raw_text stringlengths 113 616k | normalized_text stringlengths 98 618k |
|---|---|
अहमदाबाद, 27 मई (भाषा) भारत में इस साल के आखिर में होने वाले 50 ओवरों के विश्वकप का कार्यक्रम लंदन में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल के दौरान घोषित किया जा सकता है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के सचिव जय शाह ने शनिवार को बोर्ड की विशेष आम बैठक ( एसजीएम) के बाद यह जानकारी दी।
एशिया कप 2023 के आयोजन को लेकर भी फैसला जल्द किया जाएगा। एशियाई क्रिकेट परिषद के सदस्य चेन्नई सुपर किंग्स और गुजरात टाइटंस के बीच रविवार को होने वाले फाइनल को देखने के लिए यहां आ रखे हैं और उनके बीच एशिया कप को लेकर चर्चा हो सकती है। एशिया कप का आयोजन विश्वकप से पहले होना है।
बीसीसीआई सचिव ने बताया कि प्रशंसकों के लिए उचित सुविधा को ध्यान में रखते हुए अभी 15 स्टेडियमों का चयन किया गया है जबकि इसे बाद में कुछ और स्टेडियम जोड़े जाएंगे। इस काम की जिम्मेदारी ग्रांट थॉर्नटन को सौंपी गई है।
बीसीसीआई एक सप्ताह के अंदर कुछ विशेष समितियों की भी घोषणा करेगा जो भारत में होने वाले विश्वकप और महिला प्रीमियर लीग से संबंधित कामकाज को संभालेंगी। इसके अलावा पोश (यौन उत्पीड़न की रोकथाम) नीति का मसौदा तैयार करने के लिए भी एक समिति होगी।
इसके साथ ही भारत और अफगानिस्तान के बीच प्रस्तावित सीमित ओवरों की श्रृंखला विश्वकप से पहले खेली जाएगी लेकिन अभी तक इसकी तिथियां और मैच स्थल तय नहीं किए गए हैं।
| अहमदाबाद, सत्ताईस मई भारत में इस साल के आखिर में होने वाले पचास ओवरों के विश्वकप का कार्यक्रम लंदन में विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल के दौरान घोषित किया जा सकता है। भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सचिव जय शाह ने शनिवार को बोर्ड की विशेष आम बैठक के बाद यह जानकारी दी। एशिया कप दो हज़ार तेईस के आयोजन को लेकर भी फैसला जल्द किया जाएगा। एशियाई क्रिकेट परिषद के सदस्य चेन्नई सुपर किंग्स और गुजरात टाइटंस के बीच रविवार को होने वाले फाइनल को देखने के लिए यहां आ रखे हैं और उनके बीच एशिया कप को लेकर चर्चा हो सकती है। एशिया कप का आयोजन विश्वकप से पहले होना है। बीसीसीआई सचिव ने बताया कि प्रशंसकों के लिए उचित सुविधा को ध्यान में रखते हुए अभी पंद्रह स्टेडियमों का चयन किया गया है जबकि इसे बाद में कुछ और स्टेडियम जोड़े जाएंगे। इस काम की जिम्मेदारी ग्रांट थॉर्नटन को सौंपी गई है। बीसीसीआई एक सप्ताह के अंदर कुछ विशेष समितियों की भी घोषणा करेगा जो भारत में होने वाले विश्वकप और महिला प्रीमियर लीग से संबंधित कामकाज को संभालेंगी। इसके अलावा पोश नीति का मसौदा तैयार करने के लिए भी एक समिति होगी। इसके साथ ही भारत और अफगानिस्तान के बीच प्रस्तावित सीमित ओवरों की श्रृंखला विश्वकप से पहले खेली जाएगी लेकिन अभी तक इसकी तिथियां और मैच स्थल तय नहीं किए गए हैं। |
भारत और दक्षिण अफ्रीका (IND vs SA) के बीच 5 मैचों की टी20 सीरीज का तीसरा मुकाबला विशाखापट्नम के वाईएस राजशेखर रेड्डी स्टेडियम में खेला गया जहाँ भारत ने इस मुकाबले को 48 रनों से अपने नाम किया और सीरीज में पहली जीत हासिल की। हालांकि, इस जीत के बावजूद भी दक्षिण अफ्रीका सीरीज में 1-2 से आगे चल रही है। रिषभ पंत की कप्तानी में भारत को यह पहली जीत हासिल हुई है। आज हम आपको उन दो कारणों के बारे में बताएंगे जिनकी वजह से टीम इंडिया को यह जीत मिली है।
भारत और दक्षिण अफ्रीका (IND vs SA) के बीच खेले गए तीसरे टी20 मैच में टीम इंडिया की तरफ से सलामी बल्लेबाजों ने बेहतरीन शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 97 रनों की शानदार साझेदारी निभाई। भारत की तरफ से सलामी बल्लेबाज ऋतुराज गायकवाड़ ने अपने करियर की पहली फिफ्टी जड़ी। उन्होंने 30 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। अपनी पारी के दौरान उन्होंने 35 गेंदों का सामना किया और 2 छक्के और 8 चौके की मदद से 57 रन बनाकर केशव महाराज का शिकार बने।
वहीं, ईशान किशन ने भी इस मैच में दमदार अर्धशतक जमाया। यह उनके करियर का चौथा अर्धशतक था। उन्होंने अपना पचासा 31 गेंदों में पूरा किया। ईशान ने इस मैच में 35 गेंदों का सामना किया और 2 छक्के और 5 चौके की मदद से 54 रन बनाकर आउट हुए। ड्वेन प्रिटोरियस ने उनका विकेट लिया। इन दोनों खिलाड़ियों की मजबूत शुरुआत की वजह से ही भारत इस मैच को जीतने में कामयाब हो पाया।
भारत और दक्षिण अफ्रीका (IND vs SA) के बीच खेले गए तीसरे टी20 मैच में टीम इंडिया की तरफ से भारतीय गेंदबाजों ने दमदार गेंदबाजी की। भारत की तरफ से युजवेंद्र चहल ने अच्छी गेंदबाजी की और यही कारण है कि उन्हें प्लेयर ऑफ़ द मैच चुना गया। चहल ने 4 ओवर गेंदबाजी की और 5 की इकोनॉमी के साथ 20 रन देकर 3 विकेट हासिल किये।
भारत और दक्षिण अफ्रीका (IND vs SA) के बीच खेले गए तीसरे टी20 मैच में कप्तान टेम्बा बावुमा ने इस मैच टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला किया था। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने ईशान किशन और ऋतुराज गायकवाड़ की अर्धशतकीय पारी के दम पर 20 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 179 रन बनाए और दक्षिण अफ्रीका को जीत के लिए 180 रनों का लक्ष्य दिया। इसके जवाब में दक्षिण अफ्रीका की टीम 19. 1 ओवर में 131 रनों पर ढ़ेर हो गई।
| भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच पाँच मैचों की टीबीस सीरीज का तीसरा मुकाबला विशाखापट्नम के वाईएस राजशेखर रेड्डी स्टेडियम में खेला गया जहाँ भारत ने इस मुकाबले को अड़तालीस रनों से अपने नाम किया और सीरीज में पहली जीत हासिल की। हालांकि, इस जीत के बावजूद भी दक्षिण अफ्रीका सीरीज में एक-दो से आगे चल रही है। रिषभ पंत की कप्तानी में भारत को यह पहली जीत हासिल हुई है। आज हम आपको उन दो कारणों के बारे में बताएंगे जिनकी वजह से टीम इंडिया को यह जीत मिली है। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले गए तीसरे टीबीस मैच में टीम इंडिया की तरफ से सलामी बल्लेबाजों ने बेहतरीन शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए सत्तानवे रनों की शानदार साझेदारी निभाई। भारत की तरफ से सलामी बल्लेबाज ऋतुराज गायकवाड़ ने अपने करियर की पहली फिफ्टी जड़ी। उन्होंने तीस गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। अपनी पारी के दौरान उन्होंने पैंतीस गेंदों का सामना किया और दो छक्के और आठ चौके की मदद से सत्तावन रन बनाकर केशव महाराज का शिकार बने। वहीं, ईशान किशन ने भी इस मैच में दमदार अर्धशतक जमाया। यह उनके करियर का चौथा अर्धशतक था। उन्होंने अपना पचासा इकतीस गेंदों में पूरा किया। ईशान ने इस मैच में पैंतीस गेंदों का सामना किया और दो छक्के और पाँच चौके की मदद से चौवन रन बनाकर आउट हुए। ड्वेन प्रिटोरियस ने उनका विकेट लिया। इन दोनों खिलाड़ियों की मजबूत शुरुआत की वजह से ही भारत इस मैच को जीतने में कामयाब हो पाया। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले गए तीसरे टीबीस मैच में टीम इंडिया की तरफ से भारतीय गेंदबाजों ने दमदार गेंदबाजी की। भारत की तरफ से युजवेंद्र चहल ने अच्छी गेंदबाजी की और यही कारण है कि उन्हें प्लेयर ऑफ़ द मैच चुना गया। चहल ने चार ओवर गेंदबाजी की और पाँच की इकोनॉमी के साथ बीस रन देकर तीन विकेट हासिल किये। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले गए तीसरे टीबीस मैच में कप्तान टेम्बा बावुमा ने इस मैच टॉस जीतकर गेंदबाजी करने का फैसला किया था। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने ईशान किशन और ऋतुराज गायकवाड़ की अर्धशतकीय पारी के दम पर बीस ओवर में पाँच विकेट के नुकसान पर एक सौ उन्यासी रन बनाए और दक्षिण अफ्रीका को जीत के लिए एक सौ अस्सी रनों का लक्ष्य दिया। इसके जवाब में दक्षिण अफ्रीका की टीम उन्नीस. एक ओवर में एक सौ इकतीस रनों पर ढ़ेर हो गई। |
बक्सर जिले के बेलहरी गांव के लोगों ने सोमवार को एक नीलगाय को 50 फीट गहरे कुएं से रेस्क्यू करने में सफलता पाई है। ग्रामीणों ने 3 घंटे के मशक्कत के बाद बाहर निकाला। हालांकि ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग के नही पहुंचने के कारण लोगों में भी आक्रोश देखा गया। वहीं स्थानीय लोगों के द्वारा पहले उसे रस्सी के सहारे बाहर निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन वह इतनी डरी हुई थी कि उसे बांध पाना संभव नहीं हो पा रहा था, जिसके बाद देशी जुगाड़ से दो पम्पसेट के सहारे कुएं में पानी भरा गया, जैसे ही कुएं के मुंह तक पानी आया वैसे ही नीलगाय कुएं से बाहर निकल जंगल की तरफ भाग गया।
वहीं ग्रामीणों द्वारा आशंका जाहिर की गई कि नीलगाय रात के अंधेरे में भागने के दौरान कुएं में गिर गया होगा। वहीं सोमवार की सुबह कुएं के पास से गुजर रहे किसानों ने अंदर हलचल सुन झांक कर देखा तो 50 फीट गहरे कुएं में एक नीलगाय गिर गई है, जिसके बाद ग्रामीणों ने घटना की सूचना पुलिस और वन विभाग टीम को दी। हालांकि काफी देर के बाद जब कोई नहीं पहुंचा तो ग्रामीण और किसानों द्वारा उसे निकालने का प्रयास किया जाने लगा, जिसके लिए ग्रामीणों ने दो पम्पसेट मंगा कर कुएं में पानी भरा। जैसे-जैसे पानी ऊपर आने लगा वैसे-वैसे ही नीलगाय ऊपर आने लगी। वहीं कुएं में पानी भरने के साथ ही नीलगाय तैरते हुए ऊपर आई और निकलकर भाग गई।
बता दें कि किसान और नीलगाय एक-दूसरे के दुश्मन हैं। नीलगाय द्वारा किसानों की फसलों को हमेशा क्षति पहुंचाया जाता है, लेकिन किसानों को फसलों के साथ ही पशुओं से भी प्यार होता है। बार-बार किसानों की फसल को नष्ट पहुचाने वाले नीलगाय को जब किसानों ने कष्ट में देखा तो किसानों ने उसे तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| बक्सर जिले के बेलहरी गांव के लोगों ने सोमवार को एक नीलगाय को पचास फीट गहरे कुएं से रेस्क्यू करने में सफलता पाई है। ग्रामीणों ने तीन घंटाटे के मशक्कत के बाद बाहर निकाला। हालांकि ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग के नही पहुंचने के कारण लोगों में भी आक्रोश देखा गया। वहीं स्थानीय लोगों के द्वारा पहले उसे रस्सी के सहारे बाहर निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन वह इतनी डरी हुई थी कि उसे बांध पाना संभव नहीं हो पा रहा था, जिसके बाद देशी जुगाड़ से दो पम्पसेट के सहारे कुएं में पानी भरा गया, जैसे ही कुएं के मुंह तक पानी आया वैसे ही नीलगाय कुएं से बाहर निकल जंगल की तरफ भाग गया। वहीं ग्रामीणों द्वारा आशंका जाहिर की गई कि नीलगाय रात के अंधेरे में भागने के दौरान कुएं में गिर गया होगा। वहीं सोमवार की सुबह कुएं के पास से गुजर रहे किसानों ने अंदर हलचल सुन झांक कर देखा तो पचास फीट गहरे कुएं में एक नीलगाय गिर गई है, जिसके बाद ग्रामीणों ने घटना की सूचना पुलिस और वन विभाग टीम को दी। हालांकि काफी देर के बाद जब कोई नहीं पहुंचा तो ग्रामीण और किसानों द्वारा उसे निकालने का प्रयास किया जाने लगा, जिसके लिए ग्रामीणों ने दो पम्पसेट मंगा कर कुएं में पानी भरा। जैसे-जैसे पानी ऊपर आने लगा वैसे-वैसे ही नीलगाय ऊपर आने लगी। वहीं कुएं में पानी भरने के साथ ही नीलगाय तैरते हुए ऊपर आई और निकलकर भाग गई। बता दें कि किसान और नीलगाय एक-दूसरे के दुश्मन हैं। नीलगाय द्वारा किसानों की फसलों को हमेशा क्षति पहुंचाया जाता है, लेकिन किसानों को फसलों के साथ ही पशुओं से भी प्यार होता है। बार-बार किसानों की फसल को नष्ट पहुचाने वाले नीलगाय को जब किसानों ने कष्ट में देखा तो किसानों ने उसे तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उसे बाहर निकाला। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
यूरिक एसिड, शरीर में मौजूद एक ऐसा वेस्ट प्रोडक्ट है जो जोड़ो और टिश्यूज में जमने लगता है। इसमें गठिया, गाउट, हार्ट डिजीज सहित कई बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। प्यूरीन नाम का केमिकल बॉडी में नेचुरल तरीके से मैजूद होता है, साथ ही कुछ फूड्स में भी पाया जाता है। जब बॉडी प्यूरीन को पचाने की कोशिश करता है, इस प्रोसेस के दौरान वेस्ट प्रोडक्ट के रूप में यूरिक एसिड निकलता है। इसे आमतौर पर किडनी फिल्टर कर देता है और यूरिन के जरिए शरीर से बाहर निकाल देता है। लेकिन, कई बार ब्लड में यूरिक एसिड जमा रहता है, इसे मेडिक टर्म में हाइपरयूरिसेमिया कहते हैं। ब्लड में जब यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती तो इससे जोड़ो और टिश्यूज में क्रिस्टल्स बनने लगते हैं जो सूजन और गाउट के खतरे को बढ़ाते हैं।
स्वास्थ्य विशेज्ञ मानते हैं कि बॉडी में यूरिक एसिड कुछ मात्रा में होना सामान्य है। लेकिन, इसका स्तर ज्यादा या कम होने पर ये सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हाई यूरिक एसिड से गाउट का खतरा बढ़ता है। वहीं, लो लेवल की परेशानी जल्दी देखने को नहीं मिलती है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक पुरुषों और महिलाओं में यूरिक एसिड का नॉर्मस लेवल अलग-अलग हो सकता है। पुरुषों में अगर इसका स्तर 2. 5 mg/dl या उससे कम है तो इसे लो यूरिक एसिड माना जाता है। वहीं, महिलाओं में लो यूरिक एसिड 2. 5mg/dl बताया जाता है। इसके अलावा, पुरुषों में 2. 5 से लेकर 7. 0mg/dl होता है और महिलाओं में 1. 5 से 6. 0mg/dl होता है। वहीं, यूरिक एसिड का स्तर पुरुषों में 7 से ऊपर और महिलाओं में 6 से ऊपर होता है।
यूरिक एसिड बढ़ने का कारण आमतौर पर डाइट, मोटापा, बीमारी और जेनेटिक हो सकता है। जिनका मोटबॉलिज्म खराब हो, शराब पीते हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ा हो, डायबिटीज के मरीज हैं, प्यूरीन युक्त फूड्स का अधिक सेवन करते हैं या डाइ-यूरेटिक्स का इस्तेमाल करते हैं, उनका यूरिक एसिड बढ़ा हो सकता है।
हाई यूरिक के कारण जोड़ो में दर्द, सूजन, किडनी स्टोन, पीठ में दर्द, बुखार, यूरिन में ब्लीडिंग या बदबू जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
Disclaimer: यह जानकारी आयुर्वेदिक नुस्खों के आधार पर लिखी गई है। इंडिया टीवी इनके सफल होने या इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। इनके इस्तेमाल से पहले चिकित्सक का परामर्श जरूर लें।
| यूरिक एसिड, शरीर में मौजूद एक ऐसा वेस्ट प्रोडक्ट है जो जोड़ो और टिश्यूज में जमने लगता है। इसमें गठिया, गाउट, हार्ट डिजीज सहित कई बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। प्यूरीन नाम का केमिकल बॉडी में नेचुरल तरीके से मैजूद होता है, साथ ही कुछ फूड्स में भी पाया जाता है। जब बॉडी प्यूरीन को पचाने की कोशिश करता है, इस प्रोसेस के दौरान वेस्ट प्रोडक्ट के रूप में यूरिक एसिड निकलता है। इसे आमतौर पर किडनी फिल्टर कर देता है और यूरिन के जरिए शरीर से बाहर निकाल देता है। लेकिन, कई बार ब्लड में यूरिक एसिड जमा रहता है, इसे मेडिक टर्म में हाइपरयूरिसेमिया कहते हैं। ब्लड में जब यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती तो इससे जोड़ो और टिश्यूज में क्रिस्टल्स बनने लगते हैं जो सूजन और गाउट के खतरे को बढ़ाते हैं। स्वास्थ्य विशेज्ञ मानते हैं कि बॉडी में यूरिक एसिड कुछ मात्रा में होना सामान्य है। लेकिन, इसका स्तर ज्यादा या कम होने पर ये सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हाई यूरिक एसिड से गाउट का खतरा बढ़ता है। वहीं, लो लेवल की परेशानी जल्दी देखने को नहीं मिलती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक पुरुषों और महिलाओं में यूरिक एसिड का नॉर्मस लेवल अलग-अलग हो सकता है। पुरुषों में अगर इसका स्तर दो. पाँच मिलीग्राम/dl या उससे कम है तो इसे लो यूरिक एसिड माना जाता है। वहीं, महिलाओं में लो यूरिक एसिड दो. पाँच मिलीग्राम/dl बताया जाता है। इसके अलावा, पुरुषों में दो. पाँच से लेकर सात. शून्य मिलीग्राम/dl होता है और महिलाओं में एक. पाँच से छः. शून्य मिलीग्राम/dl होता है। वहीं, यूरिक एसिड का स्तर पुरुषों में सात से ऊपर और महिलाओं में छः से ऊपर होता है। यूरिक एसिड बढ़ने का कारण आमतौर पर डाइट, मोटापा, बीमारी और जेनेटिक हो सकता है। जिनका मोटबॉलिज्म खराब हो, शराब पीते हैं, ब्लड प्रेशर बढ़ा हो, डायबिटीज के मरीज हैं, प्यूरीन युक्त फूड्स का अधिक सेवन करते हैं या डाइ-यूरेटिक्स का इस्तेमाल करते हैं, उनका यूरिक एसिड बढ़ा हो सकता है। हाई यूरिक के कारण जोड़ो में दर्द, सूजन, किडनी स्टोन, पीठ में दर्द, बुखार, यूरिन में ब्लीडिंग या बदबू जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। Disclaimer: यह जानकारी आयुर्वेदिक नुस्खों के आधार पर लिखी गई है। इंडिया टीवी इनके सफल होने या इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है। इनके इस्तेमाल से पहले चिकित्सक का परामर्श जरूर लें। |
काबुल हवाईअड्डे पर अब भी अमेरिका के 5,800 सैनिक मौजूद हैं। ब्रिटेन और अन्य सहयोगी देशों ने बाइडन से अमेरिकी सेना को काबुल हवाईअड्डे पर और अधिक वक्त तक रखने का अनुरोध किया था।
पीएमओ के बयान में कहा गया है कि नेताओं ने अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति और क्षेत्र तथा दुनिया पर इसके प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने शांति और सुरक्षा बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया, जिसमें सबसे जरूरी प्राथमिकता फंसे हुए लोगों की वापसी है।
बीते सोमवार को जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान रायगढ़ पहुंचे राणे ने सीएम ठाकरे को थप्पड़ मारने की बात कही थी। उन्होंने कहा था, 'यह शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री को स्वतंत्रता का वर्ष नहीं पता।
| काबुल हवाईअड्डे पर अब भी अमेरिका के पाँच,आठ सौ सैनिक मौजूद हैं। ब्रिटेन और अन्य सहयोगी देशों ने बाइडन से अमेरिकी सेना को काबुल हवाईअड्डे पर और अधिक वक्त तक रखने का अनुरोध किया था। पीएमओ के बयान में कहा गया है कि नेताओं ने अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति और क्षेत्र तथा दुनिया पर इसके प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने शांति और सुरक्षा बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया, जिसमें सबसे जरूरी प्राथमिकता फंसे हुए लोगों की वापसी है। बीते सोमवार को जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान रायगढ़ पहुंचे राणे ने सीएम ठाकरे को थप्पड़ मारने की बात कही थी। उन्होंने कहा था, 'यह शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री को स्वतंत्रता का वर्ष नहीं पता। |
बदलते लाइफस्टाइल (LifeStyle) और खान-पान की वजह से हम अपनी सेहत (Health) पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। वजन बढ़ना आज के समय में सबसे बड़ी और कॉमन समस्या है। लेकिन अगर आप खुद को फिट रखना चाहते हैं, तो आपके लिए कुछ भी करना मुश्किल नहीं है। यहां हम आपको कुछ टीवी सेलेब्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने बिजी शेड्यूल से खुद के लिए समय निकाला और अपना वजन घटाया है।
Weight Loose Tips : बदलते लाइफस्टाइल (LifeStyle) और खान-पान की वजह से हम अपनी सेहत (Health) पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। वजन बढ़ना आज के समय में सबसे बड़ी और कॉमन समस्या है। लेकिन अगर आप खुद को फिट रखना चाहते हैं, तो आपके लिए कुछ भी करना मुश्किल नहीं है। यहां हम आपको कुछ टीवी सेलेब्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने बिजी शेड्यूल से खुद के लिए समय निकाला और अपना वजन घटाया। इन टीवी सेलिब्रिटी (TV Celebrities) में सबसे ऊपर नाम आता है, कॉमेडी क्वीन भारती सिंह (Bharti Singh) इसके बाद टीवी एक्टर राम कपूर (Ram Kapoor), 'बॉलिका वधु' से फेमस हुईं अविका गौर (Avika Gor) , बिग बॉस 13 के फेम शहनाज गिल (Shehnaaz Kaur Gill) और 'ये हैं मोहब्बते' की दिव्यांका त्रिपाठी (Divyanka Tripathi) का। इन सभी का ट्रांसफॉर्मेशन जबरदस्त हुआ, अपनी फीटनेस को लेकर यह सोशल मीडिया पर छाएं हुए हैं।
1- भारती सिंह (Bharti Sigh)
इन दिनों भारती सिंह का ट्रांसफॉर्मेशन चर्चा का विषय बना हुआ है। भारती का वजन पहले 91 किलो था, जिसे घटाकर उन्होंने 76 किलो कर लिया है। कॉमेडी क्वीन काफी लंबे समय से इंटरमिटेंट फास्टिंग डाइट फॉलो कर रही हैं। इसका खुलासा उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में किया है।
2- राम कपूर (Ram kapoor)
टीवी एक्टर राम कपूर अपने किरदारों को लेकर घर-घर में फेमस हो चुके हैं। खबरों की मानें तो राम कपूर ने अपना वजन कम करने के लिए 16-16 घंटे भूख रहें और इंटरमिटेंट फास्टिंग डाइट की। उन्होंने अपना वजन 30 किलो कम किया है।
3- रश्मि देसाई (Rashmi Desai)
रश्मि देसाई को 'उतरन' टीवी सीरियल के बाद काफी सफलता मिली थी। वह बिग बॉस 13 में भी नजर आईं थी। कहा जाता है कि एक्ट्रेस ने सूप डाइट फॉलो की थी, उन्होंने केवल 25 दिनों में 4 किलो वजन कम कर लिया था। इसके साथ ही वह लगातार वर्कआउट करती रहती हैं।
बिग बॉस 13 के बाद शहनाज गिल लाइमलाइट में आई थीं। उस समय उनका वजन काफी था। एक्ट्रेस ने अपना वजन 10-12 किलो कम किया है। शहनाज गिल ने बताया था कि वह रात में सिर्फ दूध पीकर सो जाती है। इन दिनों शहनाज गिल सुर्खियों में छाई हुई है।
श्वेता तिवारी को टीवी शो 'कसौटी जिंदगी की' से काफी सफलता मिली थी, वह घर-घर में 'प्रेरणा' के नाम से मशहूर हो गई थीं। खबरों की मानें तो श्वेता तिवारी ने डाइट कर 10 किलो वजन कम किया है। उन्होंने अपनी डाइट में हाई प्रोटीन, सूप और हरी सब्जियों का शामिल किया है। श्वेता तिवारी दो बच्चों की मां है, लेकिन आज वह अपनी बेटी पलक तिवारी को टक्कर देती हुई नजर आती हैं।
दिव्यांका त्रिपाठी का ट्रांसफॉर्मेशन भी काफी चर्चा में रहा है। 'ये है मोहब्बतें' में इशिता का किरदार निभाने वाली दिव्यांका ने भी अपना वजन काफी कम किया है, जो उनकी तस्वीरों में नजर आता है।
| बदलते लाइफस्टाइल और खान-पान की वजह से हम अपनी सेहत पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। वजन बढ़ना आज के समय में सबसे बड़ी और कॉमन समस्या है। लेकिन अगर आप खुद को फिट रखना चाहते हैं, तो आपके लिए कुछ भी करना मुश्किल नहीं है। यहां हम आपको कुछ टीवी सेलेब्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने बिजी शेड्यूल से खुद के लिए समय निकाला और अपना वजन घटाया है। Weight Loose Tips : बदलते लाइफस्टाइल और खान-पान की वजह से हम अपनी सेहत पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। वजन बढ़ना आज के समय में सबसे बड़ी और कॉमन समस्या है। लेकिन अगर आप खुद को फिट रखना चाहते हैं, तो आपके लिए कुछ भी करना मुश्किल नहीं है। यहां हम आपको कुछ टीवी सेलेब्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने बिजी शेड्यूल से खुद के लिए समय निकाला और अपना वजन घटाया। इन टीवी सेलिब्रिटी में सबसे ऊपर नाम आता है, कॉमेडी क्वीन भारती सिंह इसके बाद टीवी एक्टर राम कपूर , 'बॉलिका वधु' से फेमस हुईं अविका गौर , बिग बॉस तेरह के फेम शहनाज गिल और 'ये हैं मोहब्बते' की दिव्यांका त्रिपाठी का। इन सभी का ट्रांसफॉर्मेशन जबरदस्त हुआ, अपनी फीटनेस को लेकर यह सोशल मीडिया पर छाएं हुए हैं। एक- भारती सिंह इन दिनों भारती सिंह का ट्रांसफॉर्मेशन चर्चा का विषय बना हुआ है। भारती का वजन पहले इक्यानवे किलो था, जिसे घटाकर उन्होंने छिहत्तर किलो कर लिया है। कॉमेडी क्वीन काफी लंबे समय से इंटरमिटेंट फास्टिंग डाइट फॉलो कर रही हैं। इसका खुलासा उन्होंने खुद एक इंटरव्यू में किया है। दो- राम कपूर टीवी एक्टर राम कपूर अपने किरदारों को लेकर घर-घर में फेमस हो चुके हैं। खबरों की मानें तो राम कपूर ने अपना वजन कम करने के लिए सोलह-सोलह घंटाटे भूख रहें और इंटरमिटेंट फास्टिंग डाइट की। उन्होंने अपना वजन तीस किलो कम किया है। तीन- रश्मि देसाई रश्मि देसाई को 'उतरन' टीवी सीरियल के बाद काफी सफलता मिली थी। वह बिग बॉस तेरह में भी नजर आईं थी। कहा जाता है कि एक्ट्रेस ने सूप डाइट फॉलो की थी, उन्होंने केवल पच्चीस दिनों में चार किलो वजन कम कर लिया था। इसके साथ ही वह लगातार वर्कआउट करती रहती हैं। बिग बॉस तेरह के बाद शहनाज गिल लाइमलाइट में आई थीं। उस समय उनका वजन काफी था। एक्ट्रेस ने अपना वजन दस-बारह किलो कम किया है। शहनाज गिल ने बताया था कि वह रात में सिर्फ दूध पीकर सो जाती है। इन दिनों शहनाज गिल सुर्खियों में छाई हुई है। श्वेता तिवारी को टीवी शो 'कसौटी जिंदगी की' से काफी सफलता मिली थी, वह घर-घर में 'प्रेरणा' के नाम से मशहूर हो गई थीं। खबरों की मानें तो श्वेता तिवारी ने डाइट कर दस किलो वजन कम किया है। उन्होंने अपनी डाइट में हाई प्रोटीन, सूप और हरी सब्जियों का शामिल किया है। श्वेता तिवारी दो बच्चों की मां है, लेकिन आज वह अपनी बेटी पलक तिवारी को टक्कर देती हुई नजर आती हैं। दिव्यांका त्रिपाठी का ट्रांसफॉर्मेशन भी काफी चर्चा में रहा है। 'ये है मोहब्बतें' में इशिता का किरदार निभाने वाली दिव्यांका ने भी अपना वजन काफी कम किया है, जो उनकी तस्वीरों में नजर आता है। |
रांचीः मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से आज कांके रोड स्थित आवास में मैत्री इंफ्रास्ट्रक्चर एंड माइनिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन टी श्रीनिवास राव ने मिलकर कोरोना वायरस (कोविड-19) से निपटने हेतू एक लाख वासेबल एंड री-यूज मास्क राज्य सरकार को सहयोग किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 संक्रमण से उत्पन्न संकट की इस घड़ी में सभी लोग एकजुट होकर वैश्विक महामारी में आपसी सहयोग और सद्भाव से अपनी भूमिका निभाएं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस से निपटने में स्वयंसेवी संस्थानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है. कोरोना वायरस की इस लड़ाई को हम सब मिलकर लड़ेंगे और जीतेंगे. मौके पर मैत्री इंफ्रास्ट्रक्चर एंड माइनिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन टी श्रीनिवास राव ने कोविड-19 संक्रमण से बचाव को लेकर राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की. इस अवसर पर मैत्री इंफ्रास्ट्रक्चर एंड माइनिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर श्री जी श्रीनिवास राव, प्रोजेक्ट मैनेजर श्री जे सतीश एवं अन्य उपस्थित थे.
| रांचीः मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से आज कांके रोड स्थित आवास में मैत्री इंफ्रास्ट्रक्चर एंड माइनिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन टी श्रीनिवास राव ने मिलकर कोरोना वायरस से निपटने हेतू एक लाख वासेबल एंड री-यूज मास्क राज्य सरकार को सहयोग किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-उन्नीस संक्रमण से उत्पन्न संकट की इस घड़ी में सभी लोग एकजुट होकर वैश्विक महामारी में आपसी सहयोग और सद्भाव से अपनी भूमिका निभाएं. मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस से निपटने में स्वयंसेवी संस्थानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है. कोरोना वायरस की इस लड़ाई को हम सब मिलकर लड़ेंगे और जीतेंगे. मौके पर मैत्री इंफ्रास्ट्रक्चर एंड माइनिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन टी श्रीनिवास राव ने कोविड-उन्नीस संक्रमण से बचाव को लेकर राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की. इस अवसर पर मैत्री इंफ्रास्ट्रक्चर एंड माइनिंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर श्री जी श्रीनिवास राव, प्रोजेक्ट मैनेजर श्री जे सतीश एवं अन्य उपस्थित थे. |
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज नवमी के मौके पर सुबह गोरखनाथ मंदिर में कन्या पूजन किया. उन्होंने यह पूजन गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में किया. इस खास मौके पर सुबह से ही गोरखनाथ मंदिर में पूजा-पाठ के आयोजनों के साथ उत्सव का माहौल बना हुआ था.
कन्या पूजन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया है. कन्या पूजन करके दोपहर 3 बजे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रथ पर सवार होकर रामलीला मैदान तक जाएंगे. इस दौरान हर धर्म और समुदाय के लोग रास्ते भर उनका स्वागत करेंगे.
वर्षों से चली आ रही गोरक्षपीठ की परंपरा का निर्वहन करते हुए वह रामलीला मैदान पहुंचकर भगवान श्रीराम का राजतिलक करेंगे. इसके बाद एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे. इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंदिर वापस पहुंचने के बाद सहभोज का आयोजन होगा.
इससे पहले योगी आदित्यनाथ ने अष्टमी की मान में रविवार रात को गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में पूरे विधि विधान से विशिष्ट महानिशा पूजा की थी. वह रविवार शाम को गोरखपुर पहुंचे थे. अष्टमी पर पूजा के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वेदी पर उगे जौ के पौधे को वैदिक मंत्रों के बीच काटा.
हवन की वेदी पर ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र और अग्नि देवता का आह्वान करते हुए सीएम ने लोक मंगल की कामना की. सीएम विजयदशमी तक गोरखपुर में रहेंगे.
| उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज नवमी के मौके पर सुबह गोरखनाथ मंदिर में कन्या पूजन किया. उन्होंने यह पूजन गोरक्षपीठाधीश्वर के रूप में किया. इस खास मौके पर सुबह से ही गोरखनाथ मंदिर में पूजा-पाठ के आयोजनों के साथ उत्सव का माहौल बना हुआ था. कन्या पूजन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया है. कन्या पूजन करके दोपहर तीन बजे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रथ पर सवार होकर रामलीला मैदान तक जाएंगे. इस दौरान हर धर्म और समुदाय के लोग रास्ते भर उनका स्वागत करेंगे. वर्षों से चली आ रही गोरक्षपीठ की परंपरा का निर्वहन करते हुए वह रामलीला मैदान पहुंचकर भगवान श्रीराम का राजतिलक करेंगे. इसके बाद एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे. इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंदिर वापस पहुंचने के बाद सहभोज का आयोजन होगा. इससे पहले योगी आदित्यनाथ ने अष्टमी की मान में रविवार रात को गोरखनाथ मंदिर के शक्तिपीठ में पूरे विधि विधान से विशिष्ट महानिशा पूजा की थी. वह रविवार शाम को गोरखपुर पहुंचे थे. अष्टमी पर पूजा के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वेदी पर उगे जौ के पौधे को वैदिक मंत्रों के बीच काटा. हवन की वेदी पर ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र और अग्नि देवता का आह्वान करते हुए सीएम ने लोक मंगल की कामना की. सीएम विजयदशमी तक गोरखपुर में रहेंगे. |
कठिनका प्रसारण
विचरना; ( २ ) बिना ( तीनों चीवरोंको ) लिये विचरण करना; ( ३ ) गणके साथ भोजन (करना), ( ४ ) इच्छानुसार चीवर ( लेना ) ; ( ५ ) और जो वहाँ चीवर मिलते वक्त होगा वह उसका होगा । कठिनके लिये एकत्रित होजानेपर भिक्षुओ ! यह पाँच बातें तुम्हें विहित होंगी। 2
और भिक्षुओ ! कठिनके लिये इस तरह सम्मंत्रण ( ठहराव ) करना चाहिये; चतुर समर्थ भिक्षु संघको सूचित करे-क. ज्ञप्ति -- 'भन्ते ! संघ मेरी सुने । यह संघके लिये कठिन ( बनाने ) का कपळा प्राप्त हुआ है । यदि संघ उचित समझे तो इस कठिनके कपळेको इस नामवाले भिक्षुको पहिननेके लिये दे' - यह सूचना है।
ख. अनुश्रावण - '(१) भन्ते ! संघ मेरी सुने । संघको यह कठिन का कपळा मिला है । संघ इस कठिनके कपळेको अमुक नामवाले भिक्षुको पहनने के लिये दे रहा है । जिस आयुष्मान्को संघका इस क ठिन के कपळेको अमुक नामवाले भिक्षुको पहिननेके लिये देना पसंद हो वह चुप रहे, जिसको पसंद न हो वह बोले । ( २ ) दूसरी बार भी० । ( ३ ) तीसरी बार भी० ।
ग. धारणा 'संघने इस कठिनके कपळेको अमुक नामवाले भिक्षुको पहननेको दे दिया। संघको पसंद है इसलिये चुप है - ऐसा मैं इसे समझता हूँ ।
( ३ ) कठिनका प्रसारण और न प्रसारण
"भिक्षुओ ! इस प्रकार कठिन का प्रसारण होता है । कैसे भिक्षुओ ! कठिन का प्रसारण नहीं होता ? उपछने मात्रसे नहीं कठिन का आच्छादन होता । धोने मात्रसे नहीं०; चीवरके फैलाने मात्र से नहीं०, छेदन मात्रसे नहीं०, बंधन मात्रसे नहीं०, लपेटने मात्रसे नहीं ● कं डूस ( = कुंदी) करने मात्रसे नहीं०, हवाके रुखकी ओर करने मात्रसे नहीं०, परिभंड ( = आळ ) करने मात्रसे नहीं ०, चौपेता करने मात्रसे नहीं०, कम्बलके मर्दन मात्रसे नहीं०, चिन्ह कर चुकनेसे ही नहीं०, ( उसके संबंधकी )कथा करनेसे ही नहीं ०, कुक्कू ( = कुछ समयका ) किये होंनेपर ही नहीं०, जमा किये होनेपर नहीं०, छोळने लायक होनेपर नहीं, अकल्प्य (= अ - विहित ) कियेपर नहीं०, संघाटीसे अलग होनेपर नहीं०, न उत्तरासंगसे अलग होनेपर०, न अन्तरवासकसे अलग होनेपर०, न पाँच या पाँच के अधिकसे अलग होनेपर, उसी दिन कटा होनेसे तथा मंडलिकायुक्त होनेसे०, न व्यक्तिका पहना होनेसे अलग०, ठीक तरहसे कटि न पहना गया हो और यदि उसे सीमासे बाहर स्थित हो अनुमोदन करे तो इस प्रकार भी कठिनका आच्छादन नहीं होता । भिक्षुओ ! इस प्रकार कठिनका अ-प्रसारण होता है ।
"भिक्षुओ ! किस प्रकार कठिनका प्रसारण होता है ? बिना पहने क ठिन का प्रसारण होता है । बिना पहने वस्त्र में०, वस्त्र में०, रास्तेके चीथळेमें०, दुकानपर पळे पुराने कपळेमें०, न लांकन कियेमें०, जिसके बारेमें बात न चलाई गई हो वैसेमें०, न कुक्कू ( = कुछ समयका ) कियेमें०, नत्रित कियेमें०, न छोळे हुएमें०, न कल्प्य (= विहित ) कियेमें०, संघाटीसे कठिन आच्छादित है, उत्तरासंग से०, अन्तरवासकसे०, पाँचो या पाँचके अतिरिक्त से उसी दिन कटे तथा मंडलिका य कियेसे कठिन आच्छादित होता है, व्यक्तिके आच्छादित करनेसे कठिन आच्छादित है, कठिन अच्छी तरहसे आच्छादित हो और उसे सीमामें स्थित हो अनुमोदन करे प्रकार भो कठिन आच्छादित होता है । भिक्षुओ ! इस प्रकार कठिन प्रसारित ( = आ होता है ।" | कठिनका प्रसारण विचरना; बिना लिये विचरण करना; गणके साथ भोजन , इच्छानुसार चीवर ; और जो वहाँ चीवर मिलते वक्त होगा वह उसका होगा । कठिनके लिये एकत्रित होजानेपर भिक्षुओ ! यह पाँच बातें तुम्हें विहित होंगी। दो और भिक्षुओ ! कठिनके लिये इस तरह सम्मंत्रण करना चाहिये; चतुर समर्थ भिक्षु संघको सूचित करे-क. ज्ञप्ति -- 'भन्ते ! संघ मेरी सुने । यह संघके लिये कठिन का कपळा प्राप्त हुआ है । यदि संघ उचित समझे तो इस कठिनके कपळेको इस नामवाले भिक्षुको पहिननेके लिये दे' - यह सूचना है। ख. अनुश्रावण - ' भन्ते ! संघ मेरी सुने । संघको यह कठिन का कपळा मिला है । संघ इस कठिनके कपळेको अमुक नामवाले भिक्षुको पहनने के लिये दे रहा है । जिस आयुष्मान्को संघका इस क ठिन के कपळेको अमुक नामवाले भिक्षुको पहिननेके लिये देना पसंद हो वह चुप रहे, जिसको पसंद न हो वह बोले । दूसरी बार भीशून्य । तीसरी बार भीशून्य । ग. धारणा 'संघने इस कठिनके कपळेको अमुक नामवाले भिक्षुको पहननेको दे दिया। संघको पसंद है इसलिये चुप है - ऐसा मैं इसे समझता हूँ । कठिनका प्रसारण और न प्रसारण "भिक्षुओ ! इस प्रकार कठिन का प्रसारण होता है । कैसे भिक्षुओ ! कठिन का प्रसारण नहीं होता ? उपछने मात्रसे नहीं कठिन का आच्छादन होता । धोने मात्रसे नहींशून्य; चीवरके फैलाने मात्र से नहींशून्य, छेदन मात्रसे नहींशून्य, बंधन मात्रसे नहींशून्य, लपेटने मात्रसे नहीं ● कं डूस करने मात्रसे नहींशून्य, हवाके रुखकी ओर करने मात्रसे नहींशून्य, परिभंड करने मात्रसे नहीं शून्य, चौपेता करने मात्रसे नहींशून्य, कम्बलके मर्दन मात्रसे नहींशून्य, चिन्ह कर चुकनेसे ही नहींशून्य, कथा करनेसे ही नहीं शून्य, कुक्कू किये होंनेपर ही नहींशून्य, जमा किये होनेपर नहींशून्य, छोळने लायक होनेपर नहीं, अकल्प्य कियेपर नहींशून्य, संघाटीसे अलग होनेपर नहींशून्य, न उत्तरासंगसे अलग होनेपरशून्य, न अन्तरवासकसे अलग होनेपरशून्य, न पाँच या पाँच के अधिकसे अलग होनेपर, उसी दिन कटा होनेसे तथा मंडलिकायुक्त होनेसेशून्य, न व्यक्तिका पहना होनेसे अलगशून्य, ठीक तरहसे कटि न पहना गया हो और यदि उसे सीमासे बाहर स्थित हो अनुमोदन करे तो इस प्रकार भी कठिनका आच्छादन नहीं होता । भिक्षुओ ! इस प्रकार कठिनका अ-प्रसारण होता है । "भिक्षुओ ! किस प्रकार कठिनका प्रसारण होता है ? बिना पहने क ठिन का प्रसारण होता है । बिना पहने वस्त्र मेंशून्य, वस्त्र मेंशून्य, रास्तेके चीथळेमेंशून्य, दुकानपर पळे पुराने कपळेमेंशून्य, न लांकन कियेमेंशून्य, जिसके बारेमें बात न चलाई गई हो वैसेमेंशून्य, न कुक्कू कियेमेंशून्य, नत्रित कियेमेंशून्य, न छोळे हुएमेंशून्य, न कल्प्य कियेमेंशून्य, संघाटीसे कठिन आच्छादित है, उत्तरासंग सेशून्य, अन्तरवासकसेशून्य, पाँचो या पाँचके अतिरिक्त से उसी दिन कटे तथा मंडलिका य कियेसे कठिन आच्छादित होता है, व्यक्तिके आच्छादित करनेसे कठिन आच्छादित है, कठिन अच्छी तरहसे आच्छादित हो और उसे सीमामें स्थित हो अनुमोदन करे प्रकार भो कठिन आच्छादित होता है । भिक्षुओ ! इस प्रकार कठिन प्रसारित ( = आ होता है ।" |
जिले में शनिवार को आकाशीय बिजली गिरने का सिलसिला लगातार चलता रहा। कई जगहों पर आकाशीय बिजली गिरने से मवेशियों की मौत हो गई। कई व्यक्ति गंभीर रूप से झुलस गए। शनिवार सुबह से ही बारिश ने अपना कहर मचा के रखा था ना केवल बारिश हुई बल्कि गरज चमक के साथ बिजली भी लोगों के ऊपर गिरती हुई नजर आई। कई लोग बिजली की चपेट में भी आ गए और कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। जिनका इलाज जिला चिकित्सालय में चल रहा है।
जिले के गिजवार गांव में 25 सितंबर 2021 शनिवार को देर रात भयंकर आकाशीय बिजली गिरने के कारण एक ही पिता के 3 बेटा-बेटी गंभीर अवस्था में घायल हो गए हैं। जिन्हें एंबुलेंस से जिला चिकित्सालय सीधी में भर्ती कराया गया है। जिन का इलाज जारी है। वहीं जानकारी के अनुसार एक व्यक्ति की स्थिति गंभीर होने के कारण उसे संजय गांधी मेडिकल कॉलेज, रीवा ले जाने की भी स्थिति बन रही है। बिजली की चपेट में आने से माया कुशवाहा (14) की मौके पर ही मौत हो गई। जिसका शव मझौली मॉर्चुरी में रखा गया है और रविवार को उसका पोस्ट मार्टम किया जाएगा।
साथ ही आपको बता दें कि रामपुर नैकिन तहसील के कठार गांव में आकाशीय बिजली गिरने से एक व्यक्ति गंभीर रूप से झुलस गया है। वहीं 4 मवेशियों की मौत हो गई। जिस वजह से आसपास के क्षेत्र में एक हलचल सी पैदा हो चुकी है। आपको बता दें कि क्षेत्र में लगातार बिजली गिरने के मामला सामने आ रहे हैं। हादसे में कई लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| जिले में शनिवार को आकाशीय बिजली गिरने का सिलसिला लगातार चलता रहा। कई जगहों पर आकाशीय बिजली गिरने से मवेशियों की मौत हो गई। कई व्यक्ति गंभीर रूप से झुलस गए। शनिवार सुबह से ही बारिश ने अपना कहर मचा के रखा था ना केवल बारिश हुई बल्कि गरज चमक के साथ बिजली भी लोगों के ऊपर गिरती हुई नजर आई। कई लोग बिजली की चपेट में भी आ गए और कई लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं। जिनका इलाज जिला चिकित्सालय में चल रहा है। जिले के गिजवार गांव में पच्चीस सितंबर दो हज़ार इक्कीस शनिवार को देर रात भयंकर आकाशीय बिजली गिरने के कारण एक ही पिता के तीन बेटा-बेटी गंभीर अवस्था में घायल हो गए हैं। जिन्हें एंबुलेंस से जिला चिकित्सालय सीधी में भर्ती कराया गया है। जिन का इलाज जारी है। वहीं जानकारी के अनुसार एक व्यक्ति की स्थिति गंभीर होने के कारण उसे संजय गांधी मेडिकल कॉलेज, रीवा ले जाने की भी स्थिति बन रही है। बिजली की चपेट में आने से माया कुशवाहा की मौके पर ही मौत हो गई। जिसका शव मझौली मॉर्चुरी में रखा गया है और रविवार को उसका पोस्ट मार्टम किया जाएगा। साथ ही आपको बता दें कि रामपुर नैकिन तहसील के कठार गांव में आकाशीय बिजली गिरने से एक व्यक्ति गंभीर रूप से झुलस गया है। वहीं चार मवेशियों की मौत हो गई। जिस वजह से आसपास के क्षेत्र में एक हलचल सी पैदा हो चुकी है। आपको बता दें कि क्षेत्र में लगातार बिजली गिरने के मामला सामने आ रहे हैं। हादसे में कई लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनकी हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
बताते चलें कि सानिया और मार्टिना दोनों ने कजाखस्तान की जरीना डियास व चीन की सैसई झेंग को हराकर ये विजय हासिल की है। दोनों ने डियास ओर सैसई झेंग को सीधे सेटों में शिकस्त दी है। दोनों जोड़ियों के बीच ये मुकाबला करीब एक घंटा नौ मिनट तक चला। सानिया और हिंगिस ने अपनी प्रतिस्पर्धियों को मुकाबले में 6-2, 6-2 से धूल चटाई।
आगे की जानकारी यह है कि अगले मुकाबले में सानिया और हिंगिस दोनों की जोड़ी किमिको दाते क्रुम व फ्रांसेसका सियावोन के सामने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेगी। पूरे मैच के दौरान सानिया व हिंगिस ने अपने वर्चस्व को बराबरी पर कायम रखा। दोनों ने अपने प्रतिद्वंदियों के खिलाफ मिले आठ में से पांच ब्रेक प्वाइंट को जबकर भुनाया। वहीं दोनों की सामने वाली प्रतिद्वंद्वी जोड़ी सभी छह ब्रेक प्वाइंट पर अंक जुटाने में पूरी तरह से असफल रही। इसी के साथ अपनी धाग जमाते हुए दोनों ने पहले मैच को बेहद आसानी के साथ जीत लिया।
मैच का आनंद लेने वाले टेनिस प्रेमियों के लिए मैच काफी रोमांच से भरा रहा। पूरे मैच के दौरान टेनिस कोर्ट में बराबर सानिया और हिंगिस की जीत के नारे बुलंद होते रहे, जो आखिर तक गूंजे। फिलहाल अब सानिया मिर्जा और मार्टिना हिंगिस की जबरदस्त धमाल मचाती जोड़ी ग्रैंडस्लैम विंबलडन चैम्पियनशिप के महिला युगल के दूसरे दौर में पहुंच गई है। आगे भी भारत व टेनिस प्रेमियों को इस जोड़ी से काफी उम्मींदें हैं।
| बताते चलें कि सानिया और मार्टिना दोनों ने कजाखस्तान की जरीना डियास व चीन की सैसई झेंग को हराकर ये विजय हासिल की है। दोनों ने डियास ओर सैसई झेंग को सीधे सेटों में शिकस्त दी है। दोनों जोड़ियों के बीच ये मुकाबला करीब एक घंटा नौ मिनट तक चला। सानिया और हिंगिस ने अपनी प्रतिस्पर्धियों को मुकाबले में छः-दो, छः-दो से धूल चटाई। आगे की जानकारी यह है कि अगले मुकाबले में सानिया और हिंगिस दोनों की जोड़ी किमिको दाते क्रुम व फ्रांसेसका सियावोन के सामने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेगी। पूरे मैच के दौरान सानिया व हिंगिस ने अपने वर्चस्व को बराबरी पर कायम रखा। दोनों ने अपने प्रतिद्वंदियों के खिलाफ मिले आठ में से पांच ब्रेक प्वाइंट को जबकर भुनाया। वहीं दोनों की सामने वाली प्रतिद्वंद्वी जोड़ी सभी छह ब्रेक प्वाइंट पर अंक जुटाने में पूरी तरह से असफल रही। इसी के साथ अपनी धाग जमाते हुए दोनों ने पहले मैच को बेहद आसानी के साथ जीत लिया। मैच का आनंद लेने वाले टेनिस प्रेमियों के लिए मैच काफी रोमांच से भरा रहा। पूरे मैच के दौरान टेनिस कोर्ट में बराबर सानिया और हिंगिस की जीत के नारे बुलंद होते रहे, जो आखिर तक गूंजे। फिलहाल अब सानिया मिर्जा और मार्टिना हिंगिस की जबरदस्त धमाल मचाती जोड़ी ग्रैंडस्लैम विंबलडन चैम्पियनशिप के महिला युगल के दूसरे दौर में पहुंच गई है। आगे भी भारत व टेनिस प्रेमियों को इस जोड़ी से काफी उम्मींदें हैं। |
१०३ अनुवादक-वालह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋपिजी ६०३
नइ सम्मदिट्ठी; किं संजया असंजया, संजयासंजया १ गोतमा संजया नो असंजया नो - संजय, संजया । जइ संजया, कि पमत्तसंजया, अपमत्तसंजया? गोगमा ! पमत्तमंजया णो अपमत्तमंजया। जइ पमत्तसंजया; किं इढिपत्ता, अद्विपत्ता गोयमा ! इनुत्ता, णो अणिढिपत्ता । वयणावि भाणियव्वा ।। आहारय सरोरे समचउरंस संठाण संतो क्या ममत्त मंगति को होता है या अमत्त संपति को होता है ? अहो गौतम ! ममत्त संपति को होता है परंतु अप्रमत्त संयति को नहीं होता है. यदि ममत्त संयति को होता है तो क्या ऋद्धिधारक को होता है या ऋद्धि बगर को होता है ? अहो गौतम ! आहारक शरीर रूप लब्धि जिस को प्राप्त हुई है ऋद्धि धारक साधुओं को आहारक शरीर होना है परंतु ऋद्धि नगर के माधुओं को नहीं होता है उक्त सत्र न्याय आहारक शरीर आश्रित जानना. आहारक शरीर को समचतुस संस्थान होता है. उम की अवगाहना जघन्य देश ऊणा एक हाथ, उत्कृष्ट एक हाथ मतिपूर्ण अहो भगवन् ! तेजय शरीर कितने प्रकार का होता है ? अहो गौतम! तेजम शरीर पांच प्रकार का होता है. एकेन्द्रिय तेजम शरीर यावत पंचेन्द्रिय तेजस शरीर, तेजन शरीर के संडाण अनेक प्रकार के होते हैं, अव गौतम मी मन करते हैं कि अहो भगवन् ! मारणांतिक समुद्घात करनेवाले तेजस शरीर की कितनी अरगाहना ? अहो गौतम चौडापना में उस की अवगाहना शरीर प्रमाण और लम्बाई में जघन्य अंगुल का असंख्यात यो भाग
* मकाशक राजावहादुर लाहेरी जवानी
दिए। आहाग्य सरीरे जहन्नेणं देसणाग्यणी, उद्योगणं पाणी ॥ तैयसरीरेणं भने कतिविहे १० ? गोयमा ! पंचविहे १० तं० एमिंदिय तेयसरीरे, वितिचउ पत्र एवंजाव गेजमणं भंत देवस्म मारणंतिय समुग्याएकं समोहयरस माणस्स के महालिया गरीगंगाहणा प० गोयमा ! सरीरमाणमेत्ती, विक्समवाहलेणं आ भावार्थका तक, एकेन्द्रिय की उत्पतिस्थान अंगीकार कर मर एकेन्द्रिय बेइन्द्रिय ति वको कान तक जानना. नरक के जीरोंकी जयन्य एक हजार योजन क्यों कि नमक के अंदर गो के अभाग है उसकी टीकरी का जाडरना एक हजार योजन का होता है. नरक का जमकर वहाँ पर उत्पन्न होते हैं इसलिये एक हजार योजन का जवन्य अंतर जानना, उन्टमात्री नरक के जीवनकलकर स्वयं मन समुद्र में या मे पर्वत पर पंडगन की वावडी में 36 इतना अंतर जानना, भानपान, वाणव्यंतर ज्योतिषी व सौधर्म ईशान देवलोक के ! काल के माग स्वस्थान पृथ्वी काया में उत्पन्न होवे उत्कृष्ट जीने पृथ्वी नकके समुद्र तक की पीठिका तक,
र पृथ्वी तक में पृथ्वीपने कुमार माहेन्द्र यावत् गरघार देवलोक के देवता के तेज शरीर की अवगाहना वे भाग की क्रीडा निमित नंदन वन में आये होने और आ
45-49- जीवका अधिकार <de
Infotainm 1-1शाम असेल जाय विजाहरमेडीओ, उकोमेणं अहेलोइयग्गागाओ, उड्ड जान सानिमा तिरिय जात्र मगुस्सवेत्तं । एवं जाव अणुत्तरोबवाइया ।। एवं सनागिय ॥ ९ ॥ ३ विगय संठाणे, अभितरे बाहिरेय देसोही; आहिरसबुडहाणीपाडवाई चैव अपडिवाई ।। १ ।। कतिविहेणं भंत ओही प० !
ने उत्पन्न हो जाये अपना पूर्व सासंबंधी मनुष्योपभोगित श्री की पास भनेको आहवाही आयुष्य पूर्ण करके वहांही उत्पन्न होने और नीचे पाताल कलश के भाग में उत्पन्न होते. या भागत देवलोक मे मारवा अच्युत देवक देश के निजम शरीर की अवगाहना अन्य भांगुन का अख्यानरे माग की मृत्यु लोक में आये और लोक में आये और भायुष्य पूर्ण कर वर्ष ही विजय, तिच्छे मनुष्य क और ऊंचे त
की श्रेणी में उत्कृष्ट भयो गामिनी
और तिमनुष्य क्षेत्र पर्यंत मरण समय में जम शरीर मदेश की जानना औका भी
ज्ञान का है. वान के द्वार करते हैं १ मे २ विषय न
दक व अवमान के देवता नयनीने
★ मकाशक- राजाबहादुर लाला समदेवमहायजी ज्यालामजी
रिप रहा है
११ःकत चतुर्थ समवायोग सूत्र
आयसमिएय एवं सवअहिद मागिय
उत्पन्न होने यह मनुष्य
घंटो दश गर्व से क्षीण वृद्धि ७ मनिशाने अवनिपाति विज्ञान के हो मेर नारकीदेवताको होगो करनी करने से कार र प्रकार का
को होता है
द्रव्य मे अयन्य तेजम व भाषा के
पुलों को जाने उत्कृष्ट एक से अनंत परमाणु पुल तक के रवि पदार्थ को जाने २ क्षेत्रका यातका माग जाने उत्कृष्ट पूर्ण को भी जाने का मेन्य आवविकाका
वां भाग जाने उत्कृष्ट प्रतीत अनागत की संख्याती उत्पणी भा जाने मान मे जवन्य व्य मनिवर्ण गरम स्पर्श इन पारों को जाने उत्कष्ट द्रव्य के संख्या की रीदिक के भेद जाने. ३ अवज्ञान का संस्थानः- नरक का
थापा (नावा ) के आकार में हैं, मानपनि का पाठाके आकार, व्यंतर का पद के आकार, ज्योतिरी का झान्टर के आकार, बारड क्लीक का मादल के आकार, नवग्रेक का फुल की चंगेरी के आकार, अनुत्तर विमान वाले देवका लोकना के आकार अथवा कन्या की कंचुकी के आकार, मनुष्य वनका अनेक प्रकार का. 3 ग्राम्यंतर पास बाय. किम का अवज्ञान प्रकाशित क्षेत्र के आभ्यंतर है और किसका बाहिर है ? नारकी, देवता व कर का ज्ञान मकाशित क्षेत्र से बाथ और अन्य मनुष्य विचका दोनों है.५ दे
जीवका अधिकार स
77 ।। १ ।। मग गाया तहवैयणा भवेदुक्खं ।। अभुवगमुक्कामिया जीयाए मेस मे मई से अहारज्ञान होता है अन्य को देश में भवधिज्ञान होता है. राशन र मानव अथक देवता नारजी को अवस्थित, मनुष्य तिथंच को तीनों प्रकार का. ७ मनिपाति अडिपतिः- नाक देता को प्रतिपाति व मनुष्य नियंत्र को दोनों प्रकार का. अहो भगान् ! अवधिज्ञान कितने प्रकार का कटायो अधिकार पण मूत्र से जानना. ।। १० ।। अब वेदना के लक्षण कहत है वेदना तीन प्रकार की वही शीत वेदना, ऊष्ण बेदना व शीतोष्ण वेदना. इससे नरक केजी दोनों प्रकार की वेदना दे और अन्य को तीनों वेदना होती में और भी स्वादिकार की करो ! द्रव्य वेदना पुल २ क्षेत्र वेदना उपपाव क्षेत्र मेरी राना आयुष्य मी ४ मा वेदनानी नाम कर्म के उदय में यह चारों प्रकार की बेहाचा के जीनतीननवार की वंदना शारीरिक, मानविक, न शारीरिकमानमेरेन्द्रियको होनाकर की वेदना व अन्य मत्र जीवों को मात्र एक शारीरिक वेदना. भार कारकीदना माता, भ्रमाता, मानापाना, मजीरों उक्त तीनों प्रकार की वेदना देते हैं. को वेदना सुख दुःख वजीरों तीनों प्रकार की वंदना द है.और भी बंद के दो भेद अमिक को जानकर उत्पन्
tytic delhs 1/4
* महाराह राजावादुर लाला आजारा | एक सौ तीन अनुवादक-वालह्मचारी मुनि श्री अमोलक ऋपिजी छः सौ तीन नइ सम्मदिट्ठी; किं संजया असंजया, संजयासंजया एक गोतमा संजया नो असंजया नो - संजय, संजया । जइ संजया, कि पमत्तसंजया, अपमत्तसंजया? गोगमा ! पमत्तमंजया णो अपमत्तमंजया। जइ पमत्तसंजया; किं इढिपत्ता, अद्विपत्ता गोयमा ! इनुत्ता, णो अणिढिपत्ता । वयणावि भाणियव्वा ।। आहारय सरोरे समचउरंस संठाण संतो क्या ममत्त मंगति को होता है या अमत्त संपति को होता है ? अहो गौतम ! ममत्त संपति को होता है परंतु अप्रमत्त संयति को नहीं होता है. यदि ममत्त संयति को होता है तो क्या ऋद्धिधारक को होता है या ऋद्धि बगर को होता है ? अहो गौतम ! आहारक शरीर रूप लब्धि जिस को प्राप्त हुई है ऋद्धि धारक साधुओं को आहारक शरीर होना है परंतु ऋद्धि नगर के माधुओं को नहीं होता है उक्त सत्र न्याय आहारक शरीर आश्रित जानना. आहारक शरीर को समचतुस संस्थान होता है. उम की अवगाहना जघन्य देश ऊणा एक हाथ, उत्कृष्ट एक हाथ मतिपूर्ण अहो भगवन् ! तेजय शरीर कितने प्रकार का होता है ? अहो गौतम! तेजम शरीर पांच प्रकार का होता है. एकेन्द्रिय तेजम शरीर यावत पंचेन्द्रिय तेजस शरीर, तेजन शरीर के संडाण अनेक प्रकार के होते हैं, अव गौतम मी मन करते हैं कि अहो भगवन् ! मारणांतिक समुद्घात करनेवाले तेजस शरीर की कितनी अरगाहना ? अहो गौतम चौडापना में उस की अवगाहना शरीर प्रमाण और लम्बाई में जघन्य अंगुल का असंख्यात यो भाग * मकाशक राजावहादुर लाहेरी जवानी दिए। आहाग्य सरीरे जहन्नेणं देसणाग्यणी, उद्योगणं पाणी ॥ तैयसरीरेणं भने कतिविहे दस ? गोयमा ! पंचविहे दस तंशून्य एमिंदिय तेयसरीरे, वितिचउ पत्र एवंजाव गेजमणं भंत देवस्म मारणंतिय समुग्याएकं समोहयरस माणस्स के महालिया गरीगंगाहणा पशून्य गोयमा ! सरीरमाणमेत्ती, विक्समवाहलेणं आ भावार्थका तक, एकेन्द्रिय की उत्पतिस्थान अंगीकार कर मर एकेन्द्रिय बेइन्द्रिय ति वको कान तक जानना. नरक के जीरोंकी जयन्य एक हजार योजन क्यों कि नमक के अंदर गो के अभाग है उसकी टीकरी का जाडरना एक हजार योजन का होता है. नरक का जमकर वहाँ पर उत्पन्न होते हैं इसलिये एक हजार योजन का जवन्य अंतर जानना, उन्टमात्री नरक के जीवनकलकर स्वयं मन समुद्र में या मे पर्वत पर पंडगन की वावडी में छत्तीस इतना अंतर जानना, भानपान, वाणव्यंतर ज्योतिषी व सौधर्म ईशान देवलोक के ! काल के माग स्वस्थान पृथ्वी काया में उत्पन्न होवे उत्कृष्ट जीने पृथ्वी नकके समुद्र तक की पीठिका तक, र पृथ्वी तक में पृथ्वीपने कुमार माहेन्द्र यावत् गरघार देवलोक के देवता के तेज शरीर की अवगाहना वे भाग की क्रीडा निमित नंदन वन में आये होने और आ पैंतालीस-उनचास- जीवका अधिकार <de Infotainm एक-एकशाम असेल जाय विजाहरमेडीओ, उकोमेणं अहेलोइयग्गागाओ, उड्ड जान सानिमा तिरिय जात्र मगुस्सवेत्तं । एवं जाव अणुत्तरोबवाइया ।। एवं सनागिय ॥ नौ ॥ तीन विगय संठाणे, अभितरे बाहिरेय देसोही; आहिरसबुडहाणीपाडवाई चैव अपडिवाई ।। एक ।। कतिविहेणं भंत ओही पशून्य ! ने उत्पन्न हो जाये अपना पूर्व सासंबंधी मनुष्योपभोगित श्री की पास भनेको आहवाही आयुष्य पूर्ण करके वहांही उत्पन्न होने और नीचे पाताल कलश के भाग में उत्पन्न होते. या भागत देवलोक मे मारवा अच्युत देवक देश के निजम शरीर की अवगाहना अन्य भांगुन का अख्यानरे माग की मृत्यु लोक में आये और लोक में आये और भायुष्य पूर्ण कर वर्ष ही विजय, तिच्छे मनुष्य क और ऊंचे त की श्रेणी में उत्कृष्ट भयो गामिनी और तिमनुष्य क्षेत्र पर्यंत मरण समय में जम शरीर मदेश की जानना औका भी ज्ञान का है. वान के द्वार करते हैं एक मे दो विषय न दक व अवमान के देवता नयनीने ★ मकाशक- राजाबहादुर लाला समदेवमहायजी ज्यालामजी रिप रहा है ग्यारहःकत चतुर्थ समवायोग सूत्र आयसमिएय एवं सवअहिद मागिय उत्पन्न होने यह मनुष्य घंटो दश गर्व से क्षीण वृद्धि सात मनिशाने अवनिपाति विज्ञान के हो मेर नारकीदेवताको होगो करनी करने से कार र प्रकार का को होता है द्रव्य मे अयन्य तेजम व भाषा के पुलों को जाने उत्कृष्ट एक से अनंत परमाणु पुल तक के रवि पदार्थ को जाने दो क्षेत्रका यातका माग जाने उत्कृष्ट पूर्ण को भी जाने का मेन्य आवविकाका वां भाग जाने उत्कृष्ट प्रतीत अनागत की संख्याती उत्पणी भा जाने मान मे जवन्य व्य मनिवर्ण गरम स्पर्श इन पारों को जाने उत्कष्ट द्रव्य के संख्या की रीदिक के भेद जाने. तीन अवज्ञान का संस्थानः- नरक का थापा के आकार में हैं, मानपनि का पाठाके आकार, व्यंतर का पद के आकार, ज्योतिरी का झान्टर के आकार, बारड क्लीक का मादल के आकार, नवग्रेक का फुल की चंगेरी के आकार, अनुत्तर विमान वाले देवका लोकना के आकार अथवा कन्या की कंचुकी के आकार, मनुष्य वनका अनेक प्रकार का. तीन ग्राम्यंतर पास बाय. किम का अवज्ञान प्रकाशित क्षेत्र के आभ्यंतर है और किसका बाहिर है ? नारकी, देवता व कर का ज्ञान मकाशित क्षेत्र से बाथ और अन्य मनुष्य विचका दोनों है.पाँच दे जीवका अधिकार स सतहत्तर ।। एक ।। मग गाया तहवैयणा भवेदुक्खं ।। अभुवगमुक्कामिया जीयाए मेस मे मई से अहारज्ञान होता है अन्य को देश में भवधिज्ञान होता है. राशन र मानव अथक देवता नारजी को अवस्थित, मनुष्य तिथंच को तीनों प्रकार का. सात मनिपाति अडिपतिः- नाक देता को प्रतिपाति व मनुष्य नियंत्र को दोनों प्रकार का. अहो भगान् ! अवधिज्ञान कितने प्रकार का कटायो अधिकार पण मूत्र से जानना. ।। दस ।। अब वेदना के लक्षण कहत है वेदना तीन प्रकार की वही शीत वेदना, ऊष्ण बेदना व शीतोष्ण वेदना. इससे नरक केजी दोनों प्रकार की वेदना दे और अन्य को तीनों वेदना होती में और भी स्वादिकार की करो ! द्रव्य वेदना पुल दो क्षेत्र वेदना उपपाव क्षेत्र मेरी राना आयुष्य मी चार मा वेदनानी नाम कर्म के उदय में यह चारों प्रकार की बेहाचा के जीनतीननवार की वंदना शारीरिक, मानविक, न शारीरिकमानमेरेन्द्रियको होनाकर की वेदना व अन्य मत्र जीवों को मात्र एक शारीरिक वेदना. भार कारकीदना माता, भ्रमाता, मानापाना, मजीरों उक्त तीनों प्रकार की वेदना देते हैं. को वेदना सुख दुःख वजीरों तीनों प्रकार की वंदना द है.और भी बंद के दो भेद अमिक को जानकर उत्पन् tytic delhs एक/चार * महाराह राजावादुर लाला आजारा |
एक रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के अमरावती में बड़ी संख्या में बर्ड फ्लू के मामले दर्ज किये गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक महाराष्ट्र के अमरावती जिले में बुधवार को 6,900 नए बर्ड फ्लू के मामले सामने आए।
मुंबईः हाल के दिनों में भारत के कई राज्यों में बर्ड फ्लू के मामलों की पुष्टि हुई थी। कई जगहों पर कौए और अन्य पक्षी मरे हुए भी पाए गए थे। इसके अलावा कुछ जगहों पर एहतियातन मुर्गों को मारने के भी आदेश दिए गए थे। सरकार ने एहतियातन कई जगह मुर्गा मंडी को बंद कर दिया था। हालांकि बाद में बर्ड फ्लू के मामलों में कमी आने के बाद सरकार ने खोलने की इजाज़त दे दी थी।
लेकिन अब बर्ड फ्लू से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसे जानकर फिर से सबकी चिंता बढ़ जाएगी। दरअसल, एक रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के अमरावती में बड़ी संख्या में बर्ड फ्लू के मामले दर्ज किये गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक महाराष्ट्र के अमरावती जिले में बुधवार को 6,900 नए बर्ड फ्लू के मामले सामने आए। इसके बाद नंदुरबार जिले से 19 मामले और जालना जिले से 12 मामले नये मामले आये।
अब जांच के लिए सैंपल भोपाल के राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान और पुणे के पशु रोग जांच अनुभाग में भेजे जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक मुर्गी फार्म से 1 किमी के दायरे में सभी पोल्ट्री पक्षियों और अंडों को वैज्ञानिक रूप से नष्ट कर दिया गया है। साथ ही सरकार ने कहा कि अब तक 10,65,890 कुक्कुट पक्षी (नवापुर और नंदुरबार जिलों से 8,98,273 सहित) 60,75,791 अंडे और 83,694 किलो मुर्गी चारा संक्रमित क्षेत्र से नष्ट हो चुके हैं।
इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार द्वारा चिकन की दुकान के मालिकों को कड़ाई से मुंह और नाक को ढंकने वाले दस्ताने और मास्क का उपयोग करने के लिए निर्देशित किया जाता है। साथ ही सरकार ने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने या उन्हें फैलाने के लिए भी मना किया है।
| एक रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के अमरावती में बड़ी संख्या में बर्ड फ्लू के मामले दर्ज किये गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक महाराष्ट्र के अमरावती जिले में बुधवार को छः,नौ सौ नए बर्ड फ्लू के मामले सामने आए। मुंबईः हाल के दिनों में भारत के कई राज्यों में बर्ड फ्लू के मामलों की पुष्टि हुई थी। कई जगहों पर कौए और अन्य पक्षी मरे हुए भी पाए गए थे। इसके अलावा कुछ जगहों पर एहतियातन मुर्गों को मारने के भी आदेश दिए गए थे। सरकार ने एहतियातन कई जगह मुर्गा मंडी को बंद कर दिया था। हालांकि बाद में बर्ड फ्लू के मामलों में कमी आने के बाद सरकार ने खोलने की इजाज़त दे दी थी। लेकिन अब बर्ड फ्लू से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसे जानकर फिर से सबकी चिंता बढ़ जाएगी। दरअसल, एक रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के अमरावती में बड़ी संख्या में बर्ड फ्लू के मामले दर्ज किये गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक महाराष्ट्र के अमरावती जिले में बुधवार को छः,नौ सौ नए बर्ड फ्लू के मामले सामने आए। इसके बाद नंदुरबार जिले से उन्नीस मामले और जालना जिले से बारह मामले नये मामले आये। अब जांच के लिए सैंपल भोपाल के राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान और पुणे के पशु रोग जांच अनुभाग में भेजे जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक मुर्गी फार्म से एक किमी के दायरे में सभी पोल्ट्री पक्षियों और अंडों को वैज्ञानिक रूप से नष्ट कर दिया गया है। साथ ही सरकार ने कहा कि अब तक दस,पैंसठ,आठ सौ नब्बे कुक्कुट पक्षी साठ,पचहत्तर,सात सौ इक्यानवे अंडे और तिरासी,छः सौ चौरानवे किलो मुर्गी चारा संक्रमित क्षेत्र से नष्ट हो चुके हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार द्वारा चिकन की दुकान के मालिकों को कड़ाई से मुंह और नाक को ढंकने वाले दस्ताने और मास्क का उपयोग करने के लिए निर्देशित किया जाता है। साथ ही सरकार ने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने या उन्हें फैलाने के लिए भी मना किया है। |
NIT Kurukshetra Recruitment 2023: एनआईटी कुरुक्षेत्र में विभिन्न नॉन टीचर के पदों पर भर्ती के लिए नोटिस जारी की गई है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट के माध्यम से अप्लाई कर सकते हैं।
NIT Kurukshetra Recruitment 2023: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र (National Institute Of Technology, Kurukshetra Bharti 2023) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर नॉन टीचिंग के विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। एनआईटी कुरुक्षेत्र ((NIT Kurukshetra) भर्ती 2023 में रुचि रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह यह बेहद ही सुनहरा मौका है। इस भर्ती के माध्यम से आयोग में 63 रिक्त पदों पर योग्य उम्मीदवारों की भर्ती की जाएगी। यह भर्ती प्रक्रिया 28 जनवरी तक जारी रहेगा। उम्मीदवारों की सुविधा के लिए भर्ती से जुड़ी सभी जानकारी जैसे की आवेदन प्रक्रिया, आवेदन करने की लास्ट डेट, चयन प्रक्रिया, आयु सीमा, इत्यादि नीचे दिए गए है।
एनआईटी कुरुक्षेत्र में आवेदन करने के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय / संस्थान से ग्रेजुएशन / मास्टर डिग्री / डिप्लोमा रखने वाले उम्मीदवार आवेदन करने के पात्र है।
एनआईटी कुरुक्षेत्र भर्ती 2023 के लिए उम्मीदवारों की ऊपरी आयु सीमा निम्नानुसार होनी चाहिए।
NIT Kurukshetra Recruitment 2023: आवेदन कैसे करें?
एनआईटी कुरुक्षेत्र भर्ती 2023 के लिए सफलतापूर्वक आवेदन करने के लिए आवेदक नीचे दिए गए चरणों का पालन कर सकते हैं।
- एनआईटी कुरुक्षेत्र रिक्ति 2023 के लिए ऑनलाइन आवेदन करें लिंक पर क्लिक करें।
- आवेदन पत्र को ध्यान से भरें।
- सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें।
- आवेदन शुल्क का भुगतान करें।
उम्मीदवार द्वारा अपने ऑनलाइन आवेदन में दी गई जानकारी के समर्थन में सभी दस्तावेजों की सेल्फ असिस्टेड फोटोकॉपी के साथ ऑनलाइन आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरुक्षेत्र -136119 (हरियाणा) तक डाक द्वारा पहुंचनी चाहिए। या 07 मार्च 2023 से पहले शाम 5:30 बजे तक उम्मीदवार खुद से भी हार्ड कॉपी संस्थान तक पहुंचा सकते है । आवेदन पत्र के लिफाफे पर आवेदित पद का नाम लिखा होना चाहिए।
एनआईटी कुरुक्षेत्र भर्ती 2023 के लिए चयन प्रक्रिया में नीचे दिए गए है।
| NIT Kurukshetra Recruitment दो हज़ार तेईस: एनआईटी कुरुक्षेत्र में विभिन्न नॉन टीचर के पदों पर भर्ती के लिए नोटिस जारी की गई है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट के माध्यम से अप्लाई कर सकते हैं। NIT Kurukshetra Recruitment दो हज़ार तेईस: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कुरुक्षेत्र ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर नॉन टीचिंग के विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी की है। एनआईटी कुरुक्षेत्र भर्ती दो हज़ार तेईस में रुचि रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह यह बेहद ही सुनहरा मौका है। इस भर्ती के माध्यम से आयोग में तिरेसठ रिक्त पदों पर योग्य उम्मीदवारों की भर्ती की जाएगी। यह भर्ती प्रक्रिया अट्ठाईस जनवरी तक जारी रहेगा। उम्मीदवारों की सुविधा के लिए भर्ती से जुड़ी सभी जानकारी जैसे की आवेदन प्रक्रिया, आवेदन करने की लास्ट डेट, चयन प्रक्रिया, आयु सीमा, इत्यादि नीचे दिए गए है। एनआईटी कुरुक्षेत्र में आवेदन करने के लिए किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय / संस्थान से ग्रेजुएशन / मास्टर डिग्री / डिप्लोमा रखने वाले उम्मीदवार आवेदन करने के पात्र है। एनआईटी कुरुक्षेत्र भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए उम्मीदवारों की ऊपरी आयु सीमा निम्नानुसार होनी चाहिए। NIT Kurukshetra Recruitment दो हज़ार तेईस: आवेदन कैसे करें? एनआईटी कुरुक्षेत्र भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए सफलतापूर्वक आवेदन करने के लिए आवेदक नीचे दिए गए चरणों का पालन कर सकते हैं। - एनआईटी कुरुक्षेत्र रिक्ति दो हज़ार तेईस के लिए ऑनलाइन आवेदन करें लिंक पर क्लिक करें। - आवेदन पत्र को ध्यान से भरें। - सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करें। - आवेदन शुल्क का भुगतान करें। उम्मीदवार द्वारा अपने ऑनलाइन आवेदन में दी गई जानकारी के समर्थन में सभी दस्तावेजों की सेल्फ असिस्टेड फोटोकॉपी के साथ ऑनलाइन आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरुक्षेत्र -एक लाख छत्तीस हज़ार एक सौ उन्नीस तक डाक द्वारा पहुंचनी चाहिए। या सात मार्च दो हज़ार तेईस से पहले शाम पाँच:तीस बजे तक उम्मीदवार खुद से भी हार्ड कॉपी संस्थान तक पहुंचा सकते है । आवेदन पत्र के लिफाफे पर आवेदित पद का नाम लिखा होना चाहिए। एनआईटी कुरुक्षेत्र भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए चयन प्रक्रिया में नीचे दिए गए है। |
नई दिल्लीः भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव जारी है। पूर्वी लद्दाख में मई माह से अब तक चीन और भारत के बीच कई बार गतिरोध की नौबत आ चुकी है। दोनों देशों की सेनाएं एक दूसरे के खिलाफ आमने सामने डटी हुई है। सीमा पर युद्ध जैसे हालात बने हैं। भारतीय सेना हर खतरे से निपटने के लिए तैयार है। भारत लगातार अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने में जुटा हुआ है। इस बीच अब खबर ये आ रही है कि अब सभी राष्ट्रीय राजमार्ग, जो चीन की सीमा तक जाने के लिए फीडर सड़कों के रूप में हैं या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक महत्व रखते हैं उन्हें 10 मीटर यानी 32 फीट से ज्यादा चौड़ा किया जाएगा।
ये जानकारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की तरफ से दी गई है। राजमार्ग मंत्रालय ने अपने दो साल पुराने उस परिपत्र को संशोधित कर दिया है, जिसमें ऐसी सड़कों की चौड़ाई 5. 5 मीटर यानी 18 फीट तक सीमित कर दी गई थी। यह परिपत्र चारधाम सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए विवाद का कारण बन गया था।
| नई दिल्लीः भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव जारी है। पूर्वी लद्दाख में मई माह से अब तक चीन और भारत के बीच कई बार गतिरोध की नौबत आ चुकी है। दोनों देशों की सेनाएं एक दूसरे के खिलाफ आमने सामने डटी हुई है। सीमा पर युद्ध जैसे हालात बने हैं। भारतीय सेना हर खतरे से निपटने के लिए तैयार है। भारत लगातार अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने में जुटा हुआ है। इस बीच अब खबर ये आ रही है कि अब सभी राष्ट्रीय राजमार्ग, जो चीन की सीमा तक जाने के लिए फीडर सड़कों के रूप में हैं या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक महत्व रखते हैं उन्हें दस मीटर यानी बत्तीस फीट से ज्यादा चौड़ा किया जाएगा। ये जानकारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की तरफ से दी गई है। राजमार्ग मंत्रालय ने अपने दो साल पुराने उस परिपत्र को संशोधित कर दिया है, जिसमें ऐसी सड़कों की चौड़ाई पाँच. पाँच मीटर यानी अट्ठारह फीट तक सीमित कर दी गई थी। यह परिपत्र चारधाम सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए विवाद का कारण बन गया था। |
राजधानी रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र के एक कमरे से पुलिस ने युवक को युवती की लाश के साथ गिरफ्तार किया है। दोनों लिव इन में रह रहे थे। कमरे से जब तेज बदबू आई तो पड़ोसियों ने मकान मालिक और फिर पुलिस को सूचना दी। पुलिस पहुंची तो लाश जमीन पर पड़ी हुई थी और युवक भी वहीं था। युवक का कहना है कि उसकी गर्लफ्रेंड ने फांसी लगा ली थी। उसने लाश फंदे से उतारी और डरकर किसी को जानकारी नहीं दी।
जानकारी के मुताबिक महासमुंद निवासी बसंती यादव(30) MMI अस्पताल में काम करती थी। वहीं तिल्दा का रहने वाला गोपी निषाद भी काम करता था। साथ में काम करते हुए दोनों के बीच प्रेम हो गया। इसके बाद दोनों एक साथ रहने लगे। बसंती के घर में मालूम था कि वह रायपुर में किसी युवक के साथ रहती थी। दोनों ने एक महीने पहले ही टिकरापारा का यह कमरा किराए में लिया था। गोपी ने कुछ दिन पहले अस्पताल का काम छोड़ दिया था और वह फिलहाल वह कोई काम नहीं कर रहा था।
मकान मालिक रघुराम साहू और पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि पहले तो दोनों अच्छे से रहते थे, लेकिन 15 दिन पहले गोपी शराब के नशे में बसंती से झगड़ा करने लगा था। उसने शराब पीने के लिए अपनी साइकिल बेच दी थी, फिर घर में रखा सिलेंडर भी बेच दिया था। दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगा था।
पुलिस पूछताछ में गोपी ने बताया कि बसंती ने उसके सोए रहने के दौरान फांसी लगाई। वह यह देखकर डर गया। उसने रविवार को लाश नीचे उतारी। इसके बाद उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे। उसने दरवाजा ही नहीं खोला। फिर रात में थोड़ी देर कुछ खाने के लिए बाहर निकला और तुरंत वापस आकर दरवाजा बंद कर लिया। मकान में सार्वजनिक बाथरूम है, वह नहाने इसलिए नहीं गया कि कोई कमरे तक ना आ जाए या कमरे के अंदर देखने की कोशिश ना करे। दो दिन से वह नहीं नहाया।
मकान मालिक से बोला 'प्लीज पुलिस को मत बताना'
दो दिन से जब बसंती नहीं दिखी और कमरे से बदबू आने लगी तो पड़ोसियों ने मकान मालिक और वहीं रहने वाले उसके बेटे को बताया। इन लोगों ने दरवाजा खुलवाया तो गोपी हाथ जोड़कर रोने लगा। मकान मालिक से बोलने लगा कि पुलिस को नहीं बुलाए।
पुलिस ने बताया कि युवती की मौत 2 दिन पहले हो चुकी है। युवती के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया गया है। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं और आगे की कार्रवाई जारी है। वहीं युवती के परिजनों को भी सूचना दी गई। उनके बयान भी दर्ज किए जाएंगे। फिलहाल पुलिस यह नहीं बता रही है कि बसंती की हत्या गोपी ने की या उसने सही में फांसी लगाई है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| राजधानी रायपुर के टिकरापारा थाना क्षेत्र के एक कमरे से पुलिस ने युवक को युवती की लाश के साथ गिरफ्तार किया है। दोनों लिव इन में रह रहे थे। कमरे से जब तेज बदबू आई तो पड़ोसियों ने मकान मालिक और फिर पुलिस को सूचना दी। पुलिस पहुंची तो लाश जमीन पर पड़ी हुई थी और युवक भी वहीं था। युवक का कहना है कि उसकी गर्लफ्रेंड ने फांसी लगा ली थी। उसने लाश फंदे से उतारी और डरकर किसी को जानकारी नहीं दी। जानकारी के मुताबिक महासमुंद निवासी बसंती यादव MMI अस्पताल में काम करती थी। वहीं तिल्दा का रहने वाला गोपी निषाद भी काम करता था। साथ में काम करते हुए दोनों के बीच प्रेम हो गया। इसके बाद दोनों एक साथ रहने लगे। बसंती के घर में मालूम था कि वह रायपुर में किसी युवक के साथ रहती थी। दोनों ने एक महीने पहले ही टिकरापारा का यह कमरा किराए में लिया था। गोपी ने कुछ दिन पहले अस्पताल का काम छोड़ दिया था और वह फिलहाल वह कोई काम नहीं कर रहा था। मकान मालिक रघुराम साहू और पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि पहले तो दोनों अच्छे से रहते थे, लेकिन पंद्रह दिन पहले गोपी शराब के नशे में बसंती से झगड़ा करने लगा था। उसने शराब पीने के लिए अपनी साइकिल बेच दी थी, फिर घर में रखा सिलेंडर भी बेच दिया था। दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगा था। पुलिस पूछताछ में गोपी ने बताया कि बसंती ने उसके सोए रहने के दौरान फांसी लगाई। वह यह देखकर डर गया। उसने रविवार को लाश नीचे उतारी। इसके बाद उसे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करे। उसने दरवाजा ही नहीं खोला। फिर रात में थोड़ी देर कुछ खाने के लिए बाहर निकला और तुरंत वापस आकर दरवाजा बंद कर लिया। मकान में सार्वजनिक बाथरूम है, वह नहाने इसलिए नहीं गया कि कोई कमरे तक ना आ जाए या कमरे के अंदर देखने की कोशिश ना करे। दो दिन से वह नहीं नहाया। मकान मालिक से बोला 'प्लीज पुलिस को मत बताना' दो दिन से जब बसंती नहीं दिखी और कमरे से बदबू आने लगी तो पड़ोसियों ने मकान मालिक और वहीं रहने वाले उसके बेटे को बताया। इन लोगों ने दरवाजा खुलवाया तो गोपी हाथ जोड़कर रोने लगा। मकान मालिक से बोलने लगा कि पुलिस को नहीं बुलाए। पुलिस ने बताया कि युवती की मौत दो दिन पहले हो चुकी है। युवती के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया गया है। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं और आगे की कार्रवाई जारी है। वहीं युवती के परिजनों को भी सूचना दी गई। उनके बयान भी दर्ज किए जाएंगे। फिलहाल पुलिस यह नहीं बता रही है कि बसंती की हत्या गोपी ने की या उसने सही में फांसी लगाई है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
नवरात्रि व्रत का अधिकाधिक लाभ प्राप्त होने के लिए शास्त्र वकस्त्र में बताए आचारों का पालन करना आवश्यक होता है । परंतु देश-काल-परिस्थितिनुसार सभी आचारों का पालन करना संभव नहीं होता । इसीलिए जो संभव हो, उन आचारों का पालन अवश्य करें । जैसे :
नवरात्रि में मांसाहार सेवन और मद्यपान भी नही करना चाहिए । साथ ही रज-तम गुण बढानेवाला आचरण, जैसे चित्रपट देखना, चित्रपट संगीत सुनना इत्यादि त्यागना चाहिए ।
नवरात्रि के नौ दिनों में अधिकांश उपासक उपवास करते हैं । नौ दिन उपवास करना संभव न हो, तो प्रथम दिन एवं अष्टमी के दिन उपवास अवश्य करते हैं । उपवास करने से व्यक्ति के देह में रज-तम की मात्रा घटती है और देह की सात्त्विकता में वृद्धि होती है । ऐसा सात्त्विक देह वातावरण में कार्यरत शक्तितत्त्व को अधिक मात्रा में ग्रहण करने के लिए सक्षम बनता है ।
देवी उपासना के अन्य अंगों के साथ नवरात्रि की कालावधि में `श्री दुर्गादेव्यै नमः । ' यह नामजप अधिकाधिक करने से देवीतत्त्व का लाभ मिलने में सहायता होती है ।
नवरात्रि में किए जानेवाले धार्मिक कृत्य पूरे श्रद्धाभावसहित करने से पूजक एवं परिवार के सभी सदस्यों को शक्तितत्त्व का लाभ होता है । नवरात्रि की कालावधि में शक्तितत्त्व से संचारित वास्तुद्वारा वर्षभर इन तरंगों का लाभ मिलता रहता है। परंतु इसके लिए देवी मां की उपासना केवल नवरात्रि में ही नहीं; अपितु पूर्ण वर्ष शास्त्र समझकर योग्य पद्धति से करना आवश्यक है ।
| नवरात्रि व्रत का अधिकाधिक लाभ प्राप्त होने के लिए शास्त्र वकस्त्र में बताए आचारों का पालन करना आवश्यक होता है । परंतु देश-काल-परिस्थितिनुसार सभी आचारों का पालन करना संभव नहीं होता । इसीलिए जो संभव हो, उन आचारों का पालन अवश्य करें । जैसे : नवरात्रि में मांसाहार सेवन और मद्यपान भी नही करना चाहिए । साथ ही रज-तम गुण बढानेवाला आचरण, जैसे चित्रपट देखना, चित्रपट संगीत सुनना इत्यादि त्यागना चाहिए । नवरात्रि के नौ दिनों में अधिकांश उपासक उपवास करते हैं । नौ दिन उपवास करना संभव न हो, तो प्रथम दिन एवं अष्टमी के दिन उपवास अवश्य करते हैं । उपवास करने से व्यक्ति के देह में रज-तम की मात्रा घटती है और देह की सात्त्विकता में वृद्धि होती है । ऐसा सात्त्विक देह वातावरण में कार्यरत शक्तितत्त्व को अधिक मात्रा में ग्रहण करने के लिए सक्षम बनता है । देवी उपासना के अन्य अंगों के साथ नवरात्रि की कालावधि में `श्री दुर्गादेव्यै नमः । ' यह नामजप अधिकाधिक करने से देवीतत्त्व का लाभ मिलने में सहायता होती है । नवरात्रि में किए जानेवाले धार्मिक कृत्य पूरे श्रद्धाभावसहित करने से पूजक एवं परिवार के सभी सदस्यों को शक्तितत्त्व का लाभ होता है । नवरात्रि की कालावधि में शक्तितत्त्व से संचारित वास्तुद्वारा वर्षभर इन तरंगों का लाभ मिलता रहता है। परंतु इसके लिए देवी मां की उपासना केवल नवरात्रि में ही नहीं; अपितु पूर्ण वर्ष शास्त्र समझकर योग्य पद्धति से करना आवश्यक है । |
झांसीः देश भर में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व शुरु होने के बाद पूरे देश में इसे धूमधाम से मनाया जा रहा है। लोग अपने घर में धूमधाम से गणेश जी को लेकर आ रहे है। यहां पूरे देश में यह नजारा देखने को मिला, वहीं यूपी के झांसी में भी लोग अपने घरों में गणपति बप्पा का स्वागत कर रहे है। लोग पूरी श्रद्धा भावना के साथ बप्पा को घर लेकर आए है।
बता दें कि बाल गंगाधर तिलक द्वारा शुरू की गई सार्वजनिक गणेश उत्सव की परंपरा आज भी उसी तरह जारी है। झांसी में भी बप्पा घर-घर विराज चुके हैं। लंबे समय से मराठा शासकों के यहां राज करने की वजह से झांसी में बड़ी संख्या में मराठी समाज के लोग रहते हैं। शहर में कई जगहों पर गणपति बप्पा को स्थापित किया जाता है। पिछले कई सालों से यह परंपरा यहां चली आ रही है। हालांकि कोरोना काल में 2 साल तक सार्वजनिक गणेश उत्सव के आयोजन पर रोक लगी थी। इस बार यह रोक हटा दी गई है और शहरवासियों ने पूरे उत्साह के साथ बप्पा को जगह जगह स्थापित किया है।
वहीं, झांसी के बड़े बाजार में रामलीला मंच पर पिछले 30 सालों से गणपति बप्पा को स्थापित किया जाता है। रामलीला मंचन के शुरू होने से पहले यहां गणपति को स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है। झांसी के बड़ागांव गेट इलाके में पिछले 20 सालों से गणपति पंडाल लगाया जाता है। स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए इस पंडाल को देखने के लिए दूर-दूर से लोग देखने आते हैं।
दरअसल, जिले के ऐतिहासिक गणेश मडिया के गणपति को भी 2 साल के अंतराल के बाद स्थापित किया जा रहा है। यहां भगवान गणेश की जिस मूर्ति की स्थापना की जाती है उसे विशेष तौर पर नासिक से लाया जाता है। शहर की पुरानी तहसील के पास भी गणपति बप्पा को स्थापित किया जाता है।
यहां भगवान गणेश को पारंपरिक मराठी वेशभूषा में सजाया जाता है। झांसी के गणेश मडिया मंदिर को भी सार्वजनिक गणेश उत्सव के अवसर पर विशेष रूप से सजाया जाता है। राव शासकों के समय का बना है मंदिर झांसी में आस्था का बड़ा केंद्र है।
| झांसीः देश भर में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व शुरु होने के बाद पूरे देश में इसे धूमधाम से मनाया जा रहा है। लोग अपने घर में धूमधाम से गणेश जी को लेकर आ रहे है। यहां पूरे देश में यह नजारा देखने को मिला, वहीं यूपी के झांसी में भी लोग अपने घरों में गणपति बप्पा का स्वागत कर रहे है। लोग पूरी श्रद्धा भावना के साथ बप्पा को घर लेकर आए है। बता दें कि बाल गंगाधर तिलक द्वारा शुरू की गई सार्वजनिक गणेश उत्सव की परंपरा आज भी उसी तरह जारी है। झांसी में भी बप्पा घर-घर विराज चुके हैं। लंबे समय से मराठा शासकों के यहां राज करने की वजह से झांसी में बड़ी संख्या में मराठी समाज के लोग रहते हैं। शहर में कई जगहों पर गणपति बप्पा को स्थापित किया जाता है। पिछले कई सालों से यह परंपरा यहां चली आ रही है। हालांकि कोरोना काल में दो साल तक सार्वजनिक गणेश उत्सव के आयोजन पर रोक लगी थी। इस बार यह रोक हटा दी गई है और शहरवासियों ने पूरे उत्साह के साथ बप्पा को जगह जगह स्थापित किया है। वहीं, झांसी के बड़े बाजार में रामलीला मंच पर पिछले तीस सालों से गणपति बप्पा को स्थापित किया जाता है। रामलीला मंचन के शुरू होने से पहले यहां गणपति को स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है। झांसी के बड़ागांव गेट इलाके में पिछले बीस सालों से गणपति पंडाल लगाया जाता है। स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए इस पंडाल को देखने के लिए दूर-दूर से लोग देखने आते हैं। दरअसल, जिले के ऐतिहासिक गणेश मडिया के गणपति को भी दो साल के अंतराल के बाद स्थापित किया जा रहा है। यहां भगवान गणेश की जिस मूर्ति की स्थापना की जाती है उसे विशेष तौर पर नासिक से लाया जाता है। शहर की पुरानी तहसील के पास भी गणपति बप्पा को स्थापित किया जाता है। यहां भगवान गणेश को पारंपरिक मराठी वेशभूषा में सजाया जाता है। झांसी के गणेश मडिया मंदिर को भी सार्वजनिक गणेश उत्सव के अवसर पर विशेष रूप से सजाया जाता है। राव शासकों के समय का बना है मंदिर झांसी में आस्था का बड़ा केंद्र है। |
नवंबर में ट्विटर ने अपने 50 फीसदी स्टाफ को बाहर का रास्ता दिखा गया है. इस लिस्ट में टेक कंपनी इंटेल, सोशल मीडिया कंपनी मेटा, शॉपीफाई जैसी जानी-मानी कंपनियां शामिल हैं.
सिर्फ अमेरिका में ही टेक कंपनियों ने अक्टूबर में 50 हजार से अधिक कंपनियों को बाहर निकाला है.
कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने में भारतीय कंपनियां बायजूस, ब्लिंकिट और अनअकेडमी भी पीछे नहीं रही हैं.
दुनियाभर में छंटनी एक ट्रेंड सी बन गई है. इसको लेकर कर्मचारी क्या सोचते हैं, उसे जानने के लिए रिसर्च फर्म UpCity ने 600 टेक प्रोफेशनल्स पर सर्वे किया. सर्वे में कई दिलचस्प बातें सामने आईं.
| नवंबर में ट्विटर ने अपने पचास फीसदी स्टाफ को बाहर का रास्ता दिखा गया है. इस लिस्ट में टेक कंपनी इंटेल, सोशल मीडिया कंपनी मेटा, शॉपीफाई जैसी जानी-मानी कंपनियां शामिल हैं. सिर्फ अमेरिका में ही टेक कंपनियों ने अक्टूबर में पचास हजार से अधिक कंपनियों को बाहर निकाला है. कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने में भारतीय कंपनियां बायजूस, ब्लिंकिट और अनअकेडमी भी पीछे नहीं रही हैं. दुनियाभर में छंटनी एक ट्रेंड सी बन गई है. इसको लेकर कर्मचारी क्या सोचते हैं, उसे जानने के लिए रिसर्च फर्म UpCity ने छः सौ टेक प्रोफेशनल्स पर सर्वे किया. सर्वे में कई दिलचस्प बातें सामने आईं. |
नई दिल्ली। न्यूयार्क एयरपोर्ट पर आव्रजन विभाग की सेकेंडरी जांच के लिए जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को रोका गया। जांच के सिलसिले में उन्हें एयरपोर्ट पर ही दो घंटे बिताने पड़े। यह वाक्या उन्हें नागवार गुजरा।
उनका कहना है कि उन्हें जांच के संबंध में एयरपोर्ट पर दो घंटे तक रोका गया। 46 वर्षीय उम्र का यह भी कहना है कि यहाँ उनके साथ ऐसा पहली बार नहीं हुआ।
हर बार अमेरिका आने पर उनके साथ ऐसा ही किया जाता है। उन्होंने कहा यह जांच काफी उबाऊ है। जांच क्षेत्र में दो घंटे का लम्बा समय बिताना काफी कष्टकारी साबित होता है। उमर यहाँ न्यूयार्क यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम के सिलसिले में आए हैं।
इससे पहले अगस्त के महीने में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान को भी अमेरिका के लॉस एंजेलिस हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था।
पिछले सात साल में यह तीसरी बार था, जब अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों ने उन्हें रोका। शाहरुख ने भी ट्वीट कर इस पर नाराजगी जाहिर की थी।
| नई दिल्ली। न्यूयार्क एयरपोर्ट पर आव्रजन विभाग की सेकेंडरी जांच के लिए जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को रोका गया। जांच के सिलसिले में उन्हें एयरपोर्ट पर ही दो घंटे बिताने पड़े। यह वाक्या उन्हें नागवार गुजरा। उनका कहना है कि उन्हें जांच के संबंध में एयरपोर्ट पर दो घंटे तक रोका गया। छियालीस वर्षीय उम्र का यह भी कहना है कि यहाँ उनके साथ ऐसा पहली बार नहीं हुआ। हर बार अमेरिका आने पर उनके साथ ऐसा ही किया जाता है। उन्होंने कहा यह जांच काफी उबाऊ है। जांच क्षेत्र में दो घंटे का लम्बा समय बिताना काफी कष्टकारी साबित होता है। उमर यहाँ न्यूयार्क यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम के सिलसिले में आए हैं। इससे पहले अगस्त के महीने में बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान को भी अमेरिका के लॉस एंजेलिस हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था। पिछले सात साल में यह तीसरी बार था, जब अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों ने उन्हें रोका। शाहरुख ने भी ट्वीट कर इस पर नाराजगी जाहिर की थी। |
उदयपुर में एक कांस्टेबल बताए जा रहे व्यक्ति का एक होटल संचालक से बंधी के रूपए मांगते हुए वीडियो सामने आया है। जिसमें वह बोल रहा है कि होटल हमारी चौकी के एरिया में है। पैसा तो देना पड़ेगा। वीडियो में वह आगे अन्य होटलों से मिलने वाली बंधी के बारे में बताते हुए बोल रहा है कि कांस्टेबल के 300 और हैडकांस्टेबल के 500 रूपए चाहिए। वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। मामला झल्लारा थाना क्षेत्र की इंटालीखेड़ा चौकी में तैनात कांस्टेबल का बताया जा रहा है।
मामले में खाकी पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोग इस वीडियो को देखकर दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठा रहे हैं। हालांकि मामले में उदयपुर एसपी विकाश शर्मा ने जांच के आदेश दिए हैं। एसपी ने कहा कि मामले में जांच शुरू हो गई है। अवैध वसूली की पुष्टि या किसी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर कांस्टेबल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
वायरल वीडियो में कांस्टेबल बंदी पर अपना हक जताते हुए बात करता नजर आ रहा है। वह थाने में बंदी देने के अलावा चौकी पर अलग बंदी देने पर जोर दे रहा है। होटल संचालक की ओर से ही बनाए गए वीडियो से जब पुलिसकर्मी की करतूत सामने आई तो वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। होटल संचालक इन दिनों ग्राहकी नहीं होने की भी बात कर रहा है। फिर भी कांस्टेबल द्वारा अपनी बात जारी रखते हुए उस पर बंधी को दबाव बनाया जा रहा है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| उदयपुर में एक कांस्टेबल बताए जा रहे व्यक्ति का एक होटल संचालक से बंधी के रूपए मांगते हुए वीडियो सामने आया है। जिसमें वह बोल रहा है कि होटल हमारी चौकी के एरिया में है। पैसा तो देना पड़ेगा। वीडियो में वह आगे अन्य होटलों से मिलने वाली बंधी के बारे में बताते हुए बोल रहा है कि कांस्टेबल के तीन सौ और हैडकांस्टेबल के पाँच सौ रूपए चाहिए। वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। मामला झल्लारा थाना क्षेत्र की इंटालीखेड़ा चौकी में तैनात कांस्टेबल का बताया जा रहा है। मामले में खाकी पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोग इस वीडियो को देखकर दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठा रहे हैं। हालांकि मामले में उदयपुर एसपी विकाश शर्मा ने जांच के आदेश दिए हैं। एसपी ने कहा कि मामले में जांच शुरू हो गई है। अवैध वसूली की पुष्टि या किसी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर कांस्टेबल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वायरल वीडियो में कांस्टेबल बंदी पर अपना हक जताते हुए बात करता नजर आ रहा है। वह थाने में बंदी देने के अलावा चौकी पर अलग बंदी देने पर जोर दे रहा है। होटल संचालक की ओर से ही बनाए गए वीडियो से जब पुलिसकर्मी की करतूत सामने आई तो वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। होटल संचालक इन दिनों ग्राहकी नहीं होने की भी बात कर रहा है। फिर भी कांस्टेबल द्वारा अपनी बात जारी रखते हुए उस पर बंधी को दबाव बनाया जा रहा है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
नई दिल्ली - वैश्विक स्तर पर खाद्य तेलों में रही गिरावट के बीच मंगलवार को दिल्ली थोक जिंस बाजार में इनमें टिकाव रहा, वहीं दालों में मिलाजुला रुख रहा, जबकि चना और चीनी में नरमी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खाद्य तेलों में गिरावट रही। मलेशिया के बुरसा मलेशिया डेरिवेटिव एक्सचेंज में पाम ऑयल का जून वायदा 21 रिंगिट की गिरावट में 2437 रिंगिट प्रति टन पर आ गया। मई का अमरीका सोया तेल वायदा भी 0. 04 सेंट लुढ़ककर 32. 00 सेंट प्रति पाउंड बोला गया। स्थानीय स्तर पर बिनौला तेल, सरसों तेल, मूंगफली तेल, चावल छिलका, तिल तेल, सोया रिफाइंड, सोया डिगम और पाम ऑयल में टिकाव रहा। मीठे के बाजार में पर्याप्त आपूर्ति के बीच मांग सुस्त पड़ने से चीनी 20 रुपए प्रति क्विंटल सस्ती हो गई।
| नई दिल्ली - वैश्विक स्तर पर खाद्य तेलों में रही गिरावट के बीच मंगलवार को दिल्ली थोक जिंस बाजार में इनमें टिकाव रहा, वहीं दालों में मिलाजुला रुख रहा, जबकि चना और चीनी में नरमी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खाद्य तेलों में गिरावट रही। मलेशिया के बुरसा मलेशिया डेरिवेटिव एक्सचेंज में पाम ऑयल का जून वायदा इक्कीस रिंगिट की गिरावट में दो हज़ार चार सौ सैंतीस रिंगिट प्रति टन पर आ गया। मई का अमरीका सोया तेल वायदा भी शून्य. चार सेंट लुढ़ककर बत्तीस. शून्य सेंट प्रति पाउंड बोला गया। स्थानीय स्तर पर बिनौला तेल, सरसों तेल, मूंगफली तेल, चावल छिलका, तिल तेल, सोया रिफाइंड, सोया डिगम और पाम ऑयल में टिकाव रहा। मीठे के बाजार में पर्याप्त आपूर्ति के बीच मांग सुस्त पड़ने से चीनी बीस रुपयापए प्रति क्विंटल सस्ती हो गई। |
लाइव हिंदी खबर :- दोस्तों हर इंसान चाहता है की शादी के बाद उसे संतान की प्राप्ति हो, किसी भी इंसान के लिए सबसे ख़ुशी का पल तब होता है जब वह माता या पिता बनता है, तो आइये जानते हैं।
आज हम आपको बताते हैं की किन नाम वाले लोगों के कितने बच्चे होते हैं।
1. जिन लोगों का नाम A अक्षर से शुरु होता है, उनकी किस्मत में दो या दो से अधिक संतान के योग होते हैं. इन नाम वाले लोगों को संतान सुख बहुत जल्दी मिल जाता है।
2. जिन लोगों का नाम R अक्षर से शुरू होता उनके तीन या तीन से अधिक बच्चे होते हैं, इन नाम वाले लोगों को संतान सुख प्राप्त करने के लिए बहुत इंतज़ार भी करना पड़ता है।
3. जिन लोगों का नाम S अक्षर से शुरु होता है, उनकी किस्मत में एक या एक से अधिक संतान होने के योग होते हैं, इन नाम वाले लोगों के सबसे कम बच्चे होते हैं।
| लाइव हिंदी खबर :- दोस्तों हर इंसान चाहता है की शादी के बाद उसे संतान की प्राप्ति हो, किसी भी इंसान के लिए सबसे ख़ुशी का पल तब होता है जब वह माता या पिता बनता है, तो आइये जानते हैं। आज हम आपको बताते हैं की किन नाम वाले लोगों के कितने बच्चे होते हैं। एक. जिन लोगों का नाम A अक्षर से शुरु होता है, उनकी किस्मत में दो या दो से अधिक संतान के योग होते हैं. इन नाम वाले लोगों को संतान सुख बहुत जल्दी मिल जाता है। दो. जिन लोगों का नाम R अक्षर से शुरू होता उनके तीन या तीन से अधिक बच्चे होते हैं, इन नाम वाले लोगों को संतान सुख प्राप्त करने के लिए बहुत इंतज़ार भी करना पड़ता है। तीन. जिन लोगों का नाम S अक्षर से शुरु होता है, उनकी किस्मत में एक या एक से अधिक संतान होने के योग होते हैं, इन नाम वाले लोगों के सबसे कम बच्चे होते हैं। |
होकर राग-द्वेष का रूप धारण करती है। ये ही राग-द्वेष असंख्य स्पष्ट और अस्पष्ट भाव-भावनाओं में पल्लवित होते हैं। संस्कृत के रस-शास्त्रियों ने उनकी गणना की है, परन्तु पर्याप्त रूपेरण स्तुत्य होने पर भी वह आधुनिक मनोविज्ञानी को मान्य नहीं ! मन प्रधा सागर है, उसमें कितनी ऊम्मियाँ उठती है, इसका कौन अनुमान लगा सकता है। फिर भी मनोवेगों का हमारा यह वर्गीकरण किसी अंश तक ठीक है। यदि इसमें मनोविज्ञान की नवीन शोध अनुसार परिवर्तन कर लिया जाए, जैसा कि आचार्य शुक्ल ने किया है, तो राग-पक्ष को समझने में काफ़ी सहायता मिल सकती है।
: हाँ तो अहम् अपने बाद मनुष्य को अपनों के प्रति खींचता है इसलिए उसका ममत्व सबसे पहले अपने परिवार पर ही प्रकट होता है क्योंकि वह उसके सबसे निकट है । अतः स्वभाव से ही उसके भावों का बहुत बड़ा अंश अपने कुटुम्भ पर ही केन्द्रित रहता है । यही उसके भावों का सव से पहिला और सबसे सुन्दर क्रीड़ा क्षेत्र है। यहीं से उसका लौकिक जीवन आरम्भ होता है। यहीं वह अहं का दर्द से समन्वय करता हुआ उसका उपुयुक्त विकास करता है। तभी तो भारतीय संस्कृति में पारिवारिक जीवन को विशेष महत्व दिया गया है। जिसने गुप्त जी के काव्यों का एक चार भी अध्ययन किया होगा वह अवश्य ही मान लेगा कि उनको गृहस्थ जीवन के चित्र खींचने में अद्वितीय सफलता मिली है। यह युग राष्ट्रीयता का
होने के कारण लोग उनकी राष्ट्रीयता को ले उड़े, अन्यथा उनकी प्रधान विशेषता गृहस्थ जीवन के सुख-दुख की व्यञ्जना ही है। यह बात कहते हुए मेरे सम्मुख चिरगाँव के रामभक्त गुप्त परिवार का वह स्नेह- स्निग्ध, ममत्वपूर्ण जीवन उपस्थित हो जाता है। वह पारिवारिक जीवन कितना सरल, कितना स्वस्थ और कितना पूर्ण है। उस वातावरण में रहने वाले कवि का गार्हस्थ्य-मर्मी होना स्वाभाविक है। चिरगाँव जाने से पूर्व ही इन पंक्तियों का लेखक गुप्तजी के परिवार चित्रों पर मुग्ध था - वहाँ जाना तो कार्य से कारण का सम्बन्ध जोड़ना मात्र था ।
साकेत में रघु-परिवार के सुख-दुख का वर्णन है। यह परिवार सूर्यकुल का महान राज-परिवार है, परन्तु प्रकृति ने राजा और भिखारी के सुख-दुख में अंतर नहीं रखा । दोनों के हृदय में एकसा स्पन्दन और दोनों की में एकसा दर्द है । इस परिवार का जीवन आदर्श हिन्दू-गृहस्थ का जीवन है। उसमें इस जीवन के अनेक सफल चित्र हैं- पति-पत्नी हैं, पिता हैं, पुत्र-पुत्रियाँ हैं, माताएं हैं, विमाताएँ हैं, देवर भाभी हैं, सासें और पुत्र-वधुएँ हैं, स्वामी और सेवक हैं । परन्तु विभिन्न व्यष्टियों से बना हुआ यह परिवार एक सम्पूर्ण समष्टि है । यह इसकी क्या सभी सुखी परिवारों की विशेषता है।
एक तरु के विविध सुमनों से खिले, पौरजन रहते परस्पर हैं मिले ।
एक भी भोंगन नहीं ऐसा यहाँ । शिशु न करते हों कलित फ्रीड़ा जहाँ । कौन है ऐसा प्रभागा गृह कहो, साथ जिसके अश्व-गोशाला न हो । उपर्युक्त उद्धरण में 'शिशु न करते हों फलित क्रीड़ा जहाँ' और 'साथ जिसके अश्व-गोशाला न हो इन बातों ने गृहस्थ का वाह्यचित्र पूर्ण कर दिया है।
गृहस्थ जीवन का प्राण हे दाम्पत्य - क्योंकि मनुष्य के भाव कोप पर सब से व्यापक और गहरा अधिकार उस व्यक्ति का होगा जो उसके सबसे अधिक निकट है ! इस दृष्टि से जीवन में सेक्स ( काम ) की प्रमुखता होने के कारण स्त्री-पुरुप का नैकट्य ही सर्वाधिक ठहरता है ! उनके लिए मानसिक एकता के साथ शारीरिक एकता भी तो अनिवार्य हो जाता है ! मर्यादावादियों ने इस सम्बन्ध को दाम्पत्य में ही सीमित कर दिया है क्यों कि इस एकता का विकास मर्यादाबद्ध होकर ही - अर्थात् विवाह सम्बद्ध होकर ही हो सकता है ! इस प्रकार हम देखते हैं कि स्त्री पुरुप का सम्बन्ध अथवा रति, अथवा शृङ्गार ही मनुष्य जीवन की प्रमुख भावना है और मन प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से इसमें रमता रहता है ! साकेत के दशरथ-परिवार में पाँच दम्पति हैं-- उर्मिला लक्ष्मण, राम-सीता, भरत - माण्डवी, दशरथ और उनकी तीनों रानियाँ (विशेष कर कैकेयी) - शत्रुघ्न और श्रुतकीर्ति ! उसका प्रधान कार्य हो चौदह
वर्ष की दीर्घ अवधि के उपरान्त उर्मिला लक्ष्मरण का मिलन है अतः स्वभावतः उसका प्रधान रस शृङ्गार है - और शृङ्गार में भी, जीवन में विरह की विशेषता के कारण, वियोग-पक्ष प्रधान है, परम्परावादी जिसे 'विप्रलम्भ शृङ्गार' का 'प्रवास' अंग कहेंगे । ऐसे काव्य में दाम्पत्य जीवन के मधुर चित्र होना स्वाभाविक ही है । पहिले दाम्पत्य जीवन का आदर्श क्या है, यह सुनिए । उर्मिला लक्ष्मण का पारस्परिक विनोद वार्तालाप हो रहा है । लक्ष्मण पत्नी के गौरव की परिभाषा करते हुए कहते हैं'भूमि के कोटर, गुहा गिरि-गर्त भी, शून्यता नम की, सलिल श्रावर्त भी, प्रेयसी, किसके सहज संसर्ग से, दीखते हैं प्राणियों को स्वर्ग से ?
इन शब्दों में लक्ष्मण ने स्त्रीत्व के चरम महत्व की व्याख्या कर दी है ! स्त्री का सत्र से वड़ा सौन्दर्य यही है कि उसके संसर्ग से जीवन में रस आ जाता है ! जगत के शून्य चित्र रंगीन वन जाते हैं ! उधर उर्मिला नारी का प्रतिनिधित्व करती हुई पुरुष की महिमा का गान इस प्रकार करती हैखोजती हैं एक श्राश्रय मात्र हम चाहती हैं एक तुम सा पात्र हम । प्रान्तरिक सुख दुःख हम जिसमें घरें
और निज भव-भार यों हलका करें ।
उमिला दम्पति विज्ञान का कितना मधुर व्याख्यान करती
है । स्त्री और पुरुष का यह सम्बन्ध अनादि काल से अटूट इसीलिए रहा है कि जीवन में दोनों को एक ऐसे साथी की आवश्यकता का अनुभव होता है जिससे वे अपने सुख-दुख कह सुन सकें । स्त्री में हृदय का प्राधान्य होने के कारण उसको ऐसे पात्र की आवश्यकता अधिक रहती है जिसमें वह अपने तन-मन की भावुकता उंडेल सके । यह आवश्यकता मानसिक से अधिक शारीरिक है । भावों का व्यक्तीकरण शरीर के स्व के लिए भी तो ज़रूरी है। अन्यथा जीवन भार हो जाए ! इसीलए तो उर्मिला कहती है'और निज भव-भार यों इलका करें ।' इन्हीं दम्पति का संयोग-वियोग साकेत का जीवन है । प्रारम्भ में दोनों के हास्य-विनोद द्वारा कवि ने संयोग शृंगार का मधुर चित्रण किया है। एक आधुनिक विद्वान ने हास की मूलवृत्ति दर्प वतलाई है - यहाँ यह दर्प प्रेम-दर्प है। प्रेमी और प्रेमिका एक दूसरे को छकाने के निमित्त जिन दर्पोक्तियों का सहारा लेते हैं उनमें एक विशेष प्रकार का मधुर गर्व है जिसका उद्गम है एक दूसरे के हृदय पर अपने प्रभुत्व की भावना । प्रेम - परिहास करते-करते लक्ष्मण उर्मिला से कह उठते हैं'किन्तु मैं भी तो तुम्हारा दास हूँ ।'
देखिए, उर्मिला सहमती नहीं-वह कहती है -
'दास बनने का बहाना किस लिए, क्या मुझे दासी कहाना इस लिए !! | होकर राग-द्वेष का रूप धारण करती है। ये ही राग-द्वेष असंख्य स्पष्ट और अस्पष्ट भाव-भावनाओं में पल्लवित होते हैं। संस्कृत के रस-शास्त्रियों ने उनकी गणना की है, परन्तु पर्याप्त रूपेरण स्तुत्य होने पर भी वह आधुनिक मनोविज्ञानी को मान्य नहीं ! मन प्रधा सागर है, उसमें कितनी ऊम्मियाँ उठती है, इसका कौन अनुमान लगा सकता है। फिर भी मनोवेगों का हमारा यह वर्गीकरण किसी अंश तक ठीक है। यदि इसमें मनोविज्ञान की नवीन शोध अनुसार परिवर्तन कर लिया जाए, जैसा कि आचार्य शुक्ल ने किया है, तो राग-पक्ष को समझने में काफ़ी सहायता मिल सकती है। : हाँ तो अहम् अपने बाद मनुष्य को अपनों के प्रति खींचता है इसलिए उसका ममत्व सबसे पहले अपने परिवार पर ही प्रकट होता है क्योंकि वह उसके सबसे निकट है । अतः स्वभाव से ही उसके भावों का बहुत बड़ा अंश अपने कुटुम्भ पर ही केन्द्रित रहता है । यही उसके भावों का सव से पहिला और सबसे सुन्दर क्रीड़ा क्षेत्र है। यहीं से उसका लौकिक जीवन आरम्भ होता है। यहीं वह अहं का दर्द से समन्वय करता हुआ उसका उपुयुक्त विकास करता है। तभी तो भारतीय संस्कृति में पारिवारिक जीवन को विशेष महत्व दिया गया है। जिसने गुप्त जी के काव्यों का एक चार भी अध्ययन किया होगा वह अवश्य ही मान लेगा कि उनको गृहस्थ जीवन के चित्र खींचने में अद्वितीय सफलता मिली है। यह युग राष्ट्रीयता का होने के कारण लोग उनकी राष्ट्रीयता को ले उड़े, अन्यथा उनकी प्रधान विशेषता गृहस्थ जीवन के सुख-दुख की व्यञ्जना ही है। यह बात कहते हुए मेरे सम्मुख चिरगाँव के रामभक्त गुप्त परिवार का वह स्नेह- स्निग्ध, ममत्वपूर्ण जीवन उपस्थित हो जाता है। वह पारिवारिक जीवन कितना सरल, कितना स्वस्थ और कितना पूर्ण है। उस वातावरण में रहने वाले कवि का गार्हस्थ्य-मर्मी होना स्वाभाविक है। चिरगाँव जाने से पूर्व ही इन पंक्तियों का लेखक गुप्तजी के परिवार चित्रों पर मुग्ध था - वहाँ जाना तो कार्य से कारण का सम्बन्ध जोड़ना मात्र था । साकेत में रघु-परिवार के सुख-दुख का वर्णन है। यह परिवार सूर्यकुल का महान राज-परिवार है, परन्तु प्रकृति ने राजा और भिखारी के सुख-दुख में अंतर नहीं रखा । दोनों के हृदय में एकसा स्पन्दन और दोनों की में एकसा दर्द है । इस परिवार का जीवन आदर्श हिन्दू-गृहस्थ का जीवन है। उसमें इस जीवन के अनेक सफल चित्र हैं- पति-पत्नी हैं, पिता हैं, पुत्र-पुत्रियाँ हैं, माताएं हैं, विमाताएँ हैं, देवर भाभी हैं, सासें और पुत्र-वधुएँ हैं, स्वामी और सेवक हैं । परन्तु विभिन्न व्यष्टियों से बना हुआ यह परिवार एक सम्पूर्ण समष्टि है । यह इसकी क्या सभी सुखी परिवारों की विशेषता है। एक तरु के विविध सुमनों से खिले, पौरजन रहते परस्पर हैं मिले । एक भी भोंगन नहीं ऐसा यहाँ । शिशु न करते हों कलित फ्रीड़ा जहाँ । कौन है ऐसा प्रभागा गृह कहो, साथ जिसके अश्व-गोशाला न हो । उपर्युक्त उद्धरण में 'शिशु न करते हों फलित क्रीड़ा जहाँ' और 'साथ जिसके अश्व-गोशाला न हो इन बातों ने गृहस्थ का वाह्यचित्र पूर्ण कर दिया है। गृहस्थ जीवन का प्राण हे दाम्पत्य - क्योंकि मनुष्य के भाव कोप पर सब से व्यापक और गहरा अधिकार उस व्यक्ति का होगा जो उसके सबसे अधिक निकट है ! इस दृष्टि से जीवन में सेक्स की प्रमुखता होने के कारण स्त्री-पुरुप का नैकट्य ही सर्वाधिक ठहरता है ! उनके लिए मानसिक एकता के साथ शारीरिक एकता भी तो अनिवार्य हो जाता है ! मर्यादावादियों ने इस सम्बन्ध को दाम्पत्य में ही सीमित कर दिया है क्यों कि इस एकता का विकास मर्यादाबद्ध होकर ही - अर्थात् विवाह सम्बद्ध होकर ही हो सकता है ! इस प्रकार हम देखते हैं कि स्त्री पुरुप का सम्बन्ध अथवा रति, अथवा शृङ्गार ही मनुष्य जीवन की प्रमुख भावना है और मन प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से इसमें रमता रहता है ! साकेत के दशरथ-परिवार में पाँच दम्पति हैं-- उर्मिला लक्ष्मण, राम-सीता, भरत - माण्डवी, दशरथ और उनकी तीनों रानियाँ - शत्रुघ्न और श्रुतकीर्ति ! उसका प्रधान कार्य हो चौदह वर्ष की दीर्घ अवधि के उपरान्त उर्मिला लक्ष्मरण का मिलन है अतः स्वभावतः उसका प्रधान रस शृङ्गार है - और शृङ्गार में भी, जीवन में विरह की विशेषता के कारण, वियोग-पक्ष प्रधान है, परम्परावादी जिसे 'विप्रलम्भ शृङ्गार' का 'प्रवास' अंग कहेंगे । ऐसे काव्य में दाम्पत्य जीवन के मधुर चित्र होना स्वाभाविक ही है । पहिले दाम्पत्य जीवन का आदर्श क्या है, यह सुनिए । उर्मिला लक्ष्मण का पारस्परिक विनोद वार्तालाप हो रहा है । लक्ष्मण पत्नी के गौरव की परिभाषा करते हुए कहते हैं'भूमि के कोटर, गुहा गिरि-गर्त भी, शून्यता नम की, सलिल श्रावर्त भी, प्रेयसी, किसके सहज संसर्ग से, दीखते हैं प्राणियों को स्वर्ग से ? इन शब्दों में लक्ष्मण ने स्त्रीत्व के चरम महत्व की व्याख्या कर दी है ! स्त्री का सत्र से वड़ा सौन्दर्य यही है कि उसके संसर्ग से जीवन में रस आ जाता है ! जगत के शून्य चित्र रंगीन वन जाते हैं ! उधर उर्मिला नारी का प्रतिनिधित्व करती हुई पुरुष की महिमा का गान इस प्रकार करती हैखोजती हैं एक श्राश्रय मात्र हम चाहती हैं एक तुम सा पात्र हम । प्रान्तरिक सुख दुःख हम जिसमें घरें और निज भव-भार यों हलका करें । उमिला दम्पति विज्ञान का कितना मधुर व्याख्यान करती है । स्त्री और पुरुष का यह सम्बन्ध अनादि काल से अटूट इसीलिए रहा है कि जीवन में दोनों को एक ऐसे साथी की आवश्यकता का अनुभव होता है जिससे वे अपने सुख-दुख कह सुन सकें । स्त्री में हृदय का प्राधान्य होने के कारण उसको ऐसे पात्र की आवश्यकता अधिक रहती है जिसमें वह अपने तन-मन की भावुकता उंडेल सके । यह आवश्यकता मानसिक से अधिक शारीरिक है । भावों का व्यक्तीकरण शरीर के स्व के लिए भी तो ज़रूरी है। अन्यथा जीवन भार हो जाए ! इसीलए तो उर्मिला कहती है'और निज भव-भार यों इलका करें ।' इन्हीं दम्पति का संयोग-वियोग साकेत का जीवन है । प्रारम्भ में दोनों के हास्य-विनोद द्वारा कवि ने संयोग शृंगार का मधुर चित्रण किया है। एक आधुनिक विद्वान ने हास की मूलवृत्ति दर्प वतलाई है - यहाँ यह दर्प प्रेम-दर्प है। प्रेमी और प्रेमिका एक दूसरे को छकाने के निमित्त जिन दर्पोक्तियों का सहारा लेते हैं उनमें एक विशेष प्रकार का मधुर गर्व है जिसका उद्गम है एक दूसरे के हृदय पर अपने प्रभुत्व की भावना । प्रेम - परिहास करते-करते लक्ष्मण उर्मिला से कह उठते हैं'किन्तु मैं भी तो तुम्हारा दास हूँ ।' देखिए, उर्मिला सहमती नहीं-वह कहती है - 'दास बनने का बहाना किस लिए, क्या मुझे दासी कहाना इस लिए !! |
इस साल फुटबॉल विश्वकप 2018 रूस में आयोजित किया जा रहा है। इस बार के सीज़न को सबसे ज्यादा शानदार और दिलचस्प बताया जा रहा है। फुटबॉल विश्वकप 2018 में रूस में हो रहे फीफा वर्ल्ड कप में सभी दावेदार टीमें पूरी तैयारी और जोश के साथ मैदान में उतरी हैं।
फुटबॉल प्रेमियों के लिए ये विश्वकप किसी त्योहार से कम नहीं है।
अगर आप भी फुटबॉल विश्वकप के फैन हैं तो तो आज इस पोस्ट के ज़रिए हम आपको बता फुटबॉल विश्वकप से जुड़े कुछ अनजाने, अनसुने और दिलचस्प तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं। इन्हें जानने के बाद आपकी दिलचस्पी फीफा वर्ल्डकप में और भी ज्यादा बढ़ जाएगी।
तो चलिए जानते हैं फुटबॉल विश्वकप 2018 से जुड़े दिलचस्प तथ्यों के बारे में।
- इस टूर्नामेंट के दौरान कोच द्वारा सख्त वॉर्निंग दी जाती है कि वो इस पूरे विश्व कप में किसी भी तरह की सेक्शुअल एक्टिविटी में ना पड़ें क्योंकि इससे उनका ध्यान खेल से भटक सकता है।
- चूंकि, ये विश्वकप हर चार साल में एक बार होता है इसलिए इसे लाइव देखने के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनियाभर की लगभग 50 प्रतिशत आबादी फीफा वर्ल्ड कप देखती है।
- रिपोर्ट के अनुसार जिस देश ने विश्व कप की मेजबानी की है वहां पर जन्मदर में भी काफी वृद्धि दर्ज हुई है।
- अब तक के सबसे महंगे फुटबॉल विश्व कप की मेजबानी ब्राजील ने की है जिसमें 5 बिलियन का खर्चा आया था।
- साल 2002 हुए विश्व कप में तुर्की के हैकन सुकुर ने महज़ 11 सेकेंड में गोल कर लिया था। इसके साथ तुर्की ने दक्षिण कोरिया को 3:2 के स्कोर से मात दी थी।
- फुटबॉल के विश्वकप के इतिहास में जोस बतिस्ता को सबसे तेज रेड कार्ड का रिकॉर्ड बनाने का गौरव प्राप्त है।
- 1950 में हुए फुटबॉल विश्वकप से भारत को निकाल दिया गया था। इसके बारे में कहा जाता है कि फीफा के नियमों के अनुसार खिलाडियों को फुटबॉल बूट पहनकर खेलना था और उन्हें नंगे पैर खेलने की इजाजत नहीं थी। हालांकि, इसके बार में एक और कहानी भी बताई जाती है जिसके अनुसार उस समय ब्राजील की यात्रा भारत के लिए संभव नहीं है और हवाई यात्रा का महंगा किराया इसकी प्रमुख वजह थी।
- सन् 1966 में विश्व कप ट्रोफी चोरी हो गई थी और टूर्नोमेंट के शुरु होने से कुछ दिन पहले ही इसे ढूंढ लिया गया था।
- फुटबॉल विश्वकप में सबसे ज्यादा बार हार का सामना करने वाली टीम में मेक्सिको का नाम शामिल है। मेक्सिको ने 22 बार हार का सामना किया है और इसके साथ ही उसका नाम सबसे ज्यादा बार हारी गई टीमों में सबसे पहले दर्ज होता है।
- 1942 और 1946 में द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण विश्वकप नहीं खेला गया था।
- इजिप्ट के गोलकीपर एसाम अल हदारी विश्व कप में खेले जाने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी हैं। उन्होंने 45 साल की उम्र तक विश्वकप में हिस्सा लिया था।
- फुटबॉल प्रेमियों के लिए मेजबान देश में ट्रेन में यात्रा करने पर 43 मिलियन डॉलर खर्च किए गए हैं।
- पिछले 60 सालों में पहली बार इटली फीफा विश्वकप खेलने के योग्य नहीं बन पाया है।
दोस्तों, विश्वकप टूर्नामेंट एक ऐसा मौका होता है जब पूरी दुनिया की नज़र इस पर आकर टिक जाती है। क्रिकेट तो हम भारतीयों की जान है लेकिन फुटबॉल का खेल भी कम दिलचस्प नहीं है।
FIFA WORLDCUP के बारे में इन दिलचस्प बातों को जानने के बाद आपका भी इसे देखने का जरूर करेगा।
| इस साल फुटबॉल विश्वकप दो हज़ार अट्ठारह रूस में आयोजित किया जा रहा है। इस बार के सीज़न को सबसे ज्यादा शानदार और दिलचस्प बताया जा रहा है। फुटबॉल विश्वकप दो हज़ार अट्ठारह में रूस में हो रहे फीफा वर्ल्ड कप में सभी दावेदार टीमें पूरी तैयारी और जोश के साथ मैदान में उतरी हैं। फुटबॉल प्रेमियों के लिए ये विश्वकप किसी त्योहार से कम नहीं है। अगर आप भी फुटबॉल विश्वकप के फैन हैं तो तो आज इस पोस्ट के ज़रिए हम आपको बता फुटबॉल विश्वकप से जुड़े कुछ अनजाने, अनसुने और दिलचस्प तथ्यों के बारे में बताने जा रहे हैं। इन्हें जानने के बाद आपकी दिलचस्पी फीफा वर्ल्डकप में और भी ज्यादा बढ़ जाएगी। तो चलिए जानते हैं फुटबॉल विश्वकप दो हज़ार अट्ठारह से जुड़े दिलचस्प तथ्यों के बारे में। - इस टूर्नामेंट के दौरान कोच द्वारा सख्त वॉर्निंग दी जाती है कि वो इस पूरे विश्व कप में किसी भी तरह की सेक्शुअल एक्टिविटी में ना पड़ें क्योंकि इससे उनका ध्यान खेल से भटक सकता है। - चूंकि, ये विश्वकप हर चार साल में एक बार होता है इसलिए इसे लाइव देखने के लिए दुनियाभर से लोग आते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनियाभर की लगभग पचास प्रतिशत आबादी फीफा वर्ल्ड कप देखती है। - रिपोर्ट के अनुसार जिस देश ने विश्व कप की मेजबानी की है वहां पर जन्मदर में भी काफी वृद्धि दर्ज हुई है। - अब तक के सबसे महंगे फुटबॉल विश्व कप की मेजबानी ब्राजील ने की है जिसमें पाँच बिलियन का खर्चा आया था। - साल दो हज़ार दो हुए विश्व कप में तुर्की के हैकन सुकुर ने महज़ ग्यारह सेकेंड में गोल कर लिया था। इसके साथ तुर्की ने दक्षिण कोरिया को तीन:दो के स्कोर से मात दी थी। - फुटबॉल के विश्वकप के इतिहास में जोस बतिस्ता को सबसे तेज रेड कार्ड का रिकॉर्ड बनाने का गौरव प्राप्त है। - एक हज़ार नौ सौ पचास में हुए फुटबॉल विश्वकप से भारत को निकाल दिया गया था। इसके बारे में कहा जाता है कि फीफा के नियमों के अनुसार खिलाडियों को फुटबॉल बूट पहनकर खेलना था और उन्हें नंगे पैर खेलने की इजाजत नहीं थी। हालांकि, इसके बार में एक और कहानी भी बताई जाती है जिसके अनुसार उस समय ब्राजील की यात्रा भारत के लिए संभव नहीं है और हवाई यात्रा का महंगा किराया इसकी प्रमुख वजह थी। - सन् एक हज़ार नौ सौ छयासठ में विश्व कप ट्रोफी चोरी हो गई थी और टूर्नोमेंट के शुरु होने से कुछ दिन पहले ही इसे ढूंढ लिया गया था। - फुटबॉल विश्वकप में सबसे ज्यादा बार हार का सामना करने वाली टीम में मेक्सिको का नाम शामिल है। मेक्सिको ने बाईस बार हार का सामना किया है और इसके साथ ही उसका नाम सबसे ज्यादा बार हारी गई टीमों में सबसे पहले दर्ज होता है। - एक हज़ार नौ सौ बयालीस और एक हज़ार नौ सौ छियालीस में द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण विश्वकप नहीं खेला गया था। - इजिप्ट के गोलकीपर एसाम अल हदारी विश्व कप में खेले जाने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी हैं। उन्होंने पैंतालीस साल की उम्र तक विश्वकप में हिस्सा लिया था। - फुटबॉल प्रेमियों के लिए मेजबान देश में ट्रेन में यात्रा करने पर तैंतालीस मिलियन डॉलर खर्च किए गए हैं। - पिछले साठ सालों में पहली बार इटली फीफा विश्वकप खेलने के योग्य नहीं बन पाया है। दोस्तों, विश्वकप टूर्नामेंट एक ऐसा मौका होता है जब पूरी दुनिया की नज़र इस पर आकर टिक जाती है। क्रिकेट तो हम भारतीयों की जान है लेकिन फुटबॉल का खेल भी कम दिलचस्प नहीं है। FIFA WORLDCUP के बारे में इन दिलचस्प बातों को जानने के बाद आपका भी इसे देखने का जरूर करेगा। |
चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) और कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के बीच खेले गए रोमांचक मुकाबले को सीएसके ने जीता था। इस मैच में केकेआर के विस्फोटक बल्लेबाज आंद्रे रसेल ने अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से सभी को प्रभावित किया था।
चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) और कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) के बीच खेले गए रोमांचक मुकाबले को सीएसके ने जीता था। इस मैच में केकेआर के विस्फोटक बल्लेबाज आंद्रे रसेल ने अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से सभी को प्रभावित किया था। रसेल आउट होने के बाद काफी निराश थे और अब इसपर केकेआर के पूर्व कप्तान गौतम गंभीर ने रिएक्ट किया है।
गौतम गंभीर ने कहा, 'मुझे लगता है कि गेंदबाज ने रसेल को झांसा दिया था। यह बहुत अच्छी सोच है क्योंकि पूरे मैदान को इस तरह से सेट किया गया था जैसे कि वह स्टंप के बाहर गेंदबाजी करने जा रहे हों और रसेल शायद उसी के लिए तैयार भी थे क्योंकि शार्दुल ठाकुर भी फुल-लेंथ बॉल ही फेंक रहे थे।'
गौतम गंभीर ने आगे कहा, ' रसेल तैयार थे इसलिए सैम कुरेन ने उनके लेग स्टंप पर हमला किया और यहा थोड़ा अजीब था और रसेल ने गेंद को छोड़ दिया क्योंकि वह इसके लिए तैयार नहीं थे। मुझे पूरा यकीन है ड्रेसिंग रूम में वापस जाते वक्त रसेल सोच रहे होंगे कि उन्होंने अपना शतक बनाने का और खेल को 16 वें या 17 वें में खत्म करने का सुनहरा मौका गंवा दिया।'
गंभीर ने कहा, 'आपको अक्सर ऐसे अवसर नहीं मिलते हैं क्योंकि आप वानखेड़े के मैदान पर वास्तव में ज्यादा नहीं खेलते हैं। वह शानदार बल्लेबाजी कर रहे थे। मुझे यकीन है कि उसे पछतावा हो रहा होगा। अगर उन्होंने उस गेंद का बचाव किया होता, तो शायद केकेआर उस मैच को जीत लेता।' बता दें कि रसेल ने तूफानी बल्लेबाजी करते हुए 22 गेंदों का सामना करते हुए 54 रन की पारी खेली थी।
| चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच खेले गए रोमांचक मुकाबले को सीएसके ने जीता था। इस मैच में केकेआर के विस्फोटक बल्लेबाज आंद्रे रसेल ने अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से सभी को प्रभावित किया था। चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच खेले गए रोमांचक मुकाबले को सीएसके ने जीता था। इस मैच में केकेआर के विस्फोटक बल्लेबाज आंद्रे रसेल ने अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से सभी को प्रभावित किया था। रसेल आउट होने के बाद काफी निराश थे और अब इसपर केकेआर के पूर्व कप्तान गौतम गंभीर ने रिएक्ट किया है। गौतम गंभीर ने कहा, 'मुझे लगता है कि गेंदबाज ने रसेल को झांसा दिया था। यह बहुत अच्छी सोच है क्योंकि पूरे मैदान को इस तरह से सेट किया गया था जैसे कि वह स्टंप के बाहर गेंदबाजी करने जा रहे हों और रसेल शायद उसी के लिए तैयार भी थे क्योंकि शार्दुल ठाकुर भी फुल-लेंथ बॉल ही फेंक रहे थे।' गौतम गंभीर ने आगे कहा, ' रसेल तैयार थे इसलिए सैम कुरेन ने उनके लेग स्टंप पर हमला किया और यहा थोड़ा अजीब था और रसेल ने गेंद को छोड़ दिया क्योंकि वह इसके लिए तैयार नहीं थे। मुझे पूरा यकीन है ड्रेसिंग रूम में वापस जाते वक्त रसेल सोच रहे होंगे कि उन्होंने अपना शतक बनाने का और खेल को सोलह वें या सत्रह वें में खत्म करने का सुनहरा मौका गंवा दिया।' गंभीर ने कहा, 'आपको अक्सर ऐसे अवसर नहीं मिलते हैं क्योंकि आप वानखेड़े के मैदान पर वास्तव में ज्यादा नहीं खेलते हैं। वह शानदार बल्लेबाजी कर रहे थे। मुझे यकीन है कि उसे पछतावा हो रहा होगा। अगर उन्होंने उस गेंद का बचाव किया होता, तो शायद केकेआर उस मैच को जीत लेता।' बता दें कि रसेल ने तूफानी बल्लेबाजी करते हुए बाईस गेंदों का सामना करते हुए चौवन रन की पारी खेली थी। |
Salaar 2 के रिलीज से पहले जगपति बाबू ने खोल डाला सबसे बड़ा राज, ऐसा होगा सीक्वल?
कृति खरबंदा ने बॉयफ्रेंड पुलकित सम्राट के जन्मदिन पर शेयर किया ख़ास पोस्ट, फैन्स संग साझा की रोमांटिक तस्व�..
अंजू की जुदाई बर्दाश्त नहीं कर पाया नसरुल्ला, पाकिस्तान की सीमा पार कर जल्द आएगा हिंदुस्तान!
| Salaar दो के रिलीज से पहले जगपति बाबू ने खोल डाला सबसे बड़ा राज, ऐसा होगा सीक्वल? कृति खरबंदा ने बॉयफ्रेंड पुलकित सम्राट के जन्मदिन पर शेयर किया ख़ास पोस्ट, फैन्स संग साझा की रोमांटिक तस्व�.. अंजू की जुदाई बर्दाश्त नहीं कर पाया नसरुल्ला, पाकिस्तान की सीमा पार कर जल्द आएगा हिंदुस्तान! |
पटना/स्टेट डेस्क। सीएम आवास के बाहर आज मंगलवार को अजीबोगरीब मामला देखने को मिला। दरभंगा के रहने वाले जदयू नेता अवधेश लाल देव अपनी पत्नी से डरकर सीएम आवास पहुंचे और अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई। जदयू नेता के साथ उनकी मां और बहन भी मौजूद थीं।
अवधेश लाल ने बताया कि कि मैं पार्टी का पुराना कार्यकर्ता हूं और पदाधिकारी भी हूं। इसलिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से गुहार लगाने आया हूं। अवधेश का कहना है कि वर्ष 2006 में उसकी शादी बहेरी थाना इलाके के पकड़ी गांव में हुई थी। अवधेश का आरोप है कि उसकी पत्नी नक्सली संगठन के कमांडर मनोज लालदेव के बहकावे में आकर काम कर रही है।
नक्सली कमांडर मनोज लालदेव जैसा कहता है उनकी पत्नी वैसा ही करती है। जदयू नेता के मुताबिक वे कई बार थाने और कोर्ट कचहरी तक मामला ले जा चुके हैं। उनका पत्नी के साथ से जो विवाद रहा है, उसमें समझौता भी हो चुका है। उनकी पत्नी ने वर्ष 2012 में भी उन पर एक झूठा मुकदमा कराया था। अवधेश लाल देव का कहना है कि वे अपने बेटे और बेटी को पटना में रहकर पढ़ा रहे हैं लेकिन बार-बार पत्नी की तरफ से परेशान किया जा रहा है।
| पटना/स्टेट डेस्क। सीएम आवास के बाहर आज मंगलवार को अजीबोगरीब मामला देखने को मिला। दरभंगा के रहने वाले जदयू नेता अवधेश लाल देव अपनी पत्नी से डरकर सीएम आवास पहुंचे और अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई। जदयू नेता के साथ उनकी मां और बहन भी मौजूद थीं। अवधेश लाल ने बताया कि कि मैं पार्टी का पुराना कार्यकर्ता हूं और पदाधिकारी भी हूं। इसलिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से गुहार लगाने आया हूं। अवधेश का कहना है कि वर्ष दो हज़ार छः में उसकी शादी बहेरी थाना इलाके के पकड़ी गांव में हुई थी। अवधेश का आरोप है कि उसकी पत्नी नक्सली संगठन के कमांडर मनोज लालदेव के बहकावे में आकर काम कर रही है। नक्सली कमांडर मनोज लालदेव जैसा कहता है उनकी पत्नी वैसा ही करती है। जदयू नेता के मुताबिक वे कई बार थाने और कोर्ट कचहरी तक मामला ले जा चुके हैं। उनका पत्नी के साथ से जो विवाद रहा है, उसमें समझौता भी हो चुका है। उनकी पत्नी ने वर्ष दो हज़ार बारह में भी उन पर एक झूठा मुकदमा कराया था। अवधेश लाल देव का कहना है कि वे अपने बेटे और बेटी को पटना में रहकर पढ़ा रहे हैं लेकिन बार-बार पत्नी की तरफ से परेशान किया जा रहा है। |
जम्मू-कश्मीर में अंतिम बार विधानसभा चुनाव 2014 में हुए थे। इन चुनाव परिणाम के आधार पर भाजपा और पीडीपी के गठबंधन वाली सरकार बनी। भाजपा की ओर से समर्थन वापस लेने के बाद 19 जून 2018 को महबूबा मुफ्ती ने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था।
जम्मू, नवीन नवाज। जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लागू हुए सोमवार को पांच वर्ष पूरे हो गए। वर्ष 1996 के बाद जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन का यह दूसरा सबसे लंबा दौर है। इससे पहले 19 जनवरी 1990 से नौ अक्टूबर 1996 तक लगभग 81 माह (पौने सात साल) तक जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन रहा था। सिर्फ यही नहीं, जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए भी लगभग नौ वर्ष बीत रहे हैं। सिर्फ राजनीतिक दल ही नहीं आम जनता भी चुनाव का बेसब्री से इंतजार कर रही है, लेकिन विधानसभा चुनाव को लेकर असंमजस बना हुआ है। जो संकेत मिल रहे हैं, उसके मुताबिक पहले पंचायत और नगर निकाय चुनाव ही कराए जाने की संभावना ज्यादा है।
जम्मू कश्मीर में अंतिम बार विधानसभा चुनाव वर्ष 2014 में हुए थे। इन चुनाव परिणाम के आधार पर भाजपा और पीडीपी की गठबंधन सरकार वर्ष 2015 में सत्तासीन हुई थी। भाजपा की ओर से समर्थन वापस लेने के बाद 19 जून 2018 को महबूबा मुफ्ती ने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था और उसके बाद जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू हुआ। बाद में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।
तत्कालीन राज्यपाल एनएन वोहरा ने विधानसभा को भंग करने के बजाय निलंबित रखा था, लेकिन उनके बाद जम्मू कश्मीर के राज्यपाल का कार्यभार संभालने वाले सतपाल मलिक ने नवंबर 2018 में विधानसभा को भंग कर दिया। इससे पहले कि विधानसभा चुनाव कराए जाते, 14 फरवरी 2019 को पुलवामा हमला हो गया। इसके बाद पांच अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 और 35ए को हटा दिया। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में पुनर्गठित किया गया। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के मुताबिक 31 अक्टूबर 2019 को अस्तित्व में आए केंद्र शासित जम्मू कश्मीर में विधानसभा का प्रविधान है। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से ही जम्मू कश्मीर में उपराज्यपाल शासन की बागडोर संभाले हुए हैं।
बहुत हो गया, हम सभी चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। केंद्र सरकार को जल्द से जल्द चुनाव कराने चाहिए।
कल तक हम यह मानते थे कि प्रदेश भाजपा के कारण ही चुनाव नहीं हो रहे हैं, लेकिन अब उसके नेता भी चुनाव की मांग कर रहे हैं, इसलिए हम यहां जल्द चुनाव की उम्मीद कर सकते हैं।
मार्च में हम नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में चुनाव आयोग से मिले थे। तब कहा गया कि आयोग जल्द जम्मू कश्मीर का दौरा कर हालात का जायजा लेकर चुनाव का एलान होगा, लेकिन मुझे नहीं लगता कि केंद्र की यहां चुनाव में रूचि है।
जी-20 सम्मेलन, पंचायत और निकाय चुनाव के लिए बहाना नहीं है। हम सभी जानते हैं कि यहां सिर्फ भाजपा को सत्ता में लाने के लिए चुनाव टाला जा रहा है। भारत में लोकतंत्र वहीं खत्म होता है, जहां जम्मू कश्मीर शुरू होता है।
पूरे देश में पांच वर्ष बाद लोगों को अपना मुख्यमंत्री चुनने का मौका मिलता है और हमें नौ वर्ष बाद भी नहीं दिया जा रहा है। जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र दिखावे तक सीमित है।
नहीं लगता कि इस वर्ष विधानसभा चुनाव होंगे। हमें वर्ष 2024 के संसदीय चुनाव का इंतजार करना पड़ेगा। पंचायत और नगर निकाय चुनाव के जरिए भाजपा प्रदेश में अपनी स्थिति का आकलन करेगी और उसके आधार पर वह विधानसभा चुनाव की रणनीति बनाएगी।
| जम्मू-कश्मीर में अंतिम बार विधानसभा चुनाव दो हज़ार चौदह में हुए थे। इन चुनाव परिणाम के आधार पर भाजपा और पीडीपी के गठबंधन वाली सरकार बनी। भाजपा की ओर से समर्थन वापस लेने के बाद उन्नीस जून दो हज़ार अट्ठारह को महबूबा मुफ्ती ने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था। जम्मू, नवीन नवाज। जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लागू हुए सोमवार को पांच वर्ष पूरे हो गए। वर्ष एक हज़ार नौ सौ छियानवे के बाद जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन का यह दूसरा सबसे लंबा दौर है। इससे पहले उन्नीस जनवरी एक हज़ार नौ सौ नब्बे से नौ अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ छियानवे तक लगभग इक्यासी माह तक जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन रहा था। सिर्फ यही नहीं, जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव हुए भी लगभग नौ वर्ष बीत रहे हैं। सिर्फ राजनीतिक दल ही नहीं आम जनता भी चुनाव का बेसब्री से इंतजार कर रही है, लेकिन विधानसभा चुनाव को लेकर असंमजस बना हुआ है। जो संकेत मिल रहे हैं, उसके मुताबिक पहले पंचायत और नगर निकाय चुनाव ही कराए जाने की संभावना ज्यादा है। जम्मू कश्मीर में अंतिम बार विधानसभा चुनाव वर्ष दो हज़ार चौदह में हुए थे। इन चुनाव परिणाम के आधार पर भाजपा और पीडीपी की गठबंधन सरकार वर्ष दो हज़ार पंद्रह में सत्तासीन हुई थी। भाजपा की ओर से समर्थन वापस लेने के बाद उन्नीस जून दो हज़ार अट्ठारह को महबूबा मुफ्ती ने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था और उसके बाद जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू हुआ। बाद में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। तत्कालीन राज्यपाल एनएन वोहरा ने विधानसभा को भंग करने के बजाय निलंबित रखा था, लेकिन उनके बाद जम्मू कश्मीर के राज्यपाल का कार्यभार संभालने वाले सतपाल मलिक ने नवंबर दो हज़ार अट्ठारह में विधानसभा को भंग कर दिया। इससे पहले कि विधानसभा चुनाव कराए जाते, चौदह फरवरी दो हज़ार उन्नीस को पुलवामा हमला हो गया। इसके बाद पांच अगस्त दो हज़ार उन्नीस को केंद्र सरकार ने अनुच्छेद तीन सौ सत्तर और पैंतीसए को हटा दिया। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में पुनर्गठित किया गया। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के मुताबिक इकतीस अक्टूबर दो हज़ार उन्नीस को अस्तित्व में आए केंद्र शासित जम्मू कश्मीर में विधानसभा का प्रविधान है। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से ही जम्मू कश्मीर में उपराज्यपाल शासन की बागडोर संभाले हुए हैं। बहुत हो गया, हम सभी चुनाव का इंतजार कर रहे हैं। केंद्र सरकार को जल्द से जल्द चुनाव कराने चाहिए। कल तक हम यह मानते थे कि प्रदेश भाजपा के कारण ही चुनाव नहीं हो रहे हैं, लेकिन अब उसके नेता भी चुनाव की मांग कर रहे हैं, इसलिए हम यहां जल्द चुनाव की उम्मीद कर सकते हैं। मार्च में हम नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में चुनाव आयोग से मिले थे। तब कहा गया कि आयोग जल्द जम्मू कश्मीर का दौरा कर हालात का जायजा लेकर चुनाव का एलान होगा, लेकिन मुझे नहीं लगता कि केंद्र की यहां चुनाव में रूचि है। जी-बीस सम्मेलन, पंचायत और निकाय चुनाव के लिए बहाना नहीं है। हम सभी जानते हैं कि यहां सिर्फ भाजपा को सत्ता में लाने के लिए चुनाव टाला जा रहा है। भारत में लोकतंत्र वहीं खत्म होता है, जहां जम्मू कश्मीर शुरू होता है। पूरे देश में पांच वर्ष बाद लोगों को अपना मुख्यमंत्री चुनने का मौका मिलता है और हमें नौ वर्ष बाद भी नहीं दिया जा रहा है। जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र दिखावे तक सीमित है। नहीं लगता कि इस वर्ष विधानसभा चुनाव होंगे। हमें वर्ष दो हज़ार चौबीस के संसदीय चुनाव का इंतजार करना पड़ेगा। पंचायत और नगर निकाय चुनाव के जरिए भाजपा प्रदेश में अपनी स्थिति का आकलन करेगी और उसके आधार पर वह विधानसभा चुनाव की रणनीति बनाएगी। |
युवराज और उसके साथियों ने उसी दिन से मिलकर काम करना शुरू कर दिया । उनके अच्छे व्यवहार से वहां के लोग भी उनके साथ मिल गए । ढेर सारे कुएं खोद दिए गए । वर्षा का पानी इकट्ठा करने के लिए बहुत बड़ा तालाब खोद लिया गया । गारा - मिट्टी से ईंटें बनाई गईं। पेड़ों की लकड़ियां चीरकर गाड़ियां बनाई गईं। उन पर काले पत्थर ढोकर व्यापार किया जाने लगा। रेतीली जमीन को भी सींच-सींच कर उपजाऊ बना लिया गया। कुछ ही महीनों में वहां के जीवन में बदलाव आने लगा। वहां के लोग युवराज और उसके साथियों को देवता मानने लगे । अब उस स्थान की सुरक्षा के लिए काले पत्थरों से ही एक भव्य किला बनाने की योजना बनीं । किले के लिए बहुत गहरी नींव खोदनी थी । | युवराज और उसके साथियों ने उसी दिन से मिलकर काम करना शुरू कर दिया । उनके अच्छे व्यवहार से वहां के लोग भी उनके साथ मिल गए । ढेर सारे कुएं खोद दिए गए । वर्षा का पानी इकट्ठा करने के लिए बहुत बड़ा तालाब खोद लिया गया । गारा - मिट्टी से ईंटें बनाई गईं। पेड़ों की लकड़ियां चीरकर गाड़ियां बनाई गईं। उन पर काले पत्थर ढोकर व्यापार किया जाने लगा। रेतीली जमीन को भी सींच-सींच कर उपजाऊ बना लिया गया। कुछ ही महीनों में वहां के जीवन में बदलाव आने लगा। वहां के लोग युवराज और उसके साथियों को देवता मानने लगे । अब उस स्थान की सुरक्षा के लिए काले पत्थरों से ही एक भव्य किला बनाने की योजना बनीं । किले के लिए बहुत गहरी नींव खोदनी थी । |
श्रेणीः2000 ग्रांड प्रिक्स डे टेनिस डे ल्योन श्रेणीःग्रांड प्रिक्स डे टेनिस डे ल्योन श्रेणीःचित्र जोड़ें.
2 संबंधोंः पैट्रिक रैफ्टर, आर्नॉद क्लेमाँ।
श्रेणीःटेनिस खिलाड़ी श्रेणीःपुरुष टेनिस खिलाड़ी श्रेणीःटेनिस ग्रैंड स्लैम विजेता.
श्रेणीःटेनिस खिलाड़ी श्रेणीःपुरुष टेनिस खिलाड़ी.
| श्रेणीःदो हज़ार ग्रांड प्रिक्स डे टेनिस डे ल्योन श्रेणीःग्रांड प्रिक्स डे टेनिस डे ल्योन श्रेणीःचित्र जोड़ें. दो संबंधोंः पैट्रिक रैफ्टर, आर्नॉद क्लेमाँ। श्रेणीःटेनिस खिलाड़ी श्रेणीःपुरुष टेनिस खिलाड़ी श्रेणीःटेनिस ग्रैंड स्लैम विजेता. श्रेणीःटेनिस खिलाड़ी श्रेणीःपुरुष टेनिस खिलाड़ी. |
हाल में ही कांग्रेस को अलविदा कहने वाले हार्दिक पटेल ने आज भाजपा का दामन थाम लिया। अहमदाबाद में गुजरात भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटील और पूर्व उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी का दामन थामा। इस मौके पर हार्दिक पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश का गौरव बताया और कहा कि उनके मार्गदर्शन में एक छोटा कार्यकर्ता बनकर आगे बढूंगा। इस साल होने वाले गुजरात चुनाव को लेकर हार्दिक पटेल का भाजपा में शामिल होना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गुजरात की 182-सदस्यीय विधानसभा के लिए इस साल के अंत में चुनाव होने हैं।
| हाल में ही कांग्रेस को अलविदा कहने वाले हार्दिक पटेल ने आज भाजपा का दामन थाम लिया। अहमदाबाद में गुजरात भाजपा अध्यक्ष सीआर पाटील और पूर्व उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी का दामन थामा। इस मौके पर हार्दिक पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश का गौरव बताया और कहा कि उनके मार्गदर्शन में एक छोटा कार्यकर्ता बनकर आगे बढूंगा। इस साल होने वाले गुजरात चुनाव को लेकर हार्दिक पटेल का भाजपा में शामिल होना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गुजरात की एक सौ बयासी-सदस्यीय विधानसभा के लिए इस साल के अंत में चुनाव होने हैं। |
भारत की विदेश नीति । 543
करता रहा है। भारत की विदेश नीति महात्मा गांधी के इस मत से बहुत प्रभावित कि न केवल उद्देश्य वरन् उसकी प्राप्ति के साधन भी पवित्र होने चाहिए । यद्यपि उनके सत्य और अहिंसा के साधनों को पूरी तरह नहीं अपनाया जा सकता है, फिर भी भारत निरन्तर इस बात का प्रयत्न करता रहा है कि अन्तर्राष्ट्रीय विवादों का समाधान शान्तिपूर्ण उपायों से किया जाये, हिंसात्मक साधनों से नहीं । स्वयं भारतीय संविधान में कहा गया है कि :
"राज्य" (i) अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा का, (ii) राष्ट्रों के बीच न्यायपूर्ण और सम्मानपूर्ण सम्बन्धों को बनाये रखने का, (iii) संगठित लोगों के एक-दूसरे से व्यवहारों में अन्तके, र्राष्ट्रीय विधि और सन्धि बन्धनों के प्रति आदर बढ़ाने का; (iv) अन्तर्राष्ट्रीय विवादों को मध्यस्थता द्वारा निपटारे के लिए प्रोत्साहन देने, इत्यादि का प्रयत्न करेगा ।" यदि साधनों की श्रेष्ठता में भारत का विश्वास न होता तो 1965 का 'ताशकन्द समझौता' एवं 1972 का 'शिमला समझौता' कभी नहीं किया जाता। भारत ने केवल पाकिस्तान के युद्ध बन्दी ही लौटा दिये अपितु युद्ध में जीती हुई भूमि भी लौटा दी । भारत हथियारों का प्रयोग केवल आत्म-रक्षा में ही करना उपयुक्त मानता है। भारत मानता है कि साधन अच्छा है तो साध्य भी निश्चित रूप से अच्छा ही होगा ।
6. 'पंचशील' पर जोर देने वाली नीति
(POLICY TO ADHERE PANCHSHEELA) 'पंचशील' के पाँच सिद्धान्तों का प्रतिपादन भी भारत की शान्तिप्रियता का द्योतक है । 1954 के बाद से भारत की नीति को 'पंचशील' के सिद्धान्तों ने एक नयी दिशा प्रदान की । 'पंचशील' से अभिप्राय है- 'आचरण के पाँच सिद्धान्त । जिस प्रकार बौद्ध धर्म में ये व्रत एक व्यक्ति के लिए होते हैं उसी प्रकार आधुनिक पंचशील के सिद्धान्तों द्वारा राष्ट्रों के लिए दूसरे के साथ आचरण के सम्बन्ध निश्चित किये गये । ये सिद्धान्त निम्नलिखित हैं :
( 1 ) एक-दूसरे की प्रादेशिक अखण्डता और सर्वोच्च सत्ता के लिए पारस्परिक सम्मान को
( 2 ) अनाक्रमण,
( 3 ) एक-दूसरे के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना,
(4) समानता एवं पारस्परिक लाभ, तथा
( 5 ) शान्तिपूर्ण सह अस्तित्व ।
अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर 'पंचशील' के इन सिद्धान्तों का प्रतिपादन सर्वप्रथम 29 अप्रैल, 1954 को तिब्बत के सम्बन्ध में भारत और चीन के बीच हुए एक समझौते में किया गया था । 28 जून, 1954 को चीन के प्रधानमन्त्री चाऊं-ऐन-लाई तथा भारत के प्रधानमन्त्री नेहरू ने 'पंचशील' में अपने विश्वास को दोहराया । एशिया के प्रायः सभी देशों ने 'पंचशील' के सिद्धान्तों को स्वीकार कर लिया । अप्रैल 1955 में 'बाण्डुंग सम्मेलन' में इन 'पंचशील' के सिद्धान्तों को पुनः विस्तृत रूप दिया गया। 'बाण्डंग सम्मेलन' के बाद विश्व के अधिसंख्य राष्ट्रों ने 'पंचशील' सिद्धान्त को मान्यता दी और उसमें आस्था प्रक्ट की । 2 अप्रैल 1955 तक बर्मा, लाओस, नेपाल, वियतनाम, यूगोस्लाविया और कम्बोडिया ने इस सिद्धान्त को स्वीकार कर लिया। सन् 1955 में आस्ट्रिया, रूस, पोलैण्ड, संयुक्त राज्य अमरीका और आस्ट्रेलिया ने भी पंचशील को मान्यता दी । 14 दिसम्बर, 1959 को 82 राष्ट्रों की संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने भारत द्वारा उपस्थित किये गये 'पंचशील' के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इस प्रकार पंचशील को सम्पूर्ण विश्व की मान्यता प्राप्त हो गयी । 'पंचशील' के सिद्धान्त अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों के लिए निःसन्देह आदर्श भूमिका का निर्माण करते हैं । 'पंचशील' के सिद्धान्त आपसी विश्वासों के सिद्धान्त है । पं० नेहरू ने स्पष्ट कहा | भारत की विदेश नीति । पाँच सौ तैंतालीस करता रहा है। भारत की विदेश नीति महात्मा गांधी के इस मत से बहुत प्रभावित कि न केवल उद्देश्य वरन् उसकी प्राप्ति के साधन भी पवित्र होने चाहिए । यद्यपि उनके सत्य और अहिंसा के साधनों को पूरी तरह नहीं अपनाया जा सकता है, फिर भी भारत निरन्तर इस बात का प्रयत्न करता रहा है कि अन्तर्राष्ट्रीय विवादों का समाधान शान्तिपूर्ण उपायों से किया जाये, हिंसात्मक साधनों से नहीं । स्वयं भारतीय संविधान में कहा गया है कि : "राज्य" अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा का, राष्ट्रों के बीच न्यायपूर्ण और सम्मानपूर्ण सम्बन्धों को बनाये रखने का, संगठित लोगों के एक-दूसरे से व्यवहारों में अन्तके, र्राष्ट्रीय विधि और सन्धि बन्धनों के प्रति आदर बढ़ाने का; अन्तर्राष्ट्रीय विवादों को मध्यस्थता द्वारा निपटारे के लिए प्रोत्साहन देने, इत्यादि का प्रयत्न करेगा ।" यदि साधनों की श्रेष्ठता में भारत का विश्वास न होता तो एक हज़ार नौ सौ पैंसठ का 'ताशकन्द समझौता' एवं एक हज़ार नौ सौ बहत्तर का 'शिमला समझौता' कभी नहीं किया जाता। भारत ने केवल पाकिस्तान के युद्ध बन्दी ही लौटा दिये अपितु युद्ध में जीती हुई भूमि भी लौटा दी । भारत हथियारों का प्रयोग केवल आत्म-रक्षा में ही करना उपयुक्त मानता है। भारत मानता है कि साधन अच्छा है तो साध्य भी निश्चित रूप से अच्छा ही होगा । छः. 'पंचशील' पर जोर देने वाली नीति 'पंचशील' के पाँच सिद्धान्तों का प्रतिपादन भी भारत की शान्तिप्रियता का द्योतक है । एक हज़ार नौ सौ चौवन के बाद से भारत की नीति को 'पंचशील' के सिद्धान्तों ने एक नयी दिशा प्रदान की । 'पंचशील' से अभिप्राय है- 'आचरण के पाँच सिद्धान्त । जिस प्रकार बौद्ध धर्म में ये व्रत एक व्यक्ति के लिए होते हैं उसी प्रकार आधुनिक पंचशील के सिद्धान्तों द्वारा राष्ट्रों के लिए दूसरे के साथ आचरण के सम्बन्ध निश्चित किये गये । ये सिद्धान्त निम्नलिखित हैं : एक-दूसरे की प्रादेशिक अखण्डता और सर्वोच्च सत्ता के लिए पारस्परिक सम्मान को अनाक्रमण, एक-दूसरे के आन्तरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना, समानता एवं पारस्परिक लाभ, तथा शान्तिपूर्ण सह अस्तित्व । अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर 'पंचशील' के इन सिद्धान्तों का प्रतिपादन सर्वप्रथम उनतीस अप्रैल, एक हज़ार नौ सौ चौवन को तिब्बत के सम्बन्ध में भारत और चीन के बीच हुए एक समझौते में किया गया था । अट्ठाईस जून, एक हज़ार नौ सौ चौवन को चीन के प्रधानमन्त्री चाऊं-ऐन-लाई तथा भारत के प्रधानमन्त्री नेहरू ने 'पंचशील' में अपने विश्वास को दोहराया । एशिया के प्रायः सभी देशों ने 'पंचशील' के सिद्धान्तों को स्वीकार कर लिया । अप्रैल एक हज़ार नौ सौ पचपन में 'बाण्डुंग सम्मेलन' में इन 'पंचशील' के सिद्धान्तों को पुनः विस्तृत रूप दिया गया। 'बाण्डंग सम्मेलन' के बाद विश्व के अधिसंख्य राष्ट्रों ने 'पंचशील' सिद्धान्त को मान्यता दी और उसमें आस्था प्रक्ट की । दो अप्रैल एक हज़ार नौ सौ पचपन तक बर्मा, लाओस, नेपाल, वियतनाम, यूगोस्लाविया और कम्बोडिया ने इस सिद्धान्त को स्वीकार कर लिया। सन् एक हज़ार नौ सौ पचपन में आस्ट्रिया, रूस, पोलैण्ड, संयुक्त राज्य अमरीका और आस्ट्रेलिया ने भी पंचशील को मान्यता दी । चौदह दिसम्बर, एक हज़ार नौ सौ उनसठ को बयासी राष्ट्रों की संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने भारत द्वारा उपस्थित किये गये 'पंचशील' के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इस प्रकार पंचशील को सम्पूर्ण विश्व की मान्यता प्राप्त हो गयी । 'पंचशील' के सिद्धान्त अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्धों के लिए निःसन्देह आदर्श भूमिका का निर्माण करते हैं । 'पंचशील' के सिद्धान्त आपसी विश्वासों के सिद्धान्त है । पंशून्य नेहरू ने स्पष्ट कहा |
देवभूमि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है। हालांकि बर्फ से ढके पहाड़ों पर मौसम का मिजाज और हिमस्खलन के कारण छोटे-बड़े व्यवधान आते रहते हैं लेकिन मोक्ष और जीवन में संकटों से मुक्ति की कामना लिए तीर्थयात्रियों का सैलाब यहां यात्रा की अवधि में सदा बना रहता है। धार्मिक यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह उचित समय भी है, मई माह के अंतिम सप्ताह तक स्टूडेंट्स का ग्रीष्मावकाश शुरू हो जाता है। भीषण गर्मी से बचने के लिए लोग पहाड़ों की तरफ रूख कर जाते हैं।
पहले जान लें आवश्यक बातें : चारधाम यात्रा करने से पहले आपके शरीर का पूर्ण स्वस्थ होना जरूरी है। मेडिकल चेकअप कराने के बाद आवश्यक दवाइयां साथ ले लें। साथ ही पर्याप्त गर्म कपड़े जरूर रख लें। रास्ते में अनेक होटल हैं लेकिन सितारा होटलों जैसी परिकल्पना न करें। यात्रा शुरू करने से पहले मौसम का पूर्वानुमान देख लें। रजिस्ट्रेंशन कराना अनिवार्य है जो ऑनलाइन कराया जा सकता है। अच्छा हो कोई टूर पैकेज ले लें।
चारधाम की यात्रा में माइनस डिग्री तक का तापमान दिल के मरीजों के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। बर्फीले स्थान पर तुरंत इलाज न मिल पाने के कारण धर्मावलंबियों की मौत भी हो रही है।
अकेले केदरनाथ यात्रा में 9 दिनों के अंदर 8 तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है, वही गंगोत्री धाम में 4, यमुनोत्री धाम में 5 और बदरीनाथ धाम में 2 यात्रियों की मौत हुई है। उत्तराखंड राज्य आपदा विभाग के मुताबिक अब चार धाम की यात्रा में 19 तीर्थ यात्री काल का ग्रास बन चुके है। यदि कोई भी चारधाम धार्मिक यात्रा करने वाला यात्री अस्वस्थ है तो वह बर्फीले स्थान का विचार फिलहाल त्याग दें।
कब शुरू होती है यात्रा : चार धामों यानी यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट अलग-अलग तिथियों को खुलते हैं। यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट दर्शनों के लिए अक्षय तृतीया को खोले जाते हैं जबकि केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट खुलने की तिथि क्रमशः महाशिवरात्रि और बसंत पंचमी को विधिसम्मत निर्धारित की जाती है। इस बार यानी 2023 में यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट 22 अप्रैल, केदारनाथ के कपाट 25 अप्रैल एवं बद्रीनाथ के कपाट 27 अप्रैल को विधि-विधान के साथ खोल दिए गए। इस तरह अब देवभूमि स्थित चारों धामों की यात्रा प्रारंभ हो चुकी है। चारों धाम बर्फ से ढके दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं, इसलिए सर्दियों में भारी बर्फबारी के चलते नवंबर के दूसरे सप्ताह में अलग-अलग तिथियों को इनके कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
इन महीनों में यात्रा से बचें : हिमस्खलन से अस्थाई तौर पर मार्ग अवरूद्ध हो जाते हैं, जिससे यात्रा में अवरोध उत्पन्न हो सकता है। इस अवरोध को हटाकर मार्ग सुगम बनाने में कुछ दिन लग जाते हैं जिसकी प्रतीक्षा यात्रियों को करनी पड़ती है। होटल या धर्मशाला का आश्रय लेना पड़ता है। इसी तरह भारी बारिश होने पर पहाड़ी चट्टाने टूट कर मार्ग अवरूद्ध कर सकती हैं जिनके हटाए जाने तक यात्री बीच में ही अटक जाते हैं। इस नजरिए से मानसून के समय यानी जुलाई और अगस्त में यात्रा से बचना चाहिए। मई, जून, सितंबर और अक्टूबर यात्रा के लिए सर्वाधिक उपयुक्त महीने माने जाते हैं।
सबसे पहले यमनोत्री : चारधाम यात्रा का एक निश्चित विधान या अनुक्रम है। इस क्रम में तीर्थयात्री सबसे पहले यमुनोत्री के दर्शन करते हैं। यमुनोत्री के बाद गगोत्री, फिर केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ धाम के दर्शन करते हैं। हालांकि कुछ लोग एक या दो धाम तक सीमित रहते हैं और कुछ पर्यटन के नजरिए से भी जाते हैं।
कैसे पहुंचे यमुनोत्री : यमुनोत्री जाने के लिए आप हरिद्वार तक ट्रेन से जा सकते हैं। हरिद्वार से आपको सड़क मार्ग से ऋषिकेश होते हुए जानकीचट्टी तक जाना होगा। अगर आप सड़क से आ रहे हैं तो आपको दिल्ली से एनएच 58 पर यात्रा करते हुएं ऋषिकेश पहुंचना होगा। ऋषिकेश से जनकीचट्टी पहुंचकर छह किलोमीटर पैदल चलते हुए आप यमुनोत्री धाम पहुंचेंगे।
दिल्ली से यमुनोत्री की दूरी करीब 485 किलोमीटर है। करीब 12 घंटे का समय लगेगा। आप दिल्ली आईएसबीटी से बस द्वारा भी ऋषिकेश पहुंच सकते हैं। ऋषिकेश तक फ्रीक्वेंट बस सर्विस है। निकटतम हवाई अड्डा देहरादून है जहां से अच्छी कनेक्टिविटी है। यमुनोत्री के आसपास आप दिव्यशिला, सूर्यकुण्ड और सप्तऋषि कुंड भी जाया जा सकता है।
कैसे पहुंचे गंगोत्री : यमुनोत्री से गंगोत्री या सीधे गंगोत्री जाने के लिए आपको पहले उत्तरकाशी पहुंचना होगा। यमुनोत्री से ब्रह्मखाल होते हुए उत्तरकाशी आने पर यहां से हरसिल या गंगोत्री के लिए बस भी मिल जाएगी और टैक्सी भी लेकिन गंगोत्री से गोमुख तक 19 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी होगी। ऋषिकेश से सीधे भी गंगोत्री पहुंचा जा सकता है।
कैसे पहुंचे केदारनाथ : केदारनाथ जाने के लिए आप वाहन से गौरीकुंड तक पहुंच सकते हैं, जहां से आपको 16 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी होगी। अगर आप चाहें तो गुप्तकाशी या फाटा अथवा गौरीकुंड से हेलीकॉप्टर में सवार होकर आकाशीय मार्ग से वहां पहुंच सकते हैं। गौरीकुंड पहुंचने के लिए पहले आपको रुद्रप्रयाग पहुंचना होगा। रुद्रप्रयाग से गुप्तकाशी, फाटा, रामपुर, सीतापुर होते हुए आप गौरीकुंड पहुंचेंगे।
| देवभूमि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है। हालांकि बर्फ से ढके पहाड़ों पर मौसम का मिजाज और हिमस्खलन के कारण छोटे-बड़े व्यवधान आते रहते हैं लेकिन मोक्ष और जीवन में संकटों से मुक्ति की कामना लिए तीर्थयात्रियों का सैलाब यहां यात्रा की अवधि में सदा बना रहता है। धार्मिक यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह उचित समय भी है, मई माह के अंतिम सप्ताह तक स्टूडेंट्स का ग्रीष्मावकाश शुरू हो जाता है। भीषण गर्मी से बचने के लिए लोग पहाड़ों की तरफ रूख कर जाते हैं। पहले जान लें आवश्यक बातें : चारधाम यात्रा करने से पहले आपके शरीर का पूर्ण स्वस्थ होना जरूरी है। मेडिकल चेकअप कराने के बाद आवश्यक दवाइयां साथ ले लें। साथ ही पर्याप्त गर्म कपड़े जरूर रख लें। रास्ते में अनेक होटल हैं लेकिन सितारा होटलों जैसी परिकल्पना न करें। यात्रा शुरू करने से पहले मौसम का पूर्वानुमान देख लें। रजिस्ट्रेंशन कराना अनिवार्य है जो ऑनलाइन कराया जा सकता है। अच्छा हो कोई टूर पैकेज ले लें। चारधाम की यात्रा में माइनस डिग्री तक का तापमान दिल के मरीजों के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। बर्फीले स्थान पर तुरंत इलाज न मिल पाने के कारण धर्मावलंबियों की मौत भी हो रही है। अकेले केदरनाथ यात्रा में नौ दिनों के अंदर आठ तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है, वही गंगोत्री धाम में चार, यमुनोत्री धाम में पाँच और बदरीनाथ धाम में दो यात्रियों की मौत हुई है। उत्तराखंड राज्य आपदा विभाग के मुताबिक अब चार धाम की यात्रा में उन्नीस तीर्थ यात्री काल का ग्रास बन चुके है। यदि कोई भी चारधाम धार्मिक यात्रा करने वाला यात्री अस्वस्थ है तो वह बर्फीले स्थान का विचार फिलहाल त्याग दें। कब शुरू होती है यात्रा : चार धामों यानी यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट अलग-अलग तिथियों को खुलते हैं। यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट दर्शनों के लिए अक्षय तृतीया को खोले जाते हैं जबकि केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट खुलने की तिथि क्रमशः महाशिवरात्रि और बसंत पंचमी को विधिसम्मत निर्धारित की जाती है। इस बार यानी दो हज़ार तेईस में यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट बाईस अप्रैल, केदारनाथ के कपाट पच्चीस अप्रैल एवं बद्रीनाथ के कपाट सत्ताईस अप्रैल को विधि-विधान के साथ खोल दिए गए। इस तरह अब देवभूमि स्थित चारों धामों की यात्रा प्रारंभ हो चुकी है। चारों धाम बर्फ से ढके दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं, इसलिए सर्दियों में भारी बर्फबारी के चलते नवंबर के दूसरे सप्ताह में अलग-अलग तिथियों को इनके कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इन महीनों में यात्रा से बचें : हिमस्खलन से अस्थाई तौर पर मार्ग अवरूद्ध हो जाते हैं, जिससे यात्रा में अवरोध उत्पन्न हो सकता है। इस अवरोध को हटाकर मार्ग सुगम बनाने में कुछ दिन लग जाते हैं जिसकी प्रतीक्षा यात्रियों को करनी पड़ती है। होटल या धर्मशाला का आश्रय लेना पड़ता है। इसी तरह भारी बारिश होने पर पहाड़ी चट्टाने टूट कर मार्ग अवरूद्ध कर सकती हैं जिनके हटाए जाने तक यात्री बीच में ही अटक जाते हैं। इस नजरिए से मानसून के समय यानी जुलाई और अगस्त में यात्रा से बचना चाहिए। मई, जून, सितंबर और अक्टूबर यात्रा के लिए सर्वाधिक उपयुक्त महीने माने जाते हैं। सबसे पहले यमनोत्री : चारधाम यात्रा का एक निश्चित विधान या अनुक्रम है। इस क्रम में तीर्थयात्री सबसे पहले यमुनोत्री के दर्शन करते हैं। यमुनोत्री के बाद गगोत्री, फिर केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ धाम के दर्शन करते हैं। हालांकि कुछ लोग एक या दो धाम तक सीमित रहते हैं और कुछ पर्यटन के नजरिए से भी जाते हैं। कैसे पहुंचे यमुनोत्री : यमुनोत्री जाने के लिए आप हरिद्वार तक ट्रेन से जा सकते हैं। हरिद्वार से आपको सड़क मार्ग से ऋषिकेश होते हुए जानकीचट्टी तक जाना होगा। अगर आप सड़क से आ रहे हैं तो आपको दिल्ली से एनएच अट्ठावन पर यात्रा करते हुएं ऋषिकेश पहुंचना होगा। ऋषिकेश से जनकीचट्टी पहुंचकर छह किलोमीटर पैदल चलते हुए आप यमुनोत्री धाम पहुंचेंगे। दिल्ली से यमुनोत्री की दूरी करीब चार सौ पचासी किलोग्राममीटर है। करीब बारह घंटाटे का समय लगेगा। आप दिल्ली आईएसबीटी से बस द्वारा भी ऋषिकेश पहुंच सकते हैं। ऋषिकेश तक फ्रीक्वेंट बस सर्विस है। निकटतम हवाई अड्डा देहरादून है जहां से अच्छी कनेक्टिविटी है। यमुनोत्री के आसपास आप दिव्यशिला, सूर्यकुण्ड और सप्तऋषि कुंड भी जाया जा सकता है। कैसे पहुंचे गंगोत्री : यमुनोत्री से गंगोत्री या सीधे गंगोत्री जाने के लिए आपको पहले उत्तरकाशी पहुंचना होगा। यमुनोत्री से ब्रह्मखाल होते हुए उत्तरकाशी आने पर यहां से हरसिल या गंगोत्री के लिए बस भी मिल जाएगी और टैक्सी भी लेकिन गंगोत्री से गोमुख तक उन्नीस किलोग्राममीटर की ट्रेकिंग करनी होगी। ऋषिकेश से सीधे भी गंगोत्री पहुंचा जा सकता है। कैसे पहुंचे केदारनाथ : केदारनाथ जाने के लिए आप वाहन से गौरीकुंड तक पहुंच सकते हैं, जहां से आपको सोलह किलोग्राममीटर की ट्रेकिंग करनी होगी। अगर आप चाहें तो गुप्तकाशी या फाटा अथवा गौरीकुंड से हेलीकॉप्टर में सवार होकर आकाशीय मार्ग से वहां पहुंच सकते हैं। गौरीकुंड पहुंचने के लिए पहले आपको रुद्रप्रयाग पहुंचना होगा। रुद्रप्रयाग से गुप्तकाशी, फाटा, रामपुर, सीतापुर होते हुए आप गौरीकुंड पहुंचेंगे। |
दिवाली के मौके पर वाराणसी में भगवान राम की आरती करने वाली मुस्लिम महिलाओं को लेकर दारुल उलूम सख्त हो गया है। दारुल उलूम देवबंद ने आरती करने वाली महिलाओं को इस्लाम से खारिज करते हुए कहा है कि अगर कोई भी मुस्लिम अल्लाह के अलावा किसी और भगवान को मानता है तो वह मुस्लिम नहीं रहता। इसके अलावा दारुल उलूम ने उन महिलाओं को जिन्होंने भगवान राम की आरती की थी, उन्हें हिदायत दी है कि वे अल्लाह से माफी मांग कलमा पढ़ कर ही इमान में दाखिल हों।
दिवाली के मौके पर इस कार्यक्रम का आयोजन मुस्लिम महिला फाउंडेशन और विशाल भारत संस्थान ने मिलकर किया था। इस कार्यक्रम में कुछ मुस्लिम महिलाओं ने हिंदू महिलाओं के साथ मिलकर भगवान राम की पूजा की और आरती गायी थी। मुस्लिम महिलाओं द्वारा भगवान राम की आरती करने की परंपरा की शुरुआत 2006 में संकट मोचन मंदिर में आतंकी धमाका होने के बाद की गई थी। तब से ही मुस्लिम महिला फाउंडेशन ने हिंदू धर्म के मुख्य पर्व राम नवमी और दिवाली के मौकों पर भगवान की आरती कर रहा है।
दारुल उलूम देवबंद ने ना केवल आरती करने वाली महिलाओं के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है बल्कि सोशल मीडिया पर मुस्लिम महिलाओं के फोटो डालने पर भी रोक लगाते हुए फतवा जारी किया है। देवबंद का कहना है कि मुस्लिम महिलाओं का फेसबुक और व्हाट्सअप में फोटो डालना हराम है। दारूम उलूम देवबंद ने फतवा जारी करके सोशल मीडिया पर मुस्लिम पुरूषों और महिलाओं की फोटो अपलोड करने को नाजायज बताया है।
| दिवाली के मौके पर वाराणसी में भगवान राम की आरती करने वाली मुस्लिम महिलाओं को लेकर दारुल उलूम सख्त हो गया है। दारुल उलूम देवबंद ने आरती करने वाली महिलाओं को इस्लाम से खारिज करते हुए कहा है कि अगर कोई भी मुस्लिम अल्लाह के अलावा किसी और भगवान को मानता है तो वह मुस्लिम नहीं रहता। इसके अलावा दारुल उलूम ने उन महिलाओं को जिन्होंने भगवान राम की आरती की थी, उन्हें हिदायत दी है कि वे अल्लाह से माफी मांग कलमा पढ़ कर ही इमान में दाखिल हों। दिवाली के मौके पर इस कार्यक्रम का आयोजन मुस्लिम महिला फाउंडेशन और विशाल भारत संस्थान ने मिलकर किया था। इस कार्यक्रम में कुछ मुस्लिम महिलाओं ने हिंदू महिलाओं के साथ मिलकर भगवान राम की पूजा की और आरती गायी थी। मुस्लिम महिलाओं द्वारा भगवान राम की आरती करने की परंपरा की शुरुआत दो हज़ार छः में संकट मोचन मंदिर में आतंकी धमाका होने के बाद की गई थी। तब से ही मुस्लिम महिला फाउंडेशन ने हिंदू धर्म के मुख्य पर्व राम नवमी और दिवाली के मौकों पर भगवान की आरती कर रहा है। दारुल उलूम देवबंद ने ना केवल आरती करने वाली महिलाओं के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है बल्कि सोशल मीडिया पर मुस्लिम महिलाओं के फोटो डालने पर भी रोक लगाते हुए फतवा जारी किया है। देवबंद का कहना है कि मुस्लिम महिलाओं का फेसबुक और व्हाट्सअप में फोटो डालना हराम है। दारूम उलूम देवबंद ने फतवा जारी करके सोशल मीडिया पर मुस्लिम पुरूषों और महिलाओं की फोटो अपलोड करने को नाजायज बताया है। |
विशेषकर गांधीजीको, अगस्त १९४२ के हिंसात्मक क्रान्तिकारी आन्दोलनके लिए उत्तरदायी ठहराया था। दूसरी ओर गांधीजीके अनुसार इन घटनाओंका सारा दोप सरकारका था, जिसकी आतंकवादी दमनकारी नीतिने जनताको पागल-सा बना दिया था । उपवासके पहले के पत्र व्यवहारमें गांधीजीने कई वार वाइसरॉय से प्रार्थना की कि यदि उनकी भूल प्रमाणित कर दी जाय, तो वे उसको मान लेंगे और पर्याप्त प्रायश्चित्त करेगे। लेकिन सरकारने इस आरोपको न्यायालय के सामने प्रमाणित करनेकी कोई व्यवस्था न की। दूसरी ओर वाइसरॉयने तो गांधीजी पर यह आरोप भी लगाया कि वे कायरताके कारण उपवासके द्वारा उत्तरदायित्व से वचनेका सुगम मार्ग खोज रहे है। इस अप्रामाणिक आरोपसे उत्पन्न विवशताकी भावनाको देशकी राजनैतिक और आर्थिक स्थितिने, विशेषकर देश-व्यापक अकालने, और भी तीव्र कर दिया । गांधीजीके अनुसार ऐसे वेदनापूर्ण अवसरोंके लिए सत्याग्रहके नियमके अनुसार उपवास द्वारा शरीरके बलिदानकी" व्यवस्था है।
इन दृष्टांतों से प्रकट है कि सम्भवतः कुछ अवसरों पर शक्तिशाली विरोधीका अन्याय सत्याग्रहीके जीवन और स्वतन्त्रताको इतना संकुचित कर दे कि उसकी व्यथित आत्मा प्रतिरोधके इस अन्तिम साधनके लिए पुकार उठे ।
अपमानजनक या अमानुपिक व्यवहारके विरोध में सत्याग्रही कैदियोंका उपवास करना गांधीजी उचित मानते है । ऐसे आपत्तिजनक व्यवहार के कुछ उदाहरण है - कैदियोंका खाना उनकी ओर फेंक देना, उनको गाली देना, उनकी धार्मिक स्वतन्त्रताका अपहरण इत्यादि । कैदसे मुक्त होनेके लिए इसका उपयोग अनुचित है।
उपवासकी आलोचना
उपवासकी पद्धतिकी कड़ी आलोचना की गई है । मार्च १९३९ में जॉर्ज अरुण्डेलने कहा था कि उपवास आतंकवाद है, जिसके विरुद्ध विरोधीके लिए आत्म-समर्पण करने या सत्याग्रहीकी आत्महत्या देखनेके अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प नहीं । इस प्रकार विरुद्ध उसकी मानवता, वीरता और दयाकी भावन
जीवन मार्गके रूप में
यरवडा - उपवास के अवसर पर कविवर टैगोरने उसे "ईश्वरको उसकी व्यवस्थाके विरोधमें शरीर-पीड़नकी चुनौती बताया था ।" उनके अनुसार उसका उपयोग जीवनकी महान देनको और अन्तिम क्षण तक पूर्णताके आदर्श पर अटल रहनेके अवसरको त्याग देना है। और यही प्रार्थनाका, आदर्श मानवताके अस्तित्वका औचित्य है । कुछ आलोचकोंने राजकोटके उपवासके समय कहा था कि जनतन्त्रका निर्माण उपवासकी पद्धतिसे नहीं हो सकता, क्योंकि उसका प्रयोग जनसमूहों द्वारा नहीं हो सकता ।' हो सकता है कि सत्याग्रही उपवासकी आवश्यकताके वारेमें भूल कर दे और अकस्मात् सत्य और प्रेमकी साधनाकी अपनी शक्तिका अंत कर बैठे । यह भी खतरा है कि कुछ मनुष्य अपने विरोधियोंको धमकाने और वल-प्रयोगके साधनके रूपमें उपवासका दुरुपयोग करें ।
उपवासके कारण अक्सर ठीक सोच-विचार करना बड़ा कठिन हो जाता है। विरोधीके लिए यह स्वाभाविक है कि वह सत्याग्रहीकी मृत्युसे होनेवाली अपनी वदनामीके डरसे या उसके कष्टोंको देखने से उमड़ी हुई सहानुभूतिके दवावसे सत्याग्रहीकी ऐसी मांग भी स्वीकार कर ले, जो उसको उचित नहीं जंचती। यह खतरा विशेष रूपसे तव अधिक होता है जब उपवास करनेवाला सत्याग्रही गांधीजी सरीखा कोई महान व्यक्ति हो । इसलिए यह आवश्यक नहीं कि उपवासके परिणाम स्वरूप हृदय परिवर्तन हो ही जाय। उपवासका एक परिणाम यह भी हो सकता है कि विरोधी पर अनुचित दवाव पड़े । लेकिन यह खतरा तो केवल उपवासमें नहीं, कष्ट सहनके प्रत्येक तरीकेमें है । कप्ट-सहनके दृश्यसे दर्शक पर सहानुभूतिकी प्रतिक्रिया होती है और कम-से-कम उस समय झगड़ेके मूलभूत प्रश्नको निष्पक्ष रूपसे समझना कठिन हो जाता है। लेकिन यदि समझाने-बुझाने और अन्य नम्र उपायों से काम न चले, तो कष्ट सहकर विरोधीका हृदय परिवर्तन करनेका प्रयत्न करना उसको कप्ट देकर दवा देनेसे कहीं ज्यादा अच्छा है। इसके अतिरिक्त समय वीतने पर प्रश्न स्पष्ट हो जाता है और सत्यकी जीत होती है। जैसा कि गांधीजीने १९४३ में सर रेजिनाल्ड मैक्सवेलको लिखे एक पत्रमें कहा था, "गुप्त या प्रगट रूपसे विरोधीकी जान लेना या उसको उत्कृष्ट भावनाओंका श्रेय देना और उनको उपवास तथा उसीके समान अन्य उपायोंके द्वारा जाग्रत • इनमें से कौन अधिक अच्छा है ?" पुनः " उपवास अथवा आत्मवलिदानके अन्य किसी उपाय द्वारा स्वयं अपने जीवन से खिलवाड़ करना अथवा विरोधी और उसके आश्रितोंके विनाशके प्रयासमें लगकर (उनके)
१. ह०, १-७-८३३ में छपे गांवीजीको लिखे उनके पत्र । २. ह०, १५-४३९, पृ० ८८। | विशेषकर गांधीजीको, अगस्त एक हज़ार नौ सौ बयालीस के हिंसात्मक क्रान्तिकारी आन्दोलनके लिए उत्तरदायी ठहराया था। दूसरी ओर गांधीजीके अनुसार इन घटनाओंका सारा दोप सरकारका था, जिसकी आतंकवादी दमनकारी नीतिने जनताको पागल-सा बना दिया था । उपवासके पहले के पत्र व्यवहारमें गांधीजीने कई वार वाइसरॉय से प्रार्थना की कि यदि उनकी भूल प्रमाणित कर दी जाय, तो वे उसको मान लेंगे और पर्याप्त प्रायश्चित्त करेगे। लेकिन सरकारने इस आरोपको न्यायालय के सामने प्रमाणित करनेकी कोई व्यवस्था न की। दूसरी ओर वाइसरॉयने तो गांधीजी पर यह आरोप भी लगाया कि वे कायरताके कारण उपवासके द्वारा उत्तरदायित्व से वचनेका सुगम मार्ग खोज रहे है। इस अप्रामाणिक आरोपसे उत्पन्न विवशताकी भावनाको देशकी राजनैतिक और आर्थिक स्थितिने, विशेषकर देश-व्यापक अकालने, और भी तीव्र कर दिया । गांधीजीके अनुसार ऐसे वेदनापूर्ण अवसरोंके लिए सत्याग्रहके नियमके अनुसार उपवास द्वारा शरीरके बलिदानकी" व्यवस्था है। इन दृष्टांतों से प्रकट है कि सम्भवतः कुछ अवसरों पर शक्तिशाली विरोधीका अन्याय सत्याग्रहीके जीवन और स्वतन्त्रताको इतना संकुचित कर दे कि उसकी व्यथित आत्मा प्रतिरोधके इस अन्तिम साधनके लिए पुकार उठे । अपमानजनक या अमानुपिक व्यवहारके विरोध में सत्याग्रही कैदियोंका उपवास करना गांधीजी उचित मानते है । ऐसे आपत्तिजनक व्यवहार के कुछ उदाहरण है - कैदियोंका खाना उनकी ओर फेंक देना, उनको गाली देना, उनकी धार्मिक स्वतन्त्रताका अपहरण इत्यादि । कैदसे मुक्त होनेके लिए इसका उपयोग अनुचित है। उपवासकी आलोचना उपवासकी पद्धतिकी कड़ी आलोचना की गई है । मार्च एक हज़ार नौ सौ उनतालीस में जॉर्ज अरुण्डेलने कहा था कि उपवास आतंकवाद है, जिसके विरुद्ध विरोधीके लिए आत्म-समर्पण करने या सत्याग्रहीकी आत्महत्या देखनेके अतिरिक्त कोई अन्य विकल्प नहीं । इस प्रकार विरुद्ध उसकी मानवता, वीरता और दयाकी भावन जीवन मार्गके रूप में यरवडा - उपवास के अवसर पर कविवर टैगोरने उसे "ईश्वरको उसकी व्यवस्थाके विरोधमें शरीर-पीड़नकी चुनौती बताया था ।" उनके अनुसार उसका उपयोग जीवनकी महान देनको और अन्तिम क्षण तक पूर्णताके आदर्श पर अटल रहनेके अवसरको त्याग देना है। और यही प्रार्थनाका, आदर्श मानवताके अस्तित्वका औचित्य है । कुछ आलोचकोंने राजकोटके उपवासके समय कहा था कि जनतन्त्रका निर्माण उपवासकी पद्धतिसे नहीं हो सकता, क्योंकि उसका प्रयोग जनसमूहों द्वारा नहीं हो सकता ।' हो सकता है कि सत्याग्रही उपवासकी आवश्यकताके वारेमें भूल कर दे और अकस्मात् सत्य और प्रेमकी साधनाकी अपनी शक्तिका अंत कर बैठे । यह भी खतरा है कि कुछ मनुष्य अपने विरोधियोंको धमकाने और वल-प्रयोगके साधनके रूपमें उपवासका दुरुपयोग करें । उपवासके कारण अक्सर ठीक सोच-विचार करना बड़ा कठिन हो जाता है। विरोधीके लिए यह स्वाभाविक है कि वह सत्याग्रहीकी मृत्युसे होनेवाली अपनी वदनामीके डरसे या उसके कष्टोंको देखने से उमड़ी हुई सहानुभूतिके दवावसे सत्याग्रहीकी ऐसी मांग भी स्वीकार कर ले, जो उसको उचित नहीं जंचती। यह खतरा विशेष रूपसे तव अधिक होता है जब उपवास करनेवाला सत्याग्रही गांधीजी सरीखा कोई महान व्यक्ति हो । इसलिए यह आवश्यक नहीं कि उपवासके परिणाम स्वरूप हृदय परिवर्तन हो ही जाय। उपवासका एक परिणाम यह भी हो सकता है कि विरोधी पर अनुचित दवाव पड़े । लेकिन यह खतरा तो केवल उपवासमें नहीं, कष्ट सहनके प्रत्येक तरीकेमें है । कप्ट-सहनके दृश्यसे दर्शक पर सहानुभूतिकी प्रतिक्रिया होती है और कम-से-कम उस समय झगड़ेके मूलभूत प्रश्नको निष्पक्ष रूपसे समझना कठिन हो जाता है। लेकिन यदि समझाने-बुझाने और अन्य नम्र उपायों से काम न चले, तो कष्ट सहकर विरोधीका हृदय परिवर्तन करनेका प्रयत्न करना उसको कप्ट देकर दवा देनेसे कहीं ज्यादा अच्छा है। इसके अतिरिक्त समय वीतने पर प्रश्न स्पष्ट हो जाता है और सत्यकी जीत होती है। जैसा कि गांधीजीने एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस में सर रेजिनाल्ड मैक्सवेलको लिखे एक पत्रमें कहा था, "गुप्त या प्रगट रूपसे विरोधीकी जान लेना या उसको उत्कृष्ट भावनाओंका श्रेय देना और उनको उपवास तथा उसीके समान अन्य उपायोंके द्वारा जाग्रत • इनमें से कौन अधिक अच्छा है ?" पुनः " उपवास अथवा आत्मवलिदानके अन्य किसी उपाय द्वारा स्वयं अपने जीवन से खिलवाड़ करना अथवा विरोधी और उसके आश्रितोंके विनाशके प्रयासमें लगकर एक. हशून्य, एक जुलाई आठ सौ तैंतीस में छपे गांवीजीको लिखे उनके पत्र । दो. हशून्य, पंद्रह-चार सौ उनतालीस, पृशून्य अठासी। |
महिला सम्मान बचत पत्र खाता किसी भी पोस्ट ऑफिस में खुलवा सकते हैं. (news18)
नई दिल्ली. महिलाओं के लिये शुरू की गई बचत योजना महिला सम्मान बचत पत्र से मिलने वाले ब्याज पर टीडीएस नहीं कटेगा. इसपर जो भी ब्याज मिलेगा, उस आय पर खाताधारक को टैक्स स्लैब के हिसाब से कर देना होगा. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने 16 मई को डाकघर बचत योजना के लिये स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) प्रावधान को अधिसूचित किया है। इसके तहत लड़की या किसी महिला के नाम पर खाता खोला जा सकता है.
महिला सम्मान बचत पत्र योजना चालू वित्त वर्ष में शुरू की गयी. इसमें अधिकतम दो लाख रुपये जमा किये जा सकते हैं. इसपर सालाना 7. 5 प्रतिशत ब्याज मिलेगा. जमा राशि दो साल में परिपक्व होगी. नांगिया एंडरसन इंडिया के भागीदार नीरज अग्रवाल ने कहा कि सीबीडीटी की अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि महिला सम्मान बचत पत्र पर मिलने वाला ब्याज एक वित्त वर्ष में अगर 40,000 रुपये से अधिक नहीं है तो इस पर टीडीएस नहीं कटेगा.
महिला सम्मान बचत पत्र योजना की शुरुआत महिलाओं को बचत के लिए प्रोत्साहित करने और ज्यादा ब्याज देने के उद्देश्य से की गई है. इस योजना की शुरुआत 1 अप्रैल 2023 से हुई थी. इस योजना का लाभ सिर्फ भारतीय महिलाओं को ही मिलेगा. महिला सम्मान बचत पत्र योजना का लाभ किसी भी उम्र की महिला को मिल सकता है. भारत के किसी भी डाकघर में आप यह खाता खुलवा सकते हैं. इसके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो जरूरी दस्तावेज हैं.
महिला सम्मान बचत पत्र योजना में पैसे 2 साल के लिए जमा किए जा सकते हैं. इसमें 2 साल का ब्याज आपको एक साथ मैच्योरिटी पर मिल जाता है. 7. 5 फीसदी की ब्याज दर से अधिकतम 2 लाख रुपये का निवेश करने पर 2 साल बाद 320000 रुपये का ब्याज मिलेगा. यानी मैच्योरिटी पर आपको 2. 32 लाख रुपये मिलेंगे. हर इन्सटॉलमेंट में कम से कम 3 महीने का अंतर होना जरूरी है.
.
| महिला सम्मान बचत पत्र खाता किसी भी पोस्ट ऑफिस में खुलवा सकते हैं. नई दिल्ली. महिलाओं के लिये शुरू की गई बचत योजना महिला सम्मान बचत पत्र से मिलने वाले ब्याज पर टीडीएस नहीं कटेगा. इसपर जो भी ब्याज मिलेगा, उस आय पर खाताधारक को टैक्स स्लैब के हिसाब से कर देना होगा. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने सोलह मई को डाकघर बचत योजना के लिये स्रोत पर कर कटौती प्रावधान को अधिसूचित किया है। इसके तहत लड़की या किसी महिला के नाम पर खाता खोला जा सकता है. महिला सम्मान बचत पत्र योजना चालू वित्त वर्ष में शुरू की गयी. इसमें अधिकतम दो लाख रुपये जमा किये जा सकते हैं. इसपर सालाना सात. पाँच प्रतिशत ब्याज मिलेगा. जमा राशि दो साल में परिपक्व होगी. नांगिया एंडरसन इंडिया के भागीदार नीरज अग्रवाल ने कहा कि सीबीडीटी की अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि महिला सम्मान बचत पत्र पर मिलने वाला ब्याज एक वित्त वर्ष में अगर चालीस,शून्य रुपयापये से अधिक नहीं है तो इस पर टीडीएस नहीं कटेगा. महिला सम्मान बचत पत्र योजना की शुरुआत महिलाओं को बचत के लिए प्रोत्साहित करने और ज्यादा ब्याज देने के उद्देश्य से की गई है. इस योजना की शुरुआत एक अप्रैल दो हज़ार तेईस से हुई थी. इस योजना का लाभ सिर्फ भारतीय महिलाओं को ही मिलेगा. महिला सम्मान बचत पत्र योजना का लाभ किसी भी उम्र की महिला को मिल सकता है. भारत के किसी भी डाकघर में आप यह खाता खुलवा सकते हैं. इसके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो जरूरी दस्तावेज हैं. महिला सम्मान बचत पत्र योजना में पैसे दो साल के लिए जमा किए जा सकते हैं. इसमें दो साल का ब्याज आपको एक साथ मैच्योरिटी पर मिल जाता है. सात. पाँच फीसदी की ब्याज दर से अधिकतम दो लाख रुपये का निवेश करने पर दो साल बाद तीन लाख बीस हज़ार रुपयापये का ब्याज मिलेगा. यानी मैच्योरिटी पर आपको दो. बत्तीस लाख रुपये मिलेंगे. हर इन्सटॉलमेंट में कम से कम तीन महीने का अंतर होना जरूरी है. . |
नेहा भसीन कोरोना संक्रमित. (फोटो साभारः nehabhasin4u/Instagram)
'बिग बॉस ओटीटी' (Bigg Boss OTT) की कंटेस्टेंट और 'बिग बॉस 15' (Bigg Boss 15) की वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट रह चुकीं नेहा भसीन (Neha Bhasin) कोरोना संक्रमित हो गई हैं. कोरोना संक्रमण की दर कम हुई है लेकिन अभी भी लोगों को परेशान कर रही है. कोविड-19 से कई सेलेब्स के संक्रमित होने की खबरें आती रहती हैं. नेहा के पॉजिटिव रिपोर्ट आने की खबर सुनते ही उनके फैंस और फ्रेंड्स नेहा के जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं. 'बिग बॉस' कंटेस्टेंट और सिंगर नेहा की अच्छी दोस्त शमिता शेट्टी (Shamita Shetty) ने भी उनके लिए प्रार्थना की.
इसके अलावा नेहा भसीन ने एक पोस्ट कर लिखा कि 'आपकी लगातार दुआओं के लिए आभार. काश मैं कह सकती कि मैं अच्छा फील कर रही हूं. लेकिन उम्मीद है कि मैं जल्द स्वस्थ हो जाऊंगी. आप लोग सुरक्षित रहें'.
दरअसल, शमिता शेट्टी ने बीते 2 फरवरी को अपना बर्थडे सेलिब्रेट किया था. बर्थडे पार्टी में बिग बॉस के कई कंटेस्टेंट के साथ नेहा भसीन ने भी शिरकत किया था. इस दौरान घर के अंदर रह चुके राखी सावंत, उमर रियाज, राजीव अदातिया, रश्मि देसाई समेत शमिता के ब्वॉय फ्रेंड राकेश बापट ने जमकर मस्ती की थी.
बता दें कि बोल्ड और बिंदास सिंगर नेहा भसीन (Neha Bhasin) ने यूं तो 'टाइगर जिंदा है', 'मेरे ब्रदर की दुल्हन', 'फोर्स' जैसी फिल्मों में गाना गाया है लेकिन सलमान खान (Salman Khan) स्टारर फिल्म 'सुल्तान' के फेमस सॉन्ग 'जग घूमिया' की वजह से अधिक जानी जाती हैं. 'बिग बॉस' (Bigg Boss ) शो का हिस्सा बनने के बाद उनकी पॉपुलैरिटी में काफी इजाफा हुआ.
ये भी पढ़िए- लता मंगेशकर को याद कर भावुक हुईं श्रद्धा कपूर, निधन के 2 दिन बाद थ्रोबैक तस्वीर शेयर कर लिखा-I Love You आजी !
नेहा ने पहले 'बिग बॉस ओटीटी' में हिस्सा लिया था. इस दौरान उनकी शमिता शेट्टी, प्रतीक सहजपाल के साथ अच्छी बॉन्डिंग हो गई. नेहा ने लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि देते हुए उनके गाए गाने को गाते हुए अपना वीडियो भी इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया है.
.
| नेहा भसीन कोरोना संक्रमित. 'बिग बॉस ओटीटी' की कंटेस्टेंट और 'बिग बॉस पंद्रह' की वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट रह चुकीं नेहा भसीन कोरोना संक्रमित हो गई हैं. कोरोना संक्रमण की दर कम हुई है लेकिन अभी भी लोगों को परेशान कर रही है. कोविड-उन्नीस से कई सेलेब्स के संक्रमित होने की खबरें आती रहती हैं. नेहा के पॉजिटिव रिपोर्ट आने की खबर सुनते ही उनके फैंस और फ्रेंड्स नेहा के जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं. 'बिग बॉस' कंटेस्टेंट और सिंगर नेहा की अच्छी दोस्त शमिता शेट्टी ने भी उनके लिए प्रार्थना की. इसके अलावा नेहा भसीन ने एक पोस्ट कर लिखा कि 'आपकी लगातार दुआओं के लिए आभार. काश मैं कह सकती कि मैं अच्छा फील कर रही हूं. लेकिन उम्मीद है कि मैं जल्द स्वस्थ हो जाऊंगी. आप लोग सुरक्षित रहें'. दरअसल, शमिता शेट्टी ने बीते दो फरवरी को अपना बर्थडे सेलिब्रेट किया था. बर्थडे पार्टी में बिग बॉस के कई कंटेस्टेंट के साथ नेहा भसीन ने भी शिरकत किया था. इस दौरान घर के अंदर रह चुके राखी सावंत, उमर रियाज, राजीव अदातिया, रश्मि देसाई समेत शमिता के ब्वॉय फ्रेंड राकेश बापट ने जमकर मस्ती की थी. बता दें कि बोल्ड और बिंदास सिंगर नेहा भसीन ने यूं तो 'टाइगर जिंदा है', 'मेरे ब्रदर की दुल्हन', 'फोर्स' जैसी फिल्मों में गाना गाया है लेकिन सलमान खान स्टारर फिल्म 'सुल्तान' के फेमस सॉन्ग 'जग घूमिया' की वजह से अधिक जानी जाती हैं. 'बिग बॉस' शो का हिस्सा बनने के बाद उनकी पॉपुलैरिटी में काफी इजाफा हुआ. ये भी पढ़िए- लता मंगेशकर को याद कर भावुक हुईं श्रद्धा कपूर, निधन के दो दिन बाद थ्रोबैक तस्वीर शेयर कर लिखा-I Love You आजी ! नेहा ने पहले 'बिग बॉस ओटीटी' में हिस्सा लिया था. इस दौरान उनकी शमिता शेट्टी, प्रतीक सहजपाल के साथ अच्छी बॉन्डिंग हो गई. नेहा ने लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि देते हुए उनके गाए गाने को गाते हुए अपना वीडियो भी इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया है. . |
MUZAFFARPUR : महाशिवरात्रि पर्व करीब आते ही शिव भक्तों में उल्लास दिखने लगा है। एक मार्च को महाशिवरात्रि पर बाबा गरीबनाथ मंदिर से निकलने वाली शिव बारात की तैयारी में लोग लग गए हैं। जिसको लेकर मुज़फ़्फ़रपुर शहर के रामभजन बाजार, गोला रोड स्थित झांकी सज्जा स्थल बारात घर में शनिवार को शिव बारात की तैयारी को लेकर भक्तों की बैठक हुई। अध्यक्षता झांकी संयोजक समाजसेवी केदारनाथ प्रसाद ने की।
बैठक के बाद उन्होंने बताया की सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि कोरोना संकट को ध्यान में रखते हुए शिव बारात शाम की बजाय दिन में ही करीब 11 से 12 बजे निकाली जाएगी। जो संध्या 5 बजे तक बाबा गरीबनाथ मंदिर वापस लौट आएगी। अगले साल से भी भव्य होगा झाँकी का दृश्य। झांकी की विशेषता होगी की इसमें बाबा के पांच आकर्षक स्वरूपों का दर्शन होगा। इसमें शिव विवाह दृश्य, महाकाल दर्शन दृश्य, नटराज नृत्य अवस्था की दृश्य, जटा से गंगा बहने जैसी दृश्य और हिमालय पर तपशवी शिव जीवन दृश्य शामिल है।
बैठक में तैयारी समिति के सदस्य वार्ड पार्षद संजय केजरीवाल संतोष कुमार चिक्कू, राधाकांत सिंह उर्फ बबलू, अरुण कुमार, विजय बिंजराजका, प्रमोद जालान, शिव बंका, ओम प्रकाश यादव, प्रो. गोपी किशन प्रो. विभा कुमारी, अमरनाथ प्रसाद आदि थे।
| MUZAFFARPUR : महाशिवरात्रि पर्व करीब आते ही शिव भक्तों में उल्लास दिखने लगा है। एक मार्च को महाशिवरात्रि पर बाबा गरीबनाथ मंदिर से निकलने वाली शिव बारात की तैयारी में लोग लग गए हैं। जिसको लेकर मुज़फ़्फ़रपुर शहर के रामभजन बाजार, गोला रोड स्थित झांकी सज्जा स्थल बारात घर में शनिवार को शिव बारात की तैयारी को लेकर भक्तों की बैठक हुई। अध्यक्षता झांकी संयोजक समाजसेवी केदारनाथ प्रसाद ने की। बैठक के बाद उन्होंने बताया की सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि कोरोना संकट को ध्यान में रखते हुए शिव बारात शाम की बजाय दिन में ही करीब ग्यारह से बारह बजे निकाली जाएगी। जो संध्या पाँच बजे तक बाबा गरीबनाथ मंदिर वापस लौट आएगी। अगले साल से भी भव्य होगा झाँकी का दृश्य। झांकी की विशेषता होगी की इसमें बाबा के पांच आकर्षक स्वरूपों का दर्शन होगा। इसमें शिव विवाह दृश्य, महाकाल दर्शन दृश्य, नटराज नृत्य अवस्था की दृश्य, जटा से गंगा बहने जैसी दृश्य और हिमालय पर तपशवी शिव जीवन दृश्य शामिल है। बैठक में तैयारी समिति के सदस्य वार्ड पार्षद संजय केजरीवाल संतोष कुमार चिक्कू, राधाकांत सिंह उर्फ बबलू, अरुण कुमार, विजय बिंजराजका, प्रमोद जालान, शिव बंका, ओम प्रकाश यादव, प्रो. गोपी किशन प्रो. विभा कुमारी, अमरनाथ प्रसाद आदि थे। |
दिल्ली. भले ही लोकसभा चुनावों में अभी वक्त हो लेकिन राजनीतिक उठापटक शुरु हो गई है. भाजपा के लिए फिलहाल राजनीतिक संकेत सही इशारा नहीं कर रहे है. पार्टी के साथ जहां शिवसेना ने गठबंधन खत्म करने की घोषणा की वहीं अब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलगूदेशम पार्टी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने भाजपा के साथ लंबे अरसे से चले आ रहे गठबंधन को खत्म करने के संकेत दिए हैं. इतना ही नहीं उन्होंने इसके लिए भाजपा को ही जिम्मेदार ठहराया है.
गौरतलब है कि इस बात की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में खूब चल रही हैं कि भाजपा राज्य में जगनमोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस के साथ हाथ मिला सकती है. पिछले दिनों भाजपा की पार्टी के कई नेताओं से मुलाकात को इसी नजरिए से देखा जा रहा है. इसके बाद से ही टीडीपी और भाजपा के बीच रिश्ते तल्ख होना शुरु हो गए थे. वैसे भाजपा के लिए फिलहाल तो संकेत शुभ नहीं लग रहे हैं. एक के बाद एक राजनीतिक सहयोगियों का साथ छोड़ने का ऐलान कहीं पार्टी पर भारी न पड़ जाय. ये पार्टी के रणनीतिकारों को देखना होगा.
| दिल्ली. भले ही लोकसभा चुनावों में अभी वक्त हो लेकिन राजनीतिक उठापटक शुरु हो गई है. भाजपा के लिए फिलहाल राजनीतिक संकेत सही इशारा नहीं कर रहे है. पार्टी के साथ जहां शिवसेना ने गठबंधन खत्म करने की घोषणा की वहीं अब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और तेलगूदेशम पार्टी के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने भाजपा के साथ लंबे अरसे से चले आ रहे गठबंधन को खत्म करने के संकेत दिए हैं. इतना ही नहीं उन्होंने इसके लिए भाजपा को ही जिम्मेदार ठहराया है. गौरतलब है कि इस बात की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में खूब चल रही हैं कि भाजपा राज्य में जगनमोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस के साथ हाथ मिला सकती है. पिछले दिनों भाजपा की पार्टी के कई नेताओं से मुलाकात को इसी नजरिए से देखा जा रहा है. इसके बाद से ही टीडीपी और भाजपा के बीच रिश्ते तल्ख होना शुरु हो गए थे. वैसे भाजपा के लिए फिलहाल तो संकेत शुभ नहीं लग रहे हैं. एक के बाद एक राजनीतिक सहयोगियों का साथ छोड़ने का ऐलान कहीं पार्टी पर भारी न पड़ जाय. ये पार्टी के रणनीतिकारों को देखना होगा. |
उत्तराखंड में विधानसभा उप चुनाव की तैयारी चल रही है। उप चुनाव में सीएम पुष्कर सिंह धामी चंपावत सीट ने मैदान में उतरेंगे। जीत पुख्ता करने के लिए पार्टी समेत केंद्रीय नेतृत्व ने भी कोशिश शुरु कर दी है। वहीं पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत ने कहा कि इस बार पुष्कर सिंह धामी भारी मतों से चुनाव में जीत हासिल करेंगे।
| उत्तराखंड में विधानसभा उप चुनाव की तैयारी चल रही है। उप चुनाव में सीएम पुष्कर सिंह धामी चंपावत सीट ने मैदान में उतरेंगे। जीत पुख्ता करने के लिए पार्टी समेत केंद्रीय नेतृत्व ने भी कोशिश शुरु कर दी है। वहीं पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत ने कहा कि इस बार पुष्कर सिंह धामी भारी मतों से चुनाव में जीत हासिल करेंगे। |
Faridabad/Alive News: डीएवी शताब्दी कॉलेज में वाणिज्य विभाग की ओर से छात्र अभिभावक परामर्श सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र का उद्देश्य छात्रों को उनके नियमित अध्ययन के साथ उनकी भविष्य की महत्वाकांक्षाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के तरीकों का पता लगाना था। इसके अलावा अभिभावकों को यह जानकारी देना था कि वह समय- समय पर अपने बच्चों की प्रगति के बारे में चर्चा करने के लिए और उनसे जुड़ी समस्याओं का समाधान निकालने के लिए शिक्षकों से मिलने कॉलेज आ सकते हैं।
डीएवी शताब्दी महाविद्यालय के अरुण भाटिया 1985 सत्र के प्रथम छात्र थे। उन्होंने भी अभिभावकों को बताया कि उनके बच्चे इस कॉलेज में शिक्षकों के मार्गदर्शन में सुरक्षित है। वर्तमान में अरूण भाटिया के जाने माने उद्योगपति है। इस दौरान कॉलेज की प्राचार्या डाॅ. सविता भगत ने छात्रो को कॉलेज में होने वाली विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। आज के इस परामर्श सत्र के दौरान अभिभावकों से वाणिज्य विभाग की अध्यक्षा और इस सत्र की नोट स्पीकर डा. अर्चना भाटिया ने बातचीत करते हुए उनके प्रश्नो के उत्तर दिये और बताया कि वह किस प्रकार अपने बच्चों की प्रगति में सहायक हो सकते है।
डाॅ अर्चना भाटिया ने भारतीय संस्कृति और मूल्यों को समझने पर ज़ोर दिया। ताकि एक अच्छे समाज की संरचना कर सकें। इसके अलावा बच्चों के व्यक्तित्व विकास, समय प्रबंधनऔर जीवन में अनुशासन पर भी चर्चा हुई। चर्चा में लगभग 125 अभिभावकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में मंच संचालन रोहित सिन्हा ने किया। डाॅ. अंजु गुप्ता ने विभाग के सदस्यों का अभिभावकों से परिचय करवाया।
| Faridabad/Alive News: डीएवी शताब्दी कॉलेज में वाणिज्य विभाग की ओर से छात्र अभिभावक परामर्श सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र का उद्देश्य छात्रों को उनके नियमित अध्ययन के साथ उनकी भविष्य की महत्वाकांक्षाओं पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के तरीकों का पता लगाना था। इसके अलावा अभिभावकों को यह जानकारी देना था कि वह समय- समय पर अपने बच्चों की प्रगति के बारे में चर्चा करने के लिए और उनसे जुड़ी समस्याओं का समाधान निकालने के लिए शिक्षकों से मिलने कॉलेज आ सकते हैं। डीएवी शताब्दी महाविद्यालय के अरुण भाटिया एक हज़ार नौ सौ पचासी सत्र के प्रथम छात्र थे। उन्होंने भी अभिभावकों को बताया कि उनके बच्चे इस कॉलेज में शिक्षकों के मार्गदर्शन में सुरक्षित है। वर्तमान में अरूण भाटिया के जाने माने उद्योगपति है। इस दौरान कॉलेज की प्राचार्या डाॅ. सविता भगत ने छात्रो को कॉलेज में होने वाली विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। आज के इस परामर्श सत्र के दौरान अभिभावकों से वाणिज्य विभाग की अध्यक्षा और इस सत्र की नोट स्पीकर डा. अर्चना भाटिया ने बातचीत करते हुए उनके प्रश्नो के उत्तर दिये और बताया कि वह किस प्रकार अपने बच्चों की प्रगति में सहायक हो सकते है। डाॅ अर्चना भाटिया ने भारतीय संस्कृति और मूल्यों को समझने पर ज़ोर दिया। ताकि एक अच्छे समाज की संरचना कर सकें। इसके अलावा बच्चों के व्यक्तित्व विकास, समय प्रबंधनऔर जीवन में अनुशासन पर भी चर्चा हुई। चर्चा में लगभग एक सौ पच्चीस अभिभावकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में मंच संचालन रोहित सिन्हा ने किया। डाॅ. अंजु गुप्ता ने विभाग के सदस्यों का अभिभावकों से परिचय करवाया। |
वीणा जॉर्ज के मुताबिक विदेश से लौटे एक व्यक्ति को मंकीपॉक्स के लक्षण दिखने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच किए जाने पर उस व्यक्ति में मंकीपॉक्स की पुष्टि हुई है।
इससे पहले केरल की स्वास्थ्य मंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि मंकीपॉक्स के लक्षण वाले एक व्यक्ति के नमूने एकत्र किए गए हैं और जांच के लिए नमूनों को राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान भेजा गया है।
वीणा जॉर्ज ने कहा कि उस व्यक्ति में मंकीपॉक्स के लक्षण दिखे और वह विदेश में मंकीपॉक्स के एक मरीज के निकट संपर्क में था। केरल में मंकीपॉक्स का यह पहला मामला सामने आया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार मंकीपॉक्स जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाला वायरस है। मंकीपॉक्स के लक्षण चेचक के रोगियों में देखे गए लक्षणों के समान लक्षण होते हैं। हालांकि इसका संक्रमण चिकित्सकीय रूप से कम गंभीर है।
| वीणा जॉर्ज के मुताबिक विदेश से लौटे एक व्यक्ति को मंकीपॉक्स के लक्षण दिखने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच किए जाने पर उस व्यक्ति में मंकीपॉक्स की पुष्टि हुई है। इससे पहले केरल की स्वास्थ्य मंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि मंकीपॉक्स के लक्षण वाले एक व्यक्ति के नमूने एकत्र किए गए हैं और जांच के लिए नमूनों को राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान भेजा गया है। वीणा जॉर्ज ने कहा कि उस व्यक्ति में मंकीपॉक्स के लक्षण दिखे और वह विदेश में मंकीपॉक्स के एक मरीज के निकट संपर्क में था। केरल में मंकीपॉक्स का यह पहला मामला सामने आया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मंकीपॉक्स जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाला वायरस है। मंकीपॉक्स के लक्षण चेचक के रोगियों में देखे गए लक्षणों के समान लक्षण होते हैं। हालांकि इसका संक्रमण चिकित्सकीय रूप से कम गंभीर है। |
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार को केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर उनका ध्यान तमिलनाडु के मिल्क-शेड क्षेत्र में अमूल की दूध खरीद से उत्पन्न मुद्दों की ओर आकर्षित किया। स्टालिन ने अपने पत्र में लिखा कि कुछ अन्य राज्यों की तरह, तमिलनाडु में डेयरी सहकारी समितियां 1981 से प्रभावी ढंग से काम कर रही हैं, जिससे ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ हो रहा है और आविन उनका सर्वोच्च सहकारी विपणन संघ रहा है। इसे भी पढ़ेंः असम-मेघालय सीमा विवाद पर मुख्यमंत्री स्तर की हुई बैठक, हिमंत बिस्वा सरमा बोले- हमने 6 क्षेत्रों का मुद्दा सुलझा लिया हैआविन के तहत लगभग 9,673 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रही हैं और वे लगभग 4. 5 लाख सदस्यों से प्रति दिन 35 लाख लीटर दूध खरीदते हैं। स्टालिन ने लिखा कि मौजूदा व्यवस्था के तहत सहकारी समितियों द्वारा वर्ष भर दुग्ध उत्पादकों को पारिश्रमिक और समान कीमतों का आश्वासन दिया जाता है। तमिलनाडु में दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने और बनाए रखने के लिए, आविन दुग्ध उत्पादकों के पशुओं के लिए पशु चारा, चारा, खनिज मिश्रण, पशु स्वास्थ्य देखभाल और प्रजनन सेवाएं जैसे विभिन्न इनपुट भी प्रदान करता है। इसे भी पढ़ेंः Modi Govt's 9-Year Report Card । अमित शाह ने पेश किया मोदी सरकार के 9 साल का रिपोर्ट कार्ड, कहा- रिकॉर्ड समय में बना नया संसद भवनस्टालिन ने लिखा कि यह हमारे देश में सबसे कम कीमतों पर उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण दूध और दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित करता है। इस प्रकार, आविन ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों की आजीविका में सुधार करने और उपभोक्ताओं की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
| मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार को केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर उनका ध्यान तमिलनाडु के मिल्क-शेड क्षेत्र में अमूल की दूध खरीद से उत्पन्न मुद्दों की ओर आकर्षित किया। स्टालिन ने अपने पत्र में लिखा कि कुछ अन्य राज्यों की तरह, तमिलनाडु में डेयरी सहकारी समितियां एक हज़ार नौ सौ इक्यासी से प्रभावी ढंग से काम कर रही हैं, जिससे ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ हो रहा है और आविन उनका सर्वोच्च सहकारी विपणन संघ रहा है। इसे भी पढ़ेंः असम-मेघालय सीमा विवाद पर मुख्यमंत्री स्तर की हुई बैठक, हिमंत बिस्वा सरमा बोले- हमने छः क्षेत्रों का मुद्दा सुलझा लिया हैआविन के तहत लगभग नौ,छः सौ तिहत्तर दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियाँ ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रही हैं और वे लगभग चार. पाँच लाख सदस्यों से प्रति दिन पैंतीस लाख लीटर दूध खरीदते हैं। स्टालिन ने लिखा कि मौजूदा व्यवस्था के तहत सहकारी समितियों द्वारा वर्ष भर दुग्ध उत्पादकों को पारिश्रमिक और समान कीमतों का आश्वासन दिया जाता है। तमिलनाडु में दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने और बनाए रखने के लिए, आविन दुग्ध उत्पादकों के पशुओं के लिए पशु चारा, चारा, खनिज मिश्रण, पशु स्वास्थ्य देखभाल और प्रजनन सेवाएं जैसे विभिन्न इनपुट भी प्रदान करता है। इसे भी पढ़ेंः Modi Govt's नौ-Year Report Card । अमित शाह ने पेश किया मोदी सरकार के नौ साल का रिपोर्ट कार्ड, कहा- रिकॉर्ड समय में बना नया संसद भवनस्टालिन ने लिखा कि यह हमारे देश में सबसे कम कीमतों पर उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण दूध और दुग्ध उत्पादों की आपूर्ति सुनिश्चित करता है। इस प्रकार, आविन ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों की आजीविका में सुधार करने और उपभोक्ताओं की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। |
हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में गली-गली में शराब बेचने की महारत हासिल की है, उसको पंजाब के लोगों ने सराहा है क्योंकि पंजाब में नशे का बहुत ही ज्यादा कारोबार है।
चंडीगढ़। हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ( Anil Vij ) ने आज पांच राज्यों में हुए चुनावों ( election ) के नतीजों के आने वाले रूझानों के संबंध में अपनी प्रतिक्रिया व पंजाब में आम आदमी पार्टी ( aam aadmi party ) की सरकार आने के रूझानों पर तंज कसते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में गली-गली में शराब बेचने की महारत हासिल की है, उसको पंजाब के लोगों ने सराहा है क्योंकि पंजाब में नशे का बहुत ही ज्यादा कारोबार है और अब इससे पंजाब के हालात और ज्यादा खराब होंगे। विज पांच राज्यों में हुए चुनावों के नतीजों के संबंध में पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।
अनिल विज ने कहा कि चार राज्यों में भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में अच्छे नतीजे आ रहे हैं, केवल पंजाब में आम आदमी पार्टी रूझान लेते हुए नजर आ रही हैं। विज ने पंजाब में आम आदमी पार्टी के आने के कारण के बारे में कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में गली-गली में शराब बेचने के मामले की महारत हासिल की है, उसको पंजाब के लोगों ने सराहा है क्योंकि पंजाब में नशे का बहुत ही ज्यादा कारोबार है।
गृह एवं स्वास्थ्य ने कहा कि पंजाब में आप के आने से पंजाब की हालत बहुत ज्यादा खराब होगी क्योंकि नीतियों के अनुसार पंजाब के लोगों ने वोट नहीं किया है। उन्होंने कहा कि नशे को लेकर पंजाब के पहले से ही हालात खराब हैं और अब और ज्यादा हालात खराब होंगे।
| हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में गली-गली में शराब बेचने की महारत हासिल की है, उसको पंजाब के लोगों ने सराहा है क्योंकि पंजाब में नशे का बहुत ही ज्यादा कारोबार है। चंडीगढ़। हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने आज पांच राज्यों में हुए चुनावों के नतीजों के आने वाले रूझानों के संबंध में अपनी प्रतिक्रिया व पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आने के रूझानों पर तंज कसते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में गली-गली में शराब बेचने की महारत हासिल की है, उसको पंजाब के लोगों ने सराहा है क्योंकि पंजाब में नशे का बहुत ही ज्यादा कारोबार है और अब इससे पंजाब के हालात और ज्यादा खराब होंगे। विज पांच राज्यों में हुए चुनावों के नतीजों के संबंध में पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। अनिल विज ने कहा कि चार राज्यों में भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में अच्छे नतीजे आ रहे हैं, केवल पंजाब में आम आदमी पार्टी रूझान लेते हुए नजर आ रही हैं। विज ने पंजाब में आम आदमी पार्टी के आने के कारण के बारे में कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में गली-गली में शराब बेचने के मामले की महारत हासिल की है, उसको पंजाब के लोगों ने सराहा है क्योंकि पंजाब में नशे का बहुत ही ज्यादा कारोबार है। गृह एवं स्वास्थ्य ने कहा कि पंजाब में आप के आने से पंजाब की हालत बहुत ज्यादा खराब होगी क्योंकि नीतियों के अनुसार पंजाब के लोगों ने वोट नहीं किया है। उन्होंने कहा कि नशे को लेकर पंजाब के पहले से ही हालात खराब हैं और अब और ज्यादा हालात खराब होंगे। |
[ श्री मधु लिमये)
दूसरे सोमबार साल पहले जिस मंत्रालय के पास कुछ हथियार भी ऐसे मौजूद थे जिनका इस्तेमाल करके जिस मंत्री अर्थव्यवस्था पर अपना कुछ रोब जमा सकते । मगर रेवेन्यू इंटेलिजेन्स उनसे छीन लिया गया। डायरेक्टोरेट ग्राफ एन्फोर्समेन्ट विदेशी मुद्रा की बोरी के बारे में, वह भी सरकार का जो सीमा शुल्क है या प्रावकारी शुल्क है, इसके बारे में जो चोरियां होती है या भाय कर है या सम्पत्ति कर हैइनके ऊपर निगरानी रखने के लिए जो रेवेन्यु इन्टेलिजेन्स होता है वह इनसे छीन लिया गया, एन्फोर्समेन्ट डायरेक्टोरेट छीन लिया गया । नतीजा यह हुमा, बिल मंत्री यह इच्छा रखने हैं या नहीं मुझे पता नहीं लेकिन अगर रखते हैं तो भाज उनमें बह सामर्थ य नहीं हैं. उनके वह हथियार नहीं है जिससे वे पूरी अर्थ व्यवस्था को प्रभावित कर सकें । मेरी प्रापके मार्फत सरकार से विनती है कि सरकारी विभाग को पुनरंचना के बारे में और गठन के बारे में यह दोदाग मोज में क्योंकि अर्थव्यवस्था चौपट हो रही है ।
अभी वित्त मंत्री जो ने कहा कि एक वर्षा फेल होने का यह नतीजा है किगन साल. भाप जानते हैं. चुनाव के समय प्रधान मंत्रा का मैं बिहार में भाषण पढ़ रहा था कि जो बढ़िया रबी को फग़ल बाई है बह नीतियों की वजह से हमारी सेहत क्रान्ति की वजह से है। लेकिन आप जानते हैं गंगाजी में 1971 में भयंकर बाढ़ ग्राई थी। बाढ़ से कमान भी होता है परन्तु उसले नयी मिट्टी मातो है, जमीन में नमःती है । जगके बलोड़िया कमल 1973 में माई। लेकिन पहा गया मेरी वजह से हम कान्ति की बजह से ! तो मैंने कहा में जो वाड़ भाई वह भी शायद सापकी वजह से बाई । मेरी समझ में नहीं प्राग है अकेल होती है तो इन्द्र भगःगम का दोष औौरमा जाती है ताश्रय जी को तो हम इन्द्र और इन्दिरा के बक्कर में हमारा देश चोपट होना चला जा रहा है । मेरा साथ मंत्रालय और विदेश व्यापार मंत्रालय के ऊपर आरोप है। विगत तीन वर्षों में अर्थ व्यवस्था को चौपट करने की सबसे अधिक जिम्मेदारी प्रमर, किन्हीं मंत्रालयों की होगी तो वह बाथ मंत्रालय और व्यापार मंत्रालय की है ।
** Expunged as ordered by the Chair..
Finance Bill, 1973: 268
चीनी पैदावार जहां 42 सान हो गई यहां एक साथ में आपने यह करिश्मा विवाया कि -11 लाख टन बीनी पैदावार घट गई 31 लाख टन पर आ गई। विगत माल चीनी जो दोप किलो का दाम था वही आज दि रुपये किलो बिक रही है तो उसकी मवालय की है । जो चीनी की मिले हैं जिनके राष्ट्रीय करण की घोषणा मापने बम्बई कांग्रेस में की थी क्या बजह है शशि भूषण जैसे युवा तुकं लोग इसका जवाब दें, 1970 में बम्बई कांग्रेस में घोषणा करने के बाद उत्तर प्रदेश की हकूमत प्रापके हाथ में रहो फिर भी तीन साल तक चीनी के मामले को ठीक करने का काम आपने नहीं किया ? 11 लाख टन चीनी की पैदावार कम हो जाती है और आप अपना जो अपयश है उसको स्वीकारने के लिए तैयार नहीं होने
व्यापार मंत्रालय के बारे में क्या पाज मन्त्री महोदय बनाने की स्थिति में हैं कि किन काम के लिए टैरिफ कमीशन बनाया गया था ? टैरिफ कमिशन के सामने कई मामले प्राय थे जिनमें एक कृतिम धार्म का मामला था, मैनमंड फाइबर सौ यार्म का । मेरे क्याल से तकरीबन 4 रपट टेरिफ कमिशन के द्वारा सरकार को दी गई हैं। एक रपट जब में इस सभा का सदस्य था, प्रतिम शीत सव 1970 में दो गयी थी। उस समय मुझे याद है श्री मलित नारायण मिश्र ने इस मंत्र से घोषणा की थी कि सरकार इस रिपोर्ट का अध्ययन करके इसको प्रकाशित करने का काम करंगी । 28 महीने हो गए क्या वजह है मैनमेड फाइबस यान के बारे में टैरिफ कमीशन की जितनी रपट हैं वे अभी तक प्रकाशित क्यों नही हुई ?
रेयॉन कार्ड के बारे में मेरे पास मारी सूची है । मुझे बड़ी तकलीफ होती है कि टैरिफ कमाशन का मह काम या कि दामों के ढांचे के बारे में पूरी जान करके वह अपनी सिफारिमें सरकार के पास भेजे और सरकार हम सिफारिशों को प्रकाशित कर अपना जो निर्णय है, कैमला है उसके बारे में बह सदन के मामने वक्तव्य रखें। यह अब तक का तरीका जान जबसे हमारे विदेश व्यापार मंत्री बने उस समय से टैरिफ कमीशन की रपट का इस्तेमाल
महोदय । ग्राम बैठिये देखिये एक बात
है इस तरह से किसी की तौहीन करना ठीक नहीं है । इस्तेमाल किया है वह ठीक नहीं है। चाप भोग क्यों बोल रहे हैं ।
VAISAKHA 13. 1895 (SAKA) Finance Bill, 1973 270
श्री मधु लिमये : भाप कहते है तो मैं श्री ललित नारायण मिथ ही कहता हू । (व्य)
: मापने नाम लिया, यह ठीक है लेकिन इस तरह का शब्द मन कहिये । उसको में हटा दूगा
श्री मधु नयेः जब ग्राप फर्मा रहे है ललित नारायण ही कहू तो मैं आपकी बात मानना हू ।
डा० कैलास : कल ही यहां पर संसद की मर्यादा श्री ये बात कर रहे थे लेकिन ग्राज इस तरह की बाते कर रहे हैं। क्या यह हो मर्यादा रखने का तरीका है
सजापति महोदय : मैने कहा और उन्होंने मान लिया है। अब आप इस बात को भागे क्यो बड़ा रहे हैं। उन्होंने जो कहा उसका मैं ने एक्सेप्शन में लिया है। अब भाप लोग किम लिए बोल रहे है। धन उनको बोलने बीजिए ।
श्री मधु लिमये में अजं कर रहा था कि विदेश व्यापार मत्रालय की तहत जितने विजय आते हैं एक एक को भाप ले लीजिए। मैं माघे बा मिनट में समाप्त करता हूँ।
मनी इस बात को काट सकते हैं कि दो साल पहले कई के जो दाम मे उनको तुलना में रूई के दाम इस माल 30 प्रतिशत कम चल रहे हैं। यह महाराष्ट्र के हैं, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब की तरह कई पैदा करने वाले इलाके के मिल मालिक को साल पहले कहते थे चूंकि कई के दाम ज्यादा बड़ है इसलिए कपड़े के दाम बढ़ाना जरूरी है और इस तर्क को अपने माना। लेकिन जब कई के दाम 30 प्रतिशत घट गए तो मापने क्यो नही मजदूर किया कि मि मासिको को कपड़े के दाम भी कम से कम 18 प्रतिशत बढाये इस सवाल पर आप लोगो को हल्ला करना चाहिए था जो मंब बाते हैं लेकिन बहू नहीं करते। हल्ला करने के लिए एक ही विषय है न सिमये : नेकिन मत मालिक के
समापति महोदय, इमलिये वित्त मंत्री जी इम बात की मफाई दें कि सई के दाम घटने के बाद कम मे कम 15 प्रतिशत दाम कपडे के क्यों नहीं घंटे 20 प्रतिशत मोटे कपडे के दाम बड़े हैं और महीन कपडे के 30 से 50 प्रतिशत दाम बढ़े हैं ।
सूत के मामले मे में कुछ ग्रांकडे देता है । वियन माल 80/2 डेनियर का सून 10₹० बजट के पहले था। इस साल 16३० हुमा और बजट के बाद 24रु० हा गया । मेरी बात का आाप काट सकते हैं। ? प्राप कहते हैं कि लोग सड़क पर आ रहे हैं। सड़क पर नही आयेंगे ता क्या करेंगे क्योंकि आप अथव्यवस्था को नियतित करने में बिल्कुल अमफल रहे। 10३० से शुरुआत होती है और 24० तक सूत वा दाम हो जाता है। मेरे यहां मिवारपूर, कैरी, उहया यादि कई ऐसे मोमीनों के गाव है जहा लोग
मर रहे हैं। महाराष्ट्र के शिवन्डी, मालेगाव मे भौर उत्तर प्रदेश मे मऊ मे बुनकरों को क्या
कृत्रिम घाये के दामो को जो हालत है उम कारण है कि श्री ललित नारायण मिश्र इम सदन करत हुए टैरिक कमोशन की रिपोर्ट को छुपा रखा है और लटकती हुई नलवार के तौर पर उन का इस्तेमाल कर क वह अपन दल के लिये चन्दा वसूल करने हैं । अगर आप चाहते हैं कि इन बातो की जब मे जायें तो एक जान कमोशन नियुक्त कीजिये । वाम का मामला केवल एक वर्षा मौनतून फेल होने से खराब नहीं हुआ है। यह एक कारण है, लेकिन सब से बड़ा कारण है अर्ब व्यवस्था मे दामो की बढ़ने की प्रेरणा आप के ऐसे कामा में मिल रही है । इसलिये मैं चाहता हू कि सरकार पूरी जानकारी दे कि कितनी रिपोर्ट टैरिफ कमीशन की भाबी, कितनी प्रकाशित की गयी और क्या निर्णय किये गये १ सारा सिलसिलेवार ब्यौरा हमारे सामन याये ।
रामावतार शास्त्रीः सभापति जी, जो दिस विधेयक प्रस्तुत है मैं उसका विरोध करने के लिये बड़ा हमहू । नरकार दावा करती है कि इस विशेषक के द्वारा प्राण हिन्दुस्तान मे जो माथिक संकट दिन
| [ श्री मधु लिमये) दूसरे सोमबार साल पहले जिस मंत्रालय के पास कुछ हथियार भी ऐसे मौजूद थे जिनका इस्तेमाल करके जिस मंत्री अर्थव्यवस्था पर अपना कुछ रोब जमा सकते । मगर रेवेन्यू इंटेलिजेन्स उनसे छीन लिया गया। डायरेक्टोरेट ग्राफ एन्फोर्समेन्ट विदेशी मुद्रा की बोरी के बारे में, वह भी सरकार का जो सीमा शुल्क है या प्रावकारी शुल्क है, इसके बारे में जो चोरियां होती है या भाय कर है या सम्पत्ति कर हैइनके ऊपर निगरानी रखने के लिए जो रेवेन्यु इन्टेलिजेन्स होता है वह इनसे छीन लिया गया, एन्फोर्समेन्ट डायरेक्टोरेट छीन लिया गया । नतीजा यह हुमा, बिल मंत्री यह इच्छा रखने हैं या नहीं मुझे पता नहीं लेकिन अगर रखते हैं तो भाज उनमें बह सामर्थ य नहीं हैं. उनके वह हथियार नहीं है जिससे वे पूरी अर्थ व्यवस्था को प्रभावित कर सकें । मेरी प्रापके मार्फत सरकार से विनती है कि सरकारी विभाग को पुनरंचना के बारे में और गठन के बारे में यह दोदाग मोज में क्योंकि अर्थव्यवस्था चौपट हो रही है । अभी वित्त मंत्री जो ने कहा कि एक वर्षा फेल होने का यह नतीजा है किगन साल. भाप जानते हैं. चुनाव के समय प्रधान मंत्रा का मैं बिहार में भाषण पढ़ रहा था कि जो बढ़िया रबी को फग़ल बाई है बह नीतियों की वजह से हमारी सेहत क्रान्ति की वजह से है। लेकिन आप जानते हैं गंगाजी में एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में भयंकर बाढ़ ग्राई थी। बाढ़ से कमान भी होता है परन्तु उसले नयी मिट्टी मातो है, जमीन में नमःती है । जगके बलोड़िया कमल एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर में माई। लेकिन पहा गया मेरी वजह से हम कान्ति की बजह से ! तो मैंने कहा में जो वाड़ भाई वह भी शायद सापकी वजह से बाई । मेरी समझ में नहीं प्राग है अकेल होती है तो इन्द्र भगःगम का दोष औौरमा जाती है ताश्रय जी को तो हम इन्द्र और इन्दिरा के बक्कर में हमारा देश चोपट होना चला जा रहा है । मेरा साथ मंत्रालय और विदेश व्यापार मंत्रालय के ऊपर आरोप है। विगत तीन वर्षों में अर्थ व्यवस्था को चौपट करने की सबसे अधिक जिम्मेदारी प्रमर, किन्हीं मंत्रालयों की होगी तो वह बाथ मंत्रालय और व्यापार मंत्रालय की है । ** Expunged as ordered by the Chair.. Finance Bill, एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर: दो सौ अड़सठ चीनी पैदावार जहां बयालीस सान हो गई यहां एक साथ में आपने यह करिश्मा विवाया कि -ग्यारह लाख टन बीनी पैदावार घट गई इकतीस लाख टन पर आ गई। विगत माल चीनी जो दोप किलो का दाम था वही आज दि रुपये किलो बिक रही है तो उसकी मवालय की है । जो चीनी की मिले हैं जिनके राष्ट्रीय करण की घोषणा मापने बम्बई कांग्रेस में की थी क्या बजह है शशि भूषण जैसे युवा तुकं लोग इसका जवाब दें, एक हज़ार नौ सौ सत्तर में बम्बई कांग्रेस में घोषणा करने के बाद उत्तर प्रदेश की हकूमत प्रापके हाथ में रहो फिर भी तीन साल तक चीनी के मामले को ठीक करने का काम आपने नहीं किया ? ग्यारह लाख टन चीनी की पैदावार कम हो जाती है और आप अपना जो अपयश है उसको स्वीकारने के लिए तैयार नहीं होने व्यापार मंत्रालय के बारे में क्या पाज मन्त्री महोदय बनाने की स्थिति में हैं कि किन काम के लिए टैरिफ कमीशन बनाया गया था ? टैरिफ कमिशन के सामने कई मामले प्राय थे जिनमें एक कृतिम धार्म का मामला था, मैनमंड फाइबर सौ यार्म का । मेरे क्याल से तकरीबन चार रपट टेरिफ कमिशन के द्वारा सरकार को दी गई हैं। एक रपट जब में इस सभा का सदस्य था, प्रतिम शीत सव एक हज़ार नौ सौ सत्तर में दो गयी थी। उस समय मुझे याद है श्री मलित नारायण मिश्र ने इस मंत्र से घोषणा की थी कि सरकार इस रिपोर्ट का अध्ययन करके इसको प्रकाशित करने का काम करंगी । अट्ठाईस महीने हो गए क्या वजह है मैनमेड फाइबस यान के बारे में टैरिफ कमीशन की जितनी रपट हैं वे अभी तक प्रकाशित क्यों नही हुई ? रेयॉन कार्ड के बारे में मेरे पास मारी सूची है । मुझे बड़ी तकलीफ होती है कि टैरिफ कमाशन का मह काम या कि दामों के ढांचे के बारे में पूरी जान करके वह अपनी सिफारिमें सरकार के पास भेजे और सरकार हम सिफारिशों को प्रकाशित कर अपना जो निर्णय है, कैमला है उसके बारे में बह सदन के मामने वक्तव्य रखें। यह अब तक का तरीका जान जबसे हमारे विदेश व्यापार मंत्री बने उस समय से टैरिफ कमीशन की रपट का इस्तेमाल महोदय । ग्राम बैठिये देखिये एक बात है इस तरह से किसी की तौहीन करना ठीक नहीं है । इस्तेमाल किया है वह ठीक नहीं है। चाप भोग क्यों बोल रहे हैं । VAISAKHA तेरह. एक हज़ार आठ सौ पचानवे Finance Bill, एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर दो सौ सत्तर श्री मधु लिमये : भाप कहते है तो मैं श्री ललित नारायण मिथ ही कहता हू । : मापने नाम लिया, यह ठीक है लेकिन इस तरह का शब्द मन कहिये । उसको में हटा दूगा श्री मधु नयेः जब ग्राप फर्मा रहे है ललित नारायण ही कहू तो मैं आपकी बात मानना हू । डाशून्य कैलास : कल ही यहां पर संसद की मर्यादा श्री ये बात कर रहे थे लेकिन ग्राज इस तरह की बाते कर रहे हैं। क्या यह हो मर्यादा रखने का तरीका है सजापति महोदय : मैने कहा और उन्होंने मान लिया है। अब आप इस बात को भागे क्यो बड़ा रहे हैं। उन्होंने जो कहा उसका मैं ने एक्सेप्शन में लिया है। अब भाप लोग किम लिए बोल रहे है। धन उनको बोलने बीजिए । श्री मधु लिमये में अजं कर रहा था कि विदेश व्यापार मत्रालय की तहत जितने विजय आते हैं एक एक को भाप ले लीजिए। मैं माघे बा मिनट में समाप्त करता हूँ। मनी इस बात को काट सकते हैं कि दो साल पहले कई के जो दाम मे उनको तुलना में रूई के दाम इस माल तीस प्रतिशत कम चल रहे हैं। यह महाराष्ट्र के हैं, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब की तरह कई पैदा करने वाले इलाके के मिल मालिक को साल पहले कहते थे चूंकि कई के दाम ज्यादा बड़ है इसलिए कपड़े के दाम बढ़ाना जरूरी है और इस तर्क को अपने माना। लेकिन जब कई के दाम तीस प्रतिशत घट गए तो मापने क्यो नही मजदूर किया कि मि मासिको को कपड़े के दाम भी कम से कम अट्ठारह प्रतिशत बढाये इस सवाल पर आप लोगो को हल्ला करना चाहिए था जो मंब बाते हैं लेकिन बहू नहीं करते। हल्ला करने के लिए एक ही विषय है न सिमये : नेकिन मत मालिक के समापति महोदय, इमलिये वित्त मंत्री जी इम बात की मफाई दें कि सई के दाम घटने के बाद कम मे कम पंद्रह प्रतिशत दाम कपडे के क्यों नहीं घंटे बीस प्रतिशत मोटे कपडे के दाम बड़े हैं और महीन कपडे के तीस से पचास प्रतिशत दाम बढ़े हैं । सूत के मामले मे में कुछ ग्रांकडे देता है । वियन माल अस्सी/दो डेनियर का सून दस रुपयाशून्य बजट के पहले था। इस साल एक हज़ार छः सौ तीस हुमा और बजट के बाद चौबीस रुपयाशून्य हा गया । मेरी बात का आाप काट सकते हैं। ? प्राप कहते हैं कि लोग सड़क पर आ रहे हैं। सड़क पर नही आयेंगे ता क्या करेंगे क्योंकि आप अथव्यवस्था को नियतित करने में बिल्कुल अमफल रहे। एक हज़ार तीस से शुरुआत होती है और दो सौ चालीस तक सूत वा दाम हो जाता है। मेरे यहां मिवारपूर, कैरी, उहया यादि कई ऐसे मोमीनों के गाव है जहा लोग मर रहे हैं। महाराष्ट्र के शिवन्डी, मालेगाव मे भौर उत्तर प्रदेश मे मऊ मे बुनकरों को क्या कृत्रिम घाये के दामो को जो हालत है उम कारण है कि श्री ललित नारायण मिश्र इम सदन करत हुए टैरिक कमोशन की रिपोर्ट को छुपा रखा है और लटकती हुई नलवार के तौर पर उन का इस्तेमाल कर क वह अपन दल के लिये चन्दा वसूल करने हैं । अगर आप चाहते हैं कि इन बातो की जब मे जायें तो एक जान कमोशन नियुक्त कीजिये । वाम का मामला केवल एक वर्षा मौनतून फेल होने से खराब नहीं हुआ है। यह एक कारण है, लेकिन सब से बड़ा कारण है अर्ब व्यवस्था मे दामो की बढ़ने की प्रेरणा आप के ऐसे कामा में मिल रही है । इसलिये मैं चाहता हू कि सरकार पूरी जानकारी दे कि कितनी रिपोर्ट टैरिफ कमीशन की भाबी, कितनी प्रकाशित की गयी और क्या निर्णय किये गये एक सारा सिलसिलेवार ब्यौरा हमारे सामन याये । रामावतार शास्त्रीः सभापति जी, जो दिस विधेयक प्रस्तुत है मैं उसका विरोध करने के लिये बड़ा हमहू । नरकार दावा करती है कि इस विशेषक के द्वारा प्राण हिन्दुस्तान मे जो माथिक संकट दिन |
अक्तूबर महीने में कुल्लू और लाहुल-स्पीति में रफ्तार का खेल चलेगा। सात अक्तूबर से दस अक्तूबर तक होने वाली हिमालयन एक्सट्रीम टू और फोर व्हीलर रैली की तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं। हिमालयन एक्सट्रीम मोटर स्पोट्र्स सोसायटी के अलावा प्रशासन भी प्रबंधों में जुट गया है।
रैली का आगाज सात अक्तूबर को दशहरा मैदान कुल्लू में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर करेंगे। वह हरी झंडी दिखाकर रैली में भाग लेने वाले जांबाजों को रवाना करेंगे, जबकि सोलंगनाला में इसका समापन होगा। समापन समारोह के मुख्यातिथि केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर होंगे। हिमालयन एक्सट्रीम मोटर स्पोट्र्स सोसायटी के प्रधान सुरेश राणा ने बताया कि रैली में लगभग सौ प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। सात अक्तूबर को ढालपुर दशहरा मैदान से शुरू होकर यह रैली मनाली, काजा वाया ग्रांफू, लोसर, टाकचा तक पहुुंचेगी। रैली में हिमाचल के अलावा बाहरी राज्यों के प्रतिभागी भी भाग ले रहे हैं। प्रधान ने इस संदर्भ में लाहुल प्रशासन से मदद भी मांगी है। उपायुक्त लाहुल नीरज कुमार ने बताया कि ग्रांफू से लोकस तक बारिश की वजह से सड़क खराब हुई है। लिहाजा, नौ अक्तूबर को इस क्षेत्र में पुलिस जवानों की तैनाती के आदेश दिए गए हैं।
| अक्तूबर महीने में कुल्लू और लाहुल-स्पीति में रफ्तार का खेल चलेगा। सात अक्तूबर से दस अक्तूबर तक होने वाली हिमालयन एक्सट्रीम टू और फोर व्हीलर रैली की तैयारियां अभी से शुरू कर दी गई हैं। हिमालयन एक्सट्रीम मोटर स्पोट्र्स सोसायटी के अलावा प्रशासन भी प्रबंधों में जुट गया है। रैली का आगाज सात अक्तूबर को दशहरा मैदान कुल्लू में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर करेंगे। वह हरी झंडी दिखाकर रैली में भाग लेने वाले जांबाजों को रवाना करेंगे, जबकि सोलंगनाला में इसका समापन होगा। समापन समारोह के मुख्यातिथि केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर होंगे। हिमालयन एक्सट्रीम मोटर स्पोट्र्स सोसायटी के प्रधान सुरेश राणा ने बताया कि रैली में लगभग सौ प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। सात अक्तूबर को ढालपुर दशहरा मैदान से शुरू होकर यह रैली मनाली, काजा वाया ग्रांफू, लोसर, टाकचा तक पहुुंचेगी। रैली में हिमाचल के अलावा बाहरी राज्यों के प्रतिभागी भी भाग ले रहे हैं। प्रधान ने इस संदर्भ में लाहुल प्रशासन से मदद भी मांगी है। उपायुक्त लाहुल नीरज कुमार ने बताया कि ग्रांफू से लोकस तक बारिश की वजह से सड़क खराब हुई है। लिहाजा, नौ अक्तूबर को इस क्षेत्र में पुलिस जवानों की तैनाती के आदेश दिए गए हैं। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
नई दिल्ली, 22 मई। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली का कहना है कि वह जिस चीज का इस्तेमाल नहीं करते उसका प्रचार भी नहीं करते। विराट ने प्यूमा के इवोस्पीड वन8 जूतों को लांच किया। उन्होंने आईएएनएस से ईमेल के जरिए साक्षात्कार में यह बात कही।
उनसे जब पूछा गया कि क्या एक ब्रैंड एम्बेसडर होने के नाते उन पर जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है? इसके जबाव में उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि एक एंडोर्स होने के नाते जिम्मेदारी भी बढ़ती है। आप एक ब्रैंड का प्रचार करते हुए अपनी सहमति देते हो और अपने प्रशंसकों से उसे उपयोग में लाने की अपील करते हो।"
उन्होंने कहा, "व्यक्तिगत तौर पर मैं उन तरह की चीजों का प्रचार नहीं करता हूं जिन्हें मैं खुद उपयोग में नहीं लाता। इसलिए मैं ऐसी कई कंपनियों के साथ करार नहीं करता जिनके पदार्थ मैं उपयोग में नहीं लेता।"
इवोस्पीड वन8 के बारे में विराट ने कहा, "इवोस्पीड वन8 जूतों के बहुत अच्छे से तैयार करती है और मैं इनके जूतों को बाजार में आता देख खुश हूं।"
| नई दिल्ली, बाईस मई। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली का कहना है कि वह जिस चीज का इस्तेमाल नहीं करते उसका प्रचार भी नहीं करते। विराट ने प्यूमा के इवोस्पीड वनआठ जूतों को लांच किया। उन्होंने आईएएनएस से ईमेल के जरिए साक्षात्कार में यह बात कही। उनसे जब पूछा गया कि क्या एक ब्रैंड एम्बेसडर होने के नाते उन पर जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है? इसके जबाव में उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि एक एंडोर्स होने के नाते जिम्मेदारी भी बढ़ती है। आप एक ब्रैंड का प्रचार करते हुए अपनी सहमति देते हो और अपने प्रशंसकों से उसे उपयोग में लाने की अपील करते हो।" उन्होंने कहा, "व्यक्तिगत तौर पर मैं उन तरह की चीजों का प्रचार नहीं करता हूं जिन्हें मैं खुद उपयोग में नहीं लाता। इसलिए मैं ऐसी कई कंपनियों के साथ करार नहीं करता जिनके पदार्थ मैं उपयोग में नहीं लेता।" इवोस्पीड वनआठ के बारे में विराट ने कहा, "इवोस्पीड वनआठ जूतों के बहुत अच्छे से तैयार करती है और मैं इनके जूतों को बाजार में आता देख खुश हूं।" |
JAMSHEDPUR ( 1 Sep): स्टेट वीमेन कमीशन की चेयरपर्सन महुआ माजी ने सोमवार को एमजीएम और सदर हॉस्पिटल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने गायनिक और पेडियाट्रिक्स वार्ड के मरीजों से उनका हाल पूछा और हॉस्पिटल द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। मौके पर कई मरीजों ने उनसे अपनी परेशानियां बताईं। सदर हॉस्पिटल में भी कर्मचारियों द्वारा सैलरी और फंड अलॉटमेंट जैसी समस्याएं भी बताइर्1ं गईं।
एमजीएम हॉस्पिटल के दौरे के दौरान डॉ महुआ माजी सबसे पहले गायनिक वार्ड पहुंची। इस दौरान उन्होंने मरीजों की समस्याओं को जाना और उनके नोट कर उनके समाधान का आश्वासन दिया। कई मरीजों और उनके परिजनों ने खुद उनके पास जाकर अपनी समस्याएं बताईं। डिलीवरी के लिए गायनिक वार्ड में एडमिट गौसनगर मानगो की रहने वाली नाजनीन के परिजनों ने महुआ माजी से शिकायत करते हुए बताया कि नाजनीन सोमवार के हॉस्पिटल के अपने बेड से नीचे गिरकर बेहोश हो गई थी। कई बार कहने के बावजूद कोई डॉक्टर उसे देखने नहीं आया। वहीं कई मरीजों ने दवा नहीं मिलने, पानी की समस्या और दूसरी परेशानियां बताईं।
इसके बाद वो बच्चों के इलाज से संबंधित कुछ पेडियाट्रिक वार्ड पहुंचीं। यहां भी उन्हें कई मरीजों से कई शिकायतें सुनने को मिलीं। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात डॉ मोहन कुमार से लोगों की शिकायतों पर सवाल किया। डॉ मोहन कुमार ने वार्ड में वेंटिलेटर और अन्य जरूरी संसाधन नहीं होने की वजह से दिक्कतें आने की बात कही। इस दौरान वो हॉस्पिटल के मेस में भी पहुंची। वहां साफ-सफाई को देख उन्होंने वहां मौजूद कर्मचारियों को भी निर्देश दिए। उन्होंने नर्सेज से बात कर उनकी समस्याओं को भी जाना। इसके बाद वो हॉस्पिटल में मौजूद नर्सिंग हॉस्टल भी पहुंची और वहां की जर्जर हालत देख आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल के पिछले दौरे से लेकर अब तक यहां किसी भी तरह का सुधार नहीं आया है। उन्होंने इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री से बात कर उन्हें इन समस्याओं से अवगत कराने और इनके समाधान का प्रयास करने को कहा। एमजीएम के बाद महुआ माजी खासमहल स्थित सदर हॉस्पिटल भी पहुंची। यहां भी कर्मचारियों द्वारा करीब एक साल से सैलरी ना मिलने, फंड अलॉटमेंट ना होने जैसी शिकायतें की गईं।
एमजीएम हॉस्पिटल में मरीजों से कई शिकायतें सुनने को मिलीं। हॉस्पिटल में सुविधाओं की कमी है। नर्सिग हॉस्टल की स्थित बेहद जर्जर हो चुकी है। मैं इससे पहले भी यहां आई थी, तब से लेकर अब तक हॉस्पिटल की व्यवस्था में क्0 परसेंट का भी सुधार नहीं है। इस संबंध में मैं स्वास्थ्य मंत्री से बात करूंगी।
| JAMSHEDPUR : स्टेट वीमेन कमीशन की चेयरपर्सन महुआ माजी ने सोमवार को एमजीएम और सदर हॉस्पिटल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने गायनिक और पेडियाट्रिक्स वार्ड के मरीजों से उनका हाल पूछा और हॉस्पिटल द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। मौके पर कई मरीजों ने उनसे अपनी परेशानियां बताईं। सदर हॉस्पिटल में भी कर्मचारियों द्वारा सैलरी और फंड अलॉटमेंट जैसी समस्याएं भी बताइर्एकं गईं। एमजीएम हॉस्पिटल के दौरे के दौरान डॉ महुआ माजी सबसे पहले गायनिक वार्ड पहुंची। इस दौरान उन्होंने मरीजों की समस्याओं को जाना और उनके नोट कर उनके समाधान का आश्वासन दिया। कई मरीजों और उनके परिजनों ने खुद उनके पास जाकर अपनी समस्याएं बताईं। डिलीवरी के लिए गायनिक वार्ड में एडमिट गौसनगर मानगो की रहने वाली नाजनीन के परिजनों ने महुआ माजी से शिकायत करते हुए बताया कि नाजनीन सोमवार के हॉस्पिटल के अपने बेड से नीचे गिरकर बेहोश हो गई थी। कई बार कहने के बावजूद कोई डॉक्टर उसे देखने नहीं आया। वहीं कई मरीजों ने दवा नहीं मिलने, पानी की समस्या और दूसरी परेशानियां बताईं। इसके बाद वो बच्चों के इलाज से संबंधित कुछ पेडियाट्रिक वार्ड पहुंचीं। यहां भी उन्हें कई मरीजों से कई शिकायतें सुनने को मिलीं। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात डॉ मोहन कुमार से लोगों की शिकायतों पर सवाल किया। डॉ मोहन कुमार ने वार्ड में वेंटिलेटर और अन्य जरूरी संसाधन नहीं होने की वजह से दिक्कतें आने की बात कही। इस दौरान वो हॉस्पिटल के मेस में भी पहुंची। वहां साफ-सफाई को देख उन्होंने वहां मौजूद कर्मचारियों को भी निर्देश दिए। उन्होंने नर्सेज से बात कर उनकी समस्याओं को भी जाना। इसके बाद वो हॉस्पिटल में मौजूद नर्सिंग हॉस्टल भी पहुंची और वहां की जर्जर हालत देख आश्चर्य जताया। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल के पिछले दौरे से लेकर अब तक यहां किसी भी तरह का सुधार नहीं आया है। उन्होंने इस संबंध में स्वास्थ्य मंत्री से बात कर उन्हें इन समस्याओं से अवगत कराने और इनके समाधान का प्रयास करने को कहा। एमजीएम के बाद महुआ माजी खासमहल स्थित सदर हॉस्पिटल भी पहुंची। यहां भी कर्मचारियों द्वारा करीब एक साल से सैलरी ना मिलने, फंड अलॉटमेंट ना होने जैसी शिकायतें की गईं। एमजीएम हॉस्पिटल में मरीजों से कई शिकायतें सुनने को मिलीं। हॉस्पिटल में सुविधाओं की कमी है। नर्सिग हॉस्टल की स्थित बेहद जर्जर हो चुकी है। मैं इससे पहले भी यहां आई थी, तब से लेकर अब तक हॉस्पिटल की व्यवस्था में क्शून्य परसेंट का भी सुधार नहीं है। इस संबंध में मैं स्वास्थ्य मंत्री से बात करूंगी। |
महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर Sachin Tendulkar आज 50 वर्ष के हो गए। जिस किसी ने भी 90 और 2000 के दशक में क्रिकेट खेला है या देखा है वो इनके नाम को और अच्छे से जानता होगा। उसे पता होगा कि मास्टर ब्लास्टर की तुलना में किसी अन्य खिलाड़ी को लोग काफी कम ही जानते होंगे। अपने 24 साल के लंबे करियर के दौरान, ब्रायन लारा, रिकी पोंटिंग और जैक्स कैलिस जैसे खिलाड़ी उनके मुख्य प्रतियोगी थे, लेकिन उनमें से कोई भी उनकी निरंतरता और लंबी करियर के कारण उनके रिकॉर्ड को नहीं तोड़ सका है।
16 नवंबर 2013 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद से खेल में काफी बदलाव आया है। विराट कोहली, स्टीव स्मिथ, जो रूट और केन विलियमसन, जो इस पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज हैं, ने कुछ शानदार रन बनाए लेकिन उनमें से कोई भी सचिन के अधिकांश रिकॉर्ड तोड़ने के करीब नहीं दिखता।
जहां कोहली जल्द ही वनडे में सबसे ज्यादा शतक लगाने का अपना रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं, वहीं सचिन के कुछ रिकॉर्ड ऐसे भी हैं जो लगभग अटूट लगते हैं। आइए नजर डालते हैं ऐसे ही कुछ रिकॉर्ड्स परः
उनके नाम टेस्ट में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड है। सचिन ने 200 मैचों और 329 पारियों में 15,921 रन बनाए हैं। रिकी पोंटिंग और जैक्स कैलिस क्रमशः 13,378 और 13,289 रनों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। शीर्ष 10 की सूची में कोई अन्य बल्लेबाज अभी भी क्रिकेट नहीं खेल रहा है, और यह बहुत कम संभावना है कि यह रिकॉर्ड कभी भी टूटेगा। 200 टेस्ट खेलने के बाद भी सचिन का औसत 53. 78 का था। उन्होंने 51 टेस्ट टन, 68 अर्धशतक बनाए और प्रारूप में उनका उच्चतम स्कोर 248* था।
एक समय कैलिस और पोंटिंग सचिन के शतकों के रिकॉर्ड के काफी करीब थे, एलिस्टेयर कुक 2-3 साल तक शीर्ष फॉर्म में थे और ऐसा लग रहा था कि वह सचिन के टेस्ट शतकों के रिकॉर्ड को तोड़ सकते हैं। लेकिन अब कोहली ही एकमात्र दावेदार नजर आ रहे हैं, लेकिन वह भी सचिन के 100 अंतरराष्ट्रीय शतकों के रिकॉर्ड से 25 शतक पीछे हैं। उनका 100 शतक 664 मैचों और 782 पारियों में आया।
उन्होंने वनडे में 51 टेस्ट शतक और 49 शतक बनाए हैं। जबकि उनका एकदिवसीय टन रिकॉर्ड कोहली द्वारा जल्द ही तोड़ा जाएगा, कोई भी उनके टेस्ट शतकों के रिकॉर्ड के करीब नहीं लगता है। कैलिस 45 टन के साथ सूची में दूसरे स्थान पर हैं और शीर्ष 10 की सूची में कोई भी अभी भी नहीं खेल रहा है।
फॉर्मेट में उनका दबदबा उनके नंबरों से देखा जा सकता है। सचिन के 51 टेस्ट शतकों में से 29 भारत के बाहर बने और उनमें से 17 इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड में आए।
मैन ऑफ द मैच या प्लेयर ऑफ द मैच उस खिलाड़ी को दिया जाता है जो किसी खेल के दौरान सबसे अधिक प्रभावशाली होता है या मैच जीतने वाली भूमिका निभाता है। और कोई भी खिलाड़ी अकेले दम पर भारत के लिए सचिन जितना प्रभावशाली नहीं रहा है।
अपने करियर के दौरान, सचिन ने 63 मैन ऑफ़ द मैच पुरस्कार (62) जीते हैं, जो सबसे अधिक है। उनके पास विश्व कप मैचों में सबसे अधिक मैन ऑफ द मैच पुरस्कार भी हैं, जिसमें 9 ऐसी ट्राफियां हैं। सनथ जयसूर्या 48 पुरस्कारों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। यह एक रिकॉर्ड है जो बताता है कि सचिन केवल व्यक्तिगत रिकॉर्ड के बारे में नहीं थे और उन्होंने अपने देश के लिए रिकॉर्ड संख्या में मैच जीते। और यह भी एक ऐसा रिकॉर्ड है जो जल्द ही नहीं टूटेगा।
हालांकि सचिन ने शतकों का एक शतक बनाया है, लेकिन वह और भी कई रन बना सकते थे, अगर उनके नाम खेल में सबसे अधिक 90 रन का रिकॉर्ड नहीं होता। सचिन ने 90 के दशक में वनडे में 18 बार और टेस्ट में 10 बार रन बनाए हैं। उनके पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 90 के दशक (28) में सबसे ज्यादा बार आउट होने का रिकॉर्ड है।
जबकि कई लोग इसे नर्वस नब्बे का दशक कहते हैं, सचिन की कुछ सबसे बड़ी मैच विनिंग पारियां 90 के दशक में थीं। इसमें दक्षिण अफ्रीका में 2003 के विश्व कप के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ उनकी शानदार 75 गेंदों की 98 रन की पारी भी शामिल है।
विश्व कप में सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड किसी से कम नहीं है। उन्होंने 1992 से 2011 तक रिकॉर्ड छह विश्व कप खेले। उनके पास मेगा इवेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भी है। सचिन ने विश्व कप में 56. 95 की औसत से 2,278 रन बनाए हैं। इन विश्व कपों के दौरान, वह दो बार फाइनल में खेले और अंत में 2011 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में ट्रॉफी जीती। सचिन ने विश्व कप में छह शतक और 15 अर्धशतक बनाए हैं।
विश्व कप में सर्वाधिक रन बनाने के मामले में दूसरे नंबर पर रिकी पोंटिंग हैं, जिनके नाम 1743 रन हैं। और शीर्ष 10 में केवल शाकिब अल हसन ही ऐसे खिलाड़ी हैं जो अभी सक्रिय क्रिकेटर हैं। तो, यह भी एक ऐसा रिकॉर्ड है जिसके टूटने की संभावना बहुत कम है।
| महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर Sachin Tendulkar आज पचास वर्ष के हो गए। जिस किसी ने भी नब्बे और दो हज़ार के दशक में क्रिकेट खेला है या देखा है वो इनके नाम को और अच्छे से जानता होगा। उसे पता होगा कि मास्टर ब्लास्टर की तुलना में किसी अन्य खिलाड़ी को लोग काफी कम ही जानते होंगे। अपने चौबीस साल के लंबे करियर के दौरान, ब्रायन लारा, रिकी पोंटिंग और जैक्स कैलिस जैसे खिलाड़ी उनके मुख्य प्रतियोगी थे, लेकिन उनमें से कोई भी उनकी निरंतरता और लंबी करियर के कारण उनके रिकॉर्ड को नहीं तोड़ सका है। सोलह नवंबर दो हज़ार तेरह को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद से खेल में काफी बदलाव आया है। विराट कोहली, स्टीव स्मिथ, जो रूट और केन विलियमसन, जो इस पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज हैं, ने कुछ शानदार रन बनाए लेकिन उनमें से कोई भी सचिन के अधिकांश रिकॉर्ड तोड़ने के करीब नहीं दिखता। जहां कोहली जल्द ही वनडे में सबसे ज्यादा शतक लगाने का अपना रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं, वहीं सचिन के कुछ रिकॉर्ड ऐसे भी हैं जो लगभग अटूट लगते हैं। आइए नजर डालते हैं ऐसे ही कुछ रिकॉर्ड्स परः उनके नाम टेस्ट में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड है। सचिन ने दो सौ मैचों और तीन सौ उनतीस पारियों में पंद्रह,नौ सौ इक्कीस रन बनाए हैं। रिकी पोंटिंग और जैक्स कैलिस क्रमशः तेरह,तीन सौ अठहत्तर और तेरह,दो सौ नवासी रनों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। शीर्ष दस की सूची में कोई अन्य बल्लेबाज अभी भी क्रिकेट नहीं खेल रहा है, और यह बहुत कम संभावना है कि यह रिकॉर्ड कभी भी टूटेगा। दो सौ टेस्ट खेलने के बाद भी सचिन का औसत तिरेपन. अठहत्तर का था। उन्होंने इक्यावन टेस्ट टन, अड़सठ अर्धशतक बनाए और प्रारूप में उनका उच्चतम स्कोर दो सौ अड़तालीस* था। एक समय कैलिस और पोंटिंग सचिन के शतकों के रिकॉर्ड के काफी करीब थे, एलिस्टेयर कुक दो-तीन साल तक शीर्ष फॉर्म में थे और ऐसा लग रहा था कि वह सचिन के टेस्ट शतकों के रिकॉर्ड को तोड़ सकते हैं। लेकिन अब कोहली ही एकमात्र दावेदार नजर आ रहे हैं, लेकिन वह भी सचिन के एक सौ अंतरराष्ट्रीय शतकों के रिकॉर्ड से पच्चीस शतक पीछे हैं। उनका एक सौ शतक छः सौ चौंसठ मैचों और सात सौ बयासी पारियों में आया। उन्होंने वनडे में इक्यावन टेस्ट शतक और उनचास शतक बनाए हैं। जबकि उनका एकदिवसीय टन रिकॉर्ड कोहली द्वारा जल्द ही तोड़ा जाएगा, कोई भी उनके टेस्ट शतकों के रिकॉर्ड के करीब नहीं लगता है। कैलिस पैंतालीस टन के साथ सूची में दूसरे स्थान पर हैं और शीर्ष दस की सूची में कोई भी अभी भी नहीं खेल रहा है। फॉर्मेट में उनका दबदबा उनके नंबरों से देखा जा सकता है। सचिन के इक्यावन टेस्ट शतकों में से उनतीस भारत के बाहर बने और उनमें से सत्रह इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड में आए। मैन ऑफ द मैच या प्लेयर ऑफ द मैच उस खिलाड़ी को दिया जाता है जो किसी खेल के दौरान सबसे अधिक प्रभावशाली होता है या मैच जीतने वाली भूमिका निभाता है। और कोई भी खिलाड़ी अकेले दम पर भारत के लिए सचिन जितना प्रभावशाली नहीं रहा है। अपने करियर के दौरान, सचिन ने तिरेसठ मैन ऑफ़ द मैच पुरस्कार जीते हैं, जो सबसे अधिक है। उनके पास विश्व कप मैचों में सबसे अधिक मैन ऑफ द मैच पुरस्कार भी हैं, जिसमें नौ ऐसी ट्राफियां हैं। सनथ जयसूर्या अड़तालीस पुरस्कारों के साथ दूसरे स्थान पर हैं। यह एक रिकॉर्ड है जो बताता है कि सचिन केवल व्यक्तिगत रिकॉर्ड के बारे में नहीं थे और उन्होंने अपने देश के लिए रिकॉर्ड संख्या में मैच जीते। और यह भी एक ऐसा रिकॉर्ड है जो जल्द ही नहीं टूटेगा। हालांकि सचिन ने शतकों का एक शतक बनाया है, लेकिन वह और भी कई रन बना सकते थे, अगर उनके नाम खेल में सबसे अधिक नब्बे रन का रिकॉर्ड नहीं होता। सचिन ने नब्बे के दशक में वनडे में अट्ठारह बार और टेस्ट में दस बार रन बनाए हैं। उनके पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में नब्बे के दशक में सबसे ज्यादा बार आउट होने का रिकॉर्ड है। जबकि कई लोग इसे नर्वस नब्बे का दशक कहते हैं, सचिन की कुछ सबसे बड़ी मैच विनिंग पारियां नब्बे के दशक में थीं। इसमें दक्षिण अफ्रीका में दो हज़ार तीन के विश्व कप के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ उनकी शानदार पचहत्तर गेंदों की अट्ठानवे रन की पारी भी शामिल है। विश्व कप में सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड किसी से कम नहीं है। उन्होंने एक हज़ार नौ सौ बानवे से दो हज़ार ग्यारह तक रिकॉर्ड छह विश्व कप खेले। उनके पास मेगा इवेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भी है। सचिन ने विश्व कप में छप्पन. पचानवे की औसत से दो,दो सौ अठहत्तर रन बनाए हैं। इन विश्व कपों के दौरान, वह दो बार फाइनल में खेले और अंत में दो हज़ार ग्यारह में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में ट्रॉफी जीती। सचिन ने विश्व कप में छह शतक और पंद्रह अर्धशतक बनाए हैं। विश्व कप में सर्वाधिक रन बनाने के मामले में दूसरे नंबर पर रिकी पोंटिंग हैं, जिनके नाम एक हज़ार सात सौ तैंतालीस रन हैं। और शीर्ष दस में केवल शाकिब अल हसन ही ऐसे खिलाड़ी हैं जो अभी सक्रिय क्रिकेटर हैं। तो, यह भी एक ऐसा रिकॉर्ड है जिसके टूटने की संभावना बहुत कम है। |
शिलांग : भाजपा की मेघालय इकाई ने भ्रष्टाचार पर बहस के लिए मुख्यमंत्री कोनराड संगमा को चुनौती दी है। मेघालय भाजपा ने राज्य में कथित वित्तीय घोटालों की सीबीआई जांच के लिए मुख्यमंत्री कोनराड संगमा को भी चुनौती दी है।
विशेष रूप से भाजपा एनपीपी के नेतृत्व वाली मेघालय लोकतांत्रिक गठबंधन (एमडीए) सरकार का एक घटक है। मेघालय के भाजपा नेता बर्नार्ड मारक ने कहा, "आइए भ्रष्टाचार के बारे में बहस करें। विभिन्न घोटालों की सीबीआई जांच की जरूरत है। "
मेघालय भाजपा नेता ने कहा, "भाजपा विभिन्न घोटालों से लाभ उठाने के लिए एमडीए में नहीं है बल्कि इसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए है। चुनौती स्वीकार करें और अपना (मेघालय के सीएम कोनराड संगमा) स्टैंड साबित करें। बीजेपी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने से नहीं रुकेगी।
मेघालय भाजपा के उपाध्यक्ष बर्नार्ड मराक ने कहा, "उन्हें (कॉनराड संगमा) स्पष्ट करना चाहिए कि वह सीबीआई जांच के खिलाफ क्यों हैं। मराक ने आगे एमडीए सरकार के गठबंधन सहयोगियों पर "गरीबों को लूटने" का आरोप लगाया।
मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की टिप्पणी कि "भाजपा एमडीए से बाहर निकलने के लिए स्वतंत्र है" का जवाब देते हुए मारक ने इसे "सस्ती राजनीति" कहा। मेघालय भाजपा उपाध्यक्ष ने आगे कहा, "राजनीति में पैसा और सत्ता ही सब कुछ नहीं है, अच्छा नेतृत्व है। "
उन्होंने प्रगतिशील विचारधारा वाले सभी समान विचारधारा वाले दलों से मेघालय के लिए एक नया रोडमैप तैयार करने के लिए एक साथ आने का भी आग्रह किया। बर्नार्ड मारक ने कहा, "राज्य में कई सक्षम नेता हैं जो लालची हुए बिना नेतृत्व कर सकते हैं। "
| शिलांग : भाजपा की मेघालय इकाई ने भ्रष्टाचार पर बहस के लिए मुख्यमंत्री कोनराड संगमा को चुनौती दी है। मेघालय भाजपा ने राज्य में कथित वित्तीय घोटालों की सीबीआई जांच के लिए मुख्यमंत्री कोनराड संगमा को भी चुनौती दी है। विशेष रूप से भाजपा एनपीपी के नेतृत्व वाली मेघालय लोकतांत्रिक गठबंधन सरकार का एक घटक है। मेघालय के भाजपा नेता बर्नार्ड मारक ने कहा, "आइए भ्रष्टाचार के बारे में बहस करें। विभिन्न घोटालों की सीबीआई जांच की जरूरत है। " मेघालय भाजपा नेता ने कहा, "भाजपा विभिन्न घोटालों से लाभ उठाने के लिए एमडीए में नहीं है बल्कि इसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए है। चुनौती स्वीकार करें और अपना स्टैंड साबित करें। बीजेपी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने से नहीं रुकेगी। मेघालय भाजपा के उपाध्यक्ष बर्नार्ड मराक ने कहा, "उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि वह सीबीआई जांच के खिलाफ क्यों हैं। मराक ने आगे एमडीए सरकार के गठबंधन सहयोगियों पर "गरीबों को लूटने" का आरोप लगाया। मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की टिप्पणी कि "भाजपा एमडीए से बाहर निकलने के लिए स्वतंत्र है" का जवाब देते हुए मारक ने इसे "सस्ती राजनीति" कहा। मेघालय भाजपा उपाध्यक्ष ने आगे कहा, "राजनीति में पैसा और सत्ता ही सब कुछ नहीं है, अच्छा नेतृत्व है। " उन्होंने प्रगतिशील विचारधारा वाले सभी समान विचारधारा वाले दलों से मेघालय के लिए एक नया रोडमैप तैयार करने के लिए एक साथ आने का भी आग्रह किया। बर्नार्ड मारक ने कहा, "राज्य में कई सक्षम नेता हैं जो लालची हुए बिना नेतृत्व कर सकते हैं। " |
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने घरेलू उत्पादन क्षमता के बारे में तेहरान में लगी प्रदर्शनी का दौरा किया।
वरिष्ठ नेता की वेबसाइट के अनुसार प्रदर्शनी को वरिष्ठ नेता की ओर से इस वर्ष के लिए दिये गए उस नारे के अन्तर्गत लगाया गया था जिसका शीर्षक था, "रोज़गार पैदा करने वाला नाॅलेज बेस्ड प्रोडक्शन"।
इस प्रदर्शनी में विभिन्न क्षेत्रों में देश की क्षमताओं को प्रदर्शित किया गया था जैसे खनन, इलैक्ट्रानिक्स, दूर संचार, एरोस्पेस, उपग्रह, आटोमोबाइल, कृषि, खाद्य पदार्थ, रेल, सड़क समुद्र और वायु परिवहन, आवास, तेल, पेट्रोकैमिकल, घरेलू उपकरण, कपड़ा, आवास, ऊर्जा और बिजली संयंत्र उद्योग, बांध निर्माण, जल प्रबंधन और सूचना तथा संचार प्रौद्घोगिकी आदि।
याद रहे कि इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने नए शमसी वर्ष 1401 के लिए "रोज़गार पैदा करने वाला नाॅलेज बेस्ड प्रोडक्शन" का नारा दिया था। उनका कहना था कि नालेज बेस्ड कंपनियां, नए तरीक़े से रोज़गार सृजन का बहुत अच्छा माध्यम हैं।
हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!
| इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने घरेलू उत्पादन क्षमता के बारे में तेहरान में लगी प्रदर्शनी का दौरा किया। वरिष्ठ नेता की वेबसाइट के अनुसार प्रदर्शनी को वरिष्ठ नेता की ओर से इस वर्ष के लिए दिये गए उस नारे के अन्तर्गत लगाया गया था जिसका शीर्षक था, "रोज़गार पैदा करने वाला नाॅलेज बेस्ड प्रोडक्शन"। इस प्रदर्शनी में विभिन्न क्षेत्रों में देश की क्षमताओं को प्रदर्शित किया गया था जैसे खनन, इलैक्ट्रानिक्स, दूर संचार, एरोस्पेस, उपग्रह, आटोमोबाइल, कृषि, खाद्य पदार्थ, रेल, सड़क समुद्र और वायु परिवहन, आवास, तेल, पेट्रोकैमिकल, घरेलू उपकरण, कपड़ा, आवास, ऊर्जा और बिजली संयंत्र उद्योग, बांध निर्माण, जल प्रबंधन और सूचना तथा संचार प्रौद्घोगिकी आदि। याद रहे कि इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने नए शमसी वर्ष एक हज़ार चार सौ एक के लिए "रोज़गार पैदा करने वाला नाॅलेज बेस्ड प्रोडक्शन" का नारा दिया था। उनका कहना था कि नालेज बेस्ड कंपनियां, नए तरीक़े से रोज़गार सृजन का बहुत अच्छा माध्यम हैं। हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए! |
गड़चिरोली, ब्यूरो. तेंदूपत्ता संकलन करने हेतु परिवार के साथ मारोडा के जंगल में गए मजदूर पर जंगली सुअर ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल करने की घटना शनिवार को सुबह 7 बजे के दौरान घटी. घायल का नाम गड़चिरोली तहसील के राखी निवासी पांडूरंग बालाजी मोहुर्ले (61) है.
पांडूरंग मोहुर्ले यह अपने 3 पुत्र व 3 बहुओं के साथ गड़चिरोली वनपरिक्षेत्र अंतर्गत आनेवाले गुरवना उपक्षेत्र के मारोडा के जंगल में तेंदूपत्ता संकलन करने के लिए शनिवार को सुबह 6 बजे घर से निकले. गांव से करीब 4 किमी दूरी पर के मारोडा के जंगल में वे गए.
तेंदूपत्ता तुडाई के कार्य में व्यस्त रहते समय एक जंगली सुअर उनकी दिशामें आया. सुअर ने पांडूरंग मोहुर्ले को गंभीर रूप से घायल किया. मोहुर्ले के बेटों ने उन्हे तत्काल घर लाया. इस संदर्भ की जानकारी वनविभाग के कर्मचारियों को दी. इसके बाद गुरवला के राजपाल खोब्रागडे के मदद से मोहुर्ले को जिला अस्पताल में उपचार हेतु दाखिल किया गया.
| गड़चिरोली, ब्यूरो. तेंदूपत्ता संकलन करने हेतु परिवार के साथ मारोडा के जंगल में गए मजदूर पर जंगली सुअर ने हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल करने की घटना शनिवार को सुबह सात बजे के दौरान घटी. घायल का नाम गड़चिरोली तहसील के राखी निवासी पांडूरंग बालाजी मोहुर्ले है. पांडूरंग मोहुर्ले यह अपने तीन पुत्र व तीन बहुओं के साथ गड़चिरोली वनपरिक्षेत्र अंतर्गत आनेवाले गुरवना उपक्षेत्र के मारोडा के जंगल में तेंदूपत्ता संकलन करने के लिए शनिवार को सुबह छः बजे घर से निकले. गांव से करीब चार किमी दूरी पर के मारोडा के जंगल में वे गए. तेंदूपत्ता तुडाई के कार्य में व्यस्त रहते समय एक जंगली सुअर उनकी दिशामें आया. सुअर ने पांडूरंग मोहुर्ले को गंभीर रूप से घायल किया. मोहुर्ले के बेटों ने उन्हे तत्काल घर लाया. इस संदर्भ की जानकारी वनविभाग के कर्मचारियों को दी. इसके बाद गुरवला के राजपाल खोब्रागडे के मदद से मोहुर्ले को जिला अस्पताल में उपचार हेतु दाखिल किया गया. |
जिला पंचायत सदस्या और बीडीसी सदस्य के लिए हुए चुनाव की मतगणना रविवार को सुबह आठ बजे से शुरू हो जाएगी। 5643 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा। जिसमें से 34 जिला पंचायत सदस्य एवं 857 क्षेत्र पंचायत सदस्य पदों के विजेता सामने आएंगे। इसकी घोषणा संबंधित आरओ करेंगे और विधिवत प्रमाण पत्र भी जारी करेंगे।
चरणवार हुए मतदान के बाद सभी की निगाहें एक नवंबर को होने वाले मतगणना पर टिकी हुईं थी। प्रथम चरण के मतदान में जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए 1250 प्रत्याशी के लिए वोटिंग हुई। प्रथम चरण में रानीपुर और मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक में चुनाव हुआ।
इसमें 11 वार्डों के जिला पंचायत सदस्य का फैसला होगा इसके लिए यहां 160 प्रत्याशी मैदान में थे। रानीपुर ब्लाक में 111 पदों पर कुल 666 प्रत्याशी क्षेत्र पंचायत के थे। इनमें चार का निर्विरोध चुना जाना तय हैं। इसी प्रकार मुहम्मदाबाद गोहना में 91 पदों पर 420 प्रत्याशी मैदान में थे। इनमें तीन का निर्विरोध चुना जाना तय है।
दूसरे चरण में परदहां ब्लाक, कोपागंज रतनपुरा ब्लाक शामिल हैं। इसमें जिला पंचायत सदस्य के कुल 210 प्रत्याशी हैं। वहीं, क्षेत्र पंचायत सदस्य के रतनपुरा ब्लाक में 508, परदहां में 367 एवं कोपागंज में 630 प्रत्याशी मैदान में थे। दूसरे चरण में घोसी और बड़रांव ब्लाक में चुनाव हुआ।
यहां जिला पंचायत के सात एवं क्षेत्र पंचायत के 177 पदों के लिए 1135 प्रत्याशियों के भाग्य पर वोट पड़ा। जिनका आज फैसला होगा। जिला पंचायत सदस्य के कुल 121 प्रत्याशी यहां पर हैं। वहीं, क्षेत्र पंचायत सदस्य के बड़रांव ब्लाक में 558, घोसी में 456 प्रत्याशी मैदान में थे।
चौथे चरण में फतहपुर मंडाव ब्लाक एवं दोहरीघाट ब्लाक शामिल हैं। दोहरीघाट ब्लाक में क्षेत्र पंचायत सदस्य के 653 प्रत्याशी एवं जिला पंचायत सदस्य के 3 प्रत्याशी थे। फतहपुर मंडाव ब्लाक में क्षेत्र पंचायत सदस्य के 727 प्रत्याशी एवं जिला पंचायत सदस्य के 4 प्रत्याशी हैं।
| जिला पंचायत सदस्या और बीडीसी सदस्य के लिए हुए चुनाव की मतगणना रविवार को सुबह आठ बजे से शुरू हो जाएगी। पाँच हज़ार छः सौ तैंतालीस प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होगा। जिसमें से चौंतीस जिला पंचायत सदस्य एवं आठ सौ सत्तावन क्षेत्र पंचायत सदस्य पदों के विजेता सामने आएंगे। इसकी घोषणा संबंधित आरओ करेंगे और विधिवत प्रमाण पत्र भी जारी करेंगे। चरणवार हुए मतदान के बाद सभी की निगाहें एक नवंबर को होने वाले मतगणना पर टिकी हुईं थी। प्रथम चरण के मतदान में जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य के लिए एक हज़ार दो सौ पचास प्रत्याशी के लिए वोटिंग हुई। प्रथम चरण में रानीपुर और मुहम्मदाबाद गोहना ब्लाक में चुनाव हुआ। इसमें ग्यारह वार्डों के जिला पंचायत सदस्य का फैसला होगा इसके लिए यहां एक सौ साठ प्रत्याशी मैदान में थे। रानीपुर ब्लाक में एक सौ ग्यारह पदों पर कुल छः सौ छयासठ प्रत्याशी क्षेत्र पंचायत के थे। इनमें चार का निर्विरोध चुना जाना तय हैं। इसी प्रकार मुहम्मदाबाद गोहना में इक्यानवे पदों पर चार सौ बीस प्रत्याशी मैदान में थे। इनमें तीन का निर्विरोध चुना जाना तय है। दूसरे चरण में परदहां ब्लाक, कोपागंज रतनपुरा ब्लाक शामिल हैं। इसमें जिला पंचायत सदस्य के कुल दो सौ दस प्रत्याशी हैं। वहीं, क्षेत्र पंचायत सदस्य के रतनपुरा ब्लाक में पाँच सौ आठ, परदहां में तीन सौ सरसठ एवं कोपागंज में छः सौ तीस प्रत्याशी मैदान में थे। दूसरे चरण में घोसी और बड़रांव ब्लाक में चुनाव हुआ। यहां जिला पंचायत के सात एवं क्षेत्र पंचायत के एक सौ सतहत्तर पदों के लिए एक हज़ार एक सौ पैंतीस प्रत्याशियों के भाग्य पर वोट पड़ा। जिनका आज फैसला होगा। जिला पंचायत सदस्य के कुल एक सौ इक्कीस प्रत्याशी यहां पर हैं। वहीं, क्षेत्र पंचायत सदस्य के बड़रांव ब्लाक में पाँच सौ अट्ठावन, घोसी में चार सौ छप्पन प्रत्याशी मैदान में थे। चौथे चरण में फतहपुर मंडाव ब्लाक एवं दोहरीघाट ब्लाक शामिल हैं। दोहरीघाट ब्लाक में क्षेत्र पंचायत सदस्य के छः सौ तिरेपन प्रत्याशी एवं जिला पंचायत सदस्य के तीन प्रत्याशी थे। फतहपुर मंडाव ब्लाक में क्षेत्र पंचायत सदस्य के सात सौ सत्ताईस प्रत्याशी एवं जिला पंचायत सदस्य के चार प्रत्याशी हैं। |
नई दिल्ली, 19 दिसम्बर (आईएएनएस)। ओलम्पिक स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज अभिनव बिंद्रा और पूर्व ऑल इंग्लैंड ओपन चैम्पियन बैडमिंटन स्टार पुलेगा गोपीचंद ने देश में खेलों को लेकर नया व आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम तैयार करने के लिए मंगलवार को ईएसएमएस फाउंडेशन की शुरुआत की। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावेडकर और खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर की मौजूदगी में बिंद्रा और गोपीचंद को फाउंडेशन का मेंटॉर घोषित किया गया।
चेन्नयन एफसी की सहमालिक श्रीमति विता दानी, अर्जुन पुरस्कार विजेता टेबल टेनिस खिलाड़ी कमलेश मेहता और श्रीमति मोनालिसा मेहता द्वारा स्थापित गैरलाभकारी-एक्सीलेंस इन लर्निग एंड मास्टरिंग ऑफ स्पोर्ट्स एंड फिजिकल लिटरेसी (ईएसएमएस) फाउंडेशन का उद्देश्य फिजिकल एजुकेशन एक्सपर्ट्स, कोचेज, स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेटर्स के साथ मिलकर काम करते हुए ऐसे प्रशिक्षित पेशेवर तैयार करना है, जो हर स्तर पर देश में प्रतिभाशाली एथलीटों को आधुनिक ट्रेनिंग दे सकें।
आईआईएम, त्रिच्चि के बोर्ड ऑफ गवनर्स के चेयरमैन तथा जाने-माने व्यवसायी जलज दानी इस फाउंडेशन के सलाहकार होंगे।
बीजिंग ओलम्पिक में भारत के लिए पहला व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाले बिंद्रा ने ओलम्पिक टास्क फोर्स मीटिंग के दौरान चर्चा में आए कई मुद्दों का खुलासा किया। बिंद्रा ने कहा, खेलों में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए हमें हर खेल में विश्व स्तरीय उच्च ज्ञान वाले निदेशकों और प्रशासकों की जरूरत है। हमारा प्रोग्राम क्लासरूम ट्रेनिंग, डिजिटल लेशंस और इंटर्नशिप का मिश्रण होगा। हम खेल को बेहतर तरीके से समझने के लिए विश्व स्तरीय संस्थानों में खेल प्रशासकों को प्रशिक्षित करेंगे।
हैदराबाद में स्थापित अपनी अकादमी में कई विश्वस्तरीय बैडमिंटन खिलाड़ी तैयार कर चुके राष्ट्रीय बैडमिंटन कोच गोपीचंद ने कहा, हमारा उद्देश्य भारतीय खेल जगत में आधुनिक सोच लाना है। हम न सिर्फ ग्रासरूट लेवल पर बल्कि उच्च स्तर पर भी खेलों को लेकर स्तर सुधारना चाहते हैं।
गोपीचंद ने माना कि इस तरह की पहल के लिए यह उपयुक्त समय है। उन्होंने कहा, हमें खेलों को पदक के इतर देखना होगा। हमें खेलों को राष्ट्र विकास के माध्यम से रूप में देखना होगा।
गोपीचंद ने देश में खेल संस्कृति पैदा करने के लिए फिजिकल लिटरेसी और आत्म संदर्भित उत्कृष्ठता पर बल दिया। गोपीचंद ने कहा, इस फिलोसॉफी पर चलने और अपने सभी विचारों को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए हमें अपने फिजिकल एजुकेशन शिक्षकों और कोचों को मजबूत करना होगा। हमें उन्हें सही शिक्षा और व्यवस्थित समर्थन देना होगा।
नई दिल्ली। क्रिकेट के दीवानों के लिए खुशखबरी। भारत के जिन क्रिकेट स्टेडियमों में आईसीसी विश्व कप 2023 होने वाला है, वहां रिलायंस जियो की डाउनलोड स्पीड एयरटेल से दोगुना और वोडाफोन आइडिया से 3.5 गुना अधिक तेज है।
ओपन सिग्नल की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय क्रिकटे स्टेडियमों के अंदर और बाहर नापी गई डाउनलोड स्पीड में जियो ने बाजी मारी।
रिलायंस जियो की औसत डाउनलोड स्पीड 61.7 एमबीपीएस मापी गई। वहीं एयरटेल 30.5 एमबीपीएस के साथ दूसरे, तो वोडाफोन आइडिया 17.7 एमबीपीएस के साथ तीसरे स्थान पर पिछड़ता नजर आया।
ओपन सिग्नल की रिपोर्ट में 5जी डाउनलोड स्पीड के मामले में भी रिलायंस जियो पहले पायदान पर रहा। जियो की 5जी डाउनलोड स्पीड एयरटेल से 25.5 फीसदी अधिक रही।
जियो की औसत 5जी डाउनलोड स्पीड 344.5 एमबीपीएस दर्ज की गई वहीं एयरटेल 274.5 एमबीपीएस के साथ दूसरे नंबर पर रहा। बताते चलें कि वोडाफोन आइडिया अभी 5जी सर्विस नहीं देता। आईसीसी वर्ल्ड कप 2023 के मैच देश के 10 स्टेडियमों में होंगे।
इनमें अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम जैसे नए स्टेडियम से लेकर कोलकाता के ईडन गार्डन जैसे ऐतिहासिक स्टेडियम शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, बैंग्लुरू, लखनऊ और धर्मशाला के क्रिकेट स्टेडियमों में भी मैच होंगे।
क्रिकेट स्टेडियमों में कुल अपलोड स्पीड के मामले में कांटे की टक्कर नजर आई। एयरटेल की औसत अपलोड स्पीड 6.6 एमबीपीएस तो जियो की 6.3 एमबीपीएस मापी गई।
वोडाफोन आइडिया 5.8 एमबीपीएस के साथ तीसरे स्थान पर रहा। औसत 5जी अपलोड के मामले में एयरटेल अव्वल रहा, एयरटेल की स्पीड 26.3 एमबीपीएस तो रिलायंस जियो की 21.6 एमबीपीएस रही।
ओपन सिग्नल ने आईसीसी वर्ल्ड कप के स्टेडियमों के अंदर और बाहर 5जी कनेक्टिविटी की उपलब्धता की भी जांच की। नेटवर्क की उपलब्धता उपभोक्ताओं द्वारा 5जी नेटवर्क पर बिताए गए समय से निकाली जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक विश्व कप स्टेडियमों में 5G उपलब्धता के मामले में जियो शीर्ष पर रहा।
जियो के उपभोक्त 53% से अधिक समय 5जी नेटवर्क से जुड़े रहे। जबकि एयरटेल के उपभोक्ता मात्र 20.7% वक्त ही 5जी नेटवर्क से जुड़ सके। इस हिसाब से जियो के 5जी नेटवर्क की उपलब्धता एयरटेल से 2.6 गुना अधिक दर्ज की गई।
| नई दिल्ली, उन्नीस दिसम्बर । ओलम्पिक स्वर्ण पदक विजेता निशानेबाज अभिनव बिंद्रा और पूर्व ऑल इंग्लैंड ओपन चैम्पियन बैडमिंटन स्टार पुलेगा गोपीचंद ने देश में खेलों को लेकर नया व आधुनिक स्पोर्ट्स इकोसिस्टम तैयार करने के लिए मंगलवार को ईएसएमएस फाउंडेशन की शुरुआत की। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावेडकर और खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर की मौजूदगी में बिंद्रा और गोपीचंद को फाउंडेशन का मेंटॉर घोषित किया गया। चेन्नयन एफसी की सहमालिक श्रीमति विता दानी, अर्जुन पुरस्कार विजेता टेबल टेनिस खिलाड़ी कमलेश मेहता और श्रीमति मोनालिसा मेहता द्वारा स्थापित गैरलाभकारी-एक्सीलेंस इन लर्निग एंड मास्टरिंग ऑफ स्पोर्ट्स एंड फिजिकल लिटरेसी फाउंडेशन का उद्देश्य फिजिकल एजुकेशन एक्सपर्ट्स, कोचेज, स्पोर्ट्स एडमिनिस्ट्रेटर्स के साथ मिलकर काम करते हुए ऐसे प्रशिक्षित पेशेवर तैयार करना है, जो हर स्तर पर देश में प्रतिभाशाली एथलीटों को आधुनिक ट्रेनिंग दे सकें। आईआईएम, त्रिच्चि के बोर्ड ऑफ गवनर्स के चेयरमैन तथा जाने-माने व्यवसायी जलज दानी इस फाउंडेशन के सलाहकार होंगे। बीजिंग ओलम्पिक में भारत के लिए पहला व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाले बिंद्रा ने ओलम्पिक टास्क फोर्स मीटिंग के दौरान चर्चा में आए कई मुद्दों का खुलासा किया। बिंद्रा ने कहा, खेलों में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए हमें हर खेल में विश्व स्तरीय उच्च ज्ञान वाले निदेशकों और प्रशासकों की जरूरत है। हमारा प्रोग्राम क्लासरूम ट्रेनिंग, डिजिटल लेशंस और इंटर्नशिप का मिश्रण होगा। हम खेल को बेहतर तरीके से समझने के लिए विश्व स्तरीय संस्थानों में खेल प्रशासकों को प्रशिक्षित करेंगे। हैदराबाद में स्थापित अपनी अकादमी में कई विश्वस्तरीय बैडमिंटन खिलाड़ी तैयार कर चुके राष्ट्रीय बैडमिंटन कोच गोपीचंद ने कहा, हमारा उद्देश्य भारतीय खेल जगत में आधुनिक सोच लाना है। हम न सिर्फ ग्रासरूट लेवल पर बल्कि उच्च स्तर पर भी खेलों को लेकर स्तर सुधारना चाहते हैं। गोपीचंद ने माना कि इस तरह की पहल के लिए यह उपयुक्त समय है। उन्होंने कहा, हमें खेलों को पदक के इतर देखना होगा। हमें खेलों को राष्ट्र विकास के माध्यम से रूप में देखना होगा। गोपीचंद ने देश में खेल संस्कृति पैदा करने के लिए फिजिकल लिटरेसी और आत्म संदर्भित उत्कृष्ठता पर बल दिया। गोपीचंद ने कहा, इस फिलोसॉफी पर चलने और अपने सभी विचारों को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए हमें अपने फिजिकल एजुकेशन शिक्षकों और कोचों को मजबूत करना होगा। हमें उन्हें सही शिक्षा और व्यवस्थित समर्थन देना होगा। नई दिल्ली। क्रिकेट के दीवानों के लिए खुशखबरी। भारत के जिन क्रिकेट स्टेडियमों में आईसीसी विश्व कप दो हज़ार तेईस होने वाला है, वहां रिलायंस जियो की डाउनलोड स्पीड एयरटेल से दोगुना और वोडाफोन आइडिया से तीन.पाँच गुना अधिक तेज है। ओपन सिग्नल की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय क्रिकटे स्टेडियमों के अंदर और बाहर नापी गई डाउनलोड स्पीड में जियो ने बाजी मारी। रिलायंस जियो की औसत डाउनलोड स्पीड इकसठ.सात एमबीपीएस मापी गई। वहीं एयरटेल तीस.पाँच एमबीपीएस के साथ दूसरे, तो वोडाफोन आइडिया सत्रह.सात एमबीपीएस के साथ तीसरे स्थान पर पिछड़ता नजर आया। ओपन सिग्नल की रिपोर्ट में पाँचजी डाउनलोड स्पीड के मामले में भी रिलायंस जियो पहले पायदान पर रहा। जियो की पाँचजी डाउनलोड स्पीड एयरटेल से पच्चीस.पाँच फीसदी अधिक रही। जियो की औसत पाँचजी डाउनलोड स्पीड तीन सौ चौंतालीस.पाँच एमबीपीएस दर्ज की गई वहीं एयरटेल दो सौ चौहत्तर.पाँच एमबीपीएस के साथ दूसरे नंबर पर रहा। बताते चलें कि वोडाफोन आइडिया अभी पाँचजी सर्विस नहीं देता। आईसीसी वर्ल्ड कप दो हज़ार तेईस के मैच देश के दस स्टेडियमों में होंगे। इनमें अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम जैसे नए स्टेडियम से लेकर कोलकाता के ईडन गार्डन जैसे ऐतिहासिक स्टेडियम शामिल हैं। इसके अलावा दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, बैंग्लुरू, लखनऊ और धर्मशाला के क्रिकेट स्टेडियमों में भी मैच होंगे। क्रिकेट स्टेडियमों में कुल अपलोड स्पीड के मामले में कांटे की टक्कर नजर आई। एयरटेल की औसत अपलोड स्पीड छः.छः एमबीपीएस तो जियो की छः.तीन एमबीपीएस मापी गई। वोडाफोन आइडिया पाँच.आठ एमबीपीएस के साथ तीसरे स्थान पर रहा। औसत पाँचजी अपलोड के मामले में एयरटेल अव्वल रहा, एयरटेल की स्पीड छब्बीस.तीन एमबीपीएस तो रिलायंस जियो की इक्कीस.छः एमबीपीएस रही। ओपन सिग्नल ने आईसीसी वर्ल्ड कप के स्टेडियमों के अंदर और बाहर पाँचजी कनेक्टिविटी की उपलब्धता की भी जांच की। नेटवर्क की उपलब्धता उपभोक्ताओं द्वारा पाँचजी नेटवर्क पर बिताए गए समय से निकाली जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक विश्व कप स्टेडियमों में पाँचG उपलब्धता के मामले में जियो शीर्ष पर रहा। जियो के उपभोक्त तिरेपन% से अधिक समय पाँचजी नेटवर्क से जुड़े रहे। जबकि एयरटेल के उपभोक्ता मात्र बीस.सात% वक्त ही पाँचजी नेटवर्क से जुड़ सके। इस हिसाब से जियो के पाँचजी नेटवर्क की उपलब्धता एयरटेल से दो.छः गुना अधिक दर्ज की गई। |
दिल्ली में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम की गिरफ्तारी पर हिमाचल विधानसभा में भी विपक्षी दल कांग्रेस ने खूब हंगामा किया। कांग्रेस ने घटनाक्रम को साजिश बताते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया, वहीं सत्ता पक्ष ने इस कार्रवाई को सराहा और दोषियों को नहीं बख्शने की बात की। सदन में दोनों पक्षों की ओर से करीब 10 मिनट तक एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी होती रही। इसके बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
| दिल्ली में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम की गिरफ्तारी पर हिमाचल विधानसभा में भी विपक्षी दल कांग्रेस ने खूब हंगामा किया। कांग्रेस ने घटनाक्रम को साजिश बताते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया, वहीं सत्ता पक्ष ने इस कार्रवाई को सराहा और दोषियों को नहीं बख्शने की बात की। सदन में दोनों पक्षों की ओर से करीब दस मिनट तक एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी होती रही। इसके बाद विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi. |
शहडोल - 19 नवंबर को होने वाले शहडोल लोक सभा उप चुनाव का नजारा इस बार मोदी की नोटबन्दी ने बदल दिया है. मतदान में दो दिन शेष बचे हैं. कार्यकर्ता झंडा बैनर छोड़कर बैंक व एटीएम की लाइन में नजर आ रहे हैं. इससे चुनावी माहौल प्रभावित हुआ है. चुनाव के ऐन वक्त पर 500 और एक हजार के नोट बंद होने से चुनाव पर असर पड़ा है.
नोटबन्दी के फैसले से भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता काफी निराश हैं. नोट बदलने के कारण कार्यकर्ताओं के हाथ कुछ नहीं लग पा रहा है जबकि दोनों पार्टियों का अच्छा चुनावी बजट है. चुनाव की चिंता छोड़ कार्यकर्ता अब अपने घर की जरुरतों की चिंता में भटक रहा है. कार्यकर्ता बेमन से प्रचार कर रहे हैं.
नोटबन्दी का असर यह हुआ है कि बड़े नेता भी बड़े नोटों का प्रभाव नहीं दिखा पा रहे हैं, क्योंकि 500 और 1000 के नोट चल नहीं रहे और बिना धन के चुनाव नहीं जीते जाते. कार्यकर्ताओं की भी मज़बूरी है कि पार्टी से जुड़े हैं तो तालमेल बनाकर काम करना है, लेकिन चेहरे मुरझाये हैं.
कांग्रेस पार्टी के एक बड़े कार्यकर्ता ने कहा कि नोट का असर हम पर ही तो पड़ा है. 500 और 1000 के नोट चल नहीं रहे. एटीएम से दो हजार रुपए निकल रहे हैं वह भी लम्बी मशक्कत के बाद, वहीँ भाजपा के एक जिम्मेदार पदाधिकारी चुनाव प्रचार छोड़कर चुनाव कार्यालय के आसपास घूमते रहे इसके बाद बैंक में जाकर लाइन में लग गए. कुल मिलाकर नोट बन्दी ने दोनों पार्टियों को बुरी तरह प्रभावित किया है. इस कारण शहडोल उप चुनाव के नतीजों पर जरूर असर पड़ेगा.
| शहडोल - उन्नीस नवंबर को होने वाले शहडोल लोक सभा उप चुनाव का नजारा इस बार मोदी की नोटबन्दी ने बदल दिया है. मतदान में दो दिन शेष बचे हैं. कार्यकर्ता झंडा बैनर छोड़कर बैंक व एटीएम की लाइन में नजर आ रहे हैं. इससे चुनावी माहौल प्रभावित हुआ है. चुनाव के ऐन वक्त पर पाँच सौ और एक हजार के नोट बंद होने से चुनाव पर असर पड़ा है. नोटबन्दी के फैसले से भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता काफी निराश हैं. नोट बदलने के कारण कार्यकर्ताओं के हाथ कुछ नहीं लग पा रहा है जबकि दोनों पार्टियों का अच्छा चुनावी बजट है. चुनाव की चिंता छोड़ कार्यकर्ता अब अपने घर की जरुरतों की चिंता में भटक रहा है. कार्यकर्ता बेमन से प्रचार कर रहे हैं. नोटबन्दी का असर यह हुआ है कि बड़े नेता भी बड़े नोटों का प्रभाव नहीं दिखा पा रहे हैं, क्योंकि पाँच सौ और एक हज़ार के नोट चल नहीं रहे और बिना धन के चुनाव नहीं जीते जाते. कार्यकर्ताओं की भी मज़बूरी है कि पार्टी से जुड़े हैं तो तालमेल बनाकर काम करना है, लेकिन चेहरे मुरझाये हैं. कांग्रेस पार्टी के एक बड़े कार्यकर्ता ने कहा कि नोट का असर हम पर ही तो पड़ा है. पाँच सौ और एक हज़ार के नोट चल नहीं रहे. एटीएम से दो हजार रुपए निकल रहे हैं वह भी लम्बी मशक्कत के बाद, वहीँ भाजपा के एक जिम्मेदार पदाधिकारी चुनाव प्रचार छोड़कर चुनाव कार्यालय के आसपास घूमते रहे इसके बाद बैंक में जाकर लाइन में लग गए. कुल मिलाकर नोट बन्दी ने दोनों पार्टियों को बुरी तरह प्रभावित किया है. इस कारण शहडोल उप चुनाव के नतीजों पर जरूर असर पड़ेगा. |
OPSC AAO Notification 2022:ओडिशा लोक सेवा आयोग (Odisha Public Service Commission) की और से सहायक कृषि अधिकारी (Assistant Agriculture Officer Jobs) के पदों पर भर्तियां निकाली गई हैं. AAO ओपीएससी भर्ती 2022 के तहत जो उम्मीदवार आवेदन करना चाहते हैं, वो ओडिशा लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. ओडिशा लोक सेवा आयोग की ओर से जारी की गई अधिसूचना के अनुसार आवेदन प्रक्रिया 28 जनवरी से शुरू हो जाएगी. जो कि फरवरी तक चलेगी.
ओडिशा लोक सेवा आयोग (Odisha Public Service Commission) की और से सहायक कृषि अधिकारी (Assistant Agriculture Officer) के कुल 145 पदों पर भर्ती निकाली गई हैं. जारी किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार ये भर्ती ओडिशा कृषि और खाद्य उत्पादन सेवा के तहत ग्रुप बी क्लास 2 में निकाली गई हैं.
सहायक कृषि अधिकारी (AAO Agriculture Vacancy 2022) पद पर आवेदन करने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवार opsc. gov. in पर जाएं. यहां पर आवेदन का लिंक 28 जनवरी को एक्टिव कर दिया जाएगा. इस लिंक को खोलकर आप आवेदन पत्र भरकर जमा कर दें. आवेदन करने की आखिरी तारीख 28 फरवरी 2022 की है. वहीं आवेदन करते हुए शुल्क का भुगतान करना होगा, जो कि 500 रुपये का है. सरकारी नियमों के तहत अनुसूचित जाति और एसटी उम्मीदवारों को शुल्क में छूट प्रदान की जाएगी.
शैक्षिक योग्यता (Assistant Agriculture Officer Eligibility)
AAO पद के लिए वो उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. जिनके पास कृषि/बागवानी में विज्ञान स्नातक डिग्री होग. साथ ही आयु सीमा 21 साल से 38 साल के बीच होनी चाहिए.
सहायक कृषि अधिकारी पद पर चयन प्रक्रिया लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर की जाएगी.
| OPSC AAO Notification दो हज़ार बाईस:ओडिशा लोक सेवा आयोग की और से सहायक कृषि अधिकारी के पदों पर भर्तियां निकाली गई हैं. AAO ओपीएससी भर्ती दो हज़ार बाईस के तहत जो उम्मीदवार आवेदन करना चाहते हैं, वो ओडिशा लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं. ओडिशा लोक सेवा आयोग की ओर से जारी की गई अधिसूचना के अनुसार आवेदन प्रक्रिया अट्ठाईस जनवरी से शुरू हो जाएगी. जो कि फरवरी तक चलेगी. ओडिशा लोक सेवा आयोग की और से सहायक कृषि अधिकारी के कुल एक सौ पैंतालीस पदों पर भर्ती निकाली गई हैं. जारी किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार ये भर्ती ओडिशा कृषि और खाद्य उत्पादन सेवा के तहत ग्रुप बी क्लास दो में निकाली गई हैं. सहायक कृषि अधिकारी पद पर आवेदन करने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवार opsc. gov. in पर जाएं. यहां पर आवेदन का लिंक अट्ठाईस जनवरी को एक्टिव कर दिया जाएगा. इस लिंक को खोलकर आप आवेदन पत्र भरकर जमा कर दें. आवेदन करने की आखिरी तारीख अट्ठाईस फरवरी दो हज़ार बाईस की है. वहीं आवेदन करते हुए शुल्क का भुगतान करना होगा, जो कि पाँच सौ रुपयापये का है. सरकारी नियमों के तहत अनुसूचित जाति और एसटी उम्मीदवारों को शुल्क में छूट प्रदान की जाएगी. शैक्षिक योग्यता AAO पद के लिए वो उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं. जिनके पास कृषि/बागवानी में विज्ञान स्नातक डिग्री होग. साथ ही आयु सीमा इक्कीस साल से अड़तीस साल के बीच होनी चाहिए. सहायक कृषि अधिकारी पद पर चयन प्रक्रिया लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर की जाएगी. |
SSB Vacancy 2020: सशस्त्र सीमा बल में कॉन्स्टेबल ट्रेड्समेन के कई पदों पर वैकेंसी है। आवेदन की प्रक्रिया फिर से शुरू की गई है।
SSB Constable Tradesmen Vacancy 2020: कक्षा 10वीं पास कर चुके युवाओं के लिए भारत सरकार की नौकरी (Govt jobs) पाने का बेहतरीन अवसर है। सशस्त्र सीमा बल (Sashastra Seema Bal) ने कॉन्स्टेबल ट्रेड्समेन के कई अलग-अलग पदों पर वैकेंसी (Vacancy) निकाली है।
इस वैकेंसी के लिए एक बार आवेदन लिए जा चुके हैं। अब एसएसबी ने एप्लीकेशन रीओपन किया है। जो उम्मीदवार आवेदन नहीं कर पाए थे, उनके लिए अब भी मौका है। वैकेंसी डीटेल, नोटिफिकेशन और एप्लीकेशन फॉर्म लिंक्स यहां दिए जा रहे हैं।
ये चाहिए योग्यताएं सभी पदों के लिए उम्मीदवारों का मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं कक्षा / मैट्रिक पास होना जरूरी है। इसके अलावा कुछ पदों के लिए अलग अहर्ताएं मांगी गई हैं। जैसे - ड्राइवर के लिए हेवी व्हीकल ड्राइविंग लाइसेंस, लैब असिस्टेंट के लिए लैब असिस्टेंट कोर्स सर्टिफिकेट व अन्य। विस्तृत जानकारी नोटिफिकेशन लिंक पर क्लिक करके प्राप्त कर सकते हैं।
आवेदन की डीटेल इस भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए आपको ssb. nic. in के जरिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन की प्रक्रिया 21 नवंबर 2020 से दोबारा शुरू की गई है। उम्मीदवार 20 दिसंबर 2020 तक आवेदन कर सकते हैं।
| SSB Vacancy दो हज़ार बीस: सशस्त्र सीमा बल में कॉन्स्टेबल ट्रेड्समेन के कई पदों पर वैकेंसी है। आवेदन की प्रक्रिया फिर से शुरू की गई है। SSB Constable Tradesmen Vacancy दो हज़ार बीस: कक्षा दसवीं पास कर चुके युवाओं के लिए भारत सरकार की नौकरी पाने का बेहतरीन अवसर है। सशस्त्र सीमा बल ने कॉन्स्टेबल ट्रेड्समेन के कई अलग-अलग पदों पर वैकेंसी निकाली है। इस वैकेंसी के लिए एक बार आवेदन लिए जा चुके हैं। अब एसएसबी ने एप्लीकेशन रीओपन किया है। जो उम्मीदवार आवेदन नहीं कर पाए थे, उनके लिए अब भी मौका है। वैकेंसी डीटेल, नोटिफिकेशन और एप्लीकेशन फॉर्म लिंक्स यहां दिए जा रहे हैं। ये चाहिए योग्यताएं सभी पदों के लिए उम्मीदवारों का मान्यता प्राप्त बोर्ड से दसवीं कक्षा / मैट्रिक पास होना जरूरी है। इसके अलावा कुछ पदों के लिए अलग अहर्ताएं मांगी गई हैं। जैसे - ड्राइवर के लिए हेवी व्हीकल ड्राइविंग लाइसेंस, लैब असिस्टेंट के लिए लैब असिस्टेंट कोर्स सर्टिफिकेट व अन्य। विस्तृत जानकारी नोटिफिकेशन लिंक पर क्लिक करके प्राप्त कर सकते हैं। आवेदन की डीटेल इस भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए आपको ssb. nic. in के जरिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन की प्रक्रिया इक्कीस नवंबर दो हज़ार बीस से दोबारा शुरू की गई है। उम्मीदवार बीस दिसंबर दो हज़ार बीस तक आवेदन कर सकते हैं। |
डेरा प्रमुख राम रहीम की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत की अग्रिम जमानत याचिका दिल्ली हाईकोर्ट ने आज खारिज कर दी।
डेरा प्रमुख राम रहीम की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत की अग्रिम जमानत याचिका दिल्ली हाईकोर्ट ने आज खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि आपका यहां का मामला नहीं बनता है। इसलिए आप सरेंडर करें।
इस याचिका में कहा कहा गया था कि पंजाब और हरियाणा के ड्रग्स माफिया उसके पीछे लगे हुए हैं और उसकी जान को खतरा है। हनीप्रीत ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। दिल्ली हाईकोर्ट में हनीप्रीत के वकील की ओर से अग्रिम जमानत की याचिका लगाई गई थी।
- फैसले के बाद हनीप्रीत के वकील ने कहा कि वो दिल्ली हाईकोर्ट के मामले को आगे तक ले जाएंगे।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने हनीप्रीत की जमानत याचिका खारिज करते हुए उसे सरेंडर करने के लिए कहा है।
- उसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया और कहा कि हनीप्रीत की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज किया जाता है।
- जिसके बाद कोर्ट कहा कि यह दिल्ली का मामला नहीं बनता। आप यहां बस वक्त खराब कर रहे हैं।
- उसके बाद हाईकोर्ट ने कहा कि वो शाम साढ़े सात बजे हनीप्रीत की जमानत याचिका पर फैसला सुनाएगी।
- हनीप्रीत और पुलिस का पक्ष सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
- हरियाणा पुलिस के वकील ने भी दिल्ली हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा।
- वकील ने कहा कि दिल्ली हनीप्रीत का न्यायिक क्षेत्र ही नहीं बनता, न तो उसका पासपोर्ट दिल्ली का है, न ही पता।
- वकील ने कहा कि पंजाब और हरियाणा में उसके खिलाफ माहौल है।
- कोर्ट ने कहा कि हनीप्रीत को तीन हफ्ते का ट्रांजिट बेल क्यों चाहिए।
- दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में हनीप्रीत की छापेमारी की पूरी रिपोर्ट भी दी।
- पुलिस ने कहा कि दिल्ली में ग्रेटर कैलाश का जो पता दिया गया है, वो गलत है।
- वकील ने कहा कि वो पुलिस जांच में सहयोग के लिए तैयार है।
- कोर्ट ने कहा कि क्या हनीप्रीत सरेंडर के लिए तैयार है?
- वकील ने कहा कि उसके खिलाफ कोई एफआईआर नहीं है। ऐसे में उसकी गिरफ्तारी की जरूरत ही नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हे कभी कोई नोटिस नहीं भेजा।
- कोर्ट ने पूछा कि क्या हनीप्रीत दिल्ली की कोर्ट में सरेंडर करने के लिए तैयार है।
- वकील ने कहा कि हनीप्रीत का घर दिल्ली में ही है. उसकी जान को खतरा है।
- कोर्ट ने पूछा कि यह याचिका उनके अधिकार क्षेत्र में कैसे आता है?
- कोर्ट में हनीप्रीत ने कहा कि वह हर जांच के लिए तैयार है। हरियाणा में उसकी जान को खतरा है।
- दिल्ली हाईकोर्ट में हनीप्रीत को लेकर सुबह 11 बजे मामले की कार्रवाई शुरू की गई।
- दिल्ली हाईकोर्ट में हनीप्रीत की याचिका पर महिला जज संगीता धीगड़ा ने कार्रवाई शुरू की।
- उसके बाद उसके वकील प्रदीप आर्या ने दिल्ली हाईकोर्ट में आए।
- दिल्ली के ग्रेटर कैलाश से सीसीटीवी फुटेज में हनीप्रीत के देखे जाने का वीडियो सामने आया।
- इसके बाद मीडिया में काले रंग के कपड़े और स्कार्फ पहने हनीप्रीत एक वकील के घर जाते दिखी।
- मंगलवार सुबह करीब साढ़े सात बजे ग्रेटर कैलाश स्थित डेरा के आश्रम में पुलिस ने छापा मारा।
- सोमवार शाम हनीप्रीत ने दिल्ली हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी।
| डेरा प्रमुख राम रहीम की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत की अग्रिम जमानत याचिका दिल्ली हाईकोर्ट ने आज खारिज कर दी। डेरा प्रमुख राम रहीम की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत की अग्रिम जमानत याचिका दिल्ली हाईकोर्ट ने आज खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि आपका यहां का मामला नहीं बनता है। इसलिए आप सरेंडर करें। इस याचिका में कहा कहा गया था कि पंजाब और हरियाणा के ड्रग्स माफिया उसके पीछे लगे हुए हैं और उसकी जान को खतरा है। हनीप्रीत ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। दिल्ली हाईकोर्ट में हनीप्रीत के वकील की ओर से अग्रिम जमानत की याचिका लगाई गई थी। - फैसले के बाद हनीप्रीत के वकील ने कहा कि वो दिल्ली हाईकोर्ट के मामले को आगे तक ले जाएंगे। - दिल्ली हाईकोर्ट ने हनीप्रीत की जमानत याचिका खारिज करते हुए उसे सरेंडर करने के लिए कहा है। - उसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया और कहा कि हनीप्रीत की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज किया जाता है। - जिसके बाद कोर्ट कहा कि यह दिल्ली का मामला नहीं बनता। आप यहां बस वक्त खराब कर रहे हैं। - उसके बाद हाईकोर्ट ने कहा कि वो शाम साढ़े सात बजे हनीप्रीत की जमानत याचिका पर फैसला सुनाएगी। - हनीप्रीत और पुलिस का पक्ष सुनने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था। - हरियाणा पुलिस के वकील ने भी दिल्ली हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा। - वकील ने कहा कि दिल्ली हनीप्रीत का न्यायिक क्षेत्र ही नहीं बनता, न तो उसका पासपोर्ट दिल्ली का है, न ही पता। - वकील ने कहा कि पंजाब और हरियाणा में उसके खिलाफ माहौल है। - कोर्ट ने कहा कि हनीप्रीत को तीन हफ्ते का ट्रांजिट बेल क्यों चाहिए। - दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में हनीप्रीत की छापेमारी की पूरी रिपोर्ट भी दी। - पुलिस ने कहा कि दिल्ली में ग्रेटर कैलाश का जो पता दिया गया है, वो गलत है। - वकील ने कहा कि वो पुलिस जांच में सहयोग के लिए तैयार है। - कोर्ट ने कहा कि क्या हनीप्रीत सरेंडर के लिए तैयार है? - वकील ने कहा कि उसके खिलाफ कोई एफआईआर नहीं है। ऐसे में उसकी गिरफ्तारी की जरूरत ही नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हे कभी कोई नोटिस नहीं भेजा। - कोर्ट ने पूछा कि क्या हनीप्रीत दिल्ली की कोर्ट में सरेंडर करने के लिए तैयार है। - वकील ने कहा कि हनीप्रीत का घर दिल्ली में ही है. उसकी जान को खतरा है। - कोर्ट ने पूछा कि यह याचिका उनके अधिकार क्षेत्र में कैसे आता है? - कोर्ट में हनीप्रीत ने कहा कि वह हर जांच के लिए तैयार है। हरियाणा में उसकी जान को खतरा है। - दिल्ली हाईकोर्ट में हनीप्रीत को लेकर सुबह ग्यारह बजे मामले की कार्रवाई शुरू की गई। - दिल्ली हाईकोर्ट में हनीप्रीत की याचिका पर महिला जज संगीता धीगड़ा ने कार्रवाई शुरू की। - उसके बाद उसके वकील प्रदीप आर्या ने दिल्ली हाईकोर्ट में आए। - दिल्ली के ग्रेटर कैलाश से सीसीटीवी फुटेज में हनीप्रीत के देखे जाने का वीडियो सामने आया। - इसके बाद मीडिया में काले रंग के कपड़े और स्कार्फ पहने हनीप्रीत एक वकील के घर जाते दिखी। - मंगलवार सुबह करीब साढ़े सात बजे ग्रेटर कैलाश स्थित डेरा के आश्रम में पुलिस ने छापा मारा। - सोमवार शाम हनीप्रीत ने दिल्ली हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। |
तुंगिकानिवासी श्रमणोपासक पाइर्बापत्यीय स्थविरो की सेवा में -
१३ तए ण तु गियाए नगरीए सिंघाडग-तिग-च उपक-चच्चर-महापहपहेसु जाब एगविसाभिमुहा णिज्जायति ।
[१३] तदनन्तर तु गिकानगरी के गाटक ( सिघाडे के आकार वाले त्रिकोण) मार्ग मे, त्रिक (तीन मार्ग मिलते है, ऐसे ) रास्तो मे, चतुप्क पथो (चार मार्ग मिलते हैं, ऐसे चौराहो) मे तथा अनेक मार्ग मिलते है, ऐसे मार्गो मे, राजमार्गो मे एव सामान्य मार्गों मे ( सर्वत्र उन स्थविर भगवन्तो के पदार्पण की) बात फैल गई । जनता एक ही दिशा में उन्हे वन्दन करने के लिए जाने लगी है ।
१४ तए ण ते समणोवासया इमीसे कहाए लडट्ठा समाणा हट्टतुट्ठा जाव लद्दावॅति, २ एवं वदासी-एव खलु देवाणुप्पिया पासावच्चेज्जा थेरा भगवंतो जातिसपन्ना जाव' महापडिरूवं उग्गह उग्गिरिहत्ताण सजमेण तवसा प्रप्पाण भावेमाणा विहरति । त महाफल खलु देवाणुप्पिया ! तहारूवाण थेराण भगव ताण णाम-गोत्तस्स वि सवणयाए किमग पुण अभिगमण व वण-नमसणपडिपुच्छण-पज्जुवासणयाए ? जाव* गहणयाए ?, त गच्छामो ण देवाणुप्पिया ! थेरे भगव ते व दामो नमसामो जाव' पज्जुवासामो, एय ण इहभवे वा परभव वा जाव' अणुगामियत्ताए भविस्ततीति कट्टु अन्नमन्नस्स अतिए एयभट्ट पडिसुर्णेति, २ जेणेव सयाइ सयाइ गिहाई तेणेव उवागच्छति, २ हाया कयबलिकम्मा कतकोउयमगलपायच्छित्ता, सुद्धप्पावे साइ मगल्लाइ वत्थाइ पवराइं परिहिया, प्रप्पमहग्घाभरणालकियसरीरा सहि २ गेहेहितो पडिनिषखमति, २ सा एगतम्रो मेलायति, २ पायविहारचारेण तु गियाए नगरीए मज्झमज्भेण णिग्गच्छति, २ जेणेव पुष्फवतीए चेतिए तेणेव उवागच्छति, २ थेरे भगव ते पचविहेण अभिगमेणं अभिगच्छति त जहा-सचित्ताण दव्वाणं विग्रोसरणताए १ प्रचित्ताण दव्वाण अविनोसरणताए २ एगसाडिएण उत्तरासगकरणेणं ३ चक्खुप्फासे अजलिप्पग्गहेण ४ मणसो एगत्तीकरणेण ५, जेणेव थेरा भगव तो तेणेव उवागच्छति, २
१ 'जाव' शब्द यहाँ निम्नोक्त पाठ का सूचक है - 'बहुजणसद्द इ वा जणबोले इ वा जणकलकले इ वा जणुम्मी इ वा जणसन्निवाए इ वा बहुजणो अन्नमन्नस्स एवमाइक्खइ ४ एव खलु देवाणुप्पिया । पासावच्चिन्जा थेरा भगवतो जातिस पन्ना इत्यादि पाठ सू १२ के प्रारम्भ मे उक्त पाठ 'विहरति' तक समझना चाहिए । 'जाव' पद यहाँ निम्नोक्त पाठ-सूचक है - 'चित्तमाणविआ गदिमा परमाणविमा पोइमणा परमसोमणसिआ हरिसवसविसप्पमाणहिनया धाराहयमीवसुरहिकुपुमचच मालइयतणू ऊससियरोमनवा ।
यहाँ 'जाव' पद 'जातिसपन्ना' (सू १२) से लेकर 'महापडिरूव' तक का बोधक है ।
'जाब' पद से यहाँ निम्नक्ति पाठ समझें - 'एगस्स बि आरियस्स धम्मियस्स सुवयणस्स सवणताए किमग पुण विउलस्स अत्थस्स गहणयाए ।'
'जाव' पद निम्नोक्त पाठ का सूचक है - 'सक्कारेमो सम्माणेमो कल्लाण मगल देवय चेइय पज्जुवासामो ।' ६ 'जाव' पद यहाँ निम्नोक्त पाठ का सूचक है - 'हियाए सुहाए खमाए निस्सेयसाए ।' | तुंगिकानिवासी श्रमणोपासक पाइर्बापत्यीय स्थविरो की सेवा में - तेरह तए ण तु गियाए नगरीए सिंघाडग-तिग-च उपक-चच्चर-महापहपहेसु जाब एगविसाभिमुहा णिज्जायति । [तेरह] तदनन्तर तु गिकानगरी के गाटक मार्ग मे, त्रिक रास्तो मे, चतुप्क पथो मे तथा अनेक मार्ग मिलते है, ऐसे मार्गो मे, राजमार्गो मे एव सामान्य मार्गों मे बात फैल गई । जनता एक ही दिशा में उन्हे वन्दन करने के लिए जाने लगी है । चौदह तए ण ते समणोवासया इमीसे कहाए लडट्ठा समाणा हट्टतुट्ठा जाव लद्दावॅति, दो एवं वदासी-एव खलु देवाणुप्पिया पासावच्चेज्जा थेरा भगवंतो जातिसपन्ना जाव' महापडिरूवं उग्गह उग्गिरिहत्ताण सजमेण तवसा प्रप्पाण भावेमाणा विहरति । त महाफल खलु देवाणुप्पिया ! तहारूवाण थेराण भगव ताण णाम-गोत्तस्स वि सवणयाए किमग पुण अभिगमण व वण-नमसणपडिपुच्छण-पज्जुवासणयाए ? जाव* गहणयाए ?, त गच्छामो ण देवाणुप्पिया ! थेरे भगव ते व दामो नमसामो जाव' पज्जुवासामो, एय ण इहभवे वा परभव वा जाव' अणुगामियत्ताए भविस्ततीति कट्टु अन्नमन्नस्स अतिए एयभट्ट पडिसुर्णेति, दो जेणेव सयाइ सयाइ गिहाई तेणेव उवागच्छति, दो हाया कयबलिकम्मा कतकोउयमगलपायच्छित्ता, सुद्धप्पावे साइ मगल्लाइ वत्थाइ पवराइं परिहिया, प्रप्पमहग्घाभरणालकियसरीरा सहि दो गेहेहितो पडिनिषखमति, दो सा एगतम्रो मेलायति, दो पायविहारचारेण तु गियाए नगरीए मज्झमज्भेण णिग्गच्छति, दो जेणेव पुष्फवतीए चेतिए तेणेव उवागच्छति, दो थेरे भगव ते पचविहेण अभिगमेणं अभिगच्छति त जहा-सचित्ताण दव्वाणं विग्रोसरणताए एक प्रचित्ताण दव्वाण अविनोसरणताए दो एगसाडिएण उत्तरासगकरणेणं तीन चक्खुप्फासे अजलिप्पग्गहेण चार मणसो एगत्तीकरणेण पाँच, जेणेव थेरा भगव तो तेणेव उवागच्छति, दो एक 'जाव' शब्द यहाँ निम्नोक्त पाठ का सूचक है - 'बहुजणसद्द इ वा जणबोले इ वा जणकलकले इ वा जणुम्मी इ वा जणसन्निवाए इ वा बहुजणो अन्नमन्नस्स एवमाइक्खइ चार एव खलु देवाणुप्पिया । पासावच्चिन्जा थेरा भगवतो जातिस पन्ना इत्यादि पाठ सू बारह के प्रारम्भ मे उक्त पाठ 'विहरति' तक समझना चाहिए । 'जाव' पद यहाँ निम्नोक्त पाठ-सूचक है - 'चित्तमाणविआ गदिमा परमाणविमा पोइमणा परमसोमणसिआ हरिसवसविसप्पमाणहिनया धाराहयमीवसुरहिकुपुमचच मालइयतणू ऊससियरोमनवा । यहाँ 'जाव' पद 'जातिसपन्ना' से लेकर 'महापडिरूव' तक का बोधक है । 'जाब' पद से यहाँ निम्नक्ति पाठ समझें - 'एगस्स बि आरियस्स धम्मियस्स सुवयणस्स सवणताए किमग पुण विउलस्स अत्थस्स गहणयाए ।' 'जाव' पद निम्नोक्त पाठ का सूचक है - 'सक्कारेमो सम्माणेमो कल्लाण मगल देवय चेइय पज्जुवासामो ।' छः 'जाव' पद यहाँ निम्नोक्त पाठ का सूचक है - 'हियाए सुहाए खमाए निस्सेयसाए ।' |
KGMU यानी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में शिक्षक भर्ती को लेकर विवाद शुरू हो गया हैं। आरोप हैं कि विज्ञापन में EWS यानी आर्थिक रूप से कमजोर कोटे में तय से ज्यादा पद दे दिए गए। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से इसकी शिकायत की गई है।
आयोग ने KGMU रजिस्ट्रार से जवाब मांगते हुए 18 जनवरी को तलब किया हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया बाधित होने की आशंका हैं। पिछले साल जुलाई में शिक्षकों के 200 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था। इस बीच NAAC इवैल्यूएशन के लिए टीम भी विश्वविद्यालय परिसर का दौरा करेगी। अहम बात यह हैं कि मूल्यांकन में शिक्षकों की संख्या पर भी मार्किंग होती हैं। ऐसे में जानकार इसको लेकर रेटिंग में गिरावट होने की आशंका भी जता रहे हैं।
दरअसल KGMU के अनुसूचित जाति जनजाति चिकित्सा शिक्षक एसोसिएशन ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए आयोग से शिकायत की थी। एसोसिएशन के महासचिव डॉ. हरीराम का आरोप है कि EWS कोटे में 10% से ज्यादा आरक्षण दिया गया है, जिससे अन्य आरक्षित वर्ग के पद कम हो गए हैं। उनके अनुसार 220 में से सिर्फ 111 पद नए हैं। बाकी बैकलॉग भर्ती के हैं। ऐसे में EWS कोटा सिर्फ 111 पदों पर ही होना चाहिए, लेकिन KGMU ने इस कोटे में 23 पद कर दिए हैं। यह नियमों के खिलाफ है।
केजीएमयू ने पिछली बार शिक्षकों के 256 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था। इसमें गरीब सवर्णों के लिए 15 पद आरक्षित थे, लेकिन यूनिवर्सिटी को इस कोटे के तहत एक भी चिकित्सक नहीं मिल सका था। इसके अलावा KGMU में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर भर्ती के लिए पीजी डिग्री के साथ तीन साल सीनियर रेजीडेंट के पद पर काम करने की अनिवार्यता है। ईडब्ल्यूएस कोटे में आने के लिए अभ्यर्थी की कुल पारिवारिक आय आठ लाख रुपये सालाना से कम होनी चाहिए। डॉक्टर के रूप में सीनियर रेजीडेंट को एक लाख से ज्यादा वेतन मिलता है।
इस लिहाज से उसे सालाना 8 लाख रुपये से ज्यादा वेतन मिलता है। इसमें पारिवारिक आय जुड़ने पर यह रकम और ज्यादा हो जाती है। निजी अस्पताल में भी इस क्राइटेरिया के डॉक्टर को एक लाख रुपये से ज्यादा वेतन मिलता है। ऐसे में न्यूनतम अर्हता पूरी करते ही अभ्यर्थी EWS कोटे से बाहर हो जाता है। यही कारण हैं कि इस कोटे में भर्ती की राह मुश्किल है।
विश्वविद्यालय में नियम विरुद्ध कोई भर्ती नही की जाएगी। विधिक राय लेकर ही आगे बढ़ा जाएगा। भर्ती प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| KGMU यानी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में शिक्षक भर्ती को लेकर विवाद शुरू हो गया हैं। आरोप हैं कि विज्ञापन में EWS यानी आर्थिक रूप से कमजोर कोटे में तय से ज्यादा पद दे दिए गए। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से इसकी शिकायत की गई है। आयोग ने KGMU रजिस्ट्रार से जवाब मांगते हुए अट्ठारह जनवरी को तलब किया हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया बाधित होने की आशंका हैं। पिछले साल जुलाई में शिक्षकों के दो सौ पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था। इस बीच NAAC इवैल्यूएशन के लिए टीम भी विश्वविद्यालय परिसर का दौरा करेगी। अहम बात यह हैं कि मूल्यांकन में शिक्षकों की संख्या पर भी मार्किंग होती हैं। ऐसे में जानकार इसको लेकर रेटिंग में गिरावट होने की आशंका भी जता रहे हैं। दरअसल KGMU के अनुसूचित जाति जनजाति चिकित्सा शिक्षक एसोसिएशन ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए आयोग से शिकायत की थी। एसोसिएशन के महासचिव डॉ. हरीराम का आरोप है कि EWS कोटे में दस% से ज्यादा आरक्षण दिया गया है, जिससे अन्य आरक्षित वर्ग के पद कम हो गए हैं। उनके अनुसार दो सौ बीस में से सिर्फ एक सौ ग्यारह पद नए हैं। बाकी बैकलॉग भर्ती के हैं। ऐसे में EWS कोटा सिर्फ एक सौ ग्यारह पदों पर ही होना चाहिए, लेकिन KGMU ने इस कोटे में तेईस पद कर दिए हैं। यह नियमों के खिलाफ है। केजीएमयू ने पिछली बार शिक्षकों के दो सौ छप्पन पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था। इसमें गरीब सवर्णों के लिए पंद्रह पद आरक्षित थे, लेकिन यूनिवर्सिटी को इस कोटे के तहत एक भी चिकित्सक नहीं मिल सका था। इसके अलावा KGMU में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर भर्ती के लिए पीजी डिग्री के साथ तीन साल सीनियर रेजीडेंट के पद पर काम करने की अनिवार्यता है। ईडब्ल्यूएस कोटे में आने के लिए अभ्यर्थी की कुल पारिवारिक आय आठ लाख रुपये सालाना से कम होनी चाहिए। डॉक्टर के रूप में सीनियर रेजीडेंट को एक लाख से ज्यादा वेतन मिलता है। इस लिहाज से उसे सालाना आठ लाख रुपये से ज्यादा वेतन मिलता है। इसमें पारिवारिक आय जुड़ने पर यह रकम और ज्यादा हो जाती है। निजी अस्पताल में भी इस क्राइटेरिया के डॉक्टर को एक लाख रुपये से ज्यादा वेतन मिलता है। ऐसे में न्यूनतम अर्हता पूरी करते ही अभ्यर्थी EWS कोटे से बाहर हो जाता है। यही कारण हैं कि इस कोटे में भर्ती की राह मुश्किल है। विश्वविद्यालय में नियम विरुद्ध कोई भर्ती नही की जाएगी। विधिक राय लेकर ही आगे बढ़ा जाएगा। भर्ती प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
यूपी के कन्नौज में झगड़ा सुलझाने पहुंची पुलिस पर एक युवक ने हमला कर दिया. हमले में होमगार्ड जवान गंभीर रूप से जख्मी हो गया. पुलिस पर हमला होने का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें हमलावर युवक होमगार्ड को पहले पटकते हुए फिर उसे गालियों देते दिख रहा है. हालांकि बाद में पुलिस टीम ने हमलावर युवक पर किसी तरह काबू पाया और फिर उसे पकड़कर कोतवाली ले गई. यह मामला सदर कोतवाली क्षेत्र के मौसमपुर अल्हड़ का है. वीडियो देखें.
| यूपी के कन्नौज में झगड़ा सुलझाने पहुंची पुलिस पर एक युवक ने हमला कर दिया. हमले में होमगार्ड जवान गंभीर रूप से जख्मी हो गया. पुलिस पर हमला होने का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें हमलावर युवक होमगार्ड को पहले पटकते हुए फिर उसे गालियों देते दिख रहा है. हालांकि बाद में पुलिस टीम ने हमलावर युवक पर किसी तरह काबू पाया और फिर उसे पकड़कर कोतवाली ले गई. यह मामला सदर कोतवाली क्षेत्र के मौसमपुर अल्हड़ का है. वीडियो देखें. |
किसान कल्याण मिशन के अन्तर्गत कृषि एवं कृषि आधारित गतिविधियों के माध्यम से किसान कल्याण तथा किसानों की आमदनी को दोगुना करने के अभियान के तहत बुधवार को जिले के सिधौली, पहला, मिश्रिख, सकरन, परसेण्डी, ऐलिया एवं पिसावां विकास खण्डों में मेला एवं गोष्ठी आयोजित किये गए।
सीतापुरः किसान कल्याण मिशन के अन्तर्गत कृषि एवं कृषि आधारित गतिविधियों के माध्यम से किसान कल्याण तथा किसानों की आमदनी को दोगुना करने के अभियान के तहत बुधवार को जिले के सिधौली, पहला, मिश्रिख, सकरन, परसेण्डी, ऐलिया एवं पिसावां विकास खण्डों में मेला एवं गोष्ठी आयोजित किये गए। इसमें एलिया में आयोजित कार्यक्रम प्रमुख था।
जिसमें डीएम विशाल भारद्वाज मौजूद रहे। यहां मुख्य अतिथि के रूप में इलाके की भाजपा सांसद रेखा वर्मा को आंमत्रित किया गया था लेकिन न सांसद पहुंची और न इलाके के भाजपा विधायक शशांक त्रिवेदी। इस कार्यक्रम में सिर्फ डीएम की आवभगत और उनका संबोधन ही खास था, बाकी सब रस्म निभाने जैसी नौबत रही। यहां आयोजित मेला एवं गोष्ठी का उद्घाटन जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज ने फीता काटकर किया। उन्होंने यहां लगाये गये स्टालों को भी देखा।
कार्यक्रम में दौरान कृषि विभाग, गन्ना विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, सिंचाई विभाग, पंचायती राज विभाग, बाल विकास पुष्टाहार विभाग, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग आदि विभागों द्वारा स्टाल लगाकर किसानों को आवश्यक जानकारियां दी गयीं तथा उनकी समस्याओं का भी निराकरण किया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डा0 शैलेन्द्र सिंह ने कृषि विविधीकरण पर किसानों को विस्तारपूर्वक जानकारी दी। जिलाधिकारी ने प्रगतिशील किसानों एवं अन्य योजनाओं के अन्तर्गत प्रस्तावित लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किये।
गोष्ठी को सम्बोधित करते हुये जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज ने सभी को कृषि विविधीकरण अपनाकर उन्नत खेती करने के लिये प्रेरित किया। जैविक कृषि के लिये प्रेरित करते हुये जिलाधिकारी ने कहा कि जैविक खेती के माध्यम से उत्पादित उत्पादों की मांग शहरों में अधिक रहती है तथा किसान बेहतर प्रबन्धन से अधिक लाभ भी कमा सकते हैं। उन्होंने खेती के अतिरिक्त मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, शहद उद्योग आदि के द्वारा भी आमदनी बढ़ाये जाने के लिये किसान भाइयों को प्रेरित किया।
जिलाधिकारी ने किसान कल्याण मिशन के अन्तर्गत आयोजित इस कार्यक्रम की उपयोगिता के विषय में बताते हुये सभी को प्रेरित किया कि यहां पर लगाये गये स्टालों से लाभान्वित हों एवं अपनी समस्याओं का निराकरण करायें। साथ ही कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बताये गये उपायों को करके कम लागत में अधिक उत्पादन करके लाभान्वित हों।
जिलाधिकारी ने कहा कि जैसा कि हम सभी अवगत हैं भारत कृषि प्रधान देश है। जनपद सीतापुर की अधिकांश जनसंख्या भी कृषि एवं कृषि आधारित उद्योगों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि जैसा कि कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों द्वारा अवगत कराया गया कि जनपद में पहले मूंगफली का उत्पादन अधिक था तथा बाद में लोग अधिकांशतः गन्ने की कृषि करने लगे। यद्यपि जनपद सीतापुर में गन्ने का उत्पादन अधिक होने के साथ-साथ मिलों के माध्यम से उनकी अच्छी खरीद है तथा अन्य जनपदों से भुगतान की स्थिति भी बेहतर है।
फिर भी हमें कृषि में विविधीकरण को अपनाना चाहिये। सरकार का यह प्रयास भी है कि उन फसलों का उत्पादन अधिक किया जाये, जिनकी मांग अधिक है तथा किसान अधिक से अधिक लाभान्वित हों। कार्यक्रम में खण्ड विकास अधिकारी एलिया, ब्लाॅक प्रमुख सहित संबंधित अधिकारी व बड़ी संख्या में विभिन्न क्षेत्रों से आये कृषक उपस्थित रहे।
| किसान कल्याण मिशन के अन्तर्गत कृषि एवं कृषि आधारित गतिविधियों के माध्यम से किसान कल्याण तथा किसानों की आमदनी को दोगुना करने के अभियान के तहत बुधवार को जिले के सिधौली, पहला, मिश्रिख, सकरन, परसेण्डी, ऐलिया एवं पिसावां विकास खण्डों में मेला एवं गोष्ठी आयोजित किये गए। सीतापुरः किसान कल्याण मिशन के अन्तर्गत कृषि एवं कृषि आधारित गतिविधियों के माध्यम से किसान कल्याण तथा किसानों की आमदनी को दोगुना करने के अभियान के तहत बुधवार को जिले के सिधौली, पहला, मिश्रिख, सकरन, परसेण्डी, ऐलिया एवं पिसावां विकास खण्डों में मेला एवं गोष्ठी आयोजित किये गए। इसमें एलिया में आयोजित कार्यक्रम प्रमुख था। जिसमें डीएम विशाल भारद्वाज मौजूद रहे। यहां मुख्य अतिथि के रूप में इलाके की भाजपा सांसद रेखा वर्मा को आंमत्रित किया गया था लेकिन न सांसद पहुंची और न इलाके के भाजपा विधायक शशांक त्रिवेदी। इस कार्यक्रम में सिर्फ डीएम की आवभगत और उनका संबोधन ही खास था, बाकी सब रस्म निभाने जैसी नौबत रही। यहां आयोजित मेला एवं गोष्ठी का उद्घाटन जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज ने फीता काटकर किया। उन्होंने यहां लगाये गये स्टालों को भी देखा। कार्यक्रम में दौरान कृषि विभाग, गन्ना विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, सिंचाई विभाग, पंचायती राज विभाग, बाल विकास पुष्टाहार विभाग, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग आदि विभागों द्वारा स्टाल लगाकर किसानों को आवश्यक जानकारियां दी गयीं तथा उनकी समस्याओं का भी निराकरण किया गया। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डाशून्य शैलेन्द्र सिंह ने कृषि विविधीकरण पर किसानों को विस्तारपूर्वक जानकारी दी। जिलाधिकारी ने प्रगतिशील किसानों एवं अन्य योजनाओं के अन्तर्गत प्रस्तावित लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किये। गोष्ठी को सम्बोधित करते हुये जिलाधिकारी विशाल भारद्वाज ने सभी को कृषि विविधीकरण अपनाकर उन्नत खेती करने के लिये प्रेरित किया। जैविक कृषि के लिये प्रेरित करते हुये जिलाधिकारी ने कहा कि जैविक खेती के माध्यम से उत्पादित उत्पादों की मांग शहरों में अधिक रहती है तथा किसान बेहतर प्रबन्धन से अधिक लाभ भी कमा सकते हैं। उन्होंने खेती के अतिरिक्त मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, शहद उद्योग आदि के द्वारा भी आमदनी बढ़ाये जाने के लिये किसान भाइयों को प्रेरित किया। जिलाधिकारी ने किसान कल्याण मिशन के अन्तर्गत आयोजित इस कार्यक्रम की उपयोगिता के विषय में बताते हुये सभी को प्रेरित किया कि यहां पर लगाये गये स्टालों से लाभान्वित हों एवं अपनी समस्याओं का निराकरण करायें। साथ ही कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बताये गये उपायों को करके कम लागत में अधिक उत्पादन करके लाभान्वित हों। जिलाधिकारी ने कहा कि जैसा कि हम सभी अवगत हैं भारत कृषि प्रधान देश है। जनपद सीतापुर की अधिकांश जनसंख्या भी कृषि एवं कृषि आधारित उद्योगों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि जैसा कि कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों द्वारा अवगत कराया गया कि जनपद में पहले मूंगफली का उत्पादन अधिक था तथा बाद में लोग अधिकांशतः गन्ने की कृषि करने लगे। यद्यपि जनपद सीतापुर में गन्ने का उत्पादन अधिक होने के साथ-साथ मिलों के माध्यम से उनकी अच्छी खरीद है तथा अन्य जनपदों से भुगतान की स्थिति भी बेहतर है। फिर भी हमें कृषि में विविधीकरण को अपनाना चाहिये। सरकार का यह प्रयास भी है कि उन फसलों का उत्पादन अधिक किया जाये, जिनकी मांग अधिक है तथा किसान अधिक से अधिक लाभान्वित हों। कार्यक्रम में खण्ड विकास अधिकारी एलिया, ब्लाॅक प्रमुख सहित संबंधित अधिकारी व बड़ी संख्या में विभिन्न क्षेत्रों से आये कृषक उपस्थित रहे। |
Muthulakshmi Reddi 133rd Birth Anniversary Google Doodle( डॉ मुथुलक्ष्मी रेड्डी गूगल डूडल): डॉ मुथुलक्ष्मी रेड्डी ने अपनी बहन के कैंसर से मौत के बाद 1954 में चेन्नई में कैंसर इंस्ट्टयूट की स्थापना की। यह अस्पताल आज भी दुनिया के सबसे सम्मानित कैंसर अस्पतालों में से एक है।
गूगल आज अपने खास डूडल के जरिये भारत की पहली महिला विधायक डॉक्टर मुथुलक्ष्मी रेड्डी की 133 जयंती मना रहा है। पहली महिला विधायक होने के साथ-साथ मुथुलक्ष्मी रेड्डी को भारत की कुछ शुरुआती महिला डॉक्टरों में भी गिना जाता है। साथ ही डॉ. रेड्डी को लोग समाज सुधारक, शिक्षक, सर्जन के तौर पर भी याद करते हैं। तमिलनाडु की सरकार ने भी सोमवार को कहा कि डॉ. रेड्डी की जयंती के मौके पर राज्य के सरकारी अस्पतालों में हर साल 'हॉस्टिपल डे' मनाया जाएगा।
तमिलनाडु के पुड्डुकोट्टई में 30 जुलाई, 1886 को जन्मीं डॉ. रेड्डी किसी सरकारी अस्पताल में बतौर सर्जन काम करने वाली पहली भारतीय महिला भी हैं। साल 1918 में डॉ रेड्डी विमेंस इंडियन असोसिएशन की सह-संस्थापक रहीं और फिर आगे चलकर ब्रिटिश राज में मद्रास विधानसभा की पहली महिला सदस्य बनीं। दिलचस्प ये है कि माता-पिता छोटी उम्र में ही रेड्डी की शादी कर देना चाहते थे लेकिन उन्होंने इसका विरोध करते हुए अपनी पढ़ाई पूरी की।
साल-1914 में डॉ रेड्डी ने एक डॉक्टर सुंदरा रेड्डी से शादी की और महिलाओं के उत्थान के लिए काम करने लगीं। साथ ही वह आजादी की लड़ाई में भी महात्मा गांधी के आंदोलन से जुड़ीं।
डॉ रेड्डी ने अपनी बहन की कैंसर से मौत के बाद 1954 में चेन्नई में कैंसर इंस्ट्टयूट की स्थापना की। यह अस्पताल आज भी दुनिया के सबसे सम्मानित कैंसर अस्पतालों में से एक है। यहां हर साल 80,000 से ज्यादा कैंसर पीड़ितों का इलाज किया जाता है। डॉ रेड्डी को भारत सरकार ने 1956 में पद्म भूषण से सम्मानित किया। डॉ रेड्डी का निधन 22 जुलाई 1968 को चेन्नई में हुआ।
| Muthulakshmi Reddi एक सौ तैंतीसrd Birth Anniversary Google Doodle: डॉ मुथुलक्ष्मी रेड्डी ने अपनी बहन के कैंसर से मौत के बाद एक हज़ार नौ सौ चौवन में चेन्नई में कैंसर इंस्ट्टयूट की स्थापना की। यह अस्पताल आज भी दुनिया के सबसे सम्मानित कैंसर अस्पतालों में से एक है। गूगल आज अपने खास डूडल के जरिये भारत की पहली महिला विधायक डॉक्टर मुथुलक्ष्मी रेड्डी की एक सौ तैंतीस जयंती मना रहा है। पहली महिला विधायक होने के साथ-साथ मुथुलक्ष्मी रेड्डी को भारत की कुछ शुरुआती महिला डॉक्टरों में भी गिना जाता है। साथ ही डॉ. रेड्डी को लोग समाज सुधारक, शिक्षक, सर्जन के तौर पर भी याद करते हैं। तमिलनाडु की सरकार ने भी सोमवार को कहा कि डॉ. रेड्डी की जयंती के मौके पर राज्य के सरकारी अस्पतालों में हर साल 'हॉस्टिपल डे' मनाया जाएगा। तमिलनाडु के पुड्डुकोट्टई में तीस जुलाई, एक हज़ार आठ सौ छियासी को जन्मीं डॉ. रेड्डी किसी सरकारी अस्पताल में बतौर सर्जन काम करने वाली पहली भारतीय महिला भी हैं। साल एक हज़ार नौ सौ अट्ठारह में डॉ रेड्डी विमेंस इंडियन असोसिएशन की सह-संस्थापक रहीं और फिर आगे चलकर ब्रिटिश राज में मद्रास विधानसभा की पहली महिला सदस्य बनीं। दिलचस्प ये है कि माता-पिता छोटी उम्र में ही रेड्डी की शादी कर देना चाहते थे लेकिन उन्होंने इसका विरोध करते हुए अपनी पढ़ाई पूरी की। साल-एक हज़ार नौ सौ चौदह में डॉ रेड्डी ने एक डॉक्टर सुंदरा रेड्डी से शादी की और महिलाओं के उत्थान के लिए काम करने लगीं। साथ ही वह आजादी की लड़ाई में भी महात्मा गांधी के आंदोलन से जुड़ीं। डॉ रेड्डी ने अपनी बहन की कैंसर से मौत के बाद एक हज़ार नौ सौ चौवन में चेन्नई में कैंसर इंस्ट्टयूट की स्थापना की। यह अस्पताल आज भी दुनिया के सबसे सम्मानित कैंसर अस्पतालों में से एक है। यहां हर साल अस्सी,शून्य से ज्यादा कैंसर पीड़ितों का इलाज किया जाता है। डॉ रेड्डी को भारत सरकार ने एक हज़ार नौ सौ छप्पन में पद्म भूषण से सम्मानित किया। डॉ रेड्डी का निधन बाईस जुलाई एक हज़ार नौ सौ अड़सठ को चेन्नई में हुआ। |
बिग बॉस ओटीटी को लेकर आ रही लेटेस्ट खबरों के अनुसार, 4 कंटेस्टेंट्स को 'बिग बॉस 15' के घर में रहने का मौका मिलने वाला है. वो सीधे सलमान खान के घर यानी बिग बॉस 15 में इंट्री करेंगे.
बॉलीवुडलाईफ की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे पहले कंटेस्टेंट राकेश बापट होंगे जो बिग बॉस 15 में इंट्री करेंगे. वो टीवी के जानेमाने स्टार हैं.
वहीं जानीमानी सिंगर नेहा भसीन भी सलमान खान के घर में इंट्री लेनेवाली हैं.
शिल्पा शेट्टी की बहन शमिता शेट्टी भी बिग बॉस ओटीटी से सीधे बिग बॉस 15 में पहुंचेंगी.
शुरू से चर्चा में रहनेवाले में प्रतीक सहजपाल भी बिग बॉस 15 में इंट्री करनेवाले हैं. उन्होंने पहले ही दिन से चर्चा बटोरी हैं.
हाल ही में राकेश बापट, शमिता शेट्टी को किस करते नजर आए थे. बॉलीवुडलाईफ ने सूत्रों के हवाले से लिखा, शो मेकर्स राकेश बापट और शमिता शेट्टी का लव एंगल दिखाना चाहते हैं.
बिग बॉस ओटीटी के घर में नेहा भसीन और प्रतीक सहजपाल के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं. ऐसे में मेकर्स इन्हें भी सलमान खान के शो में भेजना चाहते हैं.
| बिग बॉस ओटीटी को लेकर आ रही लेटेस्ट खबरों के अनुसार, चार कंटेस्टेंट्स को 'बिग बॉस पंद्रह' के घर में रहने का मौका मिलने वाला है. वो सीधे सलमान खान के घर यानी बिग बॉस पंद्रह में इंट्री करेंगे. बॉलीवुडलाईफ की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे पहले कंटेस्टेंट राकेश बापट होंगे जो बिग बॉस पंद्रह में इंट्री करेंगे. वो टीवी के जानेमाने स्टार हैं. वहीं जानीमानी सिंगर नेहा भसीन भी सलमान खान के घर में इंट्री लेनेवाली हैं. शिल्पा शेट्टी की बहन शमिता शेट्टी भी बिग बॉस ओटीटी से सीधे बिग बॉस पंद्रह में पहुंचेंगी. शुरू से चर्चा में रहनेवाले में प्रतीक सहजपाल भी बिग बॉस पंद्रह में इंट्री करनेवाले हैं. उन्होंने पहले ही दिन से चर्चा बटोरी हैं. हाल ही में राकेश बापट, शमिता शेट्टी को किस करते नजर आए थे. बॉलीवुडलाईफ ने सूत्रों के हवाले से लिखा, शो मेकर्स राकेश बापट और शमिता शेट्टी का लव एंगल दिखाना चाहते हैं. बिग बॉस ओटीटी के घर में नेहा भसीन और प्रतीक सहजपाल के बीच नजदीकियां बढ़ रही हैं. ऐसे में मेकर्स इन्हें भी सलमान खान के शो में भेजना चाहते हैं. |
बुद्धि और नर्क गमन करने बास बताये है, महाँ तक मूर्ति मदडन प्रश्नोचरकार अपना बचाव करने के लिए उन बेवालयों कोमी मार्ग पवमाँ मादि के बताते है और इस बात को सिद्ध करने के लिए प्रम व्याकरण का एक पाठ भी निम्न प्रकार से पेश करते है• कपरे ये तेसो परिया मा घामा दया डाव कर कम्मकारी इमेव बहये मिषेश जाति किसे सम्बे जवाः । ( पृ० २)
पाठ भी केसे पटा बढ़ा कर दिया गया है इस प्रकार का पाठ काई मरमम्पाकरण में नहीं है और न यह मन्दिर मूर्ति से ही सम्बन्ध रखता है इस प्रकार मन माना मेरा इधर उधर से वेकर मिला देगा सरासर गर्म है। (११) भी विजयानम्व सूरजी चैत्वाद में लिखते हैं कि
'आपकों जिनमन्दिर बनाने से जिन पूजा करने से सप मिक्स करने से वीर्मपात्रा जाने से रथोत्सब उत्सव, प्रतिष्ठा, ग्रह भेजन शहाका करने से, तपा भगवान के सम्मुख जाने से गुरु के सम्मुख जाने से, इस्पानि - के रूप से जो दिसा होने सो सबै दम्प दिसा है, परन्तु भाष दिसा नहीं इसका फल अरूप पाप मन बहुत निर्जय है, पद भगवती सूत्र में लिया है यह हिंसा साधु आदि करते हैं । इस प्रकार श्री विजयात मे एकदम मिथ्या की गप्प भारदी है, भगवती सूत्र में रह प्रकार से कहीं भी नहीं सिखाहै हो शायद सुरिजी में अपनी कोई स्वत मा भगवठी बाहो और इसमें ऐसा कर फिर दूसरों को इस प्रकार बताते रहे हो तो यह दूसरी बात है ?
इस प्रकार मन्दिर व मूर्ति के लिए जिन के सुरिचर्य भी अर्थ के अनथे और मिथ्या गप्पे लगाते रहें, वहां सन्य शोधन की तो बात ही कहां रहती है ? इस प्रकार अनेक स्थलों पर मनमानी की गई है, यदि कोई इस विषय की खोज करने को वैठे तो सहज में एक वृहत ग्रन्थ वन सकता है । श्रतएव इस विषय को यहीं पूर्ण कर इनकी टीका नियुक्ति आदि की विपरीतता के भी कुछ प्रमाण दिलाये जाते है -
टीका, माध्यादि में विपरीतता कर देने के दुःख से दुखित हो स्वय विजयानन्दसूरिजी जैन तत्वादर्श पृ० ३५ में लिखते हैं कि"अनेक तरह के भाग्य, टीका, दीपिका, रचकर अर्थो की गड़बड़ कर ढीनी सो श्रव ताई करते ही चले जाते हैं" ।
यद्यपि श्री विजयानन्दजी का उक्त श्राक्षेप वेदानुयायियों पर है किन्तु यही दशा इन मूर्ति पूजक आर्यों से रचित टीका नियुक्ति भाष्य आदि का भी है, उनमें भी कर्ताओं ने अपनी करतूत चलाने में कसर नहीं रक्खी है, जबकि स्वय विजयानन्दजी ने मूल में प्रक्षेप करते कुछ भी संकोच नहीं किया, और कई स्थानों पर अर्थों के अनर्थ कर दिये जिनके कुछ प्रमाण पहले दिये जा चुके हैं, तब टीका भाप्यादि में गड़बड़ी करने में तो भय ही कौनसा है ? जैसी चाहें वैसी व्याख्या करदें । श्री विजयानन्दजी का पूर्वोक्ल कथन पूर्ण रूपेण इनकी समाज पर चरितार्थ होता है ।
श्री विजयानन्दसूरि जैन तत्वादर्श पृ० ३१२ पर लिखते हैं कि | बुद्धि और नर्क गमन करने बास बताये है, महाँ तक मूर्ति मदडन प्रश्नोचरकार अपना बचाव करने के लिए उन बेवालयों कोमी मार्ग पवमाँ मादि के बताते है और इस बात को सिद्ध करने के लिए प्रम व्याकरण का एक पाठ भी निम्न प्रकार से पेश करते है• कपरे ये तेसो परिया मा घामा दया डाव कर कम्मकारी इमेव बहये मिषेश जाति किसे सम्बे जवाः । पाठ भी केसे पटा बढ़ा कर दिया गया है इस प्रकार का पाठ काई मरमम्पाकरण में नहीं है और न यह मन्दिर मूर्ति से ही सम्बन्ध रखता है इस प्रकार मन माना मेरा इधर उधर से वेकर मिला देगा सरासर गर्म है। भी विजयानम्व सूरजी चैत्वाद में लिखते हैं कि 'आपकों जिनमन्दिर बनाने से जिन पूजा करने से सप मिक्स करने से वीर्मपात्रा जाने से रथोत्सब उत्सव, प्रतिष्ठा, ग्रह भेजन शहाका करने से, तपा भगवान के सम्मुख जाने से गुरु के सम्मुख जाने से, इस्पानि - के रूप से जो दिसा होने सो सबै दम्प दिसा है, परन्तु भाष दिसा नहीं इसका फल अरूप पाप मन बहुत निर्जय है, पद भगवती सूत्र में लिया है यह हिंसा साधु आदि करते हैं । इस प्रकार श्री विजयात मे एकदम मिथ्या की गप्प भारदी है, भगवती सूत्र में रह प्रकार से कहीं भी नहीं सिखाहै हो शायद सुरिजी में अपनी कोई स्वत मा भगवठी बाहो और इसमें ऐसा कर फिर दूसरों को इस प्रकार बताते रहे हो तो यह दूसरी बात है ? इस प्रकार मन्दिर व मूर्ति के लिए जिन के सुरिचर्य भी अर्थ के अनथे और मिथ्या गप्पे लगाते रहें, वहां सन्य शोधन की तो बात ही कहां रहती है ? इस प्रकार अनेक स्थलों पर मनमानी की गई है, यदि कोई इस विषय की खोज करने को वैठे तो सहज में एक वृहत ग्रन्थ वन सकता है । श्रतएव इस विषय को यहीं पूर्ण कर इनकी टीका नियुक्ति आदि की विपरीतता के भी कुछ प्रमाण दिलाये जाते है - टीका, माध्यादि में विपरीतता कर देने के दुःख से दुखित हो स्वय विजयानन्दसूरिजी जैन तत्वादर्श पृशून्य पैंतीस में लिखते हैं कि"अनेक तरह के भाग्य, टीका, दीपिका, रचकर अर्थो की गड़बड़ कर ढीनी सो श्रव ताई करते ही चले जाते हैं" । यद्यपि श्री विजयानन्दजी का उक्त श्राक्षेप वेदानुयायियों पर है किन्तु यही दशा इन मूर्ति पूजक आर्यों से रचित टीका नियुक्ति भाष्य आदि का भी है, उनमें भी कर्ताओं ने अपनी करतूत चलाने में कसर नहीं रक्खी है, जबकि स्वय विजयानन्दजी ने मूल में प्रक्षेप करते कुछ भी संकोच नहीं किया, और कई स्थानों पर अर्थों के अनर्थ कर दिये जिनके कुछ प्रमाण पहले दिये जा चुके हैं, तब टीका भाप्यादि में गड़बड़ी करने में तो भय ही कौनसा है ? जैसी चाहें वैसी व्याख्या करदें । श्री विजयानन्दजी का पूर्वोक्ल कथन पूर्ण रूपेण इनकी समाज पर चरितार्थ होता है । श्री विजयानन्दसूरि जैन तत्वादर्श पृशून्य तीन सौ बारह पर लिखते हैं कि |
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण लगे लॉकडाउन से पहाड़ से लेकर मैदान तक स्कूल चालक और संचालक भुखमरी की कगार पर पहुंच गए लेकिन कोई इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है। कई संचालकों ने तो तीन महीने से बैंक ऋण की किस्त तक नहीं भरी।
जागरण संवाददाता, देहरादून। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण लगे लॉकडाउन से पहाड़ से लेकर मैदान तक स्कूल चालक और संचालक भुखमरी की कगार पर पहुंच गए, लेकिन कोई इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है। कई संचालकों ने तो तीन महीने से बैंक ऋण की किस्त तक नहीं भरी। स्कूल वैन घर के सामने पार्क देख चालक और संचालकों के परिजन बेहद आहत हैं। इन चालाकें की संख्या 30 हजार से अधिक हैं। कांग्रेस सेवादल महानगर प्रभारी और प्रदेश सचिव पीयूष गौड़ ने उत्तराखंड सरकार को इसके लिए दोषी ठहराया है।
गौड़ ने कहा कि 22 मार्च 2020 को पहले लॉकडाउन से उत्तराखंड में सभी स्कूल बंद हैं। लॉकडाउन से ठीक चार माह पहले उत्तराखंड आरटीओ ने स्कूलों की अवैध वैन की रोकथाम के लिए सभी स्कूल वैन पर पीला रंग और पीली पट्टी लगाना अनिवार्य कर वैन का कमर्शियल रोड टैक्स, कमर्शियल बीमा नियम लागू किया था। इसके अभाव में भारी जुर्माना रखा गया था। सभी स्कूल वैन संचालकों ने जुर्माने से बचने के लिए कमर्शियल टैक्स, बीमा कराया और अतिरिक्त आर्थिक बोझ को वहन किया।
कुछ ही समय में लॉकडाउन हो गया, जिस कारण सभी को अपने स्कूल वाहन घर खड़े करने पड़े और जब से आज तक सभी के स्कूल वैन घरों में खड़े-खड़े खराब हो रही हैं। कुछ मालिकों द्वारा पुनः टैक्स और बीमा करने से बचने के लिए अपने वाहन को बेचकर घर खर्च चलाना पड़ रहा है तो कुछ बेचने को सोच रहे हैं। पर, इस समय उपयुक्त ग्राहक नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे वाजिब दाम भी नहीं मिल पा रहा है। गत वर्ष आरटीओ की ओर से टैक्स में कुछ राहत दी गई थी। पीयूष गौड़ ने कहा कि समय रहते सरकार ने इनकी ओर ध्यान न दिया तो इनके आगे भूखे मरने के सिवा कोई विकल्प नहीं होगा।
कांग्रेस सेवादल ने सरकार से मांग की कि तत्काल पूरे लॉकडाउन समय का टैक्स और बीमा माफ किया जाए। साथ ही कोई अन्य कार्य न होने के कारण लॉकडाउन तक सभी स्कूल वैन चालकों को प्रति माह मुफ्त राशन मुहैया कराए, जो न्यायोचित भी होगा। पहाड़ों में तो हजारों परिवारों की रोजी रोटी यहीं स्कूल वैन हैं। सरकार को महीने के खर्च के निए इन वाहन संचालकों और चालकों को गुजारा भत्ता देना चाहिए।
मांग करने वालों में पीयूष गौड़ प्रदेश सचिव व महानगर प्रभारी सेवादल उत्तराखंड कांग्रेस, अशोक मलहोत्रा, रविन्द्र जैन, वाहिद हुसैन राव, रामजी लाल, वीरेंद्र कन्नौजिया, अंजू नाहर, अकरम और भूपेंद्र धीमान आदि अन्य लोग मौजूद थे।
| कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण लगे लॉकडाउन से पहाड़ से लेकर मैदान तक स्कूल चालक और संचालक भुखमरी की कगार पर पहुंच गए लेकिन कोई इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है। कई संचालकों ने तो तीन महीने से बैंक ऋण की किस्त तक नहीं भरी। जागरण संवाददाता, देहरादून। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के कारण लगे लॉकडाउन से पहाड़ से लेकर मैदान तक स्कूल चालक और संचालक भुखमरी की कगार पर पहुंच गए, लेकिन कोई इस ओर ध्यान देने को तैयार नहीं है। कई संचालकों ने तो तीन महीने से बैंक ऋण की किस्त तक नहीं भरी। स्कूल वैन घर के सामने पार्क देख चालक और संचालकों के परिजन बेहद आहत हैं। इन चालाकें की संख्या तीस हजार से अधिक हैं। कांग्रेस सेवादल महानगर प्रभारी और प्रदेश सचिव पीयूष गौड़ ने उत्तराखंड सरकार को इसके लिए दोषी ठहराया है। गौड़ ने कहा कि बाईस मार्च दो हज़ार बीस को पहले लॉकडाउन से उत्तराखंड में सभी स्कूल बंद हैं। लॉकडाउन से ठीक चार माह पहले उत्तराखंड आरटीओ ने स्कूलों की अवैध वैन की रोकथाम के लिए सभी स्कूल वैन पर पीला रंग और पीली पट्टी लगाना अनिवार्य कर वैन का कमर्शियल रोड टैक्स, कमर्शियल बीमा नियम लागू किया था। इसके अभाव में भारी जुर्माना रखा गया था। सभी स्कूल वैन संचालकों ने जुर्माने से बचने के लिए कमर्शियल टैक्स, बीमा कराया और अतिरिक्त आर्थिक बोझ को वहन किया। कुछ ही समय में लॉकडाउन हो गया, जिस कारण सभी को अपने स्कूल वाहन घर खड़े करने पड़े और जब से आज तक सभी के स्कूल वैन घरों में खड़े-खड़े खराब हो रही हैं। कुछ मालिकों द्वारा पुनः टैक्स और बीमा करने से बचने के लिए अपने वाहन को बेचकर घर खर्च चलाना पड़ रहा है तो कुछ बेचने को सोच रहे हैं। पर, इस समय उपयुक्त ग्राहक नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे वाजिब दाम भी नहीं मिल पा रहा है। गत वर्ष आरटीओ की ओर से टैक्स में कुछ राहत दी गई थी। पीयूष गौड़ ने कहा कि समय रहते सरकार ने इनकी ओर ध्यान न दिया तो इनके आगे भूखे मरने के सिवा कोई विकल्प नहीं होगा। कांग्रेस सेवादल ने सरकार से मांग की कि तत्काल पूरे लॉकडाउन समय का टैक्स और बीमा माफ किया जाए। साथ ही कोई अन्य कार्य न होने के कारण लॉकडाउन तक सभी स्कूल वैन चालकों को प्रति माह मुफ्त राशन मुहैया कराए, जो न्यायोचित भी होगा। पहाड़ों में तो हजारों परिवारों की रोजी रोटी यहीं स्कूल वैन हैं। सरकार को महीने के खर्च के निए इन वाहन संचालकों और चालकों को गुजारा भत्ता देना चाहिए। मांग करने वालों में पीयूष गौड़ प्रदेश सचिव व महानगर प्रभारी सेवादल उत्तराखंड कांग्रेस, अशोक मलहोत्रा, रविन्द्र जैन, वाहिद हुसैन राव, रामजी लाल, वीरेंद्र कन्नौजिया, अंजू नाहर, अकरम और भूपेंद्र धीमान आदि अन्य लोग मौजूद थे। |
आज कोलकाता के ईडन गार्डन में कोलकाता नाईट राइडर्स और रॉयल चैलेंजर बैंगलौर के बीच इस आईपीएल का 48 वाँ मैच खेला गया, टॉस जीतकर रॉयल चैलेंजर बैंगलौर ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया और मेजबान कोलकाता को पहले बल्लेबाजी के लिए निमंत्रित किया.
कोलकाता की पारी की शुरुआत हमेशा की तरह आज भी रोबिन उथप्पा और कप्तान गौतम गंभीर ने किया लेकिन आज रोबिन उथप्पा थोड़े दुर्भाग्यशाली रहे और मात्र 2 के निजी स्कोर पर अब्दुल्लाह को अपना विकेट थमा बैठे इस समय तक कोलकाता 14 गेंदों में मात्र 14 रन ही बना पायी थी, इसके बाद मनीष पाण्डेय बल्लेबाजी के लिए और कप्तान से दबाव हटाते हुए उन्हें खुलकर खेलने का मौका दिया, लेकिन दोनों के बीच थोड़ी सी मिसअंडरस्टैंडिंग की वजह से कप्तान गौतम गम्भीर को वाटसन के हाथों रन आउट होना पड़ा, उस समय तक कोलकाता 10. 3 ओवर में 90 रन बना चुकी थी, जिसमे गंभीर ने 34 गेंदों में 7 चौके से 51 रनों का योगदान दिया, गंभीर के जाने के बाद युसूफ पठान के साथ मनीष पाण्डेय ने भी अपना अर्द्धशतक पूरा किया, लेकिन अर्द्धशतक पूरा करते ही वो अरविन्द की गेंद पर डिविलियर्स को कैच थमा बैठे, पाण्डेय ने 35 गेंदों में 5 चौके और 2 छक्कों की मदद से 50 रन बनाये.
मनीष पाण्डेय के आउट होने के बाद युसूफ पठान भी अपने आप को नहीं रोक पाये आज युसूफ ने काफी धीमी बल्लेबाजी किया और मात्र 6 रन बनाये, जिसके लिए उन्होंने 12 गेंदों के सामना किया. पठान के साथ उपकप्तान सूर्यकुमार यादव ने आज भी निराश किया और मात्र 5 रनों का योगदान टीम को दिया. पठान और यादव के बाद आंद्रे रसेल और शाकिब अल हसन ने अपनी जिम्मेदारी उठाया और तेजी से रन बनाये, दोनों ने 30 गेंदों में 57 रन टीम के लिए जोड़े. रसेल ने 19 गेंदों में 2 चौके और 3 छक्के की मदद से 39 रन बनाये, तो शाकिब ने 11 गेंदों में 1 चौके और 1 छक्के की मदद से 18 रन बनाये.
आरसीबी की तरफ से अब्दुल्लाह सबसे किफायती गेंदबाज रहे उन्होंने 4 ओवर में 22 रन देकर 1 विकेट लिया, तो अरविन्द ने 4 ओवर में 41 रन लुटाकर 2 विकेट लिए.
लक्ष्य का पीछा करने उतरी रॉयल चैलेंजर बैंगलौर की शुरुआत क्रिस गेल और विराट कोहली ने किया, काफी लम्बे समय से आउट ऑफ़ फॉर्म चल रहे क्रिस गेल ने आज कोलकाता के उपर शुरू से ही दबाव बनाये रखा, दुसरे छोर से विराट कोहली स्ट्राइक रोटेट करते रहे, दोनों बल्लेबाजों ने काफी सूझ बुझ से पहले विकेट के लिए 71 रनों की साझेदारी निभाया, इस साझेदारी का अंत सुनील नरेन ने गेल को एल्बीडब्ल्यू करके किया आउट होने से पहले गेल ने 31 गेंदों में 5 चौके और 4 छक्के की मदद से 49 रन बनाये, उसके बाद विराट कोहली का साथ देने पिछले मैच में शतक लगा चुके एबी डिविलियर्स मैदान पर पहुंचे, डिविलियर्स और कोहली ने पहले सम्भलकर खेला ,लेकिन कुछ देर बाद दोनों ने अपने बल्ले का मुहं खोल दिया. और अंत तक मैदान पर डटे रहे दोनों के बीच दुसरे विकेट के लिए 10. 5 ओवर में 115 रनों की साझेदारी हुई जिसकी बदौलत बैंगलौर ने ये मैच 8 गेंद रहते ही 9 विकेट से जीत लिया. बैंगलौर के कप्तान विराट कोहली ने आज भी धमाकेदार पारी खेली और 51 गेंदों में 5 चौके और 3 छक्कों की मदद से 75 रन बनाये, तो उनके साथी डिविलियर्स ने मात्र 31 गेंदों में 5 चौके और 3 छक्कों की मदद से 59 रन ठोक डाले.
कोलकाता की तरफ से सुनील नरेन सबसे सफल गेंदबाज रहे उन्होंने 4 ओवर में 34 रन देकर 1 विकेट लिया.
इन सबके बीच इस मैच के हारने में कप्तान गौतम गंभीर के साथ युसूफ पठान ने अहम भूमिका निभाया, पहले युसूफ ने काफी धीमी पारी खेली और 12 गेंदों में मात्र 6 रन ही बना सके यहाँ से कोलकाता को 20 से 25 रनों का नुकसान हुआ, तो बाद में कप्तान गौतम गंभीर ने विराट कोहली का कैच छोड़कर दूसरी गलती कर डाली, जब कोहली 34 के निजी स्कोर पर बल्लेबाजी कर रहे थे, तो गंभीर ने शाकिब की गेंद पर कोहली का कैच छोड़ा उसके बाद कोहली ने मात्र 22 गेंदों में 41 रनों की तुफानी पारी खेल डाली, जबकि अगर गंभीर यह कैच लपक लेते तो आने वाले बल्लेबाज पर दबाव बढ़ता और वो इतनी तेजी से रन नहीं बना सकता था, वहीं डिविलियर्स भी दबाव में आकर इतनी बड़ी पारी खेलने से डरते इसके लिए वो और कुछ गेंद लेते जिसकी बदौलत कोलकाता यह मैच जीत सकती थी या अंत तक खींच सकती थी.
संछिप्त स्कोरबोर्डः
कोलकाताः 183/5, 20 ओवर में (गौतम गंभीर 51, मनीष पाण्डेय 50, अरविन्द 4-41-2, अब्दुल्लाह 4-22-1)
बैंगलौरः186/1, 18. 4 ओवर में (विराट कोहली 75*, डिविलियर्स 59*, नरेन 4-32-1)
परिणामः बैंगलौर 9 विकेट से विजयी.
| आज कोलकाता के ईडन गार्डन में कोलकाता नाईट राइडर्स और रॉयल चैलेंजर बैंगलौर के बीच इस आईपीएल का अड़तालीस वाँ मैच खेला गया, टॉस जीतकर रॉयल चैलेंजर बैंगलौर ने पहले गेंदबाजी करने का फैसला लिया और मेजबान कोलकाता को पहले बल्लेबाजी के लिए निमंत्रित किया. कोलकाता की पारी की शुरुआत हमेशा की तरह आज भी रोबिन उथप्पा और कप्तान गौतम गंभीर ने किया लेकिन आज रोबिन उथप्पा थोड़े दुर्भाग्यशाली रहे और मात्र दो के निजी स्कोर पर अब्दुल्लाह को अपना विकेट थमा बैठे इस समय तक कोलकाता चौदह गेंदों में मात्र चौदह रन ही बना पायी थी, इसके बाद मनीष पाण्डेय बल्लेबाजी के लिए और कप्तान से दबाव हटाते हुए उन्हें खुलकर खेलने का मौका दिया, लेकिन दोनों के बीच थोड़ी सी मिसअंडरस्टैंडिंग की वजह से कप्तान गौतम गम्भीर को वाटसन के हाथों रन आउट होना पड़ा, उस समय तक कोलकाता दस. तीन ओवर में नब्बे रन बना चुकी थी, जिसमे गंभीर ने चौंतीस गेंदों में सात चौके से इक्यावन रनों का योगदान दिया, गंभीर के जाने के बाद युसूफ पठान के साथ मनीष पाण्डेय ने भी अपना अर्द्धशतक पूरा किया, लेकिन अर्द्धशतक पूरा करते ही वो अरविन्द की गेंद पर डिविलियर्स को कैच थमा बैठे, पाण्डेय ने पैंतीस गेंदों में पाँच चौके और दो छक्कों की मदद से पचास रन बनाये. मनीष पाण्डेय के आउट होने के बाद युसूफ पठान भी अपने आप को नहीं रोक पाये आज युसूफ ने काफी धीमी बल्लेबाजी किया और मात्र छः रन बनाये, जिसके लिए उन्होंने बारह गेंदों के सामना किया. पठान के साथ उपकप्तान सूर्यकुमार यादव ने आज भी निराश किया और मात्र पाँच रनों का योगदान टीम को दिया. पठान और यादव के बाद आंद्रे रसेल और शाकिब अल हसन ने अपनी जिम्मेदारी उठाया और तेजी से रन बनाये, दोनों ने तीस गेंदों में सत्तावन रन टीम के लिए जोड़े. रसेल ने उन्नीस गेंदों में दो चौके और तीन छक्के की मदद से उनतालीस रन बनाये, तो शाकिब ने ग्यारह गेंदों में एक चौके और एक छक्के की मदद से अट्ठारह रन बनाये. आरसीबी की तरफ से अब्दुल्लाह सबसे किफायती गेंदबाज रहे उन्होंने चार ओवर में बाईस रन देकर एक विकेट लिया, तो अरविन्द ने चार ओवर में इकतालीस रन लुटाकर दो विकेट लिए. लक्ष्य का पीछा करने उतरी रॉयल चैलेंजर बैंगलौर की शुरुआत क्रिस गेल और विराट कोहली ने किया, काफी लम्बे समय से आउट ऑफ़ फॉर्म चल रहे क्रिस गेल ने आज कोलकाता के उपर शुरू से ही दबाव बनाये रखा, दुसरे छोर से विराट कोहली स्ट्राइक रोटेट करते रहे, दोनों बल्लेबाजों ने काफी सूझ बुझ से पहले विकेट के लिए इकहत्तर रनों की साझेदारी निभाया, इस साझेदारी का अंत सुनील नरेन ने गेल को एल्बीडब्ल्यू करके किया आउट होने से पहले गेल ने इकतीस गेंदों में पाँच चौके और चार छक्के की मदद से उनचास रन बनाये, उसके बाद विराट कोहली का साथ देने पिछले मैच में शतक लगा चुके एबी डिविलियर्स मैदान पर पहुंचे, डिविलियर्स और कोहली ने पहले सम्भलकर खेला ,लेकिन कुछ देर बाद दोनों ने अपने बल्ले का मुहं खोल दिया. और अंत तक मैदान पर डटे रहे दोनों के बीच दुसरे विकेट के लिए दस. पाँच ओवर में एक सौ पंद्रह रनों की साझेदारी हुई जिसकी बदौलत बैंगलौर ने ये मैच आठ गेंद रहते ही नौ विकेट से जीत लिया. बैंगलौर के कप्तान विराट कोहली ने आज भी धमाकेदार पारी खेली और इक्यावन गेंदों में पाँच चौके और तीन छक्कों की मदद से पचहत्तर रन बनाये, तो उनके साथी डिविलियर्स ने मात्र इकतीस गेंदों में पाँच चौके और तीन छक्कों की मदद से उनसठ रन ठोक डाले. कोलकाता की तरफ से सुनील नरेन सबसे सफल गेंदबाज रहे उन्होंने चार ओवर में चौंतीस रन देकर एक विकेट लिया. इन सबके बीच इस मैच के हारने में कप्तान गौतम गंभीर के साथ युसूफ पठान ने अहम भूमिका निभाया, पहले युसूफ ने काफी धीमी पारी खेली और बारह गेंदों में मात्र छः रन ही बना सके यहाँ से कोलकाता को बीस से पच्चीस रनों का नुकसान हुआ, तो बाद में कप्तान गौतम गंभीर ने विराट कोहली का कैच छोड़कर दूसरी गलती कर डाली, जब कोहली चौंतीस के निजी स्कोर पर बल्लेबाजी कर रहे थे, तो गंभीर ने शाकिब की गेंद पर कोहली का कैच छोड़ा उसके बाद कोहली ने मात्र बाईस गेंदों में इकतालीस रनों की तुफानी पारी खेल डाली, जबकि अगर गंभीर यह कैच लपक लेते तो आने वाले बल्लेबाज पर दबाव बढ़ता और वो इतनी तेजी से रन नहीं बना सकता था, वहीं डिविलियर्स भी दबाव में आकर इतनी बड़ी पारी खेलने से डरते इसके लिए वो और कुछ गेंद लेते जिसकी बदौलत कोलकाता यह मैच जीत सकती थी या अंत तक खींच सकती थी. संछिप्त स्कोरबोर्डः कोलकाताः एक सौ तिरासी/पाँच, बीस ओवर में बैंगलौरःएक सौ छियासी/एक, अट्ठारह. चार ओवर में परिणामः बैंगलौर नौ विकेट से विजयी. |
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने मंगलवार को कहा कि कराची स्टॉक एक्सचेंज पर हुए हमले के लिए भारत जिम्मेदार है। सोमवार को हुए इस हमले में 9 लोग मारे गए थे और 7 घायल हुए थे। इसमें हमला करने आए 4 आतंकियों को भी ढेर कर दिया गया था।
पाकिस्तानी न्यूज चैनल जियो न्यूज के मुताबिक, इमरान खान ने संसद में कहा कि बेशक स्टॉक एक्सचेंज पर हुए आतंकी हमले में भारत की भी भूमिका थी। हालांकि, हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान आर्मी ने ली थी। हमले के लिए एक गाड़ी में 4 आतंकी आए थे। उनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक और एक 47 राइफल बरामद की गई थीं। पिछले साल कराची में चीनी दूतावास पर हुए हमले की भी इन्होंने जिम्मदारी ली थी। उस हमले में भी इसी तरह गाड़ी का इस्तेमाल किया गया था।
| पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने मंगलवार को कहा कि कराची स्टॉक एक्सचेंज पर हुए हमले के लिए भारत जिम्मेदार है। सोमवार को हुए इस हमले में नौ लोग मारे गए थे और सात घायल हुए थे। इसमें हमला करने आए चार आतंकियों को भी ढेर कर दिया गया था। पाकिस्तानी न्यूज चैनल जियो न्यूज के मुताबिक, इमरान खान ने संसद में कहा कि बेशक स्टॉक एक्सचेंज पर हुए आतंकी हमले में भारत की भी भूमिका थी। हालांकि, हमले की जिम्मेदारी बलूचिस्तान आर्मी ने ली थी। हमले के लिए एक गाड़ी में चार आतंकी आए थे। उनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक और एक सैंतालीस राइफल बरामद की गई थीं। पिछले साल कराची में चीनी दूतावास पर हुए हमले की भी इन्होंने जिम्मदारी ली थी। उस हमले में भी इसी तरह गाड़ी का इस्तेमाल किया गया था। |
नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में आठ वर्ष पूरे किए। इसमें दो वर्ष वैश्विक कोरोना महामारी का प्रकोप रहा। इसने दुनिया के विकसित देशों को भी हिला कर रख दिया। सभी देशों की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव हुआ। इससे अभी संभलने का प्रयास चल रहा था, तभी रूस यूक्रेन संकट सामने आ गया। इन सभी कारणों से पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ी है। अमेरिका व यूरोप के विकसित देशों में कई दशक कर बाद ऐसी मंहगाई देखी जा रही है।
मोदी सरकार ने तो इस अवधि में दुनिया की सबसे बड़ी निशुल्क राहत वितरण योजना का संचालन किया। दुनिया का सबसे बड़ा निशुल्क टीकाकरण अभियान चलाया। इसके अलावा राहत के अनेक कार्य किये गए। जाहिर है कि परिस्थितियां प्रतिकूल रही है। मंहगाई बढ़ी है। दुनिया का कोई देश इससे बचा नहीं है। किंतु भारत का विपक्ष नकारात्मक राजनीति से बाहर निकलने को तैयार नहीं है। निष्पक्षता के नाम पर नकारात्मक प्रचार करने वाले पत्रकार भी इसमें शामिल है।
वह बता रहे है कि आठ वर्षों में महंगाई की दर सर्वाधिक है। किंतु उनके विश्लेषण में दुनिया की परिस्थिति शामिल नहीं है। यूपीए सरकार तेल उत्पादक देशों व कम्पनियों का कई लाख करोड़ रुपये का कर्ज छोड़ गई थी। इसकी भरपाई भी वर्तमान सरकार को करना पड़ रहा है। इन आठ वर्षों में अनेक संवेदनशील समस्याओं का समाधान हुआ। यह सभी नरेंद्र मोदी सरकार के कारण ही संभव हुआ। यदि कोई अन्य सरकार होती तो इन मसलों पर चर्चा तक मुनासिब ना होती। कांग्रेस के अनेक दिग्गज नेता श्री रामजन्म भूमि सुनवाई को टालने के लिए जमीन आसमान एक कर रहे थे।
श्री रामजन्म भूमि का विवाद पांच शताब्दी पुराना था। कहा जा रहा था कि दोनों पक्ष सहमति से इसका समाधान निकालें या कोर्ट का फैसला माने। सहमति से समाधान असंभव था। मंदिर के विरोध में बाकायदा एक्शन कमेटी बनी थी। अपने को सेक्युलर घोषित करने वाले भी मंदिर निर्माण के विरोधी थे। नरेंद्र मोदी सरकार ने कोर्ट में शीघ्र का मार्ग प्रशस्त किया। इससे सदियों से लंबित समस्या का समाधान शांतिपूर्ण ढंग से हुआ। छब्बीस मई को मंदिर का निर्माण कार्य भी शुरू हो गया। तीन तलाक पर प्रतिबंध भी नरेंद्र मोदी सरकार के कारण संभव हुआ। अनेक मुस्लिम देश इस पर रोक लगा चुके है। लेकिन भारत में रोक की बात को ही साम्प्रदायिक करार दिया जाता था। लेकिन मोदी सरकार ने इसकी कोई चिंता नहीं की। उसने पहल की, अंततः तीन तलाक व हलाला की कुप्रथा समाप्त हुई। मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिला।
अनुच्छेद तीन सौ सत्तर और पैंतीस ए का विरोध करना भी साम्प्रदायिकता माना जाता था। सेक्युलर दिखने के लिए इन अलगाववादी प्रावधानों का समर्थन जरूरी था। संसद में इस पर चली बहस से यह प्रमाणित भी हुआ। इसके हटने पर गम्भीर परिणाम की चेतावनी तक दी गई। लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने इसको हटा कर ही दम लिया। देश में सत्तर वर्ष बाद एक विधान एक निशान लागू हुआ। इसी प्रकार पाकिस्तान, बांगलादेश, अफगानिस्तान के उत्पीड़ित हिन्दू,बौद्ध, सिख,पारसी को न्याय मिला। नागरिकता संशोधन कानून लागू हुआ। इसका जिस प्रकार विरोध किया गया उससे जाहिर हुआ कि मोदी सरकार ना होती तो इन उत्पीड़ितों की सुनने वाला कोई नहीं था।
आत्मनिर्भर भारत की नींव रखी है। इसलिए देश विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। मोदी ने अपनी दूरदर्शी नीतियों,समर्पण और टीम इंडिया की भावना के साथ देश के लोकतंत्र को एक नई दिशा दी है।
सरकार के प्रत्येक निर्णय लोक कल्याण व राष्ट्रीय हित के अनुरूप है। मोदी ने दशकों से लंबित फैसलों को लागू किया। कोरोना के बाद अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाना दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। भारत में दुनिया को चकित और प्रेरित करने का सामर्थ्य है। लेकिन इसके लिए पहले देश को आत्मनिर्भर बनाना होगा। बीस लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज के सहारे भारत आयात पर निर्भरता कम होगी। भारत आत्मनिर्भर बनेगा। इससे भारत की विकास यात्रा को नई गति मिली है। सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद के गठन किया गया। आपदा के इस दौर में उत्पीड़ित लोगों को भारतीय नागरिकता मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसके विरोध में जम कर हंगामा हुआ था। हंगामे के समर्थन करने वाले दलों व इसे लागू ना करने वाली राज्य सरकारों को शर्मिंदा होना चाहिए।
केंद्र सरकार ने पाकिस्तान अफगानिस्तान और बांग्लादेश उत्पीड़ित हिन्दू बौद्ध सिख आफ शरणार्थियों से भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। ये शरणार्थी गुजरात राजस्थान,छत्तीसगढ़ हरियाणा तथा पंजाब के तेरह जिलों में हैं। गृह मंत्रालय ने इस बारे में अधिसूचना जारी की है। सीएए के कारण ही उनके भारतीय नागरिक बनने का रास्ता साफ हुआ था। आजादी के बाद सात दशकों में देश के केवल साढ़े तीन करोड़ ग्रामीण घरों में ही पानी के कनेक्शन थे। लेकिन पिछले पिछले महीनों में ही साढ़े चार करोड़ घरों को साफ पानी कनेक्शन दिए गए हैं। दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान लागू की गई। इसके दायरे में पचास करोड़ लोग है। आठ सालों में भारत ने डिजिटल लेनदेन में दुनिया को नई दिशा दिखाने का काम किया है। रिकॉर्ड सैटेलाइट प्रक्षेपित किये जा रहे हैं। रिकॉर्ड सड़कें बनाई जा हैं। दशकों से लंबित अनेक योजनाएं पूरी की गई। अनेक पुराने विवाद भी पूरी शांति और सौहार्द से सुलझाए गए हैं।
पूर्वोत्तर से लेकर कश्मीर तक शांति और विकास का एक नया भरोसा जगा है। करोड़ों की संख्या में गरीबों के लिए आवास,शौचालय बनाये गए,निशुल्क गैस सिलेंडर दिए गए। स्वरोजगार के लिए मुद्रा बैंक ने बड़ी संख्या में लोगों को लाभान्वित किया। स्वनिधि योजना से भी गरीब व्यवसायियों को लाभ मिल रहा है। अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक पैकेज दिया गया। कोरोना काल में अस्सी करोड़ लोगों को निशुल्क राशन की व्यवस्था की गई। जन औषधी दवा केन्द्र की संख्या अस्सी से बढ़कर पांच हजार हो गई। करीब सवा सौ नये मेडिकल कालेज खुले है। यूपीए के दस वर्ष में भारतीय रेल ने मात्र चार सौ तेरह रेल रोड ब्रिज और अंडर ब्रिज का निर्माण किया।
मोदी सरकार ने इससे तीन गुना अधिक निर्मांण किया। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के पन्द्रह करोड़ से ज्यादा लाभार्थी है। यह दुनिया की सबसे सस्ती योजना है। बिजली उत्पादन चालीस प्रतिशत वृद्धि हुई। सोलर ऊर्जा में आठ गुना वृद्धि हुई। फसल बीमा योजना का लाभ पहले पचास प्रतिशत नुकसान पर मिलता था। अब किसान को तैतीस प्रतिशत पर भी मिल जाता है। युरिया को नीम कोटेड किया कलाबाजारी खत्म हुई। देश मे युरिया की कोई कमी नहीं है। बारह करोड़ लोगों को मुद्रा योजना से ऋण मिला। इतने ही किसानों को सम्मान निधि दी जा रही है। पिछली सरकारों के समय बावन सेटेलाईट लाँच किये थे। मोदी सरकार ने अब तक देशी विदेशी करीब तीन सौ सेटेलाईट लाँच कर चुकी हैं। यूपीए के समय ग्रामीण सडक से जुडी बस्ती मात्र पचपन प्रतिशत थी। अब करीब पंचानबे प्रतिशत हैं।
| नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में आठ वर्ष पूरे किए। इसमें दो वर्ष वैश्विक कोरोना महामारी का प्रकोप रहा। इसने दुनिया के विकसित देशों को भी हिला कर रख दिया। सभी देशों की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव हुआ। इससे अभी संभलने का प्रयास चल रहा था, तभी रूस यूक्रेन संकट सामने आ गया। इन सभी कारणों से पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ी है। अमेरिका व यूरोप के विकसित देशों में कई दशक कर बाद ऐसी मंहगाई देखी जा रही है। मोदी सरकार ने तो इस अवधि में दुनिया की सबसे बड़ी निशुल्क राहत वितरण योजना का संचालन किया। दुनिया का सबसे बड़ा निशुल्क टीकाकरण अभियान चलाया। इसके अलावा राहत के अनेक कार्य किये गए। जाहिर है कि परिस्थितियां प्रतिकूल रही है। मंहगाई बढ़ी है। दुनिया का कोई देश इससे बचा नहीं है। किंतु भारत का विपक्ष नकारात्मक राजनीति से बाहर निकलने को तैयार नहीं है। निष्पक्षता के नाम पर नकारात्मक प्रचार करने वाले पत्रकार भी इसमें शामिल है। वह बता रहे है कि आठ वर्षों में महंगाई की दर सर्वाधिक है। किंतु उनके विश्लेषण में दुनिया की परिस्थिति शामिल नहीं है। यूपीए सरकार तेल उत्पादक देशों व कम्पनियों का कई लाख करोड़ रुपये का कर्ज छोड़ गई थी। इसकी भरपाई भी वर्तमान सरकार को करना पड़ रहा है। इन आठ वर्षों में अनेक संवेदनशील समस्याओं का समाधान हुआ। यह सभी नरेंद्र मोदी सरकार के कारण ही संभव हुआ। यदि कोई अन्य सरकार होती तो इन मसलों पर चर्चा तक मुनासिब ना होती। कांग्रेस के अनेक दिग्गज नेता श्री रामजन्म भूमि सुनवाई को टालने के लिए जमीन आसमान एक कर रहे थे। श्री रामजन्म भूमि का विवाद पांच शताब्दी पुराना था। कहा जा रहा था कि दोनों पक्ष सहमति से इसका समाधान निकालें या कोर्ट का फैसला माने। सहमति से समाधान असंभव था। मंदिर के विरोध में बाकायदा एक्शन कमेटी बनी थी। अपने को सेक्युलर घोषित करने वाले भी मंदिर निर्माण के विरोधी थे। नरेंद्र मोदी सरकार ने कोर्ट में शीघ्र का मार्ग प्रशस्त किया। इससे सदियों से लंबित समस्या का समाधान शांतिपूर्ण ढंग से हुआ। छब्बीस मई को मंदिर का निर्माण कार्य भी शुरू हो गया। तीन तलाक पर प्रतिबंध भी नरेंद्र मोदी सरकार के कारण संभव हुआ। अनेक मुस्लिम देश इस पर रोक लगा चुके है। लेकिन भारत में रोक की बात को ही साम्प्रदायिक करार दिया जाता था। लेकिन मोदी सरकार ने इसकी कोई चिंता नहीं की। उसने पहल की, अंततः तीन तलाक व हलाला की कुप्रथा समाप्त हुई। मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिला। अनुच्छेद तीन सौ सत्तर और पैंतीस ए का विरोध करना भी साम्प्रदायिकता माना जाता था। सेक्युलर दिखने के लिए इन अलगाववादी प्रावधानों का समर्थन जरूरी था। संसद में इस पर चली बहस से यह प्रमाणित भी हुआ। इसके हटने पर गम्भीर परिणाम की चेतावनी तक दी गई। लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने इसको हटा कर ही दम लिया। देश में सत्तर वर्ष बाद एक विधान एक निशान लागू हुआ। इसी प्रकार पाकिस्तान, बांगलादेश, अफगानिस्तान के उत्पीड़ित हिन्दू,बौद्ध, सिख,पारसी को न्याय मिला। नागरिकता संशोधन कानून लागू हुआ। इसका जिस प्रकार विरोध किया गया उससे जाहिर हुआ कि मोदी सरकार ना होती तो इन उत्पीड़ितों की सुनने वाला कोई नहीं था। आत्मनिर्भर भारत की नींव रखी है। इसलिए देश विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। मोदी ने अपनी दूरदर्शी नीतियों,समर्पण और टीम इंडिया की भावना के साथ देश के लोकतंत्र को एक नई दिशा दी है। सरकार के प्रत्येक निर्णय लोक कल्याण व राष्ट्रीय हित के अनुरूप है। मोदी ने दशकों से लंबित फैसलों को लागू किया। कोरोना के बाद अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाना दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। भारत में दुनिया को चकित और प्रेरित करने का सामर्थ्य है। लेकिन इसके लिए पहले देश को आत्मनिर्भर बनाना होगा। बीस लाख करोड़ रुपये के आत्मनिर्भर भारत पैकेज के सहारे भारत आयात पर निर्भरता कम होगी। भारत आत्मनिर्भर बनेगा। इससे भारत की विकास यात्रा को नई गति मिली है। सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद के गठन किया गया। आपदा के इस दौर में उत्पीड़ित लोगों को भारतीय नागरिकता मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ। इसके विरोध में जम कर हंगामा हुआ था। हंगामे के समर्थन करने वाले दलों व इसे लागू ना करने वाली राज्य सरकारों को शर्मिंदा होना चाहिए। केंद्र सरकार ने पाकिस्तान अफगानिस्तान और बांग्लादेश उत्पीड़ित हिन्दू बौद्ध सिख आफ शरणार्थियों से भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। ये शरणार्थी गुजरात राजस्थान,छत्तीसगढ़ हरियाणा तथा पंजाब के तेरह जिलों में हैं। गृह मंत्रालय ने इस बारे में अधिसूचना जारी की है। सीएए के कारण ही उनके भारतीय नागरिक बनने का रास्ता साफ हुआ था। आजादी के बाद सात दशकों में देश के केवल साढ़े तीन करोड़ ग्रामीण घरों में ही पानी के कनेक्शन थे। लेकिन पिछले पिछले महीनों में ही साढ़े चार करोड़ घरों को साफ पानी कनेक्शन दिए गए हैं। दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान लागू की गई। इसके दायरे में पचास करोड़ लोग है। आठ सालों में भारत ने डिजिटल लेनदेन में दुनिया को नई दिशा दिखाने का काम किया है। रिकॉर्ड सैटेलाइट प्रक्षेपित किये जा रहे हैं। रिकॉर्ड सड़कें बनाई जा हैं। दशकों से लंबित अनेक योजनाएं पूरी की गई। अनेक पुराने विवाद भी पूरी शांति और सौहार्द से सुलझाए गए हैं। पूर्वोत्तर से लेकर कश्मीर तक शांति और विकास का एक नया भरोसा जगा है। करोड़ों की संख्या में गरीबों के लिए आवास,शौचालय बनाये गए,निशुल्क गैस सिलेंडर दिए गए। स्वरोजगार के लिए मुद्रा बैंक ने बड़ी संख्या में लोगों को लाभान्वित किया। स्वनिधि योजना से भी गरीब व्यवसायियों को लाभ मिल रहा है। अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक पैकेज दिया गया। कोरोना काल में अस्सी करोड़ लोगों को निशुल्क राशन की व्यवस्था की गई। जन औषधी दवा केन्द्र की संख्या अस्सी से बढ़कर पांच हजार हो गई। करीब सवा सौ नये मेडिकल कालेज खुले है। यूपीए के दस वर्ष में भारतीय रेल ने मात्र चार सौ तेरह रेल रोड ब्रिज और अंडर ब्रिज का निर्माण किया। मोदी सरकार ने इससे तीन गुना अधिक निर्मांण किया। प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के पन्द्रह करोड़ से ज्यादा लाभार्थी है। यह दुनिया की सबसे सस्ती योजना है। बिजली उत्पादन चालीस प्रतिशत वृद्धि हुई। सोलर ऊर्जा में आठ गुना वृद्धि हुई। फसल बीमा योजना का लाभ पहले पचास प्रतिशत नुकसान पर मिलता था। अब किसान को तैतीस प्रतिशत पर भी मिल जाता है। युरिया को नीम कोटेड किया कलाबाजारी खत्म हुई। देश मे युरिया की कोई कमी नहीं है। बारह करोड़ लोगों को मुद्रा योजना से ऋण मिला। इतने ही किसानों को सम्मान निधि दी जा रही है। पिछली सरकारों के समय बावन सेटेलाईट लाँच किये थे। मोदी सरकार ने अब तक देशी विदेशी करीब तीन सौ सेटेलाईट लाँच कर चुकी हैं। यूपीए के समय ग्रामीण सडक से जुडी बस्ती मात्र पचपन प्रतिशत थी। अब करीब पंचानबे प्रतिशत हैं। |
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का शनिवार को निधन हो गया. 89 साल के कल्याण सिंह लंबे वक्त से बीमार थे और लखनऊ पीजीआई में भर्ती थे. कल्याण सिंह के निधन के बाद भारतीय राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई. उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, उमा भारती समेत तमाम बड़े नेताओं ने दुख जताया है.
पीएम ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा, भारत के सांस्कृतिक उत्थान में उनके योगदान के लिए आने वाली पीढ़ियां हमेशा कल्याण सिंह जी की आभारी रहेंगी. वह दृढ़ता से भारतीय मूल्यों में निहित थे और हमारी सदियों पुरानी परंपराओं पर गर्व करते थे. पीएम ने कहा, कल्याण सिंह जी ने हाशिए पर खड़े समाज के करोड़ो लोगों को आवाज दी. किसानों, युवाओं और महिलाओं को सशक्त किया.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, कल्याण सिंह जी के निधन से मैंने अपना बड़ा भाई और साथी खोया है. उनके निधन से आई रिक्तता की भरपाई लगभग असम्भव है. ईश्वर उनके शोक संतप्त परिवार को दुःख की इस कठिन घड़ी में धैर्य और संबल प्रदान करे. ओम शान्ति!
उन्होंने दूसरे ट्वीट में कहा, जनसंघ के समय से ही उन्होंने भाजपा को मजबूत बनाने और समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत की. श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन में भी उनकी महती भूमिका के लिए उन्हें यह देश हमेशा याद रखेगा. उनका निधन भारतीय राजनीति के लिए बड़ी क्षति है और मेरे लिए तो यह बहुत ही पीड़ादायक क्षण है. उन्होंने कहा, कल्याण सिंह जी उ. प्र. ही नहीं भारतीय राजनीति की वह कद्दावर हस्ती थे, जिन्होंने अपने व्यक्तित्व एवं कृतित्व से देश और समाज पर एक अमिट छाप छोड़ी. उनका लम्बा राजनीतिक जीवन जनता-जनार्दन की सेवा में समर्पित रहा. वे उत्तर प्रदेश के अत्यंत लोकप्रिय मुख्यमंत्री के रूप में जाने गए.
श्री कल्याण सिंह जी के निधन से मैंने अपना बड़ा भाई और साथी खोया है। उनके निधन से आई रिक्तता की भरपाई लगभग असम्भव है। ईश्वर उनके शोक संतप्त परिवार को दुःख की इस कठिन घड़ी में धैर्य और संबल प्रदान करे। ओम शान्ति!
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, कल्याण सिंह जी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी कर्तव्यनिष्ठा व राजनीतिक कौशल से सुशासन की संकल्पना को साकार कर जनता को भय व अपराध से मुक्त एक जनकल्याणकारी शासन दिया और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार कर आने वाली सरकारों के लिए उत्कृष्ट आदर्श भी स्थापित किए.
उन्होंने ट्वीट किया, जन-जन के हृदय में बसने वाले प्रखर राष्ट्रवादी आदरणीय कल्याण सिंह जी जैसा महान व्यक्तित्व ढूंढने पर विरले ही मिलता है. बाबूजी ने अपनी कर्मठता से विभिन्न संवैधानिक पदों पर रहते हुए किसान, गरीब और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर देश की प्रगति में अपना अनुपम योगदान दिया.
जन-जन के हृदय में बसने वाले प्रखर राष्ट्रवादी आदरणीय कल्याण सिंह जी जैसा महान व्यक्तित्व ढूंढने पर विरले ही मिलता है।
बाबूजी ने अपनी कर्मठता से विभिन्न संवैधानिक पदों पर रहते हुए किसान, गरीब और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर देश की प्रगति में अपना अनुपम योगदान दिया।
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कल्याण सिंह के निधन पर शोक जताया. उन्होंने कहा, कल्याण सिंह का निधन राजनीति के एक युग का अंत है.
कल्याण सिंह जी के निधन से आज हमने एक ऐसा विराट व्यक्तित्व खो दिया जिसने अपने राजनीतिक कौशल, प्रशासकीय अनुभव और विकासोन्मुखी दृष्टिकोण से राष्ट्रीय स्तर पर एक अमिट छाप छोड़ी। वे वंचित वर्ग के उत्थान और सभी वर्गों के कल्याण को समर्पित रहे। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।
ओम बिरला ने कहा, कल्याण सिंह जी के निधन से आज हमने एक विराट व्यक्तित्व खो दिया. अपनी सहजता व सरलता के कारण वे जनता में लोकप्रिय थे. अपने राजनीतिक कौशल, प्रशासकीय अनुभव और विकासोन्मुखी दृष्टिकोण से राष्ट्रीय स्तर पर अमिट छाप छोड़ी. वे वंचित वर्ग के उत्थान और सभी वर्गों के कल्याण को समर्पित रहे. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने प्रदेश के विकास को नई गति दी. उनके सुदीर्घ अनुभव का लाभ राजस्थान व हिमाचल प्रदेश को भी मिला.
हमारे वरिष्ठ नेता आदरणीय कल्याण सिंह जी के निधन का समाचार सुनकर अत्यंत व्यथित हूं। जनसंघ और भाजपा को उत्तर प्रदेश में खड़ा करने में कल्याण सिंह जी का सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
| नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का शनिवार को निधन हो गया. नवासी साल के कल्याण सिंह लंबे वक्त से बीमार थे और लखनऊ पीजीआई में भर्ती थे. कल्याण सिंह के निधन के बाद भारतीय राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई. उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, उमा भारती समेत तमाम बड़े नेताओं ने दुख जताया है. पीएम ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा, भारत के सांस्कृतिक उत्थान में उनके योगदान के लिए आने वाली पीढ़ियां हमेशा कल्याण सिंह जी की आभारी रहेंगी. वह दृढ़ता से भारतीय मूल्यों में निहित थे और हमारी सदियों पुरानी परंपराओं पर गर्व करते थे. पीएम ने कहा, कल्याण सिंह जी ने हाशिए पर खड़े समाज के करोड़ो लोगों को आवाज दी. किसानों, युवाओं और महिलाओं को सशक्त किया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, कल्याण सिंह जी के निधन से मैंने अपना बड़ा भाई और साथी खोया है. उनके निधन से आई रिक्तता की भरपाई लगभग असम्भव है. ईश्वर उनके शोक संतप्त परिवार को दुःख की इस कठिन घड़ी में धैर्य और संबल प्रदान करे. ओम शान्ति! उन्होंने दूसरे ट्वीट में कहा, जनसंघ के समय से ही उन्होंने भाजपा को मजबूत बनाने और समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए कड़ी मेहनत की. श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन में भी उनकी महती भूमिका के लिए उन्हें यह देश हमेशा याद रखेगा. उनका निधन भारतीय राजनीति के लिए बड़ी क्षति है और मेरे लिए तो यह बहुत ही पीड़ादायक क्षण है. उन्होंने कहा, कल्याण सिंह जी उ. प्र. ही नहीं भारतीय राजनीति की वह कद्दावर हस्ती थे, जिन्होंने अपने व्यक्तित्व एवं कृतित्व से देश और समाज पर एक अमिट छाप छोड़ी. उनका लम्बा राजनीतिक जीवन जनता-जनार्दन की सेवा में समर्पित रहा. वे उत्तर प्रदेश के अत्यंत लोकप्रिय मुख्यमंत्री के रूप में जाने गए. श्री कल्याण सिंह जी के निधन से मैंने अपना बड़ा भाई और साथी खोया है। उनके निधन से आई रिक्तता की भरपाई लगभग असम्भव है। ईश्वर उनके शोक संतप्त परिवार को दुःख की इस कठिन घड़ी में धैर्य और संबल प्रदान करे। ओम शान्ति! गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, कल्याण सिंह जी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी कर्तव्यनिष्ठा व राजनीतिक कौशल से सुशासन की संकल्पना को साकार कर जनता को भय व अपराध से मुक्त एक जनकल्याणकारी शासन दिया और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार कर आने वाली सरकारों के लिए उत्कृष्ट आदर्श भी स्थापित किए. उन्होंने ट्वीट किया, जन-जन के हृदय में बसने वाले प्रखर राष्ट्रवादी आदरणीय कल्याण सिंह जी जैसा महान व्यक्तित्व ढूंढने पर विरले ही मिलता है. बाबूजी ने अपनी कर्मठता से विभिन्न संवैधानिक पदों पर रहते हुए किसान, गरीब और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर देश की प्रगति में अपना अनुपम योगदान दिया. जन-जन के हृदय में बसने वाले प्रखर राष्ट्रवादी आदरणीय कल्याण सिंह जी जैसा महान व्यक्तित्व ढूंढने पर विरले ही मिलता है। बाबूजी ने अपनी कर्मठता से विभिन्न संवैधानिक पदों पर रहते हुए किसान, गरीब और वंचित वर्ग को विकास की मुख्यधारा से जोड़कर देश की प्रगति में अपना अनुपम योगदान दिया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कल्याण सिंह के निधन पर शोक जताया. उन्होंने कहा, कल्याण सिंह का निधन राजनीति के एक युग का अंत है. कल्याण सिंह जी के निधन से आज हमने एक ऐसा विराट व्यक्तित्व खो दिया जिसने अपने राजनीतिक कौशल, प्रशासकीय अनुभव और विकासोन्मुखी दृष्टिकोण से राष्ट्रीय स्तर पर एक अमिट छाप छोड़ी। वे वंचित वर्ग के उत्थान और सभी वर्गों के कल्याण को समर्पित रहे। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। ओम बिरला ने कहा, कल्याण सिंह जी के निधन से आज हमने एक विराट व्यक्तित्व खो दिया. अपनी सहजता व सरलता के कारण वे जनता में लोकप्रिय थे. अपने राजनीतिक कौशल, प्रशासकीय अनुभव और विकासोन्मुखी दृष्टिकोण से राष्ट्रीय स्तर पर अमिट छाप छोड़ी. वे वंचित वर्ग के उत्थान और सभी वर्गों के कल्याण को समर्पित रहे. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने प्रदेश के विकास को नई गति दी. उनके सुदीर्घ अनुभव का लाभ राजस्थान व हिमाचल प्रदेश को भी मिला. हमारे वरिष्ठ नेता आदरणीय कल्याण सिंह जी के निधन का समाचार सुनकर अत्यंत व्यथित हूं। जनसंघ और भाजपा को उत्तर प्रदेश में खड़ा करने में कल्याण सिंह जी का सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहा है। |
Venla XR 75 Capsule डॉक्टर के पर्चे द्वारा मिलने वाली दवा है, जो कैप्सूल के रूप में उपलब्ध है। डिप्रेशन के लिए मुख्य रूप से इस्तेमाल की जाती है। इसके अलावा Venla XR 75 Capsule का उपयोग कुछ दूसरी समस्याओं के लिए भी किया जा सकता है। इनके बारे में नीचे विस्तार से जानकारी दी गयी है।
आयु, लिंग और रोगी की पिछली स्वास्थ्य जानकारी के अनुसार Venla XR 75 Capsule की खुराक दी जाती है। यह खुराक मरीज की परेशानी और दवा देने के तरीके पर निर्भर करती है। इस बारे में और अधिक जानने के लिए खुराक वाले खंड में पढ़ें।
इन दुष्परिणामों के अलावा Venla XR 75 Capsule के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। Venla XR 75 Capsule के दुष्प्रभाव जल्दी ही खत्म हो जाते हैं और इलाज के बाद जारी नहीं रहते। अगर ये दुष्प्रभाव और ज्यादा बिगड़ जाते हैं या ठीक नहीं होते तो अपने डॉक्टर से तुरंत बात करें।
इसके अलावा Venla XR 75 Capsule को गर्भावस्था के दौरान लेने पर प्रभाव मध्यम होता है और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए इसका प्रभाव गंभीर है। आगे Venla XR 75 Capsule से जुड़ी चेतावनियों के सेक्शन में बताया गया है कि Venla XR 75 Capsule का लिवर, हार्ट, किडनी पर क्या असर होता है।
यदि किसी व्यक्ति को आत्महत्या जैसी कोई समस्या है, तो उसे Venla XR 75 Capsule दवा नहीं लेनी चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसी कुछ अन्य समस्याएं भी हैं, जीने बारे में नीचे बताया गया है। अगर आपको इनमें से कोई भी समस्या है, तो Venla XR 75 Capsule न लें।
Venla XR 75 Capsule को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। पूरी जानकारी के लिए नीचे दी गई जानकारी देखें।
ऊपर बताई गई सावधानियों के अलावा यह भी ध्यान में रखें कि वाहन चलाते वक्त Venla XR 75 Capsule लेना असुरक्षित है, साथ ही इसकी लत नहीं पड़ सकती है।
यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Venla XR 75 Capsule की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Venla XR 75 Capsule की खुराक अलग हो सकती है।
क्या Venla XR 75 Capsule का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है?
Venla XR से प्रेग्नेंट महिला के शरीर पर कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ऐसा आपके साथ भी हो तो आप दवा ना लें और आपने डॉक्टर से पूछने के बाद ही इसको फिर से शरू करें।
क्या Venla XR 75 Capsule का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है?
Venla XR के स्तनपान कराने वाली स्त्रियों पर घातक दुष्प्रभाव होते हैं। इस कारण डॉक्टर से पूछे बिना इसका सेवन न करें।
Venla XR 75 Capsule का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है?
Venla XR का इस्तेमाल हम कर सकते हैं, क्योंकि इसका दुष्प्रभाव बहुत कम है।
Venla XR 75 Capsule का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है?
Venla XR का सेवन करना आपके शरीर पर बहुत ही कम प्रभाव डालता है।
क्या ह्रदय पर Venla XR 75 Capsule का प्रभाव पड़ता है?
दिल पर Venla XR के हानिकारक प्रभाव काफी कम देखे गए हैं।
क्या Venla XR 75 Capsule आदत या लत बन सकती है?
Venla XR 75 Capsule की लत नहीं लगती, लेकिन फिर भी आपको इसे लेने से पहले सर्तकता बरतनी बेहद जरूरी है और इस विषय पर डॉक्टरी सलाह अवश्य लें।
क्या Venla XR 75 Capsule को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है?
किसी मशीन के अलावा वाहन को चलाने में दिमागी सक्रियता की बेहद जरूरत होती है। लेकिन Venla XR 75 Capsule को खाने से आपको नींद व थकान होने लगती है। इसलिए इन कामों को करने से बचें।
क्या Venla XR 75 Capsule को लेना सुरखित है?
हां, लेकिन डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Venla XR 75 Capsule इस्तेमाल की जा सकती है?
हां, कई मामलों में Venla XR 75 Capsule को लेने से दिमागी विकार ठीक हो जाता है।
क्या Venla XR 75 Capsule को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है?
आप खाने के साथ भी Venla XR 75 Capsule को ले सकते हैं।
जब Venla XR 75 Capsule ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या?
Venla XR 75 Capsule व शराब का सेवन आपके स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Effexor XR® (venlafaxine)
US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Effexor® (venlafaxine hydrochloride)
| Venla XR पचहत्तर Capsule डॉक्टर के पर्चे द्वारा मिलने वाली दवा है, जो कैप्सूल के रूप में उपलब्ध है। डिप्रेशन के लिए मुख्य रूप से इस्तेमाल की जाती है। इसके अलावा Venla XR पचहत्तर Capsule का उपयोग कुछ दूसरी समस्याओं के लिए भी किया जा सकता है। इनके बारे में नीचे विस्तार से जानकारी दी गयी है। आयु, लिंग और रोगी की पिछली स्वास्थ्य जानकारी के अनुसार Venla XR पचहत्तर Capsule की खुराक दी जाती है। यह खुराक मरीज की परेशानी और दवा देने के तरीके पर निर्भर करती है। इस बारे में और अधिक जानने के लिए खुराक वाले खंड में पढ़ें। इन दुष्परिणामों के अलावा Venla XR पचहत्तर Capsule के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है। Venla XR पचहत्तर Capsule के दुष्प्रभाव जल्दी ही खत्म हो जाते हैं और इलाज के बाद जारी नहीं रहते। अगर ये दुष्प्रभाव और ज्यादा बिगड़ जाते हैं या ठीक नहीं होते तो अपने डॉक्टर से तुरंत बात करें। इसके अलावा Venla XR पचहत्तर Capsule को गर्भावस्था के दौरान लेने पर प्रभाव मध्यम होता है और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए इसका प्रभाव गंभीर है। आगे Venla XR पचहत्तर Capsule से जुड़ी चेतावनियों के सेक्शन में बताया गया है कि Venla XR पचहत्तर Capsule का लिवर, हार्ट, किडनी पर क्या असर होता है। यदि किसी व्यक्ति को आत्महत्या जैसी कोई समस्या है, तो उसे Venla XR पचहत्तर Capsule दवा नहीं लेनी चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसी कुछ अन्य समस्याएं भी हैं, जीने बारे में नीचे बताया गया है। अगर आपको इनमें से कोई भी समस्या है, तो Venla XR पचहत्तर Capsule न लें। Venla XR पचहत्तर Capsule को कुछ दवाओं के साथ लेने से गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। पूरी जानकारी के लिए नीचे दी गई जानकारी देखें। ऊपर बताई गई सावधानियों के अलावा यह भी ध्यान में रखें कि वाहन चलाते वक्त Venla XR पचहत्तर Capsule लेना असुरक्षित है, साथ ही इसकी लत नहीं पड़ सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Venla XR पचहत्तर Capsule की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Venla XR पचहत्तर Capsule की खुराक अलग हो सकती है। क्या Venla XR पचहत्तर Capsule का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? Venla XR से प्रेग्नेंट महिला के शरीर पर कई दुष्प्रभाव हो सकते हैं। ऐसा आपके साथ भी हो तो आप दवा ना लें और आपने डॉक्टर से पूछने के बाद ही इसको फिर से शरू करें। क्या Venla XR पचहत्तर Capsule का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? Venla XR के स्तनपान कराने वाली स्त्रियों पर घातक दुष्प्रभाव होते हैं। इस कारण डॉक्टर से पूछे बिना इसका सेवन न करें। Venla XR पचहत्तर Capsule का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Venla XR का इस्तेमाल हम कर सकते हैं, क्योंकि इसका दुष्प्रभाव बहुत कम है। Venla XR पचहत्तर Capsule का जिगर पर क्या असर होता है? Venla XR का सेवन करना आपके शरीर पर बहुत ही कम प्रभाव डालता है। क्या ह्रदय पर Venla XR पचहत्तर Capsule का प्रभाव पड़ता है? दिल पर Venla XR के हानिकारक प्रभाव काफी कम देखे गए हैं। क्या Venla XR पचहत्तर Capsule आदत या लत बन सकती है? Venla XR पचहत्तर Capsule की लत नहीं लगती, लेकिन फिर भी आपको इसे लेने से पहले सर्तकता बरतनी बेहद जरूरी है और इस विषय पर डॉक्टरी सलाह अवश्य लें। क्या Venla XR पचहत्तर Capsule को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? किसी मशीन के अलावा वाहन को चलाने में दिमागी सक्रियता की बेहद जरूरत होती है। लेकिन Venla XR पचहत्तर Capsule को खाने से आपको नींद व थकान होने लगती है। इसलिए इन कामों को करने से बचें। क्या Venla XR पचहत्तर Capsule को लेना सुरखित है? हां, लेकिन डॉक्टर से सलाह जरूर लें। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Venla XR पचहत्तर Capsule इस्तेमाल की जा सकती है? हां, कई मामलों में Venla XR पचहत्तर Capsule को लेने से दिमागी विकार ठीक हो जाता है। क्या Venla XR पचहत्तर Capsule को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? आप खाने के साथ भी Venla XR पचहत्तर Capsule को ले सकते हैं। जब Venla XR पचहत्तर Capsule ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? Venla XR पचहत्तर Capsule व शराब का सेवन आपके स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। US Food and Drug Administration [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Effexor XR® US Food and Drug Administration [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Effexor® |
Ranji Trophy कर्नाटक ने मुंबई को पांच विकेट से हरा दिया।
मुंबई, प्रेट्र। रणजी ट्रॉफी के एलीट ग्रुप बी के मुकाबले में कर्नाटक ने बाजी मारते हुए मुंबई को पांच विकेट से हरा दिया। दोनों टीमों के बीच खेला गया ये मैच सिर्फ ढाई दिन तक ही चल पाया। इस सीजन में ये मुंबई की अपने घरेलू मैदान पर लगातार दूसरी हार है। इससे पहले मुंबई को रेलवे के खिलाफ भी हार मिली थी। इस मैच में कर्नाटक को जीत के लिए 126 रन का लक्ष्य मिला था।
टीम के ओपनर बल्लेबाज बल्लेबाज आर समर्थ (34 रन, दो चौके) और देवदत्त पड्डीकल (50 रन, पांच चौके, दो छक्के) ने मजबूत शुरूआत करायी। लंच तक टीम का स्कोर बिना विकेट गंवाये 77 रन था। लेकिन लंच के बाद शंशाक अतार्डे (52 रन देकर चार विकेट) ने दो विकेट झटककर मेहमानों को झटके दिये। उन्होंने पहले पड्डीकल को और फिर अभिषेक रेड्डी (04) को आउट किया जिससे कर्नाटक का स्कोर दो विकेट पर 84 रन हो गया। शम्स मुलानी ने समर्थ का विकेट लेकर इसे 91 रन पर तीन विकेट कर दिया। डेब्यू कर रहे रोहन कदम (21) और कप्तान करूण नायर (10) टीम को जीत के करीब ले गये। लेकिन अतार्डे ने कदम का विकेट ले लिया।
अब टीम को जीत के लिये आठ रन की जरूरत थी। इसी ओवर में अतार्डे ने नायर को पवेलियन भेजा। इसके बाद श्रेयस गोपाल (नाबाद 05 रन) और बी आर शरत (नाबाद 04 रन) टीम को जीत तक ले गये। इससे पहले मुंबई ने पांच विकेट पर 109 रन से खेलना शुरू किया। अतार्डे (10 रन) सरफराज खान (नाबाद 71 रन) के साथ क्रीज पर उतरे, दोनों ने छठे विकेट के लिये 25 रन जोड़े। सरफराज जिम्मेदारी से खेल रहे थे लेकिन उन्हें दूसरे छोर पर साथ नहीं मिला। बायें हाथ के तेज गेंदबाज प्रतीक जैन (11 रन देकर चार विकेट) ने सुबह के सत्र के सभी विकेट झटके। अतार्डे का विकेट गिरते ही स्कोर छह विकेट पर 134 रन हो गया और फिर मुंबई की पारी नौ विकेट पर 149 रन पर समाप्त हो गयी।
पहले ही घोषणा हो गयी थी कि पृथ्वी साव दूसरी पारी में बल्लेबाजी नहीं करेंगे क्योंकि कंधे की चोट के कारण वह शनिवार को राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के लिये रवाना हो गये थे। कर्नाटक ने मुंबई को पहली पारी में 194 रन पर समेटकर पहली पारी के आधार पर 24 रन की बढ़त हासिल की थी। इस जीत से कर्नाटक को छह अंक मिले। 41 बार की घरेलू चैंपियन मुंबई का सामना अब 11 जनवरी से चेन्नई में तमिलनाडु के खिलाफ होगा।
| Ranji Trophy कर्नाटक ने मुंबई को पांच विकेट से हरा दिया। मुंबई, प्रेट्र। रणजी ट्रॉफी के एलीट ग्रुप बी के मुकाबले में कर्नाटक ने बाजी मारते हुए मुंबई को पांच विकेट से हरा दिया। दोनों टीमों के बीच खेला गया ये मैच सिर्फ ढाई दिन तक ही चल पाया। इस सीजन में ये मुंबई की अपने घरेलू मैदान पर लगातार दूसरी हार है। इससे पहले मुंबई को रेलवे के खिलाफ भी हार मिली थी। इस मैच में कर्नाटक को जीत के लिए एक सौ छब्बीस रन का लक्ष्य मिला था। टीम के ओपनर बल्लेबाज बल्लेबाज आर समर्थ और देवदत्त पड्डीकल ने मजबूत शुरूआत करायी। लंच तक टीम का स्कोर बिना विकेट गंवाये सतहत्तर रन था। लेकिन लंच के बाद शंशाक अतार्डे ने दो विकेट झटककर मेहमानों को झटके दिये। उन्होंने पहले पड्डीकल को और फिर अभिषेक रेड्डी को आउट किया जिससे कर्नाटक का स्कोर दो विकेट पर चौरासी रन हो गया। शम्स मुलानी ने समर्थ का विकेट लेकर इसे इक्यानवे रन पर तीन विकेट कर दिया। डेब्यू कर रहे रोहन कदम और कप्तान करूण नायर टीम को जीत के करीब ले गये। लेकिन अतार्डे ने कदम का विकेट ले लिया। अब टीम को जीत के लिये आठ रन की जरूरत थी। इसी ओवर में अतार्डे ने नायर को पवेलियन भेजा। इसके बाद श्रेयस गोपाल और बी आर शरत टीम को जीत तक ले गये। इससे पहले मुंबई ने पांच विकेट पर एक सौ नौ रन से खेलना शुरू किया। अतार्डे सरफराज खान के साथ क्रीज पर उतरे, दोनों ने छठे विकेट के लिये पच्चीस रन जोड़े। सरफराज जिम्मेदारी से खेल रहे थे लेकिन उन्हें दूसरे छोर पर साथ नहीं मिला। बायें हाथ के तेज गेंदबाज प्रतीक जैन ने सुबह के सत्र के सभी विकेट झटके। अतार्डे का विकेट गिरते ही स्कोर छह विकेट पर एक सौ चौंतीस रन हो गया और फिर मुंबई की पारी नौ विकेट पर एक सौ उनचास रन पर समाप्त हो गयी। पहले ही घोषणा हो गयी थी कि पृथ्वी साव दूसरी पारी में बल्लेबाजी नहीं करेंगे क्योंकि कंधे की चोट के कारण वह शनिवार को राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी के लिये रवाना हो गये थे। कर्नाटक ने मुंबई को पहली पारी में एक सौ चौरानवे रन पर समेटकर पहली पारी के आधार पर चौबीस रन की बढ़त हासिल की थी। इस जीत से कर्नाटक को छह अंक मिले। इकतालीस बार की घरेलू चैंपियन मुंबई का सामना अब ग्यारह जनवरी से चेन्नई में तमिलनाडु के खिलाफ होगा। |
पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इंजमाम उल हक ने आईसीसी वल्र्ड टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) के फाइनल में इस्तेमाल की गई पिच पर सवाल उठाया है। इंग्लैंड के साउथैम्पटन में भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए डब्ल्यूटीसी का फाइनल मुकाबला रिजर्व डे यानी के छठे दिन तक चला था, जिसमें न्यूजीलैंड ने भारत को आठ विकेट से हराकर खिताब जीत लिया। मैच में बारिश और खराब रोशनी के कारण दो दिन तक खेल पूरी तरह से धुल गया था, इसके बावजूद कीवी टीम जीत दर्ज करने में सफल रही। साउथैम्पटन के द एजिस बाउल मैदान पर बल्लेबाज रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन कीवी गेंदबाज कहर बरपा रहे थे। ऐसे में इंजमाम ने पिच पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पिच पहले से ही इस्तेमाल की जा चुकी थी, इसलिए गेंदबाज बल्लेबाजों पर हावी हो रहे थे। इंजमाम ने कहा, यह टेस्ट मैच छह दिनों तक चला और उसमें से करीब चार दिनों तक लगातार बारिश होती रही। इसके बाद भी मैच अढ़ाई दिन के अंदर ही खत्म हो गया। किसी ने भी इस पर बात नहीं की कि वल्र्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए क्यों ऐसी पिच का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। यह एक ऐसी पिच थी, जहां केवल गेंदबाज ही हावी दिखाई दे रहे थे, लेकिन बल्लेबाजों को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। इंजमाम ने आगे कहा, मेरी सलाह है कि आप दो टेस्ट मैच खेलें। एक मैच न्यूजीलैंड या जो भी चैंपियन हो वहां खेलें और दूसरा भारत में। इस तरह के मामले में परिणाम अधिक जायज होगा। मेरा मानना है कि भविष्य में डब्ल्यूटीसी का फाइनल होम एंड अवे आधार पर होना चाहिए।
| पाकिस्तान के पूर्व कप्तान इंजमाम उल हक ने आईसीसी वल्र्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में इस्तेमाल की गई पिच पर सवाल उठाया है। इंग्लैंड के साउथैम्पटन में भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए डब्ल्यूटीसी का फाइनल मुकाबला रिजर्व डे यानी के छठे दिन तक चला था, जिसमें न्यूजीलैंड ने भारत को आठ विकेट से हराकर खिताब जीत लिया। मैच में बारिश और खराब रोशनी के कारण दो दिन तक खेल पूरी तरह से धुल गया था, इसके बावजूद कीवी टीम जीत दर्ज करने में सफल रही। साउथैम्पटन के द एजिस बाउल मैदान पर बल्लेबाज रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन कीवी गेंदबाज कहर बरपा रहे थे। ऐसे में इंजमाम ने पिच पर सवाल उठाते हुए कहा है कि पिच पहले से ही इस्तेमाल की जा चुकी थी, इसलिए गेंदबाज बल्लेबाजों पर हावी हो रहे थे। इंजमाम ने कहा, यह टेस्ट मैच छह दिनों तक चला और उसमें से करीब चार दिनों तक लगातार बारिश होती रही। इसके बाद भी मैच अढ़ाई दिन के अंदर ही खत्म हो गया। किसी ने भी इस पर बात नहीं की कि वल्र्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए क्यों ऐसी पिच का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। यह एक ऐसी पिच थी, जहां केवल गेंदबाज ही हावी दिखाई दे रहे थे, लेकिन बल्लेबाजों को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। इंजमाम ने आगे कहा, मेरी सलाह है कि आप दो टेस्ट मैच खेलें। एक मैच न्यूजीलैंड या जो भी चैंपियन हो वहां खेलें और दूसरा भारत में। इस तरह के मामले में परिणाम अधिक जायज होगा। मेरा मानना है कि भविष्य में डब्ल्यूटीसी का फाइनल होम एंड अवे आधार पर होना चाहिए। |
प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान बाजार में सभी बैंक शाखाओं को जबरन बंद करवा दिया और शहर को जाम कर दिया। अनाज के थोक व्यापारियों और ग्रॉसरी व्यापारियों ने भी बैंकों के खिलाफ जमकर विरोध-प्रदर्शन किया।
पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक हालत चरमराई हुई है। वहां विदेशी मुद्रा की भारी कमी है। इस वजह से स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) साख पत्र यानी लेटर्स ऑफ क्रेडिट (LCs) क्लियर नहीं कर रहा है। साख पत्र क्लियर नहीं होने से करीब डेढ़ महीने से कंटेनरों की निकासी नहीं हो पा रही है। कंटेनर पोर्ट पर ही अटके पड़े हैं। इससे व्यापारी गुस्से में हैं। गुरुवार को कराची के व्यापारियों ने सड़कों पर उतरकर SBP बैंक के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
बैंकों के रुख के खिलाफ कराची टिम्बर मर्चेंट्स ग्रुप (केटीएमजी) की अपील पर व्यापारियों ने शटर-डाउन हड़ताल शुरू की। इस वजह से शहर के लकड़ी बाजार की सभी दुकानें बंद रहीं। ऑल सिटी ट्रेडर्स यूनियन और ऑल पाकिस्तान टिम्बर ट्रेडर्स एसोसिएशन (एपीटीए) के अध्यक्ष शरजील गोपालानी ने कहा कि लकड़ी के 700 कंटेनर 45 दिनों से बंदरगाह पर निकासी का इंतजार कर रहे हैं।
पाकिस्तान के अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने गोपालानी के हवाले से कहा है कि 2,000 और कंटेनर समुद्री मार्ग पर हैं और वे सभी पाकिस्तान पहुंचने वाले हैं। हड़ताल के दौरान, व्यापारियों ने गुरुवार को कराची में एक रैली निकालकर अपना विरोध-प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने इस दौरान "डॉलर दो और लकड़ी व्यापार बचाओ" के नारे लगाए।
प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान बाजार में सभी बैंक शाखाओं को जबरन बंद करवा दिया और शहर को जाम कर दिया। अनाज के थोक व्यापारियों और ग्रॉसरी व्यापारियों ने भी बैंकों के खिलाफ जमकर विरोध-प्रदर्शन किया। दाल और अनाज के व्यापारियों में भी भारी गुस्सा देखा गया। उन लोगों ने भी बैंकों के व्यवहार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दाल व्यापारियों ने बंदरगाहों पर खड़े 6000 कंटेनरर्स को जल्द रिलीज करने की मांग की है। बता दें कि पाकिस्तान में करीब एक महीने का ही विदेशी मुद्रा भंडार शेष रह गया है।
| प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान बाजार में सभी बैंक शाखाओं को जबरन बंद करवा दिया और शहर को जाम कर दिया। अनाज के थोक व्यापारियों और ग्रॉसरी व्यापारियों ने भी बैंकों के खिलाफ जमकर विरोध-प्रदर्शन किया। पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक हालत चरमराई हुई है। वहां विदेशी मुद्रा की भारी कमी है। इस वजह से स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान साख पत्र यानी लेटर्स ऑफ क्रेडिट क्लियर नहीं कर रहा है। साख पत्र क्लियर नहीं होने से करीब डेढ़ महीने से कंटेनरों की निकासी नहीं हो पा रही है। कंटेनर पोर्ट पर ही अटके पड़े हैं। इससे व्यापारी गुस्से में हैं। गुरुवार को कराची के व्यापारियों ने सड़कों पर उतरकर SBP बैंक के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। बैंकों के रुख के खिलाफ कराची टिम्बर मर्चेंट्स ग्रुप की अपील पर व्यापारियों ने शटर-डाउन हड़ताल शुरू की। इस वजह से शहर के लकड़ी बाजार की सभी दुकानें बंद रहीं। ऑल सिटी ट्रेडर्स यूनियन और ऑल पाकिस्तान टिम्बर ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शरजील गोपालानी ने कहा कि लकड़ी के सात सौ कंटेनर पैंतालीस दिनों से बंदरगाह पर निकासी का इंतजार कर रहे हैं। पाकिस्तान के अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने गोपालानी के हवाले से कहा है कि दो,शून्य और कंटेनर समुद्री मार्ग पर हैं और वे सभी पाकिस्तान पहुंचने वाले हैं। हड़ताल के दौरान, व्यापारियों ने गुरुवार को कराची में एक रैली निकालकर अपना विरोध-प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने इस दौरान "डॉलर दो और लकड़ी व्यापार बचाओ" के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान बाजार में सभी बैंक शाखाओं को जबरन बंद करवा दिया और शहर को जाम कर दिया। अनाज के थोक व्यापारियों और ग्रॉसरी व्यापारियों ने भी बैंकों के खिलाफ जमकर विरोध-प्रदर्शन किया। दाल और अनाज के व्यापारियों में भी भारी गुस्सा देखा गया। उन लोगों ने भी बैंकों के व्यवहार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दाल व्यापारियों ने बंदरगाहों पर खड़े छः हज़ार कंटेनरर्स को जल्द रिलीज करने की मांग की है। बता दें कि पाकिस्तान में करीब एक महीने का ही विदेशी मुद्रा भंडार शेष रह गया है। |
मुंबई/नई दिल्ली, (एजेंसी)। एक तरफ जहां भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक चल रही है, इस बीच पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी पर महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले को दबाने का आरोप लगा है। इंडिया अगेंस्ट करप्शन और आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने आरोप लगाया है कि गडकरी के एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार के साथ व्यावसायिक संबंध हैं और इसलिए वह महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले में कोई कदम नहीं उठाना चाहते हैं। इस घोटाले को गडकरी दबाने का काम कर रहे हैं। उधर, गडकरी के बचाव में उतरते हुए भाजपा ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष के खिलाफ झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। अंजलि दमानिया ने बुधवार को एक प्रेस कांपेंस में आरोप लगाया था कि गडकरी ने पवार से रिश्ते की बात मानी थी। अवैध डैम के खिलाफ आवाज उठा रही अंजलि ने कहा था कि एनसीपी के साथ बिजनेस हितों के चलते गडकरी इस घोटाले के खिलाफ नरम रुख अपनाए हुए हैं। बाद में गडकरी ने स्पष्टीकरण दिया कि वह कभी भी दमानिया के साथ नहीं मिले हैं। सिंचाई घोटाला दबाने का आरोप लगने के बाद बीजेपी अपने अध्यक्ष नितिन गडकरी के बचाव के लिए उतर आई है। गुरुवार को बीजेपी नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अंजलि दमानिया की तरफ से लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने इस आरोप को मनगढ़ंत कहानी बताया। यही नहीं, जावड़ेकर ने इसे कांग्रेस की तरफ से की जाने वाली साजिश बताया। बुधवार को महाराष्ट्र में हुए करोड़ों रुपये के सिंचाई घोटाले के मामले में आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी पर इस मामले को दबाने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। अंजलि ने बुधवार को एक प्रेस कांपेंस को संबोधित करते हुए कहा कि वह इस मामले में एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष से मिली थीं लेकिन उन्होंने शरद पवार से रिश्तों की दुहाई देते हुए इस मामले को दबाने की बात की थी।
| मुंबई/नई दिल्ली, । एक तरफ जहां भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक चल रही है, इस बीच पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी पर महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले को दबाने का आरोप लगा है। इंडिया अगेंस्ट करप्शन और आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने आरोप लगाया है कि गडकरी के एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार के साथ व्यावसायिक संबंध हैं और इसलिए वह महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले में कोई कदम नहीं उठाना चाहते हैं। इस घोटाले को गडकरी दबाने का काम कर रहे हैं। उधर, गडकरी के बचाव में उतरते हुए भाजपा ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष के खिलाफ झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। अंजलि दमानिया ने बुधवार को एक प्रेस कांपेंस में आरोप लगाया था कि गडकरी ने पवार से रिश्ते की बात मानी थी। अवैध डैम के खिलाफ आवाज उठा रही अंजलि ने कहा था कि एनसीपी के साथ बिजनेस हितों के चलते गडकरी इस घोटाले के खिलाफ नरम रुख अपनाए हुए हैं। बाद में गडकरी ने स्पष्टीकरण दिया कि वह कभी भी दमानिया के साथ नहीं मिले हैं। सिंचाई घोटाला दबाने का आरोप लगने के बाद बीजेपी अपने अध्यक्ष नितिन गडकरी के बचाव के लिए उतर आई है। गुरुवार को बीजेपी नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि अंजलि दमानिया की तरफ से लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने इस आरोप को मनगढ़ंत कहानी बताया। यही नहीं, जावड़ेकर ने इसे कांग्रेस की तरफ से की जाने वाली साजिश बताया। बुधवार को महाराष्ट्र में हुए करोड़ों रुपये के सिंचाई घोटाले के मामले में आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी पर इस मामले को दबाने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। अंजलि ने बुधवार को एक प्रेस कांपेंस को संबोधित करते हुए कहा कि वह इस मामले में एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष से मिली थीं लेकिन उन्होंने शरद पवार से रिश्तों की दुहाई देते हुए इस मामले को दबाने की बात की थी। |
नौशाद अहमद/सूरजपुर- प्रधानमंत्री के 9 सालों के कामों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रदेश में भाजपा के कार्यकर्ता हर जिले में जाकर जनता से रूबरू हो रहे हैं। इसी बीच छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में भाजपा ज्वाइन करने के बाद पहली बार एक्टर अनुज शर्मा भाजपा के कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे। सूरजपुर के कला केंद्र पहुंचकर अनुज ने संगीत और डांस सीख रहे बच्चों के साथ टाइम स्पेंड किया। साथ ही उन्हें आगे बढ़ने के लिए टिप्स भी दिए।
आपको बता दें, अनुज शर्मा को कार्यक्रम में शामिल होता देख बच्चें काफी खुश नजर आए, इसी खुशी में अनुज शर्मा से डांस करने को कहने लगे। बच्चों के बात रखने के लिए एक्टर अनुज शर्मा ने एक शानदार गाना भी गाया। जिसकी कला केंद्र की जमकर तारीफ की और कहा कि, संगीत का ऐसा वातावरण देखकर बहुत अच्छा लगा। आने वाले समय में सूरजपुर और भी आगे बढ़ेगा, इसके अलावा उन्होंने बच्चों को बताया कि, मेहनत और लगन अपनी पहचान बनाए। क्योंकि आप आने वाले वक्त के सुपरस्टार हैं।
| नौशाद अहमद/सूरजपुर- प्रधानमंत्री के नौ सालों के कामों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रदेश में भाजपा के कार्यकर्ता हर जिले में जाकर जनता से रूबरू हो रहे हैं। इसी बीच छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में भाजपा ज्वाइन करने के बाद पहली बार एक्टर अनुज शर्मा भाजपा के कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे। सूरजपुर के कला केंद्र पहुंचकर अनुज ने संगीत और डांस सीख रहे बच्चों के साथ टाइम स्पेंड किया। साथ ही उन्हें आगे बढ़ने के लिए टिप्स भी दिए। आपको बता दें, अनुज शर्मा को कार्यक्रम में शामिल होता देख बच्चें काफी खुश नजर आए, इसी खुशी में अनुज शर्मा से डांस करने को कहने लगे। बच्चों के बात रखने के लिए एक्टर अनुज शर्मा ने एक शानदार गाना भी गाया। जिसकी कला केंद्र की जमकर तारीफ की और कहा कि, संगीत का ऐसा वातावरण देखकर बहुत अच्छा लगा। आने वाले समय में सूरजपुर और भी आगे बढ़ेगा, इसके अलावा उन्होंने बच्चों को बताया कि, मेहनत और लगन अपनी पहचान बनाए। क्योंकि आप आने वाले वक्त के सुपरस्टार हैं। |
कोलंबोः श्रीलंका के खिलाफ 12 अगस्त से शुरू हो रहे तीसरे और आखिरी क्रिकेट टेस्ट के लिये बायें हाथ के स्पिनर अक्षर पटेल को रविंद्र जडेजा की जगह 12 सदस्यीय भारतीय टीम में शामिल किया गया है. बीसीसीआई के कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी ने एक विज्ञप्ति में कहा, अखिल भारतीय सीनियर चयन समिति ने 12 अगस्त 2017 से शुरू हो रहे तीसरे टेस्ट के लिये रविंद्र जडेजा की जगह अक्षर पटेल को टीम में शामिल किया है. अक्षर भारत ए टीम का हिस्सा थे जिसने कल रात दक्षिण अफ्रीका ए को सात विकेट से हराकर त्रिकोणीय श्रृंखला की ट्राफी अपने पास रखी.
जडेजा को 24 महीने के भीतर छह डिमेरिट अंक होने के कारण तीसरे टेस्ट से निलंबित कर दिया गया है. भारत ने पहले दोनों टेस्ट जीतकर श्रृंखला अपने नाम पहले ही कर ली है. इससे पहले कयास लगाए जा रहे थें कि बायें हाथ के स्पिनर अक्षर पटेल या ऑफ स्पिनर जयंत यादव को 11 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ शुरू हो रहे तीसरे टेस्ट के लिए रविंद्र जडेजा के निलंबन के चलते भारतीय टीम में 15वें सदस्य के रूप में शामिल किया जा सकता है.
अंतिम टेस्ट में कुलदीप का अंतिम एकादश में खेलना लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन टीम प्रबंधन इस युवा चाइनामैन गेंदबाज का कवर चाहता है. अक्षर फिलहाल दक्षिण अफ्रीका में हैं जहां वह 'ए' टीमों की त्रिकोणीय एकदिवसीय श्रृंखला में हिस्सा ले रहे हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक तीसरे टेस्ट के लिए पल्लेकल में मौजूद चयन समिति के अध्यक्ष एमएसके प्रसाद, कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली ने आम सहमित के बाद यह फैसला किया है.
| कोलंबोः श्रीलंका के खिलाफ बारह अगस्त से शुरू हो रहे तीसरे और आखिरी क्रिकेट टेस्ट के लिये बायें हाथ के स्पिनर अक्षर पटेल को रविंद्र जडेजा की जगह बारह सदस्यीय भारतीय टीम में शामिल किया गया है. बीसीसीआई के कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी ने एक विज्ञप्ति में कहा, अखिल भारतीय सीनियर चयन समिति ने बारह अगस्त दो हज़ार सत्रह से शुरू हो रहे तीसरे टेस्ट के लिये रविंद्र जडेजा की जगह अक्षर पटेल को टीम में शामिल किया है. अक्षर भारत ए टीम का हिस्सा थे जिसने कल रात दक्षिण अफ्रीका ए को सात विकेट से हराकर त्रिकोणीय श्रृंखला की ट्राफी अपने पास रखी. जडेजा को चौबीस महीने के भीतर छह डिमेरिट अंक होने के कारण तीसरे टेस्ट से निलंबित कर दिया गया है. भारत ने पहले दोनों टेस्ट जीतकर श्रृंखला अपने नाम पहले ही कर ली है. इससे पहले कयास लगाए जा रहे थें कि बायें हाथ के स्पिनर अक्षर पटेल या ऑफ स्पिनर जयंत यादव को ग्यारह अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ शुरू हो रहे तीसरे टेस्ट के लिए रविंद्र जडेजा के निलंबन के चलते भारतीय टीम में पंद्रहवें सदस्य के रूप में शामिल किया जा सकता है. अंतिम टेस्ट में कुलदीप का अंतिम एकादश में खेलना लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन टीम प्रबंधन इस युवा चाइनामैन गेंदबाज का कवर चाहता है. अक्षर फिलहाल दक्षिण अफ्रीका में हैं जहां वह 'ए' टीमों की त्रिकोणीय एकदिवसीय श्रृंखला में हिस्सा ले रहे हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक तीसरे टेस्ट के लिए पल्लेकल में मौजूद चयन समिति के अध्यक्ष एमएसके प्रसाद, कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली ने आम सहमित के बाद यह फैसला किया है. |
Motion Poster Of Rajinikanth, Bear Grylls in Into the Wild With Bear Grylls: दुनिया के सबसे लोकप्रिय टीवी शो में से एक मैन वर्सेज वाइल्ड (Man vs Wild) इस बार काफी रोमांचक होने वाला है क्योंकि इस बार शो में सुपरस्टार रजनीकांत (Rajinikanth) शिरकत करेंगे। सुपरस्टार रजनीकांत के शो से जुड़ने की खबर को लेकर फैंस में काफी ज्यादा उत्साह है। ऐसे में शो के होस्ट बेयर ग्रिल्स ने फैंस को सरप्राइज देते हुए शो से रजनीकांत का फर्स्ट लुक शेयर किया है।
15 सेकेंड के इस मोशन पोस्टर में 69 साल के रजनीकांत बेयर के साथ अपने निराले अंदाज में बोनट पर रेस्ट करते हुए नजर आ रहे हैं। मोशन पोस्टर शेयर करते हुए बेयर ने कैप्शन में लिखा कि रजनीकांत के ब्लॉकबस्टर टीवी डेब्यू की तैयारियां चल रही हैं। बेयर ने आगे लिखा कि मैंने विश्व के काफी सुपरस्टार के साथ काम किया लेकिन रजनीकांत के साथ काम करना मेरे लिए स्पेशल रहा।
इस मोशन पोस्टर के अलावा बेयर ने एक अन्य ट्वीट में रजनीकांत की जमकर तारीफ भी की है। बेयर ने ट्टीट कर लिखा कि रजनीकांत हमेशा से ही एक ऐसे स्टार रहे हैं जिनमें काफी स्वैग है लेकिन जंगल में सब कुछ बदल जाता है। एक लेजेंड के साथ समय बिताना काफी शानदार अनुभव था। इस शो के जरिए हमनें रजनीकांत को एक नए अवतार में देखा है।
मालूम हो कि रजनीकांत ने मैन वर्सेज वाइल्ड के लिए इस साल जनवरी के महीने में बांदीपुर टाइगर रिजर्व में शूटिंग की थी। बांदीपुर टाइगर रिजर्व 874 स्क्वॉयर किलोमीटर में फैला नेशनल पार्क है जो कर्नाटक में स्थित है। मोशन पोस्टर देखकर ऐसा लग रहा है कि मैन वर्सेज वाइल्ड में दर्शकों को एक बार फिर थलाइवा रजनीकांत का जबरदस्त अंदाज देखने को मिलेगा। फैंस इस एपिसोड का काफी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
गौरतलब है कि बेयर ग्रिल्स दुनिया भर की कई रसूखदार हस्तियों के साथ शो कर चुके हैं। इस शो पर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा नजर आ चुके हैं।
| Motion Poster Of Rajinikanth, Bear Grylls in Into the Wild With Bear Grylls: दुनिया के सबसे लोकप्रिय टीवी शो में से एक मैन वर्सेज वाइल्ड इस बार काफी रोमांचक होने वाला है क्योंकि इस बार शो में सुपरस्टार रजनीकांत शिरकत करेंगे। सुपरस्टार रजनीकांत के शो से जुड़ने की खबर को लेकर फैंस में काफी ज्यादा उत्साह है। ऐसे में शो के होस्ट बेयर ग्रिल्स ने फैंस को सरप्राइज देते हुए शो से रजनीकांत का फर्स्ट लुक शेयर किया है। पंद्रह सेकेंड के इस मोशन पोस्टर में उनहत्तर साल के रजनीकांत बेयर के साथ अपने निराले अंदाज में बोनट पर रेस्ट करते हुए नजर आ रहे हैं। मोशन पोस्टर शेयर करते हुए बेयर ने कैप्शन में लिखा कि रजनीकांत के ब्लॉकबस्टर टीवी डेब्यू की तैयारियां चल रही हैं। बेयर ने आगे लिखा कि मैंने विश्व के काफी सुपरस्टार के साथ काम किया लेकिन रजनीकांत के साथ काम करना मेरे लिए स्पेशल रहा। इस मोशन पोस्टर के अलावा बेयर ने एक अन्य ट्वीट में रजनीकांत की जमकर तारीफ भी की है। बेयर ने ट्टीट कर लिखा कि रजनीकांत हमेशा से ही एक ऐसे स्टार रहे हैं जिनमें काफी स्वैग है लेकिन जंगल में सब कुछ बदल जाता है। एक लेजेंड के साथ समय बिताना काफी शानदार अनुभव था। इस शो के जरिए हमनें रजनीकांत को एक नए अवतार में देखा है। मालूम हो कि रजनीकांत ने मैन वर्सेज वाइल्ड के लिए इस साल जनवरी के महीने में बांदीपुर टाइगर रिजर्व में शूटिंग की थी। बांदीपुर टाइगर रिजर्व आठ सौ चौहत्तर स्क्वॉयर किलोमीटर में फैला नेशनल पार्क है जो कर्नाटक में स्थित है। मोशन पोस्टर देखकर ऐसा लग रहा है कि मैन वर्सेज वाइल्ड में दर्शकों को एक बार फिर थलाइवा रजनीकांत का जबरदस्त अंदाज देखने को मिलेगा। फैंस इस एपिसोड का काफी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। गौरतलब है कि बेयर ग्रिल्स दुनिया भर की कई रसूखदार हस्तियों के साथ शो कर चुके हैं। इस शो पर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा नजर आ चुके हैं। |
Posted On:
केन्द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान; प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह ने हिन्दी माध्यम या अन्य स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों और विद्वानों के लाभ के लिए विज्ञान जर्नलों और पत्रिकाओं सहित विज्ञान साहित्य के अनुवाद के महत्व पर जोर दिया है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की हिन्दी सलाहकार समिति की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश के बाद, नियमित अंतराल पर बैठकें हो रही हैं और परिणाम देखने योग्य हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा सांसद संगीता यादव और हिन्दी सलाहकार समिति के सदस्यों को बताया कि सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, डॉ. एम रविचंद्रन, सचिव, डीएसटी श्री एस. चंद्रशेखर, सचिव डीएसआईआर, डॉ. एन. कलैसेल्वी, सचिव, डीबीटी डॉ. राजेश गोखले गैर-हिन्दी पृष्ठभूमि से हैं, लेकिन वे हमेशा हिन्दी में बोलना पसंद करते हैं और हिन्दी काम को प्रोत्साहित करते हैं।
मंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि उनके सुझाव पर गठित हिन्दी सलाहकार समिति की उप-समितियों की बैठक हर तीसरे महीने चयनित विषय पर होनी चाहिए और बाद में समीक्षा बैठक में ऐसी बैठकों के परिणामों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
उन्होंने समिति के सदस्यों से कुछ अच्छे विशेषज्ञों के सुझाव देने को भी कहा, जिन्हें विज्ञान मंत्रालयों द्वारा विज्ञान जर्नलों, पत्रिकाओं और अन्य दस्तावेजों के गुणवत्तापूर्ण अनुवाद कार्य में लगाया जा सकता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि इस साल अक्टूबर में, केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री, अमित शाह ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम की किताबें हिन्दी में शुरू कीं - जिससे मध्य प्रदेश भाषा में चिकित्सा शिक्षा देने वाला पहला राज्य बन गया।
श्री अमित शाह ने पहल को भारत में शिक्षा क्षेत्र के लिए "पुनर्जागरण और पुनर्निर्माण" का क्षण बताया।
यह कहते हुए कि भाषाएं लोगों को बांधती हैं, तब तक उन्हें अलग नहीं करती, जब तक उन्हें जबरन लागू नहीं किया जाता है, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, हम सभी को मातृभाषा और आधिकारिक भाषा हिन्दी दोनों के लिए निरंतर काम करना चाहिए और अधिक भाषाओं को सीखने का प्रयास करना चाहिए।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वह पूर्वोत्तर राज्यों में हिन्दी शिक्षकों की नियुक्ति जारी नहीं होने का मुद्दा उठाएंगे जिनकी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कहने पर नियुक्ति की गई थी। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र से बड़ी संख्या में युवा पर्यटन और विमानन क्षेत्रों में काम कर रहे हैं और हिंदी के ज्ञान ने उनका रोजगार सुरक्षित करने में मदद की है।
मंत्री ने कहा, जब भाषा को नौकरियों या व्यवसायों से जोड़ा जाता है, तो यह वृद्धि और विकास का अपना रास्ता खोज लेती है।
| Posted On: केन्द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी; पृथ्वी विज्ञान; प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने हिन्दी माध्यम या अन्य स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई करने के इच्छुक छात्रों और विद्वानों के लाभ के लिए विज्ञान जर्नलों और पत्रिकाओं सहित विज्ञान साहित्य के अनुवाद के महत्व पर जोर दिया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की हिन्दी सलाहकार समिति की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश के बाद, नियमित अंतराल पर बैठकें हो रही हैं और परिणाम देखने योग्य हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा सांसद संगीता यादव और हिन्दी सलाहकार समिति के सदस्यों को बताया कि सचिव, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, डॉ. एम रविचंद्रन, सचिव, डीएसटी श्री एस. चंद्रशेखर, सचिव डीएसआईआर, डॉ. एन. कलैसेल्वी, सचिव, डीबीटी डॉ. राजेश गोखले गैर-हिन्दी पृष्ठभूमि से हैं, लेकिन वे हमेशा हिन्दी में बोलना पसंद करते हैं और हिन्दी काम को प्रोत्साहित करते हैं। मंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि उनके सुझाव पर गठित हिन्दी सलाहकार समिति की उप-समितियों की बैठक हर तीसरे महीने चयनित विषय पर होनी चाहिए और बाद में समीक्षा बैठक में ऐसी बैठकों के परिणामों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने समिति के सदस्यों से कुछ अच्छे विशेषज्ञों के सुझाव देने को भी कहा, जिन्हें विज्ञान मंत्रालयों द्वारा विज्ञान जर्नलों, पत्रिकाओं और अन्य दस्तावेजों के गुणवत्तापूर्ण अनुवाद कार्य में लगाया जा सकता है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि इस साल अक्टूबर में, केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री, अमित शाह ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम की किताबें हिन्दी में शुरू कीं - जिससे मध्य प्रदेश भाषा में चिकित्सा शिक्षा देने वाला पहला राज्य बन गया। श्री अमित शाह ने पहल को भारत में शिक्षा क्षेत्र के लिए "पुनर्जागरण और पुनर्निर्माण" का क्षण बताया। यह कहते हुए कि भाषाएं लोगों को बांधती हैं, तब तक उन्हें अलग नहीं करती, जब तक उन्हें जबरन लागू नहीं किया जाता है, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, हम सभी को मातृभाषा और आधिकारिक भाषा हिन्दी दोनों के लिए निरंतर काम करना चाहिए और अधिक भाषाओं को सीखने का प्रयास करना चाहिए। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वह पूर्वोत्तर राज्यों में हिन्दी शिक्षकों की नियुक्ति जारी नहीं होने का मुद्दा उठाएंगे जिनकी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कहने पर नियुक्ति की गई थी। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र से बड़ी संख्या में युवा पर्यटन और विमानन क्षेत्रों में काम कर रहे हैं और हिंदी के ज्ञान ने उनका रोजगार सुरक्षित करने में मदद की है। मंत्री ने कहा, जब भाषा को नौकरियों या व्यवसायों से जोड़ा जाता है, तो यह वृद्धि और विकास का अपना रास्ता खोज लेती है। |
इसे अभिनवगुप्ताचार्य नहीं मानते। इन शास्त्रकारों ने संक्षेप में रस की व्याख्या इस प्रकार की है। स्थायी भाव जब विभाव, अनुभाव और संचारी भावों के योग से आस्वादन करने योग्य हो जाता है तब सहृदय प्रेक्षक के हृदय में रस-रून से उसका आस्वाइन होता है । स्थायी भाव के अनुभव और उसके आस्वादन में भेद है। अनुभव में भाव की सुख-दुःख- पूर्ण प्रकृति के अनुसार अनुभवकर्ता को भी सुख-दुःख होता है। परंतु उसका आस्वादन इनसे रहित है। रस की अवस्थिति इस मत के अनुसारन नायक में मानी जा सकती है, क्योंकि रस तो वर्तमान वस्तु है और नायक भूनकाल में था, वर्तमान नहीं है; और न नट में, क्योंकि नट का कार्य तो नायक आदि का अभिनय से अनुकरण मात्र करना है । वह तो केवल विभाव आदि को प्रेक्षक के सामने प्रदर्शित भर कर देता है रस की अवस्थिति सहृदय प्रेक्षक में है। प्रेक्षक में भी स्थायी भाव आदि के ज्ञान मात्र ही से रस उत्पन्न नहीं होता। ऐसा होने से तो सबको एक सा आनंद नहीं हो सकता । अपने अपने स्वभाव के अनुसार अलग अलग भावों का अनुभव होगा। जैसे किसी इंति के वास्तविक संयोग को देखकर किसी को लज्जा, किसी को घृणा, किसी को अभिलाष तथा किसी को ईर्ष्या होती है। वास्तव में बात यह है कि स्थायी भाव विभाव आदि में स्वतः कोई आनंद नहीं है प्रत्युत इन वस्तुओं से उनको (सहृयों को) स्वयं अपने उत्साह के कारण उसी प्रकार आनंद मिलता है जिस प्रकार बालकों को मिट्टी के खिलौनों से ।
यह तो हुई रस के परिपाक की बात, परंतु कभी-कभी ऐसा भी होता है कि रस उस परिपक्व अवस्था तक नहीं पहुँचता जिसमें उसका स्वादन होता है। चार अवस्थाओं में यह बात होती है। एक तो जब विभाव, अनुभाव आदि अन्य सामग्री के प्रबल न होने के कारण भाव अंकुरित हो कर ही रह जाता है, आगे बढ़कर तीत्र नहीं होने पाता; दूसरे, जब एक भाव के उदय होते ही दूसरा भाव उदय होकर उससे प्रवल हो जाता है और उसे दबा लेता है; तीसरे, | इसे अभिनवगुप्ताचार्य नहीं मानते। इन शास्त्रकारों ने संक्षेप में रस की व्याख्या इस प्रकार की है। स्थायी भाव जब विभाव, अनुभाव और संचारी भावों के योग से आस्वादन करने योग्य हो जाता है तब सहृदय प्रेक्षक के हृदय में रस-रून से उसका आस्वाइन होता है । स्थायी भाव के अनुभव और उसके आस्वादन में भेद है। अनुभव में भाव की सुख-दुःख- पूर्ण प्रकृति के अनुसार अनुभवकर्ता को भी सुख-दुःख होता है। परंतु उसका आस्वादन इनसे रहित है। रस की अवस्थिति इस मत के अनुसारन नायक में मानी जा सकती है, क्योंकि रस तो वर्तमान वस्तु है और नायक भूनकाल में था, वर्तमान नहीं है; और न नट में, क्योंकि नट का कार्य तो नायक आदि का अभिनय से अनुकरण मात्र करना है । वह तो केवल विभाव आदि को प्रेक्षक के सामने प्रदर्शित भर कर देता है रस की अवस्थिति सहृदय प्रेक्षक में है। प्रेक्षक में भी स्थायी भाव आदि के ज्ञान मात्र ही से रस उत्पन्न नहीं होता। ऐसा होने से तो सबको एक सा आनंद नहीं हो सकता । अपने अपने स्वभाव के अनुसार अलग अलग भावों का अनुभव होगा। जैसे किसी इंति के वास्तविक संयोग को देखकर किसी को लज्जा, किसी को घृणा, किसी को अभिलाष तथा किसी को ईर्ष्या होती है। वास्तव में बात यह है कि स्थायी भाव विभाव आदि में स्वतः कोई आनंद नहीं है प्रत्युत इन वस्तुओं से उनको स्वयं अपने उत्साह के कारण उसी प्रकार आनंद मिलता है जिस प्रकार बालकों को मिट्टी के खिलौनों से । यह तो हुई रस के परिपाक की बात, परंतु कभी-कभी ऐसा भी होता है कि रस उस परिपक्व अवस्था तक नहीं पहुँचता जिसमें उसका स्वादन होता है। चार अवस्थाओं में यह बात होती है। एक तो जब विभाव, अनुभाव आदि अन्य सामग्री के प्रबल न होने के कारण भाव अंकुरित हो कर ही रह जाता है, आगे बढ़कर तीत्र नहीं होने पाता; दूसरे, जब एक भाव के उदय होते ही दूसरा भाव उदय होकर उससे प्रवल हो जाता है और उसे दबा लेता है; तीसरे, |
सभी लोग हाथों और बालों में मेहंदी लगाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेहंदी हमारी सेहत के लिए भी कितनी अधिक फायदेमंद होती है और कई बीमारियों से लड़ने में काम भी आ सकती है. मेहंदी का उपयोग आप फैशन के लिए तो करती ही है लेकिन इसी के साथ जान लें मेहंदी के सेहत पर क्या लाभ होता है. जानते हैं इसके बारे में.
* माइग्रेन में मेहंदी बहुत काम आती है, इसके लिए रात में 200 ग्राम पानी में सौ ग्राम मेहंदी के पत्तों को कूटकर भिगों ले. सुबह के समय इसे छानकर पिएं. इससे माइग्रेन की समस्या पूरी तरह दूर हो जाती है.
* चर्म रोग को जड़ से खत्म करने के लिए मेहंदी के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर इसका खूब सेवन करें और इसका सेवन कम से कम 40 दिनों तक लगातार करें, लेकिन इस बात का ध्यान जरुर रखें कि आपको इन दिनों में अपनी त्वचा पर साबुन का प्रयोग कभी नहीं करना है.
* आधा लीटर पानी में पचास ग्राम मेहंदी के पत्तों को पीसकर मिलाए और फिर इसे उबाल लें. उबलने के बाद जब 100 ग्राम पानी बच जाए तब इसे छान लें और इसको गुनगुना करके ही रोगी को पिलाए. इस उपाय से गुरदे के रोग बहुत जल्द ठीक हो जाते हैं.
* उच्च रक्तचाप से परेशान लोगों के लिए मेहंदी किसी दवा से कम नहीं है. मेहंदी के ताजे पत्तों को अच्छे से पीसकर उसका लेप अपने पैरों के तलवों और हाथों में लगाएं. इससे आपको उच्च रक्तचाप में फायदा मिलेगा.
| सभी लोग हाथों और बालों में मेहंदी लगाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेहंदी हमारी सेहत के लिए भी कितनी अधिक फायदेमंद होती है और कई बीमारियों से लड़ने में काम भी आ सकती है. मेहंदी का उपयोग आप फैशन के लिए तो करती ही है लेकिन इसी के साथ जान लें मेहंदी के सेहत पर क्या लाभ होता है. जानते हैं इसके बारे में. * माइग्रेन में मेहंदी बहुत काम आती है, इसके लिए रात में दो सौ ग्राम पानी में सौ ग्राम मेहंदी के पत्तों को कूटकर भिगों ले. सुबह के समय इसे छानकर पिएं. इससे माइग्रेन की समस्या पूरी तरह दूर हो जाती है. * चर्म रोग को जड़ से खत्म करने के लिए मेहंदी के पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर इसका खूब सेवन करें और इसका सेवन कम से कम चालीस दिनों तक लगातार करें, लेकिन इस बात का ध्यान जरुर रखें कि आपको इन दिनों में अपनी त्वचा पर साबुन का प्रयोग कभी नहीं करना है. * आधा लीटर पानी में पचास ग्राम मेहंदी के पत्तों को पीसकर मिलाए और फिर इसे उबाल लें. उबलने के बाद जब एक सौ ग्राम पानी बच जाए तब इसे छान लें और इसको गुनगुना करके ही रोगी को पिलाए. इस उपाय से गुरदे के रोग बहुत जल्द ठीक हो जाते हैं. * उच्च रक्तचाप से परेशान लोगों के लिए मेहंदी किसी दवा से कम नहीं है. मेहंदी के ताजे पत्तों को अच्छे से पीसकर उसका लेप अपने पैरों के तलवों और हाथों में लगाएं. इससे आपको उच्च रक्तचाप में फायदा मिलेगा. |
SAMASTIPUR : भारत रत्न से सम्मानित स्वर कोकिला लता मंगेशकर का आज 92 साल की उम्र में निधन हो गया। दशकों तक देश ही नहीं दूसरे देशों के लोगों के दिलों में अपनी गायकी से राज करनेवाली लता मंगेशकर के निधन के बाद उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर दौड़ गयी है। जगह जगह उन्हें श्रद्धांजली दी जा रही है।
इसी कड़ी में समस्तीपुर में अनोखा तरीके से किन्नर समाज स्वर कोकिला लता दीदी को श्रद्धांजलि अर्पित किया। इस दौरान ढोल बजाकर नाचते गाते कैंडल जलाकर 2 मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा शांति के लिए प्रार्थना किया गया। इसके बाद किन्नरों ने बताया कि यह देश के अपूरणीय क्षति है। जिसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता है।
उन्होंने कहा की दीदी एक थी और एक ही रह गई। उनके चले जाने से देश में शोक का माहौल व्याप्त है। इस दौरान किन्नर समाज की दिल्ली से आई हुई गुंजा, रवीना, आजी, रजिया गुरु, सपना, सुमन, आरती, पूनम, नंदनी और मुस्कान सहित दर्जनों किन्नर मौजूद रहे।
| SAMASTIPUR : भारत रत्न से सम्मानित स्वर कोकिला लता मंगेशकर का आज बानवे साल की उम्र में निधन हो गया। दशकों तक देश ही नहीं दूसरे देशों के लोगों के दिलों में अपनी गायकी से राज करनेवाली लता मंगेशकर के निधन के बाद उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर दौड़ गयी है। जगह जगह उन्हें श्रद्धांजली दी जा रही है। इसी कड़ी में समस्तीपुर में अनोखा तरीके से किन्नर समाज स्वर कोकिला लता दीदी को श्रद्धांजलि अर्पित किया। इस दौरान ढोल बजाकर नाचते गाते कैंडल जलाकर दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा शांति के लिए प्रार्थना किया गया। इसके बाद किन्नरों ने बताया कि यह देश के अपूरणीय क्षति है। जिसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा की दीदी एक थी और एक ही रह गई। उनके चले जाने से देश में शोक का माहौल व्याप्त है। इस दौरान किन्नर समाज की दिल्ली से आई हुई गुंजा, रवीना, आजी, रजिया गुरु, सपना, सुमन, आरती, पूनम, नंदनी और मुस्कान सहित दर्जनों किन्नर मौजूद रहे। |
जब नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया ने पहली बार मुझे वृद्धावस्था पर ऐसे पाठकों के लिए पुस्तक लिखने को कहा जिनकी विज्ञान की समझ कक्षा आठ के विद्यार्थियों जितनी हो तो मेरी पहली प्रतिक्रिया बहुत अच्छी नहीं थी। वृद्धावस्था जैसे विषय पर क्यों चर्चा करनी चाहिए, मुझे आश्चर्य हुआ। लेकिन तभी, मुझे अपने एक मित्र की एक कूटोक्ति याद हो आई, "हम उसी पल से बूढ़े होने लगते हैं जब हम पैदा होते हैं।" स्कूलों में जिस तरह जन्म, वृद्धि और विकास जैसी क्रियाओं के बारे में पढ़ाया जाता है, संभवतया उसी तरह युवा विद्यार्थियों को वृद्धावस्था और जराजन्यता विज्ञान के बारे में भी जानकारी देना आवश्यक है। वृद्धावस्था और जराजन्यता ऐसी अवस्थाएं हैं जिन्हें कोई पसंद नहीं करता। युवाओं का भविष्य भी तो अन्ततः बुढ़ापा ही है। इस प्रकार, मैने सरल सुबोध भाषा में, वृद्धावस्था की प्रक्रिया को समझाने की जिम्मेदारी स्वीकार कर ली। हालांकि मैं स्वीकार करता हूं कि यह सरल कार्य नहीं था। वृद्धावस्था और जराजन्यता इतनी जटिल प्रक्रियाएं हैं कि उन्हें सरल भाषा में समझाने का अर्थ है जीवन का निर्माण करने वाली घटनाओं के सभी रहस्यों को उजागर करना और उन्हें इस तरह प्रस्तुत करना कि वे जीवन के सीधे-सादे और सोचे-समझे सत्य मालूम हों।
मैंने अपनी ओर से इस कठिनाई को हल करने का पूरा प्रयास किया है और इसे रोचक भी बनाया है - न केवल उनके लिए जिन्होंने आठवीं कक्षा तक विज्ञान पढ़ा है, बल्कि उनके लिए भी जिन्हें विज्ञान का ज्ञान तो बिलकुल नहीं है, लेकिन और अधिक जानने की लालसा है। मुझे आशा है कि यह पुस्तक एक तेजस्वी युवा व्यक्ति के कम समर्थशाली बूढ़े में परिवर्तित हो जाने के प्रति पाठकों में पर्याप्त उत्सुकता जगाएगी। बुढ़ापा, आखिरकार, एक साधारण टूट-टूट की संयोगिक घटना नहीं है। इसके विपरीत, वृद्धावस्था और मृत्यु दोनों के संकेत, हमारे आनुवंशिक ब्लूप्रिंट में बहुत गहराई में स्थित होते हैं।
मैं दो व्यक्तियों, सुश्री एन. एस. राजी और डा. श्रीपद गूंवर के प्रति आभार प्रकट करना चाहूंगा जिन्होंने यह पांडुलिपि तैयार करने में कई तरह से मेरी सहायता की है। हैदराबाद के श्री बी. वी. सत्यमूर्ति ने अपनी व्यस्तता के बावजूद उदारता से कई कार्टून तैयार किए, किंतु दुर्भाग्यवश प्रकाशक ने उन्हें पुनर्चित्रित कराने का निर्णय लिया। फिर भी, मैं हृदय से उनका धन्यवाद करता हूं । | जब नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया ने पहली बार मुझे वृद्धावस्था पर ऐसे पाठकों के लिए पुस्तक लिखने को कहा जिनकी विज्ञान की समझ कक्षा आठ के विद्यार्थियों जितनी हो तो मेरी पहली प्रतिक्रिया बहुत अच्छी नहीं थी। वृद्धावस्था जैसे विषय पर क्यों चर्चा करनी चाहिए, मुझे आश्चर्य हुआ। लेकिन तभी, मुझे अपने एक मित्र की एक कूटोक्ति याद हो आई, "हम उसी पल से बूढ़े होने लगते हैं जब हम पैदा होते हैं।" स्कूलों में जिस तरह जन्म, वृद्धि और विकास जैसी क्रियाओं के बारे में पढ़ाया जाता है, संभवतया उसी तरह युवा विद्यार्थियों को वृद्धावस्था और जराजन्यता विज्ञान के बारे में भी जानकारी देना आवश्यक है। वृद्धावस्था और जराजन्यता ऐसी अवस्थाएं हैं जिन्हें कोई पसंद नहीं करता। युवाओं का भविष्य भी तो अन्ततः बुढ़ापा ही है। इस प्रकार, मैने सरल सुबोध भाषा में, वृद्धावस्था की प्रक्रिया को समझाने की जिम्मेदारी स्वीकार कर ली। हालांकि मैं स्वीकार करता हूं कि यह सरल कार्य नहीं था। वृद्धावस्था और जराजन्यता इतनी जटिल प्रक्रियाएं हैं कि उन्हें सरल भाषा में समझाने का अर्थ है जीवन का निर्माण करने वाली घटनाओं के सभी रहस्यों को उजागर करना और उन्हें इस तरह प्रस्तुत करना कि वे जीवन के सीधे-सादे और सोचे-समझे सत्य मालूम हों। मैंने अपनी ओर से इस कठिनाई को हल करने का पूरा प्रयास किया है और इसे रोचक भी बनाया है - न केवल उनके लिए जिन्होंने आठवीं कक्षा तक विज्ञान पढ़ा है, बल्कि उनके लिए भी जिन्हें विज्ञान का ज्ञान तो बिलकुल नहीं है, लेकिन और अधिक जानने की लालसा है। मुझे आशा है कि यह पुस्तक एक तेजस्वी युवा व्यक्ति के कम समर्थशाली बूढ़े में परिवर्तित हो जाने के प्रति पाठकों में पर्याप्त उत्सुकता जगाएगी। बुढ़ापा, आखिरकार, एक साधारण टूट-टूट की संयोगिक घटना नहीं है। इसके विपरीत, वृद्धावस्था और मृत्यु दोनों के संकेत, हमारे आनुवंशिक ब्लूप्रिंट में बहुत गहराई में स्थित होते हैं। मैं दो व्यक्तियों, सुश्री एन. एस. राजी और डा. श्रीपद गूंवर के प्रति आभार प्रकट करना चाहूंगा जिन्होंने यह पांडुलिपि तैयार करने में कई तरह से मेरी सहायता की है। हैदराबाद के श्री बी. वी. सत्यमूर्ति ने अपनी व्यस्तता के बावजूद उदारता से कई कार्टून तैयार किए, किंतु दुर्भाग्यवश प्रकाशक ने उन्हें पुनर्चित्रित कराने का निर्णय लिया। फिर भी, मैं हृदय से उनका धन्यवाद करता हूं । |
मैनपुरी। मैनपुरी लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में समाजवादी पार्टी (SP) की ओर से डिंपल यादव (Dimple Yadav) को कैंडिडेट बनाया गया है। वहीं सपा ने डिंपल यादव (Dimple Yadav) की चुनावी राह आसान करने के लिए शिवपाल सिंह यादव, जया बच्चन समेत कई लोगों को स्टार प्रचारक बनाया है।
समाजवादी पार्टी ने मैनपुरी में चुनाव प्रचार के लिए स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी की है। इसमें सपा ने अखिलेश यादव, किरनमय नंदा, रामगोपाल यादव, आजम खान, जया बच्चन, शिवपाल यादव समेत 40 लोगों को शामिल किया गया है।
समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार डिंपल यादव (Dimple Yadav) नामांकन दाखिल कर चुकी हैं। वहीं अखिलेश यादव ने डिंपल के चुनाव लड़ने को लेकर कहा था कि यह चुनाव मुलायम सिंह को श्रद्धांजलि है। साथ ही अखिलेश ने भरोसा जताया कि मैनपुरी भारी मतों से डिंपल को जिताएगा। उन्होंने ने कहा कि नेताजी ने यहां जो काम किया, वह आज भी दिखता है। हमारी ओर से लगातार चुनाव प्रचार चलता रहेगा। डिंपल ने बहुत चुनाव लड़े हैं, वह आराम से चुनाव लड़ लेंगी।
मैनपुरी सीट से सांसद और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद उनके लोकसभा क्षेत्र में उपचुनाव हो रहा है। बीजेपी ने समाजवादी पार्टी की कैंडिडेट डिंपल यादव को टक्कर देने के लिए रघुराज शाक्य को मैदान में उतारा है। हालांकि रघुराज शाक्य को प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव का करीबी माना जाता है।
| मैनपुरी। मैनपुरी लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में समाजवादी पार्टी की ओर से डिंपल यादव को कैंडिडेट बनाया गया है। वहीं सपा ने डिंपल यादव की चुनावी राह आसान करने के लिए शिवपाल सिंह यादव, जया बच्चन समेत कई लोगों को स्टार प्रचारक बनाया है। समाजवादी पार्टी ने मैनपुरी में चुनाव प्रचार के लिए स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी की है। इसमें सपा ने अखिलेश यादव, किरनमय नंदा, रामगोपाल यादव, आजम खान, जया बच्चन, शिवपाल यादव समेत चालीस लोगों को शामिल किया गया है। समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार डिंपल यादव नामांकन दाखिल कर चुकी हैं। वहीं अखिलेश यादव ने डिंपल के चुनाव लड़ने को लेकर कहा था कि यह चुनाव मुलायम सिंह को श्रद्धांजलि है। साथ ही अखिलेश ने भरोसा जताया कि मैनपुरी भारी मतों से डिंपल को जिताएगा। उन्होंने ने कहा कि नेताजी ने यहां जो काम किया, वह आज भी दिखता है। हमारी ओर से लगातार चुनाव प्रचार चलता रहेगा। डिंपल ने बहुत चुनाव लड़े हैं, वह आराम से चुनाव लड़ लेंगी। मैनपुरी सीट से सांसद और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद उनके लोकसभा क्षेत्र में उपचुनाव हो रहा है। बीजेपी ने समाजवादी पार्टी की कैंडिडेट डिंपल यादव को टक्कर देने के लिए रघुराज शाक्य को मैदान में उतारा है। हालांकि रघुराज शाक्य को प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव का करीबी माना जाता है। |
नयी दिल्लीः डिजिटल भुगतान कंपनी फ़ोनपे ने वेंचरईस्ट फंड एडवाइजर्स इंडिया लिमिटेड के खिलाफ सेबी से शिकायत की है कि वह ओएसलैब्स के बहुलांश शेयर अधिग्रहीत करने के प्रयास को विफल करने के लिए एफ्फल के साथ समझौते कर रही है। वॉलमार्ट की डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म फोनपे, इंडस ओएस में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए बातचीत काफी आगे बढ़ा चुकी थी।
कंपनी की वर्तमान में ओएसलैब्स में लगभग 32 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उसने ये शेयर ओमिडयार नेटवर्क, जेएसडब्ल्यू वेंचर्स, माइक्रोमैक्स और 19 अन्य एंजेल निवेशकों से खरीदे हैं। इंडस ओस आनलाइन सामग्री और ऐप खोजने का मंच है। मोबाईल विज्ञापन कंपनी एफ्फल ग्लोबल की भी इंडस ओएस में अभी बहुमत की हिस्सेदारी है। उसने सिंगापुर की एक मध्यस्थता अदालत में ओएसलैब्स के खिलाफ मामला दायर किया है जिसमें उसने कंपनी के संस्थापक के शेयरों के लिए बोली लगाने का पहला अधिकार अपना होने का दावा किया है।
फोनपे ने भी सिंगापूर की एक अदालत में एफ्फल और वेंचरईस्ट के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह दोनों कंपनियां भी ओएसलैब्स में निवेशक हैं। फोनपे ने शनिवार को एक बयान में कहा कि वेंचरईस्ट के खिलाफ उसने सेबी की आचार संहिता के कई उल्लंघन करने के आरोप में शिकायत की है। यह शिकायत वेंचरईस्ट के प्रोएक्टिव फंड- II (वीपीएफ) के एफ्फ़ल के साथ हाल ही के समझौते के संबंध में है। शिकायत में कहा गया है कि फोनपे द्वारा ओएसलैब्स के अधिग्रहण को रोकने के लिए वीपीएफ ने एफ्फल के साथ समझौते किए हैं। " वेंचरईस्ट ने फोनपे के इन आरोपों को लेकर कोई टिपण्णी नहीं की जबकि इंडसओएस और एफ्फल को भेजे गए ईमेल का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
| नयी दिल्लीः डिजिटल भुगतान कंपनी फ़ोनपे ने वेंचरईस्ट फंड एडवाइजर्स इंडिया लिमिटेड के खिलाफ सेबी से शिकायत की है कि वह ओएसलैब्स के बहुलांश शेयर अधिग्रहीत करने के प्रयास को विफल करने के लिए एफ्फल के साथ समझौते कर रही है। वॉलमार्ट की डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म फोनपे, इंडस ओएस में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए बातचीत काफी आगे बढ़ा चुकी थी। कंपनी की वर्तमान में ओएसलैब्स में लगभग बत्तीस प्रतिशत हिस्सेदारी है। उसने ये शेयर ओमिडयार नेटवर्क, जेएसडब्ल्यू वेंचर्स, माइक्रोमैक्स और उन्नीस अन्य एंजेल निवेशकों से खरीदे हैं। इंडस ओस आनलाइन सामग्री और ऐप खोजने का मंच है। मोबाईल विज्ञापन कंपनी एफ्फल ग्लोबल की भी इंडस ओएस में अभी बहुमत की हिस्सेदारी है। उसने सिंगापुर की एक मध्यस्थता अदालत में ओएसलैब्स के खिलाफ मामला दायर किया है जिसमें उसने कंपनी के संस्थापक के शेयरों के लिए बोली लगाने का पहला अधिकार अपना होने का दावा किया है। फोनपे ने भी सिंगापूर की एक अदालत में एफ्फल और वेंचरईस्ट के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह दोनों कंपनियां भी ओएसलैब्स में निवेशक हैं। फोनपे ने शनिवार को एक बयान में कहा कि वेंचरईस्ट के खिलाफ उसने सेबी की आचार संहिता के कई उल्लंघन करने के आरोप में शिकायत की है। यह शिकायत वेंचरईस्ट के प्रोएक्टिव फंड- II के एफ्फ़ल के साथ हाल ही के समझौते के संबंध में है। शिकायत में कहा गया है कि फोनपे द्वारा ओएसलैब्स के अधिग्रहण को रोकने के लिए वीपीएफ ने एफ्फल के साथ समझौते किए हैं। " वेंचरईस्ट ने फोनपे के इन आरोपों को लेकर कोई टिपण्णी नहीं की जबकि इंडसओएस और एफ्फल को भेजे गए ईमेल का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। |
अधिकारियों ने बताया कि यादव की तबीयत खराब होने के बाद उसे रायपुर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां से उसे 21 तारीख को पृथक-वास केंद्र लाया गया था।
बिलासपुरः छत्तीसगढ़ के दो जिलों में पृथक-वास केंद्र में डेढ़ साल की बच्ची और गर्भवती महिला की मौत हो गई है। छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने बताया कि राज्य के गरियाबंद जिले में गर्भवती महिला की तथा गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में एक बच्ची की मौत हो गई है। अधिकारियों ने बताया कि गरियाबंद जिले के धरनीगोड़ा गांव के पृथक-वास केंद्र में भगवती यादव (27) की मौत हो गई है।
यादव प्रवासी मजदूर थी। उन्होंने बताया कि यादव इस महीने की 14 तारीख को अपने माता-पिता के साथ तेलंगाना से अपने गांव पहुंची थी। तब से वे सभी पृथक-वास केंद्र में रह रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि यादव की तबीयत खराब होने के बाद उसे रायपुर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां से उसे 21 तारीख को पृथक-वास केंद्र लाया गया था।
उन्होंने बताया कि यादव को देखरेख में रखा गया था लेकिन आज सुबह उसकी मौत हो गई। उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए मैनपुर भेज दिया गया है। रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि एक अन्य घटना में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के टिकरकला गांव के पृथक-वास केंद्र में डेढ़ वर्षीय बालिका की मौत हो गई है।
उन्होंने बताया कि बालिका के पिता पुरन सिंह प्रवासी मजदूर है तथा वह इस महीने की 17 तारीख को श्रमिक विशेष रेलगाड़ी से मध्यप्रदेश के भोपाल से छत्तीसगढ़ पहुंचा था। उसे पेंड्रा के पृथक-वास केंद्र में रखा गया था लेकिन वहां से 18 तारीख को वह अपने गांव भाग गया था।
अधिकारियों ने बताया कि जब ग्रमीणों ने स्थानीय प्रशासन से शिकायत की तब पुरन सिंह को उसकी पत्नी और बेटी के साथ टिकरकला के पृथक-वास केंद्र में भेजा गया था। उन्होंने बताया कि बुधवार को बच्ची की मां उसे दूध पिलाने बाद नहाने के लिए चली गई। जब वह वापस आई तब बच्ची हिचकी ले रही थी तथा उसे सांस लेने में तकलीफ थी।
अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद महिला ने तत्काल इसकी जानकारी अपने पति और अन्य लोगों को दी तथा बच्ची को अस्पताल भेजा गया। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों ने बच्ची और उसकी मां का कोरोना वायरस संक्रमण की जांच के लिए नमूना ले लिया है।
| अधिकारियों ने बताया कि यादव की तबीयत खराब होने के बाद उसे रायपुर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां से उसे इक्कीस तारीख को पृथक-वास केंद्र लाया गया था। बिलासपुरः छत्तीसगढ़ के दो जिलों में पृथक-वास केंद्र में डेढ़ साल की बच्ची और गर्भवती महिला की मौत हो गई है। छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने बताया कि राज्य के गरियाबंद जिले में गर्भवती महिला की तथा गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में एक बच्ची की मौत हो गई है। अधिकारियों ने बताया कि गरियाबंद जिले के धरनीगोड़ा गांव के पृथक-वास केंद्र में भगवती यादव की मौत हो गई है। यादव प्रवासी मजदूर थी। उन्होंने बताया कि यादव इस महीने की चौदह तारीख को अपने माता-पिता के साथ तेलंगाना से अपने गांव पहुंची थी। तब से वे सभी पृथक-वास केंद्र में रह रहे थे। अधिकारियों ने बताया कि यादव की तबीयत खराब होने के बाद उसे रायपुर के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां से उसे इक्कीस तारीख को पृथक-वास केंद्र लाया गया था। उन्होंने बताया कि यादव को देखरेख में रखा गया था लेकिन आज सुबह उसकी मौत हो गई। उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए मैनपुर भेज दिया गया है। रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि एक अन्य घटना में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के टिकरकला गांव के पृथक-वास केंद्र में डेढ़ वर्षीय बालिका की मौत हो गई है। उन्होंने बताया कि बालिका के पिता पुरन सिंह प्रवासी मजदूर है तथा वह इस महीने की सत्रह तारीख को श्रमिक विशेष रेलगाड़ी से मध्यप्रदेश के भोपाल से छत्तीसगढ़ पहुंचा था। उसे पेंड्रा के पृथक-वास केंद्र में रखा गया था लेकिन वहां से अट्ठारह तारीख को वह अपने गांव भाग गया था। अधिकारियों ने बताया कि जब ग्रमीणों ने स्थानीय प्रशासन से शिकायत की तब पुरन सिंह को उसकी पत्नी और बेटी के साथ टिकरकला के पृथक-वास केंद्र में भेजा गया था। उन्होंने बताया कि बुधवार को बच्ची की मां उसे दूध पिलाने बाद नहाने के लिए चली गई। जब वह वापस आई तब बच्ची हिचकी ले रही थी तथा उसे सांस लेने में तकलीफ थी। अधिकारियों ने बताया कि इसके बाद महिला ने तत्काल इसकी जानकारी अपने पति और अन्य लोगों को दी तथा बच्ची को अस्पताल भेजा गया। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों ने बच्ची और उसकी मां का कोरोना वायरस संक्रमण की जांच के लिए नमूना ले लिया है। |
Party On Wheels: NMRC ने 'सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स इन नोएडा' मेट्रो की शुरुआत की है। इस पॉलिसी की पहली बुकिंग, सेक्टर-121 मे रहने वाले लोकेश और प्रिया राय ने की। उन्होंने सेक्टर, 51 मेट्रो स्टेशन पर खड़े, नोएडा मेट्रो कोच में, अपने बेटे स्वयं का जन्मदिन, उसके दोस्तों के साथ बड़े धूमधाम से मनाया। इस कोच की सजावट भी, NMRC ने की।
PM Modi Returned to India : PM मोदी की अमेरिका और मिस्र यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ ?
Monsoon Pattern : मॉनसून ने वैज्ञानिकों को भी चौंकाया, रास्ता बदलकर कैसे पहुंच गया उत्तर भारत ?
PM Modi Fan Old Lady : 'मोदी मेरा बेटा है. . इलाज तक करा रहा है'. . 100 साल की बुजुर्ग ने क्यों कही ये बात ?
Opposition and Congress : विपक्ष एक हुआ तो 300 से ज्यादा लोकसभा सीटों पर कांग्रेस का क्या होगा ?
AL Hakim Mosque History : क्यों खास है मिस्र की अल-हकीम मस्जिद जहां जाएंगे PM मोदी ?
What is H1B Visa : क्या है ये H1B वीजा जिस पर PM मोदी के एलान से खुशी से झूमे अमेरिकी भारतीय ?
Opposition Meeting in Patna : नीतीश के घर विपक्ष की बैठक का क्या रहेगा नतीजा?
Indian Team Chief Selector Update : 2011 का वर्ल्ड कप विनिंग का कोई चैंपियन होगा नया चीफ सिलेक्टर. .
| Party On Wheels: NMRC ने 'सेलिब्रेशन ऑन व्हील्स इन नोएडा' मेट्रो की शुरुआत की है। इस पॉलिसी की पहली बुकिंग, सेक्टर-एक सौ इक्कीस मे रहने वाले लोकेश और प्रिया राय ने की। उन्होंने सेक्टर, इक्यावन मेट्रो स्टेशन पर खड़े, नोएडा मेट्रो कोच में, अपने बेटे स्वयं का जन्मदिन, उसके दोस्तों के साथ बड़े धूमधाम से मनाया। इस कोच की सजावट भी, NMRC ने की। PM Modi Returned to India : PM मोदी की अमेरिका और मिस्र यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ ? Monsoon Pattern : मॉनसून ने वैज्ञानिकों को भी चौंकाया, रास्ता बदलकर कैसे पहुंच गया उत्तर भारत ? PM Modi Fan Old Lady : 'मोदी मेरा बेटा है. . इलाज तक करा रहा है'. . एक सौ साल की बुजुर्ग ने क्यों कही ये बात ? Opposition and Congress : विपक्ष एक हुआ तो तीन सौ से ज्यादा लोकसभा सीटों पर कांग्रेस का क्या होगा ? AL Hakim Mosque History : क्यों खास है मिस्र की अल-हकीम मस्जिद जहां जाएंगे PM मोदी ? What is HएकB Visa : क्या है ये HएकB वीजा जिस पर PM मोदी के एलान से खुशी से झूमे अमेरिकी भारतीय ? Opposition Meeting in Patna : नीतीश के घर विपक्ष की बैठक का क्या रहेगा नतीजा? Indian Team Chief Selector Update : दो हज़ार ग्यारह का वर्ल्ड कप विनिंग का कोई चैंपियन होगा नया चीफ सिलेक्टर. . |
शादी किसी भी लड़की के जीवन का बड़ा और अहम दिन होता है। वहीं परीक्षा भी उसकी लाइम का एक अहम दिन होता है। ऐसे में क्या होगा जब ये दोनों दिन एक ही दिन फंस जाए। यकीनन यह किसी भी लड़की के लिए बड़ी चिंता की बात हो जाएगी। ऐसा ही कुछ मध्य प्रदेश के सतना की मारुति नगर निवासी शिवानी के साथ हुआ।
शिवानी की शादी सतना की विराट नगर कॉलोनी में रहने वाले ग्राम छींदा निवासी सत्यनारायण और रानी देवी पयासी के बेटे अभिषेक से तय हुई थी। शादी 10 मई की निकली थी। वहीं शिवानी का एमपी ट्रेड वर्ग 2 का पेपर 11 मई को था। जब शादी तय हुई थी तब एग्जाम की डेट सामने नहीं आई थी। लेकिन शादी के फिक्स होने और कार्ड बट जाने के बाद परीक्षा की तारीख 11 मई की फंस गई।
चुकी शादी के कार्ड छप और बट चुके थे इसलिए शादी की डेट को आगे बढ़ाना मुमकिन नहीं था। शिवानी को पहले लगा कि वह परीक्षा नहीं दे पाएगी। लेकिन फिर उसने पति और सास से बात की। सबने मिलकर फैसला किया कि शिवानी परीक्षा जरूर देगी। इसके लिए बारात समय से पहले आ जाएगी और शादी कि रस्में भी पहले शुरू हो जाएगी।
बस फिर क्या था 10 मई बुधवार को मारुति नगर स्थित एक मैरिज गार्डन में शादी धूमधाम से सम्पन्न हो गई। सारी रस्में गुरुवार सुबह 7 बजे तक निपटा ली गई। और फिर शिवानी को परीक्षा सेंटर में उसके रिपोर्टिंग टाइम 8 बजे के पहले पहुंचा भी दिया गया। यहां शिवानी ने अच्छे से परीक्षा दी। उधर दूल्हा और बाराती को विदाई के लिए 1 बजे तक का इंतजार करना पड़ा। शिवानी परीक्षा देकर 12 बजे तक आई। फिर विदाई की तैयारी शुरू हुई।
परीक्षा देकर शिवानी बड़ी खुश दिखाई दी। उसने अपने ससुराल वालों की तारीफ की। कहा कि उसे बड़ा ही सपोर्ट करने वाला ससुराल मिला है। परीक्षा में सफलता मिलना न मिलना दूसरी बात है लेकिन जिस तरह से ससुरालवालों ने उसकी भावना की कद्र की वह शिवानी काभी नहीं भूल पाएगी। उधर दूल्हे अभिषेक ने इस मामले पर कहा कि इस तरह के अवसर बार-बार नहीं मिलते हैं। इसलिए हमने शिवानी को शादी के ठीक अगले दिन परीक्षा देने के लिए सपोर्ट किया।
शिवानी की यह स्टोरी अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। हर कोई शिवानी के ससुराल वालों की तारीफ कर रहा है। बोल रहा है कि आज के जमाने में इतना सपोर्ट करने वाला ससुराल नहीं मिलता है। बल्कि लोग तो शादी के बाद बहू का जॉब पर जाना ही बंद करवा देते हैं। ऐसे में शिवानी बड़ी लकी है जो उसे इतना सपोर्ट करने वाले सास, ससुर और पति मिले।
वैसे इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है हमे कमेन्ट कर जरूर बताएं। यदि आपके घर की बहू भी इस स्थिति में फंस जाती तो आप क्या करते? कमेंट कर हमे जरूर बताएं। साथ ही ये खबर पसंद आई हो तो इसे दूसरों के साथ शेयर भी करें। ताकि दूसरे लोग भी इससे प्रेरित होकर पने घर की बहू बेटियों को पढ़ाने और जॉब करने में हिचके नहीं।
| शादी किसी भी लड़की के जीवन का बड़ा और अहम दिन होता है। वहीं परीक्षा भी उसकी लाइम का एक अहम दिन होता है। ऐसे में क्या होगा जब ये दोनों दिन एक ही दिन फंस जाए। यकीनन यह किसी भी लड़की के लिए बड़ी चिंता की बात हो जाएगी। ऐसा ही कुछ मध्य प्रदेश के सतना की मारुति नगर निवासी शिवानी के साथ हुआ। शिवानी की शादी सतना की विराट नगर कॉलोनी में रहने वाले ग्राम छींदा निवासी सत्यनारायण और रानी देवी पयासी के बेटे अभिषेक से तय हुई थी। शादी दस मई की निकली थी। वहीं शिवानी का एमपी ट्रेड वर्ग दो का पेपर ग्यारह मई को था। जब शादी तय हुई थी तब एग्जाम की डेट सामने नहीं आई थी। लेकिन शादी के फिक्स होने और कार्ड बट जाने के बाद परीक्षा की तारीख ग्यारह मई की फंस गई। चुकी शादी के कार्ड छप और बट चुके थे इसलिए शादी की डेट को आगे बढ़ाना मुमकिन नहीं था। शिवानी को पहले लगा कि वह परीक्षा नहीं दे पाएगी। लेकिन फिर उसने पति और सास से बात की। सबने मिलकर फैसला किया कि शिवानी परीक्षा जरूर देगी। इसके लिए बारात समय से पहले आ जाएगी और शादी कि रस्में भी पहले शुरू हो जाएगी। बस फिर क्या था दस मई बुधवार को मारुति नगर स्थित एक मैरिज गार्डन में शादी धूमधाम से सम्पन्न हो गई। सारी रस्में गुरुवार सुबह सात बजे तक निपटा ली गई। और फिर शिवानी को परीक्षा सेंटर में उसके रिपोर्टिंग टाइम आठ बजे के पहले पहुंचा भी दिया गया। यहां शिवानी ने अच्छे से परीक्षा दी। उधर दूल्हा और बाराती को विदाई के लिए एक बजे तक का इंतजार करना पड़ा। शिवानी परीक्षा देकर बारह बजे तक आई। फिर विदाई की तैयारी शुरू हुई। परीक्षा देकर शिवानी बड़ी खुश दिखाई दी। उसने अपने ससुराल वालों की तारीफ की। कहा कि उसे बड़ा ही सपोर्ट करने वाला ससुराल मिला है। परीक्षा में सफलता मिलना न मिलना दूसरी बात है लेकिन जिस तरह से ससुरालवालों ने उसकी भावना की कद्र की वह शिवानी काभी नहीं भूल पाएगी। उधर दूल्हे अभिषेक ने इस मामले पर कहा कि इस तरह के अवसर बार-बार नहीं मिलते हैं। इसलिए हमने शिवानी को शादी के ठीक अगले दिन परीक्षा देने के लिए सपोर्ट किया। शिवानी की यह स्टोरी अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। हर कोई शिवानी के ससुराल वालों की तारीफ कर रहा है। बोल रहा है कि आज के जमाने में इतना सपोर्ट करने वाला ससुराल नहीं मिलता है। बल्कि लोग तो शादी के बाद बहू का जॉब पर जाना ही बंद करवा देते हैं। ऐसे में शिवानी बड़ी लकी है जो उसे इतना सपोर्ट करने वाले सास, ससुर और पति मिले। वैसे इस पूरे मामले पर आपकी क्या राय है हमे कमेन्ट कर जरूर बताएं। यदि आपके घर की बहू भी इस स्थिति में फंस जाती तो आप क्या करते? कमेंट कर हमे जरूर बताएं। साथ ही ये खबर पसंद आई हो तो इसे दूसरों के साथ शेयर भी करें। ताकि दूसरे लोग भी इससे प्रेरित होकर पने घर की बहू बेटियों को पढ़ाने और जॉब करने में हिचके नहीं। |
प्रथम भांग ।
भय से कुछ कह न सकती थी, धन का धन जाता था और गुरु आज्ञाओं की पूर्ति करते २ उसके और भी नाक में दम श्राजाता था । उसके बालकों को भी कष्ट होता था। वह सोचती थी कि किस प्रकार इन से पीछा छूटे । एक दिन गुरु जी पधारे, उसकी मलिन बुद्धि में था. गया, उसका पति खेतों पर था, वह सदा एक दो बजे दिन को आाया करता था। गुरु जी सबेरे गये । इसने झटपट चौका चूल्हा तैयार करा के भोजनों का प्रवन्ध कर दिया । जब भोजन वनगये और गुरु जी बैठे, यह उनके सम्मुख बैठकर बहुत कुछ उदास हो रुवासी शक्ल बना सूंसल के सिरे पर घी लगाने लगी। गुरुजी ने देख कर पूछा तू यह क्या करती है। आंखों में जल डबडबा कर बोलीमहाराज! करती क्या हूं, तुम्हारा शिष्य थोड़े काल से सिड़ी सा हो गया है, जो कोई उसके घर आता है प्रथम भोजन खिला पश्चात् यह मूसल उसकी गटई (घाटी) में ठूस देता है । आप वृद्ध थे, मैंने सोचा कि घी लगा रक्खूं, जिससे चिकना होने से कुछ आप को सुख मिलै । उसने कहा जब भूसल घाटी में हंसा गया तब घी लगाने से क्या मैं जीवित रहूंगी ? मेरे तो किंचित उसकी हवा लगाने से ही प्राण हवा हो जायेंगे, नकि घाटी में ढूंसना । श्री ने कहा मैं स्वतः वड़े कष्ट और महा विपत्ति में फैली हूं । महाराज ! उसके आने का समय आ गया है । गुरु जी ने वैसे ही भोजन त्याग घर की रास्ता लिया। पीछे देखते जाते थे कि कहीं श्रा न जावें । इतने में वह अहीर आ गया । भोजन तैयार बना हुआ पड़ा देख कर पूछा कि किसने बनाया था । श्री ने कहा कि वेही तुम्हारे अनोखे गुरुजी श्राये थे, भोजन बनाकर जीमने बैठे । कहा मुझे मूसल दे दो मैंने कहा कि औौर जो श्राप चाहें सो लेजावे मूसल मेरे मैके का है वह तो नहीं दूंगी इसी पर क्रोधित होकर भोजन छोड़ अपना लटू पटू ले चले गये। फिर मैं देती भी रही परन्तु नहीं ठहरे अभी थोड़ी दूर पहुंचे होंगे लो यह मूसल तुम्हीं दे श्रो, वह मूसल लेकर गयो । दूर ले पुकारा और मूसल दिखाया। गुरुजी समझे कि यथार्थ में जो वह कहती थी, सच है । अव कहां गुरु का पता लंगना था । अन्त को वह या और गुरु जी से इस तरह पीछा छुड़ाया । सच
कहा हैः- :
लोभी गुरु लालची चेला, दोनों खेले दाव । भवसागर में डूबते, बैठे पत्थर की नाव ॥
इस लिये बहिनो । तुम अपना सच्चा श्रादि गुरु परमेश्वर को दूसरा पति को समझो, यही तुम्हारे कल्याण की मुख्य बात है । जब गुरुकुल तुम्हारे वन जावे या व तुम्हें जिन विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त हो वह विद्याध्ययन कराने
वाली परमेश्वरकी पहचान बतलाने वाली श्रध्यापिकायें तुम्हारी कल्याण कारक गुरू होगा। यह नहीं कि पहले बिना बिचारे गुरु करते फिर झूठ छल के ढोंग उस श्रहीरिन के सदृश रचने पड़े।
* तुलसी शालग्राम
आज सूर्ख स्त्रियों को उनके पाधा पुरोहित तुलसी शालग्राम के विवाह का माहात्म्य और उसका फल सुना धोका दे दम पट्टी में ला उनका विवाह रचवाते हैं। स्त्रियों की तुलसी और उनके शालग्राम होते हैं। उनका बड़ी धूम धाम से विवाह होता है। सैकड़ों रुपये उसमें व्यय होते हैं और पंडित जी सारा गहना पाता माल असवाब अपने घर ले जाते हैं। वहनो ! मैं क्या तुम्हें समझाऊ, बिचार और बात की छांन बीन की योग्यता ही नहीं रही हैं। दृष्टान्त के लिये देख लो, जहां कथायें होती हैं वहां मनुष्य वैठे हुए वान वटते, कपड़े सीत, बहीखाता रँगते वा इसी प्रकार के और कार्य करते जाते और कथा भी सुनते जाते हैं। हां जनं पर कथक्कड़ "हरयेनमः" या "हरे कृष्णांदि" कहते हैं वहीं सब मिलकर कहने लगते हैं, मानों यह भली भांति समझ रहे
। एक महात्मां कहते थे कि बनारस में एक शास्त्री पंडित की कथा हो रही थी । सम्पूर्ण बातें उपरोक वहां विद्यमान थीं। दर्शनों की फिलॉस्फी कौन समझता है, परन्तु "हरये नमः " अवश्य सुनाई देता था। उस पंडित ने यह समझ कर कि देखे यह कुछ समझते भी हैं, एक बिलकुल झूठी मनगढ़ंत कहानी परीक्षार्थ छेड़ दो कि इसी काशी नगर में एक बार एक राजा की सवारी निकली। राजा चार मन्त्री आदि के सहित हौढ़े में सवार था, हाट में चार मक्खियां उस हाथी के चिमट गई और पांचों मनुष्यों सहित हाथी को उड़ा ले गई । इसके अन्त पर भी सब ने "हरये नमः " उसके साथ कह दिया जिससे उसे पता लगा कि यहां पर समझने वाला एक भी नहीं है ।
मेरा यहां पर इस कथन से यह प्रयोजन है कि स्वार्थियों की शिक्षा ने हमारे देश के स्त्री पुरुषों के मस्तकों को इतना बिगाड़ा है जो अपरिमित है । मुझे एक कहानी स्मरण हुई है वह बिलकुल ही इसके अनुकूल है। एक गांव में एक मुक़द्दम ( महतिया) रहते थे। उनसे श्राकर एक पुरुष ने कह दिया कि अरे ! तू बैठा हुआ क्या करता है ? घर में तेरी लुगाई (स्त्री) रांड़ तू होगई। वह वहीं धाड़े मार २ रोने लगा। लोग इकट्ठे होगए । उससे पूँछा तू क्यों रोता है ? कहा रोता क्या हूँ, मेरी लुगाई रांड़ होगई है। लोग हँस पड़े और समझाने लगे कि तू निरा पागल है । तेरे होते हुए तेरी लुगाई कैसे गंड़ होसकती है। वह कहने लगा तुम्हीं पागल खवती हो, मेरे होने से क्या हो सकता है, मैं बैठाही रहा, मेरी बहन रांड़ होगई तो मैंने क्या कर लिया, जो अहो कर करलूँगा । वस साक्षात् यही दशा है कि बिचार समझ को ऐसा
ही फटकारा है जैसे कि उस मुक़द्दम ने, श्रव-श्राप ध्यान दीजिये कि तुलसी शालग्राम की कहानी पद्मपुराण से निकाली गई है जो एक अनोखी है. । मैं संक्षेप से "अन्तिम फल जिससे प्राप्त हो जावें " आप को बताता हूँ।
जलन्धर नामी एक राजा था ! उस की स्त्री बिन्दा नामी वड़ीही पतिव्रता थी । उस से शिवजी आदि से बड़ी कठिन लड़ाई हुई, वह किसी प्रकार मारा नहीं जाता था। तब उसके मारे जाने के अभिप्राय से उसकी स्त्री का पतिव्रत धर्म नष्ट करने के हेतु विष्णु भगवान् ने भिखारी बनकर और धोका देकर उस के साथ भोग किया और उस के पतिव्रत धर्म का नाशं किया, वाह ! कैसा शोक का स्थान है कि विष्णु भगवान् और यह काम ! जब यह छल उस पतिव्रता स्त्री पर प्रकट हुआ और इस तरह धोके से पतिव्रत धर्म नष्ट करने से उसका पति मारा गया, तब उसने शाप दिया कि जिसके शाप से विष्णुजी गण्डकी नदी में पत्थर वन लुढ़कने लगे । चुनांचे वही पत्थर शालग्राम कहलाते हैं । वह तो एक पत्थर बन गए थे। श्राज नदी भर के पत्थर पथरियां सभी शालग्राम बना लिये गये। यह किसी को ज्ञात नहीं कि वह कौन पत्थर बने थे और वह सहस्रों वर्षोंके होजाने से नष्ट भ्रष्ट होगये या. अभी शेष हैं। पौराणिक बुद्धिहीं जो ठहरी ।
पत्थर बनते समय विष्णु ने उसे शाप दिया कि तू तुलसी का पेड़ बनेगी । तेरा पत्ता जब मुझे चढ़ेगा, मैं प्रसन्न हूंगा। नहीं मालून कि यह शाप किस पाप के बदले था । उस विचारी निष्पापिन स्त्री ने क्या पाप किया था । खैर वह पत्थर वन गये यह तुलसी बन गई, यह भी पता नहीं कि कौन वा किस देश और धरती पर बनी और पहिले भी तुलसी का पेड़ सृष्टि में था i वा नहीं परन्तु जो कह दिया वही होगया । क्या इन बातों से आज उन हमारे माननीय बड़ों पर दोष नहीं आता या उनकी प्रतिष्ठा स्थिर रहती है ? स्वयं ही समझ लीजिये बहिनो ! तुम ने कभी भी इसके मूल तात्पर्य को पूछा वा तुमने सोचा कि यह कैसी टट्टी की आड़ में शिकार खेली जाती है । पत्थर जड़ और तुलसी का पेड़ जड़ ! जड़ से जड़ का विवाह कराया जाता है, क्या अच्छी फ़िलाफ़ी और बुद्धिमानी है। कभी यह भी सोचा कि शालग्राम के पिता कौन हैं ? कहां के निवासी हैं, क्या नाम है, क्या निवासस्थान है, तिस पर तुलसी को जगत् माता और शालग्राम को पिता बतलाते हैं। श्राप उनके बाल बच्चे बने हैं। फिर ही माता पिता का विवाह रचाते हैं। नहीं सोचते कि यह कैसी सन्तान है जो अपने दादे परदादे वरन उनके भी बड़ों का विवाह कराती है और शर्म नहीं खाती। इस पर और बात अधिक यह है कि तुलसी माता को पुत्री और शालग्राम पिता को पुत्र बनाते हैं । तुलसी के विषय में बड़े २ डाक्टरों की सस्मति है कि जो बुखार घर के बरतनों के धोने या घरके
नारींघर्मविचार !
और कामों की जहरीली बायु से पैदा होता है, वह हवा जब तुलसी के पेड़ से लगती है तो शुद्ध होजाती है, और वह दुखार नहीं फैलता । हमारे पुराने पुरषा इस नियम से जानकार थे । इस लिये हर गृह में तुलसी के पेड़ का होना आवश्यक था। आज स्वार्थियों ने उस से भी टका सीधा कर दिखाया ।
नोट - जैसे तुलसी के पेड़ से घर की वायु शुद्ध होती है वैसे ही पीपल के एक बड़े पेड़से एक टोला वा छोटे पुरवा की वायु शुद्ध होजाती है। जितनी प्राणवायु पीपल के पेड़ से निकलती और अपान वायु उस के करती है उतनी अन्य पेड़ों में नहीं, इस लिये हमारे ऋषियों की पीपल के पेड़ के पास हुआ करती थी। उन्हें वायु जल की शुद्धि का (जो जीवन के लिये सब से अधिक आवश्यक है ) बड़ा ध्यान था । परन्तु श्राज तुलसी के पेड़ की नाई इसके विषय में भी विचित्र कहानी गढ़ पद्मपुराण में लिखमारी, लिखा है कि श्रीकृष्ण की साली दरिद्रा को उसके पति ने छोड़ दिया था, वह पीपल पर रहती थी। हर शनैश्चर को श्रीकृष्ण उस से मिलने को उस पेड़ पर आते थे । श्राज उस पेड़ का तो पता नहीं है, इस लिये सारे पीपल के पेड़-पूजे जाते हैं। जो घी मिठाई चढ़ती है वह दरिद्रा का भोजन और डोरा धागा लपेटा जाता है वह उस के वश हैं। बाहरी मूर्खता तूने यह भी न सोचा कि जब श्रीकृष्ण प्रापही शरीर छोड़ गए तब दरिद्रा. उस सरीर से कैले श्रमर रह सकती थी । नाम भी कैसा श्रेष्ट है पूर्व समय की सृष्टि प्रणाली जैसा । जब उस के पति ने किसी कलंकके कारण छोड़ दिया होगा तो ऐसी कलंकित स्त्री के पास बरावरं नियम पूर्वफ जाने से कृष्णचन्द्र की योग्यता वा सभ्यता कैसे स्थिर रह सकती है ? " हाय ! बड़ों के नाम को कलंकित करते तक नहीं लजाते ! पीपल का पत्ता नहीं वह उनके कथनानुसार किसी एक पेड़ पर होगी, शेप कड़ोरो पेड़ों की पूजा तो निष्फल ही हुई। क्यों करोड़ों को वहका मारा ?
* शर्म *
वहनो ! इस में कुछ सन्देह नहीं कि शर्म ( लाज.) तुम्हारा एक सच्चा भूपण था । आज तुमने सच्ची शर्म को त्यांग झूठी शर्म करना सीखली । कोई ज्येष्ट श्वशुर सहस्त्र लक्ष्म एक श्राध ऐसा कुमार्गी दुराचारी होगा जो अपनी छोटी भावज से या अपनी वह से जो उस की कन्या के तुल्य होती है, उस को कुदृष्टि से देख कर उसकी प्रतिष्ठा और पवित्रता में का कारण बने और अपना लोक परलोकः बिगाड़ जैसा किःअनुजवधू भगिनी सुतनारी । सुन शठ यह कन्यासमचारी ॥ बहनो ! श्राज बह्न जी अपने-जेठ, श्वशुर के सामन मुँह खोलना तो कहां
6 प्रथम भाग ।
'मुँह से बात तक नहीं करतीं । चाहे विल्ली कुत्ता कोई चीज खा रहा हो, यह जी देख रही हो, श्वशुर जेठ वेठे हो अथ मारे शर्म के मुँहसे नहीं बोलतीं इस लिये कि बेशर्म न कहलावें, परन्तु वहही बहू विवाह, मुण्डन, सगाई, जन्म आदि उत्सवों पर ऐसे घृणित राग गाकर सुनाती हैं कि उस समय सारी शर्म हया की धज्जियां उड़ा देती हैं. फिर जरा नहीं लजातीं, तालियां भी 'बजाती हैं । यहनो ! न्याय पूर्वक सोचो विचारो कि वह शर्म थी या यह है इस को जानें दीजिये, घरवाले ही नहीं वरन् समधी वराती जब एकत्र होते हैं, उस समय नाम ले २ कर ऐसी गालियां गाई जाती है जिस से सभ्य और पुरुषों की जिन्हें ज़रा भी शर्म है गर्दन ऊपर नहीं उठती। वह दशा होती है जो अनकही अच्छी। जिस समय बहू जी गाती हैं, उनके पति जेठ श्वशुर सभी सुनते है समझते हैं, कि यह वहू जी की आवाज़ है, यह अमुक की यह अमुककी। फैस २ सुन्दर मंतोहरे शब्द उन के मुखारविन्द से निकलते हैं मानो फूल झड़ रहे हैं, बाहरी शर्म । विचार कर के देखो तो तुमसे अधिक और कौन, निर्लज्ज होगा ? सत्य है -
आप अपने दोष से माहिर नहीं होता कोई, जिस तरह बू अपने सुहँकी आती है कब नाक में.
इसके अतिरिक्त जिस समय मेला दशहरा चराई तीजों में जाती हो तौ फिर सोलह शृंगार कर मुँह खोल कर सारे मैले वालों को दिखलाती हो । अरी ! शर्म अपनों से चाहिये या अन्यों से ? परन्तु क्या किया जावे ! जव तुमने उलटाही सवक ( पाठ ) सीखा हो । यदि गहरे विचार से देखो तौ गालियां गाते समय तुमने सण्डियों को भी हरादिया क्यों कि जिस समय उसे द्वार पर रुपया. मिलजाता है फिर वह गालियां नहीं गाती और तुम अपने नेगके मिल जाने पर भी जब तक वरातीखाते हैं महामलिन शब्दों से गालियां . सुनाती ही रहती हो, जिस समय तक खाकर चलते हैं तब तक पीछा नहीं छोड़ती कि-(चोर भागे जायें पकड़ियो लोगो किन्हीं २ स्थानों पर जो परमेवशर के स्मरण का समय है, जिस में सन्ध्या हवन करना चाहिये मिड़ड़ा ( कोयल ) नामी गीत जिन में सभ्यता लेशमात्र भी नहीं बड़े ही उच्च स्वर से गाती हो फिर भी अपने को शर्मवाली समझती हो। बड़े घरों में जो कुलीन गिने जाते हैं आपस की स्रियां आप नाचती और स्वांग बनाती हैं परन्तु यदि जानकर कहीं किसी धर्मात्मा विद्वान का धर्म सम्बन्धी व्याख्यान हो उसमें स्त्री का जाना अनुचित समझा जाता है। हमारे बड़े पवित्रविचारी सदाचारी होते थे वे दूसरों की मा बेटियों को अपनी माता वैटी के तुल्य जानते थे। इस लिये झूठा परदा नहीं था । यह उन्हीं की उत्थापित रस्म है ।
जिन्हें आप पर और अपनी स्त्रियों पर एनवार नहीं है, सज्जन धर्मात्मा पुरुषों की स्त्रियों पर विश्वास का कोई कारण नहीं वरन देखा जाता है कि जब तक स्त्री मुँह छिपाये रहती है उस वक्त तक पुरुष की इच्छा उसके देखने की रहती है परन्तु जिसका मुँह खुला है उसकी ओर दुवारा दृष्टि भी नहीं उठती। वहिनो मुँह छिपाने से ही शर्म नहीं कही जा सकती । जब तक मन पवित्र और उसका परदा न हो, हाँ तुम्हें कभी जेष्ठ श्वशुर वा देवर से श्रांखें मिलाना नहीं चाहिये । मुँह ढापे रहनेसे अशेग्यता में अन्तर पड़ता है इस लिये पुरुषा के साथ निरन्तर महात्माओं के लेक्चर सुनने को जाना चाहिये परन्तु बैठने का स्थान पुरुषों के बैठने से अलग एकांत में होना चाहिये । इस लिये कि पुरुष का सुधार हुआ स्त्री का नहीं तो वह घर काना है, लूला है, लंगड़ा है ।
* नाच
जब बुरे दिन आते हैं उस से प्रथम बुद्धि बिगड़ जाती है, श्रपना हितैषी शत्रु और शत्रु हितैषी दृष्टि आता है। सच जानिये बहुधा घरानों में पुरुष वरातों में व्यय अधिक हो जाने के कारण या और इसी प्रकार के कारणों से नाच ले जाना नहीं चाहते परन्तु उनके घर की स्त्रियां हठ करती है कि पातुर विना वरात सूनी रहेगी, यह चड़ों की रीति है, आज पर्यन्त कोई विवाह ऐसा नहीं हुआ जिसमे पतुरिया न गई हो और चाहे कुछ हो वा न हो मेरे पुतवा के विवाह में पतुरिया श्रवश्य जावेगी नहीं तो सारी सृष्टि थूकेंगी कि उन्हें पतुरिया तक न जुरी, यहां तक कि वह समझती है कि विन मंगलामुखा सदासुखी गृह पवित्र न होगा, नाक यचैगी ही नहीं जिन्हें यह भी तमीज (योग्यता) नहीं रही कि इसका ले जाना नाच कराना हमारी बहुत्रों को कितना हानि कारक होगा । हमारे नातेदार वराती नाच देखकर क्या २ कौतुक न रचेंगे । कोई २ तो अपनी लुगाइयों को मुँह तक न लगावेंगे । सारी धन सम्पत्ति उसी पर निछावर कर देंगे। सारा घर वार धूल में मिला अपनो से विमुख हो उसी के द्वार की खाक छानेंगे। बहुतेरे उनमें से ऐसे भयानक परिणाम वाले रोग अपने घरों में ला बसायेंगे । जिसके प्रभाव से संन्तान "तक श्रायु भर रोती फिरेगी । आज सैकड़ों पुरुप जो नीम की टहनी हाथ में लिये घूम रहे हैं, यह इसी नाच का प्रताप है जो उन्हें यह कर्मपत्र मिले हैं। हा शौक, उनके बुलाने पर तुम्हें हठ ! और स्वयं भी नाच देखने का चसका ! देखो जहां नाच होता है स्त्रियों के लिये भी अवश्यमेव छत खिड़कियों के द्वारों से नाच देखने का प्रवन्ध किया जाता है वह देखती है कि एक परले दर्जे की कुमार्गी, दुराचारिणी, निर्लज्ज स्त्री नीचे से ऊपर तक गहनों में लदी हुई है, दिन में चार २ बार वस्त्र बदलती हैं, सुगन्धित महक की लपटें सी निकल रही है, पास खड़े हुओं के मस्तक सुगन्धियों से परिपूरित हो रहे
है, उसकी वह मान प्रतिष्ठा है कि एक मनुष्य पान लिये खड़ा है, दूसरा पीकदान ! उसके कहने की देर नहीं कि तुरन्त उपस्थित किया गया। सब खड़े हुए उसकी ओर देखते और हांजी हांजी कर रहे हैं। जिससे वह कुछ बात कह देती है वह ही अपने को कृतार्थ समझता है । उसे बैकुन्ठ बहुत निकट रह जाता है। सब फूले नहीं समाते । वह यह भी देखती हैं कि हमारे पति भी उन्हीं में सम्मिलित हो वैसे ही प्रसन्न हो गुलछरें मार रहे हैं । सोचती हैं कि मैं गोवर पाथती हूँ, चर्खा कातती हूँ, चक्की पीसती हूँ, बरतन मांजती रोटी पकाती, हर तरह से रात दिन टहल सेवा गृहधन्धों में लगी रहती हूँ। नाना प्रकार की घुड़कियां भिड़कियां भी सहती हूँ। जैसा मिल गयां खा लिया पहन लिया फिर भी मेरे पति जिस समय घर में आते हैं. नाक भो चढ़ाये होते हैं। बाहर चाहे जैसे सभ्यता से बार्तालाप करते रहे हो परन्तु घरं में तो क्रोध और गाली के अतिरिक्त बात नहीं, इधर पति का यह वर्ताव उधर सास श्वशुर ननन्द जिठानी की कठिनाइयां ।
एक ओर यह विचार भीतरही भीतर काम कर रहा है, दूसरी ओर उस पतुरिया का गान बड़े व्याख्यानदाता की नाई मन पिघला रहा है वह चही प्रेम, प्यार, विरह आदि की दशा को रिखला दिखला, इशारे, नाक, भौंहों से चतला बतलाकर पका रही है। वह साफ शब्दों में बता रही है, परन्तु जो मोह मदिरा पिये प्रेम के रज्जू में बँधे हैं उन्हें कुछ पता नहीं लगता कि क्या हो रहा है। वह इस प्रकार सैकड़ों रागों में उनकी ओर देखकर कहती है कि "पिया की कमाई कभी छल्ला हू न पायो, यार की कमाई, यह सारा गहना " जो क्या नहीं बतलाता है ? कि यदि तुम भी मुझ जैसी हो जानो तो ऐसाही गहना पाता पहरने को मिले, इसी नाच को देख कर सहस्रों बड़े २ घरों की स्त्रियां निकल २ कर पतुरियां बन रहीं हैं जो केवल अविद्या का कारण है। यदि वह पढ़ी लिखी समझदार होतीं तो प्रथम तो नाच ही न देखतीं और देखतीं भी तो यही तात्पर्य निकालती कि एक चिथड़ों की पहनने वाली टुकड़ों की खाने वाली स्त्री, यदि पतिव्रत धर्म में स्थिर है तो क्या यह उसकी बरावरी कर सकती है यह व्यभिचारिणी स्त्री है, वह समझती हैं कि यह बाहरी झलक जो इसमें दिखाई दे रही है भीतर से यह अने कान रोगों से ग्रस्त है, जिससे स्वयं कुष्टिन बन अपने सारे प्यार धूम रहे करने वालों को उसका स्वाद चखा रही है, जो नीमकी डाली लिये । जब युवावस्था ढल जावेगी । तब उसको कौड़ी तकको कोई न पूछेगा । हमारे बाल बच्चे सेवा सुश्रुषा करेंगे उस समय यह मांगती डोलेगी, दो दो दानों, को तरसैगी, कभी पापों का फल भोगे बिना नहीं बचेगी ।
माता जी ! मैं इस विषय को लिखता हुआ लजाता जाता हूँ पर देश की
दुर्दशा और स्त्री पुरुषों की अज्ञानता के कारण विवश हूँ अितएवं श्राप इतने ही से नाच के हानि लाभ समझ कर स्वप्न में भी नाच कराने अथवा देखने का विचार न करो और न बालकों व पुरुषों को देखने दो, सत्य कहा हैःकवित ।
शुभ चाल को छोड़ कुचाल चले, परमेश्वर की कुछ लाज न आई । हा ! नाच कराय के रॉडन को व्यभिचार में सब सन्तान फंसाई ।। पड़ रोड के प्रेम के बन्धन में पितु मात की सारी विभूति उड़ाई । धन धर्म बिगाड़ लियो अपनो, काहे रांड नचावत हो मेरे भाई
निवेदन ।
बहिनो ! आज कल नाम मात्र के कपड़े रंगे हुये साधु, फकीर, वरंबा, तेलिया, कनफटा ज्योतिषी, रस्माल नौते, सियाने ऐसी २ उगाई करते हैं और कभी हाथ देख कर, कभी पत्रा खोल कर, कभी हाथ की सफाई, कभी बुद्धि के चमत्कार. छत, धोखां से ऐसा २ प्रभाव डालते हैं कि किसी समय चढ़े २ पढ़े लिखे इन के दस झासों में श्राजाते हैं। फिर तुम अल्पबुद्धि मूल निरक्षररा की क्या गिनती है। इस लिये मैं तुम्हें कई एक उनके छल और धोका देने वाली बातें बताता हूं, इन्हें जान कर इन्हीं से और वातों में भी फल ग्रहण कर लेना और यह तुम्हें चाहे जैसे किसी प्रकार फुसलाव, धमकाव डरावें तुम सदा यह समझना कि चाहे इस समय वह बात हमारे विचार में नहीं आती। जब तक हम इसे तर्क और शास्त्र द्वारा न जान लें नहीं कह सकतीं कि यह छल कपट से शून्य है। सहसा विम्वास न कर लिया करो । सदा बात कहने वाले के प्रयोजन पर ध्यान देना चाहिये कि यह जो कह रहा है इस में इस का मुख्य तात्पर्य क्या है। यदि उसका जाती लाभ धोखे के साथ, है, समझ लेना कि यह मक्कार घोलेवाज़ है ।
* साधु, फकीर, ब्रह्मचारी *
यह बात भले प्रकार समझलो कि एक का शरीर, कर्म दूसरे से पृथक होता है उसकी श्रात्मा दूसरे से स्वरूप में विरुद्ध नहीं होती। इस लिए यह शब्द श्रेष्ठ साधु धर्मात्माओं के लिये प्रचलित होना चाहिये, परन्तु श्रांज सहस्रों में एक साधु, फ़क़ीर, ब्रह्मचारी चाहे आपको प्रथम सा दिखाई पड़े, जो उन | प्रथम भांग । भय से कुछ कह न सकती थी, धन का धन जाता था और गुरु आज्ञाओं की पूर्ति करते दो उसके और भी नाक में दम श्राजाता था । उसके बालकों को भी कष्ट होता था। वह सोचती थी कि किस प्रकार इन से पीछा छूटे । एक दिन गुरु जी पधारे, उसकी मलिन बुद्धि में था. गया, उसका पति खेतों पर था, वह सदा एक दो बजे दिन को आाया करता था। गुरु जी सबेरे गये । इसने झटपट चौका चूल्हा तैयार करा के भोजनों का प्रवन्ध कर दिया । जब भोजन वनगये और गुरु जी बैठे, यह उनके सम्मुख बैठकर बहुत कुछ उदास हो रुवासी शक्ल बना सूंसल के सिरे पर घी लगाने लगी। गुरुजी ने देख कर पूछा तू यह क्या करती है। आंखों में जल डबडबा कर बोलीमहाराज! करती क्या हूं, तुम्हारा शिष्य थोड़े काल से सिड़ी सा हो गया है, जो कोई उसके घर आता है प्रथम भोजन खिला पश्चात् यह मूसल उसकी गटई में ठूस देता है । आप वृद्ध थे, मैंने सोचा कि घी लगा रक्खूं, जिससे चिकना होने से कुछ आप को सुख मिलै । उसने कहा जब भूसल घाटी में हंसा गया तब घी लगाने से क्या मैं जीवित रहूंगी ? मेरे तो किंचित उसकी हवा लगाने से ही प्राण हवा हो जायेंगे, नकि घाटी में ढूंसना । श्री ने कहा मैं स्वतः वड़े कष्ट और महा विपत्ति में फैली हूं । महाराज ! उसके आने का समय आ गया है । गुरु जी ने वैसे ही भोजन त्याग घर की रास्ता लिया। पीछे देखते जाते थे कि कहीं श्रा न जावें । इतने में वह अहीर आ गया । भोजन तैयार बना हुआ पड़ा देख कर पूछा कि किसने बनाया था । श्री ने कहा कि वेही तुम्हारे अनोखे गुरुजी श्राये थे, भोजन बनाकर जीमने बैठे । कहा मुझे मूसल दे दो मैंने कहा कि औौर जो श्राप चाहें सो लेजावे मूसल मेरे मैके का है वह तो नहीं दूंगी इसी पर क्रोधित होकर भोजन छोड़ अपना लटू पटू ले चले गये। फिर मैं देती भी रही परन्तु नहीं ठहरे अभी थोड़ी दूर पहुंचे होंगे लो यह मूसल तुम्हीं दे श्रो, वह मूसल लेकर गयो । दूर ले पुकारा और मूसल दिखाया। गुरुजी समझे कि यथार्थ में जो वह कहती थी, सच है । अव कहां गुरु का पता लंगना था । अन्त को वह या और गुरु जी से इस तरह पीछा छुड़ाया । सच कहा हैः- : लोभी गुरु लालची चेला, दोनों खेले दाव । भवसागर में डूबते, बैठे पत्थर की नाव ॥ इस लिये बहिनो । तुम अपना सच्चा श्रादि गुरु परमेश्वर को दूसरा पति को समझो, यही तुम्हारे कल्याण की मुख्य बात है । जब गुरुकुल तुम्हारे वन जावे या व तुम्हें जिन विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त हो वह विद्याध्ययन कराने वाली परमेश्वरकी पहचान बतलाने वाली श्रध्यापिकायें तुम्हारी कल्याण कारक गुरू होगा। यह नहीं कि पहले बिना बिचारे गुरु करते फिर झूठ छल के ढोंग उस श्रहीरिन के सदृश रचने पड़े। * तुलसी शालग्राम आज सूर्ख स्त्रियों को उनके पाधा पुरोहित तुलसी शालग्राम के विवाह का माहात्म्य और उसका फल सुना धोका दे दम पट्टी में ला उनका विवाह रचवाते हैं। स्त्रियों की तुलसी और उनके शालग्राम होते हैं। उनका बड़ी धूम धाम से विवाह होता है। सैकड़ों रुपये उसमें व्यय होते हैं और पंडित जी सारा गहना पाता माल असवाब अपने घर ले जाते हैं। वहनो ! मैं क्या तुम्हें समझाऊ, बिचार और बात की छांन बीन की योग्यता ही नहीं रही हैं। दृष्टान्त के लिये देख लो, जहां कथायें होती हैं वहां मनुष्य वैठे हुए वान वटते, कपड़े सीत, बहीखाता रँगते वा इसी प्रकार के और कार्य करते जाते और कथा भी सुनते जाते हैं। हां जनं पर कथक्कड़ "हरयेनमः" या "हरे कृष्णांदि" कहते हैं वहीं सब मिलकर कहने लगते हैं, मानों यह भली भांति समझ रहे । एक महात्मां कहते थे कि बनारस में एक शास्त्री पंडित की कथा हो रही थी । सम्पूर्ण बातें उपरोक वहां विद्यमान थीं। दर्शनों की फिलॉस्फी कौन समझता है, परन्तु "हरये नमः " अवश्य सुनाई देता था। उस पंडित ने यह समझ कर कि देखे यह कुछ समझते भी हैं, एक बिलकुल झूठी मनगढ़ंत कहानी परीक्षार्थ छेड़ दो कि इसी काशी नगर में एक बार एक राजा की सवारी निकली। राजा चार मन्त्री आदि के सहित हौढ़े में सवार था, हाट में चार मक्खियां उस हाथी के चिमट गई और पांचों मनुष्यों सहित हाथी को उड़ा ले गई । इसके अन्त पर भी सब ने "हरये नमः " उसके साथ कह दिया जिससे उसे पता लगा कि यहां पर समझने वाला एक भी नहीं है । मेरा यहां पर इस कथन से यह प्रयोजन है कि स्वार्थियों की शिक्षा ने हमारे देश के स्त्री पुरुषों के मस्तकों को इतना बिगाड़ा है जो अपरिमित है । मुझे एक कहानी स्मरण हुई है वह बिलकुल ही इसके अनुकूल है। एक गांव में एक मुक़द्दम रहते थे। उनसे श्राकर एक पुरुष ने कह दिया कि अरे ! तू बैठा हुआ क्या करता है ? घर में तेरी लुगाई रांड़ तू होगई। वह वहीं धाड़े मार दो रोने लगा। लोग इकट्ठे होगए । उससे पूँछा तू क्यों रोता है ? कहा रोता क्या हूँ, मेरी लुगाई रांड़ होगई है। लोग हँस पड़े और समझाने लगे कि तू निरा पागल है । तेरे होते हुए तेरी लुगाई कैसे गंड़ होसकती है। वह कहने लगा तुम्हीं पागल खवती हो, मेरे होने से क्या हो सकता है, मैं बैठाही रहा, मेरी बहन रांड़ होगई तो मैंने क्या कर लिया, जो अहो कर करलूँगा । वस साक्षात् यही दशा है कि बिचार समझ को ऐसा ही फटकारा है जैसे कि उस मुक़द्दम ने, श्रव-श्राप ध्यान दीजिये कि तुलसी शालग्राम की कहानी पद्मपुराण से निकाली गई है जो एक अनोखी है. । मैं संक्षेप से "अन्तिम फल जिससे प्राप्त हो जावें " आप को बताता हूँ। जलन्धर नामी एक राजा था ! उस की स्त्री बिन्दा नामी वड़ीही पतिव्रता थी । उस से शिवजी आदि से बड़ी कठिन लड़ाई हुई, वह किसी प्रकार मारा नहीं जाता था। तब उसके मारे जाने के अभिप्राय से उसकी स्त्री का पतिव्रत धर्म नष्ट करने के हेतु विष्णु भगवान् ने भिखारी बनकर और धोका देकर उस के साथ भोग किया और उस के पतिव्रत धर्म का नाशं किया, वाह ! कैसा शोक का स्थान है कि विष्णु भगवान् और यह काम ! जब यह छल उस पतिव्रता स्त्री पर प्रकट हुआ और इस तरह धोके से पतिव्रत धर्म नष्ट करने से उसका पति मारा गया, तब उसने शाप दिया कि जिसके शाप से विष्णुजी गण्डकी नदी में पत्थर वन लुढ़कने लगे । चुनांचे वही पत्थर शालग्राम कहलाते हैं । वह तो एक पत्थर बन गए थे। श्राज नदी भर के पत्थर पथरियां सभी शालग्राम बना लिये गये। यह किसी को ज्ञात नहीं कि वह कौन पत्थर बने थे और वह सहस्रों वर्षोंके होजाने से नष्ट भ्रष्ट होगये या. अभी शेष हैं। पौराणिक बुद्धिहीं जो ठहरी । पत्थर बनते समय विष्णु ने उसे शाप दिया कि तू तुलसी का पेड़ बनेगी । तेरा पत्ता जब मुझे चढ़ेगा, मैं प्रसन्न हूंगा। नहीं मालून कि यह शाप किस पाप के बदले था । उस विचारी निष्पापिन स्त्री ने क्या पाप किया था । खैर वह पत्थर वन गये यह तुलसी बन गई, यह भी पता नहीं कि कौन वा किस देश और धरती पर बनी और पहिले भी तुलसी का पेड़ सृष्टि में था i वा नहीं परन्तु जो कह दिया वही होगया । क्या इन बातों से आज उन हमारे माननीय बड़ों पर दोष नहीं आता या उनकी प्रतिष्ठा स्थिर रहती है ? स्वयं ही समझ लीजिये बहिनो ! तुम ने कभी भी इसके मूल तात्पर्य को पूछा वा तुमने सोचा कि यह कैसी टट्टी की आड़ में शिकार खेली जाती है । पत्थर जड़ और तुलसी का पेड़ जड़ ! जड़ से जड़ का विवाह कराया जाता है, क्या अच्छी फ़िलाफ़ी और बुद्धिमानी है। कभी यह भी सोचा कि शालग्राम के पिता कौन हैं ? कहां के निवासी हैं, क्या नाम है, क्या निवासस्थान है, तिस पर तुलसी को जगत् माता और शालग्राम को पिता बतलाते हैं। श्राप उनके बाल बच्चे बने हैं। फिर ही माता पिता का विवाह रचाते हैं। नहीं सोचते कि यह कैसी सन्तान है जो अपने दादे परदादे वरन उनके भी बड़ों का विवाह कराती है और शर्म नहीं खाती। इस पर और बात अधिक यह है कि तुलसी माता को पुत्री और शालग्राम पिता को पुत्र बनाते हैं । तुलसी के विषय में बड़े दो डाक्टरों की सस्मति है कि जो बुखार घर के बरतनों के धोने या घरके नारींघर्मविचार ! और कामों की जहरीली बायु से पैदा होता है, वह हवा जब तुलसी के पेड़ से लगती है तो शुद्ध होजाती है, और वह दुखार नहीं फैलता । हमारे पुराने पुरषा इस नियम से जानकार थे । इस लिये हर गृह में तुलसी के पेड़ का होना आवश्यक था। आज स्वार्थियों ने उस से भी टका सीधा कर दिखाया । नोट - जैसे तुलसी के पेड़ से घर की वायु शुद्ध होती है वैसे ही पीपल के एक बड़े पेड़से एक टोला वा छोटे पुरवा की वायु शुद्ध होजाती है। जितनी प्राणवायु पीपल के पेड़ से निकलती और अपान वायु उस के करती है उतनी अन्य पेड़ों में नहीं, इस लिये हमारे ऋषियों की पीपल के पेड़ के पास हुआ करती थी। उन्हें वायु जल की शुद्धि का बड़ा ध्यान था । परन्तु श्राज तुलसी के पेड़ की नाई इसके विषय में भी विचित्र कहानी गढ़ पद्मपुराण में लिखमारी, लिखा है कि श्रीकृष्ण की साली दरिद्रा को उसके पति ने छोड़ दिया था, वह पीपल पर रहती थी। हर शनैश्चर को श्रीकृष्ण उस से मिलने को उस पेड़ पर आते थे । श्राज उस पेड़ का तो पता नहीं है, इस लिये सारे पीपल के पेड़-पूजे जाते हैं। जो घी मिठाई चढ़ती है वह दरिद्रा का भोजन और डोरा धागा लपेटा जाता है वह उस के वश हैं। बाहरी मूर्खता तूने यह भी न सोचा कि जब श्रीकृष्ण प्रापही शरीर छोड़ गए तब दरिद्रा. उस सरीर से कैले श्रमर रह सकती थी । नाम भी कैसा श्रेष्ट है पूर्व समय की सृष्टि प्रणाली जैसा । जब उस के पति ने किसी कलंकके कारण छोड़ दिया होगा तो ऐसी कलंकित स्त्री के पास बरावरं नियम पूर्वफ जाने से कृष्णचन्द्र की योग्यता वा सभ्यता कैसे स्थिर रह सकती है ? " हाय ! बड़ों के नाम को कलंकित करते तक नहीं लजाते ! पीपल का पत्ता नहीं वह उनके कथनानुसार किसी एक पेड़ पर होगी, शेप कड़ोरो पेड़ों की पूजा तो निष्फल ही हुई। क्यों करोड़ों को वहका मारा ? * शर्म * वहनो ! इस में कुछ सन्देह नहीं कि शर्म तुम्हारा एक सच्चा भूपण था । आज तुमने सच्ची शर्म को त्यांग झूठी शर्म करना सीखली । कोई ज्येष्ट श्वशुर सहस्त्र लक्ष्म एक श्राध ऐसा कुमार्गी दुराचारी होगा जो अपनी छोटी भावज से या अपनी वह से जो उस की कन्या के तुल्य होती है, उस को कुदृष्टि से देख कर उसकी प्रतिष्ठा और पवित्रता में का कारण बने और अपना लोक परलोकः बिगाड़ जैसा किःअनुजवधू भगिनी सुतनारी । सुन शठ यह कन्यासमचारी ॥ बहनो ! श्राज बह्न जी अपने-जेठ, श्वशुर के सामन मुँह खोलना तो कहां छः प्रथम भाग । 'मुँह से बात तक नहीं करतीं । चाहे विल्ली कुत्ता कोई चीज खा रहा हो, यह जी देख रही हो, श्वशुर जेठ वेठे हो अथ मारे शर्म के मुँहसे नहीं बोलतीं इस लिये कि बेशर्म न कहलावें, परन्तु वहही बहू विवाह, मुण्डन, सगाई, जन्म आदि उत्सवों पर ऐसे घृणित राग गाकर सुनाती हैं कि उस समय सारी शर्म हया की धज्जियां उड़ा देती हैं. फिर जरा नहीं लजातीं, तालियां भी 'बजाती हैं । यहनो ! न्याय पूर्वक सोचो विचारो कि वह शर्म थी या यह है इस को जानें दीजिये, घरवाले ही नहीं वरन् समधी वराती जब एकत्र होते हैं, उस समय नाम ले दो कर ऐसी गालियां गाई जाती है जिस से सभ्य और पुरुषों की जिन्हें ज़रा भी शर्म है गर्दन ऊपर नहीं उठती। वह दशा होती है जो अनकही अच्छी। जिस समय बहू जी गाती हैं, उनके पति जेठ श्वशुर सभी सुनते है समझते हैं, कि यह वहू जी की आवाज़ है, यह अमुक की यह अमुककी। फैस दो सुन्दर मंतोहरे शब्द उन के मुखारविन्द से निकलते हैं मानो फूल झड़ रहे हैं, बाहरी शर्म । विचार कर के देखो तो तुमसे अधिक और कौन, निर्लज्ज होगा ? सत्य है - आप अपने दोष से माहिर नहीं होता कोई, जिस तरह बू अपने सुहँकी आती है कब नाक में. इसके अतिरिक्त जिस समय मेला दशहरा चराई तीजों में जाती हो तौ फिर सोलह शृंगार कर मुँह खोल कर सारे मैले वालों को दिखलाती हो । अरी ! शर्म अपनों से चाहिये या अन्यों से ? परन्तु क्या किया जावे ! जव तुमने उलटाही सवक सीखा हो । यदि गहरे विचार से देखो तौ गालियां गाते समय तुमने सण्डियों को भी हरादिया क्यों कि जिस समय उसे द्वार पर रुपया. मिलजाता है फिर वह गालियां नहीं गाती और तुम अपने नेगके मिल जाने पर भी जब तक वरातीखाते हैं महामलिन शब्दों से गालियां . सुनाती ही रहती हो, जिस समय तक खाकर चलते हैं तब तक पीछा नहीं छोड़ती कि- नामी गीत जिन में सभ्यता लेशमात्र भी नहीं बड़े ही उच्च स्वर से गाती हो फिर भी अपने को शर्मवाली समझती हो। बड़े घरों में जो कुलीन गिने जाते हैं आपस की स्रियां आप नाचती और स्वांग बनाती हैं परन्तु यदि जानकर कहीं किसी धर्मात्मा विद्वान का धर्म सम्बन्धी व्याख्यान हो उसमें स्त्री का जाना अनुचित समझा जाता है। हमारे बड़े पवित्रविचारी सदाचारी होते थे वे दूसरों की मा बेटियों को अपनी माता वैटी के तुल्य जानते थे। इस लिये झूठा परदा नहीं था । यह उन्हीं की उत्थापित रस्म है । जिन्हें आप पर और अपनी स्त्रियों पर एनवार नहीं है, सज्जन धर्मात्मा पुरुषों की स्त्रियों पर विश्वास का कोई कारण नहीं वरन देखा जाता है कि जब तक स्त्री मुँह छिपाये रहती है उस वक्त तक पुरुष की इच्छा उसके देखने की रहती है परन्तु जिसका मुँह खुला है उसकी ओर दुवारा दृष्टि भी नहीं उठती। वहिनो मुँह छिपाने से ही शर्म नहीं कही जा सकती । जब तक मन पवित्र और उसका परदा न हो, हाँ तुम्हें कभी जेष्ठ श्वशुर वा देवर से श्रांखें मिलाना नहीं चाहिये । मुँह ढापे रहनेसे अशेग्यता में अन्तर पड़ता है इस लिये पुरुषा के साथ निरन्तर महात्माओं के लेक्चर सुनने को जाना चाहिये परन्तु बैठने का स्थान पुरुषों के बैठने से अलग एकांत में होना चाहिये । इस लिये कि पुरुष का सुधार हुआ स्त्री का नहीं तो वह घर काना है, लूला है, लंगड़ा है । * नाच जब बुरे दिन आते हैं उस से प्रथम बुद्धि बिगड़ जाती है, श्रपना हितैषी शत्रु और शत्रु हितैषी दृष्टि आता है। सच जानिये बहुधा घरानों में पुरुष वरातों में व्यय अधिक हो जाने के कारण या और इसी प्रकार के कारणों से नाच ले जाना नहीं चाहते परन्तु उनके घर की स्त्रियां हठ करती है कि पातुर विना वरात सूनी रहेगी, यह चड़ों की रीति है, आज पर्यन्त कोई विवाह ऐसा नहीं हुआ जिसमे पतुरिया न गई हो और चाहे कुछ हो वा न हो मेरे पुतवा के विवाह में पतुरिया श्रवश्य जावेगी नहीं तो सारी सृष्टि थूकेंगी कि उन्हें पतुरिया तक न जुरी, यहां तक कि वह समझती है कि विन मंगलामुखा सदासुखी गृह पवित्र न होगा, नाक यचैगी ही नहीं जिन्हें यह भी तमीज नहीं रही कि इसका ले जाना नाच कराना हमारी बहुत्रों को कितना हानि कारक होगा । हमारे नातेदार वराती नाच देखकर क्या दो कौतुक न रचेंगे । कोई दो तो अपनी लुगाइयों को मुँह तक न लगावेंगे । सारी धन सम्पत्ति उसी पर निछावर कर देंगे। सारा घर वार धूल में मिला अपनो से विमुख हो उसी के द्वार की खाक छानेंगे। बहुतेरे उनमें से ऐसे भयानक परिणाम वाले रोग अपने घरों में ला बसायेंगे । जिसके प्रभाव से संन्तान "तक श्रायु भर रोती फिरेगी । आज सैकड़ों पुरुप जो नीम की टहनी हाथ में लिये घूम रहे हैं, यह इसी नाच का प्रताप है जो उन्हें यह कर्मपत्र मिले हैं। हा शौक, उनके बुलाने पर तुम्हें हठ ! और स्वयं भी नाच देखने का चसका ! देखो जहां नाच होता है स्त्रियों के लिये भी अवश्यमेव छत खिड़कियों के द्वारों से नाच देखने का प्रवन्ध किया जाता है वह देखती है कि एक परले दर्जे की कुमार्गी, दुराचारिणी, निर्लज्ज स्त्री नीचे से ऊपर तक गहनों में लदी हुई है, दिन में चार दो बार वस्त्र बदलती हैं, सुगन्धित महक की लपटें सी निकल रही है, पास खड़े हुओं के मस्तक सुगन्धियों से परिपूरित हो रहे है, उसकी वह मान प्रतिष्ठा है कि एक मनुष्य पान लिये खड़ा है, दूसरा पीकदान ! उसके कहने की देर नहीं कि तुरन्त उपस्थित किया गया। सब खड़े हुए उसकी ओर देखते और हांजी हांजी कर रहे हैं। जिससे वह कुछ बात कह देती है वह ही अपने को कृतार्थ समझता है । उसे बैकुन्ठ बहुत निकट रह जाता है। सब फूले नहीं समाते । वह यह भी देखती हैं कि हमारे पति भी उन्हीं में सम्मिलित हो वैसे ही प्रसन्न हो गुलछरें मार रहे हैं । सोचती हैं कि मैं गोवर पाथती हूँ, चर्खा कातती हूँ, चक्की पीसती हूँ, बरतन मांजती रोटी पकाती, हर तरह से रात दिन टहल सेवा गृहधन्धों में लगी रहती हूँ। नाना प्रकार की घुड़कियां भिड़कियां भी सहती हूँ। जैसा मिल गयां खा लिया पहन लिया फिर भी मेरे पति जिस समय घर में आते हैं. नाक भो चढ़ाये होते हैं। बाहर चाहे जैसे सभ्यता से बार्तालाप करते रहे हो परन्तु घरं में तो क्रोध और गाली के अतिरिक्त बात नहीं, इधर पति का यह वर्ताव उधर सास श्वशुर ननन्द जिठानी की कठिनाइयां । एक ओर यह विचार भीतरही भीतर काम कर रहा है, दूसरी ओर उस पतुरिया का गान बड़े व्याख्यानदाता की नाई मन पिघला रहा है वह चही प्रेम, प्यार, विरह आदि की दशा को रिखला दिखला, इशारे, नाक, भौंहों से चतला बतलाकर पका रही है। वह साफ शब्दों में बता रही है, परन्तु जो मोह मदिरा पिये प्रेम के रज्जू में बँधे हैं उन्हें कुछ पता नहीं लगता कि क्या हो रहा है। वह इस प्रकार सैकड़ों रागों में उनकी ओर देखकर कहती है कि "पिया की कमाई कभी छल्ला हू न पायो, यार की कमाई, यह सारा गहना " जो क्या नहीं बतलाता है ? कि यदि तुम भी मुझ जैसी हो जानो तो ऐसाही गहना पाता पहरने को मिले, इसी नाच को देख कर सहस्रों बड़े दो घरों की स्त्रियां निकल दो कर पतुरियां बन रहीं हैं जो केवल अविद्या का कारण है। यदि वह पढ़ी लिखी समझदार होतीं तो प्रथम तो नाच ही न देखतीं और देखतीं भी तो यही तात्पर्य निकालती कि एक चिथड़ों की पहनने वाली टुकड़ों की खाने वाली स्त्री, यदि पतिव्रत धर्म में स्थिर है तो क्या यह उसकी बरावरी कर सकती है यह व्यभिचारिणी स्त्री है, वह समझती हैं कि यह बाहरी झलक जो इसमें दिखाई दे रही है भीतर से यह अने कान रोगों से ग्रस्त है, जिससे स्वयं कुष्टिन बन अपने सारे प्यार धूम रहे करने वालों को उसका स्वाद चखा रही है, जो नीमकी डाली लिये । जब युवावस्था ढल जावेगी । तब उसको कौड़ी तकको कोई न पूछेगा । हमारे बाल बच्चे सेवा सुश्रुषा करेंगे उस समय यह मांगती डोलेगी, दो दो दानों, को तरसैगी, कभी पापों का फल भोगे बिना नहीं बचेगी । माता जी ! मैं इस विषय को लिखता हुआ लजाता जाता हूँ पर देश की दुर्दशा और स्त्री पुरुषों की अज्ञानता के कारण विवश हूँ अितएवं श्राप इतने ही से नाच के हानि लाभ समझ कर स्वप्न में भी नाच कराने अथवा देखने का विचार न करो और न बालकों व पुरुषों को देखने दो, सत्य कहा हैःकवित । शुभ चाल को छोड़ कुचाल चले, परमेश्वर की कुछ लाज न आई । हा ! नाच कराय के रॉडन को व्यभिचार में सब सन्तान फंसाई ।। पड़ रोड के प्रेम के बन्धन में पितु मात की सारी विभूति उड़ाई । धन धर्म बिगाड़ लियो अपनो, काहे रांड नचावत हो मेरे भाई निवेदन । बहिनो ! आज कल नाम मात्र के कपड़े रंगे हुये साधु, फकीर, वरंबा, तेलिया, कनफटा ज्योतिषी, रस्माल नौते, सियाने ऐसी दो उगाई करते हैं और कभी हाथ देख कर, कभी पत्रा खोल कर, कभी हाथ की सफाई, कभी बुद्धि के चमत्कार. छत, धोखां से ऐसा दो प्रभाव डालते हैं कि किसी समय चढ़े दो पढ़े लिखे इन के दस झासों में श्राजाते हैं। फिर तुम अल्पबुद्धि मूल निरक्षररा की क्या गिनती है। इस लिये मैं तुम्हें कई एक उनके छल और धोका देने वाली बातें बताता हूं, इन्हें जान कर इन्हीं से और वातों में भी फल ग्रहण कर लेना और यह तुम्हें चाहे जैसे किसी प्रकार फुसलाव, धमकाव डरावें तुम सदा यह समझना कि चाहे इस समय वह बात हमारे विचार में नहीं आती। जब तक हम इसे तर्क और शास्त्र द्वारा न जान लें नहीं कह सकतीं कि यह छल कपट से शून्य है। सहसा विम्वास न कर लिया करो । सदा बात कहने वाले के प्रयोजन पर ध्यान देना चाहिये कि यह जो कह रहा है इस में इस का मुख्य तात्पर्य क्या है। यदि उसका जाती लाभ धोखे के साथ, है, समझ लेना कि यह मक्कार घोलेवाज़ है । * साधु, फकीर, ब्रह्मचारी * यह बात भले प्रकार समझलो कि एक का शरीर, कर्म दूसरे से पृथक होता है उसकी श्रात्मा दूसरे से स्वरूप में विरुद्ध नहीं होती। इस लिए यह शब्द श्रेष्ठ साधु धर्मात्माओं के लिये प्रचलित होना चाहिये, परन्तु श्रांज सहस्रों में एक साधु, फ़क़ीर, ब्रह्मचारी चाहे आपको प्रथम सा दिखाई पड़े, जो उन |
१६८ / दलित रंगमच
निवेदक २ : स्वाभिभान की रक्षा के लिए वे लडने लगे और वही बात गाँव को अच्छी नहीं लगी ।
निवेदक १ : गाँव धधकने लगा ।
निवेदक २ : बराबर । [ दो चार लोगो को भजन मंडली बन जाती है] गाँव अवसर की प्रतीक्षा करने लगता है ।
निवेदक १ : श्रा जारी विठाबाई ।
मेरी पढरी की माई । [कोरस भी गा रहा है ]
कोरस : तो हा माधव वखा । तो हा विठ्ठल बखा । ज्ञानदेव तुकाराम-निवृति महाराज....!
सूत्रधार : ईश्वर की आराधना करने लगे और दिन बीतने लगे । विचारों मे डूबा गाँव अवसर की प्रतीक्षा करने लगा । जीवन मृत्यु का प्रश्न गाँव को छुड़ाना था। गाँव उसी क्षण की प्रतीक्षा करने लगा ।
[ तन्मय हो सभी गाते है । ] रघुपति राघव राजाराम । सबको सम्मति दे भगवान । ईश्वर अल्ला तेरो नाम ।
सबको मन्मति दे भगवान ।
कोरस : एरणगाँव- एरणगांव-एरणगाँव ।
निवेदक १ : और भगवान् ने गाँव की प्रार्थना सुन ली । भगवान् दुखियों की सहायता के लिए आये। अपने श्राप भवसर प्राया ।
कोरस : गाँव का सवाल हल हुघ्रा !
गाँव हँसने लगा ।
गाँव चहकने लगा ।
विन चेहरे का गाँव १६९
निवेदक १ : गाँव मे हैजे को वोमारी प्रायो। और (एक व्यक्ति गिर जाता है। दो चार उमे राम बोलो कहते हुए उठावर से जाते हैं।
निवेदक २ : एक गया ।
[दूसरा गिरता है। उठा ले जाते हैं । ] दूसरा गया ।
निवेदक १ : देखते-देखते एक एक कर गांव के लोग मरने लगे। पटेल मुखिया विचार करने लगे है
कोरस : विचार करने लगे जो-सोचने लगे।
निवेदक १ है की बीमारी से सोग मरने संग पोर मृविया की जिम्मेदारी बढ गयो ।
निवेदक २ : उन्होने देवी माँ के भगत को बुलाया।
[ भगत को लाया जाता है। उसके सामने मोडू, कणि और पूजा साहित्य रया गया। भगत अब देई इट. रहा है।
मुखियाः गो गाँव में लोग मरने लगे हैं।
भगत : जानती हूँ | एक सौ अड़सठ / दलित रंगमच निवेदक दो : स्वाभिभान की रक्षा के लिए वे लडने लगे और वही बात गाँव को अच्छी नहीं लगी । निवेदक एक : गाँव धधकने लगा । निवेदक दो : बराबर । [ दो चार लोगो को भजन मंडली बन जाती है] गाँव अवसर की प्रतीक्षा करने लगता है । निवेदक एक : श्रा जारी विठाबाई । मेरी पढरी की माई । [कोरस भी गा रहा है ] कोरस : तो हा माधव वखा । तो हा विठ्ठल बखा । ज्ञानदेव तुकाराम-निवृति महाराज....! सूत्रधार : ईश्वर की आराधना करने लगे और दिन बीतने लगे । विचारों मे डूबा गाँव अवसर की प्रतीक्षा करने लगा । जीवन मृत्यु का प्रश्न गाँव को छुड़ाना था। गाँव उसी क्षण की प्रतीक्षा करने लगा । [ तन्मय हो सभी गाते है । ] रघुपति राघव राजाराम । सबको सम्मति दे भगवान । ईश्वर अल्ला तेरो नाम । सबको मन्मति दे भगवान । कोरस : एरणगाँव- एरणगांव-एरणगाँव । निवेदक एक : और भगवान् ने गाँव की प्रार्थना सुन ली । भगवान् दुखियों की सहायता के लिए आये। अपने श्राप भवसर प्राया । कोरस : गाँव का सवाल हल हुघ्रा ! गाँव हँसने लगा । गाँव चहकने लगा । विन चेहरे का गाँव एक सौ उनहत्तर निवेदक एक : गाँव मे हैजे को वोमारी प्रायो। और (एक व्यक्ति गिर जाता है। दो चार उमे राम बोलो कहते हुए उठावर से जाते हैं। निवेदक दो : एक गया । [दूसरा गिरता है। उठा ले जाते हैं । ] दूसरा गया । निवेदक एक : देखते-देखते एक एक कर गांव के लोग मरने लगे। पटेल मुखिया विचार करने लगे है कोरस : विचार करने लगे जो-सोचने लगे। निवेदक एक है की बीमारी से सोग मरने संग पोर मृविया की जिम्मेदारी बढ गयो । निवेदक दो : उन्होने देवी माँ के भगत को बुलाया। [ भगत को लाया जाता है। उसके सामने मोडू, कणि और पूजा साहित्य रया गया। भगत अब देई इट. रहा है। मुखियाः गो गाँव में लोग मरने लगे हैं। भगत : जानती हूँ |
(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))
मुंबईः
मनमर्जियां के शेरनी और हिट स्ट्रीमिंग सीरीज पाताल लोक के तूफान मैं ट्रैक पर काम कर चुके रैपर प्रभा दीप ने अपना नया सिंगल थप्पड़ रिलीज किया है। उन्होंने साझा किया कि उनका नया एकल कॉमिक किताबों में सुपरहीरो पात्रों से प्रेरित है और उन्होंने गाने में सुपरहीरो थप्पड़ मैन की भूमिका निभाई है।
यह गाना 6 साल बाद उनकी पहली स्वतंत्र रिलीज है।
सिंगल के बारे में बात करते हुए रैपर ने आईएएनएस से कहा, थप्पड़ के पीछे की अवधारणा! क्या यह कॉमिक किताबों और ग्राफिक उपन्यासों में सुपरहीरो पात्रों से प्रेरित है, जिसने हमें अपनी सीमाओं से परे सपने देखने का आत्मविश्वास दिया। इस कहानी में मैं नायक हूं - सुपरहीरो - थप्पड़ मैन।
उन्होंने आगे उल्लेख किया : मैं बहुत सारी ऊर्जा के साथ कुछ बनाना चाहता हूं और राइटिंग बार को याद कर रहा हूं - अपनी कलात्मकता और विचारों को उस कच्चे रूप में व्यक्त करना - प्रक्रिया, वर्डप्ले, तुकबंदी योजनाएं और संदर्भ जो एक एमसी पेन का मार्गदर्शन करते हैं। थप्पड़! मेरी रचनात्मक प्रक्रिया के उस हिस्से में एक ताजा वापसी थी।
प्रभा दीप ने ट्रैक को एक गेम चेंजर के रूप में वर्णित किया, जैसा कि उन्होंने आईएएनएस के साथ साझा किया : यह मेरे करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आता है . . आप इसे जब 10 साल पीछे मुड़कर देखेंगे, तब उस परिप्रेक्ष्य को समझेंगे जो मैं हूं।
थप्पड़! प्रभा दीप के यूट्यूब चैनल को स्ट्रीम करने के लिए उपलब्ध है।
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
| ) मुंबईः मनमर्जियां के शेरनी और हिट स्ट्रीमिंग सीरीज पाताल लोक के तूफान मैं ट्रैक पर काम कर चुके रैपर प्रभा दीप ने अपना नया सिंगल थप्पड़ रिलीज किया है। उन्होंने साझा किया कि उनका नया एकल कॉमिक किताबों में सुपरहीरो पात्रों से प्रेरित है और उन्होंने गाने में सुपरहीरो थप्पड़ मैन की भूमिका निभाई है। यह गाना छः साल बाद उनकी पहली स्वतंत्र रिलीज है। सिंगल के बारे में बात करते हुए रैपर ने आईएएनएस से कहा, थप्पड़ के पीछे की अवधारणा! क्या यह कॉमिक किताबों और ग्राफिक उपन्यासों में सुपरहीरो पात्रों से प्रेरित है, जिसने हमें अपनी सीमाओं से परे सपने देखने का आत्मविश्वास दिया। इस कहानी में मैं नायक हूं - सुपरहीरो - थप्पड़ मैन। उन्होंने आगे उल्लेख किया : मैं बहुत सारी ऊर्जा के साथ कुछ बनाना चाहता हूं और राइटिंग बार को याद कर रहा हूं - अपनी कलात्मकता और विचारों को उस कच्चे रूप में व्यक्त करना - प्रक्रिया, वर्डप्ले, तुकबंदी योजनाएं और संदर्भ जो एक एमसी पेन का मार्गदर्शन करते हैं। थप्पड़! मेरी रचनात्मक प्रक्रिया के उस हिस्से में एक ताजा वापसी थी। प्रभा दीप ने ट्रैक को एक गेम चेंजर के रूप में वर्णित किया, जैसा कि उन्होंने आईएएनएस के साथ साझा किया : यह मेरे करियर में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर आता है . . आप इसे जब दस साल पीछे मुड़कर देखेंगे, तब उस परिप्रेक्ष्य को समझेंगे जो मैं हूं। थप्पड़! प्रभा दीप के यूट्यूब चैनल को स्ट्रीम करने के लिए उपलब्ध है। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी. |
एक डिश कोमल और आश्चर्यजनक रूप से स्वादिष्ट - पोलिश सॉस के तहत Zander। विशेष एक विशेष नुस्खा द्वारा किए गए सॉस। वहाँ खाना पकाने बसेरा में कई भिन्नताएं हैं। कृपया उनमें से कुछ हैं।
सभी व्यंजनों समान सामग्री है, लेकिन प्रत्येक की अपनी विशेषताओं और बारीकियों है। कैसे खाना पकाने विधि का उपयोग करने के लिए, आप सभी विकल्प उपलब्ध एक विस्तृत अध्ययन के बाद निर्णय लेते हैं। तो, पहले नुस्खा में आप उत्पादों की निम्नलिखित सूट की आवश्यकता होगीः
- 1 किलो की राशि में बसेरा निराश;
- साधारण पीने के पानी की 1 लीटर;
- एक प्याज और गाजर;
- अजमोद;
- 4 उबले अंडे,
- नींबू का रस - 3 बड़े चम्मच (चाय);
- जड़ी बूटी, नमक, काली मिर्च, मक्खन।
कैसे पोलिश में पाइक तैयार करने के लिए? नुस्खा सब्जियों का खाना पकाने के साथ शुरू पता चलता है। पानी के साथ पैन प्याज, गाजर, हलकों, में काट डाल अजमोद, काली मिर्च और नमक। 20 मिनट के लिए उबलते पानी के बाद कुक। फिर मछली के कुछ भागों में विभाजित में टैंक जगह और एक अन्य 7-8 मिनट के लिए खाना बनाना। सूड़ाक नरम होना चाहिए। शोरबा से मछली निकालें, शांत करते हैं। मक्खन पिघल और नींबू का रस, कटा हुआ अंडे और जड़ी बूटियों के साथ मिश्रण। इस मिश्रण बसेरा डालो और सेवा करते हैं।
दूसरा नुस्खा के लिए आप उत्पादों के निम्नलिखित सूट की जरूरत हैः
- 1 पीसी की राशि में बसेरा।
- 1 पीसी की राशि में लीक।
- 2 में अजवाइन डंठल;
- गाजर - 1 मध्यम आकार;
- कई मध्यम आलू (3-4);
- आधा ताजा नींबू;
- कई (4-5) मलाई के चम्मच;
- वनस्पति तेल 30 मिलीलीटर;
- 1 चम्मच (भोजन) की राशि में सहिजन तालिका;
- काली मिर्च, नमक।
कैसे पोलिश में पाइक तैयार करने के लिए? नुस्खा ओवन में खाना पकाने के लिए उपयुक्त है। कवर पाक कागज, तेल तेल शुरू करने के लिए। आलू, धोने और हिस्सों में काट दिया। एक पैन पर डालो और 40 मिनट (तापमान - 180 डिग्री) के लिए बेक। सहिजन के साथ मलाई मिक्स, एक छोटे से काली मिर्च और podsolite जोड़ें। गाजर, अजवाइन और लीक पतली स्ट्रिप्स में कटौती। उत्पादों मिक्स। सूड़ाक स्वच्छ, सिर काट और रीढ़ की हड्डी को हटा दें। फ़िले नींबू का रस डालना और काली मिर्च prisolit छिड़क। मछली पर सब्जियों की व्यवस्था है और कुछ ही रोल ले लो। के रूप में वे कर रहे हैं आप टुकड़े छोड़ सकते हैं, वह है, बस उन्हें एक पके हुए आलू के शीर्ष पर डाल दिया। मछली सब्जियों रखा जाना चाहिए और मलाई और सहिजन सॉस डालना। एक और 15 मिनट के लिए ओवन में पैन रखो। आप पॉलिश में पाइक कर दिया है। नुस्खा किसी भी मछली खाना पकाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता। बोन एपीटिट!
तैयार करने के लिए आप की आवश्यकता होगीः
- 500 ग्राम की राशि में बसेरा पट्टिका;
- अजमोद, प्याज;
- मसाले, नमक,
- 100 ग्राम की राशि में मक्खन;
- 2 उबले अंडे,
- नींबू का रस, अजमोद;
- आलू गार्निश।
पाइक पर्च एक पैन एक परत में डाल दिया, गर्म पानी के साथ भरने और उबालने के लिए लाने के लिए। मोटे कटा हुआ प्याज और अजमोद जोड़ें। पकाया मछली जब तक उबालें। मसाले और नमक रखो। सॉस के लिए, मक्खन पिघला, यह कुचल अंडे, नमक में डाल दिया और नींबू का रस और जड़ी बूटियों के साथ मौसम डालना। एक थाली पर पाइक पर्च, सॉस डालना। गार्निश के लिए आलू उबालें। बोन एपीटिट!
| एक डिश कोमल और आश्चर्यजनक रूप से स्वादिष्ट - पोलिश सॉस के तहत Zander। विशेष एक विशेष नुस्खा द्वारा किए गए सॉस। वहाँ खाना पकाने बसेरा में कई भिन्नताएं हैं। कृपया उनमें से कुछ हैं। सभी व्यंजनों समान सामग्री है, लेकिन प्रत्येक की अपनी विशेषताओं और बारीकियों है। कैसे खाना पकाने विधि का उपयोग करने के लिए, आप सभी विकल्प उपलब्ध एक विस्तृत अध्ययन के बाद निर्णय लेते हैं। तो, पहले नुस्खा में आप उत्पादों की निम्नलिखित सूट की आवश्यकता होगीः - एक किलो की राशि में बसेरा निराश; - साधारण पीने के पानी की एक लीटरटर; - एक प्याज और गाजर; - अजमोद; - चार उबले अंडे, - नींबू का रस - तीन बड़े चम्मच ; - जड़ी बूटी, नमक, काली मिर्च, मक्खन। कैसे पोलिश में पाइक तैयार करने के लिए? नुस्खा सब्जियों का खाना पकाने के साथ शुरू पता चलता है। पानी के साथ पैन प्याज, गाजर, हलकों, में काट डाल अजमोद, काली मिर्च और नमक। बीस मिनट के लिए उबलते पानी के बाद कुक। फिर मछली के कुछ भागों में विभाजित में टैंक जगह और एक अन्य सात-आठ मिनट के लिए खाना बनाना। सूड़ाक नरम होना चाहिए। शोरबा से मछली निकालें, शांत करते हैं। मक्खन पिघल और नींबू का रस, कटा हुआ अंडे और जड़ी बूटियों के साथ मिश्रण। इस मिश्रण बसेरा डालो और सेवा करते हैं। दूसरा नुस्खा के लिए आप उत्पादों के निम्नलिखित सूट की जरूरत हैः - एक पीसी की राशि में बसेरा। - एक पीसी की राशि में लीक। - दो में अजवाइन डंठल; - गाजर - एक मध्यम आकार; - कई मध्यम आलू ; - आधा ताजा नींबू; - कई मलाई के चम्मच; - वनस्पति तेल तीस मिलीलीटर; - एक चम्मच की राशि में सहिजन तालिका; - काली मिर्च, नमक। कैसे पोलिश में पाइक तैयार करने के लिए? नुस्खा ओवन में खाना पकाने के लिए उपयुक्त है। कवर पाक कागज, तेल तेल शुरू करने के लिए। आलू, धोने और हिस्सों में काट दिया। एक पैन पर डालो और चालीस मिनट के लिए बेक। सहिजन के साथ मलाई मिक्स, एक छोटे से काली मिर्च और podsolite जोड़ें। गाजर, अजवाइन और लीक पतली स्ट्रिप्स में कटौती। उत्पादों मिक्स। सूड़ाक स्वच्छ, सिर काट और रीढ़ की हड्डी को हटा दें। फ़िले नींबू का रस डालना और काली मिर्च prisolit छिड़क। मछली पर सब्जियों की व्यवस्था है और कुछ ही रोल ले लो। के रूप में वे कर रहे हैं आप टुकड़े छोड़ सकते हैं, वह है, बस उन्हें एक पके हुए आलू के शीर्ष पर डाल दिया। मछली सब्जियों रखा जाना चाहिए और मलाई और सहिजन सॉस डालना। एक और पंद्रह मिनट के लिए ओवन में पैन रखो। आप पॉलिश में पाइक कर दिया है। नुस्खा किसी भी मछली खाना पकाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता। बोन एपीटिट! तैयार करने के लिए आप की आवश्यकता होगीः - पाँच सौ ग्राम की राशि में बसेरा पट्टिका; - अजमोद, प्याज; - मसाले, नमक, - एक सौ ग्राम की राशि में मक्खन; - दो उबले अंडे, - नींबू का रस, अजमोद; - आलू गार्निश। पाइक पर्च एक पैन एक परत में डाल दिया, गर्म पानी के साथ भरने और उबालने के लिए लाने के लिए। मोटे कटा हुआ प्याज और अजमोद जोड़ें। पकाया मछली जब तक उबालें। मसाले और नमक रखो। सॉस के लिए, मक्खन पिघला, यह कुचल अंडे, नमक में डाल दिया और नींबू का रस और जड़ी बूटियों के साथ मौसम डालना। एक थाली पर पाइक पर्च, सॉस डालना। गार्निश के लिए आलू उबालें। बोन एपीटिट! |
सिक्के की बाजी किंग्स इलेवन पंजाब के कप्तान ग्लेन मैक्सवेल ने जीती और पहले गेंदबाजी का फैसला किया। मैक्सवेल का ये फैसला सटीक साबित हुआ और पहले ही ओवर में तेज गेंदबाज संदीप शर्मा ने पुणे सुपरजायंट को झटका दे दिया। संदीप शर्मा ने पहले ओवर की 5वीं गेंद पर मयंक अग्रवाल को बोल्ड कर दिया।
इसके बाद रहाणे और स्टीवन स्मिथ ने टीम को संभालने की कोशिश की लेकिन दोनों पंजाब के गेंदबाजों की सटीक गेंदबाजी के आगे खुलकर नहीं खेल सके जिसका नतीजा ये हुआ कि अजिंक्य रहाणे 19 रन पर टी नटराजन की गेंद पर पैवेलियन लौट गए।पुणे को करारा झटका तब लगा जब उसके दो सबसे बड़े बल्लेबाज कप्तान स्टीवन स्मिथ और महेंद्र सिंह धोनी 4 ओवर के अंदर आउट हो गए। स्मिथ को मार्कस स्टोयनिस ने 26 रन पर और धोनी को स्वपनिल सिंह ने 5 रन पर आउट किया।
71 रनों पर 4 विकेट गंवाने के बाद पुणे सुपरजायंट को उसके सबसे महंगे खिलाड़ी बेन स्टोक्स ने संभाला। स्टोक्स ने अपनी ताकत से गेंद को कई बार बाउंड्री लाइन के पार भेजा। मनोज तिवारी ने भी मौका मिलने पर अपने हाथ दिखाए। स्टोक्स और मनोज तिवारी ने 37 गेंद में 61 रनों की साझेदारी की। बेन स्टोक्स ने अपने आईपीएल करियर का पहला अर्धशतक लगाया और 32 गेंद में 50 रनों की पारी खेली। स्टोक्स को अक्षर पटेल ने अपनी ही गेंद पर कैच पकड़कर आउट किया। वैसे मनोज तिवारी और डेन क्रिसचन ने ताबड़तोड़ शॉट खेलकर 14 गेंद में 30 रन जोड़कर पुणे के स्कोर को 163 रनों तक पहुंचा दिया।
This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful.
Strictly Necessary Cookie should be enabled at all times so that we can save your preferences for cookie settings.
If you disable this cookie, we will not be able to save your preferences. This means that every time you visit this website you will need to enable or disable cookies again.
| सिक्के की बाजी किंग्स इलेवन पंजाब के कप्तान ग्लेन मैक्सवेल ने जीती और पहले गेंदबाजी का फैसला किया। मैक्सवेल का ये फैसला सटीक साबित हुआ और पहले ही ओवर में तेज गेंदबाज संदीप शर्मा ने पुणे सुपरजायंट को झटका दे दिया। संदीप शर्मा ने पहले ओवर की पाँचवीं गेंद पर मयंक अग्रवाल को बोल्ड कर दिया। इसके बाद रहाणे और स्टीवन स्मिथ ने टीम को संभालने की कोशिश की लेकिन दोनों पंजाब के गेंदबाजों की सटीक गेंदबाजी के आगे खुलकर नहीं खेल सके जिसका नतीजा ये हुआ कि अजिंक्य रहाणे उन्नीस रन पर टी नटराजन की गेंद पर पैवेलियन लौट गए।पुणे को करारा झटका तब लगा जब उसके दो सबसे बड़े बल्लेबाज कप्तान स्टीवन स्मिथ और महेंद्र सिंह धोनी चार ओवर के अंदर आउट हो गए। स्मिथ को मार्कस स्टोयनिस ने छब्बीस रन पर और धोनी को स्वपनिल सिंह ने पाँच रन पर आउट किया। इकहत्तर रनों पर चार विकेट गंवाने के बाद पुणे सुपरजायंट को उसके सबसे महंगे खिलाड़ी बेन स्टोक्स ने संभाला। स्टोक्स ने अपनी ताकत से गेंद को कई बार बाउंड्री लाइन के पार भेजा। मनोज तिवारी ने भी मौका मिलने पर अपने हाथ दिखाए। स्टोक्स और मनोज तिवारी ने सैंतीस गेंद में इकसठ रनों की साझेदारी की। बेन स्टोक्स ने अपने आईपीएल करियर का पहला अर्धशतक लगाया और बत्तीस गेंद में पचास रनों की पारी खेली। स्टोक्स को अक्षर पटेल ने अपनी ही गेंद पर कैच पकड़कर आउट किया। वैसे मनोज तिवारी और डेन क्रिसचन ने ताबड़तोड़ शॉट खेलकर चौदह गेंद में तीस रन जोड़कर पुणे के स्कोर को एक सौ तिरेसठ रनों तक पहुंचा दिया। This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful. Strictly Necessary Cookie should be enabled at all times so that we can save your preferences for cookie settings. If you disable this cookie, we will not be able to save your preferences. This means that every time you visit this website you will need to enable or disable cookies again. |
आमतौर पर अप्रैल का महीना हंसीमजाक के अंदाज में एकदूसरे को अप्रैलफूल यानी मूर्ख बनाने के लिए जाना जाता है. 1 अप्रैल का लोग काफी पहले से इंतजार करते?हैं ताकि अपने चहेतों को मधुर तरीके से उल्लू बना सकें. तमाम किसान भी इस मौके को हाथ से नहीं जाने देते और अपने साथी किसानों व रिश्तेदारों को मूर्ख बनाने के हथकंडे खुल कर आजमाते हैं. जागरूक किसान इस मामले में भी कमाल करते रहते हैं. मेरे एक परिचित किसान ने जामुन की बेल लगाने का नाटक कर के कई लोगों को खुलेआम बेवकूफ बना दिया था.
बहरहाल, हंसीमजाक से हट कर अप्रैल महीने के दौरान खेती के मोरचे पर भी भरपूर काम किए जाते हैं. इस महीने रबी मौसम की तमाम फसलों की कटाई का सिलसिला शुरू हो जाता है. इस दौरान जायद मौसम की फसलें खेतों में हिलोरे लेती नजर आती हैं. आइए डालें एक तीखी नजर अप्रैल महीने के खेती से जुड़े खास कामों परः
* रोटी यानी गेहूं की फसल अप्रैल तक पक कर तैयार रहती?है, लिहाजा इस महीने का खास काम गेहूं की फसल की कटाई करने का होता?है.
* गेहूं काटने के बाद उसे अच्छी तरह सुखा कर उस की गहाई करें. अगर उस के भंडारण का इरादा है, तो उस के लिए भंडारण के नए व उन्नत तरीकों को आजमाएं.
* चना पुराने जमाने से गेहूं का खास जोड़ीदार रहा है. पहले तमाम लोग बराबर मात्रा में गेहूंचना मिला कर ही आटा पिसवाते थे, जिसे मिस्सा आटा कहते?हैं. अप्रैल तक चने की भी फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है, लिहाजा इस की कटाई का काम भी फौरन निबटा लेना चाहिए.
| आमतौर पर अप्रैल का महीना हंसीमजाक के अंदाज में एकदूसरे को अप्रैलफूल यानी मूर्ख बनाने के लिए जाना जाता है. एक अप्रैल का लोग काफी पहले से इंतजार करते?हैं ताकि अपने चहेतों को मधुर तरीके से उल्लू बना सकें. तमाम किसान भी इस मौके को हाथ से नहीं जाने देते और अपने साथी किसानों व रिश्तेदारों को मूर्ख बनाने के हथकंडे खुल कर आजमाते हैं. जागरूक किसान इस मामले में भी कमाल करते रहते हैं. मेरे एक परिचित किसान ने जामुन की बेल लगाने का नाटक कर के कई लोगों को खुलेआम बेवकूफ बना दिया था. बहरहाल, हंसीमजाक से हट कर अप्रैल महीने के दौरान खेती के मोरचे पर भी भरपूर काम किए जाते हैं. इस महीने रबी मौसम की तमाम फसलों की कटाई का सिलसिला शुरू हो जाता है. इस दौरान जायद मौसम की फसलें खेतों में हिलोरे लेती नजर आती हैं. आइए डालें एक तीखी नजर अप्रैल महीने के खेती से जुड़े खास कामों परः * रोटी यानी गेहूं की फसल अप्रैल तक पक कर तैयार रहती?है, लिहाजा इस महीने का खास काम गेहूं की फसल की कटाई करने का होता?है. * गेहूं काटने के बाद उसे अच्छी तरह सुखा कर उस की गहाई करें. अगर उस के भंडारण का इरादा है, तो उस के लिए भंडारण के नए व उन्नत तरीकों को आजमाएं. * चना पुराने जमाने से गेहूं का खास जोड़ीदार रहा है. पहले तमाम लोग बराबर मात्रा में गेहूंचना मिला कर ही आटा पिसवाते थे, जिसे मिस्सा आटा कहते?हैं. अप्रैल तक चने की भी फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है, लिहाजा इस की कटाई का काम भी फौरन निबटा लेना चाहिए. |
कोटपूतली क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता यात्रा के दौरान आमजन और छात्रों को जागरूक किया जा रहा है। आजादी के अमृत महोत्सव पर आपकी आवाज फाउंडेशन के संयोजन में 6 महीने से चल रही पानी किसानी जवानी संवेदना यात्रा माध्यमिक विद्यालय सुजातनगर ( पावटा ) पहुंची। प्रधानाचार्य रतन लाल शर्मा और शंकर यादव के नेतृत्व में शिक्षक,विद्यार्थियों,ग्रामीणों ने मिलकर टीम यात्रा का अभिनंदन कर यात्रा संदेश को समझा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि किशन लाल यादव ने विद्यार्थियों को बताया कि जीवन में संघर्ष ही निखार ला सकता है। हमें भारत के प्राचीन ज्ञान को सीखना समझना पड़ेगा। कार्यक्रम अध्यक्ष रामेश्वर बाजिया रिटायर्ड सीआई ने कहा कि आज पानी किसानी जवानी का संक्रमण काल चल रहा है। प्रकृति से क्रोध को कम करना सीखना पड़ेगा।
सुखाड़ बाढ़ विश्व जन आयोग सदस्य एवं यात्रा संयोजक दीप सिंह शेखावत ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे इलाके में अनेकों बांध एवं प्राकृतिक जल इकाइयां पानी से लबालब थी, लेकिन अवैध खनन एवं मानवीय स्वार्थों की वजह से जल का तीव्र दोहन हुआ और आज सारे प्राकृतिक संसाधन मर कर सूख रहे हैं। जल जंगल जमीन हमारी साझी विरासत है। इसका संरक्षण एवं पोषण हम सबकी जिम्मेदारी है।
टीम यात्रा कार्यक्रम में प्रधानाचार्य रतन लाल शर्मा,प्रबंध निदेशक शंकर यादव,रमेश यादव,धर्मपाल यादव,रविंद्र सिंह शेखावत,नरेंद्र सिंह शेखावत,रामेश्वर यादव सहित विद्यार्थी उपस्थित रहे।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| कोटपूतली क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता यात्रा के दौरान आमजन और छात्रों को जागरूक किया जा रहा है। आजादी के अमृत महोत्सव पर आपकी आवाज फाउंडेशन के संयोजन में छः महीने से चल रही पानी किसानी जवानी संवेदना यात्रा माध्यमिक विद्यालय सुजातनगर पहुंची। प्रधानाचार्य रतन लाल शर्मा और शंकर यादव के नेतृत्व में शिक्षक,विद्यार्थियों,ग्रामीणों ने मिलकर टीम यात्रा का अभिनंदन कर यात्रा संदेश को समझा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि किशन लाल यादव ने विद्यार्थियों को बताया कि जीवन में संघर्ष ही निखार ला सकता है। हमें भारत के प्राचीन ज्ञान को सीखना समझना पड़ेगा। कार्यक्रम अध्यक्ष रामेश्वर बाजिया रिटायर्ड सीआई ने कहा कि आज पानी किसानी जवानी का संक्रमण काल चल रहा है। प्रकृति से क्रोध को कम करना सीखना पड़ेगा। सुखाड़ बाढ़ विश्व जन आयोग सदस्य एवं यात्रा संयोजक दीप सिंह शेखावत ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे इलाके में अनेकों बांध एवं प्राकृतिक जल इकाइयां पानी से लबालब थी, लेकिन अवैध खनन एवं मानवीय स्वार्थों की वजह से जल का तीव्र दोहन हुआ और आज सारे प्राकृतिक संसाधन मर कर सूख रहे हैं। जल जंगल जमीन हमारी साझी विरासत है। इसका संरक्षण एवं पोषण हम सबकी जिम्मेदारी है। टीम यात्रा कार्यक्रम में प्रधानाचार्य रतन लाल शर्मा,प्रबंध निदेशक शंकर यादव,रमेश यादव,धर्मपाल यादव,रविंद्र सिंह शेखावत,नरेंद्र सिंह शेखावत,रामेश्वर यादव सहित विद्यार्थी उपस्थित रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
ग्रुप डी से आई क्रोएशिया पहली बार विश्वकप फाइनल में पहुंची है। यह फाइनल में पहुंचने वाली सबसे कम रैंक की टीम है। टीम ने विश्वकप में उलटफेरों की झड़ी तो लगाई ही साथ ही अभी तक विश्वकप में अविजित है और किसी टीम से ड्रॉ भी नहीं किया। देखते हैं कैसा रहा क्रोएशिया का सफर।
1998 के बाद पहली बार क्रोएशिया ने विश्वकप की शुरुआत जीत के साथ की। अंतिम मिनट में नाइजीरिया ने संघर्ष जरूर किया पर क्रोएशिया यह मैच आसानी से जीत गई।
इस विश्वकप में क्रोएशिया ने दूसरे मैच में ही एक बड़ा उलटफेर कर दिया। यह क्रोएशिया की किसी भी दक्षिण अमेरिकी टीम पर पहली जीत थी। इस मैच में मेस्सी गोल नहीं दाग पाए और उनकी खासी आलोचना हुई।
इस मैच में क्रोएशिया ने 9 बदलाव किए। यह मैच क्रोेेएशिया ने खेल के 90 मिनट में किए गए गोल से जीता। पहली बार क्रोएशिया 5 अंक के साथ ग्रुप स्टेज की टॉप टीम बना।
इस मैच के 4 मिनट में ही दोनों टीमें एक एक गोल कर चुकी थी। यह मैच अतिरिक्त समय के बाद पेनल्टी शूटआउट तक गया। गोलकीपर डेनीजेल ने 3 गोल बचाकर क्रोएशिया की जीत सुनिश्चित की।
इस दिन क्रोएशिया ने रशिया को उनके घरेलू समर्थकों के आगे हराकर पूरे देश को गमगीन कर दिया। 1-2 से पीछे चल रही क्रोएशिया की टीम को गोल कर जीवन दान दिया। मामला फिर पेनल्टी शूट आउट में पहुंचा और गोलकीपर डेनीजेल की बदौलत क्रोएशिया 4-3 से जीत गई।
इस मैच में क्रोएशिया लंबे समय तक 0-1 से पीछे रही। मैच के 68 मिनट में इवान ने मैच बराबरी पर लाया। इसके बाद क्रोएशिया एक अलग टीम की तरह खेली। इवान ने ही अतिरिक्त समय के अंत में गोल दागकर क्रोएशिया को पहली बार फाइनल में पहुंचा दिया।
| ग्रुप डी से आई क्रोएशिया पहली बार विश्वकप फाइनल में पहुंची है। यह फाइनल में पहुंचने वाली सबसे कम रैंक की टीम है। टीम ने विश्वकप में उलटफेरों की झड़ी तो लगाई ही साथ ही अभी तक विश्वकप में अविजित है और किसी टीम से ड्रॉ भी नहीं किया। देखते हैं कैसा रहा क्रोएशिया का सफर। एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे के बाद पहली बार क्रोएशिया ने विश्वकप की शुरुआत जीत के साथ की। अंतिम मिनट में नाइजीरिया ने संघर्ष जरूर किया पर क्रोएशिया यह मैच आसानी से जीत गई। इस विश्वकप में क्रोएशिया ने दूसरे मैच में ही एक बड़ा उलटफेर कर दिया। यह क्रोएशिया की किसी भी दक्षिण अमेरिकी टीम पर पहली जीत थी। इस मैच में मेस्सी गोल नहीं दाग पाए और उनकी खासी आलोचना हुई। इस मैच में क्रोएशिया ने नौ बदलाव किए। यह मैच क्रोेेएशिया ने खेल के नब्बे मिनट में किए गए गोल से जीता। पहली बार क्रोएशिया पाँच अंक के साथ ग्रुप स्टेज की टॉप टीम बना। इस मैच के चार मिनट में ही दोनों टीमें एक एक गोल कर चुकी थी। यह मैच अतिरिक्त समय के बाद पेनल्टी शूटआउट तक गया। गोलकीपर डेनीजेल ने तीन गोल बचाकर क्रोएशिया की जीत सुनिश्चित की। इस दिन क्रोएशिया ने रशिया को उनके घरेलू समर्थकों के आगे हराकर पूरे देश को गमगीन कर दिया। एक-दो से पीछे चल रही क्रोएशिया की टीम को गोल कर जीवन दान दिया। मामला फिर पेनल्टी शूट आउट में पहुंचा और गोलकीपर डेनीजेल की बदौलत क्रोएशिया चार-तीन से जीत गई। इस मैच में क्रोएशिया लंबे समय तक शून्य-एक से पीछे रही। मैच के अड़सठ मिनट में इवान ने मैच बराबरी पर लाया। इसके बाद क्रोएशिया एक अलग टीम की तरह खेली। इवान ने ही अतिरिक्त समय के अंत में गोल दागकर क्रोएशिया को पहली बार फाइनल में पहुंचा दिया। |
Darbhanga rail station bomb blast: पाकिस्तान से आईएसआई के हैंडलर ने मोबाइल के जरिए लगातार इमरान को लिक्विड बम बनाने का वीडियो भेजा और उसी वीडियो को देखकर लिक्विड बम बनाया गया था.
Darbhanga rail station bomb blast: बिहार के दरभंगा स्टेशन पर हुए पार्सल विस्फोट मामले के तार पाकिस्तान से जुड़ गए हैं. हैदराबाद से गिरफ्तार किये गये इमरान और नासिर मलिक ने कई अहम खुलासे किये हैं.
गिरफ्तार दोनों सगे भाइयों से पूछताछ में एनआईए को कई सुराग मिले हैं. सूत्रों के अनुसार पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि मो. नासिर ने पाकिस्तान में केमिकल बम बनाने की ट्रेनिंग ली थी. इसके साथ ही पाकिस्तान से हवाला के जरिए पैसे दिए गए थे और धमाके के बाद उसे करोड़ों रुपए मिलने वाले थे.
सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान से आईएसआई के हैंडलर ने मोबाइल के जरिए लगातार इमरान को लिक्विड बम बनाने का वीडियो भेजा और उसी वीडियो को देखकर लिक्विड बम बनाया गया था. एनआईए इस पूरी जांच को केवल दरभंगा तक सीमित नहीं रखना चाहता. उसका मकसद है कि इस आतंकी नेटवर्क में शामिल सभी लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जाए.
बताया जाता है कि पाकिस्तान यात्रा के दौरान सलीम लश्कर-ए-तैयबा और आइएसआइ हैंडलर के संपर्क में आया था. उसी ने ब्लास्ट की साजिश रची थी. वहां उसने हाफिज सईद से भी मिला था. बताया जाता है कि मो. नासिर मल्लिक वर्ष 2012 में पाकिस्तान गया था. वहां पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने उसे केमिकल बम तैयार करने का प्रशिक्षण दिया था.
लश्कर के इशारे पर लंबी दूरी की ट्रेनों को निशाना बनाकर देश को दहलाने की साजिश रची गयी थी. सूत्रों के अनुसार सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस से भेजे गए पार्सल में एक सेंसर भी लगाया गया था. हालांकि बनाये गए केमिकल बम के कम ज्वलनशील होने के कारण ट्रेन के पार्सल वैन में वह ब्लास्ट नहीं कर सका. आतंकियों की साजिश केमिकल बम से कई लंबी दूरी की ट्रेनों को उड़ाने की थी.
हालांकि सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस को 'द बर्निंग ट्रेन' में तब्दील करने की साजिश फेल हो जाने के बाद सिकंदराबाद जंक्शन से मिले सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एनआईए ने पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया. बता दें कि एनआईए ने जांच का जिम्मा मिलने के पांच दिनों के अंदर दरभंगा जंक्शन पार्सल ब्लास्ट के मामले का खुलासा कर दिया.
विस्फोट के बाद से ही यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि आतंकियों ने सिकंदराबाद-दरभंगा एक्प्रेस को आग के हवाले करने की साजिश रची थी. सूत्रों के अनुसार हैदराबाद में मो. इमरान मल्लिक और मो. नासिर मल्लिक अपनी मां के साथ किराए के मकान में रहते थे. वे रेडीमेड कपड़ों का धंधा करते थे. इसी दौरान मो. नासिर मल्लिक का संपर्क पकिस्तान के लश्कर आतंकी इकबाल काना से हुआ था.
इसके बाद काना के इशारे पर फेक करेंसी का सिंडिकेट तैयार किया गया था. अब एनआईए को साजिश में शामिल कई अन्य लोगों की भी तलाश है. वहीं, उत्तर प्रदेश के कैराना से सलीम और कफील की गिरफ्तारी के बाद एनआईए के हाथ कई महत्वपूर्ण जानकारियां लगी हैं. विस्फोट को अंजाम देने के लिए पुरानी दिल्ली के कई हवाला कारोबारियों के जरिये इकबाल काना ने सलीम को पैसे भेजवाये थे.
जांच एजेंसी को यह भी जानकारी हांथ लगी है कि विस्फोट को अंजाम देने कर लिए मो. नासिर मल्लिक व मो. इमरान मल्लिक को 1. 5 लाख रुपये दिए गए थे. बताया जाता है कि सोशल मीडिया के जरिये इकबाल काना से दोनों के संपर्क करने के सबूत भी एनआईए को मिले हैं.
उनलोगों के टारगेट पर और कौन-कौन सी जगह थी, इसे लेकर गहन पूछताछ चल रही है. मो. सुफियान के सिलसिले में उनलोगों से पूछताछ की जा रही है. अभी तक की जांच में पता चला है कि पाकिस्तान में बैठे लश्कर के हैंडलर इकबाल काना ने दरभंगा के अलावा देश के कई कोनों में दहशत मचाने के लिए युवकों को तैयार करने का जिम्मा सौंपा था.
| Darbhanga rail station bomb blast: पाकिस्तान से आईएसआई के हैंडलर ने मोबाइल के जरिए लगातार इमरान को लिक्विड बम बनाने का वीडियो भेजा और उसी वीडियो को देखकर लिक्विड बम बनाया गया था. Darbhanga rail station bomb blast: बिहार के दरभंगा स्टेशन पर हुए पार्सल विस्फोट मामले के तार पाकिस्तान से जुड़ गए हैं. हैदराबाद से गिरफ्तार किये गये इमरान और नासिर मलिक ने कई अहम खुलासे किये हैं. गिरफ्तार दोनों सगे भाइयों से पूछताछ में एनआईए को कई सुराग मिले हैं. सूत्रों के अनुसार पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि मो. नासिर ने पाकिस्तान में केमिकल बम बनाने की ट्रेनिंग ली थी. इसके साथ ही पाकिस्तान से हवाला के जरिए पैसे दिए गए थे और धमाके के बाद उसे करोड़ों रुपए मिलने वाले थे. सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान से आईएसआई के हैंडलर ने मोबाइल के जरिए लगातार इमरान को लिक्विड बम बनाने का वीडियो भेजा और उसी वीडियो को देखकर लिक्विड बम बनाया गया था. एनआईए इस पूरी जांच को केवल दरभंगा तक सीमित नहीं रखना चाहता. उसका मकसद है कि इस आतंकी नेटवर्क में शामिल सभी लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जाए. बताया जाता है कि पाकिस्तान यात्रा के दौरान सलीम लश्कर-ए-तैयबा और आइएसआइ हैंडलर के संपर्क में आया था. उसी ने ब्लास्ट की साजिश रची थी. वहां उसने हाफिज सईद से भी मिला था. बताया जाता है कि मो. नासिर मल्लिक वर्ष दो हज़ार बारह में पाकिस्तान गया था. वहां पाकिस्तानी सेना और आईएसआई ने उसे केमिकल बम तैयार करने का प्रशिक्षण दिया था. लश्कर के इशारे पर लंबी दूरी की ट्रेनों को निशाना बनाकर देश को दहलाने की साजिश रची गयी थी. सूत्रों के अनुसार सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस से भेजे गए पार्सल में एक सेंसर भी लगाया गया था. हालांकि बनाये गए केमिकल बम के कम ज्वलनशील होने के कारण ट्रेन के पार्सल वैन में वह ब्लास्ट नहीं कर सका. आतंकियों की साजिश केमिकल बम से कई लंबी दूरी की ट्रेनों को उड़ाने की थी. हालांकि सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस को 'द बर्निंग ट्रेन' में तब्दील करने की साजिश फेल हो जाने के बाद सिकंदराबाद जंक्शन से मिले सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एनआईए ने पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया. बता दें कि एनआईए ने जांच का जिम्मा मिलने के पांच दिनों के अंदर दरभंगा जंक्शन पार्सल ब्लास्ट के मामले का खुलासा कर दिया. विस्फोट के बाद से ही यह अंदाजा लगाया जा रहा था कि आतंकियों ने सिकंदराबाद-दरभंगा एक्प्रेस को आग के हवाले करने की साजिश रची थी. सूत्रों के अनुसार हैदराबाद में मो. इमरान मल्लिक और मो. नासिर मल्लिक अपनी मां के साथ किराए के मकान में रहते थे. वे रेडीमेड कपड़ों का धंधा करते थे. इसी दौरान मो. नासिर मल्लिक का संपर्क पकिस्तान के लश्कर आतंकी इकबाल काना से हुआ था. इसके बाद काना के इशारे पर फेक करेंसी का सिंडिकेट तैयार किया गया था. अब एनआईए को साजिश में शामिल कई अन्य लोगों की भी तलाश है. वहीं, उत्तर प्रदेश के कैराना से सलीम और कफील की गिरफ्तारी के बाद एनआईए के हाथ कई महत्वपूर्ण जानकारियां लगी हैं. विस्फोट को अंजाम देने के लिए पुरानी दिल्ली के कई हवाला कारोबारियों के जरिये इकबाल काना ने सलीम को पैसे भेजवाये थे. जांच एजेंसी को यह भी जानकारी हांथ लगी है कि विस्फोट को अंजाम देने कर लिए मो. नासिर मल्लिक व मो. इमरान मल्लिक को एक. पाँच लाख रुपये दिए गए थे. बताया जाता है कि सोशल मीडिया के जरिये इकबाल काना से दोनों के संपर्क करने के सबूत भी एनआईए को मिले हैं. उनलोगों के टारगेट पर और कौन-कौन सी जगह थी, इसे लेकर गहन पूछताछ चल रही है. मो. सुफियान के सिलसिले में उनलोगों से पूछताछ की जा रही है. अभी तक की जांच में पता चला है कि पाकिस्तान में बैठे लश्कर के हैंडलर इकबाल काना ने दरभंगा के अलावा देश के कई कोनों में दहशत मचाने के लिए युवकों को तैयार करने का जिम्मा सौंपा था. |
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.