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Ranchi : आईएमए झारखंड और झासा ने गुरुवार को एक मीटिंग के बाद सरकार को अल्टीमेटम जारी किया है. उसमें कहा गया है कि अगर दोषियों को 24 फरवरी तक गिरफ़तार नहीं किया गया तो, 26 फरवरी को एक साथ आधे दिन के लिए सभी सरकारी डाक्टर हड़ताल पर चले जायेगे. बता दें कि जामताड़ा सिविल सर्जन डा बीके सहाय और तोपचांची के एमओआईसी डा जयंत कुमार को शारीरिक प्रताड़ना दिये जाने और धमकी देने के कारण आईएमए में रोष है.
झारखंड आईएमए और झासा के अनुसार जामताड़ा और तोपचांची में हुए डाक्टरों के साथ हुए अभद्र व्यवहार के खिलाफ दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज किया जा चुका है, पर दोषियों के खिलाफ न तो कोई कार्रवाई की गयी और न ही अभी तक गिरफतारी ही हुई है.
आईएमए और झासा के पदाधिकारियों ने कहा कि वे इस मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव से मिलेंगे और चिंता जतायेंगे. इस मामले में वे जल्द कार्रवाई की मांग करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कार्रवाई नहीं की गयी, तो दूसरे चरण में सभी प्राईवेट और सरकारी डाक्टर हड़ताल पर चले जायेंगे.
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| Ranchi : आईएमए झारखंड और झासा ने गुरुवार को एक मीटिंग के बाद सरकार को अल्टीमेटम जारी किया है. उसमें कहा गया है कि अगर दोषियों को चौबीस फरवरी तक गिरफ़तार नहीं किया गया तो, छब्बीस फरवरी को एक साथ आधे दिन के लिए सभी सरकारी डाक्टर हड़ताल पर चले जायेगे. बता दें कि जामताड़ा सिविल सर्जन डा बीके सहाय और तोपचांची के एमओआईसी डा जयंत कुमार को शारीरिक प्रताड़ना दिये जाने और धमकी देने के कारण आईएमए में रोष है. झारखंड आईएमए और झासा के अनुसार जामताड़ा और तोपचांची में हुए डाक्टरों के साथ हुए अभद्र व्यवहार के खिलाफ दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज किया जा चुका है, पर दोषियों के खिलाफ न तो कोई कार्रवाई की गयी और न ही अभी तक गिरफतारी ही हुई है. आईएमए और झासा के पदाधिकारियों ने कहा कि वे इस मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव से मिलेंगे और चिंता जतायेंगे. इस मामले में वे जल्द कार्रवाई की मांग करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि अगर कार्रवाई नहीं की गयी, तो दूसरे चरण में सभी प्राईवेट और सरकारी डाक्टर हड़ताल पर चले जायेंगे. न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं. |
मुंबई । रणवीर शौरी , गुल पनाग और रोहन मेहरा जैसे सितारों से सजी कोर्ट रुम ड्रामा फिल्म IPC 420 जी5 में रिलीज हो गया है। फिल्म का रिव्यू हमने अपने चैनल में डाला है। जिसका लिंक नीचे दिया गया है।
| मुंबई । रणवीर शौरी , गुल पनाग और रोहन मेहरा जैसे सितारों से सजी कोर्ट रुम ड्रामा फिल्म IPC चार सौ बीस जीपाँच में रिलीज हो गया है। फिल्म का रिव्यू हमने अपने चैनल में डाला है। जिसका लिंक नीचे दिया गया है। |
इस्लामाबादः दुनिया के सामने शराफत का नक़ाब पहने पाकिस्तान का असली चेहरा, खुद पाकिस्तान के मीडिया ने उजागर कर दिया है. पाकिस्तान के एक निजी अख़बार ने पाक के हुक्मरानों को चेताते हुए लिखा है कि अगर कट्टरपंथ और आतंकी गतिविधियों में लिप्त संगठनों के खिलाफ सहानुभूति वाला दृष्टिकोण नहीं बदला गया तो पाकिस्तान आतंकवाद के नए रूप को जन्म दे सकता है.
अख़बार ने अपने स्तम्भ में कहा है कि 'कट्टरपंथ को लेकर दोहरा रवैया एक तरह से सहानुभूति को दर्शाता है। इससे नए तरह का आतंक पैदा होने के लिए जमीन तैयार होती है. ' अखबार ने इस बात को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है कि वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान को समस्याओं को जन्म देने वाले राष्ट्र के तौर पर देखा जा रहा है. संपादकीय में इस बात पर चिंता जताई गई है कि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, ऐसे में भविष्य के लिए आतंक की नई फसल तैयार हो रही है, जो एक बड़ी समस्या बन सकती है.
अखबार में भारत के लिहाज से जो सबसे अहम बात कही गई है उसमें हाफिज सईद का नाम ओसामा बिन लादेन और अयमान अल जवाहिरी के साथ लिखा गया है. संपादकीय में कहा गया है कि ओसामा बिन लादेन के उत्तराधिकारी अयमान अल जाहिरी के बारे में कहा जाता है कि वह पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कहीं है और इन दिनों सबसे ज्यादा सुर्खियों में छाया हुआ शख्स, जिसका नाम हाफिज सईद है, वह भी यहीं है.
| इस्लामाबादः दुनिया के सामने शराफत का नक़ाब पहने पाकिस्तान का असली चेहरा, खुद पाकिस्तान के मीडिया ने उजागर कर दिया है. पाकिस्तान के एक निजी अख़बार ने पाक के हुक्मरानों को चेताते हुए लिखा है कि अगर कट्टरपंथ और आतंकी गतिविधियों में लिप्त संगठनों के खिलाफ सहानुभूति वाला दृष्टिकोण नहीं बदला गया तो पाकिस्तान आतंकवाद के नए रूप को जन्म दे सकता है. अख़बार ने अपने स्तम्भ में कहा है कि 'कट्टरपंथ को लेकर दोहरा रवैया एक तरह से सहानुभूति को दर्शाता है। इससे नए तरह का आतंक पैदा होने के लिए जमीन तैयार होती है. ' अखबार ने इस बात को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है कि वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान को समस्याओं को जन्म देने वाले राष्ट्र के तौर पर देखा जा रहा है. संपादकीय में इस बात पर चिंता जताई गई है कि पाकिस्तान में आतंकी संगठनों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, ऐसे में भविष्य के लिए आतंक की नई फसल तैयार हो रही है, जो एक बड़ी समस्या बन सकती है. अखबार में भारत के लिहाज से जो सबसे अहम बात कही गई है उसमें हाफिज सईद का नाम ओसामा बिन लादेन और अयमान अल जवाहिरी के साथ लिखा गया है. संपादकीय में कहा गया है कि ओसामा बिन लादेन के उत्तराधिकारी अयमान अल जाहिरी के बारे में कहा जाता है कि वह पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कहीं है और इन दिनों सबसे ज्यादा सुर्खियों में छाया हुआ शख्स, जिसका नाम हाफिज सईद है, वह भी यहीं है. |
[१.१०४वादः प्रतिपक्षस्थापनाहीनो यदि तद् वादवितण्डा । जल्पोऽपि विपक्षस्थापनाहीत् जत्पवितण्डा स्यादिति न्यायमार्गेषु सद्बुधैः उद्योतकरादिभिः चतस्रः कथाः परिकीर्तिताः । तत्र
वीतरागकथे वाद वितण्डे निर्णयान्ततः ।
विजिगीषुकथे जल्पवितण्डे तदभावतः ॥ १०१ ॥ वादवादवितण्डे वीतरागकथे भवतः । गुरुशिष्यैः विशिष्टविद्वद्भिर्वा श्रेयोऽर्थिभिः तत्त्ववभुत्सुभिः अमत्सरैरन्यतरपक्षनिर्णयपर्यन्तं क्रियमाणत्वात् । जल्पजरूपवितण्डे विचिगीषुक थे स्याताम् । वादिप्रतिवादिसभापतिप्राचिकाङ्गत्वात् । लाभपूजाख्यातिका मैः समत्सरैः तत्त्वज्ञानसंरवितण्डाओं का वर्णन करते हैं । जिस वाद और जल्प में प्रतिपक्ष की स्थापना नहीं की जाती उन्हें अच्छे विद्वान न्याय मार्ग के शास्त्रों में वितण्डा कहते हैं । अर्थात् - वाद में यदि प्रतिपक्ष की स्थापना न हो तो वह वादवितण्डा होती है तथा जल्प में प्रतिपक्ष की स्थापना न हो तो वह जल्पवितण्डा होती है ऐसा न्याय के मार्ग में अच्छे विद्वानों ने - उद्योतकर आदि ने कहा है, इस प्रकार कथा के चार प्रकार होते हैं ( वाद, वादवितण्डा, जप तथा जल्पवितण्डा ) । इन में वाद तथा वादवितण्डा (तत्त्व के ) निर्णय होने तक की जाती हैं अतः ये वीतराग कथाएं हैं तथा जल्प और जल्पवितण्डामें उस का अभाव है ( तत्त्व का निर्णय मुख्य न हो कर बादी का जय अथवा पराजय मुख्य है, वादी का जय होते ही वह समाप्त होती है ) अतः ये कथाएं विजिगीषु कथाएं हैं । वाद तथा वादवितण्डा ये वीतराग कथाएं हैं क्यों कि ये गुरुशिष्यों में अथवा उन विशिष्ट विद्वानों में होती हैं जो कल्याण में के इच्छुक, तंत्त्व जानने के लिए उत्सुक तथा मत्सर से दूर होते हैं, ये कथाएं एक पक्ष के निर्णय होने तक की जाती हैं ( इन में किसी की हार या जीत का प्रश्न नहीं होता, कौनसा तत्त्व सत्य है यह निर्णय होता है ) । जल्प और जल्पवितण्डा ये विजिगीषु कथाएं हैं, इन में वादी, प्रतिवादी, सभापति तथा प्राश्निक ( परीक्षक सभासद ) ये चारों अंग होते हैं, लाभ, आदर तथा कीर्ति की इच्छा रखनेवाले मत्सरी वादी ( अपने पक्ष के ) तत्त्ववर्णन के रक्षण के लिए ये कथाएं करते हैं तथा प्रतिवादी के पराजय तक ही ये कथाएँ | [एक.एक सौ चारवादः प्रतिपक्षस्थापनाहीनो यदि तद् वादवितण्डा । जल्पोऽपि विपक्षस्थापनाहीत् जत्पवितण्डा स्यादिति न्यायमार्गेषु सद्बुधैः उद्योतकरादिभिः चतस्रः कथाः परिकीर्तिताः । तत्र वीतरागकथे वाद वितण्डे निर्णयान्ततः । विजिगीषुकथे जल्पवितण्डे तदभावतः ॥ एक सौ एक ॥ वादवादवितण्डे वीतरागकथे भवतः । गुरुशिष्यैः विशिष्टविद्वद्भिर्वा श्रेयोऽर्थिभिः तत्त्ववभुत्सुभिः अमत्सरैरन्यतरपक्षनिर्णयपर्यन्तं क्रियमाणत्वात् । जल्पजरूपवितण्डे विचिगीषुक थे स्याताम् । वादिप्रतिवादिसभापतिप्राचिकाङ्गत्वात् । लाभपूजाख्यातिका मैः समत्सरैः तत्त्वज्ञानसंरवितण्डाओं का वर्णन करते हैं । जिस वाद और जल्प में प्रतिपक्ष की स्थापना नहीं की जाती उन्हें अच्छे विद्वान न्याय मार्ग के शास्त्रों में वितण्डा कहते हैं । अर्थात् - वाद में यदि प्रतिपक्ष की स्थापना न हो तो वह वादवितण्डा होती है तथा जल्प में प्रतिपक्ष की स्थापना न हो तो वह जल्पवितण्डा होती है ऐसा न्याय के मार्ग में अच्छे विद्वानों ने - उद्योतकर आदि ने कहा है, इस प्रकार कथा के चार प्रकार होते हैं । इन में वाद तथा वादवितण्डा निर्णय होने तक की जाती हैं अतः ये वीतराग कथाएं हैं तथा जल्प और जल्पवितण्डामें उस का अभाव है अतः ये कथाएं विजिगीषु कथाएं हैं । वाद तथा वादवितण्डा ये वीतराग कथाएं हैं क्यों कि ये गुरुशिष्यों में अथवा उन विशिष्ट विद्वानों में होती हैं जो कल्याण में के इच्छुक, तंत्त्व जानने के लिए उत्सुक तथा मत्सर से दूर होते हैं, ये कथाएं एक पक्ष के निर्णय होने तक की जाती हैं । जल्प और जल्पवितण्डा ये विजिगीषु कथाएं हैं, इन में वादी, प्रतिवादी, सभापति तथा प्राश्निक ये चारों अंग होते हैं, लाभ, आदर तथा कीर्ति की इच्छा रखनेवाले मत्सरी वादी तत्त्ववर्णन के रक्षण के लिए ये कथाएं करते हैं तथा प्रतिवादी के पराजय तक ही ये कथाएँ |
भारत में रहने वाले अधिकांश लोगों की अब इंटरनेट तक पहुंच है और बहुत बार हम ऐसे वीडियो या चित्र देखते हैं जो स्वचालित रूप से हमारे चेहरे पर मुस्कान लाते हैं। इनमें से कुछ वीडियो या तस्वीरें वायरल हो जाती हैं और लोग उन्हें उसी की वजह से पहचान भी लेते हैं। यहां हमारे पास एक ऐसा वीडियो है जहां एक एडवेंचर बाइक सवार एक बूढ़े व्यक्ति को अपनी Honda Africa Twin पर बैठने और पोज देने की अनुमति देता है। वीडियो अब वायरल हो गया है और कई लोगों का दिल जीत लिया है।
इस वीडियो को Adventure_riders_world ने अपने इंस्टाग्राम चैनल पर शेयर किया है। इस वीडियो में बाइकर्स के एक समूह को ग्रामीण इलाकों की खोज करते हुए देखा जा सकता है। ऐसा लगता है कि समूह कर्नाटक के कुछ हिस्सों की खोज कर रहा था। समूह की सभी बाइक्स Honda Africa Twin्स थीं और वे सभी यात्रा के लिए अच्छी तरह से तैयार थीं। जब वे एक साहसिक बाइक की सवारी कर रहे थे, तो वे कीचड़ वाली सड़कों और पगडंडियों से गुजर रहे थे जहाँ सामान्य बाइक और कार नहीं जाती थीं। ऐसा लगता है कि बाइकर्स ने बीच में ब्रेक लिया और एक स्थानीय ने बाइक की जांच करने का फैसला किया।
स्थानीय एक बूढ़ा व्यक्ति था और यह वीडियो से काफी स्पष्ट है। हो सकता है उसने बाइकर्स से पूछा हो कि क्या वह बाइक के साथ तस्वीर क्लिक कर सकता है। वीडियो में हम देखते हैं कि बूढ़ा वास्तव में मोटरसाइकिल पर बैठा है और सवार ने उसे मोटरसाइकिल पर खड़े होने के लिए भी कहा, जैसे वे सवारी करते समय करते हैं। बाइकर्स में से दो ने उन्हें बाइक पर चढ़ने में मदद की और हम वास्तव में एडवेंचर मोटरसाइकिल पर बैठने के बाद बूढ़े व्यक्ति को मुस्कुराते हुए देख सकते हैं। उसने तस्वीरें भी खिंचवाईं और एक बार जब वह मोटरसाइकिल से उतर गया, तो सवारों ने अपनी सवारी जारी रखी।
वीडियो में यहां देखी गई मोटरसाइकिल Honda की 2022 मॉडल अफ्रीका ट्विन जैसी दिखती है। एडवेंचर स्पोर्ट्स मोटरसाइकिल देश भर में Honda Big WIng डीलरशिप के माध्यम से बेची जाती है क्योंकि यह एक प्रीमियम उत्पाद है। इस बाइक को भारतीय बाजार में CKD (कंप्लीटली नॉक्ड डाउन) मॉडल के तौर पर लॉन्च किया गया था। मोटरसाइकिल एक DCT और एक मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ उपलब्ध है। यह टूरिंग के साथ-साथ एडवेंचर ट्रेल्स के लिए बेहद सक्षम मोटरसाइकिल है। Honda Africa Twin के कई वीडियो ऑनलाइन उपलब्ध हैं जो दिखाते हैं कि यह मोटरसाइकिल वास्तव में कितनी सक्षम है।
मोटरसाइकिल 1082-cc, लिक्विड-कूल्ड, 4-स्ट्रोक, पैरेलल ट्विन इंजन के साथ आती है जो 98 Ps और 103 Nm का पीक टॉर्क जनरेट करता है। Honda सिक्स-एक्सिस इंटरटियल मेजरमेंट यूनिट (IMU), डुअल-चैनल ABS, Honda Selectable Torque Control (HSTC), Bluetooth Connectivity फीचर्स आदि जैसी सुविधाएँ प्रदान करता है। मोटरसाइकिल DCT वेरिएंट पर चार डिफॉल्ट राइडिंग मोड्स के साथ आती है। मोड टूर, शहरी, बजरी और ऑफ-रोड हैं। अब तक आप अंदाजा लगा ही चुके होंगे कि यह एक महंगी मोटरसाइकिल है। मोटरसाइकिल को 16.01 लाख रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था। इंस्टाग्राम वीडियो पर वापस आते हैं, बाइकर्स द्वारा बूढ़े आदमी को बाइक पर बैठने और उसके साथ पोज देने के इशारे ने इंटरनेट पर कई लोगों का दिल जीत लिया है। जैसा कि हमने ऊपर बताया, यह उन वीडियो में से एक है जो अपने आप आपके चेहरे पर मुस्कान ला देगा।
| भारत में रहने वाले अधिकांश लोगों की अब इंटरनेट तक पहुंच है और बहुत बार हम ऐसे वीडियो या चित्र देखते हैं जो स्वचालित रूप से हमारे चेहरे पर मुस्कान लाते हैं। इनमें से कुछ वीडियो या तस्वीरें वायरल हो जाती हैं और लोग उन्हें उसी की वजह से पहचान भी लेते हैं। यहां हमारे पास एक ऐसा वीडियो है जहां एक एडवेंचर बाइक सवार एक बूढ़े व्यक्ति को अपनी Honda Africa Twin पर बैठने और पोज देने की अनुमति देता है। वीडियो अब वायरल हो गया है और कई लोगों का दिल जीत लिया है। इस वीडियो को Adventure_riders_world ने अपने इंस्टाग्राम चैनल पर शेयर किया है। इस वीडियो में बाइकर्स के एक समूह को ग्रामीण इलाकों की खोज करते हुए देखा जा सकता है। ऐसा लगता है कि समूह कर्नाटक के कुछ हिस्सों की खोज कर रहा था। समूह की सभी बाइक्स Honda Africa Twin्स थीं और वे सभी यात्रा के लिए अच्छी तरह से तैयार थीं। जब वे एक साहसिक बाइक की सवारी कर रहे थे, तो वे कीचड़ वाली सड़कों और पगडंडियों से गुजर रहे थे जहाँ सामान्य बाइक और कार नहीं जाती थीं। ऐसा लगता है कि बाइकर्स ने बीच में ब्रेक लिया और एक स्थानीय ने बाइक की जांच करने का फैसला किया। स्थानीय एक बूढ़ा व्यक्ति था और यह वीडियो से काफी स्पष्ट है। हो सकता है उसने बाइकर्स से पूछा हो कि क्या वह बाइक के साथ तस्वीर क्लिक कर सकता है। वीडियो में हम देखते हैं कि बूढ़ा वास्तव में मोटरसाइकिल पर बैठा है और सवार ने उसे मोटरसाइकिल पर खड़े होने के लिए भी कहा, जैसे वे सवारी करते समय करते हैं। बाइकर्स में से दो ने उन्हें बाइक पर चढ़ने में मदद की और हम वास्तव में एडवेंचर मोटरसाइकिल पर बैठने के बाद बूढ़े व्यक्ति को मुस्कुराते हुए देख सकते हैं। उसने तस्वीरें भी खिंचवाईं और एक बार जब वह मोटरसाइकिल से उतर गया, तो सवारों ने अपनी सवारी जारी रखी। वीडियो में यहां देखी गई मोटरसाइकिल Honda की दो हज़ार बाईस मॉडल अफ्रीका ट्विन जैसी दिखती है। एडवेंचर स्पोर्ट्स मोटरसाइकिल देश भर में Honda Big WIng डीलरशिप के माध्यम से बेची जाती है क्योंकि यह एक प्रीमियम उत्पाद है। इस बाइक को भारतीय बाजार में CKD मॉडल के तौर पर लॉन्च किया गया था। मोटरसाइकिल एक DCT और एक मैनुअल ट्रांसमिशन के साथ उपलब्ध है। यह टूरिंग के साथ-साथ एडवेंचर ट्रेल्स के लिए बेहद सक्षम मोटरसाइकिल है। Honda Africa Twin के कई वीडियो ऑनलाइन उपलब्ध हैं जो दिखाते हैं कि यह मोटरसाइकिल वास्तव में कितनी सक्षम है। मोटरसाइकिल एक हज़ार बयासी-cc, लिक्विड-कूल्ड, चार-स्ट्रोक, पैरेलल ट्विन इंजन के साथ आती है जो अट्ठानवे Ps और एक सौ तीन Nm का पीक टॉर्क जनरेट करता है। Honda सिक्स-एक्सिस इंटरटियल मेजरमेंट यूनिट , डुअल-चैनल ABS, Honda Selectable Torque Control , Bluetooth Connectivity फीचर्स आदि जैसी सुविधाएँ प्रदान करता है। मोटरसाइकिल DCT वेरिएंट पर चार डिफॉल्ट राइडिंग मोड्स के साथ आती है। मोड टूर, शहरी, बजरी और ऑफ-रोड हैं। अब तक आप अंदाजा लगा ही चुके होंगे कि यह एक महंगी मोटरसाइकिल है। मोटरसाइकिल को सोलह.एक लाख रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था। इंस्टाग्राम वीडियो पर वापस आते हैं, बाइकर्स द्वारा बूढ़े आदमी को बाइक पर बैठने और उसके साथ पोज देने के इशारे ने इंटरनेट पर कई लोगों का दिल जीत लिया है। जैसा कि हमने ऊपर बताया, यह उन वीडियो में से एक है जो अपने आप आपके चेहरे पर मुस्कान ला देगा। |
अब एक दूसरी बात ! इन्द्रियोंमें सवस्तुके ग्रहणकी शक्ति नहीं है, विशेषके ग्रहणकी शक्ति है। क्योंकि इन्द्रियाँ ही विशेष हैं। जैसे आँख विशेष है, इसलिए वह रूपको ही ग्रहण करती है, शब्द, स्पर्श, रस और गन्धको ग्रहण नहीं करती। केवल रूप विशेषको ग्रहण करनेवाले ज्ञान विशेषका ही नाम तो नेत्र है न! अच्छा, तो अब सामान्य सत्तारूप जो तत्त्व है, वह सामान्य ज्ञानसे अभिन्न होता है, इसलिए भी ग्राह्य ग्राहक भाव नहीं होता । परन्तु इन्द्रियोंके स्तरपर तो ग्राहक - ग्राह्य भाव सच्चा होना चाहिए ! बोलेय आत्मन्रो दृश्यगुणेषु सन्निति व्यवस्यते स्वव्यतिरेकतोऽबुधः । विनानुवादं न च तन्मनीषितं सम्यक् यतस्त्यक्तमुपाददत् पुमान् ॥ यह जो ग्राह्य-ग्राहकभाव दृश्य हो रहा है यह गुण है । माने इन्द्रिय है, विषय है, अन्तःकरण है, ज्ञाता है और प्रत्येक शरीरमें अलग-अलग ज्ञाता है। माने ज्ञाता-ज्ञान-ज्ञेयकी जो त्रिपुटी दृश्य हो रही है, यह गुण है; उसको जो सच्ची मानता है, सत्य मानता है, परमार्थ अबाध्य मानता है, अपनेसे अलग सत्य मानता है; ग्राह्य-ग्राहक और ग्रहणको, 'स्वव्यतिरेकतो' अपनेसे पृथक् सत्य इनको स्वीकार करता है, तो वह अबुध है, वह तत्त्वको नहीं जानता। अबुध कौन है? जो अपनेसे पृथरूपमें ज्ञाता-ज्ञान-ज्ञेयकी त्रिपुटीको सत्य स्वीकार करता है। 'विनानुवादं न च तन्मनीषितं'- यह तुम्हारा जो मनीषित है, इतनी तुमने अपनी बुद्धि लगायी है, अकल लगायी है, यह अनुवादके सिवाय और कुछ नहीं है। अनुवाद माने प्रतीतिका अनुवादमात्र है, तत्त्वज्ञान नहीं है -
वाचारम्भणं विकारो नामधेयं मृत्तिकेत्येव सत्यम्-यह वाचारम्भणमात्र है। इसको अपनी अकलमन्दी मत समझना ।
बोले - अक्लमंदी क्यों न समझें? हमने तो बड़ी बुद्धिसे सिद्ध किया है कि गृहीता, ग्रहण और ग्राह्य- ये तीनों सत्य हैं और मैं इनसे अलग सत्य हूँ! योगदर्शनमें ऐसा निश्चय करते ही हैंः ग्राह्य समापत्ति, ग्रहण समापत्ति, गृहीत समापत्ति और द्रष्टा जो है वह तो बिलकुल अलग । तीन तरहकी समाधि होती है, ग्राह्य विषयमें समाधि, ग्रहण अन्तःकरणमें समाधि और गृहीतामें समाधि। और द्रष्टा जो वस्तु है वह तो इन तीनों समापत्तियोंसे न्यारी है; और ये तीनों अलंग सत्य हैं, द्रष्टा अलग सत्य है; मैं द्रष्टा हूँ । अरे, मैं द्रष्टा
हूँ, यह जो बोलता है सो कर्त्ता है । जो सोचता है सो कर्त्ता है और वह तो भिन्न है। छिन्न-भिन्न है, वह द्रष्टा काहेको है ! दृश्यसे पृथक् होनेके कारण वह तो छिन्न भिन्न है। क्योंकि इन मनुष्योंने अधिष्ठानके ज्ञानसे बाधित जो पदार्थ है, उसीको सत्यके रूपमें ग्रहण कर लिया है, इसलिए ये अबुध हैं ।
परमात्मा अधिष्ठान है और देश उसमें अध्यस्त है । इसीलिए परमात्माका ओर-छोर नहीं है, वह देशका अधिष्ठान है । और अब-तब कब जब यह जो काल है, वह सब समय ईश्वर है । सब समय ईश्वर नहीं है, सब समयकी कल्पना ही ईश्वरमें की हुई है, इसलिए ईश्वर अविनाशी है। ईश्वर कालसे परिच्छिन्न नहीं है, कालकी कल्पनाका अधिष्ठान है । साँपमें रस्सी व्यापक नहीं है, साँप रस्सीमें कल्पित है। इसी प्रकार कालमें परमात्मा व्यापक नहीं है, काल परमात्मामें कल्पित है । यह सूक्ष्मता है । और द्रव्यमें परमात्माका व्याप्य-व्यापक भाव नहीं है, द्रव्य ही परमात्मामें कल्पित है। और, परमात्मा माने कहीं सातवें आसमानमें मत सोचने लगना । परमात्मा माने यही जिसमें बोलना हो रहा है, जिसके होनेसे वाणी अपना काम कर रही है -
यद् वाचानभ्युदितं येन वांगभ्युद्यते । यन्मनसा न मनुते येनाहुर्मनो मतम् ।
तदेव ब्रह्म त्वं विद्धि नेदं यदिदमुपासते ॥ (केनोपनिषत्) देश, काल और वस्तु और इनकी कल्पना - दोनोंका अधिष्ठान । देश, काल और वस्तुके अधिष्ठानको ईश्वर बोलते हैं - तत् - पदार्थ और देश, काल वस्तुकी कल्पनाके अधिष्ठानको बोलते हैं आत्मा - त्वं पदार्थ । परन्तु कल्पित जो वस्तु होती है वह तो कल्पनाके अधिष्ठानमें ही रहती है, अन्य अधिष्ठान रूप ईश्वरमें रहती ही नहीं, इसलिए असलमें यह जो कल्पनाका अधिष्ठान है, वही देश - काल वस्तुका भी अधिष्ठान है। इसलिए यही अविनाशी है, यही परिपूर्ण है और यही अद्वितीय है । क्योंकि जो कल्प्य पदार्थ होता है उस कल्प्यका अधिष्ठान भी कल्प्य होता है, इसलिए कल्प्यका अधिष्ठान वही होता है, जो कल्पनाका अधिष्ठान होता है। तो असलमें देश और काल और वस्तुके अधिष्ठानके रूपमें जिस अन्य तत् पदार्थकी हम कल्पना करते हैं, वह अज्ञानसे करते हैं। असलमें जो कल्पनाका अधिष्ठान है वही कल्प्यका है। इसलिए देशकी कल्पनासे ही नहीं, देशसे भी बड़ा, कालकी ब्रह्मज्ञान और उसकी साधना
कल्पनासे ही नहीं, कालसे भी बड़ा और वस्तुकी कल्पनासे ही नहीं, वस्तुसे भी बड़ा, कौन है ? कि यह अपना स्वरूप है । और इसमें देश-काल-वस्तु केवल कल्पना मात्र है । तो -
सूक्ष्मत्वात्तदविज्ञेयं दूरस्थं चान्तिके च तत् । सूक्ष्मताकी परा अवधि होनेके कारण यह ब्रह्म अविज्ञेय है और ग्राह्य ग्राहक भावकी कसौटीपर दूरबीन, खुर्दबीनका विषय नहीं होता । बोलेतर्कसे मानेंगे, युक्तिसे मानेंगे, विचारसे मानेंगे ! तो क्या विचारके पेट में परमात्मा समायेगा? श्रद्धामें कहाँसे परमात्मा आवेगा ? अरे भाई वह तो विचारके पेटमें भी नहीं समाता, तर्कके पेटमें भी नहीं समाता, श्रद्धाके पेटमें भी नहीं समाता और ये सब जिस अन्तःकरणमें रहते हैं, इसमें भी नहीं समाता; और इस अन्तःकरणका देखनेवाला जो द्रष्टा है, वह उसकी अपनी दृष्टिमें भी नहीं समाता, माने वह साक्षी भास्य भी नहीं है ।
विदेशमें एक बहुत मशहूर महात्मा दार्शनिक थे । जब वे जिज्ञासु दशामें थे, तो बड़े व्याकुल रहते थे, रातको नींद न आवे, दिनमें चैन न पड़े, कोई काम-धन्दा न करें, पागलकी तरह घूमें कि हम ईश्वरको कैसे जानेंगे ? श्रद्धासे जानें कि तर्कसे जानें कि विचारसे जानें कि वृत्तिका विषय हो, कि हम ही देख लें उसको, हम अपने आपको ही देख लें । बड़े व्याकुल, पर दिखे कुछ नहीं । एक रात नींद नहीं आयी । सबेरे उठे, समुद्रके किनारे गये । तो ईश्वरकी क्या लीला, एक बालक वहाँ छोटा-सा कटोरा लिये व्याकुल, बेचैन, रो रहा था। उन्होंने पूछा- बच्चे, क्या चाहिए तुम्हें ? तो बच्चेने पूछातुम्हें क्या चाहिए ? तुम भी व्याकुल हो, बेचैन हो! उन्होंने पूछा- अरे, तू बता तो सही, हमारे मदद करने लायक होता तो मदद कर देते । वह बोला कि तुम भी बताओ, क्योंकि शायद हमारी बेचैनी और तुम्हारी बेचैनी एक ही किस्मकी होवे ! तो उन्होंने बताया कि हम तो ईश्वरकी प्राप्तिके लिए बेचैन हैं कि वह हमारे नेत्रका विषय होवे, वृत्तिका विषय होवे, तर्कका विषय होवे, विचारका विषय होवे, समाधिका विषय होवे, दृष्टिका विषय होवे, कैसे भी हम ईश्वरका अनुभव कर लें, हम उसके लिए बेचैन हैं । तो बच्चा बोला- हम इसलिए बेचैन हैं कि यह जो बड़ा भारी समुद्र है, इसका सारा पानी हम इस कटोरेमें कैसे ले लें !
अरे बाबा, वह तो बोला- कि हाँ भाई, हमारी बेचैनी और तुम्हारी बेचैनी एक ही किस्मकी है। तुम भी भोरे बालक और मैं भी भोरा बालक । अच्छा तुम अपनी बेचैनी छोड़ दो, हम अपनी छोड़ते हैं। जो स्वयं हैं उसको कटोरेमें भरनेकी कोशिश क्यों ?
तो, सूक्ष्मत्वात्तदविज्ञेयं । अविज्ञेय शब्दका दो अर्थ होगाविज्ञेयात् व्यतिरिक्तं अविज्ञेयं । विज्ञेयसे जो विलक्षण है उसको अविज्ञेय कहते हैं । विज्ञानकी त्रिपुटीसे जो पृथक् है, विज्ञानका विषय जो नहीं है, वह अविज्ञेय है। और दूसरा नास्ति विज्ञेयं यस्मिन्- जिसमें विज्ञेय नामकी वस्तु है ही नहीं, ऐसा है अविज्ञेय । ऐसा अपना आपा है, जिसे कुछ अविज्ञेय नहीं है - सर्वं विज्ञातं भवति ।
बहिरन्तश्च भूतानामचरं चरमेव च ।
सूक्ष्मत्वात्तदविज्ञेयं दूरस्थं चान्तिके च तत् ॥
• बहिरन्तश्च भूतानां - इसका अर्थ है कि सत्य देश परिच्छेदसे रहित है क्योंकि बहिः और अन्तः यह देशका भेद है। बाहर भी वही, भीतर भी वही- इसका अर्थ हुआ कि 'अन्तश्च बहि?' कल्पनाका अधिष्ठान और प्रकाशक स्वयं प्रकाश अद्वितीय आत्म चैतन्य ही है ।
अचरं चरमेव च - इसका अर्थ है कि परमात्म वस्तु, वस्तु परिच्छेदसे मुक्त है । अचरत्वेन जो भास रहा है और चरत्वेन जो भास रहा है उसमें एक अद्वितीय सर्वाधिष्ठान, कल्प्याधिष्ठान, कल्पनाधिष्ठान, कल्प्य - कल्पना उभयाधिष्ठान सर्वावभासक स्वयं प्रकाश आत्मचैतन्य ही है ।
दूरस्थं चान्तिके च तत् - यह काल परिच्छेदका निवारण करनेवाला है। करोड़ों बरस दूर जो चीज मालूम पड़ती है और जो चीज अभी एक सेकेण्डमें होनेवाली है, वह कालपरिच्छेद कल्प्य है। क्योंकि अनन्त अधिष्ठान में देशपरिच्छेद, कालपरिच्छेद, वस्तुपरिच्छेद होना शक्य नहीं है, इसलिए अंतःकरण द्वारा ही जैसे रज्जुमें सर्पकी कल्पना होती है, ऐसे देश-काल वस्तुके अभावाधिकरण अनन्त ब्रह्ममें, देश-काल-वस्तुकी केवल कल्पना ही होती है, इसलिए जो कल्पनावच्छिन्न चैतन्य है, वही कल्प्यावच्छिन्न चैतन्य है । जैसे सर्पभ्रान्त्यावच्छिन्न चैतन्य ही सर्पावच्छिन्न चैतन्य है, दोनोंमें कोई अन्तर नहीं है, इसी प्रकार अनन्तमें यह जो देश-काल- वस्तुरूप प्रपंच दिखायी ब्रह्मज्ञान और उसकी साधना | अब एक दूसरी बात ! इन्द्रियोंमें सवस्तुके ग्रहणकी शक्ति नहीं है, विशेषके ग्रहणकी शक्ति है। क्योंकि इन्द्रियाँ ही विशेष हैं। जैसे आँख विशेष है, इसलिए वह रूपको ही ग्रहण करती है, शब्द, स्पर्श, रस और गन्धको ग्रहण नहीं करती। केवल रूप विशेषको ग्रहण करनेवाले ज्ञान विशेषका ही नाम तो नेत्र है न! अच्छा, तो अब सामान्य सत्तारूप जो तत्त्व है, वह सामान्य ज्ञानसे अभिन्न होता है, इसलिए भी ग्राह्य ग्राहक भाव नहीं होता । परन्तु इन्द्रियोंके स्तरपर तो ग्राहक - ग्राह्य भाव सच्चा होना चाहिए ! बोलेय आत्मन्रो दृश्यगुणेषु सन्निति व्यवस्यते स्वव्यतिरेकतोऽबुधः । विनानुवादं न च तन्मनीषितं सम्यक् यतस्त्यक्तमुपाददत् पुमान् ॥ यह जो ग्राह्य-ग्राहकभाव दृश्य हो रहा है यह गुण है । माने इन्द्रिय है, विषय है, अन्तःकरण है, ज्ञाता है और प्रत्येक शरीरमें अलग-अलग ज्ञाता है। माने ज्ञाता-ज्ञान-ज्ञेयकी जो त्रिपुटी दृश्य हो रही है, यह गुण है; उसको जो सच्ची मानता है, सत्य मानता है, परमार्थ अबाध्य मानता है, अपनेसे अलग सत्य मानता है; ग्राह्य-ग्राहक और ग्रहणको, 'स्वव्यतिरेकतो' अपनेसे पृथक् सत्य इनको स्वीकार करता है, तो वह अबुध है, वह तत्त्वको नहीं जानता। अबुध कौन है? जो अपनेसे पृथरूपमें ज्ञाता-ज्ञान-ज्ञेयकी त्रिपुटीको सत्य स्वीकार करता है। 'विनानुवादं न च तन्मनीषितं'- यह तुम्हारा जो मनीषित है, इतनी तुमने अपनी बुद्धि लगायी है, अकल लगायी है, यह अनुवादके सिवाय और कुछ नहीं है। अनुवाद माने प्रतीतिका अनुवादमात्र है, तत्त्वज्ञान नहीं है - वाचारम्भणं विकारो नामधेयं मृत्तिकेत्येव सत्यम्-यह वाचारम्भणमात्र है। इसको अपनी अकलमन्दी मत समझना । बोले - अक्लमंदी क्यों न समझें? हमने तो बड़ी बुद्धिसे सिद्ध किया है कि गृहीता, ग्रहण और ग्राह्य- ये तीनों सत्य हैं और मैं इनसे अलग सत्य हूँ! योगदर्शनमें ऐसा निश्चय करते ही हैंः ग्राह्य समापत्ति, ग्रहण समापत्ति, गृहीत समापत्ति और द्रष्टा जो है वह तो बिलकुल अलग । तीन तरहकी समाधि होती है, ग्राह्य विषयमें समाधि, ग्रहण अन्तःकरणमें समाधि और गृहीतामें समाधि। और द्रष्टा जो वस्तु है वह तो इन तीनों समापत्तियोंसे न्यारी है; और ये तीनों अलंग सत्य हैं, द्रष्टा अलग सत्य है; मैं द्रष्टा हूँ । अरे, मैं द्रष्टा हूँ, यह जो बोलता है सो कर्त्ता है । जो सोचता है सो कर्त्ता है और वह तो भिन्न है। छिन्न-भिन्न है, वह द्रष्टा काहेको है ! दृश्यसे पृथक् होनेके कारण वह तो छिन्न भिन्न है। क्योंकि इन मनुष्योंने अधिष्ठानके ज्ञानसे बाधित जो पदार्थ है, उसीको सत्यके रूपमें ग्रहण कर लिया है, इसलिए ये अबुध हैं । परमात्मा अधिष्ठान है और देश उसमें अध्यस्त है । इसीलिए परमात्माका ओर-छोर नहीं है, वह देशका अधिष्ठान है । और अब-तब कब जब यह जो काल है, वह सब समय ईश्वर है । सब समय ईश्वर नहीं है, सब समयकी कल्पना ही ईश्वरमें की हुई है, इसलिए ईश्वर अविनाशी है। ईश्वर कालसे परिच्छिन्न नहीं है, कालकी कल्पनाका अधिष्ठान है । साँपमें रस्सी व्यापक नहीं है, साँप रस्सीमें कल्पित है। इसी प्रकार कालमें परमात्मा व्यापक नहीं है, काल परमात्मामें कल्पित है । यह सूक्ष्मता है । और द्रव्यमें परमात्माका व्याप्य-व्यापक भाव नहीं है, द्रव्य ही परमात्मामें कल्पित है। और, परमात्मा माने कहीं सातवें आसमानमें मत सोचने लगना । परमात्मा माने यही जिसमें बोलना हो रहा है, जिसके होनेसे वाणी अपना काम कर रही है - यद् वाचानभ्युदितं येन वांगभ्युद्यते । यन्मनसा न मनुते येनाहुर्मनो मतम् । तदेव ब्रह्म त्वं विद्धि नेदं यदिदमुपासते ॥ देश, काल और वस्तु और इनकी कल्पना - दोनोंका अधिष्ठान । देश, काल और वस्तुके अधिष्ठानको ईश्वर बोलते हैं - तत् - पदार्थ और देश, काल वस्तुकी कल्पनाके अधिष्ठानको बोलते हैं आत्मा - त्वं पदार्थ । परन्तु कल्पित जो वस्तु होती है वह तो कल्पनाके अधिष्ठानमें ही रहती है, अन्य अधिष्ठान रूप ईश्वरमें रहती ही नहीं, इसलिए असलमें यह जो कल्पनाका अधिष्ठान है, वही देश - काल वस्तुका भी अधिष्ठान है। इसलिए यही अविनाशी है, यही परिपूर्ण है और यही अद्वितीय है । क्योंकि जो कल्प्य पदार्थ होता है उस कल्प्यका अधिष्ठान भी कल्प्य होता है, इसलिए कल्प्यका अधिष्ठान वही होता है, जो कल्पनाका अधिष्ठान होता है। तो असलमें देश और काल और वस्तुके अधिष्ठानके रूपमें जिस अन्य तत् पदार्थकी हम कल्पना करते हैं, वह अज्ञानसे करते हैं। असलमें जो कल्पनाका अधिष्ठान है वही कल्प्यका है। इसलिए देशकी कल्पनासे ही नहीं, देशसे भी बड़ा, कालकी ब्रह्मज्ञान और उसकी साधना कल्पनासे ही नहीं, कालसे भी बड़ा और वस्तुकी कल्पनासे ही नहीं, वस्तुसे भी बड़ा, कौन है ? कि यह अपना स्वरूप है । और इसमें देश-काल-वस्तु केवल कल्पना मात्र है । तो - सूक्ष्मत्वात्तदविज्ञेयं दूरस्थं चान्तिके च तत् । सूक्ष्मताकी परा अवधि होनेके कारण यह ब्रह्म अविज्ञेय है और ग्राह्य ग्राहक भावकी कसौटीपर दूरबीन, खुर्दबीनका विषय नहीं होता । बोलेतर्कसे मानेंगे, युक्तिसे मानेंगे, विचारसे मानेंगे ! तो क्या विचारके पेट में परमात्मा समायेगा? श्रद्धामें कहाँसे परमात्मा आवेगा ? अरे भाई वह तो विचारके पेटमें भी नहीं समाता, तर्कके पेटमें भी नहीं समाता, श्रद्धाके पेटमें भी नहीं समाता और ये सब जिस अन्तःकरणमें रहते हैं, इसमें भी नहीं समाता; और इस अन्तःकरणका देखनेवाला जो द्रष्टा है, वह उसकी अपनी दृष्टिमें भी नहीं समाता, माने वह साक्षी भास्य भी नहीं है । विदेशमें एक बहुत मशहूर महात्मा दार्शनिक थे । जब वे जिज्ञासु दशामें थे, तो बड़े व्याकुल रहते थे, रातको नींद न आवे, दिनमें चैन न पड़े, कोई काम-धन्दा न करें, पागलकी तरह घूमें कि हम ईश्वरको कैसे जानेंगे ? श्रद्धासे जानें कि तर्कसे जानें कि विचारसे जानें कि वृत्तिका विषय हो, कि हम ही देख लें उसको, हम अपने आपको ही देख लें । बड़े व्याकुल, पर दिखे कुछ नहीं । एक रात नींद नहीं आयी । सबेरे उठे, समुद्रके किनारे गये । तो ईश्वरकी क्या लीला, एक बालक वहाँ छोटा-सा कटोरा लिये व्याकुल, बेचैन, रो रहा था। उन्होंने पूछा- बच्चे, क्या चाहिए तुम्हें ? तो बच्चेने पूछातुम्हें क्या चाहिए ? तुम भी व्याकुल हो, बेचैन हो! उन्होंने पूछा- अरे, तू बता तो सही, हमारे मदद करने लायक होता तो मदद कर देते । वह बोला कि तुम भी बताओ, क्योंकि शायद हमारी बेचैनी और तुम्हारी बेचैनी एक ही किस्मकी होवे ! तो उन्होंने बताया कि हम तो ईश्वरकी प्राप्तिके लिए बेचैन हैं कि वह हमारे नेत्रका विषय होवे, वृत्तिका विषय होवे, तर्कका विषय होवे, विचारका विषय होवे, समाधिका विषय होवे, दृष्टिका विषय होवे, कैसे भी हम ईश्वरका अनुभव कर लें, हम उसके लिए बेचैन हैं । तो बच्चा बोला- हम इसलिए बेचैन हैं कि यह जो बड़ा भारी समुद्र है, इसका सारा पानी हम इस कटोरेमें कैसे ले लें ! अरे बाबा, वह तो बोला- कि हाँ भाई, हमारी बेचैनी और तुम्हारी बेचैनी एक ही किस्मकी है। तुम भी भोरे बालक और मैं भी भोरा बालक । अच्छा तुम अपनी बेचैनी छोड़ दो, हम अपनी छोड़ते हैं। जो स्वयं हैं उसको कटोरेमें भरनेकी कोशिश क्यों ? तो, सूक्ष्मत्वात्तदविज्ञेयं । अविज्ञेय शब्दका दो अर्थ होगाविज्ञेयात् व्यतिरिक्तं अविज्ञेयं । विज्ञेयसे जो विलक्षण है उसको अविज्ञेय कहते हैं । विज्ञानकी त्रिपुटीसे जो पृथक् है, विज्ञानका विषय जो नहीं है, वह अविज्ञेय है। और दूसरा नास्ति विज्ञेयं यस्मिन्- जिसमें विज्ञेय नामकी वस्तु है ही नहीं, ऐसा है अविज्ञेय । ऐसा अपना आपा है, जिसे कुछ अविज्ञेय नहीं है - सर्वं विज्ञातं भवति । बहिरन्तश्च भूतानामचरं चरमेव च । सूक्ष्मत्वात्तदविज्ञेयं दूरस्थं चान्तिके च तत् ॥ • बहिरन्तश्च भूतानां - इसका अर्थ है कि सत्य देश परिच्छेदसे रहित है क्योंकि बहिः और अन्तः यह देशका भेद है। बाहर भी वही, भीतर भी वही- इसका अर्थ हुआ कि 'अन्तश्च बहि?' कल्पनाका अधिष्ठान और प्रकाशक स्वयं प्रकाश अद्वितीय आत्म चैतन्य ही है । अचरं चरमेव च - इसका अर्थ है कि परमात्म वस्तु, वस्तु परिच्छेदसे मुक्त है । अचरत्वेन जो भास रहा है और चरत्वेन जो भास रहा है उसमें एक अद्वितीय सर्वाधिष्ठान, कल्प्याधिष्ठान, कल्पनाधिष्ठान, कल्प्य - कल्पना उभयाधिष्ठान सर्वावभासक स्वयं प्रकाश आत्मचैतन्य ही है । दूरस्थं चान्तिके च तत् - यह काल परिच्छेदका निवारण करनेवाला है। करोड़ों बरस दूर जो चीज मालूम पड़ती है और जो चीज अभी एक सेकेण्डमें होनेवाली है, वह कालपरिच्छेद कल्प्य है। क्योंकि अनन्त अधिष्ठान में देशपरिच्छेद, कालपरिच्छेद, वस्तुपरिच्छेद होना शक्य नहीं है, इसलिए अंतःकरण द्वारा ही जैसे रज्जुमें सर्पकी कल्पना होती है, ऐसे देश-काल वस्तुके अभावाधिकरण अनन्त ब्रह्ममें, देश-काल-वस्तुकी केवल कल्पना ही होती है, इसलिए जो कल्पनावच्छिन्न चैतन्य है, वही कल्प्यावच्छिन्न चैतन्य है । जैसे सर्पभ्रान्त्यावच्छिन्न चैतन्य ही सर्पावच्छिन्न चैतन्य है, दोनोंमें कोई अन्तर नहीं है, इसी प्रकार अनन्तमें यह जो देश-काल- वस्तुरूप प्रपंच दिखायी ब्रह्मज्ञान और उसकी साधना |
हेमंत सोरेन की तरफ से पत्नी को इंडस्ट्रियल लैंड आवंटित होने पर बीजेपी के नेता और पूर्व सीएम रघुवर दास ने मीडिया से कहा कि सोरेन खुद उद्योग विभाग देखते हैं और बिजुपारा में जमीन देने के लिए उन्होंने पद का दुरुपयोग किया है। उन्होंने ये आरोप भी लगाया कि सीएम के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा और मीडिया सलाहकार अभिषेक प्रसाद ने भी झारखंड में खदानों के पट्टे हासिल किए हैं।
रांची। खदान का पट्टा लेने के मामले में घिरने के बाद अब झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन नए विवाद में फंस गए हैं। मामला 11 एकड़ के इंडस्ट्रियल लैंड का है। आरोप है कि सोरेन ने ये जमीन अपनी पत्नी को दे दी। जमीन रांची के बिजुपारा इलाके में है। आरोप इसलिए संगीन हैं, क्योंकि सीएम हेमंत सोरेन खुद उद्योग मंत्रालय देखते हैं। बीजेपी ने इस मामले में हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा JMM से जवाब मांगा है। इससे पहले सोरेन को रांची में ही खदान का पट्टा आवंटित हुआ था और पिछले साल जून में लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया गया था। मसला झारखंड हाईकोर्ट में गया था। बीते 8 अप्रैल को कोर्ट में सुनवाई होने पर झारखंड सरकार के वकील राजीव रंजन ने कहा था कि सरकार से गलती हुई और पट्टा वापस हो गया है।
हेमंत सोरेन की तरफ से पत्नी को इंडस्ट्रियल लैंड आवंटित होने पर बीजेपी के नेता और पूर्व सीएम रघुवर दास ने मीडिया से कहा कि सोरेन खुद उद्योग विभाग देखते हैं और बिजुपारा में जमीन देने के लिए उन्होंने पद का दुरुपयोग किया है। उन्होंने ये आरोप भी लगाया कि सीएम के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा और मीडिया सलाहकार अभिषेक प्रसाद ने भी झारखंड में खदानों के पट्टे हासिल किए हैं। दास ने कहा कि सरकार के रिकॉर्ड बताते हैं कि अभिषेक ने 8 अप्रैल 2021 को साहेबगंज जिले में शिवशक्ति एंटरप्राइज कंपनी के नाम से खदान का पट्टा लिया। फिर इसमें 90 लाख का निवेश भी किया। वहीं, पंकज मिश्रा को भी साहेबगंज में महाकाल स्टोन कंपनी के नाम पर खदान का पट्टा दिया गया।
झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता सुप्रिय भट्टाचार्य ने कहा कि बीजेपी के इन आरोपों का जवाब हम देंगे। ये जवाब आज या कल में पार्टी की ओर से दिया जा सकता है। हालांकि, ये तय है कि खदान मसले की तरह इंडस्ट्रियल लैंड देने के मामले के भी कोर्ट जाने के आसार हैं और इसमें हेमंत सोरेन सरकार की किरकिरी होने के पूरे आसार हैं।
| हेमंत सोरेन की तरफ से पत्नी को इंडस्ट्रियल लैंड आवंटित होने पर बीजेपी के नेता और पूर्व सीएम रघुवर दास ने मीडिया से कहा कि सोरेन खुद उद्योग विभाग देखते हैं और बिजुपारा में जमीन देने के लिए उन्होंने पद का दुरुपयोग किया है। उन्होंने ये आरोप भी लगाया कि सीएम के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा और मीडिया सलाहकार अभिषेक प्रसाद ने भी झारखंड में खदानों के पट्टे हासिल किए हैं। रांची। खदान का पट्टा लेने के मामले में घिरने के बाद अब झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन नए विवाद में फंस गए हैं। मामला ग्यारह एकड़ के इंडस्ट्रियल लैंड का है। आरोप है कि सोरेन ने ये जमीन अपनी पत्नी को दे दी। जमीन रांची के बिजुपारा इलाके में है। आरोप इसलिए संगीन हैं, क्योंकि सीएम हेमंत सोरेन खुद उद्योग मंत्रालय देखते हैं। बीजेपी ने इस मामले में हेमंत सोरेन और झारखंड मुक्ति मोर्चा JMM से जवाब मांगा है। इससे पहले सोरेन को रांची में ही खदान का पट्टा आवंटित हुआ था और पिछले साल जून में लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया गया था। मसला झारखंड हाईकोर्ट में गया था। बीते आठ अप्रैल को कोर्ट में सुनवाई होने पर झारखंड सरकार के वकील राजीव रंजन ने कहा था कि सरकार से गलती हुई और पट्टा वापस हो गया है। हेमंत सोरेन की तरफ से पत्नी को इंडस्ट्रियल लैंड आवंटित होने पर बीजेपी के नेता और पूर्व सीएम रघुवर दास ने मीडिया से कहा कि सोरेन खुद उद्योग विभाग देखते हैं और बिजुपारा में जमीन देने के लिए उन्होंने पद का दुरुपयोग किया है। उन्होंने ये आरोप भी लगाया कि सीएम के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा और मीडिया सलाहकार अभिषेक प्रसाद ने भी झारखंड में खदानों के पट्टे हासिल किए हैं। दास ने कहा कि सरकार के रिकॉर्ड बताते हैं कि अभिषेक ने आठ अप्रैल दो हज़ार इक्कीस को साहेबगंज जिले में शिवशक्ति एंटरप्राइज कंपनी के नाम से खदान का पट्टा लिया। फिर इसमें नब्बे लाख का निवेश भी किया। वहीं, पंकज मिश्रा को भी साहेबगंज में महाकाल स्टोन कंपनी के नाम पर खदान का पट्टा दिया गया। झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता सुप्रिय भट्टाचार्य ने कहा कि बीजेपी के इन आरोपों का जवाब हम देंगे। ये जवाब आज या कल में पार्टी की ओर से दिया जा सकता है। हालांकि, ये तय है कि खदान मसले की तरह इंडस्ट्रियल लैंड देने के मामले के भी कोर्ट जाने के आसार हैं और इसमें हेमंत सोरेन सरकार की किरकिरी होने के पूरे आसार हैं। |
केबीसी में चयन होने के बाद प्रोफेसर एके तिवारी अपनी पत्नी कुसुम तिवारी और पुत्र क्षितिज के साथ पहुंचे। जहां खुद अमिताभ बच्चन उन्हें हॉट सीट तक ले गए। बिग बी ने प्रोफेसर से मेरठ और उनके जीवन के बारे में बात की।
प्रोफेसर एके तिवारी ने केबीसी में बताया कि उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। बिग बी को अपना आइडियल बताते हुए प्रोफेसर ने कहा कि उनकी लाइफ पर मेगा स्टार का काफी अहम रोल रहा है। आगे बढऩे की हिम्मत उन्हें बिग बी के जीवन से मिली है।
हॉट सीट पर बैठे प्रोफेसर तिवारी ने बातों-बातों में अमिताभ बच्चन से हिंदी में कविता सुनने की फरमाइश कर दी। बिग बी ने भी उन्हें निराश नहीं किया और अपने बाबूजी की लिखी कविता सुनाई।
प्रोफेसर एके तिवारी ने केबीसी में खेलते हुए बिग बी के सामने अपनी पसंदीदा अभिनेत्री माधुरी दीक्षित से बात करने की इच्छा जाहिर की। अमिताभ बच्चन ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए माधुरी से बात कराई। प्रोफेसर ने मुस्कराते हुए माधुरी को हैलो बोला।
| केबीसी में चयन होने के बाद प्रोफेसर एके तिवारी अपनी पत्नी कुसुम तिवारी और पुत्र क्षितिज के साथ पहुंचे। जहां खुद अमिताभ बच्चन उन्हें हॉट सीट तक ले गए। बिग बी ने प्रोफेसर से मेरठ और उनके जीवन के बारे में बात की। प्रोफेसर एके तिवारी ने केबीसी में बताया कि उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी। बिग बी को अपना आइडियल बताते हुए प्रोफेसर ने कहा कि उनकी लाइफ पर मेगा स्टार का काफी अहम रोल रहा है। आगे बढऩे की हिम्मत उन्हें बिग बी के जीवन से मिली है। हॉट सीट पर बैठे प्रोफेसर तिवारी ने बातों-बातों में अमिताभ बच्चन से हिंदी में कविता सुनने की फरमाइश कर दी। बिग बी ने भी उन्हें निराश नहीं किया और अपने बाबूजी की लिखी कविता सुनाई। प्रोफेसर एके तिवारी ने केबीसी में खेलते हुए बिग बी के सामने अपनी पसंदीदा अभिनेत्री माधुरी दीक्षित से बात करने की इच्छा जाहिर की। अमिताभ बच्चन ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए माधुरी से बात कराई। प्रोफेसर ने मुस्कराते हुए माधुरी को हैलो बोला। |
त्वद्भक्तानां कथं निर्गुणब्रह्मत्त्वप्राप्तिः, सा सम्भवेत्तत्राह - ब्रह्मणो हीति । यस्मात् परमप्रतिष्ठात्वेन प्रसिद्धं यद्ब्रह्म तस्याप्यहं प्रतिष्ठा-प्रतिष्ठीयतेऽस्मिन्निति प्रतिष्ठा आश्रयोऽन्नमयादिषु श्रुतिषु सर्वत्रैव प्रतिष्ठा - पदस्य तथार्थत्वात्, तथामृतस्य प्रतिष्ठा किं स्वर्गीयसुधायाः न अव्ययस्य नाशरहितस्य मोक्षस्येत्यर्थः, तथा शाश्वतस्य धर्मस्य साधनफलदशयोरपि नित्यस्थितस्य भक्त्याख्यस्य परमधर्मस्याहं प्रतिष्ठा, तथा तत्प्राप्यस्यैकान्तिकभक्तसम्बन्धिनः सुखस्य प्रेम्णश्चाहं प्रतिष्ठा, अतः सर्वस्यापि मदधीनत्वात् कैवल्यकामनया कृतेन मद्भजनेन ब्रह्मणि लीयमानो ब्रह्मत्वमपि प्राप्नोति। अत्र "ब्रह्मणोऽहं प्रतिष्ठा घनीभूतं ब्रह्मैवाहं यथा घनीभूतप्रकाश एव सूर्यमण्डलं तद्वदित्यर्थः" इति स्वामिचरणाः । सूर्यस्य तेजोरूपत्वेऽपि यथा तेजस आश्रयत्त्वमप्युच्युते, एवं मे कृष्णस्य ब्रह्मरूपत्वेऽपि ब्रह्मणः प्रतिष्ठात्वमपि, अत्र श्रीविष्णुपुराणमपि प्रमाणम्- "शुभाश्रयः स चित्तस्य सर्वगस्य तथात्मनः" इति, व्याख्यातञ्च तत्रापि स्वामिचरणैः-"सर्वगस्यात्मनः परः ब्रह्मणोऽप्याश्रयः प्रतिष्ठा, तदुक्तं भगवता ब्रह्मणो हि प्रतिष्ठाहम्" इति । तथा विष्णुधर्मेऽपि नरकद्वादशीप्रसङ्गे-"प्रकृतौ पुरुषे चैव ब्रह्मण्यपि च स प्रभुः । यथैक एव पुरुषो वासुदेवो व्यवस्थितः ।।" इति; तत्रैव मासर्क्षपूजाप्रसङ्गे"यथाच्युतत्त्वं परतः परस्मात् स ब्रह्मभूतात् परतः परात्मा" इति; तथा हरिवंशेऽपि विप्रकुमारानयनप्रसङ्गे अर्जुनं प्रति श्रीभगवद्वाक्यम् (विष्णुपर्व ११४ अः, ११ - १२) "तत्परं परमं ब्रह्म सर्वं विभजते जगत् । ममैव तद्धनं तेजो ज्ञातुमर्हसि भारत ।।" इति; ब्रह्मसंहितायामपि - "यस्य प्रभा प्रभवतो जगदण्ड-कोटिकोटिष्वशेषवसुधादिविभूतिभिन्नम् । तद्ब्रह्म निष्कलमनन्तमशेषभूतं गोविन्दमादिपुरुषं तमहं भजामि ।।" इति; अष्टमस्कन्धे- "मदीयं महिमानञ्च परं ब्रह्मेति शब्दितम् । वेत्स्यस्यनुगृहीतं मे संप्रश्नैर्विवृतं हृदि । ।" इति भगवदुक्तिश्च । मधुसूदनसरस्वतीपादाश्च व्याचक्षतेस्म यथा -"ननु त्वद्भक्तस्त्वद्भावमाप्नोतु नाम कथं ब्रह्मभावाय कल्पते ब्रह्मणः सकाशात्तवान्यत्वादित्याशङ्कयाह - ब्रह्मणो हीति । 'प्रतिष्ठा' पर्याप्तिरहमेवेतिपर्याप्तिः परिपूर्णता इत्यमरः । पराकृतमनद्वन्द्व परं ब्रह्म नराकृति । सौन्दर्यसारसर्वस्वं वन्दे नन्दात्मजमहम्।।" इत्युपश्लोकयामासुश्च ।। २७ ।। अनर्थ एव त्रैगुण्यं निस्त्रैगुण्यं कृतार्थता। तच्च भक्त्यैव भवतीत्यध्यायार्थो निरूपितः । ॥ इति सारार्थवर्षिण्यां हर्षिण्यां भक्तचेतसाम् । चतुर्दशोऽयं गीतासु सङ्गतः सङ्गतः सताम् ।।
भावानुवाद - यदि प्रश्न हो कि आपके भक्तोंको किस प्रकार निर्गुण ब्रह्मत्त्वकी प्राप्ति होती है, वह प्राप्ति तो अद्वितीय (तदेक) तदेकात्मताके अनुभवसे ही सम्भव है, तो इसके उत्तरमें कहते हैं- क्योंकि, परमप्रतिष्ठा प्राप्त जो प्रसिद्ध ब्रह्म है, उसकी भी प्रतिष्ठा मैं ही हूँ। मुझमें प्रतिष्ठित होनेके कारण मैं उसकी प्रतिष्ठा अर्थात् आश्रय हूँ। अन्नमय आदि समस्त श्रुतिवाक्योंमें भी सर्वत्र प्रतिष्ठा शब्दका यही तात्पर्य है। और, 'अमृतस्य' - अमृतकी भी प्रतिष्ठा मैं हूँ। तो क्या यह अमृत स्वर्गीय सुधा है ? नहीं ! इसका तात्पर्य नाशरहित मोक्ष है। 'शाश्वतस्य धर्मस्य - साधन और फलदशामें भी नित्य स्थित भक्ति नामक परम धर्मकी भी प्रतिष्ठा मैं हूँ। अतएव सभी मेरे अधीन होनेके कारण कैवल्यकी कामनासे अनुष्ठित मेरे भजनसे ब्रह्ममें लीयमान ब्रह्मत्त्व भी प्राप्त होता है। इस श्लोकमें श्रीधरस्वामिपाद कहते हैं- "मैं ब्रह्मकी प्रतिष्ठा हूँ अर्थात् मैं घनीभूत ब्रह्म ही हूँ, वैसे ही जैसे कि सूर्यमण्डल घनीभूत प्रकाश ही है ।" जैसे सूर्य तेजरूप होनेपर भी तेजके आश्रयके रूपमें जाना जाता है, उसी प्रकार मैं कृष्णस्वरूप होनेपर भी ब्रह्मकी प्रतिष्ठा हूँ। इस विषयमें विष्णु पुराणमें भी प्रमाण है - "वे विष्णु सभी मङ्गलोंके आधारस्वरूप हैं, वे चित्त एवं सर्वव्यापी आत्माके आश्रय हैं " इस श्लोककी भी व्याख्या श्रीधरस्वामिपाद इस प्रकार करते है - "सर्वज्ञ आत्मा अर्थात् परब्रह्मका आश्रय अर्थात् प्रतिष्ठा विष्णु हैं । जैसा कि भगवान्ने गीतामें कहा है - मैं ब्रह्मकी प्रतिष्ठा हूँ।" विष्णु धर्ममें नरक द्वाद्वशीके प्रसङ्गमें कहा गया है -"प्रकृति, पुरुष एवं ब्रह्ममें भी एकमात्र पुरुष वासुदेव ही प्रभु हैं, यही स्थिर हुआ है।" इसी ग्रन्थमें मास-पक्ष-पूजाके प्रसङ्गमें कहा गया है - "जिस प्रकार अच्युत परतत्त्व होते हुए भी परम ब्रह्मभूत हैं, वह होते हुए भी परम आत्मा हैं।" हरिवंश पुराण (विष्णु पर्व ११४, अ. ११-१२) में भी विप्रकुमारको लानेके प्रसङ्ग में अर्जुनसे श्रीभगवान् कहते हैं कि वे सर्वश्रेष्ठ परम ब्रह्म ही समस्त जगत्का विभाग करते हैं, हे अर्जुन ! उस घनज्योतिको मेरा ही तेजस्वरूप जानना चाहिए। ब्रह्मसंहितामें भी पाया जाता है - "जिनकी प्रभासे उत्पन्न ब्रह्म अनन्त कोटि ब्रह्माण्डमें अशेष वसुधा आदि द्वारा विभाग करनेवाला है, मैं उन आदिपुरूष गोविन्दका भजन करता हूँ ।" श्रीमद्भागवतके अष्टम स्कन्धमें भी राजा सत्यवान्से मत्स्य भगवान्ने कहा है कि मेरी कृपासे अपने प्रश्नों के उत्तरस्वरूप अपने हृदयमें विस्तारित परब्रह्म नामसे | त्वद्भक्तानां कथं निर्गुणब्रह्मत्त्वप्राप्तिः, सा सम्भवेत्तत्राह - ब्रह्मणो हीति । यस्मात् परमप्रतिष्ठात्वेन प्रसिद्धं यद्ब्रह्म तस्याप्यहं प्रतिष्ठा-प्रतिष्ठीयतेऽस्मिन्निति प्रतिष्ठा आश्रयोऽन्नमयादिषु श्रुतिषु सर्वत्रैव प्रतिष्ठा - पदस्य तथार्थत्वात्, तथामृतस्य प्रतिष्ठा किं स्वर्गीयसुधायाः न अव्ययस्य नाशरहितस्य मोक्षस्येत्यर्थः, तथा शाश्वतस्य धर्मस्य साधनफलदशयोरपि नित्यस्थितस्य भक्त्याख्यस्य परमधर्मस्याहं प्रतिष्ठा, तथा तत्प्राप्यस्यैकान्तिकभक्तसम्बन्धिनः सुखस्य प्रेम्णश्चाहं प्रतिष्ठा, अतः सर्वस्यापि मदधीनत्वात् कैवल्यकामनया कृतेन मद्भजनेन ब्रह्मणि लीयमानो ब्रह्मत्वमपि प्राप्नोति। अत्र "ब्रह्मणोऽहं प्रतिष्ठा घनीभूतं ब्रह्मैवाहं यथा घनीभूतप्रकाश एव सूर्यमण्डलं तद्वदित्यर्थः" इति स्वामिचरणाः । सूर्यस्य तेजोरूपत्वेऽपि यथा तेजस आश्रयत्त्वमप्युच्युते, एवं मे कृष्णस्य ब्रह्मरूपत्वेऽपि ब्रह्मणः प्रतिष्ठात्वमपि, अत्र श्रीविष्णुपुराणमपि प्रमाणम्- "शुभाश्रयः स चित्तस्य सर्वगस्य तथात्मनः" इति, व्याख्यातञ्च तत्रापि स्वामिचरणैः-"सर्वगस्यात्मनः परः ब्रह्मणोऽप्याश्रयः प्रतिष्ठा, तदुक्तं भगवता ब्रह्मणो हि प्रतिष्ठाहम्" इति । तथा विष्णुधर्मेऽपि नरकद्वादशीप्रसङ्गे-"प्रकृतौ पुरुषे चैव ब्रह्मण्यपि च स प्रभुः । यथैक एव पुरुषो वासुदेवो व्यवस्थितः ।।" इति; तत्रैव मासर्क्षपूजाप्रसङ्गे"यथाच्युतत्त्वं परतः परस्मात् स ब्रह्मभूतात् परतः परात्मा" इति; तथा हरिवंशेऽपि विप्रकुमारानयनप्रसङ्गे अर्जुनं प्रति श्रीभगवद्वाक्यम् "तत्परं परमं ब्रह्म सर्वं विभजते जगत् । ममैव तद्धनं तेजो ज्ञातुमर्हसि भारत ।।" इति; ब्रह्मसंहितायामपि - "यस्य प्रभा प्रभवतो जगदण्ड-कोटिकोटिष्वशेषवसुधादिविभूतिभिन्नम् । तद्ब्रह्म निष्कलमनन्तमशेषभूतं गोविन्दमादिपुरुषं तमहं भजामि ।।" इति; अष्टमस्कन्धे- "मदीयं महिमानञ्च परं ब्रह्मेति शब्दितम् । वेत्स्यस्यनुगृहीतं मे संप्रश्नैर्विवृतं हृदि । ।" इति भगवदुक्तिश्च । मधुसूदनसरस्वतीपादाश्च व्याचक्षतेस्म यथा -"ननु त्वद्भक्तस्त्वद्भावमाप्नोतु नाम कथं ब्रह्मभावाय कल्पते ब्रह्मणः सकाशात्तवान्यत्वादित्याशङ्कयाह - ब्रह्मणो हीति । 'प्रतिष्ठा' पर्याप्तिरहमेवेतिपर्याप्तिः परिपूर्णता इत्यमरः । पराकृतमनद्वन्द्व परं ब्रह्म नराकृति । सौन्दर्यसारसर्वस्वं वन्दे नन्दात्मजमहम्।।" इत्युपश्लोकयामासुश्च ।। सत्ताईस ।। अनर्थ एव त्रैगुण्यं निस्त्रैगुण्यं कृतार्थता। तच्च भक्त्यैव भवतीत्यध्यायार्थो निरूपितः । ॥ इति सारार्थवर्षिण्यां हर्षिण्यां भक्तचेतसाम् । चतुर्दशोऽयं गीतासु सङ्गतः सङ्गतः सताम् ।। भावानुवाद - यदि प्रश्न हो कि आपके भक्तोंको किस प्रकार निर्गुण ब्रह्मत्त्वकी प्राप्ति होती है, वह प्राप्ति तो अद्वितीय तदेकात्मताके अनुभवसे ही सम्भव है, तो इसके उत्तरमें कहते हैं- क्योंकि, परमप्रतिष्ठा प्राप्त जो प्रसिद्ध ब्रह्म है, उसकी भी प्रतिष्ठा मैं ही हूँ। मुझमें प्रतिष्ठित होनेके कारण मैं उसकी प्रतिष्ठा अर्थात् आश्रय हूँ। अन्नमय आदि समस्त श्रुतिवाक्योंमें भी सर्वत्र प्रतिष्ठा शब्दका यही तात्पर्य है। और, 'अमृतस्य' - अमृतकी भी प्रतिष्ठा मैं हूँ। तो क्या यह अमृत स्वर्गीय सुधा है ? नहीं ! इसका तात्पर्य नाशरहित मोक्ष है। 'शाश्वतस्य धर्मस्य - साधन और फलदशामें भी नित्य स्थित भक्ति नामक परम धर्मकी भी प्रतिष्ठा मैं हूँ। अतएव सभी मेरे अधीन होनेके कारण कैवल्यकी कामनासे अनुष्ठित मेरे भजनसे ब्रह्ममें लीयमान ब्रह्मत्त्व भी प्राप्त होता है। इस श्लोकमें श्रीधरस्वामिपाद कहते हैं- "मैं ब्रह्मकी प्रतिष्ठा हूँ अर्थात् मैं घनीभूत ब्रह्म ही हूँ, वैसे ही जैसे कि सूर्यमण्डल घनीभूत प्रकाश ही है ।" जैसे सूर्य तेजरूप होनेपर भी तेजके आश्रयके रूपमें जाना जाता है, उसी प्रकार मैं कृष्णस्वरूप होनेपर भी ब्रह्मकी प्रतिष्ठा हूँ। इस विषयमें विष्णु पुराणमें भी प्रमाण है - "वे विष्णु सभी मङ्गलोंके आधारस्वरूप हैं, वे चित्त एवं सर्वव्यापी आत्माके आश्रय हैं " इस श्लोककी भी व्याख्या श्रीधरस्वामिपाद इस प्रकार करते है - "सर्वज्ञ आत्मा अर्थात् परब्रह्मका आश्रय अर्थात् प्रतिष्ठा विष्णु हैं । जैसा कि भगवान्ने गीतामें कहा है - मैं ब्रह्मकी प्रतिष्ठा हूँ।" विष्णु धर्ममें नरक द्वाद्वशीके प्रसङ्गमें कहा गया है -"प्रकृति, पुरुष एवं ब्रह्ममें भी एकमात्र पुरुष वासुदेव ही प्रभु हैं, यही स्थिर हुआ है।" इसी ग्रन्थमें मास-पक्ष-पूजाके प्रसङ्गमें कहा गया है - "जिस प्रकार अच्युत परतत्त्व होते हुए भी परम ब्रह्मभूत हैं, वह होते हुए भी परम आत्मा हैं।" हरिवंश पुराण में भी विप्रकुमारको लानेके प्रसङ्ग में अर्जुनसे श्रीभगवान् कहते हैं कि वे सर्वश्रेष्ठ परम ब्रह्म ही समस्त जगत्का विभाग करते हैं, हे अर्जुन ! उस घनज्योतिको मेरा ही तेजस्वरूप जानना चाहिए। ब्रह्मसंहितामें भी पाया जाता है - "जिनकी प्रभासे उत्पन्न ब्रह्म अनन्त कोटि ब्रह्माण्डमें अशेष वसुधा आदि द्वारा विभाग करनेवाला है, मैं उन आदिपुरूष गोविन्दका भजन करता हूँ ।" श्रीमद्भागवतके अष्टम स्कन्धमें भी राजा सत्यवान्से मत्स्य भगवान्ने कहा है कि मेरी कृपासे अपने प्रश्नों के उत्तरस्वरूप अपने हृदयमें विस्तारित परब्रह्म नामसे |
अब तक पांच लाख से अधिक यूक्रेनी नागरिक देश छोड़कर पड़ोसी देशों में शरण ले चुके हैं। पड़ोसी देशों में शरण लेने वालों में ज्यादातर महिलाएं, बच्चे या बुजुर्ग लोग हैं।
रूस और यूक्रेन के बीज जंग जारी है। हमलावर देश रूसयूक्रेन के शहरों पर बमबारी कर रहा है। यूक्रेन के आम नागरिक अपनी जान बचाने के लिए भूमिगत रेलवे स्टेशन में और अन्य सुरक्षित ठिकानों में जा रहे हैं। यूक्रेन के सैकड़ों लोग इस लड़ाई में अब तक मारे जा चुके हैं। इसके अलावा लाखों लोग दूसरे देशों में शरण लेने को मजबूर हैं।
अब तक पांच लाख से अधिक यूक्रेनी नागरिक देश छोड़कर पड़ोसी देशों में शरण ले चुके हैं। पड़ोसी देशों में शरण लेने वालों में ज्यादातर महिलाएं, बच्चे या बुजुर्ग लोग हैं। दोनों देशों के बीच बीते पांच दिनों यूक्रेन की धरती पर युद्ध हो रहा है। यूएस समर्थित देश यूक्रेन को भले ही सैनिक भेजकर मदद न करते हों, लेकिन हथियार सप्लाई करके और रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाकर यूक्रेन के साथ खड़े हैं।
रूस के न्यूज आउटलेट आरटी की खबर के अनुसार, युद्ध के बीच बेलारूस में रूस-यूक्रेन वार्ता जारी है। दोनों देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के बीच युद्ध विराम को लेकर वार्ता चल रही है। दोनों देशों के बीच शत्रुता समाप्त को समाप्त करने के लिए यह बैठक की गई है। बीते रविवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के कार्यालय की ओर से यह जानकारी दी गई थी कि युद्ध विराम को लेकर दोनों पक्ष बेलारूसी सीमा पर मिलेंगे।
सोमवार को भारत में पोलैंड के राजदूत, एडम बुराकोव्स्की ने कहा कि, " भारतीय छात्रों सहित 2 लाख से अधिक लोग पहले ही पोलैंड में सीमा पार कर चुके हैं. सीमा पर भीड़भाड़ है लेकिन हम सभी का गर्मजोशी से स्वागत कर रहे हैं। "
| अब तक पांच लाख से अधिक यूक्रेनी नागरिक देश छोड़कर पड़ोसी देशों में शरण ले चुके हैं। पड़ोसी देशों में शरण लेने वालों में ज्यादातर महिलाएं, बच्चे या बुजुर्ग लोग हैं। रूस और यूक्रेन के बीज जंग जारी है। हमलावर देश रूसयूक्रेन के शहरों पर बमबारी कर रहा है। यूक्रेन के आम नागरिक अपनी जान बचाने के लिए भूमिगत रेलवे स्टेशन में और अन्य सुरक्षित ठिकानों में जा रहे हैं। यूक्रेन के सैकड़ों लोग इस लड़ाई में अब तक मारे जा चुके हैं। इसके अलावा लाखों लोग दूसरे देशों में शरण लेने को मजबूर हैं। अब तक पांच लाख से अधिक यूक्रेनी नागरिक देश छोड़कर पड़ोसी देशों में शरण ले चुके हैं। पड़ोसी देशों में शरण लेने वालों में ज्यादातर महिलाएं, बच्चे या बुजुर्ग लोग हैं। दोनों देशों के बीच बीते पांच दिनों यूक्रेन की धरती पर युद्ध हो रहा है। यूएस समर्थित देश यूक्रेन को भले ही सैनिक भेजकर मदद न करते हों, लेकिन हथियार सप्लाई करके और रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाकर यूक्रेन के साथ खड़े हैं। रूस के न्यूज आउटलेट आरटी की खबर के अनुसार, युद्ध के बीच बेलारूस में रूस-यूक्रेन वार्ता जारी है। दोनों देशों के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों के बीच युद्ध विराम को लेकर वार्ता चल रही है। दोनों देशों के बीच शत्रुता समाप्त को समाप्त करने के लिए यह बैठक की गई है। बीते रविवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के कार्यालय की ओर से यह जानकारी दी गई थी कि युद्ध विराम को लेकर दोनों पक्ष बेलारूसी सीमा पर मिलेंगे। सोमवार को भारत में पोलैंड के राजदूत, एडम बुराकोव्स्की ने कहा कि, " भारतीय छात्रों सहित दो लाख से अधिक लोग पहले ही पोलैंड में सीमा पार कर चुके हैं. सीमा पर भीड़भाड़ है लेकिन हम सभी का गर्मजोशी से स्वागत कर रहे हैं। " |
नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। बीएलके सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में 25 साल के एक युवक का जोखिमपूर्ण बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन किया गया जो कि सफल रहा।
आम जिंदगी जीने और जानलेवा बीमारी थैलसीमिया मेजर से भावी पीढ़ी को बचाने के लिए यह निश्चित तौर पर इस बीमारी को हराने की जंग थी, जिसने दिल्ली के 25 वर्षीय निखिल बरवाल को दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी से लड़ने और बेहद जोखिमपूर्ण ट्रांसप्लांट प्रक्रिया से गुजरने के लिए प्रेरित किया।
निखिल बचपन से ही थैलसीमिया मेजर (टीएम) से पीड़ित थे क्योंकि उनके माता-पिता को थैलसीमिया था। वह नियमित तौर पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराकर इस स्थिति को संभाला करते थे लेकिन शादी के बाद वह अपने भविष्य को लेकर चिंतित हो गए। अगली पीढ़ी में यह विकार जाने की संभावना उनके दिमाग से कभी भी नहीं हटती थी। उन्होंने इस स्थिति के इलाज के रूप में उपलब्ध विभिन्न विकल्पों को खोजना शुरू किया।
अपनी सकारात्मक जांचों के परिणामों से प्रोत्साहित होकर, उन्होंने बीएलके सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में बेहद जोखिमपूर्ण बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराने का फैसला किया और सफल ट्रांसप्लांट के बाद अब वह एक सामान्य-सक्रिय जिंदगी जी रहे हैं।
बीएलके सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में विशेषज्ञों से मिले आरंभिक परामर्शो से निखिल जान गए कि वह न केवल अपनी इस स्थिति का इलाज करा सकते हैं बल्कि भावी पीढ़ी को भी आगे की यातनाओं से बचा सकते हैं। उन्हें यह सुझाया गया था कि बोन मैरो में पाई जाने वाली खास प्रकार की स्टेम सेल्स का ट्रांसप्लांटेशन थैलसीमिया मेजर से पीड़ित मरीज के लिए एकमात्र उपचारात्मक विकल्प रहा है। उन्होंने अंततः इसके लिए कदम उठाया और नई जिंदगी हासिल की।
बीएलके सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के बोन मैरो ट्रांसप्लांट विभाग के निदेशक एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. धर्मा चौधरी ने कहा, मरीज की उम्र को देखते हुए यह निश्चित तौर पर काफी कम सफलता दर वाला एक बेहद चुनौतीपूर्ण केस था। लेकिन, हमें अपनी विशेषज्ञता पर भरोसा था और हमने यह चुनौती ली क्योंकि डोनर के रूप में उनके भाई का अच्छा मैच मिल गया था और अंततः हम सफलतापूर्वक यह बोन मैरो ट्रांसप्लांट करने में सक्षम हुए।
उन्होंने कहा, ट्रांसप्लांट के बाद भी उन्हें ग्राफ्ट वर्सेस होस्ट डिसीज (जीडीएचडी) के साथ ही इम्यून सप्रेसेंट चिकित्सा के लिए व्यापक तौर पर मॉनीटरिंग पर रखा गया था। उन्हें पहले तीन महीने हर दो हफ्ते में ओपीडी में आकर जांच कराने के लिए कहा गया था और जिसे बाद में एक माह में एक बार कर दिया गया। आज वह इम्यून-सप्रेसेंट की जरूरत के बिना ट्रांसफ्यूजन से मुक्त एक आम जिंदगी जीते हैं।
निखिल जब मात्र छह माह के थे, तब उनमें थैलीसीमिया इंटरमीडिया (ट्रांसफ्यूजन निर्भर) का पता चला था। दो भाई-बहनों वाले निम्न मध्यवर्गीय परिवार से आने वाले, निखिल का पहला ब्लड ट्रांसफ्यूजन 3. 5 साल की उम्र में किया गया था। उनके बचने का रास्ता ट्रांसफ्यूजंस ही थे, इसलिए उन्हें बार-बार नियमित अंतराल में ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराने के लिए जाना पड़ता था। इसके अलावा, अगली पीढ़ी में यह बीमारी जाने का डर भी काफी बड़ा था।
निखिल के पिता रमेश बरवाल ने कहा, ट्रांसप्लांट ने हमारी जिंदगी बदल दी है। हमारे लिए यह एक नई शुरुआत है। मैं और मेरी पत्नी दोनों ही थैलसीमिया माइनर हैं। निखिल के जन्म के बाद, हमें पता चला कि वह मेजर है और हम उसकी स्थिति को लेकर काफी अवसाद में थे। निखिल की शादी के बाद हम उसकी भावी पीढ़ी को लेकर चिंतित रहने लगे थे। हमें इस बात का काफी डर था कि यह बीमारी उनमें भी जा सकती है। इसलिए, एक परिवार के तौर पर हमने बेहद जोखिमपूर्ण ट्रांसप्लांट कराने के निखिल के फैसले का पूरा समर्थन किया। हम बीएलके के विशेषज्ञों और खास तौर पर डॉ. धर्मा चौधरी और उनकी टीम के शुक्रगुजार हैं। आज, हम इस दुर्लभ आनुवांशिक बीमरी से लड़ने को लेकर अपने जीवन के अनुभव साझा करने के लिए यहां हैं।
डॉ. चौधरी ने कहा, थैलसीमिया मेजर एनीमिया की एक गंभीर अवस्था के रूप में दिखती है, जिसके लिए जीवन भर ब्लड ट्रांसफ्यूजन और आयरन चिलेशन की जरूरत होती है। बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन (बीएमटी) इसका एकमात्र इलाज है लेकिन उपयुक्त एचएलए मैच्ड डोनर की अनुपलब्धता की वजह से जोखिम और ज्यादा खर्च बढ़ जाता है।
कई सर्वे और अध्ययन यह दर्शाते हैं कि दुनिया भर में थैलसीमिया का सबसे ज्यादा बोझ भारतीयों के कंधों पर ही है और भारत में 4 प्रतिशत लोग (बीटा) थैलसीमिया लक्षण के वाहक हैं। हर साल थैलसीमिया मेजर से पीड़ित लगभग 10,000-15,000 बच्चों का जन्म होता है।
| नई दिल्ली, चार मई । बीएलके सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में पच्चीस साल के एक युवक का जोखिमपूर्ण बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन किया गया जो कि सफल रहा। आम जिंदगी जीने और जानलेवा बीमारी थैलसीमिया मेजर से भावी पीढ़ी को बचाने के लिए यह निश्चित तौर पर इस बीमारी को हराने की जंग थी, जिसने दिल्ली के पच्चीस वर्षीय निखिल बरवाल को दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी से लड़ने और बेहद जोखिमपूर्ण ट्रांसप्लांट प्रक्रिया से गुजरने के लिए प्रेरित किया। निखिल बचपन से ही थैलसीमिया मेजर से पीड़ित थे क्योंकि उनके माता-पिता को थैलसीमिया था। वह नियमित तौर पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराकर इस स्थिति को संभाला करते थे लेकिन शादी के बाद वह अपने भविष्य को लेकर चिंतित हो गए। अगली पीढ़ी में यह विकार जाने की संभावना उनके दिमाग से कभी भी नहीं हटती थी। उन्होंने इस स्थिति के इलाज के रूप में उपलब्ध विभिन्न विकल्पों को खोजना शुरू किया। अपनी सकारात्मक जांचों के परिणामों से प्रोत्साहित होकर, उन्होंने बीएलके सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में बेहद जोखिमपूर्ण बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराने का फैसला किया और सफल ट्रांसप्लांट के बाद अब वह एक सामान्य-सक्रिय जिंदगी जी रहे हैं। बीएलके सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में विशेषज्ञों से मिले आरंभिक परामर्शो से निखिल जान गए कि वह न केवल अपनी इस स्थिति का इलाज करा सकते हैं बल्कि भावी पीढ़ी को भी आगे की यातनाओं से बचा सकते हैं। उन्हें यह सुझाया गया था कि बोन मैरो में पाई जाने वाली खास प्रकार की स्टेम सेल्स का ट्रांसप्लांटेशन थैलसीमिया मेजर से पीड़ित मरीज के लिए एकमात्र उपचारात्मक विकल्प रहा है। उन्होंने अंततः इसके लिए कदम उठाया और नई जिंदगी हासिल की। बीएलके सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के बोन मैरो ट्रांसप्लांट विभाग के निदेशक एवं वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. धर्मा चौधरी ने कहा, मरीज की उम्र को देखते हुए यह निश्चित तौर पर काफी कम सफलता दर वाला एक बेहद चुनौतीपूर्ण केस था। लेकिन, हमें अपनी विशेषज्ञता पर भरोसा था और हमने यह चुनौती ली क्योंकि डोनर के रूप में उनके भाई का अच्छा मैच मिल गया था और अंततः हम सफलतापूर्वक यह बोन मैरो ट्रांसप्लांट करने में सक्षम हुए। उन्होंने कहा, ट्रांसप्लांट के बाद भी उन्हें ग्राफ्ट वर्सेस होस्ट डिसीज के साथ ही इम्यून सप्रेसेंट चिकित्सा के लिए व्यापक तौर पर मॉनीटरिंग पर रखा गया था। उन्हें पहले तीन महीने हर दो हफ्ते में ओपीडी में आकर जांच कराने के लिए कहा गया था और जिसे बाद में एक माह में एक बार कर दिया गया। आज वह इम्यून-सप्रेसेंट की जरूरत के बिना ट्रांसफ्यूजन से मुक्त एक आम जिंदगी जीते हैं। निखिल जब मात्र छह माह के थे, तब उनमें थैलीसीमिया इंटरमीडिया का पता चला था। दो भाई-बहनों वाले निम्न मध्यवर्गीय परिवार से आने वाले, निखिल का पहला ब्लड ट्रांसफ्यूजन तीन. पाँच साल की उम्र में किया गया था। उनके बचने का रास्ता ट्रांसफ्यूजंस ही थे, इसलिए उन्हें बार-बार नियमित अंतराल में ब्लड ट्रांसफ्यूजन कराने के लिए जाना पड़ता था। इसके अलावा, अगली पीढ़ी में यह बीमारी जाने का डर भी काफी बड़ा था। निखिल के पिता रमेश बरवाल ने कहा, ट्रांसप्लांट ने हमारी जिंदगी बदल दी है। हमारे लिए यह एक नई शुरुआत है। मैं और मेरी पत्नी दोनों ही थैलसीमिया माइनर हैं। निखिल के जन्म के बाद, हमें पता चला कि वह मेजर है और हम उसकी स्थिति को लेकर काफी अवसाद में थे। निखिल की शादी के बाद हम उसकी भावी पीढ़ी को लेकर चिंतित रहने लगे थे। हमें इस बात का काफी डर था कि यह बीमारी उनमें भी जा सकती है। इसलिए, एक परिवार के तौर पर हमने बेहद जोखिमपूर्ण ट्रांसप्लांट कराने के निखिल के फैसले का पूरा समर्थन किया। हम बीएलके के विशेषज्ञों और खास तौर पर डॉ. धर्मा चौधरी और उनकी टीम के शुक्रगुजार हैं। आज, हम इस दुर्लभ आनुवांशिक बीमरी से लड़ने को लेकर अपने जीवन के अनुभव साझा करने के लिए यहां हैं। डॉ. चौधरी ने कहा, थैलसीमिया मेजर एनीमिया की एक गंभीर अवस्था के रूप में दिखती है, जिसके लिए जीवन भर ब्लड ट्रांसफ्यूजन और आयरन चिलेशन की जरूरत होती है। बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन इसका एकमात्र इलाज है लेकिन उपयुक्त एचएलए मैच्ड डोनर की अनुपलब्धता की वजह से जोखिम और ज्यादा खर्च बढ़ जाता है। कई सर्वे और अध्ययन यह दर्शाते हैं कि दुनिया भर में थैलसीमिया का सबसे ज्यादा बोझ भारतीयों के कंधों पर ही है और भारत में चार प्रतिशत लोग थैलसीमिया लक्षण के वाहक हैं। हर साल थैलसीमिया मेजर से पीड़ित लगभग दस,शून्य-पंद्रह,शून्य बच्चों का जन्म होता है। |
गोरखपुर (ब्यूरो)। हृषीकेश पंचांग के अनुसार इस वर्ष 14 जनवरी की रात्रि शेष (भिनसार) को 3 बजकर 1 मिनट (15 जनवरी को अत्यंत प्रातः काल) पर सूर्य धनु राशि का परित्याग कर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इसलिए मकर संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी को मध्यान्ह के पूर्व तक विशेष पुण्य काल पश्चात सम्पूर्ण दिन और अग्रिम तीन दिन तक सामान्य पुण्य काल बना रहेगा।
संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य को अघ्र्य देने से समस्त पापों का तिरोहित हो जाता है, ऐसी धर्म शास्त्रीय मान्यता है। इस दिन तिल दान, तिल का भोजन, तिल मिश्रित जल से स्नान, तिल की मालिश, तिल का हवन और तिल से तर्पण की भी मान्यता है, इससे पूर्व जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं। धर्म सिन्धु के अनुसार संक्रांति पुण्य काल में सफेद तिलों से देवताओं तथा काले तिलों से पितरों का तर्पण करना चाहिए। मकर संक्रांति के दिन भगवान शंकर के मन्दिर में तिल के तेल का दीपक प्रज्ज्वलित करना चाहिए।
संक्रांति का प्रवेश चित्रा नक्षत्र के तृतीय चरण, सुकर्मा योग और कौलव करण में हो रहा है। उस समय चंद्रमा की स्थिति तुला राशि पर है. चित्रा नक्षत्र में घटित होने से यह 30 मुहुर्ती है। अतः वस्तुओं के मूल्य में स्थिरता का योग रहेगा। कौलव करण में घटित होने से यह ऊर्धव मुखी, श्रेष्ठ संज्ञक है। इस संक्रांति का वाहन वाराह और उपवाहन वृषभ है। अतः स्टॉकिस्ट, अति लोभी, सट्टेबाज, चोर, डाकू, ठग आदि धूर्त प्रकृति के लोगों के लिए भय देने वाली रहेगी।
| गोरखपुर । हृषीकेश पंचांग के अनुसार इस वर्ष चौदह जनवरी की रात्रि शेष को तीन बजकर एक मिनट पर सूर्य धनु राशि का परित्याग कर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इसलिए मकर संक्रांति का पुण्य काल पंद्रह जनवरी को मध्यान्ह के पूर्व तक विशेष पुण्य काल पश्चात सम्पूर्ण दिन और अग्रिम तीन दिन तक सामान्य पुण्य काल बना रहेगा। संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य को अघ्र्य देने से समस्त पापों का तिरोहित हो जाता है, ऐसी धर्म शास्त्रीय मान्यता है। इस दिन तिल दान, तिल का भोजन, तिल मिश्रित जल से स्नान, तिल की मालिश, तिल का हवन और तिल से तर्पण की भी मान्यता है, इससे पूर्व जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं। धर्म सिन्धु के अनुसार संक्रांति पुण्य काल में सफेद तिलों से देवताओं तथा काले तिलों से पितरों का तर्पण करना चाहिए। मकर संक्रांति के दिन भगवान शंकर के मन्दिर में तिल के तेल का दीपक प्रज्ज्वलित करना चाहिए। संक्रांति का प्रवेश चित्रा नक्षत्र के तृतीय चरण, सुकर्मा योग और कौलव करण में हो रहा है। उस समय चंद्रमा की स्थिति तुला राशि पर है. चित्रा नक्षत्र में घटित होने से यह तीस मुहुर्ती है। अतः वस्तुओं के मूल्य में स्थिरता का योग रहेगा। कौलव करण में घटित होने से यह ऊर्धव मुखी, श्रेष्ठ संज्ञक है। इस संक्रांति का वाहन वाराह और उपवाहन वृषभ है। अतः स्टॉकिस्ट, अति लोभी, सट्टेबाज, चोर, डाकू, ठग आदि धूर्त प्रकृति के लोगों के लिए भय देने वाली रहेगी। |
हरियाणा में 1200 से ज्यादा अवैध कालोनियां नियमित होंगी। गुरुग्राम नगर निगम के दायरे में 103 कालोनियों पर नियमित होने की मुहर लग सकती है। नगर निगम ने पिछले दिनों 63 अवैध कालोनियों की सूची शहरी स्थानीय निकाय विभाग को भेजी थी।
निगम की ओर से बताया गया था कि कालोनी को नियमित करने की शर्तें ये 63 कालोनियां पूरा कर रही हैं। अब गुरुग्राम नगर निगम की ओर से 40 और नई कालोनियों को नियमित या वैध करने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा जाएगा।
प्रस्ताव भेजने से पहले इन कालोनियों के आरडब्ल्यूए से भी निगम ने पहले से कालोनियों में मौजूद इन्फ्रास्ट्रक्चर की जानकारी जुटाई है। इसके अलावा जिन कालोनियों में अभी आरडब्ल्यूए नहीं हैं, वहां भी अस्थायी आरडब्ल्यूए का गठन करने के लिए कहा गया है।
कालोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया में स्थानीय आरडब्ल्यूए को भी शामिल किया जा रहा है। इस महीने के अंत तक नगर निगम 40 कालोनियों की सूची मुख्यालय को भेज देगा।
| हरियाणा में एक हज़ार दो सौ से ज्यादा अवैध कालोनियां नियमित होंगी। गुरुग्राम नगर निगम के दायरे में एक सौ तीन कालोनियों पर नियमित होने की मुहर लग सकती है। नगर निगम ने पिछले दिनों तिरेसठ अवैध कालोनियों की सूची शहरी स्थानीय निकाय विभाग को भेजी थी। निगम की ओर से बताया गया था कि कालोनी को नियमित करने की शर्तें ये तिरेसठ कालोनियां पूरा कर रही हैं। अब गुरुग्राम नगर निगम की ओर से चालीस और नई कालोनियों को नियमित या वैध करने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा जाएगा। प्रस्ताव भेजने से पहले इन कालोनियों के आरडब्ल्यूए से भी निगम ने पहले से कालोनियों में मौजूद इन्फ्रास्ट्रक्चर की जानकारी जुटाई है। इसके अलावा जिन कालोनियों में अभी आरडब्ल्यूए नहीं हैं, वहां भी अस्थायी आरडब्ल्यूए का गठन करने के लिए कहा गया है। कालोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया में स्थानीय आरडब्ल्यूए को भी शामिल किया जा रहा है। इस महीने के अंत तक नगर निगम चालीस कालोनियों की सूची मुख्यालय को भेज देगा। |
लैंडिंग गियर के पहियों में से एक में उतारने के लिए तेजी लाने के बाद आग लग गई। 20 मिनट बाद ही आग बुझ गई।
जापान में आखिरी हवाई जहाज की घटना 7 अक्टूबर को हुई, जब तीन अमेरिकी एफ -16 लड़ाकू विमानों ने जापान के कोमात्सु हवाई अड्डे पर एक आपातकालीन लैंडिंग की। चैनल के अनुसार, यह घटना एफ -16 में से एक के इंजन की खराबी के कारण हुई। इस घटना के परिणामस्वरूप, कोई भी घायल नहीं हुआ, एक नागरिक विमान की उड़ान में 5 मिनट की देरी हुई।
पिछले हफ्ते ओकिनावा द्वीप पर, एक कठिन आपातकालीन लैंडिंग के बाद, यूएस मरीन कॉर्प्स सीएच -53 का एक भारी हेलीकॉप्टर पूरी तरह से जल गया। हादसा आवासीय भवनों से महज 300 मीटर की दूरी पर हुआ। केंद्रीय और स्थानीय जापानी अधिकारियों के विरोध के बावजूद, बुधवार को अमेरिकी कमांड ने इन हेलीकॉप्टरों की उड़ानों को फिर से शुरू किया TASS.
| लैंडिंग गियर के पहियों में से एक में उतारने के लिए तेजी लाने के बाद आग लग गई। बीस मिनट बाद ही आग बुझ गई। जापान में आखिरी हवाई जहाज की घटना सात अक्टूबर को हुई, जब तीन अमेरिकी एफ -सोलह लड़ाकू विमानों ने जापान के कोमात्सु हवाई अड्डे पर एक आपातकालीन लैंडिंग की। चैनल के अनुसार, यह घटना एफ -सोलह में से एक के इंजन की खराबी के कारण हुई। इस घटना के परिणामस्वरूप, कोई भी घायल नहीं हुआ, एक नागरिक विमान की उड़ान में पाँच मिनट की देरी हुई। पिछले हफ्ते ओकिनावा द्वीप पर, एक कठिन आपातकालीन लैंडिंग के बाद, यूएस मरीन कॉर्प्स सीएच -तिरेपन का एक भारी हेलीकॉप्टर पूरी तरह से जल गया। हादसा आवासीय भवनों से महज तीन सौ मीटर की दूरी पर हुआ। केंद्रीय और स्थानीय जापानी अधिकारियों के विरोध के बावजूद, बुधवार को अमेरिकी कमांड ने इन हेलीकॉप्टरों की उड़ानों को फिर से शुरू किया TASS. |
रामपुरः उत्तरप्रदेश के रामपुर में SBI बैंक की मुख्य शाखा में लगे दो एटीएम में बीती रात अचानक आग लग गई. आग इतनी भीषण थी एटीएम में रखा हुआ कैश तुरन्त जलकर खाक हो गया. वही मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पा लिया.
बताया जा रहा है कि एटीएम में बीती रात आग लग गई थी और कुछ ही देर में आग की लपटे काफी तेज़ हो गई. वही स्थानीय लोगो ने 100 नंबर पर कॉल किया और एटीएम में आग लगने की सुचना दी. साथ ही बैंक मैनेजर को भी आग लगने की सूचना दी. पुलिस ने बताया कि फायर ब्रिगेड के मदद से दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पा लिया साथ ही यह भी कहा कि अगर आग पर जल्द काबू नहीं किया जाता, तो स्ट्रांग रूम को भी वह अपनी चपेट में ले लेती.
वही एटीएम में इस तरह लगी आग की वजह से बैंक परिसर में अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया है. फिलहाल उस आग से किसी को हताहत होने की खबर नही आई है.
| रामपुरः उत्तरप्रदेश के रामपुर में SBI बैंक की मुख्य शाखा में लगे दो एटीएम में बीती रात अचानक आग लग गई. आग इतनी भीषण थी एटीएम में रखा हुआ कैश तुरन्त जलकर खाक हो गया. वही मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पा लिया. बताया जा रहा है कि एटीएम में बीती रात आग लग गई थी और कुछ ही देर में आग की लपटे काफी तेज़ हो गई. वही स्थानीय लोगो ने एक सौ नंबर पर कॉल किया और एटीएम में आग लगने की सुचना दी. साथ ही बैंक मैनेजर को भी आग लगने की सूचना दी. पुलिस ने बताया कि फायर ब्रिगेड के मदद से दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पा लिया साथ ही यह भी कहा कि अगर आग पर जल्द काबू नहीं किया जाता, तो स्ट्रांग रूम को भी वह अपनी चपेट में ले लेती. वही एटीएम में इस तरह लगी आग की वजह से बैंक परिसर में अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया है. फिलहाल उस आग से किसी को हताहत होने की खबर नही आई है. |
देश के सबसे अमीर उद्योगपति के आलीशान बंगले एंटीलिया की सुरक्षा उस समय बढ़ा दी गई जब एक टैक्सी चालक ने पुलिस को सूचित किया था कि बैग लेकर जा रहे एक वाहन में सवार दो संदिग्ध यात्रियों ने उससे 'एंटीलिया' का पता पूछा है। मुंबई पुलिस ने भी मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच शुरू कर दी, लेकिन सच्चाई कुछ और ही निकली। आठ महीने पहले भी अंबानी परिवार की सुरक्षा का मुद्दा खूब गर्माया था।
मुंबई पुलिस ने उस कार के चालक का पता लगा लिया है जिसके यात्री ने एंटीलिया' के बारे में एक टैक्सी चालक से पूछा था। पुलिस ने बताया कि कार एक निजी कैब है और सोमवार देर रात इसके नवी मुंबई में होने का पता चला था जिसके बाद उसके चालक को पूछताछ के लिए बुलाया गया। पूछताछ पर पता चला कि दोनों गुजरात से मुंबई घूमने आए थे। वो बाकी पर्यटन स्थलों के जैसे एंटीलिया को भी देखना चाहता था, सिर्फ इसलिए उसने एंटीलिया का पता पूछा था।
कैब चालके ने बताया कि वहां कुछ जगहों पर जाने के बाद, उनके फोन के नक्शे में गड़बड़ी हो गई, जिसके बाद यात्री ने एक टैक्सी चालक से एंटीलिया जाने का रास्ते का पूछा। टैक्सी चालक दक्षिण मुंबई में किला कोर्ट के पास खड़ा था, जब एक कार आकर रूकी और उसमें सवार यात्रियों ने उससे अंबानी के आवास का पता पूछा। इसके बाद टैक्सी चालक ने पुलिस को सूचना दी कि एक कार के दो यात्री उर्दू बोल रहे थे और उनके पास दो बैग थे।
अधिकारी ने बताया कि कि पुलिस ने शुरू में टैक्सी चालक की ओर से दिए गए नंबर से कार का पता लगाने की कोशिश की, लेकिन यह गलत था। बाद में उन्होंने सीसीटीवी फुटेज की मदद से कार की पहचान की और नवी मुंबई में इसका पता लगाया। पुलिस का कहना है कि उन दोनों यात्रियों का मकसद र्फ एंटीलिया को देखना था। अंबानी परिवार को किसी तरह का कोई नुकसान खतरा नहीं है। याद हो कि इस साल फरवरी में एंटीलिया के बाहर एक कार मिली थी जिसमें विस्फोटक रखे थे।
| देश के सबसे अमीर उद्योगपति के आलीशान बंगले एंटीलिया की सुरक्षा उस समय बढ़ा दी गई जब एक टैक्सी चालक ने पुलिस को सूचित किया था कि बैग लेकर जा रहे एक वाहन में सवार दो संदिग्ध यात्रियों ने उससे 'एंटीलिया' का पता पूछा है। मुंबई पुलिस ने भी मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच शुरू कर दी, लेकिन सच्चाई कुछ और ही निकली। आठ महीने पहले भी अंबानी परिवार की सुरक्षा का मुद्दा खूब गर्माया था। मुंबई पुलिस ने उस कार के चालक का पता लगा लिया है जिसके यात्री ने एंटीलिया' के बारे में एक टैक्सी चालक से पूछा था। पुलिस ने बताया कि कार एक निजी कैब है और सोमवार देर रात इसके नवी मुंबई में होने का पता चला था जिसके बाद उसके चालक को पूछताछ के लिए बुलाया गया। पूछताछ पर पता चला कि दोनों गुजरात से मुंबई घूमने आए थे। वो बाकी पर्यटन स्थलों के जैसे एंटीलिया को भी देखना चाहता था, सिर्फ इसलिए उसने एंटीलिया का पता पूछा था। कैब चालके ने बताया कि वहां कुछ जगहों पर जाने के बाद, उनके फोन के नक्शे में गड़बड़ी हो गई, जिसके बाद यात्री ने एक टैक्सी चालक से एंटीलिया जाने का रास्ते का पूछा। टैक्सी चालक दक्षिण मुंबई में किला कोर्ट के पास खड़ा था, जब एक कार आकर रूकी और उसमें सवार यात्रियों ने उससे अंबानी के आवास का पता पूछा। इसके बाद टैक्सी चालक ने पुलिस को सूचना दी कि एक कार के दो यात्री उर्दू बोल रहे थे और उनके पास दो बैग थे। अधिकारी ने बताया कि कि पुलिस ने शुरू में टैक्सी चालक की ओर से दिए गए नंबर से कार का पता लगाने की कोशिश की, लेकिन यह गलत था। बाद में उन्होंने सीसीटीवी फुटेज की मदद से कार की पहचान की और नवी मुंबई में इसका पता लगाया। पुलिस का कहना है कि उन दोनों यात्रियों का मकसद र्फ एंटीलिया को देखना था। अंबानी परिवार को किसी तरह का कोई नुकसान खतरा नहीं है। याद हो कि इस साल फरवरी में एंटीलिया के बाहर एक कार मिली थी जिसमें विस्फोटक रखे थे। |
प्रधानमंत्री मोदी पिछले 9 साल से देश की बागडोर संभाल रहे हैं. उनके जन्मदिन के मौके पर भारतीय जनता पार्टी 'सेवा पखवाड़ा' मनाती है. पीएम मोदी के जन्मदिन के अवसर आज से 2 अक्टूबर तक देशभर में 'आयुष्मान भव' अभियान चलाया जाएगा. देश भर के लाखों हेल्थ और वेलनेस सेंटरों पर आयुष्मान मेले का आयोजन किया जाएगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 73 साल के हो गए हैं. पीएम मोदी के जन्मदिन पर आज से 2 अक्टूबर तक कई तरह के कार्यक्रम आयोजित होंगे. उनके जन्मदिन के मौके पर आज से देशभर में 'आयुष्मान भव' अभियान चलाया जाएगा. प्रधानमंत्री मोदी पिछले नौ साल से देश की बागडोर संभाल रहे हैं. उनके जन्मदिन के मौके पर भारतीय जनता पार्टी 'सेवा पखवाड़ा' मनाती है. यह अभियान इसी के तहत चलाया जाएगा. इस अभियान का लक्ष्य 35 करोड़ लोगों तक 'आयुष्मान भारत योजना' का लाभ पहुंचाना है.
इसके अलावा पीएम मोदी के बर्थडे पर और भी कई कार्यक्रम होंगे. बता दें कि सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य मेले लगेंगे, आयुष्मान कार्ड बनाए जाएंगे, आयुष्मान सभा का आयोजन होगा और आयुष्मान गांव भी घोषित किए जाएंगे. इसके अलावा आयुष्मान आपके द्वार, आयुष्मान मेला, आयुष्मान सभा और आयुष्मान गांव का कार्यक्रम शामिल है.
- आयुष्मान मेलाः देश भर के लाखों हेल्थ और वेलनेस सेंटरों पर आयुष्मान मेले का आयोजन किया जाएगा. इन मेलों में लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सेवाएं प्रदान की जाएंगी. यहां मरीज की स्क्रीनिंग होगी और बीपी, शुगर की जांच भी होगी. ज्यादा बीमारी हुई तो नजदीकी मेडिकल कॉलेज में इलाज कराया जाएगा.
- आयुष्मान आपके द्वारः इस कार्यक्रम के तहत उन लोगों के लिए आयुष्मान कार्ड बनाए जाएंगे, जो इसके पात्र होते हुए भी अब तक योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं. अब तक 24 करोड़ कार्ड बने हैं जबकि 36 करोड़ और लोगों का कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इसलिए ये अभियान चलाया जा रहा है.
- आयुष्मान सभाः दो अक्टूबर को सभी गांवों और वार्डों में आयुष्मान सभाएं आयोजित की जाएंगी. इन सभाओं में लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता फैलाई जाएगी. इसमें आयुष्मान कार्ड, आभा हेल्थ कार्ड, सिकल सेल एनीमिया आदि को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा.
- आयुष्मान गांवः इस कार्यक्रम के तहत जिस गांव में सौ फीसदी लाभार्थी रजिस्टर हो चुके होंगे. उस गांव को आयुष्मान गांव घोषित किया जाएगा.
'आयुष्मान भव' अभियान क्या है ?
बता दें कि आयुष्मान भव अभियान की शुरुआत 13 सितंबर से शुरू हो चुकी है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अभियान का उद्घाटन किया था. मगर ये अभियान पीएम मोदी के जन्मदिन के मौके पर 17 सितंबर यानी आज से 2 अक्टूबर तक चलेगा. अब तक देश के 25 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिया जा चुका है.
वहीं, सरकार का लक्ष्य अक्टूबर तक इस योजना का लाभ 35 करोड़ लोगों तक पहुंचाने की है. बता दें कि 'आयुष्मान भारत योजना' के तहत सरकार की तरफ से आम लोगों को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलता है. इसके लिए लोगों को स्वास्थ्य बीमा 'आयुष्मान कार्ड' जारी किया जाता है. साल 2018 में इसकी शुरुआत की गई थी.
- 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक ऑर्गन डोनेशन का अभियान भी चलाया जाएगा.
- पीएम मोदी के जन्मदिन पर ब्लड डोनेशन कैंप चलाए जाएंगे.
- टीबी मरीजों को गोद लिया जाएगा.
- सभी स्वास्थ्य संस्थानों में सफाई अभियान चलाया जाएगा.
| प्रधानमंत्री मोदी पिछले नौ साल से देश की बागडोर संभाल रहे हैं. उनके जन्मदिन के मौके पर भारतीय जनता पार्टी 'सेवा पखवाड़ा' मनाती है. पीएम मोदी के जन्मदिन के अवसर आज से दो अक्टूबर तक देशभर में 'आयुष्मान भव' अभियान चलाया जाएगा. देश भर के लाखों हेल्थ और वेलनेस सेंटरों पर आयुष्मान मेले का आयोजन किया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज तिहत्तर साल के हो गए हैं. पीएम मोदी के जन्मदिन पर आज से दो अक्टूबर तक कई तरह के कार्यक्रम आयोजित होंगे. उनके जन्मदिन के मौके पर आज से देशभर में 'आयुष्मान भव' अभियान चलाया जाएगा. प्रधानमंत्री मोदी पिछले नौ साल से देश की बागडोर संभाल रहे हैं. उनके जन्मदिन के मौके पर भारतीय जनता पार्टी 'सेवा पखवाड़ा' मनाती है. यह अभियान इसी के तहत चलाया जाएगा. इस अभियान का लक्ष्य पैंतीस करोड़ लोगों तक 'आयुष्मान भारत योजना' का लाभ पहुंचाना है. इसके अलावा पीएम मोदी के बर्थडे पर और भी कई कार्यक्रम होंगे. बता दें कि सेवा पखवाड़ा कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य मेले लगेंगे, आयुष्मान कार्ड बनाए जाएंगे, आयुष्मान सभा का आयोजन होगा और आयुष्मान गांव भी घोषित किए जाएंगे. इसके अलावा आयुष्मान आपके द्वार, आयुष्मान मेला, आयुष्मान सभा और आयुष्मान गांव का कार्यक्रम शामिल है. - आयुष्मान मेलाः देश भर के लाखों हेल्थ और वेलनेस सेंटरों पर आयुष्मान मेले का आयोजन किया जाएगा. इन मेलों में लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सेवाएं प्रदान की जाएंगी. यहां मरीज की स्क्रीनिंग होगी और बीपी, शुगर की जांच भी होगी. ज्यादा बीमारी हुई तो नजदीकी मेडिकल कॉलेज में इलाज कराया जाएगा. - आयुष्मान आपके द्वारः इस कार्यक्रम के तहत उन लोगों के लिए आयुष्मान कार्ड बनाए जाएंगे, जो इसके पात्र होते हुए भी अब तक योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं. अब तक चौबीस करोड़ कार्ड बने हैं जबकि छत्तीस करोड़ और लोगों का कार्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इसलिए ये अभियान चलाया जा रहा है. - आयुष्मान सभाः दो अक्टूबर को सभी गांवों और वार्डों में आयुष्मान सभाएं आयोजित की जाएंगी. इन सभाओं में लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता फैलाई जाएगी. इसमें आयुष्मान कार्ड, आभा हेल्थ कार्ड, सिकल सेल एनीमिया आदि को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा. - आयुष्मान गांवः इस कार्यक्रम के तहत जिस गांव में सौ फीसदी लाभार्थी रजिस्टर हो चुके होंगे. उस गांव को आयुष्मान गांव घोषित किया जाएगा. 'आयुष्मान भव' अभियान क्या है ? बता दें कि आयुष्मान भव अभियान की शुरुआत तेरह सितंबर से शुरू हो चुकी है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अभियान का उद्घाटन किया था. मगर ये अभियान पीएम मोदी के जन्मदिन के मौके पर सत्रह सितंबर यानी आज से दो अक्टूबर तक चलेगा. अब तक देश के पच्चीस करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिया जा चुका है. वहीं, सरकार का लक्ष्य अक्टूबर तक इस योजना का लाभ पैंतीस करोड़ लोगों तक पहुंचाने की है. बता दें कि 'आयुष्मान भारत योजना' के तहत सरकार की तरफ से आम लोगों को पाँच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलता है. इसके लिए लोगों को स्वास्थ्य बीमा 'आयुष्मान कार्ड' जारी किया जाता है. साल दो हज़ार अट्ठारह में इसकी शुरुआत की गई थी. - सत्रह सितंबर से दो अक्टूबर तक ऑर्गन डोनेशन का अभियान भी चलाया जाएगा. - पीएम मोदी के जन्मदिन पर ब्लड डोनेशन कैंप चलाए जाएंगे. - टीबी मरीजों को गोद लिया जाएगा. - सभी स्वास्थ्य संस्थानों में सफाई अभियान चलाया जाएगा. |
सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो हम आपको यहां देशभर में अलग अलग सरकारी विभागों में निकलीं सरकारी नौकरियों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। अगर आप 8वीं 10वीं पास हैं तब भी सरकारी नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। दरअसल केंद्र और राज्य सरकारों ने 8वीं 10वीं पास से लेकर ग्रेजुएट पोस्ट ग्रेजुएट और डिप्लोमा वालों तक के लिए सरकारी नौकरियां निकाल रखी हैं। अब इसमें आपको यह देखना है कि आप किस नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। मतलब आप जिस सरकारी नौकरी के लिए मांगी गईं जरूरी पात्रताओं को पूरा करते हैं उसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
जब आप किसी सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करें तो पहले यह चेक कर लें कि इसमें जो चीजें मांगी गई हैं वो आपके पास हैं या नहीं हैं। अगर आप किसी नौकरी के लिए मांगी गई पात्रताओं को पूरा नहीं करते हैं और फिर भी उसके लिए आवेदन कर देते हैं तो संबंधित विभाग आपके आवेदन को रद्द कर सकता है। इसलिए आवेदन करने से पहले नौकरी के लिए विभाग द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ लें, या फिर संबंधित विभाग की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी देख लें। ताकि बाद में आपको परेशानी न हो।
| सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो हम आपको यहां देशभर में अलग अलग सरकारी विभागों में निकलीं सरकारी नौकरियों के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। अगर आप आठवीं दसवीं पास हैं तब भी सरकारी नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। दरअसल केंद्र और राज्य सरकारों ने आठवीं दसवीं पास से लेकर ग्रेजुएट पोस्ट ग्रेजुएट और डिप्लोमा वालों तक के लिए सरकारी नौकरियां निकाल रखी हैं। अब इसमें आपको यह देखना है कि आप किस नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। मतलब आप जिस सरकारी नौकरी के लिए मांगी गईं जरूरी पात्रताओं को पूरा करते हैं उसके लिए आवेदन कर सकते हैं। जब आप किसी सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करें तो पहले यह चेक कर लें कि इसमें जो चीजें मांगी गई हैं वो आपके पास हैं या नहीं हैं। अगर आप किसी नौकरी के लिए मांगी गई पात्रताओं को पूरा नहीं करते हैं और फिर भी उसके लिए आवेदन कर देते हैं तो संबंधित विभाग आपके आवेदन को रद्द कर सकता है। इसलिए आवेदन करने से पहले नौकरी के लिए विभाग द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ लें, या फिर संबंधित विभाग की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी देख लें। ताकि बाद में आपको परेशानी न हो। |
नई दिल्ली। एचपी ने रचनात्मक पेशेवरों के लिए सोमवार को 77,999 रुपये की शुरुआती कीमत के साथ एक 'पविलियन पॉवर' नोटबुक पेश की। एचपी पविलियन पॉवर नोटबुक एनवीआईडीाईए जीफोर्स जीटीएक्स 1050 ग्राफिक्स कार्ड और नवीनतम 7 जेनरेश्न क्वाड कोर इंटेल प्रोसेसर से लैस है।
डिवाइस में पूर्ण-एचडी आईपीएस डिस्प्ले के साथ 'बी एंड ओ प्ले' और एचपी 'ऑडियो बूस्ट' द्वारा ऑडियो दिया गया है।
नोटबुक में 128 जीबी पेरीफेरल कोम्पोनेंट इंटरकनेक्ट एक्सप्रेस (पीसीआईई), सोलिड-स्टेट स्टोरेज डिवाइस (एसएसडी) और 1 टीबी हार्ड डिस्क ड्राइव (एचडीडी) स्टोरेज जैसी विशेषताएं हैं।
एचपी फास्ट-चार्ज तकनीक से 90 मिनट में 90 प्रतिशत चार्ज करने में सक्षम बनाता है। 'पविलियन पावर' में एमएस ऑफिस होम और स्टूडेंट 2016 संस्करण पहले से मौजूद है।
डिवाइस प्रमुख रीटेल स्टोरों पर तीन संस्करणों में उपलब्ध होगा।
| नई दिल्ली। एचपी ने रचनात्मक पेशेवरों के लिए सोमवार को सतहत्तर,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये की शुरुआती कीमत के साथ एक 'पविलियन पॉवर' नोटबुक पेश की। एचपी पविलियन पॉवर नोटबुक एनवीआईडीाईए जीफोर्स जीटीएक्स एक हज़ार पचास ग्राफिक्स कार्ड और नवीनतम सात जेनरेश्न क्वाड कोर इंटेल प्रोसेसर से लैस है। डिवाइस में पूर्ण-एचडी आईपीएस डिस्प्ले के साथ 'बी एंड ओ प्ले' और एचपी 'ऑडियो बूस्ट' द्वारा ऑडियो दिया गया है। नोटबुक में एक सौ अट्ठाईस जीबी पेरीफेरल कोम्पोनेंट इंटरकनेक्ट एक्सप्रेस , सोलिड-स्टेट स्टोरेज डिवाइस और एक टीबी हार्ड डिस्क ड्राइव स्टोरेज जैसी विशेषताएं हैं। एचपी फास्ट-चार्ज तकनीक से नब्बे मिनट में नब्बे प्रतिशत चार्ज करने में सक्षम बनाता है। 'पविलियन पावर' में एमएस ऑफिस होम और स्टूडेंट दो हज़ार सोलह संस्करण पहले से मौजूद है। डिवाइस प्रमुख रीटेल स्टोरों पर तीन संस्करणों में उपलब्ध होगा। |
वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) दोनों के नेताओं को विश्वास है कि इस बार के चुनाव में उनकी जीत होगी.
केरल की 140 सीटों के लिए मतगणना जारी है इस बीच कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने रविवार यानी आज कोट्टायम के पुथुपल्ली चर्च में प्रार्थना की. चांडी राज्य में पुथुपल्ली विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार भी हैं. कांग्रेस के दो बार के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके ओमन चांडी (Oomen chandy) को भरोसा है कि केरल का चुनावी इतिहास हर चुनाव की तरह बरकरार रहेगा, यानी एक बार फिर विपक्ष सत्ता में वापसी करेगा.
केरल में विधानसभा (Kerala Assembly Election) की 140 सीटों पर 6 अप्रैल को मतदान हुआ था. केरल विधानसभा चुनाव में करीब 74.06 फीसदी वोटिंग हुई थी. पिछले 40 सालों में केरल में कोई भी गठबंधन सरकार दोबारा सत्ता में वापसी नहीं कर सकी है. हालांकि एग्जिट पोल (Exit Poll) में लेफ्ट के नेतृत्व वाले सत्तारुढ़ LDF की वापसी लग रही है.
वहीं वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) दोनों के नेताओं को विश्वास है कि इस बार के चुनाव में उनकी जीत होगी. हालांकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के नेताओं ने एक्जिट पोल के सर्वेक्षणों को खारिज कर दिया. जबकि LDF नेताओं का कहना है कि एग्जिट पोल लोगों के बीच सत्तारूढ़ गठबंधन की स्वीकार्यता को दर्शाते हैं.
केरल लगभग चार दशकों से LDF और UDF को सत्ता में देख रहा है. इस बार के विधानसभा चुनाव के चर्चित उम्मीदवारों में ई श्रीधरन, पिनराई विजयन और पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी प्रमुख हैं. ई श्रीधरन (E Sreedharan) भारत के मशहूर सिविल इंजीनियर हैं. श्रीधरन 1995 से 2012 तक दिल्ली मेट्रो के निदेशक रहे. भारत सरकार ने उन्हें 2001 में पद्मश्री और 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया था. बीजेपी ने उन्हें पालक्कड सीट से टिकट दिया गया था.
वहीं पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो 2016 के विधानसभा चुनाव में एलडीएफ गठबंधन को 91 सीटें मिली थीं, जिसमें शामिल माकपा को 58, बीजेपी को 19, केसीबी को एक, सीएम (पी) को एक, आरएसपी एल को एक, जेडीएस को तीन, राकांपा को 2, कांग्रेस (एस) को एक और अन्य को पांच सीटें मिली थीं.
| वाम लोकतांत्रिक मोर्चा और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट दोनों के नेताओं को विश्वास है कि इस बार के चुनाव में उनकी जीत होगी. केरल की एक सौ चालीस सीटों के लिए मतगणना जारी है इस बीच कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने रविवार यानी आज कोट्टायम के पुथुपल्ली चर्च में प्रार्थना की. चांडी राज्य में पुथुपल्ली विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार भी हैं. कांग्रेस के दो बार के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके ओमन चांडी को भरोसा है कि केरल का चुनावी इतिहास हर चुनाव की तरह बरकरार रहेगा, यानी एक बार फिर विपक्ष सत्ता में वापसी करेगा. केरल में विधानसभा की एक सौ चालीस सीटों पर छः अप्रैल को मतदान हुआ था. केरल विधानसभा चुनाव में करीब चौहत्तर.छः फीसदी वोटिंग हुई थी. पिछले चालीस सालों में केरल में कोई भी गठबंधन सरकार दोबारा सत्ता में वापसी नहीं कर सकी है. हालांकि एग्जिट पोल में लेफ्ट के नेतृत्व वाले सत्तारुढ़ LDF की वापसी लग रही है. वहीं वाम लोकतांत्रिक मोर्चा और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट दोनों के नेताओं को विश्वास है कि इस बार के चुनाव में उनकी जीत होगी. हालांकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ के नेताओं ने एक्जिट पोल के सर्वेक्षणों को खारिज कर दिया. जबकि LDF नेताओं का कहना है कि एग्जिट पोल लोगों के बीच सत्तारूढ़ गठबंधन की स्वीकार्यता को दर्शाते हैं. केरल लगभग चार दशकों से LDF और UDF को सत्ता में देख रहा है. इस बार के विधानसभा चुनाव के चर्चित उम्मीदवारों में ई श्रीधरन, पिनराई विजयन और पूर्व मुख्यमंत्री ओमान चांडी प्रमुख हैं. ई श्रीधरन भारत के मशहूर सिविल इंजीनियर हैं. श्रीधरन एक हज़ार नौ सौ पचानवे से दो हज़ार बारह तक दिल्ली मेट्रो के निदेशक रहे. भारत सरकार ने उन्हें दो हज़ार एक में पद्मश्री और दो हज़ार आठ में पद्म विभूषण से सम्मानित किया था. बीजेपी ने उन्हें पालक्कड सीट से टिकट दिया गया था. वहीं पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो दो हज़ार सोलह के विधानसभा चुनाव में एलडीएफ गठबंधन को इक्यानवे सीटें मिली थीं, जिसमें शामिल माकपा को अट्ठावन, बीजेपी को उन्नीस, केसीबी को एक, सीएम को एक, आरएसपी एल को एक, जेडीएस को तीन, राकांपा को दो, कांग्रेस को एक और अन्य को पांच सीटें मिली थीं. |
अक्सर सुनने को मिलता है कि हम दिमाग का इस्तेमाल बहुत कम करते हैं और अगर दिमाग का ज्यादा इस्तेमाल कर लिया जाए तो यादादश्त काफी ज्यादा हो सकती है. दिमाग पर अभी तक काफी रिसर्च हो चुकी है और कई रिसर्च में एक ही बात सामने आती है कि हम अपने दिमाग को बहुत कम या छोटा सा हिस्सा ही इस्तेमाल करते हैं. वैसे हमारी मानसिक क्षमता काफी ज्यादा होती है और हम इसका बहुत कम इस्तेमाल करते हैं.
अब दिमाग लगाने का काम तो और भी कम हो चुका है, क्योंकि हम अधिकतर चीजों में मशीनों पर ही निर्भर करने लगे हैं. आम दिनचर्या में लोग दिमाग से ज्यादा फोन का इस्तेमाल करते हैं और डेटा स्टोर करने के लिए किसी ना किसी इलेक्ट्रॉनिक सामान का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन, ये सभी काम आपका दिमाग भी कर सकता है, दिमाग में इतनी पावर होती है कि वो कम्प्यूटर के बराबर काम कर सकता है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर दिमाग कितना पावरफुल होता है?
कितना पावरफुल है दिमाग?
दुनिया का सबसे पावरफुल कम्प्यूटर दिमाग को ही कहा जाता है. दिमाग के इतने पावरफुल होने की वजह ये है कि दिमाग में 10 अरब से ज्यादा न्यूरॉन्स होते हैं और इससे कई गुना तक उनके कनेक्शन होते हैं, जो सूचनाओं का आदान प्रदान करते हैं. ये न्यूरॉन्स सिग्नल के लिए स्टेशन का काम करते हैं. सवा किलो वजन वाला दिमाग इतना पावरफुल होता है कि शरीर को मिलने वाले आधे से ज्यादा पोषक तत्व दिमाग के ही काम आते हैं. शरीर की 20 फीसदी ऑक्सीजन, 25 फीसदी ग्लूकोज का इस्तेमाल दिमाग ही करता है. यानी यह शरीर के वजन को 2 फीसदी होता है, मगर 20 फीसदी तक एनर्जी का इस्तेमाल करता है.
खास बात ये भी है कि जब तक आप 40 साल के होते हैं, तब तक इसका विकास होता रहता है. साथ ही यह शरीर का सबसे फैटी अंग माना जाता है. एक दिन में दिमाग में 70 हजार से ज्यादा विचार आते हैं और अधिकतर नेगेटिव होते हैं. वैसे 10 फीसदी हिस्सा का इस्तेमाल करने का मतलब ये नहीं है कि आपका 10 फीसदी काम करता है, वैसे तो दिमाग का हर एक हिस्सा काम करता है और यह जरूरी भी है, लेकिन हम दिमाग में काफी कुछ स्टोर कर सकते हैं. अगर मैमोरी की बात करें तो दिमाग में 2.5 मिलियन गीगाबाइट के बराबर डेटा सेव किया जा सकता है.
क्या महिलाओं और पुरुषों का दिमाग अलग अलग होता है?
पुरुषों का दिमाग आकार में महिलाओं के दिमाग से थोड़ा बड़ा होता है. इसका मतलब ये नहीं है कि पुरुषों का दिमाग महिलाओं से तेज चलता है या बेहतर होता है. यह बात सिर्फ आकार की है. साथ ही एक रिसर्च में सामने आया था कि महिलाओं के दिमाग के बाएं और दाएं हिस्से में सूचना का आदान-प्रदान थोड़ा ज्यादा है. बल्कि, पुरुषों के दिमाग में आगे और पीछे के हिस्सा में सूचना का आदान-प्रदान ज्यादा होता है. इससे पता चलता है कि महिलाओं में ज्यादा संवेदना होती है और पुरुषों में स्थान को लेकर झुकाव होता है.
हालांकि, दिमाग के कुछ हिस्सों में लिंग के आधार पर शारीरिक फर्क होता है और यह आकार में अलग होने की वजह से पुरुषों और महिलाओं के व्यवहार में अंतर होता है. वहीं, अगर यादादश्त आदि के आधार पर देखें तो कई रिसर्च में सामने आया है कि पुरुष और महिलाओं के दिमाग में कोई फर्क नहीं है. साथ ही पुरुष और महिलाओं के दिमाग में समानताएं ज्यादा है.
| अक्सर सुनने को मिलता है कि हम दिमाग का इस्तेमाल बहुत कम करते हैं और अगर दिमाग का ज्यादा इस्तेमाल कर लिया जाए तो यादादश्त काफी ज्यादा हो सकती है. दिमाग पर अभी तक काफी रिसर्च हो चुकी है और कई रिसर्च में एक ही बात सामने आती है कि हम अपने दिमाग को बहुत कम या छोटा सा हिस्सा ही इस्तेमाल करते हैं. वैसे हमारी मानसिक क्षमता काफी ज्यादा होती है और हम इसका बहुत कम इस्तेमाल करते हैं. अब दिमाग लगाने का काम तो और भी कम हो चुका है, क्योंकि हम अधिकतर चीजों में मशीनों पर ही निर्भर करने लगे हैं. आम दिनचर्या में लोग दिमाग से ज्यादा फोन का इस्तेमाल करते हैं और डेटा स्टोर करने के लिए किसी ना किसी इलेक्ट्रॉनिक सामान का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन, ये सभी काम आपका दिमाग भी कर सकता है, दिमाग में इतनी पावर होती है कि वो कम्प्यूटर के बराबर काम कर सकता है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर दिमाग कितना पावरफुल होता है? कितना पावरफुल है दिमाग? दुनिया का सबसे पावरफुल कम्प्यूटर दिमाग को ही कहा जाता है. दिमाग के इतने पावरफुल होने की वजह ये है कि दिमाग में दस अरब से ज्यादा न्यूरॉन्स होते हैं और इससे कई गुना तक उनके कनेक्शन होते हैं, जो सूचनाओं का आदान प्रदान करते हैं. ये न्यूरॉन्स सिग्नल के लिए स्टेशन का काम करते हैं. सवा किलो वजन वाला दिमाग इतना पावरफुल होता है कि शरीर को मिलने वाले आधे से ज्यादा पोषक तत्व दिमाग के ही काम आते हैं. शरीर की बीस फीसदी ऑक्सीजन, पच्चीस फीसदी ग्लूकोज का इस्तेमाल दिमाग ही करता है. यानी यह शरीर के वजन को दो फीसदी होता है, मगर बीस फीसदी तक एनर्जी का इस्तेमाल करता है. खास बात ये भी है कि जब तक आप चालीस साल के होते हैं, तब तक इसका विकास होता रहता है. साथ ही यह शरीर का सबसे फैटी अंग माना जाता है. एक दिन में दिमाग में सत्तर हजार से ज्यादा विचार आते हैं और अधिकतर नेगेटिव होते हैं. वैसे दस फीसदी हिस्सा का इस्तेमाल करने का मतलब ये नहीं है कि आपका दस फीसदी काम करता है, वैसे तो दिमाग का हर एक हिस्सा काम करता है और यह जरूरी भी है, लेकिन हम दिमाग में काफी कुछ स्टोर कर सकते हैं. अगर मैमोरी की बात करें तो दिमाग में दो.पाँच मिलियन गीगाबाइट के बराबर डेटा सेव किया जा सकता है. क्या महिलाओं और पुरुषों का दिमाग अलग अलग होता है? पुरुषों का दिमाग आकार में महिलाओं के दिमाग से थोड़ा बड़ा होता है. इसका मतलब ये नहीं है कि पुरुषों का दिमाग महिलाओं से तेज चलता है या बेहतर होता है. यह बात सिर्फ आकार की है. साथ ही एक रिसर्च में सामने आया था कि महिलाओं के दिमाग के बाएं और दाएं हिस्से में सूचना का आदान-प्रदान थोड़ा ज्यादा है. बल्कि, पुरुषों के दिमाग में आगे और पीछे के हिस्सा में सूचना का आदान-प्रदान ज्यादा होता है. इससे पता चलता है कि महिलाओं में ज्यादा संवेदना होती है और पुरुषों में स्थान को लेकर झुकाव होता है. हालांकि, दिमाग के कुछ हिस्सों में लिंग के आधार पर शारीरिक फर्क होता है और यह आकार में अलग होने की वजह से पुरुषों और महिलाओं के व्यवहार में अंतर होता है. वहीं, अगर यादादश्त आदि के आधार पर देखें तो कई रिसर्च में सामने आया है कि पुरुष और महिलाओं के दिमाग में कोई फर्क नहीं है. साथ ही पुरुष और महिलाओं के दिमाग में समानताएं ज्यादा है. |
संस्कृतटीका--भाषाटीकासनेता ।
विधिवदिति ॥ बंधपूर्वकं कुंभकं कृत्वेडया चन्द्रनाडयाऽनिलं वायुं रेचयेत् । सस्त्राकुंमकस्यैवं परिपाटी । दामनासिकापुढं दक्षिणभुजानामिका कनिष्ठिकाभ्यां निरुभ्य दक्षिणनासिकापुटेन मखावद्वेगेन रेचकपुरकाः कार्याः । श्रभे जाते तेनैव नासापुटेन पूरकं कृत्वांगुटेन दक्षिणं नासापुटं निरुध्य चयाशक्ति कुंभक धारयेत् । पश्चादिडया रेचयेत् । पुनर्देक्षिणनासापुटमंगुष्टेन निरुव्य वामनासिकापुटेन मनावरकादति रेचकपूरकाः कर्तव्याः । श्रमे जाते तेनैव नासिका पुटेन पूरक कृत्वानामिकाकनिष्ठिकाभ्यां वामनासिकापुढं निरुध्य यथाशक्ति कुंमकं कृत्वा पिंगट्या रेचचेदित्येका रोतिः । दामनासिकापुटमनामिकाकनिष्ठिकाभ्यां दक्षिणनासिकासुटेन पूरक कृत्वा झटित्यंगुन निरुध्य वामनासापुटेन रेचयेत् ॥ एवं शतधा कृत्वा अमे जाते सेनैव पूरयेत् । बंधपूर्वकं कृत्वेडपा रेचयेट ।। पुनदक्षिणनासापुटमंगुष्ठेन निरुध्य वामनासापुटेन कृत्वा झटिति वामनासिकापुटमनामिकाकनिष्ठिकाभ्यां निरुव्य पिंगला रेचयेद्रबचन । पुनःपुनरेवं कृत्वा रेचकपूरकावृत्तिश्रमे जाते वामनासापुटेन पूरकं कृत्वानामिक्षाकनिष्ठिकाभ्यां धृत्वा कुंभकं कृत्वा पिंगल्या रेचयेदिति द्वितीया रीतिः । भधिकागुणानाह वातपित्तेति ॥ वातश्च पितं च श्लेष्मा च वातपित्तश्लेष्माणस्तान्दरतीति तादृग शरीरे देदे योऽग्निर्जठरानलस्तस्य विशेषेण वर्धनं दीपनम् ॥ ६५ ॥
भाषार्थ-विधिपूर्वक कुंभको करके इटानामकी चन्द्रनाडीसे वायुका रेचन कर इस भखाकुंभकफी यह परिपाटी ( क्रम ) है. कि नाम नासिकाके पुटको दक्षिणमुजाकी अनामिका कनिष्ठिकाओंसे रोककर दक्षिण नासिकाके पुटसे भाके समान वेगपूर्वक रेचक पूरक करने फिर श्रम होनेपर उसी नासिकाके पुटसे पूरक करके अंगूठेसे दक्षिण नासिकाके पुटको रोककर यथाशक्ति कुंभक प्राणायानसे वायुको धारण करें फिर इडासे रेचन करे फिर दक्षिण नासिकाके पुटको अँगूठेसे रोककर वामनासा पुटसे भाके समान शीघ्र २ रेचक पूरक करनेसे श्रम होनेपर तिसी नासिकाके पेंटसे पूरक करके अनामिका कनिष्टिकासे नासिकाके वामपुटको रोककर यथाशक्ति को कर पिंगला नाहीसे प्राणका रेचन करें एक तो यह रीति ह और नासिकाचे वामपुटको अनामिका कनिष्टिकासे रोककर नासिकाके दक्षिण पुटसे पूरक करके शीघ्र अंगूठेसे रोककर नासिकाके वामपुटसे रेचन करें इस प्रकार शत १०० वार करके श्रम होनेपर उससे ही पूरण करें और बंधपूर्वक करके इडानाडीसे रेचन करे फिर नासिकाके दक्षिण पुटको अँगूठेसे रोककर नासिकाके वामपुटसे पूरक करके शीघ्र ही नासिकाके वामपुटको सनामिका कनिष्ठिकासे रोककर पिंगलासे भाके समान रेचन करे वारंवार इस प्रकार करके रेचक पूरककी आवृत्तिमें जब श्रम होजाय अर्थात थकावट होजाय तव वामनासिका पुटसे पूरक करके अनामिका और कनिष्ठिकासे धारण करनेके अनंतर कुंभक प्राणायामको करके पिंगलासे रेचन करे यह दूसरी रीति है भत्रिका कुंभक्के गुणोंको कहते हैं कि बात पित्त श्रेष्मा (कफ) इनको हरती है और शरीरकी अग्नि (जठराग्नि ) को बढाती है ॥ ६५ ॥
हठयोगप्रदीपिकां ।
कुंडलीबोधकं क्षिप्रं पवनं सुखदं हितम् ।। ब्रह्मनाडीमुखे संस्थकफाद्यर्गलनाशनम् ॥ ६६ ।
कुंडलीति । क्षिप्रं शीघ्रं कुंडल्याः सुप्ताया बोधकं बोधकर्तृ पुनातोति पवनं परि त्रकारकं सुखं ददातीति सुखदं हितं त्रिदोषहरत्वात्सर्वेषां हितं सर्वंदा च हितं सर्वेषां कुंभकानां सर्वदा हितत्वेऽपि सूर्यभेदनोज्जायिभावुष्णौ प्रायेण हितौ । सीत्कारीशी तल्यौ शीतले मायेणोष्णे हिते । भस्वाकुंभकः समशीतोष्णः सर्वदा हितः सर्वेषां कुंभकानां सर्वरोगहरत्वेऽपि सूर्यभेदनं प्रायेण वातहरम् । उज्जायी प्रायेण स्टेष्महरः । सीत्कारीशीतल्यौ प्रायेण पित्तहरे । भस्त्राख्यः कुंभकः त्रिदोषहरः इति बोध्यम् । ब्रह्मनाडी सुषुझा ब्रह्ममापकत्वात् । तथा व श्रुतिः - शतं चैका च हृदयस्य नाड्य स्तासां मूर्धानमभिनिःस्रुतैका । तयोर्ध्वमायन्नमृतत्वमेति विष्वगन्या उत्क्रमणे भवति॥' इति । तस्या मुखेऽग्रभागे संस्थः सम्यक् स्थितो यः कफादिरूपोऽगेल : प्राणगतित्रतिबंधकस्तस्य नाशनं नाशकर्तृ ॥ ६६ ।
भाषार्थ और शीघ्र ही सोती हुई कुंडलीका बोधक है और पवित्र करता है और सुखका दाता है और हित है यद्यपि संपूर्ण कुंभक सव कालमें हित होते हैं तथापि सूर्यभेदन और उज्जायी ये दोनों उष्ण हैं इससे शीतके समय हितकारी हैं और सीत्कारी शीतली ये दोनों 1 शीतल हैं इससे उष्णकालमें हित हैं और भस्खा कुंभक न शीतल है न उष्ण है इससे सव कालमैं हित है । यद्मपि संपूर्ण कुंभक सब रोगोंको हरते हैं तथापि सूर्यभेदन प्रायसे वातको हरता है और उज्जायी प्रायसे कफको हरता है और शीत्कारी शांतली ये दोनों प्रायसे पित्तको हरते हैं और भानामका कुंभक त्रिदोष (संनिपात) को हरताहै यह और ब्रह्मलोक प्राप्त करनेवाली जो सुषुम्ना नामकी ब्रह्मनाडी है सोई इस श्रुतिमें लिखा है कि एक सौ एक १०१ हृदुयकी नाडी हैं उनमेंसे एक नाडी मूर्द्धा और मस्तकके सम्मुख गयी है उस नाडीके द्वारा जो ऊर्ध्व लोक में जाता है वह मोक्षको प्राप्त होता है, और अन्य सब नाडी जहां तहां क्रमको छोड़कर गयी हैं उस ब्रह्मनाडीके मुख (अग्रभाग ) में भली प्रकार स्थित जो कफ आदि अर्गल अर्थात प्राणकी गतिका प्रतिबंधक उसका नाशक है ॥ ६६ ॥
सम्यग्गा समुद्भूतं ग्रंथित्रयविभेदकम् ।। विशेषेणैव कर्तव्यं भस्राख्यं कुंभकं त्विदम् ॥ ६७ ॥
सम्यगिति ।। सम्यग्दृढीभूतं गात्रे गात्रमध्ये सुषुम्नायामेव सम्यगुतं समुद्रत जातं यद्ग्रंथीनां त्र्यं ग्रंथित्रयं ब्रह्मग्रंथिविष्णुग्रंगि रुद्रग्रंथिरूपं तस्य विशेषेण भेदज. नकम् । अत एव इदं भस्खा इत्याख्या यस्येति भस्त्राख्यं कुंभकं तु विशेषेणैव कर्त व्यमवश्यकर्तव्यमित्यर्थः । सूर्यभेदनादयस्तु ययासंभवं कर्तव्याः ॥ ६७ ॥ | संस्कृतटीका--भाषाटीकासनेता । विधिवदिति ॥ बंधपूर्वकं कुंभकं कृत्वेडया चन्द्रनाडयाऽनिलं वायुं रेचयेत् । सस्त्राकुंमकस्यैवं परिपाटी । दामनासिकापुढं दक्षिणभुजानामिका कनिष्ठिकाभ्यां निरुभ्य दक्षिणनासिकापुटेन मखावद्वेगेन रेचकपुरकाः कार्याः । श्रभे जाते तेनैव नासापुटेन पूरकं कृत्वांगुटेन दक्षिणं नासापुटं निरुध्य चयाशक्ति कुंभक धारयेत् । पश्चादिडया रेचयेत् । पुनर्देक्षिणनासापुटमंगुष्टेन निरुव्य वामनासिकापुटेन मनावरकादति रेचकपूरकाः कर्तव्याः । श्रमे जाते तेनैव नासिका पुटेन पूरक कृत्वानामिकाकनिष्ठिकाभ्यां वामनासिकापुढं निरुध्य यथाशक्ति कुंमकं कृत्वा पिंगट्या रेचचेदित्येका रोतिः । दामनासिकापुटमनामिकाकनिष्ठिकाभ्यां दक्षिणनासिकासुटेन पूरक कृत्वा झटित्यंगुन निरुध्य वामनासापुटेन रेचयेत् ॥ एवं शतधा कृत्वा अमे जाते सेनैव पूरयेत् । बंधपूर्वकं कृत्वेडपा रेचयेट ।। पुनदक्षिणनासापुटमंगुष्ठेन निरुध्य वामनासापुटेन कृत्वा झटिति वामनासिकापुटमनामिकाकनिष्ठिकाभ्यां निरुव्य पिंगला रेचयेद्रबचन । पुनःपुनरेवं कृत्वा रेचकपूरकावृत्तिश्रमे जाते वामनासापुटेन पूरकं कृत्वानामिक्षाकनिष्ठिकाभ्यां धृत्वा कुंभकं कृत्वा पिंगल्या रेचयेदिति द्वितीया रीतिः । भधिकागुणानाह वातपित्तेति ॥ वातश्च पितं च श्लेष्मा च वातपित्तश्लेष्माणस्तान्दरतीति तादृग शरीरे देदे योऽग्निर्जठरानलस्तस्य विशेषेण वर्धनं दीपनम् ॥ पैंसठ ॥ भाषार्थ-विधिपूर्वक कुंभको करके इटानामकी चन्द्रनाडीसे वायुका रेचन कर इस भखाकुंभकफी यह परिपाटी है. कि नाम नासिकाके पुटको दक्षिणमुजाकी अनामिका कनिष्ठिकाओंसे रोककर दक्षिण नासिकाके पुटसे भाके समान वेगपूर्वक रेचक पूरक करने फिर श्रम होनेपर उसी नासिकाके पुटसे पूरक करके अंगूठेसे दक्षिण नासिकाके पुटको रोककर यथाशक्ति कुंभक प्राणायानसे वायुको धारण करें फिर इडासे रेचन करे फिर दक्षिण नासिकाके पुटको अँगूठेसे रोककर वामनासा पुटसे भाके समान शीघ्र दो रेचक पूरक करनेसे श्रम होनेपर तिसी नासिकाके पेंटसे पूरक करके अनामिका कनिष्टिकासे नासिकाके वामपुटको रोककर यथाशक्ति को कर पिंगला नाहीसे प्राणका रेचन करें एक तो यह रीति ह और नासिकाचे वामपुटको अनामिका कनिष्टिकासे रोककर नासिकाके दक्षिण पुटसे पूरक करके शीघ्र अंगूठेसे रोककर नासिकाके वामपुटसे रेचन करें इस प्रकार शत एक सौ वार करके श्रम होनेपर उससे ही पूरण करें और बंधपूर्वक करके इडानाडीसे रेचन करे फिर नासिकाके दक्षिण पुटको अँगूठेसे रोककर नासिकाके वामपुटसे पूरक करके शीघ्र ही नासिकाके वामपुटको सनामिका कनिष्ठिकासे रोककर पिंगलासे भाके समान रेचन करे वारंवार इस प्रकार करके रेचक पूरककी आवृत्तिमें जब श्रम होजाय अर्थात थकावट होजाय तव वामनासिका पुटसे पूरक करके अनामिका और कनिष्ठिकासे धारण करनेके अनंतर कुंभक प्राणायामको करके पिंगलासे रेचन करे यह दूसरी रीति है भत्रिका कुंभक्के गुणोंको कहते हैं कि बात पित्त श्रेष्मा इनको हरती है और शरीरकी अग्नि को बढाती है ॥ पैंसठ ॥ हठयोगप्रदीपिकां । कुंडलीबोधकं क्षिप्रं पवनं सुखदं हितम् ।। ब्रह्मनाडीमुखे संस्थकफाद्यर्गलनाशनम् ॥ छयासठ । कुंडलीति । क्षिप्रं शीघ्रं कुंडल्याः सुप्ताया बोधकं बोधकर्तृ पुनातोति पवनं परि त्रकारकं सुखं ददातीति सुखदं हितं त्रिदोषहरत्वात्सर्वेषां हितं सर्वंदा च हितं सर्वेषां कुंभकानां सर्वदा हितत्वेऽपि सूर्यभेदनोज्जायिभावुष्णौ प्रायेण हितौ । सीत्कारीशी तल्यौ शीतले मायेणोष्णे हिते । भस्वाकुंभकः समशीतोष्णः सर्वदा हितः सर्वेषां कुंभकानां सर्वरोगहरत्वेऽपि सूर्यभेदनं प्रायेण वातहरम् । उज्जायी प्रायेण स्टेष्महरः । सीत्कारीशीतल्यौ प्रायेण पित्तहरे । भस्त्राख्यः कुंभकः त्रिदोषहरः इति बोध्यम् । ब्रह्मनाडी सुषुझा ब्रह्ममापकत्वात् । तथा व श्रुतिः - शतं चैका च हृदयस्य नाड्य स्तासां मूर्धानमभिनिःस्रुतैका । तयोर्ध्वमायन्नमृतत्वमेति विष्वगन्या उत्क्रमणे भवति॥' इति । तस्या मुखेऽग्रभागे संस्थः सम्यक् स्थितो यः कफादिरूपोऽगेल : प्राणगतित्रतिबंधकस्तस्य नाशनं नाशकर्तृ ॥ छयासठ । भाषार्थ और शीघ्र ही सोती हुई कुंडलीका बोधक है और पवित्र करता है और सुखका दाता है और हित है यद्यपि संपूर्ण कुंभक सव कालमें हित होते हैं तथापि सूर्यभेदन और उज्जायी ये दोनों उष्ण हैं इससे शीतके समय हितकारी हैं और सीत्कारी शीतली ये दोनों एक शीतल हैं इससे उष्णकालमें हित हैं और भस्खा कुंभक न शीतल है न उष्ण है इससे सव कालमैं हित है । यद्मपि संपूर्ण कुंभक सब रोगोंको हरते हैं तथापि सूर्यभेदन प्रायसे वातको हरता है और उज्जायी प्रायसे कफको हरता है और शीत्कारी शांतली ये दोनों प्रायसे पित्तको हरते हैं और भानामका कुंभक त्रिदोष को हरताहै यह और ब्रह्मलोक प्राप्त करनेवाली जो सुषुम्ना नामकी ब्रह्मनाडी है सोई इस श्रुतिमें लिखा है कि एक सौ एक एक सौ एक हृदुयकी नाडी हैं उनमेंसे एक नाडी मूर्द्धा और मस्तकके सम्मुख गयी है उस नाडीके द्वारा जो ऊर्ध्व लोक में जाता है वह मोक्षको प्राप्त होता है, और अन्य सब नाडी जहां तहां क्रमको छोड़कर गयी हैं उस ब्रह्मनाडीके मुख में भली प्रकार स्थित जो कफ आदि अर्गल अर्थात प्राणकी गतिका प्रतिबंधक उसका नाशक है ॥ छयासठ ॥ सम्यग्गा समुद्भूतं ग्रंथित्रयविभेदकम् ।। विशेषेणैव कर्तव्यं भस्राख्यं कुंभकं त्विदम् ॥ सरसठ ॥ सम्यगिति ।। सम्यग्दृढीभूतं गात्रे गात्रमध्ये सुषुम्नायामेव सम्यगुतं समुद्रत जातं यद्ग्रंथीनां त्र्यं ग्रंथित्रयं ब्रह्मग्रंथिविष्णुग्रंगि रुद्रग्रंथिरूपं तस्य विशेषेण भेदज. नकम् । अत एव इदं भस्खा इत्याख्या यस्येति भस्त्राख्यं कुंभकं तु विशेषेणैव कर्त व्यमवश्यकर्तव्यमित्यर्थः । सूर्यभेदनादयस्तु ययासंभवं कर्तव्याः ॥ सरसठ ॥ |
अमेरिका और इजराइल ने अधिकारिक तौर पर यूएन के शैक्षिक, संस्कृतिक और वैज्ञानिक विभागों से अपना नाता तोड़ दिया है। इस संघठन पर एक वर्ष पूर्व इजराइल विरोधी भावनाओं को प्रोत्साहित करने के आरोप लगाये गए थे। इस संघ्थान्न का गठन अमेरिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद शांति को प्रोत्साहित करने के लिए किया था।
ट्रम्प प्रशासन ने अक्टूबर 2017 में संघठन से सम्बन्ध खत्म करने के लिए अनुमति पत्र दाखिल किया था और इजराइल के राष्ट्रपति ने इसी प्रक्रिया को अपनाया था। पेरिस में स्थित इस संघठन को आलोचक इजराइल विरोधी बताते हैं, संघठन ने पूर्वी येरुशलम पर आधिपत्य स्थापित करने के लिए इजराइल की आलोचना की थी।
अमेरिका ने संघठन में मौलिक सुधार की मांग की है, जिसे संस्कृतिक जगहों और परम्पराओं के संरक्षण के लिए बेहतरीन वैश्विक विरासत कार्यक्रम के लिए जाना जाता है। यूनेस्को बच्चियों की शिक्षा के स्तर में को सुधारने, मीडिया की स्वतंत्रता को बचाने के लिए कार्य करता है।
इजराइल और अमेरिका के बाहर निकलने से यूनेस्को पर आर्थिक रूप से कोई असर नहीं पड़ेगा। साल 2011 के बाद इजराइल और अमेरिका ने अपने बकाये को चुकाना बंद कर दिया था, उस दौरान फिलिस्तान को संघठन का सदस्य बनाने के समर्थन में मतदान हुआ था।
अमेरिका पर संघठन का बकाया कर्ज 66 करोड़ डॉलर का है और यही कारण है कि डोनाल्ड ट्रम्प ने संघठन छोड़ने का निर्णय लिया है। इजराइल पर अनुमानित एक करोड़ डॉलर का बकाया है।
यूनेस्को के प्रमुख ऑड्रे अजौलय ने डोनाल्ड ट्रम्प के आलगाव के बाद अपने पद पर आसीन हुए थे। यूनेस्को अध्यक्ष एक यहूदी है और मोरक्कन का उत्तर्धिकारी हैं। अध्यक्ष ने होलोकॉस्ट शैक्षिक वेबसाइट को शुरू किया था और साम्यवाद विरोधी शैक्षिक दिशा निर्देशों को जारी किया था। अमेरिका और इजराइल की चिंताओं का जवाब देने की यह पहल थी।
इस वर्ष अप्रैल में यूनेस्को में इजराइल के राजदूत ने कहा था कि "मूड एक निकाह समारोह की तरह था", जब राष्ट्र सदस्यों ने फिलिस्तीन के अधिग्रहण सम्बंधित प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए थे। यूनेस्को के राजदूतों ने लम्बे अंतराल से जारी इजराइल-अरब तनाव की सम्भावित सफलता का स्वागत किया है।
यह दस्तावेज इजराइल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है लेकिन यह प्रयास इजराइल और अमेरिका को अपने निर्णय को वापस लेने के लिए पर्याप्त नहीं है।
अमेरिका के सरकारी कामकाज के ठप होने के कारण राज्य विभाग ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यूनेस्को के मुताबिक अमेरिका गैर राजनीतिक मसलो पर गैर सदस्य की तरह निगरानी राज्य बनकर रहने का इरादा रखता है। साथ ही वैश्विक विरासत स्थलों का संरक्षण, मीडिया की आज़ादी और वैज्ञानिक सहभागिता और शिक्षा का प्रचार करना चाहता हैं।
| अमेरिका और इजराइल ने अधिकारिक तौर पर यूएन के शैक्षिक, संस्कृतिक और वैज्ञानिक विभागों से अपना नाता तोड़ दिया है। इस संघठन पर एक वर्ष पूर्व इजराइल विरोधी भावनाओं को प्रोत्साहित करने के आरोप लगाये गए थे। इस संघ्थान्न का गठन अमेरिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद शांति को प्रोत्साहित करने के लिए किया था। ट्रम्प प्रशासन ने अक्टूबर दो हज़ार सत्रह में संघठन से सम्बन्ध खत्म करने के लिए अनुमति पत्र दाखिल किया था और इजराइल के राष्ट्रपति ने इसी प्रक्रिया को अपनाया था। पेरिस में स्थित इस संघठन को आलोचक इजराइल विरोधी बताते हैं, संघठन ने पूर्वी येरुशलम पर आधिपत्य स्थापित करने के लिए इजराइल की आलोचना की थी। अमेरिका ने संघठन में मौलिक सुधार की मांग की है, जिसे संस्कृतिक जगहों और परम्पराओं के संरक्षण के लिए बेहतरीन वैश्विक विरासत कार्यक्रम के लिए जाना जाता है। यूनेस्को बच्चियों की शिक्षा के स्तर में को सुधारने, मीडिया की स्वतंत्रता को बचाने के लिए कार्य करता है। इजराइल और अमेरिका के बाहर निकलने से यूनेस्को पर आर्थिक रूप से कोई असर नहीं पड़ेगा। साल दो हज़ार ग्यारह के बाद इजराइल और अमेरिका ने अपने बकाये को चुकाना बंद कर दिया था, उस दौरान फिलिस्तान को संघठन का सदस्य बनाने के समर्थन में मतदान हुआ था। अमेरिका पर संघठन का बकाया कर्ज छयासठ करोड़ डॉलर का है और यही कारण है कि डोनाल्ड ट्रम्प ने संघठन छोड़ने का निर्णय लिया है। इजराइल पर अनुमानित एक करोड़ डॉलर का बकाया है। यूनेस्को के प्रमुख ऑड्रे अजौलय ने डोनाल्ड ट्रम्प के आलगाव के बाद अपने पद पर आसीन हुए थे। यूनेस्को अध्यक्ष एक यहूदी है और मोरक्कन का उत्तर्धिकारी हैं। अध्यक्ष ने होलोकॉस्ट शैक्षिक वेबसाइट को शुरू किया था और साम्यवाद विरोधी शैक्षिक दिशा निर्देशों को जारी किया था। अमेरिका और इजराइल की चिंताओं का जवाब देने की यह पहल थी। इस वर्ष अप्रैल में यूनेस्को में इजराइल के राजदूत ने कहा था कि "मूड एक निकाह समारोह की तरह था", जब राष्ट्र सदस्यों ने फिलिस्तीन के अधिग्रहण सम्बंधित प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए थे। यूनेस्को के राजदूतों ने लम्बे अंतराल से जारी इजराइल-अरब तनाव की सम्भावित सफलता का स्वागत किया है। यह दस्तावेज इजराइल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है लेकिन यह प्रयास इजराइल और अमेरिका को अपने निर्णय को वापस लेने के लिए पर्याप्त नहीं है। अमेरिका के सरकारी कामकाज के ठप होने के कारण राज्य विभाग ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यूनेस्को के मुताबिक अमेरिका गैर राजनीतिक मसलो पर गैर सदस्य की तरह निगरानी राज्य बनकर रहने का इरादा रखता है। साथ ही वैश्विक विरासत स्थलों का संरक्षण, मीडिया की आज़ादी और वैज्ञानिक सहभागिता और शिक्षा का प्रचार करना चाहता हैं। |
देश के टॉप बिजनेसमैन मुकेश अंबानी दादा बन गए हैं। उनके बड़े बेटे आकाश की पत्नी श्लोका ने वीरवार सुबह 11:00 बजे पुत्र का जन्म दिया है। आकाश और श्लोका का विवाह 9 मार्च 2019 को हुआ था। उनके विवाह पर हुए जश्न की देश और विदेश हर जगह खूब चर्चा हुई थी। नीता और मुकेश अंबानी पहली बार दादा-दादी बनकर बेहद खुश हैं। नीता और मुकेश अंबानी के बड़े बेटे आकाश अंबानी और पत्नी श्लोका अंबानी ने एक बच्चे के जन्म की घोषणा की है। गुरुवार को मुंबई के रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में बच्चे का जन्म हुआ। "नीता और मुकेश अंबानी को पहली बार दादा-दादी बनने की खुशी है। उन्होंने धीरूभाई और कोकिलाबेन अंबानी के पोते का स्वागत किया। श्लोका और आकाश अंबानी आज मुंबई में एक बच्चे के पेरेंट्स बन गए हैं। इस नए सदस्य के आगमन ने मेहता और अंबानी परिवारों को बहुत खुशी दी है। आकाश की पत्नी श्लोका मेहता देश के दिग्गज हीरा कारोबारी रशेल मेहता की पुत्री हैं। एक बिजनेस वूमेन होने के साथ ही आकाश की पत्नी श्लोका सोशल वर्कर भी है। श्लोका कनेक्ट फॉर नाम से एक एनजीओ का संचालन भी करती है इसे उन्होंने 2015 में शुरु किया था। इस एनजीओ में जरूरतमंद लोगों को भोजन, शिक्षा और रहने के लिए जगह दी जाती है। आकाश अंबानी के साथ अचानक सगाई की खबर के बाद श्लोका ने सुर्खियां बटोरीं। उनकी सगाई से लेकर 2019 में उनकी शादी तक, श्लोका एक घरेलू नाम बन गई। उनकी शादी में हाई प्रोफ़ाइल परफार्मेंस और मेहमानों की एक लंबी सूची देखी गई। श्लोका एक व्यवसायी परिवार में जन्मीं और पली-बढ़ीं। वह प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में एंथ्रोपोलॉजी की छात्रा थीं और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अपनी मास्टर डिग्री हासिल की जिसके बाद वह 2014 में भारत लौटीं।
आकाश और श्लोका स्कूल से ही दोस्त रहे हैं। उनकी दोस्ती चार साल की उम्र में हुई थी। दोनों एक साथ धीरुभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ते थे। इसके बाद श्लोका ने 2009 में न्यू जर्सी के प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से आगे की पढ़ाई की। लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस से श्लोका ने लॉ में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है। अरबपति परिवार की बहू होने और एक लग्जरी लाइफ स्टाइल में रहने वाली श्लोका जमीन से जुड़ी हैं। वह अपने एनजीओ के जरिए वे बेसहारा और गरीब लोगों की हर संभव सहायता करती हैं। एनजीओ और बिजनेस में व्यस्त रहने पर भी वह फुर्सत के क्षणों में आउटिंग पर जाना पसंद करती हैं। आकाश अंबानी की तरह श्लोका को कीमती गाड़ियों में घूमने का शौक है। श्लोका के पास अपनी बेंटले कार है जिसकी कीमत 4 करोड़ है।
Statement from the Ambani family spokesperson:
With the grace and blessings of Lord Krishna, Shloka and Akash Ambani became proud parents of a baby boy today in Mumbai. Nita and Mukesh Ambani are delighted to become grandparents for the first time, as they welcomed the great grandson of Dhirubhai and Kokilaben Ambani. Both mother and son are doing well. The new arrival has brought immense joy to the entire Mehta and Ambani families.
| देश के टॉप बिजनेसमैन मुकेश अंबानी दादा बन गए हैं। उनके बड़े बेटे आकाश की पत्नी श्लोका ने वीरवार सुबह ग्यारह:शून्य बजे पुत्र का जन्म दिया है। आकाश और श्लोका का विवाह नौ मार्च दो हज़ार उन्नीस को हुआ था। उनके विवाह पर हुए जश्न की देश और विदेश हर जगह खूब चर्चा हुई थी। नीता और मुकेश अंबानी पहली बार दादा-दादी बनकर बेहद खुश हैं। नीता और मुकेश अंबानी के बड़े बेटे आकाश अंबानी और पत्नी श्लोका अंबानी ने एक बच्चे के जन्म की घोषणा की है। गुरुवार को मुंबई के रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में बच्चे का जन्म हुआ। "नीता और मुकेश अंबानी को पहली बार दादा-दादी बनने की खुशी है। उन्होंने धीरूभाई और कोकिलाबेन अंबानी के पोते का स्वागत किया। श्लोका और आकाश अंबानी आज मुंबई में एक बच्चे के पेरेंट्स बन गए हैं। इस नए सदस्य के आगमन ने मेहता और अंबानी परिवारों को बहुत खुशी दी है। आकाश की पत्नी श्लोका मेहता देश के दिग्गज हीरा कारोबारी रशेल मेहता की पुत्री हैं। एक बिजनेस वूमेन होने के साथ ही आकाश की पत्नी श्लोका सोशल वर्कर भी है। श्लोका कनेक्ट फॉर नाम से एक एनजीओ का संचालन भी करती है इसे उन्होंने दो हज़ार पंद्रह में शुरु किया था। इस एनजीओ में जरूरतमंद लोगों को भोजन, शिक्षा और रहने के लिए जगह दी जाती है। आकाश अंबानी के साथ अचानक सगाई की खबर के बाद श्लोका ने सुर्खियां बटोरीं। उनकी सगाई से लेकर दो हज़ार उन्नीस में उनकी शादी तक, श्लोका एक घरेलू नाम बन गई। उनकी शादी में हाई प्रोफ़ाइल परफार्मेंस और मेहमानों की एक लंबी सूची देखी गई। श्लोका एक व्यवसायी परिवार में जन्मीं और पली-बढ़ीं। वह प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में एंथ्रोपोलॉजी की छात्रा थीं और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अपनी मास्टर डिग्री हासिल की जिसके बाद वह दो हज़ार चौदह में भारत लौटीं। आकाश और श्लोका स्कूल से ही दोस्त रहे हैं। उनकी दोस्ती चार साल की उम्र में हुई थी। दोनों एक साथ धीरुभाई अंबानी इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ते थे। इसके बाद श्लोका ने दो हज़ार नौ में न्यू जर्सी के प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से आगे की पढ़ाई की। लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस से श्लोका ने लॉ में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है। अरबपति परिवार की बहू होने और एक लग्जरी लाइफ स्टाइल में रहने वाली श्लोका जमीन से जुड़ी हैं। वह अपने एनजीओ के जरिए वे बेसहारा और गरीब लोगों की हर संभव सहायता करती हैं। एनजीओ और बिजनेस में व्यस्त रहने पर भी वह फुर्सत के क्षणों में आउटिंग पर जाना पसंद करती हैं। आकाश अंबानी की तरह श्लोका को कीमती गाड़ियों में घूमने का शौक है। श्लोका के पास अपनी बेंटले कार है जिसकी कीमत चार करोड़ है। Statement from the Ambani family spokesperson: With the grace and blessings of Lord Krishna, Shloka and Akash Ambani became proud parents of a baby boy today in Mumbai. Nita and Mukesh Ambani are delighted to become grandparents for the first time, as they welcomed the great grandson of Dhirubhai and Kokilaben Ambani. Both mother and son are doing well. The new arrival has brought immense joy to the entire Mehta and Ambani families. |
भोपाल (नईदुनिया स्टेट ब्यूरो)। आनलाइन धोखाधड़ी के मामलों की जांच में पता चला है कि वेबसाइट पर जानकारी देने के दौरान हैकर डाटा चुरा रहे हैं। जिन वेबसाइट की सबसे ज्यादा खोज होती है, उससे मिलती-जुलती वेबसाइट हैकर बना लेते हैं। कोई व्यक्ति जब वहां पहुंचता है तो उससे व्यक्तिगत जानकारी ले ली जाती है। फिर इसी जानकारी का उपयोग साइबर अपराधों में किया जाता है।
इसी प्रकार डिजिटल भुगतान वाले प्लेटफार्म पर धोखाधड़ी के लिए किसी और के नाम पर सिम ली जाती है। इसमें सिम उपलब्ध करवाने वालों की भूमिका सामने आई है। डिजिटल भुगतान की लंबी कड़ी में ऐसी ही सिम का उपयोग किया जाता है। इससे धोखाधड़ी करने वालों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। पिछले कुछ महीनों में साइबर अपराधों के मामलों की पड़ताल में पाया गया है कि अब डाटा खरीदने का चलन पुराना होता जा रहा है। हैकर व्यक्तिगत स्तर पर इसकी जानकारी जुटा रहे हैं।
इसके लिए मिलते-जुलते नामों की वेबसाइट का उपयोग किया जा रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जब कोई ऐसा मामला सामने आता है जिसमें ज्यादातर लोग उससे संबंधित वेबसाइट पर पहुंचते हैं तो हैकर कुछ शब्दों के हेरफेर के साथ उसी तरह की वेबसाइट बना लेते हैं। व्यक्ति इसे असली समझकर अपनी जानकारी साझा करता है। इसी आधार पर उसे ठगने की साजिश रची जाती है।
कई मामलों में पता चला है कि सिम लेने के दौरान दिए गए दस्तावेजों का दुरुपयोग किया जाता है। सिम लेने के लिए जो दस्तावेज दिए जाते हैं, उन पर दूसरी सिम ले ली जाती है। फिर ऐसी सिम का उपयोग डिजिटल भुगतान वाली धोखाधड़ी में किया जाता है। पुलिस संबंधित तक पहुंच भी जाती है, लेकिन तब तक ठग राशि निकाल लेते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि वेबसाइट की स्पेलिंग का ध्यान रखें। स्पेलिंग में बदलाव होने पर उसे विश्वसनीय नहीं मानें। फर्जी वेबसाइट पर भाषागत अशुद्घियां काफी ज्यादा होती हैं। इसके विपरीत शासकीय वेबसाइट पर भाषागत दोष नहीं होते हैं। यह भी सतर्क होने का संकेत है। इसके अलावा सिम लेने के दौरान दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। किसी के कहनेभर से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर न करें। इस सावधानी से आपके नाम से ली जाने वाली सिम की धोखाधड़ी से बचा जा सकता है। सावधानी ही बचाव है। इसके अलावा सबसे प्रमुख बात यह है कि मुफ्त में मिलने वाली किसी भी चीज पर भरोसा न करें। अधिकांश मामलों में मुफ्त में कोई चीज देकर ही ठगी की जाती है।
मिलते-जुलते नामों की वेबसाइट से जानकारी जुटाने के कई मामले सामने आए हैं। लोग व्यक्तिगत जानकारी देने से बचें। सिम लेने में भी सावधानी बरतना जरूरी है। मुफ्त में कोई किसी को कुछ नहीं देता। ऐसी पेशकश आते ही सावधान हो जाएं।
| भोपाल । आनलाइन धोखाधड़ी के मामलों की जांच में पता चला है कि वेबसाइट पर जानकारी देने के दौरान हैकर डाटा चुरा रहे हैं। जिन वेबसाइट की सबसे ज्यादा खोज होती है, उससे मिलती-जुलती वेबसाइट हैकर बना लेते हैं। कोई व्यक्ति जब वहां पहुंचता है तो उससे व्यक्तिगत जानकारी ले ली जाती है। फिर इसी जानकारी का उपयोग साइबर अपराधों में किया जाता है। इसी प्रकार डिजिटल भुगतान वाले प्लेटफार्म पर धोखाधड़ी के लिए किसी और के नाम पर सिम ली जाती है। इसमें सिम उपलब्ध करवाने वालों की भूमिका सामने आई है। डिजिटल भुगतान की लंबी कड़ी में ऐसी ही सिम का उपयोग किया जाता है। इससे धोखाधड़ी करने वालों तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। पिछले कुछ महीनों में साइबर अपराधों के मामलों की पड़ताल में पाया गया है कि अब डाटा खरीदने का चलन पुराना होता जा रहा है। हैकर व्यक्तिगत स्तर पर इसकी जानकारी जुटा रहे हैं। इसके लिए मिलते-जुलते नामों की वेबसाइट का उपयोग किया जा रहा है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जब कोई ऐसा मामला सामने आता है जिसमें ज्यादातर लोग उससे संबंधित वेबसाइट पर पहुंचते हैं तो हैकर कुछ शब्दों के हेरफेर के साथ उसी तरह की वेबसाइट बना लेते हैं। व्यक्ति इसे असली समझकर अपनी जानकारी साझा करता है। इसी आधार पर उसे ठगने की साजिश रची जाती है। कई मामलों में पता चला है कि सिम लेने के दौरान दिए गए दस्तावेजों का दुरुपयोग किया जाता है। सिम लेने के लिए जो दस्तावेज दिए जाते हैं, उन पर दूसरी सिम ले ली जाती है। फिर ऐसी सिम का उपयोग डिजिटल भुगतान वाली धोखाधड़ी में किया जाता है। पुलिस संबंधित तक पहुंच भी जाती है, लेकिन तब तक ठग राशि निकाल लेते हैं। अधिकारियों का कहना है कि वेबसाइट की स्पेलिंग का ध्यान रखें। स्पेलिंग में बदलाव होने पर उसे विश्वसनीय नहीं मानें। फर्जी वेबसाइट पर भाषागत अशुद्घियां काफी ज्यादा होती हैं। इसके विपरीत शासकीय वेबसाइट पर भाषागत दोष नहीं होते हैं। यह भी सतर्क होने का संकेत है। इसके अलावा सिम लेने के दौरान दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें। किसी के कहनेभर से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर न करें। इस सावधानी से आपके नाम से ली जाने वाली सिम की धोखाधड़ी से बचा जा सकता है। सावधानी ही बचाव है। इसके अलावा सबसे प्रमुख बात यह है कि मुफ्त में मिलने वाली किसी भी चीज पर भरोसा न करें। अधिकांश मामलों में मुफ्त में कोई चीज देकर ही ठगी की जाती है। मिलते-जुलते नामों की वेबसाइट से जानकारी जुटाने के कई मामले सामने आए हैं। लोग व्यक्तिगत जानकारी देने से बचें। सिम लेने में भी सावधानी बरतना जरूरी है। मुफ्त में कोई किसी को कुछ नहीं देता। ऐसी पेशकश आते ही सावधान हो जाएं। |
पालि परम्परा और सांची के अभिलेखों से ज्ञात होता है कि कश्यपगोत्रीय भिक्षु समस्त हिमवत्प्रदेश के निवासियों के आचार्य थे। चीनी भाषा में उपलब्ध 'विनयामातृका' नामक ग्रन्थ से भी उपर्युक्त कथन की पुष्टि होती है। इसीलिए काश्यपीय और हैमवत अभिन्न प्रतीत होते हैं। सुवर्षक और सद्धर्मवर्षक भी इन्हीं का नाम है। इस निकाय का हिमवत्प्रदेश में प्रचार सम्भवतः महाराज अशोक के काल में सम्पन्न हुआ, जब तृतीय संगीति के अनन्तर उन्होंने विभिन्न प्रदेशों में सद्धर्म के प्रचारार्थ धर्मदूतों को प्रेषित किया था।
| पालि परम्परा और सांची के अभिलेखों से ज्ञात होता है कि कश्यपगोत्रीय भिक्षु समस्त हिमवत्प्रदेश के निवासियों के आचार्य थे। चीनी भाषा में उपलब्ध 'विनयामातृका' नामक ग्रन्थ से भी उपर्युक्त कथन की पुष्टि होती है। इसीलिए काश्यपीय और हैमवत अभिन्न प्रतीत होते हैं। सुवर्षक और सद्धर्मवर्षक भी इन्हीं का नाम है। इस निकाय का हिमवत्प्रदेश में प्रचार सम्भवतः महाराज अशोक के काल में सम्पन्न हुआ, जब तृतीय संगीति के अनन्तर उन्होंने विभिन्न प्रदेशों में सद्धर्म के प्रचारार्थ धर्मदूतों को प्रेषित किया था। |
मुख्यमंत्री और टीआरएस अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव के लिए यह काफी व्यस्त रविवार था, जिन्होंने अपनी प्रस्तावित राष्ट्रीय पार्टी पर चर्चा के लिए कई बैठकें कीं।
हैदराबादः मुख्यमंत्री और टीआरएस अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव के लिए यह काफी व्यस्त रविवार था, जिन्होंने अपनी प्रस्तावित राष्ट्रीय पार्टी पर चर्चा के लिए कई बैठकें कीं। जानकारी के मुताबिक राव ने प्रगति भवन में राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर से बातचीत की. इससे पहले दिन में वित्त मंत्री टी हरीश राव ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। माना जा रहा है कि राव और किशोर के बीच हुई बैठक में प्रस्तावित राष्ट्रीय दल, अगले विधानसभा चुनाव की रणनीति और अन्य मुद्दों पर प्रमुखता से चर्चा हुई.
साथ ही कहा जाता है कि राव प्रस्तावित राष्ट्रीय पार्टी के लिए विभिन्न राज्यों में प्रभारी नियुक्त करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, राजमुंदरी के पूर्व सांसद उंदावल्ली अरुण कुमार ने भी रविवार को राव से मुलाकात की. अफवाहों की मानें तो अरुण कुमार प्रस्तावित राष्ट्रीय पार्टी के आंध्र प्रदेश प्रभारी होंगे। हालांकि, पूर्व सांसद अफवाहों की पुष्टि या खंडन करने के लिए इच्छुक नहीं थे।
इस बीच, अनिवासी तेलंगानावासियों ने रविवार को जूम बैठक की और राव की राष्ट्रीय पार्टी बनाने की योजना का स्वागत करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। बैठक का संचालन टीआरएस एनआरआई समन्वयक महेश बिगाला ने किया। देश को राव के नेतृत्व की जरूरत है। राव से ही देश का विकास संभव है। ' बिगाला ने कहा, "हम नई पार्टी को अपना स्पष्ट समर्थन दे रहे हैं। "
बैठक में अमेरिका, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, जाम्बिया और अन्य देशों में रहने वाले तेलंगाना के लोगों ने भाग लिया। दक्षिण अफ्रीका में एक महाराष्ट्रियन सेट के नेतृत्व में भी इसमें शामिल हो गया। इस बीच, टीआरएस विधायक बालका सुमन ने कहा कि राव की नई राष्ट्रीय पार्टी बनाने की योजना की खबर सुनकर कांग्रेस और भाजपा नेता डर से कांप रहे थे।
| मुख्यमंत्री और टीआरएस अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव के लिए यह काफी व्यस्त रविवार था, जिन्होंने अपनी प्रस्तावित राष्ट्रीय पार्टी पर चर्चा के लिए कई बैठकें कीं। हैदराबादः मुख्यमंत्री और टीआरएस अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव के लिए यह काफी व्यस्त रविवार था, जिन्होंने अपनी प्रस्तावित राष्ट्रीय पार्टी पर चर्चा के लिए कई बैठकें कीं। जानकारी के मुताबिक राव ने प्रगति भवन में राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर से बातचीत की. इससे पहले दिन में वित्त मंत्री टी हरीश राव ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। माना जा रहा है कि राव और किशोर के बीच हुई बैठक में प्रस्तावित राष्ट्रीय दल, अगले विधानसभा चुनाव की रणनीति और अन्य मुद्दों पर प्रमुखता से चर्चा हुई. साथ ही कहा जाता है कि राव प्रस्तावित राष्ट्रीय पार्टी के लिए विभिन्न राज्यों में प्रभारी नियुक्त करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, राजमुंदरी के पूर्व सांसद उंदावल्ली अरुण कुमार ने भी रविवार को राव से मुलाकात की. अफवाहों की मानें तो अरुण कुमार प्रस्तावित राष्ट्रीय पार्टी के आंध्र प्रदेश प्रभारी होंगे। हालांकि, पूर्व सांसद अफवाहों की पुष्टि या खंडन करने के लिए इच्छुक नहीं थे। इस बीच, अनिवासी तेलंगानावासियों ने रविवार को जूम बैठक की और राव की राष्ट्रीय पार्टी बनाने की योजना का स्वागत करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। बैठक का संचालन टीआरएस एनआरआई समन्वयक महेश बिगाला ने किया। देश को राव के नेतृत्व की जरूरत है। राव से ही देश का विकास संभव है। ' बिगाला ने कहा, "हम नई पार्टी को अपना स्पष्ट समर्थन दे रहे हैं। " बैठक में अमेरिका, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, जाम्बिया और अन्य देशों में रहने वाले तेलंगाना के लोगों ने भाग लिया। दक्षिण अफ्रीका में एक महाराष्ट्रियन सेट के नेतृत्व में भी इसमें शामिल हो गया। इस बीच, टीआरएस विधायक बालका सुमन ने कहा कि राव की नई राष्ट्रीय पार्टी बनाने की योजना की खबर सुनकर कांग्रेस और भाजपा नेता डर से कांप रहे थे। |
India Today Conclave East 2021 कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बंगाल की हमारी भाजपा की सरकार मोदी सरकार के मॉडल पर चलेगी. देश के हर क्षेत्र में मोदी जी ने आमूलचूल परिवर्तन किए हैं. मोदी सरकार मजबूत फैसले लेने वाली सरकार है.
अमित शाह ने ममता सरकारी तीन बड़ी समस्याएं गिनाते हुए कहा, 'ममता जी के शासन में बंगाल में- प्रशासन का राजनीतिकरण हुआ है. राजनीति का अपराधीकरण हुआ है. भ्रष्टाचार को संस्थागत किया गया है. इन तीनों चीजों के रहते बंगाल विकास की प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सकता है. असम में हमारी सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है. मुझे पूरा भरोसा है कि असम की जनता फिर एक बार भाजपा को आशीर्वाद देगी. '
उन्होंने कहा, 'जो पार्टी के मूल सिद्धांत होते हैं, उन्हें हम नफा-नुकसान के तराजू में नहीं तोलते हैं, राष्ट्रहित के तराजू में तोलते हैं. चाहे फायदा हो या नुकसान. जो मूल सिद्धांत होते हैं, उसमें भाजपा अडिग रहती है. '
अमित शाह ने कहा, 'जब भी हम जीतते हैं तो कांग्रेस और विपक्ष हमेशा कहता है कि ईवीएम में घपला हुआ. मगर जब वो जीतते हैं तो शपथ ले लेते हैं. हार जाते हैं तो कहते हैं कि गड़बड़ है. '
अमित शाह ने कहा, 'चुनाव एक संवैधानिक प्रक्रिया है मत व्यक्त करने की. मैं बंगाल की जनता को आश्वस्त करता हूं कि इस बार आपको बूथ पर कोई भी गुंडा नहीं मिलेगा, डर मत रखिए. चुनाव आयोग पुख्ता इंतजाम करने वाला है. '
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, मुझे लगता है बंगाल में कहीं पर भी किसी भी किसान ने न कोई धरना किया है और न कोई प्रदर्शन किया है. यहां किसानों के जो धरने प्रदर्शन हो रहे हैं वो 6,000 रुपये प्राप्त करने के लिए हो रहे हैं, जो ममता दीदी उन्हें भेजती नहीं है.
अमित शाह ने कहा, 'हमारा सही समय हम नहीं जनता तय करती है. ये लोकतंत्र है, किसी के कहने से कोई वोट दे देगा ऐसा नहीं होता है. जनता बड़ी मैच्योर होती है, सही समय किस पार्टी का है ये जनता को तय करना है. '
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल का अगला मुख्यमंत्री बंगाल का ही धरती पुत्र होगा और बीजेपी से ही होगा, लेकिन कैलाश विजयवर्गीय नहीं बनेंगे.
अमित शाह ने कहा, 'मैं बंगाल में ममता सरकार को उखाड़ने ही आया हूं. यहां भाजपा की सरकार तभी आ सकती है, जब टीएमसी सरकार को उखाड़कर फेंक दिया जाए. ममता जी की सरकार ठीक से नहीं चल रही है, जनता इस सरकार को उखाड़कर फेंक देगी. हमारी ममता दीदी से कोई कड़वाहट नहीं है. मगर उनके राज में भ्रष्टाचार हो रहा है उससे उन्हें चिढ़ होती है तो कोई क्या कर सकता है. '
दागी नेताओं के बीजेपी में शामिल होने पर शाह ने कहा कि बीजेपी में आए नेताओं पर चल रहे मामले खत्म नहीं हुए. उन्होंने हिंसा पर बात करते हुए कहा कि बीजेपी की सरकार आएगी तो पाताल से भी टीएमसी के गुंडों को खोज निकालेंगे.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'बंगाल में टीएमसी के गुंडे बचेंगे नहीं, भाजपा की सरकार आएगी तो गुंडों को पाताल से भी ढूंढ लेंगे. हमारे कार्यकर्ताओं की जिसने भी हत्या की होगी, कानून के दायरे में उसे जेल के अंदर डालेंगे. हमारी पार्टी की 3 स्तर पर स्क्रीनिंग कमेटी है, मंडल, जिला और प्रदेश स्तर पर. ये तीनों कमेटी जिसका नाम एप्रूव करती है, उसको राष्ट्रीय अध्यक्ष जी एप्रूव करते हैं. '
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'मैं बंगाल के किसानों से कहना चाहता हूं कि हमारी सरकार बनने के बाद हम यहां के किसानों को उनका बकाया 12,000 रुपये भी देंगे और 6,000 रुपये की नई किस्त भी देंगे. हम बंगाल में हमारी तैयारी कर रहे हैं, बंगाल की जनता को अपने साथ जोड़ रहे हैं. इसके लिए हम मेहनत कर रहे हैं. CAA देश की संसद का बनाया हुआ कानून है, इसका इम्प्लीमेंटेशन होना है और शरणार्थियों को नागरिकता मिलनी है. '
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पीएम किसान निधि की राशि सरकार सीधे किसानों के खाते में डालती है. इसके लिए किसानों की सूची, उनकी बैंक डिटेल चाहिए होती, ममता जी को पूछिए की कितनी डिटेल उन्होंने भेजी हैं? सिर्फ एक चिठ्ठी उन्होंने भेजी है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'जय श्रीराम धार्मिक नारा ही नहीं है, ये तुष्टिकरण के खिलाफ एक प्रतीक है. दुर्गा पूजा के लिए क्या कोर्ट के दरवाजे खटखटाने होंगे? बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा नहीं कर पाएंगे क्या? रामनवमी के दिन शोभा यात्रा नहीं निकाल सकते? ये नारा परिवर्तन का नारा है. मुझे नहीं पता कि दीदी जय श्रीराम के नाम से क्यों चिढ़ती हैं. जय श्रीराम को धार्मिक नारे के रूप में इंटरप्रेट करने का प्रयास जो तृणमूल कांग्रेस कर रही है, वो गलत है. '
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, लेफ्ट-कांग्रेस और अन्य पार्टियों के गठबंधन से हमें कुछ लेना देना नहीं है. हमें पूरा विश्वास है कि हम पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना रहे हैं. लोकसभा में हमारे वोट बढ़े हैं. पिछली बार के चुनाव में जनता उलझन में थी कि बीजेपी जीत सकती है या नहीं जीत सकती. लेकिन इस बार उन्हें पक्का विश्वास है कि बीजेपी जीत रही है. अब लोग सोचते हैं कि बीजेपी को 200 से ज्यादा सीटें मिलेंगी.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, परिवर्तन यात्रा नाम रखने के पीछे भाजपा का उद्देश्य केवल मुख्यमंत्री, सत्ता या किसी मंत्री को बदलना नहीं है. हमारा एजेंडा बंगाल के जनमानस के अंदर अभी जो चल रहा है, उसको रोकने और परिवर्तित करने की इच्छा जगाना है. स्थिति में परिवर्तन तब होता है, जब जन जन के अंदर इच्छा और आकांक्षा हम जगाएं कि लोकतांत्रिक तरीके से जो गलत चल रहा है, उसको रोके और कुछ अच्छा करें.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, हम बंगाल में 200 से ज्यादा सीटों के साथ सरकार बनाएंगे. हम बंगाल की स्थिति को बदलने लिए आए हैं. उन्होंने कहा कि मुझे मालूम नहीं कि दीदी जय श्री राम के नारे से क्यों चिढ़ती हैं. उन्होंने कहा, जय श्री राम तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ बंगाल के लोगों का नारा है. ये राजनीति से अलग नहीं है, ये संस्कृति और भावनाओं का सवाल है.
India Today Conclave East 2021 के आज के आखिरी सत्र 'पावर पॉलिटिक्सः बंगाल के लिए लड़ाईः क्या बीजेपी कर सकती है परिवर्तन? ' में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिरकत की.
ममता बनर्जी ने कहा कि विधानसभा चुनाव को लेकर मेरा आत्मविश्वास 110 फीसदी है. साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव के नतीजे नहीं बता सकती लेकिन इस बार पिछले दोनों चुनावों से ज्यादा सीटें आएंगी और संख्या 221 से कम नहीं होगी.
चुनाव आयोग से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन वीवीपैट में हैकिंग नहीं होना चाहिए. चुनाव आयोग को सभी का सम्मान करना चाहिए, सिर्फ सेंट्रल गवर्नमेंट से. कितने सीट से चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि नंदीग्राम से पक्का चुनाव लड़ेंगी. साथ ही उन्होंने कहा कि अगर अमित शाह अगर यहां से चुनाव लड़के जीत जाएं तो उन्हें बंगाल का होम मिनिस्टर बना दूंगी.
ममता बनर्जी ने कहा कि ट्रेड मिल पर दौड़ते वक्त ही बजट बनाया. जब दौड़ते हैं तो दिमाग भी काम करता है. उन्होंने कहा कि ट्रेड मिल पर चलते वक्त अखबार पढ़ती हूं, पेपर देख लेती हूं और कुछ सोचना होता है तो वो भी सोच लेती हूं.
ममता बनर्जी ने कहा कि वैक्सीनेशन पर कहा कि हमारे यहां 10 करोड़ लोग हैं और हमें 3 लाख ही डोज मिले हैं. केंद्र सरकार कहती है कि वो जिस कंपनी का कहेंगे उन्हीं का दवा लेना होगा. लेकिन बाजार में कम्पीटिशन क्यों नहीं होना चाहिए.
ममता बनर्जी ने कहा कि हम किसी भी भारतीय को बाहरी नहीं कहते. लेकिन जो बाहर से गुंडागर्दी करने के लिए आते हैं हम उन्हें बाहरी कहते हैं. हमारे यहां सभी राज्यों के लोग हैं और कभी किसी को परेशानी नहीं हुई. हम बाहर से आकर किसी को लूटने नहीं देंगे. दिल्ली से बंगाल को क्यों कंट्रोल करेगा कोई, यहां बंगाल का आदमी ही बंगाल को कंट्रोल करेगा.
ममता बनर्जी ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के घर वालों के बारे में मैं भी बता सकती हूं. अमित शाह ने अपने बेटे को क्रिकेट बोर्ड में शामिल किया, लेकिन मैंने कभी कुछ नहीं कहा. वो मेरा भतीजा है लेकिन मैं ऐसी राजनीति नहीं करती.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी के काफी सदस्यों ने हमारे साथ हाथ मिलाया है. जो लोग बीजेपी में गए हैं, वो हमारे लिए ज्यादा अच्छा है. अच्छा है कि हम ज्यादा साफ हो गए हैं. बीजेपी तो वाशिंग मशीन में साफ हुई है और हम ऐसे साफ हुए हैं.
बंगाल में हैट्रिक लगने पर क्यां करेंगी ममता बनर्जी, इस पर उन्होंने कहा कि हम पहले ही बहुत कुछ कर चुके हैं. कोविड में केंद्र ने पैसा नहीं दिया. अम्फान तूफान में भी केंद्र ने पैसा नहीं दिया. इसके बाद भी हमने लोगों को मदद की. उन्होंने कहा कि एमएसएमई में बंगाल नंबर एक पर है और ये आंकड़े केंद्र सरकार के हैं. स्कील इंडस्ट्री, ई गवर्नेंस में नंबर वन हैं.
गवर्नर जगदीप धनखड़ द्वारा बंगाल की सरकार पर लगाए गए आरोपों पर ममता बनर्जी ने कहा कि आज गवर्नर का रोल पूरी तरह बदल गया है. उन्हें तो बीजेपी जो कहती है वो करते हैं, हम क्या करें, क्षमा कर देना चाहिए.
किसान आंदोलन पर ममता बनर्जी ने कहा कि सरकार को तीनों कानून वापस लेना चाहिए. हम किसानों के साथ हैं. बंगाल में किसान शांत हैं क्योंकि उन्हें पता है कि टीएमसी सरकार उनका भला करेगी. उनके साथ खड़ी है.
ममता ने कहा, हम संघ से नहीं लड़ रहे, हम बीजेपी से लड़ रहे हैं. ये कहते हैं कि जो हम कहते हैं वहीं सही है. जो नहीं मानेगा वो भुगतेगा. आज देश के सभी व्यापारी और कारोबारी भय में जी रहे हैं.
नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े कार्यक्रम में हुई नारेबाजी पर ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी ने नारेबाजी करवाकर सुभाष चंद्र बोस के कद को छोटा कर दिया. उन्होंने कहा कि बीजेपी वालों को किसी बात की जानकारी नहीं होती फिर भी उन्हें कुछ भी बोलना होता है.
ममता बनर्जी ने कहा, जिसके पास हिम्मत है वो लड़ता जाता है. उन्होंने कहा कि 99 फीसदी लोगों को हमने किसी न किसी स्कीम में जरूर कवर किया है. हमारी पार्टी लोगों के लिए काम करती है. हम कभी टैक्स नहीं बढ़ाते, मजदूरों की इंडस्ट्री नहीं बंद करते, डीजल-पेट्रोल का रेट भी नहीं बढ़ाते.
धर्म और जाति के नाम पर चुनाव के सवाल पर ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल में कभी जाति के नाम पर कभी चुनाव नहीं हुए. लेकिन बीजेपी ने इसकी शुरुआत की है. पहले धर्म के नाम पर किया और अब जाति के नाम पर बांट रहे हैं. उन्होंने यहां भी बंगालियों को ही आपस में बांटने का काम कर रहे हैं. वो कहते हैं कि वो बांग्लादेश का बंगाली है और ये बंगाल का बंगाली है. साथ ही वो हमेशा सीबीआई और ईडी का डर दिखाते रहते हैं.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट 2021 में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शिरकत की.
नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) पर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने कहा, 'असम में एक पुस्तक है, 'द गेम कॉल्ड एनआरसी'. कोई भी राजनीतिक दल एनआरसी नहीं चाहते. यह एक खेल है. प्रवासियों को कहा जाता है कि आपकी रक्षा करेंगे, हमें वोट दें. अन्य कहते हैं, वे आपके लिए सबसे बड़ा खतरा हैं, हमें वोट दें. इस तरह ये खेल चलता रहता है. '
किसानों के आंदोलन पर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने कहा, 'यदि इन सभी कानूनों को चुनौती दी जा रही है तो इस पर कुछ राजनीतिक अधिकारियों को काम करना होगा. मुझे उम्मीद है कि अदालत को कुछ रास्ता निकाल सकता है. इस पर कानूनी या राजनीतिक रूप से समाधान निकालना होगा. हालांकि यह हो नहीं रहा है. SC ने कहा है कि यह लॉ एंड ऑर्डर का मामला है. '
राजद्रोह के मामलों के सवाल पर जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा, 'हम भयानक समय में जी रहे हैं. ' यह पूछे जाने पर कि धमकी कहां से आ रही है, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने कहा, 'हर जगह से. '
इस सवाल पर कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद, उन्हें सरकार समर्थक न्यायाधीश के रूप में देखा गया और विपक्ष के हमलों पर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने कहा, 'यह हमला क्या है? एक जज या पूर्व जज हमलों से हीं घबराता. यदि किसी न्यायाधीश ने एक सचेत निर्णय लिया है, तो सेवानिवृत्ति के बाद हमला किया जाएगा. वो चाहते हैं कि उनके अनुसार आचरण करें नहीं तो हमला करेंगे. ' उन्होंने कहा कि कुछ जज हमलों के शिकार रहे हैं.
महुआ मोइत्रा के कमेंट पर पूर्व CJI रंजन गोगोई ने कहा कि उनके पास सही फैक्ट तक नहीं हैं. उन्होंने कहा कि मुझ पर आरोप लगाने वाले मेरा नाम लेने से क्यों डरते रहे. भारत के लोग बिना तथ्यों के आरोप लगाते हैं, ये समस्या है. कानून पर भरोसा क्यों नहीं, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि वहां फैसला नहीं बस तारीख पर तारीख है.
पूर्व CJI, जस्टिस रंजन गोगोई ने भारतीय न्यायपालिका के लिए रोडमैप पर बात करते हुए कहा, न्यायपालिका कितनी महत्वपूर्ण है, इस पर जोर नहीं दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, 'मेरे मन में जो है वह ये कि इस काम के लिए सही आदमी हो. जैसे आप सरकार में अधिकारियों को नियुक्त करते हैं, आप न्यायाधीश नियुक्त नहीं कर सकते. न्यायाधीश के लिए एक पूर्णकालिक प्रतिबद्धता होती है. यह एक जुनूनी काम है. यह 24 बाई 7 की नौकरी है. कितने लोग इस बात को समझते हैं कि एक न्यायाधीश किस प्रकार काम करता है'
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट 2021 के 'तीसरा स्तंभः भारतीय न्यायपालिका का रोडमैप' सत्र में पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई ने शिरकत की. उन्होंने कहा कि आप जजों को अफसरों की तरह नियुक्त नहीं कर सकते.
भाजपा के लोकसभा सांसद तापिर गाओ ने सत्र के दौरान कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी ने हमेशा सच्चाई को छुपाया है जबकि भाजपा ने नहीं. उन्होंने कहा, 'भाजपा की सच्चाई ये है कि मोदीजी ने कभी कोई बात नहीं छिपाई. चाहे वह पैंगोंग झील का मामला हो या फिर गालवान का. नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद, सेना को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अभ्यास करने का अधिकार मिला है. '
पूर्व सांसद निनॉन्ग एरिंग ने कहा, 1914 में एक मैप बना जिसे चीन ने भी माना. तब तिब्बत अगल देश हुआ करता था, उस पर चीन का नियंत्रण नहीं था. लेकिन अभी चीजें पूरी तरह बदल गई हैं. हम उनके साथ हाथ मिलाकर कहते हैं कि हिन्दी-चिनी भाई-भाई और वो हमारे जवानों को नुकसान पहुंचाते हैं. 20-20 जवान शहीद हो जाते हैं.
पूर्व भारतीय राजनयिक राजीव डोगरा ने कहा कि चीन इस क्षेत्र में कभी हार न मानने के लिए जाना जाता है.
जनरल बिक्रम सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा, "एलएसी, यह एक वास्तविक रेखा नहीं है. इसे लेकर दोनों तरफ अलग-अलग धारणाएं हैं. हमें यह समझना होगा कि चीन ने हमें जो चुनौती दी, वह फिंगर 4 की ओर आने के संदर्भ में थी. यह सैन्य नेतृत्व के लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है. "
चीन के साथ पहले भी सामरिक समझौते हुए हैं लेकिन इसके बावजूद चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आता. इस पर जनरल बिक्रम सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा, इस मामले में चीन का बेहद खराब रिकॉर्ड रहा है. इसलिए हमें हमेशा चौंकन्ना रहना चाहिए. चीनी नेतृत्व हमेशा दबाव में होता है. सेनाओं पीछे हटने पर उन्होंने कहा कि हम बेहतर भविष्य की कामना के साथ आगे बढ़ना चाहिए.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट 2021 के 'फ्लैशपॉइंटः ब्रेक्ड बॉर्डर्सः भारत की चीन नीति-युद्ध या समझौता? ' सत्र में पूर्व कांग्रेस सांसद निनॉन्ग एरिंग, जनरल बिक्रम सिंह (सेवानिवृत्त), बीजेपी के लोकसभा सदस्य तापिर गाओ और इटली और रोमानिया में पूर्व भारतीय राजदूत रहे राजीव डोगरा ने शिरकत की.
अजीत मोहन ने कहा, 'मुझे लगता है कि यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि कोई भी व्हाट्सएप संदेशों को नहीं पढ़ सकता है. हमारे पास आपके मैसेज का एक्सेस तक नहीं है क्योंकि वे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं और इसलिए यह कभी भी पढ़े नहीं जा सकते. दूसरा, जनवरी के कुछ हफ्तों में लोगों ने इस बात का संकेत दिया कि वो वास्तव में अपने संचार की गोपनीयता के बारे में परवाह करते हैं. अगर यह धारणा है कि मैसेज प्राइवेट नहीं हैं, तो अन्य एप्लिकेशन होंगे जो उन विकल्पों को प्रदान करेंगे. हम जानते हैं कि बहुत प्रतिस्पर्धा है. हमें हर दिन भरोसा रखना होगा और जब भी अन्य सेवाएं बेहतर प्रस्ताव के साथ आती हैं, तो प्रतिस्पर्धा होता है. '
अजीत मोहन ने कहा, हम पूरी तरह से यह सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी निभाते हैं कि इन प्लेटफॉर्म्स (सोशल मीडिया) की स्वतंत्र अभिव्यक्ति है. हमारी जिम्मेदारी भी है कि हम यह सुनिश्चित करें कि इन प्लेटफॉर्म्स के मिसयूज को कम करने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं.
सरकार और ट्विटर के बीच टकराव और भारत में सोशल मीडिया पर इसके निहितार्थ के बारे में उनकी राय के बारे में पूछे जाने पर, अजीत मोहन ने कहा, 'मैं कुछ बातें कहना चाहता हूं. इसमें कोई दोराय नहीं है कि हम एक कंपनी के रूप में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं. हम एक खुले इंटरनेट नेटवर्क में भारत में स्वतंत्रता के साथ काम करने की क्षमता से लाभान्वित होते हैं. '
फेसबुक इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन ने कहा, फेसबुक के गलत तरीके से इस्तेमाल पर उन्होंने कहा, हम अरबों लोगो का उनकी फैमिली और दोस्तों के साथ कनेक्शन बनाए रखना चाहते हैं लेकिन ये कभी चाहते कि इस प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल किया जाए. व्हाट्सएप विवाद पर उन्होंने कहा कि हम किसी के भी मैसेज नहीं पढ़ सकते. यहां तक कि हमारे पास आपके मैसेज का एक्सेस तक नहीं. यूजर्स की प्राइवेसी हमारे लिए सर्वोपरी है.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट 2021 के 'पब्लिक पॉलिसीः डिजिटल गोपनीयता का मिथक' सत्र में फेसबुक इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन शामिल हुए.
अगर वो बंगाल के वित्त मंत्री होते तो क्या करते, इस पर जवाब देते हुए प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन बिबेक देबरॉय ने कहा, किसी भी स्टेट में विकास के लिए मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर सबसे बड़ी भूमिका निभाता है. और राज्य में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर मजबूत हो इसके लिए जरूरी है कि राज्य में कानून व्यवस्था, लेबर कानून, जमीन, इंफ्रास्ट्रक्चर, रोड, इलेक्ट्रिसिटी समेत कई सुविधाओं का होना जरूरी है.
उन्होंने आगे कहा कि आपको जानकार हैरानी होगी कि पश्चिम बंगाल में मैन्यूफैक्चरिंग में लगे लोगों की संख्या गुजरात में मैन्यूफैक्चरिंग में लगे लोगों की संख्या के तीन गुणा है. इसके बाद भी गुजरात आगे क्योंकि वहां के मैन्यूफैक्चरिंग की प्रकृति बहुत अलग है. हर जिले में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के विकास की तुलना करनी होगी और जहां कुछ भी नहीं है वहां काम करना होगा. टेक्नोलॉजी पर काम करना होगा.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट 2021 के इस सत्र में प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन बिबेक देबरॉय शामिल हुए.
बंगाल पर कर्ज की मात्रा के बारे में बात करते हुए अमित मित्रा ने कहा, 'FRBM उस सकल घरेलू उत्पाद का अनुपात है जिसे आप उधार ले सकते हैं. कोरोनोवायरस महामारी से पहले यह 3 प्रतिशत था. हमने इसे हर साल 3 प्रतिशत से नीचे रखा. साथ ही उन्होंने कहा कि कर्ज के बारे में बात नहीं कर सकते क्योंकि नागालैंड का कर्ज और महाराष्ट्र का कर्ज तुलनीय नहीं है. ' उन्होंने कहा, 'कोरोनोवायरस के बीच में, हमारा राजकोषीय घाटा 2. 9 प्रतिशत पर था. जबकी केंद्र का 9 प्रतिशत रहा. '
'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' कार्यक्रम को बंगाल में लागू नहीं करने की बात पर पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस योजना के लिए करीब 5,500 करोड़ रुपये की राशि जारी किया जिसमें से 80 फीसदी पैसा विज्ञापन पर लगा दिया. वहीं पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने कन्याश्री योजना के तहत 9000 करोड़ रुपये खर्च किए. साथ ही कन्या श्री प्रकल्प योजना ( Kanyashree Prakalp Scheme 2020 ) के तहत सरकार की तरफ से स्कूली छात्राओं को 25 हजार रुपये तक स्कॉलरशिप दी गई. छात्राओं को साईकिल बांटी गई. इससे स्कूल जाने वाली लड़कियों की संख्या में बड़ी उछाल देखी गई. उन्होंने बताया कि आज हम केंद्र सरकार से एक भी सिक्का लिए बिना बंगाल के सभी निवासियों को 100 प्रतिशत स्वास्थ्य बीमा प्रदान कर रहे हैं.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट 2021 के सत्र 'आर्थिक एजेंडाः विकास बनाम लोकलुभावन- बंगाल मॉडल' में पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने शिरकत किया.
पश्चिम बंगाल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अग्निमित्रा पॉल ने कहा, 'बंगाल में सोशल मीडिया पोस्ट के लिए लोगों की गिरफ्तारी की गई. ' इसका जवाब देते हुए नुसरत जहां ने कहा कि वह हर दिन अपने सोशल मीडिया पोस्ट और अपनी पसंद के लिए घेरी जाती हैं.
भाजपा के अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया है और इस बात पर नुसरत जहां भी मुझसे सहमत होंगी. जवाब में नुसरत जहां ने कहा कि मैं इससे सहमत नहीं हूं. अल्पसंख्यकों को यह डर है कि अगर बीजेपी की सरकार आएगी, तो हमारी उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी.
नुसरत जहां ने कहा कि पश्चिम बंगाल पूर्ण रूप से मां दुर्गा और महिला सशक्तीकरण की बात होती है. इस पर बीजेपी की अग्निमित्रा पॉल ने राज्य में महिलाओं की तस्करी को लकर टीएमसी सांसद पर हमला किया. साथ ही उन्होंने कहा कि सीएम ममता बनर्जी द्वारा बांटी गई साइकिल को बंगाल में क्यों नहीं बनाया गया. इस पर, नुसरत जहां ने कहा कि भाजपा के नेता उन्हीं साइकिलों पर प्रचार क्यों कर रहे हैं?
पश्चिम बंगाल भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि 'जय श्री राम' कोई राजनीतिक नारा नहीं है. यह 'जय सिया राम' और 'राम राम' की तरह ही है, यह समृद्धि को दर्शाता है.
किस बात से फैशन डिज़ाइनर अग्निमित्रा पॉल ने राजनीति का रास्ता अपनाया?
राजनीति में युवाओं के प्रवेश पर बोलते हुए, तृणमूल कांग्रेस के नुसरत जहां ने कहा, 'हमेशा युवाओं ने अपने बलिदानों के बल पर क्रांतिकारी आंदोलन का नेतृत्व किया है. मेरे लिए राजनीति 'गेम-चेंजर' होना है. मेरे लिए राजनीति विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता लाने के लिए है. ' शिक्षा की मदद से जिस तरह मैं एक बदलाव ला सकती हूं. राजनीति समाज और लोगों के मुद्दों के बारे में समझ पैदा करने के लिए मदद करती है. मैं अमीर और गरीब के बीच की खाई को पाटना चाहती हूं. '
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट 2021 के सत्र 'पॉलिटिक्स रिडीफाइंडः द मार्च ऑफ न्यू-एज पॉलिटिशियन्स' में टीएमसी सांसद नुसरत जहां और पश्चिम बंगाल भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष अग्निमित्रा पॉल ने शिरकत किया.
इंडियन सेक्युलर फ्रंट के नेता पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने कहा कोई किसी दूसरे के लिए वोटकटवा साबित होगा, यह बात करना ही गलत है. सभी का अधिकार है चुनाव लड़ने का. हम ऐसी सरकार चाह रहे हैं कि लोगों को सुविधाएं मिलें. हम नहीं चाहते कि इमाम को सरकार भत्ता दे.
टीएमसी के प्रवक्ता और मिजोरम के पूर्व महाधिवक्ता बिस्वजीत देब ने सांप्रदायिक राजनीति की बात पर पलटवार करते हुए कहा कि तृणमूल हमेशा विकास में विश्वास करती है. उन्होंने कहा, 'हम इस बात से चिंतित नहीं हैं कि विभाजनकारी राजनीति में कौन शामिल है. हम केवल राज्य के विकास को लेकर चिंतित हैं. ' उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी तुष्टिकरण या विभाजनकारी राजनीति में विश्वास नहीं करती है.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट 2021 में बोलते हुए, CPIM के मोहम्मद सलीम ने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव विभाजनकारी राजनीति का वाटरलू होने जा रहा है. उन्होंने कहा, 'बंगाल में विभाजनकारी राजनीति विफल रही है, इस कारण भाजपा इस खेल से बाहर हो गई है. लेकिन ममता बनर्जी और तथागत रॉय एक ही स्कूल में पढ़े हैं. युवा बेरोजगार हैं लेकिन वो मंदिरों के बारे में बात कर रहे हैं. '
टीएमसी के प्रवक्ता और मिजोरम के पूर्व महाधिवक्ता बिस्वजीत देब ने कहा अल्पसंख्यक सिर्फ मुस्लिम समाज में ही नहीं बल्कि हर वर्ग में हैं. टीएमसी के लिए सभी धर्म एक समान हैं. साथ ही उन्होंने इंडियन सेक्युलर फ्रंट के नेता पीरजादा अब्बास सिद्दीकी पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्होंने चुनाव से ठीक पहले ही पार्टी की शुरुआत क्यों की. साथ ही उन्होंने मुस्लिम समाज के लिए ममता सरकार के कामों का बखान किया. हालांकि, उनके सवाल के जवाब में पीरजादा ने कहा कि अगर सरकार ने हमें मरदसे, स्कूल और अस्पताल दिए होते तो ये नहीं होता.
त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने कहा, पश्चिम बंगाल में मुस्लिम सबसे पिछड़े हुए हैं. पार्टियां उन्हें पिछड़ा रखती हैं ताकि उन्हें पूरे समुदाय को संबोधित न करना पड़े. मुस्लिम समुदाय में, महिलाएं विशेष रूप से सबसे पिछड़ी हैं.
इंडियन सेक्युलर फ्रंट के नेता पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने कहा कि अल्पसंख्यक हर जगह हैं. उन्होंने कहा कि जहां जहां मुस्लिम लोगों की संख्या ज्यादा है वहां स्कूल, कॉलेज और अस्पताल ज्यादा नहीं हैं. वहां उन्हें सिर्फ वोट बैंक के रूप में देखा जाता है. कलकता यूनिवर्सिटी में भी सिर्फ 20 फीसदी मुस्लिम टीचर्स हैं. ऐसे ही उन्होंने बंगाल की यूनिवर्सिटीज के बारे में बात करते हुए कहा कि हर एक जगह मुस्लिम टीचर्स की संख्या कम है. शिक्षा से मुस्लिम समाज को काफी दूर रखा गया है. उन्होंने चुनाव का रुख क्यों किया इस बात पर उन्होंने कहा कि हम अपने समाज को शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में मदद करने के लिए राजनीति में आए हैं.
India Today Conclave East 2021 के इस सेशन (MINORITY MATTERS: Vote for faith: Empowerment or divisive discourse? ) में टीएमसी के प्रवक्ता और मिजोरम के पूर्व महाधिवक्ता बिस्वजीत देब, इंडियन सेक्युलर फ्रंट के नेता पीरजादा अब्बास सिद्दीकी, पूर्व संसद सदस्य अभिजीत मुखर्जी, त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय शामिल हुए. थोड़ी देर में CPI (M) नेता मोहम्मद सलीम भी इस सेशन में जुड़ेंगे.
गवर्नर ने बताया कि ममता बनर्जी से मुलाकात के दौरान कैसी बातचीत होती है.
राज्यपाल जगदीप ने पश्चिम बंगाल के बारे में बात करते हुए कहा कि हम एक ज्वालामुखी पर बैठे हैं, एक भी पखवाड़ा ऐसा नहीं गुजरता जब लोग अवैध बम बनाने के काम के कारण मारे नहीं जाते हों. उन्होंने कहा, 'लोग मुझे एजेंट कहते हैं, हां मैं संविधान का एजेंट हूं और उसकी स्क्रिप्ट पढ़ता हूं. मैंने कभी संविधान की लक्ष्मण रेखा पार नहीं की. '
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा, 'मुझे राज्य या केंद्र सरकार द्वारा कोई विशेष काम करने के लिए निर्देशित नहीं किया जा सकता है. ' उन्होंने कहा, 'मेरी शपथ क्या कहती है? उसमें मैंने कहा था कि मैं भारतीय संविधान की रक्षा और बचाव करूंगा. साथ ही उसमें यह भी कहा था कि, मैं पश्चिम बंगाल के लोगों की सेवा करूंगा. आप एक राज्यपाल से क्या उम्मीद करते हैं? '
उनकी भूमिका के सवाल, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा, 'राज्यपाल एक आसान पंचिंग बैग होता है. यदि राज्य में केंद्र से अलग पार्टी की सरकार हो तो आरोप लगाना बेहद आसान होता है. मैं इसके बारे में बहुत स्पष्ट हूं, मैं केवल भारतीय संविधान से मार्गदर्शन लेता हूं. '
उन्होंने कहा कि जिस दिन मीडिया डर जाएगा उस दिन के लिए डर लगता है. उन्होंने कहा कि मुझे कोई भी रिपोर्ट नहीं मिल पाती. सभी रिपोर्ट्स को ममता सरकार द्वारा रोक दिया जाता है. मैंने कई बार राज्य से जुड़े मामलों को लेकर अफसरों से रिपोर्ट मांगी लेकिन नहीं मिली.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट कार्यक्रम में जगदीप धनखड़ ने कहा कि उन्होंने कहा कि बंगाल में इतना डर है कि लोग डर के कारण अपने डर की चर्चा नहीं करते. उन्होंने कहा कि अगर ये डर रहेगा तो संविधान का क्या मतलब है, कानून का क्या मतलब है. इस डर के बीच स्वच्छ तरीके से चुनाव कैसे हो सकते हैं. उन्होंने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाते हुए कहा कि यहां सरकारी अफसर राजनीति के काम में लगे हुए हैं.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट कार्यक्रम की शुरुआत बॉलीवुड के दिग्गज सिंगर पापोन के सुरीले म्यूजिक के साथ हुई. इस दौरान उन्होंने फोक म्यूजिक की यात्रा और उसकी खूबसूरती के बारे में चर्चा की. इस दौरान उन्होंने कई भाषाओं में गाने भी गाए.
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कला, संस्कृति और आर्थिक तरक्की पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन बिबेक देबरॉय, फेसबुक इंडिया के वाइस प्रेसिंडेंट अजीत मोहन, हेमंत कनोरिया, चेयरमैन (श्री इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस लिमिटेड), हर्षवर्धन नियोतिया, प्रेसिडेंट (अंबुज नियोतिया ग्रुप), बंधन बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर चंद्रशेखर घोष, लक्ष्मी टी के मैनेजिंग डायरेक्टर रुद्र चटर्जी, मशहूर गायिका उषा उत्थुप, फिल्म निर्देशक श्रीजीत मुखर्जी, एक्टर सब्यसाची चक्रवर्ती, प्रोसेनजीत चटर्जी और तोता रॉय चौधरी शिरकत करेंगे.
पूर्व आर्मी चीफ जनरल बिक्रम सिंह (सेवानिवृत्त), बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में हिस्सा ले चुके ले. कर्नल सज्जाद जहीर, 1971 की जंग में हिस्सा ले चुके कर्नल अशोक कुमार तारा, भारतीय सेना के पूर्व चीफ जनरल शंकर रॉय चौधुरी भी कॉन्क्लेव का हिस्सा होंगे.
बंगाल और असम विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय, केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, टीएमसी के राज्यसभा सांसद डॉ. शांतनु सेन, टीएमसी सांसद नुसरत जहां, पश्चिम बंगाल भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष अग्निमित्रा पॉल, बीजेपी सांसद स्वपन दासगुप्ता, असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता और लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई, CPI (M) के महासचिव सीताराम येचुरी, CPI (M) नेता मोहम्मद सलीम, कांग्रेस विधायक निनॉन्ग एरिंग, भाजपा सांसद तापिर गाओ, सीपीआई (एम) नेता डॉ. फवाद हलीम, पूर्व संसद सदस्य अभिजीत मुखर्जी, त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, लोकसभा सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार, टीएमसी के प्रवक्ता और मिजोरम के पूर्व महाधिवक्ता बिस्वजीत देब, इंडियन सेक्युलर फ्रंट के नेता पीरजादा अब्बास सिद्दीकी, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा, इतिहासकार और पूर्व सांसद डॉ. सुगाता बोस अपनी बात रखेंगे.
कार्यक्रम की शुरुआत बॉलीवुड के दिग्गज सिंगर पापोन के सुरीले म्यूजिक के साथ होगी. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के महामंच पर ऐन चुनाव से पहले होगी बंगाल की कला संस्कृति और विरासत से लेकर आर्थिक तरक्की तक पर गहरी चर्चा. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट का ये सिलसिला 2017 में शुरू हुआ था और इस बार इसका चौथा आयोजन 11 और 12 फरवरी को हो रहा है.
इंडिया टुडे कॉन्क्लेव (India Today Conclave East 2021) के चौथे संस्करण का आयोजन बंगाल में होने जा रहा है. पश्चिम बंगाल के आईटीसी रॉयल बंगाल में सजने वाले इस मंच पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़ी हस्तियां नजर आएंगी. विचार-मंथन के दृष्टिकोण से देश के सबसे बड़े मंच पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्यपाल जगदीप धनखड़, राज्यसभा सांसद और भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा, असम के कैबिनेट मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, टीएमसी सांसद सांसद डेरेक ओ ब्रायन सहित कई शीर्ष राजनेताओं के साथ ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा होगी. बंगाल और असम में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ये चर्चा बेहद अहम मानी जा रही है.
| India Today Conclave East दो हज़ार इक्कीस कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बंगाल की हमारी भाजपा की सरकार मोदी सरकार के मॉडल पर चलेगी. देश के हर क्षेत्र में मोदी जी ने आमूलचूल परिवर्तन किए हैं. मोदी सरकार मजबूत फैसले लेने वाली सरकार है. अमित शाह ने ममता सरकारी तीन बड़ी समस्याएं गिनाते हुए कहा, 'ममता जी के शासन में बंगाल में- प्रशासन का राजनीतिकरण हुआ है. राजनीति का अपराधीकरण हुआ है. भ्रष्टाचार को संस्थागत किया गया है. इन तीनों चीजों के रहते बंगाल विकास की प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सकता है. असम में हमारी सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है. मुझे पूरा भरोसा है कि असम की जनता फिर एक बार भाजपा को आशीर्वाद देगी. ' उन्होंने कहा, 'जो पार्टी के मूल सिद्धांत होते हैं, उन्हें हम नफा-नुकसान के तराजू में नहीं तोलते हैं, राष्ट्रहित के तराजू में तोलते हैं. चाहे फायदा हो या नुकसान. जो मूल सिद्धांत होते हैं, उसमें भाजपा अडिग रहती है. ' अमित शाह ने कहा, 'जब भी हम जीतते हैं तो कांग्रेस और विपक्ष हमेशा कहता है कि ईवीएम में घपला हुआ. मगर जब वो जीतते हैं तो शपथ ले लेते हैं. हार जाते हैं तो कहते हैं कि गड़बड़ है. ' अमित शाह ने कहा, 'चुनाव एक संवैधानिक प्रक्रिया है मत व्यक्त करने की. मैं बंगाल की जनता को आश्वस्त करता हूं कि इस बार आपको बूथ पर कोई भी गुंडा नहीं मिलेगा, डर मत रखिए. चुनाव आयोग पुख्ता इंतजाम करने वाला है. ' केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, मुझे लगता है बंगाल में कहीं पर भी किसी भी किसान ने न कोई धरना किया है और न कोई प्रदर्शन किया है. यहां किसानों के जो धरने प्रदर्शन हो रहे हैं वो छः,शून्य रुपयापये प्राप्त करने के लिए हो रहे हैं, जो ममता दीदी उन्हें भेजती नहीं है. अमित शाह ने कहा, 'हमारा सही समय हम नहीं जनता तय करती है. ये लोकतंत्र है, किसी के कहने से कोई वोट दे देगा ऐसा नहीं होता है. जनता बड़ी मैच्योर होती है, सही समय किस पार्टी का है ये जनता को तय करना है. ' केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल का अगला मुख्यमंत्री बंगाल का ही धरती पुत्र होगा और बीजेपी से ही होगा, लेकिन कैलाश विजयवर्गीय नहीं बनेंगे. अमित शाह ने कहा, 'मैं बंगाल में ममता सरकार को उखाड़ने ही आया हूं. यहां भाजपा की सरकार तभी आ सकती है, जब टीएमसी सरकार को उखाड़कर फेंक दिया जाए. ममता जी की सरकार ठीक से नहीं चल रही है, जनता इस सरकार को उखाड़कर फेंक देगी. हमारी ममता दीदी से कोई कड़वाहट नहीं है. मगर उनके राज में भ्रष्टाचार हो रहा है उससे उन्हें चिढ़ होती है तो कोई क्या कर सकता है. ' दागी नेताओं के बीजेपी में शामिल होने पर शाह ने कहा कि बीजेपी में आए नेताओं पर चल रहे मामले खत्म नहीं हुए. उन्होंने हिंसा पर बात करते हुए कहा कि बीजेपी की सरकार आएगी तो पाताल से भी टीएमसी के गुंडों को खोज निकालेंगे. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'बंगाल में टीएमसी के गुंडे बचेंगे नहीं, भाजपा की सरकार आएगी तो गुंडों को पाताल से भी ढूंढ लेंगे. हमारे कार्यकर्ताओं की जिसने भी हत्या की होगी, कानून के दायरे में उसे जेल के अंदर डालेंगे. हमारी पार्टी की तीन स्तर पर स्क्रीनिंग कमेटी है, मंडल, जिला और प्रदेश स्तर पर. ये तीनों कमेटी जिसका नाम एप्रूव करती है, उसको राष्ट्रीय अध्यक्ष जी एप्रूव करते हैं. ' केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'मैं बंगाल के किसानों से कहना चाहता हूं कि हमारी सरकार बनने के बाद हम यहां के किसानों को उनका बकाया बारह,शून्य रुपयापये भी देंगे और छः,शून्य रुपयापये की नई किस्त भी देंगे. हम बंगाल में हमारी तैयारी कर रहे हैं, बंगाल की जनता को अपने साथ जोड़ रहे हैं. इसके लिए हम मेहनत कर रहे हैं. CAA देश की संसद का बनाया हुआ कानून है, इसका इम्प्लीमेंटेशन होना है और शरणार्थियों को नागरिकता मिलनी है. ' केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पीएम किसान निधि की राशि सरकार सीधे किसानों के खाते में डालती है. इसके लिए किसानों की सूची, उनकी बैंक डिटेल चाहिए होती, ममता जी को पूछिए की कितनी डिटेल उन्होंने भेजी हैं? सिर्फ एक चिठ्ठी उन्होंने भेजी है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'जय श्रीराम धार्मिक नारा ही नहीं है, ये तुष्टिकरण के खिलाफ एक प्रतीक है. दुर्गा पूजा के लिए क्या कोर्ट के दरवाजे खटखटाने होंगे? बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा नहीं कर पाएंगे क्या? रामनवमी के दिन शोभा यात्रा नहीं निकाल सकते? ये नारा परिवर्तन का नारा है. मुझे नहीं पता कि दीदी जय श्रीराम के नाम से क्यों चिढ़ती हैं. जय श्रीराम को धार्मिक नारे के रूप में इंटरप्रेट करने का प्रयास जो तृणमूल कांग्रेस कर रही है, वो गलत है. ' केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, लेफ्ट-कांग्रेस और अन्य पार्टियों के गठबंधन से हमें कुछ लेना देना नहीं है. हमें पूरा विश्वास है कि हम पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बना रहे हैं. लोकसभा में हमारे वोट बढ़े हैं. पिछली बार के चुनाव में जनता उलझन में थी कि बीजेपी जीत सकती है या नहीं जीत सकती. लेकिन इस बार उन्हें पक्का विश्वास है कि बीजेपी जीत रही है. अब लोग सोचते हैं कि बीजेपी को दो सौ से ज्यादा सीटें मिलेंगी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, परिवर्तन यात्रा नाम रखने के पीछे भाजपा का उद्देश्य केवल मुख्यमंत्री, सत्ता या किसी मंत्री को बदलना नहीं है. हमारा एजेंडा बंगाल के जनमानस के अंदर अभी जो चल रहा है, उसको रोकने और परिवर्तित करने की इच्छा जगाना है. स्थिति में परिवर्तन तब होता है, जब जन जन के अंदर इच्छा और आकांक्षा हम जगाएं कि लोकतांत्रिक तरीके से जो गलत चल रहा है, उसको रोके और कुछ अच्छा करें. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, हम बंगाल में दो सौ से ज्यादा सीटों के साथ सरकार बनाएंगे. हम बंगाल की स्थिति को बदलने लिए आए हैं. उन्होंने कहा कि मुझे मालूम नहीं कि दीदी जय श्री राम के नारे से क्यों चिढ़ती हैं. उन्होंने कहा, जय श्री राम तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ बंगाल के लोगों का नारा है. ये राजनीति से अलग नहीं है, ये संस्कृति और भावनाओं का सवाल है. India Today Conclave East दो हज़ार इक्कीस के आज के आखिरी सत्र 'पावर पॉलिटिक्सः बंगाल के लिए लड़ाईः क्या बीजेपी कर सकती है परिवर्तन? ' में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिरकत की. ममता बनर्जी ने कहा कि विधानसभा चुनाव को लेकर मेरा आत्मविश्वास एक सौ दस फीसदी है. साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव के नतीजे नहीं बता सकती लेकिन इस बार पिछले दोनों चुनावों से ज्यादा सीटें आएंगी और संख्या दो सौ इक्कीस से कम नहीं होगी. चुनाव आयोग से कोई शिकायत नहीं है, लेकिन वीवीपैट में हैकिंग नहीं होना चाहिए. चुनाव आयोग को सभी का सम्मान करना चाहिए, सिर्फ सेंट्रल गवर्नमेंट से. कितने सीट से चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि नंदीग्राम से पक्का चुनाव लड़ेंगी. साथ ही उन्होंने कहा कि अगर अमित शाह अगर यहां से चुनाव लड़के जीत जाएं तो उन्हें बंगाल का होम मिनिस्टर बना दूंगी. ममता बनर्जी ने कहा कि ट्रेड मिल पर दौड़ते वक्त ही बजट बनाया. जब दौड़ते हैं तो दिमाग भी काम करता है. उन्होंने कहा कि ट्रेड मिल पर चलते वक्त अखबार पढ़ती हूं, पेपर देख लेती हूं और कुछ सोचना होता है तो वो भी सोच लेती हूं. ममता बनर्जी ने कहा कि वैक्सीनेशन पर कहा कि हमारे यहां दस करोड़ लोग हैं और हमें तीन लाख ही डोज मिले हैं. केंद्र सरकार कहती है कि वो जिस कंपनी का कहेंगे उन्हीं का दवा लेना होगा. लेकिन बाजार में कम्पीटिशन क्यों नहीं होना चाहिए. ममता बनर्जी ने कहा कि हम किसी भी भारतीय को बाहरी नहीं कहते. लेकिन जो बाहर से गुंडागर्दी करने के लिए आते हैं हम उन्हें बाहरी कहते हैं. हमारे यहां सभी राज्यों के लोग हैं और कभी किसी को परेशानी नहीं हुई. हम बाहर से आकर किसी को लूटने नहीं देंगे. दिल्ली से बंगाल को क्यों कंट्रोल करेगा कोई, यहां बंगाल का आदमी ही बंगाल को कंट्रोल करेगा. ममता बनर्जी ने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी के घर वालों के बारे में मैं भी बता सकती हूं. अमित शाह ने अपने बेटे को क्रिकेट बोर्ड में शामिल किया, लेकिन मैंने कभी कुछ नहीं कहा. वो मेरा भतीजा है लेकिन मैं ऐसी राजनीति नहीं करती. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी के काफी सदस्यों ने हमारे साथ हाथ मिलाया है. जो लोग बीजेपी में गए हैं, वो हमारे लिए ज्यादा अच्छा है. अच्छा है कि हम ज्यादा साफ हो गए हैं. बीजेपी तो वाशिंग मशीन में साफ हुई है और हम ऐसे साफ हुए हैं. बंगाल में हैट्रिक लगने पर क्यां करेंगी ममता बनर्जी, इस पर उन्होंने कहा कि हम पहले ही बहुत कुछ कर चुके हैं. कोविड में केंद्र ने पैसा नहीं दिया. अम्फान तूफान में भी केंद्र ने पैसा नहीं दिया. इसके बाद भी हमने लोगों को मदद की. उन्होंने कहा कि एमएसएमई में बंगाल नंबर एक पर है और ये आंकड़े केंद्र सरकार के हैं. स्कील इंडस्ट्री, ई गवर्नेंस में नंबर वन हैं. गवर्नर जगदीप धनखड़ द्वारा बंगाल की सरकार पर लगाए गए आरोपों पर ममता बनर्जी ने कहा कि आज गवर्नर का रोल पूरी तरह बदल गया है. उन्हें तो बीजेपी जो कहती है वो करते हैं, हम क्या करें, क्षमा कर देना चाहिए. किसान आंदोलन पर ममता बनर्जी ने कहा कि सरकार को तीनों कानून वापस लेना चाहिए. हम किसानों के साथ हैं. बंगाल में किसान शांत हैं क्योंकि उन्हें पता है कि टीएमसी सरकार उनका भला करेगी. उनके साथ खड़ी है. ममता ने कहा, हम संघ से नहीं लड़ रहे, हम बीजेपी से लड़ रहे हैं. ये कहते हैं कि जो हम कहते हैं वहीं सही है. जो नहीं मानेगा वो भुगतेगा. आज देश के सभी व्यापारी और कारोबारी भय में जी रहे हैं. नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े कार्यक्रम में हुई नारेबाजी पर ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी ने नारेबाजी करवाकर सुभाष चंद्र बोस के कद को छोटा कर दिया. उन्होंने कहा कि बीजेपी वालों को किसी बात की जानकारी नहीं होती फिर भी उन्हें कुछ भी बोलना होता है. ममता बनर्जी ने कहा, जिसके पास हिम्मत है वो लड़ता जाता है. उन्होंने कहा कि निन्यानवे फीसदी लोगों को हमने किसी न किसी स्कीम में जरूर कवर किया है. हमारी पार्टी लोगों के लिए काम करती है. हम कभी टैक्स नहीं बढ़ाते, मजदूरों की इंडस्ट्री नहीं बंद करते, डीजल-पेट्रोल का रेट भी नहीं बढ़ाते. धर्म और जाति के नाम पर चुनाव के सवाल पर ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल में कभी जाति के नाम पर कभी चुनाव नहीं हुए. लेकिन बीजेपी ने इसकी शुरुआत की है. पहले धर्म के नाम पर किया और अब जाति के नाम पर बांट रहे हैं. उन्होंने यहां भी बंगालियों को ही आपस में बांटने का काम कर रहे हैं. वो कहते हैं कि वो बांग्लादेश का बंगाली है और ये बंगाल का बंगाली है. साथ ही वो हमेशा सीबीआई और ईडी का डर दिखाते रहते हैं. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट दो हज़ार इक्कीस में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शिरकत की. नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर पर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने कहा, 'असम में एक पुस्तक है, 'द गेम कॉल्ड एनआरसी'. कोई भी राजनीतिक दल एनआरसी नहीं चाहते. यह एक खेल है. प्रवासियों को कहा जाता है कि आपकी रक्षा करेंगे, हमें वोट दें. अन्य कहते हैं, वे आपके लिए सबसे बड़ा खतरा हैं, हमें वोट दें. इस तरह ये खेल चलता रहता है. ' किसानों के आंदोलन पर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने कहा, 'यदि इन सभी कानूनों को चुनौती दी जा रही है तो इस पर कुछ राजनीतिक अधिकारियों को काम करना होगा. मुझे उम्मीद है कि अदालत को कुछ रास्ता निकाल सकता है. इस पर कानूनी या राजनीतिक रूप से समाधान निकालना होगा. हालांकि यह हो नहीं रहा है. SC ने कहा है कि यह लॉ एंड ऑर्डर का मामला है. ' राजद्रोह के मामलों के सवाल पर जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा, 'हम भयानक समय में जी रहे हैं. ' यह पूछे जाने पर कि धमकी कहां से आ रही है, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने कहा, 'हर जगह से. ' इस सवाल पर कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद, उन्हें सरकार समर्थक न्यायाधीश के रूप में देखा गया और विपक्ष के हमलों पर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने कहा, 'यह हमला क्या है? एक जज या पूर्व जज हमलों से हीं घबराता. यदि किसी न्यायाधीश ने एक सचेत निर्णय लिया है, तो सेवानिवृत्ति के बाद हमला किया जाएगा. वो चाहते हैं कि उनके अनुसार आचरण करें नहीं तो हमला करेंगे. ' उन्होंने कहा कि कुछ जज हमलों के शिकार रहे हैं. महुआ मोइत्रा के कमेंट पर पूर्व CJI रंजन गोगोई ने कहा कि उनके पास सही फैक्ट तक नहीं हैं. उन्होंने कहा कि मुझ पर आरोप लगाने वाले मेरा नाम लेने से क्यों डरते रहे. भारत के लोग बिना तथ्यों के आरोप लगाते हैं, ये समस्या है. कानून पर भरोसा क्यों नहीं, इसके जवाब में उन्होंने कहा कि वहां फैसला नहीं बस तारीख पर तारीख है. पूर्व CJI, जस्टिस रंजन गोगोई ने भारतीय न्यायपालिका के लिए रोडमैप पर बात करते हुए कहा, न्यायपालिका कितनी महत्वपूर्ण है, इस पर जोर नहीं दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, 'मेरे मन में जो है वह ये कि इस काम के लिए सही आदमी हो. जैसे आप सरकार में अधिकारियों को नियुक्त करते हैं, आप न्यायाधीश नियुक्त नहीं कर सकते. न्यायाधीश के लिए एक पूर्णकालिक प्रतिबद्धता होती है. यह एक जुनूनी काम है. यह चौबीस बाई सात की नौकरी है. कितने लोग इस बात को समझते हैं कि एक न्यायाधीश किस प्रकार काम करता है' इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट दो हज़ार इक्कीस के 'तीसरा स्तंभः भारतीय न्यायपालिका का रोडमैप' सत्र में पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई ने शिरकत की. उन्होंने कहा कि आप जजों को अफसरों की तरह नियुक्त नहीं कर सकते. भाजपा के लोकसभा सांसद तापिर गाओ ने सत्र के दौरान कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी ने हमेशा सच्चाई को छुपाया है जबकि भाजपा ने नहीं. उन्होंने कहा, 'भाजपा की सच्चाई ये है कि मोदीजी ने कभी कोई बात नहीं छिपाई. चाहे वह पैंगोंग झील का मामला हो या फिर गालवान का. नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद, सेना को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अभ्यास करने का अधिकार मिला है. ' पूर्व सांसद निनॉन्ग एरिंग ने कहा, एक हज़ार नौ सौ चौदह में एक मैप बना जिसे चीन ने भी माना. तब तिब्बत अगल देश हुआ करता था, उस पर चीन का नियंत्रण नहीं था. लेकिन अभी चीजें पूरी तरह बदल गई हैं. हम उनके साथ हाथ मिलाकर कहते हैं कि हिन्दी-चिनी भाई-भाई और वो हमारे जवानों को नुकसान पहुंचाते हैं. बीस-बीस जवान शहीद हो जाते हैं. पूर्व भारतीय राजनयिक राजीव डोगरा ने कहा कि चीन इस क्षेत्र में कभी हार न मानने के लिए जाना जाता है. जनरल बिक्रम सिंह ने कहा, "एलएसी, यह एक वास्तविक रेखा नहीं है. इसे लेकर दोनों तरफ अलग-अलग धारणाएं हैं. हमें यह समझना होगा कि चीन ने हमें जो चुनौती दी, वह फिंगर चार की ओर आने के संदर्भ में थी. यह सैन्य नेतृत्व के लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है. " चीन के साथ पहले भी सामरिक समझौते हुए हैं लेकिन इसके बावजूद चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आता. इस पर जनरल बिक्रम सिंह ने कहा, इस मामले में चीन का बेहद खराब रिकॉर्ड रहा है. इसलिए हमें हमेशा चौंकन्ना रहना चाहिए. चीनी नेतृत्व हमेशा दबाव में होता है. सेनाओं पीछे हटने पर उन्होंने कहा कि हम बेहतर भविष्य की कामना के साथ आगे बढ़ना चाहिए. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट दो हज़ार इक्कीस के 'फ्लैशपॉइंटः ब्रेक्ड बॉर्डर्सः भारत की चीन नीति-युद्ध या समझौता? ' सत्र में पूर्व कांग्रेस सांसद निनॉन्ग एरिंग, जनरल बिक्रम सिंह , बीजेपी के लोकसभा सदस्य तापिर गाओ और इटली और रोमानिया में पूर्व भारतीय राजदूत रहे राजीव डोगरा ने शिरकत की. अजीत मोहन ने कहा, 'मुझे लगता है कि यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है कि कोई भी व्हाट्सएप संदेशों को नहीं पढ़ सकता है. हमारे पास आपके मैसेज का एक्सेस तक नहीं है क्योंकि वे एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड हैं और इसलिए यह कभी भी पढ़े नहीं जा सकते. दूसरा, जनवरी के कुछ हफ्तों में लोगों ने इस बात का संकेत दिया कि वो वास्तव में अपने संचार की गोपनीयता के बारे में परवाह करते हैं. अगर यह धारणा है कि मैसेज प्राइवेट नहीं हैं, तो अन्य एप्लिकेशन होंगे जो उन विकल्पों को प्रदान करेंगे. हम जानते हैं कि बहुत प्रतिस्पर्धा है. हमें हर दिन भरोसा रखना होगा और जब भी अन्य सेवाएं बेहतर प्रस्ताव के साथ आती हैं, तो प्रतिस्पर्धा होता है. ' अजीत मोहन ने कहा, हम पूरी तरह से यह सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी निभाते हैं कि इन प्लेटफॉर्म्स की स्वतंत्र अभिव्यक्ति है. हमारी जिम्मेदारी भी है कि हम यह सुनिश्चित करें कि इन प्लेटफॉर्म्स के मिसयूज को कम करने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं. सरकार और ट्विटर के बीच टकराव और भारत में सोशल मीडिया पर इसके निहितार्थ के बारे में उनकी राय के बारे में पूछे जाने पर, अजीत मोहन ने कहा, 'मैं कुछ बातें कहना चाहता हूं. इसमें कोई दोराय नहीं है कि हम एक कंपनी के रूप में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं. हम एक खुले इंटरनेट नेटवर्क में भारत में स्वतंत्रता के साथ काम करने की क्षमता से लाभान्वित होते हैं. ' फेसबुक इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन ने कहा, फेसबुक के गलत तरीके से इस्तेमाल पर उन्होंने कहा, हम अरबों लोगो का उनकी फैमिली और दोस्तों के साथ कनेक्शन बनाए रखना चाहते हैं लेकिन ये कभी चाहते कि इस प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल किया जाए. व्हाट्सएप विवाद पर उन्होंने कहा कि हम किसी के भी मैसेज नहीं पढ़ सकते. यहां तक कि हमारे पास आपके मैसेज का एक्सेस तक नहीं. यूजर्स की प्राइवेसी हमारे लिए सर्वोपरी है. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट दो हज़ार इक्कीस के 'पब्लिक पॉलिसीः डिजिटल गोपनीयता का मिथक' सत्र में फेसबुक इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर अजीत मोहन शामिल हुए. अगर वो बंगाल के वित्त मंत्री होते तो क्या करते, इस पर जवाब देते हुए प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन बिबेक देबरॉय ने कहा, किसी भी स्टेट में विकास के लिए मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर सबसे बड़ी भूमिका निभाता है. और राज्य में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर मजबूत हो इसके लिए जरूरी है कि राज्य में कानून व्यवस्था, लेबर कानून, जमीन, इंफ्रास्ट्रक्चर, रोड, इलेक्ट्रिसिटी समेत कई सुविधाओं का होना जरूरी है. उन्होंने आगे कहा कि आपको जानकार हैरानी होगी कि पश्चिम बंगाल में मैन्यूफैक्चरिंग में लगे लोगों की संख्या गुजरात में मैन्यूफैक्चरिंग में लगे लोगों की संख्या के तीन गुणा है. इसके बाद भी गुजरात आगे क्योंकि वहां के मैन्यूफैक्चरिंग की प्रकृति बहुत अलग है. हर जिले में मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के विकास की तुलना करनी होगी और जहां कुछ भी नहीं है वहां काम करना होगा. टेक्नोलॉजी पर काम करना होगा. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट दो हज़ार इक्कीस के इस सत्र में प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन बिबेक देबरॉय शामिल हुए. बंगाल पर कर्ज की मात्रा के बारे में बात करते हुए अमित मित्रा ने कहा, 'FRBM उस सकल घरेलू उत्पाद का अनुपात है जिसे आप उधार ले सकते हैं. कोरोनोवायरस महामारी से पहले यह तीन प्रतिशत था. हमने इसे हर साल तीन प्रतिशत से नीचे रखा. साथ ही उन्होंने कहा कि कर्ज के बारे में बात नहीं कर सकते क्योंकि नागालैंड का कर्ज और महाराष्ट्र का कर्ज तुलनीय नहीं है. ' उन्होंने कहा, 'कोरोनोवायरस के बीच में, हमारा राजकोषीय घाटा दो. नौ प्रतिशत पर था. जबकी केंद्र का नौ प्रतिशत रहा. ' 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' कार्यक्रम को बंगाल में लागू नहीं करने की बात पर पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस योजना के लिए करीब पाँच,पाँच सौ करोड़ रुपये की राशि जारी किया जिसमें से अस्सी फीसदी पैसा विज्ञापन पर लगा दिया. वहीं पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने कन्याश्री योजना के तहत नौ हज़ार करोड़ रुपये खर्च किए. साथ ही कन्या श्री प्रकल्प योजना के तहत सरकार की तरफ से स्कूली छात्राओं को पच्चीस हजार रुपये तक स्कॉलरशिप दी गई. छात्राओं को साईकिल बांटी गई. इससे स्कूल जाने वाली लड़कियों की संख्या में बड़ी उछाल देखी गई. उन्होंने बताया कि आज हम केंद्र सरकार से एक भी सिक्का लिए बिना बंगाल के सभी निवासियों को एक सौ प्रतिशत स्वास्थ्य बीमा प्रदान कर रहे हैं. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट दो हज़ार इक्कीस के सत्र 'आर्थिक एजेंडाः विकास बनाम लोकलुभावन- बंगाल मॉडल' में पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने शिरकत किया. पश्चिम बंगाल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अग्निमित्रा पॉल ने कहा, 'बंगाल में सोशल मीडिया पोस्ट के लिए लोगों की गिरफ्तारी की गई. ' इसका जवाब देते हुए नुसरत जहां ने कहा कि वह हर दिन अपने सोशल मीडिया पोस्ट और अपनी पसंद के लिए घेरी जाती हैं. भाजपा के अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुसलमानों के लिए कुछ नहीं किया है और इस बात पर नुसरत जहां भी मुझसे सहमत होंगी. जवाब में नुसरत जहां ने कहा कि मैं इससे सहमत नहीं हूं. अल्पसंख्यकों को यह डर है कि अगर बीजेपी की सरकार आएगी, तो हमारी उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी. नुसरत जहां ने कहा कि पश्चिम बंगाल पूर्ण रूप से मां दुर्गा और महिला सशक्तीकरण की बात होती है. इस पर बीजेपी की अग्निमित्रा पॉल ने राज्य में महिलाओं की तस्करी को लकर टीएमसी सांसद पर हमला किया. साथ ही उन्होंने कहा कि सीएम ममता बनर्जी द्वारा बांटी गई साइकिल को बंगाल में क्यों नहीं बनाया गया. इस पर, नुसरत जहां ने कहा कि भाजपा के नेता उन्हीं साइकिलों पर प्रचार क्यों कर रहे हैं? पश्चिम बंगाल भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि 'जय श्री राम' कोई राजनीतिक नारा नहीं है. यह 'जय सिया राम' और 'राम राम' की तरह ही है, यह समृद्धि को दर्शाता है. किस बात से फैशन डिज़ाइनर अग्निमित्रा पॉल ने राजनीति का रास्ता अपनाया? राजनीति में युवाओं के प्रवेश पर बोलते हुए, तृणमूल कांग्रेस के नुसरत जहां ने कहा, 'हमेशा युवाओं ने अपने बलिदानों के बल पर क्रांतिकारी आंदोलन का नेतृत्व किया है. मेरे लिए राजनीति 'गेम-चेंजर' होना है. मेरे लिए राजनीति विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता लाने के लिए है. ' शिक्षा की मदद से जिस तरह मैं एक बदलाव ला सकती हूं. राजनीति समाज और लोगों के मुद्दों के बारे में समझ पैदा करने के लिए मदद करती है. मैं अमीर और गरीब के बीच की खाई को पाटना चाहती हूं. ' इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट दो हज़ार इक्कीस के सत्र 'पॉलिटिक्स रिडीफाइंडः द मार्च ऑफ न्यू-एज पॉलिटिशियन्स' में टीएमसी सांसद नुसरत जहां और पश्चिम बंगाल भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष अग्निमित्रा पॉल ने शिरकत किया. इंडियन सेक्युलर फ्रंट के नेता पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने कहा कोई किसी दूसरे के लिए वोटकटवा साबित होगा, यह बात करना ही गलत है. सभी का अधिकार है चुनाव लड़ने का. हम ऐसी सरकार चाह रहे हैं कि लोगों को सुविधाएं मिलें. हम नहीं चाहते कि इमाम को सरकार भत्ता दे. टीएमसी के प्रवक्ता और मिजोरम के पूर्व महाधिवक्ता बिस्वजीत देब ने सांप्रदायिक राजनीति की बात पर पलटवार करते हुए कहा कि तृणमूल हमेशा विकास में विश्वास करती है. उन्होंने कहा, 'हम इस बात से चिंतित नहीं हैं कि विभाजनकारी राजनीति में कौन शामिल है. हम केवल राज्य के विकास को लेकर चिंतित हैं. ' उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी तुष्टिकरण या विभाजनकारी राजनीति में विश्वास नहीं करती है. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट दो हज़ार इक्कीस में बोलते हुए, CPIM के मोहम्मद सलीम ने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनाव विभाजनकारी राजनीति का वाटरलू होने जा रहा है. उन्होंने कहा, 'बंगाल में विभाजनकारी राजनीति विफल रही है, इस कारण भाजपा इस खेल से बाहर हो गई है. लेकिन ममता बनर्जी और तथागत रॉय एक ही स्कूल में पढ़े हैं. युवा बेरोजगार हैं लेकिन वो मंदिरों के बारे में बात कर रहे हैं. ' टीएमसी के प्रवक्ता और मिजोरम के पूर्व महाधिवक्ता बिस्वजीत देब ने कहा अल्पसंख्यक सिर्फ मुस्लिम समाज में ही नहीं बल्कि हर वर्ग में हैं. टीएमसी के लिए सभी धर्म एक समान हैं. साथ ही उन्होंने इंडियन सेक्युलर फ्रंट के नेता पीरजादा अब्बास सिद्दीकी पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्होंने चुनाव से ठीक पहले ही पार्टी की शुरुआत क्यों की. साथ ही उन्होंने मुस्लिम समाज के लिए ममता सरकार के कामों का बखान किया. हालांकि, उनके सवाल के जवाब में पीरजादा ने कहा कि अगर सरकार ने हमें मरदसे, स्कूल और अस्पताल दिए होते तो ये नहीं होता. त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने कहा, पश्चिम बंगाल में मुस्लिम सबसे पिछड़े हुए हैं. पार्टियां उन्हें पिछड़ा रखती हैं ताकि उन्हें पूरे समुदाय को संबोधित न करना पड़े. मुस्लिम समुदाय में, महिलाएं विशेष रूप से सबसे पिछड़ी हैं. इंडियन सेक्युलर फ्रंट के नेता पीरजादा अब्बास सिद्दीकी ने कहा कि अल्पसंख्यक हर जगह हैं. उन्होंने कहा कि जहां जहां मुस्लिम लोगों की संख्या ज्यादा है वहां स्कूल, कॉलेज और अस्पताल ज्यादा नहीं हैं. वहां उन्हें सिर्फ वोट बैंक के रूप में देखा जाता है. कलकता यूनिवर्सिटी में भी सिर्फ बीस फीसदी मुस्लिम टीचर्स हैं. ऐसे ही उन्होंने बंगाल की यूनिवर्सिटीज के बारे में बात करते हुए कहा कि हर एक जगह मुस्लिम टीचर्स की संख्या कम है. शिक्षा से मुस्लिम समाज को काफी दूर रखा गया है. उन्होंने चुनाव का रुख क्यों किया इस बात पर उन्होंने कहा कि हम अपने समाज को शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में मदद करने के लिए राजनीति में आए हैं. India Today Conclave East दो हज़ार इक्कीस के इस सेशन में टीएमसी के प्रवक्ता और मिजोरम के पूर्व महाधिवक्ता बिस्वजीत देब, इंडियन सेक्युलर फ्रंट के नेता पीरजादा अब्बास सिद्दीकी, पूर्व संसद सदस्य अभिजीत मुखर्जी, त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय शामिल हुए. थोड़ी देर में CPI नेता मोहम्मद सलीम भी इस सेशन में जुड़ेंगे. गवर्नर ने बताया कि ममता बनर्जी से मुलाकात के दौरान कैसी बातचीत होती है. राज्यपाल जगदीप ने पश्चिम बंगाल के बारे में बात करते हुए कहा कि हम एक ज्वालामुखी पर बैठे हैं, एक भी पखवाड़ा ऐसा नहीं गुजरता जब लोग अवैध बम बनाने के काम के कारण मारे नहीं जाते हों. उन्होंने कहा, 'लोग मुझे एजेंट कहते हैं, हां मैं संविधान का एजेंट हूं और उसकी स्क्रिप्ट पढ़ता हूं. मैंने कभी संविधान की लक्ष्मण रेखा पार नहीं की. ' पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा, 'मुझे राज्य या केंद्र सरकार द्वारा कोई विशेष काम करने के लिए निर्देशित नहीं किया जा सकता है. ' उन्होंने कहा, 'मेरी शपथ क्या कहती है? उसमें मैंने कहा था कि मैं भारतीय संविधान की रक्षा और बचाव करूंगा. साथ ही उसमें यह भी कहा था कि, मैं पश्चिम बंगाल के लोगों की सेवा करूंगा. आप एक राज्यपाल से क्या उम्मीद करते हैं? ' उनकी भूमिका के सवाल, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा, 'राज्यपाल एक आसान पंचिंग बैग होता है. यदि राज्य में केंद्र से अलग पार्टी की सरकार हो तो आरोप लगाना बेहद आसान होता है. मैं इसके बारे में बहुत स्पष्ट हूं, मैं केवल भारतीय संविधान से मार्गदर्शन लेता हूं. ' उन्होंने कहा कि जिस दिन मीडिया डर जाएगा उस दिन के लिए डर लगता है. उन्होंने कहा कि मुझे कोई भी रिपोर्ट नहीं मिल पाती. सभी रिपोर्ट्स को ममता सरकार द्वारा रोक दिया जाता है. मैंने कई बार राज्य से जुड़े मामलों को लेकर अफसरों से रिपोर्ट मांगी लेकिन नहीं मिली. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट कार्यक्रम में जगदीप धनखड़ ने कहा कि उन्होंने कहा कि बंगाल में इतना डर है कि लोग डर के कारण अपने डर की चर्चा नहीं करते. उन्होंने कहा कि अगर ये डर रहेगा तो संविधान का क्या मतलब है, कानून का क्या मतलब है. इस डर के बीच स्वच्छ तरीके से चुनाव कैसे हो सकते हैं. उन्होंने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाते हुए कहा कि यहां सरकारी अफसर राजनीति के काम में लगे हुए हैं. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट कार्यक्रम की शुरुआत बॉलीवुड के दिग्गज सिंगर पापोन के सुरीले म्यूजिक के साथ हुई. इस दौरान उन्होंने फोक म्यूजिक की यात्रा और उसकी खूबसूरती के बारे में चर्चा की. इस दौरान उन्होंने कई भाषाओं में गाने भी गाए. India Today Conclave East दो हज़ार इक्कीस Live देखने के लिए यहां क्लिक करें. कला, संस्कृति और आर्थिक तरक्की पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन बिबेक देबरॉय, फेसबुक इंडिया के वाइस प्रेसिंडेंट अजीत मोहन, हेमंत कनोरिया, चेयरमैन , हर्षवर्धन नियोतिया, प्रेसिडेंट , बंधन बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर चंद्रशेखर घोष, लक्ष्मी टी के मैनेजिंग डायरेक्टर रुद्र चटर्जी, मशहूर गायिका उषा उत्थुप, फिल्म निर्देशक श्रीजीत मुखर्जी, एक्टर सब्यसाची चक्रवर्ती, प्रोसेनजीत चटर्जी और तोता रॉय चौधरी शिरकत करेंगे. पूर्व आर्मी चीफ जनरल बिक्रम सिंह , बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में हिस्सा ले चुके ले. कर्नल सज्जाद जहीर, एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर की जंग में हिस्सा ले चुके कर्नल अशोक कुमार तारा, भारतीय सेना के पूर्व चीफ जनरल शंकर रॉय चौधुरी भी कॉन्क्लेव का हिस्सा होंगे. बंगाल और असम विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी पश्चिम बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय, केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, टीएमसी के राज्यसभा सांसद डॉ. शांतनु सेन, टीएमसी सांसद नुसरत जहां, पश्चिम बंगाल भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष अग्निमित्रा पॉल, बीजेपी सांसद स्वपन दासगुप्ता, असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता और लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई, CPI के महासचिव सीताराम येचुरी, CPI नेता मोहम्मद सलीम, कांग्रेस विधायक निनॉन्ग एरिंग, भाजपा सांसद तापिर गाओ, सीपीआई नेता डॉ. फवाद हलीम, पूर्व संसद सदस्य अभिजीत मुखर्जी, त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, लोकसभा सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार, टीएमसी के प्रवक्ता और मिजोरम के पूर्व महाधिवक्ता बिस्वजीत देब, इंडियन सेक्युलर फ्रंट के नेता पीरजादा अब्बास सिद्दीकी, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा, इतिहासकार और पूर्व सांसद डॉ. सुगाता बोस अपनी बात रखेंगे. कार्यक्रम की शुरुआत बॉलीवुड के दिग्गज सिंगर पापोन के सुरीले म्यूजिक के साथ होगी. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के महामंच पर ऐन चुनाव से पहले होगी बंगाल की कला संस्कृति और विरासत से लेकर आर्थिक तरक्की तक पर गहरी चर्चा. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव ईस्ट का ये सिलसिला दो हज़ार सत्रह में शुरू हुआ था और इस बार इसका चौथा आयोजन ग्यारह और बारह फरवरी को हो रहा है. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के चौथे संस्करण का आयोजन बंगाल में होने जा रहा है. पश्चिम बंगाल के आईटीसी रॉयल बंगाल में सजने वाले इस मंच पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई बड़ी हस्तियां नजर आएंगी. विचार-मंथन के दृष्टिकोण से देश के सबसे बड़े मंच पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्यपाल जगदीप धनखड़, राज्यसभा सांसद और भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा, असम के कैबिनेट मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, टीएमसी सांसद सांसद डेरेक ओ ब्रायन सहित कई शीर्ष राजनेताओं के साथ ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा होगी. बंगाल और असम में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ये चर्चा बेहद अहम मानी जा रही है. |
संचार विकारों अक्सर दर्द की उपस्थिति के साथ कर रहे। सबसे पहले, यह मामलों में होता है, जहां रक्त परिसंचरण, जो विशेष रूप से स्पष्ट है, जब घूमना मांसपेशियों काम के अंग की मांसपेशियों के उल्लंघन के कारण विकासशील ischemia। निचले पैर संचलन में दर्द उल्लंघन बाकी की अवधि में होते व्यक्त की है। दर्द होने वाली या बुरा चलते समय कहा जाता था आंतरायिक खंजता।
आंतरायिक खंजता - की एक प्रमुख लक्षण परिधीय संचार विकारों। चलने के दौरान वहाँ पैर में दर्द है। दर्द अलग समय अंतराल पर दिखाई देता है, जो की अवधि के रोग की गंभीरता पर निर्भर करता है। निचले पैर में दर्द अक्सर कूल्हे और पैर सहित पूरे निचले अंग, करने के लिए लागू किया जाता है।
निचले पैर में दर्द जब मांसपेशियों में झुनझुनी, थकान, की अप्रिय अनुभूतियां के साथ चलते पैर का अकड़ना। दर्द अक्सर इतनी गंभीर है कि चलने के दौरान रोगी रोकने के लिए मजबूर किया जाता है। बाकी दर्द का एक संक्षिप्त समाप्ति की ओर जाता है। एक बार फिर, रोगी घूमना, दर्द शुरू शुरू होता है। बढ़ी हुई दर्द ठंड का कारण बनता है। कुछ हद तक, रोग की गंभीरता केवल आधार पर मूल्यांकन किया जा सकता है दर्द कई चरणों के माध्यम से होता है। वहाँ की पैदल दूरी पर अपने आगे के नवीकरण के बाद से पहले की शुरुआत के बाद दर्द की आम तौर पर पहला हमला। इसलिए, रोगी धीरे-धीरे खुराक चलने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
गंभीर मामलों में, निचले पैर में दर्द, बाकी पर नहीं रुकती प्रकृति में ऐंठन है, यह बहुत तीव्र और विशेष रूप से दर्दनाक जब नीचे झूठ बोल रही है। पाई, रोगी की सामान्य हालत परेशान अनिद्रा विकसित करता है। ये दर्द सबसे अधिक बार गंभीर ऊतक ischemia का एक परिणाम के रूप में होते हैं पौष्टिकता अल्सर और अवसाद में होते हैं। ऐसे मामलों में, निचले पैर में दर्द स्थायी है, गर्मी में परिलक्षित और नीचे sveshivanii पैर के साथ कम हो जाती है है। अवसाद के मामले में उपचार necrotic ऊतक और अपने किसी अंग का अंतिम विच्छेदन के छांटना के साथ तुरंत बाहर किया जाना चाहिए,।
एक गले में पिंडली होने के अलावा संचार विकारों के लिए मानदंडों को संदर्भित करता है के पीलापन झिल्ली, जो और अधिक स्पष्ट जब उठाया है। जब पैर झूलते त्वचा cyanotic लाल रंग हो जाता है। विभिन्न अंग पदों में रंगाई लालिमा और पीलापन लिए नीलिमा से भिन्न होता है। टटोलने का कार्य परिभाषित कमजोर या वापस धड़कन पाद धमनी और पीछे peroneal धमनी की कुल अभाव। एक ही समय में लहर की उपस्थिति धमनियों का संकुचन की संभावना, उंगलियों की धमनियों और यहां तक कि अवसाद की संभावना को बाहर नहीं है। arteriography, अल्ट्रासाउंड डॉप्लरः संचार विकारों जांच के वाद्य तरीकों से लागू होते हैं पहचान करने के लिए।
बुजुर्गों में निचले अंगों के संचार विकारों के कारण आमतौर पर atherosclerosis है। युवा लोगों और मध्यम आयु मुख्य कारण ऊतक ischemia thromboangiitis obliterans, भी रूप में जाना जाता है रोग Winiwarter बर्गर। और शायद इन बीमारियों का एक संयोजन।
atherosclerosis दर्द में टिबिया में इस रोग के अन्य लक्षणों के साथ। मरीजों को अक्सर दिल में atherosclerotic निचोड़ दर्द, सांस की तकलीफ, अस्थिर रक्तचाप, की वजह से सिर दर्द की शिकायत करते हैं स्मृति हानि, नींद। atherosclerosis hypercholesterolemia, अक्सर मधुमेह के लक्षण, कोरोनरी हृदय रोग, रक्त में लिपिड के स्तर, सच रक्तचाप, उदर महाधमनी में वृद्धि में वृद्धि के द्वारा निर्धारित होता है। बारे में Buerger रोग शो धमनियों और नसों में सूजन चिह्नित।
| संचार विकारों अक्सर दर्द की उपस्थिति के साथ कर रहे। सबसे पहले, यह मामलों में होता है, जहां रक्त परिसंचरण, जो विशेष रूप से स्पष्ट है, जब घूमना मांसपेशियों काम के अंग की मांसपेशियों के उल्लंघन के कारण विकासशील ischemia। निचले पैर संचलन में दर्द उल्लंघन बाकी की अवधि में होते व्यक्त की है। दर्द होने वाली या बुरा चलते समय कहा जाता था आंतरायिक खंजता। आंतरायिक खंजता - की एक प्रमुख लक्षण परिधीय संचार विकारों। चलने के दौरान वहाँ पैर में दर्द है। दर्द अलग समय अंतराल पर दिखाई देता है, जो की अवधि के रोग की गंभीरता पर निर्भर करता है। निचले पैर में दर्द अक्सर कूल्हे और पैर सहित पूरे निचले अंग, करने के लिए लागू किया जाता है। निचले पैर में दर्द जब मांसपेशियों में झुनझुनी, थकान, की अप्रिय अनुभूतियां के साथ चलते पैर का अकड़ना। दर्द अक्सर इतनी गंभीर है कि चलने के दौरान रोगी रोकने के लिए मजबूर किया जाता है। बाकी दर्द का एक संक्षिप्त समाप्ति की ओर जाता है। एक बार फिर, रोगी घूमना, दर्द शुरू शुरू होता है। बढ़ी हुई दर्द ठंड का कारण बनता है। कुछ हद तक, रोग की गंभीरता केवल आधार पर मूल्यांकन किया जा सकता है दर्द कई चरणों के माध्यम से होता है। वहाँ की पैदल दूरी पर अपने आगे के नवीकरण के बाद से पहले की शुरुआत के बाद दर्द की आम तौर पर पहला हमला। इसलिए, रोगी धीरे-धीरे खुराक चलने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। गंभीर मामलों में, निचले पैर में दर्द, बाकी पर नहीं रुकती प्रकृति में ऐंठन है, यह बहुत तीव्र और विशेष रूप से दर्दनाक जब नीचे झूठ बोल रही है। पाई, रोगी की सामान्य हालत परेशान अनिद्रा विकसित करता है। ये दर्द सबसे अधिक बार गंभीर ऊतक ischemia का एक परिणाम के रूप में होते हैं पौष्टिकता अल्सर और अवसाद में होते हैं। ऐसे मामलों में, निचले पैर में दर्द स्थायी है, गर्मी में परिलक्षित और नीचे sveshivanii पैर के साथ कम हो जाती है है। अवसाद के मामले में उपचार necrotic ऊतक और अपने किसी अंग का अंतिम विच्छेदन के छांटना के साथ तुरंत बाहर किया जाना चाहिए,। एक गले में पिंडली होने के अलावा संचार विकारों के लिए मानदंडों को संदर्भित करता है के पीलापन झिल्ली, जो और अधिक स्पष्ट जब उठाया है। जब पैर झूलते त्वचा cyanotic लाल रंग हो जाता है। विभिन्न अंग पदों में रंगाई लालिमा और पीलापन लिए नीलिमा से भिन्न होता है। टटोलने का कार्य परिभाषित कमजोर या वापस धड़कन पाद धमनी और पीछे peroneal धमनी की कुल अभाव। एक ही समय में लहर की उपस्थिति धमनियों का संकुचन की संभावना, उंगलियों की धमनियों और यहां तक कि अवसाद की संभावना को बाहर नहीं है। arteriography, अल्ट्रासाउंड डॉप्लरः संचार विकारों जांच के वाद्य तरीकों से लागू होते हैं पहचान करने के लिए। बुजुर्गों में निचले अंगों के संचार विकारों के कारण आमतौर पर atherosclerosis है। युवा लोगों और मध्यम आयु मुख्य कारण ऊतक ischemia thromboangiitis obliterans, भी रूप में जाना जाता है रोग Winiwarter बर्गर। और शायद इन बीमारियों का एक संयोजन। atherosclerosis दर्द में टिबिया में इस रोग के अन्य लक्षणों के साथ। मरीजों को अक्सर दिल में atherosclerotic निचोड़ दर्द, सांस की तकलीफ, अस्थिर रक्तचाप, की वजह से सिर दर्द की शिकायत करते हैं स्मृति हानि, नींद। atherosclerosis hypercholesterolemia, अक्सर मधुमेह के लक्षण, कोरोनरी हृदय रोग, रक्त में लिपिड के स्तर, सच रक्तचाप, उदर महाधमनी में वृद्धि में वृद्धि के द्वारा निर्धारित होता है। बारे में Buerger रोग शो धमनियों और नसों में सूजन चिह्नित। |
सुधा बहुत दिनों से राजेश्वर में एक प्यारा सा बदलाव देख रही थी. धीरगंभीर राजेश्वर आजकल अनायास मुसकराने लगते, कपड़ों पर भी वे विशेष ध्यान देते हैं. पहले तो एक ड्रैस को वे 2 व 3 दिनों तक औफिस में चला लेते थे, पर अब रोज नई ड्रैस पहनते हैं. हमेशा अखबार या टीवी की खबरों में डूबे रहने वाले राजेश्वर अब बेटे द्वारा गिफ्ट किया सारेगामा का कारवां में पुराने गाने सुनने लगे थे.
सुधा भी सारी जिम्मेदारियां खत्म होने पर राहत महसूस कर रही थी. वह सोच रही थी राजेश्वर में भी बदलाव का यही कारण था. सुधा को एक ही दुख था कि राजेश्वर उस से रूठेरूठे रहते हैं. वह जानती थी कि इस में सारी गलती पति की नहीं है पर वह भी तो उस समय पूरे घर की जिम्मेदारियों में डूब कर राजेश्वर के मीठे प्रस्तावों को अनदेखा कर दिया करती थी.
राजेश्वर के औफिस जाने के बाद सुधा चाय का कप लिए सोफे पर आ बैठी. काम वाली बाई को 11 बजे आना था. चाय पीतेपीते सुधा अतीत की लंबी गलियों में निकल पड़ी.
2 हवेलियां मिली थीं. एक भाई, 2 बहनें, मां, भरापूरा परिवार. वे बस, घरेलू लड़की जो घरपरिवार को संभालने और बांध के रखने में सक्षम हो, चाहते थे. दानदहेज की कोई डिमांड नहीं थी.
| सुधा बहुत दिनों से राजेश्वर में एक प्यारा सा बदलाव देख रही थी. धीरगंभीर राजेश्वर आजकल अनायास मुसकराने लगते, कपड़ों पर भी वे विशेष ध्यान देते हैं. पहले तो एक ड्रैस को वे दो व तीन दिनों तक औफिस में चला लेते थे, पर अब रोज नई ड्रैस पहनते हैं. हमेशा अखबार या टीवी की खबरों में डूबे रहने वाले राजेश्वर अब बेटे द्वारा गिफ्ट किया सारेगामा का कारवां में पुराने गाने सुनने लगे थे. सुधा भी सारी जिम्मेदारियां खत्म होने पर राहत महसूस कर रही थी. वह सोच रही थी राजेश्वर में भी बदलाव का यही कारण था. सुधा को एक ही दुख था कि राजेश्वर उस से रूठेरूठे रहते हैं. वह जानती थी कि इस में सारी गलती पति की नहीं है पर वह भी तो उस समय पूरे घर की जिम्मेदारियों में डूब कर राजेश्वर के मीठे प्रस्तावों को अनदेखा कर दिया करती थी. राजेश्वर के औफिस जाने के बाद सुधा चाय का कप लिए सोफे पर आ बैठी. काम वाली बाई को ग्यारह बजे आना था. चाय पीतेपीते सुधा अतीत की लंबी गलियों में निकल पड़ी. दो हवेलियां मिली थीं. एक भाई, दो बहनें, मां, भरापूरा परिवार. वे बस, घरेलू लड़की जो घरपरिवार को संभालने और बांध के रखने में सक्षम हो, चाहते थे. दानदहेज की कोई डिमांड नहीं थी. |
नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली से एक चौंकाने वाला मामले सामने आया है। राजधानी दिल्ली की नारायणा रेड लाइट पर सिविल डिफेंस के कुछ लोगों ने मास्क न लगाने पर दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल को घेरकर जमकर पीटा। इस घटना का वीडियो स्थानीय लोगों को अपने मोबाइल में कैद कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस का ये जवान ड्यूटी पूरी करने के बाद अपने घर जा रहा था, रेड लाइट पर सिविल डिफेंस के एक कर्मचारी ने इसकी बाइक की चाबी निकाल ली, जिसका विरोध करने पर सिविल डिफेंस के अन्य कर्मचारियों ने मिलकर दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल की पिटाई कर दी।
दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल नरेश ने अपनी शिकायत में बताया है कि वो बुधवार रात सादे कपड़ों में बाइक से अपने घर जा रहा था। तभी नारायणा रेड लाइट पर उसके साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया। कांस्टेबल नरेश ने नारायणा पुलिस थाने में अपनी शिकायत दर्ज करवाई है। दिल्ली पुलिस ने कांस्टेबल नरेश का डीडीयू अस्पताल में मेडिकल करवाया है और इस मामले में सिविल डिफेंस के लोगों के खिलाफ IPC की धारा 323 और 341 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
| नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली से एक चौंकाने वाला मामले सामने आया है। राजधानी दिल्ली की नारायणा रेड लाइट पर सिविल डिफेंस के कुछ लोगों ने मास्क न लगाने पर दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल को घेरकर जमकर पीटा। इस घटना का वीडियो स्थानीय लोगों को अपने मोबाइल में कैद कर लिया, जो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस का ये जवान ड्यूटी पूरी करने के बाद अपने घर जा रहा था, रेड लाइट पर सिविल डिफेंस के एक कर्मचारी ने इसकी बाइक की चाबी निकाल ली, जिसका विरोध करने पर सिविल डिफेंस के अन्य कर्मचारियों ने मिलकर दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल की पिटाई कर दी। दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल नरेश ने अपनी शिकायत में बताया है कि वो बुधवार रात सादे कपड़ों में बाइक से अपने घर जा रहा था। तभी नारायणा रेड लाइट पर उसके साथ मारपीट की घटना को अंजाम दिया गया। कांस्टेबल नरेश ने नारायणा पुलिस थाने में अपनी शिकायत दर्ज करवाई है। दिल्ली पुलिस ने कांस्टेबल नरेश का डीडीयू अस्पताल में मेडिकल करवाया है और इस मामले में सिविल डिफेंस के लोगों के खिलाफ IPC की धारा तीन सौ तेईस और तीन सौ इकतालीस के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। |
झारखंड की राजधानी रांची में एक मामले की जांच के लिए गांव पहुंची पुलिस को ग्रामीणों ने बंधक बना लिया. दरअसल एक उग्रवादी की मोबाइल लोकेशन वहां मिलने के बाद नामकुम थाने की पुलिस खूंटी में जांच करने पहुंची थी जहां ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया.
सूचना मिलते ही खूंटी और कर्रा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची. फिर पंचायत प्रतिनिधियों और वहां के लोगों से बात की. काफी समझाने-बुझाने के बाद ग्रामीणों ने पुलिस टीम को छोड़ दिया.
रिपोर्ट के मुताबिक नामकुम पुलिस को एक उग्रवादी के मोबाइल का लोकेशन डुमरदगा में मिला था. इसके बाद पुलिस की टीम सिविल ड्रेस में वहां पहुंची थी. टीम में एसआई रवि केशरी, बबलू कुमार और सुधांशु कुमार शामिल थे. ग्रामीणों के मुताबिक, पुलिस सिविल ड्रेस में आई और एक घर में घुसकर महिला से मोबाइल छीनने लगी. यह देख वहां मौजूद लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया.
इसी बीच पुलिस वाले वहां से भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया. सूचना मिलते ही खूंटी और कर्रा पुलिस मौके पर पहुंची. इसके बाद पुलिस की टीम ने ग्रामीणों को समझाया. फिर ग्राम सभा के रजिस्टर पर ग्रामीणों ने पुलिस के आने का कारण लिखवाया और हस्ताक्षर कराने के बाद उन्हें छोड़ दिया.
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस टीम बिना किसी सूचना के एक घर में घुसकर महिला से मोबाइल लेने लगी. साथ ही उसके साथ दुर्व्यवहार किया. गांव वालों ने पुलिस से जब पूछताछ की, तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए. इस वजह से ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया.
वहीं, थाना प्रभारी और प्रशिक्षु आईपीएस रित्विक श्रीवास्तव ने बताया कि बंधक बनने वाली कोई घटना नहीं हुई है. पुलिस और गांव वालों में थोड़ी बकझक हुई थी.
मामले में एसपी अमन कुमार ने बताया कि रांची पुलिस के साथ खूंटी पुलिस डुमरदगा गांव हत्या के आरोपी की तलाश में गई थी. ग्रामीणों को पता नहीं चला कि सिविल ड्रेस में पुलिस है. इस वजह से थोड़ा विवाद हो गया था. बाद में और पुलिस बल को भेजकर मामला शांत किया गया. हालांकि, ग्रामीणों से बातचीत के बाद पुलिस टीम वापस लौट आई.
| झारखंड की राजधानी रांची में एक मामले की जांच के लिए गांव पहुंची पुलिस को ग्रामीणों ने बंधक बना लिया. दरअसल एक उग्रवादी की मोबाइल लोकेशन वहां मिलने के बाद नामकुम थाने की पुलिस खूंटी में जांच करने पहुंची थी जहां ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया. सूचना मिलते ही खूंटी और कर्रा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची. फिर पंचायत प्रतिनिधियों और वहां के लोगों से बात की. काफी समझाने-बुझाने के बाद ग्रामीणों ने पुलिस टीम को छोड़ दिया. रिपोर्ट के मुताबिक नामकुम पुलिस को एक उग्रवादी के मोबाइल का लोकेशन डुमरदगा में मिला था. इसके बाद पुलिस की टीम सिविल ड्रेस में वहां पहुंची थी. टीम में एसआई रवि केशरी, बबलू कुमार और सुधांशु कुमार शामिल थे. ग्रामीणों के मुताबिक, पुलिस सिविल ड्रेस में आई और एक घर में घुसकर महिला से मोबाइल छीनने लगी. यह देख वहां मौजूद लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया. इसी बीच पुलिस वाले वहां से भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन ग्रामीणों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया. सूचना मिलते ही खूंटी और कर्रा पुलिस मौके पर पहुंची. इसके बाद पुलिस की टीम ने ग्रामीणों को समझाया. फिर ग्राम सभा के रजिस्टर पर ग्रामीणों ने पुलिस के आने का कारण लिखवाया और हस्ताक्षर कराने के बाद उन्हें छोड़ दिया. ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस टीम बिना किसी सूचना के एक घर में घुसकर महिला से मोबाइल लेने लगी. साथ ही उसके साथ दुर्व्यवहार किया. गांव वालों ने पुलिस से जब पूछताछ की, तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए. इस वजह से ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया. वहीं, थाना प्रभारी और प्रशिक्षु आईपीएस रित्विक श्रीवास्तव ने बताया कि बंधक बनने वाली कोई घटना नहीं हुई है. पुलिस और गांव वालों में थोड़ी बकझक हुई थी. मामले में एसपी अमन कुमार ने बताया कि रांची पुलिस के साथ खूंटी पुलिस डुमरदगा गांव हत्या के आरोपी की तलाश में गई थी. ग्रामीणों को पता नहीं चला कि सिविल ड्रेस में पुलिस है. इस वजह से थोड़ा विवाद हो गया था. बाद में और पुलिस बल को भेजकर मामला शांत किया गया. हालांकि, ग्रामीणों से बातचीत के बाद पुलिस टीम वापस लौट आई. |
नवंबर 1885 में कलकत्ता के तट से जब एसएस इंडस जहाज ने यात्रा शुरू की तो उसमें नील और भारतीय चाय पत्तियों के गट्ठर भरे थे. लेकिन तब इस जहाज में ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी के कुछ विरले मूर्तिशिल्प का खजाना भी भरा था, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पहले प्रमुख सर एलेक्जेंडर कनिंघम ने खुद जतन से जुटाया था. मध्य प्रदेश के एक बौद्ध मठ से कई दौर की खुदाई के बाद कनिंघम ने भरहुत मूर्तिशिल्प प्राप्त किए थे और उन्हें एक प्रदर्शनी के लिए लंदन ले जाया जा रहा था. करीब 3,462 टन वजनी यह जहाज 8 नवंबर 1885 को मद्रास से दक्षिण की ओर कोलंबो के रास्ते में डूब गया. जहाज में अमूल्य मूर्तिशिल्पों के अलावा कनिंघम का प्राचीन मुद्राओं का निजी संग्रह भी था.
हादसे के करीब सवा सौ साल बाद भारत और श्रीलंका के भूगर्भशास्त्रियों ने समुद्र के तल में छिपे उस खजाने को निकाल लाने के लिए साझा अभियान शुरू करने का फैसला किया है. असल में श्रीलंका की गाले स्थित केंद्रीय सांस्कृतिक कोष की समुद्री भूगर्भ इकाई (एमएयू) ने देश के उत्तरी तट की खोजबीन शुरू की तब जाकर यह संभव हो पाया. अगस्त 2013 में समुद्री भूगर्भ अनुसंधान अधिकारी एसएम नंददास की अगुआई में एक टीम ने वह जगह खोज निकाली, जहां एसएस इंडस डूबा था. यह जगह मुलैतिवु के नजदीक स्थित है, जहां एक समय एलटीटीई का राज हुआ करता था.
समुद्र में डूबे मूर्तिशिल्प को निकालने के लिए श्रीलंका के साथ साझा अभियान शुरू करने का समझौता हुआ है. एएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक बीआर मणि कहते हैं, 'श्रीलंका के अधिकारियों ने एसएस इंडस के मलबे का पता चल जाने के बारे में हमें लिखा है. हमें उम्मीद है कि मूर्तिशिल्प अंततः हमें हासिल हो जाएंगे. समुद्र में खुदाई के साझा अभियान के लिए सहमति-पत्र तैयार किया जा रहा है और विदेश मंत्रालय की मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाने की उम्मीद है. '
पिछली सदी में एसएस इंडस की तलाश त्रिंकोमाली के आसपास ही होती रही है. माना जाता रहा है कि जहाज त्रिंकोमाली के उत्तर में 40 मीटर नीचे समुद्र तल में डूबा हुआ है. लेकिन 2009 में गृहयुद्ध खत्म होने के बाद श्रीलंका के अधिकारियों ने मुलैतिवु के आसपास खोजबीन शुरू की, जहां पहले एलटीटीई के कब्जे की वजह से जाना संभव नहीं था. जहाज की तलाश पर नंददास की रिपोर्ट ने जहाज का मलबा त्रिंकोमाली से 50 मील उत्तर में समुद्र की तलहटी में होने के अनुमान को खारिज कर दिया. साथ ही तलाश में मुलैतिवु का खास तौर पर जिक्र भी किया.
भरहुत मध्य प्रदेश के सतना जिले का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है. भरहुत स्तूप के खंडहर आज भी मौजूद हैं. मान्यता है कि इसे सम्राट अशोक ने बनवाया था. इस स्तूप को ईसा पूर्व तीसरी सदी का आंका जाता है. भरहुत में बौद्धकला के प्रारंभिक काल का नमूना है जब भगवान बुद्ध के प्रतीक के रूप में कमल का फूल और धर्मचक्र, चरण, बोधि वृक्ष और खाली सिंहासन बनाया जाता था. सांची के स्तूप और अजंता के भित्तिचित्रों से भी प्राचीन भरहुत में मूर्तियों की बगल में उनके वर्णन शिलालेख में भी मौजूद हैं.
कनिंघम ने पहले भरहुत का दौरा 1873 में किया था, लेकिन इसकी खुदाई अगले साल की. वे कई आकृतियों और मूर्तिशिल्पों को अपने साथ कलकत्ता ले गए, जहां उन्हें भारतीय संग्रहालय में रखा गया. भरहुत मंदिर परिसर के बाकी खंडहरों के बारे में अधिक जानकारी मौजूद नहीं है, वहां पहले बुद्ध की एक विशाल मूर्ति, संस्कृत के कुछ शिलालेख और देवी-देवताओं की मूर्तियां भी थीं. माना जाता है कि इनमें से अनेक कलाकृतियां एसएस इंडस में लदी थीं, जो डूब गईं.
| नवंबर एक हज़ार आठ सौ पचासी में कलकत्ता के तट से जब एसएस इंडस जहाज ने यात्रा शुरू की तो उसमें नील और भारतीय चाय पत्तियों के गट्ठर भरे थे. लेकिन तब इस जहाज में ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी के कुछ विरले मूर्तिशिल्प का खजाना भी भरा था, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पहले प्रमुख सर एलेक्जेंडर कनिंघम ने खुद जतन से जुटाया था. मध्य प्रदेश के एक बौद्ध मठ से कई दौर की खुदाई के बाद कनिंघम ने भरहुत मूर्तिशिल्प प्राप्त किए थे और उन्हें एक प्रदर्शनी के लिए लंदन ले जाया जा रहा था. करीब तीन,चार सौ बासठ टन वजनी यह जहाज आठ नवंबर एक हज़ार आठ सौ पचासी को मद्रास से दक्षिण की ओर कोलंबो के रास्ते में डूब गया. जहाज में अमूल्य मूर्तिशिल्पों के अलावा कनिंघम का प्राचीन मुद्राओं का निजी संग्रह भी था. हादसे के करीब सवा सौ साल बाद भारत और श्रीलंका के भूगर्भशास्त्रियों ने समुद्र के तल में छिपे उस खजाने को निकाल लाने के लिए साझा अभियान शुरू करने का फैसला किया है. असल में श्रीलंका की गाले स्थित केंद्रीय सांस्कृतिक कोष की समुद्री भूगर्भ इकाई ने देश के उत्तरी तट की खोजबीन शुरू की तब जाकर यह संभव हो पाया. अगस्त दो हज़ार तेरह में समुद्री भूगर्भ अनुसंधान अधिकारी एसएम नंददास की अगुआई में एक टीम ने वह जगह खोज निकाली, जहां एसएस इंडस डूबा था. यह जगह मुलैतिवु के नजदीक स्थित है, जहां एक समय एलटीटीई का राज हुआ करता था. समुद्र में डूबे मूर्तिशिल्प को निकालने के लिए श्रीलंका के साथ साझा अभियान शुरू करने का समझौता हुआ है. एएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक बीआर मणि कहते हैं, 'श्रीलंका के अधिकारियों ने एसएस इंडस के मलबे का पता चल जाने के बारे में हमें लिखा है. हमें उम्मीद है कि मूर्तिशिल्प अंततः हमें हासिल हो जाएंगे. समुद्र में खुदाई के साझा अभियान के लिए सहमति-पत्र तैयार किया जा रहा है और विदेश मंत्रालय की मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाने की उम्मीद है. ' पिछली सदी में एसएस इंडस की तलाश त्रिंकोमाली के आसपास ही होती रही है. माना जाता रहा है कि जहाज त्रिंकोमाली के उत्तर में चालीस मीटर नीचे समुद्र तल में डूबा हुआ है. लेकिन दो हज़ार नौ में गृहयुद्ध खत्म होने के बाद श्रीलंका के अधिकारियों ने मुलैतिवु के आसपास खोजबीन शुरू की, जहां पहले एलटीटीई के कब्जे की वजह से जाना संभव नहीं था. जहाज की तलाश पर नंददास की रिपोर्ट ने जहाज का मलबा त्रिंकोमाली से पचास मील उत्तर में समुद्र की तलहटी में होने के अनुमान को खारिज कर दिया. साथ ही तलाश में मुलैतिवु का खास तौर पर जिक्र भी किया. भरहुत मध्य प्रदेश के सतना जिले का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है. भरहुत स्तूप के खंडहर आज भी मौजूद हैं. मान्यता है कि इसे सम्राट अशोक ने बनवाया था. इस स्तूप को ईसा पूर्व तीसरी सदी का आंका जाता है. भरहुत में बौद्धकला के प्रारंभिक काल का नमूना है जब भगवान बुद्ध के प्रतीक के रूप में कमल का फूल और धर्मचक्र, चरण, बोधि वृक्ष और खाली सिंहासन बनाया जाता था. सांची के स्तूप और अजंता के भित्तिचित्रों से भी प्राचीन भरहुत में मूर्तियों की बगल में उनके वर्णन शिलालेख में भी मौजूद हैं. कनिंघम ने पहले भरहुत का दौरा एक हज़ार आठ सौ तिहत्तर में किया था, लेकिन इसकी खुदाई अगले साल की. वे कई आकृतियों और मूर्तिशिल्पों को अपने साथ कलकत्ता ले गए, जहां उन्हें भारतीय संग्रहालय में रखा गया. भरहुत मंदिर परिसर के बाकी खंडहरों के बारे में अधिक जानकारी मौजूद नहीं है, वहां पहले बुद्ध की एक विशाल मूर्ति, संस्कृत के कुछ शिलालेख और देवी-देवताओं की मूर्तियां भी थीं. माना जाता है कि इनमें से अनेक कलाकृतियां एसएस इंडस में लदी थीं, जो डूब गईं. |
चर्चा में क्यों?
10 जून, 2022 को ओडिशा के जगन्नाथपुरी में आयोजित एक कार्यक्रम में झारखंड राज्य के सरायकेला छऊ नृत्य शैली का मुखौटा तैयार करने वाले वरीय कलाकार गुरु सुशांत महापात्र को 'गुरु ब्रह्मा अवार्ड' दिया गया।
- ओडिशा के कल्चरल डेवलपमेंट फाउंडेशन की ओर से आयोजित इंटरनेशनल मेगा डांस फेस्टिवल 'अप्सरा-2022' में हाईटेक ग्रुप के चेयरमैन डॉ. तिरुपति पाणिग्रही ने अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति-पत्र देकर महापात्र को सम्मानित किया।
- गुरु सुशांत महापात्र द्वारा बनाए गए छऊ मुखौटे की प्रदर्शनी देश-विदेश में लगाई जा चुकी है, उनके द्वारा तैयार किये गए सरायकेला शैली छऊ मुखौटे का प्रदर्शन सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि अमेरिका के न्यूयॉर्क, बर्लिन, वियाना के अलावा देश की राजधानी दिल्ली सहित मुंबई, कोलकाता एवं अन्य बड़े शहरों मे किया जा चुका है।
- गुरु सुशांत महापात्र द्वारा निर्मित मुखौटा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी भेंट किया जा चुका है।
- विदित है कि वर्ष 1925 में उनके बड़े पिताजी प्रशन्न कुमार महापात्र ने सरायकेला शैली छऊ के लिये पहला आधुनिक मुखौटा तैयार किया था।
- सुशांत महापात्र ने 8 वर्ष की उम्र में ही अपने बड़े पिताजी (गुरु प्रशन्न महापात्र) की प्रेरणा से मुखौटा का निर्माण शुरू किया था। इसके पश्चात् इस मुखौटा का प्रचलन बढ़ने लगा और अब यही मुखौटा की सरायकेला शैली छऊ नृत्य की पहचान बन गई है।
| चर्चा में क्यों? दस जून, दो हज़ार बाईस को ओडिशा के जगन्नाथपुरी में आयोजित एक कार्यक्रम में झारखंड राज्य के सरायकेला छऊ नृत्य शैली का मुखौटा तैयार करने वाले वरीय कलाकार गुरु सुशांत महापात्र को 'गुरु ब्रह्मा अवार्ड' दिया गया। - ओडिशा के कल्चरल डेवलपमेंट फाउंडेशन की ओर से आयोजित इंटरनेशनल मेगा डांस फेस्टिवल 'अप्सरा-दो हज़ार बाईस' में हाईटेक ग्रुप के चेयरमैन डॉ. तिरुपति पाणिग्रही ने अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति-पत्र देकर महापात्र को सम्मानित किया। - गुरु सुशांत महापात्र द्वारा बनाए गए छऊ मुखौटे की प्रदर्शनी देश-विदेश में लगाई जा चुकी है, उनके द्वारा तैयार किये गए सरायकेला शैली छऊ मुखौटे का प्रदर्शन सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि अमेरिका के न्यूयॉर्क, बर्लिन, वियाना के अलावा देश की राजधानी दिल्ली सहित मुंबई, कोलकाता एवं अन्य बड़े शहरों मे किया जा चुका है। - गुरु सुशांत महापात्र द्वारा निर्मित मुखौटा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी भेंट किया जा चुका है। - विदित है कि वर्ष एक हज़ार नौ सौ पच्चीस में उनके बड़े पिताजी प्रशन्न कुमार महापात्र ने सरायकेला शैली छऊ के लिये पहला आधुनिक मुखौटा तैयार किया था। - सुशांत महापात्र ने आठ वर्ष की उम्र में ही अपने बड़े पिताजी की प्रेरणा से मुखौटा का निर्माण शुरू किया था। इसके पश्चात् इस मुखौटा का प्रचलन बढ़ने लगा और अब यही मुखौटा की सरायकेला शैली छऊ नृत्य की पहचान बन गई है। |
एशिया कप में भारत और पाकिस्तान की टीमों का आमना-सामना 2 सितंबर की तारीख को होना है। वहीं, इससे पहले टीम इंडिया के लिए बुरी खबर सामने आई है। दरअसल, भारतीय टीम के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज के एल राहुल टूर्नामेंट के पहले 2 मुकाबले नहीं खेल पाएंगे। रोहित शर्मा की कप्तानी वाली भारतीय टीम के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। बहरहाल, अब श्रेयस अय्यर की फिटनेस पर एक बड़ा अपडेट सामने आया है।
भारतीय टीम के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ ने टीम इंडिया के मिडिल ऑर्डर के धुरंधर बल्लेबाज़ श्रेयस अय्यर की फिटनेस को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। राहुल द्रविड़ ने बताया कि अब श्रेयस अय्यर पूरी तरह से फिट हैं। श्रेयस अय्यर चोटिल होने के बाद रिकवरी कर चुके हैं।
श्रेयस अय्यर एशिया कप 2023 के मुकाबलों के लिए उपलब्ध रहेंगे। दरअसल, स्टार बल्लेबाज़ श्रेयस अय्यर का फिट होना टीम इंडिया के लिए बेहद अच्छी खबर है। श्रेयस अय्यर के फिटनेस को लेकर लगातार सवाल बना हुआ था, लेकिन भारतीय टीम के हेड कोच राहुल द्रविड़ ने कहा कि श्रेयस अय्यर अब पूरी तरह से फिट हो चुके हैं। भारतीय टीम मैनेजमेंट के अलावा टीम इंडिया के फैंस के लिए भी श्रेयस अय्यर का फिट होना बेहतरीन खबर है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों में एशिया कप 2023 के लिए रोहित शर्मा की अगुवाई वाली टीम इंडिया के खिलाड़ियों के नामों का ऐलान कर दिया गया है। इस टीम में श्रेयस अय्यर के अलावा विकेटकीपर बल्लेबाज़ के एल राहुल और तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह जैसे खिलाड़ियों की भी वापसी हुई है। दरअसल, ये सभी भारतीय खिलाड़ी चोट से जूझ रहे थे। लेकिन केएल राहुल अभी भी पूरी तरह फिट नहीं हैं। इस वजह से केएल राहुल एशिया कप 2023 के पहले 2 मुकाबले नहीं खेल पाएंगे। एशिया कप में भारतीय टीम अपना पहला मैच पाकिस्तान की टीम के खिलाफ खेलेगी। भारत और पाकिस्तान की टीमें 2 सितंबर को कैंडी में टक्कर लेती हुई नज़र आएंगी।
| एशिया कप में भारत और पाकिस्तान की टीमों का आमना-सामना दो सितंबर की तारीख को होना है। वहीं, इससे पहले टीम इंडिया के लिए बुरी खबर सामने आई है। दरअसल, भारतीय टीम के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज के एल राहुल टूर्नामेंट के पहले दो मुकाबले नहीं खेल पाएंगे। रोहित शर्मा की कप्तानी वाली भारतीय टीम के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है। बहरहाल, अब श्रेयस अय्यर की फिटनेस पर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। भारतीय टीम के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ ने टीम इंडिया के मिडिल ऑर्डर के धुरंधर बल्लेबाज़ श्रेयस अय्यर की फिटनेस को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। राहुल द्रविड़ ने बताया कि अब श्रेयस अय्यर पूरी तरह से फिट हैं। श्रेयस अय्यर चोटिल होने के बाद रिकवरी कर चुके हैं। श्रेयस अय्यर एशिया कप दो हज़ार तेईस के मुकाबलों के लिए उपलब्ध रहेंगे। दरअसल, स्टार बल्लेबाज़ श्रेयस अय्यर का फिट होना टीम इंडिया के लिए बेहद अच्छी खबर है। श्रेयस अय्यर के फिटनेस को लेकर लगातार सवाल बना हुआ था, लेकिन भारतीय टीम के हेड कोच राहुल द्रविड़ ने कहा कि श्रेयस अय्यर अब पूरी तरह से फिट हो चुके हैं। भारतीय टीम मैनेजमेंट के अलावा टीम इंडिया के फैंस के लिए भी श्रेयस अय्यर का फिट होना बेहतरीन खबर है। गौरतलब है कि पिछले दिनों में एशिया कप दो हज़ार तेईस के लिए रोहित शर्मा की अगुवाई वाली टीम इंडिया के खिलाड़ियों के नामों का ऐलान कर दिया गया है। इस टीम में श्रेयस अय्यर के अलावा विकेटकीपर बल्लेबाज़ के एल राहुल और तेज़ गेंदबाज़ जसप्रीत बुमराह जैसे खिलाड़ियों की भी वापसी हुई है। दरअसल, ये सभी भारतीय खिलाड़ी चोट से जूझ रहे थे। लेकिन केएल राहुल अभी भी पूरी तरह फिट नहीं हैं। इस वजह से केएल राहुल एशिया कप दो हज़ार तेईस के पहले दो मुकाबले नहीं खेल पाएंगे। एशिया कप में भारतीय टीम अपना पहला मैच पाकिस्तान की टीम के खिलाफ खेलेगी। भारत और पाकिस्तान की टीमें दो सितंबर को कैंडी में टक्कर लेती हुई नज़र आएंगी। |
(तिब्बकवर )
और दूसरे पर्दों में उत्पन्न नहीं होती सो वह तशन्नुन और तकल्लुम अर्थात् इस दर्द में खिचजाना और सिमटना उत्पन्न होता है उसका चिन्ह यह है कि दृष्टेि निर्वल होजाय और आंख फिरने लगे तथा बीमार पह जाने कि अखि में कांटा चुभता है या कोई चीज आंख को खींचती है और भूख की दशा में आर सूरज के प्रकाश में और दुपहर के समय अधिक होजाती है ( इलाज ) जो तशन्नुज खुश्की के कारण होतो प्रकृति म तरी पहुचाने के लिये लडकी वाली स्री का दूध, वनफशा का तेल और लवी घीया का तेल माक में डालें और जो चीजें तर और अगों को नर्म करती हों जैसे धनफशा, सित मी, कदू और तिल के पत्ते पानी में औटाकर उससे भफारा देवे और सव तरी करने वाले उपाय जिनका बहुषण वर्णने होचुका है काम में लाने । और जो तशन्नुज भरजाने से उत्पन्न हुआ होतो यारजात का सेवन पर और खुश्की लाने वाले कुलों का प्रयोग करे और सफाई के पीछे आंसू निफालन वाला सुरमा आंख में लगावे ।
रतूवत बैजिया अर्थात् आख की रतूवत के रोगों का वर्णन यह रतूवत रंग सफाई और असलियतमें अडे की सफेदी की सूरत की है इस लिये इसका नाम वैजिया रक्खा है और इस रतूत का रतवत जलीदिया के आगे उत्पन्न होने का यह लाभ है कि तेज प्रकाश रावत जुलैदिया पर २ पड़े और उसके कारण रतूव्रत जुलैदिया कष्ट से और ती क्षण प्रकाश सुश्वी और गम दवा के कष्ट और खुश्की स बच्ची रहे और इस रतूत में तीन रोग उत्पन्न होते हैं एक यह कि रहवत ममाण में बढ जावे । दूसरे यह कि प्रमाण में कम होजाय । तीसरे यह कि उसमें गदला पन और गाढापन आजाय इस लिये इन तीनों को तीन भेदों में वणन घरवदं । पहला भद-प्रमाण के बढ जाने का वर्णन ।
• इसके वह जाने की हानि प्रगट है यद्यपि धाडीसी अधिकता हो पर च इस कारण से कि भाग घटजाने से सफाई नहीं रहती है इसलिये स्तूवत जली दिया पर सुरतों के छपने में हनि होती है और सूर्य की पिग्णों के निपल ने पर प्राकृतिक मार्ग से उपद्रव आता है इस में आश्चर्य नहीं कि प्रमाण बहुत वरलाप क्योंकि इस दशा में तो दृष्टि विस्कुल जाती रहती है और अधेरा आजाता है और सुरतोंमें और रक्त और जलीदिया के बीच में इस रतूवतर्क दिन वा
और दूसरे पदों में उत्पन्न नहीं होती सौ वह तशन्नुन और तकल्लुम अर्थात् इस दर्द में खिचजाना और सिमटना उत्पन्न होता है उसका चिन्ह यह है कि दृष्टि निर्वल होजाय और आंख फिरने लगे तथा बीमार यह जाने कि आंख में कांटा चुभता है या कोई चीज आंख को खींचती है और भूस की दशा में आर सूरज के प्रकाश में और दुपहर के समय अधिक होजाती है ( इलाज ) जो तशन्नृज खुश्की के कारण होतो प्रकृति म तरी पहुचाने के लिये लडकी वाली स्री का दूध, वनफशा का तेल और लवी धीया का तेल माक में डालें और जो चीजें तर और अगों को नर्म करती हों जैसे धनफशा, सित मी, कद्दू और तिल के पत्ते पानी में औटाकर उससे भफारा देवे और सव तरी करने वाले उपाय जिनका बहुषा वर्णन होचुका है काम में लाने । और जो तशन्नुज भरजाने से उत्पन्न हुआ होतो यारजात का सेवन पर और खुश्की लाने वाले कुल्हों का प्रयोग करे और सफाई के पीछे आंसू निकालन वाला सुरमा आंख में लगावै ।।
रतूवत बैजिया अर्थात् आख की रतूवत के रोगों का वर्णन यह रतूवत रंग सफाई और असलियतमें अड़े की सफेदी की सूरत की है इस लिये इसका नाम वैजिया रक्खा है और इस रक्त का रतुवत जलीदिया के आगे उत्पन्न होने का यह लाभ है कि तेज प्रकाश रखवत जुलैदिया पर धीरे २ पड़े और उसके कारण रतूचत जुलैदिया कष्ट से और ती क्षण प्रकाश सुश्वी और गम दवा के कष्ट और खुश्की स बची रहे और इस रतूत में तीन रोग उत्पन्न होते हैं एक यह कि रक्त प्रमाण में बढ जावे । दूसरे यह कि प्रमाण में कम होजाय । तीसरे यह कि उसमें गदला पन और गाढापन आजाय इस लिये इन तीनों को तीन भेदों में वणन घरवदें। पहला भद-प्रमाण के बढ जाने का वर्णन ।
इस के वढ जाने की हानि प्रगट है यद्यपि धाडीसी अधिकता हो पर च इस कारण से कि भाग घटजाने से सफाई नहीं रहती है इसलिये स्तूवत जली दिया पर सुरतों के छपने में हानि होती है और सूर्य की पिरणों के निपल ने पर प्राकृतिक मार्ग से उपद्रव आता है इस में आश्चर्य नहीं कि प्रमाण बहुत वडलाप क्योंकि इस दशा में तो दृष्टि विल्कुल जाती रहती है और अधेरा आजाता हूँ और सूरतोंमें और रक्त और नलीदिया के बीच में इस रतूवतर्क निका
में इसका वर्णन कियागया है इस किताब का बनाने वाला लिखता है कि सच तो यह है कि जिस समय वैजिया कम होजाती है तो मुश्की के कारण इकठ्ठी होजाती है और इस में दो बातें अवश्य होजाती हैं एक यह कि वर्णन की हुई रहूवत के सच भाग इकठ्ठे होजातें है इस दशा में दृष्टि बिलकुल जाती रहती है और कुछ नहीं दिखलाई देता । दूसरे यह कि सब इकट्ठे न हों किन्तु पुछ इकट्ठे हों और कुछ न हों और यह भी दो प्रकार पर है कि उसकी एक ज गह में हों दूसरे यह कि कई जगह में हों जो रहूवत के भाग एक ही जगह इकठे होगये हैं तो वीमार को प्रत्येक वस्तु में गढ़ा और अधेरा दीसताहै और जो रतूवत के भाग कई जगह में सुकडगये हों तो जिस रीति पर भाग इफ् हुए है उसी के अनुसार प्रत्येक वस्तु में गढे २ दिसलाई देते है और ये वांत इस रतृवत के गदलेपनमें भी दिसलाई देती है जैसा आंख में पानी उत्तर आ ने के वर्णन में कहेंगे परन्तु भागों का इकट्ठा होना और बात है क्योंकि व खुश्की के भाग इकट्ठे नहीं होते इस वास्तें आंख का छोटा होजाना और प्रकृति के अनुसार नींद में कष्ट आना इस रहनत के भागों के इक्ट्ठे हाने में हुआ करता है इस कारण से भी इन दोनों में अन्तर कर सकते है यद्यपि सरे अन्तर भी बहुत हैं ( इलाज ) देह को पुष्ट करने का यत्न करें और जो वस्तु खुश्की को नष्ट करे और रहनत उत्पन्न करे उसको काम में लावे उत्तम उत्तम भोजन करे और परिश्रम और मिहनत छोउदे तथा तरी पहचाने वाले पानी से हमेशा न्हाय और लडकी वालियों का दूध और अह का सफेदी नाक में डालें । और चनफमा तथा नीलोफर सूघे और सिरको तरी प हुयाने वाले तेलों से तर रक्खे और दिमाग में बढ़ाने वाली वस्तु पाम में लाव तीसरा भेद रतूचते वैजिया के गदला और गाढ़ा होजाने का वर्णन ।
इसकी यह हानि है कि दृष्टि के काम में फष्ट आजाता है मी पौठासा गदुलापन होगा तो दरकी वस्तु कभी दिसलाई नहीं देंगी और जा गाढापन और गदलापन अधिकता से दो तो पास की चरतु भी दिसलाई न दगी और यह दो धारण से साली नहीं एक यह कि इस स्तूचत के राच भाग गए के होजाय इस दशामें दृष्टि बिलकुल जाती रहेगी। दूसरे यह कि इस स्तूचत क कुछ भाग गदले होजोय यद चार मजार पर है एक यह कि इस रचत के तीच में जो साम्हने हे गदली दोनाय और यह गदलापन आंसपी पुतली
में इसका वर्णन कियागया है इस किताब का बनाने वाला लिखता है कि सच तो यह है कि जिस समय वैजिया कम होजाती है तो खुश्की के कारण इकठ्ठी होजाती है और इस में दो बातें अवश्य होजाती है एक यह कि वर्णन की हुई रहूवत के सच भाग इकठ्ठे होजातें है इस दशा में दृष्टि बिलकुल जाती रहती है और कुछ नहीं दिखलाई देता । दूसरे यह कि सब इकट्ठे न हॉ किन्तु पुण् इकट्ठे हों और कुछ न हों और यह भी दो मकार पर है कि उसकी एक ज गह में हों दूसरे यह कि कई जगह में हों जो रतूवत के भाग एक ही जगह इकठे होगये हैं तो वीमार को प्रत्येक वस्तु में गडा और अधेरा दीखताहै और जो रहूवत के भाग कई जगह में सुकडगये हों तो जिस रीति पर भाग इफ्टूट्ठे हुए है उसी के अनुसार प्रत्येक वस्तु में गढे २ दिसलाई देते है और ये बात इस रतृवत के गदलेपनमें भी दिसलाई देती है जैसा आंख में पानी उत्तर आ ने के वर्णन में कहेंगे परन्तु भागों का इकट्ठा होना और बात है क्योंकि व खुश्की के भाग इकट्ठे नहीं होते इस वास्तें आंख का छोटा होजाना और प्रकृति के अनुसार नींद में कष्ट आना इस रतृरत के भागों के इस हाने में हुआ करता है इस कारण से भी इन दोनों में अन्तर कर सकते है यद्यपि द सरे अन्तर भी बहुत हैं ( इलाज ) देह को पुष्ट करने का यत्न करें और जो वस्तु खुश्की को नष्ट करे और रहनत उत्पन्न करै उसको काम में लावे उत्तम उत्तम भोजन करे और परिश्रम और मिहनत छोउदे तथा तरी पहुचाने वाले पानी से हमेशा न्हाय और लडकी वालियों का दूध और अह का सफेदी नाक में डालें । और चनफमा तथा नीलोफर सूधे और सिरको तरी प हुयाने वाले तेलों से तर रक्खै और दिमाग में बढ़ाने वाली वस्तु पाम में लावे तीसरा भेद रतूचते वैजिया के गदला और गाढ़ा होजाने का वर्णन ।
इसकी यह हानि है कि दृष्टि के काम में कष्ट आजाता है मी पौठासा गद्लापन होगा तो दरकी वस्तु कभी दिसलाई नहीं देंगी और जा गाटापन और गदलापन अधिकता से ही तो पास की चरतु भी दिसलाई न दगी और यह दो पारण से साली नहीं एक यह कि इस स्तूचत के सच भाग गदके होजाप इस दशामें दृष्टि बिलकुल जाती रहेगी। दूसरे यह कि इस रसूक्त फ कुछ भाग गदले होजोय यद चार मजार पर है एक पद्द कि इस सूचत के बीच में जो साम्हने है गदली दोनाप और यह गदलापन आंसपी पुतली | और दूसरे पर्दों में उत्पन्न नहीं होती सो वह तशन्नुन और तकल्लुम अर्थात् इस दर्द में खिचजाना और सिमटना उत्पन्न होता है उसका चिन्ह यह है कि दृष्टेि निर्वल होजाय और आंख फिरने लगे तथा बीमार पह जाने कि अखि में कांटा चुभता है या कोई चीज आंख को खींचती है और भूख की दशा में आर सूरज के प्रकाश में और दुपहर के समय अधिक होजाती है जो तशन्नुज खुश्की के कारण होतो प्रकृति म तरी पहुचाने के लिये लडकी वाली स्री का दूध, वनफशा का तेल और लवी घीया का तेल माक में डालें और जो चीजें तर और अगों को नर्म करती हों जैसे धनफशा, सित मी, कदू और तिल के पत्ते पानी में औटाकर उससे भफारा देवे और सव तरी करने वाले उपाय जिनका बहुषण वर्णने होचुका है काम में लाने । और जो तशन्नुज भरजाने से उत्पन्न हुआ होतो यारजात का सेवन पर और खुश्की लाने वाले कुलों का प्रयोग करे और सफाई के पीछे आंसू निफालन वाला सुरमा आंख में लगावे । रतूवत बैजिया अर्थात् आख की रतूवत के रोगों का वर्णन यह रतूवत रंग सफाई और असलियतमें अडे की सफेदी की सूरत की है इस लिये इसका नाम वैजिया रक्खा है और इस रतूत का रतवत जलीदिया के आगे उत्पन्न होने का यह लाभ है कि तेज प्रकाश रावत जुलैदिया पर दो पड़े और उसके कारण रतूव्रत जुलैदिया कष्ट से और ती क्षण प्रकाश सुश्वी और गम दवा के कष्ट और खुश्की स बच्ची रहे और इस रतूत में तीन रोग उत्पन्न होते हैं एक यह कि रहवत ममाण में बढ जावे । दूसरे यह कि प्रमाण में कम होजाय । तीसरे यह कि उसमें गदला पन और गाढापन आजाय इस लिये इन तीनों को तीन भेदों में वणन घरवदं । पहला भद-प्रमाण के बढ जाने का वर्णन । • इसके वह जाने की हानि प्रगट है यद्यपि धाडीसी अधिकता हो पर च इस कारण से कि भाग घटजाने से सफाई नहीं रहती है इसलिये स्तूवत जली दिया पर सुरतों के छपने में हनि होती है और सूर्य की पिग्णों के निपल ने पर प्राकृतिक मार्ग से उपद्रव आता है इस में आश्चर्य नहीं कि प्रमाण बहुत वरलाप क्योंकि इस दशा में तो दृष्टि विस्कुल जाती रहती है और अधेरा आजाता है और सुरतोंमें और रक्त और जलीदिया के बीच में इस रतूवतर्क दिन वा और दूसरे पदों में उत्पन्न नहीं होती सौ वह तशन्नुन और तकल्लुम अर्थात् इस दर्द में खिचजाना और सिमटना उत्पन्न होता है उसका चिन्ह यह है कि दृष्टि निर्वल होजाय और आंख फिरने लगे तथा बीमार यह जाने कि आंख में कांटा चुभता है या कोई चीज आंख को खींचती है और भूस की दशा में आर सूरज के प्रकाश में और दुपहर के समय अधिक होजाती है जो तशन्नृज खुश्की के कारण होतो प्रकृति म तरी पहुचाने के लिये लडकी वाली स्री का दूध, वनफशा का तेल और लवी धीया का तेल माक में डालें और जो चीजें तर और अगों को नर्म करती हों जैसे धनफशा, सित मी, कद्दू और तिल के पत्ते पानी में औटाकर उससे भफारा देवे और सव तरी करने वाले उपाय जिनका बहुषा वर्णन होचुका है काम में लाने । और जो तशन्नुज भरजाने से उत्पन्न हुआ होतो यारजात का सेवन पर और खुश्की लाने वाले कुल्हों का प्रयोग करे और सफाई के पीछे आंसू निकालन वाला सुरमा आंख में लगावै ।। रतूवत बैजिया अर्थात् आख की रतूवत के रोगों का वर्णन यह रतूवत रंग सफाई और असलियतमें अड़े की सफेदी की सूरत की है इस लिये इसका नाम वैजिया रक्खा है और इस रक्त का रतुवत जलीदिया के आगे उत्पन्न होने का यह लाभ है कि तेज प्रकाश रखवत जुलैदिया पर धीरे दो पड़े और उसके कारण रतूचत जुलैदिया कष्ट से और ती क्षण प्रकाश सुश्वी और गम दवा के कष्ट और खुश्की स बची रहे और इस रतूत में तीन रोग उत्पन्न होते हैं एक यह कि रक्त प्रमाण में बढ जावे । दूसरे यह कि प्रमाण में कम होजाय । तीसरे यह कि उसमें गदला पन और गाढापन आजाय इस लिये इन तीनों को तीन भेदों में वणन घरवदें। पहला भद-प्रमाण के बढ जाने का वर्णन । इस के वढ जाने की हानि प्रगट है यद्यपि धाडीसी अधिकता हो पर च इस कारण से कि भाग घटजाने से सफाई नहीं रहती है इसलिये स्तूवत जली दिया पर सुरतों के छपने में हानि होती है और सूर्य की पिरणों के निपल ने पर प्राकृतिक मार्ग से उपद्रव आता है इस में आश्चर्य नहीं कि प्रमाण बहुत वडलाप क्योंकि इस दशा में तो दृष्टि विल्कुल जाती रहती है और अधेरा आजाता हूँ और सूरतोंमें और रक्त और नलीदिया के बीच में इस रतूवतर्क निका में इसका वर्णन कियागया है इस किताब का बनाने वाला लिखता है कि सच तो यह है कि जिस समय वैजिया कम होजाती है तो मुश्की के कारण इकठ्ठी होजाती है और इस में दो बातें अवश्य होजाती हैं एक यह कि वर्णन की हुई रहूवत के सच भाग इकठ्ठे होजातें है इस दशा में दृष्टि बिलकुल जाती रहती है और कुछ नहीं दिखलाई देता । दूसरे यह कि सब इकट्ठे न हों किन्तु पुछ इकट्ठे हों और कुछ न हों और यह भी दो प्रकार पर है कि उसकी एक ज गह में हों दूसरे यह कि कई जगह में हों जो रहूवत के भाग एक ही जगह इकठे होगये हैं तो वीमार को प्रत्येक वस्तु में गढ़ा और अधेरा दीसताहै और जो रतूवत के भाग कई जगह में सुकडगये हों तो जिस रीति पर भाग इफ् हुए है उसी के अनुसार प्रत्येक वस्तु में गढे दो दिसलाई देते है और ये वांत इस रतृवत के गदलेपनमें भी दिसलाई देती है जैसा आंख में पानी उत्तर आ ने के वर्णन में कहेंगे परन्तु भागों का इकट्ठा होना और बात है क्योंकि व खुश्की के भाग इकट्ठे नहीं होते इस वास्तें आंख का छोटा होजाना और प्रकृति के अनुसार नींद में कष्ट आना इस रहनत के भागों के इक्ट्ठे हाने में हुआ करता है इस कारण से भी इन दोनों में अन्तर कर सकते है यद्यपि सरे अन्तर भी बहुत हैं देह को पुष्ट करने का यत्न करें और जो वस्तु खुश्की को नष्ट करे और रहनत उत्पन्न करे उसको काम में लावे उत्तम उत्तम भोजन करे और परिश्रम और मिहनत छोउदे तथा तरी पहचाने वाले पानी से हमेशा न्हाय और लडकी वालियों का दूध और अह का सफेदी नाक में डालें । और चनफमा तथा नीलोफर सूघे और सिरको तरी प हुयाने वाले तेलों से तर रक्खे और दिमाग में बढ़ाने वाली वस्तु पाम में लाव तीसरा भेद रतूचते वैजिया के गदला और गाढ़ा होजाने का वर्णन । इसकी यह हानि है कि दृष्टि के काम में फष्ट आजाता है मी पौठासा गदुलापन होगा तो दरकी वस्तु कभी दिसलाई नहीं देंगी और जा गाढापन और गदलापन अधिकता से दो तो पास की चरतु भी दिसलाई न दगी और यह दो धारण से साली नहीं एक यह कि इस स्तूचत के राच भाग गए के होजाय इस दशामें दृष्टि बिलकुल जाती रहेगी। दूसरे यह कि इस स्तूचत क कुछ भाग गदले होजोय यद चार मजार पर है एक यह कि इस रचत के तीच में जो साम्हने हे गदली दोनाय और यह गदलापन आंसपी पुतली में इसका वर्णन कियागया है इस किताब का बनाने वाला लिखता है कि सच तो यह है कि जिस समय वैजिया कम होजाती है तो खुश्की के कारण इकठ्ठी होजाती है और इस में दो बातें अवश्य होजाती है एक यह कि वर्णन की हुई रहूवत के सच भाग इकठ्ठे होजातें है इस दशा में दृष्टि बिलकुल जाती रहती है और कुछ नहीं दिखलाई देता । दूसरे यह कि सब इकट्ठे न हॉ किन्तु पुण् इकट्ठे हों और कुछ न हों और यह भी दो मकार पर है कि उसकी एक ज गह में हों दूसरे यह कि कई जगह में हों जो रतूवत के भाग एक ही जगह इकठे होगये हैं तो वीमार को प्रत्येक वस्तु में गडा और अधेरा दीखताहै और जो रहूवत के भाग कई जगह में सुकडगये हों तो जिस रीति पर भाग इफ्टूट्ठे हुए है उसी के अनुसार प्रत्येक वस्तु में गढे दो दिसलाई देते है और ये बात इस रतृवत के गदलेपनमें भी दिसलाई देती है जैसा आंख में पानी उत्तर आ ने के वर्णन में कहेंगे परन्तु भागों का इकट्ठा होना और बात है क्योंकि व खुश्की के भाग इकट्ठे नहीं होते इस वास्तें आंख का छोटा होजाना और प्रकृति के अनुसार नींद में कष्ट आना इस रतृरत के भागों के इस हाने में हुआ करता है इस कारण से भी इन दोनों में अन्तर कर सकते है यद्यपि द सरे अन्तर भी बहुत हैं देह को पुष्ट करने का यत्न करें और जो वस्तु खुश्की को नष्ट करे और रहनत उत्पन्न करै उसको काम में लावे उत्तम उत्तम भोजन करे और परिश्रम और मिहनत छोउदे तथा तरी पहुचाने वाले पानी से हमेशा न्हाय और लडकी वालियों का दूध और अह का सफेदी नाक में डालें । और चनफमा तथा नीलोफर सूधे और सिरको तरी प हुयाने वाले तेलों से तर रक्खै और दिमाग में बढ़ाने वाली वस्तु पाम में लावे तीसरा भेद रतूचते वैजिया के गदला और गाढ़ा होजाने का वर्णन । इसकी यह हानि है कि दृष्टि के काम में कष्ट आजाता है मी पौठासा गद्लापन होगा तो दरकी वस्तु कभी दिसलाई नहीं देंगी और जा गाटापन और गदलापन अधिकता से ही तो पास की चरतु भी दिसलाई न दगी और यह दो पारण से साली नहीं एक यह कि इस स्तूचत के सच भाग गदके होजाप इस दशामें दृष्टि बिलकुल जाती रहेगी। दूसरे यह कि इस रसूक्त फ कुछ भाग गदले होजोय यद चार मजार पर है एक पद्द कि इस सूचत के बीच में जो साम्हने है गदली दोनाप और यह गदलापन आंसपी पुतली |
इस पर वह ऐसी तेजी से उठ खड़ी हुई कि गिलास उलट गया, जिससे कस्तूरी के बहु की शराब उसके काले बालों पर फैल ई. मा उसका बप्तिस्मा हो गया। जैसे ही गिलास फर्श पर गिरा, उस के सैकड़ों टुकड़े हो गये । उसके कॉपने लगे। उसने अफर की ओर बीती दृष्टि से देखा । भी हॅम हो रहा था । वह लड़खड़ाते हुए शब्दों में बोलीयह - - यह - यह - सत्य नहीं है । क्योंकि फ्रांस की स्त्रियों तुमको मिल ही नहीं सकतीं ।
वह फिर बैठ गया ताकि दिल खोल कर हँसे रवालों का सा उच्चारण करके बोलने का प्रयत्न करने लगा - 'यह अच्छी बात है, बड़ी अच्छी बात है। किन्तु ऐ मेरी जान । तुम यहॉ फिर क्यों आई?' यह सुन कर वह एक मिनिट तक कुछ न बोली, क्योंकि घबराहट मे पहले तो उसकी बात वह समझो ही नहीं, किन्तु ज्यों हो उसको बात का अर्थ उसको समझ मे आया वह ऊपर काधित हो कर बोली - मै । मै ! मैं । स्त्रो नहीं हूँ। मैं तो
त्रेश्या हूँ, और यह एक प्रूशियन के लिए काफी है ।
वह अपनी बात पूरी भी न कर पाई थी कि
उसके मुँह पर
कसकर एक चाटा जमा दिया। किन्तु जब दुबारा मारने के लिए वह हाथ उठा रहा था तत्र राचल ने फल काटने वाला एक चाकू टेबुल पर से उठा लिया और क्रोत्र से पागल होकर ठोक उसकी गर्दन में घुसेड़ दिया। जो कुछ वह कहना चाहता था वह उसके गले मे ही रह गया, वह अपना आधा मुॅह खोल कर बैठ गया। उसकी आँखों से भयकरता टपकने लगी ।
चिल्लाने लगे और घबराहट मे इधर-उधर कूदने लेफ्टिनेट के बीच में एक कुर्ता फेक दी, जिससे वह धड़ाम से गिर पड़ा । वह झट से खिड़की की तरफ लपको और उ खोलकर रात्रि के प्रकार और मूसलाधार पानी में कूद पड़ी । वे सत्र से सत्र ताकते ही रह गये, कोई उसे पकड़ न पाया ।
दो मिनट में 'फीको' का भी प्राणान्न हो गया । फिट्ने अपनो तलवारें खींच लां और चाहने थे किका मार डाल; यद्यपि वे | इस पर वह ऐसी तेजी से उठ खड़ी हुई कि गिलास उलट गया, जिससे कस्तूरी के बहु की शराब उसके काले बालों पर फैल ई. मा उसका बप्तिस्मा हो गया। जैसे ही गिलास फर्श पर गिरा, उस के सैकड़ों टुकड़े हो गये । उसके कॉपने लगे। उसने अफर की ओर बीती दृष्टि से देखा । भी हॅम हो रहा था । वह लड़खड़ाते हुए शब्दों में बोलीयह - - यह - यह - सत्य नहीं है । क्योंकि फ्रांस की स्त्रियों तुमको मिल ही नहीं सकतीं । वह फिर बैठ गया ताकि दिल खोल कर हँसे रवालों का सा उच्चारण करके बोलने का प्रयत्न करने लगा - 'यह अच्छी बात है, बड़ी अच्छी बात है। किन्तु ऐ मेरी जान । तुम यहॉ फिर क्यों आई?' यह सुन कर वह एक मिनिट तक कुछ न बोली, क्योंकि घबराहट मे पहले तो उसकी बात वह समझो ही नहीं, किन्तु ज्यों हो उसको बात का अर्थ उसको समझ मे आया वह ऊपर काधित हो कर बोली - मै । मै ! मैं । स्त्रो नहीं हूँ। मैं तो त्रेश्या हूँ, और यह एक प्रूशियन के लिए काफी है । वह अपनी बात पूरी भी न कर पाई थी कि उसके मुँह पर कसकर एक चाटा जमा दिया। किन्तु जब दुबारा मारने के लिए वह हाथ उठा रहा था तत्र राचल ने फल काटने वाला एक चाकू टेबुल पर से उठा लिया और क्रोत्र से पागल होकर ठोक उसकी गर्दन में घुसेड़ दिया। जो कुछ वह कहना चाहता था वह उसके गले मे ही रह गया, वह अपना आधा मुॅह खोल कर बैठ गया। उसकी आँखों से भयकरता टपकने लगी । चिल्लाने लगे और घबराहट मे इधर-उधर कूदने लेफ्टिनेट के बीच में एक कुर्ता फेक दी, जिससे वह धड़ाम से गिर पड़ा । वह झट से खिड़की की तरफ लपको और उ खोलकर रात्रि के प्रकार और मूसलाधार पानी में कूद पड़ी । वे सत्र से सत्र ताकते ही रह गये, कोई उसे पकड़ न पाया । दो मिनट में 'फीको' का भी प्राणान्न हो गया । फिट्ने अपनो तलवारें खींच लां और चाहने थे किका मार डाल; यद्यपि वे |
रोहतक। वैश्य शिक्षण संस्था के गवर्निंग बॉडी के चुनाव को आखिर जिला रजिस्ट्रार कार्यालय से हरी झंडी मिल ही गई। संस्था में 20 जुलाई को चुने गए कॉलेजियम को नियमानुसार मंजूरी लेनी थी। इसके साथ ही नई कार्यकारिणी के गठन का रास्ता साफ हो गया है। अब गवर्निंग बॉडी का चुनाव होगा। इसके लिए चुनाव अधिकारी जल्दी ही शेड्यूल जारी करेंगे। इसके तहत नामांकन प्रक्रिया व मतदान की तिथि तय की जाएगी।
बात दें कि 20 जुलाई को कॉलेजियम चुनाव हुए थे। इसके बाद विवादित बूथ नंबर 96 की मतगणना कराई गई। कॉलेजियम पूरा होने पर 105 सदस्यों के नाम की सूची जिला रजिस्ट्रार कार्यालय भेजी गई। यहां जांच के बाद संबंधित अधिकारी ने कॉलेजियम को स्वीकृति प्रदान की। संस्था चुनाव को लेकर पिछले करीब दो वर्षों से विवाद चला हुआ था। संस्था के दो पक्षों में नए वोट जोड़ने को लेकर उभरे विवाद के चलते चुनाव अटके हुए थे। सरकार की ओर से प्रशासक की नियुक्ति के बाद चुनावी प्रयास सिरे चढ़ते नजर आ रहे हैं।
वर्जनः
वैश्य शिक्षण संस्था के निर्वाचित कॉलेजियम को जिला रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटी से मंजूरी मिल गई है। अब शीघ्र ही गवर्निंग बॉडी का चुनाव कराया जाएगा।
- डॉ. वीरेंद्र सिंह सिंधु, प्रशासक, वैश्य शिक्षण संस्था।
वर्जनः
संस्था के कॉलेजियम चुनाव निष्पक्ष व पारदर्शी ढंग से कराए गए। कॉलेजियम के 105 सदस्यों की सूची अनुमोदन के लिए जिला रजिस्ट्रार को भेजना अनिवार्य था। यहां से मंजूरी के चलते गवर्निंग बॉडी चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। जल्दी ही चुनावी शेड्यूल जारी किया जाएगा। इस चुनाव में कॉलेजियम सदस्य अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए नई कार्यकारिणी गठित करेंगे। इसके लिए मतदान होगा।
- डॉ. एमएस श्योराण, चुनाव अधिकारी, वैश्य शिक्षण संस्था।
| रोहतक। वैश्य शिक्षण संस्था के गवर्निंग बॉडी के चुनाव को आखिर जिला रजिस्ट्रार कार्यालय से हरी झंडी मिल ही गई। संस्था में बीस जुलाई को चुने गए कॉलेजियम को नियमानुसार मंजूरी लेनी थी। इसके साथ ही नई कार्यकारिणी के गठन का रास्ता साफ हो गया है। अब गवर्निंग बॉडी का चुनाव होगा। इसके लिए चुनाव अधिकारी जल्दी ही शेड्यूल जारी करेंगे। इसके तहत नामांकन प्रक्रिया व मतदान की तिथि तय की जाएगी। बात दें कि बीस जुलाई को कॉलेजियम चुनाव हुए थे। इसके बाद विवादित बूथ नंबर छियानवे की मतगणना कराई गई। कॉलेजियम पूरा होने पर एक सौ पाँच सदस्यों के नाम की सूची जिला रजिस्ट्रार कार्यालय भेजी गई। यहां जांच के बाद संबंधित अधिकारी ने कॉलेजियम को स्वीकृति प्रदान की। संस्था चुनाव को लेकर पिछले करीब दो वर्षों से विवाद चला हुआ था। संस्था के दो पक्षों में नए वोट जोड़ने को लेकर उभरे विवाद के चलते चुनाव अटके हुए थे। सरकार की ओर से प्रशासक की नियुक्ति के बाद चुनावी प्रयास सिरे चढ़ते नजर आ रहे हैं। वर्जनः वैश्य शिक्षण संस्था के निर्वाचित कॉलेजियम को जिला रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटी से मंजूरी मिल गई है। अब शीघ्र ही गवर्निंग बॉडी का चुनाव कराया जाएगा। - डॉ. वीरेंद्र सिंह सिंधु, प्रशासक, वैश्य शिक्षण संस्था। वर्जनः संस्था के कॉलेजियम चुनाव निष्पक्ष व पारदर्शी ढंग से कराए गए। कॉलेजियम के एक सौ पाँच सदस्यों की सूची अनुमोदन के लिए जिला रजिस्ट्रार को भेजना अनिवार्य था। यहां से मंजूरी के चलते गवर्निंग बॉडी चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। जल्दी ही चुनावी शेड्यूल जारी किया जाएगा। इस चुनाव में कॉलेजियम सदस्य अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए नई कार्यकारिणी गठित करेंगे। इसके लिए मतदान होगा। - डॉ. एमएस श्योराण, चुनाव अधिकारी, वैश्य शिक्षण संस्था। |
कोंडागांव (नईदुनिया न्यूज)। आम आदमी पार्टी की शुक्रवार को कोंडागांव में जनसभा आयोजित कर भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष व विधायक मोहन मरकाम के आवास का घेराव करने निकले, जिन्हें पुलिस ने रास्ते में रोक लिया।
आम आदमी पार्टी द्वारा आयोजित सभा को पार्टी प्रदेश प्रभारी व विधायक बुराड़ी दिल्ली संजीव झा,
प्रदेश अध्यक्ष कोमल हुपेंडी, प्रदेश पदाधिकारी आशुतोष पांडे आदि ने संबोधित करते भ्रष्टाचार व घोटालों की सरकार बताते सरकार को आड़े हाथ लिया व विगत 3 वर्षों से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने और भ्रष्टाचार चरम पर होने की बात कही।
जिले में चल रहे भ्रष्टाचार पर विधायक मरकाम को आड़े हाथ लेते शिक्षा विभाग को भ्रष्टाचार के मामले में सबसे आगे बताया जिसमें फोटो घोटाला, बर्तन घोटाला, फर्नीचर घोटाला, राशन घोटाला, बीआरजीएफ, अंडा, फर्जी निविदा, हैंडपंप घोटाला आदि तमाम घोटालों के बाद भी विधायक को मौन बताया तथा दर्जनभर घोटाले उजागर होने के बाद भी स्थानीय विधायक मोहन मरकाम की चुप्पी पर पदाधिकारियों ने निशाना साधा।
इन तमाम घोटालों की तत्काल जांच व कार्यवाही ना होने पर आम आदमी पार्टी द्वारा उग्र आंदोलन की बात कही । विधायक झा ने कहा दोनों सरकारों से यहां के लोग उब चुके हैं दिल्ली व पंजाब के बाद अब छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी की सरकार बनाने की बात कही। इस दौरान पार्टी की विचारधारा से प्रभावित होकर अन्य दलों के व्यक्तियों सहित दर्जन भर लोगों ने पार्टी की सदस्यता हासिल की।
धरना स्थल से रैली की शक्ल में पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं का काफिला मोहन मरकाम के निवास को घेराव करने निकला, जो नारेबाजी करते आवास की ओर बढ़ने की पुरजोर कोशिश की, जिन्हें पुलिस जवानों ने रास्ते में ही रोक लिया, पुलिस जवानों के रोकने के बाद करोड़ों के भ्रष्टाचार को लेकर विधायक मोहन मरकाम के नाम विधायक के निजी सचिव को ज्ञापन सौंपा।
| कोंडागांव । आम आदमी पार्टी की शुक्रवार को कोंडागांव में जनसभा आयोजित कर भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष व विधायक मोहन मरकाम के आवास का घेराव करने निकले, जिन्हें पुलिस ने रास्ते में रोक लिया। आम आदमी पार्टी द्वारा आयोजित सभा को पार्टी प्रदेश प्रभारी व विधायक बुराड़ी दिल्ली संजीव झा, प्रदेश अध्यक्ष कोमल हुपेंडी, प्रदेश पदाधिकारी आशुतोष पांडे आदि ने संबोधित करते भ्रष्टाचार व घोटालों की सरकार बताते सरकार को आड़े हाथ लिया व विगत तीन वर्षों से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने और भ्रष्टाचार चरम पर होने की बात कही। जिले में चल रहे भ्रष्टाचार पर विधायक मरकाम को आड़े हाथ लेते शिक्षा विभाग को भ्रष्टाचार के मामले में सबसे आगे बताया जिसमें फोटो घोटाला, बर्तन घोटाला, फर्नीचर घोटाला, राशन घोटाला, बीआरजीएफ, अंडा, फर्जी निविदा, हैंडपंप घोटाला आदि तमाम घोटालों के बाद भी विधायक को मौन बताया तथा दर्जनभर घोटाले उजागर होने के बाद भी स्थानीय विधायक मोहन मरकाम की चुप्पी पर पदाधिकारियों ने निशाना साधा। इन तमाम घोटालों की तत्काल जांच व कार्यवाही ना होने पर आम आदमी पार्टी द्वारा उग्र आंदोलन की बात कही । विधायक झा ने कहा दोनों सरकारों से यहां के लोग उब चुके हैं दिल्ली व पंजाब के बाद अब छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी की सरकार बनाने की बात कही। इस दौरान पार्टी की विचारधारा से प्रभावित होकर अन्य दलों के व्यक्तियों सहित दर्जन भर लोगों ने पार्टी की सदस्यता हासिल की। धरना स्थल से रैली की शक्ल में पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं का काफिला मोहन मरकाम के निवास को घेराव करने निकला, जो नारेबाजी करते आवास की ओर बढ़ने की पुरजोर कोशिश की, जिन्हें पुलिस जवानों ने रास्ते में ही रोक लिया, पुलिस जवानों के रोकने के बाद करोड़ों के भ्रष्टाचार को लेकर विधायक मोहन मरकाम के नाम विधायक के निजी सचिव को ज्ञापन सौंपा। |
यह समझने के लिए कि एक विकल्प क्या है"1 सी", आपको यह समझने की जरूरत है कि यह क्या है और इसके लिए क्या आवश्यक है। आम तौर पर, अनुप्रयोगों, सॉफ्टवेयर, उपयोगिताओं और अन्य चीजों की संख्या अब बड़ी है। आसानी से किसी प्रकार के कार्यक्रम का एनालॉग खोजें। यदि आप भाग्यशाली हैं, तो आप एक भुगतान विकल्प और एक मुफ्त दोनों पा सकते हैं।
बहुत से लोग मानते हैं कि "1 सी" एक तरह का कार्यक्रम है,उद्यम संचालित करने की इजाजत दी। वास्तव में, यह एक ऐसी कंपनी है जो व्यापार और घर के उपयोग के लिए सॉफ्टवेयर को बढ़ावा देने, समर्थन करने और बनाने में माहिर है। कंपनी की स्थापना 1 99 1 में मॉस्को में हुई थी। आज तक, बोरिस नूरिलेव सामान्य निदेशक और संस्थापक हैं।
कंपनी का नाम कथित तौर पर इंगित करता हैइसके अनुप्रयोगों की गति। इसलिए, अपने स्वयं के खोज कार्यक्रम के साथ, प्रबंधन ने फैसला किया कि कंपनी को आदर्श वाक्य के लिए निम्नलिखित नियम लेना चाहिएः "1 सेकंड से अधिक में जानकारी प्राप्त करना"।
फर्म अपने प्रमुख विकास के लिए जाना जाता है। सॉफ्टवेयर सिस्टम "1 सीः एंटरप्राइज़" सबसे लोकप्रिय है, एक विकल्प जो खोजना आसान है। कई शिक्षक भी थे, जैसे "ट्यूटर", "स्कूल", "एजुकेशन" इत्यादि।
उस समय एक और कंपनी थी"Bitrix"। यह जेएससीबी निवेश बैंक के विभाग के विशेषज्ञों द्वारा स्थापित किया गया था। लगभग 10 साल वह अपने मामलों में व्यस्त थी, जब तक कि उसने "1 सी" के साथ एकजुट होने का फैसला नहीं किया। तो 2007 में उद्यम "1 सी-बिट्रिक्स" का गठन किया गया था। दोनों फर्मों को उत्पादन का बराबर हिस्सा मिला।
जैसा कि आप जानते हैं, रूसी कंपनी ने एक बनाया हैएक प्रमुख सॉफ्टवेयर उत्पाद "1 सीः एंटरप्राइज़।" प्रणाली को लेखा, प्रबंधन और लेखांकन को स्वचालित करने के लिए विकसित किया गया था, लेकिन अब इसे एक अलग दिशा में उपयोग किया जाता है।
समय के साथ, विन्यास प्रकट होना शुरू हुआ,लागू समाधान जो "1 सीः एंटरप्राइज़" के आधार पर काम करते थे। तो, एक समय में "1 सीः लेखा" का सबसे प्रसिद्ध संस्करण लोकप्रिय हो गया। सिस्टम में निम्न कॉन्फ़िगरेशन भी शामिल थेः "व्यापार और गोदाम", "वेतन और कार्मिक", "एकीकृत स्वचालन" इत्यादि।
आम तौर पर, कार्यक्रम-अनुरूप "1 सी" बजायआज आम हैं। उनमें से वे हैं जो लगभग रूसी सॉफ्टवेयर की पूरी प्रणाली को दोहराते हैं। ऐसे विकल्प हैं जो प्रोग्राम के कुछ कॉन्फ़िगरेशन के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। फिर भी, कई परिस्थितियों के कारण, कई बार कभी-कभी एक विकल्प की तलाश करने के लिए मजबूर किया जाता है।
उन लोगों के लिए जिन्हें घटकों का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिनएक संपूर्ण सॉफ्टवेयर मंच, आपको कुछ सॉफ्टवेयर देखना चाहिए। उनमें से कुछ "1 सी" के लिए एक विकल्प हैं। घरेलू विकल्पों से "गैलेक्सी" और "सेल" उपलब्ध हैं। यदि आप विदेशी अनुरूपताओं पर बारीकी से देखते हैं, तो हम एसएपी और माइक्रोसॉफ्ट डायनेमिक्स एक्सप्टा के बारे में बात करेंगे।
एक अच्छी ईआरपी प्रणाली, जो का हिस्सा हैएक ही नाम के कार्यक्रम मध्यम और बड़े उद्योगों के लिए सबसे उपयुक्त है। एक व्यापक कार्यक्षमता है, आपको रणनीतिक योजना और परिचालन प्रबंधन का पालन करने की अनुमति देता है। रूस में, बाजार का एक छोटा सा प्रतिशत।
यह समझना महत्वपूर्ण है कि मंच का गठन किया गया थारूसी अर्थव्यवस्था के विश्लेषण को ध्यान में रखते हुए, प्रणाली अपने विनिर्देशों और कानून में परिवर्तन को समझती है। सॉफ्टवेयर प्लेटफ़ॉर्म की एक विशेषता विधायी ढांचे का लचीलापन, एकीकरण और समर्थन है। "1 सी" के मामले में, इस विकल्प को कार्यात्मक मॉड्यूल प्राप्त हुए जो प्लेटफार्म में संयुक्त होते हैं।
यह "1 सी" कार्यक्रम का एक अच्छा विकल्प है। यह मुफ्त संस्करण, और वाणिज्यिक संस्करण दोनों में उपलब्ध है। मुक्त संस्करण का नाम "गैलेक्सी एक्सप्रेस" रखा गया था। कई विशेषताएं हैंः
अगला सॉफ्टवेयर उत्पाद "सेल" है। वह राज्यों और नगरपालिका नियंत्रण के क्षेत्र से संबंधित संगठनों के काम को स्वचालित करने के लिए भी जिम्मेदार है। वाणिज्यिक संगठनों में लागू किया जा सकता है। रूस से इसी नाम की कंपनी इस नाम के तहत सॉफ्टवेयर उत्पादों की रिहाई में लगी हुई है। यह अक्सर यूक्रेनी और रूसी उद्यमों में पाया जाता है।
1 9 8 9 में पहली बार "पारस" बाजार में दिखाई दिया थारूसी एकेडमी ऑफ साइंसेज के केंद्रीय डिजाइन ब्यूरो में मजदूरी की गणना के लिए ही गणना की गई थी। 1 99 2 से पहले, "लेखा" और बजट संस्करण सॉफ़्टवेयर सूट में दिखाई दिए। " लोकप्रियता गति प्राप्त कर रही थी, प्रबंधन संगठनों में सॉफ्टवेयर पेश किया गया था। इसलिए संघीय और क्षेत्रीय प्राधिकरण, स्थानीय सरकार और अन्य संस्थानों ने सिस्टम "पारस" हासिल किया है।
अन्य चीजों के अलावा, "सेल एंटरप्राइज़ 7" के चेहरे में कार्यक्रमों के सेट में छोटे व्यवसाय के लिए "1 सी" का विकल्प है। इसके अलावा सातवें और आठवें संस्करणों के संस्करण "बजट" और "बीमा" भी थे।
यह एक जर्मन एनालॉग है, जो अधिक उन्मुख हैलेखांकन पर कार्यक्रम प्रणाली के स्वचालन पर काम कर रहा है, बड़ी कंपनियों के संसाधनों की योजना बना रहा है, विभिन्न मानकों की गणना करता है और एक विश्लेषणात्मक सरणी में प्राप्त सभी जानकारी उत्पन्न करता है।
मॉड्यूलर योजना के तहत एक ईआरपी प्रणाली भी है। अलग प्रोग्राम कॉन्फ़िगरेशन और उनके सिंक्रनाइज़ेशन दोनों का उपयोग करने की क्षमता प्रदान करता है। कार्यक्रम की प्रभावी कार्य स्वयं को सर्वोत्तम दिखाता है यदि सभी प्रक्रियाओं को एक ही सूचना मंच पर जोड़ा जाता है। एसएपी जल्दी से काम में रूट लेता है, अद्यतन करता है और विभिन्न विभागों से आता है जो डेटा आयोजित करता है।
जब पूछा गया कि 1 सी के लिए कोई विकल्प है, तो यह एसएपी हैतुरंत जवाब के रूप में दिमाग में आता है। कार्यक्रम न केवल लेखांकन और रिपोर्टिंग के कार्यों को जोड़ता है, बल्कि रसद भी। नतीजतन, इसकी मदद से आप आंतरिक उत्पादन लागत, आदेश प्रबंधन, वित्त और परिणामों को ट्रैक कर सकते हैं। इसके अलावा, प्रणाली योजना, प्रबंधन, बिक्री, चालान और शिपमेंट एकीकृत करता है। खाते, खरीद और स्टॉक पर नियंत्रण का अनुमान लगाता है।
दिलचस्प बात यह है कि यह पहला सॉफ्टवेयर हैटाइप करें। जर्मनी में 1 9 72 में वापस दिखाई दिया। कार्यक्रम केवल पांच विशेषज्ञों द्वारा विकसित किया गया था। प्रारंभ में, यह एक स्वचालित उत्पादन प्रबंधन प्रणाली विकसित करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। फिर, इस प्रक्रिया में लेखांकन, व्यापार, प्रबंधन, विपणन और इतने पर जोड़ा जाना शुरू हो गया।
200 9 तक, उसी नाम की जर्मन कंपनीइसके उत्पाद ने विश्व बाजार के नेताओं में प्रवेश किया है और बड़ी कंपनियों और निगमों के लिए सबसे बड़े सॉफ्टवेयर निर्माताओं में से एक बन गया है। इस मंच के आधार पर अपने अस्तित्व के दौरान, कई अनुप्रयोग सामने आए हैं जिन्होंने निगमों के कर्मचारियों के लिए जीवन आसान बना दिया है।
उत्पादों में से "1 सी" के अनुरूप हैं। कंपनी के लिए कॉर्पोरेट डेटा गोदामों, पोर्टल उत्पादन समाधान, नियामक और संदर्भ जानकारी के लिए सॉफ्टवेयर, ज्ञान प्रबंधन, विन्यास और मोबाइल उपकरणों के सिंक्रनाइज़ेशन आदि।
यह दिलचस्प है कि कार्यक्रमों के सेट के बीच हैखासकर वह जो लेखांकन के लिए ज़िम्मेदार है। यह संकीर्ण रूप से केंद्रित है और केवल बड़ी कंपनियों में उपयोग किया जाता है। यह इस तथ्य के कारण होता है कि सॉफ्टवेयर लाइसेंस निगम के वार्षिक कारोबार का 5-10% है, और इसलिए हर कंपनी इस प्रणाली को पीसी पर स्थापित करने का जोखिम नहीं उठा सकती है।
फिर भी, एसएपी लेखा कार्यक्रम हैसबसे अच्छा विकल्प 1 सी है। इसमें कई मॉड्यूल शामिल हैं जो विशिष्ट कार्यों के लिए ज़िम्मेदार हैं। इसलिए, वे विभिन्न प्रकार के उद्यमों की योजना और प्रबंधन प्रदान करते हैं, वित्तीय प्रवाह के प्रबंधन, जिसमें न केवल खरीद और बिक्री शामिल है, बल्कि सेवाओं और सामग्रियों, गोदामों, विश्लेषण आदि की निर्देशिका भी शामिल है।
आगमन को विनियमित करने के लिए एक मॉड्यूल भी है,लेखांकन, लिखना बंद, कंपनी वित्त पहनना। उपकरण और मरम्मत की संचालन पर नियंत्रण सुनिश्चित करना। मॉड्यूल में से एक लाभ और हानि प्रवाह के विश्लेषण से संबंधित है, दूसरा - सिस्टम बिक्री प्रक्रियाओं, खातों, बंडलिंग और शिपिंग के प्रबंधन के साथ। इसके अलावा, एसएपी सिस्टम में बहुत सारे जोड़ हैं जो कंपनी के काम को अधिक कुशल और आसान बना देंगे।
यह पता लगाने के लिए जारी है कि "1 सी के लिए कोई विकल्प है या नहींः व्यापार प्रबंधन ", हमें एक और शानदार विकल्प मिल गया - माइक्रोसॉफ्ट डायनेमिक्स एक्स। यह ईआरपी-सिस्टम भी है, जो इसके समय में पहला तीन-स्तर बन गया। मध्यम या बड़ी कंपनियों के संसाधनों के प्रबंधन में लगी हुई है। यह विकल्प बिक्री के अंत से लेकर बिक्री के अंत तक बहुत व्यापक रूप से दर्शाया गया है। शीतल आपको उत्पादन और वितरण का प्रबंधन करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं और परियोजनाओं, वित्त और व्यापार विश्लेषण, ग्राहकों और कर्मचारियों की निगरानी करने की अनुमति देता है।
इस सॉफ्टवेयर सिस्टम में कई कुंजी हैंलाभ। डेवलपर्स के मुताबिक, यह प्रत्येक कर्मचारी के लिए पूरी तरह से और व्यक्तिगत रूप से कंपनी की दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने में मदद करता है। कार्यों की जटिलता के बावजूद, कार्यक्रम को समझना आसान है, और अनुप्रयोगों के कार्यालय सूट से परिचित लोगों को बस एक्प्टा के साथ काम करना होगा।
कार्यक्रम में एक उच्च ergonomics, सुविधाजनक हैइंटरफ़ेस, कुछ कार्यों की प्राथमिकता सुनिश्चित करना, डेटा का अध्ययन करने के लिए व्यवसाय-विश्लेषणात्मक टूल का एक सेट, माइक्रोसॉफ्ट से सामान्य कार्यक्रमों का उपयोग कर संकेतक। माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस घटकों से ईआरपी सिस्टम के साथ काम करने का अवसर भी है।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि सॉफ्टवेयर मंचमध्यम और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए डिज़ाइन किया गया है, जहां कर्मचारियों की संख्या 10 हजार लोगों तक है। यह उन कंपनियों में भी उपयोगी है जिन्हें 20 से 1000 उपयोगकर्ताओं के साथ-साथ संचालन को स्वचालित करने की आवश्यकता होती है। कार्यक्रम उन ग्राहकों के लिए भी उपयुक्त है जो जटिल और विशिष्ट व्यावसायिक प्रक्रियाओं पर काम करते हैं।
उपरोक्त सभी सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म या तोअन्यथा लाइसेंस खरीदने या व्यक्तिगत मॉड्यूल खरीदने के लिए प्रबंधन की आवश्यकता होती है। लेकिन एक मुफ्त विकल्प "1 सी" भी है। और ऐसे विकल्पों में ऐसी सेवाएं हैं जिन्हें वास्तव में किसी भी वित्तीय व्यय की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन वे हैं जो छिपे हुए हैं, लेकिन उत्पाद के लिए भुगतान करने के लिए मजबूर होंगे। यह भी समझना फायदेमंद है कि निः शुल्क कार्यक्रमों में कुछ कार्य हैं। वे आमतौर पर उत्पादन के एक निश्चित विभाग के लिए जिम्मेदार होते हैं।
यह एक निः शुल्क कार्यक्रम है जो उपयुक्त हैनिजी उद्यमियों और जिन्होंने छोटे व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया। बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों के साथ सामना करने की संभावना नहीं है, लेकिन एक कॉम्पैक्ट उत्पादन आसानी से। सेवा वेयरहाउस एकाउंटिंग को बनाए रखती है, ग्राहकों के साथ सहयोग स्थापित करने में मदद करती है। वह थोड़ा लेखांकन करता है, खाते में शेष राशि, निश्चित संपत्तियों के साथ-साथ वेतन भी लेता है। डेबिट प्लस लिनक्स, विंडोज और मैक ओएस के साथ काम करता है।
एक मुफ्त सेवा भी है जिसमें लाइसेंस हैमुफ्त सॉफ्टवेयर वितरण के लिए। मंच सरल है और इसमें एक्सप्टा के रूप में कई विशेषताएं नहीं हैं। इसलिए, इसका इस्तेमाल छोटे व्यवसायों के लिए किया जा सकता है। "अनानस" परिचालन लेखांकन के स्वचालन पर नज़र रखता है। व्यापार रणनीति की निगरानी करने के लिए खातों को बनाने में मदद मिलेगी।
यह "1 सीः वेयरहाउस" का एक अच्छा विकल्प है। सेवा में एक एंट्री लेवल वर्जन है, जिसे आधिकारिक साइट से मुफ्त में इंस्टॉल किया जा सकता है। विस्तारित कार्यक्षमता के लिए भी एक भुगतान विकल्प का उपयोग करें। "इसकी तकनीक" छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों के खाते का प्रबंधन करने के लिए काम कर रही है। मुफ़्त संस्करण एक बुनियादी विन्यास है जिसका उपयोग वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
सेवा सभी उत्पादों और सामानों का रिकॉर्ड रखती हैस्टॉक, उनकी बिक्री का विश्लेषण, खरीदार और आपूर्तिकर्ता के बीच संबंधों को नियंत्रित करते हैं। यह वित्त के प्रवाह को ध्यान में रखता है, देश के कानून को ध्यान में रखते हुए, सभी आवश्यक दस्तावेज, मुद्रित रूपों को खींचता है। सभी प्राप्त विश्लेषणात्मक जानकारी पंजीकरण करना आसान है, ई-मेल द्वारा भेजें, अपलोड करें और डाउनलोड करें आदि।
"इसकी तकनीक" एक उच्च गति सेवा है,जो क्लाइंट बेस का विस्तार, नेटवर्क संस्करण के साथ काम कर सकते हैं। आपको समायोजित करने, समूह करने और उन्हें अनुकूलित करने के लिए सही समय पर लचीली रिपोर्ट बनाने की अनुमति देता है। कई डेटाबेस के साथ भी काम करता है, यदि आवश्यक हो तो ट्रेडिंग उपकरण को जोड़ता है और पुराने दस्तावेज को स्वचालित रूप से सही कर सकता है।
लाइसेंस ज्ञात नहीं है, लेकिन इंटरनेट परकार्यक्रम मुफ्त है। यह आपको डेटाबेस के लिए कुछ खाते बनाने की अनुमति देता है। इसका उपयोग ऐसे डेवलपर के रूप में किया जा सकता है जो लेखांकन परियोजनाएं बनाता है, साथ ही उपयोगकर्ता द्वारा पहले से बनाई गई परियोजनाओं का उपयोग करता है। कार्यक्रम दो मॉडल में मौजूद है। एकल उपयोगकर्ता और नेटवर्क एक साथ सिंक्रनाइज़ होते हैं, इसलिए यदि आपने एक परियोजना को एक में बनाया है, तो आप इसके साथ किसी अन्य असेंबली में काम कर सकते हैं।
"1 सीः व्यापार" के विकल्प के रूप में एक अच्छा सॉफ्टवेयर। इसमें बड़ी कार्यक्षमता है और न केवल उत्पादों के साथ, बल्कि वित्तीय रिपोर्ट, बिक्री, खरीद, गोदामों आदि के साथ भी निपट सकती है। कार्यक्रम का उपयोग करना आसान है, सभी कार्यात्मक मॉड्यूल में निःशुल्क पहुंच है। अद्यतन करने वाले डेवलपर स्वयं और एक साधारण कर्मचारी दोनों को कर सकते हैं, उन्हें प्रोग्रामिंग की आवश्यकता नहीं है।
मल्टीप्लाफ्फ़्ट सिस्टम सभी के बीच खड़ा हैतथ्य यह है कि, इसकी व्यापक कार्यक्षमता के बावजूद, यह उपयोगकर्ता को प्रोग्राम को मुफ्त में डाउनलोड करने की अनुमति देता है। आवेदन उत्पादन के प्रबंधन में मदद करता है, ईआरपी के प्रकार को संदर्भित करता है। कई समस्याओं को हल कर सकते हैं, जिनमें व्यापार और उत्पादन का एक जटिल स्वचालन है। और इस सॉफ्टवेयर के ग्राहक बड़े उद्यम और छोटी कंपनियों दोनों हो सकते हैं।
विन्यास के लिए "1 सीः सकलबी के चेहरे में खुदरा "विकल्प बहुत लाभदायक है। इसमें एक मॉड्यूलर संरचना है जिसमें प्रत्येक भाग एक विशिष्ट कार्य के लिए ज़िम्मेदार होता है। इसलिए, भौतिक लेखांकन, लेखांकन अनुबंध, वित्त, कर्मचारी, ऋण इत्यादि सहित कई उपप्रणालीएं हैं, योजना निर्माण, वित्तीय खर्च और भौतिक संसाधनों के लिए मॉड्यूल हैं। उपप्रणाली व्यक्तिगत संरचनाओं के द्रव्यमान या "बिंदु" विश्लेषण का संचालन करती है। वे उद्यम की अर्थव्यवस्था की निगरानी करते हैं, प्रशासनिक कार्यों की जांच करते हैं, वित्तीय स्थिति का विश्लेषण करते हैं, और इसी तरह।
"1 सी" के लिए एक विकल्प खोजें- सेवा नहीं थीबहुत मुश्किल बेशक, घरेलू उत्पाद कई तरीकों से अग्रणी स्थिति लेता है। प्लेटफार्म लॉन्च होने के बाद से कुछ कंपनियों ने केवल उनका इस्तेमाल किया है। अंततः कोई विदेशी सेवाओं पर जाता है, जो कुछ मामलों में अधिक अनुकूलित होते हैं।
| यह समझने के लिए कि एक विकल्प क्या है"एक सी", आपको यह समझने की जरूरत है कि यह क्या है और इसके लिए क्या आवश्यक है। आम तौर पर, अनुप्रयोगों, सॉफ्टवेयर, उपयोगिताओं और अन्य चीजों की संख्या अब बड़ी है। आसानी से किसी प्रकार के कार्यक्रम का एनालॉग खोजें। यदि आप भाग्यशाली हैं, तो आप एक भुगतान विकल्प और एक मुफ्त दोनों पा सकते हैं। बहुत से लोग मानते हैं कि "एक सी" एक तरह का कार्यक्रम है,उद्यम संचालित करने की इजाजत दी। वास्तव में, यह एक ऐसी कंपनी है जो व्यापार और घर के उपयोग के लिए सॉफ्टवेयर को बढ़ावा देने, समर्थन करने और बनाने में माहिर है। कंपनी की स्थापना एक निन्यानवे एक में मॉस्को में हुई थी। आज तक, बोरिस नूरिलेव सामान्य निदेशक और संस्थापक हैं। कंपनी का नाम कथित तौर पर इंगित करता हैइसके अनुप्रयोगों की गति। इसलिए, अपने स्वयं के खोज कार्यक्रम के साथ, प्रबंधन ने फैसला किया कि कंपनी को आदर्श वाक्य के लिए निम्नलिखित नियम लेना चाहिएः "एक सेकंड से अधिक में जानकारी प्राप्त करना"। फर्म अपने प्रमुख विकास के लिए जाना जाता है। सॉफ्टवेयर सिस्टम "एक सीः एंटरप्राइज़" सबसे लोकप्रिय है, एक विकल्प जो खोजना आसान है। कई शिक्षक भी थे, जैसे "ट्यूटर", "स्कूल", "एजुकेशन" इत्यादि। उस समय एक और कंपनी थी"Bitrix"। यह जेएससीबी निवेश बैंक के विभाग के विशेषज्ञों द्वारा स्थापित किया गया था। लगभग दस साल वह अपने मामलों में व्यस्त थी, जब तक कि उसने "एक सी" के साथ एकजुट होने का फैसला नहीं किया। तो दो हज़ार सात में उद्यम "एक सी-बिट्रिक्स" का गठन किया गया था। दोनों फर्मों को उत्पादन का बराबर हिस्सा मिला। जैसा कि आप जानते हैं, रूसी कंपनी ने एक बनाया हैएक प्रमुख सॉफ्टवेयर उत्पाद "एक सीः एंटरप्राइज़।" प्रणाली को लेखा, प्रबंधन और लेखांकन को स्वचालित करने के लिए विकसित किया गया था, लेकिन अब इसे एक अलग दिशा में उपयोग किया जाता है। समय के साथ, विन्यास प्रकट होना शुरू हुआ,लागू समाधान जो "एक सीः एंटरप्राइज़" के आधार पर काम करते थे। तो, एक समय में "एक सीः लेखा" का सबसे प्रसिद्ध संस्करण लोकप्रिय हो गया। सिस्टम में निम्न कॉन्फ़िगरेशन भी शामिल थेः "व्यापार और गोदाम", "वेतन और कार्मिक", "एकीकृत स्वचालन" इत्यादि। आम तौर पर, कार्यक्रम-अनुरूप "एक सी" बजायआज आम हैं। उनमें से वे हैं जो लगभग रूसी सॉफ्टवेयर की पूरी प्रणाली को दोहराते हैं। ऐसे विकल्प हैं जो प्रोग्राम के कुछ कॉन्फ़िगरेशन के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। फिर भी, कई परिस्थितियों के कारण, कई बार कभी-कभी एक विकल्प की तलाश करने के लिए मजबूर किया जाता है। उन लोगों के लिए जिन्हें घटकों का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिनएक संपूर्ण सॉफ्टवेयर मंच, आपको कुछ सॉफ्टवेयर देखना चाहिए। उनमें से कुछ "एक सी" के लिए एक विकल्प हैं। घरेलू विकल्पों से "गैलेक्सी" और "सेल" उपलब्ध हैं। यदि आप विदेशी अनुरूपताओं पर बारीकी से देखते हैं, तो हम एसएपी और माइक्रोसॉफ्ट डायनेमिक्स एक्सप्टा के बारे में बात करेंगे। एक अच्छी ईआरपी प्रणाली, जो का हिस्सा हैएक ही नाम के कार्यक्रम मध्यम और बड़े उद्योगों के लिए सबसे उपयुक्त है। एक व्यापक कार्यक्षमता है, आपको रणनीतिक योजना और परिचालन प्रबंधन का पालन करने की अनुमति देता है। रूस में, बाजार का एक छोटा सा प्रतिशत। यह समझना महत्वपूर्ण है कि मंच का गठन किया गया थारूसी अर्थव्यवस्था के विश्लेषण को ध्यान में रखते हुए, प्रणाली अपने विनिर्देशों और कानून में परिवर्तन को समझती है। सॉफ्टवेयर प्लेटफ़ॉर्म की एक विशेषता विधायी ढांचे का लचीलापन, एकीकरण और समर्थन है। "एक सी" के मामले में, इस विकल्प को कार्यात्मक मॉड्यूल प्राप्त हुए जो प्लेटफार्म में संयुक्त होते हैं। यह "एक सी" कार्यक्रम का एक अच्छा विकल्प है। यह मुफ्त संस्करण, और वाणिज्यिक संस्करण दोनों में उपलब्ध है। मुक्त संस्करण का नाम "गैलेक्सी एक्सप्रेस" रखा गया था। कई विशेषताएं हैंः अगला सॉफ्टवेयर उत्पाद "सेल" है। वह राज्यों और नगरपालिका नियंत्रण के क्षेत्र से संबंधित संगठनों के काम को स्वचालित करने के लिए भी जिम्मेदार है। वाणिज्यिक संगठनों में लागू किया जा सकता है। रूस से इसी नाम की कंपनी इस नाम के तहत सॉफ्टवेयर उत्पादों की रिहाई में लगी हुई है। यह अक्सर यूक्रेनी और रूसी उद्यमों में पाया जाता है। एक नौ आठ नौ में पहली बार "पारस" बाजार में दिखाई दिया थारूसी एकेडमी ऑफ साइंसेज के केंद्रीय डिजाइन ब्यूरो में मजदूरी की गणना के लिए ही गणना की गई थी। एक निन्यानवे दो से पहले, "लेखा" और बजट संस्करण सॉफ़्टवेयर सूट में दिखाई दिए। " लोकप्रियता गति प्राप्त कर रही थी, प्रबंधन संगठनों में सॉफ्टवेयर पेश किया गया था। इसलिए संघीय और क्षेत्रीय प्राधिकरण, स्थानीय सरकार और अन्य संस्थानों ने सिस्टम "पारस" हासिल किया है। अन्य चीजों के अलावा, "सेल एंटरप्राइज़ सात" के चेहरे में कार्यक्रमों के सेट में छोटे व्यवसाय के लिए "एक सी" का विकल्प है। इसके अलावा सातवें और आठवें संस्करणों के संस्करण "बजट" और "बीमा" भी थे। यह एक जर्मन एनालॉग है, जो अधिक उन्मुख हैलेखांकन पर कार्यक्रम प्रणाली के स्वचालन पर काम कर रहा है, बड़ी कंपनियों के संसाधनों की योजना बना रहा है, विभिन्न मानकों की गणना करता है और एक विश्लेषणात्मक सरणी में प्राप्त सभी जानकारी उत्पन्न करता है। मॉड्यूलर योजना के तहत एक ईआरपी प्रणाली भी है। अलग प्रोग्राम कॉन्फ़िगरेशन और उनके सिंक्रनाइज़ेशन दोनों का उपयोग करने की क्षमता प्रदान करता है। कार्यक्रम की प्रभावी कार्य स्वयं को सर्वोत्तम दिखाता है यदि सभी प्रक्रियाओं को एक ही सूचना मंच पर जोड़ा जाता है। एसएपी जल्दी से काम में रूट लेता है, अद्यतन करता है और विभिन्न विभागों से आता है जो डेटा आयोजित करता है। जब पूछा गया कि एक सी के लिए कोई विकल्प है, तो यह एसएपी हैतुरंत जवाब के रूप में दिमाग में आता है। कार्यक्रम न केवल लेखांकन और रिपोर्टिंग के कार्यों को जोड़ता है, बल्कि रसद भी। नतीजतन, इसकी मदद से आप आंतरिक उत्पादन लागत, आदेश प्रबंधन, वित्त और परिणामों को ट्रैक कर सकते हैं। इसके अलावा, प्रणाली योजना, प्रबंधन, बिक्री, चालान और शिपमेंट एकीकृत करता है। खाते, खरीद और स्टॉक पर नियंत्रण का अनुमान लगाता है। दिलचस्प बात यह है कि यह पहला सॉफ्टवेयर हैटाइप करें। जर्मनी में एक नौ बहत्तर में वापस दिखाई दिया। कार्यक्रम केवल पांच विशेषज्ञों द्वारा विकसित किया गया था। प्रारंभ में, यह एक स्वचालित उत्पादन प्रबंधन प्रणाली विकसित करने के लिए डिज़ाइन किया गया था। फिर, इस प्रक्रिया में लेखांकन, व्यापार, प्रबंधन, विपणन और इतने पर जोड़ा जाना शुरू हो गया। दो सौ नौ तक, उसी नाम की जर्मन कंपनीइसके उत्पाद ने विश्व बाजार के नेताओं में प्रवेश किया है और बड़ी कंपनियों और निगमों के लिए सबसे बड़े सॉफ्टवेयर निर्माताओं में से एक बन गया है। इस मंच के आधार पर अपने अस्तित्व के दौरान, कई अनुप्रयोग सामने आए हैं जिन्होंने निगमों के कर्मचारियों के लिए जीवन आसान बना दिया है। उत्पादों में से "एक सी" के अनुरूप हैं। कंपनी के लिए कॉर्पोरेट डेटा गोदामों, पोर्टल उत्पादन समाधान, नियामक और संदर्भ जानकारी के लिए सॉफ्टवेयर, ज्ञान प्रबंधन, विन्यास और मोबाइल उपकरणों के सिंक्रनाइज़ेशन आदि। यह दिलचस्प है कि कार्यक्रमों के सेट के बीच हैखासकर वह जो लेखांकन के लिए ज़िम्मेदार है। यह संकीर्ण रूप से केंद्रित है और केवल बड़ी कंपनियों में उपयोग किया जाता है। यह इस तथ्य के कारण होता है कि सॉफ्टवेयर लाइसेंस निगम के वार्षिक कारोबार का पाँच-दस% है, और इसलिए हर कंपनी इस प्रणाली को पीसी पर स्थापित करने का जोखिम नहीं उठा सकती है। फिर भी, एसएपी लेखा कार्यक्रम हैसबसे अच्छा विकल्प एक सी है। इसमें कई मॉड्यूल शामिल हैं जो विशिष्ट कार्यों के लिए ज़िम्मेदार हैं। इसलिए, वे विभिन्न प्रकार के उद्यमों की योजना और प्रबंधन प्रदान करते हैं, वित्तीय प्रवाह के प्रबंधन, जिसमें न केवल खरीद और बिक्री शामिल है, बल्कि सेवाओं और सामग्रियों, गोदामों, विश्लेषण आदि की निर्देशिका भी शामिल है। आगमन को विनियमित करने के लिए एक मॉड्यूल भी है,लेखांकन, लिखना बंद, कंपनी वित्त पहनना। उपकरण और मरम्मत की संचालन पर नियंत्रण सुनिश्चित करना। मॉड्यूल में से एक लाभ और हानि प्रवाह के विश्लेषण से संबंधित है, दूसरा - सिस्टम बिक्री प्रक्रियाओं, खातों, बंडलिंग और शिपिंग के प्रबंधन के साथ। इसके अलावा, एसएपी सिस्टम में बहुत सारे जोड़ हैं जो कंपनी के काम को अधिक कुशल और आसान बना देंगे। यह पता लगाने के लिए जारी है कि "एक सी के लिए कोई विकल्प है या नहींः व्यापार प्रबंधन ", हमें एक और शानदार विकल्प मिल गया - माइक्रोसॉफ्ट डायनेमिक्स एक्स। यह ईआरपी-सिस्टम भी है, जो इसके समय में पहला तीन-स्तर बन गया। मध्यम या बड़ी कंपनियों के संसाधनों के प्रबंधन में लगी हुई है। यह विकल्प बिक्री के अंत से लेकर बिक्री के अंत तक बहुत व्यापक रूप से दर्शाया गया है। शीतल आपको उत्पादन और वितरण का प्रबंधन करने, आपूर्ति श्रृंखलाओं और परियोजनाओं, वित्त और व्यापार विश्लेषण, ग्राहकों और कर्मचारियों की निगरानी करने की अनुमति देता है। इस सॉफ्टवेयर सिस्टम में कई कुंजी हैंलाभ। डेवलपर्स के मुताबिक, यह प्रत्येक कर्मचारी के लिए पूरी तरह से और व्यक्तिगत रूप से कंपनी की दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने में मदद करता है। कार्यों की जटिलता के बावजूद, कार्यक्रम को समझना आसान है, और अनुप्रयोगों के कार्यालय सूट से परिचित लोगों को बस एक्प्टा के साथ काम करना होगा। कार्यक्रम में एक उच्च ergonomics, सुविधाजनक हैइंटरफ़ेस, कुछ कार्यों की प्राथमिकता सुनिश्चित करना, डेटा का अध्ययन करने के लिए व्यवसाय-विश्लेषणात्मक टूल का एक सेट, माइक्रोसॉफ्ट से सामान्य कार्यक्रमों का उपयोग कर संकेतक। माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस घटकों से ईआरपी सिस्टम के साथ काम करने का अवसर भी है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि सॉफ्टवेयर मंचमध्यम और बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए डिज़ाइन किया गया है, जहां कर्मचारियों की संख्या दस हजार लोगों तक है। यह उन कंपनियों में भी उपयोगी है जिन्हें बीस से एक हज़ार उपयोगकर्ताओं के साथ-साथ संचालन को स्वचालित करने की आवश्यकता होती है। कार्यक्रम उन ग्राहकों के लिए भी उपयुक्त है जो जटिल और विशिष्ट व्यावसायिक प्रक्रियाओं पर काम करते हैं। उपरोक्त सभी सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म या तोअन्यथा लाइसेंस खरीदने या व्यक्तिगत मॉड्यूल खरीदने के लिए प्रबंधन की आवश्यकता होती है। लेकिन एक मुफ्त विकल्प "एक सी" भी है। और ऐसे विकल्पों में ऐसी सेवाएं हैं जिन्हें वास्तव में किसी भी वित्तीय व्यय की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन वे हैं जो छिपे हुए हैं, लेकिन उत्पाद के लिए भुगतान करने के लिए मजबूर होंगे। यह भी समझना फायदेमंद है कि निः शुल्क कार्यक्रमों में कुछ कार्य हैं। वे आमतौर पर उत्पादन के एक निश्चित विभाग के लिए जिम्मेदार होते हैं। यह एक निः शुल्क कार्यक्रम है जो उपयुक्त हैनिजी उद्यमियों और जिन्होंने छोटे व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया। बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनियों के साथ सामना करने की संभावना नहीं है, लेकिन एक कॉम्पैक्ट उत्पादन आसानी से। सेवा वेयरहाउस एकाउंटिंग को बनाए रखती है, ग्राहकों के साथ सहयोग स्थापित करने में मदद करती है। वह थोड़ा लेखांकन करता है, खाते में शेष राशि, निश्चित संपत्तियों के साथ-साथ वेतन भी लेता है। डेबिट प्लस लिनक्स, विंडोज और मैक ओएस के साथ काम करता है। एक मुफ्त सेवा भी है जिसमें लाइसेंस हैमुफ्त सॉफ्टवेयर वितरण के लिए। मंच सरल है और इसमें एक्सप्टा के रूप में कई विशेषताएं नहीं हैं। इसलिए, इसका इस्तेमाल छोटे व्यवसायों के लिए किया जा सकता है। "अनानस" परिचालन लेखांकन के स्वचालन पर नज़र रखता है। व्यापार रणनीति की निगरानी करने के लिए खातों को बनाने में मदद मिलेगी। यह "एक सीः वेयरहाउस" का एक अच्छा विकल्प है। सेवा में एक एंट्री लेवल वर्जन है, जिसे आधिकारिक साइट से मुफ्त में इंस्टॉल किया जा सकता है। विस्तारित कार्यक्षमता के लिए भी एक भुगतान विकल्प का उपयोग करें। "इसकी तकनीक" छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों के खाते का प्रबंधन करने के लिए काम कर रही है। मुफ़्त संस्करण एक बुनियादी विन्यास है जिसका उपयोग वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। सेवा सभी उत्पादों और सामानों का रिकॉर्ड रखती हैस्टॉक, उनकी बिक्री का विश्लेषण, खरीदार और आपूर्तिकर्ता के बीच संबंधों को नियंत्रित करते हैं। यह वित्त के प्रवाह को ध्यान में रखता है, देश के कानून को ध्यान में रखते हुए, सभी आवश्यक दस्तावेज, मुद्रित रूपों को खींचता है। सभी प्राप्त विश्लेषणात्मक जानकारी पंजीकरण करना आसान है, ई-मेल द्वारा भेजें, अपलोड करें और डाउनलोड करें आदि। "इसकी तकनीक" एक उच्च गति सेवा है,जो क्लाइंट बेस का विस्तार, नेटवर्क संस्करण के साथ काम कर सकते हैं। आपको समायोजित करने, समूह करने और उन्हें अनुकूलित करने के लिए सही समय पर लचीली रिपोर्ट बनाने की अनुमति देता है। कई डेटाबेस के साथ भी काम करता है, यदि आवश्यक हो तो ट्रेडिंग उपकरण को जोड़ता है और पुराने दस्तावेज को स्वचालित रूप से सही कर सकता है। लाइसेंस ज्ञात नहीं है, लेकिन इंटरनेट परकार्यक्रम मुफ्त है। यह आपको डेटाबेस के लिए कुछ खाते बनाने की अनुमति देता है। इसका उपयोग ऐसे डेवलपर के रूप में किया जा सकता है जो लेखांकन परियोजनाएं बनाता है, साथ ही उपयोगकर्ता द्वारा पहले से बनाई गई परियोजनाओं का उपयोग करता है। कार्यक्रम दो मॉडल में मौजूद है। एकल उपयोगकर्ता और नेटवर्क एक साथ सिंक्रनाइज़ होते हैं, इसलिए यदि आपने एक परियोजना को एक में बनाया है, तो आप इसके साथ किसी अन्य असेंबली में काम कर सकते हैं। "एक सीः व्यापार" के विकल्प के रूप में एक अच्छा सॉफ्टवेयर। इसमें बड़ी कार्यक्षमता है और न केवल उत्पादों के साथ, बल्कि वित्तीय रिपोर्ट, बिक्री, खरीद, गोदामों आदि के साथ भी निपट सकती है। कार्यक्रम का उपयोग करना आसान है, सभी कार्यात्मक मॉड्यूल में निःशुल्क पहुंच है। अद्यतन करने वाले डेवलपर स्वयं और एक साधारण कर्मचारी दोनों को कर सकते हैं, उन्हें प्रोग्रामिंग की आवश्यकता नहीं है। मल्टीप्लाफ्फ़्ट सिस्टम सभी के बीच खड़ा हैतथ्य यह है कि, इसकी व्यापक कार्यक्षमता के बावजूद, यह उपयोगकर्ता को प्रोग्राम को मुफ्त में डाउनलोड करने की अनुमति देता है। आवेदन उत्पादन के प्रबंधन में मदद करता है, ईआरपी के प्रकार को संदर्भित करता है। कई समस्याओं को हल कर सकते हैं, जिनमें व्यापार और उत्पादन का एक जटिल स्वचालन है। और इस सॉफ्टवेयर के ग्राहक बड़े उद्यम और छोटी कंपनियों दोनों हो सकते हैं। विन्यास के लिए "एक सीः सकलबी के चेहरे में खुदरा "विकल्प बहुत लाभदायक है। इसमें एक मॉड्यूलर संरचना है जिसमें प्रत्येक भाग एक विशिष्ट कार्य के लिए ज़िम्मेदार होता है। इसलिए, भौतिक लेखांकन, लेखांकन अनुबंध, वित्त, कर्मचारी, ऋण इत्यादि सहित कई उपप्रणालीएं हैं, योजना निर्माण, वित्तीय खर्च और भौतिक संसाधनों के लिए मॉड्यूल हैं। उपप्रणाली व्यक्तिगत संरचनाओं के द्रव्यमान या "बिंदु" विश्लेषण का संचालन करती है। वे उद्यम की अर्थव्यवस्था की निगरानी करते हैं, प्रशासनिक कार्यों की जांच करते हैं, वित्तीय स्थिति का विश्लेषण करते हैं, और इसी तरह। "एक सी" के लिए एक विकल्प खोजें- सेवा नहीं थीबहुत मुश्किल बेशक, घरेलू उत्पाद कई तरीकों से अग्रणी स्थिति लेता है। प्लेटफार्म लॉन्च होने के बाद से कुछ कंपनियों ने केवल उनका इस्तेमाल किया है। अंततः कोई विदेशी सेवाओं पर जाता है, जो कुछ मामलों में अधिक अनुकूलित होते हैं। |
ऊर्जा मंत्री प्रताप केशरी देब ने गुरुवार को टाटा पावर से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम व्यवधान के साथ बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कहा।
जनता से रिश्ता वेबडेस्क। ऊर्जा मंत्री प्रताप केशरी देब ने गुरुवार को टाटा पावर से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम व्यवधान के साथ बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कहा। यहां इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम (आईएसजीएफ) द्वारा आयोजित छठी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट (डीयूएम) 2022 का उद्घाटन करते हुए देब उन्होंने कहा कि हाल ही में पदमपुर विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान जहां 5 दिसंबर को उपचुनाव होने हैं, उन्हें ग्रामीण उपभोक्ताओं से लगातार बिजली कटौती और कम वोल्टेज की कई शिकायतें मिलीं।
देब, जिन्हें बीजद द्वारा विधानसभा क्षेत्र का झारखंड ब्लॉक सौंपा गया है, ने कहा कि राज्य के बिजली वितरण कारोबार को टाटा पावर को सौंपे जाने के बाद लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। बदलाव के दौर में कंपनी को पेश आ रही दिक्कतों को स्वीकार करते हुए मंत्री ने कहा कि कम समय में हासिल किया गया तेजी से बदलाव राज्य के लिए शुभ संकेत होगा, जिसने बिजली क्षेत्र में सुधारों की अगुआई की है।
बाद में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, देब ने कहा कि इस साल गर्मियों के महीनों (अप्रैल और मई) के दौरान राज्य को बिजली की कमी का सामना करना पड़ा, क्योंकि एनटीपीसी के दारलीपाली थर्मल पावर प्लांट की एक इकाई ग्रिड से चली गई थी। वितरण उपयोगिता द्वारा किए गए रखरखाव के कारण उपभोक्ताओं द्वारा सामना की जाने वाली स्थानीय बिजली कटौती अस्थायी है।
दो दिवसीय बैठक के मौके पर पत्रकारों से बात करते हुए, टाटा पावर के सीईओ और एमडी प्रवीर सिन्हा ने कहा कि राज्य का बिजली वितरण क्षेत्र बहुत कम समय में एक सराहनीय परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। डिस्कॉम ने न केवल एटीएंडसी घाटे को कम किया है बल्कि आपूर्ति और ग्राहक संपर्क में भी विश्वसनीयता में सुधार किया है।
ओडिशा के लोगों को स्वच्छ और हरित ऊर्जा उत्पादों और समाधानों की पेशकश करने के लिए, टाटा पावर राज्य भर में स्वच्छ गतिशीलता को बढ़ावा देने के लिए ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रही है। इसके अलावा, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए, टाटा पावर पावर रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन, सोलर पंप और होम ऑटोमेशन सॉल्यूशंस की पेशकश करेगा। टाटा पावर के अध्यक्ष (टी एंड डी), संजय बंगा ने कहा कि कंपनी ने पुराने वितरण नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए अगले पांच वर्षों में लगभग 5,000 करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की है।
| ऊर्जा मंत्री प्रताप केशरी देब ने गुरुवार को टाटा पावर से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम व्यवधान के साथ बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कहा। जनता से रिश्ता वेबडेस्क। ऊर्जा मंत्री प्रताप केशरी देब ने गुरुवार को टाटा पावर से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में न्यूनतम व्यवधान के साथ बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कहा। यहां इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम द्वारा आयोजित छठी डिस्ट्रीब्यूशन यूटिलिटी मीट दो हज़ार बाईस का उद्घाटन करते हुए देब उन्होंने कहा कि हाल ही में पदमपुर विधानसभा क्षेत्र के दौरे के दौरान जहां पाँच दिसंबर को उपचुनाव होने हैं, उन्हें ग्रामीण उपभोक्ताओं से लगातार बिजली कटौती और कम वोल्टेज की कई शिकायतें मिलीं। देब, जिन्हें बीजद द्वारा विधानसभा क्षेत्र का झारखंड ब्लॉक सौंपा गया है, ने कहा कि राज्य के बिजली वितरण कारोबार को टाटा पावर को सौंपे जाने के बाद लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। बदलाव के दौर में कंपनी को पेश आ रही दिक्कतों को स्वीकार करते हुए मंत्री ने कहा कि कम समय में हासिल किया गया तेजी से बदलाव राज्य के लिए शुभ संकेत होगा, जिसने बिजली क्षेत्र में सुधारों की अगुआई की है। बाद में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, देब ने कहा कि इस साल गर्मियों के महीनों के दौरान राज्य को बिजली की कमी का सामना करना पड़ा, क्योंकि एनटीपीसी के दारलीपाली थर्मल पावर प्लांट की एक इकाई ग्रिड से चली गई थी। वितरण उपयोगिता द्वारा किए गए रखरखाव के कारण उपभोक्ताओं द्वारा सामना की जाने वाली स्थानीय बिजली कटौती अस्थायी है। दो दिवसीय बैठक के मौके पर पत्रकारों से बात करते हुए, टाटा पावर के सीईओ और एमडी प्रवीर सिन्हा ने कहा कि राज्य का बिजली वितरण क्षेत्र बहुत कम समय में एक सराहनीय परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। डिस्कॉम ने न केवल एटीएंडसी घाटे को कम किया है बल्कि आपूर्ति और ग्राहक संपर्क में भी विश्वसनीयता में सुधार किया है। ओडिशा के लोगों को स्वच्छ और हरित ऊर्जा उत्पादों और समाधानों की पेशकश करने के लिए, टाटा पावर राज्य भर में स्वच्छ गतिशीलता को बढ़ावा देने के लिए ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रही है। इसके अलावा, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए, टाटा पावर पावर रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन, सोलर पंप और होम ऑटोमेशन सॉल्यूशंस की पेशकश करेगा। टाटा पावर के अध्यक्ष , संजय बंगा ने कहा कि कंपनी ने पुराने वितरण नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए अगले पांच वर्षों में लगभग पाँच,शून्य करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की है। |
शामके ७.०० बजने वाले हैं लेकिन सोनाली अभी तक अपने ऑफिस में काम कर रही है। कल उसके बॉस कंपनी के काम से विदेश जा रहे हैं उनके प्रजेंटेशन मे फायनल टच अभी बाकी है। ६.०० बजे तो आखिरी स्लाइड का डेटा मिला है, उसे डालके स्लाईड फायनल करके उसने बॉससे डिस्कशन तो कर लिया। पर एक बार में मान ले, वो बॉस क हाँ। चेंज के बाद चेंज, बताता है.
सोनाली अब थोडी सी परेशान दिख रही है। आज उसे वक्त पर निकलना था, जाते हुए हॉस्पिटल से रिपोर्ट कलेक्ट करना था। पूरा प्लान करके आई थी, लेकिन इस प्रेजेंटेशन ने उसके पूरे प्लांट को चौपट कर दिया था।वो फायनल टच मार ही रही है इतनेमे फोन बजता है,सोनालीः (मनमे) "अब कौन है, पहले ही मैं जल्दी मे हूं।"
फोन की तरफ देखती है 'हसबंड'
सोनालीः" हाँं, मनोज।"
मनोजः "सोनाली, पहूंची क्या?"
सोनालीः "अरे, क हाँ यार, अभी भी ऑफिस मे हूॅ।"
मनोजः "अरे!!!! क्या कह रही हो, अभी तक निकली नहीं?? दोपहर को तो बोली थी की टाईम पे निकलोगी!!"
सोनालीः " हाँ! बोला तो था, पर नहीं निकल पाई! बॉस कल अॅब्रॉड जा रहे है, उनके प्रजेंटेशन, मिटींग की तैयारी कर रही हूं!"
मनोजः" अरे, पर तुम्हे हॉस्पिटल भी तो जाना है। याद है ना? अब निकलोगी कब, पहूंचोगी कब, तुम् हाँरे पहुंचने तक तो बंद हो जायेगा।"
सोनालीः "अब बस हो ही गया, बस ५ मिनट में निकल रही हूं!"
मनोजः "जल्दी निकलो, और कूछ प्रॉब्लेम है तो मुझे फोन करदो। मुझे घर पहुंचने हे १० बज जाएंगे, अभी एक कॉल है। मैं २ घंटे बिजी रहुंगा। अगर फोन नहीं ऊठा पाया तो, मेसेज डाल देना। मैं कॉल कर दूंगा।"
सोनालीः "ओके, मैं रखती हुं अब, जल्दी खतम करके निकलना है।"
मनोजः "ठीक हैं। मिलते हैं।"
(वो फोन रखके जानेकी तैयारी करती है)
पाच-सात मिनिट में वो अॉफीस से निकलती हैं. थोडी दूरर जाते ही उसे एहसास होता है की उसे भूख लगी है! वो बाजूवाले दूकान से चिप्स और बिस्किट्स उठाती है! अब वो टॅक्सी का इंतजार कर रही है, १० मिनिट हो गये पर, एक भी टॅक्सी नहीं रुकती है।
'आज क्या हो गया है? एक भी टॅक्सी नहीं रुक रही है!! हमेशा ऐसा ही होता हैं, जब भी जल्दी होती है, कुछ ना कुछ जरुर बीच में आ जाता है, पहले बॉस, अब ये टॅक्सी।' वो मनमे सोचती हैं, उसके पेशन्स अब खत्म हो रहे है।
चलो बस स्टॉप तक चलती हूं, टॅक्सी नहीं तो कम से कम बस तो मिल ही जायेगी। ये सोचके वो बस स्टॉप की तरफ चल देती है। ५-७ मिनट में वो पहूंच जाती है। बसें आ तो रही है पर सब खचाखच भरली हुईं! वो अपनी एरिया वाली बसकी राह देखना शुरु कर देती है। खडे खडे अपनी बॅगसे चिप्स निकालती है।
चिप्स खाते खाते उसका ध्यान बार बार घडी की तरफ जाता है, 'समय बिता जा र हाँ है और ये बस आनेका नाम नहीं ले रही है। पता नहीं मै समयमें पहूंच पाऊंगी के नहीं' वो मन मे सोच रही थी.जैसे जैसे समय बितता जाता है, वो और बेचैन होती है, ना टॅक्सी ना ही बस, पता नहीं आज क्या प्रॉब्लेम है।
वो इधर ऊधर देख रही थी की अचानक उसका ध्यान बस स्टॉप के अंदरवाले बेंच पे बैठी एक नन्ही लडकीपर जाता है, वो लडकीभी उसीकी तरफ लेख रही थी 'क्या प्यारीसी बच्ची हैं, पर ये ऐसे अकेली क्यो बैठी हैं?' सोनाली मनमें सोचती हैं।सोनाली चारोतरफ देखती है, बस स्टॉप पे एक और आदमी खडा होता हैं, 'शायद ये बच्ची इनके साथ रहेगी, और कोई दिख भी तो नहीं र हाँ'
वो बच्चीकी और देखके मुस्कुराती हैं। बच्ची सिर्फ देखती ही रहती हैं, कुछ जवाब नहीं देती है। सोनाली अपने पासवाला चिप्स का पॅकेट आगे बढाती हैं। ये नुस्का काम कर जाता है, वो बच्ची झटसे उसके हाँथसे वो पॅकेट छीन लेती हैं। चिप्स निकालती है और ४-५ खाने के बाद सोनाली की तरफ देखके मुस्कुराती हैं। चिप्स का पॅकेट छोटा होनेके कारण झटसे खत्म हो जाता है! खाली पॅकेट देखके ऊस बच्चीका चेहरा उतर जाता है। वो रोनीसी सुरतसे सोनाली की तरफ देखती है, सोनाली के समझमे आ जाता है की बच्ची को भूख लगी हैं, वो बैग मे से अभी खरीदा हुआ बिस्कूट का पुडा निकालती है और बच्ची की तरफ देखती है। बच्चीके चेहरे पे अब मुस्कुराहट वापस आई हैं। वो झटसे अपना हाँथ आगे बढाती हैं, सोनाली पुडा पीछे चुपाकर बच्चीसे पूंछती है "ये आपको तभी मिलेगा जब आप अपना नाम बताएगी" बच्ची उसे सुनकर अनसुना कर देती है। वो बिस्किट्स केलिये अपना हाँथ आगे बढाती हैं। सोनाली फिरसे उसे वही सवाल करती है, फिरसे कोई जवाब नहीं।' शायद बिस्किट्स मिलनेके बाद में जवाब दे दे' यह सोचकर सोनाली उसे बिस्किट्स का पुडा खोलकर दे देती है। बच्ची झपककर पुडा हाँथमे लेती हैं और बिस्किट्स निकालकर खाना शुरू कर देती है। ' अब बताओ आपका नाम!!' सोनाली उम्मीदमे उसे पूंछती है। बच्ची फिरसे अनसुना करके खाना शुरू रखती हैं। 'अब क्या करे? पूछने केलिये य हाँँ कोई है भी तो नहीं, चलो अब और थोडी देर इंतजार करती हुं, शायद भुख मिटने के बाद जवाब दे '
इतने मे एक बस आके रूकती हैं, सोनाली देखती है की ये बस तो उसकी घर की तरफ जानेवाली है। इतनी देरके बाद आखिर आ ही गयी, सोनाली बस की तरफ बढती है. वो बसमे चढने ही वाली होती है तभी उसका ध्यान बच्ची की तरफ जाता है। ' पर ये बच्ची?, इसका क्या? मैं इसे ऐसे अकेले कैसे छोड दु' वो वापस पीछे हटती है। बस अभी भी वही खडी है। सोनाली के मनमे हॉस्पिटल और बच्ची के बीच में द्वंद्व शुरू है। कुछही पलोमे वो बस निकलने वाली हैं। आखिर सोनाली पिछे हटती है, वो बच्चीको ऊस हाँलतमे नहीं छोड सकती। वो पीछे मुड के बच्ची की तरफ देखती है वो बच्ची बिस्किट खाना रोककर सोनाली की तरफ ही देख रही होती है उसके चेहरे को देखकर सोनाली को साफ पता चलता है कि वह बच्ची डरी हुई है। उसे डर है कि कहीं सोनाली निकल ना जाए इसलिए वह डरी सहमी सी सोनाली की तरफ देख रही है। जैसे ही सोनाली पीछे मुड़के उस बच्ची की तरफ चलने लगती है वह बच्ची मुस्कुराती है, उसको तसल्ली हो जाती है कि सोनाली उसे अकेला नहीं छोड़ेगी। वह वापस बिस्कुट खाने में दंग हो जाती है. अब कुछ भी हो जाए सोनाली उस बच्ची को अकेला नहीं छोड़ सकती. सोनाली बच्ची की तरफ जाती है. बोलती है "देखो अब मैं तुम् हाँरे लिए रुक भी गई हूं, अब तो तुम् हाँरा नाम बताओ" बच्ची सोनाली की तरफ देखती है शायद उसे सवाल समझ में आता है लेकिन कुछ बोलती नहीं। वह वापस बिस्कुट खाने में मशगूल हो जाती है। सोनाली उसे पूछती है "तुम् हाँरे मां बाप क हाँं है?मम्मी डैडी!! जैसे ही मम्मी डैडी का नाम सुनती है वह बच्ची बिस्कुट खाना रोके रोने लगती है उसके आंखों से आंसू छलकते हैं सोनाली बच्ची को अपने करीब ले लेती है "देखो बेटा, मैं तुम्हें तुम् हाँरे मम्मी डैडी के पास पहुंचा देती हूं, लेकिन क हाँं पर है वह तुम्हें य हाँं अकेला छोड़कर वह क हाँं चले गए।" बच्ची सिर्फ सोनाली की तरफ देखती है लेकिन कुछ नहीं बोलती। अपने हाँथ से उस तरफ इशारा करती है। "अच्छा, तुम् हाँरे मम्मी डैडी उधर गए हैं।" बच्ची फिर कोई जवाब नहीं देती। 'कहीं यह बच्ची गूंगी नहीं।' सोनाली मन में सोचती हैं। बेटा आप कुछ बोलती क्यों नहीं हो बच्ची सिर्फ सोनाली का मुंह ताकते रहती है। "बेटा आप बोल सकती हो?" फिर कोई जवाब नहीं। अब सोनाली को सूझ नहीं र हाँ कि करना क्या है। वह बच्ची को अपने साथ चलने के लिए कहती है। बच्ची झट से सोनालिका हाँथ पकड़ लेती है। सोनाली देखती है कि सामने एक दुकान है सोनाली बच्ची को लेकर दुकान की तरफ जाती है वह दुकानदार से पूछती हैसोनालीः भाई साहब, क्या आप इस बच्ची को जानते हैं? दुकानदारः नहीं मैडम, क्यों? क्या हुआ?सोनालीः यह बच्ची अकेले ही सामने बस स्टॉप पर बैठी थी! पता नहीं अकेले कैसे पहुंच गई, क्या आपने देखा उसे कौन व हाँं पर छोड़ गया।दुकानदारः नहीं मैम साहब मेरा ध्यान नहीं था। आप बच्ची से क्यों नहीं पूछ लेती?सोनालीः भाई साहब मैं कब से वही प्रयास कर रही हूं लेकिन लगता है यह बच्ची गूंगी है। कुछ बोलती ही नहीं है।वह दुकानदार बच्ची की तरफ देखता है दुकानदारः आपका नाम क्या है बेटा? आपके मम्मी डैडी क हाँं है? आपको य हाँं कौन छोड़ गया? आप क हाँं रहती हो?
बच्ची कुछ जवाब नहीं देती. वह सोनाली को लिपटकर उसके पीछे जाकर छुप जाती है।
दुकानदारः मैडम, आप पुलिस के पास क्यों नहीं जाती? वह इसके माता-पिता को ढूंढ लेंगे।
सोनालीः भाई साहब इतने छोटे से बच्चे को पुलिस के हाँथ में दे दूं! थोड़ा आगे जाकर पूछती हूं शायद कोई इस को पहचानने वाला मिल जाए। आप प्लीज एक काम कर सकते हैं? अगर कोई इस बच्ची को ढूंढता हुआ आ जाए तो उसे तो उन्हें उस तरफ भेज दीजिएगा। क्योंकि इस बच्ची ने अपना हाँथ उस तरफ दिखाया था। शायद इसका घर उधर ही है।दुकानदारः जरूर मैडम मैं जरूर बता दूंगा अगर कोई मदद लगी तो मुझे बता दीजिएगा।
सोनाली अब उस बच्ची को लेकर आगे बढ़ती है। थोड़ा आगे जाने के बाद उसे और चार पांच दुकानें दिखती है। उसमें से एक दुकान खाने-पीने की है। सोनाली बच्ची को लेकर उस दुकान में जाती है।सोनालीः भाई साहब आप इस बच्ची को जानते हैं। पहले कहीं से देखा है।दुकानदारः नहीं तो। क्यों? क्या हुआ? सोनालीः अरे यह बच्ची अकेली ही व हाँं बैठी थी। शायद बोल भी नहीं पाती है इसलिए बता नहीं पा रही है कि उसके माता-पिता क हाँं पर है। मैंने सोचा यही आसपास की रहेगी इसलिए पूछ रही हूं।
दुकानदारः नहीं बहन जी। हमें तो नहीं पता। आप एक काम कीजिए। आगे 1 बच्चों के कपड़े की दुकान है। उन लोगों को शायद पता हो सकता है, वह बच्चों को आते-जाते देखते रहते हैं।सोनालीः ठीक है, धन्यवाद।
सोनाली व हाँं से निकलती है, थोड़ा आगे जाने के बाद उसे कपड़े की दुकान दिखाई देती है। जैसे ही वह कपड़े की दुकान की तरफ बढ़ती है उसका फोन बजता है। फोन की तरफ देखती है 'हसबैंड'
सोनालीः हाँं मनोज।मनोजः पहुंची क्या हॉस्पिटल? कुछ पता चला?सोनालीः अरे क हाँं यार!! मैं अभी तक यहीं पर हूं।मनोजः मतलब अभी ऑफिसमें हो?सोनालीः नहीं यार, ऑफिस से निकले बहुत समय हो गया। लेकिन थोड़ा रास्ते में अटक गई हूं।मनोजः मतलब? मैं कुछ समझा नहीं!! सोनालीः अब कैसे समझाऊं? जैसे ही मैं घर जाने के लिए बस स्टॉप पर पहुंची, तो एक छोटी सी अस हाँय बच्ची व हाँं पर अकेली बैठी थी, शायद गूंगी है। और उसके मां-बाप क हाँं पर है बता नहीं पा रही है। तो अभी मैं उसके मां बाप को ढूंढ रही हूं।
मनोजः अरे सोनाली यह क्या यार? तुम्हें पता है हॉस्पिटल जाना कितना इंपोर्टेंट है!!सोनालीः हाँं!! पता है, पर इस बच्ची को अकेला भी तो नहीं छोड़ सकती। कुछ हो गया तो?? तुम्हें पता है आजकल न्यूज़ में क्या क्या आ र हाँ है। यह तो अच्छा हुआ कि मेरी उस पर नजर पड़ गई। अब दो तीन जगह पर पूछती हूं नहीं तो इसको पुलिस के पास ले जाती हूं।मनोजः हाँं सही है। बराबर क हाँ तुमने। ठीक है, तो देख लो ये सब हो जाने के बाद रिपोर्ट मिलता है तो, वरना कल लेना पड़ेगा। मुझे आने की जरूरत है?? सोनालीः अरे नहीं!! मैं मैनेज कर लूंगी। कुछ लगेगा तो मैं फोन कर दूंगी।मनोजः ठीक है। लेकिन, फोन करना। और कुछ गड़बड़ दिखाई दिए तो जरुर फोन करना, मैं तुरंत आ जाऊंगा। ओके, अब रखता हूं, वापस कॉल में जाना है।सोनालीः ठीक है, मैं बता दूंगी।
दुकानदारः नहीं, नहीं बहनजी। हम में से कोई नहीं जानता इसे। पहले कभी नहीं देखा। क्यों क्या हुआ? कुछ प्रॉब्लम है? सोनालीः अरे हाँं!! मतलब, यह बच्ची अकेली ही उस बस स्टॉप पर बैठी थी। इसके मां-बाप क हाँं पर है कुछ पता नहीं इसलिए ढूंढ रही हूं।
दुकानदारः तो बच्ची से पूछ लीजिए ना!! सोनालीः अरे नहीं भाई साहब!! यह बच्ची गूंगी है। कुछ बोल नहीं पाती है। कब से वही प्रयास कर रही हूं।
सोनाली बच्ची को लेकर दुकान से निकलती है। अब उसे समझ में नहीं आ र हाँ है कि करना क्या है!! वह बच्ची की तरफ देखती है। वह बच्ची मासूम चेहरे से सोनाली की तरफ देख रही है। अब सोनाली को उस बच्ची में कुछ ज्यादा ही इंटरेस्ट आने लगता है। वह उस बच्ची में इन्वॉल्व हो जाती है। अगर कोई नहीं मिलता है तो वो उसे घर ले जाने के लिए भी तैयार हैं।
सोनालीः बेटा और कुछ चाहिए? कुछ खाना पीना है?
बच्ची अपना सर हिलाती है।
सोनालीः चलो पहले एक काम करते हैं। आपके कपड़े कितने मेले हो गए हैं। आपके लिए कुछ कपड़े ले लेते हैं।
सोनाली पीछे मुड़कर उस दुकान में वापस जाती है।
सोनालीः भाई साहब, इस बच्ची के साइजका कुछ फ्राक वगैरह मिलेगा? इसके कपड़े बहुत गंदे हो गए हैं।
दुकानदारः क्यों नहीं बहनजी! अभी दिखाता हूं। अरे गणेश, जरा बहन जी को कपड़े दिखाना बच्ची के लिए।।
दस मिनट १०-१२ फ्रॉक्स देखने के बाद सोनाली उसमें से दो फ्रॉक उठाती है। बच्ची को पूछती है, कि उसे अच्छा लगा?? बच्ची खुशी से हाँं कर देती है। सोनाली दुकानदार से वह दोनों फ्रॉक खरीद लेती है।
बच्ची को वहीं दुकान के ट्रायल रूम में फ्रॉक पहनाने के लिए ले जाती है। पहले उस दुकानदार से थोड़ा पानी पानी लेकर बच्ची का मुंह साफ करती हैं, और फिर उन दोनों में से एक अच्छा सा फ्रॉक देखकर उस बच्ची को पहनाती है। साफ होने के बाद वह बच्ची बहुत ही प्यारी लगने लगती हैं। सोनाली उसकी तरफ देखती ही रहती है। इधर खुद को नए फ्रॉक में देखकर बच्ची बहुत खुश हो जाती है, और सोनाली से लिपट जाती है। सोनाली भी बच्ची को अपने करीब ले लेती है। 1 मिनट के बाद सोनालीको याद आता है के इस बच्ची को अपने मां-बाप के पास छोड़ना है और मुझे हॉस्पिटल जाना है।
घड़ी में करीब 8:15 होने वाले हैं, 'अरे आज तो हॉस्पिटल होने से र हाँ, 8:30 बजे तो लॅब बंद हो जाएगा। इसका मतलब है आज रिपोर्ट मिलने वाला नहीं है।' वह तुरंत दुकान के बाहर आती है और लैब में फोन लगाती है।
"मैं सोनाली बोल रही हूं, मुझे हॉस्पिटल पहुंचते बहुत देर हो जायेगी, क्या प्लीज आप मेरा रिपोर्ट हॉस्पिटल के रिसेप्शन पर रख सकते हैं??" हाँं मैंने ऑलरेडी कर दिया है"" आप व हाँं पर रख दीजिए मैं घर जाते हुए उठा दूंगी"" प्लीज कीजिए ना भाई साहब"
सोनाली फोन रख देती है अब पुलिस के पास जाने के पास सिवा उसके पास और कोई चारा नहीं बचा। 'तीन चार दुकानों में तो पूछ लिया, अब थोड़ी देर में तो दुकानें भी बंद हो जाएगी। और कितनी दुकानों में जाऊं??' यह सोचकर सोनाली आगे जाती हैं, थोड़ा आगे जाने के बाद उसे एक स्कूल नजर आता है। स्कूल के बाहर सिक्योरिटी वाला गार्ड भी बैठा है। सोनाली को एक आखिरी उम्मीद दिखाई देती है, वह स्कूल के पास जाती है और गार्ड से पूछती है।
सोनालीः भाई साहब आप इस बच्ची को जानते हैं क्या? यह बच्चे य हाँं पर पढती तो नहीं?सिक्योरिटी गार्डः मेम साहब मैं तो रात का गार्ड हूं। ये दिन में आती होगी तो मुझे नहीं पता। आप बच्ची सेही पूछ लीजिए ना!!सोनालीः यह बच्ची बोल नहीं सकती, यही तो प्रॉब्लम है।सिक्योरिटी गार्डः तो मेम साहब इस स्कूल में नहीं पढ़ सकती। ईस स्कूल में वैसी कोई क्लास नहीं है।
सोनालीः ठीक है धन्यवाद।। क्या आपको पता है कि य हाँं पर पुलिस स्टेशन क हाँं पर है?
सिक्योरिटी गार्डः हाँं मेम साहब। थोड़ा आगे जाने के बाद एक स्लम एरिया मिलेगा, वहीं पर लेफ्ट में पुलिस चौकी है।
सोनालीः थॅंक्यु भाईसाहब।।
सोनाली बच्ची को लेकर आगे की तरफ जाती है। बीच में उसे गुब्बारे वाला और खिलौने वाला दिखता है। सोनाली बच्ची के लिए दो तीन खिलौने लेती है, और फिर उसके हाँथ में एक गुब्बारा भी दे देती है। बच्ची और ज्यादा खुश हो जाती है ।उसकी तो आज दिवाली ही है, अच्छा खाने को मिला, अच्छे कपड़े, अच्छे खिलौने मिले। बच्ची बहुत खुश हो जाती है, और उसकी खुशी देखकर सोनाली और खुश हो जाती है।
'बस यही खुशी तो देखनी है, और क्या' वह मन में सोचती है।
5 मिनट आगे जाने के बाद सोनाली को पुलिस चौकी दिखाई देती है। वह पुलिस चौकी के अंदर जाती है व हाँं पर एक हवलदार साहब बैठे रहते हैं।सोनालीः हवलदार साहब, मेरा नाम सोनाली है, यह बच्ची मुझे एक बस स्टॉप पर मिली य हाँं से आगे हनुमान चौक में जो बस स्टॉप है ना उस स्टॉप में यह बच्ची अकेली बैठी थी। पता नहीं इसके मां-बाप वगैरह कौन है!! और यह बच्ची बोल भी नहीं सकती। तो मैंने सोचा शायद आप मेरी कुछ मदद कर सकते हैं।।
हवलदारः अरे, एक मिनट में शायद मैं जानता हूं। अभी थोड़ी देर पहले किसी ने य हाँं पर एक बच्ची को जाने की खबर दी थी। 1 सेकंड, आपको बच्ची का नाम पता है ??
हवलदार एक पेपर निकालता है उस पर साथ एक फोटो भी लगा रहता है। फोटो बच्ची से मैच करता है। सोनाली भी फोटो देखती है।
हवालदारः रुकीये, बच्ची को लेकर यहीं पर रुकीये। मैं उसके माता-पिता को बुला लेता हूं। वे सामने ही रहते हैं ।
सोनाली व हाँं पर एक कुर्सी पर बच्ची को लेकर बैठ जाती है।
अब उसे खुशी भी है और दुःख भी है कि बच्ची के माता-पिता मिल गये। 'अब वे आकर इसे ले जायेंगे। ' वो मनमे सोचती है।
करीब 10 मिनट के बाद एक गरीब औरत दौड़ते दौड़ते पुलिस चौकी में घुसती है। जैसे ही वह सोनाली के पास बैठी बच्ची को देखती है तुरंत भाग के उसे उठा लेती है।
औरतः अरे अंकिता, क हाँं थी मेरी बच्ची?? कब से ढूंढ रहे हैं तुम्हें!! जाने बिना बताए क हाँं चली गई?
पीछे से बच्ची के पापा भी चले आते हैं। वह भी नजदीक आके सोनाली को गले लगा लेते हैं।
बच्ची के पिताः अरे मेरी बच्ची क हाँं चली गई थी तुम?? क हाँं क हाँं नहीं ढूंढा तुम्हें।।
वह दोनों हवालदार के पास चले जाते हैं।
बच्ची के पिताः धन्यवाद हवलदार साहब। बच्ची को ढूंढने के लिए।
हवालदारः अरे धन्यवाद मेरा मत कीजिए। धन्यवाद उनका कीजिए, वो मैडम आपकी बच्ची को सही सलामत य हाँं तक लेकर आई हैं।
तभी उसके माता-पिता को यह भी ध्यान में आता है कि अंकिता के कपड़े भी नए हैं। उसके हाँथ में खिलौने भी है। वह सोनाली के पास जाते हैं।
बच्ची की मांः मैडम पता नहीं कैसे आपका शुक्रिया अदा करें । हम तो शाम से रो रो के पागल हो गए हैं। बच्ची कहीं मिल नहीं रही थी। कई जगह ढूंढ के आ गए, कहीं कुछ पता नहीं चल र हाँ था।
बच्ची के पिताः अभी भी मेरे कुछ दोस्त बच्ची को ढूंढने के लिए गए हैं। आपको क हाँं मिली है??
सोनालीः जी यह हनुमान चौक में बस स्टॉप पर बैठी थी। मैं अपने ऑफिस से निकली थी और बस के लिए वेट कर रही थी। देखा तो यह बच्ची अकेली पीछे बैठी थी। मैंने पूछने की बहुत कोशिश की लेकिन कुछ बोल नहीं रही थी।
बच्ची की मांः मैडम अंकिता बोल नहीं पाती।
सोनालीः बीच में बहुत सी जगह पर पूछा, पर कोई इसे पहचान नहीं सका। इसलिए सीधा पुलिस थाने चली आई।
बच्ची की मां सोनाली के पैर छुने लगती है, सोनाली उन्हें रोककर उठा लेती है,
सोनालीः अरे, ये क्या कर रही है आप??
बच्ची की मांः आपके बहुत एहसान हुए हैं हमपे।
सोनालीः इसमें एहसान की क्या बात है! !!
लेकिन हनुमान चौक तो य हाँं से बहुत दूर है यह बच्ची य हाँं से व हाँं पर कैसे पहुंच गई??
बच्ची के पिताः वह क्या हुआ शाम को मैंने उसे थोड़ा डांटा था, और उसने रोना चालू कर दिया। रोते-रोते बाहर चली गई। हमें लगा यही बाहर जा कर बैठी है, या पड़ोस में दोस्तों के पास गई है, आएगी अभी। लेकिन आधा घंटा होने के बाद जब वह वापस नहीं आई, तो हमने उसे ढूंढना चालू कर दिया। हम दोनों ने आजू-बाजू में बहुत सी जगह पर ढूंढा। बहुत लोगों को पूछा लेकिन किसी से कुछ पता नहीं चला। रो रो के इसकी तो जान ही निकल रही थी, तभी हमने पुलिस स्टेशन आकर कंप्लेन लिखवाई और फिर ढूंढने के लिए चले गए थे।
जैसे ही हवलदार साहब का फोन आया, तुरंत दौड़कर आ गए।
सोनालीः "अरे भाई साहब इतनी छोटी सी बच्ची को कोई डांटता थोड़ी है??"
बच्ची के पिताः "अब क्या करें मैम साहब? यह तो होता ही रहता है। कुछ ना कुछ करना पड़ता है। लेकिन हमें क्या पता वह घर छोड़ कर चली जाएगी।"
सोनालीः" भाई साहब आइंदा से इसको मत डांटीये। कितनी प्यारी बच्ची है, ऐसी बच्ची को कोई डांट भी कैसे सकता है।"
बच्ची के पिताः "जी मेम साहब बिल्कुल हम ध्यान रखेंगे। और यह कपड़े खिलौने वगैरह??सोनालीः अरे वह तो प्यारी सी अंकिता के लिए मेरी तरफ से छोटा सा तोहफा है। उसकी वजह से मेरी शाम बहुत अच्छी कटी। बहुत प्यारी बच्ची है आपकी, मैं उसे मिलने के लिए वापस आऊंगी।"
बच्ची की मांः "अरे जरूर मेम साहब आप कभी भी आइएगा, और पता नहीं मैं आपका शुक्रिया कैसे अदा करूं।"
सोनालीः "उसकी कोई जरूरत नहीं है खुशी तो मेरी थी मुझे अंकिता के साथ थोड़ा समय बिताने को मौका मिला। जाओ बेटा, अपने घर जाओ। हम बाद में वापस मिलेंगे।
अंकिता झट से अपने पापा की गोदी से अंकिता की तरफ झपकती है। वह बहुत खुश है, आज उसको बहुत नई चीजें मिली। खिलौने मिले, कपड़े मिले। वो सोनाली को एक झप्पी दे देती है और फिर उतर कर अपने मां बाप के साथ चली जाती है।सोनाली उनके पीछे पुलिस स्टेशन से नीचे उतरती है और आगे जाने वाली अंकिता को देखने लगती है।
" मेरा नाम सोनाली है, मेरे लिए, लॅबवालों ने कुछ रिपोर्ट रखे हैं क्या??
रिसेप्शन वाली लड़की टेबल पर रखा हुआ एक लिफाफा सोनाली के हाँथ में दे देती है।जैसे ही लिफाफा मिलता है, सोनाली की धड़कन तेज हो जाती है। 'पता नहीं अंदर क्या लिखा है?' वह मन में सोचती है।
"थैंक यू वेरी मच"
सोनाली उसे बोलती है और वह रिपोर्ट लेकर हॉस्पिटल की लॉबी में आ जाती है। व हाँं पर भगवान की मूर्ति है, सोनाली हाँथ जोड़कर भगवान को प्रणाम करती है और वह लिफाफा खोलती है।
जैसे ही वह रिपोर्ट पढती है, उसकी आंखों से आंसू छलक ने लगते हैं। वह भगवान को और एक बार प्रणाम करती है, और आंसू पोंछती है।
क्यों ना हो? आखिर शादी के 15 साल बाद और 4 बार आईवीएफ फेल होने के बाद आखिरकार वह मां बनने जा रही है। अपने पांचवें और आखरी अटेम्प्ट में। डॉक्टर ने उसे चेतावनी दी थी के ये अटेम्प्ट नहीं करना चाहिए क्योंकि उसकी उम्र अब ज्यादा है, और ये रिस्क हो सकता है। फिर भी वो ये रीस्क लेती है।।
उसका दिल में भर आता है। तुरंत उसके सामने अंकिता का चेहरा आ जाता है। और वह अपने पर्स में हाँथ डालती है, अपना फोन निकालने के लिए।
यह खुशखबरी मनोज को भी तो देनी है।
उसने तो बच्ची का नाम भी सोच लिया है 'अंकिता'।।
| शामके सात.शून्य बजने वाले हैं लेकिन सोनाली अभी तक अपने ऑफिस में काम कर रही है। कल उसके बॉस कंपनी के काम से विदेश जा रहे हैं उनके प्रजेंटेशन मे फायनल टच अभी बाकी है। छः.शून्य बजे तो आखिरी स्लाइड का डेटा मिला है, उसे डालके स्लाईड फायनल करके उसने बॉससे डिस्कशन तो कर लिया। पर एक बार में मान ले, वो बॉस क हाँ। चेंज के बाद चेंज, बताता है. सोनाली अब थोडी सी परेशान दिख रही है। आज उसे वक्त पर निकलना था, जाते हुए हॉस्पिटल से रिपोर्ट कलेक्ट करना था। पूरा प्लान करके आई थी, लेकिन इस प्रेजेंटेशन ने उसके पूरे प्लांट को चौपट कर दिया था।वो फायनल टच मार ही रही है इतनेमे फोन बजता है,सोनालीः "अब कौन है, पहले ही मैं जल्दी मे हूं।" फोन की तरफ देखती है 'हसबंड' सोनालीः" हाँं, मनोज।" मनोजः "सोनाली, पहूंची क्या?" सोनालीः "अरे, क हाँ यार, अभी भी ऑफिस मे हूॅ।" मनोजः "अरे!!!! क्या कह रही हो, अभी तक निकली नहीं?? दोपहर को तो बोली थी की टाईम पे निकलोगी!!" सोनालीः " हाँ! बोला तो था, पर नहीं निकल पाई! बॉस कल अॅब्रॉड जा रहे है, उनके प्रजेंटेशन, मिटींग की तैयारी कर रही हूं!" मनोजः" अरे, पर तुम्हे हॉस्पिटल भी तो जाना है। याद है ना? अब निकलोगी कब, पहूंचोगी कब, तुम् हाँरे पहुंचने तक तो बंद हो जायेगा।" सोनालीः "अब बस हो ही गया, बस पाँच मिनट में निकल रही हूं!" मनोजः "जल्दी निकलो, और कूछ प्रॉब्लेम है तो मुझे फोन करदो। मुझे घर पहुंचने हे दस बज जाएंगे, अभी एक कॉल है। मैं दो घंटाटे बिजी रहुंगा। अगर फोन नहीं ऊठा पाया तो, मेसेज डाल देना। मैं कॉल कर दूंगा।" सोनालीः "ओके, मैं रखती हुं अब, जल्दी खतम करके निकलना है।" मनोजः "ठीक हैं। मिलते हैं।" पाच-सात मिनिट में वो अॉफीस से निकलती हैं. थोडी दूरर जाते ही उसे एहसास होता है की उसे भूख लगी है! वो बाजूवाले दूकान से चिप्स और बिस्किट्स उठाती है! अब वो टॅक्सी का इंतजार कर रही है, दस मिनिट हो गये पर, एक भी टॅक्सी नहीं रुकती है। 'आज क्या हो गया है? एक भी टॅक्सी नहीं रुक रही है!! हमेशा ऐसा ही होता हैं, जब भी जल्दी होती है, कुछ ना कुछ जरुर बीच में आ जाता है, पहले बॉस, अब ये टॅक्सी।' वो मनमे सोचती हैं, उसके पेशन्स अब खत्म हो रहे है। चलो बस स्टॉप तक चलती हूं, टॅक्सी नहीं तो कम से कम बस तो मिल ही जायेगी। ये सोचके वो बस स्टॉप की तरफ चल देती है। पाँच-सात मिनट में वो पहूंच जाती है। बसें आ तो रही है पर सब खचाखच भरली हुईं! वो अपनी एरिया वाली बसकी राह देखना शुरु कर देती है। खडे खडे अपनी बॅगसे चिप्स निकालती है। चिप्स खाते खाते उसका ध्यान बार बार घडी की तरफ जाता है, 'समय बिता जा र हाँ है और ये बस आनेका नाम नहीं ले रही है। पता नहीं मै समयमें पहूंच पाऊंगी के नहीं' वो मन मे सोच रही थी.जैसे जैसे समय बितता जाता है, वो और बेचैन होती है, ना टॅक्सी ना ही बस, पता नहीं आज क्या प्रॉब्लेम है। वो इधर ऊधर देख रही थी की अचानक उसका ध्यान बस स्टॉप के अंदरवाले बेंच पे बैठी एक नन्ही लडकीपर जाता है, वो लडकीभी उसीकी तरफ लेख रही थी 'क्या प्यारीसी बच्ची हैं, पर ये ऐसे अकेली क्यो बैठी हैं?' सोनाली मनमें सोचती हैं।सोनाली चारोतरफ देखती है, बस स्टॉप पे एक और आदमी खडा होता हैं, 'शायद ये बच्ची इनके साथ रहेगी, और कोई दिख भी तो नहीं र हाँ' वो बच्चीकी और देखके मुस्कुराती हैं। बच्ची सिर्फ देखती ही रहती हैं, कुछ जवाब नहीं देती है। सोनाली अपने पासवाला चिप्स का पॅकेट आगे बढाती हैं। ये नुस्का काम कर जाता है, वो बच्ची झटसे उसके हाँथसे वो पॅकेट छीन लेती हैं। चिप्स निकालती है और चार-पाँच खाने के बाद सोनाली की तरफ देखके मुस्कुराती हैं। चिप्स का पॅकेट छोटा होनेके कारण झटसे खत्म हो जाता है! खाली पॅकेट देखके ऊस बच्चीका चेहरा उतर जाता है। वो रोनीसी सुरतसे सोनाली की तरफ देखती है, सोनाली के समझमे आ जाता है की बच्ची को भूख लगी हैं, वो बैग मे से अभी खरीदा हुआ बिस्कूट का पुडा निकालती है और बच्ची की तरफ देखती है। बच्चीके चेहरे पे अब मुस्कुराहट वापस आई हैं। वो झटसे अपना हाँथ आगे बढाती हैं, सोनाली पुडा पीछे चुपाकर बच्चीसे पूंछती है "ये आपको तभी मिलेगा जब आप अपना नाम बताएगी" बच्ची उसे सुनकर अनसुना कर देती है। वो बिस्किट्स केलिये अपना हाँथ आगे बढाती हैं। सोनाली फिरसे उसे वही सवाल करती है, फिरसे कोई जवाब नहीं।' शायद बिस्किट्स मिलनेके बाद में जवाब दे दे' यह सोचकर सोनाली उसे बिस्किट्स का पुडा खोलकर दे देती है। बच्ची झपककर पुडा हाँथमे लेती हैं और बिस्किट्स निकालकर खाना शुरू कर देती है। ' अब बताओ आपका नाम!!' सोनाली उम्मीदमे उसे पूंछती है। बच्ची फिरसे अनसुना करके खाना शुरू रखती हैं। 'अब क्या करे? पूछने केलिये य हाँँ कोई है भी तो नहीं, चलो अब और थोडी देर इंतजार करती हुं, शायद भुख मिटने के बाद जवाब दे ' इतने मे एक बस आके रूकती हैं, सोनाली देखती है की ये बस तो उसकी घर की तरफ जानेवाली है। इतनी देरके बाद आखिर आ ही गयी, सोनाली बस की तरफ बढती है. वो बसमे चढने ही वाली होती है तभी उसका ध्यान बच्ची की तरफ जाता है। ' पर ये बच्ची?, इसका क्या? मैं इसे ऐसे अकेले कैसे छोड दु' वो वापस पीछे हटती है। बस अभी भी वही खडी है। सोनाली के मनमे हॉस्पिटल और बच्ची के बीच में द्वंद्व शुरू है। कुछही पलोमे वो बस निकलने वाली हैं। आखिर सोनाली पिछे हटती है, वो बच्चीको ऊस हाँलतमे नहीं छोड सकती। वो पीछे मुड के बच्ची की तरफ देखती है वो बच्ची बिस्किट खाना रोककर सोनाली की तरफ ही देख रही होती है उसके चेहरे को देखकर सोनाली को साफ पता चलता है कि वह बच्ची डरी हुई है। उसे डर है कि कहीं सोनाली निकल ना जाए इसलिए वह डरी सहमी सी सोनाली की तरफ देख रही है। जैसे ही सोनाली पीछे मुड़के उस बच्ची की तरफ चलने लगती है वह बच्ची मुस्कुराती है, उसको तसल्ली हो जाती है कि सोनाली उसे अकेला नहीं छोड़ेगी। वह वापस बिस्कुट खाने में दंग हो जाती है. अब कुछ भी हो जाए सोनाली उस बच्ची को अकेला नहीं छोड़ सकती. सोनाली बच्ची की तरफ जाती है. बोलती है "देखो अब मैं तुम् हाँरे लिए रुक भी गई हूं, अब तो तुम् हाँरा नाम बताओ" बच्ची सोनाली की तरफ देखती है शायद उसे सवाल समझ में आता है लेकिन कुछ बोलती नहीं। वह वापस बिस्कुट खाने में मशगूल हो जाती है। सोनाली उसे पूछती है "तुम् हाँरे मां बाप क हाँं है?मम्मी डैडी!! जैसे ही मम्मी डैडी का नाम सुनती है वह बच्ची बिस्कुट खाना रोके रोने लगती है उसके आंखों से आंसू छलकते हैं सोनाली बच्ची को अपने करीब ले लेती है "देखो बेटा, मैं तुम्हें तुम् हाँरे मम्मी डैडी के पास पहुंचा देती हूं, लेकिन क हाँं पर है वह तुम्हें य हाँं अकेला छोड़कर वह क हाँं चले गए।" बच्ची सिर्फ सोनाली की तरफ देखती है लेकिन कुछ नहीं बोलती। अपने हाँथ से उस तरफ इशारा करती है। "अच्छा, तुम् हाँरे मम्मी डैडी उधर गए हैं।" बच्ची फिर कोई जवाब नहीं देती। 'कहीं यह बच्ची गूंगी नहीं।' सोनाली मन में सोचती हैं। बेटा आप कुछ बोलती क्यों नहीं हो बच्ची सिर्फ सोनाली का मुंह ताकते रहती है। "बेटा आप बोल सकती हो?" फिर कोई जवाब नहीं। अब सोनाली को सूझ नहीं र हाँ कि करना क्या है। वह बच्ची को अपने साथ चलने के लिए कहती है। बच्ची झट से सोनालिका हाँथ पकड़ लेती है। सोनाली देखती है कि सामने एक दुकान है सोनाली बच्ची को लेकर दुकान की तरफ जाती है वह दुकानदार से पूछती हैसोनालीः भाई साहब, क्या आप इस बच्ची को जानते हैं? दुकानदारः नहीं मैडम, क्यों? क्या हुआ?सोनालीः यह बच्ची अकेले ही सामने बस स्टॉप पर बैठी थी! पता नहीं अकेले कैसे पहुंच गई, क्या आपने देखा उसे कौन व हाँं पर छोड़ गया।दुकानदारः नहीं मैम साहब मेरा ध्यान नहीं था। आप बच्ची से क्यों नहीं पूछ लेती?सोनालीः भाई साहब मैं कब से वही प्रयास कर रही हूं लेकिन लगता है यह बच्ची गूंगी है। कुछ बोलती ही नहीं है।वह दुकानदार बच्ची की तरफ देखता है दुकानदारः आपका नाम क्या है बेटा? आपके मम्मी डैडी क हाँं है? आपको य हाँं कौन छोड़ गया? आप क हाँं रहती हो? बच्ची कुछ जवाब नहीं देती. वह सोनाली को लिपटकर उसके पीछे जाकर छुप जाती है। दुकानदारः मैडम, आप पुलिस के पास क्यों नहीं जाती? वह इसके माता-पिता को ढूंढ लेंगे। सोनालीः भाई साहब इतने छोटे से बच्चे को पुलिस के हाँथ में दे दूं! थोड़ा आगे जाकर पूछती हूं शायद कोई इस को पहचानने वाला मिल जाए। आप प्लीज एक काम कर सकते हैं? अगर कोई इस बच्ची को ढूंढता हुआ आ जाए तो उसे तो उन्हें उस तरफ भेज दीजिएगा। क्योंकि इस बच्ची ने अपना हाँथ उस तरफ दिखाया था। शायद इसका घर उधर ही है।दुकानदारः जरूर मैडम मैं जरूर बता दूंगा अगर कोई मदद लगी तो मुझे बता दीजिएगा। सोनाली अब उस बच्ची को लेकर आगे बढ़ती है। थोड़ा आगे जाने के बाद उसे और चार पांच दुकानें दिखती है। उसमें से एक दुकान खाने-पीने की है। सोनाली बच्ची को लेकर उस दुकान में जाती है।सोनालीः भाई साहब आप इस बच्ची को जानते हैं। पहले कहीं से देखा है।दुकानदारः नहीं तो। क्यों? क्या हुआ? सोनालीः अरे यह बच्ची अकेली ही व हाँं बैठी थी। शायद बोल भी नहीं पाती है इसलिए बता नहीं पा रही है कि उसके माता-पिता क हाँं पर है। मैंने सोचा यही आसपास की रहेगी इसलिए पूछ रही हूं। दुकानदारः नहीं बहन जी। हमें तो नहीं पता। आप एक काम कीजिए। आगे एक बच्चों के कपड़े की दुकान है। उन लोगों को शायद पता हो सकता है, वह बच्चों को आते-जाते देखते रहते हैं।सोनालीः ठीक है, धन्यवाद। सोनाली व हाँं से निकलती है, थोड़ा आगे जाने के बाद उसे कपड़े की दुकान दिखाई देती है। जैसे ही वह कपड़े की दुकान की तरफ बढ़ती है उसका फोन बजता है। फोन की तरफ देखती है 'हसबैंड' सोनालीः हाँं मनोज।मनोजः पहुंची क्या हॉस्पिटल? कुछ पता चला?सोनालीः अरे क हाँं यार!! मैं अभी तक यहीं पर हूं।मनोजः मतलब अभी ऑफिसमें हो?सोनालीः नहीं यार, ऑफिस से निकले बहुत समय हो गया। लेकिन थोड़ा रास्ते में अटक गई हूं।मनोजः मतलब? मैं कुछ समझा नहीं!! सोनालीः अब कैसे समझाऊं? जैसे ही मैं घर जाने के लिए बस स्टॉप पर पहुंची, तो एक छोटी सी अस हाँय बच्ची व हाँं पर अकेली बैठी थी, शायद गूंगी है। और उसके मां-बाप क हाँं पर है बता नहीं पा रही है। तो अभी मैं उसके मां बाप को ढूंढ रही हूं। मनोजः अरे सोनाली यह क्या यार? तुम्हें पता है हॉस्पिटल जाना कितना इंपोर्टेंट है!!सोनालीः हाँं!! पता है, पर इस बच्ची को अकेला भी तो नहीं छोड़ सकती। कुछ हो गया तो?? तुम्हें पता है आजकल न्यूज़ में क्या क्या आ र हाँ है। यह तो अच्छा हुआ कि मेरी उस पर नजर पड़ गई। अब दो तीन जगह पर पूछती हूं नहीं तो इसको पुलिस के पास ले जाती हूं।मनोजः हाँं सही है। बराबर क हाँ तुमने। ठीक है, तो देख लो ये सब हो जाने के बाद रिपोर्ट मिलता है तो, वरना कल लेना पड़ेगा। मुझे आने की जरूरत है?? सोनालीः अरे नहीं!! मैं मैनेज कर लूंगी। कुछ लगेगा तो मैं फोन कर दूंगी।मनोजः ठीक है। लेकिन, फोन करना। और कुछ गड़बड़ दिखाई दिए तो जरुर फोन करना, मैं तुरंत आ जाऊंगा। ओके, अब रखता हूं, वापस कॉल में जाना है।सोनालीः ठीक है, मैं बता दूंगी। दुकानदारः नहीं, नहीं बहनजी। हम में से कोई नहीं जानता इसे। पहले कभी नहीं देखा। क्यों क्या हुआ? कुछ प्रॉब्लम है? सोनालीः अरे हाँं!! मतलब, यह बच्ची अकेली ही उस बस स्टॉप पर बैठी थी। इसके मां-बाप क हाँं पर है कुछ पता नहीं इसलिए ढूंढ रही हूं। दुकानदारः तो बच्ची से पूछ लीजिए ना!! सोनालीः अरे नहीं भाई साहब!! यह बच्ची गूंगी है। कुछ बोल नहीं पाती है। कब से वही प्रयास कर रही हूं। सोनाली बच्ची को लेकर दुकान से निकलती है। अब उसे समझ में नहीं आ र हाँ है कि करना क्या है!! वह बच्ची की तरफ देखती है। वह बच्ची मासूम चेहरे से सोनाली की तरफ देख रही है। अब सोनाली को उस बच्ची में कुछ ज्यादा ही इंटरेस्ट आने लगता है। वह उस बच्ची में इन्वॉल्व हो जाती है। अगर कोई नहीं मिलता है तो वो उसे घर ले जाने के लिए भी तैयार हैं। सोनालीः बेटा और कुछ चाहिए? कुछ खाना पीना है? बच्ची अपना सर हिलाती है। सोनालीः चलो पहले एक काम करते हैं। आपके कपड़े कितने मेले हो गए हैं। आपके लिए कुछ कपड़े ले लेते हैं। सोनाली पीछे मुड़कर उस दुकान में वापस जाती है। सोनालीः भाई साहब, इस बच्ची के साइजका कुछ फ्राक वगैरह मिलेगा? इसके कपड़े बहुत गंदे हो गए हैं। दुकानदारः क्यों नहीं बहनजी! अभी दिखाता हूं। अरे गणेश, जरा बहन जी को कपड़े दिखाना बच्ची के लिए।। दस मिनट दस-बारह फ्रॉक्स देखने के बाद सोनाली उसमें से दो फ्रॉक उठाती है। बच्ची को पूछती है, कि उसे अच्छा लगा?? बच्ची खुशी से हाँं कर देती है। सोनाली दुकानदार से वह दोनों फ्रॉक खरीद लेती है। बच्ची को वहीं दुकान के ट्रायल रूम में फ्रॉक पहनाने के लिए ले जाती है। पहले उस दुकानदार से थोड़ा पानी पानी लेकर बच्ची का मुंह साफ करती हैं, और फिर उन दोनों में से एक अच्छा सा फ्रॉक देखकर उस बच्ची को पहनाती है। साफ होने के बाद वह बच्ची बहुत ही प्यारी लगने लगती हैं। सोनाली उसकी तरफ देखती ही रहती है। इधर खुद को नए फ्रॉक में देखकर बच्ची बहुत खुश हो जाती है, और सोनाली से लिपट जाती है। सोनाली भी बच्ची को अपने करीब ले लेती है। एक मिनट के बाद सोनालीको याद आता है के इस बच्ची को अपने मां-बाप के पास छोड़ना है और मुझे हॉस्पिटल जाना है। घड़ी में करीब आठ:पंद्रह होने वाले हैं, 'अरे आज तो हॉस्पिटल होने से र हाँ, आठ:तीस बजे तो लॅब बंद हो जाएगा। इसका मतलब है आज रिपोर्ट मिलने वाला नहीं है।' वह तुरंत दुकान के बाहर आती है और लैब में फोन लगाती है। "मैं सोनाली बोल रही हूं, मुझे हॉस्पिटल पहुंचते बहुत देर हो जायेगी, क्या प्लीज आप मेरा रिपोर्ट हॉस्पिटल के रिसेप्शन पर रख सकते हैं??" हाँं मैंने ऑलरेडी कर दिया है"" आप व हाँं पर रख दीजिए मैं घर जाते हुए उठा दूंगी"" प्लीज कीजिए ना भाई साहब" सोनाली फोन रख देती है अब पुलिस के पास जाने के पास सिवा उसके पास और कोई चारा नहीं बचा। 'तीन चार दुकानों में तो पूछ लिया, अब थोड़ी देर में तो दुकानें भी बंद हो जाएगी। और कितनी दुकानों में जाऊं??' यह सोचकर सोनाली आगे जाती हैं, थोड़ा आगे जाने के बाद उसे एक स्कूल नजर आता है। स्कूल के बाहर सिक्योरिटी वाला गार्ड भी बैठा है। सोनाली को एक आखिरी उम्मीद दिखाई देती है, वह स्कूल के पास जाती है और गार्ड से पूछती है। सोनालीः भाई साहब आप इस बच्ची को जानते हैं क्या? यह बच्चे य हाँं पर पढती तो नहीं?सिक्योरिटी गार्डः मेम साहब मैं तो रात का गार्ड हूं। ये दिन में आती होगी तो मुझे नहीं पता। आप बच्ची सेही पूछ लीजिए ना!!सोनालीः यह बच्ची बोल नहीं सकती, यही तो प्रॉब्लम है।सिक्योरिटी गार्डः तो मेम साहब इस स्कूल में नहीं पढ़ सकती। ईस स्कूल में वैसी कोई क्लास नहीं है। सोनालीः ठीक है धन्यवाद।। क्या आपको पता है कि य हाँं पर पुलिस स्टेशन क हाँं पर है? सिक्योरिटी गार्डः हाँं मेम साहब। थोड़ा आगे जाने के बाद एक स्लम एरिया मिलेगा, वहीं पर लेफ्ट में पुलिस चौकी है। सोनालीः थॅंक्यु भाईसाहब।। सोनाली बच्ची को लेकर आगे की तरफ जाती है। बीच में उसे गुब्बारे वाला और खिलौने वाला दिखता है। सोनाली बच्ची के लिए दो तीन खिलौने लेती है, और फिर उसके हाँथ में एक गुब्बारा भी दे देती है। बच्ची और ज्यादा खुश हो जाती है ।उसकी तो आज दिवाली ही है, अच्छा खाने को मिला, अच्छे कपड़े, अच्छे खिलौने मिले। बच्ची बहुत खुश हो जाती है, और उसकी खुशी देखकर सोनाली और खुश हो जाती है। 'बस यही खुशी तो देखनी है, और क्या' वह मन में सोचती है। पाँच मिनट आगे जाने के बाद सोनाली को पुलिस चौकी दिखाई देती है। वह पुलिस चौकी के अंदर जाती है व हाँं पर एक हवलदार साहब बैठे रहते हैं।सोनालीः हवलदार साहब, मेरा नाम सोनाली है, यह बच्ची मुझे एक बस स्टॉप पर मिली य हाँं से आगे हनुमान चौक में जो बस स्टॉप है ना उस स्टॉप में यह बच्ची अकेली बैठी थी। पता नहीं इसके मां-बाप वगैरह कौन है!! और यह बच्ची बोल भी नहीं सकती। तो मैंने सोचा शायद आप मेरी कुछ मदद कर सकते हैं।। हवलदारः अरे, एक मिनट में शायद मैं जानता हूं। अभी थोड़ी देर पहले किसी ने य हाँं पर एक बच्ची को जाने की खबर दी थी। एक सेकंड, आपको बच्ची का नाम पता है ?? हवलदार एक पेपर निकालता है उस पर साथ एक फोटो भी लगा रहता है। फोटो बच्ची से मैच करता है। सोनाली भी फोटो देखती है। हवालदारः रुकीये, बच्ची को लेकर यहीं पर रुकीये। मैं उसके माता-पिता को बुला लेता हूं। वे सामने ही रहते हैं । सोनाली व हाँं पर एक कुर्सी पर बच्ची को लेकर बैठ जाती है। अब उसे खुशी भी है और दुःख भी है कि बच्ची के माता-पिता मिल गये। 'अब वे आकर इसे ले जायेंगे। ' वो मनमे सोचती है। करीब दस मिनट के बाद एक गरीब औरत दौड़ते दौड़ते पुलिस चौकी में घुसती है। जैसे ही वह सोनाली के पास बैठी बच्ची को देखती है तुरंत भाग के उसे उठा लेती है। औरतः अरे अंकिता, क हाँं थी मेरी बच्ची?? कब से ढूंढ रहे हैं तुम्हें!! जाने बिना बताए क हाँं चली गई? पीछे से बच्ची के पापा भी चले आते हैं। वह भी नजदीक आके सोनाली को गले लगा लेते हैं। बच्ची के पिताः अरे मेरी बच्ची क हाँं चली गई थी तुम?? क हाँं क हाँं नहीं ढूंढा तुम्हें।। वह दोनों हवालदार के पास चले जाते हैं। बच्ची के पिताः धन्यवाद हवलदार साहब। बच्ची को ढूंढने के लिए। हवालदारः अरे धन्यवाद मेरा मत कीजिए। धन्यवाद उनका कीजिए, वो मैडम आपकी बच्ची को सही सलामत य हाँं तक लेकर आई हैं। तभी उसके माता-पिता को यह भी ध्यान में आता है कि अंकिता के कपड़े भी नए हैं। उसके हाँथ में खिलौने भी है। वह सोनाली के पास जाते हैं। बच्ची की मांः मैडम पता नहीं कैसे आपका शुक्रिया अदा करें । हम तो शाम से रो रो के पागल हो गए हैं। बच्ची कहीं मिल नहीं रही थी। कई जगह ढूंढ के आ गए, कहीं कुछ पता नहीं चल र हाँ था। बच्ची के पिताः अभी भी मेरे कुछ दोस्त बच्ची को ढूंढने के लिए गए हैं। आपको क हाँं मिली है?? सोनालीः जी यह हनुमान चौक में बस स्टॉप पर बैठी थी। मैं अपने ऑफिस से निकली थी और बस के लिए वेट कर रही थी। देखा तो यह बच्ची अकेली पीछे बैठी थी। मैंने पूछने की बहुत कोशिश की लेकिन कुछ बोल नहीं रही थी। बच्ची की मांः मैडम अंकिता बोल नहीं पाती। सोनालीः बीच में बहुत सी जगह पर पूछा, पर कोई इसे पहचान नहीं सका। इसलिए सीधा पुलिस थाने चली आई। बच्ची की मां सोनाली के पैर छुने लगती है, सोनाली उन्हें रोककर उठा लेती है, सोनालीः अरे, ये क्या कर रही है आप?? बच्ची की मांः आपके बहुत एहसान हुए हैं हमपे। सोनालीः इसमें एहसान की क्या बात है! !! लेकिन हनुमान चौक तो य हाँं से बहुत दूर है यह बच्ची य हाँं से व हाँं पर कैसे पहुंच गई?? बच्ची के पिताः वह क्या हुआ शाम को मैंने उसे थोड़ा डांटा था, और उसने रोना चालू कर दिया। रोते-रोते बाहर चली गई। हमें लगा यही बाहर जा कर बैठी है, या पड़ोस में दोस्तों के पास गई है, आएगी अभी। लेकिन आधा घंटा होने के बाद जब वह वापस नहीं आई, तो हमने उसे ढूंढना चालू कर दिया। हम दोनों ने आजू-बाजू में बहुत सी जगह पर ढूंढा। बहुत लोगों को पूछा लेकिन किसी से कुछ पता नहीं चला। रो रो के इसकी तो जान ही निकल रही थी, तभी हमने पुलिस स्टेशन आकर कंप्लेन लिखवाई और फिर ढूंढने के लिए चले गए थे। जैसे ही हवलदार साहब का फोन आया, तुरंत दौड़कर आ गए। सोनालीः "अरे भाई साहब इतनी छोटी सी बच्ची को कोई डांटता थोड़ी है??" बच्ची के पिताः "अब क्या करें मैम साहब? यह तो होता ही रहता है। कुछ ना कुछ करना पड़ता है। लेकिन हमें क्या पता वह घर छोड़ कर चली जाएगी।" सोनालीः" भाई साहब आइंदा से इसको मत डांटीये। कितनी प्यारी बच्ची है, ऐसी बच्ची को कोई डांट भी कैसे सकता है।" बच्ची के पिताः "जी मेम साहब बिल्कुल हम ध्यान रखेंगे। और यह कपड़े खिलौने वगैरह??सोनालीः अरे वह तो प्यारी सी अंकिता के लिए मेरी तरफ से छोटा सा तोहफा है। उसकी वजह से मेरी शाम बहुत अच्छी कटी। बहुत प्यारी बच्ची है आपकी, मैं उसे मिलने के लिए वापस आऊंगी।" बच्ची की मांः "अरे जरूर मेम साहब आप कभी भी आइएगा, और पता नहीं मैं आपका शुक्रिया कैसे अदा करूं।" सोनालीः "उसकी कोई जरूरत नहीं है खुशी तो मेरी थी मुझे अंकिता के साथ थोड़ा समय बिताने को मौका मिला। जाओ बेटा, अपने घर जाओ। हम बाद में वापस मिलेंगे। अंकिता झट से अपने पापा की गोदी से अंकिता की तरफ झपकती है। वह बहुत खुश है, आज उसको बहुत नई चीजें मिली। खिलौने मिले, कपड़े मिले। वो सोनाली को एक झप्पी दे देती है और फिर उतर कर अपने मां बाप के साथ चली जाती है।सोनाली उनके पीछे पुलिस स्टेशन से नीचे उतरती है और आगे जाने वाली अंकिता को देखने लगती है। " मेरा नाम सोनाली है, मेरे लिए, लॅबवालों ने कुछ रिपोर्ट रखे हैं क्या?? रिसेप्शन वाली लड़की टेबल पर रखा हुआ एक लिफाफा सोनाली के हाँथ में दे देती है।जैसे ही लिफाफा मिलता है, सोनाली की धड़कन तेज हो जाती है। 'पता नहीं अंदर क्या लिखा है?' वह मन में सोचती है। "थैंक यू वेरी मच" सोनाली उसे बोलती है और वह रिपोर्ट लेकर हॉस्पिटल की लॉबी में आ जाती है। व हाँं पर भगवान की मूर्ति है, सोनाली हाँथ जोड़कर भगवान को प्रणाम करती है और वह लिफाफा खोलती है। जैसे ही वह रिपोर्ट पढती है, उसकी आंखों से आंसू छलक ने लगते हैं। वह भगवान को और एक बार प्रणाम करती है, और आंसू पोंछती है। क्यों ना हो? आखिर शादी के पंद्रह साल बाद और चार बार आईवीएफ फेल होने के बाद आखिरकार वह मां बनने जा रही है। अपने पांचवें और आखरी अटेम्प्ट में। डॉक्टर ने उसे चेतावनी दी थी के ये अटेम्प्ट नहीं करना चाहिए क्योंकि उसकी उम्र अब ज्यादा है, और ये रिस्क हो सकता है। फिर भी वो ये रीस्क लेती है।। उसका दिल में भर आता है। तुरंत उसके सामने अंकिता का चेहरा आ जाता है। और वह अपने पर्स में हाँथ डालती है, अपना फोन निकालने के लिए। यह खुशखबरी मनोज को भी तो देनी है। उसने तो बच्ची का नाम भी सोच लिया है 'अंकिता'।। |
शाहिद कपूर और कियारा आडवाणी की फिल्म 'कबीर सिंह' इन दिनों छाई हुई है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई कर रही है। इसके साथ ही फिल्म में सबसे ज्यादा चर्चा शाहिद कपूर की एक्टिंग की हो रही है। इस फिल्म को उनके करियर की सबसे बेहतरीन फिल्म माना जा रहा है। अब खबर है कि जल्द ही शाहिद एक और तेलुगु फिल्म के रीमेक में नजर आएंगे।
'कबीर सिंह' तेलुगु फिल्म 'अर्जुन रेड्डी' की हिंदी रीमेक है। अब बताया जा रहा है कि वह तेलुगू एक्टर नानी की हल ही में रिलीज हुई फिल्म 'जर्सी' के हिंदी रीमेक में नजर आएंगे। करण जौहर ने फिल्म के राइट्स खरीद लिए हैं और वह इसके लिए शाहिद को कास्ट करना चाहते हैं। करण जौहर मूवी को प्रोड्यूस करेंगे। लेकिन फिल्म की कास्टिंग को लेकर कोई भी ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं की गयी है।
बता दें कि 'कबीर सिंह' शाहिद के करियर में टर्निंग पॉइंट साबित हो रही है। इससे पहले शाहिद ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके पास कोई फिल्म नहीं है। लेकिन 'कबीर सिंह' में उनकी एक्टिंग और फिल्म की सक्सेस के बाद उन्हें कई फिल्मों के ऑफर आ रहे हैं।
इस साल अप्रैल में रिलीज हुई तेलुगु फिल्म 'जर्सी' का निर्देशन गौतम तिन्नानुरी ने किया था और फिल्म में नानी ने एक क्रिकेटर का रोल प्ले किया था। यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी, जिसके बाद इसका रीमेक बनाने का फैसला किया गया है।
| शाहिद कपूर और कियारा आडवाणी की फिल्म 'कबीर सिंह' इन दिनों छाई हुई है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई कर रही है। इसके साथ ही फिल्म में सबसे ज्यादा चर्चा शाहिद कपूर की एक्टिंग की हो रही है। इस फिल्म को उनके करियर की सबसे बेहतरीन फिल्म माना जा रहा है। अब खबर है कि जल्द ही शाहिद एक और तेलुगु फिल्म के रीमेक में नजर आएंगे। 'कबीर सिंह' तेलुगु फिल्म 'अर्जुन रेड्डी' की हिंदी रीमेक है। अब बताया जा रहा है कि वह तेलुगू एक्टर नानी की हल ही में रिलीज हुई फिल्म 'जर्सी' के हिंदी रीमेक में नजर आएंगे। करण जौहर ने फिल्म के राइट्स खरीद लिए हैं और वह इसके लिए शाहिद को कास्ट करना चाहते हैं। करण जौहर मूवी को प्रोड्यूस करेंगे। लेकिन फिल्म की कास्टिंग को लेकर कोई भी ऑफिशियल अनाउंसमेंट नहीं की गयी है। बता दें कि 'कबीर सिंह' शाहिद के करियर में टर्निंग पॉइंट साबित हो रही है। इससे पहले शाहिद ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके पास कोई फिल्म नहीं है। लेकिन 'कबीर सिंह' में उनकी एक्टिंग और फिल्म की सक्सेस के बाद उन्हें कई फिल्मों के ऑफर आ रहे हैं। इस साल अप्रैल में रिलीज हुई तेलुगु फिल्म 'जर्सी' का निर्देशन गौतम तिन्नानुरी ने किया था और फिल्म में नानी ने एक क्रिकेटर का रोल प्ले किया था। यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी, जिसके बाद इसका रीमेक बनाने का फैसला किया गया है। |
गृहस्थ संत पंडित देवप्रभाकर शास्त्री उर्फ 'दद्दाजी'का सोमवार को कटनी में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस मौके पर फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा, मप्र के पूर्व मंत्री संजय पाठक सहित उनके हजारों शिष्य मौजूद रहे। हालांकि इस दौरान लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भूल गए। बता दें कि रविवार को कटनी स्थित दद्दा आश्रम में रात 8:27 बजे उन्होंने देह त्यागी थी। दद्दाजी बीमार थे।
दद्दाजी ने रविवार रात 8 बजकर 27 मिनट पर अंतिम सांस ली थी। उनका अंतिम संस्कार सोमवार को दद्दा धाम स्थित श्रीकृष्ण वृद्धाश्रम के पास झिंझरी में किया गया। इस दौरान हजारों लोग लॉकडाउन के बावजूद पहुंचे।
दद्दाजी कुछ समय से बीमार थे। 8 मई को पैरालिसिस अटैक आने के बाद उन्हें दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार शाम उन्हें एयर एम्बुलेंस से कटनी लाया गया था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उनके निधन पर शोक जताया है।
दद्दाजी का स्वास्थ्य पिछले डेढ़ महीने से खराब था। उन्हें फेफड़ों और किडनी की समस्या थी। उनके शिष्यों में आशुतोष राणा, राजपाल यादव सहित कई नेता-अभिनेता शामिल हैं। (तस्वीर में दद्दाजी के पास मौजूद हैं भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय)
दद्दाजी ने विश्व कल्याण की कामना के साथ शिवलिंग निर्माण के 129 महायज्ञ कराए थे। साथ ही 50 से ज्यादा अन्य यज्ञों और श्रीमद्भागवत के आयोजन भी कराए थे। (तस्वीरः कुछ वर्ष पहले शिवलिंग निर्माण के दौरान मौजूद मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, उनकी पत्नी साधना सिंह और आशुतोष राणा)
दद्दाजी की अंतिम यात्रा के दौरान कुछ ऐसी भीड़ देखी गई। इसमें लॉकडाउन का पालन नहीं किया गया।
| गृहस्थ संत पंडित देवप्रभाकर शास्त्री उर्फ 'दद्दाजी'का सोमवार को कटनी में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस मौके पर फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा, मप्र के पूर्व मंत्री संजय पाठक सहित उनके हजारों शिष्य मौजूद रहे। हालांकि इस दौरान लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना भूल गए। बता दें कि रविवार को कटनी स्थित दद्दा आश्रम में रात आठ:सत्ताईस बजे उन्होंने देह त्यागी थी। दद्दाजी बीमार थे। दद्दाजी ने रविवार रात आठ बजकर सत्ताईस मिनट पर अंतिम सांस ली थी। उनका अंतिम संस्कार सोमवार को दद्दा धाम स्थित श्रीकृष्ण वृद्धाश्रम के पास झिंझरी में किया गया। इस दौरान हजारों लोग लॉकडाउन के बावजूद पहुंचे। दद्दाजी कुछ समय से बीमार थे। आठ मई को पैरालिसिस अटैक आने के बाद उन्हें दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार शाम उन्हें एयर एम्बुलेंस से कटनी लाया गया था। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उनके निधन पर शोक जताया है। दद्दाजी का स्वास्थ्य पिछले डेढ़ महीने से खराब था। उन्हें फेफड़ों और किडनी की समस्या थी। उनके शिष्यों में आशुतोष राणा, राजपाल यादव सहित कई नेता-अभिनेता शामिल हैं। दद्दाजी ने विश्व कल्याण की कामना के साथ शिवलिंग निर्माण के एक सौ उनतीस महायज्ञ कराए थे। साथ ही पचास से ज्यादा अन्य यज्ञों और श्रीमद्भागवत के आयोजन भी कराए थे। दद्दाजी की अंतिम यात्रा के दौरान कुछ ऐसी भीड़ देखी गई। इसमें लॉकडाउन का पालन नहीं किया गया। |
इच्छाओं के त्याग का अर्थ यह कदापि नहीं कि मनुष्य प्रगति, विकास, उत्थान और उन्नति की सारी कामनाएँ छोड़कर निष्क्रिय होकर बैठ जाए । इच्छाओं के त्याग का अर्थ - उन इच्छाओं को छोड़ देना है, जो मनुष्य के वास्तविक विकास में काम नहीं आती, बल्कि उलटे उसे पतन की ओर ही ले जाती हैं। जो वस्तुएँ आत्मोन्नति में उपयोगी नहीं, जो परिस्थितियाँ मनुष्य को भुलाकर अपने तक सीमित कर लेती हैं, मनुष्य को उनकी कामना नहीं करनी चाहिए। साथ ही वांछनीय कामनाओं को इतना महत्त्व न दिया जाए कि उनकी अपूर्णता शोक बनकर सारे जीवन को ही आक्रांत कर ले ।
मनुष्य का लगाव इच्छाओं से नहीं, बल्कि उनकी पूर्ति के लिए किए जाने वाले कर्म से ही होना चाहिए। इससे कर्म की गति में तीव्रता आएगी। मनुष्य की क्षमताओं में वृद्धि होगी, जिससे मनोवांछित फल पाने में कोई संदेह नहीं रह जाएगा। इसके साथ ही केवल कर्म से लगाव होने पर यदि कोई प्रयत्न असफल हो जाता है तो मनुष्य उससे अधिक उपयुक्त प्रयत्न में लग जाएगा। असफलता उसे प्रभावित नहीं कर पाएगी । इच्छा के प्रति लगाव रहने से प्रयत्न की असफलता पर मनोवांछा पूरी न होने से उसका जी रो उठेगा । वह अपनी कामना के लिए तड़पने और कलपने लगेगा। अपेक्षित फल न पाने से उसे कर्म के प्रति विरक्ति होने लगेगी, प्रयत्नों से घृणा हो जाएगी और तब का अभाव उसको निष्क्रिय बनाकर घोर निराशा की स्थिति में भेज देगा। अस्तु मनुष्य को मनोवांछाएँ प्राप्त करने और निराशा के भयानक अभिशाप से बचने के लिए अपना लगाव इच्छाओं के प्रति नहीं, बल्कि उनके लिए आवश्यक प्रयत्नों के प्रति ही रखना चाहिए ।
मनुष्य की वे ही कामनाएँ उपयुक्त कही जा सकती हैं जो उसके विकास में सहायक हों। संपत्ति की कामना तभी उपयुक्त है कर्मयोग और कर्म-कौशल / ३२
जब वह कोई महान कार्य संपादित करने में काम आए। संपत्ति की कामना इसलिए करना ठीक नहीं कि लोग हमें धनवान समझें, समाज में प्रभाव बढ़े, संसार की हर चीज प्राप्त की जाए, भोगों के साधन संग्रह किए जाएँ। लोग संतान की कामना करते हैं। ठीक है, संतान की कामना स्वाभाविक है, किंतु संतान को केवल इसलिए चाहना कि मैं पुत्रवान समझा जाऊँ, संपत्ति का कोई उत्तराधिकारी हो जाए, बहुत उपयुक्त नहीं। देश को अपने प्रतिनिधि के रूप में एक अच्छा नागरिक देने के लिए संतान की कामना महान एवं उपयुक्त है। लोग जीवन में कीर्ति चाहते हैं, अपनी ख्याति चाहते हैं है और उसके लिए न जाने कौन-कौन-से उपाय किया करते हैं । ख्याति इसीलिए चाहना ठीक नहीं कि समाज में प्रभाव बढ़ेगा, उससे हजार प्रकार के काम निकलेंगे, लोग आदर करेंगे, प्रतिष्ठा बढ़ेगी । मनुष्य को कीर्तिकामी होना चाहिए, किंतु यह तभी ठीक होगा कि वह कीर्ति का उपार्जन अपने सत्कर्मों से करे, अन्याय और धूर्तता से नहीं । इस प्रकार की उपयुक्त कामनाएँ रखने वाला व्यक्ति कभी भी उनकी असफलताओं से दुखी नहीं होता और न कभी निराशा की स्थिति में पहुँचता है। अपने व्यक्तिगत सुख-भोग के लिए विषयों की कामना परिणाम में ही नहीं, प्रारंभ में भी दुःखदायी होती है । आत्मविकास और समाज कल्याण के लिए की गई कामनाएँ आदि एवं अंत दोनों में ही सुखदायी एवं कल्याणकारी रहती हैं। जीवन में निराशा से बचने के लिए मनुष्य को कम-से-कम कामनाएँ रखना ही ठीक है। कामनाओं की अधिकता ही निराशा और पतन का कारण होती है ।
कामनाएँ, असंगत न होने पाएँ
गीता में बतलाया गया है कि "कामनाओं से क्रोध का जन्म होता है और क्रोध से बुद्धि नष्ट हो जाती है। बुद्धि के नष्ट होने से मनुष्य मूर्खतापूर्ण अपकर्मों में प्रवृत्त हो जाता है।" "अपकर्म, अशांति और असंतोष के कारण होते हैं । यह क्रम स्पष्ट करता है
कर्मयोग और कर्म-कौशल / ३३ | इच्छाओं के त्याग का अर्थ यह कदापि नहीं कि मनुष्य प्रगति, विकास, उत्थान और उन्नति की सारी कामनाएँ छोड़कर निष्क्रिय होकर बैठ जाए । इच्छाओं के त्याग का अर्थ - उन इच्छाओं को छोड़ देना है, जो मनुष्य के वास्तविक विकास में काम नहीं आती, बल्कि उलटे उसे पतन की ओर ही ले जाती हैं। जो वस्तुएँ आत्मोन्नति में उपयोगी नहीं, जो परिस्थितियाँ मनुष्य को भुलाकर अपने तक सीमित कर लेती हैं, मनुष्य को उनकी कामना नहीं करनी चाहिए। साथ ही वांछनीय कामनाओं को इतना महत्त्व न दिया जाए कि उनकी अपूर्णता शोक बनकर सारे जीवन को ही आक्रांत कर ले । मनुष्य का लगाव इच्छाओं से नहीं, बल्कि उनकी पूर्ति के लिए किए जाने वाले कर्म से ही होना चाहिए। इससे कर्म की गति में तीव्रता आएगी। मनुष्य की क्षमताओं में वृद्धि होगी, जिससे मनोवांछित फल पाने में कोई संदेह नहीं रह जाएगा। इसके साथ ही केवल कर्म से लगाव होने पर यदि कोई प्रयत्न असफल हो जाता है तो मनुष्य उससे अधिक उपयुक्त प्रयत्न में लग जाएगा। असफलता उसे प्रभावित नहीं कर पाएगी । इच्छा के प्रति लगाव रहने से प्रयत्न की असफलता पर मनोवांछा पूरी न होने से उसका जी रो उठेगा । वह अपनी कामना के लिए तड़पने और कलपने लगेगा। अपेक्षित फल न पाने से उसे कर्म के प्रति विरक्ति होने लगेगी, प्रयत्नों से घृणा हो जाएगी और तब का अभाव उसको निष्क्रिय बनाकर घोर निराशा की स्थिति में भेज देगा। अस्तु मनुष्य को मनोवांछाएँ प्राप्त करने और निराशा के भयानक अभिशाप से बचने के लिए अपना लगाव इच्छाओं के प्रति नहीं, बल्कि उनके लिए आवश्यक प्रयत्नों के प्रति ही रखना चाहिए । मनुष्य की वे ही कामनाएँ उपयुक्त कही जा सकती हैं जो उसके विकास में सहायक हों। संपत्ति की कामना तभी उपयुक्त है कर्मयोग और कर्म-कौशल / बत्तीस जब वह कोई महान कार्य संपादित करने में काम आए। संपत्ति की कामना इसलिए करना ठीक नहीं कि लोग हमें धनवान समझें, समाज में प्रभाव बढ़े, संसार की हर चीज प्राप्त की जाए, भोगों के साधन संग्रह किए जाएँ। लोग संतान की कामना करते हैं। ठीक है, संतान की कामना स्वाभाविक है, किंतु संतान को केवल इसलिए चाहना कि मैं पुत्रवान समझा जाऊँ, संपत्ति का कोई उत्तराधिकारी हो जाए, बहुत उपयुक्त नहीं। देश को अपने प्रतिनिधि के रूप में एक अच्छा नागरिक देने के लिए संतान की कामना महान एवं उपयुक्त है। लोग जीवन में कीर्ति चाहते हैं, अपनी ख्याति चाहते हैं है और उसके लिए न जाने कौन-कौन-से उपाय किया करते हैं । ख्याति इसीलिए चाहना ठीक नहीं कि समाज में प्रभाव बढ़ेगा, उससे हजार प्रकार के काम निकलेंगे, लोग आदर करेंगे, प्रतिष्ठा बढ़ेगी । मनुष्य को कीर्तिकामी होना चाहिए, किंतु यह तभी ठीक होगा कि वह कीर्ति का उपार्जन अपने सत्कर्मों से करे, अन्याय और धूर्तता से नहीं । इस प्रकार की उपयुक्त कामनाएँ रखने वाला व्यक्ति कभी भी उनकी असफलताओं से दुखी नहीं होता और न कभी निराशा की स्थिति में पहुँचता है। अपने व्यक्तिगत सुख-भोग के लिए विषयों की कामना परिणाम में ही नहीं, प्रारंभ में भी दुःखदायी होती है । आत्मविकास और समाज कल्याण के लिए की गई कामनाएँ आदि एवं अंत दोनों में ही सुखदायी एवं कल्याणकारी रहती हैं। जीवन में निराशा से बचने के लिए मनुष्य को कम-से-कम कामनाएँ रखना ही ठीक है। कामनाओं की अधिकता ही निराशा और पतन का कारण होती है । कामनाएँ, असंगत न होने पाएँ गीता में बतलाया गया है कि "कामनाओं से क्रोध का जन्म होता है और क्रोध से बुद्धि नष्ट हो जाती है। बुद्धि के नष्ट होने से मनुष्य मूर्खतापूर्ण अपकर्मों में प्रवृत्त हो जाता है।" "अपकर्म, अशांति और असंतोष के कारण होते हैं । यह क्रम स्पष्ट करता है कर्मयोग और कर्म-कौशल / तैंतीस |
एक बड़ा और विशाल अपार्टमेंट रखने के लिए सभी भाग्यशाली नहीं थे। लेकिन इसे अपने छोटे सपने, अपने सपने के अपार्टमेंट से बनाने से रोका नहीं जाना चाहिए। चलो सोने के लिए कमरे के बारे में बात करते हैं। एक छोटा शयनकक्ष प्रस्तुत करना बेहतर कैसे है? आपको डिजाइन और इंटीरियर से बाहर निकलने की क्या ज़रूरत है, और इसके विपरीत, क्या? इस लेख में आपको कई विचार मिलेंगे जो आपको एक छोटे से बेडरूम के चारों ओर सुंदर और क्षैतिज रूप से मदद करेंगे।
एक छोटा सा बेडरूम कैसे प्रस्तुत करना सबसे अच्छा है?
एक छोटे बेडरूम के इंटीरियर के लिए विचारः
- एक छोटे बेडरूम के इंटीरियर में फर्नीचर, कपड़ा, और दीवारों के रंग जैसे रंग पैलेट को हल्के रंगों और रंगों में बनाया जाना चाहिए, अधिमानतः चित्रों के बिना। इस तरह के एक स्वागत, साथ ही प्रकाश की प्रचुर उपलब्धता, आपको कमरे में जगह को दृष्टि से बढ़ाने की अनुमति देगा। एक छोटे से बेडरूम के इंटीरियर में, भारी आकार और बनावट की उपस्थिति से बचें जो अंतरिक्ष को दृष्टि से ढेर कर देगा। यदि आप ड्राइंग के साथ वॉलपेपर चाहते हैं, तो रैखिक ग्राफिक्स से कुछ चुनें। यह वांछनीय है कि रेखाएं अनुदैर्ध्य हैं, ट्रांसवर्स नहीं।
- फर्नीचर से प्रवेश जारी करें। यदि दरवाजे से विपरीत दीवार तक की जगह मुक्त है, तो एक छोटा सा बेडरूम व्यापक दिखाई देगा। उन चीजों की उपस्थिति को कम करने के सिद्धांत में प्रयास करें जो नींद पर लागू नहीं होते हैं। आप देखेंगे कि जगह बहुत बड़ी हो जाएगी।
- एक छोटे बेडरूम के इंटीरियर को सजाने के लिए, आपको कार्यात्मक और कॉम्पैक्ट फर्नीचर का उपयोग करना चाहिए। छोटे अंतर्निहित अलमारियों का चयन करें। यदि आपको एक टेबल की आवश्यकता है, तो इसे अंतर्निहित या फोल्ड-आउट भी होने दें, यह कुर्सियों या मल पर लागू होता है। इसके अलावा, एक छोटे बेडरूम में फर्नीचर ergonomic होना चाहिए। संभावित संयुक्त संरचनाएं। कोठरी में बनाया गया तह बिस्तर, आपको एक विशाल बिस्तर पर आराम करने और दिन के दौरान कमरे में जगह बचाने की अनुमति देता है। एक अंतर्निर्मित बिस्तर वाला यह विकल्प छोटे बेडरूम के इंटीरियर डिजाइन के लिए उपयुक्त है, जो एक बैठक कक्ष के साथ संयुक्त है।
- दर्पण अंतरिक्ष में वृद्धि। प्रतिबिंबित दरवाजों के साथ एक पूर्ण डिब्बे कूप के साथ एक छोटे बेडरूम के इंटीरियर को सजाने के लिए। यह तकनीक आपको असाधारण रूप से कमरे को बड़ा करने और आवश्यक चीज़ों को आसानी से रखने की अनुमति देगी।
- कार्यात्मक क्षेत्रों का संयोजन और छोटे बेडरूम के इंटीरियर में अंतरिक्ष के अनुकूलन से आप कमरे को बड़े पैमाने पर विस्तारित कर सकते हैं।
| एक बड़ा और विशाल अपार्टमेंट रखने के लिए सभी भाग्यशाली नहीं थे। लेकिन इसे अपने छोटे सपने, अपने सपने के अपार्टमेंट से बनाने से रोका नहीं जाना चाहिए। चलो सोने के लिए कमरे के बारे में बात करते हैं। एक छोटा शयनकक्ष प्रस्तुत करना बेहतर कैसे है? आपको डिजाइन और इंटीरियर से बाहर निकलने की क्या ज़रूरत है, और इसके विपरीत, क्या? इस लेख में आपको कई विचार मिलेंगे जो आपको एक छोटे से बेडरूम के चारों ओर सुंदर और क्षैतिज रूप से मदद करेंगे। एक छोटा सा बेडरूम कैसे प्रस्तुत करना सबसे अच्छा है? एक छोटे बेडरूम के इंटीरियर के लिए विचारः - एक छोटे बेडरूम के इंटीरियर में फर्नीचर, कपड़ा, और दीवारों के रंग जैसे रंग पैलेट को हल्के रंगों और रंगों में बनाया जाना चाहिए, अधिमानतः चित्रों के बिना। इस तरह के एक स्वागत, साथ ही प्रकाश की प्रचुर उपलब्धता, आपको कमरे में जगह को दृष्टि से बढ़ाने की अनुमति देगा। एक छोटे से बेडरूम के इंटीरियर में, भारी आकार और बनावट की उपस्थिति से बचें जो अंतरिक्ष को दृष्टि से ढेर कर देगा। यदि आप ड्राइंग के साथ वॉलपेपर चाहते हैं, तो रैखिक ग्राफिक्स से कुछ चुनें। यह वांछनीय है कि रेखाएं अनुदैर्ध्य हैं, ट्रांसवर्स नहीं। - फर्नीचर से प्रवेश जारी करें। यदि दरवाजे से विपरीत दीवार तक की जगह मुक्त है, तो एक छोटा सा बेडरूम व्यापक दिखाई देगा। उन चीजों की उपस्थिति को कम करने के सिद्धांत में प्रयास करें जो नींद पर लागू नहीं होते हैं। आप देखेंगे कि जगह बहुत बड़ी हो जाएगी। - एक छोटे बेडरूम के इंटीरियर को सजाने के लिए, आपको कार्यात्मक और कॉम्पैक्ट फर्नीचर का उपयोग करना चाहिए। छोटे अंतर्निहित अलमारियों का चयन करें। यदि आपको एक टेबल की आवश्यकता है, तो इसे अंतर्निहित या फोल्ड-आउट भी होने दें, यह कुर्सियों या मल पर लागू होता है। इसके अलावा, एक छोटे बेडरूम में फर्नीचर ergonomic होना चाहिए। संभावित संयुक्त संरचनाएं। कोठरी में बनाया गया तह बिस्तर, आपको एक विशाल बिस्तर पर आराम करने और दिन के दौरान कमरे में जगह बचाने की अनुमति देता है। एक अंतर्निर्मित बिस्तर वाला यह विकल्प छोटे बेडरूम के इंटीरियर डिजाइन के लिए उपयुक्त है, जो एक बैठक कक्ष के साथ संयुक्त है। - दर्पण अंतरिक्ष में वृद्धि। प्रतिबिंबित दरवाजों के साथ एक पूर्ण डिब्बे कूप के साथ एक छोटे बेडरूम के इंटीरियर को सजाने के लिए। यह तकनीक आपको असाधारण रूप से कमरे को बड़ा करने और आवश्यक चीज़ों को आसानी से रखने की अनुमति देगी। - कार्यात्मक क्षेत्रों का संयोजन और छोटे बेडरूम के इंटीरियर में अंतरिक्ष के अनुकूलन से आप कमरे को बड़े पैमाने पर विस्तारित कर सकते हैं। |
रामनगर के शिवांश जोशी परीक्षा में अव्वल रहे हैं। शिवांश ने 97 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। उन्होंने इसी साल लिटिल स्कॉलर स्कूल से 12वीं की परीक्षा 96. 8 फीसदी अंकों से उत्तीर्ण की थी। खास बात यह है कि शिवांश ने यह उपलब्धि बिना कोचिंग के हासिल की है। बेटे की इस कामयाबी से परिवार वाले गद्गद हैं और घर में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
भारतीय जीवन बीमा निगम के हल्द्वानी मंडल कार्यालय में सहायक प्रशासनिक अधिकारी संजीव जोशी और चिल्किया प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक तनुजा जोशी के बेटे शिवांश (17) का बचपन से ही सेना में जाने का सपना था।
उन्होंने 24 अप्रैल को एनडीए की प्रवेश परीक्षा दी थी। उनको इसमें सफल होने का पूरा विश्वास था। शिवांश ने बताया कि उनका चयन एनआईटी त्रिचिनापल्ली (तमिलनाडु) के लिए भी हुआ था लेकिन फौज में जाने की इच्छा के चलते वह वहां नहीं गए।
वह तीन महीने से एनडीए की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने इस परीक्षा की तैयारी के क्रम में अपनी अंग्रेजी और सामान्य ज्ञान को सुधारा। स्कूल से भी इसके लिए उसे पूरा सहयोग मिला।
शिवांश के घर रामनगर के मोहल्ला भवानीगंज स्थित पंचवटी कॉलोनी में बधाई देने वालों का तांता लगा है। उनका छोटा भाई प्रियांश भी लिटिल स्कॉलर स्कूल में आठवीं का छात्र है। शिवांश ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए वह तीन साल पुणे रहेंगे। उसके बाद एक साल के लिए देहरादून आईएमए में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।
शिवांश के अनुसार साक्षात्कार इलाहाबाद बोर्ड में हुआ। इसमें प्रदेश के 12 विशेष चीजों के बारे में पूछा गया था। वह फुटबाल के अच्छे खिलाड़ी हैं। यह जानकारी जब बोर्ड के सदस्यों को हुई तो उन्होंने फुटबाल के नियमों से संबंधित कई सवाल पूछे। क्षेत्र और राज्य से भी संबंधित कई सवाल पूछे गए।
रामनगर (नैनीताल)। शिवांश ने अनुसार उन्होंने इंटर तक कभी भी मोबाइल का उपयोग नहीं किया था। इंटर पास होने के बाद ही उनको मोबाइल दिया गया, लेकिन इसके बाद भी वह मोबाइल से दूर रहे। शिवांश ने अपनी कामयाबी में अमर उजाला को भी श्रेय दिया। उनका कहना है कि वह बचपन से ही अमर उजाला पढ़ते रहे हैं। संपादकीय पेज, देश विदेश और खेल पेज उसका पसंदीदा रहा है।
| रामनगर के शिवांश जोशी परीक्षा में अव्वल रहे हैं। शिवांश ने सत्तानवे प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। उन्होंने इसी साल लिटिल स्कॉलर स्कूल से बारहवीं की परीक्षा छियानवे. आठ फीसदी अंकों से उत्तीर्ण की थी। खास बात यह है कि शिवांश ने यह उपलब्धि बिना कोचिंग के हासिल की है। बेटे की इस कामयाबी से परिवार वाले गद्गद हैं और घर में बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। भारतीय जीवन बीमा निगम के हल्द्वानी मंडल कार्यालय में सहायक प्रशासनिक अधिकारी संजीव जोशी और चिल्किया प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक तनुजा जोशी के बेटे शिवांश का बचपन से ही सेना में जाने का सपना था। उन्होंने चौबीस अप्रैल को एनडीए की प्रवेश परीक्षा दी थी। उनको इसमें सफल होने का पूरा विश्वास था। शिवांश ने बताया कि उनका चयन एनआईटी त्रिचिनापल्ली के लिए भी हुआ था लेकिन फौज में जाने की इच्छा के चलते वह वहां नहीं गए। वह तीन महीने से एनडीए की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने इस परीक्षा की तैयारी के क्रम में अपनी अंग्रेजी और सामान्य ज्ञान को सुधारा। स्कूल से भी इसके लिए उसे पूरा सहयोग मिला। शिवांश के घर रामनगर के मोहल्ला भवानीगंज स्थित पंचवटी कॉलोनी में बधाई देने वालों का तांता लगा है। उनका छोटा भाई प्रियांश भी लिटिल स्कॉलर स्कूल में आठवीं का छात्र है। शिवांश ने बताया कि प्रशिक्षण के लिए वह तीन साल पुणे रहेंगे। उसके बाद एक साल के लिए देहरादून आईएमए में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। शिवांश के अनुसार साक्षात्कार इलाहाबाद बोर्ड में हुआ। इसमें प्रदेश के बारह विशेष चीजों के बारे में पूछा गया था। वह फुटबाल के अच्छे खिलाड़ी हैं। यह जानकारी जब बोर्ड के सदस्यों को हुई तो उन्होंने फुटबाल के नियमों से संबंधित कई सवाल पूछे। क्षेत्र और राज्य से भी संबंधित कई सवाल पूछे गए। रामनगर । शिवांश ने अनुसार उन्होंने इंटर तक कभी भी मोबाइल का उपयोग नहीं किया था। इंटर पास होने के बाद ही उनको मोबाइल दिया गया, लेकिन इसके बाद भी वह मोबाइल से दूर रहे। शिवांश ने अपनी कामयाबी में अमर उजाला को भी श्रेय दिया। उनका कहना है कि वह बचपन से ही अमर उजाला पढ़ते रहे हैं। संपादकीय पेज, देश विदेश और खेल पेज उसका पसंदीदा रहा है। |
छपराः (अमीर अफज़ल खान) छपराः जिले के जनता बाजार थाना क्षेत्र के बसही गांव में भूमि विवाद के कारण गोली मारकर एक युवक की हत्या सोमवार को अलसुबह कर दी गयी। इस घटना को लेकर दोनों गुटों के बीच पहले से विवाद चल रहा था। भूमि विवाद की जानकारी मृतक के परिजनों ने पुलिस को भी दी थी, लेकिन पुलिस ने समय रहते इस मामले में कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण विवाद बढ़ता गया और मामला हत्या तक जा पहुंची। परिजनों का कहना है कि समय रहते अगर पुलिस कार्रवाई की होती तो, शायद हत्या की यह घटना नहीं होती। मृतक जगदीश मांझी के 30 वर्षीय पुत्र श्रवण कुमार बताया गया है। परिजनों ने बताया कि सुबह करीब 6:00 बजे गोली मारकर सरवन की हत्या की गयी। गोली उसके सीने में मारी गई है, जो आर पार हो गई है। गोली लगने के बाद परिजन आनन-फानन में उसे लेकर सदर अस्पताल पहुंचे जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हत्या के काफी देर बाद घटना स्थल पर पुलिस पहुंची। इतना ही नहीं जनता बाजार से गोली लगने के बाद उसके परिजन लेकर सदर अस्पताल पहुंच गये, लेकिन सदर अस्पताल में भी पुलिस नहीं पहुंची। आमतौर पर गोली लगने और हत्या की घटनाओं के बाद पहले भगवान बाजार थाना की पुलिस पहुंच जाती थी।
हाल के दिनों में इस तरह के मामलों में पुलिस सदर अस्पताल नहीं पहुंचती है, जिसके कारण अस्पताल में विधि व्यवस्था की गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है। अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सक डॉ शैलेंद्र कुमार ने श्रवण कुमार को मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद अस्पताल में काफी देर तक अफरा-तफरी मची रही और भगदड़ की स्थिति बनी रही। मृतक के परिजनों का रो-रोकर हाल बेहाल है, अस्पताल में पुलिस दूर-दूर तक नजर नहीं आयी। मृतक के परिजन बयान दर्ज कराने और शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए पुलिस का काफी देर तक इंतजार करते रहे। समाचार लिखें जाने तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सका है और शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका है और ना ही इस मामले में किसी की गिरफ्तारी की कोई सूचना है।
| छपराः छपराः जिले के जनता बाजार थाना क्षेत्र के बसही गांव में भूमि विवाद के कारण गोली मारकर एक युवक की हत्या सोमवार को अलसुबह कर दी गयी। इस घटना को लेकर दोनों गुटों के बीच पहले से विवाद चल रहा था। भूमि विवाद की जानकारी मृतक के परिजनों ने पुलिस को भी दी थी, लेकिन पुलिस ने समय रहते इस मामले में कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण विवाद बढ़ता गया और मामला हत्या तक जा पहुंची। परिजनों का कहना है कि समय रहते अगर पुलिस कार्रवाई की होती तो, शायद हत्या की यह घटना नहीं होती। मृतक जगदीश मांझी के तीस वर्षीय पुत्र श्रवण कुमार बताया गया है। परिजनों ने बताया कि सुबह करीब छः:शून्य बजे गोली मारकर सरवन की हत्या की गयी। गोली उसके सीने में मारी गई है, जो आर पार हो गई है। गोली लगने के बाद परिजन आनन-फानन में उसे लेकर सदर अस्पताल पहुंचे जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हत्या के काफी देर बाद घटना स्थल पर पुलिस पहुंची। इतना ही नहीं जनता बाजार से गोली लगने के बाद उसके परिजन लेकर सदर अस्पताल पहुंच गये, लेकिन सदर अस्पताल में भी पुलिस नहीं पहुंची। आमतौर पर गोली लगने और हत्या की घटनाओं के बाद पहले भगवान बाजार थाना की पुलिस पहुंच जाती थी। हाल के दिनों में इस तरह के मामलों में पुलिस सदर अस्पताल नहीं पहुंचती है, जिसके कारण अस्पताल में विधि व्यवस्था की गंभीर समस्या उत्पन्न हो रही है। अस्पताल पहुंचने के बाद चिकित्सक डॉ शैलेंद्र कुमार ने श्रवण कुमार को मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद अस्पताल में काफी देर तक अफरा-तफरी मची रही और भगदड़ की स्थिति बनी रही। मृतक के परिजनों का रो-रोकर हाल बेहाल है, अस्पताल में पुलिस दूर-दूर तक नजर नहीं आयी। मृतक के परिजन बयान दर्ज कराने और शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए पुलिस का काफी देर तक इंतजार करते रहे। समाचार लिखें जाने तक प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सका है और शव का पोस्टमार्टम नहीं हो सका है और ना ही इस मामले में किसी की गिरफ्तारी की कोई सूचना है। |
मिल सकते हैं। इसलिये तन-मन-धनसे दीन-दुखियोंकी, माता-पिता आदि गुरुजनोंकी, सबकी सेवा करनी चाहिये ।
सेवा करनेके दो साधन है- दाम (धन) और काम (कर्म) । हमें भगवान्ने रुपये, भोग-पदार्थ, ऐश्वर्य आदि जो कुछ भी दिया है, वह यदि किसी प्रकार भी दूसरोंकी सेवामें लगे तो अपना अहोभाग्य समझना चाहिये। उसे दूसरोंको देकर बहुत प्रसन्न होना चाहिये और यह मानना चाहिये कि इस प्रकार आज मैंने भगवान्की ही सेवा की है। इसी प्रकार शरीरसे करनेयोग्य सेवाका कोई कार्य सामने आ जाय तो उसे खूब परिश्रमके साथ प्रसन्नचित्तसे करना चाहिये ।
सेवाके ये दो साधन - दाम और काम - बड़े महत्त्वके हैं। एकमें ऐश्वर्यका त्याग है, दूसरेमें शारीरिक परिश्रम है। अथवा यों कहें कि एकमें ममताका त्याग है, दूसरेमें अहंताका त्याग है। अहंता और ममता - ये दो बड़ी व्याधियाँ हैं। इनका त्याग होना अत्यावश्यक है। अतः कहीं भी सेवाका अवसर मिल जाय तो समझना चाहिये कि असली धन मिल गया। सेवाका काम मिल गया तो ऐसी प्रसन्नता होनी चाहिये मानो राम मिल गये ।
अच्छे पुरुष अपने समयका एक-एक मिनट काममें लेते हैं। आयु समाप्त हो जाती है, पर काम नहीं समाप्त होता । भगवान्ने गीता २।४० में कर्मयोगकी बड़ी प्रशंसा की है। स्वार्थका त्याग ही कर्मयोग है। यही असली धर्म है। इसका उलटा फल कभी नही होता, न इसका कभी नाश ही होता है। इसका थोड़ा-सा भी पालन किया जाय तो वह जन्म-मरणके बन्धनसे छुड़ा सकता है। इसीलिये सेवाको साक्षात् राम समझकर उसका आदर करना चाहिये और उसे तत्परताके साथ करनेकी पूरी चेष्टा करनी चाहिये ।
सेवाके कई स्वरूप हैं। दूसरोंको मान-बड़ाई देना भी सेवा ही है। सेवा रत्नोंकी ढेरी है। उसे लूटनेकी चीज समझकर खूब लूटना चाहिये। कोई भी नीचा काम - जैसे पैर धुलाना, हाथ धुलाना, पत्तल उठाना आदि - मिल जाय तो समझना चाहिये कि भगवान्को विशेष दया है। यदि किसी बीमारकी टट्टी-पेशाब उठानेका काम मिल जाय तब तो भगवान्की पूर्ण दया समझनी चाहिये। सेवाकार्य में जितना उच्च भाव रखा जा सके, रखना चाहिये। यदि सेवाकार्यको साक्षात् परमात्माकी सेवा समझा जाय तब तो कहना ही क्या है ? उससे परमात्मा बहुत जल्दी मिल सकते हैं।
यदि कोई व्यक्ति हमसे सेवा करावे तो हमें अपने ऊपर उसकी बड़ी दया समझनी चाहिये। समझना चाहिये कि वही दाता है। हमें मुक्त करनेके लिये हमसे सेवा करवा रहा है ।
किसीने हमारी सेवा स्वीकार कर ली तो समझना चाहिये कि उसने हमारा उद्धार कर दिया और यदि सेव्यको ईश्वर मानकर उसकी सेवा की जाय तब तो खुला दरबार है। सेवकको साक्षात् नारायणकी सेवाका लाभ हो सकता है। यह बड़े ऊँचे दर्जेका भाव है। सेवाको नारायणकी सेवा बनाना सेवकके हाथकी बात है।
अपने धन और ऐश्वर्यको अपने पूज्यजनों एवं दीनदुःखियोंकी सेवामें समर्पित कर देना चाहिये । इससे भी ऊँचा भाव यह समझ कर देना है कि साक्षात् नारायण ही उनके रूपमें प्रकट होकर हमारे धन और ऐश्वर्यको सेवाके रूपमें स्वीकार कर रहे हैं। इससे दूसरा लाभ यह समझना चाहिये कि हमारी ममताका परित्याग हो रहा है। हमारा बोझा हलका हो रहा है। तीसरा लाभ यह है कि धन और ऐश्वर्यके त्यागसे उदारता बढ़ती है, दया बढ़ती है, ये सद्गुण धन और ऐश्वर्यसे कहीं अधिक मूल्यवान् है। आज यदि हमारी मृत्यु हो जाय तो धन-ऐश्वर्य सब यहीं छूट जायेंगे, अतः इन्हें बटोरकर रखनेसे कोई लाभ नहीं। ये उलटे हमारे लिये बन्धनरूप हैं। परन्तु यदि हमने इनको दूसरोंके उपकारमें लगा दिया, इनसे दूसरोंका उपकार हो गया तो समझ लीजिये कि उससे हमारा बड़ा हित हो गया। भगवान्की चीजें भगवान्के काममें लग गयीं। हमारा भार उतर गया । जीवनकी जोखिम बिक गयी। यदि ऐसा समझकर निष्कामभावसे अपना सारा स्वत्व दूसरोंकी सेवामें अर्पित कर दिया जाय तो उससे बड़ा भारी लाभ है।
इतनी बातें तो सबके लिये कही गयीं। अब कुछ स्त्रियोंके कामकी बातें विशेषरूपसे कहनी हैं। स्त्रियोंमें कुछ अज्ञानता अधिक होती है। उनमें लड़ाई-झगड़ा प्रायः अधिक होता है, इसका कारण उनकी बेसमझी ही है। घरमें प्रेम बढ़ाने के लिये उन्हें सबसे हँसकर बोलना चाहिये, सबके साथ विनयपूर्वक व्यवहार करना चाहिये। यदि कोई उनपर क्रोध करे तब भी उन्हें प्रसन्नतासे हँसकर मीठा उत्तर देना चाहिये । मिष्टभाषिता स्त्रियोंका प्रधान गुण है। जो स्त्री दूसरोंको मान-बड़ाई देती है सबके साथ विनय और प्रेमका बर्ताव करती है उसपर भगवान् बहुत शीघ्र प्रसन्न होते हैं और साथ-साथ उसके अहङ्कार तथा कठोरताका नाश होता है। यदि किसी स्त्रीके कारणसे घरमें कलह हो गया तो उसे ऐसा मानना चाहिये मानो मुझपर कलङ्क लग गया। इस बातका बराबर ध्यान रखना चाहिये कि अपने तो भलाई ही लेकर जाना है। और भलाई तभी मिल सकती है जब हमारा व्यवहार सबके अनुकूल होगा ।
स्त्रियाँ प्रायः भोली होती है, उनमें मोह और आसक्तिकी | मिल सकते हैं। इसलिये तन-मन-धनसे दीन-दुखियोंकी, माता-पिता आदि गुरुजनोंकी, सबकी सेवा करनी चाहिये । सेवा करनेके दो साधन है- दाम और काम । हमें भगवान्ने रुपये, भोग-पदार्थ, ऐश्वर्य आदि जो कुछ भी दिया है, वह यदि किसी प्रकार भी दूसरोंकी सेवामें लगे तो अपना अहोभाग्य समझना चाहिये। उसे दूसरोंको देकर बहुत प्रसन्न होना चाहिये और यह मानना चाहिये कि इस प्रकार आज मैंने भगवान्की ही सेवा की है। इसी प्रकार शरीरसे करनेयोग्य सेवाका कोई कार्य सामने आ जाय तो उसे खूब परिश्रमके साथ प्रसन्नचित्तसे करना चाहिये । सेवाके ये दो साधन - दाम और काम - बड़े महत्त्वके हैं। एकमें ऐश्वर्यका त्याग है, दूसरेमें शारीरिक परिश्रम है। अथवा यों कहें कि एकमें ममताका त्याग है, दूसरेमें अहंताका त्याग है। अहंता और ममता - ये दो बड़ी व्याधियाँ हैं। इनका त्याग होना अत्यावश्यक है। अतः कहीं भी सेवाका अवसर मिल जाय तो समझना चाहिये कि असली धन मिल गया। सेवाका काम मिल गया तो ऐसी प्रसन्नता होनी चाहिये मानो राम मिल गये । अच्छे पुरुष अपने समयका एक-एक मिनट काममें लेते हैं। आयु समाप्त हो जाती है, पर काम नहीं समाप्त होता । भगवान्ने गीता दो।चालीस में कर्मयोगकी बड़ी प्रशंसा की है। स्वार्थका त्याग ही कर्मयोग है। यही असली धर्म है। इसका उलटा फल कभी नही होता, न इसका कभी नाश ही होता है। इसका थोड़ा-सा भी पालन किया जाय तो वह जन्म-मरणके बन्धनसे छुड़ा सकता है। इसीलिये सेवाको साक्षात् राम समझकर उसका आदर करना चाहिये और उसे तत्परताके साथ करनेकी पूरी चेष्टा करनी चाहिये । सेवाके कई स्वरूप हैं। दूसरोंको मान-बड़ाई देना भी सेवा ही है। सेवा रत्नोंकी ढेरी है। उसे लूटनेकी चीज समझकर खूब लूटना चाहिये। कोई भी नीचा काम - जैसे पैर धुलाना, हाथ धुलाना, पत्तल उठाना आदि - मिल जाय तो समझना चाहिये कि भगवान्को विशेष दया है। यदि किसी बीमारकी टट्टी-पेशाब उठानेका काम मिल जाय तब तो भगवान्की पूर्ण दया समझनी चाहिये। सेवाकार्य में जितना उच्च भाव रखा जा सके, रखना चाहिये। यदि सेवाकार्यको साक्षात् परमात्माकी सेवा समझा जाय तब तो कहना ही क्या है ? उससे परमात्मा बहुत जल्दी मिल सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति हमसे सेवा करावे तो हमें अपने ऊपर उसकी बड़ी दया समझनी चाहिये। समझना चाहिये कि वही दाता है। हमें मुक्त करनेके लिये हमसे सेवा करवा रहा है । किसीने हमारी सेवा स्वीकार कर ली तो समझना चाहिये कि उसने हमारा उद्धार कर दिया और यदि सेव्यको ईश्वर मानकर उसकी सेवा की जाय तब तो खुला दरबार है। सेवकको साक्षात् नारायणकी सेवाका लाभ हो सकता है। यह बड़े ऊँचे दर्जेका भाव है। सेवाको नारायणकी सेवा बनाना सेवकके हाथकी बात है। अपने धन और ऐश्वर्यको अपने पूज्यजनों एवं दीनदुःखियोंकी सेवामें समर्पित कर देना चाहिये । इससे भी ऊँचा भाव यह समझ कर देना है कि साक्षात् नारायण ही उनके रूपमें प्रकट होकर हमारे धन और ऐश्वर्यको सेवाके रूपमें स्वीकार कर रहे हैं। इससे दूसरा लाभ यह समझना चाहिये कि हमारी ममताका परित्याग हो रहा है। हमारा बोझा हलका हो रहा है। तीसरा लाभ यह है कि धन और ऐश्वर्यके त्यागसे उदारता बढ़ती है, दया बढ़ती है, ये सद्गुण धन और ऐश्वर्यसे कहीं अधिक मूल्यवान् है। आज यदि हमारी मृत्यु हो जाय तो धन-ऐश्वर्य सब यहीं छूट जायेंगे, अतः इन्हें बटोरकर रखनेसे कोई लाभ नहीं। ये उलटे हमारे लिये बन्धनरूप हैं। परन्तु यदि हमने इनको दूसरोंके उपकारमें लगा दिया, इनसे दूसरोंका उपकार हो गया तो समझ लीजिये कि उससे हमारा बड़ा हित हो गया। भगवान्की चीजें भगवान्के काममें लग गयीं। हमारा भार उतर गया । जीवनकी जोखिम बिक गयी। यदि ऐसा समझकर निष्कामभावसे अपना सारा स्वत्व दूसरोंकी सेवामें अर्पित कर दिया जाय तो उससे बड़ा भारी लाभ है। इतनी बातें तो सबके लिये कही गयीं। अब कुछ स्त्रियोंके कामकी बातें विशेषरूपसे कहनी हैं। स्त्रियोंमें कुछ अज्ञानता अधिक होती है। उनमें लड़ाई-झगड़ा प्रायः अधिक होता है, इसका कारण उनकी बेसमझी ही है। घरमें प्रेम बढ़ाने के लिये उन्हें सबसे हँसकर बोलना चाहिये, सबके साथ विनयपूर्वक व्यवहार करना चाहिये। यदि कोई उनपर क्रोध करे तब भी उन्हें प्रसन्नतासे हँसकर मीठा उत्तर देना चाहिये । मिष्टभाषिता स्त्रियोंका प्रधान गुण है। जो स्त्री दूसरोंको मान-बड़ाई देती है सबके साथ विनय और प्रेमका बर्ताव करती है उसपर भगवान् बहुत शीघ्र प्रसन्न होते हैं और साथ-साथ उसके अहङ्कार तथा कठोरताका नाश होता है। यदि किसी स्त्रीके कारणसे घरमें कलह हो गया तो उसे ऐसा मानना चाहिये मानो मुझपर कलङ्क लग गया। इस बातका बराबर ध्यान रखना चाहिये कि अपने तो भलाई ही लेकर जाना है। और भलाई तभी मिल सकती है जब हमारा व्यवहार सबके अनुकूल होगा । स्त्रियाँ प्रायः भोली होती है, उनमें मोह और आसक्तिकी |
जकार्ता। आपने नन्ही सी गिलहरी को पेडो पर चढते-कूदते कई बार देखा होगा।
बोर्नियो वर्षा वन में मिली है।
एक सामाचार एजेंसी के अनुसार, एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा कि बोर्मियन पिग्मी गिलहरी या एक्सिलिससियुरस एक्सीलिस नामक इस गिलहरी को दक्षिण कालीमंतन प्रांत के मेरातस पर्वत में पाया गया।
पर्वत क्षेत्र में है। यह प्राजाति 16 सितम्बर को एक अभियान के दौरान मिली।
इस गिलहरी की लंबाई 73 मिलीमीटर और वजन 17 ग्राम है।
वैज्ञानिक ने कहा, इस प्रकार की प्रजाति बोर्नियो द्वीप पर, खासकर समुद्र तट से लगभग 1,000 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहती है।
| जकार्ता। आपने नन्ही सी गिलहरी को पेडो पर चढते-कूदते कई बार देखा होगा। बोर्नियो वर्षा वन में मिली है। एक सामाचार एजेंसी के अनुसार, एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा कि बोर्मियन पिग्मी गिलहरी या एक्सिलिससियुरस एक्सीलिस नामक इस गिलहरी को दक्षिण कालीमंतन प्रांत के मेरातस पर्वत में पाया गया। पर्वत क्षेत्र में है। यह प्राजाति सोलह सितम्बर को एक अभियान के दौरान मिली। इस गिलहरी की लंबाई तिहत्तर मिलीमीटर और वजन सत्रह ग्राम है। वैज्ञानिक ने कहा, इस प्रकार की प्रजाति बोर्नियो द्वीप पर, खासकर समुद्र तट से लगभग एक,शून्य मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहती है। |
आजमगढ़ को बड़ा तोहफा देने के बाद केन्द्र सरकार में गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बस्ती में सांसद खेल महाकुंभ का शुभारंभ किया। उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी हैं।
बस्ती केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ ने शहीद सत्य मानसिंह स्टेडियम में शनिवार को सांसद खेल महाकुंभ का उद्घाटन किया है। इनके साथ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के प्रभारी केन्द्रीय शिक्षा धर्मेन्द्र प्रधान भी हैं।
बस्ती केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ ने शहीद सत्य मानसिंह स्टेडियम में शनिवार को सांसद खेल कुंभ का उद्घाटन किया है। इनके साथ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के प्रभारी केन्द्रीय शिक्षा धर्मेन्द्र प्रधान भी हैं। इन खेलों का आयोजन बस्ती से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हरीश द्विवेदी करा रहे हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने इस अवसर पर कहा कि जिस प्रकार का भव्य आयोजन, युवाओं की सहभागिता और जितने खेलों का समायोजन यहां हरीश भाई ने किया है, मैं बहुत मन से उन्हें बधाई देता हूं। खेल महाकुंभ की बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने हम सभी सांसदों से की है परन्तु मैं आपके सामने स्वीकार करता हूं कि मैं ऐसा खेल महाकुंभ मेरे यहां नहीं कर पाया। इसके बाद अमित शाह की एपीएन पीजी कॉलेज बस्ती में जनसभा भी है।
| आजमगढ़ को बड़ा तोहफा देने के बाद केन्द्र सरकार में गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बस्ती में सांसद खेल महाकुंभ का शुभारंभ किया। उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी हैं। बस्ती केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ ने शहीद सत्य मानसिंह स्टेडियम में शनिवार को सांसद खेल महाकुंभ का उद्घाटन किया है। इनके साथ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के प्रभारी केन्द्रीय शिक्षा धर्मेन्द्र प्रधान भी हैं। बस्ती केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ ने शहीद सत्य मानसिंह स्टेडियम में शनिवार को सांसद खेल कुंभ का उद्घाटन किया है। इनके साथ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के प्रभारी केन्द्रीय शिक्षा धर्मेन्द्र प्रधान भी हैं। इन खेलों का आयोजन बस्ती से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हरीश द्विवेदी करा रहे हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने इस अवसर पर कहा कि जिस प्रकार का भव्य आयोजन, युवाओं की सहभागिता और जितने खेलों का समायोजन यहां हरीश भाई ने किया है, मैं बहुत मन से उन्हें बधाई देता हूं। खेल महाकुंभ की बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने हम सभी सांसदों से की है परन्तु मैं आपके सामने स्वीकार करता हूं कि मैं ऐसा खेल महाकुंभ मेरे यहां नहीं कर पाया। इसके बाद अमित शाह की एपीएन पीजी कॉलेज बस्ती में जनसभा भी है। |
मदुरै स्थित मीनाक्षी अम्मन मंदिर (फोटो क्रेडिट- Shutterstock)
IRCTC Tour Package: अगर आप दक्षिण भारत घूमने की योजना बना रहे हैं, तो फिर आपके लिए एक खुशखबरी है. दरअसल, इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन यानी आईआरसीटीसी भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन (Bharat Gaurav Tourist Train) से 'भारत गौरव- दक्षिण भारत यात्रा, एक्स बेतिया' का संचालन करने जा रहा है. इस पैकेज के जरिए आपको तिरुपति, रामेश्वरम, मदुरै, कन्याकुमारी और त्रिवेंद्रम घूमने का मौका मिलेगा. टूर पैकेज का खर्च 19,620 रुपये से शुरू हो रहा है.
आईआरसीटीसी ने ट्वीट कर इस पैकेज की जानकारी दी है. इस पैकेज की शुरुआत 22 जुलाई, 2023 को बेतिया से होगी. यह पैकेज 10 रात और 11 दिनों का होगा. खास बात यह है कि आपको केवल पेमेंट करनी है और उसके बाद यात्रा में खाने, पीने और ठहरने की चिंता आपको नहीं करनी है. यह यात्रा भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन के जरिए कराई जाएगी.
Discover the meaning of life on the Bharat Gaurav Dakshin Bharat Yatra, Ex Bettiah.
पैकेज का नाम- Bharat Gaurav- Dakshin Bharat Yatra, Ex Bettiah (EZBG03)
कितना लगेगा किराया?
टूर पैकेज के लिए टैरिफ अलग-अलग होगा. पैकेज की शुरुआत 19,620 रुपये प्रति व्यक्ति से होगी. अगर स्लीपर में सफर करते हैं तो आपको 19,620 रुपये चुकाने होंगे. अगर थर्ड एसी में सफर करते हैं तो 32,075 रुपये प्रति व्यक्ति चार्ज देना होगा.
इस टूर पैकेज के लिए बुकिंग यात्री आईआरसीटीसी की वेबसाइट irctctourism. com पर जाकर कर सकते हैं. इसके अलावा आईआरसीटीसी पर्यटक सुविधा केंद्र, अंचल कार्यालयों और रीजनल ऑफिस के जरिए भी बुकिंग की जा सकती है.
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PHOTOS: पहले प्यार से गुलाम संग जबरन शादी तक. . . पाक वाली सीमा की पूरी कुंडली, जिसने सचिन के लिए की सारी हदें पार!
| मदुरै स्थित मीनाक्षी अम्मन मंदिर IRCTC Tour Package: अगर आप दक्षिण भारत घूमने की योजना बना रहे हैं, तो फिर आपके लिए एक खुशखबरी है. दरअसल, इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन यानी आईआरसीटीसी भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन से 'भारत गौरव- दक्षिण भारत यात्रा, एक्स बेतिया' का संचालन करने जा रहा है. इस पैकेज के जरिए आपको तिरुपति, रामेश्वरम, मदुरै, कन्याकुमारी और त्रिवेंद्रम घूमने का मौका मिलेगा. टूर पैकेज का खर्च उन्नीस,छः सौ बीस रुपयापये से शुरू हो रहा है. आईआरसीटीसी ने ट्वीट कर इस पैकेज की जानकारी दी है. इस पैकेज की शुरुआत बाईस जुलाई, दो हज़ार तेईस को बेतिया से होगी. यह पैकेज दस रात और ग्यारह दिनों का होगा. खास बात यह है कि आपको केवल पेमेंट करनी है और उसके बाद यात्रा में खाने, पीने और ठहरने की चिंता आपको नहीं करनी है. यह यात्रा भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन के जरिए कराई जाएगी. Discover the meaning of life on the Bharat Gaurav Dakshin Bharat Yatra, Ex Bettiah. पैकेज का नाम- Bharat Gaurav- Dakshin Bharat Yatra, Ex Bettiah कितना लगेगा किराया? टूर पैकेज के लिए टैरिफ अलग-अलग होगा. पैकेज की शुरुआत उन्नीस,छः सौ बीस रुपयापये प्रति व्यक्ति से होगी. अगर स्लीपर में सफर करते हैं तो आपको उन्नीस,छः सौ बीस रुपयापये चुकाने होंगे. अगर थर्ड एसी में सफर करते हैं तो बत्तीस,पचहत्तर रुपयापये प्रति व्यक्ति चार्ज देना होगा. इस टूर पैकेज के लिए बुकिंग यात्री आईआरसीटीसी की वेबसाइट irctctourism. com पर जाकर कर सकते हैं. इसके अलावा आईआरसीटीसी पर्यटक सुविधा केंद्र, अंचल कार्यालयों और रीजनल ऑफिस के जरिए भी बुकिंग की जा सकती है. . PHOTOS: पहले प्यार से गुलाम संग जबरन शादी तक. . . पाक वाली सीमा की पूरी कुंडली, जिसने सचिन के लिए की सारी हदें पार! |
बीएचयू लॉ फैकल्टी के पास तिराहे पर शनिवार की दोपहर बाइक सवार दो छात्र तेज रफ्तार कार की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए. इससे आक्रोशित छात्रों ने कार में जमकर तोड़फोड़ करते हुए उसे आग के हवाले कर दिया. इस दौरान लंका पुलिस ने छात्रों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया लेकिन वो मानने को तैयार नहीं थे. रात में छात्र एक बार फिर आक्रोशित हुए और सिंहद्वार को बंद करके धरना-प्रदर्शन किया. छात्रों को रौैंदने वाली कार भाजपा नेता रणवीर सिंह की बताई जा रही है.
दोपहर में बीएफए अंतिम वर्ष टेक्सटाइल के छात्र राकेश कुमार व दिव्यांग अंजूलता सिंह नो ड्यूज कराने दुश्य कला संकाय की ओर से सेंट्रल आफिस जा रहे थे. लॉ फैकल्टी तिराहे पर जैसे ही बाइक सेंट्रल आफिस की तरफ मुड़ी, सामने आ रही तेज रफ्तार कार ने जोरदार टक्कर मार दी. बाइक कार के नीचे आकर दूर तक घसीटती गयी. दोनों छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना की जानकारी होते ही बड़ी संख्या में छात्र घटनास्थल पर जमा हो गए. कार में सवार भाजपा नेता के पुत्र व अन्य लोगों से नोकझोंक शुरू हो गयी. सूचना पर पहुंची पुलिस ने बीच-बचाव करने की कोशिश लेकिन छात्र उग्र हो गए और कार में तोड़फोड़ शुरू कर दिया. देखते ही देखते कार को आग के हवाले कर दिया. आग से कार के साथ बाइक भी खाक हो गई.
गाड़ी में आग लगते ही एक के बाद एक कई धमाके हुए. आग की लपटों के चपेट में आम, पीपल, अशोक आदि पेड़ भी आ गए. हालांकि आधे घंटे बाद पहुंचे फायर ब्रिगेड के कर्मियों ने आग पर काबू पाया.
आक्रोशित छात्रों का प्रदर्शन रात में भी जारी रहा. आरोपी भाजपा नेता पर कार्रवाई की मांग को लेकर छात्र मुखर रहे और सिंहद्वार बंद करके धरने पर बैठ गए. किसी तरह बीएचयू एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस उच्चाधिकारियों ने समझा बुझाकर धरना समाप्त कराया.
| बीएचयू लॉ फैकल्टी के पास तिराहे पर शनिवार की दोपहर बाइक सवार दो छात्र तेज रफ्तार कार की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए. इससे आक्रोशित छात्रों ने कार में जमकर तोड़फोड़ करते हुए उसे आग के हवाले कर दिया. इस दौरान लंका पुलिस ने छात्रों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया लेकिन वो मानने को तैयार नहीं थे. रात में छात्र एक बार फिर आक्रोशित हुए और सिंहद्वार को बंद करके धरना-प्रदर्शन किया. छात्रों को रौैंदने वाली कार भाजपा नेता रणवीर सिंह की बताई जा रही है. दोपहर में बीएफए अंतिम वर्ष टेक्सटाइल के छात्र राकेश कुमार व दिव्यांग अंजूलता सिंह नो ड्यूज कराने दुश्य कला संकाय की ओर से सेंट्रल आफिस जा रहे थे. लॉ फैकल्टी तिराहे पर जैसे ही बाइक सेंट्रल आफिस की तरफ मुड़ी, सामने आ रही तेज रफ्तार कार ने जोरदार टक्कर मार दी. बाइक कार के नीचे आकर दूर तक घसीटती गयी. दोनों छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना की जानकारी होते ही बड़ी संख्या में छात्र घटनास्थल पर जमा हो गए. कार में सवार भाजपा नेता के पुत्र व अन्य लोगों से नोकझोंक शुरू हो गयी. सूचना पर पहुंची पुलिस ने बीच-बचाव करने की कोशिश लेकिन छात्र उग्र हो गए और कार में तोड़फोड़ शुरू कर दिया. देखते ही देखते कार को आग के हवाले कर दिया. आग से कार के साथ बाइक भी खाक हो गई. गाड़ी में आग लगते ही एक के बाद एक कई धमाके हुए. आग की लपटों के चपेट में आम, पीपल, अशोक आदि पेड़ भी आ गए. हालांकि आधे घंटे बाद पहुंचे फायर ब्रिगेड के कर्मियों ने आग पर काबू पाया. आक्रोशित छात्रों का प्रदर्शन रात में भी जारी रहा. आरोपी भाजपा नेता पर कार्रवाई की मांग को लेकर छात्र मुखर रहे और सिंहद्वार बंद करके धरने पर बैठ गए. किसी तरह बीएचयू एडमिनिस्ट्रेशन और पुलिस उच्चाधिकारियों ने समझा बुझाकर धरना समाप्त कराया. |
आज समाज डिजिटल, अंबाला :
Arjun Kapoor Shared Pictures : अर्जुन कपूर ने हाल ही में विशाल भारद्वाज की कुट्टी की शूटिंग पूरी की। वह एक विलेन रिटर्न्स में अगले स्टार होंगे। इन दिनों एक्टर अर्जुन कपूर किसी फिल्म में अपना जादू चलाते हुए नजर नहीं आ रहे हैं। लेकिन वो अपने सोशल मीडिया एकाउंट्स पर पोस्ट की वजह से हेडलाइंस में बने रहते हैं। हाल ही में अर्जुन कपूर अपने दोस्त और फिल्ममेकर लव रंजन और अलीशा वैद की शादी की कुछ खास तस्वीरें फैंस के बीच शेयर की हैं। इन तस्वीरों में शादी के कुछ स्पेशल फंक्शन्स झलक नजर आ रही है।
सोमवार शाम को, अर्जुन कपूर ने भी समारोह से कुछ तस्वीरें शेयर करने के लिए अपने इंस्टाग्राम फीड पर लिया। उन्होंने हल्दी समारोह से तस्वीरें भी शेयर कीं, एक तस्वीर में, रणबीर को लव को गाल पर किस देते हुए नजर आ रहे है। उन्होंने रणबीर की एक तस्वीर भी शेयर की, जहां वे रुके हुए थे, ताजमहल को देख रहे थे। तस्वीर को रणबीर ने क्लिक किया था। अर्जुन ने खुलासा किया कि रणबीर ने पहली बार ताजमहल देखा था और यह आलिया के साथ नहीं बल्कि उनके साथ था। हालांकि अर्जुन ने तस्वीर में आलिया भट्ट को टैग किया।
तस्वीरों में साफ नजर आ रहा है कि एक्टर ने लव रंजन और अलीशा वैद की शादी के हर पल को कैसे खूब एंजॉय किया है। शेयर की गई तस्वीरों में लव रंजन और अलीशा वैद के साथ-साथ अर्जुन कपूर, रणबीर कपूर और वरुण शर्मा भी दिखाई दिए हैं।
| आज समाज डिजिटल, अंबाला : Arjun Kapoor Shared Pictures : अर्जुन कपूर ने हाल ही में विशाल भारद्वाज की कुट्टी की शूटिंग पूरी की। वह एक विलेन रिटर्न्स में अगले स्टार होंगे। इन दिनों एक्टर अर्जुन कपूर किसी फिल्म में अपना जादू चलाते हुए नजर नहीं आ रहे हैं। लेकिन वो अपने सोशल मीडिया एकाउंट्स पर पोस्ट की वजह से हेडलाइंस में बने रहते हैं। हाल ही में अर्जुन कपूर अपने दोस्त और फिल्ममेकर लव रंजन और अलीशा वैद की शादी की कुछ खास तस्वीरें फैंस के बीच शेयर की हैं। इन तस्वीरों में शादी के कुछ स्पेशल फंक्शन्स झलक नजर आ रही है। सोमवार शाम को, अर्जुन कपूर ने भी समारोह से कुछ तस्वीरें शेयर करने के लिए अपने इंस्टाग्राम फीड पर लिया। उन्होंने हल्दी समारोह से तस्वीरें भी शेयर कीं, एक तस्वीर में, रणबीर को लव को गाल पर किस देते हुए नजर आ रहे है। उन्होंने रणबीर की एक तस्वीर भी शेयर की, जहां वे रुके हुए थे, ताजमहल को देख रहे थे। तस्वीर को रणबीर ने क्लिक किया था। अर्जुन ने खुलासा किया कि रणबीर ने पहली बार ताजमहल देखा था और यह आलिया के साथ नहीं बल्कि उनके साथ था। हालांकि अर्जुन ने तस्वीर में आलिया भट्ट को टैग किया। तस्वीरों में साफ नजर आ रहा है कि एक्टर ने लव रंजन और अलीशा वैद की शादी के हर पल को कैसे खूब एंजॉय किया है। शेयर की गई तस्वीरों में लव रंजन और अलीशा वैद के साथ-साथ अर्जुन कपूर, रणबीर कपूर और वरुण शर्मा भी दिखाई दिए हैं। |
उत्तरप्रदेश के कानपुर में एक दलित युवक को नंगा कर लोहे की रॉड से पीटे जाने का मामला सामने आया हैं. जिले के झींझक में युवक के दोनों पैर तोड़ने के बाद उसको सड़क किनारे एक प्लॉट में फेंक दिया गया.
प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित युवक झींझक ब्लॉक के मुंडेरा किन्नर सिंह गांव की सरपंच नन्ही शंखवार का देवर हैं. पिछले साल हुए पंचायत चुनाव में मिली हार के बाद गांव की रमाकांती, नन्ही से रंजिश रख रही थी. इसी के चलते शिवनाथ को पीटा गया हैं.
गुरुवार की रात शिवनाथ जब बाजार से मजदूरी करके घर लौट रहा था, तभी झींझक कस्बे में पेट्रोल पंप के पहले रमाकांती, रेवती रमण, छोटे लल्ला, मनीष और ज्ञानेंद्र ने उसे पकड़ लिया. रमाकांती की मौजूदगी में ही शिवनाथ को लोहे की सरिया और डंडों से बुरी तरह पीटा गया और उसके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं छोड़ा.
पुलिस ने 24 घंटे बाद नामजद एफआईआर लिखी, लेकिन आरोपियों को अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है.
| उत्तरप्रदेश के कानपुर में एक दलित युवक को नंगा कर लोहे की रॉड से पीटे जाने का मामला सामने आया हैं. जिले के झींझक में युवक के दोनों पैर तोड़ने के बाद उसको सड़क किनारे एक प्लॉट में फेंक दिया गया. प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित युवक झींझक ब्लॉक के मुंडेरा किन्नर सिंह गांव की सरपंच नन्ही शंखवार का देवर हैं. पिछले साल हुए पंचायत चुनाव में मिली हार के बाद गांव की रमाकांती, नन्ही से रंजिश रख रही थी. इसी के चलते शिवनाथ को पीटा गया हैं. गुरुवार की रात शिवनाथ जब बाजार से मजदूरी करके घर लौट रहा था, तभी झींझक कस्बे में पेट्रोल पंप के पहले रमाकांती, रेवती रमण, छोटे लल्ला, मनीष और ज्ञानेंद्र ने उसे पकड़ लिया. रमाकांती की मौजूदगी में ही शिवनाथ को लोहे की सरिया और डंडों से बुरी तरह पीटा गया और उसके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं छोड़ा. पुलिस ने चौबीस घंटाटे बाद नामजद एफआईआर लिखी, लेकिन आरोपियों को अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है. |
चान्द्रवृत्ति लिपजिग-जर्मनी, १६१८ ई. के पृ. ५१ पर "श्रीमदाचार्य धर्मदासस्य कृतिरियम्" पाठ उपलब्ध होता है। नेपाल राजकीय वीर पुस्तकालयस्थ हस्तलिखित पुस्तकों के बृहत् सूची पत्र (व्याकरणविषयक, भाग ६ पृ.२१-२२) में पूर्वलिच्छवी तथा नेवारी लिपियों में आठ हस्तलेख चान्द्रवृत्ति के उल्लिखित हैं, जिनके रचयिता धर्मदास हैं। इस वृत्ति के प्रकाशित हो जाने पर यह ठीक से ज्ञात हो सकेगा कि जर्मनी तथा पूना से प्रकाशित चान्द्रवृत्ति चन्द्रगोमी की स्वोपज्ञवृत्ति है अथवा ऊपर के लेखानुसार धर्मदास की जर्नल ऑफ दि बिहार एण्ड उड़ीसा रिसर्च सोसायटी मार्च १६३७ Vol. २३ भाग १ में चान्द्रव्याकरणवृत्ति के दो ग्रन्थों का उल्लेख है, परन्तु सम्प्रति वे उक्त संस्था में प्राप्त नहीं होते। संभवतः ये ग्रन्थ राहुल सांस्कृत्यायन के अपने व्यक्तिगत पुस्तकालय में सुरक्षित हों ग्र.सं. २८५ चान्द्रव्याकरणवृत्ति रचयिता चन्द्रगोमी, लिपि मागधी ग्र.सं. २६४ चान्द्रव्याकरणवृत्ति, रचयिता चन्द्रगोमी, लिपि कुटिला ।
तिब्बतीसंस्थान, सारनाथ से प्रकाशित तम् ग्यु- सेर ग्यी-थङ्-मा ( लेखक-प्रो. गेदुन् छोस् फेल) नामक पुस्तक के अनुसार चान्द्रवृत्ति मूल संस्कृत में तिब्बत के किसी स-स्वच विहार में संगृहीत थी।
जर्मन पण्डित डॉ. ब्रूणों लिबिश ने कहा है कि चन्द्रगोमी रचित वृत्ति को उनके शिष्य धर्मदास द्वारा लिखा गया है। इस प्रकार चन्द्रगोमी के शिष्य होने के कारण धर्मदास को बौद्धमतावलम्बी कहना पड़ेगा। इनके मतों का उल्लेख प्रकाशित चान्द्रवृत्ति तथा गोपीचन्द्र की संक्षिप्तसार टीका में हुआ है।
चान्द्रपञ्जिकाकार पूर्णचन्द्र
इन्होंने चान्द्रधातुपाठ पर चान्द्रधातुपारायण नामक व्याख्या लिखी थी। इसके अनेक उद्धरण पूर्णचन्द्र तथा पारायण के नाम से प्राचीन ग्रन्थों में उपलब्ध होते हैं। जैसे "दैवम्" के व्याख्याता लीलाशुकमुनि तथा अमरकोश के टीकासर्वस्वकार ने वर्णन किया है"तथैव चन्द्रेण पूर्णचन्द्रेण ऋणु गतौ ( दैवम् - पुरूषकारः, पृ. २४) "ऋभुक्षो वज्रः इति धातुपारायणे पूर्णचन्द्रः" (अ.को.टी.सं. १.१.४४ )
धातुपारायण ग्रन्थ प्रकाशित नहीं है, अतः इसकी विविध विशेषताओं का पर्याप्त परिचय तो नहीं दिया जा सकता, तथापि गुरुपद हालदार के लेखानुसार यह तो अवश्य ही कहा जा सकता है कि पूर्णचन्द्र ने पाणिनीय सम्प्रदाय के भीमसेनपरिष्कृत धातुपाठ को आधार मानकर उक्त व्याख्या लिखी थी (द्र. व्या. द. इति, पृ. ४०७, ४०६, ४११) । न्यू कैटेलागस कैटे. (Vol. ६ पृ. २६५) के अनुसार पूर्णचन्द्र ने चान्द्रधातुसूत्रों की भी रचना की थी। यह भी कहा जाता है कि चान्द्रधातुपाठ के अनुसार दुर्गसिंह ने कातन्त्रीय धातुपाठ की रचना की थी। | चान्द्रवृत्ति लिपजिग-जर्मनी, एक हज़ार छः सौ अट्ठारह ई. के पृ. इक्यावन पर "श्रीमदाचार्य धर्मदासस्य कृतिरियम्" पाठ उपलब्ध होता है। नेपाल राजकीय वीर पुस्तकालयस्थ हस्तलिखित पुस्तकों के बृहत् सूची पत्र में पूर्वलिच्छवी तथा नेवारी लिपियों में आठ हस्तलेख चान्द्रवृत्ति के उल्लिखित हैं, जिनके रचयिता धर्मदास हैं। इस वृत्ति के प्रकाशित हो जाने पर यह ठीक से ज्ञात हो सकेगा कि जर्मनी तथा पूना से प्रकाशित चान्द्रवृत्ति चन्द्रगोमी की स्वोपज्ञवृत्ति है अथवा ऊपर के लेखानुसार धर्मदास की जर्नल ऑफ दि बिहार एण्ड उड़ीसा रिसर्च सोसायटी मार्च एक हज़ार छः सौ सैंतीस Vol. तेईस भाग एक में चान्द्रव्याकरणवृत्ति के दो ग्रन्थों का उल्लेख है, परन्तु सम्प्रति वे उक्त संस्था में प्राप्त नहीं होते। संभवतः ये ग्रन्थ राहुल सांस्कृत्यायन के अपने व्यक्तिगत पुस्तकालय में सुरक्षित हों ग्र.सं. दो सौ पचासी चान्द्रव्याकरणवृत्ति रचयिता चन्द्रगोमी, लिपि मागधी ग्र.सं. दो सौ चौंसठ चान्द्रव्याकरणवृत्ति, रचयिता चन्द्रगोमी, लिपि कुटिला । तिब्बतीसंस्थान, सारनाथ से प्रकाशित तम् ग्यु- सेर ग्यी-थङ्-मा नामक पुस्तक के अनुसार चान्द्रवृत्ति मूल संस्कृत में तिब्बत के किसी स-स्वच विहार में संगृहीत थी। जर्मन पण्डित डॉ. ब्रूणों लिबिश ने कहा है कि चन्द्रगोमी रचित वृत्ति को उनके शिष्य धर्मदास द्वारा लिखा गया है। इस प्रकार चन्द्रगोमी के शिष्य होने के कारण धर्मदास को बौद्धमतावलम्बी कहना पड़ेगा। इनके मतों का उल्लेख प्रकाशित चान्द्रवृत्ति तथा गोपीचन्द्र की संक्षिप्तसार टीका में हुआ है। चान्द्रपञ्जिकाकार पूर्णचन्द्र इन्होंने चान्द्रधातुपाठ पर चान्द्रधातुपारायण नामक व्याख्या लिखी थी। इसके अनेक उद्धरण पूर्णचन्द्र तथा पारायण के नाम से प्राचीन ग्रन्थों में उपलब्ध होते हैं। जैसे "दैवम्" के व्याख्याता लीलाशुकमुनि तथा अमरकोश के टीकासर्वस्वकार ने वर्णन किया है"तथैव चन्द्रेण पूर्णचन्द्रेण ऋणु गतौ "ऋभुक्षो वज्रः इति धातुपारायणे पूर्णचन्द्रः" धातुपारायण ग्रन्थ प्रकाशित नहीं है, अतः इसकी विविध विशेषताओं का पर्याप्त परिचय तो नहीं दिया जा सकता, तथापि गुरुपद हालदार के लेखानुसार यह तो अवश्य ही कहा जा सकता है कि पूर्णचन्द्र ने पाणिनीय सम्प्रदाय के भीमसेनपरिष्कृत धातुपाठ को आधार मानकर उक्त व्याख्या लिखी थी । न्यू कैटेलागस कैटे. के अनुसार पूर्णचन्द्र ने चान्द्रधातुसूत्रों की भी रचना की थी। यह भी कहा जाता है कि चान्द्रधातुपाठ के अनुसार दुर्गसिंह ने कातन्त्रीय धातुपाठ की रचना की थी। |
पर पुराने नोट बेचने वाले थे।
सरथाणा थाना प्रभारी ए. के. पटेल ने बताया कि सरथाणा जकात नाका भवानी सोसायटी निवासी राणा त्रांगु (37), प्रभाकर राजहंस स्वप्न निवासी सुरेश भुवा (41), निरंजन सोसायटी बापूनगर अहमदाबाद निवासी अजय पटेल (38), पाकीजा सोसायटी, आणंद निवासी आसिफ वोरा (26 ) और अंग टावर, अश्वनी कुमार रोड, वराछा निवासी वि_ल पटेल (47) रविवार को संदिग्ध हालत में सणिया-हेमद रोड पर शुभम फार्म हाउस के निकट एक कार (जीजे 06 एफसी 8617) में मौजूद थे।
कार की तलाशी ली गई तो डिक्की और सीटों पर रखे प्लास्टिक के थैलों से बंद हो चुके एक हजार रुपए के 21 हजार 511 तथा पांच सौ रुपए के 73 हजार 319 नोट बरामद हुए। उनके बारे में कोई संतोषनजक जवाब नहीं मिलने पर सीआरपीसी 106 के तहत नोट जब्त कर उन्हें हिरासत में ले लिया गया। पुलिस ने कार्रवाई रोजनामचे में दर्ज कर आयकर विभाग को सूचना दे दी है। बरामद नोट आयकर विभाग को सौंपने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
| पर पुराने नोट बेचने वाले थे। सरथाणा थाना प्रभारी ए. के. पटेल ने बताया कि सरथाणा जकात नाका भवानी सोसायटी निवासी राणा त्रांगु , प्रभाकर राजहंस स्वप्न निवासी सुरेश भुवा , निरंजन सोसायटी बापूनगर अहमदाबाद निवासी अजय पटेल , पाकीजा सोसायटी, आणंद निवासी आसिफ वोरा और अंग टावर, अश्वनी कुमार रोड, वराछा निवासी वि_ल पटेल रविवार को संदिग्ध हालत में सणिया-हेमद रोड पर शुभम फार्म हाउस के निकट एक कार में मौजूद थे। कार की तलाशी ली गई तो डिक्की और सीटों पर रखे प्लास्टिक के थैलों से बंद हो चुके एक हजार रुपए के इक्कीस हजार पाँच सौ ग्यारह तथा पांच सौ रुपए के तिहत्तर हजार तीन सौ उन्नीस नोट बरामद हुए। उनके बारे में कोई संतोषनजक जवाब नहीं मिलने पर सीआरपीसी एक सौ छः के तहत नोट जब्त कर उन्हें हिरासत में ले लिया गया। पुलिस ने कार्रवाई रोजनामचे में दर्ज कर आयकर विभाग को सूचना दे दी है। बरामद नोट आयकर विभाग को सौंपने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। |
भरतपुर. डाॅ। भीमराव अंबेडकर राजस्थान दलित, आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना-2022 के अनुसार जघीना गेट स्थित एक होटल में जिला स्तरीय जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई. इसका उद्देश्य राज्य के गैर कृषि क्षेत्रों यथा विनिर्माण, सेवा एवं व्यापार के विकास में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग का सहयोग बढ़ाने में उनकी कारगर किरदार सुनिश्चित करने एवं योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करना था. इस कार्यशाला का आयोजन जिला उद्योग एवं वाणिज्य विभाग द्वारा किया गया.
जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने कहाकि जिले में औद्योगिक विकास को गति देने में डाॅ। भीमराव अंबेडकर राजस्थान दलित, आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना-2022 की जरूरी किरदार है. साथ ही दलित एवं आदिवासी वर्गों के लोगों का राज्य एवं राष्ट्र के विकास में भागीदारी भी सुनिश्चित होगी. उन्होंने कहाकि किसी भी उद्योग की स्थापना के लिए भूमि, पूंजी, श्रमिक, प्रबंधन एवं उद्यमशीलता की जरूरत होती है. उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के पास मजदूर एवं उद्यमशीलता पर्याप्त मात्रा में मौजूद है. भूमि एवं पूंजी की पूर्ति हेतु अन्य वर्ग के लोगों के साथ भागीदारी फर्म बनाकर की जा सकती है.
उन्होंने बोला कि इस योजना के भीतर एकल उद्योग के साथ ही पार्टनरशिप, संस्थागत, सोसायटी एवं समूह आधारित भागीदारी के माध्यम से भूमि एवं पूंजीगत प्रबंध सुनिश्चित कर बड़े उद्योगों की स्थापना की जा सकती है. साथ ही इसके माध्यम से बैंकों पर भी निर्भरता को कम किया जा सकता है. उन्होंने बोला कि वर्तमान समय में सीमित राजकीय सेवाओं के कारण बेरोजगार युवाओं के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए क्षेत्र में उद्योग स्थापित कर रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी की जा सकती है.
उन्होंने बोला कि युवाओं में उद्यम स्थापना के लिए सकारात्मक सोच विकसित करने, आत्मविश्वास बढ़ाने एवं स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने की जरूरत है. उन्होंने सम्बंधित विभागों के ऑफिसरों को निर्देश दिए कि वे आपसी समन्वय से भावी उद्यमियों की समस्याओं के निवारण के साथ ही एनसीआर एवं टीटीजेड की प्रतिबंधतात्मक निर्देशों एवं क्षेत्रीय आवश्यकताओं के आधार पर उद्योग स्थापना के सम्बंध में जानकारी दें.
शिविर में जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र के महाप्रबंधक बीएल मीना ने बताया कि योजना में लक्षित वर्गों को उद्योग, सेवा एवं व्यापारिक गतिविधियों से संबंधित परियोजनाओं की स्थापना, विस्तार, विविधिकरण एवं आधुनिकीकरण हेतु कारगर मार्गदर्शन, प्रदर्शन, योगदान सहित विभिन्न प्रकार की सहायताएं एवं सुविधाएं मौजूद करवाये जाने के प्रावधान किए गए हैं.
योजना में केन्द्र एवं राज्य गवर्नमेंट द्वारा प्रतिबंधित गतिविधियों, कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों (पशुपालन, पक्षीपालन, उद्यानिकी आदि) के अतिरिक्त समस्त वैध विनिर्माण, सेवा एवं व्यापार क्षेत्र में नवीन उद्यम स्थापित करना, स्थापित उद्यम में विस्तार, विविधिकरण, आधुनिकीकरण करना सम्मिलित होगा एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के 18 साल से अधिक उम्र के आवेदक योजनान्तर्गत पात्र होंगे.
योजनान्तर्गत विनिर्माण उद्योग हेतु 10 करोड रूपये तक, सेवा उद्यम हेतु 5 करोड रूपये तक तथा व्यापार क्षेत्र हेतु 1 करोड रूपये राशि तक की परियोजना लागत हेतु वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से अधिकतम 85 से 90 प्रतिषत तक 3 से 7 साल के लिए कर्ज मौजूद करवाया जाएगा, जिसके लिये आवेदकों को सीजीटीएमएसई भीतर गारंटी फीस का भुगतान, परियोजना लागत की 25 प्रतिषत अथवा 25 लाख रूपये में से जो भी कम हो तक मार्जिन मनी आर्थिक सहायता तथा 5 साल तक 6 से 9 प्रतिषत तक ब्याज आर्थिक सहायता संबंधी वित्तीय सुविधाएं राज्य गवर्नमेंट द्वारा मौजूद करवाई जावेंगी.
शिविर में रीको के डीजीएम सी। एल। गांधीवाल, जिला काॅर्डिनेटर डिक्की गिरधारी लाल बैरवा, बीआरकेजीबी के मुख्य प्रबंधक धर्मेन्द्र परमार, पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य प्रबंधक मनीष बुलिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए गए. कार्यक्रम में विभिन्न विभाग एवं बैंक ऑफिसरों सहित सामाजिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारी मौजूद रहे.
| भरतपुर. डाॅ। भीमराव अंबेडकर राजस्थान दलित, आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना-दो हज़ार बाईस के अनुसार जघीना गेट स्थित एक होटल में जिला स्तरीय जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई. इसका उद्देश्य राज्य के गैर कृषि क्षेत्रों यथा विनिर्माण, सेवा एवं व्यापार के विकास में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग का सहयोग बढ़ाने में उनकी कारगर किरदार सुनिश्चित करने एवं योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करना था. इस कार्यशाला का आयोजन जिला उद्योग एवं वाणिज्य विभाग द्वारा किया गया. जिला कलेक्टर आलोक रंजन ने कहाकि जिले में औद्योगिक विकास को गति देने में डाॅ। भीमराव अंबेडकर राजस्थान दलित, आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना-दो हज़ार बाईस की जरूरी किरदार है. साथ ही दलित एवं आदिवासी वर्गों के लोगों का राज्य एवं राष्ट्र के विकास में भागीदारी भी सुनिश्चित होगी. उन्होंने कहाकि किसी भी उद्योग की स्थापना के लिए भूमि, पूंजी, श्रमिक, प्रबंधन एवं उद्यमशीलता की जरूरत होती है. उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के पास मजदूर एवं उद्यमशीलता पर्याप्त मात्रा में मौजूद है. भूमि एवं पूंजी की पूर्ति हेतु अन्य वर्ग के लोगों के साथ भागीदारी फर्म बनाकर की जा सकती है. उन्होंने बोला कि इस योजना के भीतर एकल उद्योग के साथ ही पार्टनरशिप, संस्थागत, सोसायटी एवं समूह आधारित भागीदारी के माध्यम से भूमि एवं पूंजीगत प्रबंध सुनिश्चित कर बड़े उद्योगों की स्थापना की जा सकती है. साथ ही इसके माध्यम से बैंकों पर भी निर्भरता को कम किया जा सकता है. उन्होंने बोला कि वर्तमान समय में सीमित राजकीय सेवाओं के कारण बेरोजगार युवाओं के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए क्षेत्र में उद्योग स्थापित कर रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी की जा सकती है. उन्होंने बोला कि युवाओं में उद्यम स्थापना के लिए सकारात्मक सोच विकसित करने, आत्मविश्वास बढ़ाने एवं स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने की जरूरत है. उन्होंने सम्बंधित विभागों के ऑफिसरों को निर्देश दिए कि वे आपसी समन्वय से भावी उद्यमियों की समस्याओं के निवारण के साथ ही एनसीआर एवं टीटीजेड की प्रतिबंधतात्मक निर्देशों एवं क्षेत्रीय आवश्यकताओं के आधार पर उद्योग स्थापना के सम्बंध में जानकारी दें. शिविर में जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र के महाप्रबंधक बीएल मीना ने बताया कि योजना में लक्षित वर्गों को उद्योग, सेवा एवं व्यापारिक गतिविधियों से संबंधित परियोजनाओं की स्थापना, विस्तार, विविधिकरण एवं आधुनिकीकरण हेतु कारगर मार्गदर्शन, प्रदर्शन, योगदान सहित विभिन्न प्रकार की सहायताएं एवं सुविधाएं मौजूद करवाये जाने के प्रावधान किए गए हैं. योजना में केन्द्र एवं राज्य गवर्नमेंट द्वारा प्रतिबंधित गतिविधियों, कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों के अतिरिक्त समस्त वैध विनिर्माण, सेवा एवं व्यापार क्षेत्र में नवीन उद्यम स्थापित करना, स्थापित उद्यम में विस्तार, विविधिकरण, आधुनिकीकरण करना सम्मिलित होगा एवं अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के अट्ठारह साल से अधिक उम्र के आवेदक योजनान्तर्गत पात्र होंगे. योजनान्तर्गत विनिर्माण उद्योग हेतु दस करोड रूपये तक, सेवा उद्यम हेतु पाँच करोड रूपये तक तथा व्यापार क्षेत्र हेतु एक करोड रूपये राशि तक की परियोजना लागत हेतु वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से अधिकतम पचासी से नब्बे प्रतिषत तक तीन से सात साल के लिए कर्ज मौजूद करवाया जाएगा, जिसके लिये आवेदकों को सीजीटीएमएसई भीतर गारंटी फीस का भुगतान, परियोजना लागत की पच्चीस प्रतिषत अथवा पच्चीस लाख रूपये में से जो भी कम हो तक मार्जिन मनी आर्थिक सहायता तथा पाँच साल तक छः से नौ प्रतिषत तक ब्याज आर्थिक सहायता संबंधी वित्तीय सुविधाएं राज्य गवर्नमेंट द्वारा मौजूद करवाई जावेंगी. शिविर में रीको के डीजीएम सी। एल। गांधीवाल, जिला काॅर्डिनेटर डिक्की गिरधारी लाल बैरवा, बीआरकेजीबी के मुख्य प्रबंधक धर्मेन्द्र परमार, पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य प्रबंधक मनीष बुलिया ने भी अपने विचार व्यक्त किए गए. कार्यक्रम में विभिन्न विभाग एवं बैंक ऑफिसरों सहित सामाजिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारी मौजूद रहे. |
हैदराबाद शहर के बाहरी इलाके में पेट्रोल से भरे दो टैंकरों में भयानक आग लग गई। इस घटना में 18 लोग घायल हो गये। घटना मेडीपल्ली-चेंगीचेरला रोड पर एक दुकान के सामने हुई। इस दुकान में गाड़ियों को रिपेयर करने का काम किया जाता था। आग इतना प्रचंड था कि दो टैंकर और आस-पास खड़ी कई गाड़ियां जलकर खाक हो गई। स्थानीय लोगों के मुताबिक जब टैंकर में भरा पेट्रोल जलने लगा तो आसमान में भयंकर लपटें उठने लगी, वीडियो में देखने से पता चलता है कि आग की लपटे 60 से 70 फीट ऊंची थी। आग को देखकर स्थानीय लोगों में कोहराम मच गया, लोग बदहवास इधर उधर भागने लगे। चश्मदीदों के मुताबिक पहले तो आग एक टैंकर में लगी, लेकिन इसके चपेट में तुरंत ही बगल में खड़ा एक दूसरा टैंकर भी आ गया। पुलिस आग के कारणों का पता लगा रही है, हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि आग तब लगी जब स्थानीय लोग पेट्रोल चुराने के लिए टैंकर का सील तोड़ रहे थे।
लोगों का दावा है कि यहां रोजाना 10 से ज्यादा टैंकर खड़े रहते हैं, लेकिन 12 जनवरी को मात्र 2 टैंकर ही यहां मौजूद थे, जिसकी वजह से नुकसान कम हुआ। स्थानीय लोगों ने बताया कि टैंकरों से तेल चुराने की घटना यहां पिछले कई दिनों से चल रही है। इनका कहना है कि पुलिस इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं करती है। वेबसाइट द मिनट को मल्काजगिरी के डीसीपी ने बताया कि ये टैंकर एक निजी पेट्रोलियम कंपनी का है और यहां पर एक रिफिलिंग प्लांट से ईंधन भरने के बाद खड़ा था। आग बुझाने में कई दमकल कर्मी झुलस गये हैं। स्थानीय अस्पताल में इनका इलाज चल रहा है।
| हैदराबाद शहर के बाहरी इलाके में पेट्रोल से भरे दो टैंकरों में भयानक आग लग गई। इस घटना में अट्ठारह लोग घायल हो गये। घटना मेडीपल्ली-चेंगीचेरला रोड पर एक दुकान के सामने हुई। इस दुकान में गाड़ियों को रिपेयर करने का काम किया जाता था। आग इतना प्रचंड था कि दो टैंकर और आस-पास खड़ी कई गाड़ियां जलकर खाक हो गई। स्थानीय लोगों के मुताबिक जब टैंकर में भरा पेट्रोल जलने लगा तो आसमान में भयंकर लपटें उठने लगी, वीडियो में देखने से पता चलता है कि आग की लपटे साठ से सत्तर फीट ऊंची थी। आग को देखकर स्थानीय लोगों में कोहराम मच गया, लोग बदहवास इधर उधर भागने लगे। चश्मदीदों के मुताबिक पहले तो आग एक टैंकर में लगी, लेकिन इसके चपेट में तुरंत ही बगल में खड़ा एक दूसरा टैंकर भी आ गया। पुलिस आग के कारणों का पता लगा रही है, हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि आग तब लगी जब स्थानीय लोग पेट्रोल चुराने के लिए टैंकर का सील तोड़ रहे थे। लोगों का दावा है कि यहां रोजाना दस से ज्यादा टैंकर खड़े रहते हैं, लेकिन बारह जनवरी को मात्र दो टैंकर ही यहां मौजूद थे, जिसकी वजह से नुकसान कम हुआ। स्थानीय लोगों ने बताया कि टैंकरों से तेल चुराने की घटना यहां पिछले कई दिनों से चल रही है। इनका कहना है कि पुलिस इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं करती है। वेबसाइट द मिनट को मल्काजगिरी के डीसीपी ने बताया कि ये टैंकर एक निजी पेट्रोलियम कंपनी का है और यहां पर एक रिफिलिंग प्लांट से ईंधन भरने के बाद खड़ा था। आग बुझाने में कई दमकल कर्मी झुलस गये हैं। स्थानीय अस्पताल में इनका इलाज चल रहा है। |
अब सलमान के बहनोई आयुष शर्मा ने सलमान के फर्स्ट लुक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इस फिल्म में सलमान एक सिख पुलिसवाले का किरदार निभा रहे हैं।
फिल्म में सलमान खान के जीजा आयुष शर्मा एक गैंगस्टर के निगेटिव रोल में होंगे और साथ में होंगे निकितन धीर। आयुष ने सलमान का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, 'अंतिम शुरू हो गई है। '
वीडियो में सलमान खान काली पगड़ी और खालसा लॉकेट पहने हुए सब्जी मंडी से गुजरते दिखाई दे रहे हैं। वैसे, खबरों की मानें तो इस फिल्म की शूटिंग 16 नवंबर को ही पुणे में शुरू हो गई थी।
हालांकि, तब केवल आयुष ही शूटिंग कर रहे थे। सलमान खान बाद में फिल्म की यूनिट के साथ 2-3 दिन पहले ही जुड़े हैं। यह फिल्म मराठी फिल्म 'मुल्शी पैटर्न' का हिंदी रीमेक है और इसका डायरेक्शन महेश मांजरेकर कर रहे हैं।
इससे पहले सलमान खान को आखिरी बार फिल्म 'भारत' में नजर आए थे। इसमें उनके अपोजिट दिशा पाटनी और कैटरीना कैफ नजर आई थीं।
| अब सलमान के बहनोई आयुष शर्मा ने सलमान के फर्स्ट लुक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इस फिल्म में सलमान एक सिख पुलिसवाले का किरदार निभा रहे हैं। फिल्म में सलमान खान के जीजा आयुष शर्मा एक गैंगस्टर के निगेटिव रोल में होंगे और साथ में होंगे निकितन धीर। आयुष ने सलमान का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, 'अंतिम शुरू हो गई है। ' वीडियो में सलमान खान काली पगड़ी और खालसा लॉकेट पहने हुए सब्जी मंडी से गुजरते दिखाई दे रहे हैं। वैसे, खबरों की मानें तो इस फिल्म की शूटिंग सोलह नवंबर को ही पुणे में शुरू हो गई थी। हालांकि, तब केवल आयुष ही शूटिंग कर रहे थे। सलमान खान बाद में फिल्म की यूनिट के साथ दो-तीन दिन पहले ही जुड़े हैं। यह फिल्म मराठी फिल्म 'मुल्शी पैटर्न' का हिंदी रीमेक है और इसका डायरेक्शन महेश मांजरेकर कर रहे हैं। इससे पहले सलमान खान को आखिरी बार फिल्म 'भारत' में नजर आए थे। इसमें उनके अपोजिट दिशा पाटनी और कैटरीना कैफ नजर आई थीं। |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन, हिन्दी भाषा एवं साहित्य तथा देवनागरी का प्रचार-प्रसार को समर्पित एक प्रमुख सार्वजनिक संस्था है। इसका मुख्यालय प्रयाग (इलाहाबाद) में है जिसमें छापाखाना, पुस्तकालय, संग्रहालय एवं प्रशासनिक भवन हैं। हिंदी साहित्य सम्मेलन ने ही सर्वप्रथम हिंदी लेखकों को प्रोत्साहित करने के लिए उनकी रचनाओं पर पुरस्कारों आदि की योजना चलाई। उसके मंगलाप्रसाद पारितोषिक की हिंदी जगत् में पर्याप्त प्रतिष्ठा है। सम्मेलन द्वारा महिला लेखकों के प्रोत्साहन का भी कार्य हुआ। इसके लिए उसने सेकसरिया महिला पारितोषिक चलाया। सम्मेलन के द्वारा हिंदी की अनेक उच्च कोटि की पाठ्य एवं साहित्यिक पुस्तकों, पारिभाषिक शब्दकोशों एवं संदर्भग्रंथों का भी प्रकाशन हुआ है जिनकी संख्या डेढ़-दो सौ के करीब है। सम्मेलन के हिंदी संग्रहालय में हिंदी की हस्तलिखित पांडुलिपियों का भी संग्रह है। इतिहास के विद्वान् मेजर वामनदास वसु की बहुमूल्य पुस्तकों का संग्रह भी सम्मेलन के संग्रहालय में है, जिसमें पाँच हजार के करीब दुर्लभ पुस्तकें संगृहीत हैं। . आगरा और अवध संयुक्त प्रांत 1903 उत्तर प्रदेश सरकार का राजचिन्ह उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा (जनसंख्या के आधार पर) राज्य है। लखनऊ प्रदेश की प्रशासनिक व विधायिक राजधानी है और इलाहाबाद न्यायिक राजधानी है। आगरा, अयोध्या, कानपुर, झाँसी, बरेली, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, मथुरा, मुरादाबाद तथा आज़मगढ़ प्रदेश के अन्य महत्त्वपूर्ण शहर हैं। राज्य के उत्तर में उत्तराखण्ड तथा हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली तथा राजस्थान, दक्षिण में मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ और पूर्व में बिहार तथा झारखंड राज्य स्थित हैं। इनके अतिरिक्त राज्य की की पूर्वोत्तर दिशा में नेपाल देश है। सन २००० में भारतीय संसद ने उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिमी (मुख्यतः पहाड़ी) भाग से उत्तरांचल (वर्तमान में उत्तराखंड) राज्य का निर्माण किया। उत्तर प्रदेश का अधिकतर हिस्सा सघन आबादी वाले गंगा और यमुना। विश्व में केवल पाँच राष्ट्र चीन, स्वयं भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनिशिया और ब्राज़ील की जनसंख्या उत्तर प्रदेश की जनसंख्या से अधिक है। उत्तर प्रदेश भारत के उत्तर में स्थित है। यह राज्य उत्तर में नेपाल व उत्तराखण्ड, दक्षिण में मध्य प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान तथा पूर्व में बिहार तथा दक्षिण-पूर्व में झारखण्ड व छत्तीसगढ़ से घिरा हुआ है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है। यह राज्य २,३८,५६६ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहाँ का मुख्य न्यायालय इलाहाबाद में है। कानपुर, झाँसी, बाँदा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन, महोबा, ललितपुर, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, इलाहाबाद, मेरठ, गोरखपुर, नोएडा, मथुरा, मुरादाबाद, गाजियाबाद, अलीगढ़, सुल्तानपुर, फैजाबाद, बरेली, आज़मगढ़, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर यहाँ के मुख्य शहर हैं। .
अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन और उत्तर प्रदेश आम में 15 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): झाँसी, दिल्ली, पुरुषोत्तम दास टंडन, बिहार, मदनमोहन मालवीय, मध्य प्रदेश, महात्मा गांधी, मेरठ, लखनऊ, हिन्दी, वृन्दावन, गोरखपुर, इलाहाबाद, कानपुर, कृषि।
झाँसी भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त में स्थित एक प्रमुख शहर है। यह शहर उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है और बुंदेलखंड क्षेत्र के अन्तर्गत आता है। झाँसी एक प्रमुख रेल एवं सड़क केन्द्र है और झाँसी जिले का प्रशासनिक केन्द्र भी है। झाँसी शहर पत्थर निर्मित किले के चारों तरफ़ फ़ैला हुआ है, यह किला शहर के मध्य स्थित बँगरा नामक पहाड़ी पर निर्मित है। उत्तर प्रदेश में 20.7 वर्ग कि मी.
दिल्ली (IPA), आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (अंग्रेज़ीः National Capital Territory of Delhi) भारत का एक केंद्र-शासित प्रदेश और महानगर है। इसमें नई दिल्ली सम्मिलित है जो भारत की राजधानी है। दिल्ली राजधानी होने के नाते केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों - कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका के मुख्यालय नई दिल्ली और दिल्ली में स्थापित हैं १४८३ वर्ग किलोमीटर में फैला दिल्ली जनसंख्या के तौर पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। यहाँ की जनसंख्या लगभग १ करोड़ ७० लाख है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैंः हिन्दी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी। भारत में दिल्ली का ऐतिहासिक महत्त्व है। इसके दक्षिण पश्चिम में अरावली पहाड़ियां और पूर्व में यमुना नदी है, जिसके किनारे यह बसा है। यह प्राचीन समय में गंगा के मैदान से होकर जाने वाले वाणिज्य पथों के रास्ते में पड़ने वाला मुख्य पड़ाव था। यमुना नदी के किनारे स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है। यह भारत का अति प्राचीन नगर है। इसके इतिहास का प्रारम्भ सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़ा हुआ है। हरियाणा के आसपास के क्षेत्रों में हुई खुदाई से इस बात के प्रमाण मिले हैं। महाभारत काल में इसका नाम इन्द्रप्रस्थ था। दिल्ली सल्तनत के उत्थान के साथ ही दिल्ली एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक शहर के रूप में उभरी। यहाँ कई प्राचीन एवं मध्यकालीन इमारतों तथा उनके अवशेषों को देखा जा सकता हैं। १६३९ में मुगल बादशाह शाहजहाँ ने दिल्ली में ही एक चारदीवारी से घिरे शहर का निर्माण करवाया जो १६७९ से १८५७ तक मुगल साम्राज्य की राजधानी रही। १८वीं एवं १९वीं शताब्दी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने लगभग पूरे भारत को अपने कब्जे में ले लिया। इन लोगों ने कोलकाता को अपनी राजधानी बनाया। १९११ में अंग्रेजी सरकार ने फैसला किया कि राजधानी को वापस दिल्ली लाया जाए। इसके लिए पुरानी दिल्ली के दक्षिण में एक नए नगर नई दिल्ली का निर्माण प्रारम्भ हुआ। अंग्रेजों से १९४७ में स्वतंत्रता प्राप्त कर नई दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित किया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों से लोगों का प्रवासन हुआ, इससे दिल्ली के स्वरूप में आमूल परिवर्तन हुआ। विभिन्न प्रान्तो, धर्मों एवं जातियों के लोगों के दिल्ली में बसने के कारण दिल्ली का शहरीकरण तो हुआ ही साथ ही यहाँ एक मिश्रित संस्कृति ने भी जन्म लिया। आज दिल्ली भारत का एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक केन्द्र है। .
पुरूषोत्तम दास टंडन (१ अगस्त १८८२ - १ जुलाई, १९६२) भारत के स्वतन्त्रता सेनानी थे। हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा के पद पर प्रतिष्ठित करवाने में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था। वे भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के अग्रणी पंक्ति के नेता तो थे ही, समर्पित राजनयिक, हिन्दी के अनन्य सेवक, कर्मठ पत्रकार, तेजस्वी वक्ता और समाज सुधारक भी थे। हिन्दी को भारत की राजभाषा का स्थान दिलवाने के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान किया। १९५० में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने। उन्हें भारत के राजनैतिक और सामाजिक जीवन में नयी चेतना, नयी लहर, नयी क्रान्ति पैदा करने वाला कर्मयोगी कहा गया। वे जन सामान्य में राजर्षि (संधि विच्छेदः राजा+ऋषि.
बिहार भारत का एक राज्य है। बिहार की राजधानी पटना है। बिहार के उत्तर में नेपाल, पूर्व में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश और दक्षिण में झारखण्ड स्थित है। बिहार नाम का प्रादुर्भाव बौद्ध सन्यासियों के ठहरने के स्थान विहार शब्द से हुआ, जिसे विहार के स्थान पर इसके अपभ्रंश रूप बिहार से संबोधित किया जाता है। यह क्षेत्र गंगा नदी तथा उसकी सहायक नदियों के उपजाऊ मैदानों में बसा है। प्राचीन काल के विशाल साम्राज्यों का गढ़ रहा यह प्रदेश, वर्तमान में देश की अर्थव्यवस्था के सबसे पिछड़े योगदाताओं में से एक बनकर रह गया है। .
महामना मदन मोहन मालवीय (25 दिसम्बर 1861 - 1946) काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रणेता तो थे ही इस युग के आदर्श पुरुष भी थे। वे भारत के पहले और अन्तिम व्यक्ति थे जिन्हें महामना की सम्मानजनक उपाधि से विभूषित किया गया। पत्रकारिता, वकालत, समाज सुधार, मातृ भाषा तथा भारतमाता की सेवा में अपना जीवन अर्पण करने वाले इस महामानव ने जिस विश्वविद्यालय की स्थापना की उसमें उनकी परिकल्पना ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षित करके देश सेवा के लिये तैयार करने की थी जो देश का मस्तक गौरव से ऊँचा कर सकें। मालवीयजी सत्य, ब्रह्मचर्य, व्यायाम, देशभक्ति तथा आत्मत्याग में अद्वितीय थे। इन समस्त आचरणों पर वे केवल उपदेश ही नहीं दिया करते थे अपितु स्वयं उनका पालन भी किया करते थे। वे अपने व्यवहार में सदैव मृदुभाषी रहे। कर्म ही उनका जीवन था। अनेक संस्थाओं के जनक एवं सफल संचालक के रूप में उनकी अपनी विधि व्यवस्था का सुचारु सम्पादन करते हुए उन्होंने कभी भी रोष अथवा कड़ी भाषा का प्रयोग नहीं किया। भारत सरकार ने २४ दिसम्बर २०१४ को उन्हें भारत रत्न से अलंकृत किया। .
मध्य प्रदेश भारत का एक राज्य है, इसकी राजधानी भोपाल है। मध्य प्रदेश १ नवंबर, २००० तक क्षेत्रफल के आधार पर भारत का सबसे बड़ा राज्य था। इस दिन एवं मध्यप्रदेश के कई नगर उस से हटा कर छत्तीसगढ़ की स्थापना हुई थी। मध्य प्रदेश की सीमाऐं पांच राज्यों की सीमाओं से मिलती है। इसके उत्तर में उत्तर प्रदेश, पूर्व में छत्तीसगढ़, दक्षिण में महाराष्ट्र, पश्चिम में गुजरात, तथा उत्तर-पश्चिम में राजस्थान है। हाल के वर्षों में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर राष्ट्रीय औसत से ऊपर हो गया है। खनिज संसाधनों से समृद्ध, मध्य प्रदेश हीरे और तांबे का सबसे बड़ा भंडार है। अपने क्षेत्र की 30% से अधिक वन क्षेत्र के अधीन है। इसके पर्यटन उद्योग में काफी वृद्धि हुई है। राज्य में वर्ष 2010-11 राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार जीत लिया। .
मोहनदास करमचन्द गांधी (२ अक्टूबर १८६९ - ३० जनवरी १९४८) भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह (व्यापक सविनय अवज्ञा) के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की नींव सम्पूर्ण अहिंसा के सिद्धान्त पर रखी गयी थी जिसने भारत को आजादी दिलाकर पूरी दुनिया में जनता के नागरिक अधिकारों एवं स्वतन्त्रता के प्रति आन्दोलन के लिये प्रेरित किया। उन्हें दुनिया में आम जनता महात्मा गांधी के नाम से जानती है। संस्कृत भाषा में महात्मा अथवा महान आत्मा एक सम्मान सूचक शब्द है। गांधी को महात्मा के नाम से सबसे पहले १९१५ में राजवैद्य जीवराम कालिदास ने संबोधित किया था।। उन्हें बापू (गुजराती भाषा में બાપુ बापू यानी पिता) के नाम से भी याद किया जाता है। सुभाष चन्द्र बोस ने ६ जुलाई १९४४ को रंगून रेडियो से गांधी जी के नाम जारी प्रसारण में उन्हें राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित करते हुए आज़ाद हिन्द फौज़ के सैनिकों के लिये उनका आशीर्वाद और शुभकामनाएँ माँगीं थीं। प्रति वर्ष २ अक्टूबर को उनका जन्म दिन भारत में गांधी जयंती के रूप में और पूरे विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के नाम से मनाया जाता है। सबसे पहले गान्धी ने प्रवासी वकील के रूप में दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के लोगों के नागरिक अधिकारों के लिये संघर्ष हेतु सत्याग्रह करना शुरू किया। १९१५ में उनकी भारत वापसी हुई। उसके बाद उन्होंने यहाँ के किसानों, मजदूरों और शहरी श्रमिकों को अत्यधिक भूमि कर और भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाने के लिये एकजुट किया। १९२१ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बागडोर संभालने के बाद उन्होंने देशभर में गरीबी से राहत दिलाने, महिलाओं के अधिकारों का विस्तार, धार्मिक एवं जातीय एकता का निर्माण व आत्मनिर्भरता के लिये अस्पृश्यता के विरोध में अनेकों कार्यक्रम चलाये। इन सबमें विदेशी राज से मुक्ति दिलाने वाला स्वराज की प्राप्ति वाला कार्यक्रम ही प्रमुख था। गाँधी जी ने ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीयों पर लगाये गये नमक कर के विरोध में १९३० में नमक सत्याग्रह और इसके बाद १९४२ में अंग्रेजो भारत छोड़ो आन्दोलन से खासी प्रसिद्धि प्राप्त की। दक्षिण अफ्रीका और भारत में विभिन्न अवसरों पर कई वर्षों तक उन्हें जेल में भी रहना पड़ा। गांधी जी ने सभी परिस्थितियों में अहिंसा और सत्य का पालन किया और सभी को इनका पालन करने के लिये वकालत भी की। उन्होंने साबरमती आश्रम में अपना जीवन गुजारा और परम्परागत भारतीय पोशाक धोती व सूत से बनी शाल पहनी जिसे वे स्वयं चरखे पर सूत कातकर हाथ से बनाते थे। उन्होंने सादा शाकाहारी भोजन खाया और आत्मशुद्धि के लिये लम्बे-लम्बे उपवास रखे। .
मेरठ भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक शहर है। यहाँ नगर निगम कार्यरत है। यह प्राचीन नगर दिल्ली से ७२ कि॰मी॰ (४४ मील) उत्तर पूर्व में स्थित है। मेरठ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (ऍन.सी.आर) का हिस्सा है। यहाँ भारतीय सेना की एक छावनी भी है। यह उत्तर प्रदेश के सबसे तेजी से विकसित और शिक्षित होते जिलों में से एक है। मेरठ जिले में 12 ब्लॉक,34 जिला पंचायत सदस्य,80 नगर निगम पार्षद है। मेरठ जिले में 4 लोक सभा क्षेत्र सम्मिलित हैं, सरधना विधानसभा, मुजफ्फरनगर लोकसभा में हस्तिनापुर विधानसभा, बिजनौर लोकसभा में,सिवाल खास बागपत लोकसभा क्षेत्र में और मेरठ कैंट,मेरठ दक्षिण,मेरठ शहर,किठौर मेरठ लोकसभा क्षेत्र में है .
लखनऊ (भारत के सर्वाधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी है। इस शहर में लखनऊ जिले और लखनऊ मंडल के प्रशासनिक मुख्यालय भी स्थित हैं। लखनऊ शहर अपनी खास नज़ाकत और तहजीब वाली बहुसांस्कृतिक खूबी, दशहरी आम के बाग़ों तथा चिकन की कढ़ाई के काम के लिये जाना जाता है। २००६ मे इसकी जनसंख्या २,५४१,१०१ तथा साक्षरता दर ६८.६३% थी। भारत सरकार की २००१ की जनगणना, सामाजिक आर्थिक सूचकांक और बुनियादी सुविधा सूचकांक संबंधी आंकड़ों के अनुसार, लखनऊ जिला अल्पसंख्यकों की घनी आबादी वाला जिला है। कानपुर के बाद यह शहर उत्तर-प्रदेश का सबसे बड़ा शहरी क्षेत्र है। शहर के बीच से गोमती नदी बहती है, जो लखनऊ की संस्कृति का हिस्सा है। लखनऊ उस क्ष्रेत्र मे स्थित है जिसे ऐतिहासिक रूप से अवध क्षेत्र के नाम से जाना जाता था। लखनऊ हमेशा से एक बहुसांस्कृतिक शहर रहा है। यहाँ के शिया नवाबों द्वारा शिष्टाचार, खूबसूरत उद्यानों, कविता, संगीत और बढ़िया व्यंजनों को हमेशा संरक्षण दिया गया। लखनऊ को नवाबों के शहर के रूप में भी जाना जाता है। इसे पूर्व की स्वर्ण नगर (गोल्डन सिटी) और शिराज-ए-हिंद के रूप में जाना जाता है। आज का लखनऊ एक जीवंत शहर है जिसमे एक आर्थिक विकास दिखता है और यह भारत के तेजी से बढ़ रहे गैर-महानगरों के शीर्ष पंद्रह में से एक है। यह हिंदी और उर्दू साहित्य के केंद्रों में से एक है। यहां अधिकांश लोग हिन्दी बोलते हैं। यहां की हिन्दी में लखनवी अंदाज़ है, जो विश्वप्रसिद्ध है। इसके अलावा यहाँ उर्दू और अंग्रेज़ी भी बोली जाती हैं। .
हिन्दी या भारतीय विश्व की एक प्रमुख भाषा है एवं भारत की राजभाषा है। केंद्रीय स्तर पर दूसरी आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है। यह हिन्दुस्तानी भाषा की एक मानकीकृत रूप है जिसमें संस्कृत के तत्सम तथा तद्भव शब्द का प्रयोग अधिक हैं और अरबी-फ़ारसी शब्द कम हैं। हिन्दी संवैधानिक रूप से भारत की प्रथम राजभाषा और भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। हालांकि, हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है क्योंकि भारत का संविधान में कोई भी भाषा को ऐसा दर्जा नहीं दिया गया था। चीनी के बाद यह विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा भी है। विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार यह विश्व की दस शक्तिशाली भाषाओं में से एक है। हिन्दी और इसकी बोलियाँ सम्पूर्ण भारत के विविध राज्यों में बोली जाती हैं। भारत और अन्य देशों में भी लोग हिन्दी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं। फ़िजी, मॉरिशस, गयाना, सूरीनाम की और नेपाल की जनता भी हिन्दी बोलती है।http://www.ethnologue.com/language/hin 2001 की भारतीय जनगणना में भारत में ४२ करोड़ २० लाख लोगों ने हिन्दी को अपनी मूल भाषा बताया। भारत के बाहर, हिन्दी बोलने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका में 648,983; मॉरीशस में ६,८५,१७०; दक्षिण अफ्रीका में ८,९०,२९२; यमन में २,३२,७६०; युगांडा में १,४७,०००; सिंगापुर में ५,०००; नेपाल में ८ लाख; जर्मनी में ३०,००० हैं। न्यूजीलैंड में हिन्दी चौथी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसके अलावा भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों में १४ करोड़ १० लाख लोगों द्वारा बोली जाने वाली उर्दू, मौखिक रूप से हिन्दी के काफी सामान है। लोगों का एक विशाल बहुमत हिन्दी और उर्दू दोनों को ही समझता है। भारत में हिन्दी, विभिन्न भारतीय राज्यों की १४ आधिकारिक भाषाओं और क्षेत्र की बोलियों का उपयोग करने वाले लगभग १ अरब लोगों में से अधिकांश की दूसरी भाषा है। हिंदी हिंदी बेल्ट का लिंगुआ फ़्रैंका है, और कुछ हद तक पूरे भारत (आमतौर पर एक सरल या पिज्जाइज्ड किस्म जैसे बाजार हिंदुस्तान या हाफ्लोंग हिंदी में)। भाषा विकास क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी हिन्दी प्रेमियों के लिए बड़ी सन्तोषजनक है कि आने वाले समय में विश्वस्तर पर अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व की जो चन्द भाषाएँ होंगी उनमें हिन्दी भी प्रमुख होगी। 'देशी', 'भाखा' (भाषा), 'देशना वचन' (विद्यापति), 'हिन्दवी', 'दक्खिनी', 'रेखता', 'आर्यभाषा' (स्वामी दयानन्द सरस्वती), 'हिन्दुस्तानी', 'खड़ी बोली', 'भारती' आदि हिन्दी के अन्य नाम हैं जो विभिन्न ऐतिहासिक कालखण्डों में एवं विभिन्न सन्दर्भों में प्रयुक्त हुए हैं। .
कृष्ण बलराम मन्दिर इस्कॉन वृन्दावन वृन्दावन मथुरा क्षेत्र में एक स्थान है जो भगवान कृष्ण की लीला से जुडा हुआ है। यह स्थान श्री कृष्ण भगवान के बाललीलाओं का स्थान माना जाता है। यह मथुरा से १५ किमी कि दूरी पर है। यहाँ पर श्री कृष्ण और राधा रानी के मन्दिर की विशाल संख्या है। यहाँ स्थित बांके विहारी जी का मंदिर सबसे प्राचीन है। इसके अतिरिक्त यहाँ श्री कृष्ण बलराम, इस्कान मन्दिर, पागलबाबा का मंदिर, रंगनाथ जी का मंदिर, प्रेम मंदिर, श्री कृष्ण प्रणामी मन्दिर, अक्षय पात्र, निधि वन आदिदर्शनीय स्थान है। यह कृष्ण की लीलास्थली है। हरिवंश पुराण, श्रीमद्भागवत, विष्णु पुराण आदि में वृन्दावन की महिमा का वर्णन किया गया है। कालिदास ने इसका उल्लेख रघुवंश में इंदुमती-स्वयंवर के प्रसंग में शूरसेनाधिपति सुषेण का परिचय देते हुए किया है इससे कालिदास के समय में वृन्दावन के मनोहारी उद्यानों की स्थिति का ज्ञान होता है। श्रीमद्भागवत के अनुसार गोकुल से कंस के अत्याचार से बचने के लिए नंदजी कुटुंबियों और सजातीयों के साथ वृन्दावन निवास के लिए आये थे। विष्णु पुराण में इसी प्रसंग का उल्लेख है। विष्णुपुराण में अन्यत्र वृन्दावन में कृष्ण की लीलाओं का वर्णन भी है। .
300px गोरखपुर उत्तर प्रदेश राज्य के पूर्वी भाग में नेपाल के साथ सीमा के पास स्थित भारत का एक प्रसिद्ध शहर है। यह गोरखपुर जिले का प्रशासनिक मुख्यालय भी है। यह एक धार्मिक केन्द्र के रूप में मशहूर है जो बौद्ध, हिन्दू, मुस्लिम, जैन और सिख सन्तों की साधनास्थली रहा। किन्तु मध्ययुगीन सर्वमान्य सन्त गोरखनाथ के बाद उनके ही नाम पर इसका वर्तमान नाम गोरखपुर रखा गया। यहाँ का प्रसिद्ध गोरखनाथ मन्दिर अभी भी नाथ सम्प्रदाय की पीठ है। यह महान सन्त परमहंस योगानन्द का जन्म स्थान भी है। इस शहर में और भी कई ऐतिहासिक स्थल हैं जैसे, बौद्धों के घर, इमामबाड़ा, 18वीं सदी की दरगाह और हिन्दू धार्मिक ग्रन्थों का प्रमुख प्रकाशन संस्थान गीता प्रेस। 20वीं सदी में, गोरखपुर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक केन्द्र बिन्दु था और आज यह शहर एक प्रमुख व्यापार केन्द्र बन चुका है। पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय, जो ब्रिटिश काल में 'बंगाल नागपुर रेलवे' के रूप में जाना जाता था, यहीं स्थित है। अब इसे एक औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिये गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा/GIDA) की स्थापना पुराने शहर से 15 किमी दूर की गयी है। .
इलाहाबाद उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित एक नगर एवं इलाहाबाद जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। इसका प्राचीन नाम प्रयाग है। इसे 'तीर्थराज' (तीर्थों का राजा) भी कहते हैं। इलाहाबाद भारत का दूसरा प्राचीनतम बसा नगर है। हिन्दू मान्यता अनुसार, यहां सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने के बाद प्रथम यज्ञ किया था। इसी प्रथम यज्ञ के प्र और याग अर्थात यज्ञ से मिलकर प्रयाग बना और उस स्थान का नाम प्रयाग पड़ा जहाँ भगवान श्री ब्रम्हा जी ने सृष्टि का सबसे पहला यज्ञ सम्पन्न किया था। इस पावन नगरी के अधिष्ठाता भगवान श्री विष्णु स्वयं हैं और वे यहाँ माधव रूप में विराजमान हैं। भगवान के यहाँ बारह स्वरूप विध्यमान हैं। जिन्हें द्वादश माधव कहा जाता है। सबसे बड़े हिन्दू सम्मेलन महाकुंभ की चार स्थलियों में से एक है, शेष तीन हरिद्वार, उज्जैन एवं नासिक हैं। हिन्दू धर्मग्रन्थों में वर्णित प्रयाग स्थल पवित्रतम नदी गंगा और यमुना के संगम पर स्थित है। यहीं सरस्वती नदी गुप्त रूप से संगम में मिलती है, अतः ये त्रिवेणी संगम कहलाता है, जहां प्रत्येक बारह वर्ष में कुंभ मेला लगता है। इलाहाबाद में कई महत्त्वपूर्ण राज्य सरकार के कार्यालय स्थित हैं, जैसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रधान महालेखाधिकारी (एजी ऑफ़िस), उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग (पी.एस.सी), राज्य पुलिस मुख्यालय, उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय एवं उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद कार्यालय। भारत सरकार द्वारा इलाहाबाद को जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण योजना के लिये मिशन शहर के रूप में चुना गया है। .
कानपुर भारतवर्ष के उत्तरी राज्य उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक नगर है। यह नगर गंगा नदी के दक्षिण तट पर बसा हुआ है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ से ८० किलोमीटर पश्चिम स्थित यहाँ नगर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी के नाम से भी जाना जाता है। ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं के लिए चर्चित ब्रह्मावर्त (बिठूर) के उत्तर मध्य में स्थित ध्रुवटीला त्याग और तपस्या का संदेश दे रहा है। यहाँ की आबादी लगभग २७ लाख है। .
कॉफी की खेती कृषि खेती और वानिकी के माध्यम से खाद्य और अन्य सामान के उत्पादन से संबंधित है। कृषि एक मुख्य विकास था, जो सभ्यताओं के उदय का कारण बना, इसमें पालतू जानवरों का पालन किया गया और पौधों (फसलों) को उगाया गया, जिससे अतिरिक्त खाद्य का उत्पादन हुआ। इसने अधिक घनी आबादी और स्तरीकृत समाज के विकास को सक्षम बनाया। कृषि का अध्ययन कृषि विज्ञान के रूप में जाना जाता है तथा इसी से संबंधित विषय बागवानी का अध्ययन बागवानी (हॉर्टिकल्चर) में किया जाता है। तकनीकों और विशेषताओं की बहुत सी किस्में कृषि के अन्तर्गत आती है, इसमें वे तरीके शामिल हैं जिनसे पौधे उगाने के लिए उपयुक्त भूमि का विस्तार किया जाता है, इसके लिए पानी के चैनल खोदे जाते हैं और सिंचाई के अन्य रूपों का उपयोग किया जाता है। कृषि योग्य भूमि पर फसलों को उगाना और चारागाहों और रेंजलैंड पर पशुधन को गड़रियों के द्वारा चराया जाना, मुख्यतः कृषि से सम्बंधित रहा है। कृषि के भिन्न रूपों की पहचान करना व उनकी मात्रात्मक वृद्धि, पिछली शताब्दी में विचार के मुख्य मुद्दे बन गए। विकसित दुनिया में यह क्षेत्र जैविक खेती (उदाहरण पर्माकल्चर या कार्बनिक कृषि) से लेकर गहन कृषि (उदाहरण औद्योगिक कृषि) तक फैली है। आधुनिक एग्रोनोमी, पौधों में संकरण, कीटनाशकों और उर्वरकों और तकनीकी सुधारों ने फसलों से होने वाले उत्पादन को तेजी से बढ़ाया है और साथ ही यह व्यापक रूप से पारिस्थितिक क्षति का कारण भी बना है और इसने मनुष्य के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। चयनात्मक प्रजनन और पशुपालन की आधुनिक प्रथाओं जैसे गहन सूअर खेती (और इसी प्रकार के अभ्यासों को मुर्गी पर भी लागू किया जाता है) ने मांस के उत्पादन में वृद्धि की है, लेकिन इससे पशु क्रूरता, प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक) दवाओं के स्वास्थ्य प्रभाव, वृद्धि हॉर्मोन और मांस के औद्योगिक उत्पादन में सामान्य रूप से काम में लिए जाने वाले रसायनों के बारे में मुद्दे सामने आये हैं। प्रमुख कृषि उत्पादों को मोटे तौर पर भोजन, रेशा, ईंधन, कच्चा माल, फार्मास्यूटिकल्स और उद्दीपकों में समूहित किया जा सकता है। साथ ही सजावटी या विदेशी उत्पादों की भी एक श्रेणी है। वर्ष 2000 से पौधों का उपयोग जैविक ईंधन, जैवफार्मास्यूटिकल्स, जैवप्लास्टिक, और फार्मास्यूटिकल्स के उत्पादन में किया जा रहा है। विशेष खाद्यों में शामिल हैं अनाज, सब्जियां, फल और मांस। रेशे में कपास, ऊन, सन, रेशम और सन (फ्लैक्स) शामिल हैं। कच्चे माल में लकड़ी और बाँस शामिल हैं। उद्दीपकों में तम्बाकू, शराब, अफ़ीम, कोकीन और डिजिटेलिस शामिल हैं। पौधों से अन्य उपयोगी पदार्थ भी उत्पन्न होते हैं, जैसे रेजिन। जैव ईंधनों में शामिल हैं मिथेन, जैवभार (बायोमास), इथेनॉल और बायोडीजल। कटे हुए फूल, नर्सरी के पौधे, उष्णकटिबंधीय मछलियाँ और व्यापार के लिए पालतू पक्षी, कुछ सजावटी उत्पाद हैं। 2007 में, दुनिया के लगभग एक तिहाई श्रमिक कृषि क्षेत्र में कार्यरत थे। हालांकि, औद्योगिकीकरण की शुरुआत के बाद से कृषि से सम्बंधित महत्त्व कम हो गया है और 2003 में-इतिहास में पहली बार-सेवा क्षेत्र ने एक आर्थिक क्षेत्र के रूप में कृषि को पछाड़ दिया क्योंकि इसने दुनिया भर में अधिकतम लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया। इस तथ्य के बावजूद कि कृषि दुनिया के आबादी के एक तिहाई से अधिक लोगों की रोजगार उपलब्ध कराती है, कृषि उत्पादन, सकल विश्व उत्पाद (सकल घरेलू उत्पाद का एक समुच्चय) का पांच प्रतिशत से भी कम हिस्सा बनता है। .
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| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। अखिल भारतीय हिन्दी साहित्य सम्मेलन, हिन्दी भाषा एवं साहित्य तथा देवनागरी का प्रचार-प्रसार को समर्पित एक प्रमुख सार्वजनिक संस्था है। इसका मुख्यालय प्रयाग में है जिसमें छापाखाना, पुस्तकालय, संग्रहालय एवं प्रशासनिक भवन हैं। हिंदी साहित्य सम्मेलन ने ही सर्वप्रथम हिंदी लेखकों को प्रोत्साहित करने के लिए उनकी रचनाओं पर पुरस्कारों आदि की योजना चलाई। उसके मंगलाप्रसाद पारितोषिक की हिंदी जगत् में पर्याप्त प्रतिष्ठा है। सम्मेलन द्वारा महिला लेखकों के प्रोत्साहन का भी कार्य हुआ। इसके लिए उसने सेकसरिया महिला पारितोषिक चलाया। सम्मेलन के द्वारा हिंदी की अनेक उच्च कोटि की पाठ्य एवं साहित्यिक पुस्तकों, पारिभाषिक शब्दकोशों एवं संदर्भग्रंथों का भी प्रकाशन हुआ है जिनकी संख्या डेढ़-दो सौ के करीब है। सम्मेलन के हिंदी संग्रहालय में हिंदी की हस्तलिखित पांडुलिपियों का भी संग्रह है। इतिहास के विद्वान् मेजर वामनदास वसु की बहुमूल्य पुस्तकों का संग्रह भी सम्मेलन के संग्रहालय में है, जिसमें पाँच हजार के करीब दुर्लभ पुस्तकें संगृहीत हैं। . आगरा और अवध संयुक्त प्रांत एक हज़ार नौ सौ तीन उत्तर प्रदेश सरकार का राजचिन्ह उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा राज्य है। लखनऊ प्रदेश की प्रशासनिक व विधायिक राजधानी है और इलाहाबाद न्यायिक राजधानी है। आगरा, अयोध्या, कानपुर, झाँसी, बरेली, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, मथुरा, मुरादाबाद तथा आज़मगढ़ प्रदेश के अन्य महत्त्वपूर्ण शहर हैं। राज्य के उत्तर में उत्तराखण्ड तथा हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली तथा राजस्थान, दक्षिण में मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ और पूर्व में बिहार तथा झारखंड राज्य स्थित हैं। इनके अतिरिक्त राज्य की की पूर्वोत्तर दिशा में नेपाल देश है। सन दो हज़ार में भारतीय संसद ने उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिमी भाग से उत्तरांचल राज्य का निर्माण किया। उत्तर प्रदेश का अधिकतर हिस्सा सघन आबादी वाले गंगा और यमुना। विश्व में केवल पाँच राष्ट्र चीन, स्वयं भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनिशिया और ब्राज़ील की जनसंख्या उत्तर प्रदेश की जनसंख्या से अधिक है। उत्तर प्रदेश भारत के उत्तर में स्थित है। यह राज्य उत्तर में नेपाल व उत्तराखण्ड, दक्षिण में मध्य प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान तथा पूर्व में बिहार तथा दक्षिण-पूर्व में झारखण्ड व छत्तीसगढ़ से घिरा हुआ है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है। यह राज्य दो,अड़तीस,पाँच सौ छयासठ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहाँ का मुख्य न्यायालय इलाहाबाद में है। कानपुर, झाँसी, बाँदा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन, महोबा, ललितपुर, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, इलाहाबाद, मेरठ, गोरखपुर, नोएडा, मथुरा, मुरादाबाद, गाजियाबाद, अलीगढ़, सुल्तानपुर, फैजाबाद, बरेली, आज़मगढ़, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर यहाँ के मुख्य शहर हैं। . अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन और उत्तर प्रदेश आम में पंद्रह बातें हैं : झाँसी, दिल्ली, पुरुषोत्तम दास टंडन, बिहार, मदनमोहन मालवीय, मध्य प्रदेश, महात्मा गांधी, मेरठ, लखनऊ, हिन्दी, वृन्दावन, गोरखपुर, इलाहाबाद, कानपुर, कृषि। झाँसी भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त में स्थित एक प्रमुख शहर है। यह शहर उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है और बुंदेलखंड क्षेत्र के अन्तर्गत आता है। झाँसी एक प्रमुख रेल एवं सड़क केन्द्र है और झाँसी जिले का प्रशासनिक केन्द्र भी है। झाँसी शहर पत्थर निर्मित किले के चारों तरफ़ फ़ैला हुआ है, यह किला शहर के मध्य स्थित बँगरा नामक पहाड़ी पर निर्मित है। उत्तर प्रदेश में बीस.सात वर्ग कि मी. दिल्ली , आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली भारत का एक केंद्र-शासित प्रदेश और महानगर है। इसमें नई दिल्ली सम्मिलित है जो भारत की राजधानी है। दिल्ली राजधानी होने के नाते केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों - कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका के मुख्यालय नई दिल्ली और दिल्ली में स्थापित हैं एक हज़ार चार सौ तिरासी वर्ग किलोमीटर में फैला दिल्ली जनसंख्या के तौर पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। यहाँ की जनसंख्या लगभग एक करोड़ सत्तर लाख है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैंः हिन्दी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी। भारत में दिल्ली का ऐतिहासिक महत्त्व है। इसके दक्षिण पश्चिम में अरावली पहाड़ियां और पूर्व में यमुना नदी है, जिसके किनारे यह बसा है। यह प्राचीन समय में गंगा के मैदान से होकर जाने वाले वाणिज्य पथों के रास्ते में पड़ने वाला मुख्य पड़ाव था। यमुना नदी के किनारे स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है। यह भारत का अति प्राचीन नगर है। इसके इतिहास का प्रारम्भ सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़ा हुआ है। हरियाणा के आसपास के क्षेत्रों में हुई खुदाई से इस बात के प्रमाण मिले हैं। महाभारत काल में इसका नाम इन्द्रप्रस्थ था। दिल्ली सल्तनत के उत्थान के साथ ही दिल्ली एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक शहर के रूप में उभरी। यहाँ कई प्राचीन एवं मध्यकालीन इमारतों तथा उनके अवशेषों को देखा जा सकता हैं। एक हज़ार छः सौ उनतालीस में मुगल बादशाह शाहजहाँ ने दिल्ली में ही एक चारदीवारी से घिरे शहर का निर्माण करवाया जो एक हज़ार छः सौ उन्यासी से एक हज़ार आठ सौ सत्तावन तक मुगल साम्राज्य की राजधानी रही। अट्ठारहवीं एवं उन्नीसवीं शताब्दी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने लगभग पूरे भारत को अपने कब्जे में ले लिया। इन लोगों ने कोलकाता को अपनी राजधानी बनाया। एक हज़ार नौ सौ ग्यारह में अंग्रेजी सरकार ने फैसला किया कि राजधानी को वापस दिल्ली लाया जाए। इसके लिए पुरानी दिल्ली के दक्षिण में एक नए नगर नई दिल्ली का निर्माण प्रारम्भ हुआ। अंग्रेजों से एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में स्वतंत्रता प्राप्त कर नई दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित किया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों से लोगों का प्रवासन हुआ, इससे दिल्ली के स्वरूप में आमूल परिवर्तन हुआ। विभिन्न प्रान्तो, धर्मों एवं जातियों के लोगों के दिल्ली में बसने के कारण दिल्ली का शहरीकरण तो हुआ ही साथ ही यहाँ एक मिश्रित संस्कृति ने भी जन्म लिया। आज दिल्ली भारत का एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक केन्द्र है। . पुरूषोत्तम दास टंडन भारत के स्वतन्त्रता सेनानी थे। हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा के पद पर प्रतिष्ठित करवाने में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था। वे भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के अग्रणी पंक्ति के नेता तो थे ही, समर्पित राजनयिक, हिन्दी के अनन्य सेवक, कर्मठ पत्रकार, तेजस्वी वक्ता और समाज सुधारक भी थे। हिन्दी को भारत की राजभाषा का स्थान दिलवाने के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान किया। एक हज़ार नौ सौ पचास में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने। उन्हें भारत के राजनैतिक और सामाजिक जीवन में नयी चेतना, नयी लहर, नयी क्रान्ति पैदा करने वाला कर्मयोगी कहा गया। वे जन सामान्य में राजर्षि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रणेता तो थे ही इस युग के आदर्श पुरुष भी थे। वे भारत के पहले और अन्तिम व्यक्ति थे जिन्हें महामना की सम्मानजनक उपाधि से विभूषित किया गया। पत्रकारिता, वकालत, समाज सुधार, मातृ भाषा तथा भारतमाता की सेवा में अपना जीवन अर्पण करने वाले इस महामानव ने जिस विश्वविद्यालय की स्थापना की उसमें उनकी परिकल्पना ऐसे विद्यार्थियों को शिक्षित करके देश सेवा के लिये तैयार करने की थी जो देश का मस्तक गौरव से ऊँचा कर सकें। मालवीयजी सत्य, ब्रह्मचर्य, व्यायाम, देशभक्ति तथा आत्मत्याग में अद्वितीय थे। इन समस्त आचरणों पर वे केवल उपदेश ही नहीं दिया करते थे अपितु स्वयं उनका पालन भी किया करते थे। वे अपने व्यवहार में सदैव मृदुभाषी रहे। कर्म ही उनका जीवन था। अनेक संस्थाओं के जनक एवं सफल संचालक के रूप में उनकी अपनी विधि व्यवस्था का सुचारु सम्पादन करते हुए उन्होंने कभी भी रोष अथवा कड़ी भाषा का प्रयोग नहीं किया। भारत सरकार ने चौबीस दिसम्बर दो हज़ार चौदह को उन्हें भारत रत्न से अलंकृत किया। . मध्य प्रदेश भारत का एक राज्य है, इसकी राजधानी भोपाल है। मध्य प्रदेश एक नवंबर, दो हज़ार तक क्षेत्रफल के आधार पर भारत का सबसे बड़ा राज्य था। इस दिन एवं मध्यप्रदेश के कई नगर उस से हटा कर छत्तीसगढ़ की स्थापना हुई थी। मध्य प्रदेश की सीमाऐं पांच राज्यों की सीमाओं से मिलती है। इसके उत्तर में उत्तर प्रदेश, पूर्व में छत्तीसगढ़, दक्षिण में महाराष्ट्र, पश्चिम में गुजरात, तथा उत्तर-पश्चिम में राजस्थान है। हाल के वर्षों में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर राष्ट्रीय औसत से ऊपर हो गया है। खनिज संसाधनों से समृद्ध, मध्य प्रदेश हीरे और तांबे का सबसे बड़ा भंडार है। अपने क्षेत्र की तीस% से अधिक वन क्षेत्र के अधीन है। इसके पर्यटन उद्योग में काफी वृद्धि हुई है। राज्य में वर्ष दो हज़ार दस-ग्यारह राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार जीत लिया। . मोहनदास करमचन्द गांधी भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की नींव सम्पूर्ण अहिंसा के सिद्धान्त पर रखी गयी थी जिसने भारत को आजादी दिलाकर पूरी दुनिया में जनता के नागरिक अधिकारों एवं स्वतन्त्रता के प्रति आन्दोलन के लिये प्रेरित किया। उन्हें दुनिया में आम जनता महात्मा गांधी के नाम से जानती है। संस्कृत भाषा में महात्मा अथवा महान आत्मा एक सम्मान सूचक शब्द है। गांधी को महात्मा के नाम से सबसे पहले एक हज़ार नौ सौ पंद्रह में राजवैद्य जीवराम कालिदास ने संबोधित किया था।। उन्हें बापू के नाम से भी याद किया जाता है। सुभाष चन्द्र बोस ने छः जुलाई एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस को रंगून रेडियो से गांधी जी के नाम जारी प्रसारण में उन्हें राष्ट्रपिता कहकर सम्बोधित करते हुए आज़ाद हिन्द फौज़ के सैनिकों के लिये उनका आशीर्वाद और शुभकामनाएँ माँगीं थीं। प्रति वर्ष दो अक्टूबर को उनका जन्म दिन भारत में गांधी जयंती के रूप में और पूरे विश्व में अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के नाम से मनाया जाता है। सबसे पहले गान्धी ने प्रवासी वकील के रूप में दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के लोगों के नागरिक अधिकारों के लिये संघर्ष हेतु सत्याग्रह करना शुरू किया। एक हज़ार नौ सौ पंद्रह में उनकी भारत वापसी हुई। उसके बाद उन्होंने यहाँ के किसानों, मजदूरों और शहरी श्रमिकों को अत्यधिक भूमि कर और भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाने के लिये एकजुट किया। एक हज़ार नौ सौ इक्कीस में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बागडोर संभालने के बाद उन्होंने देशभर में गरीबी से राहत दिलाने, महिलाओं के अधिकारों का विस्तार, धार्मिक एवं जातीय एकता का निर्माण व आत्मनिर्भरता के लिये अस्पृश्यता के विरोध में अनेकों कार्यक्रम चलाये। इन सबमें विदेशी राज से मुक्ति दिलाने वाला स्वराज की प्राप्ति वाला कार्यक्रम ही प्रमुख था। गाँधी जी ने ब्रिटिश सरकार द्वारा भारतीयों पर लगाये गये नमक कर के विरोध में एक हज़ार नौ सौ तीस में नमक सत्याग्रह और इसके बाद एक हज़ार नौ सौ बयालीस में अंग्रेजो भारत छोड़ो आन्दोलन से खासी प्रसिद्धि प्राप्त की। दक्षिण अफ्रीका और भारत में विभिन्न अवसरों पर कई वर्षों तक उन्हें जेल में भी रहना पड़ा। गांधी जी ने सभी परिस्थितियों में अहिंसा और सत्य का पालन किया और सभी को इनका पालन करने के लिये वकालत भी की। उन्होंने साबरमती आश्रम में अपना जीवन गुजारा और परम्परागत भारतीय पोशाक धोती व सूत से बनी शाल पहनी जिसे वे स्वयं चरखे पर सूत कातकर हाथ से बनाते थे। उन्होंने सादा शाकाहारी भोजन खाया और आत्मशुद्धि के लिये लम्बे-लम्बे उपवास रखे। . मेरठ भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का एक शहर है। यहाँ नगर निगम कार्यरत है। यह प्राचीन नगर दिल्ली से बहत्तर कि॰मी॰ उत्तर पूर्व में स्थित है। मेरठ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का हिस्सा है। यहाँ भारतीय सेना की एक छावनी भी है। यह उत्तर प्रदेश के सबसे तेजी से विकसित और शिक्षित होते जिलों में से एक है। मेरठ जिले में बारह ब्लॉक,चौंतीस जिला पंचायत सदस्य,अस्सी नगर निगम पार्षद है। मेरठ जिले में चार लोक सभा क्षेत्र सम्मिलित हैं, सरधना विधानसभा, मुजफ्फरनगर लोकसभा में हस्तिनापुर विधानसभा, बिजनौर लोकसभा में,सिवाल खास बागपत लोकसभा क्षेत्र में और मेरठ कैंट,मेरठ दक्षिण,मेरठ शहर,किठौर मेरठ लोकसभा क्षेत्र में है . लखनऊ और शिराज-ए-हिंद के रूप में जाना जाता है। आज का लखनऊ एक जीवंत शहर है जिसमे एक आर्थिक विकास दिखता है और यह भारत के तेजी से बढ़ रहे गैर-महानगरों के शीर्ष पंद्रह में से एक है। यह हिंदी और उर्दू साहित्य के केंद्रों में से एक है। यहां अधिकांश लोग हिन्दी बोलते हैं। यहां की हिन्दी में लखनवी अंदाज़ है, जो विश्वप्रसिद्ध है। इसके अलावा यहाँ उर्दू और अंग्रेज़ी भी बोली जाती हैं। . हिन्दी या भारतीय विश्व की एक प्रमुख भाषा है एवं भारत की राजभाषा है। केंद्रीय स्तर पर दूसरी आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है। यह हिन्दुस्तानी भाषा की एक मानकीकृत रूप है जिसमें संस्कृत के तत्सम तथा तद्भव शब्द का प्रयोग अधिक हैं और अरबी-फ़ारसी शब्द कम हैं। हिन्दी संवैधानिक रूप से भारत की प्रथम राजभाषा और भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। हालांकि, हिन्दी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है क्योंकि भारत का संविधान में कोई भी भाषा को ऐसा दर्जा नहीं दिया गया था। चीनी के बाद यह विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा भी है। विश्व आर्थिक मंच की गणना के अनुसार यह विश्व की दस शक्तिशाली भाषाओं में से एक है। हिन्दी और इसकी बोलियाँ सम्पूर्ण भारत के विविध राज्यों में बोली जाती हैं। भारत और अन्य देशों में भी लोग हिन्दी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं। फ़िजी, मॉरिशस, गयाना, सूरीनाम की और नेपाल की जनता भी हिन्दी बोलती है।http://www.ethnologue.com/language/hin दो हज़ार एक की भारतीय जनगणना में भारत में बयालीस करोड़ बीस लाख लोगों ने हिन्दी को अपनी मूल भाषा बताया। भारत के बाहर, हिन्दी बोलने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका में छः सौ अड़तालीस,नौ सौ तिरासी; मॉरीशस में छः,पचासी,एक सौ सत्तर; दक्षिण अफ्रीका में आठ,नब्बे,दो सौ बानवे; यमन में दो,बत्तीस,सात सौ साठ; युगांडा में एक,सैंतालीस,शून्य; सिंगापुर में पाँच,शून्य; नेपाल में आठ लाख; जर्मनी में तीस,शून्य हैं। न्यूजीलैंड में हिन्दी चौथी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसके अलावा भारत, पाकिस्तान और अन्य देशों में चौदह करोड़ दस लाख लोगों द्वारा बोली जाने वाली उर्दू, मौखिक रूप से हिन्दी के काफी सामान है। लोगों का एक विशाल बहुमत हिन्दी और उर्दू दोनों को ही समझता है। भारत में हिन्दी, विभिन्न भारतीय राज्यों की चौदह आधिकारिक भाषाओं और क्षेत्र की बोलियों का उपयोग करने वाले लगभग एक अरब लोगों में से अधिकांश की दूसरी भाषा है। हिंदी हिंदी बेल्ट का लिंगुआ फ़्रैंका है, और कुछ हद तक पूरे भारत । भाषा विकास क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी हिन्दी प्रेमियों के लिए बड़ी सन्तोषजनक है कि आने वाले समय में विश्वस्तर पर अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व की जो चन्द भाषाएँ होंगी उनमें हिन्दी भी प्रमुख होगी। 'देशी', 'भाखा' , 'देशना वचन' , 'हिन्दवी', 'दक्खिनी', 'रेखता', 'आर्यभाषा' , 'हिन्दुस्तानी', 'खड़ी बोली', 'भारती' आदि हिन्दी के अन्य नाम हैं जो विभिन्न ऐतिहासिक कालखण्डों में एवं विभिन्न सन्दर्भों में प्रयुक्त हुए हैं। . कृष्ण बलराम मन्दिर इस्कॉन वृन्दावन वृन्दावन मथुरा क्षेत्र में एक स्थान है जो भगवान कृष्ण की लीला से जुडा हुआ है। यह स्थान श्री कृष्ण भगवान के बाललीलाओं का स्थान माना जाता है। यह मथुरा से पंद्रह किमी कि दूरी पर है। यहाँ पर श्री कृष्ण और राधा रानी के मन्दिर की विशाल संख्या है। यहाँ स्थित बांके विहारी जी का मंदिर सबसे प्राचीन है। इसके अतिरिक्त यहाँ श्री कृष्ण बलराम, इस्कान मन्दिर, पागलबाबा का मंदिर, रंगनाथ जी का मंदिर, प्रेम मंदिर, श्री कृष्ण प्रणामी मन्दिर, अक्षय पात्र, निधि वन आदिदर्शनीय स्थान है। यह कृष्ण की लीलास्थली है। हरिवंश पुराण, श्रीमद्भागवत, विष्णु पुराण आदि में वृन्दावन की महिमा का वर्णन किया गया है। कालिदास ने इसका उल्लेख रघुवंश में इंदुमती-स्वयंवर के प्रसंग में शूरसेनाधिपति सुषेण का परिचय देते हुए किया है इससे कालिदास के समय में वृन्दावन के मनोहारी उद्यानों की स्थिति का ज्ञान होता है। श्रीमद्भागवत के अनुसार गोकुल से कंस के अत्याचार से बचने के लिए नंदजी कुटुंबियों और सजातीयों के साथ वृन्दावन निवास के लिए आये थे। विष्णु पुराण में इसी प्रसंग का उल्लेख है। विष्णुपुराण में अन्यत्र वृन्दावन में कृष्ण की लीलाओं का वर्णन भी है। . तीन सौpx गोरखपुर उत्तर प्रदेश राज्य के पूर्वी भाग में नेपाल के साथ सीमा के पास स्थित भारत का एक प्रसिद्ध शहर है। यह गोरखपुर जिले का प्रशासनिक मुख्यालय भी है। यह एक धार्मिक केन्द्र के रूप में मशहूर है जो बौद्ध, हिन्दू, मुस्लिम, जैन और सिख सन्तों की साधनास्थली रहा। किन्तु मध्ययुगीन सर्वमान्य सन्त गोरखनाथ के बाद उनके ही नाम पर इसका वर्तमान नाम गोरखपुर रखा गया। यहाँ का प्रसिद्ध गोरखनाथ मन्दिर अभी भी नाथ सम्प्रदाय की पीठ है। यह महान सन्त परमहंस योगानन्द का जन्म स्थान भी है। इस शहर में और भी कई ऐतिहासिक स्थल हैं जैसे, बौद्धों के घर, इमामबाड़ा, अट्ठारहवीं सदी की दरगाह और हिन्दू धार्मिक ग्रन्थों का प्रमुख प्रकाशन संस्थान गीता प्रेस। बीसवीं सदी में, गोरखपुर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक केन्द्र बिन्दु था और आज यह शहर एक प्रमुख व्यापार केन्द्र बन चुका है। पूर्वोत्तर रेलवे का मुख्यालय, जो ब्रिटिश काल में 'बंगाल नागपुर रेलवे' के रूप में जाना जाता था, यहीं स्थित है। अब इसे एक औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिये गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण की स्थापना पुराने शहर से पंद्रह किमी दूर की गयी है। . इलाहाबाद उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में स्थित एक नगर एवं इलाहाबाद जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है। इसका प्राचीन नाम प्रयाग है। इसे 'तीर्थराज' भी कहते हैं। इलाहाबाद भारत का दूसरा प्राचीनतम बसा नगर है। हिन्दू मान्यता अनुसार, यहां सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने के बाद प्रथम यज्ञ किया था। इसी प्रथम यज्ञ के प्र और याग अर्थात यज्ञ से मिलकर प्रयाग बना और उस स्थान का नाम प्रयाग पड़ा जहाँ भगवान श्री ब्रम्हा जी ने सृष्टि का सबसे पहला यज्ञ सम्पन्न किया था। इस पावन नगरी के अधिष्ठाता भगवान श्री विष्णु स्वयं हैं और वे यहाँ माधव रूप में विराजमान हैं। भगवान के यहाँ बारह स्वरूप विध्यमान हैं। जिन्हें द्वादश माधव कहा जाता है। सबसे बड़े हिन्दू सम्मेलन महाकुंभ की चार स्थलियों में से एक है, शेष तीन हरिद्वार, उज्जैन एवं नासिक हैं। हिन्दू धर्मग्रन्थों में वर्णित प्रयाग स्थल पवित्रतम नदी गंगा और यमुना के संगम पर स्थित है। यहीं सरस्वती नदी गुप्त रूप से संगम में मिलती है, अतः ये त्रिवेणी संगम कहलाता है, जहां प्रत्येक बारह वर्ष में कुंभ मेला लगता है। इलाहाबाद में कई महत्त्वपूर्ण राज्य सरकार के कार्यालय स्थित हैं, जैसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रधान महालेखाधिकारी , उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग , राज्य पुलिस मुख्यालय, उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय एवं उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद कार्यालय। भारत सरकार द्वारा इलाहाबाद को जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण योजना के लिये मिशन शहर के रूप में चुना गया है। . कानपुर भारतवर्ष के उत्तरी राज्य उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक नगर है। यह नगर गंगा नदी के दक्षिण तट पर बसा हुआ है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ से अस्सी किलोग्राममीटर पश्चिम स्थित यहाँ नगर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी के नाम से भी जाना जाता है। ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं के लिए चर्चित ब्रह्मावर्त के उत्तर मध्य में स्थित ध्रुवटीला त्याग और तपस्या का संदेश दे रहा है। यहाँ की आबादी लगभग सत्ताईस लाख है। . कॉफी की खेती कृषि खेती और वानिकी के माध्यम से खाद्य और अन्य सामान के उत्पादन से संबंधित है। कृषि एक मुख्य विकास था, जो सभ्यताओं के उदय का कारण बना, इसमें पालतू जानवरों का पालन किया गया और पौधों को उगाया गया, जिससे अतिरिक्त खाद्य का उत्पादन हुआ। इसने अधिक घनी आबादी और स्तरीकृत समाज के विकास को सक्षम बनाया। कृषि का अध्ययन कृषि विज्ञान के रूप में जाना जाता है तथा इसी से संबंधित विषय बागवानी का अध्ययन बागवानी में किया जाता है। तकनीकों और विशेषताओं की बहुत सी किस्में कृषि के अन्तर्गत आती है, इसमें वे तरीके शामिल हैं जिनसे पौधे उगाने के लिए उपयुक्त भूमि का विस्तार किया जाता है, इसके लिए पानी के चैनल खोदे जाते हैं और सिंचाई के अन्य रूपों का उपयोग किया जाता है। कृषि योग्य भूमि पर फसलों को उगाना और चारागाहों और रेंजलैंड पर पशुधन को गड़रियों के द्वारा चराया जाना, मुख्यतः कृषि से सम्बंधित रहा है। कृषि के भिन्न रूपों की पहचान करना व उनकी मात्रात्मक वृद्धि, पिछली शताब्दी में विचार के मुख्य मुद्दे बन गए। विकसित दुनिया में यह क्षेत्र जैविक खेती से लेकर गहन कृषि तक फैली है। आधुनिक एग्रोनोमी, पौधों में संकरण, कीटनाशकों और उर्वरकों और तकनीकी सुधारों ने फसलों से होने वाले उत्पादन को तेजी से बढ़ाया है और साथ ही यह व्यापक रूप से पारिस्थितिक क्षति का कारण भी बना है और इसने मनुष्य के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। चयनात्मक प्रजनन और पशुपालन की आधुनिक प्रथाओं जैसे गहन सूअर खेती ने मांस के उत्पादन में वृद्धि की है, लेकिन इससे पशु क्रूरता, प्रतिजैविक दवाओं के स्वास्थ्य प्रभाव, वृद्धि हॉर्मोन और मांस के औद्योगिक उत्पादन में सामान्य रूप से काम में लिए जाने वाले रसायनों के बारे में मुद्दे सामने आये हैं। प्रमुख कृषि उत्पादों को मोटे तौर पर भोजन, रेशा, ईंधन, कच्चा माल, फार्मास्यूटिकल्स और उद्दीपकों में समूहित किया जा सकता है। साथ ही सजावटी या विदेशी उत्पादों की भी एक श्रेणी है। वर्ष दो हज़ार से पौधों का उपयोग जैविक ईंधन, जैवफार्मास्यूटिकल्स, जैवप्लास्टिक, और फार्मास्यूटिकल्स के उत्पादन में किया जा रहा है। विशेष खाद्यों में शामिल हैं अनाज, सब्जियां, फल और मांस। रेशे में कपास, ऊन, सन, रेशम और सन शामिल हैं। कच्चे माल में लकड़ी और बाँस शामिल हैं। उद्दीपकों में तम्बाकू, शराब, अफ़ीम, कोकीन और डिजिटेलिस शामिल हैं। पौधों से अन्य उपयोगी पदार्थ भी उत्पन्न होते हैं, जैसे रेजिन। जैव ईंधनों में शामिल हैं मिथेन, जैवभार , इथेनॉल और बायोडीजल। कटे हुए फूल, नर्सरी के पौधे, उष्णकटिबंधीय मछलियाँ और व्यापार के लिए पालतू पक्षी, कुछ सजावटी उत्पाद हैं। दो हज़ार सात में, दुनिया के लगभग एक तिहाई श्रमिक कृषि क्षेत्र में कार्यरत थे। हालांकि, औद्योगिकीकरण की शुरुआत के बाद से कृषि से सम्बंधित महत्त्व कम हो गया है और दो हज़ार तीन में-इतिहास में पहली बार-सेवा क्षेत्र ने एक आर्थिक क्षेत्र के रूप में कृषि को पछाड़ दिया क्योंकि इसने दुनिया भर में अधिकतम लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया। इस तथ्य के बावजूद कि कृषि दुनिया के आबादी के एक तिहाई से अधिक लोगों की रोजगार उपलब्ध कराती है, कृषि उत्पादन, सकल विश्व उत्पाद का पांच प्रतिशत से भी कम हिस्सा बनता है। . अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन चौरानवे संबंध है और उत्तर प्रदेश दो सौ सत्रह है। वे आम पंद्रह में है, समानता सूचकांक चार.बयासी% है = पंद्रह / । यह लेख अखिल भारतीय हिंदी साहित्य सम्मेलन और उत्तर प्रदेश के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
आयकर विभाग फिर से अमीर टैक्स चोरों को तलाशेगा। अगले तीन महीने तक विभाग लक्ष्य को पूरा करने के लिए अलग- अलग व्यवसाय से जुड़े लोगों का सर्वे करेगा। इस दौरान बचत खातों में दस लाख से ऊपर जमा करने वालों को नोटिस भेजा जाएगा। साथ ही तीस लाख से अधिक की संपत्ति की खरीद करने वाले और रिटर्न न दाखिल करने वालों की भी जांच होगी।
आयकर विभाग ने झांसी-ललितपुर परिक्षेत्र का वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए टैक्स वसूली का लक्ष्य 113 करोड़ कर दिया है। ये लक्ष्य पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले 30 करोड़ रुपये अधिक है। इसमें 70 करोड़ लक्ष्य करदाताओं और 12 करोड़ कंपनियों से पूरा किया जाना है। इस लक्ष्य को पाने के लिए विभाग अब मार्च तक सर्वे शुरू करने जा रहा है। 31 दिसंबर तक अफसर 2011- 12 के टाइम वार्ड केस (कालातीत मामले) निपटाने में लगे थे। इस बार झांसी सर्किल ने अपनी रणनीति में बदलाव कर अलग- अलग पेशे से जुड़े व्यवसायियों के सर्वे करने का निर्णय लिया है। आयकर अफसरों का मानना है कि किसी एक व्यापार या पेशे से जुड़े व्यक्ति का सर्वे होने पर उस ट्रेड से जुड़े सभी आयकर दाता सतर्क हो जाते हैं। इस कारण हर बार नए ट्रेड से जुड़े व्यक्ति को चुना गया। मालूम हो कि, पिछले साल 83 करोड़ का लक्ष्य दिया गया था, जिसे विभाग ने प्राप्त कर लिया।
आयकर विभाग का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति अपने बचत खाते में एक साल में दस लाख से अधिक रुपये जमा करता या निकालता है तो निश्चित ही उसके आय के स्रोत अच्छे हैं। ऐसे में यह जानकारी रिटर्न भरते समय दिखाना जरूरी है। आयकर विभाग ने झांसी-ललितपुर परिक्षेत्र के करीब तीन हजार ग्राहकों की जानकारी बैंकों से जुटाई है। इन सभी को नोटिस भेजे जा रहे हैं। ऐसे ग्राहकों को अब संबंधित रुपयों का स्रोत बताना होगा।
आयकर विभाग को तीस लाख से अधिक की संपत्ति खरीदने या बेचने की जानकारी देना भी जरूरी है। विभाग ने ऐसे लोगों की जानकारी बैंकों और रजिस्ट्री कार्यालय से एकत्रित की है। इन सभी को नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिन्होंने संपत्ति खरीदने या बेचने के बाद जानकारी विभाग को नहीं दी।
आयकर विभाग अब ऐसे पांच हजार लोगों को नोटिस जारी करने जा रहा है, जिन्होंने 2011-12 के बाद पच्चीस हजार रुपये से अधिक का टैक्स भरा था। लेकिन, बाद में रिटर्न जमा करना बंद कर दिया। आयकर दाताओं के जवाब से संतुष्ट न होने पर उनकी जांच की जाएगी। गौरतलब है कि, झांसी-ललितपुर परिक्षेत्र में 62 हजार करदाता हैं। इसमें 10 लाख से अधिक का रिटर्न भरने वाले पांच हजार करदाता हैं।
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| आयकर विभाग फिर से अमीर टैक्स चोरों को तलाशेगा। अगले तीन महीने तक विभाग लक्ष्य को पूरा करने के लिए अलग- अलग व्यवसाय से जुड़े लोगों का सर्वे करेगा। इस दौरान बचत खातों में दस लाख से ऊपर जमा करने वालों को नोटिस भेजा जाएगा। साथ ही तीस लाख से अधिक की संपत्ति की खरीद करने वाले और रिटर्न न दाखिल करने वालों की भी जांच होगी। आयकर विभाग ने झांसी-ललितपुर परिक्षेत्र का वित्तीय वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस के लिए टैक्स वसूली का लक्ष्य एक सौ तेरह करोड़ कर दिया है। ये लक्ष्य पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले तीस करोड़ रुपये अधिक है। इसमें सत्तर करोड़ लक्ष्य करदाताओं और बारह करोड़ कंपनियों से पूरा किया जाना है। इस लक्ष्य को पाने के लिए विभाग अब मार्च तक सर्वे शुरू करने जा रहा है। इकतीस दिसंबर तक अफसर दो हज़ार ग्यारह- बारह के टाइम वार्ड केस निपटाने में लगे थे। इस बार झांसी सर्किल ने अपनी रणनीति में बदलाव कर अलग- अलग पेशे से जुड़े व्यवसायियों के सर्वे करने का निर्णय लिया है। आयकर अफसरों का मानना है कि किसी एक व्यापार या पेशे से जुड़े व्यक्ति का सर्वे होने पर उस ट्रेड से जुड़े सभी आयकर दाता सतर्क हो जाते हैं। इस कारण हर बार नए ट्रेड से जुड़े व्यक्ति को चुना गया। मालूम हो कि, पिछले साल तिरासी करोड़ का लक्ष्य दिया गया था, जिसे विभाग ने प्राप्त कर लिया। आयकर विभाग का मानना है कि अगर कोई व्यक्ति अपने बचत खाते में एक साल में दस लाख से अधिक रुपये जमा करता या निकालता है तो निश्चित ही उसके आय के स्रोत अच्छे हैं। ऐसे में यह जानकारी रिटर्न भरते समय दिखाना जरूरी है। आयकर विभाग ने झांसी-ललितपुर परिक्षेत्र के करीब तीन हजार ग्राहकों की जानकारी बैंकों से जुटाई है। इन सभी को नोटिस भेजे जा रहे हैं। ऐसे ग्राहकों को अब संबंधित रुपयों का स्रोत बताना होगा। आयकर विभाग को तीस लाख से अधिक की संपत्ति खरीदने या बेचने की जानकारी देना भी जरूरी है। विभाग ने ऐसे लोगों की जानकारी बैंकों और रजिस्ट्री कार्यालय से एकत्रित की है। इन सभी को नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिन्होंने संपत्ति खरीदने या बेचने के बाद जानकारी विभाग को नहीं दी। आयकर विभाग अब ऐसे पांच हजार लोगों को नोटिस जारी करने जा रहा है, जिन्होंने दो हज़ार ग्यारह-बारह के बाद पच्चीस हजार रुपये से अधिक का टैक्स भरा था। लेकिन, बाद में रिटर्न जमा करना बंद कर दिया। आयकर दाताओं के जवाब से संतुष्ट न होने पर उनकी जांच की जाएगी। गौरतलब है कि, झांसी-ललितपुर परिक्षेत्र में बासठ हजार करदाता हैं। इसमें दस लाख से अधिक का रिटर्न भरने वाले पांच हजार करदाता हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
करण जौहर की दो फिल्मों 'गुड न्यूज़' और 'तख़्त' साइन करने के बाद अब खबर है कि करीना कपूर खान को एक डार्क कॉमेडी फिल्म ऑफर की गयी है. हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अपने कजिन रणबीर कपूर के साथ कोई फिल्म में काम करना पसंद करेंगी तो उन्होंने झट से कहा,मैं रणबीर के साथ जरुर काम करना चाहूंगी,यह बेहतरीन होगा. . हमारी केमिस्ट्री बेहतरीन होगी.
मैं उनके काम को बेहद पसंद करती हूं तो उम्मीद है कि कोई स्क्रिप्ट जरुर लिखेगा. रणबीर मौजूदा समय के बेहतरीन एक्टर हैं. मेरे लिए वह फिल्मों से ऊपर हैं. मैं मानती हूं कि वह बेस्ट हैं. मेरे ख्याल से रणबीर और रणवीर सिंह हिंदी सिनेमा को एक अलग ही लेवल पर ले गए हैं. इसके अलावा करीना ने आलिया का भी नाम लिया और कहा कि वह उनके साथ भी काम करना चाहती हैं.
| करण जौहर की दो फिल्मों 'गुड न्यूज़' और 'तख़्त' साइन करने के बाद अब खबर है कि करीना कपूर खान को एक डार्क कॉमेडी फिल्म ऑफर की गयी है. हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अपने कजिन रणबीर कपूर के साथ कोई फिल्म में काम करना पसंद करेंगी तो उन्होंने झट से कहा,मैं रणबीर के साथ जरुर काम करना चाहूंगी,यह बेहतरीन होगा. . हमारी केमिस्ट्री बेहतरीन होगी. मैं उनके काम को बेहद पसंद करती हूं तो उम्मीद है कि कोई स्क्रिप्ट जरुर लिखेगा. रणबीर मौजूदा समय के बेहतरीन एक्टर हैं. मेरे लिए वह फिल्मों से ऊपर हैं. मैं मानती हूं कि वह बेस्ट हैं. मेरे ख्याल से रणबीर और रणवीर सिंह हिंदी सिनेमा को एक अलग ही लेवल पर ले गए हैं. इसके अलावा करीना ने आलिया का भी नाम लिया और कहा कि वह उनके साथ भी काम करना चाहती हैं. |
बठिंडा, 2 नवंबर (निस)
आम आदमी पार्टी के सदस्य आंदोलनकारी किसानों को सिंघू व टीकरी बार्डर पर टीमें बना कर पूरा सहयोग दे रहे हैं। यह जानकारी पार्टी के बठिंडा जिलाध्यक्ष नवदीप सिंह जीदा दी। यह टीमें दिल्ली सरकार, विधायकों व पार्टी नेताओं के सम्पर्क में रहती हैं। नवदीप सिंह जीदा ने बताया कि यह टीमें आंदोलनकारी किसानों के लिए समय पर स्वास्थ्य सेवायें, लंगर में सब्जियां काटने, खाना बनाने की गैस, पानी के टैंकर उपलब्ध करवाने के साथ-साथ पखानों की सफाई व जगह में सहयोग दे रही हैं। जीदा ने कहाकि इन टीमों की संख्या बढ़ाई जा रही है। इन सेवादारों में दिल्ली व हरियाणा के वर्कर भी शामिल हैं।
पंजाब मामलों के प्रभारी व विधायक जरनैल सिंह दोनों राज्यों की टीमों में तालमेल बना कर रख रहे हैं।
| बठिंडा, दो नवंबर आम आदमी पार्टी के सदस्य आंदोलनकारी किसानों को सिंघू व टीकरी बार्डर पर टीमें बना कर पूरा सहयोग दे रहे हैं। यह जानकारी पार्टी के बठिंडा जिलाध्यक्ष नवदीप सिंह जीदा दी। यह टीमें दिल्ली सरकार, विधायकों व पार्टी नेताओं के सम्पर्क में रहती हैं। नवदीप सिंह जीदा ने बताया कि यह टीमें आंदोलनकारी किसानों के लिए समय पर स्वास्थ्य सेवायें, लंगर में सब्जियां काटने, खाना बनाने की गैस, पानी के टैंकर उपलब्ध करवाने के साथ-साथ पखानों की सफाई व जगह में सहयोग दे रही हैं। जीदा ने कहाकि इन टीमों की संख्या बढ़ाई जा रही है। इन सेवादारों में दिल्ली व हरियाणा के वर्कर भी शामिल हैं। पंजाब मामलों के प्रभारी व विधायक जरनैल सिंह दोनों राज्यों की टीमों में तालमेल बना कर रख रहे हैं। |
जो लोग ये सोच रहे थे की राघव के दिल में शक्ति के प्यार की घंटी बजती हैं तो वो गलत समझ रहे हैं क्योंकि रिपोर्ट्स की मानें तो राघव इन दिनों स्वीडन की एक लड़की को डेट कर रहे हैं.
टीवी के फेमस डांस शो डांस दिवाने के होस्ट राघव जुयाल (Raghav Juyal) अपने हरफनमौला अंदाज से सबके साथ मस्ती मजाक करते रहते हैं लेकिन असल जिंदगी में राघव काफी प्राइवेट पर्सन हैं. शो में राघव को अक्सर शो की जज शक्ति मोहन के साथ फ्लर्ट करते हुए देखा जाता रहा है लेकिन उनके दिल में शक्ति नहीं बल्कि दूर देश की लड़की ने जगह बनाई है.
जो लोग ये सोच रहे थे की राघव के दिल में शक्ति के प्यार की घंटी बजती हैं तो वो गलत समझ रहे हैं क्योंकि रिपोर्ट्स की मानें तो राघव इन दिनों स्वीडन की एक लड़की को डेट कर रहे हैं. दोनों की कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं जिसमें ये लव बर्ड्स काफी खुश दिखाई दे रहे हैं.दरअसल इस स्वीडिश गर्ल का नाम सारा अर्रहुसिस (Sara Arrhusius) बताया जा रहा है. सारा इंटिमेसी प्रोफेशनल्स की एक इंडियन फर्म की को फाउंडर भी हैं और इन दोनों के बीच रिश्ता अभी नहीं बल्कि 2018 से बना है.
वैसे राघव ने अब तक अपने रिलेशन पर कोई जानकारी या घोषणा नहीं की है बल्कि खुद सारा ने अपने ऑफीशियल इंस्टा हैंडल से राघव के साथ रोमांटिक पिक्चर्स शेयर करके चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है.
बता जा रहा है राघव सात समुंदर पार की हसीना को 2017 में एक ट्रैकिंग के समय मिले थे ,जहां पहले दोस्ती हुई और फिर दोनों ने 2018 में एक दूसरे को डेट करना शुरू कर दिया. सारा अक्सर राघव से मिलने आती रही हैं और राघव भी अपनी लेडी लव से मिलने उनके देश गए हैं वैसे तो राघव के कुछ खास दोस्त और परिवार के सदस्य सारा के बारे में जानते हैं लेकिन जमाने के सामने राघव फिलहाल इस रिलेशन को काफी सीक्रेट रखना चाहते थे लेकिन अब जब सारा के साथ उनका रिश्ता उजागर हो ही गया तो देखना होगा की राघव इसे लेकर सफाई देंगे या सारा के साथ डेटिंग को महज अफवाह बता देंगे.
राघव के करियर की बात करें तो उन्होनें साल 2015 में आई फिल्म ABCD 2 से बॉलावुड में एंट्री की थी. राघव डांसर, कोरियोग्राफर के साथ-साथ एक बेहतरीन कॉमेडियन भी हैं. वह जब भी स्टेज पर आते हैं तो लोग हंसे बिना नहीं रह पाते.
| जो लोग ये सोच रहे थे की राघव के दिल में शक्ति के प्यार की घंटी बजती हैं तो वो गलत समझ रहे हैं क्योंकि रिपोर्ट्स की मानें तो राघव इन दिनों स्वीडन की एक लड़की को डेट कर रहे हैं. टीवी के फेमस डांस शो डांस दिवाने के होस्ट राघव जुयाल अपने हरफनमौला अंदाज से सबके साथ मस्ती मजाक करते रहते हैं लेकिन असल जिंदगी में राघव काफी प्राइवेट पर्सन हैं. शो में राघव को अक्सर शो की जज शक्ति मोहन के साथ फ्लर्ट करते हुए देखा जाता रहा है लेकिन उनके दिल में शक्ति नहीं बल्कि दूर देश की लड़की ने जगह बनाई है. जो लोग ये सोच रहे थे की राघव के दिल में शक्ति के प्यार की घंटी बजती हैं तो वो गलत समझ रहे हैं क्योंकि रिपोर्ट्स की मानें तो राघव इन दिनों स्वीडन की एक लड़की को डेट कर रहे हैं. दोनों की कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं जिसमें ये लव बर्ड्स काफी खुश दिखाई दे रहे हैं.दरअसल इस स्वीडिश गर्ल का नाम सारा अर्रहुसिस बताया जा रहा है. सारा इंटिमेसी प्रोफेशनल्स की एक इंडियन फर्म की को फाउंडर भी हैं और इन दोनों के बीच रिश्ता अभी नहीं बल्कि दो हज़ार अट्ठारह से बना है. वैसे राघव ने अब तक अपने रिलेशन पर कोई जानकारी या घोषणा नहीं की है बल्कि खुद सारा ने अपने ऑफीशियल इंस्टा हैंडल से राघव के साथ रोमांटिक पिक्चर्स शेयर करके चर्चा का बाजार गर्म कर दिया है. बता जा रहा है राघव सात समुंदर पार की हसीना को दो हज़ार सत्रह में एक ट्रैकिंग के समय मिले थे ,जहां पहले दोस्ती हुई और फिर दोनों ने दो हज़ार अट्ठारह में एक दूसरे को डेट करना शुरू कर दिया. सारा अक्सर राघव से मिलने आती रही हैं और राघव भी अपनी लेडी लव से मिलने उनके देश गए हैं वैसे तो राघव के कुछ खास दोस्त और परिवार के सदस्य सारा के बारे में जानते हैं लेकिन जमाने के सामने राघव फिलहाल इस रिलेशन को काफी सीक्रेट रखना चाहते थे लेकिन अब जब सारा के साथ उनका रिश्ता उजागर हो ही गया तो देखना होगा की राघव इसे लेकर सफाई देंगे या सारा के साथ डेटिंग को महज अफवाह बता देंगे. राघव के करियर की बात करें तो उन्होनें साल दो हज़ार पंद्रह में आई फिल्म ABCD दो से बॉलावुड में एंट्री की थी. राघव डांसर, कोरियोग्राफर के साथ-साथ एक बेहतरीन कॉमेडियन भी हैं. वह जब भी स्टेज पर आते हैं तो लोग हंसे बिना नहीं रह पाते. |
यह खेल इस बात का है कि कैसे बैंकिंग, पेमेंट के एप्प और फर्जीवाड़ा करने वाले हैकरों की रातोंरात चांदी हो जाती है और कैसे देखते-ही-देखते आम लोगों की जिंदगी भर की कमाई गायब हो जाती है.
देश-दुनिया में जब से रुपए-पैसे के डिजिटल लेनदेन की व्यवस्थाएं बनी हैं, उन पर एक ऐसा खेल बदस्तूर जारी है जो कम से कम आम लोगों की समझ से हमेशा बाहर रहा है. यह खेल इस बात का है कि कैसे बैंकिंग, पेमेंट के एप्प और फर्जीवाड़ा करने वाले हैकरों की रातोंरात चांदी हो जाती है और कैसे देखते-ही-देखते आम लोगों की जिंदगी भर की कमाई गायब हो जाती है. अभी ये रहस्य खुलने बाकी हैं कि आखिर कैसे सुरक्षा के लाखों दावों के बावजूद हैकरों को लोगों की निजी सूचनाएं और बैंक खातों और फोन नंबरों की जानकारी मिल जाती है.
इस पर एक नए किस्म के खेल ने आम लोगों का दिमाग चकरा दिया है जिसमें तमाम खेलों (गेम्स) से जुड़े मोबाइल एप्प बनाने वाली कंपनियां लोगों को कुछ महीने ताश के रमी या कार रेसिंग जैसे गेम्स खेलने के बदले लाखों रुपए कमाने का प्रलोभन दे रही हैं. इस किस्से में इधर डिजिटल वॉलेट की सुविधा मुहैया कराने वाली कंपनी पेटीएम और ग्लोबल इंटरनेट कंपनी- गूगल के बीच हुई जंग ने नया तड़का लगाया है.
मामला डिजिटल पेमेंट और खरीदारी आदि कराने वाली देसी कंपनी- पेटीएम के हालिया ऑफर से जुड़ा है जिसमें उसने क्रिकेट टूर्नामेंट-आईपीएल को भुनाने की कोशिश के तहत स्क्रैच कार्ड और कैशबैक का एक नया ऑफर अपने ग्राहकों के लिए पेश किया.
इस प्रस्ताव में ग्राहकों से कहा गया कि उसके डिजिटल पेमेंट गेटवे से तमाम तरह की खरीदारियों के बदले स्क्रैच कार्ड और आईपीएल खिलाड़ियों के स्टीकर मिलेंगे. एक निश्चित संख्या में स्टीकर जमा होने के बाद ग्राहक उन स्क्रै च कार्ड पर जाकर कुछ रकम वापस पा सकेंगे. मोबाइल वॉलेट की सुविधा देने वाले डिजिटल एप्प अरसे से ऐसे लुभावने ऑफर दे रहे हैं और सट्टेबाजी के आरोप लगने के बावजूद उन पर कोई कार्रवाई अब तक देश में मांग उठने पर भी नहीं हुई है. लेकिन इधर पेटीएम के इस ऑफर को एक नीतिगत अपडेट के तहत गूगल ने आपत्तिजनक माना और पेटीएम के एप्प को अपने एप्प स्टोर 'प्ले स्टोर' से हटा दिया.
इस पर काफी खलबली मची और पेटीएम का एप्प प्ले स्टोर पर तभी वापस आ सका, जब उसने क्रि केट से संबंधित कैशबैक वाला ऑफर हटाने की घोषणा की. हालांकि यह बात तब और बढ़ गई, जब पेटीएम ने गूगल पर आरोप लगाया कि जिस ऑफर के लिए गूगल ने उस पर कार्रवाई की, ठीक वैसा ही ऑफर खुद गूगल के डिजिटल पेमेंट गेटवे 'गूगल पे' पर मौजूद है.
बहरहाल, इस जंग का नतीजा इस रूप में आना चाहिए कि केंद्र और राज्य सरकारें ऑनलाइन रम्मी, स्क्रै च कार्ड व स्टीकर जुटाने के रूप में चल रही सट्टेबाजी को नियंत्रित करने का ठोस प्रयास करें और इस मामले में छाए धुंधलके को साफ करें.
| यह खेल इस बात का है कि कैसे बैंकिंग, पेमेंट के एप्प और फर्जीवाड़ा करने वाले हैकरों की रातोंरात चांदी हो जाती है और कैसे देखते-ही-देखते आम लोगों की जिंदगी भर की कमाई गायब हो जाती है. देश-दुनिया में जब से रुपए-पैसे के डिजिटल लेनदेन की व्यवस्थाएं बनी हैं, उन पर एक ऐसा खेल बदस्तूर जारी है जो कम से कम आम लोगों की समझ से हमेशा बाहर रहा है. यह खेल इस बात का है कि कैसे बैंकिंग, पेमेंट के एप्प और फर्जीवाड़ा करने वाले हैकरों की रातोंरात चांदी हो जाती है और कैसे देखते-ही-देखते आम लोगों की जिंदगी भर की कमाई गायब हो जाती है. अभी ये रहस्य खुलने बाकी हैं कि आखिर कैसे सुरक्षा के लाखों दावों के बावजूद हैकरों को लोगों की निजी सूचनाएं और बैंक खातों और फोन नंबरों की जानकारी मिल जाती है. इस पर एक नए किस्म के खेल ने आम लोगों का दिमाग चकरा दिया है जिसमें तमाम खेलों से जुड़े मोबाइल एप्प बनाने वाली कंपनियां लोगों को कुछ महीने ताश के रमी या कार रेसिंग जैसे गेम्स खेलने के बदले लाखों रुपए कमाने का प्रलोभन दे रही हैं. इस किस्से में इधर डिजिटल वॉलेट की सुविधा मुहैया कराने वाली कंपनी पेटीएम और ग्लोबल इंटरनेट कंपनी- गूगल के बीच हुई जंग ने नया तड़का लगाया है. मामला डिजिटल पेमेंट और खरीदारी आदि कराने वाली देसी कंपनी- पेटीएम के हालिया ऑफर से जुड़ा है जिसमें उसने क्रिकेट टूर्नामेंट-आईपीएल को भुनाने की कोशिश के तहत स्क्रैच कार्ड और कैशबैक का एक नया ऑफर अपने ग्राहकों के लिए पेश किया. इस प्रस्ताव में ग्राहकों से कहा गया कि उसके डिजिटल पेमेंट गेटवे से तमाम तरह की खरीदारियों के बदले स्क्रैच कार्ड और आईपीएल खिलाड़ियों के स्टीकर मिलेंगे. एक निश्चित संख्या में स्टीकर जमा होने के बाद ग्राहक उन स्क्रै च कार्ड पर जाकर कुछ रकम वापस पा सकेंगे. मोबाइल वॉलेट की सुविधा देने वाले डिजिटल एप्प अरसे से ऐसे लुभावने ऑफर दे रहे हैं और सट्टेबाजी के आरोप लगने के बावजूद उन पर कोई कार्रवाई अब तक देश में मांग उठने पर भी नहीं हुई है. लेकिन इधर पेटीएम के इस ऑफर को एक नीतिगत अपडेट के तहत गूगल ने आपत्तिजनक माना और पेटीएम के एप्प को अपने एप्प स्टोर 'प्ले स्टोर' से हटा दिया. इस पर काफी खलबली मची और पेटीएम का एप्प प्ले स्टोर पर तभी वापस आ सका, जब उसने क्रि केट से संबंधित कैशबैक वाला ऑफर हटाने की घोषणा की. हालांकि यह बात तब और बढ़ गई, जब पेटीएम ने गूगल पर आरोप लगाया कि जिस ऑफर के लिए गूगल ने उस पर कार्रवाई की, ठीक वैसा ही ऑफर खुद गूगल के डिजिटल पेमेंट गेटवे 'गूगल पे' पर मौजूद है. बहरहाल, इस जंग का नतीजा इस रूप में आना चाहिए कि केंद्र और राज्य सरकारें ऑनलाइन रम्मी, स्क्रै च कार्ड व स्टीकर जुटाने के रूप में चल रही सट्टेबाजी को नियंत्रित करने का ठोस प्रयास करें और इस मामले में छाए धुंधलके को साफ करें. |
नई दिल्ली। केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों पर गतिरोध समाप्त कराने की दिशा में सरकार की ओर से पहल की गई है। इसके बाद किसान संगठनों के नेताओं की केंद्र सरकार के साथ बुधवार को छठे दौर की औपचारिक वार्ता होगी।
हालांकि सरकार और किसान संगठन पहले से तय मुद्दों को लेकर अपने-अपने रुख पर कायम हैं। मगर उन्हें इस वार्ता से समाधान के रास्ते निकलने की उम्मीद है। सरकार की ओर से बार-बार कहा जा रहा है कि किसानों के मसले का समाधान वार्ता से ही होगा और सरकार के आग्रह पर ही आंदोलन की अगुवाई कर रहे किसान संगठनों के नेता अगले दौर की वार्ता के लिए राजी हुए हैं।
पंजाब में भारतीय किसान यूनियन (लाखोवाल) के जनरल सेक्रेटरी हरिंदर सिंह लाखोवाल बुधवार को सरकार के साथ वार्ता के लिए जाने वाले किसान नेताओं में शामिल रहेंगे। हरिंदर सिंह से जब ने पूछा कि वह इस वार्ता को लेकर कितने उत्साहित हैं। तो उन्होंने कहा कि सभी किसान चाहते हैं कि सरकार जल्द इन तीनों कानूनों को रद्द करे ताकि आंदोलन समाप्त हो।
वह कहते हैं कि ये कानून किसानों के हित में नहीं हैं, इसलिए सरकार किसी अन्य मुद्दे पर बात करने से पहले इन तीनों कानूनों को रद्द करे। हरिंदर सिंह ने कहा कि हम सरकार के साथ सभी चार मसलों पर बात करेंगे और हमें उम्मीद है कि बातचीत से मसले का समाधान निकलेगा।
सरकार और किसान नेताओं के बीच हुए पत्राचार में दोनों पक्षों ने साफ नीयत से सभी मसलों पर बातचीत करने की बात कही है। कृषि सचिव की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि भारत सरकार भी साफ नीयत और खुले मन से प्रासंगिक मुद्दों के तर्कपूर्ण समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस पत्र के जवाब में मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से कृषि सचिव को लिखे गए पत्र में भी प्रासंगिक मुद्दों के तर्कपूर्ण समाधान के लिए तय एजेंडा के अनुसार वार्ता चलाने की अपील की गई है। किसान संगठन की ओर से लिखे गए इस पत्र में भी वार्ता के लिए चार मुद्दों का जिक्र किया गया है। ये मुद्दे हैंः
- तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्दध्निरस्त करने के लिए अपनाए जाने वाली क्रियाविधि।
- सभी किसानों और कृषि वस्तुओं के लिए राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा सुझाए लाभदायक एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी देने की प्रक्रिया और प्रावधान।
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अध्यादेश, 2020 में ऐसे संशोधन जो अध्यादेश के दंड प्रावधानों से किसानों को बाहर करने के लिए जरूरी हैं।
- किसानों के हितों की रक्षा के लिए विद्युत संशोधन विधेयक 2020 के मसौदे को वापस लेने की प्रक्रिया।
पत्र के आखिर में किसान संगठन ने कहा कि प्रासंगिक मुद्दों के तर्कपूर्ण समाधान के लिए जरूरी होगा कि हमारी वार्ता इसी एजेंडा के अनुसार चले।
| नई दिल्ली। केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों पर गतिरोध समाप्त कराने की दिशा में सरकार की ओर से पहल की गई है। इसके बाद किसान संगठनों के नेताओं की केंद्र सरकार के साथ बुधवार को छठे दौर की औपचारिक वार्ता होगी। हालांकि सरकार और किसान संगठन पहले से तय मुद्दों को लेकर अपने-अपने रुख पर कायम हैं। मगर उन्हें इस वार्ता से समाधान के रास्ते निकलने की उम्मीद है। सरकार की ओर से बार-बार कहा जा रहा है कि किसानों के मसले का समाधान वार्ता से ही होगा और सरकार के आग्रह पर ही आंदोलन की अगुवाई कर रहे किसान संगठनों के नेता अगले दौर की वार्ता के लिए राजी हुए हैं। पंजाब में भारतीय किसान यूनियन के जनरल सेक्रेटरी हरिंदर सिंह लाखोवाल बुधवार को सरकार के साथ वार्ता के लिए जाने वाले किसान नेताओं में शामिल रहेंगे। हरिंदर सिंह से जब ने पूछा कि वह इस वार्ता को लेकर कितने उत्साहित हैं। तो उन्होंने कहा कि सभी किसान चाहते हैं कि सरकार जल्द इन तीनों कानूनों को रद्द करे ताकि आंदोलन समाप्त हो। वह कहते हैं कि ये कानून किसानों के हित में नहीं हैं, इसलिए सरकार किसी अन्य मुद्दे पर बात करने से पहले इन तीनों कानूनों को रद्द करे। हरिंदर सिंह ने कहा कि हम सरकार के साथ सभी चार मसलों पर बात करेंगे और हमें उम्मीद है कि बातचीत से मसले का समाधान निकलेगा। सरकार और किसान नेताओं के बीच हुए पत्राचार में दोनों पक्षों ने साफ नीयत से सभी मसलों पर बातचीत करने की बात कही है। कृषि सचिव की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया है कि भारत सरकार भी साफ नीयत और खुले मन से प्रासंगिक मुद्दों के तर्कपूर्ण समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस पत्र के जवाब में मंगलवार को संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से कृषि सचिव को लिखे गए पत्र में भी प्रासंगिक मुद्दों के तर्कपूर्ण समाधान के लिए तय एजेंडा के अनुसार वार्ता चलाने की अपील की गई है। किसान संगठन की ओर से लिखे गए इस पत्र में भी वार्ता के लिए चार मुद्दों का जिक्र किया गया है। ये मुद्दे हैंः - तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को रद्दध्निरस्त करने के लिए अपनाए जाने वाली क्रियाविधि। - सभी किसानों और कृषि वस्तुओं के लिए राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा सुझाए लाभदायक एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी देने की प्रक्रिया और प्रावधान। - राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अध्यादेश, दो हज़ार बीस में ऐसे संशोधन जो अध्यादेश के दंड प्रावधानों से किसानों को बाहर करने के लिए जरूरी हैं। - किसानों के हितों की रक्षा के लिए विद्युत संशोधन विधेयक दो हज़ार बीस के मसौदे को वापस लेने की प्रक्रिया। पत्र के आखिर में किसान संगठन ने कहा कि प्रासंगिक मुद्दों के तर्कपूर्ण समाधान के लिए जरूरी होगा कि हमारी वार्ता इसी एजेंडा के अनुसार चले। |
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक हालांकि फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति को गणतंत्र दिवस का मुख्य अतिथि बनने का न्योता नहीं भेजा गया है, मगर भारत ने इसकेलिए गंभीर प्रयास शुरू कर दिए हैं। हालांकि एहतियात के तौर पर इस मामले में भारत कनाडा के भी संपर्क में है। अगर किसी कारणवश ट्रंप ने न्योता स्वीकार करने में अपनी मजबूरी गिनाई तो भारत कनाडा के पीएम को मुख्य अतिथि बनने का न्योता भेजेगा।
इस बीच, विदेश मंत्रालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा की संभावनाएं तलाश रहा है। सूत्र का कहना था कि फिलहाल पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा जुलाई में जर्मनी के हमबर्ग में होने जा रहे जी-20 सदस्य देशों की बैठक से पहले संभव नहीं दिख रही। वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से ट्रंप और मोदी की पहली मुलाकात इसी बैठक में होगी। इसके बाद पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा को अंतिम रूप दिया जाएगा।
गौरतलब है कि चुनाव जीतने के बाद ट्रंप को सबसे पहले बधाई देने वालों में पीएम मोदी भी शामिल थे। पद संभालने के बाद ट्रंप ने भी एशियाई देशों में सबसे पहले भारत से संपर्क साधा और फोन पर पीएम मोदी से बातचीत की।
| विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक हालांकि फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति को गणतंत्र दिवस का मुख्य अतिथि बनने का न्योता नहीं भेजा गया है, मगर भारत ने इसकेलिए गंभीर प्रयास शुरू कर दिए हैं। हालांकि एहतियात के तौर पर इस मामले में भारत कनाडा के भी संपर्क में है। अगर किसी कारणवश ट्रंप ने न्योता स्वीकार करने में अपनी मजबूरी गिनाई तो भारत कनाडा के पीएम को मुख्य अतिथि बनने का न्योता भेजेगा। इस बीच, विदेश मंत्रालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा की संभावनाएं तलाश रहा है। सूत्र का कहना था कि फिलहाल पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा जुलाई में जर्मनी के हमबर्ग में होने जा रहे जी-बीस सदस्य देशों की बैठक से पहले संभव नहीं दिख रही। वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से ट्रंप और मोदी की पहली मुलाकात इसी बैठक में होगी। इसके बाद पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा को अंतिम रूप दिया जाएगा। गौरतलब है कि चुनाव जीतने के बाद ट्रंप को सबसे पहले बधाई देने वालों में पीएम मोदी भी शामिल थे। पद संभालने के बाद ट्रंप ने भी एशियाई देशों में सबसे पहले भारत से संपर्क साधा और फोन पर पीएम मोदी से बातचीत की। |
नाबालिग से दुष्कर्म के 4 साल पुराने मामले में पोक्सो कोर्ट ने आरोपी को सजा सुनाई है। न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह राजावत ने आरोपी पहलवान सिंह (30) निवासी बआवली,थाना चाचौड़ा जिला गुना (एमपी) को 14 साल कारावास और 40 हजार के अर्थदंड से दंडित किया है। पहलवान सिंह पर आरोप था कि वो 17 साल की किशोरी को मिठाई में नशीला पदार्थ खिलाकर अपने साथ गुना एमपी ले गया। उसे 7 महीने अपने साथ रखा। और दुष्कर्म किया।
विशिष्ट लोक अभियोजक विजय कछावाहा ने बताया 7 अक्टूबर 2017 को पीड़िता ने पिता ने कैथून थाने में शिकायत दी थी। जिसमें बताया था कि वो मजदूरी का काम करता है। बेटी घर पर अकेली रहती है। पहलवान सिंह कैथून कस्बे में फार्म हाउस पर काम करता था। उसका घर पर आना जाना था। पहलवान सिंह उसकी बेटी को बहला फुसलाकर भगा ले गया। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया। कोर्ट में 10 गवाहों के बयान कराए गए।
फरियादी के वकील कमलकांत शर्मा ने बताया कि पीड़िता ने अपने बयान में बताया था कि पहलवान सिंह मजदूरी के लिए बुलाने घर आता था। वो मिठाई में नशीला पदार्थ खिलाकर अचेत हालत में अपने गांव ले गया। वहां एक टापरी में रखा। वो 7 महीने तक नशे में रही। मौका पाकर वहां से भागकर मनोहरथाना पहुंची। फिर इकलेरा आकर भाई को फोन करके बुलाया।
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| नाबालिग से दुष्कर्म के चार साल पुराने मामले में पोक्सो कोर्ट ने आरोपी को सजा सुनाई है। न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह राजावत ने आरोपी पहलवान सिंह निवासी बआवली,थाना चाचौड़ा जिला गुना को चौदह साल कारावास और चालीस हजार के अर्थदंड से दंडित किया है। पहलवान सिंह पर आरोप था कि वो सत्रह साल की किशोरी को मिठाई में नशीला पदार्थ खिलाकर अपने साथ गुना एमपी ले गया। उसे सात महीने अपने साथ रखा। और दुष्कर्म किया। विशिष्ट लोक अभियोजक विजय कछावाहा ने बताया सात अक्टूबर दो हज़ार सत्रह को पीड़िता ने पिता ने कैथून थाने में शिकायत दी थी। जिसमें बताया था कि वो मजदूरी का काम करता है। बेटी घर पर अकेली रहती है। पहलवान सिंह कैथून कस्बे में फार्म हाउस पर काम करता था। उसका घर पर आना जाना था। पहलवान सिंह उसकी बेटी को बहला फुसलाकर भगा ले गया। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में चालान पेश किया। कोर्ट में दस गवाहों के बयान कराए गए। फरियादी के वकील कमलकांत शर्मा ने बताया कि पीड़िता ने अपने बयान में बताया था कि पहलवान सिंह मजदूरी के लिए बुलाने घर आता था। वो मिठाई में नशीला पदार्थ खिलाकर अचेत हालत में अपने गांव ले गया। वहां एक टापरी में रखा। वो सात महीने तक नशे में रही। मौका पाकर वहां से भागकर मनोहरथाना पहुंची। फिर इकलेरा आकर भाई को फोन करके बुलाया। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने 500 रुपए और 1000 रुपए के नोटों को अमान्य करार देने के केंद्र के 8 नवंबर, 2016 के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं में हस्तक्षेप संबंधी एक अर्जी पर विचार करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति एसए नज़ीर की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह अपनी याचिका के साथ बंबई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाए। याचिका में नोटबंदी की कवायद के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पड़ताल की मांग की गई है।
संविधान पीठ में न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना, न्यायमूर्ति वी रमासुब्रमण्यन और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना भी शामिल थीं। पीठ ने कहा कि आपको इस मामले की सुनवाई के लिए संविधान पीठ की आवश्यकता नहीं है। याचिका को वापस लिये जाने के तौर पर खारिज किया जाता है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि नए डिजाइन के 500 रुपए के नोट भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश से काफी पहले छापे जा रहे थे।
आरटीआई कार्यकर्ता मनोरंजन रॉय द्वारा दायर याचिका में 500 रुपए और 1000 रुपए के नोट को बंद करने की नीति की घोषणा के संबंध में अधिकारियों के आचरण की एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा समयबद्ध, अदालत की निगरानी में जांच शुरू करने के निर्देश का अनुरोध किया गया था।
याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता ने एक अप्रैल, 2000 और 31 मार्च, 2018 के बीच आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट में दी गई जानकारी और डेटा का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया है। (एजेंसी)
| नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पाँच सौ रुपयापए और एक हज़ार रुपयापए के नोटों को अमान्य करार देने के केंद्र के आठ नवंबर, दो हज़ार सोलह के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं में हस्तक्षेप संबंधी एक अर्जी पर विचार करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एसए नज़ीर की अध्यक्षता वाली पाँच सदस्यीय संविधान पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह अपनी याचिका के साथ बंबई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाए। याचिका में नोटबंदी की कवायद के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पड़ताल की मांग की गई है। संविधान पीठ में न्यायमूर्ति बीआर गवई, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना, न्यायमूर्ति वी रमासुब्रमण्यन और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना भी शामिल थीं। पीठ ने कहा कि आपको इस मामले की सुनवाई के लिए संविधान पीठ की आवश्यकता नहीं है। याचिका को वापस लिये जाने के तौर पर खारिज किया जाता है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि नए डिजाइन के पाँच सौ रुपयापए के नोट भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश से काफी पहले छापे जा रहे थे। आरटीआई कार्यकर्ता मनोरंजन रॉय द्वारा दायर याचिका में पाँच सौ रुपयापए और एक हज़ार रुपयापए के नोट को बंद करने की नीति की घोषणा के संबंध में अधिकारियों के आचरण की एक स्वतंत्र एजेंसी द्वारा समयबद्ध, अदालत की निगरानी में जांच शुरू करने के निर्देश का अनुरोध किया गया था। याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता ने एक अप्रैल, दो हज़ार और इकतीस मार्च, दो हज़ार अट्ठारह के बीच आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट में दी गई जानकारी और डेटा का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया है। |
प्राचीन तीर्थोद्धारक चारित्रचूडामणि प. पू. आचार्यदेवश्री विजय नीतिसूरीश्वरजी महाराज साहेबना पट्टधर सकलांगमरहस्यवेदी प. पू. आचार्यदेवश्री विजय हर्षसूरीश्वरजी महाराज साहेबना पट्टधर प्रशांतमूर्ति गच्छाधिपति आचार्यदेवश्री विजय महेन्द्रसूरीश्वरजी
महाराज साहेब. 5
१९५३ आसो वद ३ रतलाम १९६९ कारतक वद ४ अमदावाद १९८६ मागसर सुद ५ अमदावाद १९८७ कारतक वद ८ सीपोर
गणिपद :
पंन्यासपद :
आचार्यपद :
स्वर्गवास :
१९९९ फागण यद ६ अमदावाद २०२२ वैशाख वद १० अमदावाद | प्राचीन तीर्थोद्धारक चारित्रचूडामणि प. पू. आचार्यदेवश्री विजय नीतिसूरीश्वरजी महाराज साहेबना पट्टधर सकलांगमरहस्यवेदी प. पू. आचार्यदेवश्री विजय हर्षसूरीश्वरजी महाराज साहेबना पट्टधर प्रशांतमूर्ति गच्छाधिपति आचार्यदेवश्री विजय महेन्द्रसूरीश्वरजी महाराज साहेब. पाँच एक हज़ार नौ सौ तिरेपन आसो वद तीन रतलाम एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर कारतक वद चार अमदावाद एक हज़ार नौ सौ छियासी मागसर सुद पाँच अमदावाद एक हज़ार नौ सौ सत्तासी कारतक वद आठ सीपोर गणिपद : पंन्यासपद : आचार्यपद : स्वर्गवास : एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे फागण यद छः अमदावाद दो हज़ार बाईस वैशाख वद दस अमदावाद |
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने असम के गुवाहाटी में डेरा डाले हुए पार्टी के बागी विधायकों से भावनात्मक अपील की कि वे मुंबई वापस आएं तथा जारी राजनीतिक संकट की समस्या का समाधान खोजने के लिए उनसे अपनी शिकायतों पर चर्चा करें। हालांकि विद्रोही नेताओं का नेतृत्व कर रहे राज्य मंत्री एकनाथ शिंदे ने परोक्ष रूप से नवीनतम प्रस्तावों को ठुकरा दिया।
ये भी पढ़ेंः महाराष्ट्र में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच फडनवीस पहुंचे दिल्ली, होने वाला है बड़ा खेल!
उद्धव ने यहां एक बयान में कहा, आप में से कुछ (विधायकों) के परिवार के सदस्यों ने मुझसे संपर्क किया और अपनी भावनाओं से अवगत कराया। मैं शिवसेना परिवार के मुखिया के रूप में आपकी भावनाओं का सम्मान करता हूं। उन्होंने कहा, परिवार के मुखिया के रूप में मैं आपको दिल की गहराइयों से कहता हूं कि भ्रम से छुटकारा पाने के लिए, इसका एक निश्चित रास्ता होगा, हम एक साथ बैठेंगे और इससे बाहर निकलने का रास्ता खोजेंगे।
उन्होंने कहा, किसी के गलत कामों के झांसे में न आएं, शिवसेना ने आपको जो सम्मान दिया है, वह कहीं नहीं मिल सकता। अगर आप आगे आकर बोलेंगे तो रास्ता निकल जाएगा। ठाकरे ने कहा, शिवसेना पार्टी प्रमुख और परिवार के मुखिया के रूप में, मैं अभी भी आपके बारे में चिंतित हूं। अंदर आओ, एक नजर डालें और आनंद लें। गौरतलब है कि राज्य के मंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के विद्रोहियों ने खुले तौर पर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के साथ संबंध तोड़ने तथा भारतीय जनता पार्टी के साथ जाने की मांग करते हुए कहा कि यह शिवसेना का स्वाभाविक गठबंधन सहयोगी है। शिंदे का दावा है कि उनके साथ निर्दलीय समेत करीब 50 विधायक हैं। पिछले एक हफ्ते से दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। साथ ही, शिवसेना कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर कई बागी नेताओं के कार्यालयों में तोड़फोड़ की और राज्य भर में बागी विधायकों के पोस्टरों पर काली स्याही लगा दी, जबकि बागियों के समर्थक भी राज्य में अपने-अपने विधायकों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं।
| महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने असम के गुवाहाटी में डेरा डाले हुए पार्टी के बागी विधायकों से भावनात्मक अपील की कि वे मुंबई वापस आएं तथा जारी राजनीतिक संकट की समस्या का समाधान खोजने के लिए उनसे अपनी शिकायतों पर चर्चा करें। हालांकि विद्रोही नेताओं का नेतृत्व कर रहे राज्य मंत्री एकनाथ शिंदे ने परोक्ष रूप से नवीनतम प्रस्तावों को ठुकरा दिया। ये भी पढ़ेंः महाराष्ट्र में राजनीतिक उथल-पुथल के बीच फडनवीस पहुंचे दिल्ली, होने वाला है बड़ा खेल! उद्धव ने यहां एक बयान में कहा, आप में से कुछ के परिवार के सदस्यों ने मुझसे संपर्क किया और अपनी भावनाओं से अवगत कराया। मैं शिवसेना परिवार के मुखिया के रूप में आपकी भावनाओं का सम्मान करता हूं। उन्होंने कहा, परिवार के मुखिया के रूप में मैं आपको दिल की गहराइयों से कहता हूं कि भ्रम से छुटकारा पाने के लिए, इसका एक निश्चित रास्ता होगा, हम एक साथ बैठेंगे और इससे बाहर निकलने का रास्ता खोजेंगे। उन्होंने कहा, किसी के गलत कामों के झांसे में न आएं, शिवसेना ने आपको जो सम्मान दिया है, वह कहीं नहीं मिल सकता। अगर आप आगे आकर बोलेंगे तो रास्ता निकल जाएगा। ठाकरे ने कहा, शिवसेना पार्टी प्रमुख और परिवार के मुखिया के रूप में, मैं अभी भी आपके बारे में चिंतित हूं। अंदर आओ, एक नजर डालें और आनंद लें। गौरतलब है कि राज्य के मंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के विद्रोहियों ने खुले तौर पर कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ संबंध तोड़ने तथा भारतीय जनता पार्टी के साथ जाने की मांग करते हुए कहा कि यह शिवसेना का स्वाभाविक गठबंधन सहयोगी है। शिंदे का दावा है कि उनके साथ निर्दलीय समेत करीब पचास विधायक हैं। पिछले एक हफ्ते से दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। साथ ही, शिवसेना कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर कई बागी नेताओं के कार्यालयों में तोड़फोड़ की और राज्य भर में बागी विधायकों के पोस्टरों पर काली स्याही लगा दी, जबकि बागियों के समर्थक भी राज्य में अपने-अपने विधायकों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। |
Delhi Airport Water: दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को जल्द ही 90 लाख लीटर वाले दो वर्षा जल भंडारण टैंक की सुविधा मिल सकेगी। इसके लिए एयरपोर्ट पर दो वर्षा जल टैंक स्थापित किए जा रहे हैं। इस संबंध में एयरपोर्ट संचालक दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) ने मगंलवार को बयान जारी किया है।
बयान के मुताबिक, दो जलाशयों में से एक जलाशय का निर्माण टर्मिनल एक के पास और दूसरा टर्मिनल दो के पास किया जा रहा है। आने वाले मानसून में इनका परिचालन हो सकेगा। इससे हवाई अड्डे को 90 लाख लीटर वर्षा जल संग्रह करने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि डायल ने 350 से अधिक वर्षा जल संचयन स्थापित किए हैं। इसके अतिरिक्त 300 नई संरचनाओं को जोड़ा जा रहा है। इससे दिल्ली एयरपोर्ट को वॉटल पॉजिटिव एयरपोर्ट बनाने में मदद मिलेगी।
बयान में कहा गया है कि बारिश के पानी के संचय के लिए ये दो बड़े भूजल जलाशय दिल्ली हवाईअड्डे को वाटर-पॉजिटिव हवाईअड्डा बनाने की दिशा में एक और कदम साबित होंगे। अब तक टर्मिनल 1सी में जो फ्लाइट्स आ रही थीं उन्हें टर्मिनल 1 में शिफ्ट किया जा रहा है. दिल्ली एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इससे संबंधित सभी जानकारी शेयर की है.
पहली फ्लाइट गोवा से इंडिगो की उड़ान संख्या ई 6532 होगी. इस फ्लाइट के यात्रियों को टर्मिनल पर बिल्कुल नया अनुभव होगा. गोवा से आने वाले यात्रियों की यह खेप पहली बार टर्मिनल 1 के नए आगमन हॉल का लुत्फ ले सकेंगे. टर्मिनल 1 अब यात्रियों के लिए पूरी तरह से खोल दिया गया है. बता दें कि दिल्ली एयरपोर्ट के विस्तार और नए कलेवर में बनाने का काम काफी समय से चल रहा है. टर्मिनल 1 में सिर्फ घरेलू फ्लाइट्स ही आएंगी.
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| Delhi Airport Water: दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को जल्द ही नब्बे लाख लीटर वाले दो वर्षा जल भंडारण टैंक की सुविधा मिल सकेगी। इसके लिए एयरपोर्ट पर दो वर्षा जल टैंक स्थापित किए जा रहे हैं। इस संबंध में एयरपोर्ट संचालक दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने मगंलवार को बयान जारी किया है। बयान के मुताबिक, दो जलाशयों में से एक जलाशय का निर्माण टर्मिनल एक के पास और दूसरा टर्मिनल दो के पास किया जा रहा है। आने वाले मानसून में इनका परिचालन हो सकेगा। इससे हवाई अड्डे को नब्बे लाख लीटर वर्षा जल संग्रह करने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि डायल ने तीन सौ पचास से अधिक वर्षा जल संचयन स्थापित किए हैं। इसके अतिरिक्त तीन सौ नई संरचनाओं को जोड़ा जा रहा है। इससे दिल्ली एयरपोर्ट को वॉटल पॉजिटिव एयरपोर्ट बनाने में मदद मिलेगी। बयान में कहा गया है कि बारिश के पानी के संचय के लिए ये दो बड़े भूजल जलाशय दिल्ली हवाईअड्डे को वाटर-पॉजिटिव हवाईअड्डा बनाने की दिशा में एक और कदम साबित होंगे। अब तक टर्मिनल एकसी में जो फ्लाइट्स आ रही थीं उन्हें टर्मिनल एक में शिफ्ट किया जा रहा है. दिल्ली एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इससे संबंधित सभी जानकारी शेयर की है. पहली फ्लाइट गोवा से इंडिगो की उड़ान संख्या ई छः हज़ार पाँच सौ बत्तीस होगी. इस फ्लाइट के यात्रियों को टर्मिनल पर बिल्कुल नया अनुभव होगा. गोवा से आने वाले यात्रियों की यह खेप पहली बार टर्मिनल एक के नए आगमन हॉल का लुत्फ ले सकेंगे. टर्मिनल एक अब यात्रियों के लिए पूरी तरह से खोल दिया गया है. बता दें कि दिल्ली एयरपोर्ट के विस्तार और नए कलेवर में बनाने का काम काफी समय से चल रहा है. टर्मिनल एक में सिर्फ घरेलू फ्लाइट्स ही आएंगी. Delhi News in Hindi , Times now के हिंदी न्यूज़ वेबसाइट -Times Now Navbharat पर। साथ ही और भी Hindi News के अपडेट के लिए हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें। |
बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस अपने स्टाइलिश लुक को लेकर अक्सर सुर्खियों में छाई रहती हैं।
एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव हैं जहां आए दिन अपने हुस्न का जलवा बिखेरती रहती हैं।
एक्ट्रेस ने एक बार फिर से सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें शेयर की है जो इस वक्त काफी तेजी से वायरल हो रही है।
जैकलीन फर्नांडिस इन तस्वीरों में स्पोर्टी लुक में नजर आ रही हैं।
जैकलीन ने व्हाइट कलर की टी-शर्ट के साथ ब्लैक हॉफ पैंट कैरी किया है।
| बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस अपने स्टाइलिश लुक को लेकर अक्सर सुर्खियों में छाई रहती हैं। एक्ट्रेस सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव हैं जहां आए दिन अपने हुस्न का जलवा बिखेरती रहती हैं। एक्ट्रेस ने एक बार फिर से सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें शेयर की है जो इस वक्त काफी तेजी से वायरल हो रही है। जैकलीन फर्नांडिस इन तस्वीरों में स्पोर्टी लुक में नजर आ रही हैं। जैकलीन ने व्हाइट कलर की टी-शर्ट के साथ ब्लैक हॉफ पैंट कैरी किया है। |
शहरी विकास विभाग ने यूपी के शहरी स्थानीय निकायों को शहरों और कस्बों में संचालित श्मशान घाटों पर लकड़ी के विकल्प के रूप में गाय के गोबर आधारित जैव ईंधन, छर्रों और ब्रिकेट का उपयोग करने के लिए कहा है।
एक हरित पहल में, जलने वाली लकड़ी के बजाय, गाय के गोबर से बने लट्ठों का उपयोग शवों के दाह संस्कार के लिए किया जा रहा है। शहरी विकास विभाग ने यूपी के शहरी स्थानीय निकायों को शहरों और कस्बों में संचालित श्मशान घाटों पर लकड़ी के विकल्प के रूप में छर्रों और ब्रिकेट का उपयोग करने के लिए कहा है। गाय के गोबर आधारित जैव ईंधन को शुरू करने का निर्णय यूपी सरकार द्वारा लिया गया है क्योंकि गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और बिहार पहले से ही शवों को जलाने के लिए गोबर के लट्ठों और छर्रों का उपयोग कर रहे हैं।
दरअसल, यूपी के मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में पिछले चार सालों से गोबर आधारित जैव ईंधन का उपयोग कर शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। विशेष सचिव, शहरी विकास, राजेंद्र पेंसिया ने 17 नगर आयुक्तों और शहरी स्थानीय निकायों के कार्यकारी प्रमुखों को लिखा कि वे नागरिक निकायों द्वारा चलाए जा रहे श्मशान घाटों में ब्रिकेट के उपयोग को बढ़ावा देना शुरू करें। विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि इस कदम से न केवल पर्यावरण पर तनाव कम होगा, बल्कि इससे गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद मिलेगी। यदि गोबर के लट्ठों की मांग बढ़ती है, तो गौशाला संचालक ब्रिकेट बनाने के लिए आवश्यक संसाधनों और उपकरणों की खरीद करेंगे।
जलने वाली लकड़ी के साथ गोबर के लट्ठों का उपयोग करने का विचार वृंदावन स्थित गाय कल्याण संगठन द्वारा लिखे एक पत्र के आधार लिया गया। पत्र में इस बारे में बताया गया था कि कैसे महामारी के दौरान जलने वाली लकड़ी की कमी के कारण शवों को जलाने के लिए बड़ी मात्रा में गोबर के लट्ठों का इस्तेमाल किया गया था। लकड़ी के लट्ठों के उपयोग को कम करने के लिए श्मशान घाटों में गोबर के लट्ठे इस्तेमाल किए।
लखनऊ के तकरोही इलाके में एक निजी गाय आश्रय के संचालक, विजय गुप्ता ने कहा कि एक शव को जलाने के लिए औसतन 300 किलोग्राम से 500 किलोग्राम लकड़ी की आवश्यकता होती है। गोबर आधारित जैव ईंधन जलने वाली लकड़ी के दैनिक उपयोग को कम से कम 35 से 40 प्रतिशत तक कम कर सकता है। वहीं गोबर के लॉग तैयार करने के लिए मशीनें 40,000 रुपये से लेकर 1. 5 लाख रुपये तक की रेंज में उपलब्ध हैं और अगर नगर निकाय गंभीरता से गोबर के लॉग के उपयोग को बढ़ावा देना चाहते हैं, तो इन्हें खरीदा जा सकता है।
| शहरी विकास विभाग ने यूपी के शहरी स्थानीय निकायों को शहरों और कस्बों में संचालित श्मशान घाटों पर लकड़ी के विकल्प के रूप में गाय के गोबर आधारित जैव ईंधन, छर्रों और ब्रिकेट का उपयोग करने के लिए कहा है। एक हरित पहल में, जलने वाली लकड़ी के बजाय, गाय के गोबर से बने लट्ठों का उपयोग शवों के दाह संस्कार के लिए किया जा रहा है। शहरी विकास विभाग ने यूपी के शहरी स्थानीय निकायों को शहरों और कस्बों में संचालित श्मशान घाटों पर लकड़ी के विकल्प के रूप में छर्रों और ब्रिकेट का उपयोग करने के लिए कहा है। गाय के गोबर आधारित जैव ईंधन को शुरू करने का निर्णय यूपी सरकार द्वारा लिया गया है क्योंकि गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और बिहार पहले से ही शवों को जलाने के लिए गोबर के लट्ठों और छर्रों का उपयोग कर रहे हैं। दरअसल, यूपी के मथुरा-वृंदावन क्षेत्र में पिछले चार सालों से गोबर आधारित जैव ईंधन का उपयोग कर शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। विशेष सचिव, शहरी विकास, राजेंद्र पेंसिया ने सत्रह नगर आयुक्तों और शहरी स्थानीय निकायों के कार्यकारी प्रमुखों को लिखा कि वे नागरिक निकायों द्वारा चलाए जा रहे श्मशान घाटों में ब्रिकेट के उपयोग को बढ़ावा देना शुरू करें। विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि इस कदम से न केवल पर्यावरण पर तनाव कम होगा, बल्कि इससे गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद मिलेगी। यदि गोबर के लट्ठों की मांग बढ़ती है, तो गौशाला संचालक ब्रिकेट बनाने के लिए आवश्यक संसाधनों और उपकरणों की खरीद करेंगे। जलने वाली लकड़ी के साथ गोबर के लट्ठों का उपयोग करने का विचार वृंदावन स्थित गाय कल्याण संगठन द्वारा लिखे एक पत्र के आधार लिया गया। पत्र में इस बारे में बताया गया था कि कैसे महामारी के दौरान जलने वाली लकड़ी की कमी के कारण शवों को जलाने के लिए बड़ी मात्रा में गोबर के लट्ठों का इस्तेमाल किया गया था। लकड़ी के लट्ठों के उपयोग को कम करने के लिए श्मशान घाटों में गोबर के लट्ठे इस्तेमाल किए। लखनऊ के तकरोही इलाके में एक निजी गाय आश्रय के संचालक, विजय गुप्ता ने कहा कि एक शव को जलाने के लिए औसतन तीन सौ किलोग्रामग्राम से पाँच सौ किलोग्रामग्राम लकड़ी की आवश्यकता होती है। गोबर आधारित जैव ईंधन जलने वाली लकड़ी के दैनिक उपयोग को कम से कम पैंतीस से चालीस प्रतिशत तक कम कर सकता है। वहीं गोबर के लॉग तैयार करने के लिए मशीनें चालीस,शून्य रुपयापये से लेकर एक. पाँच लाख रुपये तक की रेंज में उपलब्ध हैं और अगर नगर निकाय गंभीरता से गोबर के लॉग के उपयोग को बढ़ावा देना चाहते हैं, तो इन्हें खरीदा जा सकता है। |
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में आगामी पांच अगस्त को राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए पहुंच रहे है। प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए अयोध्या भी पूरी तरह से सजकर तैयार है।
लखनऊः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में आगामी पांच अगस्त को राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए पहुंच रहे है। प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए अयोध्या भी पूरी तरह से सजकर तैयार है। कोविड-19 से बचाव के लिए कार्यक्रम स्थल को स्पेशल टीम से सैनिटाइज करवाया जा रहा है। इसी बीच खबर आ रही है कि राम मंदिर आंदोलन के अग्रणी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और डा. मुरली मनोहर जोशी अयोध्या नहीं पहुंचेंगे बल्कि वीड़ियों कांफ्रसिंग के जरिए भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे। फिलहाल अयोध्या का जिला प्रशासन वीडियों कांफ्रेसिंग की व्यवस्था पुख्ता करने में लगा है।
सूत्रों के मुताबिक आडवाणी और डा. जोशी के समेत करीब एक दर्जन नेता व संत, जो कि बुजुर्ग है, उनके लिए वीडियों कांफ्रेसिंग की व्यवस्था की जा रही है। देश और प्रदेश में फैले कोरोना संक्रमण से बुजुर्गों को अधिक खतरा होने की आशंका के कारण ऐसा किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण का असर इस भूमिपूजन कार्यक्रम पर भी देखने को मिल रहा है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा पहले बनायी गई 200 लोगों की आमंत्रण सूची को भी अब कम करके 170 तक लाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा ट्रस्ट ने राम मंदिर आंदोलन से जुडे़ कारसेवकों व अन्य लोगों से भी अपनी भावनायें सोशल मीडिया के जरिए व्यक्त करने की अपील की है।
फिलहाल, अयोध्या अब पूरी तरह से सजकर तैयार हो रही है। रामनगरी का रूप-रंग बदल चुका है, अखाड़े-आश्रम सजने लगे हैं। नंदीग्राम स्थित रामजानकी मंदिर सहित हर चैक-चैराहों पर स्थित मंदिरों में संकीर्तन के सुर गूंज रहे हैं। जिस मार्ग से प्रधानमंत्री को राम जन्मभूमि परिसर और हनुमान गढ़ी जाना है, उसके दोनों तरफ के भवनों को पीले रंग से पेंट करके राम कथा के प्रसंगों के चित्र उकेरे गए हैं। मणिदासजी की छावनी में देशभर से आई भेंट स्वीकार की जा रही है। भूमिपूजन के बाद प्रसाद वितरण के लिए रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास के आश्रम में थोक के भाव में लड्डू भी तैयार किए जा रहे हैं। हनुमानगढ़ी चैराहे से रामजन्मभूमि की ओर जाने वाले मार्ग और उसके किनारे को चित्रों और प्रवेश द्वार से सजाया गया है। राम की पौड़ी भी रंग-बिरंगी रोशनी से दमक रही है।
देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
| प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में आगामी पांच अगस्त को राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए पहुंच रहे है। प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए अयोध्या भी पूरी तरह से सजकर तैयार है। लखनऊः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में आगामी पांच अगस्त को राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए पहुंच रहे है। प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए अयोध्या भी पूरी तरह से सजकर तैयार है। कोविड-उन्नीस से बचाव के लिए कार्यक्रम स्थल को स्पेशल टीम से सैनिटाइज करवाया जा रहा है। इसी बीच खबर आ रही है कि राम मंदिर आंदोलन के अग्रणी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी और डा. मुरली मनोहर जोशी अयोध्या नहीं पहुंचेंगे बल्कि वीड़ियों कांफ्रसिंग के जरिए भूमि पूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे। फिलहाल अयोध्या का जिला प्रशासन वीडियों कांफ्रेसिंग की व्यवस्था पुख्ता करने में लगा है। सूत्रों के मुताबिक आडवाणी और डा. जोशी के समेत करीब एक दर्जन नेता व संत, जो कि बुजुर्ग है, उनके लिए वीडियों कांफ्रेसिंग की व्यवस्था की जा रही है। देश और प्रदेश में फैले कोरोना संक्रमण से बुजुर्गों को अधिक खतरा होने की आशंका के कारण ऐसा किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण का असर इस भूमिपूजन कार्यक्रम पर भी देखने को मिल रहा है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा पहले बनायी गई दो सौ लोगों की आमंत्रण सूची को भी अब कम करके एक सौ सत्तर तक लाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा ट्रस्ट ने राम मंदिर आंदोलन से जुडे़ कारसेवकों व अन्य लोगों से भी अपनी भावनायें सोशल मीडिया के जरिए व्यक्त करने की अपील की है। फिलहाल, अयोध्या अब पूरी तरह से सजकर तैयार हो रही है। रामनगरी का रूप-रंग बदल चुका है, अखाड़े-आश्रम सजने लगे हैं। नंदीग्राम स्थित रामजानकी मंदिर सहित हर चैक-चैराहों पर स्थित मंदिरों में संकीर्तन के सुर गूंज रहे हैं। जिस मार्ग से प्रधानमंत्री को राम जन्मभूमि परिसर और हनुमान गढ़ी जाना है, उसके दोनों तरफ के भवनों को पीले रंग से पेंट करके राम कथा के प्रसंगों के चित्र उकेरे गए हैं। मणिदासजी की छावनी में देशभर से आई भेंट स्वीकार की जा रही है। भूमिपूजन के बाद प्रसाद वितरण के लिए रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास के आश्रम में थोक के भाव में लड्डू भी तैयार किए जा रहे हैं। हनुमानगढ़ी चैराहे से रामजन्मभूमि की ओर जाने वाले मार्ग और उसके किनारे को चित्रों और प्रवेश द्वार से सजाया गया है। राम की पौड़ी भी रंग-बिरंगी रोशनी से दमक रही है। देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें। |
यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Prasuvix 10 Mg Tablet की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Prasuvix 10 Mg Tablet की खुराक अलग हो सकती है।
क्या Prasuvix 10 Mg Tablet का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है?
गर्भवती स्त्रियों पर Prasuvix के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। गर्भवती महिलाएं Prasuvix के दुष्प्रभाव महसूस करें, तो इसे लेना तुरंत बंद कर दें और डॉक्टर से पूछने के बाद ही लें।
क्या Prasuvix 10 Mg Tablet का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है?
Prasuvix के स्तनपान कराने वाली स्त्रियों पर घातक दुष्प्रभाव होते हैं। इस कारण डॉक्टर से पूछे बिना इसका सेवन न करें।
Prasuvix 10 Mg Tablet का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है?
किडनी पर Prasuvix के खराब प्रभावों को जाने बिना भी आप इसका सेवन कर सकते हैं, क्योंकि इसका हानिकारक प्रभाव बेहद कम है।
Prasuvix 10 Mg Tablet का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है?
Prasuvix का सेवन करना आपके शरीर पर बहुत ही कम प्रभाव डालता है।
क्या ह्रदय पर Prasuvix 10 Mg Tablet का प्रभाव पड़ता है?
कुछ मामलों में Prasuvix हृदय पर साइड इफेक्ट दिखा देती है। लेकिन यह प्रभाव मामूली रूप से होगा।
क्या Prasuvix 10 Mg Tablet आदत या लत बन सकती है?
नहीं, लेकिन फिर भी आप Prasuvix 10 Mg Tablet को लेने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछें।
क्या Prasuvix 10 Mg Tablet को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है?
Prasuvix 10 Mg Tablet को खाने के बाद आपको वाहन चलाने व किसी मशीन पर काम नहीं करना चाहिए, यह खतरनाक हो सकता है।
क्या Prasuvix 10 Mg Tablet को लेना सुरखित है?
हां, डॉक्टरी सलाह के बाद।
क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Prasuvix 10 Mg Tablet इस्तेमाल की जा सकती है?
मस्तिष्क विकारों में Prasuvix 10 Mg Tablet काम नहीं कर पाती है।
क्या Prasuvix 10 Mg Tablet को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है?
Prasuvix 10 Mg Tablet और खाने को साथ में लेने से कोई परेशानी नहीं होती है।
जब Prasuvix 10 Mg Tablet ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या?
इसके बारे में फिलहाल कोई शोध कार्य नहीं किया गया है। सही जानकारी मौजूद न होने की वजह से Prasuvix 10 Mg Tablet का क्या असर होगा इस विषय पर अनुमान लगा पाना मुश्किल होगा।
US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Effient™(prasugrel)
| यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Prasuvix दस Mg Tablet की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Prasuvix दस Mg Tablet की खुराक अलग हो सकती है। क्या Prasuvix दस Mg Tablet का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? गर्भवती स्त्रियों पर Prasuvix के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। गर्भवती महिलाएं Prasuvix के दुष्प्रभाव महसूस करें, तो इसे लेना तुरंत बंद कर दें और डॉक्टर से पूछने के बाद ही लें। क्या Prasuvix दस Mg Tablet का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? Prasuvix के स्तनपान कराने वाली स्त्रियों पर घातक दुष्प्रभाव होते हैं। इस कारण डॉक्टर से पूछे बिना इसका सेवन न करें। Prasuvix दस Mg Tablet का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? किडनी पर Prasuvix के खराब प्रभावों को जाने बिना भी आप इसका सेवन कर सकते हैं, क्योंकि इसका हानिकारक प्रभाव बेहद कम है। Prasuvix दस Mg Tablet का जिगर पर क्या असर होता है? Prasuvix का सेवन करना आपके शरीर पर बहुत ही कम प्रभाव डालता है। क्या ह्रदय पर Prasuvix दस Mg Tablet का प्रभाव पड़ता है? कुछ मामलों में Prasuvix हृदय पर साइड इफेक्ट दिखा देती है। लेकिन यह प्रभाव मामूली रूप से होगा। क्या Prasuvix दस Mg Tablet आदत या लत बन सकती है? नहीं, लेकिन फिर भी आप Prasuvix दस Mg Tablet को लेने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछें। क्या Prasuvix दस Mg Tablet को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? Prasuvix दस Mg Tablet को खाने के बाद आपको वाहन चलाने व किसी मशीन पर काम नहीं करना चाहिए, यह खतरनाक हो सकता है। क्या Prasuvix दस Mg Tablet को लेना सुरखित है? हां, डॉक्टरी सलाह के बाद। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Prasuvix दस Mg Tablet इस्तेमाल की जा सकती है? मस्तिष्क विकारों में Prasuvix दस Mg Tablet काम नहीं कर पाती है। क्या Prasuvix दस Mg Tablet को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? Prasuvix दस Mg Tablet और खाने को साथ में लेने से कोई परेशानी नहीं होती है। जब Prasuvix दस Mg Tablet ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? इसके बारे में फिलहाल कोई शोध कार्य नहीं किया गया है। सही जानकारी मौजूद न होने की वजह से Prasuvix दस Mg Tablet का क्या असर होगा इस विषय पर अनुमान लगा पाना मुश्किल होगा। US Food and Drug Administration [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Effient™ |
पाकिस्तान की टिप्पणियों को अलग करते हुए संयुक्त सचिव ने कहा कि मैं एक प्रतिनिधिमंडल को जवाब देने के लिए विवश हूं. इसने मेरे देश के खिलाफ झूठे आरोप लगाने के लिए इस मंच का दुरुपयोग करने के लिए फिर से चुना है.
यूएनईएस में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र की बैठक में पाकिस्तान ने भारत में इस्लामोफोबिया का जिक्र किया. पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भारत ने कश्मीर और अल्पसंख्यकों के बारे में टिप्पणी की. यहां तो जवाब मिलता तय ही था. संयुक्त सचिव श्रीनिवास गोत्रू ने भरी सभा में पाकिस्तान की बोलती बंद कर दी. गोत्रू ने कहा कि यह विडंबना है कि पाकिस्तान अल्पसंख्यकों के अधिकारों के बारे में बात कर रहा है. पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन होता रहा है और इसका लंबा इतिहास है. इसे पूरी दुनिया ने भी देखा है.
गोत्रू ने पाकिस्तान को खरीखोटी सुनाते हुए कहा, 'पाकिस्तान ने अपने अल्पसंख्यकों को खत्म कर दिया है. पाकिस्तान लगातार सिखों, हिंदुओं, ईसाइयों और अहमदिया मुसलमानों के अधिकारों का घोर उल्लंघन कर रहा है. पाकिस्तान में हजारों महिलाओं और बच्चों, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों को अपहरण, जबरन विवाह और धर्म परिवर्तन का शिकार बनाया गया है.
भारत के संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक संयुक्त सचिव श्रीनिवास गोत्रू ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर एक उच्च स्तरीय बैठक में यह बात कही. भारत के संयुक्त सचिव ने कहा कि यह विडंबना है कि पाकिस्तान अल्पसंख्यक अधिकारों के मुद्दे को उठा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत में अल्पसंख्यक कल्याण के लिए एक विशेष मंत्रालय है जो धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों की देखभाल करता है. सचिव ने कहा कि पाकिस्तान का इस मुद्दे को उठाना 'अद्भुत' है.
गोत्रू यहीं नहीं रूके यह विडंबना है कि पाकिस्तान अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात कर रहा है. एक ऐसा देश जिसने अपने शर्मनाक रिकॉर्ड को छिपाने के लिए अपना डेटा प्रकाशित करना बंद कर दिया है, यह आश्चर्यजनक है कि उन्होंने इस विषय को उठाया. उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि पाकिस्तान ने अपने अल्पसंख्यकों के साथ क्या किया है. इनमें से कुछ अल्पसंख्यक पाकिस्तान में विलुप्त हो गए हैं. आज भी पाकिस्तान अधिकारों का गंभीर उल्लंघन कर रहा है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने संयुक्त राष्ट्र में दावा किया था कि भारत एक हिंदू राज्य में बदल रहा है। आज इस तरह के इस्लामोफोबिया की सबसे बुरी अभिव्यक्तियों में से एक हिंदुत्व से प्रेरित भारत में है. मुसलमानों के खिलाफ नफरत की विचारधारा से प्रेरित सत्तारूढ़ भाजपा-आरएसएस शासन भारत की इस्लामी विरासत को खत्म करने और बदलने के लिए अपनी सदियों पुरानी योजना को क्रियान्वित कर रहा है.
| पाकिस्तान की टिप्पणियों को अलग करते हुए संयुक्त सचिव ने कहा कि मैं एक प्रतिनिधिमंडल को जवाब देने के लिए विवश हूं. इसने मेरे देश के खिलाफ झूठे आरोप लगाने के लिए इस मंच का दुरुपयोग करने के लिए फिर से चुना है. यूएनईएस में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र की बैठक में पाकिस्तान ने भारत में इस्लामोफोबिया का जिक्र किया. पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भारत ने कश्मीर और अल्पसंख्यकों के बारे में टिप्पणी की. यहां तो जवाब मिलता तय ही था. संयुक्त सचिव श्रीनिवास गोत्रू ने भरी सभा में पाकिस्तान की बोलती बंद कर दी. गोत्रू ने कहा कि यह विडंबना है कि पाकिस्तान अल्पसंख्यकों के अधिकारों के बारे में बात कर रहा है. पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन होता रहा है और इसका लंबा इतिहास है. इसे पूरी दुनिया ने भी देखा है. गोत्रू ने पाकिस्तान को खरीखोटी सुनाते हुए कहा, 'पाकिस्तान ने अपने अल्पसंख्यकों को खत्म कर दिया है. पाकिस्तान लगातार सिखों, हिंदुओं, ईसाइयों और अहमदिया मुसलमानों के अधिकारों का घोर उल्लंघन कर रहा है. पाकिस्तान में हजारों महिलाओं और बच्चों, विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों को अपहरण, जबरन विवाह और धर्म परिवर्तन का शिकार बनाया गया है. भारत के संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक संयुक्त सचिव श्रीनिवास गोत्रू ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र में अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर एक उच्च स्तरीय बैठक में यह बात कही. भारत के संयुक्त सचिव ने कहा कि यह विडंबना है कि पाकिस्तान अल्पसंख्यक अधिकारों के मुद्दे को उठा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत में अल्पसंख्यक कल्याण के लिए एक विशेष मंत्रालय है जो धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों की देखभाल करता है. सचिव ने कहा कि पाकिस्तान का इस मुद्दे को उठाना 'अद्भुत' है. गोत्रू यहीं नहीं रूके यह विडंबना है कि पाकिस्तान अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात कर रहा है. एक ऐसा देश जिसने अपने शर्मनाक रिकॉर्ड को छिपाने के लिए अपना डेटा प्रकाशित करना बंद कर दिया है, यह आश्चर्यजनक है कि उन्होंने इस विषय को उठाया. उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि पाकिस्तान ने अपने अल्पसंख्यकों के साथ क्या किया है. इनमें से कुछ अल्पसंख्यक पाकिस्तान में विलुप्त हो गए हैं. आज भी पाकिस्तान अधिकारों का गंभीर उल्लंघन कर रहा है. पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने संयुक्त राष्ट्र में दावा किया था कि भारत एक हिंदू राज्य में बदल रहा है। आज इस तरह के इस्लामोफोबिया की सबसे बुरी अभिव्यक्तियों में से एक हिंदुत्व से प्रेरित भारत में है. मुसलमानों के खिलाफ नफरत की विचारधारा से प्रेरित सत्तारूढ़ भाजपा-आरएसएस शासन भारत की इस्लामी विरासत को खत्म करने और बदलने के लिए अपनी सदियों पुरानी योजना को क्रियान्वित कर रहा है. |
मुंबईः महाराष्ट्र सरकार ने लॉकडाउन को लेकर बड़ा फैसला किया है। राज्य की उद्धव सरकार ने 31 मई तक लॉकडाउन बढ़ाने का फैसला लिया है। दरअसल महाराष्ट्र इस समय देश में कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित राज्य है जहां 30 हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। दरअसल केंद्र सरकार द्वारा जारी देशव्यापी लॉकडाउन की अवधि आज समाप्त हो रही है और उम्मीद की जा रही है कि आज ही लॉकडाउन 4. 0 को लेकर नई गाइडलाइंस जारी होगी।
दरअसल महाराष्ट्र इस समय कोरोना से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। शनिवार को ही महाराष्ट्र में कोविड-19 के 1,606 नये मामले सामने आए जिसके साथ राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या 30 हजार के पार (30706) हो गई है। वहीं महाराष्ट्र में शनिवार को कोरोना वायरस से मुंबई में 41 मौतों सहित 67 लोगों ने जान गंवाई जिससे राज्य में कुल मृतकों की संख्या 1,135 हो गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि नये मामले के साथ कुल संक्रमितों की संख्या 30,706 तब पहुंच गई है। वहीं शनिवार को 524 लोगों को संक्रमण मुक्त होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दी गई। इसके साथ ही अबतक 7,088 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं। राज्य के मुंबई, पुणे, मालेगांव, अमरावती समेत अन्य शहरों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की कंपनियां तैनात की गई हैं।
| मुंबईः महाराष्ट्र सरकार ने लॉकडाउन को लेकर बड़ा फैसला किया है। राज्य की उद्धव सरकार ने इकतीस मई तक लॉकडाउन बढ़ाने का फैसला लिया है। दरअसल महाराष्ट्र इस समय देश में कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित राज्य है जहां तीस हजार से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। दरअसल केंद्र सरकार द्वारा जारी देशव्यापी लॉकडाउन की अवधि आज समाप्त हो रही है और उम्मीद की जा रही है कि आज ही लॉकडाउन चार. शून्य को लेकर नई गाइडलाइंस जारी होगी। दरअसल महाराष्ट्र इस समय कोरोना से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। शनिवार को ही महाराष्ट्र में कोविड-उन्नीस के एक,छः सौ छः नये मामले सामने आए जिसके साथ राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या तीस हजार के पार हो गई है। वहीं महाराष्ट्र में शनिवार को कोरोना वायरस से मुंबई में इकतालीस मौतों सहित सरसठ लोगों ने जान गंवाई जिससे राज्य में कुल मृतकों की संख्या एक,एक सौ पैंतीस हो गई है। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि नये मामले के साथ कुल संक्रमितों की संख्या तीस,सात सौ छः तब पहुंच गई है। वहीं शनिवार को पाँच सौ चौबीस लोगों को संक्रमण मुक्त होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दी गई। इसके साथ ही अबतक सात,अठासी लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं। राज्य के मुंबई, पुणे, मालेगांव, अमरावती समेत अन्य शहरों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की कंपनियां तैनात की गई हैं। |
इस बार दिवाली आपके लिए कई मायनों में खास होगी। इस वर्ष 131 साल बाद एक साथ कई शुभ संयोग बन रहे हैं। जिसमें ऐसा करने से आपकी किस्मत का ताला खुल जाएगा।
इस बार दीपावली पर 131 साल बाद ऐसा योग बना है, जब स्वाति नक्षत्र, पद्यम और अमृत योग एक साथ रहेंगे। साथ ही तुला राशि में सूर्य, बुध और चंद्रमा का त्रिकोण बन रहा है।
ज्योतिषाचार्य डा. सुशांतराज के मुताबिक, इस दिन पद्यम योग, सूर्य और बुध की एक साथ युक्ति होने से बुधादित्य योग बन रहा है। इस संयोग के चलते व्यापारिक वर्ग के साथ आम लोगों के लिए भी सुख संपन्नता, कल्याण और धन का लाभ मिलेगा।
उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार अमावस्या तिथि गुरुवार और चित्रा नक्षत्र का मिलन 27 वर्ष बाद जबकि चतुर्ग्रही योग का संयोग 12 वर्ष बाद बन रहा है। सूर्य, चंद्रमा, बुध और बृहस्पति चारों ग्रह तुला राशि पर रहेंगे। इस संयोग में खरीदारी करना शुभ माना जाता है।
| इस बार दिवाली आपके लिए कई मायनों में खास होगी। इस वर्ष एक सौ इकतीस साल बाद एक साथ कई शुभ संयोग बन रहे हैं। जिसमें ऐसा करने से आपकी किस्मत का ताला खुल जाएगा। इस बार दीपावली पर एक सौ इकतीस साल बाद ऐसा योग बना है, जब स्वाति नक्षत्र, पद्यम और अमृत योग एक साथ रहेंगे। साथ ही तुला राशि में सूर्य, बुध और चंद्रमा का त्रिकोण बन रहा है। ज्योतिषाचार्य डा. सुशांतराज के मुताबिक, इस दिन पद्यम योग, सूर्य और बुध की एक साथ युक्ति होने से बुधादित्य योग बन रहा है। इस संयोग के चलते व्यापारिक वर्ग के साथ आम लोगों के लिए भी सुख संपन्नता, कल्याण और धन का लाभ मिलेगा। उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार अमावस्या तिथि गुरुवार और चित्रा नक्षत्र का मिलन सत्ताईस वर्ष बाद जबकि चतुर्ग्रही योग का संयोग बारह वर्ष बाद बन रहा है। सूर्य, चंद्रमा, बुध और बृहस्पति चारों ग्रह तुला राशि पर रहेंगे। इस संयोग में खरीदारी करना शुभ माना जाता है। |
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने तीन साल पहले झारखंड में भाकपा (माओवादी) के हमले में हुई पांच पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में एक विस्फोटक सप्लायर के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दायर किया है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने झारखंड में तीन साल पहले भाकपा (माओवादी) द्वारा किए गए हमले के लिए विस्फोटक की सप्लाई करने वाले व्यक्ति के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किया है। इस हमले में पांच पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
एनआईए के प्रवक्ता ने बताया कि भाकपा (माओवादी) के एक 'ओवरग्राउंड वर्कर' अब्राहम तूती के खिलाफ गुरुवार को रांची स्थित स्पेशल एनआईए कोर्ट में पूरक आरोप पत्र दाखिल किया गया।
इससे पहले एनआईए ने इस मामले में 25 आरोपियों के खिलाफ 15 अप्रैल 2021 और तीन अगस्त 2021 को आरोप पत्र दाखिल किए थे। संघीय एजेंसी ने झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के कुकरुहाट में 14 जून 2019 को भाकपा (माओवादी) द्वारा किए गए हमले के बाद एफआईआर दर्ज की थी। इस हमले में पांच पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे और हमलावरों ने उनके हथियार लूट लिए थे।
एनआईए प्रवक्ता ने बताया कि जांच के दौरान खुलासा हुआ कि अब्राहम तूती आतंकवादी गतिविधि को अंजाम देने के लिए रणनीतिक मदद देने के साथ-साथ विस्फोटक की खरीद के लिए धन एकत्रित करने के काम में भी संलिप्त था।
एनआईए ने बताया कि तूती उर्फ 'सुकराम' के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), विस्फोटक सामग्री अधिनियम और एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया है।
| राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने तीन साल पहले झारखंड में भाकपा के हमले में हुई पांच पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में एक विस्फोटक सप्लायर के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दायर किया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने झारखंड में तीन साल पहले भाकपा द्वारा किए गए हमले के लिए विस्फोटक की सप्लाई करने वाले व्यक्ति के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किया है। इस हमले में पांच पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। एनआईए के प्रवक्ता ने बताया कि भाकपा के एक 'ओवरग्राउंड वर्कर' अब्राहम तूती के खिलाफ गुरुवार को रांची स्थित स्पेशल एनआईए कोर्ट में पूरक आरोप पत्र दाखिल किया गया। इससे पहले एनआईए ने इस मामले में पच्चीस आरोपियों के खिलाफ पंद्रह अप्रैल दो हज़ार इक्कीस और तीन अगस्त दो हज़ार इक्कीस को आरोप पत्र दाखिल किए थे। संघीय एजेंसी ने झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के कुकरुहाट में चौदह जून दो हज़ार उन्नीस को भाकपा द्वारा किए गए हमले के बाद एफआईआर दर्ज की थी। इस हमले में पांच पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे और हमलावरों ने उनके हथियार लूट लिए थे। एनआईए प्रवक्ता ने बताया कि जांच के दौरान खुलासा हुआ कि अब्राहम तूती आतंकवादी गतिविधि को अंजाम देने के लिए रणनीतिक मदद देने के साथ-साथ विस्फोटक की खरीद के लिए धन एकत्रित करने के काम में भी संलिप्त था। एनआईए ने बताया कि तूती उर्फ 'सुकराम' के खिलाफ भारतीय दंड संहिता , विस्फोटक सामग्री अधिनियम और एनडीपीएस एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया है। |
पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस का बम फूटा है जिसके तहत कोलकाता में हर दूसरा व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित मिल रहा है। अभी बंगाल में विधानसभा चुनाव भी चल रहे हैं। चुनाव के दौरान अब बंगाल में भी कोरोना के रिकॉर्डतोड़ मामले सामने आने लगे हैं। राज्य की राजधानी कोलकाता का हाल तो और भी काफी बुरा हो गया है। यहां कोरोना की आरटी-पीसीआर जांच करवा रहा हर दो में से एक शख्स पॉजिटिव पाया जा रहा है। राज्य स्तर की बात की जाए तो प्रत्येक 4 में से एक शख्स की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव निकल रही है। यह संख्या पिछले महीने की अपेक्षा में पांच गुना अधिक है। एक महीने पहले 20 कोरोना जांचों में सिर्फ एक शख्स की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई जा रही थी।
खबर है कि आरटी-पीसीआर टेस्ट करने वाले लैब के डाॅक्टरों का कहना है, कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों की लैब्स जोकि कोरोना जांच कर रही हैं, उनकी जांच में 45. 55 फीसदी पॉजिटिविटी रेट मिल रह है। वहीं, राज्य के अन्य शहरों में यह स्तर 24 फीसदी के आसपास है। एक महीने पहले सिर्फ पांच फीसदी ही था।
एक अप्रैल को बंगाल में 25766 लोगों की कोरोना टेस्टिंग हुई थी जिसमें सिर्फ 1274 लोग पॉजिटिव पाए गए थे। यह पॉजिटिविटी रेट 4. 9 फीसदी की थी। शनिवार को 55060 लोगों की जांच हुई, जिसमें से रिकॉर्ड 14281 लोग पॉजिटिव मिले। यह दर 25. 9 फीसदी है।
पश्चिम बंगाल में इन दिनों विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। चुनाव आयोग इस बार आठ चरणों में चुनाव करवा रहा है। सातवें चरण के लिए मतदान कल को 36 सीटों पर होगा। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच लगातार विभिन्न पार्टियों के नेता रैलियों को आयोजित करते रहे। हालांकि, बड़ी संख्या में आम जनता ने चुनावी रैलियों को रद्द किए जाने की भी मांग की, लेकिन आधे से ज्यादा चरण के मतदान बीत जाने के बाद चुनाव आयोग और दलों के नेताओं ने इस पर फैसले लिए। बीते गुरुवार को अंतिम फेज से सात दिन पहले चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में तत्काल प्रभाव से रोड शो और वाहन रैली पर रोक लगाई है। बैन लगाने के साथ-साथ चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि कई राजनीतिक दल के उम्मीदवार सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा मानदंडों का पालन नहीं कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने चुनावी सभा में अधिकतम 500 लोगों के शामिल होने की अनुमति दी है। आयोग का यह फैसला तब आया जब कुछ दिन पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान कोविड-19 रोधी नियमों के क्रियान्वयन को लेकर चुनाव आयोग से नाराजगी जताई थी।
पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस का बम फूटा है जिसके तहत कोलकाता में हर दूसरा व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित मिल रहा है। अभी बंगाल में विधानसभा चुनाव भी चल रहे हैं। चुनाव के दौरान अब बंगाल में भी कोरोना के रिकॉर्डतोड़ मामले सामने आने लगे हैं। राज्य की राजधानी कोलकाता का हाल तो और भी काफी बुरा हो गया है। यहां कोरोना की आरटी-पीसीआर जांच करवा रहा हर दो में से एक शख्स पॉजिटिव पाया जा रहा है। राज्य स्तर की बात की जाए तो प्रत्येक 4 में से एक शख्स की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव निकल रही है। यह संख्या पिछले महीने की अपेक्षा में पांच गुना अधिक है। एक महीने पहले 20 कोरोना जांचों में सिर्फ एक शख्स की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई जा रही थी।
| पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस का बम फूटा है जिसके तहत कोलकाता में हर दूसरा व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित मिल रहा है। अभी बंगाल में विधानसभा चुनाव भी चल रहे हैं। चुनाव के दौरान अब बंगाल में भी कोरोना के रिकॉर्डतोड़ मामले सामने आने लगे हैं। राज्य की राजधानी कोलकाता का हाल तो और भी काफी बुरा हो गया है। यहां कोरोना की आरटी-पीसीआर जांच करवा रहा हर दो में से एक शख्स पॉजिटिव पाया जा रहा है। राज्य स्तर की बात की जाए तो प्रत्येक चार में से एक शख्स की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव निकल रही है। यह संख्या पिछले महीने की अपेक्षा में पांच गुना अधिक है। एक महीने पहले बीस कोरोना जांचों में सिर्फ एक शख्स की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई जा रही थी। खबर है कि आरटी-पीसीआर टेस्ट करने वाले लैब के डाॅक्टरों का कहना है, कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों की लैब्स जोकि कोरोना जांच कर रही हैं, उनकी जांच में पैंतालीस. पचपन फीसदी पॉजिटिविटी रेट मिल रह है। वहीं, राज्य के अन्य शहरों में यह स्तर चौबीस फीसदी के आसपास है। एक महीने पहले सिर्फ पांच फीसदी ही था। एक अप्रैल को बंगाल में पच्चीस हज़ार सात सौ छयासठ लोगों की कोरोना टेस्टिंग हुई थी जिसमें सिर्फ एक हज़ार दो सौ चौहत्तर लोग पॉजिटिव पाए गए थे। यह पॉजिटिविटी रेट चार. नौ फीसदी की थी। शनिवार को पचपन हज़ार साठ लोगों की जांच हुई, जिसमें से रिकॉर्ड चौदह हज़ार दो सौ इक्यासी लोग पॉजिटिव मिले। यह दर पच्चीस. नौ फीसदी है। पश्चिम बंगाल में इन दिनों विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। चुनाव आयोग इस बार आठ चरणों में चुनाव करवा रहा है। सातवें चरण के लिए मतदान कल को छत्तीस सीटों पर होगा। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच लगातार विभिन्न पार्टियों के नेता रैलियों को आयोजित करते रहे। हालांकि, बड़ी संख्या में आम जनता ने चुनावी रैलियों को रद्द किए जाने की भी मांग की, लेकिन आधे से ज्यादा चरण के मतदान बीत जाने के बाद चुनाव आयोग और दलों के नेताओं ने इस पर फैसले लिए। बीते गुरुवार को अंतिम फेज से सात दिन पहले चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में तत्काल प्रभाव से रोड शो और वाहन रैली पर रोक लगाई है। बैन लगाने के साथ-साथ चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि कई राजनीतिक दल के उम्मीदवार सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा मानदंडों का पालन नहीं कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने चुनावी सभा में अधिकतम पाँच सौ लोगों के शामिल होने की अनुमति दी है। आयोग का यह फैसला तब आया जब कुछ दिन पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान कोविड-उन्नीस रोधी नियमों के क्रियान्वयन को लेकर चुनाव आयोग से नाराजगी जताई थी। पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस का बम फूटा है जिसके तहत कोलकाता में हर दूसरा व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित मिल रहा है। अभी बंगाल में विधानसभा चुनाव भी चल रहे हैं। चुनाव के दौरान अब बंगाल में भी कोरोना के रिकॉर्डतोड़ मामले सामने आने लगे हैं। राज्य की राजधानी कोलकाता का हाल तो और भी काफी बुरा हो गया है। यहां कोरोना की आरटी-पीसीआर जांच करवा रहा हर दो में से एक शख्स पॉजिटिव पाया जा रहा है। राज्य स्तर की बात की जाए तो प्रत्येक चार में से एक शख्स की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव निकल रही है। यह संख्या पिछले महीने की अपेक्षा में पांच गुना अधिक है। एक महीने पहले बीस कोरोना जांचों में सिर्फ एक शख्स की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई जा रही थी। |
तत्त्वाधिगम के उपाय
यह कि मात्र शास्त्र होने के कारण ही हर एक पुस्तक प्रमाण और ग्राह्य नही कही जा सकती। अनेक टीकाकारोनेभी मूलग्रन्थका अभिप्राय समझनेमे भूले की है । अस्तु 17
- हमे यह तो मानना ही होगा कि शास्त्र पुरुषकृत हे । यद्यपि वे महापुरुष विशिष्ट जानी ओर लोक कल्याणकी सदुद्भावनावाले थे पर क्षायोपत्रमिकज्ञानवश या परम्परावा मतभेदकी गुजायग तो हो ही सकती है । ऐसे अनेक मतभेद गोम्मटसार आदिमे स्वय उल्लिखित हे । अत शास्त्र विषयक सम्यग्दर्शन भी प्राप्त करना होगा कि शात्रमे किस युगमे किस पात्रके लिए किस विवक्षासे क्या बात लिखी गई है उनका ऐतिहासिक पर्यवेक्षण भी करना होगा । दर्शनशास्त्र के ग्रन्थोमे खण्डन मण्डन के प्रसगमे तत्कालीन या पूर्वकालीन ग्रन्थोका परस्परम आदान-प्रदान पर्याप्त रूपसे हुआ है । अत आत्म-सशोधकको जैन सस्कृतिकी शास्त्र विषयक दृष्टि भी प्राप्त करनी होगी । हमारे यहा गुणकृत प्रमाणता है । गुणवान् वक्ताके द्वारा कहा गया वह शास्त्र जिसमे हमारी मूलधारासे विरोध न आता हो, प्रमाण है ।
আ জgood son somewone mom rephind
इसीतरह् हमे मन्दिर, सस्था, समाज, शरीर, जीवन, विवाह आदिका सम्यग्दर्शन करके सभी प्रवृ त्तियोकी पुनारचना आत्मसमत्वके आधारसे करनी चाहिए तभी मानव जातिका कल्याण और व्यक्तिकी मुक्ति हो सकेगी ।
तत्त्वाधिगम के उपाय"ज्ञान प्रमाणमात्मादेरुपायो न्यास इध्यते ।
नयो ज्ञातुरभिप्रायो युक्तितोऽर्थपरिग्रहः ॥" -लघीय० ।
अकलकदेवने लघीयस्त्रय स्ववृत्तिमे बताया है कि जीवादि तत्त्वोका सर्वप्रथम निक्षेपोके द्वारा न्यास करना चाहिए, तभी प्रमाण और नयसे उनका यथावत् सम्यग्ज्ञान होता है । ज्ञान प्रमाण होता है । आत्मादिको रखनेका उपाय न्यास है। ज्ञाताके अभिप्रायको नय कहते है। प्रमाण और नय जानात्मक उपाय है और निक्षेप वस्तुरूप है । इसीलिए निक्षेपोमे नययोजना कपायपाहुडचूर्ण आदिमे की गई है कि अमुक नय अमुक निक्षेपको विषय करता है ।
निक्षेप - निक्षेपका अर्थ है रखना अर्थात् वस्तुका विश्लेषण कर उसकी स्थितिकी जितने प्रकारकी सुभावनाएँ हो सकती है उनको सामने रखना । जैसे 'राजाको बुलाओ' यहाँ राजा और बुलाना इन दो पदोका अर्थबोध करना है । राजा अनेक प्रकारके होते हैं यथा 'राजा' इस शब्दको भी राजा कहते है, पट्टीपर लिखे हुए 'राजा' इन अक्षरोको भी राजा कहते है, जिस व्यक्तिका नाम राजा है उसे भी राजा कहते है, राजाके चित्रको या मूर्तिको भी राजा कहते हैं, शतरजके मुहरो मे भी एक राजा होना ह जो आगे राजा होनेवाला है उसे भी लोग आजसे ही राजा कहन लगते है, गजाके ज्ञानको भी राजा कहते है, जो वर्तमानमे शासनाधिकारी है उसे भी राजा कहते है । अत हमें कौन राजा विवक्षित है वच्चा यदि राजा माँगता है तो उस समय किस राजाकी आवश्यकता होगी, गतरजके समय कोन राजा अपेक्षित होता है । अनेक प्रकारके राजाओसे अप्रस्तुतका निराकरण करके विवक्षित राजाका ज्ञान करा देना निक्षेपका प्रयोजन है। राजाविषयक मायका निराकरण कर विवक्षित राजाविषयक यथार्थबोध करा देना ही निक्षेपका कार्य है । इसी तरह बुलाना भी अनेक प्रकारका होता है । तो 'राजाको बुलाओ' इस वाक्यमे जो वर्तमान शामनाधिकारी हे वह भावराजा विवक्षित है, न गव्दराजा, न जानराजा न लिपिराजा न भूर्तिराजा न भावीराजा आदि । पुरानी परम्पराम अपने विवक्षित अर्थका सटीन ज्ञान करानेकेलिए प्रत्येक शब्दके सभावित वाच्यार्थीको सामने रखकर उनका विश्लेषण करनेकी परिपाटी थी । आगमोमे प्रत्येक शब्दका निक्षेप किया गया है । यहा तक क 'शेष' व्द और 'च' शब्द भी निक्षेप विधिमं भुलाये नही गये है । शब्द ज्ञान और अर्थ तीन प्रकारसे व्यवहार चलते है । कही शब्दव्यवहार कार्य चलना
है तो कही ज्ञानसे तो कही अर्थसे । बच्चेको दराने के लिए शेर शब्द पर्याप्त है । शेरका ध्यान करनेके लिए शेरका ज्ञान भी पर्याप्त है। पर सरकसमे तो शेर पदार्थ ही चिघाट सकता है।
विवेचनीय पदार्थ जितने प्रकारका हो सकता है उतने राव संभावित प्रकार सामने रखकर अप्रस्तुतना निराकरण करके विवक्षित पदार्थको पकडना निक्षेप हे । तत्त्वार्थसूत्रकारने उस निक्षेपको चार भागोमे वाँटा है - शब्दात्मक व्यवहारका प्रयोजक नामनिक्षेप है, 5 समे वस्तुमे उम प्रकारके गुण जाति क्रिया आदिका होना आवश्यक नहीं है जैसा उसे नाम दिया जा रहा है। किसी अन्बेका नाम भी नयनमुख हो सकता है ओर किसी सूखकर कॉटा हुए दुर्बल व्यक्तिको भी महावीर कहा जा सकता है। ज्ञानात्मक व्यवहारका प्रयोजक स्थापना निक्षेप है । इस निक्षेपमे ज्ञानके द्वारा तदाकार या अतदाकार में विवक्षित वस्तुकी स्थापना कर ली जाती है और सकेत ज्ञानके द्वारा उसका बोध करा दिया जाता है । अर्थात्मक निक्षेप द्रव्य और भावरूप होता है। जो पर्याय आगे होनेवाली है उसमें योग्यताके वलपर आज भी वह व्यवहार करना अथवा जो पर्याय हो चुकी है उसका व्यवहार वर्तमानमें भी करना द्रव्यनिक्षेप है जैसे युवराजको राजा कहना और राजपदका जिसने त्याग कर दिया है उसको भी राजा कहना । वर्तमानमे उस पर्यायवाले व्यक्तिमे ही वह व्यवहार करना भावनिक्षेप है, जैसे सिहासनस्थित शासनाधिकारीको राजा कहना । आगमोमे द्रव्य, क्षेत्र, काल आदिको मिलाकर यथासंभव पाच, छह और सात निक्षेप भी उपलब्ध होते हं परन्तु इन निक्षेपका प्रयोजन इतना ही है कि शिष्यको अपने विवक्षित पदार्थका ठीक ठीक ज्ञान हो जाय । धवला टीका ( पृ० ३१ ) निक्षेपके प्रयोजनोका मग्रह करनेवाली यह प्राचीन गाथा उद्धत है ---
"अवगयनिवारणट्ट् पयदस्स परवणाणिमित्त च । ससयविणासणट्ट तच्चत्थवधारणट्ठ च ॥"
अर्थात् अप्रकृतका निराकरण करने के लिए, प्रकृतका निरूपण करने के लिए, समयका विनाश करने के लिए और तत्त्वार्थका निर्णय करने के लिए निक्षेपकी उपयोगिता हे ।
प्रमाण, नय और स्याद्वाद -- निक्षेप विविसे वस्तुको फैलाकर अर्थात् उसका विश्लेषण कर प्रमाण और नयके द्वारा उसका अधिगम करनेका क्रम शास्त्रसम्मत और व्यवहारोपयोगी है। जानकी गति दो प्रकः रमे वस्तुको जाननेकी होती है । एक तो अमुक अशके द्वारा पूरी वस्तुको जाननेकी ओर दूसरी उसी अमुक अशको जाननेकी । जब ज्ञान पूरी वस्तुको ग्रहण करता है तव् वह प्रमाण कहा जाता है तथा जब वह एक अशको जानता है तब नय । पर्वतके एक भागके द्वारा पूरे पर्वतका अखण्ड भावने ज्ञान प्रमाण है और है उनी जग का ज्ञान नय हे । सिद्धान्त प्रमाणको मकलादेशी तथा नयको विकलादेशी कहा है उसका यही तात्पर्य है कि प्रमाण जात वस्तुभागके द्वारा सकल वस्तुको ही ग्रहण करता है जब कि नय उमी विकल अर्थात् एक अशको ही ग्रहण करता है । जैसे आखसे घटके रूपको देखकर र पमुखेन पूर्ण घटका ग्रहण करना सकलादेश है ओर घट रूप है इस रूपागको जानना विकलादेश अर्थात् नय है। अनन्तवर्मात्मक वस्तुका प्रवत् विशेषोके साथ पूर्ण रूपसे ग्रहण करना तो अल्पज्ञानियोके वशकी बात नहीं है वह तो पूर्ण ज्ञानका कार्य हो सकता है । पर प्रमाणजान तो अल्पज्ञानियोका भी कहा जाता है अत प्रमाण और नय की भेदक रेखा यही है कि जब ज्ञान अखड वस्तु पर दृष्टि रखे तत्र प्रमाण तथा जब अशपर दृष्टि रखे तव नय । वस्तुमे सामान्य और विशेष दोनो प्रकारके धर्म पाए जाते है । प्रमाण ज्ञान सामान्यविशेषात्मक पूर्ण वस्तुको ग्रहण करता है जब कि नय केवल सामान्य अशको या विशेष अशको । यद्यपि केवल सामान्य और केवल विशेषरूप वस्तु नही है पर नय वस्तुको अगभेद करके ग्रहण करता है । वृक्ताके अभिप्रायविशेषको ही नय कहते हैं । नयू जब विवक्षित अशको ग्रहण करके भी इतर अशोका निराकरण नहीं करता उनके प्रति तटस्थ रहता है तब मुनय कहलाता है और जब वही एक अगका आगह करके दूसरे अशोका निराकरण करने लगता हैं तव दुर्नय कहलाता है। | तत्त्वाधिगम के उपाय यह कि मात्र शास्त्र होने के कारण ही हर एक पुस्तक प्रमाण और ग्राह्य नही कही जा सकती। अनेक टीकाकारोनेभी मूलग्रन्थका अभिप्राय समझनेमे भूले की है । अस्तु सत्रह - हमे यह तो मानना ही होगा कि शास्त्र पुरुषकृत हे । यद्यपि वे महापुरुष विशिष्ट जानी ओर लोक कल्याणकी सदुद्भावनावाले थे पर क्षायोपत्रमिकज्ञानवश या परम्परावा मतभेदकी गुजायग तो हो ही सकती है । ऐसे अनेक मतभेद गोम्मटसार आदिमे स्वय उल्लिखित हे । अत शास्त्र विषयक सम्यग्दर्शन भी प्राप्त करना होगा कि शात्रमे किस युगमे किस पात्रके लिए किस विवक्षासे क्या बात लिखी गई है उनका ऐतिहासिक पर्यवेक्षण भी करना होगा । दर्शनशास्त्र के ग्रन्थोमे खण्डन मण्डन के प्रसगमे तत्कालीन या पूर्वकालीन ग्रन्थोका परस्परम आदान-प्रदान पर्याप्त रूपसे हुआ है । अत आत्म-सशोधकको जैन सस्कृतिकी शास्त्र विषयक दृष्टि भी प्राप्त करनी होगी । हमारे यहा गुणकृत प्रमाणता है । गुणवान् वक्ताके द्वारा कहा गया वह शास्त्र जिसमे हमारी मूलधारासे विरोध न आता हो, प्रमाण है । আ জgood son somewone mom rephind इसीतरह् हमे मन्दिर, सस्था, समाज, शरीर, जीवन, विवाह आदिका सम्यग्दर्शन करके सभी प्रवृ त्तियोकी पुनारचना आत्मसमत्वके आधारसे करनी चाहिए तभी मानव जातिका कल्याण और व्यक्तिकी मुक्ति हो सकेगी । तत्त्वाधिगम के उपाय"ज्ञान प्रमाणमात्मादेरुपायो न्यास इध्यते । नयो ज्ञातुरभिप्रायो युक्तितोऽर्थपरिग्रहः ॥" -लघीयशून्य । अकलकदेवने लघीयस्त्रय स्ववृत्तिमे बताया है कि जीवादि तत्त्वोका सर्वप्रथम निक्षेपोके द्वारा न्यास करना चाहिए, तभी प्रमाण और नयसे उनका यथावत् सम्यग्ज्ञान होता है । ज्ञान प्रमाण होता है । आत्मादिको रखनेका उपाय न्यास है। ज्ञाताके अभिप्रायको नय कहते है। प्रमाण और नय जानात्मक उपाय है और निक्षेप वस्तुरूप है । इसीलिए निक्षेपोमे नययोजना कपायपाहुडचूर्ण आदिमे की गई है कि अमुक नय अमुक निक्षेपको विषय करता है । निक्षेप - निक्षेपका अर्थ है रखना अर्थात् वस्तुका विश्लेषण कर उसकी स्थितिकी जितने प्रकारकी सुभावनाएँ हो सकती है उनको सामने रखना । जैसे 'राजाको बुलाओ' यहाँ राजा और बुलाना इन दो पदोका अर्थबोध करना है । राजा अनेक प्रकारके होते हैं यथा 'राजा' इस शब्दको भी राजा कहते है, पट्टीपर लिखे हुए 'राजा' इन अक्षरोको भी राजा कहते है, जिस व्यक्तिका नाम राजा है उसे भी राजा कहते है, राजाके चित्रको या मूर्तिको भी राजा कहते हैं, शतरजके मुहरो मे भी एक राजा होना ह जो आगे राजा होनेवाला है उसे भी लोग आजसे ही राजा कहन लगते है, गजाके ज्ञानको भी राजा कहते है, जो वर्तमानमे शासनाधिकारी है उसे भी राजा कहते है । अत हमें कौन राजा विवक्षित है वच्चा यदि राजा माँगता है तो उस समय किस राजाकी आवश्यकता होगी, गतरजके समय कोन राजा अपेक्षित होता है । अनेक प्रकारके राजाओसे अप्रस्तुतका निराकरण करके विवक्षित राजाका ज्ञान करा देना निक्षेपका प्रयोजन है। राजाविषयक मायका निराकरण कर विवक्षित राजाविषयक यथार्थबोध करा देना ही निक्षेपका कार्य है । इसी तरह बुलाना भी अनेक प्रकारका होता है । तो 'राजाको बुलाओ' इस वाक्यमे जो वर्तमान शामनाधिकारी हे वह भावराजा विवक्षित है, न गव्दराजा, न जानराजा न लिपिराजा न भूर्तिराजा न भावीराजा आदि । पुरानी परम्पराम अपने विवक्षित अर्थका सटीन ज्ञान करानेकेलिए प्रत्येक शब्दके सभावित वाच्यार्थीको सामने रखकर उनका विश्लेषण करनेकी परिपाटी थी । आगमोमे प्रत्येक शब्दका निक्षेप किया गया है । यहा तक क 'शेष' व्द और 'च' शब्द भी निक्षेप विधिमं भुलाये नही गये है । शब्द ज्ञान और अर्थ तीन प्रकारसे व्यवहार चलते है । कही शब्दव्यवहार कार्य चलना है तो कही ज्ञानसे तो कही अर्थसे । बच्चेको दराने के लिए शेर शब्द पर्याप्त है । शेरका ध्यान करनेके लिए शेरका ज्ञान भी पर्याप्त है। पर सरकसमे तो शेर पदार्थ ही चिघाट सकता है। विवेचनीय पदार्थ जितने प्रकारका हो सकता है उतने राव संभावित प्रकार सामने रखकर अप्रस्तुतना निराकरण करके विवक्षित पदार्थको पकडना निक्षेप हे । तत्त्वार्थसूत्रकारने उस निक्षेपको चार भागोमे वाँटा है - शब्दात्मक व्यवहारका प्रयोजक नामनिक्षेप है, पाँच समे वस्तुमे उम प्रकारके गुण जाति क्रिया आदिका होना आवश्यक नहीं है जैसा उसे नाम दिया जा रहा है। किसी अन्बेका नाम भी नयनमुख हो सकता है ओर किसी सूखकर कॉटा हुए दुर्बल व्यक्तिको भी महावीर कहा जा सकता है। ज्ञानात्मक व्यवहारका प्रयोजक स्थापना निक्षेप है । इस निक्षेपमे ज्ञानके द्वारा तदाकार या अतदाकार में विवक्षित वस्तुकी स्थापना कर ली जाती है और सकेत ज्ञानके द्वारा उसका बोध करा दिया जाता है । अर्थात्मक निक्षेप द्रव्य और भावरूप होता है। जो पर्याय आगे होनेवाली है उसमें योग्यताके वलपर आज भी वह व्यवहार करना अथवा जो पर्याय हो चुकी है उसका व्यवहार वर्तमानमें भी करना द्रव्यनिक्षेप है जैसे युवराजको राजा कहना और राजपदका जिसने त्याग कर दिया है उसको भी राजा कहना । वर्तमानमे उस पर्यायवाले व्यक्तिमे ही वह व्यवहार करना भावनिक्षेप है, जैसे सिहासनस्थित शासनाधिकारीको राजा कहना । आगमोमे द्रव्य, क्षेत्र, काल आदिको मिलाकर यथासंभव पाच, छह और सात निक्षेप भी उपलब्ध होते हं परन्तु इन निक्षेपका प्रयोजन इतना ही है कि शिष्यको अपने विवक्षित पदार्थका ठीक ठीक ज्ञान हो जाय । धवला टीका निक्षेपके प्रयोजनोका मग्रह करनेवाली यह प्राचीन गाथा उद्धत है --- "अवगयनिवारणट्ट् पयदस्स परवणाणिमित्त च । ससयविणासणट्ट तच्चत्थवधारणट्ठ च ॥" अर्थात् अप्रकृतका निराकरण करने के लिए, प्रकृतका निरूपण करने के लिए, समयका विनाश करने के लिए और तत्त्वार्थका निर्णय करने के लिए निक्षेपकी उपयोगिता हे । प्रमाण, नय और स्याद्वाद -- निक्षेप विविसे वस्तुको फैलाकर अर्थात् उसका विश्लेषण कर प्रमाण और नयके द्वारा उसका अधिगम करनेका क्रम शास्त्रसम्मत और व्यवहारोपयोगी है। जानकी गति दो प्रकः रमे वस्तुको जाननेकी होती है । एक तो अमुक अशके द्वारा पूरी वस्तुको जाननेकी ओर दूसरी उसी अमुक अशको जाननेकी । जब ज्ञान पूरी वस्तुको ग्रहण करता है तव् वह प्रमाण कहा जाता है तथा जब वह एक अशको जानता है तब नय । पर्वतके एक भागके द्वारा पूरे पर्वतका अखण्ड भावने ज्ञान प्रमाण है और है उनी जग का ज्ञान नय हे । सिद्धान्त प्रमाणको मकलादेशी तथा नयको विकलादेशी कहा है उसका यही तात्पर्य है कि प्रमाण जात वस्तुभागके द्वारा सकल वस्तुको ही ग्रहण करता है जब कि नय उमी विकल अर्थात् एक अशको ही ग्रहण करता है । जैसे आखसे घटके रूपको देखकर र पमुखेन पूर्ण घटका ग्रहण करना सकलादेश है ओर घट रूप है इस रूपागको जानना विकलादेश अर्थात् नय है। अनन्तवर्मात्मक वस्तुका प्रवत् विशेषोके साथ पूर्ण रूपसे ग्रहण करना तो अल्पज्ञानियोके वशकी बात नहीं है वह तो पूर्ण ज्ञानका कार्य हो सकता है । पर प्रमाणजान तो अल्पज्ञानियोका भी कहा जाता है अत प्रमाण और नय की भेदक रेखा यही है कि जब ज्ञान अखड वस्तु पर दृष्टि रखे तत्र प्रमाण तथा जब अशपर दृष्टि रखे तव नय । वस्तुमे सामान्य और विशेष दोनो प्रकारके धर्म पाए जाते है । प्रमाण ज्ञान सामान्यविशेषात्मक पूर्ण वस्तुको ग्रहण करता है जब कि नय केवल सामान्य अशको या विशेष अशको । यद्यपि केवल सामान्य और केवल विशेषरूप वस्तु नही है पर नय वस्तुको अगभेद करके ग्रहण करता है । वृक्ताके अभिप्रायविशेषको ही नय कहते हैं । नयू जब विवक्षित अशको ग्रहण करके भी इतर अशोका निराकरण नहीं करता उनके प्रति तटस्थ रहता है तब मुनय कहलाता है और जब वही एक अगका आगह करके दूसरे अशोका निराकरण करने लगता हैं तव दुर्नय कहलाता है। |
DESK : फिल्म इंडस्ट्री के किंग खान शाहरुख खान को बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ पांच साल से चल रहे एक मामले को गुजरात हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। बताया गया कि 2017 में फिल्म रईस के प्रमोशन के लिए शाहरुख के कार्यक्रम में मची भगदड़ से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, तब दूसरों की जान और उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए शाहरुख खान पर मामला दर्ज किया गया था।
एफआईआर में बताया गया था कि शाहरुख खान अपनी फिल्म 'रईस' के प्रमोशन के लिए मुंबई से दिल्ली ट्रेन से यात्रा कर रहे थे। जैसे ही ट्रेन वरोदड़ा रेलवे स्टेशन पर रुकी, शाहरुखखान को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इस दौरान सुपरस्टार ने भीड़ पर स्माइली गेंदे और टी-शर्ट फेंके, जिसके बाद हाथापाई शुरू हो गई। जिससे स्टेशन पर आई भीड़ में भगदड़ जैसे हालत हो गए और एक व्यक्ति की हर्ट अटैक से मौत हो गई।
जस्टिस निखिल एस करिएल की बेंच ने इस मामले में फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि शाहरुख खान की तरफ से किए गए कार्यों को लापरवाही या उतावलापन नहीं कहा जा सकता है। जिसके बाद उन्होंने शाहरुख की याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें वडोदरा अदालत द्वारा उनके खिलाफ जारी समन को रद्द करने की मांग की गई थी।
गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि शाहरुख खान की तरफ से जो भी किया गया, उसे वरोदड़ा रेलवे स्टेशन पर हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना का सटीक कारण नहीं माना जा सकता। अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने पाया कि शाहरुख खान के खिलाफ शिकायत एक ऐसे व्यक्ति द्वारा दायर की गई थी, जिसका इस घटना से कोई सीधा संबंध नहीं था।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यह विचार करने की आवश्यकता है कि क्या वडोदरा में खान के खिलाफ मुकदमे की अनुमति देना उचित और न्यायसंगत होगा और शहर के आम नागरिकों को असुविधा होगी।
अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने पाया कि शाहरुख खान के खिलाफ शिकायत एक ऐसे व्यक्ति द्वारा दायर की गई थी, जिसका इस घटना से कोई सीधा संबंध नहीं था। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यह विचार करने की आवश्यकता है कि क्या वडोदरा में खान के खिलाफ मुकदमे की अनुमति देना उचित और न्यायसंगत होगा और शहर के आम नागरिकों को असुविधा होगी।
| DESK : फिल्म इंडस्ट्री के किंग खान शाहरुख खान को बड़ी राहत मिली है। उनके खिलाफ पांच साल से चल रहे एक मामले को गुजरात हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। बताया गया कि दो हज़ार सत्रह में फिल्म रईस के प्रमोशन के लिए शाहरुख के कार्यक्रम में मची भगदड़ से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, तब दूसरों की जान और उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए शाहरुख खान पर मामला दर्ज किया गया था। एफआईआर में बताया गया था कि शाहरुख खान अपनी फिल्म 'रईस' के प्रमोशन के लिए मुंबई से दिल्ली ट्रेन से यात्रा कर रहे थे। जैसे ही ट्रेन वरोदड़ा रेलवे स्टेशन पर रुकी, शाहरुखखान को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। इस दौरान सुपरस्टार ने भीड़ पर स्माइली गेंदे और टी-शर्ट फेंके, जिसके बाद हाथापाई शुरू हो गई। जिससे स्टेशन पर आई भीड़ में भगदड़ जैसे हालत हो गए और एक व्यक्ति की हर्ट अटैक से मौत हो गई। जस्टिस निखिल एस करिएल की बेंच ने इस मामले में फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि शाहरुख खान की तरफ से किए गए कार्यों को लापरवाही या उतावलापन नहीं कहा जा सकता है। जिसके बाद उन्होंने शाहरुख की याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें वडोदरा अदालत द्वारा उनके खिलाफ जारी समन को रद्द करने की मांग की गई थी। गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि शाहरुख खान की तरफ से जो भी किया गया, उसे वरोदड़ा रेलवे स्टेशन पर हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना का सटीक कारण नहीं माना जा सकता। अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने पाया कि शाहरुख खान के खिलाफ शिकायत एक ऐसे व्यक्ति द्वारा दायर की गई थी, जिसका इस घटना से कोई सीधा संबंध नहीं था। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यह विचार करने की आवश्यकता है कि क्या वडोदरा में खान के खिलाफ मुकदमे की अनुमति देना उचित और न्यायसंगत होगा और शहर के आम नागरिकों को असुविधा होगी। अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने पाया कि शाहरुख खान के खिलाफ शिकायत एक ऐसे व्यक्ति द्वारा दायर की गई थी, जिसका इस घटना से कोई सीधा संबंध नहीं था। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यह विचार करने की आवश्यकता है कि क्या वडोदरा में खान के खिलाफ मुकदमे की अनुमति देना उचित और न्यायसंगत होगा और शहर के आम नागरिकों को असुविधा होगी। |
ये आदतें शरीर को कर रहीं हैं कमज़ोर (Photo Credit: femina. in)
New Delhi:
अक्सर लोग सारा पौष्टिक आहार लेने के बाद में थका हुआ महसूस करते हैं. अगर आपका भी वेट गेन मुश्किल से हो रहा है और आप थका हुआ और लो फील करते हैं तो ये ख़राब मेटाबोलिज्म की वजह से हो सकता है. आपको बता दें कि मेटाबॉलिज्म एक प्रॉसेस है, जो भोजन को एनर्जी में कनवर्ट (परिवर्तित) करता है. अगर आपका मेटाबॉलिक रेट बहुत स्लो (धीमा) है, तो इससे वजन बढ़ सकता है और हर वक्त थकान महसूस हो सकती है. आज कल की लाइफस्टाइल के चलते मेटाबोलिज्म बहुत लोगों का ख़राब हो चुका है. ऐसे में आपको उन चीज़ों को सही करना होगा जो आपके मेटाबोलिज्म को सही कर सके.
अक्सर वजन कम करने के प्रॉसेस में हम क्या करते हैं कि जितनी कैलोरी ले रहे होते हैं, उसे कम कर देते हैं. यदि आप अपने द्वारा खाए जा रहे भोजन को अचानक कम कर देते हैं, तो आपका शरीर इसे महसूस करता है और इसे धीमी गति से कैलोरी बर्न के लिए प्रेरित करता है. वजन कम करने के प्रोसेस में आपको कैलोरी कम करनी होगी लेकिन ध्यान रहे ज्यादा कैलोरी कम करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है.
यदि आप एक हेल्दी वेट हासिल करना चाहते हैं, तो प्रोटीन लेना शुरू करें. प्रोटीन से भरपूर डाइट शरीर में एनर्जी के लेवल को बढ़ाती है और मेटाबाॉलिज्म रेट को भी बढ़ाती है.
अगर आपको हर रात 8 घंटे की गहरी नींद नहीं मिल रही है, तो ये आपके शरीर में मेटाबॉलिज्म कम होने के प्रमुख कारणों में से एक है. पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें, ताकि आपका शरीर अगले दिन पूरे जोश में जाग सकें.
पर्याप्त खाने का मतलब प्रॉसेस्ड फूड (Processed Food) खाना नहीं है. इसका मतलब है हेल्दी डाइट लेना, जो आपके शरीर को मजबूत बनाता है और बीमारियों से बचाता है. प्रोसेस्ड फ़ूड शरीर का एनर्जी लेवल कम करदेता है. इसलिए खाने में भरपूर डाइट लें.
| ये आदतें शरीर को कर रहीं हैं कमज़ोर New Delhi: अक्सर लोग सारा पौष्टिक आहार लेने के बाद में थका हुआ महसूस करते हैं. अगर आपका भी वेट गेन मुश्किल से हो रहा है और आप थका हुआ और लो फील करते हैं तो ये ख़राब मेटाबोलिज्म की वजह से हो सकता है. आपको बता दें कि मेटाबॉलिज्म एक प्रॉसेस है, जो भोजन को एनर्जी में कनवर्ट करता है. अगर आपका मेटाबॉलिक रेट बहुत स्लो है, तो इससे वजन बढ़ सकता है और हर वक्त थकान महसूस हो सकती है. आज कल की लाइफस्टाइल के चलते मेटाबोलिज्म बहुत लोगों का ख़राब हो चुका है. ऐसे में आपको उन चीज़ों को सही करना होगा जो आपके मेटाबोलिज्म को सही कर सके. अक्सर वजन कम करने के प्रॉसेस में हम क्या करते हैं कि जितनी कैलोरी ले रहे होते हैं, उसे कम कर देते हैं. यदि आप अपने द्वारा खाए जा रहे भोजन को अचानक कम कर देते हैं, तो आपका शरीर इसे महसूस करता है और इसे धीमी गति से कैलोरी बर्न के लिए प्रेरित करता है. वजन कम करने के प्रोसेस में आपको कैलोरी कम करनी होगी लेकिन ध्यान रहे ज्यादा कैलोरी कम करना सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है. यदि आप एक हेल्दी वेट हासिल करना चाहते हैं, तो प्रोटीन लेना शुरू करें. प्रोटीन से भरपूर डाइट शरीर में एनर्जी के लेवल को बढ़ाती है और मेटाबाॉलिज्म रेट को भी बढ़ाती है. अगर आपको हर रात आठ घंटाटे की गहरी नींद नहीं मिल रही है, तो ये आपके शरीर में मेटाबॉलिज्म कम होने के प्रमुख कारणों में से एक है. पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें, ताकि आपका शरीर अगले दिन पूरे जोश में जाग सकें. पर्याप्त खाने का मतलब प्रॉसेस्ड फूड खाना नहीं है. इसका मतलब है हेल्दी डाइट लेना, जो आपके शरीर को मजबूत बनाता है और बीमारियों से बचाता है. प्रोसेस्ड फ़ूड शरीर का एनर्जी लेवल कम करदेता है. इसलिए खाने में भरपूर डाइट लें. |
बहराइच। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक और उपलब्धि जुड़ने जा रही है। शासन की ओर से बीएससी नर्सिंग कॉलेज व छात्रावास बनाने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इसके लिए ढाई एकड़ भूमि की आवश्यकता है। शहर के फाइलेरिया अस्पताल या सीतापुर आंख अस्पताल की भूमि पर कॉलेज व हॉस्टल बनाने की बात चल रही है। स्वीकृति न मिलने से निर्माण अधर में लटका है। डीएम की ओर से स्वीकृति मिलते ही कार्य प्रारंभ हो जाएगा।
स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय को बीएससी नर्सिंग कॉलेज को स्वीकृति मिली थी। मेडिकल कॉलेज में 60 छात्र वर्तमान में पढ़ाई भी कर रहे हैं। पूर्व में नर्सिंग कॉलेज तथा हॉस्टल बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। जिस पर शासन ने एक एकड़ में नर्सिंग कॉलेज व डेढ़ एकड़ में हॉस्टल बनाने की स्वीकृति प्रदान की है।
स्वीकृति मिलने के बाद भूमि का चिह्नांकन किया जा रहा है। शहर के चांदपुरा स्थित फाइलेरिया अस्पताल व सीतापुर आंख अस्पताल की भूमि पर निर्माण कराने की बात चल रही है। लेकिन नर्सिंग कॉलेज कहां बनेगा इसके लिए जिलाधिकारी स्वीकृति प्रदान करेंगी। उनकी स्वीकृति मिलते ही कार्य प्रारंभ हो जाएगा। मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. ओपी चौधरी ने बताया कि कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम निर्माण कार्य कराने का जिम्मा सौंपा गया है।
नर्सिंग कॉलेज व हॉस्टल बनाने के लिए शासन की ओर से स्वीकृति मिली है। इसके लिए फाइलेरिया अस्पताल व सीतापुर आंख अस्पताल की भूमि को देखा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ होगा।
| बहराइच। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक और उपलब्धि जुड़ने जा रही है। शासन की ओर से बीएससी नर्सिंग कॉलेज व छात्रावास बनाने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इसके लिए ढाई एकड़ भूमि की आवश्यकता है। शहर के फाइलेरिया अस्पताल या सीतापुर आंख अस्पताल की भूमि पर कॉलेज व हॉस्टल बनाने की बात चल रही है। स्वीकृति न मिलने से निर्माण अधर में लटका है। डीएम की ओर से स्वीकृति मिलते ही कार्य प्रारंभ हो जाएगा। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय को बीएससी नर्सिंग कॉलेज को स्वीकृति मिली थी। मेडिकल कॉलेज में साठ छात्र वर्तमान में पढ़ाई भी कर रहे हैं। पूर्व में नर्सिंग कॉलेज तथा हॉस्टल बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। जिस पर शासन ने एक एकड़ में नर्सिंग कॉलेज व डेढ़ एकड़ में हॉस्टल बनाने की स्वीकृति प्रदान की है। स्वीकृति मिलने के बाद भूमि का चिह्नांकन किया जा रहा है। शहर के चांदपुरा स्थित फाइलेरिया अस्पताल व सीतापुर आंख अस्पताल की भूमि पर निर्माण कराने की बात चल रही है। लेकिन नर्सिंग कॉलेज कहां बनेगा इसके लिए जिलाधिकारी स्वीकृति प्रदान करेंगी। उनकी स्वीकृति मिलते ही कार्य प्रारंभ हो जाएगा। मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. ओपी चौधरी ने बताया कि कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम निर्माण कार्य कराने का जिम्मा सौंपा गया है। नर्सिंग कॉलेज व हॉस्टल बनाने के लिए शासन की ओर से स्वीकृति मिली है। इसके लिए फाइलेरिया अस्पताल व सीतापुर आंख अस्पताल की भूमि को देखा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। |
इंडक भक्काश्रित-त्रणें पार्वतीका २स्थापना निक्षेप. ( ४३ ) निरर्थक ठहरानेका, प्रयत्नं किया है । देखो सत्यार्थ पृष्ट ८ में यथा-काष्ट, पीतल, पाषाणादिकी मूर्ति बनाके स्थापना करली क यह मेरा-इंद्र है, फिर उसको - वंदे, पूजे, उससें, धन, पुत्र, आदिक मांगे, मेला, महोत्सव करें । परंतु वह जड कुछ जाने नहीं, ताते शून्य है । अज्ञानता के कारण उसे इंद्र, मानलेते है । परंतु वह इंद्र नहीं, अर्थात् कार्यसाघक नहीं ॥
इस प्रकारसें ढूंढनीजी - प्रथम इंद्रकी मूर्त्तिको, निरर्थक उ रायके, पिछे-पृष्ट १५-१६ में ऋषभ देवजी की मूर्त्तिको, जडपणा दिखलायके निरर्थकपणा, दिखलाया है ।।
और-७३।७४ में पूर्ण मद्रादिक यक्षोंके पथ्थरकी मूर्चिसें, ढूंढक श्रावकोको - धन, पुत्रादिककी, प्राप्ति कराती हुई-स्थापना निक्षेपको, सार्थकरूप-करके, दिखलाती है । तो अब ढूंढनीजीको तीर्थकरोंकी भक्तानी समजनी, कि, यक्षोंकी ? उनका विचार वाचक वर्ग ही करें ? ॥
ढूंढक-हे भाई मूर्तिपूजक जब पूर्ण मद्रादिक यलोंकी प थ्थरसें बनी हुई, जडरूप मूर्त्तिकी पूजार्से-घन, पुत्रादिककी, प्राप्ति होनेसें सार्थकपणा है, तब तो इंद्रादिकोंकी पाषाणादिकसें बनी हुई, जडरूप मूर्त्तिकी पूजासें भी, अवश्य ही कार्य सिद्ध होनाचाहिये, क्योंकि- सरागीपणा जैसा पूर्ण भद्रादिक यक्षोंमें है, तैसा ही सरागीपणा-इंदमें भी है, तो पिछे हमारी ढूंढनीजीने-इंद्र की मूर्तिको - जडरूप, कहकर, और निरर्थकपणा ठहराय करके, सर्व वस्तुका - स्थापना निक्षेप, निरर्थकरूपसें, क्यों ठहराया होगा ? सो कुछ मेरी समजमें आया नहीं है ।
मूर्तिपूजक - हे भाई ढूंढक - ढूंढनाजीने तो वीतरागी मूर्त्तिसेंG
(४४) दूंडक भक्ताधित-त्रणें पार्वतीका २ स्थापना निक्षेप.
द्वेपभाव करके, अपना लेखका भी पूर्वाऽपरके विचार किये बिना, जो मनमें आया सो ही लिख मारा है। परंतु हेय १ । ज्ञेय २ ।
और उपादेय ३ । के स्वरूपसें, पूर्व में दिखाई हुई हमारी युक्ति के प्रमाणसें - जैन सिद्धांतकारोंफे मंतव्य मुजव स्थापनानिक्षेप-निरर्थक रूपका नहीं है, सो तो अपनी अपनी वस्तु स्वभावका - तादृश घोषको कराता हुवा, आत्माको ते ते वस्तुओंका गुणोंकी त रफ, विशेषपणे ही लक्ष कराता है
इस विषय में प्रमाण देखो - सत्यार्थ पृष्ट. ३५ में - ढूंढनी ही लिखती है कि हां हां सुननेकी अपेक्षा ( निसवत ) आकार ( नकसा ) देखने सें- ज्यादा, और जल्दी, समज - आती है, यह तोहम भी मानते है ।
अब ढूंढनीजीका - इस लेखसे, विचार करनेका यह है कि जब मूर्तिपूजनमें, कुछ विशेष ही नहीं था, तब तो पूर्ण भद्रादिक य क्षोंका - नाम स्मरण मात्र से ही, ढूंढकोंको घन, पुत्रादिककी प्राप्ति, ढूंढनीजी- करा देती, किस वास्ते यक्षादिक मिथ्यात्वी देवों की मूर्तिका पूजनमें-आरंभ, कराती हुई- धन, पुत्रादिक, प्राप्ति होनेः का-लिखके, दिखाती है ?
और यह भी विचार करो कि ढूंढनीजीका ही लेखसें, भूतिको चंदना, नमस्कारादि-फरनेका, सिद्ध होता है कि नही ?
अगर जो यक्षादिकोंकी जड स्वरूप मूर्तिको वंदना, नमस्कारादिक, न करावेगी-तो पिछे, ढूंढकोंको धन, पुत्रादिककी प्राप्ति भी किस प्रकार से करादेवेगी ?
जब ढूंढनीनी- यक्षादिक मिथ्यात्वी देवोंकी-मूर्त्तिका, आरंभवाला पूजन, और वंदना, नमस्कारादिक-करानेको उद्यत हुई है
टूटक भक्ताधित - धणे पार्वतीका २स्थायनी निक्षेप. (४५)
तो पिछे, जिनेश्वर देवकी मूत्तिके भक्तोंको, सत्यार्थ पृष्ट. १७ मेंजड पूजक, पणेका, जूठा विशेषण-क्यौं देती है ? क्यौं कि, ढूंढनी ही यक्षादिक मिथ्यात्वी देवोंकी, पापाणादिकसें बनी हुई जहरूप मूर्तिका पूजन, करानी हुई, बेसक जड पूजक पणे का विशेषणके लायक, हो सकती है। परंतु हम जिन मूर्त्तिके भक्त इस विशेषण के योग्य, कैसे हो सकते है ? ॥
और सत्यार्थ पृष्ट ६७ में ढूंडनीजीने लिखा है कि पथ्थरकी मूर्तिको घरके, श्रुति लगानी नहीं चाहिये ।
इस लेखसे विचार यह आता है कि वह यक्षादिक देवोंकी मूर्ति भी पथ्थरसें ही बनी हुई होती है, और उस मूर्तियांकी पूजासें ढूंढनीजीने-घन पुत्रादिक प्राप्ति होनेका भी दिखाया है, जबतक ढूंढनीजी भोंदू ढूंढकोंकी पासलें उस मूर्तियां - श्रुति मात्र भी लगानेको न देवेगी, तवतक- धन, पुत्रादिक, वस्तुकी प्राप्ति भी किस प्रकार करा सकेगी ? ॥
फिर पृष्ट ५७ में लिखता है कि उसको [ अर्थात् मूर्त्तिको ] हम भी भगवान्का आकार कहनें, परंतु वंदना, नमस्कार तो नहीं करें । और लडड पेंडे तो अगाडी नहीं घरें ।।
इस लेखसे भी विचार करनेका यह है कि अदृश्य स्वरूपके जो यक्षादिक देवताओ है, उनकी कल्पित पथ्थरकी मूर्तियांको वंदना, नमस्कार करना और लडड पेढे भी चढानेका हमारे ढूंढक भाईयाँको सिद्ध करके दिखलाती है, और परम ध्यान में लीनरूप तीर्थंकरोंका साक्षात् स्वरूपका आकारको वंदनादिक करनेका भी, ना पाडती हैं तो क्या तीर्थकरों के धर्मका सनातपणा इसी प्रकारसे चला आता है ? ।
( ४६ ) ढूंढक भक्ताश्रित-त्रणें पार्वतीकी - २ स्थापना निक्षेप.
और सत्यार्थ पृष्ट ३६ में ढूंढनीजी लिखती है कि उस आ कार [ नकसे ] को-वंदना, नमस्कार, करना यह मतवाल तुम्हें किसने पीलादी ।।
यह जो लिखा है सो भी यक्षादिक मिथ्यात्वी देवोंका भयंकर आकार को - वंदना, नमस्कार, और आरंभवाला पूजनसें- धन, पुत्रादिककी, प्राप्ति करानेको उद्यत हुई, यह ढूंढनी ही मतवाल पीलाने वाली सिद्ध होगी के जिनेश्वर देवका आकारकी भक्तिको दिखाने वाले, सिद्ध होंगे ?
उसका विचार तो - जैन धर्मका अभिलापियाँको ही करनेका है ? अब इस दिग्_ मात्रका लेखसे ख्याल करनेका यह है कि मूर्ति मात्रको निरर्थक ठहराने के लिये ढूंढनीजीने जो जो कुतकों किई है सो सो- - हेय १, ज्ञेय २, और उपादेय ३ । वस्तुओंकी मूर्तियांको विशेषपणेका विभागको सपजे विना, अगड वगर्ड लिखफे, भोले जीवोंको वीतरागी मूर्तिकी भक्ति से भ्रष्ट करनेकों, जूठका पुंज भेगा किया है परंतु जैन सिद्धांतकारोंकी शैलीका अनुकरण किंचित् मात्र भी किया हुवा नहीं है ।
और हम वीतराग देवकानिर्मल सिद्धांतोके लेखसें, विचार करके देखते है तवतोयही मालूम होता हैकि-अपना अपना उपादेय वस्तुका, जो नाम निक्षेप है, उसेंभी उसका स्थापना निक्षेप (मूर्त्ति ) है सो, सारी आलम दूनीयांका विशेषपणे ही ध्यान खेंच रही है, और उस प्रमाणे दूनीयाको वर्त्तन करती हुईभी प्रगटपणे देखते है । मात्र मृढताको धारण करके कोई कोई समाज, मुखसेही ना मुकर जाता है। परंतु विचारशील समाज है सो तो - हेय १ । ज्ञेय २शं और उपादेय ३की । वस्तुके स्वरूप - नाम निक्षेपको,
ढूंढक भक्ताश्रित-त्रणें पार्वतीका - २ स्थापना निक्षेप. (४७)
और स्थापना निक्षेपकोभी, योग्यता मुजव -- आदर, और सत्कार ही कर रहा है। परंतु मृढताको प्रगट नहीं करता है। यही विशेष पणा दिख रहा है ।
॥ फिर भी देखो - सत्यार्थ - पृष्ट. ११२ ओ. १२ से ढूंढनीजी लिखती है कि भगवती शतक १२ मा, उद्देशा २ में जयंती समणो पासका, अपनी भौजाई मृगावतीस कहती भई कि - महावीर स्वामौजका - नाम, गोत्र, सृणनेसे ही - महाफल है । तो प्रत्यक्ष सेवा भक्ति करनेका जो फल है सो क्या वर्णन करूं । और भी पाठ ऐसें बहुत जगह आता है ॥
ढूंढनीजीका इस लेखसें, ख्याल करनेका यह है कि-नाम- और गोत्र, एक प्रकारका होके भी - अनेक पुरुषोंमें, दाखल हुयेलो देखनेमें आता है, तो भी भगवान के साथ संबंधवाला - नाम, और गोत्र, जडरूप अक्षरोंके आकारका, दूसरेके मुखसे प्रकाशमान हुयेला, श्रवणद्वारा - सुनने मात्रसें, भक्त जनोंकों - महाफलको प्राप्त करता है । ऐसा जैन सिद्धांतोसें सिद्ध है । तो पीछे वीतराग देवके ही सदृश्य, और अन्य वस्तुओंसें अमिलित, ऐसी अलोकिकवीतरागी मूर्त्तिको, नेत्रोंसे साक्षातपणे देखते हुये, हमारे ढूंढकभाईयांको - आल्हादितपणा क्यों नहीं होता है ? क्या तीर्थंकरोंकी भक्तिभावका बीज, उनोंके हृदय मेसें नष्ट हो गया है ? ।
क्योंकि जो तीर्थंकरोंके-भक्त होंगे, सोही तीर्थंकरोके साथ संबंध वाला - नाम, और गोत्र रूप अक्षरोंको, कर्णद्वारा श्रवण करनेसेंअल्हादित हो केही, महा फलको प्राप्त करलेवेगा । तो पीछे नेत्र द्वारा - तादृश भगवान्की भव्य मूर्त्तिका, दर्शनको करता हुवा, सोभ व्यात्माभक्त - आल्हादित होके, महाफलकी प्राप्ति क्यों न कर ले | इंडक भक्काश्रित-त्रणें पार्वतीका दोस्थापना निक्षेप. निरर्थक ठहरानेका, प्रयत्नं किया है । देखो सत्यार्थ पृष्ट आठ में यथा-काष्ट, पीतल, पाषाणादिकी मूर्ति बनाके स्थापना करली क यह मेरा-इंद्र है, फिर उसको - वंदे, पूजे, उससें, धन, पुत्र, आदिक मांगे, मेला, महोत्सव करें । परंतु वह जड कुछ जाने नहीं, ताते शून्य है । अज्ञानता के कारण उसे इंद्र, मानलेते है । परंतु वह इंद्र नहीं, अर्थात् कार्यसाघक नहीं ॥ इस प्रकारसें ढूंढनीजी - प्रथम इंद्रकी मूर्त्तिको, निरर्थक उ रायके, पिछे-पृष्ट पंद्रह-सोलह में ऋषभ देवजी की मूर्त्तिको, जडपणा दिखलायके निरर्थकपणा, दिखलाया है ।। और-तिहत्तर।चौहत्तर में पूर्ण मद्रादिक यक्षोंके पथ्थरकी मूर्चिसें, ढूंढक श्रावकोको - धन, पुत्रादिककी, प्राप्ति कराती हुई-स्थापना निक्षेपको, सार्थकरूप-करके, दिखलाती है । तो अब ढूंढनीजीको तीर्थकरोंकी भक्तानी समजनी, कि, यक्षोंकी ? उनका विचार वाचक वर्ग ही करें ? ॥ ढूंढक-हे भाई मूर्तिपूजक जब पूर्ण मद्रादिक यलोंकी प थ्थरसें बनी हुई, जडरूप मूर्त्तिकी पूजार्से-घन, पुत्रादिककी, प्राप्ति होनेसें सार्थकपणा है, तब तो इंद्रादिकोंकी पाषाणादिकसें बनी हुई, जडरूप मूर्त्तिकी पूजासें भी, अवश्य ही कार्य सिद्ध होनाचाहिये, क्योंकि- सरागीपणा जैसा पूर्ण भद्रादिक यक्षोंमें है, तैसा ही सरागीपणा-इंदमें भी है, तो पिछे हमारी ढूंढनीजीने-इंद्र की मूर्तिको - जडरूप, कहकर, और निरर्थकपणा ठहराय करके, सर्व वस्तुका - स्थापना निक्षेप, निरर्थकरूपसें, क्यों ठहराया होगा ? सो कुछ मेरी समजमें आया नहीं है । मूर्तिपूजक - हे भाई ढूंढक - ढूंढनाजीने तो वीतरागी मूर्त्तिसेंG दूंडक भक्ताधित-त्रणें पार्वतीका दो स्थापना निक्षेप. द्वेपभाव करके, अपना लेखका भी पूर्वाऽपरके विचार किये बिना, जो मनमें आया सो ही लिख मारा है। परंतु हेय एक । ज्ञेय दो । और उपादेय तीन । के स्वरूपसें, पूर्व में दिखाई हुई हमारी युक्ति के प्रमाणसें - जैन सिद्धांतकारोंफे मंतव्य मुजव स्थापनानिक्षेप-निरर्थक रूपका नहीं है, सो तो अपनी अपनी वस्तु स्वभावका - तादृश घोषको कराता हुवा, आत्माको ते ते वस्तुओंका गुणोंकी त रफ, विशेषपणे ही लक्ष कराता है इस विषय में प्रमाण देखो - सत्यार्थ पृष्ट. पैंतीस में - ढूंढनी ही लिखती है कि हां हां सुननेकी अपेक्षा आकार देखने सें- ज्यादा, और जल्दी, समज - आती है, यह तोहम भी मानते है । अब ढूंढनीजीका - इस लेखसे, विचार करनेका यह है कि जब मूर्तिपूजनमें, कुछ विशेष ही नहीं था, तब तो पूर्ण भद्रादिक य क्षोंका - नाम स्मरण मात्र से ही, ढूंढकोंको घन, पुत्रादिककी प्राप्ति, ढूंढनीजी- करा देती, किस वास्ते यक्षादिक मिथ्यात्वी देवों की मूर्तिका पूजनमें-आरंभ, कराती हुई- धन, पुत्रादिक, प्राप्ति होनेः का-लिखके, दिखाती है ? और यह भी विचार करो कि ढूंढनीजीका ही लेखसें, भूतिको चंदना, नमस्कारादि-फरनेका, सिद्ध होता है कि नही ? अगर जो यक्षादिकोंकी जड स्वरूप मूर्तिको वंदना, नमस्कारादिक, न करावेगी-तो पिछे, ढूंढकोंको धन, पुत्रादिककी प्राप्ति भी किस प्रकार से करादेवेगी ? जब ढूंढनीनी- यक्षादिक मिथ्यात्वी देवोंकी-मूर्त्तिका, आरंभवाला पूजन, और वंदना, नमस्कारादिक-करानेको उद्यत हुई है टूटक भक्ताधित - धणे पार्वतीका दोस्थायनी निक्षेप. तो पिछे, जिनेश्वर देवकी मूत्तिके भक्तोंको, सत्यार्थ पृष्ट. सत्रह मेंजड पूजक, पणेका, जूठा विशेषण-क्यौं देती है ? क्यौं कि, ढूंढनी ही यक्षादिक मिथ्यात्वी देवोंकी, पापाणादिकसें बनी हुई जहरूप मूर्तिका पूजन, करानी हुई, बेसक जड पूजक पणे का विशेषणके लायक, हो सकती है। परंतु हम जिन मूर्त्तिके भक्त इस विशेषण के योग्य, कैसे हो सकते है ? ॥ और सत्यार्थ पृष्ट सरसठ में ढूंडनीजीने लिखा है कि पथ्थरकी मूर्तिको घरके, श्रुति लगानी नहीं चाहिये । इस लेखसे विचार यह आता है कि वह यक्षादिक देवोंकी मूर्ति भी पथ्थरसें ही बनी हुई होती है, और उस मूर्तियांकी पूजासें ढूंढनीजीने-घन पुत्रादिक प्राप्ति होनेका भी दिखाया है, जबतक ढूंढनीजी भोंदू ढूंढकोंकी पासलें उस मूर्तियां - श्रुति मात्र भी लगानेको न देवेगी, तवतक- धन, पुत्रादिक, वस्तुकी प्राप्ति भी किस प्रकार करा सकेगी ? ॥ फिर पृष्ट सत्तावन में लिखता है कि उसको [ अर्थात् मूर्त्तिको ] हम भी भगवान्का आकार कहनें, परंतु वंदना, नमस्कार तो नहीं करें । और लडड पेंडे तो अगाडी नहीं घरें ।। इस लेखसे भी विचार करनेका यह है कि अदृश्य स्वरूपके जो यक्षादिक देवताओ है, उनकी कल्पित पथ्थरकी मूर्तियांको वंदना, नमस्कार करना और लडड पेढे भी चढानेका हमारे ढूंढक भाईयाँको सिद्ध करके दिखलाती है, और परम ध्यान में लीनरूप तीर्थंकरोंका साक्षात् स्वरूपका आकारको वंदनादिक करनेका भी, ना पाडती हैं तो क्या तीर्थकरों के धर्मका सनातपणा इसी प्रकारसे चला आता है ? । ढूंढक भक्ताश्रित-त्रणें पार्वतीकी - दो स्थापना निक्षेप. और सत्यार्थ पृष्ट छत्तीस में ढूंढनीजी लिखती है कि उस आ कार [ नकसे ] को-वंदना, नमस्कार, करना यह मतवाल तुम्हें किसने पीलादी ।। यह जो लिखा है सो भी यक्षादिक मिथ्यात्वी देवोंका भयंकर आकार को - वंदना, नमस्कार, और आरंभवाला पूजनसें- धन, पुत्रादिककी, प्राप्ति करानेको उद्यत हुई, यह ढूंढनी ही मतवाल पीलाने वाली सिद्ध होगी के जिनेश्वर देवका आकारकी भक्तिको दिखाने वाले, सिद्ध होंगे ? उसका विचार तो - जैन धर्मका अभिलापियाँको ही करनेका है ? अब इस दिग्_ मात्रका लेखसे ख्याल करनेका यह है कि मूर्ति मात्रको निरर्थक ठहराने के लिये ढूंढनीजीने जो जो कुतकों किई है सो सो- - हेय एक, ज्ञेय दो, और उपादेय तीन । वस्तुओंकी मूर्तियांको विशेषपणेका विभागको सपजे विना, अगड वगर्ड लिखफे, भोले जीवोंको वीतरागी मूर्तिकी भक्ति से भ्रष्ट करनेकों, जूठका पुंज भेगा किया है परंतु जैन सिद्धांतकारोंकी शैलीका अनुकरण किंचित् मात्र भी किया हुवा नहीं है । और हम वीतराग देवकानिर्मल सिद्धांतोके लेखसें, विचार करके देखते है तवतोयही मालूम होता हैकि-अपना अपना उपादेय वस्तुका, जो नाम निक्षेप है, उसेंभी उसका स्थापना निक्षेप है सो, सारी आलम दूनीयांका विशेषपणे ही ध्यान खेंच रही है, और उस प्रमाणे दूनीयाको वर्त्तन करती हुईभी प्रगटपणे देखते है । मात्र मृढताको धारण करके कोई कोई समाज, मुखसेही ना मुकर जाता है। परंतु विचारशील समाज है सो तो - हेय एक । ज्ञेय दोशं और उपादेय तीनकी । वस्तुके स्वरूप - नाम निक्षेपको, ढूंढक भक्ताश्रित-त्रणें पार्वतीका - दो स्थापना निक्षेप. और स्थापना निक्षेपकोभी, योग्यता मुजव -- आदर, और सत्कार ही कर रहा है। परंतु मृढताको प्रगट नहीं करता है। यही विशेष पणा दिख रहा है । ॥ फिर भी देखो - सत्यार्थ - पृष्ट. एक सौ बारह ओ. बारह से ढूंढनीजी लिखती है कि भगवती शतक बारह मा, उद्देशा दो में जयंती समणो पासका, अपनी भौजाई मृगावतीस कहती भई कि - महावीर स्वामौजका - नाम, गोत्र, सृणनेसे ही - महाफल है । तो प्रत्यक्ष सेवा भक्ति करनेका जो फल है सो क्या वर्णन करूं । और भी पाठ ऐसें बहुत जगह आता है ॥ ढूंढनीजीका इस लेखसें, ख्याल करनेका यह है कि-नाम- और गोत्र, एक प्रकारका होके भी - अनेक पुरुषोंमें, दाखल हुयेलो देखनेमें आता है, तो भी भगवान के साथ संबंधवाला - नाम, और गोत्र, जडरूप अक्षरोंके आकारका, दूसरेके मुखसे प्रकाशमान हुयेला, श्रवणद्वारा - सुनने मात्रसें, भक्त जनोंकों - महाफलको प्राप्त करता है । ऐसा जैन सिद्धांतोसें सिद्ध है । तो पीछे वीतराग देवके ही सदृश्य, और अन्य वस्तुओंसें अमिलित, ऐसी अलोकिकवीतरागी मूर्त्तिको, नेत्रोंसे साक्षातपणे देखते हुये, हमारे ढूंढकभाईयांको - आल्हादितपणा क्यों नहीं होता है ? क्या तीर्थंकरोंकी भक्तिभावका बीज, उनोंके हृदय मेसें नष्ट हो गया है ? । क्योंकि जो तीर्थंकरोंके-भक्त होंगे, सोही तीर्थंकरोके साथ संबंध वाला - नाम, और गोत्र रूप अक्षरोंको, कर्णद्वारा श्रवण करनेसेंअल्हादित हो केही, महा फलको प्राप्त करलेवेगा । तो पीछे नेत्र द्वारा - तादृश भगवान्की भव्य मूर्त्तिका, दर्शनको करता हुवा, सोभ व्यात्माभक्त - आल्हादित होके, महाफलकी प्राप्ति क्यों न कर ले |
यह छाया ! मैं तुम्हारी ओर ही उन्मुख हूँ, फिर भी ऐसा जान पड़ता है कि उस छाया के बिना जी नहीं सकता... फिर थोड़ी देर चुप रहकर, धीरे-धीरे... गाने लगामिथ्या कथा के बोले ये भोलो नाइ ? के बोले ये खोलो नाई ?
स्मृतिर पिञ्जर द्वार ?...
मैंने पूछा, यह 'तुम' कौन है ? उसकी मुझे एक झाँकी मिली, जिसमें मैं उसे पहचान नहीं पाई ! शायद सुशील की बहिन, शायद वही नामहीन आकार जिसे लेकर वह बिथुरे बालों की कल्पना करता था, शायद कोई और,... इसलिए मेरी उस प्रश्न-भरी दृष्टि का उत्तर नहीं मिला...
कभी सोचती हूँ, संसार में कभी किसी प्रश्न का उत्तर मिलता भी है ? जो प्रश्न एक बार पूछा जाये, वह क्या कभी भी अपना उत्तर पाकर संपूर्णता में लीन हो सकता है ?
प्रश्न जब पूछा जाता है, तब वह आकाश मे फैल जाता है... उसका उत्तर कितनी भी शीघ्रता से दिया जाय, प्रश्न और उत्तर में कुछ अन्तर रह ही जाता है। प्रश्न बाध गति में अनन्त की ओर बढ़ता जाता है, और उत्तर उसकी गति में उसका पीछा करता जाता है.. वे सदा निकट रहते हैं, किन्तु केवल निकट - वे कभी मिलकर और एक होकर सम्पूर्ण, सम्पन्न, समाप्त नहीं होते....
पर, इसमें शायद जीवन को स्थायित्व, नित्यता मिलती है, शायद इसके कारण ही जीवन की विद्रोह-शक्ति मृत्यु के बाद तक परिवर्त्त रहती है, क्योंकि मृत्यु के बाद पकड़ नहीं पाती.... हाँ, तो उस प्रश्न का उत्तर मैंने कभी नहीं पाया । उसके बाद बहुत अवसर भी नहीं मिले । एक दिन मैंने देखा, उसके भीतर कुछ अधिक चहल-पहल है। उस दिन उसने भूख हड़ताल आरम्भ कर दी...
उसके बाद... उसके हृदय में ऐसे तूफान उठने लगे कि मैं भी घबरा जाती ! मैं जो पत्थर की हूँ, जो अनुभूतिहीन हूँ, मैं उन भावनाओं की चोट नहीं सह सकती, जिन्हें वह लेटा-लेटा नित्यप्रति अपने मन में फेरा करता । कोई एक मास बीत जाने के बाद, कभी-कभी मैं डरते-डरते | यह छाया ! मैं तुम्हारी ओर ही उन्मुख हूँ, फिर भी ऐसा जान पड़ता है कि उस छाया के बिना जी नहीं सकता... फिर थोड़ी देर चुप रहकर, धीरे-धीरे... गाने लगामिथ्या कथा के बोले ये भोलो नाइ ? के बोले ये खोलो नाई ? स्मृतिर पिञ्जर द्वार ?... मैंने पूछा, यह 'तुम' कौन है ? उसकी मुझे एक झाँकी मिली, जिसमें मैं उसे पहचान नहीं पाई ! शायद सुशील की बहिन, शायद वही नामहीन आकार जिसे लेकर वह बिथुरे बालों की कल्पना करता था, शायद कोई और,... इसलिए मेरी उस प्रश्न-भरी दृष्टि का उत्तर नहीं मिला... कभी सोचती हूँ, संसार में कभी किसी प्रश्न का उत्तर मिलता भी है ? जो प्रश्न एक बार पूछा जाये, वह क्या कभी भी अपना उत्तर पाकर संपूर्णता में लीन हो सकता है ? प्रश्न जब पूछा जाता है, तब वह आकाश मे फैल जाता है... उसका उत्तर कितनी भी शीघ्रता से दिया जाय, प्रश्न और उत्तर में कुछ अन्तर रह ही जाता है। प्रश्न बाध गति में अनन्त की ओर बढ़ता जाता है, और उत्तर उसकी गति में उसका पीछा करता जाता है.. वे सदा निकट रहते हैं, किन्तु केवल निकट - वे कभी मिलकर और एक होकर सम्पूर्ण, सम्पन्न, समाप्त नहीं होते.... पर, इसमें शायद जीवन को स्थायित्व, नित्यता मिलती है, शायद इसके कारण ही जीवन की विद्रोह-शक्ति मृत्यु के बाद तक परिवर्त्त रहती है, क्योंकि मृत्यु के बाद पकड़ नहीं पाती.... हाँ, तो उस प्रश्न का उत्तर मैंने कभी नहीं पाया । उसके बाद बहुत अवसर भी नहीं मिले । एक दिन मैंने देखा, उसके भीतर कुछ अधिक चहल-पहल है। उस दिन उसने भूख हड़ताल आरम्भ कर दी... उसके बाद... उसके हृदय में ऐसे तूफान उठने लगे कि मैं भी घबरा जाती ! मैं जो पत्थर की हूँ, जो अनुभूतिहीन हूँ, मैं उन भावनाओं की चोट नहीं सह सकती, जिन्हें वह लेटा-लेटा नित्यप्रति अपने मन में फेरा करता । कोई एक मास बीत जाने के बाद, कभी-कभी मैं डरते-डरते |
"... जब कोई घटना होती है तो हम निंदा करते हैं. कुछ करने का समय आ गया है. कट्टरपंथी संगठनों पर लगाम लगाने और उन पर प्रतिबंध लगाने के लिए समय की जरूरत है."
एनएसए अजीत डोभाल द्वारा बुलाए गए अंतर-धार्मिक सद्भाव मीटिंग में हैदराबाद से आए ऑल इंडिया सूफी सज्जादनशीन काउंसिल (AISSC) के चीफ नसीरुद्दीन चिश्ती ने PFI पर बैन लगाने की मांग की है. उन्होंने कहा, "... जब कोई घटना होती है तो हम निंदा करते हैं. कुछ करने का समय आ गया है. कट्टरपंथी संगठनों पर लगाम लगाने और उन पर प्रतिबंध लगाने के लिए समय की जरूरत है. चाहे वो कोई भी कट्टरपंथी संगठन हो, अगर उनके खिलाफ सबूत हैं तो उन्हें प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए." राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल शनिवार को अंतर-धार्मिक सद्भाव बनाए रखने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार के आउटरीच के हिस्से के रूप में एक अंतर-धार्मिक बैठक बुलाई थी, जिसमें विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु शामिल हुए थे.
| "... जब कोई घटना होती है तो हम निंदा करते हैं. कुछ करने का समय आ गया है. कट्टरपंथी संगठनों पर लगाम लगाने और उन पर प्रतिबंध लगाने के लिए समय की जरूरत है." एनएसए अजीत डोभाल द्वारा बुलाए गए अंतर-धार्मिक सद्भाव मीटिंग में हैदराबाद से आए ऑल इंडिया सूफी सज्जादनशीन काउंसिल के चीफ नसीरुद्दीन चिश्ती ने PFI पर बैन लगाने की मांग की है. उन्होंने कहा, "... जब कोई घटना होती है तो हम निंदा करते हैं. कुछ करने का समय आ गया है. कट्टरपंथी संगठनों पर लगाम लगाने और उन पर प्रतिबंध लगाने के लिए समय की जरूरत है. चाहे वो कोई भी कट्टरपंथी संगठन हो, अगर उनके खिलाफ सबूत हैं तो उन्हें प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए." राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल शनिवार को अंतर-धार्मिक सद्भाव बनाए रखने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार के आउटरीच के हिस्से के रूप में एक अंतर-धार्मिक बैठक बुलाई थी, जिसमें विभिन्न धर्मों के धर्मगुरु शामिल हुए थे. |
भारतीय ओप्पो यूजर्स के लिए खुशखबरी है। दरअसल, Oppo F17 और Oppo A73 को ColorOS 12 बीटा अपडेट मिलना शुरू हो गया है, जो Android 12 पर बेस्ड है। कंपनी के अनुसार, भारत में Oppo F17 मॉडल और वियतनाम में Oppo A73 फोन को बीटा वर्जन अपडेट मिल रहा है। ओप्पो द्वारा ColorOS12 बीटा वर्जन के ग्लोबल रोल आउट शेड्यूल के साथ-साथ दूसरी तिमाही के लिए स्टेबल वर्जन की घोषणा के कुछ दिनों बाद यह खबर आई है। ओप्पो के मुताबिक, भारत में Oppo F19 स्मार्टफोन यूजर्स के एक बड़े हिस्से को ColorOS 12 बीटा वर्जन पहले ही मिल चुका है।
ओप्पो के ColorOS ग्लोबल ट्विटर हैंडल ने एक तस्वीर शेयर की है और कहा है कि ColorOS 12 बीटा अपडेट अब भारत में Oppo F17 और वियतनाम में Oppo A73 के लिए आ रहा है। इसमें कहा गया है कि बीटा वर्जन केवल लिमिटेड यूजर्स के लिए है और इसे बैच-बाय-बैच आधार पर जारी किया जाएगा।
यदि एप्लिकेशन कोटा भरा हुआ है, तो उपयोगकर्ताओं को रोलआउट के अगले दौर की प्रतीक्षा करनी होगी। जैसा कि उल्लेख किया गया है, कंपनी ने पहले ही Oppo F19 स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए बीटा अपडेट को रोल आउट करना शुरू कर दिया है।
चीनी कंपनी ने हाल ही में 2022 की दूसरी तिमाही के लिए बीटा और आधिकारिक एंड्रॉइड 12 पर बेस्ड ColorOS 12 अपडेट को वैश्विक स्तर पर रोल आउट करने की अपनी योजना की घोषणा की। Oppo 19 और Oppo F19s, और Oppo F17 के अलावा, Oppo A53 और साथ ही Oppo Reno सहित स्मार्टफोन 3 प्रो को अप्रैल में बीटा अपडेट मिलेगा। Oppo Reno 7 5G, Oppo Reno 10X Zoom और Oppo A76 को मई में बीटा वर्जन मिलना शुरू हो जाएगा और Oppo F21 Pro 5G को जून में बीटा अपडेट मिलेगा। Oppo का कहना है कि Oppo A53s 5G को 25 अप्रैल से स्टेबल अपडेट मिलना शुरू हो जाएगा और Oppo Reno 7 Pro 5G को मई में आधिकारिक वर्जन मिल जाएगा।
| भारतीय ओप्पो यूजर्स के लिए खुशखबरी है। दरअसल, Oppo Fसत्रह और Oppo Aतिहत्तर को ColorOS बारह बीटा अपडेट मिलना शुरू हो गया है, जो Android बारह पर बेस्ड है। कंपनी के अनुसार, भारत में Oppo Fसत्रह मॉडल और वियतनाम में Oppo Aतिहत्तर फोन को बीटा वर्जन अपडेट मिल रहा है। ओप्पो द्वारा ColorOSबारह बीटा वर्जन के ग्लोबल रोल आउट शेड्यूल के साथ-साथ दूसरी तिमाही के लिए स्टेबल वर्जन की घोषणा के कुछ दिनों बाद यह खबर आई है। ओप्पो के मुताबिक, भारत में Oppo Fउन्नीस स्मार्टफोन यूजर्स के एक बड़े हिस्से को ColorOS बारह बीटा वर्जन पहले ही मिल चुका है। ओप्पो के ColorOS ग्लोबल ट्विटर हैंडल ने एक तस्वीर शेयर की है और कहा है कि ColorOS बारह बीटा अपडेट अब भारत में Oppo Fसत्रह और वियतनाम में Oppo Aतिहत्तर के लिए आ रहा है। इसमें कहा गया है कि बीटा वर्जन केवल लिमिटेड यूजर्स के लिए है और इसे बैच-बाय-बैच आधार पर जारी किया जाएगा। यदि एप्लिकेशन कोटा भरा हुआ है, तो उपयोगकर्ताओं को रोलआउट के अगले दौर की प्रतीक्षा करनी होगी। जैसा कि उल्लेख किया गया है, कंपनी ने पहले ही Oppo Fउन्नीस स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए बीटा अपडेट को रोल आउट करना शुरू कर दिया है। चीनी कंपनी ने हाल ही में दो हज़ार बाईस की दूसरी तिमाही के लिए बीटा और आधिकारिक एंड्रॉइड बारह पर बेस्ड ColorOS बारह अपडेट को वैश्विक स्तर पर रोल आउट करने की अपनी योजना की घोषणा की। Oppo उन्नीस और Oppo Fउन्नीस सेकंड, और Oppo Fसत्रह के अलावा, Oppo Aतिरेपन और साथ ही Oppo Reno सहित स्मार्टफोन तीन प्रो को अप्रैल में बीटा अपडेट मिलेगा। Oppo Reno सात पाँचG, Oppo Reno दसX Zoom और Oppo Aछिहत्तर को मई में बीटा वर्जन मिलना शुरू हो जाएगा और Oppo Fइक्कीस Pro पाँचG को जून में बीटा अपडेट मिलेगा। Oppo का कहना है कि Oppo Aतिरेपन सेकंड पाँचG को पच्चीस अप्रैल से स्टेबल अपडेट मिलना शुरू हो जाएगा और Oppo Reno सात Pro पाँचG को मई में आधिकारिक वर्जन मिल जाएगा। |
मोलेनबीक , (भाषा)। बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स का मुस्लिम बहुल इलाका मोलेनबीक हाल ही में आईएसआईएस के कुछ आतंकवादियों की भर्ती वाले स्थान के तौर पर सुर्खियों में आया, लेकिन स्थानीय लोग महसूस करते हैं कि कुछ लोगों की करतूतों की वजह से उनके इलाके को बेवजह से आतंक के चश्मे से देखा जा रहा है। मोलेनबीक करीब एक लाख की आबादी वाला इलाका है जिनमें मोरक्को और तुर्की मूल के नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हैं। इनमें अधिकांश मध्यवर्ग के लोग है। यह इलाका पेरिस और ब्रसेल्स आतंकी हमलों के बाद सुर्खियों में आया क्योंकि इन हमलों को अंजाम देने वाले आईएस कुछ आतंकवादियों का ताल्लुक इसी इलाके से था। पेरिस हमले का सूत्रधार माना जा रहा सालेह अब्दुस्सलाम इसी इलाके में छिपा था और उसे बीते 18 मार्च को गिरफ्तार किया गया। पेरिस हमले का संदिग्ध मुख्य षणयंत्रकारी अब्दुल हामिद अबाउद भी मोलेनबीक में रहता था। फांस की राजधानी और बेल्जियम की राजधानी में हमलों को अंजाम देने वाले 14 आतंकवादियों में से आ" ब्रसेल्स में रहते थे। इनमें से एक मोहम्मद आबरीनी मोरक्को मूल का है और वह मोलेनबीक में ही पला-बढ़ा था। उसे इसी महीने ब्रसेल्स में गिरफ्तार किया गया। मोलेनबीक के निवासी अब आतंकवाद के कलंक के साथ जीने को मजबूर हैं। ज्यादातर निवासियों का कहना है कि लोगों को इस इलाके को एक ही नजर से नहीं देखना चाहिए। मोलेनबीक की निवासी नोरा लारिसी का कहना है, ``मैं यहां की निवासी हूं और आतंकी हमलों के बाद भी हमें इस इलाके में रहने में हमें कोई दिक्कत नहीं है। हम प्रवासी मूल के लोग हैं और ऐसे में यह स्वाभाविक है कि लोग हमें संदेह की नजर से देखेंगे। परंतु एक या दो लोगों ने हमें बदनाम किया है। " यह पूछे जाने पर कि पूरे इलाके को बदनाम करना क्या अनुचित नहीं है तो नोरा ने हां में जवाब दिया। नोरा का यह भी कहना है कि प्रशासन के लोग यहां के निवासियों को परेशान नहीं कर रहे और अधिकारी `हमसे अनुचित सवाल भी नहीं पूछते। ' वैसे मोलेनबीक में रहने वाले बहुत सारे लोगों के चेहरों पर खौफ देखा जा सकता है क्योंकि वे पत्रकारों से बातचीत करने से इंकार करते हैं। इलाके में रहने वाले सलमान उन लोगों में से हैं जो अपनी बात खुलकर रखते हैं। उनका कहना है, ``कुछ को आतंकवाद से जुड़ा हुआ पाया गया है। इसका यह मतलब नहीं है कि मोलेनबीक के सभी निवासी गलत हैं। यह समुदाय बहुत अच्छा है। यहां कभी कोई खतरा नहीं रहा। " बीते 22 मार्च को ब्रसेल्स में आतंकी हमले हुए थे जिनमें 32 लोग मारे गए थे।
| मोलेनबीक , । बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स का मुस्लिम बहुल इलाका मोलेनबीक हाल ही में आईएसआईएस के कुछ आतंकवादियों की भर्ती वाले स्थान के तौर पर सुर्खियों में आया, लेकिन स्थानीय लोग महसूस करते हैं कि कुछ लोगों की करतूतों की वजह से उनके इलाके को बेवजह से आतंक के चश्मे से देखा जा रहा है। मोलेनबीक करीब एक लाख की आबादी वाला इलाका है जिनमें मोरक्को और तुर्की मूल के नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हैं। इनमें अधिकांश मध्यवर्ग के लोग है। यह इलाका पेरिस और ब्रसेल्स आतंकी हमलों के बाद सुर्खियों में आया क्योंकि इन हमलों को अंजाम देने वाले आईएस कुछ आतंकवादियों का ताल्लुक इसी इलाके से था। पेरिस हमले का सूत्रधार माना जा रहा सालेह अब्दुस्सलाम इसी इलाके में छिपा था और उसे बीते अट्ठारह मार्च को गिरफ्तार किया गया। पेरिस हमले का संदिग्ध मुख्य षणयंत्रकारी अब्दुल हामिद अबाउद भी मोलेनबीक में रहता था। फांस की राजधानी और बेल्जियम की राजधानी में हमलों को अंजाम देने वाले चौदह आतंकवादियों में से आ" ब्रसेल्स में रहते थे। इनमें से एक मोहम्मद आबरीनी मोरक्को मूल का है और वह मोलेनबीक में ही पला-बढ़ा था। उसे इसी महीने ब्रसेल्स में गिरफ्तार किया गया। मोलेनबीक के निवासी अब आतंकवाद के कलंक के साथ जीने को मजबूर हैं। ज्यादातर निवासियों का कहना है कि लोगों को इस इलाके को एक ही नजर से नहीं देखना चाहिए। मोलेनबीक की निवासी नोरा लारिसी का कहना है, ``मैं यहां की निवासी हूं और आतंकी हमलों के बाद भी हमें इस इलाके में रहने में हमें कोई दिक्कत नहीं है। हम प्रवासी मूल के लोग हैं और ऐसे में यह स्वाभाविक है कि लोग हमें संदेह की नजर से देखेंगे। परंतु एक या दो लोगों ने हमें बदनाम किया है। " यह पूछे जाने पर कि पूरे इलाके को बदनाम करना क्या अनुचित नहीं है तो नोरा ने हां में जवाब दिया। नोरा का यह भी कहना है कि प्रशासन के लोग यहां के निवासियों को परेशान नहीं कर रहे और अधिकारी `हमसे अनुचित सवाल भी नहीं पूछते। ' वैसे मोलेनबीक में रहने वाले बहुत सारे लोगों के चेहरों पर खौफ देखा जा सकता है क्योंकि वे पत्रकारों से बातचीत करने से इंकार करते हैं। इलाके में रहने वाले सलमान उन लोगों में से हैं जो अपनी बात खुलकर रखते हैं। उनका कहना है, ``कुछ को आतंकवाद से जुड़ा हुआ पाया गया है। इसका यह मतलब नहीं है कि मोलेनबीक के सभी निवासी गलत हैं। यह समुदाय बहुत अच्छा है। यहां कभी कोई खतरा नहीं रहा। " बीते बाईस मार्च को ब्रसेल्स में आतंकी हमले हुए थे जिनमें बत्तीस लोग मारे गए थे। |
1 मांडू- जहाज महल की छत पर सेल्फी लेते समय हादसा विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मांडू के जहाज महल में शनिवार को एक स्कूली छात्रा सेल्फी लेते समय 30 फीट ऊंचाई से गिर गई। हादसा उस समय हुआ जब कई छात्राएं महल की दीवार के नजदीक खड़े होकर तस्वीरें खिंचा रही थी। इस घटना के बाद सभी स्कूली छात्राएं दहशत में हैं। गौरतलब है कि सभी य़ात्राएं स्कूली की तरफ से भ्रमण पर आई थी। 2 सागर में बहेगी 'विकास की गंगा' सागर पहुंचे शिवराज सिंह चौहान ने 'मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना' के तहत आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शिरकत करते हुए प्रदेश के 20 लाख किसानों के बैंक खातों में 400 करोड़ की राशि वन क्लिक के जरिए ट्रांसफर की. इस दौरान उन्होंने सागर के लिए घोषणाओं का पिटारा खोला और 535 करोड़ की लागत के 13 विकास कार्यों की सौगात दी. 3 आ गया 10वीं,12वीं का टाइम टेबल मध्य प्रदेश शिक्षा मंडल ने बोर्ड परीक्षाओं का टाइम टेबल जारी कर दिया है। इसके मुताबिक 10वीं की परीक्षाएं 30 अप्रैल से 15 मई तक आयोजित की जाएंगी, जबकि 12वीं की परीक्षाएं 1 मई से 18 मई तक चलेंगी। पेपर सुबह 8 बजे से दोपहर 11 बजे तक रहेगा। 4 कमलनाथ ने साधा शिवराज सरकार पर निशाना मध्यप्रदेश की नई आबकारी नीति को लेकर पूर्व सीएम कमलनाथ ने हमला बोला है। कमलनाथ ने कहा- एक तरफ़ तो बातें कभी शराबबंदी की, कभी शराब की दुकानों को कम करने की, कभी शराब के ख़ात्मे की लेकिन दूसरी तरफ़ काम निरंतर शराब के व्यवसाय को बढ़ाने का? कभी शराब की दुकानें बढ़ाने का प्रस्ताव और अब होम डिलेवरी की तैयारी? 5 ड्राइव इन सिनेमा में राजधानीवासी देखेंगे फिल्म मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में अब लोग अमेरिकन कल्चर पर आधारित ड्राइव इन सिनेमा का मजा ले सकेंगे। यानी कार में बैठकर ही मूवी देखी जा सकेगी। पर्यटन विभाग ने ड्राइव इन सिनेमा का इनिशिएटिव लिया है। अशोका लेक व्यू होटल परिसर में इसकी शुरुआत हुई है। इसमें रोजना दो शो का आयोजन किया जाएगा। 6 प्रदेश के लोगों को बड़ा झटका मध्य प्रदेश में 38 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और उसकी 839 ब्रांच को बंद करने की तैयारी की जा रही है. जानकारी के मुताबिक इस प्रक्रिया के लिए एक टीम बनाई गयी है जोकि तेलंगाना, केरल और उत्तराखंड जाकर केस स्टडी करेगी और उसकी रिपोर्ट सौंपेगी. जिसके आधार पर बैंक बंद करने का फैसला लिया जाएगा. बता दें कि इन तीनों राज्यों में पहले ही केंद्रीय सहकारी बैंकों को बंद किया जा चुका. 7 दिग्विजय सिंह का राष्ट्रपति पर निशाना मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अब केंद्र सरकार के साथ-साथ राष्ट्रपति पर भी निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति कैबिनेट से भेजे हुए ड्राफ्ट को ही पढ़ते हैं. इसमे कोई बदलाव नहीं होता है. उन्होंने कहा कि जब भी किसान कानूनों के मुद्दे पर चर्चा होगी वे अपनी बात रखेगें. दिग्विजय यहां मीडिया से चर्चा कर रहे थे. 8 पुलिस विभाग में हुए थोक तबादले मध्य प्रदेश में पुलिस विभाग में आज थोक तबादले कर दिए गए. सरकार ने 12 आईपीएस अफसरों को बदल दिया है. इसी के साथ 34 डीएसपी का प्रमोशन के साथ तबादला कर दिया गया है. प्रदेश के 20 एएसपी का भी ट्रांसफर किया गया. 9 पचमढ़ी में रात का पारा 1. 6 डिग्री सेल्सियस पहुंचा उत्तर की सर्द हवाओं के कारण मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। पचमढ़ी में जहां रात का पारा 1. 6 डिग्री सेल्सियस सबसे कम रहा, वहीं रायसेन समेत प्रदेश के अन्य जिलों में रात की ओस की बूंदें बर्फ में बदल गईं। प्रदेश के 16 जिलों में कोल्ड वेव रही। राजधानी भोपाल में भी शुक्रवार-शनिवार की रात इस सीजन की सबसे सर्द रात रही।
| एक मांडू- जहाज महल की छत पर सेल्फी लेते समय हादसा विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मांडू के जहाज महल में शनिवार को एक स्कूली छात्रा सेल्फी लेते समय तीस फीट ऊंचाई से गिर गई। हादसा उस समय हुआ जब कई छात्राएं महल की दीवार के नजदीक खड़े होकर तस्वीरें खिंचा रही थी। इस घटना के बाद सभी स्कूली छात्राएं दहशत में हैं। गौरतलब है कि सभी य़ात्राएं स्कूली की तरफ से भ्रमण पर आई थी। दो सागर में बहेगी 'विकास की गंगा' सागर पहुंचे शिवराज सिंह चौहान ने 'मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना' के तहत आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शिरकत करते हुए प्रदेश के बीस लाख किसानों के बैंक खातों में चार सौ करोड़ की राशि वन क्लिक के जरिए ट्रांसफर की. इस दौरान उन्होंने सागर के लिए घोषणाओं का पिटारा खोला और पाँच सौ पैंतीस करोड़ की लागत के तेरह विकास कार्यों की सौगात दी. तीन आ गया दसवीं,बारहवीं का टाइम टेबल मध्य प्रदेश शिक्षा मंडल ने बोर्ड परीक्षाओं का टाइम टेबल जारी कर दिया है। इसके मुताबिक दसवीं की परीक्षाएं तीस अप्रैल से पंद्रह मई तक आयोजित की जाएंगी, जबकि बारहवीं की परीक्षाएं एक मई से अट्ठारह मई तक चलेंगी। पेपर सुबह आठ बजे से दोपहर ग्यारह बजे तक रहेगा। चार कमलनाथ ने साधा शिवराज सरकार पर निशाना मध्यप्रदेश की नई आबकारी नीति को लेकर पूर्व सीएम कमलनाथ ने हमला बोला है। कमलनाथ ने कहा- एक तरफ़ तो बातें कभी शराबबंदी की, कभी शराब की दुकानों को कम करने की, कभी शराब के ख़ात्मे की लेकिन दूसरी तरफ़ काम निरंतर शराब के व्यवसाय को बढ़ाने का? कभी शराब की दुकानें बढ़ाने का प्रस्ताव और अब होम डिलेवरी की तैयारी? पाँच ड्राइव इन सिनेमा में राजधानीवासी देखेंगे फिल्म मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में अब लोग अमेरिकन कल्चर पर आधारित ड्राइव इन सिनेमा का मजा ले सकेंगे। यानी कार में बैठकर ही मूवी देखी जा सकेगी। पर्यटन विभाग ने ड्राइव इन सिनेमा का इनिशिएटिव लिया है। अशोका लेक व्यू होटल परिसर में इसकी शुरुआत हुई है। इसमें रोजना दो शो का आयोजन किया जाएगा। छः प्रदेश के लोगों को बड़ा झटका मध्य प्रदेश में अड़तीस जिला केंद्रीय सहकारी बैंक और उसकी आठ सौ उनतालीस ब्रांच को बंद करने की तैयारी की जा रही है. जानकारी के मुताबिक इस प्रक्रिया के लिए एक टीम बनाई गयी है जोकि तेलंगाना, केरल और उत्तराखंड जाकर केस स्टडी करेगी और उसकी रिपोर्ट सौंपेगी. जिसके आधार पर बैंक बंद करने का फैसला लिया जाएगा. बता दें कि इन तीनों राज्यों में पहले ही केंद्रीय सहकारी बैंकों को बंद किया जा चुका. सात दिग्विजय सिंह का राष्ट्रपति पर निशाना मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अब केंद्र सरकार के साथ-साथ राष्ट्रपति पर भी निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति कैबिनेट से भेजे हुए ड्राफ्ट को ही पढ़ते हैं. इसमे कोई बदलाव नहीं होता है. उन्होंने कहा कि जब भी किसान कानूनों के मुद्दे पर चर्चा होगी वे अपनी बात रखेगें. दिग्विजय यहां मीडिया से चर्चा कर रहे थे. आठ पुलिस विभाग में हुए थोक तबादले मध्य प्रदेश में पुलिस विभाग में आज थोक तबादले कर दिए गए. सरकार ने बारह आईपीएस अफसरों को बदल दिया है. इसी के साथ चौंतीस डीएसपी का प्रमोशन के साथ तबादला कर दिया गया है. प्रदेश के बीस एएसपी का भी ट्रांसफर किया गया. नौ पचमढ़ी में रात का पारा एक. छः डिग्री सेल्सियस पहुंचा उत्तर की सर्द हवाओं के कारण मध्यप्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। पचमढ़ी में जहां रात का पारा एक. छः डिग्री सेल्सियस सबसे कम रहा, वहीं रायसेन समेत प्रदेश के अन्य जिलों में रात की ओस की बूंदें बर्फ में बदल गईं। प्रदेश के सोलह जिलों में कोल्ड वेव रही। राजधानी भोपाल में भी शुक्रवार-शनिवार की रात इस सीजन की सबसे सर्द रात रही। |
शनिवार की शाम से बूंदाबांदी की झड़ी लगाने वाली बादल वैसे तो रविवार को दोपहर बाद थम गए मगर इसका असर देखने को मिला रविवार की शाम को। अचानक से सर्द हवा ने शहर में एंट्री मार कर ठिठुरन बढ़ा दी। फरवरी के महीने में सर्द हवा का आलम देख हर कोई चौंक पड़ा। माना जा रहा है कि इसका असर कम से कम एक सप्ताह तक बना रहेगा। यानि फरवरी के अंतिम दिन तक लोगों को दिन में गर्म कपड़ों की जरूरत पड़ेगी।
मौसम विभाग की माने तो यूपी में डिस्टर्बेंस का असर अब खत्म होने को है। सोमवार को मौसम साफ हो सकता है मगर मिनिमम टेम्प्रेचर में गिरावट देखने को मिल सकती है। धूप निकलने पर दिन का टेम्प्रेचर नार्मल की ओर बढ़ेगा। कुछ दिनों बाद मौसम में फिर एक हल्का डिस्टर्बेंस आने की संभावना भी बनी हुई है जो एक बार फिर सर्द हवा के असर को बनाए रखेगी।
| शनिवार की शाम से बूंदाबांदी की झड़ी लगाने वाली बादल वैसे तो रविवार को दोपहर बाद थम गए मगर इसका असर देखने को मिला रविवार की शाम को। अचानक से सर्द हवा ने शहर में एंट्री मार कर ठिठुरन बढ़ा दी। फरवरी के महीने में सर्द हवा का आलम देख हर कोई चौंक पड़ा। माना जा रहा है कि इसका असर कम से कम एक सप्ताह तक बना रहेगा। यानि फरवरी के अंतिम दिन तक लोगों को दिन में गर्म कपड़ों की जरूरत पड़ेगी। मौसम विभाग की माने तो यूपी में डिस्टर्बेंस का असर अब खत्म होने को है। सोमवार को मौसम साफ हो सकता है मगर मिनिमम टेम्प्रेचर में गिरावट देखने को मिल सकती है। धूप निकलने पर दिन का टेम्प्रेचर नार्मल की ओर बढ़ेगा। कुछ दिनों बाद मौसम में फिर एक हल्का डिस्टर्बेंस आने की संभावना भी बनी हुई है जो एक बार फिर सर्द हवा के असर को बनाए रखेगी। |
एम्स की तरफ से एक सराहनीय कदम उठाया गया है। एम्स में मरीज को उनकी जांच रिपोर्ट 24 घंटे उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की गई है।
भोपाल। एम्स की तरफ से एक सराहनीय कदम उठाया गया है। जिसके बाद मरीजों को काफी ज्यादा फायदा होगा। एम्स में मरीज को उनकी जांच रिपोर्ट 24 घंटे उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की गई है। ऐसे में मरीज हफ्ते में सातों दिन 24 घंटे में कभी भी अपनी सुविधा अनुसार जांच रिपोर्ट प्राप्त कर सकेंगे। इससे पहले मरीजों को उनकी रिपोर्ट सुबह आठ बजे से दोपहर चार बजे के बीच ही उपलब्ध कराई जाती थी। नई व्यवस्था में मरीजों की वह जांच रिपोर्ट जो ऑनलाइन उपलब्ध नहीं हैं उसे आईपीडी काउंटर नंबर सात से सुबह आठ से दोपहर चार बजे तक और आईपीडी के काउंटर नंबर 9 से शाम चार बजे से सुबह आठ बजे तक प्राप्त कर सकते हैं। मरीज के अलावा उनके परिजन भी जांच रिपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं।
गोविंदपुरा में 10 बेड का सिविल अस्पताल बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि 2 महीने में निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। ऐसे में 15 अगस्त को अस्पताल का शुभारंभ होगा। काटजू अस्पताल की तर्ज पर इस अस्पताल की मदर एंड चाइल्ड केयर हॉस्पिटल की तर्ज पर किया जाएगा। इसका फायदा गोविंदपुरा क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं और नवजातों को होगा ।
| एम्स की तरफ से एक सराहनीय कदम उठाया गया है। एम्स में मरीज को उनकी जांच रिपोर्ट चौबीस घंटाटे उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की गई है। भोपाल। एम्स की तरफ से एक सराहनीय कदम उठाया गया है। जिसके बाद मरीजों को काफी ज्यादा फायदा होगा। एम्स में मरीज को उनकी जांच रिपोर्ट चौबीस घंटाटे उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की गई है। ऐसे में मरीज हफ्ते में सातों दिन चौबीस घंटाटे में कभी भी अपनी सुविधा अनुसार जांच रिपोर्ट प्राप्त कर सकेंगे। इससे पहले मरीजों को उनकी रिपोर्ट सुबह आठ बजे से दोपहर चार बजे के बीच ही उपलब्ध कराई जाती थी। नई व्यवस्था में मरीजों की वह जांच रिपोर्ट जो ऑनलाइन उपलब्ध नहीं हैं उसे आईपीडी काउंटर नंबर सात से सुबह आठ से दोपहर चार बजे तक और आईपीडी के काउंटर नंबर नौ से शाम चार बजे से सुबह आठ बजे तक प्राप्त कर सकते हैं। मरीज के अलावा उनके परिजन भी जांच रिपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं। गोविंदपुरा में दस बेड का सिविल अस्पताल बनाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि दो महीने में निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। ऐसे में पंद्रह अगस्त को अस्पताल का शुभारंभ होगा। काटजू अस्पताल की तर्ज पर इस अस्पताल की मदर एंड चाइल्ड केयर हॉस्पिटल की तर्ज पर किया जाएगा। इसका फायदा गोविंदपुरा क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं और नवजातों को होगा । |
तेलंगाना हाईकोर्ट ने धरणी पोर्टल में संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन को लेकर दाखिल हुई याचिका पर सुनवाई की।
साक्षी समाचार पर छपी खबर के अनुसार, इस मौके पर हाईकोर्ट ने गैर कृषि संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन पर गुरुवार तक रोक लगा दी है।
याचिकाकर्ता के वकील देसाई प्रकाश ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने इससे पहले हाईकोर्ट से पुरानी पद्दति में रजिस्ट्रेशन करने की बात कही थी, लेकिन उसपर अमल नहीं हो रहा है।
उन्होंने गैरकृषि संपत्ति के रजिस्ट्रेशन के लिए व्यक्तिगत डिटेल्स के साथ-साथ खरीददार और विक्रेताओं के परिवार के सदस्यों के डिटेल्स मांगे जाने पर भी आपत्ति व्यक्त की। उसी तरह, आधार कार्ड के डिटेल्स नहीं लेने के निर्देश के बावजूद सरकार आधार का डिटेल्स जुटा रही है।
पूरी दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार मामले की सुनवाई के दौरान कुछ बोल रही है और बाहर दूसरा कर रही है।
अदालत ने सरकार को पूर्ण डिटेल्स के साथ काउंटर हलफनामा दाखिल करने का आदेश देते हुए अगली सुनवाई गुरुवार तक स्थगित कर दी।
| तेलंगाना हाईकोर्ट ने धरणी पोर्टल में संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन को लेकर दाखिल हुई याचिका पर सुनवाई की। साक्षी समाचार पर छपी खबर के अनुसार, इस मौके पर हाईकोर्ट ने गैर कृषि संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन पर गुरुवार तक रोक लगा दी है। याचिकाकर्ता के वकील देसाई प्रकाश ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने इससे पहले हाईकोर्ट से पुरानी पद्दति में रजिस्ट्रेशन करने की बात कही थी, लेकिन उसपर अमल नहीं हो रहा है। उन्होंने गैरकृषि संपत्ति के रजिस्ट्रेशन के लिए व्यक्तिगत डिटेल्स के साथ-साथ खरीददार और विक्रेताओं के परिवार के सदस्यों के डिटेल्स मांगे जाने पर भी आपत्ति व्यक्त की। उसी तरह, आधार कार्ड के डिटेल्स नहीं लेने के निर्देश के बावजूद सरकार आधार का डिटेल्स जुटा रही है। पूरी दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार मामले की सुनवाई के दौरान कुछ बोल रही है और बाहर दूसरा कर रही है। अदालत ने सरकार को पूर्ण डिटेल्स के साथ काउंटर हलफनामा दाखिल करने का आदेश देते हुए अगली सुनवाई गुरुवार तक स्थगित कर दी। |
रीवा जिले के सोहागी थाना अंतर्गत त्योंथर कस्बे में 82 साल की बुजुर्ग महिला ने केरोसीन डालकर खुद को जिंदा जला लिया। इस दुर्घटना में कच्चा घर पूरी तरह जलकर राख हो गया है। चोरों तरफ फैली चिंगारी ने गृहस्थी को नष्ट करने के बाद आग अन्य घरों की ओर बढ़ रही थी। लेकिन समय रहते दमकल वाहन ने आग पर काबू पा लिया है।
आग बुझने के बाद मलबे से लाश को बाहर निकाला गया। इसके बाद पंचनामा कार्रवाई की गई। अधजली लाश को त्योंथर सिविल अस्पताल पीएम के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम उपरांत कंकाल बन चुकी लाश परिजनों के सुपुर्द कर दी गई है। फिलहाल त्योंथर चौकी पुलिस मर्ग कायम कर घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
चौकी प्रभारी शिवांगी गर्ग ने बताया कि शुक्रवार की रात 8 बजे के आसपास श्यामकली यादव पति जगन्नाथ 82 वर्ष निवासी त्योंथर नगर परिषद वार्ड क्रमांक 5 दुअरा की जलने से मौत हो गई। मोहल्ले के लोगों ने पूछताछ में कहा है कि बिछिप्त महिला कई दिनों से मरने की बात कर रही थी। ऐसे में बीती रात अज्ञात कारणों से खुद को कच्चे घर के अंदर बंदकर केरोसिन छिड़कर आग लगा दी।
पुलिस की मानें दो कमरे का कच्चा घर है। बिछिप्त महिला जिस घर में लकड़ी सहित अन्य गृहस्थी का सामन रखा। साथ ही दरवाजे की कुंडी बंद थी। जिसके कारण महिला को निकलने का अवसर नहीं मिला। वहीं दूसरी तरफ घर वाले भी बचान नहीं पाए। अंततः नगर परिषद का फायर बिग्रेड आया। जिसने दूसरे कमरे को जलने से बचा लिया। लेकिन वृद्धा सहित एक कमरे का कच्चा घर मलबा बन गया।
सूत्रों की मानें तो वृद्धा का पति बहुत पहले मर चुका है। वह 65 वर्षीय बेटे के साथ कच्चे घर में रहती थी। बिछिप्तता के कारण आसपास के लोगों से अक्सर मरने की बातें करती थी। हालांकि सभी परिवार के लोग आत्मघाती कदम उठाने से मना करा देते थे। लेकिन 26 अगस्त की रात वृद्धा के अंदर सनक सवार हुई। जिससे खुद को जिंदा जलाकर मार डाला है।
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| रीवा जिले के सोहागी थाना अंतर्गत त्योंथर कस्बे में बयासी साल की बुजुर्ग महिला ने केरोसीन डालकर खुद को जिंदा जला लिया। इस दुर्घटना में कच्चा घर पूरी तरह जलकर राख हो गया है। चोरों तरफ फैली चिंगारी ने गृहस्थी को नष्ट करने के बाद आग अन्य घरों की ओर बढ़ रही थी। लेकिन समय रहते दमकल वाहन ने आग पर काबू पा लिया है। आग बुझने के बाद मलबे से लाश को बाहर निकाला गया। इसके बाद पंचनामा कार्रवाई की गई। अधजली लाश को त्योंथर सिविल अस्पताल पीएम के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम उपरांत कंकाल बन चुकी लाश परिजनों के सुपुर्द कर दी गई है। फिलहाल त्योंथर चौकी पुलिस मर्ग कायम कर घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। चौकी प्रभारी शिवांगी गर्ग ने बताया कि शुक्रवार की रात आठ बजे के आसपास श्यामकली यादव पति जगन्नाथ बयासी वर्ष निवासी त्योंथर नगर परिषद वार्ड क्रमांक पाँच दुअरा की जलने से मौत हो गई। मोहल्ले के लोगों ने पूछताछ में कहा है कि बिछिप्त महिला कई दिनों से मरने की बात कर रही थी। ऐसे में बीती रात अज्ञात कारणों से खुद को कच्चे घर के अंदर बंदकर केरोसिन छिड़कर आग लगा दी। पुलिस की मानें दो कमरे का कच्चा घर है। बिछिप्त महिला जिस घर में लकड़ी सहित अन्य गृहस्थी का सामन रखा। साथ ही दरवाजे की कुंडी बंद थी। जिसके कारण महिला को निकलने का अवसर नहीं मिला। वहीं दूसरी तरफ घर वाले भी बचान नहीं पाए। अंततः नगर परिषद का फायर बिग्रेड आया। जिसने दूसरे कमरे को जलने से बचा लिया। लेकिन वृद्धा सहित एक कमरे का कच्चा घर मलबा बन गया। सूत्रों की मानें तो वृद्धा का पति बहुत पहले मर चुका है। वह पैंसठ वर्षीय बेटे के साथ कच्चे घर में रहती थी। बिछिप्तता के कारण आसपास के लोगों से अक्सर मरने की बातें करती थी। हालांकि सभी परिवार के लोग आत्मघाती कदम उठाने से मना करा देते थे। लेकिन छब्बीस अगस्त की रात वृद्धा के अंदर सनक सवार हुई। जिससे खुद को जिंदा जलाकर मार डाला है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
पहले पीटीएस में फर्जी प्रशिक्षु महिला का पकड़ा जाना और अब पीएसी से चोरी इंसास की नाटकीय ढंग से बरामदगी से साफ है कि सुरक्षा बलों में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की घुसपैठ बढ़ती जा रही है। भले ही पीएसी के सिपाहियों ने इंसास चोरी करने में कोई साजिश रची हो। लेकिन यह सुरक्षा में बड़ी चूक मानी जा रही है। इस तरह की सेंधमारी से बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे पहले कुछ पुलिसकर्मियों के बदमाशों को संरक्षण देने और खुद अपराध में लिप्त पाए जाने के मामले भी सामने आते रहे हैं।
17 जून की रात पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय (पीटीएस) में एक फर्जी महिला प्रशिक्षु सिपाही को पकड़ा गया था। इस युवती के पास से परिचय पत्र, बेल्ट, टोपी और वर्दी भी बरामद की गई थी। इसका खुलासा तब हुआ जब महिला प्रशिक्षुओं की गिनती की गई तो 401 के स्थान पर 402 महिला प्रशिक्षु मिलीं। बिजनौर निवासी प्रीति नाम की जो युवती अतिरिक्त प्रशिक्षु मिली, उसका कहीं भी रिकॉर्ड नहीं मिला था। जिसके बाद आरोपी प्रीति के खिलाफ थाना खरखौदा पर केस दर्ज कराते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
इस प्रकरण में आईजी पीटीएस लक्ष्मी सिंह ने जांच बैठाते हुए कहा था कि फर्जी महिला आरक्षी ने दूसरे जनपदों में भी ट्रेनिंग ली है, जिसके चलते उसकी भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। वहीं, पुलिस की जांच में बिजनौर का सिपाही कपिल जांच के घेरे में है। विवेचक बीएस चौहान के अनुसार आरोपी सिपाही कपिल ने धामपुर के साइबर कैफे से युवती के फर्जी कागजात तैयार कराए। मेडिकल भी फर्जी पाया गया।
फर्जी महिला प्रशिक्षु सिपाही का मामला शांत भी नहीं हुआ कि पीटीएस के सामने ही 44 वी वाहिनी पीएसी के कमांड हाउस से इंसास चोरी हो गई। यह इंसास 22 जून को चोरी हो गई थी। लेकिन इसे 28 जून को चोरी होना बताकर पीएसी के एचसीपी गुरुदेव सिंह, कांस्टेबल सोनू सिंह, रत्नेश, प्रेमवीर और अंकित नागर के खिलाफ मुकदमा हुआ। इंसास प्रेमवीर के नाम आवंटित थी। इन पांच पुलिसकर्मियों के अलावा 11 अन्य के खिलाफ विभागीय जांच बैठी तो खलबली मच गई।
अभी तक प्राथमिक जांच में सामने आया कि साजिश के तहत नजदीकी सिपाही ने ही इंसास को चोरी कराया। उसके बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से इंसास के बदले में 3. 5 लाख की की रकम मांगी गई। रकम न देने के लिए यह भी कहा गया कि तो फिर मुकदमा झेलने के लिए तैयार रहें।
पुलिस मान रही है कि सिपाही प्रेमवीर और उसके साथियों पर मुकदमा, निलंबन और जेल भिजवाने को लेकर साजिश रची गई। जिसमें वह खुद भी फंस गया है। पुलिस और पीएसी के अधिकारी पहले से ही मान रहे थे कि मामला अंदर से ही जुड़ा हुआ है। कमांड हाउस की गारद तक बाहरी व्यक्ति नहीं पहुंच सकता।
इंसास की चोरी का जब केस दर्ज हुआ तो पीएसी परिसर का चप्पा-चप्पा खोजा गया था। लेकिन सुराग नहीं लगा था। लेकिन जैसे ही अधिकारी सक्रिय हुए तो शनिवार देर रात यह इंसास पीएसी परिसर के छज्जे पर रखवा दी गई।
| पहले पीटीएस में फर्जी प्रशिक्षु महिला का पकड़ा जाना और अब पीएसी से चोरी इंसास की नाटकीय ढंग से बरामदगी से साफ है कि सुरक्षा बलों में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की घुसपैठ बढ़ती जा रही है। भले ही पीएसी के सिपाहियों ने इंसास चोरी करने में कोई साजिश रची हो। लेकिन यह सुरक्षा में बड़ी चूक मानी जा रही है। इस तरह की सेंधमारी से बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे पहले कुछ पुलिसकर्मियों के बदमाशों को संरक्षण देने और खुद अपराध में लिप्त पाए जाने के मामले भी सामने आते रहे हैं। सत्रह जून की रात पुलिस प्रशिक्षण विद्यालय में एक फर्जी महिला प्रशिक्षु सिपाही को पकड़ा गया था। इस युवती के पास से परिचय पत्र, बेल्ट, टोपी और वर्दी भी बरामद की गई थी। इसका खुलासा तब हुआ जब महिला प्रशिक्षुओं की गिनती की गई तो चार सौ एक के स्थान पर चार सौ दो महिला प्रशिक्षु मिलीं। बिजनौर निवासी प्रीति नाम की जो युवती अतिरिक्त प्रशिक्षु मिली, उसका कहीं भी रिकॉर्ड नहीं मिला था। जिसके बाद आरोपी प्रीति के खिलाफ थाना खरखौदा पर केस दर्ज कराते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इस प्रकरण में आईजी पीटीएस लक्ष्मी सिंह ने जांच बैठाते हुए कहा था कि फर्जी महिला आरक्षी ने दूसरे जनपदों में भी ट्रेनिंग ली है, जिसके चलते उसकी भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। वहीं, पुलिस की जांच में बिजनौर का सिपाही कपिल जांच के घेरे में है। विवेचक बीएस चौहान के अनुसार आरोपी सिपाही कपिल ने धामपुर के साइबर कैफे से युवती के फर्जी कागजात तैयार कराए। मेडिकल भी फर्जी पाया गया। फर्जी महिला प्रशिक्षु सिपाही का मामला शांत भी नहीं हुआ कि पीटीएस के सामने ही चौंतालीस वी वाहिनी पीएसी के कमांड हाउस से इंसास चोरी हो गई। यह इंसास बाईस जून को चोरी हो गई थी। लेकिन इसे अट्ठाईस जून को चोरी होना बताकर पीएसी के एचसीपी गुरुदेव सिंह, कांस्टेबल सोनू सिंह, रत्नेश, प्रेमवीर और अंकित नागर के खिलाफ मुकदमा हुआ। इंसास प्रेमवीर के नाम आवंटित थी। इन पांच पुलिसकर्मियों के अलावा ग्यारह अन्य के खिलाफ विभागीय जांच बैठी तो खलबली मच गई। अभी तक प्राथमिक जांच में सामने आया कि साजिश के तहत नजदीकी सिपाही ने ही इंसास को चोरी कराया। उसके बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से इंसास के बदले में तीन. पाँच लाख की की रकम मांगी गई। रकम न देने के लिए यह भी कहा गया कि तो फिर मुकदमा झेलने के लिए तैयार रहें। पुलिस मान रही है कि सिपाही प्रेमवीर और उसके साथियों पर मुकदमा, निलंबन और जेल भिजवाने को लेकर साजिश रची गई। जिसमें वह खुद भी फंस गया है। पुलिस और पीएसी के अधिकारी पहले से ही मान रहे थे कि मामला अंदर से ही जुड़ा हुआ है। कमांड हाउस की गारद तक बाहरी व्यक्ति नहीं पहुंच सकता। इंसास की चोरी का जब केस दर्ज हुआ तो पीएसी परिसर का चप्पा-चप्पा खोजा गया था। लेकिन सुराग नहीं लगा था। लेकिन जैसे ही अधिकारी सक्रिय हुए तो शनिवार देर रात यह इंसास पीएसी परिसर के छज्जे पर रखवा दी गई। |
इंटरनेट पर आए दिन इस तरह की तस्वीरें देखने को मिलती हैं जो ज्यादातर लोगों को कन्फ्यूज कर देती हैं। यह तस्वीरें देखने में तो बेहद सामान्य लगती हैं, लेकिन इनमें कई चीजें एक साथ दिखती हैं।
Optical Illusion: सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली ऑप्टिकल इल्यूजन तस्वीरें लोगों को कन्फ्यूज कर देती हैं। ऑप्टिल इल्यूजन (Optical Illusion) यानी आंखों को धोखा देने वाली तस्वीरों को लोग पसंद भी करते हैं। ये तस्वीरें लोगों के पर्सनैलिटी के बारे में भी बहुत कुछ बताती हैं। हालांकि इन तस्वीरों को देखने के बाद लोगों का दिमाग घूम जाता है, क्योंकि इस तस्वीरों में क्या चीज दिख रही है बता पाना कठिन होता है। इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही तस्वीर वायरल हो रही है।
इस वायरल तस्वीर(Optical Illusion Viral Photo) को ऑप्टिकल इल्यूजन का बिल्कुल सटीक उदाहरण माना जा सकता है। इस तस्वीर को ध्यान से देखिए और बताइए कि इस तस्वीर में सबसे पहले आपको क्या नजर आया, क्योंकि इसके आधार पर आप अपनी पर्सनैलिटी के बारे में जान सकते हैं। आइए जानते हैं कि इस तस्वीर से आप कैसे अपनी पर्सनैलिटी के बारे में जान सकते हैं।
ऑप्टिकल इल्यूजन तस्वीरों में लोगों को अलग-अलग चीजें दिखाई देती हैं। इन फोटोज में आप सबसे पहले क्या देखते हैं जिससे आपकी पर्सनैलिटी के बारे में बहुत कुछ पता चलता है। हम आपके लिए आज जिस तस्वीर को लेकर आए हैं वो आपके व्यक्तित्व के बारे में कई राज खोलेगी।
इंटरनेट पर आए दिन इस तरह की तस्वीरें देखने को मिलती हैं जो ज्यादातर लोगों को कंफ्यूज कर देती हैं। यह तस्वीरें देखने में तो बेहद सामान्य लगती हैं, लेकिन इनमें कई चीजें एक साथ दिखती हैं। इस तस्वीर में पहले आप क्या नोटिस करते हैं और उस आधार पर आप अपनी पर्सनैलिटी के बारे में जान सकते हैं।
तस्वीर में क्या दिख रहा है?
हम आपके लिए जो वायरल तस्वीर लेकर आए हैं उसमें एक पेड़ है और पीछे छोटे-छोटे पौधे लगे हुए दिख रहे हैं। इस पेड़ को ऐसे बनाया गया है कि कई लोगों को उसमें सबसे पहले पेड़ दिखाई दे रहा है, तो कुछ लोगों को चेहरा नजर आया है।
आपने इस तस्वीर में सबसे पहले पेड़ को देखा है, तो आप अपने जीवन से खुश हैं और आप चीजों के बारे में ज्यादा नहीं सोचते हैं जिसकी वजह से आप हमेशा खुश रहते हैं। अगर आपको इस तस्वीर में सबसे पहले चेहरा दिखाई दिया है, तो हर चीज यानी किसी परिस्थिति को लेकर बहुत सोचते हैं। आपको किसी चीज को सुलझने के लिए वक्त देने की जरूरत है।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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| इंटरनेट पर आए दिन इस तरह की तस्वीरें देखने को मिलती हैं जो ज्यादातर लोगों को कन्फ्यूज कर देती हैं। यह तस्वीरें देखने में तो बेहद सामान्य लगती हैं, लेकिन इनमें कई चीजें एक साथ दिखती हैं। Optical Illusion: सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली ऑप्टिकल इल्यूजन तस्वीरें लोगों को कन्फ्यूज कर देती हैं। ऑप्टिल इल्यूजन यानी आंखों को धोखा देने वाली तस्वीरों को लोग पसंद भी करते हैं। ये तस्वीरें लोगों के पर्सनैलिटी के बारे में भी बहुत कुछ बताती हैं। हालांकि इन तस्वीरों को देखने के बाद लोगों का दिमाग घूम जाता है, क्योंकि इस तस्वीरों में क्या चीज दिख रही है बता पाना कठिन होता है। इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसी ही तस्वीर वायरल हो रही है। इस वायरल तस्वीर को ऑप्टिकल इल्यूजन का बिल्कुल सटीक उदाहरण माना जा सकता है। इस तस्वीर को ध्यान से देखिए और बताइए कि इस तस्वीर में सबसे पहले आपको क्या नजर आया, क्योंकि इसके आधार पर आप अपनी पर्सनैलिटी के बारे में जान सकते हैं। आइए जानते हैं कि इस तस्वीर से आप कैसे अपनी पर्सनैलिटी के बारे में जान सकते हैं। ऑप्टिकल इल्यूजन तस्वीरों में लोगों को अलग-अलग चीजें दिखाई देती हैं। इन फोटोज में आप सबसे पहले क्या देखते हैं जिससे आपकी पर्सनैलिटी के बारे में बहुत कुछ पता चलता है। हम आपके लिए आज जिस तस्वीर को लेकर आए हैं वो आपके व्यक्तित्व के बारे में कई राज खोलेगी। इंटरनेट पर आए दिन इस तरह की तस्वीरें देखने को मिलती हैं जो ज्यादातर लोगों को कंफ्यूज कर देती हैं। यह तस्वीरें देखने में तो बेहद सामान्य लगती हैं, लेकिन इनमें कई चीजें एक साथ दिखती हैं। इस तस्वीर में पहले आप क्या नोटिस करते हैं और उस आधार पर आप अपनी पर्सनैलिटी के बारे में जान सकते हैं। तस्वीर में क्या दिख रहा है? हम आपके लिए जो वायरल तस्वीर लेकर आए हैं उसमें एक पेड़ है और पीछे छोटे-छोटे पौधे लगे हुए दिख रहे हैं। इस पेड़ को ऐसे बनाया गया है कि कई लोगों को उसमें सबसे पहले पेड़ दिखाई दे रहा है, तो कुछ लोगों को चेहरा नजर आया है। आपने इस तस्वीर में सबसे पहले पेड़ को देखा है, तो आप अपने जीवन से खुश हैं और आप चीजों के बारे में ज्यादा नहीं सोचते हैं जिसकी वजह से आप हमेशा खुश रहते हैं। अगर आपको इस तस्वीर में सबसे पहले चेहरा दिखाई दिया है, तो हर चीज यानी किसी परिस्थिति को लेकर बहुत सोचते हैं। आपको किसी चीज को सुलझने के लिए वक्त देने की जरूरत है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
बॉलीवुड एक्टर अभिषेक बच्चन का हमेशा ही अपने पिता के साथ कंपेरिजन होता रहा है। चाहे आवाज की बात हो या अभिनय की, अभिषेक के हर काम में उनकी तुलना बॉलीवुड के महानायक से किए जाने का कहीं न कहीं उन्हें नुकसान भी हुआ है। हाल ही में अभिषेक ने बताया कि किस तरह उनके पिता ने कभी आगे बढ़ने में उनकी मदद नहीं की। वो अपने दम पर आगे बढ़े हैं।
साथ ही उनके पिता अमिताभ बच्चन ने उनके लिए कभी भी किसी भी फिल्म में पैसा नहीं लगाया है। इसकी बजाय अभिषेक बच्चन ने पिता अमिताभ बच्चन के लिए फिल्म प्रोड्यूस की थी।
इस फिल्म में अमिताभ बच्चन बतौर मुख्य भूमिका में नजर आए थे। वह प्रोजेरिया नामक बीमारी से पीड़ित होते हैं। अभिनेता अभिषेक बच्चन ने एक बार फिर वंशवाद वाले विषय पर अपनी बात रखी है और कहा है कि कैसे लोगों को लगता है कि बॉलीवुड में करियर बनाने के लिए उन्होंने पिता अमिताभ बच्चन की सहायता ली है।
अभिषेक बच्चन ने अब कहा है कि पिता अमिताभ बच्चन ने उनके लिए कभी भी किसी भी फिल्म में पैसा नहीं लगाया है। अभिषेक बच्चन अक्सर सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स को सबक सिखाने वाले कमेंट लिखते हैं।
अभिषेक बच्चन का मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री में उन्होंने भी कठिन दौर देखा है। अब एक इंटरव्यू में अभिषेक बच्चन ने कहा है कि उनके पिता ने उनके लिए एक भी फिल्म नहीं बनाई है, बल्कि अभिषेक ने पिता के लिए पा फिल्म में पैसा लगाया थाl इस फिल्म का निर्देशन आर. बाल्की ने किया था।
इस फिल्म में अमिताभ बच्चन की अहम भूमिका थी। वही वह खुद सपोर्टिंग भूमिका में थे। अभिषेक बच्चन ने कहा, 'तथ्य यही है कि पिता ने मेरे लिए कभी किसी को फोन नहीं किया। ना ही उन्होंने मेरे लिए कोई फिल्म बनाई। इसके बजाय मैंने उनके लिए फिल्म बनाई जिसका नाम पा था। पा में अमिताभ बच्चन एक ऐसे लड़के की भूमिका निभाते हैं जो प्रोजेरिया नामक बीमारी से पीड़ित होता है।
| बॉलीवुड एक्टर अभिषेक बच्चन का हमेशा ही अपने पिता के साथ कंपेरिजन होता रहा है। चाहे आवाज की बात हो या अभिनय की, अभिषेक के हर काम में उनकी तुलना बॉलीवुड के महानायक से किए जाने का कहीं न कहीं उन्हें नुकसान भी हुआ है। हाल ही में अभिषेक ने बताया कि किस तरह उनके पिता ने कभी आगे बढ़ने में उनकी मदद नहीं की। वो अपने दम पर आगे बढ़े हैं। साथ ही उनके पिता अमिताभ बच्चन ने उनके लिए कभी भी किसी भी फिल्म में पैसा नहीं लगाया है। इसकी बजाय अभिषेक बच्चन ने पिता अमिताभ बच्चन के लिए फिल्म प्रोड्यूस की थी। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन बतौर मुख्य भूमिका में नजर आए थे। वह प्रोजेरिया नामक बीमारी से पीड़ित होते हैं। अभिनेता अभिषेक बच्चन ने एक बार फिर वंशवाद वाले विषय पर अपनी बात रखी है और कहा है कि कैसे लोगों को लगता है कि बॉलीवुड में करियर बनाने के लिए उन्होंने पिता अमिताभ बच्चन की सहायता ली है। अभिषेक बच्चन ने अब कहा है कि पिता अमिताभ बच्चन ने उनके लिए कभी भी किसी भी फिल्म में पैसा नहीं लगाया है। अभिषेक बच्चन अक्सर सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स को सबक सिखाने वाले कमेंट लिखते हैं। अभिषेक बच्चन का मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री में उन्होंने भी कठिन दौर देखा है। अब एक इंटरव्यू में अभिषेक बच्चन ने कहा है कि उनके पिता ने उनके लिए एक भी फिल्म नहीं बनाई है, बल्कि अभिषेक ने पिता के लिए पा फिल्म में पैसा लगाया थाl इस फिल्म का निर्देशन आर. बाल्की ने किया था। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन की अहम भूमिका थी। वही वह खुद सपोर्टिंग भूमिका में थे। अभिषेक बच्चन ने कहा, 'तथ्य यही है कि पिता ने मेरे लिए कभी किसी को फोन नहीं किया। ना ही उन्होंने मेरे लिए कोई फिल्म बनाई। इसके बजाय मैंने उनके लिए फिल्म बनाई जिसका नाम पा था। पा में अमिताभ बच्चन एक ऐसे लड़के की भूमिका निभाते हैं जो प्रोजेरिया नामक बीमारी से पीड़ित होता है। |
पटनाः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब जातीय जनगणना के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। केंद्र सरकार द्वारा संसद में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य जातीय जनगणना नहीं कराने की बात स्पष्ट किए जाने के बावजूद नीतीश ने शनिवार को जाति आधारित जनगणना की मांग फिर दोहराई। उन्होंने कहा कि देश में जाति आधारित जनगणना से दलितों के अलावा अन्य गरीबों के लिए भी कल्याणकारी योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। कुमार ने कहा कि बिहार विधानसभा ने 2019 और 2020 में सर्व सम्मति से जाति आधारित जनगणना के समर्थन में प्रस्ताव पारित किया था और केंद्र सरकार से इस पर 'अवश्य चिंतन करने' का आग्रह किया था।
जनता दल (युनाइटेड) के नेता नीतीश ने कहा कि जाति आधारित जनगणना 2010 में हुई थी और 2013 में एक रिपोर्ट मिली भी, लेकिन उसे कभी जारी नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के लाभार्थियों को यहां 350 एम्बुलेंस प्रदान करने के लिए आयोजित कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से बात करते हुए कुमार ने कहा, 'जाति आधारित जनगणना कम से कम एक बार की जानी चाहिए। इससे सरकार को दलितों के अलावा अन्य गरीबों की पहचान करने और उनके कल्याण के लिए योजनाएं बनाने में सुविधा होगी। ' कुमार के बयान से कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने संसद में कहा था कि केंद्र सरकार एससी और एसटी के अलावा कोई जातीय जनगणना नहीं कराएगी।
| पटनाः बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब जातीय जनगणना के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। केंद्र सरकार द्वारा संसद में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा अन्य जातीय जनगणना नहीं कराने की बात स्पष्ट किए जाने के बावजूद नीतीश ने शनिवार को जाति आधारित जनगणना की मांग फिर दोहराई। उन्होंने कहा कि देश में जाति आधारित जनगणना से दलितों के अलावा अन्य गरीबों के लिए भी कल्याणकारी योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी। कुमार ने कहा कि बिहार विधानसभा ने दो हज़ार उन्नीस और दो हज़ार बीस में सर्व सम्मति से जाति आधारित जनगणना के समर्थन में प्रस्ताव पारित किया था और केंद्र सरकार से इस पर 'अवश्य चिंतन करने' का आग्रह किया था। जनता दल के नेता नीतीश ने कहा कि जाति आधारित जनगणना दो हज़ार दस में हुई थी और दो हज़ार तेरह में एक रिपोर्ट मिली भी, लेकिन उसे कभी जारी नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के लाभार्थियों को यहां तीन सौ पचास एम्बुलेंस प्रदान करने के लिए आयोजित कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से बात करते हुए कुमार ने कहा, 'जाति आधारित जनगणना कम से कम एक बार की जानी चाहिए। इससे सरकार को दलितों के अलावा अन्य गरीबों की पहचान करने और उनके कल्याण के लिए योजनाएं बनाने में सुविधा होगी। ' कुमार के बयान से कुछ दिन पहले केंद्र सरकार ने संसद में कहा था कि केंद्र सरकार एससी और एसटी के अलावा कोई जातीय जनगणना नहीं कराएगी। |
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