरफनमौला खिलाड़ी ड्वेन ब्रावो ने कहा है कि वह एक बार फिर से बच्चा जैसे महसूस करने लगे हैं।
| Kieron Pollard: किरोन पोलार्ड ने छः सौ टी-बीस मैचों में इकतीस. चौंतीस की औसत से ग्यारह,सात सौ तेईस रन बनाए हैं और इस दौरान उन्होंने एक शतक व छप्पन अर्धशतक भी लगाए हैं। इस कैरेबियाई हरफनमौला खिलाड़ी का गेंदबाजी में भी शानदार रिकार्ड है। बीते साल दिसंबर में संन्यास से वापस लौटने के बाद आयरलैंड के खिलाफ खेली जाने वाली टी-बीस सीरीज के लिए वेस्टइंडीज की टीम में चुने गए हरफनमौला खिलाड़ी ड्वेन ब्रावो ने कहा है कि वह एक बार फिर से बच्चा जैसे महसूस करने लगे हैं। |
कई दिनों तक चली चर्चा के बाद आखिरकार पीएम नरेंद्र मोदी कैबिनेट में 43 नए मंत्री शामिल हो गए हैं। पश्चिम बंगाल कोटे के मंत्री बाबुल सुप्रियो का इस्तीफा लेने के बाद राज्य से चार नए चेहरों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। इनमें डॉ सुभाष सरकार, शांतनु ठाकुर, जॉन बारला और नीशीथ प्रमाणिक का नाम शामिल है। इन मंत्रियों ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में मंत्री पद की शपथ ली है। नीशीथ प्रामाणिक सिर्फ 35 साल के हैं। वह मोदी सरकार में शामिल होने वाले सबसे युवा मंत्री हैं।
सुभाष सरकार, शांतनु ठाकुर, जॉन बारला और नीशीथ प्रामाणिक को मंत्री बनाया गया है। हालांकि, ममता ने बाबुल और देबोश्री की विदाई सहित बड़े बदलाव पर तंज भी कसा। देबोश्री के इलाके रायगंज में भाजपा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। वहीं बाबुल अपना चुनाव भी नहीं जीत पाए थे। साथ ही चुनाव के दौरान ही पार्टी के कुछ फैसलों पर उन्होंने सवाल खड़े किए थे। जानकारों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए सभी समीकरणों को ध्यान में रखकर कैबिनेट में बदलाव किए गए हैं।
नीशीथ प्रमाणिक मोदी कैबिनेट में शामिल होने वाले सबसे युवा मंत्री हैं। मात्र 35 साल के प्रमाणिक कूचबिहार सीट से लोकसभा सांसद हैं। राजनीति में आने से पहले वह प्राइमरी स्कूल में अध्यापक थे। उन्होंने बीसीए की डिग्री हासिल की है। उनका जन्म जलपाईगुड़ी में हुआ है।
मोदी सरकार में नए मंत्री बने शांतनु ठाकुर सिर्फ 38 साल के हैं। वह बोगांव लोकसभा सीट से पहली बार के सांसद हैं। वह मतुआ समुदाय के वरिष्ठ नेता हैं। मतुआ समुदाय ने विधानसभा चुनाव में भाजपा का जबरदस्त साथ दिया था। लिहाजा समुदाय के नेता के तौर पर शांतनु ठाकुर को मंत्रिमंडल में जगह मिली। उन्होंने कर्नाटक ओपन यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में ग्रेजुएशन किया है। उनके पास हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट में डिप्लोमा भी है।
जॉन बारला अलीपुरद्वार लोकसभा सीट से पहली बार के सांसद हैं। उन्होंने उत्तरी बंगाल और असम में करीब दो दशक तक चाय मजदूरों के अधिकारों के लिए काम किया है। बेहद साधारण बैकग्राउंड से आने वाले बारला 14 साल की उम्र में चाय मजदूर का काम भी कर चुके हैं। 45 वर्षीय बारला का जन्म जलपाईगुड़ी में हुआ है।
| कई दिनों तक चली चर्चा के बाद आखिरकार पीएम नरेंद्र मोदी कैबिनेट में तैंतालीस नए मंत्री शामिल हो गए हैं। पश्चिम बंगाल कोटे के मंत्री बाबुल सुप्रियो का इस्तीफा लेने के बाद राज्य से चार नए चेहरों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी गई है। इनमें डॉ सुभाष सरकार, शांतनु ठाकुर, जॉन बारला और नीशीथ प्रमाणिक का नाम शामिल है। इन मंत्रियों ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में मंत्री पद की शपथ ली है। नीशीथ प्रामाणिक सिर्फ पैंतीस साल के हैं। वह मोदी सरकार में शामिल होने वाले सबसे युवा मंत्री हैं। सुभाष सरकार, शांतनु ठाकुर, जॉन बारला और नीशीथ प्रामाणिक को मंत्री बनाया गया है। हालांकि, ममता ने बाबुल और देबोश्री की विदाई सहित बड़े बदलाव पर तंज भी कसा। देबोश्री के इलाके रायगंज में भाजपा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। वहीं बाबुल अपना चुनाव भी नहीं जीत पाए थे। साथ ही चुनाव के दौरान ही पार्टी के कुछ फैसलों पर उन्होंने सवाल खड़े किए थे। जानकारों का कहना है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए सभी समीकरणों को ध्यान में रखकर कैबिनेट में बदलाव किए गए हैं। नीशीथ प्रमाणिक मोदी कैबिनेट में शामिल होने वाले सबसे युवा मंत्री हैं। मात्र पैंतीस साल के प्रमाणिक कूचबिहार सीट से लोकसभा सांसद हैं। राजनीति में आने से पहले वह प्राइमरी स्कूल में अध्यापक थे। उन्होंने बीसीए की डिग्री हासिल की है। उनका जन्म जलपाईगुड़ी में हुआ है। मोदी सरकार में नए मंत्री बने शांतनु ठाकुर सिर्फ अड़तीस साल के हैं। वह बोगांव लोकसभा सीट से पहली बार के सांसद हैं। वह मतुआ समुदाय के वरिष्ठ नेता हैं। मतुआ समुदाय ने विधानसभा चुनाव में भाजपा का जबरदस्त साथ दिया था। लिहाजा समुदाय के नेता के तौर पर शांतनु ठाकुर को मंत्रिमंडल में जगह मिली। उन्होंने कर्नाटक ओपन यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में ग्रेजुएशन किया है। उनके पास हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट में डिप्लोमा भी है। जॉन बारला अलीपुरद्वार लोकसभा सीट से पहली बार के सांसद हैं। उन्होंने उत्तरी बंगाल और असम में करीब दो दशक तक चाय मजदूरों के अधिकारों के लिए काम किया है। बेहद साधारण बैकग्राउंड से आने वाले बारला चौदह साल की उम्र में चाय मजदूर का काम भी कर चुके हैं। पैंतालीस वर्षीय बारला का जन्म जलपाईगुड़ी में हुआ है। |
दिल्ली पुलिस ने त्रिलोकपुरी में मां और बेटे को गिरफ्तार किया है, जिन पर पिता की हत्या कर शव के 22 टुकड़े करने का आरोप है. (ANI Photo)
नई दिल्लीः अभी श्रद्धा हत्याकांड की भयावहता से दिल्ली उबरी भी नहीं थी कि वैसी ही एक और वारदात सामने आ गई. पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी में बेटे ने मां के साथ मिलकर पिता की हत्या की और फिर उसके शव के टुकड़े कर फ्रिज में रख दिए. दोनों शव के टुकड़ों को एक-एक कर ठिकाने लगाते थे. सीसीटीवी फुटेज की मदद से इस पूरे मामले का राजफाश हुआ और पुलिस दोनों आरोपियों तक पहुंच गई. पुलिस के मुताबिक पति को नशे की गोलियां खिलाकर मां ने बेटे के साथ इस दिल दहलाने वाले हत्याकांड को अंजाम दिया. मृतक का नाम अंजन दास बताया जा रहा है. आरोपी पत्नी पूनम और बेटे दीपक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. दोनों ने जून में ही यह मर्डर किया था. अब जाकर इसका पर्दाफाश हुआ. हत्या की वजह अवैध संबंध बताया जा रहा है.
पुलिस के मुताबिक मां पति की हरकतों से परेशान थी. मृतक अंजन के दूसरी औरतों से संबंध थे, जिससे बेटा भी चिढ़ा था. मृतक की शराब की लत से भी मां-बेटे गुस्सा थे. दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के सूत्रों के मुताबिक शख्स की लाश के 22 टुकड़े किए गए, जिसमें से करीब 12 से 15 टुकड़ों को बरामद किया गया है. धड़ अब भी नहीं मिला है. मृतक शख्स लिफ्ट मैन था. पत्नी हाउस वाइफ थी और बेटा प्राइवेट जॉब करता था. शिकारी चाक़ू और एक अन्य हथियार से शव के टुकड़े करके फ्रिज में रखे गए. पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल एक हथियार बरामद कर लिया है. शिकारी चाकू नहीं मिला है. शव के टुकड़ों को फ्रिज में छिपाने के बाद घर मे पेंट कराया गया ताकि बदबू न आए. कई महीनों तक पाडंव नगर और ईस्ट दिल्ली के अलग-अलग इलाको में मां और बेटे शव के टुकड़े फेंकते रहे.
दरअसल, मां-बेटे फ्रिज में रखे शव के टुकड़े को रात में पांडव नगर रामलीला ग्राउंड में फेंक देते थे. जब वहां बदबू फैलने लगी तो आसपास के लोगों ने इसकी शिकायत पुलिस से की. बाद में वहां शव के टुकड़े बरामद हुए. पुलिस ने इसके बाद आसपास के थाने में मिसिंग लोगों की शिकायत जांचने लगी और तहकीकात आगे बढ़ने पर अंजन दास के लापता होने की बात पता चली. फिर पुलिस ने रामलीला ग्राउंड के आसपास लगे सीसीटीवी के फुटेज खंगाले. उन्हें मां और बेटे कुछ फेंकते हुए दिखाई दिए. इसके बाद पुलिस उन्हें ढूंढते हुए त्रिलोकपुरी स्थित उस घर तक पहुंची जहां वे किराए पर रहते थे. घर की तलाशी ली गई तो फ्रिज में शव के टुकड़े रखे मिले. पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो मां और बेटे ने अंजन दास की हत्या की बात कबूल कर ली. मकान मालिक लक्ष्मी ने बताया कि पति, पत्नी और बेटा 5 साल से उनके यहां ही रह रहे थे. बहुत लड़ाइयां होती थीं उनके बीच.
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| दिल्ली पुलिस ने त्रिलोकपुरी में मां और बेटे को गिरफ्तार किया है, जिन पर पिता की हत्या कर शव के बाईस टुकड़े करने का आरोप है. नई दिल्लीः अभी श्रद्धा हत्याकांड की भयावहता से दिल्ली उबरी भी नहीं थी कि वैसी ही एक और वारदात सामने आ गई. पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी में बेटे ने मां के साथ मिलकर पिता की हत्या की और फिर उसके शव के टुकड़े कर फ्रिज में रख दिए. दोनों शव के टुकड़ों को एक-एक कर ठिकाने लगाते थे. सीसीटीवी फुटेज की मदद से इस पूरे मामले का राजफाश हुआ और पुलिस दोनों आरोपियों तक पहुंच गई. पुलिस के मुताबिक पति को नशे की गोलियां खिलाकर मां ने बेटे के साथ इस दिल दहलाने वाले हत्याकांड को अंजाम दिया. मृतक का नाम अंजन दास बताया जा रहा है. आरोपी पत्नी पूनम और बेटे दीपक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. दोनों ने जून में ही यह मर्डर किया था. अब जाकर इसका पर्दाफाश हुआ. हत्या की वजह अवैध संबंध बताया जा रहा है. पुलिस के मुताबिक मां पति की हरकतों से परेशान थी. मृतक अंजन के दूसरी औरतों से संबंध थे, जिससे बेटा भी चिढ़ा था. मृतक की शराब की लत से भी मां-बेटे गुस्सा थे. दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के सूत्रों के मुताबिक शख्स की लाश के बाईस टुकड़े किए गए, जिसमें से करीब बारह से पंद्रह टुकड़ों को बरामद किया गया है. धड़ अब भी नहीं मिला है. मृतक शख्स लिफ्ट मैन था. पत्नी हाउस वाइफ थी और बेटा प्राइवेट जॉब करता था. शिकारी चाक़ू और एक अन्य हथियार से शव के टुकड़े करके फ्रिज में रखे गए. पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल एक हथियार बरामद कर लिया है. शिकारी चाकू नहीं मिला है. शव के टुकड़ों को फ्रिज में छिपाने के बाद घर मे पेंट कराया गया ताकि बदबू न आए. कई महीनों तक पाडंव नगर और ईस्ट दिल्ली के अलग-अलग इलाको में मां और बेटे शव के टुकड़े फेंकते रहे. दरअसल, मां-बेटे फ्रिज में रखे शव के टुकड़े को रात में पांडव नगर रामलीला ग्राउंड में फेंक देते थे. जब वहां बदबू फैलने लगी तो आसपास के लोगों ने इसकी शिकायत पुलिस से की. बाद में वहां शव के टुकड़े बरामद हुए. पुलिस ने इसके बाद आसपास के थाने में मिसिंग लोगों की शिकायत जांचने लगी और तहकीकात आगे बढ़ने पर अंजन दास के लापता होने की बात पता चली. फिर पुलिस ने रामलीला ग्राउंड के आसपास लगे सीसीटीवी के फुटेज खंगाले. उन्हें मां और बेटे कुछ फेंकते हुए दिखाई दिए. इसके बाद पुलिस उन्हें ढूंढते हुए त्रिलोकपुरी स्थित उस घर तक पहुंची जहां वे किराए पर रहते थे. घर की तलाशी ली गई तो फ्रिज में शव के टुकड़े रखे मिले. पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो मां और बेटे ने अंजन दास की हत्या की बात कबूल कर ली. मकान मालिक लक्ष्मी ने बताया कि पति, पत्नी और बेटा पाँच साल से उनके यहां ही रह रहे थे. बहुत लड़ाइयां होती थीं उनके बीच. . |
जयपुर में राहुल गांधी ने हिंदू-हिंदुत्व-हिंदुत्ववादी के नाम पर वैचारिक जलेबी बना दी!
जयपुर में आयोजित कांग्रेस की राष्ट्रव्यापी महंगाई रैली के बाद यह चर्चा आम हो चली है कि जो कुछ रैली में हुआ वह कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा है या फिर हमेशा की तरह कांग्रेस आज भी ग़लत ट्रैक पर उतर गई. क्या यूपी का चुनाव अब असली हिंदू-बनाम नक़ली हिंदू पर होने वाला है? कांग्रेस बीजेपी के हिंदूत्व का कार्ड समझ गई है या बीजेपी के पिच पर आकर खेलने के लिए मजबूर कर दी गई है?
राहुल गांधी कांग्रेस के मंच पर खूब गरजे, बरसे. रैली का नाम मंहगाई हटाओ, बीजेपी हटाओ था मगर राहुल गांधी ने मंच पर आते ही कह दिया कि इस पर बाद में आऊंगा. पहले पांच मिनट कुछ और बात करना चाहता हूं और फिर महंगाई, काले क़ानून पर खूब बोलूंगा पर शायद वैचारिक लड़ाई में इस कदर भटके या खोए कि उल्टा हो गया. राहुल महंगाई और काले क़ानून पर पांच मिनट बोले और अपनी 'कुछ और बात' पर खूब बोले.
क्या यह राहुल गांधी के अवतार-2 की शुरुआत है?
इसके बाद राहुल गांधी मंच पर नेता कम और विचारक की तरह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से भी लंबा पॉज ले-लेकर यह समझाने लगे कि हिन्दू और हिंदुत्व में क्या अंतर है. जिस तरह राहुल गांधी ने शुरुआत की, उसे देखते हुए एकबार तो नेताओं और श्रोताओं में सन्नाटा छा गया कि आख़िर राहुल गांधी कहना क्या चाहते हैं. दो मिनट तक उन्होंने यह समझाया कि एक शब्द के दो मतलब नहीं होते हैं और उसके बाद समझाया कि हम गांधी के हिंदू है और BJP वाले गोडसे के हिंदुत्ववादी हैं.
राहुल गांधी ने कहा कि हम सच के लिए लड़ने वाले हैं, वह सच के लिए कुछ भी करने वाले हैं. साथ में यह भी कह दिया कि पूरा जीवन बिता देंगे सत्य की खोज में, क्योंकि असली हिन्दू वही है जो जीवन सत्य की खोज में बीता दे. राहुल गांधी के भाषण से साफ़ झलक रहा था कि महंगाई तो बहाना है, उत्तरप्रदेश चुनाव असली निशाना है क्योंकि जिन मुद्दों पर प्रियंका गांधी और राहुल गांधी जनता के बीच जा रहे हैं वह सिरे चढ़ नहीं पा रहा है.
BJP जिस तरह से अयोध्या, काशी और मथुरा को अपने पिटारे से निकाल कर वापस चुनावी युद्ध के मैदान में ला खड़ा किया है. उसे देखकर कांग्रेस को लगने लगा है कि लड़ाई विचारधारा की है और जनता के बीच वैचारिक लड़ाई को लेकर जाना होगा. राहुल गांधी ने कहा कि वह हिंदू राज लाना चाहते हैं मगर तभी कहते हैं कि वह सत्ता के लिए नहीं लड़ना चाहते हैं.
कांग्रेसी कह रहे हैं कि राहुल गांधी ने क्या शानदार बोला है मगर सच तो यह है कि ना गांधी सत्ता की राजनीति कर रहे थे और न गोडसे सत्ता की राजनीति कर रहे थे. जबकि राहुल गांधी सत्ता की राजनीति करने राजनीति में आए हैं. राहुल गांधी को तय करना है कि वह अपना जीवन सत्य की खोज में बिठा देंगे या फिर सत्ता की तलाश में लगे कांग्रेसियों को भी सहारा दे पाएंगे.
उत्तर प्रदेश चुनाव में यह चुनावी विषय हो सकता है कि कांग्रेस नक़ली हिन्दू-असली हिन्दू का कार्ड खेले क्योंकि जानबूझकर राहुल गांधी के इस भाषण को कांग्रेस की महंगाई के ख़िलाफ़ राष्ट्रव्यापी रैली का पोस्टर बनाया गया है. BJP जिस तरह से बढ़ती जा रही है कांग्रेस को लगने लगा है कि सांप्रदायिक आधार पर समाज के बँटवारे को जनता से जुड़े मुद्दे रोक नहीं सकते हैं.
इंदिरा गाँधी के ज़माने में महंगाई बड़ा मुद्दा बन चुका है मगर हिंदुस्तान में यह राजनीति का मिज़ाज रहा है कि काठ की हांडी बार बार चढ़ती नहीं है और फिर जानता यह तय नहीं कर पा रही है कि महंगाई किसके सरकार के समय ज़्यादा बढ़ थी इसलिए हो सकता है कि कांग्रेस ने महँगाई की इस रैली को हिन्दू बनाम हिंदुत्व की रैली में बदल दिया हो.
राहुल गांधी ने कहा कि हिंदू और हिंदुत्व का मामला समझाने के बाद में महँगाई के मुद्दे पर आऊँगा मगर वह आए नहीं, क्योंकि राहुल गांधी लंबे समय से राजनेता कम और वैचारिक प्रतिबद्धता के प्रति प्रतिबद्ध समाज सुधारक ज़्यादा लगने लगे हैं. राजनेता को गैलरी प्ले करना होता है जिसकी कमी कांग्रेस की रैली में आज भी दिखी.
राहुल गांधी किसानों के मुद्दे पर भी कम ही बोले और वह जनता को यह समझाने में लगे रहे की हिंदुत्ववादी सोच की वजह से यह सत्ता में हैं और हिंदुत्ववादी सोच ही महँगाई और किसानों की भी समस्या है. एक हद तक राहुल गांधी सही भी सोच रहे हैं क्योंकि कांग्रेस की समस्या BJP की कट्टर हिंदूवादी छवि है जिससे जिन हिन्दुओं को धार्मिक उन्माद से कोई मतलब नहीं है वह भी BJP को अपने धर्म की पार्टी समझने लगा है और यही कांग्रेस की समस्या की जड़ भी है.
NDA की अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार जाने के बाद एक बार पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि BJP का समय बुरा चल रहा है. रैली का मिज़ाज देख ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस का समय भी सही नहीं चल रहा है. आप यह कह सकते हैं कि आज के वर्चुअल ज़माने में जयपुर में बैठकर उत्तरप्रदेश के मसले पर राजनीति क्यों नहीं की जा सकती है मगर वक़्त और स्थान की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण जगह होती है.
जयपुर के मंच से हिन्दू और हिंदुत्व पर राहुल गांधी के दर्शन का क्या मतलब था या लोग समझ नहीं पा रहे हैं. राजस्थान के कोने कोने से बसों में भरकर लोगों को महँगाई के ख़िलाफ़ राहुल गांधी के बिगुल बजाने की आवाज़ सुनाने के लिए बुलाया गया था मगर बाद राहुल गांधी का हिन्दू दर्शन समझ कर लौटे.
दरअसल राजस्थान का मिज़ाज कभी हिंदू मुसलमान का रहा ही नहीं है. भैरोसिंह शेखावत हों या फिर वसुंधरा राजे, यह लोग हिंदूवादी छवि से कोसों दूर रहे. कभी भी राजस्थान में सांप्रदायिक आधार पर चुनाव नहीं हुए. इसलिए हिन्दू दर्शन के लिए जयपुर का चुना जाना रणनीतिक रूप से सही क़दम नहीं था.
हालाँकि कुछ विश्लेषक यह भी कह रहे हैं कि कांग्रेस के लिए अच्छा क़दम है कि जनता से जुड़े मुद्दों पर उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी लड़ती नज़र आए और वैचारिक मुद्दे पर राहुल गांधी BJP को घेरते नज़र आए, मगर यह भ्रम की स्थिति पैदा करेगा. कांग्रेस इस बात को बख़ूबी समझती है इसलिए राजस्थान में पहली बार रैली को संबोधित करने आयी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को नेपथ्य में रखा गया. राहुल गांधी के मंच पर आने से पहले ही उनका संक्षिप्त भाषण ख़त्म करा दिया गया. प्रियंका गांधी अपने भाषण में उत्तर प्रदेश तक सीमित रही.
हालाँकि प्रियंका जनता की नस पकड़ना राहुल से बेहतर समझती हैं. उन्होंने मंच पर चढ़ते ही राजस्थानी भाषा में लोगों का अभिवादन किया तो जनता ने ज़ोरदार स्वागत किया. प्रियंका का भाषण ख़त्म होते ही राहुल मंच पर माँ सोनिया गांधी के साथ अवतरित हुए. राहुल गांधी मंच पर आए तो सारे नेताओं ने खड़े होकर स्वागत किया और मंच से जनता से कहा गया कि कुर्सियों से खड़े होकर राहुल गांधी का स्वागत किया जाए.
राहुल गांधी के एंट्री किसी रियलिटी शो या अवार्ड फ़ंक्शन के टेलिविज़न सेट पर किसी सुपरस्टार की एंट्री की तरह रखी गई. DJ की धुन पर राहुल गांधी ने ग्रांड एंट्री मारी. कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इशारा किया कि राहुल जनता की तरफ़ हाथ हिलाकर जनता का स्वागत करें.
राहुल गांधी ने भाषण ख़त्म किया तो भी डीजे बजा और फिर सभी नेताओं ने खड़े होकर राहुल गांधी को ग्रांड एक्जिट भी दिया. हालाँकि राहुल गांधी अपनी वैचारिक सोच में इस तरह डूब गए कि कई बार मंच पर कहते नज़र आए कि हमारे पंचाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी यहाँ बैठे हुए हैं जबकि चन्नी आए नहीं थे. आख़िर में जब उन्होंने कहा कि चन्नी जी बताइए तब सोनिया गांधी समेत कांग्रेस के सभी नेताओं को कहना पड़ा कि चन्नी नहीं आए नहीं है. यह जानता में बड़ा उपहास का विषय रहा और कहा जा रहा है कि मंच पर जो सोनिया गांधी का ग़ुस्सा दिख रहा था वह इसी बात को लेकर दिख रहा था कि राहुल गांधी लिखा हुआ पढ़ रहे थे, तभी उन्होंने अपने संबोधन के पहले भी चन्नी का स्वागत किया था.
पहले राजस्थान के प्रभारी अजय माकन को बुलाकर सोनिया गांधी तेज़ तेज़ इशारा कर कुछ बोलती नज़र आई, फिर कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को बुलाया गया. दो और नेताओं को तलब किया गया. मंच पर ही सोनिया का ग़ुस्सा नज़र आ रहा था कि राहुल को चन्नी को लेकर स्वागत पर्ची किसने बनाई थी और फिर न जाने क्या हुआ कि सोनिया गांधी ने राजस्थान के प्रभारी अजय माकन से कहा कि वह भाषण नहीं देंगी.
वह इशारा करके बोलती नज़र आयी कि मेरा नाम मत लेना, मुझे मत बुलाना. हो सकता है कि सोनिया गांधी कि यह रणनीति का हिस्सा था कि आज राहुल के भाषण को ही देश में सुना जाए और इसी पर चर्चा हो. हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद क़रीब दो साल बाद पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी किसी सार्वजनिक सभा में मंच पर आयी थी मगर उन्होंने आज कुछ भी नहीं बोला.
इसके साथ यह भी साफ़ हो गया कि यह रैली राहुल की ताज़पोशी से पहले राहुल के लार्जर दैन लाइफ़ इमेज को स्थापित करने के लिए आयी थी. पूरे मैदान में राहुल गांधी के बड़े बड़े कटआउट लगाए गए थे. सारे वक्ताओं ने 2-3 मिनट ही बोला, केवल राहुल गांधी 15 मिनट बोले. राहुल गांधी नीति और नीयत को लेकर साफ़ नज़र आते हैं मगर नेता के तौर पर जनता से उनका कनेक्ट हो नहीं पाता है. यह बात आज भी साफ़ देखी गई, जब वे पूंजीपतियों को बार बार पूंजापति-पूंजापति बोल रहे थे तो जानता हंस रही थी.
शास्त्रों की जगह कह रहे थे कि शस्त्र में लिखा हुआ है तब भी जनता पीछे से कह रही थी कि शास्त्र बोलो और फिर बार बार उनका चन्नी को मंच पर खोजना और चन्नी का नहीं होना भी उपहास का विषय बना रहा. मगर इस सबके बावजूद राहुल गांधी ने जिस तरह से हिम्मत दिखाई है कि BJP के हिंदुत्व के खिलाफ़ वह हिन्दू बन कर खड़े होंगे.
अपने आप में यह कांग्रेस के लिए देर से आए मगर दुरुस्त कदम है. नेहरू -पटेल की विरासत को राहुल गांधी हिन्दू बनकर कंधे पर ढोकर आगे ले जा सकते हैं और इसी से मुक़ाबला भी कर सकते हैं. मगर पार्टी के लिए नीति और नीयत के अलावा नेता की खोज में अभी भी राहुल गांधी जनता के बीच जमें नज़र नहीं आए.
जनता की नज़रें प्रियंका गांधी पर थी मगर प्रियंका गांधी भ्राता प्रेम में ख़ुद को कांग्रेस के दूसरी पंक्ति के नेताओं के बीच बैठकर राहुल राहुल गांधी को कमान देने की कोशिश करती नज़र आ रही थी. इसी जयपुर में राहुल गांधी पहली बार कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए थे और तब उन्होंने कहा था माँ ने कहा है सत्ता ज़हर है. राहुल गांधी के बारे में कहा जाता है कि तब से वह सत्ता को ज़हर मानकर दूर बैठे हुए हैं मगर आज की रैली में उन्होंने कहा कि मैं विषपान करने के लिए तैयार हूँ और मैं शिव की तरह नीलकंठ बनना चाहता हूँ. जब राहुल शिव बनना चाहते हैं तो कांग्रेस की छटपटाहट सत्ता के लिए साफ़ दिख रही थी.
कांग्रेस के भावी राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह कहना कि हिंदू राष्ट्र हम लाएँगे, सत्ता के लिए हताशा दिखाता है. इसी जयपुर में जब राहुल गांधी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर ताज़पोशी हुई थी तो तब तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हिंदु आतंकवाद का नाम लेकर हंगामा मचा दिया था और आज इसी जयपुर में राहुल गांधी ने हिंदू राज स्थापित करने की बात कही है. साफ़ है कांग्रेस इतने सालों में या तो भ्रम में जी रही है या भ्रम से उबरने में लगी हुई है.
राहुल गांधी यहां जब राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने थे तब भी सोनिया गांधी ने नेपथ्य में बैठकर उनका सत्ता दर्शन सुन कर ताली बजा रही थी और आज जब एक बार फिर से वह राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की तैयारी कर रहे हैं तो सोनिया गांधी स्टेज पर बैठकर राहुल गांधी के हिन्दू दर्शन पर ताली बजा रही थी.
इसीलिए सवाल उठ रहा है कि कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष को कुछ बोलना नहीं था और भाषण देना नहीं था तब आयी क्यों थी? क्या राहुल के नए अवतार और नए दर्शन को सुनने आयी थी? उस वक़्त भी भाई राहुल को सुनने के लिए बहन प्रियंका अलग से आयी थी और आज भी अलग से आयी हैं तो क्या राहुल गांधी के अवतार-2 की शुरुआत है?
यह रास्ता सत्ता तक कैसे जाएगा इसे लेकर भ्रम की स्थिति कांग्रेस में बनी हुई है क्योंकि जब जनता को आप महंगाई का दर्द सुनाने के लिए बुलाते हैं और हिंदुत्व का दर्शन सुनाते हैं तो साफ़ है कि भ्रम की स्थिति की वजह से आप तैयार नहीं हैं और आधी-अधूरी तैयारी के साथ जंग नहीं जीती जाती.
| जयपुर में राहुल गांधी ने हिंदू-हिंदुत्व-हिंदुत्ववादी के नाम पर वैचारिक जलेबी बना दी! जयपुर में आयोजित कांग्रेस की राष्ट्रव्यापी महंगाई रैली के बाद यह चर्चा आम हो चली है कि जो कुछ रैली में हुआ वह कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा है या फिर हमेशा की तरह कांग्रेस आज भी ग़लत ट्रैक पर उतर गई. क्या यूपी का चुनाव अब असली हिंदू-बनाम नक़ली हिंदू पर होने वाला है? कांग्रेस बीजेपी के हिंदूत्व का कार्ड समझ गई है या बीजेपी के पिच पर आकर खेलने के लिए मजबूर कर दी गई है? राहुल गांधी कांग्रेस के मंच पर खूब गरजे, बरसे. रैली का नाम मंहगाई हटाओ, बीजेपी हटाओ था मगर राहुल गांधी ने मंच पर आते ही कह दिया कि इस पर बाद में आऊंगा. पहले पांच मिनट कुछ और बात करना चाहता हूं और फिर महंगाई, काले क़ानून पर खूब बोलूंगा पर शायद वैचारिक लड़ाई में इस कदर भटके या खोए कि उल्टा हो गया. राहुल महंगाई और काले क़ानून पर पांच मिनट बोले और अपनी 'कुछ और बात' पर खूब बोले. क्या यह राहुल गांधी के अवतार-दो की शुरुआत है? इसके बाद राहुल गांधी मंच पर नेता कम और विचारक की तरह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से भी लंबा पॉज ले-लेकर यह समझाने लगे कि हिन्दू और हिंदुत्व में क्या अंतर है. जिस तरह राहुल गांधी ने शुरुआत की, उसे देखते हुए एकबार तो नेताओं और श्रोताओं में सन्नाटा छा गया कि आख़िर राहुल गांधी कहना क्या चाहते हैं. दो मिनट तक उन्होंने यह समझाया कि एक शब्द के दो मतलब नहीं होते हैं और उसके बाद समझाया कि हम गांधी के हिंदू है और BJP वाले गोडसे के हिंदुत्ववादी हैं. राहुल गांधी ने कहा कि हम सच के लिए लड़ने वाले हैं, वह सच के लिए कुछ भी करने वाले हैं. साथ में यह भी कह दिया कि पूरा जीवन बिता देंगे सत्य की खोज में, क्योंकि असली हिन्दू वही है जो जीवन सत्य की खोज में बीता दे. राहुल गांधी के भाषण से साफ़ झलक रहा था कि महंगाई तो बहाना है, उत्तरप्रदेश चुनाव असली निशाना है क्योंकि जिन मुद्दों पर प्रियंका गांधी और राहुल गांधी जनता के बीच जा रहे हैं वह सिरे चढ़ नहीं पा रहा है. BJP जिस तरह से अयोध्या, काशी और मथुरा को अपने पिटारे से निकाल कर वापस चुनावी युद्ध के मैदान में ला खड़ा किया है. उसे देखकर कांग्रेस को लगने लगा है कि लड़ाई विचारधारा की है और जनता के बीच वैचारिक लड़ाई को लेकर जाना होगा. राहुल गांधी ने कहा कि वह हिंदू राज लाना चाहते हैं मगर तभी कहते हैं कि वह सत्ता के लिए नहीं लड़ना चाहते हैं. कांग्रेसी कह रहे हैं कि राहुल गांधी ने क्या शानदार बोला है मगर सच तो यह है कि ना गांधी सत्ता की राजनीति कर रहे थे और न गोडसे सत्ता की राजनीति कर रहे थे. जबकि राहुल गांधी सत्ता की राजनीति करने राजनीति में आए हैं. राहुल गांधी को तय करना है कि वह अपना जीवन सत्य की खोज में बिठा देंगे या फिर सत्ता की तलाश में लगे कांग्रेसियों को भी सहारा दे पाएंगे. उत्तर प्रदेश चुनाव में यह चुनावी विषय हो सकता है कि कांग्रेस नक़ली हिन्दू-असली हिन्दू का कार्ड खेले क्योंकि जानबूझकर राहुल गांधी के इस भाषण को कांग्रेस की महंगाई के ख़िलाफ़ राष्ट्रव्यापी रैली का पोस्टर बनाया गया है. BJP जिस तरह से बढ़ती जा रही है कांग्रेस को लगने लगा है कि सांप्रदायिक आधार पर समाज के बँटवारे को जनता से जुड़े मुद्दे रोक नहीं सकते हैं. इंदिरा गाँधी के ज़माने में महंगाई बड़ा मुद्दा बन चुका है मगर हिंदुस्तान में यह राजनीति का मिज़ाज रहा है कि काठ की हांडी बार बार चढ़ती नहीं है और फिर जानता यह तय नहीं कर पा रही है कि महंगाई किसके सरकार के समय ज़्यादा बढ़ थी इसलिए हो सकता है कि कांग्रेस ने महँगाई की इस रैली को हिन्दू बनाम हिंदुत्व की रैली में बदल दिया हो. राहुल गांधी ने कहा कि हिंदू और हिंदुत्व का मामला समझाने के बाद में महँगाई के मुद्दे पर आऊँगा मगर वह आए नहीं, क्योंकि राहुल गांधी लंबे समय से राजनेता कम और वैचारिक प्रतिबद्धता के प्रति प्रतिबद्ध समाज सुधारक ज़्यादा लगने लगे हैं. राजनेता को गैलरी प्ले करना होता है जिसकी कमी कांग्रेस की रैली में आज भी दिखी. राहुल गांधी किसानों के मुद्दे पर भी कम ही बोले और वह जनता को यह समझाने में लगे रहे की हिंदुत्ववादी सोच की वजह से यह सत्ता में हैं और हिंदुत्ववादी सोच ही महँगाई और किसानों की भी समस्या है. एक हद तक राहुल गांधी सही भी सोच रहे हैं क्योंकि कांग्रेस की समस्या BJP की कट्टर हिंदूवादी छवि है जिससे जिन हिन्दुओं को धार्मिक उन्माद से कोई मतलब नहीं है वह भी BJP को अपने धर्म की पार्टी समझने लगा है और यही कांग्रेस की समस्या की जड़ भी है. NDA की अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार जाने के बाद एक बार पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि BJP का समय बुरा चल रहा है. रैली का मिज़ाज देख ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस का समय भी सही नहीं चल रहा है. आप यह कह सकते हैं कि आज के वर्चुअल ज़माने में जयपुर में बैठकर उत्तरप्रदेश के मसले पर राजनीति क्यों नहीं की जा सकती है मगर वक़्त और स्थान की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण जगह होती है. जयपुर के मंच से हिन्दू और हिंदुत्व पर राहुल गांधी के दर्शन का क्या मतलब था या लोग समझ नहीं पा रहे हैं. राजस्थान के कोने कोने से बसों में भरकर लोगों को महँगाई के ख़िलाफ़ राहुल गांधी के बिगुल बजाने की आवाज़ सुनाने के लिए बुलाया गया था मगर बाद राहुल गांधी का हिन्दू दर्शन समझ कर लौटे. दरअसल राजस्थान का मिज़ाज कभी हिंदू मुसलमान का रहा ही नहीं है. भैरोसिंह शेखावत हों या फिर वसुंधरा राजे, यह लोग हिंदूवादी छवि से कोसों दूर रहे. कभी भी राजस्थान में सांप्रदायिक आधार पर चुनाव नहीं हुए. इसलिए हिन्दू दर्शन के लिए जयपुर का चुना जाना रणनीतिक रूप से सही क़दम नहीं था. हालाँकि कुछ विश्लेषक यह भी कह रहे हैं कि कांग्रेस के लिए अच्छा क़दम है कि जनता से जुड़े मुद्दों पर उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी लड़ती नज़र आए और वैचारिक मुद्दे पर राहुल गांधी BJP को घेरते नज़र आए, मगर यह भ्रम की स्थिति पैदा करेगा. कांग्रेस इस बात को बख़ूबी समझती है इसलिए राजस्थान में पहली बार रैली को संबोधित करने आयी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को नेपथ्य में रखा गया. राहुल गांधी के मंच पर आने से पहले ही उनका संक्षिप्त भाषण ख़त्म करा दिया गया. प्रियंका गांधी अपने भाषण में उत्तर प्रदेश तक सीमित रही. हालाँकि प्रियंका जनता की नस पकड़ना राहुल से बेहतर समझती हैं. उन्होंने मंच पर चढ़ते ही राजस्थानी भाषा में लोगों का अभिवादन किया तो जनता ने ज़ोरदार स्वागत किया. प्रियंका का भाषण ख़त्म होते ही राहुल मंच पर माँ सोनिया गांधी के साथ अवतरित हुए. राहुल गांधी मंच पर आए तो सारे नेताओं ने खड़े होकर स्वागत किया और मंच से जनता से कहा गया कि कुर्सियों से खड़े होकर राहुल गांधी का स्वागत किया जाए. राहुल गांधी के एंट्री किसी रियलिटी शो या अवार्ड फ़ंक्शन के टेलिविज़न सेट पर किसी सुपरस्टार की एंट्री की तरह रखी गई. DJ की धुन पर राहुल गांधी ने ग्रांड एंट्री मारी. कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इशारा किया कि राहुल जनता की तरफ़ हाथ हिलाकर जनता का स्वागत करें. राहुल गांधी ने भाषण ख़त्म किया तो भी डीजे बजा और फिर सभी नेताओं ने खड़े होकर राहुल गांधी को ग्रांड एक्जिट भी दिया. हालाँकि राहुल गांधी अपनी वैचारिक सोच में इस तरह डूब गए कि कई बार मंच पर कहते नज़र आए कि हमारे पंचाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी यहाँ बैठे हुए हैं जबकि चन्नी आए नहीं थे. आख़िर में जब उन्होंने कहा कि चन्नी जी बताइए तब सोनिया गांधी समेत कांग्रेस के सभी नेताओं को कहना पड़ा कि चन्नी नहीं आए नहीं है. यह जानता में बड़ा उपहास का विषय रहा और कहा जा रहा है कि मंच पर जो सोनिया गांधी का ग़ुस्सा दिख रहा था वह इसी बात को लेकर दिख रहा था कि राहुल गांधी लिखा हुआ पढ़ रहे थे, तभी उन्होंने अपने संबोधन के पहले भी चन्नी का स्वागत किया था. पहले राजस्थान के प्रभारी अजय माकन को बुलाकर सोनिया गांधी तेज़ तेज़ इशारा कर कुछ बोलती नज़र आई, फिर कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को बुलाया गया. दो और नेताओं को तलब किया गया. मंच पर ही सोनिया का ग़ुस्सा नज़र आ रहा था कि राहुल को चन्नी को लेकर स्वागत पर्ची किसने बनाई थी और फिर न जाने क्या हुआ कि सोनिया गांधी ने राजस्थान के प्रभारी अजय माकन से कहा कि वह भाषण नहीं देंगी. वह इशारा करके बोलती नज़र आयी कि मेरा नाम मत लेना, मुझे मत बुलाना. हो सकता है कि सोनिया गांधी कि यह रणनीति का हिस्सा था कि आज राहुल के भाषण को ही देश में सुना जाए और इसी पर चर्चा हो. हरियाणा विधानसभा चुनाव के बाद क़रीब दो साल बाद पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी किसी सार्वजनिक सभा में मंच पर आयी थी मगर उन्होंने आज कुछ भी नहीं बोला. इसके साथ यह भी साफ़ हो गया कि यह रैली राहुल की ताज़पोशी से पहले राहुल के लार्जर दैन लाइफ़ इमेज को स्थापित करने के लिए आयी थी. पूरे मैदान में राहुल गांधी के बड़े बड़े कटआउट लगाए गए थे. सारे वक्ताओं ने दो-तीन मिनट ही बोला, केवल राहुल गांधी पंद्रह मिनट बोले. राहुल गांधी नीति और नीयत को लेकर साफ़ नज़र आते हैं मगर नेता के तौर पर जनता से उनका कनेक्ट हो नहीं पाता है. यह बात आज भी साफ़ देखी गई, जब वे पूंजीपतियों को बार बार पूंजापति-पूंजापति बोल रहे थे तो जानता हंस रही थी. शास्त्रों की जगह कह रहे थे कि शस्त्र में लिखा हुआ है तब भी जनता पीछे से कह रही थी कि शास्त्र बोलो और फिर बार बार उनका चन्नी को मंच पर खोजना और चन्नी का नहीं होना भी उपहास का विषय बना रहा. मगर इस सबके बावजूद राहुल गांधी ने जिस तरह से हिम्मत दिखाई है कि BJP के हिंदुत्व के खिलाफ़ वह हिन्दू बन कर खड़े होंगे. अपने आप में यह कांग्रेस के लिए देर से आए मगर दुरुस्त कदम है. नेहरू -पटेल की विरासत को राहुल गांधी हिन्दू बनकर कंधे पर ढोकर आगे ले जा सकते हैं और इसी से मुक़ाबला भी कर सकते हैं. मगर पार्टी के लिए नीति और नीयत के अलावा नेता की खोज में अभी भी राहुल गांधी जनता के बीच जमें नज़र नहीं आए. जनता की नज़रें प्रियंका गांधी पर थी मगर प्रियंका गांधी भ्राता प्रेम में ख़ुद को कांग्रेस के दूसरी पंक्ति के नेताओं के बीच बैठकर राहुल राहुल गांधी को कमान देने की कोशिश करती नज़र आ रही थी. इसी जयपुर में राहुल गांधी पहली बार कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए थे और तब उन्होंने कहा था माँ ने कहा है सत्ता ज़हर है. राहुल गांधी के बारे में कहा जाता है कि तब से वह सत्ता को ज़हर मानकर दूर बैठे हुए हैं मगर आज की रैली में उन्होंने कहा कि मैं विषपान करने के लिए तैयार हूँ और मैं शिव की तरह नीलकंठ बनना चाहता हूँ. जब राहुल शिव बनना चाहते हैं तो कांग्रेस की छटपटाहट सत्ता के लिए साफ़ दिख रही थी. कांग्रेस के भावी राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह कहना कि हिंदू राष्ट्र हम लाएँगे, सत्ता के लिए हताशा दिखाता है. इसी जयपुर में जब राहुल गांधी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर ताज़पोशी हुई थी तो तब तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने हिंदु आतंकवाद का नाम लेकर हंगामा मचा दिया था और आज इसी जयपुर में राहुल गांधी ने हिंदू राज स्थापित करने की बात कही है. साफ़ है कांग्रेस इतने सालों में या तो भ्रम में जी रही है या भ्रम से उबरने में लगी हुई है. राहुल गांधी यहां जब राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने थे तब भी सोनिया गांधी ने नेपथ्य में बैठकर उनका सत्ता दर्शन सुन कर ताली बजा रही थी और आज जब एक बार फिर से वह राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की तैयारी कर रहे हैं तो सोनिया गांधी स्टेज पर बैठकर राहुल गांधी के हिन्दू दर्शन पर ताली बजा रही थी. इसीलिए सवाल उठ रहा है कि कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष को कुछ बोलना नहीं था और भाषण देना नहीं था तब आयी क्यों थी? क्या राहुल के नए अवतार और नए दर्शन को सुनने आयी थी? उस वक़्त भी भाई राहुल को सुनने के लिए बहन प्रियंका अलग से आयी थी और आज भी अलग से आयी हैं तो क्या राहुल गांधी के अवतार-दो की शुरुआत है? यह रास्ता सत्ता तक कैसे जाएगा इसे लेकर भ्रम की स्थिति कांग्रेस में बनी हुई है क्योंकि जब जनता को आप महंगाई का दर्द सुनाने के लिए बुलाते हैं और हिंदुत्व का दर्शन सुनाते हैं तो साफ़ है कि भ्रम की स्थिति की वजह से आप तैयार नहीं हैं और आधी-अधूरी तैयारी के साथ जंग नहीं जीती जाती. |
नई दिल्ली, प्रवर्तन निदेशालय ने वर्ष 2005 में पंचकुला में नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र के प्रकाशक एजेएल को एक प्लॉट के आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामले में धन शोधन की जांच के संबंध में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा से पूछताछ की। अधिकारियों ने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष वोरा से दो दिन पहले यहां उनके आवास पर पूछताछ की गई और हुड्डा से भी चंडीगढ़ में उसी दौरान पूछताछ की गई।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत दोनों कांग्रेस नेताओं के बयान दर्ज किए हैं। अधिकारियों ने कहा कि उनसे इस मामले में जब्त और बरामद किए गए कुछ दस्तावेजों को लेकर भी पूछताछ की गई। उन्होंने कहा कि वोरा से एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड (एजेएल) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के तौर पर इस मामले में उनकी भूमिका के बारे में पूछताछ की गई।
ईडी ने वोरा की उम्र के संबंध में विशेष छूट देते हुए और घर पर पूछताछ करने के उनके आग्रह पर कांग्रेस नेता से उनके आवास पर पूछताछ की। एजेंसी ने हरियाणा राज्य सतर्कता ब्यूरो की प्राथमिकी पर संज्ञान लेते हुए गत वर्ष कथित धन शोधन के आरोपों पर हुड्डा एजेएल अधिकारियों और अन्य के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की थी। सतर्कता ब्यूरो ने 2005 में पंचकुला में एजेएल के एक प्लॉट को कथित तौर पर पुनः आवंटित करने के मामले में हुड्डा और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चार अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए थे। हुड्डा ने तब इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया था और कहा था कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया।
| नई दिल्ली, प्रवर्तन निदेशालय ने वर्ष दो हज़ार पाँच में पंचकुला में नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र के प्रकाशक एजेएल को एक प्लॉट के आवंटन में कथित अनियमितताओं के मामले में धन शोधन की जांच के संबंध में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा से पूछताछ की। अधिकारियों ने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष वोरा से दो दिन पहले यहां उनके आवास पर पूछताछ की गई और हुड्डा से भी चंडीगढ़ में उसी दौरान पूछताछ की गई। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत दोनों कांग्रेस नेताओं के बयान दर्ज किए हैं। अधिकारियों ने कहा कि उनसे इस मामले में जब्त और बरामद किए गए कुछ दस्तावेजों को लेकर भी पूछताछ की गई। उन्होंने कहा कि वोरा से एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के तौर पर इस मामले में उनकी भूमिका के बारे में पूछताछ की गई। ईडी ने वोरा की उम्र के संबंध में विशेष छूट देते हुए और घर पर पूछताछ करने के उनके आग्रह पर कांग्रेस नेता से उनके आवास पर पूछताछ की। एजेंसी ने हरियाणा राज्य सतर्कता ब्यूरो की प्राथमिकी पर संज्ञान लेते हुए गत वर्ष कथित धन शोधन के आरोपों पर हुड्डा एजेएल अधिकारियों और अन्य के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की थी। सतर्कता ब्यूरो ने दो हज़ार पाँच में पंचकुला में एजेएल के एक प्लॉट को कथित तौर पर पुनः आवंटित करने के मामले में हुड्डा और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चार अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए थे। हुड्डा ने तब इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया था और कहा था कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया। |
आज हम गुजरात राज्य में एकत्रित हुए हैं। व्यापार के प्रति गुजरातियों का आकर्षण जग जाहिर है। गुजराती लोग अफ्री़का के प्रति प्रेम भाव के लिए भी लोकप्रिय हैं! एक भारतीय और गुजराती होने के नाते मुझे इस बात की खुशी है कि यह बैठक भारत में और वह भी गुजरात में हो रही है।
भारत के अफ्री़का के साथ सदियों से मजबूत रिश्ते रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से, पश्चिमी भारत, विशेष रूप से गुजरात तथा अफ्री़का के पूर्वी तट के समुदाय एक दूसरे की भूमियों में बसे हुए हैं। ऐसा कहा जाता है कि भारत के सिद्धी (Siddhis) लोग पूर्वी अफ्री़का से आए थे। तटवर्ती केन्या में बोहरा समुदाय 12वीं सदी में भारत आए थे। वास्कोडिगामा के बारे में कहा जाता है कि वह एक गुजराती नाविक की सहायता से मालिन्दी से कालिकट पहुंचे थे। गुजरात के लोगों (dhows) ने दोनों दिशाओं में व्यापार किया। समाजों के बीच प्राचीन संपर्कों से भी हमारी संस्कृति समृद्ध हुई। समृद्ध स्वाहिली भाषा में हिंदी के कईं शब्द मिलते हैं।
उपनिवेशवाद युग के दौरान बत्तीस हजार भारतीय आईकोनिक मोम्बासा उगांडा रेलवे का निर्माण करने के लिए केन्या आए। इनमें से कईं लोगों की निर्माण कार्य के दौरान जानें चली गईं। लगभग छः हजार लोग वहीं बस गए और उन्होंने अपने परिवारों को भी वहीं बसा लिया। कईं लोगों ने "दुकास" नामक छोटे व्यवसाय शुरू किए, जिन्हें "दुकावाला" के नाम से जाना जाता था। उपनिवेशवाद के दौरान व्यापारी, कलाकार तथा उसके उपरांत पदाधिकारी, शिक्षक, डॉक्टर और अन्य पेशेवर लोग पूर्वी और पश्चिमी अफ्री़का गए और इस प्रकार एक व्यावसायिक समुदाय का सृजन हुआ, जिसमें भारत और अफ्री़का के बड़े संपन्न लोग हैं।
महात्मा गांधी, एक और गुजराती, ने अपने अहिंसक संघर्ष को धार भी दक्षिण अफ्री़का में ही दी। उन्होंने गोपाल कृष्ण गोखले के साथ 1912 में तंजान्या की यात्रा की। भारतीय मूल के अनेक नेताओं ने श्री नेवरेरे, श्री केन्याटा तथा नेल्सन मंडेला सहित अफ्री़की स्वतंत्रता संघर्षों के नेताओं को अपना पूरजोर समर्थन दिया और अफ्री़की स्वतंत्रता के लिए अपनी आवाज बुलंद की। स्वतंत्रता संघर्ष के पश्चात भारतीय मूल के अनेक नेताओं को तंजानिया और दक्षिण अफ्री़का की कैबिनेटों में नियुक्त किया गया। तंजानिया में भारतीय मूल के छः तंजानिकी नागरिक वर्तमान में संसद सदस्य हैं।
गत दशकों के दौरान हमारे रिश्तें काफी मजबूत हुए हैं। 2014 में प्रधान मंत्री बनने के पश्चात मैंने भारत की विदेशी और आर्थिक नीति में अफ्री़का को वरीयता दी है। 2015 एक ऐतिहासिक वर्ष था। इस वर्ष के दौरान आयोजित तीसरे भारत अफ्री़का शिखर वार्ता में सभी 54 अफ्री़की देशों ने भाग लिया, जिनके भारत के साथ राजनयिक संबंध थे। इसमें 51 अफ्री़की देशों के राष्ट्राध्यक्षों या सरकार ने भाग लिया।
2015 से मैंने 6 अफ्री़की देशों का दौरा किया, अर्थात दक्षिण अफ्री़का, मोजाम्बिक, तनजांनिया, केन्या, मारीशस और सेशल्स । हमारे राष्ट्रपति ने तीन देशों को दौरा किया, यानी नाम्बिया, घाना और आइवरी कोस्ट। हमारे उपराष्ट्रपति ने सात देशों का दौरा किया, अर्थात मोरक्को, टुनिसिया, नाइजीरिया, माली, अल्जीरीया, रवांडा और उगांडा। मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि अफ्री़का में कोई ऐसा देश नहीं है जिसका पिछले तीन वर्षों के दौरान किसी भारतीय मंत्री ने दौरा नहीं किया है। मित्रों, मुझे यह कहते हुए बहुत खुशी हो रही है कि एक समय ऐसा था जब मोम्बासा और मुंबई के बीच हमारे केवल व्यापारिक और समुद्रीय संपर्क व सहयोग थे, पर आज हमारे काफी कुछ है, उसका उल्लेख नीचे किया जा रहा है :
यह मुझे हमारे विकास में सहयोग की याद दिलाता है। अफ्री़का के साथ भारत की भागीदारी एक ऐसे सहयोग मॉडल पर आधारित है, जो अफ्री़की देशों की जरूरतों के लिए संगत है। यह मांग आधारित है और इसके लिए कोई शर्ते नहीं हैं।
इस सहयोग की पहल के रूप में, भारत एग्जिम बैंक के जरिए ऋण उपलब्ध कराता है। भारत ने अब तक 44 देशों को 152 ऋण उपलब्ध कराए हैं, जिसकी कुल राशि लगभग 8 बिलियन डालर है।
तीसरी भारत-अफ्री़का शिखर वार्ता के दौरान भारत ने आगामी पांच वर्षों के दौरान विकास योजनाओं के लिए 10 बिलियन डालर दिए। हमने 600 मिलियन डालर की अनुदान सहायता भी प्रदान की।
भारत को अफ्री़का के साथ अपने शैक्षणिक और तकनीकी संबंधों पर गर्व है। अफ्री़का के 13 वर्तमान या पूर्व राष्ट्राध्यक्षों, प्रधान मंत्रियों और उप-राष्ट्रपतियों ने भारत में शैक्षणिक या प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रतिभागिता की है। अफ्री़का के 6 वर्तमान या पूर्व सैन्य प्रमुखों को भारत की विभिन्न संस्थाओं में प्रशिक्षित किया गया है। अफ्री़का के दो आंतरिक मंत्रियों ने भारतीय संस्थाओं में भाग लिया। भारत तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग लोकप्रिय कार्यक्रम के अंतर्गत, वर्ष 2007 से अब तक अफ्री़की देशों के 33 हजार से अधिक पदाधिकारियों को छात्रवृतियां प्रदान की गई हैं।
कौशल के क्षेत्र में हमारी सबसे अच्छी भागीदारी है "सोलर मामाज़" ("solar mamas")। प्रत्येक वर्ष 80 अफ्री़की महिलाओं को भारत में प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे सोलर पैनलों और सर्किटों में काम कर सकें। प्रशिक्षण के पश्चात जब वे अपने देश वापस जाती हैं तब वे अपने समुदाय को बिजली उपलब्ध कराने के लिए कार्य करती हैं। प्रत्येक महिला अपने देश लौटने पर 50 घरों को बिजली पहुंचाने के लिए जिम्मेदार होती है। महिलाओं के चयन के लिए आवश्यक शर्त यह है कि वे या तो पूर्ण रूप से अशिक्षित हों या थोड़ी बहुत शिक्षित हों। ये महिलाएं भारत में प्रशिक्षण के दौरान और अनेक कौशलों की भी जानकारी प्राप्त करती हैं, जैसे कि टोकरी बनाना, मधुमक्खीपालन और किचन गार्डिनिंग।
हमने 48 अफ्री़की देशों को शामिल करते हुए टेली-मेडिशिन और टेली-नेटवर्क के लिए समूचे अफ्री़का ई-नेटवर्क परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया है। भारत में पांच अग्रणीय विश्वविद्यालयों ने अफ्री़की नागरिकों को सार्टिफिकेट, अंडर ग्रेजुवेट और पोस्ट ग्रेजुवेट कार्यक्रम प्रदान किए। भारत के बारह सुपर-सपेशियेलिटी अस्पतालों ने परामर्श और निरंतर चिकित्सीय शिक्षा प्रदान की। लगभग सात हजार छात्रों ने भारत में अपनी शिक्षा पूर्णं की। इसके अगले चरण की शुरूआत हम जल्दी करेंगे।
हम शीघ्र ही अफ्री़की देशों के लिए कपास तकनीकी सहायता कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करेंगे, जिसे वर्ष 2012 में आरंभ किया गया था। इस परियोजना का कार्यान्वयन बेनिन, बुरकिना फासो, चाड, मलावी, नाइजीरिया और उगांडा में किया गया था।
अफ्री़का-भारत व्यापार गत 15 वर्षों में काफी ज्यादा बढ़ा है। पिछले पांच वर्षों के दौरान यह दुगुना हुआ है, जो बढ़कर 2014-15 में लगभग बहत्तर बिलियन अमेरिकी डालर पर था। वर्ष 2015-16 में अफ्री़का के साथ हमारा जिंस व्यापार अमेरिका से भी अधिक था।
अफ्री़का में विकास कार्यों को समर्थन देने के लिए भारत अमेरिका और जापान से भी बातचीत कर रहा है। मुझे अपनी टोकयो यात्रा के दौरान टोकयो के प्रधान मंत्री के साथ अपनी विस्तृत वार्ता अच्छी तरह याद है। हमने सभी देशों के लिए विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर अपनी प्रतिबद्धता पर चर्चा की। हमारी संयुक्त घोषणा में हमने एशिया अफ्री़का ग्रोथ कोरिडोर का उल्लेख किया और अपने अफ्री़की भाईयों एवं बहिनों से आगे बातचीत जारी रखने का प्रस्ताव किया।
भारतीय और जापानी अनुसंधानिक संस्थाओं ने एक विजन डॉक्यूमेंट प्रस्तुत किया है। इसे एक साथ प्रस्तुत करने के लिए मैं आरआईएस, ईआरआईए और आईडीई-जेटरो को उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद देता हूं। इसे अंतिम रूप अफ्री़का के विद्वानों के साथ परामर्श कर दिया गया। मुझे विश्वास है कि विजन डॉक्यूमेंट को आगामी समय में बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। हमारी सोच यह है कि अन्य इच्छुक साझेदारों के साथ भारत और जापन कौशल, स्वास्थय, बुनियादी ढांचा, विनिर्माण तथा कनेक्टिविटी में संयुक्त पहलों की खोज करेंगे।
हमारी भागीदारी मात्र सरकारों तक सीमित नहीं है। भारत का निजी क्षेत्र निवेश को लगातार बढ़ावा देने में सबसे आगे है। 1996 से लेकर 2016 तक भारत के विदेशी प्रत्यक्ष निवेशों में अफ्री़का का योगदान लगभग 1/5 रहा है। भारत अफ्री़की महाद्वीप में निवेश करने वाले देशों में पांचवां सबसे बड़ा देश है। पिछले 20 वर्षों के दौरान भारत के निवेश 54 बिलियन डालर से भी अधिक थे, जिससे अफ्री़की नागरिकों के लिए रोजगार अवसर सृजित हुए।
अंतर्राष्ट्रीय सौर संधि पहल, जिसकी शुरूआत नवंबर 2015, पेरिस में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में हुई थी, के प्रति हम अफ्री़की देशों की प्रतिक्रिया से काफी प्रोत्साहित हैं। इस संधि को उन देशों के गठबंधन के रूप में देखा जा सकता है, जोकि सौर संसाधनों से समृद्ध हैं, ताकि उनकी विशेष सौर आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सके। मुझे इस बात की खुशी है कि अनेक अफ्री़की देशों ने इस पहल को अपना समर्थन दिया है।
नए विकास बैंक, जिसे आम रूप से "ब्रिक्स बैंक" के रूप में जाना जाता है, के संस्थापक के रूप में, भारत ने दक्षिण अफ्री़का में क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना की हमेशा ही हिमायत की है। यह अफ्री़की विकास बैंक सहित एनडीबी और अन्य विकास साझेदारों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करेगा।
भारत अफ्री़की विकास फंड में 1982 में तथा अफ्री़की विकास बैंक में 1983 में शामिल हुआ। भारत ने बैंक की सभी समान्य पूंजी वृद्धियों में योगदान दिया है। हाल ही के अफ्री़की विकास फंड संपूर्ति के लिए भारत ने 29 मिलियन डालर गिरवी रखे हैं। हमने भारी ऋण से दबे गरीब देशों और बहुआयामी ऋण अवनयन योजनाओं में योगदान दिया है।
इन बैठकों के साथ-साथ, भारत सरकार भारतीय उद्योग संघ की भागीदारी में एक सम्मेलन और संवाद का आयोजन कर रही है। भारत सरकार ने भारतीय वाणिज्य और उद्योग संघ के साथ एक प्रदर्शनी भी आयोजित की है। सम्मेलन और प्रदर्शनी में जिन मुख्य क्षेत्रों पर जोर दिया गया, उनमें कृषि से लेकर अभिनव तथा स्टार्ट-अप और अन्य विषय शामिल थे।
इस कार्यक्रम का शीर्षक है "अफ्री़का में संपदा सृजन के लिए कृषि में परिवर्तन"। इसमें एक क्षेत्र ऐसा है जिसमें भारत और बैंक एक साथ सार्थक रूप से कार्य कर सकते हैं। इस सिलसिले में मैंने कपास तकनीकी सहायता कार्यक्रम का उल्लेख पहले ही किया है।
यहां भारत में मैंने 2022 तक किसानों की आमदनी को दुगुना करने की मुहिम चलाई है जिसके लिए सतत रूप से प्रयास करने होंगे, जिनमें उन्नत फसल बीज और अधिकतम उत्पादन से लेकर फसल नुकसान कम करने तथा बेहतर विपणन बुनियादी ढांचा जैसे मुद्दे हैं। इस मुहिम पर चलते हुए भारत आपके अनुभवों से सीख लेने के लिए उत्सुक है।
मेरे अफ्री़की भाईयों और बहिनों,
हमारे सम्मुख आज जो चुनौतियों हैं, वे एक जैसी हैं, जैसे कि हमारे किसानों और गरीबों का उत्थान, महिलाओं का सशक्तिकरण, हमारे ग्रामीण समुदायों के लिए वित्त से पहुंच सुनिश्चित करना तथा बुनियादी ढांचा खड़ा करना। हमें ये कार्य वित्तीय सीमाओं के अंतर्गत ही करने हैं। हमें मैक्रो-इकनोमिक स्थिरता को कायम रखना है ताकि महंगाई को नियंत्रित रखा जा सके और हमारा भुगतान-शेष (बैलेंस ऑफ पेमेंट) संतुलित रहे। इन समस्त मुद्दों पर अपने अनुभव साझा कर हम काफी कुछ हासिल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, कम-नकदी अर्थव्यवस्था की हमारी पहल में हमने उन सफल पहलों से काफी कुछ सीखा है, जो केन्या जैसे अफ्री़की देश ने मोबाइल बैंकिंग के क्षेत्र में की थीं।
मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि पिछले तीन वर्षों में सभी मैक्रो-इकनोमिक सूचकांकों में भारत की स्थिति में सुधार आया है। राजकोषीय घाटा, भुगतान-शेष (बैलेंस ऑफ पेमेंट) घाटा तथा महंगाई कम हुई है। जीडीपी विकास दर, विदेशी मुद्रा भंडार तथा सार्वजनिक पूंजी निवेश बढ़ा है। इसके साथ-साथ, हमने विकास में भी काफी अच्छी उन्नति की है।
अफ्री़की विकास बैंक के अध्यक्ष जी, हमें यह पता चला है कि आपने हमारे हालिया कदमों को अन्य विकासशील राष्ट्रों के सम्मुख पाठ्य पुस्तकों के रूप में प्रस्तुत किया है और हमें विकास पथ-प्रदर्शक कहा है। इस बात के लिए आपका धन्यवाद करते हुए, मुझे यह जानकार खुशी है कि आपने पूर्व में हैदराबाद में प्रशिक्षण लेते हुए काफी समय बिताया है। फिर भी, मैं यह कहता हूं कि मैं आने वाली अनेक चुनौतियों के प्रति सकेंद्रित रहूं। इस संदर्भ में मैंने सोचा कि मैं आपके साथ उन कार्यनीतियों को साझा कर सकूं, जिनका उपयोग हमने पिछले 3 वर्षों में किया है।
गरीबों को मूल्य रियायतों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से सब्सिडी देने के बजाय, हमने उन्हें प्रत्यक्ष रूप से सब्सिडी देकर काफी राजकोषीय बचतें की हैं। केवल कुकिंग गैस में ही हमने तीन वर्षों में 4 बिलियन डालर की बचत की है। इसके अलावा, मैंने देश के संपन्न नागरिकों से अपनी गैस सब्सिडी स्वैच्छिक रूप से छोड़ने की अपील की थी। 'गिव इट अप' अभियान के तहत हमने यह वायदा किया था कि इस बचत का उपयोग हम किसी गरीब परिवार को गैस कनेक्शन देने के लिए करेंगे। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस अपील से 10 मिलियन से अधिक भारतीय नागरिकों ने अपनी गैस सब्सिडी स्वैच्छिक रूप से छोड़ दी। बचतों के कारण हमने एक कार्यक्रम आरंभ किया है कि हम 50 मिलियन गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन देंगे। इस दिशा में 15 मिलियन कनेक्शन पहले ही दिए जा चुके हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं के जीवन में कायांतरण होता है। इससे उन्हें लकड़ी जैसे ईधन के साथ खाना पकाने के दौरान स्वास्थ्य संबंधी खतरों से मुक्ति मिलती है। इससे पर्यावरण भी परिरक्षित रहता है और प्रदूषण कम होता है। मैं जो "रिफार्म टू ट्रांसफोर्म : जीवन-यापन में बदलाव लाने के लिए मिश्रित कार्य" की बात कहता हूं, उसका यह एक उदाहरण है।
पूर्व में किसानों के लिए अपेक्षित कुछ सब्सिडीयुक्त यूरिया को गैर-कृषि कार्यों, जैसे कि रसायनों के उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने हेतु अवैध रूप से डायवर्ट कर दिया जाता था। हमने यूरिया की सर्वव्यापी नीम-कोटिंग की शुरूआत की। इससे उर्वरक का डायवर्जन नहीं किया जा सकता है। इस दिशा में हमने न केवल काफी वित्तीय बचतें की हैं, बल्कि अध्ययनों में यह पाया गया है कि नीम कोटिंग से उर्वरक की प्रभावकारिता भी बढ़ी है।
हम अपने किसानों को मृदा स्वास्थय कार्ड भी उपलब्ध करा रहे हैं, जो उन्हें मृदा की सही प्रकृति व स्थिति बताता है और मिश्रित निविष्टयों के बेहतर उपयोग के लिए भी सलाह देता है। इसके फलस्वरूप, निविष्टयों के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा मिलता है और फसल की उपज में वृद्धि होती है।
हमने रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्गों, पावर और गैस पाइपलाइनों सहित बुनियादी ढांचे में पूंजीगत निवेश में अभूतपूर्व वृद्धि की है। भारत में अगले वर्ष तक कोई भी गांव बिना बिजली के नहीं रहेगा। हमारे गंगा सफाई, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सीटीज़, सभी के लिए घर और स्किल इंडिया मिशन हमें एक स्वच्छ, अधिक समृद्ध, तेजी से बढ़ते और आधुनिक नए भारत की दिशा में ले जा रहे हैं। हमारा उद्देश्य यह है कि भारत आने वाले वर्षों में विकास का अनूठा आदर्श बनने के साथ-साथ जलवायु अनुकूल विकास का एक उदाहरण बने।
दो ऐसे महत्वपूर्ण कारक हैं, जिनसे हमें सहायता मिली है। बदलाव के अनुक्रम में पहली शुरूआत बैंकिंग प्रणाली में की गई है। पिछले 3 वर्षों में हमने सर्वव्यापी बैंकिंग प्रक्रिया हासिल की है। हमने जन धन योजना या जन धन अभियान की शुरूआत की है, जिनके अंतर्गत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों के लिए 280 मिलियन बैंक खाते खोले गए हैं। इस पहल के कारण वस्तुतः प्रत्येक भारतीय परिवार के पास अब बैंक खाता है। आम रूप से बैंक व्यवसायों और धनी लोगों को वित्त उपलब्ध कराते हैं। हमने बैंकों को गरीबों के विकास की राह में सहायता देने का कार्य सौंपा है। हमने अपने राष्ट्रीय बैंकों को राजनीतिक निर्णयों से मुक्ति प्रदान कर तथा एक पारदर्शी चयन प्रक्रिया के जरिए मेरिट के आधार पर पेशेवर चीफ एग्जिक्यूटिव (प्रमुख प्रबंधकों) की नियुक्ति कर उन्हें सुदृढ़ किया है।
हमारी आधार नामक सर्वव्यापी बाइमैट्रिक आइडेंटिफिकेशन प्रणाली दूसरी महत्वपूर्ण सफलता है। यह उन लोगों को लाभ लेने से रोकती है, जो उसके असली हकदार नहीं हैं। इससे हमें यह सुनिश्चितता करने में सहायता मिलती है कि जिन लोगों को सरकारी सहायता की जरूरत है, उन्हें सरकारी सहायता आसानी से मिल सके और साथ ही गैर-हकदारी दावों को रोका जा सके।
मित्रों, मैं सफल और सार्थक वार्षिक बैठक के लिए आपको शुभकामना देते हुए अपनी बात संपन्न करता हूं। खेल के क्षेत्र में भारत अफ्री़का के साथ लंबी दौड़ में कोई प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता है। लेकिन, मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि भारत आपके बेहतर भविष्य के लिए आपकी लंबी एवं कठिन यात्रा में हमेशा आपके साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा और अपना भरपूर समर्थन देगा।
महामहिम, देवियों और सज्जनों! मुझे अफ्री़की विकास बैंक के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की वार्षिक बैठक की आधिकारिक रूप से घोषणा करने में काफी प्रसन्नता हो रही है।
धन्यवाद !
| आज हम गुजरात राज्य में एकत्रित हुए हैं। व्यापार के प्रति गुजरातियों का आकर्षण जग जाहिर है। गुजराती लोग अफ्री़का के प्रति प्रेम भाव के लिए भी लोकप्रिय हैं! एक भारतीय और गुजराती होने के नाते मुझे इस बात की खुशी है कि यह बैठक भारत में और वह भी गुजरात में हो रही है। भारत के अफ्री़का के साथ सदियों से मजबूत रिश्ते रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से, पश्चिमी भारत, विशेष रूप से गुजरात तथा अफ्री़का के पूर्वी तट के समुदाय एक दूसरे की भूमियों में बसे हुए हैं। ऐसा कहा जाता है कि भारत के सिद्धी लोग पूर्वी अफ्री़का से आए थे। तटवर्ती केन्या में बोहरा समुदाय बारहवीं सदी में भारत आए थे। वास्कोडिगामा के बारे में कहा जाता है कि वह एक गुजराती नाविक की सहायता से मालिन्दी से कालिकट पहुंचे थे। गुजरात के लोगों ने दोनों दिशाओं में व्यापार किया। समाजों के बीच प्राचीन संपर्कों से भी हमारी संस्कृति समृद्ध हुई। समृद्ध स्वाहिली भाषा में हिंदी के कईं शब्द मिलते हैं। उपनिवेशवाद युग के दौरान बत्तीस हजार भारतीय आईकोनिक मोम्बासा उगांडा रेलवे का निर्माण करने के लिए केन्या आए। इनमें से कईं लोगों की निर्माण कार्य के दौरान जानें चली गईं। लगभग छः हजार लोग वहीं बस गए और उन्होंने अपने परिवारों को भी वहीं बसा लिया। कईं लोगों ने "दुकास" नामक छोटे व्यवसाय शुरू किए, जिन्हें "दुकावाला" के नाम से जाना जाता था। उपनिवेशवाद के दौरान व्यापारी, कलाकार तथा उसके उपरांत पदाधिकारी, शिक्षक, डॉक्टर और अन्य पेशेवर लोग पूर्वी और पश्चिमी अफ्री़का गए और इस प्रकार एक व्यावसायिक समुदाय का सृजन हुआ, जिसमें भारत और अफ्री़का के बड़े संपन्न लोग हैं। महात्मा गांधी, एक और गुजराती, ने अपने अहिंसक संघर्ष को धार भी दक्षिण अफ्री़का में ही दी। उन्होंने गोपाल कृष्ण गोखले के साथ एक हज़ार नौ सौ बारह में तंजान्या की यात्रा की। भारतीय मूल के अनेक नेताओं ने श्री नेवरेरे, श्री केन्याटा तथा नेल्सन मंडेला सहित अफ्री़की स्वतंत्रता संघर्षों के नेताओं को अपना पूरजोर समर्थन दिया और अफ्री़की स्वतंत्रता के लिए अपनी आवाज बुलंद की। स्वतंत्रता संघर्ष के पश्चात भारतीय मूल के अनेक नेताओं को तंजानिया और दक्षिण अफ्री़का की कैबिनेटों में नियुक्त किया गया। तंजानिया में भारतीय मूल के छः तंजानिकी नागरिक वर्तमान में संसद सदस्य हैं। गत दशकों के दौरान हमारे रिश्तें काफी मजबूत हुए हैं। दो हज़ार चौदह में प्रधान मंत्री बनने के पश्चात मैंने भारत की विदेशी और आर्थिक नीति में अफ्री़का को वरीयता दी है। दो हज़ार पंद्रह एक ऐतिहासिक वर्ष था। इस वर्ष के दौरान आयोजित तीसरे भारत अफ्री़का शिखर वार्ता में सभी चौवन अफ्री़की देशों ने भाग लिया, जिनके भारत के साथ राजनयिक संबंध थे। इसमें इक्यावन अफ्री़की देशों के राष्ट्राध्यक्षों या सरकार ने भाग लिया। दो हज़ार पंद्रह से मैंने छः अफ्री़की देशों का दौरा किया, अर्थात दक्षिण अफ्री़का, मोजाम्बिक, तनजांनिया, केन्या, मारीशस और सेशल्स । हमारे राष्ट्रपति ने तीन देशों को दौरा किया, यानी नाम्बिया, घाना और आइवरी कोस्ट। हमारे उपराष्ट्रपति ने सात देशों का दौरा किया, अर्थात मोरक्को, टुनिसिया, नाइजीरिया, माली, अल्जीरीया, रवांडा और उगांडा। मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है कि अफ्री़का में कोई ऐसा देश नहीं है जिसका पिछले तीन वर्षों के दौरान किसी भारतीय मंत्री ने दौरा नहीं किया है। मित्रों, मुझे यह कहते हुए बहुत खुशी हो रही है कि एक समय ऐसा था जब मोम्बासा और मुंबई के बीच हमारे केवल व्यापारिक और समुद्रीय संपर्क व सहयोग थे, पर आज हमारे काफी कुछ है, उसका उल्लेख नीचे किया जा रहा है : यह मुझे हमारे विकास में सहयोग की याद दिलाता है। अफ्री़का के साथ भारत की भागीदारी एक ऐसे सहयोग मॉडल पर आधारित है, जो अफ्री़की देशों की जरूरतों के लिए संगत है। यह मांग आधारित है और इसके लिए कोई शर्ते नहीं हैं। इस सहयोग की पहल के रूप में, भारत एग्जिम बैंक के जरिए ऋण उपलब्ध कराता है। भारत ने अब तक चौंतालीस देशों को एक सौ बावन ऋण उपलब्ध कराए हैं, जिसकी कुल राशि लगभग आठ बिलियन डालर है। तीसरी भारत-अफ्री़का शिखर वार्ता के दौरान भारत ने आगामी पांच वर्षों के दौरान विकास योजनाओं के लिए दस बिलियन डालर दिए। हमने छः सौ मिलियन डालर की अनुदान सहायता भी प्रदान की। भारत को अफ्री़का के साथ अपने शैक्षणिक और तकनीकी संबंधों पर गर्व है। अफ्री़का के तेरह वर्तमान या पूर्व राष्ट्राध्यक्षों, प्रधान मंत्रियों और उप-राष्ट्रपतियों ने भारत में शैक्षणिक या प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रतिभागिता की है। अफ्री़का के छः वर्तमान या पूर्व सैन्य प्रमुखों को भारत की विभिन्न संस्थाओं में प्रशिक्षित किया गया है। अफ्री़का के दो आंतरिक मंत्रियों ने भारतीय संस्थाओं में भाग लिया। भारत तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग लोकप्रिय कार्यक्रम के अंतर्गत, वर्ष दो हज़ार सात से अब तक अफ्री़की देशों के तैंतीस हजार से अधिक पदाधिकारियों को छात्रवृतियां प्रदान की गई हैं। कौशल के क्षेत्र में हमारी सबसे अच्छी भागीदारी है "सोलर मामाज़" । प्रत्येक वर्ष अस्सी अफ्री़की महिलाओं को भारत में प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे सोलर पैनलों और सर्किटों में काम कर सकें। प्रशिक्षण के पश्चात जब वे अपने देश वापस जाती हैं तब वे अपने समुदाय को बिजली उपलब्ध कराने के लिए कार्य करती हैं। प्रत्येक महिला अपने देश लौटने पर पचास घरों को बिजली पहुंचाने के लिए जिम्मेदार होती है। महिलाओं के चयन के लिए आवश्यक शर्त यह है कि वे या तो पूर्ण रूप से अशिक्षित हों या थोड़ी बहुत शिक्षित हों। ये महिलाएं भारत में प्रशिक्षण के दौरान और अनेक कौशलों की भी जानकारी प्राप्त करती हैं, जैसे कि टोकरी बनाना, मधुमक्खीपालन और किचन गार्डिनिंग। हमने अड़तालीस अफ्री़की देशों को शामिल करते हुए टेली-मेडिशिन और टेली-नेटवर्क के लिए समूचे अफ्री़का ई-नेटवर्क परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया है। भारत में पांच अग्रणीय विश्वविद्यालयों ने अफ्री़की नागरिकों को सार्टिफिकेट, अंडर ग्रेजुवेट और पोस्ट ग्रेजुवेट कार्यक्रम प्रदान किए। भारत के बारह सुपर-सपेशियेलिटी अस्पतालों ने परामर्श और निरंतर चिकित्सीय शिक्षा प्रदान की। लगभग सात हजार छात्रों ने भारत में अपनी शिक्षा पूर्णं की। इसके अगले चरण की शुरूआत हम जल्दी करेंगे। हम शीघ्र ही अफ्री़की देशों के लिए कपास तकनीकी सहायता कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करेंगे, जिसे वर्ष दो हज़ार बारह में आरंभ किया गया था। इस परियोजना का कार्यान्वयन बेनिन, बुरकिना फासो, चाड, मलावी, नाइजीरिया और उगांडा में किया गया था। अफ्री़का-भारत व्यापार गत पंद्रह वर्षों में काफी ज्यादा बढ़ा है। पिछले पांच वर्षों के दौरान यह दुगुना हुआ है, जो बढ़कर दो हज़ार चौदह-पंद्रह में लगभग बहत्तर बिलियन अमेरिकी डालर पर था। वर्ष दो हज़ार पंद्रह-सोलह में अफ्री़का के साथ हमारा जिंस व्यापार अमेरिका से भी अधिक था। अफ्री़का में विकास कार्यों को समर्थन देने के लिए भारत अमेरिका और जापान से भी बातचीत कर रहा है। मुझे अपनी टोकयो यात्रा के दौरान टोकयो के प्रधान मंत्री के साथ अपनी विस्तृत वार्ता अच्छी तरह याद है। हमने सभी देशों के लिए विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर अपनी प्रतिबद्धता पर चर्चा की। हमारी संयुक्त घोषणा में हमने एशिया अफ्री़का ग्रोथ कोरिडोर का उल्लेख किया और अपने अफ्री़की भाईयों एवं बहिनों से आगे बातचीत जारी रखने का प्रस्ताव किया। भारतीय और जापानी अनुसंधानिक संस्थाओं ने एक विजन डॉक्यूमेंट प्रस्तुत किया है। इसे एक साथ प्रस्तुत करने के लिए मैं आरआईएस, ईआरआईए और आईडीई-जेटरो को उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद देता हूं। इसे अंतिम रूप अफ्री़का के विद्वानों के साथ परामर्श कर दिया गया। मुझे विश्वास है कि विजन डॉक्यूमेंट को आगामी समय में बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। हमारी सोच यह है कि अन्य इच्छुक साझेदारों के साथ भारत और जापन कौशल, स्वास्थय, बुनियादी ढांचा, विनिर्माण तथा कनेक्टिविटी में संयुक्त पहलों की खोज करेंगे। हमारी भागीदारी मात्र सरकारों तक सीमित नहीं है। भारत का निजी क्षेत्र निवेश को लगातार बढ़ावा देने में सबसे आगे है। एक हज़ार नौ सौ छियानवे से लेकर दो हज़ार सोलह तक भारत के विदेशी प्रत्यक्ष निवेशों में अफ्री़का का योगदान लगभग एक/पाँच रहा है। भारत अफ्री़की महाद्वीप में निवेश करने वाले देशों में पांचवां सबसे बड़ा देश है। पिछले बीस वर्षों के दौरान भारत के निवेश चौवन बिलियन डालर से भी अधिक थे, जिससे अफ्री़की नागरिकों के लिए रोजगार अवसर सृजित हुए। अंतर्राष्ट्रीय सौर संधि पहल, जिसकी शुरूआत नवंबर दो हज़ार पंद्रह, पेरिस में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में हुई थी, के प्रति हम अफ्री़की देशों की प्रतिक्रिया से काफी प्रोत्साहित हैं। इस संधि को उन देशों के गठबंधन के रूप में देखा जा सकता है, जोकि सौर संसाधनों से समृद्ध हैं, ताकि उनकी विशेष सौर आवश्यकताओं की पूर्ति की जा सके। मुझे इस बात की खुशी है कि अनेक अफ्री़की देशों ने इस पहल को अपना समर्थन दिया है। नए विकास बैंक, जिसे आम रूप से "ब्रिक्स बैंक" के रूप में जाना जाता है, के संस्थापक के रूप में, भारत ने दक्षिण अफ्री़का में क्षेत्रीय केंद्र की स्थापना की हमेशा ही हिमायत की है। यह अफ्री़की विकास बैंक सहित एनडीबी और अन्य विकास साझेदारों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। भारत अफ्री़की विकास फंड में एक हज़ार नौ सौ बयासी में तथा अफ्री़की विकास बैंक में एक हज़ार नौ सौ तिरासी में शामिल हुआ। भारत ने बैंक की सभी समान्य पूंजी वृद्धियों में योगदान दिया है। हाल ही के अफ्री़की विकास फंड संपूर्ति के लिए भारत ने उनतीस मिलियन डालर गिरवी रखे हैं। हमने भारी ऋण से दबे गरीब देशों और बहुआयामी ऋण अवनयन योजनाओं में योगदान दिया है। इन बैठकों के साथ-साथ, भारत सरकार भारतीय उद्योग संघ की भागीदारी में एक सम्मेलन और संवाद का आयोजन कर रही है। भारत सरकार ने भारतीय वाणिज्य और उद्योग संघ के साथ एक प्रदर्शनी भी आयोजित की है। सम्मेलन और प्रदर्शनी में जिन मुख्य क्षेत्रों पर जोर दिया गया, उनमें कृषि से लेकर अभिनव तथा स्टार्ट-अप और अन्य विषय शामिल थे। इस कार्यक्रम का शीर्षक है "अफ्री़का में संपदा सृजन के लिए कृषि में परिवर्तन"। इसमें एक क्षेत्र ऐसा है जिसमें भारत और बैंक एक साथ सार्थक रूप से कार्य कर सकते हैं। इस सिलसिले में मैंने कपास तकनीकी सहायता कार्यक्रम का उल्लेख पहले ही किया है। यहां भारत में मैंने दो हज़ार बाईस तक किसानों की आमदनी को दुगुना करने की मुहिम चलाई है जिसके लिए सतत रूप से प्रयास करने होंगे, जिनमें उन्नत फसल बीज और अधिकतम उत्पादन से लेकर फसल नुकसान कम करने तथा बेहतर विपणन बुनियादी ढांचा जैसे मुद्दे हैं। इस मुहिम पर चलते हुए भारत आपके अनुभवों से सीख लेने के लिए उत्सुक है। मेरे अफ्री़की भाईयों और बहिनों, हमारे सम्मुख आज जो चुनौतियों हैं, वे एक जैसी हैं, जैसे कि हमारे किसानों और गरीबों का उत्थान, महिलाओं का सशक्तिकरण, हमारे ग्रामीण समुदायों के लिए वित्त से पहुंच सुनिश्चित करना तथा बुनियादी ढांचा खड़ा करना। हमें ये कार्य वित्तीय सीमाओं के अंतर्गत ही करने हैं। हमें मैक्रो-इकनोमिक स्थिरता को कायम रखना है ताकि महंगाई को नियंत्रित रखा जा सके और हमारा भुगतान-शेष संतुलित रहे। इन समस्त मुद्दों पर अपने अनुभव साझा कर हम काफी कुछ हासिल कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, कम-नकदी अर्थव्यवस्था की हमारी पहल में हमने उन सफल पहलों से काफी कुछ सीखा है, जो केन्या जैसे अफ्री़की देश ने मोबाइल बैंकिंग के क्षेत्र में की थीं। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि पिछले तीन वर्षों में सभी मैक्रो-इकनोमिक सूचकांकों में भारत की स्थिति में सुधार आया है। राजकोषीय घाटा, भुगतान-शेष घाटा तथा महंगाई कम हुई है। जीडीपी विकास दर, विदेशी मुद्रा भंडार तथा सार्वजनिक पूंजी निवेश बढ़ा है। इसके साथ-साथ, हमने विकास में भी काफी अच्छी उन्नति की है। अफ्री़की विकास बैंक के अध्यक्ष जी, हमें यह पता चला है कि आपने हमारे हालिया कदमों को अन्य विकासशील राष्ट्रों के सम्मुख पाठ्य पुस्तकों के रूप में प्रस्तुत किया है और हमें विकास पथ-प्रदर्शक कहा है। इस बात के लिए आपका धन्यवाद करते हुए, मुझे यह जानकार खुशी है कि आपने पूर्व में हैदराबाद में प्रशिक्षण लेते हुए काफी समय बिताया है। फिर भी, मैं यह कहता हूं कि मैं आने वाली अनेक चुनौतियों के प्रति सकेंद्रित रहूं। इस संदर्भ में मैंने सोचा कि मैं आपके साथ उन कार्यनीतियों को साझा कर सकूं, जिनका उपयोग हमने पिछले तीन वर्षों में किया है। गरीबों को मूल्य रियायतों के माध्यम से अप्रत्यक्ष रूप से सब्सिडी देने के बजाय, हमने उन्हें प्रत्यक्ष रूप से सब्सिडी देकर काफी राजकोषीय बचतें की हैं। केवल कुकिंग गैस में ही हमने तीन वर्षों में चार बिलियन डालर की बचत की है। इसके अलावा, मैंने देश के संपन्न नागरिकों से अपनी गैस सब्सिडी स्वैच्छिक रूप से छोड़ने की अपील की थी। 'गिव इट अप' अभियान के तहत हमने यह वायदा किया था कि इस बचत का उपयोग हम किसी गरीब परिवार को गैस कनेक्शन देने के लिए करेंगे। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इस अपील से दस मिलियन से अधिक भारतीय नागरिकों ने अपनी गैस सब्सिडी स्वैच्छिक रूप से छोड़ दी। बचतों के कारण हमने एक कार्यक्रम आरंभ किया है कि हम पचास मिलियन गरीब परिवारों को गैस कनेक्शन देंगे। इस दिशा में पंद्रह मिलियन कनेक्शन पहले ही दिए जा चुके हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं के जीवन में कायांतरण होता है। इससे उन्हें लकड़ी जैसे ईधन के साथ खाना पकाने के दौरान स्वास्थ्य संबंधी खतरों से मुक्ति मिलती है। इससे पर्यावरण भी परिरक्षित रहता है और प्रदूषण कम होता है। मैं जो "रिफार्म टू ट्रांसफोर्म : जीवन-यापन में बदलाव लाने के लिए मिश्रित कार्य" की बात कहता हूं, उसका यह एक उदाहरण है। पूर्व में किसानों के लिए अपेक्षित कुछ सब्सिडीयुक्त यूरिया को गैर-कृषि कार्यों, जैसे कि रसायनों के उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने हेतु अवैध रूप से डायवर्ट कर दिया जाता था। हमने यूरिया की सर्वव्यापी नीम-कोटिंग की शुरूआत की। इससे उर्वरक का डायवर्जन नहीं किया जा सकता है। इस दिशा में हमने न केवल काफी वित्तीय बचतें की हैं, बल्कि अध्ययनों में यह पाया गया है कि नीम कोटिंग से उर्वरक की प्रभावकारिता भी बढ़ी है। हम अपने किसानों को मृदा स्वास्थय कार्ड भी उपलब्ध करा रहे हैं, जो उन्हें मृदा की सही प्रकृति व स्थिति बताता है और मिश्रित निविष्टयों के बेहतर उपयोग के लिए भी सलाह देता है। इसके फलस्वरूप, निविष्टयों के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा मिलता है और फसल की उपज में वृद्धि होती है। हमने रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्गों, पावर और गैस पाइपलाइनों सहित बुनियादी ढांचे में पूंजीगत निवेश में अभूतपूर्व वृद्धि की है। भारत में अगले वर्ष तक कोई भी गांव बिना बिजली के नहीं रहेगा। हमारे गंगा सफाई, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सीटीज़, सभी के लिए घर और स्किल इंडिया मिशन हमें एक स्वच्छ, अधिक समृद्ध, तेजी से बढ़ते और आधुनिक नए भारत की दिशा में ले जा रहे हैं। हमारा उद्देश्य यह है कि भारत आने वाले वर्षों में विकास का अनूठा आदर्श बनने के साथ-साथ जलवायु अनुकूल विकास का एक उदाहरण बने। दो ऐसे महत्वपूर्ण कारक हैं, जिनसे हमें सहायता मिली है। बदलाव के अनुक्रम में पहली शुरूआत बैंकिंग प्रणाली में की गई है। पिछले तीन वर्षों में हमने सर्वव्यापी बैंकिंग प्रक्रिया हासिल की है। हमने जन धन योजना या जन धन अभियान की शुरूआत की है, जिनके अंतर्गत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों के लिए दो सौ अस्सी मिलियन बैंक खाते खोले गए हैं। इस पहल के कारण वस्तुतः प्रत्येक भारतीय परिवार के पास अब बैंक खाता है। आम रूप से बैंक व्यवसायों और धनी लोगों को वित्त उपलब्ध कराते हैं। हमने बैंकों को गरीबों के विकास की राह में सहायता देने का कार्य सौंपा है। हमने अपने राष्ट्रीय बैंकों को राजनीतिक निर्णयों से मुक्ति प्रदान कर तथा एक पारदर्शी चयन प्रक्रिया के जरिए मेरिट के आधार पर पेशेवर चीफ एग्जिक्यूटिव की नियुक्ति कर उन्हें सुदृढ़ किया है। हमारी आधार नामक सर्वव्यापी बाइमैट्रिक आइडेंटिफिकेशन प्रणाली दूसरी महत्वपूर्ण सफलता है। यह उन लोगों को लाभ लेने से रोकती है, जो उसके असली हकदार नहीं हैं। इससे हमें यह सुनिश्चितता करने में सहायता मिलती है कि जिन लोगों को सरकारी सहायता की जरूरत है, उन्हें सरकारी सहायता आसानी से मिल सके और साथ ही गैर-हकदारी दावों को रोका जा सके। मित्रों, मैं सफल और सार्थक वार्षिक बैठक के लिए आपको शुभकामना देते हुए अपनी बात संपन्न करता हूं। खेल के क्षेत्र में भारत अफ्री़का के साथ लंबी दौड़ में कोई प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता है। लेकिन, मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि भारत आपके बेहतर भविष्य के लिए आपकी लंबी एवं कठिन यात्रा में हमेशा आपके साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा और अपना भरपूर समर्थन देगा। महामहिम, देवियों और सज्जनों! मुझे अफ्री़की विकास बैंक के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की वार्षिक बैठक की आधिकारिक रूप से घोषणा करने में काफी प्रसन्नता हो रही है। धन्यवाद ! |
वृषभ राशि वालों के लिए लाल किताब के अनुसार कैसा रहेगा वर्ष 2020 और क्या कर सकते हैं इसके उपाय? वृषभ राशि का फलादेश और उसके उपाय। जानिए लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान के अनुसार संपूर्ण वर्ष को बेहतरीन और सफल वर्ष बनाने के लिए अचूक उपाय।
1. मांस-शराब से दूर रहेंगे तो बेहतर होगा।
2. चांदी का एक सिक्का अपने पास हमेशा रखें।
3. प्रत्येक गुरुवार को गणपतिजी का पूजन करें।
4. मंदिर में पीले केले का प्रसाद वितरित करें।
5. शुक्रवार का व्रत रखकर लक्ष्मी की उपासना करें।
6. धन खर्च में सावधानी बरतेंगे तो लाभ मिलेगा।
7. यात्रा आरम्भ करने से पहले कुछ मीठा खाएं फिर यात्रा पर जाएं।
8. फरवरी 2020 से स्थिति में सुधार होगा, अप्रैल में भाग्योदय होगा।
9. काले कपड़े पहनने से परहेज करें। शुक्रवार को स्काई ब्लू कपड़े पहनें।
10. विरोधियों से सावधान रहें और दिसंबर से पहले सभी महत्वपूर्ण कार्य निपटा लें।
| वृषभ राशि वालों के लिए लाल किताब के अनुसार कैसा रहेगा वर्ष दो हज़ार बीस और क्या कर सकते हैं इसके उपाय? वृषभ राशि का फलादेश और उसके उपाय। जानिए लाल किताब के रहस्यमयी ज्ञान के अनुसार संपूर्ण वर्ष को बेहतरीन और सफल वर्ष बनाने के लिए अचूक उपाय। एक. मांस-शराब से दूर रहेंगे तो बेहतर होगा। दो. चांदी का एक सिक्का अपने पास हमेशा रखें। तीन. प्रत्येक गुरुवार को गणपतिजी का पूजन करें। चार. मंदिर में पीले केले का प्रसाद वितरित करें। पाँच. शुक्रवार का व्रत रखकर लक्ष्मी की उपासना करें। छः. धन खर्च में सावधानी बरतेंगे तो लाभ मिलेगा। सात. यात्रा आरम्भ करने से पहले कुछ मीठा खाएं फिर यात्रा पर जाएं। आठ. फरवरी दो हज़ार बीस से स्थिति में सुधार होगा, अप्रैल में भाग्योदय होगा। नौ. काले कपड़े पहनने से परहेज करें। शुक्रवार को स्काई ब्लू कपड़े पहनें। दस. विरोधियों से सावधान रहें और दिसंबर से पहले सभी महत्वपूर्ण कार्य निपटा लें। |
- 27 min ago ये क्या, 3. 3 लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद!
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गीले बालों में कभी शर्माती, कभी इठलाती बिकिनी पहन पूनम पांडे ने बरपाया कहर, फैंस के उड़े होश!
बिकिनी मॉडल पूनम पांडे आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। पूनम पांडे अक्सर अपनी हॉट फोटोज से इंटरनेट का तापमान बढ़ाती रहती हैं। हाल ही में पूनम पांडे ने अपनी बोल्ड और कामुक वीडियो इंटरनेट पर पोस्ट की है।
पूनम पांडे की ये वीडियो देखकर लोग खुद को कमेंट करने से नहीं रोक पा रहे हैं। इस वीडियो में पूनम पांडे कभी शर्मा,ती कभी इठलाती, तो कभी गीले बालों में मादक अंदाज में पोज देती हुई नजर आ रही हैं। बिकिनी में पानी के साथ अठखेलियां करती पूनम पांडे बेहद हॉट लग रही हैं। इसी वीडियो में वे समुद्र किनारे दौड़ती हुई भी नजर आ रही हैं। एनिमल प्रिंट में पहनी इस बिकिनी वीडियो को पोस्ट करते हुए पूनम पांडे ने लिखा है, Sky above, sand below, peace within . . यानी आसमान ऊपर है, रेत नीचे है और शांति उनके अंदर है। हालांकि पूनम पांडे की इस वीडियो को कुछ ही घंटों में 24 हजार से अधिक लाइक्स मिल चुके हैं।
ये पहली बार नहीं है जब पूनम पांडे ने इस तरह की कोई वीडियो पोस्ट की है। इंस्टाग्राम और अन्य सोशल नेटवर्किंद साइट पर पूनम पांडे वीडियोज और फोटोस पोस्ट करती रहती हैं। पिछले दिनों उन्होंने बाली में अपनी बिकिनी पार्टी वीडियोज, पूल पार्टी वीडियोज और वेकेशन की बोल्ड फोटोज पोस्ट की थी, जिसकी वजह से वे खूब सुर्खियों में रही।
हाल ही में पूनम पांडे ने बेहद हॉट अंदाज में एक ब्लू ड्रेस में फोटो शूट करवाया इसमें वे लॉन्जरी स्टाइल ड्रेस पहने हाथ में चूड़ा, मांग टीका और बिंदी लगाए सेक्सी अंदाज में पोज देती हुई नजर आ रही है।
नशा फेम एक्ट्रेस पूनम को इंस्टाग्राम पर लगभग 7 लाख लोग फॉलो करते हैं। हालांकि फॉलोअर्स बहुत अधिक नहीं हैं लेकिन इनकी एक-एक फोटो और वीडियो पर लाखों लाइक और कमेंट आते हैं। बता दें, पूनम पांडे इंस्टाग्राम पर जितनी एक्टिव है उतनी ही वे ट्विटर और यूट्यूब जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी एक्टिव रहती हैं।
काम के मोर्चे पर बात करें तो मॉडलिंग प्रोजेक्ट्स के अलावा ऐसा माना जा रहा है कि पूनम पांडे जल्द ही लॉक अप गर्ल्स' में बतौर कंटेस्टेंट नजर आने वाली है।
बिन ब्रा बीच रोड में कार खड़ी करके ऐसी हरकत करने लगी भोजपुरी हसीना, लोग मांग रहे हैं लोकेशन!
| - सत्ताईस मिनट ago ये क्या, तीन. तीन लाख की ओवरसाइज़्ड हुडी पहनकर मलाइका अरोड़ा ने दिखाया अपना जलवा, फैंस की बोलती हुई बंद! Don't Miss! - News खबर आपके काम की, केवल एक बचा है शनिवार! - Lifestyle हाथों से मेहंदी का रंग करना है हल्का, ये टिप्स आएंगे काम, गीले बालों में कभी शर्माती, कभी इठलाती बिकिनी पहन पूनम पांडे ने बरपाया कहर, फैंस के उड़े होश! बिकिनी मॉडल पूनम पांडे आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। पूनम पांडे अक्सर अपनी हॉट फोटोज से इंटरनेट का तापमान बढ़ाती रहती हैं। हाल ही में पूनम पांडे ने अपनी बोल्ड और कामुक वीडियो इंटरनेट पर पोस्ट की है। पूनम पांडे की ये वीडियो देखकर लोग खुद को कमेंट करने से नहीं रोक पा रहे हैं। इस वीडियो में पूनम पांडे कभी शर्मा,ती कभी इठलाती, तो कभी गीले बालों में मादक अंदाज में पोज देती हुई नजर आ रही हैं। बिकिनी में पानी के साथ अठखेलियां करती पूनम पांडे बेहद हॉट लग रही हैं। इसी वीडियो में वे समुद्र किनारे दौड़ती हुई भी नजर आ रही हैं। एनिमल प्रिंट में पहनी इस बिकिनी वीडियो को पोस्ट करते हुए पूनम पांडे ने लिखा है, Sky above, sand below, peace within . . यानी आसमान ऊपर है, रेत नीचे है और शांति उनके अंदर है। हालांकि पूनम पांडे की इस वीडियो को कुछ ही घंटों में चौबीस हजार से अधिक लाइक्स मिल चुके हैं। ये पहली बार नहीं है जब पूनम पांडे ने इस तरह की कोई वीडियो पोस्ट की है। इंस्टाग्राम और अन्य सोशल नेटवर्किंद साइट पर पूनम पांडे वीडियोज और फोटोस पोस्ट करती रहती हैं। पिछले दिनों उन्होंने बाली में अपनी बिकिनी पार्टी वीडियोज, पूल पार्टी वीडियोज और वेकेशन की बोल्ड फोटोज पोस्ट की थी, जिसकी वजह से वे खूब सुर्खियों में रही। हाल ही में पूनम पांडे ने बेहद हॉट अंदाज में एक ब्लू ड्रेस में फोटो शूट करवाया इसमें वे लॉन्जरी स्टाइल ड्रेस पहने हाथ में चूड़ा, मांग टीका और बिंदी लगाए सेक्सी अंदाज में पोज देती हुई नजर आ रही है। नशा फेम एक्ट्रेस पूनम को इंस्टाग्राम पर लगभग सात लाख लोग फॉलो करते हैं। हालांकि फॉलोअर्स बहुत अधिक नहीं हैं लेकिन इनकी एक-एक फोटो और वीडियो पर लाखों लाइक और कमेंट आते हैं। बता दें, पूनम पांडे इंस्टाग्राम पर जितनी एक्टिव है उतनी ही वे ट्विटर और यूट्यूब जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी एक्टिव रहती हैं। काम के मोर्चे पर बात करें तो मॉडलिंग प्रोजेक्ट्स के अलावा ऐसा माना जा रहा है कि पूनम पांडे जल्द ही लॉक अप गर्ल्स' में बतौर कंटेस्टेंट नजर आने वाली है। बिन ब्रा बीच रोड में कार खड़ी करके ऐसी हरकत करने लगी भोजपुरी हसीना, लोग मांग रहे हैं लोकेशन! |
आजमगढ़। मेजवा में कैफी आजमी के पैतृक घर में ताला लटक रहा है। थोड़ी मशक्कत के बाद यहां के केयरटेकर 75 साल के सीताराम मिल जाते हैं। परिचय जानने के बाद वह गेट के दरवाजे में चाबी लगाने लगे। 'क्या माहौल है यहां? ' सवाल के जवाब में सीताराम ने बरामदे पर टंगी कैफी की तस्वीर की ओर इशारा कर दिया। उस पर कैफी की लिखी बात चस्पा थी 'अब जिस तरफ से चाहे गुजर जाए कारवां, वीरानियां तो सब मिरे दिल में उतर गईं। ' हंसते हुए बोले, 'यही माहौल है। ' उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर आजमगढ़ का चुनावी माहौल अब बदल रहा है। यहां आखिरी यानी सातवें चरण में मतदान होना है।
मेजवा, फूलपुर पवई विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं। कैफी आजमी इंटर कॉलेज में केमिस्ट्र्री के शिक्षक चंद्रेश यादव जातीय गणित समझाते हुए बताते हैं कि यहां लड़ाई सीधी सपा और भाजपा गठबंधन के बीच है। इस बार भाजपा के पूर्व सांसद रमाकांत यादव सपा के उम्मीदवार हैं। बसपा ने शकील अहमद और भाजपा ने रामसूरत राजभर को टिकट दिया है। 2017 में रमाकांत भाजपा में थे और उनके बेटे अरुणकांत को मिली जीत के तौर पर जिले में भाजपा का बस खाता खुल पाया था।
आजमगढ़ में दस विधानसभा क्षेत्र हैं। पिछली बार सपा ने यहां पांच, बसपा ने चार और भाजपा ने एक सीट जीती थी। बसपा की सगड़ी से विधायक वंदना सिंह इसी सीट से भाजपा की उम्मीदवार हैं। मुबाकरपुर से विधायक शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली टिकट की आस में सपा गए थे, लेकिन टिकट मिला सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष व पुराने प्रतिद्वंद्वी अखिलेश यादव को। अखिलेश यादव के खिलाफ गुड्डू जमाली ने ओवैसी की पार्टी से पर्चा भर दिया है। बसपा ने पूर्व विधायक अब्दुस्सलाम को उतारा है। दो बड़े मुस्लिम चेहरों के चलते चतुष्कोणीय लड़ाई में भाजपा के अरविंद जायसवाल भी अपने लिए उम्मीद तलाश रहे हैं।
मुबारकपुर बनारसी साड़ियों की बुनाई के लिए जाना जाता है। साड़ियां तैयार यहां की जाती हैं, जबकि फिनिशिंग-पॉलिशिंग बनारस में होती है। यहां की अंसारी मार्केट के रहने वाले नवाज कहते हैं कि अब सोने की डिजाइनिंग का काम भी इस इलाके में तेजी से हो रहा है। यहां की अधिकतर आबादी कामकाजी होने के चलते यहां राशन जैसी योजनाएं असर नहीं करेंगी। पूरे आजमगढ़ में लड़ाई सपा-बसपा के बीच है। हालांकि, कस्बे के मनोज वर्मा इससे सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि न केवल मुबारकपुर बल्कि इस बार मेहनगर, लालगंज, अतरौलिया, आजमगढ़ सदर और फूलपुर पवई में भी भाजपा बहुत अच्छा लड़ रही है।
आजमगढ़। मेजवा में कैफी आजमी के पैतृक घर में ताला लटक रहा है। थोड़ी मशक्कत के बाद यहां के केयरटेकर 75 साल के सीताराम मिल जाते हैं। परिचय जानने के बाद वह गेट के दरवाजे में चाबी लगाने लगे। 'क्या माहौल है यहां? ' सवाल के जवाब में सीताराम ने बरामदे पर टंगी कैफी की तस्वीर की ओर इशारा कर दिया। उस पर कैफी की लिखी बात चस्पा थी 'अब जिस तरफ से चाहे गुजर जाए कारवां, वीरानियां तो सब मिरे दिल में उतर गईं। ' हंसते हुए बोले, 'यही माहौल है। ' उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर आजमगढ़ का चुनावी माहौल अब बदल रहा है। यहां आखिरी यानी सातवें चरण में मतदान होना है।
| आजमगढ़। मेजवा में कैफी आजमी के पैतृक घर में ताला लटक रहा है। थोड़ी मशक्कत के बाद यहां के केयरटेकर पचहत्तर साल के सीताराम मिल जाते हैं। परिचय जानने के बाद वह गेट के दरवाजे में चाबी लगाने लगे। 'क्या माहौल है यहां? ' सवाल के जवाब में सीताराम ने बरामदे पर टंगी कैफी की तस्वीर की ओर इशारा कर दिया। उस पर कैफी की लिखी बात चस्पा थी 'अब जिस तरफ से चाहे गुजर जाए कारवां, वीरानियां तो सब मिरे दिल में उतर गईं। ' हंसते हुए बोले, 'यही माहौल है। ' उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर आजमगढ़ का चुनावी माहौल अब बदल रहा है। यहां आखिरी यानी सातवें चरण में मतदान होना है। मेजवा, फूलपुर पवई विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं। कैफी आजमी इंटर कॉलेज में केमिस्ट्र्री के शिक्षक चंद्रेश यादव जातीय गणित समझाते हुए बताते हैं कि यहां लड़ाई सीधी सपा और भाजपा गठबंधन के बीच है। इस बार भाजपा के पूर्व सांसद रमाकांत यादव सपा के उम्मीदवार हैं। बसपा ने शकील अहमद और भाजपा ने रामसूरत राजभर को टिकट दिया है। दो हज़ार सत्रह में रमाकांत भाजपा में थे और उनके बेटे अरुणकांत को मिली जीत के तौर पर जिले में भाजपा का बस खाता खुल पाया था। आजमगढ़ में दस विधानसभा क्षेत्र हैं। पिछली बार सपा ने यहां पांच, बसपा ने चार और भाजपा ने एक सीट जीती थी। बसपा की सगड़ी से विधायक वंदना सिंह इसी सीट से भाजपा की उम्मीदवार हैं। मुबाकरपुर से विधायक शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली टिकट की आस में सपा गए थे, लेकिन टिकट मिला सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष व पुराने प्रतिद्वंद्वी अखिलेश यादव को। अखिलेश यादव के खिलाफ गुड्डू जमाली ने ओवैसी की पार्टी से पर्चा भर दिया है। बसपा ने पूर्व विधायक अब्दुस्सलाम को उतारा है। दो बड़े मुस्लिम चेहरों के चलते चतुष्कोणीय लड़ाई में भाजपा के अरविंद जायसवाल भी अपने लिए उम्मीद तलाश रहे हैं। मुबारकपुर बनारसी साड़ियों की बुनाई के लिए जाना जाता है। साड़ियां तैयार यहां की जाती हैं, जबकि फिनिशिंग-पॉलिशिंग बनारस में होती है। यहां की अंसारी मार्केट के रहने वाले नवाज कहते हैं कि अब सोने की डिजाइनिंग का काम भी इस इलाके में तेजी से हो रहा है। यहां की अधिकतर आबादी कामकाजी होने के चलते यहां राशन जैसी योजनाएं असर नहीं करेंगी। पूरे आजमगढ़ में लड़ाई सपा-बसपा के बीच है। हालांकि, कस्बे के मनोज वर्मा इससे सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि न केवल मुबारकपुर बल्कि इस बार मेहनगर, लालगंज, अतरौलिया, आजमगढ़ सदर और फूलपुर पवई में भी भाजपा बहुत अच्छा लड़ रही है। आजमगढ़। मेजवा में कैफी आजमी के पैतृक घर में ताला लटक रहा है। थोड़ी मशक्कत के बाद यहां के केयरटेकर पचहत्तर साल के सीताराम मिल जाते हैं। परिचय जानने के बाद वह गेट के दरवाजे में चाबी लगाने लगे। 'क्या माहौल है यहां? ' सवाल के जवाब में सीताराम ने बरामदे पर टंगी कैफी की तस्वीर की ओर इशारा कर दिया। उस पर कैफी की लिखी बात चस्पा थी 'अब जिस तरफ से चाहे गुजर जाए कारवां, वीरानियां तो सब मिरे दिल में उतर गईं। ' हंसते हुए बोले, 'यही माहौल है। ' उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर आजमगढ़ का चुनावी माहौल अब बदल रहा है। यहां आखिरी यानी सातवें चरण में मतदान होना है। |
इटारसी। रामपुर थाना क्षेत्र के सोमलवाड़ा कलां गांव के पास रविवार को काले हिरण का शिकार कर करने की घटना हुई। नाले की झाड़ियाें के पास हिरण को काटा गया। पुलिस पहुंचती इससे पहले शिकारी भाग निकले। मौके से कुल्हाड़ी व पाॅलीथिन मिली। दो घंटे बाद झाड़ियों में मृत हिरण को ढूंढ लिया।
सूचना पर वन विभाग के पांडरी क्षेत्र के डिप्टी रेंजर घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने मामला वन विभाग के सुपुर्द किया। काले हिरण के शिकार की पुलिस और वन विभाग ने अलग-अलग कहानी सुनाई। रामपुर थाना प्रभारी निकिता विल्सन के मुताबिक दोपहर 12:30 बजे खबर लगी कि सोमलवाड़ा-पाहनवर्री के बीच एक खेत में हिरण को पकड़ा है। सूचना पर हम एएसआई माणिक बट्टी और दो आरक्षक के साथ पहुंचे। वहां कोई नहीं मिला। टीम नाले में उतरी तो यहां झाड़ियों में काले हिरण का धड़, कटे हुए दो पैर, पसलियां एवं कलेजी झाड़ियों में मिली।
एसडीओ शिव अवस्थी, रेंजर नवलसिंह चौहान के मुताबिक रामपुर थाने की डायल 100 सोमलवाड़ा कला के दूर नाले के पास से गुजर रही थी। पुलिस की भनक लगते ही शिकारी मौके से भाग निकले। वन कर्मियों ने उच्च अधिकारियों को अवगत नहीं कराया। फारेस्ट एसडीओ शिव अवस्थी ने बताया पुलिस ने मामला वन टीम को सुपुर्द किया है। सोमवार को पोस्टमार्टम होगा। डॉग स्क्वार्ड भेजी जाएगी।
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| इटारसी। रामपुर थाना क्षेत्र के सोमलवाड़ा कलां गांव के पास रविवार को काले हिरण का शिकार कर करने की घटना हुई। नाले की झाड़ियाें के पास हिरण को काटा गया। पुलिस पहुंचती इससे पहले शिकारी भाग निकले। मौके से कुल्हाड़ी व पाॅलीथिन मिली। दो घंटे बाद झाड़ियों में मृत हिरण को ढूंढ लिया। सूचना पर वन विभाग के पांडरी क्षेत्र के डिप्टी रेंजर घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने मामला वन विभाग के सुपुर्द किया। काले हिरण के शिकार की पुलिस और वन विभाग ने अलग-अलग कहानी सुनाई। रामपुर थाना प्रभारी निकिता विल्सन के मुताबिक दोपहर बारह:तीस बजे खबर लगी कि सोमलवाड़ा-पाहनवर्री के बीच एक खेत में हिरण को पकड़ा है। सूचना पर हम एएसआई माणिक बट्टी और दो आरक्षक के साथ पहुंचे। वहां कोई नहीं मिला। टीम नाले में उतरी तो यहां झाड़ियों में काले हिरण का धड़, कटे हुए दो पैर, पसलियां एवं कलेजी झाड़ियों में मिली। एसडीओ शिव अवस्थी, रेंजर नवलसिंह चौहान के मुताबिक रामपुर थाने की डायल एक सौ सोमलवाड़ा कला के दूर नाले के पास से गुजर रही थी। पुलिस की भनक लगते ही शिकारी मौके से भाग निकले। वन कर्मियों ने उच्च अधिकारियों को अवगत नहीं कराया। फारेस्ट एसडीओ शिव अवस्थी ने बताया पुलिस ने मामला वन टीम को सुपुर्द किया है। सोमवार को पोस्टमार्टम होगा। डॉग स्क्वार्ड भेजी जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
सरल व्यजनों के सम्बन्ध में ३६३
जै०महा० में कामुय भी मिलता है ( एर्से ० ), चॉउण्डा के स्थान पर शौर० में चामुण्डा है ( मालती० ३०, ५, कर्पूर० १०५, २, १०६, २, १०७, १ ) । महा० में कुमरी के लिए कुअरी रूप जो = कुमारी है, अशुद्ध है ( हाल २९८ ) और वेबर के हाल' भूमिका के पेज ६१ श्लोक २९८ की टीका में अन्य शब्दों पर जो लिखा गया है वह भी देखिए । अप० में थाउ = स्थामन में यही ध्वनि परिवर्तन माना जाना चाहिए ( हेच० ४, ३५८, १, पाठ मे थाउ है ), टीकाकारी के अनुसार इसका अर्थ 'स्थान' है । क्रम० ५, ९९ मे थाम स्थान है । इसके अतिरिक्त भमुहा से जो भो हा निकला है ( पिगल २, ९८, पाठ में मोहा है, एस० गौरदश्मित्त भमुहा, ९१२४ और १६६ की तुलना कीजिए) और हजुआ = हनुमान ( पिगल १,६३ अ, पाठ में हणुआ है) में भी यही व्वनि परिवर्तन है । - अ०माग० अणवदग्ग, अ०माग० और जै० महा० • अणवयग्ग = पाली अनमतग्ग = अनमद (सूय० ४५६ [पाठ में अणोचदग्ग है], ७८७, ७८९, ८६७, ठाणग० ४१ और १२९, पहा० २१४ और ३०२, नायाध० ४६४ और ४७१, विवाह० ३८ ३९, १६०, ८४८, ११२८, १२९०, १३२४, उत्तर० ८४२, एस० ) में म के स्थान पर व बैठ गया है इसका सबंध नम् धातु से है, इसके महा०, जै०महा० और अप० रूप में भी कभी-कभी व मिलता है, णवइ ( हेच० ४, २२६ ), महा० ओणविअ = #अवनमित अवनत ( हाल ६३७), जै०महा० में नवकार = नमस्कार ( एर्से ० ३५, २३ २५, २७ और २९), अ०भाग० विपणवन्ति = विप्रणमन्ति ( सूय० ४७२ ) अप० वहि = नमन्ति ( हेच० ४, ३६७, ४ ), णवन्ताह = नमन्ताम् ( हेच० ४, ३९९ )। अविकाश में नम् सभी प्राकृत भाषाओं में म बनाये रहता है। अहिवण्णु ( हेच० १, २४३ ) और इसके साथ साथ अधिमण्णु ( हेच० १, २४३, ३४, १२, ६४, १६ ) रूप मिलते हैं, अप० में रवण्ण = रमण्य ( हेच० ४, २२२, ११), अ०माग० मे वाणवन्तर और इसके साथ साथ साधारण प्रचलित वाणमन्तर पाये जाते हैं (नायाघ० ११२४, ठाणग० २२२, भग० ओव०, कप्प ० ) । - शब्द के आरंभ में भी कभी कभी मका व हो जाता है • अ०माग० मे वीमंसा = मीमांसा (सूय० ५९, ठाणग० ३३२ और उसके बाद, नदी० ३५१, ३८१, ३८३ और ५०५), वीमंसय = सीमांसक ( पण्डा० १७९) ३, वंजर ( हेच० २, १३२ ) और इसके साथ साथ मंजर (§ ८१, ८६) रूप मिलते हैं [= मार्जार । -अनु०], महा०, जै०महा० और अप० वम्मह = मन्मथ ( वर० २, ३९, चड० ३, २१, हेच० १, २४२, कम० २, ४५, मार्क० पन्ना १८, गउड०, हाल, रावण० कर्पूर० ३८, ११, ४७,१६, ५७, ६ विद्ध० २४, १२, धूर्त० ३, १३, उन्मत्त० २, १९, एस०, एर्से● पिगल
२, ८८ ), पद्म में 'माग० में भी यही रूप आया है ( मृच्छ० १०, १३, पाठ में वम्मह है, गोडबोले के सस्करण में २८, ४ की नोट सहित तुलना करें ), किंतु शौर में मम्मध* रूप है ( शकु० ५३, २, हास्या० २२, १५, २५, ३ और १४, कर्पूर ० ९२, ८, माल्ती ० ८१, २, १२५, २, २६६, ३ नागा० १२, २, प्रसन्न० ३२, १२, ३६, १८, ८४, ३, वृपभ० २९, १९, ३८, २१, ४२, ११, ४९, ९; | सरल व्यजनों के सम्बन्ध में तीन सौ तिरेसठ जैशून्यमहाशून्य में कामुय भी मिलता है , चॉउण्डा के स्थान पर शौरशून्य में चामुण्डा है । महाशून्य में कुमरी के लिए कुअरी रूप जो = कुमारी है, अशुद्ध है और वेबर के हाल' भूमिका के पेज इकसठ श्लोक दो सौ अट्ठानवे की टीका में अन्य शब्दों पर जो लिखा गया है वह भी देखिए । अपशून्य में थाउ = स्थामन में यही ध्वनि परिवर्तन माना जाना चाहिए , टीकाकारी के अनुसार इसका अर्थ 'स्थान' है । क्रमशून्य पाँच, निन्यानवे मे थाम स्थान है । इसके अतिरिक्त भमुहा से जो भो हा निकला है और हजुआ = हनुमान में भी यही व्वनि परिवर्तन है । - अशून्यमागशून्य अणवदग्ग, अशून्यमागशून्य और जैशून्य महाशून्य • अणवयग्ग = पाली अनमतग्ग = अनमद में म के स्थान पर व बैठ गया है इसका सबंध नम् धातु से है, इसके महाशून्य, जैशून्यमहाशून्य और अपशून्य रूप में भी कभी-कभी व मिलता है, णवइ , महाशून्य ओणविअ = #अवनमित अवनत , जैशून्यमहाशून्य में नवकार = नमस्कार , अशून्यभागशून्य विपणवन्ति = विप्रणमन्ति अपशून्य वहि = नमन्ति , णवन्ताह = नमन्ताम् । अविकाश में नम् सभी प्राकृत भाषाओं में म बनाये रहता है। अहिवण्णु और इसके साथ साथ अधिमण्णु रूप मिलते हैं, अपशून्य में रवण्ण = रमण्य , अशून्यमागशून्य मे वाणवन्तर और इसके साथ साथ साधारण प्रचलित वाणमन्तर पाये जाते हैं । - शब्द के आरंभ में भी कभी कभी मका व हो जाता है • अशून्यमागशून्य मे वीमंसा = मीमांसा , वीमंसय = सीमांसक तीन, वंजर और इसके साथ साथ मंजर रूप मिलते हैं [= मार्जार । -अनुशून्य], महाशून्य, जैशून्यमहाशून्य और अपशून्य वम्मह = मन्मथ , पद्म में 'मागशून्य में भी यही रूप आया है , किंतु शौर में मम्मध* रूप है ( शकुशून्य तिरेपन, दो, हास्याशून्य बाईस, पंद्रह, पच्चीस, तीन और चौदह, कर्पूर शून्य बानवे, आठ, माल्ती शून्य इक्यासी, दो, एक सौ पच्चीस, दो, दो सौ छयासठ, तीन नागाशून्य बारह, दो, प्रसन्नशून्य बत्तीस, बारह, छत्तीस, अट्ठारह, चौरासी, तीन, वृपभशून्य उनतीस, उन्नीस, अड़तीस, इक्कीस, बयालीस, ग्यारह, उनचास, नौ; |
आयकर विभाग की टीम ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के निजी सचिव प्रवीण कक्कड़ के घर छापा मारा। बताया जा रहा है कि सर्विस के दौरान ही कई जांच चल रही थी। प्रवीण जब पुलिस अधिकारी थे तभी उनके खिलाफ कई मामले सामने आए थे।
आयकर विभाग की दिल्ली टीम ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशन ड्यूटी) के घर पर छापेमारी की है। देर रात 3 बजे 15 से अधिक अधिकारियों की टीम ने स्कीम नंबर 74 स्थित निवास पर छापा मारा। इसके साथ ही विजय नगर स्थित शोरूम सहित अन्य स्थानों पर भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि सर्विस के दौरान ही कई जांच चल रही थी। प्रवीण जब पुलिस अधिकारी थे तभी उनके खिलाफ कई मामले सामने आए थे।
बताया जा रहा है कि जब आयकर विभाग की टीम देर रात पहुंची तो प्रवीण कक्कड़ के परिवार के लोग घबरा गए थे। जब उन्हें पुख्ता हो गया कि ये सभी आयकर के अधिकारी हैं तो उन्होंने जांच में सहयोग किया।
प्रवीण कक्कड़ को पुलिस विभाग में रहने के दौरान उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था। इसके बाद उन्होंने 2004 में अपने नौकरी छोड़ दी और कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के ओएसडी बन गए।
कक्कड़ पुलिस सर्विस से वीआरएस लेने के बाद कांतिलाल भूरिया से जुड़ गए थे। लंबे समय तक वे भूरिया के निजी सहायक रहे। जब भूरिया मंत्री बने तो वे उनके ओएसडी रहे। शिवराज सिंह सरकार के समय जब भूरिया कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे तब कांग्रेस प्रवक्ता के के मिश्रा ने पार्टी से विद्रोह कर भूरिया के खिलाफ मोर्चा खोला था।
उस समय आरोप लगाया गया था कि कक्कड़ और भूरिया मिलाकर एक शराब फैक्टरी अपने बच्चों के पार्टनर शिप में प्रदेश में लगा रहे है। शिवराज सिंह सरकार ने अनुमति भी लगभग दे दी थी लेकिन ऐन मौके पर उठे विवाद के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाला दिया गया।
यही नहीं यह भी बताया जाता है कि कक्कड़ और भूरिया के बेटों के नाम गोवा में एक बड़ी खदान है। वह भी भाजपा सरकार के समय मिली थी।
2015 में कांतिलाल भूरिया को रतलाम-झाबुआ सीट पर मिली जीत प्रवीण कक्कड़ द्वारा बनाई रणनीति से मिली। दिसंबर 2018 में वे सीएम कमलनाथ के ओएसडी बने थे।
| आयकर विभाग की टीम ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के निजी सचिव प्रवीण कक्कड़ के घर छापा मारा। बताया जा रहा है कि सर्विस के दौरान ही कई जांच चल रही थी। प्रवीण जब पुलिस अधिकारी थे तभी उनके खिलाफ कई मामले सामने आए थे। आयकर विभाग की दिल्ली टीम ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी के घर पर छापेमारी की है। देर रात तीन बजे पंद्रह से अधिक अधिकारियों की टीम ने स्कीम नंबर चौहत्तर स्थित निवास पर छापा मारा। इसके साथ ही विजय नगर स्थित शोरूम सहित अन्य स्थानों पर भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि सर्विस के दौरान ही कई जांच चल रही थी। प्रवीण जब पुलिस अधिकारी थे तभी उनके खिलाफ कई मामले सामने आए थे। बताया जा रहा है कि जब आयकर विभाग की टीम देर रात पहुंची तो प्रवीण कक्कड़ के परिवार के लोग घबरा गए थे। जब उन्हें पुख्ता हो गया कि ये सभी आयकर के अधिकारी हैं तो उन्होंने जांच में सहयोग किया। प्रवीण कक्कड़ को पुलिस विभाग में रहने के दौरान उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था। इसके बाद उन्होंने दो हज़ार चार में अपने नौकरी छोड़ दी और कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के ओएसडी बन गए। कक्कड़ पुलिस सर्विस से वीआरएस लेने के बाद कांतिलाल भूरिया से जुड़ गए थे। लंबे समय तक वे भूरिया के निजी सहायक रहे। जब भूरिया मंत्री बने तो वे उनके ओएसडी रहे। शिवराज सिंह सरकार के समय जब भूरिया कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे तब कांग्रेस प्रवक्ता के के मिश्रा ने पार्टी से विद्रोह कर भूरिया के खिलाफ मोर्चा खोला था। उस समय आरोप लगाया गया था कि कक्कड़ और भूरिया मिलाकर एक शराब फैक्टरी अपने बच्चों के पार्टनर शिप में प्रदेश में लगा रहे है। शिवराज सिंह सरकार ने अनुमति भी लगभग दे दी थी लेकिन ऐन मौके पर उठे विवाद के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाला दिया गया। यही नहीं यह भी बताया जाता है कि कक्कड़ और भूरिया के बेटों के नाम गोवा में एक बड़ी खदान है। वह भी भाजपा सरकार के समय मिली थी। दो हज़ार पंद्रह में कांतिलाल भूरिया को रतलाम-झाबुआ सीट पर मिली जीत प्रवीण कक्कड़ द्वारा बनाई रणनीति से मिली। दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह में वे सीएम कमलनाथ के ओएसडी बने थे। |
कराची। विश्व कप से पहले पाकिस्तान क्रिकेट टीम की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले उनके अनुभवी पेसर उमर गुल चोट के कारण विश्व कप से बाहर हो गए, उसके बाद दिग्गज स्पिनर सइद अजमल ने टीम से नाम वापस ले लिया (हालांकि अभी उनके खेलने की उम्मीद बाकी है) और अब दिग्गज ऑलराउंडर मोहम्मद हफीज चोट के कारण विश्व कप टीम से बाहर हो गए हैं।
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के एक प्रवक्ता ने बताया, 'हफीज को पिंडली (काफ मसल) में चोट लगी है और डॉक्टरों ने उन्हें दो से तीन हफ्तों तक आराम करने की सलाह दी है। ' टीम के मीडिया मैनेजर रजा किचल्यू ने कहा है कि दौरे की चयन समिति ने बोर्ड के चेयरमैन को प्रस्ताव भेज दिया है कि हफीज की जगह नासिर जमशेद को टीम में शामिल करने की इजाजत दी जाए। इसके साथ ही आइसीसी को भी मेडिकल रिपोर्ट भेजकर हफीज की जगह अन्य खिलाड़ी को शामिल करने की इजाजत मांगी गई है। हफीज का टीम से बाहर होना उनकी टीम के लिए बड़ा झटका है। बेशक वो एक ऑलराउंडर के तौर पर गेंदबाजी न कर पाते क्योंकि आइसीसी ने गलत एक्शन के चलते उनकी गेंदबाजी पर प्रतिबंध लगा रखा लेकिन उनका अनुभव और बल्लेबाजी पाकिस्तान टीम के बहुत काम आ सकती थी।
| कराची। विश्व कप से पहले पाकिस्तान क्रिकेट टीम की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले उनके अनुभवी पेसर उमर गुल चोट के कारण विश्व कप से बाहर हो गए, उसके बाद दिग्गज स्पिनर सइद अजमल ने टीम से नाम वापस ले लिया और अब दिग्गज ऑलराउंडर मोहम्मद हफीज चोट के कारण विश्व कप टीम से बाहर हो गए हैं। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के एक प्रवक्ता ने बताया, 'हफीज को पिंडली में चोट लगी है और डॉक्टरों ने उन्हें दो से तीन हफ्तों तक आराम करने की सलाह दी है। ' टीम के मीडिया मैनेजर रजा किचल्यू ने कहा है कि दौरे की चयन समिति ने बोर्ड के चेयरमैन को प्रस्ताव भेज दिया है कि हफीज की जगह नासिर जमशेद को टीम में शामिल करने की इजाजत दी जाए। इसके साथ ही आइसीसी को भी मेडिकल रिपोर्ट भेजकर हफीज की जगह अन्य खिलाड़ी को शामिल करने की इजाजत मांगी गई है। हफीज का टीम से बाहर होना उनकी टीम के लिए बड़ा झटका है। बेशक वो एक ऑलराउंडर के तौर पर गेंदबाजी न कर पाते क्योंकि आइसीसी ने गलत एक्शन के चलते उनकी गेंदबाजी पर प्रतिबंध लगा रखा लेकिन उनका अनुभव और बल्लेबाजी पाकिस्तान टीम के बहुत काम आ सकती थी। |
तीसरा दृश्य
{ थोडी देर के बाद परदा उठता है । स्टेज पर धोमा-छीमा उजाला है ~~सड़क सुनसान है -- मन्दिर को सोढियो पर यात्री नहीं है - केवल मन्दिर में प्रकाश दिखाई देता है । स्टेज के बाई थोर एक श्रावारा फटे कपड़े पहने थाग जलाए बैठा है ।] पार्वती ( हारी थकी हुई ) - महाराज, अब तो खड़े-खड़े टार्गे भी - - सुन्न होने लगी उफ । जीवन के कितने ही रग उसे है
आज । महाराज, क्या इस सुतार मे झूठ और धोखे का नाम ही जीवन है ?
शिवजी ( दुखी होकर ) -- मनुष्य, मनुष्य को खाए जाता है।
[ मन्दिर का पुजारी विन-भर की भेंट अपने कंधो पर लावे हुए मन्दिर को सीढ़ियों से उतरता है । ] पार्वती (हँसकर ) - महाराज, भूख तो मुझे भी लग रही है और इन मनुष्यों की बातें सुनकर मेरा जी चाहता है कि इन्हें गा जाऊँ ! ( हँसकर ) परन्तु महाराज, यहाँ खढ़े रहकर क्या करोगे ? श्रव तो यह सड़क भी सुनसान हो गई है और वह मन्दिर के पुजारी भी चले ना रहे हे-देखो, चढाव के बोझ से कधे झुके हुए है।
शिनजी - ( भिखारियो की तरह ) - जय महादेव की ! महाराज, हम पर दया करो । हम गरीब परदेसी है, भोजन मागते है आपकी कृपा से रात को यहाँ मन्दिर के द्वार पर सो रहगे । | तीसरा दृश्य { थोडी देर के बाद परदा उठता है । स्टेज पर धोमा-छीमा उजाला है ~~सड़क सुनसान है -- मन्दिर को सोढियो पर यात्री नहीं है - केवल मन्दिर में प्रकाश दिखाई देता है । स्टेज के बाई थोर एक श्रावारा फटे कपड़े पहने थाग जलाए बैठा है ।] पार्वती - महाराज, अब तो खड़े-खड़े टार्गे भी - - सुन्न होने लगी उफ । जीवन के कितने ही रग उसे है आज । महाराज, क्या इस सुतार मे झूठ और धोखे का नाम ही जीवन है ? शिवजी -- मनुष्य, मनुष्य को खाए जाता है। [ मन्दिर का पुजारी विन-भर की भेंट अपने कंधो पर लावे हुए मन्दिर को सीढ़ियों से उतरता है । ] पार्वती - महाराज, भूख तो मुझे भी लग रही है और इन मनुष्यों की बातें सुनकर मेरा जी चाहता है कि इन्हें गा जाऊँ ! परन्तु महाराज, यहाँ खढ़े रहकर क्या करोगे ? श्रव तो यह सड़क भी सुनसान हो गई है और वह मन्दिर के पुजारी भी चले ना रहे हे-देखो, चढाव के बोझ से कधे झुके हुए है। शिनजी - - जय महादेव की ! महाराज, हम पर दया करो । हम गरीब परदेसी है, भोजन मागते है आपकी कृपा से रात को यहाँ मन्दिर के द्वार पर सो रहगे । |
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