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न्यूज4नेशन डेस्क- बिहार में महागठबंधन को लेकर आज दिल्ली में महागठबंधन की बैठक है. इस बैठक में उपेन्द्र कुशवाहा को लेकर जो सस्पेंस बना हुआ था वो खत्म हो गया है. उपेन्द्र कुशवाहा ने महागठबंधन का दामन थाम लिया है. लेकिन इन सब से बीच बड़ी खबर यह आ रही है कि इस बैठक में राहुल गांधी के शामिल होने पर सस्पेंस बना हुआ है. आज शाम महागठबंधन की बैठक होनी है. इसमें आरजेडी से तेजस्वी यादव, हम से जीतन राम मांझी और अब आरएलएसपी से उपेन्द्र कुशवाहा शामिल होंगे. इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी शामिल होने वाले थे. लेकिन अभी वो शिमला हैं इसलिए उनके इस बैठक में शामिल होने पर सस्पेंस बरकरार है. अंदरखाने से यह खबर आ रही है कि सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस अभी कोई जल्दीबाजी नहीं करना चाह रही है. माना जा रहा है कि सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने में देरी हो रही है, इसी वजह से मुलाकात को आगे बढ़ा दिया गया है.
न्यूजचारनेशन डेस्क- बिहार में महागठबंधन को लेकर आज दिल्ली में महागठबंधन की बैठक है. इस बैठक में उपेन्द्र कुशवाहा को लेकर जो सस्पेंस बना हुआ था वो खत्म हो गया है. उपेन्द्र कुशवाहा ने महागठबंधन का दामन थाम लिया है. लेकिन इन सब से बीच बड़ी खबर यह आ रही है कि इस बैठक में राहुल गांधी के शामिल होने पर सस्पेंस बना हुआ है. आज शाम महागठबंधन की बैठक होनी है. इसमें आरजेडी से तेजस्वी यादव, हम से जीतन राम मांझी और अब आरएलएसपी से उपेन्द्र कुशवाहा शामिल होंगे. इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी शामिल होने वाले थे. लेकिन अभी वो शिमला हैं इसलिए उनके इस बैठक में शामिल होने पर सस्पेंस बरकरार है. अंदरखाने से यह खबर आ रही है कि सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस अभी कोई जल्दीबाजी नहीं करना चाह रही है. माना जा रहा है कि सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने में देरी हो रही है, इसी वजह से मुलाकात को आगे बढ़ा दिया गया है.
प्रेशर कुकर में खाना जल्दी बनता है, यह सबको पता है। क्या आपको पता है कि कुछ चीजें ऐसी हैं जो इसमें नहीं पकानी चाहिए। चावल बनाने हो, आलू और अंडे उबालने हो, दाल पकानी हो या कुछ भी इंस्टेंट बनाना हो हमारे दिमाग में प्रेशर कुकर सबसे पहले आता है। यह सही भी है क्योंकि प्रेशर कुकर में चीजें जल्दी पकती हैं। फटाफट चीजों को पकाने के लिए इससे बेहतरीन किचन अप्लायंस हो ही नहीं सकता है। लेकिन क्या आपको पता है कि कुकर में बहुत सी चीजें नहीं पकानी चाहिए? हम जिन चीजों को सोचते हैं कि वो कुकर में जल्दी बनेंगी, दरअसल वही हमारे लिए नुकसानदायक हो जाती हैं। यह चीजें प्रेशर कुकर में बनकर अपना असली स्वाद खो देती हैं, इसलिए इन्हें प्रेशर कुकर में बनाने से बचना चाहिए। अब आपने लोगों को कहते सुना होगा कि कुकर में चावल नहीं पकाना चाहिए। दरअसल चावल से निकलने वाला स्टार्च एक केमिकल बना देता है, जिससे हमारी सेहत को नुकसान होता है। इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे कुछ फूड आइटम्स के बारे में बताएंगे जिन्हें प्रेशर कुकर में बनाने से पहले आपको भी 10 बार सोच लेना है और उन्हें कुकर में बनाने से बचना चाहिए। कुकर का तला मोटा होता है और यह काफी गहरा होता है। कुछ लोग इसमें चिकन को फ्राई करने लगते हैं। अगर आप भी यही करती आ रही हैं, तो ऐसा करने से बचना चाहिए। इसे डीप फ्राई के लिए कभी इस्तेमाल न करें। दरअसल, यह उच्च तापमान में तेल गर्म करने के लिए नहीं बना होता है, इसलिए इससे चिकन भी अच्छा नहीं बनेगा और आपका कुकर भी खराब होगा। इससे अच्छा है कि आप अच्छा सा फ्राइंग पैन ही खरीद लें। आपको पता है कि अलग-अलग तरह की कुकिंग करने के लिए अलग बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह स्टिर फ्राई के लिए अलग पैन या कढ़ाही का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। सब्जियां फ्राई करने के लिए जितनी जगह और तापमान चाहिए होता है वो कुकर में नहीं बन पाता है और इसलिए इन्हें प्रेशर कुकर में बिल्कुल नहीं पकाना चाहिए। अब दालें तो कुकर में ही पक सकती हैं। इसे कढ़ाही में कैसे पकाया जा सकता है? आप भी यही सोच रही होंगी! कुकर में मोटी दालों को पकाया जा सकता है। राजमा, छोले, मूंग की दाल तो इसमें पक जाती हैं, लेकिन अरहर और मसूर की दाल बहुत जल्दी पकने वाली दाल हैं जो एकदम गल जाती हैं। इस कारण से इनका टेक्सचर और टेस्ट खराब हो जाता है, इसलिए इन्हें हमेशा कढ़ाही पर धीमी आंच पर बनाएं। आलू को उबालने से लेकर बनाने तक का काम भी हम लोग कुकर में ही करते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि चावल की तरह आलू को भी उसमें नहीं पकाना चाहिए। एक स्टडी में यह बताया गया है कि जनरल ऑफ साइंस ऑफ फूड और एग्रीकल्चर की एक स्टडी में यह बताया गया था कि प्रेशर में कुकिंग करने से खाने के पोषक तत्व कम होते हैं। आलू में भी चूंकि स्टार्च होता है तो वह एक तरह का केमिकल बना देता है, जो सेहत को नुकसान पहुंचाता है। तो ये हैं वो आइटम्स जिन्हें आपको कुकर में कभी नहीं पकाना चाहिए। आलू से लेकर सब्जियां फ्राई करने तक की चीजें अगर आप कुकर में करती आ रही हैं, तो अब ऐसा न करें। हमें उम्मीद है कि यह जानकारी आपको पसंद आएगी। अगर यह लेख पसंद आया तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें। ऐसे ही आर्टिकल पढ़ते रहने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
प्रेशर कुकर में खाना जल्दी बनता है, यह सबको पता है। क्या आपको पता है कि कुछ चीजें ऐसी हैं जो इसमें नहीं पकानी चाहिए। चावल बनाने हो, आलू और अंडे उबालने हो, दाल पकानी हो या कुछ भी इंस्टेंट बनाना हो हमारे दिमाग में प्रेशर कुकर सबसे पहले आता है। यह सही भी है क्योंकि प्रेशर कुकर में चीजें जल्दी पकती हैं। फटाफट चीजों को पकाने के लिए इससे बेहतरीन किचन अप्लायंस हो ही नहीं सकता है। लेकिन क्या आपको पता है कि कुकर में बहुत सी चीजें नहीं पकानी चाहिए? हम जिन चीजों को सोचते हैं कि वो कुकर में जल्दी बनेंगी, दरअसल वही हमारे लिए नुकसानदायक हो जाती हैं। यह चीजें प्रेशर कुकर में बनकर अपना असली स्वाद खो देती हैं, इसलिए इन्हें प्रेशर कुकर में बनाने से बचना चाहिए। अब आपने लोगों को कहते सुना होगा कि कुकर में चावल नहीं पकाना चाहिए। दरअसल चावल से निकलने वाला स्टार्च एक केमिकल बना देता है, जिससे हमारी सेहत को नुकसान होता है। इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे कुछ फूड आइटम्स के बारे में बताएंगे जिन्हें प्रेशर कुकर में बनाने से पहले आपको भी दस बार सोच लेना है और उन्हें कुकर में बनाने से बचना चाहिए। कुकर का तला मोटा होता है और यह काफी गहरा होता है। कुछ लोग इसमें चिकन को फ्राई करने लगते हैं। अगर आप भी यही करती आ रही हैं, तो ऐसा करने से बचना चाहिए। इसे डीप फ्राई के लिए कभी इस्तेमाल न करें। दरअसल, यह उच्च तापमान में तेल गर्म करने के लिए नहीं बना होता है, इसलिए इससे चिकन भी अच्छा नहीं बनेगा और आपका कुकर भी खराब होगा। इससे अच्छा है कि आप अच्छा सा फ्राइंग पैन ही खरीद लें। आपको पता है कि अलग-अलग तरह की कुकिंग करने के लिए अलग बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह स्टिर फ्राई के लिए अलग पैन या कढ़ाही का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। सब्जियां फ्राई करने के लिए जितनी जगह और तापमान चाहिए होता है वो कुकर में नहीं बन पाता है और इसलिए इन्हें प्रेशर कुकर में बिल्कुल नहीं पकाना चाहिए। अब दालें तो कुकर में ही पक सकती हैं। इसे कढ़ाही में कैसे पकाया जा सकता है? आप भी यही सोच रही होंगी! कुकर में मोटी दालों को पकाया जा सकता है। राजमा, छोले, मूंग की दाल तो इसमें पक जाती हैं, लेकिन अरहर और मसूर की दाल बहुत जल्दी पकने वाली दाल हैं जो एकदम गल जाती हैं। इस कारण से इनका टेक्सचर और टेस्ट खराब हो जाता है, इसलिए इन्हें हमेशा कढ़ाही पर धीमी आंच पर बनाएं। आलू को उबालने से लेकर बनाने तक का काम भी हम लोग कुकर में ही करते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि चावल की तरह आलू को भी उसमें नहीं पकाना चाहिए। एक स्टडी में यह बताया गया है कि जनरल ऑफ साइंस ऑफ फूड और एग्रीकल्चर की एक स्टडी में यह बताया गया था कि प्रेशर में कुकिंग करने से खाने के पोषक तत्व कम होते हैं। आलू में भी चूंकि स्टार्च होता है तो वह एक तरह का केमिकल बना देता है, जो सेहत को नुकसान पहुंचाता है। तो ये हैं वो आइटम्स जिन्हें आपको कुकर में कभी नहीं पकाना चाहिए। आलू से लेकर सब्जियां फ्राई करने तक की चीजें अगर आप कुकर में करती आ रही हैं, तो अब ऐसा न करें। हमें उम्मीद है कि यह जानकारी आपको पसंद आएगी। अगर यह लेख पसंद आया तो इसे लाइक और शेयर करना न भूलें। ऐसे ही आर्टिकल पढ़ते रहने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी के साथ। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
Posted On: कृषि स्टार्टअप के लिए बड़ी नीतिगत पहल करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। पूसा मेला ग्राउंड, दिल्ली में पीएम किसान सम्मान सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित एग्री स्टार्टअप कांफ्रेंस में श्री तोमर ने बताया कि कृषि स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के समग्र मार्गदर्शन के लिए कृषि मंत्री की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय संचालन समिति गठित की जाएगी। एग्री स्टार्टअप्स की सफल पहलों को आगे बढ़ाने व उनके लोकव्यापीकरण के लिए 500 करोड़ रु. का एक्सीलरेटर प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। बड़ी संख्या में उपस्थित एग्री स्टार्टअप प्रतिनिधियों के बीच केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने ऐलान किया कि कृषि सचिव की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें संबंधित एजेंसियों जैसे डेयर, डीपीआईआईटी, कृषि इनक्यूबेटर व ज्ञान भागीदारों, कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, प्रमुख निवेशकों, अन्य हितधारकों के शीर्ष स्तर के अधिकारी शामिल होंगे। साथ ही, कृषि मंत्रालय में कृषि स्टार्टअप के लिए संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में अलग डिवीजन बनाया जाएगा। प्रमाणन एजेंसियों, वित्तीय संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों आदि के साथ एग्री स्टार्टअप के लिए आवश्यक सभी लिंकेज की सुविधा के लिए सिंगल विंडो एजेंसी के रूप में काम करने के लिए सेल भी बनाया जाएगा। श्री तोमर ने बताया कि एग्री स्टार्टअप द्वारा विकसित उत्पादों की, बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए ई-नाम व नेफेड जैसी संस्थाओं के साथ एक मार्केटिंग लिंकेज बनाया जाएगा। सभी कृषि स्टार्टअप के लिए एक डेटाबेस तैयार करने और उनके विकास की निगरानी के लिए एक पोर्टल भी विकसित किया जाएगा। श्री तोमर ने कहा कि कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एग्री स्टार्टअप कॉन्क्लेव का आयोजन राष्ट्रीय व क्षेत्रीय स्तर पर करने का प्रयास किया जाएगा। श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की पिछले आठ साल में लगातार यह कोशिश रही है कि देश की ताकत उभरकर दुनिया के राजनीतिक मंच पर आना चाहिए। हमारे देश के किसान, नौजवान, स्टार्टअप आदि की ताकत को नियोजित तरीके से उभारकर लक्ष्य साधकर काम किया जाएं तो वह दिन दूर नहीं जब भारत सबका मार्गदर्शन करने दुनिया के राजनीतिक मंच पर खड़ा होगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी जब-जब भी विदेश गए तो वहां बैठकों के अलावा उन्होंने अप्रवासी भारतीयों से संपर्क कर उनका उत्साहवर्धन किया है। हमारे इन भाइयों-बहनों पर हमें गर्व है जो दुनिया को पोषित करने की क्षमता रखते है। श्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत बनाने व वोकल फार लोकल का आह्वान किया है, ऐसे में कभी विदेशी पैन देखकर गर्व करने वाले आज स्वयं सहायता समूह द्वारा बांस से बनाए गए पैन जेब में लगा देखकर गौरव का अनुभव करते हैं। पहले विदेश जाकर नौकरी करने की प्रतिस्पर्धा थी लेकिन आज हमारे कई युवा साथी विदेश में अच्छा जाब भी छोड़कर हिंदुस्तान में ही कोई उद्यम या आजीविका पूरी ताकत से करते हुए गौरव का अनुभव कर रहे हैं। यह बदलाव शुभ संकेत हैं। 8 साल पहले मात्र 80-100 कृषि स्टार्टअप थे, वहीं प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री मोदी द्वारा लगातार प्रोत्साहन के परिणामस्वरूप आज इनकी संख्या दो हजार से भी अधिक है, जिनमें से सैकड़ों को कृषि मंत्रालय की योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण व आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई है। केंद्र सरकार का इन्हें 10 हजार करने का लक्ष्य है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार तकनीक को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार चाहती है कि हमारे स्टार्टअप विद्यमान चुनौतियों का समाधान करते हुए देश-दुनिया के काम आएं, इस दिशा में कृषि मंत्रालय के साथ ही कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग (डेयर) व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) सहित अन्य संस्थाओं द्वारा पूरी शिद्दत से काम किया जा रहा है। श्री तोमर ने कहा कि टेक्नालाजी का लोकव्यापीकरण होना जरूरी है, तभी जन-जन को इसका वास्तविक लाभ होगा, साथ ही तकनीक ऐसी हो कि जिसकी लागत आम लोग वहन कर सकें। स्टार्टअप को अपनी दिशा व क्षेत्र तय कर काम करना चाहिए, ताकि किसानों को इनके कार्यों का पूरा लाभ मिल सकें। देश-दुनिया की बढ़ती आबादी के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा के लिए भी काम करना चाहिए, साथ ही जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए भी समाधान की दिशा में काम करना होगा। स्टार्टअप दूरदृष्टि व पक्के इरादे के साथ नवाचार करें। प्रधानमंत्री के आह्वान के अनुरूप, देश की आजादी के 100 वर्ष होने तक देश को पूरी तरह से विकसित करने में हमें कामयाब होना है। श्री तोमर ने कहा कि भारत सरकार इसके लिए स्टार्टअप के साथ कंधे से कंधा और कदम से कदम मिलाकर खड़ी हुई है। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी व सुश्री शोभा करंदलाजे भी उपस्थित थी। कृषि सचिव श्री मनोज अहूजा व आईसीएआर के महानिदेशक डा. हिमांशु पाठक ने भी संबोधित किया। प्रारंभ में, देशभर से आए सैकड़ों स्टार्टअप के अनेक प्रतिनिधियों ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव मंत्रीगण के समक्ष रखें। इससे पहले, केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने दोनों राज्यमंत्रियों के साथ विभिन्न स्टाल का अवलोकन कर स्टार्टअप से जानकारी ली। श.ना.चौ./प्र.क./ म.सिं.
Posted On: कृषि स्टार्टअप के लिए बड़ी नीतिगत पहल करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की। पूसा मेला ग्राउंड, दिल्ली में पीएम किसान सम्मान सम्मेलन के दूसरे दिन आयोजित एग्री स्टार्टअप कांफ्रेंस में श्री तोमर ने बताया कि कृषि स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के समग्र मार्गदर्शन के लिए कृषि मंत्री की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय संचालन समिति गठित की जाएगी। एग्री स्टार्टअप्स की सफल पहलों को आगे बढ़ाने व उनके लोकव्यापीकरण के लिए पाँच सौ करोड़ रु. का एक्सीलरेटर प्रोग्राम शुरू किया जाएगा। बड़ी संख्या में उपस्थित एग्री स्टार्टअप प्रतिनिधियों के बीच केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने ऐलान किया कि कृषि सचिव की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें संबंधित एजेंसियों जैसे डेयर, डीपीआईआईटी, कृषि इनक्यूबेटर व ज्ञान भागीदारों, कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, प्रमुख निवेशकों, अन्य हितधारकों के शीर्ष स्तर के अधिकारी शामिल होंगे। साथ ही, कृषि मंत्रालय में कृषि स्टार्टअप के लिए संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में अलग डिवीजन बनाया जाएगा। प्रमाणन एजेंसियों, वित्तीय संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों आदि के साथ एग्री स्टार्टअप के लिए आवश्यक सभी लिंकेज की सुविधा के लिए सिंगल विंडो एजेंसी के रूप में काम करने के लिए सेल भी बनाया जाएगा। श्री तोमर ने बताया कि एग्री स्टार्टअप द्वारा विकसित उत्पादों की, बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए ई-नाम व नेफेड जैसी संस्थाओं के साथ एक मार्केटिंग लिंकेज बनाया जाएगा। सभी कृषि स्टार्टअप के लिए एक डेटाबेस तैयार करने और उनके विकास की निगरानी के लिए एक पोर्टल भी विकसित किया जाएगा। श्री तोमर ने कहा कि कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए एग्री स्टार्टअप कॉन्क्लेव का आयोजन राष्ट्रीय व क्षेत्रीय स्तर पर करने का प्रयास किया जाएगा। श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की पिछले आठ साल में लगातार यह कोशिश रही है कि देश की ताकत उभरकर दुनिया के राजनीतिक मंच पर आना चाहिए। हमारे देश के किसान, नौजवान, स्टार्टअप आदि की ताकत को नियोजित तरीके से उभारकर लक्ष्य साधकर काम किया जाएं तो वह दिन दूर नहीं जब भारत सबका मार्गदर्शन करने दुनिया के राजनीतिक मंच पर खड़ा होगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी जब-जब भी विदेश गए तो वहां बैठकों के अलावा उन्होंने अप्रवासी भारतीयों से संपर्क कर उनका उत्साहवर्धन किया है। हमारे इन भाइयों-बहनों पर हमें गर्व है जो दुनिया को पोषित करने की क्षमता रखते है। श्री मोदी ने आत्मनिर्भर भारत बनाने व वोकल फार लोकल का आह्वान किया है, ऐसे में कभी विदेशी पैन देखकर गर्व करने वाले आज स्वयं सहायता समूह द्वारा बांस से बनाए गए पैन जेब में लगा देखकर गौरव का अनुभव करते हैं। पहले विदेश जाकर नौकरी करने की प्रतिस्पर्धा थी लेकिन आज हमारे कई युवा साथी विदेश में अच्छा जाब भी छोड़कर हिंदुस्तान में ही कोई उद्यम या आजीविका पूरी ताकत से करते हुए गौरव का अनुभव कर रहे हैं। यह बदलाव शुभ संकेत हैं। आठ साल पहले मात्र अस्सी-एक सौ कृषि स्टार्टअप थे, वहीं प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री मोदी द्वारा लगातार प्रोत्साहन के परिणामस्वरूप आज इनकी संख्या दो हजार से भी अधिक है, जिनमें से सैकड़ों को कृषि मंत्रालय की योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण व आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई है। केंद्र सरकार का इन्हें दस हजार करने का लक्ष्य है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार तकनीक को विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार चाहती है कि हमारे स्टार्टअप विद्यमान चुनौतियों का समाधान करते हुए देश-दुनिया के काम आएं, इस दिशा में कृषि मंत्रालय के साथ ही कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद सहित अन्य संस्थाओं द्वारा पूरी शिद्दत से काम किया जा रहा है। श्री तोमर ने कहा कि टेक्नालाजी का लोकव्यापीकरण होना जरूरी है, तभी जन-जन को इसका वास्तविक लाभ होगा, साथ ही तकनीक ऐसी हो कि जिसकी लागत आम लोग वहन कर सकें। स्टार्टअप को अपनी दिशा व क्षेत्र तय कर काम करना चाहिए, ताकि किसानों को इनके कार्यों का पूरा लाभ मिल सकें। देश-दुनिया की बढ़ती आबादी के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा के लिए भी काम करना चाहिए, साथ ही जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए भी समाधान की दिशा में काम करना होगा। स्टार्टअप दूरदृष्टि व पक्के इरादे के साथ नवाचार करें। प्रधानमंत्री के आह्वान के अनुरूप, देश की आजादी के एक सौ वर्ष होने तक देश को पूरी तरह से विकसित करने में हमें कामयाब होना है। श्री तोमर ने कहा कि भारत सरकार इसके लिए स्टार्टअप के साथ कंधे से कंधा और कदम से कदम मिलाकर खड़ी हुई है। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी व सुश्री शोभा करंदलाजे भी उपस्थित थी। कृषि सचिव श्री मनोज अहूजा व आईसीएआर के महानिदेशक डा. हिमांशु पाठक ने भी संबोधित किया। प्रारंभ में, देशभर से आए सैकड़ों स्टार्टअप के अनेक प्रतिनिधियों ने अपने महत्वपूर्ण सुझाव मंत्रीगण के समक्ष रखें। इससे पहले, केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने दोनों राज्यमंत्रियों के साथ विभिन्न स्टाल का अवलोकन कर स्टार्टअप से जानकारी ली। श.ना.चौ./प्र.क./ म.सिं.
Jamshedpur : जमशेदपुर लोकल ट्रेलर ओनर यूनियन ने केंद्र और राज्य सरकार के परिवहन नीति के खिलाफ आंदोलन करने का एलान कर दिया है. आगामी 25 दिसंबर से यूनियन सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी और पुरे सड़क परिवहन वयवस्था को ठप्प कर देगी. यूनियन के अध्यक्ष जय किशोर सिंह ने इस बाबत कहा की झारखण्ड राज्य को बिहार से अलग हुए 22 वर्ष हो चुके है और क्षेत्रफल के हिसाब से ये छोटा भी हो चूका है. बावजूद इसके आज भी संयुक्त बिहार के तर्ज पर ही टैक्स की वसूली की जा रही है साथ ही विगत कोरोना काल मे केंद्र और राज्य सरकार के निर्देश पर तमाम वाहन मालिकों ने अपने वाहन खडे कर दिये थे. लेकिन उसमे भी किसी प्रकार का टैक्स मे छूट नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि परिवहन नीति पूर्व की भांति चली आ रही है जिससे न केवल बड़े और भारी वाहन बल्कि छोटे माल वाहक वाहन, ऑटो यहाँ तक की दो पहिया वाहन चालक भी अतिरिक्त टैक्स का बोझ ढो रहे है. ऐसे मे इस परिवहन नीति को अब यूनियन बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि एक माह का समय वे राज्य और केंद्र सरकार को देते है. जिसके बाद आगामी 25 दिसंबर को जमशेदपुर से चक्का जाम आंदोलन शुरू किया जायेगा. जिसमे तमाम परिवहन के साधनों को ठप्प कर दिया जायेगा और अंतिम सांस तक यह आंदोलन चलेगा.
Jamshedpur : जमशेदपुर लोकल ट्रेलर ओनर यूनियन ने केंद्र और राज्य सरकार के परिवहन नीति के खिलाफ आंदोलन करने का एलान कर दिया है. आगामी पच्चीस दिसंबर से यूनियन सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगी और पुरे सड़क परिवहन वयवस्था को ठप्प कर देगी. यूनियन के अध्यक्ष जय किशोर सिंह ने इस बाबत कहा की झारखण्ड राज्य को बिहार से अलग हुए बाईस वर्ष हो चुके है और क्षेत्रफल के हिसाब से ये छोटा भी हो चूका है. बावजूद इसके आज भी संयुक्त बिहार के तर्ज पर ही टैक्स की वसूली की जा रही है साथ ही विगत कोरोना काल मे केंद्र और राज्य सरकार के निर्देश पर तमाम वाहन मालिकों ने अपने वाहन खडे कर दिये थे. लेकिन उसमे भी किसी प्रकार का टैक्स मे छूट नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि परिवहन नीति पूर्व की भांति चली आ रही है जिससे न केवल बड़े और भारी वाहन बल्कि छोटे माल वाहक वाहन, ऑटो यहाँ तक की दो पहिया वाहन चालक भी अतिरिक्त टैक्स का बोझ ढो रहे है. ऐसे मे इस परिवहन नीति को अब यूनियन बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि एक माह का समय वे राज्य और केंद्र सरकार को देते है. जिसके बाद आगामी पच्चीस दिसंबर को जमशेदपुर से चक्का जाम आंदोलन शुरू किया जायेगा. जिसमे तमाम परिवहन के साधनों को ठप्प कर दिया जायेगा और अंतिम सांस तक यह आंदोलन चलेगा.
एक गोपालगंज में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता मुरलीधर सिंह के आवास पर ठेकेदार की जिंदा जल कर हुई मौत के मामले में बिहार उत्तर प्रदेश और दिल्ली के साठ से अधिक ठिकानों पर छापेमारी अभियान जारी औरंगाबाद के नवीनगर स्थित एनटीपीसी के सुपर थर्मल प्लांट से कल से बिहार को पांच सौ सत्रह मेगावाट बिजली मिलने लगेगी मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटों के दौरान पटना सहित राज्य के उत्तरपूर्वी क्षेत्रों में गरज के साथ बारिश होने की जतायी संभावना चार और आज शिक्षक दिवस है इस अवसर पर राजधानी पटना सहित पूरे प्रदेश में आयोजित किये जा रहे हैं कई कार्यक्रम दो तीन गोपालगंज में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता मुरलीधर सिंह के आवास पर ठेकेदार की जिंदा जल कर हुई मौत के मामले में मुख्य अभियंता की गिरफ्तारी के लिए बिहार उत्तर प्रदेश और दिल्ली के साठ से अधिक ठिकानों पर छापामारी अभियान चलाया जा रहा है पुलिस ने ठेकेदार रामाशंकर सिंह हत्याकांड में फरार चल रहे अधीक्षक अभियंता जीतेन्द्र प्रसाद सिंह के आवास की कुर्की जब्त की इधर इस मामले में आज भी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता के फ्लैट की कुर्की जब्ती की जायेगी औरंगाबाद के नवीनगर स्थित एनटीपीसी के सुपर थर्मल प्लांट से कल से बिहार को पांच सौ सत्रह मेगावाट बिजली मिलने लगेगी एनटीपीसी की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी एनटीजीसी में पहली यूनिट तैयार होने के बाद दो यूनिटों का भी निर्माण कर रही है नवीनगर से बिजली मिलने पर बिहार को अब बाजार से कम बिजली खरीदनी पड़ेगी इस परियोजना की कुल लागत पन्द्रह हजार एक सौ बत्तीस करोड़ रूपये है परियोजना के पहले चरण में तीन इकाइयों से एक हजार नौ सौ अस्सी मेगावाट बिजली का उत्पादन होना है व्यावसायिक बिजली का उद्घाटन कल केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री आरकेसिंह करेंगे इस अवसर पर राज्य के ऊर्जा मंत्री बीजेन्द्र प्रसाद यादव सांसद सुशील कुमार सिंह महाबली सिंह एनटीपीसी लिमिटेड के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक गुरदीप सिंह उपस्थित रहेंगे राज्यपाल फागु चौहान ने विश्वविद्यालय शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों को नियमित वेतन तथा पेंशन भुगतान का आदेश दिया है राजभवन में आयोजित विश्वविद्यालयों की शैक्षिक गतिविधियों और कार्यकलापों की अलगअलग समीक्षात्मक बैठक में कुलपतियों को यह निर्देश दिया गया छात्र संघ चुनाव को आवश्यक बताते हुए राज्यपाल ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में नामांकन पूरा होने के एक माह बाद छात्र संघ चुनाव कराने को कहा है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना को जोड़ने वाले बिहटासरमेरा सड़क निर्माण का कार्य छह माह में पूरा करने का निर्देश दिया है यह सड़क पटनाबख्तियारपुर फोर लेन से तेलमर होते हुए नूरसराय तक बीस किलोमीटर लंबी और दस मीटर चौड़ी होगी मुख्यमंत्री ने इस सड़क के एलायमेंट की सहमति दे दी है इस सड़क के निर्माण से पटना से राजगीर की दूरी लगभग पन्द्रह किलोमीटर घट जायेगी मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय उच्च पथ संख्यातीस ए रामगढ़ से डियावां तक बीस किलोमीटर लंबी साढ़े पांच मीटर चौड़ी साठ करोड़ की लागत से बन रही सड़क का भी निरीक्षण किया इसका निर्माण कार्य दो हजार बीस तक पूरा करने का भी अधिकारियों को निर्देश दिया है परिवहन मंत्री संतोष कुमार निराला ने कहा है कि राज्य में एक निश्चित समय सीमा में पेट्रोल और डीजल से चलने वाले व्यावसायिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सीएनजी में बदला जायेगा परिवहन विभाग की समीक्षात्मक बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पटना में ट्रायल के तौर पर दस वाहनों को सीएनजी से परिचालित कराया गया है उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए सीएनजी वाहनों के परिचालन को बढ़ावा दिया जायेगा बैठक में साल के अंत तक पटना में ग्यारह सीएनजी स्टेशन खोलने का भी निर्णय लिया गया केन्द्रीय उपभोक्ता खाद्य और सार्वजनिक वितरण मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने अपने मंत्रालय और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम में इस महीने की पन्द्रह तरीख से एक ही बार इस्तेमाल किए जाने वाले सभी प्रकार के प्लास्टिक उत्पाद पर पूर्णरूप से प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है दोनों विभागों के सचिवों और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक में इसका निर्णय लिया गया आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार श्री पासवान ने सभी अधिकारियों से कहा है कि वे इस प्रतिबंध को प्रभावी तौर पर लागू करने के लिए वैकल्पिक प्रबंध करें मौसम विभाग ने कहा है कि अगले चौबीस घंटों के दौरान पटना सहित राज्य के उत्तरपूर्वी क्षेत्रों में गरज के साथ बारिश होने की संभावना है ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटवर्ती इलाकों से लेकर उत्तरपश्चिम बंगाल के खाड़ी क्षेत्र में कम दबाव का केन्द बना हुआ है प्रदेश के छह जिलों में बायोटेक किसान हब विकसित कर किसानों की आमदनी दुगुनी करने की कार्ययोजना को मंजूरी दी गयी है इनमें औरंगाबाद बांका अररिया कटिहार पूर्णिया और खगड़िया जिला शामिल है केन्द्र सरकार के बायोटेकनोलॉजी विभाग की इस पहल को अपनाते हुए बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबोर ने कल तक कार्य योजना तैयार कर स्वीकृति के लिए केन्द्र को सौंप देगा इसके अंतर्गत चयनित जिलों में पारम्परिक खेती कर रहे किसानों को उन्नत प्रजाति के मखाना केला उत्पादन वैज्ञानिक तरीके से बकरीपालन और मधुमक्खी पालन तथा मशरूम की खेती से जोड़ा जायेगा खरीफ मौसम के फसल सहायता योजना के लिए आवेदन की तारीख बढ़ा दी गयी है अब किसान तीस सितम्बर तक योजना के लिए आवेदन कर सकेंगे इससे पहले आवेदन की अंतिम तिथि इकतीस जुलाई से बढ़ाकर पन्द्रह सितम्बर कर दी गयी थी सहकारिता विभाग ने राज्य में बाढ़ और सुखाड़ को देखते हुए किसानों को एक और मौका देने का निर्णय लिया है आज शिक्षक दिवस है यह पूर्व राष्ट्रपति महान शिक्षा शास्त्री डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृ ष्णन के जन्म दिवस पर मनाया जाता है आज नई दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द राष्ट्रीय अध्यापक पुरस्कार का वितरण करेंगे इस दिन राष्ट्रीय स्तर पर अध्यापकों को उनके विशिष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है राज्यपाल फागु चौहान ने शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में उनके सद्प्रयासों की सफलता के लिए शुभकामना देता हूँ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षक दिवस के मौके पर राज्य के शिक्षकों को बधाई और शुभकामनायें दी हैं श्री कुमार ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में शिक्षकों के योगदान की अनदेखी नहीं की जा सकती है मुख्यमंत्री आज पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में शिक्षकों को राज्य पुरस्कार से सम्मानित करेंगे इधर इस अवसर पर राजधानी पटना सहित पूरे प्रदेश में कई कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं प्रदेश के नियोजित शिक्षकों के समान काम समान वेतन की मांग को लेकर आज शिक्षक दिवस के मौके पर होने वाले प्रदर्शन के मद्देनजर राज्य सरकार के शिक्षण संस्थानों के खुले रहने के निर्देश के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षकों के पटना पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है गौरतलब है कि शिक्षा विभाग अपर मुख्य सचिव आर के महाजन ने इस संबंध में पहले ही अधिसूचना जारी कर कहा था कि पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर स्कूलों में हर हाल में शिक्षक उपस्थित रहेंगे जो शिक्षक विद्यालय में उपस्थित नहीं होंगे उन पर नियमानुसार कार्रवाई होगी आधार अपडेट कराने के लिए आधार सेवा केन्द्रों पर लोगों को पहले से ऑनलाईन समय लेना होगा यूआईडीएआई के मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी अजय भूषण पांडेय ने कहा है कि जल्द ही देश के तिरपन शहरों में एक सौ चौदह सेवा केन्द्र खुलेंगे पूर्णिया जिले के धमदाहा अनुमंडल के मीरगंज थाना क्षेत्र में सड़क हादसे में तीन कांवरियों की मौत हो गई तथा छह अन्य गंभीर रूप से घायल हो गये पटना जिला विद्यालय अंडर नाईनटीन रग्बी फुटबॉल प्रतियोगिता के बालक वर्ग का खिताब एएनएस हाई स्कूल बाढ़ ने जबकि बालिका वर्ग का खिताब संत जोसेफ हाई स्कूल बाढ़ ने जीत लिया है प्रतियोगिता का आयोजन कला संस्कृति और युवा विभाग ने किया आज के सभी समाचार पत्रों ने अलगअलग खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है हिन्दुस्तान का शीर्षक हैमुख्यमंत्री ने नई सड़क के एलायमेंट को मंजूरी दी पटना से राजगीर को जोड़ेंगी नई सड़क दैनिक जागरण की सुर्थी हैएक अक्टूबर से फ्लोटिंग रेट पर होंगे होम पर्सनल और ऑटो लोन प्रभात खबर ने लिखा हैआठ और पन्द्रह सितम्बर को मरम्मत कार्य के दौरान खुली रहेगी कोइलवर पुल की एक लेन दो और अब अंत में मुख्य समाचार एक गोपालगंज में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता मुरलीधर सिंह के आवास पर ठेकेदार की जिंदा जल कर हुई मौत के मामले में बिहार उत्तर प्रदेश और दिल्ली के साठ से अधिक ठिकानों पर छापेमारी अभियान जारी औरंगाबाद के नवीनगर स्थित एनटीपीसी के सुपर थर्मल प्लांट से कल से बिहार को पांच सौ सत्रह मेगावाट बिजली मिलने लगेगी मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटों के दौरान पटना सहित राज्य के उत्तरपूर्वी क्षेत्रों में गरज के साथ बारिश होने की जतायी संभावना चार और आज शिक्षक दिवस है इस अवसर पर राजधानी पटना सहित पूरे प्रदेश में आयोजित किये जा रहे हैं कई कार्यक्रम इसके साथ ही आकाशवाणी पटना से प्रसारित प्रादेशिक समाचार का ये अंक समाप्त हुआ तीन
एक गोपालगंज में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता मुरलीधर सिंह के आवास पर ठेकेदार की जिंदा जल कर हुई मौत के मामले में बिहार उत्तर प्रदेश और दिल्ली के साठ से अधिक ठिकानों पर छापेमारी अभियान जारी औरंगाबाद के नवीनगर स्थित एनटीपीसी के सुपर थर्मल प्लांट से कल से बिहार को पांच सौ सत्रह मेगावाट बिजली मिलने लगेगी मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटों के दौरान पटना सहित राज्य के उत्तरपूर्वी क्षेत्रों में गरज के साथ बारिश होने की जतायी संभावना चार और आज शिक्षक दिवस है इस अवसर पर राजधानी पटना सहित पूरे प्रदेश में आयोजित किये जा रहे हैं कई कार्यक्रम दो तीन गोपालगंज में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता मुरलीधर सिंह के आवास पर ठेकेदार की जिंदा जल कर हुई मौत के मामले में मुख्य अभियंता की गिरफ्तारी के लिए बिहार उत्तर प्रदेश और दिल्ली के साठ से अधिक ठिकानों पर छापामारी अभियान चलाया जा रहा है पुलिस ने ठेकेदार रामाशंकर सिंह हत्याकांड में फरार चल रहे अधीक्षक अभियंता जीतेन्द्र प्रसाद सिंह के आवास की कुर्की जब्त की इधर इस मामले में आज भी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता के फ्लैट की कुर्की जब्ती की जायेगी औरंगाबाद के नवीनगर स्थित एनटीपीसी के सुपर थर्मल प्लांट से कल से बिहार को पांच सौ सत्रह मेगावाट बिजली मिलने लगेगी एनटीपीसी की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी एनटीजीसी में पहली यूनिट तैयार होने के बाद दो यूनिटों का भी निर्माण कर रही है नवीनगर से बिजली मिलने पर बिहार को अब बाजार से कम बिजली खरीदनी पड़ेगी इस परियोजना की कुल लागत पन्द्रह हजार एक सौ बत्तीस करोड़ रूपये है परियोजना के पहले चरण में तीन इकाइयों से एक हजार नौ सौ अस्सी मेगावाट बिजली का उत्पादन होना है व्यावसायिक बिजली का उद्घाटन कल केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री आरकेसिंह करेंगे इस अवसर पर राज्य के ऊर्जा मंत्री बीजेन्द्र प्रसाद यादव सांसद सुशील कुमार सिंह महाबली सिंह एनटीपीसी लिमिटेड के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक गुरदीप सिंह उपस्थित रहेंगे राज्यपाल फागु चौहान ने विश्वविद्यालय शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों को नियमित वेतन तथा पेंशन भुगतान का आदेश दिया है राजभवन में आयोजित विश्वविद्यालयों की शैक्षिक गतिविधियों और कार्यकलापों की अलगअलग समीक्षात्मक बैठक में कुलपतियों को यह निर्देश दिया गया छात्र संघ चुनाव को आवश्यक बताते हुए राज्यपाल ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में नामांकन पूरा होने के एक माह बाद छात्र संघ चुनाव कराने को कहा है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना को जोड़ने वाले बिहटासरमेरा सड़क निर्माण का कार्य छह माह में पूरा करने का निर्देश दिया है यह सड़क पटनाबख्तियारपुर फोर लेन से तेलमर होते हुए नूरसराय तक बीस किलोमीटर लंबी और दस मीटर चौड़ी होगी मुख्यमंत्री ने इस सड़क के एलायमेंट की सहमति दे दी है इस सड़क के निर्माण से पटना से राजगीर की दूरी लगभग पन्द्रह किलोमीटर घट जायेगी मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय उच्च पथ संख्यातीस ए रामगढ़ से डियावां तक बीस किलोमीटर लंबी साढ़े पांच मीटर चौड़ी साठ करोड़ की लागत से बन रही सड़क का भी निरीक्षण किया इसका निर्माण कार्य दो हजार बीस तक पूरा करने का भी अधिकारियों को निर्देश दिया है परिवहन मंत्री संतोष कुमार निराला ने कहा है कि राज्य में एक निश्चित समय सीमा में पेट्रोल और डीजल से चलने वाले व्यावसायिक वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सीएनजी में बदला जायेगा परिवहन विभाग की समीक्षात्मक बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पटना में ट्रायल के तौर पर दस वाहनों को सीएनजी से परिचालित कराया गया है उन्होंने कहा कि बढ़ते प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए सीएनजी वाहनों के परिचालन को बढ़ावा दिया जायेगा बैठक में साल के अंत तक पटना में ग्यारह सीएनजी स्टेशन खोलने का भी निर्णय लिया गया केन्द्रीय उपभोक्ता खाद्य और सार्वजनिक वितरण मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने अपने मंत्रालय और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम में इस महीने की पन्द्रह तरीख से एक ही बार इस्तेमाल किए जाने वाले सभी प्रकार के प्लास्टिक उत्पाद पर पूर्णरूप से प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है दोनों विभागों के सचिवों और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक में इसका निर्णय लिया गया आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार श्री पासवान ने सभी अधिकारियों से कहा है कि वे इस प्रतिबंध को प्रभावी तौर पर लागू करने के लिए वैकल्पिक प्रबंध करें मौसम विभाग ने कहा है कि अगले चौबीस घंटों के दौरान पटना सहित राज्य के उत्तरपूर्वी क्षेत्रों में गरज के साथ बारिश होने की संभावना है ओडिशा और पश्चिम बंगाल के तटवर्ती इलाकों से लेकर उत्तरपश्चिम बंगाल के खाड़ी क्षेत्र में कम दबाव का केन्द बना हुआ है प्रदेश के छह जिलों में बायोटेक किसान हब विकसित कर किसानों की आमदनी दुगुनी करने की कार्ययोजना को मंजूरी दी गयी है इनमें औरंगाबाद बांका अररिया कटिहार पूर्णिया और खगड़िया जिला शामिल है केन्द्र सरकार के बायोटेकनोलॉजी विभाग की इस पहल को अपनाते हुए बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबोर ने कल तक कार्य योजना तैयार कर स्वीकृति के लिए केन्द्र को सौंप देगा इसके अंतर्गत चयनित जिलों में पारम्परिक खेती कर रहे किसानों को उन्नत प्रजाति के मखाना केला उत्पादन वैज्ञानिक तरीके से बकरीपालन और मधुमक्खी पालन तथा मशरूम की खेती से जोड़ा जायेगा खरीफ मौसम के फसल सहायता योजना के लिए आवेदन की तारीख बढ़ा दी गयी है अब किसान तीस सितम्बर तक योजना के लिए आवेदन कर सकेंगे इससे पहले आवेदन की अंतिम तिथि इकतीस जुलाई से बढ़ाकर पन्द्रह सितम्बर कर दी गयी थी सहकारिता विभाग ने राज्य में बाढ़ और सुखाड़ को देखते हुए किसानों को एक और मौका देने का निर्णय लिया है आज शिक्षक दिवस है यह पूर्व राष्ट्रपति महान शिक्षा शास्त्री डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृ ष्णन के जन्म दिवस पर मनाया जाता है आज नई दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द राष्ट्रीय अध्यापक पुरस्कार का वितरण करेंगे इस दिन राष्ट्रीय स्तर पर अध्यापकों को उनके विशिष्ट योगदान के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है राज्यपाल फागु चौहान ने शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में उनके सद्प्रयासों की सफलता के लिए शुभकामना देता हूँ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षक दिवस के मौके पर राज्य के शिक्षकों को बधाई और शुभकामनायें दी हैं श्री कुमार ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में शिक्षकों के योगदान की अनदेखी नहीं की जा सकती है मुख्यमंत्री आज पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में शिक्षकों को राज्य पुरस्कार से सम्मानित करेंगे इधर इस अवसर पर राजधानी पटना सहित पूरे प्रदेश में कई कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं प्रदेश के नियोजित शिक्षकों के समान काम समान वेतन की मांग को लेकर आज शिक्षक दिवस के मौके पर होने वाले प्रदर्शन के मद्देनजर राज्य सरकार के शिक्षण संस्थानों के खुले रहने के निर्देश के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षकों के पटना पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है गौरतलब है कि शिक्षा विभाग अपर मुख्य सचिव आर के महाजन ने इस संबंध में पहले ही अधिसूचना जारी कर कहा था कि पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर स्कूलों में हर हाल में शिक्षक उपस्थित रहेंगे जो शिक्षक विद्यालय में उपस्थित नहीं होंगे उन पर नियमानुसार कार्रवाई होगी आधार अपडेट कराने के लिए आधार सेवा केन्द्रों पर लोगों को पहले से ऑनलाईन समय लेना होगा यूआईडीएआई के मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी अजय भूषण पांडेय ने कहा है कि जल्द ही देश के तिरपन शहरों में एक सौ चौदह सेवा केन्द्र खुलेंगे पूर्णिया जिले के धमदाहा अनुमंडल के मीरगंज थाना क्षेत्र में सड़क हादसे में तीन कांवरियों की मौत हो गई तथा छह अन्य गंभीर रूप से घायल हो गये पटना जिला विद्यालय अंडर नाईनटीन रग्बी फुटबॉल प्रतियोगिता के बालक वर्ग का खिताब एएनएस हाई स्कूल बाढ़ ने जबकि बालिका वर्ग का खिताब संत जोसेफ हाई स्कूल बाढ़ ने जीत लिया है प्रतियोगिता का आयोजन कला संस्कृति और युवा विभाग ने किया आज के सभी समाचार पत्रों ने अलगअलग खबरों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है हिन्दुस्तान का शीर्षक हैमुख्यमंत्री ने नई सड़क के एलायमेंट को मंजूरी दी पटना से राजगीर को जोड़ेंगी नई सड़क दैनिक जागरण की सुर्थी हैएक अक्टूबर से फ्लोटिंग रेट पर होंगे होम पर्सनल और ऑटो लोन प्रभात खबर ने लिखा हैआठ और पन्द्रह सितम्बर को मरम्मत कार्य के दौरान खुली रहेगी कोइलवर पुल की एक लेन दो और अब अंत में मुख्य समाचार एक गोपालगंज में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता मुरलीधर सिंह के आवास पर ठेकेदार की जिंदा जल कर हुई मौत के मामले में बिहार उत्तर प्रदेश और दिल्ली के साठ से अधिक ठिकानों पर छापेमारी अभियान जारी औरंगाबाद के नवीनगर स्थित एनटीपीसी के सुपर थर्मल प्लांट से कल से बिहार को पांच सौ सत्रह मेगावाट बिजली मिलने लगेगी मौसम विभाग ने अगले चौबीस घंटों के दौरान पटना सहित राज्य के उत्तरपूर्वी क्षेत्रों में गरज के साथ बारिश होने की जतायी संभावना चार और आज शिक्षक दिवस है इस अवसर पर राजधानी पटना सहित पूरे प्रदेश में आयोजित किये जा रहे हैं कई कार्यक्रम इसके साथ ही आकाशवाणी पटना से प्रसारित प्रादेशिक समाचार का ये अंक समाप्त हुआ तीन
श्वर की धारणा वेदों में भी पाई जाती है - 'उतधाने यो प्रस्तुतः पुमां इति ब्रुवे पणिः सवैरदेय इत्समः (ऋग्वेद ५।६१८ ) । सायण ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा है - 'नेमः अर्धः जायापत्योमिलित्वैक कार्यकर्तृत्त्वादेक एवं पदार्थः अर्ध शरीरस्य ।" इससे यह स्पष्ट है कि बहुत प्राचीन काल से ही अर्द्धनारीश्वर की कल्पना चली आ रही है । शिव और शक्ति, पुरुष और प्रकृति तथा नर और नारी के बिना सृष्टि का क्रम नहीं चल सकता फिर भावनाओं के उद्रेक के लिये केवल राग कैसे पूरे पड़ते, रागिनी की कल्पना आवश्यक थी । राग-रागिनियों की चाक्षुष मूर्ति की परिकल्पना का भी मनोवैज्ञानिक आधार है । यह हम सबका अनुभव - बोध है कि हम उसी वस्तु को अपने हृदय के निकट पाते हैं, अपनी श्रद्धा, भक्ति, प्रेम और ममता का आलम्बन मानते हैं जिसमें हमारा पूरक बनने की शक्ति है और जो हमारी इस मिट्टी की दुनिया में हमारी इन्द्रियों के विषय और उनके व्यवहार का आधार बनने की क्षमता रखता है । निराकार सर्वव्यापक ईश्वर हमारे मन और चिन्तन का विषय तो हो सकता है, पर प्रेम-समर्पण के लिये तो उसे मनमोहन बनना ही होगा । श्रद्धा पाने के लिये उसे मर्यादापुरुषोत्तम दाशरथी राम के रूप में अवतरित होना ही होगा; 'रमन्ते योगिनो यस्मिन् ' उस राम में योगी अपनी सत्ता को चाहे भले ही एक रूप कर दें, पर श्रद्धा का आधार बनने के लिये तो उसे जगत् में माना ही होगा । मनुष्य का स्थूल-जगत् उसके भाव-जगत् का परिणाम है । भाव-जगत् को रूपायित एवं लीलायित करने में मुख्यतः तीन प्रवृत्तियों का हाथ है - जीने की इच्छा, विस्तार की इच्छा और कल्पना । मानव में जीने की इच्छा केवल भोग-विलास से ही शान्त नहीं होती : मनुष्य स्वभाव से ही प्रतृप्त है । वह जीवन के रहस्य को जानना चाहत पहुँचना चाहता है, उस मूल पर जहाँ जीवन सबसे पहले स्फुरित और जागरूक हुआ था; और इतने से ही उसे सन्तोष नहीं होता; वह परिचित होना चाहता है जीवन के उस पहलू से भी, जिसे मृत्यु कहते हैं जो 'नास्ति' नहीं 'अस्ति' की ही एक रहस्यमयी सत्ता है । इसी रहस्य की खोज ने मनुष्य में धर्म की भावना को उद्बुद्ध किया, भोग को बहुमुखी बनाया, उदात्त प्रवृत्तियों के मूल्य को निर्धारित किया । प्रेय और श्रेय को विभाजित किया, और मनुष्य में कठिनाइयों, विपत्तियों एवं बाधाओं में रस और उत्साह के साथ जूझने की प्रेरणा दी, जिसने मनुष्य को मृत्युञ्जयी बना दिया । मनुष्य में दूसरी प्रबल - प्रवृत्ति है विस्तार की- 'एकोऽहं बहुस्याम' के आदि भावना की । मनुष्य में जो कुछ सत्य, शिव और सुन्दर है उसे सब में देखने, सबके लिये सुलभ बनाने और सब में पाने का प्रयास मानव-सत्ता की चिर-परिणति है। सौन्दर्य का बोध, सौन्दर्य का सूजन और सुन्दर में प्रवह्मान रस-रूप से तादात्म्य इसी में उसके जीवन का ताना-बाना बुना हुआ है। कल्पना सहायिका बनती है उपरोक्त दोनों प्रवृत्तियों की पूर्णता एवं परिणति में । सौन्दर्य की साधना कल्पना का सहारा लेकर शिल्प, साहित्य एवं कला का रूप धारण करती है । कलाकार साधक है, स्रष्टा है और स्वयं रसरूप होकर रस का वितरक है । जिस प्रकार सारा विश्व - ब्रह्माण्ड विधाता के प्रानन्दरूप का प्रतिबिम्ब है, उसी प्रकार कला कलाकार की साधना और आनन्दानुभूति का रस सिञ्चित स्थूल रूप है । यही भावना है जिसने नाद- ब्रह्म को राग-रागिनियों के रूप में परिवर्तित किया । गायक ने अपनी संगीत - साधना में नाद के जिस रूप, रंग, स्फुरण और रसता का अनुभव किया उसे दूसरों के लिये अनुभव एवं बोधगम्य कराने के लिये किसी स्थूलरूप का सहारा लेना उसके लिये आवश्यक हो गया । यही आवश्यकता राग-रागिनियों के चाक्षुषरूप का कारण बनी। मैं यह पहले कहा हूँ कि साधकों एवं भक्तों ने उसे देवी-देवताओं के रूप में देखा और भोगियों ने नायक-नायिकाओं के रूप में उसका अनुभव किया । मध्ययुग की यह विशेषता रही कि साधक अपने आराध्य देवी-देवताओं के चाक्षुषरूप की कल्पना विस्तार से करने लगे । साधनमालाओं में इस तरह के मन्त्र भरे पड़े हैं जो देवताओं की प्रार्थना में उनके रूप, रंग, आकार एवं प्रभाव-विस्तार का विशद वर्णन करते हैं । इस तरह की आस्था का प्रभाव संगीत-साधकों पर भी पड़ा और उन्होंने भी नाद- ब्रह्म के ध्यान- मन्त्रों की परियोजना उनके विभिन्न रूपों में की । शार्ङ्गदेव (१३वीं शती का प्रारम्भिक भाग ) ऐसे पहले आचार्य हैं जिन्होंने रागों के भाव और इसका वर्णन किया और बाद के प्राचार्यों ने, जिन में हनुमान मुख्य हैं, रागरागिनियों के ध्यान मन्त्रों का समावेश संगीतशास्त्र में किया । पण्डित सोमनाथ के 'रागविबोध' में राग-रागिनियों के ध्यान -मन्त्र हैं। कुछ विद्वानों का मत है कि नारद ने अपनी पुस्तक 'पंचमसार संहिता' में राग-रागिनियों के ध्यान-मन्त्रों को दिया है, पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि नारद ने पण्डित सोमनाथ से पहले ध्यान मन्त्रों को बनाया था" । यह ध्यान देने योग्य बात है कि शार्ङ्गदेव का 'संगीत रत्नाकर' यद्यपि 'रागमाला' चित्रों का आधार बना, पर चित्रकारों ने राग के रस रूप के आलेखन एवं में अपनी स्वतन्त्रता बरती हैं । प्रश्न यह उठता है कि राग-रागिनियों के ध्यान- मन्त्र की आवश्यकता क्यों पड़ी, और उनके मूर्ति की कल्पना का प्राधार क्या बना ? इस प्रश्न का उत्तर भारतीय विचारक के लिये कठिन नहीं है । भारतीय संस्कृति ने संगीत को साधना का साधन तथा मोक्ष प्राप्ति का सहारा माना है। मानव की तन्मयता, जो ब्रह्म-साक्षातकार की साक्षी है संगीत के द्वारा जितनी आसानी से उपलब्ध की जा सकती है उतनी आसानी से दूसरे साधनों से दुर्लभ है । नाद को ब्रह्म का रूप माना है और नाद जब रस के उद्रेक का साधन बनता है तब वह स्वर, ताल, लय एवं छन्द में ढल जाता है और साधक-गायक के मानस-चक्षु के सामने नाना ६३. राग-रागिनियों के ध्यान मन्त्रों का बड़ा विस्तृत संग्रह 'राग कल्पद्रुम' में है।
श्वर की धारणा वेदों में भी पाई जाती है - 'उतधाने यो प्रस्तुतः पुमां इति ब्रुवे पणिः सवैरदेय इत्समः । सायण ने इसे स्पष्ट करते हुए कहा है - 'नेमः अर्धः जायापत्योमिलित्वैक कार्यकर्तृत्त्वादेक एवं पदार्थः अर्ध शरीरस्य ।" इससे यह स्पष्ट है कि बहुत प्राचीन काल से ही अर्द्धनारीश्वर की कल्पना चली आ रही है । शिव और शक्ति, पुरुष और प्रकृति तथा नर और नारी के बिना सृष्टि का क्रम नहीं चल सकता फिर भावनाओं के उद्रेक के लिये केवल राग कैसे पूरे पड़ते, रागिनी की कल्पना आवश्यक थी । राग-रागिनियों की चाक्षुष मूर्ति की परिकल्पना का भी मनोवैज्ञानिक आधार है । यह हम सबका अनुभव - बोध है कि हम उसी वस्तु को अपने हृदय के निकट पाते हैं, अपनी श्रद्धा, भक्ति, प्रेम और ममता का आलम्बन मानते हैं जिसमें हमारा पूरक बनने की शक्ति है और जो हमारी इस मिट्टी की दुनिया में हमारी इन्द्रियों के विषय और उनके व्यवहार का आधार बनने की क्षमता रखता है । निराकार सर्वव्यापक ईश्वर हमारे मन और चिन्तन का विषय तो हो सकता है, पर प्रेम-समर्पण के लिये तो उसे मनमोहन बनना ही होगा । श्रद्धा पाने के लिये उसे मर्यादापुरुषोत्तम दाशरथी राम के रूप में अवतरित होना ही होगा; 'रमन्ते योगिनो यस्मिन् ' उस राम में योगी अपनी सत्ता को चाहे भले ही एक रूप कर दें, पर श्रद्धा का आधार बनने के लिये तो उसे जगत् में माना ही होगा । मनुष्य का स्थूल-जगत् उसके भाव-जगत् का परिणाम है । भाव-जगत् को रूपायित एवं लीलायित करने में मुख्यतः तीन प्रवृत्तियों का हाथ है - जीने की इच्छा, विस्तार की इच्छा और कल्पना । मानव में जीने की इच्छा केवल भोग-विलास से ही शान्त नहीं होती : मनुष्य स्वभाव से ही प्रतृप्त है । वह जीवन के रहस्य को जानना चाहत पहुँचना चाहता है, उस मूल पर जहाँ जीवन सबसे पहले स्फुरित और जागरूक हुआ था; और इतने से ही उसे सन्तोष नहीं होता; वह परिचित होना चाहता है जीवन के उस पहलू से भी, जिसे मृत्यु कहते हैं जो 'नास्ति' नहीं 'अस्ति' की ही एक रहस्यमयी सत्ता है । इसी रहस्य की खोज ने मनुष्य में धर्म की भावना को उद्बुद्ध किया, भोग को बहुमुखी बनाया, उदात्त प्रवृत्तियों के मूल्य को निर्धारित किया । प्रेय और श्रेय को विभाजित किया, और मनुष्य में कठिनाइयों, विपत्तियों एवं बाधाओं में रस और उत्साह के साथ जूझने की प्रेरणा दी, जिसने मनुष्य को मृत्युञ्जयी बना दिया । मनुष्य में दूसरी प्रबल - प्रवृत्ति है विस्तार की- 'एकोऽहं बहुस्याम' के आदि भावना की । मनुष्य में जो कुछ सत्य, शिव और सुन्दर है उसे सब में देखने, सबके लिये सुलभ बनाने और सब में पाने का प्रयास मानव-सत्ता की चिर-परिणति है। सौन्दर्य का बोध, सौन्दर्य का सूजन और सुन्दर में प्रवह्मान रस-रूप से तादात्म्य इसी में उसके जीवन का ताना-बाना बुना हुआ है। कल्पना सहायिका बनती है उपरोक्त दोनों प्रवृत्तियों की पूर्णता एवं परिणति में । सौन्दर्य की साधना कल्पना का सहारा लेकर शिल्प, साहित्य एवं कला का रूप धारण करती है । कलाकार साधक है, स्रष्टा है और स्वयं रसरूप होकर रस का वितरक है । जिस प्रकार सारा विश्व - ब्रह्माण्ड विधाता के प्रानन्दरूप का प्रतिबिम्ब है, उसी प्रकार कला कलाकार की साधना और आनन्दानुभूति का रस सिञ्चित स्थूल रूप है । यही भावना है जिसने नाद- ब्रह्म को राग-रागिनियों के रूप में परिवर्तित किया । गायक ने अपनी संगीत - साधना में नाद के जिस रूप, रंग, स्फुरण और रसता का अनुभव किया उसे दूसरों के लिये अनुभव एवं बोधगम्य कराने के लिये किसी स्थूलरूप का सहारा लेना उसके लिये आवश्यक हो गया । यही आवश्यकता राग-रागिनियों के चाक्षुषरूप का कारण बनी। मैं यह पहले कहा हूँ कि साधकों एवं भक्तों ने उसे देवी-देवताओं के रूप में देखा और भोगियों ने नायक-नायिकाओं के रूप में उसका अनुभव किया । मध्ययुग की यह विशेषता रही कि साधक अपने आराध्य देवी-देवताओं के चाक्षुषरूप की कल्पना विस्तार से करने लगे । साधनमालाओं में इस तरह के मन्त्र भरे पड़े हैं जो देवताओं की प्रार्थना में उनके रूप, रंग, आकार एवं प्रभाव-विस्तार का विशद वर्णन करते हैं । इस तरह की आस्था का प्रभाव संगीत-साधकों पर भी पड़ा और उन्होंने भी नाद- ब्रह्म के ध्यान- मन्त्रों की परियोजना उनके विभिन्न रूपों में की । शार्ङ्गदेव ऐसे पहले आचार्य हैं जिन्होंने रागों के भाव और इसका वर्णन किया और बाद के प्राचार्यों ने, जिन में हनुमान मुख्य हैं, रागरागिनियों के ध्यान मन्त्रों का समावेश संगीतशास्त्र में किया । पण्डित सोमनाथ के 'रागविबोध' में राग-रागिनियों के ध्यान -मन्त्र हैं। कुछ विद्वानों का मत है कि नारद ने अपनी पुस्तक 'पंचमसार संहिता' में राग-रागिनियों के ध्यान-मन्त्रों को दिया है, पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि नारद ने पण्डित सोमनाथ से पहले ध्यान मन्त्रों को बनाया था" । यह ध्यान देने योग्य बात है कि शार्ङ्गदेव का 'संगीत रत्नाकर' यद्यपि 'रागमाला' चित्रों का आधार बना, पर चित्रकारों ने राग के रस रूप के आलेखन एवं में अपनी स्वतन्त्रता बरती हैं । प्रश्न यह उठता है कि राग-रागिनियों के ध्यान- मन्त्र की आवश्यकता क्यों पड़ी, और उनके मूर्ति की कल्पना का प्राधार क्या बना ? इस प्रश्न का उत्तर भारतीय विचारक के लिये कठिन नहीं है । भारतीय संस्कृति ने संगीत को साधना का साधन तथा मोक्ष प्राप्ति का सहारा माना है। मानव की तन्मयता, जो ब्रह्म-साक्षातकार की साक्षी है संगीत के द्वारा जितनी आसानी से उपलब्ध की जा सकती है उतनी आसानी से दूसरे साधनों से दुर्लभ है । नाद को ब्रह्म का रूप माना है और नाद जब रस के उद्रेक का साधन बनता है तब वह स्वर, ताल, लय एवं छन्द में ढल जाता है और साधक-गायक के मानस-चक्षु के सामने नाना तिरेसठ. राग-रागिनियों के ध्यान मन्त्रों का बड़ा विस्तृत संग्रह 'राग कल्पद्रुम' में है।
बिहार के गया में लोजपा नेता मोहम्मद अनवर अली खान की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी है. यह घटना आमस थाना क्षेत्र की है. इस घटना के बाद जीटी रोड पर जाम लग गया है. यह घटना आज की है जब मो. अनवर अली खान सैलून में शेविंग कर रहे थे. इसी दौरान बाइक पर तीन बदमाश वहां आये और अंधाधुंध फायरिंग कर उनकी हत्या कर दी. अनवर अली की मौके पर ही मौत हो गई। अनवर अली लोजपा श्रमिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष थे. फायरिंग होते ही बाजार में अफरा-तफरी मच गयी. घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-82 को जाम कर दिया. आक्रोशित परिजन दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं. इस पूरे मामले में गया सिटी के एसपी हिमांशु ने बताया कि अनवर सैलून में शेविंग कर रहा था. इसी दौरान अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर उनकी हत्या कर दी. नेशनल हाईवे जाम हटाने के लिए आक्रोशित लोगों को समझाया जा रहा है. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है. पुलिस मामले की जांच कर रही है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया है. यह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद पता चलेगा. अनवर अली खान पहले भी गुरुआ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं. इस क्षेत्र में उनका नाम था. उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले भी दर्ज थे. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.
बिहार के गया में लोजपा नेता मोहम्मद अनवर अली खान की बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी है. यह घटना आमस थाना क्षेत्र की है. इस घटना के बाद जीटी रोड पर जाम लग गया है. यह घटना आज की है जब मो. अनवर अली खान सैलून में शेविंग कर रहे थे. इसी दौरान बाइक पर तीन बदमाश वहां आये और अंधाधुंध फायरिंग कर उनकी हत्या कर दी. अनवर अली की मौके पर ही मौत हो गई। अनवर अली लोजपा श्रमिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष थे. फायरिंग होते ही बाजार में अफरा-तफरी मच गयी. घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-बयासी को जाम कर दिया. आक्रोशित परिजन दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं. इस पूरे मामले में गया सिटी के एसपी हिमांशु ने बताया कि अनवर सैलून में शेविंग कर रहा था. इसी दौरान अपराधियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर उनकी हत्या कर दी. नेशनल हाईवे जाम हटाने के लिए आक्रोशित लोगों को समझाया जा रहा है. फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है. पुलिस मामले की जांच कर रही है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया है. यह पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद पता चलेगा. अनवर अली खान पहले भी गुरुआ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं. इस क्षेत्र में उनका नाम था. उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले भी दर्ज थे. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है.
12 विश्व इतिहास के कुछ विषय की क्षमता भी अधिक नहीं थी, क्योंकि वह अभी भी अपना बहुत सा समय पेड़ों पर गुज़ारता था इसलिए उसमें पेड़ों पर जीवन जीने के लिए आवश्यक अनेक विशेषताएँ अब भी मौजूद थीं। (जैसे, आगे के अवयवों का लंबा होना, हाथ और पैरों की हड्डियों का मुड़ा होना, और टखने के जोड़ों आस्ट्रेलोपिथिकस, ओल्डुवई गोर्ज की खोज 17 जुलाई, 1959 ओल्डुवई गोर्ज (पृ. 14) सर्वप्रथम बीसवीं सदी के प्रारंभिक वर्षों में एक जर्मन तितली संग्राहक द्वारा खोजा गया था; लेकिन आगे चलकर यह ओल्डुवई नाम मेरी और लुईस लीकी के साथ गहराई से जुड़ गया जिन्होंने यहाँ 40 वर्ष से भी अधिक समय तक शोधकार्य किया था। मेरी लीकी ने ही ओल्डुवई और लेतोली में पुरातत्त्वीय खुदाई कार्यों की देखभाल की थी और वहाँ की गई अनेक रोमांचक खोजों में उसका हाथ रहा था । लुईस लीकी ने अपनी इस अद्भुत खोज का वर्णन इस प्रकार किया हैः " उस दिन सवेरे जब मैं उठा तो मुझे सिर में दर्द और हलका बुखार महसूस हो रहा था। इच्छा तो नहीं थी पर मुझे शिविर में ही रहना पड़ा। चूंकि हम दोनों में से मैं काम पर नहीं जा रहा था इसलिए मेरी के लिए काम पर जाना ज़रूरी हो गया। हमें अपना काम पूरा करने के लिए सिर्फ सात सप्ताह का ही समय मिला था जो जल्दी-जल्दी बीत रहा था। इसलिए मेरी अपने दोनों कुत्तों - सैली और टूट्स- के साथ खुदाई पर चली गई और मैं बेचैन होकर पीछे शिविर में रह गया। कुछ समय बाद, शायद मेरी झपकी टूटी तो मैंने लैंड-रोवर की आवाज़ सुनी। वह बड़ी तेज़ी से शिविर की ओर आ रही थी। मुझे पल भर के लिए एक सपना - सा आ गया, मुझे लगा कि मेरी को किसी ज़हरीले बिच्छू ने काट लिया है - वहाँ सैकड़ों की तादाद में बिच्छू थे, अथवा किसी साँप ने डस लिया है जो कुत्तों की नज़र से बच निकला होगा। लैंड-रोवर गाड़ी खड़खड़ाहट के साथ रुकी। और मैंने कई बार मेरी की आवाज़ सुनी, वह बार-बार पुकार रही थीः मैंने उसे पा लिया! मैंने उसे पा लिया! मैंने उसे पा लिया! मैं अब भी सिरदर्द से लड़खड़ा रहा था; मैं उसका मतलब नहीं समझ पाया। मैंने पूछाअरे, क्या हुआ? क्या पा लिया? क्या चोट खा बैठी? मेरी ने कहा, "उसी को बस उस आदमी को! हमारे आदमी को पा लिया, उसी को जिसे हम (पिछले 23 वर्षो से) खोज रहे थे। जल्दी आओ, मुझे उसके दाँत मिल गए हैं!" - 'फाइंडिंग दि वर्ड्स अर्लिएस्ट मैन', लेखक : एल. एस. बी. लीकी, नैशनल ज्योग्राफ़िक, 118 (सितंबर 1960) का घुमावदार होना)। कालांतर में जब औज़ार बनाने और लंबी दूरी तक पैदल चलने की क्रिया में बढ़ोतरी होती गई तब मानवीय विशिष्टताओं तथा लक्षणों का विकास भी होता गया। आदिकालीन मानवों के अवशेषों को भिन्न-भिन्न प्रजातियों में वर्गीकृत किया गया है। इन प्रजातियों को अक्सर उनकी हड्डियों की रचना में पाए जाने वाले अंतरों के आधार पर एक दूसरे से अलग किया गया है। उदाहरण के लिए, प्रारंभिक मानवों की प्रजातियों को उनकी खोपड़ी के आकार और जबड़े की विशिष्टता के आधार पर बाँटा गया है (पृ. 10 पर चित्र देखिए)। ये विशेषताएँ सकारात्मक प्रतिपुष्टि व्यवस्था (Positive Feedback Mechanism) यानी वांछित परिणाम प्राप्त होने से ही विकसित हुई होंगी।
बारह विश्व इतिहास के कुछ विषय की क्षमता भी अधिक नहीं थी, क्योंकि वह अभी भी अपना बहुत सा समय पेड़ों पर गुज़ारता था इसलिए उसमें पेड़ों पर जीवन जीने के लिए आवश्यक अनेक विशेषताएँ अब भी मौजूद थीं। सर्वप्रथम बीसवीं सदी के प्रारंभिक वर्षों में एक जर्मन तितली संग्राहक द्वारा खोजा गया था; लेकिन आगे चलकर यह ओल्डुवई नाम मेरी और लुईस लीकी के साथ गहराई से जुड़ गया जिन्होंने यहाँ चालीस वर्ष से भी अधिक समय तक शोधकार्य किया था। मेरी लीकी ने ही ओल्डुवई और लेतोली में पुरातत्त्वीय खुदाई कार्यों की देखभाल की थी और वहाँ की गई अनेक रोमांचक खोजों में उसका हाथ रहा था । लुईस लीकी ने अपनी इस अद्भुत खोज का वर्णन इस प्रकार किया हैः " उस दिन सवेरे जब मैं उठा तो मुझे सिर में दर्द और हलका बुखार महसूस हो रहा था। इच्छा तो नहीं थी पर मुझे शिविर में ही रहना पड़ा। चूंकि हम दोनों में से मैं काम पर नहीं जा रहा था इसलिए मेरी के लिए काम पर जाना ज़रूरी हो गया। हमें अपना काम पूरा करने के लिए सिर्फ सात सप्ताह का ही समय मिला था जो जल्दी-जल्दी बीत रहा था। इसलिए मेरी अपने दोनों कुत्तों - सैली और टूट्स- के साथ खुदाई पर चली गई और मैं बेचैन होकर पीछे शिविर में रह गया। कुछ समय बाद, शायद मेरी झपकी टूटी तो मैंने लैंड-रोवर की आवाज़ सुनी। वह बड़ी तेज़ी से शिविर की ओर आ रही थी। मुझे पल भर के लिए एक सपना - सा आ गया, मुझे लगा कि मेरी को किसी ज़हरीले बिच्छू ने काट लिया है - वहाँ सैकड़ों की तादाद में बिच्छू थे, अथवा किसी साँप ने डस लिया है जो कुत्तों की नज़र से बच निकला होगा। लैंड-रोवर गाड़ी खड़खड़ाहट के साथ रुकी। और मैंने कई बार मेरी की आवाज़ सुनी, वह बार-बार पुकार रही थीः मैंने उसे पा लिया! मैंने उसे पा लिया! मैंने उसे पा लिया! मैं अब भी सिरदर्द से लड़खड़ा रहा था; मैं उसका मतलब नहीं समझ पाया। मैंने पूछाअरे, क्या हुआ? क्या पा लिया? क्या चोट खा बैठी? मेरी ने कहा, "उसी को बस उस आदमी को! हमारे आदमी को पा लिया, उसी को जिसे हम खोज रहे थे। जल्दी आओ, मुझे उसके दाँत मिल गए हैं!" - 'फाइंडिंग दि वर्ड्स अर्लिएस्ट मैन', लेखक : एल. एस. बी. लीकी, नैशनल ज्योग्राफ़िक, एक सौ अट्ठारह का घुमावदार होना)। कालांतर में जब औज़ार बनाने और लंबी दूरी तक पैदल चलने की क्रिया में बढ़ोतरी होती गई तब मानवीय विशिष्टताओं तथा लक्षणों का विकास भी होता गया। आदिकालीन मानवों के अवशेषों को भिन्न-भिन्न प्रजातियों में वर्गीकृत किया गया है। इन प्रजातियों को अक्सर उनकी हड्डियों की रचना में पाए जाने वाले अंतरों के आधार पर एक दूसरे से अलग किया गया है। उदाहरण के लिए, प्रारंभिक मानवों की प्रजातियों को उनकी खोपड़ी के आकार और जबड़े की विशिष्टता के आधार पर बाँटा गया है । ये विशेषताएँ सकारात्मक प्रतिपुष्टि व्यवस्था यानी वांछित परिणाम प्राप्त होने से ही विकसित हुई होंगी।
नई दिल्ली । केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा (डीबीएचपीएस) के पूर्व अध्यक्ष शिवयोगी आर. निरलकट्टी और अन्य के खिलाफ कथित तौर पर हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए केंद्र द्वारा जारी धन की हेराफेरी करने और उसका दुरूपयोग करने के आरोप में मामला दर्ज किया। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि आर. एफ. निरलकट्टी (अब मृतक) और उनके बेटे और तत्कालीन कार्यकारी अध्यक्ष शिवयोगी निरलकोटी ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और 600 शिक्षकों के माध्यम से हिंदी प्रचार के लिए रखे गए 5,78,91,179 रुपये का कथित रूप से गबन करने के लिए सरकार को झूठा लाभ और हानि विवरण प्रस्तुत किया और इस पैसे का उपयोग अपने बी. एड. कॉलेजों के कर्मचारियों को वेतन के भुगतान के लिए अनाधिकृत रूप से किया। एसीबी की मदुरै शाखा के डीएसपी, सीबीआई, ए धंदापानी ने 18 जनवरी को प्रारंभिक जांच (पीई) पूरी करने के बाद एक रिपोर्ट प्रस्तुत की और उसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त सचिव नीता प्रसाद की शिकायत के आधार पर सीबीआई ने फरवरी 2022 में प्राथमिकी दर्ज की, और इसमें 2004 और 2005 और 2016 से 2017 के बीच की अवधि के दौरान डीबीएचपीएस, धारवाड़ (कर्नाटक) में धन की हेराफेरी का खुलासा हुआ, जिसमें निरलकट्टी शामिल थे। इसमें आरोप लगाया गया है कि, मंत्रालय से आवश्यक अनुमति प्राप्त किए बिना निर्धारित डीबीएचपीएस मानदंडों का उल्लंघन करते हुए निरलकट्टी द्वारा आयुर्वेद और होम्योपैथी के साथ-साथ ही लॉ कॉलेजों और अंग्रेजी-माध्यम के स्कूलों में हिंदी को बढ़ावा देने के अलावा अन्य पाठ्यक्रमों को चलाकर अपने वित्तीय हितों को बढ़ावा देने के लिए निरलकट्टी द्वारा संस्थान के नाम का दुरुपयोग किया गया था। जांच से पता चला कि डीबीएचपीएस की धारवाड़ शाखा ने विभिन्न हिंदी शिक्षकों और हिंदी शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों के प्राचार्यों को मानदेय देने के लिए मंत्रालय से अनुदान मांगा था। अनुरोधों के आधार पर, मंत्रालय ने अनुदान के रूप में कुल व्यय का 75 प्रतिशत प्रदान किया था और शेष डीबीएचपीएस द्वारा योगदान दिया जाना था। एक अधिकारी ने कहा- डीबीएचपीएस, धारवाड़ द्वारा इस प्रकार प्राप्त की गई धनराशि को उनके द्वारा बनाए गए अलग खाते में 25 प्रतिशत के अतिरिक्त योगदान के साथ जमा किया जाना था और मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा प्रदान की गई सूची और राशि के अनुसार हिंदी शिक्षकों और अन्य को जारी किया जाना था। जांच में पता चला कि शिक्षकों को अनुदान बांटने के नाम पर खाते से 7. 44 करोड़ रुपये की भारी निकासी की गई, जबकि नियमों के अनुसार लाभार्थियों को चेक और डीडी के माध्यम से ही अनुदान का भुगतान किया जाना चाहिए। जांच में पता चला कि केंद्र से अनुदान प्राप्त करने के बाद, डीबीएचपीएस लाभ और हानि खातों/विवरण के साथ उपयोग प्रमाण पत्र जमा कर रहा था। 2004-05 से 2016-2017 की अवधि के लिए डीबीएचपीएस द्वारा उनके लाभ और हानि खाते में दावा किया गया कुल योगदान 10,68,89,626 रुपये था, जबकि डीबीएचपीएस, धारवाड़ का योगदान केवल 1,85,66,919 रुपये था। एफआईआर में कहा- अभियुक्तों ने लाभ-हानि खाता/विवरण को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है और केंद्र सरकार को झूठे विवरण प्रस्तुत किए हैं। जांच से पता चला कि केंद्र सरकार ने 2011-12 से 2016-17 की अवधि के दौरान 600 मुफ्त हिंदी कक्षाओं, शिक्षकों को 600 टीए और डीबीएचपीएस, धारवाड़ के लिए पीजी डिप्लोमा अनुवाद के लिए सहायता स्वीकृत की थी। हालांकि, उक्त अवधि के दौरान केवल 400 से 450 शिक्षक उपलब्ध थे, जो कि भारत सरकार को प्रस्तुत रसीद और भुगतान विवरण और उपयोग प्रमाण पत्र से स्पष्ट था। हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों को मानदेय के भुगतान के लिए केंद्र द्वारा जारी अनुदान डीबीएचपीएस, धारवाड़ द्वारा अपने नियंत्रण में बीएड कॉलेजों के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, क्लर्कों और चपरासी को वेतन के भुगतान के लिए उपयोग किया गया था। डीबीएचपीएस की स्थापना दक्षिण भारत के गैर-हिंदी भाषी लोगों के बीच हिंदी साक्षरता में सुधार के लिए की गई थी। 1964 में, संस्थान को संसद के एक अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के रूप में मान्यता दी गई थी। डीबीएचपीएस का मुख्य उद्देश्य परीक्षा आयोजित करना और हिंदी में या हिंदी के शिक्षण में प्रवीणता के लिए डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्रदान करना है। हैदराबाद, धारवाड़, एनार्कुलम और तिरुचिरापल्ली में इसके चार क्षेत्रीय मुख्यालय हैं, और कुड्डालोर, नेवेली, पुडुचेरी, कोयम्बटूर, सलेम, वेल्लोर, ऊटी, कराईकल, तूतीकोरिन, नागरकोइल, मदुरै, करूर, तंजावुर और हैदराबाद में स्थित 14 शाखाएं हैं।
नई दिल्ली । केंद्रीय जांच ब्यूरो ने सोमवार को दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के पूर्व अध्यक्ष शिवयोगी आर. निरलकट्टी और अन्य के खिलाफ कथित तौर पर हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए केंद्र द्वारा जारी धन की हेराफेरी करने और उसका दुरूपयोग करने के आरोप में मामला दर्ज किया। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि आर. एफ. निरलकट्टी और उनके बेटे और तत्कालीन कार्यकारी अध्यक्ष शिवयोगी निरलकोटी ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया और छः सौ शिक्षकों के माध्यम से हिंदी प्रचार के लिए रखे गए पाँच,अठहत्तर,इक्यानवे,एक सौ उन्यासी रुपयापये का कथित रूप से गबन करने के लिए सरकार को झूठा लाभ और हानि विवरण प्रस्तुत किया और इस पैसे का उपयोग अपने बी. एड. कॉलेजों के कर्मचारियों को वेतन के भुगतान के लिए अनाधिकृत रूप से किया। एसीबी की मदुरै शाखा के डीएसपी, सीबीआई, ए धंदापानी ने अट्ठारह जनवरी को प्रारंभिक जांच पूरी करने के बाद एक रिपोर्ट प्रस्तुत की और उसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिक्षा मंत्रालय की संयुक्त सचिव नीता प्रसाद की शिकायत के आधार पर सीबीआई ने फरवरी दो हज़ार बाईस में प्राथमिकी दर्ज की, और इसमें दो हज़ार चार और दो हज़ार पाँच और दो हज़ार सोलह से दो हज़ार सत्रह के बीच की अवधि के दौरान डीबीएचपीएस, धारवाड़ में धन की हेराफेरी का खुलासा हुआ, जिसमें निरलकट्टी शामिल थे। इसमें आरोप लगाया गया है कि, मंत्रालय से आवश्यक अनुमति प्राप्त किए बिना निर्धारित डीबीएचपीएस मानदंडों का उल्लंघन करते हुए निरलकट्टी द्वारा आयुर्वेद और होम्योपैथी के साथ-साथ ही लॉ कॉलेजों और अंग्रेजी-माध्यम के स्कूलों में हिंदी को बढ़ावा देने के अलावा अन्य पाठ्यक्रमों को चलाकर अपने वित्तीय हितों को बढ़ावा देने के लिए निरलकट्टी द्वारा संस्थान के नाम का दुरुपयोग किया गया था। जांच से पता चला कि डीबीएचपीएस की धारवाड़ शाखा ने विभिन्न हिंदी शिक्षकों और हिंदी शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों के प्राचार्यों को मानदेय देने के लिए मंत्रालय से अनुदान मांगा था। अनुरोधों के आधार पर, मंत्रालय ने अनुदान के रूप में कुल व्यय का पचहत्तर प्रतिशत प्रदान किया था और शेष डीबीएचपीएस द्वारा योगदान दिया जाना था। एक अधिकारी ने कहा- डीबीएचपीएस, धारवाड़ द्वारा इस प्रकार प्राप्त की गई धनराशि को उनके द्वारा बनाए गए अलग खाते में पच्चीस प्रतिशत के अतिरिक्त योगदान के साथ जमा किया जाना था और मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा प्रदान की गई सूची और राशि के अनुसार हिंदी शिक्षकों और अन्य को जारी किया जाना था। जांच में पता चला कि शिक्षकों को अनुदान बांटने के नाम पर खाते से सात. चौंतालीस करोड़ रुपये की भारी निकासी की गई, जबकि नियमों के अनुसार लाभार्थियों को चेक और डीडी के माध्यम से ही अनुदान का भुगतान किया जाना चाहिए। जांच में पता चला कि केंद्र से अनुदान प्राप्त करने के बाद, डीबीएचपीएस लाभ और हानि खातों/विवरण के साथ उपयोग प्रमाण पत्र जमा कर रहा था। दो हज़ार चार-पाँच से दो हज़ार सोलह-दो हज़ार सत्रह की अवधि के लिए डीबीएचपीएस द्वारा उनके लाभ और हानि खाते में दावा किया गया कुल योगदान दस,अड़सठ,नवासी,छः सौ छब्बीस रुपयापये था, जबकि डीबीएचपीएस, धारवाड़ का योगदान केवल एक,पचासी,छयासठ,नौ सौ उन्नीस रुपयापये था। एफआईआर में कहा- अभियुक्तों ने लाभ-हानि खाता/विवरण को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है और केंद्र सरकार को झूठे विवरण प्रस्तुत किए हैं। जांच से पता चला कि केंद्र सरकार ने दो हज़ार ग्यारह-बारह से दो हज़ार सोलह-सत्रह की अवधि के दौरान छः सौ मुफ्त हिंदी कक्षाओं, शिक्षकों को छः सौ टीए और डीबीएचपीएस, धारवाड़ के लिए पीजी डिप्लोमा अनुवाद के लिए सहायता स्वीकृत की थी। हालांकि, उक्त अवधि के दौरान केवल चार सौ से चार सौ पचास शिक्षक उपलब्ध थे, जो कि भारत सरकार को प्रस्तुत रसीद और भुगतान विवरण और उपयोग प्रमाण पत्र से स्पष्ट था। हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों को मानदेय के भुगतान के लिए केंद्र द्वारा जारी अनुदान डीबीएचपीएस, धारवाड़ द्वारा अपने नियंत्रण में बीएड कॉलेजों के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, क्लर्कों और चपरासी को वेतन के भुगतान के लिए उपयोग किया गया था। डीबीएचपीएस की स्थापना दक्षिण भारत के गैर-हिंदी भाषी लोगों के बीच हिंदी साक्षरता में सुधार के लिए की गई थी। एक हज़ार नौ सौ चौंसठ में, संस्थान को संसद के एक अधिनियम के माध्यम से राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के रूप में मान्यता दी गई थी। डीबीएचपीएस का मुख्य उद्देश्य परीक्षा आयोजित करना और हिंदी में या हिंदी के शिक्षण में प्रवीणता के लिए डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाण पत्र प्रदान करना है। हैदराबाद, धारवाड़, एनार्कुलम और तिरुचिरापल्ली में इसके चार क्षेत्रीय मुख्यालय हैं, और कुड्डालोर, नेवेली, पुडुचेरी, कोयम्बटूर, सलेम, वेल्लोर, ऊटी, कराईकल, तूतीकोरिन, नागरकोइल, मदुरै, करूर, तंजावुर और हैदराबाद में स्थित चौदह शाखाएं हैं।
मथुरा डीएम पुलकित खरे बुधवार को अचानक प्राथमिक विद्यालय पहुंचे। ये नगर पंचायत धनगांव में है। वहां उन्होंने बच्चों की क्लास ली। उनसे कहानी भी सुनी। तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया। यहां से निकलने के बाद उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र दौरा भी किया। जिलाधिकारी पुलकित खरे ने विकास खण्ड सदर के ग्राम भैंसा में स्थित प्राथमिक विद्यालय प्रथम न्याय पंचायत धनगांव में अपने गोद लिए आंगनवाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने सीडीपीओ को निर्देश दिये कि कुपोषण बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाये और उनके स्वास्थ्य के लिए बेहतर से बेहतर सुविधायें की जायें। प्रत्येक कुपोषित बच्चे को पुष्टाहार युक्त खाना, दवा आदि समय समय पर उपलब्ध कराते रहें। जिलाधिकारी ने केन्द्रों के रजिस्टरों का अवलोकन किया, जिसमें उपस्थिति पंजिका, पुष्टाहार हेतु पंजीकृत बच्चों का विवरण, केन्द्र पर आयी गर्भवती महिलाओं का रजिस्टर आदि रजिस्टरों का अवलोकन किया। आंगनवाड़ी केन्द्र में आंगनवाड़ी कार्यकत्री से जानकारी ली कि कितने बच्चे लाल श्रेणी में हैं। जिलाधिकारी ने स्वयं दो बच्चों का वजन करवाया। जिलाधिकारी ने गोद लिए गए भैंसा के केंद्रों का तीन मानकों पर विशेष बल दिया। इनमें केंद्र की आधारभूत संरचना, संसाधन, पोषण सेवाओं की स्थिति शामिल हैं। जिलाधिकारी के निर्देश पर पंचायत विभाग द्वारा उक्त दोनों आंगनवाड़ी केन्द्रों का जीर्णोद्धार कर ठीक कराया गया है। जिसमें केन्द्रों की रंगाई पुताई, छत का कार्य तथा टाइल्स लगाने का कार्य किया गया है। डीएम पुलकित खरे ने सभी शिक्षक शिक्षिकाओं से कहा कि बच्चे देश प्रदेश का भविष्य हैं, इन्हें जितनी अच्छी शिक्षा होगी उतना अच्छा बच्चों का भविष्य होगा। शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाये और स्मार्ट तरीके से बच्चों को समझाया जाये। जिलाधिकारी पुलकित खरे इसके बाद गोद लिए विकास खण्ड सदर के ग्राम अल्हैपुर में स्थित प्राथमिक विद्यालय पहुंचे। यहां डीएम का अलग ही रूप देखने को मिला। यहां जिलाधिकारी टीचर बन गए और वहां पढ़ रहे बच्चों की क्लास ली। डीएम की पाठशाला में बच्चे उत्साहित नजर आए। टीचर बने डीएम पुलकित खरे ने बच्चों से सवाल जवाब किए तो उनके साथ मस्ती भी की। क्लास लेने के बाद डीएम ने स्कूल एवं शिक्षा गुणवत्ता को परखा। सामान्य शौचालय, दिव्यांग शौचालय, पेयजल, बाउंडरी बाल, स्कूल का मैदान आदि का बारीकी से निरीक्षण किया। जिलाधिकारी पुलकित खरे ने स्कूल में उपस्थित बच्चों की पंजिका रजिस्टरों का अवलोकन किया। स्कूल में प्राप्त कम्पोजिट ग्रांट के लेखा जोखा की जानकारी ली। कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों की उपस्थिति देखी, स्कूल में मीड डे मील की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान डीएम ने स्कूल के प्रधानाचार्या को निर्देश दिये कि किताबों का रख रखाव अच्छे ढंग से किया जाये तथा लाइब्रेरी की किताबों को बच्चों को नियमित रूप से घर में पढ़ने के लिए दी जायें। जिलाधिकारी ने छात्र, छात्राओं को अपने पास बुलाया और कविता, कहानी सुनी। जिसके बाद जिलाधिकारी ने बच्चों का उत्साह वर्धन करने के लिए तालिया भी बजवाई। स्कूल के शिक्षक-शिक्षिकाओं से भी बात की। उनके द्वारा बच्चों को किस तरह से पढ़ाया जाता है आदि की जानकारी प्राप्त की। जिन छात्र-छात्राओं की उपस्थित कम प्रतिशत है, उनके अभिभावकों से बात कर उपस्थिति शत प्रतिशत करायी जाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने नगर निगम एवं समाजसेवी संस्थाओं के माध्यम से पेयजल हेतु आरओ तथा बच्चों के बैठने के लिए टेबल कुर्सी आदि लगवाये हैं और समाजसेवी संस्थाओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि समाजसेवी हमेशा ही प्रदेश एवं जनपद के विकास में अहम भूमिका निभाती हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप सभी स्कूल तथा आंगनवाड़ी केन्द्रों को सुविधा लैस करना है और हम आप सब मुख्यमंत्री का सपना साकार करेंगे। एक एक कड़ी जोड़कर इस अभियान को शत प्रतिशत सफल बनायेंगे, जिससे प्रदेश एवं जनपद के स्कूल तथा आंगनवाड़ी केन्द्र उत्तर प्रदेश का मॉडल बन सकें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मथुरा डीएम पुलकित खरे बुधवार को अचानक प्राथमिक विद्यालय पहुंचे। ये नगर पंचायत धनगांव में है। वहां उन्होंने बच्चों की क्लास ली। उनसे कहानी भी सुनी। तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया। यहां से निकलने के बाद उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र दौरा भी किया। जिलाधिकारी पुलकित खरे ने विकास खण्ड सदर के ग्राम भैंसा में स्थित प्राथमिक विद्यालय प्रथम न्याय पंचायत धनगांव में अपने गोद लिए आंगनवाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने सीडीपीओ को निर्देश दिये कि कुपोषण बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाये और उनके स्वास्थ्य के लिए बेहतर से बेहतर सुविधायें की जायें। प्रत्येक कुपोषित बच्चे को पुष्टाहार युक्त खाना, दवा आदि समय समय पर उपलब्ध कराते रहें। जिलाधिकारी ने केन्द्रों के रजिस्टरों का अवलोकन किया, जिसमें उपस्थिति पंजिका, पुष्टाहार हेतु पंजीकृत बच्चों का विवरण, केन्द्र पर आयी गर्भवती महिलाओं का रजिस्टर आदि रजिस्टरों का अवलोकन किया। आंगनवाड़ी केन्द्र में आंगनवाड़ी कार्यकत्री से जानकारी ली कि कितने बच्चे लाल श्रेणी में हैं। जिलाधिकारी ने स्वयं दो बच्चों का वजन करवाया। जिलाधिकारी ने गोद लिए गए भैंसा के केंद्रों का तीन मानकों पर विशेष बल दिया। इनमें केंद्र की आधारभूत संरचना, संसाधन, पोषण सेवाओं की स्थिति शामिल हैं। जिलाधिकारी के निर्देश पर पंचायत विभाग द्वारा उक्त दोनों आंगनवाड़ी केन्द्रों का जीर्णोद्धार कर ठीक कराया गया है। जिसमें केन्द्रों की रंगाई पुताई, छत का कार्य तथा टाइल्स लगाने का कार्य किया गया है। डीएम पुलकित खरे ने सभी शिक्षक शिक्षिकाओं से कहा कि बच्चे देश प्रदेश का भविष्य हैं, इन्हें जितनी अच्छी शिक्षा होगी उतना अच्छा बच्चों का भविष्य होगा। शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाये और स्मार्ट तरीके से बच्चों को समझाया जाये। जिलाधिकारी पुलकित खरे इसके बाद गोद लिए विकास खण्ड सदर के ग्राम अल्हैपुर में स्थित प्राथमिक विद्यालय पहुंचे। यहां डीएम का अलग ही रूप देखने को मिला। यहां जिलाधिकारी टीचर बन गए और वहां पढ़ रहे बच्चों की क्लास ली। डीएम की पाठशाला में बच्चे उत्साहित नजर आए। टीचर बने डीएम पुलकित खरे ने बच्चों से सवाल जवाब किए तो उनके साथ मस्ती भी की। क्लास लेने के बाद डीएम ने स्कूल एवं शिक्षा गुणवत्ता को परखा। सामान्य शौचालय, दिव्यांग शौचालय, पेयजल, बाउंडरी बाल, स्कूल का मैदान आदि का बारीकी से निरीक्षण किया। जिलाधिकारी पुलकित खरे ने स्कूल में उपस्थित बच्चों की पंजिका रजिस्टरों का अवलोकन किया। स्कूल में प्राप्त कम्पोजिट ग्रांट के लेखा जोखा की जानकारी ली। कक्षा एक से पाँच तक के बच्चों की उपस्थिति देखी, स्कूल में मीड डे मील की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान डीएम ने स्कूल के प्रधानाचार्या को निर्देश दिये कि किताबों का रख रखाव अच्छे ढंग से किया जाये तथा लाइब्रेरी की किताबों को बच्चों को नियमित रूप से घर में पढ़ने के लिए दी जायें। जिलाधिकारी ने छात्र, छात्राओं को अपने पास बुलाया और कविता, कहानी सुनी। जिसके बाद जिलाधिकारी ने बच्चों का उत्साह वर्धन करने के लिए तालिया भी बजवाई। स्कूल के शिक्षक-शिक्षिकाओं से भी बात की। उनके द्वारा बच्चों को किस तरह से पढ़ाया जाता है आदि की जानकारी प्राप्त की। जिन छात्र-छात्राओं की उपस्थित कम प्रतिशत है, उनके अभिभावकों से बात कर उपस्थिति शत प्रतिशत करायी जाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने नगर निगम एवं समाजसेवी संस्थाओं के माध्यम से पेयजल हेतु आरओ तथा बच्चों के बैठने के लिए टेबल कुर्सी आदि लगवाये हैं और समाजसेवी संस्थाओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि समाजसेवी हमेशा ही प्रदेश एवं जनपद के विकास में अहम भूमिका निभाती हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप सभी स्कूल तथा आंगनवाड़ी केन्द्रों को सुविधा लैस करना है और हम आप सब मुख्यमंत्री का सपना साकार करेंगे। एक एक कड़ी जोड़कर इस अभियान को शत प्रतिशत सफल बनायेंगे, जिससे प्रदेश एवं जनपद के स्कूल तथा आंगनवाड़ी केन्द्र उत्तर प्रदेश का मॉडल बन सकें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नई दिल्ली/मुंबई. महारष्ट्र (Maharashtra) से आ रही मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) मामले में ED ने शिवसेना सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) को तलब किया है। मामले पर जांच एजेंसी ने उन्हें आज सुबह 11 बजे ED कार्यालय में रिपोर्ट करने को कहा गया है। इसके पहले भी संजय राउत को ED ने समन जारी कर बुलाया था और उनका बयान दर्ज किया था। वहीं बीते 1 जुलाई को उनसे आखिरी बार करीब 10 घंटे तक पूछताछ भी की गई थी। इस बाबत आज संजय राउत को ED के मुंबई स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में पेश होने के लिए कहा है। ED ने संजय राउत को बीते बुधवार सुबह 11 बजे पात्रा चॉल मामले में पूछताछ के लिए बुलाया है। पता हो कि इससे पहले भी संजय राउत को ईडी ने समन जारी कर उनका बयान दर्ज किया था। बताया गया कि यह मामला मुंबई की पात्रा चॉल नामक आवास परिसर के पुनर्विकास में कथित घोटाले से जुड़ा है। दरअसल ED, मुंबई की एक 'पात्रा चॉल' के पुनः विकास और संजय राउत की पत्नी तथा दोस्तों से संबंधित वित्तीय लेनदेन से जुड़ी धनशोधन जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए राज्यसभा सदस्य को तलब कर चुकी है। ED ने इससे पहले राउत को बीते 28 जून को तलब किया था।
नई दिल्ली/मुंबई. महारष्ट्र से आ रही मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने शिवसेना सांसद संजय राउत को तलब किया है। मामले पर जांच एजेंसी ने उन्हें आज सुबह ग्यारह बजे ED कार्यालय में रिपोर्ट करने को कहा गया है। इसके पहले भी संजय राउत को ED ने समन जारी कर बुलाया था और उनका बयान दर्ज किया था। वहीं बीते एक जुलाई को उनसे आखिरी बार करीब दस घंटाटे तक पूछताछ भी की गई थी। इस बाबत आज संजय राउत को ED के मुंबई स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में पेश होने के लिए कहा है। ED ने संजय राउत को बीते बुधवार सुबह ग्यारह बजे पात्रा चॉल मामले में पूछताछ के लिए बुलाया है। पता हो कि इससे पहले भी संजय राउत को ईडी ने समन जारी कर उनका बयान दर्ज किया था। बताया गया कि यह मामला मुंबई की पात्रा चॉल नामक आवास परिसर के पुनर्विकास में कथित घोटाले से जुड़ा है। दरअसल ED, मुंबई की एक 'पात्रा चॉल' के पुनः विकास और संजय राउत की पत्नी तथा दोस्तों से संबंधित वित्तीय लेनदेन से जुड़ी धनशोधन जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए राज्यसभा सदस्य को तलब कर चुकी है। ED ने इससे पहले राउत को बीते अट्ठाईस जून को तलब किया था।
शहर-गली में चर्चा है, स्वच्छ भारत अभियान की! आओ बच्चों तुम्हें बताएं, महत्ता कचरा दान की। बिना प्रबंधन बीमारी, फैले जो दुश्मन जान की। उचित प्रबंधन खाद बनाता, करता मदद किसान की। शहर-गली में चर्चा है, स्वच्छ भारत अभियान की! पॉलीथिन की थैली की। लहर चल रही सभी ओर अब, मोदी के अभियान की! शहर-गली में चर्चा है, स्वच्छ भारत अभियान की! शौचालय के लाभ समझना, जरूरत हर इंसान की। तुम्हारे कंधों पर निर्भर है, सफलता इस अभियान की! शहर-गली में चर्चा है, स्वच्छ भारत अभियान की!
शहर-गली में चर्चा है, स्वच्छ भारत अभियान की! आओ बच्चों तुम्हें बताएं, महत्ता कचरा दान की। बिना प्रबंधन बीमारी, फैले जो दुश्मन जान की। उचित प्रबंधन खाद बनाता, करता मदद किसान की। शहर-गली में चर्चा है, स्वच्छ भारत अभियान की! पॉलीथिन की थैली की। लहर चल रही सभी ओर अब, मोदी के अभियान की! शहर-गली में चर्चा है, स्वच्छ भारत अभियान की! शौचालय के लाभ समझना, जरूरत हर इंसान की। तुम्हारे कंधों पर निर्भर है, सफलता इस अभियान की! शहर-गली में चर्चा है, स्वच्छ भारत अभियान की!
चंडीगढ़ - गर्मी और उमस के मौसम में मौलीजागरां के लोगों को अघोषित बिजली कटौती के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस के स्थानीय महासचिव शशिशंकर तिवारी ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि यहां पिछले कुछ अर्से से हर रोज दो से तीन घंटे बिजली चली जाती है। दिन में तो एसडीओ या जेई को फोन करने पर बिजली खराबी का या कोई और बहाना बना देते हैं, परंतु रात को तो कोई फोन ही नहीं उठाता। गुरुवार को कांग्रेस के स्थानीय महासचिव शशिशंकर तिवारी की अगआई में कांग्रेस नेता व स्थानीय निवासी इन अधिकारियों से मिले व उनसे इस तरफ ध्यान देने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह में ये समस्या हल न हुई, तो बिजली दफ्तर मनीमाजरा का घेराव किया जाएगा व प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस मौके पर मुकेश राय, प्रेमानंद, रोहित यादव टिनी, अरुण कुमार, रमेश चौधरी, पिंटू, अजय उपाध्याय, राजेश यादव, पवन, लेखपाल, विनय कुमार, अजय शर्मा, इंदरपाल, ज्ञान सिंगला, दिलशाद अहमद, संजीत चौधरी आदि भी मौजूद थे।
चंडीगढ़ - गर्मी और उमस के मौसम में मौलीजागरां के लोगों को अघोषित बिजली कटौती के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस के स्थानीय महासचिव शशिशंकर तिवारी ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि यहां पिछले कुछ अर्से से हर रोज दो से तीन घंटे बिजली चली जाती है। दिन में तो एसडीओ या जेई को फोन करने पर बिजली खराबी का या कोई और बहाना बना देते हैं, परंतु रात को तो कोई फोन ही नहीं उठाता। गुरुवार को कांग्रेस के स्थानीय महासचिव शशिशंकर तिवारी की अगआई में कांग्रेस नेता व स्थानीय निवासी इन अधिकारियों से मिले व उनसे इस तरफ ध्यान देने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह में ये समस्या हल न हुई, तो बिजली दफ्तर मनीमाजरा का घेराव किया जाएगा व प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस मौके पर मुकेश राय, प्रेमानंद, रोहित यादव टिनी, अरुण कुमार, रमेश चौधरी, पिंटू, अजय उपाध्याय, राजेश यादव, पवन, लेखपाल, विनय कुमार, अजय शर्मा, इंदरपाल, ज्ञान सिंगला, दिलशाद अहमद, संजीत चौधरी आदि भी मौजूद थे।
तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की यात्रा के कार्यक्रम से पहले भगवा पार्टी से स्पष्टीकरण मांगते हुए पूछा कि असम में एनआरसी से बड़ी तादाद में हिंदुओं को बाहर क्यों किया गया। ज्ञात हो कि शाह 'नागरिक पंजी और नागरिकता (संशोधन) विधेयक' पर एक संगोष्ठि को संबोधित करने के लिए 1 अक्टूबर को शहर का दौरा करेंगे। वह दो विषयों पर एक संगोष्ठि को संबोधित करने के अलावा एक सामुदायिक दुर्गा पूजा का शुभारंभ भी करेंगे। आपको बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री ने बार-बार कहा है कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) पूरे देश भर में क्रियान्वित किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर असम में एनआरसी की अंतिम सूची को लेकर भगवा पार्टी पर निशाना साधते हुए तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्था चटर्जी ने कहा, अपने आप को हिंदुओं का रक्षक बताने से पहले भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनमें से बड़ी संख्या में लोगों को असम में एनआरसी सूची से क्यों बाहर क्यों किया गया। ' उन्होंने पूछा, भाजपा घुसपैठियों को बाहर करने के लिए एनआरसी के क्रियान्वयन पर जोर दे रही है, इसका मतलब है कि एनआरसी सूची से बाहर किये गये हिंदू घुसपैठिए हैं? अब वे क्या करेंगे? भाजपा शासित असम में अंतिम एनआरसी से बड़ी संख्या में हिंदू-बंगालियों को बाहर रखने से लोगों के बीच भय व्याप्त हो गया और अभी तक राज्य में छह लोगों की मौतें हो चुकी है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री फिरहाद हाकिम ने कहा, बंगाल में कई निर्दोष लोगों की मौतों के लिए भाजपा जिम्मेदार है। जो लोग हिंदुओं और मुस्लिमों को विभाजित करके वजूद में रहे, अब उन्होंने हिंदुओं और बंगालियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। प्रदेश भाजपा सूत्रों के अनुसार, शाह की संगोष्ठि काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह टीएमसी के सभी आरोपों और एनआरसी को लेकर उसके द्वारा फैलायी जा रही "गलतफहमियों" पर बात कर सकते हैं। प्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, हमें उम्मीद है कि शाह एनआरसी पर सभी डर और गलतफहमियों को दूर करेंगे। " भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी पर हिंदुओं में भय व्याप्त करने के लिये बंगाल में एनआरसी को लेकर डर का माहौल पैदा करने का आरोप लगाया।
तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की यात्रा के कार्यक्रम से पहले भगवा पार्टी से स्पष्टीकरण मांगते हुए पूछा कि असम में एनआरसी से बड़ी तादाद में हिंदुओं को बाहर क्यों किया गया। ज्ञात हो कि शाह 'नागरिक पंजी और नागरिकता विधेयक' पर एक संगोष्ठि को संबोधित करने के लिए एक अक्टूबर को शहर का दौरा करेंगे। वह दो विषयों पर एक संगोष्ठि को संबोधित करने के अलावा एक सामुदायिक दुर्गा पूजा का शुभारंभ भी करेंगे। आपको बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री ने बार-बार कहा है कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी पूरे देश भर में क्रियान्वित किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर असम में एनआरसी की अंतिम सूची को लेकर भगवा पार्टी पर निशाना साधते हुए तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्था चटर्जी ने कहा, अपने आप को हिंदुओं का रक्षक बताने से पहले भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनमें से बड़ी संख्या में लोगों को असम में एनआरसी सूची से क्यों बाहर क्यों किया गया। ' उन्होंने पूछा, भाजपा घुसपैठियों को बाहर करने के लिए एनआरसी के क्रियान्वयन पर जोर दे रही है, इसका मतलब है कि एनआरसी सूची से बाहर किये गये हिंदू घुसपैठिए हैं? अब वे क्या करेंगे? भाजपा शासित असम में अंतिम एनआरसी से बड़ी संख्या में हिंदू-बंगालियों को बाहर रखने से लोगों के बीच भय व्याप्त हो गया और अभी तक राज्य में छह लोगों की मौतें हो चुकी है। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री फिरहाद हाकिम ने कहा, बंगाल में कई निर्दोष लोगों की मौतों के लिए भाजपा जिम्मेदार है। जो लोग हिंदुओं और मुस्लिमों को विभाजित करके वजूद में रहे, अब उन्होंने हिंदुओं और बंगालियों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। प्रदेश भाजपा सूत्रों के अनुसार, शाह की संगोष्ठि काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह टीएमसी के सभी आरोपों और एनआरसी को लेकर उसके द्वारा फैलायी जा रही "गलतफहमियों" पर बात कर सकते हैं। प्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, हमें उम्मीद है कि शाह एनआरसी पर सभी डर और गलतफहमियों को दूर करेंगे। " भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी पर हिंदुओं में भय व्याप्त करने के लिये बंगाल में एनआरसी को लेकर डर का माहौल पैदा करने का आरोप लगाया।
Exclusive Video Of Japanese Bullet Train: पीएम मोदी सोमवार को जापान की राजधानी टोक्यो पहुंचे हैं। उनके इस दौरे पर सबसे ज्यादा चर्चा बुलेट ट्रेन की हो रही है। जापान की शान कही जाने वाली शिन्कानसेन E-5 बुलेट ट्रेन साल 2027 से भारत में भी गोली की रफ्तार से दौड़ने वाली है। ये ट्रेन कैसी है और इसके फीचर्स क्या हैं, इस बात को जानने के लिए इंडिया टीवी रिपोर्टर अमित पालित ने जापान में टोक्यो से योकोहामा तक की बुलेट ट्रेन (bullet train) यात्रा की। टोक्यो से योकोहामा की दूरी उतनी ही है, जितनी मुंबई से अहमदाबाद की है। जापान की शिन्कानसेन बुलेट ट्रेन (Shinkansen bullet train) पूरी दुनिया में मशहूर है। इसने 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार को पार किया था। हालांकि अब दुनिया में और भी ऐसी हाईस्पीड ट्रेन मौजूद हैं। जिस शिन्कानसेन बुलेट ट्रेन में इंडिया टीवी के रिपोर्टर ने यात्रा की, उस मॉडल का नाम N700 एडवांस है। इसमें 16 बोगियां होती हैं। इस ट्रेन में ऑटोमेटिक दरवाजे हैं और अंदर काफी साफ-सफाई रहती है। यात्रियों के बैठने के लिए अच्छी और आरामदायक व्यवस्था है। एक तरफ दो सीटें हैं और दूसरी तरफ तीन सीटें हैं। यात्री सीट को अपने आराम के हिसाब से आगे-पीछे भी कर सकते हैं। यात्रियों के सामने ही एक डिस्प्ले भी आता रहता है, जिसमें यात्रियों को अपने स्टेशन के नाम वगैरह का पता चलता रहता है। जापान की ये मशहूर शिन्कानसेन (Shinkansen) ट्रेन 1964 से चल रही है। इस बुलेट ट्रेन को मुंबई-अहमदाबाद के बीच साल 2027 से चलाया जाएगा। इसका ट्रायल साल 2026 में हो जाएगा। इसकी रफ्तार 320 किमी/ घंटे की होगी, जो 508 किलोमीटर की दूरी 2 घंटों में पूरी कर देगी। ये बुलेट ट्रेन 3. 35 मीटर चौड़ी होगी। पीएम मोदी और शिंजो आबे ने 14 सितंबर 2017 को इसकी आधारशिला रखी थी। ये 1. 08 लाख करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी हाई-स्पीड रेल परियोजना है और इस परियोजना के ट्रैक के लिए 3141 करोड़ रुपए का करार हुआ है।
Exclusive Video Of Japanese Bullet Train: पीएम मोदी सोमवार को जापान की राजधानी टोक्यो पहुंचे हैं। उनके इस दौरे पर सबसे ज्यादा चर्चा बुलेट ट्रेन की हो रही है। जापान की शान कही जाने वाली शिन्कानसेन E-पाँच बुलेट ट्रेन साल दो हज़ार सत्ताईस से भारत में भी गोली की रफ्तार से दौड़ने वाली है। ये ट्रेन कैसी है और इसके फीचर्स क्या हैं, इस बात को जानने के लिए इंडिया टीवी रिपोर्टर अमित पालित ने जापान में टोक्यो से योकोहामा तक की बुलेट ट्रेन यात्रा की। टोक्यो से योकोहामा की दूरी उतनी ही है, जितनी मुंबई से अहमदाबाद की है। जापान की शिन्कानसेन बुलेट ट्रेन पूरी दुनिया में मशहूर है। इसने तीन सौ किलोग्राममीटर प्रति घंटे की रफ्तार को पार किया था। हालांकि अब दुनिया में और भी ऐसी हाईस्पीड ट्रेन मौजूद हैं। जिस शिन्कानसेन बुलेट ट्रेन में इंडिया टीवी के रिपोर्टर ने यात्रा की, उस मॉडल का नाम Nसात सौ एडवांस है। इसमें सोलह बोगियां होती हैं। इस ट्रेन में ऑटोमेटिक दरवाजे हैं और अंदर काफी साफ-सफाई रहती है। यात्रियों के बैठने के लिए अच्छी और आरामदायक व्यवस्था है। एक तरफ दो सीटें हैं और दूसरी तरफ तीन सीटें हैं। यात्री सीट को अपने आराम के हिसाब से आगे-पीछे भी कर सकते हैं। यात्रियों के सामने ही एक डिस्प्ले भी आता रहता है, जिसमें यात्रियों को अपने स्टेशन के नाम वगैरह का पता चलता रहता है। जापान की ये मशहूर शिन्कानसेन ट्रेन एक हज़ार नौ सौ चौंसठ से चल रही है। इस बुलेट ट्रेन को मुंबई-अहमदाबाद के बीच साल दो हज़ार सत्ताईस से चलाया जाएगा। इसका ट्रायल साल दो हज़ार छब्बीस में हो जाएगा। इसकी रफ्तार तीन सौ बीस किमी/ घंटे की होगी, जो पाँच सौ आठ किलोग्राममीटर की दूरी दो घंटाटों में पूरी कर देगी। ये बुलेट ट्रेन तीन. पैंतीस मीटर चौड़ी होगी। पीएम मोदी और शिंजो आबे ने चौदह सितंबर दो हज़ार सत्रह को इसकी आधारशिला रखी थी। ये एक. आठ लाख करोड़ रुपए की महत्वाकांक्षी हाई-स्पीड रेल परियोजना है और इस परियोजना के ट्रैक के लिए तीन हज़ार एक सौ इकतालीस करोड़ रुपए का करार हुआ है।
गुजरात के पंचमहल जिले के गोधरा में कथित तौर पर " जय श्री राम" कहने से इंकार करने पर 1 अगस्त की रात 11 बजे छह अज्ञात लोगों ने तीन मुस्लिम युवकों की पिटाई कर दी। तीनों लड़कों को मामूली चोटें आई थीं, जिन्हें इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में छुट्टी दे दी गई। पीड़ितों के बयान के अनुसार, तीन दोस्त, समीर हाफिज भगत, सोहेल हाफिज भगत और सलमान गितेली रात में चाय पीने के लिए निकले थे, तभी लगभग छह या सात लोग उनके सामने आ गए और उन लोगों ने 'जय श्री राम' कहने को बोला और पीटने लगे। पीड़ित समीर भगत ने न्यूज़क्लिक को बताया, "समीर, सोहेल और मैं गोधरा कस्बे में बाबा नी मठ्ठी नामक स्थान पर रात के लगभग 11 बजे चाय पीने गए थे, तभा छह या सात आदमी कहीं से आए और हमें घेर लिया। उन्होंने हमसे जय श्री राम बोलने को कहा और फिर हमें पीटना शुरू कर दिया। हम अपनी जान बचाने के लिए भागे, तो वो हमारा पीछा करने लगे। उन लोगों ने तभी हमें छोड़ा जब स्थानीय लोग इकट्ठा होने लगे"। उन्होंने आगे कहा कि मेरे सर पर चोट आई है। पंचमहल की पुलिस अधीक्षक लीना पाटिल ने तीनों पीड़ितों के दावों का खंडन किया है। उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया कि ये दो गुटों के बीच आपसी झड़प का मामला है। ये लोग जब रात को करीब 11 बजे चाय पीने निकले तो मोटर साईकिल से एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में गाली- गलोच करने लगे। मामला आगे बढ़ गया और बात हाथापाई तक पहुंच गई। पाटिल ने आगे कहा, उनके पास इसके सबूत के तौर पर सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं। हालांकि सुबह करीब तीन बजे मुस्लिम युवकों के बयान के आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। चूंकि गोधरा सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील जगह है, इसलिए इस घटना के आसपास एक सांप्रदायिक माहौल का निर्माण किया जा रहा है। गोधरा साल 2002 में गुजरात दंगों का केंद्र था। हालांकि जिले को सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील घोषित किया गया, दंगों के बाद यहां कोई भी बड़ी सांप्रदायिक घटना नहीं हुई है। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
गुजरात के पंचमहल जिले के गोधरा में कथित तौर पर " जय श्री राम" कहने से इंकार करने पर एक अगस्त की रात ग्यारह बजे छह अज्ञात लोगों ने तीन मुस्लिम युवकों की पिटाई कर दी। तीनों लड़कों को मामूली चोटें आई थीं, जिन्हें इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में छुट्टी दे दी गई। पीड़ितों के बयान के अनुसार, तीन दोस्त, समीर हाफिज भगत, सोहेल हाफिज भगत और सलमान गितेली रात में चाय पीने के लिए निकले थे, तभी लगभग छह या सात लोग उनके सामने आ गए और उन लोगों ने 'जय श्री राम' कहने को बोला और पीटने लगे। पीड़ित समीर भगत ने न्यूज़क्लिक को बताया, "समीर, सोहेल और मैं गोधरा कस्बे में बाबा नी मठ्ठी नामक स्थान पर रात के लगभग ग्यारह बजे चाय पीने गए थे, तभा छह या सात आदमी कहीं से आए और हमें घेर लिया। उन्होंने हमसे जय श्री राम बोलने को कहा और फिर हमें पीटना शुरू कर दिया। हम अपनी जान बचाने के लिए भागे, तो वो हमारा पीछा करने लगे। उन लोगों ने तभी हमें छोड़ा जब स्थानीय लोग इकट्ठा होने लगे"। उन्होंने आगे कहा कि मेरे सर पर चोट आई है। पंचमहल की पुलिस अधीक्षक लीना पाटिल ने तीनों पीड़ितों के दावों का खंडन किया है। उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया कि ये दो गुटों के बीच आपसी झड़प का मामला है। ये लोग जब रात को करीब ग्यारह बजे चाय पीने निकले तो मोटर साईकिल से एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में गाली- गलोच करने लगे। मामला आगे बढ़ गया और बात हाथापाई तक पहुंच गई। पाटिल ने आगे कहा, उनके पास इसके सबूत के तौर पर सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं। हालांकि सुबह करीब तीन बजे मुस्लिम युवकों के बयान के आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। चूंकि गोधरा सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील जगह है, इसलिए इस घटना के आसपास एक सांप्रदायिक माहौल का निर्माण किया जा रहा है। गोधरा साल दो हज़ार दो में गुजरात दंगों का केंद्र था। हालांकि जिले को सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील घोषित किया गया, दंगों के बाद यहां कोई भी बड़ी सांप्रदायिक घटना नहीं हुई है। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
ambaşı नेचर फैसिलिटीज में आयोजित ड्रिल, जो कि 2 की ऊंचाई पर Ordu के ambaşı पठार में 650 decares के क्षेत्र में बनाई गई थी, वास्तविकता जितनी अच्छी थी। फायर ब्रिगेड, ORBEL A.Ş, Ordu AFAD प्रांतीय निदेशालय और Gendarmerie सर्च एंड रेस्क्यू टीमों द्वारा समर्थित अभ्यास में, Ordu मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका के समन्वय के तहत, 25 मीटर की ऊंचाई पर केबिन में फंसे लोगों को सफलतापूर्वक बचाया गया। टीमों द्वारा आयोजित ऑपरेशन। संभावित घटनाओं की स्थिति में आंदोलन और समन्वय सुनिश्चित करने के लिए ambaşı Doğa सुविधाओं में 2 कुर्सी लिफ्टों पर किया गया अभ्यास किया गया था। ORBEL, AFAD और Gendarmerie ने भी Ordu मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका अग्निशमन विभाग की खोज और बचाव टीमों द्वारा किए गए अभ्यास का समर्थन किया। ड्रिल, जिसे ड्रोन के साथ हवा से दूसरे सेकंड में देखा गया, सफलतापूर्वक समाप्त हो गया। किए गए कार्यों के दायरे में, जबकि सुविधा में स्की केंद्र में चेयरलिफ्ट रखरखाव किया गया था, स्की ढलानों के आसपास वनीकरण कार्य किए गए थे। स्नो मशीनों और स्नो इंजनों का रखरखाव और मरम्मत की गई, और पटरियों पर व्यवस्था की गई। मेहमानों के रहने के लिए पसंदीदा बंगलों में किए गए कार्यों के साथ नए सत्र के लिए सुविधा तैयार की गई है। संभावित बचाव की स्थिति में जहां मौके पर कमियां नजर आती हैं वहां अभ्यास के साथ स्की सेंटर को हर पहलू से तैयार किया गया है.
ambaşı नेचर फैसिलिटीज में आयोजित ड्रिल, जो कि दो की ऊंचाई पर Ordu के ambaşı पठार में छः सौ पचास decares के क्षेत्र में बनाई गई थी, वास्तविकता जितनी अच्छी थी। फायर ब्रिगेड, ORBEL A.Ş, Ordu AFAD प्रांतीय निदेशालय और Gendarmerie सर्च एंड रेस्क्यू टीमों द्वारा समर्थित अभ्यास में, Ordu मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका के समन्वय के तहत, पच्चीस मीटर की ऊंचाई पर केबिन में फंसे लोगों को सफलतापूर्वक बचाया गया। टीमों द्वारा आयोजित ऑपरेशन। संभावित घटनाओं की स्थिति में आंदोलन और समन्वय सुनिश्चित करने के लिए ambaşı Doğa सुविधाओं में दो कुर्सी लिफ्टों पर किया गया अभ्यास किया गया था। ORBEL, AFAD और Gendarmerie ने भी Ordu मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका अग्निशमन विभाग की खोज और बचाव टीमों द्वारा किए गए अभ्यास का समर्थन किया। ड्रिल, जिसे ड्रोन के साथ हवा से दूसरे सेकंड में देखा गया, सफलतापूर्वक समाप्त हो गया। किए गए कार्यों के दायरे में, जबकि सुविधा में स्की केंद्र में चेयरलिफ्ट रखरखाव किया गया था, स्की ढलानों के आसपास वनीकरण कार्य किए गए थे। स्नो मशीनों और स्नो इंजनों का रखरखाव और मरम्मत की गई, और पटरियों पर व्यवस्था की गई। मेहमानों के रहने के लिए पसंदीदा बंगलों में किए गए कार्यों के साथ नए सत्र के लिए सुविधा तैयार की गई है। संभावित बचाव की स्थिति में जहां मौके पर कमियां नजर आती हैं वहां अभ्यास के साथ स्की सेंटर को हर पहलू से तैयार किया गया है.
यह बात मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास जी ने कही। वे बुधवार को भोपाल के न्यू रवींद्र भवन में बोल रहे थे। मौका था दैनिक भास्कर समूह के चेयरमैन स्वर्गीय रमेशचंद्र अग्रवाल के 78वें जन्मदिन का। उनके जन्मदिन को प्रेरणा दिवस के रूप में मनाया गया। गौर ने लोगों ने कई प्रैक्टिकल उदाहरणों के जरिए सरल तरीके से लाइफ स्किल्स सिखाई। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया में घूम कर आ चुका हूं, लेकिन मध्यप्रदेश के लोगों की सिंपलिसिटी बहुत पसंद आई। एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि 'एक बार एक बच्चा गुब्बारा खरीदने गया। उसने गुब्बारे वाले से कहा कि क्या भैया सभी गुब्बारे उड़ेंगे? चाहे वह किसी भी रंग के हों ? गुब्बारे वाले ने कहा- हां गुब्बारा काला हो, लाल हो या हरा। सभी उड़ते हैं। उनका रंग से क्या लेना देना। ठीक इसी तरह जिंदगी भी है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि इंसान का ऊपरी पहनावा, वेशभूषा या रंग क्या है? फर्क इससे पड़ता है कि उसके अंदर क्या है? जैसे- गुब्बारे के अंदर भरी हवा उसके ऊपर उड़ने का कारण बनती है। उसी तरह हर इंसान भी चरित्र और विश्वास से सक्सेस हासिल करता है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तानी वह होता है, जो शैंपू की बोतल में पानी डालकर, टूथपेस्ट के ट्यूब को आखिरी दम तक दबाकर और टीशर्ट फटने से लेकर पोछा बन जाने तक इस्तेमाल करे। जिस तरह एयरोप्लेन की टेकऑफ और लैंडिंग हमारे हाथ में नहीं है। उसी तरह, पैदा होना और मरना हमारे हाथ में नहीं है। हमारे हाथ में है, सिर्फ जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करना। गौर गोपाल दास ने उदाहरण देते हुए कहा कि एक पिता का बेटा एग्जाम में फेल हो जाता है। पिता उस बच्चे को डांटता है कि तू कैसे फेल हो गया। देख- पड़ोस वाली लड़की को, वह कितने अच्छे नंबरों से पास हुई है। तू हर बार फेल हो जाता है, ऐसा क्यों? बेटा बोला- पापा आपने ही तो कहा था देख उसे! उसे देख-देख कर ही फेल हो गया हूं। उन्होंने कहा- दुनिया में कोई ऐसा नहीं हुआ, पहले दिन भर्ती और दूसरे दिन चक्रवर्ती। अगर आप स्वयं में बदलाव चाहते हैं, तो वह धीरे-धीरे होगा। गालियां देनी है, तो संस्कृत में दे सकते हैं। जैसे- किसी को गधा कहना है, तो उसे कहें वैशाख नंदन। सामने वाले को लगेगा कि आप उसे कोई उपाधि दे रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
यह बात मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास जी ने कही। वे बुधवार को भोपाल के न्यू रवींद्र भवन में बोल रहे थे। मौका था दैनिक भास्कर समूह के चेयरमैन स्वर्गीय रमेशचंद्र अग्रवाल के अठहत्तरवें जन्मदिन का। उनके जन्मदिन को प्रेरणा दिवस के रूप में मनाया गया। गौर ने लोगों ने कई प्रैक्टिकल उदाहरणों के जरिए सरल तरीके से लाइफ स्किल्स सिखाई। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया में घूम कर आ चुका हूं, लेकिन मध्यप्रदेश के लोगों की सिंपलिसिटी बहुत पसंद आई। एक किस्सा सुनाते हुए कहा कि 'एक बार एक बच्चा गुब्बारा खरीदने गया। उसने गुब्बारे वाले से कहा कि क्या भैया सभी गुब्बारे उड़ेंगे? चाहे वह किसी भी रंग के हों ? गुब्बारे वाले ने कहा- हां गुब्बारा काला हो, लाल हो या हरा। सभी उड़ते हैं। उनका रंग से क्या लेना देना। ठीक इसी तरह जिंदगी भी है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि इंसान का ऊपरी पहनावा, वेशभूषा या रंग क्या है? फर्क इससे पड़ता है कि उसके अंदर क्या है? जैसे- गुब्बारे के अंदर भरी हवा उसके ऊपर उड़ने का कारण बनती है। उसी तरह हर इंसान भी चरित्र और विश्वास से सक्सेस हासिल करता है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तानी वह होता है, जो शैंपू की बोतल में पानी डालकर, टूथपेस्ट के ट्यूब को आखिरी दम तक दबाकर और टीशर्ट फटने से लेकर पोछा बन जाने तक इस्तेमाल करे। जिस तरह एयरोप्लेन की टेकऑफ और लैंडिंग हमारे हाथ में नहीं है। उसी तरह, पैदा होना और मरना हमारे हाथ में नहीं है। हमारे हाथ में है, सिर्फ जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करना। गौर गोपाल दास ने उदाहरण देते हुए कहा कि एक पिता का बेटा एग्जाम में फेल हो जाता है। पिता उस बच्चे को डांटता है कि तू कैसे फेल हो गया। देख- पड़ोस वाली लड़की को, वह कितने अच्छे नंबरों से पास हुई है। तू हर बार फेल हो जाता है, ऐसा क्यों? बेटा बोला- पापा आपने ही तो कहा था देख उसे! उसे देख-देख कर ही फेल हो गया हूं। उन्होंने कहा- दुनिया में कोई ऐसा नहीं हुआ, पहले दिन भर्ती और दूसरे दिन चक्रवर्ती। अगर आप स्वयं में बदलाव चाहते हैं, तो वह धीरे-धीरे होगा। गालियां देनी है, तो संस्कृत में दे सकते हैं। जैसे- किसी को गधा कहना है, तो उसे कहें वैशाख नंदन। सामने वाले को लगेगा कि आप उसे कोई उपाधि दे रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
पटनाः Bihar के बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन (Anand Mohan) की तरह अनंत सिंह, प्रभुनाथ सिंह को जेल से रिहा करने की मांग को लेकर पटना में सवर्ण क्रांति दल के अध्यक्ष कल्लू सिंह द्वारा पोस्टर (Poster) लगाए गए। पोस्टर में दोनों को शेर बताया गया है और पोस्टर में लिखा गया है 'सवर्णों को चाहिए अधिकार नहीं चलेगा अत्याचार', साथ ही दोनों को जेल से रिहा करने की मांग की गयी है। सवर्ण क्रांति दल (Savarna Kranti Dal) के अध्यक्ष कल्लू सिंह ने कहा कि अनंत सिंह, प्रभुनाथ सिंह को फंसाया गया। उन्होंने सवर्ण होने की कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने मांग की कि Anand Mohan की तरह इन दोनों को रिहा किया जाए। इन लोगों का आधा जीवन जनता की सेवा में निकल गया। यह लोग जनता के सेवक हैं। बता दें पूर्व विधायक अनंत सिंह AK47 मामले में जेल में बंद हैं। उन्हें 10 साल की सजा हुई थी। पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह पूर्व विधायक अशोक सिंह हत्याकांड (Ashok Singh murder case) में आजीवन कारावास (Life imprisonment) की सजा काट रहे हैं। बता दें कि बिहार सरकार (Government of Bihar) ने कारा अधिनियम में बदलाव को मंजूरी दी है इसके बाद बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन समेत कुल 27 लोगों के रिहा होने का रास्ता साफ हुआ है। इसमें आनंद मोहन 27 अप्रैल को रिहा हो चुके हैं। ऐसे में जहां एक ओर इससे नीतीश सरकार (Nitish Government) की मंशा पर सवाल खड़े किये जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अन्य सजायाफ्ता को भी रिहा करने की मांग उठने लगी है। आनंद मोहन की रिहाई पर सवाल उठाते हुए सांसद चिराग पासवान ने कहा कि मेरा साफ तौर पर कहना है कि आनंद मोहन की रिहाई सरासर गलत है कहीं ना कहीं एक दलित परिवार को इंसाफ नहीं मिला है और उनके साथ अन्याय हुआ है। हत्या जैसे मामले में सरकार कानून को बदल कर रिहा कर रही है यह साफ तौर पर गलत है।
पटनाः Bihar के बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन की तरह अनंत सिंह, प्रभुनाथ सिंह को जेल से रिहा करने की मांग को लेकर पटना में सवर्ण क्रांति दल के अध्यक्ष कल्लू सिंह द्वारा पोस्टर लगाए गए। पोस्टर में दोनों को शेर बताया गया है और पोस्टर में लिखा गया है 'सवर्णों को चाहिए अधिकार नहीं चलेगा अत्याचार', साथ ही दोनों को जेल से रिहा करने की मांग की गयी है। सवर्ण क्रांति दल के अध्यक्ष कल्लू सिंह ने कहा कि अनंत सिंह, प्रभुनाथ सिंह को फंसाया गया। उन्होंने सवर्ण होने की कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने मांग की कि Anand Mohan की तरह इन दोनों को रिहा किया जाए। इन लोगों का आधा जीवन जनता की सेवा में निकल गया। यह लोग जनता के सेवक हैं। बता दें पूर्व विधायक अनंत सिंह AKसैंतालीस मामले में जेल में बंद हैं। उन्हें दस साल की सजा हुई थी। पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह पूर्व विधायक अशोक सिंह हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। बता दें कि बिहार सरकार ने कारा अधिनियम में बदलाव को मंजूरी दी है इसके बाद बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन समेत कुल सत्ताईस लोगों के रिहा होने का रास्ता साफ हुआ है। इसमें आनंद मोहन सत्ताईस अप्रैल को रिहा हो चुके हैं। ऐसे में जहां एक ओर इससे नीतीश सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किये जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अन्य सजायाफ्ता को भी रिहा करने की मांग उठने लगी है। आनंद मोहन की रिहाई पर सवाल उठाते हुए सांसद चिराग पासवान ने कहा कि मेरा साफ तौर पर कहना है कि आनंद मोहन की रिहाई सरासर गलत है कहीं ना कहीं एक दलित परिवार को इंसाफ नहीं मिला है और उनके साथ अन्याय हुआ है। हत्या जैसे मामले में सरकार कानून को बदल कर रिहा कर रही है यह साफ तौर पर गलत है।
पवन दुर्गम,बीजापुर। दक्षिण बस्तर के जंगल आए दिन बम, बंदूक और बारूदों के धमाकों से गूंजते रहते हैं. यहां हर जंगली रास्ता पुलिस-नक्सली मुठभेड़ों का गवाह है. करीब 3 दशकों से माओवादियों ने यहां अपनी गहरी पैठ और धमक बना ली है. घने जंगल और जंगलों में निवासरत आदिवासी समुदाय में माओवादी विचारधारा की अच्छी खासी पकड़ देखी जाती है. ऐसे में यहां विकास दूर की कौड़ी रही है. बदलते वक्त के साथ सरकारें अब उन इलाकों तक पहुंचने की जुगत में लगती दिख रही हैं. आज बीजापुर के कलेक्टर रितेश अग्रवाल, एसपी कमलोचन कश्यप, डीआईजी सीआरपीएफ कोमल सिन्हा ने नक्सलियों की मांद कहे जाने वाले मिरतुर-गंगालूर बेचापाल का दौरा करने पहुंचे. अतिसंवेदनशील क्षेत्र गंगालूर- मिरतुर सड़क माओवाद की जकड़ वाला इलाका है, जहां फ़ोर्स की जबरदस्त तैनाती के बीच सड़क का काम जारी है. सड़क सुरक्षा में लगे जवानों से तीनों अधिकारियों ने मिलकर घने जंगली इलाको में उनका हौसला बढ़ाया. दौरे के दौरान कलेक्टर, एसपी और डीआईजी ने ग्रामीणों से मुलाकात की. उन्होंने बेचापाल में ग्रामीणों से रूबरू होकर स्कूल, आंगनबाड़ी, पेयजल सहित बिजली, स्वास्थ्य आदि मूलभूत सुविधाओं और पेंशन के बारे में जानकारी ली. बता दें बीते कुछ वक्त से जिले के अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में जहां माओवादी पकड़ ज्यादा है और विकास नहीं हुआ है. उन सड़कों के निर्माण पर सरकार और प्रसाशन का ज्यादा फोकस नजर आता है. तेलांगाना से लगे पामेड़ तक सड़क बनकर तैयार है. जबकि बीजापुर से पामेड़ को जोड़ने वाली सीधी सड़क पर धर्माराम के पास पुल और सड़क का काम प्रारंभिक स्तिथि में है.
पवन दुर्गम,बीजापुर। दक्षिण बस्तर के जंगल आए दिन बम, बंदूक और बारूदों के धमाकों से गूंजते रहते हैं. यहां हर जंगली रास्ता पुलिस-नक्सली मुठभेड़ों का गवाह है. करीब तीन दशकों से माओवादियों ने यहां अपनी गहरी पैठ और धमक बना ली है. घने जंगल और जंगलों में निवासरत आदिवासी समुदाय में माओवादी विचारधारा की अच्छी खासी पकड़ देखी जाती है. ऐसे में यहां विकास दूर की कौड़ी रही है. बदलते वक्त के साथ सरकारें अब उन इलाकों तक पहुंचने की जुगत में लगती दिख रही हैं. आज बीजापुर के कलेक्टर रितेश अग्रवाल, एसपी कमलोचन कश्यप, डीआईजी सीआरपीएफ कोमल सिन्हा ने नक्सलियों की मांद कहे जाने वाले मिरतुर-गंगालूर बेचापाल का दौरा करने पहुंचे. अतिसंवेदनशील क्षेत्र गंगालूर- मिरतुर सड़क माओवाद की जकड़ वाला इलाका है, जहां फ़ोर्स की जबरदस्त तैनाती के बीच सड़क का काम जारी है. सड़क सुरक्षा में लगे जवानों से तीनों अधिकारियों ने मिलकर घने जंगली इलाको में उनका हौसला बढ़ाया. दौरे के दौरान कलेक्टर, एसपी और डीआईजी ने ग्रामीणों से मुलाकात की. उन्होंने बेचापाल में ग्रामीणों से रूबरू होकर स्कूल, आंगनबाड़ी, पेयजल सहित बिजली, स्वास्थ्य आदि मूलभूत सुविधाओं और पेंशन के बारे में जानकारी ली. बता दें बीते कुछ वक्त से जिले के अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में जहां माओवादी पकड़ ज्यादा है और विकास नहीं हुआ है. उन सड़कों के निर्माण पर सरकार और प्रसाशन का ज्यादा फोकस नजर आता है. तेलांगाना से लगे पामेड़ तक सड़क बनकर तैयार है. जबकि बीजापुर से पामेड़ को जोड़ने वाली सीधी सड़क पर धर्माराम के पास पुल और सड़क का काम प्रारंभिक स्तिथि में है.
वीर अर्जुन संवाददाता दौसा। कार्यवाहक जिला कलेक्टर एव जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टी सी बोहरा ने कहा कि जिले में पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान के पथम चरण मे 19 फरवरी को 0 से 5 वर्ष तक की आयु के 271071 बच्चों को पोलियो वैक्सीन की खुराक पिलाई जायेगी। अभियान की सफलता के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी तैयारिया पूर्ण करली गई है। मंगलवार को कलेक्टेट सभा भवन मे जिला टास्क फोर्स समिति की बैठक को संबोधित करते हुये सीईओ ने यह बात कही। उन्होने कहा कि जिले में 19 फरवरी को जिले के बाहर से आने वाले बच्चों को रेल्वे स्टेशनों एवं बस स्टेण्डों पर भी पोलियो खुराक पिलाने की व्यवस्था होगी। उन्होने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मिशन की भावना से काम कर इस अभियान को सफल बनायें, ताकि जिले में एक भी बच्चा दवा से वंचित ना रहे। उन्होने बताया कि इस बार पल्स पोलियो अभियान में पथम दिन ही बूथ पर कम से कम 80 पतिशत बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य है। उन्होने जनपतिनिधियों तथा आमजन से निवेदन किया है कि वे क्षेत्र के 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को पथम दिन ही पल्स पोलियो बूथ पर लाने के लिए जनजागरण अभियान चलाये। पल्स पोलियो अभियान के अन्तर्गत पथम दिन रविवार को निर्धारित बूथों पर पोलियो खुराक पिलाई जायेगी एवं अगले दो दिनों में शहरी क्षेत्र (20 फरवरी ) में तथा अगले एक दिन ग्रामीण क्षेत्र में (20 फरवरी) चिकित्सा विभाग की टोलियां घर-घर जाकर पथम दिन बूथ पर नहीं आये बच्चों को पोलियो की खुराक पिलायेगी।
वीर अर्जुन संवाददाता दौसा। कार्यवाहक जिला कलेक्टर एव जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टी सी बोहरा ने कहा कि जिले में पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान के पथम चरण मे उन्नीस फरवरी को शून्य से पाँच वर्ष तक की आयु के दो लाख इकहत्तर हज़ार इकहत्तर बच्चों को पोलियो वैक्सीन की खुराक पिलाई जायेगी। अभियान की सफलता के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी तैयारिया पूर्ण करली गई है। मंगलवार को कलेक्टेट सभा भवन मे जिला टास्क फोर्स समिति की बैठक को संबोधित करते हुये सीईओ ने यह बात कही। उन्होने कहा कि जिले में उन्नीस फरवरी को जिले के बाहर से आने वाले बच्चों को रेल्वे स्टेशनों एवं बस स्टेण्डों पर भी पोलियो खुराक पिलाने की व्यवस्था होगी। उन्होने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मिशन की भावना से काम कर इस अभियान को सफल बनायें, ताकि जिले में एक भी बच्चा दवा से वंचित ना रहे। उन्होने बताया कि इस बार पल्स पोलियो अभियान में पथम दिन ही बूथ पर कम से कम अस्सी पतिशत बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य है। उन्होने जनपतिनिधियों तथा आमजन से निवेदन किया है कि वे क्षेत्र के पाँच वर्ष तक के सभी बच्चों को पथम दिन ही पल्स पोलियो बूथ पर लाने के लिए जनजागरण अभियान चलाये। पल्स पोलियो अभियान के अन्तर्गत पथम दिन रविवार को निर्धारित बूथों पर पोलियो खुराक पिलाई जायेगी एवं अगले दो दिनों में शहरी क्षेत्र में तथा अगले एक दिन ग्रामीण क्षेत्र में चिकित्सा विभाग की टोलियां घर-घर जाकर पथम दिन बूथ पर नहीं आये बच्चों को पोलियो की खुराक पिलायेगी।
सुल्तानपुर। UP Accident उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के गोसाईगंज थाना क्षेत्र के माधवपुर छतौना गांव के पास मंगलवार को ट्रकों की चेकिंग के दौरान एक तेज रफ्तार ट्रक ने एआरटीओ के ड्राइवर और कांस्टेबल को रौंद दिया। जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। बता दें कि घटना के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। बता दें कि सुल्तानपुर एआरटीओ की टीम मंगलवार सुबह चेकिंग करके वापस आ रही थी, तभी एआरटीओ ने टॉयलेट के लिए एक जगह गाड़ी रुकवाई। गाड़ी से एआरटीओ के अलावा सिपाही अरुण सिंह और ड्राइवर अब्दुल मोबिन भी उतरा। जैसे ही सभी लोग गाड़ी से उतरे, उसी समय तेज रफ्तार ट्रक ने सिपाही अरुण सिंह और ड्राइवर अब्दुल मोबिन को रौंद दिया। मौके पर ही दोनों की मौत हो गई। एआरटीओ बाल-बाल बच गए, मृतक सिपाही अरुण सिंह, लखनऊ के बीकेटी का रहने वाला है, जबकि संविदा ड्राइवर अब्दुल मोबिन खान सुल्तानपुर के ही शास्त्री नगर का रहने वाला है। एक्सीडेंट करने के बाद ट्रक का ड्राइवर मौके से फरार हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने ट्रक और दोनों शव को अपने कब्जे में ले लिया है।
सुल्तानपुर। UP Accident उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के गोसाईगंज थाना क्षेत्र के माधवपुर छतौना गांव के पास मंगलवार को ट्रकों की चेकिंग के दौरान एक तेज रफ्तार ट्रक ने एआरटीओ के ड्राइवर और कांस्टेबल को रौंद दिया। जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। बता दें कि घटना के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। बता दें कि सुल्तानपुर एआरटीओ की टीम मंगलवार सुबह चेकिंग करके वापस आ रही थी, तभी एआरटीओ ने टॉयलेट के लिए एक जगह गाड़ी रुकवाई। गाड़ी से एआरटीओ के अलावा सिपाही अरुण सिंह और ड्राइवर अब्दुल मोबिन भी उतरा। जैसे ही सभी लोग गाड़ी से उतरे, उसी समय तेज रफ्तार ट्रक ने सिपाही अरुण सिंह और ड्राइवर अब्दुल मोबिन को रौंद दिया। मौके पर ही दोनों की मौत हो गई। एआरटीओ बाल-बाल बच गए, मृतक सिपाही अरुण सिंह, लखनऊ के बीकेटी का रहने वाला है, जबकि संविदा ड्राइवर अब्दुल मोबिन खान सुल्तानपुर के ही शास्त्री नगर का रहने वाला है। एक्सीडेंट करने के बाद ट्रक का ड्राइवर मौके से फरार हो गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने ट्रक और दोनों शव को अपने कब्जे में ले लिया है।
आईपीएल के 68वें मुकाबले में (20 मई) को कोलकाता नाइट राइडर्स और लखनऊ सुपर जाएंट्स के बीच मुकाबला खेला जाएगा. दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला कोलकाता के होम ग्राउंड ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स में खेला जाएगा. एक ओर केकेआर को पिछले मुकाबले में चेन्नई के खिलाफ शानदार जीत मिली थी. वहीं दूसरी ओर लखनऊ को पिछले मैच में मुंबई के खिलाफ जीत मिली थी. प्लेऑफ के दृष्टि से दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला काफी महत्वपूर्ण है. वहीं इस मैच से पहले यहां जानिए हेड टू हेड रिकॉर्ड में कौन आगे है. आईपीएल इतिहसा में कोलकाता नाइट राइडर्स और लखनऊ सुपर जाएंट्स के बीच अबतक कुल 2 बार मुकाबले खेले गए हैं. इन दोनों मैचों लखनऊ ने केकेआर को मात दी है. ऐसे में लखनऊ का पलड़ा केकेआर पर भारी नजर आ रहा है. हालांकि केकेआर इस समय कमाल के फॉर्म में चल रही है. ऐस में इस मुकाबले में कांटे की टक्कर होगी. कोलकाता के ईडन गार्डन्स क्रिकेट स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों के अनुकूल मानी जाती है. बल्लेबाजों को यहां खूब फायदा मिलता है. लेकिन इससे साथ साथ यहां स्पिन गेंदबाजों को भी खूब फायदा मिलता है. इस स्टेडियम में ओस बड़ी भूमिका निभा सकती है. ऐसे में टॉस जीतकर पहले बॉलिंग करना अच्छा फैसला माना जाएगा. कब और कहां देखें लाइव? कोलकाता नाइट राइडर्स और लखनऊ सुपर जाएंट्स के बीच आईपीएल 2023 का 68वां मैच शाम 7:30 बजे से खेला जाएगा. वहीं, टॉस का समय 30 मिनट पहले यानि 7 बजे होगा. इस मुकाबले का लाइव टेलीकास्ट स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क के अलग-अलग चैनल्स पर किया जाएगा. इस मैच की लाइव स्ट्रीमिंग 'जियो सिनेमा' एप पर उपलब्ध रहेगी. इस एप पर आप फ्री में यह मुकाबला देख सकते हैं. यहां आप 10 अलग-अलग भाषाओं में मैच का आनंद ले सकते हैं.
आईपीएल के अड़सठवें मुकाबले में को कोलकाता नाइट राइडर्स और लखनऊ सुपर जाएंट्स के बीच मुकाबला खेला जाएगा. दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला कोलकाता के होम ग्राउंड ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स में खेला जाएगा. एक ओर केकेआर को पिछले मुकाबले में चेन्नई के खिलाफ शानदार जीत मिली थी. वहीं दूसरी ओर लखनऊ को पिछले मैच में मुंबई के खिलाफ जीत मिली थी. प्लेऑफ के दृष्टि से दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला काफी महत्वपूर्ण है. वहीं इस मैच से पहले यहां जानिए हेड टू हेड रिकॉर्ड में कौन आगे है. आईपीएल इतिहसा में कोलकाता नाइट राइडर्स और लखनऊ सुपर जाएंट्स के बीच अबतक कुल दो बार मुकाबले खेले गए हैं. इन दोनों मैचों लखनऊ ने केकेआर को मात दी है. ऐसे में लखनऊ का पलड़ा केकेआर पर भारी नजर आ रहा है. हालांकि केकेआर इस समय कमाल के फॉर्म में चल रही है. ऐस में इस मुकाबले में कांटे की टक्कर होगी. कोलकाता के ईडन गार्डन्स क्रिकेट स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों के अनुकूल मानी जाती है. बल्लेबाजों को यहां खूब फायदा मिलता है. लेकिन इससे साथ साथ यहां स्पिन गेंदबाजों को भी खूब फायदा मिलता है. इस स्टेडियम में ओस बड़ी भूमिका निभा सकती है. ऐसे में टॉस जीतकर पहले बॉलिंग करना अच्छा फैसला माना जाएगा. कब और कहां देखें लाइव? कोलकाता नाइट राइडर्स और लखनऊ सुपर जाएंट्स के बीच आईपीएल दो हज़ार तेईस का अड़सठवां मैच शाम सात:तीस बजे से खेला जाएगा. वहीं, टॉस का समय तीस मिनट पहले यानि सात बजे होगा. इस मुकाबले का लाइव टेलीकास्ट स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क के अलग-अलग चैनल्स पर किया जाएगा. इस मैच की लाइव स्ट्रीमिंग 'जियो सिनेमा' एप पर उपलब्ध रहेगी. इस एप पर आप फ्री में यह मुकाबला देख सकते हैं. यहां आप दस अलग-अलग भाषाओं में मैच का आनंद ले सकते हैं.
परिशिष्ट ३ वक्रिय अगोपाग, चक्रिय सघात, वक्रिय वक्रिय वधन, वक्रिय तैजस वधन, वक्रय-कामण वधन, वक्रिय तजस कामण वधन । वक्रिमद्विक - वक्रिय शरीर, वक्रिय अगोपाग । वक्रियपटक - वक्रिय शरीर, चक्रिय अगोपाग नरकगति, नरकानुपूर्वी देवगति, देवानुपूर्वी 1 शरीरपचक- जौदारिक शरीर, वक्रिय शरीर, आहारक शरीर, तैजस शरीर, कामण गरीर नाम । सघातनपचक-जौदारिक संघातन, वक्रिय संघातन, आहारक संघातन, तजस सघातन, कामण संघातन नाम । सज्वलनकषायचतुष्क- सज्वलन क्रोध, मान, माया, लोभ । सज्वलनकषायनिक - सज्वलन क्रोध, मान, माया । सद्धिक सनी पचेद्रिय पर्याप्त, सनी पचद्रय अपर्याप्त । सस्थानपटक- समचतुरख, यग्रोधपरिमडल, सादि, वामन, कुब्ज, हुड सस्थान । सहननघटक - वज्रसृषमनाराच, ऋऋषभनाराच, नाराच, अधनाराच, कोलिका, सेवात सहनन । सम्ययत्वनिक - ओपशमिक सम्यवत्व, क्षायोपशमिय सम्यक्त्व, क्षायिक सम्यक्त्व । सम्यक्त्वद्विक - क्षायोपामिक सम्यक्त्व, क्षायिक सम्यक्त्व । सुभगचतुष्क- सुभग नाम, सुस्वर नाम, आदय नाम, यश कीर्ति नाम । सुभगत्रिक - सुभग नाम, सुस्वर नाम, आदेय नाम । सुरनिफ~- दवगति, देवानुपूर्वी, देवायु । सुरद्विक-देवगति, देवानुपूर्वी । सूक्ष्मत्रयोदशक - (सूक्ष्म नाम आदि १३ प्रकृतियाँ) सूक्ष्म नाम, साधारण नाम, अपर्याप्त नाम, एकेद्रिय जाति, द्वौद्रिय जाति, श्रोद्रिय जाति, चतुरिद्रिय जाति, स्थावर नाम, आतप नाम, नपुसक्वेद, मिथ्यात्व मोहनीय, हुढ संस्थान सचात सहनन । सूक्ष्मयिक - सूक्ष्म नाम, साधारण नाम, अपर्याप्त नाम ।
परिशिष्ट तीन वक्रिय अगोपाग, चक्रिय सघात, वक्रिय वक्रिय वधन, वक्रिय तैजस वधन, वक्रय-कामण वधन, वक्रिय तजस कामण वधन । वक्रिमद्विक - वक्रिय शरीर, वक्रिय अगोपाग । वक्रियपटक - वक्रिय शरीर, चक्रिय अगोपाग नरकगति, नरकानुपूर्वी देवगति, देवानुपूर्वी एक शरीरपचक- जौदारिक शरीर, वक्रिय शरीर, आहारक शरीर, तैजस शरीर, कामण गरीर नाम । सघातनपचक-जौदारिक संघातन, वक्रिय संघातन, आहारक संघातन, तजस सघातन, कामण संघातन नाम । सज्वलनकषायचतुष्क- सज्वलन क्रोध, मान, माया, लोभ । सज्वलनकषायनिक - सज्वलन क्रोध, मान, माया । सद्धिक सनी पचेद्रिय पर्याप्त, सनी पचद्रय अपर्याप्त । सस्थानपटक- समचतुरख, यग्रोधपरिमडल, सादि, वामन, कुब्ज, हुड सस्थान । सहननघटक - वज्रसृषमनाराच, ऋऋषभनाराच, नाराच, अधनाराच, कोलिका, सेवात सहनन । सम्ययत्वनिक - ओपशमिक सम्यवत्व, क्षायोपशमिय सम्यक्त्व, क्षायिक सम्यक्त्व । सम्यक्त्वद्विक - क्षायोपामिक सम्यक्त्व, क्षायिक सम्यक्त्व । सुभगचतुष्क- सुभग नाम, सुस्वर नाम, आदय नाम, यश कीर्ति नाम । सुभगत्रिक - सुभग नाम, सुस्वर नाम, आदेय नाम । सुरनिफ~- दवगति, देवानुपूर्वी, देवायु । सुरद्विक-देवगति, देवानुपूर्वी । सूक्ष्मत्रयोदशक - सूक्ष्म नाम, साधारण नाम, अपर्याप्त नाम, एकेद्रिय जाति, द्वौद्रिय जाति, श्रोद्रिय जाति, चतुरिद्रिय जाति, स्थावर नाम, आतप नाम, नपुसक्वेद, मिथ्यात्व मोहनीय, हुढ संस्थान सचात सहनन । सूक्ष्मयिक - सूक्ष्म नाम, साधारण नाम, अपर्याप्त नाम ।
श्रीनगर, 26 सितम्बर (आतंकवाद विरोधी मोर्चे पर सीआरपीएफ के जवानों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए) पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने पच्चीस सीआरपीएफ कर्मियों को नकद इनाम के साथ कमेंडेशन सर्टिफिकेट क्लास -1 का अनुदान प्रदान किया है। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, एएसआई / जीडी नौनिहाल सिंह को कमेंडेशन सर्टिफिकेट क्लास -1 से पुरस्कृत किया गया, साथ ही बीस हजार रुपये का नकद इनाम, कांस्टेबल / जीडी नरेंद्र कुमार और हेड कांस्टेबल / जीडी राजेश कुमार को प्रशंसा प्रमाण पत्र से पुरस्कृत किया गया। इस साल 17 अगस्त को हुए एक आतंकी हमले के दौरान मन की उत्कृष्ट उपस्थिति और तेजी से कार्रवाई करने के लिए प्रत्येक को पंद्रह हजार रुपये के नकद इनाम के साथ कक्षा -1। तीनों कर्मीसीआरपीएफ के F / 119 Bn के हैं। एक अन्य आदेश के तहत, जारी किए गए एक बयान के अनुसार, काउंटर-मिलिट्री ऑपरेशनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सीआरपीएफ के बीस-बीस लोगों को प्रशस्ति-पत्र प्रमाण पत्र वर्ग -1 से पुरस्कृत किया गया है। इस आदेश के तहत पुरस्कृत होने वालों में आईएनएस / जीडी अर्पण गोगोई, एएसआई / जीडी गंगा राम, एचसी / जीडी शंकर भौमिक, एचसी / आरओ यशपाल सिंह, सीटीएस / जीडी जगदीश चंद्र, राजीभांडिक, सुरोजदेहियांस, गौतम सैकिया, अन्नू एसए, बेनजीबिनगोंग हैं। , संझोनू दुलोय, निमाई बेरा, मज्जी रवि, तापस जेना, सीटी / बीयूजी सनी कुमार, सीआरपीएफ के क्यूएटी-176 बीएन के सीटी / डीएच जी इवरसन। एसआई / जेडी एस.आर. लस्कर, सीटीएस / जीडी हेमंत सहरिया, लोकेश्वर दास, अजय कुमार, सीटीटी-जी / 176 के राकेश कुमार। DGP ने आशा व्यक्त की है कि ये अधिकारी / कर्मी समान उत्साह और उत्साह के साथ काम करते रहेंगे और अपने बल और खुद के लिए अधिक से अधिक पुरस्कार और सम्मान अर्जित करेंगे.
श्रीनगर, छब्बीस सितम्बर पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने पच्चीस सीआरपीएफ कर्मियों को नकद इनाम के साथ कमेंडेशन सर्टिफिकेट क्लास -एक का अनुदान प्रदान किया है। पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, एएसआई / जीडी नौनिहाल सिंह को कमेंडेशन सर्टिफिकेट क्लास -एक से पुरस्कृत किया गया, साथ ही बीस हजार रुपये का नकद इनाम, कांस्टेबल / जीडी नरेंद्र कुमार और हेड कांस्टेबल / जीडी राजेश कुमार को प्रशंसा प्रमाण पत्र से पुरस्कृत किया गया। इस साल सत्रह अगस्त को हुए एक आतंकी हमले के दौरान मन की उत्कृष्ट उपस्थिति और तेजी से कार्रवाई करने के लिए प्रत्येक को पंद्रह हजार रुपये के नकद इनाम के साथ कक्षा -एक। तीनों कर्मीसीआरपीएफ के F / एक सौ उन्नीस Bn के हैं। एक अन्य आदेश के तहत, जारी किए गए एक बयान के अनुसार, काउंटर-मिलिट्री ऑपरेशनों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सीआरपीएफ के बीस-बीस लोगों को प्रशस्ति-पत्र प्रमाण पत्र वर्ग -एक से पुरस्कृत किया गया है। इस आदेश के तहत पुरस्कृत होने वालों में आईएनएस / जीडी अर्पण गोगोई, एएसआई / जीडी गंगा राम, एचसी / जीडी शंकर भौमिक, एचसी / आरओ यशपाल सिंह, सीटीएस / जीडी जगदीश चंद्र, राजीभांडिक, सुरोजदेहियांस, गौतम सैकिया, अन्नू एसए, बेनजीबिनगोंग हैं। , संझोनू दुलोय, निमाई बेरा, मज्जी रवि, तापस जेना, सीटी / बीयूजी सनी कुमार, सीआरपीएफ के क्यूएटी-एक सौ छिहत्तर बीएन के सीटी / डीएच जी इवरसन। एसआई / जेडी एस.आर. लस्कर, सीटीएस / जीडी हेमंत सहरिया, लोकेश्वर दास, अजय कुमार, सीटीटी-जी / एक सौ छिहत्तर के राकेश कुमार। DGP ने आशा व्यक्त की है कि ये अधिकारी / कर्मी समान उत्साह और उत्साह के साथ काम करते रहेंगे और अपने बल और खुद के लिए अधिक से अधिक पुरस्कार और सम्मान अर्जित करेंगे.
चेन्नई सुपरकिंग्स (CSK) के सामने आरसीबी (RCB) की टीम ने शारजाह जैसे छोटे मैदान पर 156 रन का स्कोर बनाया है। चेन्नई के गेंदबाजों ने लाइन और लेंथ के साथ गेंदबाजी करते हुए आरसीबी की मजबूत बैटिंग लाइन अप को बांधकर रखा और शार्दुल ठाकुर ने भी बेहतरीन गेंदबाजी का प्रदर्शन किया और 2 विकेट हासिल किये। सबसे अहम ड्वेन ब्रावो की गेंदबाजी रही। ब्रावो ने भी 3 विकेट हासिल किये। इस तरह चेन्नई के गेंदबाजों ने सामूहिक रूप से बेहतर खेल का प्रदर्शन करते हुए आरसीबी को बड़ा स्कोर नहीं बनाने दिया। महेंद्र सिंह धोनी ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय लेकर चौंका दिया। शारजाह में पिच फ़्लैट रहती है, ऐसे में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय थोड़ा हैरानी करने वाला कहा जा सकता है। हालांकि गेंदबाजों ने अपनी बेहतरीन लाइन से धोनी के निर्णय को सही साबित कर दिया। ट्विटर पर चेन्नई की गेंदबाजी को लेकर जबरदस्त प्रतिक्रियाएं आई। (लॉर्ड शार्दुल ने झटके एक ही ओवर में लगातार दो विकेट) (लॉर्ड शार्दुल, कृपया मैदान पर थूक देना ताकि ओस आ जाए) (आप लॉर्ड शार्दुल को गेम से बाहर नहीं रख सकते, वह गेम को नियंत्रित करते हैं, गोल्डन भुजाओं वाला आदमी) (क्रिकेट साधारण गेम है, हमारे पास लॉर्ड शार्दुल है और उनके पास नहीं) (जर्सी नम्बर 3 रैना के तीन कैच) (मैक्सवेल का आईपीएल करियर कुछ ऐसा रहा है) (लॉर्ड शार्दुल को ओपन करने भेजो और मैच 10 ओवर में खत्म करने दो) (टिम डेविड ऐसे लगे जैसे उन्होंने कभी क्रिकेट नहीं खेला) (शारजाह में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला लेना आसान नहीं होता जब तक कि आप धोनी नहीं हो)
चेन्नई सुपरकिंग्स के सामने आरसीबी की टीम ने शारजाह जैसे छोटे मैदान पर एक सौ छप्पन रन का स्कोर बनाया है। चेन्नई के गेंदबाजों ने लाइन और लेंथ के साथ गेंदबाजी करते हुए आरसीबी की मजबूत बैटिंग लाइन अप को बांधकर रखा और शार्दुल ठाकुर ने भी बेहतरीन गेंदबाजी का प्रदर्शन किया और दो विकेट हासिल किये। सबसे अहम ड्वेन ब्रावो की गेंदबाजी रही। ब्रावो ने भी तीन विकेट हासिल किये। इस तरह चेन्नई के गेंदबाजों ने सामूहिक रूप से बेहतर खेल का प्रदर्शन करते हुए आरसीबी को बड़ा स्कोर नहीं बनाने दिया। महेंद्र सिंह धोनी ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय लेकर चौंका दिया। शारजाह में पिच फ़्लैट रहती है, ऐसे में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय थोड़ा हैरानी करने वाला कहा जा सकता है। हालांकि गेंदबाजों ने अपनी बेहतरीन लाइन से धोनी के निर्णय को सही साबित कर दिया। ट्विटर पर चेन्नई की गेंदबाजी को लेकर जबरदस्त प्रतिक्रियाएं आई।
जहा तक प्रशासन की उपेक्षा की बात है तो किसी भी मुद्दे को जो राष्ट्र हित से जुडा हुआ है उसको ले कर जब तक किसी भी आम आदमी तक के अंदर जागरूकता नही आएगी तो इस तरह की आत्मोत्सर्ग की घटनाये कुछ दिनों तक सनसनीखेज खबरे बन कर छाई रहेंगी और उसके बाद वक्त के साथ इस पर भी धूल की परते जम जाएँगी दरअसल हर आदमी बस हमारे राजनीतिक दलों की तरह दोषारोपण या दूसरे में दोष ढूंढने की कवायद में लगा हुआ है जिस जगह या जिस व्यवस्था से हम जुड़े हुए है हर आदमी चाहे तो वही से थोडा प्रयास करे तो भी क्या कुछ हद तक चीजो को सही नही किया जा सकता है प्लास्टिक थैलियो का प्रयोग क्यों कर रहे है हम ? जबकि मालूम है ये पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है अवैध खनन यदि किसी भी खदानों या पहाड़ो पर हो रहे है तो जाहिर है इसके पीछे उन्ही लोग का हाथ होता है जो हर किसी भी चीज को रिश्वत दे कर खरीद सकते है तो ऐसे मुद्दे से जुड़े इंजीनियर और ठेकेदारों को ले कर करवाई क्यों नही की जाती ? अंत में सन्यासी निगमानंद को एक विनम्र श्रद्धांजली के साथ इस मुद्दे कि गंभीरता पर ध्यान कि जरुरत .... .
जहा तक प्रशासन की उपेक्षा की बात है तो किसी भी मुद्दे को जो राष्ट्र हित से जुडा हुआ है उसको ले कर जब तक किसी भी आम आदमी तक के अंदर जागरूकता नही आएगी तो इस तरह की आत्मोत्सर्ग की घटनाये कुछ दिनों तक सनसनीखेज खबरे बन कर छाई रहेंगी और उसके बाद वक्त के साथ इस पर भी धूल की परते जम जाएँगी दरअसल हर आदमी बस हमारे राजनीतिक दलों की तरह दोषारोपण या दूसरे में दोष ढूंढने की कवायद में लगा हुआ है जिस जगह या जिस व्यवस्था से हम जुड़े हुए है हर आदमी चाहे तो वही से थोडा प्रयास करे तो भी क्या कुछ हद तक चीजो को सही नही किया जा सकता है प्लास्टिक थैलियो का प्रयोग क्यों कर रहे है हम ? जबकि मालूम है ये पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है अवैध खनन यदि किसी भी खदानों या पहाड़ो पर हो रहे है तो जाहिर है इसके पीछे उन्ही लोग का हाथ होता है जो हर किसी भी चीज को रिश्वत दे कर खरीद सकते है तो ऐसे मुद्दे से जुड़े इंजीनियर और ठेकेदारों को ले कर करवाई क्यों नही की जाती ? अंत में सन्यासी निगमानंद को एक विनम्र श्रद्धांजली के साथ इस मुद्दे कि गंभीरता पर ध्यान कि जरुरत .... .
मुंबई। आमिर खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म लाल सिंह चड्ढा की हाल ही में उनकी मां जीनत हुसैन ने समीक्षा की थी। अभिनेता ने खुलासा किया, कि किसी भी फिल्म की रिलीज से पहले वह हमेशा अपनी मां की राय लेते हैं। जैसा कि लाल सिंह चड्ढा रिलीज होने से कुछ ही महीने दूर है। आमिर अपनी माँ के विचारों को जानना नहीं भूले। एक इंटरव्यू के दौरान एक्टर ने बताया कि लाल सिंह चड्ढा को देखकर उनकी मां ने क्या कहा। मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान जिस शख्स के विचारों को लेना कभी नहीं भूलते, वह हैं उनकी मां जीनत हुसैन। अपनी आने वाली फिल्म लाल सिंह चड्ढा की रिलीज से पहले, अभिनेता ने टेस्ट स्क्रीनिंग के दौरान अपनी मां को फिल्म दिखाई। आमिर ने खुलासा किया कि उन्हें यह फिल्म बहुत पसंद आई। RedFm शो के साथ एक इंटरव्यू में, अभिनेता ने कहा, "अम्मी को फिल्म बहुत पसंद आई। मेरी मां को फिल्म बहुत पसंद आई है। " आमिर खान ने बताया कि उनकी मां ने कहा, 'आमिर आप किसी बात मत सुनिए। आपकी फिल्म बहुत सही है और आप यही रिलीज करिये। कुछ मत कटिये। ' तो अम्मी को क्या लगता है मेरे काम के बारे में वो बहुत जरूरी है। नंबर एक प्रतिक्रिया यह मेरे लिए है। 28 अप्रैल को, लाल सिंह चड्ढा के निर्माताओं ने पहला गीत, कहानी. . जारी किया। अभी तक, गीत का केवल लिरकल वीडियो ही सामने आया है, जो निश्चित रूप से आपके दिल छू लेगा। गाने का संगीत काफी सुकून भरा हुआ है। प्रशंसक अब गाने के वीडियो के आने का इंतजार कर रहे हैं। फिल्म इंडस्ट्री को हमेशा के लिए छोड़ने वाले थे आमिर खान, अभिनेता ने कहा- 'मैंने पूरा मन बना लिया था. . . '
मुंबई। आमिर खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म लाल सिंह चड्ढा की हाल ही में उनकी मां जीनत हुसैन ने समीक्षा की थी। अभिनेता ने खुलासा किया, कि किसी भी फिल्म की रिलीज से पहले वह हमेशा अपनी मां की राय लेते हैं। जैसा कि लाल सिंह चड्ढा रिलीज होने से कुछ ही महीने दूर है। आमिर अपनी माँ के विचारों को जानना नहीं भूले। एक इंटरव्यू के दौरान एक्टर ने बताया कि लाल सिंह चड्ढा को देखकर उनकी मां ने क्या कहा। मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान जिस शख्स के विचारों को लेना कभी नहीं भूलते, वह हैं उनकी मां जीनत हुसैन। अपनी आने वाली फिल्म लाल सिंह चड्ढा की रिलीज से पहले, अभिनेता ने टेस्ट स्क्रीनिंग के दौरान अपनी मां को फिल्म दिखाई। आमिर ने खुलासा किया कि उन्हें यह फिल्म बहुत पसंद आई। RedFm शो के साथ एक इंटरव्यू में, अभिनेता ने कहा, "अम्मी को फिल्म बहुत पसंद आई। मेरी मां को फिल्म बहुत पसंद आई है। " आमिर खान ने बताया कि उनकी मां ने कहा, 'आमिर आप किसी बात मत सुनिए। आपकी फिल्म बहुत सही है और आप यही रिलीज करिये। कुछ मत कटिये। ' तो अम्मी को क्या लगता है मेरे काम के बारे में वो बहुत जरूरी है। नंबर एक प्रतिक्रिया यह मेरे लिए है। अट्ठाईस अप्रैल को, लाल सिंह चड्ढा के निर्माताओं ने पहला गीत, कहानी. . जारी किया। अभी तक, गीत का केवल लिरकल वीडियो ही सामने आया है, जो निश्चित रूप से आपके दिल छू लेगा। गाने का संगीत काफी सुकून भरा हुआ है। प्रशंसक अब गाने के वीडियो के आने का इंतजार कर रहे हैं। फिल्म इंडस्ट्री को हमेशा के लिए छोड़ने वाले थे आमिर खान, अभिनेता ने कहा- 'मैंने पूरा मन बना लिया था. . . '
हरदोईः हरदोई के अतरौली क्षेत्र में दिल्ली की रहने वाली किशोरी को बंधक बनाकर वेश्यावृति कराने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने छापा मारकर किशोरी को बरामद करते हुए 4 लोगों को अरैस्ट किया है। दरअसल, 3 वर्ष पहले भाई के साथ अपने घर लौट रही किशोरी की बस छूट गई थी। जिसके बाद उससे मिले अनजान दंपत्ति ने एक लाख रुपये में उसे बेच दिया था। उसके साथ जिस्म्फ़रोसी कराई जा रही थी। सोशल मीडिया पर पीड़िता का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने इसका संज्ञान लिया और किशोरी को मुक्त कराया है। आपको बता दें कि पुलिस को सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो मिला था। जिसमें किशोरी ने बंधक बनाकर वैश्यावृति कराने की बात बताई थी। इसके बाद सीओ शिल्पा कुमारी के नेतृत्व में अतरौली पुलिस ने क्षेत्र के नटपुरवा गांव में छापा मारा। जहां दिल्ली की रहने वाली किशोरी को पुलिस ने बरामद कर लिया। वायरल वीडियो में किशोरी के मुताबिक वह अपने माता पिता और भाई के साथ दादी से मिलने गई थी। माता-पिता दादी के पास रुक गए और वह भाई के साथ वापस आ रही थी। रास्ते में एक ढाबे पर उसकी बस छूट गई। इसके बाद उसने अगली बस ली। दूसरी बस में उसकी मुलाकात अमिता पत्नी अरुण और सजनी पत्नी विकास से हुई। उन्होंने किशोरी को घर छोड़ने की बात बोला और नटपुरवा लेकर चले आए। जहां, उन्होंने घर पहुंचाने की स्थान उसका एक लाख रुपये में सौदा कर दिया। जानकारी के अनुसार इसके बाद किशोरी को लगातार प्रताड़ित कर, उससे वेश्यावृति कराई जा रही थी। वीडियो वायरल होने के बाद सीओ शिल्पा कुमारी ने अतरौली प्रभारी निरीक्षक दीपक शुक्ला के साथ गांव में छापा मारा। जहां जितेंद्र के घर के सामने पीड़िता को बरामद कर लिया। पीड़िता ने बंधक बनाकर वेश्यावृति कराने की बात कही। पीडिता ने बताया मेरी तरह कई लड़कियों से वेश्यावृति कराके उर्मिला, तारा और लोहा सिंह ने अपना मकान और मुर्गा फार्म बनवाया है। दरअसल, वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने जितेंद्र, सीतेश, मुन्ना, सोमिल, सजनी, पूनम, उर्मिला, अमिता और तारा की तलाश प्रारम्भ कर दी। इसके बाद पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली। मुखबिर की सूचना पर लोहा सिंह की दुकान पर बैठे जितेंद्र नट पुत्र गजराज, उर्मिला पत्नी जितेंद्र, तारा पत्नी शिवपाल उर्फ लोहा सिंह वा सजनी पत्नी विकास को अरैस्ट किया है। पुलिस सभी आरोपियों को के खिलाफ दुष्कर्म, अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम सहित आधा दर्जन धाराओं में केस दर्ज किया है। एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि मुद्दे में कार्रवाई की जा रही है।
हरदोईः हरदोई के अतरौली क्षेत्र में दिल्ली की रहने वाली किशोरी को बंधक बनाकर वेश्यावृति कराने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने छापा मारकर किशोरी को बरामद करते हुए चार लोगों को अरैस्ट किया है। दरअसल, तीन वर्ष पहले भाई के साथ अपने घर लौट रही किशोरी की बस छूट गई थी। जिसके बाद उससे मिले अनजान दंपत्ति ने एक लाख रुपये में उसे बेच दिया था। उसके साथ जिस्म्फ़रोसी कराई जा रही थी। सोशल मीडिया पर पीड़िता का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने इसका संज्ञान लिया और किशोरी को मुक्त कराया है। आपको बता दें कि पुलिस को सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो मिला था। जिसमें किशोरी ने बंधक बनाकर वैश्यावृति कराने की बात बताई थी। इसके बाद सीओ शिल्पा कुमारी के नेतृत्व में अतरौली पुलिस ने क्षेत्र के नटपुरवा गांव में छापा मारा। जहां दिल्ली की रहने वाली किशोरी को पुलिस ने बरामद कर लिया। वायरल वीडियो में किशोरी के मुताबिक वह अपने माता पिता और भाई के साथ दादी से मिलने गई थी। माता-पिता दादी के पास रुक गए और वह भाई के साथ वापस आ रही थी। रास्ते में एक ढाबे पर उसकी बस छूट गई। इसके बाद उसने अगली बस ली। दूसरी बस में उसकी मुलाकात अमिता पत्नी अरुण और सजनी पत्नी विकास से हुई। उन्होंने किशोरी को घर छोड़ने की बात बोला और नटपुरवा लेकर चले आए। जहां, उन्होंने घर पहुंचाने की स्थान उसका एक लाख रुपये में सौदा कर दिया। जानकारी के अनुसार इसके बाद किशोरी को लगातार प्रताड़ित कर, उससे वेश्यावृति कराई जा रही थी। वीडियो वायरल होने के बाद सीओ शिल्पा कुमारी ने अतरौली प्रभारी निरीक्षक दीपक शुक्ला के साथ गांव में छापा मारा। जहां जितेंद्र के घर के सामने पीड़िता को बरामद कर लिया। पीड़िता ने बंधक बनाकर वेश्यावृति कराने की बात कही। पीडिता ने बताया मेरी तरह कई लड़कियों से वेश्यावृति कराके उर्मिला, तारा और लोहा सिंह ने अपना मकान और मुर्गा फार्म बनवाया है। दरअसल, वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने जितेंद्र, सीतेश, मुन्ना, सोमिल, सजनी, पूनम, उर्मिला, अमिता और तारा की तलाश प्रारम्भ कर दी। इसके बाद पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली। मुखबिर की सूचना पर लोहा सिंह की दुकान पर बैठे जितेंद्र नट पुत्र गजराज, उर्मिला पत्नी जितेंद्र, तारा पत्नी शिवपाल उर्फ लोहा सिंह वा सजनी पत्नी विकास को अरैस्ट किया है। पुलिस सभी आरोपियों को के खिलाफ दुष्कर्म, अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम सहित आधा दर्जन धाराओं में केस दर्ज किया है। एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि मुद्दे में कार्रवाई की जा रही है।
एजेंसी, कोच्चि। पीएम मोदी एक और दो सितंबर को कोच्चि में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के जलावतरण के लिए कर्नाटक और केरल का दौरा करेंगे और मंगलूरू में लगभग 3,800 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर आज केरल पहुंचेंगे। कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड (केएमआरएल) ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केरल आने के बाद गुरुवार (एक सितंबर) को कोच्चि मेट्रो के दूसरे चरण की आधारशिला रखेंगे। इसके साथ ही, वे कोच्चि मेट्रो के पहले चरण का शुभारंभ भी करेंगे, जो एसएन जंक्शन से वडक्केकोट्टा तक बनाया गया है। पीएम मोदी एक और दो सितंबर को कोच्चि में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के जलावतरण के लिए कर्नाटक और केरल का दौरा करेंगे और मंगलूरू में लगभग 3,800 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की उपस्थिति में कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (CIAL) व्यापार मेला और प्रदर्शनी केंद्र में समारोह आयोजित किया जाएगा। समारोह में महापौर एम अनिल कुमार, सांसद हिबी ईडन, एंटनी राजू (परिवहन मंत्री), पी राजीव (उद्योग, कानून और कॉयर मंत्री) अपनी सम्मानित उपस्थिति दर्ज कराएंगे। कोच्चि मेट्रो रेल का प्रस्तावित फेज 2 प्रोजेक्ट कॉरिडोर जेएलएन स्टेडियम मेट्रो स्टेशन से इन्फोपार्क, कक्कनड तक है, इस रेल खंड की लंबाई 11. 2 किलोमीटर होगी, जिसमें 11 मेट्रो स्टेशन होंगे। फेज 1 एक्सटेंशन कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड द्वारा सीधे शुरू किए गए कार्य का पहला खंड है। इसके उद्घाटन के बाद कोच्चि मेट्रो 24 स्टेशनों के साथ कम से कम 27 किमी की दूरी तय करेगी। पीएम मोदी द्वारा कोच्चि के लोगों को स्टेशन समर्पित करने के तुरंत बाद, दोनों स्टेशनों का राजस्व संचालन शाम सात बजे शुरू होगा। बता दें कि मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त ने निरीक्षण के बाद पेट्टा-एसएन जंक्शन खंड के राजस्व संचालन को मंजूरी दी थी। वडक्केकोट्टा, एसएन जंक्शन और पनमकुट्टी पुल का काम 16 अक्तूबर, 2019 को शुरू किया गया था और यह कोविड महामारी के दौरान भी जारी रहा। वडक्केकोट्टा 4. 3 लाख वर्ग फुट के क्षेत्र के साथ मेट्रो स्टेशनों में सबसे बड़ा है। अन्य मेट्रो स्टेशनों के विपरीत, यहां नई सुविधाओं से लैस अंदर और बाहर दोनों तरफ बड़े व्यावसायिक स्थान बनाए गए हैं। वडक्केकोट्टा स्टेशन स्वतंत्रता संग्राम में केरल की भूमिका को अपने विषय के रूप में दर्शाता है जबकि एसएन जंक्शन आयुर्वेद और इसके आधुनिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। एसएन जंक्शन और वडक्केकोट्टा स्टेशनों के राजस्व संचालन के लिए खुलने पर केएमआरएल प्रति दिन औसतन एक लाख यात्रियों के यात्रा करने की उम्मीद कर रहा है। मामले से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि देश में मेट्रो क्रांति हो रही है। 2014 में जहां पांच शहरों में मेट्रो सेवा थी, वहीं आज 20 नगरों में सार्वजनिक परिवहन की यह सेवा चल रही है। 2014 में देश में मेट्रो का कुल नेटवर्क 248 किलोमीटर था। आज देश में कुल मेट्रो नेटवर्क 775 किलोमीटर है। एक हजार किलोमीटर अतिरिक्त मेट्रो नेटवर्क निर्माणाधीन है। कोच्चि मेट्रो रेल परियोजना की 55 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकता सौर ऊर्जा से पूरी होगी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
एजेंसी, कोच्चि। पीएम मोदी एक और दो सितंबर को कोच्चि में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के जलावतरण के लिए कर्नाटक और केरल का दौरा करेंगे और मंगलूरू में लगभग तीन,आठ सौ करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर आज केरल पहुंचेंगे। कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केरल आने के बाद गुरुवार को कोच्चि मेट्रो के दूसरे चरण की आधारशिला रखेंगे। इसके साथ ही, वे कोच्चि मेट्रो के पहले चरण का शुभारंभ भी करेंगे, जो एसएन जंक्शन से वडक्केकोट्टा तक बनाया गया है। पीएम मोदी एक और दो सितंबर को कोच्चि में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के जलावतरण के लिए कर्नाटक और केरल का दौरा करेंगे और मंगलूरू में लगभग तीन,आठ सौ करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की उपस्थिति में कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड व्यापार मेला और प्रदर्शनी केंद्र में समारोह आयोजित किया जाएगा। समारोह में महापौर एम अनिल कुमार, सांसद हिबी ईडन, एंटनी राजू , पी राजीव अपनी सम्मानित उपस्थिति दर्ज कराएंगे। कोच्चि मेट्रो रेल का प्रस्तावित फेज दो प्रोजेक्ट कॉरिडोर जेएलएन स्टेडियम मेट्रो स्टेशन से इन्फोपार्क, कक्कनड तक है, इस रेल खंड की लंबाई ग्यारह. दो किलोग्राममीटर होगी, जिसमें ग्यारह मेट्रो स्टेशन होंगे। फेज एक एक्सटेंशन कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड द्वारा सीधे शुरू किए गए कार्य का पहला खंड है। इसके उद्घाटन के बाद कोच्चि मेट्रो चौबीस स्टेशनों के साथ कम से कम सत्ताईस किमी की दूरी तय करेगी। पीएम मोदी द्वारा कोच्चि के लोगों को स्टेशन समर्पित करने के तुरंत बाद, दोनों स्टेशनों का राजस्व संचालन शाम सात बजे शुरू होगा। बता दें कि मेट्रो रेल सुरक्षा आयुक्त ने निरीक्षण के बाद पेट्टा-एसएन जंक्शन खंड के राजस्व संचालन को मंजूरी दी थी। वडक्केकोट्टा, एसएन जंक्शन और पनमकुट्टी पुल का काम सोलह अक्तूबर, दो हज़ार उन्नीस को शुरू किया गया था और यह कोविड महामारी के दौरान भी जारी रहा। वडक्केकोट्टा चार. तीन लाख वर्ग फुट के क्षेत्र के साथ मेट्रो स्टेशनों में सबसे बड़ा है। अन्य मेट्रो स्टेशनों के विपरीत, यहां नई सुविधाओं से लैस अंदर और बाहर दोनों तरफ बड़े व्यावसायिक स्थान बनाए गए हैं। वडक्केकोट्टा स्टेशन स्वतंत्रता संग्राम में केरल की भूमिका को अपने विषय के रूप में दर्शाता है जबकि एसएन जंक्शन आयुर्वेद और इसके आधुनिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। एसएन जंक्शन और वडक्केकोट्टा स्टेशनों के राजस्व संचालन के लिए खुलने पर केएमआरएल प्रति दिन औसतन एक लाख यात्रियों के यात्रा करने की उम्मीद कर रहा है। मामले से जुड़े अधिकारियों ने कहा कि देश में मेट्रो क्रांति हो रही है। दो हज़ार चौदह में जहां पांच शहरों में मेट्रो सेवा थी, वहीं आज बीस नगरों में सार्वजनिक परिवहन की यह सेवा चल रही है। दो हज़ार चौदह में देश में मेट्रो का कुल नेटवर्क दो सौ अड़तालीस किलोग्राममीटर था। आज देश में कुल मेट्रो नेटवर्क सात सौ पचहत्तर किलोग्राममीटर है। एक हजार किलोमीटर अतिरिक्त मेट्रो नेटवर्क निर्माणाधीन है। कोच्चि मेट्रो रेल परियोजना की पचपन प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकता सौर ऊर्जा से पूरी होगी। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
Bareilly Conclave: बरेली के अधिवेशन में शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोग जुड़े। कार्यक्रम में राहुल आनंद, आदित्य मूर्ति ने कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने कहा कि बरेली का नाम शिक्षा के क्षेत्र में सबसे आगे, बच्चों को मिले सही माहौल, बच्चों को मिले सही माहौल, गरीब छात्रों को आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऑनलाईन क्लासेस से सारी शिक्षा पूरी नही की जाती। कोरोना काल में बच्चों को ऑनलाईन जोड़ना काफी कठिन रहा। NEP काफी रोजगार पूरक, बरेली शिक्षा का हब बन रहा, उत्तराखंड के बच्चे भी आते है पढ़ने, सभी के प्रयास से आगे है बरेली की शिक्षा व्यवस्था, बच्चों को शिक्षा से जोड़ना काफी महत्वपूर्ण, स्टूडेंट्स सिर्फ क्लास में नही पढ़ता, आने वाला समय तकनीक का परिवर्तन के लिए समाज को तैयार रहना चाहिए। वहीं इस कार्यक्रम में शिरकत करते हुए धर्मपाल सिंह ने कहा कि विश्वास के बिना विकास संभव नहीं इसलिए लोगों के विकास को जीतना जरुरी। उन्होंने कहा कि मदरसा शिक्षा में सरकार ने किया सुधार। अल्पसंख्यक मोदी के साथ आगे बढ़ने को तैयार है। वहीं उन्होंने कहा कि मदरसों की जा रही जांच। 50 से ज्यादा मदरसे चिन्हित जिनपर जांच जारी है। दरसों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का काम किया जा रहै है। शिक्षको को भरने की प्रक्रिया में बदलाव होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपराधियों को समाप्त कर दिया। अतीक अहमद के केस लिए कोई वकील तैयार नहीं हुआ करता था, आज वो सलाखों के पीछे। योगी सरकार में गुंडाराज समाप्त हुआ है। विदेशों में गायों का पालन बढ़ा है। आने वाले समय में गाय सड़को पर घूमते हुए नजर नहीं आएंगी। उन्होंने कहा कि PPP मॉडल पर गौशाला बनाएंगे। इन गौशाला में 4000 देशी गाय पाली जाएंगी, गायों के गोबर का भी होगा प्रयोग। गाय के गोबर से सीएनजी बनाई जाएगी। Also Read: Bareilly Conclave: सांसद संतोष गंगवार ने बताया कैसे बढ़ रहा बरेली, जानें क्या कहा!
Bareilly Conclave: बरेली के अधिवेशन में शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोग जुड़े। कार्यक्रम में राहुल आनंद, आदित्य मूर्ति ने कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने कहा कि बरेली का नाम शिक्षा के क्षेत्र में सबसे आगे, बच्चों को मिले सही माहौल, बच्चों को मिले सही माहौल, गरीब छात्रों को आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऑनलाईन क्लासेस से सारी शिक्षा पूरी नही की जाती। कोरोना काल में बच्चों को ऑनलाईन जोड़ना काफी कठिन रहा। NEP काफी रोजगार पूरक, बरेली शिक्षा का हब बन रहा, उत्तराखंड के बच्चे भी आते है पढ़ने, सभी के प्रयास से आगे है बरेली की शिक्षा व्यवस्था, बच्चों को शिक्षा से जोड़ना काफी महत्वपूर्ण, स्टूडेंट्स सिर्फ क्लास में नही पढ़ता, आने वाला समय तकनीक का परिवर्तन के लिए समाज को तैयार रहना चाहिए। वहीं इस कार्यक्रम में शिरकत करते हुए धर्मपाल सिंह ने कहा कि विश्वास के बिना विकास संभव नहीं इसलिए लोगों के विकास को जीतना जरुरी। उन्होंने कहा कि मदरसा शिक्षा में सरकार ने किया सुधार। अल्पसंख्यक मोदी के साथ आगे बढ़ने को तैयार है। वहीं उन्होंने कहा कि मदरसों की जा रही जांच। पचास से ज्यादा मदरसे चिन्हित जिनपर जांच जारी है। दरसों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने का काम किया जा रहै है। शिक्षको को भरने की प्रक्रिया में बदलाव होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने अपराधियों को समाप्त कर दिया। अतीक अहमद के केस लिए कोई वकील तैयार नहीं हुआ करता था, आज वो सलाखों के पीछे। योगी सरकार में गुंडाराज समाप्त हुआ है। विदेशों में गायों का पालन बढ़ा है। आने वाले समय में गाय सड़को पर घूमते हुए नजर नहीं आएंगी। उन्होंने कहा कि PPP मॉडल पर गौशाला बनाएंगे। इन गौशाला में चार हज़ार देशी गाय पाली जाएंगी, गायों के गोबर का भी होगा प्रयोग। गाय के गोबर से सीएनजी बनाई जाएगी। Also Read: Bareilly Conclave: सांसद संतोष गंगवार ने बताया कैसे बढ़ रहा बरेली, जानें क्या कहा!
इंटरनेटर मीडिया अब हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। त्योहारों पर खरीदारी हो या दोस्त बनाने हो, इंटरनेट मीडिया में कई ऐसे एप्लीकेशन हैं जहां हम अपनी जिंदगी से जुड़ी कई जानकारियां साझा करते हैं। कई बार इसका नुकसान भी . . . chhattisgarhWed, 19 Oct 2022 11:57 AM (IST) Bal Ramayana 2022: आज रविवार को बाल रामायण कार्यक्रम शाम पांच बजे नईदुनिया एक्टिविटी फेसबुक पेज पर आयोजित किया जा रहा है। chhattisgarhSun, 10 Apr 2022 09:34 AM (IST) शाजापुर। सामुदायिक प्रशिक्षण संस्थान अभयपुर में कृषि सीआरपी का पांच दिवसीय आयोजित किया जा रहा है। जिसमें देवास जिले से मास्टर ट्रेनर कृषि सीआरपी के रूप में सुनीता गोस्वामी और सूरज नायक दीदी द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा ह. . . madhya pradeshTue, 15 Mar 2022 12:44 AM (IST) दो जनवरी को सर्दी-खांसी की शिकायत के बाद टीएस सिंहदेव ने एहतियातन सरगुजा के अपने कार्यक्रम रद कर दिए थे। chhattisgarhSat, 08 Jan 2022 01:10 PM (IST) अक्षय कुमार, विक्की कौशल और अभिनेत्री भूमि पेडनेकर महामारी की चपेट में आ गए हैं। अभिनेत्री कैटरीना कैफ भी कोरोना संक्रमित हो गई हैं। entertainmentWed, 07 Apr 2021 07:50 AM (IST) छीमका। साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान के तहत छीमका में शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर को संबोधित करते हुए अनुविभागीय अधिकारी गोहद नरेंद्र सोलंकी ने कहा कि आज का युग विज्ञान का युग है और इसका मुख्य स्रोत इंटरनेट हो गया ह. . . madhya pradeshTue, 06 Apr 2021 08:43 PM (IST) रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ( Reserve Bank of India) जनता को जागरूक करने के लिए आगे आई है। उन्होंने नकली नोटों की पहचान बताई है। रिजर्व बैंक किसी भी संस्था के खिलाफ लोकपाल की शिकायत करने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। nationalThu, 11 Feb 2021 07:46 PM (IST) Ranu Mandal Deepika Chikhaliya रानू मंडल का कहना है कि उम्मीद है कि वो ही प्यार और सम्मान मिलेगा, जो आप देते आए हैं। entertainmentWed, 11 Nov 2020 11:43 AM (IST) राहुल की नागरिकता को लेकर शिकायत भाजपा नेता एवं राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी ने की थी। nationalTue, 04 Jun 2019 11:39 PM (IST) रायपुर। स्वाइन फ्लू, वर्ड फ्लू सहित संक्रामक रोगों के नियंत्रण के लिए पांच राज्य छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल प्रत्येक जानकारी को सांझा करेंगे। स्वास्थ्य विभाग की एक कांफ्रेंस के दौरान पांचों राज्यों ने म. . . chhattisgarhSun, 27 Jan 2019 08:41 PM (IST)
इंटरनेटर मीडिया अब हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। त्योहारों पर खरीदारी हो या दोस्त बनाने हो, इंटरनेट मीडिया में कई ऐसे एप्लीकेशन हैं जहां हम अपनी जिंदगी से जुड़ी कई जानकारियां साझा करते हैं। कई बार इसका नुकसान भी . . . chhattisgarhWed, उन्नीस अक्टूबर दो हज़ार बाईस ग्यारह:सत्तावन AM Bal Ramayana दो हज़ार बाईस: आज रविवार को बाल रामायण कार्यक्रम शाम पांच बजे नईदुनिया एक्टिविटी फेसबुक पेज पर आयोजित किया जा रहा है। chhattisgarhSun, दस अप्रैल दो हज़ार बाईस नौ:चौंतीस AM शाजापुर। सामुदायिक प्रशिक्षण संस्थान अभयपुर में कृषि सीआरपी का पांच दिवसीय आयोजित किया जा रहा है। जिसमें देवास जिले से मास्टर ट्रेनर कृषि सीआरपी के रूप में सुनीता गोस्वामी और सूरज नायक दीदी द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा ह. . . madhya pradeshTue, पंद्रह मार्च दो हज़ार बाईस बारह:चौंतालीस AM दो जनवरी को सर्दी-खांसी की शिकायत के बाद टीएस सिंहदेव ने एहतियातन सरगुजा के अपने कार्यक्रम रद कर दिए थे। chhattisgarhSat, आठ जनवरी दो हज़ार बाईस एक:दस PM अक्षय कुमार, विक्की कौशल और अभिनेत्री भूमि पेडनेकर महामारी की चपेट में आ गए हैं। अभिनेत्री कैटरीना कैफ भी कोरोना संक्रमित हो गई हैं। entertainmentWed, सात अप्रैल दो हज़ार इक्कीस सात:पचास AM छीमका। साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान के तहत छीमका में शिविर आयोजित किया गया। इस शिविर को संबोधित करते हुए अनुविभागीय अधिकारी गोहद नरेंद्र सोलंकी ने कहा कि आज का युग विज्ञान का युग है और इसका मुख्य स्रोत इंटरनेट हो गया ह. . . madhya pradeshTue, छः अप्रैल दो हज़ार इक्कीस आठ:तैंतालीस PM रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया जनता को जागरूक करने के लिए आगे आई है। उन्होंने नकली नोटों की पहचान बताई है। रिजर्व बैंक किसी भी संस्था के खिलाफ लोकपाल की शिकायत करने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। nationalThu, ग्यारह फ़रवरी दो हज़ार इक्कीस सात:छियालीस PM Ranu Mandal Deepika Chikhaliya रानू मंडल का कहना है कि उम्मीद है कि वो ही प्यार और सम्मान मिलेगा, जो आप देते आए हैं। entertainmentWed, ग्यारह नवंबर दो हज़ार बीस ग्यारह:तैंतालीस AM राहुल की नागरिकता को लेकर शिकायत भाजपा नेता एवं राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी ने की थी। nationalTue, चार जून दो हज़ार उन्नीस ग्यारह:उनतालीस PM रायपुर। स्वाइन फ्लू, वर्ड फ्लू सहित संक्रामक रोगों के नियंत्रण के लिए पांच राज्य छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल प्रत्येक जानकारी को सांझा करेंगे। स्वास्थ्य विभाग की एक कांफ्रेंस के दौरान पांचों राज्यों ने म. . . chhattisgarhSun, सत्ताईस जनवरी दो हज़ार उन्नीस आठ:इकतालीस PM
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को विज्ञान भवन में पहली अखिल भारतीय जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण बैठक के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए। इस दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना और केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू भी मौजूद रहे। केंद्रीय क़ानून मंत्री किरण रिजिजू ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा. 'आज पहली बार अखिल भारतीय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की बैठक दिल्ली में हो रही है। हमारे देश में जन जन तक न्याय की अंतिम मील तक पहुंच आज भी एक बहुत बड़ी चुनौती है। कानूनी सेवाओं के वितरण में समता, जवाबदेही और सुलभ पहुंच इनके तीन आवश्यकताओं को सुरक्षित करने के लिए हम नागरिकों की भागीदारी को अमल में ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि कानूनी सेवाओं के वितरण में समता, जवाबदेही और सुलभ पहुंच इनके तीन आवश्यकताओं को सुरक्षित करने के लिए हम नागरिकों की भागीदारी को अमल में ला सकते हैं। - देश में कुल 676 जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA)हैं। - वे जिला न्यायाधीश के नेतृत्व में होते हैं जो प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को विज्ञान भवन में पहली अखिल भारतीय जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण बैठक के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए। इस दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना और केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू भी मौजूद रहे। केंद्रीय क़ानून मंत्री किरण रिजिजू ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा. 'आज पहली बार अखिल भारतीय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की बैठक दिल्ली में हो रही है। हमारे देश में जन जन तक न्याय की अंतिम मील तक पहुंच आज भी एक बहुत बड़ी चुनौती है। कानूनी सेवाओं के वितरण में समता, जवाबदेही और सुलभ पहुंच इनके तीन आवश्यकताओं को सुरक्षित करने के लिए हम नागरिकों की भागीदारी को अमल में ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि कानूनी सेवाओं के वितरण में समता, जवाबदेही और सुलभ पहुंच इनके तीन आवश्यकताओं को सुरक्षित करने के लिए हम नागरिकों की भागीदारी को अमल में ला सकते हैं। - देश में कुल छः सौ छिहत्तर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हैं। - वे जिला न्यायाधीश के नेतृत्व में होते हैं जो प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। आबादी के आधार पर देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सरकार ने सरकारी स्कूलों का कायाकल्प करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। इसके तहत राज्य में सोमवार, 04 अप्रैल, 2022 से स्कूल चलो अभियान की शुरुआत की जा रही है। बिहार में आज एमएलसी की 24 सीटों पर मतदान होगा। विधान परिषद चुनाव में सबसे ज्यादा प्रत्याशी सहरसा सह मधेपुरा सुपौल निर्वाचन क्षेत्र से हैं यहां से 14 लोग ने पर्चा भरा है साथ ही भोजपुर सह बक्सर निर्वाचन क्षेत्र में सबसे कम दो प्रत्याशी चुनाव में अपना भाग्य का जोर लगा रहे हैं। कोरोना संक्रमण कम होने के कारण करीब दो साल के लंबे अंतराल के बाद यूटी प्रशासन मास्क पहनने की बाध्यता को खत्म करने जा रहा है। प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने कहा है कि प्रशासन मास्क पहनने को वैकल्पिक कर देगा। इसके बाद लोगों की मर्जी होगी। श्रीलंका में हिंसा और राजनीतिक अटकलों के बीच मंत्रिमंडल ने देररात सामूहिक इस्तीफा दे दिया। प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने त्यागपत्र नहीं दिया है। नेता सदन और शिक्षामंत्री दिनेश गुणवर्धने ने बताया कि मंत्रिमंडल ने इस्तीफा प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे को सौंपा है। उन्होंने इसका कारण नहीं बताया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। आबादी के आधार पर देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में सरकार ने सरकारी स्कूलों का कायाकल्प करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। इसके तहत राज्य में सोमवार, चार अप्रैल, दो हज़ार बाईस से स्कूल चलो अभियान की शुरुआत की जा रही है। बिहार में आज एमएलसी की चौबीस सीटों पर मतदान होगा। विधान परिषद चुनाव में सबसे ज्यादा प्रत्याशी सहरसा सह मधेपुरा सुपौल निर्वाचन क्षेत्र से हैं यहां से चौदह लोग ने पर्चा भरा है साथ ही भोजपुर सह बक्सर निर्वाचन क्षेत्र में सबसे कम दो प्रत्याशी चुनाव में अपना भाग्य का जोर लगा रहे हैं। कोरोना संक्रमण कम होने के कारण करीब दो साल के लंबे अंतराल के बाद यूटी प्रशासन मास्क पहनने की बाध्यता को खत्म करने जा रहा है। प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने कहा है कि प्रशासन मास्क पहनने को वैकल्पिक कर देगा। इसके बाद लोगों की मर्जी होगी। श्रीलंका में हिंसा और राजनीतिक अटकलों के बीच मंत्रिमंडल ने देररात सामूहिक इस्तीफा दे दिया। प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने त्यागपत्र नहीं दिया है। नेता सदन और शिक्षामंत्री दिनेश गुणवर्धने ने बताया कि मंत्रिमंडल ने इस्तीफा प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे को सौंपा है। उन्होंने इसका कारण नहीं बताया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
बांदा-डीवीएनए। कोरोना के कहर से जूझ रहे जिले में राजकीय मेडिकल कालेज में लायलटेक मैनेजमेंट सर्विस प्राइवेट लिमटेड का योगदान उल्लेखनीय भूमिका निभा रहा हैं। इनके कर्मचारी सफाई व्यवस्था से लेकर मरीजों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। आपको बतादें कि राजकीय मेडिकल कालेज में स्टाफ नर्स, वार्डव्याय एवं अन्य पैरामेडिकल वर्करों की काफी कमी थी, इसके चलते मेडिकल कालेज में सफाई व्यवस्था से लेकर मरीजों की नर्सिंग सेवा में काफी दिक्कतें आ रही थी। इस संदर्भ में इन समस्याओं के निदान के लिये प्राचार्य मुकेश यादव द्वारा शासन से निरंतर पत्राचार किया जा रहा था। जिलाधिकारी आनंद सिंह नें भी प्राचार्य को मैन पावर बढ़ाने को निर्देशित कर रखा था। इसी क्रम में शासन स्तर पर स्वास्थ विभाग नें इस महत्व पूर्ण कार्य की जिम्मेदारी लायलटेक मैनेजमेंट सर्विस प्राइवेट लिमटेड के डायरेक्टर एम एन खान को सौपी। संस्था नें मैन पावर की पूर्ति की और प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती कराकर चिकित्सीय व्यवस्था को बखूबी संभाल रखा है। संक्रमण की रोक-थाम के लिये सफाई व्यवस्था वार्ड एवं उसके बाहर संबंधित कर्मचारी संभाले हुये हैं, वहीं वार्डव्याय एवं नर्सिग स्टाफ तीन - तीन शिफ्टों में रूट चार्ट के अनुसार अनुशासित एवं सेवाभाव से कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल कर रहीं हैं। इससे मरीजों में भी इलाज और देखभाल के प्रति संतुष्टता दिखाई दे रही है। भर्ती कोरोना मरीजो की रिपोर्ट निगेटिव आने की संख्या में काफी सुधार होनें लगा है।
बांदा-डीवीएनए। कोरोना के कहर से जूझ रहे जिले में राजकीय मेडिकल कालेज में लायलटेक मैनेजमेंट सर्विस प्राइवेट लिमटेड का योगदान उल्लेखनीय भूमिका निभा रहा हैं। इनके कर्मचारी सफाई व्यवस्था से लेकर मरीजों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। आपको बतादें कि राजकीय मेडिकल कालेज में स्टाफ नर्स, वार्डव्याय एवं अन्य पैरामेडिकल वर्करों की काफी कमी थी, इसके चलते मेडिकल कालेज में सफाई व्यवस्था से लेकर मरीजों की नर्सिंग सेवा में काफी दिक्कतें आ रही थी। इस संदर्भ में इन समस्याओं के निदान के लिये प्राचार्य मुकेश यादव द्वारा शासन से निरंतर पत्राचार किया जा रहा था। जिलाधिकारी आनंद सिंह नें भी प्राचार्य को मैन पावर बढ़ाने को निर्देशित कर रखा था। इसी क्रम में शासन स्तर पर स्वास्थ विभाग नें इस महत्व पूर्ण कार्य की जिम्मेदारी लायलटेक मैनेजमेंट सर्विस प्राइवेट लिमटेड के डायरेक्टर एम एन खान को सौपी। संस्था नें मैन पावर की पूर्ति की और प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती कराकर चिकित्सीय व्यवस्था को बखूबी संभाल रखा है। संक्रमण की रोक-थाम के लिये सफाई व्यवस्था वार्ड एवं उसके बाहर संबंधित कर्मचारी संभाले हुये हैं, वहीं वार्डव्याय एवं नर्सिग स्टाफ तीन - तीन शिफ्टों में रूट चार्ट के अनुसार अनुशासित एवं सेवाभाव से कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल कर रहीं हैं। इससे मरीजों में भी इलाज और देखभाल के प्रति संतुष्टता दिखाई दे रही है। भर्ती कोरोना मरीजो की रिपोर्ट निगेटिव आने की संख्या में काफी सुधार होनें लगा है।
सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन लॉन्च (National Monetization Pipeline News ) की है। इसके तहत एमपी में भी भोपाल और इंदौर एयरपोर्ट (Bhopal Airport News) निजी हाथों में जाएगी। साथ ही प्रदेश के नौ हाईवे भी निजी हाथों में जाएंगे। इंदौर एयरपोर्ट 2022 तक निजी हाथों में चली जाएगी।
सोमवार को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन लॉन्च की है। इसके तहत एमपी में भी भोपाल और इंदौर एयरपोर्ट निजी हाथों में जाएगी। साथ ही प्रदेश के नौ हाईवे भी निजी हाथों में जाएंगे। इंदौर एयरपोर्ट दो हज़ार बाईस तक निजी हाथों में चली जाएगी।
नई दिल्ली, 1 अगस्त (आईएएनएस)। फ्यूचर जेनेरली इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने बुधवार को अपने उपभोक्ताओं को बीमा पॉलिसियों के प्रबंधन, खरीद व नवीनीकरण और आवश्यक दस्तावेज को अपलोड करने में मदद करने के लिए 'एफजी इंश्योर' ऐप लॉन्च किया है। 'एफजी इंश्योर' ऐप में एक समग्र स्वास्थ्य कल्याण कार्यक्रम को भी शामिल किया गया है, जो एक हेल्थ पोर्टल की तरह ग्राहक के व्यक्तिगत स्वास्थ्य से संबंधित जानकारियों को संग्रहित करता है। साथ ही यह ऐप उपयोगकर्ता को चैट विद 'डॉक्टर' की सुविधा के माध्यम से डॉक्टर से परामर्श करने की अनुमति देता है। फ्यूचर जेनेरली इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. जी. कृष्णमूर्ति राव ने कहा, भारत डिजिटल क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है, जिसे देखते हुए कंपनी ने भी अपने ग्राहकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अभिनव समाधान के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने कहा, 'एफजी इंश्योर' ग्राहक को अपनी जानकारी अपडेट करने, उनका प्रबंधन करने, खरीदने और नवीनीकरण करने और पॉलिसी से संबंधित गैर-वित्तीय जानकारी अपडेट करने की अनुमति देता है। यह ऐप आईओएस और एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम दोनों पर उपलब्ध होगा। नए और मौजूदा ग्राहक दोनों अपने मोबाइल नंबर का उपयोग करके ऐप में लॉग-इन कर सकते हैं।
नई दिल्ली, एक अगस्त । फ्यूचर जेनेरली इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने बुधवार को अपने उपभोक्ताओं को बीमा पॉलिसियों के प्रबंधन, खरीद व नवीनीकरण और आवश्यक दस्तावेज को अपलोड करने में मदद करने के लिए 'एफजी इंश्योर' ऐप लॉन्च किया है। 'एफजी इंश्योर' ऐप में एक समग्र स्वास्थ्य कल्याण कार्यक्रम को भी शामिल किया गया है, जो एक हेल्थ पोर्टल की तरह ग्राहक के व्यक्तिगत स्वास्थ्य से संबंधित जानकारियों को संग्रहित करता है। साथ ही यह ऐप उपयोगकर्ता को चैट विद 'डॉक्टर' की सुविधा के माध्यम से डॉक्टर से परामर्श करने की अनुमति देता है। फ्यूचर जेनेरली इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. जी. कृष्णमूर्ति राव ने कहा, भारत डिजिटल क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है, जिसे देखते हुए कंपनी ने भी अपने ग्राहकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अभिनव समाधान के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने कहा, 'एफजी इंश्योर' ग्राहक को अपनी जानकारी अपडेट करने, उनका प्रबंधन करने, खरीदने और नवीनीकरण करने और पॉलिसी से संबंधित गैर-वित्तीय जानकारी अपडेट करने की अनुमति देता है। यह ऐप आईओएस और एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम दोनों पर उपलब्ध होगा। नए और मौजूदा ग्राहक दोनों अपने मोबाइल नंबर का उपयोग करके ऐप में लॉग-इन कर सकते हैं।
DAVV Indore: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) को नैक से ए प्लस ग्रेड प्राप्त हुआ था। अब विश्वविद्यालय प्रशासन ए प्लस-प्लस की तैयारी में जुट गया है। अगले साल होने वाले नैक निरीक्षण को लेकर मई दूसरे सप्ताह में आइक्यूएसी की बैठक बुलाई है। इसमें विश्वविद्यालय की कमियों पर चर्चा की जाएगी। इस दौरान विश्वविद्यालय को शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया तेज करना है। वैसे कुलपति डा. रेणु जैन ने 45 दिन के भीतर 45 बैकलाग-47 नियमित पदों पर शिक्षकों के इंटरव्यू करना है। दरअसल 2014 से विश्वविद्यालय नैक को रिक्त पदों पर भर्तियां करने का आश्वासन दे रहा है। मगर प्रक्रिया तीन बार अटक चुकी है। बावजूद इसके 2019 में विश्वविद्यालय को नैक से ए प्लस ग्रेड प्राप्त हुई थी। पर अब भर्तियां करने करने की स्थिति में विश्वविद्यालय को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके चलते ही विश्वविद्यालय ने रिक्त पदों और पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू की है। वहीं नैैक निरीक्षण से पहले विश्वविद्यालय के नाम से पैटेंट की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया है। साथ ही विद्यार्थियों के बिजनेस आइडिया को स्टार्टअप में बदला जा रहा है। आइईटी में बने इंक्यूबेशन सेंटर की मदद से विद्यार्थियों को फंडिंग करवाई जा रही है। अगले सप्ताह होने वाले आइक्यूएसी की बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हो गई, रिक्त पदों को भरने, पेटेंट, पदोन्नति सहित रिसर्च और नए पाठ्यक्रम बढ़ाएं जाएंगे। कुलपति डा. रेणु जैन ने बताया कि नैक निरीक्षण की तैयारी को लेकर सात स्तर पर समन्वयक बनाएंगे।
DAVV Indore: इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय को नैक से ए प्लस ग्रेड प्राप्त हुआ था। अब विश्वविद्यालय प्रशासन ए प्लस-प्लस की तैयारी में जुट गया है। अगले साल होने वाले नैक निरीक्षण को लेकर मई दूसरे सप्ताह में आइक्यूएसी की बैठक बुलाई है। इसमें विश्वविद्यालय की कमियों पर चर्चा की जाएगी। इस दौरान विश्वविद्यालय को शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया तेज करना है। वैसे कुलपति डा. रेणु जैन ने पैंतालीस दिन के भीतर पैंतालीस बैकलाग-सैंतालीस नियमित पदों पर शिक्षकों के इंटरव्यू करना है। दरअसल दो हज़ार चौदह से विश्वविद्यालय नैक को रिक्त पदों पर भर्तियां करने का आश्वासन दे रहा है। मगर प्रक्रिया तीन बार अटक चुकी है। बावजूद इसके दो हज़ार उन्नीस में विश्वविद्यालय को नैक से ए प्लस ग्रेड प्राप्त हुई थी। पर अब भर्तियां करने करने की स्थिति में विश्वविद्यालय को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके चलते ही विश्वविद्यालय ने रिक्त पदों और पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू की है। वहीं नैैक निरीक्षण से पहले विश्वविद्यालय के नाम से पैटेंट की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया है। साथ ही विद्यार्थियों के बिजनेस आइडिया को स्टार्टअप में बदला जा रहा है। आइईटी में बने इंक्यूबेशन सेंटर की मदद से विद्यार्थियों को फंडिंग करवाई जा रही है। अगले सप्ताह होने वाले आइक्यूएसी की बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हो गई, रिक्त पदों को भरने, पेटेंट, पदोन्नति सहित रिसर्च और नए पाठ्यक्रम बढ़ाएं जाएंगे। कुलपति डा. रेणु जैन ने बताया कि नैक निरीक्षण की तैयारी को लेकर सात स्तर पर समन्वयक बनाएंगे।
यदि घुटने चिंतित है तो क्या करना है? पंचर कैसे किया जाता है? जब घुटनों में लोगों को थोड़ा दर्द होता हैसंयुक्त, पहले बहुत से लोग इस पर ध्यान नहीं देते हैं। लेकिन व्यर्थ में। यह एक गंभीर बीमारी की पहली घंटी हो सकती है। सिनोवाइटिस एक कपटी बीमारी है। तीव्र दर्द घुटने के जोड़ को प्रभावित करता है। पंचर इस बीमारी के उपचार में से एक है। बहुत से लोग इस सर्जरी करने से डरते हैं, लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि इसमें कुछ भी भयानक नहीं है। क्या पंचर के बाद प्रतिकूल परिणाम के लिए जोखिम हैं? इसे सही तरीके से कैसे संचालित करें? हम लेख में इन सवालों के जवाब देने का प्रयास करेंगे। कपटपूर्ण रोग सिनोवाइटिस क्या है? अगर घुटने के जोड़ में दर्द स्थानीय होता है,आपको तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। यह सिनोवाइटिस का पहला संकेत हो सकता है। यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। यह चोटों, गठिया, एलर्जी प्रतिक्रियाओं के कारण उत्पन्न होता है। घुटने के जोड़ के आसपास बड़े पैमाने पर शुरू होता हैमात्रा तरल जमा करती है, ताकि पैर के किसी भी आंदोलन तीव्र दर्द का कारण बनता है। मुख्य लक्षण हैं जिनके द्वारा इस बीमारी को निर्धारित किया जा सकता हैः घुटने आकार में बढ़ता है। संयुक्त रूप से एक लाली या साइनोसिस दिखाई देता है। शरीर के तापमान में वृद्धि (दुर्लभ मामलों में)। अगर घुटने के जोड़ दर्द होता है तो क्या होगा? पेंचर रोग से निपटने में मदद करेगा। डॉक्टर अतिरिक्त द्रव को हटा देता है, फिर पैर में एंटीबायोटिक डाला जाता है, रोगी को तुरंत राहत मिलती है। रोग खतरनाक है क्योंकि यदि आप समय पर इसे खत्म नहीं करते हैंसमस्या, घुटने का जोड़ विस्फोट कर सकता है, मेनस्कस मार रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए, सर्जिकल हस्तक्षेप और दीर्घकालिक उपचार की आवश्यकता होगी। घुटने, मरीज में तीव्र दर्द के साथ सामना करना पड़ातुरंत एक सर्जन से संपर्क करना चाहिए। 90% मामलों में, सिनोवाइटिस का निदान किया जाता है। यह कई कारणों से हो सकता है। निम्नलिखित प्रकार की बीमारियों को आवंटित करेंः संक्रमण। उन लोगों में अक्सर होता है जो गंभीर बीमारियों से बीमार हैं, उदाहरण के लिए, एड्स या तपेदिक। संक्रमण घुटने के संयुक्त में प्रवेश करता है, जिसके परिणामस्वरूप तरल का गठन होता है। अपूतित। अक्सर एथलीटों के बीच पाया जाता है। यह घुटने, मेनस्कस, अस्थिबंधन की चोटों और चोटों के परिणामस्वरूप होता है। गठिया वाले लोगों के बीच भी काफी आम है। एलर्जी। डॉक्टरों का कहना है कि इस प्रकार की सिनोवाइटिस की घटना का प्रतिशत काफी कम है। यदि डॉक्टर ने सिनोवाइटिस का निदान किया है, तो उपचार तुरंत पालन किया जाना चाहिए। अन्यथा, जटिलताएं संभव हैं। पंचर आवश्यक है? कई रोगियों में रुचि हैः "अगर घुटने परेशान हो रहा है, तो पंचर अनिवार्य है?"। डॉक्टर एक स्पष्ट जवाब देते हैं, यह बस जरूरी है। सबसे पहले, यह प्रक्रिया लगभग दर्द रहित है। इसे संचालित करने के लिए कोई विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं है। दूसरा, तरल पदार्थ हटाने के तुरंत बाद रोगी राहत महसूस करेगा। कुछ रोगी पंचर से सावधान हैं,यह मानते हुए कि एक डॉक्टर गलती कर सकता है और हड्डी को नाखून कर सकता है। यह हेरफेर एक दर्दनाक या सर्जन के लिए आम है। इस प्रक्रिया को ऑपरेशन के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। प्रक्रिया संज्ञाहरण के बिना किया जाता है, 7-10 मिनट से अधिक नहीं लेता है। अगर रोगी को घुटने में तरल पदार्थ होता है, तो क्या करना है, डॉक्टर बताएगा। मुख्य नियम - जटिलताओं को रोकने के लिए, विशेषज्ञ से सहायता लेने के लिए समय में। चिकित्सक सिनोवाइटिस का निदान करने के बाद,उपचार उसी दिन शुरू होता है। वास्तव में, यह मुश्किल नहीं है। विशेषज्ञों की पहली बात यह है कि अतिरिक्त तरल पदार्थ हटा दें। सोफे पर कार्यालय में हेरफेर किया जाता है। ऐसा करने के लिए, घुटने के जोड़ में एक पतली सुई डाली जाती है, तरल को सिरिंज का उपयोग करके बाहर निकाल दिया जाता है। परिणामस्वरूप गुहा संक्रमण को हटाने के लिए एंटीबायोटिक से भरा होता है। प्रक्रिया के बाद, रोगी की जरूरत हैपूरी शांति सुनिश्चित करने के लिए। अस्पताल में इलाज करना बेहतर है। घुटने का जोड़ एक लोचदार पट्टी के साथ तय किया जाता है, और एंटीबायोटिक्स और मलम निर्धारित किए जाते हैं। यह बीमारी फिर से नहीं उभरती है, बीमारी की शुरुआत का कारण पता लगाना आवश्यक है। यह संधिविज्ञानी या सर्जन द्वारा किया जाता है। डॉक्टर के हटाने के बारे में सुनकरएक सिरिंज के साथ घुटने के जोड़ से तरल पदार्थ, कई रोगियों को आतंक और भय का अनुभव होता है। उनका पहला सवालः "पंचर कैसे करते हैं?"। प्रक्रिया में कुछ भी जटिल नहीं है। एक अनुभवी विशेषज्ञ 7-10 मिनट में प्रक्रिया का सामना करेगा। इस मामले में, रोगी को तीव्र दर्द महसूस नहीं करना चाहिए। घुटने के संयुक्त के पंचर के कुछ बिंदु हैं। डॉक्टर मानसिक रूप से पेटेला को कई हिस्सों में विभाजित करता है, सुई बाद में नरम क्षेत्र में डाली जाती है। अगर विशेषज्ञ को लगता है कि वह हड्डी में फंस गया है, तो सिरिंज को अलग करना और सुई को थोड़ा सा स्थानांतरित करना आवश्यक है। एक महत्वपूर्ण नियमः जब रोगी एक अव्यवस्थित स्थिति में होता है तो प्रक्रिया की जानी चाहिए, अंग असंतुलित हैं। सिनोवाइटिस के उपचार में, पंचर केवल एक बार किया जाता है। प्रक्रिया के दौरान, सभी अतिरिक्त तरल पदार्थ निकाले जाते हैं और बाहरी उपयोग के लिए एंटीबायोटिक्स और मलहम के साथ उपचार की प्रक्रिया शुरू होती है। ऐसी स्थितियां हैं जब पंचर को त्याग दिया जाना चाहिएः रक्त की बढ़ी हुई कॉगुलबिलिटी। त्वचा पर घाव या फोड़े हैं। रोगी में सोरायसिस होता है। अन्य सभी मामलों में, प्रक्रिया मोनो है। मुख्य बात यह है कि एक अनुभवी विशेषज्ञ का चयन करना है, ताकि हेरफेर सही तरीके से किया जा सके।
यदि घुटने चिंतित है तो क्या करना है? पंचर कैसे किया जाता है? जब घुटनों में लोगों को थोड़ा दर्द होता हैसंयुक्त, पहले बहुत से लोग इस पर ध्यान नहीं देते हैं। लेकिन व्यर्थ में। यह एक गंभीर बीमारी की पहली घंटी हो सकती है। सिनोवाइटिस एक कपटी बीमारी है। तीव्र दर्द घुटने के जोड़ को प्रभावित करता है। पंचर इस बीमारी के उपचार में से एक है। बहुत से लोग इस सर्जरी करने से डरते हैं, लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि इसमें कुछ भी भयानक नहीं है। क्या पंचर के बाद प्रतिकूल परिणाम के लिए जोखिम हैं? इसे सही तरीके से कैसे संचालित करें? हम लेख में इन सवालों के जवाब देने का प्रयास करेंगे। कपटपूर्ण रोग सिनोवाइटिस क्या है? अगर घुटने के जोड़ में दर्द स्थानीय होता है,आपको तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। यह सिनोवाइटिस का पहला संकेत हो सकता है। यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है। यह चोटों, गठिया, एलर्जी प्रतिक्रियाओं के कारण उत्पन्न होता है। घुटने के जोड़ के आसपास बड़े पैमाने पर शुरू होता हैमात्रा तरल जमा करती है, ताकि पैर के किसी भी आंदोलन तीव्र दर्द का कारण बनता है। मुख्य लक्षण हैं जिनके द्वारा इस बीमारी को निर्धारित किया जा सकता हैः घुटने आकार में बढ़ता है। संयुक्त रूप से एक लाली या साइनोसिस दिखाई देता है। शरीर के तापमान में वृद्धि । अगर घुटने के जोड़ दर्द होता है तो क्या होगा? पेंचर रोग से निपटने में मदद करेगा। डॉक्टर अतिरिक्त द्रव को हटा देता है, फिर पैर में एंटीबायोटिक डाला जाता है, रोगी को तुरंत राहत मिलती है। रोग खतरनाक है क्योंकि यदि आप समय पर इसे खत्म नहीं करते हैंसमस्या, घुटने का जोड़ विस्फोट कर सकता है, मेनस्कस मार रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए, सर्जिकल हस्तक्षेप और दीर्घकालिक उपचार की आवश्यकता होगी। घुटने, मरीज में तीव्र दर्द के साथ सामना करना पड़ातुरंत एक सर्जन से संपर्क करना चाहिए। नब्बे% मामलों में, सिनोवाइटिस का निदान किया जाता है। यह कई कारणों से हो सकता है। निम्नलिखित प्रकार की बीमारियों को आवंटित करेंः संक्रमण। उन लोगों में अक्सर होता है जो गंभीर बीमारियों से बीमार हैं, उदाहरण के लिए, एड्स या तपेदिक। संक्रमण घुटने के संयुक्त में प्रवेश करता है, जिसके परिणामस्वरूप तरल का गठन होता है। अपूतित। अक्सर एथलीटों के बीच पाया जाता है। यह घुटने, मेनस्कस, अस्थिबंधन की चोटों और चोटों के परिणामस्वरूप होता है। गठिया वाले लोगों के बीच भी काफी आम है। एलर्जी। डॉक्टरों का कहना है कि इस प्रकार की सिनोवाइटिस की घटना का प्रतिशत काफी कम है। यदि डॉक्टर ने सिनोवाइटिस का निदान किया है, तो उपचार तुरंत पालन किया जाना चाहिए। अन्यथा, जटिलताएं संभव हैं। पंचर आवश्यक है? कई रोगियों में रुचि हैः "अगर घुटने परेशान हो रहा है, तो पंचर अनिवार्य है?"। डॉक्टर एक स्पष्ट जवाब देते हैं, यह बस जरूरी है। सबसे पहले, यह प्रक्रिया लगभग दर्द रहित है। इसे संचालित करने के लिए कोई विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं है। दूसरा, तरल पदार्थ हटाने के तुरंत बाद रोगी राहत महसूस करेगा। कुछ रोगी पंचर से सावधान हैं,यह मानते हुए कि एक डॉक्टर गलती कर सकता है और हड्डी को नाखून कर सकता है। यह हेरफेर एक दर्दनाक या सर्जन के लिए आम है। इस प्रक्रिया को ऑपरेशन के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। प्रक्रिया संज्ञाहरण के बिना किया जाता है, सात-दस मिनट से अधिक नहीं लेता है। अगर रोगी को घुटने में तरल पदार्थ होता है, तो क्या करना है, डॉक्टर बताएगा। मुख्य नियम - जटिलताओं को रोकने के लिए, विशेषज्ञ से सहायता लेने के लिए समय में। चिकित्सक सिनोवाइटिस का निदान करने के बाद,उपचार उसी दिन शुरू होता है। वास्तव में, यह मुश्किल नहीं है। विशेषज्ञों की पहली बात यह है कि अतिरिक्त तरल पदार्थ हटा दें। सोफे पर कार्यालय में हेरफेर किया जाता है। ऐसा करने के लिए, घुटने के जोड़ में एक पतली सुई डाली जाती है, तरल को सिरिंज का उपयोग करके बाहर निकाल दिया जाता है। परिणामस्वरूप गुहा संक्रमण को हटाने के लिए एंटीबायोटिक से भरा होता है। प्रक्रिया के बाद, रोगी की जरूरत हैपूरी शांति सुनिश्चित करने के लिए। अस्पताल में इलाज करना बेहतर है। घुटने का जोड़ एक लोचदार पट्टी के साथ तय किया जाता है, और एंटीबायोटिक्स और मलम निर्धारित किए जाते हैं। यह बीमारी फिर से नहीं उभरती है, बीमारी की शुरुआत का कारण पता लगाना आवश्यक है। यह संधिविज्ञानी या सर्जन द्वारा किया जाता है। डॉक्टर के हटाने के बारे में सुनकरएक सिरिंज के साथ घुटने के जोड़ से तरल पदार्थ, कई रोगियों को आतंक और भय का अनुभव होता है। उनका पहला सवालः "पंचर कैसे करते हैं?"। प्रक्रिया में कुछ भी जटिल नहीं है। एक अनुभवी विशेषज्ञ सात-दस मिनट में प्रक्रिया का सामना करेगा। इस मामले में, रोगी को तीव्र दर्द महसूस नहीं करना चाहिए। घुटने के संयुक्त के पंचर के कुछ बिंदु हैं। डॉक्टर मानसिक रूप से पेटेला को कई हिस्सों में विभाजित करता है, सुई बाद में नरम क्षेत्र में डाली जाती है। अगर विशेषज्ञ को लगता है कि वह हड्डी में फंस गया है, तो सिरिंज को अलग करना और सुई को थोड़ा सा स्थानांतरित करना आवश्यक है। एक महत्वपूर्ण नियमः जब रोगी एक अव्यवस्थित स्थिति में होता है तो प्रक्रिया की जानी चाहिए, अंग असंतुलित हैं। सिनोवाइटिस के उपचार में, पंचर केवल एक बार किया जाता है। प्रक्रिया के दौरान, सभी अतिरिक्त तरल पदार्थ निकाले जाते हैं और बाहरी उपयोग के लिए एंटीबायोटिक्स और मलहम के साथ उपचार की प्रक्रिया शुरू होती है। ऐसी स्थितियां हैं जब पंचर को त्याग दिया जाना चाहिएः रक्त की बढ़ी हुई कॉगुलबिलिटी। त्वचा पर घाव या फोड़े हैं। रोगी में सोरायसिस होता है। अन्य सभी मामलों में, प्रक्रिया मोनो है। मुख्य बात यह है कि एक अनुभवी विशेषज्ञ का चयन करना है, ताकि हेरफेर सही तरीके से किया जा सके।
शहर, जिसे पोलैंड में विरोध का मुख्य प्रतीक माना जाता है, सॉलिडैरिटी आंदोलन के समय से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। यह डांस्क के बारे में है। पोलिश शॉपिंग मॉल trojmiasto. pl रिपोर्ट में कहा गया है कि डांस्क में विरोध प्रदर्शन को सार्वजनिक परिवहन संघ के प्रतिनिधियों द्वारा समर्थन दिया गया था। अगर पोलिश सरकार के आर्थिक उपायों ने ब्रुसेल्स की प्रतिक्रिया को उकसाया नहीं, तो यूरोपीय संघ के प्रशासनिक केंद्र में पत्रकारों के मुफ्त अभ्यास पर वारसॉ प्रतिबंध वास्तव में गर्म चर्चा का कारण बना। यूरोपीय अधिकारियों, जिन्होंने पहले मीडिया पर दबाव डालने के लिए पोलैंड से आग्रह नहीं किया था, ने यूरोपीय परिषद में मतदान के अधिकारों के पोलिश प्रतिनिधिमंडल को वंचित करने के लिए एक पहल की घोषणा की है। रूस आज यूरोपीय परिषद के आधिकारिक प्रतिनिधि द्वारा दिए गए बयान का पाठ देता हैः अब जब यह आधिकारिक रूप से स्थापित हो गया है कि पोलैंड में कानून और लोकतंत्र के शासन के लिए एक प्रणालीगत खतरा है, तो यह यूरोपीय परिषद में पोलैंड के मतदान अधिकारों को निलंबित करने के लायक है। यह दिलचस्प है कि कुछ यूक्रेनी मीडिया ने ब्रसेल्स के इस तरह के बयान को पोलिश राष्ट्रवादियों के यूक्रेनी विरोधी मार्च के साथ जोड़ने का फैसला किया, जो हाल ही में पोलिश प्रेज़्मिस्ल में हुआ था। ब्रसेल्स की पहल का इस मार्च से कोई लेना-देना नहीं है।
शहर, जिसे पोलैंड में विरोध का मुख्य प्रतीक माना जाता है, सॉलिडैरिटी आंदोलन के समय से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। यह डांस्क के बारे में है। पोलिश शॉपिंग मॉल trojmiasto. pl रिपोर्ट में कहा गया है कि डांस्क में विरोध प्रदर्शन को सार्वजनिक परिवहन संघ के प्रतिनिधियों द्वारा समर्थन दिया गया था। अगर पोलिश सरकार के आर्थिक उपायों ने ब्रुसेल्स की प्रतिक्रिया को उकसाया नहीं, तो यूरोपीय संघ के प्रशासनिक केंद्र में पत्रकारों के मुफ्त अभ्यास पर वारसॉ प्रतिबंध वास्तव में गर्म चर्चा का कारण बना। यूरोपीय अधिकारियों, जिन्होंने पहले मीडिया पर दबाव डालने के लिए पोलैंड से आग्रह नहीं किया था, ने यूरोपीय परिषद में मतदान के अधिकारों के पोलिश प्रतिनिधिमंडल को वंचित करने के लिए एक पहल की घोषणा की है। रूस आज यूरोपीय परिषद के आधिकारिक प्रतिनिधि द्वारा दिए गए बयान का पाठ देता हैः अब जब यह आधिकारिक रूप से स्थापित हो गया है कि पोलैंड में कानून और लोकतंत्र के शासन के लिए एक प्रणालीगत खतरा है, तो यह यूरोपीय परिषद में पोलैंड के मतदान अधिकारों को निलंबित करने के लायक है। यह दिलचस्प है कि कुछ यूक्रेनी मीडिया ने ब्रसेल्स के इस तरह के बयान को पोलिश राष्ट्रवादियों के यूक्रेनी विरोधी मार्च के साथ जोड़ने का फैसला किया, जो हाल ही में पोलिश प्रेज़्मिस्ल में हुआ था। ब्रसेल्स की पहल का इस मार्च से कोई लेना-देना नहीं है।
मुम्बई : महाराष्ट्र में लगातार 5 दिनों से चली आ रही डॉक्टरों की हड़ताल आखिर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सख्ती के बाद आज टूट गई. हालांकि इस दौरान करीब 150 मरीजों ने दम तोड़ दिया. ख़ास बात यह कि बंबई हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी डॉक्टर्स काम पर लौटने को राजी नहीं थे. उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में डॉक्टरों की इस हड़ताल से राज्य भर में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा सी गई थी. इसे लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बेहद सख्त लहजे में कहा था कि बस अब बहुत हो गया. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वह हड़ताली डॉक्टरों के संगठन से आखिरी बार बातचीत करने जा रहे हैं. अगर वह नहीं माने और हड़ताल वापस नहीं ली , तो डॉक्टरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे. सीएम फडणवीस ने विधानसभा में कहा था, कि डॉक्टरों पर हमला गलत है. यह सिर्फ डॉक्टरों पर ही नहीं, बल्कि व्यवस्था पर हमला है. लेकिन डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर लिखित आश्वासन के बाद भी उनका इस हड़ताल जारी रखना पूरी तरह असंवेदनशील है. बता दें कि बंबई हाईकोर्ट ने गुरुवार को इन रेजिडेंट डॉक्टरों को तत्काल काम पर लौटने के निर्देश दिए थे. अदालत के आदेश के बाद महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (MARD) ने भी बीती हड़ताली डॉक्टरों से काम पर लौटने की अपील की थी. हालांकि इस अपील के कुछ डॉक्टर ही काम पर लौटे थे . हालांकि अब हड़ताल खत्म हो गई है तो मरीजों ने राहत की साँस ली है, लेकिन इस दौरान अब तक करीब 150 मरीज समय पर इलाज नहीं मिलने से दम तोड़ चुके हैं. मुंबई के KEM अस्पताल में 53, नायर अस्पताल में 34 और सियॉन अस्पताल में 48 मरीजों की मौत हो चुकी है. इसके अलावा अन्य अस्पतालों में मरीजों के दम तोड़ने की खबर है.
मुम्बई : महाराष्ट्र में लगातार पाँच दिनों से चली आ रही डॉक्टरों की हड़ताल आखिर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सख्ती के बाद आज टूट गई. हालांकि इस दौरान करीब एक सौ पचास मरीजों ने दम तोड़ दिया. ख़ास बात यह कि बंबई हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी डॉक्टर्स काम पर लौटने को राजी नहीं थे. उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में डॉक्टरों की इस हड़ताल से राज्य भर में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा सी गई थी. इसे लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बेहद सख्त लहजे में कहा था कि बस अब बहुत हो गया. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वह हड़ताली डॉक्टरों के संगठन से आखिरी बार बातचीत करने जा रहे हैं. अगर वह नहीं माने और हड़ताल वापस नहीं ली , तो डॉक्टरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे. सीएम फडणवीस ने विधानसभा में कहा था, कि डॉक्टरों पर हमला गलत है. यह सिर्फ डॉक्टरों पर ही नहीं, बल्कि व्यवस्था पर हमला है. लेकिन डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर लिखित आश्वासन के बाद भी उनका इस हड़ताल जारी रखना पूरी तरह असंवेदनशील है. बता दें कि बंबई हाईकोर्ट ने गुरुवार को इन रेजिडेंट डॉक्टरों को तत्काल काम पर लौटने के निर्देश दिए थे. अदालत के आदेश के बाद महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स ने भी बीती हड़ताली डॉक्टरों से काम पर लौटने की अपील की थी. हालांकि इस अपील के कुछ डॉक्टर ही काम पर लौटे थे . हालांकि अब हड़ताल खत्म हो गई है तो मरीजों ने राहत की साँस ली है, लेकिन इस दौरान अब तक करीब एक सौ पचास मरीज समय पर इलाज नहीं मिलने से दम तोड़ चुके हैं. मुंबई के KEM अस्पताल में तिरेपन, नायर अस्पताल में चौंतीस और सियॉन अस्पताल में अड़तालीस मरीजों की मौत हो चुकी है. इसके अलावा अन्य अस्पतालों में मरीजों के दम तोड़ने की खबर है.
संयुक्त राज्य अमेरिका और नाटो बेलारूसी सीमा पर अपने सैन्य बलों का निर्माण नहीं कर रहे हैं, और संयुक्त राज्य अमेरिका को बेलारूस में "रंग क्रांति" के प्रशंसक के प्रयासों से कोई लेना-देना नहीं है। रूस में अमेरिकी राजदूत जॉन सुलिवन ने इंटरफैक्स को दिए एक साक्षात्कार में यह बात कही। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि संयुक्त राज्य अमेरिका या नाटो द्वारा बेलारूस की सीमाओं पर एक सैन्य निर्माण का आरोप असत्य है और पूरी तरह से निराधार है। साथ ही आरोप लगाया कि संयुक्त राज्य अमेरिका या कोई भी पश्चिमी देश या नाटो के सदस्य बेलारूस में "रंग क्रांति" के लिए प्रयास कर रहे हैं, झूठे और आधारहीन हैं। - उसने कहा। सुलिवन के अनुसार, बेलारूस की घटनाएं अमेरिका और रूस के बीच विवाद का विषय नहीं हैं, लेकिन "बेलारूसी लोगों की इच्छा की शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति" का प्रतिनिधित्व करती हैं। बेलारूसी लोग धांधली चुनाव और उसके बाद सुरक्षा बलों से हिंसा का विरोध कर रहे हैं। राजदूत का दावा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका का इससे कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि यह बेलारूस के क्षेत्र की संप्रभुता और अखंडता में गैर-हस्तक्षेप के लिए प्रतिबद्ध है। उसी समय, संयुक्त राज्य अमेरिका बेलारूसी लोगों के स्वतंत्र रूप से बाहरी हस्तक्षेप के बिना नेताओं को चुनने का प्रयास करता है। - अमेरिकी राजनयिक ने जोर दिया।
संयुक्त राज्य अमेरिका और नाटो बेलारूसी सीमा पर अपने सैन्य बलों का निर्माण नहीं कर रहे हैं, और संयुक्त राज्य अमेरिका को बेलारूस में "रंग क्रांति" के प्रशंसक के प्रयासों से कोई लेना-देना नहीं है। रूस में अमेरिकी राजदूत जॉन सुलिवन ने इंटरफैक्स को दिए एक साक्षात्कार में यह बात कही। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि संयुक्त राज्य अमेरिका या नाटो द्वारा बेलारूस की सीमाओं पर एक सैन्य निर्माण का आरोप असत्य है और पूरी तरह से निराधार है। साथ ही आरोप लगाया कि संयुक्त राज्य अमेरिका या कोई भी पश्चिमी देश या नाटो के सदस्य बेलारूस में "रंग क्रांति" के लिए प्रयास कर रहे हैं, झूठे और आधारहीन हैं। - उसने कहा। सुलिवन के अनुसार, बेलारूस की घटनाएं अमेरिका और रूस के बीच विवाद का विषय नहीं हैं, लेकिन "बेलारूसी लोगों की इच्छा की शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति" का प्रतिनिधित्व करती हैं। बेलारूसी लोग धांधली चुनाव और उसके बाद सुरक्षा बलों से हिंसा का विरोध कर रहे हैं। राजदूत का दावा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका का इससे कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि यह बेलारूस के क्षेत्र की संप्रभुता और अखंडता में गैर-हस्तक्षेप के लिए प्रतिबद्ध है। उसी समय, संयुक्त राज्य अमेरिका बेलारूसी लोगों के स्वतंत्र रूप से बाहरी हस्तक्षेप के बिना नेताओं को चुनने का प्रयास करता है। - अमेरिकी राजनयिक ने जोर दिया।
बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री आलिया भट्ट इन दिनों प्रोफेशनल लाइफ से ज्यादा पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में है। जी हां, आलिया भट्ट अपनी आने वाली फिल्म ब्रह्मास्त्र की शूटिंग में व्यस्त हैं। इसके अलावा रणबीर कपूर के साथ उनकी डेटिंग शेटिंग के बारे में तो पूरी दुनिया जानती है, लेकिन आलिया एक नया लुक सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे देखकर हर कोई हैरान हो रहा है। इतना ही नहीं, यह लुक किसी फिल्म का नहीं है, बल्कि रियल लाइफ की है। तो चलिए जानते हैं कि हमारे इस लेख में आपके लिए क्या खास है? अभिनेत्री आलिया भट्ट अक्सर अपने फैशन और लुक को लेकर सुर्खियों में रहती है। आलिया भट्ट का फैशन और लुक हमेशा सबसे अलग होता है। ऐसा ही कुछ इस बार भी हुआ है। अक्सर सिंपल लुक में दिखने वाली आलिया इस बार भी सिंपल लुक में कमाल की लग रही है। आलिया की चर्चा इस बार उनके ड्रेस की कीमत को लेकर हो रही है। दरअसल, आलिया को इस बार एयरपोर्ट पर नाइट शूट में स्पॉट किया गया है, जिसमें उनके लुक के साथ साथ कीमत की भी चर्चा हो रही है। आलिया सिंपल लुक में कमाल का कहर बरपा रही हैं। आलिया भट्ट का नया लुक एयरपोर्ट का है। जहां वे नाइट ड्रेस में स्पॉट हुई। आलिया ने Gucce का फ्लोरल नाइट सूट पहना है, जिसके साथ उन्होंने खूबसूरत सा हैंडबैग ले रखा है। आलिया का यह फैशन हर किसी को भा रहा है। इसके अलावा बता दें कि आलिया भट्ट ने पोनीटेल के साथ लाइट पिंक कलर की लिपस्टिक लगाई हुई है, जोकि बहुत ही ज्यादा खूबसूरत लगा रहा है। आलिया भट्ट का यह सिंपल लुक सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है। कैमरे में कैद होती आलिया भट्ट ने कई बार हल्की हल्की स्माइल भी की, जोकि उनकी खासियत है। बताते चलें कि आलिया भट्ट ने जो नाइट ड्रेस पहना है, उसकी कीमत 2 लाख रूपये है। इतना ही नहीं, उन्होंने जो हैंडबैग कैरी किया है, उसकी कीमत 1 लाख रूपये है। ऐसे में आलिया का यह लुक तो वायरल होना ही था। आलिया हमेशा ब्रांडेड चीज़ पहनती है, क्योंकि उन्हें अपने फैशन से कोई समझौता नहीं करना होता है। सिंपल लुक में आलिया दिल चुराती हुई दिख रही हैं। आलिया भट्ट के इस लुक की तारीफ हर कोई कर रहा है। बॉलीवुड की चुलबुली गर्ल के नाम से मशहूर आलिया भट्ट इन दिनों रणबीर कपूर को डेट कर रही हैं। रणबीर कपूर को लेकर आलिया भट्ट काफी ज्यादा गंभीर है। इतना ही नहीं, रणबीर कपूर के साथ आलिया फिल्म ब्राह्मास्त्र में नजर आने वाली है, जिसकी शूटिंग में वे काफी ज्यादा बिजी हैं। आलिया भट्ट की यह रणबीर कपूर के साथ पहली फिल्म है, जिसका काफी ज्यादा इंतजार किया जा रहा है।
बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री आलिया भट्ट इन दिनों प्रोफेशनल लाइफ से ज्यादा पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में है। जी हां, आलिया भट्ट अपनी आने वाली फिल्म ब्रह्मास्त्र की शूटिंग में व्यस्त हैं। इसके अलावा रणबीर कपूर के साथ उनकी डेटिंग शेटिंग के बारे में तो पूरी दुनिया जानती है, लेकिन आलिया एक नया लुक सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसे देखकर हर कोई हैरान हो रहा है। इतना ही नहीं, यह लुक किसी फिल्म का नहीं है, बल्कि रियल लाइफ की है। तो चलिए जानते हैं कि हमारे इस लेख में आपके लिए क्या खास है? अभिनेत्री आलिया भट्ट अक्सर अपने फैशन और लुक को लेकर सुर्खियों में रहती है। आलिया भट्ट का फैशन और लुक हमेशा सबसे अलग होता है। ऐसा ही कुछ इस बार भी हुआ है। अक्सर सिंपल लुक में दिखने वाली आलिया इस बार भी सिंपल लुक में कमाल की लग रही है। आलिया की चर्चा इस बार उनके ड्रेस की कीमत को लेकर हो रही है। दरअसल, आलिया को इस बार एयरपोर्ट पर नाइट शूट में स्पॉट किया गया है, जिसमें उनके लुक के साथ साथ कीमत की भी चर्चा हो रही है। आलिया सिंपल लुक में कमाल का कहर बरपा रही हैं। आलिया भट्ट का नया लुक एयरपोर्ट का है। जहां वे नाइट ड्रेस में स्पॉट हुई। आलिया ने Gucce का फ्लोरल नाइट सूट पहना है, जिसके साथ उन्होंने खूबसूरत सा हैंडबैग ले रखा है। आलिया का यह फैशन हर किसी को भा रहा है। इसके अलावा बता दें कि आलिया भट्ट ने पोनीटेल के साथ लाइट पिंक कलर की लिपस्टिक लगाई हुई है, जोकि बहुत ही ज्यादा खूबसूरत लगा रहा है। आलिया भट्ट का यह सिंपल लुक सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है। कैमरे में कैद होती आलिया भट्ट ने कई बार हल्की हल्की स्माइल भी की, जोकि उनकी खासियत है। बताते चलें कि आलिया भट्ट ने जो नाइट ड्रेस पहना है, उसकी कीमत दो लाख रूपये है। इतना ही नहीं, उन्होंने जो हैंडबैग कैरी किया है, उसकी कीमत एक लाख रूपये है। ऐसे में आलिया का यह लुक तो वायरल होना ही था। आलिया हमेशा ब्रांडेड चीज़ पहनती है, क्योंकि उन्हें अपने फैशन से कोई समझौता नहीं करना होता है। सिंपल लुक में आलिया दिल चुराती हुई दिख रही हैं। आलिया भट्ट के इस लुक की तारीफ हर कोई कर रहा है। बॉलीवुड की चुलबुली गर्ल के नाम से मशहूर आलिया भट्ट इन दिनों रणबीर कपूर को डेट कर रही हैं। रणबीर कपूर को लेकर आलिया भट्ट काफी ज्यादा गंभीर है। इतना ही नहीं, रणबीर कपूर के साथ आलिया फिल्म ब्राह्मास्त्र में नजर आने वाली है, जिसकी शूटिंग में वे काफी ज्यादा बिजी हैं। आलिया भट्ट की यह रणबीर कपूर के साथ पहली फिल्म है, जिसका काफी ज्यादा इंतजार किया जा रहा है।
पलासी । (ए. सं) विभागीय निर्देशानुसार सोमवार से छठी कक्षा से लेकर आठवी कक्षा की पढ़ाई शुरू हो गयी। सोमवार को प्रथम दिन विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति कम देखी गयी। हालांकि बच्चे वर्ग में सोशल डिस्टेंस बनाये हुए थे तथा मास्क पहन कर आये थे। सोमवार को आदर्श मध्य विद्यालय पलासी में 389 नामांकित बच्चों में 116 बच्चे आए। स्कूल पहुंची सुप्रिया कुमारी, उषा कुमारी, अखलाक अलाम, हजरत अली आदि ने बताया कि दस माह विद्यालय खुलने से खुशी तो है। लेकिन उनलोगों का सिलेबस काफी पीछे रहने के कारण एग्जाम का डर सता रहा हैं। शिक्षकों ने बताया कि एक्स्ट्रा क्लासेस लेकर कोर्स को पूरा करना होगा। इस बाबत विद्यालय के एचएम मोहम्मद नोमानी ने बताया कि पहले दिन बच्चों की कम उपस्थिति रही।
पलासी । विभागीय निर्देशानुसार सोमवार से छठी कक्षा से लेकर आठवी कक्षा की पढ़ाई शुरू हो गयी। सोमवार को प्रथम दिन विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति कम देखी गयी। हालांकि बच्चे वर्ग में सोशल डिस्टेंस बनाये हुए थे तथा मास्क पहन कर आये थे। सोमवार को आदर्श मध्य विद्यालय पलासी में तीन सौ नवासी नामांकित बच्चों में एक सौ सोलह बच्चे आए। स्कूल पहुंची सुप्रिया कुमारी, उषा कुमारी, अखलाक अलाम, हजरत अली आदि ने बताया कि दस माह विद्यालय खुलने से खुशी तो है। लेकिन उनलोगों का सिलेबस काफी पीछे रहने के कारण एग्जाम का डर सता रहा हैं। शिक्षकों ने बताया कि एक्स्ट्रा क्लासेस लेकर कोर्स को पूरा करना होगा। इस बाबत विद्यालय के एचएम मोहम्मद नोमानी ने बताया कि पहले दिन बच्चों की कम उपस्थिति रही।
कोरोना के मामलों में गिरावट को देखते हुए बालीवुड में बड़े पर्दे पर एक के बाद एक फिल्में लगातार रिलीज हो रही है। कई फिल्मों की रिलीज डेट बदली जा रही है और कुछ फिल्मों की पुरानी रिलीज डेट बदलकर नई डेट कंफर्म की जा रही है। इस बीच कुछ बड़ी फिल्मों के ट्रेलर और पोस्टर भी रिलीज हुए हैं। वहीं, अभी हर कलाकार ओटीटी प्लेटफार्म की ओर बढ़ रहा है। आइए बालीवुड और ओटीटी पर आने वाली नई फिल्मों और सीरीज के बारे में जानते हैं। बालीवुड के किंग खान शाहरुख खान लंबे समय बाद बड़े पर पर्दे पर लौट रहे हैं। लंबे अरसे से चर्चाओं का विषय बनी फिल्म पठान की रिलीज डेट कंफर्म हो गई है। फिल्म में शाहरुख खान के साथ जान अब्राहम और दीपिका पादुकोण भी नजर आएंगे। फिल्म तीन भाषाओं हिंदी, तमिल और तेलुगु के साथ अगले साल 2023 में 25 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म के ट्रेलर को भी लोगों ने काफी पसंद किया है। कंगना रनौत की अगली फिल्म धाकड़ की नई रिलीज डेट भी कंफर्म हो गई है। फिल्म में कंगना के साथ-साथ अर्जुन रामपाल, दिव्या दत्ता और शाश्वत चटर्जी भी अभिनय कर रहे हैं। फिल्म हिंदी से साथ-साथ कई भाषाओं तमिल, तेलुगु और मलयालम में भी रिलीज होगी। कंगना की फिल्म इस साल के मध्य में 27 मई को बड़े पर पर्दे पर रिलीज होगी। धाकड़ एक एक्शन फिल्म है। ऐश्वर्या राय बच्चन भी लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं। मणिरत्नम द्वारा निर्देशित पोन्नियिन सेलवन (पीएस1) को पांच भाषाओं हिंदी सहित तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ में रिलीज किया जाएगा। फिल्म का पोस्टर भी रिलीज किया गया है। फिल्म इस साल 30 सितंबर 2022 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में ऐश्वर्या के साथ-साथ चियान विक्रम, जयम रवि, अश्विन काकुमानु, तृषा और कार्थी नजर आएंगे। तापसी पन्नू की फिल्म मिशन इम्पासिबल की रिलीज डेट फाइनल की गई है। इस मौके पर फिल्म का पोस्टर भी रिलीज किया गया है। स्वरूप आरएसजे के निर्देशन में बनी इस फिल्म से तापसी ने तेलुगु सिनेमा में वापसी की है। फिल्म इस साल 2022 को बड़े पर्दे पर रिलीज होने जा रही है। पोस्टर में तापसी भागती हुई नजर आ रही है, लेकिन तापसी ने खुद पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि फिल्म के किसी सीन में मैं भाग नहीं रही हूं। प्रभास और सैफ अली खान की फिल्म आदिपुरुष की रिलीज भी फाइनल की गई है। महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर फिल्म की टीम ने नई रिलीज डेट जारी की है। फिल्म अगले साल 2023 में गुरुवार 12 जनवरी को बड़े पर्दे पर उतरने जा रही है। प्रभास, सैफ अली खान, कृति सैनन और सनी सिंह के अभिनय से परिपूर्ण इस फिल्म को ओम राउत ने निर्देशित किया है।
कोरोना के मामलों में गिरावट को देखते हुए बालीवुड में बड़े पर्दे पर एक के बाद एक फिल्में लगातार रिलीज हो रही है। कई फिल्मों की रिलीज डेट बदली जा रही है और कुछ फिल्मों की पुरानी रिलीज डेट बदलकर नई डेट कंफर्म की जा रही है। इस बीच कुछ बड़ी फिल्मों के ट्रेलर और पोस्टर भी रिलीज हुए हैं। वहीं, अभी हर कलाकार ओटीटी प्लेटफार्म की ओर बढ़ रहा है। आइए बालीवुड और ओटीटी पर आने वाली नई फिल्मों और सीरीज के बारे में जानते हैं। बालीवुड के किंग खान शाहरुख खान लंबे समय बाद बड़े पर पर्दे पर लौट रहे हैं। लंबे अरसे से चर्चाओं का विषय बनी फिल्म पठान की रिलीज डेट कंफर्म हो गई है। फिल्म में शाहरुख खान के साथ जान अब्राहम और दीपिका पादुकोण भी नजर आएंगे। फिल्म तीन भाषाओं हिंदी, तमिल और तेलुगु के साथ अगले साल दो हज़ार तेईस में पच्चीस जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म के ट्रेलर को भी लोगों ने काफी पसंद किया है। कंगना रनौत की अगली फिल्म धाकड़ की नई रिलीज डेट भी कंफर्म हो गई है। फिल्म में कंगना के साथ-साथ अर्जुन रामपाल, दिव्या दत्ता और शाश्वत चटर्जी भी अभिनय कर रहे हैं। फिल्म हिंदी से साथ-साथ कई भाषाओं तमिल, तेलुगु और मलयालम में भी रिलीज होगी। कंगना की फिल्म इस साल के मध्य में सत्ताईस मई को बड़े पर पर्दे पर रिलीज होगी। धाकड़ एक एक्शन फिल्म है। ऐश्वर्या राय बच्चन भी लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं। मणिरत्नम द्वारा निर्देशित पोन्नियिन सेलवन को पांच भाषाओं हिंदी सहित तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ में रिलीज किया जाएगा। फिल्म का पोस्टर भी रिलीज किया गया है। फिल्म इस साल तीस सितंबर दो हज़ार बाईस को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म में ऐश्वर्या के साथ-साथ चियान विक्रम, जयम रवि, अश्विन काकुमानु, तृषा और कार्थी नजर आएंगे। तापसी पन्नू की फिल्म मिशन इम्पासिबल की रिलीज डेट फाइनल की गई है। इस मौके पर फिल्म का पोस्टर भी रिलीज किया गया है। स्वरूप आरएसजे के निर्देशन में बनी इस फिल्म से तापसी ने तेलुगु सिनेमा में वापसी की है। फिल्म इस साल दो हज़ार बाईस को बड़े पर्दे पर रिलीज होने जा रही है। पोस्टर में तापसी भागती हुई नजर आ रही है, लेकिन तापसी ने खुद पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि फिल्म के किसी सीन में मैं भाग नहीं रही हूं। प्रभास और सैफ अली खान की फिल्म आदिपुरुष की रिलीज भी फाइनल की गई है। महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर फिल्म की टीम ने नई रिलीज डेट जारी की है। फिल्म अगले साल दो हज़ार तेईस में गुरुवार बारह जनवरी को बड़े पर्दे पर उतरने जा रही है। प्रभास, सैफ अली खान, कृति सैनन और सनी सिंह के अभिनय से परिपूर्ण इस फिल्म को ओम राउत ने निर्देशित किया है।
सोम प्रदोष व्रत विशेष प्रकार का व्रत है इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की गलती से बचें. पंडितों का मानना है कि इस दिन साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें. इस दिन नहाना नहीं भूलें. काले वस्त्र न पहनें और व्रत रखें. क्रोध पर नियंत्रण रखें और ब्रह्मचर्य का पालन करें. मार्गशीर्ष मास का अंतिम प्रदोष व्रत सोमवार 05 दिसंबर 2022 को रखा जाएगा. सोमवार का दिन होने के कारण इसे सोम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा. इसके अतिरिक्त इसे सोम प्रदोषम या चंद्र प्रदोषम भी कहते हैं. प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को किया जाता है. इस बार 05 दिसंबर 2022 (सोमवार) को प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है. प्रदोष व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है. साथ ही प्रदोष काल में ही प्रदोष व्रत की पूजा होती है. पंडितों की मान्यता है कि प्रदोष के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की एक साथ पूजा करने से कई जन्मों के पाप धुल जाते हैं और मन पवित्र हो जाता है. इस दिन सबसे पहले प्रदोष व्रत करने के लिए आपको सुबह शीघ्र चाहिए. उसके बाद स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान शिव का ध्यान करें. इसके बाद भगवान शिव का अभिषेक करना करें. पंचामृत और पंचमेवा का भगवान को भोग लगाएं उसके बाद व्रत का संकल्प लें. शाम में भगवान शिव की पूजा से पहले स्नान अवश्य करें तथा प्रदोष काल में शिव जी की आराधना शुरू करें. हिन्दू धर्म में सोम प्रदोष व्रत के संबंध में एक कथा प्रचलित है. इस कथा के मुताबिक एक पति अपनी पत्नी को लेने उसके मायके गया. ससुराल में घर के लोग सोमवार के दिन दामाद और बेटी को विदा न करने की आग्रह करने लगे. लेकिन पति अपने ससुराल वाली की बात पर ध्यान नहीं दिया और उसी दिन अपनी पत्नी को साथ लेकर अपने घर को चल दिया. रास्ते में दोनों पति-पत्नी जाने लगे तभी पत्नी को प्यास लगी तो पति ने बोला मैं पानी की प्रबंध करके आता हूं. वह पानी लेने जंगल में चला गया. पति के लौटने पर उसने देखा कि पत्नी किसी और के साथ हंस रही है और दूसरे के लोटे से पानी पी रही है. यह देखकर वह काफी क्रोधित हो गया. तब उसने सामने जाकर देखा तो वहां पत्नी जिसके साथ बात कर रही थी वे कोई और नहीं बल्कि उसी का हमशक्ल था. पत्नी भी दोनों में ठीक कौन है इसकी पहचान नहीं कर पा रही थी ऐसे में पति ने भगवान शिव से प्रार्थना किया और बोला कि पत्नी के मायके पक्ष की बात न मान कर उसने बड़ी भूल की है. यदि वह सकुशल घर पहुंच जाएगा तो नियमपूर्वक सोमवार त्रियोदशी को प्रदोष का व्रत करेगा. ऐसा करते ही भगवान शिव की कृपा से दूसरा हमशक्ल गायब हो गया. उसी दिन से दोनों पति-पत्नी सोम प्रदोष का व्रत करने लगे. हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का खास महत्व होता है. हमारे शास्त्रों में बोला गया है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से घर में सुख-शांति आती है. संतान की ख़्वाहिश रखने वाली महिलाओं के लिए यह व्रत लाभकारी होता है. अच्छे वर की कामना से कुंवारी कन्याएं इस व्रत को करती हैं. सोम प्रदोष व्रत विशेष प्रकार का व्रत है इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की गलती से बचें. पंडितों का मानना है कि इस दिन साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें. इस दिन नहाना नहीं भूलें. काले वस्त्र न पहनें और व्रत रखें. क्रोध पर नियंत्रण रखें और ब्रह्मचर्य का पालन करें. साथ ही मांस-मदिरा का सेवन न कर सिर्फ शाकाहार भोजन ग्रहण करें. सोम प्रदोष पर स्नान के बाद सबसे पहले व्रत का संकल्प कर भगवान शिव की बेल पत्र, गंगाजल, अक्षत और धूप-दीप आदि से पूजा की जाती है. फिर संध्या में यानि प्रदोष के समय भी पुनः इसी प्रकार से भगवान शिव की पूजा करनी करें. पंडितों का मानना है कि त्रयोदशी की रात के पहले प्रहर में जो आदमी किसी भेंट के साथ शिव प्रतिमा के दर्शन करता है- उसपर भगवान शिव की सदैव कृपा बनी रहती है. अतः प्रदोष व्रत की रात के पहले प्रहर में शिवजी को कुछ न कुछ भेंट अवश्य करना चाहिए. सोम प्रदोष का व्रत अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए किया जाता है. प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव के मंत्र महामृत्युजंय के मंत्र का जाप करें.
सोम प्रदोष व्रत विशेष प्रकार का व्रत है इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की गलती से बचें. पंडितों का मानना है कि इस दिन साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें. इस दिन नहाना नहीं भूलें. काले वस्त्र न पहनें और व्रत रखें. क्रोध पर नियंत्रण रखें और ब्रह्मचर्य का पालन करें. मार्गशीर्ष मास का अंतिम प्रदोष व्रत सोमवार पाँच दिसंबर दो हज़ार बाईस को रखा जाएगा. सोमवार का दिन होने के कारण इसे सोम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा. इसके अतिरिक्त इसे सोम प्रदोषम या चंद्र प्रदोषम भी कहते हैं. प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि को किया जाता है. इस बार पाँच दिसंबर दो हज़ार बाईस को प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है. प्रदोष व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की जाती है. साथ ही प्रदोष काल में ही प्रदोष व्रत की पूजा होती है. पंडितों की मान्यता है कि प्रदोष के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की एक साथ पूजा करने से कई जन्मों के पाप धुल जाते हैं और मन पवित्र हो जाता है. इस दिन सबसे पहले प्रदोष व्रत करने के लिए आपको सुबह शीघ्र चाहिए. उसके बाद स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान शिव का ध्यान करें. इसके बाद भगवान शिव का अभिषेक करना करें. पंचामृत और पंचमेवा का भगवान को भोग लगाएं उसके बाद व्रत का संकल्प लें. शाम में भगवान शिव की पूजा से पहले स्नान अवश्य करें तथा प्रदोष काल में शिव जी की आराधना शुरू करें. हिन्दू धर्म में सोम प्रदोष व्रत के संबंध में एक कथा प्रचलित है. इस कथा के मुताबिक एक पति अपनी पत्नी को लेने उसके मायके गया. ससुराल में घर के लोग सोमवार के दिन दामाद और बेटी को विदा न करने की आग्रह करने लगे. लेकिन पति अपने ससुराल वाली की बात पर ध्यान नहीं दिया और उसी दिन अपनी पत्नी को साथ लेकर अपने घर को चल दिया. रास्ते में दोनों पति-पत्नी जाने लगे तभी पत्नी को प्यास लगी तो पति ने बोला मैं पानी की प्रबंध करके आता हूं. वह पानी लेने जंगल में चला गया. पति के लौटने पर उसने देखा कि पत्नी किसी और के साथ हंस रही है और दूसरे के लोटे से पानी पी रही है. यह देखकर वह काफी क्रोधित हो गया. तब उसने सामने जाकर देखा तो वहां पत्नी जिसके साथ बात कर रही थी वे कोई और नहीं बल्कि उसी का हमशक्ल था. पत्नी भी दोनों में ठीक कौन है इसकी पहचान नहीं कर पा रही थी ऐसे में पति ने भगवान शिव से प्रार्थना किया और बोला कि पत्नी के मायके पक्ष की बात न मान कर उसने बड़ी भूल की है. यदि वह सकुशल घर पहुंच जाएगा तो नियमपूर्वक सोमवार त्रियोदशी को प्रदोष का व्रत करेगा. ऐसा करते ही भगवान शिव की कृपा से दूसरा हमशक्ल गायब हो गया. उसी दिन से दोनों पति-पत्नी सोम प्रदोष का व्रत करने लगे. हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत का खास महत्व होता है. हमारे शास्त्रों में बोला गया है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से घर में सुख-शांति आती है. संतान की ख़्वाहिश रखने वाली महिलाओं के लिए यह व्रत लाभकारी होता है. अच्छे वर की कामना से कुंवारी कन्याएं इस व्रत को करती हैं. सोम प्रदोष व्रत विशेष प्रकार का व्रत है इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की गलती से बचें. पंडितों का मानना है कि इस दिन साफ-सफाई का विशेष ख्याल रखें. इस दिन नहाना नहीं भूलें. काले वस्त्र न पहनें और व्रत रखें. क्रोध पर नियंत्रण रखें और ब्रह्मचर्य का पालन करें. साथ ही मांस-मदिरा का सेवन न कर सिर्फ शाकाहार भोजन ग्रहण करें. सोम प्रदोष पर स्नान के बाद सबसे पहले व्रत का संकल्प कर भगवान शिव की बेल पत्र, गंगाजल, अक्षत और धूप-दीप आदि से पूजा की जाती है. फिर संध्या में यानि प्रदोष के समय भी पुनः इसी प्रकार से भगवान शिव की पूजा करनी करें. पंडितों का मानना है कि त्रयोदशी की रात के पहले प्रहर में जो आदमी किसी भेंट के साथ शिव प्रतिमा के दर्शन करता है- उसपर भगवान शिव की सदैव कृपा बनी रहती है. अतः प्रदोष व्रत की रात के पहले प्रहर में शिवजी को कुछ न कुछ भेंट अवश्य करना चाहिए. सोम प्रदोष का व्रत अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए किया जाता है. प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव के मंत्र महामृत्युजंय के मंत्र का जाप करें.
योगा को एक चमत्कार माना जाता है. ये लोगों की लाइफ में बहुत से मिरैकल्स (miracles) करता है. योगा ना सिर्फ लोगों को फिजिकली (physically) बल्कि मेंटली (mentally) भी फिट रखती है. योगामें ऐसे बहुत-से आसन होते है.
योगा को एक चमत्कार माना जाता है. ये लोगों की लाइफ में बहुत से मिरैकल्स करता है. योगा ना सिर्फ लोगों को फिजिकली बल्कि मेंटली भी फिट रखती है. योगामें ऐसे बहुत-से आसन होते है.
अगर आप भी झड़ते बालों से परेशान रहती हैं तो आज हम आपको आयुर्वेदिक हेयर फॉल सॉल्यूशन के बारे में बता रहे हैं। महिलाएं झड़ते बालों को रोकने के लिए नेचुरल हेयर केयर ट्रीटमेंट की ओर रुख कर रही हैं। बालों के झड़ने के उपचार के लिए नेचुरल उपाय में सबसे फेमस आयुर्वेद चिकित्सा, नेचुरल पैक और कुछ मामलों में हर्बल सप्लीमेंट और दवाएं शामिल हैं। बालों के झड़ने के कारणों में गहराई से जाने के बिना, यदि हम सामान्य परिस्थितियों को लेते हैं, तो यह तेजी से स्पष्ट होता जा रहा है कि खराब पोषण और आधुनिक जीवन शैली का स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और बालों का झड़ना कोई अपवाद नहीं है। आपकी त्वचा की तरह आपके बालों को भी अंदर से बाहर पोषण की जरूरत होती है। यदि आपके आहार में बालों के अनुकूल फूड्स की कमी है या आपका डाइजेशन सही नहीं है तो यह निश्चित रूप से बालों के पतले होने, जड़ से गिरने और अंत में गंजापन की ओर जाता है। इसलिए बालों को झड़ने से रोकने और आपको हेल्दी और शाइनी बाल पाने के लिए हेल्दी संतुलित फूड्स लेना होगा। इसलिए आज हम आपको एक आयुर्वेदिक हेयर फॉल सॉल्यूशन के बारे में बता रहे हैं। यह नुस्खा आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर चेताली जी ने अपने इंस्टाग्राम के माध्यम से शेयर किया है। नुस्खा शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन में लिखा, 'आयुर्वेद के अनुसार आंवला केशय जड़ी बूटी है और नियमित रूप से आंवला का सेवन करने से बालों की कई समस्याओं से छुटकारा मिलता है। बालों की समस्याओं को कम करने के लिए यहां छोटे, आसान और बहुत उपयोगी आयुर्वेदिक उपाय दिया गया हैं। ' अगर आप भी झड़ते बालों से परेशान रहती हैं तो 1 बार इस उपाय को आजमाकर जरूर देखें। आइए इस उपाय के बारे में एक्सपर्ट से आर्टिकल के माध्यम से विस्तार में जानें। - आंवला पाउडर में शहद मिलाएं। - अच्छी तरह मिलाएं और सुबह लें। - बालों का झड़नारोकता है। - सफेद बालों को रोकता है। - बालों को मजबूत करता है। - डैंड्रफ कम करता है। - समय से पहले सफेद बालों को उलट देता है। यह बात तो आप जानती ही हैं कि आंवला बालों की समस्याओं के लिए अविश्वसनीय काम करता है। लेकिन, जब शहद के साथ लिया जाता है तो यह इसकी प्रभावशीलता को बढ़ाता है। लेकिन, यदि आप लगातार बालों के झड़ने और बालों से संबंधित अन्य समस्याओं से पीड़ित हैं, तो अपने एक्सपर्ट से सलाह लें, क्योंकि बाल गिरने के कई कारण हैं और आपको इसे रोकने का तरीका खोजने की आवश्यकता होगी। आशा है ये आपकी मदद करेगा। आप भी इस आयुर्वेदिक हेयर फॉल सॉल्यूशन से झड़ते बालों को कम कर सकती हैं। इस आर्टिकल को शेयर और लाइक जरूर करें, साथ ही कमेंट भी करें। स्वास्थ्य सलाह से जुड़े ऐसे ही और आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
अगर आप भी झड़ते बालों से परेशान रहती हैं तो आज हम आपको आयुर्वेदिक हेयर फॉल सॉल्यूशन के बारे में बता रहे हैं। महिलाएं झड़ते बालों को रोकने के लिए नेचुरल हेयर केयर ट्रीटमेंट की ओर रुख कर रही हैं। बालों के झड़ने के उपचार के लिए नेचुरल उपाय में सबसे फेमस आयुर्वेद चिकित्सा, नेचुरल पैक और कुछ मामलों में हर्बल सप्लीमेंट और दवाएं शामिल हैं। बालों के झड़ने के कारणों में गहराई से जाने के बिना, यदि हम सामान्य परिस्थितियों को लेते हैं, तो यह तेजी से स्पष्ट होता जा रहा है कि खराब पोषण और आधुनिक जीवन शैली का स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और बालों का झड़ना कोई अपवाद नहीं है। आपकी त्वचा की तरह आपके बालों को भी अंदर से बाहर पोषण की जरूरत होती है। यदि आपके आहार में बालों के अनुकूल फूड्स की कमी है या आपका डाइजेशन सही नहीं है तो यह निश्चित रूप से बालों के पतले होने, जड़ से गिरने और अंत में गंजापन की ओर जाता है। इसलिए बालों को झड़ने से रोकने और आपको हेल्दी और शाइनी बाल पाने के लिए हेल्दी संतुलित फूड्स लेना होगा। इसलिए आज हम आपको एक आयुर्वेदिक हेयर फॉल सॉल्यूशन के बारे में बता रहे हैं। यह नुस्खा आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर चेताली जी ने अपने इंस्टाग्राम के माध्यम से शेयर किया है। नुस्खा शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन में लिखा, 'आयुर्वेद के अनुसार आंवला केशय जड़ी बूटी है और नियमित रूप से आंवला का सेवन करने से बालों की कई समस्याओं से छुटकारा मिलता है। बालों की समस्याओं को कम करने के लिए यहां छोटे, आसान और बहुत उपयोगी आयुर्वेदिक उपाय दिया गया हैं। ' अगर आप भी झड़ते बालों से परेशान रहती हैं तो एक बार इस उपाय को आजमाकर जरूर देखें। आइए इस उपाय के बारे में एक्सपर्ट से आर्टिकल के माध्यम से विस्तार में जानें। - आंवला पाउडर में शहद मिलाएं। - अच्छी तरह मिलाएं और सुबह लें। - बालों का झड़नारोकता है। - सफेद बालों को रोकता है। - बालों को मजबूत करता है। - डैंड्रफ कम करता है। - समय से पहले सफेद बालों को उलट देता है। यह बात तो आप जानती ही हैं कि आंवला बालों की समस्याओं के लिए अविश्वसनीय काम करता है। लेकिन, जब शहद के साथ लिया जाता है तो यह इसकी प्रभावशीलता को बढ़ाता है। लेकिन, यदि आप लगातार बालों के झड़ने और बालों से संबंधित अन्य समस्याओं से पीड़ित हैं, तो अपने एक्सपर्ट से सलाह लें, क्योंकि बाल गिरने के कई कारण हैं और आपको इसे रोकने का तरीका खोजने की आवश्यकता होगी। आशा है ये आपकी मदद करेगा। आप भी इस आयुर्वेदिक हेयर फॉल सॉल्यूशन से झड़ते बालों को कम कर सकती हैं। इस आर्टिकल को शेयर और लाइक जरूर करें, साथ ही कमेंट भी करें। स्वास्थ्य सलाह से जुड़े ऐसे ही और आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
हमीरपुर - हिम अकादमी विकास नगर में पिछले नवंबर में हुए साइंस ओलंपियाड में बच्चों नें अपनी प्रतिभा को साबित कर दिखाया है कि वे हर क्षेत्र में प्रशस्त हैं। इस परीक्षा में स्कूल के तीसरी से लेकर बारहवीं तक के बच्चों ने भाग लिया। इसमें तीन बच्चों ने मेडल ऑफ डिस्टिंक्शन, उन्नीस बच्चों ने गोल्ड मेडल, बीस छात्रों ने सिल्वर मेडल तथा उन्नीस बच्चों ने ब्रांज मेडल हासिल कर स्कूल का नाम चमकाया। इसमें कक्षा तीसरी के (कौस्तुभ कंवर, रिजुल वर्मा, कात्यायनी उपाध्याय) कक्षा चौथी के (प्रणव शर्मा, रुद्रांश, शादआलम) कक्षा पांचवीं के (शिवेन शर्मा, रूद्रा सिंह भारद्वाज, अक्षर दीवान) कक्षा छठी के (ईरा शर्मा, ईशान शर्मा, आत्मज शर्मा, कार्तिकेय शर्मा, तन्मय पंडित, आस्था शर्मा) कक्षा सातवीं के (शिवांश शर्मा अन्विता शर्मा) कक्षा आठवीं के (अर्पित कपूर, एस शशांक, एकाक्ष प्रियांश, जरयाल, शाशवत सिंह, अन्वेषिका शर्मा, विशालाक्षी शर्मा, शिवांश गौतम, रुहानी, अभ्युत कृष्णा, पृशा सिंह) कक्षा नौवीं के (देवकृति शर्मा, उत्कर्ष मेहरा, इप्सा कटोच, अथर्व भारद्वाज, रायना, सुधांशु शर्मा, दक्ष झोपटा, सुयश भंडारी) कक्षा दसवीं के (अंशिका पुरी, पर्व कपूर, अदिति सिंह चौहान, अनामिका शर्मा, शौर्य ठाकुर, स्नेहिल वर्मा) कक्षा ग्यारहवीं के (ऐंजल, अखिल, विकास डोगरा, श्रुति धीमान, आम्या चौहान, निखिल ठाकुर, संचित शूहारदा) कक्षा बारहवीं के (इतिका शर्मा, सरगम शर्मा, आर्यन सोनी, शालिनी ठाकुर इन सब ने मेडल जीते। स्कूल में आज विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, जिसमें स्कूल अकादमिक प्रधानाचार्या डा. हिमांशु शर्मा, स्कूल समन्वयकों शशि बाला एवं कंचन लखनपाल ने उपस्थित रह कर बच्चों को सम्मनित किया, साथ ही प्रधानचार्या ने विज्ञान के सभी अध्यापकों रघुवीर सिहं, भाग सिंह, बिंदु शर्मा, अश्वनी शर्मा, अंजना शर्मा, गरिमा शर्मा व कुमारी शालिनी सहोत्रा को मंच पर बुलाकर बहुत-बहुत बधाई दी।
हमीरपुर - हिम अकादमी विकास नगर में पिछले नवंबर में हुए साइंस ओलंपियाड में बच्चों नें अपनी प्रतिभा को साबित कर दिखाया है कि वे हर क्षेत्र में प्रशस्त हैं। इस परीक्षा में स्कूल के तीसरी से लेकर बारहवीं तक के बच्चों ने भाग लिया। इसमें तीन बच्चों ने मेडल ऑफ डिस्टिंक्शन, उन्नीस बच्चों ने गोल्ड मेडल, बीस छात्रों ने सिल्वर मेडल तथा उन्नीस बच्चों ने ब्रांज मेडल हासिल कर स्कूल का नाम चमकाया। इसमें कक्षा तीसरी के कक्षा चौथी के कक्षा पांचवीं के कक्षा छठी के कक्षा सातवीं के कक्षा आठवीं के कक्षा नौवीं के कक्षा दसवीं के कक्षा ग्यारहवीं के कक्षा बारहवीं के (इतिका शर्मा, सरगम शर्मा, आर्यन सोनी, शालिनी ठाकुर इन सब ने मेडल जीते। स्कूल में आज विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, जिसमें स्कूल अकादमिक प्रधानाचार्या डा. हिमांशु शर्मा, स्कूल समन्वयकों शशि बाला एवं कंचन लखनपाल ने उपस्थित रह कर बच्चों को सम्मनित किया, साथ ही प्रधानचार्या ने विज्ञान के सभी अध्यापकों रघुवीर सिहं, भाग सिंह, बिंदु शर्मा, अश्वनी शर्मा, अंजना शर्मा, गरिमा शर्मा व कुमारी शालिनी सहोत्रा को मंच पर बुलाकर बहुत-बहुत बधाई दी।
भारत की अध्यक्षता में तीसरी G20 शिक्षा कार्य समूह की बैठक भुवनेश्वर में शुरू हुई। इस बैठक में G20 सदस्य देशों, आमंत्रित देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के 60 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। भारत सरकार शिक्षा की पहुंच, गुणवत्ता और परिणामों में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 द्वारा निर्देशित, भारत सरकार उन तरीकों पर पुनर्विचार कर रही है जो कौशल को विकसित करने, मूल्यांकन करने और पहचानने के तरीके हैं। NEP 2020 का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और इसे अधिक समावेशी और न्यायसंगत बनाना है। भारत की अध्यक्षता में शिक्षा कार्य समूह सामान्य वास्तविकताओं को रेखांकित करने और संयुक्त कार्रवाई के लिए सामान्य प्रतिबद्धताओं को दोहराने के लिए सामूहिक रूप से काम कर रहा है। केंद्र मंत्री सुभाष सरकार ने सभी से सामूहिक विशेषज्ञता का उपयोग करने और सामाजिक लाभ प्राप्त करने के लिए मजबूत अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का आह्वान किया। शिक्षा के परिणामों को बेहतर बनाने के लिए प्रौद्योगिकी और नवाचार का लाभ उठाने के लिए सहयोग आवश्यक है। भारत सरकार अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हितधारकों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। विचार-विमर्श के साथ, भुवनेश्वर में खनिज और सामग्री प्रौद्योगिकी संस्थान (IMMT) में एक सप्ताह लंबी मल्टीमीडिया प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में उद्योग, शिक्षा, सरकारी एजेंसियों, बहुपक्षीय एजेंसियों, स्टार्टअप और अन्य संगठनों का सक्रिय प्रतिनिधित्व है। यह प्रदर्शनी प्रतिभागियों को विचारों का आदान-प्रदान करने, अपने उत्पादों और सेवाओं को प्रदर्शित करने और अन्य हितधारकों के साथ नेटवर्क बनाने का अवसर प्रदान करती है। G20 एक अंतर सरकारी मंच है, जिसमें 19 देश और यूरोपीय संघ (EU) शामिल हैं। यह जलवायु परिवर्तन शमन, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय स्थिरता और सतत विकास जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था से संबंधित प्रमुख मुद्दों को संबोधित करने के लिए काम करता है। यह औद्योगिक और विकासशील देशों सहित दुनिया की अधिकांश सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से बना है। यह सकल विश्व उत्पाद (GWP) का 90%, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का 75-80%, विश्व के भूमि क्षेत्र का आधा और वैश्विक आबादी का दो-तिहाई हिस्सा है। G20 की स्थापना कब हुई थी? G20 की स्थापना 1999 में हुई थी। 2008 से, इसकी बैठक वर्ष में कम से कम एक बार बुलाई जाती है। इस शिखर सम्मेलन में सरकार या राष्ट्र प्रमुख, विदेश मंत्री, वित्त मंत्री और प्रत्येक सदस्य राज्य के अन्य उच्च पदस्थ अधिकारी शामिल होते हैं। यूरोपीय संघ का प्रतिनिधित्व यूरोपीय आयोग और यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा किया जाता है।
भारत की अध्यक्षता में तीसरी Gबीस शिक्षा कार्य समूह की बैठक भुवनेश्वर में शुरू हुई। इस बैठक में Gबीस सदस्य देशों, आमंत्रित देशों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साठ से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। भारत सरकार शिक्षा की पहुंच, गुणवत्ता और परिणामों में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति दो हज़ार बीस द्वारा निर्देशित, भारत सरकार उन तरीकों पर पुनर्विचार कर रही है जो कौशल को विकसित करने, मूल्यांकन करने और पहचानने के तरीके हैं। NEP दो हज़ार बीस का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और इसे अधिक समावेशी और न्यायसंगत बनाना है। भारत की अध्यक्षता में शिक्षा कार्य समूह सामान्य वास्तविकताओं को रेखांकित करने और संयुक्त कार्रवाई के लिए सामान्य प्रतिबद्धताओं को दोहराने के लिए सामूहिक रूप से काम कर रहा है। केंद्र मंत्री सुभाष सरकार ने सभी से सामूहिक विशेषज्ञता का उपयोग करने और सामाजिक लाभ प्राप्त करने के लिए मजबूत अनुसंधान और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का आह्वान किया। शिक्षा के परिणामों को बेहतर बनाने के लिए प्रौद्योगिकी और नवाचार का लाभ उठाने के लिए सहयोग आवश्यक है। भारत सरकार अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हितधारकों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। विचार-विमर्श के साथ, भुवनेश्वर में खनिज और सामग्री प्रौद्योगिकी संस्थान में एक सप्ताह लंबी मल्टीमीडिया प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में उद्योग, शिक्षा, सरकारी एजेंसियों, बहुपक्षीय एजेंसियों, स्टार्टअप और अन्य संगठनों का सक्रिय प्रतिनिधित्व है। यह प्रदर्शनी प्रतिभागियों को विचारों का आदान-प्रदान करने, अपने उत्पादों और सेवाओं को प्रदर्शित करने और अन्य हितधारकों के साथ नेटवर्क बनाने का अवसर प्रदान करती है। Gबीस एक अंतर सरकारी मंच है, जिसमें उन्नीस देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं। यह जलवायु परिवर्तन शमन, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय स्थिरता और सतत विकास जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था से संबंधित प्रमुख मुद्दों को संबोधित करने के लिए काम करता है। यह औद्योगिक और विकासशील देशों सहित दुनिया की अधिकांश सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से बना है। यह सकल विश्व उत्पाद का नब्बे%, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का पचहत्तर-अस्सी%, विश्व के भूमि क्षेत्र का आधा और वैश्विक आबादी का दो-तिहाई हिस्सा है। Gबीस की स्थापना कब हुई थी? Gबीस की स्थापना एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में हुई थी। दो हज़ार आठ से, इसकी बैठक वर्ष में कम से कम एक बार बुलाई जाती है। इस शिखर सम्मेलन में सरकार या राष्ट्र प्रमुख, विदेश मंत्री, वित्त मंत्री और प्रत्येक सदस्य राज्य के अन्य उच्च पदस्थ अधिकारी शामिल होते हैं। यूरोपीय संघ का प्रतिनिधित्व यूरोपीय आयोग और यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा किया जाता है।
साउथ के भगवान माने जाने वाले सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म 'कबाली' से हटाए गए पांच सीन प्रशसंकों के लिए रिलीज कर दिए गए। यह एक तरह से नए साल के मौके पर सरप्राइज हैं। गौरतलब हैं कि कबाली इस साल सबसे ज्यादा कमाई करने वाली तमिल फिल्मों में से एक है। रिलीज किये गए पहले सीन में राधिका आप्टे और रजनीकांत रोमांटिक मजाक करते नजर आ रहे हैं। जबकि दूसरे सीन में सुपरस्टार रजनीकांत को एक मलेशियाई डॉन बंदूक देता दिख रहा है। वहीं तीसरे सीन में वह अपनी बेटी (धनिष्का) से अपनी पत्नी के प्रति अपने प्यार को जाहिर करते हुए नज़र आ रहे हैं। चौथे सीन में अभिनेता दिनेश अपना परिचय देते नजर आ रहे हैं, जबकि पांचवें सीन में रजनीकांत को अपनी बेटी के प्रेमी के बारे मे मालूमात होता हैं। जानिए, मौत के बाद आपके फ़ेसबुक या दूसरे सोशल एकाउंट का क्या होगा?
साउथ के भगवान माने जाने वाले सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म 'कबाली' से हटाए गए पांच सीन प्रशसंकों के लिए रिलीज कर दिए गए। यह एक तरह से नए साल के मौके पर सरप्राइज हैं। गौरतलब हैं कि कबाली इस साल सबसे ज्यादा कमाई करने वाली तमिल फिल्मों में से एक है। रिलीज किये गए पहले सीन में राधिका आप्टे और रजनीकांत रोमांटिक मजाक करते नजर आ रहे हैं। जबकि दूसरे सीन में सुपरस्टार रजनीकांत को एक मलेशियाई डॉन बंदूक देता दिख रहा है। वहीं तीसरे सीन में वह अपनी बेटी से अपनी पत्नी के प्रति अपने प्यार को जाहिर करते हुए नज़र आ रहे हैं। चौथे सीन में अभिनेता दिनेश अपना परिचय देते नजर आ रहे हैं, जबकि पांचवें सीन में रजनीकांत को अपनी बेटी के प्रेमी के बारे मे मालूमात होता हैं। जानिए, मौत के बाद आपके फ़ेसबुक या दूसरे सोशल एकाउंट का क्या होगा?
ऑस्ट्रेलिया ने 24 फरवरी से शुरू हो रहे भारत दौरे के लिए अपने स्क्वॉड की घोषणा कर दी है. सीमित ओवरों की इस सीरीज से मिशेल स्टार्क और मिशेल मार्श दोनों बाहर हैं, जबकि एरॉन फिंच की कप्तानी बरकरार है. चोट की वजह से 29 साल के स्टार तेज गेंदबाज स्टार्क दौरे के लिए उपलब्ध नहीं हैं, जबकि ऑलराउंडर मिशेल मार्श को ऑस्ट्रेलियाई दल में जगह नहीं मिली है. स्टार्क को श्रीलंका के खिलाफ केनबरा में खेले गए दूसरे टेस्ट के अंतिम दिन गेंदबाजी करते हुए चोट लगी थी. 27 साल के तेज गेंदबाज केन रिचर्ड्सन ने जून 2018 के बाद वापसी की है. बिग बैश लीग- 2018/19 में अब तक सर्वाधिक 22 विकेट लेने का उन्हें यह इनाम मिला है. मिशेल मार्श के अलावा पीटर सिडल और बिली स्टैनलेक को भी बाहर किया गया है, जो पिछले महीने अपने घर में भारत के खिलाफ टीम में शामिल थे. पीठ के निचले हिस्से में फ्रैक्चर से उबर रहे तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड, जो श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में भी नहीं खेले थे, की गैरमौजूदगी में संयुक्त रूप से पैट कमिंस और एलेक्स कैरी उपकप्तान बनाए गए हैं. श्रीलंका के विरुद्ध भी ये दोनों इसी भूमिका में थे. ऑस्ट्रेलियाई टीम टी-20 मुकाबले से भारत दौरे का आगाज करेगी और इसके बाद पांच वनडे मैचों की सीरीज खेली जाएगी. एरॉन फिंच (कप्तान), पैट कमिंस, एलेक्स कैरी, जेसन बेहरेनडॉर्फ, नाथन कूल्टर नाइल, पीटर हैंड्सकॉम्ब, उस्मान ख्वाजा, नाथन लियोन, शॉन मार्श, ग्लेन मैक्सवेल, झे रिचर्डसन, केन रिचर्डसन, डार्सी शॉर्ट, मार्कस स्टोइनिस, एश्टन टर्नर, एडम जांपा. उल्लेखनीय है कि हाल में खत्म हुए ऑस्ट्रेलिया दौरै में भारत ने कंगारू टीम को वनडे सीरीज में 2-1 से मात दी थी, जबकि टी-20 सीरीज 1-1 से बराबर रही थी. उन्होंने कहा, 'स्मिथ की इच्छा पहले आईपीएल खेलने का है. जिसके बाद वह विश्व कप और फिर एशेज खेलेंगे. ' स्मिथ और उनके टीम साथी डेविड वॉर्नर पर लगा एक साल का प्रतिबंध 29 मार्च को समाप्त होगा. ऑस्ट्रेलिया को पिछली छह द्विपक्षीय वनडे सीरीज में हार का सामना करना पड़ा है.
ऑस्ट्रेलिया ने चौबीस फरवरी से शुरू हो रहे भारत दौरे के लिए अपने स्क्वॉड की घोषणा कर दी है. सीमित ओवरों की इस सीरीज से मिशेल स्टार्क और मिशेल मार्श दोनों बाहर हैं, जबकि एरॉन फिंच की कप्तानी बरकरार है. चोट की वजह से उनतीस साल के स्टार तेज गेंदबाज स्टार्क दौरे के लिए उपलब्ध नहीं हैं, जबकि ऑलराउंडर मिशेल मार्श को ऑस्ट्रेलियाई दल में जगह नहीं मिली है. स्टार्क को श्रीलंका के खिलाफ केनबरा में खेले गए दूसरे टेस्ट के अंतिम दिन गेंदबाजी करते हुए चोट लगी थी. सत्ताईस साल के तेज गेंदबाज केन रिचर्ड्सन ने जून दो हज़ार अट्ठारह के बाद वापसी की है. बिग बैश लीग- दो हज़ार अट्ठारह/उन्नीस में अब तक सर्वाधिक बाईस विकेट लेने का उन्हें यह इनाम मिला है. मिशेल मार्श के अलावा पीटर सिडल और बिली स्टैनलेक को भी बाहर किया गया है, जो पिछले महीने अपने घर में भारत के खिलाफ टीम में शामिल थे. पीठ के निचले हिस्से में फ्रैक्चर से उबर रहे तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड, जो श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में भी नहीं खेले थे, की गैरमौजूदगी में संयुक्त रूप से पैट कमिंस और एलेक्स कैरी उपकप्तान बनाए गए हैं. श्रीलंका के विरुद्ध भी ये दोनों इसी भूमिका में थे. ऑस्ट्रेलियाई टीम टी-बीस मुकाबले से भारत दौरे का आगाज करेगी और इसके बाद पांच वनडे मैचों की सीरीज खेली जाएगी. एरॉन फिंच , पैट कमिंस, एलेक्स कैरी, जेसन बेहरेनडॉर्फ, नाथन कूल्टर नाइल, पीटर हैंड्सकॉम्ब, उस्मान ख्वाजा, नाथन लियोन, शॉन मार्श, ग्लेन मैक्सवेल, झे रिचर्डसन, केन रिचर्डसन, डार्सी शॉर्ट, मार्कस स्टोइनिस, एश्टन टर्नर, एडम जांपा. उल्लेखनीय है कि हाल में खत्म हुए ऑस्ट्रेलिया दौरै में भारत ने कंगारू टीम को वनडे सीरीज में दो-एक से मात दी थी, जबकि टी-बीस सीरीज एक-एक से बराबर रही थी. उन्होंने कहा, 'स्मिथ की इच्छा पहले आईपीएल खेलने का है. जिसके बाद वह विश्व कप और फिर एशेज खेलेंगे. ' स्मिथ और उनके टीम साथी डेविड वॉर्नर पर लगा एक साल का प्रतिबंध उनतीस मार्च को समाप्त होगा. ऑस्ट्रेलिया को पिछली छह द्विपक्षीय वनडे सीरीज में हार का सामना करना पड़ा है.
हम सबसे पहले उस जीन पर देखेंगे जो इसमें शामिल है, प्रोटीन देखेंगे, हमारे पास प्रोटीन की 3 डाइमेंशनल रचना है और क्या हम एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी की सहायता से 3 डाइमेंशनल रचना प्राप्त कर सकते हैं, क्या हमें एक्टिव साइट की जानकारी है, हमें जानने की और वैलिडेट करने की आवश्यकता है की क्या यही एक्टिव साइट है, यह सब टारगेट पहचान कहलाता है। एक बार जब हम टारगेट पा लेते हैं और कुछ विशेष टारगेट को वैलिडेट कर लेते हैं तब हमें लीड को पहचानने की आवश्यकता है। अब आप लाखों और लाखों कंपाउंड पर परीक्षण करते हैं यही इन सिलिको संरचनात्मक डिजाइन है । तो हम लाखों और लाखों कंपाउंड लेते हैं और उनको Dock करते हैं । डॉकिंग से मतलब है, कि हम देखने की कोशिश करते हैं कंपाउंड टारगेट के एक्टिव साइट से बंधता है, यह कैसे बंधता है? क्या यह अच्छे से बंधता है, और आप सारी चीज करते हैं इसी को ही इनसिलिको विधि कहते हैं । हम इन विट्रो विधि कर सकते हैं, हम हजारों कंपाउंड ले सकते हैं और उनको एक विशेष प्रोटीन परीक्षण कर सकते हैं और देखते हैं कौन सा कंपाउंड प्रोटीन के लिए बहुत बहुत अधिक निष्क्रिय गुण रखते हैं, इन विट्रो विधि कहलाती है । एक बार जब हम एक या दों कंपाउंड से संतुष्ट हो जाते हैं जोकि ड्रग समानता गुण रखते हैं, फिर हम इन वीवो के लिए जाते हैं जोकि जानवरों पर अध्ययन है । हमें यह नहीं भूलना है की साथ ही साथ हमको लीड ऑप्टिमाइजेशन करना है । क्योंकि यह संभव है कि हमारे द्वारा सबसे अच्छा लीड कंपाउंड जो पाया जाता है उसके पास ड्रग समानता गुण ना हो, इसलिए हम संरचना में परिवर्तन कर सकते हैं जिससे ड्रग समानता गुण में वृद्धि होती है, और हो सकता है की विषाक्तता कम हो जाए, हो सकता है साइड इफेक्ट कम हो जाए, हो सकता है यह अति विशिष्ट बन जाए और घुलनशीलता बढ़ जाए, इस पूरी प्रक्रिया को लीड ऑप्टिमाइजेशन कहते हैं। साथ ही साथ हमको विषाक्तता जानने की भी आवश्यकता है, हम इसको जानवरों पर या सेल लाइन पर कर सकते हैं । विभिन्न तरह की सेल लाइन उपलब्ध है जिस पर हम कंपाउंड की विषाक्तता अध्ययन कर सकते हैं। तो यह लीड ऑप्टिमाइजेशन है, यद्यपि लीड पहचान और लीड ऑप्टिमाइजेशन आपस में यथाशीघ्र मिल जाते हैं ऐसे ही आप एक या दो कंपाउंड को पहचान लेते हैं । अब ऑप्टिमाइजेशन की प्रक्रिया लगातार करनी होगी जिससे कि गुण को संतुष्ट करने के साथ-साथ उनको शुरू भी किया जा सके। (Refer Slide Time: 10:23) Target identification and validation understand the disease mechanism by using cellular and genetic approaches to identify potential drug targets. 1. develop concerning the disease etiology, whether the disease can be targeted. (example HIV replication within T-cells) Understanding disease mechanism to narrow down on a particular target type.(example HIV proteases are known to be important for replication). 3. Genomics/Proteomics - providing gene sequence and gene expression data for disease tissues when compared to normal tissues चलिए और विस्तार से देखते हैं, यदि हम टारगेट को पहले देखना चाहते हैं तो हमें बीमारी की प्रक्रिया को समझना होगा । मैं कह रहा हूं कि मैं इन्फ्लेमेशन में रुचि रखता हूं, यह जानकारी कैसे आगे बढ़ेगी? वहां पर प्रोस्टाग्लैंडइन और लुकोट्राइन्स नाम का कुछ है, तो प्रोस्टाग्लैंडइन पाथवे में बहुत सारे एंजाइम्स हैं, लुकोट्राइन्स पाथवे में बहुत सारे एंजाइम हैं, तो मैं इनमें से कोई एंजाइम निष्क्रिय करने की कोशिश करूंगा । सेल्यूलर जेनेटिक प्रक्रिया के आधार पर मैं किसी बीमारी के कार्यशैली को समझ सकता हूं जिससे मैं एक विशेष टारगेट को चुन सकता हूं । यहां बहुत से टारगेट हो सकते हैं, क्योंकि आप इन्फ्लेमेशन का प्रोस्टाग्लैंडइन पाथवे देखते हैं, उसमें बहुत सारे एंजाइम हैं जैसे, cyclooxygenase 2, prostagladin E synthase 1 इत्यादि । उसी तरह लुकोट्राइन्स में आपके पास, lipoxygenase है, हमारे पास बहुत से एंजाइम हैं जिनको हम टारगेट कर सकते हैं । उसके पश्चात हमें बीमारी के कारण का पता लगाने की आवश्यकता है, बीमारी कहां पर टारगेट की जा सकती है यह जानना अत्यधिक महत्वपूर्ण है । यह, जगह हो सकती हैं जहां पर बीमारी को लक्षित किया जा सके । उनके लिए HIV Replication, T cell के अंदर होता है तो हम वहां पर इसका टारगेट प्राप्त कर सकते हैं । ऐसी भी बीमारियां हैं जिनका टारगेट आप नहीं पहचान पाते हैं अब यह हमारे लिए समस्या का कारण होते हैं । एक विशेष टारगेट को पहचानने के लिए बीमारी की कार्यशैली समझना अति आवश्यक है । एक बार जब आप बीमारी की कार्यशैली को समझ लेते हैं वहां पर बहुत से टारगेट हो सकते हैं, आपको टारगेट पर ध्यान केंद्रित करना है । उदाहरण के लिए HIV Protease रिप्लिकेशन के लिए आवश्यक है तो यह मेरा टारगेट हो सकता है, । और जैसा कि मैं इन्फ्लेमेशन के बारे में बात कर रहा हूं, वह मेरा टारगेट हो सकता है । अब हमें Genomics और Proteomics की आवश्यकता है । जब हम डिजीज टिश्यू और नॉर्मल टिश्यू में तुलना करते हैं अब हमें जीन संरचना, और जीन एक्सप्रेशन डाटा प्राप्त करने की आवश्यकता है। हमें यह जानना है कौन सा जीन अपरेगुलेटेड है और कौन सा जीन डाउनरेगुलेटेड है, जबकि वहां एक बीमारी की स्थिति है और आप एक सामान्य स्थिति चाहते हैं । (Refer Slide Time: 12:44 ) If genes and their protein are highly expressed in disease tissues, but their expression is very low in normal tissues .. Can be potential targets for therapy. Validation - in vitro (usually cell based animal models) research that shows the modulation of target activity leads to the desired change in behavior of diseased cells. यदि जीन और प्रोटीन, बीमारी टिश्यू में अत्यधिक दिख रहे हैं किंतु सामान्य टिश्यू में यह बहुत कम दिख रहे हैं तो यह इलाज के लिए टारगेट हो सकता है। तो हम उन जीन पर अधिक ध्यान देंगे जो परिवर्तित हो सकते हैं । फिर हमें वैलिडेट करने की आवश्यकता है, वैलिडेट का मतलब यह है कि हमें कुछ इन विट्रो प्रायोगिक अध्ययन करने होंगे, मैं कुछ सेल के आधार पर अध्ययन कर सकता हूं । मैं विभिन्न प्रकार के सेल का प्रयोग कर सकता हूं, यदि में कैंसर सेल देख रहा हूं, तो कैंसर सेल का प्रयोग कर सकता हूं । इन्फ्लेमेशन के लिए, मैं सेल ले सकता हूं और इनफॉरमेशन प्रेरित कर सकता हूं और फिर उनका निरीक्षण कर सकता हूं क्या वास्तव में वह चीजें हुई है, क्या जीन डिजीज और सामान्य सेल के आधार पर अपरेगुलेटेड या डाउनरेगुलेटेड हो रहे हैं । यह प्रक्रिया वैलिडेशन कहलाती है, हमें इनविट्रो अध्ययन के आधार पर आश्वस्त होना होगा । (Refer Slide Time: 13:31) Lead Identification Develop an assay to measure the activity of compounds that affects the target in cell or bacterial culture or in vitro (biochemical assay) (e.g. compound X inhibits HIV protease). Screen compounds that have activity against this target. Measurement (colourimetry, fluorescence, radioactivity) Biotech and pharmaceutical companies have large small molecule compound libraries, which can include FDA-approved drugs, non FDA-approved drug candidates with known activity and compounds with unknown activity. अब लीड पर देखेंः एक बार सोचें, हम टारगेट को प्राप्त कर चुके हैं, तो हम अब क्या करें ? हमें लीड को डिजाइन करने की आवश्यकता है, हम यह कैसे करेंगे? इस प्रक्रिया में बहुत बहुत सारे चरण सम्मिलित हैं, उदाहरण के लिए यदि आपका मॉलिक्यूल किसी प्रोटीन और एंजाइम से बंधता है, वहां कुछ परिवर्तन हो सकते हैं, जैसे कि फ्लोरोसेंस, रेडियो एक्टिविटी परिवर्तन । तो हम इनकी गणना कर सकते हैं और यह लीड मॉलिक्यूल की कार्यशैली की सामान्य मॉलिक्यूल के साथ गणना हो सकती है। तो हम एक बड़ी संख्या में लीड मॉलिक्यूल परख सकता हूं और उसके अनुसार माप सकता हूं जिसको लीड कहते हैं, अब हमें एक तरीके की जरूरत है जिसका मतलब है प्रायोगिक तरीका, तरीका कुछ और नहीं प्रायोगिक तरीका है जिससे हम किसी कंपाउंड के गुणों को जान सकते हैं जोकि टारगेट को प्रभावित करता है । कंपाउंड प्रोटीन की साइट पर जाता है और बंधता है, और जाके एंजाइम से बंधता है, तब वहां कैलोरीमेट्री, फ्लोरोसेंस, रेडियो एक्टिविटी में परिवर्तन होता है । और कुछ जैव रासायनिक परिवर्तन जिनको कि मैं अपनी प्रयोगशाला में बैक्टीरिया या एनिमल सेल की सहायता से माप सकता यह जैव रासायनिक प्रक्रिया है । यदि मैं किसी विशेष टारगेट को निष्क्रिय करना चाहता हूं अब मुझे विभिन्न मॉलिक्यूल का परीक्षण करना होगा इसके लिए उन्हें एक प्रक्रिया का विकास करना होगा । उदाहरण के लिए यह विशेष कंपाउंड प्रोटीन को रोकता है, मैं कह सकता हूं एस्प्रिन जा के cyclooxygenase 2 एंजाइम को कमजोर करता है और इन्फ्लेमेटरी पाथवे को इस तरह प्रभावित करता है । किंतु सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि मेरे पास एक प्रायोगिक तरीका होना चाहिए जिसको कि मैं अपनी प्रयोगशाला में अपना सकता हूं, इसका मतलब है कि मुझको वह विशेष प्रोटीन शुद्धअवस्था में चाहिए, मैं एक बड़ी संख्या में कंपाउंड को उस पर प्रयोग कर सकता हूं। मुझे सभी कंपाउंड को सम्मिलित करना है उस विशेष प्रोटीन के लिए, और फिजियो केमिकल और बायोकेमिकल परिवर्तन जो कि हो रहे होंगे, की जांच, मानक के संबंध में करनी है, और इसकी कार्यशैली को पहचानना है । मानक का मतलब, बिना किसी कंपाउंड से है। इस तरह से हम बड़ी संख्या में लीड मॉलिक्यूल को परखते हैं । इसको स्क्रीनिंग कहते हैं, स्क्रीन कंपाउंड वह है जो विशेष टारगेट के लिए कुछ प्रभाव रखते हैं । यदि आप बायोटेक और फार्मास्यूटिकल कंपनियों को देखें तो उनके पास छोटे मॉलिक्यूल की बहुत बड़ी लाइब्रेरी होती है, उनके पास FDA से अनुमोदित और बिना अनुमोदित ड्रग कैंडिडेट होते हैं । लाइब्रेरी में बहुत सारे कैंडिडेट पाए जाते हैं । इसलिए बहुत जल्दी अपनी प्रयोगशाला में इनकी स्क्रीनिंग शुरू कर देते हैं, तो यह इन विट्रो प्रकार का तरीका है, और यह देखें लीड पहचान का यह बहुत विश्वसनीय तरीका है जिससे कि सबसे अच्छा कंपाउंड मिलता है । तो इस प्रकार से आप इन विट्रो कर सकते हैं । आप इनसिल्को भी कर सकते हैं, इन सभी कंपाउंड को विशेष टारगेट पर डॉकिंग कीजिए, और उनकी पहचान कीजिए जो कि एंजाइम के एक्टिव साइट पर अच्छी बाइंडिंग आते हैं, यह भी किया जा सकता है, इसको इनसिलिको कहते हैं । मैं इन सिलिको को और इन विट्रो को मिला सकता हूं, मैं हजारों और हजारों मॉलिक्यूल की संरचना को ले सकता हूं और उनको टारगेट की एक्टिव साइट पर डॉकिंग करा सकता हूं और यह देख सकता हूं इनमें से कौन सा सबसे अच्छे से बाइंडिंग हुआ है उसके बाद मैं सिर्फ अच्छे कंपाउंड को अपनी लाइफ में इन विट्रो एक्सपेरिमेंट करके देख सकता हूं की क्या वह अच्छी एक्टिविटी दिखा रहे हैं । तू इस तरह से मैं लाखों कंपाउंड इन विट्रो अध्ययन से बचा सकता हूं जो कि बहुत ही महंगा और समय लेने वाला है । मैं कंप्यूटेशनल इनसिल्को तरीकों का प्रयोग करता हूं, मैं चयन करता हूं, डॉकिंग करता हूं और उनमें से कुछ कंपाउंड जोकि बहुत ही अच्छे हैं उनका प्रयोग करता हूं, उसके बाद इन चयनित मॉलिक्यूल को मैं अपनी प्रयोगशाला में ले जाता हूं और इनके जैव रासायनिक प्रकार को देखता हूं इस प्रकार लीड का चयन होता है । तो इस प्रकार मैं लाखों कंपाउंड्स को अपनी प्रयोगशाला में प्रयोग करने से बच जाता हूं जो कि बहुत ही समय लेने वाला है और महंगा भी, इनसिल्को चयन का तरीका प्रयोग कर सकता हूं और तब मैं सिर्फ कुछ कंपाउंड को जो बहुत ही अच्छे दिख रहे हैं । और उसके बाद high throughput स्क्रीनिंग के माध्यम से इनको इन विट्रो में प्रयोग किया जाता है, इसको HTS, High Throughput Screening कहते हैं, और फिर लीड मॉलिक्यूल को पहचानते हैं जोकि बहुत ही अच्छे दिख रहे हैं इसको लीड पहचान जाता है । (Refer Slide Time: 18:26) Reduce the number of compounds to test, (from 40,000 per library to few) testing is expensive. In silico methods : short listing/screening/activity prediction. High through-put screens (HTS) can test many compounds in a short amount of time. HTS screens are often chemical and cell-based screens The accuracy of each hit or lead compound is then further validated with more in-depth cell-based and animal research. " कंप्यूटेशनल इनसिलिको तरीकों की सहायता से हम बहुत बड़ी मॉलिक्यूल की संख्या को टेस्ट करने से बस जाते हैं, इसलिए इसको हम एक स्क्रीनिंग टूल के रूप में प्रयोग कर सकते हैं, बहुत बड़ी लीड मॉलिक्यूल की संख्या को एक्टिव साइट पर डॉकिंग और उनमें से सिर्फ उन को चुनना जो कि बहुत अच्छे हो, इनसिल्को स्क्रीनिंग कहा जाता है । अब हम High Throughput Screening का प्रयोग कर सकते हैं, यह HTS है, कती है । तो इसका प्रयोग करते हुए हम बहुत सारे गतिविधि अध्ययन कर सकते हैं यह बहुत समय बचाता है । यदि हमें बायोकेमिकल और शैल पर आधारित चयनित कंपाउंड मिल जाते हैं, और यदि अच्छे कैंडिडेट हैं तो हम और प्रयोग कर सकते हैं, इसको लेकिन हम पशु अध्ययन या फिर और परीक्षण कर सकते हैं । शुरुआत में हम बहुत सारे कंपाउंड्स का High Throughput Screening की मदद से प्रयोग करते हैं और वह कैंडिडेट जोकि बहुत अच्छा हो उस पर ज्यादा समय देते हैं और उसका अध्ययन गहराई में जाकर करते हैं । इनका जैव रासायनिक अध्ययन और इनको पशुओं पर वैलिडेट कर सकते हैं । (Refer Slide Time: 19:37 ) Lead optimization Prior to clinical trials a lead compound or compounds are modified structurally to improve activity, lower toxicity, improve stability (T / pH) and safety In vitro cell-based and In vivo animal studies to collect data on toxicity and to understand the metabolism of compounds in the body. Then, application to the FDA for pre-clinical studies and clinical trials. और फिर लीड ऑप्टिमाइजेशन आता है । अभी हमने एक या दो कैंडिडेट या कुछ कैंडिडेट जोकि अत्यधिक आशा जनक हैं, इनके पास अच्छी कार्यशैली है, लेकिन जैसा कि मैं बता चुका हूं इनकी विषाक्तता भी कम होनी चाहिए, यह स्थिर होना चाहिए, यह तापमान और पीएच के लिए सुरक्षित होना चाहिए । तो इस तरह से लीड ऑप्टिमाइजेशन प्रक्रिया में सम्मिलित होता है, क्योंकि कोई कंपाउंड जिसके पास बहुत अच्छी कार्यशैली हो किंतु वह विषाक्त हो सकता है, ऐसा कैंसर में होता है । क्योंकि कीमोथेरेपी में प्रयोग होने वाले ड्रग केवल कैंसर सेल को ही मारने में सक्षम नहीं होते अपितु सामान्य सेल को भी मार सकते हैं, यह अत्यधिक विषाक्त होते हैं। जबकि दूसरा सबसे अच्छा कंपाउंड, मतलब वह कंपाउंड जो पहले कंपाउंड जैसी कार्यशैली ना रखता हूं, उसके पास बेहतर स्थिरता और कम विषाक्तता या अच्छी पीएच स्थिरता इत्यादि हो सकती है । यह लीड ऑप्टिमाइजेशन का हिस्सा है जिसे हम लोग करेंगे । हमलोग डाटा को एकत्रित कर सकते हैं, जो कोशिका अध्ययन संबंधी या पशु अध्ययन संबंधी हो सकता है । इन कंपाउंड की उपापचय की प्रक्रिया को समझना होगा, क्या पीएच पर स्थिर है, कंपाउंड लीवर के क्षेत्र में स्थिर इत्यादि है । हो सकता है सबसे अच्छा कंपाउंड लीवर के कार्यशैली के कारण बहुत स्थिर ना हो । वास्तव में ऐसा हो सकता है दूसरा सबसे अच्छा कंपाउंड पहले से ज्यादा स्थिर हो । इस तरीके से एक या दो कंपाउंड को सुनते हैं जो कि सिर्फ कार्यशैली को सुनिश्चित करें बल्कि उनके पास अच्छी कार्यशैली हो और वह काफी स्थिर हो, इसको लीड ऑप्टिमाइजेशन कहा जाता है। (Refer Slide Time: 21:29) New Strategies in Drug discovery Design of novel drug candidate Based on target site information or pharmacophore modelling Protein structure modeling = to identify where known compounds might interact with protein targets. X ray crystallography data of proteins यह जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है, प्रीक्लिनिकल, पशु परीक्षण या मानव वॉलिंटियर्स परीक्षण में जाने से पहले । इसलिए नई तकनीकों को जब पुरानी तकनीकों के साथ तुलना की जाती है. टारगेट साइट की जानकारी के अनुसार जब नया ड्रंक कैंडिडेट बनाया जाता है, मॉलिक्यूल की संरचना के आधार पर, हम बाद में Pharmacophore और समय देने जा रहे हैं । इनको संरचनात्मक गुण कहा जाता है, हो सकता है मॉलिक्यूल के पास कुछ विशिष्ट संरचनात्मक गुण हो जैसे कि हाइड्रोसिल ग्रुप, या मॉलिक्यूल के पास कुछ acidic ग्रुप हो, और हो सकता है इसके पास hetrocycle ग्रुप जो कि इसको कार्यशैली देता है । इस को पहचानने का प्रयास करेंगे । निश्चित तौर पर जिस टारगेट प्रोटीन को हम मॉडल करने का प्रयत्न करेंगे, हम यह भी जानेंगे कैसे प्रोटीन से सहभागिता दिखाता है और बंधता है। और कैसे हम एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी द्वारा प्रोटीन की संरचना जानते हैं। पिछले 15 से 20 वर्षों में ड्रग डिजाइन के क्षेत्र में कुछ नई तकनीकीया शामिल हुई है जोकि परंपरागत तरीकों से बिल्कुल अलग है। बहुत से कंप्यूटेशनल टूल और विश्लेषणात्मक टूल ड्रग डिजाइन में सम्मिलित हुए हैं
हम सबसे पहले उस जीन पर देखेंगे जो इसमें शामिल है, प्रोटीन देखेंगे, हमारे पास प्रोटीन की तीन डाइमेंशनल रचना है और क्या हम एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी की सहायता से तीन डाइमेंशनल रचना प्राप्त कर सकते हैं, क्या हमें एक्टिव साइट की जानकारी है, हमें जानने की और वैलिडेट करने की आवश्यकता है की क्या यही एक्टिव साइट है, यह सब टारगेट पहचान कहलाता है। एक बार जब हम टारगेट पा लेते हैं और कुछ विशेष टारगेट को वैलिडेट कर लेते हैं तब हमें लीड को पहचानने की आवश्यकता है। अब आप लाखों और लाखों कंपाउंड पर परीक्षण करते हैं यही इन सिलिको संरचनात्मक डिजाइन है । तो हम लाखों और लाखों कंपाउंड लेते हैं और उनको Dock करते हैं । डॉकिंग से मतलब है, कि हम देखने की कोशिश करते हैं कंपाउंड टारगेट के एक्टिव साइट से बंधता है, यह कैसे बंधता है? क्या यह अच्छे से बंधता है, और आप सारी चीज करते हैं इसी को ही इनसिलिको विधि कहते हैं । हम इन विट्रो विधि कर सकते हैं, हम हजारों कंपाउंड ले सकते हैं और उनको एक विशेष प्रोटीन परीक्षण कर सकते हैं और देखते हैं कौन सा कंपाउंड प्रोटीन के लिए बहुत बहुत अधिक निष्क्रिय गुण रखते हैं, इन विट्रो विधि कहलाती है । एक बार जब हम एक या दों कंपाउंड से संतुष्ट हो जाते हैं जोकि ड्रग समानता गुण रखते हैं, फिर हम इन वीवो के लिए जाते हैं जोकि जानवरों पर अध्ययन है । हमें यह नहीं भूलना है की साथ ही साथ हमको लीड ऑप्टिमाइजेशन करना है । क्योंकि यह संभव है कि हमारे द्वारा सबसे अच्छा लीड कंपाउंड जो पाया जाता है उसके पास ड्रग समानता गुण ना हो, इसलिए हम संरचना में परिवर्तन कर सकते हैं जिससे ड्रग समानता गुण में वृद्धि होती है, और हो सकता है की विषाक्तता कम हो जाए, हो सकता है साइड इफेक्ट कम हो जाए, हो सकता है यह अति विशिष्ट बन जाए और घुलनशीलता बढ़ जाए, इस पूरी प्रक्रिया को लीड ऑप्टिमाइजेशन कहते हैं। साथ ही साथ हमको विषाक्तता जानने की भी आवश्यकता है, हम इसको जानवरों पर या सेल लाइन पर कर सकते हैं । विभिन्न तरह की सेल लाइन उपलब्ध है जिस पर हम कंपाउंड की विषाक्तता अध्ययन कर सकते हैं। तो यह लीड ऑप्टिमाइजेशन है, यद्यपि लीड पहचान और लीड ऑप्टिमाइजेशन आपस में यथाशीघ्र मिल जाते हैं ऐसे ही आप एक या दो कंपाउंड को पहचान लेते हैं । अब ऑप्टिमाइजेशन की प्रक्रिया लगातार करनी होगी जिससे कि गुण को संतुष्ट करने के साथ-साथ उनको शुरू भी किया जा सके। Target identification and validation understand the disease mechanism by using cellular and genetic approaches to identify potential drug targets. एक. develop concerning the disease etiology, whether the disease can be targeted. Understanding disease mechanism to narrow down on a particular target type.. तीन. Genomics/Proteomics - providing gene sequence and gene expression data for disease tissues when compared to normal tissues चलिए और विस्तार से देखते हैं, यदि हम टारगेट को पहले देखना चाहते हैं तो हमें बीमारी की प्रक्रिया को समझना होगा । मैं कह रहा हूं कि मैं इन्फ्लेमेशन में रुचि रखता हूं, यह जानकारी कैसे आगे बढ़ेगी? वहां पर प्रोस्टाग्लैंडइन और लुकोट्राइन्स नाम का कुछ है, तो प्रोस्टाग्लैंडइन पाथवे में बहुत सारे एंजाइम्स हैं, लुकोट्राइन्स पाथवे में बहुत सारे एंजाइम हैं, तो मैं इनमें से कोई एंजाइम निष्क्रिय करने की कोशिश करूंगा । सेल्यूलर जेनेटिक प्रक्रिया के आधार पर मैं किसी बीमारी के कार्यशैली को समझ सकता हूं जिससे मैं एक विशेष टारगेट को चुन सकता हूं । यहां बहुत से टारगेट हो सकते हैं, क्योंकि आप इन्फ्लेमेशन का प्रोस्टाग्लैंडइन पाथवे देखते हैं, उसमें बहुत सारे एंजाइम हैं जैसे, cyclooxygenase दो, prostagladin E synthase एक इत्यादि । उसी तरह लुकोट्राइन्स में आपके पास, lipoxygenase है, हमारे पास बहुत से एंजाइम हैं जिनको हम टारगेट कर सकते हैं । उसके पश्चात हमें बीमारी के कारण का पता लगाने की आवश्यकता है, बीमारी कहां पर टारगेट की जा सकती है यह जानना अत्यधिक महत्वपूर्ण है । यह, जगह हो सकती हैं जहां पर बीमारी को लक्षित किया जा सके । उनके लिए HIV Replication, T cell के अंदर होता है तो हम वहां पर इसका टारगेट प्राप्त कर सकते हैं । ऐसी भी बीमारियां हैं जिनका टारगेट आप नहीं पहचान पाते हैं अब यह हमारे लिए समस्या का कारण होते हैं । एक विशेष टारगेट को पहचानने के लिए बीमारी की कार्यशैली समझना अति आवश्यक है । एक बार जब आप बीमारी की कार्यशैली को समझ लेते हैं वहां पर बहुत से टारगेट हो सकते हैं, आपको टारगेट पर ध्यान केंद्रित करना है । उदाहरण के लिए HIV Protease रिप्लिकेशन के लिए आवश्यक है तो यह मेरा टारगेट हो सकता है, । और जैसा कि मैं इन्फ्लेमेशन के बारे में बात कर रहा हूं, वह मेरा टारगेट हो सकता है । अब हमें Genomics और Proteomics की आवश्यकता है । जब हम डिजीज टिश्यू और नॉर्मल टिश्यू में तुलना करते हैं अब हमें जीन संरचना, और जीन एक्सप्रेशन डाटा प्राप्त करने की आवश्यकता है। हमें यह जानना है कौन सा जीन अपरेगुलेटेड है और कौन सा जीन डाउनरेगुलेटेड है, जबकि वहां एक बीमारी की स्थिति है और आप एक सामान्य स्थिति चाहते हैं । If genes and their protein are highly expressed in disease tissues, but their expression is very low in normal tissues .. Can be potential targets for therapy. Validation - in vitro research that shows the modulation of target activity leads to the desired change in behavior of diseased cells. यदि जीन और प्रोटीन, बीमारी टिश्यू में अत्यधिक दिख रहे हैं किंतु सामान्य टिश्यू में यह बहुत कम दिख रहे हैं तो यह इलाज के लिए टारगेट हो सकता है। तो हम उन जीन पर अधिक ध्यान देंगे जो परिवर्तित हो सकते हैं । फिर हमें वैलिडेट करने की आवश्यकता है, वैलिडेट का मतलब यह है कि हमें कुछ इन विट्रो प्रायोगिक अध्ययन करने होंगे, मैं कुछ सेल के आधार पर अध्ययन कर सकता हूं । मैं विभिन्न प्रकार के सेल का प्रयोग कर सकता हूं, यदि में कैंसर सेल देख रहा हूं, तो कैंसर सेल का प्रयोग कर सकता हूं । इन्फ्लेमेशन के लिए, मैं सेल ले सकता हूं और इनफॉरमेशन प्रेरित कर सकता हूं और फिर उनका निरीक्षण कर सकता हूं क्या वास्तव में वह चीजें हुई है, क्या जीन डिजीज और सामान्य सेल के आधार पर अपरेगुलेटेड या डाउनरेगुलेटेड हो रहे हैं । यह प्रक्रिया वैलिडेशन कहलाती है, हमें इनविट्रो अध्ययन के आधार पर आश्वस्त होना होगा । Lead Identification Develop an assay to measure the activity of compounds that affects the target in cell or bacterial culture or in vitro . Screen compounds that have activity against this target. Measurement Biotech and pharmaceutical companies have large small molecule compound libraries, which can include FDA-approved drugs, non FDA-approved drug candidates with known activity and compounds with unknown activity. अब लीड पर देखेंः एक बार सोचें, हम टारगेट को प्राप्त कर चुके हैं, तो हम अब क्या करें ? हमें लीड को डिजाइन करने की आवश्यकता है, हम यह कैसे करेंगे? इस प्रक्रिया में बहुत बहुत सारे चरण सम्मिलित हैं, उदाहरण के लिए यदि आपका मॉलिक्यूल किसी प्रोटीन और एंजाइम से बंधता है, वहां कुछ परिवर्तन हो सकते हैं, जैसे कि फ्लोरोसेंस, रेडियो एक्टिविटी परिवर्तन । तो हम इनकी गणना कर सकते हैं और यह लीड मॉलिक्यूल की कार्यशैली की सामान्य मॉलिक्यूल के साथ गणना हो सकती है। तो हम एक बड़ी संख्या में लीड मॉलिक्यूल परख सकता हूं और उसके अनुसार माप सकता हूं जिसको लीड कहते हैं, अब हमें एक तरीके की जरूरत है जिसका मतलब है प्रायोगिक तरीका, तरीका कुछ और नहीं प्रायोगिक तरीका है जिससे हम किसी कंपाउंड के गुणों को जान सकते हैं जोकि टारगेट को प्रभावित करता है । कंपाउंड प्रोटीन की साइट पर जाता है और बंधता है, और जाके एंजाइम से बंधता है, तब वहां कैलोरीमेट्री, फ्लोरोसेंस, रेडियो एक्टिविटी में परिवर्तन होता है । और कुछ जैव रासायनिक परिवर्तन जिनको कि मैं अपनी प्रयोगशाला में बैक्टीरिया या एनिमल सेल की सहायता से माप सकता यह जैव रासायनिक प्रक्रिया है । यदि मैं किसी विशेष टारगेट को निष्क्रिय करना चाहता हूं अब मुझे विभिन्न मॉलिक्यूल का परीक्षण करना होगा इसके लिए उन्हें एक प्रक्रिया का विकास करना होगा । उदाहरण के लिए यह विशेष कंपाउंड प्रोटीन को रोकता है, मैं कह सकता हूं एस्प्रिन जा के cyclooxygenase दो एंजाइम को कमजोर करता है और इन्फ्लेमेटरी पाथवे को इस तरह प्रभावित करता है । किंतु सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि मेरे पास एक प्रायोगिक तरीका होना चाहिए जिसको कि मैं अपनी प्रयोगशाला में अपना सकता हूं, इसका मतलब है कि मुझको वह विशेष प्रोटीन शुद्धअवस्था में चाहिए, मैं एक बड़ी संख्या में कंपाउंड को उस पर प्रयोग कर सकता हूं। मुझे सभी कंपाउंड को सम्मिलित करना है उस विशेष प्रोटीन के लिए, और फिजियो केमिकल और बायोकेमिकल परिवर्तन जो कि हो रहे होंगे, की जांच, मानक के संबंध में करनी है, और इसकी कार्यशैली को पहचानना है । मानक का मतलब, बिना किसी कंपाउंड से है। इस तरह से हम बड़ी संख्या में लीड मॉलिक्यूल को परखते हैं । इसको स्क्रीनिंग कहते हैं, स्क्रीन कंपाउंड वह है जो विशेष टारगेट के लिए कुछ प्रभाव रखते हैं । यदि आप बायोटेक और फार्मास्यूटिकल कंपनियों को देखें तो उनके पास छोटे मॉलिक्यूल की बहुत बड़ी लाइब्रेरी होती है, उनके पास FDA से अनुमोदित और बिना अनुमोदित ड्रग कैंडिडेट होते हैं । लाइब्रेरी में बहुत सारे कैंडिडेट पाए जाते हैं । इसलिए बहुत जल्दी अपनी प्रयोगशाला में इनकी स्क्रीनिंग शुरू कर देते हैं, तो यह इन विट्रो प्रकार का तरीका है, और यह देखें लीड पहचान का यह बहुत विश्वसनीय तरीका है जिससे कि सबसे अच्छा कंपाउंड मिलता है । तो इस प्रकार से आप इन विट्रो कर सकते हैं । आप इनसिल्को भी कर सकते हैं, इन सभी कंपाउंड को विशेष टारगेट पर डॉकिंग कीजिए, और उनकी पहचान कीजिए जो कि एंजाइम के एक्टिव साइट पर अच्छी बाइंडिंग आते हैं, यह भी किया जा सकता है, इसको इनसिलिको कहते हैं । मैं इन सिलिको को और इन विट्रो को मिला सकता हूं, मैं हजारों और हजारों मॉलिक्यूल की संरचना को ले सकता हूं और उनको टारगेट की एक्टिव साइट पर डॉकिंग करा सकता हूं और यह देख सकता हूं इनमें से कौन सा सबसे अच्छे से बाइंडिंग हुआ है उसके बाद मैं सिर्फ अच्छे कंपाउंड को अपनी लाइफ में इन विट्रो एक्सपेरिमेंट करके देख सकता हूं की क्या वह अच्छी एक्टिविटी दिखा रहे हैं । तू इस तरह से मैं लाखों कंपाउंड इन विट्रो अध्ययन से बचा सकता हूं जो कि बहुत ही महंगा और समय लेने वाला है । मैं कंप्यूटेशनल इनसिल्को तरीकों का प्रयोग करता हूं, मैं चयन करता हूं, डॉकिंग करता हूं और उनमें से कुछ कंपाउंड जोकि बहुत ही अच्छे हैं उनका प्रयोग करता हूं, उसके बाद इन चयनित मॉलिक्यूल को मैं अपनी प्रयोगशाला में ले जाता हूं और इनके जैव रासायनिक प्रकार को देखता हूं इस प्रकार लीड का चयन होता है । तो इस प्रकार मैं लाखों कंपाउंड्स को अपनी प्रयोगशाला में प्रयोग करने से बच जाता हूं जो कि बहुत ही समय लेने वाला है और महंगा भी, इनसिल्को चयन का तरीका प्रयोग कर सकता हूं और तब मैं सिर्फ कुछ कंपाउंड को जो बहुत ही अच्छे दिख रहे हैं । और उसके बाद high throughput स्क्रीनिंग के माध्यम से इनको इन विट्रो में प्रयोग किया जाता है, इसको HTS, High Throughput Screening कहते हैं, और फिर लीड मॉलिक्यूल को पहचानते हैं जोकि बहुत ही अच्छे दिख रहे हैं इसको लीड पहचान जाता है । Reduce the number of compounds to test, testing is expensive. In silico methods : short listing/screening/activity prediction. High through-put screens can test many compounds in a short amount of time. HTS screens are often chemical and cell-based screens The accuracy of each hit or lead compound is then further validated with more in-depth cell-based and animal research. " कंप्यूटेशनल इनसिलिको तरीकों की सहायता से हम बहुत बड़ी मॉलिक्यूल की संख्या को टेस्ट करने से बस जाते हैं, इसलिए इसको हम एक स्क्रीनिंग टूल के रूप में प्रयोग कर सकते हैं, बहुत बड़ी लीड मॉलिक्यूल की संख्या को एक्टिव साइट पर डॉकिंग और उनमें से सिर्फ उन को चुनना जो कि बहुत अच्छे हो, इनसिल्को स्क्रीनिंग कहा जाता है । अब हम High Throughput Screening का प्रयोग कर सकते हैं, यह HTS है, कती है । तो इसका प्रयोग करते हुए हम बहुत सारे गतिविधि अध्ययन कर सकते हैं यह बहुत समय बचाता है । यदि हमें बायोकेमिकल और शैल पर आधारित चयनित कंपाउंड मिल जाते हैं, और यदि अच्छे कैंडिडेट हैं तो हम और प्रयोग कर सकते हैं, इसको लेकिन हम पशु अध्ययन या फिर और परीक्षण कर सकते हैं । शुरुआत में हम बहुत सारे कंपाउंड्स का High Throughput Screening की मदद से प्रयोग करते हैं और वह कैंडिडेट जोकि बहुत अच्छा हो उस पर ज्यादा समय देते हैं और उसका अध्ययन गहराई में जाकर करते हैं । इनका जैव रासायनिक अध्ययन और इनको पशुओं पर वैलिडेट कर सकते हैं । Lead optimization Prior to clinical trials a lead compound or compounds are modified structurally to improve activity, lower toxicity, improve stability and safety In vitro cell-based and In vivo animal studies to collect data on toxicity and to understand the metabolism of compounds in the body. Then, application to the FDA for pre-clinical studies and clinical trials. और फिर लीड ऑप्टिमाइजेशन आता है । अभी हमने एक या दो कैंडिडेट या कुछ कैंडिडेट जोकि अत्यधिक आशा जनक हैं, इनके पास अच्छी कार्यशैली है, लेकिन जैसा कि मैं बता चुका हूं इनकी विषाक्तता भी कम होनी चाहिए, यह स्थिर होना चाहिए, यह तापमान और पीएच के लिए सुरक्षित होना चाहिए । तो इस तरह से लीड ऑप्टिमाइजेशन प्रक्रिया में सम्मिलित होता है, क्योंकि कोई कंपाउंड जिसके पास बहुत अच्छी कार्यशैली हो किंतु वह विषाक्त हो सकता है, ऐसा कैंसर में होता है । क्योंकि कीमोथेरेपी में प्रयोग होने वाले ड्रग केवल कैंसर सेल को ही मारने में सक्षम नहीं होते अपितु सामान्य सेल को भी मार सकते हैं, यह अत्यधिक विषाक्त होते हैं। जबकि दूसरा सबसे अच्छा कंपाउंड, मतलब वह कंपाउंड जो पहले कंपाउंड जैसी कार्यशैली ना रखता हूं, उसके पास बेहतर स्थिरता और कम विषाक्तता या अच्छी पीएच स्थिरता इत्यादि हो सकती है । यह लीड ऑप्टिमाइजेशन का हिस्सा है जिसे हम लोग करेंगे । हमलोग डाटा को एकत्रित कर सकते हैं, जो कोशिका अध्ययन संबंधी या पशु अध्ययन संबंधी हो सकता है । इन कंपाउंड की उपापचय की प्रक्रिया को समझना होगा, क्या पीएच पर स्थिर है, कंपाउंड लीवर के क्षेत्र में स्थिर इत्यादि है । हो सकता है सबसे अच्छा कंपाउंड लीवर के कार्यशैली के कारण बहुत स्थिर ना हो । वास्तव में ऐसा हो सकता है दूसरा सबसे अच्छा कंपाउंड पहले से ज्यादा स्थिर हो । इस तरीके से एक या दो कंपाउंड को सुनते हैं जो कि सिर्फ कार्यशैली को सुनिश्चित करें बल्कि उनके पास अच्छी कार्यशैली हो और वह काफी स्थिर हो, इसको लीड ऑप्टिमाइजेशन कहा जाता है। New Strategies in Drug discovery Design of novel drug candidate Based on target site information or pharmacophore modelling Protein structure modeling = to identify where known compounds might interact with protein targets. X ray crystallography data of proteins यह जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है, प्रीक्लिनिकल, पशु परीक्षण या मानव वॉलिंटियर्स परीक्षण में जाने से पहले । इसलिए नई तकनीकों को जब पुरानी तकनीकों के साथ तुलना की जाती है. टारगेट साइट की जानकारी के अनुसार जब नया ड्रंक कैंडिडेट बनाया जाता है, मॉलिक्यूल की संरचना के आधार पर, हम बाद में Pharmacophore और समय देने जा रहे हैं । इनको संरचनात्मक गुण कहा जाता है, हो सकता है मॉलिक्यूल के पास कुछ विशिष्ट संरचनात्मक गुण हो जैसे कि हाइड्रोसिल ग्रुप, या मॉलिक्यूल के पास कुछ acidic ग्रुप हो, और हो सकता है इसके पास hetrocycle ग्रुप जो कि इसको कार्यशैली देता है । इस को पहचानने का प्रयास करेंगे । निश्चित तौर पर जिस टारगेट प्रोटीन को हम मॉडल करने का प्रयत्न करेंगे, हम यह भी जानेंगे कैसे प्रोटीन से सहभागिता दिखाता है और बंधता है। और कैसे हम एक्स-रे क्रिस्टलोग्राफी द्वारा प्रोटीन की संरचना जानते हैं। पिछले पंद्रह से बीस वर्षों में ड्रग डिजाइन के क्षेत्र में कुछ नई तकनीकीया शामिल हुई है जोकि परंपरागत तरीकों से बिल्कुल अलग है। बहुत से कंप्यूटेशनल टूल और विश्लेषणात्मक टूल ड्रग डिजाइन में सम्मिलित हुए हैं
होता है। इस प्रकार हमारे उपचेतन में हमारा एक समष्टिगत रूप भी बना रहता है, जो विशिष्ट मूर्त्त विषयों के योग से तथा भावों के सहार निर्मित होता है। इसे हम सामान्य या साधारण प्रभाव अथवा संस्कार को संज्ञा देते हैं। सामान्य कहने का कारण है उस समय वस्तु-विशिष्टता का घोष न होना । उस अवस्था में भी हमारे भावों को विशिष्टता बनी रहती है और अनुभूतिकाल को छाप भी हमारे सामने रहती है। स्थान, काल तथा पात्र आदि की अनुपस्थिति के कारण इसे स्मृति नहीं कहते ।" तात्पर्य यह कि स्थानकालपात्रादि-वियुक्त विशिष्ट संगठित संस्कार हो उपवेतन में अन्तर्भुक्त होते है और उनकी अभिव्यक्ति पुनः अनुसन्धानात्मक अतृप्ति जगाकर हमारे संस्कारों के उद्घोष के साथ एक प्रकार का आत्मपरिचय घटित करती है, जिसे सौन्दर्यबोध कहते हैं। इस सामान्यात्मक विशेष रूप का समाधान कोई सिद्धान्त कर सकता है तो वह रस प्रक्रिया के अन्तर्गत घटित होने वाला साधारणीकरण व्यापार हो है। इसी बात को कालिदास ने 'रम्याणि वोक्ष्य' आदि इलोक में कह दिया है और इसी सत्य के विश्वासी होने के कारण ही अभिनवगुप्त ने उक्त श्लोक को 'नाटयशास्त्र' को टीका करते हुए समयंत के लिये उद्धृत किया है। उपवेतन के इस विशिष्टजातीय आत्मलाभ को, जिसे सौन्दर्य कहा गया है. 'अन्वीक्षा-वृत्ति व्यापार के फलस्वरूप घटित परिचय से किस आधार पर पृथक् सिद्ध किया जाय ? इस प्रश्न का उत्तर रस-सिद्धान्त के अन्तर्गत रसास्वाद को ब्रह्मानन्द-सहोदरता का वर्णन करते हुए दिया गया है । डॉ० दासगुप्त ने इस भेद को आधारशिला का इस प्रकार वर्णन किया हैः हम चर्मचक्षु से केवल रूप का दर्शन कर पाते हैं, अन्वोक्षादृष्टि से नाना प्रकार के सिद्धान्तों का परिचय प्राप्त होता है और इनसे भिन्न दृष्टि- अन्तविलास से सोन्दरों को ग्रहण किया जाता है। उपवेतनस्थित देशकालवजित संस्कारों से उन्मोलित इस दृष्टि से हम वस्तु को प्रयोजन निरपेक्ष अखण्ड संस्थान अथवा रेखा-वर्णाद को विन्यास समग्रता में ग्रहण करते है और उद्बुद्ध संस्कारों के साथ उसकी एकता का अवेतन परिचय प्राप्त करते हैं । इस दृष्टि में विशेष सम्बन्ध या प्रकार प्रकार गत विशिष्टता स्पष्ट नहीं होती और किसी वस्तु को 'सुन्दर' कहने का कोई बौद्धिक कारण निश्चित नहीं किया जा सकता। सौन्दर्यबोध के समय अन्य कोई ज्ञान ही नहीं रह जाता। इसी सौन्दर्यदृष्टि -को योरोपीयों ने इंटुइशन कह दिया है। इस निविकल्प अखण्ड उद्भात का लौकिक अन्योक्षा से कोई मेल ही नहीं हूँ। इसी कारण इसे स्वतः पूर्ण और स्वतन्त्र कहा गया है । लौकिक वस्तु पर आधारित रहने पर भी इसे लौकिक समझाना संभव नहीं है, यही इसकी अलौकिकता है। अबतक किये गये इस विवेचन से स्पष्ट हो जाता है कि डॉ० दासगुप्त का मत सौन्दर्य को समन्वयवादी व्याख्या प्रस्तुत करता है और लौकिक वस्तु को आधार स्वरूप मानकर उसके आध्यात्मिक स्वरूप ग्रहण को हो सही मार्ग मानता है। यही भारतीय मत है। यही रसमत भी है। स्वयं डॉ० दासगुप्त ने प्रथम अध्याय में कई स्थलों पर इस बात को स्वीकार किया है कि उनकी यह व्याख्या रस-सिद्धान्त से मिलती जुलती है । रमणीयता की परिभाषा के अन्तर्गत पण्डितराज के द्वारा निश्चित किये गये निष्क का संबंध भी रस-सिद्धान्त के निष्कर्षों से मिलताजुलता है, बल्कि हमारी समझ से जिन अलंकारादि रूपों को काव्यगत प्रतिष्ठा के लिए रस के स्थान पर पण्डितराज ने रमणीयता शब्द का प्रयोग उचित समझा उनपर उसका निर्विकल्प रूप घटित ही नहीं हो पाता और पाठक उस समाधि दशा को प्राप्त नहीं कर पाता जो डॉ० दासगुप्त को भी वांछित है । अलंकारादि तो विशिष्टतावबोधक हो अधिक होते हैं, सामान्यावबोधक कम । अतः यदि सौन्दर्य को कोई आध्यात्मिक व्याख्या प्रस्तुत की जा सकती है तो रस-सिद्धान्त के द्वारा ही हिन्दी विभाग गोरसपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर - श्रानन्दप्रकाश दीक्षित धन्यवाद और जमा-याचना डॉ० दासगुप्त की प्रस्तुत पुस्तक हिन्दी पाठकों के सम्मुख रखते हुए मुझे एक विशेष आत्मिक सुख का अनुभव हो रहा है। हिन्दी में इस प्रकार का कोई ग्रंथ अभी तक नहीं है। हिन्दी में सौन्दर्य-विषयक जो अति सामान्य सो चर्चा हुई है, उसमें इस ग्रंथ का कहीं उल्लेख तक नहीं है। न तो इतने पूर्व प्रकाशित होनेवाली पुस्तक से ही हिन्दी के पाठक आजतक परिचित हो पाये और न इस दृष्टि से किया गया कोई मौलिक प्रयत्न हो हिन्दी में सामने आया, अतएव इस ग्रंय का हिन्दी अनुवाद भी मूल्यवान और संग्राहप सिद्ध होगा, ऐसा मेरा विश्वास है। बंगला भाषा में तो इस विषय पर छोटी-मोटी एकाध और भो पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं, जिनमें इस प्रकार ऐतिहासिक और तार्किक विवेचन तो नहीं है परन्तु सौन्दर्य विषयक कुछ धारणाओं को स्पष्ट करने का अच्छा प्रयत्न अववश्य है। दूसरी ओर मराठी में इस विषय को नितान्त मौलिक चिन्तन विषय बनाकर कई लेखकों ने ग्रंथ रचना की है और श्री जोग, महॅकर तथा बालिग महोदय का नामतो महत्त्वपूर्ण विवेचकों के बीच लिया जा सकता है। हिन्दी अभी इस विषय से अछूतो सो है। संभव है, इस अनुवाद का प्रकाशन कुछ और प्रयत्नों को प्रेरणा बन सके। मैं तो इस कार्य को समाप्त कर पाने में ही अपनी कृतकृत्यता मानता हूँ। अपनी ओर से मुझसे जितना बना मंने इस रूप में अनुवाद करने का प्रयत्न किया है कि कहीं भी इस महत्त्वपूर्ण विषय अथवा मूल लेखक के कयन को हानि न पहुँचे। फिर भी अनुवाद तो अनुवाद ही है, कहीं-न-कहीं खोजी लोग त्रुटियाँ निकाल हो लेंगे। मुझे विश्वास है यह मेरे लिये हितकर ही होगा में दूसरे संस्करण में उन्नयों को दूर कर सकूँ गए। इतनी बात अपनी ओर से स्पष्ट कर दू कि अनुवाद कार्य में मैंने पारिभाषिक शब्दों को अधिकांशतः बंगला की मूल प्रति से हो प्रहण कर लिया है और जहाँ हिन्दी में अयंभिन्नता के कारण कठिनाई होती, ऐसे एकाध स्थल पर उन्हें बदल भी लिया है। पाक्यों के संगठन में कहीं-कहीं मूल पंक्ति के विन्यास की ओर बहक गया हूँ। यह स्वाभाविक-सा हो था अतः शायद अनुचित प्रतीत न होगा। भूमिका के संबंध धन्यवाद और क्षमा याचना एम० ए० को आशोष देना हो समुचित होगा, जिन्होंने इस कार्य में विविध प्रकार से सहयोग दिया है। इसके मुद्रण का प्रबन्ध श्री वाचस्पति पाठक जी ने बड़ो तत्परता के साथ किया है, उनकी इस विशेष रुचि के लिए कृतज्ञता ज्ञापित न करना मेरे लिए संभव नहीं है । आशा है इस महत्त्वपूर्ण पुस्तक का अनुवाद हिन्दी पाठकों को सन्तोषजनक. प्रतीत होगा और लाभदायी सिद्ध होगा । गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर -श्रानन्दप्रकाश दीक्षित
होता है। इस प्रकार हमारे उपचेतन में हमारा एक समष्टिगत रूप भी बना रहता है, जो विशिष्ट मूर्त्त विषयों के योग से तथा भावों के सहार निर्मित होता है। इसे हम सामान्य या साधारण प्रभाव अथवा संस्कार को संज्ञा देते हैं। सामान्य कहने का कारण है उस समय वस्तु-विशिष्टता का घोष न होना । उस अवस्था में भी हमारे भावों को विशिष्टता बनी रहती है और अनुभूतिकाल को छाप भी हमारे सामने रहती है। स्थान, काल तथा पात्र आदि की अनुपस्थिति के कारण इसे स्मृति नहीं कहते ।" तात्पर्य यह कि स्थानकालपात्रादि-वियुक्त विशिष्ट संगठित संस्कार हो उपवेतन में अन्तर्भुक्त होते है और उनकी अभिव्यक्ति पुनः अनुसन्धानात्मक अतृप्ति जगाकर हमारे संस्कारों के उद्घोष के साथ एक प्रकार का आत्मपरिचय घटित करती है, जिसे सौन्दर्यबोध कहते हैं। इस सामान्यात्मक विशेष रूप का समाधान कोई सिद्धान्त कर सकता है तो वह रस प्रक्रिया के अन्तर्गत घटित होने वाला साधारणीकरण व्यापार हो है। इसी बात को कालिदास ने 'रम्याणि वोक्ष्य' आदि इलोक में कह दिया है और इसी सत्य के विश्वासी होने के कारण ही अभिनवगुप्त ने उक्त श्लोक को 'नाटयशास्त्र' को टीका करते हुए समयंत के लिये उद्धृत किया है। उपवेतन के इस विशिष्टजातीय आत्मलाभ को, जिसे सौन्दर्य कहा गया है. 'अन्वीक्षा-वृत्ति व्यापार के फलस्वरूप घटित परिचय से किस आधार पर पृथक् सिद्ध किया जाय ? इस प्रश्न का उत्तर रस-सिद्धान्त के अन्तर्गत रसास्वाद को ब्रह्मानन्द-सहोदरता का वर्णन करते हुए दिया गया है । डॉशून्य दासगुप्त ने इस भेद को आधारशिला का इस प्रकार वर्णन किया हैः हम चर्मचक्षु से केवल रूप का दर्शन कर पाते हैं, अन्वोक्षादृष्टि से नाना प्रकार के सिद्धान्तों का परिचय प्राप्त होता है और इनसे भिन्न दृष्टि- अन्तविलास से सोन्दरों को ग्रहण किया जाता है। उपवेतनस्थित देशकालवजित संस्कारों से उन्मोलित इस दृष्टि से हम वस्तु को प्रयोजन निरपेक्ष अखण्ड संस्थान अथवा रेखा-वर्णाद को विन्यास समग्रता में ग्रहण करते है और उद्बुद्ध संस्कारों के साथ उसकी एकता का अवेतन परिचय प्राप्त करते हैं । इस दृष्टि में विशेष सम्बन्ध या प्रकार प्रकार गत विशिष्टता स्पष्ट नहीं होती और किसी वस्तु को 'सुन्दर' कहने का कोई बौद्धिक कारण निश्चित नहीं किया जा सकता। सौन्दर्यबोध के समय अन्य कोई ज्ञान ही नहीं रह जाता। इसी सौन्दर्यदृष्टि -को योरोपीयों ने इंटुइशन कह दिया है। इस निविकल्प अखण्ड उद्भात का लौकिक अन्योक्षा से कोई मेल ही नहीं हूँ। इसी कारण इसे स्वतः पूर्ण और स्वतन्त्र कहा गया है । लौकिक वस्तु पर आधारित रहने पर भी इसे लौकिक समझाना संभव नहीं है, यही इसकी अलौकिकता है। अबतक किये गये इस विवेचन से स्पष्ट हो जाता है कि डॉशून्य दासगुप्त का मत सौन्दर्य को समन्वयवादी व्याख्या प्रस्तुत करता है और लौकिक वस्तु को आधार स्वरूप मानकर उसके आध्यात्मिक स्वरूप ग्रहण को हो सही मार्ग मानता है। यही भारतीय मत है। यही रसमत भी है। स्वयं डॉशून्य दासगुप्त ने प्रथम अध्याय में कई स्थलों पर इस बात को स्वीकार किया है कि उनकी यह व्याख्या रस-सिद्धान्त से मिलती जुलती है । रमणीयता की परिभाषा के अन्तर्गत पण्डितराज के द्वारा निश्चित किये गये निष्क का संबंध भी रस-सिद्धान्त के निष्कर्षों से मिलताजुलता है, बल्कि हमारी समझ से जिन अलंकारादि रूपों को काव्यगत प्रतिष्ठा के लिए रस के स्थान पर पण्डितराज ने रमणीयता शब्द का प्रयोग उचित समझा उनपर उसका निर्विकल्प रूप घटित ही नहीं हो पाता और पाठक उस समाधि दशा को प्राप्त नहीं कर पाता जो डॉशून्य दासगुप्त को भी वांछित है । अलंकारादि तो विशिष्टतावबोधक हो अधिक होते हैं, सामान्यावबोधक कम । अतः यदि सौन्दर्य को कोई आध्यात्मिक व्याख्या प्रस्तुत की जा सकती है तो रस-सिद्धान्त के द्वारा ही हिन्दी विभाग गोरसपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर - श्रानन्दप्रकाश दीक्षित धन्यवाद और जमा-याचना डॉशून्य दासगुप्त की प्रस्तुत पुस्तक हिन्दी पाठकों के सम्मुख रखते हुए मुझे एक विशेष आत्मिक सुख का अनुभव हो रहा है। हिन्दी में इस प्रकार का कोई ग्रंथ अभी तक नहीं है। हिन्दी में सौन्दर्य-विषयक जो अति सामान्य सो चर्चा हुई है, उसमें इस ग्रंथ का कहीं उल्लेख तक नहीं है। न तो इतने पूर्व प्रकाशित होनेवाली पुस्तक से ही हिन्दी के पाठक आजतक परिचित हो पाये और न इस दृष्टि से किया गया कोई मौलिक प्रयत्न हो हिन्दी में सामने आया, अतएव इस ग्रंय का हिन्दी अनुवाद भी मूल्यवान और संग्राहप सिद्ध होगा, ऐसा मेरा विश्वास है। बंगला भाषा में तो इस विषय पर छोटी-मोटी एकाध और भो पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं, जिनमें इस प्रकार ऐतिहासिक और तार्किक विवेचन तो नहीं है परन्तु सौन्दर्य विषयक कुछ धारणाओं को स्पष्ट करने का अच्छा प्रयत्न अववश्य है। दूसरी ओर मराठी में इस विषय को नितान्त मौलिक चिन्तन विषय बनाकर कई लेखकों ने ग्रंथ रचना की है और श्री जोग, महॅकर तथा बालिग महोदय का नामतो महत्त्वपूर्ण विवेचकों के बीच लिया जा सकता है। हिन्दी अभी इस विषय से अछूतो सो है। संभव है, इस अनुवाद का प्रकाशन कुछ और प्रयत्नों को प्रेरणा बन सके। मैं तो इस कार्य को समाप्त कर पाने में ही अपनी कृतकृत्यता मानता हूँ। अपनी ओर से मुझसे जितना बना मंने इस रूप में अनुवाद करने का प्रयत्न किया है कि कहीं भी इस महत्त्वपूर्ण विषय अथवा मूल लेखक के कयन को हानि न पहुँचे। फिर भी अनुवाद तो अनुवाद ही है, कहीं-न-कहीं खोजी लोग त्रुटियाँ निकाल हो लेंगे। मुझे विश्वास है यह मेरे लिये हितकर ही होगा में दूसरे संस्करण में उन्नयों को दूर कर सकूँ गए। इतनी बात अपनी ओर से स्पष्ट कर दू कि अनुवाद कार्य में मैंने पारिभाषिक शब्दों को अधिकांशतः बंगला की मूल प्रति से हो प्रहण कर लिया है और जहाँ हिन्दी में अयंभिन्नता के कारण कठिनाई होती, ऐसे एकाध स्थल पर उन्हें बदल भी लिया है। पाक्यों के संगठन में कहीं-कहीं मूल पंक्ति के विन्यास की ओर बहक गया हूँ। यह स्वाभाविक-सा हो था अतः शायद अनुचित प्रतीत न होगा। भूमिका के संबंध धन्यवाद और क्षमा याचना एमशून्य एशून्य को आशोष देना हो समुचित होगा, जिन्होंने इस कार्य में विविध प्रकार से सहयोग दिया है। इसके मुद्रण का प्रबन्ध श्री वाचस्पति पाठक जी ने बड़ो तत्परता के साथ किया है, उनकी इस विशेष रुचि के लिए कृतज्ञता ज्ञापित न करना मेरे लिए संभव नहीं है । आशा है इस महत्त्वपूर्ण पुस्तक का अनुवाद हिन्दी पाठकों को सन्तोषजनक. प्रतीत होगा और लाभदायी सिद्ध होगा । गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर -श्रानन्दप्रकाश दीक्षित
ब्रिटेन के पूर्व वित्त मंत्री ऋषि सुनक अगले प्रधानमंत्री और कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पद के लिहाज से उन शुरुआती उम्मीदवारों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने अपने नामांकन के लिए संसद के 20कंजर्वेटिव पार्टी सदस्यों के समर्थन की सीमा को पार कर लिया है। बोरिस जॉनसन की जगह नए प्रधानमंत्री के चुनाव के लिए नामांकन औपचारिक रूप से शुरू होने के साथ यॉर्कशायर के रिचमंड से 42वर्षीय ब्रिटिश भारतीय सांसद सुनक दौड़ में आगे माने जा रहे हैं। गृह मंत्री प्रीति पटेल ने दौड़ में शामिल होने से इनकार करते हुए कहा कि वह उत्साहजनक प्रतिक्रिया के लिए आभारी हैं लेकिन उनका ध्यान गृह मंत्री के रूप में उनके मौजूदा काम पर है। पहले इस बात की प्रबल संभावना जताई जा रही थी कि सुनक की तरह भारतीय मूल की ही पटेल भी प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी पेश कर सकती हैं। गुजराती मूल की 50वर्षीय कैबिनेट मंत्री ने कहा, 'मैं सांसदों द्वारा मतदान के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ा रही। उन्होंने कहा, गृह मंत्री के रूप में मैंने हमेशा अपने देश की सुरक्षा को तथा राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखा है और मेरा ध्यान इस दिशा में लगातार काम करने पर है कि हमारी सड़कों पर और पुलिस रहे, हमारी शानदार सुरक्षा सेवाओं को हमारे देश को सुरक्षित रखने तथा हमारी सीमाओं पर नियंत्रण रखने में सहयोग दिया जाए। इस पद के लिए नेताओं के पास नामांकन दाखिल करने के लिए स्थानीय समयानुसार शाम 6बजे तक का समय है। इनके अलावा इस दौड़ में भारतवंशी अटॉर्नी जनरल सुएला ब्रेवरमैन, विदेश मंत्री लिज ट्रस, नाइजीरियाई मूल की केमी बादेनोक, पूर्व विदेश मंत्री जेरेमी हंट, परिवहन मंत्री ग्रांट शेप्स, विदेश कार्यालय में अधिकारी रहमान चिश्ती और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री साजिद जाविद शामिल हैं। ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री का चुनाव पांच सितंबर को किया जाएगा और वह संसद में प्रधानमंत्री के समक्ष आरंभिक प्रश्नों का सामना सात सितंबर को करेंगे। टोरी सांसदों द्वाaरा मतदान का पहला चरण बुधवार को होना है। गुरुवार को दूसरे चरण के मतदान के बाद चरणबद्ध तरीके से अंतिम दो उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।
ब्रिटेन के पूर्व वित्त मंत्री ऋषि सुनक अगले प्रधानमंत्री और कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पद के लिहाज से उन शुरुआती उम्मीदवारों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने अपने नामांकन के लिए संसद के बीसकंजर्वेटिव पार्टी सदस्यों के समर्थन की सीमा को पार कर लिया है। बोरिस जॉनसन की जगह नए प्रधानमंत्री के चुनाव के लिए नामांकन औपचारिक रूप से शुरू होने के साथ यॉर्कशायर के रिचमंड से बयालीसवर्षीय ब्रिटिश भारतीय सांसद सुनक दौड़ में आगे माने जा रहे हैं। गृह मंत्री प्रीति पटेल ने दौड़ में शामिल होने से इनकार करते हुए कहा कि वह उत्साहजनक प्रतिक्रिया के लिए आभारी हैं लेकिन उनका ध्यान गृह मंत्री के रूप में उनके मौजूदा काम पर है। पहले इस बात की प्रबल संभावना जताई जा रही थी कि सुनक की तरह भारतीय मूल की ही पटेल भी प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी पेश कर सकती हैं। गुजराती मूल की पचासवर्षीय कैबिनेट मंत्री ने कहा, 'मैं सांसदों द्वारा मतदान के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ा रही। उन्होंने कहा, गृह मंत्री के रूप में मैंने हमेशा अपने देश की सुरक्षा को तथा राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखा है और मेरा ध्यान इस दिशा में लगातार काम करने पर है कि हमारी सड़कों पर और पुलिस रहे, हमारी शानदार सुरक्षा सेवाओं को हमारे देश को सुरक्षित रखने तथा हमारी सीमाओं पर नियंत्रण रखने में सहयोग दिया जाए। इस पद के लिए नेताओं के पास नामांकन दाखिल करने के लिए स्थानीय समयानुसार शाम छःबजे तक का समय है। इनके अलावा इस दौड़ में भारतवंशी अटॉर्नी जनरल सुएला ब्रेवरमैन, विदेश मंत्री लिज ट्रस, नाइजीरियाई मूल की केमी बादेनोक, पूर्व विदेश मंत्री जेरेमी हंट, परिवहन मंत्री ग्रांट शेप्स, विदेश कार्यालय में अधिकारी रहमान चिश्ती और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री साजिद जाविद शामिल हैं। ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री का चुनाव पांच सितंबर को किया जाएगा और वह संसद में प्रधानमंत्री के समक्ष आरंभिक प्रश्नों का सामना सात सितंबर को करेंगे। टोरी सांसदों द्वाaरा मतदान का पहला चरण बुधवार को होना है। गुरुवार को दूसरे चरण के मतदान के बाद चरणबद्ध तरीके से अंतिम दो उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।
मानहानि मामले में राहुल गांधी को सूरत की सत्र अदालत से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी है. राहुल गांधी ने अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। आपको बता दें कि सूरत की एक सत्र अदालत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को उनकी 'मोदी उपनाम' टिप्पणी के लिए आपराधिक मानहानि के मामले में दोषी ठहराया और दो साल की जेल की सजा सुनाई। इससे राहुल गांधी को संसद की सदस्यता से हाथ धोना पड़ा। अब सेशन कोर्ट से राहुल गांधी को भी निराशा हाथ लगी है. राहुल गांधी अब राहत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। दरअसल, सूरत सीजेएम कोर्ट ने 23 मार्च को राहुल को 2019 में मोदी सरनेम पर की गई टिप्पणी के मामले में धारा 504 के तहत दो साल कैद की सजा सुनाई थी. हालांकि कोर्ट ने फैसले को लागू करने के लिए 30 दिन का वक्त भी दिया था। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार में एक रैली में राहुल गांधी ने कहा था कि 'सभी चोरों का उपनाम मोदी कैसे हो जाता है? ' इसको लेकर बीजेपी विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था. इस मामले में सुनवाई के दौरान पूर्णेश मोदी ने कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ 10 से अधिक आपराधिक मानहानि के मामले लंबित हैं. सुप्रीम कोर्ट भी उन्हें खारिज कर चुका है। पी. एम. मोदी के वकील हर्ष टोलिया ने कहा कि कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद भी राहुल गांधी कह रहे हैं कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया. उन्होंने कहा कि कोर्ट द्वारा दी गई सजा के कारण राहुल गांधी को अयोग्य करार दिया गया है, लेकिन वह चुनाव और अपनी जीत की दलील दे रहे हैं. वकील ने कहा कि राहुल गांधी को सही सजा मिली है, वे जब रैली को संबोधित कर रहे थे तब वे पूरी तरह होश में थे. वहीं अगर कोर्ट आज अपील स्वीकार कर लेती है तो राहुल गांधी को इससे राहत मिल सकती है.
मानहानि मामले में राहुल गांधी को सूरत की सत्र अदालत से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी है. राहुल गांधी ने अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग की थी। आपको बता दें कि सूरत की एक सत्र अदालत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को उनकी 'मोदी उपनाम' टिप्पणी के लिए आपराधिक मानहानि के मामले में दोषी ठहराया और दो साल की जेल की सजा सुनाई। इससे राहुल गांधी को संसद की सदस्यता से हाथ धोना पड़ा। अब सेशन कोर्ट से राहुल गांधी को भी निराशा हाथ लगी है. राहुल गांधी अब राहत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। दरअसल, सूरत सीजेएम कोर्ट ने तेईस मार्च को राहुल को दो हज़ार उन्नीस में मोदी सरनेम पर की गई टिप्पणी के मामले में धारा पाँच सौ चार के तहत दो साल कैद की सजा सुनाई थी. हालांकि कोर्ट ने फैसले को लागू करने के लिए तीस दिन का वक्त भी दिया था। दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव के दौरान कर्नाटक के कोलार में एक रैली में राहुल गांधी ने कहा था कि 'सभी चोरों का उपनाम मोदी कैसे हो जाता है? ' इसको लेकर बीजेपी विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था. इस मामले में सुनवाई के दौरान पूर्णेश मोदी ने कहा कि राहुल गांधी के खिलाफ दस से अधिक आपराधिक मानहानि के मामले लंबित हैं. सुप्रीम कोर्ट भी उन्हें खारिज कर चुका है। पी. एम. मोदी के वकील हर्ष टोलिया ने कहा कि कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद भी राहुल गांधी कह रहे हैं कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया. उन्होंने कहा कि कोर्ट द्वारा दी गई सजा के कारण राहुल गांधी को अयोग्य करार दिया गया है, लेकिन वह चुनाव और अपनी जीत की दलील दे रहे हैं. वकील ने कहा कि राहुल गांधी को सही सजा मिली है, वे जब रैली को संबोधित कर रहे थे तब वे पूरी तरह होश में थे. वहीं अगर कोर्ट आज अपील स्वीकार कर लेती है तो राहुल गांधी को इससे राहत मिल सकती है.
दिग्विजय सिंह पहले भी अनाप-शनाप बयान देते रहे हैं। वो लगातार बीजेपी और संघ के बारे में गलत बातें कहते हैं। इतना ही नहीं, दिग्विजय सिंह ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को "ओसामा जी" कहकर भी संबोधित किया था। दिग्विजय सिंह फिलहाल राज्यसभा के सदस्य हैं और एक जमाने में उन्हें राहुल का राजनीतिक गुरु भी माना जाता था। राजस्थान में इस वैरिएंट के 21, महाराष्ट्र में 2, केरल में 1, तेलंगाना में 3, गुजरात में 6 और कर्नाटक में 7 नए केस मिलने के साथ ही देश में ओमिक्रॉन के मरीजों की कुल संख्या भी बढ़कर 450 के करीब जा पहुंची है। अब तक कुल ओमिक्रॉन मरीजों की बात करें, तो ये वैरिएंट 17 राज्यों में पहुंचा है। यूपी समेत 5 राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके लिए सभी दल कमर कस रहे हैं, लेकिन जीत-हार किसकी होगी, इसे लेकर अभी से लोगों में उत्सुकता है। खासकर यूपी पर सबकी नजरें हैं। क्योंकि यहां सत्तारूढ़ बीजेपी दोबारा शासन संभालने को उत्सुक है। वहीं, सपा, बीएसपी और कांग्रेस उसे टक्कर देने के लिए लगातार कोशिश कर रही हैं। Punjab: वहीं DSP दिलशेर सिंह के बयान पर सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया सामने आई है। लोगों ने कांग्रेस नेता सिद्धू को जमकर खरी खोटी सुनाई डाली। लोगों ने डीएसपी दिलशेर सिंह का समर्थन करते हुए सिद्धू को निशाने पर लिया। Merry Christmas 2021: स्वरा भास्कर ने शनिवार को एक चैनल का वीडियो शेयर किया, जिसमें बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता सेंटा क्लॉज़ का पुतला लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे है और साथ ही सेंटा क्लॉज़ हाय-हाय, सेंटा क्लॉज वापस जाओ के नारे भी लगा रहे है। इसके साथ स्वरा ने ट्वीट कर लिखा, गधों की बारात! । जानकारी के लिए बता दें कि इसी दिन कई हिन्दू 'तुलसी पूजन दिवस' भी मनाते हैं। UP Election 2022: बीजेपी के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने असदुद्दीन ओवैसी की तुलना पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना करते हुए कहा कि ओवैसी का बयान वैसा ही है जैसा मोहम्मद अली जिन्ना ने देश के विभाजन से एक साल पहले दिया था। उन्होंने कहा, 'ओवैसी के शरीर में जिन्ना की आत्मा है। ' PM Modi on Guru Purab: पीएम मोदी ने कहा, अभी हाल ही में हम अफगानिस्तान से स-सम्मान गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों को भारत लाने में सफल रहे हैं। गुरु कृपा का इससे बड़ा अनुभव किसी के लिए और क्या हो सकता है? कुछ महीने पहले जब मैं अमेरिका गया था, तो वहां अमेरिका ने भारत को 150 से ज्यादा ऐतिहासिक वस्तुएं लौटाईं। Gurugram: बताया जा रहा है कि गुरुग्राम के पटौदी के स्कूल में क्रिसमस का आयोजन किया गया था, इस दौरान गरीब बच्चों को कंबल और खाना बांटा जाना था। लेकिन उससे पहले वहां पहुंचकर कुछ लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। इतना ही नहीं लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाए जिसके बाद वहां हड़कंप सा मच गया। Atal Bihari Vajpayee Birth Anniversary: अटल बिहारी वाजपेयी भी अपनी पारंपरिक सीट ग्वालियर से चुनाव हार गए थे। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने, चुनाव से ठीक पहले, माधव राव सिंधिया को वाजपेयी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतार दिया। इसके पहले तक वाजपेयी का जीतना लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन माधव राव सिंधिया के उतरने के बाद वाजपेयी चुनाव हार गए। Merry Christmas 2021: राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने क्रिसमस की पूर्व संध्या पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। एक संदेश में, राष्ट्रपति ने कहा है, "क्रिसमस के शुभ अवसर पर, मैं सभी देशवासियों, विशेषकर हमारे ईसाई भाइयों और बहनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।
दिग्विजय सिंह पहले भी अनाप-शनाप बयान देते रहे हैं। वो लगातार बीजेपी और संघ के बारे में गलत बातें कहते हैं। इतना ही नहीं, दिग्विजय सिंह ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को "ओसामा जी" कहकर भी संबोधित किया था। दिग्विजय सिंह फिलहाल राज्यसभा के सदस्य हैं और एक जमाने में उन्हें राहुल का राजनीतिक गुरु भी माना जाता था। राजस्थान में इस वैरिएंट के इक्कीस, महाराष्ट्र में दो, केरल में एक, तेलंगाना में तीन, गुजरात में छः और कर्नाटक में सात नए केस मिलने के साथ ही देश में ओमिक्रॉन के मरीजों की कुल संख्या भी बढ़कर चार सौ पचास के करीब जा पहुंची है। अब तक कुल ओमिक्रॉन मरीजों की बात करें, तो ये वैरिएंट सत्रह राज्यों में पहुंचा है। यूपी समेत पाँच राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके लिए सभी दल कमर कस रहे हैं, लेकिन जीत-हार किसकी होगी, इसे लेकर अभी से लोगों में उत्सुकता है। खासकर यूपी पर सबकी नजरें हैं। क्योंकि यहां सत्तारूढ़ बीजेपी दोबारा शासन संभालने को उत्सुक है। वहीं, सपा, बीएसपी और कांग्रेस उसे टक्कर देने के लिए लगातार कोशिश कर रही हैं। Punjab: वहीं DSP दिलशेर सिंह के बयान पर सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया सामने आई है। लोगों ने कांग्रेस नेता सिद्धू को जमकर खरी खोटी सुनाई डाली। लोगों ने डीएसपी दिलशेर सिंह का समर्थन करते हुए सिद्धू को निशाने पर लिया। Merry Christmas दो हज़ार इक्कीस: स्वरा भास्कर ने शनिवार को एक चैनल का वीडियो शेयर किया, जिसमें बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता सेंटा क्लॉज़ का पुतला लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे है और साथ ही सेंटा क्लॉज़ हाय-हाय, सेंटा क्लॉज वापस जाओ के नारे भी लगा रहे है। इसके साथ स्वरा ने ट्वीट कर लिखा, गधों की बारात! । जानकारी के लिए बता दें कि इसी दिन कई हिन्दू 'तुलसी पूजन दिवस' भी मनाते हैं। UP Election दो हज़ार बाईस: बीजेपी के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने असदुद्दीन ओवैसी की तुलना पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना करते हुए कहा कि ओवैसी का बयान वैसा ही है जैसा मोहम्मद अली जिन्ना ने देश के विभाजन से एक साल पहले दिया था। उन्होंने कहा, 'ओवैसी के शरीर में जिन्ना की आत्मा है। ' PM Modi on Guru Purab: पीएम मोदी ने कहा, अभी हाल ही में हम अफगानिस्तान से स-सम्मान गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों को भारत लाने में सफल रहे हैं। गुरु कृपा का इससे बड़ा अनुभव किसी के लिए और क्या हो सकता है? कुछ महीने पहले जब मैं अमेरिका गया था, तो वहां अमेरिका ने भारत को एक सौ पचास से ज्यादा ऐतिहासिक वस्तुएं लौटाईं। Gurugram: बताया जा रहा है कि गुरुग्राम के पटौदी के स्कूल में क्रिसमस का आयोजन किया गया था, इस दौरान गरीब बच्चों को कंबल और खाना बांटा जाना था। लेकिन उससे पहले वहां पहुंचकर कुछ लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया। इतना ही नहीं लोगों ने जय श्रीराम के नारे लगाए जिसके बाद वहां हड़कंप सा मच गया। Atal Bihari Vajpayee Birth Anniversary: अटल बिहारी वाजपेयी भी अपनी पारंपरिक सीट ग्वालियर से चुनाव हार गए थे। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने, चुनाव से ठीक पहले, माधव राव सिंधिया को वाजपेयी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतार दिया। इसके पहले तक वाजपेयी का जीतना लगभग तय माना जा रहा था। लेकिन माधव राव सिंधिया के उतरने के बाद वाजपेयी चुनाव हार गए। Merry Christmas दो हज़ार इक्कीस: राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने क्रिसमस की पूर्व संध्या पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। एक संदेश में, राष्ट्रपति ने कहा है, "क्रिसमस के शुभ अवसर पर, मैं सभी देशवासियों, विशेषकर हमारे ईसाई भाइयों और बहनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।
भारी राजा हुआ जिसका एक शिला लेख नासिक में प्राप्त हुआ है । ' यह जाति अपने साथ गोपाल कृष्ण को ईश्वर के रूप में लाई । भंडारकर का कथन है कि भी जाति का 'कृष्ण' शब्द संभव है पश्चिम के 'इस्ट' ( Christ ) शब्द से उद्भूत हुआ हो ।" इसी 'कृष्ण' को प्रभोर जाति ने अपने महत्त्व से 'वेद', 'उपनिषद' और 'महाभारत' के वासुदेव कृष्ण से सम्बद्ध कर दिया । प्रतः वासुदेव कृष्ण जो 'महाभारत' तक ब्रह्म और ब्रह्म के अवतार रहे प्रभीरों के गोपाल कृष्ण में रूपान्तरित हो गये और गोपाल कृष्ण की बाल लीलाएँ पुरातन कृष्ण की बाल लीलाएँ बन गई । नारद पंचरात्र की 'ज्ञानामृत सार संहिता' में कृष्ण की बाल लीलाओं का निर्देश है। ज्ञानामृत सार संहिता' का रचना - काल सर भडारकर द्वारा ईसा की चौथी शताब्दी के बाद ही निर्धारित किया गया है । अतः इस समय आभीरों का आतंक अवश्य ही अपने उत्कर्ष पर होगा और उसी आतंक से प्रेरित होकर वासुदेव कृष्ण की सत्ता गोपाल कृष्ण के समस्त बाल चरित्र में लीन हो गई । इस प्रकार धार्मिक क्षत्र में कृष्ण की भावना का विकास हुआ । कृष्ण की ईश्वरीय सृष्टि सर्वप्रथम 'वनदेव' की भावना में मानी जानी चाहिये । प्रकृति में वसन्तश्री से नवीन जीवन की सृष्टि होती है, नवीन पल्लवों में सौदर्य फूट पड़ता है । इस नवीन जीवन को उत्पन्न करने वाली शक्ति के प्रति प्राचीनतम काल के प्रसंस्कृत हृदय में भक्ति का उद्रेक होना स्वाभाविक है । हमें ज्ञात है कि आर्यों ने प्रकृति के अनेक रूपों को देवताओं के रूप में मान इन्द्र, वरुण, अग्नि, मरुत आदि देवों की कल्पना की है । उसी भाँति मृत्यु से जीवन का आविर्भाव करने वाली शक्ति भी किस प्रकार कृष्ण के रूप में आई, यही हमे देखना है । ( अ ) कृष्ण के जीवन की भावना स्पष्ट रूप से गोप रूप में है, जिसका सम्बन्ध गौवों से है। प्रकृति के जीवों की रक्षा करने वाले और प्रकृति के प्रांगण में विहार करने वाले देवताओं की कल्पना तो हमारे भक्ति काल के साहित्य में भी मिलती है । गाएँ प्रकृति की निर्दोष, सरल और करुण प्रतिमाएँ हैं । श्रीकृष्ण उनके पोषक हैं । इसीलिए वे आदि-भावना में गोप रूप होने के कारण 'वनदेव' के रूप में श्राप से आप प्रा जाते हैं। उनका नाम इसीलिए गोपाल अथवा गोपेन्द्र है । यही कारण ज्ञात होता है कि श्रीकृष्ण के हृदय में 'श्रीवत्स' चिह्न है । यह चिह्न हृदय पर रोत्रों के चक्र से निर्मित है जिसके लिए 'भौंरी' एक विशिष्ट शब्द है । यह १ वैष्णविज्म, शैविज्म ऐंड माइनर रिलीजस सिस्टम्स ( सर भंडारकर ) पृष्ठ ३७ २ वैष्णविज्म, शैविज्म ऐंड माइनर रिलीजस सिस्टम्स ( सर भंडारकर ) पृष्ठ ३८ ३ वैष्णविज्म, शैविज्म ऐण्ड माइनर रिला जस सिस्टम्स ( सर भंडारकर ) पृष्ठ ४१ हि० सा० प्रा० इ० -- ५० गाय और बैलों की छाती पर अक्सर रहा करता है । इसी भावना पर कहीं बिहारी ने श्लेष से व्यंग किया था : चिरजीवों बोरी जुरं क्यों न सनेह गंभीर । को घटि ए वृषभानुजा वे हलधर के वीर । (आ) कृष्ण के भाई का नाम बलराम है । वे भी ऋतु के देव माने गये हैं । उनका संबन्ध विशेष कर धान्यादिकों से है । उनका प्रायुध भी हल है । अतएव कृष्णबलराम प्रकृति की सृजन शक्ति के प्रतिनिधि है । ( इ ) गोवर्धन पूजा का भी यही तात्पर्य है जिसमें अनाज की पूजा का प्रधान विधान है । उस उत्सव का दूसरा नाम अन्नकूट भी है । उसका प्रारम्भ श्री कृष्ण के द्वारा होना कहा गया है जिसके कारण उन्हें इन्द्र का कोप-भाजन बनना पड़ा । इससे यह ज्ञात होता है कि प्राचीन काल के ये सब सिद्धान्त जो प्रकृति के प्रति आदर के भाव से परिपूर्ण थे, कृष्ण के देवत्व का निर्माण करने में पूर्ण सहायक थे । बाद में अन्य सिद्धान्तों के मिश्रण से कृष्ण अनेक विचारों के प्रतीक बने, किन्तु उनका आदि रूप निश्चय ही 'वनदेव' से लिया गया जान पड़ता है; क्योंकि वे आभीर जाति के आराध्य थे । यह कहा ही जा चुका है कि रामानुजाचार्य से प्रभावित होकर उनके अनुयायी रामानन्द ने विष्णु और नारायण का रूपान्तर कर राम-भक्ति का प्रचार किया तो निम्बार्क, मध्व प्रौर विष्णु स्वामी के प्रादर्शों को सामने रख कर उनके अनुयायी चैतन्य और वल्लभाचार्य ने श्रीकृष्ण की ही भक्ति का प्रचार किया । यह भक्ति 'भागवत पुराण' से ली गई है जिसमें ज्ञान की अपेक्षा प्रेम का ही अधिक महत्त्व है, आत्म-चिन्तन की अपेक्षा श्रात्म-समर्पण की भावना का प्राधान्य है, ईसा की १५ वीं शताब्दी में कृष्ण-भक्ति का जो प्रचार हुआ उसमें वल्लभाचार्य का बहुत बड़ा हाथ था। उन्होंने जहाँ दार्शनिक क्षेत्र में शुद्धाद्वैत की स्थापना की वहाँ भक्ति के क्षेत्र में पुष्टि मार्ग की। दोनों के योग से उन्होंने श्रीकृष्ण को ब्रह्म मान कर उन्हीं की कृपा पर जीव के सत् चित् के अतिरिक्त प्रानन्द रूप की कल्पना की । उनके पुष्टि- सम्प्रदाय में अनेक वैष्णव दीक्षित हुए जिन्होंने श्रीकृष्ण की भक्ति पर उत्कृष्ट रचना की । इनमें अष्टछाप बहुत प्रसिद्ध है जिसकी स्थापना श्री वल्लभाचार्य के पुत्र श्री विट्ठलनाथ ने की थी। उसी अष्टछाप में सूरदास, नन्ददास आदि ब्रजभाषा के श्रेष्ठ कवि थे जो भक्ति के क्षेत्र में यशस्वी और लोकप्रिय हुए । वल्ल भाचार्य ने अपनी गद्दी अपने आराध्य श्रीकृष्ण को जन्मभूमि ब्रज ही में स्थापित की। १ बिहारी रत्नाकर, पृष्ठ १७८-१७६ इस गद्दी का सबसे बड़ा प्रभाव यह हुआ कि श्रीकृष्ण की भक्ति के साथ-साथ ब्रजभाषा का भी बहुत प्रचार हुआ और वह शीघ्र ही काव्य-भाषा के पद पर अधिष्ठित हो गई । ब्रज भाषा में ऐ सुन्दर गेय पदों की रचना हुई कि उसके द्वारा कृष्ण भक्ति उत्तरीय भारत के कोने-कोने में व्याप्त हो गई । कृष्ण भक्ति के द्वारा ब्रजभाषा का प्रचार हुआ और ब्रजभाषा के द्वारा कृष्ण भक्ति का । इस तरह कृष्ण-भक्ति और ब्रजभाषा ने पारस्परिक रूप से एक दूसरे को महत्त्व दिया । श्रीवल्लभाचार्य से प्रभावित होकर जिन कवियों ने श्रीकृष्ण भक्ति पर रचना की उनमें श्री सूरदास सबसे अधिक प्रसिद्ध है। श्रीकृष्ण की भावना के विकास के साथ ही साथ राधा के इतिहास पर भी , दृष्टि डालना युक्ति-संगत होगा । 'महाभारत' मे जहाँ कृष्ण के जीवन का चित्रण है, वहीं राधा का निर्देश नहीं है । 'महाभारत' मे कृष्ण का जीवन महत्त्वपूर्ण है, वे मथुरा मे जन्म लेते हैं, कंस के साथ अन्य प्रसुरों को मारते हैं और कंस वध के बाद द्वारिका चले जाते हैं । उनके पिता का नाम वसुदेव और माता का नाम देवकी है, पर उनके गोप- जीवन की छाया और उनके अलौकिक कृत्यों की कथा महाभारत में नहीं है । गोप- जीवन के अभाव में राधा का उल्लेख भी नही है । 'महाभारत' के बाद ईसा की दशम शताब्दी मे 'भागवत पुराण' की रचना हुई । उसके आधार पर 'नारद भक्ति सूत्र' और 'शाण्डिल्य भक्ति सूत्र का निर्माण हुआ । इसमे भक्ति का विकास पूर्ण रूप से हुआ, किन्तु इन ग्रन्थों में भक्ति-भावना की अभिव्यक्ति होते हुए भी भक्ति को साकार मूर्ति राधा का निर्देश कृष्ण के साथ नही है, 'भागवत पुराण' में कृष्ण का बाल- जीवन ही वर्णित है, उत्तर-जीवन का विवरण ही नहीं है, केवल संकेत मात्र है । जिस बाल-जीवन का वर्णन 'भागवत' में है वह बहुत विस्तार से है । 'भागवत' में गोपियों का निर्देश अवश्य है, पर राधा का नहीं । यह बात अवश्य है कि श्री कृष्ण के साथ एकांत में विचरण करने वाली एक गोपी का विवरण अवश्य है, पर उसका नाम नहीं दिया गया । अन्य गोपियाँ उस गोपी की प्रशंसा करती हैं कि उसने पूर्व जन्म में श्रीकृष्ण की आराधना अवश्य की होगी तभी तो वह श्रीकृष्ण को इतनी प्रिय है। महाराष्ट्र के संत ज्ञानेश्वर और उसी वर्ग के अन्य गायकों ने राधा का वर्णन नहीं किया । 'भागवत पुराण' के आधार पर पहला संप्रदाय माधव संप्रदाय है, जिसमें द्वैतवाद के सिद्धान्त पर कृष्णोपासना पर विशेष जोर दिया गया है, पर इसमें भी राधा का उल्लेख नहीं है । माधव सम्प्रदाय श्री मध्वाचार्य द्वारा प्रतिपादित हुआ जिसका समय संवत् १२५६ से १३३५ ( सन् १९९६-१२७८ ) माना गया है । 'भागवत पुराण' के आधार पर जिन अन्य पुराणों की रचना की गई है उनमें राधा का निर्देश नहीं है । 'भागवत पुराण में एक गोपी का निर्देश प्रवश्य है जिसने पूर्व जन्म में श्रीकृष्ण की आराधना की है जिस कारण वह श्रीकृष्ण को विशेष प्रिय है । इसी 'आराधना' शब्द से राधा की उत्पत्ति ज्ञात होती है । राधा शब्द संस्कृत धातु 'राध' से बना है जिसका अर्थ 'सेवा करना या प्रसन्न करना है । किस ग्रन्थ में राधा का नाम पहले पहल इस अर्थ में प्राता है यह तो निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता, पर पहला ग्रन्थ जिसका परिचय अभी तक प्राप्त हो सका है वह है गोपालतापनी उपनिषद् । इसमे राधा का वर्णन कृष्ण की प्रेयसि के रूप में है । यह ग्रन्थ राधा-सम्प्रदाय के लोगों में बहुत मान्य है । 'गोपालतापनी उपनिषद्' की रचना मध्व के भाष्य और अनुव्याख्यान के बाद ही हुई होगी, क्योंकि मध्व ने राधा का उल्लेख नहीं किया । माधव सम्प्रदाय के बाद जो अन्य सम्प्रदाय हुए ( जिनमे कृष्ण का ब्रह्मत्व स्वीकार किया गया ) वे विष्णु स्वामी और निम्बार्क सम्प्रदाय हुए। इन दोनों सम्प्रदायों में राधा का निर्देश है । निम्बार्क सम्प्रदाय मे जयदेव हुए जिन्होने राधा और कृष्ण के विहार मे 'गीतगोविन्द' की रचना की। राधा की उपासना 'भागवत पुराण' के आधार पर वृन्दावन में ईसा सन् ११०० के लगभग प्रारम्भ हो गई होगी और वहीं से वह बगाल तथा अन्य स्थानों में पहुँची होगी। विष्णु स्वामी और निम्बार्क सम्प्रदाय के बाद चैतन्य और वल्लभ सम्प्रदायों में भी राधा को विशिष्ट स्थान मिला । विष्णु स्वामी में प्रभावित होकर वल्लभाचार्य ने राधा की उपासना की, जिससे महाववि सूरदाम प्रभावित हुए और निम्बार्क से प्रभावित होकर जयदेव ने 'गीतगोविन्द' में राधा का वर्णन किया जिससे महाकवि विद्यापति प्रभावित हुए । इस प्रकार विद्यापति और सूरदास की रचनाओं में राधा को महत्त्वपूर्ण स्थान मिला । कृष्ण काव्य का प्रारम्भ विद्यापति से माना गया है । किन्तु विद्यापति पर 'गीतगोविंद' के रचयिता महाकवि जयदेव का विशेष प्रभाव होने के कारण कृष्णकाव्य का सूत्रपात्र जयदेव से ही मानना चाहिए । जय देव जयदेव का जीवन वृत्त अधिकतर नाभादास के 'भक्तमाल' और प्रियादास द्वारा उसको 'टीका' से ज्ञात होता है । नाभादास के 'भक्तमाल' में जयदेव का परिचय मात्र है ।" प्रियादास की 'टीका' में जयदेव के जीवन पर कुछ अधिक १ जयदेव कवि नृप चक्व खंड मँडलेश्वर आन कवि । प्रचुर भयो तिहुँ लोक गीत गोविन्द उजागर । काक काव्य नव रस्स सरस शृगार को सागर । प्रकाश डाला गया है। इनके जीवन की अधिकांश घटनाएँ अलोकिक है और वे अधिकतर जनश्रुति के आधार पर ही हैं। इनके जीवन के विषय में प्रामाणिक रूप से यही कहा जा सकता है कि इनका जन्म किदुवित्व ( वीरभूमि, बंगाल ) में हुआ था । इनके पिता का नाम भोजदेव और माता का नाम राधादेवी ( रामादेवी ? ) था । बंगाल के राजा लक्ष्मण सेन के दरबार में इन्होंने बड़ी प्रसिद्धि पाई । राजा लक्ष्मण सेन का समय सन् १९७० ( सं० १२२७ ) है । अतः जयदेव का समय भी यही मानना चाहिये ।' 'श्री भक्तमाल सटीक' के वार्तिक प्रकाशकार श्री सीतारामशरण भगवानप्रसाद ने जयदेव का समय सन् १०२५ से ११५० ई० ( अर्थात् संवत् १०८२ से १२०७ के मध्य माना है। मानियर विलियम्स ने जयदेव का ।२ समय ईसा की बारहवी शताब्दी माना है। इतिहास के साक्ष्य से मेकालिफ के द्वारा दिया गया समय ठीक ज्ञात होता है । लक्ष्मण सेन के राज्यारोहण का समय सन् १९१६ दिया गया है। मुहम्मद बिन बख्तियार ने बिहार पर सन् १९६७ में १ चढ़ाई की थी, उसके पूर्व लक्ष्मण सेन की मृत्यु हो गई थी । अतः लक्ष्मण सेन का राजत्व-काल सन् १९९७ के पूर्व मानना चाहिए । ऐसी परिस्थिति मे सन् १९७० ( संवत् १२२७ ) मे जयदेव का लक्ष्मण सेन के संरक्षण में रहना संभव है। अतः जयदेव का समय विक्रम की तेरहवी शताब्दी का प्रारम्भ मानना चाहिए । प्रियादास ने जयदेव के वैराग्य, पद्मावती से विवाह, गृहस्थाश्रम, 'गीत गोविंद' की रचना, ठग मिलन, पद्मावती की मृत्यु और पुनर्जीवन आदि प्रसंगों पर विस्तार से लिखा है जिनमें अनेक अलौकिक घटनाम्रो का मिश्रण है, पर इतना निश्चित है कि जयदेव ने 'गीत गोविद' की रचना संस्कृत में लक्ष्मण सेन के राजत्व काल ही में की थी । 'गीत गोविन्द' में जयदेव ने राधा-कृष्ण का मिलन, कृष्ण की अष्टपदी अभ्यास करें तिहि बुद्धि बढ़ावै । राधा रमण प्रमन्न सुने तहँ निश्च भाव ।। शुभ संत सरोरुह खंड को पद्मावति सुग्व जनक रवि । जयदेव कब्बि नृप चक्कवं खंड मँडलेश्वर आन कवि । १ प्रियादास के २० कवित्त - १४४ से १६३ कवित भक्तमाल सटीक, पृष्ठ ३२७ भक्तमाल सटीक, पृष्ठ ३२८-३४६ २ सिख रिलीजन, भाग ६ ( एम० ए० मेकालिफ, १६०६ ) ३ इनका समय सन् १०२५ ई० से ११५० ईसवी तक निर्णय किया गया है, अर्थात् विक्रमी सम्वत् १०८२ तथा १२०७ के मध्य । भक्तमाल सटीक पृष्ठ ३४७ ४ ब्रह्मनिज्म ऐंड हिन्दूइज्म, पृष्ठ १४६ ( मानियर विलियम्स ) ५ मेडोबल इंडिया, पृष्ठ २६ ( डा० ईश्वरी प्रसाद) मधुर लीलाएँ और प्रेम की मादक अनुभूति सरस और मधुर शब्दावली में लिखी है । 'गीत गोविन्द' के द्वारा राधा का व्यक्तित्व पहली बार मधुर और प्रेमपूर्ण बना कर साहित्य में प्रस्तुत किया गया है । 'गीत गोविन्द' की पदावली मधुर है। उसमें कामदेव के बाणों की मीठी पीड़ा है । कीथ 'गीत गोविन्द' की प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि उसकी शब्दावली इतनी मधुर और भावों के अनुकूल है कि उसका अनुवाद अन्य किसी भाषा में ठीक तरह से हो ही नहीं सकता । १ जयदेव ने संस्कृत में 'गीत गोविन्द' की रचना कर अपने भाषाधिकार और भाव-प्रदर्शन की कुशलता का परिचय अवश्य दिया, पर हिन्दी में उन्होंने अपनी यह कुशलता नहीं दिखलाई ग्लास से उन्होंने विद्यापति और सूरदास जैसे महान् कवियों को प्रभावित अवश्य किया, पर वे स्वय हिन्दी मे उत्कृष्ट कोटि ' की रचना नहीं कर सके । संस्कृत की कोमलकात पदावली में उन्होंने जिस संगीत की सृष्टि अपने काव्य 'गीत गोविन्द' मे की, वह हिन्दी में नहीं हो सकी । संस्कृत के 'गीत-काव्य' में 'गीत गोविन्द अमर है। उसमे यमक और अनुप्रास से जिस प्रकार भाव-व्यंजना की गई है, वह अन्यत्र दुर्लभ है । उदाहरणार्थ तृतीयावलोकनम् में राधा का विरह-निवेदन लीजिए :-- ललित लवंग लता परिशीलन कोमल मलय समीरे । मधुकर निकर करम्बित कोकिल कूजित कुंज कुटीरे ॥ बिहरति हरिरिह सरस बसन्ते । नृत्यति युवति जनेत समं सखि विरहिजनस्य दुरन्ते ॥ उन्मद मदन मनोरथ पथिक वधू जन जनित विलापे । अलि कुल संकुल कुसुम समूह निराकुल बकुल कलापे । मृगमद सौरभ रभसवशंवद नवदल माल तमाले । युवजन हृदय विदारण मनसिज नखरुचि किंशुक जाले ॥ मदन महीपति कनक दण्ड रुचि केसर कुसुम विकासे । मिलित शिलीमुख पाटलि पटल कृतस्मर तूरण विलासे ।। इत्यादि 'गीत गोविंद' में प्राध्यात्मिकता की विशेष छाप नहीं है, लौकिक शृंगार से चाहे आध्यात्मिकता का संकेत भले ही मान लिया जावे । कामसूत्र के संकेतों के आधार पर राधा-कृष्ण का परिरंभन है, विलास है, क्रीड़ा है । इस क्रीड़ा में ही रहस्यवाद का संकेत आलोचकों द्वारा माना गया है । १ क्लासिकल संस्कृत लिट्रेचर ( हैरीटेज ऑव् इंडिया सोरीज, पृष्ठ १२१ ) ( ए० बी० कीथ ) ( अ ) ९ हिस्ट्री ऑॉव् संस्कृत लिट्रेचर, पृष्ठ १६६ ( ५० बी० कीथ ) (भा) ब्रह्मनिज्म ऐन्ड हिन्दूइज्म, पृष्ठ १४६ ( मानियर विलियम्स ) जयदेव हिंदी में उत्कृष्ट कोटि की रचना नहीं कर सके। उनके एक-दो पद 'श्रीगुरु ग्रन्थ साहब' में अवश्य पाये जाते हैं जो भाव और भाषा की दृष्टि से अत्यन्त साधारण है । जयदेव के ऐसे पद 'श्री गुरु ग्रंथ साहब' की राग गूजरी और राग मारू में ही मिलते हैं। उनकी हिन्दी रचना बहुत कम देखने में आती है। परिचय के लिए उनका राग मारू में एक पद इस प्रकार है चंद सत भेदिया नाद सत पूरिया सूर सत खोद सादतु कीया । अबलबलु तोड़िया अचल चलु थापिया अधड़ घड़िया तहा श्रमिउँ पीया । मन आदि गुण आदि बखानिया । ते दुविधा दृष्टि समानिया ।। अरधि को अरधिया सरधि को सरधिया, सलिल कौ सलिल संमानिआइया । वदित जयदेव जयदेव कौ रं मिया, ब्रह्म निर्वाण लवलीन पाइया ॥ १ इस पद में न तो जयदेव का भाषा-माधुर्य है और न भाव-सौन्दर्य । जयदेव ने 'गीत गोविंद' में श्रीकृष्ण और राधा के प्रेम का कोमल और विलासपूर्ण जो वर्णन किया है, उसकी छाया भी इस पद में नहीं है । यह पद तो निर्गुण ब्रह्म की शक्ति-संपन्नता के विषय में है। अतः जयदेव ने यद्यपि हिन्दी में संस्कृत की मधुर पदावली के समान कोई रचना नहीं की तथापि उन्होने हिन्दी के कवियों को राधाकृष्ण संबन्धी रचना करने के लिए प्रोत्साहित अवश्य किया । इस क्षेत्र में वे हिन्दी के कवियों के लिए आधार स्वरूप हैं । उनका सब से अधिक प्रभाव विद्यापति पर ही ज्ञात होता है, अतः यहाँ विद्यापति की कविता पर प्रकाश डालना आवश्यक है । विद्यापति बंगाली कवि नहीं थे, वे मिथिला के निवासी थे और मैथिली में उन्होंने अपनी कविता लिखी। लगभग चालीस वर्ष पहले बंगाली विद्यापति को अपना कवि समझते थे, पर जब से उनके जीवन की घटनाओं की जाँच पड़ताल बाबू राजकृष्ण मुकर्जी और डाक्टर ग्रियर्सन ने की है तब से बंगाली अपने अधिकार को श्रव्यवस्थित पाते हैं । विद्यापति एक विद्वान वंश के वंशज थे। उनके पिता गणपति ठाकुर ने अपनी मुप्रसिद्ध पुस्तक 'गंगा-भक्ति-तरगिनी' अपने मृत सरक्षक मिथिला के महाराजा गणेश्वर की स्मृति में समर्पित की थी । गणपति के पिता जयदत्त संस्कृत विद्वता के लिये ही प्रसिद्ध नहीं थे वरन् वे एक बड़े सन्त भी थे । उन्हें इसी कारण 'योगेश्वर' की उपाधि मिली थी। जयदत्त के पिता वीरेश्वर थे, जिन्होंने मैथिल ब्राह्मणों की दिनचर्या के लिए नियमसबद्ध किये थे । १ आदि श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी ( मोहन सिंह ) पृष्ठ ५६८ तरनतारन ( अमृतसर, पंजाब ), १६२७ विद्यापति विसपी के रहने वाले थे । यह दरभंगा जिले में है । यह गाँव विद्यापति ने राजा शिवसिंह से उपहार स्वरूप पाया था। विद्यापति ने शिवसिंह, लखिमा देवी, विश्वास देवी, नरसिंह देवी और मिथिला के कई राजाओं की संरक्षता पाई थी । ताम्र पत्र द्वारा विसपी गाँव का दान शिवसिहन 'अभिनव जयदेव की उपाधि सहित सन् १४०० ई० में विद्यापति को दिया था। कई विद्वान् इस ताम्र पत्र को जाली समझते है । इस लेख की अक्षराकृति उस समय के प्रक्षरों से नहीं मिलती जब कि यह दान दिया गया होगा । इस प्रमाण के आधार पर ताम्र पत्र प्रामाणिक सिद्ध किया जाता है। जो हो, इसमें कोई संदेह नहीं कि विसपी गाँव विद्यापति को शिवसिंह ने दान में दिया था । कवि स्वयं इस दान को अपने एक पद्य में लिखता है ।" उस स्थान पर प्रचलित जनश्रुति भी इस दान का समर्थन करती है । विद्यापति के आविर्भाव के सम्बन्ध में डा० उमेश मिश्र लिखते है "इनके पिता गणपति ठाकुर महाराज गणेश्वरसिंह के राज-सभासद थे और महासभा में अपने पुत्र विद्यापति को ले जाया करते थे। महाराज गणेश्वर की मृत्यु २५२ ल० सं० में हुई थी । अतः विद्यापति उस समय अंततः १० या ११ की अवस्था के अवश्य रहे होंगे जिसमें उनका राजदरबार में आना-जाना हो सकता था। दूसरी बात यह है कि विद्यापति के प्रधान श्रश्रयदाता शिवसिंह का जन्म २४३ ल० सं० में हुआ और ५० वर्ष की अवस्था में राजगद्दी पर बैठे, यह माना जाता है और यह भी लोगों की धारणा है कि कवि विद्यापति उनसे दो वर्ष मात्र बड़े थे तीसरी बात यह है कि विद्यापति ने 'कीतिलता' में अपने को खेलन कवि कहा है, इसलिये वह अवश्य कीर्तिसिंह या वीरसिंह की दृष्टि में अल्पवयस के साथ खेलने के लायक रहे होंगे । इन सभी बातों से अनुमान होता है कि विद्यापति २५२ ल० सं० में लगभग १० या ११ वर्ष के थे ।"३ १ स्वतिश्रीगजरथ इत्यादि समस्त प्रक्रिया विराजमान श्रीमद्रामेश्वरीश्वरलब्ध प्रसादभवानी भव भक्ति भावना परायण-रूप नारायण महाराजाधिराज - श्रीमच्छिवसिंह देव पादाः समरविजमिनो जरे लतप्पायां विसपी ग्रामवास्तव्य सकल लोकान् भूकर्षककाश्च समादिशन्ति ज्ञातमस्तु भवताम् । ग्रामोऽयमस्माभिः सप्रग्रिया भिनव जयदेव- महाराज पण्डित ठक्कुर - श्री विद्यापतिभ्यः शासनीकृत्य प्रदत्तोऽत ग्राम कस्था यूयमेतेषां वचनकरी भूकर्ष कादिवर्म्म करिष्यथेति लक्ष्मणसेन सम्वत् २१३ श्रामण सुदि ७ गुरौ । २ पंचगौडाभिप सिबसिंह भूप कृपा करिलेल निज-पास । विसपी ग्राम दान कएल मोहि रहइत राजनिधान ।। ३ विद्यापति ठाकुर ( डा० उमेश मिश्र ) पृष्ठ ३६ ( हिन्दुस्तानो एकेडेमी, इलाहाबाद १६३७ ) डाक्टर उमेश मिश्र के इस कथनानुसार विद्यापति का जन्म २४१ ल० सं० ( संवत् १४२५ ) निश्चित होता है । विद्यापति की मृत्यु के सम्बन्ध में डा० मिश्र का कथन है-" वाचस्पति मिश्र भैरवेन्द्रसिंह के सभासद, विद्वान और विद्यापति के सम कालीन थे । वाचस्पति मिश्र का समय सन् १४७५ ईस्वी ( प्रिंस व वेल्स सरस्वती भवन स्टडीज, ग्रन्थ ३, पृष्ठ १२५ ) तक होना माना जाता है, अतएव विद्यापति को भी इसी समय तक या इसके लगभग रखना ही पडेगा । इन सब बातों को विचार कर यह कहा जा सकता है कि विद्यापति लगभग ३५६ ल० सं० अर्थात् सन् १४७५ ईस्वी में अवश्य जीवित रहे होंगे । "" इस कथन से विद्यापति की मृत्यु सं० १५३२ ( सन् १४७५ ) के बाद ही माननी चाहिये । इस प्रकार विद्यापति ने १०० वर्ष से भी अधिक आयु पाई । नाभादास ने अपनी 'भक्तमाल' में तो विद्यापति का निर्देश मात्र कर दिया है । विद्यापति के पदों का बंगला में रूपान्तर बहुत अधिक पाया जाता है । यहाँ तक की बंगाल में विद्यापति के पद प्रचलित हैं, वे कई अंशों में मैथिली में प्रचलित पदों से भिन्न हैं । उसका एक कारण है । विद्यापति का समय मिथिला विश्वविद्यालय के गौरव का समय था और उन दिनो मिथिला और बगाल में भावविनिमय की अधिकता थी । अतएव बंगाल के राधा-कृष्ण के गीत मिथिला में पहुँच और उनका पाठ बिलकुल मैथिल हो गया । उदाहरण स्वरूप गोविन्ददास के पद दिये जा सकते हैं । वही विद्यापति को कविता का हाल हश्रा और उनका पाठ भी बंगला में हो गया । कोई-कोई पद तो केवल बंगला में ही पाये जाते हैं । विद्यापति संस्कृत के महान् पंडित थे । प्रधानतः इन्होने अपनी रचनाएँ संस्कृत ही में लिखीं । संस्कृत के अतिरिक्त इन्होंने अवहट्ट और मैथिली में भी प्रन्थ और दलिखे । अत भाषा की दृष्टि से विद्यापति के ग्रन्थ तीन वर्गों में विभाजित किये जा सकते है १ विद्यापति ठाकुर (डा० उमेश मिश्र), २ विद्यापति ब्रह्मदास बहोरन चतुर बिहारी । गोविन्द गंगा रामलाल बरसानियाँ मंगलकारी ।। प्रिय दयाल परसराम भक्तभाई या टीको । नन्द सुवन की काप कवित केसौ को नीको ॥ आश करन पूरन नृपनि भीषम जन दयाल गुननहिन पार। हरि सुजस प्रचुर कर जगत मैं ये कविजन अतिसय उदार ॥ -भक्तमाल (नामादास )
भारी राजा हुआ जिसका एक शिला लेख नासिक में प्राप्त हुआ है । ' यह जाति अपने साथ गोपाल कृष्ण को ईश्वर के रूप में लाई । भंडारकर का कथन है कि भी जाति का 'कृष्ण' शब्द संभव है पश्चिम के 'इस्ट' शब्द से उद्भूत हुआ हो ।" इसी 'कृष्ण' को प्रभोर जाति ने अपने महत्त्व से 'वेद', 'उपनिषद' और 'महाभारत' के वासुदेव कृष्ण से सम्बद्ध कर दिया । प्रतः वासुदेव कृष्ण जो 'महाभारत' तक ब्रह्म और ब्रह्म के अवतार रहे प्रभीरों के गोपाल कृष्ण में रूपान्तरित हो गये और गोपाल कृष्ण की बाल लीलाएँ पुरातन कृष्ण की बाल लीलाएँ बन गई । नारद पंचरात्र की 'ज्ञानामृत सार संहिता' में कृष्ण की बाल लीलाओं का निर्देश है। ज्ञानामृत सार संहिता' का रचना - काल सर भडारकर द्वारा ईसा की चौथी शताब्दी के बाद ही निर्धारित किया गया है । अतः इस समय आभीरों का आतंक अवश्य ही अपने उत्कर्ष पर होगा और उसी आतंक से प्रेरित होकर वासुदेव कृष्ण की सत्ता गोपाल कृष्ण के समस्त बाल चरित्र में लीन हो गई । इस प्रकार धार्मिक क्षत्र में कृष्ण की भावना का विकास हुआ । कृष्ण की ईश्वरीय सृष्टि सर्वप्रथम 'वनदेव' की भावना में मानी जानी चाहिये । प्रकृति में वसन्तश्री से नवीन जीवन की सृष्टि होती है, नवीन पल्लवों में सौदर्य फूट पड़ता है । इस नवीन जीवन को उत्पन्न करने वाली शक्ति के प्रति प्राचीनतम काल के प्रसंस्कृत हृदय में भक्ति का उद्रेक होना स्वाभाविक है । हमें ज्ञात है कि आर्यों ने प्रकृति के अनेक रूपों को देवताओं के रूप में मान इन्द्र, वरुण, अग्नि, मरुत आदि देवों की कल्पना की है । उसी भाँति मृत्यु से जीवन का आविर्भाव करने वाली शक्ति भी किस प्रकार कृष्ण के रूप में आई, यही हमे देखना है । कृष्ण के जीवन की भावना स्पष्ट रूप से गोप रूप में है, जिसका सम्बन्ध गौवों से है। प्रकृति के जीवों की रक्षा करने वाले और प्रकृति के प्रांगण में विहार करने वाले देवताओं की कल्पना तो हमारे भक्ति काल के साहित्य में भी मिलती है । गाएँ प्रकृति की निर्दोष, सरल और करुण प्रतिमाएँ हैं । श्रीकृष्ण उनके पोषक हैं । इसीलिए वे आदि-भावना में गोप रूप होने के कारण 'वनदेव' के रूप में श्राप से आप प्रा जाते हैं। उनका नाम इसीलिए गोपाल अथवा गोपेन्द्र है । यही कारण ज्ञात होता है कि श्रीकृष्ण के हृदय में 'श्रीवत्स' चिह्न है । यह चिह्न हृदय पर रोत्रों के चक्र से निर्मित है जिसके लिए 'भौंरी' एक विशिष्ट शब्द है । यह एक वैष्णविज्म, शैविज्म ऐंड माइनर रिलीजस सिस्टम्स पृष्ठ सैंतीस दो वैष्णविज्म, शैविज्म ऐंड माइनर रिलीजस सिस्टम्स पृष्ठ अड़तीस तीन वैष्णविज्म, शैविज्म ऐण्ड माइनर रिला जस सिस्टम्स पृष्ठ इकतालीस हिशून्य साशून्य प्राशून्य इशून्य -- पचास गाय और बैलों की छाती पर अक्सर रहा करता है । इसी भावना पर कहीं बिहारी ने श्लेष से व्यंग किया था : चिरजीवों बोरी जुरं क्यों न सनेह गंभीर । को घटि ए वृषभानुजा वे हलधर के वीर । कृष्ण के भाई का नाम बलराम है । वे भी ऋतु के देव माने गये हैं । उनका संबन्ध विशेष कर धान्यादिकों से है । उनका प्रायुध भी हल है । अतएव कृष्णबलराम प्रकृति की सृजन शक्ति के प्रतिनिधि है । गोवर्धन पूजा का भी यही तात्पर्य है जिसमें अनाज की पूजा का प्रधान विधान है । उस उत्सव का दूसरा नाम अन्नकूट भी है । उसका प्रारम्भ श्री कृष्ण के द्वारा होना कहा गया है जिसके कारण उन्हें इन्द्र का कोप-भाजन बनना पड़ा । इससे यह ज्ञात होता है कि प्राचीन काल के ये सब सिद्धान्त जो प्रकृति के प्रति आदर के भाव से परिपूर्ण थे, कृष्ण के देवत्व का निर्माण करने में पूर्ण सहायक थे । बाद में अन्य सिद्धान्तों के मिश्रण से कृष्ण अनेक विचारों के प्रतीक बने, किन्तु उनका आदि रूप निश्चय ही 'वनदेव' से लिया गया जान पड़ता है; क्योंकि वे आभीर जाति के आराध्य थे । यह कहा ही जा चुका है कि रामानुजाचार्य से प्रभावित होकर उनके अनुयायी रामानन्द ने विष्णु और नारायण का रूपान्तर कर राम-भक्ति का प्रचार किया तो निम्बार्क, मध्व प्रौर विष्णु स्वामी के प्रादर्शों को सामने रख कर उनके अनुयायी चैतन्य और वल्लभाचार्य ने श्रीकृष्ण की ही भक्ति का प्रचार किया । यह भक्ति 'भागवत पुराण' से ली गई है जिसमें ज्ञान की अपेक्षा प्रेम का ही अधिक महत्त्व है, आत्म-चिन्तन की अपेक्षा श्रात्म-समर्पण की भावना का प्राधान्य है, ईसा की पंद्रह वीं शताब्दी में कृष्ण-भक्ति का जो प्रचार हुआ उसमें वल्लभाचार्य का बहुत बड़ा हाथ था। उन्होंने जहाँ दार्शनिक क्षेत्र में शुद्धाद्वैत की स्थापना की वहाँ भक्ति के क्षेत्र में पुष्टि मार्ग की। दोनों के योग से उन्होंने श्रीकृष्ण को ब्रह्म मान कर उन्हीं की कृपा पर जीव के सत् चित् के अतिरिक्त प्रानन्द रूप की कल्पना की । उनके पुष्टि- सम्प्रदाय में अनेक वैष्णव दीक्षित हुए जिन्होंने श्रीकृष्ण की भक्ति पर उत्कृष्ट रचना की । इनमें अष्टछाप बहुत प्रसिद्ध है जिसकी स्थापना श्री वल्लभाचार्य के पुत्र श्री विट्ठलनाथ ने की थी। उसी अष्टछाप में सूरदास, नन्ददास आदि ब्रजभाषा के श्रेष्ठ कवि थे जो भक्ति के क्षेत्र में यशस्वी और लोकप्रिय हुए । वल्ल भाचार्य ने अपनी गद्दी अपने आराध्य श्रीकृष्ण को जन्मभूमि ब्रज ही में स्थापित की। एक बिहारी रत्नाकर, पृष्ठ एक सौ अठहत्तर-एक सौ छिहत्तर इस गद्दी का सबसे बड़ा प्रभाव यह हुआ कि श्रीकृष्ण की भक्ति के साथ-साथ ब्रजभाषा का भी बहुत प्रचार हुआ और वह शीघ्र ही काव्य-भाषा के पद पर अधिष्ठित हो गई । ब्रज भाषा में ऐ सुन्दर गेय पदों की रचना हुई कि उसके द्वारा कृष्ण भक्ति उत्तरीय भारत के कोने-कोने में व्याप्त हो गई । कृष्ण भक्ति के द्वारा ब्रजभाषा का प्रचार हुआ और ब्रजभाषा के द्वारा कृष्ण भक्ति का । इस तरह कृष्ण-भक्ति और ब्रजभाषा ने पारस्परिक रूप से एक दूसरे को महत्त्व दिया । श्रीवल्लभाचार्य से प्रभावित होकर जिन कवियों ने श्रीकृष्ण भक्ति पर रचना की उनमें श्री सूरदास सबसे अधिक प्रसिद्ध है। श्रीकृष्ण की भावना के विकास के साथ ही साथ राधा के इतिहास पर भी , दृष्टि डालना युक्ति-संगत होगा । 'महाभारत' मे जहाँ कृष्ण के जीवन का चित्रण है, वहीं राधा का निर्देश नहीं है । 'महाभारत' मे कृष्ण का जीवन महत्त्वपूर्ण है, वे मथुरा मे जन्म लेते हैं, कंस के साथ अन्य प्रसुरों को मारते हैं और कंस वध के बाद द्वारिका चले जाते हैं । उनके पिता का नाम वसुदेव और माता का नाम देवकी है, पर उनके गोप- जीवन की छाया और उनके अलौकिक कृत्यों की कथा महाभारत में नहीं है । गोप- जीवन के अभाव में राधा का उल्लेख भी नही है । 'महाभारत' के बाद ईसा की दशम शताब्दी मे 'भागवत पुराण' की रचना हुई । उसके आधार पर 'नारद भक्ति सूत्र' और 'शाण्डिल्य भक्ति सूत्र का निर्माण हुआ । इसमे भक्ति का विकास पूर्ण रूप से हुआ, किन्तु इन ग्रन्थों में भक्ति-भावना की अभिव्यक्ति होते हुए भी भक्ति को साकार मूर्ति राधा का निर्देश कृष्ण के साथ नही है, 'भागवत पुराण' में कृष्ण का बाल- जीवन ही वर्णित है, उत्तर-जीवन का विवरण ही नहीं है, केवल संकेत मात्र है । जिस बाल-जीवन का वर्णन 'भागवत' में है वह बहुत विस्तार से है । 'भागवत' में गोपियों का निर्देश अवश्य है, पर राधा का नहीं । यह बात अवश्य है कि श्री कृष्ण के साथ एकांत में विचरण करने वाली एक गोपी का विवरण अवश्य है, पर उसका नाम नहीं दिया गया । अन्य गोपियाँ उस गोपी की प्रशंसा करती हैं कि उसने पूर्व जन्म में श्रीकृष्ण की आराधना अवश्य की होगी तभी तो वह श्रीकृष्ण को इतनी प्रिय है। महाराष्ट्र के संत ज्ञानेश्वर और उसी वर्ग के अन्य गायकों ने राधा का वर्णन नहीं किया । 'भागवत पुराण' के आधार पर पहला संप्रदाय माधव संप्रदाय है, जिसमें द्वैतवाद के सिद्धान्त पर कृष्णोपासना पर विशेष जोर दिया गया है, पर इसमें भी राधा का उल्लेख नहीं है । माधव सम्प्रदाय श्री मध्वाचार्य द्वारा प्रतिपादित हुआ जिसका समय संवत् एक हज़ार दो सौ छप्पन से एक हज़ार तीन सौ पैंतीस माना गया है । 'भागवत पुराण' के आधार पर जिन अन्य पुराणों की रचना की गई है उनमें राधा का निर्देश नहीं है । 'भागवत पुराण में एक गोपी का निर्देश प्रवश्य है जिसने पूर्व जन्म में श्रीकृष्ण की आराधना की है जिस कारण वह श्रीकृष्ण को विशेष प्रिय है । इसी 'आराधना' शब्द से राधा की उत्पत्ति ज्ञात होती है । राधा शब्द संस्कृत धातु 'राध' से बना है जिसका अर्थ 'सेवा करना या प्रसन्न करना है । किस ग्रन्थ में राधा का नाम पहले पहल इस अर्थ में प्राता है यह तो निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता, पर पहला ग्रन्थ जिसका परिचय अभी तक प्राप्त हो सका है वह है गोपालतापनी उपनिषद् । इसमे राधा का वर्णन कृष्ण की प्रेयसि के रूप में है । यह ग्रन्थ राधा-सम्प्रदाय के लोगों में बहुत मान्य है । 'गोपालतापनी उपनिषद्' की रचना मध्व के भाष्य और अनुव्याख्यान के बाद ही हुई होगी, क्योंकि मध्व ने राधा का उल्लेख नहीं किया । माधव सम्प्रदाय के बाद जो अन्य सम्प्रदाय हुए वे विष्णु स्वामी और निम्बार्क सम्प्रदाय हुए। इन दोनों सम्प्रदायों में राधा का निर्देश है । निम्बार्क सम्प्रदाय मे जयदेव हुए जिन्होने राधा और कृष्ण के विहार मे 'गीतगोविन्द' की रचना की। राधा की उपासना 'भागवत पुराण' के आधार पर वृन्दावन में ईसा सन् एक हज़ार एक सौ के लगभग प्रारम्भ हो गई होगी और वहीं से वह बगाल तथा अन्य स्थानों में पहुँची होगी। विष्णु स्वामी और निम्बार्क सम्प्रदाय के बाद चैतन्य और वल्लभ सम्प्रदायों में भी राधा को विशिष्ट स्थान मिला । विष्णु स्वामी में प्रभावित होकर वल्लभाचार्य ने राधा की उपासना की, जिससे महाववि सूरदाम प्रभावित हुए और निम्बार्क से प्रभावित होकर जयदेव ने 'गीतगोविन्द' में राधा का वर्णन किया जिससे महाकवि विद्यापति प्रभावित हुए । इस प्रकार विद्यापति और सूरदास की रचनाओं में राधा को महत्त्वपूर्ण स्थान मिला । कृष्ण काव्य का प्रारम्भ विद्यापति से माना गया है । किन्तु विद्यापति पर 'गीतगोविंद' के रचयिता महाकवि जयदेव का विशेष प्रभाव होने के कारण कृष्णकाव्य का सूत्रपात्र जयदेव से ही मानना चाहिए । जय देव जयदेव का जीवन वृत्त अधिकतर नाभादास के 'भक्तमाल' और प्रियादास द्वारा उसको 'टीका' से ज्ञात होता है । नाभादास के 'भक्तमाल' में जयदेव का परिचय मात्र है ।" प्रियादास की 'टीका' में जयदेव के जीवन पर कुछ अधिक एक जयदेव कवि नृप चक्व खंड मँडलेश्वर आन कवि । प्रचुर भयो तिहुँ लोक गीत गोविन्द उजागर । काक काव्य नव रस्स सरस शृगार को सागर । प्रकाश डाला गया है। इनके जीवन की अधिकांश घटनाएँ अलोकिक है और वे अधिकतर जनश्रुति के आधार पर ही हैं। इनके जीवन के विषय में प्रामाणिक रूप से यही कहा जा सकता है कि इनका जन्म किदुवित्व में हुआ था । इनके पिता का नाम भोजदेव और माता का नाम राधादेवी था । बंगाल के राजा लक्ष्मण सेन के दरबार में इन्होंने बड़ी प्रसिद्धि पाई । राजा लक्ष्मण सेन का समय सन् एक हज़ार नौ सौ सत्तर है । अतः जयदेव का समय भी यही मानना चाहिये ।' 'श्री भक्तमाल सटीक' के वार्तिक प्रकाशकार श्री सीतारामशरण भगवानप्रसाद ने जयदेव का समय सन् एक हज़ार पच्चीस से एक हज़ार एक सौ पचास ईशून्य मे जयदेव का लक्ष्मण सेन के संरक्षण में रहना संभव है। अतः जयदेव का समय विक्रम की तेरहवी शताब्दी का प्रारम्भ मानना चाहिए । प्रियादास ने जयदेव के वैराग्य, पद्मावती से विवाह, गृहस्थाश्रम, 'गीत गोविंद' की रचना, ठग मिलन, पद्मावती की मृत्यु और पुनर्जीवन आदि प्रसंगों पर विस्तार से लिखा है जिनमें अनेक अलौकिक घटनाम्रो का मिश्रण है, पर इतना निश्चित है कि जयदेव ने 'गीत गोविद' की रचना संस्कृत में लक्ष्मण सेन के राजत्व काल ही में की थी । 'गीत गोविन्द' में जयदेव ने राधा-कृष्ण का मिलन, कृष्ण की अष्टपदी अभ्यास करें तिहि बुद्धि बढ़ावै । राधा रमण प्रमन्न सुने तहँ निश्च भाव ।। शुभ संत सरोरुह खंड को पद्मावति सुग्व जनक रवि । जयदेव कब्बि नृप चक्कवं खंड मँडलेश्वर आन कवि । एक प्रियादास के बीस कवित्त - एक सौ चौंतालीस से एक सौ तिरेसठ कवित भक्तमाल सटीक, पृष्ठ तीन सौ सत्ताईस भक्तमाल सटीक, पृष्ठ तीन सौ अट्ठाईस-तीन सौ छियालीस दो सिख रिलीजन, भाग छः तीन इनका समय सन् एक हज़ार पच्चीस ईशून्य से एक हज़ार एक सौ पचास ईसवी तक निर्णय किया गया है, अर्थात् विक्रमी सम्वत् एक हज़ार बयासी तथा एक हज़ार दो सौ सात के मध्य । भक्तमाल सटीक पृष्ठ तीन सौ सैंतालीस चार ब्रह्मनिज्म ऐंड हिन्दूइज्म, पृष्ठ एक सौ छियालीस पाँच मेडोबल इंडिया, पृष्ठ छब्बीस मधुर लीलाएँ और प्रेम की मादक अनुभूति सरस और मधुर शब्दावली में लिखी है । 'गीत गोविन्द' के द्वारा राधा का व्यक्तित्व पहली बार मधुर और प्रेमपूर्ण बना कर साहित्य में प्रस्तुत किया गया है । 'गीत गोविन्द' की पदावली मधुर है। उसमें कामदेव के बाणों की मीठी पीड़ा है । कीथ 'गीत गोविन्द' की प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि उसकी शब्दावली इतनी मधुर और भावों के अनुकूल है कि उसका अनुवाद अन्य किसी भाषा में ठीक तरह से हो ही नहीं सकता । एक जयदेव ने संस्कृत में 'गीत गोविन्द' की रचना कर अपने भाषाधिकार और भाव-प्रदर्शन की कुशलता का परिचय अवश्य दिया, पर हिन्दी में उन्होंने अपनी यह कुशलता नहीं दिखलाई ग्लास से उन्होंने विद्यापति और सूरदास जैसे महान् कवियों को प्रभावित अवश्य किया, पर वे स्वय हिन्दी मे उत्कृष्ट कोटि ' की रचना नहीं कर सके । संस्कृत की कोमलकात पदावली में उन्होंने जिस संगीत की सृष्टि अपने काव्य 'गीत गोविन्द' मे की, वह हिन्दी में नहीं हो सकी । संस्कृत के 'गीत-काव्य' में 'गीत गोविन्द अमर है। उसमे यमक और अनुप्रास से जिस प्रकार भाव-व्यंजना की गई है, वह अन्यत्र दुर्लभ है । उदाहरणार्थ तृतीयावलोकनम् में राधा का विरह-निवेदन लीजिए :-- ललित लवंग लता परिशीलन कोमल मलय समीरे । मधुकर निकर करम्बित कोकिल कूजित कुंज कुटीरे ॥ बिहरति हरिरिह सरस बसन्ते । नृत्यति युवति जनेत समं सखि विरहिजनस्य दुरन्ते ॥ उन्मद मदन मनोरथ पथिक वधू जन जनित विलापे । अलि कुल संकुल कुसुम समूह निराकुल बकुल कलापे । मृगमद सौरभ रभसवशंवद नवदल माल तमाले । युवजन हृदय विदारण मनसिज नखरुचि किंशुक जाले ॥ मदन महीपति कनक दण्ड रुचि केसर कुसुम विकासे । मिलित शिलीमुख पाटलि पटल कृतस्मर तूरण विलासे ।। इत्यादि 'गीत गोविंद' में प्राध्यात्मिकता की विशेष छाप नहीं है, लौकिक शृंगार से चाहे आध्यात्मिकता का संकेत भले ही मान लिया जावे । कामसूत्र के संकेतों के आधार पर राधा-कृष्ण का परिरंभन है, विलास है, क्रीड़ा है । इस क्रीड़ा में ही रहस्यवाद का संकेत आलोचकों द्वारा माना गया है । एक क्लासिकल संस्कृत लिट्रेचर नौ हिस्ट्री ऑॉव् संस्कृत लिट्रेचर, पृष्ठ एक सौ छयासठ ब्रह्मनिज्म ऐन्ड हिन्दूइज्म, पृष्ठ एक सौ छियालीस जयदेव हिंदी में उत्कृष्ट कोटि की रचना नहीं कर सके। उनके एक-दो पद 'श्रीगुरु ग्रन्थ साहब' में अवश्य पाये जाते हैं जो भाव और भाषा की दृष्टि से अत्यन्त साधारण है । जयदेव के ऐसे पद 'श्री गुरु ग्रंथ साहब' की राग गूजरी और राग मारू में ही मिलते हैं। उनकी हिन्दी रचना बहुत कम देखने में आती है। परिचय के लिए उनका राग मारू में एक पद इस प्रकार है चंद सत भेदिया नाद सत पूरिया सूर सत खोद सादतु कीया । अबलबलु तोड़िया अचल चलु थापिया अधड़ घड़िया तहा श्रमिउँ पीया । मन आदि गुण आदि बखानिया । ते दुविधा दृष्टि समानिया ।। अरधि को अरधिया सरधि को सरधिया, सलिल कौ सलिल संमानिआइया । वदित जयदेव जयदेव कौ रं मिया, ब्रह्म निर्वाण लवलीन पाइया ॥ एक इस पद में न तो जयदेव का भाषा-माधुर्य है और न भाव-सौन्दर्य । जयदेव ने 'गीत गोविंद' में श्रीकृष्ण और राधा के प्रेम का कोमल और विलासपूर्ण जो वर्णन किया है, उसकी छाया भी इस पद में नहीं है । यह पद तो निर्गुण ब्रह्म की शक्ति-संपन्नता के विषय में है। अतः जयदेव ने यद्यपि हिन्दी में संस्कृत की मधुर पदावली के समान कोई रचना नहीं की तथापि उन्होने हिन्दी के कवियों को राधाकृष्ण संबन्धी रचना करने के लिए प्रोत्साहित अवश्य किया । इस क्षेत्र में वे हिन्दी के कवियों के लिए आधार स्वरूप हैं । उनका सब से अधिक प्रभाव विद्यापति पर ही ज्ञात होता है, अतः यहाँ विद्यापति की कविता पर प्रकाश डालना आवश्यक है । विद्यापति बंगाली कवि नहीं थे, वे मिथिला के निवासी थे और मैथिली में उन्होंने अपनी कविता लिखी। लगभग चालीस वर्ष पहले बंगाली विद्यापति को अपना कवि समझते थे, पर जब से उनके जीवन की घटनाओं की जाँच पड़ताल बाबू राजकृष्ण मुकर्जी और डाक्टर ग्रियर्सन ने की है तब से बंगाली अपने अधिकार को श्रव्यवस्थित पाते हैं । विद्यापति एक विद्वान वंश के वंशज थे। उनके पिता गणपति ठाकुर ने अपनी मुप्रसिद्ध पुस्तक 'गंगा-भक्ति-तरगिनी' अपने मृत सरक्षक मिथिला के महाराजा गणेश्वर की स्मृति में समर्पित की थी । गणपति के पिता जयदत्त संस्कृत विद्वता के लिये ही प्रसिद्ध नहीं थे वरन् वे एक बड़े सन्त भी थे । उन्हें इसी कारण 'योगेश्वर' की उपाधि मिली थी। जयदत्त के पिता वीरेश्वर थे, जिन्होंने मैथिल ब्राह्मणों की दिनचर्या के लिए नियमसबद्ध किये थे । एक आदि श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी पृष्ठ पाँच सौ अड़सठ तरनतारन , एक हज़ार छः सौ सत्ताईस विद्यापति विसपी के रहने वाले थे । यह दरभंगा जिले में है । यह गाँव विद्यापति ने राजा शिवसिंह से उपहार स्वरूप पाया था। विद्यापति ने शिवसिंह, लखिमा देवी, विश्वास देवी, नरसिंह देवी और मिथिला के कई राजाओं की संरक्षता पाई थी । ताम्र पत्र द्वारा विसपी गाँव का दान शिवसिहन 'अभिनव जयदेव की उपाधि सहित सन् एक हज़ार चार सौ ईशून्य में विद्यापति को दिया था। कई विद्वान् इस ताम्र पत्र को जाली समझते है । इस लेख की अक्षराकृति उस समय के प्रक्षरों से नहीं मिलती जब कि यह दान दिया गया होगा । इस प्रमाण के आधार पर ताम्र पत्र प्रामाणिक सिद्ध किया जाता है। जो हो, इसमें कोई संदेह नहीं कि विसपी गाँव विद्यापति को शिवसिंह ने दान में दिया था । कवि स्वयं इस दान को अपने एक पद्य में लिखता है ।" उस स्थान पर प्रचलित जनश्रुति भी इस दान का समर्थन करती है । विद्यापति के आविर्भाव के सम्बन्ध में डाशून्य उमेश मिश्र लिखते है "इनके पिता गणपति ठाकुर महाराज गणेश्वरसिंह के राज-सभासद थे और महासभा में अपने पुत्र विद्यापति को ले जाया करते थे। महाराज गणेश्वर की मृत्यु दो सौ बावन लशून्य संशून्य में हुई थी । अतः विद्यापति उस समय अंततः दस या ग्यारह की अवस्था के अवश्य रहे होंगे जिसमें उनका राजदरबार में आना-जाना हो सकता था। दूसरी बात यह है कि विद्यापति के प्रधान श्रश्रयदाता शिवसिंह का जन्म दो सौ तैंतालीस लशून्य संशून्य में हुआ और पचास वर्ष की अवस्था में राजगद्दी पर बैठे, यह माना जाता है और यह भी लोगों की धारणा है कि कवि विद्यापति उनसे दो वर्ष मात्र बड़े थे तीसरी बात यह है कि विद्यापति ने 'कीतिलता' में अपने को खेलन कवि कहा है, इसलिये वह अवश्य कीर्तिसिंह या वीरसिंह की दृष्टि में अल्पवयस के साथ खेलने के लायक रहे होंगे । इन सभी बातों से अनुमान होता है कि विद्यापति दो सौ बावन लशून्य संशून्य में लगभग दस या ग्यारह वर्ष के थे ।"तीन एक स्वतिश्रीगजरथ इत्यादि समस्त प्रक्रिया विराजमान श्रीमद्रामेश्वरीश्वरलब्ध प्रसादभवानी भव भक्ति भावना परायण-रूप नारायण महाराजाधिराज - श्रीमच्छिवसिंह देव पादाः समरविजमिनो जरे लतप्पायां विसपी ग्रामवास्तव्य सकल लोकान् भूकर्षककाश्च समादिशन्ति ज्ञातमस्तु भवताम् । ग्रामोऽयमस्माभिः सप्रग्रिया भिनव जयदेव- महाराज पण्डित ठक्कुर - श्री विद्यापतिभ्यः शासनीकृत्य प्रदत्तोऽत ग्राम कस्था यूयमेतेषां वचनकरी भूकर्ष कादिवर्म्म करिष्यथेति लक्ष्मणसेन सम्वत् दो सौ तेरह श्रामण सुदि सात गुरौ । दो पंचगौडाभिप सिबसिंह भूप कृपा करिलेल निज-पास । विसपी ग्राम दान कएल मोहि रहइत राजनिधान ।। तीन विद्यापति ठाकुर पृष्ठ छत्तीस डाक्टर उमेश मिश्र के इस कथनानुसार विद्यापति का जन्म दो सौ इकतालीस लशून्य संशून्य निश्चित होता है । विद्यापति की मृत्यु के सम्बन्ध में डाशून्य मिश्र का कथन है-" वाचस्पति मिश्र भैरवेन्द्रसिंह के सभासद, विद्वान और विद्यापति के सम कालीन थे । वाचस्पति मिश्र का समय सन् एक हज़ार चार सौ पचहत्तर ईस्वी तक होना माना जाता है, अतएव विद्यापति को भी इसी समय तक या इसके लगभग रखना ही पडेगा । इन सब बातों को विचार कर यह कहा जा सकता है कि विद्यापति लगभग तीन सौ छप्पन लशून्य संशून्य अर्थात् सन् एक हज़ार चार सौ पचहत्तर ईस्वी में अवश्य जीवित रहे होंगे । "" इस कथन से विद्यापति की मृत्यु संशून्य एक हज़ार पाँच सौ बत्तीस के बाद ही माननी चाहिये । इस प्रकार विद्यापति ने एक सौ वर्ष से भी अधिक आयु पाई । नाभादास ने अपनी 'भक्तमाल' में तो विद्यापति का निर्देश मात्र कर दिया है । विद्यापति के पदों का बंगला में रूपान्तर बहुत अधिक पाया जाता है । यहाँ तक की बंगाल में विद्यापति के पद प्रचलित हैं, वे कई अंशों में मैथिली में प्रचलित पदों से भिन्न हैं । उसका एक कारण है । विद्यापति का समय मिथिला विश्वविद्यालय के गौरव का समय था और उन दिनो मिथिला और बगाल में भावविनिमय की अधिकता थी । अतएव बंगाल के राधा-कृष्ण के गीत मिथिला में पहुँच और उनका पाठ बिलकुल मैथिल हो गया । उदाहरण स्वरूप गोविन्ददास के पद दिये जा सकते हैं । वही विद्यापति को कविता का हाल हश्रा और उनका पाठ भी बंगला में हो गया । कोई-कोई पद तो केवल बंगला में ही पाये जाते हैं । विद्यापति संस्कृत के महान् पंडित थे । प्रधानतः इन्होने अपनी रचनाएँ संस्कृत ही में लिखीं । संस्कृत के अतिरिक्त इन्होंने अवहट्ट और मैथिली में भी प्रन्थ और दलिखे । अत भाषा की दृष्टि से विद्यापति के ग्रन्थ तीन वर्गों में विभाजित किये जा सकते है एक विद्यापति ठाकुर , दो विद्यापति ब्रह्मदास बहोरन चतुर बिहारी । गोविन्द गंगा रामलाल बरसानियाँ मंगलकारी ।। प्रिय दयाल परसराम भक्तभाई या टीको । नन्द सुवन की काप कवित केसौ को नीको ॥ आश करन पूरन नृपनि भीषम जन दयाल गुननहिन पार। हरि सुजस प्रचुर कर जगत मैं ये कविजन अतिसय उदार ॥ -भक्तमाल
Acıbadem Kozyatağı अस्पताल के पोषण और आहार विशेषज्ञ, नूर एसेम बेदी ओज़मैन का कहना है कि तरबूज को इसके स्वाद और शीतलन प्रभाव से धोखा नहीं देना चाहिए और इसके सेवन के दौरान कुछ नियमों का पालन करना चाहिए और चेतावनी देते हैं कि यह विशेष रूप से मधुमेह और गुर्दे के लिए गंभीर खतरे पैदा कर सकता है। मरीज़. गर्मियों का मौसम आते ही तरबूज का ख्याल सबसे पहले दिमाग में आता है और खासकर अत्यधिक गर्मी में यह अपने ताजगी भरे स्वाद के साथ सामने आता है। यह एक ऐसा फल है जिसका सेवन इसमें उच्च चीनी सामग्री के कारण सावधानी से किया जाना चाहिए, लेकिन किसी को इसका एहसास भी नहीं होता है। अति हो गया Acıbadem Kozyatağı अस्पताल के पोषण और आहार विशेषज्ञ, नूर एसेम बेदी ओज़मैन का कहना है कि तरबूज को इसके स्वाद और शीतलन प्रभाव से धोखा नहीं देना चाहिए और इसके सेवन के दौरान कुछ नियमों का पालन करना चाहिए और चेतावनी देते हैं कि यह विशेष रूप से मधुमेह और गुर्दे के लिए गंभीर खतरे पैदा कर सकता है। मरीज़. पोषण और आहार विशेषज्ञ नूर एसेम बायडी ओज़मैन ने तरबूज का सेवन करते समय विचार करने योग्य 7 महत्वपूर्ण नियमों के बारे में बताया, और महत्वपूर्ण चेतावनियाँ और सुझाव दिए। गर्मी के महीनों में ठंडक पाने के लिए रात के खाने के बाद खाया जाने वाला तरबूज मेटाबॉलिज्म को थका देता है। इस कारण से, अन्य सभी फलों, विशेष रूप से तरबूज, जो गर्मी के मौसम के लिए अपरिहार्य है, का सेवन देर शाम को नहीं, बल्कि दिन के दौरान करने का ध्यान रखें। क्योंकि रात में खाए गए फलों से फैटी लीवर और डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। छिलके के पास का सफेद भाग न फेंकें। पोषण और आहार विशेषज्ञ नूर एसेम बायडी ओज़मैन ने कहा, "तरबूज के छिलके के करीब के सफेद भाग में प्रचुर मात्रा में गूदा और कुछ बायोएक्टिव पदार्थ होते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। विशेष रूप से चूंकि इसमें सिट्रूलाइन, एक एमिनो एसिड होता है जो हृदय स्वास्थ्य की रक्षा में प्रभावी होता है, इसमें हृदय-अनुकूल विशेषता होती है। इस कारण से, आप तरबूज को इस तरह से काटकर लाभ बढ़ा सकते हैं जिसमें काटते समय सफेद भाग भी शामिल हो। तरबूज के सफेद भाग का सेवन आप अचार या जैम बनाकर भी कर सकते हैं. जब तरबूज का सेवन अकेले किया जाता है, तो यह आपको थोड़े समय के बाद भूखा कर सकता है। इस कारण से, आप पनीर के साथ तरबूज का सेवन कर सकते हैं क्योंकि स्वाद में सामंजस्य होता है और एक साथ सेवन करने पर आपका पेट भरा रहता है। जो लोग स्वस्थ हैं और आदर्श वजन में हैं, वे समय-समय पर तरबूज के 2 स्लाइस और पनीर के 60-90 स्लाइस, जो 2-3 ग्राम के बराबर होते हैं, के साथ भोजन कर सकते हैं। हालाँकि, इसे स्थायी बनाने से बचना चाहिए। चाकू से काटने की प्रक्रिया के दौरान तरबूज के छिलके में मौजूद मिट्टी और धूल जैसे अवशेष तरबूज के खाने योग्य हिस्सों पर लग सकते हैं। इन अवशेषों से छुटकारा पाने के लिए तरबूज को काटने से पहले बहते पानी के नीचे धो लें। धोने से खोल की सतह पर रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया से शुद्धिकरण नहीं हो सकता है। इसलिए तरबूज को काटने से पहले उसे सिरके वाले पानी में थोड़ी देर के लिए भिगो दें. अगर आपको मधुमेह है! पोषण और आहार विशेषज्ञ नूर एसेम बायडी ओज़मैन ने कहा, "भले ही लोगों के बीच तरबूज को 'उच्च पानी सामग्री वाला एक निर्दोष फल' माना जाता है, यह उच्च चीनी सामग्री और स्वाद वाला फल है जिसका अत्यधिक सेवन किया जा सकता है।" . विशेष रूप से, मधुमेह के रोगियों को 1 सर्विंग यानी लगभग 200 ग्राम से अधिक नहीं लेना चाहिए। यदि मधुमेह के रोगी तरबूज जैसे मीठे फलों के साथ गूदे वाले खाद्य पदार्थ जैसे सलाद और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, तो रक्त में मिश्रण की दर धीमी हो जाएगी, जिससे रक्त शर्करा कम बढ़ेगी। आहार संबंधी यह गलती न करें! जबकि वजन घटाने वाले आहार पर रहने वाले लोग गर्मियों के महीनों के दौरान फलों, विशेष रूप से तरबूज के साथ अपना भोजन करते हैं, इससे अस्वास्थ्यकर आहार दोनों हो सकता है और वजन कम होने के बजाय वजन बढ़ सकता है। चूंकि तरबूज के 1 टुकड़े में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा लगभग ब्रेड के 1 टुकड़े के बराबर होती है, आप 60 अखरोट या 1 कच्चे बादाम का सेवन करके अपने तृप्ति के समय को बढ़ा सकते हैं और वजन नियंत्रण से लाभ उठा सकते हैं, जबकि तरबूज के 200 टुकड़े (लगभग 2 ग्राम) से अधिक नहीं होना चाहिए। प्रतिदिन, जो 10 किलो कैलोरी है। अगर आपको है किडनी की बीमारी तो सावधान! पोषण और आहार विशेषज्ञ नूर एसेम बेदी ओज़मान "गुर्दे के रोगियों को तरबूज का सेवन सावधानी से करना चाहिए, जिन्हें इसकी उच्च पोटेशियम और पानी की मात्रा के कारण पोटेशियम या तरल पदार्थ प्रतिबंध की आवश्यकता होती है। इस कारण से, उन्हें अपने चिकित्सक या आहार विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए कि क्या वे उपभोग कर सकते हैं या कितना उपभोग कर सकते हैं। क्योंकि किडनी के मरीजों के खून में पोटैशियम की मात्रा बढ़ने से बहुत विनाशकारी प्रभाव हो सकते हैं।
Acıbadem Kozyatağı अस्पताल के पोषण और आहार विशेषज्ञ, नूर एसेम बेदी ओज़मैन का कहना है कि तरबूज को इसके स्वाद और शीतलन प्रभाव से धोखा नहीं देना चाहिए और इसके सेवन के दौरान कुछ नियमों का पालन करना चाहिए और चेतावनी देते हैं कि यह विशेष रूप से मधुमेह और गुर्दे के लिए गंभीर खतरे पैदा कर सकता है। मरीज़. गर्मियों का मौसम आते ही तरबूज का ख्याल सबसे पहले दिमाग में आता है और खासकर अत्यधिक गर्मी में यह अपने ताजगी भरे स्वाद के साथ सामने आता है। यह एक ऐसा फल है जिसका सेवन इसमें उच्च चीनी सामग्री के कारण सावधानी से किया जाना चाहिए, लेकिन किसी को इसका एहसास भी नहीं होता है। अति हो गया Acıbadem Kozyatağı अस्पताल के पोषण और आहार विशेषज्ञ, नूर एसेम बेदी ओज़मैन का कहना है कि तरबूज को इसके स्वाद और शीतलन प्रभाव से धोखा नहीं देना चाहिए और इसके सेवन के दौरान कुछ नियमों का पालन करना चाहिए और चेतावनी देते हैं कि यह विशेष रूप से मधुमेह और गुर्दे के लिए गंभीर खतरे पैदा कर सकता है। मरीज़. पोषण और आहार विशेषज्ञ नूर एसेम बायडी ओज़मैन ने तरबूज का सेवन करते समय विचार करने योग्य सात महत्वपूर्ण नियमों के बारे में बताया, और महत्वपूर्ण चेतावनियाँ और सुझाव दिए। गर्मी के महीनों में ठंडक पाने के लिए रात के खाने के बाद खाया जाने वाला तरबूज मेटाबॉलिज्म को थका देता है। इस कारण से, अन्य सभी फलों, विशेष रूप से तरबूज, जो गर्मी के मौसम के लिए अपरिहार्य है, का सेवन देर शाम को नहीं, बल्कि दिन के दौरान करने का ध्यान रखें। क्योंकि रात में खाए गए फलों से फैटी लीवर और डायबिटीज जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। छिलके के पास का सफेद भाग न फेंकें। पोषण और आहार विशेषज्ञ नूर एसेम बायडी ओज़मैन ने कहा, "तरबूज के छिलके के करीब के सफेद भाग में प्रचुर मात्रा में गूदा और कुछ बायोएक्टिव पदार्थ होते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। विशेष रूप से चूंकि इसमें सिट्रूलाइन, एक एमिनो एसिड होता है जो हृदय स्वास्थ्य की रक्षा में प्रभावी होता है, इसमें हृदय-अनुकूल विशेषता होती है। इस कारण से, आप तरबूज को इस तरह से काटकर लाभ बढ़ा सकते हैं जिसमें काटते समय सफेद भाग भी शामिल हो। तरबूज के सफेद भाग का सेवन आप अचार या जैम बनाकर भी कर सकते हैं. जब तरबूज का सेवन अकेले किया जाता है, तो यह आपको थोड़े समय के बाद भूखा कर सकता है। इस कारण से, आप पनीर के साथ तरबूज का सेवन कर सकते हैं क्योंकि स्वाद में सामंजस्य होता है और एक साथ सेवन करने पर आपका पेट भरा रहता है। जो लोग स्वस्थ हैं और आदर्श वजन में हैं, वे समय-समय पर तरबूज के दो स्लाइस और पनीर के साठ-नब्बे स्लाइस, जो दो-तीन ग्राम के बराबर होते हैं, के साथ भोजन कर सकते हैं। हालाँकि, इसे स्थायी बनाने से बचना चाहिए। चाकू से काटने की प्रक्रिया के दौरान तरबूज के छिलके में मौजूद मिट्टी और धूल जैसे अवशेष तरबूज के खाने योग्य हिस्सों पर लग सकते हैं। इन अवशेषों से छुटकारा पाने के लिए तरबूज को काटने से पहले बहते पानी के नीचे धो लें। धोने से खोल की सतह पर रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया से शुद्धिकरण नहीं हो सकता है। इसलिए तरबूज को काटने से पहले उसे सिरके वाले पानी में थोड़ी देर के लिए भिगो दें. अगर आपको मधुमेह है! पोषण और आहार विशेषज्ञ नूर एसेम बायडी ओज़मैन ने कहा, "भले ही लोगों के बीच तरबूज को 'उच्च पानी सामग्री वाला एक निर्दोष फल' माना जाता है, यह उच्च चीनी सामग्री और स्वाद वाला फल है जिसका अत्यधिक सेवन किया जा सकता है।" . विशेष रूप से, मधुमेह के रोगियों को एक सर्विंग यानी लगभग दो सौ ग्राम से अधिक नहीं लेना चाहिए। यदि मधुमेह के रोगी तरबूज जैसे मीठे फलों के साथ गूदे वाले खाद्य पदार्थ जैसे सलाद और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, तो रक्त में मिश्रण की दर धीमी हो जाएगी, जिससे रक्त शर्करा कम बढ़ेगी। आहार संबंधी यह गलती न करें! जबकि वजन घटाने वाले आहार पर रहने वाले लोग गर्मियों के महीनों के दौरान फलों, विशेष रूप से तरबूज के साथ अपना भोजन करते हैं, इससे अस्वास्थ्यकर आहार दोनों हो सकता है और वजन कम होने के बजाय वजन बढ़ सकता है। चूंकि तरबूज के एक टुकड़े में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा लगभग ब्रेड के एक टुकड़े के बराबर होती है, आप साठ अखरोट या एक कच्चे बादाम का सेवन करके अपने तृप्ति के समय को बढ़ा सकते हैं और वजन नियंत्रण से लाभ उठा सकते हैं, जबकि तरबूज के दो सौ टुकड़े से अधिक नहीं होना चाहिए। प्रतिदिन, जो दस किलो कैलोरी है। अगर आपको है किडनी की बीमारी तो सावधान! पोषण और आहार विशेषज्ञ नूर एसेम बेदी ओज़मान "गुर्दे के रोगियों को तरबूज का सेवन सावधानी से करना चाहिए, जिन्हें इसकी उच्च पोटेशियम और पानी की मात्रा के कारण पोटेशियम या तरल पदार्थ प्रतिबंध की आवश्यकता होती है। इस कारण से, उन्हें अपने चिकित्सक या आहार विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए कि क्या वे उपभोग कर सकते हैं या कितना उपभोग कर सकते हैं। क्योंकि किडनी के मरीजों के खून में पोटैशियम की मात्रा बढ़ने से बहुत विनाशकारी प्रभाव हो सकते हैं।
छतरपुर (पलामू ): शुक्रवार को परम दयाल श्री श्री ठाकुर अनुकूल चंद्र जी का शुभ आविर्भाव दिवस छतरपुर जपला रोड स्थित सत्संग केंद्र पर धूमधाम से मनाया गया । इस उपलक्ष्य में शुक्रवार सुबह समय 4:30 बजे प्रभात फेरी उसके बाद 5 : 39 में प्रार्थना वंदना एवं 6:05 से भजन कीर्तन के ततपश्चात प्रातः 7:05 पर शंख ध्वनि और जयकारी के साथ जन्म लग्न की घोषणा की गई , उसके बाद विभिन्न धर्म ग्रंथ की पाठ की गई और कीर्तन मंडली में भोला व्यास , विद्याशंकर , श्रवण गुप्ता , पूर्वी सिन्हा और अन्य गुरुभाइयो के द्वारा सुंदर भजन और सोहर गाया गया। जानकारी देते हुए सत्संग केंद्र संचालक और सह प्रति ऋत्विक नागेंद्र प्रसाद सिन्हा ने बताया की श्री श्री ठाकुर जी का आविर्भाव भादो मास में ही हुआ था जिसके उपलक्ष्य में पूरे माह प्रतिदिन दर्जनों ठाकुर प्रेमियों के द्वारा प्रातः प्रभात फेरी और शाम में छतरपुर के विभिन्न गुरुभाईयो के घर पर सत्संग का आयोजन किया जा रहा था । सत्संग में सुनील गुप्ता , विजय कुमार , मुनी लाला विश्वकर्मा , ज्योति कुमार , सोनू मिश्रा , शशिबाला सिन्हा , पुष्पा सिन्हा , रवींद्र कुमार , दिलीप गुप्ता , निरंजन गुप्ता , विजय कुमार और दर्जनों गुरुभाई - बहन शामिल रहे ।
छतरपुर : शुक्रवार को परम दयाल श्री श्री ठाकुर अनुकूल चंद्र जी का शुभ आविर्भाव दिवस छतरपुर जपला रोड स्थित सत्संग केंद्र पर धूमधाम से मनाया गया । इस उपलक्ष्य में शुक्रवार सुबह समय चार:तीस बजे प्रभात फेरी उसके बाद पाँच : उनतालीस में प्रार्थना वंदना एवं छः:पाँच से भजन कीर्तन के ततपश्चात प्रातः सात:पाँच पर शंख ध्वनि और जयकारी के साथ जन्म लग्न की घोषणा की गई , उसके बाद विभिन्न धर्म ग्रंथ की पाठ की गई और कीर्तन मंडली में भोला व्यास , विद्याशंकर , श्रवण गुप्ता , पूर्वी सिन्हा और अन्य गुरुभाइयो के द्वारा सुंदर भजन और सोहर गाया गया। जानकारी देते हुए सत्संग केंद्र संचालक और सह प्रति ऋत्विक नागेंद्र प्रसाद सिन्हा ने बताया की श्री श्री ठाकुर जी का आविर्भाव भादो मास में ही हुआ था जिसके उपलक्ष्य में पूरे माह प्रतिदिन दर्जनों ठाकुर प्रेमियों के द्वारा प्रातः प्रभात फेरी और शाम में छतरपुर के विभिन्न गुरुभाईयो के घर पर सत्संग का आयोजन किया जा रहा था । सत्संग में सुनील गुप्ता , विजय कुमार , मुनी लाला विश्वकर्मा , ज्योति कुमार , सोनू मिश्रा , शशिबाला सिन्हा , पुष्पा सिन्हा , रवींद्र कुमार , दिलीप गुप्ता , निरंजन गुप्ता , विजय कुमार और दर्जनों गुरुभाई - बहन शामिल रहे ।
श्री रामधारीसिंह दिनकर नियति भी कभी कभी तोखा व्यग्य करती है। 31 माच की रात को मद्रास म एक उद्योगपति के घर पर भोज का आयोजन था। मैसूर के गवनर श्री मोहनलाल सुखाडिया जोर श्री रामनाथ गायनका जादि अनेक गण्यमाय व्यक्ति उसम सम्मिलित हुए थे। जचानक अगले दिन होने वाले कवि सम्मेलन की चर्चा चल पड़ी। गोयनकाजी बोल 'मैं तो दिनकरजी को मानता हू, आपने उन्ह तो बुलाया ही नहीं ।' किमो को क्या पता था कि दिनकर जी शीघ्र ही मद्रास आएग और फिर कभी नहीं लोटेंगे । सचमुच 24 अप्रैल को उनको आत्मा अचानक हो उनको पार्थिव दह को छोड़कर जनत में विलीन हो गई मात्र शरीर ही पटना पहुच सका। उनका जाना आकस्मिक और असामयिक था पर साहित्य के क्षेत्र म उनका उदय सहज भाव से हुआ था । उह वह सब प्राप्त हो चुका था जो किसी साहित्यिक वे लिए काम्य हो सकता है । सम्मान, पद कीर्ति जोर अय सभी न तो उनका वरण किया था लेकिन फिर भी उनक अत्तर म कही दद था, एक बेचैनी थी, जिसव सूत खोजने का समय सम्भवत अभी नहीं आया । शायद व्यक्ति दिनकर और माहित्यिक मनीषी दिनकर पूणत एकाकार नहीं हो पाए थ । व्यक्ति की समस्याए जहा साहित्यिक का प्रेरणा दती थी वहा आयात भी करती थी । लेकिन जभी रहन दें उस मून का 1 अतीत म यापता हू तो पाता हूँ कि जिन पविया ने मेरे मन वे आसन पर अधिकार जमा लिया था उनम श्री रामधारी सिंह दिनकर / 121 दिनकर प्रमुख थे। यह भी क्सा विरोधाभास है कि प्रवृति म, नितात अहिंसव हात हुए भी मुझे सप्यासिया मे सनम प्रिय थे 'योद्धा मयासो विवकानद' और कविया में औघडदानी क्वीर । फिर निराला न मुझे आकपित किया और उसके बाद आए दिनकर एक दिन वजीर न पुकारा था - कविरा खडा बाजार में लिए लुकाठी हाथ । जो घर जारे आपना वह आए हमारे साथ ॥ 'दिनकर के जिस स्वर न मुये आकर्षित किया, वह भी वैसा हो तजस्त्री था-सिंहासन खाली करा कि जनता आती है । या फिर तान तान फ्ण व्याल कि तुम पर वासुरी बजाऊ । गांधीजी को जो मूर्ति मेरे मानस पर अंकित है वह ढाडी मार्च को मूर्ति है । एक दुबला पतला परम तेजस्वी मानव हाथ में लकुटिया लिए लम्बे लम्बे डग भरता हुआ, समुद्र की ओर बढ़ रहा है मानो साहस की मूर्तिमान प्रतिमा त्रिलोकी को चुनौती देने चल पडी हो। इस सत्र मे शरोर की वीरता कही नहीं है मनोवल ही है । यही मनोबल मुझे खीचता रहा। इसी कारण दिनकर मेरे प्रिय हो उठे । वे उन सर्वाधिक सामथ्य वान कवियो मे थे जिहा। जनता के आयोश और विद्रोह को स्वर दिया। जनता के ओज को वाणी दी। वे सचमुच नव जागरण के चारण थे। इसी लिए जनता ने प्राण भरकर श्रद्धा उ हे दो। राष्ट्रकवि वा विरुद भी दिया । गांधी युग मे उहोस यश की सीमाओं को छुआ पर वे गांधीवादी नही थे । गाधी की अहिंसा को वे व्यक्ति के उत्थान तक हो स्वीकार करते थे । 'कुरुक्षेत्र मही उन्होने अपनी इस मान्यता को स्पष्ट कर दिया व्यक्ति का है धम तप, करुणा, क्षमा, व्यक्ति की शाभा विनय भी त्याग भी,
श्री रामधारीसिंह दिनकर नियति भी कभी कभी तोखा व्यग्य करती है। इकतीस माच की रात को मद्रास म एक उद्योगपति के घर पर भोज का आयोजन था। मैसूर के गवनर श्री मोहनलाल सुखाडिया जोर श्री रामनाथ गायनका जादि अनेक गण्यमाय व्यक्ति उसम सम्मिलित हुए थे। जचानक अगले दिन होने वाले कवि सम्मेलन की चर्चा चल पड़ी। गोयनकाजी बोल 'मैं तो दिनकरजी को मानता हू, आपने उन्ह तो बुलाया ही नहीं ।' किमो को क्या पता था कि दिनकर जी शीघ्र ही मद्रास आएग और फिर कभी नहीं लोटेंगे । सचमुच चौबीस अप्रैल को उनको आत्मा अचानक हो उनको पार्थिव दह को छोड़कर जनत में विलीन हो गई मात्र शरीर ही पटना पहुच सका। उनका जाना आकस्मिक और असामयिक था पर साहित्य के क्षेत्र म उनका उदय सहज भाव से हुआ था । उह वह सब प्राप्त हो चुका था जो किसी साहित्यिक वे लिए काम्य हो सकता है । सम्मान, पद कीर्ति जोर अय सभी न तो उनका वरण किया था लेकिन फिर भी उनक अत्तर म कही दद था, एक बेचैनी थी, जिसव सूत खोजने का समय सम्भवत अभी नहीं आया । शायद व्यक्ति दिनकर और माहित्यिक मनीषी दिनकर पूणत एकाकार नहीं हो पाए थ । व्यक्ति की समस्याए जहा साहित्यिक का प्रेरणा दती थी वहा आयात भी करती थी । लेकिन जभी रहन दें उस मून का एक अतीत म यापता हू तो पाता हूँ कि जिन पविया ने मेरे मन वे आसन पर अधिकार जमा लिया था उनम श्री रामधारी सिंह दिनकर / एक सौ इक्कीस दिनकर प्रमुख थे। यह भी क्सा विरोधाभास है कि प्रवृति म, नितात अहिंसव हात हुए भी मुझे सप्यासिया मे सनम प्रिय थे 'योद्धा मयासो विवकानद' और कविया में औघडदानी क्वीर । फिर निराला न मुझे आकपित किया और उसके बाद आए दिनकर एक दिन वजीर न पुकारा था - कविरा खडा बाजार में लिए लुकाठी हाथ । जो घर जारे आपना वह आए हमारे साथ ॥ 'दिनकर के जिस स्वर न मुये आकर्षित किया, वह भी वैसा हो तजस्त्री था-सिंहासन खाली करा कि जनता आती है । या फिर तान तान फ्ण व्याल कि तुम पर वासुरी बजाऊ । गांधीजी को जो मूर्ति मेरे मानस पर अंकित है वह ढाडी मार्च को मूर्ति है । एक दुबला पतला परम तेजस्वी मानव हाथ में लकुटिया लिए लम्बे लम्बे डग भरता हुआ, समुद्र की ओर बढ़ रहा है मानो साहस की मूर्तिमान प्रतिमा त्रिलोकी को चुनौती देने चल पडी हो। इस सत्र मे शरोर की वीरता कही नहीं है मनोवल ही है । यही मनोबल मुझे खीचता रहा। इसी कारण दिनकर मेरे प्रिय हो उठे । वे उन सर्वाधिक सामथ्य वान कवियो मे थे जिहा। जनता के आयोश और विद्रोह को स्वर दिया। जनता के ओज को वाणी दी। वे सचमुच नव जागरण के चारण थे। इसी लिए जनता ने प्राण भरकर श्रद्धा उ हे दो। राष्ट्रकवि वा विरुद भी दिया । गांधी युग मे उहोस यश की सीमाओं को छुआ पर वे गांधीवादी नही थे । गाधी की अहिंसा को वे व्यक्ति के उत्थान तक हो स्वीकार करते थे । 'कुरुक्षेत्र मही उन्होने अपनी इस मान्यता को स्पष्ट कर दिया व्यक्ति का है धम तप, करुणा, क्षमा, व्यक्ति की शाभा विनय भी त्याग भी,
'ओह माई गॉड' की सफलता से अक्षय कुमार काफी खुश हैं। 'ओह माई गॉड'ने बॉक्स ऑफिस पर 50 करोड़ रूपये का बिजनेस किया है। और अक्की इसे एक आश्चर्य मानते हैं। अक्षय का कहना है कि हम शुरुआत से ही जानते थे कि सब कुछ अच्छा होगा। फिल्म की आइडिया और स्क्रिप्ट पर हमें पहले से ही विश्वास था। हमें यह पूरा भरोसा था कि फिल्म लोगों को पंसद आयेगी। और ऐसा ही हुआ। इस फिल्म को आलोचको नें भी पंसद किया है। लेकिन कुछ लोगों ने इस फिल्म को लेकर सवाल भी खडे किये थे। साथ ही अक्षय ने यह भी बताया कि हम फिल्म के जरिये लोंगों एक मैसेज देना चाहते थें कि ईश्वर मानवता में है। आज की दुनिया में हम ईश्वर को खुश करने के लिए हर तरीका अपनाते हैं लेकिन मानवता को भूल जाते हैं। हमें खुशी है कि हम अपने उद्देश्य में सफल रहे।'ओह माई गॉड'अन्य हिन्दी फिल्मों से काफी हटकर है क्योंकि इसमें कोई हीरोइन नहीं थी। और इस फिल्म में मुख्य रोल में परेश रावेल थे। 'ओह माई गॉड'अभी तक बॉक्स ऑफिस पर अच्छा बिजनेस कर रही है। और लोगों को पंसद आ रही है। Know when the festival of colors, Holi, is being observed in 2020 and read its mythological significance. Find out Holi puja muhurat and rituals to follow. मकर संक्रांति 2020 में 15 जनवरी को पूरे भारत वर्ष में मनाया जाएगा। जानें इस त्योहार का धार्मिक महत्व, मान्यताएं और इसे मनाने का तरीका।
'ओह माई गॉड' की सफलता से अक्षय कुमार काफी खुश हैं। 'ओह माई गॉड'ने बॉक्स ऑफिस पर पचास करोड़ रूपये का बिजनेस किया है। और अक्की इसे एक आश्चर्य मानते हैं। अक्षय का कहना है कि हम शुरुआत से ही जानते थे कि सब कुछ अच्छा होगा। फिल्म की आइडिया और स्क्रिप्ट पर हमें पहले से ही विश्वास था। हमें यह पूरा भरोसा था कि फिल्म लोगों को पंसद आयेगी। और ऐसा ही हुआ। इस फिल्म को आलोचको नें भी पंसद किया है। लेकिन कुछ लोगों ने इस फिल्म को लेकर सवाल भी खडे किये थे। साथ ही अक्षय ने यह भी बताया कि हम फिल्म के जरिये लोंगों एक मैसेज देना चाहते थें कि ईश्वर मानवता में है। आज की दुनिया में हम ईश्वर को खुश करने के लिए हर तरीका अपनाते हैं लेकिन मानवता को भूल जाते हैं। हमें खुशी है कि हम अपने उद्देश्य में सफल रहे।'ओह माई गॉड'अन्य हिन्दी फिल्मों से काफी हटकर है क्योंकि इसमें कोई हीरोइन नहीं थी। और इस फिल्म में मुख्य रोल में परेश रावेल थे। 'ओह माई गॉड'अभी तक बॉक्स ऑफिस पर अच्छा बिजनेस कर रही है। और लोगों को पंसद आ रही है। Know when the festival of colors, Holi, is being observed in दो हज़ार बीस and read its mythological significance. Find out Holi puja muhurat and rituals to follow. मकर संक्रांति दो हज़ार बीस में पंद्रह जनवरी को पूरे भारत वर्ष में मनाया जाएगा। जानें इस त्योहार का धार्मिक महत्व, मान्यताएं और इसे मनाने का तरीका।
Aryan Khan Drugs Case: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के एक विशेष जांच दल (SIT) ने जांच में पाया है कि पिछले साल अक्टूबर की शुरुआत में कॉर्डेलिया क्रूज जहाज पर छापेमारी अनियमितताओं से भरी हुई थी। Bollywood News Updates: फिल्म सनम तेरी कसम (Sanam Teri Kasam) के सीक्वेल की शूटिंग जल्द शुरू होने वाली है। इस बात की जानकारी डायरेक्टर विनय सप्रु और राधिका राव ने दी है। Bollywood News Updates: आलिया भट्ट (Alia Bhatt) की फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी (Gangubai Kathiawadi) का नया गाना मेरी जान (Meri Jaan) रिलीज हो गया है। Bollywood News Updates: आलिया भट्ट (Alia Bhatt) की फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी रिलीज से पहले ही विवादों में फंसती हुई नजर आ रही है। Bollywood News Updates: बॅालीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) की फिल्म गहराइयां (Gehraiyaan) OTT पर रिलीज हो चुकी है। आईपीएल ऑक्शन का पहला आयोजन 12 फरवरी को किया गया था इस दौरान इस दौरान आर्यन खान (Aryan Khan) और सुहाना खान (Suhana Khan) को बेंगलुरु में देखा गया। Bollywood News Updates: बॅालीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ के फैंस के लिए खुशखबरी सामने आई है बता दें कि 'हीरोपंती-2' की रिलीज डेट अनाउंस हो गई है। प्री-आईपीएल नीलामी ब्रीफिंग में शाहरुख खान (Shah Rukh Khan) के बेटे आर्यन खान (Aryan Khan) और बेटी सुहाना खान (Suhana Khan) को बेंगलुरु में देखा गया। Bollywood News Updates कर्नाटक हिजाब का मामला सुर्खियों में बना हुआ है। हिजाब विवाद के कारण हुई हिंसा की घटनाओं के कारण कर्नाटक में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
Aryan Khan Drugs Case: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के एक विशेष जांच दल ने जांच में पाया है कि पिछले साल अक्टूबर की शुरुआत में कॉर्डेलिया क्रूज जहाज पर छापेमारी अनियमितताओं से भरी हुई थी। Bollywood News Updates: फिल्म सनम तेरी कसम के सीक्वेल की शूटिंग जल्द शुरू होने वाली है। इस बात की जानकारी डायरेक्टर विनय सप्रु और राधिका राव ने दी है। Bollywood News Updates: आलिया भट्ट की फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी का नया गाना मेरी जान रिलीज हो गया है। Bollywood News Updates: आलिया भट्ट की फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी रिलीज से पहले ही विवादों में फंसती हुई नजर आ रही है। Bollywood News Updates: बॅालीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की फिल्म गहराइयां OTT पर रिलीज हो चुकी है। आईपीएल ऑक्शन का पहला आयोजन बारह फरवरी को किया गया था इस दौरान इस दौरान आर्यन खान और सुहाना खान को बेंगलुरु में देखा गया। Bollywood News Updates: बॅालीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ के फैंस के लिए खुशखबरी सामने आई है बता दें कि 'हीरोपंती-दो' की रिलीज डेट अनाउंस हो गई है। प्री-आईपीएल नीलामी ब्रीफिंग में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान और बेटी सुहाना खान को बेंगलुरु में देखा गया। Bollywood News Updates कर्नाटक हिजाब का मामला सुर्खियों में बना हुआ है। हिजाब विवाद के कारण हुई हिंसा की घटनाओं के कारण कर्नाटक में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
वहाँ तक तो सब साथ थे, लेकिन अब कोई भी दो एक साथ नहीं रहा । दस-के-दसो अलग-अलग खेतो मे अपनी पिंडलियाँ खुजलाते, हाँफ रहे 'समझते-समझाते उमिर बीत गई, पर यह माटी का माधो ही रह गया । ससुरू मिले, तो कसकर मरम्मत कर दी जाय आज !' बाबा अपने फूटे घुटने से खून पोछते हुए ठठाकर हँसे । पास के खेत में फसे मगनूसिह हँसी के मारे लोटपोट होते हुए उनके पास पहुँचे। 'पकड़ तो नही गया ससुरा ? बाप रे.... भैया, वे सब आ तो नही रहे हैं ?" और वह लपककर चार कदम भागे, पर बाबा की अडिगता ने उन्हें रोक लिया । दोनों श्रादमी चुपचाप इधर-उधर देखने लगे । सावन-भादो की काली रात, रिमझिम बूंदें पड रही थी । 'का किया जाय, रास्ता भी तो छूट गया । पता नहीं कहाँ हैं, हम लोग ।' 'किसी मेड पर चढ़कर इधर-उधर देखा जाय । मेरा तो घुटना फूट गया 'बुढवा कैसे हुक्का पटक के दोडा था !" 'अरे भइया, कुछ न पूछो" मगन हो हो..हँसने लगे। इसी बीच जोर की आवाज सुनाई पडी : हसा जाई अकेला, ई देहिया ना रही । मल ले, धो ले, नहा ले, खा ले, करना हो सो कर ले, ई देहिया.... दस- एक बीघे के इर्दगिर्दं, अँधेरे और भय मे धँसी हुई पूरी मण्डली सिमट आयी। चेहरे किसी के नहीं दिखाई पड़े, पर हंसी के मारे सबका पेट फूल रहा था । उसी बीच थूक घोटने की-सी आवाज करता हुआ वह आया और जोर से हँसने लगा । 'होई गयी गलती भइया ! मैं का जानू कि मेहरिया है। समझा, तुममे से कोई रुक गया है ।' मगनू ने कहा, 'सरऊ साँड़ हो रहे हो, अब मरद मेहरारू मे भी तुम्हे भेद नही दिखाई पडता ?" 'नाही, भाय, जब ठोकर खाके गिरने को हुए न, मैंने सहारे के लिए उसे पकड लिया । फिर जो मालूम हुआ, तो हकबका गया । तभी बुढवा ने एक लाठी जमा दी । खैर कहो निकल भागा ।' उसने झुककर अपनी टाँगो पर हाथ फेरा । नीचे से ऊपर तक झरबेरी के काँटे चुभे हुए थे । 'ससुरे को बीच मे कर लो " बाबा ने कहा । मगनू कहने लगे, 'चलो मेहरारू तो छू लिया, ससुरे की किस्मत में लिखी तो है नही !' उसे लोग हसा कहते है । काला चिट्टा, बहुत ही तगडा आदमी है । उसके भारी चेहरे मे मटर सी आँखे और आलू-सी नाक, उसके व्यक्तित्व के विस्तार को बहुत सीमित कर देती हैं । सीने पर उगे हुए बाल, किसी भीट पर उगी हुई घास का बोध कराते है । घुटने तक की धोती और मारकीन का दुगजी गमछा उसका पहनावा है। वैसे उसके पास एक दोहरा कुर्ता भी है, पर वह
वहाँ तक तो सब साथ थे, लेकिन अब कोई भी दो एक साथ नहीं रहा । दस-के-दसो अलग-अलग खेतो मे अपनी पिंडलियाँ खुजलाते, हाँफ रहे 'समझते-समझाते उमिर बीत गई, पर यह माटी का माधो ही रह गया । ससुरू मिले, तो कसकर मरम्मत कर दी जाय आज !' बाबा अपने फूटे घुटने से खून पोछते हुए ठठाकर हँसे । पास के खेत में फसे मगनूसिह हँसी के मारे लोटपोट होते हुए उनके पास पहुँचे। 'पकड़ तो नही गया ससुरा ? बाप रे.... भैया, वे सब आ तो नही रहे हैं ?" और वह लपककर चार कदम भागे, पर बाबा की अडिगता ने उन्हें रोक लिया । दोनों श्रादमी चुपचाप इधर-उधर देखने लगे । सावन-भादो की काली रात, रिमझिम बूंदें पड रही थी । 'का किया जाय, रास्ता भी तो छूट गया । पता नहीं कहाँ हैं, हम लोग ।' 'किसी मेड पर चढ़कर इधर-उधर देखा जाय । मेरा तो घुटना फूट गया 'बुढवा कैसे हुक्का पटक के दोडा था !" 'अरे भइया, कुछ न पूछो" मगन हो हो..हँसने लगे। इसी बीच जोर की आवाज सुनाई पडी : हसा जाई अकेला, ई देहिया ना रही । मल ले, धो ले, नहा ले, खा ले, करना हो सो कर ले, ई देहिया.... दस- एक बीघे के इर्दगिर्दं, अँधेरे और भय मे धँसी हुई पूरी मण्डली सिमट आयी। चेहरे किसी के नहीं दिखाई पड़े, पर हंसी के मारे सबका पेट फूल रहा था । उसी बीच थूक घोटने की-सी आवाज करता हुआ वह आया और जोर से हँसने लगा । 'होई गयी गलती भइया ! मैं का जानू कि मेहरिया है। समझा, तुममे से कोई रुक गया है ।' मगनू ने कहा, 'सरऊ साँड़ हो रहे हो, अब मरद मेहरारू मे भी तुम्हे भेद नही दिखाई पडता ?" 'नाही, भाय, जब ठोकर खाके गिरने को हुए न, मैंने सहारे के लिए उसे पकड लिया । फिर जो मालूम हुआ, तो हकबका गया । तभी बुढवा ने एक लाठी जमा दी । खैर कहो निकल भागा ।' उसने झुककर अपनी टाँगो पर हाथ फेरा । नीचे से ऊपर तक झरबेरी के काँटे चुभे हुए थे । 'ससुरे को बीच मे कर लो " बाबा ने कहा । मगनू कहने लगे, 'चलो मेहरारू तो छू लिया, ससुरे की किस्मत में लिखी तो है नही !' उसे लोग हसा कहते है । काला चिट्टा, बहुत ही तगडा आदमी है । उसके भारी चेहरे मे मटर सी आँखे और आलू-सी नाक, उसके व्यक्तित्व के विस्तार को बहुत सीमित कर देती हैं । सीने पर उगे हुए बाल, किसी भीट पर उगी हुई घास का बोध कराते है । घुटने तक की धोती और मारकीन का दुगजी गमछा उसका पहनावा है। वैसे उसके पास एक दोहरा कुर्ता भी है, पर वह
EPFO की बैठक (EPFO Meeting) में ब्याज दर (Interest rate) पर भी फैसला होना है कि आपको इस साल कितना ब्याज मिलेगा? ऐसा माना जा रहा है कि ईपीएफ में जमा रकम पर 8. 5 फीसदी की मौजूदा ब्याज दर जारी रख सकता है. मौजूदा ब्याज दर में कोई बदलाव होने की संभावना कम है. नई दिल्ली. EPFO सब्सक्राइर्ब्स के लिए बेहद जरूरी खबर आ रही है. EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की जल्द ही बैठक होने वाली है. खबर है कि Employees Provident Fund Organisation (EPFO) के सेंट्रल बोर्ड की मीटिंग 16 नवबंर को हो सकती है. आपको इस साल PF के ब्याज पर कितना ब्याज मिलेगा इसका फैसला इसी बैठक में होगा. इस बैठक में कई बड़े फैसलों पर विचार होना है. इस बैठक का मुख्य एजेंडा पेंशन की न्यूनतम राशि को बढ़ाने पर फैसला लेना भी है. EPFO की बैठक (EPFO Meeting) में ब्याज दर (Interest rate) पर भी फैसला होना है कि आपको इस साल कितना ब्याज मिलेगा? ऐसा माना जा रहा है कि ईपीएफ में जमा रकम पर 8. 5 फीसदी की मौजूदा ब्याज दर जारी रख सकता है. मौजूदा ब्याज दर में कोई बदलाव होने की संभावना कम है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मौजूदा न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 1,000 रुपये से 6,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की मांग की है, जबकि सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी या CBT इसे बढ़ाकर 3,000 रुपये कर सकता है. ईपीएफओ के पैसे को निजी कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश करने का विवादास्पद मुद्दा भी बैठक में चर्चा का विषय होगा. साथ ही 2021-22 के लिए पेंशन फंड की ब्याज दर क्या हो, इस मुद्दे पर भी फैसला हो सकता है. सीबीटी न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 3,000 रुपये करने का फैसला कर सकता है। ट्रेड यूनियन इसे बढ़ाने की मांग कर रही है. यह बैठक 16 नवंबर को हो सकती है. CBT की आखिरी बैठक मार्च में श्रीनगर में हुई थी. सीबीटी ने 2020-21 के लिए सदस्यों के खातों में ईपीएफ जमा राशि पर 8. 5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर देने की सिफारिश की थी. वित्त मंत्रालय ने हाल ही में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है. .
EPFO की बैठक में ब्याज दर पर भी फैसला होना है कि आपको इस साल कितना ब्याज मिलेगा? ऐसा माना जा रहा है कि ईपीएफ में जमा रकम पर आठ. पाँच फीसदी की मौजूदा ब्याज दर जारी रख सकता है. मौजूदा ब्याज दर में कोई बदलाव होने की संभावना कम है. नई दिल्ली. EPFO सब्सक्राइर्ब्स के लिए बेहद जरूरी खबर आ रही है. EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की जल्द ही बैठक होने वाली है. खबर है कि Employees Provident Fund Organisation के सेंट्रल बोर्ड की मीटिंग सोलह नवबंर को हो सकती है. आपको इस साल PF के ब्याज पर कितना ब्याज मिलेगा इसका फैसला इसी बैठक में होगा. इस बैठक में कई बड़े फैसलों पर विचार होना है. इस बैठक का मुख्य एजेंडा पेंशन की न्यूनतम राशि को बढ़ाने पर फैसला लेना भी है. EPFO की बैठक में ब्याज दर पर भी फैसला होना है कि आपको इस साल कितना ब्याज मिलेगा? ऐसा माना जा रहा है कि ईपीएफ में जमा रकम पर आठ. पाँच फीसदी की मौजूदा ब्याज दर जारी रख सकता है. मौजूदा ब्याज दर में कोई बदलाव होने की संभावना कम है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने मौजूदा न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर एक,शून्य रुपयापये से छः,शून्य रुपयापये तक की बढ़ोतरी की मांग की है, जबकि सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी या CBT इसे बढ़ाकर तीन,शून्य रुपयापये कर सकता है. ईपीएफओ के पैसे को निजी कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश करने का विवादास्पद मुद्दा भी बैठक में चर्चा का विषय होगा. साथ ही दो हज़ार इक्कीस-बाईस के लिए पेंशन फंड की ब्याज दर क्या हो, इस मुद्दे पर भी फैसला हो सकता है. सीबीटी न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर तीन,शून्य रुपयापये करने का फैसला कर सकता है। ट्रेड यूनियन इसे बढ़ाने की मांग कर रही है. यह बैठक सोलह नवंबर को हो सकती है. CBT की आखिरी बैठक मार्च में श्रीनगर में हुई थी. सीबीटी ने दो हज़ार बीस-इक्कीस के लिए सदस्यों के खातों में ईपीएफ जमा राशि पर आठ. पाँच प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर देने की सिफारिश की थी. वित्त मंत्रालय ने हाल ही में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी है. .
कोरोना महामारी के चलते काफी महीनों से महिला क्रिकेट बंद पड़ा हुआ था। जिसके चलते हाल ही में भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड ( बीसीसीआई ) द्वारा घरेलू सरजमीं पर महिला टीम इंडिया और महिला साउथ अफ्रीका के बीच वनडे सीरीज लखनऊ के अटल बिहारी स्टेडियम में खेली जा रही है। इस तरह 5 मैचों की वनडे सीरीज के चौथे मैच में महिला टीम इंडिया की कप्तान मिताली राज ने एक खास रिकॉर्ड अपने नाम किया है। जिसके चलते वो ऐसा करने वाली दुनिया की एकलौती महिला बल्लेबाज बन गई है। दरअसल, चौथे वनडे मैच के दौरान शुरुआत में दो विकेट जल्दी गिरने के बाद मिताली ने शानदार अंदाज में अपनी पारी को आगे बढाना शुरू किया। जिसके चलते उन्होंने अपनी 45 रन की पारी के दौरान बीच में अंतराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट में उन्होंने 7 हजार रन पूरे कर डाले। ऐसे में अब महिला क्रिकेट की दुनिया में मिताली का राज हो गया है। ऐसा करने वाली वो दुनिया की पहली महिला खिलाड़ी भी बन गई है। मिताली ने इस मुकाम को अपने 213वें वनडे मैच में हासिल किया। वहीं मिताली के आस - पास भी इस समय कोई महिला खिलाड़ी नहीं है। वनडे क्रिकेट में मिताली के बाद सबसे ज्यादा 191 वनडे मैचों में इंग्लैंड की पूर्व महिला खिलाड़ी चार्ले एडवर्ड्स के नाम 5992 रन दर्ज हैं। जिसके चलते मिताली उनसे पहले ही काफी आगे निकला चुकी हैं और अब 7 हजार के मुकाम को पार कर चुकी है। बता दें कि इससे पहले हाल ही में मिताली ने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी फॉर्मेट मिलाकर अपने 10 हजार रन पूरे किए थे। इस तरह अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में 10 हजार रन बनाने वाली वो भारत की पहली महिला खिलाड़ी जबकि विश्व की दूसरी महिला खिलाड़ी बबनी। मिताली ने ये कारनामा जहां 311 मैचों में अपने नाम किया है। वहीं इससे पहले 309 मैचों में इंग्लैंड की चार्ले एडवर्ड्स ने 10,273 अन्तराष्ट्रीय रन बनाकर अपने नाम किया था। इस तरह महिला वर्ल्ड क्रिकेट में चार्ले पहले जबकि मिताली अब दूसरे स्थान पर हैं।
कोरोना महामारी के चलते काफी महीनों से महिला क्रिकेट बंद पड़ा हुआ था। जिसके चलते हाल ही में भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड द्वारा घरेलू सरजमीं पर महिला टीम इंडिया और महिला साउथ अफ्रीका के बीच वनडे सीरीज लखनऊ के अटल बिहारी स्टेडियम में खेली जा रही है। इस तरह पाँच मैचों की वनडे सीरीज के चौथे मैच में महिला टीम इंडिया की कप्तान मिताली राज ने एक खास रिकॉर्ड अपने नाम किया है। जिसके चलते वो ऐसा करने वाली दुनिया की एकलौती महिला बल्लेबाज बन गई है। दरअसल, चौथे वनडे मैच के दौरान शुरुआत में दो विकेट जल्दी गिरने के बाद मिताली ने शानदार अंदाज में अपनी पारी को आगे बढाना शुरू किया। जिसके चलते उन्होंने अपनी पैंतालीस रन की पारी के दौरान बीच में अंतराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट में उन्होंने सात हजार रन पूरे कर डाले। ऐसे में अब महिला क्रिकेट की दुनिया में मिताली का राज हो गया है। ऐसा करने वाली वो दुनिया की पहली महिला खिलाड़ी भी बन गई है। मिताली ने इस मुकाम को अपने दो सौ तेरहवें वनडे मैच में हासिल किया। वहीं मिताली के आस - पास भी इस समय कोई महिला खिलाड़ी नहीं है। वनडे क्रिकेट में मिताली के बाद सबसे ज्यादा एक सौ इक्यानवे वनडे मैचों में इंग्लैंड की पूर्व महिला खिलाड़ी चार्ले एडवर्ड्स के नाम पाँच हज़ार नौ सौ बानवे रन दर्ज हैं। जिसके चलते मिताली उनसे पहले ही काफी आगे निकला चुकी हैं और अब सात हजार के मुकाम को पार कर चुकी है। बता दें कि इससे पहले हाल ही में मिताली ने अंतराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी फॉर्मेट मिलाकर अपने दस हजार रन पूरे किए थे। इस तरह अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में दस हजार रन बनाने वाली वो भारत की पहली महिला खिलाड़ी जबकि विश्व की दूसरी महिला खिलाड़ी बबनी। मिताली ने ये कारनामा जहां तीन सौ ग्यारह मैचों में अपने नाम किया है। वहीं इससे पहले तीन सौ नौ मैचों में इंग्लैंड की चार्ले एडवर्ड्स ने दस,दो सौ तिहत्तर अन्तराष्ट्रीय रन बनाकर अपने नाम किया था। इस तरह महिला वर्ल्ड क्रिकेट में चार्ले पहले जबकि मिताली अब दूसरे स्थान पर हैं।
पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। पुलिस टीम को मौके से सिंदूर की डिब्बी बरामद हुई है। वहीं, युवती की मांग भी भरी हुई थी, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि दोनों ने मरने से पहले शादी रचाई थी। पीलीभीत (Uttar Pradesh)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना से लड़ाई में पीलीभीत को प्रदेश का मॉडल जिला घोषित किया है। डीएम वैभव श्रीवास्तव की भी मुक्त कंठ से प्रशंसा भी की थी। इसके बाद डीएम का उत्साह और बढ़ गया है। वे लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने जुट गए है। इतना ही नहीं जरूरतमंदों को खाना, राशन आदि वितरण के कार्यों की खुद मानीटरिंग कर रहे हैं। इसी बीत उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर छा गई है। दरअसल इस तस्वीर में वे गेहूं की खेत में मजदूरों के साथ लंच करते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि खेत में कटाई कर रहे मजदूरों को अब भी यकीन नहीं हो रहा हैं कि उनके जिले का मुखिया उनके साथ ऐसा भी कर सकता है। एप डाउनलोड करने के कुछ देर बाद ही उसके नंबर पर एक अंजान नंबर से अश्लील मैसेज आया। उस नंबर पर फोन किया तो दूसरी तरफ से लड़की की आवाज आई। फिर क्या दोनों में बातचीत होने लगी। लड़की से बातचीत में अश्लील ऑडियो और वीडियो क्लिप का भी आदान-प्रदान होता था। कोरोना संकट को देखते हुए सरकार ने विधायक निधि के साथ ही विधायकों के वेतन में 30 फीसदी कटौती का फरमान जारी किया है। खबर है कि इस आदेश के बाद पांच जनप्रतिनिधियों ने सीडीओ को पत्र भेजकर धनराशि खर्च न करने की बात कही है। चंदौली (Uttar Pradesh)। लॉकडाउन के फेज टू में लोग घर के बार नहीं निकल पा रहे हैं, जबकि इस समय शादियों का सीजन चल रहा है। ऐसे में लोग परेशान हैं। हालांकि अधिकांश लोगों ने तो शादी की डेट ही कैंसिल कर दी है। लेकिन, इसी बीच बहुत से ऐसे भी लोग हैं जो अनोखे तरीके से अपनी शादी कर रहे हैं। इसी में एक अनूठी शादी धीना थाने में हुई है। इस अनोखी शादी की हर ओर चर्चा हो रही है। दरअल यहां दूल्हा-दुल्हन ने पुलिस की मौजूदगी में ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए शादी की है। वहीं, पुलिस भी घराती और बाराती के रूप में शामिल हुई और दोनों को आशीर्वाद दी। दूल्हे के पिता ने बताया कि कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन कब खत्म होगा। यह अभी तय नहीं हैं। इसलिए हमने तय तारीख को ही शादी करने का फैसला किया। मोबाइल से दूल्हा-दुल्हन की रजामंदी ली गई। 16 अप्रैल को महाराष्ट्र के पालघर के गड़चिनचले गांव में दो साधुओं समेत तीन की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। यह पूरी घटना वहां मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों के सामने हुई। आरोपियों ने साधुओं के साथ पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया। इसके बाद साधुओं को अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। संत सुशील गिरी के दो भाई मुंबई में ही रहते हैं, लेकिन लॉकडाउन के चलते वे अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सके। सुशील की मौत से उनके परिवार व गांव में हर कोई गमगीन है। सभी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अनिल भाटी का ये मोबाइल थाने से गायब हो गया था, जिसकी एफआईआर भी दर्ज है। लेकिन, चैटिंग की डिटेल अब भी पुलिस के कागजातों में मौजूद है। मीडिया की खबरों के मुताबिक डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने अब इस मामले की एसआईटी जांच के लिए आदेश दे दिया है।
पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। पुलिस टीम को मौके से सिंदूर की डिब्बी बरामद हुई है। वहीं, युवती की मांग भी भरी हुई थी, जिससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि दोनों ने मरने से पहले शादी रचाई थी। पीलीभीत । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना से लड़ाई में पीलीभीत को प्रदेश का मॉडल जिला घोषित किया है। डीएम वैभव श्रीवास्तव की भी मुक्त कंठ से प्रशंसा भी की थी। इसके बाद डीएम का उत्साह और बढ़ गया है। वे लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने जुट गए है। इतना ही नहीं जरूरतमंदों को खाना, राशन आदि वितरण के कार्यों की खुद मानीटरिंग कर रहे हैं। इसी बीत उनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर छा गई है। दरअसल इस तस्वीर में वे गेहूं की खेत में मजदूरों के साथ लंच करते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि खेत में कटाई कर रहे मजदूरों को अब भी यकीन नहीं हो रहा हैं कि उनके जिले का मुखिया उनके साथ ऐसा भी कर सकता है। एप डाउनलोड करने के कुछ देर बाद ही उसके नंबर पर एक अंजान नंबर से अश्लील मैसेज आया। उस नंबर पर फोन किया तो दूसरी तरफ से लड़की की आवाज आई। फिर क्या दोनों में बातचीत होने लगी। लड़की से बातचीत में अश्लील ऑडियो और वीडियो क्लिप का भी आदान-प्रदान होता था। कोरोना संकट को देखते हुए सरकार ने विधायक निधि के साथ ही विधायकों के वेतन में तीस फीसदी कटौती का फरमान जारी किया है। खबर है कि इस आदेश के बाद पांच जनप्रतिनिधियों ने सीडीओ को पत्र भेजकर धनराशि खर्च न करने की बात कही है। चंदौली । लॉकडाउन के फेज टू में लोग घर के बार नहीं निकल पा रहे हैं, जबकि इस समय शादियों का सीजन चल रहा है। ऐसे में लोग परेशान हैं। हालांकि अधिकांश लोगों ने तो शादी की डेट ही कैंसिल कर दी है। लेकिन, इसी बीच बहुत से ऐसे भी लोग हैं जो अनोखे तरीके से अपनी शादी कर रहे हैं। इसी में एक अनूठी शादी धीना थाने में हुई है। इस अनोखी शादी की हर ओर चर्चा हो रही है। दरअल यहां दूल्हा-दुल्हन ने पुलिस की मौजूदगी में ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए शादी की है। वहीं, पुलिस भी घराती और बाराती के रूप में शामिल हुई और दोनों को आशीर्वाद दी। दूल्हे के पिता ने बताया कि कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन कब खत्म होगा। यह अभी तय नहीं हैं। इसलिए हमने तय तारीख को ही शादी करने का फैसला किया। मोबाइल से दूल्हा-दुल्हन की रजामंदी ली गई। सोलह अप्रैल को महाराष्ट्र के पालघर के गड़चिनचले गांव में दो साधुओं समेत तीन की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। यह पूरी घटना वहां मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों के सामने हुई। आरोपियों ने साधुओं के साथ पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया। इसके बाद साधुओं को अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। संत सुशील गिरी के दो भाई मुंबई में ही रहते हैं, लेकिन लॉकडाउन के चलते वे अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सके। सुशील की मौत से उनके परिवार व गांव में हर कोई गमगीन है। सभी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अनिल भाटी का ये मोबाइल थाने से गायब हो गया था, जिसकी एफआईआर भी दर्ज है। लेकिन, चैटिंग की डिटेल अब भी पुलिस के कागजातों में मौजूद है। मीडिया की खबरों के मुताबिक डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी ने अब इस मामले की एसआईटी जांच के लिए आदेश दे दिया है।
Nasa SpaceX Rocket Launch नौ साल में पहली बार अब अमेरिका ने अपने Astronauts को अमेरिका की धरती से स्पेस (NASA SpaceX ) पर भेजा है। ऐस्ट्रोनॉट्स Robert Behnken और Douglas Hurley रॉकेट Falcon 9 में सवार हैं। NASA Administrator Jim Bridenstine ने इसे गर्व का लम्हा बताया। अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने 9 साल बाद इतिहास रच दिया है। फ्लोरिडा के केप कनवरल में जॉन एफ केनेडी स्पेस सेंटर से NASA-SpaceX Demo-2 mission सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया है। अमेरिका ने 9 साल में पहली बार अपनी धरती से स्पेस (अंतरिक्ष) में Astronauts भेजे हैं। नासा के ऐडमिनिस्ट्रेटर जिम ब्राइडेनस्टीन ने लॉन्च के बारे में जानकारी दी। चांद को छूने के लिए पृथ्वी से पहली उड़ान इसी जॉन एफ केनेडी सेंटर से रखी गई थी। नासा के ऐडमिनिस्ट्रेटर जिम ब्राइडेनस्टीन ने ट्वीट करते हुए बताया, '9 साल में पहली बार अब हमने अमेरिकी Astronauts को अमेरिकी रॉकेट के जरिए अमेरिका की धरती से भेजा है। मुझे नासा और SpaceX टीम पर गर्व है, जिसने हमें इस क्षण को देखने का मौका दिया है। यह एक बहुत अलग तरह की फीलिंग है, जब आप अपनी टीम को इस रॉकेट (Falcon 9) पर देखते हैं। ये हमारी टीम है। यह Launch America है। ' अमेरिकी समय के मुताबिक दोपहर 3 बजकर 22 मिनट पर रॉकेट को लॉन्च किया गया। दोनों Astronauts (अंतरिक्ष यात्री) सभी तैयारियों के साथ SpaceX रॉकेट में सवार हुए। काउंटडाउन खत्म होने के साथ ही यान अंतरिक्ष की ओर उड़ चला। इससे पहले बुधवार को खराब मौसम की वजह से लॉन्चिंग को तय समय से 16 मिनट पहले टालना पड़ा था।
Nasa SpaceX Rocket Launch नौ साल में पहली बार अब अमेरिका ने अपने Astronauts को अमेरिका की धरती से स्पेस पर भेजा है। ऐस्ट्रोनॉट्स Robert Behnken और Douglas Hurley रॉकेट Falcon नौ में सवार हैं। NASA Administrator Jim Bridenstine ने इसे गर्व का लम्हा बताया। अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA ने नौ साल बाद इतिहास रच दिया है। फ्लोरिडा के केप कनवरल में जॉन एफ केनेडी स्पेस सेंटर से NASA-SpaceX Demo-दो mission सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया है। अमेरिका ने नौ साल में पहली बार अपनी धरती से स्पेस में Astronauts भेजे हैं। नासा के ऐडमिनिस्ट्रेटर जिम ब्राइडेनस्टीन ने लॉन्च के बारे में जानकारी दी। चांद को छूने के लिए पृथ्वी से पहली उड़ान इसी जॉन एफ केनेडी सेंटर से रखी गई थी। नासा के ऐडमिनिस्ट्रेटर जिम ब्राइडेनस्टीन ने ट्वीट करते हुए बताया, 'नौ साल में पहली बार अब हमने अमेरिकी Astronauts को अमेरिकी रॉकेट के जरिए अमेरिका की धरती से भेजा है। मुझे नासा और SpaceX टीम पर गर्व है, जिसने हमें इस क्षण को देखने का मौका दिया है। यह एक बहुत अलग तरह की फीलिंग है, जब आप अपनी टीम को इस रॉकेट पर देखते हैं। ये हमारी टीम है। यह Launch America है। ' अमेरिकी समय के मुताबिक दोपहर तीन बजकर बाईस मिनट पर रॉकेट को लॉन्च किया गया। दोनों Astronauts सभी तैयारियों के साथ SpaceX रॉकेट में सवार हुए। काउंटडाउन खत्म होने के साथ ही यान अंतरिक्ष की ओर उड़ चला। इससे पहले बुधवार को खराब मौसम की वजह से लॉन्चिंग को तय समय से सोलह मिनट पहले टालना पड़ा था।
जोधपुर, 17 फरवरी 2021. नाबालिग से रेप के आरोप में जेल में बंद आसाराम (Asaram Admitted in Hospital) की तबियत अचानक बिगड़ गई है. जिसके बाद उसे जोधपुर के सेंट्रल जेल से अस्पताल में भर्ती कराया गया है. आसाराम का महात्मा गांधी अस्पताल में इलाज चल रहा है. आसाराम के अस्पताल में आने की जानकारी मिलते ही बड़ी तादात में उनके समर्थक वहां पहुंच गए. Rajasthan: Self-styled godman Asaram Bapu admitted to a hospital after he complained of restlessness, discomfort in knees and other ailments. वहीं आसाराम की जांच करने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें कुछ दवाएं दी है. उनकी रिपोर्ट नार्मल आने की खबर भी सामने आयी है. आसाराम को जोधपुर कोर्ट ने एक नाबालिग से रेप के मामले में दोषी करार दिया है. उनकी सीटी स्कैन भी कराया गया है.
जोधपुर, सत्रह फरवरी दो हज़ार इक्कीस. नाबालिग से रेप के आरोप में जेल में बंद आसाराम की तबियत अचानक बिगड़ गई है. जिसके बाद उसे जोधपुर के सेंट्रल जेल से अस्पताल में भर्ती कराया गया है. आसाराम का महात्मा गांधी अस्पताल में इलाज चल रहा है. आसाराम के अस्पताल में आने की जानकारी मिलते ही बड़ी तादात में उनके समर्थक वहां पहुंच गए. Rajasthan: Self-styled godman Asaram Bapu admitted to a hospital after he complained of restlessness, discomfort in knees and other ailments. वहीं आसाराम की जांच करने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें कुछ दवाएं दी है. उनकी रिपोर्ट नार्मल आने की खबर भी सामने आयी है. आसाराम को जोधपुर कोर्ट ने एक नाबालिग से रेप के मामले में दोषी करार दिया है. उनकी सीटी स्कैन भी कराया गया है.
मुंबई। इम्तियाज अली के निर्देशन में बन रही शाहरुख खान की फिल्म के टाइटल को लेकर अब एक और नाम सुना गया है। कहा जा रहा है कि फिल्म का टाइटल रहनुमान रखा जाएगा। इससे पहले फिल्म का टाइटल द रिंग कहा जा रहा था। वैसे फिल्म के टाइटल को लेकर शाहरुख खान ने बॉलीवुड से लेकर आम जनता से सुझाव मांगे थे। फिल्म का पहला पोस्टर पिछले दिनों सलमान खान ने सोशल मीडिया पर रिलीज किया था और इसकी रिलीज डेट भी बता दी थी, लेकिन टाइटल को लेकर चर्चाओं का बाजार तेजी पकड़ता जा रहा है। फिल्म के निर्देशक इम्तियाज अली का कहना है कि वे सही समय पर टाइटल की घोषणा करेंगे। अगले साल 11 अगस्त को ये फिल्म रिलीज होने जा रही है। फिल्म में रब ने बना दी जोड़ी और जब तक है जान के बाद तीसरी बार शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा की जोड़ी काम कर रही है। शाहिद कपूर के साथ जब वी मेट, रणबीर कपूर के साथ रॉक स्टार और आलिया भट्ट के साथ हाईवे बना चुके निर्देशक इम्तियाज अली की इन दोनों के साथ पहली फिल्म है।
मुंबई। इम्तियाज अली के निर्देशन में बन रही शाहरुख खान की फिल्म के टाइटल को लेकर अब एक और नाम सुना गया है। कहा जा रहा है कि फिल्म का टाइटल रहनुमान रखा जाएगा। इससे पहले फिल्म का टाइटल द रिंग कहा जा रहा था। वैसे फिल्म के टाइटल को लेकर शाहरुख खान ने बॉलीवुड से लेकर आम जनता से सुझाव मांगे थे। फिल्म का पहला पोस्टर पिछले दिनों सलमान खान ने सोशल मीडिया पर रिलीज किया था और इसकी रिलीज डेट भी बता दी थी, लेकिन टाइटल को लेकर चर्चाओं का बाजार तेजी पकड़ता जा रहा है। फिल्म के निर्देशक इम्तियाज अली का कहना है कि वे सही समय पर टाइटल की घोषणा करेंगे। अगले साल ग्यारह अगस्त को ये फिल्म रिलीज होने जा रही है। फिल्म में रब ने बना दी जोड़ी और जब तक है जान के बाद तीसरी बार शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा की जोड़ी काम कर रही है। शाहिद कपूर के साथ जब वी मेट, रणबीर कपूर के साथ रॉक स्टार और आलिया भट्ट के साथ हाईवे बना चुके निर्देशक इम्तियाज अली की इन दोनों के साथ पहली फिल्म है।
बॉलीवुड एक्टर धर्मेंद्र अपने जमाने के सबसे कामयाब और बड़े सितारों में से हैं। लेकिन उन्हें जो नाम और पहचान मिली वो उनके छोटे बेटे बॉबी देओल को नहीं मिल सकी। बॉबी देओल ने साल 1995 में फिल्म बरसात से बॉलीवुड में कदम रखा था जिसमें वो ट्विंकल खन्ना के साथ नजर आए थे। इसके बाद बॉबी देओल ने कई फिल्मों में काम किया जिसमें गुप्त, और प्यार हो गया, करीब, सोलजर, दिल्लगी, बिच्छू, अजनबी, हमराज, जुर्म, अपने, रेस 3, यमला पगला दीवाना और हाउसफुल 4 जैसी फिल्मों में काम किया लेकिन उन्हें वो पहचान नहीं मिली। बॉबी देओल की पर्सनल लाइफ की बात करें तो उन्होंने 30 मई 1996 को तान्या देओल से शादी की थी और उनके दो बेटे आर्यमन और धरम देओल हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बॉबी लंबे समय तक एक्ट्रेस नीलम कोठारी को डेट कर चुके हैं? बॉबी देओल और नीलम कोठारी एक-दूसरे से प्यार करते थे और सीरियस रिलेशनशिप में थे और हमेशा एक दूसरे के साथ रहना चाहते थे लेकिन उनका यह रिश्ता लंबे समय तक नहीं टिका। दोनों के करीबी और दोस्त इस रिश्ते के बारे में जानते थे लेकिन उन्होंने खुद कभी अपने रिश्ते को लेकर बात नहीं की। पांच साल तक रिलेशनशिप में रहने के बाद दोनों का रिश्ता खत्म हो गया। बॉबी देओल और नीलम कोठारी के ब्रेकअप के बाद इसकी वजह को लेकर कई तरह के कयास लगाए गए। बाद में नीलम ने एक इंटरव्यू में कहा कि उन दोनों ने आपसी रजामंदी से ब्रेकअप किया है और इसके लिए कोई भी तीसरा शख्स जिम्मेदार नहीं है। नीलम ने बॉबी से अलग होने पर कहा था कि उनका मानना है कि यह उनकी लाइफ का सबसे समझदारी वाला फैसला है और इस फैसले से उनका परिवार भी काफी खुश है। नीलम ने कहा था, 'मुझे लगता है कि यह मेरा सबसे समझदारी वाला फैसला है। इससे मेरा परिवार बहुत खुश है। अब मैं जिंदगी में उन चीजों पर ध्यान दे सकूंगी जिन्हें मैं नजरअंदाज कर रही थी। ' 'बॉबी के साथ नहीं रहती खुश' बॉबी से अलग होने पर नीलम ने कहा था मुझे अचानक यह अहसास हुआ कि मैं कभी बॉबी के साथ खुश नहीं रह पाऊंगी। मैं जानती हूं कि मुझे देर से अहसास हुआ लेकिन हुआ। मालूम हो कि बाद में बॉबी ने तान्या देओल से शादी कर ली।
बॉलीवुड एक्टर धर्मेंद्र अपने जमाने के सबसे कामयाब और बड़े सितारों में से हैं। लेकिन उन्हें जो नाम और पहचान मिली वो उनके छोटे बेटे बॉबी देओल को नहीं मिल सकी। बॉबी देओल ने साल एक हज़ार नौ सौ पचानवे में फिल्म बरसात से बॉलीवुड में कदम रखा था जिसमें वो ट्विंकल खन्ना के साथ नजर आए थे। इसके बाद बॉबी देओल ने कई फिल्मों में काम किया जिसमें गुप्त, और प्यार हो गया, करीब, सोलजर, दिल्लगी, बिच्छू, अजनबी, हमराज, जुर्म, अपने, रेस तीन, यमला पगला दीवाना और हाउसफुल चार जैसी फिल्मों में काम किया लेकिन उन्हें वो पहचान नहीं मिली। बॉबी देओल की पर्सनल लाइफ की बात करें तो उन्होंने तीस मई एक हज़ार नौ सौ छियानवे को तान्या देओल से शादी की थी और उनके दो बेटे आर्यमन और धरम देओल हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बॉबी लंबे समय तक एक्ट्रेस नीलम कोठारी को डेट कर चुके हैं? बॉबी देओल और नीलम कोठारी एक-दूसरे से प्यार करते थे और सीरियस रिलेशनशिप में थे और हमेशा एक दूसरे के साथ रहना चाहते थे लेकिन उनका यह रिश्ता लंबे समय तक नहीं टिका। दोनों के करीबी और दोस्त इस रिश्ते के बारे में जानते थे लेकिन उन्होंने खुद कभी अपने रिश्ते को लेकर बात नहीं की। पांच साल तक रिलेशनशिप में रहने के बाद दोनों का रिश्ता खत्म हो गया। बॉबी देओल और नीलम कोठारी के ब्रेकअप के बाद इसकी वजह को लेकर कई तरह के कयास लगाए गए। बाद में नीलम ने एक इंटरव्यू में कहा कि उन दोनों ने आपसी रजामंदी से ब्रेकअप किया है और इसके लिए कोई भी तीसरा शख्स जिम्मेदार नहीं है। नीलम ने बॉबी से अलग होने पर कहा था कि उनका मानना है कि यह उनकी लाइफ का सबसे समझदारी वाला फैसला है और इस फैसले से उनका परिवार भी काफी खुश है। नीलम ने कहा था, 'मुझे लगता है कि यह मेरा सबसे समझदारी वाला फैसला है। इससे मेरा परिवार बहुत खुश है। अब मैं जिंदगी में उन चीजों पर ध्यान दे सकूंगी जिन्हें मैं नजरअंदाज कर रही थी। ' 'बॉबी के साथ नहीं रहती खुश' बॉबी से अलग होने पर नीलम ने कहा था मुझे अचानक यह अहसास हुआ कि मैं कभी बॉबी के साथ खुश नहीं रह पाऊंगी। मैं जानती हूं कि मुझे देर से अहसास हुआ लेकिन हुआ। मालूम हो कि बाद में बॉबी ने तान्या देओल से शादी कर ली।
बॉलीवुड के जाने-माने दिग्गज एक्टर रणधीर कपूर (Randhir Kapoor) आज अपना 76th बर्थडे मना रहे हैं. रणधीर कपूर अपने जमाने में कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया है. साल 1971 में रणधीर और बबीता ने एक-दूसरे को अपना हमसफर बना लिया. दोनों की प्रेम कहानी भी बहुत इंटरेस्टिंग है. रणधीर कपूर और बबीता की पहली मुलाकात 1969 की फिल्म 'संगम' के सेट पर हुई थी. 80 के दशक में रणधीर कपूर (Randhir Kapoor) की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही थीं. उनके करियर का ग्राफ लगातार नीचे गिरता जा रहा था. इस वजह से वे बहुत परेशान रहने लगे और उन्होंने ड्रिंक करना शुरू कर दिया था. उनके शराब पीने की आदत से बबीता को भी दिक्कत होने लगी. इस वजह से दोनों के बीच अनबन भी रहने लगी. दोनों के रिश्ते में दरार आ गई और बबीता करिश्मा और करीना को लेकर अलग रहने लगीं. उन्होंने रणधीर कपूर का घर छोड़कर चली गई थीं.
बॉलीवुड के जाने-माने दिग्गज एक्टर रणधीर कपूर आज अपना छिहत्तरth बर्थडे मना रहे हैं. रणधीर कपूर अपने जमाने में कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया है. साल एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में रणधीर और बबीता ने एक-दूसरे को अपना हमसफर बना लिया. दोनों की प्रेम कहानी भी बहुत इंटरेस्टिंग है. रणधीर कपूर और बबीता की पहली मुलाकात एक हज़ार नौ सौ उनहत्तर की फिल्म 'संगम' के सेट पर हुई थी. अस्सी के दशक में रणधीर कपूर की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही थीं. उनके करियर का ग्राफ लगातार नीचे गिरता जा रहा था. इस वजह से वे बहुत परेशान रहने लगे और उन्होंने ड्रिंक करना शुरू कर दिया था. उनके शराब पीने की आदत से बबीता को भी दिक्कत होने लगी. इस वजह से दोनों के बीच अनबन भी रहने लगी. दोनों के रिश्ते में दरार आ गई और बबीता करिश्मा और करीना को लेकर अलग रहने लगीं. उन्होंने रणधीर कपूर का घर छोड़कर चली गई थीं.
Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 15 फरवरी, 2019 को उत्तर प्रदेश में झांसी का दौरा करेंगे जहां वे विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। प्रधानमंत्री झांसी में रक्षा गलियारे का शिलान्यास करेंगे। भारत सरकार ने देश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्म निर्भर बनाने के लिए तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में दो रक्षा गलियारा बनाने का फैसला किया है। झांसी उत्तर प्रदेश में बनाये जाने वाले रक्षा गलियारे के छह महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है। प्रधानमंत्री ने फरवरी,2018 में उत्तर प्रदेश निवेशक सम्मेलन में राज्य में ऐसा ही एक और गलियारा बुंदेलखंड क्षेत्र में भी बनाये जाने की घोषणा की थी। श्री मोदी 297 किलोमीटर लंबे झांसी-खैरार रेल सेक्शन के विद्युतीकरण का भी उद्घाटन करेंगे। इससे इस सेक्शन पर रेलगाडि़यों का आवागमन तेज हो जाएगा और साथ ही कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। प्रधानमंत्री पश्चिमी उत्तर प्रदेश को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई पश्चिमी-उत्तर अन्तर-क्षेत्रीय बिजली पारेषण लाइन राष्ट्र को समर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री पहाड़ी बांध आधुनिकीकरण परियोजना का भी उद्घाटन करेंगे। यह बांध धसान नदी पर बनाया गया है। सभी के लिए स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने की सरकार की योजना के तहत प्रधानमंत्री बुंदेलखंड क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पाइप लाइन के जरिये पानी की आपूर्ति योजना का शिलान्यास भी करेंगे। यह परियोजना इस नजरिये से महत्वपूर्ण है कि इससे सूखा प्रभावित बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की आपूर्ति हो सकेगी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री झांसी शहर के लिए 'अमृत' के तहत पेयजल आपूर्ति योजना के दूसरे चरण की भी आधारशिला रखेंगे। श्री मोदी झांसी में पुराने रेल डिब्बों को नया बनाने के वर्कशॉप का शिलान्यास करेंगे। इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में लोगों के लिए रोजगार की संभावनाएं बनेगी। प्रधानमंत्री झांसी-माणिकपुर और भीमसैन-खैरार सेक्शन पर 425 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग के दोहरीकरण की परियोजना की आधारशिला रखेंगे। इससे न सिर्फ रेलगाडि़यों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि बुंदेलखंड क्षेत्र के सर्वांगीण विकास में भी मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री इससे पहले वाराणसी और वृंदावन भी गये थे। वाराणसी में उन्होंने प्रवासी भारतीय दिवस को संबोधित किया था और वृंदावन में वंचित तबकों के स्कूली छात्रों को तीन अरबवीं भोजन की थाली परोसी थी।
Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी पंद्रह फरवरी, दो हज़ार उन्नीस को उत्तर प्रदेश में झांसी का दौरा करेंगे जहां वे विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखेंगे। प्रधानमंत्री झांसी में रक्षा गलियारे का शिलान्यास करेंगे। भारत सरकार ने देश को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्म निर्भर बनाने के लिए तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में दो रक्षा गलियारा बनाने का फैसला किया है। झांसी उत्तर प्रदेश में बनाये जाने वाले रक्षा गलियारे के छह महत्वपूर्ण स्थानों में से एक है। प्रधानमंत्री ने फरवरी,दो हज़ार अट्ठारह में उत्तर प्रदेश निवेशक सम्मेलन में राज्य में ऐसा ही एक और गलियारा बुंदेलखंड क्षेत्र में भी बनाये जाने की घोषणा की थी। श्री मोदी दो सौ सत्तानवे किलोग्राममीटर लंबे झांसी-खैरार रेल सेक्शन के विद्युतीकरण का भी उद्घाटन करेंगे। इससे इस सेक्शन पर रेलगाडि़यों का आवागमन तेज हो जाएगा और साथ ही कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। प्रधानमंत्री पश्चिमी उत्तर प्रदेश को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई पश्चिमी-उत्तर अन्तर-क्षेत्रीय बिजली पारेषण लाइन राष्ट्र को समर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री पहाड़ी बांध आधुनिकीकरण परियोजना का भी उद्घाटन करेंगे। यह बांध धसान नदी पर बनाया गया है। सभी के लिए स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने की सरकार की योजना के तहत प्रधानमंत्री बुंदेलखंड क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पाइप लाइन के जरिये पानी की आपूर्ति योजना का शिलान्यास भी करेंगे। यह परियोजना इस नजरिये से महत्वपूर्ण है कि इससे सूखा प्रभावित बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की आपूर्ति हो सकेगी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री झांसी शहर के लिए 'अमृत' के तहत पेयजल आपूर्ति योजना के दूसरे चरण की भी आधारशिला रखेंगे। श्री मोदी झांसी में पुराने रेल डिब्बों को नया बनाने के वर्कशॉप का शिलान्यास करेंगे। इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में लोगों के लिए रोजगार की संभावनाएं बनेगी। प्रधानमंत्री झांसी-माणिकपुर और भीमसैन-खैरार सेक्शन पर चार सौ पच्चीस किलोग्राममीटर लंबे रेल मार्ग के दोहरीकरण की परियोजना की आधारशिला रखेंगे। इससे न सिर्फ रेलगाडि़यों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि बुंदेलखंड क्षेत्र के सर्वांगीण विकास में भी मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री इससे पहले वाराणसी और वृंदावन भी गये थे। वाराणसी में उन्होंने प्रवासी भारतीय दिवस को संबोधित किया था और वृंदावन में वंचित तबकों के स्कूली छात्रों को तीन अरबवीं भोजन की थाली परोसी थी।
एक छोटे से खेत में एक जवान लड़का और उसके दादा मिट्टी खोद रहे थे। वे मिट्टी को पलट रहे थे, उसकी गांठों को तोड़ रहे थे ताकि मिट्टी उस वर्ष की बुवाई के लिए अच्छे से तैयार हो सके। उस काम में काफी कड़ी मेहनत थी लेकिन उनके सभी प्रयास एक अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए आवश्यक थी। बूढ़ा आदमी अपने 70 की उम्र में भी अच्छी तरह से कड़ी मेहनत कर रहा था। हाँ थकान से वो काफी हद तक हांफ रहा था। हर प्रहार के जोर से उनके माथे से पसीना टपकता था लेकिन फिर भी वह शिकायत नहीं कर रहा था। उनका पोता जो महज 17 साल का था, तंदुरुस्त और ताकतवर। वह मिट्टी को पलटने और गांठों को तोड़ने में लगती मेहनत और ताकत के लिए कोसता, फिर वहाँ खड़े होकर वह हाँफता और थोड़ी देर के लिए रुक जाता! थोड़ा आराम करने के बाद एक बार फिर से काम शुरू करने से पहले शिकायत करता। थोड़ी देर बाद, युवा पोता देखता है कि उसके दादाजी ने जितना काम कर जमीन को तैयार किया वो उसके द्वारा तैयार की जमीन से बहोत ज्यादा हैं। "दादाजी,आप इतने बूढ़े हो फिर भी आपने मुझसे इतना अधिक काम कैसे किया?" पोता अपने दादा से पूछता है। दादाजी ने उसे जो जवाब दिया ऊसकी उसे उम्मीद नहीं थी। "जब हम किसी काम को मुश्किल मानते है और उसके बारे में ज्यादा सोचते है तो सच में मुश्किल हो जाता है,और हम बिना सोचे जब उसे करते है और करते ही रहते है तो वो आसान हो जाता है।" पोता थोड़ा अचंभित हो जाता है इसलिए दादाजी अपनी बात जारी रखते हैं। "जब हम अपना समय यह सोचने में बिताते हैं कि कोई काम कितना कठिन है,और अभी कितना सारा बाकी है, तब हमारा मन बहाने बनाने लगता हैं। "जब आप तय किए काम के बारे में ज्यादा सोचते हैं और अपने दिमाग को नकारात्मक विचारों पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देते हैं, तो आपकी गति उस काम को करने के लिए अपने आप धीमी होती जाती है। अगर आप किसी भी काम के दौरान सकारात्मकता बनाए रखना चाहते हैं तो आपको तुरंत उस काम को शुरू करना चाहिए और अगर देखना और सोचना है तो जितना आप आगे बढ़े यानी की जितना काम आपने अच्छे से खत्म कर लिया उसे देखें न की जो बाकी है उसे! ऐसा करने से एक सुखद और सकारात्मक एहसास आपको उस काम को लगातार करते रहने की ऊर्जा देता रहेगा । हमें अपने कार्य को मन लगा कर करने से कार्य सरलता व सहजता से पूरा हो जाता है और हमें कार्य करने में रूचि बनी रहती है जिससे कार्य से अलगाव नहीं होता है । कार्य में सकारात्मक एहसास कार्य करने की क्षमता को दुगुना कर देता है ।
एक छोटे से खेत में एक जवान लड़का और उसके दादा मिट्टी खोद रहे थे। वे मिट्टी को पलट रहे थे, उसकी गांठों को तोड़ रहे थे ताकि मिट्टी उस वर्ष की बुवाई के लिए अच्छे से तैयार हो सके। उस काम में काफी कड़ी मेहनत थी लेकिन उनके सभी प्रयास एक अच्छी फसल प्राप्त करने के लिए आवश्यक थी। बूढ़ा आदमी अपने सत्तर की उम्र में भी अच्छी तरह से कड़ी मेहनत कर रहा था। हाँ थकान से वो काफी हद तक हांफ रहा था। हर प्रहार के जोर से उनके माथे से पसीना टपकता था लेकिन फिर भी वह शिकायत नहीं कर रहा था। उनका पोता जो महज सत्रह साल का था, तंदुरुस्त और ताकतवर। वह मिट्टी को पलटने और गांठों को तोड़ने में लगती मेहनत और ताकत के लिए कोसता, फिर वहाँ खड़े होकर वह हाँफता और थोड़ी देर के लिए रुक जाता! थोड़ा आराम करने के बाद एक बार फिर से काम शुरू करने से पहले शिकायत करता। थोड़ी देर बाद, युवा पोता देखता है कि उसके दादाजी ने जितना काम कर जमीन को तैयार किया वो उसके द्वारा तैयार की जमीन से बहोत ज्यादा हैं। "दादाजी,आप इतने बूढ़े हो फिर भी आपने मुझसे इतना अधिक काम कैसे किया?" पोता अपने दादा से पूछता है। दादाजी ने उसे जो जवाब दिया ऊसकी उसे उम्मीद नहीं थी। "जब हम किसी काम को मुश्किल मानते है और उसके बारे में ज्यादा सोचते है तो सच में मुश्किल हो जाता है,और हम बिना सोचे जब उसे करते है और करते ही रहते है तो वो आसान हो जाता है।" पोता थोड़ा अचंभित हो जाता है इसलिए दादाजी अपनी बात जारी रखते हैं। "जब हम अपना समय यह सोचने में बिताते हैं कि कोई काम कितना कठिन है,और अभी कितना सारा बाकी है, तब हमारा मन बहाने बनाने लगता हैं। "जब आप तय किए काम के बारे में ज्यादा सोचते हैं और अपने दिमाग को नकारात्मक विचारों पर ध्यान केंद्रित करने की अनुमति देते हैं, तो आपकी गति उस काम को करने के लिए अपने आप धीमी होती जाती है। अगर आप किसी भी काम के दौरान सकारात्मकता बनाए रखना चाहते हैं तो आपको तुरंत उस काम को शुरू करना चाहिए और अगर देखना और सोचना है तो जितना आप आगे बढ़े यानी की जितना काम आपने अच्छे से खत्म कर लिया उसे देखें न की जो बाकी है उसे! ऐसा करने से एक सुखद और सकारात्मक एहसास आपको उस काम को लगातार करते रहने की ऊर्जा देता रहेगा । हमें अपने कार्य को मन लगा कर करने से कार्य सरलता व सहजता से पूरा हो जाता है और हमें कार्य करने में रूचि बनी रहती है जिससे कार्य से अलगाव नहीं होता है । कार्य में सकारात्मक एहसास कार्य करने की क्षमता को दुगुना कर देता है ।
हमारे संवाददाता नई दिल्ली। दिल्ली में दूषित पानी की सप्लाई के विरोध में पदर्शन कर रहे भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। गिरफ्तारी से पूर्व नई दिल्ली एवं करोल बाग जिले के करीब 4000 फ्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित की सां"गां" से पानी की कीमतों में कई गुना वृद्धि हुई है। कांग्रेस के नेता टैंकर माफिया को संरक्षण दे रहे हैं जबकि राजधानी में पानी की कमी है। इस अवसर पर विजेन्द्र गुप्ता के अतिरिक्त दिल्ली विधानसभा में नेता फ्रतिपक्ष फ्रो. विजय कुमार मलहोत्रा, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना, फ्रदेश महामंत्री रमेश बिधूड़ी, विधायक सुरेन्द्रपाल रातावाल, सुभाष सचदेवा, दिल्ली नगर निगम स्थायी समिति के अध्यक्ष योगेन्द्र चांदोलिया, फ्रदेश महामंत्री आशीष सूद, सतीश उपाध्याय, जिला अध्यक्ष राजेश भाटिया, फ्रदेश मंत्री नरेन्द्र टंडन, राजन तिवारी, कृष्ण लाल ढिलोड़ आदि ने सम्बोधित किया। इसमें एक दर्जन पार्षद भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों 616 नमूनों की जांच में सरकारी फ्रयोगशाला के अधिकारियों ने पाया कि 111 नमूने जहरीलेपन की सीमा तक फ्रदूषित पाये गये। जो नमूने सही पाये गये वे भी फिट और अनफिट पानी की बॉर्डर लाइन को छू रहे थे। दिल्ली नगर निगम की मेडिकल रिलीफ और पब्लिक हेल्थ समिति के चेयरमैन डॉ. वी. के. मोंगा ने बताया कि पानी के नमूनों का बैक्टीरिया टेस्ट कराया गया। पानी में जहरीले बैक्टीरिया की मात्रा फ्रति 100 मिलीलीटर 10 तक क्षम्य है। यदि 10 से ऊपर बैक्टीरिया 100 मिलीलीटर पानी में पाये जाते हैं तो उससे टाइफाइड, कॉलरा, आत्रशोथ, पीलिया जैसी खतरनाक जानलेवा बीमारियां पैदा हो जाती हैं। आश्चर्य ये है कि दिल्ली जल बोर्ड की चेयरमैन भी स्वयं मुख्यमंत्री हैं फिर भी दिल्ली का हर पांचवा व्यक्ति जहरीला पानी पीने को मजबूर है। फ्रदेश अध्यक्ष ने घोषणा की कि दिल्लीवासियों को न्याय दिलाने के लिए भाजपा अपना विरोध फ्रदर्शन जारी रखेगी।
हमारे संवाददाता नई दिल्ली। दिल्ली में दूषित पानी की सप्लाई के विरोध में पदर्शन कर रहे भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। गिरफ्तारी से पूर्व नई दिल्ली एवं करोल बाग जिले के करीब चार हज़ार फ्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए भाजपा नेताओं ने कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती शीला दीक्षित की सां"गां" से पानी की कीमतों में कई गुना वृद्धि हुई है। कांग्रेस के नेता टैंकर माफिया को संरक्षण दे रहे हैं जबकि राजधानी में पानी की कमी है। इस अवसर पर विजेन्द्र गुप्ता के अतिरिक्त दिल्ली विधानसभा में नेता फ्रतिपक्ष फ्रो. विजय कुमार मलहोत्रा, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना, फ्रदेश महामंत्री रमेश बिधूड़ी, विधायक सुरेन्द्रपाल रातावाल, सुभाष सचदेवा, दिल्ली नगर निगम स्थायी समिति के अध्यक्ष योगेन्द्र चांदोलिया, फ्रदेश महामंत्री आशीष सूद, सतीश उपाध्याय, जिला अध्यक्ष राजेश भाटिया, फ्रदेश मंत्री नरेन्द्र टंडन, राजन तिवारी, कृष्ण लाल ढिलोड़ आदि ने सम्बोधित किया। इसमें एक दर्जन पार्षद भी उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों छः सौ सोलह नमूनों की जांच में सरकारी फ्रयोगशाला के अधिकारियों ने पाया कि एक सौ ग्यारह नमूने जहरीलेपन की सीमा तक फ्रदूषित पाये गये। जो नमूने सही पाये गये वे भी फिट और अनफिट पानी की बॉर्डर लाइन को छू रहे थे। दिल्ली नगर निगम की मेडिकल रिलीफ और पब्लिक हेल्थ समिति के चेयरमैन डॉ. वी. के. मोंगा ने बताया कि पानी के नमूनों का बैक्टीरिया टेस्ट कराया गया। पानी में जहरीले बैक्टीरिया की मात्रा फ्रति एक सौ मिलीलीटर दस तक क्षम्य है। यदि दस से ऊपर बैक्टीरिया एक सौ मिलीलीटर पानी में पाये जाते हैं तो उससे टाइफाइड, कॉलरा, आत्रशोथ, पीलिया जैसी खतरनाक जानलेवा बीमारियां पैदा हो जाती हैं। आश्चर्य ये है कि दिल्ली जल बोर्ड की चेयरमैन भी स्वयं मुख्यमंत्री हैं फिर भी दिल्ली का हर पांचवा व्यक्ति जहरीला पानी पीने को मजबूर है। फ्रदेश अध्यक्ष ने घोषणा की कि दिल्लीवासियों को न्याय दिलाने के लिए भाजपा अपना विरोध फ्रदर्शन जारी रखेगी।
प्रायश्चित्त शब्द इतना व्यापक है कि उसे समस्त दर्शनकारों ने स्वीकार किया है। जैनशास्त्रों के अनुसार प्रायश्चित से ज्ञान, दर्शन और चारित्र की विशुद्धि होती है। श्रीस्थानागसून में, तीसरे स्थानक में प्रायश्चित्त के तीन भेद आठव स्थानक में आठ भेद, नौवें स्थानक में और दसवें स्थानक में दम भेद बताय हैं। इन सब का सार यही है कि प्रायश्चित्त करा से दशन को विशुद्धि होती है, त प्रायश्चित्त करना चाहिए । अन्य दार्शनिकों ने भी प्रायश्चित्त को स्वीकार किया है, पर जैनशास्त्र कहत है कि प्रायश्चित्त द्वारा पाप का विशोधन करो। पाव के सत्ताप से बचते रहने की इच्छा परता और पाप का त्याग न करना प्रायश्चित्त नहीं है। पाप के परिणाम में प्रर्थात् पाप क दड से घबरान की आवश्यक्ता नहीं, वरन् पाप स भयमीत होना चाहिए । मवावर किरणावनी नेकदर्शनकार कहते हैं- पाप तो होता ही रहता पाप से बचना शक्य नहीं है अत पाप के परिणाम से बचन लिए ईश्वर की प्रार्थना करना चाहिए। मगर जैनदर्शन कहता है कि पाप क पल से बचन का प्रयत्न नहीं करना चाहिए । अन्य दर्शन कारों का कथन और उसको असंगतता आजकल क युगप्रवर्तक माने जाने वाले गांधीजी की आत्मकथा का उदाहरण देकर बतलाना हूँ। गाधीनी पथ विलायत जा रहे थे तब राजकोट में उन्होंने अपनी माता के आम से अपने सम्प्रदाय के बेचरजी स्वामी नामक जैन-माधु के समक्ष मदिरा, मांस और परस्त्री का त्याग किया था । इस त्याग के प्रभाव से गांधीजी विलायत में मदिरा आदि अपवित्र वस्तुओं के सेवन के पाप से पच सके थे। विलायत से भारत लौटने के पश्चात वह फिर दक्षिण अफ्रिका गये थे। वहाँ का अनुभव धीजी कहते हैंसोलहवा बोल कोट्स नामक ईसाई ने ईमाई घम के विषय में मुझसे बहुत तर्क वितर्क किया और मैंने भी उसके सामने बहुतरी दलीलें दी। मगर मर। दलीलें उसकी समम में नहीं आई, क्योंकि उसे मेरे धर्म पर अश्रद्धा ही थी। वह तो उलटा मुझे ही अज्ञान-धूप से बाहर निकालना चाहता था। उसका कहना था कि दूसरे धर्मों में मल हो थाहान्बहुत सत्य हो मगर पूर्ण सत्य स्वरूप ईसाई धर्म स्वीकार किय विना तुम्हें मुक्ति नहीं मिल मक्ती की कृपादृष्टि के बिना पाप धुल नहीं सकते और तमाम पुण्यकार्य निरर्थक हो जात है ! जब मैं पोट्स की दलोलों से प्रभावित न हुआ तो मेरा परिचय ऐसे इमान्यों के साथ कराया गया जिन्हें व चुम्न सममता था। जिनके साथ उसन मरा परिचय कराया उनमें एक प्लीम प्रदरन का कुटुम्ब था। रैलोमथ ब्रदरन नामक ईसाई सम्प्रदाय है। कोट्स न कुछ ऐसे परिचय कराये जो मुझे बहुत अच्छे लगे। उनके परिचय से मुझे ऐसा लगा कि वे लोग ईश्वर से डरते थे, मगर इस परिवार ने मेरे सामने यह दलील रक्सी तुम हमारे धर्म की खूबी समझ नहीं सकत । तुम्हारे कहने हम जान सकत है कि तुम्हें क्षण क्षण अपनी भूल का विचार करना पड़ता है और सुधार करना पड़ता है। अगर भूल न सुधर तो तुम्हे पश्चात्ताप या प्रायश्चित्त करना पड़ता है। इस क्रियावाद से तुम कथ छुटकारा पाओग और कब तुम्ह शान्ति मिल सकता । हम सब पाया है, यह तो तुम मारते ही हो हमारी मान्यता देखो, वह की परिपूर्ण है। हमारा प्रयत्न व्यर्थ है। फिर भी खित ता हमें चाहिए हो। हम पाप का बोझ कैसे उठा सकते हैं। इस
प्रायश्चित्त शब्द इतना व्यापक है कि उसे समस्त दर्शनकारों ने स्वीकार किया है। जैनशास्त्रों के अनुसार प्रायश्चित से ज्ञान, दर्शन और चारित्र की विशुद्धि होती है। श्रीस्थानागसून में, तीसरे स्थानक में प्रायश्चित्त के तीन भेद आठव स्थानक में आठ भेद, नौवें स्थानक में और दसवें स्थानक में दम भेद बताय हैं। इन सब का सार यही है कि प्रायश्चित्त करा से दशन को विशुद्धि होती है, त प्रायश्चित्त करना चाहिए । अन्य दार्शनिकों ने भी प्रायश्चित्त को स्वीकार किया है, पर जैनशास्त्र कहत है कि प्रायश्चित्त द्वारा पाप का विशोधन करो। पाव के सत्ताप से बचते रहने की इच्छा परता और पाप का त्याग न करना प्रायश्चित्त नहीं है। पाप के परिणाम में प्रर्थात् पाप क दड से घबरान की आवश्यक्ता नहीं, वरन् पाप स भयमीत होना चाहिए । मवावर किरणावनी नेकदर्शनकार कहते हैं- पाप तो होता ही रहता पाप से बचना शक्य नहीं है अत पाप के परिणाम से बचन लिए ईश्वर की प्रार्थना करना चाहिए। मगर जैनदर्शन कहता है कि पाप क पल से बचन का प्रयत्न नहीं करना चाहिए । अन्य दर्शन कारों का कथन और उसको असंगतता आजकल क युगप्रवर्तक माने जाने वाले गांधीजी की आत्मकथा का उदाहरण देकर बतलाना हूँ। गाधीनी पथ विलायत जा रहे थे तब राजकोट में उन्होंने अपनी माता के आम से अपने सम्प्रदाय के बेचरजी स्वामी नामक जैन-माधु के समक्ष मदिरा, मांस और परस्त्री का त्याग किया था । इस त्याग के प्रभाव से गांधीजी विलायत में मदिरा आदि अपवित्र वस्तुओं के सेवन के पाप से पच सके थे। विलायत से भारत लौटने के पश्चात वह फिर दक्षिण अफ्रिका गये थे। वहाँ का अनुभव धीजी कहते हैंसोलहवा बोल कोट्स नामक ईसाई ने ईमाई घम के विषय में मुझसे बहुत तर्क वितर्क किया और मैंने भी उसके सामने बहुतरी दलीलें दी। मगर मर। दलीलें उसकी समम में नहीं आई, क्योंकि उसे मेरे धर्म पर अश्रद्धा ही थी। वह तो उलटा मुझे ही अज्ञान-धूप से बाहर निकालना चाहता था। उसका कहना था कि दूसरे धर्मों में मल हो थाहान्बहुत सत्य हो मगर पूर्ण सत्य स्वरूप ईसाई धर्म स्वीकार किय विना तुम्हें मुक्ति नहीं मिल मक्ती की कृपादृष्टि के बिना पाप धुल नहीं सकते और तमाम पुण्यकार्य निरर्थक हो जात है ! जब मैं पोट्स की दलोलों से प्रभावित न हुआ तो मेरा परिचय ऐसे इमान्यों के साथ कराया गया जिन्हें व चुम्न सममता था। जिनके साथ उसन मरा परिचय कराया उनमें एक प्लीम प्रदरन का कुटुम्ब था। रैलोमथ ब्रदरन नामक ईसाई सम्प्रदाय है। कोट्स न कुछ ऐसे परिचय कराये जो मुझे बहुत अच्छे लगे। उनके परिचय से मुझे ऐसा लगा कि वे लोग ईश्वर से डरते थे, मगर इस परिवार ने मेरे सामने यह दलील रक्सी तुम हमारे धर्म की खूबी समझ नहीं सकत । तुम्हारे कहने हम जान सकत है कि तुम्हें क्षण क्षण अपनी भूल का विचार करना पड़ता है और सुधार करना पड़ता है। अगर भूल न सुधर तो तुम्हे पश्चात्ताप या प्रायश्चित्त करना पड़ता है। इस क्रियावाद से तुम कथ छुटकारा पाओग और कब तुम्ह शान्ति मिल सकता । हम सब पाया है, यह तो तुम मारते ही हो हमारी मान्यता देखो, वह की परिपूर्ण है। हमारा प्रयत्न व्यर्थ है। फिर भी खित ता हमें चाहिए हो। हम पाप का बोझ कैसे उठा सकते हैं। इस
ज्ञानशक्ति का विकास अभिनन्दन जिनदर्शन तरसिये, दर्शन दुर्लभ देव, मत मत भेदे रे जो जइ पूछिये, सहु थापे अहमेव ।। 1 ।। घाती डूंगर आड़ा अति घणा, तुज दरिशन जगनाथ, ढिठाई करी मारग संचरू, सेंगु कोई न साथ ।। 2 ।। ये अभिनन्दन भगवान् की प्रार्थना की कड़ियां हैं। यह अभिनन्दन भगवान् के नाम पर बनाई गई स्तुति है। इस स्तुति की कड़ियों को मैं थोड़ी-थोड़ी सा उच्चारण कर रहा हूँ जिनका अर्थ करना है। उनका यत्किंचित् अर्थ करना और फिर शास्त्रीय विषय का प्रतिपादन करना अभीष्ट है। जो आप्तोपदिष्ट शास्त्रीय दृष्टिकोण है वहीं वीतराग प्रभु का दृष्टिकोण है। और यदि वीतराग दशा की ओर ध्यान गया तो हम अपने जीवन के अन्दर अभिनन्दन भगवान के दर्शन ठीक तरह से कर पायेंगे। पर उन दर्शनों के पीछे कई बड़ी कठिनाइयां हैं। कई उलझनें आकर खड़ी हो जाती हैं, इस प्रकार की आपत्तियां हैं। कई उलझनें आकर खड़ी हो जाती हैं, इस प्रकार की आपत्तियां रास्ता रोक लेती हैं तब आगे बढ़ने पर भी दर्शन में रूकावट आ जाती है। कवि ने संकेत दिया :घाती डूंगर आड़ा अति घणा, ढिठाई करी मारग दरिशण जगन्नाथ । सेंगु कोई न साथ । नव निधान / 17 डूंगर आपकी भाषा में पहाड़ है। वह लम्बी-लम्बी चोटियों वाला पहाड़, विकराल भीमकाय चट्टानें, अनेक तरह की कंटीली झाड़ियों वाले पहाड़ ! क्या वे भगवान् के दर्शन में बाधक हो रहे हैं ? तो क्या भगवान् उन पहाड़ों के पीछे हैं ? यह बाहरी दिखने वाले पहाड़ों का जिक्र नहीं है, बाहरी पहाड़ पार किये जा सकते हैं, घाटियां लांघी जा सकती हैं। पर वहां कोई दर्शन मिले तब ना ! वहां दर्शन नहीं ! दर्शन तो इस जीवन में है। पहाड़ के मानिंद वे जबरदस्त घाटियां इस जीवन में रही हुई हैं। उन घाटियों को मानव समझ नहीं पाता इसलिए वह लड़खड़ा जाता है। और प्रभु के दर्शन की प्यास शान्त नहीं हो पाती । प्रभु का नाम स्मरण या स्तुति की कड़ियां कर्णगोचर होती हैं। कर्ण के माध्यम से वे फिर अन्दर पहुँचती हैं । अन्दर में जिस स्थान पर वाक्यों के अर्थ का अनुसंधान होता है उस स्थलं पर शब्द का अर्थ पहुँचने का जब प्रसंग आता है तो चेतना उस अर्थ की ओर ध्यान देकर आत्मा के साथ संबंन्धित करने का प्रयास करती है। वहीं स्थल आन्तरिक शक्ति के निवास का भी है । शब्द रूप पदार्थ कान पर जाकर टकराता है और लौट जाता है। लेकिन कान के पर्दे पर पड़ी हुई आवाज अन्दर तक पहुँचती है। अन्दर में वह चेतना उस शब्द के अर्थ को बिखेर देती है और देखती है कि शब्द की आकृति में (उच्चारण में) क्या प्रभु के दर्शन हैं ? दरअसल शब्द की आकृति में प्रभु के दर्शन नहीं हैं। शब्द के पीछे रहने वाले अर्थ में यदि अन्तर की चेतना जुड़ जाती है तो वह संभवत प्रभु के दर्शन कर सकती है। लेकिन कभी-कभी मेरे भाई सोच लिया करते हैं कि महाराज कहते हैं अन्दर में प्रभु के दर्शन करो। इससे यह समझ में आता है कि एक तो हमारी आत्मा अन्दर बैठी है और दूसरे वह सिद्ध स्वरूप भगवान् भी अन्दर किसी कोने में आकर बैठा है तो इस शरीर में दो तत्व रह रहे हैं। ऐसे कई भ्रम में पड़ जाते हैं। पर आपको ख्याल रखना है कि इस शरीर में चेतना एक ही है। प्रत्येक शरीरी आत्मा एक शरीर में एक ही रहती हैं। शरीर नियन्ता रूप में एक ही आत्मा होती है। उसमें दो आत्मा एक साथ नहीं रहते। एक शरीर में एक 18 / नाशवाणी - 23 आत्मा ही है। सिद्ध स्वरूप का आकार अन्दर बैठा हुआ नहीं है । पर जो आत्मा इस शरीर के प्रत्येक अवयव में व्याप्त है वहीं आत्मा स्वयं ईश्वर स्वरूप है। पूर्ण ईश्वरत्व की शक्ति इस शरीर के अन्दर रहने वाले आत्मा में विद्यमान है, लेकिन वह शक्ति छिपी हुई है। जैसे कि स्वर्ण खदान में मिट्टी के साथ घुल मिल कर रह रहा है और मिट्टी में में घुला हुआ स्वर्ण जन साधारण की दृष्टि में नहीं आता। ऊपरी दृष्टि से तो मिट्टी का ढेला ही दिखता है। बहिर्दृष्टि कहेगा - स्वर्ण कहां है ? पर यदि किसी समझदार व्यक्ति को या स्वर्णकार को कहा जावे कि भाई इसमे क्या दिखता है ? वह कहेगा । इसी मिट्टी में स्वर्ण रहा हुआ है, इस मिट्टी में तुम्हें स्वर्ण मिलेगा । वह स्वर्णकार उस मिट्टी में स्वर्ण देखने के लिये कहता है । वह मिट्टी और स्वर्ण को अलग-अलग करने की कोशिश करता है। उसी से निखालिश स्वर्ण सामने आ जाता है। जैसे स्वर्ण मिट्टी में रहा हुआ, वैसे ही सत् चित् आनन्द घन- रूप ईश्वर की समग्र शक्ति इस शरीर के अवयवों में छिपी हुई है। वह है चेतन्य । उसे देखने के लिये सम्बोधन किया जाता है कि अपने अन्दर में रहने वाले भगवान् को जल्दी देख नहीं पायेगा, अतः सिद्ध अवस्था में रहे हुए भगवान् के आदर्श स्वरूप को अपनी ज्ञानशक्ति में ग्रहण कर और उस आदर्श स्वरूप भगवान् के तुल्य भगवान् को इसी शरीर में खोजने के चेष्ठा कर। क्योंकि वह ईश्वर तेरे इस शरीर के अवयवों से भी आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यधिक नजदीक है। तुझे बाहर जाने की आश्यकता नहीं है। घर मे ही तुझे वह विज्ञान मिल जायगा । पर मिलेगा कब ? जिस आदर्श रूप में प्रभु का उच्चारण किया गया है उस उच्चारित शब्द को छोड़कर शब्द में रहने वाले रस रूप अर्थ को लिया जायगा तब । एक व्यक्ति गन्ने के रस को चखना चाहता है। उस व्यक्ति से पूछिये कि तू यदि मीठा रस अपने पेट में डालना चाहता है तो गन्ने के टुकड़े क्यों चूसता है ? गन्ने के टुकड़ों को लेकर के चूसता है या कुछ अन्य वस्तु ? गन्ना जानते हैं आप ? इस वक्त सामायिक के अन्दर उसे नहीं चूसना है। यहां मैं किसी दूसरे गन्ने का रस चबाना
ज्ञानशक्ति का विकास अभिनन्दन जिनदर्शन तरसिये, दर्शन दुर्लभ देव, मत मत भेदे रे जो जइ पूछिये, सहु थापे अहमेव ।। एक ।। घाती डूंगर आड़ा अति घणा, तुज दरिशन जगनाथ, ढिठाई करी मारग संचरू, सेंगु कोई न साथ ।। दो ।। ये अभिनन्दन भगवान् की प्रार्थना की कड़ियां हैं। यह अभिनन्दन भगवान् के नाम पर बनाई गई स्तुति है। इस स्तुति की कड़ियों को मैं थोड़ी-थोड़ी सा उच्चारण कर रहा हूँ जिनका अर्थ करना है। उनका यत्किंचित् अर्थ करना और फिर शास्त्रीय विषय का प्रतिपादन करना अभीष्ट है। जो आप्तोपदिष्ट शास्त्रीय दृष्टिकोण है वहीं वीतराग प्रभु का दृष्टिकोण है। और यदि वीतराग दशा की ओर ध्यान गया तो हम अपने जीवन के अन्दर अभिनन्दन भगवान के दर्शन ठीक तरह से कर पायेंगे। पर उन दर्शनों के पीछे कई बड़ी कठिनाइयां हैं। कई उलझनें आकर खड़ी हो जाती हैं, इस प्रकार की आपत्तियां हैं। कई उलझनें आकर खड़ी हो जाती हैं, इस प्रकार की आपत्तियां रास्ता रोक लेती हैं तब आगे बढ़ने पर भी दर्शन में रूकावट आ जाती है। कवि ने संकेत दिया :घाती डूंगर आड़ा अति घणा, ढिठाई करी मारग दरिशण जगन्नाथ । सेंगु कोई न साथ । नव निधान / सत्रह डूंगर आपकी भाषा में पहाड़ है। वह लम्बी-लम्बी चोटियों वाला पहाड़, विकराल भीमकाय चट्टानें, अनेक तरह की कंटीली झाड़ियों वाले पहाड़ ! क्या वे भगवान् के दर्शन में बाधक हो रहे हैं ? तो क्या भगवान् उन पहाड़ों के पीछे हैं ? यह बाहरी दिखने वाले पहाड़ों का जिक्र नहीं है, बाहरी पहाड़ पार किये जा सकते हैं, घाटियां लांघी जा सकती हैं। पर वहां कोई दर्शन मिले तब ना ! वहां दर्शन नहीं ! दर्शन तो इस जीवन में है। पहाड़ के मानिंद वे जबरदस्त घाटियां इस जीवन में रही हुई हैं। उन घाटियों को मानव समझ नहीं पाता इसलिए वह लड़खड़ा जाता है। और प्रभु के दर्शन की प्यास शान्त नहीं हो पाती । प्रभु का नाम स्मरण या स्तुति की कड़ियां कर्णगोचर होती हैं। कर्ण के माध्यम से वे फिर अन्दर पहुँचती हैं । अन्दर में जिस स्थान पर वाक्यों के अर्थ का अनुसंधान होता है उस स्थलं पर शब्द का अर्थ पहुँचने का जब प्रसंग आता है तो चेतना उस अर्थ की ओर ध्यान देकर आत्मा के साथ संबंन्धित करने का प्रयास करती है। वहीं स्थल आन्तरिक शक्ति के निवास का भी है । शब्द रूप पदार्थ कान पर जाकर टकराता है और लौट जाता है। लेकिन कान के पर्दे पर पड़ी हुई आवाज अन्दर तक पहुँचती है। अन्दर में वह चेतना उस शब्द के अर्थ को बिखेर देती है और देखती है कि शब्द की आकृति में क्या प्रभु के दर्शन हैं ? दरअसल शब्द की आकृति में प्रभु के दर्शन नहीं हैं। शब्द के पीछे रहने वाले अर्थ में यदि अन्तर की चेतना जुड़ जाती है तो वह संभवत प्रभु के दर्शन कर सकती है। लेकिन कभी-कभी मेरे भाई सोच लिया करते हैं कि महाराज कहते हैं अन्दर में प्रभु के दर्शन करो। इससे यह समझ में आता है कि एक तो हमारी आत्मा अन्दर बैठी है और दूसरे वह सिद्ध स्वरूप भगवान् भी अन्दर किसी कोने में आकर बैठा है तो इस शरीर में दो तत्व रह रहे हैं। ऐसे कई भ्रम में पड़ जाते हैं। पर आपको ख्याल रखना है कि इस शरीर में चेतना एक ही है। प्रत्येक शरीरी आत्मा एक शरीर में एक ही रहती हैं। शरीर नियन्ता रूप में एक ही आत्मा होती है। उसमें दो आत्मा एक साथ नहीं रहते। एक शरीर में एक अट्ठारह / नाशवाणी - तेईस आत्मा ही है। सिद्ध स्वरूप का आकार अन्दर बैठा हुआ नहीं है । पर जो आत्मा इस शरीर के प्रत्येक अवयव में व्याप्त है वहीं आत्मा स्वयं ईश्वर स्वरूप है। पूर्ण ईश्वरत्व की शक्ति इस शरीर के अन्दर रहने वाले आत्मा में विद्यमान है, लेकिन वह शक्ति छिपी हुई है। जैसे कि स्वर्ण खदान में मिट्टी के साथ घुल मिल कर रह रहा है और मिट्टी में में घुला हुआ स्वर्ण जन साधारण की दृष्टि में नहीं आता। ऊपरी दृष्टि से तो मिट्टी का ढेला ही दिखता है। बहिर्दृष्टि कहेगा - स्वर्ण कहां है ? पर यदि किसी समझदार व्यक्ति को या स्वर्णकार को कहा जावे कि भाई इसमे क्या दिखता है ? वह कहेगा । इसी मिट्टी में स्वर्ण रहा हुआ है, इस मिट्टी में तुम्हें स्वर्ण मिलेगा । वह स्वर्णकार उस मिट्टी में स्वर्ण देखने के लिये कहता है । वह मिट्टी और स्वर्ण को अलग-अलग करने की कोशिश करता है। उसी से निखालिश स्वर्ण सामने आ जाता है। जैसे स्वर्ण मिट्टी में रहा हुआ, वैसे ही सत् चित् आनन्द घन- रूप ईश्वर की समग्र शक्ति इस शरीर के अवयवों में छिपी हुई है। वह है चेतन्य । उसे देखने के लिये सम्बोधन किया जाता है कि अपने अन्दर में रहने वाले भगवान् को जल्दी देख नहीं पायेगा, अतः सिद्ध अवस्था में रहे हुए भगवान् के आदर्श स्वरूप को अपनी ज्ञानशक्ति में ग्रहण कर और उस आदर्श स्वरूप भगवान् के तुल्य भगवान् को इसी शरीर में खोजने के चेष्ठा कर। क्योंकि वह ईश्वर तेरे इस शरीर के अवयवों से भी आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यधिक नजदीक है। तुझे बाहर जाने की आश्यकता नहीं है। घर मे ही तुझे वह विज्ञान मिल जायगा । पर मिलेगा कब ? जिस आदर्श रूप में प्रभु का उच्चारण किया गया है उस उच्चारित शब्द को छोड़कर शब्द में रहने वाले रस रूप अर्थ को लिया जायगा तब । एक व्यक्ति गन्ने के रस को चखना चाहता है। उस व्यक्ति से पूछिये कि तू यदि मीठा रस अपने पेट में डालना चाहता है तो गन्ने के टुकड़े क्यों चूसता है ? गन्ने के टुकड़ों को लेकर के चूसता है या कुछ अन्य वस्तु ? गन्ना जानते हैं आप ? इस वक्त सामायिक के अन्दर उसे नहीं चूसना है। यहां मैं किसी दूसरे गन्ने का रस चबाना
जिले के NH 52 पर खुरी गांव के पास शुक्रवार को कंटेनर ट्रक और मारुति कार की आमने-सामने की भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों युवक कार के अंदर ही फंस गए। कार के आगे का हिस्सा पूरी तरह साफ हो गया। इस हादसे में कार में सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं घटना के बाद ट्रक चालक मौके से ट्रक छोड़कर फरार हो गया। जानकारी के अनुसार, एक तेज रफ्तार कंटेनर ट्रक ब्यावरा से राजगढ़ की तरफ जा रहा था। वहीं राजगढ़ की तरफ से मारुती कार में सवार होकर कल्लूखेड़ा गांव के निवासी दो युवक इक्लेश और बबलू ब्यावरा की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान राजगढ़ और ब्यावरा के बीच NH 52 पर खुरी गांव के पास ट्रक और कार में आमने सामने भिड़ंत हो गई। जिसमें इक्लेश और बबलू की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि दोनों युवक कार में ही फंस गए। वहीं कार के आगे का हिस्सा भी पूरी तरह तहस-नहस हो गया। वहीं हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। सूचना के बाद मौके पर ब्यावरा देहात थाना प्रभारी आदित्य सोनी मौके पर पहुंचे। जिसके बाद कार से दोनों शवों को बाहर निकाला और पोस्ट मार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने थाने में मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जिले के NH बावन पर खुरी गांव के पास शुक्रवार को कंटेनर ट्रक और मारुति कार की आमने-सामने की भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों युवक कार के अंदर ही फंस गए। कार के आगे का हिस्सा पूरी तरह साफ हो गया। इस हादसे में कार में सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं घटना के बाद ट्रक चालक मौके से ट्रक छोड़कर फरार हो गया। जानकारी के अनुसार, एक तेज रफ्तार कंटेनर ट्रक ब्यावरा से राजगढ़ की तरफ जा रहा था। वहीं राजगढ़ की तरफ से मारुती कार में सवार होकर कल्लूखेड़ा गांव के निवासी दो युवक इक्लेश और बबलू ब्यावरा की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान राजगढ़ और ब्यावरा के बीच NH बावन पर खुरी गांव के पास ट्रक और कार में आमने सामने भिड़ंत हो गई। जिसमें इक्लेश और बबलू की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि दोनों युवक कार में ही फंस गए। वहीं कार के आगे का हिस्सा भी पूरी तरह तहस-नहस हो गया। वहीं हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। सूचना के बाद मौके पर ब्यावरा देहात थाना प्रभारी आदित्य सोनी मौके पर पहुंचे। जिसके बाद कार से दोनों शवों को बाहर निकाला और पोस्ट मार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने थाने में मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
रैली, थैली, भीड़-भड़क्का, तंदूरी रोटी के सँग है, गली-गली में तवा गर्म है, जन गण के दरवाजे जाकर, पाँच साल के बाद सियासत, वादों की तस्वीरें धुँधली, बिछी हुई शतरंज चुनावी, सबकी नजरें वहीं गड़ी हैं, बुधिया की भी लगी उचट के, मुनिया को भी आज साब जी, झंडों, डंडों की विक्री से, "मौलिक एवं अप्रकाशित" जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,अच्छा नवगीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । आदरणीय बसंत कुमार जी आदाब, बहुत ही उम्दा गीत । पढ़कर मज़ा आ गया । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
रैली, थैली, भीड़-भड़क्का, तंदूरी रोटी के सँग है, गली-गली में तवा गर्म है, जन गण के दरवाजे जाकर, पाँच साल के बाद सियासत, वादों की तस्वीरें धुँधली, बिछी हुई शतरंज चुनावी, सबकी नजरें वहीं गड़ी हैं, बुधिया की भी लगी उचट के, मुनिया को भी आज साब जी, झंडों, डंडों की विक्री से, "मौलिक एवं अप्रकाशित" जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब,अच्छा नवगीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । आदरणीय बसंत कुमार जी आदाब, बहुत ही उम्दा गीत । पढ़कर मज़ा आ गया । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।
तामूलपुर जिले में तूफान से भारी नुकसान हुआ है। घर में लगे तामुल का पेड़ गिरने से आमबारी पान बारी इलाके में एक व्यक्ति के अलावा एक महिला की भी मौत हो गई। गुवाहाटी : असम में बीती रात आए तूफान से कई जिलों में भारी नुकसान हुआ है। डिब्रूगढ़ जिले के टिंगखान इलाके में तूफान के दौरान स्कूटी से घर जाते समय पेड़ गिरने से रूपेश कोच (32) की मौत हो गई वही। टींगखान के खेरनी गांव में तूफान के दौरान बांस का पेड़ गिरने की वजह से चार महिलाओं की मौत हो गई। तामूलपुर जिले में तूफान से भारी नुकसान हुआ है। घर में लगे तामुल का पेड़ गिरने से आमबारी पान बारी इलाके में एक व्यक्ति के अलावा एक महिला की भी मौत हो गई। दरंग जिले के दल गांव के विभिन्न इलाकों में तूफान की वजह से भारी नुकसान हुआ है। वही तिनसुकिया जिले के डिग्बेई में तूफान के दौरान घायल तिखेस्वर सोनवाल की अस्पताल में मौत हो गई। मोरिगांव जिले के बिभिन्न इलाके में तूफान की वजह से भारी नुकसान हुआ है। जगह-जगह पेड़ गिरने की वजह से बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है।
तामूलपुर जिले में तूफान से भारी नुकसान हुआ है। घर में लगे तामुल का पेड़ गिरने से आमबारी पान बारी इलाके में एक व्यक्ति के अलावा एक महिला की भी मौत हो गई। गुवाहाटी : असम में बीती रात आए तूफान से कई जिलों में भारी नुकसान हुआ है। डिब्रूगढ़ जिले के टिंगखान इलाके में तूफान के दौरान स्कूटी से घर जाते समय पेड़ गिरने से रूपेश कोच की मौत हो गई वही। टींगखान के खेरनी गांव में तूफान के दौरान बांस का पेड़ गिरने की वजह से चार महिलाओं की मौत हो गई। तामूलपुर जिले में तूफान से भारी नुकसान हुआ है। घर में लगे तामुल का पेड़ गिरने से आमबारी पान बारी इलाके में एक व्यक्ति के अलावा एक महिला की भी मौत हो गई। दरंग जिले के दल गांव के विभिन्न इलाकों में तूफान की वजह से भारी नुकसान हुआ है। वही तिनसुकिया जिले के डिग्बेई में तूफान के दौरान घायल तिखेस्वर सोनवाल की अस्पताल में मौत हो गई। मोरिगांव जिले के बिभिन्न इलाके में तूफान की वजह से भारी नुकसान हुआ है। जगह-जगह पेड़ गिरने की वजह से बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है।
Inter Model Station । भगवान विश्वनाथ की नगरी काशी में लगातार विकास कार्य चल रहे है और काफी तेजी से चल रहे है, वाराणसी में आए दिनों किसी ना किसी परियोजना का उद्घाटन होता ही रहता है। अभी हाल में ही देश के पीएम और वाराणसी के सांसद श्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में बहुत ही परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई है। हाल में ही सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा वाराणसी में सबसे बड़ी परियोजना को शुरू करने का निर्णय लिया है। काशी को ट्रांसपोर्ट हब बनाने के लिए काफी तेजी से काम किया जा रहा है, अब काशी में एक ही जगह से जल, थल और नभ की यात्री सुविधा मिलने जा रही है। इस इंटर मॉडल स्टेशन (Inter Model Station) वाली योजना को पूर्ण करने के लिए वाराणसी में 40 एकड़ की जमीन को चिन्हित किया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए डीपीआर भी तैयार कर ली गई है, इस इंटर मॉडल स्टेशन पर ट्रांसपोर्ट की सेवा के अलावा फाइव स्टार होटल के साथ अर्बन हाट और अन्य यात्री सुविधाएं भी मौजूद होंगी। वाराणसी का यह रेलवे स्टेशन इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद इंटर मॉडल स्टेशन काशी (Inter Model Station Kashi) कहा जाएगा, इस प्रोजेक्ट की अनुमानित कीमत लगभग 3 हजार करोड़ बताई जा रही है। इस योजना के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के द्वारा इस प्रोजेक्ट की एक बार फिर से नई डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की है। जानकारी के अनुसार इंटर मॉडल काशी स्टेशन को मौजूदा काशी स्टेशन और उसके आसपास की जगह पर बनाया जाएगा। इंटर मॉडल काशी स्टेशन को राष्ट्रीय राजमार्ग से प्रस्तावित सिग्नेचर ब्रिज और रिंग रोड़ से जोड़ने की बात चल रही है, इसके अलावा प्रोजेक्ट के अनुसार कैंट में बने हुए रोडवेज बस स्टेशन को भी यही शिफ्ट किया जाएगा। इसके अलावा काशी रेलवे स्टेशन पर भी मौजूदा प्लेटफॉर्म की संख्या भी बढ़ाने का प्रस्ताव है जिसके बाद इस स्टेशन पर ट्रेन की संख्या में भी बढोतरी होगी। नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के तकनीकी प्रबंधक ललित कुमार सिंह के अनुसार Inter model Station की पहली मंजिल पर इंट्रा सिटी बस टर्मिनल बनाया जाएगा। जिसके बाद शहर में चलने वाली बसों का यहां से परिचालन किया जाएगा, इसके अलावा यहां कैंट बस अड्डे को यहां पर ट्रांसफर करने के बाद शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात मिलेगा। बस टर्मिनल के अलावा यहां आठ मीटर की ऊंचाई पर काशी रेलवे स्टेशन का पुनर्निर्माण किया जाएगा और तीसरी मंजिल पर यानी 117 मीटर की ऊंचाई पर काशी बस अड्डे को शिफ्ट किया जाएगा जिसके बाद यहां से अंतरराज्यीय बसों का परिचालन शूरू किया जाएगा। इंटर मॉडल स्टेशन (Inter Model Station) काशी में प्रवेश हेतु इसे एलिवेटेड फ्लाईओवर से जोड़ा जाएगा और उसके बाद काशी रेलवे स्टेशन और काशी अंतरराज्यीय बस टर्मिनल के लिए भी अलग रास्ता बनाने का प्रस्ताव है। प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में बस अड्डे के तल पर ही फाइव स्टार और थ्री स्टार होटल बनाने का प्रस्ताव है जो गंगा फेसिंग होगा। खिड़किया घाट और उसके अलावा अन्य घाटों पर जाने के लिए इस मल्टीटर्मिनल से रास्ता निकलेगा। प्रोजेक्ट डायरेक्टर आर एस यादव के मुताबिक इंटर मॉडल स्टेशन (Inter Model Station) काशी को अंतरराष्ट्रीय सुविधा युक्त बनाया जाएगा जिसमें यात्रियों को वर्ल्ड क्लास सुविधाएं मुहैया करवाई जायेगी। यात्रियों के अलावा इस मॉडल स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेनों के लिए यार्ड भी बनाया जाएगा, यहां अपनी जीविका चलाने के लिए अर्बन हाट भी बनाई जाएगी जिसके बाद यहां वेंडर्स अपना सामान बेच सकेंगे।
Inter Model Station । भगवान विश्वनाथ की नगरी काशी में लगातार विकास कार्य चल रहे है और काफी तेजी से चल रहे है, वाराणसी में आए दिनों किसी ना किसी परियोजना का उद्घाटन होता ही रहता है। अभी हाल में ही देश के पीएम और वाराणसी के सांसद श्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में बहुत ही परियोजनाओं को हरी झंडी दिखाई है। हाल में ही सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा वाराणसी में सबसे बड़ी परियोजना को शुरू करने का निर्णय लिया है। काशी को ट्रांसपोर्ट हब बनाने के लिए काफी तेजी से काम किया जा रहा है, अब काशी में एक ही जगह से जल, थल और नभ की यात्री सुविधा मिलने जा रही है। इस इंटर मॉडल स्टेशन वाली योजना को पूर्ण करने के लिए वाराणसी में चालीस एकड़ की जमीन को चिन्हित किया गया है। इस प्रोजेक्ट के लिए डीपीआर भी तैयार कर ली गई है, इस इंटर मॉडल स्टेशन पर ट्रांसपोर्ट की सेवा के अलावा फाइव स्टार होटल के साथ अर्बन हाट और अन्य यात्री सुविधाएं भी मौजूद होंगी। वाराणसी का यह रेलवे स्टेशन इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद इंटर मॉडल स्टेशन काशी कहा जाएगा, इस प्रोजेक्ट की अनुमानित कीमत लगभग तीन हजार करोड़ बताई जा रही है। इस योजना के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के द्वारा इस प्रोजेक्ट की एक बार फिर से नई डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की है। जानकारी के अनुसार इंटर मॉडल काशी स्टेशन को मौजूदा काशी स्टेशन और उसके आसपास की जगह पर बनाया जाएगा। इंटर मॉडल काशी स्टेशन को राष्ट्रीय राजमार्ग से प्रस्तावित सिग्नेचर ब्रिज और रिंग रोड़ से जोड़ने की बात चल रही है, इसके अलावा प्रोजेक्ट के अनुसार कैंट में बने हुए रोडवेज बस स्टेशन को भी यही शिफ्ट किया जाएगा। इसके अलावा काशी रेलवे स्टेशन पर भी मौजूदा प्लेटफॉर्म की संख्या भी बढ़ाने का प्रस्ताव है जिसके बाद इस स्टेशन पर ट्रेन की संख्या में भी बढोतरी होगी। नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के तकनीकी प्रबंधक ललित कुमार सिंह के अनुसार Inter model Station की पहली मंजिल पर इंट्रा सिटी बस टर्मिनल बनाया जाएगा। जिसके बाद शहर में चलने वाली बसों का यहां से परिचालन किया जाएगा, इसके अलावा यहां कैंट बस अड्डे को यहां पर ट्रांसफर करने के बाद शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात मिलेगा। बस टर्मिनल के अलावा यहां आठ मीटर की ऊंचाई पर काशी रेलवे स्टेशन का पुनर्निर्माण किया जाएगा और तीसरी मंजिल पर यानी एक सौ सत्रह मीटर की ऊंचाई पर काशी बस अड्डे को शिफ्ट किया जाएगा जिसके बाद यहां से अंतरराज्यीय बसों का परिचालन शूरू किया जाएगा। इंटर मॉडल स्टेशन काशी में प्रवेश हेतु इसे एलिवेटेड फ्लाईओवर से जोड़ा जाएगा और उसके बाद काशी रेलवे स्टेशन और काशी अंतरराज्यीय बस टर्मिनल के लिए भी अलग रास्ता बनाने का प्रस्ताव है। प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में बस अड्डे के तल पर ही फाइव स्टार और थ्री स्टार होटल बनाने का प्रस्ताव है जो गंगा फेसिंग होगा। खिड़किया घाट और उसके अलावा अन्य घाटों पर जाने के लिए इस मल्टीटर्मिनल से रास्ता निकलेगा। प्रोजेक्ट डायरेक्टर आर एस यादव के मुताबिक इंटर मॉडल स्टेशन काशी को अंतरराष्ट्रीय सुविधा युक्त बनाया जाएगा जिसमें यात्रियों को वर्ल्ड क्लास सुविधाएं मुहैया करवाई जायेगी। यात्रियों के अलावा इस मॉडल स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेनों के लिए यार्ड भी बनाया जाएगा, यहां अपनी जीविका चलाने के लिए अर्बन हाट भी बनाई जाएगी जिसके बाद यहां वेंडर्स अपना सामान बेच सकेंगे।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
यहाँ तक कि असतकी दुर्गम उत्तुंगता तक भी चले जांय, किन्तु तो भी यह अभियान व्यर्थ हो जायगा यदि हम अपने आधारको भूल जांब । निम्नतरको अपने आपके भरोसे छोड देना नहीं, परन् हम जिस उच्चतर लोक तक पहुंच गये हैं, उसकी ज्योति के द्वारा उसे रूपान्तरित करना, यही है दिव्य प्रकृतिका स्वधर्म । ब्रह्म है अखंड समग्रता से पूर्णस्वरूप उनमें है बहु विचित्र चेतनाका युगपत् समन्वय, अतएव ब्राह्मी प्रकृतिको अभिव्यक्त करने में हमें भी अखड सम्यक, सर्वाधार एवं सर्वावगाही होना होगा । " वैदिक धर्मः अप्रैल १९५२ इन प्रेरणा देनेवाले शब्दों में श्री भरविन्द अपना संदेश देते हैं, जीवनमें पूर्ण ब्रह्मकी पूर्ण सिद्धिका और रूपान्तरित मानव प्रकृति में उनकी विशुद्ध अभिव्यक्तिका । यह संदेश हमें तुरन्त ही वेदों तथा उपनिषदोंको गौरवमयी संस्कृति की व्यापक दृष्टि तथा शक्तिशालिनी प्राणशक्तिकी ओर के जाता है और भारतके ही नहीं वरन् सारे संसारके भविष्य के किये असीम आशा से प्रज्वलित कर देता है, क्योंकि भारतका अतीत मिश्र, यूनान या रोमके अतीतकी भांति मृत नहीं हुआ है। धडकते हुए वर्त्तमान में वह अत्यन्त सजीवन तथा क्रियाशील है और महत्तर भविष्य के निर्माण के लिये अपना योगदान दे रहा । इस पाश्चात्य विचारका खंडन करते हुए कि भारतको आध्यात्मिकता दुर्बल, रक्तद्दीन, अव्यावहारिक और पारलौ किक रही है, और विचार तथा जीवनके क्षेत्र में भारतकी संस्कृति कोई बडा कार्य नहीं कर सकी है, श्री अरविन्द लिखते हैं; " जब हम भारतके अतीतकी मोर दृष्टि देते हैं तब जो चीज हमारा ध्यान आकर्षित करती है... वह है उसकी विपुल प्राणशक्ति, जीवनकी और जीवन के आनन्दकी उसकी अशेष शक्ति, उसकी प्रायः अकल्पनीय जैसी बहुप्रसूत्रती सृजनकारिता । तीन हजार वर्षों से - वास्तव में इससे बहुत अधिक समय से भारत प्रचुर और अनवरत रूपसे, बहुलतासे एक अशेष बहुमुखीनता के साथ रचना करता रहा है प्रजातंत्रों, राज्यों और साम्राज्योंकी, दर्शन शाख, जगतकी उत्पत्ति के सिद्धांत, विज्ञानों, मत कलाओं और काव्योंकी, सब प्रकारके स्मृतियों, महलों, मंदिरों और सार्वजनीन उपयोगी इमारतोंकी, सम्प्रदाय, समाजों और धार्मिक आश्रमकी, नियमों, विधानों और अनुष्ठानों की भौतिक विज्ञान और आध्यात्मिक विज्ञानकी, योगकी और राजनीति और शासनकी प्रणालियोंकी बाध्यात्मिक फलामांकी और सांसारिक कलाओंकी, व्यापारों व्यवसायें और सूक्ष्म कारीगिरीकी, सूचीका अन्त नहीं, और प्रत्येक क्षेत्र में क्रियाशीलता की अतिरिक्तता जैसी चीज है। भारत रचना करता है और करता जाता है और थकता नहीं, उसके लिये इसका अन्त नहीं माता... वह अपनी भौगोलिक सीमाओं को पार करता हुआ अपना विस्तार करता है, उसके जद्दाज सागरको पार करते हैं और उसके वैभवकीधारा जूडिया मिश्र और शेमतक फैल जाती है। उसके उप निवेश उसकी कलाओंका, उसके काव्यों सिद्धांतों का प्रसार आर्चिपेलागो ( यूनान और एशिया माइनरके बीचका प्रदेश ) में करते हैं, उसके चिन्ह मेसोपोटामियाको बालुओं में पाये जाते हैं, उसके धर्म चीन और जापानको जीतते हैं और पश्चिममें फिलिस्तीन और अलेक्जेंड्रियाकी जितनी दूरी तक प्रसारित होते हैं, और उपनिषदोंके शब्द और बौद्धों वाक्य ईसामसीह की जिह्वा पर प्रतिध्वनित हो उठते हैं। हर जगह, जैसे उसकी भूमिमें, वैसे ही उसके कार्यों में, जीवनकी असिबहुल शक्तिकी अतिप्रचुरता है।" (भारतका नवजन्म) तो, ऐसा था अतीतका भारत, आत्माके वैभवमें महान् और विचार तथा कर्मके क्षेत्रों में भी उतना ही महान्, समृद्ध तथा शक्तिमान् तथा सृजनकारी। फिर जिस अव नतिका आरंभ हुआ, उसका कारण यदि एकमात्र नहीं, क्योंकि अन्य कारण भी थे, तो भी प्रधानत बौद्ध शून्यवाद और शकरके मायावादका विनाशकारी प्रभाव था । मायाने राष्ट्रको जीवन के उत्साह से विहीन कर दिया, रचनाका सत्साह और मानन्द बुझा दिया, और स्वयं उस प्राणशक्तिको सुखा डाला जिसने कि अतीत में उसे इतना महान् बनाया था। इसके अंतिम पतनका मार्ग इसने प्रशस्त कर दिया । भारतकी फिरसे उठती हुई श्राध्यात्मिकता समस्त सप्ताकी एकता और सृष्टिके अन्दर भगवानकी इच्छा देखनेवाली पुरातन दृष्टिको फिरसे पानेकी राहपुर अच्छी प्रगति कर चुकी है। मनुष्यको दिव्य बनाने और भौतिक जगत के अन्दर भगवानकी अभिव्यक्ति होनेके श्रीबरविन्दके संदेशने सदाके लिये माया के कुइरेको छितरा दिया है । जीवनको उसके सारे मूल्यों और क्रियाओं के साथ फिरसे अपनाया जा रहा है और सर्वागीण रूपसे अववरित होती हुई ज्योतिकी और उसका मोढा जा रहा है। आज जातिकी सुप्त, विधीत प्राणशक्तिको जगानेके लिये और पृथ्वी पर " देव जाति " के पुरातन वैदिक द्रष्टाओंका स्वप्न पूरा करने के लिये एक तेजस्विनी सर्व आलिंगनकारिणी, सर्व-रूपान्तरकारिणी आध्यात्मिकता उठ रही है।
यहाँ तक कि असतकी दुर्गम उत्तुंगता तक भी चले जांय, किन्तु तो भी यह अभियान व्यर्थ हो जायगा यदि हम अपने आधारको भूल जांब । निम्नतरको अपने आपके भरोसे छोड देना नहीं, परन् हम जिस उच्चतर लोक तक पहुंच गये हैं, उसकी ज्योति के द्वारा उसे रूपान्तरित करना, यही है दिव्य प्रकृतिका स्वधर्म । ब्रह्म है अखंड समग्रता से पूर्णस्वरूप उनमें है बहु विचित्र चेतनाका युगपत् समन्वय, अतएव ब्राह्मी प्रकृतिको अभिव्यक्त करने में हमें भी अखड सम्यक, सर्वाधार एवं सर्वावगाही होना होगा । " वैदिक धर्मः अप्रैल एक हज़ार नौ सौ बावन इन प्रेरणा देनेवाले शब्दों में श्री भरविन्द अपना संदेश देते हैं, जीवनमें पूर्ण ब्रह्मकी पूर्ण सिद्धिका और रूपान्तरित मानव प्रकृति में उनकी विशुद्ध अभिव्यक्तिका । यह संदेश हमें तुरन्त ही वेदों तथा उपनिषदोंको गौरवमयी संस्कृति की व्यापक दृष्टि तथा शक्तिशालिनी प्राणशक्तिकी ओर के जाता है और भारतके ही नहीं वरन् सारे संसारके भविष्य के किये असीम आशा से प्रज्वलित कर देता है, क्योंकि भारतका अतीत मिश्र, यूनान या रोमके अतीतकी भांति मृत नहीं हुआ है। धडकते हुए वर्त्तमान में वह अत्यन्त सजीवन तथा क्रियाशील है और महत्तर भविष्य के निर्माण के लिये अपना योगदान दे रहा । इस पाश्चात्य विचारका खंडन करते हुए कि भारतको आध्यात्मिकता दुर्बल, रक्तद्दीन, अव्यावहारिक और पारलौ किक रही है, और विचार तथा जीवनके क्षेत्र में भारतकी संस्कृति कोई बडा कार्य नहीं कर सकी है, श्री अरविन्द लिखते हैं; " जब हम भारतके अतीतकी मोर दृष्टि देते हैं तब जो चीज हमारा ध्यान आकर्षित करती है... वह है उसकी विपुल प्राणशक्ति, जीवनकी और जीवन के आनन्दकी उसकी अशेष शक्ति, उसकी प्रायः अकल्पनीय जैसी बहुप्रसूत्रती सृजनकारिता । तीन हजार वर्षों से - वास्तव में इससे बहुत अधिक समय से भारत प्रचुर और अनवरत रूपसे, बहुलतासे एक अशेष बहुमुखीनता के साथ रचना करता रहा है प्रजातंत्रों, राज्यों और साम्राज्योंकी, दर्शन शाख, जगतकी उत्पत्ति के सिद्धांत, विज्ञानों, मत कलाओं और काव्योंकी, सब प्रकारके स्मृतियों, महलों, मंदिरों और सार्वजनीन उपयोगी इमारतोंकी, सम्प्रदाय, समाजों और धार्मिक आश्रमकी, नियमों, विधानों और अनुष्ठानों की भौतिक विज्ञान और आध्यात्मिक विज्ञानकी, योगकी और राजनीति और शासनकी प्रणालियोंकी बाध्यात्मिक फलामांकी और सांसारिक कलाओंकी, व्यापारों व्यवसायें और सूक्ष्म कारीगिरीकी, सूचीका अन्त नहीं, और प्रत्येक क्षेत्र में क्रियाशीलता की अतिरिक्तता जैसी चीज है। भारत रचना करता है और करता जाता है और थकता नहीं, उसके लिये इसका अन्त नहीं माता... वह अपनी भौगोलिक सीमाओं को पार करता हुआ अपना विस्तार करता है, उसके जद्दाज सागरको पार करते हैं और उसके वैभवकीधारा जूडिया मिश्र और शेमतक फैल जाती है। उसके उप निवेश उसकी कलाओंका, उसके काव्यों सिद्धांतों का प्रसार आर्चिपेलागो में करते हैं, उसके चिन्ह मेसोपोटामियाको बालुओं में पाये जाते हैं, उसके धर्म चीन और जापानको जीतते हैं और पश्चिममें फिलिस्तीन और अलेक्जेंड्रियाकी जितनी दूरी तक प्रसारित होते हैं, और उपनिषदोंके शब्द और बौद्धों वाक्य ईसामसीह की जिह्वा पर प्रतिध्वनित हो उठते हैं। हर जगह, जैसे उसकी भूमिमें, वैसे ही उसके कार्यों में, जीवनकी असिबहुल शक्तिकी अतिप्रचुरता है।" तो, ऐसा था अतीतका भारत, आत्माके वैभवमें महान् और विचार तथा कर्मके क्षेत्रों में भी उतना ही महान्, समृद्ध तथा शक्तिमान् तथा सृजनकारी। फिर जिस अव नतिका आरंभ हुआ, उसका कारण यदि एकमात्र नहीं, क्योंकि अन्य कारण भी थे, तो भी प्रधानत बौद्ध शून्यवाद और शकरके मायावादका विनाशकारी प्रभाव था । मायाने राष्ट्रको जीवन के उत्साह से विहीन कर दिया, रचनाका सत्साह और मानन्द बुझा दिया, और स्वयं उस प्राणशक्तिको सुखा डाला जिसने कि अतीत में उसे इतना महान् बनाया था। इसके अंतिम पतनका मार्ग इसने प्रशस्त कर दिया । भारतकी फिरसे उठती हुई श्राध्यात्मिकता समस्त सप्ताकी एकता और सृष्टिके अन्दर भगवानकी इच्छा देखनेवाली पुरातन दृष्टिको फिरसे पानेकी राहपुर अच्छी प्रगति कर चुकी है। मनुष्यको दिव्य बनाने और भौतिक जगत के अन्दर भगवानकी अभिव्यक्ति होनेके श्रीबरविन्दके संदेशने सदाके लिये माया के कुइरेको छितरा दिया है । जीवनको उसके सारे मूल्यों और क्रियाओं के साथ फिरसे अपनाया जा रहा है और सर्वागीण रूपसे अववरित होती हुई ज्योतिकी और उसका मोढा जा रहा है। आज जातिकी सुप्त, विधीत प्राणशक्तिको जगानेके लिये और पृथ्वी पर " देव जाति " के पुरातन वैदिक द्रष्टाओंका स्वप्न पूरा करने के लिये एक तेजस्विनी सर्व आलिंगनकारिणी, सर्व-रूपान्तरकारिणी आध्यात्मिकता उठ रही है।
शिमला (निस) : शिमला जिला के ऊपरी क्षेत्र झाकड़ी पुलिस थाना के पास दसो पुल नामक स्थान पर आज राज्य पथ परिवहन निगम की एक बस 100 मीटर गहरी खाई में गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। दुर्घटनाग्रस्त बस मंडी से रिकांगपिओ जा रही थी। गनीमत रही कि इस दुर्घटना में बड़ा जानी नुकसान नहीं हुआ और चार लोग ही घायल हुए। बस में कुल 30 लोग सवार थे। सभी घायलों को उपचार के लिए रामपुर के खनेरी स्थित सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। सभी घायलों की हालत खतरे से बाहर है। दुर्घटना की सूचना मिलते ही झाकड़ी पुलिस और रामपुर से राज्यपथ परिवहन निगम के कर्मचारी व अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा राहत व बचाव कार्य किए और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है। 'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
शिमला : शिमला जिला के ऊपरी क्षेत्र झाकड़ी पुलिस थाना के पास दसो पुल नामक स्थान पर आज राज्य पथ परिवहन निगम की एक बस एक सौ मीटर गहरी खाई में गिरकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। दुर्घटनाग्रस्त बस मंडी से रिकांगपिओ जा रही थी। गनीमत रही कि इस दुर्घटना में बड़ा जानी नुकसान नहीं हुआ और चार लोग ही घायल हुए। बस में कुल तीस लोग सवार थे। सभी घायलों को उपचार के लिए रामपुर के खनेरी स्थित सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। सभी घायलों की हालत खतरे से बाहर है। दुर्घटना की सूचना मिलते ही झाकड़ी पुलिस और रामपुर से राज्यपथ परिवहन निगम के कर्मचारी व अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा राहत व बचाव कार्य किए और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने दो फरवरी, एक हज़ार आठ सौ इक्यासी को लाहौर से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है। 'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में पंद्रह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास , न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
छत्तीसगढ़ में बिजली और महंगी होने वाली है । दरअसल, राज्यपाल अनुसुईया उइके ने छत्तीसगढ़ विद्युत शुल्क (संशोधन) विधेयक, 2022 पर हस्ताक्षर कर दिए है। संशोधन में विभिन्न उपभोक्ता श्रेणियों के लिए वर्तमान में प्रभावशील ऊर्जा प्रभार के शुल्क की दरों में प्रतिशत में वृद्धि की गई है। विधेयक के भाग क (धारा 3(1) (अ) ) में उल्लेखित सरल क्र. 1 व 2 में क्रमशः घरेलू उ उपभोक्ताओं के लिए वर्तमान ऊर्जा प्रभारोें के प्रतिशत में प्रभावशील शुल्क की दर 8 प्रतिशत में 3 प्रतिशत वृद्धि उपरांत 11 प्रतिशत तथा गैर घरेलू उपभोक्ता के लिए वर्तमान प्रभावशील दर 12 प्रतिशत में 5 प्रतिशत वृद्धि उपरांत 17 प्रतिशत शुल्क निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार भाग क (धारा 3(1) (अ) ) में सरल क्र. 3 से 13 के विभिन्न उपभोक्ता श्रेणी तथा औद्योगिक इकाईयों, लघु व मध्यम उद्योगों आदि के लिए शुल्क वृद्धि की गयी है। सरल क्र. 14 व 15 के लिये अनुसूची की उच्चतम दर निर्धारित की गई है। इसी प्रकार भाग ख के (धारा 3 (1) (ब) में सरल क्र. 16 के उपभोक्ता अर्थात् राज्य के बाहर खुली पहंुच के माध्यम सेे अभिप्राप्त विद्युत उपभोग के लिए शुल्क की दरों मे कोई परिवर्तन नही किया गया है। विधेयक के भाग-ग (धारा 3 (1) (स) ) के सरल क्र. 17, 19, 20, 21, 22 और 24 में उल्लेखित उत्पादन कम्पनियों, राज्य के निजी व सार्वजनिक कम्पनियां आदि इकाईयों के लिए ऊर्जा प्रभारों के प्रतिशत में शुल्क की दरे बढ़ाई गयी है तथा सरल क्र. 18 में उल्लेखित उत्पादन इकाईयों के लिए शुल्क यथावत रखा गया है।
छत्तीसगढ़ में बिजली और महंगी होने वाली है । दरअसल, राज्यपाल अनुसुईया उइके ने छत्तीसगढ़ विद्युत शुल्क विधेयक, दो हज़ार बाईस पर हस्ताक्षर कर दिए है। संशोधन में विभिन्न उपभोक्ता श्रेणियों के लिए वर्तमान में प्रभावशील ऊर्जा प्रभार के शुल्क की दरों में प्रतिशत में वृद्धि की गई है। विधेयक के भाग क ) में उल्लेखित सरल क्र. एक व दो में क्रमशः घरेलू उ उपभोक्ताओं के लिए वर्तमान ऊर्जा प्रभारोें के प्रतिशत में प्रभावशील शुल्क की दर आठ प्रतिशत में तीन प्रतिशत वृद्धि उपरांत ग्यारह प्रतिशत तथा गैर घरेलू उपभोक्ता के लिए वर्तमान प्रभावशील दर बारह प्रतिशत में पाँच प्रतिशत वृद्धि उपरांत सत्रह प्रतिशत शुल्क निर्धारित किया गया है। इसी प्रकार भाग क ) में सरल क्र. तीन से तेरह के विभिन्न उपभोक्ता श्रेणी तथा औद्योगिक इकाईयों, लघु व मध्यम उद्योगों आदि के लिए शुल्क वृद्धि की गयी है। सरल क्र. चौदह व पंद्रह के लिये अनुसूची की उच्चतम दर निर्धारित की गई है। इसी प्रकार भाग ख के में सरल क्र. सोलह के उपभोक्ता अर्थात् राज्य के बाहर खुली पहंुच के माध्यम सेे अभिप्राप्त विद्युत उपभोग के लिए शुल्क की दरों मे कोई परिवर्तन नही किया गया है। विधेयक के भाग-ग ) के सरल क्र. सत्रह, उन्नीस, बीस, इक्कीस, बाईस और चौबीस में उल्लेखित उत्पादन कम्पनियों, राज्य के निजी व सार्वजनिक कम्पनियां आदि इकाईयों के लिए ऊर्जा प्रभारों के प्रतिशत में शुल्क की दरे बढ़ाई गयी है तथा सरल क्र. अट्ठारह में उल्लेखित उत्पादन इकाईयों के लिए शुल्क यथावत रखा गया है।
राहुल गांधी भारत में पाकिस्तान और कम्युनिस्ट चीन के एजेंडा को आगे बढ़ा रहे हैं? गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार केंद्रीय सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं और सरकार से कई सारे सवाल पूछ रहे हैं। राहुल गांधी ने तो मोदी पर ये आरोप भी लगाया है कि उन्होंने चीन के सामाने खुद को Surrender कर दिया है। राहुल गांधी ने एक ट्वीट कर लिखा था कि नरेंद्र मोदी वास्तव में 'सरेंडर मोदी' हैं। इसके अलावा राहुल बार-बार चीन मुद्दे पर सरकार से कई सारे सवाल भी पूछ रहे हैं। राहुल गांधी की और से लगातार आ रहे इन्हीं बयानों को लेकर अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इनपर पलटवार किया है और कहा है कि पार्लियामेंट होनी है। चर्चा करनी है तो आएं, करेंगे, 1962 से आजतक दो-दो हाथ हो जाए। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी इस समय एक छिछली सोच वाली राजनीति में शामिल हैं। चीन के मुद्दे पर बहस के लिए तैयार हैं। मै साफ कर दूं कि पीएम मोदी की अगुवाई में भारत दोनों (कोरोना और चीन) ही लड़ाई जीतने जा रहा है। #WATCH "Parliament honi hai, charcha karni hai to aaiye, karenge. 1962 se aaj tak do-do haath ho jayein...," HM Amit Shah on Rahul Gandhi's "Surender Modi" tweet . समाचार एजेंसी एएनआई को दिए गए एक इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा कि चर्चा से कोई नहीं डरता है। मगर जब देश के जवान संघर्ष कर रहे हों। तो सरकार स्टैंड लेकर ठीक कदम उठा रही है। उस वक्त पाकिस्तान और चीन को खुश करने वाले इस प्रकार के बयान ठीक नहीं है। अमित शाह ने अपने बयान में आगे कहा कि मैं राहुल गांधी को सलाह नहीं दे सकता। ये उनकी पार्टी के नेताओं का काम है। कुछ लोग 'वक्रद्रष्टा' हैं। वे सही चीजों में भी गलत देखते हैं। दिल्ली में कोरोना के हालातों पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि दिल्ली में 5. 5 लाख कोरोना केस वाली स्थित जुलाई महीने में नहीं होगी। मैं ये कह सकता हूं कि दिल्ली के डिप्टी सीएम का जो 5. 5 लाख कोरोना केस वाला बयान था। वो स्थिति अब दिल्ली में नहीं आएगी। दिल्ली में 30 जून तक कंटेनमेंट जोन के हर घर का सर्वेक्षण हो जाएगा। हमने टेस्टिंग भी बढ़ा दी है। उसके बाद दिल्ली के घर-घर का सर्वेक्षण किया जाएगा। दिल्ली में रोजाना हजारों की संख्या में कोरोना के केस आ रहे हैं और ये माना जा रहा है कि दिल्ली में कम्युनिटी ट्रांसमिशन शुरू हो गया है। हालांकि अमित शाह ने इस बात से इंकार किया है। अमित शाह के अनुसार दिल्ली में कम्युनिटी ट्रांसमिशन शुरू नहीं हुआ है और किसी भी तरह की चिंता की जरूरत नहीं है। अमित शाह ने दिल्ली कि स्थिति पर बात करते हुए बताया कि दिल्ली में बेड की संख्या अब बढ़ा दी गई है। साथ में ही पहले जहां आइसोलेशन बेड की कीमत 24-25 हजार थी उसे कम कर दिया गया है और अब आइसोलेशन बेड की कीमत 8-10 हजार हो गई है। जबकि बिना वेंटिलेटर के ICU बेड का रेट अब 13-15 हजार किया गया है, जो कि पहले 34-43 हजार रेट का था। इसी तरह से वेंटिलेटर के साथ ICU बेड का रेट 44-54 हजार की जगह अब 15-18 हजार किया गया है। इसमें रहने, टेस्ट और दवाइयों का खर्चा शामिल है। गृह मंत्री ने कोरोना मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि भारत सरकार ने कोरोना के खिलाफ अच्छी लड़ाई लड़ी है। भारत ने कोरोना के खिलाफ अच्छा संघर्ष किया और हमारे आंकड़े दुनिया की तुलना में बहुत बेहतर हैं।
राहुल गांधी भारत में पाकिस्तान और कम्युनिस्ट चीन के एजेंडा को आगे बढ़ा रहे हैं? गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार केंद्रीय सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं और सरकार से कई सारे सवाल पूछ रहे हैं। राहुल गांधी ने तो मोदी पर ये आरोप भी लगाया है कि उन्होंने चीन के सामाने खुद को Surrender कर दिया है। राहुल गांधी ने एक ट्वीट कर लिखा था कि नरेंद्र मोदी वास्तव में 'सरेंडर मोदी' हैं। इसके अलावा राहुल बार-बार चीन मुद्दे पर सरकार से कई सारे सवाल भी पूछ रहे हैं। राहुल गांधी की और से लगातार आ रहे इन्हीं बयानों को लेकर अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इनपर पलटवार किया है और कहा है कि पार्लियामेंट होनी है। चर्चा करनी है तो आएं, करेंगे, एक हज़ार नौ सौ बासठ से आजतक दो-दो हाथ हो जाए। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी इस समय एक छिछली सोच वाली राजनीति में शामिल हैं। चीन के मुद्दे पर बहस के लिए तैयार हैं। मै साफ कर दूं कि पीएम मोदी की अगुवाई में भारत दोनों ही लड़ाई जीतने जा रहा है। #WATCH "Parliament honi hai, charcha karni hai to aaiye, karenge. एक हज़ार नौ सौ बासठ se aaj tak do-do haath ho jayein...," HM Amit Shah on Rahul Gandhi's "Surender Modi" tweet . समाचार एजेंसी एएनआई को दिए गए एक इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा कि चर्चा से कोई नहीं डरता है। मगर जब देश के जवान संघर्ष कर रहे हों। तो सरकार स्टैंड लेकर ठीक कदम उठा रही है। उस वक्त पाकिस्तान और चीन को खुश करने वाले इस प्रकार के बयान ठीक नहीं है। अमित शाह ने अपने बयान में आगे कहा कि मैं राहुल गांधी को सलाह नहीं दे सकता। ये उनकी पार्टी के नेताओं का काम है। कुछ लोग 'वक्रद्रष्टा' हैं। वे सही चीजों में भी गलत देखते हैं। दिल्ली में कोरोना के हालातों पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि दिल्ली में पाँच. पाँच लाख कोरोना केस वाली स्थित जुलाई महीने में नहीं होगी। मैं ये कह सकता हूं कि दिल्ली के डिप्टी सीएम का जो पाँच. पाँच लाख कोरोना केस वाला बयान था। वो स्थिति अब दिल्ली में नहीं आएगी। दिल्ली में तीस जून तक कंटेनमेंट जोन के हर घर का सर्वेक्षण हो जाएगा। हमने टेस्टिंग भी बढ़ा दी है। उसके बाद दिल्ली के घर-घर का सर्वेक्षण किया जाएगा। दिल्ली में रोजाना हजारों की संख्या में कोरोना के केस आ रहे हैं और ये माना जा रहा है कि दिल्ली में कम्युनिटी ट्रांसमिशन शुरू हो गया है। हालांकि अमित शाह ने इस बात से इंकार किया है। अमित शाह के अनुसार दिल्ली में कम्युनिटी ट्रांसमिशन शुरू नहीं हुआ है और किसी भी तरह की चिंता की जरूरत नहीं है। अमित शाह ने दिल्ली कि स्थिति पर बात करते हुए बताया कि दिल्ली में बेड की संख्या अब बढ़ा दी गई है। साथ में ही पहले जहां आइसोलेशन बेड की कीमत चौबीस-पच्चीस हजार थी उसे कम कर दिया गया है और अब आइसोलेशन बेड की कीमत आठ-दस हजार हो गई है। जबकि बिना वेंटिलेटर के ICU बेड का रेट अब तेरह-पंद्रह हजार किया गया है, जो कि पहले चौंतीस-तैंतालीस हजार रेट का था। इसी तरह से वेंटिलेटर के साथ ICU बेड का रेट चौंतालीस-चौवन हजार की जगह अब पंद्रह-अट्ठारह हजार किया गया है। इसमें रहने, टेस्ट और दवाइयों का खर्चा शामिल है। गृह मंत्री ने कोरोना मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि भारत सरकार ने कोरोना के खिलाफ अच्छी लड़ाई लड़ी है। भारत ने कोरोना के खिलाफ अच्छा संघर्ष किया और हमारे आंकड़े दुनिया की तुलना में बहुत बेहतर हैं।
ALLAHABAD: सदाफलदेव आश्रम में बुधवार को कथामृत के प्रवर्तक संत प्रवर श्री विज्ञानदेवजी महाराज के जन्मोत्सव पर शिष्यों ने दो सौ यूनिट रक्तदान किया। रक्तदान शिविर इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन की ओर से लगाया गया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप्र कैबिनेट मंत्री अंबिका चौधरी रहे। इसके पहले आश्रम में सुबह स्वर्वेद महाग्रंथ का अखंड पाठ हुआ और इसके बाद पौधरोपण किया गया। कैबिनेट मंत्री ने इस दौरान आश्रम का मुआयना किया। उन्होंने रक्तदान शिविर का शुभारंभ फीता काटकर किया। उन्होंने संत प्रवर के जन्मोत्सव पर शुभकामनाएं देते हुए श्रद्धा प्रकट की। संत प्रवर ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर विहंगम योग के स्वयंसेवक रक्तदान कर लोगों की जान बचाते रहे हैं। देश विदेश में पचास से अधिक केंद्रों द्वारा तीन से चार हजार यूनिट रक्तदान किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान संगीतमय स्वर्वेद दोहों के साथ अदभुत आध्यात्मिक माहौल बना रहा। समारोह में 11 निशक्तजनों को आश्रम द्वारा उत्तम श्रेणी के ट्राइसाइकिल प्रदान किए गए। साथ ही जरूरतमंदों को कंबल, वस्त्र आदि बांटे गए। आयोजित भंडारे में लगभग एक हजार लोगों ने भाग लिया। आश्रम में 120 गाय हैं और सदगुरु सदाफलदेव विहंगम योग संस्थान संयुक्त राष्ट्र से मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी सामाजिक गतिविधियां पूरे विश्व में संचालित हैं।
ALLAHABAD: सदाफलदेव आश्रम में बुधवार को कथामृत के प्रवर्तक संत प्रवर श्री विज्ञानदेवजी महाराज के जन्मोत्सव पर शिष्यों ने दो सौ यूनिट रक्तदान किया। रक्तदान शिविर इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन की ओर से लगाया गया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप्र कैबिनेट मंत्री अंबिका चौधरी रहे। इसके पहले आश्रम में सुबह स्वर्वेद महाग्रंथ का अखंड पाठ हुआ और इसके बाद पौधरोपण किया गया। कैबिनेट मंत्री ने इस दौरान आश्रम का मुआयना किया। उन्होंने रक्तदान शिविर का शुभारंभ फीता काटकर किया। उन्होंने संत प्रवर के जन्मोत्सव पर शुभकामनाएं देते हुए श्रद्धा प्रकट की। संत प्रवर ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर विहंगम योग के स्वयंसेवक रक्तदान कर लोगों की जान बचाते रहे हैं। देश विदेश में पचास से अधिक केंद्रों द्वारा तीन से चार हजार यूनिट रक्तदान किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान संगीतमय स्वर्वेद दोहों के साथ अदभुत आध्यात्मिक माहौल बना रहा। समारोह में ग्यारह निशक्तजनों को आश्रम द्वारा उत्तम श्रेणी के ट्राइसाइकिल प्रदान किए गए। साथ ही जरूरतमंदों को कंबल, वस्त्र आदि बांटे गए। आयोजित भंडारे में लगभग एक हजार लोगों ने भाग लिया। आश्रम में एक सौ बीस गाय हैं और सदगुरु सदाफलदेव विहंगम योग संस्थान संयुक्त राष्ट्र से मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसकी सामाजिक गतिविधियां पूरे विश्व में संचालित हैं।
प्रज्ञानवादी*। वे ऐसे कहते हैं, कि ज्ञान अच्छी वस्तु नहीं है । क्योंकि शान जब होवेगा, तब परस्पर विवाद होगा; जब विवाद होगा तब चित्त मलिन होगा; जब चित्त मलिन होगा, तब संसार की वृद्धि होगी। जैसे किसी पुरुष ने कोई वस्तु (बात) उलटी कही, तब निस को सुन कर जो ज्ञानी अपने ज्ञान के अभिमान मे उस पुरुष के ऊपर बहुत मलिन चित्त करके ( क्रुद्ध हो कर ) उसके साथ विवाद करने लगा, विवाद करते हुए वित्त अत्यन्त मलिन हुआ भर अहंकार बढ़ा, उस अहंकार और चित्त की मलिनता मे महा पाप कर्म उत्पन्न हुआ, तिस पाप मे दीर्घतर संसार की वृद्धि हुई। इस वास्ते ज्ञान अच्छी वस्तु नहीं है। अरु जब अपने को अज्ञानी मानिये, तब तो अहंकार का संभव नहीं होता है, अरु दूसरों के ऊपर चित्त का मलिनपन भी नहीं होता है । तिस वास्ते कर्म का बन्ध भी नहीं होता है। तथा जो कार्य विचार कर किया जाता है, तिस में महा कर्म का बन्ध होता है, और उस का फल भी महा भयानक होता है। इस वास्ते उस का फल अवश्यमेव भोगने में आता है । परन्तु जो काम मनोव्यापार के बिना किया जाता है, जिस का फल भयानक नहीं होता, अरु प्रवश्यमेव भोगने में भी नहीं माता है । जो उस काम में किंचित् कर्म बन्ध होता है, सो w Arvvs * कुत्सितं ज्ञानमज्ञानं तदेषामस्तीत्यज्ञानिकाः, अथवाऽज्ञानेन चरन्तोन्यज्ञानिकाः । [ षड० म० श्लो० १ की बृहद्वृत्ति ] भी चूने की भीत के ऊपर बालु रेत की मुष्टि के सम्बन्धवत् स्पर्शमात्र है; परन्तु बन्ध नहीं होता है। इस वास्ते प्रशान ही मोक्षगामी पुरुषों को अंगीकार करना श्रेय है; परन्तु ज्ञान अंगीकार करना श्रेय नहीं है। प्रज्ञानवादी कहते हैं, कि जेकर ज्ञानका निश्चय करने में सामर्थ्य होवे, तो हम ज्ञान को मान भी लेवें । प्रथम तो ज्ञान सिद्ध ही नहीं हो सकता है, क्योंकि जितने मतावलंबी पुरुष हैं, सो सर्व परस्पर भिन्न ही ज्ञान अंगीकार करते हैं, इस वास्ते क्यों कर यह निश्चय हो सके, कि इस मत का ज्ञान सम्यग है, अरु इस मत का ज्ञान सम्यग नहीं है। जेकर कहोगे कि सकल वस्तु के समूह को साक्षात् करने वाले ज्ञान से युक्त जो भगवान् है, तिल के उपदेश से जो ज्ञान होवे सो सम्यग् ज्ञान है । अरु जो इस के बिना दूसरे मत हैं, उस का ज्ञान सम्यग् नहीं है। क्योंकि उन के मत में जो ज्ञान है, सो सर्वज्ञ का कथन किया हुआ नहीं है । प्रज्ञानवादी कहते हैं कि यह तुमारा कहना तो सत्य है, किंतु सफल वस्तु के समूह का साक्षात् करने वाला ज्ञानी, क्या सुगंत, विष्णु, ब्रह्मादिक को हम मानें ? किंवा भगवान् महावीर स्वामी को ? फिर भी वोही संशय रहा, निश्चय न हुआ, कि कौन सर्वश है ? जेकर कहोगे कि जिस भगवान् के पादारविंद युगल को इन्द्रादि सर्व देवता, परस्पर महं पूर्वक (मैं पहिले कि मैं पहिले ) विशिष्ट विशिष्टतर विभूति श्रुति करके संयुक्त सैंकड़ों विमानों में बैठ करके, सफल आकाश मंडल को आच्छादित करते हुए पृथिवी में उतर करके पूजते भये, सो भगवान् वर्द्धमान स्वामी सर्वज्ञ है। परन्तु सुगत, शंकर, विष्णु, ब्रह्मादिक नहीं; क्योंकि सुगतादिक सर्व अल्प बुद्धि वाले मनुष्य हुये हैं, इस वास्ते वो देव नहीं हैं। जेकर सुगतादिक भी सर्वश होते, तो तिन की भी इन्द्रादि देवता पूजा करते। परन्तु किसी भी देवता ने पूजा नहीं करी । इस वास्ते सुगतादिक सर्वज्ञ नहीं हुये हैं। हे जैन ! यह जो तुमने बात कही है, सो अपने मत के राग के कारण कही है। परन्तु इस बात से इष्टसिद्धि नहीं होती है । क्योंकि वर्द्धमान स्वामी की इन्द्रादि देवता, देवलोक से आकर के पूजा करते थे, यह तुमारा कहना हम क्योंकर सच्चा मान लेवे ? भगवान् श्री महावीर को तो हुये बहुत काल होगया है, थरु उन के सर्वश होने में कोई भी साधक प्रमाण नहीं है ? जेकर कहोगे कि संप्रदाय से एतावता महावीर के शासन मे महावीर सर्वश सिद्ध होता है, तो इसमें यह तर्क होगी कि यह जो तुमारी संप्रदाय है, सो कौन जाने कि किसी धूर्त्त की चलाई हुई है ? वा किसी सत्पुरुष की बलाई हुई है ? इस बात के सिद्ध करने वाला कोई भी प्रमाण नहीं है। अरु विना प्रमाण के हम मान लेवें, तो हम प्रेक्षावान् काहेके ? तथा मायावान् पुरुष ग्राप सर्वश नहीं भी होते तो भी अपने आप को जगत् में सर्वज्ञ रूप से प्रगट कर देते हैं। इंद्रजाल के २७ पीठ हैं, तिन में से कितनेक पीठों के पाठक अपने आपको तीर्थकर के रूप में भरु पूजा करते हुए इन्द्र, देवता, बना सकते हैं। तो फिर देवताओं का आगमन अरु पूजा देखने से सर्वशपन क्योंकर सिद्ध होत्रे, जो हम श्रीमहावीर जी को सर्वश मान लेवें । तुमारे मत का स्तुतिकार आचार्य समंतभद्र भी कहता है। देवागमनभोयान-चामरादिविभूतयः । मायाविष्वपि दृश्यंते, नातस्त्वमसि नो महान् ॥ [ प्रा० मी०, श्लो० १ ] इस श्लोक का भावार्थः-देवताओं का प्रागमन, आकाश में चलना, छत्र चामरादिक की विभूति, यह सर्व भाडंबर, इंद्रजालियों में भी हो सकता है। इस हेतु से तो हे भगवन् ! तू हमारा महान् स्तुति करने योग्य नहीं हो सकता है । तथा हे जैन ! तेरे कहने से महावीर ही सर्वज्ञ होवे, तो भी यह जो प्राचारांगादिक शास्त्र हैं, सो महावीर सर्वश हो के कथन करे हुए हैं, यह क्योंकर जाना जाये ? क्या जाने किसी धूर्त ने रच करके महावीर का नाम रख दिया होवेगा ? क्योंकि यह बात इन्द्रिय ज्ञान का विषय नहीं है; अरु अतींद्रिय ज्ञान की सिद्धि में कोई भी प्रमाण नहीं है। भला कदी यह भी होवे, कि जो प्राचारांगादिक शास्त्र हैं, सो महावीर सर्वश ही के कहे हुए हैं। तो भी श्रीमहावीर जी के कहे हुए शास्त्र का यही अभिप्राय - अर्थ है, और अर्थ नहीं, यह क्योंकर जाना जाय ? क्योंकि शब्दों के अनेक अर्थ हैं, सो इस जगत् में प्रगट सुनने में आते हैं। क्या जाने इन ही अक्षरों करके श्री महावीर स्वामी जी ने कोई अन्य ही अर्थ कहा होवे, परन्तु तुमारी समझ में उन ही अक्षरों करके कछु और अर्थ भासन होता होवे। फिर निश्चय क्योंकर होवे, कि इन अक्षरों का यही अर्थ भगवान् ने कहा है। जेकर तुम ने यह मान रक्खा होवे, कि भगवान् के समय में गौतमादिक मुनि थे, उन्होंने भगवान् के मुखारविन्द से साक्षात् जो अर्थ सुना था, सोई अर्थ भाज तांई परंपरा से चला आता है। इस वास्ते प्राचारांगादिक शास्त्रों का यही अर्थ है, अन्य नहीं। यह भी तुमारा कहना भयुक्त है, क्योंकि गौतमादिक भी कुझस्थ थे, भरु छमस्थ को दूसरे की चित्तवृत्ति का ज्ञान नहीं होता है । क्योंकि दूसरे की चित्तवृत्ति तो प्रतींद्रिय ज्ञान का विषय है । इद्मस्थ तो इन्द्रिय द्वारा जान सकता है । इन्द्रियज्ञानी सर्वज्ञ के अभिप्राय को क्योंकर जान सके, कि सर्वश का यही अभिप्राय है, इस अभिप्राय से सर्वज्ञ ने यह शब्द कहा है। इस वास्ते भगवान् का अभिप्राय तो गौतमादिक नहीं जान सकते हैं । केवल जो वर्णावली भगवान् कहते भये, सोई वर्णावली भगवान के अनुयायी गौतमादिक उच्चारण करते आये । चतुथ परिच्छेद परन्तु भगवान् का अभिप्राय किसी ने नहीं जाना । जैसे आार्यदेशोत्पन्न पुरुष के शब्द उच्चारण से म्लेच्छ भी वैसा शब्द उच्चार सकता है; परन्तु तात्पर्य कुछ नहीं जानता। ऐसे ही महावीर के शब्द के अनुवादक गौतमादिक हैं, परन्तु महावीर का अभिप्राय नहीं जानते। इस वास्ते सम्यग् ज्ञान किसी मत में भी सिद्ध नहीं होता है। एक तो, ज्ञान होने से पुरुष अभिमान से बहुत कर्म बांध कर दीर्घ संसारी हो जाता है, दूसरे, सम्यग् ज्ञान किसी मत में है नहीं, इस वास्ते प्रज्ञान ही श्रेय है । सो अज्ञानी सतसठ प्रकार के हैं। तिन के जानने का यह उपाय है, कि जीवादिक नव पदार्थ किसी पट्टादिक (पट्टी आदि) में लिखने, अरु दशमे स्थान में उत्पत्ति लिखनी । तिन जीवादि नव पदार्थों के हेठ न्यारे न्यारे सत्त्वादिक सात पद स्थापन करने, सो यह हैंः - १. सत्त्व, २. प्रसत्व, ३. सद्सत्त्व, ४. प्रवाच्यत्त्व, ५. सदवाच्यत्व, ६. असवाच्यत्त्व, ७. सद्सवाच्यत्व । १. सत्व - स्वरूप करके विद्यमान पना, २ प्रसत्त्व - पररूप करके अविद्यमान पना, ३. सदसत्व स्वरूप से विद्यमानपना और पररूप करके अविद्यमान पना । यद्यपि सर्व वस्तु स्वपररूप करके सर्वदा ही स्वभाव से सदसत् स्वरूप वाली है, तो भी उस की किसी जगे कदाचित् कुछ अद्भुत रूप करके विवक्षा की जाती है । तिस हेतु से यह तीन विकल्प होते हैं, तथा ४. प्रवाच्यत्व सोई सत्व, असत्त्व को जब युगपत् एक शब्द करके कहना होवे, तदा तिसका वाचक कोई भी शब्द नहीं है, इस वास्ते अवाच्यत्व। यह चारों विकल्प सकला देश रूप हैं, क्योंकि सकल वस्तु को विषय करते हैं । ५. सदवाच्यत्त्व - यदा एक भाग में सत्, दूसरे भाग में प्रवाव्य, ऐसी युगपत् विवक्षा करें, तदा सदवाच्यत्व, इ. ऋसदवाच्यत्व यंदा एक भाग में असत्, दूसरे भाग में अवाच्य, तदा असदवाच्यत्व, ७. सद्सद्वाच्यत्व -- यदा एक भाग में सत्, दूसरे भाग में असत्, तीसरे भाग में प्रवाच्य ऐसी युगपत् कल्पना करें, तदा सद्सदवाच्यत्व । इन सातों विकल्पों से अन्य विकल्प कोई भी नहीं है । जेकर कोई कर भी लेवे, तो इन सातों ही में अन्तर्भूत हो जायेंगे। परन्तु सातों से अधिक विकल्प कदापि न होवेंगे। यह जो सात विकल्प कहे हैं, इन सातों को नव गुणा करें, तब सठ होते हैं । अरु उत्पत्ति के चार विकल्प आदि के ही होते हैं । सत्त्वादि चार विकल्प त्रेसठ में प्रक्षेप करें (मिलावें), तब सतसठ मत अज्ञानवादी के होते हैं। अब इन सातों विकल्पों का अर्थ लिखते हैं। कौन जानता है कि जीव सत् है ? कोई भी नहीं जानता है । क्योंकि इसका ग्रहण करने वाला प्रमाण कोई भी नहीं है । जेकर कोई जान भी लेवेगा कि जीव सत् है, तो कौन से पुरुषार्थ की सिद्धि हो गई। क्योंकि जब शान हो जावेगा तब अभिनि घेश, अभिमान, मलिन चित्त लोकों से विवाद, झगड़ा,
प्रज्ञानवादी*। वे ऐसे कहते हैं, कि ज्ञान अच्छी वस्तु नहीं है । क्योंकि शान जब होवेगा, तब परस्पर विवाद होगा; जब विवाद होगा तब चित्त मलिन होगा; जब चित्त मलिन होगा, तब संसार की वृद्धि होगी। जैसे किसी पुरुष ने कोई वस्तु उलटी कही, तब निस को सुन कर जो ज्ञानी अपने ज्ञान के अभिमान मे उस पुरुष के ऊपर बहुत मलिन चित्त करके उसके साथ विवाद करने लगा, विवाद करते हुए वित्त अत्यन्त मलिन हुआ भर अहंकार बढ़ा, उस अहंकार और चित्त की मलिनता मे महा पाप कर्म उत्पन्न हुआ, तिस पाप मे दीर्घतर संसार की वृद्धि हुई। इस वास्ते ज्ञान अच्छी वस्तु नहीं है। अरु जब अपने को अज्ञानी मानिये, तब तो अहंकार का संभव नहीं होता है, अरु दूसरों के ऊपर चित्त का मलिनपन भी नहीं होता है । तिस वास्ते कर्म का बन्ध भी नहीं होता है। तथा जो कार्य विचार कर किया जाता है, तिस में महा कर्म का बन्ध होता है, और उस का फल भी महा भयानक होता है। इस वास्ते उस का फल अवश्यमेव भोगने में आता है । परन्तु जो काम मनोव्यापार के बिना किया जाता है, जिस का फल भयानक नहीं होता, अरु प्रवश्यमेव भोगने में भी नहीं माता है । जो उस काम में किंचित् कर्म बन्ध होता है, सो w Arvvs * कुत्सितं ज्ञानमज्ञानं तदेषामस्तीत्यज्ञानिकाः, अथवाऽज्ञानेन चरन्तोन्यज्ञानिकाः । [ षडशून्य मशून्य श्लोशून्य एक की बृहद्वृत्ति ] भी चूने की भीत के ऊपर बालु रेत की मुष्टि के सम्बन्धवत् स्पर्शमात्र है; परन्तु बन्ध नहीं होता है। इस वास्ते प्रशान ही मोक्षगामी पुरुषों को अंगीकार करना श्रेय है; परन्तु ज्ञान अंगीकार करना श्रेय नहीं है। प्रज्ञानवादी कहते हैं, कि जेकर ज्ञानका निश्चय करने में सामर्थ्य होवे, तो हम ज्ञान को मान भी लेवें । प्रथम तो ज्ञान सिद्ध ही नहीं हो सकता है, क्योंकि जितने मतावलंबी पुरुष हैं, सो सर्व परस्पर भिन्न ही ज्ञान अंगीकार करते हैं, इस वास्ते क्यों कर यह निश्चय हो सके, कि इस मत का ज्ञान सम्यग है, अरु इस मत का ज्ञान सम्यग नहीं है। जेकर कहोगे कि सकल वस्तु के समूह को साक्षात् करने वाले ज्ञान से युक्त जो भगवान् है, तिल के उपदेश से जो ज्ञान होवे सो सम्यग् ज्ञान है । अरु जो इस के बिना दूसरे मत हैं, उस का ज्ञान सम्यग् नहीं है। क्योंकि उन के मत में जो ज्ञान है, सो सर्वज्ञ का कथन किया हुआ नहीं है । प्रज्ञानवादी कहते हैं कि यह तुमारा कहना तो सत्य है, किंतु सफल वस्तु के समूह का साक्षात् करने वाला ज्ञानी, क्या सुगंत, विष्णु, ब्रह्मादिक को हम मानें ? किंवा भगवान् महावीर स्वामी को ? फिर भी वोही संशय रहा, निश्चय न हुआ, कि कौन सर्वश है ? जेकर कहोगे कि जिस भगवान् के पादारविंद युगल को इन्द्रादि सर्व देवता, परस्पर महं पूर्वक विशिष्ट विशिष्टतर विभूति श्रुति करके संयुक्त सैंकड़ों विमानों में बैठ करके, सफल आकाश मंडल को आच्छादित करते हुए पृथिवी में उतर करके पूजते भये, सो भगवान् वर्द्धमान स्वामी सर्वज्ञ है। परन्तु सुगत, शंकर, विष्णु, ब्रह्मादिक नहीं; क्योंकि सुगतादिक सर्व अल्प बुद्धि वाले मनुष्य हुये हैं, इस वास्ते वो देव नहीं हैं। जेकर सुगतादिक भी सर्वश होते, तो तिन की भी इन्द्रादि देवता पूजा करते। परन्तु किसी भी देवता ने पूजा नहीं करी । इस वास्ते सुगतादिक सर्वज्ञ नहीं हुये हैं। हे जैन ! यह जो तुमने बात कही है, सो अपने मत के राग के कारण कही है। परन्तु इस बात से इष्टसिद्धि नहीं होती है । क्योंकि वर्द्धमान स्वामी की इन्द्रादि देवता, देवलोक से आकर के पूजा करते थे, यह तुमारा कहना हम क्योंकर सच्चा मान लेवे ? भगवान् श्री महावीर को तो हुये बहुत काल होगया है, थरु उन के सर्वश होने में कोई भी साधक प्रमाण नहीं है ? जेकर कहोगे कि संप्रदाय से एतावता महावीर के शासन मे महावीर सर्वश सिद्ध होता है, तो इसमें यह तर्क होगी कि यह जो तुमारी संप्रदाय है, सो कौन जाने कि किसी धूर्त्त की चलाई हुई है ? वा किसी सत्पुरुष की बलाई हुई है ? इस बात के सिद्ध करने वाला कोई भी प्रमाण नहीं है। अरु विना प्रमाण के हम मान लेवें, तो हम प्रेक्षावान् काहेके ? तथा मायावान् पुरुष ग्राप सर्वश नहीं भी होते तो भी अपने आप को जगत् में सर्वज्ञ रूप से प्रगट कर देते हैं। इंद्रजाल के सत्ताईस पीठ हैं, तिन में से कितनेक पीठों के पाठक अपने आपको तीर्थकर के रूप में भरु पूजा करते हुए इन्द्र, देवता, बना सकते हैं। तो फिर देवताओं का आगमन अरु पूजा देखने से सर्वशपन क्योंकर सिद्ध होत्रे, जो हम श्रीमहावीर जी को सर्वश मान लेवें । तुमारे मत का स्तुतिकार आचार्य समंतभद्र भी कहता है। देवागमनभोयान-चामरादिविभूतयः । मायाविष्वपि दृश्यंते, नातस्त्वमसि नो महान् ॥ [ प्राशून्य मीशून्य, श्लोशून्य एक ] इस श्लोक का भावार्थः-देवताओं का प्रागमन, आकाश में चलना, छत्र चामरादिक की विभूति, यह सर्व भाडंबर, इंद्रजालियों में भी हो सकता है। इस हेतु से तो हे भगवन् ! तू हमारा महान् स्तुति करने योग्य नहीं हो सकता है । तथा हे जैन ! तेरे कहने से महावीर ही सर्वज्ञ होवे, तो भी यह जो प्राचारांगादिक शास्त्र हैं, सो महावीर सर्वश हो के कथन करे हुए हैं, यह क्योंकर जाना जाये ? क्या जाने किसी धूर्त ने रच करके महावीर का नाम रख दिया होवेगा ? क्योंकि यह बात इन्द्रिय ज्ञान का विषय नहीं है; अरु अतींद्रिय ज्ञान की सिद्धि में कोई भी प्रमाण नहीं है। भला कदी यह भी होवे, कि जो प्राचारांगादिक शास्त्र हैं, सो महावीर सर्वश ही के कहे हुए हैं। तो भी श्रीमहावीर जी के कहे हुए शास्त्र का यही अभिप्राय - अर्थ है, और अर्थ नहीं, यह क्योंकर जाना जाय ? क्योंकि शब्दों के अनेक अर्थ हैं, सो इस जगत् में प्रगट सुनने में आते हैं। क्या जाने इन ही अक्षरों करके श्री महावीर स्वामी जी ने कोई अन्य ही अर्थ कहा होवे, परन्तु तुमारी समझ में उन ही अक्षरों करके कछु और अर्थ भासन होता होवे। फिर निश्चय क्योंकर होवे, कि इन अक्षरों का यही अर्थ भगवान् ने कहा है। जेकर तुम ने यह मान रक्खा होवे, कि भगवान् के समय में गौतमादिक मुनि थे, उन्होंने भगवान् के मुखारविन्द से साक्षात् जो अर्थ सुना था, सोई अर्थ भाज तांई परंपरा से चला आता है। इस वास्ते प्राचारांगादिक शास्त्रों का यही अर्थ है, अन्य नहीं। यह भी तुमारा कहना भयुक्त है, क्योंकि गौतमादिक भी कुझस्थ थे, भरु छमस्थ को दूसरे की चित्तवृत्ति का ज्ञान नहीं होता है । क्योंकि दूसरे की चित्तवृत्ति तो प्रतींद्रिय ज्ञान का विषय है । इद्मस्थ तो इन्द्रिय द्वारा जान सकता है । इन्द्रियज्ञानी सर्वज्ञ के अभिप्राय को क्योंकर जान सके, कि सर्वश का यही अभिप्राय है, इस अभिप्राय से सर्वज्ञ ने यह शब्द कहा है। इस वास्ते भगवान् का अभिप्राय तो गौतमादिक नहीं जान सकते हैं । केवल जो वर्णावली भगवान् कहते भये, सोई वर्णावली भगवान के अनुयायी गौतमादिक उच्चारण करते आये । चतुथ परिच्छेद परन्तु भगवान् का अभिप्राय किसी ने नहीं जाना । जैसे आार्यदेशोत्पन्न पुरुष के शब्द उच्चारण से म्लेच्छ भी वैसा शब्द उच्चार सकता है; परन्तु तात्पर्य कुछ नहीं जानता। ऐसे ही महावीर के शब्द के अनुवादक गौतमादिक हैं, परन्तु महावीर का अभिप्राय नहीं जानते। इस वास्ते सम्यग् ज्ञान किसी मत में भी सिद्ध नहीं होता है। एक तो, ज्ञान होने से पुरुष अभिमान से बहुत कर्म बांध कर दीर्घ संसारी हो जाता है, दूसरे, सम्यग् ज्ञान किसी मत में है नहीं, इस वास्ते प्रज्ञान ही श्रेय है । सो अज्ञानी सतसठ प्रकार के हैं। तिन के जानने का यह उपाय है, कि जीवादिक नव पदार्थ किसी पट्टादिक में लिखने, अरु दशमे स्थान में उत्पत्ति लिखनी । तिन जीवादि नव पदार्थों के हेठ न्यारे न्यारे सत्त्वादिक सात पद स्थापन करने, सो यह हैंः - एक. सत्त्व, दो. प्रसत्व, तीन. सद्सत्त्व, चार. प्रवाच्यत्त्व, पाँच. सदवाच्यत्व, छः. असवाच्यत्त्व, सात. सद्सवाच्यत्व । एक. सत्व - स्वरूप करके विद्यमान पना, दो प्रसत्त्व - पररूप करके अविद्यमान पना, तीन. सदसत्व स्वरूप से विद्यमानपना और पररूप करके अविद्यमान पना । यद्यपि सर्व वस्तु स्वपररूप करके सर्वदा ही स्वभाव से सदसत् स्वरूप वाली है, तो भी उस की किसी जगे कदाचित् कुछ अद्भुत रूप करके विवक्षा की जाती है । तिस हेतु से यह तीन विकल्प होते हैं, तथा चार. प्रवाच्यत्व सोई सत्व, असत्त्व को जब युगपत् एक शब्द करके कहना होवे, तदा तिसका वाचक कोई भी शब्द नहीं है, इस वास्ते अवाच्यत्व। यह चारों विकल्प सकला देश रूप हैं, क्योंकि सकल वस्तु को विषय करते हैं । पाँच. सदवाच्यत्त्व - यदा एक भाग में सत्, दूसरे भाग में प्रवाव्य, ऐसी युगपत् विवक्षा करें, तदा सदवाच्यत्व, इ. ऋसदवाच्यत्व यंदा एक भाग में असत्, दूसरे भाग में अवाच्य, तदा असदवाच्यत्व, सात. सद्सद्वाच्यत्व -- यदा एक भाग में सत्, दूसरे भाग में असत्, तीसरे भाग में प्रवाच्य ऐसी युगपत् कल्पना करें, तदा सद्सदवाच्यत्व । इन सातों विकल्पों से अन्य विकल्प कोई भी नहीं है । जेकर कोई कर भी लेवे, तो इन सातों ही में अन्तर्भूत हो जायेंगे। परन्तु सातों से अधिक विकल्प कदापि न होवेंगे। यह जो सात विकल्प कहे हैं, इन सातों को नव गुणा करें, तब सठ होते हैं । अरु उत्पत्ति के चार विकल्प आदि के ही होते हैं । सत्त्वादि चार विकल्प त्रेसठ में प्रक्षेप करें , तब सतसठ मत अज्ञानवादी के होते हैं। अब इन सातों विकल्पों का अर्थ लिखते हैं। कौन जानता है कि जीव सत् है ? कोई भी नहीं जानता है । क्योंकि इसका ग्रहण करने वाला प्रमाण कोई भी नहीं है । जेकर कोई जान भी लेवेगा कि जीव सत् है, तो कौन से पुरुषार्थ की सिद्धि हो गई। क्योंकि जब शान हो जावेगा तब अभिनि घेश, अभिमान, मलिन चित्त लोकों से विवाद, झगड़ा,
भारत में कोरोना (Coronavirus) के बढ़ते केस को देखते हुए, 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों का टीकाकरण 1 मई, 2021 से शुरू किया जाएगा। इसके लिए पंजीकरण 28 अप्रैल से शुरू किया गया है। आइए देखते हैं, इस टीकाकरण (vaccination) के लिए पंजीकरण कैसे करना है? कोविशील्ड (covishiled) और कोवैक्सीन (covaxine) , इन दोनों वैक्सीन के लिए CoWIN ऐप सभी नागरिकों को सेल्फ रजिस्ट्रेशन करना होगा। जो कि गूगल प्ले स्टोर (google play store) से मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है। क्या है CoWIN ऐप? बता दें कि Co-WIN का पूरा नाम कोविड-19 वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क है। यह eVIN (इलेक्ट्रॉनिक्स वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क) का अपग्रेड है। कोविड-19 वैक्सीन की ट्रैकिंग और रजिस्ट्रेशन के लिए CoWin ऐप को 5 हिस्सों में बांटा गया है, जो एडमिनिस्ट्रेटर, रजिस्ट्रेशन, वैक्सीनेशन, बेनिफिशियरी, एक्नॉलेजमेंट और रिपोर्ट हैं। यूजर रजिस्ट्रेशन डेटा के ऐप पर उपलब्ध होने के बाद यूजर्स को जानकारी दी जाएगी, कि वो अपने नज्दीक कहां कोविड-19 वैक्सीन लगवा सकते हैं। इस ऐप पर रजिस्ट्रेशन करने के बाद वेरिफिकेशन और एक्नॉलेजमेंट को ई-सर्टिफिकेशन के लिए भेजा जाएगा। एक व्यक्ति के वैक्सीनेशन में करीब 30 मिनट का वक्त लगेगा। हर सेशन में 100 लोगों का वैक्सीनेशन होगा। रजिस्ट्रेशन करने के लिए क्या करना होगा? यूजर को CoWIN ऐप पर रजिस्ट्रेशन के लिए फोटो आईडी कार्ड में से कोई एक होना जरूरी होगा। CoWIN ऐप पर सेंटर और स्टेट की गाइडलाइन दर्ज रहेंगी। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद यूजर के पास रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक मैसेज आएगा। इसमें ड्यू डेट, प्लेस और वेरिफिकेशन की टाइमिंग होगी। 1) रजिस्टर करने के लिए आपको फोटो आईडी की आवश्यकता होगी। खुद को पंजीकृत करते समय, आपको इलेक्ट्रॉनिक केवाईसी के लिए पहचानपत्र को स्कैन करके संलग्न करना होगा। इसके लिए 12 पहचान पत्र का विकल्प दिया गया है। 2) पंजीकरण के दौरान उपयोग किए जाने वाले समान पहचान पत्र को टीकाकरण के लिए जाते समय दिखाना होगा।
भारत में कोरोना के बढ़ते केस को देखते हुए, अट्ठारह वर्ष से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों का टीकाकरण एक मई, दो हज़ार इक्कीस से शुरू किया जाएगा। इसके लिए पंजीकरण अट्ठाईस अप्रैल से शुरू किया गया है। आइए देखते हैं, इस टीकाकरण के लिए पंजीकरण कैसे करना है? कोविशील्ड और कोवैक्सीन , इन दोनों वैक्सीन के लिए CoWIN ऐप सभी नागरिकों को सेल्फ रजिस्ट्रेशन करना होगा। जो कि गूगल प्ले स्टोर से मुफ्त में डाउनलोड किया जा सकता है। क्या है CoWIN ऐप? बता दें कि Co-WIN का पूरा नाम कोविड-उन्नीस वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क है। यह eVIN का अपग्रेड है। कोविड-उन्नीस वैक्सीन की ट्रैकिंग और रजिस्ट्रेशन के लिए CoWin ऐप को पाँच हिस्सों में बांटा गया है, जो एडमिनिस्ट्रेटर, रजिस्ट्रेशन, वैक्सीनेशन, बेनिफिशियरी, एक्नॉलेजमेंट और रिपोर्ट हैं। यूजर रजिस्ट्रेशन डेटा के ऐप पर उपलब्ध होने के बाद यूजर्स को जानकारी दी जाएगी, कि वो अपने नज्दीक कहां कोविड-उन्नीस वैक्सीन लगवा सकते हैं। इस ऐप पर रजिस्ट्रेशन करने के बाद वेरिफिकेशन और एक्नॉलेजमेंट को ई-सर्टिफिकेशन के लिए भेजा जाएगा। एक व्यक्ति के वैक्सीनेशन में करीब तीस मिनट का वक्त लगेगा। हर सेशन में एक सौ लोगों का वैक्सीनेशन होगा। रजिस्ट्रेशन करने के लिए क्या करना होगा? यूजर को CoWIN ऐप पर रजिस्ट्रेशन के लिए फोटो आईडी कार्ड में से कोई एक होना जरूरी होगा। CoWIN ऐप पर सेंटर और स्टेट की गाइडलाइन दर्ज रहेंगी। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद यूजर के पास रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक मैसेज आएगा। इसमें ड्यू डेट, प्लेस और वेरिफिकेशन की टाइमिंग होगी। एक) रजिस्टर करने के लिए आपको फोटो आईडी की आवश्यकता होगी। खुद को पंजीकृत करते समय, आपको इलेक्ट्रॉनिक केवाईसी के लिए पहचानपत्र को स्कैन करके संलग्न करना होगा। इसके लिए बारह पहचान पत्र का विकल्प दिया गया है। दो) पंजीकरण के दौरान उपयोग किए जाने वाले समान पहचान पत्र को टीकाकरण के लिए जाते समय दिखाना होगा।
श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री श्री कोडिकुन्नील सुरेश ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि देश से बंधुआ श्रम पद्धति का कानून द्वारा 25 अक्तूबर, 1975 को बंधुआ श्रम पद्धति (उत्सादन) अधिदेश के माध्यम से समाप्त कर दिया गया है जिसे बंधुआ श्रम पद्धति (उत्सादन) अधिनियम, 1976 द्वारा बदल दिया गया था। इस अधिनियम के क्रियान्वयन का उत्तरदायित्व राज्य सरकारों का है। जब कभी बंधुआ श्रम के वि़द्यमान होने की जानकारी मिलती है तो ऐसे व्यकितयों की पहचान की जाती है और उनका पुनर्वास किया जाता है। केन्द्र सरकार बंधुआ श्रमिकों से संबंधित मामलों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्टों अथवा संदर्भों पर समुचित कार्यवाही करती है। मुक्त कराए गए बंधुआ श्रमिकों के पुनर्वास का उत्तरदायित्व संबंधित राज्य सरकारों का है। पहचान किए गए एवं मुक्त कराए गए बंधुआ श्रमिकों के पुनर्वास के इस कार्य में राज्य सरकारों की सहायता के उद्देश्य से बंधुआ श्रमिकों के पुनर्वास के लिए केन्द्र द्वारा संपोषित एक योजना स्कीम मई, 1978 से प्रचालन में है। इस योजना के अंतर्गत पुनर्वास सहायता के रूप में प्रति बंधुआ श्रमिक 20,000/- रूपये की राशि प्रदान की जाती है जिसका वहन केन्द्र तथा राज्य सरकारों द्वारा बराबर-बराबर किया जाता है। यह योजना राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्रों को सर्वेक्षण कराने, जागरूकता सृजन गतिविधियों तथा मूल्यांकन अध्ययन कराने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री श्री कोडिकुन्नील सुरेश ने आज राज्य सभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि देश से बंधुआ श्रम पद्धति का कानून द्वारा पच्चीस अक्तूबर, एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर को बंधुआ श्रम पद्धति अधिदेश के माध्यम से समाप्त कर दिया गया है जिसे बंधुआ श्रम पद्धति अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर द्वारा बदल दिया गया था। इस अधिनियम के क्रियान्वयन का उत्तरदायित्व राज्य सरकारों का है। जब कभी बंधुआ श्रम के वि़द्यमान होने की जानकारी मिलती है तो ऐसे व्यकितयों की पहचान की जाती है और उनका पुनर्वास किया जाता है। केन्द्र सरकार बंधुआ श्रमिकों से संबंधित मामलों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्टों अथवा संदर्भों पर समुचित कार्यवाही करती है। मुक्त कराए गए बंधुआ श्रमिकों के पुनर्वास का उत्तरदायित्व संबंधित राज्य सरकारों का है। पहचान किए गए एवं मुक्त कराए गए बंधुआ श्रमिकों के पुनर्वास के इस कार्य में राज्य सरकारों की सहायता के उद्देश्य से बंधुआ श्रमिकों के पुनर्वास के लिए केन्द्र द्वारा संपोषित एक योजना स्कीम मई, एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर से प्रचालन में है। इस योजना के अंतर्गत पुनर्वास सहायता के रूप में प्रति बंधुआ श्रमिक बीस,शून्य/- रूपये की राशि प्रदान की जाती है जिसका वहन केन्द्र तथा राज्य सरकारों द्वारा बराबर-बराबर किया जाता है। यह योजना राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्रों को सर्वेक्षण कराने, जागरूकता सृजन गतिविधियों तथा मूल्यांकन अध्ययन कराने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
Android डिवाइस से iPhone में डेटा ट्रांसफर करना OS में अंतर के कारण ज्यादा दिक्कत का काम लग सकता है, लेकिन जब आप सही टूल और सही स्टेप का यूज करते हैं तो यह वास्तव में काफी आसान होता है। चाहे आप किसी Android डिवाइस से iPhone पर स्विच कर रहे हों या केवल दो डिवाइसों के बीच कुछ डेटा ट्रांसफर करने की जरूरत हो, इसे करने के कुछ तरीके दिए गए हैं। आइए उन सभी पॉपुलर तरीकों के बारे में जानें जिनका उपयोग आप Android से iPhone में डेटा स्थानांतरित करने के लिए कर सकते हैं। मूव टू आईओएस एप्पल द्वारा डेवलप किया गया एक फ्री ऐप है, जो प्ले स्टोर पर उपलब्ध है, जो आपको एंड्रॉइड फोन से आईफोन में वायरलेस तरीके से डेटा ट्रांसफर करने की अनुमति देता है। 1 - सबसे पहले अपने Android फ़ोन पर Google Play Store से मूव टू आईओएस ऐप डाउनलोड करें । 2 - अब अपने iPhone पर, सेटअप के दौरान ऐप्स और डेटा पर जाएं और Android से डेटा ट्रासफर करना चुनें। 3 - अपने Android फ़ोन पर मूव टू आईओएस ऐप खोलें और जारी रखें पर टैप करें । 4 - अपने iPhone पर, सेटअप के दौरान ऐप्स और डेटा पर जाएं और Android से मूव डेटा ऑप्शन चुनें। 5 - अपने Android फ़ोन पर मूव टू आईओएस ऐप खोलें और continue पर टैप करें । 6- कंटिन्यू रखने के लिए Agree पर टैप करें , जब आप नियम और शर्तों को अच्छी तरह समझ लें। 7 - अपने iPhone पर, continue टैप करें और एक यूनिक कोड पाने के लिए इंतजार करें। 8- अपने Android फ़ोन पर कोड दर्ज करें, और उस प्रकार का डेटा चुनें जिसे आप ट्रांसफर करना चाहते हैं। 9 - ट्रांसफर पूरा होने तक प्रतीक्षा करें, और फिर अपने iPhone को सेट करना समाप्त करें। Android मोबाइल फ़ोन से iPhone में डेटा ले जाने के लिए आप पहले से इंस्टॉल Google ड्राइव का यूज कर सकते हैं। चलिए जानते हैं यह कैसे करता है काम। 1 - सबसे पहले, Google ड्राइव पर अपने डेटा का बैकअप लें। ऐसा करने के लिए, अपने एंड्रॉइड फोन पर सेटिंग्स पर जाएं , सिस्टम को सेलेक्ट करें , फिर बैकअप और Google ड्राइव पर बैकअप का चयन करें । वह सभी डेटा शामिल करें जिसे आप iPhone में ट्रांसफर करना चाहते हैं। 2 - अपने iPhone पर Google ड्राइव इंस्टॉल करें और अपने Android फ़ोन पर उपयोग किए गए उसी अकाउंट से साइन इन करें। 3- IPhone पर Google ड्राइव खोलें और बैकअप फ़ाइल का पता लगाएं। आप अपने iPhone पर मेनू > बैकअप पर जाकर ऐसा कर सकते हैं । 4 - वह डेटा चुनें जिसे आप ट्रांसफर करना चाहते हैं, और फिर रिस्टोर करें टैप करें ।
Android डिवाइस से iPhone में डेटा ट्रांसफर करना OS में अंतर के कारण ज्यादा दिक्कत का काम लग सकता है, लेकिन जब आप सही टूल और सही स्टेप का यूज करते हैं तो यह वास्तव में काफी आसान होता है। चाहे आप किसी Android डिवाइस से iPhone पर स्विच कर रहे हों या केवल दो डिवाइसों के बीच कुछ डेटा ट्रांसफर करने की जरूरत हो, इसे करने के कुछ तरीके दिए गए हैं। आइए उन सभी पॉपुलर तरीकों के बारे में जानें जिनका उपयोग आप Android से iPhone में डेटा स्थानांतरित करने के लिए कर सकते हैं। मूव टू आईओएस एप्पल द्वारा डेवलप किया गया एक फ्री ऐप है, जो प्ले स्टोर पर उपलब्ध है, जो आपको एंड्रॉइड फोन से आईफोन में वायरलेस तरीके से डेटा ट्रांसफर करने की अनुमति देता है। एक - सबसे पहले अपने Android फ़ोन पर Google Play Store से मूव टू आईओएस ऐप डाउनलोड करें । दो - अब अपने iPhone पर, सेटअप के दौरान ऐप्स और डेटा पर जाएं और Android से डेटा ट्रासफर करना चुनें। तीन - अपने Android फ़ोन पर मूव टू आईओएस ऐप खोलें और जारी रखें पर टैप करें । चार - अपने iPhone पर, सेटअप के दौरान ऐप्स और डेटा पर जाएं और Android से मूव डेटा ऑप्शन चुनें। पाँच - अपने Android फ़ोन पर मूव टू आईओएस ऐप खोलें और continue पर टैप करें । छः- कंटिन्यू रखने के लिए Agree पर टैप करें , जब आप नियम और शर्तों को अच्छी तरह समझ लें। सात - अपने iPhone पर, continue टैप करें और एक यूनिक कोड पाने के लिए इंतजार करें। आठ- अपने Android फ़ोन पर कोड दर्ज करें, और उस प्रकार का डेटा चुनें जिसे आप ट्रांसफर करना चाहते हैं। नौ - ट्रांसफर पूरा होने तक प्रतीक्षा करें, और फिर अपने iPhone को सेट करना समाप्त करें। Android मोबाइल फ़ोन से iPhone में डेटा ले जाने के लिए आप पहले से इंस्टॉल Google ड्राइव का यूज कर सकते हैं। चलिए जानते हैं यह कैसे करता है काम। एक - सबसे पहले, Google ड्राइव पर अपने डेटा का बैकअप लें। ऐसा करने के लिए, अपने एंड्रॉइड फोन पर सेटिंग्स पर जाएं , सिस्टम को सेलेक्ट करें , फिर बैकअप और Google ड्राइव पर बैकअप का चयन करें । वह सभी डेटा शामिल करें जिसे आप iPhone में ट्रांसफर करना चाहते हैं। दो - अपने iPhone पर Google ड्राइव इंस्टॉल करें और अपने Android फ़ोन पर उपयोग किए गए उसी अकाउंट से साइन इन करें। तीन- IPhone पर Google ड्राइव खोलें और बैकअप फ़ाइल का पता लगाएं। आप अपने iPhone पर मेनू > बैकअप पर जाकर ऐसा कर सकते हैं । चार - वह डेटा चुनें जिसे आप ट्रांसफर करना चाहते हैं, और फिर रिस्टोर करें टैप करें ।
जिन महिलाओं या संस्थाओं ने महिला सशक्तिकरण, महिलाओं के सामाजिक उत्थान एवं उनकी आत्मनिर्भरता के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं, वे राष्ट्रीय नारी शक्ति पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकती हैं। चंडीगढ़(चंद्रशेखर धरणी): आजादी के अमृत महोत्सव की श्रृंखला में हरियाणा महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा नारी शक्ति पुरस्कार के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। विभाग के एक प्रवक्ता ने आज इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि जिन महिलाओं या संस्थाओं ने महिला सशक्तिकरण, महिलाओं के सामाजिक उत्थान एवं उनकी आत्मनिर्भरता के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं, वे राष्ट्रीय नारी शक्ति पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि आवेदक महिला की आयु कम से कम 25 वर्ष होनी चाहिए तथा जो भी संस्था इस पुरस्कार के लिए आवेदन करें, वह पिछले पांच वर्षों से काम कर रही हो। उन्होंने बताया कि केवल www. awards. gov. in पोर्टल पर 31 अक्टूबर तक पुरस्कार के लिए आवेदन किया जा सकता है। पुरस्कार के लिए चुनी जाने वाली महिलाओं को 8 मार्च,2023 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया जाएगा। (हरियाणा की खबरें टेलीग्राम पर भी, बस यहां क्लिक करें या फिर टेलीग्राम पर Punjab Kesari Haryana सर्च करें। )
जिन महिलाओं या संस्थाओं ने महिला सशक्तिकरण, महिलाओं के सामाजिक उत्थान एवं उनकी आत्मनिर्भरता के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं, वे राष्ट्रीय नारी शक्ति पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकती हैं। चंडीगढ़: आजादी के अमृत महोत्सव की श्रृंखला में हरियाणा महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा नारी शक्ति पुरस्कार के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। विभाग के एक प्रवक्ता ने आज इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि जिन महिलाओं या संस्थाओं ने महिला सशक्तिकरण, महिलाओं के सामाजिक उत्थान एवं उनकी आत्मनिर्भरता के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं, वे राष्ट्रीय नारी शक्ति पुरस्कार के लिए आवेदन कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि आवेदक महिला की आयु कम से कम पच्चीस वर्ष होनी चाहिए तथा जो भी संस्था इस पुरस्कार के लिए आवेदन करें, वह पिछले पांच वर्षों से काम कर रही हो। उन्होंने बताया कि केवल www. awards. gov. in पोर्टल पर इकतीस अक्टूबर तक पुरस्कार के लिए आवेदन किया जा सकता है। पुरस्कार के लिए चुनी जाने वाली महिलाओं को आठ मार्च,दो हज़ार तेईस को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया जाएगा।
होती है एवं वैधव्य के आदर्श को वह स्वीकार कर लेती है। उसका चरित्र स्थिर है वह अपने आदर्श-पक्ष में अवचलित है यद्यापे उसके लिए वह कोई बौद्धिक दृष्टिकोण का प्रचार नहीं करती । प्रसन्नकुमार की कन्या भुवन विधवा होती है एवं अपने बाल. सखा प्रकाश के प्रति आकृष्ट होकर चरम पतन की ओर बढ़ती है। भुवन का यह पतन देख प्रसन्नकुमार कनिष्ठ पुत्री विधवा प्रमदा का पुनर्विवाह करते हैं किंतु उसका पति उसे केवल अपने स्वार्थों का साधन बना कर घर से निकाल देता है । लेखक ने समाज की बाल-विधवाओं का अत्यंत करुण चित्र खींचा है । इस देव के अभिशाप का कोई बुद्धि जनोचित प्रतिकार है या नहीं यही लेखक का प्रतिपाद्य विषय है । न तो आदर्श पथ पर निर्मला सुखी है, न तो पतित भुवन सुखी है और न पुनविवाह प्रमदा सुखी है । यद्यपि एक ही परिवार में तीन नारियों को विधवा बनाकर लेखक ने आकस्मिकता की सृष्टि की है जिसका कोई नाटकीय कारण नहीं है फिर भी बगाली मध्यवित्त परिवार, उसके नर नारियों का सुख दुःख, कलकत्ता नगरी के भद्र एवं दुःशील वर्ग के लोगों का व्यवहार, उत्थान एवं पतन के दृश्य उनकी लेखनी में जीवन्त हो उठे हैं । अगर इसमें अनेक मृत्यु एवं प्रकाश के असत् व्यवहार का नाटकीय कारण उपस्थित होता तो अनेक मनस्तत्व-विश्लेषणात्मक तत्वों से पूर्ण यह नाटक आधुनिक शैली का न होते हुए भी. भारतीय मध्यवित्त समाज का अनुपम चित्र होता । द्विजेन्द्रलाल राय नं गिरीशचन्द्र की शैली पर "परपारे" नामक सामाजिक नाटक की रचना की है। इसमें एक धनी जमींदार पुत्र के उच्छृंखल जीवन की कथा है । यह भी समाज का समग्र रूप नहीं एक परिवार का चित्र है । लेखक का उद्देश्य यह दिखाना है कि यदि पुत्र विवाह के बाद माता की उपेक्षा करता है तो वह और भी पतन की ओर बढ़ने के ही पूर्वाभास हैं । महिम सरयू से विवाह कर कलकत्ते में रहता है एवं अपनी माता की उपेक्षा करता है । इसी दुःख में उसकी माता की मृत्यु हो जाती है । अब जिस दाम्पत्य जीवन में इतनी आसक्ति थी उसका अवसान अवश्यम्भावी है। महिम शान्ता नामक एक गणिका के प्रति आसक्त होता है। इसके बाद महिम और सरयू के जीवन की अशांति, महिम का सरयू को खून करने के लिए उद्यत होना, बीच में शान्ता का आगमन इत्यादि बाह्य घटनाओं से नाटक पूर्ण है। शांता के चरित्र का माहात्म्य दिखाकर लेखक ने यह प्रतिपादित किया है कि गणिका मात्र ही नीच नहीं होतीं । पतिताओं का चरित्र चित्रण समस्या - नाटकों का भी एक विषय रहा है जैसे 'राक्षस का मंदिर' की अश्गरी वेश्या । किंतु अनेक रोमांचकारी घटनाओं से पूर्ण किसी परिवार का चित्रग साधारण कोटि का सामाजिक नाटक है । लेखक का अभिप्राय समाज की पतिताओं की समस्या पर बौद्धिक आलोकपात करना नहीं है । इसी तरह गोविंदवल्लभ पन्त ने हिंदी नाटक 'अंगूर की बेटी' में मद्यपान के दुष्परिणामों का चित्रण कया किन्तु उसका भी दृष्टिकोण बौद्धिक नहीं तथा बाह्य घटनाओं से परिपूर्ण है । मोहनदास शराबी है एवं उसकी पत्नि कामिनी इस कारण अत्यन्त दुःखी है । सिनेमा के डायरेक्टर माधव मोहनदास के मद्यपान को और भी उत्साहित करते हैं एवं जब
होती है एवं वैधव्य के आदर्श को वह स्वीकार कर लेती है। उसका चरित्र स्थिर है वह अपने आदर्श-पक्ष में अवचलित है यद्यापे उसके लिए वह कोई बौद्धिक दृष्टिकोण का प्रचार नहीं करती । प्रसन्नकुमार की कन्या भुवन विधवा होती है एवं अपने बाल. सखा प्रकाश के प्रति आकृष्ट होकर चरम पतन की ओर बढ़ती है। भुवन का यह पतन देख प्रसन्नकुमार कनिष्ठ पुत्री विधवा प्रमदा का पुनर्विवाह करते हैं किंतु उसका पति उसे केवल अपने स्वार्थों का साधन बना कर घर से निकाल देता है । लेखक ने समाज की बाल-विधवाओं का अत्यंत करुण चित्र खींचा है । इस देव के अभिशाप का कोई बुद्धि जनोचित प्रतिकार है या नहीं यही लेखक का प्रतिपाद्य विषय है । न तो आदर्श पथ पर निर्मला सुखी है, न तो पतित भुवन सुखी है और न पुनविवाह प्रमदा सुखी है । यद्यपि एक ही परिवार में तीन नारियों को विधवा बनाकर लेखक ने आकस्मिकता की सृष्टि की है जिसका कोई नाटकीय कारण नहीं है फिर भी बगाली मध्यवित्त परिवार, उसके नर नारियों का सुख दुःख, कलकत्ता नगरी के भद्र एवं दुःशील वर्ग के लोगों का व्यवहार, उत्थान एवं पतन के दृश्य उनकी लेखनी में जीवन्त हो उठे हैं । अगर इसमें अनेक मृत्यु एवं प्रकाश के असत् व्यवहार का नाटकीय कारण उपस्थित होता तो अनेक मनस्तत्व-विश्लेषणात्मक तत्वों से पूर्ण यह नाटक आधुनिक शैली का न होते हुए भी. भारतीय मध्यवित्त समाज का अनुपम चित्र होता । द्विजेन्द्रलाल राय नं गिरीशचन्द्र की शैली पर "परपारे" नामक सामाजिक नाटक की रचना की है। इसमें एक धनी जमींदार पुत्र के उच्छृंखल जीवन की कथा है । यह भी समाज का समग्र रूप नहीं एक परिवार का चित्र है । लेखक का उद्देश्य यह दिखाना है कि यदि पुत्र विवाह के बाद माता की उपेक्षा करता है तो वह और भी पतन की ओर बढ़ने के ही पूर्वाभास हैं । महिम सरयू से विवाह कर कलकत्ते में रहता है एवं अपनी माता की उपेक्षा करता है । इसी दुःख में उसकी माता की मृत्यु हो जाती है । अब जिस दाम्पत्य जीवन में इतनी आसक्ति थी उसका अवसान अवश्यम्भावी है। महिम शान्ता नामक एक गणिका के प्रति आसक्त होता है। इसके बाद महिम और सरयू के जीवन की अशांति, महिम का सरयू को खून करने के लिए उद्यत होना, बीच में शान्ता का आगमन इत्यादि बाह्य घटनाओं से नाटक पूर्ण है। शांता के चरित्र का माहात्म्य दिखाकर लेखक ने यह प्रतिपादित किया है कि गणिका मात्र ही नीच नहीं होतीं । पतिताओं का चरित्र चित्रण समस्या - नाटकों का भी एक विषय रहा है जैसे 'राक्षस का मंदिर' की अश्गरी वेश्या । किंतु अनेक रोमांचकारी घटनाओं से पूर्ण किसी परिवार का चित्रग साधारण कोटि का सामाजिक नाटक है । लेखक का अभिप्राय समाज की पतिताओं की समस्या पर बौद्धिक आलोकपात करना नहीं है । इसी तरह गोविंदवल्लभ पन्त ने हिंदी नाटक 'अंगूर की बेटी' में मद्यपान के दुष्परिणामों का चित्रण कया किन्तु उसका भी दृष्टिकोण बौद्धिक नहीं तथा बाह्य घटनाओं से परिपूर्ण है । मोहनदास शराबी है एवं उसकी पत्नि कामिनी इस कारण अत्यन्त दुःखी है । सिनेमा के डायरेक्टर माधव मोहनदास के मद्यपान को और भी उत्साहित करते हैं एवं जब
करीना कपूर खान वैसे तो ज्यादा सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं रहती हैं. लेकिन जब भी वो कोई पोस्ट करती हैं खबरें बन जाती हैं. ऐसा ही कुछ एक बार फिर हुआ है. करीना कपूर ने पति सैफ अली खान और छोटे बेटे जेह की बेहद ही प्यारी फोटो शेयर की है. जिसमें वो कमाल की खूबसूरत लग रही हैं. (SocialLY के साथ पाएं लेटेस्ट ब्रेकिंग न्यूज, वायरल ट्रेंड और सोशल मीडिया की दुनिया से जुड़ी सभी खबरें. यहां आपको ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वायरल होने वाले हर कंटेंट की सीधी जानकारी मिलेगी. ऊपर दिखाया गया पोस्ट अनएडिटेड कंटेंट है, जिसे सीधे सोशल मीडिया यूजर्स के अकाउंट से लिया गया है. लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है. सोशल मीडिया पोस्ट लेटेस्टली के विचारों और भावनाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता है, हम इस पोस्ट में मौजूद किसी भी कंटेंट के लिए कोई जिम्मेदारी या दायित्व स्वीकार नहीं करते हैं. )
करीना कपूर खान वैसे तो ज्यादा सोशल मीडिया पर एक्टिव नहीं रहती हैं. लेकिन जब भी वो कोई पोस्ट करती हैं खबरें बन जाती हैं. ऐसा ही कुछ एक बार फिर हुआ है. करीना कपूर ने पति सैफ अली खान और छोटे बेटे जेह की बेहद ही प्यारी फोटो शेयर की है. जिसमें वो कमाल की खूबसूरत लग रही हैं.
वाशिंगटनः भारतवंशियों के लिए आज सोमवार (9 जनवरी) को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक और अच्छी खबर मिली. दरअसल, भारतीय मूल की मनप्रीत मोनिका सिंह ने हैरिस काउंटी के न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की है, और वह अमेरिका में प्रथम स्त्री सिख न्यायाधीश बन गई हैं. बता दें कि, मनप्रीत का जन्म और पालन-पोषण ह्यूस्टन में ही हुआ है और अब वह अपने पति और दो बच्चों संग बेलेयर में रहती हैं. भारतीय-अमेरिकी जज रवि संदिल ने खचाखच भरे न्यायालय रूम में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता की. संदिल ने बोला कि, 'सिख समुदाय के लिए यह वास्तव में एक जरूरी क्षण है. ' संदिल राज्य के पहले दक्षिण एशियाई जज भी हैं. उन्होंने बोला कि, 'जब वे दूसरे रंग के आदमी को देखते हैं, तो वे जानते हैं कि उनके लिए आसार है. मनप्रीत न केवल सिखों के लिए एक राजदूत हैं, बल्कि वह सभी रंग की स्त्रियों के लिए भी राजदूत हैं. ' बता दें कि, एक अनुमान के मुताबिक, अमेरिका में 500,000 सिख रहते हैं, जिनमें से 20,000 सिख अकेले ह्यूस्टन क्षेत्र में रहते हैं.
वाशिंगटनः भारतवंशियों के लिए आज सोमवार को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक और अच्छी खबर मिली. दरअसल, भारतीय मूल की मनप्रीत मोनिका सिंह ने हैरिस काउंटी के न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण की है, और वह अमेरिका में प्रथम स्त्री सिख न्यायाधीश बन गई हैं. बता दें कि, मनप्रीत का जन्म और पालन-पोषण ह्यूस्टन में ही हुआ है और अब वह अपने पति और दो बच्चों संग बेलेयर में रहती हैं. भारतीय-अमेरिकी जज रवि संदिल ने खचाखच भरे न्यायालय रूम में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता की. संदिल ने बोला कि, 'सिख समुदाय के लिए यह वास्तव में एक जरूरी क्षण है. ' संदिल राज्य के पहले दक्षिण एशियाई जज भी हैं. उन्होंने बोला कि, 'जब वे दूसरे रंग के आदमी को देखते हैं, तो वे जानते हैं कि उनके लिए आसार है. मनप्रीत न केवल सिखों के लिए एक राजदूत हैं, बल्कि वह सभी रंग की स्त्रियों के लिए भी राजदूत हैं. ' बता दें कि, एक अनुमान के मुताबिक, अमेरिका में पाँच सौ,शून्य सिख रहते हैं, जिनमें से बीस,शून्य सिख अकेले ह्यूस्टन क्षेत्र में रहते हैं.
लकेशरी में स्थित फैक्ट्री में कार्यरत श्रमिक की शनिवार देर शाम संदिग्ध हालात में मौत हो गई। परिजनों ने बिना पुलिस को सूचना दिए ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया। लेकिन रविवार को मृतक के परिजनों ने थाने पहुंचकर पुलिस से कार्रवाई की मांग की। घाड क्षेत्र के गांव हसनपुर मदनपुर निवासी 22 वर्षीय ललित लकेश्वरी स्थित एक फैक्ट्री में एक वर्ष से कार्यरत थे। शनिवार शाम फैक्ट्री में काम करते वक्त अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। तभी फैक्ट्री प्रबंधन ने आनन-फानन में उन्हें पास के अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंचे मृतक के परिजन शव को गांव ले गए और बिना पुलिस को सूचना दिए अंतिम संस्कार कर दिया। लेकिन रविवार सुबह मृतक के परिवार के दर्जनों से अधिक लोग ट्रैक्टर ट्राली में सवार होकर थाने पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि मृतक की करंट लगने से मौत हुई है। तभी क्षेत्रीय विधायक ममता राकेश ने भी थाने पहुंचकर मामले की जांच कर कार्यवाही किए जाने की बात पुलिस से कही। पुलिस ने मृतक के परिजनों को आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। भगवानपुर थाना प्रभारी पीडी भट्ट ने बताया कि मामले की पड़ताल कर कार्रवाई की जाएगी।
लकेशरी में स्थित फैक्ट्री में कार्यरत श्रमिक की शनिवार देर शाम संदिग्ध हालात में मौत हो गई। परिजनों ने बिना पुलिस को सूचना दिए ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया। लेकिन रविवार को मृतक के परिजनों ने थाने पहुंचकर पुलिस से कार्रवाई की मांग की। घाड क्षेत्र के गांव हसनपुर मदनपुर निवासी बाईस वर्षीय ललित लकेश्वरी स्थित एक फैक्ट्री में एक वर्ष से कार्यरत थे। शनिवार शाम फैक्ट्री में काम करते वक्त अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। तभी फैक्ट्री प्रबंधन ने आनन-फानन में उन्हें पास के अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंचे मृतक के परिजन शव को गांव ले गए और बिना पुलिस को सूचना दिए अंतिम संस्कार कर दिया। लेकिन रविवार सुबह मृतक के परिवार के दर्जनों से अधिक लोग ट्रैक्टर ट्राली में सवार होकर थाने पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि मृतक की करंट लगने से मौत हुई है। तभी क्षेत्रीय विधायक ममता राकेश ने भी थाने पहुंचकर मामले की जांच कर कार्यवाही किए जाने की बात पुलिस से कही। पुलिस ने मृतक के परिजनों को आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। भगवानपुर थाना प्रभारी पीडी भट्ट ने बताया कि मामले की पड़ताल कर कार्रवाई की जाएगी।
उसकी उतनी स्थिति वह इस जन्म में पूरी कर लेता है। परन्तु यह सब आयुकर्म के प्रभाव से ही होता है। अब नाम कर्म के विषय में कहते हैंनामकम्मं तु दुविहं, सुहमसुहं च आहियं । सुहस्स उ बहू भेया, एमेव असुहस्स वि ॥ १३ ॥ नामकर्म तु द्विविध, शुभमशुभं चाख्यातम् । शुभस्य तु बहवो भेदाः, एवमेवाशुभस्यापि ॥ १३ ॥ पदार्थान्वयः-नामकम्पं-नामकर्म, दुविहं - दो प्रकार का, आहियं कहा है, सुहं - शुभ, च-और, असुहं - अशुभ, सुहस्स उ - शुभ नामकर्म के भी, बहू भेया - बहुत भेद है, एमेव-इसी प्रकार, असुहस्स वि- अशुभ के भी बहुत भेद हैं । मूलार्थ - नामकर्म का दो प्रकार से वर्णन किया गया हैशुभ नाम और अशुभ नाम । शुभ नामकर्म के बहुत भेद हैं तथा अशुभ नामकर्म के भी अनेक भेद हैं। टीका- जिस कर्म के प्रभाव से यह जीवात्मा देव, मनुष्य, तिर्यंच और नारकी आदि नामों से सम्बोधित किया जाता है उसे नामकर्म कहते है। नामकर्म के शुभ नामकर्म और अशुभ नामकर्म ऐसे दो भेद है। यद्यपि शुभ और अशुभ इन दोनों नामकर्मों के उत्तरोत्तर अनन्त भेद हो जाते हैं, तथापि मध्यम मार्ग की विवक्षा से शुभ नामकर्म के ३७ और अशुभ नाम के ३४ उत्तर भेद कथन किए गए हैं। यथा} शुभ नामकर्म के उत्तर भेद - १ मनुष्यगति २ देवगत ३ पञ्चेन्द्रियजाति, ४ औदारिक, ५ वैक्रिन, ६ आहारक, ७. तैजस, ८. कार्मण, पचशरीर ९ सम चतुरस्त्र संस्थान, १०. वज्रऋषभ - नाराच-सहनन, ११ औदारिक, १२ वैक्रिय, १३ आहारक, १४ तीनो शरीरो के प्रशस्त अगोपांग, १५ गन्ध, १६. रस, १७ स्पर्श, १८. मनुष्यानुपूर्वी, १९ देवानुपूर्वी, २० अगुरुलघु, २१. पराघात, २२. उच्छ्वास, २३ आताप, २४ उद्योत, २५ प्रशस्त विहायोगति, २६. त्रस, २७ बादर, २८ पर्याप्त, २९ प्रत्येक, ३०. स्थिर, ३१ शुभ, ३२. सुभग ३३ सुस्वर, ३४ आदेय, ३५ यशः कीर्ति, ३६ निर्माण और ३७ तीर्थकरनाम, ये ३७ भेद शुभ नामकर्म के है। अशुभ नामकर्म के उत्तर भेद - १ नरकगति, २. तिर्यचगति, ३. एकेन्द्रियजाति, ४ द्वीन्द्रियजाति, ५ त्रीन्द्रियजाति, ६ चतुरिन्द्रिय - जाति, ७. ऋषभ-नाराच, ८ नाराच, ९ अर्द्धनाराच, १०. कीलिका, ११. सेवार्त्त, १२. न्यग्रोधमण्डल, १३ साति, १४. वामन, १५. कुब्ज, १६. हुड, १७. अप्रशस्त वर्ण, १८. अप्रशस्त गन्ध, १९ अप्रशस्त रस, २० अप्रशस्त स्पर्श, २१. नरकानुपूर्वी, २२ तिर्यगानुपूर्वी, २३. उपघात, २४ अप्रशस्त विहायोगति, २५ स्थावर, २६. सूक्ष्म, २७ साधारण, २८. अपर्याप्त, २९ १. यहा पर नाम शब्द सब के साथ जोड लेना- जैसे- मनुष्यगति-नाम, इत्यादि । उत्तराध्ययन सूत्रम् - तृतीय भाग [ २९८ ] कम्पप्पयडी तेत्तीसइमं अज्झयणं
उसकी उतनी स्थिति वह इस जन्म में पूरी कर लेता है। परन्तु यह सब आयुकर्म के प्रभाव से ही होता है। अब नाम कर्म के विषय में कहते हैंनामकम्मं तु दुविहं, सुहमसुहं च आहियं । सुहस्स उ बहू भेया, एमेव असुहस्स वि ॥ तेरह ॥ नामकर्म तु द्विविध, शुभमशुभं चाख्यातम् । शुभस्य तु बहवो भेदाः, एवमेवाशुभस्यापि ॥ तेरह ॥ पदार्थान्वयः-नामकम्पं-नामकर्म, दुविहं - दो प्रकार का, आहियं कहा है, सुहं - शुभ, च-और, असुहं - अशुभ, सुहस्स उ - शुभ नामकर्म के भी, बहू भेया - बहुत भेद है, एमेव-इसी प्रकार, असुहस्स वि- अशुभ के भी बहुत भेद हैं । मूलार्थ - नामकर्म का दो प्रकार से वर्णन किया गया हैशुभ नाम और अशुभ नाम । शुभ नामकर्म के बहुत भेद हैं तथा अशुभ नामकर्म के भी अनेक भेद हैं। टीका- जिस कर्म के प्रभाव से यह जीवात्मा देव, मनुष्य, तिर्यंच और नारकी आदि नामों से सम्बोधित किया जाता है उसे नामकर्म कहते है। नामकर्म के शुभ नामकर्म और अशुभ नामकर्म ऐसे दो भेद है। यद्यपि शुभ और अशुभ इन दोनों नामकर्मों के उत्तरोत्तर अनन्त भेद हो जाते हैं, तथापि मध्यम मार्ग की विवक्षा से शुभ नामकर्म के सैंतीस और अशुभ नाम के चौंतीस उत्तर भेद कथन किए गए हैं। यथा} शुभ नामकर्म के उत्तर भेद - एक मनुष्यगति दो देवगत तीन पञ्चेन्द्रियजाति, चार औदारिक, पाँच वैक्रिन, छः आहारक, सात. तैजस, आठ. कार्मण, पचशरीर नौ सम चतुरस्त्र संस्थान, दस. वज्रऋषभ - नाराच-सहनन, ग्यारह औदारिक, बारह वैक्रिय, तेरह आहारक, चौदह तीनो शरीरो के प्रशस्त अगोपांग, पंद्रह गन्ध, सोलह. रस, सत्रह स्पर्श, अट्ठारह. मनुष्यानुपूर्वी, उन्नीस देवानुपूर्वी, बीस अगुरुलघु, इक्कीस. पराघात, बाईस. उच्छ्वास, तेईस आताप, चौबीस उद्योत, पच्चीस प्रशस्त विहायोगति, छब्बीस. त्रस, सत्ताईस बादर, अट्ठाईस पर्याप्त, उनतीस प्रत्येक, तीस. स्थिर, इकतीस शुभ, बत्तीस. सुभग तैंतीस सुस्वर, चौंतीस आदेय, पैंतीस यशः कीर्ति, छत्तीस निर्माण और सैंतीस तीर्थकरनाम, ये सैंतीस भेद शुभ नामकर्म के है। अशुभ नामकर्म के उत्तर भेद - एक नरकगति, दो. तिर्यचगति, तीन. एकेन्द्रियजाति, चार द्वीन्द्रियजाति, पाँच त्रीन्द्रियजाति, छः चतुरिन्द्रिय - जाति, सात. ऋषभ-नाराच, आठ नाराच, नौ अर्द्धनाराच, दस. कीलिका, ग्यारह. सेवार्त्त, बारह. न्यग्रोधमण्डल, तेरह साति, चौदह. वामन, पंद्रह. कुब्ज, सोलह. हुड, सत्रह. अप्रशस्त वर्ण, अट्ठारह. अप्रशस्त गन्ध, उन्नीस अप्रशस्त रस, बीस अप्रशस्त स्पर्श, इक्कीस. नरकानुपूर्वी, बाईस तिर्यगानुपूर्वी, तेईस. उपघात, चौबीस अप्रशस्त विहायोगति, पच्चीस स्थावर, छब्बीस. सूक्ष्म, सत्ताईस साधारण, अट्ठाईस. अपर्याप्त, उनतीस एक. यहा पर नाम शब्द सब के साथ जोड लेना- जैसे- मनुष्यगति-नाम, इत्यादि । उत्तराध्ययन सूत्रम् - तृतीय भाग [ दो सौ अट्ठानवे ] कम्पप्पयडी तेत्तीसइमं अज्झयणं
अमरावती/ दि. 19- केन्द्र सरकार द्बारा 1995 वें में कामगारों के लिए पेंशन योजना लागू की गई थी. इस योजना में देश के लगभग 197 उद्योग के कामगारों का समावेश था. कामगारों की तनखा से हर माह पहले 471 रूपये व उसके पश्चात 571 तथा साल 2011 के बाद 1200 रूपये की कटौती की गई थी. जिसमें बिजली विभाग, एसटी महामंडल, सुतगिरनी के कामगारों को 30 से 35 साल की सेवा के पश्चात केवल 2 से 3 हजार रूपये ही पेंशन दी जा रही है. कामगारों को दी जानेवाली पेंशन इतनी कम है कि कामगार अपना उदरनिर्वाह कैसे करे यह समस्या उनके समक्ष निर्माण हो रही है. कामगारों की पेंशन बढाई जाए, ऐसी मांग साहित्यिक भारतीय मजदूर संघ के कार्यकर्ता विष्णु सोलंके ने केन्द्रीय मंत्री नितीन गडकरी से की. जिसमें उन्होंने इस आशय का निवेदन अमरावती के दौरे पर आए केन्द्रीय मंत्री गडकरी को सौंपा और कामगारों की पेंशन बढाए जाने की मांग की.
अमरावती/ दि. उन्नीस- केन्द्र सरकार द्बारा एक हज़ार नौ सौ पचानवे वें में कामगारों के लिए पेंशन योजना लागू की गई थी. इस योजना में देश के लगभग एक सौ सत्तानवे उद्योग के कामगारों का समावेश था. कामगारों की तनखा से हर माह पहले चार सौ इकहत्तर रूपये व उसके पश्चात पाँच सौ इकहत्तर तथा साल दो हज़ार ग्यारह के बाद एक हज़ार दो सौ रूपये की कटौती की गई थी. जिसमें बिजली विभाग, एसटी महामंडल, सुतगिरनी के कामगारों को तीस से पैंतीस साल की सेवा के पश्चात केवल दो से तीन हजार रूपये ही पेंशन दी जा रही है. कामगारों को दी जानेवाली पेंशन इतनी कम है कि कामगार अपना उदरनिर्वाह कैसे करे यह समस्या उनके समक्ष निर्माण हो रही है. कामगारों की पेंशन बढाई जाए, ऐसी मांग साहित्यिक भारतीय मजदूर संघ के कार्यकर्ता विष्णु सोलंके ने केन्द्रीय मंत्री नितीन गडकरी से की. जिसमें उन्होंने इस आशय का निवेदन अमरावती के दौरे पर आए केन्द्रीय मंत्री गडकरी को सौंपा और कामगारों की पेंशन बढाए जाने की मांग की.
कासगंज। कासगंज में व्यापारी नेता पर जानलेवा हमला हुआ है। जहां एक मटर व्यवसायी पर हमले के बाद उपद्रवियों ने जमकर लूट की है। वहीं परिजनों का आरोप है कि लगभग 5 लाख रुपए और लाइसेंसी पिस्टल लेकर उपद्रवियों ने गाड़ी को निशाना बनाकर पूरी तरह से ध्वस्त किया है। बता दें ये पूरा मामला कासगंज कोतवाली के अंतर्गत मोहनपुरा स्थित मटर मंडी का है। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद भी मटर मंडी में जमकर बवाल होता रहा। फिलहाल हमले में घायल व्यापारी दुर्गेश माहेश्वरी को कासगंज से आगरा के लिए रेफर कर दिया गया है।
कासगंज। कासगंज में व्यापारी नेता पर जानलेवा हमला हुआ है। जहां एक मटर व्यवसायी पर हमले के बाद उपद्रवियों ने जमकर लूट की है। वहीं परिजनों का आरोप है कि लगभग पाँच लाख रुपए और लाइसेंसी पिस्टल लेकर उपद्रवियों ने गाड़ी को निशाना बनाकर पूरी तरह से ध्वस्त किया है। बता दें ये पूरा मामला कासगंज कोतवाली के अंतर्गत मोहनपुरा स्थित मटर मंडी का है। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद भी मटर मंडी में जमकर बवाल होता रहा। फिलहाल हमले में घायल व्यापारी दुर्गेश माहेश्वरी को कासगंज से आगरा के लिए रेफर कर दिया गया है।
भारत में एक से बढ़कर एक आलीशान होटल औऱ रिजॉर्ट्स हैं। इनकी भव्यता ऐसी है कि देखने वाले देखते ही रह जाएं। ये होटल और रिजॉर्ट्स देखेन में जितने आलीशान हैं उतनी ही महंगा यहां रुकना भी है। कुछ होटल्स में ऐसे कमरे हैं जिनका एक रात का किराया लाखों में है। आइए डालते हैं भारत के सबसे महंगे होटल्स पर एक नजर(All Photos: Social Media):
भारत में एक से बढ़कर एक आलीशान होटल औऱ रिजॉर्ट्स हैं। इनकी भव्यता ऐसी है कि देखने वाले देखते ही रह जाएं। ये होटल और रिजॉर्ट्स देखेन में जितने आलीशान हैं उतनी ही महंगा यहां रुकना भी है। कुछ होटल्स में ऐसे कमरे हैं जिनका एक रात का किराया लाखों में है। आइए डालते हैं भारत के सबसे महंगे होटल्स पर एक नजर: