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की तरह अनेक रूप में दिखाई देता है । तात्पर्य यह है कि एक ही ब्रह्म सकल पदार्थों के रूप में परिणमित व प्रतिभासित होता है । इस दृष्टि से वेदान्त ( उत्तरमीमांसा ) दर्शन अभेदवादी है, द्रव्यवादी है, द्रव्याथिक नय को एकान्त दृष्टि रखता है, परमसंग्रहवादी और नित्यवादी जैनदर्शन के निश्चयनय (शुद्धसंग्रहनय) की दृष्टि से 'एगे आया' आत्मा एक ही है, क्योंकि आत्मा अयप्रदेश सर्वप्राणियों में समान हैं तथा सर्वप्राणियों के आत्मा का लक्षण. उपयोग (ज्ञाताद्रष्टा) एक समान है । समस्त आत्माओं की सत्ता एक है, सब आत्माओं में द्रव्य-गुण-पर्यायरूप धर्म एक ही है । निश्चयनय आत्मा के बन्ध को नही मानता । परन्तु आत्मा मुक्त भी नहीं होता, यह बात निश्चयदृष्टि से इस प्रकार घटित हो सकती है शुद्ध आत्मा न तो बन्धता है, न मुक्त होता है; क्योंकि जो बंधता ही नहीं, उसके मुक्त होने की भी जरूरत नहीं रहती; वस्तुतः आत्मा सर्वथा सर्वदा मुक्त ही है । निश्चयनयानुसार यह बात सत्य है । इसलिए इसे जिनवरतत्त्वज्ञानरूपी कलावृक्ष का एक हाय कहना उचित ही है। यद्यपि वेदान्त की पूर्वोक्त वातें अंशसत्य है, अंशसत्य को सर्वसत्य नहीं समझना चाहिए ।
भेद और अभेद में लोक - अलोक का आलम्बन कैसे ? जैनदर्शन की विश्व व्यवस्था भेद और अभेद दोनों तत्त्वों पर व्यवस्थित है । जगत् में कोई भी पदार्थ ऐसा नहीं है, जिसमें भेद और अभेद दोनों न हों । दीपक से ले कर आकाश तक तमाम पदार्थ भेद और अभेद से युक्त हैं । उदाहरणार्थ -नट एक होते हुए भी वह अलग-अलग वेश धारण करता है. तव पृथक् पृथक् ( भिन्न-भिन्न ) वेश में, भिन्न भिन्न नाम से पहचाना जाता है ! इस प्रकार उसमें पृथक्त्व और एकत्व दोनों दिखाई देते हैं। पुस्तक एक होते हुए भी उसके पन्ने अलग-अलग होते हैं । पुस्तक यदि सर्वथा एक ही हो तो अलग अलग फ्न्ने क्यों पढ़े जाते ? और पन्ने अगर सर्वथा अलग-अलग होते तो एक पन्ने के विषय सम्बन्ध दूसरे पन्ने के साथ न मिलता, पुस्तक भी एक नहीं कहलाती ।
'एक एच हि भूतात्मा भूते-भूते व्यवस्थितः । एकधा बहुधा चैव दृश्यते जलचन्द्रवत् ॥' | की तरह अनेक रूप में दिखाई देता है । तात्पर्य यह है कि एक ही ब्रह्म सकल पदार्थों के रूप में परिणमित व प्रतिभासित होता है । इस दृष्टि से वेदान्त दर्शन अभेदवादी है, द्रव्यवादी है, द्रव्याथिक नय को एकान्त दृष्टि रखता है, परमसंग्रहवादी और नित्यवादी जैनदर्शन के निश्चयनय की दृष्टि से 'एगे आया' आत्मा एक ही है, क्योंकि आत्मा अयप्रदेश सर्वप्राणियों में समान हैं तथा सर्वप्राणियों के आत्मा का लक्षण. उपयोग एक समान है । समस्त आत्माओं की सत्ता एक है, सब आत्माओं में द्रव्य-गुण-पर्यायरूप धर्म एक ही है । निश्चयनय आत्मा के बन्ध को नही मानता । परन्तु आत्मा मुक्त भी नहीं होता, यह बात निश्चयदृष्टि से इस प्रकार घटित हो सकती है शुद्ध आत्मा न तो बन्धता है, न मुक्त होता है; क्योंकि जो बंधता ही नहीं, उसके मुक्त होने की भी जरूरत नहीं रहती; वस्तुतः आत्मा सर्वथा सर्वदा मुक्त ही है । निश्चयनयानुसार यह बात सत्य है । इसलिए इसे जिनवरतत्त्वज्ञानरूपी कलावृक्ष का एक हाय कहना उचित ही है। यद्यपि वेदान्त की पूर्वोक्त वातें अंशसत्य है, अंशसत्य को सर्वसत्य नहीं समझना चाहिए । भेद और अभेद में लोक - अलोक का आलम्बन कैसे ? जैनदर्शन की विश्व व्यवस्था भेद और अभेद दोनों तत्त्वों पर व्यवस्थित है । जगत् में कोई भी पदार्थ ऐसा नहीं है, जिसमें भेद और अभेद दोनों न हों । दीपक से ले कर आकाश तक तमाम पदार्थ भेद और अभेद से युक्त हैं । उदाहरणार्थ -नट एक होते हुए भी वह अलग-अलग वेश धारण करता है. तव पृथक् पृथक् वेश में, भिन्न भिन्न नाम से पहचाना जाता है ! इस प्रकार उसमें पृथक्त्व और एकत्व दोनों दिखाई देते हैं। पुस्तक एक होते हुए भी उसके पन्ने अलग-अलग होते हैं । पुस्तक यदि सर्वथा एक ही हो तो अलग अलग फ्न्ने क्यों पढ़े जाते ? और पन्ने अगर सर्वथा अलग-अलग होते तो एक पन्ने के विषय सम्बन्ध दूसरे पन्ने के साथ न मिलता, पुस्तक भी एक नहीं कहलाती । 'एक एच हि भूतात्मा भूते-भूते व्यवस्थितः । एकधा बहुधा चैव दृश्यते जलचन्द्रवत् ॥' |
Prabhat Ranjan : आजकल मीडिया में प्रिया सिंह पॉल का नाम चर्चा में है। 90 के दशक में जब भारत में निजी टीवी चैनलों का विस्तार हो रहा था तो उनका नाम जाना पहचाना था। जहां तक मुझे याद आता है वह ज़ी टीवी चैनल की प्रोग्रामिंग हेड भी थीं। न जाने कितने नामों को उन्होंने टीवी के पर्दे पर चमकाया। बाद में उस दौर में टीवी के सभी प्रमुख नामों के साथ उनका नाम भी गुम हो गया।
अब अचानक टीवी धारावाहिकों की कहानी की तरह उन्होंने यह कहना शुरू कर दिया है कि वह संजय गांधी की पुत्री हैं। मधुर भंडारकर की फ़िल्म 'इंदु सरकार" के ऊपर आपत्ति की है कि फ़िल्म में उनके 'पिता' संजय गांधी का किरदार ठीक तरह से पेश नहीं किया गया है। जबकि नेहरू-गांधी परिवार के असली वारिसों ने अभी तक इस फ़िल्म को लेकर कुछ नहीं कहा है। मीडिया में जिस तरह से उनका जीवन उभरकर आ रहा है वह अपने आप में किसी रहस्य रोमांच से भरे उपन्यास की कथा की तरह लग रहा है।
बहरहाल, मुझे अपने सीतामढ़ी के पास बने उस विशाल मठ के अंतिम महंत की मौत का किस्सा याद आ गया। महंत जी की मौत के बाद गांव की अनेक औरतें अपने अपने हाथ की चूड़ियां फोड़कर माथे का सिंदूर मिटाने लगीं। सबका कहना था कि महंत जी की मौत के कारण वे विधवा हो गईं। गांव के दर्जनों युवक अपने अपने सिर मुंडाकर उनको मुखाग्नि देंने के लिए आगे आ गए। सबका दावा था कि महंत जी उनके पिता थे। जब विरासत बड़ी होती है तो दावेदार उभर कर आते ही रहते हैं।
पत्रकार और साहित्यकार प्रभात रंजन की एफबी वॉल से.
| Prabhat Ranjan : आजकल मीडिया में प्रिया सिंह पॉल का नाम चर्चा में है। नब्बे के दशक में जब भारत में निजी टीवी चैनलों का विस्तार हो रहा था तो उनका नाम जाना पहचाना था। जहां तक मुझे याद आता है वह ज़ी टीवी चैनल की प्रोग्रामिंग हेड भी थीं। न जाने कितने नामों को उन्होंने टीवी के पर्दे पर चमकाया। बाद में उस दौर में टीवी के सभी प्रमुख नामों के साथ उनका नाम भी गुम हो गया। अब अचानक टीवी धारावाहिकों की कहानी की तरह उन्होंने यह कहना शुरू कर दिया है कि वह संजय गांधी की पुत्री हैं। मधुर भंडारकर की फ़िल्म 'इंदु सरकार" के ऊपर आपत्ति की है कि फ़िल्म में उनके 'पिता' संजय गांधी का किरदार ठीक तरह से पेश नहीं किया गया है। जबकि नेहरू-गांधी परिवार के असली वारिसों ने अभी तक इस फ़िल्म को लेकर कुछ नहीं कहा है। मीडिया में जिस तरह से उनका जीवन उभरकर आ रहा है वह अपने आप में किसी रहस्य रोमांच से भरे उपन्यास की कथा की तरह लग रहा है। बहरहाल, मुझे अपने सीतामढ़ी के पास बने उस विशाल मठ के अंतिम महंत की मौत का किस्सा याद आ गया। महंत जी की मौत के बाद गांव की अनेक औरतें अपने अपने हाथ की चूड़ियां फोड़कर माथे का सिंदूर मिटाने लगीं। सबका कहना था कि महंत जी की मौत के कारण वे विधवा हो गईं। गांव के दर्जनों युवक अपने अपने सिर मुंडाकर उनको मुखाग्नि देंने के लिए आगे आ गए। सबका दावा था कि महंत जी उनके पिता थे। जब विरासत बड़ी होती है तो दावेदार उभर कर आते ही रहते हैं। पत्रकार और साहित्यकार प्रभात रंजन की एफबी वॉल से. |
चेन्नई, (भाषा)। जुनैद खान की तूफानी गेंदबाजी के बाद नासिर जमशेद के नाबाद शतक की मदद से पाकिस्तान ने पहले एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में आज यहां भारत को छह विकेट से हराकर तीन मैचें की श्रृंखला में 1-0 की बढ़त बना ली। सलामी बल्लेबाज जमशेद ने 132 गेंद में पांच चौकों और एक छक्के की मदद से नाबाद 101 रन की पारी खेलने के अलावा यूनिस खान (58) के साथ दूसरे विकेट के लिए सिर्फ 121 गेंद पर 112 रन की साझेदारी की जिससे पाकिस्तान ने 228 रन के लक्ष्य को 48-1 ओवर में चार विकेट गंवाकर हासिल कर लिया। जमशेद ने शोएब मलिक (35 गेंद में नाबाद 34) के साथ भी पांचवें विकेट के लिए 56 रन की अटूट साझेदारी की। इससे पहले भारत ने शीर्ष क्रम के ध्वस्त होने के बाद कप्तान महेंद सिंह धोनी (125 गेंद में नाबाद 113 रन) के नाबाद शतक की मदद से छह विकेट पर 227 रन का सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया। पाकिस्तान की ओर से जुनैद ने नौ ओवर में 43 रन देकर चार विकेट चटकाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरे पाकिस्तान की शुरूआत भी अच्छी नहीं रही। टी20 में जानदार पदार्पण करने वाले भुवनेश्वर कुमार ने अपने पहले वनडे को भी यादगार बनाते हुए इनस्विंग होती अपनी पहली गेंद पर ही मोहम्मद हफीज (00) को बोल्ड कर दिया जिन्होंने गेंद को खेलने को कोई रुचि नहीं दिखाई। वह सदगोपन रमेश के बाद दूसरे भारतीय गेंदबाज हैं जिन्होंने वनडे में अपनी पहली गेंद पर विकेट चटकाया। अंपायर बिली बोडेन ने अगली गेंद पर अजहर अली (09) के खिलाफ भुवनेश्वर की पगबाधा की विश्वसनीय अपील "gकरा दी और गेंद चार रन के लिए गई। पहले 10 ओवर में सिर्फ यही गेंद बाउंड्री तक पहुंची। अजहर और जमशेद ने इसके बाद विकेट पर टिकने को तरजीह दी। दोनों ने 10 ओवर में टीम का स्कोर एक विकेट पर 21 रन तक पहुंचाया। धोनी ने भुवनेश्वर को लंबा स्पैल दिया जिसका फायदा उन्हें 11वें ओवर में मिला जब अजहर उनकी गेंद को हवा में लहरा गए और मिड विकेट पर रोहित ने आसान कैच लपका। भुवनेश्वर ने सात ओवर के स्पैल में केवल 11 रन देकर दो विकेट हासिल किए जिसमें तीन ओवर मेडन रहे। अनुभवी यूनिस ने इसके बाद क्रीज पर कदम रखा और मैच का रुख बदल दिया। उन्होंने स्वच्छंद होकर बल्लेबाजी करते हुए टीम के उढपर बना दबाव हटाया। जमशेद 24 रन के स्कोर पर भाग्यशाली रहे जब रविचंदन अश्विन की गेंद पर सहवाग ने पहली स्लिप में उनका कैच लपका। गेंद जमशेद के बल्ले का किनारा लेने के बाद स्लिप में पहुंची थी लेकिन अंपायर ने अश्विन की अपील "gकरा दी। यूनिस ने इशांत शर्मा पर चौके के साथ खाता खोलने के बाद युवराज सिंह पर लगातार दो चौके मारे। उन्होंने जमशेद के साथ मिलकर 26वें ओवर में टीम का स्कोर 100 रन तक पहुंचाया। जमशेद ने अश्विन की गेंद पर एक रन के साथ 76 गेंद में अर्धशतक पूरा किया जबकि यूनिस ने रैना के ओवर में दो छक्के जड़कर 53 गेंद में अपना 48वां अर्धशतक पूरा किया। पाकिस्तान को अंतिम 20 ओवर में जीत के लिए सिर्फ 95 रन की दरकार थी। धोनी ने ऐsसे में गेंद अशोक डिंडा को थमाई जिन्होंने तीसरी गेंद पर ही यूनिस को मिडविकेट पर अश्विन के हाथों कैच करा दिया। यूनिस ने 60 गेंद की अपनी पारी में तीन चौके और एक छक्का मारा। जमशेद को 68 रन के स्कोर पर जीवनदान मिला जब प्वाइंट पर युवराज ने डिंडा की गेंद पर उनका आसान कैच छोड़ दिया। मिसबाह उल हक (16) ने वनडे क्रिकेट में तीन हजार रन पूरे किए लेकिन इशांत की धीमी गेंद को चूककर बोल्ड हो गए। दूसरा पावर प्ले 35वें ओवर में लिया गया जिसमें पांच ओवर में सिर्फ 13 रन बने जबकि इस दौरान मिसबाह आउट हुए। अश्विन ने आ" रन के निजी स्कोर पर शोएब मलिक को धोनी के हाथों कैच कराया लेकिन यह नोबाल हो गई। जमशेद ने डिंडा की गेंद पर एक रन के साथ 127 गेंद में अपना दूसरा शतक पूरा किया और फिर मलिक के साथ मिलकर टीम को आसानी से लक्ष्य तक पहुंचाया। भारत की ओर से भुवनेश्वर ने 27 रन देकर दो विकेट चटकाए। डिंडा और इशांत को एक एक विकेट मिला। इससे पहले जुनैद ने मिसबाह के पहले गेंदबाजी करने के फैसले को सही साबित किया। भारत ने 10 ओवर में 29 रन तक पांच विकेट गंवाए दिए थे। धोनी ने इसके बाद 125 गेंद में सात चौकों और तीन छक्कों की मदद से नाबाद 113 रन की पारी खेली पारी को संवारा। उन्होंने सुरेश रैना (43) के साथ छ"s विकेट के लिए 73 जबकि अश्विन (नाबाद 31) के साथ सातवें विकेट के लिए 16 . 5 ओवर में 125 रन की अटूट साझेदारी की। खराब फार्म के कारण आलोचनाओं का सामना कर रहे धोनी ने वनडे क्रिकेट में सात हजार रन भी पूरे किए। वह यह उलपब्धि हासिल करने वाले सातवें भारतीय बल्लेबाज बने। भारत की शुरूआत बुरे सपने की तरह रही। जुनैद ने सलामी बल्लेबाज वीरेंद सहवाग (04) को अपना पहला शिकार बनाया। दिल्ली का यह आक्रामक बल्लेबाज जुनैद की इनस्विंगर पर बोल्ड हुआ। रात हुई बारिश के कारण हालात बल्लेबाजी के लिए काफी अच्छे नहीं थे जिसका मेहमान टीम के गेंदबाजों ने पूरा फायदा उ"ाया। जुनैद ने इसके बाद विराट कोहली (00), युवराज सिंह (02) और रोहित शर्मा (04) को भी पवेलियन की राह दिखाई जबकि मोहम्मद इरफान ने गौतम गंभीर (08) को बोल्ड किया। रोहित ने एक बार फिर निराश किया और 14 गेंद खेलने के बाद जुनैद की गेंद पर तीसरी स्लिप में मोहम्मद हफीज को कैच थमा बै"s। उन्होंने अपनी पिछली छह पारियों में 4, 4, 4, 0, 0 और 5 रन बनाए हैं। धोनी और रैना ने इसके बाद पारी को संवारा। दोनों ने पाकिस्तानी गेंदबाजों को 23 ओवर तक विकेट से महरूम रखा। धोनी को 26वें ओवर में 16 रन के निजी स्कोर पर जीवनदान मिला जब विरोधी कप्तान मिसबाह ने हफीज की गेंद पर मिडविकेट पर उनका कैच छोड़ दिया। भारतीय कप्तान को इस पारी के दौरान पानी की कमी और मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या से भी जूझना पड़ा। रैना की धैर्यपूर्ण पारी का अंत हफीज ने उनका लेग स्टंप उखाड़कर किया। उन्हेंने 88 गेंद का सामना करते हुए दो चौके मारे। धोनी पर हालांकि इसका कोई असर नहीं पड़ा। उन्होंने गुल की गेंद को मिड विकेट के उढपर से चार रन के लिए भेजकर अपना अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने दिग्गज स्पिनर सईद अजमल पर छक्का भी मारा। धोनी ने 49वें ओवर में इरफान की गेंद को कवर क्षेत्र में छह रन के लिए भेजकर अपना शतक पूरा किया। भारत ने इस ओवर में 21 रन जुटाए। इससे पहले रात हुई बारिश के कारण मैच एक घंटा देर से शुरू हुआ। यह पहला मैच है जो आईसीसी के नये नियमों के तहत खेला गया। इन नियमों के अनुसार दोनों छोर से एक नयी गेंद का इस्तेमाल किया गया, एक ओवर में गेंदबाज को दो बाउंसर फेंकने की स्वीकृति थी, गेंदबाजी पावर प्ले नहीं था, बल्लेबाजी पावरप्ले को 40वें ओवर से पहले समाप्त करना था और पारी के दौरान किसी भी समय चार से अधिक क्षेत्ररक्षकों को 30 गज के घेरे से बाहर खड़े होने की स्वीकृति नहीं थी।
| चेन्नई, । जुनैद खान की तूफानी गेंदबाजी के बाद नासिर जमशेद के नाबाद शतक की मदद से पाकिस्तान ने पहले एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में आज यहां भारत को छह विकेट से हराकर तीन मैचें की श्रृंखला में एक-शून्य की बढ़त बना ली। सलामी बल्लेबाज जमशेद ने एक सौ बत्तीस गेंद में पांच चौकों और एक छक्के की मदद से नाबाद एक सौ एक रन की पारी खेलने के अलावा यूनिस खान के साथ दूसरे विकेट के लिए सिर्फ एक सौ इक्कीस गेंद पर एक सौ बारह रन की साझेदारी की जिससे पाकिस्तान ने दो सौ अट्ठाईस रन के लक्ष्य को अड़तालीस-एक ओवर में चार विकेट गंवाकर हासिल कर लिया। जमशेद ने शोएब मलिक के साथ भी पांचवें विकेट के लिए छप्पन रन की अटूट साझेदारी की। इससे पहले भारत ने शीर्ष क्रम के ध्वस्त होने के बाद कप्तान महेंद सिंह धोनी के नाबाद शतक की मदद से छह विकेट पर दो सौ सत्ताईस रन का सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया। पाकिस्तान की ओर से जुनैद ने नौ ओवर में तैंतालीस रन देकर चार विकेट चटकाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरे पाकिस्तान की शुरूआत भी अच्छी नहीं रही। टीबीस में जानदार पदार्पण करने वाले भुवनेश्वर कुमार ने अपने पहले वनडे को भी यादगार बनाते हुए इनस्विंग होती अपनी पहली गेंद पर ही मोहम्मद हफीज को बोल्ड कर दिया जिन्होंने गेंद को खेलने को कोई रुचि नहीं दिखाई। वह सदगोपन रमेश के बाद दूसरे भारतीय गेंदबाज हैं जिन्होंने वनडे में अपनी पहली गेंद पर विकेट चटकाया। अंपायर बिली बोडेन ने अगली गेंद पर अजहर अली के खिलाफ भुवनेश्वर की पगबाधा की विश्वसनीय अपील "gकरा दी और गेंद चार रन के लिए गई। पहले दस ओवर में सिर्फ यही गेंद बाउंड्री तक पहुंची। अजहर और जमशेद ने इसके बाद विकेट पर टिकने को तरजीह दी। दोनों ने दस ओवर में टीम का स्कोर एक विकेट पर इक्कीस रन तक पहुंचाया। धोनी ने भुवनेश्वर को लंबा स्पैल दिया जिसका फायदा उन्हें ग्यारहवें ओवर में मिला जब अजहर उनकी गेंद को हवा में लहरा गए और मिड विकेट पर रोहित ने आसान कैच लपका। भुवनेश्वर ने सात ओवर के स्पैल में केवल ग्यारह रन देकर दो विकेट हासिल किए जिसमें तीन ओवर मेडन रहे। अनुभवी यूनिस ने इसके बाद क्रीज पर कदम रखा और मैच का रुख बदल दिया। उन्होंने स्वच्छंद होकर बल्लेबाजी करते हुए टीम के उढपर बना दबाव हटाया। जमशेद चौबीस रन के स्कोर पर भाग्यशाली रहे जब रविचंदन अश्विन की गेंद पर सहवाग ने पहली स्लिप में उनका कैच लपका। गेंद जमशेद के बल्ले का किनारा लेने के बाद स्लिप में पहुंची थी लेकिन अंपायर ने अश्विन की अपील "gकरा दी। यूनिस ने इशांत शर्मा पर चौके के साथ खाता खोलने के बाद युवराज सिंह पर लगातार दो चौके मारे। उन्होंने जमशेद के साथ मिलकर छब्बीसवें ओवर में टीम का स्कोर एक सौ रन तक पहुंचाया। जमशेद ने अश्विन की गेंद पर एक रन के साथ छिहत्तर गेंद में अर्धशतक पूरा किया जबकि यूनिस ने रैना के ओवर में दो छक्के जड़कर तिरेपन गेंद में अपना अड़तालीसवां अर्धशतक पूरा किया। पाकिस्तान को अंतिम बीस ओवर में जीत के लिए सिर्फ पचानवे रन की दरकार थी। धोनी ने ऐsसे में गेंद अशोक डिंडा को थमाई जिन्होंने तीसरी गेंद पर ही यूनिस को मिडविकेट पर अश्विन के हाथों कैच करा दिया। यूनिस ने साठ गेंद की अपनी पारी में तीन चौके और एक छक्का मारा। जमशेद को अड़सठ रन के स्कोर पर जीवनदान मिला जब प्वाइंट पर युवराज ने डिंडा की गेंद पर उनका आसान कैच छोड़ दिया। मिसबाह उल हक ने वनडे क्रिकेट में तीन हजार रन पूरे किए लेकिन इशांत की धीमी गेंद को चूककर बोल्ड हो गए। दूसरा पावर प्ले पैंतीसवें ओवर में लिया गया जिसमें पांच ओवर में सिर्फ तेरह रन बने जबकि इस दौरान मिसबाह आउट हुए। अश्विन ने आ" रन के निजी स्कोर पर शोएब मलिक को धोनी के हाथों कैच कराया लेकिन यह नोबाल हो गई। जमशेद ने डिंडा की गेंद पर एक रन के साथ एक सौ सत्ताईस गेंद में अपना दूसरा शतक पूरा किया और फिर मलिक के साथ मिलकर टीम को आसानी से लक्ष्य तक पहुंचाया। भारत की ओर से भुवनेश्वर ने सत्ताईस रन देकर दो विकेट चटकाए। डिंडा और इशांत को एक एक विकेट मिला। इससे पहले जुनैद ने मिसबाह के पहले गेंदबाजी करने के फैसले को सही साबित किया। भारत ने दस ओवर में उनतीस रन तक पांच विकेट गंवाए दिए थे। धोनी ने इसके बाद एक सौ पच्चीस गेंद में सात चौकों और तीन छक्कों की मदद से नाबाद एक सौ तेरह रन की पारी खेली पारी को संवारा। उन्होंने सुरेश रैना के साथ छ"s विकेट के लिए तिहत्तर जबकि अश्विन के साथ सातवें विकेट के लिए सोलह . पाँच ओवर में एक सौ पच्चीस रन की अटूट साझेदारी की। खराब फार्म के कारण आलोचनाओं का सामना कर रहे धोनी ने वनडे क्रिकेट में सात हजार रन भी पूरे किए। वह यह उलपब्धि हासिल करने वाले सातवें भारतीय बल्लेबाज बने। भारत की शुरूआत बुरे सपने की तरह रही। जुनैद ने सलामी बल्लेबाज वीरेंद सहवाग को अपना पहला शिकार बनाया। दिल्ली का यह आक्रामक बल्लेबाज जुनैद की इनस्विंगर पर बोल्ड हुआ। रात हुई बारिश के कारण हालात बल्लेबाजी के लिए काफी अच्छे नहीं थे जिसका मेहमान टीम के गेंदबाजों ने पूरा फायदा उ"ाया। जुनैद ने इसके बाद विराट कोहली , युवराज सिंह और रोहित शर्मा को भी पवेलियन की राह दिखाई जबकि मोहम्मद इरफान ने गौतम गंभीर को बोल्ड किया। रोहित ने एक बार फिर निराश किया और चौदह गेंद खेलने के बाद जुनैद की गेंद पर तीसरी स्लिप में मोहम्मद हफीज को कैच थमा बै"s। उन्होंने अपनी पिछली छह पारियों में चार, चार, चार, शून्य, शून्य और पाँच रन बनाए हैं। धोनी और रैना ने इसके बाद पारी को संवारा। दोनों ने पाकिस्तानी गेंदबाजों को तेईस ओवर तक विकेट से महरूम रखा। धोनी को छब्बीसवें ओवर में सोलह रन के निजी स्कोर पर जीवनदान मिला जब विरोधी कप्तान मिसबाह ने हफीज की गेंद पर मिडविकेट पर उनका कैच छोड़ दिया। भारतीय कप्तान को इस पारी के दौरान पानी की कमी और मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या से भी जूझना पड़ा। रैना की धैर्यपूर्ण पारी का अंत हफीज ने उनका लेग स्टंप उखाड़कर किया। उन्हेंने अठासी गेंद का सामना करते हुए दो चौके मारे। धोनी पर हालांकि इसका कोई असर नहीं पड़ा। उन्होंने गुल की गेंद को मिड विकेट के उढपर से चार रन के लिए भेजकर अपना अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने दिग्गज स्पिनर सईद अजमल पर छक्का भी मारा। धोनी ने उनचासवें ओवर में इरफान की गेंद को कवर क्षेत्र में छह रन के लिए भेजकर अपना शतक पूरा किया। भारत ने इस ओवर में इक्कीस रन जुटाए। इससे पहले रात हुई बारिश के कारण मैच एक घंटा देर से शुरू हुआ। यह पहला मैच है जो आईसीसी के नये नियमों के तहत खेला गया। इन नियमों के अनुसार दोनों छोर से एक नयी गेंद का इस्तेमाल किया गया, एक ओवर में गेंदबाज को दो बाउंसर फेंकने की स्वीकृति थी, गेंदबाजी पावर प्ले नहीं था, बल्लेबाजी पावरप्ले को चालीसवें ओवर से पहले समाप्त करना था और पारी के दौरान किसी भी समय चार से अधिक क्षेत्ररक्षकों को तीस गज के घेरे से बाहर खड़े होने की स्वीकृति नहीं थी। |
भारत में हुई नोटबंदी को पूरे दो साल हो चुके हैं. आठ नवंबर दो हजार सोलह के दिन आधी रात से देश में जारी हज़ार और पांच सौ रुपए के नोट बेकार हो गए थे. इसके बाद सरकार की ओर से नए पांच सौ और दो हजार रुपए के नोट जारी किए गए थे.
इसके कुछ दिन बाद सरकार ने दौ सौ रुपए, सौ रुपए, पचास रुपए, और दस रुपए के नए नोट भी जारी किए जो भारत में चल में है. लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि भारत सरकार की ओर से जारी इन नए नोटों में से दो हजार, पांच सौ और दो सौ के रुपए के नोट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. जी हां, पड़ोसी देश नेपाल की सररकार ने ये फैसला लिया है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया है.
यानी नेपाल में 100 रुपए से ज्यादा की भारतीय मुद्रा के चलन पर रोक लगा दी गई है. नेपाली अखबार काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अब 100 रुपये से ज्यादा के भारतीय नोट यानी 200, 500 और 2000 रुपये का नोट ना रखें.
आपको बता दें कि भारत में जब नोटबंदी हुई थी, तब नेपाल में बड़ी तादात में 500 और 1000 के पुराने नोट थे. जिसकी वजह से वो नोट वहां पर ही अटक गए थे. इसी समस्या को देखते हुए नेपाल में अब इन नोटों के इस्तेमाल पर ही रोक लगा दी है.
आपको जानकारी दे दें, कि भारतीय मुद्रा नेपाल में आसानी से चलती थी. लेकिन नोटबंदी के बाद नेपाल के कई बैकों में सैकड़ों करोड़ रुपए के पुराने नोट फंसे हुए थे, जो वापस नहीं हो पाए थे. जिससे नेपाल की अर्थव्यवस्था पर काफी असर पड़ा था. तो अगर आप भी नेपाल से सटे इलाके में रहते हैं और वहां आपका जाना आना है या फिर आप टूरिस्ट हैं और नेपाल जाने की योजना बना रहे हैं. तो वहां जाने से पहले सौ रुपए से कम की भारतीय मुद्रा का इंतज़ाम कर लें क्योंकि बड़े नोट वहां नहीं चलने वाले और आपको वहां दिक्कत हो सकती है.
| भारत में हुई नोटबंदी को पूरे दो साल हो चुके हैं. आठ नवंबर दो हजार सोलह के दिन आधी रात से देश में जारी हज़ार और पांच सौ रुपए के नोट बेकार हो गए थे. इसके बाद सरकार की ओर से नए पांच सौ और दो हजार रुपए के नोट जारी किए गए थे. इसके कुछ दिन बाद सरकार ने दौ सौ रुपए, सौ रुपए, पचास रुपए, और दस रुपए के नए नोट भी जारी किए जो भारत में चल में है. लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि भारत सरकार की ओर से जारी इन नए नोटों में से दो हजार, पांच सौ और दो सौ के रुपए के नोट पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. जी हां, पड़ोसी देश नेपाल की सररकार ने ये फैसला लिया है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया है. यानी नेपाल में एक सौ रुपयापए से ज्यादा की भारतीय मुद्रा के चलन पर रोक लगा दी गई है. नेपाली अखबार काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अब एक सौ रुपयापये से ज्यादा के भारतीय नोट यानी दो सौ, पाँच सौ और दो हज़ार रुपयापये का नोट ना रखें. आपको बता दें कि भारत में जब नोटबंदी हुई थी, तब नेपाल में बड़ी तादात में पाँच सौ और एक हज़ार के पुराने नोट थे. जिसकी वजह से वो नोट वहां पर ही अटक गए थे. इसी समस्या को देखते हुए नेपाल में अब इन नोटों के इस्तेमाल पर ही रोक लगा दी है. आपको जानकारी दे दें, कि भारतीय मुद्रा नेपाल में आसानी से चलती थी. लेकिन नोटबंदी के बाद नेपाल के कई बैकों में सैकड़ों करोड़ रुपए के पुराने नोट फंसे हुए थे, जो वापस नहीं हो पाए थे. जिससे नेपाल की अर्थव्यवस्था पर काफी असर पड़ा था. तो अगर आप भी नेपाल से सटे इलाके में रहते हैं और वहां आपका जाना आना है या फिर आप टूरिस्ट हैं और नेपाल जाने की योजना बना रहे हैं. तो वहां जाने से पहले सौ रुपए से कम की भारतीय मुद्रा का इंतज़ाम कर लें क्योंकि बड़े नोट वहां नहीं चलने वाले और आपको वहां दिक्कत हो सकती है. |
हालांकि अभी तक इस एक्सीडेंट को लेकर पुलिस की तरफ से कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि कितने लोग घायल हुए हैं और कितने की मौत हुई है ? लेकिन स्पॉट से जो तस्वीर मिली है, उससे साफ लग रहा है कि हादसा बहुत बड़ा है।
थार गाड़ी की हालत देखकर भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह कितनी स्पीड में होगी। उधर मौके पर पहुंची पुलिस की टीम ने आनन-फानन में घायलों को नजदीकी हॉस्पिटल में भर्ती कराया। आगे की छानबीन पुलिस ने शुरू कर दी है।
चश्मदीदों ने बताया कि रोड एक्सीडेंट काफी खतरनाक था। एक्सीडेंट के बाद कार कई बार पलटी थी। कार की चपेट में आए लोग बुरी तरह घायल हो गए। घायल लोगों को आनन फानन में अस्पताल ले जाया गया। दो लोगों की हालत गंभीर है।
(रिपोर्टः नवीन निश्चल)
| हालांकि अभी तक इस एक्सीडेंट को लेकर पुलिस की तरफ से कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि कितने लोग घायल हुए हैं और कितने की मौत हुई है ? लेकिन स्पॉट से जो तस्वीर मिली है, उससे साफ लग रहा है कि हादसा बहुत बड़ा है। थार गाड़ी की हालत देखकर भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह कितनी स्पीड में होगी। उधर मौके पर पहुंची पुलिस की टीम ने आनन-फानन में घायलों को नजदीकी हॉस्पिटल में भर्ती कराया। आगे की छानबीन पुलिस ने शुरू कर दी है। चश्मदीदों ने बताया कि रोड एक्सीडेंट काफी खतरनाक था। एक्सीडेंट के बाद कार कई बार पलटी थी। कार की चपेट में आए लोग बुरी तरह घायल हो गए। घायल लोगों को आनन फानन में अस्पताल ले जाया गया। दो लोगों की हालत गंभीर है। |
Sonipat Triple Murder: सोनीपत के अगवानपुर गांव में दो सगे भाइयों ने शख्स की हत्या तो ग्रामीणों ने दोनों को बेरहमी से पीट पीटकर उतारा मौत के घाट उतार दिया. मृतक सगे भाइयों ने विजयपाल नाम के शख्स की गोली मारकर हत्या कर दी थी.
'दोस्ताना संबंध, गीतिका को फायदा. . . ', गोपाल कांडा मामले में कोर्ट ने क्या कहा?
Red Dairy पर BJP युवा मोर्चा का प्रदर्शन, Congress Office की दीवार पर लिखा- लाल डायरी कहां मिलेगी?
| Sonipat Triple Murder: सोनीपत के अगवानपुर गांव में दो सगे भाइयों ने शख्स की हत्या तो ग्रामीणों ने दोनों को बेरहमी से पीट पीटकर उतारा मौत के घाट उतार दिया. मृतक सगे भाइयों ने विजयपाल नाम के शख्स की गोली मारकर हत्या कर दी थी. 'दोस्ताना संबंध, गीतिका को फायदा. . . ', गोपाल कांडा मामले में कोर्ट ने क्या कहा? Red Dairy पर BJP युवा मोर्चा का प्रदर्शन, Congress Office की दीवार पर लिखा- लाल डायरी कहां मिलेगी? |
बीजिंग, 9 जनवरी (आईएएनएस)। चीन ने मंगलवार को 0.5 मीटर के उच्च क्षमता वाला दूरसंवेदी उपग्रह छोड़ा। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, शांक्सी प्रांत के ताइयुआन उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से सुपर व्यू-1 03/04 उपग्रह 'लॉन्ग मार्च 2डी रॉकेट' के जरिए सुबह 11.24 बजे छोड़ा गया।
अधिकारियों के मुताबिक, 0.5 मीटर रेजोल्यूशन वाली व्यावसायिक तस्वीरें उपलब्ध कराने में सक्षम उपग्रह के जरिए दुनियाभर के ग्राहकों को दूरसंवेदी डेटा और भूमि व संसाधन सर्वेक्षण, नक्शा, पर्यावरण निगरानी, वित्तीय व बीमा सेवा के साथ ही इंटरनेट उद्योग को सेवाएं उपलब्ध कराने की संभावना है।
'चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन' ने यह उपग्रह विकसित किए हैं।
कॉरपोरेशन ने दूसरी बार वाणिज्यिक दूरसंवेदी उपग्रह छोड़े हैं। इससे पहले इसने दिसंबर 2016 में सुपरव्यू-1 01/02 का प्रक्षेपण किया था।
नई दिल्ली। क्रिकेट के दीवानों के लिए खुशखबरी। भारत के जिन क्रिकेट स्टेडियमों में आईसीसी विश्व कप 2023 होने वाला है, वहां रिलायंस जियो की डाउनलोड स्पीड एयरटेल से दोगुना और वोडाफोन आइडिया से 3.5 गुना अधिक तेज है।
ओपन सिग्नल की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय क्रिकटे स्टेडियमों के अंदर और बाहर नापी गई डाउनलोड स्पीड में जियो ने बाजी मारी।
रिलायंस जियो की औसत डाउनलोड स्पीड 61.7 एमबीपीएस मापी गई। वहीं एयरटेल 30.5 एमबीपीएस के साथ दूसरे, तो वोडाफोन आइडिया 17.7 एमबीपीएस के साथ तीसरे स्थान पर पिछड़ता नजर आया।
ओपन सिग्नल की रिपोर्ट में 5जी डाउनलोड स्पीड के मामले में भी रिलायंस जियो पहले पायदान पर रहा। जियो की 5जी डाउनलोड स्पीड एयरटेल से 25.5 फीसदी अधिक रही।
जियो की औसत 5जी डाउनलोड स्पीड 344.5 एमबीपीएस दर्ज की गई वहीं एयरटेल 274.5 एमबीपीएस के साथ दूसरे नंबर पर रहा। बताते चलें कि वोडाफोन आइडिया अभी 5जी सर्विस नहीं देता। आईसीसी वर्ल्ड कप 2023 के मैच देश के 10 स्टेडियमों में होंगे।
इनमें अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम जैसे नए स्टेडियम से लेकर कोलकाता के ईडन गार्डन जैसे ऐतिहासिक स्टेडियम शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, बैंग्लुरू, लखनऊ और धर्मशाला के क्रिकेट स्टेडियमों में भी मैच होंगे।
क्रिकेट स्टेडियमों में कुल अपलोड स्पीड के मामले में कांटे की टक्कर नजर आई। एयरटेल की औसत अपलोड स्पीड 6.6 एमबीपीएस तो जियो की 6.3 एमबीपीएस मापी गई।
वोडाफोन आइडिया 5.8 एमबीपीएस के साथ तीसरे स्थान पर रहा। औसत 5जी अपलोड के मामले में एयरटेल अव्वल रहा, एयरटेल की स्पीड 26.3 एमबीपीएस तो रिलायंस जियो की 21.6 एमबीपीएस रही।
ओपन सिग्नल ने आईसीसी वर्ल्ड कप के स्टेडियमों के अंदर और बाहर 5जी कनेक्टिविटी की उपलब्धता की भी जांच की। नेटवर्क की उपलब्धता उपभोक्ताओं द्वारा 5जी नेटवर्क पर बिताए गए समय से निकाली जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक विश्व कप स्टेडियमों में 5G उपलब्धता के मामले में जियो शीर्ष पर रहा।
जियो के उपभोक्त 53% से अधिक समय 5जी नेटवर्क से जुड़े रहे। जबकि एयरटेल के उपभोक्ता मात्र 20.7% वक्त ही 5जी नेटवर्क से जुड़ सके। इस हिसाब से जियो के 5जी नेटवर्क की उपलब्धता एयरटेल से 2.6 गुना अधिक दर्ज की गई।
| बीजिंग, नौ जनवरी । चीन ने मंगलवार को शून्य दशमलव पाँच मीटर के उच्च क्षमता वाला दूरसंवेदी उपग्रह छोड़ा। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, शांक्सी प्रांत के ताइयुआन उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र से सुपर व्यू-एक तीन/चार उपग्रह 'लॉन्ग मार्च दोडी रॉकेट' के जरिए सुबह ग्यारह.चौबीस बजे छोड़ा गया। अधिकारियों के मुताबिक, शून्य दशमलव पाँच मीटर रेजोल्यूशन वाली व्यावसायिक तस्वीरें उपलब्ध कराने में सक्षम उपग्रह के जरिए दुनियाभर के ग्राहकों को दूरसंवेदी डेटा और भूमि व संसाधन सर्वेक्षण, नक्शा, पर्यावरण निगरानी, वित्तीय व बीमा सेवा के साथ ही इंटरनेट उद्योग को सेवाएं उपलब्ध कराने की संभावना है। 'चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन' ने यह उपग्रह विकसित किए हैं। कॉरपोरेशन ने दूसरी बार वाणिज्यिक दूरसंवेदी उपग्रह छोड़े हैं। इससे पहले इसने दिसंबर दो हज़ार सोलह में सुपरव्यू-एक एक/दो का प्रक्षेपण किया था। नई दिल्ली। क्रिकेट के दीवानों के लिए खुशखबरी। भारत के जिन क्रिकेट स्टेडियमों में आईसीसी विश्व कप दो हज़ार तेईस होने वाला है, वहां रिलायंस जियो की डाउनलोड स्पीड एयरटेल से दोगुना और वोडाफोन आइडिया से तीन.पाँच गुना अधिक तेज है। ओपन सिग्नल की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय क्रिकटे स्टेडियमों के अंदर और बाहर नापी गई डाउनलोड स्पीड में जियो ने बाजी मारी। रिलायंस जियो की औसत डाउनलोड स्पीड इकसठ.सात एमबीपीएस मापी गई। वहीं एयरटेल तीस.पाँच एमबीपीएस के साथ दूसरे, तो वोडाफोन आइडिया सत्रह.सात एमबीपीएस के साथ तीसरे स्थान पर पिछड़ता नजर आया। ओपन सिग्नल की रिपोर्ट में पाँचजी डाउनलोड स्पीड के मामले में भी रिलायंस जियो पहले पायदान पर रहा। जियो की पाँचजी डाउनलोड स्पीड एयरटेल से पच्चीस.पाँच फीसदी अधिक रही। जियो की औसत पाँचजी डाउनलोड स्पीड तीन सौ चौंतालीस.पाँच एमबीपीएस दर्ज की गई वहीं एयरटेल दो सौ चौहत्तर.पाँच एमबीपीएस के साथ दूसरे नंबर पर रहा। बताते चलें कि वोडाफोन आइडिया अभी पाँचजी सर्विस नहीं देता। आईसीसी वर्ल्ड कप दो हज़ार तेईस के मैच देश के दस स्टेडियमों में होंगे। इनमें अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम जैसे नए स्टेडियम से लेकर कोलकाता के ईडन गार्डन जैसे ऐतिहासिक स्टेडियम शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, बैंग्लुरू, लखनऊ और धर्मशाला के क्रिकेट स्टेडियमों में भी मैच होंगे। क्रिकेट स्टेडियमों में कुल अपलोड स्पीड के मामले में कांटे की टक्कर नजर आई। एयरटेल की औसत अपलोड स्पीड छः.छः एमबीपीएस तो जियो की छः.तीन एमबीपीएस मापी गई। वोडाफोन आइडिया पाँच.आठ एमबीपीएस के साथ तीसरे स्थान पर रहा। औसत पाँचजी अपलोड के मामले में एयरटेल अव्वल रहा, एयरटेल की स्पीड छब्बीस.तीन एमबीपीएस तो रिलायंस जियो की इक्कीस.छः एमबीपीएस रही। ओपन सिग्नल ने आईसीसी वर्ल्ड कप के स्टेडियमों के अंदर और बाहर पाँचजी कनेक्टिविटी की उपलब्धता की भी जांच की। नेटवर्क की उपलब्धता उपभोक्ताओं द्वारा पाँचजी नेटवर्क पर बिताए गए समय से निकाली जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक विश्व कप स्टेडियमों में पाँचG उपलब्धता के मामले में जियो शीर्ष पर रहा। जियो के उपभोक्त तिरेपन% से अधिक समय पाँचजी नेटवर्क से जुड़े रहे। जबकि एयरटेल के उपभोक्ता मात्र बीस.सात% वक्त ही पाँचजी नेटवर्क से जुड़ सके। इस हिसाब से जियो के पाँचजी नेटवर्क की उपलब्धता एयरटेल से दो.छः गुना अधिक दर्ज की गई। |
मुंबई, 26 नवंबर (आईएएनएस)। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त करते हुए 'महा विकास अगाड़ी' ने मंगलवार शाम उन्हें सर्वसम्मति से अपना नेता चुन लिया।
उद्धव ठाकरे का नाम राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बालासाहेब थोरात ने यहां 'महा विकास अगाड़ी' की सभी दलों की बैठक में प्रस्तावित किया।
इस अवसर पर राकांपा अध्यक्ष शरद पवार, समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अबू आसिम आजमी, स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी और शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के अन्य शीर्ष नेता मौजूद रहे।
संकेतों के अनुसार, 'महा विकास अगाड़ी' गठबंधन मंगलवार रात राज्यपाल के पास महाराष्ट्र में सरकार बनाने का दावा पेश कर सकता है।
गौरतलब है कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने फडणवीस सरकार को बुधवार शाम पांच बजे तक विधानसभा के पटल पर बहुमत सिद्ध करने का निर्देश जारी किया था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता देवेंद्र फडणवीस ने समर्थन जुटाने में असमर्थता जताते हुए शक्ति-परीक्षण से पहले ही मुख्मयंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उनसे पहले राकांपा में वापस लौटे 'बागी' नेता अजित पवार ने भी उप-मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
| मुंबई, छब्बीस नवंबर । शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त करते हुए 'महा विकास अगाड़ी' ने मंगलवार शाम उन्हें सर्वसम्मति से अपना नेता चुन लिया। उद्धव ठाकरे का नाम राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष बालासाहेब थोरात ने यहां 'महा विकास अगाड़ी' की सभी दलों की बैठक में प्रस्तावित किया। इस अवसर पर राकांपा अध्यक्ष शरद पवार, समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अबू आसिम आजमी, स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के अध्यक्ष राजू शेट्टी और शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के अन्य शीर्ष नेता मौजूद रहे। संकेतों के अनुसार, 'महा विकास अगाड़ी' गठबंधन मंगलवार रात राज्यपाल के पास महाराष्ट्र में सरकार बनाने का दावा पेश कर सकता है। गौरतलब है कि मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने फडणवीस सरकार को बुधवार शाम पांच बजे तक विधानसभा के पटल पर बहुमत सिद्ध करने का निर्देश जारी किया था। भारतीय जनता पार्टी के नेता देवेंद्र फडणवीस ने समर्थन जुटाने में असमर्थता जताते हुए शक्ति-परीक्षण से पहले ही मुख्मयंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उनसे पहले राकांपा में वापस लौटे 'बागी' नेता अजित पवार ने भी उप-मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। |
अघ तिमिर दूरत हरि नांव तें ।।
क्यौं रजनी चलिवै को चंचल थिर न रहत रवि घाम तें ।। सुमिररण सारण प्रगट जसु जाकौं भवतारण गुरणग्राम तें ।। जामण मरण विघरण टारण कोई और नहीं बड़राम तें ।। तैं ।। कलह केलि कलु काल कलपना कटत कलपतर छाम मिटत दुरति दुर्वास दुसह दुख सुख उपजत अभिराम तैं । पतित पावन पद परसत छूटत छल बल काम तें ॥ तन मन सुद्ध कररण करुरणामय नर निर्मल निकाम ते ॥ हरि हरि हरि सुमरन सोई सुकृत विक्त मन धन वाम तें ॥ असर सरग प्रेम रत जन को करण अरति भ्रम भाम तैं ।। हरि सुमरें ताको भय नाहीं निर्भों निज विश्राम तें ॥ लिपें नहीं संसार सु परसा अधिकारी जल जाम ते ॥
श्रवरण - कीर्तन की भांति स्मरण-भक्ति का भी महत्व है । मन को विषय-वासनाओं से हटाकर बार बार प्रभु का स्मरण करना, हरिनाम का मनन एव मानसिक जाप करना ही स्मरण भक्ति है । यही नाम स्मरण पाप हरण है तथा मोक्ष दायक है; जिन्होंने हरि स्मरण किया है उन्हें इसका शुभ फल मिला हैःहरि हरि सुमरि न कोई हार्यो ।
जिन सुमर्यो तिनहि गति पाई राखि सरणि अपरणी निस्तार्यो ।। केरू सभा सकल नृप देखत सती विपति पति नाम संभार्यो ।। हा हा कार सबद सुनि संकट तहि औसरि प्रभु प्रकट पधार्यो । परसराम प्रभु मिटैन कबहू साखि निगम प्रहलाद पुकार्यो ।। ( ब ) पाद सेवन-पूजन-अर्चन और वंदनःसगुण संप्रदायों में वैधी भक्ति की इन साधनाओं का बड़ा महत्व है । भक्त जब अपने सेव्य स्वरूप की इन विधियों से साधना करता है
तो उसके मन में दास्य-भाव का उद्रक होता है और धीरे धीरे वह मानसिक पाद पूजन-अर्चन की कोटि में पहुंच जाता है। परशुरामदेव के काव्य में इन भक्ति-साधनों के पर्याप्त लक्षरण मिलते हैंः
( १ ) गोविन्द मैं वंदीजन तेरा ।
प्रात समै नित उठि गाऊं तो गाऊं तो मन मानै मेरा । किर्तम कर्म भर्म कुल करणी ताकि नाहिन आसा. तेरा नांव लियां मन मानै हरि सुमरणं वेसासा ॥ - नित करू पुकार द्वार सिर नाऊं गाऊं ब्रह्म विधाता ।। परसराम जन करत वीनती सुनि प्रभु अवगति नाथा ॥ सेवा श्री गोपाल की मेरे मन भावे ।। मनसा वाचा कर्मरणा याही मन आवै ।। करि दंडीत सनेह सौं सऩमुख सिर नावै ॥ लोचन भरि भरि भाव सौ. हरि दरसन पावै ।। -हरि चरण कंवल हिरदै सदा थिर वसावै ! प्रोम नेम निचौ ग़है मन दै लिव लावै ॥ उमगि उमगि आनन्द सौं हरि के गुरण गावै ।। यौं प्रसाद फल परसराम जो हरिभगत कहावै ।।
प्रेमाभक्ति की दो अवस्थाएं मानी गई हैं-प्रमावस्था और भावावस्था । दास्य-सख्य-आत्मनिवेदन भक्ति-रस के उत्पादक भाव हैं । रूपगोस्वामी ने पांच भक्ति रस माने हैं और समस्त भावों को इन्हीं के अन्तर्गत माना है । आपने प्रीति रस में दास्य भाव, प्रेम में सख्य भाव, वात्सल्य में वात्सल्यता, मधुर रस में आत्मनिवेदन तथा शांत रस में वैराग्य भाव माना है। इस प्रकार आपने शान्त, दास्य, सख्य, वात्सल्य और मधुर-पांच प्रकार की रसोपासना का विवेचन किया है । परशुरामदेव | अघ तिमिर दूरत हरि नांव तें ।। क्यौं रजनी चलिवै को चंचल थिर न रहत रवि घाम तें ।। सुमिररण सारण प्रगट जसु जाकौं भवतारण गुरणग्राम तें ।। जामण मरण विघरण टारण कोई और नहीं बड़राम तें ।। तैं ।। कलह केलि कलु काल कलपना कटत कलपतर छाम मिटत दुरति दुर्वास दुसह दुख सुख उपजत अभिराम तैं । पतित पावन पद परसत छूटत छल बल काम तें ॥ तन मन सुद्ध कररण करुरणामय नर निर्मल निकाम ते ॥ हरि हरि हरि सुमरन सोई सुकृत विक्त मन धन वाम तें ॥ असर सरग प्रेम रत जन को करण अरति भ्रम भाम तैं ।। हरि सुमरें ताको भय नाहीं निर्भों निज विश्राम तें ॥ लिपें नहीं संसार सु परसा अधिकारी जल जाम ते ॥ श्रवरण - कीर्तन की भांति स्मरण-भक्ति का भी महत्व है । मन को विषय-वासनाओं से हटाकर बार बार प्रभु का स्मरण करना, हरिनाम का मनन एव मानसिक जाप करना ही स्मरण भक्ति है । यही नाम स्मरण पाप हरण है तथा मोक्ष दायक है; जिन्होंने हरि स्मरण किया है उन्हें इसका शुभ फल मिला हैःहरि हरि सुमरि न कोई हार्यो । जिन सुमर्यो तिनहि गति पाई राखि सरणि अपरणी निस्तार्यो ।। केरू सभा सकल नृप देखत सती विपति पति नाम संभार्यो ।। हा हा कार सबद सुनि संकट तहि औसरि प्रभु प्रकट पधार्यो । परसराम प्रभु मिटैन कबहू साखि निगम प्रहलाद पुकार्यो ।। पाद सेवन-पूजन-अर्चन और वंदनःसगुण संप्रदायों में वैधी भक्ति की इन साधनाओं का बड़ा महत्व है । भक्त जब अपने सेव्य स्वरूप की इन विधियों से साधना करता है तो उसके मन में दास्य-भाव का उद्रक होता है और धीरे धीरे वह मानसिक पाद पूजन-अर्चन की कोटि में पहुंच जाता है। परशुरामदेव के काव्य में इन भक्ति-साधनों के पर्याप्त लक्षरण मिलते हैंः गोविन्द मैं वंदीजन तेरा । प्रात समै नित उठि गाऊं तो गाऊं तो मन मानै मेरा । किर्तम कर्म भर्म कुल करणी ताकि नाहिन आसा. तेरा नांव लियां मन मानै हरि सुमरणं वेसासा ॥ - नित करू पुकार द्वार सिर नाऊं गाऊं ब्रह्म विधाता ।। परसराम जन करत वीनती सुनि प्रभु अवगति नाथा ॥ सेवा श्री गोपाल की मेरे मन भावे ।। मनसा वाचा कर्मरणा याही मन आवै ।। करि दंडीत सनेह सौं सऩमुख सिर नावै ॥ लोचन भरि भरि भाव सौ. हरि दरसन पावै ।। -हरि चरण कंवल हिरदै सदा थिर वसावै ! प्रोम नेम निचौ ग़है मन दै लिव लावै ॥ उमगि उमगि आनन्द सौं हरि के गुरण गावै ।। यौं प्रसाद फल परसराम जो हरिभगत कहावै ।। प्रेमाभक्ति की दो अवस्थाएं मानी गई हैं-प्रमावस्था और भावावस्था । दास्य-सख्य-आत्मनिवेदन भक्ति-रस के उत्पादक भाव हैं । रूपगोस्वामी ने पांच भक्ति रस माने हैं और समस्त भावों को इन्हीं के अन्तर्गत माना है । आपने प्रीति रस में दास्य भाव, प्रेम में सख्य भाव, वात्सल्य में वात्सल्यता, मधुर रस में आत्मनिवेदन तथा शांत रस में वैराग्य भाव माना है। इस प्रकार आपने शान्त, दास्य, सख्य, वात्सल्य और मधुर-पांच प्रकार की रसोपासना का विवेचन किया है । परशुरामदेव |
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने गुरुवार को आयरलैंड और अफगानिस्तान को टेस्ट टीमों का दर्जा दे दिया है। ये दोनों टीमें अब आईसीसी की पूर्ण सदस्य बन गई हैं और अब ये क्रमशः 11वें और 12वीं टेस्ट टीमें होंगी।
आईसीसी ने यहां आयोजित फुल काउंलिस मीटिंग में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया। आईसीसी की मेंम्बर कमिटि ने इन दो टीमों को पूर्ण टेस्ट टीम का दर्जा दिए जाने की वकालत की थी।
आयरलैंड और अफगानिस्तान की पुरुष टीम को पांच दिन का टेस्ट क्रिकेट खेलने का दर्जा दे दिया गया है। टेस्ट को खेल का सर्वोच्च प्रारूप है।
पिछली बार आईसीसी ने वर्ष 2000 में किसी टीम को टेस्ट टीम का दर्जा दिया गया था। तब बांग्लादेशी टीम को यह दर्जा दिया गया था। पर अब अफगानिस्तान और आयरलैंड को भी इस ग्रुप में शामिल कर लिया गया है। इसमें ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे संस्थापक सदस्यों के अलावा, साउथ अफ्रीका, न्यू जीलैंड, भारत, वेस्ट इंडीज, पाकिस्तान, श्री लंका और जिम्बाब्वे जैसी टीमें शामिल हैं। पहला टेस्ट मैच मेलबर्न में वर्ष 1877 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच ही खेला गया था।
| अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने गुरुवार को आयरलैंड और अफगानिस्तान को टेस्ट टीमों का दर्जा दे दिया है। ये दोनों टीमें अब आईसीसी की पूर्ण सदस्य बन गई हैं और अब ये क्रमशः ग्यारहवें और बारहवीं टेस्ट टीमें होंगी। आईसीसी ने यहां आयोजित फुल काउंलिस मीटिंग में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया। आईसीसी की मेंम्बर कमिटि ने इन दो टीमों को पूर्ण टेस्ट टीम का दर्जा दिए जाने की वकालत की थी। आयरलैंड और अफगानिस्तान की पुरुष टीम को पांच दिन का टेस्ट क्रिकेट खेलने का दर्जा दे दिया गया है। टेस्ट को खेल का सर्वोच्च प्रारूप है। पिछली बार आईसीसी ने वर्ष दो हज़ार में किसी टीम को टेस्ट टीम का दर्जा दिया गया था। तब बांग्लादेशी टीम को यह दर्जा दिया गया था। पर अब अफगानिस्तान और आयरलैंड को भी इस ग्रुप में शामिल कर लिया गया है। इसमें ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसे संस्थापक सदस्यों के अलावा, साउथ अफ्रीका, न्यू जीलैंड, भारत, वेस्ट इंडीज, पाकिस्तान, श्री लंका और जिम्बाब्वे जैसी टीमें शामिल हैं। पहला टेस्ट मैच मेलबर्न में वर्ष एक हज़ार आठ सौ सतहत्तर में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच ही खेला गया था। |
Punjab Congress Fight: पंजाब में जारी राजनीतिक घमासान के बीच बुधवार को मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी. मुख्यमंत्री का कहना है कि सिद्धू से उन्होंने फोन पर बात की है और उनसे चर्चा लगातार जारी है.
पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने बुधवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पार्टी ही सुप्रीम होती है, सरकार पार्टी की विचारधारा पर ही आगे बढ़ रही है.
"पार्टी का जो हेड है, उसे परिवार में अपनी बात रखनी चाहिए. मैंने सिद्धू साहब से फोन पर बात की है, पार्टी ही सुप्रीम होती है. उन्हें आकर बात करने के लिए कहा है, सरकार पार्टी की विचारधारा पर ही काम कर रही है. आज या कल में बात हो जाएगी, समय दिया गया है".
गौरतलब है कि नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से मंगलवार को इस्तीफा दिया है. बुधवार को सिद्धू ने एक वीडियो जारी किया और पंजाब सरकार के फैसलों, नियुक्तियों पर सवाल खड़े कर दिए.
नवजोत सिंह सिद्धू ने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर दाग लगा था, उन्हें सरकार में जगह दी गई. ऐसे में ये ठीक नहीं है, वह अपने एजेंडे से पीछे नहीं हट सकते हैं. इसलिए उन्होंने अपना पद छोड़ दिया है.
किस बात पर खफा हुए थे सिद्धू?
आपको बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा पंजाब सरकार के नए एडवोकेट जनरल और कुछ मंत्रियों की नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े किए गए थे. साथ ही नवजोत सिंह सिद्धू कुछ अधिकारियों की सीएमओ में नियुक्ति चाहते थे, जो नहीं हो सका था.
कांग्रेस आलाकमान द्वारा अभी नवजोत सिंह सिद्धू को मनाने की कोशिश नहीं हो रही हैं. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने नया प्रदेश अध्यक्ष ढूंढने के लिए अपने कदम बढ़ा दिए हैं.
| Punjab Congress Fight: पंजाब में जारी राजनीतिक घमासान के बीच बुधवार को मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी. मुख्यमंत्री का कहना है कि सिद्धू से उन्होंने फोन पर बात की है और उनसे चर्चा लगातार जारी है. पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने बुधवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पार्टी ही सुप्रीम होती है, सरकार पार्टी की विचारधारा पर ही आगे बढ़ रही है. "पार्टी का जो हेड है, उसे परिवार में अपनी बात रखनी चाहिए. मैंने सिद्धू साहब से फोन पर बात की है, पार्टी ही सुप्रीम होती है. उन्हें आकर बात करने के लिए कहा है, सरकार पार्टी की विचारधारा पर ही काम कर रही है. आज या कल में बात हो जाएगी, समय दिया गया है". गौरतलब है कि नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद से मंगलवार को इस्तीफा दिया है. बुधवार को सिद्धू ने एक वीडियो जारी किया और पंजाब सरकार के फैसलों, नियुक्तियों पर सवाल खड़े कर दिए. नवजोत सिंह सिद्धू ने आरोप लगाया कि जिन लोगों पर दाग लगा था, उन्हें सरकार में जगह दी गई. ऐसे में ये ठीक नहीं है, वह अपने एजेंडे से पीछे नहीं हट सकते हैं. इसलिए उन्होंने अपना पद छोड़ दिया है. किस बात पर खफा हुए थे सिद्धू? आपको बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा पंजाब सरकार के नए एडवोकेट जनरल और कुछ मंत्रियों की नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े किए गए थे. साथ ही नवजोत सिंह सिद्धू कुछ अधिकारियों की सीएमओ में नियुक्ति चाहते थे, जो नहीं हो सका था. कांग्रेस आलाकमान द्वारा अभी नवजोत सिंह सिद्धू को मनाने की कोशिश नहीं हो रही हैं. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने नया प्रदेश अध्यक्ष ढूंढने के लिए अपने कदम बढ़ा दिए हैं. |
अरवल। उजियारपुर प्रखंड में पिछले एक सप्ताह से जारी भीषण ठंड एवं शीतलहरी के कारण आम जन जीवन प्रभावित होकर रहा है। इसको देखते हुए राजद अल्पसंख्यक सेल के प्रदेश महासचिव मोo परवेज आलम ने उजियारपुर के अंचलाधिकारी से प्रखंड के सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर अविलंब अलाव जलाने की मांग की, ताकि गरीबों को कुछ राहत मिल सके। राजद नेता ने कहा कि सर्दी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। घने कोहरे और बढ़ती ठंड से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। मगर अभी तक प्रखंड प्रशासन के द्वारा अलाव की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। ठंड के चलते रात को रेलवे स्टेशन के यात्रियों व गरीब लोगो की परेशानी को देखते हुए अलाव की व्यवस्था की जाए। परवेज आलम ने प्रखंड के लोगों से अपील करते हुए कहा कि जो लोग जिन गर्म वस्त्रों को वह अपने प्रयोग में नहीं ला रहे हैं ऐसी वस्तुओं को अपने आस-पास की झुग्गी-झोंपड़ियों में देकर गरीब लोगों का सहयोग करें ताकि वे भी ठंड से अपनी बचाव कर सकें।
| अरवल। उजियारपुर प्रखंड में पिछले एक सप्ताह से जारी भीषण ठंड एवं शीतलहरी के कारण आम जन जीवन प्रभावित होकर रहा है। इसको देखते हुए राजद अल्पसंख्यक सेल के प्रदेश महासचिव मोo परवेज आलम ने उजियारपुर के अंचलाधिकारी से प्रखंड के सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर अविलंब अलाव जलाने की मांग की, ताकि गरीबों को कुछ राहत मिल सके। राजद नेता ने कहा कि सर्दी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। घने कोहरे और बढ़ती ठंड से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। मगर अभी तक प्रखंड प्रशासन के द्वारा अलाव की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। ठंड के चलते रात को रेलवे स्टेशन के यात्रियों व गरीब लोगो की परेशानी को देखते हुए अलाव की व्यवस्था की जाए। परवेज आलम ने प्रखंड के लोगों से अपील करते हुए कहा कि जो लोग जिन गर्म वस्त्रों को वह अपने प्रयोग में नहीं ला रहे हैं ऐसी वस्तुओं को अपने आस-पास की झुग्गी-झोंपड़ियों में देकर गरीब लोगों का सहयोग करें ताकि वे भी ठंड से अपनी बचाव कर सकें। |
KANPUR: बुधवार को नशे में धुत एक बेखौफ ठेकेदार ने केडीए बिल्डिंग में घुसकर इंजीनियर पर रिवॉल्वर तान दी और जमकर गाली-गलौच की। इससे ऑफिस में मौजूद इंजीनियर्स में अफरातफरी मच गई। उन्होंने ठेकेदार को रोकने की कोशिश की तो वह इंजीनियर्स से भिड़ पड़ा। जैसे-तैसे इंजीनियर्स ने ठेकेदार और उसके साथी ड्राइवर को पकड़कर स्वरूप नगर पुलिस के हवाले कर दिया। ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। सोर्सेज के मुताबिक, ठेकेदार अपने पेमेंट के लिए हफ्तों से चक्कर लगा रहा है। लेकिन सुविधा शुल्क के चक्कर में मामला क्लियर नहीं हो पा रहा था।
केडीए के फर्स्ट फ्लोर में बाईं तरफ के गलियारे में चीफ इंजीनियर का ऑफिस है। इस ऑफिस के आखिरी में रूम नम्बर ख्क्0 है। जिसमें कई इंजीनियर के केबिन हैं। चीफ इंजीनियर के न होने के कारण रूम नम्बर ख्क्0 में बने इस ऑफिस में इंजीनियर्स का का अच्छा-खासा जमावड़ा था। असिसटेंट इंजीनियर संदीप अग्रवाल, जेई वाईपी सिंह, देवेन्द्र सिंह, सतवीर सिंह, राकेश चंद्र गुप्ता के अलावा एनफोर्समेंट में काफी चर्चित रह चुका जेई प्रमोद गुप्ता आदि मौजूद थे। अवैध निर्माणों को लेकर शिकायतों की वजह से उसे हटा दिया गया था। सुबह क्क्. फ्0 बजे नशे में धुत दीपू सिंह उर्फ महेन्द्र सिंह ड्राइवर संजय कुमार के साथ पहुंच गया। उसने प्रमोद गुप्ता को देखकर गालियां देने शुरू कर दी। इंजीनियर्स ने रोकने की कोशिश की तो वह उनसे भिड़ पड़ा।
स्वरूप नगर थाना प्रभारी राजीव द्विवेदी ने बताया कि नशे में धुत दीपू ने रिवॉल्वर भी तान दी। इससे केडीए में अफरातफरी मच गई । जानकारी पाकर आसपास के ऑफिस के इम्प्लाई भी आ गए। इंजीनियर्स ने उनकी मदद से ठेकेदार व उसके ड्राइवर को पकड़कर सचिव जगदीश त्रिपाठी के यहां ले गए। इस बीच जानकारी पाकर स्वरूप नगर पुलिस भी पहुंच गई। स्वरूप नगर थाना प्रभारी राजीव द्विवेदी के मुताबिक केडीए सचिव ने घटना की जानकारी दी थी। नशे में धुत ठेकेदार के द्वारा रिवॉल्वर तानने, धमकियां देने और गाली-गलौच करने की शिकायत की गई। हालांकि ठेकेदार दीपू सिंह ने किसी पर भी रिवॉल्वर तानने से इंकार किया। कहा कि उसके पास रिवॉल्वर थी नहीं, झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।
केडीए इम्प्लाइज सोर्सेज का कहना है कि ठेकेदार लंबे समय से केडीए के कार्यों का ठेका ले रहा है। विवाद की जड़ जवाहरपुरम की एक रोड है, जो करीब फ् करोड़ से दीपू सिंह बना रहा है। लेकिन जेई प्रमोद गुप्ता के कारण उसका पेमेंट लटकाया जा रहा है। पूरा खेल मनमुताबिक सुविधा शुल्क न मिलने का है। इसी वजह से दीपू सिंह काफी समय से केडीए के चक्कर काट रहा है।
केडीए गेट से लेकर पोर्टिको और बिल्डिंग के अन्दर भी होमगार्ड लगे हुए हैं। बावजूद इसके नशे में धुत ठेकेदार रिवॉल्वर लेकर केडीए बिल्डिंग में ही नहीं ऑफिसर्स गलियारे तक पहुंच गया है। इससे केडीए के सिक्योरिटी इंतजामों की भी पोल खुल गई।
केडीए में पोर्टिको सहित कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए है। स्वरूप नगर थाना प्रभारी के मुताबिक सीसीटीवी कैमरा खराब है। जिसके कारण ये पता नहीं लगाया जा सका कि जो रिवॉल्वर ठेकेदार ने इंजीनियर पर तानी थी, वह कहां गई?
-जेई राकेश चन्द्र गुप्ता की तहरीर पर ठेकेदार दीपू सिंह के खिलाफ धारा फ्भ्फ्, भ्0ब्, भ्0म् के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। ठेकेदार के द्वारा रिवॉल्वर तानने की शिकायत की गई, लेकिन मौके पर उसके पास रिवॉल्वर नहीं मिली है।
| KANPUR: बुधवार को नशे में धुत एक बेखौफ ठेकेदार ने केडीए बिल्डिंग में घुसकर इंजीनियर पर रिवॉल्वर तान दी और जमकर गाली-गलौच की। इससे ऑफिस में मौजूद इंजीनियर्स में अफरातफरी मच गई। उन्होंने ठेकेदार को रोकने की कोशिश की तो वह इंजीनियर्स से भिड़ पड़ा। जैसे-तैसे इंजीनियर्स ने ठेकेदार और उसके साथी ड्राइवर को पकड़कर स्वरूप नगर पुलिस के हवाले कर दिया। ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। सोर्सेज के मुताबिक, ठेकेदार अपने पेमेंट के लिए हफ्तों से चक्कर लगा रहा है। लेकिन सुविधा शुल्क के चक्कर में मामला क्लियर नहीं हो पा रहा था। केडीए के फर्स्ट फ्लोर में बाईं तरफ के गलियारे में चीफ इंजीनियर का ऑफिस है। इस ऑफिस के आखिरी में रूम नम्बर ख्क्शून्य है। जिसमें कई इंजीनियर के केबिन हैं। चीफ इंजीनियर के न होने के कारण रूम नम्बर ख्क्शून्य में बने इस ऑफिस में इंजीनियर्स का का अच्छा-खासा जमावड़ा था। असिसटेंट इंजीनियर संदीप अग्रवाल, जेई वाईपी सिंह, देवेन्द्र सिंह, सतवीर सिंह, राकेश चंद्र गुप्ता के अलावा एनफोर्समेंट में काफी चर्चित रह चुका जेई प्रमोद गुप्ता आदि मौजूद थे। अवैध निर्माणों को लेकर शिकायतों की वजह से उसे हटा दिया गया था। सुबह क्क्. फ्शून्य बजे नशे में धुत दीपू सिंह उर्फ महेन्द्र सिंह ड्राइवर संजय कुमार के साथ पहुंच गया। उसने प्रमोद गुप्ता को देखकर गालियां देने शुरू कर दी। इंजीनियर्स ने रोकने की कोशिश की तो वह उनसे भिड़ पड़ा। स्वरूप नगर थाना प्रभारी राजीव द्विवेदी ने बताया कि नशे में धुत दीपू ने रिवॉल्वर भी तान दी। इससे केडीए में अफरातफरी मच गई । जानकारी पाकर आसपास के ऑफिस के इम्प्लाई भी आ गए। इंजीनियर्स ने उनकी मदद से ठेकेदार व उसके ड्राइवर को पकड़कर सचिव जगदीश त्रिपाठी के यहां ले गए। इस बीच जानकारी पाकर स्वरूप नगर पुलिस भी पहुंच गई। स्वरूप नगर थाना प्रभारी राजीव द्विवेदी के मुताबिक केडीए सचिव ने घटना की जानकारी दी थी। नशे में धुत ठेकेदार के द्वारा रिवॉल्वर तानने, धमकियां देने और गाली-गलौच करने की शिकायत की गई। हालांकि ठेकेदार दीपू सिंह ने किसी पर भी रिवॉल्वर तानने से इंकार किया। कहा कि उसके पास रिवॉल्वर थी नहीं, झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। केडीए इम्प्लाइज सोर्सेज का कहना है कि ठेकेदार लंबे समय से केडीए के कार्यों का ठेका ले रहा है। विवाद की जड़ जवाहरपुरम की एक रोड है, जो करीब फ् करोड़ से दीपू सिंह बना रहा है। लेकिन जेई प्रमोद गुप्ता के कारण उसका पेमेंट लटकाया जा रहा है। पूरा खेल मनमुताबिक सुविधा शुल्क न मिलने का है। इसी वजह से दीपू सिंह काफी समय से केडीए के चक्कर काट रहा है। केडीए गेट से लेकर पोर्टिको और बिल्डिंग के अन्दर भी होमगार्ड लगे हुए हैं। बावजूद इसके नशे में धुत ठेकेदार रिवॉल्वर लेकर केडीए बिल्डिंग में ही नहीं ऑफिसर्स गलियारे तक पहुंच गया है। इससे केडीए के सिक्योरिटी इंतजामों की भी पोल खुल गई। केडीए में पोर्टिको सहित कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए है। स्वरूप नगर थाना प्रभारी के मुताबिक सीसीटीवी कैमरा खराब है। जिसके कारण ये पता नहीं लगाया जा सका कि जो रिवॉल्वर ठेकेदार ने इंजीनियर पर तानी थी, वह कहां गई? -जेई राकेश चन्द्र गुप्ता की तहरीर पर ठेकेदार दीपू सिंह के खिलाफ धारा फ्भ्फ्, भ्शून्यब्, भ्शून्यम् के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। ठेकेदार के द्वारा रिवॉल्वर तानने की शिकायत की गई, लेकिन मौके पर उसके पास रिवॉल्वर नहीं मिली है। |
नई दिल्ली विपक्ष के तमाम प्रतिरोधों के बावजूद सरकार लैंड बिल पर दोबारा अध्यादेश ले आई। शुक्रवार को राष्ट्रपति ने फिर से भूमि अधिग्रहण से जुड़े अध्यादेश पर साइन किए। उधर, विपक्षी दलों ने बिल पर अपने विरोध को और तेज करने के संकेत दिए हैं। लैंड बिल से जुड़े पिछले अध्यादेश के खत्म होने से एक दिन पहले सरकार ने राष्ट्रपति से इस पर मंजूरी ले ली।
उल्लेखनीय है कि इस पर पहला अध्यादेश 31 दिसंबर को आया था, जिसकी अवधि 4 अप्रैल को खत्म हो रही है। इसी के मद्देनजर सरकार ने 31 मार्च को दोबारा अध्यादेश का प्रस्ताव राष्ट्रपति को भेजा। उल्लेखनीय है कि सरकार की कोशिश अब 20 अप्रैल से शुरू हो रहे बजट सत्र के अगले हिस्से में इसे राज्यसभा से पास कराना रहेगा, जबकि नंबरों के आधार पर सदन में प्रभावी विपक्ष इसे रेाकने की पूरी कोशिश करेगा।
उल्लेखनीय है कि एनडीए सरकार के लैंड बिल का विरोध कर रहे तमाम राजनैतिक दलों ने पिछले दिनों राष्ट्रपति को ज्ञापन देकर किसान विरोधी अध्यादेश को मंजूरी न देने की अपील की थी। सरकार की मंशा को भांपते हुए विपक्षी दलों ने इस बिल को लेकर देशभर में प्रदर्शन, धरना व विरोध की रणनीति पर अमल करना शुरू कर दिया।
विपक्षी दल यूपीए एनडीए के किए गए संशोधनों को किसान विरोधी करार देते हुए बिल का विरोध कर रहे हैं। वह सरकार से इन संशोधनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में तमाम विपक्षी दल अध्यादेश की विरोध में देश भर में सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
कांग्रेस ने कहा, लोकतंत्र की उपेक्षा पार्टी के सूचना प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने पत्रकारों से कहा कि भूमि अधिग्रहण विधेयक की फिर से घोषणा बताती है कि सरकार संसदीय लोकतंत्र की उपेक्षा कर रही है और प्रधानमंत्री मोदी हठ कर रहे हैं और वह पूंजीपतियों के पक्ष में हैं।
| नई दिल्ली विपक्ष के तमाम प्रतिरोधों के बावजूद सरकार लैंड बिल पर दोबारा अध्यादेश ले आई। शुक्रवार को राष्ट्रपति ने फिर से भूमि अधिग्रहण से जुड़े अध्यादेश पर साइन किए। उधर, विपक्षी दलों ने बिल पर अपने विरोध को और तेज करने के संकेत दिए हैं। लैंड बिल से जुड़े पिछले अध्यादेश के खत्म होने से एक दिन पहले सरकार ने राष्ट्रपति से इस पर मंजूरी ले ली। उल्लेखनीय है कि इस पर पहला अध्यादेश इकतीस दिसंबर को आया था, जिसकी अवधि चार अप्रैल को खत्म हो रही है। इसी के मद्देनजर सरकार ने इकतीस मार्च को दोबारा अध्यादेश का प्रस्ताव राष्ट्रपति को भेजा। उल्लेखनीय है कि सरकार की कोशिश अब बीस अप्रैल से शुरू हो रहे बजट सत्र के अगले हिस्से में इसे राज्यसभा से पास कराना रहेगा, जबकि नंबरों के आधार पर सदन में प्रभावी विपक्ष इसे रेाकने की पूरी कोशिश करेगा। उल्लेखनीय है कि एनडीए सरकार के लैंड बिल का विरोध कर रहे तमाम राजनैतिक दलों ने पिछले दिनों राष्ट्रपति को ज्ञापन देकर किसान विरोधी अध्यादेश को मंजूरी न देने की अपील की थी। सरकार की मंशा को भांपते हुए विपक्षी दलों ने इस बिल को लेकर देशभर में प्रदर्शन, धरना व विरोध की रणनीति पर अमल करना शुरू कर दिया। विपक्षी दल यूपीए एनडीए के किए गए संशोधनों को किसान विरोधी करार देते हुए बिल का विरोध कर रहे हैं। वह सरकार से इन संशोधनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में तमाम विपक्षी दल अध्यादेश की विरोध में देश भर में सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस ने कहा, लोकतंत्र की उपेक्षा पार्टी के सूचना प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने पत्रकारों से कहा कि भूमि अधिग्रहण विधेयक की फिर से घोषणा बताती है कि सरकार संसदीय लोकतंत्र की उपेक्षा कर रही है और प्रधानमंत्री मोदी हठ कर रहे हैं और वह पूंजीपतियों के पक्ष में हैं। |
Summer Vacation in Punjab: गर्मी की छुट्टियो में एक फैमिली ट्रिप पर जाने का मन बना रहे हैं, तो इन छुट्टियों में पंजाब की सैर एकदम बढ़िया हो सकती है। नदी, पहाड़, झील, जंगल और प्रकृति के अनदेखे स्वरूप के बीच परिवार संग क्वालिटी टाइम बिताने के लिए ये रही पंजाब की बेस्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स, जिन्हें आपको समर वेकेशन्स में विजिट करना ही चाहिए।
पंजाब का कपूरथला खूबसूरती के मामले में पेरिस जैसे टूरिस्ट डेस्टिनेशन से कुछ कम नहीं है। जालंधर से करीब 21 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कपूरथला में आपको बेशक ही इंडो-फ्रेंच के आर्किटेक्चर वाली वाइब आएगी। कपूरथला में आपको जगतजीत महल, एलिसी महल, जगतजीत क्लब, मूरिश मस्जिद, शालीमार गार्डन, कांजी वेटलैंड, खेत-खलिहान आदि देखने को मिल सकते हैं।
मोहाली (Tourist places in Punjab)
चंढीगढ़ के पश्चिमी भाग में स्थित मोहाली पंजाब की सबसे खूबसूरत जगहों की लिस्ट में शामिल है। शानदार स्टेडियम, हरियाली, झील, जंगल और सांस्कृतिक केंद्रों से लबरेज मोहाली इन गर्मी की छुट्टियों में विजिट किया जा सकता है। मोहाली में आपको फतेह बुर्ज, अंब साहिब गुरुद्वारा, संत मंडल अंगिता साहिब, थंडर जोन एडवेंचर पार्क, पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम, रॉक गार्डन, मनसा देवी, सुखना झील, सिल्वी पार्क, सुखना वन्यजीव अभयारण्य, रोज़ गार्डन मोहाली में घूमने ेके लिए बहुत ही अच्छी जगह हो सकती है।
पंचकूला (Hill stations in Punjab)
वैसे तो भारत में घूमने फिरने के लिए कई सारे हिल स्टेशन्स हैं, लेकिन अगर आप किसी शांत, सौम्य और सुखदायक वातावरण वाली जगह पर फैमिली के साथ क्वालिटी टाइम बिताना चाह रहे हैं। तो हरियाणा और पंजाब की बॉर्डर पर बसा का पंचकूला आपके लिए अच्छी चॉइस हो सकता है, शांत झील, हिमालय की पर्वतमाला और हरियाली में डूबा पंचकूला नेचर लवर्स के लिए बेस्ट समर डेस्टिनेशन हो सकती है। पंचकूला में आप मोरनी हिल्स, पिंजौर गार्डन, रामगढ़ किला, रानीपुर, बरवाला आदि जैसी जगहों की सैर कर सकते हैं।
भाखड़ा नांगल डैम (Dams in Punjab)
पंजाब के जालंधर से करीब 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भाखड़ा नांगल डैम के बारे में तो आपने भी स्कूल और कॉलेज में सुना ही होगा। सतलुज नदी के छोर पर बने इस डैम की सुंदरता देख बेशक आपका मन भी एकदम खुश हो जाएगा। 226 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस डैम का नज़ारा देखने के साथ साथ आप शिवालिक पर्वतमाला का अनदेखा और अनूठा दृश्य भी देख सकते हैं।
चंढीगढ़ के पास स्थित बरोग एडवेंचर प्रेमियों के घूमने के लिए एकदम परफेक्ट जगह है। शिमला-कालका हाईवे पर स्थित पंजाब का ये हिल स्टेशन ट्रेकिंग, कैम्पिंग और प्रकृति की गोद में कुछ सुकून भरे पल गुजारने के लिए एकदम बेस्ट जगह है। बरोग का चूर चांदनी पीक, सुकेती फॉसिल पार्क, डोलानजी बोन मोनेस्ट्री बरोग की मस्ट विजिट जगहों की लिस्ट में शामिल हैं।
घूमने फिरने के लिए पंजाब का अमृतसर बहुत ही बेहतरीन जगह हो सकती है, गोल्डन टेम्पल, वाघा बॉर्डर, जलियांवाला बाग आदि सबसे प्रसिद्ध जगहों की लिस्ट में शामिल है। छुट्टियों में पंजाब आएं हैं तो एक बार तो अमृतसर की सैर आपको करनी ही करनी चाहिए। आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर से लबरेज अमृतसर की खूबसूरती और अनदेखा माहौल आपका मन मोह लेगा। स्वर्ण मंदिर, वाघा बॉर्डर के साथ आप अमृतसर में राम तीर्थ मंदिर, गोविंदगढ़ किला, पार्टीशन म्यूजियम, साड्डा पिंड, अकाल तख्त, इस्कॉन मंदिर आदि की सैर कर सकते हैं।
हरिके पट्टन (Harike wetland)
नेचर लवर्स और वाइल्ड लाइफ प्रेमियों के लिए पंजाब की सतलुज और ब्यास नदी के संगम पर बना हिरिके पट्टन वेटलेंड और बर्ड सैंक्चुअरी घूमने के लिए एकदम परफेक्ट हो सकता है। इस मानव निर्मित वेटलैंड में आप पक्षियों की अनदेखी और बेहद खूबसूरत प्रजातियां देख प्रकृति का लुत्फ उठा सकते हैं। हरिके पट्टन अमृतसर का ही नहीं बल्कि उत्तर भारत का सबसे बड़ा वेटलैंड है, जहां पक्षियों के साथ साथ आपको कछुओं की सात तरह की अलग अलग प्रजातियों से रूबरू होने का मौका मिलेगा। ये अभ्यारण तरनतारन साहिब के फिरोजपुर से लेकर कपूरथला तक फैला हुआ है।
| Summer Vacation in Punjab: गर्मी की छुट्टियो में एक फैमिली ट्रिप पर जाने का मन बना रहे हैं, तो इन छुट्टियों में पंजाब की सैर एकदम बढ़िया हो सकती है। नदी, पहाड़, झील, जंगल और प्रकृति के अनदेखे स्वरूप के बीच परिवार संग क्वालिटी टाइम बिताने के लिए ये रही पंजाब की बेस्ट टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स, जिन्हें आपको समर वेकेशन्स में विजिट करना ही चाहिए। पंजाब का कपूरथला खूबसूरती के मामले में पेरिस जैसे टूरिस्ट डेस्टिनेशन से कुछ कम नहीं है। जालंधर से करीब इक्कीस किलोग्राममीटर की दूरी पर स्थित कपूरथला में आपको बेशक ही इंडो-फ्रेंच के आर्किटेक्चर वाली वाइब आएगी। कपूरथला में आपको जगतजीत महल, एलिसी महल, जगतजीत क्लब, मूरिश मस्जिद, शालीमार गार्डन, कांजी वेटलैंड, खेत-खलिहान आदि देखने को मिल सकते हैं। मोहाली चंढीगढ़ के पश्चिमी भाग में स्थित मोहाली पंजाब की सबसे खूबसूरत जगहों की लिस्ट में शामिल है। शानदार स्टेडियम, हरियाली, झील, जंगल और सांस्कृतिक केंद्रों से लबरेज मोहाली इन गर्मी की छुट्टियों में विजिट किया जा सकता है। मोहाली में आपको फतेह बुर्ज, अंब साहिब गुरुद्वारा, संत मंडल अंगिता साहिब, थंडर जोन एडवेंचर पार्क, पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम, रॉक गार्डन, मनसा देवी, सुखना झील, सिल्वी पार्क, सुखना वन्यजीव अभयारण्य, रोज़ गार्डन मोहाली में घूमने ेके लिए बहुत ही अच्छी जगह हो सकती है। पंचकूला वैसे तो भारत में घूमने फिरने के लिए कई सारे हिल स्टेशन्स हैं, लेकिन अगर आप किसी शांत, सौम्य और सुखदायक वातावरण वाली जगह पर फैमिली के साथ क्वालिटी टाइम बिताना चाह रहे हैं। तो हरियाणा और पंजाब की बॉर्डर पर बसा का पंचकूला आपके लिए अच्छी चॉइस हो सकता है, शांत झील, हिमालय की पर्वतमाला और हरियाली में डूबा पंचकूला नेचर लवर्स के लिए बेस्ट समर डेस्टिनेशन हो सकती है। पंचकूला में आप मोरनी हिल्स, पिंजौर गार्डन, रामगढ़ किला, रानीपुर, बरवाला आदि जैसी जगहों की सैर कर सकते हैं। भाखड़ा नांगल डैम पंजाब के जालंधर से करीब एक सौ किलोग्राममीटर की दूरी पर स्थित भाखड़ा नांगल डैम के बारे में तो आपने भी स्कूल और कॉलेज में सुना ही होगा। सतलुज नदी के छोर पर बने इस डैम की सुंदरता देख बेशक आपका मन भी एकदम खुश हो जाएगा। दो सौ छब्बीस फीट की ऊंचाई पर स्थित इस डैम का नज़ारा देखने के साथ साथ आप शिवालिक पर्वतमाला का अनदेखा और अनूठा दृश्य भी देख सकते हैं। चंढीगढ़ के पास स्थित बरोग एडवेंचर प्रेमियों के घूमने के लिए एकदम परफेक्ट जगह है। शिमला-कालका हाईवे पर स्थित पंजाब का ये हिल स्टेशन ट्रेकिंग, कैम्पिंग और प्रकृति की गोद में कुछ सुकून भरे पल गुजारने के लिए एकदम बेस्ट जगह है। बरोग का चूर चांदनी पीक, सुकेती फॉसिल पार्क, डोलानजी बोन मोनेस्ट्री बरोग की मस्ट विजिट जगहों की लिस्ट में शामिल हैं। घूमने फिरने के लिए पंजाब का अमृतसर बहुत ही बेहतरीन जगह हो सकती है, गोल्डन टेम्पल, वाघा बॉर्डर, जलियांवाला बाग आदि सबसे प्रसिद्ध जगहों की लिस्ट में शामिल है। छुट्टियों में पंजाब आएं हैं तो एक बार तो अमृतसर की सैर आपको करनी ही करनी चाहिए। आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर से लबरेज अमृतसर की खूबसूरती और अनदेखा माहौल आपका मन मोह लेगा। स्वर्ण मंदिर, वाघा बॉर्डर के साथ आप अमृतसर में राम तीर्थ मंदिर, गोविंदगढ़ किला, पार्टीशन म्यूजियम, साड्डा पिंड, अकाल तख्त, इस्कॉन मंदिर आदि की सैर कर सकते हैं। हरिके पट्टन नेचर लवर्स और वाइल्ड लाइफ प्रेमियों के लिए पंजाब की सतलुज और ब्यास नदी के संगम पर बना हिरिके पट्टन वेटलेंड और बर्ड सैंक्चुअरी घूमने के लिए एकदम परफेक्ट हो सकता है। इस मानव निर्मित वेटलैंड में आप पक्षियों की अनदेखी और बेहद खूबसूरत प्रजातियां देख प्रकृति का लुत्फ उठा सकते हैं। हरिके पट्टन अमृतसर का ही नहीं बल्कि उत्तर भारत का सबसे बड़ा वेटलैंड है, जहां पक्षियों के साथ साथ आपको कछुओं की सात तरह की अलग अलग प्रजातियों से रूबरू होने का मौका मिलेगा। ये अभ्यारण तरनतारन साहिब के फिरोजपुर से लेकर कपूरथला तक फैला हुआ है। |
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार सुबह सात बजे से शुरू की गई ये छापेमारी देर रात दो बजे तक चली थी। ईडी ने मनी लांड्रिंग के कानून के तहत ये छापेमारी की थी। ये छापेमारी सत्येंद्र जैन-पूनम जैन और उनके सहयोगी और मामले से प्रत्यक्ष औऱ परोक्ष रूप से जुड़े लोगों के यहां ये कार्रवाई की थी। इनमें प्रमुखतया अंकुश जैन, वैभव जैन, नवीन जैन और सिद्धार्थ जैन शामिल हैं। इसके अलावा जीएस मथारू भी और कुछ अन्य के यहां भी ये कार्रवाई की गई। जांच से पता चला कि मैसर्स लाला शेर सिंह जीवन विज्ञान ट्रस्ट के एक सहयोगी सदस्य ने संपत्ति को अलग करने और जब्ती की प्रक्रिया को विफल करने के लिए सत्येंद्र कुमार जैन के स्वामित्व वाली कंपनी से अपने सहयोगियों के परिवार के सदस्यों को भूमि हस्तांतरण के लिए आवास प्रविष्टियां प्रदान की थीं। तलाशी के दौरान विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए।
सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी को लेकर आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का लंबा दौर भी चला है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि 7-8 साल पुराने इस केस में कोई भी साक्ष्य नहीं है और जैन को जानबूझकर फंसाया जा रहा है। सरकार की ओर से जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। वहीं बीजेपी ने जैन की गिरफ्तारी के बाद भी उन्हें मंत्री बनाए रखने को लेकर केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा है। आम आदमी पार्टी ने सत्येंद्र जैन के विभाग तो दूसरे मंत्रियों के दे दिए हैं, लेकिन उन्हें मंत्री बनाए रखा है।
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
| प्रवर्तन निदेशालय ने सोमवार सुबह सात बजे से शुरू की गई ये छापेमारी देर रात दो बजे तक चली थी। ईडी ने मनी लांड्रिंग के कानून के तहत ये छापेमारी की थी। ये छापेमारी सत्येंद्र जैन-पूनम जैन और उनके सहयोगी और मामले से प्रत्यक्ष औऱ परोक्ष रूप से जुड़े लोगों के यहां ये कार्रवाई की थी। इनमें प्रमुखतया अंकुश जैन, वैभव जैन, नवीन जैन और सिद्धार्थ जैन शामिल हैं। इसके अलावा जीएस मथारू भी और कुछ अन्य के यहां भी ये कार्रवाई की गई। जांच से पता चला कि मैसर्स लाला शेर सिंह जीवन विज्ञान ट्रस्ट के एक सहयोगी सदस्य ने संपत्ति को अलग करने और जब्ती की प्रक्रिया को विफल करने के लिए सत्येंद्र कुमार जैन के स्वामित्व वाली कंपनी से अपने सहयोगियों के परिवार के सदस्यों को भूमि हस्तांतरण के लिए आवास प्रविष्टियां प्रदान की थीं। तलाशी के दौरान विभिन्न आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड जब्त किए गए। सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी को लेकर आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का लंबा दौर भी चला है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि सात-आठ साल पुराने इस केस में कोई भी साक्ष्य नहीं है और जैन को जानबूझकर फंसाया जा रहा है। सरकार की ओर से जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। वहीं बीजेपी ने जैन की गिरफ्तारी के बाद भी उन्हें मंत्री बनाए रखने को लेकर केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा है। आम आदमी पार्टी ने सत्येंद्र जैन के विभाग तो दूसरे मंत्रियों के दे दिए हैं, लेकिन उन्हें मंत्री बनाए रखा है। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड। |
विद्याध्ययन दोनों में ही इन्होंने अपनी तीव्र बुद्धि का परिचय दिया। महाराज छत्रसाल एक चतुर सेनापति ही नहीं वरन विद्वान और कवि भी थे । दस वर्ष की आयु के पहले से ही वीर छत्रसाल ने बरछी चलाना, तलवार और अन्य शस्त्र से अचूक निशाने मारना और दौड़ते हुए घोड़े पर से शिकार सेलना सीख लिया। जंगल के हिंस्र जंतुओं से युद्ध करते समय उन पर कैसे वार करना चाहिए, यह वे शीघ्र सीख गए। पुस्तकों के पढ़ने में इनका मन बहुत लगता था। ओड़ के कवि केशवदास कृत रामचंद्रिका को ये बड़े चाव से पढ़ते थे और उस पुस्तक को सदा अपने पास रखते थे ।
१ -छत्रसाल सहरा नामक ग्राम में थे, जब इन्हें इनके माता-पिता की मृत्यु का हाल मालूम हुआ । यह हाल उनको उस सैनिक ने सुनाया था जो चंपतराय और उनकी खो के साथ उस स्थान में था जहाँ चंपतराय घेरे गए थे। वह किसी प्रकार अपने प्राण बचाकर सबर देने को भाग आाया था । जब चंपतराय को मृत्यु हुई तब छन्नसाल के पास न सेना थी और न धन ही था । पिता-माता को मृत्यु सुनने पर शोक होना स्वाभाविक ही है। परंतु ये उत्साही और धैर्यवान् युवक थे। इन्होंने अपने रहने इत्यादि का स्थान और सेना संग्रह करने का प्रबंध तुरंत ही सोच लिया। उन्हें चंपतराय का वृद्ध सैनिक मिला। इसने छत्रसाल का आदर किया। फिर छत्रसाल महेवा में अपने काका सुजानराय के पास गए। इनके काका ने छत्रसाल को पहले न देखा था । वे छत्रसाल के बड़े भाइयों को जानते थे। इससे छत्रसाल ने अपना पूरा परिचय सुजानराय को दिया, जिसे सुनकर सुजानराय ने बड़े प्रेम से भेंट की। इसके पश्चात् कुछ दिनों तक छत्रसाल नेकाका
(१) कविवर कशवदास का जन्म लगभग विक्रम संवत् १६१२ में हुआ । थोड़छे के राजदरबार में इनका घडा मान था । | विद्याध्ययन दोनों में ही इन्होंने अपनी तीव्र बुद्धि का परिचय दिया। महाराज छत्रसाल एक चतुर सेनापति ही नहीं वरन विद्वान और कवि भी थे । दस वर्ष की आयु के पहले से ही वीर छत्रसाल ने बरछी चलाना, तलवार और अन्य शस्त्र से अचूक निशाने मारना और दौड़ते हुए घोड़े पर से शिकार सेलना सीख लिया। जंगल के हिंस्र जंतुओं से युद्ध करते समय उन पर कैसे वार करना चाहिए, यह वे शीघ्र सीख गए। पुस्तकों के पढ़ने में इनका मन बहुत लगता था। ओड़ के कवि केशवदास कृत रामचंद्रिका को ये बड़े चाव से पढ़ते थे और उस पुस्तक को सदा अपने पास रखते थे । एक -छत्रसाल सहरा नामक ग्राम में थे, जब इन्हें इनके माता-पिता की मृत्यु का हाल मालूम हुआ । यह हाल उनको उस सैनिक ने सुनाया था जो चंपतराय और उनकी खो के साथ उस स्थान में था जहाँ चंपतराय घेरे गए थे। वह किसी प्रकार अपने प्राण बचाकर सबर देने को भाग आाया था । जब चंपतराय को मृत्यु हुई तब छन्नसाल के पास न सेना थी और न धन ही था । पिता-माता को मृत्यु सुनने पर शोक होना स्वाभाविक ही है। परंतु ये उत्साही और धैर्यवान् युवक थे। इन्होंने अपने रहने इत्यादि का स्थान और सेना संग्रह करने का प्रबंध तुरंत ही सोच लिया। उन्हें चंपतराय का वृद्ध सैनिक मिला। इसने छत्रसाल का आदर किया। फिर छत्रसाल महेवा में अपने काका सुजानराय के पास गए। इनके काका ने छत्रसाल को पहले न देखा था । वे छत्रसाल के बड़े भाइयों को जानते थे। इससे छत्रसाल ने अपना पूरा परिचय सुजानराय को दिया, जिसे सुनकर सुजानराय ने बड़े प्रेम से भेंट की। इसके पश्चात् कुछ दिनों तक छत्रसाल नेकाका कविवर कशवदास का जन्म लगभग विक्रम संवत् एक हज़ार छः सौ बारह में हुआ । थोड़छे के राजदरबार में इनका घडा मान था । |
मेरठ (ब्यूरो)। शहर में कई प्रमुख स्थानों पर छठ पूजन को लेकर तैयारी शुरू हो चुकी हैं। इसमें परतापुर गंगोल घाट, सीसीएस यूनिवर्सिटी, गंगानगर आइ-ब्लाक, न्यू मीनाक्षीपुरम मंदिर, जेल चुंगी व पल्लवपुरम में पूर्वाचंल समाज के लोग एकत्र होकर पूरे उल्लास के साथ इस पर्व को मनाते हैं। गंगोल घाट में सरोवर पर छठ पूजन की अनुपम छठा देखते ही बनती है। इसके अलावा अन्य स्थानों पर कृत्रिम जलाशय बनाकर भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। छठ पूजन में ठेकुआ का प्रसाद विशेष होता है। इसे घर के लोग व महिलाएं सामूहिक रूप से तैयार करते हैं।
इस दिन छठ पूजा की शुरूआत होती है। इस दिन को नहाय खाय के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत करने से पहले एक बार ही खाना होता है।
छठ का दूसरा दिन खरना कहलाता है। इस दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक महिलाओं का व्रत रहता है। सायंकाल में सूर्यास्त के बाद व्रत का परायण करना होता है। उसके बाद भोजन तैयार किया जाता है। सूर्य भगवान को भोग अर्पित किया जाता है।
यह छठ पूजन का तीसरा व सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिन है। इसमें भगवान सूर्य को अस्त होते हुए अध्र्य दिया जाता है। बांस की टोकरी में फल, ठेकुआ, चावल के लड्डू आदि पूजन सामग्री से सूर्यदेव की आराधना की जाती है। सूर्य को अध्र्य देते हुए छठ गीत गाए जाते हैं।
छठ पूजन के चौथे व अंतिम दिन उगते हुए सूर्य को अध्र्य दिया जाएगा। इसे उषा अध्र्य कहते हैं। 36 घंटे के व्रत के बाद यह अध्र्य दिया जाता है। सूर्योदय को अघ्र्य देने के बाद छठ पर्व संपन्न हो जाएगा।
| मेरठ । शहर में कई प्रमुख स्थानों पर छठ पूजन को लेकर तैयारी शुरू हो चुकी हैं। इसमें परतापुर गंगोल घाट, सीसीएस यूनिवर्सिटी, गंगानगर आइ-ब्लाक, न्यू मीनाक्षीपुरम मंदिर, जेल चुंगी व पल्लवपुरम में पूर्वाचंल समाज के लोग एकत्र होकर पूरे उल्लास के साथ इस पर्व को मनाते हैं। गंगोल घाट में सरोवर पर छठ पूजन की अनुपम छठा देखते ही बनती है। इसके अलावा अन्य स्थानों पर कृत्रिम जलाशय बनाकर भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। छठ पूजन में ठेकुआ का प्रसाद विशेष होता है। इसे घर के लोग व महिलाएं सामूहिक रूप से तैयार करते हैं। इस दिन छठ पूजा की शुरूआत होती है। इस दिन को नहाय खाय के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत करने से पहले एक बार ही खाना होता है। छठ का दूसरा दिन खरना कहलाता है। इस दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक महिलाओं का व्रत रहता है। सायंकाल में सूर्यास्त के बाद व्रत का परायण करना होता है। उसके बाद भोजन तैयार किया जाता है। सूर्य भगवान को भोग अर्पित किया जाता है। यह छठ पूजन का तीसरा व सर्वाधिक महत्वपूर्ण दिन है। इसमें भगवान सूर्य को अस्त होते हुए अध्र्य दिया जाता है। बांस की टोकरी में फल, ठेकुआ, चावल के लड्डू आदि पूजन सामग्री से सूर्यदेव की आराधना की जाती है। सूर्य को अध्र्य देते हुए छठ गीत गाए जाते हैं। छठ पूजन के चौथे व अंतिम दिन उगते हुए सूर्य को अध्र्य दिया जाएगा। इसे उषा अध्र्य कहते हैं। छत्तीस घंटाटे के व्रत के बाद यह अध्र्य दिया जाता है। सूर्योदय को अघ्र्य देने के बाद छठ पर्व संपन्न हो जाएगा। |
तबलीगी जमात प्रमुख मौलाना साद लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। कभी उससे जुड़े खुलासे हो रहे हैं तो कभी उसके रिश्तेदार कोरोना पॉजिटिव पाए जा रहे हैं।
तबलीगी जमात के मुखिया मौलाना साद के खिलाफ दिल्ली पुलिस को एक के बाद दूसरे अहम तथ्य और गवाह मिलते जा रहे हैं। ऐसा ही एक गवाह अमानतुल्लाह चौधरी है। वह तबलीगी जमात की वर्किंग कमिटी का पूर्व सदस्य है।
तबलीगी जमात के मुखिया मौलाना साद ने वकील के माध्यम से कहा था कि वह दिल्ली पुलिस के साथ सहयोग करना चाहता है।
अब तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद ने फिर से ऑडियो टेप जारी किया है। इस नए ऑडियो टेप में साद ने रमज़ान से मुत्तलिक बातों का जिक्र किया है।
पुलिस तबलीगी जमात को विदेशों से भेजी जाने वाली राशि का पता लगाने के लिए इनकी भूमिका की जांच कर रही है।
बुधवार को भी क्राइम ब्रांच की टीम एक बार फिर से मरकज के अंदर दाखिल हुई और एक बार फिरसे पूरे मरकज की तलाशी ली गई।
कोरोना के कहर बीच ये लोग सरकारी आदेश के विरुद्ध धार्मिक जलसों में शामिल होते रहे थे और धार्मिक मुलाकातें जारी रखी थीं।
दिल्ली पुलिस ने जमात के अमीर मौलाना मोहम्मद साद समेत कई लोगों पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है।
दिल्ली पुलिस अपराध शाखा के सूत्रों की मानें, तो कानूनी रूप से मौलाना का लुक आउट नोटिस जारी किए जाने की कार्यवाही अभी बची है। हालांकि, उस पर भी विचार हुआ है। मगर इस विषय पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
मौलाना मोहम्मद साद कांधलवी दक्षिण पूर्वी दिल्ली में अपने एक करीबी सहयोगी के निवास पर एकांतवास में हैं। यह जानकारी सूत्रों ने दी।
| तबलीगी जमात प्रमुख मौलाना साद लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। कभी उससे जुड़े खुलासे हो रहे हैं तो कभी उसके रिश्तेदार कोरोना पॉजिटिव पाए जा रहे हैं। तबलीगी जमात के मुखिया मौलाना साद के खिलाफ दिल्ली पुलिस को एक के बाद दूसरे अहम तथ्य और गवाह मिलते जा रहे हैं। ऐसा ही एक गवाह अमानतुल्लाह चौधरी है। वह तबलीगी जमात की वर्किंग कमिटी का पूर्व सदस्य है। तबलीगी जमात के मुखिया मौलाना साद ने वकील के माध्यम से कहा था कि वह दिल्ली पुलिस के साथ सहयोग करना चाहता है। अब तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद ने फिर से ऑडियो टेप जारी किया है। इस नए ऑडियो टेप में साद ने रमज़ान से मुत्तलिक बातों का जिक्र किया है। पुलिस तबलीगी जमात को विदेशों से भेजी जाने वाली राशि का पता लगाने के लिए इनकी भूमिका की जांच कर रही है। बुधवार को भी क्राइम ब्रांच की टीम एक बार फिर से मरकज के अंदर दाखिल हुई और एक बार फिरसे पूरे मरकज की तलाशी ली गई। कोरोना के कहर बीच ये लोग सरकारी आदेश के विरुद्ध धार्मिक जलसों में शामिल होते रहे थे और धार्मिक मुलाकातें जारी रखी थीं। दिल्ली पुलिस ने जमात के अमीर मौलाना मोहम्मद साद समेत कई लोगों पर गैर-इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है। दिल्ली पुलिस अपराध शाखा के सूत्रों की मानें, तो कानूनी रूप से मौलाना का लुक आउट नोटिस जारी किए जाने की कार्यवाही अभी बची है। हालांकि, उस पर भी विचार हुआ है। मगर इस विषय पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। मौलाना मोहम्मद साद कांधलवी दक्षिण पूर्वी दिल्ली में अपने एक करीबी सहयोगी के निवास पर एकांतवास में हैं। यह जानकारी सूत्रों ने दी। |
जलगांव : जलापूर्ति और पालक मंत्री गुलाबराव पाटिल (Minister Gulabrao Patil) ने एक विवाह समारोह में शरद पवार (Sharad Pawar) पर दोधारी वक्तव्य कर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पवार परिवार सुबह-सुबह शपथ लेकर क्या गुल खिलाएगें, उनका कोई भरोसा नहीं। मैं तो पवार से डरता हुं। उनका दिमाग बहुत तेज चलता है।
मंत्री गुलाबराव पाटिल अपने मजाकिया अंदाज के भाषण के लिए संपूर्ण महाराष्ट्र के साथ खानदेश में ख्यात हैं। एक बार फिर अपने वीडियो के चलते मंत्री पाटील चर्चा में हैं। जलगांव ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र में एक विवाह समारोह में गुलाबराव पाटिल द्वारा की गई पवार परिवार पर टिप्पणी का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिस विवाह समारोह में वे गए थे वहां दुल्हन वाले पवार परिवार से थे। इस पर गुलाबराव पाटिल ने नाम न लेते हुए शरद पवार पर चिमटी ली। उन्होंने कहा कि मैं तो पवार से डरता हुं। पवार परिवार सुबह-सुबह शपथ लेकर क्या कर डालेंगे उनका कोई भरोसा नहीं। गुलावराव पाटिल के इस बयान बारातियों में हंसी छूट गई और यह वीडियो क्लिप वायरल होने से राजनीतिक गलियारों में हास्य फुट पड़ा है।
मंत्री गुलाब पाटिल ने अपनी बोलने की शैली से कई लोगों को भ्रमित कर बहुतों का दिल जीत लिया है। गुलाबराव पाटिल मंगलवार को एक शादी में दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद देने अपने निर्वाचन क्षेत्र जलगांव ग्रामीण गए थे। दुल्हन के पवार परिवार से होने के कारण गुलाबराव पाटिल ने अपने भाषण के दौरान शरद पवार की राजनीतिक मजाक उड़ाते हुए कार्यक्रम को रंगीन बना दिया।
कुछ दिन पहले गुलाबराव पाटिल ने जलगांव में एक कार्यक्रम में कव्वाली गाकर सबको चौंका दिया था। कव्वाली 'चढ़ता सूरज धीरे-धीरे' गाना शुरू करने के बाद, सब को उम्मीद थी कि गुलाराव गाना गाकर जाएंगे लेकिन गुलाराव ने पूरी कव्वाली गाई। गुलाबराव पाटिल को इस कव्वाली का एक एक शब्द याद था। राजनीति से परे गुलाबराव पाटिल के इस हुनर को देखकर श्रोता आश्चर्य में पड़ गए।
| जलगांव : जलापूर्ति और पालक मंत्री गुलाबराव पाटिल ने एक विवाह समारोह में शरद पवार पर दोधारी वक्तव्य कर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पवार परिवार सुबह-सुबह शपथ लेकर क्या गुल खिलाएगें, उनका कोई भरोसा नहीं। मैं तो पवार से डरता हुं। उनका दिमाग बहुत तेज चलता है। मंत्री गुलाबराव पाटिल अपने मजाकिया अंदाज के भाषण के लिए संपूर्ण महाराष्ट्र के साथ खानदेश में ख्यात हैं। एक बार फिर अपने वीडियो के चलते मंत्री पाटील चर्चा में हैं। जलगांव ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र में एक विवाह समारोह में गुलाबराव पाटिल द्वारा की गई पवार परिवार पर टिप्पणी का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिस विवाह समारोह में वे गए थे वहां दुल्हन वाले पवार परिवार से थे। इस पर गुलाबराव पाटिल ने नाम न लेते हुए शरद पवार पर चिमटी ली। उन्होंने कहा कि मैं तो पवार से डरता हुं। पवार परिवार सुबह-सुबह शपथ लेकर क्या कर डालेंगे उनका कोई भरोसा नहीं। गुलावराव पाटिल के इस बयान बारातियों में हंसी छूट गई और यह वीडियो क्लिप वायरल होने से राजनीतिक गलियारों में हास्य फुट पड़ा है। मंत्री गुलाब पाटिल ने अपनी बोलने की शैली से कई लोगों को भ्रमित कर बहुतों का दिल जीत लिया है। गुलाबराव पाटिल मंगलवार को एक शादी में दूल्हा-दुल्हन को आशीर्वाद देने अपने निर्वाचन क्षेत्र जलगांव ग्रामीण गए थे। दुल्हन के पवार परिवार से होने के कारण गुलाबराव पाटिल ने अपने भाषण के दौरान शरद पवार की राजनीतिक मजाक उड़ाते हुए कार्यक्रम को रंगीन बना दिया। कुछ दिन पहले गुलाबराव पाटिल ने जलगांव में एक कार्यक्रम में कव्वाली गाकर सबको चौंका दिया था। कव्वाली 'चढ़ता सूरज धीरे-धीरे' गाना शुरू करने के बाद, सब को उम्मीद थी कि गुलाराव गाना गाकर जाएंगे लेकिन गुलाराव ने पूरी कव्वाली गाई। गुलाबराव पाटिल को इस कव्वाली का एक एक शब्द याद था। राजनीति से परे गुलाबराव पाटिल के इस हुनर को देखकर श्रोता आश्चर्य में पड़ गए। |
अदालत में चले ओबीसी आरक्षण के मामले में जब जब कोर्ट का फैसला आया तो भाजपा-कांग्रेस में मौजूद इस वर्ग के नेताओं का अपना विचार नहीं सामने नहीं आया बल्कि पार्टियों की लाइन का इंतजार किया जाता रहा।
आरक्षण की राजनीति मध्य प्रदेश ही नहीं देशभर में जब-जब हुई है तब-तब उनसे जुड़े वर्ग के लोगों ने अपने आकाओं के रुख दो भांपते हुए बयानबाजी की है। इस बार मध्य प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण पर भी वही स्थिति बनी और भाजपा-कांग्रेस दोनों तरफ के नेताओं ने वही रुख अख्तियार किया। अदालत में चले ओबीसी आरक्षण के मामले में जब जब कोर्ट का फैसला आया तो भाजपा-कांग्रेस में मौजूद इस वर्ग के नेताओं का अपना विचार नहीं सामने नहीं आया बल्कि पार्टियों की लाइन का इंतजार किया जाता रहा। अभी भी 50 फीसदी आरक्षण सीमा के बावजूद राजनीतिक दल ओबीसी को 27 फीसदी या इससे ज्यादा के रिजर्वेशन की पार्टी लाइन पर बयानबाजी कर रहे हैं और लोगों को अंधेरे में रखे हैं।
नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में चली सुनवाई और पहले व संशोधित आदेशों को लेकर भाजपा-कांग्रेस के इस वर्ग से जुड़े नेताओं के बयानों पर गौर करें तो समाज नहीं बल्कि पार्टी की सीमाओं में बांधकर विचार रख रहे हैं। ओबीसी से आने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कहा कि कमलनाथ ने पाप किया था और 27 फीसदी आरक्षण की घोषणा कर अदालत में सरकार के पक्ष को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया। इससे आरक्षण पर स्थगन हो गया। चौहान यहीं रुके बल्कि कमलनाथ सरकार के परिसीमन को निररस्त कर घोषित किए गए पंचायत चुनाव समय पर नहीं होने के लिए भी कांग्रेस को दोषी ठहराया है। वे कहते हैं कि उनके अदालत में जाने से ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठा जिससे बिना ओबीसी आरक्षण के सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव कराने का आदेश दिया था। चौहान ने कहा कि अदालत के आदेश के बाद कांग्रेस, भाजपा सरकार को ओबीसी आरक्षण के बिना चुनाव कराने के फैसले पर खुशी मना रही थी और भाजपा के खिलाफ मौके को भुनाना चाह रही थी। मगर अदालत के संशोधन आदेश से सत्य की जीत हुई। सीएम ने ओबीसी वर्ग के साथ अपने फर्ज को इस तरह निभाया। सीएम की तरह नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह भी इस वर्ग से आते हैं लेकिन विभाग से सीधे जुड़ा मामला होने से वे भी सीएम की तरह सक्रिय दिखाई दिए।
ओबीसी नेता के रूप में भाजपा की राजनीति करने वाली पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती हो या केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल या राज्य सरकार के मंत्री बृजेंद्र सिंह यादव, की चुप्पी दिखाई दी। फायरब्रांड नेता उमा भारती ट्वीट के सहारे अयोध्या के राम मंदिर, मथुरा-काशी के मुद्दों पर तो वे लगातार सक्रिय रहीं लेकिन ओबीसी आरक्षण के पहले और संशोधित फैसले पर वे चुप रहीं। इसी तरह केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल भी पहले या संशोधित आदेश के फैसलों पर चुप्पी साधे रखी। कमोबेश यही स्थिति शिवराज सरकार के मंत्री बृजेंद्रसिंह यादव की बनी। शिवराज सरकार के मंत्री डॉ. मोहन यादव भी इसी वर्ग के होने के बावजूद समाज के इस मुद्दे के लिए मुखर दिखाई नहीं।
दूसरी तरफ कांग्रेस में ओबीसी को नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण दिलाने के लिए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने कमान संभाली। यादव इसी वर्ग से आते हैं लेकिन उनके भाई वैसे सक्रिय नहीं दिखाई दिए। अरुण यादव ने बिना आरक्षण के पंचायत, नगरीय निकाय चुनाव कराने के सुप्रीम कोर्ट के पहले आदेश पर भाजपा की घेराबंदी की थी और सरकार के वकीलों को सही ढंग से प्रकरण पेश नहीं करने के लिए दोषी ठहराया था। प्रदेश कांग्रसे अध्यक्ष कमलनाथ, पूर्व मंत्री व इस वर्ग से आने वाले पूर्व मंत्री व विधायक कमलेश्वर पटेल भी इस में मुद्दे पर सक्रिय नजर आए।
नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दोनों फैसले आए लेकिन इस वर्ग से आकर कांग्रेस की राजनीतिक करने वाले पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल व महापौर रहीं विभा पटेल भी मुखर नहीं हुए। विभा पटेल तो महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी हैं। इसी तरह पूर्व मंत्री जीतू पटवारी, लाखन सिंह यादव व हर्ष यादव, विधायक संजय यादव व प्रागीलाल यादव, तरबर सिंह, हिना कांवरे, सुनीता पटेल, सुखदेव पांसे व कुणाल चौधरी जैसे नेता की चुप्पी जैसी स्थिति रही। वहीं, कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य राजमणि पटेल भी इस बार बिलकुल चुप रहे।
| अदालत में चले ओबीसी आरक्षण के मामले में जब जब कोर्ट का फैसला आया तो भाजपा-कांग्रेस में मौजूद इस वर्ग के नेताओं का अपना विचार नहीं सामने नहीं आया बल्कि पार्टियों की लाइन का इंतजार किया जाता रहा। आरक्षण की राजनीति मध्य प्रदेश ही नहीं देशभर में जब-जब हुई है तब-तब उनसे जुड़े वर्ग के लोगों ने अपने आकाओं के रुख दो भांपते हुए बयानबाजी की है। इस बार मध्य प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण पर भी वही स्थिति बनी और भाजपा-कांग्रेस दोनों तरफ के नेताओं ने वही रुख अख्तियार किया। अदालत में चले ओबीसी आरक्षण के मामले में जब जब कोर्ट का फैसला आया तो भाजपा-कांग्रेस में मौजूद इस वर्ग के नेताओं का अपना विचार नहीं सामने नहीं आया बल्कि पार्टियों की लाइन का इंतजार किया जाता रहा। अभी भी पचास फीसदी आरक्षण सीमा के बावजूद राजनीतिक दल ओबीसी को सत्ताईस फीसदी या इससे ज्यादा के रिजर्वेशन की पार्टी लाइन पर बयानबाजी कर रहे हैं और लोगों को अंधेरे में रखे हैं। नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में चली सुनवाई और पहले व संशोधित आदेशों को लेकर भाजपा-कांग्रेस के इस वर्ग से जुड़े नेताओं के बयानों पर गौर करें तो समाज नहीं बल्कि पार्टी की सीमाओं में बांधकर विचार रख रहे हैं। ओबीसी से आने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कहा कि कमलनाथ ने पाप किया था और सत्ताईस फीसदी आरक्षण की घोषणा कर अदालत में सरकार के पक्ष को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया। इससे आरक्षण पर स्थगन हो गया। चौहान यहीं रुके बल्कि कमलनाथ सरकार के परिसीमन को निररस्त कर घोषित किए गए पंचायत चुनाव समय पर नहीं होने के लिए भी कांग्रेस को दोषी ठहराया है। वे कहते हैं कि उनके अदालत में जाने से ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठा जिससे बिना ओबीसी आरक्षण के सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव कराने का आदेश दिया था। चौहान ने कहा कि अदालत के आदेश के बाद कांग्रेस, भाजपा सरकार को ओबीसी आरक्षण के बिना चुनाव कराने के फैसले पर खुशी मना रही थी और भाजपा के खिलाफ मौके को भुनाना चाह रही थी। मगर अदालत के संशोधन आदेश से सत्य की जीत हुई। सीएम ने ओबीसी वर्ग के साथ अपने फर्ज को इस तरह निभाया। सीएम की तरह नगरीय विकास मंत्री भूपेंद्र सिंह भी इस वर्ग से आते हैं लेकिन विभाग से सीधे जुड़ा मामला होने से वे भी सीएम की तरह सक्रिय दिखाई दिए। ओबीसी नेता के रूप में भाजपा की राजनीति करने वाली पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती हो या केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल या राज्य सरकार के मंत्री बृजेंद्र सिंह यादव, की चुप्पी दिखाई दी। फायरब्रांड नेता उमा भारती ट्वीट के सहारे अयोध्या के राम मंदिर, मथुरा-काशी के मुद्दों पर तो वे लगातार सक्रिय रहीं लेकिन ओबीसी आरक्षण के पहले और संशोधित फैसले पर वे चुप रहीं। इसी तरह केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल भी पहले या संशोधित आदेश के फैसलों पर चुप्पी साधे रखी। कमोबेश यही स्थिति शिवराज सरकार के मंत्री बृजेंद्रसिंह यादव की बनी। शिवराज सरकार के मंत्री डॉ. मोहन यादव भी इसी वर्ग के होने के बावजूद समाज के इस मुद्दे के लिए मुखर दिखाई नहीं। दूसरी तरफ कांग्रेस में ओबीसी को नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण दिलाने के लिए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने कमान संभाली। यादव इसी वर्ग से आते हैं लेकिन उनके भाई वैसे सक्रिय नहीं दिखाई दिए। अरुण यादव ने बिना आरक्षण के पंचायत, नगरीय निकाय चुनाव कराने के सुप्रीम कोर्ट के पहले आदेश पर भाजपा की घेराबंदी की थी और सरकार के वकीलों को सही ढंग से प्रकरण पेश नहीं करने के लिए दोषी ठहराया था। प्रदेश कांग्रसे अध्यक्ष कमलनाथ, पूर्व मंत्री व इस वर्ग से आने वाले पूर्व मंत्री व विधायक कमलेश्वर पटेल भी इस में मुद्दे पर सक्रिय नजर आए। नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दोनों फैसले आए लेकिन इस वर्ग से आकर कांग्रेस की राजनीतिक करने वाले पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल व महापौर रहीं विभा पटेल भी मुखर नहीं हुए। विभा पटेल तो महिला कांग्रेस की अध्यक्ष भी हैं। इसी तरह पूर्व मंत्री जीतू पटवारी, लाखन सिंह यादव व हर्ष यादव, विधायक संजय यादव व प्रागीलाल यादव, तरबर सिंह, हिना कांवरे, सुनीता पटेल, सुखदेव पांसे व कुणाल चौधरी जैसे नेता की चुप्पी जैसी स्थिति रही। वहीं, कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य राजमणि पटेल भी इस बार बिलकुल चुप रहे। |
थे उनमें, भक्त एवं सूफ़ी कवियों ने अपने प्रमाणों द्वारा नये प्राणों का संचार कर न केवल पर्याप्त सरसता ही ला दी, अपितु उन्हें लोकप्रियता भी प्रदान कर दी ।
काव्य की उपयुक्त तृतीय वर्ग वाली परंपरा की रचनाओं में से चारणों के प्रबन्ध-काव्य भी 'रासो' संडा द्वारा ही अभिहित किये जाते थे और उनकी फुटकर रचनाएँ प्रायः दोहीं एवं सोरटी के रूप में पायी जाती थां । इन सारी रचनाओं में से अधिकांश का वर्ण्य विषय शृंगाररस पर थबीर-रस परक हुआ करता था और कभी-कभी इन दोनों का पुट एक-सा भी रहा करता था । रासो काव्यों की रचना का दर्श जिसे अपभ्रंश कवियों ने स्थापित किया था उसे ही पीछे हिन्दी कवियों ने भी अपनाया। इन्होंने लगभग उसी प्रकार अपने चरित-नायकों की की, उनकी तथा उनके वंशों की प्रशन्तियाँ लिखी, उनके विविध साहसपूर्ण कार्यों के अतिर जित चित्र खींचें तथा उनके शौर्य, ऐश्वर्य एवं उदारता की प्रशंसा में सैकड़ों पद रच डाले। यदि कालीन हिन्दी कवियों की ऐसी रचनाओं में वैसी कोई विशेषता नहीं लक्षित होती औौर काव्यरूढ़ियाँ तक भी ज्यों की त्यों उद्धृत हो जाती हैं । परन्तु जैसे-जैसे समय व्यतीत होता गया, हिन्दी वाली ऐसी रचनाओं के अन्तर्गत पूर्व प्रचलित पौराणिकता की क्रमशः क्षीणतर होती चली गई और मध्ययुगीन शृंगार-काल के या जाने पर इनमें वीर एवं शृंगार श्मों का प्रायः पार्थक्य भी दीख पड़ने लगा। इश्वर वाले ऐसे काव्य ग्रंथी का निर्माण बहुधा काव्यशक्ति प्रदर्शन के ही उद्देश्य से किया जाने लगा । काव्यं शास्त्र बंधी विभिन्न आदर्शों के पालन में सजगता लाने के सदन में [[अपेक्षाकृत अधिक नीरसता तक को प्रश्रय दिया जाने लगा। परन्तु, जहाँ तक शृंगार अथवा वीर रस परक स्फुट रचनाओं को प्रस्तुत करने का प्रश्न है, इधर के हिन्दी कवियों ने उनके निर्माण में विशेष तत्परता. दिखलायी और इनके द्वारा भी उन्होंने अधिकतर काव्य-तत्वों को हो उदाहृत किया। इस काल के शृंगारी कवियों की एक यह विशेषता भी. | थे उनमें, भक्त एवं सूफ़ी कवियों ने अपने प्रमाणों द्वारा नये प्राणों का संचार कर न केवल पर्याप्त सरसता ही ला दी, अपितु उन्हें लोकप्रियता भी प्रदान कर दी । काव्य की उपयुक्त तृतीय वर्ग वाली परंपरा की रचनाओं में से चारणों के प्रबन्ध-काव्य भी 'रासो' संडा द्वारा ही अभिहित किये जाते थे और उनकी फुटकर रचनाएँ प्रायः दोहीं एवं सोरटी के रूप में पायी जाती थां । इन सारी रचनाओं में से अधिकांश का वर्ण्य विषय शृंगाररस पर थबीर-रस परक हुआ करता था और कभी-कभी इन दोनों का पुट एक-सा भी रहा करता था । रासो काव्यों की रचना का दर्श जिसे अपभ्रंश कवियों ने स्थापित किया था उसे ही पीछे हिन्दी कवियों ने भी अपनाया। इन्होंने लगभग उसी प्रकार अपने चरित-नायकों की की, उनकी तथा उनके वंशों की प्रशन्तियाँ लिखी, उनके विविध साहसपूर्ण कार्यों के अतिर जित चित्र खींचें तथा उनके शौर्य, ऐश्वर्य एवं उदारता की प्रशंसा में सैकड़ों पद रच डाले। यदि कालीन हिन्दी कवियों की ऐसी रचनाओं में वैसी कोई विशेषता नहीं लक्षित होती औौर काव्यरूढ़ियाँ तक भी ज्यों की त्यों उद्धृत हो जाती हैं । परन्तु जैसे-जैसे समय व्यतीत होता गया, हिन्दी वाली ऐसी रचनाओं के अन्तर्गत पूर्व प्रचलित पौराणिकता की क्रमशः क्षीणतर होती चली गई और मध्ययुगीन शृंगार-काल के या जाने पर इनमें वीर एवं शृंगार श्मों का प्रायः पार्थक्य भी दीख पड़ने लगा। इश्वर वाले ऐसे काव्य ग्रंथी का निर्माण बहुधा काव्यशक्ति प्रदर्शन के ही उद्देश्य से किया जाने लगा । काव्यं शास्त्र बंधी विभिन्न आदर्शों के पालन में सजगता लाने के सदन में [[अपेक्षाकृत अधिक नीरसता तक को प्रश्रय दिया जाने लगा। परन्तु, जहाँ तक शृंगार अथवा वीर रस परक स्फुट रचनाओं को प्रस्तुत करने का प्रश्न है, इधर के हिन्दी कवियों ने उनके निर्माण में विशेष तत्परता. दिखलायी और इनके द्वारा भी उन्होंने अधिकतर काव्य-तत्वों को हो उदाहृत किया। इस काल के शृंगारी कवियों की एक यह विशेषता भी. |
Don't Miss!
अमिताभ ने ब्लॉग पर लिखा है कि अभिनेत्री काजोल बाल दिवस समारोह के जश्न के हिस्से के रूप में इस प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में पहुंचेंगी। अभिनेत्री द्वारा जीती गई पूरी राशि बच्चों के परोपकार में खर्च की जाएगी। हसीन काजोल जल्द सेट पर आएंगी और एक विशेष निमित्त के लिए खेलेंगी।"
तीन दिवसीय बाल दिवस जश्न 8 नवंबर से शुरू होगा। इस दौरान हॉट सीट पर 'इंडियन आइडल जूनियर' के फाइनलिस्ट को भी देखेंगे। इसके अलावा अपनी अद्वितीय बुद्धि के लिए हरियाणा सरकार द्वारा 10 लाख रुपये से पुरस्कृत किए गए पांच वर्षीय कौटिल्य पंडित भी इस कार्यक्रम में दिखेंगे।
यही नहीं अमिताभ बच्चन ने यह भी जानकारी दी कि इस बार हॉट सीट पर आप सभी के चहेते आमिर खान भी नजर आयेंगे। अमिताभ ने इसे ट्विटर पर बताया। बिग बी ने ट्विट किया कि आमिर खान आज सेट पर हैं..हैलो कहना भूल गया! और केबीसी के मेहमानों का स्वागत किया। हमने 'धूम 3' पर बात की।"
20 दिसंबर को प्रदर्शित होने वाली इस फिल्म में अभिषेक बच्चन, कैटरीना कैफ और उदय चोपड़ा प्रमुख किरदारों में हैं। यश राज फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्माण आदित्य चोपड़ा ने किया है।
| Don't Miss! अमिताभ ने ब्लॉग पर लिखा है कि अभिनेत्री काजोल बाल दिवस समारोह के जश्न के हिस्से के रूप में इस प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम में पहुंचेंगी। अभिनेत्री द्वारा जीती गई पूरी राशि बच्चों के परोपकार में खर्च की जाएगी। हसीन काजोल जल्द सेट पर आएंगी और एक विशेष निमित्त के लिए खेलेंगी।" तीन दिवसीय बाल दिवस जश्न आठ नवंबर से शुरू होगा। इस दौरान हॉट सीट पर 'इंडियन आइडल जूनियर' के फाइनलिस्ट को भी देखेंगे। इसके अलावा अपनी अद्वितीय बुद्धि के लिए हरियाणा सरकार द्वारा दस लाख रुपये से पुरस्कृत किए गए पांच वर्षीय कौटिल्य पंडित भी इस कार्यक्रम में दिखेंगे। यही नहीं अमिताभ बच्चन ने यह भी जानकारी दी कि इस बार हॉट सीट पर आप सभी के चहेते आमिर खान भी नजर आयेंगे। अमिताभ ने इसे ट्विटर पर बताया। बिग बी ने ट्विट किया कि आमिर खान आज सेट पर हैं..हैलो कहना भूल गया! और केबीसी के मेहमानों का स्वागत किया। हमने 'धूम तीन' पर बात की।" बीस दिसंबर को प्रदर्शित होने वाली इस फिल्म में अभिषेक बच्चन, कैटरीना कैफ और उदय चोपड़ा प्रमुख किरदारों में हैं। यश राज फिल्म्स के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्माण आदित्य चोपड़ा ने किया है। |
- बीटीसी वर्तमान में अंडरवैल्यूड है, और इसकी कीमत में और गिरावट आ सकती है।
- दिन के व्यापारी राजा के सिक्के को बेचना जारी रखते हैं।
क्रिप्टोक्वांट विश्लेषक MAC_D, एक नए में रिपोर्ट goodने कहा कि प्रमुख सिक्का बिटकॉइन [BTC]वर्तमान बाजार में इसका मूल्यांकन नहीं किया गया है, और इसकी कीमत 2023 में और गिर सकती है।
MAC_D के अनुसार, कुछ ऑन-चेन इंडिकेटर्स जैसे कि मार्केट-वैल्यू-टू-रियलाइज्ड-वैल्यू (MVRV), नेट अनरियलाइज्ड प्रॉफिट/लॉस (NUPL), प्यूएल मल्टीपल और खर्च किए गए आउटपुट प्रॉफिट रेशियो (SOPR) के आकलन से पता चलता है कि BTC अवमूल्यन स्तर पर पहुंच गया था। हालाँकि, इन मेट्रिक्स के साथ, बीटीसी खरीदने के लिए विशिष्ट समय निर्धारित करना कठिन था।
एक अन्य क्रिप्टोक्वांट विश्लेषक ल्यूपिन द्वारा पहले की गई स्थिति से संकेत लेते हुए, एमएसी_डी ने पाया कि लाभ और हानि संकेतकों में बीटीसी के यूटीएक्सओ (अव्ययित लेनदेन आउटपुट) का उपयोग करना सटीक रूप से इंगित करेगा कि राजा सिक्का का मूल्यांकन नहीं किया गया था या नहीं।
ल्यूपिन के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से, जब लाभ और हानि संकेतकों में यूटीएक्सओ पार हो गया, तो पिछले तीन बीटीसी पड़ावों के दौरान इसने बाजार के निचले हिस्से को चिह्नित किया।
वर्तमान में, हालांकि, इस सूचक ने अभी तक एक क्रॉस नहीं दिखाया है, यह दर्शाता है कि बीटीसी में अभी भी गिरावट की गुंजाइश हो सकती है, MAC_D ने कहा।
व्हेल संचय को संपत्ति की कीमत में वृद्धि के लिए प्रेरक शक्ति के रूप में जाना जाता है। हालांकि, वर्तमान बीटीसी बाजार में, क्रिप्टोक्वांट विश्लेषक, व्हेल द्वारा सिक्का संचय में कमी आई है डैन लिम मिला।
डैन लिम के अनुसार, मौजूदा भालू बाजार में, बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव और शीर्ष 10 व्हेलों द्वारा अपने निवेश की सुरक्षा के लिए एक्सचेंजों पर बीटीसी की जमा राशि में वृद्धि के बीच संबंध रहा है।
लिम ने नोट किया कि यह व्यापक आर्थिक कारकों के कारण बाजार की स्थितियों के प्रति समर्पण या अस्थायी आत्मसमर्पण का संकेत हो सकता है।
पिछले कुछ महीनों में बीटीसी व्यापार करने के लिए व्हेल की अनिच्छा की पुष्टि हाल के आंकड़ों से हुई है भावनाजिसने दिखाया कि बीटीसी व्हेल लेनदेन जो $100,000 और $1 मिलियन से अधिक है, 27 दिसंबर को क्रमशः 2019 और 2020 के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
कितने बीटीसी आप $ 1 के लिए खरीद सकते हैं?
4-घंटे के चार्ट पर बीटीसी के मूल्य प्रदर्शन के आकलन से सिक्का वितरण में उछाल का पता चला। प्रेस समय में गंभीर रूप से ओवरसोल्ड, बीटीसी के रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) और इसके मनी फ्लो इंडेक्स (एमएफआई) को क्रमशः 30.86 और 18.06 पर आंका गया था।
अंत में, किंग कॉइन का ऑन-बैलेंस वॉल्यूम -883.026k पर देखा गया। एक परिसंपत्ति के ओबीवी में एक नकारात्मक मूल्य पोस्ट करने के लिए गिरावट एक मंदी का संकेत है जो संचय मात्रा में गिरावट का संकेत देता है। इसलिए कीमतों में और गिरावट का अनुमान लगाया जाना चाहिए।
| - बीटीसी वर्तमान में अंडरवैल्यूड है, और इसकी कीमत में और गिरावट आ सकती है। - दिन के व्यापारी राजा के सिक्के को बेचना जारी रखते हैं। क्रिप्टोक्वांट विश्लेषक MAC_D, एक नए में रिपोर्ट goodने कहा कि प्रमुख सिक्का बिटकॉइन [BTC]वर्तमान बाजार में इसका मूल्यांकन नहीं किया गया है, और इसकी कीमत दो हज़ार तेईस में और गिर सकती है। MAC_D के अनुसार, कुछ ऑन-चेन इंडिकेटर्स जैसे कि मार्केट-वैल्यू-टू-रियलाइज्ड-वैल्यू , नेट अनरियलाइज्ड प्रॉफिट/लॉस , प्यूएल मल्टीपल और खर्च किए गए आउटपुट प्रॉफिट रेशियो के आकलन से पता चलता है कि BTC अवमूल्यन स्तर पर पहुंच गया था। हालाँकि, इन मेट्रिक्स के साथ, बीटीसी खरीदने के लिए विशिष्ट समय निर्धारित करना कठिन था। एक अन्य क्रिप्टोक्वांट विश्लेषक ल्यूपिन द्वारा पहले की गई स्थिति से संकेत लेते हुए, एमएसी_डी ने पाया कि लाभ और हानि संकेतकों में बीटीसी के यूटीएक्सओ का उपयोग करना सटीक रूप से इंगित करेगा कि राजा सिक्का का मूल्यांकन नहीं किया गया था या नहीं। ल्यूपिन के अनुसार, ऐतिहासिक रूप से, जब लाभ और हानि संकेतकों में यूटीएक्सओ पार हो गया, तो पिछले तीन बीटीसी पड़ावों के दौरान इसने बाजार के निचले हिस्से को चिह्नित किया। वर्तमान में, हालांकि, इस सूचक ने अभी तक एक क्रॉस नहीं दिखाया है, यह दर्शाता है कि बीटीसी में अभी भी गिरावट की गुंजाइश हो सकती है, MAC_D ने कहा। व्हेल संचय को संपत्ति की कीमत में वृद्धि के लिए प्रेरक शक्ति के रूप में जाना जाता है। हालांकि, वर्तमान बीटीसी बाजार में, क्रिप्टोक्वांट विश्लेषक, व्हेल द्वारा सिक्का संचय में कमी आई है डैन लिम मिला। डैन लिम के अनुसार, मौजूदा भालू बाजार में, बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव और शीर्ष दस व्हेलों द्वारा अपने निवेश की सुरक्षा के लिए एक्सचेंजों पर बीटीसी की जमा राशि में वृद्धि के बीच संबंध रहा है। लिम ने नोट किया कि यह व्यापक आर्थिक कारकों के कारण बाजार की स्थितियों के प्रति समर्पण या अस्थायी आत्मसमर्पण का संकेत हो सकता है। पिछले कुछ महीनों में बीटीसी व्यापार करने के लिए व्हेल की अनिच्छा की पुष्टि हाल के आंकड़ों से हुई है भावनाजिसने दिखाया कि बीटीसी व्हेल लेनदेन जो एक सौ डॉलर,शून्य और एक डॉलर मिलियन से अधिक है, सत्ताईस दिसंबर को क्रमशः दो हज़ार उन्नीस और दो हज़ार बीस के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। कितने बीटीसी आप एक डॉलर के लिए खरीद सकते हैं? चार-घंटे के चार्ट पर बीटीसी के मूल्य प्रदर्शन के आकलन से सिक्का वितरण में उछाल का पता चला। प्रेस समय में गंभीर रूप से ओवरसोल्ड, बीटीसी के रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स और इसके मनी फ्लो इंडेक्स को क्रमशः तीस.छियासी और अट्ठारह.छः पर आंका गया था। अंत में, किंग कॉइन का ऑन-बैलेंस वॉल्यूम -आठ सौ तिरासी.छब्बीसk पर देखा गया। एक परिसंपत्ति के ओबीवी में एक नकारात्मक मूल्य पोस्ट करने के लिए गिरावट एक मंदी का संकेत है जो संचय मात्रा में गिरावट का संकेत देता है। इसलिए कीमतों में और गिरावट का अनुमान लगाया जाना चाहिए। |
वे सभी 16 दिसम्बर को होने वाले नगर निगम के आम चुनावों में अपना वोटर कार्ड दिखाकर मतदान कर सकेंगे। लेकिन चुनाव में मतदाता पहचान-पत्र के अलावा अन्य करीब 15 दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज मतदान केन्द्र पर ले जाकर मतदान कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि जिन मतदाताओं को अभी तक फोटो पहचान-पत्र प्राप्त नहीं हुए हैं वे अपनी पहचान साबित करने के लिए पासपोर्ट, ड्राइविंग लाईसेंस, आयकर पहचान-पत्र, केन्द्रीय व राज्य सरकार के कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों व स्थानीय निकायों एवं अन्य सार्वजनिक निकायों व अन्य लिमिटेड कम्पनी द्वारा कर्मचारियों को जारी सेवा पहचान पत्र तथा प्राधिकृत बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते की पासबुक जिसमें फोटो लगी हो।
स्वतंत्रता सेनानी पहचान-पत्र फोटो सहित व अनुसूचित जाति व जनजाति तथा पिछड़ा वर्ग प्रमाण-पत्र फोटोग्राफ सहित, सक्षम अधिकारी द्वारा जारी विकलांगता प्रमाण पत्र और शस्त्र लाईसेंस व राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत जॉब कार्ड, स्वास्थ्य बीमा योजना के स्मार्ट कार्ड, राशन कार्ड, पैंशन दस्तावेज फोटोग्राफ सहित जैसे कि भूतपूर्व सैनिक पैंशन बुक व पैंशन भुगतान आदेश, पूर्व सैनिक की विधवा या आश्रित प्रमाण-पत्र, वृद्घावस्था पैंशन आदेश व सम्बंधित दस्तावेज जैसे पट्टा, पंजीकृत दस्तावेज आदि फोटोग्राफ सहित तथा यू. आई. डी. ए. आई. कार्ड दिखाकर मतदाता मतदान कर सकेंगे।
| वे सभी सोलह दिसम्बर को होने वाले नगर निगम के आम चुनावों में अपना वोटर कार्ड दिखाकर मतदान कर सकेंगे। लेकिन चुनाव में मतदाता पहचान-पत्र के अलावा अन्य करीब पंद्रह दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज मतदान केन्द्र पर ले जाकर मतदान कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि जिन मतदाताओं को अभी तक फोटो पहचान-पत्र प्राप्त नहीं हुए हैं वे अपनी पहचान साबित करने के लिए पासपोर्ट, ड्राइविंग लाईसेंस, आयकर पहचान-पत्र, केन्द्रीय व राज्य सरकार के कार्यालयों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों व स्थानीय निकायों एवं अन्य सार्वजनिक निकायों व अन्य लिमिटेड कम्पनी द्वारा कर्मचारियों को जारी सेवा पहचान पत्र तथा प्राधिकृत बैंक या पोस्ट ऑफिस खाते की पासबुक जिसमें फोटो लगी हो। स्वतंत्रता सेनानी पहचान-पत्र फोटो सहित व अनुसूचित जाति व जनजाति तथा पिछड़ा वर्ग प्रमाण-पत्र फोटोग्राफ सहित, सक्षम अधिकारी द्वारा जारी विकलांगता प्रमाण पत्र और शस्त्र लाईसेंस व राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत जॉब कार्ड, स्वास्थ्य बीमा योजना के स्मार्ट कार्ड, राशन कार्ड, पैंशन दस्तावेज फोटोग्राफ सहित जैसे कि भूतपूर्व सैनिक पैंशन बुक व पैंशन भुगतान आदेश, पूर्व सैनिक की विधवा या आश्रित प्रमाण-पत्र, वृद्घावस्था पैंशन आदेश व सम्बंधित दस्तावेज जैसे पट्टा, पंजीकृत दस्तावेज आदि फोटोग्राफ सहित तथा यू. आई. डी. ए. आई. कार्ड दिखाकर मतदाता मतदान कर सकेंगे। |
दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा में ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। स्कूलों में कहीं शिक्षक नहीं तो कहीं स्कूलों में ताला बंदी है। आश्रम भी नक्सलगढ़ का दिखा बदहाल, चार महीने से अधीक्षक आश्रम नहीं आए, इसकी भी जानकारी जिले के अधिकारियों को नहीं है।
केश एकः गुरुवार को जब नईदुनिया की टीम पहुंची लखापाल के गूंजेंमपारा स्कूल यहां स्कूल में लगा रहा ताला।
केश नंबर दोः इसके आगे लखापाल के ही स्कूलपारा के प्राथमिक शाला में 14 बच्चे मौजूद थे, पर इनको पढ़ाने स्कूल में कोई शिक्षक मौजूद नहीं थे, बच्चों ने बताया कि शिक्षक सुबह आए थे। अभी दंतेवाड़ा जाने की बात कह कर स्कूल से चले गए हैं।
केश तीनः आश्रम में दिखा अजीबोगरीब नजारा, नक्सलगढ़ के टेटम माता रुक्मणि आश्रम में एक भी शिक्षक नहीं थे। इसके अलावा यहां पर अधीक्षक नदारद थे। हालांकि दो भृत्य मौजूद थे। जिन्होंने बताया अधीक्षक चार महीने से आश्रम नहीं आए हैं, एक अन्य भृत्य भी कभी आश्रम में ड्यूटी करने नहीं आया है। वहीं भृत्यों ने बताया एक शिक्षक उनके घर में कुछ जरूरी काम होने की वजह से अपने गांव गए हुए हैं। आश्रम में जवाबदार कोई नहीं, आठ बच्चे खाना खाते हुए नजर आए, माता रुक्मणि के भृत्य सोनधर ने बताया चार बजे आश्रम को बंद कर देंगे, बच्चों को घर भेज देंगे, टेटम का माता रुक्मणि आश्रम 30 सीटर है।
जो रेसिडेंस आश्रम है पर यहां के कर्मचारियों की मनमानी की वजह से आश्रम अब बंद होने की कागार पर है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में चलने वाले इस आश्रम को यहां के भृत्य के भरोसे छोड़ दिया गया है, बच्चों को सिर्फ दोपहर को ही मध्याह्न भोजन मिल रहा है, रात को बच्चे आश्रम में नही रहते हैं। कटेकल्याण ब्लाक में ग्रामीण क्षेत्र में चलने वाले ज्यादा तर स्कूल या तो बंद रहते हैं, या फिर शिक्षकों के अभाव में पढ़ाई प्रभावित है।
टेटम माता रुक्मणि आश्रम में 25 प्रतिशत ही ट्राईवाल विभाग देखता है, महीने भर पहले निरक्षण में गया था, अधीक्षक लंबे समय से अनुपस्थित हैं।
इन सभी स्कूलों की जांच करवाकर सभी बंद स्कूलों के शिक्षकों को नोटिस जारी किया जाएगा।
| दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा में ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। स्कूलों में कहीं शिक्षक नहीं तो कहीं स्कूलों में ताला बंदी है। आश्रम भी नक्सलगढ़ का दिखा बदहाल, चार महीने से अधीक्षक आश्रम नहीं आए, इसकी भी जानकारी जिले के अधिकारियों को नहीं है। केश एकः गुरुवार को जब नईदुनिया की टीम पहुंची लखापाल के गूंजेंमपारा स्कूल यहां स्कूल में लगा रहा ताला। केश नंबर दोः इसके आगे लखापाल के ही स्कूलपारा के प्राथमिक शाला में चौदह बच्चे मौजूद थे, पर इनको पढ़ाने स्कूल में कोई शिक्षक मौजूद नहीं थे, बच्चों ने बताया कि शिक्षक सुबह आए थे। अभी दंतेवाड़ा जाने की बात कह कर स्कूल से चले गए हैं। केश तीनः आश्रम में दिखा अजीबोगरीब नजारा, नक्सलगढ़ के टेटम माता रुक्मणि आश्रम में एक भी शिक्षक नहीं थे। इसके अलावा यहां पर अधीक्षक नदारद थे। हालांकि दो भृत्य मौजूद थे। जिन्होंने बताया अधीक्षक चार महीने से आश्रम नहीं आए हैं, एक अन्य भृत्य भी कभी आश्रम में ड्यूटी करने नहीं आया है। वहीं भृत्यों ने बताया एक शिक्षक उनके घर में कुछ जरूरी काम होने की वजह से अपने गांव गए हुए हैं। आश्रम में जवाबदार कोई नहीं, आठ बच्चे खाना खाते हुए नजर आए, माता रुक्मणि के भृत्य सोनधर ने बताया चार बजे आश्रम को बंद कर देंगे, बच्चों को घर भेज देंगे, टेटम का माता रुक्मणि आश्रम तीस सीटर है। जो रेसिडेंस आश्रम है पर यहां के कर्मचारियों की मनमानी की वजह से आश्रम अब बंद होने की कागार पर है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में चलने वाले इस आश्रम को यहां के भृत्य के भरोसे छोड़ दिया गया है, बच्चों को सिर्फ दोपहर को ही मध्याह्न भोजन मिल रहा है, रात को बच्चे आश्रम में नही रहते हैं। कटेकल्याण ब्लाक में ग्रामीण क्षेत्र में चलने वाले ज्यादा तर स्कूल या तो बंद रहते हैं, या फिर शिक्षकों के अभाव में पढ़ाई प्रभावित है। टेटम माता रुक्मणि आश्रम में पच्चीस प्रतिशत ही ट्राईवाल विभाग देखता है, महीने भर पहले निरक्षण में गया था, अधीक्षक लंबे समय से अनुपस्थित हैं। इन सभी स्कूलों की जांच करवाकर सभी बंद स्कूलों के शिक्षकों को नोटिस जारी किया जाएगा। |
लखनऊ (ब्यूरो)। दुबग्गा चौराहे के पास एक पार्षद की स्कार्पियो ने सड़क किनारे बस का इंतजार कर रहे वन दारोगा और उनकी बेटी को टक्कर मार दी। दुघर्टना में घायल पिता को अस्पताल पहुंचाने के लिए बेटी लोगों से गुहार करती रही। जब तक लोगों की सूचना पर एंबुलेंस वहां पहुंची घायल वन दारोगा ने दम तोड़ दिया। हादसे के बाद पार्षद गाड़ी छोड़कर फरार हो गया। पुलिस को कार में शराब की बोतल और कैश भी मिला है।
ठाकुरगंज के मशकगंज निवासी अनिरुद्ध श्रीवास्तव के मुताबिक शुक्रवार सुबह छोटे भाई मनोज श्रीवास्तव (57) की स्कार्पियो की टक्कर से मौत हो गई। वन विभाग में दारोगा की पोस्ट पर कार्यरत मनोज सुबह बेटी नेहा को स्कूल छोडऩे दुबग्गा बाई पास गए थे। वहां वे बस का इंतजार कर रहे थे, तभी बालागंज की तरफ से आ रही मुंशीगंज वार्ड के पार्षद नरेंद्र यादव की स्कार्पियो ने उन लोगों को टक्कर मार दी। लोगों ने उन्हें पकडऩे की कोशिश की तो वे धक्का देकर वहां से भाग गए। बताया जा रहा है कि हादसे के दौरान पार्षद नशे में थे।
स्कार्पियो की टक्कर लगने से बाइक के सहारे खड़े मनोज और नेहा दोनों सड़क पर उछल कर गिरे। सिर के बल गिरने से मनोज की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं नेहा गंभीर रूप से घायल हो गई। कुछ महिलाओं ने नेहा से घर का मोबाइल नंबर लेकर इस हादसे की सूचना परिजनों को दी। घटना के बाद वन दारोगा की पत्नी मधु, बेटे सचिन और बेटी श्रृष्टि का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
दुबग्गा पुलिस पुलिस के मुताबिक परिजनों की तहरीर पर गाड़ी नंबर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया है। गाड़ी पर मुंशीगंज के पार्षद नरेंद्र यादव का पोस्टर लगा है। लोगों का कहना है कि वह गाड़ी में मौजूद थे। मामले की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
| लखनऊ । दुबग्गा चौराहे के पास एक पार्षद की स्कार्पियो ने सड़क किनारे बस का इंतजार कर रहे वन दारोगा और उनकी बेटी को टक्कर मार दी। दुघर्टना में घायल पिता को अस्पताल पहुंचाने के लिए बेटी लोगों से गुहार करती रही। जब तक लोगों की सूचना पर एंबुलेंस वहां पहुंची घायल वन दारोगा ने दम तोड़ दिया। हादसे के बाद पार्षद गाड़ी छोड़कर फरार हो गया। पुलिस को कार में शराब की बोतल और कैश भी मिला है। ठाकुरगंज के मशकगंज निवासी अनिरुद्ध श्रीवास्तव के मुताबिक शुक्रवार सुबह छोटे भाई मनोज श्रीवास्तव की स्कार्पियो की टक्कर से मौत हो गई। वन विभाग में दारोगा की पोस्ट पर कार्यरत मनोज सुबह बेटी नेहा को स्कूल छोडऩे दुबग्गा बाई पास गए थे। वहां वे बस का इंतजार कर रहे थे, तभी बालागंज की तरफ से आ रही मुंशीगंज वार्ड के पार्षद नरेंद्र यादव की स्कार्पियो ने उन लोगों को टक्कर मार दी। लोगों ने उन्हें पकडऩे की कोशिश की तो वे धक्का देकर वहां से भाग गए। बताया जा रहा है कि हादसे के दौरान पार्षद नशे में थे। स्कार्पियो की टक्कर लगने से बाइक के सहारे खड़े मनोज और नेहा दोनों सड़क पर उछल कर गिरे। सिर के बल गिरने से मनोज की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं नेहा गंभीर रूप से घायल हो गई। कुछ महिलाओं ने नेहा से घर का मोबाइल नंबर लेकर इस हादसे की सूचना परिजनों को दी। घटना के बाद वन दारोगा की पत्नी मधु, बेटे सचिन और बेटी श्रृष्टि का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। दुबग्गा पुलिस पुलिस के मुताबिक परिजनों की तहरीर पर गाड़ी नंबर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया है। गाड़ी पर मुंशीगंज के पार्षद नरेंद्र यादव का पोस्टर लगा है। लोगों का कहना है कि वह गाड़ी में मौजूद थे। मामले की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। |
ऑटो डेस्कः बेंगलुरु आधारित इलेक्ट्रिक व्हीकल स्टार्ट अप कंपनी बैरल मोटर्स जल्द ही भारतीय बाजार में एक इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल लॉन्च करने जा रही हैं। Barrel Motors इस इलेक्ट्रिक बाइक को Veloc-e (वेलोक-ई) के नाम से बाजार में लॉन्च करेगी। यह इलेक्ट्रिक बाइक भारतीय बाजार में मौजूद अन्य इलेक्ट्रिक बाइक्स की तुलना में काफी अलग होने वाली है।
कंपनी की यह मोटरसाइकिल एक इलेक्ट्रिक डर्ट बाइक है जो पहाड़ी और पथरीले रास्तों पर चलाने के लिए डिजाइन की गई है। यह ई-बाइक चट्टान, कीचड़, बर्फ और रेत पर चलाने के लिए डिजाइन की गई है।
फिलहाल कंपनी इस बाइक के प्रोटोटाइप मॉडल की टेस्टिंग कर रही है। टेस्टिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाजार की जरूरत के हिसाब से बाइक का उत्पादन शुरू किया जाएगा। कंपनी का कहना है कि इस बाइक की टेस्टिंग की प्रक्रिया को पूरा करने में एक से डेढ़ साल का समय लग सकता है। कंपनी के अनुसार Veloc-e डर्ट बाइक का उत्पादन 2024 में शुरू किया जा सकता है और इसी साल बाजार में बाइक की बिक्री होगी।
Barrel Motors का कहना है कि वह बाजार में बिकने वाली आम कम्यूटर बाइक से अलग केवल ऑफ-रोड इलेक्ट्रिक पर ध्यान केंद्रित कर रही है। बैरल मोटर्स Veloc-e इस सेगमेंट में हीरो एक्सपल्स और केटीएम 390 एडवेंचर जैसी पेट्रोल से चलने वाली मोटरसाइकिलों को टक्कर देगी.
कंपनी के मुताबिक Veloc-e बाइक का पॉवर आउटपुट एक 200cc की पेट्रोल बाइक से बेहतर होगा। यह इलेक्ट्रिक बाइक ने केवल अधिक पावर देगी बल्कि इसका टॉर्क भी एक 200cc बाइक से कहीं अधिक होगा।
Barrel Motors का कहना है कि वह कुछ ऐसे इलेक्ट्रिक वाहन विकसित कर रही है जो भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करेगी। Veloc-e इलेक्ट्रिक बाइक सीमा से सटे इलाकों में पेट्रोलिंग के लिए इस्तेमाल में लाई जा सकती है। यह बाइक लद्दाख और सियाचिन के कठोर मौसम में भी काम कर सकती है।
बैरल मोटर्स Veloc-e दो वेरिएंट में आएगी - एक स्ट्रीट-फ्रेंडली वर्जन जिसमें हाई-परफॉर्मेंस वेरिएंट पर स्विच करने का विकल्प होगा. कंपनी की योजना अंततः एडवेंचर टूरिंग और लंबी दूरी की टूरिंग स्पेस में प्रवेश करने की है। फर्म प्रदर्शन संख्या और यहां तक कि रेंज पर भी चुप्पी साधे हुए है लेकिन सुंदरराजन ने सुझाव दिया कि बाइक एक बार चार्ज करने पर लगभग 150 किमी चलेगी।
| ऑटो डेस्कः बेंगलुरु आधारित इलेक्ट्रिक व्हीकल स्टार्ट अप कंपनी बैरल मोटर्स जल्द ही भारतीय बाजार में एक इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल लॉन्च करने जा रही हैं। Barrel Motors इस इलेक्ट्रिक बाइक को Veloc-e के नाम से बाजार में लॉन्च करेगी। यह इलेक्ट्रिक बाइक भारतीय बाजार में मौजूद अन्य इलेक्ट्रिक बाइक्स की तुलना में काफी अलग होने वाली है। कंपनी की यह मोटरसाइकिल एक इलेक्ट्रिक डर्ट बाइक है जो पहाड़ी और पथरीले रास्तों पर चलाने के लिए डिजाइन की गई है। यह ई-बाइक चट्टान, कीचड़, बर्फ और रेत पर चलाने के लिए डिजाइन की गई है। फिलहाल कंपनी इस बाइक के प्रोटोटाइप मॉडल की टेस्टिंग कर रही है। टेस्टिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाजार की जरूरत के हिसाब से बाइक का उत्पादन शुरू किया जाएगा। कंपनी का कहना है कि इस बाइक की टेस्टिंग की प्रक्रिया को पूरा करने में एक से डेढ़ साल का समय लग सकता है। कंपनी के अनुसार Veloc-e डर्ट बाइक का उत्पादन दो हज़ार चौबीस में शुरू किया जा सकता है और इसी साल बाजार में बाइक की बिक्री होगी। Barrel Motors का कहना है कि वह बाजार में बिकने वाली आम कम्यूटर बाइक से अलग केवल ऑफ-रोड इलेक्ट्रिक पर ध्यान केंद्रित कर रही है। बैरल मोटर्स Veloc-e इस सेगमेंट में हीरो एक्सपल्स और केटीएम तीन सौ नब्बे एडवेंचर जैसी पेट्रोल से चलने वाली मोटरसाइकिलों को टक्कर देगी. कंपनी के मुताबिक Veloc-e बाइक का पॉवर आउटपुट एक दो सौcc की पेट्रोल बाइक से बेहतर होगा। यह इलेक्ट्रिक बाइक ने केवल अधिक पावर देगी बल्कि इसका टॉर्क भी एक दो सौcc बाइक से कहीं अधिक होगा। Barrel Motors का कहना है कि वह कुछ ऐसे इलेक्ट्रिक वाहन विकसित कर रही है जो भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करेगी। Veloc-e इलेक्ट्रिक बाइक सीमा से सटे इलाकों में पेट्रोलिंग के लिए इस्तेमाल में लाई जा सकती है। यह बाइक लद्दाख और सियाचिन के कठोर मौसम में भी काम कर सकती है। बैरल मोटर्स Veloc-e दो वेरिएंट में आएगी - एक स्ट्रीट-फ्रेंडली वर्जन जिसमें हाई-परफॉर्मेंस वेरिएंट पर स्विच करने का विकल्प होगा. कंपनी की योजना अंततः एडवेंचर टूरिंग और लंबी दूरी की टूरिंग स्पेस में प्रवेश करने की है। फर्म प्रदर्शन संख्या और यहां तक कि रेंज पर भी चुप्पी साधे हुए है लेकिन सुंदरराजन ने सुझाव दिया कि बाइक एक बार चार्ज करने पर लगभग एक सौ पचास किमी चलेगी। |
Gyanvapi Mosque Survey Report एडवोकेट कमिश्नर की कार्यवाही के दौरान वादी के अधिवक्ता हरिशंकर जैन विष्णु शंकर जैन व सुधीर त्रिपाठी ने प्रोफेसर अल्तेकर की किताब हिस्ट्री आफ बनारस और जेम्स प्रिंसेप की किताब व्यू आफ बनारस का जिक्र किया।
जागरण संवाददाता, वाराणसी : Gyanvapi Mosque Survey Report एडवोकेट कमिश्नर की कार्यवाही के दौरान वादी के अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णु शंकर जैन व सुधीर त्रिपाठी ने प्रोफेसर अल्तेकर की किताब हिस्ट्री आफ बनारस और जेम्स प्रिंसेप की किताब व्यू आफ बनारस का जिक्र किया। उसमें छपे पुराने आदि विश्वशेश्वर मंदिर के ग्राउंड प्लान से पूरी तरह मिलता हुआ नक्शा जो दोनों किताबों में दर्शाया गया है की फोटो कापी दी गई।
बताया गया है कि मुख्य गुंबद के नीचे चारों दिशाओं में दीवारों के जिग-जैग कट बने हैं। जो उतनी ही संख्या में है व आकार में है , जैसा किताब के नक्शे में है। इसी तरह से दो दिशा उत्तर व दक्षिण के गुंबदों के नीचे नमाज अदा करने के स्थल की दीवारों के जिग-जैग कट की शेप व संख्या भी उस नक्शे से मिलती है। इन्हीं में कुछ मूल मंडप भी स्थित हैं। मस्जिद के मध्य नमाज हाल व उत्तर व दक्षिण के हाल के मध्य जो दरवाजानुमा आर्क बना है उसकी लंबाई-चौड़ाई भी नक्शे के अनुरूप है। मस्जिद की छत पर बाहरी गुंबदों के अंदर त्रिशंकु शिखरनुमा आकृतियां इन्ही जिग-जैग दीवारो व खंभों के ऊपर टिकी है। फोटोकापी नक्शे से दीवारों के आकार का मिलान करने पर पाया गया कि दोनों में पूरी समानता है। हालांकि इन तथ्यों की सत्यता की जांच के लिए किसी ख्यातिप्राप्त इतिहासकार द्वारा करा किए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
ज्ञानवापी मस्जिद, मंदिर तोड़ कर नहीं बनाई गई है। इसकी मौजूदगी औरंगजेब से पहले से रही है। इस पर विवाद खड़ा किया जाना निराधार है। स्थानीय अदालत जितनी तेजी से बिना हमारे पक्ष को समय दिए और बिना सुने आर्डर पर आर्डर पास कर रही है, उससे हमें ज्यादा उम्मीद नहीं है, लेकिन देश की सर्वोच्च न्यायालय पर पूरा भरोसा है। एडवोकेट कमिश्नर की पहली रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं है। दूसरी रिपोर्ट की कापी अभी हमें मिली नहीं है, इसलिए उस पर कुछ नहीं कहेंगे।
स्पेशल एडवोकेट कमिश्नर की ओर से दाखिल की गई रिपोर्ट की कापी मुझे नहीं मिली है। उसमें क्या लिखा है, मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। रिपोर्ट अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के वकील पढ़ेंगे। रिपोर्ट में क्या है, यह जानने के बाद ही मैं कोई टिप्पणी कर पाऊंगा।
| Gyanvapi Mosque Survey Report एडवोकेट कमिश्नर की कार्यवाही के दौरान वादी के अधिवक्ता हरिशंकर जैन विष्णु शंकर जैन व सुधीर त्रिपाठी ने प्रोफेसर अल्तेकर की किताब हिस्ट्री आफ बनारस और जेम्स प्रिंसेप की किताब व्यू आफ बनारस का जिक्र किया। जागरण संवाददाता, वाराणसी : Gyanvapi Mosque Survey Report एडवोकेट कमिश्नर की कार्यवाही के दौरान वादी के अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णु शंकर जैन व सुधीर त्रिपाठी ने प्रोफेसर अल्तेकर की किताब हिस्ट्री आफ बनारस और जेम्स प्रिंसेप की किताब व्यू आफ बनारस का जिक्र किया। उसमें छपे पुराने आदि विश्वशेश्वर मंदिर के ग्राउंड प्लान से पूरी तरह मिलता हुआ नक्शा जो दोनों किताबों में दर्शाया गया है की फोटो कापी दी गई। बताया गया है कि मुख्य गुंबद के नीचे चारों दिशाओं में दीवारों के जिग-जैग कट बने हैं। जो उतनी ही संख्या में है व आकार में है , जैसा किताब के नक्शे में है। इसी तरह से दो दिशा उत्तर व दक्षिण के गुंबदों के नीचे नमाज अदा करने के स्थल की दीवारों के जिग-जैग कट की शेप व संख्या भी उस नक्शे से मिलती है। इन्हीं में कुछ मूल मंडप भी स्थित हैं। मस्जिद के मध्य नमाज हाल व उत्तर व दक्षिण के हाल के मध्य जो दरवाजानुमा आर्क बना है उसकी लंबाई-चौड़ाई भी नक्शे के अनुरूप है। मस्जिद की छत पर बाहरी गुंबदों के अंदर त्रिशंकु शिखरनुमा आकृतियां इन्ही जिग-जैग दीवारो व खंभों के ऊपर टिकी है। फोटोकापी नक्शे से दीवारों के आकार का मिलान करने पर पाया गया कि दोनों में पूरी समानता है। हालांकि इन तथ्यों की सत्यता की जांच के लिए किसी ख्यातिप्राप्त इतिहासकार द्वारा करा किए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है। ज्ञानवापी मस्जिद, मंदिर तोड़ कर नहीं बनाई गई है। इसकी मौजूदगी औरंगजेब से पहले से रही है। इस पर विवाद खड़ा किया जाना निराधार है। स्थानीय अदालत जितनी तेजी से बिना हमारे पक्ष को समय दिए और बिना सुने आर्डर पर आर्डर पास कर रही है, उससे हमें ज्यादा उम्मीद नहीं है, लेकिन देश की सर्वोच्च न्यायालय पर पूरा भरोसा है। एडवोकेट कमिश्नर की पहली रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं है। दूसरी रिपोर्ट की कापी अभी हमें मिली नहीं है, इसलिए उस पर कुछ नहीं कहेंगे। स्पेशल एडवोकेट कमिश्नर की ओर से दाखिल की गई रिपोर्ट की कापी मुझे नहीं मिली है। उसमें क्या लिखा है, मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। रिपोर्ट अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के वकील पढ़ेंगे। रिपोर्ट में क्या है, यह जानने के बाद ही मैं कोई टिप्पणी कर पाऊंगा। |
आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ क्षेत्रीय दलों से एक साथ आने का आह्वान करते हुए ओवैसी ने कहा कि क्षेत्रीय गठबंधनों के एक साथ आने से हम भाजपा को हरा सकते हैं। तेलंगाना में बीजेपी 2014 और 2018 के चुनाव हार गई थी। इस साल भी दिसंबर 2023 में बीजेपी तेलंगाना चुनाव फिर से हार जाएगी।
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी।
ऑल इंडिया मजलिस-ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने क्षेत्रीय एकता पर बल दिया है। उन्होंने महाराष्ट्र की राजधानी में कहा कि क्षेत्रीय गठबंधनों के एक साथ आने से हम भाजपा को हरा सकते हैं। आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर अपनी रणनीति पर बताते हुए एक बार फिर जुनैद-नासिर हत्याकांड का मुद्दा उठाते हुए राजस्थान सरकार पर निशाना साधा है।
भिवानी हत्याकांड का मुद्दा उठाते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने राजस्थान सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा कि राजस्थान सरकार देश भर में भरत जोड़ो यात्रा में शामिल हो सकती है, अलवर में शाही शादी में जा सकती है, लेकिन वे उस जगह पर नहीं जा सकते जहां जुनैद और नासिर मारे गए।
आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ क्षेत्रीय दलों से एक साथ आने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय गठबंधनों के एक साथ आने से हम भाजपा को हरा सकते हैं। तेलंगाना में बीजेपी 2014 और 2018 के चुनाव हार गई थी। इस साल भी दिसंबर 2023 में बीजेपी तेलंगाना चुनाव फिर से हार जाएगी। इसके लिए हमें कुछ श्रेय दें।
उन्होंने आगे कहा कि हम औरंगाबाद और अन्य सीटों से अगला लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि हम कुछ अन्य दलों के साथ गठबंधन की संभावना पर गौर करेंगे। अगले चुनाव में हम किसके साथ जाएंगे इस पर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी।
गौरतलब है कि ऑल इंडिया मजलिस-ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) पार्टी का पहला राष्ट्रीय अधिवेशन मुंबई में चल रहा है। मुंबई में आज से शुरू हुआ दो दिवसीय अधिवेशन 25 और 26 फरवरी तक चलेगा। अधिवेशन का समापन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की अध्यक्षता में होगा। इसमें राष्ट्रीय कार्यकारिणी सहित सभी राज्यों के प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे।
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| आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ क्षेत्रीय दलों से एक साथ आने का आह्वान करते हुए ओवैसी ने कहा कि क्षेत्रीय गठबंधनों के एक साथ आने से हम भाजपा को हरा सकते हैं। तेलंगाना में बीजेपी दो हज़ार चौदह और दो हज़ार अट्ठारह के चुनाव हार गई थी। इस साल भी दिसंबर दो हज़ार तेईस में बीजेपी तेलंगाना चुनाव फिर से हार जाएगी। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी। ऑल इंडिया मजलिस-ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने क्षेत्रीय एकता पर बल दिया है। उन्होंने महाराष्ट्र की राजधानी में कहा कि क्षेत्रीय गठबंधनों के एक साथ आने से हम भाजपा को हरा सकते हैं। आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर अपनी रणनीति पर बताते हुए एक बार फिर जुनैद-नासिर हत्याकांड का मुद्दा उठाते हुए राजस्थान सरकार पर निशाना साधा है। भिवानी हत्याकांड का मुद्दा उठाते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने राजस्थान सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरत फैला रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने कहा कि राजस्थान सरकार देश भर में भरत जोड़ो यात्रा में शामिल हो सकती है, अलवर में शाही शादी में जा सकती है, लेकिन वे उस जगह पर नहीं जा सकते जहां जुनैद और नासिर मारे गए। आगामी लोकसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ क्षेत्रीय दलों से एक साथ आने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय गठबंधनों के एक साथ आने से हम भाजपा को हरा सकते हैं। तेलंगाना में बीजेपी दो हज़ार चौदह और दो हज़ार अट्ठारह के चुनाव हार गई थी। इस साल भी दिसंबर दो हज़ार तेईस में बीजेपी तेलंगाना चुनाव फिर से हार जाएगी। इसके लिए हमें कुछ श्रेय दें। उन्होंने आगे कहा कि हम औरंगाबाद और अन्य सीटों से अगला लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि हम कुछ अन्य दलों के साथ गठबंधन की संभावना पर गौर करेंगे। अगले चुनाव में हम किसके साथ जाएंगे इस पर टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। गौरतलब है कि ऑल इंडिया मजलिस-ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन पार्टी का पहला राष्ट्रीय अधिवेशन मुंबई में चल रहा है। मुंबई में आज से शुरू हुआ दो दिवसीय अधिवेशन पच्चीस और छब्बीस फरवरी तक चलेगा। अधिवेशन का समापन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की अध्यक्षता में होगा। इसमें राष्ट्रीय कार्यकारिणी सहित सभी राज्यों के प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
भारतीय मूल के अमेरिकी छात्र साहिल दोषी को अमेरिका में युवा वैज्ञानिका का पुरस्कार मिला है. 8वीं क्लास के छात्र 14 वर्षीय साहिल को 'अमेरिकाज टॉप यंग साइंटिस्ट' (अमेरिका के शीर्ष युवा वैज्ञानिक) का यह पुरस्कार पर्यावरण के अनुकूल एक ऐसे डिवाइस को बनाने के लिेए दिया गया है जो घरों में इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई के दौरान कार्बन फुटप्रिंट में कटौती करता है.
2014 डिस्कवरी एजुकेशन 3एम यंग साइंटिस्ट चैलेंज जीतने के लिए पिट्सबर्ग के रहने वाले साहिल का अंतिम दौर में नौ अन्य लोगों से मुकाबला था. इस पुरस्कार में 25 हजार डॉलर की ईनामी राशि और कोस्टा रिका जैसे किसी स्थान की रोमांचक यात्रा मिलती है.
डिस्कवरी एजुकेशन एंड 3 एम ने एक बयान में कहा कि साहिल द्वारा तैयार प्रोटोटाईप- द पोलूसेल कार्बन डाई-ऑक्साइड को बिजली में बदलता है और स्वदेशी तरीके से घरों एवं विकासशील देशों के लिए बिजली देते हुए कार्बन फुटप्रिंट में कटौती करने में मददगार होता है.
बयान में कहा गया कि दुनियाभर में बिजली की कमी और जहरीले वायु प्रदूषण से जूझते 1. 2 अरब लोगों की समस्या को समझते हुए दोषी ने ऊर्जा संग्रहण का एक ऐसा उपकरण बनाने का संकल्प किया, जो बिजली के जरूरतमंद लोगों के लिए बिजली बनाने के साथ-साथ हानिकारक ग्रीनहाउस गैसों को भी कम कर सके.
इस प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर नार्थ पोटोमैक के कैथरीन वू रहे. तीसरे स्थान पर वर्जीनिया के जयकुमार रहे. उन्होंने खिड़की पर लगने वाले वायु शोधन तंत्र का विकास किया, जो नुकसानदायक प्रदूषकों को घर के अंदर दाखिल होने से रोकता है.
| भारतीय मूल के अमेरिकी छात्र साहिल दोषी को अमेरिका में युवा वैज्ञानिका का पुरस्कार मिला है. आठवीं क्लास के छात्र चौदह वर्षीय साहिल को 'अमेरिकाज टॉप यंग साइंटिस्ट' का यह पुरस्कार पर्यावरण के अनुकूल एक ऐसे डिवाइस को बनाने के लिेए दिया गया है जो घरों में इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई के दौरान कार्बन फुटप्रिंट में कटौती करता है. दो हज़ार चौदह डिस्कवरी एजुकेशन तीनएम यंग साइंटिस्ट चैलेंज जीतने के लिए पिट्सबर्ग के रहने वाले साहिल का अंतिम दौर में नौ अन्य लोगों से मुकाबला था. इस पुरस्कार में पच्चीस हजार डॉलर की ईनामी राशि और कोस्टा रिका जैसे किसी स्थान की रोमांचक यात्रा मिलती है. डिस्कवरी एजुकेशन एंड तीन एम ने एक बयान में कहा कि साहिल द्वारा तैयार प्रोटोटाईप- द पोलूसेल कार्बन डाई-ऑक्साइड को बिजली में बदलता है और स्वदेशी तरीके से घरों एवं विकासशील देशों के लिए बिजली देते हुए कार्बन फुटप्रिंट में कटौती करने में मददगार होता है. बयान में कहा गया कि दुनियाभर में बिजली की कमी और जहरीले वायु प्रदूषण से जूझते एक. दो अरब लोगों की समस्या को समझते हुए दोषी ने ऊर्जा संग्रहण का एक ऐसा उपकरण बनाने का संकल्प किया, जो बिजली के जरूरतमंद लोगों के लिए बिजली बनाने के साथ-साथ हानिकारक ग्रीनहाउस गैसों को भी कम कर सके. इस प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर नार्थ पोटोमैक के कैथरीन वू रहे. तीसरे स्थान पर वर्जीनिया के जयकुमार रहे. उन्होंने खिड़की पर लगने वाले वायु शोधन तंत्र का विकास किया, जो नुकसानदायक प्रदूषकों को घर के अंदर दाखिल होने से रोकता है. |
मिक्स वेज पराठा एक लोकप्रिय और स्वादिष्ट भारतीय फ्लैटब्रेड है जिसे मिश्रित सब्जियों के स्वादिष्ट मिश्रण से भरा जाता है। यहां देखें मिक्स वेज पराठा बनाने की विधिः
आटे के लिएः
, पानी,
भराई के लिएः
निर्देशः
एक मिश्रण कटोरे में, पूरे गेहूं का आटा, नमक और पानी मिलाएं। नरम और चिकना आटा बनाने के लिए गूंधें। इसे एक गीले कपड़े से ढक कर लगभग 15-20 मिनट के लिए रख दें।
एक पैन में मध्यम आंच पर तेल या घी गरम करें। जीरा डालें और फूटने दें।
बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च और कद्दूकस किया हुआ अदरक डालें। प्याज के पारदर्शी होने तक भूनें।
पैन में मिली-जुली सब्जियाँ डालें और उन्हें कुछ मिनट तक पकाएँ जब तक कि वे थोड़े नरम न हो जाएँ। चिपकने से रोकने के लिए समय-समय पर हिलाते रहें।
लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, गरम मसाला और नमक डालें। अच्छी तरह मिलाएँ और 2-3 मिनट तक पकाएँ ताकि स्वाद अच्छी तरह से मिल जाए।
मिश्रण को आंच से उतार लें और ठंडा होने दें। ठंडा होने पर ताज़ा हरा धनिया डालें और अच्छी तरह मिलाएँ।
आटे को बराबर भागों में बाँट लें और प्रत्येक भाग को एक छोटी गेंद में रोल करें।
आटे की एक लोई लें और इसे एक छोटी लोई में बेल लें। गोले के बीच में एक चम्मच सब्जी का मिश्रण रखें।
सर्कल के किनारों को इकट्ठा करें और स्टफिंग को अंदर लाकर और एक साथ लाकर सील कर दें। इसे अपने हाथों से धीरे से चपटा करें।
स्टफिंग को थोडा़ सा मैदा लगाकर बेल लीजिए ताकि स्टफिंग बाहर न निकले. शेष आटा और भराई के साथ प्रक्रिया को दोहराएं।
मध्यम आंच पर एक तवा या तवा गरम करें। बेले हुए परांठे को गरम तवे पर डालिये और 1 मिनिट तक या परांठे की सतह ब्राउन होने तक सेक लीजिये.
पराठे को पलट दें और पकी हुई तरफ थोड़ा तेल या घी फैलाएं। इसे फिर से पलट दें और दूसरी तरफ भी तेल या घी लगाकर चारों तरफ फैला दें।
दोनों तरफ से सुनहरा भूरा होने तक पकाएं, पकाने के लिए कलछी से धीरे से दबाएं।
पके हुए मिक्स वेज पराठे को तवे से उतार लें और दही, अचार या अपनी पसंद की किसी भी चटनी के साथ गरमागरम परोसें।
| मिक्स वेज पराठा एक लोकप्रिय और स्वादिष्ट भारतीय फ्लैटब्रेड है जिसे मिश्रित सब्जियों के स्वादिष्ट मिश्रण से भरा जाता है। यहां देखें मिक्स वेज पराठा बनाने की विधिः आटे के लिएः , पानी, भराई के लिएः निर्देशः एक मिश्रण कटोरे में, पूरे गेहूं का आटा, नमक और पानी मिलाएं। नरम और चिकना आटा बनाने के लिए गूंधें। इसे एक गीले कपड़े से ढक कर लगभग पंद्रह-बीस मिनट के लिए रख दें। एक पैन में मध्यम आंच पर तेल या घी गरम करें। जीरा डालें और फूटने दें। बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च और कद्दूकस किया हुआ अदरक डालें। प्याज के पारदर्शी होने तक भूनें। पैन में मिली-जुली सब्जियाँ डालें और उन्हें कुछ मिनट तक पकाएँ जब तक कि वे थोड़े नरम न हो जाएँ। चिपकने से रोकने के लिए समय-समय पर हिलाते रहें। लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, गरम मसाला और नमक डालें। अच्छी तरह मिलाएँ और दो-तीन मिनट तक पकाएँ ताकि स्वाद अच्छी तरह से मिल जाए। मिश्रण को आंच से उतार लें और ठंडा होने दें। ठंडा होने पर ताज़ा हरा धनिया डालें और अच्छी तरह मिलाएँ। आटे को बराबर भागों में बाँट लें और प्रत्येक भाग को एक छोटी गेंद में रोल करें। आटे की एक लोई लें और इसे एक छोटी लोई में बेल लें। गोले के बीच में एक चम्मच सब्जी का मिश्रण रखें। सर्कल के किनारों को इकट्ठा करें और स्टफिंग को अंदर लाकर और एक साथ लाकर सील कर दें। इसे अपने हाथों से धीरे से चपटा करें। स्टफिंग को थोडा़ सा मैदा लगाकर बेल लीजिए ताकि स्टफिंग बाहर न निकले. शेष आटा और भराई के साथ प्रक्रिया को दोहराएं। मध्यम आंच पर एक तवा या तवा गरम करें। बेले हुए परांठे को गरम तवे पर डालिये और एक मिनिट तक या परांठे की सतह ब्राउन होने तक सेक लीजिये. पराठे को पलट दें और पकी हुई तरफ थोड़ा तेल या घी फैलाएं। इसे फिर से पलट दें और दूसरी तरफ भी तेल या घी लगाकर चारों तरफ फैला दें। दोनों तरफ से सुनहरा भूरा होने तक पकाएं, पकाने के लिए कलछी से धीरे से दबाएं। पके हुए मिक्स वेज पराठे को तवे से उतार लें और दही, अचार या अपनी पसंद की किसी भी चटनी के साथ गरमागरम परोसें। |
बिहार में बीजेपी एमएलसी संजय पासवान ने विधान परिषद समति से इस्तीफा दे दिया है। उनकी नाराजगी कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह की कार्यशैली से है। संजय पासवान बीजेपी में रहते हुए एनडीए के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना लगाते रहे हैं।
पटना, स्टेट ब्यूरो। बिहार की सियासत से जुड़ी यह बड़ी खबर है। भारतीय जनता पार्टी के विधान पार्षद संजय पासवान (BJP MLC Sanjay Paswan) ने विधान परिषद की समिति के सभापति (Chairman of Bihar Legislative Council Committee) के पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सभापति से फैसले को लेकर नाराजगी भी जाहिर की है। ये वही संजय पासवान हैं, जिन्होंने जनवरी 2020 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) का यह कहकर विरोध किया था कि जनता एक चेहरे से ऊब चुकी है, अब बीजेपी से नया मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। संजय पासवान बिहार में शराबबंदी (Liquor Ban) व कानून-व्यवस्था (law and Order) को लेकर भी सरकार को नसीहत देते रहे हैं। एक बार अपने गले में सांप लपेटकर सोशल मीडिया में चर्चा में रह चुके हैं।
बीजेपी के विधान परिषद सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय पासवान ने परिषद की अनुसूचित जाति-जनजाति समिति (SC-ST Committee) के सभापति पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा परिषद के कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा। कार्यकारी सभापति भी बीजेपी के ही हैं। पांच दिन पहले डॉ. पासवान को इस समिति का सभापति बनाया गया था। गुरुवार को नवगठित समितियों की पहली बैठक बुलाई गई थी। बैठक में शामिल होने के तुरंत बाद वे नाराज होकर निकल गए। निकलने के समय ही उन्होंने सभापति पद से इस्तीफे की घोषणा की थी। शुक्रवार को उन्होंने विधिवत इस्तीफा दे दिया।
डाॅ. पासवान ने दैनिक जागरण को बताया कि उनका एतराज कई मुददों पर है। उन्होंने 10 साल पहले घोषणा की थी कि वे विधानसभा या लोकसभा का चुनाव अनुसूचित जातियों के लिए सुरक्षित सीट से नहीं लड़ेंगे। बीच में कई चुनाव हुए। वे अपनी घोषणा पर कायम रहे। इसी तर्क के आधार पर उन्होंने परिषद की अनुसूचित जाति, जनजाति समिति के सभापति पद से इस्तीफा दिया। क्योंकि, उन्हें अनुसूचित जाति का होने के कारण यह पद दिया गया था। उन्होंने कहा कि जाति और लिंग के आधार पर समितियों का सभापति बनाना गलत है। हम कहते हैं कि अगर कोई पुरुष सदस्य सक्षम है तो उसे महिलाओं से संबंधित समितियों का सभापति बना देना चाहिए।
हालांकि, डॉ. पासवान ने कहा कि सभापति पद से उनके इस्तीफे की इकलौती वजह यह नहीं है। उन्हें कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह की कार्यशैली पर सख्त ऐतराज है। उन्हें केंद्र में मंत्री बनाया गया था। शपथ ग्रहण के लिए नाम भेजने से पहले उनकी राय ली गई थी। बड़े नेताओं ने राय ली थी। लेकिन कार्यकारी सभापति ने बिना हमारी राय लिए पद दे दिया। यह तरीका आपत्तिजनक है। बीजेपी नेता ने कहा कि विधान परिषद में कम संख्या वाले दलों के नेताओं को महत्वपूर्ण समितियों का सभापति बनाया गया। इस लिहाज से उन्हें जिस समिति का सभापति बनाया गया, उसकी खास पहचान नहीं है। तमाम बातों के अलावा उन्हें इस बात का भी मलाल है कि उनके कद का सम्मान नहीं किया गया।
क्या पार्टी में नाराज चल रहे हैं संजय पासवान?
कार्यकारी सभापति की माने तो समितियों के लिए नाम पार्टियों द्वारा तय करने की परंपरा रही है। ऐसे में सवाल यह उठा है कि क्या वे पार्टी में नाराज चल रहे है? हालांकि, इस बाबत उन्होंने कुछ भी नहीं कहा है।
संजय पासवान केंद्र सरकार में मंत्री (Minister in Central Government) रह चुके हैं। वे बीजेपी में वे बड़ा चेहरा माने जाते हैं। बीजेपी में रहते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार पर भी वे हमलावर होते रहे हैं। बीते फरवरी में उन्होंने शराबबंदी के साथ-साथ कानून-व्यवस्था की सिथति लेकर गृह सचिव आमिर सुभानी को इस्तीफा देने के लिए कह डाला था। उन्होंने कहा था कि बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा कर इसपर सरकार को फिर से सोचना चाहिए। संजय पासवान का उक्त बयान मुख्समंत्री नीतीश कुमार पर हमला माना गया था, क्योंकि शराबंदी उनकी ड्रीम प्रोजेक्ट है और कानून-व्यवस्था के लिए जिम्मेदार राज्य का गृह विभाग भी उन्होंने अपने पास ही रखा है।
संजय पासवान ने मुख्यंमत्री नीतीश कुमार का पहले भी विरोध किया था। बीते साल जनवरी 2020 में उन्होंने बीजेपी के मुख्यमंत्री CM from BJP) की मांग करते हुए कहा था कि एक ही चेहरे से ऊब चुकी है। तब उन्होंने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (Sushil Modi) या केंन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय (Nityanand Rai) को मुख्यमंत्री बनाने पर बल दिया था। हालांकि, यह भी कहा था कि इसपर अंतिम फैसला तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) को करना है।
संजय पासवान अपनी अजब-गजब हरकतों से भी चर्चा में रहे हैं। एक बार उन्होंने गले में सांप लपेट कर फेसबुक पर तस्वीर पोस्ट कर दी थी। तस्वीर में उनके गले में सांप लटका था तथा कुछ इस तरह आंखें बंद थीं मानो वे भक्ति में लीन हों।
| बिहार में बीजेपी एमएलसी संजय पासवान ने विधान परिषद समति से इस्तीफा दे दिया है। उनकी नाराजगी कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह की कार्यशैली से है। संजय पासवान बीजेपी में रहते हुए एनडीए के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना लगाते रहे हैं। पटना, स्टेट ब्यूरो। बिहार की सियासत से जुड़ी यह बड़ी खबर है। भारतीय जनता पार्टी के विधान पार्षद संजय पासवान ने विधान परिषद की समिति के सभापति के पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सभापति से फैसले को लेकर नाराजगी भी जाहिर की है। ये वही संजय पासवान हैं, जिन्होंने जनवरी दो हज़ार बीस में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह कहकर विरोध किया था कि जनता एक चेहरे से ऊब चुकी है, अब बीजेपी से नया मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। संजय पासवान बिहार में शराबबंदी व कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार को नसीहत देते रहे हैं। एक बार अपने गले में सांप लपेटकर सोशल मीडिया में चर्चा में रह चुके हैं। बीजेपी के विधान परिषद सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय पासवान ने परिषद की अनुसूचित जाति-जनजाति समिति के सभापति पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा परिषद के कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा। कार्यकारी सभापति भी बीजेपी के ही हैं। पांच दिन पहले डॉ. पासवान को इस समिति का सभापति बनाया गया था। गुरुवार को नवगठित समितियों की पहली बैठक बुलाई गई थी। बैठक में शामिल होने के तुरंत बाद वे नाराज होकर निकल गए। निकलने के समय ही उन्होंने सभापति पद से इस्तीफे की घोषणा की थी। शुक्रवार को उन्होंने विधिवत इस्तीफा दे दिया। डाॅ. पासवान ने दैनिक जागरण को बताया कि उनका एतराज कई मुददों पर है। उन्होंने दस साल पहले घोषणा की थी कि वे विधानसभा या लोकसभा का चुनाव अनुसूचित जातियों के लिए सुरक्षित सीट से नहीं लड़ेंगे। बीच में कई चुनाव हुए। वे अपनी घोषणा पर कायम रहे। इसी तर्क के आधार पर उन्होंने परिषद की अनुसूचित जाति, जनजाति समिति के सभापति पद से इस्तीफा दिया। क्योंकि, उन्हें अनुसूचित जाति का होने के कारण यह पद दिया गया था। उन्होंने कहा कि जाति और लिंग के आधार पर समितियों का सभापति बनाना गलत है। हम कहते हैं कि अगर कोई पुरुष सदस्य सक्षम है तो उसे महिलाओं से संबंधित समितियों का सभापति बना देना चाहिए। हालांकि, डॉ. पासवान ने कहा कि सभापति पद से उनके इस्तीफे की इकलौती वजह यह नहीं है। उन्हें कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह की कार्यशैली पर सख्त ऐतराज है। उन्हें केंद्र में मंत्री बनाया गया था। शपथ ग्रहण के लिए नाम भेजने से पहले उनकी राय ली गई थी। बड़े नेताओं ने राय ली थी। लेकिन कार्यकारी सभापति ने बिना हमारी राय लिए पद दे दिया। यह तरीका आपत्तिजनक है। बीजेपी नेता ने कहा कि विधान परिषद में कम संख्या वाले दलों के नेताओं को महत्वपूर्ण समितियों का सभापति बनाया गया। इस लिहाज से उन्हें जिस समिति का सभापति बनाया गया, उसकी खास पहचान नहीं है। तमाम बातों के अलावा उन्हें इस बात का भी मलाल है कि उनके कद का सम्मान नहीं किया गया। क्या पार्टी में नाराज चल रहे हैं संजय पासवान? कार्यकारी सभापति की माने तो समितियों के लिए नाम पार्टियों द्वारा तय करने की परंपरा रही है। ऐसे में सवाल यह उठा है कि क्या वे पार्टी में नाराज चल रहे है? हालांकि, इस बाबत उन्होंने कुछ भी नहीं कहा है। संजय पासवान केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वे बीजेपी में वे बड़ा चेहरा माने जाते हैं। बीजेपी में रहते हुए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार पर भी वे हमलावर होते रहे हैं। बीते फरवरी में उन्होंने शराबबंदी के साथ-साथ कानून-व्यवस्था की सिथति लेकर गृह सचिव आमिर सुभानी को इस्तीफा देने के लिए कह डाला था। उन्होंने कहा था कि बिहार में शराबबंदी कानून की समीक्षा कर इसपर सरकार को फिर से सोचना चाहिए। संजय पासवान का उक्त बयान मुख्समंत्री नीतीश कुमार पर हमला माना गया था, क्योंकि शराबंदी उनकी ड्रीम प्रोजेक्ट है और कानून-व्यवस्था के लिए जिम्मेदार राज्य का गृह विभाग भी उन्होंने अपने पास ही रखा है। संजय पासवान ने मुख्यंमत्री नीतीश कुमार का पहले भी विरोध किया था। बीते साल जनवरी दो हज़ार बीस में उन्होंने बीजेपी के मुख्यमंत्री CM from BJP) की मांग करते हुए कहा था कि एक ही चेहरे से ऊब चुकी है। तब उन्होंने तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी या केंन्द्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को मुख्यमंत्री बनाने पर बल दिया था। हालांकि, यह भी कहा था कि इसपर अंतिम फैसला तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को करना है। संजय पासवान अपनी अजब-गजब हरकतों से भी चर्चा में रहे हैं। एक बार उन्होंने गले में सांप लपेट कर फेसबुक पर तस्वीर पोस्ट कर दी थी। तस्वीर में उनके गले में सांप लटका था तथा कुछ इस तरह आंखें बंद थीं मानो वे भक्ति में लीन हों। |
चीन में कोरोना से हालात बिगड़ते चले जा रहे हैं। चीन लगातार कोविड से जुड़े आंकड़े और जानकारी छिपाने के लिए नए नए पैंतरे चल रहा है। चीन का दावा है कि वहां पिछले 6 दिन से कोरोना से किसी की मौत नहीं हुई है, लेकिन चीन से जो वीडियो सामने आ रहे हैं, वे कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट जेनिफर जेंग ने चीन के शंघाई शहर का एक वीडियो शेयर किया है। इसमें शंघाई के अस्पताल में शवों के ढेर नजर आ रहे हैं।
उनके मुताबिक, ये वीडियो 24 दिसंबर का है। इतना ही नहीं जेंग ने एक वीडियो अनसन शहर का भी शेयर किया है। इसमें देखा जा सकता है कि किस तरह से चीन में फ्यूनरल होम फुल हो गए हैं। अंतिम संस्कार के लिए लंबी वेटिंग है। कोरोना के लगातार हो रहीं मौतें के चलते फ्यूनरल होम की पार्किंग में शवों को रखा जा रहा है। कोरोना का कहर शंघाई शहर में भी जारी है। यहां कोरोना के लगातार केस बढ़ रहे हैं। इतना ही नहीं कोरोना के चलते काफी लोगों की जान भी जा रही है। ऐसे में शंघाई के श्मशान घाटों में भर्तियां चल रही हैं। लोग जो शव उठा सकें, वे इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
इतना ही नहीं जो लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, उन्हें वरीयता दी जा रही है। कोरोना से जुड़े मौत के आंकड़े दुनिया के सामने न आएं, चीन इसकी पुरजोर कोशिश में जुटा है। लोगों को उनके परिजनों के शव अस्पताल से तभी दिए जा रहे हैं, जब वे एक फॉर्म पर साइन कर रहे हैं। इसमें लोगों को यह लिखकर देना पड़ रहा है कि उनके परिजनों की मौत कोरोना से नहीं हुई। कोई भी गलत दावा होता है, तो उसके लिए मैं जिम्मेदार हूं।
| चीन में कोरोना से हालात बिगड़ते चले जा रहे हैं। चीन लगातार कोविड से जुड़े आंकड़े और जानकारी छिपाने के लिए नए नए पैंतरे चल रहा है। चीन का दावा है कि वहां पिछले छः दिन से कोरोना से किसी की मौत नहीं हुई है, लेकिन चीन से जो वीडियो सामने आ रहे हैं, वे कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट जेनिफर जेंग ने चीन के शंघाई शहर का एक वीडियो शेयर किया है। इसमें शंघाई के अस्पताल में शवों के ढेर नजर आ रहे हैं। उनके मुताबिक, ये वीडियो चौबीस दिसंबर का है। इतना ही नहीं जेंग ने एक वीडियो अनसन शहर का भी शेयर किया है। इसमें देखा जा सकता है कि किस तरह से चीन में फ्यूनरल होम फुल हो गए हैं। अंतिम संस्कार के लिए लंबी वेटिंग है। कोरोना के लगातार हो रहीं मौतें के चलते फ्यूनरल होम की पार्किंग में शवों को रखा जा रहा है। कोरोना का कहर शंघाई शहर में भी जारी है। यहां कोरोना के लगातार केस बढ़ रहे हैं। इतना ही नहीं कोरोना के चलते काफी लोगों की जान भी जा रही है। ऐसे में शंघाई के श्मशान घाटों में भर्तियां चल रही हैं। लोग जो शव उठा सकें, वे इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। इतना ही नहीं जो लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं, उन्हें वरीयता दी जा रही है। कोरोना से जुड़े मौत के आंकड़े दुनिया के सामने न आएं, चीन इसकी पुरजोर कोशिश में जुटा है। लोगों को उनके परिजनों के शव अस्पताल से तभी दिए जा रहे हैं, जब वे एक फॉर्म पर साइन कर रहे हैं। इसमें लोगों को यह लिखकर देना पड़ रहा है कि उनके परिजनों की मौत कोरोना से नहीं हुई। कोई भी गलत दावा होता है, तो उसके लिए मैं जिम्मेदार हूं। |
अयोध्या, मथुरा और काशी की सुरक्षा की जाएगी हाइटेक, बनाई जाएगी स्पेशल फोर्स!
यदि सपने में कोई वाहन या आभूषण चोरी हो जाए तो क्या होगा? जानिए, शुभ और अशुभ संकेत!
Somwati Amavasya 2023: सोमवती अमावस्या पर करें ये पूजा, मिलेगा मां पार्वती का भी आशीर्वाद!
| अयोध्या, मथुरा और काशी की सुरक्षा की जाएगी हाइटेक, बनाई जाएगी स्पेशल फोर्स! यदि सपने में कोई वाहन या आभूषण चोरी हो जाए तो क्या होगा? जानिए, शुभ और अशुभ संकेत! Somwati Amavasya दो हज़ार तेईस: सोमवती अमावस्या पर करें ये पूजा, मिलेगा मां पार्वती का भी आशीर्वाद! |
प्रमागातर्कसाथ नोपालम्भ सिद्धान्ता विरुडः पचावयवापयन्त्रःपक्षप्रति पतपरिग्रहोवादः ४२ ॥ तीनों कथाओं में प्रधान बाद का लक्षण यह है कि जिस में यथार्थ प्रमाण से अपने पक्ष का साधन (सिडि) औरय थार्थ तर्क से विरुद्ध पक्ष का उपालभ (खंडन) हो, पत मनामन) प्रतिपक्ष (अपमे विरुद्धमत) इन दोनों में से प्रत्ये कमत की सिद्धि के अर्थ जो परस्पर उत्तर प्रशा, के रूस से कहा हुआ वायाका समूह उसे बाद कहते हैं, प्रमाणाआस (उटप्रमाण) से अपने मत की सिद्धि और तकी भारुड टतर्क) से विरुद्धमत का खंडन तो यद्यपि जल्प विनंडा में भी होता है, तो भी वाद के लक्षण में यथार्थप्रमाण और यथार्थ तर्क का निवेश करने से जल्प और विनंडा में अति व्याप्ति नहीं लगती; इस वाद कथा में निग्रहस्थानोकानिय म बांधने के अर्थ (सिद्धांताविरुडा, पञ्चावयवापपन्न :) ये दो विशेष दिये हैं क्योंकि पहिले विशेष में सिद्धान का साधारया नाम लेने से प्रतीत हुआ, कि बाद में श्रपति होत नामी निग्रहस्थान भी लेते हैं; और दूसरे विशेषण में सामान्यरूप से पांच अवयवों का नाम लेने से नन, अधिक. अवयवाभास दुष्टव्यव) दृष्टांतात आदि हेवाभास भी बाद में श्रनुज्ञात होते हैं, तो सिद्ध यह हुआ कि हे वाभास कि, उरांत यही चारे। निग्रहस्थान वाद में लिये जाते हैं. वास्तव सिद्धांत यह जानना, कि राम आदि दोषों की निहति से अनंतर ही मनुष्य तत्व ( यदा●
र्य के यथार्थ स्वरूप) का निश्चय करने के बाद में प्र हत होते हैं तो बाद में विज्ञानार्थ आदि निग्रह स्थान की नई और अधिक नामी निग्रहस्थानों की भी के ई आवश्यकता नहीं है, इसी से भाष्यकार ने पांच श्रव शों की आवश्यकता भी बाद में नहीं मानी; उडेर हेलाभास के प्रकाश करने से भी कथा का विच्छेद तभी हैं, अब अन्य हे तसे अर्थ की सिद्धि न कर सकें नहीं तो क दल वह पहिला देत ही इष्ट देगा, कथा का विच्छेद कभी नहीं होगा; किंतु अन्य देत से कथा प्रवृत्त होगी; इसवाद कथा के अधिकारी ये पुरुष हैंः तत्व (पदार्थ का यथार्थ स्वर (घ) जानने की इच्छावाले, संबद्धबात कहने वाले, कलहनक रनेवाले, छालन करने वाले, जिसरपरसूति हो, यु का निश्चय करने वाले, डर कोई कहते हैं,
राजा, मध्यस्य पंडितों की सभा वाद में चाहिये, परंत बाद के अधिकारियों में राग आदि दोषों के नहाने से इस सभा की ये कुळनही है ४२ ॥ यथाक्लोपपत्र स्थान साधनोपालम्भोजल्पः ४३ ॥ तीनों कथाओं में मध्यम जल्प का लगा यह है कि जिस में सामान्य प्रमरोग से छलों के द्वारा अपने मत की सिडिगे र सामान्य तर्के से जाति और निग्रहस्थानों के द्वारा हसरे मन का खंडन है।, जीतने की कामना से अपने अपने पक्ष की सि दि के अर्थ प्रधा, उत्तर के क्रम से कहे इस वाक्या का समू है जल्प कहाता है; यद्यपि छल, जाति, निग्रहस्थानों से इस | प्रमागातर्कसाथ नोपालम्भ सिद्धान्ता विरुडः पचावयवापयन्त्रःपक्षप्रति पतपरिग्रहोवादः बयालीस ॥ तीनों कथाओं में प्रधान बाद का लक्षण यह है कि जिस में यथार्थ प्रमाण से अपने पक्ष का साधन औरय थार्थ तर्क से विरुद्ध पक्ष का उपालभ हो, पत मनामन) प्रतिपक्ष इन दोनों में से प्रत्ये कमत की सिद्धि के अर्थ जो परस्पर उत्तर प्रशा, के रूस से कहा हुआ वायाका समूह उसे बाद कहते हैं, प्रमाणाआस से अपने मत की सिद्धि और तकी भारुड टतर्क) से विरुद्धमत का खंडन तो यद्यपि जल्प विनंडा में भी होता है, तो भी वाद के लक्षण में यथार्थप्रमाण और यथार्थ तर्क का निवेश करने से जल्प और विनंडा में अति व्याप्ति नहीं लगती; इस वाद कथा में निग्रहस्थानोकानिय म बांधने के अर्थ ये दो विशेष दिये हैं क्योंकि पहिले विशेष में सिद्धान का साधारया नाम लेने से प्रतीत हुआ, कि बाद में श्रपति होत नामी निग्रहस्थान भी लेते हैं; और दूसरे विशेषण में सामान्यरूप से पांच अवयवों का नाम लेने से नन, अधिक. अवयवाभास दुष्टव्यव) दृष्टांतात आदि हेवाभास भी बाद में श्रनुज्ञात होते हैं, तो सिद्ध यह हुआ कि हे वाभास कि, उरांत यही चारे। निग्रहस्थान वाद में लिये जाते हैं. वास्तव सिद्धांत यह जानना, कि राम आदि दोषों की निहति से अनंतर ही मनुष्य तत्व का निश्चय करने के बाद में प्र हत होते हैं तो बाद में विज्ञानार्थ आदि निग्रह स्थान की नई और अधिक नामी निग्रहस्थानों की भी के ई आवश्यकता नहीं है, इसी से भाष्यकार ने पांच श्रव शों की आवश्यकता भी बाद में नहीं मानी; उडेर हेलाभास के प्रकाश करने से भी कथा का विच्छेद तभी हैं, अब अन्य हे तसे अर्थ की सिद्धि न कर सकें नहीं तो क दल वह पहिला देत ही इष्ट देगा, कथा का विच्छेद कभी नहीं होगा; किंतु अन्य देत से कथा प्रवृत्त होगी; इसवाद कथा के अधिकारी ये पुरुष हैंः तत्व जानने की इच्छावाले, संबद्धबात कहने वाले, कलहनक रनेवाले, छालन करने वाले, जिसरपरसूति हो, यु का निश्चय करने वाले, डर कोई कहते हैं, राजा, मध्यस्य पंडितों की सभा वाद में चाहिये, परंत बाद के अधिकारियों में राग आदि दोषों के नहाने से इस सभा की ये कुळनही है बयालीस ॥ यथाक्लोपपत्र स्थान साधनोपालम्भोजल्पः तैंतालीस ॥ तीनों कथाओं में मध्यम जल्प का लगा यह है कि जिस में सामान्य प्रमरोग से छलों के द्वारा अपने मत की सिडिगे र सामान्य तर्के से जाति और निग्रहस्थानों के द्वारा हसरे मन का खंडन है।, जीतने की कामना से अपने अपने पक्ष की सि दि के अर्थ प्रधा, उत्तर के क्रम से कहे इस वाक्या का समू है जल्प कहाता है; यद्यपि छल, जाति, निग्रहस्थानों से इस |
एक ऐसी दुनिया की कल्पना करें जहां आपकी सभी डिजिटल जरूरतें एक ही स्थान पर पूरी हो जाएं, ठीक आपकी फ़ोन के लॉक स्क्रीन पर।
डॉक्टर बासु आई अस्पताल नई दिल्ली के सहयोग से नई अनाज मण्डी करनाल हरियाणा में आँखों का एक मेगा आई कैंप आयोजित किया जाएगा।
एचएसबीसी इंडिया ने आज घोषणा की कि उन्होंने दिग्गज भारतीय क्रिकेटर और खेल आइकन विराट कोहली को अपने ब्रांड इन्फ्लुएंसर के रूप में साइन किया है।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली आबकारी नीति लागू करने के दौरान भ्रष्टाचार के कथित मामले में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत 13 आरोपियों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया है।
जहां पूरे देश में जन्माष्टमी पूरे देश में मनाई गई है ।
दिल्ली मेट्रो में दो महिलाओं के बीच जमकर तू-तू, मैं-मैं हुई और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। दरअसल दो महिलाएं मेट्रो में सीट को लेकर भिड़ गई।
केंद्र सरकार ने 2020 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की 36 घंटे की राजकीय यात्रा में शामिल आवास, भोजन, रसद आदि पर लगभग 38 लाख रुपए खर्च किए। विदेश मंत्रालय ने केंद्रीय सूचना आयोग को इसकी जानकारी दी।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा, अन्य देशों से संबंधों और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े कथित दुष्प्रचार के मामले में एक पाकिस्तानी चैनल समेत आठ यूट्यूब चैनल को ब्लॉक (अवरुद्ध) करने का गुरुवार को आदेश दिया।
भाजपा नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका मिला है। दिल्ली हाईकोर्ट ने हुसैन के खिलाफ महिला से दुष्कर्म के आरोप में दिल्ली पुलिस को तत्काल मुकद्दमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
दिल्ली में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों को जल्द ही 250 सरकारी आवासों में शिफ्ट किया जाएगा। इन आवासों में कुल 1100 शरणार्थियों के रहने की व्यवस्था होगी। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसका ऐलान किया है।
आजादी के अमृत महोत्सव पर दिल्ली में बसे हिमाचलियों ने रेजिडेंस वेल्फेयर एसोसिएशन भजनपुरा के साथ संयुक्त रूप से भजनपुरा में ध्वजारोहण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश के स्वतंत्रता दिवस पर विश्व नेताओं की ओर से मिली शुभकामनाओं के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।
देश के 76वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लाल किले की प्राचीर से 9वीं बार देश को संबोधित किया।
राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए 75वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि वहां उपस्थित लोगों द्वारा covid-19 प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
राष्ट्रीय राजधानी में 15 अगस्त को लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखते हुए सुरक्षा कारणों से किले के आसपास कुछ यातायात प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
दिल्ली में अगस्त महीने के शुरुआती 10 दिनों में ही कोरोना वायरस संक्रमण के 19,760 मामले आ गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में यह जानकारी मिली है।
वृष राशि वालों मार्केटिंग से जुड़े लोगों के लिए दिन खास रहेगा। कार्यक्षेत्र में नए लोगों से थोड़ा संभल कर रहने की जरूरत है।
मिथुन राशि वालों सरकारी कामों में आप उच्च पद हासिल कर सकते हैं। खर्चों के बढ़ने से आर्थिक स्थिति डगमगा सकती है।
कर्क राशि वालों आज आपको करियर से जुड़े बढ़िया नतीजे हासिल होंगे। कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिलेगी।
तुला राशि वालों कार्यक्षेत्र में आज आपको उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। अधिकारी वर्ग आपकी भावुकता का फायदा उठा सकते हैं।
वृश्चिक राशि वालों किसी परिचित व्यक्ति की मदद से बड़ा ऑर्डर प्राप्त हो सकता है। व्यवसाय में भाग्य आपके पक्ष में है।
मकर राशि वालों कलात्मक गतिविधियों के जरिए आपको नई पहचान मिलेगी। प्रॉपर्टी पर निवेश करने के योग बन रहे हैं।
कुंभ राशि वालों कार्यक्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल करेंगे। घूमने-फिरने के लिहाज से आज का दिन बेहतर रहेगा।
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| एक ऐसी दुनिया की कल्पना करें जहां आपकी सभी डिजिटल जरूरतें एक ही स्थान पर पूरी हो जाएं, ठीक आपकी फ़ोन के लॉक स्क्रीन पर। डॉक्टर बासु आई अस्पताल नई दिल्ली के सहयोग से नई अनाज मण्डी करनाल हरियाणा में आँखों का एक मेगा आई कैंप आयोजित किया जाएगा। एचएसबीसी इंडिया ने आज घोषणा की कि उन्होंने दिग्गज भारतीय क्रिकेटर और खेल आइकन विराट कोहली को अपने ब्रांड इन्फ्लुएंसर के रूप में साइन किया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने दिल्ली आबकारी नीति लागू करने के दौरान भ्रष्टाचार के कथित मामले में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत तेरह आरोपियों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया है। जहां पूरे देश में जन्माष्टमी पूरे देश में मनाई गई है । दिल्ली मेट्रो में दो महिलाओं के बीच जमकर तू-तू, मैं-मैं हुई और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। दरअसल दो महिलाएं मेट्रो में सीट को लेकर भिड़ गई। केंद्र सरकार ने दो हज़ार बीस में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की छत्तीस घंटाटे की राजकीय यात्रा में शामिल आवास, भोजन, रसद आदि पर लगभग अड़तीस लाख रुपए खर्च किए। विदेश मंत्रालय ने केंद्रीय सूचना आयोग को इसकी जानकारी दी। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा, अन्य देशों से संबंधों और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े कथित दुष्प्रचार के मामले में एक पाकिस्तानी चैनल समेत आठ यूट्यूब चैनल को ब्लॉक करने का गुरुवार को आदेश दिया। भाजपा नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका मिला है। दिल्ली हाईकोर्ट ने हुसैन के खिलाफ महिला से दुष्कर्म के आरोप में दिल्ली पुलिस को तत्काल मुकद्दमा दर्ज करने का आदेश दिया है। दिल्ली में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों को जल्द ही दो सौ पचास सरकारी आवासों में शिफ्ट किया जाएगा। इन आवासों में कुल एक हज़ार एक सौ शरणार्थियों के रहने की व्यवस्था होगी। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इसका ऐलान किया है। आजादी के अमृत महोत्सव पर दिल्ली में बसे हिमाचलियों ने रेजिडेंस वेल्फेयर एसोसिएशन भजनपुरा के साथ संयुक्त रूप से भजनपुरा में ध्वजारोहण कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश के स्वतंत्रता दिवस पर विश्व नेताओं की ओर से मिली शुभकामनाओं के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। देश के छिहत्तरवें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लाल किले की प्राचीर से नौवीं बार देश को संबोधित किया। राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए पचहत्तरवें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि वहां उपस्थित लोगों द्वारा covid-उन्नीस प्रोटोकॉल का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। राष्ट्रीय राजधानी में पंद्रह अगस्त को लाल किले पर स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखते हुए सुरक्षा कारणों से किले के आसपास कुछ यातायात प्रतिबंध लगाए जाएंगे। दिल्ली में अगस्त महीने के शुरुआती दस दिनों में ही कोरोना वायरस संक्रमण के उन्नीस,सात सौ साठ मामले आ गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में यह जानकारी मिली है। वृष राशि वालों मार्केटिंग से जुड़े लोगों के लिए दिन खास रहेगा। कार्यक्षेत्र में नए लोगों से थोड़ा संभल कर रहने की जरूरत है। मिथुन राशि वालों सरकारी कामों में आप उच्च पद हासिल कर सकते हैं। खर्चों के बढ़ने से आर्थिक स्थिति डगमगा सकती है। कर्क राशि वालों आज आपको करियर से जुड़े बढ़िया नतीजे हासिल होंगे। कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता मिलेगी। तुला राशि वालों कार्यक्षेत्र में आज आपको उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। अधिकारी वर्ग आपकी भावुकता का फायदा उठा सकते हैं। वृश्चिक राशि वालों किसी परिचित व्यक्ति की मदद से बड़ा ऑर्डर प्राप्त हो सकता है। व्यवसाय में भाग्य आपके पक्ष में है। मकर राशि वालों कलात्मक गतिविधियों के जरिए आपको नई पहचान मिलेगी। प्रॉपर्टी पर निवेश करने के योग बन रहे हैं। कुंभ राशि वालों कार्यक्षेत्र में एक नया मुकाम हासिल करेंगे। घूमने-फिरने के लिहाज से आज का दिन बेहतर रहेगा। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service. |
तेल विपणन कंपनियों ने बुधवार को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में कटौती की है। दिल्ली में बुधवार को पेट्रोल का दाम 76. 38 रुपए प्रति लीटर है, जबकि डीजल 71. 27 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है।
पेट्रोल, डीजल की कीमतों में सोमवार को भी कमी आई। आज की इस कटौती के बाद पेट्रोल और डीजल 17 से 20 पैसे प्रति लीटर सस्ता हुआ है।
डीजल-पेट्रोल की कीमतों में रविवार को लगातार 29वें दिन कमी दर्ज की गयी और ये पुनः मध्य अगस्त के स्तर पर आ गये।
यदि संतुलित कदम उठाया जाए तो इसकी मदद से सरकार के राजस्व को बिना नुकसान पहुंचाए पेट्रोल और डीजल की कीमतों को 5-6 रुपए प्रति लीटर तक घटाया जा सकता है।
देश की राजधानी दिल्ली में दो महीने से अधिक समय बाद डीजल का दाम 72 रुपए प्रति लीटर से नीचे आ गया है।
पेट्रोल डीजल की कीमतों में कटौती पिछले 4 हफ्तों से जारी है। पिछले महीने की 17 तारीख से लेकर आज तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार कटौती हो रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में पिछले पांच सप्ताह से नरमी बनी हुई है, जिसके कारण पेट्रोल और डीजल के दाम अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मिल रही राहत का दौर फिलहाल थमा नहीं है। पिछले करीब 25 दिनों से मिल रही राहत मंगलवार को भी जारी रही।
पेट्रोल की कीमतों में सोमवार को दिल्ली और मुंबई में 17 पैसे की कटौती दर्ज की गई वहीं डीजल की कीमतों में भी 16 पैसे तक की कमी दर्ज की गई है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत का दौर अभी भी जारी है। रविवार को पेट्रोल 16 पैसे सस्ता हो गया।
तेल मार्केटिंग कंपनियों ने शनिवार को लगातार 20वें दिन पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की है।
पेट्रोल डीजल पर पिछले 3 हफ्तों से जारी राहत का सिलसिला दिवाली पर भी जारी है। मंगलवार को भी पेट्रोलियम कंपनियों ने कीमतों के मामले में आम लोगों को राहत दी है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जारी कटौती का दौर त्योहारी हफ्ते में भी जारी रहा। सोमवार को भी धनतेरस के दिन आम लोगों को पेट्रोलियम कंपनियों ने राहत प्रदान की।
कुछ समय पहले तक पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों से परेशान जनता को अब राहत मिलने लगी है।
पेट्रोल और डीजल के दाम में शनिवार को भी कटौती दर्ज की गई। इस हफ्ते मंगलवार को बढ़ने के बाद पेट्रोल का दाम लगातार चौथे दिन घटा है, जबकि डीजल के दाम में लगातार तीसरे दिन कटौती की गई है।
पेट्रोल के दाम में एक दिन की स्थिरता के बाद शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। डीजल की कीमतों में भी कमी आई। इससे पहले तीन दिनों तक डीजल के भाव में स्थिरता बनी रही।
पेट्रोल की कीमतों में पिछले 2 हफ्तों से जारी कटौती का दौर गुरुवार को भी जारी रहा। 1 नवंबर को देश भर में पेट्रोल की दरों में 18 पैसे तक की कटौती हो गई।
पेट्रोल की कीमतों में पिछले 14 दिनों से जारी गिरावट आखिरकार बुधवार को जाकर थम गई। राहत की बात यह रही कि कीमतों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले 13 दिनों से जारी कटौती का सिलसिला 30 अक्टूबर को भी जारी रहा। मंगलवार को दिल्ली में पेट्रोल 20 पैसे सस्ता हो गया।
| तेल विपणन कंपनियों ने बुधवार को एक बार फिर पेट्रोल और डीजल के दामों में कटौती की है। दिल्ली में बुधवार को पेट्रोल का दाम छिहत्तर. अड़तीस रुपयापए प्रति लीटर है, जबकि डीजल इकहत्तर. सत्ताईस रुपयापए प्रति लीटर बिक रहा है। पेट्रोल, डीजल की कीमतों में सोमवार को भी कमी आई। आज की इस कटौती के बाद पेट्रोल और डीजल सत्रह से बीस पैसे प्रति लीटर सस्ता हुआ है। डीजल-पेट्रोल की कीमतों में रविवार को लगातार उनतीसवें दिन कमी दर्ज की गयी और ये पुनः मध्य अगस्त के स्तर पर आ गये। यदि संतुलित कदम उठाया जाए तो इसकी मदद से सरकार के राजस्व को बिना नुकसान पहुंचाए पेट्रोल और डीजल की कीमतों को पाँच-छः रुपयापए प्रति लीटर तक घटाया जा सकता है। देश की राजधानी दिल्ली में दो महीने से अधिक समय बाद डीजल का दाम बहत्तर रुपयापए प्रति लीटर से नीचे आ गया है। पेट्रोल डीजल की कीमतों में कटौती पिछले चार हफ्तों से जारी है। पिछले महीने की सत्रह तारीख से लेकर आज तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार कटौती हो रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में पिछले पांच सप्ताह से नरमी बनी हुई है, जिसके कारण पेट्रोल और डीजल के दाम अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मिल रही राहत का दौर फिलहाल थमा नहीं है। पिछले करीब पच्चीस दिनों से मिल रही राहत मंगलवार को भी जारी रही। पेट्रोल की कीमतों में सोमवार को दिल्ली और मुंबई में सत्रह पैसे की कटौती दर्ज की गई वहीं डीजल की कीमतों में भी सोलह पैसे तक की कमी दर्ज की गई है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत का दौर अभी भी जारी है। रविवार को पेट्रोल सोलह पैसे सस्ता हो गया। तेल मार्केटिंग कंपनियों ने शनिवार को लगातार बीसवें दिन पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती की है। पेट्रोल डीजल पर पिछले तीन हफ्तों से जारी राहत का सिलसिला दिवाली पर भी जारी है। मंगलवार को भी पेट्रोलियम कंपनियों ने कीमतों के मामले में आम लोगों को राहत दी है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जारी कटौती का दौर त्योहारी हफ्ते में भी जारी रहा। सोमवार को भी धनतेरस के दिन आम लोगों को पेट्रोलियम कंपनियों ने राहत प्रदान की। कुछ समय पहले तक पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों से परेशान जनता को अब राहत मिलने लगी है। पेट्रोल और डीजल के दाम में शनिवार को भी कटौती दर्ज की गई। इस हफ्ते मंगलवार को बढ़ने के बाद पेट्रोल का दाम लगातार चौथे दिन घटा है, जबकि डीजल के दाम में लगातार तीसरे दिन कटौती की गई है। पेट्रोल के दाम में एक दिन की स्थिरता के बाद शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। डीजल की कीमतों में भी कमी आई। इससे पहले तीन दिनों तक डीजल के भाव में स्थिरता बनी रही। पेट्रोल की कीमतों में पिछले दो हफ्तों से जारी कटौती का दौर गुरुवार को भी जारी रहा। एक नवंबर को देश भर में पेट्रोल की दरों में अट्ठारह पैसे तक की कटौती हो गई। पेट्रोल की कीमतों में पिछले चौदह दिनों से जारी गिरावट आखिरकार बुधवार को जाकर थम गई। राहत की बात यह रही कि कीमतों में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले तेरह दिनों से जारी कटौती का सिलसिला तीस अक्टूबर को भी जारी रहा। मंगलवार को दिल्ली में पेट्रोल बीस पैसे सस्ता हो गया। |
श्री रेबती त्रिपुराः सर, 'आयुष्मान भारत' के ऊपर मेरा प्रश्न है। सबसे पहले मैं प्रधान मंत्री जी और स्वास्थ्य मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं। 'आयुष्मान भारत' के तहत भारत में करीब 50 करोड़ लोगों को हेल्थ फैसिलिटी दी जाती है। मेरा मानना है कि अभी तक दिल्ली और वेस्ट बंगाल समेत बहुत से ऐसे राज्य हैं, जहां 'आयुष्मान भारत' को लागू नहीं किया गया। मेरा मंत्री जी से प्रश्न है कि जहां यह अभी तक लागू नहीं हुआ है, वहां भी गरीब लोग हैं, गरीब लोगों को सुविधा देने के लिए ऐसा कुछ मैकेनिज्म या व्यवस्था मंत्री जी की सोच में है, ताकि वहां के गरीब लोगों को भी ये फैसिलिटीज़ मिलें?
डॉ. हर्ष वर्धनः महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को यह कहना चाहता हूं कि इसमें कोई दो मत और दो राय नहीं कि अभी भी देश में चार राज्य ऐसे हैं, जो हमारी आयुष्मान भारत' स्कीम को लागू नहीं कर रहे हैं। इसमें दिल्ली, तेलंगाना, वेस्ट बंगाल और ओडिशा हैं। लगातार पिछले 6 महीने से स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद मैंने सबसे पहला काम यह किया कि यहां के मुख्य मंत्रियों को पत्र लिखा और उनसे व्यक्तिगत टेलीफोन पर भी बात की। हम लगातार उनके साथ अपने आफिसर्स के माध्यम से पर्यू कर रहे हैं कि वे इस एंबीशियस स्कीम को जिससे देश के अंदर 55 करोड़ से ज्यादा गरीब लोगों को फायदा पहुंच रहा है, उनके जीवन में बीमारी के कारण जो इतनी जबरदस्त तकलीफ होती थी, लोगों के घर बिक जाते थे, लोगों के मकान बिक जाते थे, सारा जीवन बर्बाद हो जाता था, अब उनको एक राहत मिली है। अभी करीब एक साल के लगभग पीरियड बीता है और 82 लाख से ज्यादा लोगों को इस 'आयुष्मान भारत' योजना से फायदा हो चुका है। 'आयुष्मान भारत' को, क्योंकि हमारा फेडरल सिस्टम है, हम जबरदस्ती तो इन स्टेट्स में लागू नहीं कर सकते हैं, लेकिन जो दूसरे माध्यम हैं, जिसमें इन स्टेट्स के गरीब मरीजों के लिए राष्ट्रीय आरोग्य निधि और दूसरी सुविधायें, प्रधान मंत्री राहत कोष से, स्वास्थ्य मंत्रालय से गरीबों के लिए जो मदद की जा सकती है, जिस स्तर तक भी की जा सकती है, वह हम करते हैं। हम इस सदन के माध्यम से फिर से इन स्टेट्स से और उनके मुख्यमंत्रियों से रिक्वैस्ट करना चाहते हैं कि
आप वहां के गरीब लोगों के हित में, इस विषय को राजनीति से ऊपर उठकर देखें और गरीब लोगों के हित में इस योजना को उन स्टेट्स में भी लागू करें।
इस योजना के संदर्भ में प्रधान मंत्री को यूनाइटेड नेशंस में बुलाया गया। सारी दुनिया इस योजना को एप्रीशिएट कर रही है। यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज पर प्रधान मंत्री जी का यूनाइटेड नेशंस में बयान हुआ। यह दुनिया का सबसे बड़ा एंबीशियस प्रोग्राम है। आजादी के 70 वर्षों के बाद शायद इतना बड़ा कार्यक्रम और जो स्वास्थ्य के हितों की रक्षा करने के लिए हो, कभी देश के अंदर इसकी कल्पना भी नहीं की गई थी।
श्री रेबती त्रिपुरा : सर, मेरा सप्लीमेंट्री क्वैश्चन यह है कि 'आयुष्मान भारत', जिनके पास बीपीएल कार्ड या अंत्योदय कार्ड होता है, उनको इसका लाभ दिया जाता है, लेकिन जो एपीएल कार्ड होल्डर्स हैं, उनमें भी बहुत से गरीब लोग हैं। उनके लिए भी मिनिस्ट्री अगर सोचे तो बहुत अच्छा होगा।
डॉ. हर्ष वर्धनः अध्यक्ष जी, मैं माननीय सदस्य को सूचित करना चाहता हूं कि वर्ष 2011 में एक सोशियो-इकॉनामिक कास्ट बेस्ड सेंसस हुआ था। इसके अंतर्गत लगभग 10.74 करोड़ ऐसे गरीब लोग थे। एक प्रकार से अभी तो यह एक एंटाइटलमेंट स्कीम है। इसके तहत करीब 55 करोड़ से ज्यादा लोग इसमें एंटाइटल्ड हैं। इसमें ब्रॉडली, जो वास्तव में बहुत ज्यादा गरीब लोग हैं, वे सब इसके अंदर कवर्ड हैं।
जैसा उन्होंने सुझाव दिया, अल्टीमेटली भविष्य में इसके अलावा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्कीम का दूसरा कम्पोनेंट है। उसके माध्यम से हम देश भर में आने वाले वर्षों में 2022 तक डेढ़ लाख हैल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स क्रिएट कर रहे हैं, जिसमें ग्रासरूट लेवल पर पॉजिटीव हेल्थ और प्रिवेन्टिव हैल्थ सर्विसेज को इन्कलूड किया गया है, हम 27-28 हजार ऑलरेडी बना चुके हैं। इस 31 मार्च तक यह चालीस हजार की संख्या तक पहुंचने वाला है, 31 दिसम्बर, 2022 तक डेढ़
लाख तक पहुंचने वाले हैं। इससे लोगों को पॉजिटिव हैल्थ, प्रिवेन्टिव हैल्थ और क्यूरेटिव हैल्थ की सुविधाएं देने के लिए हैल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स को डेवलप व स्ट्रैन्थेन कर रहे हैं।
श्री महाबली सिंहः अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय ने जो विवरण सदन पटल पर रखा है, उससे मैं सहमत हूं लेकिन पूरी तरह से सहमत नहीं हूं। मैं मानता हूं कि आजादी के बाद देश में गरीब परिवार के लोगों का इलाज और दवा के अभाव में मौत हो जाती थी। आदरणीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने एक ऐसी योजना चालू की जिससे गरीब परिवार जो दवा के अभाव में मरते थे, वे अब नहीं मरेंगे, उनको जीवनदान देने का काम किया है।
मैं माननीय मंत्री महोदय से एक बात कहना चाहता हूं कि बिहार में बीपीएल सूची में जिन गरीबों को चिन्हित किया गया है, उनकी आबादी पांच करोड़ चौरासी लाख इक्यावन हजार के लगभग है।
माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य, आंकड़े बताने का काम अपना नहीं है, आप सीधा सवाल पूछिए । श्री महाबली सिंहः अध्यक्ष महोदय, उसमें 43,48,901 लोगों को ही आयुष्मान हैल्थ कार्ड निर्गत किये गये है। मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि जो बीपीएल परिवार के गरीब लोग छूट गए हैं, क्या सरकार उन बीपीएल परिवारों को आयुष्मान हैल्थ कार्ड निर्गत करने का विचार औरकब तक करती है?
डॉ. हर्ष वर्धनः अध्यक्ष महोदय, मैं सबसे पहले मैंबर साहब को जानकारी देना चाहता हूं कि जो 10.74 करोड़, यानी लगभग 55 करोड़ से ज्यादा इंसान इस स्कीम के एंटाइटलमेंट हैं। जो कार्ड दिया जा रहा है, इसमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को अवेर किया जा रहा है। केवल इस कार्ड के कारण ही इलाज नहीं हो रहा है, जिनके पास कोई कार्ड नहीं है, अगर वे बाइस हजार अस्पतालों में से किसी भी जगह पर जाते हैं और वहां जाकर अपना नाम, एड्रेस या अपनी उम्र बताते हैं तो हर अस्पताल के अंदर पीएमजेएवाई के लिए एक आरोग्य मित्र है। फोन नम्बर- 14555 पर कोई भी टेलीफोन करके अपना इंटाइटलमेंट पूछ सकता है कि वह इस स्कीम का पात्र है या नहीं। माननीय अध्यक्षः माननीय मंत्री जी, वह पूछ रहे हैं कि इसके अलावा भी कार्ड देंगे?
डॉ. हर्ष वर्धनः अध्यक्ष महोदय, हमें 55 करोड़ लोगों को इंडिव्जुअल कार्ड देना है। हम आप सभी की सहायता चाहते हैं। कॉमन सर्विस सेंटर और स्टेट्स ने भी बहुत सारी स्कीम्स लागू की हैं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि अभी तक 12.04 करोड़ लोगों ने अपने हाथ में लिया। इसके अलावा 43 करोड़ लोग हैं, जो बिना कार्ड किसी भी अस्पताल में जा सकते हैं। जेब में पैसा नहीं भी है तो भी बाइस हजार इम्पैनल्ड अस्पताल में जाएंगे तो उनका इलाज शुरू हो जाएगा।
SHRI BENNY BEHANAN : Sir, we are very much disappointed about the answer given by the hon. Minister because it is a long pending demand of Kerala to have the National Institute. Sir, you know that Kerala already has a well-established tradition and ancient practice of this branch of medicine. Perhaps, we are the first not only in India but also in the world as a whole in Ayurvedic medicine.
Ayurveda Medical System is a huge generator of medical tourism to Kerala and wherever it is practiced, it is earning goodwill as well as dollars for the country. Will the Government include major Ayurveda Centres in the Incredible India Programme and its tourist promotion activities?
श्री अश्विनी कुमार चौबेः माननीय अध्यक्ष जी, माननीय सदस्य ने जो बात कही है, यह बहुत ही पुराने सदस्य हैं। इनका अनुभव बहुत अच्छा है।
माननीय अध्यक्षः ज्यादा अनुभव नहीं है, नए हैं।
श्री अश्विनी कुमार चौबेः महोदय, इनका राजनीति में बड़ा अनुभव है। हमारे देश में दक्षिण में बसा हुआ केरल राज्य सदियों से आयुर्वेद पद्धति का बहुत ही सुविख्यात स्थान है, इसमें कहीं दो मत नहीं है ।
इसी बात को ध्यान में रखकर हमारी सरकार ने केरल राज्य में आयुष मंत्रालय के माध्यम से केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा सीसीआरएएस नामक स्वायत्त संस्था द्वारा दो महत्वपूर्ण रिसर्च इंस्टीट्यूट का संचालन सुनिश्चित किया है। इनमें से एक है नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ पंचकर्म, चेरुतुरुथी तथा दूसरा है आयुर्वेद रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर मदर एंड चाइल्ड हैल्थ केयर, त्रिवेन्द्रमा सैंटर फॉर एक्सीलेंस योजना 2007 में सरकार ने चलाई थी, सरकार ने 2017 में पंचकर्म इंस्टीट्यूट को अपग्रेड किया है। इसका प्रत्यक्ष संचालन भी केंद्र
सरकार स्वयं कर रही है। केरल राज्य को कितना महत्व दिया गया है, इस बात से इंगित होता है कि सरकार ने पूरे देश में 36 ऐसे संस्थानों को सैंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में अपग्रेड किया है, जिसमें से छः केवल केरल राज्य को दिए गए हैं।
मेरा मत है कि आयुष मंत्रालय द्वारा इस योजना के तहत छः संस्थानों को 25 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी पिछले दिनों दी है। सरकार आयुष मंत्रालय की इस योजना के तहत पहले से चल रहे संस्थानों को, चाहे वह सरकारी हो या गैर-सरकारी हो, एनजीओ या ट्रस्ट द्वारा संचालित हो, तय मानदंड के आधार पर दस करोड़ रुपये तक वित्तीय सहायता देकर सैंटर ऑफ एक्सीलेंस में परिणत करती रही है।
अभी माननीय सदस्य ने जो प्रश्न रखा है, उसमें सरकार ने यह काम किया है और केरल को बहुत महत्व दिया है।
SHRI BENNY BEHANAN: Sir, you have given some grant but majority of the Institutes are under the private sector and not in the Government sector. Panchakarma Hospital in Cheruthuruthi is not serving the purpose of Ayurvedic
National Institute.
My second supplementary is, Ayurveda is being adopted by many countries as an accepted way of medical treatment and what are the steps taken by the Government to promote the system in more countries?
श्री अश्विनी कुमार चौबे : महोदय, मैंने स्पष्ट बताया है कि केरल में दो सरकारी संस्थान हैं। ... ( व्यवधान)
SHRI BENNY BEHANAN: Ayurveda system of medicine is being practiced in many countries. Has the Government got any plan to promote Ayurveda in other countries?
श्री अश्विनी कुमार चौबेः अध्यक्ष महोदय, मैं इसलिए कह रहा हूं कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेद के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से कई सेमिनार और कई प्रकार के बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं तथा अभी कई देशों के साथ एग्रीमेंट भी होना है। उस स्तर पर भारत सरकार आयुष मंत्रालय के माध्यम से काम कर रही है और निकट भविष्य में कुछ इस प्रकार एग्रीमेंट भी होने वाले हैं।
SHRI TALARI RANGAIAH : Thank you, Sir, for giving me this opportunity.
Sir, forest fires occur every year in almost every State. Some of the regions are more vulnerable than others. I would like to know from the hon. Minister that what steps are taken by the Government to prevent such forest fires.
श्री बाबुल सुप्रियोः अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने बहुत महत्वपूर्ण सवाल किया है। मैं आपको पहले ही बताना चाहता हूं, आपको जानकर खुशी होगी कि पूरी दुनिया में केवल सात या आठ ऐसे देश हैं, जहां पर फॉरेस्ट कवर इन्क्रीज हुआ है। भारत उनमें से एक है। यहां पिछले कई सालों से 2 परसेंट से ऊपर फॉरेस्ट कवर इन्क्रीज हुआ है। इसके लिए मैं आपको बताना चाहता हूं कि मिनिस्ट्री ऑफ एनवॉयरमेंट एंड फॉरेस्ट के बहुत सारे प्रकल्प हैं, जिसमें प्लांटेशन को एनकरेज किया जाता है, जिसमें नगर वन उद्यान योजना, स्कूल नर्सरी योजना ये सब हैं। लेकिन, आप जो स्पेसिफिक सवाल कर रहे हैं कि डिग्रेडेड फॉरेस्ट के लिए हम क्या कर रहे हैं तो मैं आपको बता दूं कि डिग्रेडेड फॉरेस्ट के लिए स्पेसिफिक एक प्रोग्राम है, जिसका नाम 'नैप (NAP)' है। But the Government is not napping on that. It is called National Afforestation Programme. ट्री प्लांटेशन डिग्रेडेड फॉरेस्ट में लोगों के पार्टिसिपेशन और नेशनल मिशन फॉर ए ग्रीन इंडिया (जीआईएम) दोनों चीजें चल रही हैं। इसमें 2 मिलियन हेक्टेयर जगह में स्टेट्स और यूनियन टेरिटरीज में 3 हजार 874 करोड़ रुपये केवल नैप के लिए, आपने जो डिग्रेडेड फॉरेस्ट के बारे में कहा है, उसके लिए खर्च किया जा रहा है। हम यह उम्मीद करते हैं कि स्टेट और यूनियन टेरिटरीज के सहयोग से हम बहुत जल्द फॉरेस्ट कवर को और बढ़ा पाएंगे और जो जगह डिग्रेड हुई है, टॉप सॉयल खराब हुई है, वहां अफॉरस्टेशन से हमें बहुत ज्यादा फायदा मिलेगा
SHRI TALARI RANGAIAH: Sir, actually, your answer is irrelevant. I am asking that what are you going to do to prevent forest fires.
श्री बाबुल सुप्रियोः मैं फॉरेस्ट फायर के बारे में बताना चाहता हूं। फॉरेस्ट फायर्स के लिए एक अलग स्कीम है, जिसमें फॉरेस्ट फायर्स को काउंटर किया जाता है। जब फॉरेस्ट फायर्स बनते हैं तो डिफॉरेस्टेशन होता है, प्लांटेशन्स जल जाते हैं, इस पर भी यही फंड खर्च होता है। इसके अलावा, जहां पर फॉरेस्ट फायर्स होता है, वहां पर अलग से फाइनेंशिएल सपोर्ट दिया जाता है। पांच एलर्ट सिस्टम हैं, जिसको एफएसआई के माध्यम से डेवलप किया गया है। एलर्ट सिस्टम के आधार पर जहां-जहां फॉरेस्ट फायर्स हो रहा है, उसको हम रोकने की कोशिश करते हैं।
श्री जगदम्बिका पालः अध्यक्ष महोदय, मैंने एक महत्वपूर्ण प्रश्न आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में पूछा है। मेरा सवाल माननीय मंत्री जी से था कि नीति आयोग के द्वारा वर्ष 2018-19 में उन्होंने जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संबंध में पेपर तैयार किया था, डिस्कस किया था - National Programme on Artificial Intelligence, with a view to guiding the research and
development in new and emerging technologies. हमने यही सवाल पूछा था । नीति आयोग ने वर्ष 2018 में डिसकस किया। आज जो माननीय मंत्री जी का उत्तर आया है, उसमें "NITI Aayog's National Strategy on Artificial Intelligence (NSAI) discusses the following." जो वर्ष 2018 के डिसकशन में थे, उन सारी चीजों को दिया है। मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से प्रश्न है कि आज जब एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बात पूरी दुनिया में चल रही है और आज भी भारत में या दुनिया में ह्यूमन बिंग को अगर सबसे सर्वोच्च बनाने का काम करती है तो वह इंटेलिजेंस ही करती है। दूसरे ह्यूमन बिंग के बजाय मनुष्य के पास इंटेलिजेंस है, इसलिए वह सर्वोच्च है। जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दुनिया में हो रही है तो क्या आप भविष्य में आने वाले दिनों में इस पर कोई पॉलिसी बनाएंगे?
नीति आयोग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर डिसकसन किया है। आप कह रहे हैं कि इसके लिए इलेक्ट्रानिक एण्ड इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी कमेटी है । About development of
template and the required legal and regulatory framework in the domain of Artificial Intelligence. मैं आपके माध्यम से जानना चाहता हूं कि क्या सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए कोई नीति बनाएगी?
डॉ. हर्ष वर्धन : सर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक अमर्जिंग एरिया है। हमारी सरकार डिस्रप्टिव टेक्नोलॉजी है और कटिंग एज टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है और हमारे प्रधान मंत्री जी इसके लिए बहुत पैशनेट हैं। आजकल काफी चीजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग भी होता है।
आज हम मेडिकल फील्ड्स में इसका बहुत जगह इस्तेमाल कर रहे हैं। यहां तक कि आयुष्मान भारत में फ्रॉड डिटेक्शन को भी, जो अस्पतालों में कहीं भी किसी भी लेवल पर हो रहा है, उसको डिटेक्ट करने के लिए जो भी साइंस हो सकती है, उसमें भी आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर रहे हैं। जहां तक सरकार का सवाल है तो इसके संदर्भ में नीति आयोग ने बहुत विस्तृत चर्चा की है। नेशनल स्ट्रेटेजी फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने भी डिटेल में डॉक्यूमेंट्स पब्लिश कर दिए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को देश में कैसे इंप्लीमेंट करना है, इसके लिए आप जिस कमेटी की चर्चा कर रहे हैं, वह कमेटी आगे चर्चा करे कि इसके बारे में हमारा रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क क्या होना चाहिए? इसके साथ ही साथ जो मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रानिक्स एण्ड इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी है, वह भी डाटा प्रोटेक्शन प्राइवेसी के बारे में लॉ बनाने के लिए विस्तार से चर्चा कर रही है। एक-डेढ़ साल पहले सरकार ने कैबिनेट में एक नेशनल मिशन ऑन साइबर फिजिकल सिस्टम पॉलिसी बनाई थी, जिसमें लगभग 3,660 करोड़ रुपये के करीब खर्च होना था। हमारी कैबिनेट ने ऐसी पॉलिसी अप्रूव की थी। साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी मंत्रालय देश में 20 इनोवेशन हब स्थापित कर रहा है, जिसमें से एक हब एक्सक्लूसिवली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर फोकस करेगा। मेरा माननीय सदस्य को यह कहना है कि कमिटमेंट के मामले में, वीजन के मामले में, तैयारी के मामले में या जो हम करना चाहते हैं या हम जिस दिशा में काम कर रहे हैं, उसमें हम दुनिया से कम नहीं है। विज्ञान का जनता के हित में और सभी क्षेत्रों में किस तरह से ज्यादा से ज्यादा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से प्रयोग कर सकते हैं, वह हम कर रहे हैं। श्री जगदम्बिका पालः माननीय मंत्री जी ने अपने उत्तर में कहा है कि भारत सरकार इस पर बहुत फोकस कर रही है। प्रधान मंत्री जी को भी बहुत चिंता है। In the light of NITI Ayog's Discussion Paper on National Strategy on Artificial Intelligence which was released in 2018, what measure the Government is taking to implement the same? The same document also states that the global investment in the field of artificial intelligence are forecasted to reach US $57.6 billion by 2021 and we
are in 2020. The Union Budget for 2020-21 allocated Rs. 8,000 crore for the period of next five years for the National Mission on Quantum Technology and Applications. Therefore, can the Government state the details in this regard? डॉ. हर्ष वर्धन : आप जो सवाल पूछ रहे हैं, उसका आपने ही जवाब दे दिया है। आपने कहा है कि क्वांटम टेक्नोलॉजी के लिए बजट में आठ हजार करोड़ रुपये का अनाउंसमेंट हुआ है। मैंने आपको साइबर फिजिकल सिस्टम के बारे में भी बताया है। यह स्ट्रैटेजी पेपर बहुत ज्यादा अध्ययन करके, स्टेकहॉल्डर्स से बातचीत करके बनाया गया है। इसमें सभी तरह के लोग शामिल है। अभी स्ट्रेटजी पेपर्स की जो फाइंडिग्स है या नेशनल स्ट्रेटेजी बनी है, यह आने वाले समय में कैबिनेट के पास जाएगी। कैबिनेट इसके बारे में और ज्यादा तेजी से निर्णय लेगा। इसके लिए गवर्नमेंट का सपोर्ट और कमिटमेंट तो पहले से ही है। मैंने साइबर फिजिकल सिस्टम्स के बारे में बताया है। अभी आपने स्वयं उल्लेख किया है कि इस बार के बजट में क्वांटम मैकेनिक्स और अन्य चीजों के लिए आठ हजार करोड़ रुपये का अनाउंसमेंट हुआ है।
जो स्टेट ऑफ द आर्ट, लेटेस्ट डिसरप्टिव टेक्नोलॉजीज हैं, उनके बारे में आलरेडी सरकार और हमारी साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री काम कर रही है। अभी हम पब्लिकेशन्स के मामले में दुनिया में तीसरे नम्बर पर पहुंच गए हैं और लगभग हर पैरामीटर पर हम पहले दस नेशन्स में हैं। प्रधान मंत्री जी चाहते हैं कि आने वाले वर्षों में टॉप टू-थ्री साइंटिफिक नेशन्स ऑफ द वर्ल्ड में हमारा नाम दर्ज हो, इसलिए सरकार इस मामले में पर्याप्त चिन्तित है और पर्याप्त काम भी कर रही
SHRI MANISH TEWARI: Hon. Speaker, Sir, the Fourth Industrial Age comprising of digitisation, robotics, and artificial intelligence, is going to completely transform the workplace. According to a World Bank estimate, 67 per cent of all manufacturing jobs in India will be lost to robotization.
| श्री रेबती त्रिपुराः सर, 'आयुष्मान भारत' के ऊपर मेरा प्रश्न है। सबसे पहले मैं प्रधान मंत्री जी और स्वास्थ्य मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं। 'आयुष्मान भारत' के तहत भारत में करीब पचास करोड़ लोगों को हेल्थ फैसिलिटी दी जाती है। मेरा मानना है कि अभी तक दिल्ली और वेस्ट बंगाल समेत बहुत से ऐसे राज्य हैं, जहां 'आयुष्मान भारत' को लागू नहीं किया गया। मेरा मंत्री जी से प्रश्न है कि जहां यह अभी तक लागू नहीं हुआ है, वहां भी गरीब लोग हैं, गरीब लोगों को सुविधा देने के लिए ऐसा कुछ मैकेनिज्म या व्यवस्था मंत्री जी की सोच में है, ताकि वहां के गरीब लोगों को भी ये फैसिलिटीज़ मिलें? डॉ. हर्ष वर्धनः महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को यह कहना चाहता हूं कि इसमें कोई दो मत और दो राय नहीं कि अभी भी देश में चार राज्य ऐसे हैं, जो हमारी आयुष्मान भारत' स्कीम को लागू नहीं कर रहे हैं। इसमें दिल्ली, तेलंगाना, वेस्ट बंगाल और ओडिशा हैं। लगातार पिछले छः महीने से स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद मैंने सबसे पहला काम यह किया कि यहां के मुख्य मंत्रियों को पत्र लिखा और उनसे व्यक्तिगत टेलीफोन पर भी बात की। हम लगातार उनके साथ अपने आफिसर्स के माध्यम से पर्यू कर रहे हैं कि वे इस एंबीशियस स्कीम को जिससे देश के अंदर पचपन करोड़ से ज्यादा गरीब लोगों को फायदा पहुंच रहा है, उनके जीवन में बीमारी के कारण जो इतनी जबरदस्त तकलीफ होती थी, लोगों के घर बिक जाते थे, लोगों के मकान बिक जाते थे, सारा जीवन बर्बाद हो जाता था, अब उनको एक राहत मिली है। अभी करीब एक साल के लगभग पीरियड बीता है और बयासी लाख से ज्यादा लोगों को इस 'आयुष्मान भारत' योजना से फायदा हो चुका है। 'आयुष्मान भारत' को, क्योंकि हमारा फेडरल सिस्टम है, हम जबरदस्ती तो इन स्टेट्स में लागू नहीं कर सकते हैं, लेकिन जो दूसरे माध्यम हैं, जिसमें इन स्टेट्स के गरीब मरीजों के लिए राष्ट्रीय आरोग्य निधि और दूसरी सुविधायें, प्रधान मंत्री राहत कोष से, स्वास्थ्य मंत्रालय से गरीबों के लिए जो मदद की जा सकती है, जिस स्तर तक भी की जा सकती है, वह हम करते हैं। हम इस सदन के माध्यम से फिर से इन स्टेट्स से और उनके मुख्यमंत्रियों से रिक्वैस्ट करना चाहते हैं कि आप वहां के गरीब लोगों के हित में, इस विषय को राजनीति से ऊपर उठकर देखें और गरीब लोगों के हित में इस योजना को उन स्टेट्स में भी लागू करें। इस योजना के संदर्भ में प्रधान मंत्री को यूनाइटेड नेशंस में बुलाया गया। सारी दुनिया इस योजना को एप्रीशिएट कर रही है। यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज पर प्रधान मंत्री जी का यूनाइटेड नेशंस में बयान हुआ। यह दुनिया का सबसे बड़ा एंबीशियस प्रोग्राम है। आजादी के सत्तर वर्षों के बाद शायद इतना बड़ा कार्यक्रम और जो स्वास्थ्य के हितों की रक्षा करने के लिए हो, कभी देश के अंदर इसकी कल्पना भी नहीं की गई थी। श्री रेबती त्रिपुरा : सर, मेरा सप्लीमेंट्री क्वैश्चन यह है कि 'आयुष्मान भारत', जिनके पास बीपीएल कार्ड या अंत्योदय कार्ड होता है, उनको इसका लाभ दिया जाता है, लेकिन जो एपीएल कार्ड होल्डर्स हैं, उनमें भी बहुत से गरीब लोग हैं। उनके लिए भी मिनिस्ट्री अगर सोचे तो बहुत अच्छा होगा। डॉ. हर्ष वर्धनः अध्यक्ष जी, मैं माननीय सदस्य को सूचित करना चाहता हूं कि वर्ष दो हज़ार ग्यारह में एक सोशियो-इकॉनामिक कास्ट बेस्ड सेंसस हुआ था। इसके अंतर्गत लगभग दस.चौहत्तर करोड़ ऐसे गरीब लोग थे। एक प्रकार से अभी तो यह एक एंटाइटलमेंट स्कीम है। इसके तहत करीब पचपन करोड़ से ज्यादा लोग इसमें एंटाइटल्ड हैं। इसमें ब्रॉडली, जो वास्तव में बहुत ज्यादा गरीब लोग हैं, वे सब इसके अंदर कवर्ड हैं। जैसा उन्होंने सुझाव दिया, अल्टीमेटली भविष्य में इसके अलावा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्कीम का दूसरा कम्पोनेंट है। उसके माध्यम से हम देश भर में आने वाले वर्षों में दो हज़ार बाईस तक डेढ़ लाख हैल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स क्रिएट कर रहे हैं, जिसमें ग्रासरूट लेवल पर पॉजिटीव हेल्थ और प्रिवेन्टिव हैल्थ सर्विसेज को इन्कलूड किया गया है, हम सत्ताईस-अट्ठाईस हजार ऑलरेडी बना चुके हैं। इस इकतीस मार्च तक यह चालीस हजार की संख्या तक पहुंचने वाला है, इकतीस दिसम्बर, दो हज़ार बाईस तक डेढ़ लाख तक पहुंचने वाले हैं। इससे लोगों को पॉजिटिव हैल्थ, प्रिवेन्टिव हैल्थ और क्यूरेटिव हैल्थ की सुविधाएं देने के लिए हैल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स को डेवलप व स्ट्रैन्थेन कर रहे हैं। श्री महाबली सिंहः अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय ने जो विवरण सदन पटल पर रखा है, उससे मैं सहमत हूं लेकिन पूरी तरह से सहमत नहीं हूं। मैं मानता हूं कि आजादी के बाद देश में गरीब परिवार के लोगों का इलाज और दवा के अभाव में मौत हो जाती थी। आदरणीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने एक ऐसी योजना चालू की जिससे गरीब परिवार जो दवा के अभाव में मरते थे, वे अब नहीं मरेंगे, उनको जीवनदान देने का काम किया है। मैं माननीय मंत्री महोदय से एक बात कहना चाहता हूं कि बिहार में बीपीएल सूची में जिन गरीबों को चिन्हित किया गया है, उनकी आबादी पांच करोड़ चौरासी लाख इक्यावन हजार के लगभग है। माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य, आंकड़े बताने का काम अपना नहीं है, आप सीधा सवाल पूछिए । श्री महाबली सिंहः अध्यक्ष महोदय, उसमें तैंतालीस,अड़तालीस,नौ सौ एक लोगों को ही आयुष्मान हैल्थ कार्ड निर्गत किये गये है। मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि जो बीपीएल परिवार के गरीब लोग छूट गए हैं, क्या सरकार उन बीपीएल परिवारों को आयुष्मान हैल्थ कार्ड निर्गत करने का विचार औरकब तक करती है? डॉ. हर्ष वर्धनः अध्यक्ष महोदय, मैं सबसे पहले मैंबर साहब को जानकारी देना चाहता हूं कि जो दस.चौहत्तर करोड़, यानी लगभग पचपन करोड़ से ज्यादा इंसान इस स्कीम के एंटाइटलमेंट हैं। जो कार्ड दिया जा रहा है, इसमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को अवेर किया जा रहा है। केवल इस कार्ड के कारण ही इलाज नहीं हो रहा है, जिनके पास कोई कार्ड नहीं है, अगर वे बाइस हजार अस्पतालों में से किसी भी जगह पर जाते हैं और वहां जाकर अपना नाम, एड्रेस या अपनी उम्र बताते हैं तो हर अस्पताल के अंदर पीएमजेएवाई के लिए एक आरोग्य मित्र है। फोन नम्बर- चौदह हज़ार पाँच सौ पचपन पर कोई भी टेलीफोन करके अपना इंटाइटलमेंट पूछ सकता है कि वह इस स्कीम का पात्र है या नहीं। माननीय अध्यक्षः माननीय मंत्री जी, वह पूछ रहे हैं कि इसके अलावा भी कार्ड देंगे? डॉ. हर्ष वर्धनः अध्यक्ष महोदय, हमें पचपन करोड़ लोगों को इंडिव्जुअल कार्ड देना है। हम आप सभी की सहायता चाहते हैं। कॉमन सर्विस सेंटर और स्टेट्स ने भी बहुत सारी स्कीम्स लागू की हैं। मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि अभी तक बारह.चार करोड़ लोगों ने अपने हाथ में लिया। इसके अलावा तैंतालीस करोड़ लोग हैं, जो बिना कार्ड किसी भी अस्पताल में जा सकते हैं। जेब में पैसा नहीं भी है तो भी बाइस हजार इम्पैनल्ड अस्पताल में जाएंगे तो उनका इलाज शुरू हो जाएगा। SHRI BENNY BEHANAN : Sir, we are very much disappointed about the answer given by the hon. Minister because it is a long pending demand of Kerala to have the National Institute. Sir, you know that Kerala already has a well-established tradition and ancient practice of this branch of medicine. Perhaps, we are the first not only in India but also in the world as a whole in Ayurvedic medicine. Ayurveda Medical System is a huge generator of medical tourism to Kerala and wherever it is practiced, it is earning goodwill as well as dollars for the country. Will the Government include major Ayurveda Centres in the Incredible India Programme and its tourist promotion activities? श्री अश्विनी कुमार चौबेः माननीय अध्यक्ष जी, माननीय सदस्य ने जो बात कही है, यह बहुत ही पुराने सदस्य हैं। इनका अनुभव बहुत अच्छा है। माननीय अध्यक्षः ज्यादा अनुभव नहीं है, नए हैं। श्री अश्विनी कुमार चौबेः महोदय, इनका राजनीति में बड़ा अनुभव है। हमारे देश में दक्षिण में बसा हुआ केरल राज्य सदियों से आयुर्वेद पद्धति का बहुत ही सुविख्यात स्थान है, इसमें कहीं दो मत नहीं है । इसी बात को ध्यान में रखकर हमारी सरकार ने केरल राज्य में आयुष मंत्रालय के माध्यम से केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा सीसीआरएएस नामक स्वायत्त संस्था द्वारा दो महत्वपूर्ण रिसर्च इंस्टीट्यूट का संचालन सुनिश्चित किया है। इनमें से एक है नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ पंचकर्म, चेरुतुरुथी तथा दूसरा है आयुर्वेद रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर मदर एंड चाइल्ड हैल्थ केयर, त्रिवेन्द्रमा सैंटर फॉर एक्सीलेंस योजना दो हज़ार सात में सरकार ने चलाई थी, सरकार ने दो हज़ार सत्रह में पंचकर्म इंस्टीट्यूट को अपग्रेड किया है। इसका प्रत्यक्ष संचालन भी केंद्र सरकार स्वयं कर रही है। केरल राज्य को कितना महत्व दिया गया है, इस बात से इंगित होता है कि सरकार ने पूरे देश में छत्तीस ऐसे संस्थानों को सैंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में अपग्रेड किया है, जिसमें से छः केवल केरल राज्य को दिए गए हैं। मेरा मत है कि आयुष मंत्रालय द्वारा इस योजना के तहत छः संस्थानों को पच्चीस करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी पिछले दिनों दी है। सरकार आयुष मंत्रालय की इस योजना के तहत पहले से चल रहे संस्थानों को, चाहे वह सरकारी हो या गैर-सरकारी हो, एनजीओ या ट्रस्ट द्वारा संचालित हो, तय मानदंड के आधार पर दस करोड़ रुपये तक वित्तीय सहायता देकर सैंटर ऑफ एक्सीलेंस में परिणत करती रही है। अभी माननीय सदस्य ने जो प्रश्न रखा है, उसमें सरकार ने यह काम किया है और केरल को बहुत महत्व दिया है। SHRI BENNY BEHANAN: Sir, you have given some grant but majority of the Institutes are under the private sector and not in the Government sector. Panchakarma Hospital in Cheruthuruthi is not serving the purpose of Ayurvedic National Institute. My second supplementary is, Ayurveda is being adopted by many countries as an accepted way of medical treatment and what are the steps taken by the Government to promote the system in more countries? श्री अश्विनी कुमार चौबे : महोदय, मैंने स्पष्ट बताया है कि केरल में दो सरकारी संस्थान हैं। ... SHRI BENNY BEHANAN: Ayurveda system of medicine is being practiced in many countries. Has the Government got any plan to promote Ayurveda in other countries? श्री अश्विनी कुमार चौबेः अध्यक्ष महोदय, मैं इसलिए कह रहा हूं कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयुर्वेद के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से कई सेमिनार और कई प्रकार के बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं तथा अभी कई देशों के साथ एग्रीमेंट भी होना है। उस स्तर पर भारत सरकार आयुष मंत्रालय के माध्यम से काम कर रही है और निकट भविष्य में कुछ इस प्रकार एग्रीमेंट भी होने वाले हैं। SHRI TALARI RANGAIAH : Thank you, Sir, for giving me this opportunity. Sir, forest fires occur every year in almost every State. Some of the regions are more vulnerable than others. I would like to know from the hon. Minister that what steps are taken by the Government to prevent such forest fires. श्री बाबुल सुप्रियोः अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने बहुत महत्वपूर्ण सवाल किया है। मैं आपको पहले ही बताना चाहता हूं, आपको जानकर खुशी होगी कि पूरी दुनिया में केवल सात या आठ ऐसे देश हैं, जहां पर फॉरेस्ट कवर इन्क्रीज हुआ है। भारत उनमें से एक है। यहां पिछले कई सालों से दो परसेंट से ऊपर फॉरेस्ट कवर इन्क्रीज हुआ है। इसके लिए मैं आपको बताना चाहता हूं कि मिनिस्ट्री ऑफ एनवॉयरमेंट एंड फॉरेस्ट के बहुत सारे प्रकल्प हैं, जिसमें प्लांटेशन को एनकरेज किया जाता है, जिसमें नगर वन उद्यान योजना, स्कूल नर्सरी योजना ये सब हैं। लेकिन, आप जो स्पेसिफिक सवाल कर रहे हैं कि डिग्रेडेड फॉरेस्ट के लिए हम क्या कर रहे हैं तो मैं आपको बता दूं कि डिग्रेडेड फॉरेस्ट के लिए स्पेसिफिक एक प्रोग्राम है, जिसका नाम 'नैप ' है। But the Government is not napping on that. It is called National Afforestation Programme. ट्री प्लांटेशन डिग्रेडेड फॉरेस्ट में लोगों के पार्टिसिपेशन और नेशनल मिशन फॉर ए ग्रीन इंडिया दोनों चीजें चल रही हैं। इसमें दो मिलियन हेक्टेयर जगह में स्टेट्स और यूनियन टेरिटरीज में तीन हजार आठ सौ चौहत्तर करोड़ रुपये केवल नैप के लिए, आपने जो डिग्रेडेड फॉरेस्ट के बारे में कहा है, उसके लिए खर्च किया जा रहा है। हम यह उम्मीद करते हैं कि स्टेट और यूनियन टेरिटरीज के सहयोग से हम बहुत जल्द फॉरेस्ट कवर को और बढ़ा पाएंगे और जो जगह डिग्रेड हुई है, टॉप सॉयल खराब हुई है, वहां अफॉरस्टेशन से हमें बहुत ज्यादा फायदा मिलेगा SHRI TALARI RANGAIAH: Sir, actually, your answer is irrelevant. I am asking that what are you going to do to prevent forest fires. श्री बाबुल सुप्रियोः मैं फॉरेस्ट फायर के बारे में बताना चाहता हूं। फॉरेस्ट फायर्स के लिए एक अलग स्कीम है, जिसमें फॉरेस्ट फायर्स को काउंटर किया जाता है। जब फॉरेस्ट फायर्स बनते हैं तो डिफॉरेस्टेशन होता है, प्लांटेशन्स जल जाते हैं, इस पर भी यही फंड खर्च होता है। इसके अलावा, जहां पर फॉरेस्ट फायर्स होता है, वहां पर अलग से फाइनेंशिएल सपोर्ट दिया जाता है। पांच एलर्ट सिस्टम हैं, जिसको एफएसआई के माध्यम से डेवलप किया गया है। एलर्ट सिस्टम के आधार पर जहां-जहां फॉरेस्ट फायर्स हो रहा है, उसको हम रोकने की कोशिश करते हैं। श्री जगदम्बिका पालः अध्यक्ष महोदय, मैंने एक महत्वपूर्ण प्रश्न आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में पूछा है। मेरा सवाल माननीय मंत्री जी से था कि नीति आयोग के द्वारा वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस में उन्होंने जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संबंध में पेपर तैयार किया था, डिस्कस किया था - National Programme on Artificial Intelligence, with a view to guiding the research and development in new and emerging technologies. हमने यही सवाल पूछा था । नीति आयोग ने वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में डिसकस किया। आज जो माननीय मंत्री जी का उत्तर आया है, उसमें "NITI Aayog's National Strategy on Artificial Intelligence discusses the following." जो वर्ष दो हज़ार अट्ठारह के डिसकशन में थे, उन सारी चीजों को दिया है। मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से प्रश्न है कि आज जब एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बात पूरी दुनिया में चल रही है और आज भी भारत में या दुनिया में ह्यूमन बिंग को अगर सबसे सर्वोच्च बनाने का काम करती है तो वह इंटेलिजेंस ही करती है। दूसरे ह्यूमन बिंग के बजाय मनुष्य के पास इंटेलिजेंस है, इसलिए वह सर्वोच्च है। जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दुनिया में हो रही है तो क्या आप भविष्य में आने वाले दिनों में इस पर कोई पॉलिसी बनाएंगे? नीति आयोग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर डिसकसन किया है। आप कह रहे हैं कि इसके लिए इलेक्ट्रानिक एण्ड इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी कमेटी है । About development of template and the required legal and regulatory framework in the domain of Artificial Intelligence. मैं आपके माध्यम से जानना चाहता हूं कि क्या सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए कोई नीति बनाएगी? डॉ. हर्ष वर्धन : सर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक अमर्जिंग एरिया है। हमारी सरकार डिस्रप्टिव टेक्नोलॉजी है और कटिंग एज टेक्नोलॉजी पर काम कर रही है और हमारे प्रधान मंत्री जी इसके लिए बहुत पैशनेट हैं। आजकल काफी चीजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग भी होता है। आज हम मेडिकल फील्ड्स में इसका बहुत जगह इस्तेमाल कर रहे हैं। यहां तक कि आयुष्मान भारत में फ्रॉड डिटेक्शन को भी, जो अस्पतालों में कहीं भी किसी भी लेवल पर हो रहा है, उसको डिटेक्ट करने के लिए जो भी साइंस हो सकती है, उसमें भी आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर रहे हैं। जहां तक सरकार का सवाल है तो इसके संदर्भ में नीति आयोग ने बहुत विस्तृत चर्चा की है। नेशनल स्ट्रेटेजी फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने भी डिटेल में डॉक्यूमेंट्स पब्लिश कर दिए हैं। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को देश में कैसे इंप्लीमेंट करना है, इसके लिए आप जिस कमेटी की चर्चा कर रहे हैं, वह कमेटी आगे चर्चा करे कि इसके बारे में हमारा रेग्युलेटरी फ्रेमवर्क क्या होना चाहिए? इसके साथ ही साथ जो मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रानिक्स एण्ड इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी है, वह भी डाटा प्रोटेक्शन प्राइवेसी के बारे में लॉ बनाने के लिए विस्तार से चर्चा कर रही है। एक-डेढ़ साल पहले सरकार ने कैबिनेट में एक नेशनल मिशन ऑन साइबर फिजिकल सिस्टम पॉलिसी बनाई थी, जिसमें लगभग तीन,छः सौ साठ करोड़ रुपये के करीब खर्च होना था। हमारी कैबिनेट ने ऐसी पॉलिसी अप्रूव की थी। साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी मंत्रालय देश में बीस इनोवेशन हब स्थापित कर रहा है, जिसमें से एक हब एक्सक्लूसिवली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर फोकस करेगा। मेरा माननीय सदस्य को यह कहना है कि कमिटमेंट के मामले में, वीजन के मामले में, तैयारी के मामले में या जो हम करना चाहते हैं या हम जिस दिशा में काम कर रहे हैं, उसमें हम दुनिया से कम नहीं है। विज्ञान का जनता के हित में और सभी क्षेत्रों में किस तरह से ज्यादा से ज्यादा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से प्रयोग कर सकते हैं, वह हम कर रहे हैं। श्री जगदम्बिका पालः माननीय मंत्री जी ने अपने उत्तर में कहा है कि भारत सरकार इस पर बहुत फोकस कर रही है। प्रधान मंत्री जी को भी बहुत चिंता है। In the light of NITI Ayog's Discussion Paper on National Strategy on Artificial Intelligence which was released in दो हज़ार अट्ठारह, what measure the Government is taking to implement the same? The same document also states that the global investment in the field of artificial intelligence are forecasted to reach US सत्तावन दशमलव छः डॉलर billion by दो हज़ार इक्कीस and we are in दो हज़ार बीस. The Union Budget for दो हज़ार बीस-इक्कीस allocated Rs. आठ,शून्य crore for the period of next five years for the National Mission on Quantum Technology and Applications. Therefore, can the Government state the details in this regard? डॉ. हर्ष वर्धन : आप जो सवाल पूछ रहे हैं, उसका आपने ही जवाब दे दिया है। आपने कहा है कि क्वांटम टेक्नोलॉजी के लिए बजट में आठ हजार करोड़ रुपये का अनाउंसमेंट हुआ है। मैंने आपको साइबर फिजिकल सिस्टम के बारे में भी बताया है। यह स्ट्रैटेजी पेपर बहुत ज्यादा अध्ययन करके, स्टेकहॉल्डर्स से बातचीत करके बनाया गया है। इसमें सभी तरह के लोग शामिल है। अभी स्ट्रेटजी पेपर्स की जो फाइंडिग्स है या नेशनल स्ट्रेटेजी बनी है, यह आने वाले समय में कैबिनेट के पास जाएगी। कैबिनेट इसके बारे में और ज्यादा तेजी से निर्णय लेगा। इसके लिए गवर्नमेंट का सपोर्ट और कमिटमेंट तो पहले से ही है। मैंने साइबर फिजिकल सिस्टम्स के बारे में बताया है। अभी आपने स्वयं उल्लेख किया है कि इस बार के बजट में क्वांटम मैकेनिक्स और अन्य चीजों के लिए आठ हजार करोड़ रुपये का अनाउंसमेंट हुआ है। जो स्टेट ऑफ द आर्ट, लेटेस्ट डिसरप्टिव टेक्नोलॉजीज हैं, उनके बारे में आलरेडी सरकार और हमारी साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री काम कर रही है। अभी हम पब्लिकेशन्स के मामले में दुनिया में तीसरे नम्बर पर पहुंच गए हैं और लगभग हर पैरामीटर पर हम पहले दस नेशन्स में हैं। प्रधान मंत्री जी चाहते हैं कि आने वाले वर्षों में टॉप टू-थ्री साइंटिफिक नेशन्स ऑफ द वर्ल्ड में हमारा नाम दर्ज हो, इसलिए सरकार इस मामले में पर्याप्त चिन्तित है और पर्याप्त काम भी कर रही SHRI MANISH TEWARI: Hon. Speaker, Sir, the Fourth Industrial Age comprising of digitisation, robotics, and artificial intelligence, is going to completely transform the workplace. According to a World Bank estimate, सरसठ per cent of all manufacturing jobs in India will be lost to robotization. |
ALLAHABAD: महज मकान नंबर नहीं बताने पर कोई किसी को इस तरह से पीट सकता है। यकीन नही होगा, लेकिन ऐसा हुआ है। शुक्रवार को मुट्ठीगंज नगर निगम कार्यालय पर लगभग दो दर्जन लोगों ने जमकर गुंडई की। कर्मचारियों को जमकर पीटा। जिसमें आधा दर्जन से अधिक कर्मचारी घायल हो गए और तीन को गंभीर चोट आई है। इतने से भी मन नहीं भरा तो कार्यालय में तोड़फोड़ भी कर डाली। मामलें में घायलों ने आरोपियों के खिलाफ मुट्ठीगंज थाने में तहरीर दी है।
सूचना के मुताबिक दोपहर ढाई बजे के आसपास दो व्यक्ति मुट्ठीगंज नगर निगम कार्यालय पर किसी मकान नंबर की जानकारी लेने पहुंचे थे। इससे पहले भी उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत एक मकान के नंबर की जानकारी ली थी। हालांकि, इस बार ये लोग मुंह जुबानी सूचना चाहते थे। इस पर कार्यालय के कर्मचारियों ने ऐतराज जताया। उनका कहना था कि इस बार भी सूचना के अधिकार के तहत ही जानकारी दी जाएगी। बस इसी को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई और मामला बढ़ गया।
इसके बाद दोनों व्यक्तियों ने फोन करके अपने क्भ्-ख्0 साथियों को मौके पर बुलाया और नगर निगम कर्मचारियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। लात-घूसे और बेल्ट से हुई पिटाई में आधा दर्जन से अधिक कर्मचारियों को चोटे आई हैं। इनमें से मुख्य लिपिक भारत नाथ यादव, टैक्स कलेक्टर नंद कुमार शर्मा और कर्मचारी अनिल कुमार को गंभीर चोटे आई हैं। इनको इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा राजस्व निरीक्षक जया सिंह, लिपिक एके पाल, अंजली अनुचर सहित अन्य कर्मचारियों ने भी मारपीट किए जाने की बात कही है। काम से आए युवक नीलेश ने जब बीच-बचाव की कोशिश की तो उसके सिर पर हेलमेट मारकर घायल कर दिया।
कर्मचारियों की मानें तो मारपीट के बाद भी हमलावर शांत नहीं हुए और उन्होंने कार्यालय पर पथराव करना शुरू कर दिया। उन्होंने कुर्सी-मेज और कम्प्यूटर तोड़ने के साथ सरकारी दस्तावेज फाड़ डाले। घटनाक्रम काफी देर तक चलने से कार्यालय के आसपास भारी भीड़ जमा हो गई। हंगामा करने के बाद सभी हमलावर भाग गए। आरोपियों के खिलाफ देर शाम मुट्ठीगंज थाने में तहरीर दी गई थी।
| ALLAHABAD: महज मकान नंबर नहीं बताने पर कोई किसी को इस तरह से पीट सकता है। यकीन नही होगा, लेकिन ऐसा हुआ है। शुक्रवार को मुट्ठीगंज नगर निगम कार्यालय पर लगभग दो दर्जन लोगों ने जमकर गुंडई की। कर्मचारियों को जमकर पीटा। जिसमें आधा दर्जन से अधिक कर्मचारी घायल हो गए और तीन को गंभीर चोट आई है। इतने से भी मन नहीं भरा तो कार्यालय में तोड़फोड़ भी कर डाली। मामलें में घायलों ने आरोपियों के खिलाफ मुट्ठीगंज थाने में तहरीर दी है। सूचना के मुताबिक दोपहर ढाई बजे के आसपास दो व्यक्ति मुट्ठीगंज नगर निगम कार्यालय पर किसी मकान नंबर की जानकारी लेने पहुंचे थे। इससे पहले भी उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत एक मकान के नंबर की जानकारी ली थी। हालांकि, इस बार ये लोग मुंह जुबानी सूचना चाहते थे। इस पर कार्यालय के कर्मचारियों ने ऐतराज जताया। उनका कहना था कि इस बार भी सूचना के अधिकार के तहत ही जानकारी दी जाएगी। बस इसी को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हुई और मामला बढ़ गया। इसके बाद दोनों व्यक्तियों ने फोन करके अपने क्भ्-ख्शून्य साथियों को मौके पर बुलाया और नगर निगम कर्मचारियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। लात-घूसे और बेल्ट से हुई पिटाई में आधा दर्जन से अधिक कर्मचारियों को चोटे आई हैं। इनमें से मुख्य लिपिक भारत नाथ यादव, टैक्स कलेक्टर नंद कुमार शर्मा और कर्मचारी अनिल कुमार को गंभीर चोटे आई हैं। इनको इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा राजस्व निरीक्षक जया सिंह, लिपिक एके पाल, अंजली अनुचर सहित अन्य कर्मचारियों ने भी मारपीट किए जाने की बात कही है। काम से आए युवक नीलेश ने जब बीच-बचाव की कोशिश की तो उसके सिर पर हेलमेट मारकर घायल कर दिया। कर्मचारियों की मानें तो मारपीट के बाद भी हमलावर शांत नहीं हुए और उन्होंने कार्यालय पर पथराव करना शुरू कर दिया। उन्होंने कुर्सी-मेज और कम्प्यूटर तोड़ने के साथ सरकारी दस्तावेज फाड़ डाले। घटनाक्रम काफी देर तक चलने से कार्यालय के आसपास भारी भीड़ जमा हो गई। हंगामा करने के बाद सभी हमलावर भाग गए। आरोपियों के खिलाफ देर शाम मुट्ठीगंज थाने में तहरीर दी गई थी। |
कोरोना वायरस (Corona Virus) के कारण पूरी दुनिया में रोजाना लाखों लोगों की मौत हो रही है। इतनी बड़ी संख्या में होने वाली मौतों को लेकर वहां की सरकारें चिंतित हैं। महामारी (Pandemic) की वजह से मरे लोगों के शवों का सावधानी के साथ अंतिम संस्कार करना भी मुसीबत बन गया है। भारत में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें लोग कोरोना वायरस की वजह से मृत लोगों के शवों के पास जाने से भी कतरा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला असम में सामने आया जहां एक कोरोना मरीज की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने गांव में अंतिम संस्कार का विरोध किया, इस दौरान वहां के पुलिस अधीक्षक (Superintendent of police) ने खुद शव को लेकर जाकर उसकी अंत्येष्टि की।
यह मामला असम के कार्बी आंगलोंग का है। बताया जा रहा है कि यहां एक 58 वर्षीय व्यक्ति 26 मई को असम से लौटा था। संक्रमण के खतरे को देखते हुए उसे बोकोलिया घाट पर बने एक क्वारंटीन सेंटर (Quarantine Centre) पर रखा गया था। जांच में उस व्यक्ति की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। जिसके बाद उसे क्वारंटीन रहने की सलाह के साथ घर भेज दिया गया था। लेकिन घर पहुंचकर भी उस व्यक्ति की हालत बिगड़ती गई। जिसके बाद उसे परिवार के सदस्य दीफू मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में ले गए। लेकिन वहां पहुंचने से पहले भी उसने दम तोड़ दिया। मृतक के लक्षण भी महामारी से मिलते-जुलते थे। बाद में दोबारा जांच होने के बाद व्यक्ति कोरोना वायरस (Corona Virus) पॉजिटिव निकला था।
कोरोना पॉजिटिव होने की वजह से मौत के बाद शव को अस्पताल के कर्मचारियों ने ले जाने से मना कर दिया। किसी भी तरह से कर्मचारियों के न मानने पर कार्बी आंगलोंग के पुलिस अधीक्षक (Superintendent of police) देवजीत देउरी ने अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ पीपीई किट पहनकर खुद मृतक के शव को अस्पताल से बाहर निकाला।
इस बारे में कार्बी आंगलोंग के उपायुक्त मुकुल कुमार सैकिया ने जानकारी दी कि ग्रामीणों और पुलिस के बीच लंबे समय तक विवाद की स्थिति बनी रही। इसके बाद जिला स्वायत्त परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य ने डोडोली आरक्षित वन में एक वैकल्पिक क्षेत्र में शव का अंतिम संस्कार करने की अनुमति दी। लेकिन रात का समय हो जाने के कारण अंत्येष्टि नहीं हो सकी। इस दौरान शव ऐसे ही पड़ा रहा। जिसके बाद अगले दिन पुलिस अधीक्षक (Superintendent of police) देवजीत देउरी ने अपने सुरक्षा गार्डों के साथ कोलिया क्षेत्र के सनबोरा गांव में शव का अंतिम संस्कार किया। इस मामले में देवजीत देउरी की हर कोई तारीफ कर रहा है। कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के साथ इस तरह की खबरें आजकल खूब सामने आ रही हैं।
पुलिस अधीक्षक (Superintendent of police) देवजीत देउरी इस मामले से काफी निराश हैं। दीफू मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों का व्यवहार काफी अप्रत्याशित था। उन्होंने कहा कि शव के अंतिम संस्कार के लिए कोई भी सामने नहीं आ रहा था। ऐसे में पुलिस के पास विशेषाधिकार होते हैं कि वे लावारिस शवों का रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार करे। वहीं ग्रामीणों का व्यवहार भी इस मामले में अच्छा नहीं रहा। वो शव को अपने गांव के अंदर दाखिल नहीं होने दे रहे थे। उन्होंने पुलिस के लाख समझाने के बावजूद अंतिम संस्कार नहीं होने दिया। देउरी का कहना है कि हमें कोरोना वायरस (Corona Virus) से मरने वाले लोगों के प्रति भी मानवीय संवेदना रखनी चाहिए। इस तरह का व्यवहार सभ्य समाज के लिए उचित नहीं है।
| कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में रोजाना लाखों लोगों की मौत हो रही है। इतनी बड़ी संख्या में होने वाली मौतों को लेकर वहां की सरकारें चिंतित हैं। महामारी की वजह से मरे लोगों के शवों का सावधानी के साथ अंतिम संस्कार करना भी मुसीबत बन गया है। भारत में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें लोग कोरोना वायरस की वजह से मृत लोगों के शवों के पास जाने से भी कतरा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला असम में सामने आया जहां एक कोरोना मरीज की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने गांव में अंतिम संस्कार का विरोध किया, इस दौरान वहां के पुलिस अधीक्षक ने खुद शव को लेकर जाकर उसकी अंत्येष्टि की। यह मामला असम के कार्बी आंगलोंग का है। बताया जा रहा है कि यहां एक अट्ठावन वर्षीय व्यक्ति छब्बीस मई को असम से लौटा था। संक्रमण के खतरे को देखते हुए उसे बोकोलिया घाट पर बने एक क्वारंटीन सेंटर पर रखा गया था। जांच में उस व्यक्ति की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। जिसके बाद उसे क्वारंटीन रहने की सलाह के साथ घर भेज दिया गया था। लेकिन घर पहुंचकर भी उस व्यक्ति की हालत बिगड़ती गई। जिसके बाद उसे परिवार के सदस्य दीफू मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में ले गए। लेकिन वहां पहुंचने से पहले भी उसने दम तोड़ दिया। मृतक के लक्षण भी महामारी से मिलते-जुलते थे। बाद में दोबारा जांच होने के बाद व्यक्ति कोरोना वायरस पॉजिटिव निकला था। कोरोना पॉजिटिव होने की वजह से मौत के बाद शव को अस्पताल के कर्मचारियों ने ले जाने से मना कर दिया। किसी भी तरह से कर्मचारियों के न मानने पर कार्बी आंगलोंग के पुलिस अधीक्षक देवजीत देउरी ने अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ पीपीई किट पहनकर खुद मृतक के शव को अस्पताल से बाहर निकाला। इस बारे में कार्बी आंगलोंग के उपायुक्त मुकुल कुमार सैकिया ने जानकारी दी कि ग्रामीणों और पुलिस के बीच लंबे समय तक विवाद की स्थिति बनी रही। इसके बाद जिला स्वायत्त परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य ने डोडोली आरक्षित वन में एक वैकल्पिक क्षेत्र में शव का अंतिम संस्कार करने की अनुमति दी। लेकिन रात का समय हो जाने के कारण अंत्येष्टि नहीं हो सकी। इस दौरान शव ऐसे ही पड़ा रहा। जिसके बाद अगले दिन पुलिस अधीक्षक देवजीत देउरी ने अपने सुरक्षा गार्डों के साथ कोलिया क्षेत्र के सनबोरा गांव में शव का अंतिम संस्कार किया। इस मामले में देवजीत देउरी की हर कोई तारीफ कर रहा है। कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के साथ इस तरह की खबरें आजकल खूब सामने आ रही हैं। पुलिस अधीक्षक देवजीत देउरी इस मामले से काफी निराश हैं। दीफू मेडिकल कॉलेज के कर्मचारियों का व्यवहार काफी अप्रत्याशित था। उन्होंने कहा कि शव के अंतिम संस्कार के लिए कोई भी सामने नहीं आ रहा था। ऐसे में पुलिस के पास विशेषाधिकार होते हैं कि वे लावारिस शवों का रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार करे। वहीं ग्रामीणों का व्यवहार भी इस मामले में अच्छा नहीं रहा। वो शव को अपने गांव के अंदर दाखिल नहीं होने दे रहे थे। उन्होंने पुलिस के लाख समझाने के बावजूद अंतिम संस्कार नहीं होने दिया। देउरी का कहना है कि हमें कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों के प्रति भी मानवीय संवेदना रखनी चाहिए। इस तरह का व्यवहार सभ्य समाज के लिए उचित नहीं है। |
ग्रेटरनोएडा में ओला कैब सवार केन्याई युवती पर हमले की बात गलत साबित हुई। युवती के द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद निकले।
नोएडाः ग्रेटरनोएडा में ओला कैब सवार नाइजीरियन युवती पर हमले की बात गलत साबित हुई। युवती के द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद निकले। एसएसपी ने जांच में सभी साक्ष्यों को गलत पाया। जिसके बाद युवती द्वारा लगाए गए सभी आरोपो को निराधार बता दिया गया ।
-युवती का आरोप था कि बुधवार तड़के करीब साढ़े चार बजे दस युवकों ने उसकी कैब पर हमला कर दिया था।
- साथ ही युवकों ने उसे कैब से उतारकर पीटा। इस दौरान ड्राइवर कैब लेकर फरार हो गया।
-बताया गया कि मौके पर मौजूद लोगों ने 100 नंबर पर पुलिस को फोन किया। एसएसपी ने बताया कि सुबह सबसे पहले चौकी इंचार्ज को जानकारी मिली। जिसके बाद एसएचओ और करीब साढ़े आठ बजे मुझे इस मामले की जानकारी हुई।
- इससे पहले ही पीसीआर- 67 पुलिस युवती को कैलाश अस्पताल ले जा चुकी थी। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे छुट्टी दे दी गई।
एसएसपी धमेंद्र यादव ने बताया कि युवती मारिया बूरेंडी द्वारा लगाए गए सभी आरोप गलत है। मरिया का अपने ही किसी दोस्त के साथ झगड़ा हुआ था। किसी भी लोकल आदमी ने मरिया के साथ मारपीट नहीं की। साथ ही कैब चालक भी फरार नहीं बल्कि वहां से चला गया। पुलिस ने बताया कि युवती ने जो भी मामला अपनी एफआईआर में दिया था उसकी पुख्ता जांच की गई। ऐसे में युवती से पूछताछ के जरिए यह जानने की कोशिश की जा रही है कि आखिर उसने ऐसा क्यों किया।
| ग्रेटरनोएडा में ओला कैब सवार केन्याई युवती पर हमले की बात गलत साबित हुई। युवती के द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद निकले। नोएडाः ग्रेटरनोएडा में ओला कैब सवार नाइजीरियन युवती पर हमले की बात गलत साबित हुई। युवती के द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद निकले। एसएसपी ने जांच में सभी साक्ष्यों को गलत पाया। जिसके बाद युवती द्वारा लगाए गए सभी आरोपो को निराधार बता दिया गया । -युवती का आरोप था कि बुधवार तड़के करीब साढ़े चार बजे दस युवकों ने उसकी कैब पर हमला कर दिया था। - साथ ही युवकों ने उसे कैब से उतारकर पीटा। इस दौरान ड्राइवर कैब लेकर फरार हो गया। -बताया गया कि मौके पर मौजूद लोगों ने एक सौ नंबर पर पुलिस को फोन किया। एसएसपी ने बताया कि सुबह सबसे पहले चौकी इंचार्ज को जानकारी मिली। जिसके बाद एसएचओ और करीब साढ़े आठ बजे मुझे इस मामले की जानकारी हुई। - इससे पहले ही पीसीआर- सरसठ पुलिस युवती को कैलाश अस्पताल ले जा चुकी थी। जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे छुट्टी दे दी गई। एसएसपी धमेंद्र यादव ने बताया कि युवती मारिया बूरेंडी द्वारा लगाए गए सभी आरोप गलत है। मरिया का अपने ही किसी दोस्त के साथ झगड़ा हुआ था। किसी भी लोकल आदमी ने मरिया के साथ मारपीट नहीं की। साथ ही कैब चालक भी फरार नहीं बल्कि वहां से चला गया। पुलिस ने बताया कि युवती ने जो भी मामला अपनी एफआईआर में दिया था उसकी पुख्ता जांच की गई। ऐसे में युवती से पूछताछ के जरिए यह जानने की कोशिश की जा रही है कि आखिर उसने ऐसा क्यों किया। |
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लेकिन इस फिल्म को लेकर एक और बड़ी खबर सामने आ रही है जो कि चौकाने वाली है। पता चला है कि अभिनेत्री हेमा मालिनी की इस फिल्म में एंट्री हुई है जो कि कौशल्या का किरदार निभाती दिखेंगी। माता कौशल्या... भगवान राम की मां और दशरथ की पहली पत्नी थीं। हालांकि हेमा मालिनी का इस फिल्म में होने को लेकर किसी तरह का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है लेकिन खबरें चर्चा में हैं।
इस फिल्म के बजट की बात करें तो इसको करीब 350 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है और वीएफएक्स और तकनीक के लिहाज़ से बेहद अनूठा एक्सपेरिमेंट होने वाला है।
बात करें फिल्म के कलाकारों की तो ये फिल्म सैफ अली खान और प्रभास दोनों के लिए काफी अहम होने वाली है और इस तरह के किरदार में ये पहली बार दिखने वाले हैं।
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आयुष्मान खुराना की फिल्म डॉक्टर जी में हुई इस शानदार अदाकारा की एंट्री? खुश हो जाएंगे फैंस!
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लखनऊ। देश भर में शाहरुख खान की फिल्म 'पठान का विरोध किया जा रहा है, दरअसल पठान फिल्म के एक गाने में दीपिका पादुकोण ने भगवा रंग की बिकिनी पहनी है। जिसके चलते देश के कई हिस्सों में इस फिल्म का विरोध प्रदर्शन हुआ है। कई हिन्दू संगठन इस फिल्म के विरोध में उतर आए हैं। वहीँ अब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है. अखिलेश ने बिना किसी फिल्म या अभिनेता का नाम लिए बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि फिल्में एंटरटेनमेंट का साधन होती हैं लेकिन बीजेपी ने इसे भी सियासी विचारधारा का हथकंडा बना लिया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी की नफरत की तलवार से सिनेमा को भी दो फाड़ किया जा रहा है। अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सिनेमा को लेकर ट्वीट करते हुए बीजेपी पर हमला किया।
| लखनऊ। देश भर में शाहरुख खान की फिल्म 'पठान का विरोध किया जा रहा है, दरअसल पठान फिल्म के एक गाने में दीपिका पादुकोण ने भगवा रंग की बिकिनी पहनी है। जिसके चलते देश के कई हिस्सों में इस फिल्म का विरोध प्रदर्शन हुआ है। कई हिन्दू संगठन इस फिल्म के विरोध में उतर आए हैं। वहीँ अब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है. अखिलेश ने बिना किसी फिल्म या अभिनेता का नाम लिए बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि फिल्में एंटरटेनमेंट का साधन होती हैं लेकिन बीजेपी ने इसे भी सियासी विचारधारा का हथकंडा बना लिया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी की नफरत की तलवार से सिनेमा को भी दो फाड़ किया जा रहा है। अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से सिनेमा को लेकर ट्वीट करते हुए बीजेपी पर हमला किया। |
वह कभी चिंतित अथवा क्रुद्ध नहीं होते। प्रत्येक काम बड़ी शांति के साथ, सोच-विचारकर करते हैं। उनकी स्मरण शक्ति भी बड़ी तेज़ है। प्रत्येक बात उन्हें बड़े विस्तार से याद रहती है। ये ही सब गुण हैं, जिनके कारण वह आज देश और समाज की इतनी सेवा कर रहे हैं। भारत में उनसे अधिक धनी तो बहुत सेठ और साहूकार होंगे, लेकिन उनके जैसे दिमाग़ और हृदयवाले व्यक्ति विरले ही मिलेंगे ।
सेठजी सामाजिक सुधार में भी लगे रहते हैं। अपन मंदिर, आदि हरिजनों के लिये वर्धा में सबसे पहले उन्होंने खोला था। विवाह-संबंधी सुधार भी बहुत से किए हैं । उनको देश-प्रेमी और सुयोग्य युवकों तथा युवतियों की परस्पर शादी कराने की बड़ी फ़िक्र रहती है। वह चाहते हैं, वर और वधू दोनो एक ही स्वभाव के हों, और देश तथा समाज की सेवा मिलकर कर सकें। बहुत से नवयुवकों की इसी प्रकार शादी कराकर उन्होंने एक महत्त्व पूर्ण समस्या हल की है। विवाह-संबंध कराने में वह कभी अनुचित दबाव नहीं डालते, और बहुधा ऐसे लड़के और लड़कियों की शादी कराते हैं, जिनका परस्पर परिचय हो । ऐसी शादी कराने में उन्हें बड़ी दिलचस्पी रहती है, इसलिये कुछ मित्रों मजाक में उनका नाम 'शादीलाल' रख दिया है । यहाँ सेठजी के राष्ट्रीय कार्यों का भी संक्षेप में वर्णन करना आवश्यक जान पड़ता है । सन् १६२१ में जो राष्ट्र सेवा
उन्होंने की थी, वह किसी से छिपी नहीं। महात्मा गांधी यदि असहयोग आंदोलन के मस्तिष्क थे, तो जमनालालजी उनके मेरुदंड । दो वर्ष बाद सेठजी ने नागपुर- भंडा-सत्याग्रह में बड़ा उत्साह और साहस दिखलाया । इस सत्याग्रह के वही मुख्य संचालक थे । सन् १६२० की नागपुर कांग्रेस में वह खजांची चुने गए थे, और आज तक वह उस कार्य को बड़ी योग्यता से चला रहे हैं । 'गांधी-सेवा-संघ, जो अब राष्ट्र की एक महत्त्वपूर्ण संस्था है, उन्हीं के उत्साह से संगठित हुआ है। 'अखिल भारतीय चरखा-संघ' को स्थापित करने में उनका काफ़ी हाथ था। मेरे विचार में शायद ही कोई ऐसी राष्ट्रीय संस्था हो, जिसमें सेठजी किसी प्रकार सहायता न करते हों । 'अखिल भारतीय ग्राम उद्योग संघ' के लिये तो उन्होंने अपना बहुत बड़ा, सुंदर उद्यान और इमारतें, जो अब 'मगनबाड़ी' के नाम से प्रसिद्ध हैं, दान कर दी हैं। वर्धा का 'सत्याग्रह आश्रम', जहाँ कुछ वर्ष पहले महात्माजी रहते थे, उन्हीं का बनवाया हुआ है। अब वहाँ 'हिंदू-महिला मंडल' की ओर से, जिसके सेठजी अध्यक्ष हैं, 'महिला-आश्रम' चल
शिक्षा के क्षेत्र में भी सेठजी ने बहुत कुछ सेवा की है । सन् १९९० में उन्होंने मारवाड़ियों की शिक्षा के प्रबंध के लिये वर्धा में 'मारवाड़ी विद्यार्थी गृह' खोला था । बाद में यह संस्था धीरे-धीरे 'मारवाड़ी-शिक्षा मंडल' के नाम से प्रसिद्ध
हुई, जिसने शिक्षा क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया है। वर्धा का 'नव-भारत- विद्यालय' इसी संस्था द्वारा ही चलाया जा रहा है।
हिंदी प्रचार और साहित्य क्षेत्र में भी सेठजी पीछे नहीं रहे हैं। आज से अठारह वर्ष पूर्व 'दक्षिण-भारत-हिंदी-प्रचारसभा' क़ायम हुई थी। उसमें उनका बहुत कुछ हाथ था । हिंदी साहित्य सम्मेलन के गत नागपुर- अधिवेशन में जो हिंदी प्रचार समिति बनी थी, उसके भी वह उपाध्यक्ष थे । 'भारतीय साहित्य परिषद् के काम में भी सेठजी बहुत सहायता दे रहे हैं। देश की सेवा में उन्होंने सचमुच अपना तन, मन और धन लगा दिया है। राष्ट्रीय कार्यों के लिये लाखों रुपए दान दे चुके हैं। अब तो वह देश सेवा में इतने लीन हो गए हैं कि अपना निजी कार-बार देखने की भी उन्हें बहुत कम फुरसत मिलती है । यह उन्हीं की निश्चित सेवा का फल है कि वर्धा एक गौरव-पूर्ण राष्ट्रीय केंद्र बन गया है। देश की राजनीति, शिक्षा, साहित्य, ग्राम-उद्योग आदि के संबंध की सभी संस्थाओं के कार्यालय वर्धा में चल रहे हैं । ऐसी दशा में मध्यप्रांत के इस छोटे से नगर को राष्ट्र का हृदय ही समझना चाहिए, और इस हृदय में देश-भक्त जमनालालजी की विशाल शक्ति विद्यमान है।
इस विषय को समाप्त करने के पहले सेठजी की सुयोग्य पत्नी श्रीमती जानकीदेवी के विषय में भी कुछ लिखना
आवश्यक है। मारवाड़ी-समाज में होते हुए भी इन्होंने समाज-सुधार किया है, और वह अति प्रशंसनीय है। इन्होंने बहुत वर्षों से पर्दा करना छोड़ दिया है, और पर्दा- प्रथा के संबंध में अक्सर व्याख्यान दिया करती हैं। व्याख्यान देने में यह सेठजी से बाजी मार ले गई हैं। अधिक शिक्षित न होने पर भी बड़ी निर्भयता और आत्मविश्वास के साथ बोलती हैं । उनके भाषणों में हास्य का पुट भी काफ़ी रहता है। इधर कुछ महीनों से इनका स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहता। आशा है, यह शीघ्र ही तंदुरुस्त हो जायँगी, और बहुत वर्षों तक देश और समाज की सेवा करती रहेंगी।
सेठजी की माता का भी जीवन जानने योग्य है। लगभग ७५ वर्ष की होते हुए भी वह दिन-भर कुछ-न-कुछ काम करती ही रहती हैं। दिन में कई घंटे चरखे पर सूत कातती हैं, और किसी प्रकार का आराम नहीं चाहतीं। सेठजी जैसे पुत्र को जन्म देकर उन्होंने अपना जीवन सफल बनाया है। | वह कभी चिंतित अथवा क्रुद्ध नहीं होते। प्रत्येक काम बड़ी शांति के साथ, सोच-विचारकर करते हैं। उनकी स्मरण शक्ति भी बड़ी तेज़ है। प्रत्येक बात उन्हें बड़े विस्तार से याद रहती है। ये ही सब गुण हैं, जिनके कारण वह आज देश और समाज की इतनी सेवा कर रहे हैं। भारत में उनसे अधिक धनी तो बहुत सेठ और साहूकार होंगे, लेकिन उनके जैसे दिमाग़ और हृदयवाले व्यक्ति विरले ही मिलेंगे । सेठजी सामाजिक सुधार में भी लगे रहते हैं। अपन मंदिर, आदि हरिजनों के लिये वर्धा में सबसे पहले उन्होंने खोला था। विवाह-संबंधी सुधार भी बहुत से किए हैं । उनको देश-प्रेमी और सुयोग्य युवकों तथा युवतियों की परस्पर शादी कराने की बड़ी फ़िक्र रहती है। वह चाहते हैं, वर और वधू दोनो एक ही स्वभाव के हों, और देश तथा समाज की सेवा मिलकर कर सकें। बहुत से नवयुवकों की इसी प्रकार शादी कराकर उन्होंने एक महत्त्व पूर्ण समस्या हल की है। विवाह-संबंध कराने में वह कभी अनुचित दबाव नहीं डालते, और बहुधा ऐसे लड़के और लड़कियों की शादी कराते हैं, जिनका परस्पर परिचय हो । ऐसी शादी कराने में उन्हें बड़ी दिलचस्पी रहती है, इसलिये कुछ मित्रों मजाक में उनका नाम 'शादीलाल' रख दिया है । यहाँ सेठजी के राष्ट्रीय कार्यों का भी संक्षेप में वर्णन करना आवश्यक जान पड़ता है । सन् एक हज़ार छः सौ इक्कीस में जो राष्ट्र सेवा उन्होंने की थी, वह किसी से छिपी नहीं। महात्मा गांधी यदि असहयोग आंदोलन के मस्तिष्क थे, तो जमनालालजी उनके मेरुदंड । दो वर्ष बाद सेठजी ने नागपुर- भंडा-सत्याग्रह में बड़ा उत्साह और साहस दिखलाया । इस सत्याग्रह के वही मुख्य संचालक थे । सन् एक हज़ार छः सौ बीस की नागपुर कांग्रेस में वह खजांची चुने गए थे, और आज तक वह उस कार्य को बड़ी योग्यता से चला रहे हैं । 'गांधी-सेवा-संघ, जो अब राष्ट्र की एक महत्त्वपूर्ण संस्था है, उन्हीं के उत्साह से संगठित हुआ है। 'अखिल भारतीय चरखा-संघ' को स्थापित करने में उनका काफ़ी हाथ था। मेरे विचार में शायद ही कोई ऐसी राष्ट्रीय संस्था हो, जिसमें सेठजी किसी प्रकार सहायता न करते हों । 'अखिल भारतीय ग्राम उद्योग संघ' के लिये तो उन्होंने अपना बहुत बड़ा, सुंदर उद्यान और इमारतें, जो अब 'मगनबाड़ी' के नाम से प्रसिद्ध हैं, दान कर दी हैं। वर्धा का 'सत्याग्रह आश्रम', जहाँ कुछ वर्ष पहले महात्माजी रहते थे, उन्हीं का बनवाया हुआ है। अब वहाँ 'हिंदू-महिला मंडल' की ओर से, जिसके सेठजी अध्यक्ष हैं, 'महिला-आश्रम' चल शिक्षा के क्षेत्र में भी सेठजी ने बहुत कुछ सेवा की है । सन् एक हज़ार नौ सौ नब्बे में उन्होंने मारवाड़ियों की शिक्षा के प्रबंध के लिये वर्धा में 'मारवाड़ी विद्यार्थी गृह' खोला था । बाद में यह संस्था धीरे-धीरे 'मारवाड़ी-शिक्षा मंडल' के नाम से प्रसिद्ध हुई, जिसने शिक्षा क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया है। वर्धा का 'नव-भारत- विद्यालय' इसी संस्था द्वारा ही चलाया जा रहा है। हिंदी प्रचार और साहित्य क्षेत्र में भी सेठजी पीछे नहीं रहे हैं। आज से अठारह वर्ष पूर्व 'दक्षिण-भारत-हिंदी-प्रचारसभा' क़ायम हुई थी। उसमें उनका बहुत कुछ हाथ था । हिंदी साहित्य सम्मेलन के गत नागपुर- अधिवेशन में जो हिंदी प्रचार समिति बनी थी, उसके भी वह उपाध्यक्ष थे । 'भारतीय साहित्य परिषद् के काम में भी सेठजी बहुत सहायता दे रहे हैं। देश की सेवा में उन्होंने सचमुच अपना तन, मन और धन लगा दिया है। राष्ट्रीय कार्यों के लिये लाखों रुपए दान दे चुके हैं। अब तो वह देश सेवा में इतने लीन हो गए हैं कि अपना निजी कार-बार देखने की भी उन्हें बहुत कम फुरसत मिलती है । यह उन्हीं की निश्चित सेवा का फल है कि वर्धा एक गौरव-पूर्ण राष्ट्रीय केंद्र बन गया है। देश की राजनीति, शिक्षा, साहित्य, ग्राम-उद्योग आदि के संबंध की सभी संस्थाओं के कार्यालय वर्धा में चल रहे हैं । ऐसी दशा में मध्यप्रांत के इस छोटे से नगर को राष्ट्र का हृदय ही समझना चाहिए, और इस हृदय में देश-भक्त जमनालालजी की विशाल शक्ति विद्यमान है। इस विषय को समाप्त करने के पहले सेठजी की सुयोग्य पत्नी श्रीमती जानकीदेवी के विषय में भी कुछ लिखना आवश्यक है। मारवाड़ी-समाज में होते हुए भी इन्होंने समाज-सुधार किया है, और वह अति प्रशंसनीय है। इन्होंने बहुत वर्षों से पर्दा करना छोड़ दिया है, और पर्दा- प्रथा के संबंध में अक्सर व्याख्यान दिया करती हैं। व्याख्यान देने में यह सेठजी से बाजी मार ले गई हैं। अधिक शिक्षित न होने पर भी बड़ी निर्भयता और आत्मविश्वास के साथ बोलती हैं । उनके भाषणों में हास्य का पुट भी काफ़ी रहता है। इधर कुछ महीनों से इनका स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहता। आशा है, यह शीघ्र ही तंदुरुस्त हो जायँगी, और बहुत वर्षों तक देश और समाज की सेवा करती रहेंगी। सेठजी की माता का भी जीवन जानने योग्य है। लगभग पचहत्तर वर्ष की होते हुए भी वह दिन-भर कुछ-न-कुछ काम करती ही रहती हैं। दिन में कई घंटे चरखे पर सूत कातती हैं, और किसी प्रकार का आराम नहीं चाहतीं। सेठजी जैसे पुत्र को जन्म देकर उन्होंने अपना जीवन सफल बनाया है। |
पटना। विधान सभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते ही विजय सिन्हा को विधान मंडल दल का नेता घोषित कर भाजपा ने बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी। इसके साथ ही विधान परिषद में पार्टी ने पूर्व मंत्री सम्राट चौधरी को नेता घोषित किया है। भाजपा की ओर से इसकी जानकारी बुधवार को विधान सभा और विधान परिषद कार्यालय को दे दी गई।
विधान सभा उपाध्यक्ष महेश्वर हजारी ने बताया कि विजय सिन्हा को नेता विरोधी दल के रूप में मान्यता दे दी गई है। विपक्ष की भूमिका में पहुंचने के बाद विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी को सदन में प्रतिनिधित्व देकर भाजपा ने बड़ा संदेश दिया है। पार्टी के इस पहल को सर्व समाज को साधने का प्रयास माना जा रहा है। विजय सिन्हा सवर्ण समाज और सम्राट चौधरी अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं। भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष के पद पर पहले से पिछड़ा समाज के डा. संजय जायसवाल को बिठा रखा है।
इटानगर। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश में झटका दिया है। उनकी पार्टी के इकलौते विधायक को अपने पाले में कर लिया है। अरुणाचल प्रदेश में जेडीयू के एकमात्र विधायक टेची कासो ने बुधवार को सत्तारूढ़ भाजपा का दामन थाम लिया है। विधान सभा के उपाध्यक्ष टेसम पोंगटे ने ईटानगर विधायक के भाजपा में विलय के आवेदन को स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही 60 सदस्यों वाली विधान सभा में भाजपा के 49 विधायक हो गए हैं। जेडीयू ने 2019 के विधान सभा चुनाव में अपने दम पर 15 सीटों पर कैंडिडेट उतारा था। उनमें से सात सीटों पर नीतीश कुमार की पार्टी को जीत मिली। अरुणाचल में जेडीयू भाजपा के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। हालांकि नीतीश के छह विधायकों वे पाला बदलते हुए भाजपा का दामन थाम लिया था।
| पटना। विधान सभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते ही विजय सिन्हा को विधान मंडल दल का नेता घोषित कर भाजपा ने बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी। इसके साथ ही विधान परिषद में पार्टी ने पूर्व मंत्री सम्राट चौधरी को नेता घोषित किया है। भाजपा की ओर से इसकी जानकारी बुधवार को विधान सभा और विधान परिषद कार्यालय को दे दी गई। विधान सभा उपाध्यक्ष महेश्वर हजारी ने बताया कि विजय सिन्हा को नेता विरोधी दल के रूप में मान्यता दे दी गई है। विपक्ष की भूमिका में पहुंचने के बाद विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी को सदन में प्रतिनिधित्व देकर भाजपा ने बड़ा संदेश दिया है। पार्टी के इस पहल को सर्व समाज को साधने का प्रयास माना जा रहा है। विजय सिन्हा सवर्ण समाज और सम्राट चौधरी अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं। भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष के पद पर पहले से पिछड़ा समाज के डा. संजय जायसवाल को बिठा रखा है। इटानगर। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भाजपा ने अरुणाचल प्रदेश में झटका दिया है। उनकी पार्टी के इकलौते विधायक को अपने पाले में कर लिया है। अरुणाचल प्रदेश में जेडीयू के एकमात्र विधायक टेची कासो ने बुधवार को सत्तारूढ़ भाजपा का दामन थाम लिया है। विधान सभा के उपाध्यक्ष टेसम पोंगटे ने ईटानगर विधायक के भाजपा में विलय के आवेदन को स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही साठ सदस्यों वाली विधान सभा में भाजपा के उनचास विधायक हो गए हैं। जेडीयू ने दो हज़ार उन्नीस के विधान सभा चुनाव में अपने दम पर पंद्रह सीटों पर कैंडिडेट उतारा था। उनमें से सात सीटों पर नीतीश कुमार की पार्टी को जीत मिली। अरुणाचल में जेडीयू भाजपा के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। हालांकि नीतीश के छह विधायकों वे पाला बदलते हुए भाजपा का दामन थाम लिया था। |
Covid-19: ये संकेत बताते हैं कि फ्लू नहीं बल्कि कोविड से संक्रमित हैं आप!
Covid-19 पिछले कुछ सालों में कोरोना ने हम सभी की जिंदगी को बदल कर रख दिया है। पहले बुखार सर्दी-खांसी का मतलब सिर्फ वायरल फीवर हुआ करता था लेकिन अब कोविड के भी यही लक्षण हैं। जिसकी वजह से हल्की सर्दी-खांसी या बुखार होने पर कंफ्यूज़न पैदा होने लगी है।
नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Covid-19: हम में से ज्यादातर लोगों को बचपन से वायरल फीवर होता आया है। इसलिए लक्षण दिखते ही हम समझ जाते हैं कि यह फ्लू है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में कोविड-19 के आने से अब यही लक्षण कंफ्यूज़न पैदा करने लगे हैं। क्योंकि फ्लू और कोविड-19 के लक्षण एक तरह के हैं, इसलिए बिना टेस्ट के पता लगाना मुश्किल हो जाता है, कि आपके लक्षण किस संक्रमण के हैं। ऐसे में आज हम आपको बता रहे हैं कोविड-19 के ऐसे लक्षणों के बारे में जिनको आप फ्लू समझने की गलती भी कर सकते हैं।
अगर आप सांस लेने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, तो आपको ऐसा लगेगा कि आपके फेफड़ों में हवा नहीं आ रही है। कोविड लक्षणों के डाटा पर नजर डालें, तो आप देखेंगे कि जो लोग कोविड-19 से संक्रमित हुए उन्हें फ्लू संक्रमण की तुलना सांस लेने में दिक्कत आई, जो एक एक आम संकेत भी था।
कमजोरी या थकावट होने पर, नींद पूरी न होने से भी बदतर महसूस होता है। बीमारी के ठीक हो जाने के बाद भी हफ्तों तक कमजोरी और तेज सिर दर्द रहता है, जो फ्लू का मुख्य लक्षण है। वहीं, कोविड संक्रमण के दौरान और बाद में लोग भयानक कमजोरी से जूझते हैं। कई लोगों ने बताया कि कोविड की वजह से कैसे एक हफ्ते की छुट्टी के बाद ऑफिस का काम करना कितना मुश्किल हो गया था।
खांसी एक ऐसा लक्षण है, जो फ्लू और कोविड-19 दोनों संक्रमणों में देखा जाता है। मायो क्लीनिक के अनुसार, कोविड-19 संक्रमण में रूखी खांसी होती है, जिसमें बलगम नहीं निकलता। सूखी खांसी एक बार शुरू हो जाए, तो मुश्किल से रुकती है।
बुखार या फिर कंपकपी दोनों संक्रमण में महसूस होती है। हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, जिन लोगों को फ्लू होता है, उन्हें हमेशा 100 डिग्री बुखार रहता है, वहीं कोविड-19 में बुखार तेज भी हो सकता है या हल्का या फिर नहीं भी आ सकता है।
कोविड-19 या फ्लू का पता कैसे चलेगा?
आपका बुखार, सर्दी और खांसी फ्लू की वजह से है या कोविड, इसका पता सिर्फ टेस्ट से ही लगाया जा सकता है। आप कोविड की होम किट का इस्तेमाल कर सकते हैं, या फिर RT-PCR करवा सकते हैं।
Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।
| Covid-उन्नीस: ये संकेत बताते हैं कि फ्लू नहीं बल्कि कोविड से संक्रमित हैं आप! Covid-उन्नीस पिछले कुछ सालों में कोरोना ने हम सभी की जिंदगी को बदल कर रख दिया है। पहले बुखार सर्दी-खांसी का मतलब सिर्फ वायरल फीवर हुआ करता था लेकिन अब कोविड के भी यही लक्षण हैं। जिसकी वजह से हल्की सर्दी-खांसी या बुखार होने पर कंफ्यूज़न पैदा होने लगी है। नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Covid-उन्नीस: हम में से ज्यादातर लोगों को बचपन से वायरल फीवर होता आया है। इसलिए लक्षण दिखते ही हम समझ जाते हैं कि यह फ्लू है। हालांकि, पिछले कुछ सालों में कोविड-उन्नीस के आने से अब यही लक्षण कंफ्यूज़न पैदा करने लगे हैं। क्योंकि फ्लू और कोविड-उन्नीस के लक्षण एक तरह के हैं, इसलिए बिना टेस्ट के पता लगाना मुश्किल हो जाता है, कि आपके लक्षण किस संक्रमण के हैं। ऐसे में आज हम आपको बता रहे हैं कोविड-उन्नीस के ऐसे लक्षणों के बारे में जिनको आप फ्लू समझने की गलती भी कर सकते हैं। अगर आप सांस लेने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं, तो आपको ऐसा लगेगा कि आपके फेफड़ों में हवा नहीं आ रही है। कोविड लक्षणों के डाटा पर नजर डालें, तो आप देखेंगे कि जो लोग कोविड-उन्नीस से संक्रमित हुए उन्हें फ्लू संक्रमण की तुलना सांस लेने में दिक्कत आई, जो एक एक आम संकेत भी था। कमजोरी या थकावट होने पर, नींद पूरी न होने से भी बदतर महसूस होता है। बीमारी के ठीक हो जाने के बाद भी हफ्तों तक कमजोरी और तेज सिर दर्द रहता है, जो फ्लू का मुख्य लक्षण है। वहीं, कोविड संक्रमण के दौरान और बाद में लोग भयानक कमजोरी से जूझते हैं। कई लोगों ने बताया कि कोविड की वजह से कैसे एक हफ्ते की छुट्टी के बाद ऑफिस का काम करना कितना मुश्किल हो गया था। खांसी एक ऐसा लक्षण है, जो फ्लू और कोविड-उन्नीस दोनों संक्रमणों में देखा जाता है। मायो क्लीनिक के अनुसार, कोविड-उन्नीस संक्रमण में रूखी खांसी होती है, जिसमें बलगम नहीं निकलता। सूखी खांसी एक बार शुरू हो जाए, तो मुश्किल से रुकती है। बुखार या फिर कंपकपी दोनों संक्रमण में महसूस होती है। हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, जिन लोगों को फ्लू होता है, उन्हें हमेशा एक सौ डिग्री बुखार रहता है, वहीं कोविड-उन्नीस में बुखार तेज भी हो सकता है या हल्का या फिर नहीं भी आ सकता है। कोविड-उन्नीस या फ्लू का पता कैसे चलेगा? आपका बुखार, सर्दी और खांसी फ्लू की वजह से है या कोविड, इसका पता सिर्फ टेस्ट से ही लगाया जा सकता है। आप कोविड की होम किट का इस्तेमाल कर सकते हैं, या फिर RT-PCR करवा सकते हैं। Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें। |
नई दिल्ली/गाजियाबादः गाजियाबाद में बिजली विभाग के ठेकेदार को बाइक सवार बदमाशों द्वारा शनिवार को गोली मारने की घटना सामने आई है, जिसके बाद उसे घायल अवस्था में अस्पताल में एडमिट कराया गया है. वहीं पुलिस के पास बदमाशों का कोई सुराग नहीं है और वारदात के पीछे का कारण भी साफ नहीं है. पुलिस मामले में तफ्तीश में जुटी हुई है और जिस गांव में यह वारदात हुई है, वहां पर पुलिस भी तैनात कर दी गई है. साथ ही आसपास के सीसीटीवी कैमरों भी खंगाले जा रहे हैं.
आपसी दुश्मनी का एंगलः दरअसल मामला गाजियाबाद के मुरादनगर थाना क्षेत्र के उखलारसी गांव का है, जहां पर 50 वर्षीय नवीन भारद्वाज को गोली मार दी गई. बदमाश शनिवार रात बाइक पर सवार होकर आए और ताबड़तोड़ गोलियां चलाई, जिसमें से दो गोलियां नवीन को लगी, जिससे वह घायल हो गया. घटना के वक्त नवीन अपने घर जा रहा था. पुलिस मामले की जांच आपसी दुश्मनी के एंगल से कर रही है और नवीन के पुराने विवाद भी चेक किया जा रहा है.
घायल की हालत गंभीरः नवीन को फिलहाल गाजियाबाद स्थित यशोदा अस्पताल में एडमिट कराया गया है और उसके होश में आने के बाद पुलिस उनका बयान दर्ज करेगी. हालांकि ठेकेदार की हालत फिलहाल गंभीर बताई जा रही है. पुलिस नवीन के परिवार से भी बातचीत कर रही है और उनका दावा है कि आरोपियों को तलाश कर जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की जाएगी. वहीं घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है, जिसके चलते यहां पुलिस बल की तैनाती की गई है.
| नई दिल्ली/गाजियाबादः गाजियाबाद में बिजली विभाग के ठेकेदार को बाइक सवार बदमाशों द्वारा शनिवार को गोली मारने की घटना सामने आई है, जिसके बाद उसे घायल अवस्था में अस्पताल में एडमिट कराया गया है. वहीं पुलिस के पास बदमाशों का कोई सुराग नहीं है और वारदात के पीछे का कारण भी साफ नहीं है. पुलिस मामले में तफ्तीश में जुटी हुई है और जिस गांव में यह वारदात हुई है, वहां पर पुलिस भी तैनात कर दी गई है. साथ ही आसपास के सीसीटीवी कैमरों भी खंगाले जा रहे हैं. आपसी दुश्मनी का एंगलः दरअसल मामला गाजियाबाद के मुरादनगर थाना क्षेत्र के उखलारसी गांव का है, जहां पर पचास वर्षीय नवीन भारद्वाज को गोली मार दी गई. बदमाश शनिवार रात बाइक पर सवार होकर आए और ताबड़तोड़ गोलियां चलाई, जिसमें से दो गोलियां नवीन को लगी, जिससे वह घायल हो गया. घटना के वक्त नवीन अपने घर जा रहा था. पुलिस मामले की जांच आपसी दुश्मनी के एंगल से कर रही है और नवीन के पुराने विवाद भी चेक किया जा रहा है. घायल की हालत गंभीरः नवीन को फिलहाल गाजियाबाद स्थित यशोदा अस्पताल में एडमिट कराया गया है और उसके होश में आने के बाद पुलिस उनका बयान दर्ज करेगी. हालांकि ठेकेदार की हालत फिलहाल गंभीर बताई जा रही है. पुलिस नवीन के परिवार से भी बातचीत कर रही है और उनका दावा है कि आरोपियों को तलाश कर जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की जाएगी. वहीं घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है, जिसके चलते यहां पुलिस बल की तैनाती की गई है. |
मुंबई : नियमों का उल्लंघन करके जहांज में पर्ससीन सामग्री रखनेवाले 4 जहांजों पर वरसोली बंदरगाह (तहसील अलिबाग) में महाराष्ट्र समुद्री मासेमारी नियमन अधिनियम 1981 के अंतर्गत कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई में जहांज में पर्ससीन जाली के लिए उपयोग कर रहे कुल 235 पितल रिंग को जब्त किया और सुरक्षा की दृष्टि से इसे स्थानिक नाखवा संघ वरसोली की ओर सौपा गया। कार्रवाई की गई जहांजों को वरसोली बंदरगाह पर रखा गया है और जहांज मालिकों के खिलाफ शिकायत दर्ज की जाएगी।
यह कार्रवाई सहायक आयुक्त मत्स्य व्यवसाय श्री. नाखवा, लाइसेन्स अधिकारी श्री. पाटिल, पुलिस दामिनी पथक की श्रीमती कांबले व श्रीमती पवार की टीम ने की।
| मुंबई : नियमों का उल्लंघन करके जहांज में पर्ससीन सामग्री रखनेवाले चार जहांजों पर वरसोली बंदरगाह में महाराष्ट्र समुद्री मासेमारी नियमन अधिनियम एक हज़ार नौ सौ इक्यासी के अंतर्गत कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई में जहांज में पर्ससीन जाली के लिए उपयोग कर रहे कुल दो सौ पैंतीस पितल रिंग को जब्त किया और सुरक्षा की दृष्टि से इसे स्थानिक नाखवा संघ वरसोली की ओर सौपा गया। कार्रवाई की गई जहांजों को वरसोली बंदरगाह पर रखा गया है और जहांज मालिकों के खिलाफ शिकायत दर्ज की जाएगी। यह कार्रवाई सहायक आयुक्त मत्स्य व्यवसाय श्री. नाखवा, लाइसेन्स अधिकारी श्री. पाटिल, पुलिस दामिनी पथक की श्रीमती कांबले व श्रीमती पवार की टीम ने की। |
अगर आप एक टैक्सपेयर हैं और डेबिट कार्ड से ज्यादा लेनदेन करते हैं। साथ ही नेशनल पेंशन सिस्टम में निवेश करते हैं तो बहुत सारी चीजें सितंबर से बदलने वाले हैं, जिसका असर सीधा आपकी जेब पर होगा। यहां कुछ फाइनेंश से जुड़े परिवर्तन के बारे में बताया गया है।
अगर आपने आईटीआर फाइल कर दी है, लेकिन रिटर्न को वेरिफाई नहीं किया है तो 30 दिनों के अंदर ITR वेरिफाई करना होगा। यानी अगर आपने 4 अगस्त को आईटीआर फाइल किया है तो आपको 7 सितंबर से पहले आईटीआर वेरिफाई करना होगा। पहले यह 120 दिनों के लिए था और आयकर विभाग की ओर से इसे घटाकर 30 दिन कर दिया गया है। टैक्स रिटर्न वेरिफाई करता है कि आईटीआर के तहत दी गई जानकारी बिल्कुल सही है।
वेरिफिकेशन के बिना आईटी डिपॉर्टमेंट की ओर से फंड जारी नहीं किया जाता है। वेरिफिकेशन कराने में जितनी ही देरी होती है, आपके बैंक खाते में रकम ट्रांसफर होने में उतना ही समय लगता है। अगर आईटीआर के तहत वेरिफाई नहीं किया जाता है तो आपका आईटीर फाइल नहीं माना जाएगा और इसे खारिज भी किया जा सकता है।
इसके अलावा अगर रिटर्न वेरिफाई करने का समय एक्सपायर हो जाता है तो आपको पेनाल्टी देकर ही फाइल किया जा सकता है। आधार कार्ड, नेटबैंकिंग या अन्य चीजों को उपयोग कर आप वेरिफाई कर सकते हैं।
सितंबर में, सुरक्षित लेनदेन के लिए टोकन के साथ ऑनलाइन, पॉइंट-ऑफ-सेल (पीओएस) और इन-ऐप लेनदेन में उपयोग किए जाने वाले सभी क्रेडिट और डेबिट कार्ड डेटा को बदलना होगा।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आदेश के अनुसार, टोकन नियम 1 अक्टूबर से लागू होगा। इसके तहत, सभी व्यापारी वेबसाइटों को ऑनलाइन लेनदेन की प्रक्रिया के लिए आपके कार्ड नंबर, CVV या समाप्ति तिथि को अपने सर्वर पर सेव करने से रोक दिया जाएगा। अगर व्यापारी अपने भुगतान गेटवे पृष्ठ पर सुविधा प्रदान करता है तो कार्ड उपयोगकर्ताओं को अब एक टोकन सेव करना चाहिए और उस टोकन को विशेष वेबसाइट (भविष्य में उपयोग के लिए) पर सेव करके रखना चाहिए। वेबसाइट पर टोकन आपके कार्ड के मास्क डाटा के रूप में काम करता है, इसलिए कोई भी मिसयूज भी नहीं कर सकता है।
नेंशलन पेंशन सिस्टम (एनपीएस) में योगदान करने के दौरान, अगर यूनिटों को रद्द किया जाता है तो एक कमीशन काट लिया जाता है। 1 सितंबर से एनपीएस के तहत डायरेक्ट-रेमिट मोड के माध्यम से किए गए योगदान पर ट्रेल कमीशन को योगदान राशि के मौजूदा 0. 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 0. 20 प्रतिशत कर दिया जाएगा। इस बढ़ोतरी के कारण 15 से 10,000 रुपए ट्रेल कमीशन के रूप में काटे जाएंगे।
मान लीजिए अगर 1 सितंबर को आप एनपीएस में डायरेक्ट-रेमिट मोड के तहत 50,000 रुपए का निवेश करते हैं, यानी सुबह 9. 30 बजे से पहले, तो 5,000 रुपए के बजाय 10,000 रुपए का कमीशन काट लिया जाएगा। ये कमीशन बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों या अन्य वित्तीय संस्थाओं जैसे उपस्थिति के बिंदु पर दिए जाएंगे जो आपको एनपीएस में निवेश करने में मदद करते हैं।
सितंबर से कई बैंकों ने डेबिट कार्ड पर वार्षिक शुल्क और जारी करने की फीस में बढ़ोतरी की घोषणा की है। यह कार्ड और अन्य इनपुट में उपयोग किए जाने वाले सेमीकंडक्टर चिप्स की लागत में बढ़ोतरी के कारण ऐसा हुआ है।
इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) ने 6 सितंबर से प्रभावी डेबिट कार्ड के कई प्रकारों के लिए शुल्क बढ़ा दिया है। IOB से Rupay क्लासिक डेबिट कार्ड जारी करने का शुल्क 50 रुपए था और दूसरे वर्ष से वार्षिक शुल्क 150 रुपए था। निर्गम शुल्क और वार्षिक शुल्क दूसरे वर्ष से बढ़कर क्रमशः 150 रुपए और 250 रुपए हो जाएगा।
इसी तरह से यस बैंक रूपे डेबिट कार्ड (सिर्फ किसान के लिए) और एलिमेंट डेबिट कार्ड क्रमशः 149 रुपए और 299 रुपए बढ़ा कर दिया है। इससे पहले, यस बैंक इन कार्डों के लिए क्रमशः 99 रुपए और 249 रुपए सालाना चार्ज कर रहा था। वहीं अन्य बैंक ने इंश्योरेंस चार्ज और वार्षिक चार्ज ने चार्ज बढ़ाए है , जिसमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और सुर्योदय फाइनेंस बैंक भी शामिल हैं।
10 से 40 साल के उम्र के टैक्सपेयर्स, जो अटल पेंशन योजना में निवेश करना चाहता है, वह 30 सितंबर से निवेश नहीं कर पाएगा। यह पेंशन योजना पीएफआरडी की ओर से मैनेज किया जाता है और इसमें 1000 से लेकर 5000 रुपए तक का हर महीने गारंटीड पेंशन लाभ दिया जाता है।
| अगर आप एक टैक्सपेयर हैं और डेबिट कार्ड से ज्यादा लेनदेन करते हैं। साथ ही नेशनल पेंशन सिस्टम में निवेश करते हैं तो बहुत सारी चीजें सितंबर से बदलने वाले हैं, जिसका असर सीधा आपकी जेब पर होगा। यहां कुछ फाइनेंश से जुड़े परिवर्तन के बारे में बताया गया है। अगर आपने आईटीआर फाइल कर दी है, लेकिन रिटर्न को वेरिफाई नहीं किया है तो तीस दिनों के अंदर ITR वेरिफाई करना होगा। यानी अगर आपने चार अगस्त को आईटीआर फाइल किया है तो आपको सात सितंबर से पहले आईटीआर वेरिफाई करना होगा। पहले यह एक सौ बीस दिनों के लिए था और आयकर विभाग की ओर से इसे घटाकर तीस दिन कर दिया गया है। टैक्स रिटर्न वेरिफाई करता है कि आईटीआर के तहत दी गई जानकारी बिल्कुल सही है। वेरिफिकेशन के बिना आईटी डिपॉर्टमेंट की ओर से फंड जारी नहीं किया जाता है। वेरिफिकेशन कराने में जितनी ही देरी होती है, आपके बैंक खाते में रकम ट्रांसफर होने में उतना ही समय लगता है। अगर आईटीआर के तहत वेरिफाई नहीं किया जाता है तो आपका आईटीर फाइल नहीं माना जाएगा और इसे खारिज भी किया जा सकता है। इसके अलावा अगर रिटर्न वेरिफाई करने का समय एक्सपायर हो जाता है तो आपको पेनाल्टी देकर ही फाइल किया जा सकता है। आधार कार्ड, नेटबैंकिंग या अन्य चीजों को उपयोग कर आप वेरिफाई कर सकते हैं। सितंबर में, सुरक्षित लेनदेन के लिए टोकन के साथ ऑनलाइन, पॉइंट-ऑफ-सेल और इन-ऐप लेनदेन में उपयोग किए जाने वाले सभी क्रेडिट और डेबिट कार्ड डेटा को बदलना होगा। भारतीय रिजर्व बैंक के आदेश के अनुसार, टोकन नियम एक अक्टूबर से लागू होगा। इसके तहत, सभी व्यापारी वेबसाइटों को ऑनलाइन लेनदेन की प्रक्रिया के लिए आपके कार्ड नंबर, CVV या समाप्ति तिथि को अपने सर्वर पर सेव करने से रोक दिया जाएगा। अगर व्यापारी अपने भुगतान गेटवे पृष्ठ पर सुविधा प्रदान करता है तो कार्ड उपयोगकर्ताओं को अब एक टोकन सेव करना चाहिए और उस टोकन को विशेष वेबसाइट पर सेव करके रखना चाहिए। वेबसाइट पर टोकन आपके कार्ड के मास्क डाटा के रूप में काम करता है, इसलिए कोई भी मिसयूज भी नहीं कर सकता है। नेंशलन पेंशन सिस्टम में योगदान करने के दौरान, अगर यूनिटों को रद्द किया जाता है तो एक कमीशन काट लिया जाता है। एक सितंबर से एनपीएस के तहत डायरेक्ट-रेमिट मोड के माध्यम से किए गए योगदान पर ट्रेल कमीशन को योगदान राशि के मौजूदा शून्य. दस प्रतिशत से बढ़ाकर शून्य. बीस प्रतिशत कर दिया जाएगा। इस बढ़ोतरी के कारण पंद्रह से दस,शून्य रुपयापए ट्रेल कमीशन के रूप में काटे जाएंगे। मान लीजिए अगर एक सितंबर को आप एनपीएस में डायरेक्ट-रेमिट मोड के तहत पचास,शून्य रुपयापए का निवेश करते हैं, यानी सुबह नौ. तीस बजे से पहले, तो पाँच,शून्य रुपयापए के बजाय दस,शून्य रुपयापए का कमीशन काट लिया जाएगा। ये कमीशन बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों या अन्य वित्तीय संस्थाओं जैसे उपस्थिति के बिंदु पर दिए जाएंगे जो आपको एनपीएस में निवेश करने में मदद करते हैं। सितंबर से कई बैंकों ने डेबिट कार्ड पर वार्षिक शुल्क और जारी करने की फीस में बढ़ोतरी की घोषणा की है। यह कार्ड और अन्य इनपुट में उपयोग किए जाने वाले सेमीकंडक्टर चिप्स की लागत में बढ़ोतरी के कारण ऐसा हुआ है। इंडियन ओवरसीज बैंक ने छः सितंबर से प्रभावी डेबिट कार्ड के कई प्रकारों के लिए शुल्क बढ़ा दिया है। IOB से Rupay क्लासिक डेबिट कार्ड जारी करने का शुल्क पचास रुपयापए था और दूसरे वर्ष से वार्षिक शुल्क एक सौ पचास रुपयापए था। निर्गम शुल्क और वार्षिक शुल्क दूसरे वर्ष से बढ़कर क्रमशः एक सौ पचास रुपयापए और दो सौ पचास रुपयापए हो जाएगा। इसी तरह से यस बैंक रूपे डेबिट कार्ड और एलिमेंट डेबिट कार्ड क्रमशः एक सौ उनचास रुपयापए और दो सौ निन्यानवे रुपयापए बढ़ा कर दिया है। इससे पहले, यस बैंक इन कार्डों के लिए क्रमशः निन्यानवे रुपयापए और दो सौ उनचास रुपयापए सालाना चार्ज कर रहा था। वहीं अन्य बैंक ने इंश्योरेंस चार्ज और वार्षिक चार्ज ने चार्ज बढ़ाए है , जिसमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और सुर्योदय फाइनेंस बैंक भी शामिल हैं। दस से चालीस साल के उम्र के टैक्सपेयर्स, जो अटल पेंशन योजना में निवेश करना चाहता है, वह तीस सितंबर से निवेश नहीं कर पाएगा। यह पेंशन योजना पीएफआरडी की ओर से मैनेज किया जाता है और इसमें एक हज़ार से लेकर पाँच हज़ार रुपयापए तक का हर महीने गारंटीड पेंशन लाभ दिया जाता है। |
शिवपाल ने भतीजे अखिलेश पर निशाना साधने के बाद अपने भाई और सपा के संरक्षक मुलायम सिंह पर भी निशाना साध दिया। उन्होंने इसके लिए सपा के विधायक आजम खान का एक बार फिर नाम लिया। उन्होंने कहा कि आजम के साथ जुल्म हो रहा है।
UP: यूपी के चुनावी जंग में मुलायम सिंह के बेटे अखिलेश का समर्थन करने के बावजूद शिवपाल अभी तक मुलायम के बराबर का दर्जा देते रहे हैं, लेकिन अब उन्होंने उन पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।
UP Politics: बता दें कि बीते दिनों अखिलेश यादव ने शिवपाल को लेकर कहा था कि वो विपक्षी दलों के संपर्क में है। जिस पर अब शिवपाल यादव का पलटवार आया है। शिवपाल ने यादव ने ये भी कहा है कि, मैं सपा के 111 विधायकों में से एक हूं। ऐसे में चाहे सपा प्रमुख मुझे पार्टी से निकाल सकते है।
UP Politics: ऐसे में शिवपाल सिंह द्वारा अपनी पार्टी की सभी इकाईयों को भंग करने पर काफी अहम माना जा रहा है। एक तरफ जहां शिवपाल यादव ने बीते दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। जिसके बाद कयास का दौर शुरू हो गया था कि शिवपाल यादव के भाजपा में शामिल होने की उम्मीद लगाए जा रहे थे।
UP Election: हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के बाद से ही शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच दूरियां बढ़ती जा रही है। एक और जहां शिवपाल यादव के भारतीय जनता पार्टी में आने की अटकलें तेज हैं तो वहीं अखिलेश यादव भी इसके लिए तैयार नजर आ रहे हैं।
UP: साल 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले सपा की साइकिल छोड़ अलग पार्टी (प्रगतिशील समाजवादी पार्टी) बनाने शिवपाल यादव को 2022 विधानसभा चुनाव से पहले सपा प्रमुख ने मना लिया था। बड़े भाई मुलायम सिंह यादव समझाने पर शिवपाल यादव नाराजगी छोड़ अखिलेश यादव के साथ आ गए थे लेकिन महज एक सीट मिलने पर उनकी नाराजगी दिखने लगी।
Uttar Pradesh: शिवपाल सिंह यादव ने सोमवार सुबह भगवान श्री राम के पूरे परिवार के तस्वीर को शेयर करते हुए ट्वीट कर लिखा, प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा॥ आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मन राजा॥ भगवान राम का चरित्र 'परिवार, संस्कार और राष्ट्र' निर्माण की सर्वोत्तम पाठशाला है। चैत्र नवरात्रि आस्था के साथ ही प्रभु राम के आदर्श से जुड़ने व उसे गुनने का भी क्षण है।
UP: प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को जोरदार झटका देने की तैयारी कर ली है।
UP: एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से ये कहा गया है कि उत्तर प्रदेश चुनाव में हार के कुछ दिन बाद ही शिवपाल यादव अपने भतीजे के साथ गठबंधन करने वाले हैं। उन्होंने कथित तौर पर अपनी पार्टी के नेताओं से मुलाकात कर उन्हें 'बड़ी जंग के लिए तैयार रहने को' कहा।
| शिवपाल ने भतीजे अखिलेश पर निशाना साधने के बाद अपने भाई और सपा के संरक्षक मुलायम सिंह पर भी निशाना साध दिया। उन्होंने इसके लिए सपा के विधायक आजम खान का एक बार फिर नाम लिया। उन्होंने कहा कि आजम के साथ जुल्म हो रहा है। UP: यूपी के चुनावी जंग में मुलायम सिंह के बेटे अखिलेश का समर्थन करने के बावजूद शिवपाल अभी तक मुलायम के बराबर का दर्जा देते रहे हैं, लेकिन अब उन्होंने उन पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। UP Politics: बता दें कि बीते दिनों अखिलेश यादव ने शिवपाल को लेकर कहा था कि वो विपक्षी दलों के संपर्क में है। जिस पर अब शिवपाल यादव का पलटवार आया है। शिवपाल ने यादव ने ये भी कहा है कि, मैं सपा के एक सौ ग्यारह विधायकों में से एक हूं। ऐसे में चाहे सपा प्रमुख मुझे पार्टी से निकाल सकते है। UP Politics: ऐसे में शिवपाल सिंह द्वारा अपनी पार्टी की सभी इकाईयों को भंग करने पर काफी अहम माना जा रहा है। एक तरफ जहां शिवपाल यादव ने बीते दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। जिसके बाद कयास का दौर शुरू हो गया था कि शिवपाल यादव के भाजपा में शामिल होने की उम्मीद लगाए जा रहे थे। UP Election: हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के बाद से ही शिवपाल यादव और अखिलेश यादव के बीच दूरियां बढ़ती जा रही है। एक और जहां शिवपाल यादव के भारतीय जनता पार्टी में आने की अटकलें तेज हैं तो वहीं अखिलेश यादव भी इसके लिए तैयार नजर आ रहे हैं। UP: साल दो हज़ार सत्रह में विधानसभा चुनाव से पहले सपा की साइकिल छोड़ अलग पार्टी बनाने शिवपाल यादव को दो हज़ार बाईस विधानसभा चुनाव से पहले सपा प्रमुख ने मना लिया था। बड़े भाई मुलायम सिंह यादव समझाने पर शिवपाल यादव नाराजगी छोड़ अखिलेश यादव के साथ आ गए थे लेकिन महज एक सीट मिलने पर उनकी नाराजगी दिखने लगी। Uttar Pradesh: शिवपाल सिंह यादव ने सोमवार सुबह भगवान श्री राम के पूरे परिवार के तस्वीर को शेयर करते हुए ट्वीट कर लिखा, प्रातकाल उठि कै रघुनाथा। मातु पिता गुरु नावहिं माथा॥ आयसु मागि करहिं पुर काजा। देखि चरित हरषइ मन राजा॥ भगवान राम का चरित्र 'परिवार, संस्कार और राष्ट्र' निर्माण की सर्वोत्तम पाठशाला है। चैत्र नवरात्रि आस्था के साथ ही प्रभु राम के आदर्श से जुड़ने व उसे गुनने का भी क्षण है। UP: प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को जोरदार झटका देने की तैयारी कर ली है। UP: एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से ये कहा गया है कि उत्तर प्रदेश चुनाव में हार के कुछ दिन बाद ही शिवपाल यादव अपने भतीजे के साथ गठबंधन करने वाले हैं। उन्होंने कथित तौर पर अपनी पार्टी के नेताओं से मुलाकात कर उन्हें 'बड़ी जंग के लिए तैयार रहने को' कहा। |
Valentine Day 2023 :
फरवरी को प्यार का महीना माना जाता है क्योंकि इसी महीने वैलेंटाइन डे आता है.
इस दिन लोग अपने-अपने पार्टनर को उसके खास होने का एहसास दिलाते हैं.
इतना ही नहीं प्रेमी जोड़े एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करते हैं.
डिनर डेट पर जाते हैं.
ना जाकर अपने पार्टनर के साथ अकेले में समय व्यतीत करना चाहते हैं.
अगर आप भी उन्हीं लोगों में से हैं जो अपने पार्टनर के साथ घर पर ही वैलेंटाइन डे मनाने की प्लानिंग कर रही हैं तो आप उन्हें घर पर ही सरप्राइज दे सकती हैं. दरअसल, आज हम आपको रेड वेलवेट केक के बारे में बताएंगे जिसको बनाकर आप अपने पार्टनर को उनके खास होने का एहसास करा सकती हैं. इससे आपका पार्टनर भी काफी इंप्रेस होगा. आइए आपको बताते हैं रेड वेलवेट केक बनाने का आसान तरीका.
वैलेंटाइन डे के लिए सबसे बेस्ट है हार्ट शेप रेड वेलवेट केक. इसको बनाने के लिए आप सबसे पहले एक हार्ट शेप का मोल्ड लीजिए. अब उसमें ऑयल लगाकर एक कढ़ाही में मीडियम आंच अपर गर्म होने के लिए रख दें. मोल्ड की 10 मिनट के लिए प्रीहीट होने के लिए ढककर रख दें. इसके बाद आपको केक का बेटर तैयार करना है. इसके लिए सबसे पहले बड़ बाउल में कंडेंस मिल्क और रिफाइंड डालकर इसे अच्छे से फेंट लें.
क्रीमी टेक्चर आने के बाद इसमें मैदा, बेकिंग पाउडर, वनिला एसेंस और बेकिंग सोडा डालकर इस अच्छे से मिक्स करें. इसके बाद इसमें थोड़ा-थोड़ा दूध डालते हुए अच्छे से मिक्स कर लें. इससे इसका अक स्मूद बेटर तैयार हो जाएगा. बेटर में गांठ नहीं होनी चाहिए अन्यथा केक फ्लफी नहीं बनेगा.
बेटर तैयार होने के बाद इसमें रेड फूड कलर डाल कर इसे अच्छे से मिलाए. सबसे लास्ट में इसमें विनेगर डाल दें. अभी तक आपका मोल्ड अच्छे से गर्म हो चुका होगा. बेटर को केक मोल्ड में डाल दें और कढ़ाई को 40 से 50 मिनट के लिए ढक दें. समय पूरा होने के बाद चाकू या टूथपिक डालकर ये चेक करें केक बना या नहीं. यदि केक कच्चा होगा तो वो चाकू में चिपक जाएगा. यदि ये बन गया है तो गैस बंद करके इसे ठंडा करने के लिए रख दें. इस बीच आप शुगर सिरप तैयार कर सकती हैं.
इसको बनाने के लिए सबसे पहले तीन चम्मच पानी लें और उसमें एक चम्मच चीनी मिला लें और सुगर सीरप बनाकर तैयार कर लें.
क्रीमी टेक्सचर में न आ जाए.
अब केक की एक पतली लेयर काट कर अलग कर लें.
इसे बारीक तोड़ कर रख लें.
इसके बाद बचे हुए केक को दो बराबर भागों में बांट लें. इन दोनों भागों के बीच में अब क्रीम लगाएं. दोनो लेयर को एक के ऊपर एक रखने के बाद इस पर शुगर सिरप लगाएं. इसके बाद क्रीम को केक के ऊपर अच्छे से लगाएं और केक कवर कर लें.
अब इसे आप अपनी तरह से डेकोरेट कर सकती हैं. चाहें तो कुकिंग ब्लेड की सहायता से जिग-जैग की डिजाइन बना लें और फिर पाइपिंग बैग की सहायता से केक पर डिजाइन बनाएं. अब क्रश किए गए केक के टुकड़ों को इस पर डाल डें. इसे अब जमने के लिए 3 घंटे तक फ्रिज में रख दें. बस आपका हार्ट शेप केक तैयार है.
| Valentine Day दो हज़ार तेईस : फरवरी को प्यार का महीना माना जाता है क्योंकि इसी महीने वैलेंटाइन डे आता है. इस दिन लोग अपने-अपने पार्टनर को उसके खास होने का एहसास दिलाते हैं. इतना ही नहीं प्रेमी जोड़े एक-दूसरे के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करते हैं. डिनर डेट पर जाते हैं. ना जाकर अपने पार्टनर के साथ अकेले में समय व्यतीत करना चाहते हैं. अगर आप भी उन्हीं लोगों में से हैं जो अपने पार्टनर के साथ घर पर ही वैलेंटाइन डे मनाने की प्लानिंग कर रही हैं तो आप उन्हें घर पर ही सरप्राइज दे सकती हैं. दरअसल, आज हम आपको रेड वेलवेट केक के बारे में बताएंगे जिसको बनाकर आप अपने पार्टनर को उनके खास होने का एहसास करा सकती हैं. इससे आपका पार्टनर भी काफी इंप्रेस होगा. आइए आपको बताते हैं रेड वेलवेट केक बनाने का आसान तरीका. वैलेंटाइन डे के लिए सबसे बेस्ट है हार्ट शेप रेड वेलवेट केक. इसको बनाने के लिए आप सबसे पहले एक हार्ट शेप का मोल्ड लीजिए. अब उसमें ऑयल लगाकर एक कढ़ाही में मीडियम आंच अपर गर्म होने के लिए रख दें. मोल्ड की दस मिनट के लिए प्रीहीट होने के लिए ढककर रख दें. इसके बाद आपको केक का बेटर तैयार करना है. इसके लिए सबसे पहले बड़ बाउल में कंडेंस मिल्क और रिफाइंड डालकर इसे अच्छे से फेंट लें. क्रीमी टेक्चर आने के बाद इसमें मैदा, बेकिंग पाउडर, वनिला एसेंस और बेकिंग सोडा डालकर इस अच्छे से मिक्स करें. इसके बाद इसमें थोड़ा-थोड़ा दूध डालते हुए अच्छे से मिक्स कर लें. इससे इसका अक स्मूद बेटर तैयार हो जाएगा. बेटर में गांठ नहीं होनी चाहिए अन्यथा केक फ्लफी नहीं बनेगा. बेटर तैयार होने के बाद इसमें रेड फूड कलर डाल कर इसे अच्छे से मिलाए. सबसे लास्ट में इसमें विनेगर डाल दें. अभी तक आपका मोल्ड अच्छे से गर्म हो चुका होगा. बेटर को केक मोल्ड में डाल दें और कढ़ाई को चालीस से पचास मिनट के लिए ढक दें. समय पूरा होने के बाद चाकू या टूथपिक डालकर ये चेक करें केक बना या नहीं. यदि केक कच्चा होगा तो वो चाकू में चिपक जाएगा. यदि ये बन गया है तो गैस बंद करके इसे ठंडा करने के लिए रख दें. इस बीच आप शुगर सिरप तैयार कर सकती हैं. इसको बनाने के लिए सबसे पहले तीन चम्मच पानी लें और उसमें एक चम्मच चीनी मिला लें और सुगर सीरप बनाकर तैयार कर लें. क्रीमी टेक्सचर में न आ जाए. अब केक की एक पतली लेयर काट कर अलग कर लें. इसे बारीक तोड़ कर रख लें. इसके बाद बचे हुए केक को दो बराबर भागों में बांट लें. इन दोनों भागों के बीच में अब क्रीम लगाएं. दोनो लेयर को एक के ऊपर एक रखने के बाद इस पर शुगर सिरप लगाएं. इसके बाद क्रीम को केक के ऊपर अच्छे से लगाएं और केक कवर कर लें. अब इसे आप अपनी तरह से डेकोरेट कर सकती हैं. चाहें तो कुकिंग ब्लेड की सहायता से जिग-जैग की डिजाइन बना लें और फिर पाइपिंग बैग की सहायता से केक पर डिजाइन बनाएं. अब क्रश किए गए केक के टुकड़ों को इस पर डाल डें. इसे अब जमने के लिए तीन घंटाटे तक फ्रिज में रख दें. बस आपका हार्ट शेप केक तैयार है. |
केविन क्लेन नामक दो प्रसिद्ध लोग हैं। वे इस तथ्य से एकजुट हैं कि वे दोनों पिछले शताब्दी के दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका में पैदा हुए थे। मिसौरी के मूल निवासी केवल केविन डेलाने क्लेन एक हॉलीवुड अभिनेता बन गए, और उनका पूरा नामक, केवल एक औसत नाम - रिचर्ड्स द्वारा प्रतिष्ठित, हौट कॉटर की दुनिया में एक शक्तिशाली निगम की स्थापना की। हम इसके बारे में बात करेंगे। डिजाइनर, निश्चित रूप से, हॉलीवुड में वाक ऑफ फेम पर अपना सितारा नहीं है, लेकिन यह विश्व प्रसिद्ध भी है। और जिस महिमा में वह बैठा है वह वास्तव में सुनहरा है। चूंकि 1 9 68 में स्थापित कंपनी कैल्विन क्लीन.इंक, मुनाफा कमाती रही है। यह फैशन हाउस धीरे-धीरे एक प्रसिद्ध प्रचारित ब्रांड बन गया है। इस लेख में पढ़ने के लिए "यूके से तैयार" का क्या अर्थ है।
केविन रिचर्ड क्लेन (हमारे नाम का उच्चारण हैकितनी बार क्लाइन कि गलत) 1942 में पैदा हुआ था, पांच साल के अपने हमनाम से पहले, बाद में हॉलीवुड विजय प्राप्त की। राशि चक्र पर हस्ताक्षर वृश्चिक स्टार डिजाइनरः वह 19 नवंबर को जन्मदिन मनाता है। उनके पिता एक औसत हाथ, जो ब्रोंक्स में रहते थे के एक यहूदी व्यापारी था - जबकि यह न्यूयॉर्क के एक उपनगर था। लिटिल केविन बचपन सुंदरता के लिए तरस दिखाया। इसलिए, अपने पिता उदार था और उनके बेटे एक प्रतिष्ठित शिक्षा दे दी है। केविन क्लेन कला के ग्रेजुएट स्कूल से स्नातक की उपाधि जब वह केवल अठारह साल का था। वह पहले से ही पक्का पता था कि वह क्या बनना चाहता है, लेकिन वह अपने शिक्षा जारी रखने का फैसला किया और प्रौद्योगिकी दो साल की फैशन संस्थान में अध्ययन किया। 1962 में वयस्कता के लिए एक टिकट प्राप्त करने के बाद, केविन के बारे में छह साल कहीं भी रोके बिना न्यूयॉर्क में विभिन्न डिजाइन घरों में काम किया था, एक लंबे समय के लिए।
फैशन हाउस में काम करते हुए केविन नहीं दिया और न ही बुझास्वस्थ महत्वाकांक्षा, न ही निर्वाह के पर्याप्त साधन। एक शब्द में, अनमोल अनुभव के अलावा कुछ भी नहीं। उन्हें सड़क कलाकार के रूप में अंशकालिक भी काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। 1 9 68 में, अपने बचपन के एक दोस्त, बैरी श्वार्टज़ ने उन्हें आध्यात्मिक और वित्तीय रूप से प्रेरित किया - अपना फैशन हाउस खोलने के लिए। कंपनी का नाम कैल्विन क्लेन लिमिटेड रखा गया था, और न्यूयॉर्क में पंजीकृत था। प्रारंभ में, कंपनी पुरुषों के लिए बाहरी वस्त्रों के विकास में लगी हुई थी। केवल 70 केविन क्लेन ने महिलाओं के शौचालयों के डिजाइन पर फैसला किया था। महिमा तुरंत उसके पास नहीं आई, लेकिन इंतजार करने में लंबा समय नहीं लगा। कंपनी की स्थापना के पांच साल बाद, डिजाइनर को फैशन की दुनिया में प्रतिष्ठित कोटी पुरस्कार मिला। और इस पुरस्कार को उन्होंने लगातार तीन साल प्राप्त किए।
अमेरिकी समाज में जींस हमेशा विचार किया गया हैकाम करने वाले कपड़े की तरह कुछ। चौग़ा और चौग़ा को सजाने के लिए - कौन दिमाग में आएगा? केवल क्लेन के रूप में इस तरह के एक घृणित लड़के के लिए। 1 9 78 में, फैशन की दुनिया उत्तेजित थी, जब "डिजाइनर जींस" के मॉडल मंच पर आए थे। "एसके" लेबल (संक्षेप में कैल्विन क्लेन), जो कि पैंट जेब के पीछे फहरा हुआ था, 70 के उछाल के दौरान उछाल का पहला निगल था, जिसे "लॉगोमैनिया" कहा जाता था। जीन्स का प्रचार करने वाली एक विज्ञापन कंपनी भी सामान्य नहीं थी। केविन क्लेन ने एक पोस्टर जारी किया जिसने लियोनार्डो दा विंची के लास्ट सपर की प्रसिद्ध कृति की नकल की। तालिका में, प्रेषितों और यीशु मसीह की पूरी तरह से प्रतिलिपि बनाने पर, दोनों लिंगों के आधा नग्न मॉडल बैठे। वे केवल जीन्स पहन रहे थे। पोस्टर को क्लेन का लास्ट सपर कहा जाता था। और हालांकि डिजाइनर को रोमन कैथोलिक चर्च के दावे को पूरा करना पड़ा, जिसने दस लाख डॉलर का भुगतान किया, विज्ञापन कंपनी सफल रही। जब वीडियो में 15 वर्षीय मॉडल ने कथित तौर पर बताया कि "मेरे और मेरे केल्विन के बीच कुछ भी नहीं है", कई स्नॉब्स ने इस नारे को अश्लीलता का संकेत पाया, लेकिन बिक्री के स्तर से पता चला कि यह काम करता है।
1992 में, केविन क्लेन ने एक विज्ञापन जारी कियापोस्टर, जिसमें से नायक आधे कपड़े पहने रैपर मार्क मार्क और युवा मॉडल केट मॉस हैं। समान लिंग वाले लोगों ने कपड़ों के एक ही मॉडल को पहना। इसलिए, डिजाइनर को यूनिसेक्स शैली का गॉडफादर माना जाता है (अर्थात, कपड़े जो महिलाओं और पुरुषों दोनों पर सूट करते हैं)। नई दुनिया के फैशन उद्योग के राजा यहीं नहीं रुके। उन्होंने फैशन की दुनिया में एक नई अवधारणा शुरू की - डिजाइनर कपड़े आकस्मिक शैली में। इस शब्द का अर्थ है "यादृच्छिक", लेकिन इसका अधिक सटीक अर्थ "स्थिति" है। पार्क में टहलने या प्रकृति में वृद्धि के साथ-साथ युवा पार्टी और डिनर पार्टी के लिए, हम पूरी तरह से अलग कपड़े पहनते हैं।
उसी समय, जब दुनिया ने फिल्में देखींकेविन क्लेन द्वारा, लगभग डिजाइनर के नाम, उन्होंने अपने फैशन साम्राज्य की सीमाओं का व्यवस्थित रूप से विस्तार किया। 1982 में, जब टेप "सोफीस चॉइस" स्क्रीन पर दिखाई दी, जहां अभिनेता ने मुख्य भूमिकाओं में से एक निभाई, अंडरवियर में लगे अमेरिकी फैशन की दुनिया के राजा कपड़े, सामान और जूते, उनके घर द्वारा बनाए गए, युवा और सुंदर के लिए इरादा थे - क्लेन की सफलता का एक और रहस्य। उनकी फर्म जानबूझकर बड़े आकार को सिलाई नहीं करती है। ऐसे कपड़े मोटे लोगों के लिए नहीं हैं। कोमलता, युवा और एक निश्चित तुच्छता - ये मुख्य संघ हैं जो उत्पाद यूके के नाम से पैदा होते हैं। लेकिन इस तरह की जीत में भी, यह प्रतीत होता है, अप्रत्याशित कठिनाइयां पैदा हुईं। 1999 में, जब अभिनेता ने फिल्म "ए मिडसमर नाइट्स ड्रीम" में अभिनय किया, तो डिजाइनर ने एक बार फिर अपने प्रचार अभियान के साथ एक घोटाले का कारण बना। हल्के कपड़े पहने हुए किशोरों और अंडरवियर के नए संग्रह का प्रदर्शन करने वाले बच्चों ने नैतिक पहरेदारों को चौंका दिया।
एक व्यक्ति में सब कुछ ठीक होना चाहिए - जूते सेएक टाई में पिन अप करें। डिजाइनर ने कपड़े, लिनन और जूते के लिए एक घड़ी जोड़कर इस सच्चाई को साझा किया। 1997 में केविन क्लेन ने स्विस कंपनी द स्वैच ग्रुप लिमिटेड के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए, जो पहले ही क्रोनोमीटर के निर्माताओं के बीच विश्वसनीयता हासिल करने में कामयाब रहा। इसलिए, पोषित अंकन "मेड इन स्विस" अब ब्रिटेन से घड़ियों - पुरुष और महिला - के साथ सजाया गया है। डिजाइनर ने इस उत्पाद के लिए एक बुद्धिमान मूल्य निर्धारण नीति लागू की। उत्कृष्ट डिजाइन और विश्वसनीय स्विस आंदोलन अपेक्षाकृत कम कीमत पर खरीदा जा सकता है। घर के प्रमुख डिजाइनर, फ्रांसिस्को कोस्टा ने मास्टर के साथ एक सममूल्य पर मॉडल विकसित किए। इस ब्रांड की घड़ियों की विशेषता लालित्य और हर विवरण का सावधानीपूर्वक अध्ययन है।
शौचालय का पानी "केविन क्लेन"
डिजाइनरों और इत्र की अनदेखी नहीं की गई। शक्तिशाली घर में नई महक आने लगी - महिलाओं, पुरुषों, यूनिसेक्स। चूंकि केविन क्लेन के कपड़े युवा और सुंदर के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, यहां तक कि इत्र उत्पादों में भी डिजाइनर ने इस लक्षित दर्शकों से विचलित नहीं किया। शौचालय के पानी और इत्र की खुशबू हल्की, भोली और एक ही समय में आकर्षक होती है। महिलाओं के ओउ डे टॉयलेट में immediacy और shock होता है। मजबूत सेक्स डिजाइनर ने मर्दानगी, जुनून, कामुकता को बचाया। यूनिसेक्स इत्र अमेरिकी ग्लैमर के वातावरण में डुबकी लगाने की अनुमति देता है। हाउस एसके को प्रेमियों के लिए बनाई गई सुगंधित सुगंध का उत्पादन करना पसंद है - वे एक दूसरे के पूरक हैं।
| केविन क्लेन नामक दो प्रसिद्ध लोग हैं। वे इस तथ्य से एकजुट हैं कि वे दोनों पिछले शताब्दी के दशक में संयुक्त राज्य अमेरिका में पैदा हुए थे। मिसौरी के मूल निवासी केवल केविन डेलाने क्लेन एक हॉलीवुड अभिनेता बन गए, और उनका पूरा नामक, केवल एक औसत नाम - रिचर्ड्स द्वारा प्रतिष्ठित, हौट कॉटर की दुनिया में एक शक्तिशाली निगम की स्थापना की। हम इसके बारे में बात करेंगे। डिजाइनर, निश्चित रूप से, हॉलीवुड में वाक ऑफ फेम पर अपना सितारा नहीं है, लेकिन यह विश्व प्रसिद्ध भी है। और जिस महिमा में वह बैठा है वह वास्तव में सुनहरा है। चूंकि एक नौ अड़सठ में स्थापित कंपनी कैल्विन क्लीन.इंक, मुनाफा कमाती रही है। यह फैशन हाउस धीरे-धीरे एक प्रसिद्ध प्रचारित ब्रांड बन गया है। इस लेख में पढ़ने के लिए "यूके से तैयार" का क्या अर्थ है। केविन रिचर्ड क्लेन एक हज़ार नौ सौ बयालीस में पैदा हुआ था, पांच साल के अपने हमनाम से पहले, बाद में हॉलीवुड विजय प्राप्त की। राशि चक्र पर हस्ताक्षर वृश्चिक स्टार डिजाइनरः वह उन्नीस नवंबर को जन्मदिन मनाता है। उनके पिता एक औसत हाथ, जो ब्रोंक्स में रहते थे के एक यहूदी व्यापारी था - जबकि यह न्यूयॉर्क के एक उपनगर था। लिटिल केविन बचपन सुंदरता के लिए तरस दिखाया। इसलिए, अपने पिता उदार था और उनके बेटे एक प्रतिष्ठित शिक्षा दे दी है। केविन क्लेन कला के ग्रेजुएट स्कूल से स्नातक की उपाधि जब वह केवल अठारह साल का था। वह पहले से ही पक्का पता था कि वह क्या बनना चाहता है, लेकिन वह अपने शिक्षा जारी रखने का फैसला किया और प्रौद्योगिकी दो साल की फैशन संस्थान में अध्ययन किया। एक हज़ार नौ सौ बासठ में वयस्कता के लिए एक टिकट प्राप्त करने के बाद, केविन के बारे में छह साल कहीं भी रोके बिना न्यूयॉर्क में विभिन्न डिजाइन घरों में काम किया था, एक लंबे समय के लिए। फैशन हाउस में काम करते हुए केविन नहीं दिया और न ही बुझास्वस्थ महत्वाकांक्षा, न ही निर्वाह के पर्याप्त साधन। एक शब्द में, अनमोल अनुभव के अलावा कुछ भी नहीं। उन्हें सड़क कलाकार के रूप में अंशकालिक भी काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। एक नौ अड़सठ में, अपने बचपन के एक दोस्त, बैरी श्वार्टज़ ने उन्हें आध्यात्मिक और वित्तीय रूप से प्रेरित किया - अपना फैशन हाउस खोलने के लिए। कंपनी का नाम कैल्विन क्लेन लिमिटेड रखा गया था, और न्यूयॉर्क में पंजीकृत था। प्रारंभ में, कंपनी पुरुषों के लिए बाहरी वस्त्रों के विकास में लगी हुई थी। केवल सत्तर केविन क्लेन ने महिलाओं के शौचालयों के डिजाइन पर फैसला किया था। महिमा तुरंत उसके पास नहीं आई, लेकिन इंतजार करने में लंबा समय नहीं लगा। कंपनी की स्थापना के पांच साल बाद, डिजाइनर को फैशन की दुनिया में प्रतिष्ठित कोटी पुरस्कार मिला। और इस पुरस्कार को उन्होंने लगातार तीन साल प्राप्त किए। अमेरिकी समाज में जींस हमेशा विचार किया गया हैकाम करने वाले कपड़े की तरह कुछ। चौग़ा और चौग़ा को सजाने के लिए - कौन दिमाग में आएगा? केवल क्लेन के रूप में इस तरह के एक घृणित लड़के के लिए। एक नौ अठहत्तर में, फैशन की दुनिया उत्तेजित थी, जब "डिजाइनर जींस" के मॉडल मंच पर आए थे। "एसके" लेबल , जो कि पैंट जेब के पीछे फहरा हुआ था, सत्तर के उछाल के दौरान उछाल का पहला निगल था, जिसे "लॉगोमैनिया" कहा जाता था। जीन्स का प्रचार करने वाली एक विज्ञापन कंपनी भी सामान्य नहीं थी। केविन क्लेन ने एक पोस्टर जारी किया जिसने लियोनार्डो दा विंची के लास्ट सपर की प्रसिद्ध कृति की नकल की। तालिका में, प्रेषितों और यीशु मसीह की पूरी तरह से प्रतिलिपि बनाने पर, दोनों लिंगों के आधा नग्न मॉडल बैठे। वे केवल जीन्स पहन रहे थे। पोस्टर को क्लेन का लास्ट सपर कहा जाता था। और हालांकि डिजाइनर को रोमन कैथोलिक चर्च के दावे को पूरा करना पड़ा, जिसने दस लाख डॉलर का भुगतान किया, विज्ञापन कंपनी सफल रही। जब वीडियो में पंद्रह वर्षीय मॉडल ने कथित तौर पर बताया कि "मेरे और मेरे केल्विन के बीच कुछ भी नहीं है", कई स्नॉब्स ने इस नारे को अश्लीलता का संकेत पाया, लेकिन बिक्री के स्तर से पता चला कि यह काम करता है। एक हज़ार नौ सौ बानवे में, केविन क्लेन ने एक विज्ञापन जारी कियापोस्टर, जिसमें से नायक आधे कपड़े पहने रैपर मार्क मार्क और युवा मॉडल केट मॉस हैं। समान लिंग वाले लोगों ने कपड़ों के एक ही मॉडल को पहना। इसलिए, डिजाइनर को यूनिसेक्स शैली का गॉडफादर माना जाता है । नई दुनिया के फैशन उद्योग के राजा यहीं नहीं रुके। उन्होंने फैशन की दुनिया में एक नई अवधारणा शुरू की - डिजाइनर कपड़े आकस्मिक शैली में। इस शब्द का अर्थ है "यादृच्छिक", लेकिन इसका अधिक सटीक अर्थ "स्थिति" है। पार्क में टहलने या प्रकृति में वृद्धि के साथ-साथ युवा पार्टी और डिनर पार्टी के लिए, हम पूरी तरह से अलग कपड़े पहनते हैं। उसी समय, जब दुनिया ने फिल्में देखींकेविन क्लेन द्वारा, लगभग डिजाइनर के नाम, उन्होंने अपने फैशन साम्राज्य की सीमाओं का व्यवस्थित रूप से विस्तार किया। एक हज़ार नौ सौ बयासी में, जब टेप "सोफीस चॉइस" स्क्रीन पर दिखाई दी, जहां अभिनेता ने मुख्य भूमिकाओं में से एक निभाई, अंडरवियर में लगे अमेरिकी फैशन की दुनिया के राजा कपड़े, सामान और जूते, उनके घर द्वारा बनाए गए, युवा और सुंदर के लिए इरादा थे - क्लेन की सफलता का एक और रहस्य। उनकी फर्म जानबूझकर बड़े आकार को सिलाई नहीं करती है। ऐसे कपड़े मोटे लोगों के लिए नहीं हैं। कोमलता, युवा और एक निश्चित तुच्छता - ये मुख्य संघ हैं जो उत्पाद यूके के नाम से पैदा होते हैं। लेकिन इस तरह की जीत में भी, यह प्रतीत होता है, अप्रत्याशित कठिनाइयां पैदा हुईं। एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में, जब अभिनेता ने फिल्म "ए मिडसमर नाइट्स ड्रीम" में अभिनय किया, तो डिजाइनर ने एक बार फिर अपने प्रचार अभियान के साथ एक घोटाले का कारण बना। हल्के कपड़े पहने हुए किशोरों और अंडरवियर के नए संग्रह का प्रदर्शन करने वाले बच्चों ने नैतिक पहरेदारों को चौंका दिया। एक व्यक्ति में सब कुछ ठीक होना चाहिए - जूते सेएक टाई में पिन अप करें। डिजाइनर ने कपड़े, लिनन और जूते के लिए एक घड़ी जोड़कर इस सच्चाई को साझा किया। एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में केविन क्लेन ने स्विस कंपनी द स्वैच ग्रुप लिमिटेड के साथ एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए, जो पहले ही क्रोनोमीटर के निर्माताओं के बीच विश्वसनीयता हासिल करने में कामयाब रहा। इसलिए, पोषित अंकन "मेड इन स्विस" अब ब्रिटेन से घड़ियों - पुरुष और महिला - के साथ सजाया गया है। डिजाइनर ने इस उत्पाद के लिए एक बुद्धिमान मूल्य निर्धारण नीति लागू की। उत्कृष्ट डिजाइन और विश्वसनीय स्विस आंदोलन अपेक्षाकृत कम कीमत पर खरीदा जा सकता है। घर के प्रमुख डिजाइनर, फ्रांसिस्को कोस्टा ने मास्टर के साथ एक सममूल्य पर मॉडल विकसित किए। इस ब्रांड की घड़ियों की विशेषता लालित्य और हर विवरण का सावधानीपूर्वक अध्ययन है। शौचालय का पानी "केविन क्लेन" डिजाइनरों और इत्र की अनदेखी नहीं की गई। शक्तिशाली घर में नई महक आने लगी - महिलाओं, पुरुषों, यूनिसेक्स। चूंकि केविन क्लेन के कपड़े युवा और सुंदर के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, यहां तक कि इत्र उत्पादों में भी डिजाइनर ने इस लक्षित दर्शकों से विचलित नहीं किया। शौचालय के पानी और इत्र की खुशबू हल्की, भोली और एक ही समय में आकर्षक होती है। महिलाओं के ओउ डे टॉयलेट में immediacy और shock होता है। मजबूत सेक्स डिजाइनर ने मर्दानगी, जुनून, कामुकता को बचाया। यूनिसेक्स इत्र अमेरिकी ग्लैमर के वातावरण में डुबकी लगाने की अनुमति देता है। हाउस एसके को प्रेमियों के लिए बनाई गई सुगंधित सुगंध का उत्पादन करना पसंद है - वे एक दूसरे के पूरक हैं। |
पंजाब के एक गांव में भयावह घटना के बाद तनाव फैल गया. इस घटना में एक दलित मजदूर को कथित तौर पर पीटा गया और उच्च जाति के लोगों ने जबरदस्ती पेशाब पीने को मजबूर किया. बाद में मजदूर ने पीजीआई अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. मजदूर का परिवार राज्य सरकार से मुआवजे के तौर पर 50 लाख रुपये व एक नौकरी की मांग कर रहा है. मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने प्रदेश के प्रमुख सचिव और डीजीपी को जल्द से जल्द जांच पूरी करने का निर्देश दिया है.
| पंजाब के एक गांव में भयावह घटना के बाद तनाव फैल गया. इस घटना में एक दलित मजदूर को कथित तौर पर पीटा गया और उच्च जाति के लोगों ने जबरदस्ती पेशाब पीने को मजबूर किया. बाद में मजदूर ने पीजीआई अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. मजदूर का परिवार राज्य सरकार से मुआवजे के तौर पर पचास लाख रुपये व एक नौकरी की मांग कर रहा है. मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने प्रदेश के प्रमुख सचिव और डीजीपी को जल्द से जल्द जांच पूरी करने का निर्देश दिया है. |
कोरबा, 2 दिसम्बर सिटी काेतवाली परिसर स्थित पुलिस काॅलाेनी में जनसुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले 30 पुलिस कर्मियाें के परिवार के सदस्यों की जान जोखिम में है। दरअसल ज्यादातर परिवार कंडम हाे चुके मकानों में निवासरत है। काॅलाेनी में कंडम मकानाें काे ताेड़कर 60 मकान बनाने का प्रस्ताव पुलिस विभाग ने प्रशासन के पास भेजा है लेकिन अब तक इसपर संबंधित विभाग ने कार्रवाई शुरू नहीं की है। जिले का सबसे पुरानी पुलिस काॅलाेनी सिटी काेतवाली परिवार में स्थित है, जहां 80 के दशक में पुलिस परिवार के रहने के लिए मकान बनाए गए थे।
बाद में अलग-अलग थाना बनते गए और वहां पुलिस काॅलाेनी भी बनी। जिला गठन के बाद पुलिस लाइन बनने पर वहां पर सबसे बड़ी पुलिस काॅलाेनी बन गई, लेकिन 40 साल भी काेतवाली काॅलाेनी जस के तस है। मरम्मत नहीं हाेने से धीरे-धीरे कर काॅलाेनी के 48 में से ज्यादातर मकान कंडम हाे चुके हैं।
पुलिस विभाग ने उनमें से 29 मकान काे चिन्हित कर पूरी तरह कंडम घाेषित किया है, लेकिन अब तक इन मकानाें काे नहीं ढहाया गया है। इससे अब भी ऐसे कर्ई मकान में पुलिस परिवार निवासरत है। इसके अलावा कई मकानाें में भी परिवार रह रहे हैं। इस तरह काेतवाली पुलिस काॅलाेनी में खतरे साए में 30 परिवार निवासरत है। अधिकारियाें के मुताबिक जिला प्रशासन व नगर निगम के अधिकारियाें के कई बार काॅलाेनी का निरीक्षण कर कंडम मकानाें काे ढहाकर उनकी जगह नए मकान बनाने की बात कही, लेकिन अब तक याेजना ठंड बस्ते में है। पुलिस विभाग द्वारा राज्य शासन काे नई काॅलाेनी के लिए भी प्रस्ताव भेजा गया है।
डीएमएफ से 13 कराेड़ की लागत से 60 नए मकान बनाने का प्रस्ताव पुलिस विभाग ने प्रशासन काे भेजा, लेकिन 1 साल से प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है। 6 माह पहले कलेक्टर रानू साहू ने काेतवाली परिसर का निरीक्षण किया था। तब उन्हाेंने ने भी काॅलाेनी के मकानाें के मरम्मत व नए मकान निर्माण के लिए अधिकारियाें काे निर्देश दिए थे।
डीएसपी हेड क्वार्टर शेरबहादुर सिंह के मुताबिक सिटी काेतवाली परिसर स्थित पुलिस काॅलाेनी में ज्यादातर मकान कंडम घाेषित किए जा चुके हैं। जिन मकानाें में परिवार निवासरत है वह अभी ठीक है। समय-समय पर मरम्मत कराया जाता है। काॅलाेनी में नए मकान निर्माण के लिए प्रशासन काे प्रस्ताव भेजा गया है, जिसपर स्वीकृति अपेक्षित है।
| कोरबा, दो दिसम्बर सिटी काेतवाली परिसर स्थित पुलिस काॅलाेनी में जनसुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले तीस पुलिस कर्मियाें के परिवार के सदस्यों की जान जोखिम में है। दरअसल ज्यादातर परिवार कंडम हाे चुके मकानों में निवासरत है। काॅलाेनी में कंडम मकानाें काे ताेड़कर साठ मकान बनाने का प्रस्ताव पुलिस विभाग ने प्रशासन के पास भेजा है लेकिन अब तक इसपर संबंधित विभाग ने कार्रवाई शुरू नहीं की है। जिले का सबसे पुरानी पुलिस काॅलाेनी सिटी काेतवाली परिवार में स्थित है, जहां अस्सी के दशक में पुलिस परिवार के रहने के लिए मकान बनाए गए थे। बाद में अलग-अलग थाना बनते गए और वहां पुलिस काॅलाेनी भी बनी। जिला गठन के बाद पुलिस लाइन बनने पर वहां पर सबसे बड़ी पुलिस काॅलाेनी बन गई, लेकिन चालीस साल भी काेतवाली काॅलाेनी जस के तस है। मरम्मत नहीं हाेने से धीरे-धीरे कर काॅलाेनी के अड़तालीस में से ज्यादातर मकान कंडम हाे चुके हैं। पुलिस विभाग ने उनमें से उनतीस मकान काे चिन्हित कर पूरी तरह कंडम घाेषित किया है, लेकिन अब तक इन मकानाें काे नहीं ढहाया गया है। इससे अब भी ऐसे कर्ई मकान में पुलिस परिवार निवासरत है। इसके अलावा कई मकानाें में भी परिवार रह रहे हैं। इस तरह काेतवाली पुलिस काॅलाेनी में खतरे साए में तीस परिवार निवासरत है। अधिकारियाें के मुताबिक जिला प्रशासन व नगर निगम के अधिकारियाें के कई बार काॅलाेनी का निरीक्षण कर कंडम मकानाें काे ढहाकर उनकी जगह नए मकान बनाने की बात कही, लेकिन अब तक याेजना ठंड बस्ते में है। पुलिस विभाग द्वारा राज्य शासन काे नई काॅलाेनी के लिए भी प्रस्ताव भेजा गया है। डीएमएफ से तेरह कराेड़ की लागत से साठ नए मकान बनाने का प्रस्ताव पुलिस विभाग ने प्रशासन काे भेजा, लेकिन एक साल से प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है। छः माह पहले कलेक्टर रानू साहू ने काेतवाली परिसर का निरीक्षण किया था। तब उन्हाेंने ने भी काॅलाेनी के मकानाें के मरम्मत व नए मकान निर्माण के लिए अधिकारियाें काे निर्देश दिए थे। डीएसपी हेड क्वार्टर शेरबहादुर सिंह के मुताबिक सिटी काेतवाली परिसर स्थित पुलिस काॅलाेनी में ज्यादातर मकान कंडम घाेषित किए जा चुके हैं। जिन मकानाें में परिवार निवासरत है वह अभी ठीक है। समय-समय पर मरम्मत कराया जाता है। काॅलाेनी में नए मकान निर्माण के लिए प्रशासन काे प्रस्ताव भेजा गया है, जिसपर स्वीकृति अपेक्षित है। |
गुजरात सरकार ने 11 जनवरी से 10 वीं और 12 वीं कक्षा के छात्रों के लिए स्कूलों को फिर से खोलने की घोषणा की। इसके साथ ही स्नातक और स्नातकोत्तर के लिए फिर से कॉलेज खुलेंगे। अंतिम वर्ष कोविड-19 रोकथाम मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) और माता-पिता की सहमति के अनिवार्य अनुपालन के साथ यह होगा।
नई दिल्लीः कोरोना महामारी के संकट के कारण देश में स्कूल- कॉलेज को बंद कर दिया गया था। स्थिति नियंत्रण में आने के बाद लॉक डाउन की प्रक्रिया ख़त्म हुई और अनलॉक की प्रक्रिया चालू की गई। जिसके तहत संक्रमण रोकने वाले नियमों का पालन करते हुए अब स्कूलों को धीरे-धीरे खोला जा रहा है। बता दें कि कर्नाटक, बिहार और ओडिशा समेत कई राज्यों में पहले ही स्कूल खुल चुके हैं। वहीं गुजरात और राजस्थान समेत कुछ राज्यों में आज से स्कूल- कॉलेज खोले जा रहे हैं। हालांकि अभी कुछ राज्यों में 14 और 18 जनवरी से स्कूलों को दोबारा खोलने की तैयारी में हैं।
बता दें कि गुजरात सरकार ने 11 जनवरी से 10 वीं और 12 वीं कक्षा के छात्रों के लिए स्कूलों को फिर से खोलने की घोषणा की। इसके साथ ही स्नातक और स्नातकोत्तर के लिए फिर से कॉलेज खुलेंगे। अंतिम वर्ष कोविड-19 रोकथाम मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) और माता-पिता की सहमति के अनिवार्य अनुपालन के साथ यह होगा। राज्य के शिक्षा मंत्री भूपेंद्रसिंह चुडासमा ने कहा कि छात्रों को स्कूलों में आने के दौरान अपने माता-पिता की सहमति लेनी होगी। हालांकि, सरकार के मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का पालन स्कूल करेंगे, इस समय उपस्थिति अनिवार्य नहीं है।
राजस्थान में मेडिकल कॉलेज, पैरामेडिकल कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज 11 जनवरी से फिर से खुलेंगे। कोविड मामलों में लगातार कमी आने के साथ ही राजस्थान में 18 जनवरी से स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और कोचिंग सेंटर सहित शैक्षणिक संस्थान फिर से खुलेंगे। मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज और पैरामेडिकल कॉलेज को जनवरी से फिर से शुरू करने का निर्देश दिया गया है। सरकार के निर्देश के अनुसार, कोरोना से बचाव संबंधी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार 50 प्रतिशत क्षमता के साथ कॉलेजों को फिर से खोलने के बारे में 20 जनवरी तक निर्णय करेगी। कोविड-19 महामारी के तेजी से प्रसार के कारण मार्च, 2020 से महाराष्ट्र में स्कूल और कॉलेज सहित सभी शैक्षणिक संस्थान बंद हो गए हैं। कुछ स्कूलों और जूनियर कॉलेजों को इस महीने की शुरुआत में राज्य के कुछ हिस्सों में कक्षा 9 से 12 के लिए फिर से खोल दिया गया था।
देश की राजधानी दिल्ली में राज्य सरकार ने कहा कि अभी स्कूल खोलने की कोई योजना नहीं है। वर्गों को फिर से शुरू करने का निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि फ्रंटलाइन श्रमिकों के टीकाकरण के बाद कोविड-19 टीके जनता के लिए उपलब्ध हैं। दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि सरकार स्कूलों को फिर से खोलने के लिए योजना बना रही थी जैसे कि वह COVID-19 टीकाकरण के लिए योजना बना रही थी।
कर्नाटक प्रथम और द्वितीय वर्ष के कॉलेज के छात्रों के लिए नियमित कक्षाएं 14 जनवरी को फिर से शुरू होंगी। 10 वीं कक्षा के लिए ऑफलाइन कक्षाएं, द्वितीय पूर्व-विश्वविद्यालय, अंतिम वर्ष की डिग्री और स्नातकोत्तर छात्र की कक्षाएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं।
गौरतलब है कि कोविड-19 महामारी के चलते मार्च, 2020 से स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए थे। सरकार ने दिशा-निर्देशों में स्कूलों को 15 अक्तूबर से फिर से खोलने की अनुमति दी थी। स्कूल कब से खोले जाने हैं, इसका अंतिम फैसला राज्य सरकारों का होगा। उत्तर प्रदेश और हरियाणा ने दिसंबर से ही स्कूल शुरू कर दिए थे।
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| गुजरात सरकार ने ग्यारह जनवरी से दस वीं और बारह वीं कक्षा के छात्रों के लिए स्कूलों को फिर से खोलने की घोषणा की। इसके साथ ही स्नातक और स्नातकोत्तर के लिए फिर से कॉलेज खुलेंगे। अंतिम वर्ष कोविड-उन्नीस रोकथाम मानक संचालन प्रक्रियाओं और माता-पिता की सहमति के अनिवार्य अनुपालन के साथ यह होगा। नई दिल्लीः कोरोना महामारी के संकट के कारण देश में स्कूल- कॉलेज को बंद कर दिया गया था। स्थिति नियंत्रण में आने के बाद लॉक डाउन की प्रक्रिया ख़त्म हुई और अनलॉक की प्रक्रिया चालू की गई। जिसके तहत संक्रमण रोकने वाले नियमों का पालन करते हुए अब स्कूलों को धीरे-धीरे खोला जा रहा है। बता दें कि कर्नाटक, बिहार और ओडिशा समेत कई राज्यों में पहले ही स्कूल खुल चुके हैं। वहीं गुजरात और राजस्थान समेत कुछ राज्यों में आज से स्कूल- कॉलेज खोले जा रहे हैं। हालांकि अभी कुछ राज्यों में चौदह और अट्ठारह जनवरी से स्कूलों को दोबारा खोलने की तैयारी में हैं। बता दें कि गुजरात सरकार ने ग्यारह जनवरी से दस वीं और बारह वीं कक्षा के छात्रों के लिए स्कूलों को फिर से खोलने की घोषणा की। इसके साथ ही स्नातक और स्नातकोत्तर के लिए फिर से कॉलेज खुलेंगे। अंतिम वर्ष कोविड-उन्नीस रोकथाम मानक संचालन प्रक्रियाओं और माता-पिता की सहमति के अनिवार्य अनुपालन के साथ यह होगा। राज्य के शिक्षा मंत्री भूपेंद्रसिंह चुडासमा ने कहा कि छात्रों को स्कूलों में आने के दौरान अपने माता-पिता की सहमति लेनी होगी। हालांकि, सरकार के मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन स्कूल करेंगे, इस समय उपस्थिति अनिवार्य नहीं है। राजस्थान में मेडिकल कॉलेज, पैरामेडिकल कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज ग्यारह जनवरी से फिर से खुलेंगे। कोविड मामलों में लगातार कमी आने के साथ ही राजस्थान में अट्ठारह जनवरी से स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय और कोचिंग सेंटर सहित शैक्षणिक संस्थान फिर से खुलेंगे। मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज और पैरामेडिकल कॉलेज को जनवरी से फिर से शुरू करने का निर्देश दिया गया है। सरकार के निर्देश के अनुसार, कोरोना से बचाव संबंधी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार पचास प्रतिशत क्षमता के साथ कॉलेजों को फिर से खोलने के बारे में बीस जनवरी तक निर्णय करेगी। कोविड-उन्नीस महामारी के तेजी से प्रसार के कारण मार्च, दो हज़ार बीस से महाराष्ट्र में स्कूल और कॉलेज सहित सभी शैक्षणिक संस्थान बंद हो गए हैं। कुछ स्कूलों और जूनियर कॉलेजों को इस महीने की शुरुआत में राज्य के कुछ हिस्सों में कक्षा नौ से बारह के लिए फिर से खोल दिया गया था। देश की राजधानी दिल्ली में राज्य सरकार ने कहा कि अभी स्कूल खोलने की कोई योजना नहीं है। वर्गों को फिर से शुरू करने का निर्णय इस बात पर निर्भर करेगा कि फ्रंटलाइन श्रमिकों के टीकाकरण के बाद कोविड-उन्नीस टीके जनता के लिए उपलब्ध हैं। दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि सरकार स्कूलों को फिर से खोलने के लिए योजना बना रही थी जैसे कि वह COVID-उन्नीस टीकाकरण के लिए योजना बना रही थी। कर्नाटक प्रथम और द्वितीय वर्ष के कॉलेज के छात्रों के लिए नियमित कक्षाएं चौदह जनवरी को फिर से शुरू होंगी। दस वीं कक्षा के लिए ऑफलाइन कक्षाएं, द्वितीय पूर्व-विश्वविद्यालय, अंतिम वर्ष की डिग्री और स्नातकोत्तर छात्र की कक्षाएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं। गौरतलब है कि कोविड-उन्नीस महामारी के चलते मार्च, दो हज़ार बीस से स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए थे। सरकार ने दिशा-निर्देशों में स्कूलों को पंद्रह अक्तूबर से फिर से खोलने की अनुमति दी थी। स्कूल कब से खोले जाने हैं, इसका अंतिम फैसला राज्य सरकारों का होगा। उत्तर प्रदेश और हरियाणा ने दिसंबर से ही स्कूल शुरू कर दिए थे। यह भी पढ़ेंः दोस्तों देश दुनिया की और खबरों को तेजी से जानने के लिए बनें रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलों करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें। |
केन्स के लिए नामांकित फिल्ममेकर अरमान ज़ॉरेस, लॉस एंजिलिस स्थित प्रोडक्शन हाउस जीरो ग्रेविटी पार्टनर्स के लिए एक अनूठी हॉरर फिल्म व्रेथ की शुरूआत के लिए पूरी तरह तैयार है। जॉरेस द्वारा लिखित और निर्देशित व्रेथ मिडिल इस्ट के एक शहर का रूख करने वाले एक ऐसे जोड़े की कहानी है, जहां उन्हें बुरी शक्तियां घेर लेती हैं।
हालांकि, हॉलीवुड की हॉरर फिल्मों में पहले भी कैथोलिक एक्सॉरसिज्म को चित्रित किया है, लेकिन व्रेथ इससे थोड़ा आगे है और इसमें नयापन यह है कि यह इस्लामिक विचारों (एक ऐसा विचार जो भारतीय बाजार में भी ज्यादा प्रचलित नहीं है) को गहनता से उजागर करता है।
अरमान ने दोहराया कि वे दर्शकों को एक बिल्कुल ही नए सफर पर ले जाना चाहते हैं, जहां उन्हें इस बात पर एक विशिष्ट परिप्रेक्ष्य मिलेगा कि इस्लामिक दुनिया में एक्सॉरसिज्म का प्रदर्शन कैसे किया जाता है। इसके जरिए भारत में भी बड़ी संख्या में मौजद हॉरर प्रशंसकों के साथ संबंध बनाया जा सकेगा।
इस तरह की विषय वस्तु के पूर्व में सामने न आने के कारण, कल्चर के हिसाब से, भारतीयों को कहानी को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी और फिल्म की मौलिकता के आधार पर अरमान ने उम्मीद जतायी कि यह वैश्विक स्तर पर भी दर्शकों को उत्साहित करेगी। इतना ही नहीं फिल्म में नई अत्याधुनिक तकनीकों को भी शामिल किया गया है, जिसमें नई 4 डी साउंड और "घोस्ट कैम" जैसे अद्वितीय फिल्मांकन उपकरण शामिल हैं।
फिल्म के बारे में बात करते हुए, अरमान कहते हैं, "फिल्म के लिए लाइव एक्सॉरसिज्म का फिल्मांकन करना बेहद चुनौतीपूर्ण है, लेकिन मैं चाहता हूं कि, जैसा मैंने देखा, दर्शक भी बिना किसी कृत्रिम प्रयोग और विजुएल इफेक्ट्स के, स्क्रीन पर बिल्कुल वैसा ही देखें। मैं उन साउंड्स पर काम कर रहे हैं, जो पहले लोगों द्वारा नहीं सुनी गई होंगी, इनमें ब्लैक होल की ध्वनियां शामिल हैं। इतना ही नहीं दूसरे ग्रहों से आए, कुछ अन्य रेडियो फ्रीक्वेंसी उत्सर्जन भी हैं, जिनका मैंने फिल्म में उपयोग किया है।"
अगले साल की शुरुआत में सिएटल और अबू धाबी में फिल्म की शूटिंग की जाएगी। जहां तक कलाकारों की बात है तो मेकर्स मुख्य भूमिकाओं में से एक किरदार के लिए पहले से ही एक मेनस्ट्रीम इंडियन एक्ट्रेस के संपर्क में हैं।
| केन्स के लिए नामांकित फिल्ममेकर अरमान ज़ॉरेस, लॉस एंजिलिस स्थित प्रोडक्शन हाउस जीरो ग्रेविटी पार्टनर्स के लिए एक अनूठी हॉरर फिल्म व्रेथ की शुरूआत के लिए पूरी तरह तैयार है। जॉरेस द्वारा लिखित और निर्देशित व्रेथ मिडिल इस्ट के एक शहर का रूख करने वाले एक ऐसे जोड़े की कहानी है, जहां उन्हें बुरी शक्तियां घेर लेती हैं। हालांकि, हॉलीवुड की हॉरर फिल्मों में पहले भी कैथोलिक एक्सॉरसिज्म को चित्रित किया है, लेकिन व्रेथ इससे थोड़ा आगे है और इसमें नयापन यह है कि यह इस्लामिक विचारों को गहनता से उजागर करता है। अरमान ने दोहराया कि वे दर्शकों को एक बिल्कुल ही नए सफर पर ले जाना चाहते हैं, जहां उन्हें इस बात पर एक विशिष्ट परिप्रेक्ष्य मिलेगा कि इस्लामिक दुनिया में एक्सॉरसिज्म का प्रदर्शन कैसे किया जाता है। इसके जरिए भारत में भी बड़ी संख्या में मौजद हॉरर प्रशंसकों के साथ संबंध बनाया जा सकेगा। इस तरह की विषय वस्तु के पूर्व में सामने न आने के कारण, कल्चर के हिसाब से, भारतीयों को कहानी को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी और फिल्म की मौलिकता के आधार पर अरमान ने उम्मीद जतायी कि यह वैश्विक स्तर पर भी दर्शकों को उत्साहित करेगी। इतना ही नहीं फिल्म में नई अत्याधुनिक तकनीकों को भी शामिल किया गया है, जिसमें नई चार डी साउंड और "घोस्ट कैम" जैसे अद्वितीय फिल्मांकन उपकरण शामिल हैं। फिल्म के बारे में बात करते हुए, अरमान कहते हैं, "फिल्म के लिए लाइव एक्सॉरसिज्म का फिल्मांकन करना बेहद चुनौतीपूर्ण है, लेकिन मैं चाहता हूं कि, जैसा मैंने देखा, दर्शक भी बिना किसी कृत्रिम प्रयोग और विजुएल इफेक्ट्स के, स्क्रीन पर बिल्कुल वैसा ही देखें। मैं उन साउंड्स पर काम कर रहे हैं, जो पहले लोगों द्वारा नहीं सुनी गई होंगी, इनमें ब्लैक होल की ध्वनियां शामिल हैं। इतना ही नहीं दूसरे ग्रहों से आए, कुछ अन्य रेडियो फ्रीक्वेंसी उत्सर्जन भी हैं, जिनका मैंने फिल्म में उपयोग किया है।" अगले साल की शुरुआत में सिएटल और अबू धाबी में फिल्म की शूटिंग की जाएगी। जहां तक कलाकारों की बात है तो मेकर्स मुख्य भूमिकाओं में से एक किरदार के लिए पहले से ही एक मेनस्ट्रीम इंडियन एक्ट्रेस के संपर्क में हैं। |
बॉलीवुड के सुपरस्टार आमिर खान ने हाल ही में एक जापानी पारिस्थि तकनिकी वैज्ञानिक से प्रेरित होकर अपने "पानी फाउंडेशन" की मदद से एक बंजर जमीन को जंगल में बदल दिया है ।
बॉलीवुड के सुपरस्टार आमिर खान ने हाल ही में अपनी नींव की मदद से एक बंजर भूमि को जंगल में बदल दिया है। महान जापानी इकोलॉजिस्ट अकीरा मियावाकी से प्रेरित होकर, सायट्रीज़ पर्यावरण ट्रस्ट के सहयोग से "पानी फ़ाउंडेशन" ने महज दो साल की अवधि में अपनी अत्यधिक महत्वाकांक्षी यात्रा की शुरुआत की है। सितंबर 2018 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट आखिरकार अब पूरा हो गया है।
आमिर खान ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया जिसमें फाउंडेशन द्वारा इस पहल का वर्णन किया गया था और साथ ही लिखा था कि कैसे टीम ने दो साल में एक बंजर पैच को घने जंगल में बदलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वीडियो में पौधे रोपने के बारे में कुछ तथ्य बताए गए हैं। इसमें कहा गया है कि "स्पर्धाओं को प्रोत्साहित करने और विकास को प्रोत्साहित करने के लिए सघन रूप से स्थान दिया गया। " वीडियो में आगे दिखाया गया है कि महाराष्ट्र के सतारा जिले के ग्रामीणों की मदद से नींव के सदस्यों को एक साथ पौधे कैसे लगाए जा सकते हैं।
| बॉलीवुड के सुपरस्टार आमिर खान ने हाल ही में एक जापानी पारिस्थि तकनिकी वैज्ञानिक से प्रेरित होकर अपने "पानी फाउंडेशन" की मदद से एक बंजर जमीन को जंगल में बदल दिया है । बॉलीवुड के सुपरस्टार आमिर खान ने हाल ही में अपनी नींव की मदद से एक बंजर भूमि को जंगल में बदल दिया है। महान जापानी इकोलॉजिस्ट अकीरा मियावाकी से प्रेरित होकर, सायट्रीज़ पर्यावरण ट्रस्ट के सहयोग से "पानी फ़ाउंडेशन" ने महज दो साल की अवधि में अपनी अत्यधिक महत्वाकांक्षी यात्रा की शुरुआत की है। सितंबर दो हज़ार अट्ठारह में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट आखिरकार अब पूरा हो गया है। आमिर खान ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया जिसमें फाउंडेशन द्वारा इस पहल का वर्णन किया गया था और साथ ही लिखा था कि कैसे टीम ने दो साल में एक बंजर पैच को घने जंगल में बदलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वीडियो में पौधे रोपने के बारे में कुछ तथ्य बताए गए हैं। इसमें कहा गया है कि "स्पर्धाओं को प्रोत्साहित करने और विकास को प्रोत्साहित करने के लिए सघन रूप से स्थान दिया गया। " वीडियो में आगे दिखाया गया है कि महाराष्ट्र के सतारा जिले के ग्रामीणों की मदद से नींव के सदस्यों को एक साथ पौधे कैसे लगाए जा सकते हैं। |
मैनपुरी में आकाशीय बिजली गिरने से मवेशी चराने गए युवक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामले की जानकारी जुटा युवक के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है।
मामला कुर्रा थाना क्षेत्र के गांव टीकराहार से जुड़ा है। जहां की निवासी 35 वर्षीय किसान अवनीश अपने मवेशी चराने के लिए खेतों की तरफ गया था। तभी तेज गर्जना के साथ तेज बारिश होने लगी। उसी दौरान आसमान से तेज कड़ाके के साथ बिजली चमकी। युवक के ऊपर गिर गई। जिससे उसकी घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। परिवार को जानकारी मिली तो परिजन दौड़ते हुए घटनास्थल पर पहुंच गए। जानकारी मिलते ही भारी संख्या में भीड़ घटनास्थल पर जमा हो गई।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना से संबंधित जानकारी जुटाई। वहीं युवक के शव को कब्जे में लेकर मौत के कारण जानने के लिए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| मैनपुरी में आकाशीय बिजली गिरने से मवेशी चराने गए युवक की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मामले की जानकारी जुटा युवक के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है। मामला कुर्रा थाना क्षेत्र के गांव टीकराहार से जुड़ा है। जहां की निवासी पैंतीस वर्षीय किसान अवनीश अपने मवेशी चराने के लिए खेतों की तरफ गया था। तभी तेज गर्जना के साथ तेज बारिश होने लगी। उसी दौरान आसमान से तेज कड़ाके के साथ बिजली चमकी। युवक के ऊपर गिर गई। जिससे उसकी घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। परिवार को जानकारी मिली तो परिजन दौड़ते हुए घटनास्थल पर पहुंच गए। जानकारी मिलते ही भारी संख्या में भीड़ घटनास्थल पर जमा हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना से संबंधित जानकारी जुटाई। वहीं युवक के शव को कब्जे में लेकर मौत के कारण जानने के लिए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई पर हाल में हुए आंतकी हमलों ने ऑटो निर्माता कंपनियों को भी धक्का पहुंचाया है।
देश की सबसे बड़ी स्पोट्र्स यूटिलिटी वाहन बनाने वाली कंपनी महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एमऐंडएम) और इटली के लोकप्रिय कार ब्रांड फिएट की भारतीय इकाई ने अपने नए वाहन बाजार में उतारने की अपनी योजनाओं को टाल दिया है। अब दोनों जनवरी में अपने वाहन बाजार में उतारेंगी।
महाराष्ट्र में अपने-अपने मुख्य कार्यालयों वाली दोनों कंपनियों की योजना पहले दिसंबर के मध्य में अपने वाहन पेश करने की थी, लेकिन वाहनों की मांग के दर्द को मुंबई में हुए आतंकी हमलों ने और भी बढ़ा दिया, इसलिए कंपनियों ने एक महीने तक अपनी योजना को टाल दिया है।
एमऐंडएम की योजना अपने बहुपयोगी वाहन क्जाइलो (पहले इंजेनियो) और फिएट इंडिया ऑटोमोबाइल्स (एफआईएएल)की योजना सीडान लिनीया को दिसंबर में बाजार में उतारने की थी।
गौरतलब बात है कि दोनों वाहनों को बाजार में उतारना कंपनियों के लिए काफी अहम है, क्योंकि 6 से 7 साल बाद कंपनियां नए उत्पाद पेश करने जा रही हैं। इससे पहले एमऐंडएम का पूरी तरह से नया उत्पाद स्कॉर्पियो थी, जिसे कंपनी ने 2002 में पेश किया था।
फिएट का आखिरी नया उत्पाद सात साल पहले बाजार में उतारा गया था। हालांकि एमऐंडएम ने कई नए उत्पाद पेश किए हैं और फिएट भी इस फेहरिस्त में पीछे नहीं है, ये वाहन पिछले वाहनों की बाहरी या आंतरिक रूपरेखा और इंजन में बदलाव कर बाजार में उतारे गए थे।
मुंबई के एक विशेषज्ञ का कहना है कि मुंबई बाजार को देखते हुए बड़ी-बड़ी ऑटो निर्माता कंपनियों का अपने उत्पादों को बाजार में उतारने की तारीख को बढ़ा देना एक बेहतर कदम है।
बावजूद इसके विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि मौजूदा वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही ऑटो निर्माताओं के लिए कुछ राहत भरी हो सकती है, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि इस तिमाही के दौरान नकदी प्रवाह को बढ़ाने के लिए बैंक की ऑटो कर्ज पर ब्याज दरें कम हो सकती हैं।
| भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई पर हाल में हुए आंतकी हमलों ने ऑटो निर्माता कंपनियों को भी धक्का पहुंचाया है। देश की सबसे बड़ी स्पोट्र्स यूटिलिटी वाहन बनाने वाली कंपनी महिंद्रा ऐंड महिंद्रा और इटली के लोकप्रिय कार ब्रांड फिएट की भारतीय इकाई ने अपने नए वाहन बाजार में उतारने की अपनी योजनाओं को टाल दिया है। अब दोनों जनवरी में अपने वाहन बाजार में उतारेंगी। महाराष्ट्र में अपने-अपने मुख्य कार्यालयों वाली दोनों कंपनियों की योजना पहले दिसंबर के मध्य में अपने वाहन पेश करने की थी, लेकिन वाहनों की मांग के दर्द को मुंबई में हुए आतंकी हमलों ने और भी बढ़ा दिया, इसलिए कंपनियों ने एक महीने तक अपनी योजना को टाल दिया है। एमऐंडएम की योजना अपने बहुपयोगी वाहन क्जाइलो और फिएट इंडिया ऑटोमोबाइल्स की योजना सीडान लिनीया को दिसंबर में बाजार में उतारने की थी। गौरतलब बात है कि दोनों वाहनों को बाजार में उतारना कंपनियों के लिए काफी अहम है, क्योंकि छः से सात साल बाद कंपनियां नए उत्पाद पेश करने जा रही हैं। इससे पहले एमऐंडएम का पूरी तरह से नया उत्पाद स्कॉर्पियो थी, जिसे कंपनी ने दो हज़ार दो में पेश किया था। फिएट का आखिरी नया उत्पाद सात साल पहले बाजार में उतारा गया था। हालांकि एमऐंडएम ने कई नए उत्पाद पेश किए हैं और फिएट भी इस फेहरिस्त में पीछे नहीं है, ये वाहन पिछले वाहनों की बाहरी या आंतरिक रूपरेखा और इंजन में बदलाव कर बाजार में उतारे गए थे। मुंबई के एक विशेषज्ञ का कहना है कि मुंबई बाजार को देखते हुए बड़ी-बड़ी ऑटो निर्माता कंपनियों का अपने उत्पादों को बाजार में उतारने की तारीख को बढ़ा देना एक बेहतर कदम है। बावजूद इसके विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि मौजूदा वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही ऑटो निर्माताओं के लिए कुछ राहत भरी हो सकती है, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि इस तिमाही के दौरान नकदी प्रवाह को बढ़ाने के लिए बैंक की ऑटो कर्ज पर ब्याज दरें कम हो सकती हैं। |
अजमेर। राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने राज्य की पूर्ववर्ती भारतीय जनता पार्टी सरकार पर रोडवेज की हालत खराब कर देने का आरोप लगाते हुए कहा है कि कांग्रेस शासन में रोडवेज की हालत सुधारने एवं इसे घाटे से उबारने के लिए योजना बनाई जा रही है। उन्होंने बस स्टेंड का निरीक्षण कर यात्रियों व स्टाफ से मुलाकात की।
मंत्री बनने के बाद पहली बार अजमेर आए खाचरियावास ने कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से कहा कि भाजपा शासन में भ्रष्टाचार के चलते रोडवेज घाटे में रही लेकिन कांग्रेस शासन में ऐसा नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि उनके पास रोडवेज के लिए दूरदर्शी योजना है, जिसे जल्द ही लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रोडवेज को बेहतर स्थिति में लाने के लिए भाजपा शासन में अनुबंधित बसों की समीक्षा के साथ रोडवेज की जमीनों के व्यावसायिक उपयोग पर भी विचार किया जा रहा है।
आगामी लोकसभा चुनाव में सभी 25 सीटों पर कांग्रेस की जीत का दावा करते हुए उन्होंने कांग्रेसजनों का आवाह्न किया कि वे अभी से चुनाव की तैयारियां शुरू कर दें।
इससे पहले जयपुर से अजमेर आते समय किशनगढ़ के हरमाड़ा चौराहे पर खाचरियावास ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि केंद्र की मोदी सरकार अपने अन्तिम समय में काम कर रही है, जो घोषणा मोदी आज कर रहे है वह केवल चुनावी पुलिन्दा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस शासन आते ही पहली ही मंत्रिमंडल बैठक में कांग्रेस के घोषणापत्र को सरकारी दस्तावेज का दर्जा दे दिया गया। कांग्रेस शासन में सरकार की मालिक जनता है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार का दायित्व है कि उनके मंत्री, प्रतिनिधि जनसेवक जनता के दर्द को समझें, उन्हें सुने, समझे और उनके मन के अनुसार उनकी तकलीफों को दूर करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश के एक करोड़ 40 लाख लोगों को एक रुपये किलो गेहूं, किसानों को कर्जा माफी, बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता आदि सत्ता में आते ही कांग्रेस के प्रारंभिक फैसले है। कांग्रेस जनता के हित में ज्यादा से ज्यादा कदम उठाएगी।
खाचरियावास ने अजमेर के जवाहर रंगमंच पर क्षत्रिय प्रतिभा विकास एवं शोध संस्थान की ओर से आयोजित 20वें प्रतिभा सम्मान समारोह में राजपूत समाज की 122 प्रतिभाओं एवं वरिष्ठ सदस्यों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी ने की।
खाचरिवास के अजमेर आने पर शहर कांग्रेस अध्यक्ष विजय जैन, प्रदेश महासचिव ललित भाटी, पूर्व मंत्री नसीम अख्तर इंसाफ सहित सैकड़ों कार्यकर्ताआओं ने उनका स्वागत किया।
| अजमेर। राजस्थान के परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने राज्य की पूर्ववर्ती भारतीय जनता पार्टी सरकार पर रोडवेज की हालत खराब कर देने का आरोप लगाते हुए कहा है कि कांग्रेस शासन में रोडवेज की हालत सुधारने एवं इसे घाटे से उबारने के लिए योजना बनाई जा रही है। उन्होंने बस स्टेंड का निरीक्षण कर यात्रियों व स्टाफ से मुलाकात की। मंत्री बनने के बाद पहली बार अजमेर आए खाचरियावास ने कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से कहा कि भाजपा शासन में भ्रष्टाचार के चलते रोडवेज घाटे में रही लेकिन कांग्रेस शासन में ऐसा नहीं होगा। उन्होंने कहा कि उनके पास रोडवेज के लिए दूरदर्शी योजना है, जिसे जल्द ही लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रोडवेज को बेहतर स्थिति में लाने के लिए भाजपा शासन में अनुबंधित बसों की समीक्षा के साथ रोडवेज की जमीनों के व्यावसायिक उपयोग पर भी विचार किया जा रहा है। आगामी लोकसभा चुनाव में सभी पच्चीस सीटों पर कांग्रेस की जीत का दावा करते हुए उन्होंने कांग्रेसजनों का आवाह्न किया कि वे अभी से चुनाव की तैयारियां शुरू कर दें। इससे पहले जयपुर से अजमेर आते समय किशनगढ़ के हरमाड़ा चौराहे पर खाचरियावास ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि केंद्र की मोदी सरकार अपने अन्तिम समय में काम कर रही है, जो घोषणा मोदी आज कर रहे है वह केवल चुनावी पुलिन्दा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस शासन आते ही पहली ही मंत्रिमंडल बैठक में कांग्रेस के घोषणापत्र को सरकारी दस्तावेज का दर्जा दे दिया गया। कांग्रेस शासन में सरकार की मालिक जनता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार का दायित्व है कि उनके मंत्री, प्रतिनिधि जनसेवक जनता के दर्द को समझें, उन्हें सुने, समझे और उनके मन के अनुसार उनकी तकलीफों को दूर करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश के एक करोड़ चालीस लाख लोगों को एक रुपये किलो गेहूं, किसानों को कर्जा माफी, बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता आदि सत्ता में आते ही कांग्रेस के प्रारंभिक फैसले है। कांग्रेस जनता के हित में ज्यादा से ज्यादा कदम उठाएगी। खाचरियावास ने अजमेर के जवाहर रंगमंच पर क्षत्रिय प्रतिभा विकास एवं शोध संस्थान की ओर से आयोजित बीसवें प्रतिभा सम्मान समारोह में राजपूत समाज की एक सौ बाईस प्रतिभाओं एवं वरिष्ठ सदस्यों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता उच्च शिक्षा मंत्री भंवर सिंह भाटी ने की। खाचरिवास के अजमेर आने पर शहर कांग्रेस अध्यक्ष विजय जैन, प्रदेश महासचिव ललित भाटी, पूर्व मंत्री नसीम अख्तर इंसाफ सहित सैकड़ों कार्यकर्ताआओं ने उनका स्वागत किया। |
बूंदी जिला अस्पताल में मरीज सुविधाओं को तरस रहे हैं। अस्पताल प्रशासन की अनदेखी मरीजों पर भारी पड़ रही है। पिछले 7 दिनों से डिजिटल एक्स-रे मशीन बंद पड़ी है। जिसे समय रहते ठीक नहीं करवाया गया। जिससे मरीजों की डिजिटल एक्स-रे जांच नहीं हो पा रही है, जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घायलों व मरीजों को बाजार में महंगी दर पर डिजिटल एक्स-रे करवाने पड़ रहे है।
जानकारी के अनुसार एक्स-रे विभाग में एक ही डिजिटल एक्स-रे मशीन है। जिसका यूपीएस इनवर्टर 18 अगस्त को खराब हो गया था। इसके बाद से मशीन में डिजिटल एक्स-रे जांच बन्द हो गई। एक्स-रे विभाग प्रभारी ने इसकी ऑनलाइन शिकायत की। इसके बाद कम्पनी के कर्मचारी यूपीएस को ले गए। सात दिन बाद भी अभी तक ठीक करके नहीं लाया गया।
डिजिटल एक्सरे का यूपीएस इन्वर्टर खराब हो गया है। जिसे ठीक करवाने के लिए भेज दिया है। यूपीएस सोमवार तक ठीक होकर आ जाएगा।
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| बूंदी जिला अस्पताल में मरीज सुविधाओं को तरस रहे हैं। अस्पताल प्रशासन की अनदेखी मरीजों पर भारी पड़ रही है। पिछले सात दिनों से डिजिटल एक्स-रे मशीन बंद पड़ी है। जिसे समय रहते ठीक नहीं करवाया गया। जिससे मरीजों की डिजिटल एक्स-रे जांच नहीं हो पा रही है, जिससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घायलों व मरीजों को बाजार में महंगी दर पर डिजिटल एक्स-रे करवाने पड़ रहे है। जानकारी के अनुसार एक्स-रे विभाग में एक ही डिजिटल एक्स-रे मशीन है। जिसका यूपीएस इनवर्टर अट्ठारह अगस्त को खराब हो गया था। इसके बाद से मशीन में डिजिटल एक्स-रे जांच बन्द हो गई। एक्स-रे विभाग प्रभारी ने इसकी ऑनलाइन शिकायत की। इसके बाद कम्पनी के कर्मचारी यूपीएस को ले गए। सात दिन बाद भी अभी तक ठीक करके नहीं लाया गया। डिजिटल एक्सरे का यूपीएस इन्वर्टर खराब हो गया है। जिसे ठीक करवाने के लिए भेज दिया है। यूपीएस सोमवार तक ठीक होकर आ जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
यावश्यक दिग्दर्शन दुल्लहे खलु माणुसे भवे,, चिर कालेरण चि सव्वपारिगणं । गाढा प विवाग कम्मुणो,
समयं गोयम । मा पमायए ।
- ( उत्तराध्ययन १० । ४ )
जैन संस्कृति में मानव-जन्म को बहुत ही दुर्लभ एवं महान् माना गया है। मनुष्य जन्म पाना, किस प्रकार दुर्लभ है, इस के लिए जैन संस्कृति के व्याख्याताओं ने दश दृष्टान्तो का निरूपण किया है । सत्र के सब उदाहरणों के कहने का न यहाँ अवकाश ही है और न औचित्य ही । वस्तु-स्थिति की स्पष्टता के लिए कुछ बातें आपके सामने रक्खी जा रही हैं, आशा है, जैसे जिज्ञासु इन्ही के द्वारा मानवजीवन का महत्त्व समझ सकेंगे।
"कल्पना करो कि भारत वर्ष के जितने भी छोटे बड़े धान्य हो, उन सब को एक देवता किसी स्थान विशेष पर यदि इकट्ठा करे, पहाड जितना ऊँचा गगन चुम्बी ढेर लगा दे । और उस ढेर में एक सेर सरसों मिलादे, खूत्र अच्छी तरह उथल पुथल कर । सो वर्ष की बुढ़िया, जिसके हाथ कॉपते हो, गर्दन कॉपती हो, और खा से भी कम दीखता हो ! उम को छाज देकर कहा जाय कि 'इस धान्य के ढेर में से सेर भर सरसो निकाल दो ।' क्या वह बुढिया सरसो का एक एक दाना बीन कर पुनः सेर भर सरसों का अलग ढेर निकाल सकती है? आपको मालूम होता
है । परन्तु यह सत्र तो किसी तरह देवशक्ति आदि के द्वारा सभव भी हो सकता है, परन्तु एक बार मनुष्यजन्म पाकर खो देने के बाद पुनः उसे प्राप्त करना सहज नहीं है ।"
" एक बहुत लम्बा चौडा जलाशय था, जो हजारों वर्षों से शैवाल ( काई ) की मोटी तह से रहता था। एक कछुवा अपने परिवार के साथ जब से जन्मा, तभी से शैवाल के नीचे अन्धकार | यावश्यक दिग्दर्शन दुल्लहे खलु माणुसे भवे,, चिर कालेरण चि सव्वपारिगणं । गाढा प विवाग कम्मुणो, समयं गोयम । मा पमायए । - जैन संस्कृति में मानव-जन्म को बहुत ही दुर्लभ एवं महान् माना गया है। मनुष्य जन्म पाना, किस प्रकार दुर्लभ है, इस के लिए जैन संस्कृति के व्याख्याताओं ने दश दृष्टान्तो का निरूपण किया है । सत्र के सब उदाहरणों के कहने का न यहाँ अवकाश ही है और न औचित्य ही । वस्तु-स्थिति की स्पष्टता के लिए कुछ बातें आपके सामने रक्खी जा रही हैं, आशा है, जैसे जिज्ञासु इन्ही के द्वारा मानवजीवन का महत्त्व समझ सकेंगे। "कल्पना करो कि भारत वर्ष के जितने भी छोटे बड़े धान्य हो, उन सब को एक देवता किसी स्थान विशेष पर यदि इकट्ठा करे, पहाड जितना ऊँचा गगन चुम्बी ढेर लगा दे । और उस ढेर में एक सेर सरसों मिलादे, खूत्र अच्छी तरह उथल पुथल कर । सो वर्ष की बुढ़िया, जिसके हाथ कॉपते हो, गर्दन कॉपती हो, और खा से भी कम दीखता हो ! उम को छाज देकर कहा जाय कि 'इस धान्य के ढेर में से सेर भर सरसो निकाल दो ।' क्या वह बुढिया सरसो का एक एक दाना बीन कर पुनः सेर भर सरसों का अलग ढेर निकाल सकती है? आपको मालूम होता है । परन्तु यह सत्र तो किसी तरह देवशक्ति आदि के द्वारा सभव भी हो सकता है, परन्तु एक बार मनुष्यजन्म पाकर खो देने के बाद पुनः उसे प्राप्त करना सहज नहीं है ।" " एक बहुत लम्बा चौडा जलाशय था, जो हजारों वर्षों से शैवाल की मोटी तह से रहता था। एक कछुवा अपने परिवार के साथ जब से जन्मा, तभी से शैवाल के नीचे अन्धकार |
मेरठ से एक बुजुर्ग महिला ने कॉल किया। 112 कंट्रोल रूम ने बुजुर्ग महिला से कॉल करने की वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि घर में राशन खत्म हो गया है, खाने के लिए कुछ भी नहीं है। एक बेटा है, लेकिन उसकी भी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है।
लखनऊः देश में कोरोना महामारी से निपटने के लिए लगाए गए लॉकडाउन को एक साल पूरे हो गए हैं। देशभर से लॉकडाउन के समय कई मार्मिक कहानियां सामने आईं। जिन पुलिसवालों के पास लोग जाते डरते थे, उनमें लोगों को अचानक भगवान का रूप दिखने लगा। अपराधियों के पीछे भागने वाली पुलिस बीमारों को अस्पताल पहुंचाने से लेकर, घर-घर दवा-राशन पहुंचाने के काम में जुट गई। 23-24 मार्च 2020 की आधी रात से लगे लॉकडाउन से करीब सात घंट पहले शाम पांच बजे 112-यूपी पर एक एक कॉल आई थी जिसे यूपी पुलिस हमेशा याद रखेगी।
मेरठ से एक बुजुर्ग महिला ने कॉल किया। 112 कंट्रोल रूम ने बुजुर्ग महिला से कॉल करने की वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि घर में राशन खत्म हो गया है, खाने के लिए कुछ भी नहीं है। एक बेटा है, लेकिन उसकी भी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। सूचना मिलते ही पीआरवी 3780 पर तैनात कॉन्स्टेबल शिवकुमार और होमगार्ड प्रवीण कुमार मौके पर गए।
बुजुर्ग के घर की हालत देखते हुए दोनों पीआरवी कर्मियों ने मानवता का परिचय देते हुए तत्काल आटा, दाल, चीनी, चाय की पत्ती, बिस्कुट सहित कुछ अन्य जरूरत का सामान अपने पास से खरीदकर महिला को दिया। इस कॉल के कुछ घंटे बाद ही 112 पर कई अन्य जिलों से भी इस तरह की कॉल आने का सिलसिला शुरू हो गया।
लॉकडाउन शुरू होते ही सीएम योगी ने प्रदेश के लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने की जिम्मेदारी 112-यूपी को सौंपी थी। खाना/राशन के साथ-साथ दवाई, गैस सिलेंडर, दूध और बेबी फूड जैसी तमाम जरूरी चीजों के लिए 112-यूपी पर कॉल कर लोगों ने मदद लेना शुरू किया। जरूरतमंद लोगों तक तक खाना/राशन पहुंचाने में प्रशासन और समाजसेवियों ने भी हाथ बढ़ाया। दो महीने में 112-यूपी ने दो लाख से ज्यादा जरूरतमंदों तक खाना/राशन और करीब 55 हजार लोगों तक दवाई और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुओं को पहुंचाया था।
संक्रमण की रोकथाम में जागरूक नागरिकों ने भी पुलिस एवं प्रशासन की पूरी मदद की। प्रदेश भर में संदिग्ध संक्रमितों के बारे में 154299 लोगों ने 112-यूपी को जानकारी दी। संक्रमण से बेपरवाह लोगों के एक स्थान पर एकत्र होने, खुले में खेलने आदि की भी सैकड़ों सूचनाएं 112 को देकर सजग नागरिक होने का परिचय प्रदेश के लोगों ने दिया।
फ्रंट लाइन वर्कर के तौर पर 112-UP की पीआरवी कर्मियों के सामने लॉकडाउन एक चुनौती के रूप में था। लोगों को उनके घर तक आवश्यक वस्तुओं को पहुंचाना, लॉकडाउन का पालन करवाना और इसके साथ साथ खुद को संक्रमण से बचाए रखना पीआरवी कर्मियों के सामने एक चुनौती भरा लक्ष्य था। इस चुनौती का भी 112 कर्मियों ने सूझबूझ और हिम्मत के साथ सामना किया।
| मेरठ से एक बुजुर्ग महिला ने कॉल किया। एक सौ बारह कंट्रोल रूम ने बुजुर्ग महिला से कॉल करने की वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि घर में राशन खत्म हो गया है, खाने के लिए कुछ भी नहीं है। एक बेटा है, लेकिन उसकी भी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। लखनऊः देश में कोरोना महामारी से निपटने के लिए लगाए गए लॉकडाउन को एक साल पूरे हो गए हैं। देशभर से लॉकडाउन के समय कई मार्मिक कहानियां सामने आईं। जिन पुलिसवालों के पास लोग जाते डरते थे, उनमें लोगों को अचानक भगवान का रूप दिखने लगा। अपराधियों के पीछे भागने वाली पुलिस बीमारों को अस्पताल पहुंचाने से लेकर, घर-घर दवा-राशन पहुंचाने के काम में जुट गई। तेईस-चौबीस मार्च दो हज़ार बीस की आधी रात से लगे लॉकडाउन से करीब सात घंट पहले शाम पांच बजे एक सौ बारह-यूपी पर एक एक कॉल आई थी जिसे यूपी पुलिस हमेशा याद रखेगी। मेरठ से एक बुजुर्ग महिला ने कॉल किया। एक सौ बारह कंट्रोल रूम ने बुजुर्ग महिला से कॉल करने की वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि घर में राशन खत्म हो गया है, खाने के लिए कुछ भी नहीं है। एक बेटा है, लेकिन उसकी भी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। सूचना मिलते ही पीआरवी तीन हज़ार सात सौ अस्सी पर तैनात कॉन्स्टेबल शिवकुमार और होमगार्ड प्रवीण कुमार मौके पर गए। बुजुर्ग के घर की हालत देखते हुए दोनों पीआरवी कर्मियों ने मानवता का परिचय देते हुए तत्काल आटा, दाल, चीनी, चाय की पत्ती, बिस्कुट सहित कुछ अन्य जरूरत का सामान अपने पास से खरीदकर महिला को दिया। इस कॉल के कुछ घंटे बाद ही एक सौ बारह पर कई अन्य जिलों से भी इस तरह की कॉल आने का सिलसिला शुरू हो गया। लॉकडाउन शुरू होते ही सीएम योगी ने प्रदेश के लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने की जिम्मेदारी एक सौ बारह-यूपी को सौंपी थी। खाना/राशन के साथ-साथ दवाई, गैस सिलेंडर, दूध और बेबी फूड जैसी तमाम जरूरी चीजों के लिए एक सौ बारह-यूपी पर कॉल कर लोगों ने मदद लेना शुरू किया। जरूरतमंद लोगों तक तक खाना/राशन पहुंचाने में प्रशासन और समाजसेवियों ने भी हाथ बढ़ाया। दो महीने में एक सौ बारह-यूपी ने दो लाख से ज्यादा जरूरतमंदों तक खाना/राशन और करीब पचपन हजार लोगों तक दवाई और अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुओं को पहुंचाया था। संक्रमण की रोकथाम में जागरूक नागरिकों ने भी पुलिस एवं प्रशासन की पूरी मदद की। प्रदेश भर में संदिग्ध संक्रमितों के बारे में एक लाख चौवन हज़ार दो सौ निन्यानवे लोगों ने एक सौ बारह-यूपी को जानकारी दी। संक्रमण से बेपरवाह लोगों के एक स्थान पर एकत्र होने, खुले में खेलने आदि की भी सैकड़ों सूचनाएं एक सौ बारह को देकर सजग नागरिक होने का परिचय प्रदेश के लोगों ने दिया। फ्रंट लाइन वर्कर के तौर पर एक सौ बारह-UP की पीआरवी कर्मियों के सामने लॉकडाउन एक चुनौती के रूप में था। लोगों को उनके घर तक आवश्यक वस्तुओं को पहुंचाना, लॉकडाउन का पालन करवाना और इसके साथ साथ खुद को संक्रमण से बचाए रखना पीआरवी कर्मियों के सामने एक चुनौती भरा लक्ष्य था। इस चुनौती का भी एक सौ बारह कर्मियों ने सूझबूझ और हिम्मत के साथ सामना किया। |
डिंपल की बोल्ड अदाओ के तो आज भी फैंस दीवाने है. डिंपल ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत 15 साल की उम्र में ही कर दी थी. इस समय डिंपल की उम्र काफी छोटी थी बावजूद इसके उन्होंने फिल्म 'बॉबी' में हॉट सीन्स देकर करोड़ो लोगो को अपना दीवाना बना दिया था. इस फिल्म के लिए डिंपल के चर्चे हर तरफ हो रहे है.
फिल्म राम तेरी गंगा मैली में मंदाकिनी ने अपनी बोल्ड अदाओ के जरिये सबको अपना दीवाना बना दिया था. इस फिल्म में मंदाकिनी ने अपना हॉट अवतार दिखाया था जिसके बाद उनकी बॉलीवुड के साथ-साथ देशभर में चर्चा हो रही थी. इस फिल्म में मंदाकिनी ने सफ़ेद कपडे पहनकर झरने के पास नहाने वाला सीन किया था जो आज भी प्रचलित है.
जीनत अमान की गिनती वैसे तो बॉलीवुड की सेक्सी एक्ट्रेस में की जाती है. लेकिन एक फिल्म ने जीनत को चर्चा का विषय बना दिया था. फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम में जीनत ने हिंदी सिनेमा को पहला किस सीन दिया था. इस फिल्म में जीनत के किस सीन देखने के बाद तो फैंस उनके दीवाने हो गए थे और हर तरफ उन्ही की चर्चा हो रही थी.
नेहा धूपिया बॉलीवुड की हॉट एक्ट्रेस में शुमार है. नेहा ने साल 2003 में आई फिल्म 'कयामत-सिटी अंडर थ्रेट' में अपनी हॉटनेस के जलवे बिखेरे थे. लेकिन नेहा सबसे ज्यादा पॉपुलर फिल्म 'जूली' से हुई थी. जूली फिल्म में नेहा ने एक वैश्या का किरदार निभाया था. इस फिल्म के पोस्टर के जरिये ही नेहा रातो-रात फेमस हो गई थी.
| डिंपल की बोल्ड अदाओ के तो आज भी फैंस दीवाने है. डिंपल ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत पंद्रह साल की उम्र में ही कर दी थी. इस समय डिंपल की उम्र काफी छोटी थी बावजूद इसके उन्होंने फिल्म 'बॉबी' में हॉट सीन्स देकर करोड़ो लोगो को अपना दीवाना बना दिया था. इस फिल्म के लिए डिंपल के चर्चे हर तरफ हो रहे है. फिल्म राम तेरी गंगा मैली में मंदाकिनी ने अपनी बोल्ड अदाओ के जरिये सबको अपना दीवाना बना दिया था. इस फिल्म में मंदाकिनी ने अपना हॉट अवतार दिखाया था जिसके बाद उनकी बॉलीवुड के साथ-साथ देशभर में चर्चा हो रही थी. इस फिल्म में मंदाकिनी ने सफ़ेद कपडे पहनकर झरने के पास नहाने वाला सीन किया था जो आज भी प्रचलित है. जीनत अमान की गिनती वैसे तो बॉलीवुड की सेक्सी एक्ट्रेस में की जाती है. लेकिन एक फिल्म ने जीनत को चर्चा का विषय बना दिया था. फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम में जीनत ने हिंदी सिनेमा को पहला किस सीन दिया था. इस फिल्म में जीनत के किस सीन देखने के बाद तो फैंस उनके दीवाने हो गए थे और हर तरफ उन्ही की चर्चा हो रही थी. नेहा धूपिया बॉलीवुड की हॉट एक्ट्रेस में शुमार है. नेहा ने साल दो हज़ार तीन में आई फिल्म 'कयामत-सिटी अंडर थ्रेट' में अपनी हॉटनेस के जलवे बिखेरे थे. लेकिन नेहा सबसे ज्यादा पॉपुलर फिल्म 'जूली' से हुई थी. जूली फिल्म में नेहा ने एक वैश्या का किरदार निभाया था. इस फिल्म के पोस्टर के जरिये ही नेहा रातो-रात फेमस हो गई थी. |
Dhanbad : झरिया में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने से शहर में सनसनी फैल गयी. स्थानीय लोगों ने इस संबंध में बताया कि भूख और बीमारी की वजह से मजदूर की मौत हुई है. इन लोगों का कहना है कि यह मजदूर झरिया के सोनापट्टी मुहल्ले में मोटिया मजदूर का काम करता था. लॉकडाउन के कारण उसे कहीं काम नहीं मिल रहा था.
वहीं लोगों का ये भी कहना है कि संभवतः उसके पास रहने के लिए घर नहीं था. इसलिए वह फुटपाथ पर सोकर अपना समय गुजार रहा था. लेकिन लॉकडाउन के कारण उसकी हालत खराब हो गयी थी.
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ समय से वह किसी गंभीर बीमारी से परेशान रहता था. जिससे वह अक्सर बीमार भी रहता था. लोगदों का कहना है कि हो सकता है कि बीमारी की वजह से ही उसकी मौत हुई हो. हालांकि अभी तक किसी ने शव की शिनाख्त नहीं की है.
बताया जाता है कि घटना की जानकारी मिलने के पांच घंटे बाद झरिया थाना की पुलिस पहुंची. पुलिस ने शव की शिनाख्त करने की कोशिश की. लेकिन कड़ी मशक्कत के बाद भी शव की शिनाख्त नहीं हो पायी. लोगों ने बताया कि वह सोनापट्टी मुहल्ले में मोटिया मजदूर का काम करता था. वह एक दुकान के पास चबूतरे पर अक्सर पड़ा रहता था.
स्थानीय लोगों के अनुसार, उसका परिवार नहीं था. पांच घंटे बाद पहुंची पुलिस पहले शव को छूने से भी परहेज करती रही. पुलिस को इस बात की आशंका थी कि कहीं मजदूर कोरोना संक्रमित न हो. काफी देर बाद पुलिस ने पंचनामा बनाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए पीएमसीएच भेजा.
वहीं कुछ लोगों ने कहा कि लॉकडाउन में सामाजिक लोगों द्वारा गरीबों के बीच खाना का तो वितरण किया जाता है. लेकिन जहां गरीबों को खाना मिलना चाहिए, वहां खाना नहीं मिलता है. आज भी बहुत से ऐसे गरीब हैं, जो भूखे सोने को मजबूर हैं.
वहीं झरिया थाना के एएसआई बिरसा हेंब्रम द्वारा पंचनामा बनाया गया और शव को उठाया गया. झरिया थाना प्रभारी प्रमोद सिंह ने कहा कि एक मजदूर की मौत हुई है. इसके परिवार का भी पता नहीं चला है. फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है.
| Dhanbad : झरिया में एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने से शहर में सनसनी फैल गयी. स्थानीय लोगों ने इस संबंध में बताया कि भूख और बीमारी की वजह से मजदूर की मौत हुई है. इन लोगों का कहना है कि यह मजदूर झरिया के सोनापट्टी मुहल्ले में मोटिया मजदूर का काम करता था. लॉकडाउन के कारण उसे कहीं काम नहीं मिल रहा था. वहीं लोगों का ये भी कहना है कि संभवतः उसके पास रहने के लिए घर नहीं था. इसलिए वह फुटपाथ पर सोकर अपना समय गुजार रहा था. लेकिन लॉकडाउन के कारण उसकी हालत खराब हो गयी थी. स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ समय से वह किसी गंभीर बीमारी से परेशान रहता था. जिससे वह अक्सर बीमार भी रहता था. लोगदों का कहना है कि हो सकता है कि बीमारी की वजह से ही उसकी मौत हुई हो. हालांकि अभी तक किसी ने शव की शिनाख्त नहीं की है. बताया जाता है कि घटना की जानकारी मिलने के पांच घंटे बाद झरिया थाना की पुलिस पहुंची. पुलिस ने शव की शिनाख्त करने की कोशिश की. लेकिन कड़ी मशक्कत के बाद भी शव की शिनाख्त नहीं हो पायी. लोगों ने बताया कि वह सोनापट्टी मुहल्ले में मोटिया मजदूर का काम करता था. वह एक दुकान के पास चबूतरे पर अक्सर पड़ा रहता था. स्थानीय लोगों के अनुसार, उसका परिवार नहीं था. पांच घंटे बाद पहुंची पुलिस पहले शव को छूने से भी परहेज करती रही. पुलिस को इस बात की आशंका थी कि कहीं मजदूर कोरोना संक्रमित न हो. काफी देर बाद पुलिस ने पंचनामा बनाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए पीएमसीएच भेजा. वहीं कुछ लोगों ने कहा कि लॉकडाउन में सामाजिक लोगों द्वारा गरीबों के बीच खाना का तो वितरण किया जाता है. लेकिन जहां गरीबों को खाना मिलना चाहिए, वहां खाना नहीं मिलता है. आज भी बहुत से ऐसे गरीब हैं, जो भूखे सोने को मजबूर हैं. वहीं झरिया थाना के एएसआई बिरसा हेंब्रम द्वारा पंचनामा बनाया गया और शव को उठाया गया. झरिया थाना प्रभारी प्रमोद सिंह ने कहा कि एक मजदूर की मौत हुई है. इसके परिवार का भी पता नहीं चला है. फिलहाल शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. |
सोलन। केन्द्रीय राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डाॅ. भारती प्रवीन पवार ने कहा कि स्वास्थ्य सहित अन्य क्षेत्रों में नवाचार ही भविष्य की सुरक्षा का आधार है। डाॅ. भारती प्रवीन पवार आज हिमाचल प्रदेश के सोलन ज़िला के कसौली स्थित केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली के 119वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह को मुख्यातिथि के रूप में सम्बोधित कर रहीं थीं।
उन्होंने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ किया।
डाॅ. भारती प्रवीन पवार ने कहा कि प्रौद्योगिकी में बदलाव के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार की प्रक्रिया नवीन रूप ले रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवाचार अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि रोगों के कारक भी नित नया रूप ले रहे हैं। कोविड-19 महामारी में वायरस के बदलते स्वरूप के कारण उत्पन्न परिस्थितियों से हम सभी परिचित हैं। उन्होंने कहा कि अनुसंधान के क्षेत्र में नवाचार के सकारात्मक परिणाम टीकाकरण सहित कोरोना वैक्सीन के रूप में प्रत्यक्ष हैं।
केन्द्रीय राज्य स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश में टीकाकरण कवरेज में केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1905 में अपनी स्थापना के समय से ही केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान नवाचार अपनाकर रोगों के उपचार के लिए टीकों के उत्पादन में राह दिखा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य एवं अनुसंधान के क्षेत्र में देश को सर्वोच्च शिखर तक पहंुंचाने के लिए यह संस्थान अग्रसर है। अपनी 118 वर्षों की यात्रा में संस्थान ने मील के अनेक ऐतिहासिक पत्थर स्थापित किए हैं।
उन्होंने कहा कि केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली में बी. एस. एल-III स्तर की प्रयोगशाला स्थापित करने को स्वीकृति प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि यहां तपेदिक रोग के टीकों के वाणिज्यिक उत्पादन के लिए परीक्षण किए जा रहे हैं। उन्होंने आशा जताई कि संस्थान तकनीक के माध्यम से जन सेवा के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए भविष्य में नई ऊंचाइयां प्राप्त करेगा। उन्होंने इस अवसर पर कोरोना टीकाकरण, आयुष्मान भारत और डी-संजीवनी सहित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने संस्थान को 118 वर्ष का उपलब्धियों भरा सफ़र पूर्ण करने पर बधाई दी।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में ड्रोन तकनीक के उपयोग को व्यापक स्तर पर अपनाएं।
हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा श्रम एवं रोज़गार मंत्री डाॅ. कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली की उपलब्धियां असाधारण हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में कोरोना जांच तथा टीकाकरण के कार्य में संस्थान ने प्रदेश वासियों के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने आशा जताई कि भविष्य में संस्थान नवीन प्रौद्योगिकी के प्रयोग से अनेक जटिल रोगों का उपचार सम्भव बना सकेगा।
डाॅ. शांडिल ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल में स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत बनाकर जन-जन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए दृढ़ संकल्प है। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में राज्य में ग्रामीण स्तर तक स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसी कड़ी में आई. जी. एम. सी शिमला, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टाण्डा (कांगड़ा), हमीरपुर, नाहन, चम्बा और नेरचैक स्थित चिकित्सा महाविद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से यूरोलाॅजी, सामान्य शल्य चिकित्सा, स्त्री रोग, कार्डियोथोरेसिक शल्य तथा गेस्ट्रो सर्जरी में रोबोटिक शल्य चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध करवाने पर 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक का उपयोग करने के लिए चरणबद्ध कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने आग्रह किया कि केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली में ऐसे रोगों पर भी अनुसंधान किया जाए जो पर्वतीय क्षेत्रों में अधिक पाए जाते हैं।
हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण विभाग तथा युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि अपने 118 वर्षों के कार्यकाल में केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली ने यह सिद्ध किया है कि यह संस्थान तकनीक एवं नवाचार के प्रयोग में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि नवीन अनुसंधान, कार्यक्रम एवं नवाचार ही जनमानस को भविष्य में होने वाले रोगों से बचा सकते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने में संस्थान के योगदान की सराहना की।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि देश एवं प्रदेश को निरोग रखने में सभी का सहयोग एवं समन्वय अपेक्षित है।
शिमला लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुरेश कश्यप तथा कसौली विधानसभा क्षेत्र के विधायक विनोद सुल्तानपुरी ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान की वर्ष 2022-23 की वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन किया गया।
केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान की निदेशक डाॅ. डिम्पल कसाना ने सभी का स्वागत किया और संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में सी. जी. एम. बी के अनुरूप टीके तैयार करने वाला यह पहला संस्थान है और सूक्ष्म जीव विज्ञान के क्षेत्र में संस्थान अग्रणी है।
केन्द्रीय मंत्री ने इस अवसर पर संस्थान की वार्षिक प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित किया। उन्होंने काॅमनवेल्थ खेल तथा ऐशियन पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में देश के लिए मेडल जीतने के लिए संस्थान की निदेशक डाॅ. डिम्पल कसाना को भी सम्मानित किया।
इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के कलाकारों द्वारा हिमाचली संस्कृति को दर्शाता रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया।
प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डाॅ. राजीव सैजल, केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डाॅ. अतुल गोयल, अतिरिक्त उप महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डाॅ. अनिल कुमार, उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा, अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी तथा केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक एवं कर्मी इस अवसर पर उपस्थित थे।
| सोलन। केन्द्रीय राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डाॅ. भारती प्रवीन पवार ने कहा कि स्वास्थ्य सहित अन्य क्षेत्रों में नवाचार ही भविष्य की सुरक्षा का आधार है। डाॅ. भारती प्रवीन पवार आज हिमाचल प्रदेश के सोलन ज़िला के कसौली स्थित केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली के एक सौ उन्नीसवें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह को मुख्यातिथि के रूप में सम्बोधित कर रहीं थीं। उन्होंने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ किया। डाॅ. भारती प्रवीन पवार ने कहा कि प्रौद्योगिकी में बदलाव के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार की प्रक्रिया नवीन रूप ले रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवाचार अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि रोगों के कारक भी नित नया रूप ले रहे हैं। कोविड-उन्नीस महामारी में वायरस के बदलते स्वरूप के कारण उत्पन्न परिस्थितियों से हम सभी परिचित हैं। उन्होंने कहा कि अनुसंधान के क्षेत्र में नवाचार के सकारात्मक परिणाम टीकाकरण सहित कोरोना वैक्सीन के रूप में प्रत्यक्ष हैं। केन्द्रीय राज्य स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि देश में टीकाकरण कवरेज में केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वर्ष एक हज़ार नौ सौ पाँच में अपनी स्थापना के समय से ही केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान नवाचार अपनाकर रोगों के उपचार के लिए टीकों के उत्पादन में राह दिखा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य एवं अनुसंधान के क्षेत्र में देश को सर्वोच्च शिखर तक पहंुंचाने के लिए यह संस्थान अग्रसर है। अपनी एक सौ अट्ठारह वर्षों की यात्रा में संस्थान ने मील के अनेक ऐतिहासिक पत्थर स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली में बी. एस. एल-III स्तर की प्रयोगशाला स्थापित करने को स्वीकृति प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि यहां तपेदिक रोग के टीकों के वाणिज्यिक उत्पादन के लिए परीक्षण किए जा रहे हैं। उन्होंने आशा जताई कि संस्थान तकनीक के माध्यम से जन सेवा के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए भविष्य में नई ऊंचाइयां प्राप्त करेगा। उन्होंने इस अवसर पर कोरोना टीकाकरण, आयुष्मान भारत और डी-संजीवनी सहित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने संस्थान को एक सौ अट्ठारह वर्ष का उपलब्धियों भरा सफ़र पूर्ण करने पर बधाई दी। उन्होंने हिमाचल प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में ड्रोन तकनीक के उपयोग को व्यापक स्तर पर अपनाएं। हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा श्रम एवं रोज़गार मंत्री डाॅ. कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली की उपलब्धियां असाधारण हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में कोरोना जांच तथा टीकाकरण के कार्य में संस्थान ने प्रदेश वासियों के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने आशा जताई कि भविष्य में संस्थान नवीन प्रौद्योगिकी के प्रयोग से अनेक जटिल रोगों का उपचार सम्भव बना सकेगा। डाॅ. शांडिल ने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल में स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत बनाकर जन-जन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए दृढ़ संकल्प है। उन्होंने कहा कि प्रथम चरण में राज्य में ग्रामीण स्तर तक स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसी कड़ी में आई. जी. एम. सी शिमला, राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टाण्डा , हमीरपुर, नाहन, चम्बा और नेरचैक स्थित चिकित्सा महाविद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से यूरोलाॅजी, सामान्य शल्य चिकित्सा, स्त्री रोग, कार्डियोथोरेसिक शल्य तथा गेस्ट्रो सर्जरी में रोबोटिक शल्य चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध करवाने पर एक सौ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक का उपयोग करने के लिए चरणबद्ध कार्य किया जा रहा है। उन्होंने आग्रह किया कि केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली में ऐसे रोगों पर भी अनुसंधान किया जाए जो पर्वतीय क्षेत्रों में अधिक पाए जाते हैं। हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण विभाग तथा युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि अपने एक सौ अट्ठारह वर्षों के कार्यकाल में केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली ने यह सिद्ध किया है कि यह संस्थान तकनीक एवं नवाचार के प्रयोग में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि नवीन अनुसंधान, कार्यक्रम एवं नवाचार ही जनमानस को भविष्य में होने वाले रोगों से बचा सकते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सुदृढ़ करने में संस्थान के योगदान की सराहना की। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि देश एवं प्रदेश को निरोग रखने में सभी का सहयोग एवं समन्वय अपेक्षित है। शिमला लोकसभा क्षेत्र के सांसद सुरेश कश्यप तथा कसौली विधानसभा क्षेत्र के विधायक विनोद सुल्तानपुरी ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान की वर्ष दो हज़ार बाईस-तेईस की वार्षिक रिपोर्ट का विमोचन किया गया। केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान की निदेशक डाॅ. डिम्पल कसाना ने सभी का स्वागत किया और संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में सी. जी. एम. बी के अनुरूप टीके तैयार करने वाला यह पहला संस्थान है और सूक्ष्म जीव विज्ञान के क्षेत्र में संस्थान अग्रणी है। केन्द्रीय मंत्री ने इस अवसर पर संस्थान की वार्षिक प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को सम्मानित किया। उन्होंने काॅमनवेल्थ खेल तथा ऐशियन पावर लिफ्टिंग प्रतियोगिता में देश के लिए मेडल जीतने के लिए संस्थान की निदेशक डाॅ. डिम्पल कसाना को भी सम्मानित किया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के कलाकारों द्वारा हिमाचली संस्कृति को दर्शाता रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डाॅ. राजीव सैजल, केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डाॅ. अतुल गोयल, अतिरिक्त उप महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डाॅ. अनिल कुमार, उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा, अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी तथा केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक एवं कर्मी इस अवसर पर उपस्थित थे। |
पंजाब क्षेत्र में होली के मुल्तान शहर में जन्म लिया प्रहलाद-पुरी मंदिर में। प्रहलादपुरी के मूल मंदिर प्रहलाद, हिरण्यकश्यप का बेटा, मुल्तान काश्य-पूरा के राजा द्वारा निर्मित किया गया है कहा जाता है) नरसिंह अवतार, हिंदू देवता विष्णु का अवतार, डब्ल्यूएचओ खम्भे से उभरा प्रहलाद को बचाने के लिए के सम्मान में। होली भी वसंत के आगमन का प्रतीक है। होली फागन जा रहा पूर्णिमा या (पूर्णिमा) पर मनाया के साथ दो दिनों होलिका दहन भर में मनाया जाता है, और होली खुद चेट के पहले दिनपर अगले दिन किया जा रहा है पंजाबी कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है। अंतर्वस्तु 1 व्युत्पत्ति 2 प्रहलाद-पुरी मंदिर और होलिका दहन ३ होलाष्टक 4 होली ४.१ मटका या तोड़ने 4.2 रंग 4 ३ चोव्नक-पूर्णा 5 होली और वसंत 6 होली और सिख धर्म 7 सन्दर्भ .
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| पंजाब क्षेत्र में होली के मुल्तान शहर में जन्म लिया प्रहलाद-पुरी मंदिर में। प्रहलादपुरी के मूल मंदिर प्रहलाद, हिरण्यकश्यप का बेटा, मुल्तान काश्य-पूरा के राजा द्वारा निर्मित किया गया है कहा जाता है) नरसिंह अवतार, हिंदू देवता विष्णु का अवतार, डब्ल्यूएचओ खम्भे से उभरा प्रहलाद को बचाने के लिए के सम्मान में। होली भी वसंत के आगमन का प्रतीक है। होली फागन जा रहा पूर्णिमा या पर मनाया के साथ दो दिनों होलिका दहन भर में मनाया जाता है, और होली खुद चेट के पहले दिनपर अगले दिन किया जा रहा है पंजाबी कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है। अंतर्वस्तु एक व्युत्पत्ति दो प्रहलाद-पुरी मंदिर और होलिका दहन तीन होलाष्टक चार होली चार.एक मटका या तोड़ने चार.दो रंग चार तीन चोव्नक-पूर्णा पाँच होली और वसंत छः होली और सिख धर्म सात सन्दर्भ . शून्य संबंधों। |
रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2021-22 के आय-व्ययक पर हुई सामान्य चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण की चुनौतियों के बावजूद छत्तीसगढ़ का वित्तीय प्रबंधन राष्ट्रीय स्तर की तुलना में बेहतर स्थिति में है। अगले वर्ष हमारी आर्थिक स्थिति और भी बेहतर होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर जीडीपी में 7. 7 प्रतिशत की कमी अनुमानित है, जबकि छत्तीसगढ़ में 1. 7 प्रतिशत कमी का अनुमान है। इसी तरह राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति आय में 5. 41 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि छत्तीसगढ़ में मात्र 0. 14 प्रतिशत की कमी अनुमानित है। राजस्व प्राप्ति के ब्याज भुगतान के प्रतिशत में भी छत्तीसगढ़ बेहतर स्थिति में है। जहां केंद्र के स्तर पर ब्याज भुगतान राजस्व प्राप्तियों का 35 प्रतिशत है, वहीं छत्तीसगढ़ में यह अनुपात मात्र 8 प्रतिशत है। केंद्रीय बजट में अगले वर्ष लिया जाने वाला शुद्ध ऋण कुल बजट का 26 प्रतिशत है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह 14 प्रतिशत है। केंद्रीय बजट 2021-22 में राजस्व प्राप्तियों में 11. 5 प्रतिशत की कमी अनुमानित है, जबकि छत्तीसगढ़ की राजस्व प्राप्तियां गत वर्ष के बराबर ही अनुमानित हैं। श्री भूपेश बघेल ने कहा- कोरोना आपदा के समय जब देश और दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट आई है, छत्तीसगढ़ में हमारे प्रयासों से इस वर्ष तुलनात्मक रूप से हम कम प्रभावित हुए हैं।
केंद्रीय बजट में वित्तीय घाटा जीडीपी का 9. 5 प्रतिशत और अगले वर्ष 6. 4 प्रतिशत अनुमानित है। छत्तीसगढ़ के बजट के पुनरीक्षित अनुमानों में यह इस वर्ष 6. 5 प्रतिशत और अगले वर्ष 4. 5 प्रतिशत अनुमानित है, जो केंद्र से इस वर्ष 03 और अगले वर्ष 02 प्रतिशत कम है। केंद्र का राजस्व घाटा इस वर्ष जीडीपी का 7. 5 प्रतिशत और अगले वर्ष 5. 1 प्रतिशत अनुमानित है, जबकि हमारा राजस्व घाटा इस वर्ष 3. 5 प्रतिशत और अगले वर्ष मात्र 01 प्रतिशत अनुमानित है। इस प्रकार राज्य का राजस्व घाटा भी केंद्र से इस वर्ष और अगले वर्ष 04 प्रतिशत कम है। इस वर्ष और अगले वर्ष में ये दोनों ही घाटे केंद्र से राज्य को मिलने वाले राजस्व में भारी कमी (12 हजार 132 करोड़) और जीएसटी क्षतिपूर्ति (3109 करोड़) अनुदान के बजाय ऋण के रूप में देने के कारण है।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि यदि जीएसटी नहीं लगता तो हम वैट में राशि वसूल कर सकते थे। जीएसटी में वसूल किए गए करों का 50 प्रतिशत हिस्सा केंद्र को जाता है और 43 प्रतिशत राज्यों को देने का प्रावधान है। उत्पादक राज्य होने के कारण छत्तीसगढ़ को इसमें भारी घाटा उठाना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने गरीब आदमी को अपने बजट के केंद्र में रखा है। हमने पिछली सरकार के सिस्टम को एलीट ओरिएंटेड से कॉमन मैन ओरिएंटेड कर दिया है। हम लोग तो डाउन टू अर्थ हैं। हमारी सरकार में छत्तीसगढ़ के 17 लाख 96 हजार किसानों का 8734 करोड़ 50 लाख रुपए का कर्ज माफ किया।
कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ की स्थिति राष्ट्रीय स्तर से बेहतर है। देश में कृषि क्षेत्र में 3. 4 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, वहीं छत्तीसगढ़ में 4. 61 प्रतिशत की वृद्धि हुई, इसमें हम केंद्र से बेहतर स्थिति में हैं। उद्योग क्षेत्र में केंद्र सरकार माइनस 9. 6 प्रतिशत पर रही, जबकि छत्तीसगढ़ में इस कमी को हम माइनस 5. 28 प्रतिशत पर रोकने में सफल रहे। इसी तरह सेवा क्षेत्र में देश में माइनस 8. 8 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि छत्तीसगढ़ में सेवा क्षेत्र में 0. 75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। श्री बघेल ने कहा कि वर्ष 2021-22 में केंद्र सरकार का डेब्ट जीएसडीपी रेश्यो 62. 22 प्रतिशत है, जबकि छत्तीसगढ़ के लिए ये अनुमान केवल 22. 29 प्रतिशत है। इसी प्रकार केंद्र का इन्टरेस्ट पेमेंट और रेवेन्यू रिसीप्ट का रेश्यो अनुमानित 45 प्रतिशत है, जबकि छत्तीसगढ के लिए ये रेश्यो 8. 16 प्रतिशत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लगभग 18 हजार करोड़ रुपए की राशि नहीं दी गई, इस कारण ऋण लेना पड़ा। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2019-20 में 63 हजार 147 करोड़ रुपए का ऋण रहा जो सकल घरेलू उत्पाद का 18. 03 प्रतिशत है। जबकि वर्ष 2020-21 के लिए अब तक 72 हजार 12 करोड़ रुपए का ऋण लिया है, जो सकल घरेलू उत्पादन का 20. 5 प्रतिशत है।
श्री बघेल ने कहा कि विभिन्न विभागों को बजट आबंटन में किसी तरह की कमी नहीं की गई है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के बजट में पिछली सरकार ने वर्ष 2018-19 में 3445 करोड़ रुपए का प्रावधान किया था, जबकि हमने वर्ष 2020-21 में 3998 करोड़ रुपए और वर्ष 2021-22 में 4088 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बजट में वर्ष 2018-19 में 3358 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, जबकि वर्ष 2021-22 में 3592 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आदिवासी आबादी 30 प्रतिशत है, लेकिन हमने वर्ष 2021-22 के बजट में अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के लिए 34 प्रतिशत, अनुसूचित जाति हेतु 13 प्रतिशत और सामान्य क्षेत्र के लिए 53 प्रतिशत राशि का प्रावधान किया है। इसी तरह सामाजिक क्षेत्र के लिए 38 प्रतिशत, सामान्य क्षेत्र में 23 प्रतिशत और आर्थिक क्षेत्र में 39 प्रतिशत बजट प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार के बजट की तुलना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने कृषि के बजट में गत वर्ष की तुलना में लगभग 2. 03 प्रतिशत की वृद्धि की, जबकि छत्तीसगढ़ में कुल बजट का लगभग 09 प्रतिशत कृषि के लिए प्रावधानित किया गया, जो लगभग 9 हजार करोड़ रुपए है। इसी तरह केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के बजट में गत वर्ष की तुलना में लगभग 7843 करोड़ रुपए की कटौती की, जबकि हमने गत वर्ष की तुलना में 100 करोड़ रुपए बढ़ाया है। केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास के बजट को 21 हजार 709 करोड़ रुपए कम कर दिया है, जबकि हमने अपने बजट का लगभग 09 प्रतिशत 8828 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।
श्री बघेल ने कहा कि समर्थन मूल्य पर धान बिक्री के लिए इस साल 21 लाख 52 हजार किसानों ने पंजीयन कराया, जिनमें से 95 प्रतिशत किसानों ने धान बेचा। उन्होंने कहा कि यह सरकार किसानों की सरकार है, हम किसानों के हित में काम करते रहेंगे। केंद्र सरकार के लगातार अड़ंगे के बावजूद राजीव गांधी किसान न्याय योजना में 5703 करोड़ रुपए का प्रावधान इस बार के बजट में किया गया है। श्री बघेल ने कहा कि पिछली सरकार में 60 से 70 लाख मीटरिक टन धान की खरीदी होती थी, और वे 24 लाख मीटरिक टन चावल एफसीआई को देते थे। हमने 92 लाख मीटरिक टन धान की खरीदी की है, हमें एफसीआई को 60 लाख मीटरिक टन चावल देने की अनुमति केंद्र द्वारा मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने बारदानों की कमी के संबंध में कहा कि राज्य सरकार रायगढ़ की जूट मिल को प्रारंभ करने के लिए प्रयासरत है। छत्तीसगढ़ में यदि कोई जूट मिल लगाना चाहता है, तो उनका स्वागत है। औद्योगिक क्षेत्र में पूंजी निवेश के संबंध में उन्होंने कहा कि पिछले सरकार ने 93 हजार करोड़ रुपए के एमओयू किए थे, लेकिन वास्तविक निवेश मात्र 02 हजार करोड़ रुपए का हुआ। हमारी नयी औद्योगिक नीति के कारण 154 एमओयू हुए, जिनमें 56 हजार करोड़ रुपए का पूंजीनिवेश संभावित है। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार चिडफंड कंपनियों से 16 हजार निवेशकों के पैसे वापस दिलवाए गए।
वनअधिकार मान्यता पत्रों के वितरण के संबंध में उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने 12 साल में 3. 87 लाख पट्टे वितरित किए थे। हमने निरस्त किए गए पट्टों का पुनर्परीक्षण किया। व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार मान्यता पत्र के माध्यम से 46 लाख एकड़ वन भूमि पर अधिकार दिलाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वनोपज की खरीदी में छ्त्तीसगढ़ पूरे देश में अग्रणी राज्य है। कोरोना काल में देश में खरीदी गई वनोपजों का 99 प्रतिशत छत्तीसगढ़ में खरीदा गया। वर्तमान स्थिति में भी छत्तीसगढ़ की देश के कुल संग्रहित लघु वनोपजों में भागीदारी 72. 5 प्रतिशत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक दर ढाई हजार रुपए प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर 4000 रुपए प्रति मानक बोरा कर दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के कारण कुपोषण में 25. 9 प्रतिशत कमी आई है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार हमारी प्राथमिकता है। साथ ही चाहे सड़क-पुल-पुलिया की बात हो, या प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की बात हो, इनके निर्माण में कमी नहीं आने दी गई है। उन्होंने कहा कि रेत के अवैध उत्खनन और अवैध परिवहन पर राज्य सरकार द्वारा तत्परता से कार्यवाही की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब बंदी की नीति विभिन्न राज्यों की नीतियों का अध्ययन कर सबकी सहमति से बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020-21 में शराब से प्राप्त राजस्व में पिछले साल की तुलना में 17 प्रतिशत और खपत में 38. 4 प्रतिशत की कमी हुई है। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना के माध्यम से राज्य सरकार ने खेती में सुधार, गौ माता की सेवा और लोगों को रोजगार दिलाने की व्यवस्था करने की पहल की है। उन्होंने कहा कि 200 से ज्यादा गोठान आत्मनिर्भर बन चुके है, हमारा लक्ष्य सभी गोठानों को स्वावलंबी बनाने का है। गोठानों में 63 हजार वर्मी-टांके भरे हुए हैं, प्रति टांका लगभग 15 क्विंटल के मान से वर्मी कंपोस्ट तैयार होने का अनुमान है।
| रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज विधानसभा में वित्तीय वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस के आय-व्ययक पर हुई सामान्य चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण की चुनौतियों के बावजूद छत्तीसगढ़ का वित्तीय प्रबंधन राष्ट्रीय स्तर की तुलना में बेहतर स्थिति में है। अगले वर्ष हमारी आर्थिक स्थिति और भी बेहतर होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर जीडीपी में सात. सात प्रतिशत की कमी अनुमानित है, जबकि छत्तीसगढ़ में एक. सात प्रतिशत कमी का अनुमान है। इसी तरह राष्ट्रीय स्तर पर प्रति व्यक्ति आय में पाँच. इकतालीस प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जबकि छत्तीसगढ़ में मात्र शून्य. चौदह प्रतिशत की कमी अनुमानित है। राजस्व प्राप्ति के ब्याज भुगतान के प्रतिशत में भी छत्तीसगढ़ बेहतर स्थिति में है। जहां केंद्र के स्तर पर ब्याज भुगतान राजस्व प्राप्तियों का पैंतीस प्रतिशत है, वहीं छत्तीसगढ़ में यह अनुपात मात्र आठ प्रतिशत है। केंद्रीय बजट में अगले वर्ष लिया जाने वाला शुद्ध ऋण कुल बजट का छब्बीस प्रतिशत है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह चौदह प्रतिशत है। केंद्रीय बजट दो हज़ार इक्कीस-बाईस में राजस्व प्राप्तियों में ग्यारह. पाँच प्रतिशत की कमी अनुमानित है, जबकि छत्तीसगढ़ की राजस्व प्राप्तियां गत वर्ष के बराबर ही अनुमानित हैं। श्री भूपेश बघेल ने कहा- कोरोना आपदा के समय जब देश और दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट आई है, छत्तीसगढ़ में हमारे प्रयासों से इस वर्ष तुलनात्मक रूप से हम कम प्रभावित हुए हैं। केंद्रीय बजट में वित्तीय घाटा जीडीपी का नौ. पाँच प्रतिशत और अगले वर्ष छः. चार प्रतिशत अनुमानित है। छत्तीसगढ़ के बजट के पुनरीक्षित अनुमानों में यह इस वर्ष छः. पाँच प्रतिशत और अगले वर्ष चार. पाँच प्रतिशत अनुमानित है, जो केंद्र से इस वर्ष तीन और अगले वर्ष दो प्रतिशत कम है। केंद्र का राजस्व घाटा इस वर्ष जीडीपी का सात. पाँच प्रतिशत और अगले वर्ष पाँच. एक प्रतिशत अनुमानित है, जबकि हमारा राजस्व घाटा इस वर्ष तीन. पाँच प्रतिशत और अगले वर्ष मात्र एक प्रतिशत अनुमानित है। इस प्रकार राज्य का राजस्व घाटा भी केंद्र से इस वर्ष और अगले वर्ष चार प्रतिशत कम है। इस वर्ष और अगले वर्ष में ये दोनों ही घाटे केंद्र से राज्य को मिलने वाले राजस्व में भारी कमी और जीएसटी क्षतिपूर्ति अनुदान के बजाय ऋण के रूप में देने के कारण है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि यदि जीएसटी नहीं लगता तो हम वैट में राशि वसूल कर सकते थे। जीएसटी में वसूल किए गए करों का पचास प्रतिशत हिस्सा केंद्र को जाता है और तैंतालीस प्रतिशत राज्यों को देने का प्रावधान है। उत्पादक राज्य होने के कारण छत्तीसगढ़ को इसमें भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने गरीब आदमी को अपने बजट के केंद्र में रखा है। हमने पिछली सरकार के सिस्टम को एलीट ओरिएंटेड से कॉमन मैन ओरिएंटेड कर दिया है। हम लोग तो डाउन टू अर्थ हैं। हमारी सरकार में छत्तीसगढ़ के सत्रह लाख छियानवे हजार किसानों का आठ हज़ार सात सौ चौंतीस करोड़ पचास लाख रुपए का कर्ज माफ किया। कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ की स्थिति राष्ट्रीय स्तर से बेहतर है। देश में कृषि क्षेत्र में तीन. चार प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, वहीं छत्तीसगढ़ में चार. इकसठ प्रतिशत की वृद्धि हुई, इसमें हम केंद्र से बेहतर स्थिति में हैं। उद्योग क्षेत्र में केंद्र सरकार माइनस नौ. छः प्रतिशत पर रही, जबकि छत्तीसगढ़ में इस कमी को हम माइनस पाँच. अट्ठाईस प्रतिशत पर रोकने में सफल रहे। इसी तरह सेवा क्षेत्र में देश में माइनस आठ. आठ प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि छत्तीसगढ़ में सेवा क्षेत्र में शून्य. पचहत्तर प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। श्री बघेल ने कहा कि वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस में केंद्र सरकार का डेब्ट जीएसडीपी रेश्यो बासठ. बाईस प्रतिशत है, जबकि छत्तीसगढ़ के लिए ये अनुमान केवल बाईस. उनतीस प्रतिशत है। इसी प्रकार केंद्र का इन्टरेस्ट पेमेंट और रेवेन्यू रिसीप्ट का रेश्यो अनुमानित पैंतालीस प्रतिशत है, जबकि छत्तीसगढ के लिए ये रेश्यो आठ. सोलह प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लगभग अट्ठारह हजार करोड़ रुपए की राशि नहीं दी गई, इस कारण ऋण लेना पड़ा। छत्तीसगढ़ में वर्ष दो हज़ार उन्नीस-बीस में तिरेसठ हजार एक सौ सैंतालीस करोड़ रुपए का ऋण रहा जो सकल घरेलू उत्पाद का अट्ठारह. तीन प्रतिशत है। जबकि वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस के लिए अब तक बहत्तर हजार बारह करोड़ रुपए का ऋण लिया है, जो सकल घरेलू उत्पादन का बीस. पाँच प्रतिशत है। श्री बघेल ने कहा कि विभिन्न विभागों को बजट आबंटन में किसी तरह की कमी नहीं की गई है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के बजट में पिछली सरकार ने वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस में तीन हज़ार चार सौ पैंतालीस करोड़ रुपए का प्रावधान किया था, जबकि हमने वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस में तीन हज़ार नौ सौ अट्ठानवे करोड़ रुपए और वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस में चार हज़ार अठासी करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के बजट में वर्ष दो हज़ार अट्ठारह-उन्नीस में तीन हज़ार तीन सौ अट्ठावन करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया था, जबकि वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस में तीन हज़ार पाँच सौ बानवे करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आदिवासी आबादी तीस प्रतिशत है, लेकिन हमने वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस के बजट में अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के लिए चौंतीस प्रतिशत, अनुसूचित जाति हेतु तेरह प्रतिशत और सामान्य क्षेत्र के लिए तिरेपन प्रतिशत राशि का प्रावधान किया है। इसी तरह सामाजिक क्षेत्र के लिए अड़तीस प्रतिशत, सामान्य क्षेत्र में तेईस प्रतिशत और आर्थिक क्षेत्र में उनतालीस प्रतिशत बजट प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार के बजट की तुलना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने कृषि के बजट में गत वर्ष की तुलना में लगभग दो. तीन प्रतिशत की वृद्धि की, जबकि छत्तीसगढ़ में कुल बजट का लगभग नौ प्रतिशत कृषि के लिए प्रावधानित किया गया, जो लगभग नौ हजार करोड़ रुपए है। इसी तरह केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य विभाग के बजट में गत वर्ष की तुलना में लगभग सात हज़ार आठ सौ तैंतालीस करोड़ रुपए की कटौती की, जबकि हमने गत वर्ष की तुलना में एक सौ करोड़ रुपए बढ़ाया है। केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास के बजट को इक्कीस हजार सात सौ नौ करोड़ रुपए कम कर दिया है, जबकि हमने अपने बजट का लगभग नौ प्रतिशत आठ हज़ार आठ सौ अट्ठाईस करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। श्री बघेल ने कहा कि समर्थन मूल्य पर धान बिक्री के लिए इस साल इक्कीस लाख बावन हजार किसानों ने पंजीयन कराया, जिनमें से पचानवे प्रतिशत किसानों ने धान बेचा। उन्होंने कहा कि यह सरकार किसानों की सरकार है, हम किसानों के हित में काम करते रहेंगे। केंद्र सरकार के लगातार अड़ंगे के बावजूद राजीव गांधी किसान न्याय योजना में पाँच हज़ार सात सौ तीन करोड़ रुपए का प्रावधान इस बार के बजट में किया गया है। श्री बघेल ने कहा कि पिछली सरकार में साठ से सत्तर लाख मीटरिक टन धान की खरीदी होती थी, और वे चौबीस लाख मीटरिक टन चावल एफसीआई को देते थे। हमने बानवे लाख मीटरिक टन धान की खरीदी की है, हमें एफसीआई को साठ लाख मीटरिक टन चावल देने की अनुमति केंद्र द्वारा मिलनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने बारदानों की कमी के संबंध में कहा कि राज्य सरकार रायगढ़ की जूट मिल को प्रारंभ करने के लिए प्रयासरत है। छत्तीसगढ़ में यदि कोई जूट मिल लगाना चाहता है, तो उनका स्वागत है। औद्योगिक क्षेत्र में पूंजी निवेश के संबंध में उन्होंने कहा कि पिछले सरकार ने तिरानवे हजार करोड़ रुपए के एमओयू किए थे, लेकिन वास्तविक निवेश मात्र दो हजार करोड़ रुपए का हुआ। हमारी नयी औद्योगिक नीति के कारण एक सौ चौवन एमओयू हुए, जिनमें छप्पन हजार करोड़ रुपए का पूंजीनिवेश संभावित है। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार चिडफंड कंपनियों से सोलह हजार निवेशकों के पैसे वापस दिलवाए गए। वनअधिकार मान्यता पत्रों के वितरण के संबंध में उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने बारह साल में तीन. सत्तासी लाख पट्टे वितरित किए थे। हमने निरस्त किए गए पट्टों का पुनर्परीक्षण किया। व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार मान्यता पत्र के माध्यम से छियालीस लाख एकड़ वन भूमि पर अधिकार दिलाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वनोपज की खरीदी में छ्त्तीसगढ़ पूरे देश में अग्रणी राज्य है। कोरोना काल में देश में खरीदी गई वनोपजों का निन्यानवे प्रतिशत छत्तीसगढ़ में खरीदा गया। वर्तमान स्थिति में भी छत्तीसगढ़ की देश के कुल संग्रहित लघु वनोपजों में भागीदारी बहत्तर. पाँच प्रतिशत बनी हुई है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक दर ढाई हजार रुपए प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर चार हज़ार रुपयापए प्रति मानक बोरा कर दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के कारण कुपोषण में पच्चीस. नौ प्रतिशत कमी आई है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार हमारी प्राथमिकता है। साथ ही चाहे सड़क-पुल-पुलिया की बात हो, या प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की बात हो, इनके निर्माण में कमी नहीं आने दी गई है। उन्होंने कहा कि रेत के अवैध उत्खनन और अवैध परिवहन पर राज्य सरकार द्वारा तत्परता से कार्यवाही की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शराब बंदी की नीति विभिन्न राज्यों की नीतियों का अध्ययन कर सबकी सहमति से बनाई जाएगी। उन्होंने बताया कि वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस में शराब से प्राप्त राजस्व में पिछले साल की तुलना में सत्रह प्रतिशत और खपत में अड़तीस. चार प्रतिशत की कमी हुई है। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना के माध्यम से राज्य सरकार ने खेती में सुधार, गौ माता की सेवा और लोगों को रोजगार दिलाने की व्यवस्था करने की पहल की है। उन्होंने कहा कि दो सौ से ज्यादा गोठान आत्मनिर्भर बन चुके है, हमारा लक्ष्य सभी गोठानों को स्वावलंबी बनाने का है। गोठानों में तिरेसठ हजार वर्मी-टांके भरे हुए हैं, प्रति टांका लगभग पंद्रह क्विंटल के मान से वर्मी कंपोस्ट तैयार होने का अनुमान है। |
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार फ़िल्मफ़ेयर पत्रिका द्वारा प्रति वर्ष दिया जाने वाला पुरस्कार है। यह हिन्दी फ़िल्म में बेहतर अभिनय के लिये अभिनेत्री फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार समारोह में दिया जाता है। . माइ नेम इज़ ख़ान वर्ष 2010 में बनी एक हिन्दी फ़िल्म है। फिल्म के मुख्य कलाकार शाहरुख खान और काजोल देवगन हैं। इसे करन जोहर ने निर्देशित किया है और लिखा है शिबानी बथीजा ने ।इसके निर्माता हैं हीरू जोहर, गौरी खान और शाहरुख खान । इस फिल्म को मिलकर बनाया है धर्मा प्रोडक्शन और रेड चिलीस एंटरटेनमेंट ने 100 करोड़ के बजट में जिसके कारण ये 2006 में बालीवुड की सबसे महँगी फिल्म थी । इसकी रिलीज़ से पहले ही इसने काफी सुर्खियाँ बटोर लीं। 2001 में " कभी खुशी कभी गम " के बाद काजोल और शाहरुख बहुत लंबे समय बाद एक साथ दिखे ।माइ नेम इज़ इज़ खान अबू धाबी में 10 फरबरी 2010 को सबसे पहले रिलीज़ हुई । यह अंतर्राष्ट्रीय रूप से 12 फरबरी को रिलीज़ हुई । इसकी रिलीज़ पर इस फिल्म ने कई रिकॉर्ड तोड़ दिए । ये फिल्म उस समय की सबसे कमाऊ फिल्म बन गयी । चार सप्ताह में इस फिल्म ने 70 करोड़ का आकड़ा पर कर दिया और 2010 की पहली फिल्म बन गयी जिसे 70 करोड़ से ज्यादा की कमाई की । इस समय मई नेम इज़ खान 200 करोड़ रूपये के साथ बॉलीवुड की 10वी सबसे ज्यादा कमाने वाली फिल्म है।ब्लू रे डी.वी.डी.
फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार और माइ नेम इज़ ख़ान आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): काजोल देवगन।
(बांग्लाः কাজল দেবগন Kajol Debgon, काजोल हिंदी फ़िल्मों की एक प्रसिद्ध अभिनेत्री हैं जिनका जन्म 5 अगस्त 1974 को हुआ था। उनकी माँ तनुजा अभिनेत्री थी और नानी शोभना समर्थ भी अभिनेत्री थीं। उनकी छोटी बहिन तनिषा भी अब फिल्मों मैं काम कर रही हैं। उनके पिता का नाम शोमू मुखर्जी है। वे फिल्में बनाते थे। काजोल ने अपना फिल्मी सफ़र फिल्म बेखुदी से शुरू किया जिसमें उनके पात्र का नाम राधिका था। वह फिल्म तो नहीं चली पर उनकी बाद की फिल्में बहुत प्रसिद्ध हुईं। जैसे कि बाज़ीगर और दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे। उहोंने अपने सहकर्मी और प्रेमी, अजय देवगन से २४ फरवरी 1999 को विवाह किया था। उनकी एक छोटी बेटी है जिसका नाम न्यसा है। उनके नाम कुल ६ फिल्मफेयर और उनमें से ५ सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार हैं जो की एक कीर्तिमान है। वह यह कीर्तिमान अपनी मौसी नूतन के साथ साझा करती हैं। .
फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार 95 संबंध है और माइ नेम इज़ ख़ान 9 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 0.96% है = 1 / (95 + 9)।
यह लेख फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार और माइ नेम इज़ ख़ान के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
| शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार फ़िल्मफ़ेयर पत्रिका द्वारा प्रति वर्ष दिया जाने वाला पुरस्कार है। यह हिन्दी फ़िल्म में बेहतर अभिनय के लिये अभिनेत्री फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार समारोह में दिया जाता है। . माइ नेम इज़ ख़ान वर्ष दो हज़ार दस में बनी एक हिन्दी फ़िल्म है। फिल्म के मुख्य कलाकार शाहरुख खान और काजोल देवगन हैं। इसे करन जोहर ने निर्देशित किया है और लिखा है शिबानी बथीजा ने ।इसके निर्माता हैं हीरू जोहर, गौरी खान और शाहरुख खान । इस फिल्म को मिलकर बनाया है धर्मा प्रोडक्शन और रेड चिलीस एंटरटेनमेंट ने एक सौ करोड़ के बजट में जिसके कारण ये दो हज़ार छः में बालीवुड की सबसे महँगी फिल्म थी । इसकी रिलीज़ से पहले ही इसने काफी सुर्खियाँ बटोर लीं। दो हज़ार एक में " कभी खुशी कभी गम " के बाद काजोल और शाहरुख बहुत लंबे समय बाद एक साथ दिखे ।माइ नेम इज़ इज़ खान अबू धाबी में दस फरबरी दो हज़ार दस को सबसे पहले रिलीज़ हुई । यह अंतर्राष्ट्रीय रूप से बारह फरबरी को रिलीज़ हुई । इसकी रिलीज़ पर इस फिल्म ने कई रिकॉर्ड तोड़ दिए । ये फिल्म उस समय की सबसे कमाऊ फिल्म बन गयी । चार सप्ताह में इस फिल्म ने सत्तर करोड़ का आकड़ा पर कर दिया और दो हज़ार दस की पहली फिल्म बन गयी जिसे सत्तर करोड़ से ज्यादा की कमाई की । इस समय मई नेम इज़ खान दो सौ करोड़ रूपये के साथ बॉलीवुड की दसवी सबसे ज्यादा कमाने वाली फिल्म है।ब्लू रे डी.वी.डी. फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार और माइ नेम इज़ ख़ान आम में एक बात है : काजोल देवगन। । यह लेख फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार और माइ नेम इज़ ख़ान के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः |
बॉलीवुड सुपर स्टार आलिया भट्ट और रणवीर सिंह की अपकमिंग फिल्म 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' (Rocky Aur Rani Ki Prem Kahani) का दर्शक काफी लम्बे समय से इंतज़ार कर रहे हैं और आलिया के माँ बनने के बाद तो उनकी भी बॉक्स ऑफिस पर यह पहली फिल्म होगी फिल्म से जुडी कई खबरे और तस्वीरें कई बार सोशल मीडिया द्वारा सामने आयी हैं ऐसे में इनके फैंस को फिल्म से जुडी हर एक अपडेट का और भी बेसब्री से इंतज़ार रहता हैं, अब तो रणवीर और आलिया के फैंस का पूरा ध्यान फिल्म की रिलीज डेट पर बना हुआ हैं।
जैसा की सभी जानते हैं की साल 2022 नवंबर में इस फिल्म की रिलीज डेट का एलान भी हुआ था, जो इस साल 28 अप्रैल 2023 को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली थी, लेकिन अब फिल्म से जुडी एक और खबर ने दस्तक दे दी हैं की आलिया और रणवीर के फैंस को अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। फिल्म मेकर्स ने रॉकी और रानी की प्रेम कहानी की रिलीज डेट में थोड़ा बदलाव कर दिया है। जिसमे अब गुरुवार को फिल्ममेकर करण जौहर ने इस फिल्म की नई डेट का एलान किया है।
'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' की रिलीज डेट में ये बदलाव करने के पीछे का कारण आखिर क्या बना? इसका अभी पूर्ण रूप से कोई खुलासा नहीं हुआ हैं , लेकिन इस मामले में कई कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद करण जौहर एक्टर सलमान खान की फिल्म किसी का भाई किसी की जान और मशहूर निर्देशक मणिरत्नम की फिल्म 'पोन्नियिन सेलवन 2' से बॉक्स ऑफिस पर टक्कर नहीं लेना चाहते हैं हालाँकि इन सभी खबरों में कितनी सच्चाई हैं और कितनी नहीं ये अभी तक कोई नहीं जनता हैं। लेकिन ऐसे में उनका अपनी फिल्म की रिलीज डेट को बदल देना इन सभी अफवाहों को और हवा दे रहा है।
साल 2023 में सिनेमालोवेर्स को काफी सारे सरप्राइज मिलने वाले हैं जिसके अंतर्गत बॉक्स ऑफिस पर कई बड़ी फिल्मे इस साल रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस महीने फरवरी में दो बड़ी फिल्में सिल्वर स्क्रीन पर रिलीज होने जा रही है। जिसमें पहला नंबर आता हैं बी-टाउन के भाई जान सलमान खान की फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' का हैं। ये फिल्म 21 अप्रैल को बॉक्स ऑफिस पर रिलीज होगी। तो वहीं दूसरा नंबर ऐश्वर्या राय बच्चन की फिल्म 'पीएस 2' का आता हैं जोकि 28 अप्रैल को रिलीज होगी। इस फिल्म में ऐश्वर्या राय बच्चन, चियान विक्रम, कार्ति, तृषा कृष्णन, जयम रवि, सरथकुमार, प्रभुलाल, किशोर, अश्विन जैसे कलाकार नजर आने वाले हैं।
| बॉलीवुड सुपर स्टार आलिया भट्ट और रणवीर सिंह की अपकमिंग फिल्म 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' का दर्शक काफी लम्बे समय से इंतज़ार कर रहे हैं और आलिया के माँ बनने के बाद तो उनकी भी बॉक्स ऑफिस पर यह पहली फिल्म होगी फिल्म से जुडी कई खबरे और तस्वीरें कई बार सोशल मीडिया द्वारा सामने आयी हैं ऐसे में इनके फैंस को फिल्म से जुडी हर एक अपडेट का और भी बेसब्री से इंतज़ार रहता हैं, अब तो रणवीर और आलिया के फैंस का पूरा ध्यान फिल्म की रिलीज डेट पर बना हुआ हैं। जैसा की सभी जानते हैं की साल दो हज़ार बाईस नवंबर में इस फिल्म की रिलीज डेट का एलान भी हुआ था, जो इस साल अट्ठाईस अप्रैल दो हज़ार तेईस को सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली थी, लेकिन अब फिल्म से जुडी एक और खबर ने दस्तक दे दी हैं की आलिया और रणवीर के फैंस को अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। फिल्म मेकर्स ने रॉकी और रानी की प्रेम कहानी की रिलीज डेट में थोड़ा बदलाव कर दिया है। जिसमे अब गुरुवार को फिल्ममेकर करण जौहर ने इस फिल्म की नई डेट का एलान किया है। 'रॉकी और रानी की प्रेम कहानी' की रिलीज डेट में ये बदलाव करने के पीछे का कारण आखिर क्या बना? इसका अभी पूर्ण रूप से कोई खुलासा नहीं हुआ हैं , लेकिन इस मामले में कई कयास लगाए जा रहे हैं कि शायद करण जौहर एक्टर सलमान खान की फिल्म किसी का भाई किसी की जान और मशहूर निर्देशक मणिरत्नम की फिल्म 'पोन्नियिन सेलवन दो' से बॉक्स ऑफिस पर टक्कर नहीं लेना चाहते हैं हालाँकि इन सभी खबरों में कितनी सच्चाई हैं और कितनी नहीं ये अभी तक कोई नहीं जनता हैं। लेकिन ऐसे में उनका अपनी फिल्म की रिलीज डेट को बदल देना इन सभी अफवाहों को और हवा दे रहा है। साल दो हज़ार तेईस में सिनेमालोवेर्स को काफी सारे सरप्राइज मिलने वाले हैं जिसके अंतर्गत बॉक्स ऑफिस पर कई बड़ी फिल्मे इस साल रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस महीने फरवरी में दो बड़ी फिल्में सिल्वर स्क्रीन पर रिलीज होने जा रही है। जिसमें पहला नंबर आता हैं बी-टाउन के भाई जान सलमान खान की फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' का हैं। ये फिल्म इक्कीस अप्रैल को बॉक्स ऑफिस पर रिलीज होगी। तो वहीं दूसरा नंबर ऐश्वर्या राय बच्चन की फिल्म 'पीएस दो' का आता हैं जोकि अट्ठाईस अप्रैल को रिलीज होगी। इस फिल्म में ऐश्वर्या राय बच्चन, चियान विक्रम, कार्ति, तृषा कृष्णन, जयम रवि, सरथकुमार, प्रभुलाल, किशोर, अश्विन जैसे कलाकार नजर आने वाले हैं। |
पाकिस्तान वेस्टइंडीज के बीच तीसरे वनडे मैच में कैरेबियाई खिलाड़ी मैदान पर फेस मास्क लगाकर फील्डिंग करते नज़र आए।
पाकिस्तान और वेस्टइंडीज के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का आखिरी मुकाबला मेजबानों ने रविवार (12 जून) को 53 रनों से जीतकर अपने नाम किया। इस मैच के दौरान एक अजीबों-गरीब वाक्या देखने को मिला। दरअसल वेस्टइंडीज टीम के कई खिलाड़ी फील्डिंग के दौरान चेहरे पर मास्क लगाकर खेलते नज़र आए। अब इस घटना से जुड़े वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
दरअसल, मुल्तान क्रिकेट स्टेडियम में तीसरे वनडे मैच के दौरान धूल भरा तूफान आया जिस वज़ह से पहले गेम का बीच में रोकना पड़ा और फिर जब खिलाड़ी मैदान पर उतरे तब वेस्टइंडीज के प्लेयर्स अपनी सेफ्टी के लिए मास्क से अपने चेहरे को कवर करते हुए कैमरे में कैद हुए। यह पूरी घटना पाकिस्तान की पारी के 33वें ओवर से शुरू हुई थी।
बता दें कि कोविड-19 के बाद से ही पूरी दुनिया को मास्क के पीछे अपने चेहरे को रखना पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद खिलाड़ियों को मास्क के साथ क्रिकेट के मैदान पर शायद ही देखा गया। हालांकि इस धूल भरे तूफान के कारण कैरेबियाई खिलाड़ी को मैदान के अंदर भी मास्क जरूर पहनना पड़ा।
बात करें अगर मुकाबले की तो तीसरे वनडे में पाकिस्तान के कप्तान बाबर आजम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फैसला किया था, जिसके बाद इमाम-अल-हक(62) और शादाब खान(86) की अर्धशतकीय पारियों के दम पर पाकिस्तान ने 270 रनों का टारगेट सेट किया।
लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज के लिए अकील होसिन के अलावा कोई भी बल्लेबाज़ बड़ी पारी नहीं खेल सका और पूरी टीम 216 रनों पर ही ढेर हो गई। अकील होसिन ने 37 गेंदों पर 60 रन बनाए, लेकिन वह अपनी टीम को जीत नहीं दिला सके।
| पाकिस्तान वेस्टइंडीज के बीच तीसरे वनडे मैच में कैरेबियाई खिलाड़ी मैदान पर फेस मास्क लगाकर फील्डिंग करते नज़र आए। पाकिस्तान और वेस्टइंडीज के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का आखिरी मुकाबला मेजबानों ने रविवार को तिरेपन रनों से जीतकर अपने नाम किया। इस मैच के दौरान एक अजीबों-गरीब वाक्या देखने को मिला। दरअसल वेस्टइंडीज टीम के कई खिलाड़ी फील्डिंग के दौरान चेहरे पर मास्क लगाकर खेलते नज़र आए। अब इस घटना से जुड़े वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। दरअसल, मुल्तान क्रिकेट स्टेडियम में तीसरे वनडे मैच के दौरान धूल भरा तूफान आया जिस वज़ह से पहले गेम का बीच में रोकना पड़ा और फिर जब खिलाड़ी मैदान पर उतरे तब वेस्टइंडीज के प्लेयर्स अपनी सेफ्टी के लिए मास्क से अपने चेहरे को कवर करते हुए कैमरे में कैद हुए। यह पूरी घटना पाकिस्तान की पारी के तैंतीसवें ओवर से शुरू हुई थी। बता दें कि कोविड-उन्नीस के बाद से ही पूरी दुनिया को मास्क के पीछे अपने चेहरे को रखना पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद खिलाड़ियों को मास्क के साथ क्रिकेट के मैदान पर शायद ही देखा गया। हालांकि इस धूल भरे तूफान के कारण कैरेबियाई खिलाड़ी को मैदान के अंदर भी मास्क जरूर पहनना पड़ा। बात करें अगर मुकाबले की तो तीसरे वनडे में पाकिस्तान के कप्तान बाबर आजम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फैसला किया था, जिसके बाद इमाम-अल-हक और शादाब खान की अर्धशतकीय पारियों के दम पर पाकिस्तान ने दो सौ सत्तर रनों का टारगेट सेट किया। लक्ष्य का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज के लिए अकील होसिन के अलावा कोई भी बल्लेबाज़ बड़ी पारी नहीं खेल सका और पूरी टीम दो सौ सोलह रनों पर ही ढेर हो गई। अकील होसिन ने सैंतीस गेंदों पर साठ रन बनाए, लेकिन वह अपनी टीम को जीत नहीं दिला सके। |
सर्वोच्च न्यायालय ने हरियाणा के पंचायती राज अधिनियम, 2015 को सही ठहराया है। इससे जहां हरियाणा में पंचायत चुनावों का रास्ता साफ हो गया है, वहीं एक हद तक पंचायती राज व्यवस्था की तस्वीर बदलने की उम्मीद की जा रही है। गौरतलब है कि मनोहर लाल खट््टर सरकार ने राज्य के पंचायती राज कानून में चार संशोधन पेश किए थे। इन संशोधनों से संबंधित विधेयक को विधानसभा की मंजूरी भी मिल गई और इस तरह ये संशोधन कानून का हिस्सा बन गए। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका के जरिए चुनौती दिए जाने के बाद संबंधित कानून कुछ समय के लिए अधर में लटक गया। सितंबर में न्यायालय ने इन संशोधनों पर रोक लगा दी थी, पर अपने ताजा फैसले में इन्हें उचित माना है। चार संशोधनों में से एक के तहत उम्मीदवारों का एक हद तक शिक्षित होना अनिवार्य है। अभी तक उनके लिए न्यूनतम योग्यता की कोई शर्त नहीं थी। हरियाणा सरकार के नए कानून के मुताबिक पंचायत चुनाव लड़ने के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों का दसवीं पास होना जरूरी है। अलबत्ता दलितों और महिलाओं के लिए इस शर्त में कुछ ढील दी गई है, उम्मीदवारी के लिए उनकी पात्रता आठवीं पास होने पर मानी जाएगी, वहीं दलित महिला के लिए न्यूनतम योग्यता पांचवीं पास निर्धारित की गई है। पंचायत चुनाव लड़ने का दूसरा पैमाना यह है कि उम्मीदवार पर सहकारी बैंक का कर्ज और बिजली का बिल बकाया न हो। तीसरी शर्त यह है कि उम्मीदवार के घर में शौचालय हो। चौथी शर्त के तहत संगीन आपराधिक मामलों के आरोपितों को चुनावी मैदान से बाहर रखने का प्रावधान है।
पंचायती राज से संबंधित हरियाणा का संशोधित कानून शुरू से विवाद का विषय रहा है। एतराज खासकर न्यूनतम योग्यता के निर्धारण को लेकर सामने आए। दलील दी गई कि जब विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए यह शर्त लागू नहीं है, जहां प्रतिनिधि के पढ़े-लिखे होने की कहीं अधिक आवश्यकता है, तो फिर पंचायत चुनावों में ऐसी बाध्यता क्यों? आलोचकों की दूसरी दलील यह थी कि औपचारिक शिक्षा और समाज सेवा की भावना एक दूसरे के पर्याय नहीं हैं। यह तर्क अपनी जगह ठीक हो सकता है, पर न्यूनतम योग्यता की कसौटी का नतीजा यह होगा कि पंचायतों का कामकाज पहले से ज्यादा सुचारु हो सकेगा; उनके संपूर्ण कंप्यूटरीकरण की बात भी सोची जा सकती है। शिक्षा संबंधी शर्त का एक सकारात्मक परिणाम यह भी होगा कि घर-परिवार के किसी भी सदस्य को उम्मीदवार बनाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा। घर में शौचालय की शर्त पर सर्वोच्च अदालत ने कहा कि स्वच्छता रखना सभ्य समाज की निशानी है, जनप्रतिनिधियों को इस मामले में मिसाल पेश करनी चाहिए। संगीन मामलों के आरोपितों को चुनाव मैदान से बाहर रखने का फैसला दूरगामी नतीजे ला सकता है। देर-सवेर अन्य राज्यों में भी पंचायत चुनावों में इस तरह का प्रावधान करने की मांग उठ सकती है। संशोधित कानून की आलोचना करने वाली कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल को सर्वोच्च अदालत के फैसले से झटका लगा है, वहीं भाजपा फूले नहीं समा रही। फैसले से उत्साहित मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एलान किया कि स्थानीय निकाय चुनावों में भी ये शर्तें लागू होंगी, इसके लिए अध्यादेश जल्द लाया जाएगा। अदालत के फैसले का एक संदेश यह भी है कि जब तक कोई संवैधानिक अड़चन न हो, विधायिका के निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए।
| सर्वोच्च न्यायालय ने हरियाणा के पंचायती राज अधिनियम, दो हज़ार पंद्रह को सही ठहराया है। इससे जहां हरियाणा में पंचायत चुनावों का रास्ता साफ हो गया है, वहीं एक हद तक पंचायती राज व्यवस्था की तस्वीर बदलने की उम्मीद की जा रही है। गौरतलब है कि मनोहर लाल खट््टर सरकार ने राज्य के पंचायती राज कानून में चार संशोधन पेश किए थे। इन संशोधनों से संबंधित विधेयक को विधानसभा की मंजूरी भी मिल गई और इस तरह ये संशोधन कानून का हिस्सा बन गए। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका के जरिए चुनौती दिए जाने के बाद संबंधित कानून कुछ समय के लिए अधर में लटक गया। सितंबर में न्यायालय ने इन संशोधनों पर रोक लगा दी थी, पर अपने ताजा फैसले में इन्हें उचित माना है। चार संशोधनों में से एक के तहत उम्मीदवारों का एक हद तक शिक्षित होना अनिवार्य है। अभी तक उनके लिए न्यूनतम योग्यता की कोई शर्त नहीं थी। हरियाणा सरकार के नए कानून के मुताबिक पंचायत चुनाव लड़ने के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों का दसवीं पास होना जरूरी है। अलबत्ता दलितों और महिलाओं के लिए इस शर्त में कुछ ढील दी गई है, उम्मीदवारी के लिए उनकी पात्रता आठवीं पास होने पर मानी जाएगी, वहीं दलित महिला के लिए न्यूनतम योग्यता पांचवीं पास निर्धारित की गई है। पंचायत चुनाव लड़ने का दूसरा पैमाना यह है कि उम्मीदवार पर सहकारी बैंक का कर्ज और बिजली का बिल बकाया न हो। तीसरी शर्त यह है कि उम्मीदवार के घर में शौचालय हो। चौथी शर्त के तहत संगीन आपराधिक मामलों के आरोपितों को चुनावी मैदान से बाहर रखने का प्रावधान है। पंचायती राज से संबंधित हरियाणा का संशोधित कानून शुरू से विवाद का विषय रहा है। एतराज खासकर न्यूनतम योग्यता के निर्धारण को लेकर सामने आए। दलील दी गई कि जब विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए यह शर्त लागू नहीं है, जहां प्रतिनिधि के पढ़े-लिखे होने की कहीं अधिक आवश्यकता है, तो फिर पंचायत चुनावों में ऐसी बाध्यता क्यों? आलोचकों की दूसरी दलील यह थी कि औपचारिक शिक्षा और समाज सेवा की भावना एक दूसरे के पर्याय नहीं हैं। यह तर्क अपनी जगह ठीक हो सकता है, पर न्यूनतम योग्यता की कसौटी का नतीजा यह होगा कि पंचायतों का कामकाज पहले से ज्यादा सुचारु हो सकेगा; उनके संपूर्ण कंप्यूटरीकरण की बात भी सोची जा सकती है। शिक्षा संबंधी शर्त का एक सकारात्मक परिणाम यह भी होगा कि घर-परिवार के किसी भी सदस्य को उम्मीदवार बनाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा। घर में शौचालय की शर्त पर सर्वोच्च अदालत ने कहा कि स्वच्छता रखना सभ्य समाज की निशानी है, जनप्रतिनिधियों को इस मामले में मिसाल पेश करनी चाहिए। संगीन मामलों के आरोपितों को चुनाव मैदान से बाहर रखने का फैसला दूरगामी नतीजे ला सकता है। देर-सवेर अन्य राज्यों में भी पंचायत चुनावों में इस तरह का प्रावधान करने की मांग उठ सकती है। संशोधित कानून की आलोचना करने वाली कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल को सर्वोच्च अदालत के फैसले से झटका लगा है, वहीं भाजपा फूले नहीं समा रही। फैसले से उत्साहित मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एलान किया कि स्थानीय निकाय चुनावों में भी ये शर्तें लागू होंगी, इसके लिए अध्यादेश जल्द लाया जाएगा। अदालत के फैसले का एक संदेश यह भी है कि जब तक कोई संवैधानिक अड़चन न हो, विधायिका के निर्णय का सम्मान किया जाना चाहिए। |
।ग्राम क्रमांक :
।ग्राम का नाम :
।तहसील :
।जनपद :
।फसली वर्ष :
।भाग :
।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल (हे.)
।1 - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसे1950 ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा 117 - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो ।
।1क(क) - रिक्त ( नदारद )
।1-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ( नदारद )
।2 - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो।
।3 - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ( नदारद )
।4 - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ 4 में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ( नदारद )
।4-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -(क)जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ( नदारद )
।4-क(ख) - अन्य भूमि । ( नदारद )
।5-1 - कृषि योग्य भूमि - नई परती (परतीजदीद)
।5-2 - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती (परतीकदीम) ( नदारद )
।5-3-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ( नदारद )
।5-3-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ( नदारद )
।5-3-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ ।
।5-3-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ( नदारद )
।5-3-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि।
।5-क (क) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ( नदारद )
।5-क (ख) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ( नदारद )
।5-क (ग) - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी (वनाधिकारों की मान्यत्ाा) अधि. - 2006 के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ( नदारद )
।6-1 - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि ।
।6-2 - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो।
।6-3 - कब्रिस्तान और श्मशान (मरघट) , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो।
।6-4 - जो अन्य कारणों से अकृषित हो ।
।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है।
| ।ग्राम क्रमांक : ।ग्राम का नाम : ।तहसील : ।जनपद : ।फसली वर्ष : ।भाग : ।प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल ।एक - ऐसी भूमि, जिसमें सरकार अथवा गाँवसभा या अन्य स्थानीय अधिकारिकी जिसेएक हज़ार नौ सौ पचास ई. के उ. प्र. ज. वि.एवं भू. व्य. अधि.की धारा एक सौ सत्रह - क के अधीन भूमि का प्रबन्ध सौंपा गया हो , खेती करता हो । ।एकक - रिक्त ।एक-ख - ऐसी भूमि जो गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट केअन्तर्गत व्यक्तियों के पास हो । ।दो - भूमि जो असंक्रमणीय भूमिधरो केअधिकार में हो। ।तीन - भूमि जो असामियों के अध्यासन या अधिकारमें हो। ।चार - भूमि जो उस दशा में बिना आगम केअध्यासीनों के अधिकार में हो जब खसरेके स्तम्भ चार में पहले से ही किसी व्यक्तिका नाम अभिलिखित न हो। ।चार-क - उ.प्र. अधिकतम जोत सीमा आरोपण.अधि.अन्तर्गत अर्जित की गई अतिरिक्त भूमि -जो उ.प्र.जोत सी.आ.अ.के उपबन्धो केअधीन किसी अन्तरिम अवधि के लिये किसी पट्टेदार द्वारा रखी गयी हो । ।चार-क - अन्य भूमि । ।पाँच-एक - कृषि योग्य भूमि - नई परती ।पाँच-दो - कृषि योग्य भूमि - पुरानी परती ।पाँच-तीन-क - कृषि योग्य बंजर - इमारती लकड़ी केवन। ।पाँच-तीन-ख - कृषि योग्य बंजर - ऐसे वन जिसमें अन्यप्रकर के वृक्ष,झाडि़यों के झुन्ड,झाडि़याँ इत्यादि हों। ।पाँच-तीन-ग - कृषि योग्य बंजर - स्थाई पशुचर भूमि तथा अन्य चराई की भूमियाँ । ।पाँच-तीन-घ - कृषि योग्य बंजर - छप्पर छाने की घास तथा बाँस की कोठियाँ । ।पाँच-तीन-ङ - अन्य कृषि योग्य बंजर भूमि। ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - कृषि हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - आबादी हेतु ।पाँच-क - वन भूमि जिस पर अनु.जन. व अन्य परम्परागत वन निवासी अधि. - दो हज़ार छः के अन्तर्गत वनाधिकार दिये गये हों - सामुदायिक वनाधिकार हेतु ।छः-एक - अकृषिक भूमि - जलमग्न भूमि । ।छः-दो - अकृषिक भूमि - स्थल, सड़कें, रेलवे,भवन और ऐसी दूसरी भूमियां जोअकृषित उपयोगों के काम में लायी जाती हो। ।छः-तीन - कब्रिस्तान और श्मशान , ऐसेकब्रस्तानों और श्मशानों को छोड़ करजो खातेदारों की भूमि या आबादी क्षेत्र में स्थित हो। ।छः-चार - जो अन्य कारणों से अकृषित हो । ।यह खतौनी इलेक्ट्रोनिक डिलीवरी सिस्टम द्वारा तैयार की गयी है तथा डाटा डिजीटल हस्ताक्षर द्वारा हस्ताक्षरित है। |
नई दिल्ली, (भाषा)। शीर्ष भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल, पारूपल्ली कश्यप और अजय जयराम आज यहां हांगकांग सुपर सीरीज के दूसरे राउंड में बाहर हो गये जिससे भारत के लिये यह दिन निराशाजनक रहा। लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना को महिला एकल के दूसरे राउंड में दुनिया की पूर्व नंबर एक चीनी खिलाड़ी वांग लिन से 19 . 21 15 . 21 से जबकि जयराम को पुरूष एकल में दुनिया के नंबर एक ली चोंग वेई से 18 . 21 19 . 21 से हार का मुंह देखना पड़ा। पुरूष एकल वर्ग में कश्यप का अभियान भी निराशाजनक तरीके से समाप्त हो गया। कश्यप ने पेट में दर्द के कारण इंडोनेशिया के टामी सुगियार्तो के खिलाफ पहले गेम में 6 . 11 के स्कोर पर हटने का फैसला किया। कश्यप ने इससे पहले दुनिया के 10वें नंबर के डेनमार्क के खिलाड़ी जान जोर्गेनसन को हराकर उलटफेर किया था। दुनिया की तीसरे नंबर की खिलाड़ी साइना वांग के स्मैश का सामना नहीं कर सकी और दुनिया की मौजूदा 61 नंबर की खिलाड़ी से 37 मिनट में हार गयी। घुटने की समस्या के कारण साइना पिछले हफ्ते चाइना मास्टर्स नहीं खेल सकी थी। यहां वापसी करने के बाद वह अपनी सर्वश्रेष्" फार्म में नहीं दिख रही थी, जिसका अंदाजा इस बात से हो सकता है कि उन्होंने इस चीनी खिलाड़ी के खिलाफ 10 में से केवल पांच स्मैश विनर लगाये। वर्ष 2010 की विश्व चैम्पियन वांग का साइना के खिलाफ जीत का रिकार्ड 3 . 2 का हो गया है। उन्होंने इस भारतीय खिलाड़ी को नेट के करीब लाकर अपने स्मैश का बखूबी इस्तेमाल किया। अन्य भारतीयों में अश्विनी पोनप्पा और प्रदन्या गादरे की जोड़ी को महिला युगल स्पर्धा में थाईलैंड की दुआंगानोंग अरूनकेर्सोन और कुंचला वोराविचिचाईकुल से 17 . 21 18 . 21 से शिकस्त मिली। मिश्रित युगल में चीन की शीर्ष वरीय जोड़ी चेन जु और जिन मा ने भारत के प्रणव चोपड़ा और सिक्की रेड्डी की जोड़ी को 21 . 16 21 . 10 से मात दी। प्रणव को पुरूष युगल स्पर्धा में भी अपने जोड़ीदार अक्षय देवालकर के साथ हार का मुंह देखना पड़ा। इस भारतीय जोड़ी को युन काई और हेफेंग फु की चीन की दूसरी वरीय जोड़ी ने 23 . 21 19 . 21 21 . 6 से शिकस्त दी।
| नई दिल्ली, । शीर्ष भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल, पारूपल्ली कश्यप और अजय जयराम आज यहां हांगकांग सुपर सीरीज के दूसरे राउंड में बाहर हो गये जिससे भारत के लिये यह दिन निराशाजनक रहा। लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी साइना को महिला एकल के दूसरे राउंड में दुनिया की पूर्व नंबर एक चीनी खिलाड़ी वांग लिन से उन्नीस . इक्कीस पंद्रह . इक्कीस से जबकि जयराम को पुरूष एकल में दुनिया के नंबर एक ली चोंग वेई से अट्ठारह . इक्कीस उन्नीस . इक्कीस से हार का मुंह देखना पड़ा। पुरूष एकल वर्ग में कश्यप का अभियान भी निराशाजनक तरीके से समाप्त हो गया। कश्यप ने पेट में दर्द के कारण इंडोनेशिया के टामी सुगियार्तो के खिलाफ पहले गेम में छः . ग्यारह के स्कोर पर हटने का फैसला किया। कश्यप ने इससे पहले दुनिया के दसवें नंबर के डेनमार्क के खिलाड़ी जान जोर्गेनसन को हराकर उलटफेर किया था। दुनिया की तीसरे नंबर की खिलाड़ी साइना वांग के स्मैश का सामना नहीं कर सकी और दुनिया की मौजूदा इकसठ नंबर की खिलाड़ी से सैंतीस मिनट में हार गयी। घुटने की समस्या के कारण साइना पिछले हफ्ते चाइना मास्टर्स नहीं खेल सकी थी। यहां वापसी करने के बाद वह अपनी सर्वश्रेष्" फार्म में नहीं दिख रही थी, जिसका अंदाजा इस बात से हो सकता है कि उन्होंने इस चीनी खिलाड़ी के खिलाफ दस में से केवल पांच स्मैश विनर लगाये। वर्ष दो हज़ार दस की विश्व चैम्पियन वांग का साइना के खिलाफ जीत का रिकार्ड तीन . दो का हो गया है। उन्होंने इस भारतीय खिलाड़ी को नेट के करीब लाकर अपने स्मैश का बखूबी इस्तेमाल किया। अन्य भारतीयों में अश्विनी पोनप्पा और प्रदन्या गादरे की जोड़ी को महिला युगल स्पर्धा में थाईलैंड की दुआंगानोंग अरूनकेर्सोन और कुंचला वोराविचिचाईकुल से सत्रह . इक्कीस अट्ठारह . इक्कीस से शिकस्त मिली। मिश्रित युगल में चीन की शीर्ष वरीय जोड़ी चेन जु और जिन मा ने भारत के प्रणव चोपड़ा और सिक्की रेड्डी की जोड़ी को इक्कीस . सोलह इक्कीस . दस से मात दी। प्रणव को पुरूष युगल स्पर्धा में भी अपने जोड़ीदार अक्षय देवालकर के साथ हार का मुंह देखना पड़ा। इस भारतीय जोड़ी को युन काई और हेफेंग फु की चीन की दूसरी वरीय जोड़ी ने तेईस . इक्कीस उन्नीस . इक्कीस इक्कीस . छः से शिकस्त दी। |
श्री एकवीरा देवी मंदिर अमरावती सिटी में श्री अम्बादेवी मंदिर के पास स्थित है। 1960 में निर्मित मंदिर ऐसा माना जाता है कि अमरावती परमहंस के पुत्र श्री जनार्दन स्वामी द्वारा इसे निर्मित किया गया है। यह भी माना जाता है कि मंदिर में मौजूद देवी का मूर्ति शक्ति का अवतार है। मंदिर पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के बीच समान रूप से लोकप्रिय है।
मंदिर तक पहुँचने के लिए आगंतुक गंतव्य के लिये उपलब्ध टैक्सियों, बसों, ताँगा और ऑटो रिक्शा ले सकते हैं।
| श्री एकवीरा देवी मंदिर अमरावती सिटी में श्री अम्बादेवी मंदिर के पास स्थित है। एक हज़ार नौ सौ साठ में निर्मित मंदिर ऐसा माना जाता है कि अमरावती परमहंस के पुत्र श्री जनार्दन स्वामी द्वारा इसे निर्मित किया गया है। यह भी माना जाता है कि मंदिर में मौजूद देवी का मूर्ति शक्ति का अवतार है। मंदिर पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के बीच समान रूप से लोकप्रिय है। मंदिर तक पहुँचने के लिए आगंतुक गंतव्य के लिये उपलब्ध टैक्सियों, बसों, ताँगा और ऑटो रिक्शा ले सकते हैं। |
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नए कार्यकाल के पहले दिनों से, पश्चिमी प्रेस ने उनके लिए एक वास्तविक शिकार खोलाः एक दिन भी एक प्रभावशाली अमेरिकी, ब्रिटिश या सबसे खराब, सीड पोलिश टैब्लॉइड द्वारा सभी पापों का खुलासा नहीं करने के लिए जाता है। हालांकि, एक साल बाद, पश्चिम में पुतिन की छवि धीरे-धीरे शुरू होती है, लेकिन निश्चित रूप से 180 डिग्री पर प्रकट होती है। तो वह पश्चिमी निवासियों की नज़र में आज कौन है - "केजीबी एजेंट" या "असली हिपस्टर" - हम नीचे का विश्लेषण करते हैं।
पुतिन के अत्याचारी हिम्मत को उजागर करने वाले लेखों की धारा के बीच, विदेशी प्रेस में हाल ही में कुछ नया दिखाई दिया है - एस्क्वायर फैशन पत्रिका ने "व्लादिमीर पुतिन एक हिपस्टर बन रहा है" शीर्षक से सामग्री जारी की है। हास्य तरीके से लेखक राष्ट्रपति की उपस्थिति और व्यवहार का विश्लेषण करता है और दावा करता है कि पुतिन हमारे समय के सबसे उन्नत हिपस्टर हैं। यहाँ कुछ कारण हैंः
- वह फैशनेबल चश्मा पहनता है;
- वह हिपस्टर हेडफ़ोन का उपयोग करता है;
- वह डिजिटल दुनिया पर थूकता है और अपने प्रशासन के लिए एनालॉग टाइपराइटर खरीद रहा है;
- उसने एक अंगूठे को दिखाया जब एक नग्न फेमिन कार्यकर्ता उसके सामने कूद गया;
- वह पतला है, दर्शकों को झटका देना और गर्व करना पसंद करता है, आदि।
लेकिन यह खुद एस्क्वायर का लेख नहीं है जो उत्सुक है, लेकिन इसके साथी लेखकों की प्रतिक्रिया। अमेरिकन फ्लेवरवायर ने गुस्से में फटकार के साथ जवाब दिया, जहां लेखक ने मुंह पर फोम के साथ लगभग साबित कर दिया कि पुतिन एक हिपस्टर नहीं है। यदि केवल इसलिए कि वह यौन अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करता है और कहा जाता है कि देश के बाहर राजनीतिक असंतुष्टों पर नकेल कसी जा रही हैः
"यह दावा करना कि वह एक हिपस्टर है, केवल इस व्यक्ति के वास्तविक स्वभाव से ध्यान भटकाता है। "
सामान्य तौर पर, एक भ्रमपूर्ण लेख का दूसरे द्वारा उत्तर दिया गया था। हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हाल ही में पश्चिमी देशों द्वारा पुतिन की छवि "एस-हुसैन, एम। गद्दाफी और किम जोंग-उन के कॉमरेड-इन-आर्म्स" के रूप में, अक्सर पश्चिमी लोगों द्वारा अस्वीकार कर दी जाती है।
और अब, कोई मजाक नहींः हाल ही में मैं अमेरिकी रूढ़िवादियों के सामाजिक नेटवर्क की दुनिया में गोता लगाने के लिए हुआ - ये ऐसे लोग हैं जो शीत युद्ध के समय का सपना देखते हैं और संयुक्त राज्य की पूर्व शक्ति को वापस करने का सपना देखते हैं। रूसी, जैसा कि आप जानते हैं, वे आत्मा को खड़ा नहीं कर सकते हैं और अभी भी मानते हैं कि हम सभी कम्युनिस्ट हैं और उनकी पारंपरिक स्वतंत्रता को खतरा है।
तो, इस माहौल में (और यह बहुत विशाल है), बराक ओबामा एक दयनीय हारे हुए व्यक्ति के लिए पूजनीय हैं, और व्लादिमीर पुतिन लगभग आधुनिक राजनीति का एक मॉडल है। किसी ने पुतिन की तस्वीर और कैप्शन के साथ एक "डिमोटीवेटर" भी खींचाः "आप समझते हैं कि आप अब एक स्वतंत्र देश में नहीं रहते हैं जब व्लादिमीर पुतिन भी आपकी सरकार की तुलना में अधिक उचित लगने लगते हैं। "
इस तरह की तस्वीर कुछ ही समय में "पसंद" की एक उग्र मात्रा में प्राप्त हुई और अमेरिकियों की टिप्पणियों के साथ उग आई - जैसे किः
"मुझे विश्वास है कि पुतिन अब ओबामा से पहले से कहीं अधिक . . . "; "तुम्हें पता है, मैं पुतिन के लिए ओबामा का आदान-प्रदान करूंगा! " पागल, मैंने अपने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि मैं रूसी राष्ट्रपति को अपने लिए पसंद करूंगा! वास्तव में, पांच साल पहले मैं नाराज हो जाता अगर कोई मुझे इस तरह की पेशकश भी करता "; "शायद हमें पुतिन को चुराना चाहिए और हमें सेना में रखना चाहिए? )) "; "भले ही आप पुतिन की नीतियों से सहमत न हों, यह पहचानने लायक है कि वह मजबूत है और भीड़ की इच्छाओं का पालन नहीं करता है" "पुतिन की तुलना में ओबामा और भी बड़े कम्युनिस्ट हैं! बहुत कम से कम, पुतिन अपने देश के प्रति वफादार हैं, और अपने दुश्मनों के नेतृत्व का पालन नहीं कर रहे हैं। यहां तक कि रीगन भी इससे सहमत होंगे। मुझे लगता है कि अगर रीगन ओबामा को देखता है, तो वह तुरंत उसके पास सेनानियों को भेजेगा जैसे कि वह एक आतंकवादी था "; "पुतिन ने तुरंत पता लगा लिया कि ओबामा कौन हैं, और उन्हें खुद को बेवकूफ बनाने की अनुमति नहीं है"; "मुझे लगता है कि पुतिन ने ओबामा को बोस्टन के बारे में चेतावनी दी थी, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया, उसके बाद पुतिन को एहसास हुआ कि ओबामा एक पहचान है! "
मैं ध्यान देता हूं कि यह कुछ अपवाद नहीं है - मैं अमेरिकी सामाजिक नेटवर्क के विभिन्न कोनों में इसी तरह की टिप्पणियों को पूरा करता हूं।
एक राय है कि, शायद, मीडिया में नॉन-स्टॉप बदमाशी का वर्ष भी भयंकर पश्चिमी निवासियों के लिए बहुत अधिक है। कुछ महत्वपूर्ण बिंदु पारित किए गए हैं, और लोग रूसी तानाशाह की छवि पर संदेह करना शुरू करते हैं कि वह सक्रिय रूप से रोपण कर रहा है। एक्वायर में लेख एक ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे एक समाज, एक डरावनी कहानी से थक गया, खुद इसे हास्य रूप में जकड़ लेता है। इसका मतलब यह है कि पश्चिमी मीडिया प्रेमियों ने अपने ग्राहकों के सिर को कुछ हद तक गर्म कर दिया है।
पुतिन की नकारात्मक छवि के पतन की शुरुआत का एक और कारण यह है कि कोई भी वास्तव में पश्चिमी राजनीतिक अभिजात वर्ग के बीच उनका विरोध नहीं कर सकता है। हाल ही में G8 शिखर सम्मेलन इसकी स्पष्ट पुष्टि है। वैसे, वह रूसी नेता के साथ प्रतिस्पर्धा में असमर्थता के लिए पूरे पश्चिम को उजागर करने, विदेशी प्रेस के अभियोगों और आक्रामक कैरिकेचर के विस्फोट का कारण बन गया।
एडवर्ड स्नोडेन के साथ घोटाले ने भी संयुक्त राज्य में पुतिन की छवि को लोकप्रिय बनाने में योगदान दिया। यहां तक कि जो लोग भगोड़े को देशद्रोही मानते हैं कि पुतिन ने उन्हें देश से निष्कासित न करके साहस दिखाया, जो निश्चित रूप से वर्तमान यूरोपीय नेताओं में से किसी ने किया होगा।
हम अक्सर शिकायत करते हैं कि हमारा देश विदेशों में अपनी छवि मजबूत करने के लिए बहुत कम प्रयास करता है। हालांकि, यह छवि सीधे राज्य के पहले व्यक्ति की छवि से जुड़ी हुई है, और इसका व्यवहार मुख्य जानकारी है हथियार। जैसा कि अभ्यास से पता चलता है, कस्टम-निर्मित लेखों के टन को झेलने के लिए, आपको अपने आप को खुश करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, ताकि एक पश्चिमी पश्चिमी राजनीतिज्ञ के लोहे के पैटर्न के अनुकूल हो - बस अपने निर्णयों में दृढ़ रहें और पटाखा न बनें।
- लेखकः
- मूल स्रोतः
| राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नए कार्यकाल के पहले दिनों से, पश्चिमी प्रेस ने उनके लिए एक वास्तविक शिकार खोलाः एक दिन भी एक प्रभावशाली अमेरिकी, ब्रिटिश या सबसे खराब, सीड पोलिश टैब्लॉइड द्वारा सभी पापों का खुलासा नहीं करने के लिए जाता है। हालांकि, एक साल बाद, पश्चिम में पुतिन की छवि धीरे-धीरे शुरू होती है, लेकिन निश्चित रूप से एक सौ अस्सी डिग्री पर प्रकट होती है। तो वह पश्चिमी निवासियों की नज़र में आज कौन है - "केजीबी एजेंट" या "असली हिपस्टर" - हम नीचे का विश्लेषण करते हैं। पुतिन के अत्याचारी हिम्मत को उजागर करने वाले लेखों की धारा के बीच, विदेशी प्रेस में हाल ही में कुछ नया दिखाई दिया है - एस्क्वायर फैशन पत्रिका ने "व्लादिमीर पुतिन एक हिपस्टर बन रहा है" शीर्षक से सामग्री जारी की है। हास्य तरीके से लेखक राष्ट्रपति की उपस्थिति और व्यवहार का विश्लेषण करता है और दावा करता है कि पुतिन हमारे समय के सबसे उन्नत हिपस्टर हैं। यहाँ कुछ कारण हैंः - वह फैशनेबल चश्मा पहनता है; - वह हिपस्टर हेडफ़ोन का उपयोग करता है; - वह डिजिटल दुनिया पर थूकता है और अपने प्रशासन के लिए एनालॉग टाइपराइटर खरीद रहा है; - उसने एक अंगूठे को दिखाया जब एक नग्न फेमिन कार्यकर्ता उसके सामने कूद गया; - वह पतला है, दर्शकों को झटका देना और गर्व करना पसंद करता है, आदि। लेकिन यह खुद एस्क्वायर का लेख नहीं है जो उत्सुक है, लेकिन इसके साथी लेखकों की प्रतिक्रिया। अमेरिकन फ्लेवरवायर ने गुस्से में फटकार के साथ जवाब दिया, जहां लेखक ने मुंह पर फोम के साथ लगभग साबित कर दिया कि पुतिन एक हिपस्टर नहीं है। यदि केवल इसलिए कि वह यौन अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करता है और कहा जाता है कि देश के बाहर राजनीतिक असंतुष्टों पर नकेल कसी जा रही हैः "यह दावा करना कि वह एक हिपस्टर है, केवल इस व्यक्ति के वास्तविक स्वभाव से ध्यान भटकाता है। " सामान्य तौर पर, एक भ्रमपूर्ण लेख का दूसरे द्वारा उत्तर दिया गया था। हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि हाल ही में पश्चिमी देशों द्वारा पुतिन की छवि "एस-हुसैन, एम। गद्दाफी और किम जोंग-उन के कॉमरेड-इन-आर्म्स" के रूप में, अक्सर पश्चिमी लोगों द्वारा अस्वीकार कर दी जाती है। और अब, कोई मजाक नहींः हाल ही में मैं अमेरिकी रूढ़िवादियों के सामाजिक नेटवर्क की दुनिया में गोता लगाने के लिए हुआ - ये ऐसे लोग हैं जो शीत युद्ध के समय का सपना देखते हैं और संयुक्त राज्य की पूर्व शक्ति को वापस करने का सपना देखते हैं। रूसी, जैसा कि आप जानते हैं, वे आत्मा को खड़ा नहीं कर सकते हैं और अभी भी मानते हैं कि हम सभी कम्युनिस्ट हैं और उनकी पारंपरिक स्वतंत्रता को खतरा है। तो, इस माहौल में , बराक ओबामा एक दयनीय हारे हुए व्यक्ति के लिए पूजनीय हैं, और व्लादिमीर पुतिन लगभग आधुनिक राजनीति का एक मॉडल है। किसी ने पुतिन की तस्वीर और कैप्शन के साथ एक "डिमोटीवेटर" भी खींचाः "आप समझते हैं कि आप अब एक स्वतंत्र देश में नहीं रहते हैं जब व्लादिमीर पुतिन भी आपकी सरकार की तुलना में अधिक उचित लगने लगते हैं। " इस तरह की तस्वीर कुछ ही समय में "पसंद" की एक उग्र मात्रा में प्राप्त हुई और अमेरिकियों की टिप्पणियों के साथ उग आई - जैसे किः "मुझे विश्वास है कि पुतिन अब ओबामा से पहले से कहीं अधिक . . . "; "तुम्हें पता है, मैं पुतिन के लिए ओबामा का आदान-प्रदान करूंगा! " पागल, मैंने अपने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि मैं रूसी राष्ट्रपति को अपने लिए पसंद करूंगा! वास्तव में, पांच साल पहले मैं नाराज हो जाता अगर कोई मुझे इस तरह की पेशकश भी करता "; "शायद हमें पुतिन को चुराना चाहिए और हमें सेना में रखना चाहिए? )) "; "भले ही आप पुतिन की नीतियों से सहमत न हों, यह पहचानने लायक है कि वह मजबूत है और भीड़ की इच्छाओं का पालन नहीं करता है" "पुतिन की तुलना में ओबामा और भी बड़े कम्युनिस्ट हैं! बहुत कम से कम, पुतिन अपने देश के प्रति वफादार हैं, और अपने दुश्मनों के नेतृत्व का पालन नहीं कर रहे हैं। यहां तक कि रीगन भी इससे सहमत होंगे। मुझे लगता है कि अगर रीगन ओबामा को देखता है, तो वह तुरंत उसके पास सेनानियों को भेजेगा जैसे कि वह एक आतंकवादी था "; "पुतिन ने तुरंत पता लगा लिया कि ओबामा कौन हैं, और उन्हें खुद को बेवकूफ बनाने की अनुमति नहीं है"; "मुझे लगता है कि पुतिन ने ओबामा को बोस्टन के बारे में चेतावनी दी थी, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया, उसके बाद पुतिन को एहसास हुआ कि ओबामा एक पहचान है! " मैं ध्यान देता हूं कि यह कुछ अपवाद नहीं है - मैं अमेरिकी सामाजिक नेटवर्क के विभिन्न कोनों में इसी तरह की टिप्पणियों को पूरा करता हूं। एक राय है कि, शायद, मीडिया में नॉन-स्टॉप बदमाशी का वर्ष भी भयंकर पश्चिमी निवासियों के लिए बहुत अधिक है। कुछ महत्वपूर्ण बिंदु पारित किए गए हैं, और लोग रूसी तानाशाह की छवि पर संदेह करना शुरू करते हैं कि वह सक्रिय रूप से रोपण कर रहा है। एक्वायर में लेख एक ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे एक समाज, एक डरावनी कहानी से थक गया, खुद इसे हास्य रूप में जकड़ लेता है। इसका मतलब यह है कि पश्चिमी मीडिया प्रेमियों ने अपने ग्राहकों के सिर को कुछ हद तक गर्म कर दिया है। पुतिन की नकारात्मक छवि के पतन की शुरुआत का एक और कारण यह है कि कोई भी वास्तव में पश्चिमी राजनीतिक अभिजात वर्ग के बीच उनका विरोध नहीं कर सकता है। हाल ही में Gआठ शिखर सम्मेलन इसकी स्पष्ट पुष्टि है। वैसे, वह रूसी नेता के साथ प्रतिस्पर्धा में असमर्थता के लिए पूरे पश्चिम को उजागर करने, विदेशी प्रेस के अभियोगों और आक्रामक कैरिकेचर के विस्फोट का कारण बन गया। एडवर्ड स्नोडेन के साथ घोटाले ने भी संयुक्त राज्य में पुतिन की छवि को लोकप्रिय बनाने में योगदान दिया। यहां तक कि जो लोग भगोड़े को देशद्रोही मानते हैं कि पुतिन ने उन्हें देश से निष्कासित न करके साहस दिखाया, जो निश्चित रूप से वर्तमान यूरोपीय नेताओं में से किसी ने किया होगा। हम अक्सर शिकायत करते हैं कि हमारा देश विदेशों में अपनी छवि मजबूत करने के लिए बहुत कम प्रयास करता है। हालांकि, यह छवि सीधे राज्य के पहले व्यक्ति की छवि से जुड़ी हुई है, और इसका व्यवहार मुख्य जानकारी है हथियार। जैसा कि अभ्यास से पता चलता है, कस्टम-निर्मित लेखों के टन को झेलने के लिए, आपको अपने आप को खुश करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, ताकि एक पश्चिमी पश्चिमी राजनीतिज्ञ के लोहे के पैटर्न के अनुकूल हो - बस अपने निर्णयों में दृढ़ रहें और पटाखा न बनें। - लेखकः - मूल स्रोतः |
पिछोर। पिछोर के गौचौनी गांव में दो दिन से लापता किसान की शनिवार को स्वयं के कुंए में लाश उतराती मिली। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामला विवेचना में ले लिया हैं। जानकारी के अनुसार गौरीशंकर उम्र 50 साल पुत्र किशनलाल जोशी निवासी गौचौनी 2 जून की रात से लापता हो गया था। परिजनों ने हिम्मतपुर चौकी में गुमशुदगी दर्ज करा दी थी।
शनिवार को खेत स्थित कुंए में लाश उतराती मिली। बाहर निकाला तो मृतक की पहचान गौरीशंकर लोधी के रूप में हुई। पुलिस ने शव बाहर निकलवाकर पीएम कराकर मर्ग कायम कर लिया है।
| पिछोर। पिछोर के गौचौनी गांव में दो दिन से लापता किसान की शनिवार को स्वयं के कुंए में लाश उतराती मिली। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामला विवेचना में ले लिया हैं। जानकारी के अनुसार गौरीशंकर उम्र पचास साल पुत्र किशनलाल जोशी निवासी गौचौनी दो जून की रात से लापता हो गया था। परिजनों ने हिम्मतपुर चौकी में गुमशुदगी दर्ज करा दी थी। शनिवार को खेत स्थित कुंए में लाश उतराती मिली। बाहर निकाला तो मृतक की पहचान गौरीशंकर लोधी के रूप में हुई। पुलिस ने शव बाहर निकलवाकर पीएम कराकर मर्ग कायम कर लिया है। |
नयी दिल्ली : दिल्ली में विधानसभा चुनाव कब होंगे, ये अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन इस मुद्दे को लेकर राजनीति जरूर तेज हो गई है। एक तरफ आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर पर रैली कर भाजपा को दिल्ली में विधानसभा चुनाव कराने की चुनौती दे रहे हैं तो वहीं आम आदमी पार्टी की रैली में लोगों की संख्या देखकर कांग्रेस और भाजपा के पसीने छूटने लगी है। जहां कांग्रेस आम आदमी पार्टी की रैली को पब्लिसिटी स्टंट बता रही है तो वहीं भाजपा अरविंद केजरीवाल पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगा रही है। कांग्रेस ने जंतर-मंतर पर रविवार को हुई आम आदमी पार्टी की रैली को नाकाम करार देते हुए कहा है कि अरविंद केजरीवाल लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद एक बार फिर वह दिल्ली की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि रैली में बीड़ जुटाने के लिए पार्टी ने भाड़े पर कार्यकर्ताओं को जुटाया था।
केजरीवाल पर तीखा हमला बोलते हुए दिल्ली कांग्रेस के नेता मुकेश शर्मा ने कहा कि आप नेता ने दिल्ली में विधानसभा चुनाव कराने की मांग करने के लिए रैली की जबकि यहां के लोग सब्जियों, फलों और जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से हलकान हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि केजरीवाल को दिल्ली के लोगों से कोई समर्थन नहीं मिला। कांग्रेस के आरोप के मुताबिक रैली में ज्यादातर लोग दिल्ली और दूसरे राज्यों के 'आप' कार्यकर्ता थे।
वहीं, दूसरी ओर भाजपा केजरीवाल पर दिल्ली की जनता को भ्रमित करने का आरोप लगा रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि केजरीवाल को पहले दिल्लीवासियों के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि सरकार छोड़ते हुए विधानसभा भंग करने की मांग के बाद लोकसभा चुनाव हारने पर उन्होंने उपराज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने की संभावना तलाशने का अनुरोध क्यों किया था?
| नयी दिल्ली : दिल्ली में विधानसभा चुनाव कब होंगे, ये अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन इस मुद्दे को लेकर राजनीति जरूर तेज हो गई है। एक तरफ आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर पर रैली कर भाजपा को दिल्ली में विधानसभा चुनाव कराने की चुनौती दे रहे हैं तो वहीं आम आदमी पार्टी की रैली में लोगों की संख्या देखकर कांग्रेस और भाजपा के पसीने छूटने लगी है। जहां कांग्रेस आम आदमी पार्टी की रैली को पब्लिसिटी स्टंट बता रही है तो वहीं भाजपा अरविंद केजरीवाल पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगा रही है। कांग्रेस ने जंतर-मंतर पर रविवार को हुई आम आदमी पार्टी की रैली को नाकाम करार देते हुए कहा है कि अरविंद केजरीवाल लोकसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद एक बार फिर वह दिल्ली की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि रैली में बीड़ जुटाने के लिए पार्टी ने भाड़े पर कार्यकर्ताओं को जुटाया था। केजरीवाल पर तीखा हमला बोलते हुए दिल्ली कांग्रेस के नेता मुकेश शर्मा ने कहा कि आप नेता ने दिल्ली में विधानसभा चुनाव कराने की मांग करने के लिए रैली की जबकि यहां के लोग सब्जियों, फलों और जरूरी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से हलकान हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि केजरीवाल को दिल्ली के लोगों से कोई समर्थन नहीं मिला। कांग्रेस के आरोप के मुताबिक रैली में ज्यादातर लोग दिल्ली और दूसरे राज्यों के 'आप' कार्यकर्ता थे। वहीं, दूसरी ओर भाजपा केजरीवाल पर दिल्ली की जनता को भ्रमित करने का आरोप लगा रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि केजरीवाल को पहले दिल्लीवासियों के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि सरकार छोड़ते हुए विधानसभा भंग करने की मांग के बाद लोकसभा चुनाव हारने पर उन्होंने उपराज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने की संभावना तलाशने का अनुरोध क्यों किया था? |
नई दिल्ली, (भाषा)। राष्ट्रमंडल खेलों से ऐन पहले कुछ कोचों पर कथित यौन उत्पीडन के आरोपों के बीच सरकार ने आज अपनी सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि वह राष्ट्रीय खेल महासंघों के कामकाज से जरा भी संतुष्ट नहीं है। केन्दीय खेल मंत्री एम एस गिल ने कहा,सरकार राष्ट्रीय खेल महासंघों के कामकाज से संतुष्ट नहीं है क्योंकि किसी ने भी सरकार द्वारा तय दिशानिर्देशों के तहत अच्छे प्रशासन का पूर्ण अनुपालन नहीं किया। गिल ने आज लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा कि सरकार की ओर से हाल हमें कराये गये एक अध्ययन से पता चलता है कि अधिकांश खेल महासंघों के उचित चुनावी नियम नहीं हैं, जिनसे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सकें। उन्होंने कहा कि अधिकांश महासंघों के प्रबंधन में खिलाडियों के प्रतिनिधित्व के उद्देश्य से आरक्षण की व्यवस्था नहीं है। गिल ने कहा कि भारतीय बैडमिंटन संघ और भारतीय तैराकी महासंघ ने जून 2010 में चुनाव कराये, जो आयु और कार्यकाल के संबंध में सरकारी दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी दिशानिर्देशों का सही ढंग से पालन सुनिश्चित करने के लिए खेल महासंघों की वार्षिक मान्यता की प्रणाली कैलेण्डर वर्ष 2010 से शुरू किया गया और इस प्रणाली के तहत उन्हीं फेडरेशनों को वार्षिक मान्यता मिलती है, जो सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करती हैं। गिल ने कहा कि मौजूदा वर्ष में कुल 68 खेल महासंघों में से 42 को 2010 के लिए वार्षिक मान्यता प्रदान की गयी है। खेल मंत्री ने कहा कि कार्यकाल की सीमा तय करने के सरकारी दिशानिर्देश को लागू करने के बारे में अदालत के निर्देश पर सरकार ने भारतीय ओलंपिक संघ सहित सभी मान्यता प्राप्त खेल महासंघों के सदस्यों की आयु सीमा 70 वर्ष तय कर दी। उन्होंने कहा कि वित्तीय जवाबदेही के लिए सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों को सरकार की ओर से मिलने वाली अनुदान राशि के बारे में उपयोग प्रमाणपत्र देने की अनिवार्यता है। इस नियम का पालन नहीं करने वाले महासंघों को आगे अनुदान नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा एक करोड़ रूपये से अधिक का अनुदान पाने वाले महासंघों की भारत के नियंत्रण एवं महालेखापरीक्षक (कैग) आडिट करेंगे। गिल ने कहा कि सरकार ने दस लाख रूपये या इससे अधिक का सरकारी अनुदान वाले वाले राष्ट्रीय खेल महासंघों को सूचना के अधिकार कानून के तहत सार्वजनिक इकाई करार दिया है।
| नई दिल्ली, । राष्ट्रमंडल खेलों से ऐन पहले कुछ कोचों पर कथित यौन उत्पीडन के आरोपों के बीच सरकार ने आज अपनी सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि वह राष्ट्रीय खेल महासंघों के कामकाज से जरा भी संतुष्ट नहीं है। केन्दीय खेल मंत्री एम एस गिल ने कहा,सरकार राष्ट्रीय खेल महासंघों के कामकाज से संतुष्ट नहीं है क्योंकि किसी ने भी सरकार द्वारा तय दिशानिर्देशों के तहत अच्छे प्रशासन का पूर्ण अनुपालन नहीं किया। गिल ने आज लोकसभा में एक लिखित जवाब में कहा कि सरकार की ओर से हाल हमें कराये गये एक अध्ययन से पता चलता है कि अधिकांश खेल महासंघों के उचित चुनावी नियम नहीं हैं, जिनसे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सकें। उन्होंने कहा कि अधिकांश महासंघों के प्रबंधन में खिलाडियों के प्रतिनिधित्व के उद्देश्य से आरक्षण की व्यवस्था नहीं है। गिल ने कहा कि भारतीय बैडमिंटन संघ और भारतीय तैराकी महासंघ ने जून दो हज़ार दस में चुनाव कराये, जो आयु और कार्यकाल के संबंध में सरकारी दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी दिशानिर्देशों का सही ढंग से पालन सुनिश्चित करने के लिए खेल महासंघों की वार्षिक मान्यता की प्रणाली कैलेण्डर वर्ष दो हज़ार दस से शुरू किया गया और इस प्रणाली के तहत उन्हीं फेडरेशनों को वार्षिक मान्यता मिलती है, जो सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करती हैं। गिल ने कहा कि मौजूदा वर्ष में कुल अड़सठ खेल महासंघों में से बयालीस को दो हज़ार दस के लिए वार्षिक मान्यता प्रदान की गयी है। खेल मंत्री ने कहा कि कार्यकाल की सीमा तय करने के सरकारी दिशानिर्देश को लागू करने के बारे में अदालत के निर्देश पर सरकार ने भारतीय ओलंपिक संघ सहित सभी मान्यता प्राप्त खेल महासंघों के सदस्यों की आयु सीमा सत्तर वर्ष तय कर दी। उन्होंने कहा कि वित्तीय जवाबदेही के लिए सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों को सरकार की ओर से मिलने वाली अनुदान राशि के बारे में उपयोग प्रमाणपत्र देने की अनिवार्यता है। इस नियम का पालन नहीं करने वाले महासंघों को आगे अनुदान नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा एक करोड़ रूपये से अधिक का अनुदान पाने वाले महासंघों की भारत के नियंत्रण एवं महालेखापरीक्षक आडिट करेंगे। गिल ने कहा कि सरकार ने दस लाख रूपये या इससे अधिक का सरकारी अनुदान वाले वाले राष्ट्रीय खेल महासंघों को सूचना के अधिकार कानून के तहत सार्वजनिक इकाई करार दिया है। |
ओडिशा के जाजपुर रोड रेलवे स्टेशन पर बुधवार को एक मालगाड़ी से कटकर कम से कम चार मजदूरों की मौत हो गई और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
भुवनेश्वरः ओडिशा के जाजपुर रोड रेलवे स्टेशन पर बुधवार को एक मालगाड़ी से कटकर कम से कम चार मजदूरों की मौत हो गई और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
मजदूरों ने भारी बारिश से बचने के लिए खड़ी हुई मालगाड़ी के नीचे शरण ली थी कि तभी अचानक बिना इंजन के मालगाड़ी चल पड़ी और मजदूरों को उसके नीचे से निकलने का मौका नहीं मिला।
जाजपुर के स्थानीय लोगों ने हालांकि दावा किया कि दो और घायलों ने भी दम तोड़ दिया।
यह घटना ओडिशा के बालासोर जिले में भीषण रेल हादसे के पांच दिन बाद हुई, जिसमें 288 लोगों की मौत हो गई थी।
| ओडिशा के जाजपुर रोड रेलवे स्टेशन पर बुधवार को एक मालगाड़ी से कटकर कम से कम चार मजदूरों की मौत हो गई और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। भुवनेश्वरः ओडिशा के जाजपुर रोड रेलवे स्टेशन पर बुधवार को एक मालगाड़ी से कटकर कम से कम चार मजदूरों की मौत हो गई और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। मजदूरों ने भारी बारिश से बचने के लिए खड़ी हुई मालगाड़ी के नीचे शरण ली थी कि तभी अचानक बिना इंजन के मालगाड़ी चल पड़ी और मजदूरों को उसके नीचे से निकलने का मौका नहीं मिला। जाजपुर के स्थानीय लोगों ने हालांकि दावा किया कि दो और घायलों ने भी दम तोड़ दिया। यह घटना ओडिशा के बालासोर जिले में भीषण रेल हादसे के पांच दिन बाद हुई, जिसमें दो सौ अठासी लोगों की मौत हो गई थी। |
अखिल में व्याप्त सूत्र धर
- पन्त 'परिवर्तन' प्रस्तुत कविता में प्रथम चार चरणों और अन्त के दो चरणों का छंद एक ही है । बीच के पाँच चरणों का छंद दूसरा है ।
अतः छायावादी कविता में छंद विधान अति अनुपम तथा मौलिक है । भावनाओं की विविधता के साथ-साथ छंदों की विविधता भी दर्शनीय है ।
छायावादी कविता के छंदों की अन्य विशेषता संगीतात्मकता है । वस्तुतः काव्य और संगीत का अमर सम्बन्ध है । संगीत का आधार स्वर है, जो मात्रा और ताल द्वारा नियंत्रित रहता है । काव्य का आधार शब्द मात्रा और लय द्वारा नियन्त्रित रहता है । संगीत में नाद तत्व को प्रधान दी जाती और काव्य में शब्द 'को' जिसका प्रारण स्वर ही कहा जाएगा। इस प्रकार संगीत और काव्य का निकट सम्बन्ध स्वाभाविक ही है । भारतीय काव्य का विकास तो संगीत लहरी से सिञ्चित होकर ही हुआ । लोकगीतों में संगीत और काव्य की एक रूपता अब भी अक्षरग है । भक्तिकालीन कवियों की हृततन्त्री से निनादित वाणी संगीत माधुर्य से पूर्ण रूपेरण मिश्रत है । कबीर, सूर, मीरा, तुलसी आदि अमर कलाकारों के काव्य मे संगीत स्वर लहरी का मनोहारी माधुर्य रसना को ही रसवती नही करता वरन् श्रुत पुटों में पीयूष उडेलता है । भक्त कवियों के असंख्य एवं अनेक राग-रागनियां अपने अनुपम माधुर्य से बसुन्धरा को सिञ्चित करती हुई सी प्रतीत होती है । छायावादी युग में भी संगीतात्मकता के वह सरस एवं सजल अंकुर पुनः हरित होते हुए से प्रतीत होते हैं । निराला जी में भी यह कला चरमावस्था पर विचरण करती हुई प्रतीत होती है । पाश्चात्य साहित्य तथा बंगला साहित्य के सतत प्रभाव से हिन्दी काव्य में एक विशिष्ट सौन्दर्य का समावेश हुआ है जो संगीत के स्वर से भंकृत होकर हृदय के अंचल को स्पष्ट रूप से स्पर्श कर रहा है। अतएव हिन्दी के छायावादी कवि विभिन्न राग-रागनियों के गायक ही नहीं अपितु विधायक भी हैं । सिनैमा की गीतपद्धति कवि सम्मेलनों में सस्वर कविता पाठ ते छायावादी कवियों को संगीत की अधिकाधिक प्रोत्साहित किया है। आज छायावादी कवि कोरे कवि ही नहीं
: तथा, | अखिल में व्याप्त सूत्र धर - पन्त 'परिवर्तन' प्रस्तुत कविता में प्रथम चार चरणों और अन्त के दो चरणों का छंद एक ही है । बीच के पाँच चरणों का छंद दूसरा है । अतः छायावादी कविता में छंद विधान अति अनुपम तथा मौलिक है । भावनाओं की विविधता के साथ-साथ छंदों की विविधता भी दर्शनीय है । छायावादी कविता के छंदों की अन्य विशेषता संगीतात्मकता है । वस्तुतः काव्य और संगीत का अमर सम्बन्ध है । संगीत का आधार स्वर है, जो मात्रा और ताल द्वारा नियंत्रित रहता है । काव्य का आधार शब्द मात्रा और लय द्वारा नियन्त्रित रहता है । संगीत में नाद तत्व को प्रधान दी जाती और काव्य में शब्द 'को' जिसका प्रारण स्वर ही कहा जाएगा। इस प्रकार संगीत और काव्य का निकट सम्बन्ध स्वाभाविक ही है । भारतीय काव्य का विकास तो संगीत लहरी से सिञ्चित होकर ही हुआ । लोकगीतों में संगीत और काव्य की एक रूपता अब भी अक्षरग है । भक्तिकालीन कवियों की हृततन्त्री से निनादित वाणी संगीत माधुर्य से पूर्ण रूपेरण मिश्रत है । कबीर, सूर, मीरा, तुलसी आदि अमर कलाकारों के काव्य मे संगीत स्वर लहरी का मनोहारी माधुर्य रसना को ही रसवती नही करता वरन् श्रुत पुटों में पीयूष उडेलता है । भक्त कवियों के असंख्य एवं अनेक राग-रागनियां अपने अनुपम माधुर्य से बसुन्धरा को सिञ्चित करती हुई सी प्रतीत होती है । छायावादी युग में भी संगीतात्मकता के वह सरस एवं सजल अंकुर पुनः हरित होते हुए से प्रतीत होते हैं । निराला जी में भी यह कला चरमावस्था पर विचरण करती हुई प्रतीत होती है । पाश्चात्य साहित्य तथा बंगला साहित्य के सतत प्रभाव से हिन्दी काव्य में एक विशिष्ट सौन्दर्य का समावेश हुआ है जो संगीत के स्वर से भंकृत होकर हृदय के अंचल को स्पष्ट रूप से स्पर्श कर रहा है। अतएव हिन्दी के छायावादी कवि विभिन्न राग-रागनियों के गायक ही नहीं अपितु विधायक भी हैं । सिनैमा की गीतपद्धति कवि सम्मेलनों में सस्वर कविता पाठ ते छायावादी कवियों को संगीत की अधिकाधिक प्रोत्साहित किया है। आज छायावादी कवि कोरे कवि ही नहीं : तथा, |
प्रभावशाली वाणी होने के कारण लोगों से चौधरी मोहन जतुआ अपनी बात मनवा लेते हैं। प्रसिद्ध व्यक्तियों के चौधरी मोहन जतुआ सम्पर्क में आयेंगे। चौधरी मोहन जतुआ की ख्याति और प्रतिष्ठा सम्मान में बढ़ोत्तरी होगी। अपनी बुद्धिमत्ता के कारण चौधरी मोहन जतुआ प्रचुर लाभ पायेंगे। अपने व्यवसाय में चौधरी मोहन जतुआ अच्छा काम करेंगे। यात्रा से निश्चित लाभ प्राप्त करेंगे।
अपने कार्य क्षेत्र में चौधरी मोहन जतुआ महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त करेंगे। प्रतिष्ठा और सम्मान में प्रचुर वृद्धि होगी। इस अवधि में विपरीत परिस्थितियों से भी चौधरी मोहन जतुआ कुशलता से निपट सकेंगे। व्यापारी सहयोगियों या व्यवसायकि लोगों ग्राहकों के साथ चौधरी मोहन जतुआ के संबंध दिन व रात सुधरेंगे। समय के साथ साथ चौधरी मोहन जतुआ संग्रहशील होते जायेंगे और विलास सामग्री पर भी व्यय करेंगे। परिवार जनों का बर्ताव बहुत अच्छा रहेगा। व्यापारिक यात्राओं की संभावना है।
यह अच्छा समय नहीं है क्योंकि चौधरी मोहन जतुआ के भागीदार या सहयोगी चौधरी मोहन जतुआ को नीचा दिखाएगें। औरों की लापरवाही और असफलताओं से चौधरी मोहन जतुआ चिन्तित रहेंगे। रोजमर्रा के कामों में भी समस्याएं खड़ी हो सकती है। बेबुनियाद इल्जाम चौधरी मोहन जतुआ के सर मंढे जाएगें। छोटे मोटे झंझट या विवादों से बचें। स्त्री वर्ग से चौधरी मोहन जतुआ के संबंध अच्छे नहीं रहेंगे। जहां तक संभव हो फालतू की यात्रा कम करें। व्यापार के बड़े बड़े निर्णय लेने या विकास की योजनाओं पर ध्यान देने के लिए यह आवश्यक है कि चौधरी मोहन जतुआ पूरी जांच परख करके ही ऐसा करें।
अपनी उद्यम शक्ति और महती ऊर्जा के द्वारा चौधरी मोहन जतुआ किसी भी काम को बहुत अच्छे तरीके से पूरा करने में सक्षम रहेंगे। चौधरी मोहन जतुआ के उद्देश्य की दृढ़ता सराही जायेगी। अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के कारण विपरीत परिस्थिति में भी चौधरी मोहन जतुआ को मति भ्रम नहीं होगा और सही काम करेंगे। चौधरी मोहन जतुआ का सामाजिक दायरा बढ़ेगा और चौधरी मोहन जतुआ की प्रतिष्ठा में भी बढोत्तरी होगी। काफी भ्रमण करना पड़ेगा। भाई बहिनों से संबंध अच्छे रहेंगे। संचार माध्यम व्दारा चौधरी मोहन जतुआ को उत्साहवर्धक समाचार मिलेगा। व्यापार और लेन देन के सौदों की बहुत अच्छे रहने की संभावना है। अगर नौकरी में हैं तो शीघ्र पदोन्नति होनी चाहिये।
| प्रभावशाली वाणी होने के कारण लोगों से चौधरी मोहन जतुआ अपनी बात मनवा लेते हैं। प्रसिद्ध व्यक्तियों के चौधरी मोहन जतुआ सम्पर्क में आयेंगे। चौधरी मोहन जतुआ की ख्याति और प्रतिष्ठा सम्मान में बढ़ोत्तरी होगी। अपनी बुद्धिमत्ता के कारण चौधरी मोहन जतुआ प्रचुर लाभ पायेंगे। अपने व्यवसाय में चौधरी मोहन जतुआ अच्छा काम करेंगे। यात्रा से निश्चित लाभ प्राप्त करेंगे। अपने कार्य क्षेत्र में चौधरी मोहन जतुआ महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त करेंगे। प्रतिष्ठा और सम्मान में प्रचुर वृद्धि होगी। इस अवधि में विपरीत परिस्थितियों से भी चौधरी मोहन जतुआ कुशलता से निपट सकेंगे। व्यापारी सहयोगियों या व्यवसायकि लोगों ग्राहकों के साथ चौधरी मोहन जतुआ के संबंध दिन व रात सुधरेंगे। समय के साथ साथ चौधरी मोहन जतुआ संग्रहशील होते जायेंगे और विलास सामग्री पर भी व्यय करेंगे। परिवार जनों का बर्ताव बहुत अच्छा रहेगा। व्यापारिक यात्राओं की संभावना है। यह अच्छा समय नहीं है क्योंकि चौधरी मोहन जतुआ के भागीदार या सहयोगी चौधरी मोहन जतुआ को नीचा दिखाएगें। औरों की लापरवाही और असफलताओं से चौधरी मोहन जतुआ चिन्तित रहेंगे। रोजमर्रा के कामों में भी समस्याएं खड़ी हो सकती है। बेबुनियाद इल्जाम चौधरी मोहन जतुआ के सर मंढे जाएगें। छोटे मोटे झंझट या विवादों से बचें। स्त्री वर्ग से चौधरी मोहन जतुआ के संबंध अच्छे नहीं रहेंगे। जहां तक संभव हो फालतू की यात्रा कम करें। व्यापार के बड़े बड़े निर्णय लेने या विकास की योजनाओं पर ध्यान देने के लिए यह आवश्यक है कि चौधरी मोहन जतुआ पूरी जांच परख करके ही ऐसा करें। अपनी उद्यम शक्ति और महती ऊर्जा के द्वारा चौधरी मोहन जतुआ किसी भी काम को बहुत अच्छे तरीके से पूरा करने में सक्षम रहेंगे। चौधरी मोहन जतुआ के उद्देश्य की दृढ़ता सराही जायेगी। अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के कारण विपरीत परिस्थिति में भी चौधरी मोहन जतुआ को मति भ्रम नहीं होगा और सही काम करेंगे। चौधरी मोहन जतुआ का सामाजिक दायरा बढ़ेगा और चौधरी मोहन जतुआ की प्रतिष्ठा में भी बढोत्तरी होगी। काफी भ्रमण करना पड़ेगा। भाई बहिनों से संबंध अच्छे रहेंगे। संचार माध्यम व्दारा चौधरी मोहन जतुआ को उत्साहवर्धक समाचार मिलेगा। व्यापार और लेन देन के सौदों की बहुत अच्छे रहने की संभावना है। अगर नौकरी में हैं तो शीघ्र पदोन्नति होनी चाहिये। |
जेनिफर अब बिल्कुल अलग अंदाज में नज़र आने वाली हैं। इसमें वह मासूम और एक साधारण लड़की का किरदार निभाएंगी।
इसमें कोई दोराय नहीं है कि इस सीरीयल ने उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ा दी है और वे अब टीवी की सुपरस्टार बन गई हैं। टीवी एक्ट्रेस जेनिफर विंगेट के फैंस के लिए एक अच्छी खबर है।
| जेनिफर अब बिल्कुल अलग अंदाज में नज़र आने वाली हैं। इसमें वह मासूम और एक साधारण लड़की का किरदार निभाएंगी। इसमें कोई दोराय नहीं है कि इस सीरीयल ने उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ा दी है और वे अब टीवी की सुपरस्टार बन गई हैं। टीवी एक्ट्रेस जेनिफर विंगेट के फैंस के लिए एक अच्छी खबर है। |
श्रीगणेशाय नमः
ॐ तपःस्वाध्यायनिरतं तपस्वी वाग्विदां वरम् । नारदं परिपप्रच्छ वाल्मीकिर्मुनिपुङ्गवम् ॥ १ ॥ तपखी वाल्मीकिजीने तपस्या और स्वाध्यायमें लगे हुए विद्वानोंमें श्रेष्ठ मुनिवर नारदजीसे पूछाको न्वस्मिन्साम्प्रतं लोके गुणवान् कश्च वीर्यवान् । धर्मज्ञश्च कृतज्ञश्च सत्यवाक्यो दृढव्रतः ॥ २ [ हे मुने ! ] इस समय इस संसारमें गुणवान्, वीर्यवान्, धर्मज्ञ, उपकार माननेवाला, सत्यवक्ता और दृढ़प्रतिज्ञ कौन है ?
चारित्रेण च को युक्तः सर्वभूतेषु को हितः । विद्वान् कः कः समर्थच कञ्चैकप्रियदर्शनः ॥ ३ ॥ सदाचारसे युक्त, समस्त प्राणियोंका हितसाधक, विद्वान्, सामर्थ्यशाली और एकमात्र प्रियदर्शन ( सुन्दर ) पुरुष कौन है ?
आत्मवान्को जितक्रोधो द्युतिमान् कोऽनसूयकः । कस्य बिभ्यति देवाश्च जातरोषस्य संयुगे ॥ ४ ॥ मनपर अधिकार रखनेवाला, क्रोधको जीतनेवाला, कान्तिमान् और किसीकी भी निन्दा नहीं करनेवाला कौन है तथा संग्राममें कुपित होनेपर किससे देवता भी डरते हैं ?
एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं परं कौतूहलं हि मे । महर्षे त्वं समर्थोऽसि ज्ञातुमेवंविधं नरम् ॥५॥ हे महर्षे ! मैं यह सुनना चाहता हूँ, इसके लिये मुझे बड़ी उत्सुकता है । और आप ऐसे पुरुषको जाननेमें समर्थ हैं।
श्रुत्वा चैतत्रिलोकज्ञो वाल्मीकेर्नारदो वचः । श्रूयतामिति चामन्त्र्य प्रहृष्टो वाक्यमब्रवीत् ॥ ६ ॥ महर्षि वाल्मीकिके इस वचनको सुनकर तीनों लोकोंका ज्ञान रखनेवाले नारदजीने उन्हें सम्बोधित करके कहा, अच्छा, सुनिये, और फिर प्रसन्नतापूर्वक बोलेबहवो दुर्लभाश्चैव ये त्वया कीर्तिता गुणाः । मुने वक्ष्याम्यहं बुद्ध्वा तैर्युक्तः श्रूयतां नरः ॥ ७ ॥ हे मुने ! आपने जिन बहुत से दुर्लभ गुणोंका वर्णन किया है उनसे युक्त पुरुषको - मैं विचार करके कहता हूँ, आप सुनें ।
इक्ष्वाकुवंशप्रभवो रामो नाम जनैः श्रुतः । नियतात्मा महावीर्यो युतिमान् धृतिमान्वशी ॥ ८ ॥ इक्ष्वाकुके वंश में उत्पन्न हुए एक ऐसे पुरुष हैं, जो लोगोंमें | श्रीगणेशाय नमः ॐ तपःस्वाध्यायनिरतं तपस्वी वाग्विदां वरम् । नारदं परिपप्रच्छ वाल्मीकिर्मुनिपुङ्गवम् ॥ एक ॥ तपखी वाल्मीकिजीने तपस्या और स्वाध्यायमें लगे हुए विद्वानोंमें श्रेष्ठ मुनिवर नारदजीसे पूछाको न्वस्मिन्साम्प्रतं लोके गुणवान् कश्च वीर्यवान् । धर्मज्ञश्च कृतज्ञश्च सत्यवाक्यो दृढव्रतः ॥ दो [ हे मुने ! ] इस समय इस संसारमें गुणवान्, वीर्यवान्, धर्मज्ञ, उपकार माननेवाला, सत्यवक्ता और दृढ़प्रतिज्ञ कौन है ? चारित्रेण च को युक्तः सर्वभूतेषु को हितः । विद्वान् कः कः समर्थच कञ्चैकप्रियदर्शनः ॥ तीन ॥ सदाचारसे युक्त, समस्त प्राणियोंका हितसाधक, विद्वान्, सामर्थ्यशाली और एकमात्र प्रियदर्शन पुरुष कौन है ? आत्मवान्को जितक्रोधो द्युतिमान् कोऽनसूयकः । कस्य बिभ्यति देवाश्च जातरोषस्य संयुगे ॥ चार ॥ मनपर अधिकार रखनेवाला, क्रोधको जीतनेवाला, कान्तिमान् और किसीकी भी निन्दा नहीं करनेवाला कौन है तथा संग्राममें कुपित होनेपर किससे देवता भी डरते हैं ? एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं परं कौतूहलं हि मे । महर्षे त्वं समर्थोऽसि ज्ञातुमेवंविधं नरम् ॥पाँच॥ हे महर्षे ! मैं यह सुनना चाहता हूँ, इसके लिये मुझे बड़ी उत्सुकता है । और आप ऐसे पुरुषको जाननेमें समर्थ हैं। श्रुत्वा चैतत्रिलोकज्ञो वाल्मीकेर्नारदो वचः । श्रूयतामिति चामन्त्र्य प्रहृष्टो वाक्यमब्रवीत् ॥ छः ॥ महर्षि वाल्मीकिके इस वचनको सुनकर तीनों लोकोंका ज्ञान रखनेवाले नारदजीने उन्हें सम्बोधित करके कहा, अच्छा, सुनिये, और फिर प्रसन्नतापूर्वक बोलेबहवो दुर्लभाश्चैव ये त्वया कीर्तिता गुणाः । मुने वक्ष्याम्यहं बुद्ध्वा तैर्युक्तः श्रूयतां नरः ॥ सात ॥ हे मुने ! आपने जिन बहुत से दुर्लभ गुणोंका वर्णन किया है उनसे युक्त पुरुषको - मैं विचार करके कहता हूँ, आप सुनें । इक्ष्वाकुवंशप्रभवो रामो नाम जनैः श्रुतः । नियतात्मा महावीर्यो युतिमान् धृतिमान्वशी ॥ आठ ॥ इक्ष्वाकुके वंश में उत्पन्न हुए एक ऐसे पुरुष हैं, जो लोगोंमें |
ABP Live ( Image Source : Getty )
Divgi Torqtransfer IPO: ऑटो पार्ट्स बनने वाली मैन्युफैक्चरिंग कंपनी दिवगी टोर्क ट्रांसफर सिस्टम लिमिटेड का आईपीओ (Divgi Torqtransfer IPO) एक मार्च 2023 को खुलने जा रहा है. कंपनी ने आईपीओ के प्राइस बैंड का एलान कर दिया है. लेकिन इस आईपीओ के लॉन्च होने पर सबसे बड़ा फायदा होने वाला है इंफोसिस (Infosys) के को-फाउंडर ( Co-Founder) नंदन नीलेकणि (Nandan Nilekani) के फैमिली ट्रस्ट एनआरजेएन फैमिली ट्रस्ट (NRJN Family Trust) को.
इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि के फैमिली ट्रस्ट एनआरजेएन फैमिली ट्रस्ट ( NRJN Family Trust) के पास दिवगी टोर्क ट्रांसफर के 14. 4 लाख शेयर्स हैं. इस आईफीओ में नंदन नीलेकणि अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने जा रहे हैं. इस आईपीओ से नंदन नीलेकणि को अपने निवेश पर 370 फीसदी का रिटर्न मिलने वाला है. यानि निवेशक पर करीब 4 गुना का रिटर्न मिल सकता है.
दिवगी टोर्क ट्रांसफर का आईपीओ एक मार्च 2023 को निवेशकों के आवेदन के लिए खुलने जा रहा है और 3 मार्च तक आईपीओ खुला रहेगा. कंपनी ने 560 से 590 रुपये प्रति शेयर प्राइस बैंड फिक्स किया है. 28 फरवरी को एंकर निवेशक निवेश करेंगे.
कंपनी की योजना आईपीओ के जरिए 412 करोड़ रुपये जुटाने की है. जिसमें 180 करोड़ रुपये फ्रेश इश्यू से जुटाये जा रहे हैं. बाकी बचे 39. 34 लाख शेयर्स ऑफर फॉर सेल के तहत आईपीओ में बेचा जा रहा है जो मौजूदा निवेशक बेच रहे हैं.
ड्रॉफ्ट पेपर के मुताबिक नंदन नीलेकणि की फैमिली ट्रास्ट ने 125. 28 रुपये प्रति शेयर के भाव पर दिवगी टोर्क ट्रांसफर के शेयर्स खरीदे थे. अगर निवेशकों को 590 रुपये पर शेयर अलॉट किए जाते हैं तो 18 करोड़ रुपये के निवेश पर एनआरजेएन फैमिली ट्रस्ट को 67 करोड़ रुपये का मुनाफा होगा जो निवेश पर 370 फीसदी है. ट्रस्ट के पास कंपनी की 8. 7 फीसदी हिस्सेदारी है.
बहरहाल अडानी समूह और विदेशी निशकों के चलते शेयर बाजार का सेंटीमेंट बिगड़ा हुआ है. कई कंपनियां आईपीओ लाने के फैसले को टाल रही हैं उसके बावजूद नंदन नीलेकणि समर्थित दिवगी टोर्क ट्रांसफर अपना आईपीओ लॉन्च करने जा रही है.
| ABP Live Divgi Torqtransfer IPO: ऑटो पार्ट्स बनने वाली मैन्युफैक्चरिंग कंपनी दिवगी टोर्क ट्रांसफर सिस्टम लिमिटेड का आईपीओ एक मार्च दो हज़ार तेईस को खुलने जा रहा है. कंपनी ने आईपीओ के प्राइस बैंड का एलान कर दिया है. लेकिन इस आईपीओ के लॉन्च होने पर सबसे बड़ा फायदा होने वाला है इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि के फैमिली ट्रस्ट एनआरजेएन फैमिली ट्रस्ट को. इंफोसिस के को-फाउंडर नंदन नीलेकणि के फैमिली ट्रस्ट एनआरजेएन फैमिली ट्रस्ट के पास दिवगी टोर्क ट्रांसफर के चौदह. चार लाख शेयर्स हैं. इस आईफीओ में नंदन नीलेकणि अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने जा रहे हैं. इस आईपीओ से नंदन नीलेकणि को अपने निवेश पर तीन सौ सत्तर फीसदी का रिटर्न मिलने वाला है. यानि निवेशक पर करीब चार गुना का रिटर्न मिल सकता है. दिवगी टोर्क ट्रांसफर का आईपीओ एक मार्च दो हज़ार तेईस को निवेशकों के आवेदन के लिए खुलने जा रहा है और तीन मार्च तक आईपीओ खुला रहेगा. कंपनी ने पाँच सौ साठ से पाँच सौ नब्बे रुपयापये प्रति शेयर प्राइस बैंड फिक्स किया है. अट्ठाईस फरवरी को एंकर निवेशक निवेश करेंगे. कंपनी की योजना आईपीओ के जरिए चार सौ बारह करोड़ रुपये जुटाने की है. जिसमें एक सौ अस्सी करोड़ रुपये फ्रेश इश्यू से जुटाये जा रहे हैं. बाकी बचे उनतालीस. चौंतीस लाख शेयर्स ऑफर फॉर सेल के तहत आईपीओ में बेचा जा रहा है जो मौजूदा निवेशक बेच रहे हैं. ड्रॉफ्ट पेपर के मुताबिक नंदन नीलेकणि की फैमिली ट्रास्ट ने एक सौ पच्चीस. अट्ठाईस रुपयापये प्रति शेयर के भाव पर दिवगी टोर्क ट्रांसफर के शेयर्स खरीदे थे. अगर निवेशकों को पाँच सौ नब्बे रुपयापये पर शेयर अलॉट किए जाते हैं तो अट्ठारह करोड़ रुपये के निवेश पर एनआरजेएन फैमिली ट्रस्ट को सरसठ करोड़ रुपये का मुनाफा होगा जो निवेश पर तीन सौ सत्तर फीसदी है. ट्रस्ट के पास कंपनी की आठ. सात फीसदी हिस्सेदारी है. बहरहाल अडानी समूह और विदेशी निशकों के चलते शेयर बाजार का सेंटीमेंट बिगड़ा हुआ है. कई कंपनियां आईपीओ लाने के फैसले को टाल रही हैं उसके बावजूद नंदन नीलेकणि समर्थित दिवगी टोर्क ट्रांसफर अपना आईपीओ लॉन्च करने जा रही है. |
का क्रूर वेध हो तो हानि (घाटा, नुकसान) (iv) चार का क्रूर वेव हो तो रोग (बीमारी) (v) पाँचों का क्रूर वेध हो तो मृत्यु ।
यदि जन्म राशि - शनि, मंगल, राहु, केतु, सूर्य इन पांचों से वेध में आवे तो भी मृत्यु या मृत्यु सदृश कष्ट होता है ।
(ii) जैसे पाप ग्रहों से वेध का ऊपर कष्ट फल बताया गया है उसी प्रकार शुभ ग्रहों के वेध से शुभ फल होता है। जितने अधिक (जन्म नक्षत्र, जन्म राशि आदि का ) का जितने अधिक शुभ ग्रह (बृहस्पति आदि) से वेघ होगा उतना ही अधिक शुभ फल होगा ।
(iii) पाप ग्रह और शुभ ग्रह दोनों वेध करते हों तो तारतम्य करके फल कहना चाहिये ।
पापग्रह का वेध
१३. (i) साधारणतः जन्म नक्षत्र का वेध होने से भ्रम ( इघर उधर भटकना या मन के विचारों में ऊल जलूल व्यव स्था होना) नामक्षर के वेध से हानि, स्वर वेघ होने से हानि, तिथि वेध होने से भय और जन्म राशि के वेध होने से महाविघ्न-पाँचों का एक साथ वेव हो तो जातक जिन्दा नहीं रहता ।
(ii) अब युद्ध के समय (अर्थात् जिस आदमी का शुभा-शुभ विचार कर रहे हैं वह लड़ाई के मैदान में शस्त्र में लड़ रहा हो) तो एक) जन्म नाम, जन्म नक्षत्र आदि) के वेध से भय, दो के वेघ से धन-क्षय (यदि मुकदमा लड़ रहा हो) | का क्रूर वेध हो तो हानि चार का क्रूर वेव हो तो रोग पाँचों का क्रूर वेध हो तो मृत्यु । यदि जन्म राशि - शनि, मंगल, राहु, केतु, सूर्य इन पांचों से वेध में आवे तो भी मृत्यु या मृत्यु सदृश कष्ट होता है । जैसे पाप ग्रहों से वेध का ऊपर कष्ट फल बताया गया है उसी प्रकार शुभ ग्रहों के वेध से शुभ फल होता है। जितने अधिक का जितने अधिक शुभ ग्रह से वेघ होगा उतना ही अधिक शुभ फल होगा । पाप ग्रह और शुभ ग्रह दोनों वेध करते हों तो तारतम्य करके फल कहना चाहिये । पापग्रह का वेध तेरह. साधारणतः जन्म नक्षत्र का वेध होने से भ्रम नामक्षर के वेध से हानि, स्वर वेघ होने से हानि, तिथि वेध होने से भय और जन्म राशि के वेध होने से महाविघ्न-पाँचों का एक साथ वेव हो तो जातक जिन्दा नहीं रहता । अब युद्ध के समय तो एक) जन्म नाम, जन्म नक्षत्र आदि) के वेध से भय, दो के वेघ से धन-क्षय |
टीम इंडिया आखिरकार दिसंबर में बांग्लादेश के दौरे पर तीन मैचों की वनडे और दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगी, तीनों वनडे शेर-ए-बांग्ला नेशनल क्रिकेट स्टेडियम ढाका में खेले जाएंगे, जो 04, 07 और 10 दिसंबर को होगा, इसके बाद, पहला टेस्ट 14 दिसंबर से जहूर अहमद चौधरी स्टेडियम चटगांव में खेला जाएगा और दूसरा टेस्ट शेर-ए-बांग्ला नेशनल क्रिकेट स्टेडियम 22 से 27 दिसंबर तक खेला जाएगा.
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| टीम इंडिया आखिरकार दिसंबर में बांग्लादेश के दौरे पर तीन मैचों की वनडे और दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगी, तीनों वनडे शेर-ए-बांग्ला नेशनल क्रिकेट स्टेडियम ढाका में खेले जाएंगे, जो चार, सात और दस दिसंबर को होगा, इसके बाद, पहला टेस्ट चौदह दिसंबर से जहूर अहमद चौधरी स्टेडियम चटगांव में खेला जाएगा और दूसरा टेस्ट शेर-ए-बांग्ला नेशनल क्रिकेट स्टेडियम बाईस से सत्ताईस दिसंबर तक खेला जाएगा. ट्वीट देखेंः |
बालासोरः दुखद कोरोमंडल एक्सप्रेस दुर्घटना के बाद लापता हुए अपने प्रियजनों के भाग्य पर जवाब की प्रतीक्षा में परिवार आघात और अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के पंसकुरा के एसके शमशेर अली (50) पिछले तीन दिनों से अपने 19 वर्षीय बेटे एसके सयाल अली की तलाश कर रहे हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। कथित तौर पर सायल हावड़ा से ट्रेन में सवार हुआ था और चेन्नई जा रहा था जहां वह एक निजी फर्म में काम करता था।
शमशेर ने कहा कि उन्होंने बालासोर, सोरो और भद्रक के अस्पतालों के कई चक्कर लगाए लेकिन अभी तक अपने बेटे का पता नहीं चल पाया है। "अस्पतालों का दौरा करने के बाद, मैं बालासोर शहर के पास नॉर्थ उड़ीसा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (NOCCI) गया, जहाँ मृत यात्रियों के शव रखे गए हैं। मुझे मेरा बेटा भी वहाँ नहीं मिला," उन्होंने कहा।
इसी तरह, पांच दिहाड़ी मजदूरों का एक समूह - तापस हेम्ब्रम, गोपाल हेम्ब्रम, अतनु किस्कू, प्रसंजीत माझी और रोहित हेम्ब्रम काम के लिए चेन्नई जा रहे थे, जब उन पर हादसा हुआ। जबकि उनमें से चार का फकीर मोहन मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में इलाज चल रहा है, तापस अभी भी लापता है।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि लापता लोगों और फंसे हुए यात्रियों के परिवारों को सहायता प्रदान करने के लिए भुवनेश्वर के सत्य नगर में बीएमसी-आईसीओएमसी टॉवर में एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है।
वे सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर - 18003450061/1929 (24/7) पर संपर्क कर सकते हैं। वे मदद के लिए निम्नलिखित नोडल अधिकारी राजेश प्रधान- 6370946287, आशीष पात्रा- 7978095293, देबाशीष मिश्रा- 6370585221, दीपक कुमार राउत- 8249217415 एवं संदीप मोहराणा- 8847822559 पर भी संपर्क कर सकते हैं।
रविवार से भद्रक से चेन्नई के लिए एक स्पेशल ट्रेन चलनी शुरू हो गई है। कटक, भुवनेश्वर और मार्ग में सभी प्रमुख स्थानों पर इसका ठहराव है। ट्रेन बचाए गए यात्रियों को उनके संबंधित स्थानों पर ले जाएगी। इसमें मृतकों के शवों को ले जाने के लिए एक पार्सल वैन भी जुड़ी हुई है।
| बालासोरः दुखद कोरोमंडल एक्सप्रेस दुर्घटना के बाद लापता हुए अपने प्रियजनों के भाग्य पर जवाब की प्रतीक्षा में परिवार आघात और अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के पंसकुरा के एसके शमशेर अली पिछले तीन दिनों से अपने उन्नीस वर्षीय बेटे एसके सयाल अली की तलाश कर रहे हैं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। कथित तौर पर सायल हावड़ा से ट्रेन में सवार हुआ था और चेन्नई जा रहा था जहां वह एक निजी फर्म में काम करता था। शमशेर ने कहा कि उन्होंने बालासोर, सोरो और भद्रक के अस्पतालों के कई चक्कर लगाए लेकिन अभी तक अपने बेटे का पता नहीं चल पाया है। "अस्पतालों का दौरा करने के बाद, मैं बालासोर शहर के पास नॉर्थ उड़ीसा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री गया, जहाँ मृत यात्रियों के शव रखे गए हैं। मुझे मेरा बेटा भी वहाँ नहीं मिला," उन्होंने कहा। इसी तरह, पांच दिहाड़ी मजदूरों का एक समूह - तापस हेम्ब्रम, गोपाल हेम्ब्रम, अतनु किस्कू, प्रसंजीत माझी और रोहित हेम्ब्रम काम के लिए चेन्नई जा रहे थे, जब उन पर हादसा हुआ। जबकि उनमें से चार का फकीर मोहन मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में इलाज चल रहा है, तापस अभी भी लापता है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि लापता लोगों और फंसे हुए यात्रियों के परिवारों को सहायता प्रदान करने के लिए भुवनेश्वर के सत्य नगर में बीएमसी-आईसीओएमसी टॉवर में एक नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। वे सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर - एक आठ शून्य शून्य तीन चार पाँच शून्य शून्य छः एक/एक हज़ार नौ सौ उनतीस पर संपर्क कर सकते हैं। वे मदद के लिए निम्नलिखित नोडल अधिकारी राजेश प्रधान- छः तीन सात शून्य नौ चार छः दो आठ सात, आशीष पात्रा- सात नौ सात आठ शून्य नौ पाँच दो नौ तीन, देबाशीष मिश्रा- छः तीन सात शून्य पाँच आठ पाँच दो दो एक, दीपक कुमार राउत- आठ दो चार नौ दो एक सात चार एक पाँच एवं संदीप मोहराणा- आठ आठ चार सात आठ दो दो पाँच पाँच नौ पर भी संपर्क कर सकते हैं। रविवार से भद्रक से चेन्नई के लिए एक स्पेशल ट्रेन चलनी शुरू हो गई है। कटक, भुवनेश्वर और मार्ग में सभी प्रमुख स्थानों पर इसका ठहराव है। ट्रेन बचाए गए यात्रियों को उनके संबंधित स्थानों पर ले जाएगी। इसमें मृतकों के शवों को ले जाने के लिए एक पार्सल वैन भी जुड़ी हुई है। |
नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट कंपनी पेटीएम ने अपने प्लेटफार्म पर ट्रेन टिकट बुकिंग पर सभी लेन-देन शुल्क, पेमेंट गेटवे और सेवा शुल्क नहीं वसूलने की पेशकश की है।
कंपनी ने बुधवार को यहां जारी बयान में कहा कि पीएनआर स्टेटस चैक करने से लेकर टिकट बुक करना सभी काम एक मिनट के अंदर हो जाएंगे और टिकट रद्द कराने पर रिफंड भी तत्काल मिल जाएगा।
पेटीएम ने कहा कि ट्रेन टिकट बुकिंग के लिए सबसे पंसदीदा प्लेटफार्म बनने की दिशा में नई पेशकश की गई है।
| नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट कंपनी पेटीएम ने अपने प्लेटफार्म पर ट्रेन टिकट बुकिंग पर सभी लेन-देन शुल्क, पेमेंट गेटवे और सेवा शुल्क नहीं वसूलने की पेशकश की है। कंपनी ने बुधवार को यहां जारी बयान में कहा कि पीएनआर स्टेटस चैक करने से लेकर टिकट बुक करना सभी काम एक मिनट के अंदर हो जाएंगे और टिकट रद्द कराने पर रिफंड भी तत्काल मिल जाएगा। पेटीएम ने कहा कि ट्रेन टिकट बुकिंग के लिए सबसे पंसदीदा प्लेटफार्म बनने की दिशा में नई पेशकश की गई है। |
Viral News: इन दिनों दुनिया की सबसे छोटी गाय को देखने की एक होड़ लगी हुई है। आपको बता दें कि दुनिया की सबसे छोटी गाय केरल के कोझीकोड के तहत आने वाले गांव अथोली में पाई गई है।
Viral News: इन दिनों दुनिया की सबसे छोटी गाय को देखने की एक होड़ लगी हुई है। आपको बता दें कि दुनिया की सबसे छोटी गाय केरल के कोझीकोड के तहत आने वाले गांव अथोली में पाई गई है। आपको बता दें कि इस गाय का नाम मानिक्यम है और इसकी उम्र 6 साल है और यह बस 61. 5 सेमी लंबी है। इस गाय को पेशे से एक किसान और पर्यावरणविद एनवी बालाकृष्णन के घर में पाला पोसा जाता है। गिनीज रिकॉर्ड में शामिल सबसे छोटी गाय का नाम मानिक्यम है।
बालाकृष्णन ने बताया कि इस गाय का जन्म बाकी सामान्य गायों की तरह ही हुआ है। लेकिन दो फिट से ज्यादा इसकी लंबाई बढ़ नहीं पाई। बालाकृष्णन इस गाय को पांच साल पहले घर लेकर आए थे। तब से वो हमेशा मानिक्यम की खासियत को समझने लगे थे। इसलिए उन्होंने मानिक्यम को बहुत ही प्यार से पाला पोसा।
उसकी स्पेशल केयर की और अब वो उनके घर के एक सदस्य की ही तरह हो गई है। बालकृष्णन के मुताबिक मानिक्यम बहुत ही महत्वपूर्ण और इंटेलीजेंट गाय है। वहीं डॉक्टर प्रिया नायर जो पेशे से एक वेटनेरियन हैं उन्होंने इस गाय के बारे में और विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने आज तक कभी भी ऐसी स्थिति नहीं देखी।
उन्होंने इस गाय को दुनिया का एक असाधारण जानवर करार दिया है। एनवी बालाकृष्णन के बेटे अक्षय नमबुकुडी ने कहा कि मानिक्यम अब एक लोकल सेलिब्रिटी बन गई है। लोगों में उसके साथ हमेशा फोटोग्राफ खिंचाने का क्रेज रहता है।
मानिक्यम जैसी गाय पहले कभी नहीं देखी गई है। केरल के वेचुर में सबसे पहले मानिक्यम को पाया गया था। वेचुर कोट्टायम के तहत आता है। तब इसे मानिक्यम को वेचुर प्रजाति की गाय भी कहा जाने लगा है। यह दुनिया की सबसे छोटी गाय है। वेचुर गाय से मिलने वाला दूध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट क्वालिटी का माना जाता है।
इस गाय को पालने वाले शिकार एग्रो फार्म ने इस गाय को जन्म के बाद नौगाव के एक खेत से खरीदा था। फॉर्म के मैनेजर ने बताया कि कोरोना वायरस लॉकडाउन के बावजूद लोग सैकड़ों किलोमीटर का सफर करके इस गाय को देखने आ रहे हैं। अधिकतर लोग रानी के साथ सेल्फी लेना चाहते हैं। अकेले तीन दिनों में 15,000 से ज्यादा लोग रानी को देखने आए हैं। ईमानदारी से कहूं तो हम थक गए हैं।
वेचुर गाय कुछ साल पहले तक यहां से गायब हो गई थी क्योंकि लोग ज्यादा से ज्यादा क्रॉस ब्रीडिंग को अपनाने लगे थे। लेकिन कई लोग इस बात पर हैरान हैं कि अचानक गायब हो चुकी प्रजाति फिर से कैसे सामने आ गई है। इन सबके पीछे दरअसल डॉक्टर सोसाम्मा आईपे का योगदान है।
| Viral News: इन दिनों दुनिया की सबसे छोटी गाय को देखने की एक होड़ लगी हुई है। आपको बता दें कि दुनिया की सबसे छोटी गाय केरल के कोझीकोड के तहत आने वाले गांव अथोली में पाई गई है। Viral News: इन दिनों दुनिया की सबसे छोटी गाय को देखने की एक होड़ लगी हुई है। आपको बता दें कि दुनिया की सबसे छोटी गाय केरल के कोझीकोड के तहत आने वाले गांव अथोली में पाई गई है। आपको बता दें कि इस गाय का नाम मानिक्यम है और इसकी उम्र छः साल है और यह बस इकसठ. पाँच सेमी लंबी है। इस गाय को पेशे से एक किसान और पर्यावरणविद एनवी बालाकृष्णन के घर में पाला पोसा जाता है। गिनीज रिकॉर्ड में शामिल सबसे छोटी गाय का नाम मानिक्यम है। बालाकृष्णन ने बताया कि इस गाय का जन्म बाकी सामान्य गायों की तरह ही हुआ है। लेकिन दो फिट से ज्यादा इसकी लंबाई बढ़ नहीं पाई। बालाकृष्णन इस गाय को पांच साल पहले घर लेकर आए थे। तब से वो हमेशा मानिक्यम की खासियत को समझने लगे थे। इसलिए उन्होंने मानिक्यम को बहुत ही प्यार से पाला पोसा। उसकी स्पेशल केयर की और अब वो उनके घर के एक सदस्य की ही तरह हो गई है। बालकृष्णन के मुताबिक मानिक्यम बहुत ही महत्वपूर्ण और इंटेलीजेंट गाय है। वहीं डॉक्टर प्रिया नायर जो पेशे से एक वेटनेरियन हैं उन्होंने इस गाय के बारे में और विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने आज तक कभी भी ऐसी स्थिति नहीं देखी। उन्होंने इस गाय को दुनिया का एक असाधारण जानवर करार दिया है। एनवी बालाकृष्णन के बेटे अक्षय नमबुकुडी ने कहा कि मानिक्यम अब एक लोकल सेलिब्रिटी बन गई है। लोगों में उसके साथ हमेशा फोटोग्राफ खिंचाने का क्रेज रहता है। मानिक्यम जैसी गाय पहले कभी नहीं देखी गई है। केरल के वेचुर में सबसे पहले मानिक्यम को पाया गया था। वेचुर कोट्टायम के तहत आता है। तब इसे मानिक्यम को वेचुर प्रजाति की गाय भी कहा जाने लगा है। यह दुनिया की सबसे छोटी गाय है। वेचुर गाय से मिलने वाला दूध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट क्वालिटी का माना जाता है। इस गाय को पालने वाले शिकार एग्रो फार्म ने इस गाय को जन्म के बाद नौगाव के एक खेत से खरीदा था। फॉर्म के मैनेजर ने बताया कि कोरोना वायरस लॉकडाउन के बावजूद लोग सैकड़ों किलोमीटर का सफर करके इस गाय को देखने आ रहे हैं। अधिकतर लोग रानी के साथ सेल्फी लेना चाहते हैं। अकेले तीन दिनों में पंद्रह,शून्य से ज्यादा लोग रानी को देखने आए हैं। ईमानदारी से कहूं तो हम थक गए हैं। वेचुर गाय कुछ साल पहले तक यहां से गायब हो गई थी क्योंकि लोग ज्यादा से ज्यादा क्रॉस ब्रीडिंग को अपनाने लगे थे। लेकिन कई लोग इस बात पर हैरान हैं कि अचानक गायब हो चुकी प्रजाति फिर से कैसे सामने आ गई है। इन सबके पीछे दरअसल डॉक्टर सोसाम्मा आईपे का योगदान है। |
आग की घटना को लेकर एसएस तुली ने कहा, 'करीब 30 फायर टेंडर घटनास्थल पर हैं। आग पर काबू पा लिया गया है। आग लगने की वजह का अभी तक पता नहीं चल पाई है।
नई दिल्ली। दिल्ली के तुगलकाबाद गांव में भीषण आग लगने से 200 झुग्गियां जलकर खाक हो गई हैं। झुग्गियों के बीच एक के बाद एक सिलेंडर फटने से आग तेजी से फैली, जिसके बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल हो गया। हालात को काबू पाने के लिए मौके पर दमकल की 30 गाड़ियां पहुंची थी। बड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
आग बुझाने के दौरान दिल्ली साउथ ईस्ट के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया था कि हमें लगभग 1 बजे आग लगने की सूचना मिली थी। 18-20 फायर टेंडर मौके पर हैं। दमकल की कार्रवाई जारी है। अब तक कोई हताहत नहीं हुआ है। । बाद में दमकल को कई और गाड़ियां मंगानी पड़ी. इसके बाद आगू पर काबू पाया जा सका।
दक्षिणी दिल्ली जोन के डिप्टी चीफ फायर ऑफिसर एसएस तुली ने कहा कि तुगलकाबाद गांव में बड़े पैमाने पर लगी आग को बुझाने के लिए करीब 30 फायर टेंडर इलाके में भेजे गए थे। फिलहाल आग अब काबू में है और दमकल के अधिकारी आग लगने के कारण का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं।
| आग की घटना को लेकर एसएस तुली ने कहा, 'करीब तीस फायर टेंडर घटनास्थल पर हैं। आग पर काबू पा लिया गया है। आग लगने की वजह का अभी तक पता नहीं चल पाई है। नई दिल्ली। दिल्ली के तुगलकाबाद गांव में भीषण आग लगने से दो सौ झुग्गियां जलकर खाक हो गई हैं। झुग्गियों के बीच एक के बाद एक सिलेंडर फटने से आग तेजी से फैली, जिसके बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल हो गया। हालात को काबू पाने के लिए मौके पर दमकल की तीस गाड़ियां पहुंची थी। बड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग बुझाने के दौरान दिल्ली साउथ ईस्ट के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया था कि हमें लगभग एक बजे आग लगने की सूचना मिली थी। अट्ठारह-बीस फायर टेंडर मौके पर हैं। दमकल की कार्रवाई जारी है। अब तक कोई हताहत नहीं हुआ है। । बाद में दमकल को कई और गाड़ियां मंगानी पड़ी. इसके बाद आगू पर काबू पाया जा सका। दक्षिणी दिल्ली जोन के डिप्टी चीफ फायर ऑफिसर एसएस तुली ने कहा कि तुगलकाबाद गांव में बड़े पैमाने पर लगी आग को बुझाने के लिए करीब तीस फायर टेंडर इलाके में भेजे गए थे। फिलहाल आग अब काबू में है और दमकल के अधिकारी आग लगने के कारण का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। |
India News (इंडिया न्यूज़), Uttarakhand Weather Update: उत्तराखंड की राजधानी दून सहित नैनीताल, पौड़ी, टिहरी, चमोली व बागेश्वर में कल भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। जिसे देखते हुए मौसम विभाग की ओर से ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार 6 जुलाई को प्रदेश के इन जनपदों में भारी बारिश के आसार हैं। साथ ही पहाड़ी श्रेत्रों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ बिजली चमकने व हवा के साथ तीव्र से अति तीव्र बौछार पड़ सकती है।
भारी बारिश के साथ ही तेज हवाए चलने की भी संभावना मौसम विभाग की ओर से जताई गई है। मौसम विभाग के निदेशक विक्रम सिहं के अनुसार कल देहरादून, टिहरी और पौडी जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। इन जिलों के लिए 'ऑरेंज' अलर्ट जारी किया गया है। देहरादून में आज करीब 90 मिमी बारिश दर्ज की गई। नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोग रहें सतर्क रहने को कहा है।
इसके साथ ही उत्तराखंड के अन्य जुलों में आकाशीय बिजली चमकने और तेज बौछार की कई दौर की बारिश होने के आसार है। इलके अलावा विभाग ने ने संवेदनशील इलाकों में हल्के मध्यम भूस्खलन और चट्टान गिरने से कहीं-कहीं सड़कें और राजमार्गा के अवरुद्ध होने की संभावना जताई है।
उत्तराखंड के कई जिलों में आज आकाशीय बिजली चमकने और तेज बौछार की कई दौर की बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। जिससे की संवेदनशील इलाकों में हल्के से मध्यम भूस्खलन और चट्टान गिरने से कहीं-कहीं सड़कें और राजमार्गों के अवरुद्ध हुई है। बता दे की बीते दिन ऋषिकेश बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग छिनका के पास मलवा आने से राजमार्ग अवरूद्ध हो गया है। विभाग का कहना है कि प्रदेश में खराब मौसम के कारण कई रास्तें बंद होने की संभावना है। जिससे की चारधाम यात्रा पर भी इसका असर देखने को मिलेगा।
| India News , Uttarakhand Weather Update: उत्तराखंड की राजधानी दून सहित नैनीताल, पौड़ी, टिहरी, चमोली व बागेश्वर में कल भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। जिसे देखते हुए मौसम विभाग की ओर से ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार छः जुलाई को प्रदेश के इन जनपदों में भारी बारिश के आसार हैं। साथ ही पहाड़ी श्रेत्रों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ बिजली चमकने व हवा के साथ तीव्र से अति तीव्र बौछार पड़ सकती है। भारी बारिश के साथ ही तेज हवाए चलने की भी संभावना मौसम विभाग की ओर से जताई गई है। मौसम विभाग के निदेशक विक्रम सिहं के अनुसार कल देहरादून, टिहरी और पौडी जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। इन जिलों के लिए 'ऑरेंज' अलर्ट जारी किया गया है। देहरादून में आज करीब नब्बे मिमी बारिश दर्ज की गई। नदी-नालों के किनारे रहने वाले लोग रहें सतर्क रहने को कहा है। इसके साथ ही उत्तराखंड के अन्य जुलों में आकाशीय बिजली चमकने और तेज बौछार की कई दौर की बारिश होने के आसार है। इलके अलावा विभाग ने ने संवेदनशील इलाकों में हल्के मध्यम भूस्खलन और चट्टान गिरने से कहीं-कहीं सड़कें और राजमार्गा के अवरुद्ध होने की संभावना जताई है। उत्तराखंड के कई जिलों में आज आकाशीय बिजली चमकने और तेज बौछार की कई दौर की बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। जिससे की संवेदनशील इलाकों में हल्के से मध्यम भूस्खलन और चट्टान गिरने से कहीं-कहीं सड़कें और राजमार्गों के अवरुद्ध हुई है। बता दे की बीते दिन ऋषिकेश बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग छिनका के पास मलवा आने से राजमार्ग अवरूद्ध हो गया है। विभाग का कहना है कि प्रदेश में खराब मौसम के कारण कई रास्तें बंद होने की संभावना है। जिससे की चारधाम यात्रा पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। |
-पुरुष क्या पुरुषार्थ हुआ न जो, हृदयकी सब दुर्बलता तजो । प्रवल जो तुम में पुरुषार्थ हो, सुलभ कौन तुम्हें न पदार्थ हो ? प्रगति के पथमें विचरो उठो, पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठा ॥१॥ •न पुरुषार्थ बिना कुछ स्वार्थ है, न पुरुषार्थ बिना परमार्थ है । समझ लो यह बात यथार्थ है, कि पुरुषार्थ वही पुरुषार्थ है। भुवनमें सुख शांति भरो उठो, पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठो ॥२॥ न पुरुषार्थ बिना वह स्वर्ग है, न पुरुषार्थ बिना अपवर्ग है । न पुरुषार्थ चिना क्रियता कहीं, न पुरुषार्थ बिना प्रियता कहीं । सफलता वर-तुल्प बरो उठो, पुरुष हो पुरुषार्थ करो, उठो ॥३॥ न जिसमें कुछ पौरुप हो यहां, सफलता वह पा सकता कहां ? ● अरु पार्थ भयंकर पाप है, न उस में यश है न प्रताप है। ल कृमि कीट-समान मरो, उठो, पुरुप हो, पुरुषार्थ करो, उठो ॥४॥ मैनुज जीवन में जय के लिये, प्रथम ही दृढ़ पौरुष चाहिए । विजय तो पुरुषार्थ बिना कहां, कठिन है चिरजीवन भी यहां । भय नहीं, भवसिन्धु तगे, उठो, पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठो ॥५॥ यदि अनिष्ट अड़े अड़ते रहें, विपुल विघ्न पड़ें पड़ते रहें । हृदय में पुरुषार्थ रहे भरा, जलधि क्या, नभ क्या. फिर क्या धरा ? दृढ़ रहो, ध्रुव धैय्ये धरो, उठो, पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठो ॥ ६ ॥ यदि अभीष्ट तुम्हें निज सत्व है, प्रिय तुम्हें यदि मान महत्व है यदि तुम्हें रखना निल नाम है, जगत में करना कुछ काम है रा, उठो, पुरुष हा पुगे, उठा
प्रकट नित्य करो पुरुषार्थ को, हृदय से तज दो सब स्वार्थ को । यदि कहीं तुमसे परमार्थ हो, यह विनश्वर देह कृतार्थ हो । सदय हो, पर दुःख द्दरो, उठो, पुरुष हो, पुरुषार्थ करो उठो।। ८ ।।
( मैथिलीशरण गुप्त )
अवतो उठो क्यों पड़ रहे हो व्यर्थ सोच विचार में । सुख पूर्ण जीना भी कठिन है श्रम बिना संसार में ।। भग्न मनोरथ होकर भी तू श्रम करना मत छोड़ । सारी विषय वासनाओं से अपना मुखले मोड़ ।।
उद्योग ।
उद्यम कीजै जगत में मिले भाग्य अनुसार । मोती मिले कि शंख कर, सागर गोता मार ।। उद्यम ते संपति घर आये, उद्यम करे सपूत कहावे । उद्यम करें संग सब लागे, उद्यम ते जगमें जस जागे । समुद्र उतरि उद्यम ते जइये उद्यन ते परमेश्वर पइये । बिनु उद्यम नहीं पाइये, कर्म लिखे हूं जौन । बिनु जल पान न जाइ है, प्यास जंग तट भौन ॥ २ ॥ उद्यम में निद्रा नहिं नहिं सुख दारिद नांहि । लोभी उर संतोष नहि, धीर अबुध में नांहि ।।
गिरधर दास ) | -पुरुष क्या पुरुषार्थ हुआ न जो, हृदयकी सब दुर्बलता तजो । प्रवल जो तुम में पुरुषार्थ हो, सुलभ कौन तुम्हें न पदार्थ हो ? प्रगति के पथमें विचरो उठो, पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठा ॥एक॥ •न पुरुषार्थ बिना कुछ स्वार्थ है, न पुरुषार्थ बिना परमार्थ है । समझ लो यह बात यथार्थ है, कि पुरुषार्थ वही पुरुषार्थ है। भुवनमें सुख शांति भरो उठो, पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठो ॥दो॥ न पुरुषार्थ बिना वह स्वर्ग है, न पुरुषार्थ बिना अपवर्ग है । न पुरुषार्थ चिना क्रियता कहीं, न पुरुषार्थ बिना प्रियता कहीं । सफलता वर-तुल्प बरो उठो, पुरुष हो पुरुषार्थ करो, उठो ॥तीन॥ न जिसमें कुछ पौरुप हो यहां, सफलता वह पा सकता कहां ? ● अरु पार्थ भयंकर पाप है, न उस में यश है न प्रताप है। ल कृमि कीट-समान मरो, उठो, पुरुप हो, पुरुषार्थ करो, उठो ॥चार॥ मैनुज जीवन में जय के लिये, प्रथम ही दृढ़ पौरुष चाहिए । विजय तो पुरुषार्थ बिना कहां, कठिन है चिरजीवन भी यहां । भय नहीं, भवसिन्धु तगे, उठो, पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठो ॥पाँच॥ यदि अनिष्ट अड़े अड़ते रहें, विपुल विघ्न पड़ें पड़ते रहें । हृदय में पुरुषार्थ रहे भरा, जलधि क्या, नभ क्या. फिर क्या धरा ? दृढ़ रहो, ध्रुव धैय्ये धरो, उठो, पुरुष हो, पुरुषार्थ करो, उठो ॥ छः ॥ यदि अभीष्ट तुम्हें निज सत्व है, प्रिय तुम्हें यदि मान महत्व है यदि तुम्हें रखना निल नाम है, जगत में करना कुछ काम है रा, उठो, पुरुष हा पुगे, उठा प्रकट नित्य करो पुरुषार्थ को, हृदय से तज दो सब स्वार्थ को । यदि कहीं तुमसे परमार्थ हो, यह विनश्वर देह कृतार्थ हो । सदय हो, पर दुःख द्दरो, उठो, पुरुष हो, पुरुषार्थ करो उठो।। आठ ।। अवतो उठो क्यों पड़ रहे हो व्यर्थ सोच विचार में । सुख पूर्ण जीना भी कठिन है श्रम बिना संसार में ।। भग्न मनोरथ होकर भी तू श्रम करना मत छोड़ । सारी विषय वासनाओं से अपना मुखले मोड़ ।। उद्योग । उद्यम कीजै जगत में मिले भाग्य अनुसार । मोती मिले कि शंख कर, सागर गोता मार ।। उद्यम ते संपति घर आये, उद्यम करे सपूत कहावे । उद्यम करें संग सब लागे, उद्यम ते जगमें जस जागे । समुद्र उतरि उद्यम ते जइये उद्यन ते परमेश्वर पइये । बिनु उद्यम नहीं पाइये, कर्म लिखे हूं जौन । बिनु जल पान न जाइ है, प्यास जंग तट भौन ॥ दो ॥ उद्यम में निद्रा नहिं नहिं सुख दारिद नांहि । लोभी उर संतोष नहि, धीर अबुध में नांहि ।। गिरधर दास ) |
रॉकवेल ऑटोमेशन, इंक, औद्योगिक स्वचालन और डिजिटल परिवर्तन में एक वैश्विक नेता। (NYSE: ROK) ने एक बयान में घोषणा की कि उसने बार्सिलोना, स्पेन में स्थित एक औद्योगिक साइबर सेवा प्रदाता ओयलो का अधिग्रहण किया है। Oylo औद्योगिक सुरक्षा प्रणालियों (ICS) की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए साइबर सुरक्षा सेवाओं और समाधानों की आपूर्ति करता है। उनकी सेवा के विषयों में पूर्व-मूल्यांकन अध्ययन, टर्नकी अनुप्रयोग, साइबर सुरक्षा परियोजना प्रबंधन सेवाएं और साइबर घटना पर प्रतिक्रिया देने की क्षमता का संचालन किया जाता है।
रॉकवेल ऑटोमेशन के लिए लाइफसाइकल सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष फ्रैंक कुलज़ेविकेज़ ने कहाः "औद्योगिक संचालन प्रौद्योगिकी (ओटी) और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) में एक अधिक व्यापक साइबर सुरक्षा रणनीति होने के बाद एक बार जुड़ा और स्मार्ट डिवाइस कारखाने के फर्श में प्रवेश करते हैं। पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। हम कनेक्टेड एंटरप्राइज यात्रा में अपने ग्राहकों की सफलता के लिए काम करना जारी रखते हैं। क्षेत्र में ओयलो की गहरी विशेषज्ञता रॉकवेल ऑटोमेशन की क्षमता को दुनिया भर में इस विशेषज्ञता को वितरित करने में और तेजी लाएगी "।
ओयलो अधिग्रहण सर्वोत्तम श्रेणी की साइबर सुरक्षा सेवाएं और समाधान प्रदान करने की रॉकवेल ऑटोमेशन की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। ओयलो की ओटी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञता एवनेट डेटा सिक्योरिटी के हालिया अधिग्रहण के माध्यम से प्राप्त आईटी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञता का पूरक है। रॉकवेल ऑटोमेशन में ओयलो के जुड़ने से तेजी से बदलते बाजार में वैश्विक वितरण क्षमताओं में तेजी आती है और उद्योग के लिए उपलब्ध साइबर सुरक्षा सेवाओं का विस्तार होता है।
ओयलो के सीईओ एडुआर्डो मोंटी ने कहाः "हम अपने वफादार ग्राहकों और भागीदारों की सेवा करना जारी रखने के लिए उत्साहित हैं, जबकि एक ही समय में दुनिया भर के कई संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं"।
ओयलो लाइफ साइकल सर्विसेज यूनिट का हिस्सा होगी।
| रॉकवेल ऑटोमेशन, इंक, औद्योगिक स्वचालन और डिजिटल परिवर्तन में एक वैश्विक नेता। ने एक बयान में घोषणा की कि उसने बार्सिलोना, स्पेन में स्थित एक औद्योगिक साइबर सेवा प्रदाता ओयलो का अधिग्रहण किया है। Oylo औद्योगिक सुरक्षा प्रणालियों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए साइबर सुरक्षा सेवाओं और समाधानों की आपूर्ति करता है। उनकी सेवा के विषयों में पूर्व-मूल्यांकन अध्ययन, टर्नकी अनुप्रयोग, साइबर सुरक्षा परियोजना प्रबंधन सेवाएं और साइबर घटना पर प्रतिक्रिया देने की क्षमता का संचालन किया जाता है। रॉकवेल ऑटोमेशन के लिए लाइफसाइकल सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष फ्रैंक कुलज़ेविकेज़ ने कहाः "औद्योगिक संचालन प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी में एक अधिक व्यापक साइबर सुरक्षा रणनीति होने के बाद एक बार जुड़ा और स्मार्ट डिवाइस कारखाने के फर्श में प्रवेश करते हैं। पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। हम कनेक्टेड एंटरप्राइज यात्रा में अपने ग्राहकों की सफलता के लिए काम करना जारी रखते हैं। क्षेत्र में ओयलो की गहरी विशेषज्ञता रॉकवेल ऑटोमेशन की क्षमता को दुनिया भर में इस विशेषज्ञता को वितरित करने में और तेजी लाएगी "। ओयलो अधिग्रहण सर्वोत्तम श्रेणी की साइबर सुरक्षा सेवाएं और समाधान प्रदान करने की रॉकवेल ऑटोमेशन की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। ओयलो की ओटी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञता एवनेट डेटा सिक्योरिटी के हालिया अधिग्रहण के माध्यम से प्राप्त आईटी साइबर सुरक्षा विशेषज्ञता का पूरक है। रॉकवेल ऑटोमेशन में ओयलो के जुड़ने से तेजी से बदलते बाजार में वैश्विक वितरण क्षमताओं में तेजी आती है और उद्योग के लिए उपलब्ध साइबर सुरक्षा सेवाओं का विस्तार होता है। ओयलो के सीईओ एडुआर्डो मोंटी ने कहाः "हम अपने वफादार ग्राहकों और भागीदारों की सेवा करना जारी रखने के लिए उत्साहित हैं, जबकि एक ही समय में दुनिया भर के कई संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं"। ओयलो लाइफ साइकल सर्विसेज यूनिट का हिस्सा होगी। |
बयान में कहा गया है कि प्रांत के बगलान-ए-मरकजी जिले में मंगलवार रात को एक शिविर पर हमला होने से कम से कम 14 अन्य घायल हो गए।
अब तक, किसी ने भी इस घटना का दावा नहीं किया है, हालांकि आंतरिक मंत्रालय ने आतंकवादी संगठन तालिबान को दोषी ठहराया है।
तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें इस घटना के बारे में पता लगाना है।
स्थानीय मीडिया ने बताया कि हमला किए गए डिमाइनिंग कैंप को अंतरराष्ट्रीय माइन क्लीयरेंस ऑर्गनाइजेशन हेलो ट्रस्ट द्वारा चलाया जा रहा था।
गैर-सरकारी संगठन की वेबसाइट के अनुसार, हेलो ट्रस्ट के अफगानिस्तान में 2,600 कर्मचारी हैं। देश में डिमाइनिंग प्रोग्राम पूरी तरह से अफगान के नेतृत्व वाला है।
अतीत में, अफगानिस्तान में सहायता परियोजनाओं और गैर सरकारी संगठनों पर बार-बार हमला किया गया है।
| बयान में कहा गया है कि प्रांत के बगलान-ए-मरकजी जिले में मंगलवार रात को एक शिविर पर हमला होने से कम से कम चौदह अन्य घायल हो गए। अब तक, किसी ने भी इस घटना का दावा नहीं किया है, हालांकि आंतरिक मंत्रालय ने आतंकवादी संगठन तालिबान को दोषी ठहराया है। तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें इस घटना के बारे में पता लगाना है। स्थानीय मीडिया ने बताया कि हमला किए गए डिमाइनिंग कैंप को अंतरराष्ट्रीय माइन क्लीयरेंस ऑर्गनाइजेशन हेलो ट्रस्ट द्वारा चलाया जा रहा था। गैर-सरकारी संगठन की वेबसाइट के अनुसार, हेलो ट्रस्ट के अफगानिस्तान में दो,छः सौ कर्मचारी हैं। देश में डिमाइनिंग प्रोग्राम पूरी तरह से अफगान के नेतृत्व वाला है। अतीत में, अफगानिस्तान में सहायता परियोजनाओं और गैर सरकारी संगठनों पर बार-बार हमला किया गया है। |
इंग्लैंड की एक महिला क्रिकेटर के साथ तो उनका नाम भी जुड़ चुका है. कोहली इस महिला क्रिकेटर से मिलने के लिए सुबह 5 बजे उनके कमरे में भी पहुंच गए थे. . (AP)
नई दिल्ली. टी20 वर्ल्ड कप (T20 World Cup 2021) को लेकर सभी 16 टीमें तैयार हैं. सभी 16 टीमों की घोषणा हो चुकी है. विराट काेहली (Virat Kohli) की कप्तानी में टीम इंडिया पहली बार टी20 वर्ल्ड कप खेलने जा रही है. टीम ने 2007 के बाद से टी20 वर्ल्ड कप का खिताब नहीं जीता है. 2013 से टीम इंडिया को पहली आईसीसी ट्रॉफी का इंतजार है. इंग्लैंड के कप्तान ऑयन मॉर्गन (Eoin Morgan) टूर्नामेंट खेलने वाली 16 टीमों के सबसे अनुभवी कप्तान हैं. वर्ल्ड कप जीतने वाले सभी 5 कप्तान इस बार टूर्नामेंट में नहीं दिखेंगे. वर्ल्ड कप के मुकाबले 17 अक्टूबर से 14 नवंबर तक यूएई और ओमान में होने हैं.
यह टी20 वर्ल्ड कप का 7वां सीजन है. अब तक 5 टीमें ही खिताब जीत चुकी हैं. वेस्टइंडीज के डैरेन सैमी और भारत के एमएस धोनी ने बतौर कप्तान सबसे अधिक 2-2 फाइनल खेले हैं. सैमी ने दोनों फाइनल जीते हैं, जबकि धोनी सिर्फ 2007 में खिताब जीतने में सफल रहे. 2014 में लसिथ मलिंगा की कप्तानी में श्रीलंका ने टीम इंडिया को फाइनल में हराया था. इसके अलावा इंग्लैंड के पॉल कॉलिंगवुड और पाकिस्तान के यूनुस खान ने बतौर कप्तान एक-एक बार खिताब जीता है. इस बार वर्ल्ड कप में यह पांचों कप्तान नहीं दिखेंगे.
टी20 वर्ल्ड कप के लिए विराट कोहली को टीम इंडिया की कमान दी गई है. एमएस धोनी को टीम का मेंटॉर बनाया गया है. धोनी के पास 4 टी20 के खिताब हैं. उन्होंने वर्ल्ड कप के अलावा तीन बार आईपीएल का खिताब भी जीता है. रोहित शर्मा टीम के उपकप्तान हैं. वे अब तक 5 बार अपनी कप्तानी में टी20 लीग का खिताब जीत चुके हैं. यानी टीम इंडिया के पास अनुभव की कमी नहीं है. ऐसे में विराट कोहली अपनी कप्तानी में पहली आईसीसी ट्रॉफी जीतना चाहेंगे.
मौजूदा टूर्नामेंट में उतरने वाली 16 टीमों को देखें तो इंग्लैंड के ऑयन मॉर्गन सबसे अनुभवी कप्तान हैं. उन्होंने अब तक 64 टी20 मैच में टीम की कप्तानी की है. मॉर्गन की कप्तानी में इंग्लिश टीम 2016 में टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में भी पहुंची थी. हालांकि उसे वेस्टइंडीज के हाथों हार मिली थी. मॉर्गन ने 2019 में अपनी कप्तानी में इंग्लैंड को पहली बार वनडे वर्ल्ड कप का खिताब दिलाया है. ऐसे में वे इसे यूएई में भी दोहराना चाहेंगे. ऑस्ट्रेलिया के एरोन फिंच और न्यूजीलैंड के केन विलियम्सन ने 49-49 टी20 में कप्तानी की है. वहीं विराट कोहली अब तक 45 मैचों में कमान संभाल चुके हैं.
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1 सीन को करने में जब डर रहे थे शत्रुघ्न सिन्हा, 49 साल पहले धर्मेंद्र से मांगी थी सलाह, बोले- 'तुम वही करो जो मैंने किया'
220 करोड़ी Jawan को दिया म्यूजिक, पहली हिंदी मूवी से छा गया ये 32 साल का संगीतकार, AR Rahman से भी महंगी फीस!
| इंग्लैंड की एक महिला क्रिकेटर के साथ तो उनका नाम भी जुड़ चुका है. कोहली इस महिला क्रिकेटर से मिलने के लिए सुबह पाँच बजे उनके कमरे में भी पहुंच गए थे. . नई दिल्ली. टीबीस वर्ल्ड कप को लेकर सभी सोलह टीमें तैयार हैं. सभी सोलह टीमों की घोषणा हो चुकी है. विराट काेहली की कप्तानी में टीम इंडिया पहली बार टीबीस वर्ल्ड कप खेलने जा रही है. टीम ने दो हज़ार सात के बाद से टीबीस वर्ल्ड कप का खिताब नहीं जीता है. दो हज़ार तेरह से टीम इंडिया को पहली आईसीसी ट्रॉफी का इंतजार है. इंग्लैंड के कप्तान ऑयन मॉर्गन टूर्नामेंट खेलने वाली सोलह टीमों के सबसे अनुभवी कप्तान हैं. वर्ल्ड कप जीतने वाले सभी पाँच कप्तान इस बार टूर्नामेंट में नहीं दिखेंगे. वर्ल्ड कप के मुकाबले सत्रह अक्टूबर से चौदह नवंबर तक यूएई और ओमान में होने हैं. यह टीबीस वर्ल्ड कप का सातवां सीजन है. अब तक पाँच टीमें ही खिताब जीत चुकी हैं. वेस्टइंडीज के डैरेन सैमी और भारत के एमएस धोनी ने बतौर कप्तान सबसे अधिक दो-दो फाइनल खेले हैं. सैमी ने दोनों फाइनल जीते हैं, जबकि धोनी सिर्फ दो हज़ार सात में खिताब जीतने में सफल रहे. दो हज़ार चौदह में लसिथ मलिंगा की कप्तानी में श्रीलंका ने टीम इंडिया को फाइनल में हराया था. इसके अलावा इंग्लैंड के पॉल कॉलिंगवुड और पाकिस्तान के यूनुस खान ने बतौर कप्तान एक-एक बार खिताब जीता है. इस बार वर्ल्ड कप में यह पांचों कप्तान नहीं दिखेंगे. टीबीस वर्ल्ड कप के लिए विराट कोहली को टीम इंडिया की कमान दी गई है. एमएस धोनी को टीम का मेंटॉर बनाया गया है. धोनी के पास चार टीबीस के खिताब हैं. उन्होंने वर्ल्ड कप के अलावा तीन बार आईपीएल का खिताब भी जीता है. रोहित शर्मा टीम के उपकप्तान हैं. वे अब तक पाँच बार अपनी कप्तानी में टीबीस लीटरग का खिताब जीत चुके हैं. यानी टीम इंडिया के पास अनुभव की कमी नहीं है. ऐसे में विराट कोहली अपनी कप्तानी में पहली आईसीसी ट्रॉफी जीतना चाहेंगे. मौजूदा टूर्नामेंट में उतरने वाली सोलह टीमों को देखें तो इंग्लैंड के ऑयन मॉर्गन सबसे अनुभवी कप्तान हैं. उन्होंने अब तक चौंसठ टीबीस मैच में टीम की कप्तानी की है. मॉर्गन की कप्तानी में इंग्लिश टीम दो हज़ार सोलह में टीबीस वर्ल्ड कप के फाइनल में भी पहुंची थी. हालांकि उसे वेस्टइंडीज के हाथों हार मिली थी. मॉर्गन ने दो हज़ार उन्नीस में अपनी कप्तानी में इंग्लैंड को पहली बार वनडे वर्ल्ड कप का खिताब दिलाया है. ऐसे में वे इसे यूएई में भी दोहराना चाहेंगे. ऑस्ट्रेलिया के एरोन फिंच और न्यूजीलैंड के केन विलियम्सन ने उनचास-उनचास टीबीस में कप्तानी की है. वहीं विराट कोहली अब तक पैंतालीस मैचों में कमान संभाल चुके हैं. . एक सीन को करने में जब डर रहे थे शत्रुघ्न सिन्हा, उनचास साल पहले धर्मेंद्र से मांगी थी सलाह, बोले- 'तुम वही करो जो मैंने किया' दो सौ बीस करोड़ी Jawan को दिया म्यूजिक, पहली हिंदी मूवी से छा गया ये बत्तीस साल का संगीतकार, AR Rahman से भी महंगी फीस! |
LSG vs GT Match: केएल राहुल ने लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए अर्धशतकीय पारी तो खेली लेकिन जीत दिलाने में असफल रहे। टीम को हार का सामना करना पड़ा। गुजरात टाइटंस के खिलाफ मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स आसान जीत की तरफ बढ़ते हुए हार गई। राहुल का धीमा अर्धशतक काम नहीं आया। (Photo: LSG/Twitter)
गुजरात की तरफ से लखनऊ को 136 रनों का लक्ष्य मिला था लेकिन वे इसे हासिल करने में नाकाम रहे। एक समय ऐसा था जब लखनऊ की टीम 14 ओवरों में 105 रन बनाकर आसान जीत की तरफ अग्रसर थी। इसके बाद गुजरात के गेंदबाजों ने मामला मुश्किल कर दिया। केएल राहुल की स्ट्राइक रेट खराब हो गई।
केएल राहुल ने 6 गेंदों तक अपना खाता नहीं खोला था। इसके बाद उन्होंने 38 गेंदों में अपना अर्धशतक जमा दिया। वहां से अच्छे टच में होने के बाद वह फिर से स्ट्राइक रेट के मामले में पीछे रह गए। राहुल 61 गेंदों का सामना करते हुए 68 के निजी स्कोर पर आउट हो गए। मैच नाटकीय अंदाज में पलट गया।
अंतिम ओवर में लखनऊ को जीतने के लिए 12 रन चाहिए थे। मोहित शर्मा ने राहुल और मार्कस स्टोइनिस को लगातार गेंदों पर आउट कर दिया। इसके बाद इस ओवर में दो बल्लेबाज रन आउट हो गए। मोहित शर्मा ने सिर्फ 4 ही रन खर्च किये और गुजरात यह मैच 7 रनों के अंतर से जीत गई।
केएल राहुल मैच समाप्त करने के उद्देश्य से क्रीज पर बने रहे लेकिन वह तेज खेलने में विफल रहे और लखनऊ की हार इस वजह से हुई। लखनऊ की पराजय के बाद ट्विटर पर जबरदस्त प्रतिक्रियाएं देखने को मिली। फैन्स ने इस हार के लिए सीधे तौर पर केएल राहुल की धीमी पारी को ही जिम्मेदार माना।
गुजरात के लिए हार्दिक पांड्या ने फिफ्टी जमाई। उन्होंने 50 गेंदों का सामना करते हुए 66 रन बनाये। गुजरात ने 135 रन बोर्ड पर लगाये और बाद में गेंदबाजों ने अपना काम कर दिया। धीमे विकेट पर हार्दिक पांड्या ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया था।
| LSG vs GT Match: केएल राहुल ने लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए अर्धशतकीय पारी तो खेली लेकिन जीत दिलाने में असफल रहे। टीम को हार का सामना करना पड़ा। गुजरात टाइटंस के खिलाफ मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स आसान जीत की तरफ बढ़ते हुए हार गई। राहुल का धीमा अर्धशतक काम नहीं आया। गुजरात की तरफ से लखनऊ को एक सौ छत्तीस रनों का लक्ष्य मिला था लेकिन वे इसे हासिल करने में नाकाम रहे। एक समय ऐसा था जब लखनऊ की टीम चौदह ओवरों में एक सौ पाँच रन बनाकर आसान जीत की तरफ अग्रसर थी। इसके बाद गुजरात के गेंदबाजों ने मामला मुश्किल कर दिया। केएल राहुल की स्ट्राइक रेट खराब हो गई। केएल राहुल ने छः गेंदों तक अपना खाता नहीं खोला था। इसके बाद उन्होंने अड़तीस गेंदों में अपना अर्धशतक जमा दिया। वहां से अच्छे टच में होने के बाद वह फिर से स्ट्राइक रेट के मामले में पीछे रह गए। राहुल इकसठ गेंदों का सामना करते हुए अड़सठ के निजी स्कोर पर आउट हो गए। मैच नाटकीय अंदाज में पलट गया। अंतिम ओवर में लखनऊ को जीतने के लिए बारह रन चाहिए थे। मोहित शर्मा ने राहुल और मार्कस स्टोइनिस को लगातार गेंदों पर आउट कर दिया। इसके बाद इस ओवर में दो बल्लेबाज रन आउट हो गए। मोहित शर्मा ने सिर्फ चार ही रन खर्च किये और गुजरात यह मैच सात रनों के अंतर से जीत गई। केएल राहुल मैच समाप्त करने के उद्देश्य से क्रीज पर बने रहे लेकिन वह तेज खेलने में विफल रहे और लखनऊ की हार इस वजह से हुई। लखनऊ की पराजय के बाद ट्विटर पर जबरदस्त प्रतिक्रियाएं देखने को मिली। फैन्स ने इस हार के लिए सीधे तौर पर केएल राहुल की धीमी पारी को ही जिम्मेदार माना। गुजरात के लिए हार्दिक पांड्या ने फिफ्टी जमाई। उन्होंने पचास गेंदों का सामना करते हुए छयासठ रन बनाये। गुजरात ने एक सौ पैंतीस रन बोर्ड पर लगाये और बाद में गेंदबाजों ने अपना काम कर दिया। धीमे विकेट पर हार्दिक पांड्या ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया था। |
युद्ध पूरे ग्रह में हिला रहे हैंमानव जाति के अस्तित्व का इतिहास। और प्रत्येक शताब्दी के साथ वे अधिक खूनी हो जाते हैं, और इस्तेमाल किए गए हथियार अधिक परिष्कृत होते हैं। सैन्य जो पूरी तरह से नैतिक करना जाना चाहिए और दुश्मन को तबाह हथियारों के नए प्रकार, आविष्कार, संरचना और बुनियादी ढांचे को प्रभावित किए बिना। जब कि लाभ की तरह कुछ रासायनिक हथियारों के विरोधियों दिया था, उन्नीसवीं सदी के सैन्य घटनाओं के विकास में एक नया मील का पत्थर बन गया है। और अब तक उसमें सुधार है क्योंकि यह हमला पक्ष के उपयोग के नुकसान को कम करता है, केवल एक जहरीले बादल बेजान रेगिस्तान और शवों के पहाड़ों पीछे छोड़ गया है। क्या रासायनिक हमले से खुद को बचाने के लिए संभव है? क्या हमारे दिनों के सैन्य संचालन के रंगमंच में जहरीले पदार्थों का उपयोग किया जाता है? और हार का उनका त्रिज्या क्या है? हम इस लेख में इन सभी सवालों का जवाब देंगे।
रासायनिक हथियार एक विशेष प्रकार के हैंशस्त्र, जो विभिन्न रसायनों के उपयोग पर आधारित है। इनमें जहरीले पदार्थ और विषाक्त पदार्थ शामिल हैं जो चोट के त्रिज्या में पौधों समेत सभी जीवित जीवों पर अपना प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे हथियारों का उपयोग करने के बाद, न केवल लोग मारे जाते हैं, बल्कि जमीन भी। यह ज्ञात है कि वियतनाम में, उन जगहों पर जहां अमेरिकियों ने जहरीले पदार्थों का उपयोग किया है, अब तक कुछ भी नहीं बढ़ रहा है, और बच्चे कई उत्परिवर्तनों के साथ पैदा हुए हैं।
आधुनिक वैज्ञानिकों का मानना है कि एक रासायनिक हमलाएक वास्तविक पर्यावरणीय आपदा का कारण बन सकता है जो ग्रह के हर निवासियों को प्रभावित करेगा। इसलिए, कई वैज्ञानिक समुदाय नए जहरीले पदार्थों को खोजने और क्षति की सीमा बढ़ाने के लिए डिजाइन किए गए रासायनिक हथियार के किसी भी विकास के खिलाफ बोलते हैं।
आज तक, विषाक्त पदार्थों के कई राज्य हैं जिनके साथ रासायनिक हमलों का उत्पादन होता हैः
- वाष्प;
- गैसीय;
- तरल।
किसी भी रूप में, पदार्थ सक्रिय रहते हैं और विनाश के क्षेत्र में आने वाली सभी जीवित चीजों के लिए अपूरणीय क्षति का कारण बनते हैं।
गोला बारूद के साथ गोला बारूद गोला बारूदविस्फोट हवा में पीले या सफेद वाष्प का बादल जारी करता है। यह लंबी दूरी पर हवा के साथ बिजली की गति के साथ फैलता है, सैन्य उपकरणों, आश्रयों और घरों में प्रवेश करता है। इस जहरीले बादल से छुपा असंभव है।
कभी-कभी एक रासायनिक हमला किया जाता हैतरल विषाक्त पदार्थों का उपयोग करके - फिर वे एक अंधेरे लकीर का प्रतिनिधित्व करते हुए विमान से बाहर निकलते हैं। जहरीली बारिश तेल की फिल्म के साथ घास और पेड़ पर स्थिर होती है।
जहरीले पदार्थों का कोई भी उपयोग होता हैसभी जीवित चीजों के लिए एक भयानक परिणाम। रासायनिक हथियारों के उपयोग के तुरंत बाद, एक हार क्षेत्र के रूप में, जिसमें निम्नलिखित विशेषताएं हैंः
- विस्फोट के केंद्र को मारने वाले लोगों और जानवरों को घातक नुकसान;
- खुली हवा में महाकाव्य से दूर जीवित जीवों को नुकसान;
- घाव से दूरी पर एक आश्रय में छुपा लोगों और जानवरों की हार;
- आवासीय क्षेत्रों का संक्रमण, अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे की वस्तुएं;
- शक्तिशाली नैतिक प्रभाव।
बेशक, यह काफी सामान्य विशेषता है। आखिरकार, जहरीले पदार्थों के उपयोग के परिणामों की भविष्यवाणी करना संभव है कि वे किस प्रकार के हैं।
वैज्ञानिकों ने कई क्षेत्रों का विकास किया है जिसमें रासायनिक हथियारों में उपयोग किए जाने वाले पदार्थों को वर्गीकृत करना संभव हैः
- विषाक्त अभिव्यक्ति पर;
- युद्ध में;
- दृढ़ता से।
बदले में, प्रत्येक दिशा को कई प्रकारों में बांटा गया है। अगर हम विषाक्त पदार्थों के बारे में बात कर रहे हैं, तो पदार्थों को निम्नानुसार वर्गीकृत किया जा सकता हैः
- तंत्रिका एजेंट (उदाहरण के लिए, सरिन द्वारा रासायनिक हमले);
- ब्लिस्टर एजेंट;
- घुट;
- सामान्य जहर;
- मनोचिकित्सा क्रिया;
- अड़चन।
प्रत्येक श्रेणी के लिए कई प्रकार के ज्ञात विषाक्त पदार्थ होते हैं, जिन्हें किसी भी रासायनिक प्रयोगशाला में आसानी से संश्लेषित किया जाता है।
युद्ध के प्रयोजनों के लिए, निम्नलिखित विषाक्त पदार्थों की पहचान की जा सकती हैः
- मौत;
- थोड़ी देर के लिए दुश्मन को बेअसर करना;
- परेशान।
दृढ़ता से, सैन्य रसायनज्ञ लगातार उत्पादन करते हैं औरअस्थिर पदार्थ पहले कई विशेषताओं या दिनों के लिए अपनी विशेषताओं को बनाए रखें। और उत्तरार्द्ध एक घंटे से अधिक समय तक कार्य करने में सक्षम नहीं हैं, भविष्य में वे सभी जीवित चीजों के लिए बिल्कुल सुरक्षित हो जाते हैं।
पहले रासायनिक हमलों के दौरान किए गए थेपहला विश्व युद्ध रासायनिक हथियार के डेवलपर को जर्मन फ़्रिट्ज गैबर माना जाता है। उन्हें एक पदार्थ बनाने के लिए कमीशन किया गया था जो सभी मोर्चों पर एक लंबे युद्ध को समाप्त करने में सक्षम होगा। यह ध्यान देने योग्य है कि गेबर ने स्वयं किसी सैन्य कार्रवाई का विरोध किया था। उनका मानना था कि एक जहरीले पदार्थ का निर्माण अधिक सामूहिक हताहतों से बचने में मदद करेगा और लंबे समय तक युद्ध को खत्म कर देगा।
अपनी पत्नी के साथ, गैबर ने आविष्कार किया और लॉन्च कियाक्लोरीन गैस के आधार पर हथियारों का उत्पादन। 22 अप्रैल, 1 9 15 को पहली बार एक रासायनिक हमला किया गया था। यपेरेस्क प्रोट्रूज़न के पूर्वोत्तर में, ब्रिटिश और फ्रेंच सैनिकों ने दृढ़ता से कई महीनों तक अपनी सुरक्षा संभाली, इसलिए इस दिशा में जर्मन कमांड ने नवीनतम हथियारों का उपयोग करने का फैसला किया।
परिणाम भयानक थेः एक पीले रंग के हरे बादल ने उसकी आंखों को अंधा कर दिया, अपनी सांस को अवरुद्ध कर दिया और त्वचा को खराब कर दिया। कई सैनिक डरावने भाग गए, लेकिन अन्य खरोंच से बाहर नहीं निकल सके। जर्मन स्वयं अपने नए हथियार की प्रभावशीलता से चौंक गए और जल्दी से अपने सैन्य शस्त्रागार को भरने के लिए नए जहरीले एजेंटों के विकास के बारे में स्थापित किया।
इस साल अप्रैल की चौथी सारी दुनियासीरिया में रासायनिक हमले से समुदाय चौंक गया था। सुबह की शुरुआत में, पहली खबरें आईं कि आइडिलिब प्रांत में आधिकारिक दमिश्क द्वारा जहरीले पदार्थों के उपयोग के परिणामस्वरूप, दो सौ से अधिक नागरिकों को अस्पतालों में ले जाया गया।
हर जगह मृतकों की भयानक तस्वीरों को प्रकाशित करना शुरू कर दिया।निकायों और पीड़ितों, जो स्थानीय डॉक्टरों ने बचाने की कोशिश की है। सीरिया में एक रासायनिक हमले के परिणामस्वरूप, लगभग सत्तर लोग मारे गए। वे सभी साधारण, शांतिपूर्ण लोग थे। स्वाभाविक रूप से, लोगों का इतना राक्षसी विनाश एक सार्वजनिक चिल्लाहट नहीं कर सका। हालांकि, आधिकारिक दमिश्क ने जवाब दिया कि उन्होंने नागरिक आबादी के खिलाफ कोई शत्रुता नहीं आयोजित की थी। बम विस्फोट के परिणामस्वरूप, एक आतंकवादी गोला बारूद नष्ट कर दिया गया था, जहां गोले जहरीले पदार्थों से भरे जा सकते थे। रूस इस संस्करण का समर्थन करता है और अपने शब्दों के ठोस सबूत प्रदान करने के लिए तैयार है।
रासायनिक हमले के पीड़ितों की तस्वीरें पूरी तरह से भर जाती हैंइंटरनेट यहां और वहां साइरियन के वीडियो साक्षात्कार क्रूर बशर असद और उनके शासन के बारे में बताने लगते हैं। स्वाभाविक रूप से, आधिकारिक दमिश्क में फेंकने वाले सभी आरोपों के संबंध में, रासायनिक हमले में एक स्वतंत्र जांच करने के लिए आवश्यक हो गया।
हालांकि, किसी के मामले को साबित करना मुश्किल हैलोग स्पष्ट देखना नहीं चाहते हैं। उदाहरण के लिए, चौकस इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने हमले के समय के बारे में एक बयान के साथ हमले के बारे में वीडियो में असंगतता देखी है। यह भी इस तथ्य को समझ में नहीं आता है कि कथित हमले की पूर्व संध्या पर एक ट्रक के पीछे तस्वीर नौ मृत बच्चों के साथ आई थी। इन सभी को सावधानीपूर्वक अध्ययन और सत्यापन की आवश्यकता है, क्योंकि यह अज्ञात है कि जहरीले पदार्थों का फैलाव जानबूझकर था, या फिर भी यह एक दुखद दुर्घटना थी जिसमें निर्दोष लोगों के कई दर्जन जीवन हुए थे।
रासायनिक हथियार के हानिकारक कारक हैंइसकी स्थिति के बावजूद प्रभाव बनाने की इसकी क्षमता में। उनमें से किसी भी में, विषाक्त पदार्थ सभी जीवित जीवों को नष्ट कर सकते हैं। इसलिए, रासायनिक हथियार के उपयोग के निषेध पर सम्मेलन के बावजूद, दुनिया के पचास देशों द्वारा समर्थित, जहरीले पदार्थों के खिलाफ सुरक्षा का विचार होना जरूरी है।
रासायनिक हथियारों के प्रभाव से आबादी की रक्षा करना जीवन के सभी क्षेत्रों को कवर करने वाले व्यापक उपायों के माध्यम से ही संभव हैः
- रासायनिक खुफिया और जहरीले पदार्थों के उपयोग की पहचान;
- प्रभावित क्षेत्र में विशेष उपचार का पालन करना;
- आबादी को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण का वितरण और उनके उपयोग के तरीकों के बारे में सूचित करना;
- आश्रय में प्रभावित क्षेत्र या जनसंख्या के वितरण से निकासी, जहां अस्थिर विषाक्त पदार्थ प्रवेश नहीं कर सकते हैं;
- त्वचा को साफ करने और एंटीडोट्स के परिचय के उपायों को पूरा करना;
- प्रभावित क्षेत्र के बाहर से भोजन और पानी के साथ नागरिकों को प्रदान करना।
उपरोक्त सभी गतिविधियों को लगातार और स्पष्ट नियमों के अनुपालन में किया जाना चाहिए।
| युद्ध पूरे ग्रह में हिला रहे हैंमानव जाति के अस्तित्व का इतिहास। और प्रत्येक शताब्दी के साथ वे अधिक खूनी हो जाते हैं, और इस्तेमाल किए गए हथियार अधिक परिष्कृत होते हैं। सैन्य जो पूरी तरह से नैतिक करना जाना चाहिए और दुश्मन को तबाह हथियारों के नए प्रकार, आविष्कार, संरचना और बुनियादी ढांचे को प्रभावित किए बिना। जब कि लाभ की तरह कुछ रासायनिक हथियारों के विरोधियों दिया था, उन्नीसवीं सदी के सैन्य घटनाओं के विकास में एक नया मील का पत्थर बन गया है। और अब तक उसमें सुधार है क्योंकि यह हमला पक्ष के उपयोग के नुकसान को कम करता है, केवल एक जहरीले बादल बेजान रेगिस्तान और शवों के पहाड़ों पीछे छोड़ गया है। क्या रासायनिक हमले से खुद को बचाने के लिए संभव है? क्या हमारे दिनों के सैन्य संचालन के रंगमंच में जहरीले पदार्थों का उपयोग किया जाता है? और हार का उनका त्रिज्या क्या है? हम इस लेख में इन सभी सवालों का जवाब देंगे। रासायनिक हथियार एक विशेष प्रकार के हैंशस्त्र, जो विभिन्न रसायनों के उपयोग पर आधारित है। इनमें जहरीले पदार्थ और विषाक्त पदार्थ शामिल हैं जो चोट के त्रिज्या में पौधों समेत सभी जीवित जीवों पर अपना प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे हथियारों का उपयोग करने के बाद, न केवल लोग मारे जाते हैं, बल्कि जमीन भी। यह ज्ञात है कि वियतनाम में, उन जगहों पर जहां अमेरिकियों ने जहरीले पदार्थों का उपयोग किया है, अब तक कुछ भी नहीं बढ़ रहा है, और बच्चे कई उत्परिवर्तनों के साथ पैदा हुए हैं। आधुनिक वैज्ञानिकों का मानना है कि एक रासायनिक हमलाएक वास्तविक पर्यावरणीय आपदा का कारण बन सकता है जो ग्रह के हर निवासियों को प्रभावित करेगा। इसलिए, कई वैज्ञानिक समुदाय नए जहरीले पदार्थों को खोजने और क्षति की सीमा बढ़ाने के लिए डिजाइन किए गए रासायनिक हथियार के किसी भी विकास के खिलाफ बोलते हैं। आज तक, विषाक्त पदार्थों के कई राज्य हैं जिनके साथ रासायनिक हमलों का उत्पादन होता हैः - वाष्प; - गैसीय; - तरल। किसी भी रूप में, पदार्थ सक्रिय रहते हैं और विनाश के क्षेत्र में आने वाली सभी जीवित चीजों के लिए अपूरणीय क्षति का कारण बनते हैं। गोला बारूद के साथ गोला बारूद गोला बारूदविस्फोट हवा में पीले या सफेद वाष्प का बादल जारी करता है। यह लंबी दूरी पर हवा के साथ बिजली की गति के साथ फैलता है, सैन्य उपकरणों, आश्रयों और घरों में प्रवेश करता है। इस जहरीले बादल से छुपा असंभव है। कभी-कभी एक रासायनिक हमला किया जाता हैतरल विषाक्त पदार्थों का उपयोग करके - फिर वे एक अंधेरे लकीर का प्रतिनिधित्व करते हुए विमान से बाहर निकलते हैं। जहरीली बारिश तेल की फिल्म के साथ घास और पेड़ पर स्थिर होती है। जहरीले पदार्थों का कोई भी उपयोग होता हैसभी जीवित चीजों के लिए एक भयानक परिणाम। रासायनिक हथियारों के उपयोग के तुरंत बाद, एक हार क्षेत्र के रूप में, जिसमें निम्नलिखित विशेषताएं हैंः - विस्फोट के केंद्र को मारने वाले लोगों और जानवरों को घातक नुकसान; - खुली हवा में महाकाव्य से दूर जीवित जीवों को नुकसान; - घाव से दूरी पर एक आश्रय में छुपा लोगों और जानवरों की हार; - आवासीय क्षेत्रों का संक्रमण, अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे की वस्तुएं; - शक्तिशाली नैतिक प्रभाव। बेशक, यह काफी सामान्य विशेषता है। आखिरकार, जहरीले पदार्थों के उपयोग के परिणामों की भविष्यवाणी करना संभव है कि वे किस प्रकार के हैं। वैज्ञानिकों ने कई क्षेत्रों का विकास किया है जिसमें रासायनिक हथियारों में उपयोग किए जाने वाले पदार्थों को वर्गीकृत करना संभव हैः - विषाक्त अभिव्यक्ति पर; - युद्ध में; - दृढ़ता से। बदले में, प्रत्येक दिशा को कई प्रकारों में बांटा गया है। अगर हम विषाक्त पदार्थों के बारे में बात कर रहे हैं, तो पदार्थों को निम्नानुसार वर्गीकृत किया जा सकता हैः - तंत्रिका एजेंट ; - ब्लिस्टर एजेंट; - घुट; - सामान्य जहर; - मनोचिकित्सा क्रिया; - अड़चन। प्रत्येक श्रेणी के लिए कई प्रकार के ज्ञात विषाक्त पदार्थ होते हैं, जिन्हें किसी भी रासायनिक प्रयोगशाला में आसानी से संश्लेषित किया जाता है। युद्ध के प्रयोजनों के लिए, निम्नलिखित विषाक्त पदार्थों की पहचान की जा सकती हैः - मौत; - थोड़ी देर के लिए दुश्मन को बेअसर करना; - परेशान। दृढ़ता से, सैन्य रसायनज्ञ लगातार उत्पादन करते हैं औरअस्थिर पदार्थ पहले कई विशेषताओं या दिनों के लिए अपनी विशेषताओं को बनाए रखें। और उत्तरार्द्ध एक घंटे से अधिक समय तक कार्य करने में सक्षम नहीं हैं, भविष्य में वे सभी जीवित चीजों के लिए बिल्कुल सुरक्षित हो जाते हैं। पहले रासायनिक हमलों के दौरान किए गए थेपहला विश्व युद्ध रासायनिक हथियार के डेवलपर को जर्मन फ़्रिट्ज गैबर माना जाता है। उन्हें एक पदार्थ बनाने के लिए कमीशन किया गया था जो सभी मोर्चों पर एक लंबे युद्ध को समाप्त करने में सक्षम होगा। यह ध्यान देने योग्य है कि गेबर ने स्वयं किसी सैन्य कार्रवाई का विरोध किया था। उनका मानना था कि एक जहरीले पदार्थ का निर्माण अधिक सामूहिक हताहतों से बचने में मदद करेगा और लंबे समय तक युद्ध को खत्म कर देगा। अपनी पत्नी के साथ, गैबर ने आविष्कार किया और लॉन्च कियाक्लोरीन गैस के आधार पर हथियारों का उत्पादन। बाईस अप्रैल, एक नौ पंद्रह को पहली बार एक रासायनिक हमला किया गया था। यपेरेस्क प्रोट्रूज़न के पूर्वोत्तर में, ब्रिटिश और फ्रेंच सैनिकों ने दृढ़ता से कई महीनों तक अपनी सुरक्षा संभाली, इसलिए इस दिशा में जर्मन कमांड ने नवीनतम हथियारों का उपयोग करने का फैसला किया। परिणाम भयानक थेः एक पीले रंग के हरे बादल ने उसकी आंखों को अंधा कर दिया, अपनी सांस को अवरुद्ध कर दिया और त्वचा को खराब कर दिया। कई सैनिक डरावने भाग गए, लेकिन अन्य खरोंच से बाहर नहीं निकल सके। जर्मन स्वयं अपने नए हथियार की प्रभावशीलता से चौंक गए और जल्दी से अपने सैन्य शस्त्रागार को भरने के लिए नए जहरीले एजेंटों के विकास के बारे में स्थापित किया। इस साल अप्रैल की चौथी सारी दुनियासीरिया में रासायनिक हमले से समुदाय चौंक गया था। सुबह की शुरुआत में, पहली खबरें आईं कि आइडिलिब प्रांत में आधिकारिक दमिश्क द्वारा जहरीले पदार्थों के उपयोग के परिणामस्वरूप, दो सौ से अधिक नागरिकों को अस्पतालों में ले जाया गया। हर जगह मृतकों की भयानक तस्वीरों को प्रकाशित करना शुरू कर दिया।निकायों और पीड़ितों, जो स्थानीय डॉक्टरों ने बचाने की कोशिश की है। सीरिया में एक रासायनिक हमले के परिणामस्वरूप, लगभग सत्तर लोग मारे गए। वे सभी साधारण, शांतिपूर्ण लोग थे। स्वाभाविक रूप से, लोगों का इतना राक्षसी विनाश एक सार्वजनिक चिल्लाहट नहीं कर सका। हालांकि, आधिकारिक दमिश्क ने जवाब दिया कि उन्होंने नागरिक आबादी के खिलाफ कोई शत्रुता नहीं आयोजित की थी। बम विस्फोट के परिणामस्वरूप, एक आतंकवादी गोला बारूद नष्ट कर दिया गया था, जहां गोले जहरीले पदार्थों से भरे जा सकते थे। रूस इस संस्करण का समर्थन करता है और अपने शब्दों के ठोस सबूत प्रदान करने के लिए तैयार है। रासायनिक हमले के पीड़ितों की तस्वीरें पूरी तरह से भर जाती हैंइंटरनेट यहां और वहां साइरियन के वीडियो साक्षात्कार क्रूर बशर असद और उनके शासन के बारे में बताने लगते हैं। स्वाभाविक रूप से, आधिकारिक दमिश्क में फेंकने वाले सभी आरोपों के संबंध में, रासायनिक हमले में एक स्वतंत्र जांच करने के लिए आवश्यक हो गया। हालांकि, किसी के मामले को साबित करना मुश्किल हैलोग स्पष्ट देखना नहीं चाहते हैं। उदाहरण के लिए, चौकस इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने हमले के समय के बारे में एक बयान के साथ हमले के बारे में वीडियो में असंगतता देखी है। यह भी इस तथ्य को समझ में नहीं आता है कि कथित हमले की पूर्व संध्या पर एक ट्रक के पीछे तस्वीर नौ मृत बच्चों के साथ आई थी। इन सभी को सावधानीपूर्वक अध्ययन और सत्यापन की आवश्यकता है, क्योंकि यह अज्ञात है कि जहरीले पदार्थों का फैलाव जानबूझकर था, या फिर भी यह एक दुखद दुर्घटना थी जिसमें निर्दोष लोगों के कई दर्जन जीवन हुए थे। रासायनिक हथियार के हानिकारक कारक हैंइसकी स्थिति के बावजूद प्रभाव बनाने की इसकी क्षमता में। उनमें से किसी भी में, विषाक्त पदार्थ सभी जीवित जीवों को नष्ट कर सकते हैं। इसलिए, रासायनिक हथियार के उपयोग के निषेध पर सम्मेलन के बावजूद, दुनिया के पचास देशों द्वारा समर्थित, जहरीले पदार्थों के खिलाफ सुरक्षा का विचार होना जरूरी है। रासायनिक हथियारों के प्रभाव से आबादी की रक्षा करना जीवन के सभी क्षेत्रों को कवर करने वाले व्यापक उपायों के माध्यम से ही संभव हैः - रासायनिक खुफिया और जहरीले पदार्थों के उपयोग की पहचान; - प्रभावित क्षेत्र में विशेष उपचार का पालन करना; - आबादी को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण का वितरण और उनके उपयोग के तरीकों के बारे में सूचित करना; - आश्रय में प्रभावित क्षेत्र या जनसंख्या के वितरण से निकासी, जहां अस्थिर विषाक्त पदार्थ प्रवेश नहीं कर सकते हैं; - त्वचा को साफ करने और एंटीडोट्स के परिचय के उपायों को पूरा करना; - प्रभावित क्षेत्र के बाहर से भोजन और पानी के साथ नागरिकों को प्रदान करना। उपरोक्त सभी गतिविधियों को लगातार और स्पष्ट नियमों के अनुपालन में किया जाना चाहिए। |
आज दिनांक 20. 01. 2019 को रोट्रेक्ट क्लब ऑफ पटना सिटी ने एक इंटरनेशनल प्रोजेक्ट और नमामि गंगे के तहत घाट सफाई अभियान चलाया गया। इस प्रोजेक्ट की शरुआत रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट 3232 चेन्नई द्वारा किया गया। इस प्रोजेक्ट का नाम Peachy Clean है। पुरे देश भर में चल रहे इस अभियान का हिस्सा बनकर साफ़ सफाई की ओर रोट्रेक्ट क्लब ऑफ़ पटना सिटी ने भी एक कदम बढ़ाया।
Peachy Clean के तहत नदी की साफ़-सफाई की गयी। रोट्रेक्ट क्लब ऑफ़ पटना सिटी के सदस्यों ने पटना सिटी स्थित भद्रघाट में सफाई अभियान चलाया। कार्यक्रम में क्लब के सदस्यों के अलावा आम-नागरिकों ने भी हिस्सा लिया और घाट की सफाई में अपना योगदान दिया। प्रेसिडेंट रोट्रक्टर लिपिका प्रीत एवं सेक्रेटरी रोट्रक्टर शुभम गुप्ता के नेतृत्व में एवं कार्यक्रम के चेयरमैन रोट्रक्टर गणेश कुमार एवं को-चेयरमैन रोट्रक्टर शुभांगीनि गुप्ता के साथ भारी संख्या में रोट्रक्टर की मदद से भद्र घाट पटना-7 में सफाई अभियान चला।
कार्यक्रम का संयोजन श्री गंगा सेवा समिति के अध्यक्ष श्री मिथिलेश शर्मा ने किया। धन्यवाद् ज्ञापन रोटरी क्लब ऑफ़ पटना सिटी के पूर्व अध्यक्ष रोटेरियन रवि शंकर प्रीत ने किया और युवाओं का समाजसेवा के प्रति मार्गदर्शन किया।
| आज दिनांक बीस. एक. दो हज़ार उन्नीस को रोट्रेक्ट क्लब ऑफ पटना सिटी ने एक इंटरनेशनल प्रोजेक्ट और नमामि गंगे के तहत घाट सफाई अभियान चलाया गया। इस प्रोजेक्ट की शरुआत रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट तीन हज़ार दो सौ बत्तीस चेन्नई द्वारा किया गया। इस प्रोजेक्ट का नाम Peachy Clean है। पुरे देश भर में चल रहे इस अभियान का हिस्सा बनकर साफ़ सफाई की ओर रोट्रेक्ट क्लब ऑफ़ पटना सिटी ने भी एक कदम बढ़ाया। Peachy Clean के तहत नदी की साफ़-सफाई की गयी। रोट्रेक्ट क्लब ऑफ़ पटना सिटी के सदस्यों ने पटना सिटी स्थित भद्रघाट में सफाई अभियान चलाया। कार्यक्रम में क्लब के सदस्यों के अलावा आम-नागरिकों ने भी हिस्सा लिया और घाट की सफाई में अपना योगदान दिया। प्रेसिडेंट रोट्रक्टर लिपिका प्रीत एवं सेक्रेटरी रोट्रक्टर शुभम गुप्ता के नेतृत्व में एवं कार्यक्रम के चेयरमैन रोट्रक्टर गणेश कुमार एवं को-चेयरमैन रोट्रक्टर शुभांगीनि गुप्ता के साथ भारी संख्या में रोट्रक्टर की मदद से भद्र घाट पटना-सात में सफाई अभियान चला। कार्यक्रम का संयोजन श्री गंगा सेवा समिति के अध्यक्ष श्री मिथिलेश शर्मा ने किया। धन्यवाद् ज्ञापन रोटरी क्लब ऑफ़ पटना सिटी के पूर्व अध्यक्ष रोटेरियन रवि शंकर प्रीत ने किया और युवाओं का समाजसेवा के प्रति मार्गदर्शन किया। |
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