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रामा, गोड तोरा लागीला लहुरि ननदिया, हो रामा ॥ रचि एक आपन भैया देहू ना जगाई, हो रामा, रचि एक ॥ रामा, कैसे के भौजी भैया के जगाइबी, हो रामा ॥ हमरो भैया निंदिया के मातल, हो रामा, हमरो भैया ॥ रामा, तोरा लेखे ननदी तोर भैया निंदिया के मातल, हो रामा ॥ मोरा लेखे चान सुरुज दूनो छपित भइलें, हो रामा, मोरा लेखे ॥ रामा, 'दास बुलाकी' चैत घाँटो गावे, हो रामा ॥ गाइ गाइ बिरहिन सखि समुझावे, हो रामा, गाइ गाइ ॥ रामा, नदिया किनरवा मुँगिया बोश्रवलीं, हो रामा ॥ सेह मुँगिया फरेले घवदवा', हो रामा सेह मुँगिया ॥ रामा, एक फाँड तुरलीं दोसर फाँड तुरलीं, हो रामा ॥ आ गइलें खेत रखवरवा, हो रामा, आगइले ।। रामा एक छड़ी मारले दोसर छड़ी मारले, रामा । लूट लेले, हंस परेडा दूनो जोबना, हो रामा, लूटि लेले ॥ रामा, दास बुलाकी चइती घाँटो गावे, हो रामा ॥ गाइ गाइ बिरहिन सखि समुझावे, हो रामा ॥ आहो रामा, मानिक हमरो हेरइले हो रामा । जमुना में, केहू नाहीं खोजेला हमरो पदारथ हो रामा ॥ जमुना में० ॥ श्री रामा, श्रोही रे जमुनवा के चिकनी रे मटिया, चलत पाँव बिछिलइले", हो रामा ॥ जमुना में० ॥ हो रामा, श्रोही रे जमुनवा के करिया पनिया, देखत मन घबरइले हो रामा ॥ जमुना में० ॥ श्राहो रामा, तोरा लेखे ग्वालिन मानिक हेरइले । मोरा लेखे चान छुइतवा हो रामा ।। मोरा लेखे०॥ हो रामा, दास बुलाकी चइत घाँटो गावे हो रामा, गाई गाई बिरहिन समझावे हो रामा, गाई गाई ॥ (घ ) बारहमासा - बारहमासा के गाने का कोई समय निश्चित नहीं है, परंतु ये अधिकतर पावस ऋतु में ही गाए जाते हैं। चूँकि इनमें विरहिणी स्त्री के वर्ष के बारहो महीने में होनेवाले कष्टों का वर्णन होता है, अतः इन्हें 'बारहमासा' कहते है । हिंदी साहित्य में 'बारहमासा' लिखने की परंपरा प्राचीन है। इन गीतों में विप्रलंभ शृंगार की प्रधानता है। जिन गीतों में बारहो गुच्छा । २ श्रोँचल । कबूतर । स्तन । ५ फिसल गया। ६ भरत हो गया।
रामा, गोड तोरा लागीला लहुरि ननदिया, हो रामा ॥ रचि एक आपन भैया देहू ना जगाई, हो रामा, रचि एक ॥ रामा, कैसे के भौजी भैया के जगाइबी, हो रामा ॥ हमरो भैया निंदिया के मातल, हो रामा, हमरो भैया ॥ रामा, तोरा लेखे ननदी तोर भैया निंदिया के मातल, हो रामा ॥ मोरा लेखे चान सुरुज दूनो छपित भइलें, हो रामा, मोरा लेखे ॥ रामा, 'दास बुलाकी' चैत घाँटो गावे, हो रामा ॥ गाइ गाइ बिरहिन सखि समुझावे, हो रामा, गाइ गाइ ॥ रामा, नदिया किनरवा मुँगिया बोश्रवलीं, हो रामा ॥ सेह मुँगिया फरेले घवदवा', हो रामा सेह मुँगिया ॥ रामा, एक फाँड तुरलीं दोसर फाँड तुरलीं, हो रामा ॥ आ गइलें खेत रखवरवा, हो रामा, आगइले ।। रामा एक छड़ी मारले दोसर छड़ी मारले, रामा । लूट लेले, हंस परेडा दूनो जोबना, हो रामा, लूटि लेले ॥ रामा, दास बुलाकी चइती घाँटो गावे, हो रामा ॥ गाइ गाइ बिरहिन सखि समुझावे, हो रामा ॥ आहो रामा, मानिक हमरो हेरइले हो रामा । जमुना में, केहू नाहीं खोजेला हमरो पदारथ हो रामा ॥ जमुना मेंशून्य ॥ श्री रामा, श्रोही रे जमुनवा के चिकनी रे मटिया, चलत पाँव बिछिलइले", हो रामा ॥ जमुना मेंशून्य ॥ हो रामा, श्रोही रे जमुनवा के करिया पनिया, देखत मन घबरइले हो रामा ॥ जमुना मेंशून्य ॥ श्राहो रामा, तोरा लेखे ग्वालिन मानिक हेरइले । मोरा लेखे चान छुइतवा हो रामा ।। मोरा लेखेशून्य॥ हो रामा, दास बुलाकी चइत घाँटो गावे हो रामा, गाई गाई बिरहिन समझावे हो रामा, गाई गाई ॥ बारहमासा - बारहमासा के गाने का कोई समय निश्चित नहीं है, परंतु ये अधिकतर पावस ऋतु में ही गाए जाते हैं। चूँकि इनमें विरहिणी स्त्री के वर्ष के बारहो महीने में होनेवाले कष्टों का वर्णन होता है, अतः इन्हें 'बारहमासा' कहते है । हिंदी साहित्य में 'बारहमासा' लिखने की परंपरा प्राचीन है। इन गीतों में विप्रलंभ शृंगार की प्रधानता है। जिन गीतों में बारहो गुच्छा । दो श्रोँचल । कबूतर । स्तन । पाँच फिसल गया। छः भरत हो गया।
यदि औषधीय जड़ी बूटियों के फायदेमंद पदार्थ शहद से प्राप्त किए जा सकते हैं, तो दुर्भाग्यवश, मधुमक्खी शंकुधारी पेड़ों को बाईपास करती है, क्योंकि वे अमृत को अलग नहीं करते हैं कि ये कीड़े खिलते हैं। शंकुधारी पेड़ - यह स्वास्थ्य का एक वास्तविक कुआं है, क्योंकि पाइन वन के माध्यम से भी चलना ताकत जोड़ता है और सांस लेने में आसान बनाता है। पाइन और स्पूस में उपलब्ध सभी पदार्थों को स्टॉक करने के लिए, आप युवा पाइन शंकुओं से शहद बना सकते हैं, जिसमें कई उपयोगी गुण होंगे। इसे कैसे और कैसे बीमारियों को लेना है, हम इस लेख में बताएंगे। खांसी से उपयोग के लिए पाइन शंकु से शहद की अक्सर सिफारिश की जाती है, लेकिन यह एकमात्र मामला नहीं है जब इसे लिया जा सकता है। इस उत्पाद को निवारक एजेंट के रूप में उपयोग किया जा सकता हैः - ऑन्कोलॉजिकल बीमारियों से; - प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए ; - चयापचय में सुधार करने के लिए। एक चिकित्सा उत्पाद के रूप में, पाइन शहद का उपयोग किया जाता हैः - एक फ्लू और ठंड पर ; - पाचन तंत्र की बीमारियों के साथ; - तपेदिक के साथ। पाइन शंकुओं से भी शहद थकान को दूर करने में मदद करता है। उपयोग के क्षेत्र में यह विविधता इस तथ्य के कारण है कि प्राथमिक सामग्री (शंकु, शूटिंग, गुर्दे, पराग) में एक व्यक्ति के लिए बहुत उपयोगी होता हैः - विटामिन; - आवश्यक तेल; - एमिनो एसिड; - खनिज। अक्सर, हरी शंकुओं से पाइन शहद बनाने की सिफारिश की जाती है, जिसे वसंत या गर्मी की शुरुआत में केवल स्वस्थ पेड़ों से एकत्र किया जाना चाहिए जो सड़क और पौधों से दूर हो जाते हैं। सामग्रीः - हरी शंकु; - पानी; - चीनी; - नींबू या 0. 5 चम्मच। साइट्रिक एसिड। उत्पादों की आवश्यक मात्रा की गणना निम्नानुसार की जाती हैः 1 लीटर पानी 1 किलो चीनी, शंकु के 75-80 टुकड़े और 0. 5 नींबू लेना चाहिए। तैयारी का पहला संस्करणः - एकत्रित शंकु गंदगी से धोए जाते हैं और एक बड़े तामचीनी कंटेनर जोड़ते हैं। - उन्हें पानी से भरें और धीमी आग पर पकाएं। ब्रू फोड़े के बाद इसे 20-30 मिनट तक आग में रखना जरूरी है। शंकुओं की इच्छा उनकी नरमता से निर्धारित होती है, इसलिए प्रत्येक मामले में उबलते समय अलग-अलग हो सकते हैं। - कंटेनर को प्लेट से शंकु से हटा दें और इसे 24 घंटे तक ब्रू दें। - हम शोरबा शोर से निकालते हैं और इसे चीनी के साथ कवर करते हैं। - स्थिरता मोटा होने तक, हम नियमित रूप से सरगर्मी, धीमी आग और पकाते हैं। यह आमतौर पर 1. 5 घंटे लगते हैं। - नींबू का रस जोड़ें और अच्छी तरह मिलाएं। शहद में गर्म शहद डालना आवश्यक है, ढक्कन को बंद करें और रेफ्रिजरेटर में डाल दें। विकल्प दोः - धोया और छिद्रित शंकु एक विस्तृत बेसिन में सो जाते हैं। - उन्हें पानी से भरें ताकि उनके ऊपर 2 सेमी तरल हो और प्लेट पर रखा जा सके। - शंकु को 1 घंटे तक उबालें, और फिर आग्रह करने के लिए 8 घंटे तक साफ करें। - इस प्रक्रिया को दोहराएं (1 घंटे के लिए पकाएं, पुश 8) कई बार शंकु बहुत नरम नहीं होते हैं, और शोरबा संतृप्त होता है। - हम शंकु को हटाते हैं, और गौज की कई परतों के माध्यम से शोरबा फ़िल्टर करते हैं। - परिणामी तरल और 30 मिनट के लिए फोड़ा में चीनी जोड़ें। - कंटेनरों पर डालने से पहले, नींबू का रस या साइट्रिक एसिड जोड़ें और हलचल। पाइन शंकु से शहद कैसे लें? आप इस शहद को किसी भी उम्र में लगभग 5 वर्षों से शुरू कर सकते हैं। खुराक का पालन करना केवल आवश्यक हैः वयस्कों के लिए - 1 बड़ा चमचा, बच्चों के लिए - चाय। खाने से पहले 30-40 मिनट के लिए दिन में तीन बार पाइन शहद दें। उन लोगों को पाइन शहद लेने की सिफारिश नहीं की जाती है, जिन्हें हेपेटाइटिस का निदान किया गया है या यकृत सिरोसिस की उत्तेजना है, साथ ही एलर्जी प्रतिक्रियाओं के लिए प्रवण है। गर्भावस्था के दौरान इस दवा का प्रयोग न करें।
यदि औषधीय जड़ी बूटियों के फायदेमंद पदार्थ शहद से प्राप्त किए जा सकते हैं, तो दुर्भाग्यवश, मधुमक्खी शंकुधारी पेड़ों को बाईपास करती है, क्योंकि वे अमृत को अलग नहीं करते हैं कि ये कीड़े खिलते हैं। शंकुधारी पेड़ - यह स्वास्थ्य का एक वास्तविक कुआं है, क्योंकि पाइन वन के माध्यम से भी चलना ताकत जोड़ता है और सांस लेने में आसान बनाता है। पाइन और स्पूस में उपलब्ध सभी पदार्थों को स्टॉक करने के लिए, आप युवा पाइन शंकुओं से शहद बना सकते हैं, जिसमें कई उपयोगी गुण होंगे। इसे कैसे और कैसे बीमारियों को लेना है, हम इस लेख में बताएंगे। खांसी से उपयोग के लिए पाइन शंकु से शहद की अक्सर सिफारिश की जाती है, लेकिन यह एकमात्र मामला नहीं है जब इसे लिया जा सकता है। इस उत्पाद को निवारक एजेंट के रूप में उपयोग किया जा सकता हैः - ऑन्कोलॉजिकल बीमारियों से; - प्रतिरक्षा बढ़ाने के लिए ; - चयापचय में सुधार करने के लिए। एक चिकित्सा उत्पाद के रूप में, पाइन शहद का उपयोग किया जाता हैः - एक फ्लू और ठंड पर ; - पाचन तंत्र की बीमारियों के साथ; - तपेदिक के साथ। पाइन शंकुओं से भी शहद थकान को दूर करने में मदद करता है। उपयोग के क्षेत्र में यह विविधता इस तथ्य के कारण है कि प्राथमिक सामग्री में एक व्यक्ति के लिए बहुत उपयोगी होता हैः - विटामिन; - आवश्यक तेल; - एमिनो एसिड; - खनिज। अक्सर, हरी शंकुओं से पाइन शहद बनाने की सिफारिश की जाती है, जिसे वसंत या गर्मी की शुरुआत में केवल स्वस्थ पेड़ों से एकत्र किया जाना चाहिए जो सड़क और पौधों से दूर हो जाते हैं। सामग्रीः - हरी शंकु; - पानी; - चीनी; - नींबू या शून्य. पाँच चम्मच। साइट्रिक एसिड। उत्पादों की आवश्यक मात्रा की गणना निम्नानुसार की जाती हैः एक लीटरटर पानी एक किलो चीनी, शंकु के पचहत्तर-अस्सी टुकड़े और शून्य. पाँच नींबू लेना चाहिए। तैयारी का पहला संस्करणः - एकत्रित शंकु गंदगी से धोए जाते हैं और एक बड़े तामचीनी कंटेनर जोड़ते हैं। - उन्हें पानी से भरें और धीमी आग पर पकाएं। ब्रू फोड़े के बाद इसे बीस-तीस मिनट तक आग में रखना जरूरी है। शंकुओं की इच्छा उनकी नरमता से निर्धारित होती है, इसलिए प्रत्येक मामले में उबलते समय अलग-अलग हो सकते हैं। - कंटेनर को प्लेट से शंकु से हटा दें और इसे चौबीस घंटाटे तक ब्रू दें। - हम शोरबा शोर से निकालते हैं और इसे चीनी के साथ कवर करते हैं। - स्थिरता मोटा होने तक, हम नियमित रूप से सरगर्मी, धीमी आग और पकाते हैं। यह आमतौर पर एक. पाँच घंटाटे लगते हैं। - नींबू का रस जोड़ें और अच्छी तरह मिलाएं। शहद में गर्म शहद डालना आवश्यक है, ढक्कन को बंद करें और रेफ्रिजरेटर में डाल दें। विकल्प दोः - धोया और छिद्रित शंकु एक विस्तृत बेसिन में सो जाते हैं। - उन्हें पानी से भरें ताकि उनके ऊपर दो सेमी तरल हो और प्लेट पर रखा जा सके। - शंकु को एक घंटाटे तक उबालें, और फिर आग्रह करने के लिए आठ घंटाटे तक साफ करें। - इस प्रक्रिया को दोहराएं कई बार शंकु बहुत नरम नहीं होते हैं, और शोरबा संतृप्त होता है। - हम शंकु को हटाते हैं, और गौज की कई परतों के माध्यम से शोरबा फ़िल्टर करते हैं। - परिणामी तरल और तीस मिनट के लिए फोड़ा में चीनी जोड़ें। - कंटेनरों पर डालने से पहले, नींबू का रस या साइट्रिक एसिड जोड़ें और हलचल। पाइन शंकु से शहद कैसे लें? आप इस शहद को किसी भी उम्र में लगभग पाँच वर्षों से शुरू कर सकते हैं। खुराक का पालन करना केवल आवश्यक हैः वयस्कों के लिए - एक बड़ा चमचा, बच्चों के लिए - चाय। खाने से पहले तीस-चालीस मिनट के लिए दिन में तीन बार पाइन शहद दें। उन लोगों को पाइन शहद लेने की सिफारिश नहीं की जाती है, जिन्हें हेपेटाइटिस का निदान किया गया है या यकृत सिरोसिस की उत्तेजना है, साथ ही एलर्जी प्रतिक्रियाओं के लिए प्रवण है। गर्भावस्था के दौरान इस दवा का प्रयोग न करें।
वोल्गेविज्मका अर्थ एक इनाम मेरे अनुरोध करनेपर श्रीयुत रेवायकर जगजीवन झवेरीने चरखा और वादीके सन्देश के विषयपर सबसे बढ़िया निवन्व लिखनेवालेको एक हजार रुपयेका पुरस्कार देना स्वीकार किया है। निवन्धमे उद्योग विभागका इतिहास शुरुमे देना होगा और उसके पुनरुद्वारकी क्या सम्भावना है, इसपर चर्चा करनी होगी। अन्य शर्ते अगले अकमें प्रकाशित की जायेंगी । [अग्रेजीसे ] यग इंडिया, १-१-१९२५ ४०५. बोल्शेविज्मका अर्थ नीचे दिया गया लेख' श्री एम० एन० रायने बोल्शेविज्मपर लिखे मेरे लेखके उत्तरमे भेजा है। मै उमे खुशी से प्रकाशित करता हूं, लेकिन यह कहे बिना नही रह सकता कि अगर श्री रायके लेख में वोल्गेविज्मका सही चित्रण हुआ है तो बोल्गेविज्म बहुत घटिया चीज है । जिस तरह मैं पूंजीवादका जुआ वरदाश्त नही कर सकता, उमी तरह् श्री राय द्वारा वर्णित बोल्शेविज्मका जुआ भी मैं वरदाश्त नही कर सकता । मै मनुष्य-जातिका हृदय परिवर्तन करनेमे विश्वास रखता हूँ, उसके विनागमें नही । कारण बहुत स्पष्ट है। हम सव अत्यन्त अपूर्ण और कमजोर प्राणी है और यदि हम सब लोगोको मारना शुरू कर दें, जिनकी रीति-नीति हमें पमन्द नही तो इस पृथ्वी पर एक भी आदमी जीता न बचेगा । भीडगाही किमी एक व्यक्तिके स्वेच्छाचारी शासनका ही अत्यन्त बृहत्तर रूप है । लेकिन मैं आशा करता हूँ, बल्कि मुझे लगभग पूर्ण विश्वास है कि वोल्शेविज्मका सच्चा स्वरूप श्री एम० एन० राय द्वारा खीचे गये इस चित्रसे कही ज्यादा अच्छा है। [ अंग्रेजीमे ] १. देखिए परिशिष्ट १ २. देखिए " बोल्शेविजन या आरन सपन", २१-८-१९२४ । ४०६. पत्रः न० चि० केलकरको साबरमती जाते हुए २ जनवरी, १९२५ प्रिय श्री केलकर, यह सदा मेरी इच्छा और नीति रही है कि दूसरोकी भावनाओको ठेस पहुँचाने - के लिए कुछ न लिखूं । लेकिन इस वर्ष, जबकि मै आपको अपने पक्षमे लानेके लिए पूरी कोशिशमे लगा हुआ हूँ, तब तो मै और भी अधिक सावधान रहना चाहूँगा । मैं जानता हूँ कि बिना चाहे भी मै ऐसी चीजे लिख सकता हूँ जो आपको अर्थात् काग्रेसको, अच्छी न लगे । इसलिए यदि 'यग इडिया' या 'नवजीवन में कोई ऐसी चीज प्रकाशित हो, जो उचित न हो तो कृपया मेरा ध्यान उसकी ओर आकृष्ट कर दे । जहाँ भी सम्भव होगा, मै उसका परिमार्जन करनेका प्रयत्न करूंगा । अग्रेजी पत्र (सी० डब्ल्यू० ३११५ ) की फोटो नकल से । सौजन्य : काशीनाथ केलकर । ४०७. भाषणः दाहोदकी सार्वजनिक सभामें कताईके प्रस्तावमे कातनेकी अनिच्छाके सम्बन्धमे जो रियायत दी गई है, मेरी इच्छा है कि उससे कोई गुजराती लाभ न उठाये। मुझे ईश्वरने यरवदा जेलसे भयकर बीमारी के कारण रिहा करवाया, इसमे मुझे ईश्वरका कोई बडा हेतु दिखाई देता है । मुझे लगता है, उसने मुझे इसलिए छुडवाया है कि मैं देशमे चारो ओर घूम-घूमकर अन्नपूर्णाकी -- चरखेकी - चर्चा करूं और उसका सार्वत्रिक प्रचार करूँ । - • यदि हिन्दुस्तान अभी भी चरखा कातनेके इस सन्देशको नही सुनेगा तो देशमे भुखमरी और बढेगी । दाहोद बम्बई हो जाये, उसमे चार-छ लोग लखपति हो जाये तो इसमे मुझे कोई खुशी न होगी। सबको खाने-पीने और कपड़े पहननेका अधिकार है। लेकिन किसीको धन इकट्ठा करके धनवान बन जानेका हक नही है । दाहोदमे चार-छ लोग साहूकार बने, यह मैं नहीं चाहता । मेरी इच्छा तो यह है कि हम खादी घीकी तरह आसानीसे बेच सके और वह सिक्को तथा डाककी टिकिटोकी तरह जहाँ चाहे वहाँ सुलभ हो जाये । जो लोग सूत नही कात सकते वे दूसरोंसे कतवाकर सदस्य बन सकते है, ऐसी शर्त रखी गई है । लेकिन मैं चाहता हूँ कि इसका लाभ कोई भाषण अन्त्यज आश्रम गोवराम भी गुजराती न ले। भाई मुखदेवने मुझे कहा है कि उन्होंने भूत कातना छोड़ दिया है। मुझे यह बात मालूम न थी । वे अन्य कार्य करते होंगे, लेकिन वे कातना छोड देंगे तो इससे हमारी भारी दुर्दशा होगी। और भाई सुग्वदेवको कातना अच्छा नही लगता मो बात नहीं है, किन्तु उन्हें कातनेमे आलम्य महसूम होता है। मैं किसी गुजरातीसे इन शब्दोको मुनना नही चाहता। ४०८. भाषण : अन्त्यज आश्रम गोधरामें आपने अनेक प्रकारके मवाद और भजन मुने। कौन कह सकता है कि वे मवाद अन्त्यज वालकांके थे अथवा भगवानकी भक्तिके इन भजनोको उन्होंने ही गाया । परिषद्का परिणाम ऐसा होगा, यह कौन जानता था ? मैने तो अन्त्यजोमे मम्वन्धित प्रस्तावपर वोलते हुए सवको अन्त्यज वाडेमे जानेका सुझाव दिया था। मैने समझा था कि परिषद्मे गोवराके भाई-बहन है, लेकिन मुझसे भूल हुई । इसमे अनेक ऐसे भाई-बहन आये थे जो गोधरा निवासी नही थे। हालांकि उनमें से अधिकतर लोग गुजरातके थे। उस समय हमे काफी वन मिला । हमने उसमे अन्त्यज-गाला खोली । परन्तु गोधराके भाइयों और बहनोने उसका स्वागत नहीं किया, इतना ही नहीं बल्कि उनके प्रति अपनी अरुचि वताई । ऐसी ही स्थिति अन्त्यज भाइयोकी भी थी । अन्त्यजोकी पाठशाला में अन्त्यज वालकोको ही लाना मुश्किल हो गया। एक समय ऐसा आया कि यहाँके कार्य को चन्द करने के प्रस्तावपर गंभीरता से विचार करनेका मन हुआ, लेकिन बादमें वह विचार स्थगित कर दिया । मामा' दक्षिणके है, लेकिन इन्होंने गुजराती पढ ली है। इन्हें अन्त्यजीका कार्य प्रिय है, यह बात मैने आश्रममे देखी थी । इन्हें मैंने गोधरामे जमकर बैठनेकी सलाह दी। उसके बाद मैं जेल चला गया। मेरे बाद इसका दायित्व और असह्य बोज वल्लभभाईने उठाया । इसी बीच यह मकान बना । यह मुझे पसन्द नहीं है । यह अचूरा है, सो गत नहीं, लेकिन यह हमें शोभा नहीं देता । इसको सुन्दरता मे कोई त्रुटि नही है, लेकिन यह ऐसा होना चाहिए जो हमे शोभा दे। मामा शिल्पी नही है, लेकिन उनके मनमे प्रेम और भक्ति है । वे अन्त्यजांके प्रति अपने प्रेम में वह गये और इसमे २०,००० रुपया खर्च कर दिया । वल्लभभाईमे इतना रुपया इकट्ठा करनेकी शक्ति नही थी, लेकिन मौभाग्यने पारमी रुस्तमजीने इस प्रकारके कार्यके लिए कुछ धन दिया था। उसमे से ही इस मकान के लिए पैसा लिया गया। लेकिन यह मकान ऐसा होना चाहिए था जो हमको, अन्त्यजीको, गरीबीको शोभा देता । हम लोग गरीब है और इसमें भी सबसे गरीब है हमारे अन्त्यज भाई । ये विना मालिक १. विठ्ठल लक्ष्मण फड़के ढोरों- जैसे है । हिन्दुओने इनका तिरस्कार करके एक पाप किया है। आप ऐसा रुख रखे कि ऐसा आलीशान मकान बन गया है, इस कारण आप उनसे कोई ईर्ष्या न करे । • यदि ऐसा मकान वणिक् छात्रावासका हो तो आप ईर्ष्या करे । मै यह बात स्वीकार करता हूँ कि एक भी ऐसा मकान नही होना चाहिए जो हिन्दुस्तानकी जनताको, उसकी गरीवीको शोभा न दे । इससे भी अधिक सुन्दर मकान अनेक है जो अन्य वर्णोंके बालकोके उपयोग मे आते है । लेकिन अन्त्यजोको ऐसे मकानोको इस्तेमाल करनेका अधिकार नही है, ऐसा भाव आपके मनमे कदापि न आना चाहिए । तथापि हमे अन्त्यजोको भी समझाना चाहिए । मै तो इसकी चर्चा यहाँ कर ही रहा हूँ, लेकिन यदि गोधराका कोई धनी इस मकानको ले ले तो अच्छा हो और तब हम, जो गरीबोको शोभा दे, ऐसे किसी अन्य मकान में चले जायेगे । तबतक मामा इससे काम लें। आज मै अन्त्यजोके वाड़ेमे तीन जगह गया था। वहाँ मैने मनुष्य नही वरन् पशु देखे । हम इनसे बात करने बैठे तो ये हमे अपनेसे भिन्न प्राणी लगे । परन्तु ये भी प्रेमको समझते है। इनकी इस दयनीय स्थिति के लिए हम लोग उत्तरदायी नही है तो और कौन है ? मेरी दृष्टिमे स्वराज्य इन लोगोकी सेवा की तुलनामे तुच्छ वस्तु है। अन्त्यजों की सेवासे स्वराज्य मिलेगा, इस उद्देश्यसे मैने यह सेवा आरम्भ नहीं की है । तीस वर्ष पहले जब मै दक्षिण आफ्रिकामे था और जब स्वराज्यकी वात भी नही थी तबसे मैं अपने अन्त्यज - सेवा सम्वन्धी विचार प्रकट करता आ रहा हूँ । आजकल हम हिन्दू धर्मको रक्षा नहीं कर रहे है, उसका नाश कर रहे है और मैं चाहता कि उसे इस नाशसे बचाने के लिए आप यह सेवा कार्य हाथमे ले । आप ऐसा समझें कि आप लोग जो यहाँ आये है, यहाँ आकर अपवित्र नहीं, बल्कि पवित्र हुए है। मुझे तो यह कहनेमे भी कोई सकोच नही कि जहाँ जहाँ अन्त्यज-सेवा है, जहाँ-जहाँ अन्त्यजपाठशाला है, जहाँ-जहाँ अन्त्यज आश्रम है, वहाँ-वहाँ तीर्थ है । कारण, तीर्थ वही होता है जहाँ हम अपने पापोका परिमार्जन करके भवसागरसे तरनेके लिए तैयार होते है । माँ-वाप' क्यो तीर्थ-रूप है ? गुरु क्यो तीर्थ-रूप है ? यदि हम हृदयसे सेवा करते है तो पवित्र वनते है । आप इनसे छू गये है, इसलिए आपको नहाना चाहिए, ऐसा आप न माने । यदि आपको पहलेसे मालूम न होता तो क्या आप कह सकते थे कि ये सवाद सुनानेवाले बालक अन्त्यज है ? यदि हम इन बालकोपर पूरी मेहनत करे तो ये वालक हम लोगोंसे आगे वढ जायेगे । भगीके बालकोमे सद्विचार नहीं आ सकते, मैं ऐसा नहीं मानता । मै अनुभवसे कहता हूँ कि यदि हम प्रयास करें तो उनके हृदयमे सद्विचार अवश्य आयेगे । आप सब लोगोसे, जो यहाँ आये है प्रार्थना करता कि आप इस अवसरको अन्तिम अवसर न मान ले; आप समय-समयपर यहाँ आकर सहायता देते रहे । यहाँ अन्त्यज सेवा मण्डल है, इसके अस्तित्व के लिए हम इन्दुलालके' आभारी है। इन्होने भारी सेवा की है। वे जेलमे भी इसीका विचार करते थे । यदि उन्होने उत्साहअतिरेकमे कुछ ऐसा काम किया हो जो सम्भव है हमको अच्छा न लगे, तो हमें १. इन्दुलाल कन्हैयालाल पाशिक । भापण गोवराकी सार्वजनिक सभाम उसपर ध्यान नहीं देना चाहिए । अमृतलाल' अपना प्रवास छोड़कर आज यहाँ आये हैं । अत्र वे टेढों, भगियो और भीलोके गुरु बन गये है । इन्दुलालने अन्त्यज सेवामण्डल छोडनेका विचार किया तब मैने उनसे कहा था, मैं उसे विद्यापीठको नांग दूंगा । अमृतलालने कहा कि यह सस्या तो रहनी चाहिए। अब उसका बोज उन्होंने स्त्रय उठा लिया है। लेकिन एक मनुष्य कितना बोझ उठा सकता है? आप उनकी मदद भी करें । अन्त्यज-सेवा-मण्डलका कार्य बहुत वडा है । वह गुजरातके अन्त्यजोका नक्शा तैयार कर रहा है। गोधराने एक भी पैमा दिया हो, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। यदि आपके हृदय मे ईश्वर वमता है तो आप भाई अमृतलाल अथवा मामाको पैसा दे । ऐसा आप समझ-बूझकर करे । [ गुजरानीमे ] महादेवभाईनी डायरी, खण्ड ७ ४०९. भाषणः गोधराकी सार्वजनिक सभामें अन्त्यजीको जन्मसे अस्पृश्य माननेमे धर्म नही, वल्कि अचर्म है। मेरी दृढ मान्यता है कि मुझे सनातनी न माननेवाले लोग अज्ञानी है। आप कहेंगे कि अनेक पण्डित भी अस्पृश्यताका समर्थन करते है। लेकिन उनपर अखा भगतकी यह उक्ति लागू होती है 'विन विचार विद्या मिथ्या । हिन्दू धर्म में एक ही तरहकी अस्पृश्यता है, असन्तोसे दूर रहने की, दुष्ट, पाखण्डी लम्पट और व्यभिचारीसे दूर रहनेकी । उन्हें आप अस्तृश्य मानकर उनसे दूर भागें, लेकिन जो व्यक्ति आपकी सेवा करे, आपका मैला साफ करे, आपके लिए चमडा तैयार करे और आपकी खेती [ की सिंचाई के लिए चरमा तैयार करे, उसे क्या आप अपूज्य मानेंगे? यह तो हिन्दू धर्म नही, पाखण्ड है। यदि हिन्दूधर्म यह कहता हो कि ये लोग अस्पृश्य है तो मै हिन्दूधर्मका त्याग करनेकी सलाह दूंगा । अस्पृश्यताकी यह प्रवृत्ति भ्रम मात्र है, यदि आपमे दयाभाव हो तो आप भगीका अज्ञान देखकर रो उठे और आपके मनमें कर्तव्य पालनकी भावना जाग्रत हो । आप मेरा त्याग करे, आप मुझे जगलमें भगा दे और मैं पागल हो जाऊँ तो इसमे दोष मेरा है या आपका ? उमी तरह बेचारे भगी और टेड दीन-हीन और कगाल हो गये है, उनमे अज्ञानको कोई हद नहीं है और हैं तो इसमें उनका दोप है या आपका दोप है ? यह आपका ही दोप है और मैं चाहता हूँ कि आप इस दोपका त्यागकर शुद्ध बने । मुझे ईश्वरने यरवदा जेलमें भयकर बीमारीने बचाकर आपको नेवा के लिए मुक्त किया, इसमे मुझे तो उनका कोई बहुत बडा हेतु दिखाई देता है और वह हेनु यह है कि मैं आपमें आत्म-विश्वासका सचार करूँ, जेलमे अपने गंभीर चिन्तनके परिणाम स्वरूप बने अपने विचारको आपके समक्ष रखूं कि तीन यतों - चरना हिन्दु-मुस्लिम १. अमृतलाल विट्ठलभाई ठक्कर । एकता और अस्पृश्यता निवारण -- में ही स्वराज्य निहित है। मैने चरखेकी बात सबसे पहले रखी है, उसका कारण यह है कि उपर्युक्त तीनों बातोमे केवल चरखेकी बात ही ऐसी है जिसके सम्बन्धमे हममे अविश्वास है और दूसरा कारण यह है कि चरखा ही एक ऐसी वस्तु है जो हर रोज हमसे खरा काम माँगता है। यदि मै रोज हिन्दू-मुस्लिम एकता अथवा अस्पृश्यता निवारणके लिए आधा घटा काम करना चाहूँ तो मेरी समझमे नही आयेगा कि क्या करूँ । लेकिन आधा घटा चरखा चलानेमे प्रत्यक्ष काम होता है। यह जडपदार्थ है, लेकिन इसमें निहित शक्ति अमोघ है। इसको चलाने के लिए आप सब तैयार हो जाये, ऐसी मेरी इच्छा है। खादीका कपडा आपको मोटा लगता है। आपका कहना है कि खादी तो चुभती है। इसका अर्थ यह हुआ कि आपको यह देश चुभता है और जिसे देश चुभता है, वह स्वराज्य क्या प्राप्त करेगा? तिलक महाराज कहा करते थे कि जब लोग जलवायु परिवर्तनके लिए विदेश जानेकी बात करते है तब मुझे तो दुःख होता है। ईश्वरने मुझे यहाँ उत्पन्न किया है तो क्या उसने मुझे मेरे लिए इसी जलवायुमे स्वस्थ बने रहनेकी बात न सोची होगी ? इग्लैंडमे अत्यधिक ठण्ड होने के बावजूद क्या अग्रेज इग्लैंड छोडकर भागते है ? घरमे सिगडी सुलगाते है, गरम कपडे पहनते है और ठण्डसे बचने के लिए अनेक उपाय करते है। लेकिन जिनके पास करोडो रुपये है, वे लोग करे तो क्या करे? वे जलवायुपरिवर्तनका विचार करते है । मैं आपसे कहता हूँ कि यह उनका पाखण्ड है। उसी तरह हम यहाँकी बनी, महँगी सस्ती, अच्छी-बुरी, मोटी-पतली खादी पहनें, इसीमे हमारी स्वदेश भक्ति है और नही तो स्वदेशका नाम लेना निरर्थक है। क्या कोई माँ अपने कुरूप पुत्रको छोड दूसरीके अच्छे बच्चेको गोदमे लेगी? बालकके प्रति माँके हृदय में ईश्वरने जो प्रेम और ममत्व पैदा किया है, मेरी इच्छा है कि वही प्रेम और ममत्व आपके हृदयमे हिन्दुस्तान के लिए हो, हिन्दुस्तानमे पैदा होनेवाले अन्नके लिए हो, खादी के लिए हो । यदि गोधराका प्रत्येक व्यक्ति पाँच रुपये मूल्यकी खादी तैयार करे तो २५००० की आबादीमे कितने रुपयोकी बचत हो ? यदि आप यह रुपया बचा लें तो गोधराके निवासी अधिक खुशहाल हो जाये । उससे आपका तेज बढेगा और आपका देश-प्रेम छलक उठेगा । चरखा चलाना ही एक ऐसी प्रवृत्ति है जिसमे स्त्री-पुरुष और बालक, गरीब और अमीर सब समान योग दे सकते है तथा जिससे भारी फलकी उपलब्धि हो सकती है। 'बूंद-बूंद सरोवर भरता है। इस कहावतपर आप विचार करे और प्रति व्यक्ति दो हजार गज सूत देकर स्वराज्य रूपी सरोवरको भरते रहे । वामनराव विधान-सभामे जाये और वहाँ जाकर सरकारको आँखे दिखाये तो क्या आप समझते हैं, इससे आपको स्वराज्य मिल जायेगा । मैं तो कहता हूँ कि आप विधानसभामे जाये तो वहाँ भी सूत और खादीकी ही पुकार करे। लेकिन यदि आप विदेशी कपडेका बहिष्कार न कर सकें तो चाहे वल्लभभाई अथवा वामनराव जैसे पाँच हजार लोग विधान सभामे जाये, पर इससे स्वराज्य नही मिलेगा । ४१०. काठियावाड़ियों से परिस्थितियाँ मुझे काठियावाड ले जा रही है। काठियावाडियों के प्रेमको मै समझता हूँ, पहचानता हूँ । लेकिन मुझे तो काम चाहिए। मैं अपनी पति और आजके शिक्षित वर्गकी पद्धति भेद देख रहा हूँ । इस भेदके वावजूद मेरा अध्यक्ष बनाना हास्यास्पद है । मैंने जिन प्रस्तावोका मनविदा तैयार किया था वे यद्यपि काग्रेममे पारित हो चुके हैं तथापि अनेक लोग मुझसे कहते है कि इन प्रस्तावोपर अमल कोई नहीं करेगा । ऐसी भयकर वातपर मैं कैसे विश्वास कर सकता हूँ । मेरे पाम जिस तरह काग्रेसके सम्मुख कहने के लिए कोई नई वान नही थी, उमी तरह कदाचित् काठियावाडसे कहनेके लिए भी न हो । सत्य तो यह है कि मुझे जो कुछ कहना था वह सब मै कह चुका हूँ । मुझे तो हेर-फेरके साथ केवल उन्ही वातोको दुहराना है । मेरा मन तो केवल गरीबोमे ही रमा रहता है, मुझे तो भगियोके लिए, मजदूरोके लिए स्वराज्य चाहिए । वे किस तरह मुखी हो, मैं हर पल इसी वातपर विचार करता रहता हूँ। हम उनके कन्वोपर से कब उतरेगे? हमें अपने अधिकारोकी पडी है, किन्तु मुझे तो गरीबोके अधिकारोकी और अपने कर्त्तव्यको बात करनी है । यदि मै अपनी बात काठियावाडियोको समझा सकूं तो कितना अच्छा हो । क्या यह ऐसी बात है जो सम्भव नही ? मनुष्य आशापर जीता है । यही बात मेरे सम्बन्ध भी है। किसी-न-किसी दिन हिन्दुस्तानको मेरी वात मुननी ही पडेगी । इसका आरम्भ काठियावाड ही क्यो न करे ? व्यवस्थापकोने मेरे लिए वातावरण तैयार करनेका बीड़ा उठाया है । वे मेरे लिए इतना तो करेगे ही कि जहाँ देखूं वहाँ खादी नजर आये। वे काठियावाडकी कारीगरी ओर कलाओकी प्रदर्शनी भी अवश्य रखेंगे। बेलगाँव मे प्रदर्शनी कितनी सुदर थी? काठियावाडमे क्या कम कलाएँ है ? काठियावाडकी वनस्पतियोमे क्या नही है ? काठियावाडके गाय-बैल कितने मुन्दर है ? क्या उनके दर्शन होगे ? में पश्चिमको महिमा देखने नही जाता, वह तो मैने पश्चिममे ही बहुत देखी है । लेकिन मैं तो देशसे निर्वासित देशी वस्तुओका स्मरण करता हूँ, उन्हें देखना चाहता हूँ काठियावाड अपनी शिष्टता के लिए तो प्रसिद्ध है ही। स्वागत समिनिये मेरी प्रार्थना है कि वह शिष्टताकी अतिमें समय नष्ट न करे। समयकी मर्यादा नहीं है, किन्तु मनुष्य देहकी तो है । हमें इस क्षणभगुर गरीरकी सहायतामे अनेक काम करने है, इसलिए हमे एक-एक क्षणका सदुपयोग करना उचित है। इस कारण मैं चाहता हूँ कि कार्यवाहक इस बातकी भाववानी रखें कि अपना प्रत्येक कार्य हम समयपर कर सकें। जिन-जिन प्रस्तावोको परिषद् रमना आवश्यक लगता हो, यदि उनके मसविदे पहलेसे तैयार कर लिये गये होगे तो हम उनपर पर्याप्त विचार कर सकेगे। मेरी सलाह है कि विषय समितिकी बैठक के लिए पर्याप्त समय रखा जाये । प्रस्तावोकी रचनामे अपने कर्तव्योपर विशेष जोर दिया जाये तो हम अधिक सफल होगे । इसलिए मैं चाहता हूँ कि प्रस्ताव इस वातको ध्यानमे रखकर ही तैयार किये जाये । समय बचाने का एक मार्ग तो मै सुझा दूं । आप स्वागत हृदयसे करे । इससे आपकी समझमे आ जायेगा कि बाह्य स्वागतकी कोई आवश्यकता नही है । जुलूस आदिमे समय लगाना तो हमे जो असली कार्य करना है उसमे चोरी करनेके समान होगा। दो दिनमे छब्बीस लाख लोगोकी सेवाका कार्यक्रम बनाता है, आपको यह बात न भूलनी चाहिए । हजारो स्त्री-पुरुप इकट्ठे होगे, उनको सतोप देनेके लिए कितनी ही बाह्य वस्तुओकी आवश्यकता होगी। इसके लिए तो प्रदर्शनी - जैसी दूसरी कोई वस्तु नही है, यह हम बेलगॉवमे देख चुके है। ४११. मनसे और बेमनसे काग्रेसका काम निर्विघ्न समाप्त हो गया । काम एक ही था, अगर ऐसा भी कहे तो गलत न होगा । वह काम यह स्वीकार करना था कि सूत कातना भारतीयमात्रका धर्म है। यदि यह बात प्रामाणिकताके साथ स्वीकार की गई हो तो काग्रेसका यह अधिवेशन हमारे इतिहास में प्रसिद्ध हो जायेगा, और यदि यह कदम हमने अप्रामाणिकता के साथ उठाया होगा तो इतिहासकार काग्रेसके इस अधिवेशनको निन्दनीय ठहरायेगे । मेरे पास तो ऐसा माननेका एक भी कारण नहीं कि यह कदम अप्रामाणिकताके साथ मनमें मैल रखकर उठाया गया है । जो प्रस्ताव स्वीकार किया गया, स्वय उस प्रस्तावमे ही मनसे और बेमनसे स्वीकार करनेवाले दो पक्षोका उल्लेख किया गया है । बेमनसे स्वीकार करनेवालोने भी कातनेको आवश्यकताको तो मान लिया है, किन्तु यह स्वीकार नही किया कि वे स्वय कातेगे । इन्होने भी वर्षमे २४,००० गज सूत देने की बात मान ली है, किन्तु वे यह काम खुशीसे करे, इसे सम्भव बनाना उनका काम है, जिन्होंने प्रस्तावको पूरे मनसे स्वीकार किया है। यदि खुशी-खुशी कातनेवाले लोग नियमित रूपसे कातने लगे तो दूसरे पक्षवाले स्वय कातनेके धर्मको मानने लगेगे । आशा करनी चाहिए कि गुजरातमे वेमनसे स्वीकार करनेवाला पक्ष है ही नही । मनसे स्वीकार करनेवालोंकी सख्या भले ही बहुत कम हो, हमे उसकी चिन्ता हरगिज नही करनी चाहिए । हम चिन्ता कामकी करे । कोई स्वय न काते, फिर भी काग्रेसमे आना चाहे तो उसे ऐसा करनेका पूरा पूरा अधिकार है । पत्र रेहाना तैयवजीको किन्तु गुजरातमे ऐसा कोई पक्ष देखनेमे नही आया है जो स्वय कातनेके विषयमें उदासीन हो । कातनेवालोकी सख्या भले ही प्रारम्भमे छोटी हो, किन्तु यदि हमे वैमे चुस्त लोग मिल जायेगे तो हम उनकी मार्फत बहुत सारा काम करा सकते है, ऐमा मेरा दृढ विश्वास है । यदि गुजरात चाहे तो वह इस मामलेमे अगुआ बन सकता है। सारे साधन गुजरातमे है। आवश्यकता सिर्फ इस बातकी है कि जनतामें उसके प्रति इच्छा हो । इच्छा उत्पन्न करना कार्यकर्ताओका काम है और इसीमे हमारी सगठन-शक्ति, देशभक्ति, दृढता आदिकी कसौटी होनी है। कातने के प्रचारका अर्थ है खादी प्रचार और खादी प्रचारका अर्थ है विदेशी कपडेका परिपूर्ण वहिष्कार । इसलिए अभीतक खादी-प्रचार के लिए जितना किया है, उससे बहुत अधिक प्रयत्न हमे करना है। फिर, खादी प्रचारका अर्थ है, गुजरातकी खादीका प्रचार । जवतक गुजरात स्वयं अपना कपडा तैयार करके उसीका उपयोग नहीं करता तवतक गुजरातमे खादीका चमत्कार दिखाई नही पड़ सकता । खादीप्रचारके साथ-साथ गुजरात मे अन्य सभी कलाएँ अपने-आप आ जायेगी और गुजरात की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। गुजरातमे भुखमरी भले ही न हो, किन्तु उसमे तेज भी नहीं है। यहाँके बालकोको दूध नही मिलता और जब-कभी यहाँ अकाल पड़ जाता है तो यहाँके लोग भीख माँगने निकल पडते है । हिन्दुस्तान के बाहर कदाचित् ही कही ऐसा होता हो । विदेशी कपडेके सम्पूर्ण बहिष्कारके वाद ही गुजरात इस स्थितिसे छुटकारा पा सकता है । ४१२. पत्रः रेहाना तैयबजीको प्रिय रेहाना, मुझे खुशी है कि तुम आ रही हो । तुम्हे शायद मालूम हो कि मेरे पिता के एक मित्र ईश्वरकी निरन्तर आराधना करके अपने रोगसे मुक्त हो गये थे । क्या तुम भी वँसा नहीं कर सकती ? अगर तुम चाहो तो ठीक हो सकती हो । अंग्रेजी पत्र ( एस० एन० ९५९९ ) की फोटो-नकलसे । मो० क० गावी ४१३. पत्रः फूलचन्द शाहको भाईश्री फूलचन्द, यदि किसी कार्यक्रमको हाथमे लेनेकी वात सोची तो भावनगर पहुँचनेके बाद ही लूंगा । अभीसे आप मुझे न वाँविये । मै बहुत थका हुआ हूँ और मुझे अभी भी अनेक योजनाओमे भाग लेना बाकी है । भाईश्री फूलचन्द कस्तूरचन्द केळवणी मण्डल कार्यालय, वढवान शहर गुजराती पत्र (सी० डब्ल्यू० २८२४) से । सौजन्य : शारदाबहन शाह ४१४. पत्र : अवन्तिकाबाई गोखलेको चिरंजीव छगनलालने मुझे आपकी आर्थिक स्थितिके वारेमे बताया है, सुनकर दुख हुआ । आपने इस सम्बन्धमे मुझसे आजतक कुछ क्यो नही कहा ? खैर जो हुआ सो हुआ । आप दोनो जब चाहे तब यहाँ आकर रह सकते हैं। आप इसे अपना घर ही समझियेगा । डाक्टर मेहताका बगला फिलहाल खाली ही पडा है। उसके एक हिस्सेका उपयोग आप कर मकेगी । नया मकान बनानेका विचार हम बादमें करेंगे। यह सुझाव आपके स्वास्थ्यको व्यान में रखकर मैंने पहले ही दिया था। आप सार्वजनिक कार्य यहाँ भी कर सकेंगी। निर्णय करनेमे देर न लगाइये । वहाँ भला कैसे आ सकती हूँ -- ऐसा व्यर्थका विचार मनमे हरगिज न लाइये । अपने स्वास्थ्यका समाचार लिखियेगा । पत्रोत्तर भावनगर भेजिये । वहाँ ८ तारीखसे १३ तारीखतक रहनेका मेरा विचार है । पत्र सर प्रभाशकर पट्टणीके । पतेपर लिखियेगा गुजराती पत्र (सी० डब्ल्यू० ४८३८) की फोटो-नकलमे । सौजन्य वम्बई राज्य कमेटी, सं. गा वा ।
वोल्गेविज्मका अर्थ एक इनाम मेरे अनुरोध करनेपर श्रीयुत रेवायकर जगजीवन झवेरीने चरखा और वादीके सन्देश के विषयपर सबसे बढ़िया निवन्व लिखनेवालेको एक हजार रुपयेका पुरस्कार देना स्वीकार किया है। निवन्धमे उद्योग विभागका इतिहास शुरुमे देना होगा और उसके पुनरुद्वारकी क्या सम्भावना है, इसपर चर्चा करनी होगी। अन्य शर्ते अगले अकमें प्रकाशित की जायेंगी । [अग्रेजीसे ] यग इंडिया, एक जनवरी एक हज़ार नौ सौ पच्चीस चार सौ पाँच. बोल्शेविज्मका अर्थ नीचे दिया गया लेख' श्री एमशून्य एनशून्य रायने बोल्शेविज्मपर लिखे मेरे लेखके उत्तरमे भेजा है। मै उमे खुशी से प्रकाशित करता हूं, लेकिन यह कहे बिना नही रह सकता कि अगर श्री रायके लेख में वोल्गेविज्मका सही चित्रण हुआ है तो बोल्गेविज्म बहुत घटिया चीज है । जिस तरह मैं पूंजीवादका जुआ वरदाश्त नही कर सकता, उमी तरह् श्री राय द्वारा वर्णित बोल्शेविज्मका जुआ भी मैं वरदाश्त नही कर सकता । मै मनुष्य-जातिका हृदय परिवर्तन करनेमे विश्वास रखता हूँ, उसके विनागमें नही । कारण बहुत स्पष्ट है। हम सव अत्यन्त अपूर्ण और कमजोर प्राणी है और यदि हम सब लोगोको मारना शुरू कर दें, जिनकी रीति-नीति हमें पमन्द नही तो इस पृथ्वी पर एक भी आदमी जीता न बचेगा । भीडगाही किमी एक व्यक्तिके स्वेच्छाचारी शासनका ही अत्यन्त बृहत्तर रूप है । लेकिन मैं आशा करता हूँ, बल्कि मुझे लगभग पूर्ण विश्वास है कि वोल्शेविज्मका सच्चा स्वरूप श्री एमशून्य एनशून्य राय द्वारा खीचे गये इस चित्रसे कही ज्यादा अच्छा है। [ अंग्रेजीमे ] एक. देखिए परिशिष्ट एक दो. देखिए " बोल्शेविजन या आरन सपन", इक्कीस अगस्त एक हज़ार नौ सौ चौबीस । चार सौ छः. पत्रः नशून्य चिशून्य केलकरको साबरमती जाते हुए दो जनवरी, एक हज़ार नौ सौ पच्चीस प्रिय श्री केलकर, यह सदा मेरी इच्छा और नीति रही है कि दूसरोकी भावनाओको ठेस पहुँचाने - के लिए कुछ न लिखूं । लेकिन इस वर्ष, जबकि मै आपको अपने पक्षमे लानेके लिए पूरी कोशिशमे लगा हुआ हूँ, तब तो मै और भी अधिक सावधान रहना चाहूँगा । मैं जानता हूँ कि बिना चाहे भी मै ऐसी चीजे लिख सकता हूँ जो आपको अर्थात् काग्रेसको, अच्छी न लगे । इसलिए यदि 'यग इडिया' या 'नवजीवन में कोई ऐसी चीज प्रकाशित हो, जो उचित न हो तो कृपया मेरा ध्यान उसकी ओर आकृष्ट कर दे । जहाँ भी सम्भव होगा, मै उसका परिमार्जन करनेका प्रयत्न करूंगा । अग्रेजी पत्र की फोटो नकल से । सौजन्य : काशीनाथ केलकर । चार सौ सात. भाषणः दाहोदकी सार्वजनिक सभामें कताईके प्रस्तावमे कातनेकी अनिच्छाके सम्बन्धमे जो रियायत दी गई है, मेरी इच्छा है कि उससे कोई गुजराती लाभ न उठाये। मुझे ईश्वरने यरवदा जेलसे भयकर बीमारी के कारण रिहा करवाया, इसमे मुझे ईश्वरका कोई बडा हेतु दिखाई देता है । मुझे लगता है, उसने मुझे इसलिए छुडवाया है कि मैं देशमे चारो ओर घूम-घूमकर अन्नपूर्णाकी -- चरखेकी - चर्चा करूं और उसका सार्वत्रिक प्रचार करूँ । - • यदि हिन्दुस्तान अभी भी चरखा कातनेके इस सन्देशको नही सुनेगा तो देशमे भुखमरी और बढेगी । दाहोद बम्बई हो जाये, उसमे चार-छ लोग लखपति हो जाये तो इसमे मुझे कोई खुशी न होगी। सबको खाने-पीने और कपड़े पहननेका अधिकार है। लेकिन किसीको धन इकट्ठा करके धनवान बन जानेका हक नही है । दाहोदमे चार-छ लोग साहूकार बने, यह मैं नहीं चाहता । मेरी इच्छा तो यह है कि हम खादी घीकी तरह आसानीसे बेच सके और वह सिक्को तथा डाककी टिकिटोकी तरह जहाँ चाहे वहाँ सुलभ हो जाये । जो लोग सूत नही कात सकते वे दूसरोंसे कतवाकर सदस्य बन सकते है, ऐसी शर्त रखी गई है । लेकिन मैं चाहता हूँ कि इसका लाभ कोई भाषण अन्त्यज आश्रम गोवराम भी गुजराती न ले। भाई मुखदेवने मुझे कहा है कि उन्होंने भूत कातना छोड़ दिया है। मुझे यह बात मालूम न थी । वे अन्य कार्य करते होंगे, लेकिन वे कातना छोड देंगे तो इससे हमारी भारी दुर्दशा होगी। और भाई सुग्वदेवको कातना अच्छा नही लगता मो बात नहीं है, किन्तु उन्हें कातनेमे आलम्य महसूम होता है। मैं किसी गुजरातीसे इन शब्दोको मुनना नही चाहता। चार सौ आठ. भाषण : अन्त्यज आश्रम गोधरामें आपने अनेक प्रकारके मवाद और भजन मुने। कौन कह सकता है कि वे मवाद अन्त्यज वालकांके थे अथवा भगवानकी भक्तिके इन भजनोको उन्होंने ही गाया । परिषद्का परिणाम ऐसा होगा, यह कौन जानता था ? मैने तो अन्त्यजोमे मम्वन्धित प्रस्तावपर वोलते हुए सवको अन्त्यज वाडेमे जानेका सुझाव दिया था। मैने समझा था कि परिषद्मे गोवराके भाई-बहन है, लेकिन मुझसे भूल हुई । इसमे अनेक ऐसे भाई-बहन आये थे जो गोधरा निवासी नही थे। हालांकि उनमें से अधिकतर लोग गुजरातके थे। उस समय हमे काफी वन मिला । हमने उसमे अन्त्यज-गाला खोली । परन्तु गोधराके भाइयों और बहनोने उसका स्वागत नहीं किया, इतना ही नहीं बल्कि उनके प्रति अपनी अरुचि वताई । ऐसी ही स्थिति अन्त्यज भाइयोकी भी थी । अन्त्यजोकी पाठशाला में अन्त्यज वालकोको ही लाना मुश्किल हो गया। एक समय ऐसा आया कि यहाँके कार्य को चन्द करने के प्रस्तावपर गंभीरता से विचार करनेका मन हुआ, लेकिन बादमें वह विचार स्थगित कर दिया । मामा' दक्षिणके है, लेकिन इन्होंने गुजराती पढ ली है। इन्हें अन्त्यजीका कार्य प्रिय है, यह बात मैने आश्रममे देखी थी । इन्हें मैंने गोधरामे जमकर बैठनेकी सलाह दी। उसके बाद मैं जेल चला गया। मेरे बाद इसका दायित्व और असह्य बोज वल्लभभाईने उठाया । इसी बीच यह मकान बना । यह मुझे पसन्द नहीं है । यह अचूरा है, सो गत नहीं, लेकिन यह हमें शोभा नहीं देता । इसको सुन्दरता मे कोई त्रुटि नही है, लेकिन यह ऐसा होना चाहिए जो हमे शोभा दे। मामा शिल्पी नही है, लेकिन उनके मनमे प्रेम और भक्ति है । वे अन्त्यजांके प्रति अपने प्रेम में वह गये और इसमे बीस,शून्य रुपयापया खर्च कर दिया । वल्लभभाईमे इतना रुपया इकट्ठा करनेकी शक्ति नही थी, लेकिन मौभाग्यने पारमी रुस्तमजीने इस प्रकारके कार्यके लिए कुछ धन दिया था। उसमे से ही इस मकान के लिए पैसा लिया गया। लेकिन यह मकान ऐसा होना चाहिए था जो हमको, अन्त्यजीको, गरीबीको शोभा देता । हम लोग गरीब है और इसमें भी सबसे गरीब है हमारे अन्त्यज भाई । ये विना मालिक एक. विठ्ठल लक्ष्मण फड़के ढोरों- जैसे है । हिन्दुओने इनका तिरस्कार करके एक पाप किया है। आप ऐसा रुख रखे कि ऐसा आलीशान मकान बन गया है, इस कारण आप उनसे कोई ईर्ष्या न करे । • यदि ऐसा मकान वणिक् छात्रावासका हो तो आप ईर्ष्या करे । मै यह बात स्वीकार करता हूँ कि एक भी ऐसा मकान नही होना चाहिए जो हिन्दुस्तानकी जनताको, उसकी गरीवीको शोभा न दे । इससे भी अधिक सुन्दर मकान अनेक है जो अन्य वर्णोंके बालकोके उपयोग मे आते है । लेकिन अन्त्यजोको ऐसे मकानोको इस्तेमाल करनेका अधिकार नही है, ऐसा भाव आपके मनमे कदापि न आना चाहिए । तथापि हमे अन्त्यजोको भी समझाना चाहिए । मै तो इसकी चर्चा यहाँ कर ही रहा हूँ, लेकिन यदि गोधराका कोई धनी इस मकानको ले ले तो अच्छा हो और तब हम, जो गरीबोको शोभा दे, ऐसे किसी अन्य मकान में चले जायेगे । तबतक मामा इससे काम लें। आज मै अन्त्यजोके वाड़ेमे तीन जगह गया था। वहाँ मैने मनुष्य नही वरन् पशु देखे । हम इनसे बात करने बैठे तो ये हमे अपनेसे भिन्न प्राणी लगे । परन्तु ये भी प्रेमको समझते है। इनकी इस दयनीय स्थिति के लिए हम लोग उत्तरदायी नही है तो और कौन है ? मेरी दृष्टिमे स्वराज्य इन लोगोकी सेवा की तुलनामे तुच्छ वस्तु है। अन्त्यजों की सेवासे स्वराज्य मिलेगा, इस उद्देश्यसे मैने यह सेवा आरम्भ नहीं की है । तीस वर्ष पहले जब मै दक्षिण आफ्रिकामे था और जब स्वराज्यकी वात भी नही थी तबसे मैं अपने अन्त्यज - सेवा सम्वन्धी विचार प्रकट करता आ रहा हूँ । आजकल हम हिन्दू धर्मको रक्षा नहीं कर रहे है, उसका नाश कर रहे है और मैं चाहता कि उसे इस नाशसे बचाने के लिए आप यह सेवा कार्य हाथमे ले । आप ऐसा समझें कि आप लोग जो यहाँ आये है, यहाँ आकर अपवित्र नहीं, बल्कि पवित्र हुए है। मुझे तो यह कहनेमे भी कोई सकोच नही कि जहाँ जहाँ अन्त्यज-सेवा है, जहाँ-जहाँ अन्त्यजपाठशाला है, जहाँ-जहाँ अन्त्यज आश्रम है, वहाँ-वहाँ तीर्थ है । कारण, तीर्थ वही होता है जहाँ हम अपने पापोका परिमार्जन करके भवसागरसे तरनेके लिए तैयार होते है । माँ-वाप' क्यो तीर्थ-रूप है ? गुरु क्यो तीर्थ-रूप है ? यदि हम हृदयसे सेवा करते है तो पवित्र वनते है । आप इनसे छू गये है, इसलिए आपको नहाना चाहिए, ऐसा आप न माने । यदि आपको पहलेसे मालूम न होता तो क्या आप कह सकते थे कि ये सवाद सुनानेवाले बालक अन्त्यज है ? यदि हम इन बालकोपर पूरी मेहनत करे तो ये वालक हम लोगोंसे आगे वढ जायेगे । भगीके बालकोमे सद्विचार नहीं आ सकते, मैं ऐसा नहीं मानता । मै अनुभवसे कहता हूँ कि यदि हम प्रयास करें तो उनके हृदयमे सद्विचार अवश्य आयेगे । आप सब लोगोसे, जो यहाँ आये है प्रार्थना करता कि आप इस अवसरको अन्तिम अवसर न मान ले; आप समय-समयपर यहाँ आकर सहायता देते रहे । यहाँ अन्त्यज सेवा मण्डल है, इसके अस्तित्व के लिए हम इन्दुलालके' आभारी है। इन्होने भारी सेवा की है। वे जेलमे भी इसीका विचार करते थे । यदि उन्होने उत्साहअतिरेकमे कुछ ऐसा काम किया हो जो सम्भव है हमको अच्छा न लगे, तो हमें एक. इन्दुलाल कन्हैयालाल पाशिक । भापण गोवराकी सार्वजनिक सभाम उसपर ध्यान नहीं देना चाहिए । अमृतलाल' अपना प्रवास छोड़कर आज यहाँ आये हैं । अत्र वे टेढों, भगियो और भीलोके गुरु बन गये है । इन्दुलालने अन्त्यज सेवामण्डल छोडनेका विचार किया तब मैने उनसे कहा था, मैं उसे विद्यापीठको नांग दूंगा । अमृतलालने कहा कि यह सस्या तो रहनी चाहिए। अब उसका बोज उन्होंने स्त्रय उठा लिया है। लेकिन एक मनुष्य कितना बोझ उठा सकता है? आप उनकी मदद भी करें । अन्त्यज-सेवा-मण्डलका कार्य बहुत वडा है । वह गुजरातके अन्त्यजोका नक्शा तैयार कर रहा है। गोधराने एक भी पैमा दिया हो, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। यदि आपके हृदय मे ईश्वर वमता है तो आप भाई अमृतलाल अथवा मामाको पैसा दे । ऐसा आप समझ-बूझकर करे । [ गुजरानीमे ] महादेवभाईनी डायरी, खण्ड सात चार सौ नौ. भाषणः गोधराकी सार्वजनिक सभामें अन्त्यजीको जन्मसे अस्पृश्य माननेमे धर्म नही, वल्कि अचर्म है। मेरी दृढ मान्यता है कि मुझे सनातनी न माननेवाले लोग अज्ञानी है। आप कहेंगे कि अनेक पण्डित भी अस्पृश्यताका समर्थन करते है। लेकिन उनपर अखा भगतकी यह उक्ति लागू होती है 'विन विचार विद्या मिथ्या । हिन्दू धर्म में एक ही तरहकी अस्पृश्यता है, असन्तोसे दूर रहने की, दुष्ट, पाखण्डी लम्पट और व्यभिचारीसे दूर रहनेकी । उन्हें आप अस्तृश्य मानकर उनसे दूर भागें, लेकिन जो व्यक्ति आपकी सेवा करे, आपका मैला साफ करे, आपके लिए चमडा तैयार करे और आपकी खेती [ की सिंचाई के लिए चरमा तैयार करे, उसे क्या आप अपूज्य मानेंगे? यह तो हिन्दू धर्म नही, पाखण्ड है। यदि हिन्दूधर्म यह कहता हो कि ये लोग अस्पृश्य है तो मै हिन्दूधर्मका त्याग करनेकी सलाह दूंगा । अस्पृश्यताकी यह प्रवृत्ति भ्रम मात्र है, यदि आपमे दयाभाव हो तो आप भगीका अज्ञान देखकर रो उठे और आपके मनमें कर्तव्य पालनकी भावना जाग्रत हो । आप मेरा त्याग करे, आप मुझे जगलमें भगा दे और मैं पागल हो जाऊँ तो इसमे दोष मेरा है या आपका ? उमी तरह बेचारे भगी और टेड दीन-हीन और कगाल हो गये है, उनमे अज्ञानको कोई हद नहीं है और हैं तो इसमें उनका दोप है या आपका दोप है ? यह आपका ही दोप है और मैं चाहता हूँ कि आप इस दोपका त्यागकर शुद्ध बने । मुझे ईश्वरने यरवदा जेलमें भयकर बीमारीने बचाकर आपको नेवा के लिए मुक्त किया, इसमे मुझे तो उनका कोई बहुत बडा हेतु दिखाई देता है और वह हेनु यह है कि मैं आपमें आत्म-विश्वासका सचार करूँ, जेलमे अपने गंभीर चिन्तनके परिणाम स्वरूप बने अपने विचारको आपके समक्ष रखूं कि तीन यतों - चरना हिन्दु-मुस्लिम एक. अमृतलाल विट्ठलभाई ठक्कर । एकता और अस्पृश्यता निवारण -- में ही स्वराज्य निहित है। मैने चरखेकी बात सबसे पहले रखी है, उसका कारण यह है कि उपर्युक्त तीनों बातोमे केवल चरखेकी बात ही ऐसी है जिसके सम्बन्धमे हममे अविश्वास है और दूसरा कारण यह है कि चरखा ही एक ऐसी वस्तु है जो हर रोज हमसे खरा काम माँगता है। यदि मै रोज हिन्दू-मुस्लिम एकता अथवा अस्पृश्यता निवारणके लिए आधा घटा काम करना चाहूँ तो मेरी समझमे नही आयेगा कि क्या करूँ । लेकिन आधा घटा चरखा चलानेमे प्रत्यक्ष काम होता है। यह जडपदार्थ है, लेकिन इसमें निहित शक्ति अमोघ है। इसको चलाने के लिए आप सब तैयार हो जाये, ऐसी मेरी इच्छा है। खादीका कपडा आपको मोटा लगता है। आपका कहना है कि खादी तो चुभती है। इसका अर्थ यह हुआ कि आपको यह देश चुभता है और जिसे देश चुभता है, वह स्वराज्य क्या प्राप्त करेगा? तिलक महाराज कहा करते थे कि जब लोग जलवायु परिवर्तनके लिए विदेश जानेकी बात करते है तब मुझे तो दुःख होता है। ईश्वरने मुझे यहाँ उत्पन्न किया है तो क्या उसने मुझे मेरे लिए इसी जलवायुमे स्वस्थ बने रहनेकी बात न सोची होगी ? इग्लैंडमे अत्यधिक ठण्ड होने के बावजूद क्या अग्रेज इग्लैंड छोडकर भागते है ? घरमे सिगडी सुलगाते है, गरम कपडे पहनते है और ठण्डसे बचने के लिए अनेक उपाय करते है। लेकिन जिनके पास करोडो रुपये है, वे लोग करे तो क्या करे? वे जलवायुपरिवर्तनका विचार करते है । मैं आपसे कहता हूँ कि यह उनका पाखण्ड है। उसी तरह हम यहाँकी बनी, महँगी सस्ती, अच्छी-बुरी, मोटी-पतली खादी पहनें, इसीमे हमारी स्वदेश भक्ति है और नही तो स्वदेशका नाम लेना निरर्थक है। क्या कोई माँ अपने कुरूप पुत्रको छोड दूसरीके अच्छे बच्चेको गोदमे लेगी? बालकके प्रति माँके हृदय में ईश्वरने जो प्रेम और ममत्व पैदा किया है, मेरी इच्छा है कि वही प्रेम और ममत्व आपके हृदयमे हिन्दुस्तान के लिए हो, हिन्दुस्तानमे पैदा होनेवाले अन्नके लिए हो, खादी के लिए हो । यदि गोधराका प्रत्येक व्यक्ति पाँच रुपये मूल्यकी खादी तैयार करे तो पच्चीस हज़ार की आबादीमे कितने रुपयोकी बचत हो ? यदि आप यह रुपया बचा लें तो गोधराके निवासी अधिक खुशहाल हो जाये । उससे आपका तेज बढेगा और आपका देश-प्रेम छलक उठेगा । चरखा चलाना ही एक ऐसी प्रवृत्ति है जिसमे स्त्री-पुरुष और बालक, गरीब और अमीर सब समान योग दे सकते है तथा जिससे भारी फलकी उपलब्धि हो सकती है। 'बूंद-बूंद सरोवर भरता है। इस कहावतपर आप विचार करे और प्रति व्यक्ति दो हजार गज सूत देकर स्वराज्य रूपी सरोवरको भरते रहे । वामनराव विधान-सभामे जाये और वहाँ जाकर सरकारको आँखे दिखाये तो क्या आप समझते हैं, इससे आपको स्वराज्य मिल जायेगा । मैं तो कहता हूँ कि आप विधानसभामे जाये तो वहाँ भी सूत और खादीकी ही पुकार करे। लेकिन यदि आप विदेशी कपडेका बहिष्कार न कर सकें तो चाहे वल्लभभाई अथवा वामनराव जैसे पाँच हजार लोग विधान सभामे जाये, पर इससे स्वराज्य नही मिलेगा । चार सौ दस. काठियावाड़ियों से परिस्थितियाँ मुझे काठियावाड ले जा रही है। काठियावाडियों के प्रेमको मै समझता हूँ, पहचानता हूँ । लेकिन मुझे तो काम चाहिए। मैं अपनी पति और आजके शिक्षित वर्गकी पद्धति भेद देख रहा हूँ । इस भेदके वावजूद मेरा अध्यक्ष बनाना हास्यास्पद है । मैंने जिन प्रस्तावोका मनविदा तैयार किया था वे यद्यपि काग्रेममे पारित हो चुके हैं तथापि अनेक लोग मुझसे कहते है कि इन प्रस्तावोपर अमल कोई नहीं करेगा । ऐसी भयकर वातपर मैं कैसे विश्वास कर सकता हूँ । मेरे पाम जिस तरह काग्रेसके सम्मुख कहने के लिए कोई नई वान नही थी, उमी तरह कदाचित् काठियावाडसे कहनेके लिए भी न हो । सत्य तो यह है कि मुझे जो कुछ कहना था वह सब मै कह चुका हूँ । मुझे तो हेर-फेरके साथ केवल उन्ही वातोको दुहराना है । मेरा मन तो केवल गरीबोमे ही रमा रहता है, मुझे तो भगियोके लिए, मजदूरोके लिए स्वराज्य चाहिए । वे किस तरह मुखी हो, मैं हर पल इसी वातपर विचार करता रहता हूँ। हम उनके कन्वोपर से कब उतरेगे? हमें अपने अधिकारोकी पडी है, किन्तु मुझे तो गरीबोके अधिकारोकी और अपने कर्त्तव्यको बात करनी है । यदि मै अपनी बात काठियावाडियोको समझा सकूं तो कितना अच्छा हो । क्या यह ऐसी बात है जो सम्भव नही ? मनुष्य आशापर जीता है । यही बात मेरे सम्बन्ध भी है। किसी-न-किसी दिन हिन्दुस्तानको मेरी वात मुननी ही पडेगी । इसका आरम्भ काठियावाड ही क्यो न करे ? व्यवस्थापकोने मेरे लिए वातावरण तैयार करनेका बीड़ा उठाया है । वे मेरे लिए इतना तो करेगे ही कि जहाँ देखूं वहाँ खादी नजर आये। वे काठियावाडकी कारीगरी ओर कलाओकी प्रदर्शनी भी अवश्य रखेंगे। बेलगाँव मे प्रदर्शनी कितनी सुदर थी? काठियावाडमे क्या कम कलाएँ है ? काठियावाडकी वनस्पतियोमे क्या नही है ? काठियावाडके गाय-बैल कितने मुन्दर है ? क्या उनके दर्शन होगे ? में पश्चिमको महिमा देखने नही जाता, वह तो मैने पश्चिममे ही बहुत देखी है । लेकिन मैं तो देशसे निर्वासित देशी वस्तुओका स्मरण करता हूँ, उन्हें देखना चाहता हूँ काठियावाड अपनी शिष्टता के लिए तो प्रसिद्ध है ही। स्वागत समिनिये मेरी प्रार्थना है कि वह शिष्टताकी अतिमें समय नष्ट न करे। समयकी मर्यादा नहीं है, किन्तु मनुष्य देहकी तो है । हमें इस क्षणभगुर गरीरकी सहायतामे अनेक काम करने है, इसलिए हमे एक-एक क्षणका सदुपयोग करना उचित है। इस कारण मैं चाहता हूँ कि कार्यवाहक इस बातकी भाववानी रखें कि अपना प्रत्येक कार्य हम समयपर कर सकें। जिन-जिन प्रस्तावोको परिषद् रमना आवश्यक लगता हो, यदि उनके मसविदे पहलेसे तैयार कर लिये गये होगे तो हम उनपर पर्याप्त विचार कर सकेगे। मेरी सलाह है कि विषय समितिकी बैठक के लिए पर्याप्त समय रखा जाये । प्रस्तावोकी रचनामे अपने कर्तव्योपर विशेष जोर दिया जाये तो हम अधिक सफल होगे । इसलिए मैं चाहता हूँ कि प्रस्ताव इस वातको ध्यानमे रखकर ही तैयार किये जाये । समय बचाने का एक मार्ग तो मै सुझा दूं । आप स्वागत हृदयसे करे । इससे आपकी समझमे आ जायेगा कि बाह्य स्वागतकी कोई आवश्यकता नही है । जुलूस आदिमे समय लगाना तो हमे जो असली कार्य करना है उसमे चोरी करनेके समान होगा। दो दिनमे छब्बीस लाख लोगोकी सेवाका कार्यक्रम बनाता है, आपको यह बात न भूलनी चाहिए । हजारो स्त्री-पुरुप इकट्ठे होगे, उनको सतोप देनेके लिए कितनी ही बाह्य वस्तुओकी आवश्यकता होगी। इसके लिए तो प्रदर्शनी - जैसी दूसरी कोई वस्तु नही है, यह हम बेलगॉवमे देख चुके है। चार सौ ग्यारह. मनसे और बेमनसे काग्रेसका काम निर्विघ्न समाप्त हो गया । काम एक ही था, अगर ऐसा भी कहे तो गलत न होगा । वह काम यह स्वीकार करना था कि सूत कातना भारतीयमात्रका धर्म है। यदि यह बात प्रामाणिकताके साथ स्वीकार की गई हो तो काग्रेसका यह अधिवेशन हमारे इतिहास में प्रसिद्ध हो जायेगा, और यदि यह कदम हमने अप्रामाणिकता के साथ उठाया होगा तो इतिहासकार काग्रेसके इस अधिवेशनको निन्दनीय ठहरायेगे । मेरे पास तो ऐसा माननेका एक भी कारण नहीं कि यह कदम अप्रामाणिकताके साथ मनमें मैल रखकर उठाया गया है । जो प्रस्ताव स्वीकार किया गया, स्वय उस प्रस्तावमे ही मनसे और बेमनसे स्वीकार करनेवाले दो पक्षोका उल्लेख किया गया है । बेमनसे स्वीकार करनेवालोने भी कातनेको आवश्यकताको तो मान लिया है, किन्तु यह स्वीकार नही किया कि वे स्वय कातेगे । इन्होने भी वर्षमे चौबीस,शून्य गज सूत देने की बात मान ली है, किन्तु वे यह काम खुशीसे करे, इसे सम्भव बनाना उनका काम है, जिन्होंने प्रस्तावको पूरे मनसे स्वीकार किया है। यदि खुशी-खुशी कातनेवाले लोग नियमित रूपसे कातने लगे तो दूसरे पक्षवाले स्वय कातनेके धर्मको मानने लगेगे । आशा करनी चाहिए कि गुजरातमे वेमनसे स्वीकार करनेवाला पक्ष है ही नही । मनसे स्वीकार करनेवालोंकी सख्या भले ही बहुत कम हो, हमे उसकी चिन्ता हरगिज नही करनी चाहिए । हम चिन्ता कामकी करे । कोई स्वय न काते, फिर भी काग्रेसमे आना चाहे तो उसे ऐसा करनेका पूरा पूरा अधिकार है । पत्र रेहाना तैयवजीको किन्तु गुजरातमे ऐसा कोई पक्ष देखनेमे नही आया है जो स्वय कातनेके विषयमें उदासीन हो । कातनेवालोकी सख्या भले ही प्रारम्भमे छोटी हो, किन्तु यदि हमे वैमे चुस्त लोग मिल जायेगे तो हम उनकी मार्फत बहुत सारा काम करा सकते है, ऐमा मेरा दृढ विश्वास है । यदि गुजरात चाहे तो वह इस मामलेमे अगुआ बन सकता है। सारे साधन गुजरातमे है। आवश्यकता सिर्फ इस बातकी है कि जनतामें उसके प्रति इच्छा हो । इच्छा उत्पन्न करना कार्यकर्ताओका काम है और इसीमे हमारी सगठन-शक्ति, देशभक्ति, दृढता आदिकी कसौटी होनी है। कातने के प्रचारका अर्थ है खादी प्रचार और खादी प्रचारका अर्थ है विदेशी कपडेका परिपूर्ण वहिष्कार । इसलिए अभीतक खादी-प्रचार के लिए जितना किया है, उससे बहुत अधिक प्रयत्न हमे करना है। फिर, खादी प्रचारका अर्थ है, गुजरातकी खादीका प्रचार । जवतक गुजरात स्वयं अपना कपडा तैयार करके उसीका उपयोग नहीं करता तवतक गुजरातमे खादीका चमत्कार दिखाई नही पड़ सकता । खादीप्रचारके साथ-साथ गुजरात मे अन्य सभी कलाएँ अपने-आप आ जायेगी और गुजरात की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। गुजरातमे भुखमरी भले ही न हो, किन्तु उसमे तेज भी नहीं है। यहाँके बालकोको दूध नही मिलता और जब-कभी यहाँ अकाल पड़ जाता है तो यहाँके लोग भीख माँगने निकल पडते है । हिन्दुस्तान के बाहर कदाचित् ही कही ऐसा होता हो । विदेशी कपडेके सम्पूर्ण बहिष्कारके वाद ही गुजरात इस स्थितिसे छुटकारा पा सकता है । चार सौ बारह. पत्रः रेहाना तैयबजीको प्रिय रेहाना, मुझे खुशी है कि तुम आ रही हो । तुम्हे शायद मालूम हो कि मेरे पिता के एक मित्र ईश्वरकी निरन्तर आराधना करके अपने रोगसे मुक्त हो गये थे । क्या तुम भी वँसा नहीं कर सकती ? अगर तुम चाहो तो ठीक हो सकती हो । अंग्रेजी पत्र की फोटो-नकलसे । मोशून्य कशून्य गावी चार सौ तेरह. पत्रः फूलचन्द शाहको भाईश्री फूलचन्द, यदि किसी कार्यक्रमको हाथमे लेनेकी वात सोची तो भावनगर पहुँचनेके बाद ही लूंगा । अभीसे आप मुझे न वाँविये । मै बहुत थका हुआ हूँ और मुझे अभी भी अनेक योजनाओमे भाग लेना बाकी है । भाईश्री फूलचन्द कस्तूरचन्द केळवणी मण्डल कार्यालय, वढवान शहर गुजराती पत्र से । सौजन्य : शारदाबहन शाह चार सौ चौदह. पत्र : अवन्तिकाबाई गोखलेको चिरंजीव छगनलालने मुझे आपकी आर्थिक स्थितिके वारेमे बताया है, सुनकर दुख हुआ । आपने इस सम्बन्धमे मुझसे आजतक कुछ क्यो नही कहा ? खैर जो हुआ सो हुआ । आप दोनो जब चाहे तब यहाँ आकर रह सकते हैं। आप इसे अपना घर ही समझियेगा । डाक्टर मेहताका बगला फिलहाल खाली ही पडा है। उसके एक हिस्सेका उपयोग आप कर मकेगी । नया मकान बनानेका विचार हम बादमें करेंगे। यह सुझाव आपके स्वास्थ्यको व्यान में रखकर मैंने पहले ही दिया था। आप सार्वजनिक कार्य यहाँ भी कर सकेंगी। निर्णय करनेमे देर न लगाइये । वहाँ भला कैसे आ सकती हूँ -- ऐसा व्यर्थका विचार मनमे हरगिज न लाइये । अपने स्वास्थ्यका समाचार लिखियेगा । पत्रोत्तर भावनगर भेजिये । वहाँ आठ तारीखसे तेरह तारीखतक रहनेका मेरा विचार है । पत्र सर प्रभाशकर पट्टणीके । पतेपर लिखियेगा गुजराती पत्र की फोटो-नकलमे । सौजन्य वम्बई राज्य कमेटी, सं. गा वा ।
साउथ सिनेमा के सुपरस्टार अल्लू अर्जुन ने एक दिन पहले अपना 41वां जन्मदिन मनाया. सोशल मीडिया पर अभिनेता के फैन्स ने उन्हें जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामना दी। वहीं, उनकी फिल्म 'पुष्पा 2' को लेकर भी लोगों का उत्साह काफी अधिक है. फिल्म के टीजर ने फैंस की एक्साइटमेंट को और भी बढ़ा दिया है। खैर, अब हम आपको बताने जा रहे हैं कि आपके इस फेवरेट स्टार के इंस्टाग्राम पर एक नहीं बल्कि दो एकाउंट हैं. पिंकविला की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अल्लू अर्जुन के इंस्टाग्राम पर दो एकाउंट हैं, एक के बारे में तो आप जानते ही होंगे लेकिन उन्होंने दूसरे को गोपनीय रखा है. इस रिपोर्ट में यह भी बोला गया है कि अल्लू अर्जुन ही नहीं, साउथ और बॉलीवुड के और भी कई सितारे हैं, जो सोशल मीडिया पर अपना गोपनीय एकाउंट चलाते हैं, जिसकी जानकारी फैन्स को भी नहीं है। अल्लू अर्जुन अपने गोपनीय इंस्टाग्राम एकाउंट से अपने खास दोस्तों के साथ चैट करते हैं. अल्लू अर्जुन के प्रशंसकों ने इंस्टाग्राम पर उनके गुप्त खाते की तलाश प्रारम्भ कर दी होगी. इस एकाउंट पर एक्टर्स हर तरह की बातें अपने दोस्तों के साथ शेयर करते हैं। वहीं उनके ऑफिशियल इंस्टाग्राम एकाउंट पर आपको उनकी प्रोफेशनल व्यक्तिगत जीवन की फोटोज़ और वीडियो देखने को मिल जाएंगे, जिन्हें फैंस भी खूब पसंद करते हैं। इस बीच, 'पुष्पाः द रूल' से अल्लू अर्जुन के फर्स्ट लुक ने इंटरनेट पर तूफान ला दिया है. इस फिल्म में आगे क्या होने वाला है यह जानने के लिए फैंस बेसब्री से इन्तजार कर रहे हैं. सुकुमार निर्देशित फिल्म 'पुष्पा 2' का टीजर 'कहां है पुष्पा? ' कैप्शन के साथ देखा गया. जिससे साबित होता है कि फिल्म का दूसरा पार्ट काफी दिलचस्प होने वाला है. 'पुष्पा 2′ में अल्लू अर्जुन, फहद फासिल, रश्मिका मंदाना, धनंजय, राव रमेश, सुनील, अनसूया भारद्वाज और अजय घोष जैसे कलाकार नजर आएंगे। फिल्म की रिलीज की बात करें तो यह अगले वर्ष 2024 में सिनेमाघरों में दस्तक देगी।
साउथ सिनेमा के सुपरस्टार अल्लू अर्जुन ने एक दिन पहले अपना इकतालीसवां जन्मदिन मनाया. सोशल मीडिया पर अभिनेता के फैन्स ने उन्हें जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामना दी। वहीं, उनकी फिल्म 'पुष्पा दो' को लेकर भी लोगों का उत्साह काफी अधिक है. फिल्म के टीजर ने फैंस की एक्साइटमेंट को और भी बढ़ा दिया है। खैर, अब हम आपको बताने जा रहे हैं कि आपके इस फेवरेट स्टार के इंस्टाग्राम पर एक नहीं बल्कि दो एकाउंट हैं. पिंकविला की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अल्लू अर्जुन के इंस्टाग्राम पर दो एकाउंट हैं, एक के बारे में तो आप जानते ही होंगे लेकिन उन्होंने दूसरे को गोपनीय रखा है. इस रिपोर्ट में यह भी बोला गया है कि अल्लू अर्जुन ही नहीं, साउथ और बॉलीवुड के और भी कई सितारे हैं, जो सोशल मीडिया पर अपना गोपनीय एकाउंट चलाते हैं, जिसकी जानकारी फैन्स को भी नहीं है। अल्लू अर्जुन अपने गोपनीय इंस्टाग्राम एकाउंट से अपने खास दोस्तों के साथ चैट करते हैं. अल्लू अर्जुन के प्रशंसकों ने इंस्टाग्राम पर उनके गुप्त खाते की तलाश प्रारम्भ कर दी होगी. इस एकाउंट पर एक्टर्स हर तरह की बातें अपने दोस्तों के साथ शेयर करते हैं। वहीं उनके ऑफिशियल इंस्टाग्राम एकाउंट पर आपको उनकी प्रोफेशनल व्यक्तिगत जीवन की फोटोज़ और वीडियो देखने को मिल जाएंगे, जिन्हें फैंस भी खूब पसंद करते हैं। इस बीच, 'पुष्पाः द रूल' से अल्लू अर्जुन के फर्स्ट लुक ने इंटरनेट पर तूफान ला दिया है. इस फिल्म में आगे क्या होने वाला है यह जानने के लिए फैंस बेसब्री से इन्तजार कर रहे हैं. सुकुमार निर्देशित फिल्म 'पुष्पा दो' का टीजर 'कहां है पुष्पा? ' कैप्शन के साथ देखा गया. जिससे साबित होता है कि फिल्म का दूसरा पार्ट काफी दिलचस्प होने वाला है. 'पुष्पा दो′ में अल्लू अर्जुन, फहद फासिल, रश्मिका मंदाना, धनंजय, राव रमेश, सुनील, अनसूया भारद्वाज और अजय घोष जैसे कलाकार नजर आएंगे। फिल्म की रिलीज की बात करें तो यह अगले वर्ष दो हज़ार चौबीस में सिनेमाघरों में दस्तक देगी।
विरल भयानी ने इंस्टाग्राम पर अबराम खान का वीडियो शेयर किया है। वो मॉम गौरी खान के स्टोर पहुंचे, जहां उनकी मौजूदगी में पहली बार पपाराजी के सामने पोज दिया। अबराम बेहद क्यूट दिखे और मीडिया के सामने शरमाते नजर आए। किसी ने कहा कि वो बड़ा हो गया है तो किसी ने लिखा कि वो लिटिल शाहरुख हैं। अबराम के स्वीट बिहेवियर पर फैंस फिदा हो गए हैं। एक यूजर ने तो ये भी कहा कि उनमें स्टार किड वाला एटीड्यूड बिल्कुल भी नहीं है। ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। एक तरफ जहां अबराम मां गौरी खान के स्टोर पर नजर आए, वहीं शाहरुख की बेटी सुहाना खान भी चर्चा में बनी हुई हैं। उनकी नेटफ्लिक्स मूवी 'द आर्चीज' का टीजर और फर्स्ट लुक पोस्टर रिलीज हो गया है। फैंस उनकी स्क्रीन प्रेसेंज से बेहद खुश हैं। वहीं, मां गौरी भी खुशी से फूले नहीं समा रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बेटी को बधाई दी है। शाहरुख खान जल्द ही स्क्रीन पर कमबैक करने वाले हैं। ऐसे में वो इन दिनों फिल्मों की शूटिंग में बिजी हैं। उनकी 'पठान' रिलीज होगी, जिसमें दीपिका पादुकोण और जॉन अब्राहम भी हैं। वो साउथ के डायरेक्टर एटली की मूवी की शूटिंग भी कर रहे हैं, जिसमें वो नयनतारा संग नजर आएंगे। इसके अलावा उन्होंने राजकुमार हिरानी की फिल्म 'डन्की' की शूटिंग भी शुरू कर दी है।
विरल भयानी ने इंस्टाग्राम पर अबराम खान का वीडियो शेयर किया है। वो मॉम गौरी खान के स्टोर पहुंचे, जहां उनकी मौजूदगी में पहली बार पपाराजी के सामने पोज दिया। अबराम बेहद क्यूट दिखे और मीडिया के सामने शरमाते नजर आए। किसी ने कहा कि वो बड़ा हो गया है तो किसी ने लिखा कि वो लिटिल शाहरुख हैं। अबराम के स्वीट बिहेवियर पर फैंस फिदा हो गए हैं। एक यूजर ने तो ये भी कहा कि उनमें स्टार किड वाला एटीड्यूड बिल्कुल भी नहीं है। ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। एक तरफ जहां अबराम मां गौरी खान के स्टोर पर नजर आए, वहीं शाहरुख की बेटी सुहाना खान भी चर्चा में बनी हुई हैं। उनकी नेटफ्लिक्स मूवी 'द आर्चीज' का टीजर और फर्स्ट लुक पोस्टर रिलीज हो गया है। फैंस उनकी स्क्रीन प्रेसेंज से बेहद खुश हैं। वहीं, मां गौरी भी खुशी से फूले नहीं समा रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बेटी को बधाई दी है। शाहरुख खान जल्द ही स्क्रीन पर कमबैक करने वाले हैं। ऐसे में वो इन दिनों फिल्मों की शूटिंग में बिजी हैं। उनकी 'पठान' रिलीज होगी, जिसमें दीपिका पादुकोण और जॉन अब्राहम भी हैं। वो साउथ के डायरेक्टर एटली की मूवी की शूटिंग भी कर रहे हैं, जिसमें वो नयनतारा संग नजर आएंगे। इसके अलावा उन्होंने राजकुमार हिरानी की फिल्म 'डन्की' की शूटिंग भी शुरू कर दी है।
नयी दिल्ली। लैंगिक न्याय को नरेंद्र मोदी सरकार का मूल तत्व बताते हुए विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बृहस्पतिवार को कहा कि तीन तलाक पर रोक लगाने संबंधी विधेयक सियासत, धर्म, सम्प्रदाय का प्रश्न नहीं है बल्कि यह नारी के सम्मान और नारी-न्याय' का सवाल है और हिन्दुस्तान की बेटियों के अधिकारों की सुरक्षा संबंधी इस पहल का सभी को समर्थन करना चाहिए। रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में 'मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019' को चर्चा एवं पारित करने के लिये पेश किया जिसमें विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की संरक्षा करने और उनके पतियों द्वारा तीन बार तलाक बोलकर विवाह तोड़ने को निषेध करने का प्रावधान किया गया है। आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने विधेयक को चर्चा एवं पारित करने के लिये पेश किये जाने का विरोध करते हुए इस संबंध में सरकार द्वारा फरवरी में लाये गये अध्यादेश के खिलाफ सांविधिक संकल्प पेश किया। संकल्प पेश करने वालों में अधीर रंजन चौधरी, शशि थरूर, प्रो. सौगत राय, पी के कुन्हालीकुट्टी और असदुद्दीन औवैसी भी शामिल हैं। प्रसाद ने कहा कि यह नारी के सम्मान और नारी-न्याय का सवाल है , धर्म का नहीं। " प्रसाद ने कहा कि पिछले साल दिसंबर में तीन तलाक विधेयक को लोकसभा ने मंजूरी दी थी। लेकिन यह राज्यसभा में पारित नहीं हो सका। संसद के दोनों सदनों से मंजूरी नहीं मिलने पर सरकार इस संबंध में अध्यादेश लेकर आई थी जो अभी प्रभावी है। विधि एवं न्याय मंत्री ने कहा कि 2017 से अब तक तीन तलाक के 574 मामले विभिन्न स्रोतों से सामने आये हैं। मीडिया में लगातार तीन तलाक के उदाहरण सामने आ रहे हैं। इस विधेयक को सियासी चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। यह इंसाफ से जुड़ा विषय है। इसका धर्म से कोई लेना देना नहीं है। प्रसाद ने कहा कि 20 इस्लामी देशों ने इस प्रथा को नियंत्रित किया है। हिन्दुस्तान एक धर्मनिरपेक्ष देश है तो वह ऐसा क्यों नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि इसमें मजिस्ट्रेट जमानत दे सकता है। इसके अलावा भी कई एहतियाती उपाए किये गए हैं।
नयी दिल्ली। लैंगिक न्याय को नरेंद्र मोदी सरकार का मूल तत्व बताते हुए विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बृहस्पतिवार को कहा कि तीन तलाक पर रोक लगाने संबंधी विधेयक सियासत, धर्म, सम्प्रदाय का प्रश्न नहीं है बल्कि यह नारी के सम्मान और नारी-न्याय' का सवाल है और हिन्दुस्तान की बेटियों के अधिकारों की सुरक्षा संबंधी इस पहल का सभी को समर्थन करना चाहिए। रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में 'मुस्लिम महिला विधेयक दो हज़ार उन्नीस' को चर्चा एवं पारित करने के लिये पेश किया जिसमें विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की संरक्षा करने और उनके पतियों द्वारा तीन बार तलाक बोलकर विवाह तोड़ने को निषेध करने का प्रावधान किया गया है। आरएसपी के एन के प्रेमचंद्रन ने विधेयक को चर्चा एवं पारित करने के लिये पेश किये जाने का विरोध करते हुए इस संबंध में सरकार द्वारा फरवरी में लाये गये अध्यादेश के खिलाफ सांविधिक संकल्प पेश किया। संकल्प पेश करने वालों में अधीर रंजन चौधरी, शशि थरूर, प्रो. सौगत राय, पी के कुन्हालीकुट्टी और असदुद्दीन औवैसी भी शामिल हैं। प्रसाद ने कहा कि यह नारी के सम्मान और नारी-न्याय का सवाल है , धर्म का नहीं। " प्रसाद ने कहा कि पिछले साल दिसंबर में तीन तलाक विधेयक को लोकसभा ने मंजूरी दी थी। लेकिन यह राज्यसभा में पारित नहीं हो सका। संसद के दोनों सदनों से मंजूरी नहीं मिलने पर सरकार इस संबंध में अध्यादेश लेकर आई थी जो अभी प्रभावी है। विधि एवं न्याय मंत्री ने कहा कि दो हज़ार सत्रह से अब तक तीन तलाक के पाँच सौ चौहत्तर मामले विभिन्न स्रोतों से सामने आये हैं। मीडिया में लगातार तीन तलाक के उदाहरण सामने आ रहे हैं। इस विधेयक को सियासी चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। यह इंसाफ से जुड़ा विषय है। इसका धर्म से कोई लेना देना नहीं है। प्रसाद ने कहा कि बीस इस्लामी देशों ने इस प्रथा को नियंत्रित किया है। हिन्दुस्तान एक धर्मनिरपेक्ष देश है तो वह ऐसा क्यों नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि इसमें मजिस्ट्रेट जमानत दे सकता है। इसके अलावा भी कई एहतियाती उपाए किये गए हैं।
इस विषय पर एक पत्रिका में लॉरेन थॉम्पसन ने बातचीत की। "फोर्ब्स". पर्यवेक्षक इंगित करता है कि अमेरिकी सेना को एक बड़े युद्ध की आशंका है, जो अगले पांच वर्षों में शुरू होने की संभावना है। मुसीबत यह है कि वाशिंगटन के पास इस युद्ध की तैयारी के लिए पर्याप्त धन भी नहीं है। पर्यवेक्षक का दावा है कि अमेरिकी कमांडरों को आसन्न युद्ध का एक प्राकृतिक डर है, उनके दिमाग डर से एकदम लकवाग्रस्त हैं। पेंटागन का कहना है कि अमेरिकी सेना पांच साल के लिए एक बड़े युद्ध में शामिल हो सकती है, और यह कुछ "विद्रोहियों" के साथ लड़ने के बारे में नहीं है - नहीं, यह एक बड़े पैमाने पर संघर्ष की संभावना है, और भविष्य के भविष्य में। युद्ध या तो पूर्वी यूरोप में रूस के साथ आ रहा है, या मध्य पूर्व में ईरान के साथ, या उत्तर कोरिया में। पूर्वोत्तर एशिया में संभावित शत्रुता। और शायद हर जगह एक ही समय पर। पेंटागन में उच्च रैंकिंग वाले अधिकारी अपने खुले निर्णयों में काफी सतर्क हैं, जो प्रेस के लिए अभिप्रेत हैं। श्री थॉम्पसन नोट करते हैं कि ये व्यक्ति "सार्वजनिक रूप से अमेरिकी कमजोरियों को उजागर नहीं करना चाहते हैं। " इसी समय, यह उनके लिए "स्पष्ट" प्रतीत होता है कि ओबामा प्रशासन, जिसने एक्सएनयूएमएक्स में "प्रशांत महासागर के लिए यू-टर्न" बनाया था, बाल्टिक सागर से फारस की खाड़ी तक फैला "भू-राजनीतिक वैक्यूम" बनाया। और रूस और ईरान अब इस "शून्य" को भरने की कोशिश कर रहे हैं। खैर, उत्तर कोरिया की "अप्रत्याशित सरकार" दक्षिण कोरिया के प्रति "जुझारू व्यवहार" का प्रदर्शन करना जारी रखती है। लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका ने बाद की रक्षा करने का वादा किया। वास्तव में, पत्रकार स्वीकार करता है, वाशिंगटन के पास अब नए युद्धों के लिए एक मजबूत भूख नहीं है। हालाँकि, संयुक्त राज्य के नेताओं के पास कोई विकल्प नहीं होगा यदि ऊपर दिए गए देश "बलपूर्वक पड़ोसी लोगों पर अपनी इच्छा थोपने" का प्रयास करेंगे। चाहे वह "विध्वंसक गतिविधि" या "प्रत्यक्ष आक्रमण" का एक रूप है, लेकिन अमेरिका को प्रतिक्रिया देनी होगीः अन्यथा, हमलावरों द्वारा जीत "अमेरिका के प्रतिबंध के लिए वैश्विक आदेश को काफी बदल देगा। " ज़रा सोचिए, प्रेक्षक जारी है, कैसे रूसी सेना "यूरोप के बहुत दिल" में जा रही है! या कल्पना कीजिए कि ईरान ने मध्य पूर्व में तेल के प्रवाह को नियंत्रित करना शुरू किया। आप सोच सकते हैं कि उत्तर कोरियाई दक्षिण पर कैसे हमला कर रहे हैं। अमेरिकी सेना में रणनीतिक योजना के लिए जिम्मेदार रैंक ऐसी काल्पनिक स्थितियों के बारे में चिंतित हैं। वे चिंतित हैं क्योंकि सैनिकों को इनमें से किसी भी परिदृश्य के लिए ठीक से तैयार नहीं किया गया है। और इससे भी अधिक वे परिदृश्यों के एक जटिल के लिए तैयार नहीं हैंः एक ही समय में कई सैन्य संघर्ष। Сегодня Вашингтон стремится в большей степени рассчитывать на свои военно-воздушные и морские силы для обеспечения региональной безопасности. А вот инвестиции в новые технологии для сухопутных войск падают. Весь ежегодный бюджет армии, затрачиваемый на разработку и производство нового оборудования, от танков до вертолётов, от ракет до пушек, составляет всего два дня федеральных расходов! Такой уровень расходов автор статьи называет «почти невероятно низким». सेना हर साल बिक्री पर सामान्य मोटर्स की तुलना में प्रति वर्ष पहिएदार और ट्रैक किए गए वाहनों की खरीद पर कम खर्च करती है। हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए $ 3,6 बिलियन की राशि के लिए बजट अनुरोध मुख्य रूप से रीगन युग की मशीनों के आधुनिकीकरण पर केंद्रित है। वाशिंगटन नए हेलीकॉप्टर खरीदने का जोखिम नहीं उठा सकता है। लेकिन गोला बारूद के लिए बजटः 1,5 बिलियन। $। यह उस राशि से अधिक नहीं है जो अमेरिकी हर साल आतिशबाजी पर खर्च करते हैं (लगभग $ 1 बिलियन)। इस प्रकार, लोरेन थॉम्पसन का निष्कर्ष है, जब वे कहते हैं कि सेना के बॉस अतिरंजना नहीं कर रहे हैं, तो कोई बड़ी आधुनिकीकरण पहल नहीं है - कम से कम अगले दशक तक। और यह एक बड़ी समस्या है। हां, वृद्ध युद्ध प्रणालियों को "पुनर्पूंजीकरण" करने की योजना है, हालांकि, अगर निकट भविष्य में एक प्रमुख संघर्ष "ड्रॉ" होता है, तो सेना को पहले इन कमियों को दूर करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। लेकिन जल्दी से आप उन्हें खत्म नहीं कर सकते। यहाँ कुछ अच्छे उदाहरण हैं। उच्च-परिशुद्धता ("स्मार्ट") गोला-बारूद के स्टॉक पहले से ही समाप्त हो चुके हैं, और खर्च के मौजूदा स्तर पर उन्हें बहाल नहीं किया जा सकता है। वार्षिक गोला-बारूद बजट को दोगुना करने से सेना को उन बजटीय "खतरों" से बचाने में मदद मिल सकती है जो आने वाले वर्षों में दिखाई दे सकते हैं। एक और प्राथमिकता, लेखक का मानना है, टैंकों के लिए तथाकथित सक्रिय सुरक्षा प्रणालियों को सुनिश्चित करना चाहिए, क्योंकि किसी भी, यहां तक कि अल्पकालिक, यूरोप या अन्य जगहों पर संघर्ष, वे सबसे आगे होंगे। सक्रिय रक्षा प्रणाली बख्तरबंद वाहनों के पूरक हैं और वायु सेनाओं को मजबूत करते हैं, जो अपने लक्ष्य को खोजने से पहले टैंक-रोधी गोला बारूद को रोककर टैंक की रक्षा करते हैं। समीक्षक अमेरिकी प्रौद्योगिकी के अन्य कमजोर बिंदुओं का भी हवाला देता है जिन्हें आधुनिक बनाने की आवश्यकता है, जिसके लिए वित्तीय निवेश की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, वह यूरोप में स्ट्राइकर्स में सुधार करना चाहता है और वारफेयर इंफॉर्मेशन नेटवर्क-टैक्टिकल कम्युनिकेशन सिस्टम की डिलीवरी में तेजी लाना चाहता है। वर्तमान में, आपूर्ति "जमे हुए" हैं। इस बीच, ये स्वचालित प्रणालियां सेना को "भविष्य के युद्धों में साइबर हमलों की चपेट में आने से निपटने" में मदद करेंगी। पत्रकार के अनुसार, सेना को "अपने ईडब्ल्यू कौशल को बहाल करना चाहिए और अपनी वायु रक्षा प्रणालियों को आधुनिक बनाना चाहिए। " आधुनिकीकरण के साथ समय खो गया था, और अब भी "विद्रोहियों" को अच्छी तरह से पता है कि जीपीएस संकेतों को कैसे जाम किया जाए और यूएवी की आंखों से छिपाया जाए। और अगर कोई भी विद्रोही ऐसा कर सकता है, तो कल्पना करें, ब्राउज़र लिखता है, जो परिणाम रूसी या ईरानी यहां हासिल करेंगे, अगर वे यूएसए के विरोधी बन जाते हैं! एक साधारण तथ्य यह है कि लॉरेन थॉम्पसन सोचता है, कि अमेरिकी सेना ने सैन्य विरोधियों को बिल्कुल नहीं देखा है जहां उन्हें 9 / 11 हमलों के बाद से इसकी आवश्यकता है। संभावित दुश्मन जो निकट भविष्य में अमेरिका का सामना कर सकते हैं, वे अपनी पूर्व छवि से बहुत अलग हैं। पत्रकार क्या सलाह देता है? उनकी राय में, व्हाइट हाउस को "अधिक पैसा" खर्च करना चाहिए, क्योंकि यह अब तक कांग्रेस को बाहर करने में कामयाब रहा है। हमें कुछ तकनीकी क्षेत्रों में "तेज निवेश" की आवश्यकता है जहां स्थिति आदर्श से बहुत दूर है। यही है, आपको डॉलर का निवेश करने की आवश्यकता है जहां प्रौद्योगिकी में सुधार की आवश्यकता है। सेना को बिना देरी किए सबसे अच्छे उपकरण और सर्वोत्तम उपकरण खरीदने के लिए अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता होती है। थॉम्पसन के अनुसार, यह न केवल "रूस, ईरान या उत्तर कोरिया के साथ अल्पकालिक युद्धों में हार से बचने के लिए" किया जाना चाहिए, बल्कि "आक्रामकता को रोकने के लिए" भी किया जाना चाहिए। इस मामले में, युद्ध "कम संभावना" बन जाएगा। विशेषज्ञ आश्वस्त हैं कि पेंटागन तर्कहीन रूप से नई तकनीकों के विकास पर भारी मात्रा में खर्च कर रहा है, और लागत "बिल्कुल शानदार परियोजनाओंः हाइपरसोनिक विमान, लेजर और विद्युत चुम्बकीय बंदूकें, उच्च-अदृश्यता विमान" पर खर्च की जाती है। लेकिन "आवश्यक व्यावहारिक जरूरतों के लिए - टैंक, तोपखाने का सुधार, सेवादारों के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण - पैसा तंग रहता है। " अलेक्जेंड्रोव के अनुसार, बजटीय असंतुलन का कारण नई युद्ध की आभासी युद्ध की आदत में निहित है। अब "यह पता चला है कि जब अमेरिका को एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करने की आवश्यकता होती है, तो सब कुछ इतना सरल नहीं होता हैः आप आसानी से गोलमाल कर सकते हैं। " विशेषज्ञ के अनुसार, "एक छोटी हार पर्याप्त है - उदाहरण के लिए, सीरिया में रूसी और अमेरिकी इकाइयों के बीच सैन्य संघर्ष के दौरान - और एक महान साम्राज्य की छवि उखड़ जाएगी, और संयुक्त राज्य अमेरिका तुरंत अपना विश्व प्रभाव खो देगा। " इसलिए, कुछ रूसी विशेषज्ञ संकेत दे रहे हैं कि संयुक्त राज्य की सैन्य छवि कुछ अल्पकालिक या आभासी है, कि यह पहले छोटे झड़प में धूल में उखड़ जाएगी, और कुछ भी वाशिंगटन के वैश्विक प्रभाव से नहीं बचेगा। विशेषज्ञों द्वारा इस तरह के बयान, निश्चित रूप से प्रासंगिक दर्शकों को प्रोत्साहित कर सकते हैं, लेकिन वे शायद ही वास्तविकता को दर्शाते हैं। अफगानिस्तान और इराक दोनों में, अमेरिकी सैनिकों ने किसी भी तरह से संघर्ष नहीं किया। उनके पास आया, और यूगोस्लाविया में यह मुश्किल हो गया। हालांकि, यह कहना कि अमेरिकी वैश्विक प्रभाव गायब हो गया है, अभी भी आवश्यक नहीं है। और निश्चित रूप से रूस से किसी प्रकार की "छोटी हार" के कारण उसके नुकसान के बारे में बात करना आवश्यक नहीं है। क्या यह हो सकता है कि अमेरिकी रूसियों से एक भी हार से नहीं बचेंगे? अमेरिकी धन के लिए "रक्षा" के रूप में, तब, जैसा कि लेखक मिनाएव ने रखा होगा, सब कुछ मुश्किल है। सबसे पहले, ओबामा ने 10 वर्षों के लिए डिज़ाइन किए गए एक रक्षा खर्च कटौती कार्यक्रम की घोषणा की और आंशिक रूप से लागू किया। दूसरे, यूएसए में चुनाव पूर्व अभियान है और उम्मीदवार ट्रम्प अरबों-खरबों में भाग लेने के लिए उत्सुक नहीं हैं। यह रिपब्लिकन या तो नाटो के अन्य देशों की मदद नहीं करना चाहता है, जिससे उन्हें जीडीपी में नकद खर्च को दो प्रतिशत तक बढ़ाने की मांग की जा रही है। तीसरा, वाशिंगटन में वे यह देखने में असफल नहीं हो सकते कि चारों ओर की दुनिया तेजी से बदल रही है, और सैन्य बल अब पश्चिमी विश्व व्यवस्था के संरक्षण में तत्व नहीं है, जैसा कि पिछली शताब्दी में था। प्रभाव के नए केंद्र दिखाई दिए हैं - बहुत चीन जिसके साथ अमेरिका युद्ध में नहीं जाएगा, भले ही उसका बजट कम से कम दो बार बढ़ाया जाए, एक ही समय में "राज्य ऋण की छत" को बढ़ाते हुए, और सेना को अंततः इंजीनियर गारिन के हाइपरसॉइड की तरह कुछ मिलेगा। संयुक्त राज्य अमेरिका को विश्व मंच पर खिलाड़ियों के साथ फिर से जुड़ना होगा, जो विस्तार के प्रयासों का गंभीरता से जवाब दे सकते हैं। पत्रकार लॉरेन थॉम्पसन या कोई और यह मान सकता है कि रूसी पूर्वी यूरोप को जब्त करने के लिए जाएंगे, लेकिन वे नहीं करेंगे। वास्तव में, कोई केवल यह कह सकता है कि अमेरिका अपनी आंखों में लिखत खो रहा है, जिसने ग्रह के विभिन्न क्षेत्रों में एक सुविधाजनक लीवर के रूप में काम किया है। एक शब्द में, कूटनीति अब तोपखाने की तुलना में अधिक बार बोलती है। यही कारण है कि ओबामा सीरिया में नहीं चढ़े।
इस विषय पर एक पत्रिका में लॉरेन थॉम्पसन ने बातचीत की। "फोर्ब्स". पर्यवेक्षक इंगित करता है कि अमेरिकी सेना को एक बड़े युद्ध की आशंका है, जो अगले पांच वर्षों में शुरू होने की संभावना है। मुसीबत यह है कि वाशिंगटन के पास इस युद्ध की तैयारी के लिए पर्याप्त धन भी नहीं है। पर्यवेक्षक का दावा है कि अमेरिकी कमांडरों को आसन्न युद्ध का एक प्राकृतिक डर है, उनके दिमाग डर से एकदम लकवाग्रस्त हैं। पेंटागन का कहना है कि अमेरिकी सेना पांच साल के लिए एक बड़े युद्ध में शामिल हो सकती है, और यह कुछ "विद्रोहियों" के साथ लड़ने के बारे में नहीं है - नहीं, यह एक बड़े पैमाने पर संघर्ष की संभावना है, और भविष्य के भविष्य में। युद्ध या तो पूर्वी यूरोप में रूस के साथ आ रहा है, या मध्य पूर्व में ईरान के साथ, या उत्तर कोरिया में। पूर्वोत्तर एशिया में संभावित शत्रुता। और शायद हर जगह एक ही समय पर। पेंटागन में उच्च रैंकिंग वाले अधिकारी अपने खुले निर्णयों में काफी सतर्क हैं, जो प्रेस के लिए अभिप्रेत हैं। श्री थॉम्पसन नोट करते हैं कि ये व्यक्ति "सार्वजनिक रूप से अमेरिकी कमजोरियों को उजागर नहीं करना चाहते हैं। " इसी समय, यह उनके लिए "स्पष्ट" प्रतीत होता है कि ओबामा प्रशासन, जिसने एक्सएनयूएमएक्स में "प्रशांत महासागर के लिए यू-टर्न" बनाया था, बाल्टिक सागर से फारस की खाड़ी तक फैला "भू-राजनीतिक वैक्यूम" बनाया। और रूस और ईरान अब इस "शून्य" को भरने की कोशिश कर रहे हैं। खैर, उत्तर कोरिया की "अप्रत्याशित सरकार" दक्षिण कोरिया के प्रति "जुझारू व्यवहार" का प्रदर्शन करना जारी रखती है। लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका ने बाद की रक्षा करने का वादा किया। वास्तव में, पत्रकार स्वीकार करता है, वाशिंगटन के पास अब नए युद्धों के लिए एक मजबूत भूख नहीं है। हालाँकि, संयुक्त राज्य के नेताओं के पास कोई विकल्प नहीं होगा यदि ऊपर दिए गए देश "बलपूर्वक पड़ोसी लोगों पर अपनी इच्छा थोपने" का प्रयास करेंगे। चाहे वह "विध्वंसक गतिविधि" या "प्रत्यक्ष आक्रमण" का एक रूप है, लेकिन अमेरिका को प्रतिक्रिया देनी होगीः अन्यथा, हमलावरों द्वारा जीत "अमेरिका के प्रतिबंध के लिए वैश्विक आदेश को काफी बदल देगा। " ज़रा सोचिए, प्रेक्षक जारी है, कैसे रूसी सेना "यूरोप के बहुत दिल" में जा रही है! या कल्पना कीजिए कि ईरान ने मध्य पूर्व में तेल के प्रवाह को नियंत्रित करना शुरू किया। आप सोच सकते हैं कि उत्तर कोरियाई दक्षिण पर कैसे हमला कर रहे हैं। अमेरिकी सेना में रणनीतिक योजना के लिए जिम्मेदार रैंक ऐसी काल्पनिक स्थितियों के बारे में चिंतित हैं। वे चिंतित हैं क्योंकि सैनिकों को इनमें से किसी भी परिदृश्य के लिए ठीक से तैयार नहीं किया गया है। और इससे भी अधिक वे परिदृश्यों के एक जटिल के लिए तैयार नहीं हैंः एक ही समय में कई सैन्य संघर्ष। Сегодня Вашингтон стремится в большей степени рассчитывать на свои военно-воздушные и морские силы для обеспечения региональной безопасности. А вот инвестиции в новые технологии для сухопутных войск падают. Весь ежегодный бюджет армии, затрачиваемый на разработку и производство нового оборудования, от танков до вертолётов, от ракет до пушек, составляет всего два дня федеральных расходов! Такой уровень расходов автор статьи называет «почти невероятно низким». सेना हर साल बिक्री पर सामान्य मोटर्स की तुलना में प्रति वर्ष पहिएदार और ट्रैक किए गए वाहनों की खरीद पर कम खर्च करती है। हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए तीन डॉलर,छः बिलियन की राशि के लिए बजट अनुरोध मुख्य रूप से रीगन युग की मशीनों के आधुनिकीकरण पर केंद्रित है। वाशिंगटन नए हेलीकॉप्टर खरीदने का जोखिम नहीं उठा सकता है। लेकिन गोला बारूद के लिए बजटः एक,पाँच बिलियन। $। यह उस राशि से अधिक नहीं है जो अमेरिकी हर साल आतिशबाजी पर खर्च करते हैं । इस प्रकार, लोरेन थॉम्पसन का निष्कर्ष है, जब वे कहते हैं कि सेना के बॉस अतिरंजना नहीं कर रहे हैं, तो कोई बड़ी आधुनिकीकरण पहल नहीं है - कम से कम अगले दशक तक। और यह एक बड़ी समस्या है। हां, वृद्ध युद्ध प्रणालियों को "पुनर्पूंजीकरण" करने की योजना है, हालांकि, अगर निकट भविष्य में एक प्रमुख संघर्ष "ड्रॉ" होता है, तो सेना को पहले इन कमियों को दूर करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। लेकिन जल्दी से आप उन्हें खत्म नहीं कर सकते। यहाँ कुछ अच्छे उदाहरण हैं। उच्च-परिशुद्धता गोला-बारूद के स्टॉक पहले से ही समाप्त हो चुके हैं, और खर्च के मौजूदा स्तर पर उन्हें बहाल नहीं किया जा सकता है। वार्षिक गोला-बारूद बजट को दोगुना करने से सेना को उन बजटीय "खतरों" से बचाने में मदद मिल सकती है जो आने वाले वर्षों में दिखाई दे सकते हैं। एक और प्राथमिकता, लेखक का मानना है, टैंकों के लिए तथाकथित सक्रिय सुरक्षा प्रणालियों को सुनिश्चित करना चाहिए, क्योंकि किसी भी, यहां तक कि अल्पकालिक, यूरोप या अन्य जगहों पर संघर्ष, वे सबसे आगे होंगे। सक्रिय रक्षा प्रणाली बख्तरबंद वाहनों के पूरक हैं और वायु सेनाओं को मजबूत करते हैं, जो अपने लक्ष्य को खोजने से पहले टैंक-रोधी गोला बारूद को रोककर टैंक की रक्षा करते हैं। समीक्षक अमेरिकी प्रौद्योगिकी के अन्य कमजोर बिंदुओं का भी हवाला देता है जिन्हें आधुनिक बनाने की आवश्यकता है, जिसके लिए वित्तीय निवेश की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, वह यूरोप में स्ट्राइकर्स में सुधार करना चाहता है और वारफेयर इंफॉर्मेशन नेटवर्क-टैक्टिकल कम्युनिकेशन सिस्टम की डिलीवरी में तेजी लाना चाहता है। वर्तमान में, आपूर्ति "जमे हुए" हैं। इस बीच, ये स्वचालित प्रणालियां सेना को "भविष्य के युद्धों में साइबर हमलों की चपेट में आने से निपटने" में मदद करेंगी। पत्रकार के अनुसार, सेना को "अपने ईडब्ल्यू कौशल को बहाल करना चाहिए और अपनी वायु रक्षा प्रणालियों को आधुनिक बनाना चाहिए। " आधुनिकीकरण के साथ समय खो गया था, और अब भी "विद्रोहियों" को अच्छी तरह से पता है कि जीपीएस संकेतों को कैसे जाम किया जाए और यूएवी की आंखों से छिपाया जाए। और अगर कोई भी विद्रोही ऐसा कर सकता है, तो कल्पना करें, ब्राउज़र लिखता है, जो परिणाम रूसी या ईरानी यहां हासिल करेंगे, अगर वे यूएसए के विरोधी बन जाते हैं! एक साधारण तथ्य यह है कि लॉरेन थॉम्पसन सोचता है, कि अमेरिकी सेना ने सैन्य विरोधियों को बिल्कुल नहीं देखा है जहां उन्हें नौ / ग्यारह हमलों के बाद से इसकी आवश्यकता है। संभावित दुश्मन जो निकट भविष्य में अमेरिका का सामना कर सकते हैं, वे अपनी पूर्व छवि से बहुत अलग हैं। पत्रकार क्या सलाह देता है? उनकी राय में, व्हाइट हाउस को "अधिक पैसा" खर्च करना चाहिए, क्योंकि यह अब तक कांग्रेस को बाहर करने में कामयाब रहा है। हमें कुछ तकनीकी क्षेत्रों में "तेज निवेश" की आवश्यकता है जहां स्थिति आदर्श से बहुत दूर है। यही है, आपको डॉलर का निवेश करने की आवश्यकता है जहां प्रौद्योगिकी में सुधार की आवश्यकता है। सेना को बिना देरी किए सबसे अच्छे उपकरण और सर्वोत्तम उपकरण खरीदने के लिए अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता होती है। थॉम्पसन के अनुसार, यह न केवल "रूस, ईरान या उत्तर कोरिया के साथ अल्पकालिक युद्धों में हार से बचने के लिए" किया जाना चाहिए, बल्कि "आक्रामकता को रोकने के लिए" भी किया जाना चाहिए। इस मामले में, युद्ध "कम संभावना" बन जाएगा। विशेषज्ञ आश्वस्त हैं कि पेंटागन तर्कहीन रूप से नई तकनीकों के विकास पर भारी मात्रा में खर्च कर रहा है, और लागत "बिल्कुल शानदार परियोजनाओंः हाइपरसोनिक विमान, लेजर और विद्युत चुम्बकीय बंदूकें, उच्च-अदृश्यता विमान" पर खर्च की जाती है। लेकिन "आवश्यक व्यावहारिक जरूरतों के लिए - टैंक, तोपखाने का सुधार, सेवादारों के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण - पैसा तंग रहता है। " अलेक्जेंड्रोव के अनुसार, बजटीय असंतुलन का कारण नई युद्ध की आभासी युद्ध की आदत में निहित है। अब "यह पता चला है कि जब अमेरिका को एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करने की आवश्यकता होती है, तो सब कुछ इतना सरल नहीं होता हैः आप आसानी से गोलमाल कर सकते हैं। " विशेषज्ञ के अनुसार, "एक छोटी हार पर्याप्त है - उदाहरण के लिए, सीरिया में रूसी और अमेरिकी इकाइयों के बीच सैन्य संघर्ष के दौरान - और एक महान साम्राज्य की छवि उखड़ जाएगी, और संयुक्त राज्य अमेरिका तुरंत अपना विश्व प्रभाव खो देगा। " इसलिए, कुछ रूसी विशेषज्ञ संकेत दे रहे हैं कि संयुक्त राज्य की सैन्य छवि कुछ अल्पकालिक या आभासी है, कि यह पहले छोटे झड़प में धूल में उखड़ जाएगी, और कुछ भी वाशिंगटन के वैश्विक प्रभाव से नहीं बचेगा। विशेषज्ञों द्वारा इस तरह के बयान, निश्चित रूप से प्रासंगिक दर्शकों को प्रोत्साहित कर सकते हैं, लेकिन वे शायद ही वास्तविकता को दर्शाते हैं। अफगानिस्तान और इराक दोनों में, अमेरिकी सैनिकों ने किसी भी तरह से संघर्ष नहीं किया। उनके पास आया, और यूगोस्लाविया में यह मुश्किल हो गया। हालांकि, यह कहना कि अमेरिकी वैश्विक प्रभाव गायब हो गया है, अभी भी आवश्यक नहीं है। और निश्चित रूप से रूस से किसी प्रकार की "छोटी हार" के कारण उसके नुकसान के बारे में बात करना आवश्यक नहीं है। क्या यह हो सकता है कि अमेरिकी रूसियों से एक भी हार से नहीं बचेंगे? अमेरिकी धन के लिए "रक्षा" के रूप में, तब, जैसा कि लेखक मिनाएव ने रखा होगा, सब कुछ मुश्किल है। सबसे पहले, ओबामा ने दस वर्षों के लिए डिज़ाइन किए गए एक रक्षा खर्च कटौती कार्यक्रम की घोषणा की और आंशिक रूप से लागू किया। दूसरे, यूएसए में चुनाव पूर्व अभियान है और उम्मीदवार ट्रम्प अरबों-खरबों में भाग लेने के लिए उत्सुक नहीं हैं। यह रिपब्लिकन या तो नाटो के अन्य देशों की मदद नहीं करना चाहता है, जिससे उन्हें जीडीपी में नकद खर्च को दो प्रतिशत तक बढ़ाने की मांग की जा रही है। तीसरा, वाशिंगटन में वे यह देखने में असफल नहीं हो सकते कि चारों ओर की दुनिया तेजी से बदल रही है, और सैन्य बल अब पश्चिमी विश्व व्यवस्था के संरक्षण में तत्व नहीं है, जैसा कि पिछली शताब्दी में था। प्रभाव के नए केंद्र दिखाई दिए हैं - बहुत चीन जिसके साथ अमेरिका युद्ध में नहीं जाएगा, भले ही उसका बजट कम से कम दो बार बढ़ाया जाए, एक ही समय में "राज्य ऋण की छत" को बढ़ाते हुए, और सेना को अंततः इंजीनियर गारिन के हाइपरसॉइड की तरह कुछ मिलेगा। संयुक्त राज्य अमेरिका को विश्व मंच पर खिलाड़ियों के साथ फिर से जुड़ना होगा, जो विस्तार के प्रयासों का गंभीरता से जवाब दे सकते हैं। पत्रकार लॉरेन थॉम्पसन या कोई और यह मान सकता है कि रूसी पूर्वी यूरोप को जब्त करने के लिए जाएंगे, लेकिन वे नहीं करेंगे। वास्तव में, कोई केवल यह कह सकता है कि अमेरिका अपनी आंखों में लिखत खो रहा है, जिसने ग्रह के विभिन्न क्षेत्रों में एक सुविधाजनक लीवर के रूप में काम किया है। एक शब्द में, कूटनीति अब तोपखाने की तुलना में अधिक बार बोलती है। यही कारण है कि ओबामा सीरिया में नहीं चढ़े।
ने भारत के सम्बन्ध मे अपने एक विचार पूर्ण निबध में "... आनेवाले युग में भारत विश्व राजनीति का बनेगा। अधिक स्पष्ट शब्दों में इसका अर्थ यह है कि यदि भारत ब्रिटिशकॉमनवैल्य से अपना सम्पर्क बनाये रखेगा और दूसरी ओर कॉमनवैल्थ भी भारत को अपने संघटन में समुचित पद प्रदान करेगा तो विश्व शांति और मानव समाज के अभ्युदय का मार्ग अत्यधिक प्रशस्त हो जायेगा । यदि भारत और दूसरे ब्रिटिश उपनिवेशो के बीच समानता के आधार पर सम्बन्ध स्थापित करने का प्रयत्न विफल रहा, तो उसका परिणाम न केवल कॉमनवेल्थ पर प्रत्युत समग्र मानव-समाज पर पड़ेगा। अस्तर्जातीय संघर्ष के लिए एक विशाल रंगमंच तैयार होजायेगा ।"९ प्रोफेसर ज़िमर्न के कथन से यह स्पष्ट होजाता है कि अन्तर्राष्ट्रीय समाज में भारत का स्थान अद्वितीय है। परन्तु भारत के पराधीन देश होने से मानव-समाज की उन्नति मे वडी अडचन होरही है। राष्ट्रसघ मे या विश्व की राजनीति मे अधीनस्थ राज्यो का कोई स्थान नही है । वैसे भारतवर्ष राष्ट्रसघ के जन्म काल से ही उसका मौलिक सदस्य रहा है, परन्तु उसकी सदस्यता के कारण उसे कोई विशेष लाभ नही हुआ और न विश्व शान्ति की समस्या के समाधान में ही कोई योग मिला है । भारत का राष्ट्रीय लोकमत प्रारम्भ से ही राष्ट्रसघ की सदस्यता का विरोधी रहा है। यह इसलिए नही कि भारत राष्ट्रसघ के आदर्शों में विश्वास नही करता, वल्कि इसका कारण यह है कि वर्तमान परिस्थिति मे, जबकि राष्ट्रसघ यूरोप के महान् राष्ट्रो के कूटनीतिजों का एक गुप्त मण्डल बन गया है, भारत का राष्ट्रसघ से सम्बद्ध रहना किसीके लिए हितकर नही हो सकता । यो प्रतिवर्ष सितम्बर मात में भारत की ओर से राष्ट्रसघ की असे म्वली के अधिवेशन में सम्मिलित होने के लिए प्रतिनिधि मण्डल जेनेवा को जाता है, परन्तु यह प्रतिनिधि मण्डल सच्चे अर्थो मे भारत १ फ्रेडा ओर बेडी 'इण्डिया एनेलाइज्ड' (१), पृ० १५ का नही होता, क्योंकि इन प्रतिनिधियों की नियुक्ति या निर्वाचन में भारतीय नागरिको का हाथ नहीं है और न भारतीय व्यवस्थापिका सभा ही इन्हें चुनकर भेजती है। इन प्रतिनिधियों का चुनाव भारत- मंत्री के हाथों में है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रसघ की असेम्बली के अधिवेशन में भारत का प्रतिनिधि मण्डल स्वतन्त्रतापूर्वक अपने हितो की रक्षा के लिए कोई कार्य नहीं कर सकता, वह ब्रिटिग-प्रतिनिधिमण्डल के सकेत पर ही अपने विचार प्रकट कर सकता है। सन १९३२ में राष्ट्रसघ की आय ( जो राष्ट्रो के चन्दे से प्राप्त हुई थी ) १३ लाख ४७ हजार ५२० पौड थी । भारत ने प्रतिवर्प ७५ हजार ४९९ पौड अर्थात् १० लाख ५ हजार ८० रु० के हिसाव से अवतक १९ वर्षो मे १ करोड ९१ लाख ६ हजार ५२० ( अर्थात् २ करोड़ के लगभग ) रुपये राष्ट्रसघ की भेट चढाये है। भारत की गरीबी तथा राष्ट्रसघ मे उसकी स्थिति को देखते हुए यह घन-राशि बहुत अधिक है। राष्ट्रसघ के लिए सबसे अधिक घन इग्लंड देता है। उसके बाद फास । फ्रास के बाद जापान का और चौथा नम्बर भारत का है। जापान ने राष्ट्रसघ छोड दिया है। इसलिए सबसे अधिक चदा देनेवालो मे अब भारत का तीसरा स्थान है। इतना धन व्यय करने पर भी भारत का राष्ट्रसंघ की कौसिल मे कोई वास्तविक प्रतिनिधित्व नहीं है । कौंसिल मे केवल वडे-वडे राष्ट्री का ही प्रभुत्व है। सितम्बर १९३८ के असेम्बली- अधिवेशन मे मुसलमानों के नेता और वार्मिक प्रमुख श्री आगाखां को राष्ट्रसघ की असेम्बली का प्रधान निर्वाचित करके इंग्लैण्ड ने अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया है। पर अगक्त, दुर्बल और अपने ध्येय से पतित राष्ट्रसघ की अध्यक्षता भारतीय को प्रदान कर इंग्लैण्ड ने कोई प्रशसनीय कार्य नही किया। इस समय सारे संसार को यह जान हो गया है कि राष्ट्रसघ सघटिन पाखण्ड के सिवा और कुछ नही है । भारत का अंगभंग इस समय जहाँ भारत समार के समस्त देशो के साथ सहयोग और मित्रता का सम्बन्ध बनाने मे प्रयत्नशील है वहाँ ब्रिटिश शासन की नीति इसके सर्वथा विपरीत चली आ रही है और दूसरे देशो से भारत का सम्बन्ध दृढ करना तो दूर उसके अपने अगों- ब्रह्मा, लका आदिको ही उससे विच्छिन्न किया जारहा है। १ अप्रैल १९३७ तक ब्रह्मा भारत का ही एक प्रात था। परन्तु इसके बाद से ब्रह्मा को भारत से पृथक् करके एक स्वतन्त्र किंतु ब्रिटिश सरकार के अधीन देश बना दिया गया है। यही नहीं, ब्रह्मा के लिए अलग शासनविधान भी बनाया गया है जिसके अनुसार उसका शासन होरहा है। ब्रह्मा मे १० लाख भारतीय निवास करते है । वहाँके व्यवसाय और कृषि मे १० करोड रुपये की भारतीय पूंजी लगी हुई है । वहाँ मद्रास के बहुसख्यक महाजन, बिहार-बगाल के मजदूर और भारतीय सरकारी नौकर तथा वकील आदि है । अब इनमे और ब्रह्मा के लोगो मे प्रतिस्पर्द्धा बनी रहने लगी । इस प्रतिस्पर्द्धा और भारतीयो के प्रति ब्रह्मी लोगो की घृणा का दुष्परिणाम यह हुआ है कि भारतीय ब्रह्मा के चावल, लकडी और तेल का बहिष्कार कर रहे है । लका मे भी भारतीय मजदूरो की संख्या ६ लाख है । वहाँ भारतीय पूंजी और भारतीय शिक्षितो का अभाव है। भारतीय मजदूरों के साथ भेदभाव किया जाता है। स्थानीय संस्थाओं के चुनावो मे ग्राम्य मताधिकार के सम्बन्ध में भी भारतीयो के साथ भेदभाव से व्यवहार किया जाता है। इसका भी दुष्परिणाम यह हुआ कि भारतवासी लका के नारियल तथा दूसरी चीजो का बहिष्कार कर रहे है। प्रवासी भारतीय प्रवासी भारतीयों की समस्या के विशेषज्ञ सन्यासी ने अपने एक लेख में प्रवासियों की लिखा है " इस समय संसार में भिन्न-भिन्न देशो और उपनिवेशो में प्रवासी भारतीयो को जन-संख्या लगभग २५ लाख है। जहाँ-जहाँ वे बसे हुए स्वामी भवानीदयाल स्थिति के सम्बन्ध मे
ने भारत के सम्बन्ध मे अपने एक विचार पूर्ण निबध में "... आनेवाले युग में भारत विश्व राजनीति का बनेगा। अधिक स्पष्ट शब्दों में इसका अर्थ यह है कि यदि भारत ब्रिटिशकॉमनवैल्य से अपना सम्पर्क बनाये रखेगा और दूसरी ओर कॉमनवैल्थ भी भारत को अपने संघटन में समुचित पद प्रदान करेगा तो विश्व शांति और मानव समाज के अभ्युदय का मार्ग अत्यधिक प्रशस्त हो जायेगा । यदि भारत और दूसरे ब्रिटिश उपनिवेशो के बीच समानता के आधार पर सम्बन्ध स्थापित करने का प्रयत्न विफल रहा, तो उसका परिणाम न केवल कॉमनवेल्थ पर प्रत्युत समग्र मानव-समाज पर पड़ेगा। अस्तर्जातीय संघर्ष के लिए एक विशाल रंगमंच तैयार होजायेगा ।"नौ प्रोफेसर ज़िमर्न के कथन से यह स्पष्ट होजाता है कि अन्तर्राष्ट्रीय समाज में भारत का स्थान अद्वितीय है। परन्तु भारत के पराधीन देश होने से मानव-समाज की उन्नति मे वडी अडचन होरही है। राष्ट्रसघ मे या विश्व की राजनीति मे अधीनस्थ राज्यो का कोई स्थान नही है । वैसे भारतवर्ष राष्ट्रसघ के जन्म काल से ही उसका मौलिक सदस्य रहा है, परन्तु उसकी सदस्यता के कारण उसे कोई विशेष लाभ नही हुआ और न विश्व शान्ति की समस्या के समाधान में ही कोई योग मिला है । भारत का राष्ट्रीय लोकमत प्रारम्भ से ही राष्ट्रसघ की सदस्यता का विरोधी रहा है। यह इसलिए नही कि भारत राष्ट्रसघ के आदर्शों में विश्वास नही करता, वल्कि इसका कारण यह है कि वर्तमान परिस्थिति मे, जबकि राष्ट्रसघ यूरोप के महान् राष्ट्रो के कूटनीतिजों का एक गुप्त मण्डल बन गया है, भारत का राष्ट्रसघ से सम्बद्ध रहना किसीके लिए हितकर नही हो सकता । यो प्रतिवर्ष सितम्बर मात में भारत की ओर से राष्ट्रसघ की असे म्वली के अधिवेशन में सम्मिलित होने के लिए प्रतिनिधि मण्डल जेनेवा को जाता है, परन्तु यह प्रतिनिधि मण्डल सच्चे अर्थो मे भारत एक फ्रेडा ओर बेडी 'इण्डिया एनेलाइज्ड' , पृशून्य पंद्रह का नही होता, क्योंकि इन प्रतिनिधियों की नियुक्ति या निर्वाचन में भारतीय नागरिको का हाथ नहीं है और न भारतीय व्यवस्थापिका सभा ही इन्हें चुनकर भेजती है। इन प्रतिनिधियों का चुनाव भारत- मंत्री के हाथों में है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रसघ की असेम्बली के अधिवेशन में भारत का प्रतिनिधि मण्डल स्वतन्त्रतापूर्वक अपने हितो की रक्षा के लिए कोई कार्य नहीं कर सकता, वह ब्रिटिग-प्रतिनिधिमण्डल के सकेत पर ही अपने विचार प्रकट कर सकता है। सन एक हज़ार नौ सौ बत्तीस में राष्ट्रसघ की आय तेरह लाख सैंतालीस हजार पाँच सौ बीस पौड थी । भारत ने प्रतिवर्प पचहत्तर हजार चार सौ निन्यानवे पौड अर्थात् दस लाख पाँच हजार अस्सी रुपयाशून्य के हिसाव से अवतक उन्नीस वर्षो मे एक करोड इक्यानवे लाख छः हजार पाँच सौ बीस रुपये राष्ट्रसघ की भेट चढाये है। भारत की गरीबी तथा राष्ट्रसघ मे उसकी स्थिति को देखते हुए यह घन-राशि बहुत अधिक है। राष्ट्रसघ के लिए सबसे अधिक घन इग्लंड देता है। उसके बाद फास । फ्रास के बाद जापान का और चौथा नम्बर भारत का है। जापान ने राष्ट्रसघ छोड दिया है। इसलिए सबसे अधिक चदा देनेवालो मे अब भारत का तीसरा स्थान है। इतना धन व्यय करने पर भी भारत का राष्ट्रसंघ की कौसिल मे कोई वास्तविक प्रतिनिधित्व नहीं है । कौंसिल मे केवल वडे-वडे राष्ट्री का ही प्रभुत्व है। सितम्बर एक हज़ार नौ सौ अड़तीस के असेम्बली- अधिवेशन मे मुसलमानों के नेता और वार्मिक प्रमुख श्री आगाखां को राष्ट्रसघ की असेम्बली का प्रधान निर्वाचित करके इंग्लैण्ड ने अपनी दूरदर्शिता का परिचय दिया है। पर अगक्त, दुर्बल और अपने ध्येय से पतित राष्ट्रसघ की अध्यक्षता भारतीय को प्रदान कर इंग्लैण्ड ने कोई प्रशसनीय कार्य नही किया। इस समय सारे संसार को यह जान हो गया है कि राष्ट्रसघ सघटिन पाखण्ड के सिवा और कुछ नही है । भारत का अंगभंग इस समय जहाँ भारत समार के समस्त देशो के साथ सहयोग और मित्रता का सम्बन्ध बनाने मे प्रयत्नशील है वहाँ ब्रिटिश शासन की नीति इसके सर्वथा विपरीत चली आ रही है और दूसरे देशो से भारत का सम्बन्ध दृढ करना तो दूर उसके अपने अगों- ब्रह्मा, लका आदिको ही उससे विच्छिन्न किया जारहा है। एक अप्रैल एक हज़ार नौ सौ सैंतीस तक ब्रह्मा भारत का ही एक प्रात था। परन्तु इसके बाद से ब्रह्मा को भारत से पृथक् करके एक स्वतन्त्र किंतु ब्रिटिश सरकार के अधीन देश बना दिया गया है। यही नहीं, ब्रह्मा के लिए अलग शासनविधान भी बनाया गया है जिसके अनुसार उसका शासन होरहा है। ब्रह्मा मे दस लाख भारतीय निवास करते है । वहाँके व्यवसाय और कृषि मे दस करोड रुपये की भारतीय पूंजी लगी हुई है । वहाँ मद्रास के बहुसख्यक महाजन, बिहार-बगाल के मजदूर और भारतीय सरकारी नौकर तथा वकील आदि है । अब इनमे और ब्रह्मा के लोगो मे प्रतिस्पर्द्धा बनी रहने लगी । इस प्रतिस्पर्द्धा और भारतीयो के प्रति ब्रह्मी लोगो की घृणा का दुष्परिणाम यह हुआ है कि भारतीय ब्रह्मा के चावल, लकडी और तेल का बहिष्कार कर रहे है । लका मे भी भारतीय मजदूरो की संख्या छः लाख है । वहाँ भारतीय पूंजी और भारतीय शिक्षितो का अभाव है। भारतीय मजदूरों के साथ भेदभाव किया जाता है। स्थानीय संस्थाओं के चुनावो मे ग्राम्य मताधिकार के सम्बन्ध में भी भारतीयो के साथ भेदभाव से व्यवहार किया जाता है। इसका भी दुष्परिणाम यह हुआ कि भारतवासी लका के नारियल तथा दूसरी चीजो का बहिष्कार कर रहे है। प्रवासी भारतीय प्रवासी भारतीयों की समस्या के विशेषज्ञ सन्यासी ने अपने एक लेख में प्रवासियों की लिखा है " इस समय संसार में भिन्न-भिन्न देशो और उपनिवेशो में प्रवासी भारतीयो को जन-संख्या लगभग पच्चीस लाख है। जहाँ-जहाँ वे बसे हुए स्वामी भवानीदयाल स्थिति के सम्बन्ध मे
यह अच्छी खबर है कि पिछले 24 घंटे में कोरोना की स्पीड को ब्रेक लगे हैं। भारत में 2. 56 लाख नए केस मिले हैं। जबकि इससे पहले 2. 73 लाख केस सामने आए थे। 5 अप्रैल से कोरोना संक्रमण की रफ्तार लगातार बढ़ रही थी। बीच में सिर्फ 12 अप्रैल को तुलनात्मक रूप से 9000 केस कम आए थे। माना जा रहा है कि संक्रमण रोकने विभिन्न राज्यों की सख्ती का असर दिख सकता है। नई दिल्ली. यह अच्छी खबर है कि पिछले 24 घंटे में कोरोना मामलों में 16 हजार से अधिक की कमी आई है। एक दिन में भारत में 2. 57 लाख नए केस मिले हैं। जबकि इससे एक दिन पहले 18 अप्रैल को 2,73,802 नए केस सामने आए थे। भारत में 5 अप्रैल के बाद जिस स्पीड से कोरोना संक्रमण फैल रहा, उसने सारे देश को चिंता में डाल दिया था। लेकिन संक्रमण रोकने विभिन्न राज्यों की सख्ती-लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू का असर दिखाई देने लगा है। अगर कोरोना संक्रमण के डर से लोग घर में बैठे, बेवजह बाहर नहीं निकले, तो यह डर अच्छा है। हालांकि कोरोना का यह ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता है, लेकिन लॉकडाउन और कोरोना गाइडलाइन का पालन करने से संक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी। सोमवार को केंद्र सरकार ने 18+ को वैक्सीनेट करने का बड़ा ऐलान किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी घोषणा की। इसके तहत सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेटरी से जारी होने वाले 50 प्रतिशत डोज केंद्र सरकार को मिलेंगे। केंद्र सरकार इन्हें केंद्र शासित प्रदेशों और आवश्यकतानुसार विभिन्न राज्यों को बांटेगा। इसके साथ ही 1 मई, 2021 से पहले ड्रग्स लैबोरेटरी को डोज की कीमत सार्वजनिक करनी होंगी। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के अनुसार, भारत में 19 अप्रैल तक कोरोना वायरस के लिए कुल 26,94,14,035 सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं, जिनमें से 15,19,486 सैंपल कल टेस्ट किए गए। वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ने से संक्रमण को रोकना प्रभावी होगा। देश में कुल 12,71,29,113 लोगों को कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई गई है। टॉप 10 संक्रमित राज(24 घंटे में) कोरोना की दूसरी लहर के तेजी से फैलने की वजह डबल म्यूटेंट वाला वैरिएंट माना जा रहा है। महाराष्ट्र में 61 प्रतिशत सैम्पल की जीनोम सीक्वेंसिंग में इसकी पुष्टि हुई थी। यह डबल म्यूटेंट वायरस महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्यप्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़, झारखंड को संक्रमित करता हुआ देश के करीब 10 राज्यों में पहुंच चुका है। इसी वजह से यहां अधिक केस आ रहे हैं। जानीमानी वैक्सीन साइंटिस्ट और वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में माइक्रोबायोलॉजी प्रोफेसर डॉ. गगनदीप कंग बताती हैं कि जब वायरस एक शरीर से दूसरे शरीर में एंटर होता है, तो उसका स्वरूप बदल जाता है। इसे ही वैरिएंट्स कहते हैं। (सोर्स-covid19india. org) भारत में कोरोन से अब तक 1,80,550 मौतें हो चुकी हैं। पिछले 24 घंटे में 1,757 लोगों की मौतें हुईं। देश में अब तक 1,53,14,714 केस आ चुके हैं। इनमें से 1,31,03,220 रिकवर हो चुके हैं। पिछले 24 घंटे में ही 1,54,234 लोग रिकवर हुए। इस समय 20,24,629 एक्टिव केस हैं। सरकार के सर्वे के मुताबिक, भारत में मौत का आंकड़ा 0. 08 प्रतिशत है। जबकि अमेरिका में यह 0. 06 है। यानी भारत से 8 गुना अधिक। इसके पीछे भारत में युवा आबादी अधिक है, जिससे मौत का आंकड़ा अधिक नहीं बढ़ेगा।
यह अच्छी खबर है कि पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना की स्पीड को ब्रेक लगे हैं। भारत में दो. छप्पन लाख नए केस मिले हैं। जबकि इससे पहले दो. तिहत्तर लाख केस सामने आए थे। पाँच अप्रैल से कोरोना संक्रमण की रफ्तार लगातार बढ़ रही थी। बीच में सिर्फ बारह अप्रैल को तुलनात्मक रूप से नौ हज़ार केस कम आए थे। माना जा रहा है कि संक्रमण रोकने विभिन्न राज्यों की सख्ती का असर दिख सकता है। नई दिल्ली. यह अच्छी खबर है कि पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना मामलों में सोलह हजार से अधिक की कमी आई है। एक दिन में भारत में दो. सत्तावन लाख नए केस मिले हैं। जबकि इससे एक दिन पहले अट्ठारह अप्रैल को दो,तिहत्तर,आठ सौ दो नए केस सामने आए थे। भारत में पाँच अप्रैल के बाद जिस स्पीड से कोरोना संक्रमण फैल रहा, उसने सारे देश को चिंता में डाल दिया था। लेकिन संक्रमण रोकने विभिन्न राज्यों की सख्ती-लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू का असर दिखाई देने लगा है। अगर कोरोना संक्रमण के डर से लोग घर में बैठे, बेवजह बाहर नहीं निकले, तो यह डर अच्छा है। हालांकि कोरोना का यह ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता है, लेकिन लॉकडाउन और कोरोना गाइडलाइन का पालन करने से संक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी। सोमवार को केंद्र सरकार ने अट्ठारह+ को वैक्सीनेट करने का बड़ा ऐलान किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी घोषणा की। इसके तहत सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेटरी से जारी होने वाले पचास प्रतिशत डोज केंद्र सरकार को मिलेंगे। केंद्र सरकार इन्हें केंद्र शासित प्रदेशों और आवश्यकतानुसार विभिन्न राज्यों को बांटेगा। इसके साथ ही एक मई, दो हज़ार इक्कीस से पहले ड्रग्स लैबोरेटरी को डोज की कीमत सार्वजनिक करनी होंगी। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के अनुसार, भारत में उन्नीस अप्रैल तक कोरोना वायरस के लिए कुल छब्बीस,चौरानवे,चौदह,पैंतीस सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं, जिनमें से पंद्रह,उन्नीस,चार सौ छियासी सैंपल कल टेस्ट किए गए। वैक्सीनेशन की रफ्तार बढ़ने से संक्रमण को रोकना प्रभावी होगा। देश में कुल बारह,इकहत्तर,उनतीस,एक सौ तेरह लोगों को कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई गई है। टॉप दस संक्रमित राज कोरोना की दूसरी लहर के तेजी से फैलने की वजह डबल म्यूटेंट वाला वैरिएंट माना जा रहा है। महाराष्ट्र में इकसठ प्रतिशत सैम्पल की जीनोम सीक्वेंसिंग में इसकी पुष्टि हुई थी। यह डबल म्यूटेंट वायरस महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्यप्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़, झारखंड को संक्रमित करता हुआ देश के करीब दस राज्यों में पहुंच चुका है। इसी वजह से यहां अधिक केस आ रहे हैं। जानीमानी वैक्सीन साइंटिस्ट और वेल्लोर के क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज में माइक्रोबायोलॉजी प्रोफेसर डॉ. गगनदीप कंग बताती हैं कि जब वायरस एक शरीर से दूसरे शरीर में एंटर होता है, तो उसका स्वरूप बदल जाता है। इसे ही वैरिएंट्स कहते हैं। भारत में कोरोन से अब तक एक,अस्सी,पाँच सौ पचास मौतें हो चुकी हैं। पिछले चौबीस घंटाटे में एक,सात सौ सत्तावन लोगों की मौतें हुईं। देश में अब तक एक,तिरेपन,चौदह,सात सौ चौदह केस आ चुके हैं। इनमें से एक,इकतीस,तीन,दो सौ बीस रिकवर हो चुके हैं। पिछले चौबीस घंटाटे में ही एक,चौवन,दो सौ चौंतीस लोग रिकवर हुए। इस समय बीस,चौबीस,छः सौ उनतीस एक्टिव केस हैं। सरकार के सर्वे के मुताबिक, भारत में मौत का आंकड़ा शून्य. आठ प्रतिशत है। जबकि अमेरिका में यह शून्य. छः है। यानी भारत से आठ गुना अधिक। इसके पीछे भारत में युवा आबादी अधिक है, जिससे मौत का आंकड़ा अधिक नहीं बढ़ेगा।
मुंबई, 26 दिसंबरः अभिनेत्री तुनिषा शर्मा का नाम मनोरंजन उद्योग की उन शख्सियतों में जुड़ गया है, जिन्होंने बहुत हद तक अपने रिश्तों में तनाव आने पर आत्महत्या की है. तुनिषा (21) ने मुंबई के पड़ोस में स्थित पालघर जिले के वसई में एक टेलीविजन धारावाहिक के सेट पर आत्महत्या कर ली. पुलिस के मुताबिक, प्रथम दृष्टया सह-अभिनेता शीजान मोहम्मद खान के साथ प्रेम-संबंध टूटने के बाद तुनिषा ने शनिवार को यह कठोर कदम उठाया. खान को भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के तहत, आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. 'Sushant Singh Rajput की हुई थी हत्या', पोस्टमॉर्टम कराने वाले शख्स ने किया बड़ा दावा, गर्दन में थे चोट के कई निशान (Watch Video) उल्लेखनीय है कि इससे पहले, जून 2020 में बॉलीवुड उस वक्त दहल उठा था, जब अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (34) का शव उपनगर बांद्रा स्थित उनके फ्लैट में फंदे से लटका हुआ मिला था. जांच के दौरान, यह पता चला कि अभिनेता अवसाद में थे. पुलिस ने घटना के सिलसिले में उनकी महिला मित्र एवं अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के खिलाफ मामला दर्ज किया था. बाद में इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने की, जबकि स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी अभिनेता की मौत को लेकर चक्रवर्ती से पूछताछ की थी. टीवी धारावाहिक 'बालिका वधू' की अभिनेत्री प्रत्यूषा बनर्जी (24) की एक अप्रैल 2016 को मौत हो जाने पर पुलिस ने उसके परिवार की शिकायत पर बनर्जी के मित्र एवं टेलीविजन धारावाहिक निर्माता राहुल राज सिंह के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था. मामले में, गिरफ्तारी से बचने के लिए सिंह को अग्रिम जमानत लेनी पड़ी. इसी तरह का एक प्रकरण उस वक्त सामने आया था, जब अभिनेत्री जिया खान (25) का शव तीन जून, 2013 को जुहू स्थित उनके फ्लैट में फंदे से लटका हुआ पाया गया था. जिया की मां राबिया खान ने अभिनेता सूरज पंचोली पर आरोप लगाया था कि वह उनकी बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार है. अभिनेता आदित्य पंचोली के पुत्र सूरज को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. बाद में, पुलिस और सीबीआई ने अदालत में कहा था कि अभिनेत्री ने आत्महत्या की थी.
मुंबई, छब्बीस दिसंबरः अभिनेत्री तुनिषा शर्मा का नाम मनोरंजन उद्योग की उन शख्सियतों में जुड़ गया है, जिन्होंने बहुत हद तक अपने रिश्तों में तनाव आने पर आत्महत्या की है. तुनिषा ने मुंबई के पड़ोस में स्थित पालघर जिले के वसई में एक टेलीविजन धारावाहिक के सेट पर आत्महत्या कर ली. पुलिस के मुताबिक, प्रथम दृष्टया सह-अभिनेता शीजान मोहम्मद खान के साथ प्रेम-संबंध टूटने के बाद तुनिषा ने शनिवार को यह कठोर कदम उठाया. खान को भारतीय दंड संहिता की धारा तीन सौ छः के तहत, आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. 'Sushant Singh Rajput की हुई थी हत्या', पोस्टमॉर्टम कराने वाले शख्स ने किया बड़ा दावा, गर्दन में थे चोट के कई निशान उल्लेखनीय है कि इससे पहले, जून दो हज़ार बीस में बॉलीवुड उस वक्त दहल उठा था, जब अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का शव उपनगर बांद्रा स्थित उनके फ्लैट में फंदे से लटका हुआ मिला था. जांच के दौरान, यह पता चला कि अभिनेता अवसाद में थे. पुलिस ने घटना के सिलसिले में उनकी महिला मित्र एवं अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के खिलाफ मामला दर्ज किया था. बाद में इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने की, जबकि स्वापक नियंत्रण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय ने भी अभिनेता की मौत को लेकर चक्रवर्ती से पूछताछ की थी. टीवी धारावाहिक 'बालिका वधू' की अभिनेत्री प्रत्यूषा बनर्जी की एक अप्रैल दो हज़ार सोलह को मौत हो जाने पर पुलिस ने उसके परिवार की शिकायत पर बनर्जी के मित्र एवं टेलीविजन धारावाहिक निर्माता राहुल राज सिंह के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था. मामले में, गिरफ्तारी से बचने के लिए सिंह को अग्रिम जमानत लेनी पड़ी. इसी तरह का एक प्रकरण उस वक्त सामने आया था, जब अभिनेत्री जिया खान का शव तीन जून, दो हज़ार तेरह को जुहू स्थित उनके फ्लैट में फंदे से लटका हुआ पाया गया था. जिया की मां राबिया खान ने अभिनेता सूरज पंचोली पर आरोप लगाया था कि वह उनकी बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार है. अभिनेता आदित्य पंचोली के पुत्र सूरज को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. बाद में, पुलिस और सीबीआई ने अदालत में कहा था कि अभिनेत्री ने आत्महत्या की थी.
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय को डिस्टेंस एजुकेशन ब्योरा (डेब) से तीन कोर्स में मंजूरी मिली है। इसको लेकर यूजीसी की ओर से पत्र जारी किया गया है। बैचलर ऑफ कंप्यूटर (बीसीए), बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (बीबीए) और बैचलर ऑफ लाइब्रेरी एंड इनफॉर्मेशन साइंस (बीलिस) को मंजूरी मिली है। यूजीसी की बॉडी डेब की ओर से इसका पत्र वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। हालांकि, डेब की ओर से जुलाई 2019 व जनवरी 2020 सत्र के लिए पत्र जारी हुआ है। डीडीई की ओर से एडमिशन लिए जाने को लेकर भी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वहीं बीएड की लंबित परीक्षाएं लेने का काम शुरू हो गया है।
बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय को डिस्टेंस एजुकेशन ब्योरा से तीन कोर्स में मंजूरी मिली है। इसको लेकर यूजीसी की ओर से पत्र जारी किया गया है। बैचलर ऑफ कंप्यूटर , बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन और बैचलर ऑफ लाइब्रेरी एंड इनफॉर्मेशन साइंस को मंजूरी मिली है। यूजीसी की बॉडी डेब की ओर से इसका पत्र वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। हालांकि, डेब की ओर से जुलाई दो हज़ार उन्नीस व जनवरी दो हज़ार बीस सत्र के लिए पत्र जारी हुआ है। डीडीई की ओर से एडमिशन लिए जाने को लेकर भी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वहीं बीएड की लंबित परीक्षाएं लेने का काम शुरू हो गया है।
जबलपुर/रीवा. रीवा जिले के एक मरीज को जबलपुर में कोरोना का बहाना बनाकर बिना इलाज के लौटा दिया गया. और गंभीर मरीज को दर दर भटके के लिए मजबूर कर दिया गया. इस कारण दो निजी अस्पतालों को नोटिस जारी की गई है. रीवा जिला के सिरमौर तहसील का एक मरीज जिसे फेफड़े से सम्बंधित बीमारी का इलाज़ कराने के लिए शहर दर शहर, अस्पताल दर अस्पताल भटकना पड़ रहा था. पर कई अस्पतालों ने उसका इलाज करने से इंकार कर दिया. वजह कोरोना बताई गई. जबकि मरीज को कुल तीन बार कोरोना की जांच हो चुकी थी, तीनों बार उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई. बावजूद इसके जबलपुर के दो बड़े निजी अस्पतालों ने इलाज देने की बजाय मेडिकल जाने की सलाह दे डाली. इसके बाद मरीज को उसकी पत्नी और परिजन बिलासपुर ले जाना पड़ा था. सोशल मीडिया पर मरीज की पत्नी ने पीड़ा जाहिर किया. पत्नी के अनुसार रीवा मेडिकल कॉलेज में हुए दो टेस्ट में भी रिपोर्ट निगेटिव आई थी, वहाँ के डिस्चार्ज पेपर में इसका उल्लेख भी है. शहर के मेट्रो हॉस्पिटल में फीवर क्लीनिक से ही उसे मेडिकल जाकर कोरोना की जाँच कराने कहा गया, वहीं लाइफ मेडिसिटी हॉस्पिटल में उसे दो घंटे रखा गया, एक्स-रे में फेफड़ों के संक्रमण को देखते हुए मरीज को कोरोना पीडि़त मानकर उपचार देने की बजाय मेडिकल जाने कहा गया. इधर लाइफ मेडिसिटी अस्पताल के संचालक डॉ. मुकेश श्रीवास्तव का कहना है कि उक्त मरीज 11 जून की रात में 2.30 बजे आए थे, उनकी हालत नाजुक थी. साँस की तकलीफ होनेे पर उन्हें हाई फ्लो ऑक्सीजन ट्रीटमेंट के साथ दवाएँ-इंजेक्शन दिए गए, साथ ही एक्स-रे कराया गया. मरीज को भर्ती करने के दौरान 10 हजार रुपए डिपॉजिट कराए गए थे. एक्स-रे रिपोर्ट के बाद उनके कोरोना संक्रमित होने की ज्यादा संभावनाएँ दिखीं, जिससे उन्हें मेडिकल रेफर कर दिया गया. मरीज से सिर्फ एक्स-रे का पैसा लिया गया, डिपॉजिट कराए गए 10 हजार रुपए उन्हें वापस कर दिए गए थे. उनका कहना था कि मरीज की हालत गंभीर थी, यदि वे उसे नॉर्मल कर नहीं भेजते तो वह बिलासपुर तक कैसे जा सकता था? दूसरी ओर मरीज की पत्नी पूजा पांडे का कहना था कि उन्हें 10 हजार रुपए बेड, 10 हजार ट्रीटमेंट, 1 हजार रुपए एक्स-रे तथा 4900 रुपए दवा का बिल दिया गया, बाद में कुछ राशि डिस्काउंट की गई. रीवा से आए मरीज को उपचार नहीं देने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रत्नेश कुररिया ने लाइफ मेडिसिटी और मेट्रो अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर 3 दिनों में जवाब देने कहा है. नोटिस में कहा गया है कि रीवा का यह मरीज 11 जून को इलाज कराने आया था, परिजनों द्वारा यह बताए जाने के बावजूद कि रीवा में कोविड टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है, उसका इलाज शुरू नहीं किया गया और पुनः कोविड टेस्ट कराकर आने की बात कही गई. इससे मरीज के स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आती रही. जबकि प्रोटोकाल के मुताबिक उन्हें इस मरीज का उपचार किया जाना था और इसकी सूचना जिला स्तरीय कोविड कंट्रोल रूम को दी जानी थी.
जबलपुर/रीवा. रीवा जिले के एक मरीज को जबलपुर में कोरोना का बहाना बनाकर बिना इलाज के लौटा दिया गया. और गंभीर मरीज को दर दर भटके के लिए मजबूर कर दिया गया. इस कारण दो निजी अस्पतालों को नोटिस जारी की गई है. रीवा जिला के सिरमौर तहसील का एक मरीज जिसे फेफड़े से सम्बंधित बीमारी का इलाज़ कराने के लिए शहर दर शहर, अस्पताल दर अस्पताल भटकना पड़ रहा था. पर कई अस्पतालों ने उसका इलाज करने से इंकार कर दिया. वजह कोरोना बताई गई. जबकि मरीज को कुल तीन बार कोरोना की जांच हो चुकी थी, तीनों बार उसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई. बावजूद इसके जबलपुर के दो बड़े निजी अस्पतालों ने इलाज देने की बजाय मेडिकल जाने की सलाह दे डाली. इसके बाद मरीज को उसकी पत्नी और परिजन बिलासपुर ले जाना पड़ा था. सोशल मीडिया पर मरीज की पत्नी ने पीड़ा जाहिर किया. पत्नी के अनुसार रीवा मेडिकल कॉलेज में हुए दो टेस्ट में भी रिपोर्ट निगेटिव आई थी, वहाँ के डिस्चार्ज पेपर में इसका उल्लेख भी है. शहर के मेट्रो हॉस्पिटल में फीवर क्लीनिक से ही उसे मेडिकल जाकर कोरोना की जाँच कराने कहा गया, वहीं लाइफ मेडिसिटी हॉस्पिटल में उसे दो घंटे रखा गया, एक्स-रे में फेफड़ों के संक्रमण को देखते हुए मरीज को कोरोना पीडि़त मानकर उपचार देने की बजाय मेडिकल जाने कहा गया. इधर लाइफ मेडिसिटी अस्पताल के संचालक डॉ. मुकेश श्रीवास्तव का कहना है कि उक्त मरीज ग्यारह जून की रात में दो.तीस बजे आए थे, उनकी हालत नाजुक थी. साँस की तकलीफ होनेे पर उन्हें हाई फ्लो ऑक्सीजन ट्रीटमेंट के साथ दवाएँ-इंजेक्शन दिए गए, साथ ही एक्स-रे कराया गया. मरीज को भर्ती करने के दौरान दस हजार रुपए डिपॉजिट कराए गए थे. एक्स-रे रिपोर्ट के बाद उनके कोरोना संक्रमित होने की ज्यादा संभावनाएँ दिखीं, जिससे उन्हें मेडिकल रेफर कर दिया गया. मरीज से सिर्फ एक्स-रे का पैसा लिया गया, डिपॉजिट कराए गए दस हजार रुपए उन्हें वापस कर दिए गए थे. उनका कहना था कि मरीज की हालत गंभीर थी, यदि वे उसे नॉर्मल कर नहीं भेजते तो वह बिलासपुर तक कैसे जा सकता था? दूसरी ओर मरीज की पत्नी पूजा पांडे का कहना था कि उन्हें दस हजार रुपए बेड, दस हजार ट्रीटमेंट, एक हजार रुपए एक्स-रे तथा चार हज़ार नौ सौ रुपयापए दवा का बिल दिया गया, बाद में कुछ राशि डिस्काउंट की गई. रीवा से आए मरीज को उपचार नहीं देने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रत्नेश कुररिया ने लाइफ मेडिसिटी और मेट्रो अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिनों में जवाब देने कहा है. नोटिस में कहा गया है कि रीवा का यह मरीज ग्यारह जून को इलाज कराने आया था, परिजनों द्वारा यह बताए जाने के बावजूद कि रीवा में कोविड टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आई है, उसका इलाज शुरू नहीं किया गया और पुनः कोविड टेस्ट कराकर आने की बात कही गई. इससे मरीज के स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आती रही. जबकि प्रोटोकाल के मुताबिक उन्हें इस मरीज का उपचार किया जाना था और इसकी सूचना जिला स्तरीय कोविड कंट्रोल रूम को दी जानी थी.
साइकिलिंग के शौकीन आईएएस संदीप कुमार ने ऐतिहासिक धरोहरों को जोडऩे वाले पोंग सर्किट की दो दिवसीय यात्रा अपने सहयोगियों सहित पूरी की। इस जुनून के दौरान नए-नए आयाम स्थापित कर चुके हैं। वह प्रदेश के अति दुर्गम स्थलों पर साइकिलिंग कर चुके हैं। उन्होंने अपने साथी साइकिल जसप्रीत, जगतार, राजेंद्र मनन व जसवीर सहित नादौन के ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब से साइकिलिंग आरंभ की। इस दौरान गुरुद्वारा के ग्रंथी बाबा सिमरजीत सिंह ने गुरुद्वारा के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी। इसके बाद वे यहां से 10 किलोमीटर दूर पांडवों द्वारा निर्मित ऐतिहासिक चौमुखा महादेव मंदिर मार्ग पर पहुंचे। यहां का महत्व बताने के बाद वह प्रसिद्ध कालेश्वर महादेव मंदिर होते हुए हेरिटेज विलेज गरली पहुंचे। जहां के ऐतिहासिक महत्व के बारे में उन्होंने जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने 573 किलोमीटर की कठिन यात्रा अति दुर्गम स्थलों से होते हुए साइकिल से की थी। सात दिन में वह द्रास पहुंचे। इस दौरान 8200 मीटर तक ऊंची चोटियों को भी उन्होंने पार किया। 14 अगस्त को आरंभ अपनी यात्रा में वह अन्य पांच सहयोगियों सहित जिसपा, शिनकुला पास, गेंबो रग्जन, जसकर बैली, रंगडूम, शेंकू होते हुए द्रास पहुंचे थे। संदीप कुमार नादौन ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हंै।
साइकिलिंग के शौकीन आईएएस संदीप कुमार ने ऐतिहासिक धरोहरों को जोडऩे वाले पोंग सर्किट की दो दिवसीय यात्रा अपने सहयोगियों सहित पूरी की। इस जुनून के दौरान नए-नए आयाम स्थापित कर चुके हैं। वह प्रदेश के अति दुर्गम स्थलों पर साइकिलिंग कर चुके हैं। उन्होंने अपने साथी साइकिल जसप्रीत, जगतार, राजेंद्र मनन व जसवीर सहित नादौन के ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब से साइकिलिंग आरंभ की। इस दौरान गुरुद्वारा के ग्रंथी बाबा सिमरजीत सिंह ने गुरुद्वारा के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी। इसके बाद वे यहां से दस किलोग्राममीटर दूर पांडवों द्वारा निर्मित ऐतिहासिक चौमुखा महादेव मंदिर मार्ग पर पहुंचे। यहां का महत्व बताने के बाद वह प्रसिद्ध कालेश्वर महादेव मंदिर होते हुए हेरिटेज विलेज गरली पहुंचे। जहां के ऐतिहासिक महत्व के बारे में उन्होंने जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने पाँच सौ तिहत्तर किलोग्राममीटर की कठिन यात्रा अति दुर्गम स्थलों से होते हुए साइकिल से की थी। सात दिन में वह द्रास पहुंचे। इस दौरान आठ हज़ार दो सौ मीटर तक ऊंची चोटियों को भी उन्होंने पार किया। चौदह अगस्त को आरंभ अपनी यात्रा में वह अन्य पांच सहयोगियों सहित जिसपा, शिनकुला पास, गेंबो रग्जन, जसकर बैली, रंगडूम, शेंकू होते हुए द्रास पहुंचे थे। संदीप कुमार नादौन ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हंै।
इस मामले में पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि पांच अभी फरार हैं. बता दें कि पुलिस ने कुल 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इसमें मुख्य आरोपी पूर्व सरपंच अकरम पटेल को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. महाराष्ट्र के परभणी में मॉब लिंचिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां भीड़ ने एक नाबालिग सिख युवक को बकरी चोर समझ कर मार डाला. वहीं सूचना पर पहुंची पुलिस ने दो युवकों को बचाया. फिलहाल इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि पांच अभी भी फरार हैं. बता दें कि पुलिस ने इस मामले में कुल 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इसमें मुख्य आरोपी ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच अकरम पटेल को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. वहीं मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक इस घटना पर अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने ट्वीट किया कि 'महाराष्ट्र में तीन सिख नाबालिग बच्चों की लिंचिंग से पूरा समुदाय हैरान है. बादल ने लिखा कि पहले से ही पीड़ित सिख समुदाय के खिलाफ ये जघन्य अपराध अक्षम्य है. उन्होंने महाराष्ट्र सीएम ऑफिस, डीजीपी और राज्यपाल को टैग करते हुए लिखा कि दोषियों को तत्काल सजा मिलनी चाहिए. दरअसल परभणी तहसील के उखलद गांव में तीन युवकों की बकरी चोरी के शक में भीड़ ने पिटाई कर दी. इनमें से एक युवक की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गयी. बता दें कि ये मामला शनिवार का है. यहां शनिवार देर रात तीन युवक क्रिपाण सिंह भोंड, गोरा सिंह और अरुण सिंह बाईक से जा रहे थे. तभी गांव वालों ने उन्हें चोर समझकर पकड़ लिया और जमकर पिटाई कर दी. इसके साथ ही बकरी चोर पकड़े जाने की जानकारी भी ग्रामीणों ने ही पुलिस को भी दी. वहीं आनन-फानन में मौके पर पहुंची पुलिस ने तीनों युवकों को अस्पताल में भर्ती कराया. यहां इलाज के दौरान क्रिपाण सिंह भोंड की मौत हो गयी. बता दें कि पिटाई के दौरान भीड़ ने एक वीडियो भी बनाया है. फिलहाल युवकों की मौत के मामले में पुलिस ने 9 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. जिसमें चार की गिरफ्तारी हो चुकी है.
इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि पांच अभी फरार हैं. बता दें कि पुलिस ने कुल नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इसमें मुख्य आरोपी पूर्व सरपंच अकरम पटेल को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. महाराष्ट्र के परभणी में मॉब लिंचिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है. यहां भीड़ ने एक नाबालिग सिख युवक को बकरी चोर समझ कर मार डाला. वहीं सूचना पर पहुंची पुलिस ने दो युवकों को बचाया. फिलहाल इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि पांच अभी भी फरार हैं. बता दें कि पुलिस ने इस मामले में कुल नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इसमें मुख्य आरोपी ग्राम पंचायत के पूर्व सरपंच अकरम पटेल को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. वहीं मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के मुताबिक इस घटना पर अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने ट्वीट किया कि 'महाराष्ट्र में तीन सिख नाबालिग बच्चों की लिंचिंग से पूरा समुदाय हैरान है. बादल ने लिखा कि पहले से ही पीड़ित सिख समुदाय के खिलाफ ये जघन्य अपराध अक्षम्य है. उन्होंने महाराष्ट्र सीएम ऑफिस, डीजीपी और राज्यपाल को टैग करते हुए लिखा कि दोषियों को तत्काल सजा मिलनी चाहिए. दरअसल परभणी तहसील के उखलद गांव में तीन युवकों की बकरी चोरी के शक में भीड़ ने पिटाई कर दी. इनमें से एक युवक की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गयी. बता दें कि ये मामला शनिवार का है. यहां शनिवार देर रात तीन युवक क्रिपाण सिंह भोंड, गोरा सिंह और अरुण सिंह बाईक से जा रहे थे. तभी गांव वालों ने उन्हें चोर समझकर पकड़ लिया और जमकर पिटाई कर दी. इसके साथ ही बकरी चोर पकड़े जाने की जानकारी भी ग्रामीणों ने ही पुलिस को भी दी. वहीं आनन-फानन में मौके पर पहुंची पुलिस ने तीनों युवकों को अस्पताल में भर्ती कराया. यहां इलाज के दौरान क्रिपाण सिंह भोंड की मौत हो गयी. बता दें कि पिटाई के दौरान भीड़ ने एक वीडियो भी बनाया है. फिलहाल युवकों की मौत के मामले में पुलिस ने नौ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. जिसमें चार की गिरफ्तारी हो चुकी है.
बॉलीवुड अभिनेत्री मिनीषा लांबा ने सोमवार (18 जनवरी) को अपना 36वां जन्मदिन मनाया। इस खास मौके पर उन्हें फिल्मी सितारों के अलावा फैंस ने भी जन्मदिन की बधाई दी थी। वहीं अपने जन्मदिन पर मिनीषा लांबा ने अपने तलाक को लेकर बड़ी बात बोली है। उन्होंने खुलासा किया कि वह पति रेस्टोरेंट मालिक रियान थाम से क्यों अलग हुईं। बॉलीवुड अभिनेत्री मिनीषा लांबा ने सोमवार (18 जनवरी) को अपना 36वां जन्मदिन मनाया। इस खास मौके पर उन्हें फिल्मी सितारों के अलावा फैंस ने भी जन्मदिन की बधाई दी थी। वहीं अपने जन्मदिन पर मिनीषा लांबा ने अपने तलाक को लेकर बड़ी बात बोली। इसके अलावा मिनीषा लंबा ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर और भी ढेर सारी बातें की हैं। आपको बता दें कि उन्होंने पिछले साल रियान थाम से तलाक लिया है। साल 2018 से ऐसी खबरें चल रही थीं कि मिनीषा और उनके पति अलग रहे हैं, हालांकि मिनीषा ने कभी इस मामले पर कोई बयान नहीं दिया था। मीडिया ने उनसे इस दौरान कई बार बात करने की कोशिश की लेकिन मिनीषा ने चुप्पी साधे रखी। मिनीषा ने इतने वक्त न तो कहीं कोई बयान दिया और न ही सोशल मीडिया पर कोई ऐसा पोस्ट शेयर किया था, जो इस बात की तरफ इशारा करे उनकी शादीशुदा जिंदगी ठीक नहीं चल रही है। लेकिन पिछले साल मिनीषा ने खुद इस खबर पर मुहर लगा दी थी और पुष्ठी की थी कि वह और रियान अलग हो गए हैं। मिनीषा ने कहा था, 'हां, मैं और रियान आपसी सहमती से अलग हो गए हैं। लीगल कार्रवाई भी पूरी हो गई है'। आपको बता दें कि मिनीषा और रियान मुलाकात साल 2013 में जूहू के एक नाइट क्लब में हुई थी। इसके बाद दोनों में इश्क हो गया और दो साल दोनों ने एक दूसरे को डेट किया। 6 जुलाई, 2015 में दोनों ने सिंपल तरीक से शादी कर ली। दोनों के वर्क फ्रंट की बात करें तो रियान एक रेस्ट्रो ओनर हैं तो वहीं मिनीषा मशहूर अभिनेत्री हैं। हालांकि मिनीषी काफी वक्त से बॉलीवुड से दूरी बना रखी है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2005 में आई फिल्म 'यहां' से की थी। इसके बाद वह साल 2007 में फिल्म 'हनीमून ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड' में नजर आईं इसके बाद अभिनेत्री ने, 'दस कहानियां', 'किडनैप' और 'बचना-ऐ-हसीनों' जैसी फिल्मों में भी काम किया। हालांकि इन फिल्मों के बाद मिनीषी किसी भी फिल्म में बतौर लीड एक्ट्रेस नजर नहीं आईं। साल 2018 में वह टीवी सीरियल 'इंटरनेट वाला लव' में भी दिखाई दी थीं।
बॉलीवुड अभिनेत्री मिनीषा लांबा ने सोमवार को अपना छत्तीसवां जन्मदिन मनाया। इस खास मौके पर उन्हें फिल्मी सितारों के अलावा फैंस ने भी जन्मदिन की बधाई दी थी। वहीं अपने जन्मदिन पर मिनीषा लांबा ने अपने तलाक को लेकर बड़ी बात बोली है। उन्होंने खुलासा किया कि वह पति रेस्टोरेंट मालिक रियान थाम से क्यों अलग हुईं। बॉलीवुड अभिनेत्री मिनीषा लांबा ने सोमवार को अपना छत्तीसवां जन्मदिन मनाया। इस खास मौके पर उन्हें फिल्मी सितारों के अलावा फैंस ने भी जन्मदिन की बधाई दी थी। वहीं अपने जन्मदिन पर मिनीषा लांबा ने अपने तलाक को लेकर बड़ी बात बोली। इसके अलावा मिनीषा लंबा ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर और भी ढेर सारी बातें की हैं। आपको बता दें कि उन्होंने पिछले साल रियान थाम से तलाक लिया है। साल दो हज़ार अट्ठारह से ऐसी खबरें चल रही थीं कि मिनीषा और उनके पति अलग रहे हैं, हालांकि मिनीषा ने कभी इस मामले पर कोई बयान नहीं दिया था। मीडिया ने उनसे इस दौरान कई बार बात करने की कोशिश की लेकिन मिनीषा ने चुप्पी साधे रखी। मिनीषा ने इतने वक्त न तो कहीं कोई बयान दिया और न ही सोशल मीडिया पर कोई ऐसा पोस्ट शेयर किया था, जो इस बात की तरफ इशारा करे उनकी शादीशुदा जिंदगी ठीक नहीं चल रही है। लेकिन पिछले साल मिनीषा ने खुद इस खबर पर मुहर लगा दी थी और पुष्ठी की थी कि वह और रियान अलग हो गए हैं। मिनीषा ने कहा था, 'हां, मैं और रियान आपसी सहमती से अलग हो गए हैं। लीगल कार्रवाई भी पूरी हो गई है'। आपको बता दें कि मिनीषा और रियान मुलाकात साल दो हज़ार तेरह में जूहू के एक नाइट क्लब में हुई थी। इसके बाद दोनों में इश्क हो गया और दो साल दोनों ने एक दूसरे को डेट किया। छः जुलाई, दो हज़ार पंद्रह में दोनों ने सिंपल तरीक से शादी कर ली। दोनों के वर्क फ्रंट की बात करें तो रियान एक रेस्ट्रो ओनर हैं तो वहीं मिनीषा मशहूर अभिनेत्री हैं। हालांकि मिनीषी काफी वक्त से बॉलीवुड से दूरी बना रखी है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल दो हज़ार पाँच में आई फिल्म 'यहां' से की थी। इसके बाद वह साल दो हज़ार सात में फिल्म 'हनीमून ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड' में नजर आईं इसके बाद अभिनेत्री ने, 'दस कहानियां', 'किडनैप' और 'बचना-ऐ-हसीनों' जैसी फिल्मों में भी काम किया। हालांकि इन फिल्मों के बाद मिनीषी किसी भी फिल्म में बतौर लीड एक्ट्रेस नजर नहीं आईं। साल दो हज़ार अट्ठारह में वह टीवी सीरियल 'इंटरनेट वाला लव' में भी दिखाई दी थीं।
के अनुसारजानकारी4 जुलाई की एक रिपोर्ट के अनुसार, सिकोइया कैपिटल की चीनी सहायक कंपनी ने प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा में निवेश के लिए नए फंड में लगभग 9 बिलियन डॉलर जुटाए हैं। कंपनी को 50% ओवर-सब्सक्रिप्शन के दौर में 12 बिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग मिली। कंपनी संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया में पेंशन, एंडोमेंट फंड और पारिवारिक कार्यालयों से धन जुटाती है,ब्लूमबर्गइसकी सूचना दी। एसईसी दस्तावेजों के अनुसार, सिकोइया कैपिटल ने एक नया अमेरिकी डॉलर फंड पंजीकृत किया है, जिसमें एक बीज फंड, एक उद्यम फंड, एक विस्तार फंड और एक विकास फंड शामिल है। चार फंड प्रौद्योगिकी, उपभोक्ता और स्वास्थ्य देखभाल में निवेश पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखेंगे। पिछले एक दशक में, सिकोइया कैपिटल और इसकी चीनी सहायक कंपनियों ने घरेलू स्टार्टअप में $10 बिलियन से अधिक का निवेश किया है, जो चीनी बाजार में निवेश करने के लिए समर्पित एक शक्तिशाली ब्रांड बन गया है। सिकोइया कैपिटल चीन चीन की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं के बारे में आशावादी है और अत्याधुनिक तकनीकों में निवेश करने की योजना बना रहा है जो फार्मास्यूटिकल्स और हेल्थकेयर जैसे उद्योगों को चलाने में मदद कर सकते हैंब्लूमबर्गरिपोर्ट ने मामले से परिचित लोगों को उद्धृत किया। सीबी इंसाइट्स की एक रिपोर्ट बताती है कि 2022 की पहली तिमाही में वैश्विक उद्यम पूंजी में 19% की कमी आई है, जो पिछले 10 वर्षों में सबसे बड़ी तिमाही-दर-तिमाही गिरावट है। इस मामले में, सिकोइया कैपिटल चीन का नया धन उगाहने वाला ध्यान आकर्षित करने में विफल नहीं हो सकता है।
के अनुसारजानकारीचार जुलाई की एक रिपोर्ट के अनुसार, सिकोइया कैपिटल की चीनी सहायक कंपनी ने प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य सेवा में निवेश के लिए नए फंड में लगभग नौ बिलियन डॉलर जुटाए हैं। कंपनी को पचास% ओवर-सब्सक्रिप्शन के दौर में बारह बिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग मिली। कंपनी संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया में पेंशन, एंडोमेंट फंड और पारिवारिक कार्यालयों से धन जुटाती है,ब्लूमबर्गइसकी सूचना दी। एसईसी दस्तावेजों के अनुसार, सिकोइया कैपिटल ने एक नया अमेरिकी डॉलर फंड पंजीकृत किया है, जिसमें एक बीज फंड, एक उद्यम फंड, एक विस्तार फंड और एक विकास फंड शामिल है। चार फंड प्रौद्योगिकी, उपभोक्ता और स्वास्थ्य देखभाल में निवेश पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखेंगे। पिछले एक दशक में, सिकोइया कैपिटल और इसकी चीनी सहायक कंपनियों ने घरेलू स्टार्टअप में दस डॉलर बिलियन से अधिक का निवेश किया है, जो चीनी बाजार में निवेश करने के लिए समर्पित एक शक्तिशाली ब्रांड बन गया है। सिकोइया कैपिटल चीन चीन की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं के बारे में आशावादी है और अत्याधुनिक तकनीकों में निवेश करने की योजना बना रहा है जो फार्मास्यूटिकल्स और हेल्थकेयर जैसे उद्योगों को चलाने में मदद कर सकते हैंब्लूमबर्गरिपोर्ट ने मामले से परिचित लोगों को उद्धृत किया। सीबी इंसाइट्स की एक रिपोर्ट बताती है कि दो हज़ार बाईस की पहली तिमाही में वैश्विक उद्यम पूंजी में उन्नीस% की कमी आई है, जो पिछले दस वर्षों में सबसे बड़ी तिमाही-दर-तिमाही गिरावट है। इस मामले में, सिकोइया कैपिटल चीन का नया धन उगाहने वाला ध्यान आकर्षित करने में विफल नहीं हो सकता है।
भादरण में एक मानपत्र का उत्तर देते हुए लोगों के अनुरोध से गांधीजी ने ब्रह्मचर्य पर लम्बा प्रवचन किया । उसका सार यहाँ दिया जाता है आप चाहते हैं कि ब्रह्मचर्य के विषय पर मैं कुछ कहूँ । कितने ही विषय ऐसे हैं कि जिन पर मैं ' नवजीवन में प्रसगोपात्त ही लिखता है और उन पर व्याख्यान तो शायद ही देता हॅू । क्यों कि यह विषय ही ऐसा है कि कह कर नहीं समझाया जा सकता । आप तो मामूली ब्रह्मचर्य के विषय में सुनना चाहते हैं में जिस ब्रह्मचर्य की विस्तृत व्याख्या ' समस्त इन्द्रियो का सयम है, उसके विषय में नहीं। इस साधारण ब्रह्मचर्य को भी शास्त्रो में बडा कठिन बतलाया गया है। यह बात ९९ फी सदी सच है, इसमें १ फीसदी की कमी है। इसका पालन इसलिए कटिन
भादरण में एक मानपत्र का उत्तर देते हुए लोगों के अनुरोध से गांधीजी ने ब्रह्मचर्य पर लम्बा प्रवचन किया । उसका सार यहाँ दिया जाता है आप चाहते हैं कि ब्रह्मचर्य के विषय पर मैं कुछ कहूँ । कितने ही विषय ऐसे हैं कि जिन पर मैं ' नवजीवन में प्रसगोपात्त ही लिखता है और उन पर व्याख्यान तो शायद ही देता हॅू । क्यों कि यह विषय ही ऐसा है कि कह कर नहीं समझाया जा सकता । आप तो मामूली ब्रह्मचर्य के विषय में सुनना चाहते हैं में जिस ब्रह्मचर्य की विस्तृत व्याख्या ' समस्त इन्द्रियो का सयम है, उसके विषय में नहीं। इस साधारण ब्रह्मचर्य को भी शास्त्रो में बडा कठिन बतलाया गया है। यह बात निन्यानवे फी सदी सच है, इसमें एक फीसदी की कमी है। इसका पालन इसलिए कटिन
डेस्क. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश हायर जूडिशियल सर्विस के लिए 59 पदों पर आवेदन मंगवाए हैं। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार इसके लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तारीख 14 दिसंबर 2018 है। सभी तरह के आरक्षण का लाभ केवल उत्तर प्रदेश के मूल निवासियों को मिलेगा। अन्य राज्यों के सभी श्रेणी के उम्मीदवार अनारक्षित श्रेणी में आवेदन कर सकते हैं। कुल पदों में से 20 फीसदी पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। पद, योग्यता और आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आगे पढ़ें : योग्यताः उम्मीदवार ने मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से लॉ में बैचलर डिग्री हो। साथ ही वकील के रूप में सात साल का अनुभव होना चाहिए। वेतनमानः 51,550-63,070 रुपये। उम्र सीमाः अधिकतम 45 वर्ष। -उम्र सीमा में छूट का लाभ नियमानुसार मिलेगा। -ओबीसी,एससी और एसटी श्रेणी के अधिकतम उम्र सीमा में तीन वर्ष की छूट मिलेगी। चयन प्रक्रियाः -योग्य उम्मीदवारों का चयन प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा के जरिये किया जाएगा। -प्रारंभिक परीक्षा प्रयागराज (इलाहाबाद) में होगी। -प्रारंभिक परीक्षा वस्तुनिष्ठ प्रकार की होगी। -इसमें न्यूनतम 45 फीसदी अंक लाने वाले उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए चयनित किया जाएगा। -कुल रिक्तियों का 20 गुना उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए चयनित किया जाएगा। -उम्मीदवार परीक्षा से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए संस्थान की वेबसाइट देखें। आवेदन शुल्कः -सामान्य एवं ओबीसी श्रेणी के लिए 1000 रुपये। -एससी एवं एसटी श्रेणी के लिए 750 रुपये। -अन्य राज्यों के सभी श्रेणी के लिए 1000 रुपये। -शुल्क बैंक चालान या डिमांड ड्राफ्ट के जरिये जमा कर सकते हैं। -संस्थान की वेबसाइट से बैंच चालान का प्रिंट निकालकर एसबीआई की किसी भी शाखा में शुल्क जमा कर सकते हैं। -डिमांड ड्राफ्ट यूपी एच. जे. एस. रिक्रूटमेंट 2007 के नाम से एसबीआई इलाहाबाद, हाईकोर्ट ब्रांच में भुगतेय होना चाहिए। -डिमांड ड्राफ्ट 14 दिसंबर 2018 या उससे पहले का बना होना चाहिए। आवेदन प्रक्रियाः -सबसे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट की वेबसाइट http://www. allahabadhighcourt. in पर जाएं। -वेबसाइट के होम पेज पर सबसे नीचे रिक्रूटमेंट लिंक पर क्लिक करें। -यहां क्लिक करने पर एक अलग पेज खुल जाएगा जहां लिस्ट ऑफ रिक्रूटमेंट का सेक्शन बना हुआ। -यहां एडवर्टाइजमेंट डायरेक्ट रिक्रूटमेंट टू द उत्तर प्रदेश हायर जूडिशियल सर्विस 2018 के सामने पीडीएफ आईकॉन पर क्लिक करें। -ऐसा करने पर पद से जुड़ा विज्ञापन खुल जाएगा। -इसके बाद विज्ञापन को सावधानी से पढ़ते हुए अपनी योग्यता जांच लें। -इसके बाद रिक्रूटमेंट पेज पर डायरेक्ट रिक्रूटमेंट टू द उत्तर प्रदेश हायर जूडिशियल सर्विस 2018 के सामने एचटीएमएल आईकॉन पर क्लिक करें। -ऐसा करने पर ऑनलाइन आवेदन का पेज खुल जहां दिए गए निर्देश के अनुसार आवेदन पत्र भरें। -आवेदन पत्र भरने एवं शुल्क भुगतान की जानकारी देने के बाद सब्मिट करने के पहले सावधानी से पढ़ते हुए भरी गई जानकारी जांच लें। -सब्मिट करने के बाद अंतिम रूप से भरे गए आवेदन का प्रिंट निकालकर रख लें। -प्रिंटआउट के साथ जरूरी दस्तावेज के साथ इसे तय पते पर भेजना है। -संबंधित दस्तावेज 03 जनवरी 2019 के पहले तय पते पर पहुंच जाना चाहिए। सूचना : -यूपी में वकालत कर रहे उम्मीदवार एवं प्रदेश से बाहर वकालत कर रहे उम्मीदवारों को अलग पते पर दस्तावेज भेजना है। -उम्मीदवार जिस कोर्ट के तहत कार्यरत हैं वहां के संबंधित अधिकारी से आवेदन फारवर्ड कराकर भेजना है। महत्वपूर्ण तिथियां : -संबंधित जिले के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज/ रजिस्ट्रार जनरल, हाईकोर्ट इलाहाबाद/ सीनियर रजिस्ट्रार,लखनऊ बेंच, लखनऊ।
डेस्क. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश हायर जूडिशियल सर्विस के लिए उनसठ पदों पर आवेदन मंगवाए हैं। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार इसके लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तारीख चौदह दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह है। सभी तरह के आरक्षण का लाभ केवल उत्तर प्रदेश के मूल निवासियों को मिलेगा। अन्य राज्यों के सभी श्रेणी के उम्मीदवार अनारक्षित श्रेणी में आवेदन कर सकते हैं। कुल पदों में से बीस फीसदी पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। पद, योग्यता और आवेदन प्रक्रिया से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए आगे पढ़ें : योग्यताः उम्मीदवार ने मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से लॉ में बैचलर डिग्री हो। साथ ही वकील के रूप में सात साल का अनुभव होना चाहिए। वेतनमानः इक्यावन,पाँच सौ पचास-तिरेसठ,सत्तर रुपयापये। उम्र सीमाः अधिकतम पैंतालीस वर्ष। -उम्र सीमा में छूट का लाभ नियमानुसार मिलेगा। -ओबीसी,एससी और एसटी श्रेणी के अधिकतम उम्र सीमा में तीन वर्ष की छूट मिलेगी। चयन प्रक्रियाः -योग्य उम्मीदवारों का चयन प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा के जरिये किया जाएगा। -प्रारंभिक परीक्षा प्रयागराज में होगी। -प्रारंभिक परीक्षा वस्तुनिष्ठ प्रकार की होगी। -इसमें न्यूनतम पैंतालीस फीसदी अंक लाने वाले उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए चयनित किया जाएगा। -कुल रिक्तियों का बीस गुना उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा के लिए चयनित किया जाएगा। -उम्मीदवार परीक्षा से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए संस्थान की वेबसाइट देखें। आवेदन शुल्कः -सामान्य एवं ओबीसी श्रेणी के लिए एक हज़ार रुपयापये। -एससी एवं एसटी श्रेणी के लिए सात सौ पचास रुपयापये। -अन्य राज्यों के सभी श्रेणी के लिए एक हज़ार रुपयापये। -शुल्क बैंक चालान या डिमांड ड्राफ्ट के जरिये जमा कर सकते हैं। -संस्थान की वेबसाइट से बैंच चालान का प्रिंट निकालकर एसबीआई की किसी भी शाखा में शुल्क जमा कर सकते हैं। -डिमांड ड्राफ्ट यूपी एच. जे. एस. रिक्रूटमेंट दो हज़ार सात के नाम से एसबीआई इलाहाबाद, हाईकोर्ट ब्रांच में भुगतेय होना चाहिए। -डिमांड ड्राफ्ट चौदह दिसंबर दो हज़ार अट्ठारह या उससे पहले का बना होना चाहिए। आवेदन प्रक्रियाः -सबसे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट की वेबसाइट http://www. allahabadhighcourt. in पर जाएं। -वेबसाइट के होम पेज पर सबसे नीचे रिक्रूटमेंट लिंक पर क्लिक करें। -यहां क्लिक करने पर एक अलग पेज खुल जाएगा जहां लिस्ट ऑफ रिक्रूटमेंट का सेक्शन बना हुआ। -यहां एडवर्टाइजमेंट डायरेक्ट रिक्रूटमेंट टू द उत्तर प्रदेश हायर जूडिशियल सर्विस दो हज़ार अट्ठारह के सामने पीडीएफ आईकॉन पर क्लिक करें। -ऐसा करने पर पद से जुड़ा विज्ञापन खुल जाएगा। -इसके बाद विज्ञापन को सावधानी से पढ़ते हुए अपनी योग्यता जांच लें। -इसके बाद रिक्रूटमेंट पेज पर डायरेक्ट रिक्रूटमेंट टू द उत्तर प्रदेश हायर जूडिशियल सर्विस दो हज़ार अट्ठारह के सामने एचटीएमएल आईकॉन पर क्लिक करें। -ऐसा करने पर ऑनलाइन आवेदन का पेज खुल जहां दिए गए निर्देश के अनुसार आवेदन पत्र भरें। -आवेदन पत्र भरने एवं शुल्क भुगतान की जानकारी देने के बाद सब्मिट करने के पहले सावधानी से पढ़ते हुए भरी गई जानकारी जांच लें। -सब्मिट करने के बाद अंतिम रूप से भरे गए आवेदन का प्रिंट निकालकर रख लें। -प्रिंटआउट के साथ जरूरी दस्तावेज के साथ इसे तय पते पर भेजना है। -संबंधित दस्तावेज तीन जनवरी दो हज़ार उन्नीस के पहले तय पते पर पहुंच जाना चाहिए। सूचना : -यूपी में वकालत कर रहे उम्मीदवार एवं प्रदेश से बाहर वकालत कर रहे उम्मीदवारों को अलग पते पर दस्तावेज भेजना है। -उम्मीदवार जिस कोर्ट के तहत कार्यरत हैं वहां के संबंधित अधिकारी से आवेदन फारवर्ड कराकर भेजना है। महत्वपूर्ण तिथियां : -संबंधित जिले के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज/ रजिस्ट्रार जनरल, हाईकोर्ट इलाहाबाद/ सीनियर रजिस्ट्रार,लखनऊ बेंच, लखनऊ।
निर्माता भूषण कुमार इस समय अलग-अलग शैलियों और इंडस्ट्री में एक दर्जन से ज्यादा फिल्मों को नियंत्रित कर रहे हैं। इस महीने की शुरुआत में, फिल्म निर्माता ने निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा की आगामी फिल्म पर आइकॉन स्टार, अल्लू अर्जुन के साथ अपने पहले सहयोग की घोषणा की। यह फिल्म साल 2025 में रिलीज होगी। वहीं, बीते दिन भूषण कुमार को जूनियर एनटीआर की अपकमिंग फिल्म 'एनटीआर 30' के मुहूर्त समारोह में भाग लेते हुए देखा गया, यह समारोह हैदराबाद में आयोजित किया गया था। गौरतलब हो कि भूषण कुमार ने एक बेहतरीन भारतीय फिल्म बनाने के इरादे से हैदराबाद का दौरा किया था। हाल ही में उन्होंने प्रभास और अल्लू अर्जुन के साथ एक फिल्म की घोषणा की। वहीं, अब खबर है कि भूषण कुमार, जूनियर एनटीआर संग काम करने की योजना बने रहे हैं। यह खबरे बीते कुछ दिनों से इंडस्ट्री के गलियारों में तेजी से फैल रही हैं। वहीं अब 'एनटीआर 30' के मुहूर्त कार्यक्रम में भूषण कुमार की उपस्थिति ने इसे और तूल दे दी है। कयास लगाया जा रहा है कि भूषण कुमार आने वाले दिनों में जूनियर एनटीआर संग अपने नए प्रोजेक्ट की घोषणा कर सकते हैं। इस पर सितारों से जुड़े एक सूत्र ने कहा है, 'अगर ऐसा होता है, तो यह निश्चित रूप से इंडस्ट्री के भीतर कुछ आग भड़काएगा। ' एनटीआर 30 की बात करें तो यह कोर्तला शिवा द्वारा निर्देशित है, और इसमें जूनियर एनटीआर और जान्हवी कपूर लीड रोल में हैं। सैफ अली खान 2024 की गर्मियों में रिलीज के लिए तैयार हो रही इस एपिक एक्शन से भरपूर एंटरटेनर में नेगेटिव रोल अदा कर सकते हैं। जूनियर एनटीआर को लेकर खबर है कि एक प्रोजेक्ट पर उनकी निर्देशक प्रशांत नील से भी बात चल रही है, जिसकी अनाउंसमेंट महामारी के दौरान की गई थी। दूसरी ओर भूषण कुमार के पास आदिपुरुष, आत्मा और अल्लू अर्जुन के साथ एक अनटाइटल्ड फिल्म है। वह रणबीर कपूर, वरुण धवन और कार्तिक आर्यन जैसे अभिनेताओं के साथ बैंक रोल मेगा बजट हिंदी फिल्मों के लिए भी बातचीत कर रहे हैं।
निर्माता भूषण कुमार इस समय अलग-अलग शैलियों और इंडस्ट्री में एक दर्जन से ज्यादा फिल्मों को नियंत्रित कर रहे हैं। इस महीने की शुरुआत में, फिल्म निर्माता ने निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा की आगामी फिल्म पर आइकॉन स्टार, अल्लू अर्जुन के साथ अपने पहले सहयोग की घोषणा की। यह फिल्म साल दो हज़ार पच्चीस में रिलीज होगी। वहीं, बीते दिन भूषण कुमार को जूनियर एनटीआर की अपकमिंग फिल्म 'एनटीआर तीस' के मुहूर्त समारोह में भाग लेते हुए देखा गया, यह समारोह हैदराबाद में आयोजित किया गया था। गौरतलब हो कि भूषण कुमार ने एक बेहतरीन भारतीय फिल्म बनाने के इरादे से हैदराबाद का दौरा किया था। हाल ही में उन्होंने प्रभास और अल्लू अर्जुन के साथ एक फिल्म की घोषणा की। वहीं, अब खबर है कि भूषण कुमार, जूनियर एनटीआर संग काम करने की योजना बने रहे हैं। यह खबरे बीते कुछ दिनों से इंडस्ट्री के गलियारों में तेजी से फैल रही हैं। वहीं अब 'एनटीआर तीस' के मुहूर्त कार्यक्रम में भूषण कुमार की उपस्थिति ने इसे और तूल दे दी है। कयास लगाया जा रहा है कि भूषण कुमार आने वाले दिनों में जूनियर एनटीआर संग अपने नए प्रोजेक्ट की घोषणा कर सकते हैं। इस पर सितारों से जुड़े एक सूत्र ने कहा है, 'अगर ऐसा होता है, तो यह निश्चित रूप से इंडस्ट्री के भीतर कुछ आग भड़काएगा। ' एनटीआर तीस की बात करें तो यह कोर्तला शिवा द्वारा निर्देशित है, और इसमें जूनियर एनटीआर और जान्हवी कपूर लीड रोल में हैं। सैफ अली खान दो हज़ार चौबीस की गर्मियों में रिलीज के लिए तैयार हो रही इस एपिक एक्शन से भरपूर एंटरटेनर में नेगेटिव रोल अदा कर सकते हैं। जूनियर एनटीआर को लेकर खबर है कि एक प्रोजेक्ट पर उनकी निर्देशक प्रशांत नील से भी बात चल रही है, जिसकी अनाउंसमेंट महामारी के दौरान की गई थी। दूसरी ओर भूषण कुमार के पास आदिपुरुष, आत्मा और अल्लू अर्जुन के साथ एक अनटाइटल्ड फिल्म है। वह रणबीर कपूर, वरुण धवन और कार्तिक आर्यन जैसे अभिनेताओं के साथ बैंक रोल मेगा बजट हिंदी फिल्मों के लिए भी बातचीत कर रहे हैं।
में भी तलाशी हुई किन्तु कुछ मिला नहीं। पुलिस ने तलाशी के लिये उनके मकान की छत तक फोड़ डाली । भाई बालमुकन्द जी के मुक़द्दमे में पैरवी की कमी तो नहीं रही क्योंकि भाई परमानन्द जी ने अच्छे वकील जुटा दिये थे किन्तु उन्हे जो फाँसी की सजा हुई उसकी अपील प्रिवी कौंसिल तक से खारिज हो गई । भाई बालमुकन्द जी की अपील प्रिवी कौंसिल में चल रही थी कि भाई परमानन्द जी को भी गिरफ्तार कर लिया गया । जहाँ तक हम जानते हैं भाई वालमुकन्द जी क्रान्तिकारी पंजाव के पहले शहीद थे । उनके बाद तो शहीदियों का तांता ही लग गया । जव उन्हें फाँसी लगी तो उन्होंने फाँसी का फन्दा जल्लाद के हाथ से लेकर स्वयं गले में लगा कर अपने सहपं वलिदान होने का परिचय दिया था । सती रामरखी वह अभी केवल १७-१८ वर्ष की वालिका थी। उसके पिता आर्य समाजी थे और पति भी आर्य समाजी । सोलह वर्ष की उम्र में उसकी शादी हुई थी और साढ़े सत्रह वर्ष की उम्र में वह शहीद हो गई थी । फाँसी पर चढ़ कर नहीं, फाँसी लगा कर भी नहीं, आत्मघात करके भी नहीं किन्तु आत्मसात् करके वह सती हो गई । घटना सन् १९१४ की है । उसके पति श्री बालमुकन्द देहली पड़यन्त्र केस में गिरफ्तार हुए थे । उन्हें फाँसी की सज़ा हुई थी। उन्होंने तो वड़े गौरव के साथ यह कह कर ग्राम संतोष कर लिया था कि शहीदी मेरे ही लिये नहीं हो रही, अत्याचारी औरंगजेब के समय में मेरे प्रपितामह भी शहीद हुए थे । ववारी उनकी अर्धाङ्गिनी की थी। हाँ, वह वालमुकन्द जी की अघही थी । हम नहीं कहते, वह स्वयं कहती थी । शब्दों से ही नहीं ग्रमल से उसने बताया था कि वह वालमुकन्द की अर्धाङ्ग है । एक दिन उसने कहा-~~"छः महीने हो गये उन्हें पकड़े हुए । घर से जाये हुए। लोग कहते हैं तू रोया न कर, हँसी खुशी रह, वे ग्रा जायेंगे। गर्मी के दिन हैं । में घर में हैं, वे जेल में हैं । जेल कैसी है ? वे कैसे रहते हैं ? मैं देखूंगी, वे कैसे रहते हैं। मैंने दिल्ली नहीं देखी है । देखने की कभी इच्छा भी नहीं की । अव देखूंगी क्योंकि दिल्ली ही की जेल में हैं ! "हा तुम आ गई । यह क्या ? तुम तो सफ़ेद पड़ गई हो मानों वर्षों से वीमार हो । बालमुकन्द ने एक साँस में ही जेल पर मिलने ग्राईपनी नववधू रामरखी से कहा ? में थक गई हैं - रामरखी वोली- और शायद तुम मोटे हो गये हो ? दोनों की आँखें भर आई किन्तु दोनों ही आँसुओं को पी जाना चाहते थे । "आपको खाने को क्या मिलता है ?" गद्गदाये स्वर में रामरखी ने पूछा । 'यह रोटी' नमूने का एक टुकड़ा देते हुए वालमुकन्द जी ने कहा । "और सोते काहे पर हो ? " मिट्टी के बने फूलों पर ।"
में भी तलाशी हुई किन्तु कुछ मिला नहीं। पुलिस ने तलाशी के लिये उनके मकान की छत तक फोड़ डाली । भाई बालमुकन्द जी के मुक़द्दमे में पैरवी की कमी तो नहीं रही क्योंकि भाई परमानन्द जी ने अच्छे वकील जुटा दिये थे किन्तु उन्हे जो फाँसी की सजा हुई उसकी अपील प्रिवी कौंसिल तक से खारिज हो गई । भाई बालमुकन्द जी की अपील प्रिवी कौंसिल में चल रही थी कि भाई परमानन्द जी को भी गिरफ्तार कर लिया गया । जहाँ तक हम जानते हैं भाई वालमुकन्द जी क्रान्तिकारी पंजाव के पहले शहीद थे । उनके बाद तो शहीदियों का तांता ही लग गया । जव उन्हें फाँसी लगी तो उन्होंने फाँसी का फन्दा जल्लाद के हाथ से लेकर स्वयं गले में लगा कर अपने सहपं वलिदान होने का परिचय दिया था । सती रामरखी वह अभी केवल सत्रह-अट्ठारह वर्ष की वालिका थी। उसके पिता आर्य समाजी थे और पति भी आर्य समाजी । सोलह वर्ष की उम्र में उसकी शादी हुई थी और साढ़े सत्रह वर्ष की उम्र में वह शहीद हो गई थी । फाँसी पर चढ़ कर नहीं, फाँसी लगा कर भी नहीं, आत्मघात करके भी नहीं किन्तु आत्मसात् करके वह सती हो गई । घटना सन् एक हज़ार नौ सौ चौदह की है । उसके पति श्री बालमुकन्द देहली पड़यन्त्र केस में गिरफ्तार हुए थे । उन्हें फाँसी की सज़ा हुई थी। उन्होंने तो वड़े गौरव के साथ यह कह कर ग्राम संतोष कर लिया था कि शहीदी मेरे ही लिये नहीं हो रही, अत्याचारी औरंगजेब के समय में मेरे प्रपितामह भी शहीद हुए थे । ववारी उनकी अर्धाङ्गिनी की थी। हाँ, वह वालमुकन्द जी की अघही थी । हम नहीं कहते, वह स्वयं कहती थी । शब्दों से ही नहीं ग्रमल से उसने बताया था कि वह वालमुकन्द की अर्धाङ्ग है । एक दिन उसने कहा-~~"छः महीने हो गये उन्हें पकड़े हुए । घर से जाये हुए। लोग कहते हैं तू रोया न कर, हँसी खुशी रह, वे ग्रा जायेंगे। गर्मी के दिन हैं । में घर में हैं, वे जेल में हैं । जेल कैसी है ? वे कैसे रहते हैं ? मैं देखूंगी, वे कैसे रहते हैं। मैंने दिल्ली नहीं देखी है । देखने की कभी इच्छा भी नहीं की । अव देखूंगी क्योंकि दिल्ली ही की जेल में हैं ! "हा तुम आ गई । यह क्या ? तुम तो सफ़ेद पड़ गई हो मानों वर्षों से वीमार हो । बालमुकन्द ने एक साँस में ही जेल पर मिलने ग्राईपनी नववधू रामरखी से कहा ? में थक गई हैं - रामरखी वोली- और शायद तुम मोटे हो गये हो ? दोनों की आँखें भर आई किन्तु दोनों ही आँसुओं को पी जाना चाहते थे । "आपको खाने को क्या मिलता है ?" गद्गदाये स्वर में रामरखी ने पूछा । 'यह रोटी' नमूने का एक टुकड़ा देते हुए वालमुकन्द जी ने कहा । "और सोते काहे पर हो ? " मिट्टी के बने फूलों पर ।"
देश में कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिये लागू किये लॉकडाउन में मिली छूट के बाद अब अनेक गतिविधियां शुरू हो रही हैं. फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में भी शांति के बाद अब शूटिंग शुरू हो रही है. वहीं कपिल शर्मा भी अपने शो द कपिल शर्मा शो की शूटिंग शुरू कर चुके हैं. उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर बताया था कि सेट पर एंट्री करने से पहले लोगों को सैनिटाइज किया जा रहा है. उनका टेम्प्रेचर भी चेक होता है. अब शो में जज की भूमिका निभाने वाली अर्चना पूरन सिंह ने शूटिंग के दौरान का वीडियो शेयर किया है, जिसमें सभी मास्क, फेस शील्ड और ग्ल्वस पहनकर शूटिंग करते दिखाई दे रहे हैं. इस वीडियो को अर्चना पूरन सिंह ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है. इसमें कृष्णा अभिषेक और राजीव ठाकुर रिहर्सल करते दिखाई दे रहे हैं. ऑडियंस भी है. पूरी टीम ने गाइडलाइंस को फॉलो करते हुए मास्क, ग्ल्व्स और पीपीई किट भी पहना हुआ है. अर्चना पूरन सिंह ने वीडियो में बताया कि पूरे सेट को सैनिटाइज किया गया है. यहां तक कि कोरोना से बचाव के लिए वो खुद अपने मेकअप का टचअप करती दिखाई दे रही हैं. इसके साथ उन्होंने नई फोटो शेयर लिखा है कि अब यही नया नॉर्मल है. लंबे समय बाद शूटिंग शुरू कर वो बहुत एक्साइडेट हैं.
देश में कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिये लागू किये लॉकडाउन में मिली छूट के बाद अब अनेक गतिविधियां शुरू हो रही हैं. फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में भी शांति के बाद अब शूटिंग शुरू हो रही है. वहीं कपिल शर्मा भी अपने शो द कपिल शर्मा शो की शूटिंग शुरू कर चुके हैं. उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर बताया था कि सेट पर एंट्री करने से पहले लोगों को सैनिटाइज किया जा रहा है. उनका टेम्प्रेचर भी चेक होता है. अब शो में जज की भूमिका निभाने वाली अर्चना पूरन सिंह ने शूटिंग के दौरान का वीडियो शेयर किया है, जिसमें सभी मास्क, फेस शील्ड और ग्ल्वस पहनकर शूटिंग करते दिखाई दे रहे हैं. इस वीडियो को अर्चना पूरन सिंह ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है. इसमें कृष्णा अभिषेक और राजीव ठाकुर रिहर्सल करते दिखाई दे रहे हैं. ऑडियंस भी है. पूरी टीम ने गाइडलाइंस को फॉलो करते हुए मास्क, ग्ल्व्स और पीपीई किट भी पहना हुआ है. अर्चना पूरन सिंह ने वीडियो में बताया कि पूरे सेट को सैनिटाइज किया गया है. यहां तक कि कोरोना से बचाव के लिए वो खुद अपने मेकअप का टचअप करती दिखाई दे रही हैं. इसके साथ उन्होंने नई फोटो शेयर लिखा है कि अब यही नया नॉर्मल है. लंबे समय बाद शूटिंग शुरू कर वो बहुत एक्साइडेट हैं.
उत्तर प्रदेश के कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाले मास्टरमाइंड विकास दुबे को आज सुबह पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया। उत्तर प्रदेश के कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाले मास्टरमाइंड विकास दुबे को आज सुबह पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया। विकास दुबे को उज्जैन से गिरफ्तार कर कानपुर लाया जा रहा था। इसी दौरान उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई और विकास दुबे भागने की कोशिश करने लगा। इसी दौरान पुलिस और विकास दुबे मुठभेड़ हुई और वह मारा गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार तड़के सुबह उज्जैन से कानपुर लेकर आ रही एसटीएफ की टीम की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई। जिसके बाद विकास दुबे ने भागने की कोशिश की और पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस का कहना है कि पुलिस ने उसे आत्मसमर्पण करने के लिए बोला था। लेकिन उसने नहीं किया इस दौरान पुलिस मुठभेड़ में वह मारा गया। जानकारी के लिए बता दें कि बीती 2 जुलाई की रात को गैंगस्टर विकास दुबे की टीम ने 8 पुलिसकर्मियों को शहीद कर दिया था। जिसके बाद से लगातार पुलिस छापेमारी कर रही थी। इस दौरान पुलिस ने बीते 8 दिनों के अंदर विकास दुबे के गैंग का सफाया कर दिया। 8 दिन में छठा एनकाउंटर हुआ है। चारों के एनकाउंटर में लगभग एक जैसी थ्योरी सामने आई कि वे पुलिस पर हमला कर भागने की कोशिश कर रहे थे। पहला एनकाउंटरः बीती 3 जुलाई को पुलिस ने सुबह 7 बजे विकास के मामा प्रेमप्रकाश पांडे और सहयोगी अतुल दुबे को मार गिराया। दूसरा एनकाउंटरः बीती 5 जुलाई को विकास के नौकर और खास सहयोगी दयाशंकर उर्फ कल्लू अग्निहोत्री मार गिराया। मुठभेड़ के दौरान दयाशंकर ने बताया कि विकास दुबे ने पहले ही पुलिसकर्मियों पर हमला करने की प्लानिंग बना रखी थी। यह पूरी एक प्लानिंग थी। जिसके तहत पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया गया। तीसरा एनकाउंटरः बीती 6 जुलाई को यूपी पुलिस ने अमर की मां क्षमा दुबे और दयाशंकर की पत्नी रेखा समेत 3 को गिरफ्तार किया। चौथा एनकाउंटरः एसटीएफ ने विकास के करीबी अमर दुबे को मार गिराया। प्रभात मिश्रा समेत 10 बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। पांचवा एनकाउंटरः बीती 9 जुलाई को उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुख्य आरोपी विकास दुबे को उज्जैन से गिरफ्तार किया। इस दौरान प्रभात मिश्रा और बबुआ दुबे को मुठभेड़ में मार गिराया गया। छठा एनकाउंटरः कानपुर पुलिस और एसटीएफ की टीम ने 10 जुलाई को विकास दुबे को मार गिराया। इससे पहले पुलिस ने विकास दुबे को उज्जैन से गिरफ्तार किया था। जिसके बाद टीम उसे लेकर कानपुर आ रही थी। इस दौरान उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हुई और इस दौरान विकास दुबे भागने की कोशिश में था।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाले मास्टरमाइंड विकास दुबे को आज सुबह पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया। उत्तर प्रदेश के कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाले मास्टरमाइंड विकास दुबे को आज सुबह पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया। विकास दुबे को उज्जैन से गिरफ्तार कर कानपुर लाया जा रहा था। इसी दौरान उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई और विकास दुबे भागने की कोशिश करने लगा। इसी दौरान पुलिस और विकास दुबे मुठभेड़ हुई और वह मारा गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार तड़के सुबह उज्जैन से कानपुर लेकर आ रही एसटीएफ की टीम की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई। जिसके बाद विकास दुबे ने भागने की कोशिश की और पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस का कहना है कि पुलिस ने उसे आत्मसमर्पण करने के लिए बोला था। लेकिन उसने नहीं किया इस दौरान पुलिस मुठभेड़ में वह मारा गया। जानकारी के लिए बता दें कि बीती दो जुलाई की रात को गैंगस्टर विकास दुबे की टीम ने आठ पुलिसकर्मियों को शहीद कर दिया था। जिसके बाद से लगातार पुलिस छापेमारी कर रही थी। इस दौरान पुलिस ने बीते आठ दिनों के अंदर विकास दुबे के गैंग का सफाया कर दिया। आठ दिन में छठा एनकाउंटर हुआ है। चारों के एनकाउंटर में लगभग एक जैसी थ्योरी सामने आई कि वे पुलिस पर हमला कर भागने की कोशिश कर रहे थे। पहला एनकाउंटरः बीती तीन जुलाई को पुलिस ने सुबह सात बजे विकास के मामा प्रेमप्रकाश पांडे और सहयोगी अतुल दुबे को मार गिराया। दूसरा एनकाउंटरः बीती पाँच जुलाई को विकास के नौकर और खास सहयोगी दयाशंकर उर्फ कल्लू अग्निहोत्री मार गिराया। मुठभेड़ के दौरान दयाशंकर ने बताया कि विकास दुबे ने पहले ही पुलिसकर्मियों पर हमला करने की प्लानिंग बना रखी थी। यह पूरी एक प्लानिंग थी। जिसके तहत पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया गया। तीसरा एनकाउंटरः बीती छः जुलाई को यूपी पुलिस ने अमर की मां क्षमा दुबे और दयाशंकर की पत्नी रेखा समेत तीन को गिरफ्तार किया। चौथा एनकाउंटरः एसटीएफ ने विकास के करीबी अमर दुबे को मार गिराया। प्रभात मिश्रा समेत दस बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। पांचवा एनकाउंटरः बीती नौ जुलाई को उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुख्य आरोपी विकास दुबे को उज्जैन से गिरफ्तार किया। इस दौरान प्रभात मिश्रा और बबुआ दुबे को मुठभेड़ में मार गिराया गया। छठा एनकाउंटरः कानपुर पुलिस और एसटीएफ की टीम ने दस जुलाई को विकास दुबे को मार गिराया। इससे पहले पुलिस ने विकास दुबे को उज्जैन से गिरफ्तार किया था। जिसके बाद टीम उसे लेकर कानपुर आ रही थी। इस दौरान उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हुई और इस दौरान विकास दुबे भागने की कोशिश में था।
गाजीपुर जिले के जमानिया कोतवाली अंतर्गत लहूआर गांव में ईंट भट्ठे पर काम करने वाला एक मजदूर परिवार रिहायशी झोपड़ी डालकर रहता था। बुधवार रात दो बजे अचानक आग लगने से झोपड़ी में सो रहे तीन बच्चों की मौत हो गई। जबकि मां जीवन-मौत से जूझ रही है। उसका इलाज वाराणसी में चल रहा है। ईंट-भट्ठे की एक झोपड़ी में बुधवार रात अचानक आग लग गई। अभी कोई कुछ समझ पाता कि पुआल की झोपड़ी धू-धू कर जलने लगी। पिता बबलू बनवासी बेबस और लाचार हो चीखता रहा, लेकिन बेटी और मासूम बेटों को नहीं बचा सका। नब्बे दिन पहले ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर पेट पालने के लिए परिवार के साथ पहुंचे मजदूर की हंसती-खेलती बच्चों की दुनिया आग में तबाह हो गई। घटनास्थल पर शवों को देखकर पत्थर दिल इंसान भी बिलख पड़े। गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ था। अग्निकांड ने मजदूर परिवारों का ऐसा जख्म दिया, जो वे कभी नहीं भूल सकेंगे। रात करीब दो बजे लहुआर गांव के एक ईंट-भट्ठे पर 15 मजदूर अपने परिवार व बच्चों के साथ झोपड़ी में सोए थे। अचानक बचाओ-बचाओ की आवाज सुनकर अन्य मजदूर एवं ग्रामीण बबलू बनवासी की झोपड़ी की तरफ दौड़ पड़े, वहां तीन झोपड़ियां धू-धू कर जल रहीं थीं। लपटें आसमान को छूने को बेताब थीं। लोगों की समझ में नहीं आ रहा था कि आग पर कैसे काबू पाया जाय। कड़ी मशक्कत के बाद आग बुझाई गई तब तक बबलू की बड़ी पुत्री पूजा एवं चंद्रिका की झुलसकर मौत हो चुकी थी। किसी तरह लोगों ने पत्नी भागीरथी देवी और छोटे पुत्र डमरू को बाहर निकाला। आग की लपटें तो शांत हो गई, लेकिन मजदूरों के रोने-बिलखने की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दे रही थी। आनन-फानन में गंभीर रूप से झुलसी भागीरथी और मासूम डमरू को जमानियां पीएचसी लाया गया, जहां से डाक्टरों ने उन्हें वाराणसी रेफर दिया। वहां इलाज के दौरान डमरू की भी मौत हो गई। तीन मासूमों बच्चों की मौत और पत्नी की हालत गंभीर देख बबलू बिलख पड़ रहा था। इधर चंदौली से पहुंचे उसके परिवार के अन्य सदस्य भी बिलखते-रोते बेहोश हो जा रहे थे। ईंट-भट्ठे पर बबलू बनवासी की झोपड़ी के बगल में मिर्जापुर निवासी नंदू और धर्मेंद्र की झोपड़ियां थी। बबलू की झोपड़ी में लगी आग ने पहले नंदू और फिर धर्मेंद्र की झोपड़ी को आगोश में ले लिया। एक साथ तीन झोपड़ियों की विकराल लपटों को देख वहां मौजूद मजदूर एवं ग्रामीण घबड़ा गए। हालांकि नंदू और धर्मेंद्र अपने परिवार के साथ सुरक्षित बाहर निकल गए थे। झोपड़ी में किन परिस्थितियों में आग लगी। यह स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस अपने स्तर से छानबीन करने में जुटी हुई है। ईंट-भट्ठे पर रहने वाले अन्य मजदूरों से भी पूछताछ की जा रही है। लेकिन अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। तीन मासूमों के जिंदा जल जाने के बाद भी जिले के जिम्मेदार अधिकारी घटनास्थल नहीं पहुंचे। यही नहीं किसी जनप्रतिनिधि ने पीड़ितों के आंसू पोंछने की जरूरत नहीं समझी । घटनास्थल पर सिर्फ तहसीलदार, सीओ एवं कोतवाल ही पहुंच पाए थे। यही लोग अधिकारियों को हादसे की जानकारी दे रहे थे।
गाजीपुर जिले के जमानिया कोतवाली अंतर्गत लहूआर गांव में ईंट भट्ठे पर काम करने वाला एक मजदूर परिवार रिहायशी झोपड़ी डालकर रहता था। बुधवार रात दो बजे अचानक आग लगने से झोपड़ी में सो रहे तीन बच्चों की मौत हो गई। जबकि मां जीवन-मौत से जूझ रही है। उसका इलाज वाराणसी में चल रहा है। ईंट-भट्ठे की एक झोपड़ी में बुधवार रात अचानक आग लग गई। अभी कोई कुछ समझ पाता कि पुआल की झोपड़ी धू-धू कर जलने लगी। पिता बबलू बनवासी बेबस और लाचार हो चीखता रहा, लेकिन बेटी और मासूम बेटों को नहीं बचा सका। नब्बे दिन पहले ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर पेट पालने के लिए परिवार के साथ पहुंचे मजदूर की हंसती-खेलती बच्चों की दुनिया आग में तबाह हो गई। घटनास्थल पर शवों को देखकर पत्थर दिल इंसान भी बिलख पड़े। गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ था। अग्निकांड ने मजदूर परिवारों का ऐसा जख्म दिया, जो वे कभी नहीं भूल सकेंगे। रात करीब दो बजे लहुआर गांव के एक ईंट-भट्ठे पर पंद्रह मजदूर अपने परिवार व बच्चों के साथ झोपड़ी में सोए थे। अचानक बचाओ-बचाओ की आवाज सुनकर अन्य मजदूर एवं ग्रामीण बबलू बनवासी की झोपड़ी की तरफ दौड़ पड़े, वहां तीन झोपड़ियां धू-धू कर जल रहीं थीं। लपटें आसमान को छूने को बेताब थीं। लोगों की समझ में नहीं आ रहा था कि आग पर कैसे काबू पाया जाय। कड़ी मशक्कत के बाद आग बुझाई गई तब तक बबलू की बड़ी पुत्री पूजा एवं चंद्रिका की झुलसकर मौत हो चुकी थी। किसी तरह लोगों ने पत्नी भागीरथी देवी और छोटे पुत्र डमरू को बाहर निकाला। आग की लपटें तो शांत हो गई, लेकिन मजदूरों के रोने-बिलखने की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दे रही थी। आनन-फानन में गंभीर रूप से झुलसी भागीरथी और मासूम डमरू को जमानियां पीएचसी लाया गया, जहां से डाक्टरों ने उन्हें वाराणसी रेफर दिया। वहां इलाज के दौरान डमरू की भी मौत हो गई। तीन मासूमों बच्चों की मौत और पत्नी की हालत गंभीर देख बबलू बिलख पड़ रहा था। इधर चंदौली से पहुंचे उसके परिवार के अन्य सदस्य भी बिलखते-रोते बेहोश हो जा रहे थे। ईंट-भट्ठे पर बबलू बनवासी की झोपड़ी के बगल में मिर्जापुर निवासी नंदू और धर्मेंद्र की झोपड़ियां थी। बबलू की झोपड़ी में लगी आग ने पहले नंदू और फिर धर्मेंद्र की झोपड़ी को आगोश में ले लिया। एक साथ तीन झोपड़ियों की विकराल लपटों को देख वहां मौजूद मजदूर एवं ग्रामीण घबड़ा गए। हालांकि नंदू और धर्मेंद्र अपने परिवार के साथ सुरक्षित बाहर निकल गए थे। झोपड़ी में किन परिस्थितियों में आग लगी। यह स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस अपने स्तर से छानबीन करने में जुटी हुई है। ईंट-भट्ठे पर रहने वाले अन्य मजदूरों से भी पूछताछ की जा रही है। लेकिन अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। तीन मासूमों के जिंदा जल जाने के बाद भी जिले के जिम्मेदार अधिकारी घटनास्थल नहीं पहुंचे। यही नहीं किसी जनप्रतिनिधि ने पीड़ितों के आंसू पोंछने की जरूरत नहीं समझी । घटनास्थल पर सिर्फ तहसीलदार, सीओ एवं कोतवाल ही पहुंच पाए थे। यही लोग अधिकारियों को हादसे की जानकारी दे रहे थे।
कुत्तेको अपना भक्त बतलाकर स्वर्गतकका त्याग कर दिया। तुम्हारे इस त्यागकी बराबरी कोई स्वर्गवासी भी नहीं कर सकता ।" ऐसा कह वे युधिष्ठिरको रथ में चढ़ाकर स्वर्ग गये । इस प्रकार महाराज युधिष्टिरने स्वर्गकी भी परत्रा न करके अन्ततक धर्मका पालन किया । जो लोग धर्म और ईश्वरको नहीं मानते, वे धर्म और ईश्वर क्या वस्तु है, इसीको नहीं समझते। उन्होंने न तो कभी इस विषयके शास्त्रोंका ही अध्ययन किया है और न इस विषयका तत्त्व समझनेकी ही कभी चेष्टा की है। उनका इस विषयके अन्तर में प्रवेश न होनेके कारण ही वे इस महान् लाभसे वञ्चित हो रहे हैं । ईश्वरकी आज्ञारूप जो धर्म है, उसका सकामभावसे पालन किया जाता है तो उससे इस लोक और परलोक में सुख मिलता है और यदि उसका निष्कामभावसे पालन किया जाता है तो उससे अपने आत्माका कल्याण हो जाता है। भगवान् ने कहा है -- देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः । परस्परं भावयन्तः श्रेयः (गीता ३ । ११ ) 'तुमलोग इस यज्ञके द्वारा देवताओंको उन्नत करो और त्रे देवता तुमलोगोंको उन्नत करें । इस प्रकार नि स्त्रार्थभावसे एकदूसरेको उन्नत करते हुए तुमलोग परम कल्याणको प्राप्त हो जाओगे ।' अतएव हमें निष्कामभावसे धर्मका पालन करना चाहिये । निष्कामभावसे धर्मका पालन करनेवाला मनुष्य परम पदको प्राप्त हो जाता है । जिसके द्वारा इस जीवनमें और आगे भी पवित्र सुख, शान्ति और समृद्धिमय सफलता प्राप्त हो और अन्त में निरतिशय एवं दुखलेशरहित परम कल्याणरूप आत्यन्तिक सुखकी प्राप्ति हो जाय, उसका नाम धर्म है । विभिन्न कर्मानुसार जीव, जगत् एवं जीवोंके सुख-दुःख एवं उन्नत - अवनतका निर्णय, निर्माण, नियमननियन्त्रण करनेवाली नित्य सत्य चेतन शक्तिका नाम ईश्वर है । त्रिकालज्ञ - सर्वज्ञ ऋषियोंने ईश्वरकी इच्छा और अभिप्रायको जानकर * यतोऽभ्युदयनिःश्रेयससिद्धिः स धर्मः । (वैशेषिकदर्शन ) 'जिसके द्वारा अभ्युदय और निःश्रेयमकी सिद्धि हो, वह धर्म है ।" य एव श्रेयस्करः स एव धर्मशब्देनोच्यते । 'जिसके अनुष्ठानसे ( लौकिक और धर्म कहते हैं । ' ( मीमासादर्शन सूत्र - भाप्य ) पारमार्थिक ) कल्याण हो, उसे ईश्वरस्वरूप वेदोंके अनुकूल जो विधि-निषेधमय कानून बनाये हैं, उनका नाम है - शास्त्र । ईश्वरको मानकर शास्त्रके अनुकूल आचरण करनेवाला मनुष्य इस लोकमें पवित्र सुख, शान्ति एवं समृद्धिको प्राप्त करता हुआ अन्तमें मनुष्य जीवनके चरम फलरूप परमात्माको प्राप्त कर लेता है । यह धर्मका फल है । ईश्वर और धर्म - - जगत्की सर्वाङ्गीण एवं स्थायी उन्नतिके ये ही दो परम आधार हैं। धर्म सदा ही ईश्वरके आश्रित है और जहाँ धर्म है, वहाँ ईश्वर है ही। इन दोनोंमें परस्पर नित्य सम्बन्ध है। ईश्वर का कानून ही धर्म है। और जहाँ धर्म है, वहीं विजय है - सफलता है । 'यतः कृष्णस्ततो धर्मो यतो धर्मस्ततो जय । ( महा० अनु० १६७ । ४१ ) ईश्वर और धर्मके प्रति जब मनुष्यकी अनास्था हो जाती है, तब धर्मका बन्धन ढीला हो जाता है और मनुष्यके आचरण मनमाने होने लगते हैं। मनमाने आचरण करनेवाले को न सिद्धि मिलती है, न सुख और न परम गति ही मिलती है । भगवान्ने गीतानें कहा है--- यः शास्त्रविधिमुत्सृज्य वर्तते कामकारतः । नस मिद्धिमाप्नोति न मुर्ख न परां गतिम् ।। ( १६ । २३ ) 'जो पुरुष शास्त्रविधिको त्यागकर अपनी इच्छा मनमाना आचरण करता है, वह न सिद्धिको प्राप्त होता है, न परम गतिको और न सुखको ही ।' सिद्धि, सुख और परम गति धर्माचरणले ही मिलते । जगत् में आज जो सर्वत्र असफलता और दुःख दिखायी दे रहे हैं, इसका एकमात्र कारण है - मनुष्यका धर्मसे च्युत हो जानाईश्वरको न मानकर उनके अनुकूल आचरण न करना । जगत्का यह दुख तबतक बना रहेगा, जबतक मनुष्य ईश्वर और उनके कानूनको मानकर मनमाना आचरण करता रहेगा । हम सभी सफलता चाहते हैं; परतु ईश्वर और धर्मसे विमुख होकर सफलता चाहना दुराशामात्र ही है । गीता हमें बतलानी है कि सृष्टिके आदिमें जगत्पिता ब्रह्माजीने मनुष्यको यही आदेश दिया था कि 'तुम इन देवताओंकी स्वधर्मपालनरूप यज्ञद्वारा आराधना करो और तुम्हारी सेवासे प्रसन्न एवं परिपुष्ट होकर ये तुम्हारी पुष्टि, तुम्हारी उन्नति करें - 'देवान् भात्रयतानेन ते देवा भावयन्तु वः' ( ३ । ११ ) । ये देवता यदि हमारी सहायता न करें तो हम जगत् में जीवित ही नहीं रह सकते; और इनकी सहायता प्राप्त करनेके लिये यह आवश्यक है कि हम भी बदले में उनकी पुष्टि करें। आज जगत् में विग्रह, महामारी, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, अकाल, भूकम्प, अग्निकाण्ड एव बाढ़ आदिके कारण जो भयङ्कर जन-संहार हो रहा है, उसका प्रधान कारण इन देवताओंका मनुष्यके द्वारा पुष्ट न किया जाना ही है । परंतु आज भी जितना अपराध देवताओंका हम करते हैं, उतना देवता हमारा नहीं करते । सूर्य अभी भी समयपर उगते और समयपर ही अस्त होते हैं । चन्द्रमा अब भी हमपर तथा हमारी ओषधियों एवं वनस्पतियोंपर सुधावृष्टि करते हैं। अग्नि अब भी हमें सदाकी भाँति ताप एवं प्रकाश देती है और हमारे अनेकों कार्य तत्त्व-चिन्तामणि भाग.७ सिद्ध करती है । अवश्य ही इसके कार्यों में बहुत कुछ व्यतिक्रम होने लगा है, परंतु इनके स्वभाव में परिवर्तन नहीं हुआ है। कहते हैं, इनके स्वभाव में परिवर्तन होगा, उस समय प्रलय हो जायगा । अतः जगत् में सुख-समृद्धि के विस्तारके लिये इन देवताओंका पूजन एवं पोषण होना आवश्यक है। लौकिक कार्यों में देवताओंके यजन एवं आराधन से शीघ्र सिद्धि मिलती है । भगवान् गीतामें कहते हैं-काङ्क्षन्तः कर्मणां सिद्धिं यजन्त इह देवताः । क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा ।। (४। १२) 'इस मनुष्यलोकमें कर्मोंके फलको चाहनेवाले लोग देवताओंका पूजन किया करते हैं, क्योंकि उनको कर्मोंसे उत्पन्न होनेवाली सिद्धि शीघ्र मिल जाती है ।। यहाँ इस वातपर ध्यान देना चाहिये कि जहाँ एक ओर भगवान् मनमाने आचरणसे सिद्धिका अभाव बतलाते हैं वहीं दूसरी ओर वे देवताओंके आराधनसे बहुत शीघ्र सिद्धि मिलनेकी बात कहते हैं । इससे लौकिक सिद्धिमें भी देवारावनकी आवश्यकता एवं उपयोगिता सिद्ध होती है । देवाराधनका पञ्चमहायज्ञ एक मुख्य अङ्ग है । इसमें देवताओं, ऋषियों, पितरों, मनुष्यों तथा अन्य जीवोंका यजन किया जाता है । वडिवैश्वदेव इसका प्रतीक है । इनमें देवताओंको अग्निहोत्र तथा पूजनके द्वारा, ऋपियों को स्वाध्यायसे पितरोंको तर्पणादिसे, ईश्वर और धर्ममें विश्वासको आवश्यकता २३७ भोजन आदि के द्वारा और अन्य जीवोंको भी आहार आदिके द्वारा प्रसन्न करना होता है । आजकल पचमहायज्ञोंका अनुठान तो दूर रहा, अधिकाश लोग नियमपूर्वक सन्ध्यावन्दन भी नहीं करते । उसके विपरीत वे ऐसे कर्म करते हैं, जिनसे देवताओंका पोरग. संर्द्धन तो किनारे रहा, उल्टे उनकी शक्ति क्षीण होनी चटी जा रही है। ऐसी दशा में मनुष्यजाति आये दिन देवी का शिकार बने उसमें आश्रर्य ही क्या है । आज मनुष्वका प्राय देवी साधनोंम विश्वास नहीं रहा, अतएव वह केवल भौतिक साधनोंके करने में ही अपने कर्तव्यकी इतिश्री मान बैठा है । आजकउका शिक्षित समाज यज्ञादिके अनुष्ठानपर यो कहकर आपत्ति किया करता है कि इस समय जब कि प्रजापर अन्नका महान् सकट है, लोग अन्नके बिना भूखों मर रहे, हैं, यज्ञ ट्रिके नामवर अन्नका अपव्यय करना --उसे अग्निमें होम देना कितना वड़ा अपराध है । वे लोग यह नहीं सोचते कि आखिर अन्न आता कहाँसे है ? पृथ्वी माताके गर्भसे ही तो ? अन्नके लिये पृथ्वीपर वर्षाका होना भी परमात्रश्यक है, परंतु वर्मा इन्द्रकी कृपाके विना नहीं हो सकती। ऐसी दशामें अन्नको उपजके लिये अन्नका चोया जाना जैसे अपव्यय नहीं कहा जा सकता, उसी प्रकार यज्ञादिम देवताओंकी पुष्टिके लिये अन्न-घी आदिका उपयोग करना उनका दुरुपयोग नहीं कहा जा सकता, बल्कि प्रजाके हितके लिये वह परमावश्यक है । ठीक तरह मे यदि देवाराचन हो तो देवी विपत्तियों आ ही नहीं सकतीं - अकाल, महामारी आदिकिा भय ही न रहे । जगत् में इतना अन्न उपजे कि वह जल्दी समाप्त ही न हो । गोस्वामी तुलसीदासजीने रामचरितमानसमें रामराज्यका इस प्रकार वर्णन किया है --- लता विटप मागें मधु चवहीं । मनभावतो धेनु पय स्रवहीं ।। ससि संपन्न सदा रह धरनी । त्रेता भइ कृतजुग के करनी ॥ प्रगटीं गिरिन्ह विविधि मनि खानी। जगदातमा भूप जग जानी ॥ सरिता सकल बहहिं घर बारी। सीतल अमल खाद सुखकारी ।। सागर निज मरजादाँ रहहीं । डारहिं रत्न तटन्हि नर लहहीं ॥ सरसिज संकुल सकल तड़ागा। अति प्रसन्न दस दिसा विभागा ।। विधु महि पूर मयूखन्हि रवि तप जेतने हि काज । मागें वारिद देहिं जल रामचंद्र के राज ॥ ( उत्तर० २३ ) इसका कारण भी गोस्वामी जीने वहीं लिख दिया हैवरनाश्रम निज निज धरम निरत वेद पथ लोग । चलहिं सदा पावहिं सुखहि नहि भय सोक न रोग ।। ( उत्तर० २० ) आजकउके लोग इस वर्णनको काल्पनिक अथवा अयुक्तिपूर्ण कह सकते हैं; परंतु वास्तव में ऐसी बात नहीं है। जिन देवी शक्तियों के द्वारा जगचकका परिचालन होता है, उन शक्तियोंके प्रसन्न रहनेसे असम्भव भी सम्भव हो सकता है। फिर भगवान् खुकुलचूड़ामणि श्रीरामचन्द्रजी तो साक्षात् परमेश्वर ही थे। सारी शक्तियों के अनन्त निवि थे। उनके राज्य में ऐसा हो तो उसमें आवर्यकी कौन-सी बात है धार्मिक लोगोंका ऐसा विश्वास ही नहीं, अनुभव भी है। वे लोग ऐसा मानते है कि लौकिक उपायों से उतना लाभ नहीं होता, जितना दैवी उपायोंसे सम्भव है । किसी वृक्षको हरा-भरा देखनेका एकमात्र उपाय है-उसकी जड़को सींचना । वृक्षके मूलमें सींचा हुआ जल डालके तनेको ही नहीं बल्कि उसकी शाखा-प्रशाखाओं एवं छोटी-छोटी टहनियों, पत्तियों, फूलों तथा फलोतकोआप्यायित कर देता है, उनमें रस भर देता है । इसके विपरीत यदि वृक्षके मूलमें जल न देकर केवल उसके पत्तों, फलो एवं टहनियों आदिको ही सींचा जाय तो उससे कोई लाभ नहीं होगा, वृक्ष हरा-भरा होनेके बदले जल्दी ही सूख जायगा और मर जायगा । जगतुके सुख-शान्तिके विस्तार एवं देवी आपदाओंको टालने के लिये भगवदाराधन और भगवान् के आज्ञानुसार देवाराधनादि कर्तव्यपालनको छोड़कर केवल बाहरी उपाय करना तो वृक्षकी जड़को न सींचकर केवल पत्तोंको सींचनेके समान ही है। मानत्रका वाह्य भौतिक प्रयत्न आज कम नहीं है । लौकिक सुख तथा शरीरको आराम पहुॅचानेके साधन जितने आज उपलब्ध हैं, उतने पहले कभी थे -- यह कहा नहीं जा सकता । क्योंकि पारमार्थिक उन्नतिमें बाधक होनेके कारण उस समय भौतिक सुखका इतना आदर नहीं था । परंतु यह मूलमें जल न देकर डालीपत्तोंको सींचना है, इसलिये इनसे सफलता न होकर व्यर्थता ही मिलती है । सुख-शान्तिके लिये जितने बाह्य उपाय किये जाते हैं, उतना ही जगत् में दु.ख और अशान्ति बढ़ती जा रही है । यह बात नहीं है कि लोगोंको देवाराधनके लिये अवकाश नहीं है । समय तो है परंतु अधिकाश मनुष्योंका दैवी साधनोंमें विश्वास ही उठ गया है। विश्वास होनेपर समय आसानीसे निकल सकता है । सिनेमा देखने, सभा-सोसाइटियोंमें जाकर व्याख्यान देने, क्लबोंमें जाकर अनुचित आमोद-प्रमोदमें तथा भोजोंमें सम्मिलित होनेके लिये आज लोग समय निकाल ही लेते हैं । प्राचीन कालमें ऐसी बात नहीं थी । बडे-बडे चक्रवर्ती नरेश भी देवाराधन तथा अन्य धार्मिक कृत्यों में अपना समय लगाया करते थे। द्विजातिमात्रके लिये सन्ध्या, तर्पण, बलिवैश्वदेव, गायत्री जप तथा अग्निहोत्र आदि अनेवार्य माने जाते थे। महाभारत में वर्णन आता है कि महाराज युधिष्ठिर जुएमें अपना सर्वस्व हारकर जब वनमें गये, उस समय अग्निहोत्रकी अग्नियाँ उनके साथ थीं। इतना ही नहीं, घोर युद्धके समय जब लड़ते-लडते सूर्यास्तका समय हो जाता था और किसी पक्षकी विजय नहीं होती थी, उस समय दोनों पक्षोंकी सम्मतिसे युद्ध बंद कर दिया जाता था और उभयपक्षके योद्धा सायं सन्ध्योपासना के लिये बैठ जाते थे । महाराज दिलीपकी कथा प्रसिद्ध है कि वे गुरुकी आज्ञासे अपनी राजोचित मानमर्यादाका परित्याग कर एक साधारण सेवककी भौति वनमें जाकर अपने गुरुकी गायकी सेवा करते थे । स्त्रयं भगवान् श्रीकृष्णकी दिनचर्याका वर्णन श्रीमद्भागवत में मिलता है। वहाँ लिखा है कि वे प्रतिदिन पहर रात रहते उठ जाते थे और उठकर आचमन करके आत्मचिन्तन करने बैठ जाते थे । फिर विधिपूर्वक निमज्जन ( जलमे गोता लगाकर स्नान ) करके नवीन वस्त्र धारण कर सन्ध्या-चन्दन तथा अग्निहोत्र करते थे और फिर मौन होकर गायत्री मन्त्रका जाप करते थे । इसके अनन्तर सूर्योपस्थान तथा ईश्वर और धर्म में विश्वासकी आवश्यकता २४९ अपनी ही कटारूप देवता, ऋषि एवं पितरोका तर्पण करते थे, ब्राह्मणोका पूजन करते थे और फिर वस्त्र, तिल तथा वस्त्राभूषणोंसे अलङ्कत १३०८४ गौओंका प्रतिदिन दान करते थे। इसके बाद वे गौ, ब्राह्मण, देवता, बड़े-बूढे तथा गुरुजनोंको प्रणाम करते थे । इस प्रकार उनका बहुत-सा समय नित्य धार्मिक कृत्योंमें बीतता था । ( श्रीमद्भागवत १० स्कन्ध, ७० अध्याय देखिये ।) भगवान् श्रीकृष्ण के जैसा कर्ममय जीवन तो किसका हो सकता है। फिर भी वे नियमितरूपसे दो पहरका काल धार्मिक कृत्यों में बिताते थे । किसलिये ? इसका उत्तर उन्हींके शब्दोंमे सुनिये । गीतामें वे स्वयं कहते हैं-न मे पार्थास्ति कर्तव्यं त्रिषु लोकेषु किंचन । नानवासमवाप्तव्यं वर्त एव च कर्मणि ॥ यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः । मम वर्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥ उत्सीदेयुरिमे लोका न कुर्या कर्म चेदहम् । संकरस्य च कर्ता स्यामुपहन्यामिमाः प्रजाः ॥ 'हे अर्जुन । मुझे इन तीनों लोकोंमें न तो कुछ कर्तव्य हैं और न कोई भी प्राप्त करनेयोग्य वस्तु अप्राप्त है, तो भी मैं कर्ममें ही वरतता हूँ। क्योंकि हे पार्थ ! यदि कदाचित् में सावधान बरतें तो बड़ी हानि हो जाय, क्योंकि मनुष्य सव प्रकारसे मेरे ही मार्गका अनुसरण करते हैं । इसलिये यदि में कर्म न करूँ तो ये सब मनुष्य नष्ट-भ्रष्ट हो जायँ और मैं सकरताका करनेवाला होऊ तथा इस समस्त प्रजाको नष्ट करनेवाला बनूँ ।। असलमें उस समय वृक्षके पत्तोंको न सींचकर मूल सींचनेकी भोति भौतिक साधनोंकी अपेक्षा दैवी साधनों पर अधिक आस्था थी । धार्मिक जनताकी बात जाने दीजिये - हिरण्याक्ष-हिरण्यकशिपु तथा रावण-कुम्भकर्ण-जैसे महान् असुरोंका भी तप एवं यज्ञ-यागादि में विश्वास था, चाहे उनका लक्ष्य कितना ही दुष्ट रहा हो । हिरण्यकशिपुने अपने अभूतपूर्व तपके द्वारा ब्रह्माजीको प्रसन्न किया था और रावणने अपने हाथों अपने सिरोंकी बलि देकर शङ्करजीका अमोघ वर प्राप्त किया था। यह बात दूसरी है कि देवाराधनके द्वारा प्राप्त शक्तिका दुरुपयोग करके अधर्माचरणके द्वारा वे भगवान् के कोपभाजन बने और अन्तमें अपनी दुर्दम्य शक्ति, सर्वस्व एव प्यारे प्राणोंसे भी हाथ धो बैठे। परन्तु आरम्भ श्रेष्ठ होनेके कारण वे भी भगवान्के हाथों मरकर अन्तमें परम कल्याणको ही प्राप्त हुए । उनके चरित्रसे हमें यह भी शिक्षा मिलती है कि जिस प्रकार तपस्या एव देवाराधन के द्वारा शक्तिसञ्चय होता है, उसी प्रकार धर्मविरुद्ध आचरणके द्वारा उस शक्तिको हम खो बैठते हैं । लौकिक साधनोंके द्वारा शक्ति सञ्चय तो होता है, परन्तु वह अधिक दिन टिकता नहीं । जर्मनीने थोडे ही दिनोंमें कितनी शक्ति अर्जन कर ली थी, पर आज वह देश पराधीन हो गया है । यूरोप आज कितना समृद्धिशाली माना जाता है और है भी, परन्तु वहाँ कितना हाहाकार मचा हुआ है- -इसे वहाँके निवासी ही जानते हैं । अमेरिका इस समय सबसे अधिक ईश्वर और धर्ममें विश्वासकी आवश्यकता २४३ बलशाली तथा समृद्ध राष्ट्र माना जाता है; परन्तु वहाँ भी सुख-शान्ति नहीं है। बहुत से लोग अशान्तिमय जीवनसे दुखी होकर आत्मघात करते सुने जाते हैं। पारस्परिक राग-द्वेष एवं प्रतिहिंसाके भाव भी कम नहीं हैं, और तो क्या, पति-पत्नियोंके भी आपसमें बहुत संख्यामे मुकद्दमे होते रहते हैं । जापानने थोड़े ही वर्षों में इतनी उन्नति कर ली थी कि वह ससारकी बड़ी-बडी शक्तियोंमे गिना जाने लगा था । पर आज उसकी क्या दशा हैइसे सब लोग जानते हैं । इस प्रकार परिणाम में प्राप्त होनेवाली इस असफलताका कारण है - प्रयत्नकी अधर्ममूलकता । अधर्ममूलक कर्मसे आरम्भ में चाहे सफलता दीखे, पर परिणाममें असफलता ही हाथ लगती है । अधर्ममूलक प्रयत्न व्यर्थ ही नहीं जाते, उनसे परलोकमे भी दुर्गति भोगनी पड़ती है । आसुरी सम्पदा और उससे होनेवाले अनिष्टकर परिणामोंका भगवान्ने गीताके सोलहवें अध्याय में बड़ा ही सुन्दर एवं विशद वर्णन किया है। कहना न होगा कि आजका मानव स्पष्ट ही असुर-मानव होने जा रहा है और उसके कर्म प्रायः आज वैसे ही हैं, जैसे भगवान्ने आसुरी सम्पदावालोंके बताये है । फलतः इस लोकमें दु.ख और अशान्ति तथा परलोकमें घोर नारकी यन्त्रणाएँ अनिवार्य हैं, चाहे कोई इसे माने या न माने । यह ऊपर बताया जा चुका है कि धर्म और ईश्वर - ये दो ही सुख, सफलता एवं परम गतिके एकमात्र आधार हैं । परन्तु आजका अभिमानमत्त असुर- मानव इन्हींको अनावश्यक एवं व्याय मानने लगा है । कुछ ही वर्षों पूर्व रूसवासियोंने बहुमतसे ईश्वर और धर्मका बहिष्कार करनेका दु. साहस किया था। (सौभाग्यकी बात है कि पिछले युद्धकी विभीषिकाने उनकी आँखें खोल दीं और आज वे खुल्लमखुल्डा ईश्वर तथा धर्मका विरोध नहीं करते एव वहाँके गिरजाघरों में फिरसे ईश्वरकी प्रार्थना होने लगी है ।) पश्चिमके लोगोंकी देखा-देखी हम भारतवासी भी आज यह कहने लगे हैं कि धर्मसे ही हमारा पतन हुआ है, ईश्वरके प्रति विश्वासने ही हमे अधोगतिपर पहुॅचाया है। इसीका परिणाम यह है कि आज हम पापसे नहीं डरते । ईश्वर और धर्ममें विश्वास करनेवाला एकान्तमें भी पाप करनेसे झिझकेगा, क्योंकि वह जानता है कि ईश्वर सर्वव्यापी एव सर्वतश्चक्षु हैं । किन्तु ईश्वर और धर्मको न माननेवाला पापसे नहीं डरेगा, केवल कानूनसे बचनेकी चेष्टा करेगा । यही कारण है कि आज लोग कानूनसे बचनेके नये-नये उपाय निकालकर नाना प्रकारके पाप करते हैं । ईश्वर और धर्म के प्रति अविश्वासके कारण ही आज प्रायः सभी क्षेत्रोंमें घूसखोरी बढ़ गयी है। चोरवाजार और जनताके सकटोंसे लाभ उठानेकी जघन्य मनोवृत्ति भी इसीके परिणाम हैं । सरकार घूसखोरी और चोरबाजारीको रोकनेके लिये नये महकमे खोलने जा रही है, परन्तु इस बुराईको रोकने के लिये नियुक्त किये जानेवाले अधिकारी भी तो हमारे-ही-जैसे मनुष्य होंगे। वे घूसखोरी और चोरबाजारीको रोकने जाकर स्वय इनके शिकार नहीं बन जायेंगे - यह कौन कह सकता है। आज तो यह स्थिति है कि जनताके रक्षक कहलानेवाले भी जनताको दोनों हाथोंसे लूटने लगे हैं। इसका कारण यही है कि हमारे मनोंमें धर्म और ईश्वरका भय नहीं रहा; इसकी ओर किसीका ध्यान नहीं है । इसीलिये क्षुद्र स्वार्थ की सिद्धि के लिये किसी भी पाप-कर्ममे संकोच नहीं है । पकडे न जायँ, फिर चाहे सो करें; कोई आपत्ति नहीं । और इसीलिये कानूनको बचाकर पाप करना आजकल बुद्धिमानीका चिह्न हो गया है । सर्वव्यापी भगवान् सब कुछ देखते हैं, हृदयके अंदरकी बात भी जानते हैं - यह धारणा प्राय मिट गयी है । एक कथा आती है कि एक बार किसी महात्माके पास दो शिष्य ज्ञान प्राप्त करनेके उद्देश्यसे गये । गुरुजीने दोनों को एक-एक चिडिया देकर कहा कि 'इसे किसी ऐसे स्थानमें ले जाकर मार डालो, जहाँ कोई न देखता हो ।" पहला शिष्य गुरुजीकी आज्ञा मानकर तुरंत उसे किसी निर्जन स्थानमें ले जाकर मार लाया । दूसरे शिष्यने बहुत चेष्टा की, परन्तु उसे ऐसा कोई स्थान ही नहीं मिला, जहाँ कोई न देखता हो । वह जहाँ भी गया, वहाँ कोई-नकोई देखनेवाला था ही । कहीं कोई पशु बैठा था तो कहीं कोई पक्षी । जहाँ कोई भी जीव नहीं मिला, वहाँ उसने देखा कि और नहीं तो वायु देवता तो वहाँ हैं ही; एकान्त वनमें भी उसने सोचा कि यहाॅ वनदेवी तो अवश्य होंगी । वह कहीं भी जाता पृथ्वीमाता तो मौजूद ही रहती, सूर्य भगवान् तो हैं ही; कोई भी नहीं, वहाँ भी स्वयं वह और उसके अपने अंदरका अन्तर्यामी द्रष्टा तो था ही । अन्तमें वह निराश होकर लौट आया और जहाँ पहला शिष्य अपनी करतूतपर गर्वित था, वहाँ यह गुरुजीकी आज्ञाका पालन न कर सकनेके कारण विषण्णवदन होकर खेद प्रकट करने लगा । परीक्षा हो गयी । गुरुजीने समझ लिया कि दूसरा शिष्य ही ज्ञानका वास्तविक अधिकारी है, क्योंकि वह भगवान्को सर्वत्र देखता था । गुरुजी समर्थ थे। उन्होंने पहले शिष्यद्वारा मारी हुई चिडियाको जिला दिया। जात्पर्य यह है कि आजका मनुष्य पहले शिष्यकी भाँति प्रत्यक्षवादी हो गया है । अधर्मका फल प्रत्यक्ष तो दीखता नहीं । इसीलिये लोग झूठ बोलने में, झूठी गवाही देनेमें, झूठे आँकड़े बनाने में नहीं हिचकते। कहीं पकड़े भी जाते हैं तो यही सोचते हैं कि 'मैंने अमुक जाल बनानेमें भूल कर दी, आगे और भी सावधान रहूँगा ।" उस समय भी यह नहीं सोचते कि 'मैने झूठ बोलकर पाप किया है, इसका परिणाम अच्छा नहीं होगा ।" आज तो हमारा यहाँतक पतन हो गया है कि ईश्वर और धर्मको माननेवालोंको आजका शिक्षित समाज पाखण्डी और मूर्ख मानने लगा है। यही नहीं, सभ्य समाज में लोग अग्ज अपनेको ईश्वरवादी कहनेमे भी हिचकने लगे हैं । यह सत्य है कि आज अपनेको ईश्वरवादी और धार्मिक कहलानेवालों में पाखण्डी भी बहुत-से हैं और वे नास्तिकोंसे भी अधिक भयकर और नास्तिकता के उत्पादक हैं, परन्तु ऐसे लोगोंसे ईश्वर और धर्मका अपलाप ( बाध ) नहीं हो सकता । सत्य तो सत्य ही रहेगा । उसका त्रिकालमें भी बाध नहीं हो सकता । अवश्य ही उसे न माननेवाला उसके लाभसे वञ्चित रहेगा और नष्ट हो जायगा । जो कुछ सहृदय महानुभाव जनताका दुःख दूर करना, सर्वत्र सुख-शान्तिका प्रसार करना, अनाचार अत्याचारको मिटाकर सबको समान भावसे लौकिक पदार्थों की प्राप्ति कराना और सबको आराम पहुँचाना चाहते हैं, उनमें भी अधिकांश ऐसे हैं जो, इस उद्देश्यकी सिद्धि के लिये स्वयं केवल लौकिक उपायोंको ही काम में लाते हैं और उन्हींके लिये दूसरोंको भी उपदेश करते हैं। धर्म और ईश्वरमें, जो सुख-शान्तिके मूल हैं, विश्वास बढ़नेका साधन न तो वे करते हैं और न उसे करनेके लिये दूसरोंको ही उपदेश करते हैं । यही कारण है कि आज जगत् में सर्वत्र हाहाकार मचा हुआ है और मानवजाति दु खाग्निको जालासे जल रही है ! धर्म और ईश्वर नित्य हैं, अटल हैं, महान् है । ऐसा समझकर हमें अपने कल्याण के लिये उनका आश्रय लेकर उनका प्रचार करना चाहिये । 'वर्मो रक्षति रक्षितः ।' जो बुद्धिमान् एवं विचारशील हैं, उनका कर्तव्य है कि वे धर्मानुकूल आचरणके द्वारा धार्मिक भावोंका प्रचार करें । स्वयं धर्मानुकूल आचरण किये विना कोई धर्मका प्रचार नहीं कर सकता । वास्तवमें तो ईश्वर और धर्मका प्रचार कोई कर ही क्या सकता है। ईश्वर सर्वसमर्थ हैं । उनकी शक्तिसे ही सब कुछ हो रहा है। कल्याणकामी सभी मनुष्योंको एक-न-एक दिन उन्हें मानना ही पड़ेगा । बिना माने जीवका निस्तार नहीं है, फिर भी प्रत्येक धार्मिक एवं ईश्वरवादी मनुष्यका यह कर्तव्य है कि वह ईश्वरका आश्रय लेकर अपने आचरणद्वारा जगत्में ईश्वर और धर्मका प्रचार करे । स्वयं ईश्वर और धर्मकी ओर आगे बढे तथा सबको वढ़ानेका प्रयत्न करे । यही जगत् की सबसे बड़ी सेवा है । इसीसे जगत्का वास्तत्रिक कल्याण होगा ।
कुत्तेको अपना भक्त बतलाकर स्वर्गतकका त्याग कर दिया। तुम्हारे इस त्यागकी बराबरी कोई स्वर्गवासी भी नहीं कर सकता ।" ऐसा कह वे युधिष्ठिरको रथ में चढ़ाकर स्वर्ग गये । इस प्रकार महाराज युधिष्टिरने स्वर्गकी भी परत्रा न करके अन्ततक धर्मका पालन किया । जो लोग धर्म और ईश्वरको नहीं मानते, वे धर्म और ईश्वर क्या वस्तु है, इसीको नहीं समझते। उन्होंने न तो कभी इस विषयके शास्त्रोंका ही अध्ययन किया है और न इस विषयका तत्त्व समझनेकी ही कभी चेष्टा की है। उनका इस विषयके अन्तर में प्रवेश न होनेके कारण ही वे इस महान् लाभसे वञ्चित हो रहे हैं । ईश्वरकी आज्ञारूप जो धर्म है, उसका सकामभावसे पालन किया जाता है तो उससे इस लोक और परलोक में सुख मिलता है और यदि उसका निष्कामभावसे पालन किया जाता है तो उससे अपने आत्माका कल्याण हो जाता है। भगवान् ने कहा है -- देवान्भावयतानेन ते देवा भावयन्तु वः । परस्परं भावयन्तः श्रेयः 'तुमलोग इस यज्ञके द्वारा देवताओंको उन्नत करो और त्रे देवता तुमलोगोंको उन्नत करें । इस प्रकार नि स्त्रार्थभावसे एकदूसरेको उन्नत करते हुए तुमलोग परम कल्याणको प्राप्त हो जाओगे ।' अतएव हमें निष्कामभावसे धर्मका पालन करना चाहिये । निष्कामभावसे धर्मका पालन करनेवाला मनुष्य परम पदको प्राप्त हो जाता है । जिसके द्वारा इस जीवनमें और आगे भी पवित्र सुख, शान्ति और समृद्धिमय सफलता प्राप्त हो और अन्त में निरतिशय एवं दुखलेशरहित परम कल्याणरूप आत्यन्तिक सुखकी प्राप्ति हो जाय, उसका नाम धर्म है । विभिन्न कर्मानुसार जीव, जगत् एवं जीवोंके सुख-दुःख एवं उन्नत - अवनतका निर्णय, निर्माण, नियमननियन्त्रण करनेवाली नित्य सत्य चेतन शक्तिका नाम ईश्वर है । त्रिकालज्ञ - सर्वज्ञ ऋषियोंने ईश्वरकी इच्छा और अभिप्रायको जानकर * यतोऽभ्युदयनिःश्रेयससिद्धिः स धर्मः । 'जिसके द्वारा अभ्युदय और निःश्रेयमकी सिद्धि हो, वह धर्म है ।" य एव श्रेयस्करः स एव धर्मशब्देनोच्यते । 'जिसके अनुष्ठानसे पारमार्थिक ) कल्याण हो, उसे ईश्वरस्वरूप वेदोंके अनुकूल जो विधि-निषेधमय कानून बनाये हैं, उनका नाम है - शास्त्र । ईश्वरको मानकर शास्त्रके अनुकूल आचरण करनेवाला मनुष्य इस लोकमें पवित्र सुख, शान्ति एवं समृद्धिको प्राप्त करता हुआ अन्तमें मनुष्य जीवनके चरम फलरूप परमात्माको प्राप्त कर लेता है । यह धर्मका फल है । ईश्वर और धर्म - - जगत्की सर्वाङ्गीण एवं स्थायी उन्नतिके ये ही दो परम आधार हैं। धर्म सदा ही ईश्वरके आश्रित है और जहाँ धर्म है, वहाँ ईश्वर है ही। इन दोनोंमें परस्पर नित्य सम्बन्ध है। ईश्वर का कानून ही धर्म है। और जहाँ धर्म है, वहीं विजय है - सफलता है । 'यतः कृष्णस्ततो धर्मो यतो धर्मस्ततो जय । ईश्वर और धर्मके प्रति जब मनुष्यकी अनास्था हो जाती है, तब धर्मका बन्धन ढीला हो जाता है और मनुष्यके आचरण मनमाने होने लगते हैं। मनमाने आचरण करनेवाले को न सिद्धि मिलती है, न सुख और न परम गति ही मिलती है । भगवान्ने गीतानें कहा है--- यः शास्त्रविधिमुत्सृज्य वर्तते कामकारतः । नस मिद्धिमाप्नोति न मुर्ख न परां गतिम् ।। 'जो पुरुष शास्त्रविधिको त्यागकर अपनी इच्छा मनमाना आचरण करता है, वह न सिद्धिको प्राप्त होता है, न परम गतिको और न सुखको ही ।' सिद्धि, सुख और परम गति धर्माचरणले ही मिलते । जगत् में आज जो सर्वत्र असफलता और दुःख दिखायी दे रहे हैं, इसका एकमात्र कारण है - मनुष्यका धर्मसे च्युत हो जानाईश्वरको न मानकर उनके अनुकूल आचरण न करना । जगत्का यह दुख तबतक बना रहेगा, जबतक मनुष्य ईश्वर और उनके कानूनको मानकर मनमाना आचरण करता रहेगा । हम सभी सफलता चाहते हैं; परतु ईश्वर और धर्मसे विमुख होकर सफलता चाहना दुराशामात्र ही है । गीता हमें बतलानी है कि सृष्टिके आदिमें जगत्पिता ब्रह्माजीने मनुष्यको यही आदेश दिया था कि 'तुम इन देवताओंकी स्वधर्मपालनरूप यज्ञद्वारा आराधना करो और तुम्हारी सेवासे प्रसन्न एवं परिपुष्ट होकर ये तुम्हारी पुष्टि, तुम्हारी उन्नति करें - 'देवान् भात्रयतानेन ते देवा भावयन्तु वः' । ये देवता यदि हमारी सहायता न करें तो हम जगत् में जीवित ही नहीं रह सकते; और इनकी सहायता प्राप्त करनेके लिये यह आवश्यक है कि हम भी बदले में उनकी पुष्टि करें। आज जगत् में विग्रह, महामारी, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, अकाल, भूकम्प, अग्निकाण्ड एव बाढ़ आदिके कारण जो भयङ्कर जन-संहार हो रहा है, उसका प्रधान कारण इन देवताओंका मनुष्यके द्वारा पुष्ट न किया जाना ही है । परंतु आज भी जितना अपराध देवताओंका हम करते हैं, उतना देवता हमारा नहीं करते । सूर्य अभी भी समयपर उगते और समयपर ही अस्त होते हैं । चन्द्रमा अब भी हमपर तथा हमारी ओषधियों एवं वनस्पतियोंपर सुधावृष्टि करते हैं। अग्नि अब भी हमें सदाकी भाँति ताप एवं प्रकाश देती है और हमारे अनेकों कार्य तत्त्व-चिन्तामणि भाग.सात सिद्ध करती है । अवश्य ही इसके कार्यों में बहुत कुछ व्यतिक्रम होने लगा है, परंतु इनके स्वभाव में परिवर्तन नहीं हुआ है। कहते हैं, इनके स्वभाव में परिवर्तन होगा, उस समय प्रलय हो जायगा । अतः जगत् में सुख-समृद्धि के विस्तारके लिये इन देवताओंका पूजन एवं पोषण होना आवश्यक है। लौकिक कार्यों में देवताओंके यजन एवं आराधन से शीघ्र सिद्धि मिलती है । भगवान् गीतामें कहते हैं-काङ्क्षन्तः कर्मणां सिद्धिं यजन्त इह देवताः । क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा ।। 'इस मनुष्यलोकमें कर्मोंके फलको चाहनेवाले लोग देवताओंका पूजन किया करते हैं, क्योंकि उनको कर्मोंसे उत्पन्न होनेवाली सिद्धि शीघ्र मिल जाती है ।। यहाँ इस वातपर ध्यान देना चाहिये कि जहाँ एक ओर भगवान् मनमाने आचरणसे सिद्धिका अभाव बतलाते हैं वहीं दूसरी ओर वे देवताओंके आराधनसे बहुत शीघ्र सिद्धि मिलनेकी बात कहते हैं । इससे लौकिक सिद्धिमें भी देवारावनकी आवश्यकता एवं उपयोगिता सिद्ध होती है । देवाराधनका पञ्चमहायज्ञ एक मुख्य अङ्ग है । इसमें देवताओं, ऋषियों, पितरों, मनुष्यों तथा अन्य जीवोंका यजन किया जाता है । वडिवैश्वदेव इसका प्रतीक है । इनमें देवताओंको अग्निहोत्र तथा पूजनके द्वारा, ऋपियों को स्वाध्यायसे पितरोंको तर्पणादिसे, ईश्वर और धर्ममें विश्वासको आवश्यकता दो सौ सैंतीस भोजन आदि के द्वारा और अन्य जीवोंको भी आहार आदिके द्वारा प्रसन्न करना होता है । आजकल पचमहायज्ञोंका अनुठान तो दूर रहा, अधिकाश लोग नियमपूर्वक सन्ध्यावन्दन भी नहीं करते । उसके विपरीत वे ऐसे कर्म करते हैं, जिनसे देवताओंका पोरग. संर्द्धन तो किनारे रहा, उल्टे उनकी शक्ति क्षीण होनी चटी जा रही है। ऐसी दशा में मनुष्यजाति आये दिन देवी का शिकार बने उसमें आश्रर्य ही क्या है । आज मनुष्वका प्राय देवी साधनोंम विश्वास नहीं रहा, अतएव वह केवल भौतिक साधनोंके करने में ही अपने कर्तव्यकी इतिश्री मान बैठा है । आजकउका शिक्षित समाज यज्ञादिके अनुष्ठानपर यो कहकर आपत्ति किया करता है कि इस समय जब कि प्रजापर अन्नका महान् सकट है, लोग अन्नके बिना भूखों मर रहे, हैं, यज्ञ ट्रिके नामवर अन्नका अपव्यय करना --उसे अग्निमें होम देना कितना वड़ा अपराध है । वे लोग यह नहीं सोचते कि आखिर अन्न आता कहाँसे है ? पृथ्वी माताके गर्भसे ही तो ? अन्नके लिये पृथ्वीपर वर्षाका होना भी परमात्रश्यक है, परंतु वर्मा इन्द्रकी कृपाके विना नहीं हो सकती। ऐसी दशामें अन्नको उपजके लिये अन्नका चोया जाना जैसे अपव्यय नहीं कहा जा सकता, उसी प्रकार यज्ञादिम देवताओंकी पुष्टिके लिये अन्न-घी आदिका उपयोग करना उनका दुरुपयोग नहीं कहा जा सकता, बल्कि प्रजाके हितके लिये वह परमावश्यक है । ठीक तरह मे यदि देवाराचन हो तो देवी विपत्तियों आ ही नहीं सकतीं - अकाल, महामारी आदिकिा भय ही न रहे । जगत् में इतना अन्न उपजे कि वह जल्दी समाप्त ही न हो । गोस्वामी तुलसीदासजीने रामचरितमानसमें रामराज्यका इस प्रकार वर्णन किया है --- लता विटप मागें मधु चवहीं । मनभावतो धेनु पय स्रवहीं ।। ससि संपन्न सदा रह धरनी । त्रेता भइ कृतजुग के करनी ॥ प्रगटीं गिरिन्ह विविधि मनि खानी। जगदातमा भूप जग जानी ॥ सरिता सकल बहहिं घर बारी। सीतल अमल खाद सुखकारी ।। सागर निज मरजादाँ रहहीं । डारहिं रत्न तटन्हि नर लहहीं ॥ सरसिज संकुल सकल तड़ागा। अति प्रसन्न दस दिसा विभागा ।। विधु महि पूर मयूखन्हि रवि तप जेतने हि काज । मागें वारिद देहिं जल रामचंद्र के राज ॥ इसका कारण भी गोस्वामी जीने वहीं लिख दिया हैवरनाश्रम निज निज धरम निरत वेद पथ लोग । चलहिं सदा पावहिं सुखहि नहि भय सोक न रोग ।। आजकउके लोग इस वर्णनको काल्पनिक अथवा अयुक्तिपूर्ण कह सकते हैं; परंतु वास्तव में ऐसी बात नहीं है। जिन देवी शक्तियों के द्वारा जगचकका परिचालन होता है, उन शक्तियोंके प्रसन्न रहनेसे असम्भव भी सम्भव हो सकता है। फिर भगवान् खुकुलचूड़ामणि श्रीरामचन्द्रजी तो साक्षात् परमेश्वर ही थे। सारी शक्तियों के अनन्त निवि थे। उनके राज्य में ऐसा हो तो उसमें आवर्यकी कौन-सी बात है धार्मिक लोगोंका ऐसा विश्वास ही नहीं, अनुभव भी है। वे लोग ऐसा मानते है कि लौकिक उपायों से उतना लाभ नहीं होता, जितना दैवी उपायोंसे सम्भव है । किसी वृक्षको हरा-भरा देखनेका एकमात्र उपाय है-उसकी जड़को सींचना । वृक्षके मूलमें सींचा हुआ जल डालके तनेको ही नहीं बल्कि उसकी शाखा-प्रशाखाओं एवं छोटी-छोटी टहनियों, पत्तियों, फूलों तथा फलोतकोआप्यायित कर देता है, उनमें रस भर देता है । इसके विपरीत यदि वृक्षके मूलमें जल न देकर केवल उसके पत्तों, फलो एवं टहनियों आदिको ही सींचा जाय तो उससे कोई लाभ नहीं होगा, वृक्ष हरा-भरा होनेके बदले जल्दी ही सूख जायगा और मर जायगा । जगतुके सुख-शान्तिके विस्तार एवं देवी आपदाओंको टालने के लिये भगवदाराधन और भगवान् के आज्ञानुसार देवाराधनादि कर्तव्यपालनको छोड़कर केवल बाहरी उपाय करना तो वृक्षकी जड़को न सींचकर केवल पत्तोंको सींचनेके समान ही है। मानत्रका वाह्य भौतिक प्रयत्न आज कम नहीं है । लौकिक सुख तथा शरीरको आराम पहुॅचानेके साधन जितने आज उपलब्ध हैं, उतने पहले कभी थे -- यह कहा नहीं जा सकता । क्योंकि पारमार्थिक उन्नतिमें बाधक होनेके कारण उस समय भौतिक सुखका इतना आदर नहीं था । परंतु यह मूलमें जल न देकर डालीपत्तोंको सींचना है, इसलिये इनसे सफलता न होकर व्यर्थता ही मिलती है । सुख-शान्तिके लिये जितने बाह्य उपाय किये जाते हैं, उतना ही जगत् में दु.ख और अशान्ति बढ़ती जा रही है । यह बात नहीं है कि लोगोंको देवाराधनके लिये अवकाश नहीं है । समय तो है परंतु अधिकाश मनुष्योंका दैवी साधनोंमें विश्वास ही उठ गया है। विश्वास होनेपर समय आसानीसे निकल सकता है । सिनेमा देखने, सभा-सोसाइटियोंमें जाकर व्याख्यान देने, क्लबोंमें जाकर अनुचित आमोद-प्रमोदमें तथा भोजोंमें सम्मिलित होनेके लिये आज लोग समय निकाल ही लेते हैं । प्राचीन कालमें ऐसी बात नहीं थी । बडे-बडे चक्रवर्ती नरेश भी देवाराधन तथा अन्य धार्मिक कृत्यों में अपना समय लगाया करते थे। द्विजातिमात्रके लिये सन्ध्या, तर्पण, बलिवैश्वदेव, गायत्री जप तथा अग्निहोत्र आदि अनेवार्य माने जाते थे। महाभारत में वर्णन आता है कि महाराज युधिष्ठिर जुएमें अपना सर्वस्व हारकर जब वनमें गये, उस समय अग्निहोत्रकी अग्नियाँ उनके साथ थीं। इतना ही नहीं, घोर युद्धके समय जब लड़ते-लडते सूर्यास्तका समय हो जाता था और किसी पक्षकी विजय नहीं होती थी, उस समय दोनों पक्षोंकी सम्मतिसे युद्ध बंद कर दिया जाता था और उभयपक्षके योद्धा सायं सन्ध्योपासना के लिये बैठ जाते थे । महाराज दिलीपकी कथा प्रसिद्ध है कि वे गुरुकी आज्ञासे अपनी राजोचित मानमर्यादाका परित्याग कर एक साधारण सेवककी भौति वनमें जाकर अपने गुरुकी गायकी सेवा करते थे । स्त्रयं भगवान् श्रीकृष्णकी दिनचर्याका वर्णन श्रीमद्भागवत में मिलता है। वहाँ लिखा है कि वे प्रतिदिन पहर रात रहते उठ जाते थे और उठकर आचमन करके आत्मचिन्तन करने बैठ जाते थे । फिर विधिपूर्वक निमज्जन करके नवीन वस्त्र धारण कर सन्ध्या-चन्दन तथा अग्निहोत्र करते थे और फिर मौन होकर गायत्री मन्त्रका जाप करते थे । इसके अनन्तर सूर्योपस्थान तथा ईश्वर और धर्म में विश्वासकी आवश्यकता दो सौ उनचास अपनी ही कटारूप देवता, ऋषि एवं पितरोका तर्पण करते थे, ब्राह्मणोका पूजन करते थे और फिर वस्त्र, तिल तथा वस्त्राभूषणोंसे अलङ्कत तेरह हज़ार चौरासी गौओंका प्रतिदिन दान करते थे। इसके बाद वे गौ, ब्राह्मण, देवता, बड़े-बूढे तथा गुरुजनोंको प्रणाम करते थे । इस प्रकार उनका बहुत-सा समय नित्य धार्मिक कृत्योंमें बीतता था । भगवान् श्रीकृष्ण के जैसा कर्ममय जीवन तो किसका हो सकता है। फिर भी वे नियमितरूपसे दो पहरका काल धार्मिक कृत्यों में बिताते थे । किसलिये ? इसका उत्तर उन्हींके शब्दोंमे सुनिये । गीतामें वे स्वयं कहते हैं-न मे पार्थास्ति कर्तव्यं त्रिषु लोकेषु किंचन । नानवासमवाप्तव्यं वर्त एव च कर्मणि ॥ यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः । मम वर्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥ उत्सीदेयुरिमे लोका न कुर्या कर्म चेदहम् । संकरस्य च कर्ता स्यामुपहन्यामिमाः प्रजाः ॥ 'हे अर्जुन । मुझे इन तीनों लोकोंमें न तो कुछ कर्तव्य हैं और न कोई भी प्राप्त करनेयोग्य वस्तु अप्राप्त है, तो भी मैं कर्ममें ही वरतता हूँ। क्योंकि हे पार्थ ! यदि कदाचित् में सावधान बरतें तो बड़ी हानि हो जाय, क्योंकि मनुष्य सव प्रकारसे मेरे ही मार्गका अनुसरण करते हैं । इसलिये यदि में कर्म न करूँ तो ये सब मनुष्य नष्ट-भ्रष्ट हो जायँ और मैं सकरताका करनेवाला होऊ तथा इस समस्त प्रजाको नष्ट करनेवाला बनूँ ।। असलमें उस समय वृक्षके पत्तोंको न सींचकर मूल सींचनेकी भोति भौतिक साधनोंकी अपेक्षा दैवी साधनों पर अधिक आस्था थी । धार्मिक जनताकी बात जाने दीजिये - हिरण्याक्ष-हिरण्यकशिपु तथा रावण-कुम्भकर्ण-जैसे महान् असुरोंका भी तप एवं यज्ञ-यागादि में विश्वास था, चाहे उनका लक्ष्य कितना ही दुष्ट रहा हो । हिरण्यकशिपुने अपने अभूतपूर्व तपके द्वारा ब्रह्माजीको प्रसन्न किया था और रावणने अपने हाथों अपने सिरोंकी बलि देकर शङ्करजीका अमोघ वर प्राप्त किया था। यह बात दूसरी है कि देवाराधनके द्वारा प्राप्त शक्तिका दुरुपयोग करके अधर्माचरणके द्वारा वे भगवान् के कोपभाजन बने और अन्तमें अपनी दुर्दम्य शक्ति, सर्वस्व एव प्यारे प्राणोंसे भी हाथ धो बैठे। परन्तु आरम्भ श्रेष्ठ होनेके कारण वे भी भगवान्के हाथों मरकर अन्तमें परम कल्याणको ही प्राप्त हुए । उनके चरित्रसे हमें यह भी शिक्षा मिलती है कि जिस प्रकार तपस्या एव देवाराधन के द्वारा शक्तिसञ्चय होता है, उसी प्रकार धर्मविरुद्ध आचरणके द्वारा उस शक्तिको हम खो बैठते हैं । लौकिक साधनोंके द्वारा शक्ति सञ्चय तो होता है, परन्तु वह अधिक दिन टिकता नहीं । जर्मनीने थोडे ही दिनोंमें कितनी शक्ति अर्जन कर ली थी, पर आज वह देश पराधीन हो गया है । यूरोप आज कितना समृद्धिशाली माना जाता है और है भी, परन्तु वहाँ कितना हाहाकार मचा हुआ है- -इसे वहाँके निवासी ही जानते हैं । अमेरिका इस समय सबसे अधिक ईश्वर और धर्ममें विश्वासकी आवश्यकता दो सौ तैंतालीस बलशाली तथा समृद्ध राष्ट्र माना जाता है; परन्तु वहाँ भी सुख-शान्ति नहीं है। बहुत से लोग अशान्तिमय जीवनसे दुखी होकर आत्मघात करते सुने जाते हैं। पारस्परिक राग-द्वेष एवं प्रतिहिंसाके भाव भी कम नहीं हैं, और तो क्या, पति-पत्नियोंके भी आपसमें बहुत संख्यामे मुकद्दमे होते रहते हैं । जापानने थोड़े ही वर्षों में इतनी उन्नति कर ली थी कि वह ससारकी बड़ी-बडी शक्तियोंमे गिना जाने लगा था । पर आज उसकी क्या दशा हैइसे सब लोग जानते हैं । इस प्रकार परिणाम में प्राप्त होनेवाली इस असफलताका कारण है - प्रयत्नकी अधर्ममूलकता । अधर्ममूलक कर्मसे आरम्भ में चाहे सफलता दीखे, पर परिणाममें असफलता ही हाथ लगती है । अधर्ममूलक प्रयत्न व्यर्थ ही नहीं जाते, उनसे परलोकमे भी दुर्गति भोगनी पड़ती है । आसुरी सम्पदा और उससे होनेवाले अनिष्टकर परिणामोंका भगवान्ने गीताके सोलहवें अध्याय में बड़ा ही सुन्दर एवं विशद वर्णन किया है। कहना न होगा कि आजका मानव स्पष्ट ही असुर-मानव होने जा रहा है और उसके कर्म प्रायः आज वैसे ही हैं, जैसे भगवान्ने आसुरी सम्पदावालोंके बताये है । फलतः इस लोकमें दु.ख और अशान्ति तथा परलोकमें घोर नारकी यन्त्रणाएँ अनिवार्य हैं, चाहे कोई इसे माने या न माने । यह ऊपर बताया जा चुका है कि धर्म और ईश्वर - ये दो ही सुख, सफलता एवं परम गतिके एकमात्र आधार हैं । परन्तु आजका अभिमानमत्त असुर- मानव इन्हींको अनावश्यक एवं व्याय मानने लगा है । कुछ ही वर्षों पूर्व रूसवासियोंने बहुमतसे ईश्वर और धर्मका बहिष्कार करनेका दु. साहस किया था। पश्चिमके लोगोंकी देखा-देखी हम भारतवासी भी आज यह कहने लगे हैं कि धर्मसे ही हमारा पतन हुआ है, ईश्वरके प्रति विश्वासने ही हमे अधोगतिपर पहुॅचाया है। इसीका परिणाम यह है कि आज हम पापसे नहीं डरते । ईश्वर और धर्ममें विश्वास करनेवाला एकान्तमें भी पाप करनेसे झिझकेगा, क्योंकि वह जानता है कि ईश्वर सर्वव्यापी एव सर्वतश्चक्षु हैं । किन्तु ईश्वर और धर्मको न माननेवाला पापसे नहीं डरेगा, केवल कानूनसे बचनेकी चेष्टा करेगा । यही कारण है कि आज लोग कानूनसे बचनेके नये-नये उपाय निकालकर नाना प्रकारके पाप करते हैं । ईश्वर और धर्म के प्रति अविश्वासके कारण ही आज प्रायः सभी क्षेत्रोंमें घूसखोरी बढ़ गयी है। चोरवाजार और जनताके सकटोंसे लाभ उठानेकी जघन्य मनोवृत्ति भी इसीके परिणाम हैं । सरकार घूसखोरी और चोरबाजारीको रोकनेके लिये नये महकमे खोलने जा रही है, परन्तु इस बुराईको रोकने के लिये नियुक्त किये जानेवाले अधिकारी भी तो हमारे-ही-जैसे मनुष्य होंगे। वे घूसखोरी और चोरबाजारीको रोकने जाकर स्वय इनके शिकार नहीं बन जायेंगे - यह कौन कह सकता है। आज तो यह स्थिति है कि जनताके रक्षक कहलानेवाले भी जनताको दोनों हाथोंसे लूटने लगे हैं। इसका कारण यही है कि हमारे मनोंमें धर्म और ईश्वरका भय नहीं रहा; इसकी ओर किसीका ध्यान नहीं है । इसीलिये क्षुद्र स्वार्थ की सिद्धि के लिये किसी भी पाप-कर्ममे संकोच नहीं है । पकडे न जायँ, फिर चाहे सो करें; कोई आपत्ति नहीं । और इसीलिये कानूनको बचाकर पाप करना आजकल बुद्धिमानीका चिह्न हो गया है । सर्वव्यापी भगवान् सब कुछ देखते हैं, हृदयके अंदरकी बात भी जानते हैं - यह धारणा प्राय मिट गयी है । एक कथा आती है कि एक बार किसी महात्माके पास दो शिष्य ज्ञान प्राप्त करनेके उद्देश्यसे गये । गुरुजीने दोनों को एक-एक चिडिया देकर कहा कि 'इसे किसी ऐसे स्थानमें ले जाकर मार डालो, जहाँ कोई न देखता हो ।" पहला शिष्य गुरुजीकी आज्ञा मानकर तुरंत उसे किसी निर्जन स्थानमें ले जाकर मार लाया । दूसरे शिष्यने बहुत चेष्टा की, परन्तु उसे ऐसा कोई स्थान ही नहीं मिला, जहाँ कोई न देखता हो । वह जहाँ भी गया, वहाँ कोई-नकोई देखनेवाला था ही । कहीं कोई पशु बैठा था तो कहीं कोई पक्षी । जहाँ कोई भी जीव नहीं मिला, वहाँ उसने देखा कि और नहीं तो वायु देवता तो वहाँ हैं ही; एकान्त वनमें भी उसने सोचा कि यहाॅ वनदेवी तो अवश्य होंगी । वह कहीं भी जाता पृथ्वीमाता तो मौजूद ही रहती, सूर्य भगवान् तो हैं ही; कोई भी नहीं, वहाँ भी स्वयं वह और उसके अपने अंदरका अन्तर्यामी द्रष्टा तो था ही । अन्तमें वह निराश होकर लौट आया और जहाँ पहला शिष्य अपनी करतूतपर गर्वित था, वहाँ यह गुरुजीकी आज्ञाका पालन न कर सकनेके कारण विषण्णवदन होकर खेद प्रकट करने लगा । परीक्षा हो गयी । गुरुजीने समझ लिया कि दूसरा शिष्य ही ज्ञानका वास्तविक अधिकारी है, क्योंकि वह भगवान्को सर्वत्र देखता था । गुरुजी समर्थ थे। उन्होंने पहले शिष्यद्वारा मारी हुई चिडियाको जिला दिया। जात्पर्य यह है कि आजका मनुष्य पहले शिष्यकी भाँति प्रत्यक्षवादी हो गया है । अधर्मका फल प्रत्यक्ष तो दीखता नहीं । इसीलिये लोग झूठ बोलने में, झूठी गवाही देनेमें, झूठे आँकड़े बनाने में नहीं हिचकते। कहीं पकड़े भी जाते हैं तो यही सोचते हैं कि 'मैंने अमुक जाल बनानेमें भूल कर दी, आगे और भी सावधान रहूँगा ।" उस समय भी यह नहीं सोचते कि 'मैने झूठ बोलकर पाप किया है, इसका परिणाम अच्छा नहीं होगा ।" आज तो हमारा यहाँतक पतन हो गया है कि ईश्वर और धर्मको माननेवालोंको आजका शिक्षित समाज पाखण्डी और मूर्ख मानने लगा है। यही नहीं, सभ्य समाज में लोग अग्ज अपनेको ईश्वरवादी कहनेमे भी हिचकने लगे हैं । यह सत्य है कि आज अपनेको ईश्वरवादी और धार्मिक कहलानेवालों में पाखण्डी भी बहुत-से हैं और वे नास्तिकोंसे भी अधिक भयकर और नास्तिकता के उत्पादक हैं, परन्तु ऐसे लोगोंसे ईश्वर और धर्मका अपलाप नहीं हो सकता । सत्य तो सत्य ही रहेगा । उसका त्रिकालमें भी बाध नहीं हो सकता । अवश्य ही उसे न माननेवाला उसके लाभसे वञ्चित रहेगा और नष्ट हो जायगा । जो कुछ सहृदय महानुभाव जनताका दुःख दूर करना, सर्वत्र सुख-शान्तिका प्रसार करना, अनाचार अत्याचारको मिटाकर सबको समान भावसे लौकिक पदार्थों की प्राप्ति कराना और सबको आराम पहुँचाना चाहते हैं, उनमें भी अधिकांश ऐसे हैं जो, इस उद्देश्यकी सिद्धि के लिये स्वयं केवल लौकिक उपायोंको ही काम में लाते हैं और उन्हींके लिये दूसरोंको भी उपदेश करते हैं। धर्म और ईश्वरमें, जो सुख-शान्तिके मूल हैं, विश्वास बढ़नेका साधन न तो वे करते हैं और न उसे करनेके लिये दूसरोंको ही उपदेश करते हैं । यही कारण है कि आज जगत् में सर्वत्र हाहाकार मचा हुआ है और मानवजाति दु खाग्निको जालासे जल रही है ! धर्म और ईश्वर नित्य हैं, अटल हैं, महान् है । ऐसा समझकर हमें अपने कल्याण के लिये उनका आश्रय लेकर उनका प्रचार करना चाहिये । 'वर्मो रक्षति रक्षितः ।' जो बुद्धिमान् एवं विचारशील हैं, उनका कर्तव्य है कि वे धर्मानुकूल आचरणके द्वारा धार्मिक भावोंका प्रचार करें । स्वयं धर्मानुकूल आचरण किये विना कोई धर्मका प्रचार नहीं कर सकता । वास्तवमें तो ईश्वर और धर्मका प्रचार कोई कर ही क्या सकता है। ईश्वर सर्वसमर्थ हैं । उनकी शक्तिसे ही सब कुछ हो रहा है। कल्याणकामी सभी मनुष्योंको एक-न-एक दिन उन्हें मानना ही पड़ेगा । बिना माने जीवका निस्तार नहीं है, फिर भी प्रत्येक धार्मिक एवं ईश्वरवादी मनुष्यका यह कर्तव्य है कि वह ईश्वरका आश्रय लेकर अपने आचरणद्वारा जगत्में ईश्वर और धर्मका प्रचार करे । स्वयं ईश्वर और धर्मकी ओर आगे बढे तथा सबको वढ़ानेका प्रयत्न करे । यही जगत् की सबसे बड़ी सेवा है । इसीसे जगत्का वास्तत्रिक कल्याण होगा ।
APN News Live Updates: CM योगी आदित्यनाथ आज यानी शुक्रवार को तीन दिवसीय दौर पर गोरखपुर (Gorakhpur) जाने वाले हैं। यह मामला जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। Lalu Prasad Yadav: रांची की सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) को पांच साल कैद की सजा सुनाई और उन पर 60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। Lalu Prasad Yadav आज सीबीआई कोर्ट के सामने पेश हुए। चारा घोटाला मामले में अगली सुनवाई 30 नवंबर को पटना सीबीआई कोर्ट में होगी। कोर्ट को वकील सुधीर सिन्हा ने जानकारी दी कि सीबीआई को निर्देश दिया गया है कि वह 30 नवंबर को गवाह पेश करे।
APN News Live Updates: CM योगी आदित्यनाथ आज यानी शुक्रवार को तीन दिवसीय दौर पर गोरखपुर जाने वाले हैं। यह मामला जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था। Lalu Prasad Yadav: रांची की सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को पांच साल कैद की सजा सुनाई और उन पर साठ लाख रुपये का जुर्माना लगाया। Lalu Prasad Yadav आज सीबीआई कोर्ट के सामने पेश हुए। चारा घोटाला मामले में अगली सुनवाई तीस नवंबर को पटना सीबीआई कोर्ट में होगी। कोर्ट को वकील सुधीर सिन्हा ने जानकारी दी कि सीबीआई को निर्देश दिया गया है कि वह तीस नवंबर को गवाह पेश करे।
बॉलीवुड डेस्क,मुंबई. भोजपुरी स्टार पवन सिंह का आज जन्मदिन है अपने 33वें जन्मदिन पर पवन सिंह को ढेर सारी बधाइंया मिल रही है. फैन्स से लेकर भोजपुरी स्टार तक पवन सिंह को बधाइयां दे रहे हैं. भोजपुरी स्टार पवन सिंह ने बड़े ही धूमधाम से अपना जन्मदिन मनाया. पवन सिंह भोजपुरी सिनेमा के बेहद ही पॉपुलर स्टार है अक्सर इनके गाने वायरल होते रहते हैं. फैन्स भी पवन सिंह को बहुत पसंद करते हैं. पवन सिंह के जन्मदिन पर देखते हैं उनके कुछ बेहतरीन गाने जो आपको बहुत पसंद आएंगे. पवन सिंह ने एक से बढ़कर एक भोजपुरी फिल्मों में काम किया है इसके अलावा वह कई गानों में भी नजर आ चुके हैं, पवन सिंह की जोड़ी हर एक्ट्रेस के साथ कमाल की होती है. मोनालिसा से लेकर आम्रपाली दुबे तक पवन सिंह की हिट जोड़ी रह चुकी है. लेकिन उनके अफेयर की खबरे अक्षरा सिंह के साथ सुनने को मिल रही थी दोनों के बीच काफी विवाद हुआ था. पवन सिंह की फैन फॉलोइंग काफी अच्छी है. फैन्स उनके हर गाने को बहुत पसंद करते हैं. यूट्यूब पर उनके गाने पर मिलियन से भी ज्यादा व्यूज है. इसके अलावा इंस्टाग्राम पर भी उनके कई मिलियन फॉलोर्अस है. पवन सिंह सोशल मीडिया पर एक्टिव भी रहते है. डेली अपनी अपडेट वीडियो फोटो शेयर करते रहते हैं.
बॉलीवुड डेस्क,मुंबई. भोजपुरी स्टार पवन सिंह का आज जन्मदिन है अपने तैंतीसवें जन्मदिन पर पवन सिंह को ढेर सारी बधाइंया मिल रही है. फैन्स से लेकर भोजपुरी स्टार तक पवन सिंह को बधाइयां दे रहे हैं. भोजपुरी स्टार पवन सिंह ने बड़े ही धूमधाम से अपना जन्मदिन मनाया. पवन सिंह भोजपुरी सिनेमा के बेहद ही पॉपुलर स्टार है अक्सर इनके गाने वायरल होते रहते हैं. फैन्स भी पवन सिंह को बहुत पसंद करते हैं. पवन सिंह के जन्मदिन पर देखते हैं उनके कुछ बेहतरीन गाने जो आपको बहुत पसंद आएंगे. पवन सिंह ने एक से बढ़कर एक भोजपुरी फिल्मों में काम किया है इसके अलावा वह कई गानों में भी नजर आ चुके हैं, पवन सिंह की जोड़ी हर एक्ट्रेस के साथ कमाल की होती है. मोनालिसा से लेकर आम्रपाली दुबे तक पवन सिंह की हिट जोड़ी रह चुकी है. लेकिन उनके अफेयर की खबरे अक्षरा सिंह के साथ सुनने को मिल रही थी दोनों के बीच काफी विवाद हुआ था. पवन सिंह की फैन फॉलोइंग काफी अच्छी है. फैन्स उनके हर गाने को बहुत पसंद करते हैं. यूट्यूब पर उनके गाने पर मिलियन से भी ज्यादा व्यूज है. इसके अलावा इंस्टाग्राम पर भी उनके कई मिलियन फॉलोर्अस है. पवन सिंह सोशल मीडिया पर एक्टिव भी रहते है. डेली अपनी अपडेट वीडियो फोटो शेयर करते रहते हैं.
কর এও ন যট bara कार्य आता है, उस मौखिक साहित्य को लिपिवद्ध करना। इसमें बहुत सावधानी की आवश्यकता है । १ - कहानी कहने वाला या गायक अपने स्वाभाविक ढड़ से निरन्तर अपनी कहानी या गीत कहता चला जाय, और उसी गति से वह लिपिबद्ध कर लिया जाय तो सबसे श्रेष्ठ फल मिलेगा। यदि यह सम्भव न हो तो कहानी कहने वाले या गायक को यह समझा दिया जाय कि वह धीरे धीरे कहे । २ ―― जैसे जैसे वह कहे उसे लिपिबद्ध करते चले जाना चाहिये । यदि कोई ऐसा स्थल आये जो आपकी समझ में न आये तो बीच में मत टोकिये, कोई चिह्न लगाकर आगे लिखते चले जाइये। जब वह गीत या कहानी सभात हो जाय तब उन शङ्काओं का समाधान उससे कर लीजिये । यह व्यक है कि आप हर दशा मे वही लिखें जो कहानी कहने वाला लिखा रहा है, वह चाहे कितना ही असम्भव और ऊटपटांग क्यो न हो ! ३ - कहानीकार तथा गायक से कहानी या गीत में आने वाले शब्दों, पात्रो तथा स्थानों के सम्बन्ध में, तथा कहानी कब और क्यों बनी, या उसका क्या उपयोग है - इन बातों के सम्बन्ध में भी प्रश्न करके उसकी व्याख्याएँ भी हाशिये मे लिख लेनी चाहिये । ४ - जब कहानी कही जा चुके और लिखी जा चुके तो कहानी कहने वाले या गाने वाले को उसे पढकर फिर सुना देना चाहिये तथा भूलों का संशोधन कर लेना चाहिये । ५ - सबसे अधिक ध्यान देने की बात है यह कि कहानी या गीत ठीक उस बोली में लिपिबद्ध होना चाहिये जिसमें कि कहानी कहने वाला बोल रहा है, और वह जिस ढङ्ग से बोल रहा है उसी ढङ्ग से लिखी जानी चाहिये । वह यदि 'नखलऊ' कहता है तो यही लिखना होगा अपनी ओर से उसे 'लखनऊ' ! नहीं करना होगा । ६ --- इस सम्बन्ध में स्वरों पर विशेष दृष्टि रखनी चाहिये - सभी स्वरो का उच्चारण सब स्थानों पर एकसा नहीं होता । उदाहरणार्थ - 'एक राजा ओ, एक् राजा श्रो, इक राजाओ, एकु राजा ओ -- यहाँ पर 'एक' के विविध उच्चारण दिये गये हैं। बोलने वाला जैसा उच्चारण करे बसा ही लिखा जाना चाहिये । - यदि ऐसा अवकाश या सुविधा न मिले कि आप अक्षरश उसे } उपरोक्त ढङ्ग से लिख सके तो आखिर के दर्जे उसे अपने शब्दो मे ही लिख डालें
কর এও ন যট bara कार्य आता है, उस मौखिक साहित्य को लिपिवद्ध करना। इसमें बहुत सावधानी की आवश्यकता है । एक - कहानी कहने वाला या गायक अपने स्वाभाविक ढड़ से निरन्तर अपनी कहानी या गीत कहता चला जाय, और उसी गति से वह लिपिबद्ध कर लिया जाय तो सबसे श्रेष्ठ फल मिलेगा। यदि यह सम्भव न हो तो कहानी कहने वाले या गायक को यह समझा दिया जाय कि वह धीरे धीरे कहे । दो ―― जैसे जैसे वह कहे उसे लिपिबद्ध करते चले जाना चाहिये । यदि कोई ऐसा स्थल आये जो आपकी समझ में न आये तो बीच में मत टोकिये, कोई चिह्न लगाकर आगे लिखते चले जाइये। जब वह गीत या कहानी सभात हो जाय तब उन शङ्काओं का समाधान उससे कर लीजिये । यह व्यक है कि आप हर दशा मे वही लिखें जो कहानी कहने वाला लिखा रहा है, वह चाहे कितना ही असम्भव और ऊटपटांग क्यो न हो ! तीन - कहानीकार तथा गायक से कहानी या गीत में आने वाले शब्दों, पात्रो तथा स्थानों के सम्बन्ध में, तथा कहानी कब और क्यों बनी, या उसका क्या उपयोग है - इन बातों के सम्बन्ध में भी प्रश्न करके उसकी व्याख्याएँ भी हाशिये मे लिख लेनी चाहिये । चार - जब कहानी कही जा चुके और लिखी जा चुके तो कहानी कहने वाले या गाने वाले को उसे पढकर फिर सुना देना चाहिये तथा भूलों का संशोधन कर लेना चाहिये । पाँच - सबसे अधिक ध्यान देने की बात है यह कि कहानी या गीत ठीक उस बोली में लिपिबद्ध होना चाहिये जिसमें कि कहानी कहने वाला बोल रहा है, और वह जिस ढङ्ग से बोल रहा है उसी ढङ्ग से लिखी जानी चाहिये । वह यदि 'नखलऊ' कहता है तो यही लिखना होगा अपनी ओर से उसे 'लखनऊ' ! नहीं करना होगा । छः --- इस सम्बन्ध में स्वरों पर विशेष दृष्टि रखनी चाहिये - सभी स्वरो का उच्चारण सब स्थानों पर एकसा नहीं होता । उदाहरणार्थ - 'एक राजा ओ, एक् राजा श्रो, इक राजाओ, एकु राजा ओ -- यहाँ पर 'एक' के विविध उच्चारण दिये गये हैं। बोलने वाला जैसा उच्चारण करे बसा ही लिखा जाना चाहिये । - यदि ऐसा अवकाश या सुविधा न मिले कि आप अक्षरश उसे } उपरोक्त ढङ्ग से लिख सके तो आखिर के दर्जे उसे अपने शब्दो मे ही लिख डालें
कीव । पूर्वी यूक्रेन में भयंकर गोलाबारी में शुक्रवार को यूक्रेन के 3० सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई जबकि रूस समर्थक 4० अलगाववादी मारे गए। यूक्रेन के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। यूक्रेन आंतरिक मंत्रालय के सलाहकर्ता जोरियन शिरियक ने कहा कि लुहांस्क के पूर्वी क्षेत्र में शुक्रवार अहले सुबह विद्रोहियों के रॉकेट हमले में सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है। यूक्रेनी कमान के प्रवक्ता व्लादिस्लाव सेलेंयो ने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा कि सुरक्षा बलों की भारी बमबारी में रूस समर्थक अलगाववादी मारे गए। पूर्वी यूक्रेन में टकराव के कारण पिछले तीन महीनों के दौरान 3० महिलाओं और सात बच्चों समेत 173 सुरक्षाकर्मी और 478 नागरिकों की मौत हुई है। यूके्रन के आंतरिक मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने संभावना जताई कि एक महीने के अंदर 14 लाख की आबादी वाले दो शहर सुरक्षाकर्मियों के कब्जे में होंगे।
कीव । पूर्वी यूक्रेन में भयंकर गोलाबारी में शुक्रवार को यूक्रेन के तीस सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई जबकि रूस समर्थक चालीस अलगाववादी मारे गए। यूक्रेन के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। यूक्रेन आंतरिक मंत्रालय के सलाहकर्ता जोरियन शिरियक ने कहा कि लुहांस्क के पूर्वी क्षेत्र में शुक्रवार अहले सुबह विद्रोहियों के रॉकेट हमले में सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है। यूक्रेनी कमान के प्रवक्ता व्लादिस्लाव सेलेंयो ने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा कि सुरक्षा बलों की भारी बमबारी में रूस समर्थक अलगाववादी मारे गए। पूर्वी यूक्रेन में टकराव के कारण पिछले तीन महीनों के दौरान तीस महिलाओं और सात बच्चों समेत एक सौ तिहत्तर सुरक्षाकर्मी और चार सौ अठहत्तर नागरिकों की मौत हुई है। यूके्रन के आंतरिक मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने संभावना जताई कि एक महीने के अंदर चौदह लाख की आबादी वाले दो शहर सुरक्षाकर्मियों के कब्जे में होंगे।
ज्योती मगर । अरे प्यारज्योंगरनारि। ज्योंधायचखावति अन्यबाला त्योभोग करत नाहीं खसाल सो हे भव्यजीवो मन लगाकर कानदे सुनो । मैं तिसका वर्णन विधिपूर्वक करता हूं ।। जिन जीवों को स्वानुभव बोध लाभ हुआ है । वे घर में वास करते भी मोक्ष होनेका उपाय करते रहते हैं। उनका घरमें बात करतेगी जैसे जलमें क मल रहते भी जलसे अरिहता है वैसेही घरसे प्रेम रहित बास है ॥ ७ ॥ जैसे तीव्रता का शृंगार पर पुरुषों से प्रेमको नहीं है । वा वैश्या का प्रेम मित्रों से बाहरी है अंतरंग नहीं । तथा धाय बालक को दूध पिलाती खि लाती कुदाती प्यार करती है। तिसपर भी जानती रहती है कि यह वालक पराया है तेसही सम्पदृष्टी जीव सन्सार भोग करतेभी भागांसे विरक्तही रहतेहैं जो उदय मोह चारित्रभाव नहीं होतरंचहत्यागताव ॥ तहांकरें मन्दखोटेकपाय । घर थिरथ ॥ सबकी रक्षा युतन्यायनीति। जिनशासनगुरुकीदृढ़प्रतीति । रुपलप्रमाण । शीग्रही मरतले परमथान १०॥ वे धन्यजीववन्यभाग्यसोइ । जिनके ऐसीसुप्रतीतिहोई ॥ तिनकी महिमा हैस्वर्गलोइ । बुधजनभाषेमोसे नहोइ ११॥ यद्यपि चारित्र मोह प्रकृति के तीव्र उदयसे किंचित् ( थोड़ाभी ) त्यागनहीं हासकता है । तथापि खोटे कषाय भावों को मन्दकर उदास रहे हैं ऐसी आकु लता रहती है कि कब यह घरबास छूटे और आत्म कल्याण करें ।। ९ ।। इसी से सबकी रक्षा न्याय करते हैं । और भगवान का आज्ञा और गुरुके बचनों की दृढ़ प्रतीत करते हैं चिरकाल अर्द्धपुल प्रमाण काल सन्सार में भ्रमे हैं तौभी सम्यक्त्व प्राप्ति होने से मरके स्वर्ग में प्राप्ति होते हैं ॥ १० ॥ वे जीव धन्यवाद के योग्य हैं उनका भाग्य है । जिनके ऐसा सम्यक् श्रद्धाण होवे । तिनकी प्रशंसा स्वर्ग के इन्द्र करते हैं। काव्य कर्त्ता बुधजन कहते हैं कि मैं नहीं कर सकता हूं ।। ११ ।। इतिश्री तृतीयढाल सम्पूर्ण । वहढाला सटीक । * अथ चतुर्थ ढाल * इस में व्यवहार सम्यग्दर्शन ज्ञान चारित्र एकोदेश श्रावक धर्म का कथन है !!! ॥ सोरठा छंद ।। इसके प्रथम तृतीय पदों में ग्यारह २ मात्रा और द्वितिय चतुर्थ पदों में तेरह २ मात्रा होती हैं !!! ऊगो मसूर दूर गयो मिथ्यात्त्व तम । बटो गुणपूर ताको कुछइककहतहों ॥ १ ॥ शंका मनमें नाहिं तत्वार्थ श्रद्धाण में । निर्वाछक चित माहिं परमारथ में रत रहें ॥ २ ॥ नेंकन करतेग्लानिवाह्यमलिनमुनिजनल खें। नाहीं होत जान तत्त्व कुतत्त्व विचार में ॥ ३ ॥ उरमें दया विशेष गुण प्रगटे गुण ढकें । शिथिल धर्म में देख जैसे तैसे थिरकरें ॥ ४ ॥ ज्ञानरूप सूर्यका हृदय में प्रकाश होनेसे मिथ्यात्व अन्धकार चलागग । तिसके कारण से जो गुण प्रगट हुए तिनका कुछ वर्णन करताहूं ।। १ ।। तत्त्रार्थ श्रद्धाण में कुछभी आशंका न रही । और सर्व विषय भोगों की चाद छोड़ पर मार्थ जो मुक्ति का साधन तिसमें स्थिर रहते हैं ।। २ ।। और संयमी लोगों को स्नान रहित मलिन शरीर देख घृणा नहीं करते हैं । और सत्य कुतत्व के विचार में अजान असावधान नहीं होते हैं ।। ३ ।। हृदय दयाकी अधिकता होने से धर्मात्माओं के गुण प्रगट करते और अवगुणों को ढांकते हैं । जिसको धर्म में ढीला देखते हैं उसे जिस प्रकार बने उस प्रकार स्थिर करते हैं ॥ ४ ॥ साधर्मी पहिचान करें प्रीतिगोबच्चसम । महिमा होय महान धर्म कार्य ऐसे करें ॥ ५ ॥ मदनहीं जोनूपतातमदनहीं भूपतिमामको । मदनहीं विभवलहातमदनहींसुन्दररूपको ॥ ६ ॥ मदनहीं होयप्रधानमदनहीं तनमें जोरका । मदनहीं जोविद्वान मदनहींसम्पतिकोषका ॥ ७ ॥ वो आत्मज्ञान तज रागादि विभाइपर । !ताकोहोक्योंमानजात्यादि का ॥ ८ ॥ साधर्मी को पहिचान कर ऐसी प्रीति करें जैसी गाय व से करती है । और सदा ऐसे धर्म कार्य करें कि जिनसे धर्मका महत्त्व बढ़े ।। ५ ।। यदि राजा का पुत्र होने तांभी कुलका मद न करे । यदि राजाका भनेज हो तोभी जाति का गर्व न करे । चाहो जैसा ऐश्वर्य होने परन्तु ऐश्वर्य का अभिमान न करे ॥ बाहो जैसा रूपवान होने पर रूपका घमंड न करें ।। ६ ।। जाहाँ जैसा चालेवाला हमान न करे । चाहो जैसा धन होवे परचनका गर्व न करे७ आत्मज्ञान होने से पर पदार्थों में रागादि विभाव भाव त्याग करे काहे से कि जिस सम्यग्ज्ञान हुआ वह जात्यादि नाशवान् वस्तुओं में प्रेम कैसे करेगा ? अर्थात् करेगा ऐसी सम्यग्दृष्टियों की स्वाभाविक रीति है ॥ ८ ॥ बन्द हैं [अरिहंतजिनमुनिजिन सिद्धांतको । वहढाला सटीक । नवेंन देख महन्त कुगुरु कुदेव कुधर्म को ॥ ६ ॥ फुत्सितगम देवकुत्सित पुनसुरसेव की । प्रशंसा षट भेव करें न सम्यक् वान हैं ॥ १० ॥ प्रगटोऐसाभावकिया अभावमिथ्यात्त्वका । बन्दत ताकेपांव बुधजन मन बचकायसे ॥ ११ ॥ प्रोत भगवान् और जिन मुद्रा धारक मुनि और जैन सिद्धान्त को बन्दना करते हैं। और बड़े महन्त भी देखने में होवें परंतु कुलिंगी देव गुरुधर्म होवें तो तिनको नमस्कार नहीं करते हैं ।। ९ ।। और खोटा आम ( कुशास्त्र ) खोटा देव गरुकी सेवा प्रशंसा नहीं करते हैं ऐसे तीन मूहुता छ : अनायतन से अला उद्दन ।। १० । जो सम्यग्ज्ञान श्रद्धाण के धारक हैं। जिनके ऐसा सम्यक्त भाव प्रगट हुआ है और मिथ्यात्त्व भाव जिनने प्रभाव किया है। तिनके चरर कमल को बुवजन काव्य कर्त्ता मन बचन शरीर से बन्दना करते हैं ।। ११ ।। इतिश्री चतुर्थाल सम्पूर्ण ॥ * अथ पंचम ढाल * जिसमें वारह व्रतका वर्णन है ।। ( मनहरण छंद ) जिसके प्रत्येक पद में १४ मात्रा हैं !!! तिर्यच मनुष दो गतिमें । व्रतधारक श्रद्धा चित में । सो गलितनीर न पीवें । निशि भोजनतजेंसदीचें ॥ १ ॥ मुख वस्तु अभचयन खावें । जिन भक्ति त्रिकालरचावें ॥ पन बचतन कपट निवारें । कृतकारित मोद सम्हारें ॥२॥ जैसे उपशमत कषायः । तैसा तिन त्याग कराया ।। कोई सात बिसन कोत्यागें । कोई अनुतपला ॥ ३ ॥ त्रिस जीव कभी नहीं मारें । न वृथा थावर संहारें ।। परहितविनझूठन बोलें । मुख सत्य बिना नहीं खोलें ४ ॥ तिर्यच और मनुष्य दो गति में अणुव्रत के धारक जीव होते हैं । सो विना छना पानी नहीं पीते । और कभी भी रात्रिको नहीं खाते पीते हैं ॥ १ ॥ और अभ्य वस्तु तो कभी खाते पीते ही नहीं हैं । त्रिकाल जिनेंद्र देवकी भक्ति में लवलीन रहते हैं । और मनसे वचन से शरीर से छल कपट नहीं करते हैं । न आपाप कार्य करते हैं न दूसरों से प्रेरणा वा उपदेश सम्मति देकर कराते हैं । और न पाप कार्य को व करनेवालों को भला समझते हैं न उनकी प्रशंसा करते ॥ २ ॥ जिस जीवके जैसा २ कषायों का क्षयोपशम होता जाता है । तैसा२ वह त्याग व प्रतिज्ञा करता जाता है । कोई तो जुआ मांस मदिरा चोरी हिंसा वेश्या परस्त्री इन सात दुर्विसन काही त्याग करते हैं कोई अहिंसा सत्य मचौर्य शील परिग्रह प्रमाण ये ५ अनुव्रत पालते ।। ३ ।। कभी भी त्रिस जंघम ) जीवों को नहीं मारते हैं । न विना प्रयोजन स्थावर जीवों का नाश करते हैं । पग़ये हित बिना स्वार्थ को झूठ नहीं बोलते हैं अर्थात् जो स्वाभा विक धर्मात्मा है उससे कोई भूल में अपराध हुआ हो और वह उसके कारण फंसता होवे तो उसके बचाने को झूठ बोलें अथवा जिसमें निरापराध फसता हवे और अन्य का नुक्सान न होता होवे तो उसकी रक्षाको झूठ बोलें अन्यथा 5ठ बोलने को मुख न खोलें जबबोलें तब सत्य बचनही बोलें ॥ ४ ॥ जल मृतिकाबिन धनसबही । बिनदिये न लेवेंकवही ।।
ज्योती मगर । अरे प्यारज्योंगरनारि। ज्योंधायचखावति अन्यबाला त्योभोग करत नाहीं खसाल सो हे भव्यजीवो मन लगाकर कानदे सुनो । मैं तिसका वर्णन विधिपूर्वक करता हूं ।। जिन जीवों को स्वानुभव बोध लाभ हुआ है । वे घर में वास करते भी मोक्ष होनेका उपाय करते रहते हैं। उनका घरमें बात करतेगी जैसे जलमें क मल रहते भी जलसे अरिहता है वैसेही घरसे प्रेम रहित बास है ॥ सात ॥ जैसे तीव्रता का शृंगार पर पुरुषों से प्रेमको नहीं है । वा वैश्या का प्रेम मित्रों से बाहरी है अंतरंग नहीं । तथा धाय बालक को दूध पिलाती खि लाती कुदाती प्यार करती है। तिसपर भी जानती रहती है कि यह वालक पराया है तेसही सम्पदृष्टी जीव सन्सार भोग करतेभी भागांसे विरक्तही रहतेहैं जो उदय मोह चारित्रभाव नहीं होतरंचहत्यागताव ॥ तहांकरें मन्दखोटेकपाय । घर थिरथ ॥ सबकी रक्षा युतन्यायनीति। जिनशासनगुरुकीदृढ़प्रतीति । रुपलप्रमाण । शीग्रही मरतले परमथान दस॥ वे धन्यजीववन्यभाग्यसोइ । जिनके ऐसीसुप्रतीतिहोई ॥ तिनकी महिमा हैस्वर्गलोइ । बुधजनभाषेमोसे नहोइ ग्यारह॥ यद्यपि चारित्र मोह प्रकृति के तीव्र उदयसे किंचित् त्यागनहीं हासकता है । तथापि खोटे कषाय भावों को मन्दकर उदास रहे हैं ऐसी आकु लता रहती है कि कब यह घरबास छूटे और आत्म कल्याण करें ।। नौ ।। इसी से सबकी रक्षा न्याय करते हैं । और भगवान का आज्ञा और गुरुके बचनों की दृढ़ प्रतीत करते हैं चिरकाल अर्द्धपुल प्रमाण काल सन्सार में भ्रमे हैं तौभी सम्यक्त्व प्राप्ति होने से मरके स्वर्ग में प्राप्ति होते हैं ॥ दस ॥ वे जीव धन्यवाद के योग्य हैं उनका भाग्य है । जिनके ऐसा सम्यक् श्रद्धाण होवे । तिनकी प्रशंसा स्वर्ग के इन्द्र करते हैं। काव्य कर्त्ता बुधजन कहते हैं कि मैं नहीं कर सकता हूं ।। ग्यारह ।। इतिश्री तृतीयढाल सम्पूर्ण । वहढाला सटीक । * अथ चतुर्थ ढाल * इस में व्यवहार सम्यग्दर्शन ज्ञान चारित्र एकोदेश श्रावक धर्म का कथन है !!! ॥ सोरठा छंद ।। इसके प्रथम तृतीय पदों में ग्यारह दो मात्रा और द्वितिय चतुर्थ पदों में तेरह दो मात्रा होती हैं !!! ऊगो मसूर दूर गयो मिथ्यात्त्व तम । बटो गुणपूर ताको कुछइककहतहों ॥ एक ॥ शंका मनमें नाहिं तत्वार्थ श्रद्धाण में । निर्वाछक चित माहिं परमारथ में रत रहें ॥ दो ॥ नेंकन करतेग्लानिवाह्यमलिनमुनिजनल खें। नाहीं होत जान तत्त्व कुतत्त्व विचार में ॥ तीन ॥ उरमें दया विशेष गुण प्रगटे गुण ढकें । शिथिल धर्म में देख जैसे तैसे थिरकरें ॥ चार ॥ ज्ञानरूप सूर्यका हृदय में प्रकाश होनेसे मिथ्यात्व अन्धकार चलागग । तिसके कारण से जो गुण प्रगट हुए तिनका कुछ वर्णन करताहूं ।। एक ।। तत्त्रार्थ श्रद्धाण में कुछभी आशंका न रही । और सर्व विषय भोगों की चाद छोड़ पर मार्थ जो मुक्ति का साधन तिसमें स्थिर रहते हैं ।। दो ।। और संयमी लोगों को स्नान रहित मलिन शरीर देख घृणा नहीं करते हैं । और सत्य कुतत्व के विचार में अजान असावधान नहीं होते हैं ।। तीन ।। हृदय दयाकी अधिकता होने से धर्मात्माओं के गुण प्रगट करते और अवगुणों को ढांकते हैं । जिसको धर्म में ढीला देखते हैं उसे जिस प्रकार बने उस प्रकार स्थिर करते हैं ॥ चार ॥ साधर्मी पहिचान करें प्रीतिगोबच्चसम । महिमा होय महान धर्म कार्य ऐसे करें ॥ पाँच ॥ मदनहीं जोनूपतातमदनहीं भूपतिमामको । मदनहीं विभवलहातमदनहींसुन्दररूपको ॥ छः ॥ मदनहीं होयप्रधानमदनहीं तनमें जोरका । मदनहीं जोविद्वान मदनहींसम्पतिकोषका ॥ सात ॥ वो आत्मज्ञान तज रागादि विभाइपर । !ताकोहोक्योंमानजात्यादि का ॥ आठ ॥ साधर्मी को पहिचान कर ऐसी प्रीति करें जैसी गाय व से करती है । और सदा ऐसे धर्म कार्य करें कि जिनसे धर्मका महत्त्व बढ़े ।। पाँच ।। यदि राजा का पुत्र होने तांभी कुलका मद न करे । यदि राजाका भनेज हो तोभी जाति का गर्व न करे । चाहो जैसा ऐश्वर्य होने परन्तु ऐश्वर्य का अभिमान न करे ॥ बाहो जैसा रूपवान होने पर रूपका घमंड न करें ।। छः ।। जाहाँ जैसा चालेवाला हमान न करे । चाहो जैसा धन होवे परचनका गर्व न करेसात आत्मज्ञान होने से पर पदार्थों में रागादि विभाव भाव त्याग करे काहे से कि जिस सम्यग्ज्ञान हुआ वह जात्यादि नाशवान् वस्तुओं में प्रेम कैसे करेगा ? अर्थात् करेगा ऐसी सम्यग्दृष्टियों की स्वाभाविक रीति है ॥ आठ ॥ बन्द हैं [अरिहंतजिनमुनिजिन सिद्धांतको । वहढाला सटीक । नवेंन देख महन्त कुगुरु कुदेव कुधर्म को ॥ छः ॥ फुत्सितगम देवकुत्सित पुनसुरसेव की । प्रशंसा षट भेव करें न सम्यक् वान हैं ॥ दस ॥ प्रगटोऐसाभावकिया अभावमिथ्यात्त्वका । बन्दत ताकेपांव बुधजन मन बचकायसे ॥ ग्यारह ॥ प्रोत भगवान् और जिन मुद्रा धारक मुनि और जैन सिद्धान्त को बन्दना करते हैं। और बड़े महन्त भी देखने में होवें परंतु कुलिंगी देव गुरुधर्म होवें तो तिनको नमस्कार नहीं करते हैं ।। नौ ।। और खोटा आम खोटा देव गरुकी सेवा प्रशंसा नहीं करते हैं ऐसे तीन मूहुता छ : अनायतन से अला उद्दन ।। दस । जो सम्यग्ज्ञान श्रद्धाण के धारक हैं। जिनके ऐसा सम्यक्त भाव प्रगट हुआ है और मिथ्यात्त्व भाव जिनने प्रभाव किया है। तिनके चरर कमल को बुवजन काव्य कर्त्ता मन बचन शरीर से बन्दना करते हैं ।। ग्यारह ।। इतिश्री चतुर्थाल सम्पूर्ण ॥ * अथ पंचम ढाल * जिसमें वारह व्रतका वर्णन है ।। जिसके प्रत्येक पद में चौदह मात्रा हैं !!! तिर्यच मनुष दो गतिमें । व्रतधारक श्रद्धा चित में । सो गलितनीर न पीवें । निशि भोजनतजेंसदीचें ॥ एक ॥ मुख वस्तु अभचयन खावें । जिन भक्ति त्रिकालरचावें ॥ पन बचतन कपट निवारें । कृतकारित मोद सम्हारें ॥दो॥ जैसे उपशमत कषायः । तैसा तिन त्याग कराया ।। कोई सात बिसन कोत्यागें । कोई अनुतपला ॥ तीन ॥ त्रिस जीव कभी नहीं मारें । न वृथा थावर संहारें ।। परहितविनझूठन बोलें । मुख सत्य बिना नहीं खोलें चार ॥ तिर्यच और मनुष्य दो गति में अणुव्रत के धारक जीव होते हैं । सो विना छना पानी नहीं पीते । और कभी भी रात्रिको नहीं खाते पीते हैं ॥ एक ॥ और अभ्य वस्तु तो कभी खाते पीते ही नहीं हैं । त्रिकाल जिनेंद्र देवकी भक्ति में लवलीन रहते हैं । और मनसे वचन से शरीर से छल कपट नहीं करते हैं । न आपाप कार्य करते हैं न दूसरों से प्रेरणा वा उपदेश सम्मति देकर कराते हैं । और न पाप कार्य को व करनेवालों को भला समझते हैं न उनकी प्रशंसा करते ॥ दो ॥ जिस जीवके जैसा दो कषायों का क्षयोपशम होता जाता है । तैसादो वह त्याग व प्रतिज्ञा करता जाता है । कोई तो जुआ मांस मदिरा चोरी हिंसा वेश्या परस्त्री इन सात दुर्विसन काही त्याग करते हैं कोई अहिंसा सत्य मचौर्य शील परिग्रह प्रमाण ये पाँच अनुव्रत पालते ।। तीन ।। कभी भी त्रिस जंघम ) जीवों को नहीं मारते हैं । न विना प्रयोजन स्थावर जीवों का नाश करते हैं । पग़ये हित बिना स्वार्थ को झूठ नहीं बोलते हैं अर्थात् जो स्वाभा विक धर्मात्मा है उससे कोई भूल में अपराध हुआ हो और वह उसके कारण फंसता होवे तो उसके बचाने को झूठ बोलें अथवा जिसमें निरापराध फसता हवे और अन्य का नुक्सान न होता होवे तो उसकी रक्षाको झूठ बोलें अन्यथा पाँचठ बोलने को मुख न खोलें जबबोलें तब सत्य बचनही बोलें ॥ चार ॥ जल मृतिकाबिन धनसबही । बिनदिये न लेवेंकवही ।।
।बस्करण (Baskaran) वृषभ राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है। इस राशिवालों के लिए शुभ दिन शुक्रवार और बुधवार होते हैं। कुलस्वामिनी को वृषभ राशि के बस्करण नाम के लड़कों का आराध्य माना जाता है। बस्करण नाम के लड़कों का गला स्वास्थ्य की स्थिति से ठीक नहीं रहता। ये खांसी और गले की खिचखिच से परेशान रहते हैं। इन बस्करण नाम के लड़कों में गोइटर और गले में टॉन्सिल संभावित रूप से हो जाता है साथ ही ये के लड़के मांसल शरीर के होते हैं। वृषभ राशि के बस्करण नाम के लड़के मोटे और आलसी होते हैं ,इन्हें खाना बहुत पसंद होता है। इन बस्करण नाम के लड़कों को थायरॉइड ग्रंथि सम्बंधित बीमारियां, कान और निचले जबड़े से जुड़ी समस्याएं आदि होने की सम्भावना रहती है। बस्करण नाम के लड़कों पर विश्वास किया जा सकता है और ये लक्ष्य को पूरा करने में माहिर होते हैं। बस्करण नाम बहुत सुंदर और आकर्षक माना जाता है। इतना ही नहीं इसका मतलब भी बहुत अच्छा होता है। आपको बता दें कि बस्करण नाम का अर्थ सूरज होता है। सूरज मतलब होने के कारण बस्करण नाम बहुत सुंदर बन जाता है। बस्करण नाम रखने से पहले इसका अर्थ जानना जरूरी होता है। जैसे कि बस्करण नाम का मतलब सूरज होता है और इस अर्थ का प्रभाव बस्करण नाम के व्यक्ति के स्वभाव में भी दिखने लगता है। बस्करण नाम रखने से आपका बच्चा भी वो गुण ले लेता है जो इसके अर्थ में समाहित होता है। कुछ सामाजिक अवधारणाओं के अनुसार बस्करण नाम का अर्थ व्यक्ति के स्वभाव से जुड़ा होता है, यानी कि बस्करण नाम का अर्थ सूरज है तो आपके स्वभाव में भी इसकी झलक दिखेगी। आगे पढ़ें बस्करण नाम की राशि, इसका लकी नंबर क्या है, बस्करण नाम के सूरज मतलब के बारे में विस्तार से जानें। जिनका नाम वृषभ है, उनका ग्रह स्वामी शुक्र और लकी नंबर 6 होता है। 6 अंक वाले व्यक्ति आकर्षक और सुंदर होते हैं। वृषभ नाम के लोग साफ-सफाई पसंद होते हैं और ये काफी कलात्मक भी होते हैं। वृषभ नाम के लोगों में धैर्य की कमी नहीं होती, ये घूमने का शौक भी रखते हैं। यदि आपका लकी नंबर 6 है, तो आपको विदेश घूमने का मौका मिल सकता है। वृषभ नाम के लोगों को अपने अभिभावकों से बहुत प्यार और स्नेह मिलता है। जिनका नाम बस्करण होता है उनकी राशि वृषभ होती है। इस राशि के लोग दोस्त, नौकरी, काम और अपने आस-पास की सभी चीजों से लगाव रखते हैं। ये स्वभाव से काफी ईमानदार होते हैं। बस्करण नाम वाली लोगों को अपने जीवन में बदलाव बिलकुल अच्छा नहीं लगता। बदलाव पसंद ना होने के कारण ही बस्करण नाम के लोग अक्सर थोड़े अड़ियल बन जाते हैं। मेष राशि के लोगों पर विश्वास किया जा सकता है, इनमें खूब धैर्य होता है और ये हमेशा खुश रहते हैं। बस्करण नाम के लोग कभी किसी का भरोसा नहीं तोड़ते। ।(भगवान कृष्ण की पत्नी) ।देवी सीता, विदेह के राजा, सीता के पिता, विदेह में एक निवासी (भगवान राम की पत्नी)
।बस्करण वृषभ राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है। इस राशिवालों के लिए शुभ दिन शुक्रवार और बुधवार होते हैं। कुलस्वामिनी को वृषभ राशि के बस्करण नाम के लड़कों का आराध्य माना जाता है। बस्करण नाम के लड़कों का गला स्वास्थ्य की स्थिति से ठीक नहीं रहता। ये खांसी और गले की खिचखिच से परेशान रहते हैं। इन बस्करण नाम के लड़कों में गोइटर और गले में टॉन्सिल संभावित रूप से हो जाता है साथ ही ये के लड़के मांसल शरीर के होते हैं। वृषभ राशि के बस्करण नाम के लड़के मोटे और आलसी होते हैं ,इन्हें खाना बहुत पसंद होता है। इन बस्करण नाम के लड़कों को थायरॉइड ग्रंथि सम्बंधित बीमारियां, कान और निचले जबड़े से जुड़ी समस्याएं आदि होने की सम्भावना रहती है। बस्करण नाम के लड़कों पर विश्वास किया जा सकता है और ये लक्ष्य को पूरा करने में माहिर होते हैं। बस्करण नाम बहुत सुंदर और आकर्षक माना जाता है। इतना ही नहीं इसका मतलब भी बहुत अच्छा होता है। आपको बता दें कि बस्करण नाम का अर्थ सूरज होता है। सूरज मतलब होने के कारण बस्करण नाम बहुत सुंदर बन जाता है। बस्करण नाम रखने से पहले इसका अर्थ जानना जरूरी होता है। जैसे कि बस्करण नाम का मतलब सूरज होता है और इस अर्थ का प्रभाव बस्करण नाम के व्यक्ति के स्वभाव में भी दिखने लगता है। बस्करण नाम रखने से आपका बच्चा भी वो गुण ले लेता है जो इसके अर्थ में समाहित होता है। कुछ सामाजिक अवधारणाओं के अनुसार बस्करण नाम का अर्थ व्यक्ति के स्वभाव से जुड़ा होता है, यानी कि बस्करण नाम का अर्थ सूरज है तो आपके स्वभाव में भी इसकी झलक दिखेगी। आगे पढ़ें बस्करण नाम की राशि, इसका लकी नंबर क्या है, बस्करण नाम के सूरज मतलब के बारे में विस्तार से जानें। जिनका नाम वृषभ है, उनका ग्रह स्वामी शुक्र और लकी नंबर छः होता है। छः अंक वाले व्यक्ति आकर्षक और सुंदर होते हैं। वृषभ नाम के लोग साफ-सफाई पसंद होते हैं और ये काफी कलात्मक भी होते हैं। वृषभ नाम के लोगों में धैर्य की कमी नहीं होती, ये घूमने का शौक भी रखते हैं। यदि आपका लकी नंबर छः है, तो आपको विदेश घूमने का मौका मिल सकता है। वृषभ नाम के लोगों को अपने अभिभावकों से बहुत प्यार और स्नेह मिलता है। जिनका नाम बस्करण होता है उनकी राशि वृषभ होती है। इस राशि के लोग दोस्त, नौकरी, काम और अपने आस-पास की सभी चीजों से लगाव रखते हैं। ये स्वभाव से काफी ईमानदार होते हैं। बस्करण नाम वाली लोगों को अपने जीवन में बदलाव बिलकुल अच्छा नहीं लगता। बदलाव पसंद ना होने के कारण ही बस्करण नाम के लोग अक्सर थोड़े अड़ियल बन जाते हैं। मेष राशि के लोगों पर विश्वास किया जा सकता है, इनमें खूब धैर्य होता है और ये हमेशा खुश रहते हैं। बस्करण नाम के लोग कभी किसी का भरोसा नहीं तोड़ते। । ।देवी सीता, विदेह के राजा, सीता के पिता, विदेह में एक निवासी
हुसैनियालम पुलिस ने इस्लामिक उपदेशक इलियास शरफुद्दीन के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से भड़काऊ बयान देने और प्रसारित करने के लिए मुकदमा दर्ज किया है। सूत्रों के अनुसार, हुसैनिलम पुलिस स्टेशन के उप-निरीक्षक वाई. के. प्रसाद ने उसी पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि इलियास शर्फुद्दीन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें जनता को गाय खाने के लिए प्रेरित किया गया है। आईपीसी की धाराओं 153 (ए), 295 (ए) और 505 (2) के तहत दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि फेस बुक अकाउंट इलियास शर्फुद्दीन गुलाम-अल्लाह पर पोस्ट की गई 2. 37 मिनट की अवधि वीडियो किसी विशेष व्यक्ति की भावना, दुश्मनी या भावनाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से है। हालांकि, गाय खाने के लिए धर्म को "गोहत्या निषेध और पशु संरक्षण अधिनियम -1977" के तहत निषिद्ध है। उन्होंने कथित तौर पर हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया, जो समुदायों के बीच सांप्रदायिक हंगामा को बढ़ावा देने की संभावना है। शिकायतकर्ता सब-इंस्पेक्टर ने यह भी आरोप लगाया कि दुर्भावनापूर्ण इरादे से उन्होंने लोगों के वर्ग के धार्मिक विश्वासों का अपमान किया और उन्होंने अन्य वर्ग की धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने के लिए जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण इरादे से यह कृत्य किया। दुश्मनी और नफरत की भावना से युक्त वीडियो।
हुसैनियालम पुलिस ने इस्लामिक उपदेशक इलियास शरफुद्दीन के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित रूप से भड़काऊ बयान देने और प्रसारित करने के लिए मुकदमा दर्ज किया है। सूत्रों के अनुसार, हुसैनिलम पुलिस स्टेशन के उप-निरीक्षक वाई. के. प्रसाद ने उसी पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि इलियास शर्फुद्दीन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें जनता को गाय खाने के लिए प्रेरित किया गया है। आईपीसी की धाराओं एक सौ तिरेपन , दो सौ पचानवे और पाँच सौ पाँच के तहत दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि फेस बुक अकाउंट इलियास शर्फुद्दीन गुलाम-अल्लाह पर पोस्ट की गई दो. सैंतीस मिनट की अवधि वीडियो किसी विशेष व्यक्ति की भावना, दुश्मनी या भावनाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से है। हालांकि, गाय खाने के लिए धर्म को "गोहत्या निषेध और पशु संरक्षण अधिनियम -एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर" के तहत निषिद्ध है। उन्होंने कथित तौर पर हिंदुओं की भावनाओं को आहत किया, जो समुदायों के बीच सांप्रदायिक हंगामा को बढ़ावा देने की संभावना है। शिकायतकर्ता सब-इंस्पेक्टर ने यह भी आरोप लगाया कि दुर्भावनापूर्ण इरादे से उन्होंने लोगों के वर्ग के धार्मिक विश्वासों का अपमान किया और उन्होंने अन्य वर्ग की धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने के लिए जानबूझकर दुर्भावनापूर्ण इरादे से यह कृत्य किया। दुश्मनी और नफरत की भावना से युक्त वीडियो।
IPL 2023: आईपीएल 2023 के फाइनल मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स ने गुजरात जायंट्स को 5 विकेट से हराकर अपना 5वां खिताब जीता। सीएसके अब मुंबई इंडियंस के बाद 5वीं आईपीएल ट्रॉफी जीतने वाली दूसरी टीम बन चुकी है। इस मैच में जीत हासिल करने के बाद सीएसके के खिलाड़ियों ने जमकर जश्न मनाया। वहीं चेन्नई सुपरकिंग्स की मालिक एन श्रीनिवासन ने कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को लेकर एक बड़ा बयान दिया। श्रीनिवासन ने धोनी को लेकर क्या कहा? बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और इंडिया सीमेंट्स के उपाध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने गुजरात टाइटंस के खिलाफ फाइनल में अंतिम गेंद पर अपनी टीम की रोमांचक जीत को 'चमत्कार' करार दिया और कहा कि दिग्गज महेंद्र सिंह धोनी की अगुआई में ही ऐसा कुछ हो सकता है। श्रीनिवासन ने मंगलवार सुबह सुपरकिंग्स के कप्तान धोनी से बात की और इस शानदार जीत के लिए उन्हें और उनकी टीम को बधाई दी। धोनी को श्रीनिवासन के संदेश को विशेष तौर पर पीटीआई के साथ साझा किया गया। 'करिश्मा कर दिया' श्रीनिवासन ने धोनी से कहा कि शानदार कप्तान। आपने करिश्मा कर दिया। आप ही ऐसा कर सकते हैं। हमें खिलाड़ियों और टीम पर गर्व है। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में लगातार मुकाबलों के बाद धोनी को आराम करने की सलाह दी और जीत का जश्न मनाने के लिए उन्हें टीम के साथ चेन्नई आने के लिए आमंत्रित किया। श्रीनिवासन ने कहा कि ये सीजन ऐसा रहा है जहां फैंस ने दिखाया है कि वे महेंद्र सिंह धोनी से कितना प्यार करते हैं। हम भी करते हैं। शाम को एन श्रीनिवासन के साथ चेन्नई सुपर किंग्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के एस विश्वनाथ और चेयरमैन आर श्रीनिवासन यहां पहुंचे। उन्होंने तिरूमाला तिरूपति देवस्थानम द्वारा संचालित भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में ट्रॉफी के साथ पूजा अर्चना की।
IPL दो हज़ार तेईस: आईपीएल दो हज़ार तेईस के फाइनल मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स ने गुजरात जायंट्स को पाँच विकेट से हराकर अपना पाँचवां खिताब जीता। सीएसके अब मुंबई इंडियंस के बाद पाँचवीं आईपीएल ट्रॉफी जीतने वाली दूसरी टीम बन चुकी है। इस मैच में जीत हासिल करने के बाद सीएसके के खिलाड़ियों ने जमकर जश्न मनाया। वहीं चेन्नई सुपरकिंग्स की मालिक एन श्रीनिवासन ने कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को लेकर एक बड़ा बयान दिया। श्रीनिवासन ने धोनी को लेकर क्या कहा? बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और इंडिया सीमेंट्स के उपाध्यक्ष एन श्रीनिवासन ने गुजरात टाइटंस के खिलाफ फाइनल में अंतिम गेंद पर अपनी टीम की रोमांचक जीत को 'चमत्कार' करार दिया और कहा कि दिग्गज महेंद्र सिंह धोनी की अगुआई में ही ऐसा कुछ हो सकता है। श्रीनिवासन ने मंगलवार सुबह सुपरकिंग्स के कप्तान धोनी से बात की और इस शानदार जीत के लिए उन्हें और उनकी टीम को बधाई दी। धोनी को श्रीनिवासन के संदेश को विशेष तौर पर पीटीआई के साथ साझा किया गया। 'करिश्मा कर दिया' श्रीनिवासन ने धोनी से कहा कि शानदार कप्तान। आपने करिश्मा कर दिया। आप ही ऐसा कर सकते हैं। हमें खिलाड़ियों और टीम पर गर्व है। उन्होंने पिछले कुछ दिनों में लगातार मुकाबलों के बाद धोनी को आराम करने की सलाह दी और जीत का जश्न मनाने के लिए उन्हें टीम के साथ चेन्नई आने के लिए आमंत्रित किया। श्रीनिवासन ने कहा कि ये सीजन ऐसा रहा है जहां फैंस ने दिखाया है कि वे महेंद्र सिंह धोनी से कितना प्यार करते हैं। हम भी करते हैं। शाम को एन श्रीनिवासन के साथ चेन्नई सुपर किंग्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के एस विश्वनाथ और चेयरमैन आर श्रीनिवासन यहां पहुंचे। उन्होंने तिरूमाला तिरूपति देवस्थानम द्वारा संचालित भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में ट्रॉफी के साथ पूजा अर्चना की।
İBB एक ऐसा केंद्र बनाएगा जहां ऐतिहासिक थियोडोसियस पोर्ट और उसके खंडहर जो येनकिपाय खुदाई के दौरान खोजे गए थे, का प्रदर्शन किया जाएगा। केंद्र के वास्तुशिल्प डिजाइन के लिए एक परियोजना प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। परियोजना की डिलीवरी की तारीख 26 अक्टूबर 2020 के रूप में निर्धारित की गई है। इस्तांबुल मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका (IMM) एक यात्रा केंद्र बनाएगी जहाँ यानिकोसिअन में मेट्रो खुदाई के दौरान खोजे गए थियोडोसियस पोर्ट के साथ पुरातात्विक अवशेषों का प्रदर्शन किया जाएगा। IMM केंद्र के वास्तुशिल्प डिजाइन के लिए एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित करता है। 'थियोडोसियस पोर्ट आर्कियोलॉजिकल साइट प्रोजेक्ट प्रतियोगिता' की घोषणा आज आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित हुई। घोषणा के अनुसार, प्रतियोगिता का विषय 'थियोडोसियस हार्बर आर्कियोलॉजिकल साइट के संदर्भ में आगंतुक केंद्र को डिजाइन करना' के रूप में निर्धारित किया गया था। फ्रीलांस में, राष्ट्रीय, वास्तुकला प्रतियोगिता, पहला पुरस्कार 80 हजार टीएल, दूसरा पुरस्कार 60 हजार टीएल, और तीसरा पुरस्कार 40 हजार टीएल होगा। इसके अलावा, 5 परियोजनाओं को 30 हजार टीएल के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। 20 जुलाई, 2020 को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित प्रतियोगिता की घोषणा के अनुसार, अंतिम प्रश्न-तिथि 13 अगस्त, 2020 निर्धारित की गई थी। परियोजनाओं को 26 अक्टूबर, 2020 तक वितरित किया जा सकता है। मेल द्वारा डिलीवरी की तारीख 30 अक्टूबर 2020 तक की जा सकती है। जूरी 7 नवंबर, 2020 को परियोजनाओं का मूल्यांकन शुरू करेगी। 21 नवंबर 2020 को बोलचाल और पुरस्कार समारोह आयोजित करने की योजना है। प्रतियोगिता के सलाहकार जूरी सदस्य; आईएमएम अध्यक्ष Ekrem İmamoğlu, İBB उप महासचिव मेहमत akılcıoğlu, İBB सांस्कृतिक विरासत विभाग के प्रमुख माहिर पोलाट, इस्तांबुल विश्वविद्यालय येनिकापी शिपव्रेक के अध्यक्ष प्रो। डॉ। Ufuk Kocabaş IPA (पूर्व-परिग्रहण सहायता के लिए साधन) प्रतियोगिता समन्वयक mer Yılmaz के रूप में निर्धारित किया गया था। वास्तुकार नेवज़त औज़ुज़ अज़ेर की अध्यक्षता वाले महान जूरी सदस्य, वास्तुकार ज़ेनेप एरेस ज़ादोआन, वास्तुकार केम सोर्गुक, लैंडस्केप योजनाकार अता तुरक और सिविल इंजीनियर टुन्टा तिब्बत अकबस हैं। इस्तांबुल येनिकापी में 2004 में शुरू हुई पुरातात्विक खुदाई में, लगभग 13 मीटर की एक संस्कृति भराव का पता चला था। इस्तांबुल के इतिहास के बारे में अनूठी जानकारी जो उस दिन तक ज्ञात नहीं हुई है। 12 वीं या 13 वीं शताब्दी की एक चर्च संरचना इस क्षेत्र में ओटोमन परत के नीचे पाई गई थी। निष्कर्षों के बीच दिलचस्प उदाहरण हैं। 1500 साल पुराने हाथीदांत से बना पासा, 8500 साल पुराना गेहूं स्पाइक, बीजान्टिन युग से लकड़ी के सैंडल के तहत पाठ उल्लेखनीय हैंः "इसे स्वास्थ्य महिला में उपयोग करें, इसे सुंदरता और खुशी में पहनें"। खुदाई में 37 नावें मिलीं। एक जहाज के रसोई अनुभाग में एम.एस. 9 वीं शताब्दी की एक विकर टोकरी में खट्टा चेरी के बीज, 5 क्रिमियन प्रकार एक अन्य जहाज में 127 वीं शताब्दी से उभारा हुआ अम्फोरा। फाइनल में तेल के लैंप, पत्थर, कटोरे, लकड़ी के लंगर, लोहे के लंगर, पुली, शिपिंग आइटम, सैंडल और लकड़ी और चमड़े से बने कंघी शामिल हैं। कुल 3 हाथीदांत स्कैलप और 3 से अधिक सिक्के भी पाए गए। यह निर्धारित किया गया था कि खुदाई में मिले पैरों के निशान पहले इस्तांबुलवासियों के 8000 साल पुराने पैरों के निशान थे।
İBB एक ऐसा केंद्र बनाएगा जहां ऐतिहासिक थियोडोसियस पोर्ट और उसके खंडहर जो येनकिपाय खुदाई के दौरान खोजे गए थे, का प्रदर्शन किया जाएगा। केंद्र के वास्तुशिल्प डिजाइन के लिए एक परियोजना प्रतियोगिता आयोजित की जाती है। परियोजना की डिलीवरी की तारीख छब्बीस अक्टूबर दो हज़ार बीस के रूप में निर्धारित की गई है। इस्तांबुल मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका एक यात्रा केंद्र बनाएगी जहाँ यानिकोसिअन में मेट्रो खुदाई के दौरान खोजे गए थियोडोसियस पोर्ट के साथ पुरातात्विक अवशेषों का प्रदर्शन किया जाएगा। IMM केंद्र के वास्तुशिल्प डिजाइन के लिए एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित करता है। 'थियोडोसियस पोर्ट आर्कियोलॉजिकल साइट प्रोजेक्ट प्रतियोगिता' की घोषणा आज आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित हुई। घोषणा के अनुसार, प्रतियोगिता का विषय 'थियोडोसियस हार्बर आर्कियोलॉजिकल साइट के संदर्भ में आगंतुक केंद्र को डिजाइन करना' के रूप में निर्धारित किया गया था। फ्रीलांस में, राष्ट्रीय, वास्तुकला प्रतियोगिता, पहला पुरस्कार अस्सी हजार टीएल, दूसरा पुरस्कार साठ हजार टीएल, और तीसरा पुरस्कार चालीस हजार टीएल होगा। इसके अलावा, पाँच परियोजनाओं को तीस हजार टीएल के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। बीस जुलाई, दो हज़ार बीस को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित प्रतियोगिता की घोषणा के अनुसार, अंतिम प्रश्न-तिथि तेरह अगस्त, दो हज़ार बीस निर्धारित की गई थी। परियोजनाओं को छब्बीस अक्टूबर, दो हज़ार बीस तक वितरित किया जा सकता है। मेल द्वारा डिलीवरी की तारीख तीस अक्टूबर दो हज़ार बीस तक की जा सकती है। जूरी सात नवंबर, दो हज़ार बीस को परियोजनाओं का मूल्यांकन शुरू करेगी। इक्कीस नवंबर दो हज़ार बीस को बोलचाल और पुरस्कार समारोह आयोजित करने की योजना है। प्रतियोगिता के सलाहकार जूरी सदस्य; आईएमएम अध्यक्ष Ekrem İmamoğlu, İBB उप महासचिव मेहमत akılcıoğlu, İBB सांस्कृतिक विरासत विभाग के प्रमुख माहिर पोलाट, इस्तांबुल विश्वविद्यालय येनिकापी शिपव्रेक के अध्यक्ष प्रो। डॉ। Ufuk Kocabaş IPA प्रतियोगिता समन्वयक mer Yılmaz के रूप में निर्धारित किया गया था। वास्तुकार नेवज़त औज़ुज़ अज़ेर की अध्यक्षता वाले महान जूरी सदस्य, वास्तुकार ज़ेनेप एरेस ज़ादोआन, वास्तुकार केम सोर्गुक, लैंडस्केप योजनाकार अता तुरक और सिविल इंजीनियर टुन्टा तिब्बत अकबस हैं। इस्तांबुल येनिकापी में दो हज़ार चार में शुरू हुई पुरातात्विक खुदाई में, लगभग तेरह मीटर की एक संस्कृति भराव का पता चला था। इस्तांबुल के इतिहास के बारे में अनूठी जानकारी जो उस दिन तक ज्ञात नहीं हुई है। बारह वीं या तेरह वीं शताब्दी की एक चर्च संरचना इस क्षेत्र में ओटोमन परत के नीचे पाई गई थी। निष्कर्षों के बीच दिलचस्प उदाहरण हैं। एक हज़ार पाँच सौ साल पुराने हाथीदांत से बना पासा, आठ हज़ार पाँच सौ साल पुराना गेहूं स्पाइक, बीजान्टिन युग से लकड़ी के सैंडल के तहत पाठ उल्लेखनीय हैंः "इसे स्वास्थ्य महिला में उपयोग करें, इसे सुंदरता और खुशी में पहनें"। खुदाई में सैंतीस नावें मिलीं। एक जहाज के रसोई अनुभाग में एम.एस. नौ वीं शताब्दी की एक विकर टोकरी में खट्टा चेरी के बीज, पाँच क्रिमियन प्रकार एक अन्य जहाज में एक सौ सत्ताईस वीं शताब्दी से उभारा हुआ अम्फोरा। फाइनल में तेल के लैंप, पत्थर, कटोरे, लकड़ी के लंगर, लोहे के लंगर, पुली, शिपिंग आइटम, सैंडल और लकड़ी और चमड़े से बने कंघी शामिल हैं। कुल तीन हाथीदांत स्कैलप और तीन से अधिक सिक्के भी पाए गए। यह निर्धारित किया गया था कि खुदाई में मिले पैरों के निशान पहले इस्तांबुलवासियों के आठ हज़ार साल पुराने पैरों के निशान थे।
Entertainment News Of The Day: एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से 7 सितंबर को कई बड़ी खबरों ने ध्यान खींचा है। एक तरफ जहां उर्फी जावेद ने अंजलि अरोड़ा के एमएमसएस लीक विवाद पर अपनी राय रखी है। वहीं एक्ट्रेस सारा अली खान हाल ही में गणपति बप्पा के दर्शन के लिए टी-सीरीज के ऑफिस पहुंचीं। Entertainment News Of The Day 6th September 2022: मनोरंजन जगत से 6 सितंबर को कई दिलचस्प खबरें सामने आई हैं। जहां ऋतिक रोशन और सैफ अली खान स्टारर फिल्म 'विक्रम वेधा' के ट्रेलर को रिलीज डेट मिल गई है तो वहीं एक्ट्रेस उर्फी जावेद ने अंजलि अरोड़ा के एमएमएस लीक को लेकर बयान दिया है। सारा अली खान अपने बिजी शेड्यू्ल के बीच गणपति बप्पा के दर्शन करने के लिए टी-सीरीज के ऑफिस पहुंची हैं, जहां से उनका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। यहां पर आपको आज की ऐसी ही 5 खबरें पढ़ने को मिलेंगी। ऋतिक रोशन और सैफ अली खान स्टारर फिल्म 'विक्रम वेधा' का ट्रेलर कल यानी 8 सितंबर को दोपहर 2 बजे रिलीज होगा। इस बात की जानकारी खुद ऋतिक रोशन ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए दी। बता दें कि ऋतिक और सैफ की यह फिल्म 30 सितंबर को बॉक्स ऑफिस पर रिलीज होने वाली है। एक्ट्रेस सारा अली खान गणपति बप्पा के दर्शन के लिए टी-सीरीज के ऑफिस पहुंची, जहां से उनका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में व्हाइट सूट पहने सारा अली खान गणपति बप्पा को भोग लगाती और उनकी आरती करती नजर आ रही हैं। फैन्स को सारा का यह अंदाज बहुत पसंद आ रहा है। अंजलि अरोड़ा के एमएमएस लीक को लेकर फैशन आइकन उर्फी जावेद ने जूम से बातचीत के दौरान कहा कि अंजलि नहीं चाहती थीं कि उनका वीडियो सार्वजनिक हो। इसके साथ ही उर्फी जावेद ने कहा कि अगर कोई लड़की मास्टरबेट करते हुए या फिर सेक्स करते हुए खुद को रिकॉर्ड करती है और वह वीडियो लीक हो जाए, फिर भी वह विक्टिम है। एक्ट्रसे नरगिस फाखरी ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि वह इंडस्ट्री में खुश नहीं थीं। अपने फिल्मी करियर के दौरान वह बहुत ज्यादा मेंटल और फिजिकल स्ट्रेस से गुजरीं, इसलिए उन्होंने ब्रेक लेने का फैसला किया है। 'ब्रह्मास्त्र' की रिलीज से पहले आलिया भट्ट और रणबीर कपूर जोरो शोरों से 'ब्रह्मास्त्र' का प्रमोशन कर रहे हैं। हाल ही में आलिया भट्ट फिल्म के प्रमोशन के लिए दिल्ली पहुंची। यहां उन्होंने एक बार फिर से सुर छेड़ा और 'ब्रह्मास्त्र' का गाना 'केसरिया' गाया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
Entertainment News Of The Day: एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से सात सितंबर को कई बड़ी खबरों ने ध्यान खींचा है। एक तरफ जहां उर्फी जावेद ने अंजलि अरोड़ा के एमएमसएस लीक विवाद पर अपनी राय रखी है। वहीं एक्ट्रेस सारा अली खान हाल ही में गणपति बप्पा के दर्शन के लिए टी-सीरीज के ऑफिस पहुंचीं। Entertainment News Of The Day छः सितंबरtember दो हज़ार बाईस: मनोरंजन जगत से छः सितंबर को कई दिलचस्प खबरें सामने आई हैं। जहां ऋतिक रोशन और सैफ अली खान स्टारर फिल्म 'विक्रम वेधा' के ट्रेलर को रिलीज डेट मिल गई है तो वहीं एक्ट्रेस उर्फी जावेद ने अंजलि अरोड़ा के एमएमएस लीक को लेकर बयान दिया है। सारा अली खान अपने बिजी शेड्यू्ल के बीच गणपति बप्पा के दर्शन करने के लिए टी-सीरीज के ऑफिस पहुंची हैं, जहां से उनका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। यहां पर आपको आज की ऐसी ही पाँच खबरें पढ़ने को मिलेंगी। ऋतिक रोशन और सैफ अली खान स्टारर फिल्म 'विक्रम वेधा' का ट्रेलर कल यानी आठ सितंबर को दोपहर दो बजे रिलीज होगा। इस बात की जानकारी खुद ऋतिक रोशन ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए दी। बता दें कि ऋतिक और सैफ की यह फिल्म तीस सितंबर को बॉक्स ऑफिस पर रिलीज होने वाली है। एक्ट्रेस सारा अली खान गणपति बप्पा के दर्शन के लिए टी-सीरीज के ऑफिस पहुंची, जहां से उनका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में व्हाइट सूट पहने सारा अली खान गणपति बप्पा को भोग लगाती और उनकी आरती करती नजर आ रही हैं। फैन्स को सारा का यह अंदाज बहुत पसंद आ रहा है। अंजलि अरोड़ा के एमएमएस लीक को लेकर फैशन आइकन उर्फी जावेद ने जूम से बातचीत के दौरान कहा कि अंजलि नहीं चाहती थीं कि उनका वीडियो सार्वजनिक हो। इसके साथ ही उर्फी जावेद ने कहा कि अगर कोई लड़की मास्टरबेट करते हुए या फिर सेक्स करते हुए खुद को रिकॉर्ड करती है और वह वीडियो लीक हो जाए, फिर भी वह विक्टिम है। एक्ट्रसे नरगिस फाखरी ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि वह इंडस्ट्री में खुश नहीं थीं। अपने फिल्मी करियर के दौरान वह बहुत ज्यादा मेंटल और फिजिकल स्ट्रेस से गुजरीं, इसलिए उन्होंने ब्रेक लेने का फैसला किया है। 'ब्रह्मास्त्र' की रिलीज से पहले आलिया भट्ट और रणबीर कपूर जोरो शोरों से 'ब्रह्मास्त्र' का प्रमोशन कर रहे हैं। हाल ही में आलिया भट्ट फिल्म के प्रमोशन के लिए दिल्ली पहुंची। यहां उन्होंने एक बार फिर से सुर छेड़ा और 'ब्रह्मास्त्र' का गाना 'केसरिया' गाया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
श्री 'क' एक विख्यात नेता हैं और चूँकि विख्यात नेता हैं,उन्हें अक्सर रोना पड़ता है. कभी बाढ़ की विनाशलीला पर रोते हैं,कभी सूखे पर,कभी गरीबी पर तो कभी बेकारी पर,कभी भ्रष्टाचार पर तो कभी मंहगाई पर. देश की दुर्दशा का रोना तो उनके हर. भाषण में होता है. उनका रोना जायज है इसलिए उनकी आंसुओं की बड़ी कीमत से इनकार नहीं किया जा सकता. कहीं एक शेर पढ़ा था- ' गर अश्क बजा टपके,आंसू नहीं मोती है ' इस शेर के अनुसार श्री 'क' का हर आंसू एक मोती है और मोती को बर्बाद कर देना आदमी की फितरत में अभी शामिल नहीं हुआ. लिहाजा प्रबुद्ध कहलाने वाले चंद लोगों ( जिन्हें नेताजी ससम्मान 'जनता' कहते हैं ) ने नेताजी के आंसुओं को संचित करने का उपाय किया. वे नहीं चाहते थे कि अश्कों के कीमती मोती धूल में बिखर जाएँ. अंततः उपाय निकल आया. नेताजी के आंसू शीशियों में इकट्ठे होने लगे और उनकी बड़ी-बड़ी कीमतें लगने लगी. लोग आंसुओं को खरीदते रहे और खरीद-खरीद कर मोतियों जैसी हिफाजत से रखते रहे.इतने बड़े नेता के आंसुओं की क़द्र करके जनता कृतार्थ होती रही. बड़े-बड़े ड्राईंगरूम में उनके आंसुओं का होना अनिवार्य-सा हो गया. उनके आंसुओं की शीशी रखकर लोग बिना कुछ बोले जता जाते थे कि लो देखो,हमें भी राष्ट्र और राष्ट्रवासियों के प्रति गहरी सहानुभूति है,तभी तो हमने अपने प्रिय नेता के आंसुओं तक को संभाल कर रखा है. और मैं देश के लिए , मेरे आंसुओं को ) श्री 'क' की दृष्टि में जब ये विद्रोही कवितायें आई तो उन्होंने एक सभा का आयोजन करवा डाला और कवियों के रुख पर आंसू बहाना शुरू किया.श्रद्धालु जनता अपने प्रिय नेता के आंसुओं से द्रवित हुई और उनके भी नयनों के कोर गीले हुए.उस दिन नेताजी के नयनों ने पूरे दो सौ पचास ग्राम आंसुओं की बरसात की. " हम घर पर नहीं रोते...पब्लिक की अमानत पब्लिक के सामने ही पेश करना चाहिए.." उन्होंने कहा और व्हिस्की की बोतल खोलने लगे. मेरी आस्था पर व्हिस्की की बोतल बिजली बनकर गिरी और यह शायद उन्होंने महसूस कर लिया, बोले-" इसके पीने के बाद आंसू बहाने में आसानी होती है." सुनकर मन का काँटा निकल गया. " सो कैसे ? " मैं हैरान हुआ. मैं एक क्षण अभिभूत- सा उन्हें देखता रहा फिर बोला- " सिर्फ एक बात और पूछनी है आपसे, आपके मन में आंसुओं का यह सागर आता कहाँ से है ? " उत्तर में उनका कहकहा गूंज उठा. मैं उनके कहकहे को उनका उत्तर मान उठ आया. फिर एक दिन अखबारों में एक चौका देनेवाली खबर छपी कि नगर में धड़ल्ले से नेताजी के नकली आंसू असली दामों में बेचे जा रहे हैं. इस समाचार से भूचाल- सा आ गया. श्रद्धालु जनता की आस्था पर यह करारी चोट थी. लोगों ने सरकार को चेतावनी दी कि नकली आंसुओं के विक्रेताओं को तुरंत गिरफ्तार करें और कड़ी से कड़ी सजा दें. सरकार सक्रिय हुई मगर नतीजा शून्य रहा. लोगों की उत्तेजना बढती गयी. सरकार ने एक पांच सदस्यीय आयोग की स्थापना की और इस मामले की तफ्शीश शुरू हुई. आयोग ने सबसे पहले चंद गवाहों की मौजूदगी में नेताजी के असली आंसुओं को इकठ्ठा किया फिर ऐसी सौ शीशियाँ इकट्ठी की जिनके नकली होने का संदेह था. ये सौ शीशियाँ और असली के नमूने लेबोरेटरी टेस्ट को भेज दिए गए. वैज्ञानिक गण इन आंसुओं पर परी क्षण करते रहे और लोगों की उत्तेजना नए-नए रंग लाती रही. श्री 'क' इस बीच सभाओं में इस काण्ड पर आंसू बहाते रहे और लोग उनके आंसुओं को बड़ी सावधानी से इकठ्ठा करते रहे. अंततः लेबोरेटरी टेस्ट का परिणाम सामने आया.आयोग में रिपोर्ट पढ़ी गयी.लिखा था कि हमें भेजी गई सौ शीशियों में से पैंतीस शीशियाँ नकली आंसुओं की थी और बाकी असली आंसुओं से भरी थी. किन्तु परी क्षण के दौरान एक विचित्र तथ्य उपस्थित हुआ है कि नेताजी के असली आंसुओं में इंसानी आंसुओं का कोई तत्व या गुण नहीं है. इस सन्दर्भ में आगे परी क्षण जारी है. अब आयोग के सामने नई उलझन आ गई. वे नहीं चाहते थे कि उत्तेजित लोगों को यह नई जानकारी मिले मगर बात अंततः लीक हो गई और लोगों में तरह-तरह की चर्चा होने लगी.नेताजी ने सभाओं में जाना छोड़ दिया और अनशन पर बैठ गए कि अब लेबोरेटरी टेस्ट का यह लफड़ा बंद करो...क्या फायदा जब लेबोरेटरी टेस्ट इंसानी आंसुओं को न पहचान सके. स्थिति और उलझ गई. " बिलकुल यही बात है..." दुसरे ने अपनी श्रद्धा प्रकट की और फिर वे उठकर आगे बढ़ गए.
श्री 'क' एक विख्यात नेता हैं और चूँकि विख्यात नेता हैं,उन्हें अक्सर रोना पड़ता है. कभी बाढ़ की विनाशलीला पर रोते हैं,कभी सूखे पर,कभी गरीबी पर तो कभी बेकारी पर,कभी भ्रष्टाचार पर तो कभी मंहगाई पर. देश की दुर्दशा का रोना तो उनके हर. भाषण में होता है. उनका रोना जायज है इसलिए उनकी आंसुओं की बड़ी कीमत से इनकार नहीं किया जा सकता. कहीं एक शेर पढ़ा था- ' गर अश्क बजा टपके,आंसू नहीं मोती है ' इस शेर के अनुसार श्री 'क' का हर आंसू एक मोती है और मोती को बर्बाद कर देना आदमी की फितरत में अभी शामिल नहीं हुआ. लिहाजा प्रबुद्ध कहलाने वाले चंद लोगों ने नेताजी के आंसुओं को संचित करने का उपाय किया. वे नहीं चाहते थे कि अश्कों के कीमती मोती धूल में बिखर जाएँ. अंततः उपाय निकल आया. नेताजी के आंसू शीशियों में इकट्ठे होने लगे और उनकी बड़ी-बड़ी कीमतें लगने लगी. लोग आंसुओं को खरीदते रहे और खरीद-खरीद कर मोतियों जैसी हिफाजत से रखते रहे.इतने बड़े नेता के आंसुओं की क़द्र करके जनता कृतार्थ होती रही. बड़े-बड़े ड्राईंगरूम में उनके आंसुओं का होना अनिवार्य-सा हो गया. उनके आंसुओं की शीशी रखकर लोग बिना कुछ बोले जता जाते थे कि लो देखो,हमें भी राष्ट्र और राष्ट्रवासियों के प्रति गहरी सहानुभूति है,तभी तो हमने अपने प्रिय नेता के आंसुओं तक को संभाल कर रखा है. और मैं देश के लिए , मेरे आंसुओं को ) श्री 'क' की दृष्टि में जब ये विद्रोही कवितायें आई तो उन्होंने एक सभा का आयोजन करवा डाला और कवियों के रुख पर आंसू बहाना शुरू किया.श्रद्धालु जनता अपने प्रिय नेता के आंसुओं से द्रवित हुई और उनके भी नयनों के कोर गीले हुए.उस दिन नेताजी के नयनों ने पूरे दो सौ पचास ग्राम आंसुओं की बरसात की. " हम घर पर नहीं रोते...पब्लिक की अमानत पब्लिक के सामने ही पेश करना चाहिए.." उन्होंने कहा और व्हिस्की की बोतल खोलने लगे. मेरी आस्था पर व्हिस्की की बोतल बिजली बनकर गिरी और यह शायद उन्होंने महसूस कर लिया, बोले-" इसके पीने के बाद आंसू बहाने में आसानी होती है." सुनकर मन का काँटा निकल गया. " सो कैसे ? " मैं हैरान हुआ. मैं एक क्षण अभिभूत- सा उन्हें देखता रहा फिर बोला- " सिर्फ एक बात और पूछनी है आपसे, आपके मन में आंसुओं का यह सागर आता कहाँ से है ? " उत्तर में उनका कहकहा गूंज उठा. मैं उनके कहकहे को उनका उत्तर मान उठ आया. फिर एक दिन अखबारों में एक चौका देनेवाली खबर छपी कि नगर में धड़ल्ले से नेताजी के नकली आंसू असली दामों में बेचे जा रहे हैं. इस समाचार से भूचाल- सा आ गया. श्रद्धालु जनता की आस्था पर यह करारी चोट थी. लोगों ने सरकार को चेतावनी दी कि नकली आंसुओं के विक्रेताओं को तुरंत गिरफ्तार करें और कड़ी से कड़ी सजा दें. सरकार सक्रिय हुई मगर नतीजा शून्य रहा. लोगों की उत्तेजना बढती गयी. सरकार ने एक पांच सदस्यीय आयोग की स्थापना की और इस मामले की तफ्शीश शुरू हुई. आयोग ने सबसे पहले चंद गवाहों की मौजूदगी में नेताजी के असली आंसुओं को इकठ्ठा किया फिर ऐसी सौ शीशियाँ इकट्ठी की जिनके नकली होने का संदेह था. ये सौ शीशियाँ और असली के नमूने लेबोरेटरी टेस्ट को भेज दिए गए. वैज्ञानिक गण इन आंसुओं पर परी क्षण करते रहे और लोगों की उत्तेजना नए-नए रंग लाती रही. श्री 'क' इस बीच सभाओं में इस काण्ड पर आंसू बहाते रहे और लोग उनके आंसुओं को बड़ी सावधानी से इकठ्ठा करते रहे. अंततः लेबोरेटरी टेस्ट का परिणाम सामने आया.आयोग में रिपोर्ट पढ़ी गयी.लिखा था कि हमें भेजी गई सौ शीशियों में से पैंतीस शीशियाँ नकली आंसुओं की थी और बाकी असली आंसुओं से भरी थी. किन्तु परी क्षण के दौरान एक विचित्र तथ्य उपस्थित हुआ है कि नेताजी के असली आंसुओं में इंसानी आंसुओं का कोई तत्व या गुण नहीं है. इस सन्दर्भ में आगे परी क्षण जारी है. अब आयोग के सामने नई उलझन आ गई. वे नहीं चाहते थे कि उत्तेजित लोगों को यह नई जानकारी मिले मगर बात अंततः लीक हो गई और लोगों में तरह-तरह की चर्चा होने लगी.नेताजी ने सभाओं में जाना छोड़ दिया और अनशन पर बैठ गए कि अब लेबोरेटरी टेस्ट का यह लफड़ा बंद करो...क्या फायदा जब लेबोरेटरी टेस्ट इंसानी आंसुओं को न पहचान सके. स्थिति और उलझ गई. " बिलकुल यही बात है..." दुसरे ने अपनी श्रद्धा प्रकट की और फिर वे उठकर आगे बढ़ गए.
सामग्री : विधि : होममेड पीनट बटर घर पर बनाने के लिए सबसे पहले मूंगफली,नमक और शहद एकसाथ एक मिनट के लिए ग्राइंड करते हैं। अब इसमें तेल डालें। इन सारी सामग्रियों के मिश्रण को 1-2 मिनट के लिए ब्लेंड करें। इस मिश्रण को ढक कर कुछ देर के लिए फ्रिज में रख दें। जब जरूरत हो चलाएं। पीनट बटर बनकर तैयार है,इसे स्टोर करके अच्छे से रख दें और यूज करें।
सामग्री : विधि : होममेड पीनट बटर घर पर बनाने के लिए सबसे पहले मूंगफली,नमक और शहद एकसाथ एक मिनट के लिए ग्राइंड करते हैं। अब इसमें तेल डालें। इन सारी सामग्रियों के मिश्रण को एक-दो मिनट के लिए ब्लेंड करें। इस मिश्रण को ढक कर कुछ देर के लिए फ्रिज में रख दें। जब जरूरत हो चलाएं। पीनट बटर बनकर तैयार है,इसे स्टोर करके अच्छे से रख दें और यूज करें।
हिमाचल में पांवटा साहिब के राजकीय महाविद्यालय में ABVP और SFI इकाई के छात्रों के बीच खूनी संघर्ष हुआ। दोनों छात्र संगठनों ने एक दूसरे के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। ABVP ने SFI के कार्यकर्ताओं पर बाहरी लोगों से हमला करवाने के आरोप लगाए हैं। ABVP इकाई का कहना है कि जब सोमवार को वह कॉलेज पहुंचे तो SFI के गुंडे महाविद्यालय परिसर के बाहर तेजधार हथियार के साथ बैठे थे। उसी दौरान विद्यार्थी परिषद के पूर्व प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रह चुके दीपांशु राणा पर साजिश के तहत तेजधार हथियार से हमला किया गया। जिसमें उनके सिर पर गहरी चोट आई है। साथ ही इस लड़ाई में आम छात्रों को भी चोटें आई हैं। इकाई अध्यक्ष प्रिंस ठाकुर ने बताया कि SFI का अगर इतिहास उठाकर देखा जाए तो कॉलेज में माहौल खराब करने वाला रहा है। फिलहाल पुलिस में हमलवरों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हिमाचल में पांवटा साहिब के राजकीय महाविद्यालय में ABVP और SFI इकाई के छात्रों के बीच खूनी संघर्ष हुआ। दोनों छात्र संगठनों ने एक दूसरे के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। ABVP ने SFI के कार्यकर्ताओं पर बाहरी लोगों से हमला करवाने के आरोप लगाए हैं। ABVP इकाई का कहना है कि जब सोमवार को वह कॉलेज पहुंचे तो SFI के गुंडे महाविद्यालय परिसर के बाहर तेजधार हथियार के साथ बैठे थे। उसी दौरान विद्यार्थी परिषद के पूर्व प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रह चुके दीपांशु राणा पर साजिश के तहत तेजधार हथियार से हमला किया गया। जिसमें उनके सिर पर गहरी चोट आई है। साथ ही इस लड़ाई में आम छात्रों को भी चोटें आई हैं। इकाई अध्यक्ष प्रिंस ठाकुर ने बताया कि SFI का अगर इतिहास उठाकर देखा जाए तो कॉलेज में माहौल खराब करने वाला रहा है। फिलहाल पुलिस में हमलवरों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
चंडीगढ़। हरियाणा के फरीदाबाद जिले के बल्लभगढ़ में छात्रा निकिता तोमर हत्याकांड के आरोपी तौसीफ ने पुलिस पर चार्जशीट में सही से जांच नहीं करने व एक तरफा जांच करने का आरोप लगाकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। गुरुवार को याचिका पर सुनवाई हुई। अगली सुनवाई 7 जनवरी को होगी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनीस खान ने बताया कि उन्होंने एक दिसंबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपील की थी। जिस पर गुरुवार को सुनवाई हुई। न्यायाधीश अल्का सरीन की अदालत में याचिका सुनी गई। इस दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ता मौजूद थे। अधिवक्ता अनीस ने आरोप लगाया कि पुलिस ने चार्जशीट दाखिल करने में बहुत जल्दी की है। तीन महीने का समय होने के बावजूद पुलिस ने एक सामाजिक दबाव को देखते हुए बिना आरोपी पक्ष की जांच किए चार्जशीट दाखिल कर दी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच करने के बाद पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि सुनवाई के दौरान अगर उन्हें कुछ सबूत मिलते हैं तो वह उसे चार्जशीट में जोड़ देंगे। ऐसे में उनकी जांच पर सवाल उठते हैं। अधिवक्ता अनीस खान ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एफएसएल की रिपोर्ट आने से पहले ही दस लोगों की गवाही भी करवा दी। इस केस को जल्द से जल्द निपटाने की कोशिश हो रही है जबकि फास्ट ट्रैक कोर्ट में और भी मामले चल रहे हैं, जिनकी सुनवाई आराम से सही जांच के साथ हो रही है। इस मामले में अदालत ने पुलिस को मामले की डिटेल रिपोर्ट के साथ आने के लिए कहा है। अगली सुनवाई सात जनवरी 2021 को होगी। निकिता तोमर हत्याकांड में बुधवार को अभियोजन पक्ष ने छह गवाहों को पेश किया। हालांकि कार्रवाई लंबी चलने के कारण केवल चार लोगों के ही बयान दर्ज हो पाए। बुधवार को हुई सुनवाई में सभी गवाहों को केवल कागजों को पूरा करने संबंधी बयान के लिए ही बुलाया गया था। इसमें दो कॉलेज के परीक्षा प्रभारी थे, जिन्होंने वारदात के दिन निकिता के कॉलेज में परीक्षा देने की पुष्टि की। इसके अलावा परीक्षा कर्मी थे, जिन्होंने दो साल पहले की अपहरण की वारदात की फाइल अदालत में पेश की, जिससे हत्या का कारण स्पष्ट हो सके।
चंडीगढ़। हरियाणा के फरीदाबाद जिले के बल्लभगढ़ में छात्रा निकिता तोमर हत्याकांड के आरोपी तौसीफ ने पुलिस पर चार्जशीट में सही से जांच नहीं करने व एक तरफा जांच करने का आरोप लगाकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। गुरुवार को याचिका पर सुनवाई हुई। अगली सुनवाई सात जनवरी को होगी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनीस खान ने बताया कि उन्होंने एक दिसंबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपील की थी। जिस पर गुरुवार को सुनवाई हुई। न्यायाधीश अल्का सरीन की अदालत में याचिका सुनी गई। इस दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ता मौजूद थे। अधिवक्ता अनीस ने आरोप लगाया कि पुलिस ने चार्जशीट दाखिल करने में बहुत जल्दी की है। तीन महीने का समय होने के बावजूद पुलिस ने एक सामाजिक दबाव को देखते हुए बिना आरोपी पक्ष की जांच किए चार्जशीट दाखिल कर दी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच करने के बाद पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि सुनवाई के दौरान अगर उन्हें कुछ सबूत मिलते हैं तो वह उसे चार्जशीट में जोड़ देंगे। ऐसे में उनकी जांच पर सवाल उठते हैं। अधिवक्ता अनीस खान ने आरोप लगाया कि पुलिस ने एफएसएल की रिपोर्ट आने से पहले ही दस लोगों की गवाही भी करवा दी। इस केस को जल्द से जल्द निपटाने की कोशिश हो रही है जबकि फास्ट ट्रैक कोर्ट में और भी मामले चल रहे हैं, जिनकी सुनवाई आराम से सही जांच के साथ हो रही है। इस मामले में अदालत ने पुलिस को मामले की डिटेल रिपोर्ट के साथ आने के लिए कहा है। अगली सुनवाई सात जनवरी दो हज़ार इक्कीस को होगी। निकिता तोमर हत्याकांड में बुधवार को अभियोजन पक्ष ने छह गवाहों को पेश किया। हालांकि कार्रवाई लंबी चलने के कारण केवल चार लोगों के ही बयान दर्ज हो पाए। बुधवार को हुई सुनवाई में सभी गवाहों को केवल कागजों को पूरा करने संबंधी बयान के लिए ही बुलाया गया था। इसमें दो कॉलेज के परीक्षा प्रभारी थे, जिन्होंने वारदात के दिन निकिता के कॉलेज में परीक्षा देने की पुष्टि की। इसके अलावा परीक्षा कर्मी थे, जिन्होंने दो साल पहले की अपहरण की वारदात की फाइल अदालत में पेश की, जिससे हत्या का कारण स्पष्ट हो सके।
ये है बीबीसी हिंदी का ताज़ातरीन पॉडकास्ट 'कहानी ज़िंदगी की' 'कहानी ज़िंदगी की' के हर एपीसोड में रूपा झा आपको सुना रही हैं भारतीय भाषाओं में लिखी ऐसी चुनिंदा कहानियां जो अपने आप में बेमिसाल हैं, जो हमारी और आपकी ज़िंदगी में झांकती हैं और सोचने को मजबूर भी करती हैं. आज की कहानी का नाम है सती धनुकाइन. लेखक हैं मैथिली और हिंदी के प्रसिद्ध कवि कहानीकार राजकमल चौधरी. राजकमल चौधरी को विद्रोही रचनाकार भी माना जाता है और उनका रचना संसार नए प्रयोगों से भरा पड़ा है. राजकमल चौधरी का जन्म 13 दिसंबर 1929 को हुआ और मृत्यु 19 जून 1968 को. उनके जन्म और मृत्यु स्थान को लेकर अलग अलग तरह की जानकारी उपलब्ध है, इसलिए केवल इतना ही कि उनका पैतृक स्थान है महिषी. . सहरसा बिहार. . सुनिए मार्च 1958 में उनकी लिखी कहानी - सती धनुकाइन . . जिसे हमने राजकमल प्रकाशन से साभार लिया है. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
ये है बीबीसी हिंदी का ताज़ातरीन पॉडकास्ट 'कहानी ज़िंदगी की' 'कहानी ज़िंदगी की' के हर एपीसोड में रूपा झा आपको सुना रही हैं भारतीय भाषाओं में लिखी ऐसी चुनिंदा कहानियां जो अपने आप में बेमिसाल हैं, जो हमारी और आपकी ज़िंदगी में झांकती हैं और सोचने को मजबूर भी करती हैं. आज की कहानी का नाम है सती धनुकाइन. लेखक हैं मैथिली और हिंदी के प्रसिद्ध कवि कहानीकार राजकमल चौधरी. राजकमल चौधरी को विद्रोही रचनाकार भी माना जाता है और उनका रचना संसार नए प्रयोगों से भरा पड़ा है. राजकमल चौधरी का जन्म तेरह दिसंबर एक हज़ार नौ सौ उनतीस को हुआ और मृत्यु उन्नीस जून एक हज़ार नौ सौ अड़सठ को. उनके जन्म और मृत्यु स्थान को लेकर अलग अलग तरह की जानकारी उपलब्ध है, इसलिए केवल इतना ही कि उनका पैतृक स्थान है महिषी. . सहरसा बिहार. . सुनिए मार्च एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन में उनकी लिखी कहानी - सती धनुकाइन . . जिसे हमने राजकमल प्रकाशन से साभार लिया है.
समिति ने वित्त मंत्रालय से बैंकों की इस चुनौतियों से पार पाने के लिये स्पष्ट नीति तैयार करने को कहा। उसने कहा कि यह बैंकों को खासकर कोविड-19 संकट से उत्पन्न चुनौतियों से पार पाने के लिये सशक्त बनाएगा। भारतीय जनता पार्टी के सांसद जयंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली वित्त पर संसद की स्थायी समिति ने केंद्र की कार्रवाई रिपोर्ट पर अपनी रपट में यह माना कि सरकार ने ऋण पर नजर रखने, जोखिम प्रबंधन, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) यानी फंसे कर्ज के समाधान और वसूली, संचालन व्यवस्था में सुधार, विपणन रणनीति और पहुंच के मामलों में बैंक व्यवस्था में सुधार के लिए कदम उठाए हैं। हालांकि रिपोर्ट में आगाह करते हुए कहा गया है कि पहले से चले आ रहे बड़ी राशि के फंसे कर्ज से जुड़े मामलों का अबतक निपटान नहीं हुआ है। इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है। समिति ने यह बात दोहरायी कि बड़ी राशि पुराने कर्ज या एनपीए को समाधान के लिए अलग किया जा सकता है। इससे बैंक पुराने मुद्दों में फंसे बिना अपने नियमित कारोबार के साथ आगे बढ़ सकेंगे।
समिति ने वित्त मंत्रालय से बैंकों की इस चुनौतियों से पार पाने के लिये स्पष्ट नीति तैयार करने को कहा। उसने कहा कि यह बैंकों को खासकर कोविड-उन्नीस संकट से उत्पन्न चुनौतियों से पार पाने के लिये सशक्त बनाएगा। भारतीय जनता पार्टी के सांसद जयंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली वित्त पर संसद की स्थायी समिति ने केंद्र की कार्रवाई रिपोर्ट पर अपनी रपट में यह माना कि सरकार ने ऋण पर नजर रखने, जोखिम प्रबंधन, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों यानी फंसे कर्ज के समाधान और वसूली, संचालन व्यवस्था में सुधार, विपणन रणनीति और पहुंच के मामलों में बैंक व्यवस्था में सुधार के लिए कदम उठाए हैं। हालांकि रिपोर्ट में आगाह करते हुए कहा गया है कि पहले से चले आ रहे बड़ी राशि के फंसे कर्ज से जुड़े मामलों का अबतक निपटान नहीं हुआ है। इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है। समिति ने यह बात दोहरायी कि बड़ी राशि पुराने कर्ज या एनपीए को समाधान के लिए अलग किया जा सकता है। इससे बैंक पुराने मुद्दों में फंसे बिना अपने नियमित कारोबार के साथ आगे बढ़ सकेंगे।
ईरान की न्याय पालिका की मानवाधिकार परिषद ने कहा है कि ब्रिटेन अपने यहां की दयनीय मानवाधिकार स्थिति के मद्देनज़र, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों में सदस्यता के लायक़ नहीं है। ब्रितानी विदेश मंत्रालय की ओर से ईरान में वर्ष 2016 के पहले अर्ध में मानवाधिकार की स्थिति के बारे जारी की गयी निराधार रिपोर्ट की प्रतिक्रिया में ईरान की न्यायपालिका की मानवाधिकार परिषद ने एक बयान जारी किया। इस बयान में आया है, "बच्चों के हत्यारे ज़ायोनी शासन, आले ख़लीफ़ा शासन, सऊदी अरब और सीरिया में आतंकियों को ब्रिटेन की ओर से समर्थन ने यह साबित कर दिया है कि ब्रिटेन ने अंतर्राष्ट्रीय और इस्लामी मानदंड के अनुसार मानवाधिकार का उल्लंघन किया है। मानवाधिकार विभाग ने कहा कि इराक़, अफ़ग़ानिस्तान, सीरिया, बहरैन और यमन में ब्रितानी सैनिकों के हाथों हज़ारों बेगुनाह महिलाओं और मासूम बच्चों की परोक्ष व अप्ररोक्ष रूप से हत्या की, मादक पदार्थ के तस्करों को फांसी से तुलना नहीं की जा सकती। (MAQ/N)
ईरान की न्याय पालिका की मानवाधिकार परिषद ने कहा है कि ब्रिटेन अपने यहां की दयनीय मानवाधिकार स्थिति के मद्देनज़र, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों में सदस्यता के लायक़ नहीं है। ब्रितानी विदेश मंत्रालय की ओर से ईरान में वर्ष दो हज़ार सोलह के पहले अर्ध में मानवाधिकार की स्थिति के बारे जारी की गयी निराधार रिपोर्ट की प्रतिक्रिया में ईरान की न्यायपालिका की मानवाधिकार परिषद ने एक बयान जारी किया। इस बयान में आया है, "बच्चों के हत्यारे ज़ायोनी शासन, आले ख़लीफ़ा शासन, सऊदी अरब और सीरिया में आतंकियों को ब्रिटेन की ओर से समर्थन ने यह साबित कर दिया है कि ब्रिटेन ने अंतर्राष्ट्रीय और इस्लामी मानदंड के अनुसार मानवाधिकार का उल्लंघन किया है। मानवाधिकार विभाग ने कहा कि इराक़, अफ़ग़ानिस्तान, सीरिया, बहरैन और यमन में ब्रितानी सैनिकों के हाथों हज़ारों बेगुनाह महिलाओं और मासूम बच्चों की परोक्ष व अप्ररोक्ष रूप से हत्या की, मादक पदार्थ के तस्करों को फांसी से तुलना नहीं की जा सकती।
जयपुर। राजनीतिक सूत्रों की माने तो पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर के कांग्रेस विधायकों को अवैध शिकार के डर से राजस्थान स्थानांतरित किया जा सकता है। रविवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और के. सी. वेणुगोपाल से नई दिल्ली में मुलाकात की। इसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी शामिल हुए। चर्चा राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद अपनाई जाने वाली रणनीतियों पर केंद्रित रही। कथित तौर पर, इन पांच राज्यों के विधायकों के राजनीतिक शिविर को भी विचार-विमर्श में प्रमुखता से लिया गया और उन्हें राजस्थान में स्थानांतरित करने का एक सर्वसम्मत निर्णय लिया गया। गहलोत के शासन काल में अन्य राज्यों के विधायकों के लिए सुरक्षित शिविर की व्यवस्था करने में राजस्थान अग्रणी रहा है। इससे पहले, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के विधायकों को भी विपक्ष के अवैध शिकार के डर से यहां स्थानांतरित कर दिया गया था। दरअसल इसी मकसद से असम के विधायकों को भी यहां शिफ्ट किया गया था। 10 मार्च को परिणाम घोषित होने से पहले कुछ राज्यों के विधायक राजस्थान आ सकते हैं।
जयपुर। राजनीतिक सूत्रों की माने तो पांच राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर के कांग्रेस विधायकों को अवैध शिकार के डर से राजस्थान स्थानांतरित किया जा सकता है। रविवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और के. सी. वेणुगोपाल से नई दिल्ली में मुलाकात की। इसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी शामिल हुए। चर्चा राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद अपनाई जाने वाली रणनीतियों पर केंद्रित रही। कथित तौर पर, इन पांच राज्यों के विधायकों के राजनीतिक शिविर को भी विचार-विमर्श में प्रमुखता से लिया गया और उन्हें राजस्थान में स्थानांतरित करने का एक सर्वसम्मत निर्णय लिया गया। गहलोत के शासन काल में अन्य राज्यों के विधायकों के लिए सुरक्षित शिविर की व्यवस्था करने में राजस्थान अग्रणी रहा है। इससे पहले, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के विधायकों को भी विपक्ष के अवैध शिकार के डर से यहां स्थानांतरित कर दिया गया था। दरअसल इसी मकसद से असम के विधायकों को भी यहां शिफ्ट किया गया था। दस मार्च को परिणाम घोषित होने से पहले कुछ राज्यों के विधायक राजस्थान आ सकते हैं।
३. वैरसे वैर कभी शात नहीं होता । वैर प्रेमसे हो शांत होता है । यही सनातन नियम है । ४. ' दूसरे भले हीं न समझ, पर हम इस कलहसे दूर ही रहेंगे, ' ऐसा जो समझते हैं उनका द्वेष या कलह नष्ट हो जाता है । ५. लोगोंकी हड्डियाँ तोड डालनेवाले, दूसरोंका प्राण ले लेनेवाले. गाय, घोड़ा, धन-संपत्ति का हरण करनेवाले राष्ट्र विप्लव मचानेवाले लोग भी मेल कर लेते हैं, उनमें भी एका हो जाता है; तब तुम्हारा मेल क्यों नहीं होता ? ६. किसीसे कंटु वचन न बोलो । यदि बोलोगे, तो वह भी तुमसे वैसा ही कटु वचन बोलेगा. । भगड़ेसे दुःख बढ़ता ही है । कटु वचन बोलनेसे, बदले में, तुम्हें दंड मिलेगा । टूटा हुआ कासा जैसे निःशब्द रहता है उसी तरह अगर तुम स्वयं चुप रहोगे, तो तुम निर्वाद प्राप्त कर लोगे; तुम्हें कलह नहीं सतायगा । १ I ७. क्षमाके समान - इस जगत्में दूसरा तप नहीं । ८. जो चढ़े हुए क्रोधको चलते हुए रथकी तरह रोक लेका है, उसीको मैं सच्चा सारथी कहूँगा; और लोग तो केवल लगाम पकडनेवाले हैं। ६. क्रोधको जीते, भलाईसे बुराईको जीते, कृपरणको दानसे जीते, और झूठ बोलनेवालेको सत्यसे-जीते । १०. क्रोध करनेवालेके ऊपर जो क्रोध करता है, उसका खुद उससे, ' होता है; पर जो क्रोधका जवाब क्रोधसे नहीं देता, वह एक भारी युद्ध जीत लेता है। प्रतिपक्षीको क्रोधाघ देखकर जो अत्यन्त विवेकके साथ. शात हो जाता है, वह अपना और पराया दोनोंका ही हित-साधन करता है । ११. तुझे कोई गाली. ही नहीं, तेरे गाल पर कोई थप्पड़ मारते,, या पत्थर या हथियारसे तेरे शरीरपर कोई प्रहार करे, तो भी तेरे चित्तमें विकार नहीं ग्राना चाहिए, तेरे मुँहसे गंदे शब्द नहीं निकलने चाहिए, तेरे मन में उस समय भी तेरे शत्रु के प्रति अनुकरमैत्रीका भाव रहना चहिए, और किसी भी हालत में क्रोध नहीं आना चाहिए । १२. मनुष्य तभीतक शात और नम्र टीखता है. जबतक कोई उसके विरुद्ध अपशब्द नहीं कहता । पर जन उसे अपशब्द या निंदा क प्रसंग त्राता है, तभी इस बातकी परीक्षा हो सकती है, कि वह वास्तवमं शात और नम्र है या नहीं । १३. जो धर्मके गौरवसे धर्म को पूज्य मानकर शात और नम्र होता है उसीको सच्चा शात और उसीको सञ्चा नम्र समझना चाहिए। अपना मतलव साधनेके लिए कौन शात और नम्र नहीं बन जाता ? १४. कोई मौकेसे बोलता है तो कोई वेमौकेसे बोल देता है; कोई उचित वात कहता है तो कोई अनुचित बात कह देता है; कोई मधुर वचन बोलता है तो कोई कटु वचन बोलता है; कोई हितकी बात कहता है तो कोई अतिकी बात कहता है; कोई हितबुद्धिसे बोलता है तो कोई द्वोपबुद्धिसे बोलता है । इन सब प्रसंगोंपर तुम्हारा चित्त विकारके वश नहीं होना चाहिए, तुम्हारे मुह से गंदे शब्द नहीं निकलने चाहिए, तुम्हारे अंतः करणमें दया- मैत्री रहनी चाहिए, क्रूरता और द्वेप नहीं; और तुम्हें ऐसा अभ्यास करना चाहिए कि जिस मनुष्यने तुम्हारे विरुद्ध कोई बात कही है, उसे ही ग्राधार बनाकर तुम समस्त संसारपर मैत्री - भावनाको सतत वर्षा कर सको । १५. यदि कोई टोकरी और कुदाली लेकर यह कहे कि 'इस तमाम पृथिवीको मैं खोदकर फेंक दूंगा !' दूसरा मनुष्य लाखका रंग, हल्दीका रंग और मजीठका रंग लेकर कहे कि 'इस समस्त प्रकाशको मैं रंग डालूँगा ! और तीसरा मनुष्य घासकी पूली सुलगाकर कहे कि 'इस गंगा नदीको मै भस्म कर डालूँगा !' तो उन मनुष्योक प्रयत्नोंका पृथिवी, या गंगा नदीपर कोई असर पड़नेका नहीं। इसी प्रकार दूसरे लोगों के बोलनेका तुम्हारे हद पर तनिक भी बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए।
तीन. वैरसे वैर कभी शात नहीं होता । वैर प्रेमसे हो शांत होता है । यही सनातन नियम है । चार. ' दूसरे भले हीं न समझ, पर हम इस कलहसे दूर ही रहेंगे, ' ऐसा जो समझते हैं उनका द्वेष या कलह नष्ट हो जाता है । पाँच. लोगोंकी हड्डियाँ तोड डालनेवाले, दूसरोंका प्राण ले लेनेवाले. गाय, घोड़ा, धन-संपत्ति का हरण करनेवाले राष्ट्र विप्लव मचानेवाले लोग भी मेल कर लेते हैं, उनमें भी एका हो जाता है; तब तुम्हारा मेल क्यों नहीं होता ? छः. किसीसे कंटु वचन न बोलो । यदि बोलोगे, तो वह भी तुमसे वैसा ही कटु वचन बोलेगा. । भगड़ेसे दुःख बढ़ता ही है । कटु वचन बोलनेसे, बदले में, तुम्हें दंड मिलेगा । टूटा हुआ कासा जैसे निःशब्द रहता है उसी तरह अगर तुम स्वयं चुप रहोगे, तो तुम निर्वाद प्राप्त कर लोगे; तुम्हें कलह नहीं सतायगा । एक I सात. क्षमाके समान - इस जगत्में दूसरा तप नहीं । आठ. जो चढ़े हुए क्रोधको चलते हुए रथकी तरह रोक लेका है, उसीको मैं सच्चा सारथी कहूँगा; और लोग तो केवल लगाम पकडनेवाले हैं। छः. क्रोधको जीते, भलाईसे बुराईको जीते, कृपरणको दानसे जीते, और झूठ बोलनेवालेको सत्यसे-जीते । दस. क्रोध करनेवालेके ऊपर जो क्रोध करता है, उसका खुद उससे, ' होता है; पर जो क्रोधका जवाब क्रोधसे नहीं देता, वह एक भारी युद्ध जीत लेता है। प्रतिपक्षीको क्रोधाघ देखकर जो अत्यन्त विवेकके साथ. शात हो जाता है, वह अपना और पराया दोनोंका ही हित-साधन करता है । ग्यारह. तुझे कोई गाली. ही नहीं, तेरे गाल पर कोई थप्पड़ मारते,, या पत्थर या हथियारसे तेरे शरीरपर कोई प्रहार करे, तो भी तेरे चित्तमें विकार नहीं ग्राना चाहिए, तेरे मुँहसे गंदे शब्द नहीं निकलने चाहिए, तेरे मन में उस समय भी तेरे शत्रु के प्रति अनुकरमैत्रीका भाव रहना चहिए, और किसी भी हालत में क्रोध नहीं आना चाहिए । बारह. मनुष्य तभीतक शात और नम्र टीखता है. जबतक कोई उसके विरुद्ध अपशब्द नहीं कहता । पर जन उसे अपशब्द या निंदा क प्रसंग त्राता है, तभी इस बातकी परीक्षा हो सकती है, कि वह वास्तवमं शात और नम्र है या नहीं । तेरह. जो धर्मके गौरवसे धर्म को पूज्य मानकर शात और नम्र होता है उसीको सच्चा शात और उसीको सञ्चा नम्र समझना चाहिए। अपना मतलव साधनेके लिए कौन शात और नम्र नहीं बन जाता ? चौदह. कोई मौकेसे बोलता है तो कोई वेमौकेसे बोल देता है; कोई उचित वात कहता है तो कोई अनुचित बात कह देता है; कोई मधुर वचन बोलता है तो कोई कटु वचन बोलता है; कोई हितकी बात कहता है तो कोई अतिकी बात कहता है; कोई हितबुद्धिसे बोलता है तो कोई द्वोपबुद्धिसे बोलता है । इन सब प्रसंगोंपर तुम्हारा चित्त विकारके वश नहीं होना चाहिए, तुम्हारे मुह से गंदे शब्द नहीं निकलने चाहिए, तुम्हारे अंतः करणमें दया- मैत्री रहनी चाहिए, क्रूरता और द्वेप नहीं; और तुम्हें ऐसा अभ्यास करना चाहिए कि जिस मनुष्यने तुम्हारे विरुद्ध कोई बात कही है, उसे ही ग्राधार बनाकर तुम समस्त संसारपर मैत्री - भावनाको सतत वर्षा कर सको । पंद्रह. यदि कोई टोकरी और कुदाली लेकर यह कहे कि 'इस तमाम पृथिवीको मैं खोदकर फेंक दूंगा !' दूसरा मनुष्य लाखका रंग, हल्दीका रंग और मजीठका रंग लेकर कहे कि 'इस समस्त प्रकाशको मैं रंग डालूँगा ! और तीसरा मनुष्य घासकी पूली सुलगाकर कहे कि 'इस गंगा नदीको मै भस्म कर डालूँगा !' तो उन मनुष्योक प्रयत्नोंका पृथिवी, या गंगा नदीपर कोई असर पड़नेका नहीं। इसी प्रकार दूसरे लोगों के बोलनेका तुम्हारे हद पर तनिक भी बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए।
कस्बे के सुबाष तिराहे पर रविवार को भारतीय जनता पार्टी लघु उद्योग प्रकोष्ठ के प्रदेश कार्य समिति सदस्य और काशी प्रांत के प्रभारी बृजेश पांडेय के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने ओबरा नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी का प्रतिकात्मक पुतला दहन कर विरोध जताया। नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि नगरवासियों की समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं किया गया तो वृहद आंदोलन किया जाएगा। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि ओबरा नगर पंचायत में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। अधिशासी अधिकारी ओबरा का प्रभार लेने के बाद भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुंच गया है। नगर पंचायत प्रशासन के क्रियाकलापों से नगरवासी परेशान हो गए हैं। विकास कार्य कराने के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई न होने से उनका मनोबल बढ़ता जा रहा है। कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त ईओ को तत्काल बर्खास्त कर न्यायिक कार्रवाई की जाए। पुतला दहन करने में राजेश्वर प्रसाद, वीरेंद्र मित्तल, अरशद हुसैन, मोहन गुप्ता, अफरोज, लक्ष्मी, रमेशचंद्र, गुंजन पांडेय, राजू गोस्वामी आदि शामिल थे। संचालन संजय सिंह चंदेल ने किया।
कस्बे के सुबाष तिराहे पर रविवार को भारतीय जनता पार्टी लघु उद्योग प्रकोष्ठ के प्रदेश कार्य समिति सदस्य और काशी प्रांत के प्रभारी बृजेश पांडेय के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने ओबरा नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी का प्रतिकात्मक पुतला दहन कर विरोध जताया। नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ताओं ने कहा कि नगरवासियों की समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं किया गया तो वृहद आंदोलन किया जाएगा। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि ओबरा नगर पंचायत में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। अधिशासी अधिकारी ओबरा का प्रभार लेने के बाद भ्रष्टाचार अपने चरम पर पहुंच गया है। नगर पंचायत प्रशासन के क्रियाकलापों से नगरवासी परेशान हो गए हैं। विकास कार्य कराने के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई न होने से उनका मनोबल बढ़ता जा रहा है। कहा कि भ्रष्टाचार में लिप्त ईओ को तत्काल बर्खास्त कर न्यायिक कार्रवाई की जाए। पुतला दहन करने में राजेश्वर प्रसाद, वीरेंद्र मित्तल, अरशद हुसैन, मोहन गुप्ता, अफरोज, लक्ष्मी, रमेशचंद्र, गुंजन पांडेय, राजू गोस्वामी आदि शामिल थे। संचालन संजय सिंह चंदेल ने किया।
अभिनेत्री रवीना टंडन का कहना है कि उनके अंदर हमेशा "मुखर कार्यकर्ता जैसी प्रवृत्ति" रही है लेकिन राजनीति में आने का उनका कोई इरादा नहीं है। अभिनेत्री ने कहा, "मैं उस तरह की व्यक्ति हूं जो किसी पार्टी लाइन से नहीं जुड़ सकता और मुझे कमोबेश सभी राजनीतिक पार्टियों से समस्या है। ऐसी कोई पार्टी नहीं है जिसकी विचारधारा मुझसे मिलती हो। ऐसे कुछ लोग हैं जिन पर मैं विश्वास करती हूं लेकिन मुझे एक आजाद आवाज बने रहना पसंद है। अभिनेत्री (42) ने कहा है कि वह किसी राजनीतिक पार्टी के शोर शराबे में गुम होने के बजाय अपना विचार रखना पसंद करेंगी। रवीना ने पीटीआई-भाषा को बताया, "मैं किसी को यह नहीं बताने जा रही हूं कि मैं क्या कह सकती हूं या मुझे क्या कहना चाहिए या फिर मेरी संवेदनशीलता क्या है। अगर मेरी संवेदनशीलता यह कहती है कि कुछ गलत है लेकिन पार्टी उस पर 'वाह वाह' करती है तो मैं यह नहीं कर सकती। इसलिए मैं किसी राजनीति में शामिल होने के बजाय अपनी आवाज बेधड़क कहने में यकीन रखती हूं। अभिनेत्री ने कहा, "जी हां, ऐसे कुछ लोग हैं जिनके बारे में मैं सोचती हूं कि वे अच्छा काम कर रहे हैं जबकि उनके आस पास के लोग अच्छा काम (उस तरह से) नहीं कर सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं अमुक पार्टी का समर्थन कर रही हूं। उन्होंने कहा, "आज अगर आप यह कहते हैं कि आपको अपने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पर गर्व है तो आपको ट्रोल किया जायेगा। जब हम यह कहते हैं कि इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं, तब हम गौरवान्वित होते हैं। लेकिन आज ऐसा करना किसी प्रतिबंध के समान है। अगर मोदीजी या राहुल गांधी की प्रशंसा करते हैं तो... लोग यही कहेंगे कि आप उनकी राजनीतिक समर्थक हैं।
अभिनेत्री रवीना टंडन का कहना है कि उनके अंदर हमेशा "मुखर कार्यकर्ता जैसी प्रवृत्ति" रही है लेकिन राजनीति में आने का उनका कोई इरादा नहीं है। अभिनेत्री ने कहा, "मैं उस तरह की व्यक्ति हूं जो किसी पार्टी लाइन से नहीं जुड़ सकता और मुझे कमोबेश सभी राजनीतिक पार्टियों से समस्या है। ऐसी कोई पार्टी नहीं है जिसकी विचारधारा मुझसे मिलती हो। ऐसे कुछ लोग हैं जिन पर मैं विश्वास करती हूं लेकिन मुझे एक आजाद आवाज बने रहना पसंद है। अभिनेत्री ने कहा है कि वह किसी राजनीतिक पार्टी के शोर शराबे में गुम होने के बजाय अपना विचार रखना पसंद करेंगी। रवीना ने पीटीआई-भाषा को बताया, "मैं किसी को यह नहीं बताने जा रही हूं कि मैं क्या कह सकती हूं या मुझे क्या कहना चाहिए या फिर मेरी संवेदनशीलता क्या है। अगर मेरी संवेदनशीलता यह कहती है कि कुछ गलत है लेकिन पार्टी उस पर 'वाह वाह' करती है तो मैं यह नहीं कर सकती। इसलिए मैं किसी राजनीति में शामिल होने के बजाय अपनी आवाज बेधड़क कहने में यकीन रखती हूं। अभिनेत्री ने कहा, "जी हां, ऐसे कुछ लोग हैं जिनके बारे में मैं सोचती हूं कि वे अच्छा काम कर रहे हैं जबकि उनके आस पास के लोग अच्छा काम नहीं कर सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं अमुक पार्टी का समर्थन कर रही हूं। उन्होंने कहा, "आज अगर आप यह कहते हैं कि आपको अपने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पर गर्व है तो आपको ट्रोल किया जायेगा। जब हम यह कहते हैं कि इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं, तब हम गौरवान्वित होते हैं। लेकिन आज ऐसा करना किसी प्रतिबंध के समान है। अगर मोदीजी या राहुल गांधी की प्रशंसा करते हैं तो... लोग यही कहेंगे कि आप उनकी राजनीतिक समर्थक हैं।
डब्ल्यूएचओ ने ऑस्ट्रेलिया, फिलीपीन और जापान सहित क्षेत्र के देशों को चेतावनी दी है - जहां 40 वर्ष से कम उम्र के लोग वायरस के शिकार हो रहे हैं। बुचर ने कहा, "हल्के लक्षणों वाले या बिना कई लोग इस बात से अनजान हैं कि वे संक्रमित हैं। नतीजतन, वे अनजाने में दूसरों को संक्रमित करेंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र - जो लगभग 1. 9 बिलियन की आबादी वाला एक विशाल क्षेत्र है - ने कोविद -19 महामारी के एक नए चरण में प्रवेश किया है।
डब्ल्यूएचओ ने ऑस्ट्रेलिया, फिलीपीन और जापान सहित क्षेत्र के देशों को चेतावनी दी है - जहां चालीस वर्ष से कम उम्र के लोग वायरस के शिकार हो रहे हैं। बुचर ने कहा, "हल्के लक्षणों वाले या बिना कई लोग इस बात से अनजान हैं कि वे संक्रमित हैं। नतीजतन, वे अनजाने में दूसरों को संक्रमित करेंगे। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र - जो लगभग एक. नौ बिलियन की आबादी वाला एक विशाल क्षेत्र है - ने कोविद -उन्नीस महामारी के एक नए चरण में प्रवेश किया है।
जिले के नुआंव प्रखंड के रहने वाले क्लास 8वीं कक्षा के छात्र विकास कुमार ने प्लास्टिक से पेट्रोल बनाया है। बता दें कि विकास पिछले 4 महीने से कड़ी मेहनत से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था। विकास ने कचरे के ढेर में से सामान इकट्ठा कर प्लास्टिक से पेट्रोल बनाया। हालांकि, अभी इसे हम कार या बाइक में डायरेक्ट यूज नहीं कर सकते। बताया जा रहा है कि इसके प्यूरीफिकेशन की जरूरत है। फिलहाल, इसे केवल डायरेक्ट ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। विकास ने 1500 रुपये की लागत से प्लास्टिक से पेट्रोल बनाने की मशीन का भी इजाद किया है। इस अविष्कार में उसके स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षकों का अहम रोल रहा है। जिले में साइंस विज्ञान मेला में विकास ने पहला स्थान लाकर अपने स्कूल के साथ-साथ अपने परिवार और जिला का भी नाम रोशन किया है। अब विकास राज्य स्तर पर अपना प्रदर्शन दिखाने के लिए तैयार है। बताया जा रहा है कि विकास ने तैयारी पूरी कर दी है। स्टेट लेवल पर होने वाले विज्ञान प्रदर्शनी में विकास अपनी प्रतिभा का लोहा मनवायेंगे। क्या है फार्मूला? हालांकि, ये पहली बार होगा जब कैमूर में किसी ने प्लास्टिक से पेट्रोल बनाया है। विकास कुमार की पूरे जिले में चर्चा हो रही है। विकास कुमार के फार्मूले से जो पेट्रोल तैयार हो रही है, उसमें 100% में से 30% ऑयल, 30% वैक्स, 30% कार्बन और 10% गैस होती है। वैक्स आग जलाने के लिए काम आती है। ये फार्मूला थर्मोकेमिकल डी पॉलीमराइजेशन पर काम करता है। जिससे प्लास्टिक के कचरे को पेट्रोल में बदला जाता है। विकास कुमार के मुताबिक यदि उनके फार्मूले से बने तेल का प्यूरिफिकेशन कर दिया जाए, तो लोग उसका प्रयोग कर सकते हैं।
जिले के नुआंव प्रखंड के रहने वाले क्लास आठवीं कक्षा के छात्र विकास कुमार ने प्लास्टिक से पेट्रोल बनाया है। बता दें कि विकास पिछले चार महीने से कड़ी मेहनत से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहा था। विकास ने कचरे के ढेर में से सामान इकट्ठा कर प्लास्टिक से पेट्रोल बनाया। हालांकि, अभी इसे हम कार या बाइक में डायरेक्ट यूज नहीं कर सकते। बताया जा रहा है कि इसके प्यूरीफिकेशन की जरूरत है। फिलहाल, इसे केवल डायरेक्ट ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। विकास ने एक हज़ार पाँच सौ रुपयापये की लागत से प्लास्टिक से पेट्रोल बनाने की मशीन का भी इजाद किया है। इस अविष्कार में उसके स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षकों का अहम रोल रहा है। जिले में साइंस विज्ञान मेला में विकास ने पहला स्थान लाकर अपने स्कूल के साथ-साथ अपने परिवार और जिला का भी नाम रोशन किया है। अब विकास राज्य स्तर पर अपना प्रदर्शन दिखाने के लिए तैयार है। बताया जा रहा है कि विकास ने तैयारी पूरी कर दी है। स्टेट लेवल पर होने वाले विज्ञान प्रदर्शनी में विकास अपनी प्रतिभा का लोहा मनवायेंगे। क्या है फार्मूला? हालांकि, ये पहली बार होगा जब कैमूर में किसी ने प्लास्टिक से पेट्रोल बनाया है। विकास कुमार की पूरे जिले में चर्चा हो रही है। विकास कुमार के फार्मूले से जो पेट्रोल तैयार हो रही है, उसमें एक सौ% में से तीस% ऑयल, तीस% वैक्स, तीस% कार्बन और दस% गैस होती है। वैक्स आग जलाने के लिए काम आती है। ये फार्मूला थर्मोकेमिकल डी पॉलीमराइजेशन पर काम करता है। जिससे प्लास्टिक के कचरे को पेट्रोल में बदला जाता है। विकास कुमार के मुताबिक यदि उनके फार्मूले से बने तेल का प्यूरिफिकेशन कर दिया जाए, तो लोग उसका प्रयोग कर सकते हैं।
नई दिल्ली। क्रिकेट जगत ने अपने एक दिग्गज खिलाड़ी को खो दिया और इसकी जानकारी लगते ही विश्व भर के क्रिकेटरों में शोक की लहर है। सीडब्ल्यूआई ने मीडिया को जानकारी दी है कि वेस्टइंडीज के दिग्गज स्पिनर सोनी रामदीन का निधन हो गया है। वे 92 वर्ष के थे। सीडब्ल्यूआई के अध्यक्ष रिकी स्केरिट ने कहा कि क्रिकेट वेस्टइंडीज की ओर से मैं वेस्टइंडीज के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल रहे सोनी रामदीन के परिवार और मित्रों के प्रति सहानुभूति जाहिर करता हूं। जानकारी के तहत सोनी रामदीन इंग्लैंड के खेल मैदान में 1950 में पहली बार टेस्ट सीरीज जीतने वाली टीम के अच्छे खिलाड़ी रहे है। उन्होने इंग्लैंड के खिलाफ 1950 में ओल्ड ट्रैफर्ड में टेस्ट डेब्यू किया था। उन्होने वेस्टइंडीज के लिए 43 टेस्ट में 28.98 की औसत से 158 विकेट लिए थें। रिकी स्केरिट ने 1950 के दौरे पर अपने गेंदबाजी से सभी को परेशान करते रहे है। उन्होंने एल्फ वेलेंटाइन के साथ मिलकर क्रिकेट की 'स्पिन ट्विन' जोड़ी बनाई, जिससे वेस्टइंडीज ने इंग्लैंड को पहली बार उसकी सरजमीं पर हराया। रामदीन ने इंग्लैंड में वेस्टइंडीज की पहली टेस्ट जीत के दौरान लॉर्ड्स में हुए मैच में 152 रन देकर 11 विकेट चटकाए, वेस्टइंडीज ने 1950 की वह सीरीज 3-1 से जीती थी।
नई दिल्ली। क्रिकेट जगत ने अपने एक दिग्गज खिलाड़ी को खो दिया और इसकी जानकारी लगते ही विश्व भर के क्रिकेटरों में शोक की लहर है। सीडब्ल्यूआई ने मीडिया को जानकारी दी है कि वेस्टइंडीज के दिग्गज स्पिनर सोनी रामदीन का निधन हो गया है। वे बानवे वर्ष के थे। सीडब्ल्यूआई के अध्यक्ष रिकी स्केरिट ने कहा कि क्रिकेट वेस्टइंडीज की ओर से मैं वेस्टइंडीज के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल रहे सोनी रामदीन के परिवार और मित्रों के प्रति सहानुभूति जाहिर करता हूं। जानकारी के तहत सोनी रामदीन इंग्लैंड के खेल मैदान में एक हज़ार नौ सौ पचास में पहली बार टेस्ट सीरीज जीतने वाली टीम के अच्छे खिलाड़ी रहे है। उन्होने इंग्लैंड के खिलाफ एक हज़ार नौ सौ पचास में ओल्ड ट्रैफर्ड में टेस्ट डेब्यू किया था। उन्होने वेस्टइंडीज के लिए तैंतालीस टेस्ट में अट्ठाईस.अट्ठानवे की औसत से एक सौ अट्ठावन विकेट लिए थें। रिकी स्केरिट ने एक हज़ार नौ सौ पचास के दौरे पर अपने गेंदबाजी से सभी को परेशान करते रहे है। उन्होंने एल्फ वेलेंटाइन के साथ मिलकर क्रिकेट की 'स्पिन ट्विन' जोड़ी बनाई, जिससे वेस्टइंडीज ने इंग्लैंड को पहली बार उसकी सरजमीं पर हराया। रामदीन ने इंग्लैंड में वेस्टइंडीज की पहली टेस्ट जीत के दौरान लॉर्ड्स में हुए मैच में एक सौ बावन रन देकर ग्यारह विकेट चटकाए, वेस्टइंडीज ने एक हज़ार नौ सौ पचास की वह सीरीज तीन-एक से जीती थी।
नई दिल्ली. द एनर्जी एंड रिसॉर्सेस इंस्टीट्यूट (टेरी) ने यौन उत्पीड़न मामले में फंसे महानिदेशक आरके पचौरी को पद से हटा दिया गया है. बिजली मंत्रालय के तहत काम करने वाले ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) के महानिदेशक अजय माथुर पचौरी की जगह लेंगे. बंगलोर में टेरी की गर्वनिंग काउंसिल की बैठक में पचौरी को हटाकर माथुर को टेरी का महानिदेशक बनाने का फैसला लिया गया है. पचौरी पर एक महिला कर्मचारी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है और इस केस में कोर्ट ने उन्हें इस समय शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दे रखी है.
नई दिल्ली. द एनर्जी एंड रिसॉर्सेस इंस्टीट्यूट ने यौन उत्पीड़न मामले में फंसे महानिदेशक आरके पचौरी को पद से हटा दिया गया है. बिजली मंत्रालय के तहत काम करने वाले ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के महानिदेशक अजय माथुर पचौरी की जगह लेंगे. बंगलोर में टेरी की गर्वनिंग काउंसिल की बैठक में पचौरी को हटाकर माथुर को टेरी का महानिदेशक बनाने का फैसला लिया गया है. पचौरी पर एक महिला कर्मचारी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है और इस केस में कोर्ट ने उन्हें इस समय शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दे रखी है.
SBI की नई सर्विस के जरिए रोजमर्रा की जिंदगी के कई जरूरी काम कर पाएंगे. साथ ही आप घर बैठे 60 जरूरी सर्विस एक ही जगह पर इस्तेमाल कर पाएंगे. देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक एसबीआई (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) अपने ग्राहकों को अच्छी सुविधा मुहिया कराने के लिए कई कोशिशें कर रहा है इसी कड़ी में कुछ ही समय पहले एसबीआई ने योनो ऐप (यू ओनली नीड वन) लॉन्च किया है. इस ऐप के आप जरिए रोजमर्रा की जिंदगी के कई जरूरी काम कर पाएंगे. इस ऐप के साथ आप 60 जरूरी सर्विस एक ही जगह पर इस्तेमाल कर पाएंगे. इस नए ऐप के जरिए आप उबर, ओला की बुकिंग कर सकते है. साथ ही, जबैंग, मैक्स फैशन, मिंत्रा से शॉपिंग भी कर सकेंगे. 14 अलग-अलग कैटेगरी में आपके लिए किताबें, कैब बुक करना, मनोरंजन, खाना पीना, ट्रैवल और मेडिकल सेवाएं शामिल होंगी. इसके लिए बैंक 60 ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ भी करार कर चुकी है. जिसमें अमेजन, उबर, मिंत्रा, शॉपर स्टॉप, थॉमस कुक, यात्रा इत्यादि कंपनियां शामिल हैं. SBI के YONO ऐप की मदद से खाता खोलने के 1 साल के भीतर खाताधारक को फुल KYC (नो योर कस्टमर) के लिए बैंक शाखा में जाना होगा. ग्राहक को ये काम एक साल के भीतर करना होगा. एसबीआई नई एप योनो पर फैशन, कैब एंड कार रेंटल, ऑटोमोबाइल, डील्स, इलेक्ट्रॉनिक, फूड्स एंड इंटरटेनमेंट, गिफ्टिंग, ग्रॉसरी, जनरल स्टोर्स, हेल्थएंड पर्सनल केयर, होम एंड फर्निशिंग, होस्पिटेलिटी एंड हॉलीडेज, ज्वैलर्स और कई अन्य सेवाएं एक ही ऐप पर मिलेंगी. देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक एसबीआई (स्टेट बैंक ऑफ इंडिया) अपने ग्राहकों को अच्छी सुविधा मुहिया कराने के लिए कई कोशिशें कर रहा है इसी कड़ी में कुछ ही समय पहले एसबीआई ने योनो ऐप (यू ओनली नीड वन) लॉन्च किया है. इस ऐप के आप जरिए रोजमर्रा की जिंदगी के कई जरूरी काम कर पाएंगे. इस ऐप के साथ आप 60 जरूरी सर्विस एक ही जगह पर इस्तेमाल कर पाएंगे.
SBI की नई सर्विस के जरिए रोजमर्रा की जिंदगी के कई जरूरी काम कर पाएंगे. साथ ही आप घर बैठे साठ जरूरी सर्विस एक ही जगह पर इस्तेमाल कर पाएंगे. देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक एसबीआई अपने ग्राहकों को अच्छी सुविधा मुहिया कराने के लिए कई कोशिशें कर रहा है इसी कड़ी में कुछ ही समय पहले एसबीआई ने योनो ऐप लॉन्च किया है. इस ऐप के आप जरिए रोजमर्रा की जिंदगी के कई जरूरी काम कर पाएंगे. इस ऐप के साथ आप साठ जरूरी सर्विस एक ही जगह पर इस्तेमाल कर पाएंगे. इस नए ऐप के जरिए आप उबर, ओला की बुकिंग कर सकते है. साथ ही, जबैंग, मैक्स फैशन, मिंत्रा से शॉपिंग भी कर सकेंगे. चौदह अलग-अलग कैटेगरी में आपके लिए किताबें, कैब बुक करना, मनोरंजन, खाना पीना, ट्रैवल और मेडिकल सेवाएं शामिल होंगी. इसके लिए बैंक साठ ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ भी करार कर चुकी है. जिसमें अमेजन, उबर, मिंत्रा, शॉपर स्टॉप, थॉमस कुक, यात्रा इत्यादि कंपनियां शामिल हैं. SBI के YONO ऐप की मदद से खाता खोलने के एक साल के भीतर खाताधारक को फुल KYC के लिए बैंक शाखा में जाना होगा. ग्राहक को ये काम एक साल के भीतर करना होगा. एसबीआई नई एप योनो पर फैशन, कैब एंड कार रेंटल, ऑटोमोबाइल, डील्स, इलेक्ट्रॉनिक, फूड्स एंड इंटरटेनमेंट, गिफ्टिंग, ग्रॉसरी, जनरल स्टोर्स, हेल्थएंड पर्सनल केयर, होम एंड फर्निशिंग, होस्पिटेलिटी एंड हॉलीडेज, ज्वैलर्स और कई अन्य सेवाएं एक ही ऐप पर मिलेंगी. देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक एसबीआई अपने ग्राहकों को अच्छी सुविधा मुहिया कराने के लिए कई कोशिशें कर रहा है इसी कड़ी में कुछ ही समय पहले एसबीआई ने योनो ऐप लॉन्च किया है. इस ऐप के आप जरिए रोजमर्रा की जिंदगी के कई जरूरी काम कर पाएंगे. इस ऐप के साथ आप साठ जरूरी सर्विस एक ही जगह पर इस्तेमाल कर पाएंगे.
आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अब कांग्रेस पार्टी प्रदेश में सदस्यता अभियान चलाने जा रही है। इसे लेकर भारतीय जनता पार्टी के विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने तंज कसा है। अग्रवाल ने कहा- कांग्रेस के इस सदस्यता अभियान में आम लोगों को तो छोड़िए, कांग्रेस के लोग भी सदस्यता नहीं लेना चाहते। लगभग 90 प्रतिशत कार्यकर्ता कांग्रेस पार्टी की वर्किंग से नाराज हैं। ये बातें रायपुर में अपने निवास पर बृजमोहन ने मीडिया से चर्चा में कहीं। कांग्रेस को लेकर अपने बयान में बृजमोहन ने आगे कहा कि वैसे तो ये कांग्रेस का अंदरुनी मामला है। मगर जिस तरह की वर्किंग कांग्रेस की है पार्टी से जुड़े लोग नाराज हैं। जनता ने कांग्रेस को बहुमत दिया मगर जनता अब निराश है। कार्यकर्ताओं का भी मोहभंग हो गया है, इसलिए कोई दोबारा इस पार्टी से जुड़ना नहीं चाहता। दरअसल शनिवार को कांग्रेस की बड़ी बैठक रायपुर में हुई। यहां सदस्यता अभियान को लेकर अभियान चलाने की बात तय हुई। बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि लक्ष्य 10 लाख है। पिछले समय 6 लाख थे, उसको प्राप्त करना है। कांग्रेस का सदस्य बनना सम्मान का विषय है। हमें घर बैठ कर सदस्य नहीं बनाना है, बल्कि कांग्रेसियों के घर जाकर सदस्य बनाना है। सम्मान देने से हमारा कार्यकर्ता खुद को गौरान्वित महसूस करता है। सदस्यता हर ब्लॉक, हर जोन, हर सेक्टर में होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा था सदस्यता अभियान जन संपर्क का एक अच्छा अवसर है। हर जिले को दूसरे से बेहतर करने की कोशिश करना है। आपके पास अपनी सरकार की उपलब्धियों की फेहरिस्त है। उसको लेकर लोगों के पास जाना है। विपक्ष में रहते हमने तत्कालीन सरकार के खिलाफ खूब आंदोलन किया। सबने खूब कर्मठता दिखाई। अब अपने सफल कार्यक्रमों को लोगों को बताना है। हमें 2023 ही नहीं 2024 भी जीतना है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अब कांग्रेस पार्टी प्रदेश में सदस्यता अभियान चलाने जा रही है। इसे लेकर भारतीय जनता पार्टी के विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने तंज कसा है। अग्रवाल ने कहा- कांग्रेस के इस सदस्यता अभियान में आम लोगों को तो छोड़िए, कांग्रेस के लोग भी सदस्यता नहीं लेना चाहते। लगभग नब्बे प्रतिशत कार्यकर्ता कांग्रेस पार्टी की वर्किंग से नाराज हैं। ये बातें रायपुर में अपने निवास पर बृजमोहन ने मीडिया से चर्चा में कहीं। कांग्रेस को लेकर अपने बयान में बृजमोहन ने आगे कहा कि वैसे तो ये कांग्रेस का अंदरुनी मामला है। मगर जिस तरह की वर्किंग कांग्रेस की है पार्टी से जुड़े लोग नाराज हैं। जनता ने कांग्रेस को बहुमत दिया मगर जनता अब निराश है। कार्यकर्ताओं का भी मोहभंग हो गया है, इसलिए कोई दोबारा इस पार्टी से जुड़ना नहीं चाहता। दरअसल शनिवार को कांग्रेस की बड़ी बैठक रायपुर में हुई। यहां सदस्यता अभियान को लेकर अभियान चलाने की बात तय हुई। बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि लक्ष्य दस लाख है। पिछले समय छः लाख थे, उसको प्राप्त करना है। कांग्रेस का सदस्य बनना सम्मान का विषय है। हमें घर बैठ कर सदस्य नहीं बनाना है, बल्कि कांग्रेसियों के घर जाकर सदस्य बनाना है। सम्मान देने से हमारा कार्यकर्ता खुद को गौरान्वित महसूस करता है। सदस्यता हर ब्लॉक, हर जोन, हर सेक्टर में होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा था सदस्यता अभियान जन संपर्क का एक अच्छा अवसर है। हर जिले को दूसरे से बेहतर करने की कोशिश करना है। आपके पास अपनी सरकार की उपलब्धियों की फेहरिस्त है। उसको लेकर लोगों के पास जाना है। विपक्ष में रहते हमने तत्कालीन सरकार के खिलाफ खूब आंदोलन किया। सबने खूब कर्मठता दिखाई। अब अपने सफल कार्यक्रमों को लोगों को बताना है। हमें दो हज़ार तेईस ही नहीं दो हज़ार चौबीस भी जीतना है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
Posted On: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 18(2)(जे) के अंतर्गत शक्तियों का उपयोग करते हुए, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने उपभोक्ताओं को ऐसे घरेलू सामान खरीदने के प्रति सावधान करने के लिए एक सुरक्षा नोटिस जारी किया है जो बिना वैध आईएसआई मार्क के नहीं हैं और केंद्र सरकार द्वारा अनिवार्य उपयोग के लिए निर्देशित मानकों का उल्लंघन करते हैं। उपभोक्ताओं को क्षति और हानि के खतरे से बचाने के लिए और आवश्यक सुरक्षा और तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए, केंद्र सरकार को बीआईएस अधिनियम की धारा 16 के अंतर्गत मानक और मानक चिह्न के अनिवार्य उपयोग के अनुरूप निर्देश देने का अधिकार है। ये निर्देश साधारण रूप से गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) के रूप में प्रकाशित होते हैं। बीआईएस अधिनियम की धारा 17 किसी भी व्यक्ति को किसी भी ऐसे सामान या वस्तु के निर्माण, आयात, वितरण, बिक्री, किराया, पट्टे, भंडारण या बिक्री के लिए प्रदर्शित करने के लिए प्रतिबंधित करती है, जिसके लिए केंद्र सरकार द्वारा धारा 16 के अंतर्गत मानक चिह्न के अनिवार्य उपयोग के निर्देश प्रकाशित किए गए हैं। इसके अलावा, धारा 29(3) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो धारा 17 के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, उसे दो साल तक की कैद या दो लाख रुपये से कम के जुर्माने से दंडित किया जा सकता है। पहला उल्लंघन और दूसरे और बाद के उल्लंघनों के लिए जुर्माना पांच लाख रुपये से कम नहीं हो सकता है, लेकिन हॉलमार्क सहित एक मानक चिह्न के साथ या दोनों के साथ उत्पादित या बेचे जाने या बेचने या चिपकाने या लागू करने की पेशकश की गई वस्तुओं या वस्तुओं के मूल्य के दस गुना तक जुर्माना बढ़ सकता है। धारा 29(4) उप-धारा (3) के उल्लंघन को संज्ञेय अपराध के रूप में नामित करती है। क्यूसीओ द्वारा अनिवार्य मानकों का उल्लंघन न केवल सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है, यह उपभोक्ताओं को गंभीर क्षति पहुंचाने के प्रति संवेदनशील बना सकता है। यह विशेष रूप से घरेलू सामानों के मामले में चिंता का एक महत्वपूर्ण कारण है, क्योंकि ऐसे सामान ज्यादातर घरों में मौजूद होते हैं और परिवार के सदस्यों के बिल्कुल आसपास होते हैं। इससे पहले, सीसीपीए ने अनिवार्य मानकों का उल्लंघन करने वाले हेलमेट, प्रेशर कुकर और रसोई गैस सिलेंडर खरीदने के विरुद्ध उपभोक्ताओं को सावधान करने के लिए दिनांक 06.12.2021 को सुरक्षा नोटिस भी जारी किया था। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत अनिवार्य मानकों का उल्लंघन करने वाले सामान को 'दोषपूर्ण' माना जाएगा। सीसीपीए ने अनुचित व्यापार तरीके को रोकने और एक वर्ग के रूप में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा, प्रचार और लागू करने के मामले में बिक्री या बिक्री के सामान की पेशकश से जुड़े मामलों पर संज्ञान लेने का फैसला किया है जो अनिवार्य मानकों का उल्लंघन करते हैं। इसलिए, कोई भी व्यक्ति जो उपरोक्त तालिका में उल्लिखित घरेलू सामानों को अनिवार्य मानकों के अनुरूप और बीआईएस द्वारा निर्धारित वैध लाइसेंस के बिना बेचते हुए पाया गया, उपभोक्ता अधिकारों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के उल्लंघन के लिए उत्तरदायी होगा और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत कार्रवाई का सामना करेगा। आजादी के 75 वर्ष के उत्सव के हिस्से के रूप में - आजादी का अमृत महोत्सव, सीसीपीए ने पहले से ही नकली और जाली सामानों की बिक्री को रोकने के लिए एक देशव्यापी अभियान शुरू किया है जो क्यूसीओ का उल्लंघन करते हैं और उपभोक्ताओं के बीच बीआईएस मानकों के अनुरूप सामान खरीदने के लिए जागरूकता और चेतना बढ़ाते हैं। इस संबंध में, सीसीपीए ने देश भर के जिला कलेक्टरों को हेलमेट, घरेलू प्रेशर कुकर और रसोई गैस सिलेंडर के निर्माण या बिक्री से संबंधित अनुचित व्यापार प्रथाओं और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन की जांच करने के लिए पत्र लिखा है। सीसीपीए ने भी ई-कॉमर्स संस्थाओं और विक्रेताओं के खिलाफ स्वतः कार्रवाई करने का निर्णय लिया है , जो ऑनलाइन अनिवार्य मानकों के उल्लंघन में प्रेशर कुकर बेचते पाए गए थे। इस तरह के उल्लंघन के संबंध में 15 नोटिस पहले ही जारी किए जा चुके हैं। बीआईएस अधिनियम, 2016 के अंतर्गत आवश्यक कार्रवाई करने के लिए मामलों को बीआईएस को भी भेज दिया गया है। बीआईएस ने घरेलू प्रेशर कुकर के क्यूसीओ के उल्लंघन के लिए 3 नोटिस और हेलमेट के लिए क्यूसीओ के उल्लंघन के लिए 2 नोटिस भी जारी किए हैं।
Posted On: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, दो हज़ार उन्नीस की धारा अट्ठारह के अंतर्गत शक्तियों का उपयोग करते हुए, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने उपभोक्ताओं को ऐसे घरेलू सामान खरीदने के प्रति सावधान करने के लिए एक सुरक्षा नोटिस जारी किया है जो बिना वैध आईएसआई मार्क के नहीं हैं और केंद्र सरकार द्वारा अनिवार्य उपयोग के लिए निर्देशित मानकों का उल्लंघन करते हैं। उपभोक्ताओं को क्षति और हानि के खतरे से बचाने के लिए और आवश्यक सुरक्षा और तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए, केंद्र सरकार को बीआईएस अधिनियम की धारा सोलह के अंतर्गत मानक और मानक चिह्न के अनिवार्य उपयोग के अनुरूप निर्देश देने का अधिकार है। ये निर्देश साधारण रूप से गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के रूप में प्रकाशित होते हैं। बीआईएस अधिनियम की धारा सत्रह किसी भी व्यक्ति को किसी भी ऐसे सामान या वस्तु के निर्माण, आयात, वितरण, बिक्री, किराया, पट्टे, भंडारण या बिक्री के लिए प्रदर्शित करने के लिए प्रतिबंधित करती है, जिसके लिए केंद्र सरकार द्वारा धारा सोलह के अंतर्गत मानक चिह्न के अनिवार्य उपयोग के निर्देश प्रकाशित किए गए हैं। इसके अलावा, धारा उनतीस के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो धारा सत्रह के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, उसे दो साल तक की कैद या दो लाख रुपये से कम के जुर्माने से दंडित किया जा सकता है। पहला उल्लंघन और दूसरे और बाद के उल्लंघनों के लिए जुर्माना पांच लाख रुपये से कम नहीं हो सकता है, लेकिन हॉलमार्क सहित एक मानक चिह्न के साथ या दोनों के साथ उत्पादित या बेचे जाने या बेचने या चिपकाने या लागू करने की पेशकश की गई वस्तुओं या वस्तुओं के मूल्य के दस गुना तक जुर्माना बढ़ सकता है। धारा उनतीस उप-धारा के उल्लंघन को संज्ञेय अपराध के रूप में नामित करती है। क्यूसीओ द्वारा अनिवार्य मानकों का उल्लंघन न केवल सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है, यह उपभोक्ताओं को गंभीर क्षति पहुंचाने के प्रति संवेदनशील बना सकता है। यह विशेष रूप से घरेलू सामानों के मामले में चिंता का एक महत्वपूर्ण कारण है, क्योंकि ऐसे सामान ज्यादातर घरों में मौजूद होते हैं और परिवार के सदस्यों के बिल्कुल आसपास होते हैं। इससे पहले, सीसीपीए ने अनिवार्य मानकों का उल्लंघन करने वाले हेलमेट, प्रेशर कुकर और रसोई गैस सिलेंडर खरीदने के विरुद्ध उपभोक्ताओं को सावधान करने के लिए दिनांक छः.बारह.दो हज़ार इक्कीस को सुरक्षा नोटिस भी जारी किया था। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, दो हज़ार उन्नीस के अंतर्गत अनिवार्य मानकों का उल्लंघन करने वाले सामान को 'दोषपूर्ण' माना जाएगा। सीसीपीए ने अनुचित व्यापार तरीके को रोकने और एक वर्ग के रूप में उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा, प्रचार और लागू करने के मामले में बिक्री या बिक्री के सामान की पेशकश से जुड़े मामलों पर संज्ञान लेने का फैसला किया है जो अनिवार्य मानकों का उल्लंघन करते हैं। इसलिए, कोई भी व्यक्ति जो उपरोक्त तालिका में उल्लिखित घरेलू सामानों को अनिवार्य मानकों के अनुरूप और बीआईएस द्वारा निर्धारित वैध लाइसेंस के बिना बेचते हुए पाया गया, उपभोक्ता अधिकारों और अनुचित व्यापार प्रथाओं के उल्लंघन के लिए उत्तरदायी होगा और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, दो हज़ार उन्नीस के अंतर्गत कार्रवाई का सामना करेगा। आजादी के पचहत्तर वर्ष के उत्सव के हिस्से के रूप में - आजादी का अमृत महोत्सव, सीसीपीए ने पहले से ही नकली और जाली सामानों की बिक्री को रोकने के लिए एक देशव्यापी अभियान शुरू किया है जो क्यूसीओ का उल्लंघन करते हैं और उपभोक्ताओं के बीच बीआईएस मानकों के अनुरूप सामान खरीदने के लिए जागरूकता और चेतना बढ़ाते हैं। इस संबंध में, सीसीपीए ने देश भर के जिला कलेक्टरों को हेलमेट, घरेलू प्रेशर कुकर और रसोई गैस सिलेंडर के निर्माण या बिक्री से संबंधित अनुचित व्यापार प्रथाओं और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन की जांच करने के लिए पत्र लिखा है। सीसीपीए ने भी ई-कॉमर्स संस्थाओं और विक्रेताओं के खिलाफ स्वतः कार्रवाई करने का निर्णय लिया है , जो ऑनलाइन अनिवार्य मानकों के उल्लंघन में प्रेशर कुकर बेचते पाए गए थे। इस तरह के उल्लंघन के संबंध में पंद्रह नोटिस पहले ही जारी किए जा चुके हैं। बीआईएस अधिनियम, दो हज़ार सोलह के अंतर्गत आवश्यक कार्रवाई करने के लिए मामलों को बीआईएस को भी भेज दिया गया है। बीआईएस ने घरेलू प्रेशर कुकर के क्यूसीओ के उल्लंघन के लिए तीन नोटिस और हेलमेट के लिए क्यूसीओ के उल्लंघन के लिए दो नोटिस भी जारी किए हैं।
लगभग सौ प्रतिशत मृत्यु दर के साथ रेबीज सबसे पुरानी और सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है। दुनिया भर में इस बीमारी से करीब 55 हजार लोगों की मौत हो जाती है। भारत में रेबीज के बढ़ते मामले चिंता का विषय बन गए हैं। गाजियाबाद में एक घटना जहां एक बच्चे को एक पालतू कुत्ते ने लिफ्ट में काट लिया था, ने इस मुद्दे पर विचार किया हैभारत में 2021 में कुल 17,01,133 जानवरों के काटने के मामले सामने आए, जो इस साल के पहले सात महीनों में 14. 5 लाख को पार कर गए। रेबीज वायरस आमतौर पर पागल जानवरों की लार में पाया जाता है। भारत में रेबीज के लगभग 97 प्रतिशत मामलों में कुत्तों का योगदान है, इसके बाद बिल्लियों (2 प्रतिशत), लोमड़ियों और कोयोट्स (1 प्रतिशत) का स्थान है। लगभग 80 प्रतिशत मानव मामले ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम को 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान रेबीज के मुद्दे पर मंजूरी दी गई थी। मनुष्यों और जानवरों में टीकों से इस बीमारी को रोका जा सकता है। कुत्ते जनित रेबीज को 2030 तक शून्य पर लाने के लिए पिछले साल एक कार्य योजना शुरू की गई थी।
लगभग सौ प्रतिशत मृत्यु दर के साथ रेबीज सबसे पुरानी और सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है। दुनिया भर में इस बीमारी से करीब पचपन हजार लोगों की मौत हो जाती है। भारत में रेबीज के बढ़ते मामले चिंता का विषय बन गए हैं। गाजियाबाद में एक घटना जहां एक बच्चे को एक पालतू कुत्ते ने लिफ्ट में काट लिया था, ने इस मुद्दे पर विचार किया हैभारत में दो हज़ार इक्कीस में कुल सत्रह,एक,एक सौ तैंतीस जानवरों के काटने के मामले सामने आए, जो इस साल के पहले सात महीनों में चौदह. पाँच लाख को पार कर गए। रेबीज वायरस आमतौर पर पागल जानवरों की लार में पाया जाता है। भारत में रेबीज के लगभग सत्तानवे प्रतिशत मामलों में कुत्तों का योगदान है, इसके बाद बिल्लियों , लोमड़ियों और कोयोट्स का स्थान है। लगभग अस्सी प्रतिशत मानव मामले ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम को बारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान रेबीज के मुद्दे पर मंजूरी दी गई थी। मनुष्यों और जानवरों में टीकों से इस बीमारी को रोका जा सकता है। कुत्ते जनित रेबीज को दो हज़ार तीस तक शून्य पर लाने के लिए पिछले साल एक कार्य योजना शुरू की गई थी।
नई दिल्ली - पेप्सिको इंडिया ने आज अपने प्रमुख जूस ब्रांड ट्रॉपिकाना को नए अवतार में पेश करने की घोषणा की। कंपनी ने यहां जारी बयान में कहा कि स्वादिष्ट और ताज़ा ट्रॉपिकाना जूस अब नई और ख़बूसूरत पीईटी बोतल में उपलब्ध होगा। उपभोक्ता के लिए इसको कहीं ले जाना भी आसान होगा। इसके अलावा ट्रॉपिकाना ने एक नया अभियान 'हवाबाज़ी गॉन, असली ऑन' भी शुरू किया है। पेश किया। इसमें दो अलग-अलग व्यक्तित्वों - छिछोरे और दिखावा करने वाले 'हवाबाज़' और ट्रॉपिकाना पीने वाले 'ऑथेंटिक कूल डूअर्स' की तुलना करके ट्रॉपिकाना पीने वालों के व्यक्तित्व को सामने लाया गया है। कंपनी ने कहा कि नई पीईटी बोतल नए इनोवेशन को आगे बढ़ाने के प्रति ब्रांड की प्रतिबद्धता दोहराती है। इसे उपभोक्ताओं से मिले फीडबैक के आधार पर विकसित किया गया है। ट्रॉपिकाना एसेप्टिक पीईटी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री को 100 प्रतिशत रीसायकल किया जा सकता है।
नई दिल्ली - पेप्सिको इंडिया ने आज अपने प्रमुख जूस ब्रांड ट्रॉपिकाना को नए अवतार में पेश करने की घोषणा की। कंपनी ने यहां जारी बयान में कहा कि स्वादिष्ट और ताज़ा ट्रॉपिकाना जूस अब नई और ख़बूसूरत पीईटी बोतल में उपलब्ध होगा। उपभोक्ता के लिए इसको कहीं ले जाना भी आसान होगा। इसके अलावा ट्रॉपिकाना ने एक नया अभियान 'हवाबाज़ी गॉन, असली ऑन' भी शुरू किया है। पेश किया। इसमें दो अलग-अलग व्यक्तित्वों - छिछोरे और दिखावा करने वाले 'हवाबाज़' और ट्रॉपिकाना पीने वाले 'ऑथेंटिक कूल डूअर्स' की तुलना करके ट्रॉपिकाना पीने वालों के व्यक्तित्व को सामने लाया गया है। कंपनी ने कहा कि नई पीईटी बोतल नए इनोवेशन को आगे बढ़ाने के प्रति ब्रांड की प्रतिबद्धता दोहराती है। इसे उपभोक्ताओं से मिले फीडबैक के आधार पर विकसित किया गया है। ट्रॉपिकाना एसेप्टिक पीईटी के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री को एक सौ प्रतिशत रीसायकल किया जा सकता है।
Devon Conway: आईपीएल 2022 का 55वां मैच चेन्नई सुपर किंग्स और दिल्ली कैपिटल्स के बीच नवी मुंबई के डीवाय पाटिल स्टडियम में आज यानी 8 मई को खेला जा रहा है. जिसमें डीसी के कप्तान ऋषभ पंत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी करने का फैसला किया. हालांकि पंत का यह इतना कारगर साबित नहीं हुआ. चेन्नई के सलामी बल्लेबाज़ ऋतुराज गायकवाड़ और डेवोन कॉनवे ने मिलकर ज़बरदस्त शुरुआत की. खासकर कॉनवे (Devon Conway) आज अलग ही मूड में नज़र आ रहे थे. उन्होंने डीसी के सबसे सफल गेंदबाज़ कुलदीप यादव की ही धुनाई कर दी. डेवोन कॉनवे (Devon Conway) दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ बहुत ही आक्रामक अंदाज़ से बल्लेबाज़ी कर रहे थे. वैसे तो उन्होंने डीसी के सभी गेंदबाज़ों की जमकर धुनाई की. लेकिन कुलदीप यादव की गेंदबाज़ी उन्हें कुछ ज़्यादा ही रास आई. कॉनवे ने कुलदीप की 11 गेंदों का सामना किया जिसमें उन्होंने 37 रन जड़ डाले. कॉनवे ने कुलदीप के खिलाफ चौकों-छक्कों की बारिश कर दी. कॉनवे का स्ट्राइक रेट डीसी के इस सफल गेंदबाज़ के खिलाफ 336 का था. वहीं डेवोन कॉनवे ने दिल्ली के खिलाफ कुल 49 गेंदों में 87 रन बनाए. जिसमें 7 चौके और 5 गगनचुंबी छक्के भी शामिल थे. वहीं इनका स्ट्राइक रेट डीसी के खिलाफ 175 से ऊपर का था. आपको बता दें कि सीएसके के ओपनर्स ऋतुराज गायकवाड़ और डेवोन कॉनवे ने मिलकर टीम को ज़बरदस्त शुरुआत दी. पहले ओवर से ही उन्होंने डीसी के गेंदबाज़ों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था. दोनों ओपनर्स के बीच पहली विकेट के लिए शतकीय साझेदारी देखने को मिली. हालांकि इसके बाद 110 रन के स्कोर पर ऋतुराज के रूप में सीएसके का पहला विकेट गिरा. इसके बाद कॉनवे के साथ मिलकर शिवम दुबे ने भी अच्छी बल्लेबाज़ी की. उन्होंने भी 19 गेंदों में 32 रन बनाए. वहीं अंत में विश्व के बेस्ट फिनिशर्स में से एक महेंद्र सिंह धोनी ने आकर कुछ बड़े हिट्स लगाए और दिल्ली कैपिटल्स के सामने 209 रनों का बड़ा लक्ष्य रखा.
Devon Conway: आईपीएल दो हज़ार बाईस का पचपनवां मैच चेन्नई सुपर किंग्स और दिल्ली कैपिटल्स के बीच नवी मुंबई के डीवाय पाटिल स्टडियम में आज यानी आठ मई को खेला जा रहा है. जिसमें डीसी के कप्तान ऋषभ पंत ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी करने का फैसला किया. हालांकि पंत का यह इतना कारगर साबित नहीं हुआ. चेन्नई के सलामी बल्लेबाज़ ऋतुराज गायकवाड़ और डेवोन कॉनवे ने मिलकर ज़बरदस्त शुरुआत की. खासकर कॉनवे आज अलग ही मूड में नज़र आ रहे थे. उन्होंने डीसी के सबसे सफल गेंदबाज़ कुलदीप यादव की ही धुनाई कर दी. डेवोन कॉनवे दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ बहुत ही आक्रामक अंदाज़ से बल्लेबाज़ी कर रहे थे. वैसे तो उन्होंने डीसी के सभी गेंदबाज़ों की जमकर धुनाई की. लेकिन कुलदीप यादव की गेंदबाज़ी उन्हें कुछ ज़्यादा ही रास आई. कॉनवे ने कुलदीप की ग्यारह गेंदों का सामना किया जिसमें उन्होंने सैंतीस रन जड़ डाले. कॉनवे ने कुलदीप के खिलाफ चौकों-छक्कों की बारिश कर दी. कॉनवे का स्ट्राइक रेट डीसी के इस सफल गेंदबाज़ के खिलाफ तीन सौ छत्तीस का था. वहीं डेवोन कॉनवे ने दिल्ली के खिलाफ कुल उनचास गेंदों में सत्तासी रन बनाए. जिसमें सात चौके और पाँच गगनचुंबी छक्के भी शामिल थे. वहीं इनका स्ट्राइक रेट डीसी के खिलाफ एक सौ पचहत्तर से ऊपर का था. आपको बता दें कि सीएसके के ओपनर्स ऋतुराज गायकवाड़ और डेवोन कॉनवे ने मिलकर टीम को ज़बरदस्त शुरुआत दी. पहले ओवर से ही उन्होंने डीसी के गेंदबाज़ों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था. दोनों ओपनर्स के बीच पहली विकेट के लिए शतकीय साझेदारी देखने को मिली. हालांकि इसके बाद एक सौ दस रन के स्कोर पर ऋतुराज के रूप में सीएसके का पहला विकेट गिरा. इसके बाद कॉनवे के साथ मिलकर शिवम दुबे ने भी अच्छी बल्लेबाज़ी की. उन्होंने भी उन्नीस गेंदों में बत्तीस रन बनाए. वहीं अंत में विश्व के बेस्ट फिनिशर्स में से एक महेंद्र सिंह धोनी ने आकर कुछ बड़े हिट्स लगाए और दिल्ली कैपिटल्स के सामने दो सौ नौ रनों का बड़ा लक्ष्य रखा.
Jamtara: गोविंदपुर-साहिबगंज हाईवे पर 31 मई की दोपहर को नारायणपुर थाना क्षेत्र के मंझलाडीह गांव के समीप स्कूटी व बाइक के बीच भिडंत होने से स्कूटी सवार घनश्याम महतो की घटनास्थल पर मौत हो गई. घनश्याम महतो मंझलाडीह गांव का रहने वाला है. वहीं बाइक चालक भी घायल है जिसका सीएचसी में इलाज किया गया. सड़क दुर्घटना के बाद मुआवजा की मांग को लेकर ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया. इस कारण सड़क के दोनों छोर पर वाहनों की लंबी कतार लग गई है. सूचना पाकर नारायणपुर सर्किल इंस्पेक्टर संजय कुमार व थाना प्रभारी दिलीप कुमार घटनास्थल पर जाम कर रहे लोगों को समझा रहें हैं. धनबाद व दुमका जाने वाली छोटे वाहनों को रास्ता बदलना पड़ रहा है. थाना प्रभारी ने कहा कि ग्रामीणों से सड़क जाम समाप्त करने की अपील की जा रही है. दुर्घटना में मृतक के आश्रित को मिलने वाली सहायता राशि की कुछ प्रक्रियाएं है जिसे पूरा करना आवश्यक है.
Jamtara: गोविंदपुर-साहिबगंज हाईवे पर इकतीस मई की दोपहर को नारायणपुर थाना क्षेत्र के मंझलाडीह गांव के समीप स्कूटी व बाइक के बीच भिडंत होने से स्कूटी सवार घनश्याम महतो की घटनास्थल पर मौत हो गई. घनश्याम महतो मंझलाडीह गांव का रहने वाला है. वहीं बाइक चालक भी घायल है जिसका सीएचसी में इलाज किया गया. सड़क दुर्घटना के बाद मुआवजा की मांग को लेकर ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया. इस कारण सड़क के दोनों छोर पर वाहनों की लंबी कतार लग गई है. सूचना पाकर नारायणपुर सर्किल इंस्पेक्टर संजय कुमार व थाना प्रभारी दिलीप कुमार घटनास्थल पर जाम कर रहे लोगों को समझा रहें हैं. धनबाद व दुमका जाने वाली छोटे वाहनों को रास्ता बदलना पड़ रहा है. थाना प्रभारी ने कहा कि ग्रामीणों से सड़क जाम समाप्त करने की अपील की जा रही है. दुर्घटना में मृतक के आश्रित को मिलने वाली सहायता राशि की कुछ प्रक्रियाएं है जिसे पूरा करना आवश्यक है.
1993 की गर्मियों में, जब सुभाष घई की खलनायक का पहला गाना रिलीज हुआ तो लोग हैरान रह गए। गाना था 'चोली के पीछे क्या है'। गाने के शुरुआती बोल रूढ़िवादियों को असहज करने के लिए काफी थे। गाने को लेकर इतनी बेचैनी थी कि लगभग 32 संगठनों ने गाने पर आपत्ति जताई। उस वक्त खलनायक के म्यूजिक एल्बम ने केवल एक सप्ताह में एक करोड़ कैसेट बेचे, जो उस समय एक रिकॉर्ड था। जब फिल्म रिलीज हुई उस वक्त भी सबसे ज्यादा चर्चा इस गाने की ही थी। माधुरी दीक्षित का दिलकश प्रदर्शन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल संगीत, आनंद बख्शी के बोल, सरोज खान द्वारा कोरियोग्राफ किया गया और अलका याग्निक और इला अरुण द्वारा गाया गया ये गाना सुपरहिट हो गया। माधुरी को हिंदी सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ डांसर्स में से एक माना जाता है, लेकिन 'चोली के पीछे' में उन्होंने कुछ ऐसा किया जो उनकी प्रतिभा से परे था। गाने में उनका चरित्र गंगा (प्राचीन हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार पवित्रता से जुड़ा नाम) है जो प्रेम और लालसा के बारे के गाने पर डांस करती है। गंगा यह सब करती है और बिना अत्यधिक कामुक हुए, लेकिन फिर भी सेक्सी है। वह ऐसे डांस स्टेप्स करती हैं, जो शायद और भी एक्ट्रेस कर सकती थीं, लेकिन जो अदाएं माधुरी के पास हैं वो किसी और अभिनेत्री के पास कहां। वह उन्हें अपनी मासूमियत से लुभाती है और कुछ ही सेकंड में भोलेपन से चुलबुली बन जाती है। गाने में माधुरी की अदाएं देखने लायक है। पंजाब में शादी के गीत यौन संकेतों पर भारी होने के लिए प्रसिद्ध हैं, और यह कई क्षेत्रीय लोक गीतों के लिए भी सच है, लेकिन 'चोली के पीछे' ने कुछ पंख लगाए और वह संभवतः इसलिए था क्योंकि यहां एक महिला गर्व से अपनी यौन इच्छाओं का दावा कर रही थी और वह कोई खलनायिका भी नहीं थी जो नायक का ध्यान भटकाने के लिए ऐसा कर रही थी। यह गंगा नाम की नायिका थी जो संजय दत्त द्वारा अभिनीत 'खलनायक' बल्लू का ध्यान आकर्षित करने के लिए इस गाने पर डांस कर रही थी। उस वक्त रियल लाइफ में संजय दत्त 1993 के बॉम्बे बम विस्फोट मामले में अपनी संलिप्तता के लिए सलाखों के पीछे थे। फिल्म रिलीज होने के बाद भी गाने के खिलाफ विरोध थमा नहीं। वास्तव में, दिल्ली की एक अदालत में बनाई गई फिल्म के खिलाफ अपील की गई थी जिसमें अश्लीलता के आधार पर स्क्रीनिंग को रोकने का अनुरोध किया गया था, लेकिन जजों ने कहा कि यह किसी भी तरह से सार्वजनिक शालीनता को ठेस नहीं पहुंचाता।
एक हज़ार नौ सौ तिरानवे की गर्मियों में, जब सुभाष घई की खलनायक का पहला गाना रिलीज हुआ तो लोग हैरान रह गए। गाना था 'चोली के पीछे क्या है'। गाने के शुरुआती बोल रूढ़िवादियों को असहज करने के लिए काफी थे। गाने को लेकर इतनी बेचैनी थी कि लगभग बत्तीस संगठनों ने गाने पर आपत्ति जताई। उस वक्त खलनायक के म्यूजिक एल्बम ने केवल एक सप्ताह में एक करोड़ कैसेट बेचे, जो उस समय एक रिकॉर्ड था। जब फिल्म रिलीज हुई उस वक्त भी सबसे ज्यादा चर्चा इस गाने की ही थी। माधुरी दीक्षित का दिलकश प्रदर्शन, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल संगीत, आनंद बख्शी के बोल, सरोज खान द्वारा कोरियोग्राफ किया गया और अलका याग्निक और इला अरुण द्वारा गाया गया ये गाना सुपरहिट हो गया। माधुरी को हिंदी सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ डांसर्स में से एक माना जाता है, लेकिन 'चोली के पीछे' में उन्होंने कुछ ऐसा किया जो उनकी प्रतिभा से परे था। गाने में उनका चरित्र गंगा है जो प्रेम और लालसा के बारे के गाने पर डांस करती है। गंगा यह सब करती है और बिना अत्यधिक कामुक हुए, लेकिन फिर भी सेक्सी है। वह ऐसे डांस स्टेप्स करती हैं, जो शायद और भी एक्ट्रेस कर सकती थीं, लेकिन जो अदाएं माधुरी के पास हैं वो किसी और अभिनेत्री के पास कहां। वह उन्हें अपनी मासूमियत से लुभाती है और कुछ ही सेकंड में भोलेपन से चुलबुली बन जाती है। गाने में माधुरी की अदाएं देखने लायक है। पंजाब में शादी के गीत यौन संकेतों पर भारी होने के लिए प्रसिद्ध हैं, और यह कई क्षेत्रीय लोक गीतों के लिए भी सच है, लेकिन 'चोली के पीछे' ने कुछ पंख लगाए और वह संभवतः इसलिए था क्योंकि यहां एक महिला गर्व से अपनी यौन इच्छाओं का दावा कर रही थी और वह कोई खलनायिका भी नहीं थी जो नायक का ध्यान भटकाने के लिए ऐसा कर रही थी। यह गंगा नाम की नायिका थी जो संजय दत्त द्वारा अभिनीत 'खलनायक' बल्लू का ध्यान आकर्षित करने के लिए इस गाने पर डांस कर रही थी। उस वक्त रियल लाइफ में संजय दत्त एक हज़ार नौ सौ तिरानवे के बॉम्बे बम विस्फोट मामले में अपनी संलिप्तता के लिए सलाखों के पीछे थे। फिल्म रिलीज होने के बाद भी गाने के खिलाफ विरोध थमा नहीं। वास्तव में, दिल्ली की एक अदालत में बनाई गई फिल्म के खिलाफ अपील की गई थी जिसमें अश्लीलता के आधार पर स्क्रीनिंग को रोकने का अनुरोध किया गया था, लेकिन जजों ने कहा कि यह किसी भी तरह से सार्वजनिक शालीनता को ठेस नहीं पहुंचाता।
महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ रखी है। पेट्रोल व डीजल की कीमतों में दिवाली में आई गिरावट के बाद अंदाजा था कि एलपीजी के रेट में भी कमी आएगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हालांकि, बीते दिनों एलपीजी के कॉमर्शियल सिलेंडर के रेट 102 रुपये कम किए गए हैं। एलपीजी के घरेलू गैस सिलेंडर के रेट में भले कमी न की गई हो लेकिन मध्यम वर्गीय परिवार के लिए राहत की बात ये है कि अब आप को एलपीजी का 10 केजी का कम्पोजिट सिलेंडर मात्र 660 रुपये में मिल रहा है। जिससे जहां आप कम पैसों में भी सिलेंडर खरीद सकते हैं वहीं इस कम्पोजिट सिलेंजर को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जानें में भी सुविधा होती है ऐसे में महिलाओं के ये कम्पोजिस सिलेंड काफी पसंद आ रहे हैं। 10 केजी के कम्पोजिट सिलेंडर का प्रयोग 14 किलो के एलपीजी गैस सिलेंडर के विकल्प के तौर पर किया जा रहा है। 10 किलो के कम्पोजिट गैस सिलेंडर को मात्र ₹660 में खरीदा जा सकता है। इस सिलेंडर की खास बात ये है कि इसमें गैस की चोरी नहीं हो सकती है वहीं 14 किलो के गैस सिलेंडर में सामान्यता गैस कटिंग की जाती है और लोहे के सिलेंडर में गैर कटिंग को पकड़ना कठिन होता है। पिछले 1 साल में 14 किलो गैस सिलेंडर के बढ़े हुए रेट पर नजर दौड़ाई तो 1 जनवरी 2022 को 14 किलो का गैस सिलेंडर 937. 50 रुपए थीं वहीं 1 जनवरी 2021 को भी 14 किलो एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत 937. 50 हैं। हालांकि पिछले 1 वर्ष में 14 किलो घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में कई बार उतार-चढ़ाव किया गया है। इंडियन ऑयल ने दस किलो व पाचं किलों के कम्पोजिट गैस सिलेंडर को लांच किया है। इस सिलेंडर की खास बात यह है कि यह पारदर्शी होता है और इसमें गैस कटिंग की संभावनाएं बिल्कुल भी नहीं होती हैं। 10 किलो का कंपोजिट गैस सिलेंडर ₹660 का मिल रहा है वहीं 5 किलो का कम अपोजिट एलपीजी गैस सिलेंडर ₹330 में उपलब्ध है। इंडियन ऑयल ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर धारक उपभोक्ताओं को राहत दी है। बीते दिनों ₹19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर पर 102 रुपये कम किए गए हैं। जिसके बाद सिलेंडर 2193. 50 रुपए का मिलने वाला कॉमर्शियल गैस सिलेंडर अब मात्र ₹ 2091 रुपए का मिल रहा है।
महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ रखी है। पेट्रोल व डीजल की कीमतों में दिवाली में आई गिरावट के बाद अंदाजा था कि एलपीजी के रेट में भी कमी आएगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हालांकि, बीते दिनों एलपीजी के कॉमर्शियल सिलेंडर के रेट एक सौ दो रुपयापये कम किए गए हैं। एलपीजी के घरेलू गैस सिलेंडर के रेट में भले कमी न की गई हो लेकिन मध्यम वर्गीय परिवार के लिए राहत की बात ये है कि अब आप को एलपीजी का दस केजी का कम्पोजिट सिलेंडर मात्र छः सौ साठ रुपयापये में मिल रहा है। जिससे जहां आप कम पैसों में भी सिलेंडर खरीद सकते हैं वहीं इस कम्पोजिट सिलेंजर को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जानें में भी सुविधा होती है ऐसे में महिलाओं के ये कम्पोजिस सिलेंड काफी पसंद आ रहे हैं। दस केजी के कम्पोजिट सिलेंडर का प्रयोग चौदह किलो के एलपीजी गैस सिलेंडर के विकल्प के तौर पर किया जा रहा है। दस किलो के कम्पोजिट गैस सिलेंडर को मात्र छः सौ साठ रुपया में खरीदा जा सकता है। इस सिलेंडर की खास बात ये है कि इसमें गैस की चोरी नहीं हो सकती है वहीं चौदह किलो के गैस सिलेंडर में सामान्यता गैस कटिंग की जाती है और लोहे के सिलेंडर में गैर कटिंग को पकड़ना कठिन होता है। पिछले एक साल में चौदह किलो गैस सिलेंडर के बढ़े हुए रेट पर नजर दौड़ाई तो एक जनवरी दो हज़ार बाईस को चौदह किलो का गैस सिलेंडर नौ सौ सैंतीस. पचास रुपयापए थीं वहीं एक जनवरी दो हज़ार इक्कीस को भी चौदह किलो एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत नौ सौ सैंतीस. पचास हैं। हालांकि पिछले एक वर्ष में चौदह किलो घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में कई बार उतार-चढ़ाव किया गया है। इंडियन ऑयल ने दस किलो व पाचं किलों के कम्पोजिट गैस सिलेंडर को लांच किया है। इस सिलेंडर की खास बात यह है कि यह पारदर्शी होता है और इसमें गैस कटिंग की संभावनाएं बिल्कुल भी नहीं होती हैं। दस किलो का कंपोजिट गैस सिलेंडर छः सौ साठ रुपया का मिल रहा है वहीं पाँच किलो का कम अपोजिट एलपीजी गैस सिलेंडर तीन सौ तीस रुपया में उपलब्ध है। इंडियन ऑयल ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर धारक उपभोक्ताओं को राहत दी है। बीते दिनों उन्नीस रुपया किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर पर एक सौ दो रुपयापये कम किए गए हैं। जिसके बाद सिलेंडर दो हज़ार एक सौ तिरानवे. पचास रुपयापए का मिलने वाला कॉमर्शियल गैस सिलेंडर अब मात्र दो हज़ार इक्यानवे रुपया रुपए का मिल रहा है।
चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में जहां 7 चरण में चुनाव कराने का फैसला किया तो वहीं मणिपुर में 2 चरणों में मतदान होने हैं. इसी तरह पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में एक चरण में ही मतदान कराया जाना तय हुआ है. Assembly Election 2022: पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2022) को लेकर तारीखों का ऐलान कर दिया गया है. उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों, उत्तराखंड में 70 विधानसभा सीटों, पंजाब में 117 विधानसभा सीटों, गोवा में 40 विधानसभा सीटों जबकि मणिपुर में 60 विधानसभा सीटों पर चुनाव होने हैं. चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में जहां 7 चरण में चुनाव कराने का फैसला किया तो वहीं मणिपुर में 2 चरणों में मतदान होने हैं. इसी तरह पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में एक चरण में ही मतदान कराया जाना तय हुआ है. इस लिहाज से देखें तो पांच राज्यों का चुनाव सात चरणों में पूरा कर लिया जाएगा. पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो उत्तर प्रदेश, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर में बीजेपी की सरकार है जबकि पंजाब में कांग्रेस सत्ता में है. चुनाव आयोग ने कोरोना महामारी को देखते हुए चुनावों को लेकर सख्त नियमों का ऐलान किया है. चुनाव आयोग ने इस बार उम्मीदवारों को घर बैठे ऑनलाइन नामांकन करने की सुविधा दी है. प्रत्याशियों के ऑनलाइन नॉमिनेशन के लिए एप तैयार किया गया है. CIVIGIL एप के जरिए उम्मीदवार समस्या या शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे. इसके साथ चुनाव में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर भी इस एप के जरिए शिकायत दर्ज की जा सकेगी. 14 फरवरी- दूसरा चरण मुरादाबाद, बिजनौर, शाहजहांपुर, अमरोहा, रामपुर, संभल, सहारनपुर, बदायूं, बरेली, 23 फरवरी- चौथा चरण लखनऊ, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, सीतापुर, हरदोई, उन्नाव, फतेहपुर, बांदा, पीलीभीत, 27 फरवरी- पहला चरण हिंगांग, खुरई, खेतरीगांव, थोंगजू, केइराव, एंड्रो, लामलाई, थंगमीबंद, उरीपोक, सगोलबंद, कीसमथोंग, सिंगजैमी, याइसकुली, वांगखेई, लमसांग, कोंठोजाम, पटसोई, लंगथबल, नौरिया पखंगलकपा, वांगोई, मायांग इंफाल,नंबोल, ओइनम, बिशनपुर, मोइरांग, थंगा, कुंबी, सैकुल (एसटी), कांगपोकपी, सैतु (एसटी), तिपैमुख (एसटी), थानलॉन (एसटी), हेंगलप (एसटी), चुराचांदपुर (एसटी), सैकोट (एसटी), सिंघत (एसटी) 3 मार्च- दूसरा चरण लिलोंग, थौबली, वांगखेम, हेरोक, वांगजिंग तेनथा, खंगाबो, वबगई, काकचिंग, हियांग्लाम, सुगनू, जिरिबम, चंदेल (एसटी), टेंग्नौपाल (एसटी), फुंगयार (एसटी), उखरूल (एसटी), चिंगाई (एसटी), करोंग (एसटी), माओ (एसटी), तदुबी (एसटी), तमी (एसटी), तामेंगलोंग (एसटी), नुंगबा (एसटी) इसे भी पढ़ें :- 5 State Poll Dates 2022: चुनाव की अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू, कोरोना काल में कैसे होंगे चुनाव, जानें इलेक्शन कमीशन की क्या है तैयारी? इसे भी पढ़ें :- Assembly elections 2022: 15 जनवरी तक रोड शो, बाइक रैली और जुलूस पर रोक, चुनाव आयोग ने कहा- स्थिति देखकर दी जाएगी ढील!
चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में जहां सात चरण में चुनाव कराने का फैसला किया तो वहीं मणिपुर में दो चरणों में मतदान होने हैं. इसी तरह पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में एक चरण में ही मतदान कराया जाना तय हुआ है. Assembly Election दो हज़ार बाईस: पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर तारीखों का ऐलान कर दिया गया है. उत्तर प्रदेश की चार सौ तीन विधानसभा सीटों, उत्तराखंड में सत्तर विधानसभा सीटों, पंजाब में एक सौ सत्रह विधानसभा सीटों, गोवा में चालीस विधानसभा सीटों जबकि मणिपुर में साठ विधानसभा सीटों पर चुनाव होने हैं. चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में जहां सात चरण में चुनाव कराने का फैसला किया तो वहीं मणिपुर में दो चरणों में मतदान होने हैं. इसी तरह पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में एक चरण में ही मतदान कराया जाना तय हुआ है. इस लिहाज से देखें तो पांच राज्यों का चुनाव सात चरणों में पूरा कर लिया जाएगा. पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो उत्तर प्रदेश, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर में बीजेपी की सरकार है जबकि पंजाब में कांग्रेस सत्ता में है. चुनाव आयोग ने कोरोना महामारी को देखते हुए चुनावों को लेकर सख्त नियमों का ऐलान किया है. चुनाव आयोग ने इस बार उम्मीदवारों को घर बैठे ऑनलाइन नामांकन करने की सुविधा दी है. प्रत्याशियों के ऑनलाइन नॉमिनेशन के लिए एप तैयार किया गया है. CIVIGIL एप के जरिए उम्मीदवार समस्या या शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे. इसके साथ चुनाव में किसी भी तरह की गड़बड़ी होने पर भी इस एप के जरिए शिकायत दर्ज की जा सकेगी. चौदह फरवरी- दूसरा चरण मुरादाबाद, बिजनौर, शाहजहांपुर, अमरोहा, रामपुर, संभल, सहारनपुर, बदायूं, बरेली, तेईस फरवरी- चौथा चरण लखनऊ, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, सीतापुर, हरदोई, उन्नाव, फतेहपुर, बांदा, पीलीभीत, सत्ताईस फरवरी- पहला चरण हिंगांग, खुरई, खेतरीगांव, थोंगजू, केइराव, एंड्रो, लामलाई, थंगमीबंद, उरीपोक, सगोलबंद, कीसमथोंग, सिंगजैमी, याइसकुली, वांगखेई, लमसांग, कोंठोजाम, पटसोई, लंगथबल, नौरिया पखंगलकपा, वांगोई, मायांग इंफाल,नंबोल, ओइनम, बिशनपुर, मोइरांग, थंगा, कुंबी, सैकुल , कांगपोकपी, सैतु , तिपैमुख , थानलॉन , हेंगलप , चुराचांदपुर , सैकोट , सिंघत तीन मार्च- दूसरा चरण लिलोंग, थौबली, वांगखेम, हेरोक, वांगजिंग तेनथा, खंगाबो, वबगई, काकचिंग, हियांग्लाम, सुगनू, जिरिबम, चंदेल , टेंग्नौपाल , फुंगयार , उखरूल , चिंगाई , करोंग , माओ , तदुबी , तमी , तामेंगलोंग , नुंगबा इसे भी पढ़ें :- पाँच State Poll Dates दो हज़ार बाईस: चुनाव की अधिसूचना तत्काल प्रभाव से लागू, कोरोना काल में कैसे होंगे चुनाव, जानें इलेक्शन कमीशन की क्या है तैयारी? इसे भी पढ़ें :- Assembly elections दो हज़ार बाईस: पंद्रह जनवरी तक रोड शो, बाइक रैली और जुलूस पर रोक, चुनाव आयोग ने कहा- स्थिति देखकर दी जाएगी ढील!
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में हुए सियासी उलटफेर को लेकर एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि, आज जो हुआ उसको लेकर पहले से बात चल रही थी और इसे लेकर प्लानिंग थी. उन्होंने ये साफ करने की कोशिश की रविवार को लिया गया फैसला सिर्फ सत्ता के लिए नहीं है, बल्कि ये स्थिरता की बात थी और इससे कहीं अधिक ये फैसला महाराष्ट्र और राज्य के विकास के हित में लिया गया है. आजतक से खात बातचीत करते हुए एनसीपी वर्किंग प्रेसिडेंट ने अजित पवार के बगावती फैसले को लेकर अपनी राय पेश की और कहा कि शिवसेना और बीजेपी में कोई फर्क नहीं है. बातचीत के दौरान प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि, इसमें कोई दोराए नहीं कि कुछ समय से एनसीपी में ये चर्चा जारी थी कि एनडीए में जाना चाहिए. इसलिए नहीं कि ये सत्ता की बात थी. शिवसेना और एनसीपी के साथ सरकार बनाना हमारा कोई नेचुरल अलायंस नहीं था. शिवसेना बीजेपी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. राजनीति में कम ज्यादा बातें नहीं होती. उस वक्त ऐसा हुआ. मेरे हिसाब से वो प्राकृतिक गठबंधन नहीं था. शिवसेना टूटी, इसके बाद शिवसेना ही सबसे बड़ी पार्टी के तौर उस अलायंस में है. कांग्रेस अब भी मानने को तैयार नहीं कि वह सबसे बड़ी पार्टी नहीं है. हम विपक्ष में जरूर थे, लेकिन हमें ये समझ आ रहा था कि, साल भर बाद चुनाव में जाएंगे तो लोगों के सामने खुद को ठीक से प्रोजेक्ट नहीं कर पाएंगे. शिवसेना और कांग्रेस के सामने कंप्रोमाइज एनसीपी को ही करना पड़ेगा. जब प्रफुल्ल पटेल से सवाल हुआ कि ऐसा कंप्रोमाइज तो आपको अभी भी करना पड़ेगा तो पटेल ने कहा कि, बीजेपी को ही देखिए वह 115 लोगों के समर्थन लेकर लार्जेस्ट पार्टी है. इससे इस सरकार में स्टेबिलिटी नजर आती है. भले ही सीएम एकनाथ शिंदे हैं, आज अजित पवार के माध्यम से हम जुड़े हैं तो ऐसे में एक स्थिरता दिखाई देती है. देश के लेवल पर सोचिए पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पर कोई सवाल नहीं है और वह 9 साल से देश के नेतृत्व कर रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा, मैं शरद पवार पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा. साथ ही कहा कि 'शिवसेना और बीजेपी में कोई फर्क नहीं है. अगर आप आदर्श स्थिति की बात करें तो यह होना चाहिए, एनसीपी पूरे महाराष्ट्र में लड़े, जीते और सरकार बनाए. ' उन्होंने कहा कि, राजनीति में वक्त के हिसाब से फैसले होते हैं. पीएम मोदी की देश में देश से बाहर भी लोकप्रियता है. ये सभी बातें स्थिरता लाती हैं. प्रफुल्ल पटेल ने यह भी कहा कि, मैं आज के या कल के बयानों पर नहीं जाता हूं. राजनीति में टीका-टिप्पणी करना चलता रहता है. बीजेपी के साथ हम गए तो बीजेपी भी हमारे साथ आई, तभी तो तालमेल हुआ. मेरा तो इतना ही कहना है जो भी फैसला लिया, वह राज्य, विकास और स्थिरता को देखते हुए लिया है. नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजीत पवार रविवार (02 जुलाई 2023) को अपने कई साथियों के साथ महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए. अजीत पवार ने प्रदेश सरकार में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. प्रदेश में फिलहाल बीजेपी और शिव सेना (एकनाथ शिंदे गुट) के गठबंधन की सरकार है जिसमें देवेंद्र फडणवीस पहले ही उपमुख्यमंत्री पद पर हैं. शपथ लेने के बाद अजीत पवार ने कहा कि उन्होंने 'एनसीपी पार्टी के तौर पर सरकार में शामिल होने का फ़ैसला लिया है और अगले चुनाव में वो पार्टी के चिन्ह और नाम के साथ ही मैदान में उतरेंगे. ' इधर उनके चाचा शरद पवार ने कहा है, "एनसीपी किसकी है इसका फ़ैसला लोग करेंगे. " एनसीपी के मुख्य प्रवक्ता महेश भारत तपासे ने स्पष्ट किया है, 'ये बगावत है जिसे एनसीपी का कोई समर्थन नहीं है. ' बीते कुछ महीनों से महाराष्ट्र के अख़बारों में 'अजीत पवार नॉट रिचेबल' और 'अजीत पवार बगावत करेंगे' जैसी सुर्खियां देखने को मिल रही थीं. कुछ सप्ताह पहले शरद पवार के पार्टी अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने की बात मीडिया में छाई हुई थी. उस वक्त अटकलें लगाई जा रही थीं कि पार्टी की कमान अजीत पवार को मिलेगी. लेकिन शरद पवार ने इस्तीफा वापस ले लिया जिसके बाद इस तरह के कयास लगना बंद हुए. अजीत पवार को जल्दबाज़ी से काम करने वाले और खुलेआम नाराज़गी जताकर पार्टी को एक्शन लेने पर मजबूर करने वाले नेता के तौर पर देखा जाता है. उन्हें बेहद महत्वाकांक्षी नेता भी माना जाता है. वो पांच बार प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बने लेकिन मुख्यमंत्री बनते-बनते चूक गए. लेकिन इसके बाद भी प्रदेश में कई लोगों की पसंद अजीत पवार नहीं है. लेकिन क्या इन बातों का मूल अजीत पवार के राजनीतिक सफर में खोजा जा सकता है. सतारा से बारामती आकर बसे पवार परिवार के पास किसान मजदूर पार्टी की विरासत थी. शरद पवार की मां शारदाबाई पवार शेकाप से तीन बार लोकल बोर्ड की सदस्य रहीं थीं. उनके पिता गोविंदराव पवार स्थानीय किसान संघ का नेतृत्व करते थे. हालांकि शरद पवार ने 1958 में कांग्रेस का हाथ थाम लिया. 27 साल की उम्र में 1967 में वो बारामती से विधानसभा चुनाव में उतरे. उस वक्त उनके बड़े भाई अनंतराव पवार ने उनकी जीत के लिए कड़ी मेहनत की. शरद पवार पहली बार चुनाव जीतकर महाराष्ट्र विधानसभा पहुंचे. इसके बाद वो राज्य मंत्री बने, फिर कैबिनेट मंत्री और फिर 1978 में मुख्यमंत्री बने. 1969 में जब कांग्रेस दोफाड़ हुई तो शरद पवार और उनके राजनीतिक गुरु यशवंतराव चव्हाण इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाले कांग्रेस गुट में शामिल हुए. 1977 में जब कांग्रेस में एक बार फिर बंटने की कगार पर पहुंची तो शरद पवार और चव्हाण ने कांग्रेस यूनाईटेड का दामन थामा जबकि इंदिरा गांधी कांग्रेस (इंदिरा) का नेतृत्व कर रही थीं. साल भर बाद वो कांग्रेस यूनाईटेड का साथ छोड़ जनता पार्टी के साथ गठबंधन में आए और महज़ 38 साल की उम्र में मुख्यमंत्री बने. शरद पवार की पीढ़ी से किसी और ने राजनीति में कदम नहीं रखा. अगर पवार के बाद इस परिवार से कोई राजनीति में आया, तो वो हैं अनंतराव के बेटे अजीत पवार. हालांकि विश्लेषक मानते हैं कि उनकी एंट्री के दशकों बाद शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले की एंट्री के बाद पार्टी में हालात बदलने लगे. भारतीय जनता पार्टी के हिंदूवादी नेता कपिल मिश्रा (Kapil Mishra) अपने बयानों की वजह से हमेशा सुर्खियों में रहते हैं. एक बार फिर उन्होंने एक ऐसा ट्वीट किया है जिसकी वजह से वो फिर चर्चाओ में आ गए हैं. महाराष्ट्र में हुए सियासी घटनाक्रम के बाद रविवार को ट्वीट करते हुए उन्होंने विपक्षी एकजुटता पर निशाना साधा और कहा कि महागठबंधन का मटका अभी एक ही मीटिंग हुई और महाराष्ट्र में मटके में छेद हो गया. दो तीन मीटिंग होते होते विपक्षी एकता का मटका चकनाचूर ही मिलेगा. लड़खड़ाते विपक्ष के नेता मटकी सम्हाले या सिर. बता दें कि हाल ही में 23 जून को पटना में विपक्षी दलों का बैठक हुआ था. जिसमें एनसीपी नेता शरद पवार भी शामिल हुए थे. इस पर बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने महागठबंधन पर तंज कसते हुए ट्वीट किया है. उन्होंने अजित पवार को शिंदे गुट में शामिल होने पर कहा है कि महाराष्ट्र में मटके में अभी छेद हुआ है. आगे उन्होंने यह भी कहा है कि महागठबंधन की दो-तीन मीटिंग और होती है तो पूरा मटका ही फूट जाएगा.
नई दिल्ली। महाराष्ट्र में हुए सियासी उलटफेर को लेकर एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि, आज जो हुआ उसको लेकर पहले से बात चल रही थी और इसे लेकर प्लानिंग थी. उन्होंने ये साफ करने की कोशिश की रविवार को लिया गया फैसला सिर्फ सत्ता के लिए नहीं है, बल्कि ये स्थिरता की बात थी और इससे कहीं अधिक ये फैसला महाराष्ट्र और राज्य के विकास के हित में लिया गया है. आजतक से खात बातचीत करते हुए एनसीपी वर्किंग प्रेसिडेंट ने अजित पवार के बगावती फैसले को लेकर अपनी राय पेश की और कहा कि शिवसेना और बीजेपी में कोई फर्क नहीं है. बातचीत के दौरान प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि, इसमें कोई दोराए नहीं कि कुछ समय से एनसीपी में ये चर्चा जारी थी कि एनडीए में जाना चाहिए. इसलिए नहीं कि ये सत्ता की बात थी. शिवसेना और एनसीपी के साथ सरकार बनाना हमारा कोई नेचुरल अलायंस नहीं था. शिवसेना बीजेपी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. राजनीति में कम ज्यादा बातें नहीं होती. उस वक्त ऐसा हुआ. मेरे हिसाब से वो प्राकृतिक गठबंधन नहीं था. शिवसेना टूटी, इसके बाद शिवसेना ही सबसे बड़ी पार्टी के तौर उस अलायंस में है. कांग्रेस अब भी मानने को तैयार नहीं कि वह सबसे बड़ी पार्टी नहीं है. हम विपक्ष में जरूर थे, लेकिन हमें ये समझ आ रहा था कि, साल भर बाद चुनाव में जाएंगे तो लोगों के सामने खुद को ठीक से प्रोजेक्ट नहीं कर पाएंगे. शिवसेना और कांग्रेस के सामने कंप्रोमाइज एनसीपी को ही करना पड़ेगा. जब प्रफुल्ल पटेल से सवाल हुआ कि ऐसा कंप्रोमाइज तो आपको अभी भी करना पड़ेगा तो पटेल ने कहा कि, बीजेपी को ही देखिए वह एक सौ पंद्रह लोगों के समर्थन लेकर लार्जेस्ट पार्टी है. इससे इस सरकार में स्टेबिलिटी नजर आती है. भले ही सीएम एकनाथ शिंदे हैं, आज अजित पवार के माध्यम से हम जुड़े हैं तो ऐसे में एक स्थिरता दिखाई देती है. देश के लेवल पर सोचिए पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता पर कोई सवाल नहीं है और वह नौ साल से देश के नेतृत्व कर रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा, मैं शरद पवार पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा. साथ ही कहा कि 'शिवसेना और बीजेपी में कोई फर्क नहीं है. अगर आप आदर्श स्थिति की बात करें तो यह होना चाहिए, एनसीपी पूरे महाराष्ट्र में लड़े, जीते और सरकार बनाए. ' उन्होंने कहा कि, राजनीति में वक्त के हिसाब से फैसले होते हैं. पीएम मोदी की देश में देश से बाहर भी लोकप्रियता है. ये सभी बातें स्थिरता लाती हैं. प्रफुल्ल पटेल ने यह भी कहा कि, मैं आज के या कल के बयानों पर नहीं जाता हूं. राजनीति में टीका-टिप्पणी करना चलता रहता है. बीजेपी के साथ हम गए तो बीजेपी भी हमारे साथ आई, तभी तो तालमेल हुआ. मेरा तो इतना ही कहना है जो भी फैसला लिया, वह राज्य, विकास और स्थिरता को देखते हुए लिया है. नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजीत पवार रविवार को अपने कई साथियों के साथ महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए. अजीत पवार ने प्रदेश सरकार में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. प्रदेश में फिलहाल बीजेपी और शिव सेना के गठबंधन की सरकार है जिसमें देवेंद्र फडणवीस पहले ही उपमुख्यमंत्री पद पर हैं. शपथ लेने के बाद अजीत पवार ने कहा कि उन्होंने 'एनसीपी पार्टी के तौर पर सरकार में शामिल होने का फ़ैसला लिया है और अगले चुनाव में वो पार्टी के चिन्ह और नाम के साथ ही मैदान में उतरेंगे. ' इधर उनके चाचा शरद पवार ने कहा है, "एनसीपी किसकी है इसका फ़ैसला लोग करेंगे. " एनसीपी के मुख्य प्रवक्ता महेश भारत तपासे ने स्पष्ट किया है, 'ये बगावत है जिसे एनसीपी का कोई समर्थन नहीं है. ' बीते कुछ महीनों से महाराष्ट्र के अख़बारों में 'अजीत पवार नॉट रिचेबल' और 'अजीत पवार बगावत करेंगे' जैसी सुर्खियां देखने को मिल रही थीं. कुछ सप्ताह पहले शरद पवार के पार्टी अध्यक्ष के पद से इस्तीफा देने की बात मीडिया में छाई हुई थी. उस वक्त अटकलें लगाई जा रही थीं कि पार्टी की कमान अजीत पवार को मिलेगी. लेकिन शरद पवार ने इस्तीफा वापस ले लिया जिसके बाद इस तरह के कयास लगना बंद हुए. अजीत पवार को जल्दबाज़ी से काम करने वाले और खुलेआम नाराज़गी जताकर पार्टी को एक्शन लेने पर मजबूर करने वाले नेता के तौर पर देखा जाता है. उन्हें बेहद महत्वाकांक्षी नेता भी माना जाता है. वो पांच बार प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बने लेकिन मुख्यमंत्री बनते-बनते चूक गए. लेकिन इसके बाद भी प्रदेश में कई लोगों की पसंद अजीत पवार नहीं है. लेकिन क्या इन बातों का मूल अजीत पवार के राजनीतिक सफर में खोजा जा सकता है. सतारा से बारामती आकर बसे पवार परिवार के पास किसान मजदूर पार्टी की विरासत थी. शरद पवार की मां शारदाबाई पवार शेकाप से तीन बार लोकल बोर्ड की सदस्य रहीं थीं. उनके पिता गोविंदराव पवार स्थानीय किसान संघ का नेतृत्व करते थे. हालांकि शरद पवार ने एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन में कांग्रेस का हाथ थाम लिया. सत्ताईस साल की उम्र में एक हज़ार नौ सौ सरसठ में वो बारामती से विधानसभा चुनाव में उतरे. उस वक्त उनके बड़े भाई अनंतराव पवार ने उनकी जीत के लिए कड़ी मेहनत की. शरद पवार पहली बार चुनाव जीतकर महाराष्ट्र विधानसभा पहुंचे. इसके बाद वो राज्य मंत्री बने, फिर कैबिनेट मंत्री और फिर एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में मुख्यमंत्री बने. एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर में जब कांग्रेस दोफाड़ हुई तो शरद पवार और उनके राजनीतिक गुरु यशवंतराव चव्हाण इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाले कांग्रेस गुट में शामिल हुए. एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में जब कांग्रेस में एक बार फिर बंटने की कगार पर पहुंची तो शरद पवार और चव्हाण ने कांग्रेस यूनाईटेड का दामन थामा जबकि इंदिरा गांधी कांग्रेस का नेतृत्व कर रही थीं. साल भर बाद वो कांग्रेस यूनाईटेड का साथ छोड़ जनता पार्टी के साथ गठबंधन में आए और महज़ अड़तीस साल की उम्र में मुख्यमंत्री बने. शरद पवार की पीढ़ी से किसी और ने राजनीति में कदम नहीं रखा. अगर पवार के बाद इस परिवार से कोई राजनीति में आया, तो वो हैं अनंतराव के बेटे अजीत पवार. हालांकि विश्लेषक मानते हैं कि उनकी एंट्री के दशकों बाद शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले की एंट्री के बाद पार्टी में हालात बदलने लगे. भारतीय जनता पार्टी के हिंदूवादी नेता कपिल मिश्रा अपने बयानों की वजह से हमेशा सुर्खियों में रहते हैं. एक बार फिर उन्होंने एक ऐसा ट्वीट किया है जिसकी वजह से वो फिर चर्चाओ में आ गए हैं. महाराष्ट्र में हुए सियासी घटनाक्रम के बाद रविवार को ट्वीट करते हुए उन्होंने विपक्षी एकजुटता पर निशाना साधा और कहा कि महागठबंधन का मटका अभी एक ही मीटिंग हुई और महाराष्ट्र में मटके में छेद हो गया. दो तीन मीटिंग होते होते विपक्षी एकता का मटका चकनाचूर ही मिलेगा. लड़खड़ाते विपक्ष के नेता मटकी सम्हाले या सिर. बता दें कि हाल ही में तेईस जून को पटना में विपक्षी दलों का बैठक हुआ था. जिसमें एनसीपी नेता शरद पवार भी शामिल हुए थे. इस पर बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने महागठबंधन पर तंज कसते हुए ट्वीट किया है. उन्होंने अजित पवार को शिंदे गुट में शामिल होने पर कहा है कि महाराष्ट्र में मटके में अभी छेद हुआ है. आगे उन्होंने यह भी कहा है कि महागठबंधन की दो-तीन मीटिंग और होती है तो पूरा मटका ही फूट जाएगा.
मुंबई : श्री क्षेत्र शनिशिंगनापुर में वर्ष २०११ में देवस्थान समितिद्वारा ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया है कि, शनि मंदिर में सभी स्त्री-पुरुषोंके लिए प्रवेश खुला है किंतु वेदी प्रवेश पर प्रतिबंध है ! यदि वेदी पर भीड हुई, तो संभाव्य भगदड का संकट टालने हेतु शनिमंदिर में वेदी पर प्रवेश, प्रतिबंधित किया गया है। इसलिए शनैश्वर देवस्थान समिति पर कार्रवाई करने का प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता, मुख्यमंत्री श्री. देवेंद्र फडणवीस ने अपने उत्तर में इसका स्पष्ट उल्लेख किया है ! इस संदर्भ में राष्ट्रवादी कांग्रेस की विधायक श्रीमती विद्या चौहान, सर्वश्री हेमंत टकले, आनंद ठाकुर, नरेंद्र पाटिल एवं किरण पावसकर ने तारांकित प्रश्न पूछा था। इस प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री श्री. फडणवीस ने लिखित उत्तर देते हुए कहा कि .... १. न्यासी मंडलद्वारा ९ फरवरी २०११ को ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया है कि, श्री शनिदेव की वेदी पर स्त्री एवं पुरुषोंको जाने की अनुमति नहीं है। २. ऐसा प्रस्ताव सम्मत करने का उद्देश्य यह है कि, भक्तोंद्वारा भीगे वस्त्र से दर्शन करते समय वे शनिमूर्ति को दोनों हाथोंसे स्पर्श कर पूरा बोझ मूर्ति पर डालते हैं तथा साथ में लाई पूजा सामग्री लोहे के नाल, यंत्र, अंगूठी आदि वस्तुएं शनिमूर्ति पर घिसते हैं। इसलिए मूर्ति को भारी मात्रा में क्षति पहूंच रही है। ३. भक्त अधिक समय तक मूर्ति के पास रुकते हैं। इसलिए वेदी पर भीड होती है एवं जो भक्त वेदी के नीचे से दर्शन लेना चाहते हैं, उन्हें मूर्ति दिखाई नहीं देती। उसी प्रकार शनिमूर्ति पर तैलाभिषेक करने से वेदी की फर्श पर तैल गिरा होता है, जिस से पांव फिसलकर भक्तोंके गिरने की संभावना अधिक होती है। ४. न्यासी मंडलद्वारा ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया है कि, इस प्रकार से होनेवाली संभाव्य भगदड को रोकने हेतु एवं सभी को सुगमता से दर्शन करना सुविधाजनक हो, इसलिए सभी भक्तोंको वेदी के नीचे से ही दर्शन कर शनिदेव की पूजा हेतु न्यास के अधिकृत पुरोहित वेदी पर रुक कर भक्तोंद्वारा लाई गई तैल, तथा अन्य पूजा सामग्री उनसे ले कर मूर्ति को समर्पित कर सकें !
मुंबई : श्री क्षेत्र शनिशिंगनापुर में वर्ष दो हज़ार ग्यारह में देवस्थान समितिद्वारा ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया है कि, शनि मंदिर में सभी स्त्री-पुरुषोंके लिए प्रवेश खुला है किंतु वेदी प्रवेश पर प्रतिबंध है ! यदि वेदी पर भीड हुई, तो संभाव्य भगदड का संकट टालने हेतु शनिमंदिर में वेदी पर प्रवेश, प्रतिबंधित किया गया है। इसलिए शनैश्वर देवस्थान समिति पर कार्रवाई करने का प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता, मुख्यमंत्री श्री. देवेंद्र फडणवीस ने अपने उत्तर में इसका स्पष्ट उल्लेख किया है ! इस संदर्भ में राष्ट्रवादी कांग्रेस की विधायक श्रीमती विद्या चौहान, सर्वश्री हेमंत टकले, आनंद ठाकुर, नरेंद्र पाटिल एवं किरण पावसकर ने तारांकित प्रश्न पूछा था। इस प्रश्न का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री श्री. फडणवीस ने लिखित उत्तर देते हुए कहा कि .... एक. न्यासी मंडलद्वारा नौ फरवरी दो हज़ार ग्यारह को ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया है कि, श्री शनिदेव की वेदी पर स्त्री एवं पुरुषोंको जाने की अनुमति नहीं है। दो. ऐसा प्रस्ताव सम्मत करने का उद्देश्य यह है कि, भक्तोंद्वारा भीगे वस्त्र से दर्शन करते समय वे शनिमूर्ति को दोनों हाथोंसे स्पर्श कर पूरा बोझ मूर्ति पर डालते हैं तथा साथ में लाई पूजा सामग्री लोहे के नाल, यंत्र, अंगूठी आदि वस्तुएं शनिमूर्ति पर घिसते हैं। इसलिए मूर्ति को भारी मात्रा में क्षति पहूंच रही है। तीन. भक्त अधिक समय तक मूर्ति के पास रुकते हैं। इसलिए वेदी पर भीड होती है एवं जो भक्त वेदी के नीचे से दर्शन लेना चाहते हैं, उन्हें मूर्ति दिखाई नहीं देती। उसी प्रकार शनिमूर्ति पर तैलाभिषेक करने से वेदी की फर्श पर तैल गिरा होता है, जिस से पांव फिसलकर भक्तोंके गिरने की संभावना अधिक होती है। चार. न्यासी मंडलद्वारा ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया है कि, इस प्रकार से होनेवाली संभाव्य भगदड को रोकने हेतु एवं सभी को सुगमता से दर्शन करना सुविधाजनक हो, इसलिए सभी भक्तोंको वेदी के नीचे से ही दर्शन कर शनिदेव की पूजा हेतु न्यास के अधिकृत पुरोहित वेदी पर रुक कर भक्तोंद्वारा लाई गई तैल, तथा अन्य पूजा सामग्री उनसे ले कर मूर्ति को समर्पित कर सकें !
न्यूजीलैंड ने भारत के खिलाफ 18-22 जून के बीच विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (World Test Championship) का फाइनल मैच साउथम्प्टन में खेलना है. न्यूजीलैंड (New Zealand) के अनुभवी तेज गेंदबाज टिम साउदी (Tim Southee) के मुताबिक इस खिताबी मुकाबले में उनकी टीम को फायदा मिल सकता है. टिम साउदी का मानना है कि इंग्लैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की आगामी शृंखला उनकी टीम के लिए भारत के खिलाफ WTC Final की अच्छी तैयारी में मददगार होंगे. न्यूजीलैंड की टीम इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स (दो से छह जून) और बर्मिंघम (10 से 14 जून) में दो टेस्ट मैच खेलेगी.
न्यूजीलैंड ने भारत के खिलाफ अट्ठारह-बाईस जून के बीच विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल मैच साउथम्प्टन में खेलना है. न्यूजीलैंड के अनुभवी तेज गेंदबाज टिम साउदी के मुताबिक इस खिताबी मुकाबले में उनकी टीम को फायदा मिल सकता है. टिम साउदी का मानना है कि इंग्लैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की आगामी शृंखला उनकी टीम के लिए भारत के खिलाफ WTC Final की अच्छी तैयारी में मददगार होंगे. न्यूजीलैंड की टीम इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स और बर्मिंघम में दो टेस्ट मैच खेलेगी.
उन्होंने कैमरे का बटन दबाना अधिक उचित समझा। कुछ ही मिनट सामने रहकर, वह विशालकाय प्राणी भाग खड़ा हुआ। उसे पकड़ा या मारा तो न जा सका, पर फोटो बहुत साफ आए। उसके पैरों के निशानों के भी फोटो उन्होंने लिए और अपने देश जाकर, उन चित्रों को छापते हुए हिम मानव के अस्तित्व की पुष्टि की। तिब्बत और चीन की सीमा पर किसी प्रयोजन के लिए गए एक चीनी कप्तान ने भी हिम-मानव से सामना होने का विवरण अपने फौजी कार्यालय में नोट कराया था। स्विट्जरलैंड का एक पर्वतारोही दल एवरेस्ट पर चढ़ाई करने के लिए आया था। उनके साथ पंद्रह पहाड़ी कुली थे। दल का एक कुली थोड़ा पीछे रह गया। उस पर हिम-मानव ने आक्रमण कर दिया। चीख-पुकार सुनकर, अन्य कुली उसे बचाने दौड़े और घायल स्थिति में उसे बचाया। सन् १८८७ में कर्नल वेडैल के नेतृत्व में एक ब्रिटिश पर्वतारोही दल भारत आया था। उसने सिक्किम क्षेत्र में यात्रा की थी । १६ हजार फुट ऊँचाई पर उन्होंने बर्फीली चोटियों पर पाए गए हिम मानव के ताजे पद-चिह्नों के फोटो उतारे थे। वनस्पति विज्ञान के प्रो० हेनरी ल्यूस जिन दिनों वनस्पति शोध के संदर्भ में हिमाच्छादित प्रदेशों में भ्रमण कर रहे थे, तब उन्होंने मनुष्याकृति के विशालकाय प्राणी को आँखों से देखा था। वह तेजी से एक ओर से आया और दूसरी ओर के पहाड़ी गड्ढों में कहीं गायब हो गया। ठीक इसी से मिलती-जुलती कहानी सन् १६२१ में एवरेस्ट चढ़ाई पर निकले कर्नल हावर्ड ब्यूरी की है। उनके सामने से भी वैसा ही वन-मानुष से मिलता-जुलता प्राणी निकला था। उस क्षेत्र में आने-जाने वाले बताते थे कि वह अकेले-दुकेले आदमियों और जानवरों को मारकर खा जाता है। भारतीय हिम-यात्री ए० एन० तोम्वाजी ने सिक्किम क्षेत्र में हिम-मानव देखने का विवरण बताया था। स्विट्जरलैंड के डायरन फर्थ ने भी सन् १६२५ में उसे आँखों से देखा था। नार्वे के दो वैज्ञानिक थोरवर्ग और फ्रसिस्ट किसी अनुसंधान के संबंध में सिक्किम क्षेत्र में गये थे। उस पर हिम-मानव ने हमला कर दिया और कंधे नोंच डाले। गोलियों से उसका मुकाबला करने पर ही वे लोग बच सके । गोली उसे लगी तो नहीं किंतु वह डरकर भाग तो गया ही। सन् १६५१ में एक ब्रिटिश यात्री एरिक शिपटन ने भी हिम-मानव के पैरों के निशानों के बर्फीले क्षेत्र से फोटो खींचे थे। ऐसे ही फोटो प्राप्त करने वालों में डॉ० एडमंड हिलेरी का भी नाम है। सन् १६५४ में कंचन जंघा चोटियों पर सर जानहंट के दल ने २० हजार फुट की ऊँचाई पर हिम - मानव के पद चिह्नों के प्रमाण एकत्रित किए थे। वे निशान प्रायः १८ इंच लंबे थे। न्यूजीलैंड के पर्वतारोही जार्जलोंव ने उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर हिम-मानव के अस्तित्व को असंदिग्ध बताया था । सन् १६५५ में इंग्लैंड के दैनिक पत्र 'डेलीमेल' ने अपना एक खोजी दल मात्र हिम-मानव संबंधी अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए भेजा था । दल ने बहुत समय तक हिमाच्छादित प्रदेशों के दौरे किये। इस बीच उन्होंने हिम मानव देखा या पकड़ा तो नहीं, पर ऐसे अनेक प्रमाण, अवशेष एवं चित्र संग्रह करके, उस पत्र में छपाए, जिनसे हिम-मानव संबंधी जनश्रुतियाँ सारगर्भित होती हैं। असह्य माने जाने वाले शीत और ताप से प्राणियों का विशेषतया मनुष्य जैसे कोमल प्रकृति जीवधारी का निर्वाह होते रहने के उपरोक्त प्रमाण यह सिद्ध करते हैं कि प्रतिकूलताएँ कितनी ही बड़ी क्यों न हों जीव उन सबसे लड़ सकने में समर्थ है। उसका संकल्प बल ऐसी परिस्थितियाँ पैदा कर सकता है, जिसमें असह्य को सह्य और असंभव को संभव बनाया जा सके। न केवल प्रकृति से जूझने में वरन् पग-पग पर आती रहने वाली कठिनाइयों को निरस्त करने में भी संकल्प बल की प्रखरता का तथ्य सदा ही सामने आता रहता है। अद्भुत चमत्कारी संकल्प-शक्ति विंडसर स्टेट (अमेरिका) की विधान सभा के सम्मानित सम्माननीय सदस्य क्लेरेन्स एडम, राजकीय पुस्तकालय के निदेशक भी थे। यह पद उन्होंने बड़े यत्न से प्राप्त किया था, सो भी केवल स्वाध्याय का शौक पूरा करने के लिए। एडम की दिनचर्या में सर्वाधिक घंटे पढ़ाई के थे। दुर्भाग्य कहें या सौभाग्य एक दिन क्लेरेन्स एडम के हाथ आगस्टाइन एडम की पुस्तक मैस्मरेजम पर पच्चीस रहस्यमय पाठ (ट्वेन्टीफाइव सीक्रेट लेसंस इन मैस्मरेजिम) और डॉक्टर बर्नहम की हिप्नोटिज्म का इतिहास (हिस्ट्री आफ हिजोटिज्म) हाथ लग गईं। पुस्तकें अभी तक पूरी नहीं पढ़ी जा सकी थीं कि एडम के मन में इस विद्या के प्रयोग की तीव्र इच्छा उठ खड़ी हुई। एडम मानवीय चेतना की अद्भुत शक्तियों के प्रमाण थे। यद्यपि उन्होंने अपराधी जीवन प्रारंभ कर दिया, किंतु इस बात के प्रमाणीकरण में कोई त्रुटि नहीं आई कि मनुष्य की प्राण-चेतना सचमुच ही एक आश्चर्यजनक शक्ति है। प्राणशक्ति के प्रयोग से व्यक्ति अद्भुत कार्य कर सकता है। सिद्धियाँ प्राणशक्ति के ही निमंत्रण का अद्भुत परिणाम होती हैं। एडम ने पहला प्रयोग वाटरमैन फ्लावरा मिल में किया। एक दिन घनी रात के अंधकार में एडम उस मील के फाटक में जा घुसे। न तो सेघ काटी और न ही संतरी को जबरन क्लोरोफार्म सुँघाया। जड़-चेतन किसी को भी प्रभावित कर मनमर्जी के अनुसार काम ले लेना तो अब मात्र उनकी दृष्टि का काम था; हिप्नोटिज्म और मैस्मरेज्म का उन्होंने कुछ इस तरह अभ्यास किया। फ्लावरा मील खजाने का चौकीदार हाथ में रायफल लिए खड़ा था। एडम ने कोई मारपीट नहीं की। भरपूर दृष्टि डाली चौकीदार के चेहरे पर नजरें चार हुईं, न जाने कौन-सा मंत्र फूँका एडम ने, चौकीदार जहाँ था, वहीं खड़े का खड़ा रह गया। मानो उस खड़े-खड़े सोने की बीमारी हो गई हो। एडम अब तिजोरी के पास पहुँचा। ताला खोला बिना किसी चाभी के जड़ पदार्थ भी अब उनकी दृष्टि प्रखरता के दास बन गए थे। तिजोरी से १५ हजार डालर निकाले । ताला उसी तरह बंद कर दिया और बड़े मजे से वहाँ से चले आए मानो डालर चुराए नहीं हों वरन् अपनी ही संपत्ति लेकर निकले हों। चौकीदार अभी तक यंत्रवत् खड़ा था । एडम के जाने के बाद उसे पता चला कि कोई आया था और तिजोरी की चोरी हो गई। प्रातःकाल पुलिस के सामने उसने बयान दिया - एक आदमी आया, उसने मेरी ओर देखा तो मैं संज्ञाहीन-सा खड़ा रह गया; उसने सारा काम किया, पर मुझे पता नहीं वह कौन था, क्योंकि न तो मैं बोल सका और न ही हिल-डुल सका। चोरी उसने मेरे देखते की, पर मुझे ऐसा लगता था कि मेरे ऊपर हल्का-सा धुएँ का पर्दा पड़ा हुआ है और मैं उसमें बंदी हूँ, कुछ कर नहीं सकता था, जब तक वह व्यक्ति यहाँ रहा।" इस घटना के कुछ ही दिन बाद विंडसर के एक जौहरी की दुकान में एक आदमी आया; उसने अपनी विलक्षण दृष्टि से जौहरी को देखा। जौहरी इस तरह निस्तब्ध रह गया, मानो वह काष्ठ विनिर्मित हो, उस आगंतुक ने अच्छे-अच्छे जवाहरात, जौहरी और बाजार की भारी भीड़ के बीच अपनी जेब में भरे और वहाँ से चला गया। देखा सबने पर किसी ने न पहचाना, न प्रतिरोध किया, कौन आया, कहाँ गया यह भी किसी को पता नहीं था। पीछे जौहरी से पुलिस ने बयान लिए तो उसने भी वही शब्द दोहराए, जो पहले चौकीदार ने कहे। एक दिन समुद्र की हवा खाने के लिए बिंडसर के एक करोड़पति अपनी पत्नी के साथ कार पर आ रहे थे। उनकी भेंट अनायास ही इस जादूगर से हो गई। उसने उनके सारे जेबर और घड़ियाँ उतरवा लीं और उन्होंने ऐसे दे दिया, मानो उपहार दे रहे हों। पीछे जो बयान दिए उन्होंने वह पहले वाले पीड़ितों के बयानों से अक्षरशः मिलते-जुलते थे। इन खबरों ने एक बार तो बिंडसर राज्य में तहलका मचा दिया। कुबेरों की नींद हराम हो गई। एक मिल मालिक ने तो अपने मानवी क्षमता-असीम अप्रत्याशित बँगले के सभी निकासों पर स्वचालित बंदूकें लगवा दीं। इन्हीं बंदूकों के बल पर क्लेरेन्स एडम पकड़े जा सके। एक रात वे इस बँगले के एक दरवाजे पर पहुँचे और अंदर प्रवेश का प्रयत्न करने लगे तो बंदूक ने उन्हें घायल कर दिया । धड़ाके की आवाज सुनकर लोग दौड़े-दौड़े आए। एडम को पहचानकर लोग आश्चर्यचकित रह गए। अदालत में एडम ने अपने ऊपर लगाए गए वह सारे अभियोग स्वीकार कर लिए और यह भी मान लिया कि यह सब उन्होंने सम्मोहन विद्या (हिप्नोटिज्म) के द्वारा किया है। इन अपराधों के लिए इन्हें दस वर्ष सश्रम कारावास का दंड दिया गया और वे शहर की अपेक्षा बिंडसर की पहाड़ी जेल में भेज दिए गए। जेलर उनकी भद्र वेश-भूषा और सांस्कृतिक रहन-सहन से बहुत अधिक प्रभावित हुआ, सो वह एडम के लिए अनायास ही उदार बन गया। इस उदारता का लाभ एक बार फिर एडम को मिला। उसने जेलर की सहायता से अपने लिए कुछ पुस्तकें पढ़ने के लिए प्राप्त कर लीं। इन्हीं पुस्तकों में उसकी वह दोनों मनचाही पुस्तकें भी थीं। दरअसल अन्य पुस्तकें तो साथ में एडम ने केवल इसलिए मँगाई थीं कि किसी को उस पर शक न हो जाए। यह पुस्तकें उसने अपनी विद्या को आगे बढ़ाने के लिए मँगाई थीं, सो एक बार फिर से जेल में ही उसकी साधना अनुष्ठान चल पड़ा और दूसरे लोगों को इस बात की कानों कान खबर न हुई। एक दिन दैवयोग से जब एडम अपने कमरे की चीजों पर हिप्नोटिज्म का अभ्यास कर रहे थे, तब उन्हें जेल के एक अन्य डॉक्टर कैदी ने देख लिया, उसका भी हिप्नोटिज्म सीखने का मन था। धीरे-धीरे दोनों में बातचीत होने लगी और यही बातचीत एक दिन प्रगाढ़ मैत्री में बदल गई । किंतु इन्हीं दिनों एडम बीमार पड़ गए। उनका इलाज हुआ, पर वे अच्छे हुए ही नहीं। एक दिन अपने डॉक्टर मित्र के कमरे में प्राण त्याग दिए। जेल के डॉक्टर ब्राउस्टर उनकी अंत्य परीक्षा की और उन्हें मृत घोषित कर मृत्यु का प्रमाण पत्र भी दे दिया। एडम के भतीजे विलियम डान को वह शव भी सौंप दिया गया। शव ले ५६ मानवी क्षमता असीम अप्रत्याशित जाकर विलियम डान ने विंडसर के कब्रगाह के संरक्षक को सौंप दिया ताकि अगले दिन उसे एक सुरक्षित कब्र में दफनाया जा सके। एडम का शव एक संदूक में कफन लपेटकर रख दिया गया। जाड़े के दिन थे, उस दिन तो और भी भयंकर शीत थी। हिमपात हो रहा था, ऐसे समय तीन-चार व्यक्ति उस कब्रिस्तान में प्रविष्ट हुए और जिस पेटी में एडम का शव था उसके पास गए। संदूक खोलकर, उनका शव निकाला और उनके स्थान पर उन्होंने अपने साथ लाए शव को लिटा दिया। ताला जैसे का तैसा बंद कर, वह लोग बाहर आ गए और घनघोर अंधकार में न जाने कहाँ खो गए ? इस बार कब्रिस्तान के संरक्षक के साथ भी वही सम्मोहन हुआ। वह सब कुछ देखते हुए भी कुछ कर न सका, पर उसने जो रिपोर्ट दी- उससे यह पता चल गया कि लाश बदली गयी और जिसने यह सारा काम किया, उसका हुलिया डॉ० मार्टिन जैसा था। दूसरे दिन एलियास से खबर मिली कि वहाँ से एक शव की चोरी हो गई है। लोगों ने जाकर बदले हुए शव को खुलवाकर देखा पर उसका चेहरा कुछ इस तरह विकृत था कि पहचान में ही नहीं आया, जबकि एडम के शव में किसी प्रकार के दाग-धब्बे नहीं थे तो भी यह रहस्य, रहस्य ही बना रह गया। कुछ दिन बीते । बिंडसर का एक नागरिक कनाडा आया। वहाँ एक होटल में खाना खाने पहुँचा तो यह देखकर अवाक् रह गया कि वहाँ एडम और डॉ० मार्टिन दोनों साथ-साथ बैठे भोजन कर रहे हैं। वह बहुत घबराया, जब तक सँभलकर पुलिस को सूचना दे, तब तक वह दोनों व्यक्ति वहाँ से जा चुके थे। घटना अखबारों में छपी तो एक बार फिर से बिंडसर के धन कुबेर काँप गए। इसी बीच कई स्थानों पर उसके देखे जाने की खबरें मिलीं। सभी खबरें विश्वस्त व्यक्तियों द्वारा दी गई थीं। फलस्वरूप एक बार फिर से पुलिस और सी० आई० डी० विभाग सतर्क किया गया । पर एडम पकड़ा नहीं जा सका। कहते हैं, उसने ओझल और अंतर्धान होने की विद्या जान ली थी। यही नहीं उसने अपने शरीर की हर अनैच्छिक क्रिया पर नियंत्रण प्राप्त कर मानवी क्षमता असीम, अप्रत्याशित ५७ लिया था। एक क्षण में मर जाना और दूसरे ही क्षण जीकर काम में लग जाना उसके लिए बाँये हाथ का खेल था । आखिरी भेंट एक सी० आई० डी० आफीसर से अमेरिका के ही टोरंटो नगर में हुई। एडम ने अधिकारी से काफी देर तक बातचीत की। जैसे ही पुलिस के सिपाही गिरफ्तार करने के लिए मौका पाकर आगे बढ़े और उसे चारों ओर से घेरे में लिया, एडम एकाएक अंतर्धान हो गया। सी० आई० डी० अधिकारी तथा सिपाही एक-दूसरे का मुँह ताकते खड़े रह गए। इसके बाद ऐडवर्ड स्मिथ ने उसका विस्तृत परिचय छापा और स्वीकार किया कि उसके पास कोई अद्भुत योग शक्ति थी, जो किसी भी भौतिक शक्ति से कहीं अधिक समर्थ थी; किंतु उसके बाद से आज तक एडम के बारे में कुछ भी पता नहीं चल पाया कि वह कहाँ गया है, है भी या नहीं और है तो लोगों को दीखता क्यों नहीं ? यह घटना भारतीय योगियों की सी सिद्धि और प्राण नियंत्रण की जैसी घटना है। उससे जीवनी शक्ति की विलक्षणता, विलगता और समर्थता का ही प्रतिपादन होता है। पश्चिमी देशों में योग सिद्धि और प्राण नियंत्रण के भारतीय विज्ञान की अनुकृति ही सम्मोहन तथा मानवीय विद्युत् के प्रयोगों के रूप में अपनायी गई। इस विद्या के मूल में मनुष्य की संकल्प शक्ति की प्रगाढ़ता ही काम करती है और वही बल अपने परिमाण के अनुसार पात्र को प्रभावित करता व इच्छानुयायी बनाता है। मानवी विद्युत् का उपयोग इस विद्या का वशीकरण, मूर्छा प्रयोग, दैवी आवेश आदि के रूप में प्रचलन तो पहले भी था, पर उसे व्यवस्थित रूप अठारहवीं शताब्दी के आरंभ में आस्ट्रिया निवासी डॉक्टर फ्रांज मेस्मर ने दिया। उन्होंने मानवी विद्युत् का अस्तित्व, स्वरूप और उपयोग सिद्ध करने में घोर परिश्रम किया और उसके आधार पर कठिन रोगों के उपचार में बहुत ख्याति कमाई । वे अपने शरीर की बिजली का रोगियों पर आघात करते, साथ ही लौह चुंबक भी आवश्यकतानुसार प्रयोग में लाते। इस दुहरे प्रयोग से न केवल शारीरिक वरन् मानसिक रोगों के उपचार में उन्होंने आशातीत सफलता प्राप्त की। मेस्मर के शिष्य प्युइसेग्यूर ने प्रयोग को अधिक तत्परतापूर्वक आगे बढ़ाया और उन्होंने चुंबकीय शक्ति द्वारा तंद्रा उत्पन्न करने में नई सफलताएँ पाईं। यह तंद्रा मानसिक तनाव को विश्राम द्वारा शांत करने और अवचेतन के रहस्मय परतों को खोलने में बहुत कारगर सिद्ध हुई। इस प्रकार चिकित्सक की सहायता के बिना भी कोई व्यक्ति स्वनिर्देशन विधि का उपयोग करके अपनी शारीरिक एवं मानसिक चिकित्सा आप कर सकता है। सम्मोहन प्रयोग से गहरी निद्रा लाकर, गहरे आपरेशन में समग्र सफलता सबसे पहले डॉ० ऐसडेल को मिली। उन्होंने लगभग ३०० ऐसे आपरेशन किए। उनके दावे विवादास्पद माने गए। अस्तु सरकारी जाँच कमीशन बिठाया गया। कमीशन ने अपनी उपस्थिति में ऐसे आपरेशन कराए और एसडेल के प्रयोगों को यथार्थ घोषित किया। यह प्रक्रिया संसार भर में फैली । फ्रांस के डॉ० सार्क को इस विधि से हिस्टीरिया को अच्छा करने में कारगर सफलता मिली। मनोविश्लेषण विज्ञान को मूर्त रूप देने वाले डॉ० फ्रायड ने अपने प्रतिपादनों में डॉ० सार्क के प्रयोगों से विशेष प्रेरणा ली थी। इंगलैंड की रायल मेडीकल सोसायटी के अध्यक्ष तथा लंदन विश्वविद्यालय में चिकित्सा विज्ञान के प्राध्यापक डॉ० जान एलियट सन ने सम्मोहन विज्ञान में सन्निहित तथ्यों को बहुत उपयोगी पाया और वे इस प्रयत्न में जुट पड़े कि रोगी को पीड़ा की अनुभूति से बचाकर आपरेशन करने में इस विद्या का उपयोग किया जा सकता है। उन दिनों बेहोश करने की दवाओं का आविष्कार नहीं हुआ था। आपरेशन के समय रोगी कष्ट पाते थे। इस कठिनाई को हल करने मानवी क्षमता-असीम, अप्रत्याशित ५६ में सम्मोहन-विज्ञान बड़ी सहायता कर सकता है। इसी दृष्टि से उसका अनुसंधान एवं प्रयोग कार्य चलता रहा। इसमें उन्हें आंशिक सफलता भी मिली। इसी शोध संदर्भ में इंग्लैंड के एक-दूसरे डॉक्टर जेम्स ब्रेड ने यह सिद्ध किया कि दूसरे के प्रयोग से ही नहीं वरन् आत्म निर्देशों से एवं ध्यान की एकाग्रता से भी सम्मोहन निद्रा की स्थिति बुला लेना संभव है। दूसरों के दिये सुझाव को बिना किसी तर्क-वितर्क से स्वीकार कर लेना एक अद्भुत बात है। इसमें तर्क शक्ति लगभग प्रसुप्त स्थिति में चली जाती है और आदेश, अनुशासन पालन करने वाली श्रद्धा का आधिपत्य मस्तिष्क पर छाया रहता है। इस स्थिति से लाभ उठाकर, उपचारकर्ता मन में उगी हुई अवांछनीय परतों को उखाड़कर, उस जगह नई स्थापनाएँ करता है। यह शारीरिक सर्जरी जैसी क्रिया है। सड़े अंग काटकर फेंक देना और उस स्थान पर नई चमड़ी, नया मांस जोड़ देना सर्जरी के अंतर्गत सरल है। इसी प्रकार सम्मोहन विद्या-हिजोटिज्म के प्रयोगों से मन की विकृतियों के झाड़-झंखाड़ उखाड़ना और उनके स्थान पर नई पौध जमाना संभव होता है। उपचारकर्ता यही करते हैं। यों इन प्रयोगों का एक हानिकारक पक्ष भी है, जिसे भूतकाल में तांत्रिक लोग किन्हीं को क्षति पहुँचाने के लिए मारण, मोहन, उच्चाटन, वशीकरण आदि रूपों में करते रहे हैं। इसके भले बुरे परिणामों में शक्ति का दोष नहीं है। दोष है उनके प्रयोक्ताओं का। आग का उपयोग भोजन पकाने, जाड़ा भगाने, सर्दी से बचने के लिए भी किया जा सकता है और घर जलाने में भी हो सकता है। इसमें आग का क्या दोष ? दोष तो आग का उपयोग करने वाले का है। उचित यही है कि इस शक्ति का सदुपयोग किया जाए। दुरुपयोग के साथ अपनी स्वयं की हानि होने की भी संभावना सदैव बनी रहती है। अद्भुत और चमत्कारी शक्ति संकल्प शक्ति के इस स्वरूप को अद्भुत और चमत्कारी कहा जा सकता है। इसकी पृष्ठभूमि प्रत्येक मस्तिष्क में विद्यमान रहती है। कई बार अनायास और आकस्मिक ही जागृत हो उठती है। इस चमत्कारी क्षमता से संपन्न होने के रूप में विख्यात रूसी महिला नेल्या मिखायलोव में सहसा असामान्य इच्छा शक्ति उस समय विकसित हो गई, जब वह युद्ध के दिनों में सैनिक के रूप में मोर्चे पर लड़ते हुए शत्रु के गोले से गंभीर रूप से आहत होकर, अस्पताल में आरोग्य लाभ कर रही थी । मास्को विश्वविद्यालय के जीव विज्ञान शास्त्री एडवर्ड नोमोव ने नेल्या का परीक्षण विश्लेषण किया। प्रयोगशाला में उसने मेज पर बिखरी माचिस की तीलियों को बिना छुए, तनिक ऊपर से हाथ घुमाकर जमीन पर गिरा दिया। फिर वही तीलियाँ काँच के डिब्बे में बंद कर दी गईं। नेल्या ने बंद डिब्बे के ऊपर हाथ घुमाया, तो तीलियों में हलचल मच गई। इसी तरह सोवियत लेखक बदिममारीन के साथ भोजन करते समय नेल्या ने मेज पर थोड़ी दूर पड़े रोटी के टुकड़े पर अपना ध्यान एकाग्र किया, तो वह टुकड़ा खिंचकर नेल्या के पास आ गया। फिर उसने झुककर मुँह खोला, तो वह टुकड़ा मुँह में उछलकर समा गया। नेल्या का परीक्षण भली-भाँति रूसी वैज्ञानिकों ने किया और पाया कि उसके मस्तिष्क में विद्युत् शक्ति-सी कौंधती है और देह से चुंबकीय शक्ति निकलती है। बिजली के भले-बुरे परिणाम सभी को विदित हैं। तांत्रिक वर्ग के लोगों में से कितने ही उसका दुष्प्रयोजनों में व्यय करते और अपने प्रतिपक्षियों को हानि पहुँचाते भी देखे गए हैं। युगांडा के एक भूमिगत संगठन दिनी बा मसांबूबा के कार्यों की जानकारी के लिए नियुक्त एक ब्रिटिश गुप्तचर अधिकारी ने अपनी संस्मरण पुस्तक में विभिन्न घटनाओं का उल्लेख किया है। ये मानवी क्षमता असीम, अप्रत्याशित ६१ ब्रिटिश अफसर जान क्राफ्ट प्रगतिशील अंधविश्वासों से सर्वथा मुक्त, कुशाग्र बुद्धि, साहसी व प्रशांत मस्तिष्क से काम करने वाले थे। उन्हें जादू-टोने पर तनिक भी विश्वास नहीं था, पर जब वे गुप्त संगठन का पता लगाने में सक्रिय हुए, तो उन्हें चेतावनी दी गयी कि वे इस कार्य से हाथ खींच लें। जब वे न माने, तो उनके ऊपर सर्वथा अप्रत्याशित व अस्वाभाविक तौर पर महा विषैले सर्पों से आक्रमणों की योजना बनाई गई। वे एक भोज में गए, वहाँ से लौटते समय, आगे अनेक अतिथि तो निरापद चले गए, पर जब जानक्राफ्ट सीढ़ियों पर उतरने लगे तो वहाँ भयंकर विषधर घात लगाए बैठा था। मेजबान ने जानक्राफ्ट को एकदम से धक्का देते हुए, न ठेल दिया होता तो उन्हें डंसने ही वाला था। एकबार वे अकस्मात् एक सहयोगी के यहाँ पहुँचे, तो वहाँ भी एक भयंकर फणिधर ने तीखी विषधार उनकी आँखों की ओर छोड़ी। सहकर्मी सतर्क व चुस्त था, उसने उन्हें तत्काल नीचे गिरा दिया और जहरीली घात ऊपर निकल गई अन्यथा उनका प्राणांत हो जाता या फिर वे जन्मभर के लिए अंधे हो जाते। फिर एक बार मोटर के दरवाजे के पास, दूसरी बार बिस्तर पर ही भयंकर विषैले सर्प दीखे। एकबार क्राफ्ट के दफ्तर के अंधेरे कौने में दुबका बैठा था । घटनाओं का विश्लेषण स्पष्ट बताता था कि यह संयोग मात्र नहीं हो सकता। उनके अकस्मात् दूर कहीं पहुँचने की सूचना उनके शत्रुओं को भी नहीं मिल सकती थी, अतः संभावना भी नहीं मानी जा सकती थी कि वे लोग चुपके से ये सर्प छोड़े जाते रहे होंगे। फिर भोज में आये अनेक नागरिकों में से सिर्फ क्राफ्ट पर ही प्रहार की चेष्टा सर्प ने क्यों की ? घटनाएँ इस तथ्य को मानने को विवश करती हैं कि वहाँ प्रचलित यह मान्यता सही हो सकती है कि वहाँ के तांत्रिक सर्पों को वश में कर उनका इस तरह मन चाहा प्रयोग करते हैं। इस स्तर की सिद्धियाँ कठिन योगाभ्यासों और दीर्घकाल तक की जाने वाली साधनाओं के परिणामस्वरूप ही प्राप्त होती हैं। किसी को पूर्व जन्म के संचित पुण्यों से अथवा ईश्वरीय कृपा के परिणामस्वरूप ये चमत्कारीय उपलब्धियाँ प्राप्त हो जाएँ, यह बात और है। सामान्य व्यक्ति अपने जीवन में इस संकल्प शक्ति का थोड़ा भी उपयोग कर सके तो बहुत सी चिंताओं और परेशानियों से बच सकता है। ● संकल्प शक्ति के उपयोगी लाभ सामान्य जीवन में आने वाली छुटपुट असफलताओं का दोष दुर्भाग्य, दैव और दूसरों को देते रहने वाले जीवन भर असफलताओं को ही आमंत्रित करते रहते हैं क्योंकि सफलता प्राप्ति के लिए उनमें न अभीष्ट मनोबल होता है और न ही संकटों से जूझने का साहस जबकि कितने ही व्यक्तियों ने सामान्य से भी गिरी नितांत दुर्दशाग्रस्त स्थिति में रहते हुए भी असाधारण सफलताएँ प्राप्त कर दिखाई हैं। कितने ही व्रतशील उच्च उद्देश्यों को लेकर कार्य क्षेत्र में उतरे और तुच्छ सामर्थ्य के रहते हुए भी महान् कार्य कर सकने में सफल हुए हैं। उन्हें निरंतर आगे बढ़ने और अवरोधों को गिराने की सामर्थ्य आंतरिक मनोबल से ही मिली है। बिहार के हजारी बाग जिले के हजारी नामक किसान ने इस प्रदेश के गाँव में आम के बगीचे लगाने का निश्चय किया था। यदि दृढ़ संकल्प प्रबल आकांक्षा बनकर उभरे तो फिर मस्तिष्क को उसका सरंजाम खड़ा करने और शरीर को उसे व्यवहार में परिणत करते देर नहीं लगती। यही सदा सर्वदा से होता रहा है, यही हजारी किसान ने भी कर दिखाया। उसने उस सारे इलाके में आम के दरख्त लगाए और अंततः उन आम्र उद्यानों की संख्या एक हजार तक जा पहुँची। वही इलाका इन दिनों बिहार का हजारी बाग जिला कहलाता है। सत्संकल्पों की परिणति सदा इसी प्रकार से व्यक्ति और समाज के लिए महान् उपलब्धियाँ प्रस्तुत करती रही है। मानवी क्षमता असीम, अप्रत्याशित ६३ नर हो या नारी, बालक हो या वृद्ध, स्वस्थ हो या रुग्ण, धनी हो या निर्धन परिस्थितियों से कुछ बनता - बिगड़ता नहीं, प्रश्न संकल्प शक्ति का है। मनस्वी व्यक्ति अपने लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ बनाते और सफल होते हैं। समय कितना लगा और श्रम कितना पड़ा उसमें अंतर हो सकता है, पर आत्म निर्माण के लिए प्रयत्नशील अपनी आकांक्षा में शिथिलता एवं प्रखरता के अनुरूप देर-सबेर में सफल होकर ही रहता है। नारी की परिस्थितियाँ नर की अपेक्षा कई दृष्टियों से न्यून मानी जाती हैं किंतु यह मान्यता वहीं तक सही है, जहाँ तक कि उसका मनोबल गया गुजरा बना रहे । यदि वे अपनी साहसिकता को जगा लें, संकल्प शक्ति का सदुद्देश्य के लिए उपयोग करने लगें तो कोई कारण नहीं कि अपने गौरव - गरिमा का प्रभाव देने में किसी से पीछे रहें । मैत्रेयी याज्ञवल्क्य के साथ पत्नी नहीं, धर्मपत्नी बनकर रहीं। राम कृष्ण परमहंस की सहचरी शारदामणि का उदाहरण भी ऐसा ही है। सुकन्या ने च्यवन के साथ रहना किसी विलास-वासना के लिए नहीं उनके महान् लक्ष्य को पूरा करने में साथी बनने के लिए किया था। जापान के गांधी कागावा की पत्नी भी दीन-दुःखियों की सेवा का उद्देश्य लेकर के ही उनके साथ दांपत्य सूत्र में बँधी थी । नर- पामरों को जहाँ दांपत्य जीवन में विलासिता के पशु-प्रयोजन के अतिरिक्त और कोई उद्देश्य दृष्टिगोचर ही नहीं होता; वहाँ ऐसी आदर्शवादी नर-नारियों की भी कमी नहीं जो विवाह बंधन की आवश्यकता तभी अनुभव करते हैं, जब उससे वैयक्तिक और सामाजिक प्रगति का कोई उच्च स्तरीय उद्देश्य पूरा होता हो । कुंती भी सामान्य रानियों की तरह एक महिला थी । जन्म जात रूप से तो सभी एक जैसे उत्पन्न होते हैं। प्रगति तो मनुष्य अपने पराक्रम-पुरुषार्थ के बल पर करता पर करता है। कुंती ने देवत्व जगाया आकाशवासी देवताओं को अपना सहचर बनाया और पाँच देव-पुत्रों को जन्म दे सकने में सफल बन सकी । सुकन्या ने अश्विनी कुमारों को और सावित्री ने यम को सहायता करने के लिए विवश कर दिया था। उच्चस्तरीय निष्ठा का परिचय देने वाले देवताओं की, ईश्वरीय सत्ता की सहायता प्राप्त कर सकने में भी सफल होते हैं। टिटहरी के धर्म युद्ध में महर्षि अगस्त्य सहायक बनकर सामने आए थे । तपस्विनी पार्वती अपने व्रत-संकल्प के सहारे शिव की अर्धांगिनी बन सकने का गौरव प्राप्त कर सकी थी। पति को आदर्श पालन के लिए प्रेरित करने वाली लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला स्वयं भी वनवास जैसी साधना घर पर करती रही। इन महान् गाथाओं में आदर्शवादी संकल्प ही अपनी गरिमा प्रकट करते दीखते हैं। बंगाल के निर्धन विद्वान् प्रतापचंद्र राय ने अपनी सारी शक्ति और संपत्ति को बाजी पर लगाकर, महाभारत के अनुवाद का कार्य हाथ में लिया। वे उसे अपने जीवन में पूरा न कर सके तो उनकी पत्नी ने अपना संस्कृत ज्ञान पूरा करके, उस अधूरे काम को पूर्ण करके दिखा दिया। ऐसी साहसिकता वहाँ ही दिखायी पड़ती है, जहाँ उच्चस्तरीय आदर्शों का समावेश हो । विद्वान् कैयट व्याकरण शास्त्र की संरचना में लगे हुए थे। उनकी पत्नी भारती मूंज की रस्सी बटकर गुजारे का प्रबंध करती थी। साम्यवाद के प्रवर्तक कार्ल्स मार्क्स भी कुछ कमा नहीं पाते थे। यह कार्य उनकी पत्नी जैनी करती थी। वे पुराने कपड़े खरीदकर उनमें से बच्चों के छोटे कपड़े बनाती और फेरी लगाकर बेचती थीं। आदर्शों के लिए पतियों को इस प्रकार प्रोत्साहित करने और सहयोग देने में उनका उच्चस्तरीय संकल्प बल ही कार्य करता था। जहाँ सामान्य नारियाँ अपने बच्चों को मात्र सुखी - संपन्न देखने भर की कामना सँजोए रहती हैं, वहाँ ऐसी महान् महिलाएँ भी हुई हैं, जिन्होंने अपनी संतान को बड़ा आदमी नहीं, महामानव बनाने का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए अपनी दृष्टि और चेष्टा में आमूल-चूल परिवर्तन कर डाला। ऐसी महान् महिलाओं में विनोबा की माता आती हैं, जिन्होंने अपने तीन बालकों को ब्रह्मज्ञानी मानवी क्षमता - असीम, अप्रत्याशित ६५ बनाया। शिवाजी की माता जीजाबाई को भी यही गौरव प्राप्त हुआ। मदालसा ने अपने सभी बालकों को बाल ब्रह्मचारी बनाया था। शकुंतला अपने बेटे भरत को, सीता अपने लवकुश को सामान्य नर-वानरों से भिन्न प्रकार का बनाना चाहती थी। उन्हें जो सफलताएँ मिलीं वे अन्यान्यों को भी मिल सकती हैं। शर्त एक ही है कि आदर्शों के अंतःकरण में गहन श्रद्धा की स्थापना हो सके और उसे पूरा करने के लिए अभीष्ट साहस संजोया जा सके। संकल्प इसी को कहते हैं। पुरुष महिलाओं की आत्मिक प्रगति में सहायक बनें, महिलाएँ पुरुषों, छोटे बच्चों को संस्कारवान् बनाने का व्रत लें, तो इस पारस्परिक सहयोग से राष्ट्र जागरण, आध्यात्मिक चेतना का विकास तथा आदर्शवादी आस्थाओं की स्थापना जैसे महान् कार्य सहज ही किए जा सकते हैं। वंश परंपरा या पारिवारिक परिस्थितियों की हीनता किसी की प्रगति में चिरस्थायी अवरोध उत्पन्न नहीं कर सकी है। इसी प्रकार की अड़चनें अधिक संघर्ष करने के लिए चुनौती देने के अतिरिक्त और कुछ नहीं कर सकतीं। सत्यकाम जावाल वेश्या पुत्र थे। उनकी माता यह नहीं बता सकी थी कि उस बालक का पिता कौन था ? ऐतरेय ब्राह्मण के रचयिता ऋषि ऐतरेय - इतरा नामक रखैल के पुत्र थे। महर्षि वशिष्ठ, मातंगी आदि के बारे में भी ऐसा ही कहा जाता है। रैदास, कबीर, बाल्मीकि आदि का जन्म छोटे कहे जाने वाले परिवारों में ही हुआ था। पर इससे उन्हें महानता के उच्च पद तक पहुँचने में कोई स्थायी अवरोध उत्पन्न नहीं हुआ । मनुष्य की संकल्प शक्ति इतनी बड़ी है कि वह अग्रगमन के मार्ग में उत्पन्न होने वाली प्रत्येक बाधा को पैरों तले रौंदती हुई आगे बढ़ सकती है। पहले मन को संस्कारित कीजिए मन की दो सर्वज्ञात विशेषताएँ हैं- चंचलता एवं सुख-लिप्सा । बंदर जैसी उछल-कूद, आवारा छोकरों जैसी मटरगस्ती, चिड़ियों की तरह यहाँ-वहाँ फुदकते फिरना, उसकी चपलवृत्ति को संतुष्टि पहुँचाते हैं। कल्पना के महलों की सृष्टि कल्पना लोकों का तीव्र भ्रमण-विचारणा, उसकी शक्ति का बड़ा अंश तो इन्हीं भटकनों, जंजालों में नष्ट हो जाते हैं। शक्ति का यह व्यर्थ छीजन रोककर, उसे सुनिश्चित एवं सार्थक प्रयोजन में केंद्रित करना ही योगाभ्यास है। शक्तियों का यह सही उपयोग जीवन में स्पष्ट और आश्चर्यजनक परिणाम सामने लाता है। पिछड़ेपन के स्थान पर प्रगतिशीलता आ जाती है। दरिद्रता समृद्धि में परिणत हो जाती है। भटकाव की जगह प्रचंड पुरुषार्थ प्रवृत्ति पनपने पर परिस्थितियाँ अनुकूल बनने लगती हैं और साधन संचित होने लगते हैं। लौकिक सफलताएँ भी लक्ष्य केंद्रित पुरुषार्थ का ही परिणाम होती हैं। मन की मटकन रोककर ही उसे लक्ष्योन्मुख बनाया जा सकता है। यही सधा हुआ मन आत्मिक क्षेत्र में लगाए जाने पर सुषुप्त शक्ति केंद्रों को जागृत व क्रियाशील बनाता है और दिव्य क्षमताएँ प्रकाश में आती हैं। अंतःचेतना का परिष्कार सामान्य व्यक्ति को महामानव स्तर पर ले जाकर ही रहता है। प्रगति का संपूर्ण इतिहास मनःशक्ति के पुंजीभूत, लक्ष्य केंद्रित पुरुषार्थ की ही यशगाथा है। चंचलता की प्रवृत्ति को पुरुषार्थ की प्रवृत्ति में परिवर्तित करने का पराक्रम ही प्रगति का सार्वभौम आधार रहा है। मन की दूसरी प्रवृत्ति है - सुख-लिप्सा । शारीरिक सुखों के भोग का माध्यम है - इंद्रियाँ । उनके द्वारा विभिन्न वासनाओं का स्वाद मिलता है। पेट और प्रजनन से संबंधित सुखों के लिए तरह-तरह की चेष्टाओं में ही मन उलझा रहता है और इन सुखों की प्राप्ति के लिए प्रेरणा ही नहीं देता, बल्कि इनकी मात्र कल्पनाएँ मानवी क्षमता- असीम, अप्रत्याशित ६७ करने में भी बहुत अधिक समय नष्ट करता है। फिर इन भौतिक सुखों के लिए साधन जुटाने में भी मन को जाने कितने ताने-बाने बुनने पड़ते हैं। इंद्रियों की प्रिय वस्तु या व्यक्ति देखने, सुनने, छूने, सूँघने अथवा स्वाद लेने की लिप्साएँ मन को ललक से भर देती हैं और वह उसी दिशा में लगा रहता है। अहंकार की पूर्ति के लिए मन औरों पर प्रभाव डालने हेतु तरह-तरह की चेष्टाएँ करता है और व्यक्ति भाँति-भाँति के ठाट-बाट बनाता है। संग्रह और स्वामित्व की इच्छाएँ भी अनेक विधि प्रयत्नों का कारण बनती हैं। इन सभी इच्छाओं, आकांक्षाओं की प्यास को व्यक्त करने के लिए ही तृष्णा शब्द का प्रयोग होता है। अहं भावना पर आघात पहुँचते ही प्रतिशोध की उत्तेजना प्रबल हो उठती है। इच्छित विषय पर अपना हक मान लेना और फिर उसके न प्राप्त होने या प्राप्ति में बाधा पड़ने पर भड़क उठना भी, अहंता पर आघात के ही कारण होता है। यह उत्तेजना ही क्रोध है। काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर आदि संपूर्ण विकार समूह वस्तुतः मन में उठने वाली प्रतिक्रियाएँ मात्र हैं, जो भौतिक सुख की लिप्साओं के कारण उठती रहती हैं। लिप्सा की इस ललक की दिशा को उलट देना ही 'तप' है । वह दूसरी दिशा भौतिक सुखों की वासना, तृष्णा और अहंता की पूर्ति से होने वाले क्षणिक सुखों की नहीं है वरन् आनंद की है। आनंद उपभोग से नहीं, उत्कर्ष और उत्सर्ग से प्राप्त होता है। सुख मन का विषय है, जबकि आनंद और आत्म-संतोष आत्मा का । सुख लिप्सा का अभ्यस्त मन आनंद के स्वाद को नहीं जान पाता और जिसे जाना ही नहीं, उसके प्रति गहरी और स्थायी प्रीति, सच्चा आकर्षण संभव नहीं। आनंद की आकांक्षा विषयलोलुप मन में प्रगाढ़ नहीं होती। उसके लिए तो मन का प्रशिक्षण आवश्यक है। यह प्रशिक्षण प्रक्रिया ही तप है। तपस्वी को कष्ट इसी अर्थ में सहना पड़ता है कि अभ्यस्त सुख का अवसर जाता रहता है। शारीरिक सुख-सुविधाएँ सिमटती हैं। मानसिक आमोद-प्रमोद का भी अवकाश नहीं रहता और आदर्शनिष्ठ आचरण आर्थिक समृद्धि के भी आड़े ६८ मानवी क्षमता असीम, अप्रत्याशित ही आता है। प्रत्यक्ष तौर पर तो ऐसे परिणामों के लिए किया जाने वाला प्रयास मूर्खता ही प्रतीत होगा। लेकिन श्रेष्ठ उपलब्धियों का राजमार्ग यही है। किसान, विद्यार्थी, पहलवान, श्रमिक, व्यवसायी, कलाकार आदि को भी अपनी प्रगति व उपलब्धियों की प्राप्ति के लिए बाल - चंचलता से मन को विरत ही करना पड़ता है और अपने नीरस प्रयोजनों में ही मनःशक्ति नियोजित करनी पड़ती है। शौक-मौज के अभ्यस्त उनके संगी उन लोगों की ऐसी लक्ष्योन्मुख प्रवृत्तियों का मजाक भी उड़ाते हैं। लेकिन सभी जानते हैं कि अंततः बुद्धिमान् और प्रगतिशील ऐसे ही लोगों को माना जाता है, जो चित्त की चपलता को नियंत्रित कर उसे अपने लक्ष्य की ओर ही लगाए रहते हैं - वह कृषि का क्षेत्र हो या शिक्षा का शरीर सौष्ठव का हो या आर्थिक समृद्धि का, कला-कौशल का हो या वैज्ञानिक आविष्कार का अथवा दार्शनिक चिंतन-मनन का । भारतीय मनीषियों ने मन को संस्कारित व परिष्कृत करने के लिए पंचकोशीय साधना विधान में मनोमय कोश की साधना का एक स्वतंत्र चरण ही रखा है। मनोमय कोश का अर्थ हैविचारशीलता, विवेक बुद्धि । ● मनोमय कोश अर्थ और साधना मन कोई ऐसा तत्त्व नहीं है जो केवल मनुष्य के पास ही है। वह हर जीवित प्राणी के पास होता है। कीट-पतंग भी उससे रहित नहीं हैं, परंतु मनोमय कोश के व्याख्याकारों ने उसे दूरदर्शिता, तर्क, प्रखरता एवं विवेकशीलता के रूप में विस्तारपूर्वक समझाया है। मन की स्थिति हवा की तरह है। वह दिशा विशेष तक सीमित न रहकर, स्वेच्छाचारी वन्य पशु की तरह किधर भी उछलता-कूदता है ? पक्षियों की तरह किसी भी दिशा में चल पड़ता है ? इसे दिशा देना, चिंतन को अनुपयोगी प्रवाह में बहने से बचाकर, उपयुक्त मार्ग मानवी क्षमता असीम, अप्रत्याशित હૃદ पर सुनियोजित करना मनस्वी होने का प्रधान चिह्न है। मनोनिग्रह- मनोजय इसी का नाम है। जंगली को पकड़कर अनुशासित बनाने का काम तो कठिन है, पर इसकी उपयोगिता अत्यधिक है। जंगली हाथी फसलें उजाड़ते और झोपड़ियाँ तोड़ते हैं और भूखे-प्यासे अनिश्चित स्थिति में भटकते हैं, किंतु पालतू बन जाने पर उसकी जीवनचर्या भी सुनिश्चित हो जाती है और साथ ही वे अपने मालिक का भी बहुत हित साधन करते हैं। सधे हुए मन की तुलना पालतू हाथी से की जा सकती है और अनियंत्रित मन को उन्मत्त जंगली हाथी कहा जा सकता है। आवेग और आवेशग्रस्त होकर उन उत्तेजनाओं से प्रेरित मनुष्य कुछ भी सोच सकता है और कुछ भी कर गुजर सकता है। वह चिंतन और कर्तृत्व इतना असंगत हो सकता है कि फलस्वरूप जीवन भर पश्चाताप करना पड़े और असीम हानि उठानी पड़े, किंतु आवेगों के प्रवाह में बुद्धि पर पर्दा पड़ जाता है और कुछ सूझ नहीं पड़ता। उन्मतों की तरह दूसरों की हत्या, आत्म-हत्या न सही ऐसे काम तो सहज ही बन पड़ते हैं, जिन पर शांत मनःस्थिति में विचार करने पर स्वयं ही अपने पर क्रोध आता है। असंख्य मनुष्य ऐसे ही उद्धत कर्म करते हैं अथवा मरे हुए मन से अकर्मण्य बने हुए जीवन की लाश ढोते हैं। स्थिति से उबरने का कोई प्रकाश भी उन्हें नहीं मिलता। प्रायः एक समय में एक प्रकार के विचार एक ही दिशा में दौड़ते हैं। यह प्रवाह जिधर भी चलता है उधर लाभ ही लाभ, औचित्य ही औचित्य दिखाई पड़ता है, जबकि वास्तविकता कुछ और ही होती है। प्रवाह को रोक कर धारा द्वारा उससे बाँध या बिजलीघर बनाए जाते हैं। मन के प्रवाह को जब दूसरी प्रतिरोधी शक्ति से रोका जाता है, उचित-अनुचित के मंथन से उलट-पुलट कर नवनीत निकाला जाता है, तब पता चलता है कि क्या सोचना सार्थक है क्या निरर्थक ? लाभ किसमें है और हानि किसमें ? ७० मानवी क्षमता असीम, अप्रत्याशित तत्काल के क्षणिक लाभ को ही सब कुछ न मानकर, भविष्य के चिरस्थायी परिणाम का विचार करने में समर्थ एवं परिपक्व बुद्धि, मन के प्रवाह को अवांछनीय दिशा में रोक सकती है, उसे उचित में नियोजित कर सकती है। इस परिष्कृत चिंतन प्रक्रिया को मनोमय कोश की उपलब्धि कह सकते हैं। महामनीषी, तत्त्वदर्शी, शोधकर्ता एवं मनस्वी व्यक्ति ही महा मानवों की पंक्ति में बैठ सकने में समर्थ हुए हैं। उन्होंने संसार का नेतृत्व किया है और अपने महान् कर्तृत्वों से इतिहास को यशस्वी किया है। इन सभी की यह प्रमुख विशेषता रही है कि उन्होंने अपने मन पर अंकुश करना और उसे दिशा देना सीखा। सामान्य लोगों का मन हवा के साथ उड़ते-फिरने वाले तिनके की तरह अपनी मानसिक चेतना को निरर्थक अथवा अनर्थ मूलक स्थिति में भटकने देता है, जबकि मनस्वी व्यक्ति उसकी प्रत्येक लहर को सुनियोजित करता है। उचित और अनुचित की कसौटी का अंकुश रखकर मन को उसी दिशा में, उसी गति से चलने देता है; जिससे कुछ महत्त्वपूर्ण हित साधन हो सके। इच्छाओं को मोड़ने में चिंतन को सुनियोजित करने में सफलता प्रखर तर्क बुद्धि से उत्पन्न होती है और आत्म-दमन कर सकने की साहसिकता से मनोनिग्रह बन पड़ता है। एकाग्रता का, चित्त-वृत्ति-निरोध का बहुत माहात्म्य योगशास्त्रों में बताया गया है। इसका अर्थ चिंतन-प्रक्रिया को ठप्प कर देना, एक ही ध्यान में निमग्न रहना नहीं, वरन् यह है कि विचारों का प्रवाह नियत-निर्धारित प्रयोजन में ही निष्ठापूर्वक लगा रहे । यह कुशलता जिनको करतलगत हो जाती है, वे जो भी लक्ष्य निश्चित करते हैं, उसमें प्रायः अभीष्ट सफलता ही प्राप्त करते रहते हैं। बिखराव की दशा में चिंतन की गहराई में उतरने का अवसर नहीं मिलता अस्तु किसी विषय में प्रवीणता और पारंगतता भी हाथ नहीं लगती। संसार में विशेषज्ञों का स्वागत होता है, यहाँ हर क्षेत्र में ए-वन' की माँग है मानवी क्षमता असीम, अप्रत्याशित ७१ और वह उपलब्धि कुशाग्र बुद्धि पर नहीं, सघन मनोयोग के साथसंबद्ध है। यह मनोयोग का वरदान प्राप्त करने के लिए जो प्रयास - व्यायाम करने पड़ते हैं, उन्हें ही मनोमय कोश की साधना कहते हैं। मनोमय कोश की साधना मस्तिष्कीय क्षेत्र में घुसे मनोविकारों को, दुष्प्रवृत्तियों को निरस्त करने के लिए लड़ा जाने वाला महाभारत है; साथ ही इसमें धर्म राज्य की, राम राज्य की, स्थापना का लक्ष्य संकल्प भी जुड़ा हुआ है। इस संदर्भ में वैज्ञानिक अनुशीलन प्रयत्न ध्यान देने योग्य है। बहुत समय पहले शारीरिक रोगों का कारण, वात, पित्त, कफ, अपच, मलावरोध, ऋतु प्रभाव, विषाणुओं का आक्रमण आदि माना जाता था। नवीनतम शोधें शरीर पर पूरी तरह मनः सत्ता का अधिकार मानती हैं और बताती हैं कि बाह्य कारणों से उत्पन्न हुए रोग तो शरीर की जीवनी शक्ति स्वयं ही अच्छी कर लेती हैं अथवा मामूली उपचार से अच्छे हो सकते हैं। जंटिल रोग तो आमतौर से मनोविकारों के ही परिणाम होते हैं। उनका निराकरण दवादारू से नहीं, मानसिक परिशोधन से ही संभव हो सकता है। शारीरिक ही नहीं मानसिक रोगों का भी यही प्रधान कारण है। दुष्कर्म अथवा दुर्बुद्धिग्रस्त व्यक्ति शारीरिक ही नहीं, मानसिक रोगों से भी ग्रसित रहते हैं। उन्माद-विस्फोट की स्थिति न आए तो भी असंतुलन से ग्रस्त व्यक्ति अर्ध- विक्षिप्त स्थिति में पड़े रहते हैं। अकारण दुःख पाते और अकारण दुःख देते हैं। इनकी मनःस्थिति कितनी दयनीय होती है ? यह देखने भर से बड़ा कष्ट होता है। शारीरिक व्यथाओं से पीड़ितों की अपेक्षा मनोवेगों से ग्रस्त लोगों की संख्या ही नहीं पीड़ा भी अधिक है। इन व्यथाओं से छुटकारे का उपाय अस्पतालों में नहीं, मानसिक संशोधन की साधनाओं पर ही अवलंबित है। वे उपाय, उपचार अन्य प्रकार भी हो सकते हैं, पर
उन्होंने कैमरे का बटन दबाना अधिक उचित समझा। कुछ ही मिनट सामने रहकर, वह विशालकाय प्राणी भाग खड़ा हुआ। उसे पकड़ा या मारा तो न जा सका, पर फोटो बहुत साफ आए। उसके पैरों के निशानों के भी फोटो उन्होंने लिए और अपने देश जाकर, उन चित्रों को छापते हुए हिम मानव के अस्तित्व की पुष्टि की। तिब्बत और चीन की सीमा पर किसी प्रयोजन के लिए गए एक चीनी कप्तान ने भी हिम-मानव से सामना होने का विवरण अपने फौजी कार्यालय में नोट कराया था। स्विट्जरलैंड का एक पर्वतारोही दल एवरेस्ट पर चढ़ाई करने के लिए आया था। उनके साथ पंद्रह पहाड़ी कुली थे। दल का एक कुली थोड़ा पीछे रह गया। उस पर हिम-मानव ने आक्रमण कर दिया। चीख-पुकार सुनकर, अन्य कुली उसे बचाने दौड़े और घायल स्थिति में उसे बचाया। सन् एक हज़ार आठ सौ सत्तासी में कर्नल वेडैल के नेतृत्व में एक ब्रिटिश पर्वतारोही दल भारत आया था। उसने सिक्किम क्षेत्र में यात्रा की थी । सोलह हजार फुट ऊँचाई पर उन्होंने बर्फीली चोटियों पर पाए गए हिम मानव के ताजे पद-चिह्नों के फोटो उतारे थे। वनस्पति विज्ञान के प्रोशून्य हेनरी ल्यूस जिन दिनों वनस्पति शोध के संदर्भ में हिमाच्छादित प्रदेशों में भ्रमण कर रहे थे, तब उन्होंने मनुष्याकृति के विशालकाय प्राणी को आँखों से देखा था। वह तेजी से एक ओर से आया और दूसरी ओर के पहाड़ी गड्ढों में कहीं गायब हो गया। ठीक इसी से मिलती-जुलती कहानी सन् एक हज़ार छः सौ इक्कीस में एवरेस्ट चढ़ाई पर निकले कर्नल हावर्ड ब्यूरी की है। उनके सामने से भी वैसा ही वन-मानुष से मिलता-जुलता प्राणी निकला था। उस क्षेत्र में आने-जाने वाले बताते थे कि वह अकेले-दुकेले आदमियों और जानवरों को मारकर खा जाता है। भारतीय हिम-यात्री एशून्य एनशून्य तोम्वाजी ने सिक्किम क्षेत्र में हिम-मानव देखने का विवरण बताया था। स्विट्जरलैंड के डायरन फर्थ ने भी सन् एक हज़ार छः सौ पच्चीस में उसे आँखों से देखा था। नार्वे के दो वैज्ञानिक थोरवर्ग और फ्रसिस्ट किसी अनुसंधान के संबंध में सिक्किम क्षेत्र में गये थे। उस पर हिम-मानव ने हमला कर दिया और कंधे नोंच डाले। गोलियों से उसका मुकाबला करने पर ही वे लोग बच सके । गोली उसे लगी तो नहीं किंतु वह डरकर भाग तो गया ही। सन् एक हज़ार छः सौ इक्यावन में एक ब्रिटिश यात्री एरिक शिपटन ने भी हिम-मानव के पैरों के निशानों के बर्फीले क्षेत्र से फोटो खींचे थे। ऐसे ही फोटो प्राप्त करने वालों में डॉशून्य एडमंड हिलेरी का भी नाम है। सन् एक हज़ार छः सौ चौवन में कंचन जंघा चोटियों पर सर जानहंट के दल ने बीस हजार फुट की ऊँचाई पर हिम - मानव के पद चिह्नों के प्रमाण एकत्रित किए थे। वे निशान प्रायः अट्ठारह इंच लंबे थे। न्यूजीलैंड के पर्वतारोही जार्जलोंव ने उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर हिम-मानव के अस्तित्व को असंदिग्ध बताया था । सन् एक हज़ार छः सौ पचपन में इंग्लैंड के दैनिक पत्र 'डेलीमेल' ने अपना एक खोजी दल मात्र हिम-मानव संबंधी अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए भेजा था । दल ने बहुत समय तक हिमाच्छादित प्रदेशों के दौरे किये। इस बीच उन्होंने हिम मानव देखा या पकड़ा तो नहीं, पर ऐसे अनेक प्रमाण, अवशेष एवं चित्र संग्रह करके, उस पत्र में छपाए, जिनसे हिम-मानव संबंधी जनश्रुतियाँ सारगर्भित होती हैं। असह्य माने जाने वाले शीत और ताप से प्राणियों का विशेषतया मनुष्य जैसे कोमल प्रकृति जीवधारी का निर्वाह होते रहने के उपरोक्त प्रमाण यह सिद्ध करते हैं कि प्रतिकूलताएँ कितनी ही बड़ी क्यों न हों जीव उन सबसे लड़ सकने में समर्थ है। उसका संकल्प बल ऐसी परिस्थितियाँ पैदा कर सकता है, जिसमें असह्य को सह्य और असंभव को संभव बनाया जा सके। न केवल प्रकृति से जूझने में वरन् पग-पग पर आती रहने वाली कठिनाइयों को निरस्त करने में भी संकल्प बल की प्रखरता का तथ्य सदा ही सामने आता रहता है। अद्भुत चमत्कारी संकल्प-शक्ति विंडसर स्टेट की विधान सभा के सम्मानित सम्माननीय सदस्य क्लेरेन्स एडम, राजकीय पुस्तकालय के निदेशक भी थे। यह पद उन्होंने बड़े यत्न से प्राप्त किया था, सो भी केवल स्वाध्याय का शौक पूरा करने के लिए। एडम की दिनचर्या में सर्वाधिक घंटे पढ़ाई के थे। दुर्भाग्य कहें या सौभाग्य एक दिन क्लेरेन्स एडम के हाथ आगस्टाइन एडम की पुस्तक मैस्मरेजम पर पच्चीस रहस्यमय पाठ और डॉक्टर बर्नहम की हिप्नोटिज्म का इतिहास हाथ लग गईं। पुस्तकें अभी तक पूरी नहीं पढ़ी जा सकी थीं कि एडम के मन में इस विद्या के प्रयोग की तीव्र इच्छा उठ खड़ी हुई। एडम मानवीय चेतना की अद्भुत शक्तियों के प्रमाण थे। यद्यपि उन्होंने अपराधी जीवन प्रारंभ कर दिया, किंतु इस बात के प्रमाणीकरण में कोई त्रुटि नहीं आई कि मनुष्य की प्राण-चेतना सचमुच ही एक आश्चर्यजनक शक्ति है। प्राणशक्ति के प्रयोग से व्यक्ति अद्भुत कार्य कर सकता है। सिद्धियाँ प्राणशक्ति के ही निमंत्रण का अद्भुत परिणाम होती हैं। एडम ने पहला प्रयोग वाटरमैन फ्लावरा मिल में किया। एक दिन घनी रात के अंधकार में एडम उस मील के फाटक में जा घुसे। न तो सेघ काटी और न ही संतरी को जबरन क्लोरोफार्म सुँघाया। जड़-चेतन किसी को भी प्रभावित कर मनमर्जी के अनुसार काम ले लेना तो अब मात्र उनकी दृष्टि का काम था; हिप्नोटिज्म और मैस्मरेज्म का उन्होंने कुछ इस तरह अभ्यास किया। फ्लावरा मील खजाने का चौकीदार हाथ में रायफल लिए खड़ा था। एडम ने कोई मारपीट नहीं की। भरपूर दृष्टि डाली चौकीदार के चेहरे पर नजरें चार हुईं, न जाने कौन-सा मंत्र फूँका एडम ने, चौकीदार जहाँ था, वहीं खड़े का खड़ा रह गया। मानो उस खड़े-खड़े सोने की बीमारी हो गई हो। एडम अब तिजोरी के पास पहुँचा। ताला खोला बिना किसी चाभी के जड़ पदार्थ भी अब उनकी दृष्टि प्रखरता के दास बन गए थे। तिजोरी से पंद्रह हजार डालर निकाले । ताला उसी तरह बंद कर दिया और बड़े मजे से वहाँ से चले आए मानो डालर चुराए नहीं हों वरन् अपनी ही संपत्ति लेकर निकले हों। चौकीदार अभी तक यंत्रवत् खड़ा था । एडम के जाने के बाद उसे पता चला कि कोई आया था और तिजोरी की चोरी हो गई। प्रातःकाल पुलिस के सामने उसने बयान दिया - एक आदमी आया, उसने मेरी ओर देखा तो मैं संज्ञाहीन-सा खड़ा रह गया; उसने सारा काम किया, पर मुझे पता नहीं वह कौन था, क्योंकि न तो मैं बोल सका और न ही हिल-डुल सका। चोरी उसने मेरे देखते की, पर मुझे ऐसा लगता था कि मेरे ऊपर हल्का-सा धुएँ का पर्दा पड़ा हुआ है और मैं उसमें बंदी हूँ, कुछ कर नहीं सकता था, जब तक वह व्यक्ति यहाँ रहा।" इस घटना के कुछ ही दिन बाद विंडसर के एक जौहरी की दुकान में एक आदमी आया; उसने अपनी विलक्षण दृष्टि से जौहरी को देखा। जौहरी इस तरह निस्तब्ध रह गया, मानो वह काष्ठ विनिर्मित हो, उस आगंतुक ने अच्छे-अच्छे जवाहरात, जौहरी और बाजार की भारी भीड़ के बीच अपनी जेब में भरे और वहाँ से चला गया। देखा सबने पर किसी ने न पहचाना, न प्रतिरोध किया, कौन आया, कहाँ गया यह भी किसी को पता नहीं था। पीछे जौहरी से पुलिस ने बयान लिए तो उसने भी वही शब्द दोहराए, जो पहले चौकीदार ने कहे। एक दिन समुद्र की हवा खाने के लिए बिंडसर के एक करोड़पति अपनी पत्नी के साथ कार पर आ रहे थे। उनकी भेंट अनायास ही इस जादूगर से हो गई। उसने उनके सारे जेबर और घड़ियाँ उतरवा लीं और उन्होंने ऐसे दे दिया, मानो उपहार दे रहे हों। पीछे जो बयान दिए उन्होंने वह पहले वाले पीड़ितों के बयानों से अक्षरशः मिलते-जुलते थे। इन खबरों ने एक बार तो बिंडसर राज्य में तहलका मचा दिया। कुबेरों की नींद हराम हो गई। एक मिल मालिक ने तो अपने मानवी क्षमता-असीम अप्रत्याशित बँगले के सभी निकासों पर स्वचालित बंदूकें लगवा दीं। इन्हीं बंदूकों के बल पर क्लेरेन्स एडम पकड़े जा सके। एक रात वे इस बँगले के एक दरवाजे पर पहुँचे और अंदर प्रवेश का प्रयत्न करने लगे तो बंदूक ने उन्हें घायल कर दिया । धड़ाके की आवाज सुनकर लोग दौड़े-दौड़े आए। एडम को पहचानकर लोग आश्चर्यचकित रह गए। अदालत में एडम ने अपने ऊपर लगाए गए वह सारे अभियोग स्वीकार कर लिए और यह भी मान लिया कि यह सब उन्होंने सम्मोहन विद्या के द्वारा किया है। इन अपराधों के लिए इन्हें दस वर्ष सश्रम कारावास का दंड दिया गया और वे शहर की अपेक्षा बिंडसर की पहाड़ी जेल में भेज दिए गए। जेलर उनकी भद्र वेश-भूषा और सांस्कृतिक रहन-सहन से बहुत अधिक प्रभावित हुआ, सो वह एडम के लिए अनायास ही उदार बन गया। इस उदारता का लाभ एक बार फिर एडम को मिला। उसने जेलर की सहायता से अपने लिए कुछ पुस्तकें पढ़ने के लिए प्राप्त कर लीं। इन्हीं पुस्तकों में उसकी वह दोनों मनचाही पुस्तकें भी थीं। दरअसल अन्य पुस्तकें तो साथ में एडम ने केवल इसलिए मँगाई थीं कि किसी को उस पर शक न हो जाए। यह पुस्तकें उसने अपनी विद्या को आगे बढ़ाने के लिए मँगाई थीं, सो एक बार फिर से जेल में ही उसकी साधना अनुष्ठान चल पड़ा और दूसरे लोगों को इस बात की कानों कान खबर न हुई। एक दिन दैवयोग से जब एडम अपने कमरे की चीजों पर हिप्नोटिज्म का अभ्यास कर रहे थे, तब उन्हें जेल के एक अन्य डॉक्टर कैदी ने देख लिया, उसका भी हिप्नोटिज्म सीखने का मन था। धीरे-धीरे दोनों में बातचीत होने लगी और यही बातचीत एक दिन प्रगाढ़ मैत्री में बदल गई । किंतु इन्हीं दिनों एडम बीमार पड़ गए। उनका इलाज हुआ, पर वे अच्छे हुए ही नहीं। एक दिन अपने डॉक्टर मित्र के कमरे में प्राण त्याग दिए। जेल के डॉक्टर ब्राउस्टर उनकी अंत्य परीक्षा की और उन्हें मृत घोषित कर मृत्यु का प्रमाण पत्र भी दे दिया। एडम के भतीजे विलियम डान को वह शव भी सौंप दिया गया। शव ले छप्पन मानवी क्षमता असीम अप्रत्याशित जाकर विलियम डान ने विंडसर के कब्रगाह के संरक्षक को सौंप दिया ताकि अगले दिन उसे एक सुरक्षित कब्र में दफनाया जा सके। एडम का शव एक संदूक में कफन लपेटकर रख दिया गया। जाड़े के दिन थे, उस दिन तो और भी भयंकर शीत थी। हिमपात हो रहा था, ऐसे समय तीन-चार व्यक्ति उस कब्रिस्तान में प्रविष्ट हुए और जिस पेटी में एडम का शव था उसके पास गए। संदूक खोलकर, उनका शव निकाला और उनके स्थान पर उन्होंने अपने साथ लाए शव को लिटा दिया। ताला जैसे का तैसा बंद कर, वह लोग बाहर आ गए और घनघोर अंधकार में न जाने कहाँ खो गए ? इस बार कब्रिस्तान के संरक्षक के साथ भी वही सम्मोहन हुआ। वह सब कुछ देखते हुए भी कुछ कर न सका, पर उसने जो रिपोर्ट दी- उससे यह पता चल गया कि लाश बदली गयी और जिसने यह सारा काम किया, उसका हुलिया डॉशून्य मार्टिन जैसा था। दूसरे दिन एलियास से खबर मिली कि वहाँ से एक शव की चोरी हो गई है। लोगों ने जाकर बदले हुए शव को खुलवाकर देखा पर उसका चेहरा कुछ इस तरह विकृत था कि पहचान में ही नहीं आया, जबकि एडम के शव में किसी प्रकार के दाग-धब्बे नहीं थे तो भी यह रहस्य, रहस्य ही बना रह गया। कुछ दिन बीते । बिंडसर का एक नागरिक कनाडा आया। वहाँ एक होटल में खाना खाने पहुँचा तो यह देखकर अवाक् रह गया कि वहाँ एडम और डॉशून्य मार्टिन दोनों साथ-साथ बैठे भोजन कर रहे हैं। वह बहुत घबराया, जब तक सँभलकर पुलिस को सूचना दे, तब तक वह दोनों व्यक्ति वहाँ से जा चुके थे। घटना अखबारों में छपी तो एक बार फिर से बिंडसर के धन कुबेर काँप गए। इसी बीच कई स्थानों पर उसके देखे जाने की खबरें मिलीं। सभी खबरें विश्वस्त व्यक्तियों द्वारा दी गई थीं। फलस्वरूप एक बार फिर से पुलिस और सीशून्य आईशून्य डीशून्य विभाग सतर्क किया गया । पर एडम पकड़ा नहीं जा सका। कहते हैं, उसने ओझल और अंतर्धान होने की विद्या जान ली थी। यही नहीं उसने अपने शरीर की हर अनैच्छिक क्रिया पर नियंत्रण प्राप्त कर मानवी क्षमता असीम, अप्रत्याशित सत्तावन लिया था। एक क्षण में मर जाना और दूसरे ही क्षण जीकर काम में लग जाना उसके लिए बाँये हाथ का खेल था । आखिरी भेंट एक सीशून्य आईशून्य डीशून्य आफीसर से अमेरिका के ही टोरंटो नगर में हुई। एडम ने अधिकारी से काफी देर तक बातचीत की। जैसे ही पुलिस के सिपाही गिरफ्तार करने के लिए मौका पाकर आगे बढ़े और उसे चारों ओर से घेरे में लिया, एडम एकाएक अंतर्धान हो गया। सीशून्य आईशून्य डीशून्य अधिकारी तथा सिपाही एक-दूसरे का मुँह ताकते खड़े रह गए। इसके बाद ऐडवर्ड स्मिथ ने उसका विस्तृत परिचय छापा और स्वीकार किया कि उसके पास कोई अद्भुत योग शक्ति थी, जो किसी भी भौतिक शक्ति से कहीं अधिक समर्थ थी; किंतु उसके बाद से आज तक एडम के बारे में कुछ भी पता नहीं चल पाया कि वह कहाँ गया है, है भी या नहीं और है तो लोगों को दीखता क्यों नहीं ? यह घटना भारतीय योगियों की सी सिद्धि और प्राण नियंत्रण की जैसी घटना है। उससे जीवनी शक्ति की विलक्षणता, विलगता और समर्थता का ही प्रतिपादन होता है। पश्चिमी देशों में योग सिद्धि और प्राण नियंत्रण के भारतीय विज्ञान की अनुकृति ही सम्मोहन तथा मानवीय विद्युत् के प्रयोगों के रूप में अपनायी गई। इस विद्या के मूल में मनुष्य की संकल्प शक्ति की प्रगाढ़ता ही काम करती है और वही बल अपने परिमाण के अनुसार पात्र को प्रभावित करता व इच्छानुयायी बनाता है। मानवी विद्युत् का उपयोग इस विद्या का वशीकरण, मूर्छा प्रयोग, दैवी आवेश आदि के रूप में प्रचलन तो पहले भी था, पर उसे व्यवस्थित रूप अठारहवीं शताब्दी के आरंभ में आस्ट्रिया निवासी डॉक्टर फ्रांज मेस्मर ने दिया। उन्होंने मानवी विद्युत् का अस्तित्व, स्वरूप और उपयोग सिद्ध करने में घोर परिश्रम किया और उसके आधार पर कठिन रोगों के उपचार में बहुत ख्याति कमाई । वे अपने शरीर की बिजली का रोगियों पर आघात करते, साथ ही लौह चुंबक भी आवश्यकतानुसार प्रयोग में लाते। इस दुहरे प्रयोग से न केवल शारीरिक वरन् मानसिक रोगों के उपचार में उन्होंने आशातीत सफलता प्राप्त की। मेस्मर के शिष्य प्युइसेग्यूर ने प्रयोग को अधिक तत्परतापूर्वक आगे बढ़ाया और उन्होंने चुंबकीय शक्ति द्वारा तंद्रा उत्पन्न करने में नई सफलताएँ पाईं। यह तंद्रा मानसिक तनाव को विश्राम द्वारा शांत करने और अवचेतन के रहस्मय परतों को खोलने में बहुत कारगर सिद्ध हुई। इस प्रकार चिकित्सक की सहायता के बिना भी कोई व्यक्ति स्वनिर्देशन विधि का उपयोग करके अपनी शारीरिक एवं मानसिक चिकित्सा आप कर सकता है। सम्मोहन प्रयोग से गहरी निद्रा लाकर, गहरे आपरेशन में समग्र सफलता सबसे पहले डॉशून्य ऐसडेल को मिली। उन्होंने लगभग तीन सौ ऐसे आपरेशन किए। उनके दावे विवादास्पद माने गए। अस्तु सरकारी जाँच कमीशन बिठाया गया। कमीशन ने अपनी उपस्थिति में ऐसे आपरेशन कराए और एसडेल के प्रयोगों को यथार्थ घोषित किया। यह प्रक्रिया संसार भर में फैली । फ्रांस के डॉशून्य सार्क को इस विधि से हिस्टीरिया को अच्छा करने में कारगर सफलता मिली। मनोविश्लेषण विज्ञान को मूर्त रूप देने वाले डॉशून्य फ्रायड ने अपने प्रतिपादनों में डॉशून्य सार्क के प्रयोगों से विशेष प्रेरणा ली थी। इंगलैंड की रायल मेडीकल सोसायटी के अध्यक्ष तथा लंदन विश्वविद्यालय में चिकित्सा विज्ञान के प्राध्यापक डॉशून्य जान एलियट सन ने सम्मोहन विज्ञान में सन्निहित तथ्यों को बहुत उपयोगी पाया और वे इस प्रयत्न में जुट पड़े कि रोगी को पीड़ा की अनुभूति से बचाकर आपरेशन करने में इस विद्या का उपयोग किया जा सकता है। उन दिनों बेहोश करने की दवाओं का आविष्कार नहीं हुआ था। आपरेशन के समय रोगी कष्ट पाते थे। इस कठिनाई को हल करने मानवी क्षमता-असीम, अप्रत्याशित छप्पन में सम्मोहन-विज्ञान बड़ी सहायता कर सकता है। इसी दृष्टि से उसका अनुसंधान एवं प्रयोग कार्य चलता रहा। इसमें उन्हें आंशिक सफलता भी मिली। इसी शोध संदर्भ में इंग्लैंड के एक-दूसरे डॉक्टर जेम्स ब्रेड ने यह सिद्ध किया कि दूसरे के प्रयोग से ही नहीं वरन् आत्म निर्देशों से एवं ध्यान की एकाग्रता से भी सम्मोहन निद्रा की स्थिति बुला लेना संभव है। दूसरों के दिये सुझाव को बिना किसी तर्क-वितर्क से स्वीकार कर लेना एक अद्भुत बात है। इसमें तर्क शक्ति लगभग प्रसुप्त स्थिति में चली जाती है और आदेश, अनुशासन पालन करने वाली श्रद्धा का आधिपत्य मस्तिष्क पर छाया रहता है। इस स्थिति से लाभ उठाकर, उपचारकर्ता मन में उगी हुई अवांछनीय परतों को उखाड़कर, उस जगह नई स्थापनाएँ करता है। यह शारीरिक सर्जरी जैसी क्रिया है। सड़े अंग काटकर फेंक देना और उस स्थान पर नई चमड़ी, नया मांस जोड़ देना सर्जरी के अंतर्गत सरल है। इसी प्रकार सम्मोहन विद्या-हिजोटिज्म के प्रयोगों से मन की विकृतियों के झाड़-झंखाड़ उखाड़ना और उनके स्थान पर नई पौध जमाना संभव होता है। उपचारकर्ता यही करते हैं। यों इन प्रयोगों का एक हानिकारक पक्ष भी है, जिसे भूतकाल में तांत्रिक लोग किन्हीं को क्षति पहुँचाने के लिए मारण, मोहन, उच्चाटन, वशीकरण आदि रूपों में करते रहे हैं। इसके भले बुरे परिणामों में शक्ति का दोष नहीं है। दोष है उनके प्रयोक्ताओं का। आग का उपयोग भोजन पकाने, जाड़ा भगाने, सर्दी से बचने के लिए भी किया जा सकता है और घर जलाने में भी हो सकता है। इसमें आग का क्या दोष ? दोष तो आग का उपयोग करने वाले का है। उचित यही है कि इस शक्ति का सदुपयोग किया जाए। दुरुपयोग के साथ अपनी स्वयं की हानि होने की भी संभावना सदैव बनी रहती है। अद्भुत और चमत्कारी शक्ति संकल्प शक्ति के इस स्वरूप को अद्भुत और चमत्कारी कहा जा सकता है। इसकी पृष्ठभूमि प्रत्येक मस्तिष्क में विद्यमान रहती है। कई बार अनायास और आकस्मिक ही जागृत हो उठती है। इस चमत्कारी क्षमता से संपन्न होने के रूप में विख्यात रूसी महिला नेल्या मिखायलोव में सहसा असामान्य इच्छा शक्ति उस समय विकसित हो गई, जब वह युद्ध के दिनों में सैनिक के रूप में मोर्चे पर लड़ते हुए शत्रु के गोले से गंभीर रूप से आहत होकर, अस्पताल में आरोग्य लाभ कर रही थी । मास्को विश्वविद्यालय के जीव विज्ञान शास्त्री एडवर्ड नोमोव ने नेल्या का परीक्षण विश्लेषण किया। प्रयोगशाला में उसने मेज पर बिखरी माचिस की तीलियों को बिना छुए, तनिक ऊपर से हाथ घुमाकर जमीन पर गिरा दिया। फिर वही तीलियाँ काँच के डिब्बे में बंद कर दी गईं। नेल्या ने बंद डिब्बे के ऊपर हाथ घुमाया, तो तीलियों में हलचल मच गई। इसी तरह सोवियत लेखक बदिममारीन के साथ भोजन करते समय नेल्या ने मेज पर थोड़ी दूर पड़े रोटी के टुकड़े पर अपना ध्यान एकाग्र किया, तो वह टुकड़ा खिंचकर नेल्या के पास आ गया। फिर उसने झुककर मुँह खोला, तो वह टुकड़ा मुँह में उछलकर समा गया। नेल्या का परीक्षण भली-भाँति रूसी वैज्ञानिकों ने किया और पाया कि उसके मस्तिष्क में विद्युत् शक्ति-सी कौंधती है और देह से चुंबकीय शक्ति निकलती है। बिजली के भले-बुरे परिणाम सभी को विदित हैं। तांत्रिक वर्ग के लोगों में से कितने ही उसका दुष्प्रयोजनों में व्यय करते और अपने प्रतिपक्षियों को हानि पहुँचाते भी देखे गए हैं। युगांडा के एक भूमिगत संगठन दिनी बा मसांबूबा के कार्यों की जानकारी के लिए नियुक्त एक ब्रिटिश गुप्तचर अधिकारी ने अपनी संस्मरण पुस्तक में विभिन्न घटनाओं का उल्लेख किया है। ये मानवी क्षमता असीम, अप्रत्याशित इकसठ ब्रिटिश अफसर जान क्राफ्ट प्रगतिशील अंधविश्वासों से सर्वथा मुक्त, कुशाग्र बुद्धि, साहसी व प्रशांत मस्तिष्क से काम करने वाले थे। उन्हें जादू-टोने पर तनिक भी विश्वास नहीं था, पर जब वे गुप्त संगठन का पता लगाने में सक्रिय हुए, तो उन्हें चेतावनी दी गयी कि वे इस कार्य से हाथ खींच लें। जब वे न माने, तो उनके ऊपर सर्वथा अप्रत्याशित व अस्वाभाविक तौर पर महा विषैले सर्पों से आक्रमणों की योजना बनाई गई। वे एक भोज में गए, वहाँ से लौटते समय, आगे अनेक अतिथि तो निरापद चले गए, पर जब जानक्राफ्ट सीढ़ियों पर उतरने लगे तो वहाँ भयंकर विषधर घात लगाए बैठा था। मेजबान ने जानक्राफ्ट को एकदम से धक्का देते हुए, न ठेल दिया होता तो उन्हें डंसने ही वाला था। एकबार वे अकस्मात् एक सहयोगी के यहाँ पहुँचे, तो वहाँ भी एक भयंकर फणिधर ने तीखी विषधार उनकी आँखों की ओर छोड़ी। सहकर्मी सतर्क व चुस्त था, उसने उन्हें तत्काल नीचे गिरा दिया और जहरीली घात ऊपर निकल गई अन्यथा उनका प्राणांत हो जाता या फिर वे जन्मभर के लिए अंधे हो जाते। फिर एक बार मोटर के दरवाजे के पास, दूसरी बार बिस्तर पर ही भयंकर विषैले सर्प दीखे। एकबार क्राफ्ट के दफ्तर के अंधेरे कौने में दुबका बैठा था । घटनाओं का विश्लेषण स्पष्ट बताता था कि यह संयोग मात्र नहीं हो सकता। उनके अकस्मात् दूर कहीं पहुँचने की सूचना उनके शत्रुओं को भी नहीं मिल सकती थी, अतः संभावना भी नहीं मानी जा सकती थी कि वे लोग चुपके से ये सर्प छोड़े जाते रहे होंगे। फिर भोज में आये अनेक नागरिकों में से सिर्फ क्राफ्ट पर ही प्रहार की चेष्टा सर्प ने क्यों की ? घटनाएँ इस तथ्य को मानने को विवश करती हैं कि वहाँ प्रचलित यह मान्यता सही हो सकती है कि वहाँ के तांत्रिक सर्पों को वश में कर उनका इस तरह मन चाहा प्रयोग करते हैं। इस स्तर की सिद्धियाँ कठिन योगाभ्यासों और दीर्घकाल तक की जाने वाली साधनाओं के परिणामस्वरूप ही प्राप्त होती हैं। किसी को पूर्व जन्म के संचित पुण्यों से अथवा ईश्वरीय कृपा के परिणामस्वरूप ये चमत्कारीय उपलब्धियाँ प्राप्त हो जाएँ, यह बात और है। सामान्य व्यक्ति अपने जीवन में इस संकल्प शक्ति का थोड़ा भी उपयोग कर सके तो बहुत सी चिंताओं और परेशानियों से बच सकता है। ● संकल्प शक्ति के उपयोगी लाभ सामान्य जीवन में आने वाली छुटपुट असफलताओं का दोष दुर्भाग्य, दैव और दूसरों को देते रहने वाले जीवन भर असफलताओं को ही आमंत्रित करते रहते हैं क्योंकि सफलता प्राप्ति के लिए उनमें न अभीष्ट मनोबल होता है और न ही संकटों से जूझने का साहस जबकि कितने ही व्यक्तियों ने सामान्य से भी गिरी नितांत दुर्दशाग्रस्त स्थिति में रहते हुए भी असाधारण सफलताएँ प्राप्त कर दिखाई हैं। कितने ही व्रतशील उच्च उद्देश्यों को लेकर कार्य क्षेत्र में उतरे और तुच्छ सामर्थ्य के रहते हुए भी महान् कार्य कर सकने में सफल हुए हैं। उन्हें निरंतर आगे बढ़ने और अवरोधों को गिराने की सामर्थ्य आंतरिक मनोबल से ही मिली है। बिहार के हजारी बाग जिले के हजारी नामक किसान ने इस प्रदेश के गाँव में आम के बगीचे लगाने का निश्चय किया था। यदि दृढ़ संकल्प प्रबल आकांक्षा बनकर उभरे तो फिर मस्तिष्क को उसका सरंजाम खड़ा करने और शरीर को उसे व्यवहार में परिणत करते देर नहीं लगती। यही सदा सर्वदा से होता रहा है, यही हजारी किसान ने भी कर दिखाया। उसने उस सारे इलाके में आम के दरख्त लगाए और अंततः उन आम्र उद्यानों की संख्या एक हजार तक जा पहुँची। वही इलाका इन दिनों बिहार का हजारी बाग जिला कहलाता है। सत्संकल्पों की परिणति सदा इसी प्रकार से व्यक्ति और समाज के लिए महान् उपलब्धियाँ प्रस्तुत करती रही है। मानवी क्षमता असीम, अप्रत्याशित तिरेसठ नर हो या नारी, बालक हो या वृद्ध, स्वस्थ हो या रुग्ण, धनी हो या निर्धन परिस्थितियों से कुछ बनता - बिगड़ता नहीं, प्रश्न संकल्प शक्ति का है। मनस्वी व्यक्ति अपने लिए उपयुक्त परिस्थितियाँ बनाते और सफल होते हैं। समय कितना लगा और श्रम कितना पड़ा उसमें अंतर हो सकता है, पर आत्म निर्माण के लिए प्रयत्नशील अपनी आकांक्षा में शिथिलता एवं प्रखरता के अनुरूप देर-सबेर में सफल होकर ही रहता है। नारी की परिस्थितियाँ नर की अपेक्षा कई दृष्टियों से न्यून मानी जाती हैं किंतु यह मान्यता वहीं तक सही है, जहाँ तक कि उसका मनोबल गया गुजरा बना रहे । यदि वे अपनी साहसिकता को जगा लें, संकल्प शक्ति का सदुद्देश्य के लिए उपयोग करने लगें तो कोई कारण नहीं कि अपने गौरव - गरिमा का प्रभाव देने में किसी से पीछे रहें । मैत्रेयी याज्ञवल्क्य के साथ पत्नी नहीं, धर्मपत्नी बनकर रहीं। राम कृष्ण परमहंस की सहचरी शारदामणि का उदाहरण भी ऐसा ही है। सुकन्या ने च्यवन के साथ रहना किसी विलास-वासना के लिए नहीं उनके महान् लक्ष्य को पूरा करने में साथी बनने के लिए किया था। जापान के गांधी कागावा की पत्नी भी दीन-दुःखियों की सेवा का उद्देश्य लेकर के ही उनके साथ दांपत्य सूत्र में बँधी थी । नर- पामरों को जहाँ दांपत्य जीवन में विलासिता के पशु-प्रयोजन के अतिरिक्त और कोई उद्देश्य दृष्टिगोचर ही नहीं होता; वहाँ ऐसी आदर्शवादी नर-नारियों की भी कमी नहीं जो विवाह बंधन की आवश्यकता तभी अनुभव करते हैं, जब उससे वैयक्तिक और सामाजिक प्रगति का कोई उच्च स्तरीय उद्देश्य पूरा होता हो । कुंती भी सामान्य रानियों की तरह एक महिला थी । जन्म जात रूप से तो सभी एक जैसे उत्पन्न होते हैं। प्रगति तो मनुष्य अपने पराक्रम-पुरुषार्थ के बल पर करता पर करता है। कुंती ने देवत्व जगाया आकाशवासी देवताओं को अपना सहचर बनाया और पाँच देव-पुत्रों को जन्म दे सकने में सफल बन सकी । सुकन्या ने अश्विनी कुमारों को और सावित्री ने यम को सहायता करने के लिए विवश कर दिया था। उच्चस्तरीय निष्ठा का परिचय देने वाले देवताओं की, ईश्वरीय सत्ता की सहायता प्राप्त कर सकने में भी सफल होते हैं। टिटहरी के धर्म युद्ध में महर्षि अगस्त्य सहायक बनकर सामने आए थे । तपस्विनी पार्वती अपने व्रत-संकल्प के सहारे शिव की अर्धांगिनी बन सकने का गौरव प्राप्त कर सकी थी। पति को आदर्श पालन के लिए प्रेरित करने वाली लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला स्वयं भी वनवास जैसी साधना घर पर करती रही। इन महान् गाथाओं में आदर्शवादी संकल्प ही अपनी गरिमा प्रकट करते दीखते हैं। बंगाल के निर्धन विद्वान् प्रतापचंद्र राय ने अपनी सारी शक्ति और संपत्ति को बाजी पर लगाकर, महाभारत के अनुवाद का कार्य हाथ में लिया। वे उसे अपने जीवन में पूरा न कर सके तो उनकी पत्नी ने अपना संस्कृत ज्ञान पूरा करके, उस अधूरे काम को पूर्ण करके दिखा दिया। ऐसी साहसिकता वहाँ ही दिखायी पड़ती है, जहाँ उच्चस्तरीय आदर्शों का समावेश हो । विद्वान् कैयट व्याकरण शास्त्र की संरचना में लगे हुए थे। उनकी पत्नी भारती मूंज की रस्सी बटकर गुजारे का प्रबंध करती थी। साम्यवाद के प्रवर्तक कार्ल्स मार्क्स भी कुछ कमा नहीं पाते थे। यह कार्य उनकी पत्नी जैनी करती थी। वे पुराने कपड़े खरीदकर उनमें से बच्चों के छोटे कपड़े बनाती और फेरी लगाकर बेचती थीं। आदर्शों के लिए पतियों को इस प्रकार प्रोत्साहित करने और सहयोग देने में उनका उच्चस्तरीय संकल्प बल ही कार्य करता था। जहाँ सामान्य नारियाँ अपने बच्चों को मात्र सुखी - संपन्न देखने भर की कामना सँजोए रहती हैं, वहाँ ऐसी महान् महिलाएँ भी हुई हैं, जिन्होंने अपनी संतान को बड़ा आदमी नहीं, महामानव बनाने का सपना देखा और उसे पूरा करने के लिए अपनी दृष्टि और चेष्टा में आमूल-चूल परिवर्तन कर डाला। ऐसी महान् महिलाओं में विनोबा की माता आती हैं, जिन्होंने अपने तीन बालकों को ब्रह्मज्ञानी मानवी क्षमता - असीम, अप्रत्याशित पैंसठ बनाया। शिवाजी की माता जीजाबाई को भी यही गौरव प्राप्त हुआ। मदालसा ने अपने सभी बालकों को बाल ब्रह्मचारी बनाया था। शकुंतला अपने बेटे भरत को, सीता अपने लवकुश को सामान्य नर-वानरों से भिन्न प्रकार का बनाना चाहती थी। उन्हें जो सफलताएँ मिलीं वे अन्यान्यों को भी मिल सकती हैं। शर्त एक ही है कि आदर्शों के अंतःकरण में गहन श्रद्धा की स्थापना हो सके और उसे पूरा करने के लिए अभीष्ट साहस संजोया जा सके। संकल्प इसी को कहते हैं। पुरुष महिलाओं की आत्मिक प्रगति में सहायक बनें, महिलाएँ पुरुषों, छोटे बच्चों को संस्कारवान् बनाने का व्रत लें, तो इस पारस्परिक सहयोग से राष्ट्र जागरण, आध्यात्मिक चेतना का विकास तथा आदर्शवादी आस्थाओं की स्थापना जैसे महान् कार्य सहज ही किए जा सकते हैं। वंश परंपरा या पारिवारिक परिस्थितियों की हीनता किसी की प्रगति में चिरस्थायी अवरोध उत्पन्न नहीं कर सकी है। इसी प्रकार की अड़चनें अधिक संघर्ष करने के लिए चुनौती देने के अतिरिक्त और कुछ नहीं कर सकतीं। सत्यकाम जावाल वेश्या पुत्र थे। उनकी माता यह नहीं बता सकी थी कि उस बालक का पिता कौन था ? ऐतरेय ब्राह्मण के रचयिता ऋषि ऐतरेय - इतरा नामक रखैल के पुत्र थे। महर्षि वशिष्ठ, मातंगी आदि के बारे में भी ऐसा ही कहा जाता है। रैदास, कबीर, बाल्मीकि आदि का जन्म छोटे कहे जाने वाले परिवारों में ही हुआ था। पर इससे उन्हें महानता के उच्च पद तक पहुँचने में कोई स्थायी अवरोध उत्पन्न नहीं हुआ । मनुष्य की संकल्प शक्ति इतनी बड़ी है कि वह अग्रगमन के मार्ग में उत्पन्न होने वाली प्रत्येक बाधा को पैरों तले रौंदती हुई आगे बढ़ सकती है। पहले मन को संस्कारित कीजिए मन की दो सर्वज्ञात विशेषताएँ हैं- चंचलता एवं सुख-लिप्सा । बंदर जैसी उछल-कूद, आवारा छोकरों जैसी मटरगस्ती, चिड़ियों की तरह यहाँ-वहाँ फुदकते फिरना, उसकी चपलवृत्ति को संतुष्टि पहुँचाते हैं। कल्पना के महलों की सृष्टि कल्पना लोकों का तीव्र भ्रमण-विचारणा, उसकी शक्ति का बड़ा अंश तो इन्हीं भटकनों, जंजालों में नष्ट हो जाते हैं। शक्ति का यह व्यर्थ छीजन रोककर, उसे सुनिश्चित एवं सार्थक प्रयोजन में केंद्रित करना ही योगाभ्यास है। शक्तियों का यह सही उपयोग जीवन में स्पष्ट और आश्चर्यजनक परिणाम सामने लाता है। पिछड़ेपन के स्थान पर प्रगतिशीलता आ जाती है। दरिद्रता समृद्धि में परिणत हो जाती है। भटकाव की जगह प्रचंड पुरुषार्थ प्रवृत्ति पनपने पर परिस्थितियाँ अनुकूल बनने लगती हैं और साधन संचित होने लगते हैं। लौकिक सफलताएँ भी लक्ष्य केंद्रित पुरुषार्थ का ही परिणाम होती हैं। मन की मटकन रोककर ही उसे लक्ष्योन्मुख बनाया जा सकता है। यही सधा हुआ मन आत्मिक क्षेत्र में लगाए जाने पर सुषुप्त शक्ति केंद्रों को जागृत व क्रियाशील बनाता है और दिव्य क्षमताएँ प्रकाश में आती हैं। अंतःचेतना का परिष्कार सामान्य व्यक्ति को महामानव स्तर पर ले जाकर ही रहता है। प्रगति का संपूर्ण इतिहास मनःशक्ति के पुंजीभूत, लक्ष्य केंद्रित पुरुषार्थ की ही यशगाथा है। चंचलता की प्रवृत्ति को पुरुषार्थ की प्रवृत्ति में परिवर्तित करने का पराक्रम ही प्रगति का सार्वभौम आधार रहा है। मन की दूसरी प्रवृत्ति है - सुख-लिप्सा । शारीरिक सुखों के भोग का माध्यम है - इंद्रियाँ । उनके द्वारा विभिन्न वासनाओं का स्वाद मिलता है। पेट और प्रजनन से संबंधित सुखों के लिए तरह-तरह की चेष्टाओं में ही मन उलझा रहता है और इन सुखों की प्राप्ति के लिए प्रेरणा ही नहीं देता, बल्कि इनकी मात्र कल्पनाएँ मानवी क्षमता- असीम, अप्रत्याशित सरसठ करने में भी बहुत अधिक समय नष्ट करता है। फिर इन भौतिक सुखों के लिए साधन जुटाने में भी मन को जाने कितने ताने-बाने बुनने पड़ते हैं। इंद्रियों की प्रिय वस्तु या व्यक्ति देखने, सुनने, छूने, सूँघने अथवा स्वाद लेने की लिप्साएँ मन को ललक से भर देती हैं और वह उसी दिशा में लगा रहता है। अहंकार की पूर्ति के लिए मन औरों पर प्रभाव डालने हेतु तरह-तरह की चेष्टाएँ करता है और व्यक्ति भाँति-भाँति के ठाट-बाट बनाता है। संग्रह और स्वामित्व की इच्छाएँ भी अनेक विधि प्रयत्नों का कारण बनती हैं। इन सभी इच्छाओं, आकांक्षाओं की प्यास को व्यक्त करने के लिए ही तृष्णा शब्द का प्रयोग होता है। अहं भावना पर आघात पहुँचते ही प्रतिशोध की उत्तेजना प्रबल हो उठती है। इच्छित विषय पर अपना हक मान लेना और फिर उसके न प्राप्त होने या प्राप्ति में बाधा पड़ने पर भड़क उठना भी, अहंता पर आघात के ही कारण होता है। यह उत्तेजना ही क्रोध है। काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर आदि संपूर्ण विकार समूह वस्तुतः मन में उठने वाली प्रतिक्रियाएँ मात्र हैं, जो भौतिक सुख की लिप्साओं के कारण उठती रहती हैं। लिप्सा की इस ललक की दिशा को उलट देना ही 'तप' है । वह दूसरी दिशा भौतिक सुखों की वासना, तृष्णा और अहंता की पूर्ति से होने वाले क्षणिक सुखों की नहीं है वरन् आनंद की है। आनंद उपभोग से नहीं, उत्कर्ष और उत्सर्ग से प्राप्त होता है। सुख मन का विषय है, जबकि आनंद और आत्म-संतोष आत्मा का । सुख लिप्सा का अभ्यस्त मन आनंद के स्वाद को नहीं जान पाता और जिसे जाना ही नहीं, उसके प्रति गहरी और स्थायी प्रीति, सच्चा आकर्षण संभव नहीं। आनंद की आकांक्षा विषयलोलुप मन में प्रगाढ़ नहीं होती। उसके लिए तो मन का प्रशिक्षण आवश्यक है। यह प्रशिक्षण प्रक्रिया ही तप है। तपस्वी को कष्ट इसी अर्थ में सहना पड़ता है कि अभ्यस्त सुख का अवसर जाता रहता है। शारीरिक सुख-सुविधाएँ सिमटती हैं। मानसिक आमोद-प्रमोद का भी अवकाश नहीं रहता और आदर्शनिष्ठ आचरण आर्थिक समृद्धि के भी आड़े अड़सठ मानवी क्षमता असीम, अप्रत्याशित ही आता है। प्रत्यक्ष तौर पर तो ऐसे परिणामों के लिए किया जाने वाला प्रयास मूर्खता ही प्रतीत होगा। लेकिन श्रेष्ठ उपलब्धियों का राजमार्ग यही है। किसान, विद्यार्थी, पहलवान, श्रमिक, व्यवसायी, कलाकार आदि को भी अपनी प्रगति व उपलब्धियों की प्राप्ति के लिए बाल - चंचलता से मन को विरत ही करना पड़ता है और अपने नीरस प्रयोजनों में ही मनःशक्ति नियोजित करनी पड़ती है। शौक-मौज के अभ्यस्त उनके संगी उन लोगों की ऐसी लक्ष्योन्मुख प्रवृत्तियों का मजाक भी उड़ाते हैं। लेकिन सभी जानते हैं कि अंततः बुद्धिमान् और प्रगतिशील ऐसे ही लोगों को माना जाता है, जो चित्त की चपलता को नियंत्रित कर उसे अपने लक्ष्य की ओर ही लगाए रहते हैं - वह कृषि का क्षेत्र हो या शिक्षा का शरीर सौष्ठव का हो या आर्थिक समृद्धि का, कला-कौशल का हो या वैज्ञानिक आविष्कार का अथवा दार्शनिक चिंतन-मनन का । भारतीय मनीषियों ने मन को संस्कारित व परिष्कृत करने के लिए पंचकोशीय साधना विधान में मनोमय कोश की साधना का एक स्वतंत्र चरण ही रखा है। मनोमय कोश का अर्थ हैविचारशीलता, विवेक बुद्धि । ● मनोमय कोश अर्थ और साधना मन कोई ऐसा तत्त्व नहीं है जो केवल मनुष्य के पास ही है। वह हर जीवित प्राणी के पास होता है। कीट-पतंग भी उससे रहित नहीं हैं, परंतु मनोमय कोश के व्याख्याकारों ने उसे दूरदर्शिता, तर्क, प्रखरता एवं विवेकशीलता के रूप में विस्तारपूर्वक समझाया है। मन की स्थिति हवा की तरह है। वह दिशा विशेष तक सीमित न रहकर, स्वेच्छाचारी वन्य पशु की तरह किधर भी उछलता-कूदता है ? पक्षियों की तरह किसी भी दिशा में चल पड़ता है ? इसे दिशा देना, चिंतन को अनुपयोगी प्रवाह में बहने से बचाकर, उपयुक्त मार्ग मानवी क्षमता असीम, अप्रत्याशित હૃદ पर सुनियोजित करना मनस्वी होने का प्रधान चिह्न है। मनोनिग्रह- मनोजय इसी का नाम है। जंगली को पकड़कर अनुशासित बनाने का काम तो कठिन है, पर इसकी उपयोगिता अत्यधिक है। जंगली हाथी फसलें उजाड़ते और झोपड़ियाँ तोड़ते हैं और भूखे-प्यासे अनिश्चित स्थिति में भटकते हैं, किंतु पालतू बन जाने पर उसकी जीवनचर्या भी सुनिश्चित हो जाती है और साथ ही वे अपने मालिक का भी बहुत हित साधन करते हैं। सधे हुए मन की तुलना पालतू हाथी से की जा सकती है और अनियंत्रित मन को उन्मत्त जंगली हाथी कहा जा सकता है। आवेग और आवेशग्रस्त होकर उन उत्तेजनाओं से प्रेरित मनुष्य कुछ भी सोच सकता है और कुछ भी कर गुजर सकता है। वह चिंतन और कर्तृत्व इतना असंगत हो सकता है कि फलस्वरूप जीवन भर पश्चाताप करना पड़े और असीम हानि उठानी पड़े, किंतु आवेगों के प्रवाह में बुद्धि पर पर्दा पड़ जाता है और कुछ सूझ नहीं पड़ता। उन्मतों की तरह दूसरों की हत्या, आत्म-हत्या न सही ऐसे काम तो सहज ही बन पड़ते हैं, जिन पर शांत मनःस्थिति में विचार करने पर स्वयं ही अपने पर क्रोध आता है। असंख्य मनुष्य ऐसे ही उद्धत कर्म करते हैं अथवा मरे हुए मन से अकर्मण्य बने हुए जीवन की लाश ढोते हैं। स्थिति से उबरने का कोई प्रकाश भी उन्हें नहीं मिलता। प्रायः एक समय में एक प्रकार के विचार एक ही दिशा में दौड़ते हैं। यह प्रवाह जिधर भी चलता है उधर लाभ ही लाभ, औचित्य ही औचित्य दिखाई पड़ता है, जबकि वास्तविकता कुछ और ही होती है। प्रवाह को रोक कर धारा द्वारा उससे बाँध या बिजलीघर बनाए जाते हैं। मन के प्रवाह को जब दूसरी प्रतिरोधी शक्ति से रोका जाता है, उचित-अनुचित के मंथन से उलट-पुलट कर नवनीत निकाला जाता है, तब पता चलता है कि क्या सोचना सार्थक है क्या निरर्थक ? लाभ किसमें है और हानि किसमें ? सत्तर मानवी क्षमता असीम, अप्रत्याशित तत्काल के क्षणिक लाभ को ही सब कुछ न मानकर, भविष्य के चिरस्थायी परिणाम का विचार करने में समर्थ एवं परिपक्व बुद्धि, मन के प्रवाह को अवांछनीय दिशा में रोक सकती है, उसे उचित में नियोजित कर सकती है। इस परिष्कृत चिंतन प्रक्रिया को मनोमय कोश की उपलब्धि कह सकते हैं। महामनीषी, तत्त्वदर्शी, शोधकर्ता एवं मनस्वी व्यक्ति ही महा मानवों की पंक्ति में बैठ सकने में समर्थ हुए हैं। उन्होंने संसार का नेतृत्व किया है और अपने महान् कर्तृत्वों से इतिहास को यशस्वी किया है। इन सभी की यह प्रमुख विशेषता रही है कि उन्होंने अपने मन पर अंकुश करना और उसे दिशा देना सीखा। सामान्य लोगों का मन हवा के साथ उड़ते-फिरने वाले तिनके की तरह अपनी मानसिक चेतना को निरर्थक अथवा अनर्थ मूलक स्थिति में भटकने देता है, जबकि मनस्वी व्यक्ति उसकी प्रत्येक लहर को सुनियोजित करता है। उचित और अनुचित की कसौटी का अंकुश रखकर मन को उसी दिशा में, उसी गति से चलने देता है; जिससे कुछ महत्त्वपूर्ण हित साधन हो सके। इच्छाओं को मोड़ने में चिंतन को सुनियोजित करने में सफलता प्रखर तर्क बुद्धि से उत्पन्न होती है और आत्म-दमन कर सकने की साहसिकता से मनोनिग्रह बन पड़ता है। एकाग्रता का, चित्त-वृत्ति-निरोध का बहुत माहात्म्य योगशास्त्रों में बताया गया है। इसका अर्थ चिंतन-प्रक्रिया को ठप्प कर देना, एक ही ध्यान में निमग्न रहना नहीं, वरन् यह है कि विचारों का प्रवाह नियत-निर्धारित प्रयोजन में ही निष्ठापूर्वक लगा रहे । यह कुशलता जिनको करतलगत हो जाती है, वे जो भी लक्ष्य निश्चित करते हैं, उसमें प्रायः अभीष्ट सफलता ही प्राप्त करते रहते हैं। बिखराव की दशा में चिंतन की गहराई में उतरने का अवसर नहीं मिलता अस्तु किसी विषय में प्रवीणता और पारंगतता भी हाथ नहीं लगती। संसार में विशेषज्ञों का स्वागत होता है, यहाँ हर क्षेत्र में ए-वन' की माँग है मानवी क्षमता असीम, अप्रत्याशित इकहत्तर और वह उपलब्धि कुशाग्र बुद्धि पर नहीं, सघन मनोयोग के साथसंबद्ध है। यह मनोयोग का वरदान प्राप्त करने के लिए जो प्रयास - व्यायाम करने पड़ते हैं, उन्हें ही मनोमय कोश की साधना कहते हैं। मनोमय कोश की साधना मस्तिष्कीय क्षेत्र में घुसे मनोविकारों को, दुष्प्रवृत्तियों को निरस्त करने के लिए लड़ा जाने वाला महाभारत है; साथ ही इसमें धर्म राज्य की, राम राज्य की, स्थापना का लक्ष्य संकल्प भी जुड़ा हुआ है। इस संदर्भ में वैज्ञानिक अनुशीलन प्रयत्न ध्यान देने योग्य है। बहुत समय पहले शारीरिक रोगों का कारण, वात, पित्त, कफ, अपच, मलावरोध, ऋतु प्रभाव, विषाणुओं का आक्रमण आदि माना जाता था। नवीनतम शोधें शरीर पर पूरी तरह मनः सत्ता का अधिकार मानती हैं और बताती हैं कि बाह्य कारणों से उत्पन्न हुए रोग तो शरीर की जीवनी शक्ति स्वयं ही अच्छी कर लेती हैं अथवा मामूली उपचार से अच्छे हो सकते हैं। जंटिल रोग तो आमतौर से मनोविकारों के ही परिणाम होते हैं। उनका निराकरण दवादारू से नहीं, मानसिक परिशोधन से ही संभव हो सकता है। शारीरिक ही नहीं मानसिक रोगों का भी यही प्रधान कारण है। दुष्कर्म अथवा दुर्बुद्धिग्रस्त व्यक्ति शारीरिक ही नहीं, मानसिक रोगों से भी ग्रसित रहते हैं। उन्माद-विस्फोट की स्थिति न आए तो भी असंतुलन से ग्रस्त व्यक्ति अर्ध- विक्षिप्त स्थिति में पड़े रहते हैं। अकारण दुःख पाते और अकारण दुःख देते हैं। इनकी मनःस्थिति कितनी दयनीय होती है ? यह देखने भर से बड़ा कष्ट होता है। शारीरिक व्यथाओं से पीड़ितों की अपेक्षा मनोवेगों से ग्रस्त लोगों की संख्या ही नहीं पीड़ा भी अधिक है। इन व्यथाओं से छुटकारे का उपाय अस्पतालों में नहीं, मानसिक संशोधन की साधनाओं पर ही अवलंबित है। वे उपाय, उपचार अन्य प्रकार भी हो सकते हैं, पर
बुधवार को हैदराबाद पुलिस ने लिस्बन पब में छापा मारकर 30 लोगों व 2 आयोजकों को पब में अश्लील गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में हिरासत में ले लिया। वेस्ट जोन टास्क फोर्स पुलिस के अनुसार, उन्होंने विश्वसनीय स्रोतों से इसके बारे में जानकारी मिली थी। उसी आधार पर पंजागुट्टा पुलिस स्टेशन की सीमा में स्थित पब पर उन्होंने छापा मारा। इसके अतिरिक्त पुलिस ने बोला कि हमने 21 महिलाओं, 9 पुरुषों व 2 आयोजकों को अश्लील गतिविधियों का सहारा लेने के लिए अपनी हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने यह भी बोला कि आयोजक पिछले कुछ दिनों से पब में गैरकानूनी गतिविधियों का आयोजन कर रहे है। आरोपियों को आगे की कार्रवाई के लिए पंजागुट्टा पुलिस स्टेशन को सौंप दिया गया है। आगे के विवरण की प्रतीक्षा है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि पुलिस को इस मुद्दे की जानकारी पहले से थी। लेकिन पूरी तरह से कंफर्म होने के बाद इस कारवाही को अंजाम दिया गया है। पुलिस के इस सतर्क कदम से लिस्बन पब में लगभग हर शख्स को छापे वाली कार्यवाही में पकड़ लिया गया है।
बुधवार को हैदराबाद पुलिस ने लिस्बन पब में छापा मारकर तीस लोगों व दो आयोजकों को पब में अश्लील गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में हिरासत में ले लिया। वेस्ट जोन टास्क फोर्स पुलिस के अनुसार, उन्होंने विश्वसनीय स्रोतों से इसके बारे में जानकारी मिली थी। उसी आधार पर पंजागुट्टा पुलिस स्टेशन की सीमा में स्थित पब पर उन्होंने छापा मारा। इसके अतिरिक्त पुलिस ने बोला कि हमने इक्कीस महिलाओं, नौ पुरुषों व दो आयोजकों को अश्लील गतिविधियों का सहारा लेने के लिए अपनी हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने यह भी बोला कि आयोजक पिछले कुछ दिनों से पब में गैरकानूनी गतिविधियों का आयोजन कर रहे है। आरोपियों को आगे की कार्रवाई के लिए पंजागुट्टा पुलिस स्टेशन को सौंप दिया गया है। आगे के विवरण की प्रतीक्षा है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि पुलिस को इस मुद्दे की जानकारी पहले से थी। लेकिन पूरी तरह से कंफर्म होने के बाद इस कारवाही को अंजाम दिया गया है। पुलिस के इस सतर्क कदम से लिस्बन पब में लगभग हर शख्स को छापे वाली कार्यवाही में पकड़ लिया गया है।
Rajasthan Police Constable Recruitment 2019: राजस्थान में पुलिस कांस्टेबल के लिए भर्ती परीक्षा अगले साल (2020) फरवर या मार्च माह में होगी। लिखित परीक्षा के प्रवेश पत्र ऑनलाइन जारी किए जाएंगे। डाक से कोई प्रवेश पत्र नहीं भेजा जाएगा। Rajasthan Police Constable Recruitment 2019: राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल भर्ती के लिए आज (21 दिसंबर) से आवेदन शुरू किए हैं। आवेदन करने की अंतिम तारीख चार जनवरी 2020 है। इन भर्तियों के लिए इच्छुक उम्मीदवारों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए sso. rajasthan. gov. in वेबसाइट पर जाकर SSO ID बनाना होगा फिर अप्लाई करना होगा। राजस्थान पुलिस ने भर्तियां कांस्टेबल जीडी (जनरल ड्यूटी) और कांस्टेबल ड्राइवर के पदों पर निकली है। -कांस्टेबल जीडी में जनरल क्षेत्र की 3050 वैकेंसी हैं। -टीएसपी क्षेत्र की 1591 वैकेंसी है। -टीएसपी क्षेत्र की 12 वैकेंसी है। -इन रिक्तियों में 79 पद खेल कोटे से भी भरे जाएंगे। कांस्टेबल जीडी के लिए 10वीं पास आवदेन कर सकते हैं। आरएससी/एमबीसी बटालियन के लिए 8वीं पास भी अप्लाई कर सकते हैं। दो साल तक ट्रेनी के दौरान 14,600 रुपये प्रति माह मिलेंगे। इसके बाद 7वें वेतन आयोग के मुताबिक नियमित वेतन एल-5 वेतन व नियमानुसार अन्य भत्ते मिलेंगे। राजस्थान में पुलिस कांस्टेबल के लिए भर्ती परीक्षा अगले साल (2020) फरवर या मार्च माह में होगी। लिखित परीक्षा के प्रवेश पत्र ऑनलाइन जारी किए जाएंगे। डाक से कोई प्रवेश पत्र नहीं भेजा जाएगा।
Rajasthan Police Constable Recruitment दो हज़ार उन्नीस: राजस्थान में पुलिस कांस्टेबल के लिए भर्ती परीक्षा अगले साल फरवर या मार्च माह में होगी। लिखित परीक्षा के प्रवेश पत्र ऑनलाइन जारी किए जाएंगे। डाक से कोई प्रवेश पत्र नहीं भेजा जाएगा। Rajasthan Police Constable Recruitment दो हज़ार उन्नीस: राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल भर्ती के लिए आज से आवेदन शुरू किए हैं। आवेदन करने की अंतिम तारीख चार जनवरी दो हज़ार बीस है। इन भर्तियों के लिए इच्छुक उम्मीदवारों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए sso. rajasthan. gov. in वेबसाइट पर जाकर SSO ID बनाना होगा फिर अप्लाई करना होगा। राजस्थान पुलिस ने भर्तियां कांस्टेबल जीडी और कांस्टेबल ड्राइवर के पदों पर निकली है। -कांस्टेबल जीडी में जनरल क्षेत्र की तीन हज़ार पचास वैकेंसी हैं। -टीएसपी क्षेत्र की एक हज़ार पाँच सौ इक्यानवे वैकेंसी है। -टीएसपी क्षेत्र की बारह वैकेंसी है। -इन रिक्तियों में उन्यासी पद खेल कोटे से भी भरे जाएंगे। कांस्टेबल जीडी के लिए दसवीं पास आवदेन कर सकते हैं। आरएससी/एमबीसी बटालियन के लिए आठवीं पास भी अप्लाई कर सकते हैं। दो साल तक ट्रेनी के दौरान चौदह,छः सौ रुपयापये प्रति माह मिलेंगे। इसके बाद सातवें वेतन आयोग के मुताबिक नियमित वेतन एल-पाँच वेतन व नियमानुसार अन्य भत्ते मिलेंगे। राजस्थान में पुलिस कांस्टेबल के लिए भर्ती परीक्षा अगले साल फरवर या मार्च माह में होगी। लिखित परीक्षा के प्रवेश पत्र ऑनलाइन जारी किए जाएंगे। डाक से कोई प्रवेश पत्र नहीं भेजा जाएगा।
Benefits of Nadi Shodhan pranayama: नाड़ी शोधन प्राणायाम के मुख्य प्रकारों में से एक है। नाड़ी शोधन प्राणायाम शरीर की अशुद्धियों को दूर करने के लिए किया जाने वाला प्राणयाम है। अन्य प्राणायाम की तरह इस प्राणायाम में भी सांस लिया और छोड़ा जाता है। नाड़ी शोधन प्राणयाम से खून तो साफ़ होता ही है साथ ही खून में ऑक्सीजन का स्तर भी बढ़ जाता है। इस प्राणायाम के और भी कई स्वास्थ्य लाभ हैं और इस वजह से आपको इसका अभ्यास रोजाना कम से कम 30 मिनट करना चाहिए। आइए जानते हैं नाड़ी शोधन प्राणयाम कैसे किया जाता है तथा इससे शरीर को क्या-क्या लाभ होते हैं। नाड़ी शोधन प्राणयाम करने का तरीकाः 1. सबसे पहले पालथी मार कर बैठें। दायें पैर को बाएं पैर के ऊपर और बाएं पैर को दायें पैर के ऊपर रखें। अपने दोनों हाथ अपने जांघों पर रखें और रिलैक्स हो जाएं और अपनी आंखें बंद करें। यह प्राणायाम करने के लिए किसी साफ सुथरे कमरे का चुनाव करें। 2. अपने दायें हाथ को अपने चेहरे की तरफ लायें और अपने दायें हाथ के अंगूठे से दायीं नाक को बंद करें। 3. दायीं नाक बंद करने के बाद अपनी बायीं नाक से धीरे-धीरे एक गहरी सांस लें। जब फेफड़े हवा से भर जाए तब उतने समय के लिए सांसें रोके जितने समय में आपने सांस ली थी। धीरे धीरे सांसों को छोड़ें। सांस छोड़ने में भी उतना समय लगायें जितना आपने सांस लेने में लिया था। पूरी तरह से सांस छोड़ने के बाद दायीं नाक से अंगूठा हटायें और दोनों हाथों को अपने जांघ पर वापस रख लें। 4. अपने बाएं हाथ को अपने चेहरे की तरफ लायें और अपने बाएं हाथ के अंगूठे से बायीं नाक को बंद करें। 5. अपने दायीं नाक से धीरे-धीरे एक गहरी सांस लें। जब फेफड़े हवा से भर जाए तो अपनी सांस रोके। फिर धीरे-धीरे सांस छोड़े। सांस छोड़ने में भी उतना समय लगायें जितना आपने सांस लेने में लिया था। नाड़ी शोधन प्राणायाम के फायदेः 1. नाड़ी शोधन प्राणायाम करने से खून साफ होता है तथा श्वशन तंत्र मजबूत बनता है। 2. इस प्राणायाम को करने से खून में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। 3. इस प्राणायाम को करने से फेफड़े और शरीर के कई अन्य अंग मजबूत होते हैं। 4. नाड़ी शोधन प्राणायाम करने से सिरदर्द, माइग्रेन, बेचैनी और तनाव की समस्या दूर होती है। 5. नियमित रूप से नाड़ीशोधन प्राणायाम करने से एकाग्रता बढ़ती है। (और Lifestyle News पढ़ें)
Benefits of Nadi Shodhan pranayama: नाड़ी शोधन प्राणायाम के मुख्य प्रकारों में से एक है। नाड़ी शोधन प्राणायाम शरीर की अशुद्धियों को दूर करने के लिए किया जाने वाला प्राणयाम है। अन्य प्राणायाम की तरह इस प्राणायाम में भी सांस लिया और छोड़ा जाता है। नाड़ी शोधन प्राणयाम से खून तो साफ़ होता ही है साथ ही खून में ऑक्सीजन का स्तर भी बढ़ जाता है। इस प्राणायाम के और भी कई स्वास्थ्य लाभ हैं और इस वजह से आपको इसका अभ्यास रोजाना कम से कम तीस मिनट करना चाहिए। आइए जानते हैं नाड़ी शोधन प्राणयाम कैसे किया जाता है तथा इससे शरीर को क्या-क्या लाभ होते हैं। नाड़ी शोधन प्राणयाम करने का तरीकाः एक. सबसे पहले पालथी मार कर बैठें। दायें पैर को बाएं पैर के ऊपर और बाएं पैर को दायें पैर के ऊपर रखें। अपने दोनों हाथ अपने जांघों पर रखें और रिलैक्स हो जाएं और अपनी आंखें बंद करें। यह प्राणायाम करने के लिए किसी साफ सुथरे कमरे का चुनाव करें। दो. अपने दायें हाथ को अपने चेहरे की तरफ लायें और अपने दायें हाथ के अंगूठे से दायीं नाक को बंद करें। तीन. दायीं नाक बंद करने के बाद अपनी बायीं नाक से धीरे-धीरे एक गहरी सांस लें। जब फेफड़े हवा से भर जाए तब उतने समय के लिए सांसें रोके जितने समय में आपने सांस ली थी। धीरे धीरे सांसों को छोड़ें। सांस छोड़ने में भी उतना समय लगायें जितना आपने सांस लेने में लिया था। पूरी तरह से सांस छोड़ने के बाद दायीं नाक से अंगूठा हटायें और दोनों हाथों को अपने जांघ पर वापस रख लें। चार. अपने बाएं हाथ को अपने चेहरे की तरफ लायें और अपने बाएं हाथ के अंगूठे से बायीं नाक को बंद करें। पाँच. अपने दायीं नाक से धीरे-धीरे एक गहरी सांस लें। जब फेफड़े हवा से भर जाए तो अपनी सांस रोके। फिर धीरे-धीरे सांस छोड़े। सांस छोड़ने में भी उतना समय लगायें जितना आपने सांस लेने में लिया था। नाड़ी शोधन प्राणायाम के फायदेः एक. नाड़ी शोधन प्राणायाम करने से खून साफ होता है तथा श्वशन तंत्र मजबूत बनता है। दो. इस प्राणायाम को करने से खून में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। तीन. इस प्राणायाम को करने से फेफड़े और शरीर के कई अन्य अंग मजबूत होते हैं। चार. नाड़ी शोधन प्राणायाम करने से सिरदर्द, माइग्रेन, बेचैनी और तनाव की समस्या दूर होती है। पाँच. नियमित रूप से नाड़ीशोधन प्राणायाम करने से एकाग्रता बढ़ती है।
-ज्योति वेंकटेशवॉशरूम में लॉक अप के डिजाइन के अनुसार ही पर्दे होते हैं। कंटेस्टेंट्स को करना होगा पर्देघर के एक हिस्से में भारतीय शौचालय हैं, कुछ ऐसा जो मशहूर हस्तियों के लिए अभ्यस्त नहीं है। सामान्य बाथरूम भी हैं, लेकिन प्रतियोगियों को उनका उपयोग करने का विशेषाधिकार अर्जित करना होगा सोने के क्षेत्र को दो खंडों में बांटा गया है - एक आम सोने का क्षेत्र है जिसके चारों ओर बार हैं, और दूसरा व्यक्तिगत सोने का क्षेत्र हैस्विमिंग पूल को एक कालकोठरी क्षेत्र में बदल दिया गया है जहाँ प्रतियोगियों को उनकी सजा मिलेगीकिचन भी बंद है और उसके चारों ओर बार हैं जो कंगना रनौत के कहने पर ही खुलेंगेचुनौती थी कुछ भी जो पहले किया गया था उसे भूल जाना और कुछ बिल्कुल नया बनाना। यह एक चुनौती थी कि हर कोई पहले की तरह की किसी भी चीज़ को भूल जाए और इस नए डिज़ाइन से जुड़ जाएलॉक उप्प में अलग-अलग कमरे और कॉमन स्लीपिंग रूम कैसे बनाया जाए, इस पर बहुत बहस हुई ओमंग कुमार ने विशेष रूप से सोने के क्षेत्र के चारों ओर गलियारों को एक वास्तविक जेल का रूप देने के लिए डिजाइन कियाओमंग कुमार ने जेल की कोठरी बनाते समय फिल्म सरबजीत के लिए शोध किया था और वह लॉक अप के सेट को डिजाइन करने के लिए उसी पर निर्भर थे।लॉक अप में बहुत सारे छिपे हुए दरवाजे हैं जो खेल के आगे बढ़ने पर खुलेंगे और प्रतियोगी धीरे-धीरे इन दरवाजों के पीछे छिपे रहस्यों को खोलेंगे।
-ज्योति वेंकटेशवॉशरूम में लॉक अप के डिजाइन के अनुसार ही पर्दे होते हैं। कंटेस्टेंट्स को करना होगा पर्देघर के एक हिस्से में भारतीय शौचालय हैं, कुछ ऐसा जो मशहूर हस्तियों के लिए अभ्यस्त नहीं है। सामान्य बाथरूम भी हैं, लेकिन प्रतियोगियों को उनका उपयोग करने का विशेषाधिकार अर्जित करना होगा सोने के क्षेत्र को दो खंडों में बांटा गया है - एक आम सोने का क्षेत्र है जिसके चारों ओर बार हैं, और दूसरा व्यक्तिगत सोने का क्षेत्र हैस्विमिंग पूल को एक कालकोठरी क्षेत्र में बदल दिया गया है जहाँ प्रतियोगियों को उनकी सजा मिलेगीकिचन भी बंद है और उसके चारों ओर बार हैं जो कंगना रनौत के कहने पर ही खुलेंगेचुनौती थी कुछ भी जो पहले किया गया था उसे भूल जाना और कुछ बिल्कुल नया बनाना। यह एक चुनौती थी कि हर कोई पहले की तरह की किसी भी चीज़ को भूल जाए और इस नए डिज़ाइन से जुड़ जाएलॉक उप्प में अलग-अलग कमरे और कॉमन स्लीपिंग रूम कैसे बनाया जाए, इस पर बहुत बहस हुई ओमंग कुमार ने विशेष रूप से सोने के क्षेत्र के चारों ओर गलियारों को एक वास्तविक जेल का रूप देने के लिए डिजाइन कियाओमंग कुमार ने जेल की कोठरी बनाते समय फिल्म सरबजीत के लिए शोध किया था और वह लॉक अप के सेट को डिजाइन करने के लिए उसी पर निर्भर थे।लॉक अप में बहुत सारे छिपे हुए दरवाजे हैं जो खेल के आगे बढ़ने पर खुलेंगे और प्रतियोगी धीरे-धीरे इन दरवाजों के पीछे छिपे रहस्यों को खोलेंगे।
अक्सर बाहर लैपटॉप लेकर जाते समय बैटरी खत्म होने की परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन अब मोबाइल के साथ ही लैपटॉप के लिए भी पावर बैंक का इस्तेमाल कर सकेंगे। क्योंकि EVM ने भारत में 20000mAh बैटरी वाला लैपटॉप पावर बैंक लॉन्च किया है। EVM ENLAPPOWER लैपटॉप पावर बैंक को भारत में 9,999 रुपये की कीमत में लॉन्च किया गया है। इसमें 20000mAh की बैटरी दी गई है और यह यूएसबी सी पोर्ट के साथ आता है। यानि यूजर्स मॉडर्न यूएसबी सी पोर्ट वाले लैपटॉप को इसकी मदद से आसानी से चार्ज कर सकते हैं। लेकिन बता दें कि भारत में यूएसबी सी पोर्ट वाले लैपटॉप की संख्या थोड़ी कम है। यह EVM ENLAPPOWER लैपटॉप पावर बैंक एक्सक्लूसिवली विजय सेल्स पर खरीददारी के लिए उपलब्ध होगा। EVM ENLAPPOWER लैपटॉप पावर बैंक की मदद से यूजर्स जिन लैपटॉप को चार्ज को चार्ज कर सकते हैं, उसमें Macbook, Macbook Air, Macbook Pro, MS Surface Pro, Dell XPS 13, HP Spectre x360, Lenovo IdeaPad, LG Gram और Asus Zenbook 13 शामिल हैं। यह पावर बैंक 3 साल की वारंटी के साथ आता है। यह डिवाइस अल्ट्रा प्रीमियम मेटल बॉडी और क्लासी लुक के साथ आता है। अन्य फीचर्स की बात करें तो इसके साथ 4 फीट लंबी टाइप सी और सिंक केबल मिलेगी। सबसे खास बात है कि EVM ENLAPPOWER पावर बैंक एयर ट्रैवल के दौरान बिल्कुल सुरक्षित है।
अक्सर बाहर लैपटॉप लेकर जाते समय बैटरी खत्म होने की परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन अब मोबाइल के साथ ही लैपटॉप के लिए भी पावर बैंक का इस्तेमाल कर सकेंगे। क्योंकि EVM ने भारत में बीस हज़ारmAh बैटरी वाला लैपटॉप पावर बैंक लॉन्च किया है। EVM ENLAPPOWER लैपटॉप पावर बैंक को भारत में नौ,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये की कीमत में लॉन्च किया गया है। इसमें बीस हज़ारmAh की बैटरी दी गई है और यह यूएसबी सी पोर्ट के साथ आता है। यानि यूजर्स मॉडर्न यूएसबी सी पोर्ट वाले लैपटॉप को इसकी मदद से आसानी से चार्ज कर सकते हैं। लेकिन बता दें कि भारत में यूएसबी सी पोर्ट वाले लैपटॉप की संख्या थोड़ी कम है। यह EVM ENLAPPOWER लैपटॉप पावर बैंक एक्सक्लूसिवली विजय सेल्स पर खरीददारी के लिए उपलब्ध होगा। EVM ENLAPPOWER लैपटॉप पावर बैंक की मदद से यूजर्स जिन लैपटॉप को चार्ज को चार्ज कर सकते हैं, उसमें Macbook, Macbook Air, Macbook Pro, MS Surface Pro, Dell XPS तेरह, HP Spectre xतीन सौ साठ, Lenovo IdeaPad, LG Gram और Asus Zenbook तेरह शामिल हैं। यह पावर बैंक तीन साल की वारंटी के साथ आता है। यह डिवाइस अल्ट्रा प्रीमियम मेटल बॉडी और क्लासी लुक के साथ आता है। अन्य फीचर्स की बात करें तो इसके साथ चार फीट लंबी टाइप सी और सिंक केबल मिलेगी। सबसे खास बात है कि EVM ENLAPPOWER पावर बैंक एयर ट्रैवल के दौरान बिल्कुल सुरक्षित है।
रविवार के फियानल में दिल तोड़ने वाली हार के बाद। ट्विटर और फेसबुक ने कहा कि इंग्लैंड फुटबॉल टीम के सदस्यों पर नस्लीय रूप से अपमानजनक टिप्पणी की गई थी। अमेरिकी सोशल मीडिया दिग्गजों ने कहा कि वे नस्लवादी और घृणित सामग्री को हटा रहे हैं, जिसकी ब्रिटिश राजनीतिक नेताओं ने निंदा की थी। रविवार को इंग्लैंड के दंड से चूकने वाले तीन खिलाड़ियों मार्कस रैशफोर्ड, जादोन सांचो और बुकायो साका पर निर्देशित ट्विटर और फेसबुक के स्वामित्व वाले इंस्टाग्राम पर अपमानजनक संदेशों की एक धारा के बाद कार्रवाई हुई। सैन फ्रांसिस्को स्थित लघु संदेश सेवा के एक प्रवक्ता ने कहा, "इंग्लैंड के खिलाड़ियों पर कल रात घृणित नस्लवादी दुर्व्यवहार का ट्विटर पर कोई स्थान नहीं है। " "पिछले 24 घंटों में, मशीन लर्निंग आधारित ऑटोमेशन और मानव समीक्षा के संयोजन के माध्यम से, हमने 1,000 से अधिक ट्वीट्स को तेजी से हटा दिया है और हमारे नियमों का उल्लंघन करने के लिए कई खातों को स्थायी रूप से निलंबित कर दिया है - जिनमें से अधिकांश को हमने प्रौद्योगिकी का उपयोग करके खुद को सक्रिय रूप से पाया। " फेसबुक ने पहले एक बयान में कहा कि उसने "कल रात इंग्लैंड के फुटबॉलरों पर दुर्व्यवहार करने वाली टिप्पणियों और खातों को तुरंत हटा दिया था और हम उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना जारी रखेंगे जो हमारे नियम तोड़ते हैं। " "कोई भी चीज इस चुनौती को रातोंरात ठीक नहीं करेगी, लेकिन हम अपने समुदाय को दुर्व्यवहार से सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ब्रिटिश प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन और अन्य नेताओं ने ऑनलाइन दुरुपयोग पर निराशा व्यक्त की। संस्कृति सचिव ओलिवर डाउडेन ने ऑनलाइन सेवाओं की चेतावनी देते हुए ट्वीट किया, "मैं अपने वीर खिलाड़ियों के नस्लवादी दुर्व्यवहार पर गुस्से को साझा करता हूं"। उन्होंने लिखा- सोशल मीडिया कंपनियों को इसे संबोधित करने के लिए अपने खेल को बढ़ाने की जरूरत है और अगर वे असफल होते हैं, तो हमारा नया ऑनलाइन सुरक्षा विधेयक वैश्विक राजस्व के 10 प्रतिशत तक के जुर्माने के साथ उन्हें जिम्मेदार ठहराएगा। "
रविवार के फियानल में दिल तोड़ने वाली हार के बाद। ट्विटर और फेसबुक ने कहा कि इंग्लैंड फुटबॉल टीम के सदस्यों पर नस्लीय रूप से अपमानजनक टिप्पणी की गई थी। अमेरिकी सोशल मीडिया दिग्गजों ने कहा कि वे नस्लवादी और घृणित सामग्री को हटा रहे हैं, जिसकी ब्रिटिश राजनीतिक नेताओं ने निंदा की थी। रविवार को इंग्लैंड के दंड से चूकने वाले तीन खिलाड़ियों मार्कस रैशफोर्ड, जादोन सांचो और बुकायो साका पर निर्देशित ट्विटर और फेसबुक के स्वामित्व वाले इंस्टाग्राम पर अपमानजनक संदेशों की एक धारा के बाद कार्रवाई हुई। सैन फ्रांसिस्को स्थित लघु संदेश सेवा के एक प्रवक्ता ने कहा, "इंग्लैंड के खिलाड़ियों पर कल रात घृणित नस्लवादी दुर्व्यवहार का ट्विटर पर कोई स्थान नहीं है। " "पिछले चौबीस घंटाटों में, मशीन लर्निंग आधारित ऑटोमेशन और मानव समीक्षा के संयोजन के माध्यम से, हमने एक,शून्य से अधिक ट्वीट्स को तेजी से हटा दिया है और हमारे नियमों का उल्लंघन करने के लिए कई खातों को स्थायी रूप से निलंबित कर दिया है - जिनमें से अधिकांश को हमने प्रौद्योगिकी का उपयोग करके खुद को सक्रिय रूप से पाया। " फेसबुक ने पहले एक बयान में कहा कि उसने "कल रात इंग्लैंड के फुटबॉलरों पर दुर्व्यवहार करने वाली टिप्पणियों और खातों को तुरंत हटा दिया था और हम उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना जारी रखेंगे जो हमारे नियम तोड़ते हैं। " "कोई भी चीज इस चुनौती को रातोंरात ठीक नहीं करेगी, लेकिन हम अपने समुदाय को दुर्व्यवहार से सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ब्रिटिश प्रधान मंत्री बोरिस जॉनसन और अन्य नेताओं ने ऑनलाइन दुरुपयोग पर निराशा व्यक्त की। संस्कृति सचिव ओलिवर डाउडेन ने ऑनलाइन सेवाओं की चेतावनी देते हुए ट्वीट किया, "मैं अपने वीर खिलाड़ियों के नस्लवादी दुर्व्यवहार पर गुस्से को साझा करता हूं"। उन्होंने लिखा- सोशल मीडिया कंपनियों को इसे संबोधित करने के लिए अपने खेल को बढ़ाने की जरूरत है और अगर वे असफल होते हैं, तो हमारा नया ऑनलाइन सुरक्षा विधेयक वैश्विक राजस्व के दस प्रतिशत तक के जुर्माने के साथ उन्हें जिम्मेदार ठहराएगा। "
वाशिंगटन, 31 दिसंबर (एपी) अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने बृहस्पतिवार को बताया कोलंबिया जिले में नेशनल गार्ड के आपात इस्तेमाल की मंजूरी प्रक्रिया को सुचारू किया जा रहा है जिसमें रक्षा मंत्री को अधिक अधिकार प्राप्त होंगे। यह फैसला अमेरिकी कैपिटॉल (संसद परिसर) में इस साल छह जनवरी को हुए दंगे के बाद हुए अध्ययन के आधार पर किया जा रहा है। पेंटागन के प्रेस सचिव जॉन किर्बी ने एक लिखित बयान में बताया कि इस बदलाव में रक्षा मंत्री को अधिकार दिया गया है कि वह जरूरत के अनुसार, डीसी नेशनल गार्ड के इस्तेमाल के अनुरोध पर फैसला ले सकें या ऐसी स्थिति में 48 घंटे के भीतर नियुक्ति को मंजूरी दे। इससे पहले इस तरह की अनुमति देने का अधिकार सेना के शीर्ष असैन्य अधिकारी सेना सचिव को था। बयान के मुताबिक यह बदलाव प्रशासन द्वारा कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए आपात स्थिति में किए गए अनुरोध पर बेहतर कार्रवाई के वास्ते पेंटागन को तैयार रखना है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हार के बाद उनके समर्थकों ने संसद भवन परिसर के सामने प्रदर्शन किया था और उस दौरान दंगे की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। पेंटागन को गार्ड की सहायता के लिए अनुरोध मिलने के बावजूद कथित धीमी प्रतिक्रिया के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
वाशिंगटन, इकतीस दिसंबर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने बृहस्पतिवार को बताया कोलंबिया जिले में नेशनल गार्ड के आपात इस्तेमाल की मंजूरी प्रक्रिया को सुचारू किया जा रहा है जिसमें रक्षा मंत्री को अधिक अधिकार प्राप्त होंगे। यह फैसला अमेरिकी कैपिटॉल में इस साल छह जनवरी को हुए दंगे के बाद हुए अध्ययन के आधार पर किया जा रहा है। पेंटागन के प्रेस सचिव जॉन किर्बी ने एक लिखित बयान में बताया कि इस बदलाव में रक्षा मंत्री को अधिकार दिया गया है कि वह जरूरत के अनुसार, डीसी नेशनल गार्ड के इस्तेमाल के अनुरोध पर फैसला ले सकें या ऐसी स्थिति में अड़तालीस घंटाटे के भीतर नियुक्ति को मंजूरी दे। इससे पहले इस तरह की अनुमति देने का अधिकार सेना के शीर्ष असैन्य अधिकारी सेना सचिव को था। बयान के मुताबिक यह बदलाव प्रशासन द्वारा कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए आपात स्थिति में किए गए अनुरोध पर बेहतर कार्रवाई के वास्ते पेंटागन को तैयार रखना है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हार के बाद उनके समर्थकों ने संसद भवन परिसर के सामने प्रदर्शन किया था और उस दौरान दंगे की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। पेंटागन को गार्ड की सहायता के लिए अनुरोध मिलने के बावजूद कथित धीमी प्रतिक्रिया के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
. . . घटनाओं की गतिशीलता जो तेजी से अब यूक्रेन में और यूक्रेन के आसपास विकसित हो रही है, केवल एक ही बात बोलती हैः कोई बहुत जल्दी में है। वह इतनी जल्दी में है कि वह विक्टर यानुकोविच के शासनकाल के अंतिम दिनों में हस्ताक्षर किए गए "रोड मैप" से भी संतुष्ट नहीं था, वास्तव में, तत्कालीन सत्ता से तत्कालीन विपक्ष को सत्ता का हस्तांतरण। लेकिन इस तरह की स्थिति में, "विजेताओं" को अधिक या कम जीवंत रूप से प्राप्त होता है, यद्यपि संभावित व्यवहार्य अर्थव्यवस्था के साथ बहुत "खिलने" क्षेत्र नहीं है। सत्ता में लाए गए मौजूदा "कुलीन" के हिस्से के समान पूर्ण नियंत्रणीयता के साथ। सबसे सरल रोजमर्रा का तर्क बताता हैः इसका मतलब है - रुचि क्षेत्र में नहीं थी। और लालच में नहीं और सीधे "संभ्रांत" नियंत्रित। इसके अलावा, इसका मतलब है कि यूक्रेन की अर्थव्यवस्था के प्रबंधन का कार्य (और, निश्चित रूप से, यूक्रेन का ही) शुरू में एक विशेष रूप से सहायक कार्य माना जाता था। यहाँ, सब के बाद, बल्कि एक सरल तर्क। एक साधारण गैंगस्टर के "दो-तरफा" के स्तर परः जब Yanukovych ने अर्थव्यवस्था और सामाजिक विस्फोट के प्रत्यक्ष रूप से अनुमानित पतन के कारण "यूरोसाइज़ेशन" पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, तो उन्होंने Yanukovych को मैदान के साथ धकेल दिया। लेकिन जब Yanukovych राज़ी करने के लिए सहमत हुआ, तो इसे "अपर्याप्त" भी माना गया। इसका मतलब यह है कि सब कुछ सरल हैः ग्राहकों को वास्तव में इस बात में दिलचस्पी थी कि प्रोफेसर ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, अर्थात् पतन और सामाजिक विस्फोट, अधिमानतः गृह युद्ध के साथ, जो अभी हमारे टकटकी में हो रहा है, अपने सबसे गर्म रूप में जितना संभव हो। बस इतना ही। यहाँ एक और दिलचस्प हैः इन "बहुत" ग्राहकों के साथ नरक क्यों, भगवान ने मुझे माफ कर दिया, "पेरोस्ट्रोका और त्वरण", और यहां तक कि इतने कम समय में? यूरोप में शेल गैस की आपूर्ति के बारे में संस्करण, मुझे लगता है, दूर करने की आवश्यकता है। और यहां तक कि न केवल "महान शेल क्रांति" के स्पष्ट रूप से स्पष्ट परिणामों के कारणः यहां तक कि अगर हम एक दूसरे के लिए कल्पना करते हैं कि सब कुछ संयुक्त राज्य अमेरिका में शेल के साथ एकदम सही है, तो वे अभी भी एक्सएमयूएमएक्स वर्ष तक यूरोपीय बाजारों में विशुद्ध रूप से तकनीकी आपूर्ति स्थापित करने में सक्षम नहीं हैं। तो, इस तरह, इस स्थिति में बेरहमी से भीड़ पूरी तरह से अनावश्यक है। बेशक, "यूरो-अटलांटिक आर्थिक क्षेत्र" बनाने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका की आवश्यकता का संस्करण बहुत अधिक दिलचस्प लगता हैः इसमें कोई संदेह नहीं है कि इसके लिए अमेरिकी अधिकारियों द्वारा आवाज उठाए जाने के कारण भी हैं। लेकिन यह प्रोजेक्ट बहुत "लंबा" है, "रणनीतिक" और कशीदाकारी, बड़े और स्पष्ट रूप से, सफेद धागे के साथः कोई फर्क नहीं पड़ता कि कमजोर-इच्छाशक्ति और राजनीतिक रूप से यूरोपीय अभिजात वर्ग को नियंत्रित करने के लिए, उन्हें खुद को मारने के लिए राजी करने के लिए, आपको अभी भी कुछ चाहिए एक निश्चित समय है, और एक "आम अर्थव्यवस्था" बनाने की प्रक्रिया एक साथ नहीं हैः यह यूरोपीय संघ के अनुभव और यूरेशियन आर्थिक अंतरिक्ष के अनुभव से स्पष्ट है। यह काम लंबा और श्रमसाध्य है, बड़ी संख्या में "नुकसान" के साथ, यहां तक कि जबरन सामग्री और अस्थायी संसाधनों दोनों की आवश्यकता होती है। "यूक्रेनी संकट", निश्चित रूप से, इसमें योगदान कर सकता है, लेकिन यह निर्णायक होने की संभावना नहीं है, इसलिए यहां इस तरह की ठोस जल्दबाजी, जाहिर है, बेकार है। तो फिर सौदा क्या है! . . . जवाब, वास्तव में, सतह पर है। लीबिया, सीरिया, इराक, अफगानिस्तान। यहां तक कि एक बार "संबद्ध" मिस्र में, जब सेना ने, एक सैन्य तख्तापलट के माध्यम से, अपने राज्य के पतन को रोक दिया, वाशिंगटन बहुत दुखी था। तो, हो सकता है, अगर बार-बार "लोकतंत्र का प्रचार" "पोस्ट-एपोकैलिक कथा" से आदिम अराजकता की ओर जाता है, तो यह "बहुत पागल हाथों" के कारण नहीं हो सकता है, लेकिन क्योंकि ऐसा करने का इरादा था! और यह ठीक तरह से आदिम अराजकता थी जो कि एक बार बहुत गरीब, लेकिन व्यवहार्य क्षेत्रों में कार्रवाई का मूल लक्ष्य था! यहां सब कुछ सरल हैः हमने पहले ही लिखा था कि अमेरिकी राजनीतिक विज्ञान में "शक्ति" की बहुत महत्वपूर्ण अवधारणा है (यह अभी भी काफी नहीं है कि "शक्ति" या "ऊर्जा" रूसी में क्या है, यहां सबसे सटीक सटीक अनुवाद है " शक्ति ")" पूर्ण "नहीं है। "पावर" एक "सापेक्ष" चीज हैः आप एक कमजोर और विकराल व्यक्ति भी हो सकते हैं, लेकिन अगर आप का विरोध करने वाले भी कमजोर हैं, तो आप अभी भी सुपरमैन हैं। और अगर इस विकट घुटन का पूरी दुनिया पर लगभग पूरा पैसा बकाया है, जो, यह सब अच्छी तरह से समझा जाता है, मौलिक रूप से नहीं कर सकता है और वापस नहीं देना चाहता है! यहाँ। " यह बात है। तब यह आवश्यक है, कड़ाई से आभासी इंटरनेट सेनानियों के तर्क के अनुसार, हर किसी को "दस्त की निर्मम किरणों" को भेजने के लिए। यह उन सभी के लिए जितना बुरा है, उतनी ही कम संभावना है कि बीस्पेक्टेड सुपरमैन भी प्रश्नों को हल करने में बहुत कठिन होगा। और सामान्य तौर पर, शायद वह बचाने के लिए भी आएगाः एक छोटे से हिस्से के लिए और निश्चित रूप से, पुराने ऋणों को रद्द करना, लेकिन यह पहले से ही डिफ़ॉल्ट रूप से कहा जाता है। और आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि यह यूरोप में है कि अमेरिका को एशिया या मध्य पूर्व की तुलना में अलग व्यवहार करना चाहिए! समस्याएँ, आप देखते हैं, यहां तक कि अनुकूल शेरिफ भारतीय भी चिंतित नहीं हैं, खासकर अगर इन "भारतीयों" के पास अभी भी ऐसा कुछ है जो खुद को चाहिए। यहाँ एक और है। "एफ * सीके ईयू" (सी), मुझे खेद है, और शायद यह सब कहता है। बस, अनुसूची के दृष्टिकोण से, यह भगवान-चुने हुए "अनन्य राष्ट्र" को बचाने की आपकी बारी है।
. . . घटनाओं की गतिशीलता जो तेजी से अब यूक्रेन में और यूक्रेन के आसपास विकसित हो रही है, केवल एक ही बात बोलती हैः कोई बहुत जल्दी में है। वह इतनी जल्दी में है कि वह विक्टर यानुकोविच के शासनकाल के अंतिम दिनों में हस्ताक्षर किए गए "रोड मैप" से भी संतुष्ट नहीं था, वास्तव में, तत्कालीन सत्ता से तत्कालीन विपक्ष को सत्ता का हस्तांतरण। लेकिन इस तरह की स्थिति में, "विजेताओं" को अधिक या कम जीवंत रूप से प्राप्त होता है, यद्यपि संभावित व्यवहार्य अर्थव्यवस्था के साथ बहुत "खिलने" क्षेत्र नहीं है। सत्ता में लाए गए मौजूदा "कुलीन" के हिस्से के समान पूर्ण नियंत्रणीयता के साथ। सबसे सरल रोजमर्रा का तर्क बताता हैः इसका मतलब है - रुचि क्षेत्र में नहीं थी। और लालच में नहीं और सीधे "संभ्रांत" नियंत्रित। इसके अलावा, इसका मतलब है कि यूक्रेन की अर्थव्यवस्था के प्रबंधन का कार्य शुरू में एक विशेष रूप से सहायक कार्य माना जाता था। यहाँ, सब के बाद, बल्कि एक सरल तर्क। एक साधारण गैंगस्टर के "दो-तरफा" के स्तर परः जब Yanukovych ने अर्थव्यवस्था और सामाजिक विस्फोट के प्रत्यक्ष रूप से अनुमानित पतन के कारण "यूरोसाइज़ेशन" पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, तो उन्होंने Yanukovych को मैदान के साथ धकेल दिया। लेकिन जब Yanukovych राज़ी करने के लिए सहमत हुआ, तो इसे "अपर्याप्त" भी माना गया। इसका मतलब यह है कि सब कुछ सरल हैः ग्राहकों को वास्तव में इस बात में दिलचस्पी थी कि प्रोफेसर ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, अर्थात् पतन और सामाजिक विस्फोट, अधिमानतः गृह युद्ध के साथ, जो अभी हमारे टकटकी में हो रहा है, अपने सबसे गर्म रूप में जितना संभव हो। बस इतना ही। यहाँ एक और दिलचस्प हैः इन "बहुत" ग्राहकों के साथ नरक क्यों, भगवान ने मुझे माफ कर दिया, "पेरोस्ट्रोका और त्वरण", और यहां तक कि इतने कम समय में? यूरोप में शेल गैस की आपूर्ति के बारे में संस्करण, मुझे लगता है, दूर करने की आवश्यकता है। और यहां तक कि न केवल "महान शेल क्रांति" के स्पष्ट रूप से स्पष्ट परिणामों के कारणः यहां तक कि अगर हम एक दूसरे के लिए कल्पना करते हैं कि सब कुछ संयुक्त राज्य अमेरिका में शेल के साथ एकदम सही है, तो वे अभी भी एक्सएमयूएमएक्स वर्ष तक यूरोपीय बाजारों में विशुद्ध रूप से तकनीकी आपूर्ति स्थापित करने में सक्षम नहीं हैं। तो, इस तरह, इस स्थिति में बेरहमी से भीड़ पूरी तरह से अनावश्यक है। बेशक, "यूरो-अटलांटिक आर्थिक क्षेत्र" बनाने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका की आवश्यकता का संस्करण बहुत अधिक दिलचस्प लगता हैः इसमें कोई संदेह नहीं है कि इसके लिए अमेरिकी अधिकारियों द्वारा आवाज उठाए जाने के कारण भी हैं। लेकिन यह प्रोजेक्ट बहुत "लंबा" है, "रणनीतिक" और कशीदाकारी, बड़े और स्पष्ट रूप से, सफेद धागे के साथः कोई फर्क नहीं पड़ता कि कमजोर-इच्छाशक्ति और राजनीतिक रूप से यूरोपीय अभिजात वर्ग को नियंत्रित करने के लिए, उन्हें खुद को मारने के लिए राजी करने के लिए, आपको अभी भी कुछ चाहिए एक निश्चित समय है, और एक "आम अर्थव्यवस्था" बनाने की प्रक्रिया एक साथ नहीं हैः यह यूरोपीय संघ के अनुभव और यूरेशियन आर्थिक अंतरिक्ष के अनुभव से स्पष्ट है। यह काम लंबा और श्रमसाध्य है, बड़ी संख्या में "नुकसान" के साथ, यहां तक कि जबरन सामग्री और अस्थायी संसाधनों दोनों की आवश्यकता होती है। "यूक्रेनी संकट", निश्चित रूप से, इसमें योगदान कर सकता है, लेकिन यह निर्णायक होने की संभावना नहीं है, इसलिए यहां इस तरह की ठोस जल्दबाजी, जाहिर है, बेकार है। तो फिर सौदा क्या है! . . . जवाब, वास्तव में, सतह पर है। लीबिया, सीरिया, इराक, अफगानिस्तान। यहां तक कि एक बार "संबद्ध" मिस्र में, जब सेना ने, एक सैन्य तख्तापलट के माध्यम से, अपने राज्य के पतन को रोक दिया, वाशिंगटन बहुत दुखी था। तो, हो सकता है, अगर बार-बार "लोकतंत्र का प्रचार" "पोस्ट-एपोकैलिक कथा" से आदिम अराजकता की ओर जाता है, तो यह "बहुत पागल हाथों" के कारण नहीं हो सकता है, लेकिन क्योंकि ऐसा करने का इरादा था! और यह ठीक तरह से आदिम अराजकता थी जो कि एक बार बहुत गरीब, लेकिन व्यवहार्य क्षेत्रों में कार्रवाई का मूल लक्ष्य था! यहां सब कुछ सरल हैः हमने पहले ही लिखा था कि अमेरिकी राजनीतिक विज्ञान में "शक्ति" की बहुत महत्वपूर्ण अवधारणा है " पूर्ण "नहीं है। "पावर" एक "सापेक्ष" चीज हैः आप एक कमजोर और विकराल व्यक्ति भी हो सकते हैं, लेकिन अगर आप का विरोध करने वाले भी कमजोर हैं, तो आप अभी भी सुपरमैन हैं। और अगर इस विकट घुटन का पूरी दुनिया पर लगभग पूरा पैसा बकाया है, जो, यह सब अच्छी तरह से समझा जाता है, मौलिक रूप से नहीं कर सकता है और वापस नहीं देना चाहता है! यहाँ। " यह बात है। तब यह आवश्यक है, कड़ाई से आभासी इंटरनेट सेनानियों के तर्क के अनुसार, हर किसी को "दस्त की निर्मम किरणों" को भेजने के लिए। यह उन सभी के लिए जितना बुरा है, उतनी ही कम संभावना है कि बीस्पेक्टेड सुपरमैन भी प्रश्नों को हल करने में बहुत कठिन होगा। और सामान्य तौर पर, शायद वह बचाने के लिए भी आएगाः एक छोटे से हिस्से के लिए और निश्चित रूप से, पुराने ऋणों को रद्द करना, लेकिन यह पहले से ही डिफ़ॉल्ट रूप से कहा जाता है। और आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि यह यूरोप में है कि अमेरिका को एशिया या मध्य पूर्व की तुलना में अलग व्यवहार करना चाहिए! समस्याएँ, आप देखते हैं, यहां तक कि अनुकूल शेरिफ भारतीय भी चिंतित नहीं हैं, खासकर अगर इन "भारतीयों" के पास अभी भी ऐसा कुछ है जो खुद को चाहिए। यहाँ एक और है। "एफ * सीके ईयू" , मुझे खेद है, और शायद यह सब कहता है। बस, अनुसूची के दृष्टिकोण से, यह भगवान-चुने हुए "अनन्य राष्ट्र" को बचाने की आपकी बारी है।
Faridabad/Alive News : क्राइम ब्रांच सेक्टर-30 की पुलिस टीम ने एक किलो से अधिक गांजा सहित एक आरोपी को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। आरोपी का नाम अजय है और यह फरीदाबाद में सेक्टर-56 का रहने वाला है। पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह ने मामले में जानकारी देते हुए बताया कि क्राइम ब्रांच की पुलिस टीम ने खेड़ी पुल थानाक्षेत्र में गश्त लगा रही थी। तभी गुप्त सूत्रों से सूचना मिली कि एक व्यक्ति गांजा लेकर बड़खल की तरफ से खेड़ी पुल की ओर आ रहा है। सूचना पाते ही पुलिस टीम ने सेक्टर-29 बाईपास के पुल के नजदीक नाकाबंदी कर आरोपी को 1. 350 किलोग्राम गांजा सहित गिरफ्तार किया है। आरोपी से पूछताछ के दौरान सामने आया कि पिता के बीमार होने के कारण आरोपी ने पैसे कमाने के लिए गांजा बेचने का काम शुरू कर दिया। वह जल्दी पैसे कमा कर अपने पिता का इलाज करवाना चाहता था। परंतु पुलिस ने उसे पहले ही गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ पूरी होने के पश्चात आरोपी को अदालत में पेश करके जेल भेज दिया गया है।
Faridabad/Alive News : क्राइम ब्रांच सेक्टर-तीस की पुलिस टीम ने एक किलो से अधिक गांजा सहित एक आरोपी को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। आरोपी का नाम अजय है और यह फरीदाबाद में सेक्टर-छप्पन का रहने वाला है। पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह ने मामले में जानकारी देते हुए बताया कि क्राइम ब्रांच की पुलिस टीम ने खेड़ी पुल थानाक्षेत्र में गश्त लगा रही थी। तभी गुप्त सूत्रों से सूचना मिली कि एक व्यक्ति गांजा लेकर बड़खल की तरफ से खेड़ी पुल की ओर आ रहा है। सूचना पाते ही पुलिस टीम ने सेक्टर-उनतीस बाईपास के पुल के नजदीक नाकाबंदी कर आरोपी को एक. तीन सौ पचास किलोग्रामग्राम गांजा सहित गिरफ्तार किया है। आरोपी से पूछताछ के दौरान सामने आया कि पिता के बीमार होने के कारण आरोपी ने पैसे कमाने के लिए गांजा बेचने का काम शुरू कर दिया। वह जल्दी पैसे कमा कर अपने पिता का इलाज करवाना चाहता था। परंतु पुलिस ने उसे पहले ही गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ पूरी होने के पश्चात आरोपी को अदालत में पेश करके जेल भेज दिया गया है।
१४. आचार जिसका पालन चारो मोर की मर्यादानो को ध्यान में रख कर किया जाए वही ऋचार है दूसरे शब्दों मे उत्तम जनो द्वारा आचरित कार्यों का आचरण करना ही चार है । प्राचार पाच प्रकार का होता है। जानाचार, दर्शनाचार, चारित्राचार, तप- प्राचार और वोर्याचार । लोक व्यवहार मे जैसे प्रत्येक क्षेत्र के कार्य विभाग में विशेष जानकारी की आवश्यकता रहती है वैसे ही धर्म क्षेत्र मे भी विशेष तात्त्विक जानकारी के बिना कोई भी साधक मागे नही बढ सकता । साधक अध्ययन के द्वारा जो श्रुतज्ञान की अभिवृद्धि करता है वही जानाचार है, अथवा नए-नए ज्ञान की प्राप्ति और प्राप्त ज्ञान की रक्षा के लिये सद् प्रयत्न को ही ज्ञानाचार कहा गया है । सम्यग्दर्शन हठवाद और रूढिवाद का विरोधी तत्त्व है । सत्य और असत्य की परख में निश्चय लाने वाला और साधना के क्षेत्र मे दृढता लाने वाला यदि कोई तत्त्व है तो वह सम्यग्दर्शन ही है। इसकी उपस्थिति मे जीव सम्यक्प्रवृत्ति और सम्यग्निवृत्ति स्वत. ही करने लगता है । जीवादि नवतत्त्वो का ठीक-ठीक जान तथा तत्त्ववेत्ता की विनय-भक्ति एवं सेवा करना ये दोनो सम्यक् - प्रवृत्तिया है । इन्ही सत् प्रवृत्तियो को सम्यक् चारित्र कहा जाता है । सम्यग्दर्शन साधक को चारित्र भ्रष्टता और एकान्त मिथ्यावादियो की सगति से दूर रखता है । सम्यग्दृष्टि मोक्ष के उपायो मे, जिनवाणी मे एव प्रखण्ड सत्य मे नि शकित रहता है । मिथ्यात्व या मिथ्यावाद और सासारिक सुख-साधनो से वह निस्पृह रहता है । वह भयकर विपतियों से घिर जाने पर भी धर्म फल के प्रति सन्देह नहीं करता । मिथ्यादृष्टियो के चमत्कार को देख कर भी उसकी चेतना मूढता से दूर रहती है। वह तीर्थंकरो के द्वारा वताए हुए मार्ग पर चलने वालो को प्रगसा करता है । जो व्यक्ति सन्मार्ग से फिमल रहा हो उसे पुन धर्म मे स्थिर करता है, सहधर्मी लोगो पर वात्सल्य एत्र प्रोति रखता है, मार्गानुसारी जीवो को प्रभावना के द्वारा जिन-मार्ग पर लाता है । इस प्रकार के सभी कार्य दर्शनाचार कहलाते है । सर्व देश और सर्व काल मे विना किसी आगार या अपवाद के जिन व्रतो की आराधना की जाती है, उन्हे सार्वभौम महाव्रत कहते हैं। महाव्रती मे साधक को किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाती। जिन मे छूट दी जा सकती है, वे महाव्रत नहीं, बल्कि प्रणुव्रत कहलाते है । महाव्रत ग्रहण करते समय साधक कोई छूट नही रखता, वह तीन योग और तीन करण से हिसा, झूठ, चोरी, मैथुन और परिग्रह का त्याग कर देता है, इन से पूर्णतया निवृत्त होने की प्रतिज्ञा लेता है। इतना ही नही पृथ्वी काय, अपकाय, तेजस्काय, वायुकाय, वनस्पतिकाय और त्रसकाय की हिंसा का तीन योगो और तीन करणो से जीवन भर के लिये त्याग कर देता है । महाव्रत एक ही नहीं प्रत्युत पाच है । कोई भी महाव्रत न बडा है और न छोटा, सभी अपने-अपने महत्त्व और उपयोगिता की दृष्टि से श्रेष्ठ एव महत्त्वपूर्ण है। इनका अस्तित्व सभी चारित्रो मे पाया जाता है । रात्रि भोजन-विरमणव्रत नित्य तपस्या का परिचायक है । इस तप की साधना के लिये रात्रि में जीवन भर के लिये सभी तरह के खान-पान का परित्याग, इतना ही नही रात्रि को खाने-पीने की वस्तुप्रो के ग्रह का भो त्याग, यहां तक कि रात्रि को श्रीपधिसेवन का भी त्याग कर देना होता है। अन्य सभी महाव्रती और रात्रिभोजन-विरमगव्रत मे साधक किसी प्रकार की छूट या ग्रागार नही रखता और न आगार रखने वाले को महाव्रतो का पालक कहा जाता है । सार्वभौम महाव्रतो की रक्षा समिति और गुप्ति से की जाती है । ईर्या-समिति, भाषा-समिति, एपणा-समिति, श्रादान भण्डमात्र निक्षेपणा-समिति और उच्चार-पासवण-खेल-जल्ल-मल-परिठावणिया-समिति- इन पांचो समितियों का सम्यकृतथा पालन करने को ही समिति या सम्यक्प्रवृत्ति भी कह सकते है । जब साधक अशुभ सकल्पो से मन को, अशुभ एवं ग्रमगल वाणी से वचन को और अशुभ प्रवृत्ति से काया को नियन्त्रित करता है तब उसी को गुप्ति या सम्यग्निवृत्ति कहते हैं। चारित्राचार के सभी भेद समिति एव गुप्ति में निहित हो जाते हैं । जिस तप से विषय, कपाय और अन्तर्मल भस्म हो जाएं, अहिंसा भगवती की सफल एव पूर्ण श्राराधना हो जाए, जीवन सन्तोष से परिपूर्ण हो जाए शरीर पर ममत्व भी न रहने पाए, श्रध्ययन और ध्यान में मन सलीन हो जाए, पूज्य जनो के प्रति विनयभक्ति, प्रीति एव सेवा की भावना जाग जाए, राग, द्वेष, मोह बिल्कुल मन्द पड जाए, मान, एव प्रतिष्ठा की भूख शान्त हो जाए, खान-पान के पदार्थो मे ग्रासक्ति न रहे, परीषह और उपसर्ग उपस्थित होने पर उन्हें समभाव से सहन करने लगे, स्वर्गीय सुख साम्राज्य से विरक्त रहे, निदान न करे, नित्यप्रति कष्ट सहने का अभ्यास करता रहे, केशलोच करना, वस्त्र न रखना या ज़रूरत से कम रखना, सर्दी के दिनो मे शीत सहना, गर्मियों के दिनो मे धूप की आतापना लेना, वीरासनादि लगाना, पैदल विहार करना, पैरो मे जूता न डालना, सिर से नगे रहना, निर्दोष गोचरी करके करना, रसीले पदार्थो एव विगयो का त्याग करना, जितेन्द्रिय बनना, मन को जीतना, मौन रखना इत्यादि सव तप के ही अनेक रूप है । जैन आगमो मे तपस्या बारह प्रकार की बतलाई गई है । ज्ञानाचार के आठ रूप, दर्शनाचार के आठ रूप, चारित्राचार के आठ रूप और बारह प्रकार के तप - इन छत्तीस चारो का यथाशक्य यथासम्भव निरन्तर पालन करना और इनके पालनार्थ अपनी शक्ति का प्रयोग करना वीर्याचार है, प्रत पाच प्रकार के प्राचारो का जीवन के अन्तिम श्वास तक पालन करना ही प्राचार है । १५. विनयोपेत दिपूर्वक णीञ प्रापणे धातु मे विनय शब्द की निष्पत्ति होती है । विनय शब्द अनेकार्थक है। प्रणाम, भक्ति, प्रीति, शिष्टता, नम्रता, सयम, शिक्षा, अपनयन, लध्यविन्दु मे पहुचाने वाली साधना, इन सब का विनय शब्द से ग्रहण हो जाता है, परन्तु विनय का मुख्य अर्थ है आचार । विनय ही धर्म का मूल है, इसी सदर्भ मे एक शास्त्रीय वार्ता प्रस्तुत करना उचित रहेगा। एक वार सुदर्शन सेठ ने थावच्चा पुत्र से प्रश्न किया - 'भते । आपकी दृष्टि मे धर्म का मूल क्या है ? " उत्तर मे थावच्चा पुत्र ने कहा- 'सुदर्शन । मेरा यह विश्वास है कि धर्म का मूल विनय है विनय के दो भेद है, अगार - विनय और अनगार- विनय । श्रावक की ग्यारह उपासक प्रतिमा और बारह व्रतो का समावेश अगार विनय मे हो जाता है । अठारह पापो से निवृत्ति, पाच महाव्रत, छटा रात्रि भोजन-विरमण, दशविध श्रमणधर्म, दर्शाविध उत्तर-गुण-प्रत्याख्यान इस प्रकार के सभी साधन अनगार- विनय के ही हैं । गृहस्थ और साधु दोनो का प्रथम कर्तव्य विनय है। जबकि विनय को धम का मूल बताया गया है, तव जीवन की भूमि पर विना मूल के धर्मवृक्ष का विकास सम्भव ही है । विनय का स्वरूप और उसके भेदधर्म की ओर झुकाव का होना या अपने आप को धर्मसाधना एव गुरुजनो के लिये अर्पित कर देना विनय है, ग्रंथवा जिसके द्वारा सम्पूर्ण दुखो के कारणीभूत ठ कर्मों का उन्मूलन एव क्षय हो वह विनय है, अथवा अपने से बड़े तथा गुरुजनो का देश और काल के अनुसार सरकार सन्मान करना विनय है । इसके सात भेद हैं १ ज्ञान-विनय, २ दर्शन- विनय, ३ चारित्रविनय, ४ मनो-विनय ५ वचन-विनय, ६ काय-विनय और ७ लोकोपचार- विनय । १. ज्ञान-विनयज्ञान और ज्ञान के आधार भूत ज्ञानी पर श्रद्धा रखना, उनके प्रति भक्ति एव वहुमान दिखाना, उनके द्वारा वताए हुए तत्त्वो पर भली भान्ति विचार एव मनन करना, निरन्तर ज्ञान का अभ्यास करना और विधिपूर्वक ज्ञान को ग्रहण करना, ज्ञान-विनय है । इसके पाच भेद हैं, यथा - मतिज्ञान-विनय, श्रुतज्ञान-विनय, अवधिज्ञान-विनय, मन पर्यवज्ञान-विनय और केवल ज्ञान-विनय । २ दर्शन-विनयदेव - अरिहन्त ( वीतराग ) गुरु-निर्ग्रन्थ, वेवलि-भाषित धर्म श्रोर जिनवाणी इन सव पर श्रद्धा रखना सम्यग्दर्शन है। जिनको भक्ति और श्रद्धा से सम्यग्दर्शन की प्राप्ति हो चुकी है, जिनका ज्ञान स्वच्छ एव निर्मल हो गया है, उनके प्रति विनय का होना दर्शनविनय है । इसके मुख्यतया दो भेद है, सुश्रूपाविनय और अना शातना - विनय । इनमे सुश्रूषा विनय के दस भेद हैं । जैसे कियोग एक चिन्तन ] (क) प्रभ्युत्थान - गुरु एव बडे सन्तो देखकर खड़े हो जाना । को सामने से प्रति (ख) ग्रासनभिग्रह- "पधारिये, इस घासन को अलकृत कीजिए, इत्यादि विनीत वचन कहना । (ग) आसन-प्रदान-बैठने के लिए उन्हें ग्रासन देना । (घ) सत्कार - उनका आदर सत्कार करना । (ङ) सम्मान - उन्हें बहुत सम्मान देना । (च) कौतिकर्म - उनकी स्तुति एवं गुणगान करना, सविधि वंदना करना । (छ) अजलि प्रग्रह- उनके सामने हाथ जोडना । (ज) अनुगमनता - वापिस जाते समय कुछ दूर तक पहुंचाने जाना । (झ) पर्युपासनता-बैठे हो तो उनकी उपासना करना । (ञ) प्रतिसंसाधनता - उनके वचनों को श्रद्धा से स्वीकार वैसे तो शुश्रूषा का अर्थ है सुनने की इच्छा । आज्ञा और प्रवचन सुनने की इच्छा को शुश्रूपा कहते है। शुश्रूपा के स्थान पर सुश्रूषा शब्द का प्रयोग भी होता है, जिसका अर्थ है गुरुजनों की सेवा - भक्ति । जिस विनय का सम्बन्ध सेवा भाव से हो वह सुश्रूपा विनय है और जिसमे सुनने की इच्छा होती है वह शुश्रुषा करने वाला साधक अपने सेव्य से कभी भी दूर नहीं रहता । जहा तक उसे सेव्य के दर्शन होते रहे या जहा तक उनकी आज्ञा परिचायक शब्द सुविधा पूर्वक सुनने को मिल सके, वहा तक वह उनके सान्निध्य का परित्याग नही करता । अभिप्राय यह कि जिस विनय के पीछे सेवा भाव छिग हो वही शुश्रूषा विनय है । दर्शन विनय का दूसरा भेद अनाशातना विनय है । विपरीत वर्तन, असद्व्यवहार, अपमान, तिरस्कार, श्रवहेलना, श्रश्रद्धा आशातना के ही पर्यायवाची शब्द हैं । आशाता न करना ही अनाशातना विनय है । ग्ररिहन्त भगवान, केवलि-भाषित धर्म, आचार्य, उपाध्याय, स्थविर, कुल, गण, सघ, साघमिक, क्रियावान्, मतिज्ञानी, अवधिज्ञानी मन पर्याय-ज्ञानी और केवलज्ञानी इन पन्द्रह की आशातना न करना, इनकी भक्ति और वर्णवाद करना मनाशातना- विनय है । इन तीन कार्यो के करने से इसके पन्द्रह भेद हो जाते हैं। हाथ जोडना आदि विनय के बाह्य प्राचार को भक्ति कहते हैं और हृदय में श्रद्धा और प्रीति रखना बहुमान मे है तथा वाणी से दूसरो के सामने गुणानुवाद करना प्रशसा करना वर्णवाद है । ३. चारित्र विनय चारित्र का अर्थ है सयम, नियम, विरति या व्रत । चारित्रप्राप्ति के लिए विनय करना या चारित्रवान की विनय करना चारित्र - विनय है । ज्ञान दर्शन पूर्वक होता है और ज्ञान पूर्वक चारित्र की आराधना होती है । ज्ञान- पूर्वक ग्रहण किया हुआ चारित्र ही सम्यक् चारित्र हुआ करता है । अज्ञान पूर्वक ग्रहण किया हुआ आचरण चारित्र नही, वह तो चारित्राभास है । चारित्र-विनय के पाच भेद हैं - सामायिक-चारित्र- विनय, छेदोपस्थापनीय चारित्र- विनय, परिहार- विशुद्धि चारित्र-विनय, सूक्ष्म-सपराय- चारित्र-विनय और यथाख्यात चारित्र- विनय ।
चौदह. आचार जिसका पालन चारो मोर की मर्यादानो को ध्यान में रख कर किया जाए वही ऋचार है दूसरे शब्दों मे उत्तम जनो द्वारा आचरित कार्यों का आचरण करना ही चार है । प्राचार पाच प्रकार का होता है। जानाचार, दर्शनाचार, चारित्राचार, तप- प्राचार और वोर्याचार । लोक व्यवहार मे जैसे प्रत्येक क्षेत्र के कार्य विभाग में विशेष जानकारी की आवश्यकता रहती है वैसे ही धर्म क्षेत्र मे भी विशेष तात्त्विक जानकारी के बिना कोई भी साधक मागे नही बढ सकता । साधक अध्ययन के द्वारा जो श्रुतज्ञान की अभिवृद्धि करता है वही जानाचार है, अथवा नए-नए ज्ञान की प्राप्ति और प्राप्त ज्ञान की रक्षा के लिये सद् प्रयत्न को ही ज्ञानाचार कहा गया है । सम्यग्दर्शन हठवाद और रूढिवाद का विरोधी तत्त्व है । सत्य और असत्य की परख में निश्चय लाने वाला और साधना के क्षेत्र मे दृढता लाने वाला यदि कोई तत्त्व है तो वह सम्यग्दर्शन ही है। इसकी उपस्थिति मे जीव सम्यक्प्रवृत्ति और सम्यग्निवृत्ति स्वत. ही करने लगता है । जीवादि नवतत्त्वो का ठीक-ठीक जान तथा तत्त्ववेत्ता की विनय-भक्ति एवं सेवा करना ये दोनो सम्यक् - प्रवृत्तिया है । इन्ही सत् प्रवृत्तियो को सम्यक् चारित्र कहा जाता है । सम्यग्दर्शन साधक को चारित्र भ्रष्टता और एकान्त मिथ्यावादियो की सगति से दूर रखता है । सम्यग्दृष्टि मोक्ष के उपायो मे, जिनवाणी मे एव प्रखण्ड सत्य मे नि शकित रहता है । मिथ्यात्व या मिथ्यावाद और सासारिक सुख-साधनो से वह निस्पृह रहता है । वह भयकर विपतियों से घिर जाने पर भी धर्म फल के प्रति सन्देह नहीं करता । मिथ्यादृष्टियो के चमत्कार को देख कर भी उसकी चेतना मूढता से दूर रहती है। वह तीर्थंकरो के द्वारा वताए हुए मार्ग पर चलने वालो को प्रगसा करता है । जो व्यक्ति सन्मार्ग से फिमल रहा हो उसे पुन धर्म मे स्थिर करता है, सहधर्मी लोगो पर वात्सल्य एत्र प्रोति रखता है, मार्गानुसारी जीवो को प्रभावना के द्वारा जिन-मार्ग पर लाता है । इस प्रकार के सभी कार्य दर्शनाचार कहलाते है । सर्व देश और सर्व काल मे विना किसी आगार या अपवाद के जिन व्रतो की आराधना की जाती है, उन्हे सार्वभौम महाव्रत कहते हैं। महाव्रती मे साधक को किसी प्रकार की छूट नहीं दी जाती। जिन मे छूट दी जा सकती है, वे महाव्रत नहीं, बल्कि प्रणुव्रत कहलाते है । महाव्रत ग्रहण करते समय साधक कोई छूट नही रखता, वह तीन योग और तीन करण से हिसा, झूठ, चोरी, मैथुन और परिग्रह का त्याग कर देता है, इन से पूर्णतया निवृत्त होने की प्रतिज्ञा लेता है। इतना ही नही पृथ्वी काय, अपकाय, तेजस्काय, वायुकाय, वनस्पतिकाय और त्रसकाय की हिंसा का तीन योगो और तीन करणो से जीवन भर के लिये त्याग कर देता है । महाव्रत एक ही नहीं प्रत्युत पाच है । कोई भी महाव्रत न बडा है और न छोटा, सभी अपने-अपने महत्त्व और उपयोगिता की दृष्टि से श्रेष्ठ एव महत्त्वपूर्ण है। इनका अस्तित्व सभी चारित्रो मे पाया जाता है । रात्रि भोजन-विरमणव्रत नित्य तपस्या का परिचायक है । इस तप की साधना के लिये रात्रि में जीवन भर के लिये सभी तरह के खान-पान का परित्याग, इतना ही नही रात्रि को खाने-पीने की वस्तुप्रो के ग्रह का भो त्याग, यहां तक कि रात्रि को श्रीपधिसेवन का भी त्याग कर देना होता है। अन्य सभी महाव्रती और रात्रिभोजन-विरमगव्रत मे साधक किसी प्रकार की छूट या ग्रागार नही रखता और न आगार रखने वाले को महाव्रतो का पालक कहा जाता है । सार्वभौम महाव्रतो की रक्षा समिति और गुप्ति से की जाती है । ईर्या-समिति, भाषा-समिति, एपणा-समिति, श्रादान भण्डमात्र निक्षेपणा-समिति और उच्चार-पासवण-खेल-जल्ल-मल-परिठावणिया-समिति- इन पांचो समितियों का सम्यकृतथा पालन करने को ही समिति या सम्यक्प्रवृत्ति भी कह सकते है । जब साधक अशुभ सकल्पो से मन को, अशुभ एवं ग्रमगल वाणी से वचन को और अशुभ प्रवृत्ति से काया को नियन्त्रित करता है तब उसी को गुप्ति या सम्यग्निवृत्ति कहते हैं। चारित्राचार के सभी भेद समिति एव गुप्ति में निहित हो जाते हैं । जिस तप से विषय, कपाय और अन्तर्मल भस्म हो जाएं, अहिंसा भगवती की सफल एव पूर्ण श्राराधना हो जाए, जीवन सन्तोष से परिपूर्ण हो जाए शरीर पर ममत्व भी न रहने पाए, श्रध्ययन और ध्यान में मन सलीन हो जाए, पूज्य जनो के प्रति विनयभक्ति, प्रीति एव सेवा की भावना जाग जाए, राग, द्वेष, मोह बिल्कुल मन्द पड जाए, मान, एव प्रतिष्ठा की भूख शान्त हो जाए, खान-पान के पदार्थो मे ग्रासक्ति न रहे, परीषह और उपसर्ग उपस्थित होने पर उन्हें समभाव से सहन करने लगे, स्वर्गीय सुख साम्राज्य से विरक्त रहे, निदान न करे, नित्यप्रति कष्ट सहने का अभ्यास करता रहे, केशलोच करना, वस्त्र न रखना या ज़रूरत से कम रखना, सर्दी के दिनो मे शीत सहना, गर्मियों के दिनो मे धूप की आतापना लेना, वीरासनादि लगाना, पैदल विहार करना, पैरो मे जूता न डालना, सिर से नगे रहना, निर्दोष गोचरी करके करना, रसीले पदार्थो एव विगयो का त्याग करना, जितेन्द्रिय बनना, मन को जीतना, मौन रखना इत्यादि सव तप के ही अनेक रूप है । जैन आगमो मे तपस्या बारह प्रकार की बतलाई गई है । ज्ञानाचार के आठ रूप, दर्शनाचार के आठ रूप, चारित्राचार के आठ रूप और बारह प्रकार के तप - इन छत्तीस चारो का यथाशक्य यथासम्भव निरन्तर पालन करना और इनके पालनार्थ अपनी शक्ति का प्रयोग करना वीर्याचार है, प्रत पाच प्रकार के प्राचारो का जीवन के अन्तिम श्वास तक पालन करना ही प्राचार है । पंद्रह. विनयोपेत दिपूर्वक णीञ प्रापणे धातु मे विनय शब्द की निष्पत्ति होती है । विनय शब्द अनेकार्थक है। प्रणाम, भक्ति, प्रीति, शिष्टता, नम्रता, सयम, शिक्षा, अपनयन, लध्यविन्दु मे पहुचाने वाली साधना, इन सब का विनय शब्द से ग्रहण हो जाता है, परन्तु विनय का मुख्य अर्थ है आचार । विनय ही धर्म का मूल है, इसी सदर्भ मे एक शास्त्रीय वार्ता प्रस्तुत करना उचित रहेगा। एक वार सुदर्शन सेठ ने थावच्चा पुत्र से प्रश्न किया - 'भते । आपकी दृष्टि मे धर्म का मूल क्या है ? " उत्तर मे थावच्चा पुत्र ने कहा- 'सुदर्शन । मेरा यह विश्वास है कि धर्म का मूल विनय है विनय के दो भेद है, अगार - विनय और अनगार- विनय । श्रावक की ग्यारह उपासक प्रतिमा और बारह व्रतो का समावेश अगार विनय मे हो जाता है । अठारह पापो से निवृत्ति, पाच महाव्रत, छटा रात्रि भोजन-विरमण, दशविध श्रमणधर्म, दर्शाविध उत्तर-गुण-प्रत्याख्यान इस प्रकार के सभी साधन अनगार- विनय के ही हैं । गृहस्थ और साधु दोनो का प्रथम कर्तव्य विनय है। जबकि विनय को धम का मूल बताया गया है, तव जीवन की भूमि पर विना मूल के धर्मवृक्ष का विकास सम्भव ही है । विनय का स्वरूप और उसके भेदधर्म की ओर झुकाव का होना या अपने आप को धर्मसाधना एव गुरुजनो के लिये अर्पित कर देना विनय है, ग्रंथवा जिसके द्वारा सम्पूर्ण दुखो के कारणीभूत ठ कर्मों का उन्मूलन एव क्षय हो वह विनय है, अथवा अपने से बड़े तथा गुरुजनो का देश और काल के अनुसार सरकार सन्मान करना विनय है । इसके सात भेद हैं एक ज्ञान-विनय, दो दर्शन- विनय, तीन चारित्रविनय, चार मनो-विनय पाँच वचन-विनय, छः काय-विनय और सात लोकोपचार- विनय । एक. ज्ञान-विनयज्ञान और ज्ञान के आधार भूत ज्ञानी पर श्रद्धा रखना, उनके प्रति भक्ति एव वहुमान दिखाना, उनके द्वारा वताए हुए तत्त्वो पर भली भान्ति विचार एव मनन करना, निरन्तर ज्ञान का अभ्यास करना और विधिपूर्वक ज्ञान को ग्रहण करना, ज्ञान-विनय है । इसके पाच भेद हैं, यथा - मतिज्ञान-विनय, श्रुतज्ञान-विनय, अवधिज्ञान-विनय, मन पर्यवज्ञान-विनय और केवल ज्ञान-विनय । दो दर्शन-विनयदेव - अरिहन्त गुरु-निर्ग्रन्थ, वेवलि-भाषित धर्म श्रोर जिनवाणी इन सव पर श्रद्धा रखना सम्यग्दर्शन है। जिनको भक्ति और श्रद्धा से सम्यग्दर्शन की प्राप्ति हो चुकी है, जिनका ज्ञान स्वच्छ एव निर्मल हो गया है, उनके प्रति विनय का होना दर्शनविनय है । इसके मुख्यतया दो भेद है, सुश्रूपाविनय और अना शातना - विनय । इनमे सुश्रूषा विनय के दस भेद हैं । जैसे कियोग एक चिन्तन ] प्रभ्युत्थान - गुरु एव बडे सन्तो देखकर खड़े हो जाना । को सामने से प्रति ग्रासनभिग्रह- "पधारिये, इस घासन को अलकृत कीजिए, इत्यादि विनीत वचन कहना । आसन-प्रदान-बैठने के लिए उन्हें ग्रासन देना । सत्कार - उनका आदर सत्कार करना । सम्मान - उन्हें बहुत सम्मान देना । कौतिकर्म - उनकी स्तुति एवं गुणगान करना, सविधि वंदना करना । अजलि प्रग्रह- उनके सामने हाथ जोडना । अनुगमनता - वापिस जाते समय कुछ दूर तक पहुंचाने जाना । पर्युपासनता-बैठे हो तो उनकी उपासना करना । प्रतिसंसाधनता - उनके वचनों को श्रद्धा से स्वीकार वैसे तो शुश्रूषा का अर्थ है सुनने की इच्छा । आज्ञा और प्रवचन सुनने की इच्छा को शुश्रूपा कहते है। शुश्रूपा के स्थान पर सुश्रूषा शब्द का प्रयोग भी होता है, जिसका अर्थ है गुरुजनों की सेवा - भक्ति । जिस विनय का सम्बन्ध सेवा भाव से हो वह सुश्रूपा विनय है और जिसमे सुनने की इच्छा होती है वह शुश्रुषा करने वाला साधक अपने सेव्य से कभी भी दूर नहीं रहता । जहा तक उसे सेव्य के दर्शन होते रहे या जहा तक उनकी आज्ञा परिचायक शब्द सुविधा पूर्वक सुनने को मिल सके, वहा तक वह उनके सान्निध्य का परित्याग नही करता । अभिप्राय यह कि जिस विनय के पीछे सेवा भाव छिग हो वही शुश्रूषा विनय है । दर्शन विनय का दूसरा भेद अनाशातना विनय है । विपरीत वर्तन, असद्व्यवहार, अपमान, तिरस्कार, श्रवहेलना, श्रश्रद्धा आशातना के ही पर्यायवाची शब्द हैं । आशाता न करना ही अनाशातना विनय है । ग्ररिहन्त भगवान, केवलि-भाषित धर्म, आचार्य, उपाध्याय, स्थविर, कुल, गण, सघ, साघमिक, क्रियावान्, मतिज्ञानी, अवधिज्ञानी मन पर्याय-ज्ञानी और केवलज्ञानी इन पन्द्रह की आशातना न करना, इनकी भक्ति और वर्णवाद करना मनाशातना- विनय है । इन तीन कार्यो के करने से इसके पन्द्रह भेद हो जाते हैं। हाथ जोडना आदि विनय के बाह्य प्राचार को भक्ति कहते हैं और हृदय में श्रद्धा और प्रीति रखना बहुमान मे है तथा वाणी से दूसरो के सामने गुणानुवाद करना प्रशसा करना वर्णवाद है । तीन. चारित्र विनय चारित्र का अर्थ है सयम, नियम, विरति या व्रत । चारित्रप्राप्ति के लिए विनय करना या चारित्रवान की विनय करना चारित्र - विनय है । ज्ञान दर्शन पूर्वक होता है और ज्ञान पूर्वक चारित्र की आराधना होती है । ज्ञान- पूर्वक ग्रहण किया हुआ चारित्र ही सम्यक् चारित्र हुआ करता है । अज्ञान पूर्वक ग्रहण किया हुआ आचरण चारित्र नही, वह तो चारित्राभास है । चारित्र-विनय के पाच भेद हैं - सामायिक-चारित्र- विनय, छेदोपस्थापनीय चारित्र- विनय, परिहार- विशुद्धि चारित्र-विनय, सूक्ष्म-सपराय- चारित्र-विनय और यथाख्यात चारित्र- विनय ।
पत्नी की हत्या कर शव को घर के पीछे दफनाने के आरोपी व्यक्ति ने रविवार को नगांव पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। उसने इटाचली टाउन चौकी में पुलिस अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने अपनी पत्नी मोमी दास के कथित हत्यारे नारायण दास को हिरासत में ले लिया। नारायण जो एक ई-रिक्शा चालक है। अपनी पत्नी के साथ कई वर्षों से दिमोरुगुरी इलाके में रह रहा था और अक्सर उसके साथ झगड़ा करने के लिए जाना जाता था। मोमी दास का शव शनिवार शाम को उनके घर के पिछवाड़े से निकाला गया। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।
पत्नी की हत्या कर शव को घर के पीछे दफनाने के आरोपी व्यक्ति ने रविवार को नगांव पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। उसने इटाचली टाउन चौकी में पुलिस अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने अपनी पत्नी मोमी दास के कथित हत्यारे नारायण दास को हिरासत में ले लिया। नारायण जो एक ई-रिक्शा चालक है। अपनी पत्नी के साथ कई वर्षों से दिमोरुगुरी इलाके में रह रहा था और अक्सर उसके साथ झगड़ा करने के लिए जाना जाता था। मोमी दास का शव शनिवार शाम को उनके घर के पिछवाड़े से निकाला गया। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उद्देश्य के हिसाब से अब तक अच्छी प्रगति हासिल कर ली गई है. चीनी सेना तय कार्यक्रम के अनुसार बहुत तेजी से पीछे हट रही है. पैंगोंग झील से पीछे हटने की प्रक्रिया में चीनी सेना श्रीजाप प्लेन की ओर फिंगर 8 के पूर्व में जाएगी. भारत और चीनी सेना के बीच पैंगोंग झील पर पीछे हटने की कार्रवाई तय समय के हिसाब से चल रही है. सैटेलाइट इमेजरी में देखा जा सकता है चीनी सेना तेजी से फिंगर 8 से पीछे जा रही है. नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक में LAC पर चल रही कार्रवाई को लेकर शुक्रवार को एक बैठक हुई. बैठक में भारतीय सेना ने LAC चल रही कार्रवाई को लेकर संतोष जताया है. सेना ने साथ ही ये अनुमान लगाया है की बॉर्डर से पीछे हटने की कार्रवाई 19 या 20 फरवरी तक पूरी हो जाएगी. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उद्देश्य के हिसाब से अब तक अच्छी प्रगति हासिल कर ली गई है. चीनी सेना तय कार्यक्रम के अनुसार बहुत तेजी से पीछे हट रही है. पैंगोंग झील से पीछे हटने की प्रक्रिया में चीनी सेना श्रीजाप प्लेन की ओर फिंगर 8 के पूर्व में जाएगी. जबकि भारतीय सेना फिंगर 3 पर धन सिंह थापा पोस्ट पर वापस आएगी. फिंगर 4 से 8 के बीच के पूरे इलाके से सेनाओं को हटाया जाएगा और कंमाडर स्तर की वार्ता में गश्त को लेकर कार्यक्रम तय किया जाएगा. पूर्वी क्षेत्र में अब भी मौजूद है चीनी सेना? पैंगोंग झील के दक्षिण से चीनी सेना के मुख्य बैटल टैंक पीछे हटने के सबूत मौजूद हैं. साथ ही भारतीय सेना ने भी वापसी की है. हालांकि चीनी सेना या उपकरणों के गहराई वाले क्षेत्रों या केंद्रीय या पूर्वी क्षेत्रों से वापसी के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार लद्दाख सेक्टर में 1597 किलोमीटर LAC पर शांति सुनिश्चित करने के लिए पैंगोंग झील के बाद दोनों पक्ष गोगरा -हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र और डेपसांग बलज क्षेत्र को लेकर चर्चा होगी. जबकि भारतीय सुरक्षा नियोजक 10 महीनों के टकराव के बाद दोनों सेनाओं के पीछे हटने से संतुष्ट हैं. साथ ही सुरक्षा नियोजक इस बात से भी परिचित है कि सेनाओं के पीछे हटने का मतलब शांति नहीं है. उनका मानना है कि ये सुनिश्चित करने के लिए की दोनों सेनाओं के बीच कोई टकरान नहीं होगा, भारतीय और चीनी सेना को LAC पर अप्रैल 2020 से पहले की स्थिति में वापस जाना होगा. दोनों सेनाओं का पीछे हटना इस प्रक्रिया का सिर्फ पहला कदम है.
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उद्देश्य के हिसाब से अब तक अच्छी प्रगति हासिल कर ली गई है. चीनी सेना तय कार्यक्रम के अनुसार बहुत तेजी से पीछे हट रही है. पैंगोंग झील से पीछे हटने की प्रक्रिया में चीनी सेना श्रीजाप प्लेन की ओर फिंगर आठ के पूर्व में जाएगी. भारत और चीनी सेना के बीच पैंगोंग झील पर पीछे हटने की कार्रवाई तय समय के हिसाब से चल रही है. सैटेलाइट इमेजरी में देखा जा सकता है चीनी सेना तेजी से फिंगर आठ से पीछे जा रही है. नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक में LAC पर चल रही कार्रवाई को लेकर शुक्रवार को एक बैठक हुई. बैठक में भारतीय सेना ने LAC चल रही कार्रवाई को लेकर संतोष जताया है. सेना ने साथ ही ये अनुमान लगाया है की बॉर्डर से पीछे हटने की कार्रवाई उन्नीस या बीस फरवरी तक पूरी हो जाएगी. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उद्देश्य के हिसाब से अब तक अच्छी प्रगति हासिल कर ली गई है. चीनी सेना तय कार्यक्रम के अनुसार बहुत तेजी से पीछे हट रही है. पैंगोंग झील से पीछे हटने की प्रक्रिया में चीनी सेना श्रीजाप प्लेन की ओर फिंगर आठ के पूर्व में जाएगी. जबकि भारतीय सेना फिंगर तीन पर धन सिंह थापा पोस्ट पर वापस आएगी. फिंगर चार से आठ के बीच के पूरे इलाके से सेनाओं को हटाया जाएगा और कंमाडर स्तर की वार्ता में गश्त को लेकर कार्यक्रम तय किया जाएगा. पूर्वी क्षेत्र में अब भी मौजूद है चीनी सेना? पैंगोंग झील के दक्षिण से चीनी सेना के मुख्य बैटल टैंक पीछे हटने के सबूत मौजूद हैं. साथ ही भारतीय सेना ने भी वापसी की है. हालांकि चीनी सेना या उपकरणों के गहराई वाले क्षेत्रों या केंद्रीय या पूर्वी क्षेत्रों से वापसी के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार लद्दाख सेक्टर में एक हज़ार पाँच सौ सत्तानवे किलोग्राममीटर LAC पर शांति सुनिश्चित करने के लिए पैंगोंग झील के बाद दोनों पक्ष गोगरा -हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र और डेपसांग बलज क्षेत्र को लेकर चर्चा होगी. जबकि भारतीय सुरक्षा नियोजक दस महीनों के टकराव के बाद दोनों सेनाओं के पीछे हटने से संतुष्ट हैं. साथ ही सुरक्षा नियोजक इस बात से भी परिचित है कि सेनाओं के पीछे हटने का मतलब शांति नहीं है. उनका मानना है कि ये सुनिश्चित करने के लिए की दोनों सेनाओं के बीच कोई टकरान नहीं होगा, भारतीय और चीनी सेना को LAC पर अप्रैल दो हज़ार बीस से पहले की स्थिति में वापस जाना होगा. दोनों सेनाओं का पीछे हटना इस प्रक्रिया का सिर्फ पहला कदम है.
घटाकर्ण - 1 खरगोश - 1 को डराते है । लो, वे हमारे पास आ रहे हैं । खवरदार । आगे मत वढो । ईऽऽऽश, चुप रहो, हमको तग न करो । परीलोक को हम जाते है, पूपू का मन बहलाने । ईऽऽऽश, चुप रहो, हमको तग न करो । [ खरगोश आगे बढते जाते है । ] घटाकर्ण-1 जरा-जरा से इन खरहो की इतनी हिम्मत । चलो पकड़ कर मजा चखाए । [घटाकर्ण अपनी भारी-भरकम चाल द्वारा खरगोशो को पकड़ने की कोशिश करते हुए रगमच से बाहर चले जाते है । खरगोश पूपू को लेकर दूसरी ओर चले जाते है । धीरे-धीरे अधकार । एक पल मच खाली । फिर पूपू के दादा का प्रवेश । जैसे बहुत ही सोच मे पडे हो । इधर-उधर देखते है । पर जब कही पूपू दिखाई नही पडती, तो असमजस के भाव से कहते है । ] दावा अरे, कहा गई, पूपू बेटी ? सब तरफ
घटाकर्ण - एक खरगोश - एक को डराते है । लो, वे हमारे पास आ रहे हैं । खवरदार । आगे मत वढो । ईऽऽऽश, चुप रहो, हमको तग न करो । परीलोक को हम जाते है, पूपू का मन बहलाने । ईऽऽऽश, चुप रहो, हमको तग न करो । [ खरगोश आगे बढते जाते है । ] घटाकर्ण-एक जरा-जरा से इन खरहो की इतनी हिम्मत । चलो पकड़ कर मजा चखाए । [घटाकर्ण अपनी भारी-भरकम चाल द्वारा खरगोशो को पकड़ने की कोशिश करते हुए रगमच से बाहर चले जाते है । खरगोश पूपू को लेकर दूसरी ओर चले जाते है । धीरे-धीरे अधकार । एक पल मच खाली । फिर पूपू के दादा का प्रवेश । जैसे बहुत ही सोच मे पडे हो । इधर-उधर देखते है । पर जब कही पूपू दिखाई नही पडती, तो असमजस के भाव से कहते है । ] दावा अरे, कहा गई, पूपू बेटी ? सब तरफ
मानव शरीर एक जटिल बहुआयामी हैएक प्रणाली जो विभिन्न स्तरों पर चलती है अंगों और कोशिकाओं को सही मोड में काम करने के लिए, विशिष्ट पदार्थों को विशिष्ट जैव रासायनिक प्रक्रियाओं में भाग लेना चाहिए। ऐसा करने के लिए, आपको एक ठोस नींव की आवश्यकता होती है, अर्थात, आनुवंशिक कोड का सही स्थानांतरण। यह विरासत में मिली सामग्री है जो भ्रूण के विकास को नियंत्रित करती है। हालांकि, वंशानुगत जानकारी में, कभी-कभीऐसे परिवर्तन होते हैं जो बड़े पूल में दिखाई देते हैं या व्यक्तिगत जीनों को छूते हैं। ऐसी त्रुटियों को जीन के उत्परिवर्तन कहते हैं। कुछ मामलों में, यह समस्या सेल के संरचनात्मक इकाइयों को संदर्भित करती है, जो पूरे गुणसूत्रों के लिए है। तदनुसार, इस मामले में, त्रुटि को क्रोमोसोम उत्परिवर्तन कहा जाता है। क्रोमोसोमल म्यूटेशन उनके परिवर्तन में योगदान करते हैंसंख्या और संरचना इस प्रकार, एक अतिरिक्त गुणसूत्र प्रकट हो सकता है या इसके विपरीत, उन्हें याद किया जाएगा यह असंतुलन गर्भपात का कारण हो सकता है या क्रोमोसोमल रोगों की शुरुआत में योगदान कर सकता है। निम्न प्रकार के गुणसूत्र हैंः विसंगतियां अपेक्षाकृत बड़ी हैं औरछोटे। शोध के तरीके इस पैरामीटर के आधार पर भिन्न होते हैं। कुछ माइक्रोस्कोप के साथ नहीं पता लगाया जा सकता है। ऐसे मामलों में, अंतर धुंधला विधि का उपयोग किया जाता है, लेकिन केवल तभी जब प्रभावित क्षेत्र का लाखों न्यूक्लियोटाइड में अनुमान लगाया जाता है। केवल न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम स्थापित करके, छोटे उत्परिवर्तन का पता लगाया जा सकता है। और बड़े उल्लंघन मानव शरीर पर एक स्पष्ट प्रभाव का कारण बनता है। गुणसूत्रों में से एक की अनुपस्थिति में, विसंगति को मोनोसॉमी कहा जाता है। शरीर में अतिरिक्त गुणसूत्र trisomy है। जब भी दवा आधुनिक से बहुत दूर थीविकास के स्तर, यह माना जाता था कि एक व्यक्ति 48 गुणसूत्रों है। यह केवल 1956 में वे सही ढंग से गणना की गणना और गुणसूत्रों की संख्या के उल्लंघन और कुछ वंशानुगत बीमारियों के बीच के रिश्ते की पहचान करने में कामयाब रहे थे। तीन साल बाद फ्रांसीसी वैज्ञानिक जे। हालांकि, यह पता चला था कि बौद्धिक विकास और संक्रमण की स्थिरता के लोगों पर अशांति सीधे जीनोमिक उत्परिवर्तन से जुड़ी हुई है। यह एक अतिरिक्त 21 गुणसूत्रों के बारे में था। यह सबसे छोटा है, लेकिन इसमें बड़ी संख्या में जीन हैं। 1,000 नवजात शिशुओं में से 1 में एक अतिरिक्त गुणसूत्र मनाया गया था। यह गुणसूत्र बीमारी अब तक का सबसे ज्यादा अध्ययन किया जाता है और इसे डाउन सिंड्रोम कहा जाता है। 1 9 5 9 के उसी वर्ष, इसका अध्ययन किया गया और साबित हुआ कि पुरुषों में एक अतिरिक्त एक्स गुणसूत्र की उपस्थिति क्लेनफेलटर की बीमारी की ओर ले जाती है, जिसमें एक व्यक्ति मानसिक मंदता और बांझपन से पीड़ित होता है। हालांकि, इस तथ्य के बावजूद कि गुणसूत्र असामान्यताएंलंबे समय से मनाया और अध्ययन किया गया है, यहां तक कि आधुनिक चिकित्सा आनुवंशिक बीमारियों का इलाज करने में सक्षम नहीं है। लेकिन इस तरह के उत्परिवर्तनों का निदान करने के तरीके काफी आधुनिकीकृत हैं। Anomaly के लिए एकमात्र कारण हैनिर्धारित 46 के बजाय 47 गुणसूत्रों का उदय। दवा के क्षेत्र में विशेषज्ञ साबित हुए हैं कि एक अतिरिक्त गुणसूत्र की उपस्थिति का मुख्य कारण भविष्य की मां की उम्र है। गर्भवती पुरानी, गुणसूत्रों को अलग करने की संभावना अधिक है। केवल इसी कारण से महिलाओं को 35 साल तक जन्म देने की सिफारिश की जाती है। इस उम्र के बाद गर्भावस्था के मामले में जांच की जानी चाहिए। एक अतिरिक्त गुणसूत्र के उद्भव में योगदान देने वाले कारकों में विसंगति का स्तर शामिल है जो पूरी दुनिया में बढ़ गया है, पर्यावरण प्रदूषण की डिग्री और भी बहुत कुछ है। एक राय है कि अनावश्यक गुणसूत्रयदि जीनस में इसी तरह के मामले थे तो होता है। यह सिर्फ एक मिथक हैः अध्ययनों से पता चला है कि जिन माता-पिता को क्रोमोसोमल बीमारी से पीड़ित हैं, वे पूरी तरह से स्वस्थ कैरियोटाइप रखते हैं। दोनों गुणसूत्र संख्या उल्लंघन की पहचान, दोनोंएनीप्लोइडी स्क्रीनिंग कहा जाता है, भ्रूण में कमी या क्रोमोसोम की अधिकता का खुलासा करता है। 35 साल से अधिक उम्र की गर्भवती महिलाओं को अम्नीओटिक तरल पदार्थ का नमूना प्राप्त करने की प्रक्रिया से गुजरने की सिफारिश की जाती है। यदि कार्योटाइप का उल्लंघन पाया जाता है, तो गर्भवती मां को गर्भावस्था को समाप्त करने की आवश्यकता होगी, क्योंकि पैदा हुए बच्चे को उपचार के प्रभावी तरीकों की अनुपस्थिति में हर समय गंभीर बीमारी होगी। गुणसूत्र विकार मुख्य रूप से एक मातृभाषा हैउत्पत्ति, इसलिए, भ्रूण के केवल कोशिकाओं का विश्लेषण करना आवश्यक नहीं है, बल्कि परिपक्वता के दौरान बनाए गए पदार्थ भी आवश्यक हैं। इस प्रक्रिया को ध्रुवीय निकायों में अनुवांशिक विकारों का निदान कहा जाता है। वैज्ञानिक, जो पहले मंगोलवाद का वर्णन करता है, हैDaun। अतिरिक्त गुणसूत्र, जो उपस्थिति में जीन की बीमारी है, का व्यापक रूप से अध्ययन किया जाता है। मंगोलिज्म के साथ, 21 गुणसूत्रों पर ट्राइसोमी होती है। यही है, निर्धारित 46 के बजाय, रोगी को 47 गुणसूत्र प्राप्त होते हैं। मुख्य संकेत विकास में पिछड़ापन है। जिन बच्चों के पास अतिरिक्त हैगुणसूत्र, स्कूल प्रतिष्ठान में सामग्री को आत्मसात करने में गंभीर कठिनाइयों का अनुभव करते हैं, इसलिए उन्हें शिक्षण की वैकल्पिक विधि की आवश्यकता होती है। मानसिक के अलावा, शारीरिक विकास में विचलन होता है, अर्थात्ः आंखों में त्वचा की बड़ी संचय, आंखों, फ्लैट चेहरे, चौड़े होंठ, फ्लैट जीभ, छोटे या विस्तृत अंग और पैर, त्वचा में बड़े संचय। औसत पर जीवन प्रत्याशा 50 वर्षों तक पहुंच जाती है। ट्राइसोमी में पटाऊ सिंड्रोम भी शामिल हैजो 13 गुणसूत्रों की 3 प्रतियां हैं। एक विशिष्ट विशेषता केंद्रीय तंत्रिका तंत्र या इसके अविकसितता का उल्लंघन है। रोगियों में, जन्मजात हृदय रोगों सहित कई विकृतियां मनाई जाती हैं। पटाऊ सिंड्रोम के साथ 9 0% से अधिक लोग जीवन के पहले वर्ष में मर जाते हैं। पिछली एक की तरह यह विसंगति, संदर्भित करता हैत्रिगुणसूत्रता। इस मामले में हम 18 गुणसूत्रों के बारे में बात कर रहे हैं। एडवर्ड्स सिंड्रोम विभिन्न विकारों द्वारा विशेषता है। असल में, रोगियों को हड्डी विकृति का अनुभव होता है, खोपड़ी खोपड़ी का रूप, श्वसन अंगों और कार्डियोवैस्कुलर प्रणाली के साथ समस्याएं होती हैं। जीवन प्रत्याशा आमतौर पर लगभग 3 महीने होती है, लेकिन कुछ बच्चे एक वर्ष तक रहते हैं। गुणसूत्र असामान्यता के इन सिंड्रोम के अलावा, अन्य भी हैं, जिनमें एक संख्यात्मक और संरचनात्मक विसंगति भी देखी जाती है। ऐसी बीमारियों में निम्नलिखित शामिल हैंः जन्मजात गुणसूत्र के साथ एक बच्चे को उठाओरोग आसान नहीं है। अपने जीवन को सुविधाजनक बनाने के लिए, आपको कुछ नियमों का पालन करना होगा। सबसे पहले, हमें तुरंत निराशा और भय से उबरना चाहिए। दूसरा, दोषी की तलाश में समय बर्बाद करने की कोई आवश्यकता नहीं है, यह बस अस्तित्व में नहीं है। तीसरा, यह निर्धारित करना महत्वपूर्ण है कि बच्चे और परिवार के लिए किस प्रकार की सहायता की आवश्यकता है, और फिर चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक-शैक्षणिक सहायता के लिए विशेषज्ञों की ओर मुड़ें। जीवन के पहले वर्ष में, निदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिएइस अवधि में मोटर समारोह विकसित होता है। पेशेवरों की मदद से, बच्चे मोटर क्षमताओं को जल्दी से हासिल करेगा। दृष्टि और सुनवाई के रोगविज्ञान पर बच्चे को निष्पक्ष रूप से जांचना आवश्यक है। इसके अलावा बच्चे को बाल रोग विशेषज्ञ, मनोविज्ञानी और एंडोक्राइनोलॉजिस्ट में देखा जाना चाहिए। माता-पिता को इस स्थिति को दूर करने वाले लोगों से मूल्यवान व्यावहारिक सलाह प्राप्त करने के लिए एक विशेष एसोसिएशन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और साझा करने के लिए तैयार होते हैं। अनावश्यक गुणसूत्र का वाहक आमतौर पर अनुकूल हैअपने पालन-पोषण को सुविधाजनक बनाता है, वह वयस्कों की स्वीकृति कमाने की भी कोशिश करता है जितना वह कर सकता है। एक विशेष बच्चे के विकास का स्तर इस बात पर निर्भर करेगा कि उसे बुनियादी कौशल सिखाना कितना मुश्किल होगा। बीमार बच्चों को हालांकि दूसरों के पीछे अंतराल, लेकिन बहुत ध्यान देने की आवश्यकता है। बच्चे की आजादी को प्रोत्साहित करना हमेशा जरूरी है। उदाहरण के लिए स्वयं सेवा कौशल को बढ़ावा देने के लिए, और फिर परिणाम प्रतीक्षा करने में लंबा समय नहीं लगेगा। गुणसूत्र बीमारियों वाले बच्चे को संपन्न किया जाता हैविशेष प्रतिभा जिन्हें प्रकट किया जाना चाहिए। यह संगीत या ड्राइंग हो सकता है। बच्चे के भाषण को विकसित करना, सक्रिय और मोटर कौशल खेल विकसित करना, पढ़ना और शासन और सटीकता के प्रति आदी होना भी महत्वपूर्ण है। यदि आप बच्चे को सभी कोमलता, देखभाल, चौकसता और स्नेह दिखाते हैं, तो वह इसका उत्तर देगा। आज तक, गुणसूत्र रोगों का इलाज करने के लिएयह असंभव है; प्रत्येक प्रस्तावित विधि प्रयोगात्मक है, और उनकी नैदानिक प्रभावशीलता साबित नहीं हुई है। विकास, सामाजिककरण और कौशल के अधिग्रहण में सफलता प्राप्त करने से व्यवस्थित चिकित्सा और शैक्षिक सहायता से सहायता मिलती है।
मानव शरीर एक जटिल बहुआयामी हैएक प्रणाली जो विभिन्न स्तरों पर चलती है अंगों और कोशिकाओं को सही मोड में काम करने के लिए, विशिष्ट पदार्थों को विशिष्ट जैव रासायनिक प्रक्रियाओं में भाग लेना चाहिए। ऐसा करने के लिए, आपको एक ठोस नींव की आवश्यकता होती है, अर्थात, आनुवंशिक कोड का सही स्थानांतरण। यह विरासत में मिली सामग्री है जो भ्रूण के विकास को नियंत्रित करती है। हालांकि, वंशानुगत जानकारी में, कभी-कभीऐसे परिवर्तन होते हैं जो बड़े पूल में दिखाई देते हैं या व्यक्तिगत जीनों को छूते हैं। ऐसी त्रुटियों को जीन के उत्परिवर्तन कहते हैं। कुछ मामलों में, यह समस्या सेल के संरचनात्मक इकाइयों को संदर्भित करती है, जो पूरे गुणसूत्रों के लिए है। तदनुसार, इस मामले में, त्रुटि को क्रोमोसोम उत्परिवर्तन कहा जाता है। क्रोमोसोमल म्यूटेशन उनके परिवर्तन में योगदान करते हैंसंख्या और संरचना इस प्रकार, एक अतिरिक्त गुणसूत्र प्रकट हो सकता है या इसके विपरीत, उन्हें याद किया जाएगा यह असंतुलन गर्भपात का कारण हो सकता है या क्रोमोसोमल रोगों की शुरुआत में योगदान कर सकता है। निम्न प्रकार के गुणसूत्र हैंः विसंगतियां अपेक्षाकृत बड़ी हैं औरछोटे। शोध के तरीके इस पैरामीटर के आधार पर भिन्न होते हैं। कुछ माइक्रोस्कोप के साथ नहीं पता लगाया जा सकता है। ऐसे मामलों में, अंतर धुंधला विधि का उपयोग किया जाता है, लेकिन केवल तभी जब प्रभावित क्षेत्र का लाखों न्यूक्लियोटाइड में अनुमान लगाया जाता है। केवल न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम स्थापित करके, छोटे उत्परिवर्तन का पता लगाया जा सकता है। और बड़े उल्लंघन मानव शरीर पर एक स्पष्ट प्रभाव का कारण बनता है। गुणसूत्रों में से एक की अनुपस्थिति में, विसंगति को मोनोसॉमी कहा जाता है। शरीर में अतिरिक्त गुणसूत्र trisomy है। जब भी दवा आधुनिक से बहुत दूर थीविकास के स्तर, यह माना जाता था कि एक व्यक्ति अड़तालीस गुणसूत्रों है। यह केवल एक हज़ार नौ सौ छप्पन में वे सही ढंग से गणना की गणना और गुणसूत्रों की संख्या के उल्लंघन और कुछ वंशानुगत बीमारियों के बीच के रिश्ते की पहचान करने में कामयाब रहे थे। तीन साल बाद फ्रांसीसी वैज्ञानिक जे। हालांकि, यह पता चला था कि बौद्धिक विकास और संक्रमण की स्थिरता के लोगों पर अशांति सीधे जीनोमिक उत्परिवर्तन से जुड़ी हुई है। यह एक अतिरिक्त इक्कीस गुणसूत्रों के बारे में था। यह सबसे छोटा है, लेकिन इसमें बड़ी संख्या में जीन हैं। एक,शून्य नवजात शिशुओं में से एक में एक अतिरिक्त गुणसूत्र मनाया गया था। यह गुणसूत्र बीमारी अब तक का सबसे ज्यादा अध्ययन किया जाता है और इसे डाउन सिंड्रोम कहा जाता है। एक नौ पाँच नौ के उसी वर्ष, इसका अध्ययन किया गया और साबित हुआ कि पुरुषों में एक अतिरिक्त एक्स गुणसूत्र की उपस्थिति क्लेनफेलटर की बीमारी की ओर ले जाती है, जिसमें एक व्यक्ति मानसिक मंदता और बांझपन से पीड़ित होता है। हालांकि, इस तथ्य के बावजूद कि गुणसूत्र असामान्यताएंलंबे समय से मनाया और अध्ययन किया गया है, यहां तक कि आधुनिक चिकित्सा आनुवंशिक बीमारियों का इलाज करने में सक्षम नहीं है। लेकिन इस तरह के उत्परिवर्तनों का निदान करने के तरीके काफी आधुनिकीकृत हैं। Anomaly के लिए एकमात्र कारण हैनिर्धारित छियालीस के बजाय सैंतालीस गुणसूत्रों का उदय। दवा के क्षेत्र में विशेषज्ञ साबित हुए हैं कि एक अतिरिक्त गुणसूत्र की उपस्थिति का मुख्य कारण भविष्य की मां की उम्र है। गर्भवती पुरानी, गुणसूत्रों को अलग करने की संभावना अधिक है। केवल इसी कारण से महिलाओं को पैंतीस साल तक जन्म देने की सिफारिश की जाती है। इस उम्र के बाद गर्भावस्था के मामले में जांच की जानी चाहिए। एक अतिरिक्त गुणसूत्र के उद्भव में योगदान देने वाले कारकों में विसंगति का स्तर शामिल है जो पूरी दुनिया में बढ़ गया है, पर्यावरण प्रदूषण की डिग्री और भी बहुत कुछ है। एक राय है कि अनावश्यक गुणसूत्रयदि जीनस में इसी तरह के मामले थे तो होता है। यह सिर्फ एक मिथक हैः अध्ययनों से पता चला है कि जिन माता-पिता को क्रोमोसोमल बीमारी से पीड़ित हैं, वे पूरी तरह से स्वस्थ कैरियोटाइप रखते हैं। दोनों गुणसूत्र संख्या उल्लंघन की पहचान, दोनोंएनीप्लोइडी स्क्रीनिंग कहा जाता है, भ्रूण में कमी या क्रोमोसोम की अधिकता का खुलासा करता है। पैंतीस साल से अधिक उम्र की गर्भवती महिलाओं को अम्नीओटिक तरल पदार्थ का नमूना प्राप्त करने की प्रक्रिया से गुजरने की सिफारिश की जाती है। यदि कार्योटाइप का उल्लंघन पाया जाता है, तो गर्भवती मां को गर्भावस्था को समाप्त करने की आवश्यकता होगी, क्योंकि पैदा हुए बच्चे को उपचार के प्रभावी तरीकों की अनुपस्थिति में हर समय गंभीर बीमारी होगी। गुणसूत्र विकार मुख्य रूप से एक मातृभाषा हैउत्पत्ति, इसलिए, भ्रूण के केवल कोशिकाओं का विश्लेषण करना आवश्यक नहीं है, बल्कि परिपक्वता के दौरान बनाए गए पदार्थ भी आवश्यक हैं। इस प्रक्रिया को ध्रुवीय निकायों में अनुवांशिक विकारों का निदान कहा जाता है। वैज्ञानिक, जो पहले मंगोलवाद का वर्णन करता है, हैDaun। अतिरिक्त गुणसूत्र, जो उपस्थिति में जीन की बीमारी है, का व्यापक रूप से अध्ययन किया जाता है। मंगोलिज्म के साथ, इक्कीस गुणसूत्रों पर ट्राइसोमी होती है। यही है, निर्धारित छियालीस के बजाय, रोगी को सैंतालीस गुणसूत्र प्राप्त होते हैं। मुख्य संकेत विकास में पिछड़ापन है। जिन बच्चों के पास अतिरिक्त हैगुणसूत्र, स्कूल प्रतिष्ठान में सामग्री को आत्मसात करने में गंभीर कठिनाइयों का अनुभव करते हैं, इसलिए उन्हें शिक्षण की वैकल्पिक विधि की आवश्यकता होती है। मानसिक के अलावा, शारीरिक विकास में विचलन होता है, अर्थात्ः आंखों में त्वचा की बड़ी संचय, आंखों, फ्लैट चेहरे, चौड़े होंठ, फ्लैट जीभ, छोटे या विस्तृत अंग और पैर, त्वचा में बड़े संचय। औसत पर जीवन प्रत्याशा पचास वर्षों तक पहुंच जाती है। ट्राइसोमी में पटाऊ सिंड्रोम भी शामिल हैजो तेरह गुणसूत्रों की तीन प्रतियां हैं। एक विशिष्ट विशेषता केंद्रीय तंत्रिका तंत्र या इसके अविकसितता का उल्लंघन है। रोगियों में, जन्मजात हृदय रोगों सहित कई विकृतियां मनाई जाती हैं। पटाऊ सिंड्रोम के साथ नौ शून्य% से अधिक लोग जीवन के पहले वर्ष में मर जाते हैं। पिछली एक की तरह यह विसंगति, संदर्भित करता हैत्रिगुणसूत्रता। इस मामले में हम अट्ठारह गुणसूत्रों के बारे में बात कर रहे हैं। एडवर्ड्स सिंड्रोम विभिन्न विकारों द्वारा विशेषता है। असल में, रोगियों को हड्डी विकृति का अनुभव होता है, खोपड़ी खोपड़ी का रूप, श्वसन अंगों और कार्डियोवैस्कुलर प्रणाली के साथ समस्याएं होती हैं। जीवन प्रत्याशा आमतौर पर लगभग तीन महीने होती है, लेकिन कुछ बच्चे एक वर्ष तक रहते हैं। गुणसूत्र असामान्यता के इन सिंड्रोम के अलावा, अन्य भी हैं, जिनमें एक संख्यात्मक और संरचनात्मक विसंगति भी देखी जाती है। ऐसी बीमारियों में निम्नलिखित शामिल हैंः जन्मजात गुणसूत्र के साथ एक बच्चे को उठाओरोग आसान नहीं है। अपने जीवन को सुविधाजनक बनाने के लिए, आपको कुछ नियमों का पालन करना होगा। सबसे पहले, हमें तुरंत निराशा और भय से उबरना चाहिए। दूसरा, दोषी की तलाश में समय बर्बाद करने की कोई आवश्यकता नहीं है, यह बस अस्तित्व में नहीं है। तीसरा, यह निर्धारित करना महत्वपूर्ण है कि बच्चे और परिवार के लिए किस प्रकार की सहायता की आवश्यकता है, और फिर चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक-शैक्षणिक सहायता के लिए विशेषज्ञों की ओर मुड़ें। जीवन के पहले वर्ष में, निदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिएइस अवधि में मोटर समारोह विकसित होता है। पेशेवरों की मदद से, बच्चे मोटर क्षमताओं को जल्दी से हासिल करेगा। दृष्टि और सुनवाई के रोगविज्ञान पर बच्चे को निष्पक्ष रूप से जांचना आवश्यक है। इसके अलावा बच्चे को बाल रोग विशेषज्ञ, मनोविज्ञानी और एंडोक्राइनोलॉजिस्ट में देखा जाना चाहिए। माता-पिता को इस स्थिति को दूर करने वाले लोगों से मूल्यवान व्यावहारिक सलाह प्राप्त करने के लिए एक विशेष एसोसिएशन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है और साझा करने के लिए तैयार होते हैं। अनावश्यक गुणसूत्र का वाहक आमतौर पर अनुकूल हैअपने पालन-पोषण को सुविधाजनक बनाता है, वह वयस्कों की स्वीकृति कमाने की भी कोशिश करता है जितना वह कर सकता है। एक विशेष बच्चे के विकास का स्तर इस बात पर निर्भर करेगा कि उसे बुनियादी कौशल सिखाना कितना मुश्किल होगा। बीमार बच्चों को हालांकि दूसरों के पीछे अंतराल, लेकिन बहुत ध्यान देने की आवश्यकता है। बच्चे की आजादी को प्रोत्साहित करना हमेशा जरूरी है। उदाहरण के लिए स्वयं सेवा कौशल को बढ़ावा देने के लिए, और फिर परिणाम प्रतीक्षा करने में लंबा समय नहीं लगेगा। गुणसूत्र बीमारियों वाले बच्चे को संपन्न किया जाता हैविशेष प्रतिभा जिन्हें प्रकट किया जाना चाहिए। यह संगीत या ड्राइंग हो सकता है। बच्चे के भाषण को विकसित करना, सक्रिय और मोटर कौशल खेल विकसित करना, पढ़ना और शासन और सटीकता के प्रति आदी होना भी महत्वपूर्ण है। यदि आप बच्चे को सभी कोमलता, देखभाल, चौकसता और स्नेह दिखाते हैं, तो वह इसका उत्तर देगा। आज तक, गुणसूत्र रोगों का इलाज करने के लिएयह असंभव है; प्रत्येक प्रस्तावित विधि प्रयोगात्मक है, और उनकी नैदानिक प्रभावशीलता साबित नहीं हुई है। विकास, सामाजिककरण और कौशल के अधिग्रहण में सफलता प्राप्त करने से व्यवस्थित चिकित्सा और शैक्षिक सहायता से सहायता मिलती है।
कोरोना केस में लगातार कमी आती जा रही है. देश में कहर बरपाने वाले वायरस की रफ्तार अब मंद पड़ चुकी है. आज 24 घंटे में एक लाख से कम मामले सामने आए. ऐसे में उम्मीद जगी है कि कोरोना की दूसरी लहर जल्द खत्म हो जाएगी. अलग-अलग राज्यों में लॉकडाउन जैसे ठोस उपायों का असर हुआ है कि एक दिन में 4 लाख के पार जा चुका आंकड़ा अब 1 लाख से नीचे पहुंच गया है. इसी मुद्दे पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों से चर्चा के दौरान हमने पूछा कि कोरोना से उबरे लोगों में बनी नैचुरल इम्युनिटी वायरस के खिलाफ ज्यादा मजबूत होती है या वैक्सीन? देखें इसपर क्या बोले एक्सपर्ट. India's active caseload of covid patients has now dipped to over 13 lakh. India reports 86,498 new Covid-19 cases, 1,82,282 discharges, as per Health Ministry. In such a situation, there is hope that the second wave of coronavirus will end soon. While discussing this issue with health experts we asked whether the natural immunity after covid recovery is more strong against the virus or the vaccine? Watch this video to know.
कोरोना केस में लगातार कमी आती जा रही है. देश में कहर बरपाने वाले वायरस की रफ्तार अब मंद पड़ चुकी है. आज चौबीस घंटाटे में एक लाख से कम मामले सामने आए. ऐसे में उम्मीद जगी है कि कोरोना की दूसरी लहर जल्द खत्म हो जाएगी. अलग-अलग राज्यों में लॉकडाउन जैसे ठोस उपायों का असर हुआ है कि एक दिन में चार लाख के पार जा चुका आंकड़ा अब एक लाख से नीचे पहुंच गया है. इसी मुद्दे पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों से चर्चा के दौरान हमने पूछा कि कोरोना से उबरे लोगों में बनी नैचुरल इम्युनिटी वायरस के खिलाफ ज्यादा मजबूत होती है या वैक्सीन? देखें इसपर क्या बोले एक्सपर्ट. India's active caseload of covid patients has now dipped to over तेरह lakh. India reports छियासी,चार सौ अट्ठानवे new Covid-उन्नीस cases, एक,बयासी,दो सौ बयासी discharges, as per Health Ministry. In such a situation, there is hope that the second wave of coronavirus will end soon. While discussing this issue with health experts we asked whether the natural immunity after covid recovery is more strong against the virus or the vaccine? Watch this video to know.
नशीद अस-सलाम अस-सुल्तानी (अरबीः نشيد وطني عماني) ओमान का राष्ट्रगान है। इसे १९७० में अपनाया गया था और ६ नवम्बर, १९९६ को संशोधित किया गया था। . 6 संबंधोंः राष्ट्रगान, ओमान, अरबी भाषा, १९७०, १९९६, ६ नवम्बर। राष्ट्रगान देश प्रेम से परिपूर्ण एक ऐसी संगीत रचना है, जो उस देश के इतिहास, सभ्यता, संस्कृति और उसकी प्रजा के संघर्ष की व्याख्या करती है। यह संगीत रचना या तो उस देश की सरकार द्वारा स्वीकृत होती है या परंपरागत रूप से प्राप्त होती है। . ओमान (अरबी) अरबी प्रायद्वीप के पूर्व-दक्षिण में स्थित एक देश है जिसे आधिकारिक रूप से सल्तनत उमान नाम से जानते हैं। यह सउदी अरब के पूर्व और दक्षिण की दिशा में अरब सागर की सीमा से लगा है। संयुक्त अरब अमीरात इसके उत्तर में स्थित है। ओमान की कुल जनसंख्या 25 लाख के आसपास है और यहाँ बाहर से आकर रहने वालों (आप्रवासियों) की संख्या काफ़ी है। लगभग पूरी जनसंख्या मुस्लिम है जिसमें इबादियों की संख्या सबसे अधिक है। इसके अमेरिका और ब्रिटेन के साथ गहरे कूटनीतिक संबंध हैं। . अरबी भाषा सामी भाषा परिवार की एक भाषा है। ये हिन्द यूरोपीय परिवार की भाषाओं से मुख़्तलिफ़ है, यहाँ तक कि फ़ारसी से भी। ये इब्रानी भाषा से सम्बन्धित है। अरबी इस्लाम धर्म की धर्मभाषा है, जिसमें क़ुरान-ए-शरीफ़ लिखी गयी है। . 1970 ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। . १९९६ निम्न रूप से नामित किया गया था. ६ नवंबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का ३१०वाँ (लीप वर्ष मे 311 वॉ) दिन है। साल मे अभी और ५५ दिन बाकी है। .
नशीद अस-सलाम अस-सुल्तानी ओमान का राष्ट्रगान है। इसे एक हज़ार नौ सौ सत्तर में अपनाया गया था और छः नवम्बर, एक हज़ार नौ सौ छियानवे को संशोधित किया गया था। . छः संबंधोंः राष्ट्रगान, ओमान, अरबी भाषा, एक हज़ार नौ सौ सत्तर, एक हज़ार नौ सौ छियानवे, छः नवम्बर। राष्ट्रगान देश प्रेम से परिपूर्ण एक ऐसी संगीत रचना है, जो उस देश के इतिहास, सभ्यता, संस्कृति और उसकी प्रजा के संघर्ष की व्याख्या करती है। यह संगीत रचना या तो उस देश की सरकार द्वारा स्वीकृत होती है या परंपरागत रूप से प्राप्त होती है। . ओमान अरबी प्रायद्वीप के पूर्व-दक्षिण में स्थित एक देश है जिसे आधिकारिक रूप से सल्तनत उमान नाम से जानते हैं। यह सउदी अरब के पूर्व और दक्षिण की दिशा में अरब सागर की सीमा से लगा है। संयुक्त अरब अमीरात इसके उत्तर में स्थित है। ओमान की कुल जनसंख्या पच्चीस लाख के आसपास है और यहाँ बाहर से आकर रहने वालों की संख्या काफ़ी है। लगभग पूरी जनसंख्या मुस्लिम है जिसमें इबादियों की संख्या सबसे अधिक है। इसके अमेरिका और ब्रिटेन के साथ गहरे कूटनीतिक संबंध हैं। . अरबी भाषा सामी भाषा परिवार की एक भाषा है। ये हिन्द यूरोपीय परिवार की भाषाओं से मुख़्तलिफ़ है, यहाँ तक कि फ़ारसी से भी। ये इब्रानी भाषा से सम्बन्धित है। अरबी इस्लाम धर्म की धर्मभाषा है, जिसमें क़ुरान-ए-शरीफ़ लिखी गयी है। . एक हज़ार नौ सौ सत्तर ग्रेगोरी कैलंडर का एक साधारण वर्ष है। . एक हज़ार नौ सौ छियानवे निम्न रूप से नामित किया गया था. छः नवंबर ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का तीन सौ दसवाँ दिन है। साल मे अभी और पचपन दिन बाकी है। .
आप अलग-अलग उपयोग करते हैं"पाक" वाक्यांशों? सबसे अधिक संभावना है, हाँ वे हमारे जीवन में दृढ़ता से स्थापित हो गए हैं और ज्यादातर मामलों में प्रेरणा द्वारा उपयोग किया जाता है। उनके वास्तविक अर्थ के बारे में, हम कभी-कभी अनुमान नहीं लगाते हैं। उदाहरण के लिए, हर कोई यह जानता है कि "पहले पैनकेक ढेलेदार" उत्पत्ति के बारे में कुछ भी नहीं हो सकता है जिसके बारे में हम सोचते हैं सब के बाद, प्राचीन रूस में, कई बुतपरस्त विश्वास थे, जो स्वादिष्ट भोजन के साथ आत्माओं को लुभाने के लिए थे। हम किस बारे में बात कर रहे हैं? हां, कि कहावत की उत्पत्ति "पहले पैनकेक ढेलेदार है" बहुत असामान्य हो सकती है और उसका पवित्र अर्थ हो सकता है। दुनिया भर में पेनकेक्स को रूसी मूल रूप से माना जाता हैआविष्कार। उनके पास अंग्रेजी और फ्रेंच में एनालॉग नहीं होते हैं, जो उनके मूल के सिद्धांत की पुष्टि करते हैं। इतिहासकारों का मानना है कि रूसी ब्लिनी एक हजार साल से कम उम्र का नहीं है यद्यपि पहली बार ऐसी पकवान का उल्लेख नौवीं शताब्दी तक है। यह निश्चित है कि पेनकेक्स के लिए नुस्खा का आविष्कार करने वाले लोगों के लिए नहीं जाना जाता है, लेकिन इस आविष्कार की आकस्मिकता के बारे में एक किंवदंती है। इतिहासकार इस सिद्धांत का पालन करते हैं कि गृहिणियों के किसी से ओवन में गलती से दलिया को भूल गया था, और यह थोड़ा तली हुई था। नतीजतन, यह एक स्वादिष्ट और असामान्य पकवान निकला, अंततः दैनिक मेनू में प्रवेश किया। रूस पेनकेक्स में बहुत लोकप्रिय थेएक प्रकार का अनाज और राई के आटे से, वे अक्सर विभिन्न fillings के साथ बना रहे थे समय के साथ, पेनकेक्स को स्मारक पकवान के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया जाता था, वे बड़ी मात्रा में पके हुए थे और गरीबों को वितरित किया जाता था ताकि वे एक प्रकार के शब्द से मृतक को याद कर सकें। हमारे कई समकालीन सहयोगी मूलबातें "पहले पैनकेक ढेलेदार है" छुट्टी Maslenitsa के साथ इस समय यह पैनकेक को सेंकना और उन्हें खाने के लिए हर दिन स्वीकार किया गया था, उदारता से तेल डालना, खट्टा क्रीम या बेरी जेली प्रारंभिक रूप से रूसी अर्थ में, मास्लेंनेस्सा वसंत का एक बुतपरस्त अवकाश था, हमारे पूर्वजों ने सूरज की पहली किरणों और सौर मंडल के अपने स्वरूप की याद दिलाते हुए पके हुए पेनकेक्स पर आनन्द किया। इसे सुबह से शाम तक पैनकेक्स खाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता था, देवताओं को खुश करने और वसंत गर्मी के आगमन में तेजी लाने के लिए। कई मास्टेस्टस ने पहली पैनकेक को मुख्य भाग में छोड़ दियाबुतपरस्त देवता Perun, जो चाहिए था मवेशी और बिजली बिजली, प्राचीन स्लाव से अधिक प्रेरणादायक भय के नुकसान से घर पर दया करने के लिए। क्या आपको लगता है कि आप में से क्यों "सबसे खराब पहले" प्रश्न के उत्तर मिल गया है? इस phraseologism ज्यादा यह तुलना में अधिक जटिल की उत्पत्ति पहली बार में लग सकता है। तो अपना समय ले, कहानी जल्दी से उनके रहस्य बताने के लिए पसंद नहीं है। यहां तक कि अगर आपको पेनकेक्स पसंद नहीं है, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ताइस वाक्यांश को एक से अधिक बार कहा। तो, लगभग कहने के अर्थ को समझें। यदि आप पहले प्रयास में कुछ नहीं कर सकते हैं, तो आप खुद को दिलासा देते हैं, कहते हैं कि पहला पैनकेक ढेलेदार है इस अर्थ में अभिव्यक्ति की उत्पत्ति बहुत पारदर्शी है - यह हमेशा ऐसा नहीं होता है जो पहले प्रयास के साथ तर्क करता है, क्योंकि सभी में कुछ अनुभव होना आवश्यक है। लेकिन कहावत की उपस्थिति के प्रागितिहास पेनकेक्स के बेकिंग के दौरान साधारण क्रियाओं से जुड़ा हुआ है। स्वादिष्ट और नाजुक पेनकेक्स के रहस्यों में से एकएक बहुत गर्म फ्राइंग पैन है इससे आप आसानी से उन्हें बदल सकते हैं, परिणामस्वरूप, पेनकेक्स पके हुए और गुलाबी होते हैं लेकिन फ्राइंग पैन को गरम करने की प्रक्रिया कुछ समय लगती है, इसलिए अनुभवहीन गृहिणियां हीटिंग के समय की गणना नहीं कर सका और फ्राइंग पैन में आटा डालना जो वांछित तापमान तक नहीं पहुंच पाई। नतीजतन, पैनकेक छड़ी करना शुरू कर देता है और इसे बंद नहीं करता, जिसके कारण इसे गलत गंदे में बदल दिया जाता है, जो मेज पर एक डिश के रूप में सेवा करने के लिए शर्म की बात है। इसे कहा जाता है - पहला पैनकेक गांठ, वाक्यांश का मूल और उसके अर्थ, बहुत से इसे इस में देखते हैं, हमारे द्वारा वर्णित इतिहास। ऐसा लगता है कि सब कुछ सरल है, लेकिन इसके अतिरिक्त, सबसे आम संस्करण, मंडल की एक विस्तृत श्रृंखला में अज्ञात इस वाक्यांश की उत्पत्ति के कई रूप हैं। अतीत से हमेशा वाक्यांश हमारे पास इतने तक पहुंचे,जैसा कि हमारे पूर्वजों ने उन्हें योजना बनाई थी रूसी भाषा के कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि अपने मूल रूप में प्रसिद्ध वाक्यांश "कोमा से पहले पैनकेक" की तरह लग रहा था, और आधुनिक व्यक्ति के कान से ज्यादा परिचित नहीं था- "पहला पैनकेक ढेलेदार है।" इस मामले में इस वाक्यांश की उत्पत्ति गहन बुतपरस्त महत्व का है। रूस में सबसे प्राचीन समय से बहुत सम्मानित किया गया थाभालू के पंथ। ताकतवर जानवर न केवल जंगल के मालिक, लेकिन यह भी कमजोर और जरूरतमंद के रक्षक माना जाता था। एक व्यापक अर्थ में, भालू शरीर में कोई जानवरों और उनके संरक्षण के तहत निष्पक्ष वन, लेने वाला की भावना, और लोग हैं, जो जानते हैं कि कैसे देवता के साथ साथ पाने के लिए और यह सम्मान करने के लिए देखा गया था। शब्द "भालू" का भी इसका अर्थ था, क्योंकि यहयह दो विशिष्ट शब्दों "शहद" और "जानने" से बनता है लेकिन कॉमेट कहां हैं, आप पूछते हैं यह कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है प्राचीन स्लाव ने शीतलता में सर्दियों को खर्च करने के लिए भालू की पवित्र कांपने की क्षमता लाई थी। यह स्थिति हमारे पूर्वजों द्वारा मृत्यु की एक तरह के रूप में देखी गई थी, और भालू की आत्मा को पुनरुत्थान के रूप में जागने और मौत पर जीवन की जीत के रूप में जागृत किया गया था। हाइबरनेशन की स्थिति के लिए, एक विशेष शब्द गढ़ा गया था, मा। उन्होंने आत्माओं के पवित्र सपने को चिह्नित किया था, और आत्माओं को अक्सर कोमास कहा जाता था। उन्हें तंग करने के लिए, भूमि-भाड़े ने पहले पैनकेक को भेंट के रूप में दिया और भविष्य में सभी मामलों में वन मालिक की मदद पर भरोसा कर सके। ऐसे वैज्ञानिक हैं जो बहुत गहरे लगते हैं"कोमा" शब्द के अर्थ में वे शब्द "अंतरिक्ष" और प्राचीन स्लावों की परंपराओं के व्यापक अर्थों में समझ के बीच एक समान समानता को आकर्षित करते हैं। कई अध्ययनों के अनुसार, हमारे पूर्वजों को न केवल प्राकृतिक घटनाओं के लिए जिम्मेदार मूर्तिपूजक देवताओं के देवताओं के बारे में एक विचार था, बल्कि इससे भी अधिक महत्वपूर्ण देवता के बारे में भी था जो सभी के ऊपर था। यह वे थे जिन्होंने इसे एक गांठ कहा था बाद में, शब्द "अंतरिक्ष" दिखाई दिया। कोम सब कुछ के निर्माता था और सकता हैबाकी देवताओं को आज्ञा दें हैरानी की बात है, प्राचीन स्लाव के इस देवता के निवास को नक्षत्र उर्स मेजर कहा जाता है। यह एक विशाल भालू के साथ था कि मूर्तिपूजक देवी लाडा को पास के रूप में चित्रित किया गया था, जो हमें प्राचीन रस में भालू पंथ के महान महत्व के बारे में बताता है। कुछ इतिहासकारों ने संस्करण को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया"कोमा" शब्द के साथ भालू की भावना की पहचान के बारे में लेकिन कहावत की मूल ध्वनि के साथ वे सहमत होते हैं। ये सिर्फ कोमा है, ये वैज्ञानिक एक निश्चित श्रेणी के लोगों को कहते हैं। ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, रूस में कोमा अक्सर भिखारी या अपंग कहलाते थे। इन लोगों के पास अपना आवास और आय नहीं था, वेएक क्षेत्र से दूसरे स्थान पर चले गए और दान की कीमत पर मौजूद। अक्सर, comas बहुत प्रतिभाशाली थे और निष्पक्ष शो में भाग लिया। उन्होंने भैंसों की भूमिका निभाई और भालू की खाल में कपड़े पहने, पूरे प्रदर्शन खेल रहे थे अपने काम के लिए धन कोमा नहीं मिली, लेकिन वे स्वेच्छा से भोजन ले गए। इसलिए यह आश्चर्य की बात नहीं है कि पहले पकाया गयापैनकेक मालकिन के दावत पर गरीबों और भिकारीों को उनके घर और परिवार पर आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए त्याग करने के लिए तैयार थे आखिरकार, रूस में हर समय, दान को आत्मा के लिए शुद्ध माना जाता था, यह एक तरह से या किसी अन्य समृद्धि और सामाजिक स्थिति के हमारे पूर्वजों में लगे हुए थे। भाषाविद् हैं जो मानते हैं कि कहावत"पहले पैनकेक ढेलेदार है," जिसकी उत्पत्ति हम आज पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं, वह पूरी तरह से हमारे दिनों तक नहीं पहुंच पाई है। तथ्य यह है कि रूसी लोगों की आतिथ्य हमारे देश से बहुत दूर जाना जाता था। गलतियों ने मेहमान, दोस्तों और परिचितों को खिलाने का उनका कर्तव्य माना। और केवल तब ही खाना शुरू करो खासकर जब पेनकेक्स के रूप में इस तरह के एक उत्सव के डिब्बे में आए ऐतिहासिक रूप से, केवल सबसे ताज़ा और सर्वोत्तम उत्पाद पैनकेक आटा के लिए इस्तेमाल किया गया था अन्यथा, यह सोचा गया कि यह सेंकना करने के लिए परेशान करने के लायक भी नहीं था - आटा नहीं बढ़ेगा, पेनकेक्स बेस्वाद होने के लिए निकलेगा। भाषाविदों के अनुसार, कहावत थाअगले संस्करण में हमारे पूर्वजों ने आविष्कार किया - "कॉमस के लिए पहला पैनकेक, दूसरे परिचित, तीसरे दूर के परिजन और मेरे पास चौथे।" किसी भी मामले में, पेनकेक्स के पहले कोमा को जाता है, और केवल उत्सव के अंतिम मालिक। यह एकमात्र तरीका है जो स्लाव को केवल सच मानता है।
आप अलग-अलग उपयोग करते हैं"पाक" वाक्यांशों? सबसे अधिक संभावना है, हाँ वे हमारे जीवन में दृढ़ता से स्थापित हो गए हैं और ज्यादातर मामलों में प्रेरणा द्वारा उपयोग किया जाता है। उनके वास्तविक अर्थ के बारे में, हम कभी-कभी अनुमान नहीं लगाते हैं। उदाहरण के लिए, हर कोई यह जानता है कि "पहले पैनकेक ढेलेदार" उत्पत्ति के बारे में कुछ भी नहीं हो सकता है जिसके बारे में हम सोचते हैं सब के बाद, प्राचीन रूस में, कई बुतपरस्त विश्वास थे, जो स्वादिष्ट भोजन के साथ आत्माओं को लुभाने के लिए थे। हम किस बारे में बात कर रहे हैं? हां, कि कहावत की उत्पत्ति "पहले पैनकेक ढेलेदार है" बहुत असामान्य हो सकती है और उसका पवित्र अर्थ हो सकता है। दुनिया भर में पेनकेक्स को रूसी मूल रूप से माना जाता हैआविष्कार। उनके पास अंग्रेजी और फ्रेंच में एनालॉग नहीं होते हैं, जो उनके मूल के सिद्धांत की पुष्टि करते हैं। इतिहासकारों का मानना है कि रूसी ब्लिनी एक हजार साल से कम उम्र का नहीं है यद्यपि पहली बार ऐसी पकवान का उल्लेख नौवीं शताब्दी तक है। यह निश्चित है कि पेनकेक्स के लिए नुस्खा का आविष्कार करने वाले लोगों के लिए नहीं जाना जाता है, लेकिन इस आविष्कार की आकस्मिकता के बारे में एक किंवदंती है। इतिहासकार इस सिद्धांत का पालन करते हैं कि गृहिणियों के किसी से ओवन में गलती से दलिया को भूल गया था, और यह थोड़ा तली हुई था। नतीजतन, यह एक स्वादिष्ट और असामान्य पकवान निकला, अंततः दैनिक मेनू में प्रवेश किया। रूस पेनकेक्स में बहुत लोकप्रिय थेएक प्रकार का अनाज और राई के आटे से, वे अक्सर विभिन्न fillings के साथ बना रहे थे समय के साथ, पेनकेक्स को स्मारक पकवान के रूप में इस्तेमाल करना शुरू किया जाता था, वे बड़ी मात्रा में पके हुए थे और गरीबों को वितरित किया जाता था ताकि वे एक प्रकार के शब्द से मृतक को याद कर सकें। हमारे कई समकालीन सहयोगी मूलबातें "पहले पैनकेक ढेलेदार है" छुट्टी Maslenitsa के साथ इस समय यह पैनकेक को सेंकना और उन्हें खाने के लिए हर दिन स्वीकार किया गया था, उदारता से तेल डालना, खट्टा क्रीम या बेरी जेली प्रारंभिक रूप से रूसी अर्थ में, मास्लेंनेस्सा वसंत का एक बुतपरस्त अवकाश था, हमारे पूर्वजों ने सूरज की पहली किरणों और सौर मंडल के अपने स्वरूप की याद दिलाते हुए पके हुए पेनकेक्स पर आनन्द किया। इसे सुबह से शाम तक पैनकेक्स खाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता था, देवताओं को खुश करने और वसंत गर्मी के आगमन में तेजी लाने के लिए। कई मास्टेस्टस ने पहली पैनकेक को मुख्य भाग में छोड़ दियाबुतपरस्त देवता Perun, जो चाहिए था मवेशी और बिजली बिजली, प्राचीन स्लाव से अधिक प्रेरणादायक भय के नुकसान से घर पर दया करने के लिए। क्या आपको लगता है कि आप में से क्यों "सबसे खराब पहले" प्रश्न के उत्तर मिल गया है? इस phraseologism ज्यादा यह तुलना में अधिक जटिल की उत्पत्ति पहली बार में लग सकता है। तो अपना समय ले, कहानी जल्दी से उनके रहस्य बताने के लिए पसंद नहीं है। यहां तक कि अगर आपको पेनकेक्स पसंद नहीं है, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ताइस वाक्यांश को एक से अधिक बार कहा। तो, लगभग कहने के अर्थ को समझें। यदि आप पहले प्रयास में कुछ नहीं कर सकते हैं, तो आप खुद को दिलासा देते हैं, कहते हैं कि पहला पैनकेक ढेलेदार है इस अर्थ में अभिव्यक्ति की उत्पत्ति बहुत पारदर्शी है - यह हमेशा ऐसा नहीं होता है जो पहले प्रयास के साथ तर्क करता है, क्योंकि सभी में कुछ अनुभव होना आवश्यक है। लेकिन कहावत की उपस्थिति के प्रागितिहास पेनकेक्स के बेकिंग के दौरान साधारण क्रियाओं से जुड़ा हुआ है। स्वादिष्ट और नाजुक पेनकेक्स के रहस्यों में से एकएक बहुत गर्म फ्राइंग पैन है इससे आप आसानी से उन्हें बदल सकते हैं, परिणामस्वरूप, पेनकेक्स पके हुए और गुलाबी होते हैं लेकिन फ्राइंग पैन को गरम करने की प्रक्रिया कुछ समय लगती है, इसलिए अनुभवहीन गृहिणियां हीटिंग के समय की गणना नहीं कर सका और फ्राइंग पैन में आटा डालना जो वांछित तापमान तक नहीं पहुंच पाई। नतीजतन, पैनकेक छड़ी करना शुरू कर देता है और इसे बंद नहीं करता, जिसके कारण इसे गलत गंदे में बदल दिया जाता है, जो मेज पर एक डिश के रूप में सेवा करने के लिए शर्म की बात है। इसे कहा जाता है - पहला पैनकेक गांठ, वाक्यांश का मूल और उसके अर्थ, बहुत से इसे इस में देखते हैं, हमारे द्वारा वर्णित इतिहास। ऐसा लगता है कि सब कुछ सरल है, लेकिन इसके अतिरिक्त, सबसे आम संस्करण, मंडल की एक विस्तृत श्रृंखला में अज्ञात इस वाक्यांश की उत्पत्ति के कई रूप हैं। अतीत से हमेशा वाक्यांश हमारे पास इतने तक पहुंचे,जैसा कि हमारे पूर्वजों ने उन्हें योजना बनाई थी रूसी भाषा के कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि अपने मूल रूप में प्रसिद्ध वाक्यांश "कोमा से पहले पैनकेक" की तरह लग रहा था, और आधुनिक व्यक्ति के कान से ज्यादा परिचित नहीं था- "पहला पैनकेक ढेलेदार है।" इस मामले में इस वाक्यांश की उत्पत्ति गहन बुतपरस्त महत्व का है। रूस में सबसे प्राचीन समय से बहुत सम्मानित किया गया थाभालू के पंथ। ताकतवर जानवर न केवल जंगल के मालिक, लेकिन यह भी कमजोर और जरूरतमंद के रक्षक माना जाता था। एक व्यापक अर्थ में, भालू शरीर में कोई जानवरों और उनके संरक्षण के तहत निष्पक्ष वन, लेने वाला की भावना, और लोग हैं, जो जानते हैं कि कैसे देवता के साथ साथ पाने के लिए और यह सम्मान करने के लिए देखा गया था। शब्द "भालू" का भी इसका अर्थ था, क्योंकि यहयह दो विशिष्ट शब्दों "शहद" और "जानने" से बनता है लेकिन कॉमेट कहां हैं, आप पूछते हैं यह कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है प्राचीन स्लाव ने शीतलता में सर्दियों को खर्च करने के लिए भालू की पवित्र कांपने की क्षमता लाई थी। यह स्थिति हमारे पूर्वजों द्वारा मृत्यु की एक तरह के रूप में देखी गई थी, और भालू की आत्मा को पुनरुत्थान के रूप में जागने और मौत पर जीवन की जीत के रूप में जागृत किया गया था। हाइबरनेशन की स्थिति के लिए, एक विशेष शब्द गढ़ा गया था, मा। उन्होंने आत्माओं के पवित्र सपने को चिह्नित किया था, और आत्माओं को अक्सर कोमास कहा जाता था। उन्हें तंग करने के लिए, भूमि-भाड़े ने पहले पैनकेक को भेंट के रूप में दिया और भविष्य में सभी मामलों में वन मालिक की मदद पर भरोसा कर सके। ऐसे वैज्ञानिक हैं जो बहुत गहरे लगते हैं"कोमा" शब्द के अर्थ में वे शब्द "अंतरिक्ष" और प्राचीन स्लावों की परंपराओं के व्यापक अर्थों में समझ के बीच एक समान समानता को आकर्षित करते हैं। कई अध्ययनों के अनुसार, हमारे पूर्वजों को न केवल प्राकृतिक घटनाओं के लिए जिम्मेदार मूर्तिपूजक देवताओं के देवताओं के बारे में एक विचार था, बल्कि इससे भी अधिक महत्वपूर्ण देवता के बारे में भी था जो सभी के ऊपर था। यह वे थे जिन्होंने इसे एक गांठ कहा था बाद में, शब्द "अंतरिक्ष" दिखाई दिया। कोम सब कुछ के निर्माता था और सकता हैबाकी देवताओं को आज्ञा दें हैरानी की बात है, प्राचीन स्लाव के इस देवता के निवास को नक्षत्र उर्स मेजर कहा जाता है। यह एक विशाल भालू के साथ था कि मूर्तिपूजक देवी लाडा को पास के रूप में चित्रित किया गया था, जो हमें प्राचीन रस में भालू पंथ के महान महत्व के बारे में बताता है। कुछ इतिहासकारों ने संस्करण को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया"कोमा" शब्द के साथ भालू की भावना की पहचान के बारे में लेकिन कहावत की मूल ध्वनि के साथ वे सहमत होते हैं। ये सिर्फ कोमा है, ये वैज्ञानिक एक निश्चित श्रेणी के लोगों को कहते हैं। ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, रूस में कोमा अक्सर भिखारी या अपंग कहलाते थे। इन लोगों के पास अपना आवास और आय नहीं था, वेएक क्षेत्र से दूसरे स्थान पर चले गए और दान की कीमत पर मौजूद। अक्सर, comas बहुत प्रतिभाशाली थे और निष्पक्ष शो में भाग लिया। उन्होंने भैंसों की भूमिका निभाई और भालू की खाल में कपड़े पहने, पूरे प्रदर्शन खेल रहे थे अपने काम के लिए धन कोमा नहीं मिली, लेकिन वे स्वेच्छा से भोजन ले गए। इसलिए यह आश्चर्य की बात नहीं है कि पहले पकाया गयापैनकेक मालकिन के दावत पर गरीबों और भिकारीों को उनके घर और परिवार पर आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए त्याग करने के लिए तैयार थे आखिरकार, रूस में हर समय, दान को आत्मा के लिए शुद्ध माना जाता था, यह एक तरह से या किसी अन्य समृद्धि और सामाजिक स्थिति के हमारे पूर्वजों में लगे हुए थे। भाषाविद् हैं जो मानते हैं कि कहावत"पहले पैनकेक ढेलेदार है," जिसकी उत्पत्ति हम आज पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं, वह पूरी तरह से हमारे दिनों तक नहीं पहुंच पाई है। तथ्य यह है कि रूसी लोगों की आतिथ्य हमारे देश से बहुत दूर जाना जाता था। गलतियों ने मेहमान, दोस्तों और परिचितों को खिलाने का उनका कर्तव्य माना। और केवल तब ही खाना शुरू करो खासकर जब पेनकेक्स के रूप में इस तरह के एक उत्सव के डिब्बे में आए ऐतिहासिक रूप से, केवल सबसे ताज़ा और सर्वोत्तम उत्पाद पैनकेक आटा के लिए इस्तेमाल किया गया था अन्यथा, यह सोचा गया कि यह सेंकना करने के लिए परेशान करने के लायक भी नहीं था - आटा नहीं बढ़ेगा, पेनकेक्स बेस्वाद होने के लिए निकलेगा। भाषाविदों के अनुसार, कहावत थाअगले संस्करण में हमारे पूर्वजों ने आविष्कार किया - "कॉमस के लिए पहला पैनकेक, दूसरे परिचित, तीसरे दूर के परिजन और मेरे पास चौथे।" किसी भी मामले में, पेनकेक्स के पहले कोमा को जाता है, और केवल उत्सव के अंतिम मालिक। यह एकमात्र तरीका है जो स्लाव को केवल सच मानता है।
तमिलनाडु हेलिकॉप्टर हादसे में शहीद स्क्वॉड्रन लीडर कुलदीप सिंह राव का शनिवार को राजस्थान के झुंझुनू में उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार हुआ। घरों की छतों से लेकर सड़कें तक लोगों से पट गईं। सम्मान में तिरंगा लहराया, नारे लगे. . . पर एक चीख सबको रुला गई। ये चीख थी कुलदीप की पत्नी यश्विनी की। कुलदीप की पार्थिव देह दिल्ली से एयरफोर्स के विमान में आई। पत्नी यश्विनी और कुलदीप की बहन भी साथ ही आए। यश्विनी ने कुलदीप की तस्वीर सीने से लगा रखी थी। सेना के ट्रक में रखी पार्थिव देह को एकटक देखती रही। सास आई तो उन्हें सीने से लगाकर ढांढस बंधाया। मां ने भी बेटे की तस्वीर को चूमा और सैल्यूट किया। यश्विनी चुप रही, कुछ नहीं बोली. . . कुलदीप की ओर देखती रही। चिता को मुखाग्नि दी गई और जय हिंद का जयघोष गूंजने लगा। यश्विनी भी शहीद पति को सैल्यूट करते हुए जय हिंद के नारे लगा रही थी, पर अचानक चीखते हुए बोली- I LOVE YOU कुलदीप। मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं। यश्विनी की ये चीख हर दिल को भेद गई। आसपास खड़े लोगों ने उन्हें संभाला, पर पति की चिता पर यश्विनी का ये रुदन गूंजता ही रहा- कुलदीप, आई लव यू। कुलदीप की मां ने बेटे की तस्वीर को चूमा। आंखों में आंसू भरे थे, लेकिन देश के लिए बेटे के फर्ज का अहसास भी था। लगातार नारे लगाती रही- जय हिंद। शहीद की अंत्येष्टि में महिलाएं भी शामिल हुईं, अपने दुधमुंहे बच्चों के साथ। राजस्थान और खासकर शेखावाटी में अब ये परंपरा बन गई है कि महिलाएं भी शहीद की अंत्येष्टि में शामिल हो रही हैं। बहन भी दिल्ली से अपने भाई कुलदीप के पार्थिव शरीर के साथ गांव पहुंची। यहां मां-बाप को हिम्मत दी। घर से जब कुलदीप का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था तो बेटी ने अपने पिता को संभाला। वे पूरे रास्ते अपने पिता का हाथ थामे चलती रहीं। हवाई पट्टी से लेकर गांव तक लोगों का जनसैलाब दिखा। गांव से अंतिम यात्रा गुजरी। लोगों ने फूल बरसाए। छतों पर खड़े लोग अपने लाल के अंतिम दर्शन के लिए इंताजर कर रहे थे। हालात ये थे कि पैर रखने की जगह नहीं थी। गांव के चौक में शहीद कुलदीप सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
तमिलनाडु हेलिकॉप्टर हादसे में शहीद स्क्वॉड्रन लीडर कुलदीप सिंह राव का शनिवार को राजस्थान के झुंझुनू में उनके पैतृक गांव में अंतिम संस्कार हुआ। घरों की छतों से लेकर सड़कें तक लोगों से पट गईं। सम्मान में तिरंगा लहराया, नारे लगे. . . पर एक चीख सबको रुला गई। ये चीख थी कुलदीप की पत्नी यश्विनी की। कुलदीप की पार्थिव देह दिल्ली से एयरफोर्स के विमान में आई। पत्नी यश्विनी और कुलदीप की बहन भी साथ ही आए। यश्विनी ने कुलदीप की तस्वीर सीने से लगा रखी थी। सेना के ट्रक में रखी पार्थिव देह को एकटक देखती रही। सास आई तो उन्हें सीने से लगाकर ढांढस बंधाया। मां ने भी बेटे की तस्वीर को चूमा और सैल्यूट किया। यश्विनी चुप रही, कुछ नहीं बोली. . . कुलदीप की ओर देखती रही। चिता को मुखाग्नि दी गई और जय हिंद का जयघोष गूंजने लगा। यश्विनी भी शहीद पति को सैल्यूट करते हुए जय हिंद के नारे लगा रही थी, पर अचानक चीखते हुए बोली- I LOVE YOU कुलदीप। मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं। यश्विनी की ये चीख हर दिल को भेद गई। आसपास खड़े लोगों ने उन्हें संभाला, पर पति की चिता पर यश्विनी का ये रुदन गूंजता ही रहा- कुलदीप, आई लव यू। कुलदीप की मां ने बेटे की तस्वीर को चूमा। आंखों में आंसू भरे थे, लेकिन देश के लिए बेटे के फर्ज का अहसास भी था। लगातार नारे लगाती रही- जय हिंद। शहीद की अंत्येष्टि में महिलाएं भी शामिल हुईं, अपने दुधमुंहे बच्चों के साथ। राजस्थान और खासकर शेखावाटी में अब ये परंपरा बन गई है कि महिलाएं भी शहीद की अंत्येष्टि में शामिल हो रही हैं। बहन भी दिल्ली से अपने भाई कुलदीप के पार्थिव शरीर के साथ गांव पहुंची। यहां मां-बाप को हिम्मत दी। घर से जब कुलदीप का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था तो बेटी ने अपने पिता को संभाला। वे पूरे रास्ते अपने पिता का हाथ थामे चलती रहीं। हवाई पट्टी से लेकर गांव तक लोगों का जनसैलाब दिखा। गांव से अंतिम यात्रा गुजरी। लोगों ने फूल बरसाए। छतों पर खड़े लोग अपने लाल के अंतिम दर्शन के लिए इंताजर कर रहे थे। हालात ये थे कि पैर रखने की जगह नहीं थी। गांव के चौक में शहीद कुलदीप सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
गई है। इस आशय के आदेश अपर सचिव धर्म सिंह मीणा की ओर से जारी किए गए हैं। इस आधार पर अपर प्रमुख वन संरक्षक, वन्यजीव व सदस्य-सचिव पर्वतारोहण समिति, उत्तराखंड की ओर से इन चोटियों को खोले जाने की शासन से अनुमति मांगी गई थी। जिस पर सोमवार को शासन ने सशर्त अनुमति प्रदान कर दी। इन शर्तों के साथ मिलेगी अनुमतिः - पर्वतारोहण गाइडलाइन 2004 के अनुसार, किसी भी पर्वत चोटी पर प्रत्येक माह में दो पर्वतारोही टीमों और एक कैलेंडर वर्ष में कुल 12 टीमों को ही के साथ आरोहण की अनुमति दी जाएगी। एक टीम में 10 सदस्य ही अनुमन्य है, जो अतिरिक्त शुल्क अधिकतम 12 तक हो सकते हैं। - मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, उत्तराखंड एवं संबंधित प्रभागीय वनाधिकारियों की ओर से पर्वतारोहण के लिए पर्वतारोहियों को अनुमति एवं गाइडलाइन की आवश्यक शर्तों का पालन कराया जाएगा। - भारतीय पर्वतारोहण संस्थान, नई दिल्ली की ओर पर्वतारोहण अभियानों के लिए अधिरोपित शर्तों के साथ-साथ अन्य सुसंगत वन, वन्यजीव, जैव विविधता, नियमों, अधिनियमों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। - पर्वतारोहण के लिए टीम के सभी पर्वतारोहियों के आईडी कार्ड, टीम का निर्धारित कार्यक्रम, रूट मैप और निर्धारित शुल्क प्राप्त करने के बाद ही सक्षम अधिकारी की ओर से अनुमति जारी की जाएगी। - पर्वतारोहियों की ओर से पर्वत चोटी पर निर्धारित बेस कैंपों में ही अस्थायी तंबू लगाए जाएंगे। - पर्वतारोहियों की ओर से साथ ले जाई जा रही अजैविक सामग्री के लिए विदेशी टीम से 10 हजार एवं भारतीय टीम से 5 हजार की बंधक धनराशि जमा कराई जाएगी। जो उन्हें वापसी पर चेकपोस्ट पर अजैविक सामग्री दिखाने पर वापस कर दी जाएगी।
गई है। इस आशय के आदेश अपर सचिव धर्म सिंह मीणा की ओर से जारी किए गए हैं। इस आधार पर अपर प्रमुख वन संरक्षक, वन्यजीव व सदस्य-सचिव पर्वतारोहण समिति, उत्तराखंड की ओर से इन चोटियों को खोले जाने की शासन से अनुमति मांगी गई थी। जिस पर सोमवार को शासन ने सशर्त अनुमति प्रदान कर दी। इन शर्तों के साथ मिलेगी अनुमतिः - पर्वतारोहण गाइडलाइन दो हज़ार चार के अनुसार, किसी भी पर्वत चोटी पर प्रत्येक माह में दो पर्वतारोही टीमों और एक कैलेंडर वर्ष में कुल बारह टीमों को ही के साथ आरोहण की अनुमति दी जाएगी। एक टीम में दस सदस्य ही अनुमन्य है, जो अतिरिक्त शुल्क अधिकतम बारह तक हो सकते हैं। - मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, उत्तराखंड एवं संबंधित प्रभागीय वनाधिकारियों की ओर से पर्वतारोहण के लिए पर्वतारोहियों को अनुमति एवं गाइडलाइन की आवश्यक शर्तों का पालन कराया जाएगा। - भारतीय पर्वतारोहण संस्थान, नई दिल्ली की ओर पर्वतारोहण अभियानों के लिए अधिरोपित शर्तों के साथ-साथ अन्य सुसंगत वन, वन्यजीव, जैव विविधता, नियमों, अधिनियमों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। - पर्वतारोहण के लिए टीम के सभी पर्वतारोहियों के आईडी कार्ड, टीम का निर्धारित कार्यक्रम, रूट मैप और निर्धारित शुल्क प्राप्त करने के बाद ही सक्षम अधिकारी की ओर से अनुमति जारी की जाएगी। - पर्वतारोहियों की ओर से पर्वत चोटी पर निर्धारित बेस कैंपों में ही अस्थायी तंबू लगाए जाएंगे। - पर्वतारोहियों की ओर से साथ ले जाई जा रही अजैविक सामग्री के लिए विदेशी टीम से दस हजार एवं भारतीय टीम से पाँच हजार की बंधक धनराशि जमा कराई जाएगी। जो उन्हें वापसी पर चेकपोस्ट पर अजैविक सामग्री दिखाने पर वापस कर दी जाएगी।
जाकर नाक कान मे छेद करवा आई और फिर मेरा धन डूबता गया। मेरी तो पत्नी के हाथो मे जैसे छेद है छेद ।" दुर्गुणी ने परमानद उफ सनकी लात को लाल आखो से देखा तो उनकी घिग्घी बध गई । सामने धमचद अब तक चौवीस सुइयो मे धागा डालकर खड़े हुए थे । दुर्गुणी से बोले, "लगता है आयें कमज़ोर हो गई हैं। सुइयों के छेद तक नही नजर आते । यह लो जैसे उस मटके वाले ने एक एक मटका पानी का भर के दिखाया था, तभी आप ले गयी थी, में एक एक सुई के छेद से धागा आर पार करके देता हू फिर शिकायत न आये यह लो यह लो " कहते हुए उन्होंने सारी सुइयो से घागे खीच निकाले और फिर वाले कागज मे सारी सुइया छद करके दुर्गुणी की तरफ मुस्कराते हुए ऐसे बढाईं जैसे किसी ने कत्था चूना लगावर पान की गिलौरी दी है । दुर्गुणी चुपके से सुइया लेकर घर जा पहुची। फिर धागा डालने लगी फिर छेद नदारद । धागे की नोक थूक से गीली करती, उगलियों से सिवइयों की तरह मरोडती, पर नामुराद धागा था कि यहा वहा भटकता फिरता था। उसे लग रहा था कोई बाधा दौड मे से जैसे किसी को सुरग से निकलना तो है लेकिन निकल नही पा रहा। अब दुर्गुणी ने धागे को थोडी और थूक लगाई। सुई की तरफ ऐसे वढाया जैसे कोई शिकारी अपना तीर साध रहा हो। या कोई जादूगर आग के गोले से निकलने को कमर कस कर रहा हो- पर नामुराद सुई का छेद ही नही। वे अपने बेटे पप्पू से बोल उठी- तूने तो आख की डाक्टरी पास कर ली, पर आस की जाच परख न हुई । मेरी जण आख देख । लगता है, कुछ इही मे सरावी आ गई है, वरना यह कैसे हो गया कि सुई में छेद हो और मुझे छेद भी नजर न आवे । अये । मैं तो कल से देख रही हू, पीतल की छलनी के भी सारे छेद बाद हो गये हैं। बाहर जो तेरे पिता ने जालीदार सीमेन्ट को टुकडिया लगवाई थी, वह भी सीधी सपाट हो गई हैं। देख तो मेरी आख को कुछ हुआ है या सारी चीजो के मुह बाद हो गये है ।" और वह सिरथाम कर बैठ गई । उनका बेटा आख का डाक्टर हो गया, लेकिन उनके लिए वही पप्पू ही था । इसीलिए अगले दिन पप्पू ने उहे कह दिया--" दो दिन बाद आख टेस्ट होगी।" दुर्गणी बोली"- मैंने आठवी जमात तो पास कर ली बेटा । अब कौन से टेस्ट दूगो 'तू ऐसे हो देस ले। किती कमज़ोर है आस पर लिया होगा । मैं अब कोई टेस्ट न दूगो हा ।" लेकिन उन पप्पू अगले दिन उन्हे जैसे तैसे मनाकर अस्पताल ले गया, तब उसे ध्यान आया, आस पडोस की औरतो ने खूबसूरत डिजायनदार चश्मे चढा रहे हैं। अब यह भी उनमे शामिल होगी । दुर्गुणो ने सोचा- सोने के फेम मे शीशे जडवा लूगी । आयँ गमज़ोर हुई तो उन्हे कुछ तो फायदा मिले। पति रामरग के पास ढेरो सोना था । दुर्गुणी ने कान मे छ मुकिया पहन रखी थी। नाक मे मोने का लोग था । आज वा काटा भो उसने सुन तो रखा था, लेआय मे छेद करवाकर वह कैसे आज घा वाटा पहनती । अव मौरा मिला था तो सोच लिया, पप्पू से बहेगीसिर्फ सोने के चश्मे में ही फिट होंगे आम के शोशे । उह । आखें भी क्या ला हैं। भूसी रहती हैं, लेविन वमजोर नही होती । वमजोर होती हैं तो नजर ही नहीं आता कि क्या हुआ । यो उसे आठवी पाम करने के बाद से ही मस्ते उपयाम पढने का चाव हो गया था पर आये किस किस चीज्र से कमजोर होती हैं, यह वह न समझ सको। अब टेस्ट की घडी मिर पर आ गई। आस पर चश्मा चढा कर ऐसे रख दिया कि जैसे कोई स्टैण्ड हो जहा अब चीजें टागी जायेंगी । (वह) पप्पू उस चश्मे मे एक एक करके शीशे घढाता निकालता । सामने का लिसा अ व सद ज साफ होता जा रहा था । बहुत स्पष्ट वाह वाह । कहकर वह युशी से उछल पड़ी। जैसे कोई बहुत बडा टैस्ट दे दिया हो । डाक्टर ने अव जैसे टेस्ट षे नम्बर दिये हो । शायद तीन और चार नम्बर के शीशे थे । एक पर्ची बना पर पप्पू ने उहे घर भिजवा दिया । अगले ही दिन सोने का पानी चढा चश्मा दुर्गुणी को आख के लिए आ गया था । दुर्गुणी चाहती तो थी कि चश्मे का भी किसी से उदघाटन करचाये पप्पू कह रहा था, नजदीव और दूर का चश्मा अलग अलग बनेगा । दूर वालो को भी नजदीक लाने को कितना अच्छा तरीका है । पप्पू चश्मे के शीगे बार बार ऐसे पोछ रहा था जैसे चमका रहा हो, या तेज़ कर रहा हो । दुर्गुणो ने भो अपनी आखें बार बार पोछी । कान पोछे । पप्पू ने दो हाथो से ऐन उनकी तरफ ऐसे बढाई जैसे किसी अमूल्य वस्तु को तश्तरी मे लाकर पश किया जाय । दुर्गुणी ने पप्पू के आगे मुह झुकाया ओर ऐनक को सिर आखा पर धारण करने को वढी । आह । कमानी ने दोनो कान कस कर पकड लिए थे । आसो पर जैसे फेम करा दिया हो । अब उनमे धूल पडने का भो इतना खतरा न रहेगा । नाक पर चश्मा ऐसे फिट बैठा था जैसे यह नाक इसी चश्मे के लिए ही बनी थी। दुर्गुणी ने अब चश्मा टेस्ट करने का सोचा । सामने देखा तो आगन मे सीमेट की जालीदार झरोखो मे एवं एक छेद साफ दिखाई दिया। आगन के बाह्र सडक पर देखा - जेद्रो कासिंग को सफेद मोटी लकीरें उभर कर साफ नज़र आने लगी । हर आदमी का चेहरा साफ सुथरा, हर आदमी ने भाज ही जसे धुले कपडे पहने हो । दीवारों पर नई सफेदी हो गई - यह सब एक ही रात का चमत्कार है । जहा सब तरफ एक जाला सा नजर आता था, वह हट गया । आज तक उसे दूर से आते हुए आदमी के आख कान नाक कभी न नजर आये । लम्बे छोटे बालो से हो अदाजा तगा लेती थी कि आने वाला पुष्प है या स्त्री । लेकिन जब से समानता के अधिकार मागने वालियो ने सिर के बाल भी पुरपनुमा करा लिए थे, तब से बेचारी की यह पहचान भी जाती रही । वह आगे पीछे देखकर ही सामने वाले की नमस्ते का जवाव दिया करती थी । पहले हर आदमी आधुनिक चित्रकला का नमूना था, अब वह (चाहे कितनाही गदा हो) उसे साफ दिखाई दे रहा था। दुर्गुणी खुशी से फूली न ममाई । पप्पू भी खुश था कि आज पहली बार उसे अपनी मा की सेवा का मौवा मिला था । उसने मा से पूछ ही लिया - "भामने का पेड दिखाई दे रहा है, मा। ' "हा, हा, उसके पत्ते दिखाई दे रहे है, पत्तो की धारिया भी दिखाई दे रही है रे 'ऐं ।" पप्पू की लगा मा की आखें जरूरत से ज्यादा तेज हो गयी हैं कि तभी गौर से देखा ~~ अब वह नजदीक का चश्मा साफ करके आख पर चा रही है पप्पू तुरन्त बोला--- "ओहो, पहले उस चश्मे को उतारो, तभी तो दूसरा चढेगा ।" "अये हा, एक ही नाव जो ठहरी । वरना दो होती तो एक पर पास का चश्मा लटका रहता पप्पू अभी वहा से गया भीन था कि दुगुणी बोल उठी-"अब ले आना वर्मचन्द की दुकान की दालें पत्थर बीन बीन कर, दाल और पत्थर अलग अलग तुलवाऊंगी अब तक वह लूटना रहा है । पत्थरो की कीमत पिछली दालो से घटा घटा कर ही पैसे दूगी ।" दुर्गुणी का पाव पिछले दिनो दुर्गुणों ने जाने कैमी दवाई खाई थी कि शरीर फूलता जा रहा था। कभी गाल फूले होते तो कभी आखें सूजी हुईं । दुर्गुणी अपनी शक्ल शीशे मे देखती तो हसी आ जाती । और किसी के गाल इतने फूले होते तो शायद मुक्का मारकर उन्हें पिचका देती लेकिन यह तो मोटे हो चुके थे जैसे दूध मे भोगी डवलरोटी हो या तीन चार दिन पडे आटे की रोटी हो । बार वार अपना चेहरा देखती । लगता था ज़रूर कही से उसके भीतर हवा भरती चली जा रही है। बैठे बैठे उसे लगता वह पहिया बन गई है उसे फुला दिया गया है अब वह गोल गोल चक्कर काटेगी। कभी मोटर का पहिया कभी स्कूटर का पहिया - हाय राम सोचकर वह फिर मुह फुला कर बैठनी तो सोच लेती अब तो गाल ऐसे फूल चुके है कि मुह फूला हुआ है या नही यह अन्दाजा भी नहीं लगाया जा सकता, वाह 1 अब वह खडी होती तो अपने आपको सभालती । देह फूल गई थी लेकिन पाव वही थे। उनमे सूजन आई तो ऐसे कि ऐडियो के ऊपर का हिस्सा फूला हुआ था टाग और पैर को जोड़ने वाली हड्डिया फूली हुई थी । दुर्गुणी खडी होती तो पैर जैसे भार सभालने से इन्कार कर देते । जाना कही और चाहती थी लेकिन पैर कही और मुडे हुए होते । वह अपने पैरो को सकेत देना चाहती थी पर पैर कहा सुनते है किसी की । वह तो तू तडाक जवाब देना ही जानते हैं । वस बात बेबात पर जवाब देने लगते । आज सुबह से पाव का दद बढ गया था जब से उनका बेटा डाक्टर पप्पू दौरे पर गया था उन्हे एक भी बीमारी न थी । आज वह वापस आने लगा था तो वीमारी भी आने लगी। अरे हाय रे । कहकर वह रोने लगी। दर्द भी जाने कैसे उठता । पैर के ऊपर के हिस्से मे दर्द की लहर मी उठती सारा शरीरझनझना जाता था । जैसे कोई दद को छेड रहा हो- फिर वह दर्द आतो मे से होता हुआ मस्तिष्क मे जा पहुंचा है । हाय क्या होगा ? कहकर वह अपने पाव को देखने लगी। इतना नीचे होने पर, हर वक्त जमीन चाटने पर भी देखो तो कैसे ठाठ से रहते है । दो पल मे ही सारी जमीन नाप लेते हैं। सारे शरीर का बोझ ढोना इ हे अच्छा लगता है वैसे अगर आदमी भी चलते समय अपने दोनो हाथ, पाव के साथ जोड़कर चलने लगे तो शायद वह ज्यादा तेज चले लेकिन हाथ तो कोमल है - अगर मेरे पाव को कुछ हो गया तो ? तभी दुर्गुणी को अपनी आखो के आगे लाठी टेकते वैसाखी लगाये लोग दिखाई दिये। उसने घबराकर दोनो हाथो से मुह ढाप लिया ज़ोर से रो पड़ी "मेरे पाव की रक्षा करो भगवान । यह पाव कभी गलत रास्ते पर नही चले । इन पावो पर में अपने आप खडी हुई। अच्छा पति मिला, पुत्र मिला, धनधान्य, रूप सम्पन्नता सब मिला । लेकिन पाव ही न होगा तो यह सब व्यथ है । पाव के बिना तो कोई चल ही नहीं सकता, कुछ हो ही नहीं सकता। कायदे से देखो । पेड की तरह तो यह पाव जड हैं। जडो की तरह इनमे ही पानी डालो तो पूरी देह हरी भरी रहे । शुक्र है पाव मिट्टी मे जकडे हुए नही थे वरना कितनी मुश्किल होती। पर हाय मिट्टी मे जकडे होते तो अच्छा था । सराव अच्छे तो नजर न आते । अगर तगडाकर चलना पड़ा तो - हाय । सोचकर उनके पाव का दर्द और बढ़ गया । अब वह लौट गई तो लगा दर्द सीधी लकीर की तरह पाव से लेकर आस तक लम्बा है। रह रहकर टीस सी उठनी । पाव को गौर से देखने लगा पाव थोडा फूल रहा है फिर पिचक रहा है - फिर फूल जाता है, उहे हैरानी हुई । जी चाहा सबसे कहे देखो देखो पाव सास ले रहा है पर फिर चुप हो गई । कहे तो किसे कहे । बेटा डाक्टर हो तो बीमार होकर भी तसल्ली तो रहती है। आये तो सही पप्पू । हो सकता है पाव की हड्डी गल गई हो । कौन कहे कोई फोडा हो । आजकल तो हडिडयो पर फोडे निकल आते है - जाने कैसे कैसे रोग आ गए है । इलाज निकले नही और रोग दिनोदिन सवार हो रहे हैं। पहले भली प्रकार रोग हो, डाक्टर इलाज इन्जेक्शन निकाले तभी तो यह रोग प्रचलित हो । हर ऐरे गैरे को भी अब बडे से वडा रोग होने लगा है। हाय रे पप्पू में मर गई रे । हड्डियो के डाक्टर को दिखा दे । कहकर वह चुप हो गई। फिर सोचा अगर हडिडयो का डाक्टर सिर्फ हड्डियो का ढाचा मात्र होता या फिर ? हा हड्डिया देखने के लिए पहले तो पूरे शरीर की खाल अलग करके किनारे पर रख देता फिर हरेक हडडी उलट पलट कर देखता और उनमे जो
जाकर नाक कान मे छेद करवा आई और फिर मेरा धन डूबता गया। मेरी तो पत्नी के हाथो मे जैसे छेद है छेद ।" दुर्गुणी ने परमानद उफ सनकी लात को लाल आखो से देखा तो उनकी घिग्घी बध गई । सामने धमचद अब तक चौवीस सुइयो मे धागा डालकर खड़े हुए थे । दुर्गुणी से बोले, "लगता है आयें कमज़ोर हो गई हैं। सुइयों के छेद तक नही नजर आते । यह लो जैसे उस मटके वाले ने एक एक मटका पानी का भर के दिखाया था, तभी आप ले गयी थी, में एक एक सुई के छेद से धागा आर पार करके देता हू फिर शिकायत न आये यह लो यह लो " कहते हुए उन्होंने सारी सुइयो से घागे खीच निकाले और फिर वाले कागज मे सारी सुइया छद करके दुर्गुणी की तरफ मुस्कराते हुए ऐसे बढाईं जैसे किसी ने कत्था चूना लगावर पान की गिलौरी दी है । दुर्गुणी चुपके से सुइया लेकर घर जा पहुची। फिर धागा डालने लगी फिर छेद नदारद । धागे की नोक थूक से गीली करती, उगलियों से सिवइयों की तरह मरोडती, पर नामुराद धागा था कि यहा वहा भटकता फिरता था। उसे लग रहा था कोई बाधा दौड मे से जैसे किसी को सुरग से निकलना तो है लेकिन निकल नही पा रहा। अब दुर्गुणी ने धागे को थोडी और थूक लगाई। सुई की तरफ ऐसे वढाया जैसे कोई शिकारी अपना तीर साध रहा हो। या कोई जादूगर आग के गोले से निकलने को कमर कस कर रहा हो- पर नामुराद सुई का छेद ही नही। वे अपने बेटे पप्पू से बोल उठी- तूने तो आख की डाक्टरी पास कर ली, पर आस की जाच परख न हुई । मेरी जण आख देख । लगता है, कुछ इही मे सरावी आ गई है, वरना यह कैसे हो गया कि सुई में छेद हो और मुझे छेद भी नजर न आवे । अये । मैं तो कल से देख रही हू, पीतल की छलनी के भी सारे छेद बाद हो गये हैं। बाहर जो तेरे पिता ने जालीदार सीमेन्ट को टुकडिया लगवाई थी, वह भी सीधी सपाट हो गई हैं। देख तो मेरी आख को कुछ हुआ है या सारी चीजो के मुह बाद हो गये है ।" और वह सिरथाम कर बैठ गई । उनका बेटा आख का डाक्टर हो गया, लेकिन उनके लिए वही पप्पू ही था । इसीलिए अगले दिन पप्पू ने उहे कह दिया--" दो दिन बाद आख टेस्ट होगी।" दुर्गणी बोली"- मैंने आठवी जमात तो पास कर ली बेटा । अब कौन से टेस्ट दूगो 'तू ऐसे हो देस ले। किती कमज़ोर है आस पर लिया होगा । मैं अब कोई टेस्ट न दूगो हा ।" लेकिन उन पप्पू अगले दिन उन्हे जैसे तैसे मनाकर अस्पताल ले गया, तब उसे ध्यान आया, आस पडोस की औरतो ने खूबसूरत डिजायनदार चश्मे चढा रहे हैं। अब यह भी उनमे शामिल होगी । दुर्गुणो ने सोचा- सोने के फेम मे शीशे जडवा लूगी । आयँ गमज़ोर हुई तो उन्हे कुछ तो फायदा मिले। पति रामरग के पास ढेरो सोना था । दुर्गुणी ने कान मे छ मुकिया पहन रखी थी। नाक मे मोने का लोग था । आज वा काटा भो उसने सुन तो रखा था, लेआय मे छेद करवाकर वह कैसे आज घा वाटा पहनती । अव मौरा मिला था तो सोच लिया, पप्पू से बहेगीसिर्फ सोने के चश्मे में ही फिट होंगे आम के शोशे । उह । आखें भी क्या ला हैं। भूसी रहती हैं, लेविन वमजोर नही होती । वमजोर होती हैं तो नजर ही नहीं आता कि क्या हुआ । यो उसे आठवी पाम करने के बाद से ही मस्ते उपयाम पढने का चाव हो गया था पर आये किस किस चीज्र से कमजोर होती हैं, यह वह न समझ सको। अब टेस्ट की घडी मिर पर आ गई। आस पर चश्मा चढा कर ऐसे रख दिया कि जैसे कोई स्टैण्ड हो जहा अब चीजें टागी जायेंगी । पप्पू उस चश्मे मे एक एक करके शीशे घढाता निकालता । सामने का लिसा अ व सद ज साफ होता जा रहा था । बहुत स्पष्ट वाह वाह । कहकर वह युशी से उछल पड़ी। जैसे कोई बहुत बडा टैस्ट दे दिया हो । डाक्टर ने अव जैसे टेस्ट षे नम्बर दिये हो । शायद तीन और चार नम्बर के शीशे थे । एक पर्ची बना पर पप्पू ने उहे घर भिजवा दिया । अगले ही दिन सोने का पानी चढा चश्मा दुर्गुणी को आख के लिए आ गया था । दुर्गुणी चाहती तो थी कि चश्मे का भी किसी से उदघाटन करचाये पप्पू कह रहा था, नजदीव और दूर का चश्मा अलग अलग बनेगा । दूर वालो को भी नजदीक लाने को कितना अच्छा तरीका है । पप्पू चश्मे के शीगे बार बार ऐसे पोछ रहा था जैसे चमका रहा हो, या तेज़ कर रहा हो । दुर्गुणो ने भो अपनी आखें बार बार पोछी । कान पोछे । पप्पू ने दो हाथो से ऐन उनकी तरफ ऐसे बढाई जैसे किसी अमूल्य वस्तु को तश्तरी मे लाकर पश किया जाय । दुर्गुणी ने पप्पू के आगे मुह झुकाया ओर ऐनक को सिर आखा पर धारण करने को वढी । आह । कमानी ने दोनो कान कस कर पकड लिए थे । आसो पर जैसे फेम करा दिया हो । अब उनमे धूल पडने का भो इतना खतरा न रहेगा । नाक पर चश्मा ऐसे फिट बैठा था जैसे यह नाक इसी चश्मे के लिए ही बनी थी। दुर्गुणी ने अब चश्मा टेस्ट करने का सोचा । सामने देखा तो आगन मे सीमेट की जालीदार झरोखो मे एवं एक छेद साफ दिखाई दिया। आगन के बाह्र सडक पर देखा - जेद्रो कासिंग को सफेद मोटी लकीरें उभर कर साफ नज़र आने लगी । हर आदमी का चेहरा साफ सुथरा, हर आदमी ने भाज ही जसे धुले कपडे पहने हो । दीवारों पर नई सफेदी हो गई - यह सब एक ही रात का चमत्कार है । जहा सब तरफ एक जाला सा नजर आता था, वह हट गया । आज तक उसे दूर से आते हुए आदमी के आख कान नाक कभी न नजर आये । लम्बे छोटे बालो से हो अदाजा तगा लेती थी कि आने वाला पुष्प है या स्त्री । लेकिन जब से समानता के अधिकार मागने वालियो ने सिर के बाल भी पुरपनुमा करा लिए थे, तब से बेचारी की यह पहचान भी जाती रही । वह आगे पीछे देखकर ही सामने वाले की नमस्ते का जवाव दिया करती थी । पहले हर आदमी आधुनिक चित्रकला का नमूना था, अब वह उसे साफ दिखाई दे रहा था। दुर्गुणी खुशी से फूली न ममाई । पप्पू भी खुश था कि आज पहली बार उसे अपनी मा की सेवा का मौवा मिला था । उसने मा से पूछ ही लिया - "भामने का पेड दिखाई दे रहा है, मा। ' "हा, हा, उसके पत्ते दिखाई दे रहे है, पत्तो की धारिया भी दिखाई दे रही है रे 'ऐं ।" पप्पू की लगा मा की आखें जरूरत से ज्यादा तेज हो गयी हैं कि तभी गौर से देखा ~~ अब वह नजदीक का चश्मा साफ करके आख पर चा रही है पप्पू तुरन्त बोला--- "ओहो, पहले उस चश्मे को उतारो, तभी तो दूसरा चढेगा ।" "अये हा, एक ही नाव जो ठहरी । वरना दो होती तो एक पर पास का चश्मा लटका रहता पप्पू अभी वहा से गया भीन था कि दुगुणी बोल उठी-"अब ले आना वर्मचन्द की दुकान की दालें पत्थर बीन बीन कर, दाल और पत्थर अलग अलग तुलवाऊंगी अब तक वह लूटना रहा है । पत्थरो की कीमत पिछली दालो से घटा घटा कर ही पैसे दूगी ।" दुर्गुणी का पाव पिछले दिनो दुर्गुणों ने जाने कैमी दवाई खाई थी कि शरीर फूलता जा रहा था। कभी गाल फूले होते तो कभी आखें सूजी हुईं । दुर्गुणी अपनी शक्ल शीशे मे देखती तो हसी आ जाती । और किसी के गाल इतने फूले होते तो शायद मुक्का मारकर उन्हें पिचका देती लेकिन यह तो मोटे हो चुके थे जैसे दूध मे भोगी डवलरोटी हो या तीन चार दिन पडे आटे की रोटी हो । बार वार अपना चेहरा देखती । लगता था ज़रूर कही से उसके भीतर हवा भरती चली जा रही है। बैठे बैठे उसे लगता वह पहिया बन गई है उसे फुला दिया गया है अब वह गोल गोल चक्कर काटेगी। कभी मोटर का पहिया कभी स्कूटर का पहिया - हाय राम सोचकर वह फिर मुह फुला कर बैठनी तो सोच लेती अब तो गाल ऐसे फूल चुके है कि मुह फूला हुआ है या नही यह अन्दाजा भी नहीं लगाया जा सकता, वाह एक अब वह खडी होती तो अपने आपको सभालती । देह फूल गई थी लेकिन पाव वही थे। उनमे सूजन आई तो ऐसे कि ऐडियो के ऊपर का हिस्सा फूला हुआ था टाग और पैर को जोड़ने वाली हड्डिया फूली हुई थी । दुर्गुणी खडी होती तो पैर जैसे भार सभालने से इन्कार कर देते । जाना कही और चाहती थी लेकिन पैर कही और मुडे हुए होते । वह अपने पैरो को सकेत देना चाहती थी पर पैर कहा सुनते है किसी की । वह तो तू तडाक जवाब देना ही जानते हैं । वस बात बेबात पर जवाब देने लगते । आज सुबह से पाव का दद बढ गया था जब से उनका बेटा डाक्टर पप्पू दौरे पर गया था उन्हे एक भी बीमारी न थी । आज वह वापस आने लगा था तो वीमारी भी आने लगी। अरे हाय रे । कहकर वह रोने लगी। दर्द भी जाने कैसे उठता । पैर के ऊपर के हिस्से मे दर्द की लहर मी उठती सारा शरीरझनझना जाता था । जैसे कोई दद को छेड रहा हो- फिर वह दर्द आतो मे से होता हुआ मस्तिष्क मे जा पहुंचा है । हाय क्या होगा ? कहकर वह अपने पाव को देखने लगी। इतना नीचे होने पर, हर वक्त जमीन चाटने पर भी देखो तो कैसे ठाठ से रहते है । दो पल मे ही सारी जमीन नाप लेते हैं। सारे शरीर का बोझ ढोना इ हे अच्छा लगता है वैसे अगर आदमी भी चलते समय अपने दोनो हाथ, पाव के साथ जोड़कर चलने लगे तो शायद वह ज्यादा तेज चले लेकिन हाथ तो कोमल है - अगर मेरे पाव को कुछ हो गया तो ? तभी दुर्गुणी को अपनी आखो के आगे लाठी टेकते वैसाखी लगाये लोग दिखाई दिये। उसने घबराकर दोनो हाथो से मुह ढाप लिया ज़ोर से रो पड़ी "मेरे पाव की रक्षा करो भगवान । यह पाव कभी गलत रास्ते पर नही चले । इन पावो पर में अपने आप खडी हुई। अच्छा पति मिला, पुत्र मिला, धनधान्य, रूप सम्पन्नता सब मिला । लेकिन पाव ही न होगा तो यह सब व्यथ है । पाव के बिना तो कोई चल ही नहीं सकता, कुछ हो ही नहीं सकता। कायदे से देखो । पेड की तरह तो यह पाव जड हैं। जडो की तरह इनमे ही पानी डालो तो पूरी देह हरी भरी रहे । शुक्र है पाव मिट्टी मे जकडे हुए नही थे वरना कितनी मुश्किल होती। पर हाय मिट्टी मे जकडे होते तो अच्छा था । सराव अच्छे तो नजर न आते । अगर तगडाकर चलना पड़ा तो - हाय । सोचकर उनके पाव का दर्द और बढ़ गया । अब वह लौट गई तो लगा दर्द सीधी लकीर की तरह पाव से लेकर आस तक लम्बा है। रह रहकर टीस सी उठनी । पाव को गौर से देखने लगा पाव थोडा फूल रहा है फिर पिचक रहा है - फिर फूल जाता है, उहे हैरानी हुई । जी चाहा सबसे कहे देखो देखो पाव सास ले रहा है पर फिर चुप हो गई । कहे तो किसे कहे । बेटा डाक्टर हो तो बीमार होकर भी तसल्ली तो रहती है। आये तो सही पप्पू । हो सकता है पाव की हड्डी गल गई हो । कौन कहे कोई फोडा हो । आजकल तो हडिडयो पर फोडे निकल आते है - 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सामाजिक विज्ञान में ए-लेवल क्या है? अध्ययन के इस कोर्स से समाज विज्ञान, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, अपराध विज्ञान, नृविज्ञान और अधिक सहित छात्रों के ज्ञान में विस्तार की जानकारी मिल सकती है। छात्र व्यक्तियों, समूहों और समाजों और उनके आसपास के परिवेश के बीच के संबंधों को देख सकते हैं। कार्यक्रम संस्कृति, सामाजिक स्तरीकरण, बिजली, परिवार, मीडिया और देवता जैसे विषयों में अन्वेषण की पेशकश कर सकते हैं। कई कार्यक्रम पूरे अध्ययन में अनुसंधान विधियों के विकास पर भी ध्यान केंद्रित करते हैं। छात्र लाभ की एक सीमा के साथ छोड़ सकते हैं उत्थान वाले अनुसंधान कौशल छात्रों को उच्च शिक्षा हासिल करने में सफल हो सकते हैं या पेशे में प्रवेश कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सांस्कृतिक संरचनाओं को समझने और अलग-अलग उद्देश्यों का विश्लेषण करने के लिए सीखने से छात्रों को विभिन्न प्रकार के क्षेत्रों में पदों का अधिग्रहण करने में मदद मिल सकती है। चयनित संस्था के आधार पर ए-लेवल के अध्ययन लागत भिन्न होती हैं कई छात्र एक कार्यक्रम में दो साल बिताते हैं, लेकिन अध्ययन की लंबाई अलग-अलग हो सकती है। छात्र उन्हें बजट की सहायता के लिए एक शोधित वित्तीय योजना बनाना चाहते हैं। कई छात्र पूरा होने के बाद विश्वविद्यालय की शिक्षा का पीछा करना चुनते हैं। हालांकि, कुछ लोग तुरंत कार्यबल में प्रवेश करना चुन सकते हैं अंत में, छात्रों को सार्वजनिक और निजी दोनों संगठनों में कैरियर विकल्प का विस्तृत चयन मिल सकता है। कुछ व्यक्ति सामुदायिक विकास में पदों का प्रबंधन करने के लिए प्रबंधकों और अधिकारियों के रूप में चुन सकते हैं। दूसरों को सुधार अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, सलाहकार या सामुदायिक संसाधन विशेषज्ञों के रूप में करियर का चयन कर सकते हैं। अध्ययन के फोकस के आधार पर, छात्र राजनीति या कानून में प्रवेश भी चुन सकते हैं। कई संस्थान सामाजिक विज्ञान में एक स्तर की पेशकश करते हैं। ऑनलाइन विकल्प अवसरों के विस्तृत चयन के लिए अधिक से अधिक पहुंच वाले छात्रों को प्रदान करते हैं। अपनी शैक्षिक खोज शुरू करने के लिए, नीचे अपने कार्यक्रम की तलाश करें और मुख्य रूप से भरकर अपनी पसंद के विद्यालय के प्रवेश कार्यालय से सीधे संपर्क करें।
सामाजिक विज्ञान में ए-लेवल क्या है? अध्ययन के इस कोर्स से समाज विज्ञान, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, अपराध विज्ञान, नृविज्ञान और अधिक सहित छात्रों के ज्ञान में विस्तार की जानकारी मिल सकती है। छात्र व्यक्तियों, समूहों और समाजों और उनके आसपास के परिवेश के बीच के संबंधों को देख सकते हैं। कार्यक्रम संस्कृति, सामाजिक स्तरीकरण, बिजली, परिवार, मीडिया और देवता जैसे विषयों में अन्वेषण की पेशकश कर सकते हैं। कई कार्यक्रम पूरे अध्ययन में अनुसंधान विधियों के विकास पर भी ध्यान केंद्रित करते हैं। छात्र लाभ की एक सीमा के साथ छोड़ सकते हैं उत्थान वाले अनुसंधान कौशल छात्रों को उच्च शिक्षा हासिल करने में सफल हो सकते हैं या पेशे में प्रवेश कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, सांस्कृतिक संरचनाओं को समझने और अलग-अलग उद्देश्यों का विश्लेषण करने के लिए सीखने से छात्रों को विभिन्न प्रकार के क्षेत्रों में पदों का अधिग्रहण करने में मदद मिल सकती है। चयनित संस्था के आधार पर ए-लेवल के अध्ययन लागत भिन्न होती हैं कई छात्र एक कार्यक्रम में दो साल बिताते हैं, लेकिन अध्ययन की लंबाई अलग-अलग हो सकती है। छात्र उन्हें बजट की सहायता के लिए एक शोधित वित्तीय योजना बनाना चाहते हैं। कई छात्र पूरा होने के बाद विश्वविद्यालय की शिक्षा का पीछा करना चुनते हैं। हालांकि, कुछ लोग तुरंत कार्यबल में प्रवेश करना चुन सकते हैं अंत में, छात्रों को सार्वजनिक और निजी दोनों संगठनों में कैरियर विकल्प का विस्तृत चयन मिल सकता है। कुछ व्यक्ति सामुदायिक विकास में पदों का प्रबंधन करने के लिए प्रबंधकों और अधिकारियों के रूप में चुन सकते हैं। दूसरों को सुधार अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, सलाहकार या सामुदायिक संसाधन विशेषज्ञों के रूप में करियर का चयन कर सकते हैं। अध्ययन के फोकस के आधार पर, छात्र राजनीति या कानून में प्रवेश भी चुन सकते हैं। कई संस्थान सामाजिक विज्ञान में एक स्तर की पेशकश करते हैं। ऑनलाइन विकल्प अवसरों के विस्तृत चयन के लिए अधिक से अधिक पहुंच वाले छात्रों को प्रदान करते हैं। अपनी शैक्षिक खोज शुरू करने के लिए, नीचे अपने कार्यक्रम की तलाश करें और मुख्य रूप से भरकर अपनी पसंद के विद्यालय के प्रवेश कार्यालय से सीधे संपर्क करें।
जर्मनी की लग्जरी कार निर्माता कंपनी BMW ने भारतीय बाजार में अपनी BMW 5-सीरीज सेडान कार को इलेक्ट्रिक और ICE वेरिएंट में लॉन्च करने वाली है। कंपनी ने कार के ICE मॉडल को BMW 5-सीरीज और इलेक्ट्रिक मॉडल को BMW i5 xड्राइव नाम दिया है। रिपोर्ट्स की मानें तो BMW इन दोनों गाड़ियों को 24 मई को लॉन्च करने की योजना बना रही है। इनकी डिलीवरी साल के अंत में शुरू होगी। आइये इनके बारे में जानते हैं । डिजाइन की बात करें तो नई BMW 5-सीरीज में एक लंबा तराशा हुआ हुड, बड़ी किडनी ग्रिल, स्प्लिट-टाइप LED हेडलाइट्स, कैपेसिटिव बटन के साथ डोर हैंडल और रैप-अराउंड LED टेललैंप्स दिए गए हैं। अंदर की तरफ इस सेडान कार में डैशबोर्ड पर फुल-चौड़ाई वाले लाइट बैंड के साथ एक शानदार केबिन दिया गया है। इसमें 10. 2-इंच का इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और 12. 3-इंच का इंफोटेनमेंट सिस्टम और 8K स्क्रीन दी गई है। BMW 5-सीरीज में 2. 0-लीटर के इनलाइन-फोर डीजल इंजन मिल सकता है, जो 188hp की अधिकतम पावर और और 400Nm का पीक टॉर्क जनरेट करता है। ट्रांसमिशन के लिए इस इंजन को 8-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स से जोड़ा गया है। यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए कार में ड्राइवर एयरबैग, पैसेंजर एयरबैग और नी एयरबैग के साथ-साथ फ्रंट और रियर साइड एयरबैग्स जैसे फीचर्स दिए गए हैं। यह बेहद ही आरामदायक सेडान कार होगी। ऑल-न्यू BMW i5 xड्राइव इलेक्ट्रिक कार में एक लंबा और मस्कुलर हुड, इल्यूमिनेटेड किडनी ग्रिल, स्प्लिट-टाइप क्रिस्टल LED हेडलाइट्स, क्रोम-लाइन्ड विंडो, शार्क-फिन एंटीना और रैप-अराउंड LED टेललाइट्स मिल सकते हैं। अंदर की तरफ इस EV में प्रीमियम और बड़ा 5-सीटर केबिन, हीटिंग और मसाज तकनीक के साथ सीटें, पीछे के यात्रियों के लिए रूफ पर 8K स्क्रीन, आई-ड्राइव 8 के साथ एक इंफोटेनमेंट पैनल मिलेंगे, जो ब्लूटूथ और एंड्रॉयड ऑटो को सपोर्ट करता है। BMW i5 में ड्यूल इलेक्ट्रिक मोटर्स दी गई है, जो 90kWh की बैटरी पैक से जुड़ी हैं। यह सेटअप 590hp की पावर और 650Nm का पीक टॉर्क जनरेट करने में सक्षम होगा। यह इलेक्ट्रिक कार में फ़ास्ट चार्जिंग तकनीक को भी जोड़ा गया है। इसे मात्र 34 मिनट में 80 प्रतिशत तक चार्ज किया जा सकता है। यह फ्लैगशिप EV एक बार चार्ज करने पर 474 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम होगी। क्या होगी इन दोनों गाड़ियों की कीमत?
जर्मनी की लग्जरी कार निर्माता कंपनी BMW ने भारतीय बाजार में अपनी BMW पाँच-सीरीज सेडान कार को इलेक्ट्रिक और ICE वेरिएंट में लॉन्च करने वाली है। कंपनी ने कार के ICE मॉडल को BMW पाँच-सीरीज और इलेक्ट्रिक मॉडल को BMW iपाँच xड्राइव नाम दिया है। रिपोर्ट्स की मानें तो BMW इन दोनों गाड़ियों को चौबीस मई को लॉन्च करने की योजना बना रही है। इनकी डिलीवरी साल के अंत में शुरू होगी। आइये इनके बारे में जानते हैं । डिजाइन की बात करें तो नई BMW पाँच-सीरीज में एक लंबा तराशा हुआ हुड, बड़ी किडनी ग्रिल, स्प्लिट-टाइप LED हेडलाइट्स, कैपेसिटिव बटन के साथ डोर हैंडल और रैप-अराउंड LED टेललैंप्स दिए गए हैं। अंदर की तरफ इस सेडान कार में डैशबोर्ड पर फुल-चौड़ाई वाले लाइट बैंड के साथ एक शानदार केबिन दिया गया है। इसमें दस. दो-इंच का इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर और बारह. तीन-इंच का इंफोटेनमेंट सिस्टम और आठ केल्विन स्क्रीन दी गई है। BMW पाँच-सीरीज में दो. शून्य-लीटर के इनलाइन-फोर डीजल इंजन मिल सकता है, जो एक सौ अठासीhp की अधिकतम पावर और और चार सौNm का पीक टॉर्क जनरेट करता है। ट्रांसमिशन के लिए इस इंजन को आठ-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स से जोड़ा गया है। यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए कार में ड्राइवर एयरबैग, पैसेंजर एयरबैग और नी एयरबैग के साथ-साथ फ्रंट और रियर साइड एयरबैग्स जैसे फीचर्स दिए गए हैं। यह बेहद ही आरामदायक सेडान कार होगी। ऑल-न्यू BMW iपाँच xड्राइव इलेक्ट्रिक कार में एक लंबा और मस्कुलर हुड, इल्यूमिनेटेड किडनी ग्रिल, स्प्लिट-टाइप क्रिस्टल LED हेडलाइट्स, क्रोम-लाइन्ड विंडो, शार्क-फिन एंटीना और रैप-अराउंड LED टेललाइट्स मिल सकते हैं। अंदर की तरफ इस EV में प्रीमियम और बड़ा पाँच-सीटर केबिन, हीटिंग और मसाज तकनीक के साथ सीटें, पीछे के यात्रियों के लिए रूफ पर आठ केल्विन स्क्रीन, आई-ड्राइव आठ के साथ एक इंफोटेनमेंट पैनल मिलेंगे, जो ब्लूटूथ और एंड्रॉयड ऑटो को सपोर्ट करता है। BMW iपाँच में ड्यूल इलेक्ट्रिक मोटर्स दी गई है, जो नब्बे किलोवाट-घंटा की बैटरी पैक से जुड़ी हैं। यह सेटअप पाँच सौ नब्बेhp की पावर और छः सौ पचासNm का पीक टॉर्क जनरेट करने में सक्षम होगा। यह इलेक्ट्रिक कार में फ़ास्ट चार्जिंग तकनीक को भी जोड़ा गया है। इसे मात्र चौंतीस मिनट में अस्सी प्रतिशत तक चार्ज किया जा सकता है। यह फ्लैगशिप EV एक बार चार्ज करने पर चार सौ चौहत्तर किलोग्राममीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम होगी। क्या होगी इन दोनों गाड़ियों की कीमत?
* योगोश्वरं शिवं वन्दे वन्दे योगेश्वरं हरिम् * ( २ ) अन्तश्शदानुविद्ध सविकल्प समाधि'अत्राय पुरुषः स्वयंज्योतिः' इत्यादि श्रुतिके श्रवण और चिन्तनसे स्वयप्रकाशरूप आत्माकार वृत्ति करना ही 'अन्तश्शब्दानुविद्ध सविकल्प समाधि' है । ( ३ ) अन्तर्दृश्यानु विद्ध और अन्तरशब्दानुविद्ध समाधियोंके अभ्याससे होनेवाली 'अन्तर्निर्विकल्प समाधि' - इसमें चित्तकी स्थिति 'अचलदीपवत्' अथवा जैसा कि गीतामे कहा है, 'यथा दीपो निवातस्यो नेङ्गते सोपमा स्मृता' - निवातस्थ दीपके समान होती है। अर्थात् दृश्य और शब्द दोनों सम्बन्ध छूट जाते हैं और अचल दीपशिखा-सी साक्ष्याकारवृत्ति होती है । ( ४ ) बाह्य दृश्यानुविद्ध सविकल्प समाधि चाहर जगत्के पदार्थोंको देखकर होनेवाली नामरूपाकार वृत्तिको त्यागकर अर्थात् नाम और रूपगत मायांशको त्यागकर उसके अस्ति-भाति- प्रियरूप ब्रह्मांशका अनुसन्धान करना 'बाह्यदृश्यानुविद्ध सविकल्प समाधि' है । ( ५ ) वाह्य शब्दानुविद्ध सविकल्प समाधि- 'सत्य ज्ञानमनन्त ब्रह्म', 'सदेव सौम्येदमग्र आसीत्' इत्यादि तत्पद निर्देश करनेवाले वाक्योंसे चराचर जगत्का ब्रह्मरूपसे चिन्तन करना - वृत्तिको ब्रह्माकार करना 'बाह्य शब्दानुविद्ध सविकल्प समाघि' है । ( ६ ) वाह्य दृश्यानुषिद्ध और बाह्य शब्दानुविद्ध सविकल्प समाधियोंके अभ्याससे जो स्थिति होती है, जिसमें नामरूपोंको देखते हुए अस्ति-भाति- प्रियरूपकी ओर ध्यान बॅघता है, वृत्ति निस्तरङ्ग होकर ब्रह्माकार होती है, उस स्थितिको 'बाह्य निर्विकल्प समाधि' कहते हैं । वह 'निस्तरङ्गसमुद्रवत्' अथवा 'कल्पाम्बुनीरवत्' होती है । [ त्वपद साक्षीका निर्देश करनेवाले वाक्य अन्तदशब्दानुविद्ध समाधिके बोधक शब्द हैं और तत्पदार्थका बोध करानेवाले वाक्य वाह्य शब्दानुषिद्ध समाधिके साधक शब्द हैं, ऐसा समझना चाहिये । ] आत्मसाक्षात्कार और जगन्मिथ्यात्वका निश्चय होनेपर भी जीवन्मुक्तको नामरूपाकार जगत्की प्रतीति होती ही है। नदी किनारे खड़े होनेसे नदीके जलमें अपना उलटा प्रतिविम्व दिखायी देता है अर्थात् सिर नीचे और पैर ऊपर दिखायी देते हैं । अभ्यासकी दृढ़तासे जगत्का मिथ्याभास नहीं रह जाता । ऐसी समाधि उपर्युक्त घट् समाधियोंके अभ्यास से प्राप्त होती है। उसका वर्णन शब्दोंसे नहीं हो सकता । यह स्वसवेद्य ही है। यह समाधि सप्तभूमिकाकी छठी भूमिका है। उत्थाने वाप्यनुत्यानेऽप्यप्रमत्तो जितेन्द्रिय. । समाधिपटक कुर्वीत सर्वदा प्रयतो यतिः ॥९००॥ विपरीतार्थ धीर्यावन नि. शेषं निवर्तते । स्वरूपस्फुरण यावश्न प्रसिद्धयत्यनिर्गलम् । सावरसमाधिपट्केन नयेत्कालं निरन्तरम् ॥९०१॥ ( श्रीशङ्कराचार्यकृत 'सर्ववेदान्नतिद्धान्तनारसग्रह) 'उत्थानमें और अनुत्थानमे भी, अप्रमत्त और जितेन्द्रिय होकर यतशील साधक इस समाविषट्का अभ्यास करे । मायाजनित 'आवरण' और 'विक्षेप' सर्वथा जबतक नष्ट नहीं होते अर्थात् आत्माके ऊपर तद्विपरीत जमी हुई अनात्मबुद्धि ( ब्रह्म में होनेवाली जगद्बुद्धि ) जबतक समूल उखड़ नहीं जाती तबतक इस समाधिका निरन्तर अभ्यास करना चाहिये । इसमें कभी प्रमाद न हो । ' न प्रमादोऽत्र कर्तव्यो विदुपा मोक्षमिच्छता । प्रमादे जृम्भते माया सूर्यापाये तमो यथा ॥९०२॥ स्वानुभूतिं परिष्यज्य न तिष्ठन्ति क्षण बुधा । स्वानुभूतौ प्रमादो यः स मृत्युनं यम. सताम् ॥९०३॥ भावार्थ - मोक्षकी इच्छा करनेवाला विद्वान् इस अभ्यासमें कदापि प्रमाद ( गलती, गफलत, आलत्य ) न होने दे । कारण, सूर्यास्तकालमें जैसे अन्धकार, वैसे ही प्रमादम मायाका उद्भव होता है । तत्त्वज्ञानी पुरुष स्वानुभूति छोड़कर एक क्षण भी नहीं रहते, कारण, वे यह जानते है कि स्वानुभूति प्रमादका होना ही ज्ञानियोंकी मृत्यु है, यम मृत्यु नहीं ।' इन षट् समाधियोंमें पहली तीन समाधियाँ अपने भीतर साधनेकी हैं और आगेकी तीन समाधियाँ सम्पूर्ण द्वैतनिवृत्ति के लिये बाहरी दृश्य जगत्में साधनेकी हैं । यथा समाधित्रितय यज्ञेन क्रियते हृदि । तथैव बाह्यदेशेऽपि कार्य द्वैतनिवृत्तये ॥ ( सर्ववेदान्तसिद्धान्तसारसंग्रह ) भिद्यते हृदयप्रन्थिश्छिद्यन्ते सर्वसशयाः । क्षीयन्ते चास्य कर्माणि तस्मिन् दृष्टे परावरे ॥ (श्रुति ) ॐ तत् सत्
* योगोश्वरं शिवं वन्दे वन्दे योगेश्वरं हरिम् * अन्तश्शदानुविद्ध सविकल्प समाधि'अत्राय पुरुषः स्वयंज्योतिः' इत्यादि श्रुतिके श्रवण और चिन्तनसे स्वयप्रकाशरूप आत्माकार वृत्ति करना ही 'अन्तश्शब्दानुविद्ध सविकल्प समाधि' है । अन्तर्दृश्यानु विद्ध और अन्तरशब्दानुविद्ध समाधियोंके अभ्याससे होनेवाली 'अन्तर्निर्विकल्प समाधि' - इसमें चित्तकी स्थिति 'अचलदीपवत्' अथवा जैसा कि गीतामे कहा है, 'यथा दीपो निवातस्यो नेङ्गते सोपमा स्मृता' - निवातस्थ दीपके समान होती है। अर्थात् दृश्य और शब्द दोनों सम्बन्ध छूट जाते हैं और अचल दीपशिखा-सी साक्ष्याकारवृत्ति होती है । बाह्य दृश्यानुविद्ध सविकल्प समाधि चाहर जगत्के पदार्थोंको देखकर होनेवाली नामरूपाकार वृत्तिको त्यागकर अर्थात् नाम और रूपगत मायांशको त्यागकर उसके अस्ति-भाति- प्रियरूप ब्रह्मांशका अनुसन्धान करना 'बाह्यदृश्यानुविद्ध सविकल्प समाधि' है । वाह्य शब्दानुविद्ध सविकल्प समाधि- 'सत्य ज्ञानमनन्त ब्रह्म', 'सदेव सौम्येदमग्र आसीत्' इत्यादि तत्पद निर्देश करनेवाले वाक्योंसे चराचर जगत्का ब्रह्मरूपसे चिन्तन करना - वृत्तिको ब्रह्माकार करना 'बाह्य शब्दानुविद्ध सविकल्प समाघि' है । वाह्य दृश्यानुषिद्ध और बाह्य शब्दानुविद्ध सविकल्प समाधियोंके अभ्याससे जो स्थिति होती है, जिसमें नामरूपोंको देखते हुए अस्ति-भाति- प्रियरूपकी ओर ध्यान बॅघता है, वृत्ति निस्तरङ्ग होकर ब्रह्माकार होती है, उस स्थितिको 'बाह्य निर्विकल्प समाधि' कहते हैं । वह 'निस्तरङ्गसमुद्रवत्' अथवा 'कल्पाम्बुनीरवत्' होती है । [ त्वपद साक्षीका निर्देश करनेवाले वाक्य अन्तदशब्दानुविद्ध समाधिके बोधक शब्द हैं और तत्पदार्थका बोध करानेवाले वाक्य वाह्य शब्दानुषिद्ध समाधिके साधक शब्द हैं, ऐसा समझना चाहिये । ] आत्मसाक्षात्कार और जगन्मिथ्यात्वका निश्चय होनेपर भी जीवन्मुक्तको नामरूपाकार जगत्की प्रतीति होती ही है। नदी किनारे खड़े होनेसे नदीके जलमें अपना उलटा प्रतिविम्व दिखायी देता है अर्थात् सिर नीचे और पैर ऊपर दिखायी देते हैं । अभ्यासकी दृढ़तासे जगत्का मिथ्याभास नहीं रह जाता । ऐसी समाधि उपर्युक्त घट् समाधियोंके अभ्यास से प्राप्त होती है। उसका वर्णन शब्दोंसे नहीं हो सकता । यह स्वसवेद्य ही है। यह समाधि सप्तभूमिकाकी छठी भूमिका है। उत्थाने वाप्यनुत्यानेऽप्यप्रमत्तो जितेन्द्रिय. । समाधिपटक कुर्वीत सर्वदा प्रयतो यतिः ॥नौ सौ॥ विपरीतार्थ धीर्यावन नि. शेषं निवर्तते । स्वरूपस्फुरण यावश्न प्रसिद्धयत्यनिर्गलम् । सावरसमाधिपट्केन नयेत्कालं निरन्तरम् ॥नौ सौ एक॥ 'उत्थानमें और अनुत्थानमे भी, अप्रमत्त और जितेन्द्रिय होकर यतशील साधक इस समाविषट्का अभ्यास करे । मायाजनित 'आवरण' और 'विक्षेप' सर्वथा जबतक नष्ट नहीं होते अर्थात् आत्माके ऊपर तद्विपरीत जमी हुई अनात्मबुद्धि जबतक समूल उखड़ नहीं जाती तबतक इस समाधिका निरन्तर अभ्यास करना चाहिये । इसमें कभी प्रमाद न हो । ' न प्रमादोऽत्र कर्तव्यो विदुपा मोक्षमिच्छता । प्रमादे जृम्भते माया सूर्यापाये तमो यथा ॥नौ सौ दो॥ स्वानुभूतिं परिष्यज्य न तिष्ठन्ति क्षण बुधा । स्वानुभूतौ प्रमादो यः स मृत्युनं यम. सताम् ॥नौ सौ तीन॥ भावार्थ - मोक्षकी इच्छा करनेवाला विद्वान् इस अभ्यासमें कदापि प्रमाद न होने दे । कारण, सूर्यास्तकालमें जैसे अन्धकार, वैसे ही प्रमादम मायाका उद्भव होता है । तत्त्वज्ञानी पुरुष स्वानुभूति छोड़कर एक क्षण भी नहीं रहते, कारण, वे यह जानते है कि स्वानुभूति प्रमादका होना ही ज्ञानियोंकी मृत्यु है, यम मृत्यु नहीं ।' इन षट् समाधियोंमें पहली तीन समाधियाँ अपने भीतर साधनेकी हैं और आगेकी तीन समाधियाँ सम्पूर्ण द्वैतनिवृत्ति के लिये बाहरी दृश्य जगत्में साधनेकी हैं । यथा समाधित्रितय यज्ञेन क्रियते हृदि । तथैव बाह्यदेशेऽपि कार्य द्वैतनिवृत्तये ॥ भिद्यते हृदयप्रन्थिश्छिद्यन्ते सर्वसशयाः । क्षीयन्ते चास्य कर्माणि तस्मिन् दृष्टे परावरे ॥ ॐ तत् सत्
Ranchi : छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में शनिवार को पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई. यह मुठभेड़ बासागुड़ा थाना क्षेत्र के तिम्मापुर से लगे पुतकेल के जंगल में हुई है. पुलिस और नक्सली के बीच हुए मुठभेड़ में CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट एसबी तिर्की शहीद हो गए हैं. शहीद कमांडेंट झारखंड के रहने वाले है. मुठभेड़ में एक जवान भी घायल है. मुठभेड़ की घटना जिले के तिम्मापुर में उस वक्त हुई. जब सीआरपीएफ की 168 वीं बटालियन का एक गश्ती दल सड़क मार्ग खुलवाने और सफाई की ड्यूटी के लिए निकला था. इसी दौरान नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी. CRPF के जवानों ने भी नक्सलियों का मुंहतोड़ जवाब दिया. जवानों और नक्सलियों के बीच लगभग आधे घंटे से ज्यादा जबरदस्त मुठभेड़ चली. इस मुठभेड़ में CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट एसबी तिर्की शहीद हो गए. असिस्टेंट कमाडेंट शांति भूषण तिर्की मूल रूप से सिमडेगा के केसारी गोबरी टोली के निवासी थे. वर्तमान में वे रांची के डिबडीह में रह रहे थे. उनकी पत्नी का नाम पुष्पा तिर्की है. वह अपने पीछे पुत्र अनिकेत और पुत्री अनीशा को छोड़ गये हैं. उन्होंने साइंस में स्नातक किया था. उन्होंने 25 फरवरी 2003 में सीआरपीएफ को ज्वाइन किया था. 4 अगस्त 2018 को असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में 168 बटालियन में उनकी पोस्टिंग हुई थी.
Ranchi : छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में शनिवार को पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई. यह मुठभेड़ बासागुड़ा थाना क्षेत्र के तिम्मापुर से लगे पुतकेल के जंगल में हुई है. पुलिस और नक्सली के बीच हुए मुठभेड़ में CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट एसबी तिर्की शहीद हो गए हैं. शहीद कमांडेंट झारखंड के रहने वाले है. मुठभेड़ में एक जवान भी घायल है. मुठभेड़ की घटना जिले के तिम्मापुर में उस वक्त हुई. जब सीआरपीएफ की एक सौ अड़सठ वीं बटालियन का एक गश्ती दल सड़क मार्ग खुलवाने और सफाई की ड्यूटी के लिए निकला था. इसी दौरान नक्सलियों ने गोलीबारी शुरू कर दी. CRPF के जवानों ने भी नक्सलियों का मुंहतोड़ जवाब दिया. जवानों और नक्सलियों के बीच लगभग आधे घंटे से ज्यादा जबरदस्त मुठभेड़ चली. इस मुठभेड़ में CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट एसबी तिर्की शहीद हो गए. असिस्टेंट कमाडेंट शांति भूषण तिर्की मूल रूप से सिमडेगा के केसारी गोबरी टोली के निवासी थे. वर्तमान में वे रांची के डिबडीह में रह रहे थे. उनकी पत्नी का नाम पुष्पा तिर्की है. वह अपने पीछे पुत्र अनिकेत और पुत्री अनीशा को छोड़ गये हैं. उन्होंने साइंस में स्नातक किया था. उन्होंने पच्चीस फरवरी दो हज़ार तीन में सीआरपीएफ को ज्वाइन किया था. चार अगस्त दो हज़ार अट्ठारह को असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में एक सौ अड़सठ बटालियन में उनकी पोस्टिंग हुई थी.
था। हाथ-मुंह धोकर भटपट नाश्ता किया। इसी बीच घोषणा हुई और हम लोग विमान में जा बैठे। माना अंदर आई और उसने टिकट मांगी। मैंने जेब से निकालकर दी। उसने देवार कहा, "इसमें मास्को से ताशकंद को टिकट कहां है ?" मेने टिकट अपने हाथ में लेकर देखी तो सचमुच वह उसमें नहीं थी। ताशकंद से तरमेश की थी। मेरी परेशानी देखकर माशा बोली, "ऐसा मालूम होता है कि मास्को के हवाई अड पर जल्दी में गुल से उसे फाड़ लिया गया है। ग्राप चिन्ता न करें । एक कागज पर अपना नाम और पता लिखकर दे दें।" मैंने वैसा ही किया । इतनी देर में विमान का इंजन चालू हो गया। विदाई का नमस्कार करते हुए माशा बोली, "फिर माइये। अच्छा, दसविदानिया ।" उसके स्वर में बड़ी आत्मीयता थी। मैने कहा, "माशा, अब तुम्हारी बारी है। तुम दिल्ली माना । अच्छा नमस्कार ।" ताशकन्द के हिसाब से ८ ।। बजे विमान रवाना हुआ। थोड़ी देर उड़ने पर गिरि-शृंखलाएं प्रारंभ हो गई। वे हिम का श्वेत किरीट धारण किये बड़ी सुहावनी लग रही थीं। उन्हें पार करने के लिए हमारे विमान को काफी ऊंचा जाना गड़ा, पर उसके प्रेशराइज्ड होने से हमें तनिक भी असुविधा नहीं हुई । मजे में अपनी सीट पर बैठे हुए प्रकृति की छटा देखते रहे । जाते समय जितनी बर्फ थी, उसकी अपेक्षा अब कहीं अधिक थी। लगभग डेढ़ घंटे की उड़ान के बाद पर्बत-मालाएं समाप्त हुई, मैदान दीखने लगा । विमान निचाई पर आ गया। जरा आगे बढ़ते ही एक नगर आया । विमान की परिचारिका ने बताया, तरमेज या गया। विमान उतरा और हम लोग हवाई अड्डे के भीतर प्रविष्ट हुए। उस समय १० बजे थे। जाते समय इस सीमावर्ती हवाई अड्डे पर बड़ी चहल-पहल थी, अब राब सुनसान था। कुछ अधिकारी लोग इधर-उधर घूम रहे थे। हम चौदह यात्री थे। हमें एक कमरे में ले जाकर एक बड़ी मेज के सहारे बिठाकर सबको एक-एक फार्म भरने को दिया गया। उसमें एक खाना था कि पास में किस देश की कितनी मुद्राएं हैं ? मैने जेब से रुपये निकाले और गिनकर उस खाने में लिख दिये। एक अफसर ने श्राकर फार्म ले लिया। उसे देखकर वह बोला, "मापके इन रुपयों की रसीद कहां है ?" मैंने पूछा, "कैसी, रसौद ?" उसने कहा, "जाते समय यहां आपको दी गई होगी।" मैंने उत्तर दिया, "नहीं, मुझे कोई रसीद नहीं दी गई।"
था। हाथ-मुंह धोकर भटपट नाश्ता किया। इसी बीच घोषणा हुई और हम लोग विमान में जा बैठे। माना अंदर आई और उसने टिकट मांगी। मैंने जेब से निकालकर दी। उसने देवार कहा, "इसमें मास्को से ताशकंद को टिकट कहां है ?" मेने टिकट अपने हाथ में लेकर देखी तो सचमुच वह उसमें नहीं थी। ताशकंद से तरमेश की थी। मेरी परेशानी देखकर माशा बोली, "ऐसा मालूम होता है कि मास्को के हवाई अड पर जल्दी में गुल से उसे फाड़ लिया गया है। ग्राप चिन्ता न करें । एक कागज पर अपना नाम और पता लिखकर दे दें।" मैंने वैसा ही किया । इतनी देर में विमान का इंजन चालू हो गया। विदाई का नमस्कार करते हुए माशा बोली, "फिर माइये। अच्छा, दसविदानिया ।" उसके स्वर में बड़ी आत्मीयता थी। मैने कहा, "माशा, अब तुम्हारी बारी है। तुम दिल्ली माना । अच्छा नमस्कार ।" ताशकन्द के हिसाब से आठ ।। बजे विमान रवाना हुआ। थोड़ी देर उड़ने पर गिरि-शृंखलाएं प्रारंभ हो गई। वे हिम का श्वेत किरीट धारण किये बड़ी सुहावनी लग रही थीं। उन्हें पार करने के लिए हमारे विमान को काफी ऊंचा जाना गड़ा, पर उसके प्रेशराइज्ड होने से हमें तनिक भी असुविधा नहीं हुई । मजे में अपनी सीट पर बैठे हुए प्रकृति की छटा देखते रहे । जाते समय जितनी बर्फ थी, उसकी अपेक्षा अब कहीं अधिक थी। लगभग डेढ़ घंटे की उड़ान के बाद पर्बत-मालाएं समाप्त हुई, मैदान दीखने लगा । विमान निचाई पर आ गया। जरा आगे बढ़ते ही एक नगर आया । विमान की परिचारिका ने बताया, तरमेज या गया। विमान उतरा और हम लोग हवाई अड्डे के भीतर प्रविष्ट हुए। उस समय दस बजे थे। जाते समय इस सीमावर्ती हवाई अड्डे पर बड़ी चहल-पहल थी, अब राब सुनसान था। कुछ अधिकारी लोग इधर-उधर घूम रहे थे। हम चौदह यात्री थे। हमें एक कमरे में ले जाकर एक बड़ी मेज के सहारे बिठाकर सबको एक-एक फार्म भरने को दिया गया। उसमें एक खाना था कि पास में किस देश की कितनी मुद्राएं हैं ? मैने जेब से रुपये निकाले और गिनकर उस खाने में लिख दिये। एक अफसर ने श्राकर फार्म ले लिया। उसे देखकर वह बोला, "मापके इन रुपयों की रसीद कहां है ?" मैंने पूछा, "कैसी, रसौद ?" उसने कहा, "जाते समय यहां आपको दी गई होगी।" मैंने उत्तर दिया, "नहीं, मुझे कोई रसीद नहीं दी गई।"
बैग छीनने के जुर्म में आज पांच साल कैद की सजा सुनाई। यहां की एक स्थानीय अदालत ने चंडीगढ़ निवासी को 25,000 रुपये से भरा बैग छीनने के जुर्म में आज पांच साल कैद की सजा सुनाई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरबीर सिंह दहिया ने आरोपी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। आरोपी की पहचान चंडीगढ़ के विकास नगर कॉलोनी के मंगत राम के रूप में हुई है। मामला 13 फरवरी, 2021 का है, जब जीरकपुर के बलटाना इलाके के सैनी विहार की पीड़ित रोक्जा पब्बीवाल ने सेक्टर 16 पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा कि कुछ अज्ञात मोटरसाइकिल सवार ने सेक्टर 16 में उसका बैग छीन लिया। बैग में एक मोबाइल फोन, नकदी, एटीएम डेबिट और क्रेडिट कार्ड आदि। अज्ञात आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 379ए के तहत मामला दर्ज किया गया है। सब इंस्पेक्टर भीम सिंह के नेतृत्व में सेक्टर 26 क्राइम ब्रांच की एक टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने कहा कि उप जिला अटॉर्नी पंकज गर्ग के मार्गदर्शन में कानूनी कार्रवाई की गई, आरोपियों के खिलाफ सबूत और गवाही की गई।
बैग छीनने के जुर्म में आज पांच साल कैद की सजा सुनाई। यहां की एक स्थानीय अदालत ने चंडीगढ़ निवासी को पच्चीस,शून्य रुपयापये से भरा बैग छीनने के जुर्म में आज पांच साल कैद की सजा सुनाई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरबीर सिंह दहिया ने आरोपी पर पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। आरोपी की पहचान चंडीगढ़ के विकास नगर कॉलोनी के मंगत राम के रूप में हुई है। मामला तेरह फरवरी, दो हज़ार इक्कीस का है, जब जीरकपुर के बलटाना इलाके के सैनी विहार की पीड़ित रोक्जा पब्बीवाल ने सेक्टर सोलह पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा कि कुछ अज्ञात मोटरसाइकिल सवार ने सेक्टर सोलह में उसका बैग छीन लिया। बैग में एक मोबाइल फोन, नकदी, एटीएम डेबिट और क्रेडिट कार्ड आदि। अज्ञात आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा तीन सौ उन्यासीए के तहत मामला दर्ज किया गया है। सब इंस्पेक्टर भीम सिंह के नेतृत्व में सेक्टर छब्बीस क्राइम ब्रांच की एक टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने कहा कि उप जिला अटॉर्नी पंकज गर्ग के मार्गदर्शन में कानूनी कार्रवाई की गई, आरोपियों के खिलाफ सबूत और गवाही की गई।
Agra News कारागार एवं होमगार्ड मंत्री धर्मवीर प्रजापति के पुत्र और पत्नी आगरा आ रहे थे। इसी बीच रास्ते में आटो ने टक्कर मार दी। आटो चालक से बात करते समय उसने हमला बोल दिया। थाने में पुलिस को तहरीर दी है। आगरा, जागरण संवाददाता। आगरा में थाना ट्रांस यमुना क्षेत्र के टेडी बगिया चौराहे पर कारागार एवं होमगार्ड मंत्री धर्मवीर प्रजापति की पत्नी राजकुमारी और पुत्र चंद्रमोहन पर लोडिंग टेंपो सवार लोगों ने हमला बोल दिया। चंद्रमोहन प्रजापति मंगलवार की शाम को मां के साथ हाजीपुर खेड़ा से अपनी स्कोडा गाड़ी से आवास विकास कालोनी आ रहे थे। टेढ़ी बगिया पर लोडिंग ऑटो ने गाड़ी में टक्कर मार दी। मंत्री पुत्र ने ऑटो चालक से बात करना चाहा तो उसने हमला बोल दिया। चालक और उसके उसके साथियों ने हाथ में हथौड़ी और लोहे की राड से मारने का प्रयास किया। मंत्री पुत्र ने थाना ट्रांस यमुना में ऑटो चालक और उसके साथियों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कराया है।
Agra News कारागार एवं होमगार्ड मंत्री धर्मवीर प्रजापति के पुत्र और पत्नी आगरा आ रहे थे। इसी बीच रास्ते में आटो ने टक्कर मार दी। आटो चालक से बात करते समय उसने हमला बोल दिया। थाने में पुलिस को तहरीर दी है। आगरा, जागरण संवाददाता। आगरा में थाना ट्रांस यमुना क्षेत्र के टेडी बगिया चौराहे पर कारागार एवं होमगार्ड मंत्री धर्मवीर प्रजापति की पत्नी राजकुमारी और पुत्र चंद्रमोहन पर लोडिंग टेंपो सवार लोगों ने हमला बोल दिया। चंद्रमोहन प्रजापति मंगलवार की शाम को मां के साथ हाजीपुर खेड़ा से अपनी स्कोडा गाड़ी से आवास विकास कालोनी आ रहे थे। टेढ़ी बगिया पर लोडिंग ऑटो ने गाड़ी में टक्कर मार दी। मंत्री पुत्र ने ऑटो चालक से बात करना चाहा तो उसने हमला बोल दिया। चालक और उसके उसके साथियों ने हाथ में हथौड़ी और लोहे की राड से मारने का प्रयास किया। मंत्री पुत्र ने थाना ट्रांस यमुना में ऑटो चालक और उसके साथियों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कराया है।
जयपुर। स्पेशल ओलंपिक भारत-राजस्थान (एसओबी-राजस्थान) की ओर से अक्टूबर में आयोजित किए जाने वाले स्पेशल खिलाडिय़ों के नेशनल एथलेटिक्स गेम्स इस बार जयपुर में आयोजित होंगे। खास बात यह है कि जयपुर को पहली बार इन खेलों की मेजबानी मिली है। एसओबी-राजस्थान के एसओबी-राजस्थान के क्षेत्रीय निदेशक यू. के. पांडे और मीडिया समन्वयक अमित बैजनाथ गर्ग ने बताया कि सवाई मानसिंह स्टेडियम में 21 से लेकर 26 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इन एथलेटिक्स गेम्स में 34 राज्यों के करीब 500 स्पेशल एथलीट्स और 100 से अधिक कोच-अधिकारी भाग लेंगे। इनमें राजस्थान से करीब 30 स्पेशल एथलीट्स भाग लेंगे। एथलेटिक्स गेम्स के तहत विभिन्न वर्गों में लॉन्ग जंप, शॉर्ट पुट, शॉर्ट बॉल थ्रो और 100 गुणा 4 रिले दौड़ का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिता की शुरुआत टॉर्च रन से होगी।
जयपुर। स्पेशल ओलंपिक भारत-राजस्थान की ओर से अक्टूबर में आयोजित किए जाने वाले स्पेशल खिलाडिय़ों के नेशनल एथलेटिक्स गेम्स इस बार जयपुर में आयोजित होंगे। खास बात यह है कि जयपुर को पहली बार इन खेलों की मेजबानी मिली है। एसओबी-राजस्थान के एसओबी-राजस्थान के क्षेत्रीय निदेशक यू. के. पांडे और मीडिया समन्वयक अमित बैजनाथ गर्ग ने बताया कि सवाई मानसिंह स्टेडियम में इक्कीस से लेकर छब्बीस अक्टूबर तक आयोजित होने वाले इन एथलेटिक्स गेम्स में चौंतीस राज्यों के करीब पाँच सौ स्पेशल एथलीट्स और एक सौ से अधिक कोच-अधिकारी भाग लेंगे। इनमें राजस्थान से करीब तीस स्पेशल एथलीट्स भाग लेंगे। एथलेटिक्स गेम्स के तहत विभिन्न वर्गों में लॉन्ग जंप, शॉर्ट पुट, शॉर्ट बॉल थ्रो और एक सौ गुणा चार रिले दौड़ का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिता की शुरुआत टॉर्च रन से होगी।
एक टीवी ट्यूनर कार्ड, जो कंप्यूटर के अंदर लगाया जा सकता है। एक टीवी ट्यूनर कार्ड, जो कंप्यूटर के बाहर लगाया जाता है। टीवी ट्यूनर कार्ड एक कंप्यूटर घटक होता है, जिसकी मदद से कंप्यूटर के मॉनीटर की स्क्रीन पर टीवी के सिग्नल देखे जासकते हैं। अधिकांश टीवी ट्यूनर कार्डों पर वीडियो कैप्चर इकाई भी उपलब्ध होती है, जिसके द्वारा कंप्यूटर की हार्ड डिस्क पर टीवी के कार्यक्रम रिकॉर्ड भी किये जा सकते हैं। ये कार्ड कंप्यूटर के अंदर भी लगाये जा सकते हैं और बाहर स्थापित करने लायक रूप में भी उपलब्ध होते हैं। बाहर स्थापित करने वाले कार्डों में पावर सप्लाई अलग से लगानी होती है। . 2 संबंधोंः टीवी कॉम्बो बॉक्स, इंटरनेट टीवी। सेट्टौप बौक्स टीवी कॉम्बो बॉक्स कम्प्यूटर पर जुड़ने वाला एक ऐसा बाहरी उपकरण है जिसे कंप्यूटर मॉनीटर से जोड़ा जा सकता है। यह कंप्यूटर की स्क्रीन पर टीवी के प्रोग्राम देखने के काम आता है।।हिन्दुस्तान लाइव।।१ नवंबर, २००९ यह कार्य प्रायः टीवी ट्यूनर कार्ड से ही लिया जाता है। इससे भी मॉनीटर स्क्रीन पर टीवी देखा जा सकता है, लेकिन, टीवी कांबो बॉक्स से बिना कंप्यूटर चलाए (सीपीयू की पॉवर ऑन किए बिना) ही टीवी के कार्यक्रम देखे जा सकते हैं। इस कोंबो बॉक्स में अंदर स्थित स्पीकर भी लगे होते हैं, जिनकी मदद से टीवी की आवाज भी सुनी जा सकती है, तथा इसमें बाहरी स्टीरियो स्पीकर जोड़कर आवाज सुनने का भी विकल्प होता है। इसके अलावा इसमें कैलकुलेटर, कंप्यूटर गेम्स और टाइमर जैसे प्रकार्य-प्रोग्राम भी उपलब्ध होते हैं। इसका प्रयोग इसके साथ उपलब्ध रिमोट नियंत्रण से किया जाता है। रिमोट पर सभी विकल्प उपलब्ध होते हैं। यह टीवी और कंप्यूटर के प्रकार्यों को बिना जोड़े या हटाये उपयोक्ता की इच्छानुसार रिमोट से बदल कर देखने के काम आता है। यानी जब चाहें टीवी देखें और जब मन हो कंप्यूटर पर काम करें। रिमोट पर ही इसके लिए विकल्प उपलब्ध होता है। इसके रिमोट पर ही सब तरह के नियंत्रक बटन उपल्ब्ध होते हैं। जिनमें सामान्य केबल या डिश टीवी रिमोट जैसी सभी सुविधाएं होती हैं। कोंबो बॉक्स में ऑपरेटर से प्राप्त केबल, डीटीएच केबल, यूएसबी केबल को जोड़ा जा सकता है। कोंबो बॉक्स के रिमोट की मदद से ऐसे १००० तक चैनल तक देख सकते हैं, जिनकी सेवा स्रोत से उपलब्ध हो। . इंटरनेट टेलीविज़न (आइ.टीवी, ऑनलाइन टीवी या इंटरनेट टीवी भी कहते हैं) इंटरनेट के माध्यम से प्रसारित दूरदर्शन सेवा होती है। ये सेवा २१वीं शताब्दी में काफी प्रचलित हो चुकी है। इसके उदाहरण हैं संयुक्त राज्य में ह्यूलु एवं बीबीसी आईप्लेयर, नीदरलैंड्स में नीदरलैंड २४ सेवा। इसके लिये तेज गति वाला ब्रॉडबैंड कनेक्शन चाहिये, जिसके द्वारा इंटरनेट पर उपलब्ध टीवी चैनलों की स्ट्रीमिंग करके लाइव खबरें व अन्य सामग्री देख सकते हैं। अभी तक उपभोक्ता पहले सीधे उपग्रह, फिर केबल टीवी और उसके बाद डीटीएच यानी डायरेक्ट टू होम डिश के माध्यम से टीवी देखते रहे हैं। इंटरनेट अब नया माध्यम है, जिस पर टीवी देखा जा सकता है। यह आम आदमी तक देश और दुनिया के समाचार व मनोरंजन सामग्री पहुंचाने का नया तरीका है और एकदम वैसा ही, जैसे बाकी माध्यम है। भारत में इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत को इंटरनेट प्रोटोकाल टेलीविजन (आईपीटीवी) के रूप में समझ सकते हैं। इसमें इंटरनेट, ब्राडबैंड की सहायता से टेलीविजन कार्यक्रम घरों तक पहुंचाता है। इस नेट नियोजित प्रणाली में टेलीविजन के कार्यक्रम डीटीएच या केबल नेटवर्क के बजाय, कंप्यूटर नेटवर्क में प्रयोग होने वाली तकनीकी मदद से देखे जाते हैं।।हिन्दुस्तान लाइव। १८ मार्च २०१० संभवतः दुनिया में एबीसी का वर्ल्ड न्यूज नाउ पहला टीवी कार्यक्रम रहा है, जिसे इंटरनेट पर प्रसारित किया गया था। इंटरनेट के लिए एक वीडियो उत्पाद तैयार किया गया, जिसका नाम आईपीटीवी रखा गया था। लेकिन सबसे पहले जो टेलीविजन के कार्यक्रम इंटरनेट ब्राडबैंड के द्वारा प्रसारित किए गए तो उस फार्मेट को भी आईपीटीवी का ही नाम दिया गया। भारत सरकार ने भी इसे स्वीकृति दे दी है और भारत के कई शहरों में यह सेवा चालू हो चुकी है। .
एक टीवी ट्यूनर कार्ड, जो कंप्यूटर के अंदर लगाया जा सकता है। एक टीवी ट्यूनर कार्ड, जो कंप्यूटर के बाहर लगाया जाता है। टीवी ट्यूनर कार्ड एक कंप्यूटर घटक होता है, जिसकी मदद से कंप्यूटर के मॉनीटर की स्क्रीन पर टीवी के सिग्नल देखे जासकते हैं। अधिकांश टीवी ट्यूनर कार्डों पर वीडियो कैप्चर इकाई भी उपलब्ध होती है, जिसके द्वारा कंप्यूटर की हार्ड डिस्क पर टीवी के कार्यक्रम रिकॉर्ड भी किये जा सकते हैं। ये कार्ड कंप्यूटर के अंदर भी लगाये जा सकते हैं और बाहर स्थापित करने लायक रूप में भी उपलब्ध होते हैं। बाहर स्थापित करने वाले कार्डों में पावर सप्लाई अलग से लगानी होती है। . दो संबंधोंः टीवी कॉम्बो बॉक्स, इंटरनेट टीवी। सेट्टौप बौक्स टीवी कॉम्बो बॉक्स कम्प्यूटर पर जुड़ने वाला एक ऐसा बाहरी उपकरण है जिसे कंप्यूटर मॉनीटर से जोड़ा जा सकता है। यह कंप्यूटर की स्क्रीन पर टीवी के प्रोग्राम देखने के काम आता है।।हिन्दुस्तान लाइव।।एक नवंबर, दो हज़ार नौ यह कार्य प्रायः टीवी ट्यूनर कार्ड से ही लिया जाता है। इससे भी मॉनीटर स्क्रीन पर टीवी देखा जा सकता है, लेकिन, टीवी कांबो बॉक्स से बिना कंप्यूटर चलाए ही टीवी के कार्यक्रम देखे जा सकते हैं। इस कोंबो बॉक्स में अंदर स्थित स्पीकर भी लगे होते हैं, जिनकी मदद से टीवी की आवाज भी सुनी जा सकती है, तथा इसमें बाहरी स्टीरियो स्पीकर जोड़कर आवाज सुनने का भी विकल्प होता है। इसके अलावा इसमें कैलकुलेटर, कंप्यूटर गेम्स और टाइमर जैसे प्रकार्य-प्रोग्राम भी उपलब्ध होते हैं। इसका प्रयोग इसके साथ उपलब्ध रिमोट नियंत्रण से किया जाता है। रिमोट पर सभी विकल्प उपलब्ध होते हैं। यह टीवी और कंप्यूटर के प्रकार्यों को बिना जोड़े या हटाये उपयोक्ता की इच्छानुसार रिमोट से बदल कर देखने के काम आता है। यानी जब चाहें टीवी देखें और जब मन हो कंप्यूटर पर काम करें। रिमोट पर ही इसके लिए विकल्प उपलब्ध होता है। इसके रिमोट पर ही सब तरह के नियंत्रक बटन उपल्ब्ध होते हैं। जिनमें सामान्य केबल या डिश टीवी रिमोट जैसी सभी सुविधाएं होती हैं। कोंबो बॉक्स में ऑपरेटर से प्राप्त केबल, डीटीएच केबल, यूएसबी केबल को जोड़ा जा सकता है। कोंबो बॉक्स के रिमोट की मदद से ऐसे एक हज़ार तक चैनल तक देख सकते हैं, जिनकी सेवा स्रोत से उपलब्ध हो। . इंटरनेट टेलीविज़न इंटरनेट के माध्यम से प्रसारित दूरदर्शन सेवा होती है। ये सेवा इक्कीसवीं शताब्दी में काफी प्रचलित हो चुकी है। इसके उदाहरण हैं संयुक्त राज्य में ह्यूलु एवं बीबीसी आईप्लेयर, नीदरलैंड्स में नीदरलैंड चौबीस सेवा। इसके लिये तेज गति वाला ब्रॉडबैंड कनेक्शन चाहिये, जिसके द्वारा इंटरनेट पर उपलब्ध टीवी चैनलों की स्ट्रीमिंग करके लाइव खबरें व अन्य सामग्री देख सकते हैं। अभी तक उपभोक्ता पहले सीधे उपग्रह, फिर केबल टीवी और उसके बाद डीटीएच यानी डायरेक्ट टू होम डिश के माध्यम से टीवी देखते रहे हैं। इंटरनेट अब नया माध्यम है, जिस पर टीवी देखा जा सकता है। यह आम आदमी तक देश और दुनिया के समाचार व मनोरंजन सामग्री पहुंचाने का नया तरीका है और एकदम वैसा ही, जैसे बाकी माध्यम है। भारत में इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत को इंटरनेट प्रोटोकाल टेलीविजन के रूप में समझ सकते हैं। इसमें इंटरनेट, ब्राडबैंड की सहायता से टेलीविजन कार्यक्रम घरों तक पहुंचाता है। इस नेट नियोजित प्रणाली में टेलीविजन के कार्यक्रम डीटीएच या केबल नेटवर्क के बजाय, कंप्यूटर नेटवर्क में प्रयोग होने वाली तकनीकी मदद से देखे जाते हैं।।हिन्दुस्तान लाइव। अट्ठारह मार्च दो हज़ार दस संभवतः दुनिया में एबीसी का वर्ल्ड न्यूज नाउ पहला टीवी कार्यक्रम रहा है, जिसे इंटरनेट पर प्रसारित किया गया था। इंटरनेट के लिए एक वीडियो उत्पाद तैयार किया गया, जिसका नाम आईपीटीवी रखा गया था। लेकिन सबसे पहले जो टेलीविजन के कार्यक्रम इंटरनेट ब्राडबैंड के द्वारा प्रसारित किए गए तो उस फार्मेट को भी आईपीटीवी का ही नाम दिया गया। भारत सरकार ने भी इसे स्वीकृति दे दी है और भारत के कई शहरों में यह सेवा चालू हो चुकी है। .
प्रखंड के सभी पंचायतों में कोरोना से बचाव व बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए राज्य सरकार ने 15 वें वित्त की राशि से हर परिवार छह छह मास्क देने व सेनेटाइजेशन करने के सरकार के आदेश का सिंघिया प्रखंड में अनुपालन नहीं हुआ है। अब तक न मास्क नहीं मिल सका है और ना ही सेनेटाइजेशन किया गया है। हालांकि कुछ पंचायतों में मास्क वितरण शुरू किया गया है, लेकिन प्रखंड के 14 पंचायतों में एक भी पंचायत में पूर्ण रूप से मास्क वितरण नहीं हो पाया है। ज्ञात हो कि एक पंचायत में कम से कम औसतन 15 से 20 हजार मास्क का वितरण किया जाना है। मास्क की खरीदारी व वितरण में इस बार पंचायत के मुखिया को अलग रखा गया है। मास्क की खरीदारी में जीविका को प्राथमिकता दी गयी है। वहीं वितरण पंचायत में प्रतिनियुक सरकारी कर्मी द्वारा किया जा रहा है। वर्तमान में प्रायः सभी पंचायतों में कोरोना का संक्रमण फैल चुका है। गांवों में जगह जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित रूप से साफ सफाई व सेनेटाइजेशन की आवश्यकता है। परंतु प्रखंड प्रशासन इस ओर अपनी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। इस संदर्भ में प्रभारी प्रखंड पंचायत राज सह सांख्यिकी पदाधिकारी पवन कुमार सिंह ने बताया कि वर्तमान में सात पंचायतों में मास्क वितरण शुरू किया गया है। जैसे ही मास्क उपलब्ध हो जाता है शेष पंचायतों में भी वितरण शुरू कर दिया जाएगा। उ न्होंने बताया कि फिलहाल सेनेटाइजेशन उस मुहल्ले में किया जा रहा है जहाँ कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं।
प्रखंड के सभी पंचायतों में कोरोना से बचाव व बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए राज्य सरकार ने पंद्रह वें वित्त की राशि से हर परिवार छह छह मास्क देने व सेनेटाइजेशन करने के सरकार के आदेश का सिंघिया प्रखंड में अनुपालन नहीं हुआ है। अब तक न मास्क नहीं मिल सका है और ना ही सेनेटाइजेशन किया गया है। हालांकि कुछ पंचायतों में मास्क वितरण शुरू किया गया है, लेकिन प्रखंड के चौदह पंचायतों में एक भी पंचायत में पूर्ण रूप से मास्क वितरण नहीं हो पाया है। ज्ञात हो कि एक पंचायत में कम से कम औसतन पंद्रह से बीस हजार मास्क का वितरण किया जाना है। मास्क की खरीदारी व वितरण में इस बार पंचायत के मुखिया को अलग रखा गया है। मास्क की खरीदारी में जीविका को प्राथमिकता दी गयी है। वहीं वितरण पंचायत में प्रतिनियुक सरकारी कर्मी द्वारा किया जा रहा है। वर्तमान में प्रायः सभी पंचायतों में कोरोना का संक्रमण फैल चुका है। गांवों में जगह जगह गंदगी का अंबार लगा हुआ है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित रूप से साफ सफाई व सेनेटाइजेशन की आवश्यकता है। परंतु प्रखंड प्रशासन इस ओर अपनी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। इस संदर्भ में प्रभारी प्रखंड पंचायत राज सह सांख्यिकी पदाधिकारी पवन कुमार सिंह ने बताया कि वर्तमान में सात पंचायतों में मास्क वितरण शुरू किया गया है। जैसे ही मास्क उपलब्ध हो जाता है शेष पंचायतों में भी वितरण शुरू कर दिया जाएगा। उ न्होंने बताया कि फिलहाल सेनेटाइजेशन उस मुहल्ले में किया जा रहा है जहाँ कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं।
सलूणी - राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला संघणी की बैठक का आयोजन बुधवार को परिसर में किया गया। बैठक की अध्यक्षता शिक्षा उपनिदेशक उच्चतर देवेंद्र पाल ने की। बैठक के दौरान पाठशाला में रिक्त चल रहे अध्यापकों के पदों से छात्रों को पेश आ रही दिक्कतों पर चर्चा की गई। और प्रस्ताव पारित कर सरकार व शिक्षा विभाग से जल्द रिक्त पदों को भरने की मांग उठाई गई। शिक्षा उपनिदेशक उच्चतर देवेंद्र पाल ने बताया कि संघणी पाठशाला में रिक्त अध्यापकों के पदों को भरने का मामला निदेशालय को भेजा जा चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही संघणी पाठशाला में अध्यापकों के पद भर दिए जाएंगे। उन्हांेने एसएमसी कमेटी से संयम बरतने का आग्रह भी किया। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को संघणी पाठशाला की एसएमसी ने अध्यापकों के रिक्त पदों के चलते अल्टीमेटम दिया था कि अगर पांच दिनों के भीतर सकारात्मक कार्रवाई अमल में न लाई गई तो परिसर को ताला लगा देंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार व शिक्षा विभाग की होगी। एसएमसी के इस कड़े फैसले की भनक लगते ही बुधवार को शिक्षा उपनिदेशक उच्चतर देवेंद्र पाल ने सदस्यों संग बैठक कर विभागीय पक्ष रखा। बैठक में पाठशाला की प्रिंसीपल कुमारी रीता, एसएमसी अध्यक्ष विमला देवी के अलावा सदस्य नूर मोहम्मद, रमेश, महबूब मीर, मोहम्मद फारुक के अलावा अभिभावकों में जाकिर हुसैन, सिराजू मागरा, असलम हुसैन, रणधीर चंदेल व ओमप्रकाश मौजूद रहे।
सलूणी - राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला संघणी की बैठक का आयोजन बुधवार को परिसर में किया गया। बैठक की अध्यक्षता शिक्षा उपनिदेशक उच्चतर देवेंद्र पाल ने की। बैठक के दौरान पाठशाला में रिक्त चल रहे अध्यापकों के पदों से छात्रों को पेश आ रही दिक्कतों पर चर्चा की गई। और प्रस्ताव पारित कर सरकार व शिक्षा विभाग से जल्द रिक्त पदों को भरने की मांग उठाई गई। शिक्षा उपनिदेशक उच्चतर देवेंद्र पाल ने बताया कि संघणी पाठशाला में रिक्त अध्यापकों के पदों को भरने का मामला निदेशालय को भेजा जा चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही संघणी पाठशाला में अध्यापकों के पद भर दिए जाएंगे। उन्हांेने एसएमसी कमेटी से संयम बरतने का आग्रह भी किया। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को संघणी पाठशाला की एसएमसी ने अध्यापकों के रिक्त पदों के चलते अल्टीमेटम दिया था कि अगर पांच दिनों के भीतर सकारात्मक कार्रवाई अमल में न लाई गई तो परिसर को ताला लगा देंगे, जिसकी सारी जिम्मेदारी सरकार व शिक्षा विभाग की होगी। एसएमसी के इस कड़े फैसले की भनक लगते ही बुधवार को शिक्षा उपनिदेशक उच्चतर देवेंद्र पाल ने सदस्यों संग बैठक कर विभागीय पक्ष रखा। बैठक में पाठशाला की प्रिंसीपल कुमारी रीता, एसएमसी अध्यक्ष विमला देवी के अलावा सदस्य नूर मोहम्मद, रमेश, महबूब मीर, मोहम्मद फारुक के अलावा अभिभावकों में जाकिर हुसैन, सिराजू मागरा, असलम हुसैन, रणधीर चंदेल व ओमप्रकाश मौजूद रहे।
रायपुर के शहीद वीर नरायण सिंह स्टेडियम में खेले गए मैच में मोहम्मद शमी सहित भारतीय गेंदबाज़ों की सटीक गेंदबाज़ी के चलते भारत को यह मैच जीतने के लिए सिर्फ 109 रनों का आसान लक्ष्य मिला. इस लक्ष्य को भारत ने मात्र 20 ओवरों में 2 विकेट विकेट खोकर आसानी से प्राप्त कर लिया. रोहित शर्मा ने 51 रनों की शानदार कप्तानी पारी खेली. रोहित ने शुभमन गिल के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए 86 गेंदों पर 72 रनों की साझेदारी कर जीत की नींव रख दी. पिछली 5 पारियों में दोनों के बीच यह चौथी बार अर्धशतकीय साझेदारी हुई. शुभमन गिल 40 रन बनाकर नाबाद रहे. इसके पहले टॉस हारकर बल्लेबाज़ी करते हुए न्यूजीलैंड टीम 34 ओवर और 3 गेंदों में मात्र 108 रनों पर ही सिमट गई. ग्लेन फिलिप्स ने सबसे अधिक 36 रन बनाए. मिचेल सैंटनर ने 27 और माइकल ब्रेसवेल ने 22 रनों का योगदान दिया. न्यूजीलैंड के 8 बल्लेबाज़ दोहरी रन संख्या में भी नहीं पहुंच सके. मोहम्मद शमी ने घातक गेंदबाज़ी करते हुए 3 विकेट चटकाए. हार्दिक पंड्या और वॉशिंगटन सुंदर को 2-2 विकेट लने में सफलता मिली. मोहम्मद सिराज, शार्दूल ठाकुर और कुलदीप यादव को एक-एक विकेट मिला. इस जीत के साथ ही टीम इंडिया अपने घरेलू मैदान पर लगातार 7वीं वनडे सीरीज अपने नाम करने में कामयाब रही. टीम पिछले चार साल से अपने घर में कोई वनडे सीरीज़ नहीं हारी है. यह वनडे में भारत की लगातार छठवीं जीत भी है. सीरीज का अंतिम मैच मंगलवार को इंदौर में खेला जाएगा. बीसीसीआई ने अभी महिला आईपीएल के पहले संस्करण के लिए फाइनल तारीखें तय नहीं की हैं, लेकिन इसके 4 से 26 मार्च तक आयोजित किए जाने की संभावना है. महिला आईपीएल के मुकाबले मुंबई में ब्रेबॉर्न स्टेडियम और डीवाई पाटिल स्टेडियम में होने की संभावना जताई गई है. पहले सीजन में 22 मैच होंगे. भुवनेश्वर के कालिंगा स्टेडियम में भारत यूजीलैंड से हॉकी विश्व कप 2023 के क्रॉसओवर मुकाबले में हारकर विश्वकप हाॅकी स्पर्धा से बाहर हो गया है. इस अहम मुकाबले में पेनल्टी शूटआउट में सडेन डेथ के दौरान शमशेर सिंह निर्णायक मौके पर गोल करने से चूके गए. कीवियों ने एक बार फिर नॉकआउट मुकाबले में भारत को हराकर 47 साल बाद भारत के विश्व चैंपियन बनने के मंसूबों पर पानी फेर दिया. भारत अभी तक सिर्फ एक बार 1975 में हॉकी वर्ल्ड कप जीता है. साल 2021 में टोक्यो ओलंपिक में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया था और कांस्य पदक हासिल किया था. हॉकी में विश्व की नंबर-5 टीम नंबर-12 की टीम से हारकर क्वार्टर फाइनल से पहले ही बाहर हो गई. निर्धारित समय में दोनों टीमें 3-3 से बराबरी पर रहीं. भारतीय टीम ने अंत में बढ़त को गंवा दिया. पेनल्टी शूटआउट में पीआर श्रीजेश के बेहतरीन गोलकीपिंग से स्कोर 3-3 से बराबरी रहा, लेकिन सडेन डेथ में शमशेर सिंह गोल नहीं कर पाए और भारत को निराशा हाथ लगी. पहले क्वार्टर में कोई भी टीम गोल करने में सफल नहीं रही. दूसरे क्वार्टर में भारत के लिए ललित उपाध्याय और सुखजीत सिंह ने गोल करके टीम इंडिया को 2-0 की बढ़त दिला दी. न्यूजीलैंड के लिए पहला गोल खेल के 28वें मिनट में सैम लेन ने किया. मध्यांतर तक भारत 2-1 से बढ़त बनाकर मज़बूत स्थिति में था. तीसरे क्वार्टर में वरुण कुमार ने पेनल्टी को गोल में तब्दील कर भारत के लिए तीसरा गोल दाग़ा. इसी के साथ ही भारत 3-1 से आगे हो गया. इसके बाद न्यूजीलैंड ने आक्रमक रूख अपनाकर शानदार वापसी करते हुए खेल के 43वें मिनट में पेनल्टी से गोल कर दिया. स्कोर 3-2 होने के बाद जल्द ही सीन फिंडले ने 49वें मिनट में पेनल्टी को गोल में तब्दील करके मैच को रोमांचक स्थिति में पहुंचा दिया. मैच निर्धारित समय मे 3-3 से बराबर रहने पर पेनल्टी शूटआउट में पहुंचा, जहां अंततः न्यूज़ीलैंड ने 4-5 से बाज़ी मारी. न्यूजीलैंड का क्वार्टर फाइनल में सामना बेल्जियम से होगा. ऑस्ट्रेलियन ओपन 2023 में पुरुषों के बाद महिला एकल में भी उलटफेर का दौर जारी है. विश्व की नंबर एक महिला टेनिस खिलाड़ी इगा स्वियातेक ऑस्ट्रेलियन ओपन से बाहर हो गई हैं. रविवार को महिला एकल के चैथे दौर में उन्हें एलेना रयबाकिना ने 6-4, 6-4 से से शिकस्त दी. क्वार्टर फाइनल में रयबाकिना का सामना जेलेना ओस्टापेंको से होगा. 17वीं वरीयता प्राप्त जेलेना ओस्टापेंको ने सातवीं वरीयता प्राप्त कोको गॉफ को सीधे सेटों में 7-5, 6-3 से हराया. इससे पहले इस टूर्नामेंट में पुरुष एकल में शीर्ष वरीयता वाले राफेल नडाल और दूसरी वरीयता वाले कैस्पर रुड हारकर बाहर हो चुके हैं. इन दोनों के अलावा एंडी मरे और दानिल मेदवेदेव भी इस टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं. ग्रीस के स्टार खिलाड़ी स्टेफानोस सितसिपास ने ऑस्ट्रेलियन ओपन के क्वार्टरफाइनल में जगह बना ली है. तीसरी वरीयता प्राप्त सितसिपास ने इटली के जैनिक सिनर को पांच सेटों तक चले कड़े मुकाबले में हराया. क्वार्टर फाइनल में उनका मुकाबला चेक गणराज्य के जिरी लेहेका से होगा. अमेरिका के 22 साल के सेबेस्टियन कोर्डा 10वीं वरीयता प्राप्त ह्यूबर्ट हरकाज को पांच सेट तक चले कड़े मुकाबले में शिकस्त देकर पहली बार किसी ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में पहुंचे हैं. क्वार्टर फाइनल में कोर्डा की भिड़ंत कारेन खचानोव से होगी. सानिया मिर्जा के करियर का ऑस्ट्रेलिया ओपन आखिरी ग्रैंड स्लैम इवेंट है. इस टूर्नामेंट के बाद वह टेनिस को अलविदा कह देंगी. उनका वुमेंस डबल्स करियर हार के साथ समाप्त हुआ. वैसे मिक्सड डबल्स में अभी उम्मीदें बरकरार हैं. जहां रोहन बोपन्ना उनके जोड़ीदार हैं. सानिया मिर्जा की मिकस्ड डबल्स जोड़ी ने शनिवार को दूसरे दौर में प्रवेश भी किया. दोनों की जोड़ी ने 2017 फ्रेंच ओपन का खिताब जीता था. ऑस्ट्रेलिया ओपन में उनकी निगाहें 7वें प्रमुख खिताब पर टिकी हुई हैं. उन्होंने अब तक अब तक 3 मिक्स्ड डबल्स और 3 वुमेंस डबल्स मिलाकर कुल 6 ग्रैंड स्लैम जीते हैं. न्यूज़ 18 हिन्दी पाॅडकास्ट के साप्ताहिक स्पेशल स्पोर्ट्स बुलेटिन में आज इतना ही. ताजतरीन खेल खबरों के साथ हम फिर हाज़िर होंगे. तब के लिए नवीन श्रीवास्तव को इजाज़त दीजिए. नमस्कार. टैग्ज़ :
रायपुर के शहीद वीर नरायण सिंह स्टेडियम में खेले गए मैच में मोहम्मद शमी सहित भारतीय गेंदबाज़ों की सटीक गेंदबाज़ी के चलते भारत को यह मैच जीतने के लिए सिर्फ एक सौ नौ रनों का आसान लक्ष्य मिला. इस लक्ष्य को भारत ने मात्र बीस ओवरों में दो विकेट विकेट खोकर आसानी से प्राप्त कर लिया. रोहित शर्मा ने इक्यावन रनों की शानदार कप्तानी पारी खेली. रोहित ने शुभमन गिल के साथ मिलकर पहले विकेट के लिए छियासी गेंदों पर बहत्तर रनों की साझेदारी कर जीत की नींव रख दी. पिछली पाँच पारियों में दोनों के बीच यह चौथी बार अर्धशतकीय साझेदारी हुई. शुभमन गिल चालीस रन बनाकर नाबाद रहे. इसके पहले टॉस हारकर बल्लेबाज़ी करते हुए न्यूजीलैंड टीम चौंतीस ओवर और तीन गेंदों में मात्र एक सौ आठ रनों पर ही सिमट गई. ग्लेन फिलिप्स ने सबसे अधिक छत्तीस रन बनाए. मिचेल सैंटनर ने सत्ताईस और माइकल ब्रेसवेल ने बाईस रनों का योगदान दिया. न्यूजीलैंड के आठ बल्लेबाज़ दोहरी रन संख्या में भी नहीं पहुंच सके. मोहम्मद शमी ने घातक गेंदबाज़ी करते हुए तीन विकेट चटकाए. हार्दिक पंड्या और वॉशिंगटन सुंदर को दो-दो विकेट लने में सफलता मिली. मोहम्मद सिराज, शार्दूल ठाकुर और कुलदीप यादव को एक-एक विकेट मिला. इस जीत के साथ ही टीम इंडिया अपने घरेलू मैदान पर लगातार सातवीं वनडे सीरीज अपने नाम करने में कामयाब रही. टीम पिछले चार साल से अपने घर में कोई वनडे सीरीज़ नहीं हारी है. यह वनडे में भारत की लगातार छठवीं जीत भी है. सीरीज का अंतिम मैच मंगलवार को इंदौर में खेला जाएगा. बीसीसीआई ने अभी महिला आईपीएल के पहले संस्करण के लिए फाइनल तारीखें तय नहीं की हैं, लेकिन इसके चार से छब्बीस मार्च तक आयोजित किए जाने की संभावना है. महिला आईपीएल के मुकाबले मुंबई में ब्रेबॉर्न स्टेडियम और डीवाई पाटिल स्टेडियम में होने की संभावना जताई गई है. पहले सीजन में बाईस मैच होंगे. भुवनेश्वर के कालिंगा स्टेडियम में भारत यूजीलैंड से हॉकी विश्व कप दो हज़ार तेईस के क्रॉसओवर मुकाबले में हारकर विश्वकप हाॅकी स्पर्धा से बाहर हो गया है. इस अहम मुकाबले में पेनल्टी शूटआउट में सडेन डेथ के दौरान शमशेर सिंह निर्णायक मौके पर गोल करने से चूके गए. कीवियों ने एक बार फिर नॉकआउट मुकाबले में भारत को हराकर सैंतालीस साल बाद भारत के विश्व चैंपियन बनने के मंसूबों पर पानी फेर दिया. भारत अभी तक सिर्फ एक बार एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में हॉकी वर्ल्ड कप जीता है. साल दो हज़ार इक्कीस में टोक्यो ओलंपिक में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया था और कांस्य पदक हासिल किया था. हॉकी में विश्व की नंबर-पाँच टीम नंबर-बारह की टीम से हारकर क्वार्टर फाइनल से पहले ही बाहर हो गई. निर्धारित समय में दोनों टीमें तीन-तीन से बराबरी पर रहीं. भारतीय टीम ने अंत में बढ़त को गंवा दिया. पेनल्टी शूटआउट में पीआर श्रीजेश के बेहतरीन गोलकीपिंग से स्कोर तीन-तीन से बराबरी रहा, लेकिन सडेन डेथ में शमशेर सिंह गोल नहीं कर पाए और भारत को निराशा हाथ लगी. पहले क्वार्टर में कोई भी टीम गोल करने में सफल नहीं रही. दूसरे क्वार्टर में भारत के लिए ललित उपाध्याय और सुखजीत सिंह ने गोल करके टीम इंडिया को दो-शून्य की बढ़त दिला दी. न्यूजीलैंड के लिए पहला गोल खेल के अट्ठाईसवें मिनट में सैम लेन ने किया. मध्यांतर तक भारत दो-एक से बढ़त बनाकर मज़बूत स्थिति में था. तीसरे क्वार्टर में वरुण कुमार ने पेनल्टी को गोल में तब्दील कर भारत के लिए तीसरा गोल दाग़ा. इसी के साथ ही भारत तीन-एक से आगे हो गया. इसके बाद न्यूजीलैंड ने आक्रमक रूख अपनाकर शानदार वापसी करते हुए खेल के तैंतालीसवें मिनट में पेनल्टी से गोल कर दिया. स्कोर तीन-दो होने के बाद जल्द ही सीन फिंडले ने उनचासवें मिनट में पेनल्टी को गोल में तब्दील करके मैच को रोमांचक स्थिति में पहुंचा दिया. मैच निर्धारित समय मे तीन-तीन से बराबर रहने पर पेनल्टी शूटआउट में पहुंचा, जहां अंततः न्यूज़ीलैंड ने चार-पाँच से बाज़ी मारी. न्यूजीलैंड का क्वार्टर फाइनल में सामना बेल्जियम से होगा. ऑस्ट्रेलियन ओपन दो हज़ार तेईस में पुरुषों के बाद महिला एकल में भी उलटफेर का दौर जारी है. विश्व की नंबर एक महिला टेनिस खिलाड़ी इगा स्वियातेक ऑस्ट्रेलियन ओपन से बाहर हो गई हैं. रविवार को महिला एकल के चैथे दौर में उन्हें एलेना रयबाकिना ने छः-चार, छः-चार से से शिकस्त दी. क्वार्टर फाइनल में रयबाकिना का सामना जेलेना ओस्टापेंको से होगा. सत्रहवीं वरीयता प्राप्त जेलेना ओस्टापेंको ने सातवीं वरीयता प्राप्त कोको गॉफ को सीधे सेटों में सात-पाँच, छः-तीन से हराया. इससे पहले इस टूर्नामेंट में पुरुष एकल में शीर्ष वरीयता वाले राफेल नडाल और दूसरी वरीयता वाले कैस्पर रुड हारकर बाहर हो चुके हैं. इन दोनों के अलावा एंडी मरे और दानिल मेदवेदेव भी इस टूर्नामेंट से बाहर हो गए हैं. ग्रीस के स्टार खिलाड़ी स्टेफानोस सितसिपास ने ऑस्ट्रेलियन ओपन के क्वार्टरफाइनल में जगह बना ली है. तीसरी वरीयता प्राप्त सितसिपास ने इटली के जैनिक सिनर को पांच सेटों तक चले कड़े मुकाबले में हराया. क्वार्टर फाइनल में उनका मुकाबला चेक गणराज्य के जिरी लेहेका से होगा. अमेरिका के बाईस साल के सेबेस्टियन कोर्डा दसवीं वरीयता प्राप्त ह्यूबर्ट हरकाज को पांच सेट तक चले कड़े मुकाबले में शिकस्त देकर पहली बार किसी ग्रैंडस्लैम टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में पहुंचे हैं. क्वार्टर फाइनल में कोर्डा की भिड़ंत कारेन खचानोव से होगी. सानिया मिर्जा के करियर का ऑस्ट्रेलिया ओपन आखिरी ग्रैंड स्लैम इवेंट है. इस टूर्नामेंट के बाद वह टेनिस को अलविदा कह देंगी. उनका वुमेंस डबल्स करियर हार के साथ समाप्त हुआ. वैसे मिक्सड डबल्स में अभी उम्मीदें बरकरार हैं. जहां रोहन बोपन्ना उनके जोड़ीदार हैं. सानिया मिर्जा की मिकस्ड डबल्स जोड़ी ने शनिवार को दूसरे दौर में प्रवेश भी किया. दोनों की जोड़ी ने दो हज़ार सत्रह फ्रेंच ओपन का खिताब जीता था. ऑस्ट्रेलिया ओपन में उनकी निगाहें सातवें प्रमुख खिताब पर टिकी हुई हैं. उन्होंने अब तक अब तक तीन मिक्स्ड डबल्स और तीन वुमेंस डबल्स मिलाकर कुल छः ग्रैंड स्लैम जीते हैं. न्यूज़ अट्ठारह हिन्दी पाॅडकास्ट के साप्ताहिक स्पेशल स्पोर्ट्स बुलेटिन में आज इतना ही. ताजतरीन खेल खबरों के साथ हम फिर हाज़िर होंगे. तब के लिए नवीन श्रीवास्तव को इजाज़त दीजिए. नमस्कार. टैग्ज़ :
मानसिक र बौद्धिक विकासके साधन अमरीका, योरप और दक्षिण भारतके विद्यालयोंमें वहाँ के अध्यापक • बारी-बारीसे प्रत्येक छुट्टाके दिन विद्यार्थियों को इधर-उधर घुमाने ले जाते हैं । - इस पर्यटनमें विद्यार्थि गण पर्यटनकी सुविधा और असुविधाओंका अनुभव तो प्राप्त करते ही हैं, साथ ही वन, उपवन, नदी-तर, समुद्र तट, पुल, रेलगाड़ी, पुतलीघर, यंत्र-शाला, नये विद्यालय, प्रदर्शनी, कौतुकालय, जोवशाला, पुस्तकालय, भवन श्रादि प्राकृतिक तथा मानव निर्मित वैभवोंका भी प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त करते हैं । शिक्षा शास्त्रियों का मत है कि एक वर्षमे पुस्तकों के सहारे जितना ज्ञान बढ़ाया जाता है, उतना एक दिन के पर्यटन में सिखाया जा सकता है क्योंकि नई वस्तुओंके परिचय के समय अध्यापक • तत्सम्बन्धी प्रत्येक ज्ञान स्वाभाविक रूपमें दे भी सकता है और प्रत्यक्ष • अनुभव होनेसे वह ज्ञान पक्का भी होता चलता है । यद्यपि हमारा देश -बहुत धनी नहीं है और दूर-दूरकी यात्राएँ हमारे लिये संभव भी नहीं हैं फिर भी आस पासके नगरों, गाँवों, पर्वतों और प्राकृतिक स्थानोंका परिचय तो हम छात्रोको करा ही सकते हैं। इस पर्यटनमें केवल भोजन-पानी, सैर-सपाटे, खेल-कूद और गप-सड़ाकेकी ही योजना न हो घरन् भली प्रकारसे उन स्थानोंक सम्बन्ध में सिखाए जानेवाले संभव विषयों के शिक्षणकी भी ऐसी व्यवस्था हो कि छात्र स्वयं उत्सुकतापूर्वक उन स्थानों के विषय में जानननेको लालायित हों और यदि उनकी उत्सुकता उद्दीत न हो तो अध्यापक स्वयं उन्हें ज्ञान -देने में प्रवृत्त हों। छात्रों व्यवस्थित मानसिक और बौद्धिक विकासके लिये साहित्य गोष्ठियोका भी आयोजन करना चाहिए । इन गोष्ठियोंमें पहले से विषय निर्धारित कर देने चाहिएँ, छात्रोंको उन गोष्ठियोंमें सक्रिय योग देनेके लिये उत्साहित करना चाहिए और उन्हें सामग्रीका भी निर्देश कर देना चाहिए कि वे उसके आधार पर पूर्व पक्ष या उत्तर पक्षकी ओरसे योग्यतापूर्वक
मानसिक र बौद्धिक विकासके साधन अमरीका, योरप और दक्षिण भारतके विद्यालयोंमें वहाँ के अध्यापक • बारी-बारीसे प्रत्येक छुट्टाके दिन विद्यार्थियों को इधर-उधर घुमाने ले जाते हैं । - इस पर्यटनमें विद्यार्थि गण पर्यटनकी सुविधा और असुविधाओंका अनुभव तो प्राप्त करते ही हैं, साथ ही वन, उपवन, नदी-तर, समुद्र तट, पुल, रेलगाड़ी, पुतलीघर, यंत्र-शाला, नये विद्यालय, प्रदर्शनी, कौतुकालय, जोवशाला, पुस्तकालय, भवन श्रादि प्राकृतिक तथा मानव निर्मित वैभवोंका भी प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त करते हैं । शिक्षा शास्त्रियों का मत है कि एक वर्षमे पुस्तकों के सहारे जितना ज्ञान बढ़ाया जाता है, उतना एक दिन के पर्यटन में सिखाया जा सकता है क्योंकि नई वस्तुओंके परिचय के समय अध्यापक • तत्सम्बन्धी प्रत्येक ज्ञान स्वाभाविक रूपमें दे भी सकता है और प्रत्यक्ष • अनुभव होनेसे वह ज्ञान पक्का भी होता चलता है । यद्यपि हमारा देश -बहुत धनी नहीं है और दूर-दूरकी यात्राएँ हमारे लिये संभव भी नहीं हैं फिर भी आस पासके नगरों, गाँवों, पर्वतों और प्राकृतिक स्थानोंका परिचय तो हम छात्रोको करा ही सकते हैं। इस पर्यटनमें केवल भोजन-पानी, सैर-सपाटे, खेल-कूद और गप-सड़ाकेकी ही योजना न हो घरन् भली प्रकारसे उन स्थानोंक सम्बन्ध में सिखाए जानेवाले संभव विषयों के शिक्षणकी भी ऐसी व्यवस्था हो कि छात्र स्वयं उत्सुकतापूर्वक उन स्थानों के विषय में जानननेको लालायित हों और यदि उनकी उत्सुकता उद्दीत न हो तो अध्यापक स्वयं उन्हें ज्ञान -देने में प्रवृत्त हों। छात्रों व्यवस्थित मानसिक और बौद्धिक विकासके लिये साहित्य गोष्ठियोका भी आयोजन करना चाहिए । इन गोष्ठियोंमें पहले से विषय निर्धारित कर देने चाहिएँ, छात्रोंको उन गोष्ठियोंमें सक्रिय योग देनेके लिये उत्साहित करना चाहिए और उन्हें सामग्रीका भी निर्देश कर देना चाहिए कि वे उसके आधार पर पूर्व पक्ष या उत्तर पक्षकी ओरसे योग्यतापूर्वक
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.) ।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ( नदारद ) ।1क(क) - रिक्त ( नदारद ) ।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद ) ।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ( नदारद ) ।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद ) ।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद ) ।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद ) ।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद ) ।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद) ।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद ) ।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद ) ।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ( नदारद ) ।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद ) ।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ( नदारद ) ।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद ) ।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद ) ।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद ) ।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ( नदारद ) ।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
उदयपुर में एक सड़क के भूमि पूजन को लेकर विवाद हो गया। उदयपुर के अलसीगढ़ में नालफला सड़क का श्रेय लेने के लिए कांग्रेस और बीजेपी में तकरार हो गई। बीजेपी का कहना है कि ग्राम पंचायत अलसीगढ़ में सन 2014 में अलसीगढ़ से नालफला सड़क केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सड़क योजना में स्वीकृत हुई थी। 2014 में इस सड़क का भूमि पूजन और शिलान्यास हुआ था। यह शिलान्यास उदयपुर सांसद अर्जुनलाल मीणा और ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने किया था। मगर वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने से काम बंद हो गया था। बीजेपी ने कहा कि अब 7 साल बाद इसका काम 6 दिसम्बर को दोबारा शुरू हुआ। जिसे लेकर 7 दिसम्बर को पूर्व विधायक सज्जन कटारा और उनके कार्यकर्ताओं के साथ दोबारा इसका भूमिपूजन कर दिया। साथ ही उनके कार्यकर्ताओं ने शिलान्यास का पत्थर तोड़कर पास में पुलिया के नीचे फेंक दिया। इसे लेकर स्थानीय सरपंच और ग्रामीणों ने विरोध जताया। बीजेपी के उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने इसे लेकर उदयपुर एसपी से मुलाकात की और उन्हें कानूनी कार्रवाई के लिए ज्ञापन सौंप। ग्राम पंचायत से जुड़ी कई नेता-कार्यकर्ता इस मसले के चलते उदयपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे। नेताओं ने कहा कि ये सरासर गलत तरीका है और ऐसा करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए। इस दौरान फूलसिंह मीणा के साथ-साथ गिर्वा के पूर्व प्रधान तख्तसिंह शक्तावत, भाजपा नान्देश्वर मंडल अध्यक्ष दिनेश जी धायभाई, सरपंच पुष्करलाल सहित कई लोग मौजूद रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
उदयपुर में एक सड़क के भूमि पूजन को लेकर विवाद हो गया। उदयपुर के अलसीगढ़ में नालफला सड़क का श्रेय लेने के लिए कांग्रेस और बीजेपी में तकरार हो गई। बीजेपी का कहना है कि ग्राम पंचायत अलसीगढ़ में सन दो हज़ार चौदह में अलसीगढ़ से नालफला सड़क केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सड़क योजना में स्वीकृत हुई थी। दो हज़ार चौदह में इस सड़क का भूमि पूजन और शिलान्यास हुआ था। यह शिलान्यास उदयपुर सांसद अर्जुनलाल मीणा और ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने किया था। मगर वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने से काम बंद हो गया था। बीजेपी ने कहा कि अब सात साल बाद इसका काम छः दिसम्बर को दोबारा शुरू हुआ। जिसे लेकर सात दिसम्बर को पूर्व विधायक सज्जन कटारा और उनके कार्यकर्ताओं के साथ दोबारा इसका भूमिपूजन कर दिया। साथ ही उनके कार्यकर्ताओं ने शिलान्यास का पत्थर तोड़कर पास में पुलिया के नीचे फेंक दिया। इसे लेकर स्थानीय सरपंच और ग्रामीणों ने विरोध जताया। बीजेपी के उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने इसे लेकर उदयपुर एसपी से मुलाकात की और उन्हें कानूनी कार्रवाई के लिए ज्ञापन सौंप। ग्राम पंचायत से जुड़ी कई नेता-कार्यकर्ता इस मसले के चलते उदयपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे। नेताओं ने कहा कि ये सरासर गलत तरीका है और ऐसा करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए। इस दौरान फूलसिंह मीणा के साथ-साथ गिर्वा के पूर्व प्रधान तख्तसिंह शक्तावत, भाजपा नान्देश्वर मंडल अध्यक्ष दिनेश जी धायभाई, सरपंच पुष्करलाल सहित कई लोग मौजूद रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.