raw_text stringlengths 113 616k | normalized_text stringlengths 98 618k |
|---|---|
क्रिकेट मैच के दौरान आप सबने अक्सर पक्षियों को मैदान के बीच में या फिर आस-पास उड़ते हुए देखा होगा। कई बार ये पंछी कैमरे के सामने भी मंडराते हुए दिखाई दे जाते हैं। हालाँकि, कुछ दिन पहले एक पंछी की वजह से पूर्व श्रीलंकाई तेज गेंदबाज परवेज महरूफ (Farveez Maharoof) को लाइव शो के दौरान शर्मिंदा होना पड़ा था जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
दरअसल, परवेज महरूफ मौजूदा समय में लंका प्रीमियर लीग (Lanka Premier League) में कमेंटटर्स के तौर पर काम कर रहे हैं। 17 दिसंबर (शनिवार) को कैंडी फाल्कंस और कोलंबो स्टार्स के बीच खेले जाने वाले मैच से पहले महरूफ, वेस्टइंडीज के पूर्व खिलाड़ी डैरेन गंगा के साथ स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टर नेरोली मीडोज से लाइव शो में मैच को लेकर बातचीत कर रहे थे। इस दौरान मीडोज मुकाबले को लेकर दोनों दिग्गजों से सवाल कर रही होती हैं कि तभी एक पंछी जो शायद ऊपर आसमान में मंडरा रहा होता है, महरूफ के ऊपर पूप्स (मल त्याग) कर देता है।
भले ही यह साधारण सी बात है लेकिन लाइव शो के दौरान यह महरूफ के लिए एक अजीब घटना में बदल जाती है। इसे देखकर शो की होस्ट नेरोली अपनी हंसी नहीं रोक पाती और वो पूर्व श्रीलंकाई गेंदबाज से मजाक करने लगती हैं। हँसते हुए वो महरूफ से कहती हैं,
मुझे लगता है कि अभी-अभी आपके साथ जो हुआ उससे आप हैरान हैं।
इस पर महरूफ ने भी मजेदार अंदाज़ में जवाब देते हुए कहा,
हो सकता है कि आज मेरी किस्मत अच्छी हो।
इस पूरे वाकये को महरूफ ने मजाक के तौर पर लिया और इस दौरान उन्होंने अपनी बातचीत भी जारी रखी हुई थी। इस मजेदार घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर अब खूब वायरल हो रहा है।
गौरतबल है कि यह टूर्नामेंट अब अपने अंतिम पड़ाव पर आ चुका है। इस इवेंट की शुरुआत 6 दिसंबर से हुई थी और इसका फाइनल मैच 23 दिसंबर को खेला जाएगा। जाफ़ना किंग्स टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाने वाली पहली टीम बनी है।
| क्रिकेट मैच के दौरान आप सबने अक्सर पक्षियों को मैदान के बीच में या फिर आस-पास उड़ते हुए देखा होगा। कई बार ये पंछी कैमरे के सामने भी मंडराते हुए दिखाई दे जाते हैं। हालाँकि, कुछ दिन पहले एक पंछी की वजह से पूर्व श्रीलंकाई तेज गेंदबाज परवेज महरूफ को लाइव शो के दौरान शर्मिंदा होना पड़ा था जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दरअसल, परवेज महरूफ मौजूदा समय में लंका प्रीमियर लीग में कमेंटटर्स के तौर पर काम कर रहे हैं। सत्रह दिसंबर को कैंडी फाल्कंस और कोलंबो स्टार्स के बीच खेले जाने वाले मैच से पहले महरूफ, वेस्टइंडीज के पूर्व खिलाड़ी डैरेन गंगा के साथ स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टर नेरोली मीडोज से लाइव शो में मैच को लेकर बातचीत कर रहे थे। इस दौरान मीडोज मुकाबले को लेकर दोनों दिग्गजों से सवाल कर रही होती हैं कि तभी एक पंछी जो शायद ऊपर आसमान में मंडरा रहा होता है, महरूफ के ऊपर पूप्स कर देता है। भले ही यह साधारण सी बात है लेकिन लाइव शो के दौरान यह महरूफ के लिए एक अजीब घटना में बदल जाती है। इसे देखकर शो की होस्ट नेरोली अपनी हंसी नहीं रोक पाती और वो पूर्व श्रीलंकाई गेंदबाज से मजाक करने लगती हैं। हँसते हुए वो महरूफ से कहती हैं, मुझे लगता है कि अभी-अभी आपके साथ जो हुआ उससे आप हैरान हैं। इस पर महरूफ ने भी मजेदार अंदाज़ में जवाब देते हुए कहा, हो सकता है कि आज मेरी किस्मत अच्छी हो। इस पूरे वाकये को महरूफ ने मजाक के तौर पर लिया और इस दौरान उन्होंने अपनी बातचीत भी जारी रखी हुई थी। इस मजेदार घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर अब खूब वायरल हो रहा है। गौरतबल है कि यह टूर्नामेंट अब अपने अंतिम पड़ाव पर आ चुका है। इस इवेंट की शुरुआत छः दिसंबर से हुई थी और इसका फाइनल मैच तेईस दिसंबर को खेला जाएगा। जाफ़ना किंग्स टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बनाने वाली पहली टीम बनी है। |
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप निहायत ही उद्दंड और विलासी व्यक्ति हैं, यह ज्यादा गौर करने लायक बात नहीं थी, इसलिए अमेरिकी वोटर ने उन्हें चुना. लेकिन चुनने के बाद उन की मनमानी पर नकेल कसने के लिए अमेरिकियों सड़कों पर आने से परहेज भी नहीं किया. झल्लाएबौखलाए ट्रंप को आखिरकार कहना ही पड़ा कि जब राष्ट्रपति नहीं बनाना था तो मुझे वोट ही क्यों दिया.
लोकतंत्र में वाकई जनता ही सर्वोपरि होती है बशर्ते वह अमेरिकियों जितनी शिक्षित और जागरूक हो, जो चुनने के बाद भी शासक को नियंत्रित रखने के गुर जानती है. अब होगा यह कि जब भी डोनाल्ड ट्रंप बेकाबू और बेलगाम होंगे तबतब उन्हें ऐसे ही विरोधप्रदर्शनों का सामना करना पड़ेगा और जनता उन्हें सधा व वैसा शासक बना कर रहेगी जैसा कि वह चाहती है.
| अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप निहायत ही उद्दंड और विलासी व्यक्ति हैं, यह ज्यादा गौर करने लायक बात नहीं थी, इसलिए अमेरिकी वोटर ने उन्हें चुना. लेकिन चुनने के बाद उन की मनमानी पर नकेल कसने के लिए अमेरिकियों सड़कों पर आने से परहेज भी नहीं किया. झल्लाएबौखलाए ट्रंप को आखिरकार कहना ही पड़ा कि जब राष्ट्रपति नहीं बनाना था तो मुझे वोट ही क्यों दिया. लोकतंत्र में वाकई जनता ही सर्वोपरि होती है बशर्ते वह अमेरिकियों जितनी शिक्षित और जागरूक हो, जो चुनने के बाद भी शासक को नियंत्रित रखने के गुर जानती है. अब होगा यह कि जब भी डोनाल्ड ट्रंप बेकाबू और बेलगाम होंगे तबतब उन्हें ऐसे ही विरोधप्रदर्शनों का सामना करना पड़ेगा और जनता उन्हें सधा व वैसा शासक बना कर रहेगी जैसा कि वह चाहती है. |
भारतीय क्रिकेट कप्तान विराट कोहली 18 अगस्त से शुरू होने जा रहे तीसरे टेस्ट मैच में भारत का नेतृत्व करने के लिए आशावान हैं। हालांकि लॉर्ड्स मैदान में खेले गए टेस्ट मैच के दौरान ज्यादातर वक्त वे पीठ में दर्द से परेशान रहे थे। लेकिन ईएसपीएन के साथ अपनी बातचीत के दौरान कोहली ने साफ किया कि वह अगले मैच में मैदान में धमाकेदार वापसी करने के लिए खुद को तैयार करने में जुटे हुए हैं।
कोहली की तकलीफ का पहला लक्षण शनिवार की शाम को दिखा था। वह रविवार की सुबह भी उसके साथ जूझते दिखाई दिए। इंग्लैंड ने 396 रनों और 7 विकेट के नुकसान के बाद पारी समाप्ति की घोषणा कर दी थी। इसके बाद भी कोहली मैदान पर नहीं उतरे। कोहली ने इसके बाद 37 मिनट का खेल मिस कर दिया। इसीलिए उन्हें बैटिंग के लिए वापस आने से पहले उस टाइम का इंतजार करना पड़ा। लेकिन जब उन्होंने किया, वह बेहद मुश्किल से चल पा रहे थे।
हालांकि कोहली की चिंताएं कुछ और भी हैं। अपने इंटरव्यू में कोहली ने स्वीकार किया कि लॉर्ड्स के मैदान में खेलने के दौरान टीम के चयन में उनसे कुछ गलतियां हुईं थीं। उन्होंने इस मैच के लिए दूसरा स्पिनर चुनकर गलती की थी। खासतौर पर उस वक्त जब परिस्थितियां तेज गेंदबाजी के पक्ष में थीं। भारत पहले दिन का मैच बारिश में खराब होने के बाद उमेश यादव को बाहर बैठा सकता था और उनकी जगह बाएं हाथ के गेंदबाज कुलदीप यादव को टीम में शामिल किया जा सकता था। लेकिन कोहली को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में टीम इस झटके से उबर जाएगी।
| भारतीय क्रिकेट कप्तान विराट कोहली अट्ठारह अगस्त से शुरू होने जा रहे तीसरे टेस्ट मैच में भारत का नेतृत्व करने के लिए आशावान हैं। हालांकि लॉर्ड्स मैदान में खेले गए टेस्ट मैच के दौरान ज्यादातर वक्त वे पीठ में दर्द से परेशान रहे थे। लेकिन ईएसपीएन के साथ अपनी बातचीत के दौरान कोहली ने साफ किया कि वह अगले मैच में मैदान में धमाकेदार वापसी करने के लिए खुद को तैयार करने में जुटे हुए हैं। कोहली की तकलीफ का पहला लक्षण शनिवार की शाम को दिखा था। वह रविवार की सुबह भी उसके साथ जूझते दिखाई दिए। इंग्लैंड ने तीन सौ छियानवे रनों और सात विकेट के नुकसान के बाद पारी समाप्ति की घोषणा कर दी थी। इसके बाद भी कोहली मैदान पर नहीं उतरे। कोहली ने इसके बाद सैंतीस मिनट का खेल मिस कर दिया। इसीलिए उन्हें बैटिंग के लिए वापस आने से पहले उस टाइम का इंतजार करना पड़ा। लेकिन जब उन्होंने किया, वह बेहद मुश्किल से चल पा रहे थे। हालांकि कोहली की चिंताएं कुछ और भी हैं। अपने इंटरव्यू में कोहली ने स्वीकार किया कि लॉर्ड्स के मैदान में खेलने के दौरान टीम के चयन में उनसे कुछ गलतियां हुईं थीं। उन्होंने इस मैच के लिए दूसरा स्पिनर चुनकर गलती की थी। खासतौर पर उस वक्त जब परिस्थितियां तेज गेंदबाजी के पक्ष में थीं। भारत पहले दिन का मैच बारिश में खराब होने के बाद उमेश यादव को बाहर बैठा सकता था और उनकी जगह बाएं हाथ के गेंदबाज कुलदीप यादव को टीम में शामिल किया जा सकता था। लेकिन कोहली को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में टीम इस झटके से उबर जाएगी। |
मोरवा। बाबा खुद नेश्वर धाम में जलाभिषेक के समय अपार भीड़ के समय न्यास समिति की महिला सदस्य बिरिया देवी का अपराधियों के द्वारा गले से सोने की चेन गायब कर दी गई। चेन की कीमत पचास हजार से अधिक बताई गई है। न्यास समिति के अध्यक्ष अग्निदेव शर्मा ने घटना पर चिंता प्रकट करते हुए सभी श्रद्धालुओं से शरीर में किसी भी प्रकार के किमती गहने पहनकर नहीं आने की अपील की है।
यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
| मोरवा। बाबा खुद नेश्वर धाम में जलाभिषेक के समय अपार भीड़ के समय न्यास समिति की महिला सदस्य बिरिया देवी का अपराधियों के द्वारा गले से सोने की चेन गायब कर दी गई। चेन की कीमत पचास हजार से अधिक बताई गई है। न्यास समिति के अध्यक्ष अग्निदेव शर्मा ने घटना पर चिंता प्रकट करते हुए सभी श्रद्धालुओं से शरीर में किसी भी प्रकार के किमती गहने पहनकर नहीं आने की अपील की है। यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है। |
कैसे इनका अभाव कहते हो ? वशिष्ठजी बोले. हे राम! यह सत्र जगत् विराट् पुरुष का शरीर है। जब वह आदि-विराट् ही उपजा नहीं, तो और की उत्पत्ति कैसे कहिये ? राम ने पूछा. हे मुनीश्वर जगत् का सद्भाव तो तीनों कालों में पाया जाता है, पर तुम कहते हो कि उपजा ही नहीं । वशिष्ठजी बोले, हे राम! जैसे स्वप्न में जगत् के सव पदार्थ प्रत्यक्ष दिखते हैं, पर कुछ उपजे नहीं। जैसे मृगतृष्णा का जल आकाश में द्वितीय चन्द्रमा और संकल्पनगर भ्रम से दिखता है, वैसे ही अहं त्वं आदि जगत् भ्रम से दिखता है। राम ने पूछा, हे भगवन् ! अहं त्वं आदि जगत् दृढ़ भासित होता है, तब कैसे जानिये कि उपजा नहीं ? वशिष्ठजा बोले हे राम! जो पदार्थ कारण से उपजता है. निश्चय सत्य जाना जाता है। जब महाप्रलय होता है तब कारणकार्य कुछ नहीं रहता, सब शान्तरूप होता है, और फिर उस महाप्रलय से जगत् प्रकट होता है। इसी से जाना जाता है कि सव आभासगात्र है। राम ने पूछा, हे मुनीश्वर ! जब महायलय होता है, तब अज और अविनाशी गत्ता शेष रहती है। इसमे जाना जाता है कि वही जगत का कारण है। वशिष्ठजी बोले. हे राम! जैसा कारण होता है. वैसा ही उसका कार्य होता है. उससे उल्टा नहीं होता । जो आत्मसत्ता अद्वैत और आकाशरूप हैं तो जगत् भी वही रूप है। जैसे घट से पट नहीं उपजता. वैसे ही और कुछ नहीं उपजता ।
राम ने पूछा है भगवन् ! जब महाप्रलय होता है, तब जगत् सूक्ष्मरूप होकर स्थित होता है, और उसी से फिर प्रवृत्ति होती है। वशिष्ठजी बोले, हे निष्पाप राम महाप्रलय में जो तुमने सृष्टि का अनुभव किया, वह कैसी होती है ? राम बोले, हे भगवन् ! इतिरूप सत्ता ही वहाँ स्थित होती है और तुम जैमों ने अनुभव भी किया है कि वह चिदाकाशरूप है । सत्य और असत्य शब्द से नहीं कहा जाता । वशिष्ठजी बोले, हे महावाहु ! जो ऐसे हुआ तो भी जगत् तो ज्ञप्तिरूप हुआ इसलिए वह जन्म-गरण से रहित शुद्ध ज्ञानरूप है । राम ने पूछा, हे भगवन् ! तुम कहते हो कि जगत् उत्पन्न नहीं हुआ, भ्रममात्र है, तो
वह भ्रम कहाँ से आया ? वशिष्ठजी बोले, हे राम ! यह जगत् चित् के फुरने से भासित होता है। जैसे-जैसे चित्त फुरता है, वैसे ही वैसे यह भी भासित होता है। इसका और कोई कारण नहीं है। राम ने पूछा, हे भगवन् ! जो यह चित्त के फुरने से दिखता है, तो यह परस्पर विरुद्ध कैसे दिखता है कि अग्नि को जल नष्ट करता है और जल को अग्नि नष्ट करती हैं ? वशिष्ठजी बोले, हे राम! जो द्रष्टा पुरुष है, वह दृश्यभाव को नहीं प्राप्त होता । और ऐसी कुछ वस्तु नहीं, मानरूप आत्मा ही चैतन्यघन सर्वरूप होकर भासित होता है।
राम ने पूछा, हे भगवन् ! चिन्मात्रतत्त्व आदि-अन्त से रहित है। और जब वह जगत् को चिताता है, तब होता है, पर तो भी तो वह कुछ हुआ। जगत्रूप चैत्य को असंभव कैसे कहिये ? वशिष्ठजी बोले, हे राम! इसका कारण कोई नहीं, इससे चैत्य असंभव है। चेतन्य सदा मुक्त और अवाच्यपद है। राम ने पूछा, हे भगवन् ! जो इस प्रकार है तो जगत् और तत्त्व कैसे प्रकट होते हैं, और अहं त्वं आदिक द्वैत कहाँ से आये ? वशिष्ठजी बोले, हे राम ! कारण के अभाव से यह जगत् कुछ आदि से उपजा नहीं, सब शान्तरूप है। और नाना जो भासित होता है, सो भ्रममात्र है। राम ने पूछा, हे भगवन् ! सर्वदा प्रकाशरूप निर्मलतत्त्व निरुल्लेख और अचलरूप है। आपमें भ्रान्ति कैसे है और किसको है ? वशिष्ठजी बोले, हे राम ! निश्चय करके जानो कि कारण के अभाव से भ्रान्ति कुछ वस्तु नहीं । अहं त्वं आदिक सब एक अनामय सत्ता स्थित है। राम ने पूछा, हे ब्राह्मण ! मुझे भ्रम हो रहा है, इससे इस विषय में और अधिक प्रश्न करना नहीं जानता और अत्यन्त प्रबुद्ध भी नहीं, तो अब क्या पूछू ? वशिष्ठजी बोले, हे राम! यह प्रश्न करो कि कारण बिना जगत् कैसे उत्पन्न हुआ ? जब विचार करके कारण का अभाव जानोगे, तब परम स्वभाव अशब्द पद में विश्रान्ति पाओगे ।
राम ने पूछा, हे भगवन् ! मैं यह जानता हूँ कि कारण के अभाव से जगत् कुछ उपजा नहीं, परन्तु चैत्य का फुरना भ्रम कैसे हुआ ?
वशिष्ठजी बोले, हे राम ! कारण के अभाव से सर्वत्र शान्तिरूप है । भ्रम भी कुछ दूसरी वस्तु नहीं। जबतक आत्मपद में अभ्यास नहीं होता, तब तक भ्रम भासित होता है और शान्ति नहीं होती। पर जब अभ्यास करके केवल तत्त्व में विश्रान्ति पाओगे तब भ्रग मिट जायगा । राम ने पूछा, हे भगवन् ! अभ्यास और अनभ्यास कैसे होता है, और एक अद्वैत में अभ्यास अनभ्यास की भ्रान्ति कैसे होती है ? वशिष्ठजी बोले. हे राम! अनन्ततत्त्व में शान्ति भी कुछ वस्तु नहीं और जो आभास शान्ति दिखती है, वह महाचिघन अविनाशरूप है। राम ने पूछा, हे ब्राह्मण ! उपदेश और उपदेश के अधिकारी, ये जो भिन्न-भिन्न शब्द हैं. वे सर्वात्मा में कैसे आमित होते हैं। वशिष्ठजी बोले, हे राम उपदेश और उपदेश के योग्य, ये शब्द भी ब्रह्म में कल्पित हैं। शुद्ध बोध में बन्धन और मोक्ष दोनों का अभाव है। राम ने पूछा, हे भगवन् ! जो आदि में कुछ उत्पन्न नहीं हुआ तो देश, काल, किया और द्रव्य के भेद कैसे दिखते हैं ? वशिष्ठजी बोले हे राम! देश काल. क्रिया और द्रव्य के जो भेद हैं. सो संवेदन दृश्य में है और अज्ञानमात्र भासित होते हैंअज्ञानमात्र से कुछ मिन्न नहीं । राम ने पूछा, हे भगवन् ! बोध को दृश्य की प्राप्ति कैसे हुई ? जहाँ द्वेत और एकता का अभाव है, वहाँ दृश्य भ्रम कैसे है ? वशिष्ठजी बोले, हे राम! बोध को दृश्य की प्राप्ति और द्वैत एक का भ्रम मूखों का विषय है; हम जैसा का विषय नहीं है। राम ने पूछा, हे भगवन् ! अनन्ततत्त्व तो केवल बोधरूप है. तव अहं त्वं हमारे मन में कैसे होता है ? वशिष्ठजी बोले. हे राम! शुद्ध बोधसत्ता में जो बोध का जानना है, वह अहं त्वं द्वारा कहाता है। जैसे पवन में स्फुरण है वैसे ही उसमें चेतना जगती है। राम ने पूछा हे भगवन् ! जैसे निर्मल अचल समुद्र में तरङ्ग और बुलबुले उठते हैं, सो वे कुछ जल से भिन्न नहीं होते. वैसे ही बोध में बोधसत्ता से भिन्न कुछ नहीं । वह अपने आपमें स्थित हैं। वशिष्ठजी बोले हे राम! जो यह बात है तो किसका किसको दुःख हो ? एक अनन्ततत्त्व अपने आपमें स्थित और पूर्ण हैं । राम ने पूछा, हे भगवन् ! जो वह एक और निर्मल हैं तो अहं त्वं | कैसे इनका अभाव कहते हो ? वशिष्ठजी बोले. हे राम! यह सत्र जगत् विराट् पुरुष का शरीर है। जब वह आदि-विराट् ही उपजा नहीं, तो और की उत्पत्ति कैसे कहिये ? राम ने पूछा. हे मुनीश्वर जगत् का सद्भाव तो तीनों कालों में पाया जाता है, पर तुम कहते हो कि उपजा ही नहीं । वशिष्ठजी बोले, हे राम! जैसे स्वप्न में जगत् के सव पदार्थ प्रत्यक्ष दिखते हैं, पर कुछ उपजे नहीं। जैसे मृगतृष्णा का जल आकाश में द्वितीय चन्द्रमा और संकल्पनगर भ्रम से दिखता है, वैसे ही अहं त्वं आदि जगत् भ्रम से दिखता है। राम ने पूछा, हे भगवन् ! अहं त्वं आदि जगत् दृढ़ भासित होता है, तब कैसे जानिये कि उपजा नहीं ? वशिष्ठजा बोले हे राम! जो पदार्थ कारण से उपजता है. निश्चय सत्य जाना जाता है। जब महाप्रलय होता है तब कारणकार्य कुछ नहीं रहता, सब शान्तरूप होता है, और फिर उस महाप्रलय से जगत् प्रकट होता है। इसी से जाना जाता है कि सव आभासगात्र है। राम ने पूछा, हे मुनीश्वर ! जब महायलय होता है, तब अज और अविनाशी गत्ता शेष रहती है। इसमे जाना जाता है कि वही जगत का कारण है। वशिष्ठजी बोले. हे राम! जैसा कारण होता है. वैसा ही उसका कार्य होता है. उससे उल्टा नहीं होता । जो आत्मसत्ता अद्वैत और आकाशरूप हैं तो जगत् भी वही रूप है। जैसे घट से पट नहीं उपजता. वैसे ही और कुछ नहीं उपजता । राम ने पूछा है भगवन् ! जब महाप्रलय होता है, तब जगत् सूक्ष्मरूप होकर स्थित होता है, और उसी से फिर प्रवृत्ति होती है। वशिष्ठजी बोले, हे निष्पाप राम महाप्रलय में जो तुमने सृष्टि का अनुभव किया, वह कैसी होती है ? राम बोले, हे भगवन् ! इतिरूप सत्ता ही वहाँ स्थित होती है और तुम जैमों ने अनुभव भी किया है कि वह चिदाकाशरूप है । सत्य और असत्य शब्द से नहीं कहा जाता । वशिष्ठजी बोले, हे महावाहु ! जो ऐसे हुआ तो भी जगत् तो ज्ञप्तिरूप हुआ इसलिए वह जन्म-गरण से रहित शुद्ध ज्ञानरूप है । राम ने पूछा, हे भगवन् ! तुम कहते हो कि जगत् उत्पन्न नहीं हुआ, भ्रममात्र है, तो वह भ्रम कहाँ से आया ? वशिष्ठजी बोले, हे राम ! यह जगत् चित् के फुरने से भासित होता है। जैसे-जैसे चित्त फुरता है, वैसे ही वैसे यह भी भासित होता है। इसका और कोई कारण नहीं है। राम ने पूछा, हे भगवन् ! जो यह चित्त के फुरने से दिखता है, तो यह परस्पर विरुद्ध कैसे दिखता है कि अग्नि को जल नष्ट करता है और जल को अग्नि नष्ट करती हैं ? वशिष्ठजी बोले, हे राम! जो द्रष्टा पुरुष है, वह दृश्यभाव को नहीं प्राप्त होता । और ऐसी कुछ वस्तु नहीं, मानरूप आत्मा ही चैतन्यघन सर्वरूप होकर भासित होता है। राम ने पूछा, हे भगवन् ! चिन्मात्रतत्त्व आदि-अन्त से रहित है। और जब वह जगत् को चिताता है, तब होता है, पर तो भी तो वह कुछ हुआ। जगत्रूप चैत्य को असंभव कैसे कहिये ? वशिष्ठजी बोले, हे राम! इसका कारण कोई नहीं, इससे चैत्य असंभव है। चेतन्य सदा मुक्त और अवाच्यपद है। राम ने पूछा, हे भगवन् ! जो इस प्रकार है तो जगत् और तत्त्व कैसे प्रकट होते हैं, और अहं त्वं आदिक द्वैत कहाँ से आये ? वशिष्ठजी बोले, हे राम ! कारण के अभाव से यह जगत् कुछ आदि से उपजा नहीं, सब शान्तरूप है। और नाना जो भासित होता है, सो भ्रममात्र है। राम ने पूछा, हे भगवन् ! सर्वदा प्रकाशरूप निर्मलतत्त्व निरुल्लेख और अचलरूप है। आपमें भ्रान्ति कैसे है और किसको है ? वशिष्ठजी बोले, हे राम ! निश्चय करके जानो कि कारण के अभाव से भ्रान्ति कुछ वस्तु नहीं । अहं त्वं आदिक सब एक अनामय सत्ता स्थित है। राम ने पूछा, हे ब्राह्मण ! मुझे भ्रम हो रहा है, इससे इस विषय में और अधिक प्रश्न करना नहीं जानता और अत्यन्त प्रबुद्ध भी नहीं, तो अब क्या पूछू ? वशिष्ठजी बोले, हे राम! यह प्रश्न करो कि कारण बिना जगत् कैसे उत्पन्न हुआ ? जब विचार करके कारण का अभाव जानोगे, तब परम स्वभाव अशब्द पद में विश्रान्ति पाओगे । राम ने पूछा, हे भगवन् ! मैं यह जानता हूँ कि कारण के अभाव से जगत् कुछ उपजा नहीं, परन्तु चैत्य का फुरना भ्रम कैसे हुआ ? वशिष्ठजी बोले, हे राम ! कारण के अभाव से सर्वत्र शान्तिरूप है । भ्रम भी कुछ दूसरी वस्तु नहीं। जबतक आत्मपद में अभ्यास नहीं होता, तब तक भ्रम भासित होता है और शान्ति नहीं होती। पर जब अभ्यास करके केवल तत्त्व में विश्रान्ति पाओगे तब भ्रग मिट जायगा । राम ने पूछा, हे भगवन् ! अभ्यास और अनभ्यास कैसे होता है, और एक अद्वैत में अभ्यास अनभ्यास की भ्रान्ति कैसे होती है ? वशिष्ठजी बोले. हे राम! अनन्ततत्त्व में शान्ति भी कुछ वस्तु नहीं और जो आभास शान्ति दिखती है, वह महाचिघन अविनाशरूप है। राम ने पूछा, हे ब्राह्मण ! उपदेश और उपदेश के अधिकारी, ये जो भिन्न-भिन्न शब्द हैं. वे सर्वात्मा में कैसे आमित होते हैं। वशिष्ठजी बोले, हे राम उपदेश और उपदेश के योग्य, ये शब्द भी ब्रह्म में कल्पित हैं। शुद्ध बोध में बन्धन और मोक्ष दोनों का अभाव है। राम ने पूछा, हे भगवन् ! जो आदि में कुछ उत्पन्न नहीं हुआ तो देश, काल, किया और द्रव्य के भेद कैसे दिखते हैं ? वशिष्ठजी बोले हे राम! देश काल. क्रिया और द्रव्य के जो भेद हैं. सो संवेदन दृश्य में है और अज्ञानमात्र भासित होते हैंअज्ञानमात्र से कुछ मिन्न नहीं । राम ने पूछा, हे भगवन् ! बोध को दृश्य की प्राप्ति कैसे हुई ? जहाँ द्वेत और एकता का अभाव है, वहाँ दृश्य भ्रम कैसे है ? वशिष्ठजी बोले, हे राम! बोध को दृश्य की प्राप्ति और द्वैत एक का भ्रम मूखों का विषय है; हम जैसा का विषय नहीं है। राम ने पूछा, हे भगवन् ! अनन्ततत्त्व तो केवल बोधरूप है. तव अहं त्वं हमारे मन में कैसे होता है ? वशिष्ठजी बोले. हे राम! शुद्ध बोधसत्ता में जो बोध का जानना है, वह अहं त्वं द्वारा कहाता है। जैसे पवन में स्फुरण है वैसे ही उसमें चेतना जगती है। राम ने पूछा हे भगवन् ! जैसे निर्मल अचल समुद्र में तरङ्ग और बुलबुले उठते हैं, सो वे कुछ जल से भिन्न नहीं होते. वैसे ही बोध में बोधसत्ता से भिन्न कुछ नहीं । वह अपने आपमें स्थित हैं। वशिष्ठजी बोले हे राम! जो यह बात है तो किसका किसको दुःख हो ? एक अनन्ततत्त्व अपने आपमें स्थित और पूर्ण हैं । राम ने पूछा, हे भगवन् ! जो वह एक और निर्मल हैं तो अहं त्वं |
मालवो और उसका साहित्य
यह धारणा विवादास्पद है कि मालवी राजस्थानी उपशाखा की एक बोली है । विवाद या मतभेट का मुख्य कारण नार्ज ग्रियर्सन द्वारा निर्धारित भारतीय भाषाओं का वर्गीकरण है । ग्रियर्सन के पूर्व भारतीय भाषा एव उपभाषाओं का किसी ने समग्र रूप से वैज्ञानिक अध्ययन नहीं किया था । ग्रियर्सन ने सन् १६०७-८ में 'लिग्विस्टिक सर्वे ऑफ इण्डिया को बृहद् जिल्दों में राजस्थानी और उसके उपभेदो पर प्रकाश डालते हुए मालवी के सम्बन्ध में विचार किया है। उन्होंने सुविधा के लिए राजस्थानी को पाँच मोटे वर्गों में विभक्त किया । चौथा वर्ग 'दक्षिण पूर्वी राजस्थानी' या मालवी का है, जिसके मुख्य भेट रॉगडी और सोंधवाड़ी बताए हैं । प्रसिद्ध भाषाचार्य डॉ० सुनीतिकुमार चाटुर्ज्या ने यह उचित समझा कि राजस्थानी भाषाओं को ढो पृथक् शाखाओं में विभक्त कर दिया जाय - १ पूर्वी शाखा ( पछाही हिन्दी ) और २ पश्चिमी शाखा । 'कुछ स्थूल विशिष्टताथों' के कारण जिन भाषाओं को 'एक ही सूत्र में गूँथ दिया गया है वह ठीक नहीं है। टेसीटरी के विचारों के आधार पर वह यह स्पष्ट स्वीकार करते हैं कि 'सूक्ष्मतर वैयाकरण दृष्टि के कारण राजस्थान-मालवा की बोलियों को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित करना बेहतर होगा ।' साथ ही वह यह भय भी मानते हैं कि मेवाती, निमाड़ी
के साथ मालवी पछाही हिन्दी से ज्यादातर सम्पर्कित है ।' ग्रियर्सन ने निमाडी को दक्षिणी राजस्थानी माना है, किन्तु मालवी से उसका निकटतम सम्बन्ध है । इस प्रसग में मालवी और निमाडी के विषय में थोडा विचार करना आवश्यक है ।
मालवी और निमाडो
निमाडी उज्जयिनी के दक्षिण में नर्मदा नदी के ऊपर भूनपूर्व इन्दौर गज्य के एक भाग में बोली जाती है । भौगोलिक दृष्टि से यह भाग मालवा से अनेक बातों में भिन्न है । समुद्र तल से मालवा, जहाँ ानुपातिक तौर पर डॉ० सुनीतिकुमार चाटु, 'राजस्थानी भाषा', पृष्ठ ६-१० । | मालवो और उसका साहित्य यह धारणा विवादास्पद है कि मालवी राजस्थानी उपशाखा की एक बोली है । विवाद या मतभेट का मुख्य कारण नार्ज ग्रियर्सन द्वारा निर्धारित भारतीय भाषाओं का वर्गीकरण है । ग्रियर्सन के पूर्व भारतीय भाषा एव उपभाषाओं का किसी ने समग्र रूप से वैज्ञानिक अध्ययन नहीं किया था । ग्रियर्सन ने सन् एक हज़ार छः सौ सात-आठ में 'लिग्विस्टिक सर्वे ऑफ इण्डिया को बृहद् जिल्दों में राजस्थानी और उसके उपभेदो पर प्रकाश डालते हुए मालवी के सम्बन्ध में विचार किया है। उन्होंने सुविधा के लिए राजस्थानी को पाँच मोटे वर्गों में विभक्त किया । चौथा वर्ग 'दक्षिण पूर्वी राजस्थानी' या मालवी का है, जिसके मुख्य भेट रॉगडी और सोंधवाड़ी बताए हैं । प्रसिद्ध भाषाचार्य डॉशून्य सुनीतिकुमार चाटुर्ज्या ने यह उचित समझा कि राजस्थानी भाषाओं को ढो पृथक् शाखाओं में विभक्त कर दिया जाय - एक पूर्वी शाखा और दो पश्चिमी शाखा । 'कुछ स्थूल विशिष्टताथों' के कारण जिन भाषाओं को 'एक ही सूत्र में गूँथ दिया गया है वह ठीक नहीं है। टेसीटरी के विचारों के आधार पर वह यह स्पष्ट स्वीकार करते हैं कि 'सूक्ष्मतर वैयाकरण दृष्टि के कारण राजस्थान-मालवा की बोलियों को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित करना बेहतर होगा ।' साथ ही वह यह भय भी मानते हैं कि मेवाती, निमाड़ी के साथ मालवी पछाही हिन्दी से ज्यादातर सम्पर्कित है ।' ग्रियर्सन ने निमाडी को दक्षिणी राजस्थानी माना है, किन्तु मालवी से उसका निकटतम सम्बन्ध है । इस प्रसग में मालवी और निमाडी के विषय में थोडा विचार करना आवश्यक है । मालवी और निमाडो निमाडी उज्जयिनी के दक्षिण में नर्मदा नदी के ऊपर भूनपूर्व इन्दौर गज्य के एक भाग में बोली जाती है । भौगोलिक दृष्टि से यह भाग मालवा से अनेक बातों में भिन्न है । समुद्र तल से मालवा, जहाँ ानुपातिक तौर पर डॉशून्य सुनीतिकुमार चाटु, 'राजस्थानी भाषा', पृष्ठ छः-दस । |
कुछ चीजें आपके जीवन में ऐसी होती हैं जो आपके हाथ में नहीं होती हैं लेकिन उनके साथ भी आपको जीते आना चाहिए। जिंदगी में कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन पर आपका पूरा नियंत्रण होता है और कुछ ऐसी भी होती हैं जिन पर कभी पूरा नियंत्रण नहीं हो सकता।
लेकिन आपको पूरी जागरूकता के साथ अपनी जीवन जीना चाहिए। आखिर इस तरह जीने में क्या सम्मिलित है? जागरूकता के साथ जीने का मतलब यही है कि आप नियंत्रण में होने वाली और नियंत्रण से बाहर की चीजों को अपने जीवन में शामिल करते हैं।
आपकी परवरिश ठीक से नहीं हो सकती है। इसमें आपकी कोई भूमिका नहीं है लेकिन यह आपके हाथ में है कि आप इस तरह के बचपन की छाया को अपने ऊपर हावी न होने दें।
मैं आपको एक सत्य कथा बताता हूं। एक पिता और उनके दो पुत्र एक ही कमरे के मकान में रहते थे। फादर रोज रात को शराब पीकर घर आते और टीवी देखते हुए बच्चों की पढ़ाई का समय खराब कर देते थे। बड़े बेटे ने जहां इन हालात में भी पढ़ाई जारी रखी तो छोटा पिता के नक्शेकदम पर आगे बढ़ गया। जब दोनों बड़े हुए तो बड़े बेटे को अच्छे नागरिक के लिए पुरस्कार मिला जबकि छोटा बेटा एक जुर्म में पकडा गया और उसे जेल हो गई।
जब उन दोनों से बातचीत की गई तो छोटे बेटे ने कहा 'मैं अपने पिता के कारण यहां पहुंच गया। मेरे पिता ने घर को नरक बना दिया था और वहां से मैं और कहां पहुंच सकता था। " बड़े बेटे ने कहा, 'मेरी सफलता में पिता की गलत आदत और घर के खराब माहौल का बड़ा हाथ है क्योंकि वहीं मुझे यही सीख मिली कि मुझे इस राह पर हरगिज नहीं जाना है।
एक ही स्थिति में दो लोग अलग-अलग तरह से काम करते हैं। यह किस तरह स्थितियों का सामना करते हैं उसी से हमारी पहचान बनती है।
लेकिन वह आदमी बार-बार आग्रह करता है और तब भगवान कहते हैं, 'मैं तुम्हारी इच्छाएं पूरी कर दूंगा लेकिन एक शर्त है कि तुम्हें जो कुछ भी मिलेगा उसका दुगुना पूरे शहर को मिलेगा। "वह व्यक्ति राजी हो जाता है।
वह व्यक्ति एक बड़े मकान की ख्वाहिश करता है और अगले ही क्षण उसका यह मकान पूरा हो जाता है। लेकिन यह प्रसन्नाता गायब हो जाती है जब वह देखता है कि उसके पड़ोसी के पास उस तरह के दो मकान हैं। इससे उसके भीतर गुस्सा और जलन पैदा होती है। उसे लगता है कि उसने भगवान को प्रसन्ना किया और जो वरदान मिला उसका फायदा सभी ले रहे हैं। वह सभी को सबक सिखाने का निर्णय लेता है।
वह फिर से प्रार्थना करता है और भगवान से कहता है, 'हे, भगवान मेरी एक आंख छीन ले। " तभी उसने पाया कि उसके पड़ोसी की दोनों आंखें चली गई हैं। इसके अगले दिन उसने पाया कि पूरे शहर के साथ ऐसा ही हुआ है। अब वह अकेला रह गया। पूरे शहर की आंखों की रोशनी छीन लेने का उसका उत्साह उसी पर भारी पड़ा।
टैगोर एक रोचक कथा कहते हैं। एक युवा ज्ञान की तलाश कर रहा था। वह कई लोगों से मिला। बहुत वर्ष बीत गए। वह हिमालय की घाटी पहुंच गया। यहां का वातावरण बहुत मोहक था। उसे लगा कि यही ईश्वर का घर है।
अगर कोई व्यक्ति अपनी खोज का आनंद उठा सकता है और उससे अपने लिए संतुष्टि तलाश सकता है तो उसने ईश्वर को पा ही लिया है। हमें खुद को यही सिखाना है कि अपनी यात्रा का आनंद लो।
| कुछ चीजें आपके जीवन में ऐसी होती हैं जो आपके हाथ में नहीं होती हैं लेकिन उनके साथ भी आपको जीते आना चाहिए। जिंदगी में कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन पर आपका पूरा नियंत्रण होता है और कुछ ऐसी भी होती हैं जिन पर कभी पूरा नियंत्रण नहीं हो सकता। लेकिन आपको पूरी जागरूकता के साथ अपनी जीवन जीना चाहिए। आखिर इस तरह जीने में क्या सम्मिलित है? जागरूकता के साथ जीने का मतलब यही है कि आप नियंत्रण में होने वाली और नियंत्रण से बाहर की चीजों को अपने जीवन में शामिल करते हैं। आपकी परवरिश ठीक से नहीं हो सकती है। इसमें आपकी कोई भूमिका नहीं है लेकिन यह आपके हाथ में है कि आप इस तरह के बचपन की छाया को अपने ऊपर हावी न होने दें। मैं आपको एक सत्य कथा बताता हूं। एक पिता और उनके दो पुत्र एक ही कमरे के मकान में रहते थे। फादर रोज रात को शराब पीकर घर आते और टीवी देखते हुए बच्चों की पढ़ाई का समय खराब कर देते थे। बड़े बेटे ने जहां इन हालात में भी पढ़ाई जारी रखी तो छोटा पिता के नक्शेकदम पर आगे बढ़ गया। जब दोनों बड़े हुए तो बड़े बेटे को अच्छे नागरिक के लिए पुरस्कार मिला जबकि छोटा बेटा एक जुर्म में पकडा गया और उसे जेल हो गई। जब उन दोनों से बातचीत की गई तो छोटे बेटे ने कहा 'मैं अपने पिता के कारण यहां पहुंच गया। मेरे पिता ने घर को नरक बना दिया था और वहां से मैं और कहां पहुंच सकता था। " बड़े बेटे ने कहा, 'मेरी सफलता में पिता की गलत आदत और घर के खराब माहौल का बड़ा हाथ है क्योंकि वहीं मुझे यही सीख मिली कि मुझे इस राह पर हरगिज नहीं जाना है। एक ही स्थिति में दो लोग अलग-अलग तरह से काम करते हैं। यह किस तरह स्थितियों का सामना करते हैं उसी से हमारी पहचान बनती है। लेकिन वह आदमी बार-बार आग्रह करता है और तब भगवान कहते हैं, 'मैं तुम्हारी इच्छाएं पूरी कर दूंगा लेकिन एक शर्त है कि तुम्हें जो कुछ भी मिलेगा उसका दुगुना पूरे शहर को मिलेगा। "वह व्यक्ति राजी हो जाता है। वह व्यक्ति एक बड़े मकान की ख्वाहिश करता है और अगले ही क्षण उसका यह मकान पूरा हो जाता है। लेकिन यह प्रसन्नाता गायब हो जाती है जब वह देखता है कि उसके पड़ोसी के पास उस तरह के दो मकान हैं। इससे उसके भीतर गुस्सा और जलन पैदा होती है। उसे लगता है कि उसने भगवान को प्रसन्ना किया और जो वरदान मिला उसका फायदा सभी ले रहे हैं। वह सभी को सबक सिखाने का निर्णय लेता है। वह फिर से प्रार्थना करता है और भगवान से कहता है, 'हे, भगवान मेरी एक आंख छीन ले। " तभी उसने पाया कि उसके पड़ोसी की दोनों आंखें चली गई हैं। इसके अगले दिन उसने पाया कि पूरे शहर के साथ ऐसा ही हुआ है। अब वह अकेला रह गया। पूरे शहर की आंखों की रोशनी छीन लेने का उसका उत्साह उसी पर भारी पड़ा। टैगोर एक रोचक कथा कहते हैं। एक युवा ज्ञान की तलाश कर रहा था। वह कई लोगों से मिला। बहुत वर्ष बीत गए। वह हिमालय की घाटी पहुंच गया। यहां का वातावरण बहुत मोहक था। उसे लगा कि यही ईश्वर का घर है। अगर कोई व्यक्ति अपनी खोज का आनंद उठा सकता है और उससे अपने लिए संतुष्टि तलाश सकता है तो उसने ईश्वर को पा ही लिया है। हमें खुद को यही सिखाना है कि अपनी यात्रा का आनंद लो। |
सर्विस रूल का उल्लंघन करने के आरोप में गौतम बुद्ध नगर जिले के एसएसपी वैभव कृष्ण को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा 14 पुलिस अधिकारियों का तबादला किया गया है, जिनमें वे पांच अधिकारी भी शामिल हैं, जिनके नाम एसएसपी वैभव कृष्ण की गोपनीय रिपोर्ट में शामिल थे। अब लखनऊ के एसएसपी कलानिधि नैथानी को गाजियाबाद का एसएसपी बनाया गया है।
जानकारी के मुताबिक, एसएसपी वैभव कृष्ण का जो चैट वायरल हुआ था, उसे फरेंसिक रिपोर्ट में सही पाया गया है। आईपीएस वैभव कृष्ण ने इस विडियो को एडिटेड बताया था। वैभव कृष्ण ने वायरल विडियो के संबंध में खुद एफआईआर कराई थी, जिसके बाद मेरठ के एडीजी और आईजी को जांच सौंपी गई थी। जांच के दौरान आईजी ने विडियो फरेंसिक लैब को भेजा था। एसएसपी वैभव कृष्ण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर मामले की जानकारी दी थी और शासन को भेजी गई गोपनीय रिपोर्ट को लीक किया था।
वैभव कृष्ण के मुताबिक, उन्होंने एसएसपी (गाजियाबाद) सुधीर कुमार सिंह, एसपी (सुलतानपुर) हिमांशु कुमार, एसएसपी (एसटीएफ) राजीव नारायण मिश्र, एसपी (बांदा) गणेश साहा और एसपी (रामपुर) डॉ. अजय पाल शर्मा के खिलाफ जांच रिपोर्ट भेजी थी। एसएसपी ने साजिश के लिए इन्हीं अफसरों पर आरोप लगाए थे। बता दें कि नोएडा का चार्ज लेते ही वैभव कृष्ण ने अग्निशमन-होमगार्ड विभाग के बड़े अफसरों, पुलिस और पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की थी। आरोप है कि इसी के बाद उनका विरोध शुरू हो गया था।
अधिकारी आचरण नियमावली का उल्लंघन करने के वैभव कृष्ण को सस्पेंड कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं। लखनऊ के एडीजी एसएन साबत इस केस में जांच करके जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपेंगे। गाजियाबाद के एसएसपी सुधीर कुमार सिंह को पीएसी आगरा, सुलतानपुर के एसपी हिमांशु कुमार को पीएसी इटावा में सेनानायक, एसटीएफ के एसएसपी राजीव नारायण मिश्र को मुरादाबाद पीएसी सेनानायक, बांदा के एसपी गणेश साहा को पुलिस अधीक्षक (मानवाधिकार) लखनऊ और मेरठ के एसपी डॉ. अजयपाल शर्मा को पुलिस अधीक्षक (पीटीएस) उन्नाव बनाया गया है। बता दें कि इन पांचों अधिकारियों के नाम एसएसपी वैभव कृष्ण की रिपोर्ट में शामिल थे।
एडीजी जसवीर सिंह ने सीएम को भेजे पत्र में लिखा है कि रिपोर्ट में अफसरों द्वारा थानाध्यक्षों की पोस्टिंग-ट्रांसफर, खुद अफसरों की तैनाती को लेकर रेट लिस्ट के संबंध में अपराधियों के साथ सांठगांठ के तमाम प्रमाण हैं। इनका संज्ञान लेते हुए आरोपी पांचों आईपीएस अफसरों को उनके वर्तमान पदों से हटाने की जरूरत है। ऐसा नहीं होने पर वे लोग जांच प्रभावित कर सकते हैं इसलिए इन्हें तत्काल पदों से हटाकर निलंबित किया जाना चाहिए।
एसएसपी वैभव कृष्ण ने आरोप लगाया था कि उन्होंने पांच आईपीएस अफसरों के खिलाफ सीएम ऑफिस, डीजीपी और अपर मुख्य सचिव (गृह) को करीब एक महीना पहले गोपनीय जांच रिपोर्ट भेजी थी। तबसे एक बड़ी लॉबी उनके खिलाफ साजिश रच रही थी और फेक विडियो इसी का हिस्सा है। मीडिया के जरिए मामला संज्ञान में आने के बाद सीएम ने अपने दफ्तर, अपर मुख्य सचिव (गृह) व डीजीपी से गोपनीय रिपोर्ट पर जानकारी मांगी है। बता दें कि एक विडियो और महिला के साथ चैट भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। अब फरेंसिक रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि विडियो सही है और उससे छेड़छाड़ नहीं की गई है।
| सर्विस रूल का उल्लंघन करने के आरोप में गौतम बुद्ध नगर जिले के एसएसपी वैभव कृष्ण को सस्पेंड कर दिया गया है। इसके अलावा चौदह पुलिस अधिकारियों का तबादला किया गया है, जिनमें वे पांच अधिकारी भी शामिल हैं, जिनके नाम एसएसपी वैभव कृष्ण की गोपनीय रिपोर्ट में शामिल थे। अब लखनऊ के एसएसपी कलानिधि नैथानी को गाजियाबाद का एसएसपी बनाया गया है। जानकारी के मुताबिक, एसएसपी वैभव कृष्ण का जो चैट वायरल हुआ था, उसे फरेंसिक रिपोर्ट में सही पाया गया है। आईपीएस वैभव कृष्ण ने इस विडियो को एडिटेड बताया था। वैभव कृष्ण ने वायरल विडियो के संबंध में खुद एफआईआर कराई थी, जिसके बाद मेरठ के एडीजी और आईजी को जांच सौंपी गई थी। जांच के दौरान आईजी ने विडियो फरेंसिक लैब को भेजा था। एसएसपी वैभव कृष्ण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर मामले की जानकारी दी थी और शासन को भेजी गई गोपनीय रिपोर्ट को लीक किया था। वैभव कृष्ण के मुताबिक, उन्होंने एसएसपी सुधीर कुमार सिंह, एसपी हिमांशु कुमार, एसएसपी राजीव नारायण मिश्र, एसपी गणेश साहा और एसपी डॉ. अजय पाल शर्मा के खिलाफ जांच रिपोर्ट भेजी थी। एसएसपी ने साजिश के लिए इन्हीं अफसरों पर आरोप लगाए थे। बता दें कि नोएडा का चार्ज लेते ही वैभव कृष्ण ने अग्निशमन-होमगार्ड विभाग के बड़े अफसरों, पुलिस और पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की थी। आरोप है कि इसी के बाद उनका विरोध शुरू हो गया था। अधिकारी आचरण नियमावली का उल्लंघन करने के वैभव कृष्ण को सस्पेंड कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं। लखनऊ के एडीजी एसएन साबत इस केस में जांच करके जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपेंगे। गाजियाबाद के एसएसपी सुधीर कुमार सिंह को पीएसी आगरा, सुलतानपुर के एसपी हिमांशु कुमार को पीएसी इटावा में सेनानायक, एसटीएफ के एसएसपी राजीव नारायण मिश्र को मुरादाबाद पीएसी सेनानायक, बांदा के एसपी गणेश साहा को पुलिस अधीक्षक लखनऊ और मेरठ के एसपी डॉ. अजयपाल शर्मा को पुलिस अधीक्षक उन्नाव बनाया गया है। बता दें कि इन पांचों अधिकारियों के नाम एसएसपी वैभव कृष्ण की रिपोर्ट में शामिल थे। एडीजी जसवीर सिंह ने सीएम को भेजे पत्र में लिखा है कि रिपोर्ट में अफसरों द्वारा थानाध्यक्षों की पोस्टिंग-ट्रांसफर, खुद अफसरों की तैनाती को लेकर रेट लिस्ट के संबंध में अपराधियों के साथ सांठगांठ के तमाम प्रमाण हैं। इनका संज्ञान लेते हुए आरोपी पांचों आईपीएस अफसरों को उनके वर्तमान पदों से हटाने की जरूरत है। ऐसा नहीं होने पर वे लोग जांच प्रभावित कर सकते हैं इसलिए इन्हें तत्काल पदों से हटाकर निलंबित किया जाना चाहिए। एसएसपी वैभव कृष्ण ने आरोप लगाया था कि उन्होंने पांच आईपीएस अफसरों के खिलाफ सीएम ऑफिस, डीजीपी और अपर मुख्य सचिव को करीब एक महीना पहले गोपनीय जांच रिपोर्ट भेजी थी। तबसे एक बड़ी लॉबी उनके खिलाफ साजिश रच रही थी और फेक विडियो इसी का हिस्सा है। मीडिया के जरिए मामला संज्ञान में आने के बाद सीएम ने अपने दफ्तर, अपर मुख्य सचिव व डीजीपी से गोपनीय रिपोर्ट पर जानकारी मांगी है। बता दें कि एक विडियो और महिला के साथ चैट भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। अब फरेंसिक रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि विडियो सही है और उससे छेड़छाड़ नहीं की गई है। |
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने कहा कि सभी प्रदेश के 12 जिलों में जिला मुख्यालय पर भाजपा द्वारा चंबा हत्याकांड को लेकर धरना प्रदर्शनों का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया की जिला चंबा में विधायक हंसराज, डीएस ठाकुर, डॉक्टर जनक राज और भाजपा नेता डॉ राजीव भारद्वाज उपस्थित रहे।
इसी प्रकार कांगड़ा में पूर्व मंत्री सरवीण चौधरी, त्रिलोक कपूर। लाहौल स्पीति में डॉक्टर रामलाल मरकांडे। कुल्लू में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष महेश्वर सिंह, पूर्व मंत्री गोविंद ठाकुर, धनेश्वरी ठाकुर। मंडी में प्रदेश उपाध्यक्ष पायल वैद्य, संसदीय क्षेत्र प्रभारी बिहारी लाल शर्मा। हमीरपुर में पूर्व मुख्य सचेतक कमलेश कुमारी, अनिल धीमान, नरेंद्र ठाकुर, विजय अग्निहोत्री। ऊना में पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर, सुमित शर्मा। बिलासपुर में मुख्यप्रवक्त विधायक रणधीर शर्मा, पूर्व मंत्री राजेंद्र गर्ग। सोलन में पूर्व मंत्री राजीव सहजल, पुरुषोत्तम गुलेरिया। सिरमौर में प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सांसद सुरेश कश्यप, पूर्व मंत्री सुखराम चौधरी, शिमला में पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज, संजय सूद, रवि मेहता, अजय श्याम और किन्नौर में पूर्व चेयरमैन सूरत नेगी उपस्थित रहे।
उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर डिप्टी कमिश्नर के माध्यम से राज्यपाल को एक चंबा जिला के सलूणी में हुई युवक की निर्मम हत्या के संदर्भ में एक ज्ञापन भेजा गया ।
ज्ञापन में राज्यपाल शिव प्राप्त शुक्ल को बताता गया की भारतीय जनता पार्टी, चंबा जिला के ग्राम पंचायत भांदल स्थित थरोली गांव, जोकि जिला केन्द्र से 60 कि०मी० की दूरी पर स्थित है, में पिछले दिनों मनोहर लाल नामक युवक जिसकी आयु लगभग 25 वर्ष थी, की निर्मम हत्या के संबंध में आपका ध्यान आकर्षित करना चाहती हैं। गांव के लोगों की जानकारी के मुताबिक मनोहर नाम के युवक को 6 जून, 2023 प्रातः 7:00 बजे आरोपित परिवार के लोगों ने घर में बुलाकर उसकी निर्मम हत्या कर उसके शरीर के 8 टुकड़े करके उसके शव को गांव के साथ लगते नजदीक के नाले में फेंक दिया जिसकी शिनाख्त 9 जून, 2023 को होने के बाद 10 जून, 2023 को अंतिम संस्कार किया गया।
महामहिम महोदय, महत्वपूर्ण विषय यह है कि इस नृशंस हत्या में एक विशेष समुदाय के परिवार की संलिप्तता पाई गई है। भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि घटना के पीछे जिस परिवार का हाथ बताया गया है उसकी पृष्ठभूमि पहले से ही संदिग्ध रही है और वह परिवार इस क्षेत्र में पहले भी ऐसी कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे चुका है। इस घटना को प्रेम प्रसंग की झूठी कहानी से जोड़कर पुलिस प्रशासन द्वारा आरोपियों के खिलाफ घटना होने के बाद जो कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए थी, उसमें प्रशासन नाकाम रहा जिस कारण इस परिवार ने कई साक्ष्यों को मिटाने का प्रयास भी किया। गांव के लोगों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बाहुबली ने सैंकड़ो बीघा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कई वर्षों से कर रखा है। इस क्षेत्र में इस घटना से पहले भी कई भेड़ पालकों और फुहालों के गायब होने की सूचनाएं समय-समय पर मिलती रही है लेकिन उन घटनाओं पर भी प्रशासन ने कभी कोई कड़ी कार्यवाही नहीं की। इस घटना के बाद चंबा जिला के साथ-साथ पूरे प्रदेश में आकोश का वातावरण है।
• इस क्षेत्र में हुई इस दर्दनाक घटना की जांच एन0आई०ए० से करवाई जाए और दाषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए।
• सरकार इससे पूर्व हुई गुमशुदगी की घटनाओं की छानबीन के लिए विशेष टीम गठित कर उचित कार्यवाही करे।
• इस परिवार ने सरकारी भूमि पर जो नाजायज कब्जा कर रखा है उसकी विभागीय जांच हो और सरकारी भूमि को इस परिवार के कब्जे से मुक्त करवाया जाए।
• भारतीय जनता पार्टी इस ज्ञापन के माध्यम से मांग करती है कि मनोहर लाल नाम के युवक जिसकी दर्दनाक हत्या की गई है, यह एक गरीब एवं दलित समुदाय से संबंध रखता था, सरकार इस परिवार को उचित आर्थिक सहायता प्रदान करे।
महोदय, भारतीय जनता पार्टी, प्रदेश सरकार को आगाह करती है कि यदि दोषियों को कड़ी सजा और मृतक के परिवार को उचित आर्थिक सहायता नहीं दी गई तो भाजपा पूरे प्रदेशभर में एक जनांदोलन खड़ा करेगी जिसकी जिम्मेदारी स्वयं प्रदेश सरकार की होगी । पे नाऊ पर क्लिक करे।
| भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने कहा कि सभी प्रदेश के बारह जिलों में जिला मुख्यालय पर भाजपा द्वारा चंबा हत्याकांड को लेकर धरना प्रदर्शनों का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया की जिला चंबा में विधायक हंसराज, डीएस ठाकुर, डॉक्टर जनक राज और भाजपा नेता डॉ राजीव भारद्वाज उपस्थित रहे। इसी प्रकार कांगड़ा में पूर्व मंत्री सरवीण चौधरी, त्रिलोक कपूर। लाहौल स्पीति में डॉक्टर रामलाल मरकांडे। कुल्लू में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष महेश्वर सिंह, पूर्व मंत्री गोविंद ठाकुर, धनेश्वरी ठाकुर। मंडी में प्रदेश उपाध्यक्ष पायल वैद्य, संसदीय क्षेत्र प्रभारी बिहारी लाल शर्मा। हमीरपुर में पूर्व मुख्य सचेतक कमलेश कुमारी, अनिल धीमान, नरेंद्र ठाकुर, विजय अग्निहोत्री। ऊना में पूर्व मंत्री वीरेंद्र कंवर, सुमित शर्मा। बिलासपुर में मुख्यप्रवक्त विधायक रणधीर शर्मा, पूर्व मंत्री राजेंद्र गर्ग। सोलन में पूर्व मंत्री राजीव सहजल, पुरुषोत्तम गुलेरिया। सिरमौर में प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सांसद सुरेश कश्यप, पूर्व मंत्री सुखराम चौधरी, शिमला में पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज, संजय सूद, रवि मेहता, अजय श्याम और किन्नौर में पूर्व चेयरमैन सूरत नेगी उपस्थित रहे। उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर डिप्टी कमिश्नर के माध्यम से राज्यपाल को एक चंबा जिला के सलूणी में हुई युवक की निर्मम हत्या के संदर्भ में एक ज्ञापन भेजा गया । ज्ञापन में राज्यपाल शिव प्राप्त शुक्ल को बताता गया की भारतीय जनता पार्टी, चंबा जिला के ग्राम पंचायत भांदल स्थित थरोली गांव, जोकि जिला केन्द्र से साठ किशून्यमीशून्य की दूरी पर स्थित है, में पिछले दिनों मनोहर लाल नामक युवक जिसकी आयु लगभग पच्चीस वर्ष थी, की निर्मम हत्या के संबंध में आपका ध्यान आकर्षित करना चाहती हैं। गांव के लोगों की जानकारी के मुताबिक मनोहर नाम के युवक को छः जून, दो हज़ार तेईस प्रातः सात:शून्य बजे आरोपित परिवार के लोगों ने घर में बुलाकर उसकी निर्मम हत्या कर उसके शरीर के आठ टुकड़े करके उसके शव को गांव के साथ लगते नजदीक के नाले में फेंक दिया जिसकी शिनाख्त नौ जून, दो हज़ार तेईस को होने के बाद दस जून, दो हज़ार तेईस को अंतिम संस्कार किया गया। महामहिम महोदय, महत्वपूर्ण विषय यह है कि इस नृशंस हत्या में एक विशेष समुदाय के परिवार की संलिप्तता पाई गई है। भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि घटना के पीछे जिस परिवार का हाथ बताया गया है उसकी पृष्ठभूमि पहले से ही संदिग्ध रही है और वह परिवार इस क्षेत्र में पहले भी ऐसी कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम दे चुका है। इस घटना को प्रेम प्रसंग की झूठी कहानी से जोड़कर पुलिस प्रशासन द्वारा आरोपियों के खिलाफ घटना होने के बाद जो कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए थी, उसमें प्रशासन नाकाम रहा जिस कारण इस परिवार ने कई साक्ष्यों को मिटाने का प्रयास भी किया। गांव के लोगों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बाहुबली ने सैंकड़ो बीघा सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कई वर्षों से कर रखा है। इस क्षेत्र में इस घटना से पहले भी कई भेड़ पालकों और फुहालों के गायब होने की सूचनाएं समय-समय पर मिलती रही है लेकिन उन घटनाओं पर भी प्रशासन ने कभी कोई कड़ी कार्यवाही नहीं की। इस घटना के बाद चंबा जिला के साथ-साथ पूरे प्रदेश में आकोश का वातावरण है। • इस क्षेत्र में हुई इस दर्दनाक घटना की जांच एनशून्यआईशून्यएशून्य से करवाई जाए और दाषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए। • सरकार इससे पूर्व हुई गुमशुदगी की घटनाओं की छानबीन के लिए विशेष टीम गठित कर उचित कार्यवाही करे। • इस परिवार ने सरकारी भूमि पर जो नाजायज कब्जा कर रखा है उसकी विभागीय जांच हो और सरकारी भूमि को इस परिवार के कब्जे से मुक्त करवाया जाए। • भारतीय जनता पार्टी इस ज्ञापन के माध्यम से मांग करती है कि मनोहर लाल नाम के युवक जिसकी दर्दनाक हत्या की गई है, यह एक गरीब एवं दलित समुदाय से संबंध रखता था, सरकार इस परिवार को उचित आर्थिक सहायता प्रदान करे। महोदय, भारतीय जनता पार्टी, प्रदेश सरकार को आगाह करती है कि यदि दोषियों को कड़ी सजा और मृतक के परिवार को उचित आर्थिक सहायता नहीं दी गई तो भाजपा पूरे प्रदेशभर में एक जनांदोलन खड़ा करेगी जिसकी जिम्मेदारी स्वयं प्रदेश सरकार की होगी । पे नाऊ पर क्लिक करे। |
CHAPRA : पूर्व सांसद आनंद मोहन जेल से छुटने के बाद रविवार को पहली बार छपरा पहूंचे। जहां फ्रेंड ऑफ़ आनंद के बैनर तले पूर्व सांसद आनंद मोहन का अभिनन्दन समारोह प्रेक्षा गृह में आयोजित किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि वह देश को बेचने वालों, भाई को भाई से लड़ाने वालो के खिलाफ निकले हैं ताकि देश को बचाया और बढ़ाया जा सके।
उन्होंने कहा की देश सावरकर और गोडसे के सिद्धांतों पर नही, बल्कि गाँघी और मजहरूल हक के रास्ते पर आगे बढ़ेगा। राष्ट्रवाद के नाम पर कमाऊ संस्थानों को दो गुजराती बेच रहे हैं और दो गुजराती खरीद रहे है। देश में जो बुद्धिजीवी वर्तमान सरकार के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ बोलता है उसे जेल भेजा जा रहा है। लेकिन ओवैसी के लिए कोई जेल नही है। आज प्रभुनाथ सिंह और महराजगंज के पूर्व सांसद स्व रामबहादुर सिंह की कमी महसूस हो रही है। स्व रामबहादुर सिंह समाजवाद के सच्चे सिपाही थे। अगर वह आज होते तो पाखंडियों और कर्मकांडियों को जड़ से उखाड़ देने का काम कर रहे होते।
आनंद मोहन ने कहा कि जब वह जेल से बाहर निकले तो कुछ लोगो के पेट मे दर्द होने लगा और उन्होंने उन्हें दलित का हत्यारा साबित करने की साज़िश रची और सहरसा जैसे छोटे से जिला में सैकड़ो की तादात में मीडिया को लगा दिया। ताकि उन्हें बदनाम किया जा सके। गाँधी को अपशब्द कहे जा रहे हैं और हमारे पुरखो को गाली दी जा रही है तो क्या हम चुपचाप उनकी गालियों को सुनते रहें। अब यह नही होगा। उन्होंने महाराजगंज के सांसद प्रभुनाथ सिंह को याद करते हुए कहा कि राज्य सरकार को बहुत शक्ति प्राप्त है। वह बची हुई सज़ा को अच्छे आचरण के बुनियाद पर माफ करवा कर उन्हें बाहर निकाले। ताकि इस लड़ाई में उनका साथ भी प्राप्त हो।
अभिनंदन समारोह की शुरुआत समर्थकों द्वारा पूर्व सांसद आनंद मोहन को तलवार और स्मारिका भेंट करने के बाद फूलमाला पहना कर किया गया। आनंद मोहन के साथ उनके विधायक पुत्र चेतन आनंद भी थे। जिन्होंने सारणवासियो का मुश्किल दौर में साथ देने के लिए धन्यवाद दिया और एहसान याद रखने की बात को दोहराया। देश मे नई संसद को लेकर उन्होंने कहा कि जब सावरकर की फोटो लगेगी तो देश के लिए अपना राजपाट त्यागने वाले अपनी कुर्बानी देने वाले सभी राजा महाराजाओं की तश्वीर भी लगनी चाहिए। जिसका समर्थन आयोजन में शामिल सभी समर्थकों ने किया। आयोजन में पूर्व केंद्रीय मंत्री दसई चौधरी, फ्रेंड्स ऑफ आनंद के अध्यक्ष कुलानंद यादव, मोहम्मद आसिफ, प्रो परमेन्द्र रंजन, पुरुषोत्तम सिंह गुड्डा, पूर्व मुखिया देवेन्द्र सिंह, अमर सिंह, रमाकांत सिंह, बीरेंद्र सिंह, पप्पू सिंह, चांदनी प्रकाश, बेबी सिंह, प्रियंका सिंह सहित अन्य लोग शामिल थे।
| CHAPRA : पूर्व सांसद आनंद मोहन जेल से छुटने के बाद रविवार को पहली बार छपरा पहूंचे। जहां फ्रेंड ऑफ़ आनंद के बैनर तले पूर्व सांसद आनंद मोहन का अभिनन्दन समारोह प्रेक्षा गृह में आयोजित किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि वह देश को बेचने वालों, भाई को भाई से लड़ाने वालो के खिलाफ निकले हैं ताकि देश को बचाया और बढ़ाया जा सके। उन्होंने कहा की देश सावरकर और गोडसे के सिद्धांतों पर नही, बल्कि गाँघी और मजहरूल हक के रास्ते पर आगे बढ़ेगा। राष्ट्रवाद के नाम पर कमाऊ संस्थानों को दो गुजराती बेच रहे हैं और दो गुजराती खरीद रहे है। देश में जो बुद्धिजीवी वर्तमान सरकार के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ बोलता है उसे जेल भेजा जा रहा है। लेकिन ओवैसी के लिए कोई जेल नही है। आज प्रभुनाथ सिंह और महराजगंज के पूर्व सांसद स्व रामबहादुर सिंह की कमी महसूस हो रही है। स्व रामबहादुर सिंह समाजवाद के सच्चे सिपाही थे। अगर वह आज होते तो पाखंडियों और कर्मकांडियों को जड़ से उखाड़ देने का काम कर रहे होते। आनंद मोहन ने कहा कि जब वह जेल से बाहर निकले तो कुछ लोगो के पेट मे दर्द होने लगा और उन्होंने उन्हें दलित का हत्यारा साबित करने की साज़िश रची और सहरसा जैसे छोटे से जिला में सैकड़ो की तादात में मीडिया को लगा दिया। ताकि उन्हें बदनाम किया जा सके। गाँधी को अपशब्द कहे जा रहे हैं और हमारे पुरखो को गाली दी जा रही है तो क्या हम चुपचाप उनकी गालियों को सुनते रहें। अब यह नही होगा। उन्होंने महाराजगंज के सांसद प्रभुनाथ सिंह को याद करते हुए कहा कि राज्य सरकार को बहुत शक्ति प्राप्त है। वह बची हुई सज़ा को अच्छे आचरण के बुनियाद पर माफ करवा कर उन्हें बाहर निकाले। ताकि इस लड़ाई में उनका साथ भी प्राप्त हो। अभिनंदन समारोह की शुरुआत समर्थकों द्वारा पूर्व सांसद आनंद मोहन को तलवार और स्मारिका भेंट करने के बाद फूलमाला पहना कर किया गया। आनंद मोहन के साथ उनके विधायक पुत्र चेतन आनंद भी थे। जिन्होंने सारणवासियो का मुश्किल दौर में साथ देने के लिए धन्यवाद दिया और एहसान याद रखने की बात को दोहराया। देश मे नई संसद को लेकर उन्होंने कहा कि जब सावरकर की फोटो लगेगी तो देश के लिए अपना राजपाट त्यागने वाले अपनी कुर्बानी देने वाले सभी राजा महाराजाओं की तश्वीर भी लगनी चाहिए। जिसका समर्थन आयोजन में शामिल सभी समर्थकों ने किया। आयोजन में पूर्व केंद्रीय मंत्री दसई चौधरी, फ्रेंड्स ऑफ आनंद के अध्यक्ष कुलानंद यादव, मोहम्मद आसिफ, प्रो परमेन्द्र रंजन, पुरुषोत्तम सिंह गुड्डा, पूर्व मुखिया देवेन्द्र सिंह, अमर सिंह, रमाकांत सिंह, बीरेंद्र सिंह, पप्पू सिंह, चांदनी प्रकाश, बेबी सिंह, प्रियंका सिंह सहित अन्य लोग शामिल थे। |
नई दिल्ली : अयोध्या में विवादित राम जन्मभूमि मंदिर पर तीर्थ यात्रियों और अन्य लोगों के लिए छांव की व्यवस्था हेतु लगाए गए टेंट को बदलने की इजाजत सर्वोच्च न्यायालय ने दे दी है। न्यायालय ने आदेश के तहत कहा है कि इस कार्य को DM की निगरानी में किया जाए। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने एक याचिका में कहा था कि उत्तर प्रदेश सरकार यहां पर तीर्थ यात्रियों की सुविधाओं को दरकिनार कर रही है। जिसके बाद न्यायालय ने सरकार को व्यवस्था जुटाने के आदेश दिए थे। अब न्यायालय ने जन्मभूमि के विवादित क्षेत्र के पास यात्रियों के लिए शानदार सुविधाऐं उपलब्ध करवाने की बात कही है।
अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि यहां साफ - सफाई की समुचित व्यवस्था की जाए, साथ ही यहां पर टेंट का कपड़ा बदले जाने की भी न्यायालय ने अनुमति दे दी है। उल्लेखनीय है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने याचिका दायर कर कहा था कि तीर्थयात्रियों के लिए पीने के पानी और शौचायल जैसी आधारभूत सुविधाओं को उपलब्ध करवाए। इनके अभाव में तीर्थयात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
| नई दिल्ली : अयोध्या में विवादित राम जन्मभूमि मंदिर पर तीर्थ यात्रियों और अन्य लोगों के लिए छांव की व्यवस्था हेतु लगाए गए टेंट को बदलने की इजाजत सर्वोच्च न्यायालय ने दे दी है। न्यायालय ने आदेश के तहत कहा है कि इस कार्य को DM की निगरानी में किया जाए। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने एक याचिका में कहा था कि उत्तर प्रदेश सरकार यहां पर तीर्थ यात्रियों की सुविधाओं को दरकिनार कर रही है। जिसके बाद न्यायालय ने सरकार को व्यवस्था जुटाने के आदेश दिए थे। अब न्यायालय ने जन्मभूमि के विवादित क्षेत्र के पास यात्रियों के लिए शानदार सुविधाऐं उपलब्ध करवाने की बात कही है। अदालत ने सरकार को आदेश दिया है कि यहां साफ - सफाई की समुचित व्यवस्था की जाए, साथ ही यहां पर टेंट का कपड़ा बदले जाने की भी न्यायालय ने अनुमति दे दी है। उल्लेखनीय है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने याचिका दायर कर कहा था कि तीर्थयात्रियों के लिए पीने के पानी और शौचायल जैसी आधारभूत सुविधाओं को उपलब्ध करवाए। इनके अभाव में तीर्थयात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। |
जबलपुर मध्य प्रदेश। लार्डगंज क्षेत्र स्थित एक मकान में बर्तन, झाड़ू का काम करने वाली नौकरानी के साथ मकान मालिक ने धमकाते हुए दुष्कर्म किया और उसके अश्लील फोटो खींचे। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस ने बताया कि 38 वर्षीय महिला लार्डगंज क्षेत्र में रहने वाले व्यक्ति के घर में 20 जनवरी 2020 से काम कर रही है। महिला रोज सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक काम करने जाती थी। रात ज्यादा होने के कारण कभी मालिक भी उसे घर छोड़ने जाता था। 29 जनवरी को महिला काम कर रही थी। शाम लगभग 6 बजे आरोपित ने उसे जान से मारने की धमकाते देते हुए दुष्कर्म किया। दहशत में उसने किसी को नहीं बताया। 30 जनवरी को जब वह काम करने गई, तो आरोपित संतोष ने उसके साथ गालीगलौज की और कमरे में ले जाकर उसके अश्लील फोटो उतार लिए। साथ ही किसी को भी बताने पर बदनाम करने की धमकी दी। जब महिला ने विरोध किया, तो आरोपित संतोष ने उसके साथ लाठी से मारपीट कर दी। पुलिस ने पीड़ित महिला की शिकायत पर केस दर्ज कर आरोपित को दबोच लिया है।
| जबलपुर मध्य प्रदेश। लार्डगंज क्षेत्र स्थित एक मकान में बर्तन, झाड़ू का काम करने वाली नौकरानी के साथ मकान मालिक ने धमकाते हुए दुष्कर्म किया और उसके अश्लील फोटो खींचे। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया कि अड़तीस वर्षीय महिला लार्डगंज क्षेत्र में रहने वाले व्यक्ति के घर में बीस जनवरी दो हज़ार बीस से काम कर रही है। महिला रोज सुबह ग्यारह बजे से रात आठ बजे तक काम करने जाती थी। रात ज्यादा होने के कारण कभी मालिक भी उसे घर छोड़ने जाता था। उनतीस जनवरी को महिला काम कर रही थी। शाम लगभग छः बजे आरोपित ने उसे जान से मारने की धमकाते देते हुए दुष्कर्म किया। दहशत में उसने किसी को नहीं बताया। तीस जनवरी को जब वह काम करने गई, तो आरोपित संतोष ने उसके साथ गालीगलौज की और कमरे में ले जाकर उसके अश्लील फोटो उतार लिए। साथ ही किसी को भी बताने पर बदनाम करने की धमकी दी। जब महिला ने विरोध किया, तो आरोपित संतोष ने उसके साथ लाठी से मारपीट कर दी। पुलिस ने पीड़ित महिला की शिकायत पर केस दर्ज कर आरोपित को दबोच लिया है। |
टीम इंडिया ने चार मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया को 31 रन से हराकर जीत के साथ आगाज किया। ये पहली बार है जब टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज का पहला मैच जीतने में कामयाब रही। इस जीत के साथ ही भारत ने 4 मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली है। मैच जीतने के बाद विराट कोहली खासा खुश नजर आए और उनकी खुशी मैच के बाद दिए गए उनके पांच बयानों में साफ नजर आए। आइए आपको बताते हैं कि विराट कोहली ने क्या कुछ कहा।
रोमांच क्रिकेट का हिस्साः जब कोहली से पूछा गया कि मैच काफी नजदीकी था तो उन्होंने कहा, 'टेस्ट क्रिकेट में ये सब होता रहता है। आपको सिर्फ शांत रहने की जरूरत होती है। ' आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलिया के पुछल्ले बल्लेबाजों ने आखिर तक संघर्ष किया और आसानी से हार नहीं मानी।
मैं भी दबाव में थाः विराट कोहली ने ये भी साफ किया कि मैच के दौरान उन पर भी थोड़ा दबाव था। कोहली ने कहा, 'उन्होंने शानदार जज्बा दिखाया। मैं ये नहीं कहूंगा कि मैं बर्फ की तरह ठंडा था लेकिन आप ऐसा (खुद पर दबाव होना) दिखा नहीं सकते। जसप्रीत अपने आखिरी ओवर में जरूरत से ज्यादा कोशिश कर रहे थे और मैंने उन्हें शांत रहने को कहा था। '
गेंदबाजों पर गर्व हैः विराट कोहली ने कहा कि उन्हें अपने गेंदबाजों पर गर्व है। कोहली ने कहा, 'मुझे अपने गेंदबाजों पर गर्व है। हम चार गेंदबाजों के साथ उतरे थे और उन्होंने पूरे 20 विकेट झटके। 20 विकेट लेना बहुत बड़ी उपलब्धि है। ऐसा हम पहले नहीं कर सके थे। '
जीत सकते हैं हर मैचः विराट कोहली ने ये भी कहा कि अगर आने वाले मैचों में बल्लेबाजी अच्छी होती रही तो फिर भारतीय टीम सीरीज का हर मैच जीत सकती है। कोहली ने कहा, 'अगर बल्लेबाज लगातार अच्छा करते रहे तो हम सीरीज का हर मैच जीत सकते हैं। आखिर में हम ज्यादा अच्छे थे और जीत के हकदार भी थे। '
पुजारा ने की गजब की बल्लेबाजीः विराट कोहली ने चेतेश्वर पुजारा की भी जमकर तारीफ की। कोहली ने कहा कि पुजारा ने जिस तरह की बल्लेबाजी की वो काबिलेतारीफ था। उन्होंने हमें दबाव से उबारा और पहली पारी में शतक लगाया। इसके अलावा दूसरी पारी में भी उन्होंने रहाणे के साथ मिलकर शानदार खेल दिखाया।
| टीम इंडिया ने चार मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया को इकतीस रन से हराकर जीत के साथ आगाज किया। ये पहली बार है जब टीम इंडिया ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज का पहला मैच जीतने में कामयाब रही। इस जीत के साथ ही भारत ने चार मैचों की टेस्ट सीरीज में एक-शून्य की बढ़त बना ली है। मैच जीतने के बाद विराट कोहली खासा खुश नजर आए और उनकी खुशी मैच के बाद दिए गए उनके पांच बयानों में साफ नजर आए। आइए आपको बताते हैं कि विराट कोहली ने क्या कुछ कहा। रोमांच क्रिकेट का हिस्साः जब कोहली से पूछा गया कि मैच काफी नजदीकी था तो उन्होंने कहा, 'टेस्ट क्रिकेट में ये सब होता रहता है। आपको सिर्फ शांत रहने की जरूरत होती है। ' आपको बता दें कि ऑस्ट्रेलिया के पुछल्ले बल्लेबाजों ने आखिर तक संघर्ष किया और आसानी से हार नहीं मानी। मैं भी दबाव में थाः विराट कोहली ने ये भी साफ किया कि मैच के दौरान उन पर भी थोड़ा दबाव था। कोहली ने कहा, 'उन्होंने शानदार जज्बा दिखाया। मैं ये नहीं कहूंगा कि मैं बर्फ की तरह ठंडा था लेकिन आप ऐसा दिखा नहीं सकते। जसप्रीत अपने आखिरी ओवर में जरूरत से ज्यादा कोशिश कर रहे थे और मैंने उन्हें शांत रहने को कहा था। ' गेंदबाजों पर गर्व हैः विराट कोहली ने कहा कि उन्हें अपने गेंदबाजों पर गर्व है। कोहली ने कहा, 'मुझे अपने गेंदबाजों पर गर्व है। हम चार गेंदबाजों के साथ उतरे थे और उन्होंने पूरे बीस विकेट झटके। बीस विकेट लेना बहुत बड़ी उपलब्धि है। ऐसा हम पहले नहीं कर सके थे। ' जीत सकते हैं हर मैचः विराट कोहली ने ये भी कहा कि अगर आने वाले मैचों में बल्लेबाजी अच्छी होती रही तो फिर भारतीय टीम सीरीज का हर मैच जीत सकती है। कोहली ने कहा, 'अगर बल्लेबाज लगातार अच्छा करते रहे तो हम सीरीज का हर मैच जीत सकते हैं। आखिर में हम ज्यादा अच्छे थे और जीत के हकदार भी थे। ' पुजारा ने की गजब की बल्लेबाजीः विराट कोहली ने चेतेश्वर पुजारा की भी जमकर तारीफ की। कोहली ने कहा कि पुजारा ने जिस तरह की बल्लेबाजी की वो काबिलेतारीफ था। उन्होंने हमें दबाव से उबारा और पहली पारी में शतक लगाया। इसके अलावा दूसरी पारी में भी उन्होंने रहाणे के साथ मिलकर शानदार खेल दिखाया। |
नई दिल्ली/टीम डिजीटल। कॉनफेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए ने सोसाइटीज के पंजीकरण के नवीनीकरण को एक जटिल प्रक्रिया बताते हुए। नवीनीकरण प्रक्रिया को बंद करने की मांग की है। संस्था के अध्यक्ष पवन कुमार कौशिक ने बताया कि उनकी ओर से मुख्यमंत्री को इस संदर्भ में पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया गया है। ताकि जल्द से इस जटिल प्रक्रिया से निदान मिल सके। उनका कहना है कि कहने के लिए नवीनीकरण प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। परन्तु कोई नवीनीकरण तब तक नही होता। जब तक संबंधित लोग कई बार डिप्टी रजिस्टार मेरठ कार्यालय के चक्कर न काट ले।
मेरठ कार्यालय में उन्हें भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। जब तक वहां मौजूद दलालो को संतुष्ट ना किया जाए, तब तक काम नहीं होता। उन्होंने बताया कि यदि नवीनीकरण की तिथि से 15 दिन पहले ऑनलाइन एप्लाई किया जाए तो जवाब आता है कि अभी समय नहीं हुआ है। जबकि डिप्टी रजिस्ट्रार मेरठ लिखते हैं किनवीनीकरण की तिथि से पहले ही एप्लाई कर दिया जाए। सोसाइटीज का कार्यकाल दो साल,तीन साल अथवा पांच साल होता है। इस कार्यकाल के बाद पंजीकरण का नवीनीकरण कराना होता है।
नवीनीकरण के लिए सबसे पहले सोसाइटी की बेलेंस शीट मांगी जाती है। बेलेंस शीट से टर्न ओवर का पता लगने के बाद समझौता किया जाता है। छोटी छोटी बातो के लिए संबंधित लोगो को बार बार बुलाया जाता है। इसमें न केवल भ्रष्टाचार पनपता है और समय खराब होता है बल्कि बार बार सोसाइटी के लोगो के गाजिय़ाबाद से मेरठ जाने पर परेशानी झेलनी पड़ती है। मजे की बात यह है कि बिना किसी जमीनी बदलाव के केवल कागजो में हेर फेर करके समझौता कर लिया जाता है,और नवीनीकरण प्रमाण पत्र दे दिया जाता है।
पवन कुमार कौशिक ने कहा कि दिल्ली में जितनी भी सोसाइटीज का पंजीकरण किया गया है। उनके पंजीकरण का नवीनीकरण नही किया जाता। क्या वो सब सोसाइटियां और देश भर के ट्रस्ट उतर प्रदेश में बनने वाली सोसाइटियो से अलग हैं । इसलिए पूरे प्रदेश में सोसाइटीज के पंजीकरण के नवीनीकरण की व्यवस्था पर तत्काल प्रतिबंध लगे।
| नई दिल्ली/टीम डिजीटल। कॉनफेडरेशन ऑफ आरडब्ल्यूए ने सोसाइटीज के पंजीकरण के नवीनीकरण को एक जटिल प्रक्रिया बताते हुए। नवीनीकरण प्रक्रिया को बंद करने की मांग की है। संस्था के अध्यक्ष पवन कुमार कौशिक ने बताया कि उनकी ओर से मुख्यमंत्री को इस संदर्भ में पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया गया है। ताकि जल्द से इस जटिल प्रक्रिया से निदान मिल सके। उनका कहना है कि कहने के लिए नवीनीकरण प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया गया है। परन्तु कोई नवीनीकरण तब तक नही होता। जब तक संबंधित लोग कई बार डिप्टी रजिस्टार मेरठ कार्यालय के चक्कर न काट ले। मेरठ कार्यालय में उन्हें भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। जब तक वहां मौजूद दलालो को संतुष्ट ना किया जाए, तब तक काम नहीं होता। उन्होंने बताया कि यदि नवीनीकरण की तिथि से पंद्रह दिन पहले ऑनलाइन एप्लाई किया जाए तो जवाब आता है कि अभी समय नहीं हुआ है। जबकि डिप्टी रजिस्ट्रार मेरठ लिखते हैं किनवीनीकरण की तिथि से पहले ही एप्लाई कर दिया जाए। सोसाइटीज का कार्यकाल दो साल,तीन साल अथवा पांच साल होता है। इस कार्यकाल के बाद पंजीकरण का नवीनीकरण कराना होता है। नवीनीकरण के लिए सबसे पहले सोसाइटी की बेलेंस शीट मांगी जाती है। बेलेंस शीट से टर्न ओवर का पता लगने के बाद समझौता किया जाता है। छोटी छोटी बातो के लिए संबंधित लोगो को बार बार बुलाया जाता है। इसमें न केवल भ्रष्टाचार पनपता है और समय खराब होता है बल्कि बार बार सोसाइटी के लोगो के गाजिय़ाबाद से मेरठ जाने पर परेशानी झेलनी पड़ती है। मजे की बात यह है कि बिना किसी जमीनी बदलाव के केवल कागजो में हेर फेर करके समझौता कर लिया जाता है,और नवीनीकरण प्रमाण पत्र दे दिया जाता है। पवन कुमार कौशिक ने कहा कि दिल्ली में जितनी भी सोसाइटीज का पंजीकरण किया गया है। उनके पंजीकरण का नवीनीकरण नही किया जाता। क्या वो सब सोसाइटियां और देश भर के ट्रस्ट उतर प्रदेश में बनने वाली सोसाइटियो से अलग हैं । इसलिए पूरे प्रदेश में सोसाइटीज के पंजीकरण के नवीनीकरण की व्यवस्था पर तत्काल प्रतिबंध लगे। |
शिरोमणि अकाली दल दिल्ली (सरना) के महासचिव हरविंदर सिंह सरना और जग आसरा गुरु ओट (जागो) के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। गुरु घर में पुलिस लाकर वर्ष 1984 का काला इतिहास दोहराया गया है।
नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। शिरोमणि अकाली दल दिल्ली (सरना) के महासचिव हरविंदर सिंह सरना और जग आसरा गुरु ओट (जागो) के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। दोनों नेता डीएसजीएमसी के अन्य नवनिर्वाचित सदस्यों के साथ कमेटी के कार्यालय पहुंचे और वहां मौजूद कर्मचारियों व अधिकारियों से पैसे का हिसाब दिखाने को कहा। उन्होंने कमेटी के खजाने में लाखों रुपये 63 लाख रुपये की कमी होने का आरोप लगाया।
वहीं, कमेटी के निवर्तमान अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा और महासचिव हरमीत सिंह कालका ने सरना और जीके पर डीएसजीएमसी कार्यालय पर कब्जा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। जीके व सरना ने कहा उन्हें जानकारी मिली थी कि कमेटी के रिकार्ड में नकदी की कमी है। इसकी सच्चाई मालूम करने के लिए उन्हें कमेटी के कार्यालय में आना पड़ा है। वहां मौजूद कर्मचारी भी नकदी कम होने की बात मान रहे हैं। लेकिन, इस बारे में उचित जवाब देने के बजाय प्रबंधन से पूछने की बात कह रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लाखों रुपये की कमी से स्पष्ट है कि गुरु घर के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है। निवर्तमान उपाध्यक्ष कुलवंत सिंह बाठ ने कहा कि कमेटी के महाप्रबंधक ने गलत जानकारी दी कि 63 लाख रुपये बैंक में जमा कराने के लिए भेजा गया है। दूसरी ओर सिरसा व कालका कहना है कि पुलिस को लेकर सरना और जीके गुरु घर में पहुंचकर कार्यालय पर कब्जा करने की कोशिश की।
गुरु घर में पुलिस लाकर वर्ष 1984 का काला इतिहास दोहराया गया है। इससे पहले भी सरना बंधुओं ने कमेटी के कार्यालय पर कब्जा करने की कोशिश कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने जब इन नेताओं को नकदी गिनने को कहा तो वहां से भाग खड़े हुए। जल्द ही डीएसजीएमसी सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह से मुलाकात कर सरना बंधुओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और उन्हें पंथ से निष्कासित करने की मांग की जाएगी।
| शिरोमणि अकाली दल दिल्ली के महासचिव हरविंदर सिंह सरना और जग आसरा गुरु ओट के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। गुरु घर में पुलिस लाकर वर्ष एक हज़ार नौ सौ चौरासी का काला इतिहास दोहराया गया है। नई दिल्ली [संतोष कुमार सिंह]। शिरोमणि अकाली दल दिल्ली के महासचिव हरविंदर सिंह सरना और जग आसरा गुरु ओट के अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। दोनों नेता डीएसजीएमसी के अन्य नवनिर्वाचित सदस्यों के साथ कमेटी के कार्यालय पहुंचे और वहां मौजूद कर्मचारियों व अधिकारियों से पैसे का हिसाब दिखाने को कहा। उन्होंने कमेटी के खजाने में लाखों तिरेसठ रुपया लाख रुपये की कमी होने का आरोप लगाया। वहीं, कमेटी के निवर्तमान अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा और महासचिव हरमीत सिंह कालका ने सरना और जीके पर डीएसजीएमसी कार्यालय पर कब्जा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। जीके व सरना ने कहा उन्हें जानकारी मिली थी कि कमेटी के रिकार्ड में नकदी की कमी है। इसकी सच्चाई मालूम करने के लिए उन्हें कमेटी के कार्यालय में आना पड़ा है। वहां मौजूद कर्मचारी भी नकदी कम होने की बात मान रहे हैं। लेकिन, इस बारे में उचित जवाब देने के बजाय प्रबंधन से पूछने की बात कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि लाखों रुपये की कमी से स्पष्ट है कि गुरु घर के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है। निवर्तमान उपाध्यक्ष कुलवंत सिंह बाठ ने कहा कि कमेटी के महाप्रबंधक ने गलत जानकारी दी कि तिरेसठ लाख रुपये बैंक में जमा कराने के लिए भेजा गया है। दूसरी ओर सिरसा व कालका कहना है कि पुलिस को लेकर सरना और जीके गुरु घर में पहुंचकर कार्यालय पर कब्जा करने की कोशिश की। गुरु घर में पुलिस लाकर वर्ष एक हज़ार नौ सौ चौरासी का काला इतिहास दोहराया गया है। इससे पहले भी सरना बंधुओं ने कमेटी के कार्यालय पर कब्जा करने की कोशिश कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने जब इन नेताओं को नकदी गिनने को कहा तो वहां से भाग खड़े हुए। जल्द ही डीएसजीएमसी सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह से मुलाकात कर सरना बंधुओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और उन्हें पंथ से निष्कासित करने की मांग की जाएगी। |
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2023 के 35वें मैच में गुजरात टाइटंस (GT) ने मुंबई इंडियंस (MI) के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवरों के बाद 207/6 का स्कोर बनाया है। GT से शुभमन गिल ने सर्वाधिक 56 रन बनाए हैं। उनके अलावा डेविड मिलर ने 46 रन का योगदान दिया है। MI की ओर ऐसे पीयूष चावला ने 2 विकेट झटके। GT की पारी पर नजर डालते हैं।
टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी GT की शुरुआत खराब रही और रिद्धिमान साहा पारी के तीसरे ओवर के दौरान ही 12 के स्कोर पर आउट हुए। वह सिर्फ 4 रन ही बना सके और उन्हें अर्जुन तेंदुलकर ने पवेलियन की राह दिखाई। इसके बाद शुभमन गिल और कप्तान हार्दिक पांड्या ने पॉवरप्ले में अच्छी बल्लेबाजी की। शुरुआती 6 ओवरों के बाद GT ने 1 विकेट के नुकसान पर 50 रन बना लिए।
पॉवरप्ले की समाप्ति के ठीक बाद हार्दिक 50 के टीम स्कोर पर ही 13 रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद गिल ने मोर्चा संभाले रखा और 30 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने 34 गेंदों में 56 रन की पारी खेली, जिसमें 7 चौके और 1 छक्का शामिल रहा। वह कुमार कार्तिकेय की गेंद पर आउट हुए। वह IPL 2023 में अब तक 7 मैचों में 284 रन बना चुके हैं।
GT ने 101 के स्कोर पर अपना चौथा विकेट गंवा दिया था। इसके बाद अभिनव मनोहर और डेविड मिलर ने अच्छी रन गति से बल्लेबाजी की और अर्धशतकीय साझेदारी करते हुए टीम को अच्छे स्कोर तक पहुंचा दिया। आक्रामक बल्लेबाजी कर रहे मनोहर अर्धशतक बनाने से चूक गए। उन्होंने 21 गेंदों में 42 रन की पारी खेली। मिलर ने 22 गेंदों में 4 छक्कों की मदद से 46 रन बनाए। राहुल तेवतिया ने 5 गेंदों में नाबाद 20 रन बनाए।
| इंडियन प्रीमियर लीग दो हज़ार तेईस के पैंतीसवें मैच में गुजरात टाइटंस ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित बीस ओवरों के बाद दो सौ सात/छः का स्कोर बनाया है। GT से शुभमन गिल ने सर्वाधिक छप्पन रन बनाए हैं। उनके अलावा डेविड मिलर ने छियालीस रन का योगदान दिया है। MI की ओर ऐसे पीयूष चावला ने दो विकेट झटके। GT की पारी पर नजर डालते हैं। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी GT की शुरुआत खराब रही और रिद्धिमान साहा पारी के तीसरे ओवर के दौरान ही बारह के स्कोर पर आउट हुए। वह सिर्फ चार रन ही बना सके और उन्हें अर्जुन तेंदुलकर ने पवेलियन की राह दिखाई। इसके बाद शुभमन गिल और कप्तान हार्दिक पांड्या ने पॉवरप्ले में अच्छी बल्लेबाजी की। शुरुआती छः ओवरों के बाद GT ने एक विकेट के नुकसान पर पचास रन बना लिए। पॉवरप्ले की समाप्ति के ठीक बाद हार्दिक पचास के टीम स्कोर पर ही तेरह रन बनाकर आउट हो गए। इसके बाद गिल ने मोर्चा संभाले रखा और तीस गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने चौंतीस गेंदों में छप्पन रन की पारी खेली, जिसमें सात चौके और एक छक्का शामिल रहा। वह कुमार कार्तिकेय की गेंद पर आउट हुए। वह IPL दो हज़ार तेईस में अब तक सात मैचों में दो सौ चौरासी रन बना चुके हैं। GT ने एक सौ एक के स्कोर पर अपना चौथा विकेट गंवा दिया था। इसके बाद अभिनव मनोहर और डेविड मिलर ने अच्छी रन गति से बल्लेबाजी की और अर्धशतकीय साझेदारी करते हुए टीम को अच्छे स्कोर तक पहुंचा दिया। आक्रामक बल्लेबाजी कर रहे मनोहर अर्धशतक बनाने से चूक गए। उन्होंने इक्कीस गेंदों में बयालीस रन की पारी खेली। मिलर ने बाईस गेंदों में चार छक्कों की मदद से छियालीस रन बनाए। राहुल तेवतिया ने पाँच गेंदों में नाबाद बीस रन बनाए। |
अमेरिकी सरकार ने पांच आतंकी संगठनों को काली सूची से हटाने की तैयारी कर रहा है। यह संगठन हैं बास्क अलगाववादी समूह जापानी औम शिनरिक्यो कहाने काच और दो इस्लामी समूह शामिल हैं। जानिए इन संगठनों के बारे में।
बर्लिन, एपी। अमेरिका पांच आतंकवादी समूहों को काली सूची से हटाने की तैयारी कर रहा है। इनमें कई ऐसे संगठन भी शमिल हैं जो एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व में कई आतंकी घटनाओं को अंजाम दे चुके है। हालांकि ये संगठन अब निष्क्रिय हैं। इन संगठनों में बास्क अलगाववादी समूह, जापानी आतंकी संगठन औम शिनरिक्यो, कट्टरपंथी यहूदी समूह कहाने काच और दो इस्लामी समूह शामिल हैं जो इजरायल, फलस्तीनी क्षेत्रों और मिस्त्र में सक्रिय रहे हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार को कांग्रेस को इस बारे में जानकारी दी। इन पांच समूहों में से एक को छोड़कर सभी को पहली बार 1997 में विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया गया था। औम शिनरिक्यो ने 1995 में टोक्यो मेट्रो पर सरीन गैस हमले को अंजाम दिया था, जिसमें 13 लोग मारे गए थे और सैकड़ों लोग बीमार हो गए थे। यह संगठन 2018 के बाद से काफी हद तक निष्क्रिय है। बास्क अलगाववादी समूह ने उत्तरी स्पेन और अन्य जगहों पर दशकों तक बमबारी और हत्याओं को अंजाम दिया, जिसमें 800 से अधिक लोग मारे गए और हजारों लोग घायल हुए।
कहाने काचः कट्टरपंथी यहूदी समूह कहाने काच की स्थापना 1971 में कट्टरपंथी इजरायली रब्बी मीर कहाने ने की थी। उन्होंने 1990 में अपनी हत्या तक समूह का नेतृत्व किया। समूह के सदस्यों ने अरबों, फलस्तीनियों और इजरायली सरकारी अधिकारियों की हत्या की, या उन पर हमला किया। यह संगठन 2005 से निष्क्रिय है। मुजाहिदीन शूरा परिषद ने 2012 में अपनी स्थापना के बाद से इजरायल पर कई राकेट और अन्य हमलों को अंजाम दिया। इसे 2014 में ब्लैकलिस्ट किया गया। गामा अल-इस्लामिया मिस्त्र का सुन्नी इस्लामी संगठन है। इसने पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ-साथ पर्यटकों पर भी सैकड़ों हमले किए।
ओम शिनरिक्योः जापानी 'सुप्रीम ट्रुथ' पंथ जिसने 1995 में टोक्यो मेट्रो पर घातक सरीन गैस हमले को अंजाम दिया था, जिसमें 13 लोग मारे गए थे और सैकड़ों लोग बीमार हो गए थे। 2018 में नेता शोको असहारा सहित अपने शीर्ष सोपानों के निष्पादन के बाद से समूह को काफी हद तक निष्क्रिय माना गया है। इसे 1997 में एक विदेशी आतंकवादी संगठन नामित किया गया था।
बास्क फादरलैंड एंड लिबर्टीः इस आतंकवादी संगठन ने उत्तरी स्पेन और अन्य जगहों पर दशकों तक बमबारी और हत्याओं का एक अलगाववादी अभियान चलाया, जिसमें 800 से अधिक लोग मारे गए और हजारों लोग घायल हुए, जब तक कि 2010 में संघर्ष विराम की घोषणा नहीं की गई और गिरफ्तारी के बाद भंग कर दिया गया। 2018 में अपने अंतिम नेताओं के परीक्षण। इसे 1997 में एक विदेशी आतंकवादी संगठन नामित किया गया था।
गामा अल-इस्लामियाः एक मिस्र का सुन्नी इस्लामी आंदोलन से जन्मी संगठन जिसने 1990 के दशक के दौरान मिस्र की सरकार को गिराने के लिए लड़ाई लड़ी। इसने पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ-साथ पर्यटकों पर भी सैकड़ों घातक हमले किए। समूह को पहली बार 1997 में नामित किया गया था।
| अमेरिकी सरकार ने पांच आतंकी संगठनों को काली सूची से हटाने की तैयारी कर रहा है। यह संगठन हैं बास्क अलगाववादी समूह जापानी औम शिनरिक्यो कहाने काच और दो इस्लामी समूह शामिल हैं। जानिए इन संगठनों के बारे में। बर्लिन, एपी। अमेरिका पांच आतंकवादी समूहों को काली सूची से हटाने की तैयारी कर रहा है। इनमें कई ऐसे संगठन भी शमिल हैं जो एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व में कई आतंकी घटनाओं को अंजाम दे चुके है। हालांकि ये संगठन अब निष्क्रिय हैं। इन संगठनों में बास्क अलगाववादी समूह, जापानी आतंकी संगठन औम शिनरिक्यो, कट्टरपंथी यहूदी समूह कहाने काच और दो इस्लामी समूह शामिल हैं जो इजरायल, फलस्तीनी क्षेत्रों और मिस्त्र में सक्रिय रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने शुक्रवार को कांग्रेस को इस बारे में जानकारी दी। इन पांच समूहों में से एक को छोड़कर सभी को पहली बार एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया गया था। औम शिनरिक्यो ने एक हज़ार नौ सौ पचानवे में टोक्यो मेट्रो पर सरीन गैस हमले को अंजाम दिया था, जिसमें तेरह लोग मारे गए थे और सैकड़ों लोग बीमार हो गए थे। यह संगठन दो हज़ार अट्ठारह के बाद से काफी हद तक निष्क्रिय है। बास्क अलगाववादी समूह ने उत्तरी स्पेन और अन्य जगहों पर दशकों तक बमबारी और हत्याओं को अंजाम दिया, जिसमें आठ सौ से अधिक लोग मारे गए और हजारों लोग घायल हुए। कहाने काचः कट्टरपंथी यहूदी समूह कहाने काच की स्थापना एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर में कट्टरपंथी इजरायली रब्बी मीर कहाने ने की थी। उन्होंने एक हज़ार नौ सौ नब्बे में अपनी हत्या तक समूह का नेतृत्व किया। समूह के सदस्यों ने अरबों, फलस्तीनियों और इजरायली सरकारी अधिकारियों की हत्या की, या उन पर हमला किया। यह संगठन दो हज़ार पाँच से निष्क्रिय है। मुजाहिदीन शूरा परिषद ने दो हज़ार बारह में अपनी स्थापना के बाद से इजरायल पर कई राकेट और अन्य हमलों को अंजाम दिया। इसे दो हज़ार चौदह में ब्लैकलिस्ट किया गया। गामा अल-इस्लामिया मिस्त्र का सुन्नी इस्लामी संगठन है। इसने पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ-साथ पर्यटकों पर भी सैकड़ों हमले किए। ओम शिनरिक्योः जापानी 'सुप्रीम ट्रुथ' पंथ जिसने एक हज़ार नौ सौ पचानवे में टोक्यो मेट्रो पर घातक सरीन गैस हमले को अंजाम दिया था, जिसमें तेरह लोग मारे गए थे और सैकड़ों लोग बीमार हो गए थे। दो हज़ार अट्ठारह में नेता शोको असहारा सहित अपने शीर्ष सोपानों के निष्पादन के बाद से समूह को काफी हद तक निष्क्रिय माना गया है। इसे एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में एक विदेशी आतंकवादी संगठन नामित किया गया था। बास्क फादरलैंड एंड लिबर्टीः इस आतंकवादी संगठन ने उत्तरी स्पेन और अन्य जगहों पर दशकों तक बमबारी और हत्याओं का एक अलगाववादी अभियान चलाया, जिसमें आठ सौ से अधिक लोग मारे गए और हजारों लोग घायल हुए, जब तक कि दो हज़ार दस में संघर्ष विराम की घोषणा नहीं की गई और गिरफ्तारी के बाद भंग कर दिया गया। दो हज़ार अट्ठारह में अपने अंतिम नेताओं के परीक्षण। इसे एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में एक विदेशी आतंकवादी संगठन नामित किया गया था। गामा अल-इस्लामियाः एक मिस्र का सुन्नी इस्लामी आंदोलन से जन्मी संगठन जिसने एक हज़ार नौ सौ नब्बे के दशक के दौरान मिस्र की सरकार को गिराने के लिए लड़ाई लड़ी। इसने पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ-साथ पर्यटकों पर भी सैकड़ों घातक हमले किए। समूह को पहली बार एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में नामित किया गया था। |
(क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर)
स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआईएल)
महोदया/ महोदय,
राष्ट्रिक स्वर्ण बॉण्ड 2017-18 - श्रृंखला I पर भारत सरकार द्वारा जारी 20 अप्रैल 2017 की अधिसूचना सं. एफ़ 4(8)-डबल्यू & एम/2017 और 20 अप्रैल 2017 को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी परिपत्र आंऋप्रवि.सीडीडी.सं.2760/14.04.050/2016-17 का संदर्भ लें। इस संदर्भ में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों को हमारे वेबसाइट (www.rbi.org.in) पर डाला गया है। योजना के संदर्भ में परिचालन दिशानिर्देश नीचे दिया गया है।
निवेशकों से आवेदन पत्र शाखाओं में 24 अप्रैल 2017 से 27 अप्रैल 2017 तक सामान्य बैंकिंग घंटे के दौरान स्वीकार किया जाएगा। प्राप्त करने वाले कार्यालय को आवेदन सभी मायनों में पूर्ण होना सुनिश्चित किया जाना है और अपूर्ण आवेदन को अस्वीकार कर दिया जाएगा। जहां आवश्यक है अतिरिक्त विवरण आवेदकों से प्राप्त किया जा सकता है। आवेदन प्राप्त किए जाने वाले कार्यालय द्वारा निवेशकों को आवेदन ऑनलाइन प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक व्यवस्था की जाए ताकि बेहतर ग्राहक सेवा दिए जा सकें।
एकाधिक संयुक्त धारक और नामिती (प्रथम धारक में से) हेतु अनुमति है। कार्यप्रणाली के अनुसार आवेदकों से आवश्यक जानकारी प्राप्त किया जा सकता है।
अपने ग्राहक को जानिए (केवाईसी) मानदंड का अनुपालन सोने की भौतिक रूप से खरीद के लिए प्रयुक्त के समान रूप में होना आवश्यक है। पहचान के दस्तावेज जैसे पासपोर्ट, स्थायी खाता संख्या (पैन) कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड आदि आवश्यक होगा। केवल नाबालिगों के मामले में बैंक खाता संख्या केवाईसी सत्यापन के लिए मान्य माना जा सकता है। जारीकर्ता बैंक/ एसएचसीआईएल कार्यालय/ डाक घर/ एजेंट द्वारा केवाईसी का अनुपालन किया जाएगा।
आवेदकों को ब्याज भुगतान प्राप्ति की तारीख से निपटारा तारीख तक अर्थात आउट ऑफ फंड अवधि में विद्यमान बचत बैंक दर पर किया जाएगा। यदि आवेदक को आवेदन प्राप्त करने वाले बैंक में खाता नहीं है तो आवेदक द्वारा दिए गए सूचना के अनुसार के खाते में ब्याज इलेक्ट्रोनिक रूप में अंतरित किया जाना है।
आवेदन को प्रस्तुत करने हेतु अंतिम तारीख तक अर्थात 28 अप्रैल 2017 तक रद्दीकरण के लिए अनुमति है। स्वर्ण बॉण्ड की खरीद हेतु प्रस्तुत अनुरोध को आंशिक रूप से रद्द किया जाना संभव नहीं है। यदि आवेदन को रद्द किया जाता है तो आवेदन शुल्क पर ब्याज़ नहीं दिया जाएगा।
बॉण्ड सरकारी प्रतिभूति होने के कारण ग्रहणाधिकार का अंकन के संदर्भ में विधिक प्रावधान सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 2006 तथा उसके अधीन बनाए गए नियम के अनुसार होगी।
प्राप्त करने वाला कार्यालय आवेदन स्वीकार करने के लिए एनबीएफ़सी, एनएससी एजेंट, एवं अन्यों को काम पर लगा सकते हैं। बैंक इस प्रकार के संस्थाओं के साथ टाईअप या व्यवस्था किया जाए। आवेदन प्राप्त करने वाले कार्यालयों द्वारा सौ आवेदन के लिए एक रुपए के दर पर कमीशन का भुगतान किया जाएगा और आवेदन प्राप्त करने वाले कार्यालय एजेंटों या सब-एजेंटों को उनके माध्यम से प्राप्त व्यापार के लिए कमीशन का कम से कम 50% उनके साथ साझा करेगा।
राष्ट्रिक स्वर्ण बॉण्ड सबस्क्रिप्शन हेतु अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और नामित डाकघरों में भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर सिस्टम के माध्यम से उपलब्ध है। ई कुबेर प्रणाली को इनफिनिट या इंटरनेट के माध्यम से प्रयोग में लाया जा सकता है। प्राप्त करने वाले कार्यालय से यह अपेक्षित है कि उनके द्वारा प्राप्त किए गए सबस्क्रिप्शन के संदर्भ में डाटा अपलोड किया जा रहा है। उन्हें डाटा दर्ज करते वक्त शुद्धता को सुनिश्चित करना होगा ताकि किसी प्रकार की त्रुटियां से बच सकें। आवेदन प्राप्त होने पर तुरंत उसकी पुष्टि किया जाना है। इसके अतिरिक्त पुष्टि के संदर्भ में एक स्क्रॉल उपलब्ध किया जाएगा ताकि प्राप्त करने वाले कार्यालय अपने डाटाबेस को अद्यतित कर सकें। आबंटन के दिन अर्थात 12 मई 2017 को सभी सबस्क्रिप्शन्स के लिए एकमात्र/ मुख्य धारक के नाम धारण प्रमाणपत्र सृजित किया जाएगा। प्राप्त करने वाले कार्यालय द्वारा उसे डाउनलोड करते हुए प्रिंटआउट लिया जा सकता है। ई मेल पता उपलब्ध कराने वाले निवेशकों को धारण प्रमाणपत्र ई मेल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। प्रतिभूति आबंटन तारीख से 2-3 दिनों के अंतर्गत डीमैट खाते में क्रेडिट किया जाएगा बशर्ते आवेदन में प्रस्तुत जानकारी डिपोसिटरी के रेकॉर्ड से मेल खाता हो।
धारण का प्रमाणपत्र A4 आकार के100 जीएसएम कागज पर रंगीन में मुद्रित करने की जरूरत है।
आवेदन प्राप्त करने वाले कार्यालय अर्थात अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक की शाखा/ नामित डाक घर/ एसएचसीआईएल/ स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई और बीएसई) ग्राहक को अपना मानेंगे और बॉण्ड के संदर्भ में आवश्यक सेवा यानि पते को अद्यतित करना, समयपूर्व नकदीकरण के लिए अनुरोध स्वीकार करना आदि सेवाएं देंगे। प्राप्त करने वाले कार्यालय द्वारा बॉण्ड की परिपक्वता और चुकाने के समय तक आवेदन अनुरक्षित किया जाएगा।
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अधिसूचित तारीख में बॉण्ड ट्रेडिंग के लिए पात्र होंगे। (ध्यान दिया जाए कि निक्षेपागार (डेपोसिटरी) में डीमैट रूप में अनुरक्षित बॉण्ड का ही शेयर बाजार में कारोबार किया जा सकता है)
किसी प्रकार के पूछताछ/ स्पष्टीकरण प्राप्त करने के लिएः
(षैनि सुनिल)
| स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड महोदया/ महोदय, राष्ट्रिक स्वर्ण बॉण्ड दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह - श्रृंखला I पर भारत सरकार द्वारा जारी बीस अप्रैल दो हज़ार सत्रह की अधिसूचना सं. एफ़ चार-डबल्यू & एम/दो हज़ार सत्रह और बीस अप्रैल दो हज़ार सत्रह को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी परिपत्र आंऋप्रवि.सीडीडी.सं.दो हज़ार सात सौ साठ/चौदह.चार.पचास/दो हज़ार सोलह-सत्रह का संदर्भ लें। इस संदर्भ में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों को हमारे वेबसाइट पर डाला गया है। योजना के संदर्भ में परिचालन दिशानिर्देश नीचे दिया गया है। निवेशकों से आवेदन पत्र शाखाओं में चौबीस अप्रैल दो हज़ार सत्रह से सत्ताईस अप्रैल दो हज़ार सत्रह तक सामान्य बैंकिंग घंटे के दौरान स्वीकार किया जाएगा। प्राप्त करने वाले कार्यालय को आवेदन सभी मायनों में पूर्ण होना सुनिश्चित किया जाना है और अपूर्ण आवेदन को अस्वीकार कर दिया जाएगा। जहां आवश्यक है अतिरिक्त विवरण आवेदकों से प्राप्त किया जा सकता है। आवेदन प्राप्त किए जाने वाले कार्यालय द्वारा निवेशकों को आवेदन ऑनलाइन प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक व्यवस्था की जाए ताकि बेहतर ग्राहक सेवा दिए जा सकें। एकाधिक संयुक्त धारक और नामिती हेतु अनुमति है। कार्यप्रणाली के अनुसार आवेदकों से आवश्यक जानकारी प्राप्त किया जा सकता है। अपने ग्राहक को जानिए मानदंड का अनुपालन सोने की भौतिक रूप से खरीद के लिए प्रयुक्त के समान रूप में होना आवश्यक है। पहचान के दस्तावेज जैसे पासपोर्ट, स्थायी खाता संख्या कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड आदि आवश्यक होगा। केवल नाबालिगों के मामले में बैंक खाता संख्या केवाईसी सत्यापन के लिए मान्य माना जा सकता है। जारीकर्ता बैंक/ एसएचसीआईएल कार्यालय/ डाक घर/ एजेंट द्वारा केवाईसी का अनुपालन किया जाएगा। आवेदकों को ब्याज भुगतान प्राप्ति की तारीख से निपटारा तारीख तक अर्थात आउट ऑफ फंड अवधि में विद्यमान बचत बैंक दर पर किया जाएगा। यदि आवेदक को आवेदन प्राप्त करने वाले बैंक में खाता नहीं है तो आवेदक द्वारा दिए गए सूचना के अनुसार के खाते में ब्याज इलेक्ट्रोनिक रूप में अंतरित किया जाना है। आवेदन को प्रस्तुत करने हेतु अंतिम तारीख तक अर्थात अट्ठाईस अप्रैल दो हज़ार सत्रह तक रद्दीकरण के लिए अनुमति है। स्वर्ण बॉण्ड की खरीद हेतु प्रस्तुत अनुरोध को आंशिक रूप से रद्द किया जाना संभव नहीं है। यदि आवेदन को रद्द किया जाता है तो आवेदन शुल्क पर ब्याज़ नहीं दिया जाएगा। बॉण्ड सरकारी प्रतिभूति होने के कारण ग्रहणाधिकार का अंकन के संदर्भ में विधिक प्रावधान सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, दो हज़ार छः तथा उसके अधीन बनाए गए नियम के अनुसार होगी। प्राप्त करने वाला कार्यालय आवेदन स्वीकार करने के लिए एनबीएफ़सी, एनएससी एजेंट, एवं अन्यों को काम पर लगा सकते हैं। बैंक इस प्रकार के संस्थाओं के साथ टाईअप या व्यवस्था किया जाए। आवेदन प्राप्त करने वाले कार्यालयों द्वारा सौ आवेदन के लिए एक रुपए के दर पर कमीशन का भुगतान किया जाएगा और आवेदन प्राप्त करने वाले कार्यालय एजेंटों या सब-एजेंटों को उनके माध्यम से प्राप्त व्यापार के लिए कमीशन का कम से कम पचास% उनके साथ साझा करेगा। राष्ट्रिक स्वर्ण बॉण्ड सबस्क्रिप्शन हेतु अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और नामित डाकघरों में भारतीय रिजर्व बैंक के ई-कुबेर सिस्टम के माध्यम से उपलब्ध है। ई कुबेर प्रणाली को इनफिनिट या इंटरनेट के माध्यम से प्रयोग में लाया जा सकता है। प्राप्त करने वाले कार्यालय से यह अपेक्षित है कि उनके द्वारा प्राप्त किए गए सबस्क्रिप्शन के संदर्भ में डाटा अपलोड किया जा रहा है। उन्हें डाटा दर्ज करते वक्त शुद्धता को सुनिश्चित करना होगा ताकि किसी प्रकार की त्रुटियां से बच सकें। आवेदन प्राप्त होने पर तुरंत उसकी पुष्टि किया जाना है। इसके अतिरिक्त पुष्टि के संदर्भ में एक स्क्रॉल उपलब्ध किया जाएगा ताकि प्राप्त करने वाले कार्यालय अपने डाटाबेस को अद्यतित कर सकें। आबंटन के दिन अर्थात बारह मई दो हज़ार सत्रह को सभी सबस्क्रिप्शन्स के लिए एकमात्र/ मुख्य धारक के नाम धारण प्रमाणपत्र सृजित किया जाएगा। प्राप्त करने वाले कार्यालय द्वारा उसे डाउनलोड करते हुए प्रिंटआउट लिया जा सकता है। ई मेल पता उपलब्ध कराने वाले निवेशकों को धारण प्रमाणपत्र ई मेल के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। प्रतिभूति आबंटन तारीख से दो-तीन दिनों के अंतर्गत डीमैट खाते में क्रेडिट किया जाएगा बशर्ते आवेदन में प्रस्तुत जानकारी डिपोसिटरी के रेकॉर्ड से मेल खाता हो। धारण का प्रमाणपत्र Aचार आकार केएक सौ जीएसएम कागज पर रंगीन में मुद्रित करने की जरूरत है। आवेदन प्राप्त करने वाले कार्यालय अर्थात अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक की शाखा/ नामित डाक घर/ एसएचसीआईएल/ स्टॉक एक्सचेंज ग्राहक को अपना मानेंगे और बॉण्ड के संदर्भ में आवश्यक सेवा यानि पते को अद्यतित करना, समयपूर्व नकदीकरण के लिए अनुरोध स्वीकार करना आदि सेवाएं देंगे। प्राप्त करने वाले कार्यालय द्वारा बॉण्ड की परिपक्वता और चुकाने के समय तक आवेदन अनुरक्षित किया जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अधिसूचित तारीख में बॉण्ड ट्रेडिंग के लिए पात्र होंगे। में डीमैट रूप में अनुरक्षित बॉण्ड का ही शेयर बाजार में कारोबार किया जा सकता है) किसी प्रकार के पूछताछ/ स्पष्टीकरण प्राप्त करने के लिएः |
गुजरात के सूरत जिले के थाना जहांगीरपुरा में दो सगी बहनों ने आसाराम और उनके बेटे नारायण साईं पर बलात्कार का आरोप लगाया है। आरोप है कि छोटी बहन के साथ नारायण साईं ने चार साल बलात्कार किया। नारायण साईं पर आईपीसी की धारा 376, 377, 342, 346 जी, 12 बीआईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। ।
जिस दिन नारायण साईं पर मुकदमा दर्ज हुआ उसके दूसरे दिन ही नारायण साईं आगरा के शाहगंज में आलोक नगर 20ए निवासी लक्ष्मणदास सेवनानी के घर अपनी फॉर्चूनर गाड़ी से आया था। उसके साथ ड्राईवर रमेश और एक सेवादार था। मॉर्निंग में ही चला गया था। 17 अक्टूबर की रात को भी नारायण साईं लेट नाइट सेवनानी के घर पहुंचा।
सेवनानी ने मीडिया को बाइट दी है कि नारायण साईं ने दाढ़ी-मूंछ और सिर के बाल मुड़वा लिए हैं। क्रीम कलर के कपड़े पहने है। पुलिस से बचने के लिए पूरी तरह से भेष बदल लिया है। थर्सडे रात को पंजाब के नंबर वाली ओडी से आया था. तीनों ने रात को उसके खाना भी खाया। कुछ घंटे आराम भी किया।
नारायण ने अपने ड्राइवर रमेश के द्वारा नया सिम दिलाने को कहा था। सेवनानी ने नारायण साईं के हाथ जोड़े कि आप मेरे गुरुके बेटे हैं। लेकिन मैं भी परिवार वाला हूं। मुझे माफ कर दो। फ्राइडे अर्ली मॉर्निंग सेवनानी के घर से नारायण साईं चला गया। साधक ने खुलासा किया कि नारायण साईं हर दूसरे दिन नई सिम बदल लेता है। उसके ड्राइवर और सेवादार पर कोई मोबाइल नहीं हैं। सूरत पुलिस ने सैटरडे नाइट मुज्जफर नगर में भी दबिश डाली है। नेपाल बॉडर पर भी सख्ती कर दी गई है।
फ्राइडे रात को सूरत पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सीओ लोहामंडी को साथ लेकर शाहगंज के आलोक नगर में 20ए में नारायण साईं को तलाशने के लिए दबिश डाली। दो मंजिला बने घर में दर्जनों की तादाद में पुलिसकर्मी थे। परिवार के लोग भारी फोर्स देखकर घबरा गए थे। घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में पुलिस की सारी हरकतें कै द हो गई हैं। अर्जनदास जसवानी ने यह तक बताया कि उसने तो आसाराम को टीवी पर ही देखा है।
पुलिस को लगा कि गलत घर में दबिश दे दी है। तो पीडि़त परिवार कोर्ट या मानवाधिकार में न चला जाए। इससे बचने के लिए पुलिस ने अर्जनदास जसवानी से लिखवाकर लिया कि तलाशी के दौरान उनसे किसी भी तरह की बदतमीजी नहीं हुई है। उसके बाद फैमली से माफी मांगकर पुलिस वहां से नौ-दो ग्यारह हो गई। एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि सूरत पुलिस को सूचना मिली थी। हेल्प के लिए एएसपी को लगाया था।
शाहगंज के आलोक नगर निवासी लक्ष्मणदास सेवनानी दस साल पहले स्पेन में रहता था। वहां पर आसाराम से प्रभावित होकर भक्त बन गया। तब से ही आसाराम के कई आश्रमों के फाइनेंस का काम देख रहा है। दो बेटे हैं, बड़ा बेटा गुजरात में तीन लोगों की पार्टनरशिप में पेपर मिल चला रहा है। शक है कि उसमें आसाराम भी शामिल है। छोटा बेटा हींग की मंडी में ट्रेडिंग कंपनी चला रहा है। आरोप यह भी है कि आसाराम की ब्लैक मनी को ब्याज में उठाता है। घर के अंदर आसाराम का शानदार मंदिर बनवाया है। जिसे देखने से ही लगता है कि लक्ष्मणदास और आसाराम का क्या रिश्ता है।
देश में चर्चित रेप केस के आरोपी साईं नारायण को घर में पनाह देना सेवनानी की खबर बढ़ सकती है। सीनियर एडवोकेट रवि अरोरा ने बताया कि क्रिमिनल को पनाह देने वाला भी कानून का अपराधी है। सबसे पहले उसे पुलिस को सूचना देनी चाहिए। चूंकि उसे पता था कि वह सूरत पुलिस का वांछित अपराधी है। साधक पर धारा 212 के तहत मुकदमा बनता है।
शलभ माथुर-एसएसपी आगरा.
सूरत पुलिस नारायण साईं की तलाश में आई थी। जिस घर में सूरत पुलिस को जानकारी थी वहां नारायण साईं नहीं मिला है। सूरत पुलिस वापस चली गई है।
नारायण साईं ने बदले हुए भेष में शहर में नया सिम लेने की जुगाड़ लगाई है। लेकिन नारायण साईं को नया सिम लेने में सफलता हासिल नहीं हुई। थक हारकर नारायण साईं ने थाना हरीपर्वत के सामने से ड्राइवर रमेश के द्वारा पंछी पेठा से पांच किलो पेठा खरीदकर ले गया है.
| गुजरात के सूरत जिले के थाना जहांगीरपुरा में दो सगी बहनों ने आसाराम और उनके बेटे नारायण साईं पर बलात्कार का आरोप लगाया है। आरोप है कि छोटी बहन के साथ नारायण साईं ने चार साल बलात्कार किया। नारायण साईं पर आईपीसी की धारा तीन सौ छिहत्तर, तीन सौ सतहत्तर, तीन सौ बयालीस, तीन सौ छियालीस जी, बारह बीआईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। । जिस दिन नारायण साईं पर मुकदमा दर्ज हुआ उसके दूसरे दिन ही नारायण साईं आगरा के शाहगंज में आलोक नगर बीसए निवासी लक्ष्मणदास सेवनानी के घर अपनी फॉर्चूनर गाड़ी से आया था। उसके साथ ड्राईवर रमेश और एक सेवादार था। मॉर्निंग में ही चला गया था। सत्रह अक्टूबर की रात को भी नारायण साईं लेट नाइट सेवनानी के घर पहुंचा। सेवनानी ने मीडिया को बाइट दी है कि नारायण साईं ने दाढ़ी-मूंछ और सिर के बाल मुड़वा लिए हैं। क्रीम कलर के कपड़े पहने है। पुलिस से बचने के लिए पूरी तरह से भेष बदल लिया है। थर्सडे रात को पंजाब के नंबर वाली ओडी से आया था. तीनों ने रात को उसके खाना भी खाया। कुछ घंटे आराम भी किया। नारायण ने अपने ड्राइवर रमेश के द्वारा नया सिम दिलाने को कहा था। सेवनानी ने नारायण साईं के हाथ जोड़े कि आप मेरे गुरुके बेटे हैं। लेकिन मैं भी परिवार वाला हूं। मुझे माफ कर दो। फ्राइडे अर्ली मॉर्निंग सेवनानी के घर से नारायण साईं चला गया। साधक ने खुलासा किया कि नारायण साईं हर दूसरे दिन नई सिम बदल लेता है। उसके ड्राइवर और सेवादार पर कोई मोबाइल नहीं हैं। सूरत पुलिस ने सैटरडे नाइट मुज्जफर नगर में भी दबिश डाली है। नेपाल बॉडर पर भी सख्ती कर दी गई है। फ्राइडे रात को सूरत पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सीओ लोहामंडी को साथ लेकर शाहगंज के आलोक नगर में बीसए में नारायण साईं को तलाशने के लिए दबिश डाली। दो मंजिला बने घर में दर्जनों की तादाद में पुलिसकर्मी थे। परिवार के लोग भारी फोर्स देखकर घबरा गए थे। घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में पुलिस की सारी हरकतें कै द हो गई हैं। अर्जनदास जसवानी ने यह तक बताया कि उसने तो आसाराम को टीवी पर ही देखा है। पुलिस को लगा कि गलत घर में दबिश दे दी है। तो पीडि़त परिवार कोर्ट या मानवाधिकार में न चला जाए। इससे बचने के लिए पुलिस ने अर्जनदास जसवानी से लिखवाकर लिया कि तलाशी के दौरान उनसे किसी भी तरह की बदतमीजी नहीं हुई है। उसके बाद फैमली से माफी मांगकर पुलिस वहां से नौ-दो ग्यारह हो गई। एसएसपी शलभ माथुर ने बताया कि सूरत पुलिस को सूचना मिली थी। हेल्प के लिए एएसपी को लगाया था। शाहगंज के आलोक नगर निवासी लक्ष्मणदास सेवनानी दस साल पहले स्पेन में रहता था। वहां पर आसाराम से प्रभावित होकर भक्त बन गया। तब से ही आसाराम के कई आश्रमों के फाइनेंस का काम देख रहा है। दो बेटे हैं, बड़ा बेटा गुजरात में तीन लोगों की पार्टनरशिप में पेपर मिल चला रहा है। शक है कि उसमें आसाराम भी शामिल है। छोटा बेटा हींग की मंडी में ट्रेडिंग कंपनी चला रहा है। आरोप यह भी है कि आसाराम की ब्लैक मनी को ब्याज में उठाता है। घर के अंदर आसाराम का शानदार मंदिर बनवाया है। जिसे देखने से ही लगता है कि लक्ष्मणदास और आसाराम का क्या रिश्ता है। देश में चर्चित रेप केस के आरोपी साईं नारायण को घर में पनाह देना सेवनानी की खबर बढ़ सकती है। सीनियर एडवोकेट रवि अरोरा ने बताया कि क्रिमिनल को पनाह देने वाला भी कानून का अपराधी है। सबसे पहले उसे पुलिस को सूचना देनी चाहिए। चूंकि उसे पता था कि वह सूरत पुलिस का वांछित अपराधी है। साधक पर धारा दो सौ बारह के तहत मुकदमा बनता है। शलभ माथुर-एसएसपी आगरा. सूरत पुलिस नारायण साईं की तलाश में आई थी। जिस घर में सूरत पुलिस को जानकारी थी वहां नारायण साईं नहीं मिला है। सूरत पुलिस वापस चली गई है। नारायण साईं ने बदले हुए भेष में शहर में नया सिम लेने की जुगाड़ लगाई है। लेकिन नारायण साईं को नया सिम लेने में सफलता हासिल नहीं हुई। थक हारकर नारायण साईं ने थाना हरीपर्वत के सामने से ड्राइवर रमेश के द्वारा पंछी पेठा से पांच किलो पेठा खरीदकर ले गया है. |
देश के इतिहास में इतनी संगठित और बड़े पैमाने पर छापेमारी शायद पहले कभी हुई होगी। गुरुवार यानी 22 सितंबर को तड़के 3. 30 बजे पूरे दिन एनआईए ने 15 राज्यों में पीएफआई के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस रेड में 106 लोगों की गिरफ्तारी हुई जिसमें पीएफआई का राष्ट्रीय अध्यक्ष और दिल्ली का अध्यक्ष भी शामिल था। कई राज्यों में पीएफआई के दफ्तरों को सील भी कर दिया गया। छापेमारी की इस कार्रवाई को इतना गोपनीय रखा गया कि छापे में शामिल लोगों को भी ऐन वक्त पर पता चला। उसके पीछे वजह यह थी कि दक्षिण के राज्यों में पीएफआई समर्थक बड़े पैमाने पर हंगामा कर सकते थे। केरल और कर्नाटक में पीएएफ समर्थकों ने बवाल किया कर्नाटक रोडवेज ट्रांसपोर्ट की बस को निशाना बनाया। हालांकि उसे नियंत्रित कर लिया गया।
बताया जा रहा है कि एनआईए की रेड का समय गुरुवार सुबह चार बजे रखा गया था। लेकिन छापे की कार्रवाई आधे घंटे पहले शुरू हो गई। पीएफआई के नेताओं को समझने या संदेशा देने का मौका नहीं मिला। इस पूरी कार्यवाही को बड़े स्तर के आईपीएस संचालित कर रहे थे जिनकी अगुवाई में करीब 300 एनआईए अफसर रेड को अंजाम दे रहे थे। पीएफआई पर छापेमारी से पहले महीनों की तैयारी की गई थी। अलग अलग तरीके से डेटा को इकट्ठा किया गया, खुफिया जानकारियों को साझा किया गया और उसके बाद रेड की योजना बनाई गई।
'कहने के लिए सामाजिक- धार्मिक संगठन'
एजेंसियों का कहना है कि पीएफआई अपने आपको भले ही सामाजिक धार्मिक संस्था बताए। लेकिन जिस तरह से जानकारियां और उस संगठन की हरकतें सामने आई है उससे साफ है कि वो देश में अशांति का माहौल बनाना चाहते थे। कर्नाटक के शिवमोग्गा में जिस तरह से विस्फोट की साजिशों को नाकाम कर दिया गया वो इस बात की गवाही देते हैं इस संगठन की कथनी और करनी में कितना अंतर है। सिमी के बैन होने के बाद उसके सदस्य पीएफआई का हिस्सा बने। केरल से लेकर देश के दूसरे हिस्सों में तेजी से फैले। इस संगठन को मुस्लिम ब्रदरहूड की बात करने वाले देश जैसे कतर कुवैत, तुर्की से आर्थिक मदद मिलती है।
| देश के इतिहास में इतनी संगठित और बड़े पैमाने पर छापेमारी शायद पहले कभी हुई होगी। गुरुवार यानी बाईस सितंबर को तड़के तीन. तीस बजे पूरे दिन एनआईए ने पंद्रह राज्यों में पीएफआई के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस रेड में एक सौ छः लोगों की गिरफ्तारी हुई जिसमें पीएफआई का राष्ट्रीय अध्यक्ष और दिल्ली का अध्यक्ष भी शामिल था। कई राज्यों में पीएफआई के दफ्तरों को सील भी कर दिया गया। छापेमारी की इस कार्रवाई को इतना गोपनीय रखा गया कि छापे में शामिल लोगों को भी ऐन वक्त पर पता चला। उसके पीछे वजह यह थी कि दक्षिण के राज्यों में पीएफआई समर्थक बड़े पैमाने पर हंगामा कर सकते थे। केरल और कर्नाटक में पीएएफ समर्थकों ने बवाल किया कर्नाटक रोडवेज ट्रांसपोर्ट की बस को निशाना बनाया। हालांकि उसे नियंत्रित कर लिया गया। बताया जा रहा है कि एनआईए की रेड का समय गुरुवार सुबह चार बजे रखा गया था। लेकिन छापे की कार्रवाई आधे घंटे पहले शुरू हो गई। पीएफआई के नेताओं को समझने या संदेशा देने का मौका नहीं मिला। इस पूरी कार्यवाही को बड़े स्तर के आईपीएस संचालित कर रहे थे जिनकी अगुवाई में करीब तीन सौ एनआईए अफसर रेड को अंजाम दे रहे थे। पीएफआई पर छापेमारी से पहले महीनों की तैयारी की गई थी। अलग अलग तरीके से डेटा को इकट्ठा किया गया, खुफिया जानकारियों को साझा किया गया और उसके बाद रेड की योजना बनाई गई। 'कहने के लिए सामाजिक- धार्मिक संगठन' एजेंसियों का कहना है कि पीएफआई अपने आपको भले ही सामाजिक धार्मिक संस्था बताए। लेकिन जिस तरह से जानकारियां और उस संगठन की हरकतें सामने आई है उससे साफ है कि वो देश में अशांति का माहौल बनाना चाहते थे। कर्नाटक के शिवमोग्गा में जिस तरह से विस्फोट की साजिशों को नाकाम कर दिया गया वो इस बात की गवाही देते हैं इस संगठन की कथनी और करनी में कितना अंतर है। सिमी के बैन होने के बाद उसके सदस्य पीएफआई का हिस्सा बने। केरल से लेकर देश के दूसरे हिस्सों में तेजी से फैले। इस संगठन को मुस्लिम ब्रदरहूड की बात करने वाले देश जैसे कतर कुवैत, तुर्की से आर्थिक मदद मिलती है। |
विषय में हम दोनों सलाह करें । तुम्हें अपने गुरुको उनका सारा धन चुकाये बिना चुप नहीं बैठना चाहिये ।। २२-२३ ॥
त्रयोदशाधिकशततमोऽध्यायः ।। ११३ ।।
एक सौ तेरहवाँ अध्याय ।। ११३ ।।
गरुड़ और गालवका राजा ययातिके यहां जाकर गुरुको देनेके लिये श्यामकर्ण घोड़ोंकी याचना करना
अथाह गालवं दीनं सुपर्णः पततां वरः । निर्मितं वह्निना भूमो वायुना शोधितं तथा । यस्माद्धिरण्मयं सर्वे हिरण्यं तेन चोच्यते ।। १ ।।
नारदजी कहते हैं - तदनन्तर पक्षियों में श्रेष्ठ गरुड़ने दीनदुखी गालब मुनिसे इस प्रकार कहा- 'पृथ्वी के भीतर जो उसका सारतत्त्व है, उसे तपाकर अग्निने जिसका निर्माण किया है और उस अग्निको उद्दीप्त करने जाली वायुने जिसका शोधन किया है, उस सुवर्णको हिरण्य कहते हैं । यह सम्पूर्ण जगत् हिरण्यप्रधान है; इसलिये भी उसे हिरण्य कहते हैं ॥ १ ॥
धत्ते धारयते चेदमेतस्मात् कारणाद् धनम् ।
तदेतत् त्रिषु लोकेषु धनं तिष्ठति शाश्वतम् ॥ २ ॥
'वह इस जगत्को स्वयं तो धारण करता ही है, दूसरोंसे भी धारण कराता है। इस कारण उस सुवर्णका नाम धन, है । यह धन तीनों लोकों में सदा स्थित रहता है ॥ २ ॥
नित्यं प्रोष्ठपदाभ्यां च शुक्रे धनपतौ तथा । मनुष्येभ्यः समादत्ते शुक्रश्चित्तार्जितं धनम् ॥ ३ ॥ अजैकपादहिर्बुध्न्यै रक्ष्यते धनदेन च । एवं न शक्यते लब्धुमलब्धव्यं द्विजर्षभ । ॠते च धनमश्वानां नावाप्तिविद्यते तव ॥४॥
'द्विजश्रेष्ठ ! पूर्व भाद्रपद और उत्तरभाद्रपद इन दो नक्षत्रों में से किसी एकके साथ शुक्रवारका योग हो तो अग्निदेव कुबेरके लिये अपने संकल्पसे धनका निर्माण करके उसे मनुष्यों को दे देते हैं। पूर्वभाद्रपदके देवता अजैक | विषय में हम दोनों सलाह करें । तुम्हें अपने गुरुको उनका सारा धन चुकाये बिना चुप नहीं बैठना चाहिये ।। बाईस-तेईस ॥ त्रयोदशाधिकशततमोऽध्यायः ।। एक सौ तेरह ।। एक सौ तेरहवाँ अध्याय ।। एक सौ तेरह ।। गरुड़ और गालवका राजा ययातिके यहां जाकर गुरुको देनेके लिये श्यामकर्ण घोड़ोंकी याचना करना अथाह गालवं दीनं सुपर्णः पततां वरः । निर्मितं वह्निना भूमो वायुना शोधितं तथा । यस्माद्धिरण्मयं सर्वे हिरण्यं तेन चोच्यते ।। एक ।। नारदजी कहते हैं - तदनन्तर पक्षियों में श्रेष्ठ गरुड़ने दीनदुखी गालब मुनिसे इस प्रकार कहा- 'पृथ्वी के भीतर जो उसका सारतत्त्व है, उसे तपाकर अग्निने जिसका निर्माण किया है और उस अग्निको उद्दीप्त करने जाली वायुने जिसका शोधन किया है, उस सुवर्णको हिरण्य कहते हैं । यह सम्पूर्ण जगत् हिरण्यप्रधान है; इसलिये भी उसे हिरण्य कहते हैं ॥ एक ॥ धत्ते धारयते चेदमेतस्मात् कारणाद् धनम् । तदेतत् त्रिषु लोकेषु धनं तिष्ठति शाश्वतम् ॥ दो ॥ 'वह इस जगत्को स्वयं तो धारण करता ही है, दूसरोंसे भी धारण कराता है। इस कारण उस सुवर्णका नाम धन, है । यह धन तीनों लोकों में सदा स्थित रहता है ॥ दो ॥ नित्यं प्रोष्ठपदाभ्यां च शुक्रे धनपतौ तथा । मनुष्येभ्यः समादत्ते शुक्रश्चित्तार्जितं धनम् ॥ तीन ॥ अजैकपादहिर्बुध्न्यै रक्ष्यते धनदेन च । एवं न शक्यते लब्धुमलब्धव्यं द्विजर्षभ । ॠते च धनमश्वानां नावाप्तिविद्यते तव ॥चार॥ 'द्विजश्रेष्ठ ! पूर्व भाद्रपद और उत्तरभाद्रपद इन दो नक्षत्रों में से किसी एकके साथ शुक्रवारका योग हो तो अग्निदेव कुबेरके लिये अपने संकल्पसे धनका निर्माण करके उसे मनुष्यों को दे देते हैं। पूर्वभाद्रपदके देवता अजैक |
बढा नही । इसमे तो हेतु आनेकी जरूरत नही किन्तु यदि घटे या बढे कुछ तो उसमे हेतु पूछा जायगा कि क्या कारण है जो बढ गया था घट गया ? नवीन बात होनेमे हेतु पूछा जायगा । जो जैसा था वैसा ही रहा । इसमे क्या खोजनेकी व्यग्रता की जाय ? अपने व्यवहारमे भी देखलो, कोई मामला घरमे, सस्थामे प्राजाय जिसमे कुछ घटाया बढाया जाय, कुछ लोगो के खिलाफ हो तो निश्चय होता है कि जैसा है वैसा ही रहने दो उसमे कुछ तर मत करो । वह अरह्तकेवली जिस देहाकारसे मुक्त हुआ है उस देहाकार के प्रमाण घट गया या बढ गया तो कारण बताओ । अत शुद्ध आत्मद्रव्य देहसे जब मुक्त हो जाता है तो जिस देहसे मुक्त हुआ उस प्रमाण वह सिद्धलोकमे भी विराजमान रहता है ।
देहप्रमारणसे श्रात्मप्रदेशोका न्यून आकार- यदि यह कहा जाय कि ऐसी भी कुछ प्रसिद्धि है कि पूर्व देहाकारसे कुछ कम प्रकार रहता है जो वैसा कम तो इस समय भी है, जो देहमे छिद्र है ऊपरको सूक्ष्म त्वचा है नख है बाल है वहां प्रात्मप्रदेश नही । फिर क्षेत्रकी दृष्टिमे विशेषता क्या रही ? अर्थात् जितने कम कामे रहेगे, रहते है, देहमे उतने कम कामे हम भी रहते है । अभी शरीरके ऊपरकी चमडी जो मक्खीके परकी तरह पतली है जिस पर कदाचित् जरा सी रगड़ लग जाय तो मैल ही निकले, किन्तु तकलीफ रच भी नही होती । यह त्वचा प्रात्मप्रदेशरहित है । यहाँ जितने बाल निकल रहे यह भी अग बन रहे, इनमे भी आत्मप्रदेश नही है, तभी देखो जब कोई कैची आदि बाल काटे तो जरा भी हमे ख्याल नही रहेगा, रच भी दुःखका अनुभव नही होगा । यही बात इन नखोकी है, यह भी हड्डीका मलमात्र है जो ऊपर निकले है । तब जो जो इस आत्मप्रदेशसे बाहरकी चीज है अर्थात् जिनमे प्रदेश नहीं है वहाँ तो आत्मप्रदेश अब भी हमारे आपके नहीं है ।
केवलज्ञानकी निरपेक्षता व स्वाभाविकता - इस तरहसे देहप्रमाण क्षेत्रस्थ भी इस आत्मामे वह ज्ञान प्रकट होता, उस केवलज्ञानमे कोई भी प्रतीक्षा नही होती । भावदृष्टि से वह इतना व्यापक है कि वह अतीन्द्रिय स्वाभाविक है । इससे कहते है कि इस भगवान केवलीके अतीन्द्रियज्ञान होनेसे ही पूर्वज्ञान सुख है । 'ही' शब्द इसलिए कहा कि शकाकार कहता था कि जिनके इन्द्रिय नही उनके और आनन्द कैसे होगा, उसके लिये निर्णय हो पर कहा कि इन्द्रिय नही है इसलिए ही पूर्णज्ञान और सुख है जिसको कि किसीको सहायता या प्रतीक्षा आदि नही करनी पडती । अब कहते हैं कि इस भगवान आत्मा के प्रतीन्द्रिय ज्ञानमे परिवर्तन होनेसे ही कुछ भी नहीं रहता, ज्ञान नहीं रहता, इस बातको अभिप्रेत अर्थात् कहते है । यहाँ अभिप्रेति शब्द कहा जिसका रहस्य है कि आचार्य अपने मनका भिदा हुआ अभिप्राय कहते है अथवा यही इष्ट है उसकी शक्ति से कहते है । | बढा नही । इसमे तो हेतु आनेकी जरूरत नही किन्तु यदि घटे या बढे कुछ तो उसमे हेतु पूछा जायगा कि क्या कारण है जो बढ गया था घट गया ? नवीन बात होनेमे हेतु पूछा जायगा । जो जैसा था वैसा ही रहा । इसमे क्या खोजनेकी व्यग्रता की जाय ? अपने व्यवहारमे भी देखलो, कोई मामला घरमे, सस्थामे प्राजाय जिसमे कुछ घटाया बढाया जाय, कुछ लोगो के खिलाफ हो तो निश्चय होता है कि जैसा है वैसा ही रहने दो उसमे कुछ तर मत करो । वह अरह्तकेवली जिस देहाकारसे मुक्त हुआ है उस देहाकार के प्रमाण घट गया या बढ गया तो कारण बताओ । अत शुद्ध आत्मद्रव्य देहसे जब मुक्त हो जाता है तो जिस देहसे मुक्त हुआ उस प्रमाण वह सिद्धलोकमे भी विराजमान रहता है । देहप्रमारणसे श्रात्मप्रदेशोका न्यून आकार- यदि यह कहा जाय कि ऐसी भी कुछ प्रसिद्धि है कि पूर्व देहाकारसे कुछ कम प्रकार रहता है जो वैसा कम तो इस समय भी है, जो देहमे छिद्र है ऊपरको सूक्ष्म त्वचा है नख है बाल है वहां प्रात्मप्रदेश नही । फिर क्षेत्रकी दृष्टिमे विशेषता क्या रही ? अर्थात् जितने कम कामे रहेगे, रहते है, देहमे उतने कम कामे हम भी रहते है । अभी शरीरके ऊपरकी चमडी जो मक्खीके परकी तरह पतली है जिस पर कदाचित् जरा सी रगड़ लग जाय तो मैल ही निकले, किन्तु तकलीफ रच भी नही होती । यह त्वचा प्रात्मप्रदेशरहित है । यहाँ जितने बाल निकल रहे यह भी अग बन रहे, इनमे भी आत्मप्रदेश नही है, तभी देखो जब कोई कैची आदि बाल काटे तो जरा भी हमे ख्याल नही रहेगा, रच भी दुःखका अनुभव नही होगा । यही बात इन नखोकी है, यह भी हड्डीका मलमात्र है जो ऊपर निकले है । तब जो जो इस आत्मप्रदेशसे बाहरकी चीज है अर्थात् जिनमे प्रदेश नहीं है वहाँ तो आत्मप्रदेश अब भी हमारे आपके नहीं है । केवलज्ञानकी निरपेक्षता व स्वाभाविकता - इस तरहसे देहप्रमाण क्षेत्रस्थ भी इस आत्मामे वह ज्ञान प्रकट होता, उस केवलज्ञानमे कोई भी प्रतीक्षा नही होती । भावदृष्टि से वह इतना व्यापक है कि वह अतीन्द्रिय स्वाभाविक है । इससे कहते है कि इस भगवान केवलीके अतीन्द्रियज्ञान होनेसे ही पूर्वज्ञान सुख है । 'ही' शब्द इसलिए कहा कि शकाकार कहता था कि जिनके इन्द्रिय नही उनके और आनन्द कैसे होगा, उसके लिये निर्णय हो पर कहा कि इन्द्रिय नही है इसलिए ही पूर्णज्ञान और सुख है जिसको कि किसीको सहायता या प्रतीक्षा आदि नही करनी पडती । अब कहते हैं कि इस भगवान आत्मा के प्रतीन्द्रिय ज्ञानमे परिवर्तन होनेसे ही कुछ भी नहीं रहता, ज्ञान नहीं रहता, इस बातको अभिप्रेत अर्थात् कहते है । यहाँ अभिप्रेति शब्द कहा जिसका रहस्य है कि आचार्य अपने मनका भिदा हुआ अभिप्राय कहते है अथवा यही इष्ट है उसकी शक्ति से कहते है । |
सुंदर और अच्छी तरह से तैयार हाथ हर महिला का सपना है। पूर्व में यह माना जाता है कि यह शरीर का सबसे कामुक हिस्सा है। और इसलिए प्राचीन काल में भी, निष्पक्ष सेक्स ने उन्हें साफ रखने की कोशिश की। लड़कियों ने विशेष तेल और स्नान का इस्तेमाल किया, नियमित रूप से मैनीक्योर बनाया और विभिन्न प्रकार के सामान के साथ अपने पेन सजाए। आज तक, कॉस्मेटोलॉजी की दुनिया तेजी से विकसित हो रही है। बहुत सारे नाखून देखभाल उत्पादों का उत्पादन किया जाता है। और एक आदर्श उदाहरण जेल-लाह है। उन्होंने न केवल महिलाओं के बीच लोकप्रियता हासिल की, बल्कि पुरुषों के बीच भी लोकप्रियता हासिल की।
बहुत से लोग मानते हैं कि कोटिंग जेल-वार्निश हैनई सैलून उपचार। लेकिन इस राय गलत है। लाह आधारित जेल दस साल पहले विकसित किया गया था, लेकिन मजबूत प्रतिस्पर्धा के कारण इसे जारी नहीं करने का फैसला। कई मैनीक्योर लंबे मॉडलिंग जैल को पेंट जोड़ने का अभ्यास किया गया है। जेल वार्निश के घटकों को खुद के लिए बात करते हैं, कि एक जेल है, और अपने आप में वार्निश, जो रासायनिक पदार्थों और यौगिकों के माध्यम से एक बन गया।
वास्तव में, जेल-वार्निश कोटिंग में तीन घटक शामिल हैंः
इस कोटिंग के आवेदन के लिए विशेष की आवश्यकता हैकौशल और प्रौद्योगिकियां। इसके अलावा, जेल-वार्निश को हटाने के लिए कुछ औजार और साधन मौजूद होना चाहिए। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि जेल-लाह केवल प्राकृतिक नाखून पर लागू होता है। इस तरह के एक नाखून कवर के सकारात्मक पक्ष भी रंगों का विशाल पैलेट है। यह आपको हर स्वाद के लिए मैनीक्योर चुनने की अनुमति देता है।
जेल-लाह के पास कई फायदे हैं जो नहीं कर सकते हैंसाधारण वार्निश का दावा करें। इसके अलावा, यह उन महिलाओं के लिए सही है जिनके पास नाजुक और स्तरित नाखून हैं। ऐसे उत्पाद की एक पतली परत नाखून प्लेट की रक्षा करती है, इससे इसे नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं मिलती है और लगभग तीन सप्ताह तक चलती है। यह उन लड़कियों के लिए जरूरी है जो मजबूत और सुंदर नाखून चाहते हैं।
कवरेज के सकारात्मक पहलुओं में शामिल हैंः
बेशक, इस तरह के कवरेज में कुछ नुकसान हैं, लेकिन उनमें से कई नहीं हैं। तो, उत्पाद के नकारात्मक पक्षों के लिए हैंः
कोटिंग प्रक्रिया में आमतौर पर लगभग एक घंटे लगते हैं। नाखून प्लेट कितनी तेज़ी से बढ़ती है, इस पर निर्भर करता है कि हर दो से तीन सप्ताह में सुधार किया जा सकता है।
नाखूनों को कवर करने के लिए, आपको चाहिएविशेष उपकरण उनके बिना, प्रक्रिया नहीं की जा सकती है। उत्पाद का उपयोग करना बहुत आसान है, आप घर पर अपने नाखूनों को कवर कर सकते हैं। लेकिन आपको यह जानने की जरूरत है कि इसकी आवश्यकता हैः
यदि सभी उपकरण तैयार हैं, तो आप कवरेज की प्रक्रिया में आगे बढ़ सकते हैं।
जेल-वार्निश के आवेदन की आवश्यकता होती हैप्रौद्योगिकी कार्यान्वयन। सब कुछ करने के बाद, नाखून की सतह से चिपचिपा परत हटा दें। मैनीक्योर के परास्नातक इसे विशेष उपकरणों की मदद से करने के लिए सलाह देते हैं। लेकिन ऐसी महिलाएं हैं जो घर पर जेल-लाह से चिपचिपा परत को हटाने के बारे में सोच रही हैं। और उत्तर विभिन्न हो सकते हैं, क्योंकि इस प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त साधन हैं।
लेकिन चिपचिपा हटाने के लिए एक तैयारी का चयन करने के लिएकुछ कारकों को ध्यान में रखना बहुत महत्वपूर्ण है। और सबसे पहले यह व्यक्तिगत सहिष्णुता और जीव की विशेषताएं है। यदि एक महिला की त्वचा बहुत अधिक संवेदनशीलता है, तो यह निश्चित रूप से परीक्षण के लायक है, क्योंकि दवाओं में पदार्थ शामिल हो सकते हैं जो एलर्जी प्रतिक्रियाएं पैदा करते हैं। परीक्षण के बाद नकारात्मक परिणाम मिलते हैं, आप सुरक्षित रूप से प्रक्रिया में आगे बढ़ सकते हैं।
नाखून अक्सर एक क्लीनर का उपयोग करते हैं - यह हैएक दवा जो जेल-लाह से चिपचिपा परत को हटा देती है। यह व्यावसायिक साधनों को संदर्भित करता है। इसमें पानी, इत्र और शराब शामिल है। मैनीक्योर मास्टर के शुरुआती प्रश्न अक्सर पूछते हैंः "क्लिंसर - यह क्या है?"। नाखूनों के लिए, यह एक अनिवार्य उपकरण है, जिसका मुख्य कार्य प्राकृतिक नाखून प्लेट और जेल-लाह से चिपचिपा परत से चिकना शीन को हटाना है।
यह याद रखना चाहिए कि जेल-लाह का उपयोग औरक्लिनर केवल एक कंपनी हो सकता है। चूंकि निर्माताओं ने विशेष रूप से इसे बनाया है ताकि वे रासायनिक संरचना के संदर्भ में एक-दूसरे के लिए उपयुक्त हों। यदि ऐसा होता है कि चिपचिपा परत को हटाने के बाद जेल-वार्निश बादल छाए रहेंगे, तो आपको फर्म पर ध्यान देना चाहिए। जब विभिन्न निर्माताओं के धन, यह अक्सर होता है। सभी इस तथ्य के कारण कि क्लिचर और जेल-वार्निश के बीच कोई संगतता नहीं है।
घर पर कब,नाखून, कई समस्या का सामना कर रहे हैंः जितना अधिक आप जेल वार्निश के साथ चिपचिपा परत हटा दें। ऐसे मामले में जहां कोई क्लीनर नहीं है, आप अन्य माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं। सबसे पहले, एक विकल्प एसीटोन के बिना वार्निश हटाने के साधन हो सकता है। केवल यह बहुत महत्वपूर्ण है कि इस घटक में मौजूद नहीं है। अन्यथा, जेल-वार्निश बादल हो जाता है। इसके अलावा, एसीटोन पूरी कोटिंग को पूरी तरह हटा देगा, भले ही यह पतला हो।
इसके अलावा एक परेशान सवाल भी निकालना हैजेल-वार्निश की चिपचिपा परत, यदि कोई तरल नहीं है, तो खुद को क्लीनर की तैयारी की मदद से हल किया जा सकता है। इसके लिए शराब और पानी की आवश्यकता होती है, अनुपात 70% से 30% होना चाहिए। शराब को औपचारिक रूप से लिया जा सकता है, यह जेल-लाह के गुणों को नहीं बदलता है, और यह भी अशक्तता को समाप्त करता है।
जब एक चिपचिपा परत को हटाने के सवाल के बारे मेंजेल-वार्निश, हल हो गया। आप नाखूनों की देखभाल करना शुरू कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए, याद रखें कि कोटिंग के साथ नाखून प्लेट उबलते पानी में नहीं होनी चाहिए। मैनीक्योर और स्नान बहाल करने के लिए आपको गर्म पानी लेने की जरूरत है। इस तरह के उपकरणः
| सुंदर और अच्छी तरह से तैयार हाथ हर महिला का सपना है। पूर्व में यह माना जाता है कि यह शरीर का सबसे कामुक हिस्सा है। और इसलिए प्राचीन काल में भी, निष्पक्ष सेक्स ने उन्हें साफ रखने की कोशिश की। लड़कियों ने विशेष तेल और स्नान का इस्तेमाल किया, नियमित रूप से मैनीक्योर बनाया और विभिन्न प्रकार के सामान के साथ अपने पेन सजाए। आज तक, कॉस्मेटोलॉजी की दुनिया तेजी से विकसित हो रही है। बहुत सारे नाखून देखभाल उत्पादों का उत्पादन किया जाता है। और एक आदर्श उदाहरण जेल-लाह है। उन्होंने न केवल महिलाओं के बीच लोकप्रियता हासिल की, बल्कि पुरुषों के बीच भी लोकप्रियता हासिल की। बहुत से लोग मानते हैं कि कोटिंग जेल-वार्निश हैनई सैलून उपचार। लेकिन इस राय गलत है। लाह आधारित जेल दस साल पहले विकसित किया गया था, लेकिन मजबूत प्रतिस्पर्धा के कारण इसे जारी नहीं करने का फैसला। कई मैनीक्योर लंबे मॉडलिंग जैल को पेंट जोड़ने का अभ्यास किया गया है। जेल वार्निश के घटकों को खुद के लिए बात करते हैं, कि एक जेल है, और अपने आप में वार्निश, जो रासायनिक पदार्थों और यौगिकों के माध्यम से एक बन गया। वास्तव में, जेल-वार्निश कोटिंग में तीन घटक शामिल हैंः इस कोटिंग के आवेदन के लिए विशेष की आवश्यकता हैकौशल और प्रौद्योगिकियां। इसके अलावा, जेल-वार्निश को हटाने के लिए कुछ औजार और साधन मौजूद होना चाहिए। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि जेल-लाह केवल प्राकृतिक नाखून पर लागू होता है। इस तरह के एक नाखून कवर के सकारात्मक पक्ष भी रंगों का विशाल पैलेट है। यह आपको हर स्वाद के लिए मैनीक्योर चुनने की अनुमति देता है। जेल-लाह के पास कई फायदे हैं जो नहीं कर सकते हैंसाधारण वार्निश का दावा करें। इसके अलावा, यह उन महिलाओं के लिए सही है जिनके पास नाजुक और स्तरित नाखून हैं। ऐसे उत्पाद की एक पतली परत नाखून प्लेट की रक्षा करती है, इससे इसे नुकसान पहुंचाने की अनुमति नहीं मिलती है और लगभग तीन सप्ताह तक चलती है। यह उन लड़कियों के लिए जरूरी है जो मजबूत और सुंदर नाखून चाहते हैं। कवरेज के सकारात्मक पहलुओं में शामिल हैंः बेशक, इस तरह के कवरेज में कुछ नुकसान हैं, लेकिन उनमें से कई नहीं हैं। तो, उत्पाद के नकारात्मक पक्षों के लिए हैंः कोटिंग प्रक्रिया में आमतौर पर लगभग एक घंटे लगते हैं। नाखून प्लेट कितनी तेज़ी से बढ़ती है, इस पर निर्भर करता है कि हर दो से तीन सप्ताह में सुधार किया जा सकता है। नाखूनों को कवर करने के लिए, आपको चाहिएविशेष उपकरण उनके बिना, प्रक्रिया नहीं की जा सकती है। उत्पाद का उपयोग करना बहुत आसान है, आप घर पर अपने नाखूनों को कवर कर सकते हैं। लेकिन आपको यह जानने की जरूरत है कि इसकी आवश्यकता हैः यदि सभी उपकरण तैयार हैं, तो आप कवरेज की प्रक्रिया में आगे बढ़ सकते हैं। जेल-वार्निश के आवेदन की आवश्यकता होती हैप्रौद्योगिकी कार्यान्वयन। सब कुछ करने के बाद, नाखून की सतह से चिपचिपा परत हटा दें। मैनीक्योर के परास्नातक इसे विशेष उपकरणों की मदद से करने के लिए सलाह देते हैं। लेकिन ऐसी महिलाएं हैं जो घर पर जेल-लाह से चिपचिपा परत को हटाने के बारे में सोच रही हैं। और उत्तर विभिन्न हो सकते हैं, क्योंकि इस प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त साधन हैं। लेकिन चिपचिपा हटाने के लिए एक तैयारी का चयन करने के लिएकुछ कारकों को ध्यान में रखना बहुत महत्वपूर्ण है। और सबसे पहले यह व्यक्तिगत सहिष्णुता और जीव की विशेषताएं है। यदि एक महिला की त्वचा बहुत अधिक संवेदनशीलता है, तो यह निश्चित रूप से परीक्षण के लायक है, क्योंकि दवाओं में पदार्थ शामिल हो सकते हैं जो एलर्जी प्रतिक्रियाएं पैदा करते हैं। परीक्षण के बाद नकारात्मक परिणाम मिलते हैं, आप सुरक्षित रूप से प्रक्रिया में आगे बढ़ सकते हैं। नाखून अक्सर एक क्लीनर का उपयोग करते हैं - यह हैएक दवा जो जेल-लाह से चिपचिपा परत को हटा देती है। यह व्यावसायिक साधनों को संदर्भित करता है। इसमें पानी, इत्र और शराब शामिल है। मैनीक्योर मास्टर के शुरुआती प्रश्न अक्सर पूछते हैंः "क्लिंसर - यह क्या है?"। नाखूनों के लिए, यह एक अनिवार्य उपकरण है, जिसका मुख्य कार्य प्राकृतिक नाखून प्लेट और जेल-लाह से चिपचिपा परत से चिकना शीन को हटाना है। यह याद रखना चाहिए कि जेल-लाह का उपयोग औरक्लिनर केवल एक कंपनी हो सकता है। चूंकि निर्माताओं ने विशेष रूप से इसे बनाया है ताकि वे रासायनिक संरचना के संदर्भ में एक-दूसरे के लिए उपयुक्त हों। यदि ऐसा होता है कि चिपचिपा परत को हटाने के बाद जेल-वार्निश बादल छाए रहेंगे, तो आपको फर्म पर ध्यान देना चाहिए। जब विभिन्न निर्माताओं के धन, यह अक्सर होता है। सभी इस तथ्य के कारण कि क्लिचर और जेल-वार्निश के बीच कोई संगतता नहीं है। घर पर कब,नाखून, कई समस्या का सामना कर रहे हैंः जितना अधिक आप जेल वार्निश के साथ चिपचिपा परत हटा दें। ऐसे मामले में जहां कोई क्लीनर नहीं है, आप अन्य माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं। सबसे पहले, एक विकल्प एसीटोन के बिना वार्निश हटाने के साधन हो सकता है। केवल यह बहुत महत्वपूर्ण है कि इस घटक में मौजूद नहीं है। अन्यथा, जेल-वार्निश बादल हो जाता है। इसके अलावा, एसीटोन पूरी कोटिंग को पूरी तरह हटा देगा, भले ही यह पतला हो। इसके अलावा एक परेशान सवाल भी निकालना हैजेल-वार्निश की चिपचिपा परत, यदि कोई तरल नहीं है, तो खुद को क्लीनर की तैयारी की मदद से हल किया जा सकता है। इसके लिए शराब और पानी की आवश्यकता होती है, अनुपात सत्तर% से तीस% होना चाहिए। शराब को औपचारिक रूप से लिया जा सकता है, यह जेल-लाह के गुणों को नहीं बदलता है, और यह भी अशक्तता को समाप्त करता है। जब एक चिपचिपा परत को हटाने के सवाल के बारे मेंजेल-वार्निश, हल हो गया। आप नाखूनों की देखभाल करना शुरू कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए, याद रखें कि कोटिंग के साथ नाखून प्लेट उबलते पानी में नहीं होनी चाहिए। मैनीक्योर और स्नान बहाल करने के लिए आपको गर्म पानी लेने की जरूरत है। इस तरह के उपकरणः |
Сайт "खेरसॉन ऑनलाइन" खेरसॉन पीपुल्स सेल्फ-डिफेंस का एक संदेश प्रकाशित किया, जिसमें खेरसन और क्षेत्र के निवासियों ने एक यूक्रेनी-विरोधी स्थिति को व्यक्त करने पर ध्यान दिया, उन्हें आंतरिक मामलों के निकायों, एसबीयू और अभियोजकों को स्वेच्छा से आने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
"जो लोग लंबे समय से हैंः
- यूक्रेन के देशभक्तों के खिलाफ धमकी,
- हमारे देश की क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन के लिए कहा जाता है,
- आबादी, आदि के बीच दहशत फैलाने के लिए अविश्वसनीय अफवाहें फैलाई गईं।
अपनी अवैध गतिविधियों पर नज़र रखना सेल्फ डिफेंस में काम के मुख्य क्षेत्रों में से एक रहा है। हम आपको सूचित करते हैं कि आपके व्यक्तित्व और संपर्क लंबे समय से स्थापित हैं, "संदेश कहता है।
आत्मरक्षा में कहा गया है कि "आज खेरसॉन क्षेत्र के क्षेत्र में रूसी संघ के सैन्य आक्रमण का खतरा बना हुआ है", इसलिए "9: 00 17 से शुरू, जो लोग चाहते हैं कि उनके निवास स्थान पर आंतरिक मामलों के निकायों, अभियोजन पक्ष और एसबीयू को रिपोर्ट करने के लिए XXUMX घंटे हों" और कारण स्पष्ट करें। "समान व्यवहार," ईमानदारी से अपने कर्मों के लिए पश्चाताप करते हैं और उन व्यक्तियों और कारणों पर रिपोर्ट करते हैं जिन्होंने आपको इसे धक्का दिया था। "
यह भी ध्यान दिया जाता है कि "जो लोग इस संदेश को अनदेखा करते हैं, खेरसॉन के सेल्फ डिफेंस सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकते हैं"।
| Сайт "खेरसॉन ऑनलाइन" खेरसॉन पीपुल्स सेल्फ-डिफेंस का एक संदेश प्रकाशित किया, जिसमें खेरसन और क्षेत्र के निवासियों ने एक यूक्रेनी-विरोधी स्थिति को व्यक्त करने पर ध्यान दिया, उन्हें आंतरिक मामलों के निकायों, एसबीयू और अभियोजकों को स्वेच्छा से आने के लिए आमंत्रित किया जाता है। "जो लोग लंबे समय से हैंः - यूक्रेन के देशभक्तों के खिलाफ धमकी, - हमारे देश की क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन के लिए कहा जाता है, - आबादी, आदि के बीच दहशत फैलाने के लिए अविश्वसनीय अफवाहें फैलाई गईं। अपनी अवैध गतिविधियों पर नज़र रखना सेल्फ डिफेंस में काम के मुख्य क्षेत्रों में से एक रहा है। हम आपको सूचित करते हैं कि आपके व्यक्तित्व और संपर्क लंबे समय से स्थापित हैं, "संदेश कहता है। आत्मरक्षा में कहा गया है कि "आज खेरसॉन क्षेत्र के क्षेत्र में रूसी संघ के सैन्य आक्रमण का खतरा बना हुआ है", इसलिए "नौ: शून्य सत्रह से शुरू, जो लोग चाहते हैं कि उनके निवास स्थान पर आंतरिक मामलों के निकायों, अभियोजन पक्ष और एसबीयू को रिपोर्ट करने के लिए XXUMX घंटे हों" और कारण स्पष्ट करें। "समान व्यवहार," ईमानदारी से अपने कर्मों के लिए पश्चाताप करते हैं और उन व्यक्तियों और कारणों पर रिपोर्ट करते हैं जिन्होंने आपको इसे धक्का दिया था। " यह भी ध्यान दिया जाता है कि "जो लोग इस संदेश को अनदेखा करते हैं, खेरसॉन के सेल्फ डिफेंस सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकते हैं"। |
'गरीबी में आटा गीला. . ' कहावत इन दिनों पाकिस्तान (Pakistan) पर एकदम चरितार्थ होती दिख रही है. पाकिस्तान आर्थिक संकट और बेतहाशा महंगाई (Inflation) से जूझ रहा है और ऐसे में उसने कश्मीर (Kashmir) के मुद्दे पर अपना विरोध जताते हुए भारत (India) के साथ कारोबारी रिश्ते (Trade Relations) भी स्थगित कर दिए हैं. नतीजा ये है कि पाकिस्तान में इस बार ईद उज अज़हा यानी बकरीद की रौनक और स्वाद दोनों फीके हो सकते हैं. फलों और सब्ज़ियों के कई उत्पादों के दाम तो पाकिस्तान में आसमान छू ही रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान की अवाम के लिए बड़ी मुश्किल ये है कि बकरीद में कुर्बानी कैसे दी जाए! क्योंकि महंगाई है तो बकरों के दाम (Livestock Prices) भी चढ़ गए हैं.
ये भी पढ़ें : सवा सौ पहले क्या गौरक्षा मुहिम की वजह से हुए थे बम्बई के भीषण दंगे?
पहले से ही महंगाई के बोझ से दबे पाकिस्तान ने आर्टिकल 370 (Article 370) के प्रावधान रद्द कर जम्मू कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश (Union Territory) बनाने के भारत के फैसले के विरोध में व्यापारिक संबंध फिलहाल टाल देने का कदम उठाकर एक तरह से अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है. वहां के लोगों के सामने बकरीद (Bakrid) पर काफी समस्या हो गई है क्योंकि पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक अदरक और लहुसन क्रमशः 400 रुपये व 320 रुपये किलो बिक रहा है. हरी मिर्च 100 रुपये किलो और कुछ दिन पहले 35 रुपये किलो बिकने वाला प्याज़ अब 50 रुपये किलो बिक रहा है. वहीं टमाटर की कीमतों में भी उछाल है.
अब जानें पाकिस्तान में बकरों के दामों की कहानी. पाकिस्तान में कैसे इस ईद पर कुर्बानी की रस्म अदा की जाएगी क्योंकि पिछले साल की तुलना में वहां बकरों के दाम दोगुने से ज़्यादा हो चुके हैं और वो भी तब, जबकि देश महंगाई की चपेट में है.
इस तरह से हो रहा है मोलभाव?
पाकिस्तान में पशुओं की कीमतों में पिछले साल की तुलना में 50 से 80 फीसदी तक इज़ाफ़ा हुआ है.
लाहौर की सबसे बड़ी पशु मंडी है शाहपुर कांजरान. डॉन की खबर के हवाले से देखें, कैसे यहां बकरों की खरीदारी के दौरान देश की आर्थिक नीति की चर्चा हो रही है. एक खरीदार कहता हुआ देखा गया 'डॉलर बहुत महंगा हो गया है और हमारा रुपया बहुत गिर गया है भाईजान, ये बकरा 30 हज़ार में दे दो, एकदम सही कीमत है'. उसे जवाब मिला 'हमारे हालात भी आप जैसे हैं सरकार, हम भी इस बकरे को 38 हज़ार में बेचेंगे तो बमुश्किल 2 हज़ार कमाएंगे. छह महीने इस बकरे पर इन्वेस्टमेंट किया है, क्या इतना भी न कमाएं? '
तो क्या है बकरों की कीमतें?
कुर्बानी के लिए पाकिस्तान में पशु मंडियों में लाए जा रहे पशुओं की कीमतों में पिछले साल की तुलना में 50 से 80 फीसदी तक इज़ाफ़ा हुआ है. उर्दूपॉइंट की चार दिन पहले की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इस साल मंडियों में एक बकरे की औसत कीमत 40 से 50 हज़ार रुपये तक है जबकि पिछले साल यही 10 से 20 हज़ार रुपये की थी. वहीं, सेहत, नस्ल और वज़न के हिसाब से कोई कोई बकरा तो लाखों रुपये तक में भी बिक रहा है.
आधे लोग नहीं दे पाएंगे कुर्बानी!
दूसरी ओर, इसी रिपोर्ट की मानें तो बकरीद के मौके पर लाहौर की कांजरान मंडी में करीब सवा लाख पशु बेचे जा रहे हैं. इनमें शमिल गौवंश के एक पशु की कीमत 90 हज़ार से सवा लाख रुपये तक है, जो पिछले साल 40 हज़ार रुपये की आसपास रही थी. उर्दूपॉइंट ने अपनी रिपोर्ट में एक खरीदार के हवाले से लिखा है कि पाकिस्तान में इस साल तकरीबन आधी आबादी ईद पर कुर्बानी नहीं दे सकेगी.
क्यों बढ़ीं इस कदर कीमतें?
एक कारोबारी के हवाले से इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि इस साल पशुओं की कीमतें बढ़ने की दो खास वजहें रहीं. पिछले दिनों मौसमी महामारी फैलने के कारण बड़ी संख्या में पशु मारे गए और दूसरी तरफ, महंगाई के कारण पशुओं के टीके, इलाज के साथ ही ट्रांसपोर्ट महंगा हो जाने के कारण पशुओं का पालन और देखरेख काफी महंगा पड़ा इसलिए विक्रेता ज़्यादा दामों पर बिक्री के लिए मजबूर हैं. वहीं, एक ग्राहक के हवाले से लिखा गया है कि विक्रेता मुंहमांगे दाम मांग रहे हैं क्योंकि इस बाज़ार में दाम निर्धारण की व्यवस्था नहीं है.
तो क्या निकाला गया रास्ता?
पाकिस्तान में सब्ज़ियों, फलों और मसालों के दामों में भी बढ़ोत्तरी हुई है.
पाकिस्तान की एक न्यूज़ एजेंसी ने पशु विक्रेताओं और ग्राहकों से बातचीत के हवाले से कहा है कि भेड़, बकरों और गौवंश की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी होने के कारण इस साल हो सकता है कि पाकिस्तान के लोग मिल जुलकर कुर्बानी देने का रास्ता निकालें. यानी एक परिवार अलग से कुर्बानी देने के बजाय एक बड़ा समूह मिलकर एक कुर्बानी देने का रास्ता खोज सकता है.
क्या सिर्फ पाकिस्तान में ही है ये हाल?
यूएई में भी इस साल कुर्बानी के पशुओं की कीमतों में भारी इज़ाफ़ा हुआ है. गल्फ़न्यूज़ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि पाकिस्तान पशु निर्यात नहीं कर रहा है, ईरान और आस्ट्रेलिया से भी इस साल पशु उपलब्ध नहीं हैं. दूसरी तरफ, ट्रांसपोर्ट का ज़रिया इस बार पानी का जहाज़ न होकर हवाई जहाज़ रहा इसलिए भी कीमतें बहुत बढ़ गई हैं. दुबई सहित यूएई में 2 से साढ़े तीन हज़ार दिरहम तक बकरे बिक रहे हैं. 2 हज़ार दिरहम करीब 39 हज़ार रुपये होता है. वहीं, हल्की क्वालिटी के बकरों की कीमतें इस साल 400 से 500 दिरहम तक हैं यानी करीब साढ़े सात हज़ार से 10 हज़ार रुपये तक.
यानी सोने से कीमती है बकरा?
कुछ ही रोज़ पहले न्यूज़18 ने एक खबर में आपको बताया था कि पाकिस्तान में बकरीद के मद्देनज़र बकरों का बाज़ार कितने मुनाफे का होगा. अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के चलते पाकिस्तान में सोने के दाम रिकॉर्ड 86,250 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंचे थे. डॉन ने एक खबर में बताया था कि लोग इस दौर में सोना बेचकर पशु खरीदने लगे थे, ताकि ईद के आसपास बेतहाशा दामों में कुर्बानी के लिए बकरे या अन्य पशु बेचकर भारी मुनाफा कमा सकें.
ये भी पढ़ें :
(पढ़ें : गोल्ड को छोड़ अचानक जानवर खरीदने लगे पाकिस्तानी)
5 साल में हर चौथे दिन एक नाबालिग ने की ख़ुदकुशी, इसलिए चौंकिए!
.
| 'गरीबी में आटा गीला. . ' कहावत इन दिनों पाकिस्तान पर एकदम चरितार्थ होती दिख रही है. पाकिस्तान आर्थिक संकट और बेतहाशा महंगाई से जूझ रहा है और ऐसे में उसने कश्मीर के मुद्दे पर अपना विरोध जताते हुए भारत के साथ कारोबारी रिश्ते भी स्थगित कर दिए हैं. नतीजा ये है कि पाकिस्तान में इस बार ईद उज अज़हा यानी बकरीद की रौनक और स्वाद दोनों फीके हो सकते हैं. फलों और सब्ज़ियों के कई उत्पादों के दाम तो पाकिस्तान में आसमान छू ही रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान की अवाम के लिए बड़ी मुश्किल ये है कि बकरीद में कुर्बानी कैसे दी जाए! क्योंकि महंगाई है तो बकरों के दाम भी चढ़ गए हैं. ये भी पढ़ें : सवा सौ पहले क्या गौरक्षा मुहिम की वजह से हुए थे बम्बई के भीषण दंगे? पहले से ही महंगाई के बोझ से दबे पाकिस्तान ने आर्टिकल तीन सौ सत्तर के प्रावधान रद्द कर जम्मू कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाने के भारत के फैसले के विरोध में व्यापारिक संबंध फिलहाल टाल देने का कदम उठाकर एक तरह से अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है. वहां के लोगों के सामने बकरीद पर काफी समस्या हो गई है क्योंकि पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक अदरक और लहुसन क्रमशः चार सौ रुपयापये व तीन सौ बीस रुपयापये किलो बिक रहा है. हरी मिर्च एक सौ रुपयापये किलो और कुछ दिन पहले पैंतीस रुपयापये किलो बिकने वाला प्याज़ अब पचास रुपयापये किलो बिक रहा है. वहीं टमाटर की कीमतों में भी उछाल है. अब जानें पाकिस्तान में बकरों के दामों की कहानी. पाकिस्तान में कैसे इस ईद पर कुर्बानी की रस्म अदा की जाएगी क्योंकि पिछले साल की तुलना में वहां बकरों के दाम दोगुने से ज़्यादा हो चुके हैं और वो भी तब, जबकि देश महंगाई की चपेट में है. इस तरह से हो रहा है मोलभाव? पाकिस्तान में पशुओं की कीमतों में पिछले साल की तुलना में पचास से अस्सी फीसदी तक इज़ाफ़ा हुआ है. लाहौर की सबसे बड़ी पशु मंडी है शाहपुर कांजरान. डॉन की खबर के हवाले से देखें, कैसे यहां बकरों की खरीदारी के दौरान देश की आर्थिक नीति की चर्चा हो रही है. एक खरीदार कहता हुआ देखा गया 'डॉलर बहुत महंगा हो गया है और हमारा रुपया बहुत गिर गया है भाईजान, ये बकरा तीस हज़ार में दे दो, एकदम सही कीमत है'. उसे जवाब मिला 'हमारे हालात भी आप जैसे हैं सरकार, हम भी इस बकरे को अड़तीस हज़ार में बेचेंगे तो बमुश्किल दो हज़ार कमाएंगे. छह महीने इस बकरे पर इन्वेस्टमेंट किया है, क्या इतना भी न कमाएं? ' तो क्या है बकरों की कीमतें? कुर्बानी के लिए पाकिस्तान में पशु मंडियों में लाए जा रहे पशुओं की कीमतों में पिछले साल की तुलना में पचास से अस्सी फीसदी तक इज़ाफ़ा हुआ है. उर्दूपॉइंट की चार दिन पहले की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इस साल मंडियों में एक बकरे की औसत कीमत चालीस से पचास हज़ार रुपये तक है जबकि पिछले साल यही दस से बीस हज़ार रुपये की थी. वहीं, सेहत, नस्ल और वज़न के हिसाब से कोई कोई बकरा तो लाखों रुपये तक में भी बिक रहा है. आधे लोग नहीं दे पाएंगे कुर्बानी! दूसरी ओर, इसी रिपोर्ट की मानें तो बकरीद के मौके पर लाहौर की कांजरान मंडी में करीब सवा लाख पशु बेचे जा रहे हैं. इनमें शमिल गौवंश के एक पशु की कीमत नब्बे हज़ार से सवा लाख रुपये तक है, जो पिछले साल चालीस हज़ार रुपये की आसपास रही थी. उर्दूपॉइंट ने अपनी रिपोर्ट में एक खरीदार के हवाले से लिखा है कि पाकिस्तान में इस साल तकरीबन आधी आबादी ईद पर कुर्बानी नहीं दे सकेगी. क्यों बढ़ीं इस कदर कीमतें? एक कारोबारी के हवाले से इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि इस साल पशुओं की कीमतें बढ़ने की दो खास वजहें रहीं. पिछले दिनों मौसमी महामारी फैलने के कारण बड़ी संख्या में पशु मारे गए और दूसरी तरफ, महंगाई के कारण पशुओं के टीके, इलाज के साथ ही ट्रांसपोर्ट महंगा हो जाने के कारण पशुओं का पालन और देखरेख काफी महंगा पड़ा इसलिए विक्रेता ज़्यादा दामों पर बिक्री के लिए मजबूर हैं. वहीं, एक ग्राहक के हवाले से लिखा गया है कि विक्रेता मुंहमांगे दाम मांग रहे हैं क्योंकि इस बाज़ार में दाम निर्धारण की व्यवस्था नहीं है. तो क्या निकाला गया रास्ता? पाकिस्तान में सब्ज़ियों, फलों और मसालों के दामों में भी बढ़ोत्तरी हुई है. पाकिस्तान की एक न्यूज़ एजेंसी ने पशु विक्रेताओं और ग्राहकों से बातचीत के हवाले से कहा है कि भेड़, बकरों और गौवंश की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी होने के कारण इस साल हो सकता है कि पाकिस्तान के लोग मिल जुलकर कुर्बानी देने का रास्ता निकालें. यानी एक परिवार अलग से कुर्बानी देने के बजाय एक बड़ा समूह मिलकर एक कुर्बानी देने का रास्ता खोज सकता है. क्या सिर्फ पाकिस्तान में ही है ये हाल? यूएई में भी इस साल कुर्बानी के पशुओं की कीमतों में भारी इज़ाफ़ा हुआ है. गल्फ़न्यूज़ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि पाकिस्तान पशु निर्यात नहीं कर रहा है, ईरान और आस्ट्रेलिया से भी इस साल पशु उपलब्ध नहीं हैं. दूसरी तरफ, ट्रांसपोर्ट का ज़रिया इस बार पानी का जहाज़ न होकर हवाई जहाज़ रहा इसलिए भी कीमतें बहुत बढ़ गई हैं. दुबई सहित यूएई में दो से साढ़े तीन हज़ार दिरहम तक बकरे बिक रहे हैं. दो हज़ार दिरहम करीब उनतालीस हज़ार रुपये होता है. वहीं, हल्की क्वालिटी के बकरों की कीमतें इस साल चार सौ से पाँच सौ दिरहम तक हैं यानी करीब साढ़े सात हज़ार से दस हज़ार रुपये तक. यानी सोने से कीमती है बकरा? कुछ ही रोज़ पहले न्यूज़अट्ठारह ने एक खबर में आपको बताया था कि पाकिस्तान में बकरीद के मद्देनज़र बकरों का बाज़ार कितने मुनाफे का होगा. अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के चलते पाकिस्तान में सोने के दाम रिकॉर्ड छियासी,दो सौ पचास पाकिस्तानी रुपये तक पहुंचे थे. डॉन ने एक खबर में बताया था कि लोग इस दौर में सोना बेचकर पशु खरीदने लगे थे, ताकि ईद के आसपास बेतहाशा दामों में कुर्बानी के लिए बकरे या अन्य पशु बेचकर भारी मुनाफा कमा सकें. ये भी पढ़ें : पाँच साल में हर चौथे दिन एक नाबालिग ने की ख़ुदकुशी, इसलिए चौंकिए! . |
वायरल वीडियो में एक व्यक्ति कहता दिख रहा है कि प्रभार साईल जो है वो केपी गोसावी का बॉडीगार्ड था और उसने उससे रुपए माँगे थे, जो उसने नहीं दिए।
महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में बताया है कि उन्हें परमबीर सिंह के बारे में अभी तक कोई भी जानकारी नहीं मिल पाई है।
महाराष्ट्र के उस्मानाबाद में 150 लोगों की भीड़ ने सड़क पर उत्पात मचाया। वजह मुगल आक्रान्ता औरंगजेब पर एक फेसबुक पोस्ट।
भाजपा ने इस महाराष्ट्र बंद का विरोध किया है। विखरोली में शिवसेना कार्यकर्ताओं ने टायर जला कर ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे को ही जाम कर दिया।
एनसीपी नेता नवाब मलिक ने एनसीबी की रेड को फर्जी करार देते हुए कहा है कि समीर वानखेड़े के बीजेपी से संबंध हैं।
आशंका जताई जा रही है कि मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह देश छोड़कर भाग गए हैं। मीडिया रिपोर्टों में उनके रूस में होने की बात कही जा रही है।
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से सटे डोंबिवली में एक नाबालिग से रेप के मामले में पुलिस अब तक 23 गिरफ्तारी कर चुकी है। इनमें दो नाबालिग बताए जा रहे हैं।
बकौल कोर्ट, संकेत मिलता है कि महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने अपने पीए कुंदन शिंदे के जरिए सचिन वाजे से 4. 7 करोड़ रुपए लिए थे।
महाराष्ट्र की नवी मुंबई में शादी का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद माजिरुल मसुरुद्दीन हक ने महिला के नाबालिग भाई का ही अपहरण कर लिया। महिला की पिटाई भी की।
महाराष्ट्र के पुणे में आरोपित 22 वर्षीय चाँद अकबर शेख ने पहले लड़की से इंस्टाग्राम के जरिए दोस्ती की और बाद में उसके साथ बलात्कार किया।
| वायरल वीडियो में एक व्यक्ति कहता दिख रहा है कि प्रभार साईल जो है वो केपी गोसावी का बॉडीगार्ड था और उसने उससे रुपए माँगे थे, जो उसने नहीं दिए। महाराष्ट्र सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट में बताया है कि उन्हें परमबीर सिंह के बारे में अभी तक कोई भी जानकारी नहीं मिल पाई है। महाराष्ट्र के उस्मानाबाद में एक सौ पचास लोगों की भीड़ ने सड़क पर उत्पात मचाया। वजह मुगल आक्रान्ता औरंगजेब पर एक फेसबुक पोस्ट। भाजपा ने इस महाराष्ट्र बंद का विरोध किया है। विखरोली में शिवसेना कार्यकर्ताओं ने टायर जला कर ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे को ही जाम कर दिया। एनसीपी नेता नवाब मलिक ने एनसीबी की रेड को फर्जी करार देते हुए कहा है कि समीर वानखेड़े के बीजेपी से संबंध हैं। आशंका जताई जा रही है कि मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह देश छोड़कर भाग गए हैं। मीडिया रिपोर्टों में उनके रूस में होने की बात कही जा रही है। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से सटे डोंबिवली में एक नाबालिग से रेप के मामले में पुलिस अब तक तेईस गिरफ्तारी कर चुकी है। इनमें दो नाबालिग बताए जा रहे हैं। बकौल कोर्ट, संकेत मिलता है कि महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने अपने पीए कुंदन शिंदे के जरिए सचिन वाजे से चार. सात करोड़ रुपए लिए थे। महाराष्ट्र की नवी मुंबई में शादी का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद माजिरुल मसुरुद्दीन हक ने महिला के नाबालिग भाई का ही अपहरण कर लिया। महिला की पिटाई भी की। महाराष्ट्र के पुणे में आरोपित बाईस वर्षीय चाँद अकबर शेख ने पहले लड़की से इंस्टाग्राम के जरिए दोस्ती की और बाद में उसके साथ बलात्कार किया। |
विद्या बालन की शेरनी का ट्रेलर आते ही उनका लुक और एक्टिंग एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। पिछले साल भी उनकी फिल्म शकुंतला ओटीटी पर धमाल मचा चुकी थी। विद्या ने हाल ही में अपनी पहली सैलरी और पहले काम का खुलासा किया है। विद्या को पहला काम एक पेड़ के पास खड़े होने का मिला था।
विद्या ने बताया कि उनका पहला काम किसी फिल्म या शो का नहीं था। वह राज्य पर्यटन विभाग का एक प्रमोशनल कैम्पेन था। और उन्हें इसके लिए 500 रुपए मिले थे। विद्या कहती हैं- हम चार लोग थे, मेरी बहन, मैं, एक कजिन और एक दोस्त। चारों को 500-500 रुपए मिले थे। उन्हें प्रिंट कैम्पेन के लिए एक पेड़ के साथ खड़े होना था और स्माइल करना था।
विद्या ने अपने कॅरियर की शुरुआत 1995 में एकता कपूर के कॉमेडी शो हम पांच से की थी। हालांकि वे इससे बहुत पहले ही काम करना शुरू कर चुकी थीं। विद्या ने बताया कि अपने पहले टीवी ऑडिशन के लिए मां और बहन के साथ गई थीं। यह शो था- ला बेला, लेकिन यह आज तक टेलीकास्ट नहीं हो सका। विद्या की फिल्म शेरनी इसी हफ्ते अमेजन प्राइम पर रिलीज हो रही है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
| विद्या बालन की शेरनी का ट्रेलर आते ही उनका लुक और एक्टिंग एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। पिछले साल भी उनकी फिल्म शकुंतला ओटीटी पर धमाल मचा चुकी थी। विद्या ने हाल ही में अपनी पहली सैलरी और पहले काम का खुलासा किया है। विद्या को पहला काम एक पेड़ के पास खड़े होने का मिला था। विद्या ने बताया कि उनका पहला काम किसी फिल्म या शो का नहीं था। वह राज्य पर्यटन विभाग का एक प्रमोशनल कैम्पेन था। और उन्हें इसके लिए पाँच सौ रुपयापए मिले थे। विद्या कहती हैं- हम चार लोग थे, मेरी बहन, मैं, एक कजिन और एक दोस्त। चारों को पाँच सौ-पाँच सौ रुपयापए मिले थे। उन्हें प्रिंट कैम्पेन के लिए एक पेड़ के साथ खड़े होना था और स्माइल करना था। विद्या ने अपने कॅरियर की शुरुआत एक हज़ार नौ सौ पचानवे में एकता कपूर के कॉमेडी शो हम पांच से की थी। हालांकि वे इससे बहुत पहले ही काम करना शुरू कर चुकी थीं। विद्या ने बताया कि अपने पहले टीवी ऑडिशन के लिए मां और बहन के साथ गई थीं। यह शो था- ला बेला, लेकिन यह आज तक टेलीकास्ट नहीं हो सका। विद्या की फिल्म शेरनी इसी हफ्ते अमेजन प्राइम पर रिलीज हो रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics. |
।सूर्यादेव (Suryadev)
भगवान शनि देव और हनुमान जी को कुंभ राशि का आराध्य देव माना जाता है। कुम्भ राशि के सूर्यादेव नाम के लड़कों की उत्तेजना और परिसंचरण को यूरेनस ग्रह द्वारा नियंत्रित किया जाता है। जब वातावरण गुलाबी ठण्डक से भर उठता है उस मौसम में इन सूर्यादेव नाम के लड़कों का आगमन होता है। कुंभ राशि के सूर्यादेव नाम के लड़कों को गुस्सा अधिक आता है। सूर्यादेव नाम के लड़के गठिया, अस्थमा, हृदय सम्बन्धी रोग और एलर्जी से ग्रस्त हो सकते हैं। इस सूर्यादेव नाम के लड़कों में बुद्धि, ऊर्जा और प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती और ये डोरसों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। इन्हें दोस्ती करना पसंद होता है।
सूर्यादेव नाम बहुत सुंदर और आकर्षक माना जाता है। इतना ही नहीं इसका मतलब भी बहुत अच्छा होता है। आपको बता दें कि सूर्यादेव नाम का अर्थ सूर्य देव होता है। सूर्य देव मतलब होने के कारण सूर्यादेव नाम बहुत सुंदर बन जाता है। शास्त्रों में सूर्यादेव नाम को काफी अच्छा माना गया है और इसका मतलब यानी सूर्य देव भी लोगों को बहुत पसंद आता है। जैसा कि हमने बताया कि सूर्यादेव का अर्थ सूर्य देव होता है और इस अर्थ का प्रभाव आप सूर्यादेव नाम के व्यक्ति के व्यव्हार में भी देख सकते हैं। माना जाता है कि सूर्यादेव नाम वाले व्यक्ति के स्वभाव में सूर्य देव होने की झलक देख सकते हैं। आगे सूर्यादेव नाम की राशि व लकी नंबर अथवा सूर्यादेव नाम के सूर्य देव अर्थ के बारे में विस्तार से बताया गया है।
सूर्यादेव नाम का स्वामी ग्रह शनि और शुभ अंक 8 है। जिन लोगों का नाम सूर्यादेव और शुभ अंक 8 होता है, उन्हें धन की कोई कमी नहीं होती। सूर्यादेव नाम वाले लोग अपनी शर्तों पर जीते हैं। ये अपने नियम खुद बनाते हैं। सूर्यादेव नाम के व्यक्ति को संगीत से काफी लगाव होता है। सूर्यादेव नाम के लोग भाग्य या मदद के भरोसे नहीं बल्कि अपनी मेहनत व प्रयासों के दम पर सफलता हासिल करते हैं। सूर्यादेव नाम के लोग स्वभाव से दयालु होते हैं। इन्हें सफलता देर से मिलती है।
सूर्यादेव नाम के लोगों की कुंभ राशि होती है। सूर्यादेव के लोग प्रतिभावान, खुद पर नियंत्रण रखने वाले और नरम दिल के इंसान होते हैं। सूर्यादेव नाम वाले लोग बहुत बुद्धिमान होते हैं और ये अपनी बुद्धिमता पर गर्व महसूस करते हैं। अक्सर इन लोगों को समझ पाना मुश्किल होता है। कुंभ राशि के लोग समाज में अच्छा व्यवहार करते है, लेकिन मित्र बहुत ध्यानपूर्वक चुनते हैं। सूर्यादेव नाम के लोग दूसरों के प्रति काफी सहानुभूति रखते हैं और लोगों की मदद करना इन्हें अच्छा लगता है।
| ।सूर्यादेव भगवान शनि देव और हनुमान जी को कुंभ राशि का आराध्य देव माना जाता है। कुम्भ राशि के सूर्यादेव नाम के लड़कों की उत्तेजना और परिसंचरण को यूरेनस ग्रह द्वारा नियंत्रित किया जाता है। जब वातावरण गुलाबी ठण्डक से भर उठता है उस मौसम में इन सूर्यादेव नाम के लड़कों का आगमन होता है। कुंभ राशि के सूर्यादेव नाम के लड़कों को गुस्सा अधिक आता है। सूर्यादेव नाम के लड़के गठिया, अस्थमा, हृदय सम्बन्धी रोग और एलर्जी से ग्रस्त हो सकते हैं। इस सूर्यादेव नाम के लड़कों में बुद्धि, ऊर्जा और प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती और ये डोरसों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। इन्हें दोस्ती करना पसंद होता है। सूर्यादेव नाम बहुत सुंदर और आकर्षक माना जाता है। इतना ही नहीं इसका मतलब भी बहुत अच्छा होता है। आपको बता दें कि सूर्यादेव नाम का अर्थ सूर्य देव होता है। सूर्य देव मतलब होने के कारण सूर्यादेव नाम बहुत सुंदर बन जाता है। शास्त्रों में सूर्यादेव नाम को काफी अच्छा माना गया है और इसका मतलब यानी सूर्य देव भी लोगों को बहुत पसंद आता है। जैसा कि हमने बताया कि सूर्यादेव का अर्थ सूर्य देव होता है और इस अर्थ का प्रभाव आप सूर्यादेव नाम के व्यक्ति के व्यव्हार में भी देख सकते हैं। माना जाता है कि सूर्यादेव नाम वाले व्यक्ति के स्वभाव में सूर्य देव होने की झलक देख सकते हैं। आगे सूर्यादेव नाम की राशि व लकी नंबर अथवा सूर्यादेव नाम के सूर्य देव अर्थ के बारे में विस्तार से बताया गया है। सूर्यादेव नाम का स्वामी ग्रह शनि और शुभ अंक आठ है। जिन लोगों का नाम सूर्यादेव और शुभ अंक आठ होता है, उन्हें धन की कोई कमी नहीं होती। सूर्यादेव नाम वाले लोग अपनी शर्तों पर जीते हैं। ये अपने नियम खुद बनाते हैं। सूर्यादेव नाम के व्यक्ति को संगीत से काफी लगाव होता है। सूर्यादेव नाम के लोग भाग्य या मदद के भरोसे नहीं बल्कि अपनी मेहनत व प्रयासों के दम पर सफलता हासिल करते हैं। सूर्यादेव नाम के लोग स्वभाव से दयालु होते हैं। इन्हें सफलता देर से मिलती है। सूर्यादेव नाम के लोगों की कुंभ राशि होती है। सूर्यादेव के लोग प्रतिभावान, खुद पर नियंत्रण रखने वाले और नरम दिल के इंसान होते हैं। सूर्यादेव नाम वाले लोग बहुत बुद्धिमान होते हैं और ये अपनी बुद्धिमता पर गर्व महसूस करते हैं। अक्सर इन लोगों को समझ पाना मुश्किल होता है। कुंभ राशि के लोग समाज में अच्छा व्यवहार करते है, लेकिन मित्र बहुत ध्यानपूर्वक चुनते हैं। सूर्यादेव नाम के लोग दूसरों के प्रति काफी सहानुभूति रखते हैं और लोगों की मदद करना इन्हें अच्छा लगता है। |
GORAKHPUR : गोरखपुर के रास्ते पूरे देश में फैले नकली नोटों के जाल का अब पर्दाफाश होने वाला है। आई नेक्स्ट के कैंपेन 'नकली नोट पर चोट' का असर है कि एसएसपी ने सभी थानों को निर्देश जारी कर दिए हैं। अब अगर नोट लेते हुए कोई भी शख्स पकड़ा गया तो उस पर तत्काल कार्रवाई होगी। इसके अलावा फेक करेंसी पर लगाम लगाने के लिए बैंक ने भी कमर कस ली है। इसकी पहल करते हुए यूनयिन बैंक ऑफ इंडिया ने अवेयरनेस कैंप लगाने का निर्णय लिया है।
आई नेक्स्ट में लगातार फेक करेंसी पर न्यूज पब्लिश होने के बाद पुलिस महकमा भी हरकत में आ गया है। नकली नोटों के पूरे जाल को पर्दाफाश करने की प्लानिंग तैयार की जा रही है। इसकी पहल करते हुए गोरखपुर के एसएसपी ने सभी थानों को निर्देश जारी किए है कि अगर कोई भी व्यक्ति नकली नोट में पकड़ा जाता है तो उससे सघन पूछताछ की जाए। इसके अलावा अगर कोई संदिग्ध भी पाया जाता है तो सख्ती से पूछताछ कर पूरे मामले को स्कैन किया जाना चाहिए।
नकली नोट का नेक्सस नेपाल से होते हुए पूरे देश में फैला हुआ है। इंटेलीजेंस एजेंसियों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि नकली नोट नेपाल के रास्ते ही इंडिया में आते हैं। इस बात को गौरतलब रखते हुए एसएसपी ने थानों को जारी किए हैं कि नेपाल बॉर्डर की ओर से आने वाली बसों और निजी वाहनों की सघन चेकिंग की जाए। उन्होंने बार्डर एरिया से आने वाली ट्रेनों पर भी नजर रखने के निर्देश दिए है।
फेक करेंसी के मामले आए दिन उजागर होते हैं। पुलिस इसे बहुत ही लाइट मोड में लेती है। फेक करेंसी देने वाले को यह नोट कहां से मिला, इस पूरी चेन को स्कैन करने के बजाय, केवल उसे डांट-डपट कर भगा दिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। आई नेक्स्ट की खबर के बाद पुलिस महकमे ने इस चेन को पूरी तरह से स्कैन करने की ठानी है। वह कड़ी दर कड़ी नोट किस तरह बाजार में आता है, उस पर नजर रखकर पूरे स्कैम को उजागर करने की तैयारी में है।
गोरखपुर एसएसपी प्रदीप कुमार ने जहां थानों को सख्ती करने के आदेश किए हैं, वहीं जनता से भी अपील की है कि ऐसे मामलों को लाइट मोड में न लें। अगर कोई नकली नोट मिलता है तो उसकी कंप्लेंट तत्काल पुलिस को करें, जिससे हर दिन फैल रहे इस जाल को बेनकाब किया जा सके।
देश की इकॉनमी को भारी नुकसान पहुंचाने वाली फेक करेंसी को रोकने के लिए डिस्ट्रिक्ट के सभी थानों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। पब्लिक से अपील है कि फेक करेंसी के मामले में किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को देखते ही पुलिस को सूचना दें।
आई नेक्स्ट की ओर से फेक करेंसी के खिलाफ चलाया गया अभियान सराहनीय है। यूनियन बैंक फेक करेंसी प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए बाजारों में अवेयरनेस कैंप लगाएगा। इसमें लोगों को फेक करेंसी और ओरिजनल करेंसी के बीच फर्क बताया जाएगा।
| GORAKHPUR : गोरखपुर के रास्ते पूरे देश में फैले नकली नोटों के जाल का अब पर्दाफाश होने वाला है। आई नेक्स्ट के कैंपेन 'नकली नोट पर चोट' का असर है कि एसएसपी ने सभी थानों को निर्देश जारी कर दिए हैं। अब अगर नोट लेते हुए कोई भी शख्स पकड़ा गया तो उस पर तत्काल कार्रवाई होगी। इसके अलावा फेक करेंसी पर लगाम लगाने के लिए बैंक ने भी कमर कस ली है। इसकी पहल करते हुए यूनयिन बैंक ऑफ इंडिया ने अवेयरनेस कैंप लगाने का निर्णय लिया है। आई नेक्स्ट में लगातार फेक करेंसी पर न्यूज पब्लिश होने के बाद पुलिस महकमा भी हरकत में आ गया है। नकली नोटों के पूरे जाल को पर्दाफाश करने की प्लानिंग तैयार की जा रही है। इसकी पहल करते हुए गोरखपुर के एसएसपी ने सभी थानों को निर्देश जारी किए है कि अगर कोई भी व्यक्ति नकली नोट में पकड़ा जाता है तो उससे सघन पूछताछ की जाए। इसके अलावा अगर कोई संदिग्ध भी पाया जाता है तो सख्ती से पूछताछ कर पूरे मामले को स्कैन किया जाना चाहिए। नकली नोट का नेक्सस नेपाल से होते हुए पूरे देश में फैला हुआ है। इंटेलीजेंस एजेंसियों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि नकली नोट नेपाल के रास्ते ही इंडिया में आते हैं। इस बात को गौरतलब रखते हुए एसएसपी ने थानों को जारी किए हैं कि नेपाल बॉर्डर की ओर से आने वाली बसों और निजी वाहनों की सघन चेकिंग की जाए। उन्होंने बार्डर एरिया से आने वाली ट्रेनों पर भी नजर रखने के निर्देश दिए है। फेक करेंसी के मामले आए दिन उजागर होते हैं। पुलिस इसे बहुत ही लाइट मोड में लेती है। फेक करेंसी देने वाले को यह नोट कहां से मिला, इस पूरी चेन को स्कैन करने के बजाय, केवल उसे डांट-डपट कर भगा दिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। आई नेक्स्ट की खबर के बाद पुलिस महकमे ने इस चेन को पूरी तरह से स्कैन करने की ठानी है। वह कड़ी दर कड़ी नोट किस तरह बाजार में आता है, उस पर नजर रखकर पूरे स्कैम को उजागर करने की तैयारी में है। गोरखपुर एसएसपी प्रदीप कुमार ने जहां थानों को सख्ती करने के आदेश किए हैं, वहीं जनता से भी अपील की है कि ऐसे मामलों को लाइट मोड में न लें। अगर कोई नकली नोट मिलता है तो उसकी कंप्लेंट तत्काल पुलिस को करें, जिससे हर दिन फैल रहे इस जाल को बेनकाब किया जा सके। देश की इकॉनमी को भारी नुकसान पहुंचाने वाली फेक करेंसी को रोकने के लिए डिस्ट्रिक्ट के सभी थानों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। पब्लिक से अपील है कि फेक करेंसी के मामले में किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को देखते ही पुलिस को सूचना दें। आई नेक्स्ट की ओर से फेक करेंसी के खिलाफ चलाया गया अभियान सराहनीय है। यूनियन बैंक फेक करेंसी प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए बाजारों में अवेयरनेस कैंप लगाएगा। इसमें लोगों को फेक करेंसी और ओरिजनल करेंसी के बीच फर्क बताया जाएगा। |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
द कपिल शर्मा शो में इस बार 'जस्सी' दिखाई देने वाली हैं। जी हां, जस्सी जैसी कोई नहीं शो फेम अभिनेत्री मोना सिंह इस बार कपिल शर्मा के शो में अपने को-स्टार्स संग आने वाली हैं। शो का प्रोमो सामने आया है जिसमें किकू शारदा अपने शो के वक़्त के दौर की बातों को याद करते दिखाई दे रहे हैं। द कपिल शर्मा शो इस बार 'जस्सी जैसी कोई नहीं' खास है, जिसमें इस सीरियल के सितारें दिखाई देंगे।
वही मोना सिंह के अतिरिक्त शो में गौरव गेरा, समीर सोनी तथा वीरेंद्र सक्सेना भी सम्मिलित हुए हैं। सभी जस्सी जैसी कोई नहीं सीरियल के महत्वपूर्ण रोल रह चुके हैं। इस शो के पश्चात् से मोना को बहुत लोकप्रियता प्राप्त हुई। तो इस बार कपिल शर्मा शो में भी जस्सी जैसी कोई नहीं के दिनों की यादों को ताजा करते देखा जाएगा। प्रोमो में बच्चा यादव उर्फ किकू शारदा बोलते हैं- स्कूल के दिनों में आपके कारण काफी डांट पड़ी। सारे लड़के उन्यासी के पश्चात् अस्सी लिखते थे तथा हम जस्सी लिखते थे।
कॉमेडी के मंच पर मोना के साथ यह मजाक-मस्ती का प्रोमो तो सिर्फ एक झलक थी। शो में और भी बहुत कुछ जबरदस्त होने वाला है। ध्यान रहे कि मोना सिंह बेहद शीघ्र ही लाल सिंह चड्ढा फिल्म में दिखाई देगी। इस फिल्म में वे आमिर खान तथा करीना कपूर खान के साथ दूसरी बार काम कर रही हैं। इससे पहले वे 3 इडियट्स में करीना की बड़ी बहन का किरदार अदा कर चुकी हैं।
| द कपिल शर्मा शो में इस बार 'जस्सी' दिखाई देने वाली हैं। जी हां, जस्सी जैसी कोई नहीं शो फेम अभिनेत्री मोना सिंह इस बार कपिल शर्मा के शो में अपने को-स्टार्स संग आने वाली हैं। शो का प्रोमो सामने आया है जिसमें किकू शारदा अपने शो के वक़्त के दौर की बातों को याद करते दिखाई दे रहे हैं। द कपिल शर्मा शो इस बार 'जस्सी जैसी कोई नहीं' खास है, जिसमें इस सीरियल के सितारें दिखाई देंगे। वही मोना सिंह के अतिरिक्त शो में गौरव गेरा, समीर सोनी तथा वीरेंद्र सक्सेना भी सम्मिलित हुए हैं। सभी जस्सी जैसी कोई नहीं सीरियल के महत्वपूर्ण रोल रह चुके हैं। इस शो के पश्चात् से मोना को बहुत लोकप्रियता प्राप्त हुई। तो इस बार कपिल शर्मा शो में भी जस्सी जैसी कोई नहीं के दिनों की यादों को ताजा करते देखा जाएगा। प्रोमो में बच्चा यादव उर्फ किकू शारदा बोलते हैं- स्कूल के दिनों में आपके कारण काफी डांट पड़ी। सारे लड़के उन्यासी के पश्चात् अस्सी लिखते थे तथा हम जस्सी लिखते थे। कॉमेडी के मंच पर मोना के साथ यह मजाक-मस्ती का प्रोमो तो सिर्फ एक झलक थी। शो में और भी बहुत कुछ जबरदस्त होने वाला है। ध्यान रहे कि मोना सिंह बेहद शीघ्र ही लाल सिंह चड्ढा फिल्म में दिखाई देगी। इस फिल्म में वे आमिर खान तथा करीना कपूर खान के साथ दूसरी बार काम कर रही हैं। इससे पहले वे तीन इडियट्स में करीना की बड़ी बहन का किरदार अदा कर चुकी हैं। |
भूषण के काव्य मे वीरता का आदर्श छत्रपति शिवाजी है। वे ही काव्य के नायक हैं । शास्त्रीय शब्दों मे 'आश्रय' छत्रपति शिवाजी हैं । आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने "मंगल का विधान करने वाले दो भाव बतलाए हैं - करुणा और प्रेम । इन दोनों में करुणा की गति रक्षा की ओर होती है.......लोक में प्रथम साध्य रक्षा "अत. साधनावस्था या प्रयत्नपक्ष को लेकर चलनेवाले काव्यों का बीज भाव करुणा है । "१ वीर रस के नायक को कर्म की प्रेरणा लोक में अत्याचार को देखकर मिलती है और साथ ही अत्याचारी व्यक्तित्व को देखकर भी । एक ओर जहाँ उसकी दृष्टि समाज पर होती है तो दूसरी ओर उसकी दृष्टि सामाजिक धर्म को बाधित करनेवाले व्यक्तित्व पर भी होती है । एक का रूप उसमें करुणा का भाव जाग्रत करता है तो दूसरे का रूप उसमें क्रोध का भाव । करुणा की प्रतिक्रिया दया में होती है और क्रोध की प्रतिक्रिया अत्याचारी के दमन में । अतः वीर रस के नायक में वीरता के लिए कर्म की ओर प्रवृत्त होने में इन मूल भावों का होना आवश्यक सा हो जाता है । छत्रपति शिवाजी की वीरता के मूल में ये दोनो ही भाव है ।
विदित पुरान परसिद्ध राखे,
राम नाम राख्यो अति रसना सुघर में । चोटी रोटी राखी सिपाहिन की,
काँधे में जनेऊ राख्यो माला राखी गर में । मुगल मरोड़ि राखे पातसाह,
बैरी पीसि राखे बरदान राख्यो कर मे । राजन की हद्द राखी तेग बल सिवराज, देव राखे देवल स्वधर्म राख्यो
वेद राखे
हिंदुन की
शुक्लजी ने मंगल का विधान करनेवाले जिन दो मूलभावों का उल्लेख किया है - करुणा और प्रेम । उनमें से करुणा का भाव उक्त कवित्त में है। नायक में करुणा के साथ-साथ क्रोध का भाव भी दिखलाया गया है। सामाजिक अत्याचार को देखकर नायक को पीड़ित पात्रों के प्रति करुणा होती है और इसी तरह सामाजिक धर्म में बाधा पहुँचानेवाले पात्र के प्रति - अत्याचारी पात्र के प्रति - क्रोध आता है । ये दोनों ही भाव वीरता के प्रेरक हैं। उत्साह का वर्धन करने वाले हैं, नायक को कर्म के लिए प्रेरित करनेवाले हैं। वास्तव में कवित्त में न करुणा का वर्णन है और न ही क्रोध का बल्कि कवित्त में उस उत्साह का वर्णन है, जिसकी
मीड़ि राखे
रस मीमांसा, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, पृ० ६७
भूषण, पं० विश्वनाथप्रसाद मिश्र, ६० सं० ४२० | भूषण के काव्य मे वीरता का आदर्श छत्रपति शिवाजी है। वे ही काव्य के नायक हैं । शास्त्रीय शब्दों मे 'आश्रय' छत्रपति शिवाजी हैं । आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने "मंगल का विधान करने वाले दो भाव बतलाए हैं - करुणा और प्रेम । इन दोनों में करुणा की गति रक्षा की ओर होती है.......लोक में प्रथम साध्य रक्षा "अत. साधनावस्था या प्रयत्नपक्ष को लेकर चलनेवाले काव्यों का बीज भाव करुणा है । "एक वीर रस के नायक को कर्म की प्रेरणा लोक में अत्याचार को देखकर मिलती है और साथ ही अत्याचारी व्यक्तित्व को देखकर भी । एक ओर जहाँ उसकी दृष्टि समाज पर होती है तो दूसरी ओर उसकी दृष्टि सामाजिक धर्म को बाधित करनेवाले व्यक्तित्व पर भी होती है । एक का रूप उसमें करुणा का भाव जाग्रत करता है तो दूसरे का रूप उसमें क्रोध का भाव । करुणा की प्रतिक्रिया दया में होती है और क्रोध की प्रतिक्रिया अत्याचारी के दमन में । अतः वीर रस के नायक में वीरता के लिए कर्म की ओर प्रवृत्त होने में इन मूल भावों का होना आवश्यक सा हो जाता है । छत्रपति शिवाजी की वीरता के मूल में ये दोनो ही भाव है । विदित पुरान परसिद्ध राखे, राम नाम राख्यो अति रसना सुघर में । चोटी रोटी राखी सिपाहिन की, काँधे में जनेऊ राख्यो माला राखी गर में । मुगल मरोड़ि राखे पातसाह, बैरी पीसि राखे बरदान राख्यो कर मे । राजन की हद्द राखी तेग बल सिवराज, देव राखे देवल स्वधर्म राख्यो वेद राखे हिंदुन की शुक्लजी ने मंगल का विधान करनेवाले जिन दो मूलभावों का उल्लेख किया है - करुणा और प्रेम । उनमें से करुणा का भाव उक्त कवित्त में है। नायक में करुणा के साथ-साथ क्रोध का भाव भी दिखलाया गया है। सामाजिक अत्याचार को देखकर नायक को पीड़ित पात्रों के प्रति करुणा होती है और इसी तरह सामाजिक धर्म में बाधा पहुँचानेवाले पात्र के प्रति - अत्याचारी पात्र के प्रति - क्रोध आता है । ये दोनों ही भाव वीरता के प्रेरक हैं। उत्साह का वर्धन करने वाले हैं, नायक को कर्म के लिए प्रेरित करनेवाले हैं। वास्तव में कवित्त में न करुणा का वर्णन है और न ही क्रोध का बल्कि कवित्त में उस उत्साह का वर्णन है, जिसकी मीड़ि राखे रस मीमांसा, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, पृशून्य सरसठ भूषण, पंशून्य विश्वनाथप्रसाद मिश्र, साठ संशून्य चार सौ बीस |
जयपुर, तीन दिसंबर राजस्थान पुलिस ने भिवाड़ी में एक नाबालिग से दुष्कर्म के बाद फरार हुए 22 वर्षीय आरोपी को बिहार से गिरफ्तार किया है।
भिवाड़ी के पुलिस अधीक्षक राममूर्ति जोशी ने बताया कि 13 वर्षीय बालिका को बहला-फुसलाकर अगवा करने व उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में नीतू कुमार को बिहार के छपरा जिले से गिरफ्तार किया गया है।
इस बारे में पुलिस की ओर से जारी बयान के अनुसार, 20 नवंबर को पीड़िता के पिता ने महिला थाने में नीतू कुमार के विरुद्ध मामला दर्ज कराया था। पीड़िता का परिवार भी मूल रूप से बिहार का रहनेवाला है।
इसमें कहा गया कि पुलिस की विशेष टीम ने आरोपी को बृहस्पतिवार को बिहार के थाना अमनौर इलाके से हिरासत में लिया था जिसे पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| जयपुर, तीन दिसंबर राजस्थान पुलिस ने भिवाड़ी में एक नाबालिग से दुष्कर्म के बाद फरार हुए बाईस वर्षीय आरोपी को बिहार से गिरफ्तार किया है। भिवाड़ी के पुलिस अधीक्षक राममूर्ति जोशी ने बताया कि तेरह वर्षीय बालिका को बहला-फुसलाकर अगवा करने व उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में नीतू कुमार को बिहार के छपरा जिले से गिरफ्तार किया गया है। इस बारे में पुलिस की ओर से जारी बयान के अनुसार, बीस नवंबर को पीड़िता के पिता ने महिला थाने में नीतू कुमार के विरुद्ध मामला दर्ज कराया था। पीड़िता का परिवार भी मूल रूप से बिहार का रहनेवाला है। इसमें कहा गया कि पुलिस की विशेष टीम ने आरोपी को बृहस्पतिवार को बिहार के थाना अमनौर इलाके से हिरासत में लिया था जिसे पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
मृतक प्रेम बाबू का फाइल फोटो। (संवाद)
झींझक। पत्नी से विवाद के चलते मेघजाल रसूलाबाद निवासी प्रेमबाबू (32) ने गुरुवार सुबह मालगाड़ी के आगे छलांग लगाकर जान दे दी। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
स्टेशन मास्टर झींझक पुष्पेंद्र सिंह की सूचना पर पहुंची जीआरपी ने शव के पास मिली पर्ची में लिखे नंबरों से परिजनों को सूचना दी। झींझक पहुंचे पिता परशुराम ने बताया कि बेटे को अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह था। वह अक्सर झगड़ा करती थी और एक महीने से मायके में है। प्रेमबाबू दस दिन पहले मजदूरी करने की बात कहकर घर से निकला था।
प्रभारी चौकी इंचार्ज जीआरपी झींझक अरुण कुमार ने बताया कि मृतक के पिता ने पत्नी के चरित्र पर संदेह व विवाद की वजह से आत्महत्या करने की बात बताई है।
प्रेमबाबू ने एक फरवरी को भी झींझक रेलवे फाटक के पास रेल पटरी पर लेटकर आत्महत्या का प्रयास किया था। उस समय गेटमैन ने पीआरडी जवानों की मदद से उसे पटरियों से हटाया था। बाद में उसे समझाबुझाकर घर भेज दिया गया था।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
| मृतक प्रेम बाबू का फाइल फोटो। झींझक। पत्नी से विवाद के चलते मेघजाल रसूलाबाद निवासी प्रेमबाबू ने गुरुवार सुबह मालगाड़ी के आगे छलांग लगाकर जान दे दी। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। स्टेशन मास्टर झींझक पुष्पेंद्र सिंह की सूचना पर पहुंची जीआरपी ने शव के पास मिली पर्ची में लिखे नंबरों से परिजनों को सूचना दी। झींझक पहुंचे पिता परशुराम ने बताया कि बेटे को अपनी पत्नी के चरित्र पर संदेह था। वह अक्सर झगड़ा करती थी और एक महीने से मायके में है। प्रेमबाबू दस दिन पहले मजदूरी करने की बात कहकर घर से निकला था। प्रभारी चौकी इंचार्ज जीआरपी झींझक अरुण कुमार ने बताया कि मृतक के पिता ने पत्नी के चरित्र पर संदेह व विवाद की वजह से आत्महत्या करने की बात बताई है। प्रेमबाबू ने एक फरवरी को भी झींझक रेलवे फाटक के पास रेल पटरी पर लेटकर आत्महत्या का प्रयास किया था। उस समय गेटमैन ने पीआरडी जवानों की मदद से उसे पटरियों से हटाया था। बाद में उसे समझाबुझाकर घर भेज दिया गया था। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen. |
[ उदञ्चालवाँ
ताम्य च सहितः शको विजिग्गे दैत्यदानवान् ॥ १३ ॥ नर इन्द्रस्य संग्रामे हत्घा शत्रून् परन्तपः । पौलोमान् कालखखांश्च सहस्राणि शतानि च ॥१४॥ एष भ्रांते रथे तिष्ठन् भल्लेनापाहरच्छिरः। जम्मस्य ग्रलमानस्य तदा खर्जुन आहवे ॥ १५ ॥ एप पारे समुद्रस्य हिरण्यपुरमारुजत् । जित्लो षष्टि सहस्राणि निवातकवचान् रणे । १६ । एष देवान् सहेंद्रोण जित्वा परपुरञ्जयः । अतर्पयन्महावाहुरर्जुनो आतवेदसम् १७ नारायणस्तथैवात्र भूयसोऽन्यान् जघान छ । एषमेतौ महावीयों तो पश्यत्त समागतौ ॥ १८ ॥ वासुदेवार्जुनौ वीरौ समवेतौ महारथौ । नरनारायणौ देवौ पूर्वदेवाविति श्रुतिः ॥ १९ ॥ अजेयौ मानुषे लोके सेन्द्ररपि सुरासुरैः । एष नारायणः कृष्णः फाल्गुनश्च नरः स्मृतः । नारायणो नरश्चैव सत्त्वमेकं द्विधाकृतम् ।२०। पतौ हि कर्मणा लोका नधनुषातेऽक्षयान् ध्रुवान् । तत्र तत्रैव जायेते युद्धकाले पुनः पुनः २१ ही करेंगे, तब उनको साथ में लेकर इन्द्रने दैत्य दानवोंको जीत लिया १३ परन्तप नर भगवान्ने संग्राम में पौलोम और कालखञ्ज नामचाले सैंकड़ों और सहस्रों इन्द्र के शत्रुओंको मारा था, इस समय वही नहं भगवान् अर्जुन के रूपमें उत्पन्न हुए हैं और इसने चारों ओरको घूमने वाले एक ही रथमें बैठकर भी संग्राम में अपनेको ग्रसनेके लिये आये हुए जम्मासुरके शिरको भालेले काट लिया था ॥ १४ ॥ १५ ॥ और अर्जुनरूप में वर्त्तमान उन नरभगवान्ने समुद्रके पार हिरण्यपुर में रहने छाले निघातकवच नामके आठ हजार असुरोको रणमें हराकर हिररायपुरका भी नाश कर दिया था ।।१६।। शत्रुओंके नगरोंको जीतनेवाले इस महावली अर्जुनने इन्द्रसहित देवताओंको हराकर खाण्डव वनसे अनिको तृप्त किया था।।१७।। इसके सहायकऔर श्रीकृष्णरूपसे प्रकट हुए नारायणने भी और बहुतसोंका नाश किया था, ऐसे महापराक्रमी ये दोनों देवता इकट्ठे होगये हैं, इसको तुम देखलो ॥ १८ ॥ महारथी श्रीकृष्ण तथा अर्जुन ये दोनों वीर जो इकट्ठे हुए हैं, हमने सुना है, कि यह दोनों नरनारायण नामवाले प्राचीन देवता हैं ।।१९।। इन दोनों को मनुष्यलोक में इंद्रसहित सुर असुर भी नहीं जीत सकते हैं यह श्रीकृष्ण साक्षात् नारायण और अर्जुन नर है ऐसा शास्त्र में कद्दा है, यह नारायण और नर एक ही सत्त्व हैं, परन्तु योग के प्रभाव से दो भागमै चटगये हैं ॥ २० ॥ ये दोनों अपने कर्म के प्रभाव से अक्षय ध्रुव वलोकॉमें रहते हैं, परन्तु युद्ध के समय वार २ जहां तहां जन्म धारण | [ उदञ्चालवाँ ताम्य च सहितः शको विजिग्गे दैत्यदानवान् ॥ तेरह ॥ नर इन्द्रस्य संग्रामे हत्घा शत्रून् परन्तपः । पौलोमान् कालखखांश्च सहस्राणि शतानि च ॥चौदह॥ एष भ्रांते रथे तिष्ठन् भल्लेनापाहरच्छिरः। जम्मस्य ग्रलमानस्य तदा खर्जुन आहवे ॥ पंद्रह ॥ एप पारे समुद्रस्य हिरण्यपुरमारुजत् । जित्लो षष्टि सहस्राणि निवातकवचान् रणे । सोलह । एष देवान् सहेंद्रोण जित्वा परपुरञ्जयः । अतर्पयन्महावाहुरर्जुनो आतवेदसम् सत्रह नारायणस्तथैवात्र भूयसोऽन्यान् जघान छ । एषमेतौ महावीयों तो पश्यत्त समागतौ ॥ अट्ठारह ॥ वासुदेवार्जुनौ वीरौ समवेतौ महारथौ । नरनारायणौ देवौ पूर्वदेवाविति श्रुतिः ॥ उन्नीस ॥ अजेयौ मानुषे लोके सेन्द्ररपि सुरासुरैः । एष नारायणः कृष्णः फाल्गुनश्च नरः स्मृतः । नारायणो नरश्चैव सत्त्वमेकं द्विधाकृतम् ।बीस। पतौ हि कर्मणा लोका नधनुषातेऽक्षयान् ध्रुवान् । तत्र तत्रैव जायेते युद्धकाले पुनः पुनः इक्कीस ही करेंगे, तब उनको साथ में लेकर इन्द्रने दैत्य दानवोंको जीत लिया तेरह परन्तप नर भगवान्ने संग्राम में पौलोम और कालखञ्ज नामचाले सैंकड़ों और सहस्रों इन्द्र के शत्रुओंको मारा था, इस समय वही नहं भगवान् अर्जुन के रूपमें उत्पन्न हुए हैं और इसने चारों ओरको घूमने वाले एक ही रथमें बैठकर भी संग्राम में अपनेको ग्रसनेके लिये आये हुए जम्मासुरके शिरको भालेले काट लिया था ॥ चौदह ॥ पंद्रह ॥ और अर्जुनरूप में वर्त्तमान उन नरभगवान्ने समुद्रके पार हिरण्यपुर में रहने छाले निघातकवच नामके आठ हजार असुरोको रणमें हराकर हिररायपुरका भी नाश कर दिया था ।।सोलह।। शत्रुओंके नगरोंको जीतनेवाले इस महावली अर्जुनने इन्द्रसहित देवताओंको हराकर खाण्डव वनसे अनिको तृप्त किया था।।सत्रह।। इसके सहायकऔर श्रीकृष्णरूपसे प्रकट हुए नारायणने भी और बहुतसोंका नाश किया था, ऐसे महापराक्रमी ये दोनों देवता इकट्ठे होगये हैं, इसको तुम देखलो ॥ अट्ठारह ॥ महारथी श्रीकृष्ण तथा अर्जुन ये दोनों वीर जो इकट्ठे हुए हैं, हमने सुना है, कि यह दोनों नरनारायण नामवाले प्राचीन देवता हैं ।।उन्नीस।। इन दोनों को मनुष्यलोक में इंद्रसहित सुर असुर भी नहीं जीत सकते हैं यह श्रीकृष्ण साक्षात् नारायण और अर्जुन नर है ऐसा शास्त्र में कद्दा है, यह नारायण और नर एक ही सत्त्व हैं, परन्तु योग के प्रभाव से दो भागमै चटगये हैं ॥ बीस ॥ ये दोनों अपने कर्म के प्रभाव से अक्षय ध्रुव वलोकॉमें रहते हैं, परन्तु युद्ध के समय वार दो जहां तहां जन्म धारण |
सुर्तिपूजा का प्राचीन इतिहास
e eae
२२०० वर्षों की प्राचीन
wener जैनमूर्ति ।
मथुरा के ककाली टीला का सोद काम करते समय भूगर्भ से अनेक प्राचीन मूर्तियाँ मिली जिनमे यह भी एक है यह लखनऊ के म्यूजियम में सुरक्षित है।
JE UKUIJ CEUAN 1.1.ND
जैन तीर्थकरो की प्राचीन मूर्तिऍ
जैन तीर्थंकरो मथुरा के कंकाली टीला के खुदाई का काम करते समय की अनेक मूर्तिया मिली जिनमें यह दो मृत्ति भी हैं। लखनऊ के म्यूजियम से विद्यमान हैं। इनका समय गुप्तकाल अर्थात् वि० पू० दो सौ वर्ष का बतलाया जाता है। इस समय के पूर्व भी जैन धर्म में मूर्तिपूजा प्रचलित थी जिसका यह एक अकाट्य प्रमाण है ।
IAS- LLM
KUALDE.35 CZOCH | सुर्तिपूजा का प्राचीन इतिहास e eae दो हज़ार दो सौ वर्षों की प्राचीन wener जैनमूर्ति । मथुरा के ककाली टीला का सोद काम करते समय भूगर्भ से अनेक प्राचीन मूर्तियाँ मिली जिनमे यह भी एक है यह लखनऊ के म्यूजियम में सुरक्षित है। JE UKUIJ CEUAN एक.एक.ND जैन तीर्थकरो की प्राचीन मूर्तिऍ जैन तीर्थंकरो मथुरा के कंकाली टीला के खुदाई का काम करते समय की अनेक मूर्तिया मिली जिनमें यह दो मृत्ति भी हैं। लखनऊ के म्यूजियम से विद्यमान हैं। इनका समय गुप्तकाल अर्थात् विशून्य पूशून्य दो सौ वर्ष का बतलाया जाता है। इस समय के पूर्व भी जैन धर्म में मूर्तिपूजा प्रचलित थी जिसका यह एक अकाट्य प्रमाण है । IAS- LLM KUALDE.पैंतीस CZOCH |
पुण्य प्रसून बाजपेयी मिर्ची-धान छोड़ो, गन्ना उगाओ. . ज्यादा पाओ। यह नारा और किसी का नहीं भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी का है। विदर्भ में भंडारा के उमरेड ताल्लुका में पूर्ति साखर कारखाना (शुगर फैक्ट्री) लगाने के बाद भाजपा अध्यक्ष का किसानों को खेती से मुनाफा बनाने का यह नया मंत्र है। यानी जो किसान अभी खुले बाजार में मिर्ची और धान बेचकर दो जून की रोटी का जुगाड किसी तरह कर पा रहे हैं, वह गन्ना उगाकर कैसे गडकरी के पूर्ति साखर कारखाने से मजे में दो जून की रोटी पा सकते हैं, इसका खुला प्रचार भंडारा में देखा जा सकता है। और अगर गन्ना ना उगाया तो कैसे किसानों के सामने फसल नष्ट होने का संकट मंडरा सकता है, इसकी चेतावनी भी शुगर फैक्ट्री के कर्मचारी यह कहकर दे रहे हैं कि डैम का सारा पानी तो शुगर फैक्ट्री में जाएगा तो खेती कौन कर पाएगा। फिर डैम का पानी उन्हीं खेतों में जाएगा, जहां गन्ना उपजाया जाएगा। और यह डैम वही गोसीखुर्द परियोजना है, जिसके ठेकेदारों का रुका हुआ पैसा रिलीज कराने के लिये भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने जल संसाधन मंत्री पवन बंसल को पत्र लिखा। यानी जिस गोसीखुर्द परियोजना को लेकर राजीव गांधी से लेकर मनमोहन सिंह दस्तावेजों में विदर्भ की एक लाख नब्बे हजार हेक्टेयर सूखी जमीन पर सिंचाई की सोच रहे हैं, उस डैम के पानी पर न सिर्प शुगर फैक्ट्री बल्कि इथिनाल बनाने की फैक्ट्री से लेकर पावर प्रोजेक्ट तक का भार है। और यह तीनों ही भाजपा अध्यक्ष की नई इंडस्ट्री हैं। ऐसे में किन खेतों तक डैम का पानी पहुंचेगा, यह अपने आप में बड़ा सवाल इसलिये भी होता जा रहा है क्योंकि विदर्भ में किसानों से ज्यादा पानी महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम यानी एमआईडीसी में जाता है और बीते तीन बरस में सिर्प भंडारा की शुगर फैक्ट्री ही नहीं या पावर प्रोजेक्ट ही नहीं बल्कि विदर्भ में चार अन्य शुगर फैक्ट्री भी भाजपा अध्यक्ष ने ली हैं। जिसे कांग्रेस की सत्ता ने बेचा और भाजपा नेता ने खरीदा। मौदा में बापदेव साखर कारखाना। वर्धा के भू-गांव में साखर कारखाना। नागपुर से सटे सावनेर में राम नरेश गडकरी साखर कारखाना। खास बात यह है कि सभी कारखाने नदियों के किनारे हैं या फिर सिंचाई को लेकर विदर्भ में जो भी परियोजना बन रह हैं, उसके करीब हैं। जिससे पहले उद्योगों में पानी जाये। असल सवाल यहीं से खड़ा होता है कि क्या वाकई विदर्भ में खुदकुशी करते किसानों की फिक भाजपा अध्यक्ष को है या फिर खुदकुशी करते किसानों के नाम पर परियोजना लगा कर उससे अपना मुनाफा बनाने की होड़ ही नेताओं में ज्यादा है। क्योंकि सिर्प भाजपा अध्यक्ष ही नहीं बल्कि कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना के नेताओं के 50 से ज्यादा उघोग भी विदर्भ के 12 एमआईडीसी क्षेत्र में हैं। और सभी की जरुरत पानी है। विदर्भ के करीब एक दर्जन पावर प्रोजेक्ट का लाइसेंस भी राजनेताओ के ही पास है और चन्द्रपुर, गढ़चिरोली, वर्धा, भंडारा में देश के टॉपमोस्ट पहले दस उद्योगपतियों की इंडस्ट्री चल रही है, जिन्हें पानी की कोई किल्लत नहीं होती है। जबकि किसान की जमीन पर पानी है ही नहीं। खासकर कपास उगाने वाले किसानों की हालत देखें तो परियोजनायें त्रासदी दिखायी देंगी। क्योंकि 1987 में गोसीखुर्द परियोजना के भूमिपूजन के बाद से सिर्प कपास के 16 हजार किसानों ने खुदकुशी कर ली। कपास के लिए ज्यादा पानी चाहिये और 1988 के बाद से जिस तरह हर जिले में एमआईडीसी के लिये पानी जाने लगा उससे किसानो को मिलने वाले पानी में 60 से 80 फिसदी तक की कमी आती चली गई। वहीं विकास परियजनाओ के खेल में एक तरफ हर परियोजना से जुड़ी लाभ की जमीन पर ही उघोग लगने लगे तों दूसरी तरफ किसानों की जमीन के छिनने से लेकर उनके विस्थापन का दर्द खुले तौर पर विदर्भ में उभरा। 122 उद्योगों और सिंचाई की छह छोटी बड़ी परियोजनाओं से विदर्भ के करीब एक लाख किसान परिवार विस्थापित हो गये। सिर्प गोसीखुर्द परियोजना में 200 गांव के बीस हजार से ज्यादा परिवार विस्थापित हुए। ऐसा भी नहीं है कि आज कांग्रेस सत्ता में है तो किसानों की फिक कर रही है या फिर जब शिवसेना-बीजेपी की सरकार थी तो उसे किसानों की सुध थी। असल में सत्ता में जो भी जब भी रहा विदर्भ के किसानों की त्रासदी को राहत देने वाली योजनाओं के जरीये लूट का खेल ही खेला। लूट के खेल में किसानो की बलि कैसे चढ़ती चली गई यह महाराष्ट्र में वंसत राव नाईक की हरित कांति के नारे से जो शुरु हुई वह भाजपा के महादेवराव शिवणकर से होते हुये राष्ट्रवादी कांग्रेस के अजित पवार तक के दौर में रही। 1995 से 1999 तक शिवणकर विदर्भ में सिंचाई कांति की बात करते रहे। और 1999 में जब अजित पवार मंत्री बने तो वह सिंचाई परियोजनाओ की लूट में विकास देखने लगे। जो 2012 में सामने आया। खास बात यह भी है कि 1995-99 के दौरान नितिन गडकरी सार्वजनिक बांधाकाम मंत्री भी थे और नागपुर के पालक मंत्री भी। और उस दौर में नितिन गडकरी जनता दरबार लगाते थे। मंत्री रहते हुये उन्होंने आखिरी जनता दरबार 1999 में नागपुर के वंसतराव देशपांडे हॉल में लगाया। जिसमें गोसीखुर्द के विस्थापित किसानों को राहत दिलाने के लिये बनी संघर्ष समिति (गोसीखुर्द प्रकल्पग्रस्त संघर्ष समिति) के सदस्य भी पहुंचे। समिति के अध्यक्ष विलास भोंगाडे ने जब विस्थापितों का सवाल उठाया तब नितिन गडकरी ने विदर्भ के विकास के लिये परियोजनाओ का पा कर हर किसी को यह कहकर चुप करा दिया कि अगले पांच बरस में विदर्भ की तस्वीर बदल जायेगी। ऐसे में टक्का भर किसानों की सोचने से क्या फायदा। संयोग है कि वही किसान 13 बरस बाद एक बार फिर जब अपने जीने के हक की मांग करने नागपुर पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि नितिन गडकरी ही गोसीखुर्द से लेकर हर परियोजाना को पूरा करवाने की लडाई लड़ रहे हैं। लेकिन परियोजनाओ को अंजाम कैसे दिया जा रहा है, यह गोसीखुर्द डैम की योजना से समझा जा सकता है। डैम को बनाने के लिये खड़ी की गई 107 किलोमीटर की दीवार (राइट कैनाल) जो भंडारा के गोसीखुर्द से चन्द्रपुर के आसोलामेंडा तक जाती है, 24 बरस में आधी भी नहीं बनी है। जबकि लेफ्ट कैनाल की 23 किलोमीटर की दीवार (स्लापिंग वाल) खुद-ब-खुद ढह गयी है। फिर डैम तैयार करते वक्त जिन गांव वालों को बताया गया कि पहले चरण में उनके गांव डूबेंगे। उसकी जगह पहले चरण में ही दूसरे चरण के गांव डूब गये। इसमें पात्री गांव की हालत तो झटके में बदतर हो गई क्योंकि उनका गांव डूबना नहीं था। लेकिन डैम की योजना की गलती निकली। और पात्री गांव डूब गया। फिर पात्री गांव के लोगों के लिये जिस जमीन एक नया गांव तैयार कर उसका नाम साखर गांव रखकर बसाया गया। तीन करोड़ से ज्यादा का खर्च किया गया। बसने के तीन महीने बाद ही वन विभाग ने कहा कि गांव तो जंगल की जमीन पर बसा दिया गया है। आलम यह हो गया कि कि मामला अदालत में चला गया। और अदालत में भी माना कि गांव तो अवैध है। और जमीन वन विभाग की है। उसके बाद इस नये साखर गांव को भी खत्म कर दिया गया। गांव में रह रहे दो हजार लोग बिना जमीन-बिना घर के हो गये। और जब इन्होंने अपने लिये घर और खेती की जमीन की मांग की तो मुबंई सचिवालय से विदर्भ के किसानों के विकास और पुनर्वास की फाइल यह कहकर नागपुर भेजी गई कि इन्हें तो बकायदा घर और तमाम सुविधाओं वाले गांव में शिफ्ट किया जा चुका है। और फाइल पर तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के हस्ताक्षर थे। यानी विदर्भ के किसानों की त्रासदी राजनीतिक किस्सागोई की तरह मुंबई में भी कैसे ली जाती है, इसका सच महाराष्ट्र सरकार के दस्तावेज ही बताते हैं। जहां बीते बीस बरस में खुदकुशी करने वाले 18 हजार किसानों के साथ साथ किसानो ने पुनर्वास के लिये खर्च किये गये सवा लाख करोड रुपये का भी पा है और इससे दुगने से ज्यादा करीब तीन लाख करोड़ से ज्यादा की विकास योजनाओं का पा यह लिखकर किया गया है कि विदर्भ के किसानों की हालात बीते तीन बरस में चालीस टक्का तक सुधरे हैं। खास बात यह है कि बीते बीस बरस के दौर में हर तीन बरस बाद की फाइल में विदर्भ के किसानों के हालात सुधारने का दावा क्षेत्र के पालक मंत्री, सिंचाई मंत्री, कृर्षि मंत्री, उघोग मंत्री, उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री तक ने किया है। और छह फाइलों में हर बार बीस से चालीस टक्का (फिसदी) सुधार हुआ है। यानी रफ्तार की धारा को अगर जोड़ दिया जाये तो विदर्भ अब तक स्वर्ग बन जाना चाहिये था क्योंकि बीस बरस में 120 फिसदी से ज्यादा सुधार तो दस्तावेजों में हो चुका है। और सरकारी दस्तावेजों के इस सुधार में अगर विपक्ष के नेता नीतिन गडकरी भी अगर अब कहते है कि उन्हें तो विदर्भ के किसानों की पड़ी है, इसीलिये वह गोसीखुर्द डैम जल्द जल्द चाहते हैं तो इसमें बुरा क्या है।
| पुण्य प्रसून बाजपेयी मिर्ची-धान छोड़ो, गन्ना उगाओ. . ज्यादा पाओ। यह नारा और किसी का नहीं भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी का है। विदर्भ में भंडारा के उमरेड ताल्लुका में पूर्ति साखर कारखाना लगाने के बाद भाजपा अध्यक्ष का किसानों को खेती से मुनाफा बनाने का यह नया मंत्र है। यानी जो किसान अभी खुले बाजार में मिर्ची और धान बेचकर दो जून की रोटी का जुगाड किसी तरह कर पा रहे हैं, वह गन्ना उगाकर कैसे गडकरी के पूर्ति साखर कारखाने से मजे में दो जून की रोटी पा सकते हैं, इसका खुला प्रचार भंडारा में देखा जा सकता है। और अगर गन्ना ना उगाया तो कैसे किसानों के सामने फसल नष्ट होने का संकट मंडरा सकता है, इसकी चेतावनी भी शुगर फैक्ट्री के कर्मचारी यह कहकर दे रहे हैं कि डैम का सारा पानी तो शुगर फैक्ट्री में जाएगा तो खेती कौन कर पाएगा। फिर डैम का पानी उन्हीं खेतों में जाएगा, जहां गन्ना उपजाया जाएगा। और यह डैम वही गोसीखुर्द परियोजना है, जिसके ठेकेदारों का रुका हुआ पैसा रिलीज कराने के लिये भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने जल संसाधन मंत्री पवन बंसल को पत्र लिखा। यानी जिस गोसीखुर्द परियोजना को लेकर राजीव गांधी से लेकर मनमोहन सिंह दस्तावेजों में विदर्भ की एक लाख नब्बे हजार हेक्टेयर सूखी जमीन पर सिंचाई की सोच रहे हैं, उस डैम के पानी पर न सिर्प शुगर फैक्ट्री बल्कि इथिनाल बनाने की फैक्ट्री से लेकर पावर प्रोजेक्ट तक का भार है। और यह तीनों ही भाजपा अध्यक्ष की नई इंडस्ट्री हैं। ऐसे में किन खेतों तक डैम का पानी पहुंचेगा, यह अपने आप में बड़ा सवाल इसलिये भी होता जा रहा है क्योंकि विदर्भ में किसानों से ज्यादा पानी महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम यानी एमआईडीसी में जाता है और बीते तीन बरस में सिर्प भंडारा की शुगर फैक्ट्री ही नहीं या पावर प्रोजेक्ट ही नहीं बल्कि विदर्भ में चार अन्य शुगर फैक्ट्री भी भाजपा अध्यक्ष ने ली हैं। जिसे कांग्रेस की सत्ता ने बेचा और भाजपा नेता ने खरीदा। मौदा में बापदेव साखर कारखाना। वर्धा के भू-गांव में साखर कारखाना। नागपुर से सटे सावनेर में राम नरेश गडकरी साखर कारखाना। खास बात यह है कि सभी कारखाने नदियों के किनारे हैं या फिर सिंचाई को लेकर विदर्भ में जो भी परियोजना बन रह हैं, उसके करीब हैं। जिससे पहले उद्योगों में पानी जाये। असल सवाल यहीं से खड़ा होता है कि क्या वाकई विदर्भ में खुदकुशी करते किसानों की फिक भाजपा अध्यक्ष को है या फिर खुदकुशी करते किसानों के नाम पर परियोजना लगा कर उससे अपना मुनाफा बनाने की होड़ ही नेताओं में ज्यादा है। क्योंकि सिर्प भाजपा अध्यक्ष ही नहीं बल्कि कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस और शिवसेना के नेताओं के पचास से ज्यादा उघोग भी विदर्भ के बारह एमआईडीसी क्षेत्र में हैं। और सभी की जरुरत पानी है। विदर्भ के करीब एक दर्जन पावर प्रोजेक्ट का लाइसेंस भी राजनेताओ के ही पास है और चन्द्रपुर, गढ़चिरोली, वर्धा, भंडारा में देश के टॉपमोस्ट पहले दस उद्योगपतियों की इंडस्ट्री चल रही है, जिन्हें पानी की कोई किल्लत नहीं होती है। जबकि किसान की जमीन पर पानी है ही नहीं। खासकर कपास उगाने वाले किसानों की हालत देखें तो परियोजनायें त्रासदी दिखायी देंगी। क्योंकि एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में गोसीखुर्द परियोजना के भूमिपूजन के बाद से सिर्प कपास के सोलह हजार किसानों ने खुदकुशी कर ली। कपास के लिए ज्यादा पानी चाहिये और एक हज़ार नौ सौ अठासी के बाद से जिस तरह हर जिले में एमआईडीसी के लिये पानी जाने लगा उससे किसानो को मिलने वाले पानी में साठ से अस्सी फिसदी तक की कमी आती चली गई। वहीं विकास परियजनाओ के खेल में एक तरफ हर परियोजना से जुड़ी लाभ की जमीन पर ही उघोग लगने लगे तों दूसरी तरफ किसानों की जमीन के छिनने से लेकर उनके विस्थापन का दर्द खुले तौर पर विदर्भ में उभरा। एक सौ बाईस उद्योगों और सिंचाई की छह छोटी बड़ी परियोजनाओं से विदर्भ के करीब एक लाख किसान परिवार विस्थापित हो गये। सिर्प गोसीखुर्द परियोजना में दो सौ गांव के बीस हजार से ज्यादा परिवार विस्थापित हुए। ऐसा भी नहीं है कि आज कांग्रेस सत्ता में है तो किसानों की फिक कर रही है या फिर जब शिवसेना-बीजेपी की सरकार थी तो उसे किसानों की सुध थी। असल में सत्ता में जो भी जब भी रहा विदर्भ के किसानों की त्रासदी को राहत देने वाली योजनाओं के जरीये लूट का खेल ही खेला। लूट के खेल में किसानो की बलि कैसे चढ़ती चली गई यह महाराष्ट्र में वंसत राव नाईक की हरित कांति के नारे से जो शुरु हुई वह भाजपा के महादेवराव शिवणकर से होते हुये राष्ट्रवादी कांग्रेस के अजित पवार तक के दौर में रही। एक हज़ार नौ सौ पचानवे से एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे तक शिवणकर विदर्भ में सिंचाई कांति की बात करते रहे। और एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में जब अजित पवार मंत्री बने तो वह सिंचाई परियोजनाओ की लूट में विकास देखने लगे। जो दो हज़ार बारह में सामने आया। खास बात यह भी है कि एक हज़ार नौ सौ पचानवे-निन्यानवे के दौरान नितिन गडकरी सार्वजनिक बांधाकाम मंत्री भी थे और नागपुर के पालक मंत्री भी। और उस दौर में नितिन गडकरी जनता दरबार लगाते थे। मंत्री रहते हुये उन्होंने आखिरी जनता दरबार एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में नागपुर के वंसतराव देशपांडे हॉल में लगाया। जिसमें गोसीखुर्द के विस्थापित किसानों को राहत दिलाने के लिये बनी संघर्ष समिति के सदस्य भी पहुंचे। समिति के अध्यक्ष विलास भोंगाडे ने जब विस्थापितों का सवाल उठाया तब नितिन गडकरी ने विदर्भ के विकास के लिये परियोजनाओ का पा कर हर किसी को यह कहकर चुप करा दिया कि अगले पांच बरस में विदर्भ की तस्वीर बदल जायेगी। ऐसे में टक्का भर किसानों की सोचने से क्या फायदा। संयोग है कि वही किसान तेरह बरस बाद एक बार फिर जब अपने जीने के हक की मांग करने नागपुर पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि नितिन गडकरी ही गोसीखुर्द से लेकर हर परियोजाना को पूरा करवाने की लडाई लड़ रहे हैं। लेकिन परियोजनाओ को अंजाम कैसे दिया जा रहा है, यह गोसीखुर्द डैम की योजना से समझा जा सकता है। डैम को बनाने के लिये खड़ी की गई एक सौ सात किलोग्राममीटर की दीवार जो भंडारा के गोसीखुर्द से चन्द्रपुर के आसोलामेंडा तक जाती है, चौबीस बरस में आधी भी नहीं बनी है। जबकि लेफ्ट कैनाल की तेईस किलोग्राममीटर की दीवार खुद-ब-खुद ढह गयी है। फिर डैम तैयार करते वक्त जिन गांव वालों को बताया गया कि पहले चरण में उनके गांव डूबेंगे। उसकी जगह पहले चरण में ही दूसरे चरण के गांव डूब गये। इसमें पात्री गांव की हालत तो झटके में बदतर हो गई क्योंकि उनका गांव डूबना नहीं था। लेकिन डैम की योजना की गलती निकली। और पात्री गांव डूब गया। फिर पात्री गांव के लोगों के लिये जिस जमीन एक नया गांव तैयार कर उसका नाम साखर गांव रखकर बसाया गया। तीन करोड़ से ज्यादा का खर्च किया गया। बसने के तीन महीने बाद ही वन विभाग ने कहा कि गांव तो जंगल की जमीन पर बसा दिया गया है। आलम यह हो गया कि कि मामला अदालत में चला गया। और अदालत में भी माना कि गांव तो अवैध है। और जमीन वन विभाग की है। उसके बाद इस नये साखर गांव को भी खत्म कर दिया गया। गांव में रह रहे दो हजार लोग बिना जमीन-बिना घर के हो गये। और जब इन्होंने अपने लिये घर और खेती की जमीन की मांग की तो मुबंई सचिवालय से विदर्भ के किसानों के विकास और पुनर्वास की फाइल यह कहकर नागपुर भेजी गई कि इन्हें तो बकायदा घर और तमाम सुविधाओं वाले गांव में शिफ्ट किया जा चुका है। और फाइल पर तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के हस्ताक्षर थे। यानी विदर्भ के किसानों की त्रासदी राजनीतिक किस्सागोई की तरह मुंबई में भी कैसे ली जाती है, इसका सच महाराष्ट्र सरकार के दस्तावेज ही बताते हैं। जहां बीते बीस बरस में खुदकुशी करने वाले अट्ठारह हजार किसानों के साथ साथ किसानो ने पुनर्वास के लिये खर्च किये गये सवा लाख करोड रुपये का भी पा है और इससे दुगने से ज्यादा करीब तीन लाख करोड़ से ज्यादा की विकास योजनाओं का पा यह लिखकर किया गया है कि विदर्भ के किसानों की हालात बीते तीन बरस में चालीस टक्का तक सुधरे हैं। खास बात यह है कि बीते बीस बरस के दौर में हर तीन बरस बाद की फाइल में विदर्भ के किसानों के हालात सुधारने का दावा क्षेत्र के पालक मंत्री, सिंचाई मंत्री, कृर्षि मंत्री, उघोग मंत्री, उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री तक ने किया है। और छह फाइलों में हर बार बीस से चालीस टक्का सुधार हुआ है। यानी रफ्तार की धारा को अगर जोड़ दिया जाये तो विदर्भ अब तक स्वर्ग बन जाना चाहिये था क्योंकि बीस बरस में एक सौ बीस फिसदी से ज्यादा सुधार तो दस्तावेजों में हो चुका है। और सरकारी दस्तावेजों के इस सुधार में अगर विपक्ष के नेता नीतिन गडकरी भी अगर अब कहते है कि उन्हें तो विदर्भ के किसानों की पड़ी है, इसीलिये वह गोसीखुर्द डैम जल्द जल्द चाहते हैं तो इसमें बुरा क्या है। |
टुकेश्वर लोधी, आरंग। नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म करने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया है. जहां से उसे जेल भेज दिया गया.
जानकारी के अनुसार, नाबालिग की पिता ने 27 जनवरी को आरंग थाना में रिपोर्ट दर्ज कराया था कि उसकी बेटी को अज्ञात युवक भगाकर ले गया. इस शिकायत पर पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज किया था. जिसके बाद पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी थी.
पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी युवक ग्राम गुल्लू में है. उसके साथ में नाबालिग भी है. पुलिस ने इस सूचना के बाद तत्काल गांव में दबिश दी. तलाशी के दौरान नाबालिग को आरोपी युवक के घर से बरामद किया. इसके साथ ही आरोपी कृष्णा कुर्रे पिता कन्हैया कुर्रे (19 वर्ष) को गिरफ्तार किया.
आरंग पुलिस ने नाबालिग ने पूछताछ किया. पीड़िता ने बताया कि कृष्णा कुर्रे उसे शादी का प्रलोभन देकर अपने साथ भगाकर ले गया था. इस दौरान युवक ने उसके साथ दुष्कर्म किया.
पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ धारा 366, 376 एवं पास्को एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया. इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से आरोपी को जेल भेज दिया गया.
इसे भी पढ़े- सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के साथ केंद्र से पूछा सवाल- NOTA ज्यादा हो तो चुनाव रद्द कर करना चाहिए नया चुनाव?
| टुकेश्वर लोधी, आरंग। नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म करने वाले युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया है. जहां से उसे जेल भेज दिया गया. जानकारी के अनुसार, नाबालिग की पिता ने सत्ताईस जनवरी को आरंग थाना में रिपोर्ट दर्ज कराया था कि उसकी बेटी को अज्ञात युवक भगाकर ले गया. इस शिकायत पर पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज किया था. जिसके बाद पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी थी. पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी युवक ग्राम गुल्लू में है. उसके साथ में नाबालिग भी है. पुलिस ने इस सूचना के बाद तत्काल गांव में दबिश दी. तलाशी के दौरान नाबालिग को आरोपी युवक के घर से बरामद किया. इसके साथ ही आरोपी कृष्णा कुर्रे पिता कन्हैया कुर्रे को गिरफ्तार किया. आरंग पुलिस ने नाबालिग ने पूछताछ किया. पीड़िता ने बताया कि कृष्णा कुर्रे उसे शादी का प्रलोभन देकर अपने साथ भगाकर ले गया था. इस दौरान युवक ने उसके साथ दुष्कर्म किया. पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ धारा तीन सौ छयासठ, तीन सौ छिहत्तर एवं पास्को एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया. इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से आरोपी को जेल भेज दिया गया. इसे भी पढ़े- सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के साथ केंद्र से पूछा सवाल- NOTA ज्यादा हो तो चुनाव रद्द कर करना चाहिए नया चुनाव? |
ईसीएलजीएस स्कीम एमएसएमई के लिए खास लोन स्कीम है.
नई दिल्ली. केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने मंगलवार को देश का आम बजट (Budget 2022-23) पेश किया. इस दौरान वित्त मंत्री ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई (MSME) के लिए बड़ा ऐलान किया. वित्तमंत्री ने कहा कि इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम यानी ईसीएलजीएस (ECLGS) को मार्च 2023 तक बढ़ाया गया है. ईसीएलजीएस योजना के तहत गारंटी कवर को 50 हजार करोड़ तक बढ़ाया गया है और कुल कवर अब 5 लाख करोड़ का होगा.
लोकसभा में सीतारमण ने बजट पेश करते हुए इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि केंद्र एवं राज्य सरकारों के प्रयासों के कारण रोजगार एवं उद्यम अवसरों में वृद्धि हो रही है. वित्त मंत्री ने कहा कि रेलवे छोटे किसानों, एमएसएमई के लिए नए उत्पाद विकसित करेगा.
निर्मला सीतारमण ने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों की रेटिंग के लिए 6,000 करोड़ रुपये के कार्यक्रम को अगले पांच सालों में लागू किया जाएगा. आम बजट 2022-23 पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि डिजिटल आधारभूत ढांचे को बढ़ावा देने की पहल के तहत 'देश स्टैक ई-पोर्टल' शुरू किया जाएगा.
ईसीएलजीएस स्कीम एमएसएमई के लिए खास लोन स्कीम है, जिसका ऐलान आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत किया गया था. आर्थिक संकट के मद्देनजर एमएसएमई सेक्टर की सहायता के लिए 13 मई 2020 को वित्त मंत्रालय द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज के तहत इसका ऐलान किया गया था.
.
| ईसीएलजीएस स्कीम एमएसएमई के लिए खास लोन स्कीम है. नई दिल्ली. केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को देश का आम बजट पेश किया. इस दौरान वित्त मंत्री ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई के लिए बड़ा ऐलान किया. वित्तमंत्री ने कहा कि इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम यानी ईसीएलजीएस को मार्च दो हज़ार तेईस तक बढ़ाया गया है. ईसीएलजीएस योजना के तहत गारंटी कवर को पचास हजार करोड़ तक बढ़ाया गया है और कुल कवर अब पाँच लाख करोड़ का होगा. लोकसभा में सीतारमण ने बजट पेश करते हुए इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि केंद्र एवं राज्य सरकारों के प्रयासों के कारण रोजगार एवं उद्यम अवसरों में वृद्धि हो रही है. वित्त मंत्री ने कहा कि रेलवे छोटे किसानों, एमएसएमई के लिए नए उत्पाद विकसित करेगा. निर्मला सीतारमण ने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों की रेटिंग के लिए छः,शून्य करोड़ रुपये के कार्यक्रम को अगले पांच सालों में लागू किया जाएगा. आम बजट दो हज़ार बाईस-तेईस पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि डिजिटल आधारभूत ढांचे को बढ़ावा देने की पहल के तहत 'देश स्टैक ई-पोर्टल' शुरू किया जाएगा. ईसीएलजीएस स्कीम एमएसएमई के लिए खास लोन स्कीम है, जिसका ऐलान आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत किया गया था. आर्थिक संकट के मद्देनजर एमएसएमई सेक्टर की सहायता के लिए तेरह मई दो हज़ार बीस को वित्त मंत्रालय द्वारा घोषित बीस लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज के तहत इसका ऐलान किया गया था. . |
असम. असम राज्य परिवहन निगम (एएसटीसी) की बसें 1 जून से शुरू होने वाले राज्यव्यापी विरोध में सड़कों पर चलने के लिए जब्त कर ली जाएंगी।
मिली जानकारी के मुताबिक एएसटीसी कर्मचारियों ने पूरे असम के हर बस अड्डे पर हड़ताल का ऐलान किया है.
एएसटीसी का यह फैसला 771 कर्मचारियों को कथित तौर पर अनुचित तरीकों से रोजगार हासिल करने के आरोप में उनकी ड्यूटी से मुक्त करने के फैसले के आलोक में आया है।
इससे पहले आज, रिपोर्टें सामने आईं कि एएसटीसी अवैध रूप से भर्ती किए गए 771 कर्मचारियों को उनकी नौकरी से निकालने के लिए तैयार है।
सूत्रों ने बताया कि आरोपों के अनुसार, आनंद प्रकाश तिवारी और खगेंद्र नाथ चेतिया के प्रबंध निदेशक के कार्यकाल के दौरान उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना 2,274 कर्मचारियों की भर्ती की गई थी।
"अनुबंध कर्मचारियों की नियुक्ति के संबंध में, यह आरोप लगाया गया है कि पूरे 2274 कर्मचारियों को नियत प्रक्रिया का पालन किए बिना या आरक्षण की प्रणाली का पालन किए बिना भर्ती किया गया था और न ही कोई साक्षात्कार आयोजित किया गया था। इसकी जांच की जानी है और अगर यह सच पाया जाता है, तो तत्कालीन एमडी, एएसटीसी को सरकारी मानदंडों की धज्जियां उड़ाने और ऐसी सरकार के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना चाहिए, "एक नोटिस पढ़ता है।
"तदनुसार, जांच के बाद और मूल्यांकन के बाद परिवहन विभाग एएसटीसी के वर्तमान अनुबंधित कर्मचारियों के माध्यम से जाएगा और केवल आवश्यक और कानूनी रूप से नियुक्त अनुबंधित कर्मचारियों और अन्य कर्मचारियों को उसके तुरंत बाद रिहा करने के लिए उचित निर्देश जारी किया जाएगा। यह अभ्यास 60 दिनों के भीतर पूरा किया जाना है।
| असम. असम राज्य परिवहन निगम की बसें एक जून से शुरू होने वाले राज्यव्यापी विरोध में सड़कों पर चलने के लिए जब्त कर ली जाएंगी। मिली जानकारी के मुताबिक एएसटीसी कर्मचारियों ने पूरे असम के हर बस अड्डे पर हड़ताल का ऐलान किया है. एएसटीसी का यह फैसला सात सौ इकहत्तर कर्मचारियों को कथित तौर पर अनुचित तरीकों से रोजगार हासिल करने के आरोप में उनकी ड्यूटी से मुक्त करने के फैसले के आलोक में आया है। इससे पहले आज, रिपोर्टें सामने आईं कि एएसटीसी अवैध रूप से भर्ती किए गए सात सौ इकहत्तर कर्मचारियों को उनकी नौकरी से निकालने के लिए तैयार है। सूत्रों ने बताया कि आरोपों के अनुसार, आनंद प्रकाश तिवारी और खगेंद्र नाथ चेतिया के प्रबंध निदेशक के कार्यकाल के दौरान उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना दो,दो सौ चौहत्तर कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। "अनुबंध कर्मचारियों की नियुक्ति के संबंध में, यह आरोप लगाया गया है कि पूरे दो हज़ार दो सौ चौहत्तर कर्मचारियों को नियत प्रक्रिया का पालन किए बिना या आरक्षण की प्रणाली का पालन किए बिना भर्ती किया गया था और न ही कोई साक्षात्कार आयोजित किया गया था। इसकी जांच की जानी है और अगर यह सच पाया जाता है, तो तत्कालीन एमडी, एएसटीसी को सरकारी मानदंडों की धज्जियां उड़ाने और ऐसी सरकार के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना चाहिए, "एक नोटिस पढ़ता है। "तदनुसार, जांच के बाद और मूल्यांकन के बाद परिवहन विभाग एएसटीसी के वर्तमान अनुबंधित कर्मचारियों के माध्यम से जाएगा और केवल आवश्यक और कानूनी रूप से नियुक्त अनुबंधित कर्मचारियों और अन्य कर्मचारियों को उसके तुरंत बाद रिहा करने के लिए उचित निर्देश जारी किया जाएगा। यह अभ्यास साठ दिनों के भीतर पूरा किया जाना है। |
भार और तुलाका परिमाण । पलानां द्विसहस्रं च भार एकः प्रकीर्त्तितः ॥ तुला पलशतं ज्ञेया सर्वत्रैवैष निश्चयः ॥ २९ ॥ अर्थ - २००० पलका १ भार होता है और १०० पलकी १ तुला होती है । यह केवल मगध देशमेंही नहीं किंतु सर्व देशमें यही तोलका निश्चय जानना ॥
अब सर्व मान ज्ञापनार्थ एक श्लोककरके मान कहते हैं । मापटंकाक्षबिल्वानि कुडवः प्रस्थमाढकम् ।। राशिर्गोणी खारिकेति यथोत्तरचतुर्गुणा ॥ ३० ॥ अर्थ-मासेसे लेकर खारीपर्यंत एकसे दूसरी तोल चौगुनी जानना । जैसे ४ मासेका १ शाण, ४ शाणका एक कर्ष, ४ कर्षका एक बिल्व, चार बिल्वकी एक अंजली, ४ अंजलीका एक प्रस्थ, चार प्रस्थका १ आटक, चार आढककी एक राशि, ४ राशिकी एक गोणी, ४ गोणीकी एक खारी इस प्रकार एकसे दूसरी चौगुनी जाननी ॥ अब गीली सूखी और दूध आदि पतली वस्तुकी तोल । गुंजादिमानमारभ्य यावत्स्यात्कुडैवस्थितिः ॥ द्रवार्द्रशुष्कद्रव्याणां तावन्मानं समं मतम् ॥ ३१ ॥ प्रस्थादिमानमारभ्य द्विगुणं तद्रवार्द्रयोः ॥
मानं तथा तुलायास्तु द्विगुणं न क्वचिन्मतम् ॥ ३२ ॥ अर्थ-जल आदि पतले पदार्थ और गीली औषध तथा सूखी औषध ये रत्तीसे लेकर कुडवपर्यंत समान लेवे और जल आदि पतले पदार्थ तथा गीली औषध ये लेनी होय तो प्रस्थसे लेकर तुलापर्यंत इनकी तोल सूखी औषधकी अपेक्षा दुप्पट लेवे। तथा तुलासे लेकर द्रोणपर्यंत इनकी तोल दुप्पट लेवे ऐसा कहीं नहीं कहा अत एव इनका मान सूखी औषधीके समान लेवे। इस अभिप्रायको स्नेहपाकमें प्रायः मानते हैं । तत्कालकी लाई हुई औषधको गीली कहते हैं। धूप में सुखाय लीनी अथवा बहुत दिनकी घरी हुई औषधको शुष्क कहते हैं ।
१ तुलापलशतं तासां विंशतिर्भार उच्यते । खारी भारद्वयेनैव स्मृता षड्भाजनाधिका ॥ २ रक्तिकादिषु मानेषु यावन्न कुडवो भवेत् । शुष्कद्रव्याद्रयोस्तावत्तुल्यं मानं प्रकीर्त्तितम् ॥ ३ प्रस्थादिमानमारभ्य द्रव्यादिद्विगुणं त्विदम् । कुडवोपि क्वचित् दृष्टं यथा दंती घृते मतः ॥ ४ शुष्कद्रव्यस्य या मात्रा त्वार्द्रस्य द्विगुणा हि सा । शुष्कस्य गुरुतीक्ष्णत्वात्तस्माद प्रयोजयेत् ॥ | भार और तुलाका परिमाण । पलानां द्विसहस्रं च भार एकः प्रकीर्त्तितः ॥ तुला पलशतं ज्ञेया सर्वत्रैवैष निश्चयः ॥ उनतीस ॥ अर्थ - दो हज़ार पलका एक भार होता है और एक सौ पलकी एक तुला होती है । यह केवल मगध देशमेंही नहीं किंतु सर्व देशमें यही तोलका निश्चय जानना ॥ अब सर्व मान ज्ञापनार्थ एक श्लोककरके मान कहते हैं । मापटंकाक्षबिल्वानि कुडवः प्रस्थमाढकम् ।। राशिर्गोणी खारिकेति यथोत्तरचतुर्गुणा ॥ तीस ॥ अर्थ-मासेसे लेकर खारीपर्यंत एकसे दूसरी तोल चौगुनी जानना । जैसे चार मासेका एक शाण, चार शाणका एक कर्ष, चार कर्षका एक बिल्व, चार बिल्वकी एक अंजली, चार अंजलीका एक प्रस्थ, चार प्रस्थका एक आटक, चार आढककी एक राशि, चार राशिकी एक गोणी, चार गोणीकी एक खारी इस प्रकार एकसे दूसरी चौगुनी जाननी ॥ अब गीली सूखी और दूध आदि पतली वस्तुकी तोल । गुंजादिमानमारभ्य यावत्स्यात्कुडैवस्थितिः ॥ द्रवार्द्रशुष्कद्रव्याणां तावन्मानं समं मतम् ॥ इकतीस ॥ प्रस्थादिमानमारभ्य द्विगुणं तद्रवार्द्रयोः ॥ मानं तथा तुलायास्तु द्विगुणं न क्वचिन्मतम् ॥ बत्तीस ॥ अर्थ-जल आदि पतले पदार्थ और गीली औषध तथा सूखी औषध ये रत्तीसे लेकर कुडवपर्यंत समान लेवे और जल आदि पतले पदार्थ तथा गीली औषध ये लेनी होय तो प्रस्थसे लेकर तुलापर्यंत इनकी तोल सूखी औषधकी अपेक्षा दुप्पट लेवे। तथा तुलासे लेकर द्रोणपर्यंत इनकी तोल दुप्पट लेवे ऐसा कहीं नहीं कहा अत एव इनका मान सूखी औषधीके समान लेवे। इस अभिप्रायको स्नेहपाकमें प्रायः मानते हैं । तत्कालकी लाई हुई औषधको गीली कहते हैं। धूप में सुखाय लीनी अथवा बहुत दिनकी घरी हुई औषधको शुष्क कहते हैं । एक तुलापलशतं तासां विंशतिर्भार उच्यते । खारी भारद्वयेनैव स्मृता षड्भाजनाधिका ॥ दो रक्तिकादिषु मानेषु यावन्न कुडवो भवेत् । शुष्कद्रव्याद्रयोस्तावत्तुल्यं मानं प्रकीर्त्तितम् ॥ तीन प्रस्थादिमानमारभ्य द्रव्यादिद्विगुणं त्विदम् । कुडवोपि क्वचित् दृष्टं यथा दंती घृते मतः ॥ चार शुष्कद्रव्यस्य या मात्रा त्वार्द्रस्य द्विगुणा हि सा । शुष्कस्य गुरुतीक्ष्णत्वात्तस्माद प्रयोजयेत् ॥ |
You Searched For "Rafale"
राहुल गांधी ने कहा- राफेल सौदे में काफी भ्रष्टाचार हुआ है.
राफेल फाइटर जेट की पहली खेप कल यानी 29 जुलाई को अंबाला एयर फोर्स स्टेशन पर दोपहर तक पहुंचने की उम्मीद है.
राफेल 36 सुपरसोनिक ओनीरोल कॉम्बैड एयरक्राफ्ट का पहला बैच है, जिन्हें भारत फ्रांस से खरीद रहा है.
हालांकि, लेनिन ने कहा कि जेट की डिलीवरी के लिए मूल समयरेखा का पालन किया जाएगा।
| You Searched For "Rafale" राहुल गांधी ने कहा- राफेल सौदे में काफी भ्रष्टाचार हुआ है. राफेल फाइटर जेट की पहली खेप कल यानी उनतीस जुलाई को अंबाला एयर फोर्स स्टेशन पर दोपहर तक पहुंचने की उम्मीद है. राफेल छत्तीस सुपरसोनिक ओनीरोल कॉम्बैड एयरक्राफ्ट का पहला बैच है, जिन्हें भारत फ्रांस से खरीद रहा है. हालांकि, लेनिन ने कहा कि जेट की डिलीवरी के लिए मूल समयरेखा का पालन किया जाएगा। |
चर्चा में क्यों?
30 नवंबर, 2021 को बिहार विधानसभा के द्वारा तकनीकी सेवा आयोग संशोधन विधेयक पारित किया गया, जिसमें आयोग के अध्यक्ष के कार्यकाल में परिवर्तन किया गया है।
- संशोधन विधेयक के अनुसार अब तकनीकी सेवा आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल 3 वर्ष या अधिकतम 70 वर्ष की आयु तक कर दिया गया है।
- सदन में विधेयक पेश करते हुए मंत्री विजेंद्र यादव ने बताया कि अब तक के प्रावधान के अनुसार, इस आयोग में नियुक्ति के लिये अनुभव की बाध्यता थी, जिसे इस संशोधन विधेयक में समाप्त कर दिया गया है।
- संशोधित विधेयक के अनुसार, अगर किसी कारणवश आयोग में अध्यक्ष का पद खाली होता है तो आयोग के वरिष्ठतम् सदस्य प्रभारी अध्यक्ष होंगे।
- विदित हो कि इस आयोग का नाम पहले बिहार तकनीकी कर्मचारी चयन आयोग था, परंतु वर्ष 2018 में एक संशोधन के तहत इसका नाम बिहार तकनीकी सेवा आयोग किया गया।
| चर्चा में क्यों? तीस नवंबर, दो हज़ार इक्कीस को बिहार विधानसभा के द्वारा तकनीकी सेवा आयोग संशोधन विधेयक पारित किया गया, जिसमें आयोग के अध्यक्ष के कार्यकाल में परिवर्तन किया गया है। - संशोधन विधेयक के अनुसार अब तकनीकी सेवा आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्ष या अधिकतम सत्तर वर्ष की आयु तक कर दिया गया है। - सदन में विधेयक पेश करते हुए मंत्री विजेंद्र यादव ने बताया कि अब तक के प्रावधान के अनुसार, इस आयोग में नियुक्ति के लिये अनुभव की बाध्यता थी, जिसे इस संशोधन विधेयक में समाप्त कर दिया गया है। - संशोधित विधेयक के अनुसार, अगर किसी कारणवश आयोग में अध्यक्ष का पद खाली होता है तो आयोग के वरिष्ठतम् सदस्य प्रभारी अध्यक्ष होंगे। - विदित हो कि इस आयोग का नाम पहले बिहार तकनीकी कर्मचारी चयन आयोग था, परंतु वर्ष दो हज़ार अट्ठारह में एक संशोधन के तहत इसका नाम बिहार तकनीकी सेवा आयोग किया गया। |
आईएमडी के मुताबिक दिन में आसमान में बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। दिल्ली में अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के आस-पास रहने का अनुमान है।
मौसम विभाग के मुताबिक सुबह साढ़े आठ बजे तक शहर में औसतम 43. 6 मिलीमीटर बारिश हुई। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक शाम तक मध्यम बारिश हो सकती है।
मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले 19 सालों में मानसून इस बार दो सप्ताह से अधिक देरी से दिल्ली पहुंचा है। वर्ष 2002 में मानसून 19 जुलाई को दिल्ली पहुंचा था।
देश के लगभग सभी हिस्सों में मानसून दस्तक दे चुका है, लेकिन राजधानी दिल्ली में जून के अंत तक भी मानसून आने की संभावना नहीं है।
| आईएमडी के मुताबिक दिन में आसमान में बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। दिल्ली में अधिकतम तापमान अड़तीस डिग्री सेल्सियस के आस-पास रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के मुताबिक सुबह साढ़े आठ बजे तक शहर में औसतम तैंतालीस. छः मिलीमीटर बारिश हुई। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक शाम तक मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले उन्नीस सालों में मानसून इस बार दो सप्ताह से अधिक देरी से दिल्ली पहुंचा है। वर्ष दो हज़ार दो में मानसून उन्नीस जुलाई को दिल्ली पहुंचा था। देश के लगभग सभी हिस्सों में मानसून दस्तक दे चुका है, लेकिन राजधानी दिल्ली में जून के अंत तक भी मानसून आने की संभावना नहीं है। |
यहाँ homoeopathy विषय की शिक्षा दी जाती है और चिकित्सालय में रोगियों को स्वास्थ्य लाभ दिया जाता है ! श्रेणीःग्वालियर में शिक्षा.
1 संबंधः ग्वालियर।
ग्वालियर भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त का एक प्रमुख शहर है। भौगोलिक दृष्टि से ग्वालियर म.प्र.
| यहाँ homoeopathy विषय की शिक्षा दी जाती है और चिकित्सालय में रोगियों को स्वास्थ्य लाभ दिया जाता है ! श्रेणीःग्वालियर में शिक्षा. एक संबंधः ग्वालियर। ग्वालियर भारत के मध्य प्रदेश प्रान्त का एक प्रमुख शहर है। भौगोलिक दृष्टि से ग्वालियर म.प्र. |
मुंबईः दादर और नागर हवेली लोकसभा सीट में उपचुनाव के नतीजे आ चुके हैं। जी दरअसल इस सीट पर शिवसेना (Shiv Sena) ने जीत अपने नाम कर ली है। आपको बता दें कि शिवसेना के लिए जीत खास है क्योंकि महाराष्ट्र के बाहर शिवसेना ने ये पहली कोई सीट जीती है। ऐसा होने के चलते शिवसेना में खुशी का माहौल है। अब जीत के बाद शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत का बयान सामने आया है।
हाल ही में उन्होंने कहा कि 'ये राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ता हमारा पहला कदम है। ' इसी के साथ संजय राउत ने यह भी कहा कि, 'महाराष्ट्र के बाहर पहली बार शिवसेना ने जीत हासिल की है। 2024 में जब लोकसभा चुनाव होंगे तो स्थिति ऐसी नहीं होगी, हम सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। ' वहीं उनके अलावा CM उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ने एक ट्वीट किया जो मराठी भाषा में है। इसमें उन्होंने लिखा है- 'दादरा नगर हवेलीत आज भगवा फडकला। लोकसभा पोटनिवडणुकीत श्रीमती कलाबेन डेलकर जी यांचा विजय निश्चितच एका नव्या विकास पर्वाची नांदी आहे। अन्याय आणि हुकूमशाही विरुद्ध जनतेने दिलेला हा कौल असून आता जनतेच्या हितासाठी दिल्लीत शिवसेनेचा आवाज आणखी बुलंद होईल, हा विश्वास आहे। '
वहीं अपने बयान में संजय राउत ने कहा, 'दादर नागर हवेली में जो नतीजे आए हैं वो केवल शुरुआत है। अब आने वाले समय में शिवसेना, दमन और दक्षिण गुजरात में भी चुनावी मैदान में उतरेगी। यूपी चुनाव में भी पार्टी मैदान में उतरने जा रही है। '
| मुंबईः दादर और नागर हवेली लोकसभा सीट में उपचुनाव के नतीजे आ चुके हैं। जी दरअसल इस सीट पर शिवसेना ने जीत अपने नाम कर ली है। आपको बता दें कि शिवसेना के लिए जीत खास है क्योंकि महाराष्ट्र के बाहर शिवसेना ने ये पहली कोई सीट जीती है। ऐसा होने के चलते शिवसेना में खुशी का माहौल है। अब जीत के बाद शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत का बयान सामने आया है। हाल ही में उन्होंने कहा कि 'ये राष्ट्रीय राजनीति की ओर बढ़ता हमारा पहला कदम है। ' इसी के साथ संजय राउत ने यह भी कहा कि, 'महाराष्ट्र के बाहर पहली बार शिवसेना ने जीत हासिल की है। दो हज़ार चौबीस में जब लोकसभा चुनाव होंगे तो स्थिति ऐसी नहीं होगी, हम सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। ' वहीं उनके अलावा CM उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ने एक ट्वीट किया जो मराठी भाषा में है। इसमें उन्होंने लिखा है- 'दादरा नगर हवेलीत आज भगवा फडकला। लोकसभा पोटनिवडणुकीत श्रीमती कलाबेन डेलकर जी यांचा विजय निश्चितच एका नव्या विकास पर्वाची नांदी आहे। अन्याय आणि हुकूमशाही विरुद्ध जनतेने दिलेला हा कौल असून आता जनतेच्या हितासाठी दिल्लीत शिवसेनेचा आवाज आणखी बुलंद होईल, हा विश्वास आहे। ' वहीं अपने बयान में संजय राउत ने कहा, 'दादर नागर हवेली में जो नतीजे आए हैं वो केवल शुरुआत है। अब आने वाले समय में शिवसेना, दमन और दक्षिण गुजरात में भी चुनावी मैदान में उतरेगी। यूपी चुनाव में भी पार्टी मैदान में उतरने जा रही है। ' |
गुवाहाटी, 11 जुलाई असम पुलिस ने दो अलग-अलग मुठभेड़ों में कम से कम एक और आरोपी को मार गिराया जबकि एक अन्य के घायल होने की खबर है। भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के दो महीने पहले सत्ता में आने के बाद सुरक्षा बलों द्वारा मुठभेड़ के मामले बढ़े हैं।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि नवीनतम मुठभेड़ नौगांव जिले में शनिवार रात को हुई।
अधिकारी ने कहा कि एक आरोपी की जांघ में गोली लगी है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है जबकि दूसरे को गिरफ्तार कर लिया गया है।
दूसरी घटना ढिंग पुलिस थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई जब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में एक दल सूचना मिलने के बाद एक कुख्यात डकैत को पकड़ने के लिये पहुंचा था।
कोकराझार और चिरांग जिलों में शनिवार को अलग- अलग घटनाओं में एक हत्या आरोपी मारा गया और हिरासत से भागने का प्रयास करने पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में दो कथित गांजा तस्कर घायल हो गए।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
| गुवाहाटी, ग्यारह जुलाई असम पुलिस ने दो अलग-अलग मुठभेड़ों में कम से कम एक और आरोपी को मार गिराया जबकि एक अन्य के घायल होने की खबर है। भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के दो महीने पहले सत्ता में आने के बाद सुरक्षा बलों द्वारा मुठभेड़ के मामले बढ़े हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि नवीनतम मुठभेड़ नौगांव जिले में शनिवार रात को हुई। अधिकारी ने कहा कि एक आरोपी की जांघ में गोली लगी है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है जबकि दूसरे को गिरफ्तार कर लिया गया है। दूसरी घटना ढिंग पुलिस थाना क्षेत्र के एक गांव में हुई जब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में एक दल सूचना मिलने के बाद एक कुख्यात डकैत को पकड़ने के लिये पहुंचा था। कोकराझार और चिरांग जिलों में शनिवार को अलग- अलग घटनाओं में एक हत्या आरोपी मारा गया और हिरासत से भागने का प्रयास करने पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में दो कथित गांजा तस्कर घायल हो गए। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है। |
स्मार्टफोन निर्माता कंपनी OPPO ने पिछले दिनों अपनी A सीरीज के तहत OPPO A31 स्मार्टफोन को इंडोनेशिया में लॉन्च किया गया था। जिसके बाद भारतीय यूजर्स का इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, वहीं अब कंपनी ने यूजर्स के इंतजार पर विराम लगाते हुए आखिरकार इस स्मार्टफोन को भारत में लॉन्च कर दिया है। बजट रेंज के तहत लॉन्च किए गए इस स्मार्टफोन में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप, 6GB रैम और 4230mAh की बैटरी दी गई है। यह फोन सभी रिटेल स्टोर्स पर सेल के लिए उपलब्ध होगा।
OPPO A31 को भारतीय बाजार में दो स्टोरेज वेरिएंट लॉन्च किया गया है। फोन के 4GB रैम +64GB इंटरनल स्टोरेज वेरिएंटी की कीमत Rs 11,490 है। जबकि 6GB रैम +128GB इंटरनल मेमोरी वाले मॉडल को Rs 13,990 की कीमत में खरीदा जा सकता है। यह फोन मिस्ट्री ब्लैक और फेंटेसी व्हाइट कलर वेरिएंट में उपलब्ध होगा।
OPPO A31 में 6. 5 इंच का वॉटरड्रॉप नॉच डिस्प्ले दिया गया है, जिसका स्क्रीन रेजोल्यूशन 1600 x 720 पिक्सल और आस्पेक्ट रेश्यो 20:9 है। यह फोन Android 9 Pie ओएस पर आधारित है और इसे MediaTek Helio P95 चिपसेट पर पेश किया गया है। फोन में पावर बैकअप के लिए 4,230mAh की बैटरी दी गई है। फोन में सिक्योरिटी के लिए यूजर्स को फिंगरप्रिंट सेंसर की सुविधा मिलेगी।
| स्मार्टफोन निर्माता कंपनी OPPO ने पिछले दिनों अपनी A सीरीज के तहत OPPO Aइकतीस स्मार्टफोन को इंडोनेशिया में लॉन्च किया गया था। जिसके बाद भारतीय यूजर्स का इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, वहीं अब कंपनी ने यूजर्स के इंतजार पर विराम लगाते हुए आखिरकार इस स्मार्टफोन को भारत में लॉन्च कर दिया है। बजट रेंज के तहत लॉन्च किए गए इस स्मार्टफोन में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप, छःGB रैम और चार हज़ार दो सौ तीसmAh की बैटरी दी गई है। यह फोन सभी रिटेल स्टोर्स पर सेल के लिए उपलब्ध होगा। OPPO Aइकतीस को भारतीय बाजार में दो स्टोरेज वेरिएंट लॉन्च किया गया है। फोन के चारGB रैम +चौंसठGB इंटरनल स्टोरेज वेरिएंटी की कीमत ग्यारह रुपया,चार सौ नब्बे है। जबकि छःGB रैम +एक सौ अट्ठाईसGB इंटरनल मेमोरी वाले मॉडल को तेरह रुपया,नौ सौ नब्बे की कीमत में खरीदा जा सकता है। यह फोन मिस्ट्री ब्लैक और फेंटेसी व्हाइट कलर वेरिएंट में उपलब्ध होगा। OPPO Aइकतीस में छः. पाँच इंच का वॉटरड्रॉप नॉच डिस्प्ले दिया गया है, जिसका स्क्रीन रेजोल्यूशन एक हज़ार छः सौ x सात सौ बीस पिक्सल और आस्पेक्ट रेश्यो बीस:नौ है। यह फोन Android नौ Pie ओएस पर आधारित है और इसे MediaTek Helio Pपचानवे चिपसेट पर पेश किया गया है। फोन में पावर बैकअप के लिए चार,दो सौ तीसmAh की बैटरी दी गई है। फोन में सिक्योरिटी के लिए यूजर्स को फिंगरप्रिंट सेंसर की सुविधा मिलेगी। |
से इन्होंने दो पत्र लिखे - एक काशिराज को और दूसरा अपने छोटे भाई साहब को। उन पत्रों का सारांश यही था कि उन्होंने अब अपने पूर्वजों की संपत्ति खाना छोड़ दिया है । इसी काल में यह प्रायः एक पक्ष तक दुर्गाकुंड में केशोराम के बाग में भी रहे थे । इस प्रकार कुछ दिनों तक यह बाहर ही बाहर रहने के अनंतर पुनः अपने पूर्वजों के गृह पर आए थे।
इस प्रकार देश, समाज, मातृभाषा आदि की उन्नति तथा अपनी कौटुबिक और आदि की चिंताओं से ग्रस्त होने के कारण इनका शरीर जर्जर हो रहा था। इसी समय मेवाड़ पति महाराणा सज्जन सिंह के आग्रह तथा श्रीनाथ जी के दर्शन की लालसा से सन् १८८२ ई० में यह उदयपुर गए । इतनी लम्बी यात्रा के प्रयास को इनका जीर्ण शीर्ण शरीर नहीं सह सका । ये बीमार पड़ गए और श्वास, खाँसी तथा ज्वर तीनों प्रबल हो उठे यों ही प्राणभय उपस्थित था । उस पर एकाएक एक दिन हैजा का इन पर कड़ा आक्रमण हुआ । यहाँ तक कि कुल शरीर ऐंठने लगा पर अभी आयुष्य थी, इससे ये बच गए । सं० १९४० चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को लिखे गए नाटक J के समर्पण में लिखते हैं - 'नाथ ! आज एक सप्ताह होता है कि मेरे इस मनुष्य जीवन का अंतिम अंक हो चुकता, किन्तु न जाने क्या सोच कर और किस पर अनुग्रह करके उसकी आज्ञा नहीं हुई। नहीं तो यह ग्रंथ प्रकाश भी न होने पाता । यह भी आपही का खेल है कि आज इसके प्रकाश का दिन आया।'
अभी ये पूर्णतया स्वस्थ नहीं हुए थे कि शरीर को चिंता छोड़कर वे अपने लिखने-पढ़ने आदि कार्यों में लग गए। दवा भी कौन करता है, जब रोग प्रबल थे सभी को चिंता थी पर जब वे निर्बल हुए तब अन्य सांसारिक विचारादि प्रबल हो गए। अस्तु, रोग इस प्रकार दब गए थे, पर जड़ मूल के नष्ट नहीं हुए थे। रोग दिन दिन अधिक होता गया, महीनों में शरीर अच्छा हुआ। लोगों ने ईश्वर को धन्यवाद दिया। यद्यपि देखने कुछ रोज तक रोग मालूम न पड़ा पर भीतर रोग बना रहा और जड़ से नहीं गया बीच में दो एक बार उभड़ आया था पर शांत होगया था। इधर
दो महीने से फिर श्वास चलता था, कभी २ ज्वर का आवेश भी हो आता था औषधि होती रही, शरीर कृशित तो हो चला था पर ऐसा नहीं था कि जिस से किसी काम में हानि होती, श्वास अधिक हो चला । क्षयी के चिन्ह पैदा हुए । एकाएक दूसरी जनवरी से बीमारी बढ़ने लगी। दवा इलाज सब कुछ होता था पर रोग बढ़ता जाता था । ६ वीं तारीख को प्रातःकाल के समय जब ऊपर से हाल पूछने के समय मजदूरनी आई तो आप ने कहा कि जाकर कह दो कि हमारे जीवन के नाटक का प्रोग्राम नित्य नया नया छप रहा है पहिले दिन ज्वर की, दूसरे दिन दर्द की, तीसरे दिन खाँसी की सीन हो चुकी देखें लास्ट नाइट कब होती है, उसी दिन दोपहर से श्वास वेग से आने लगा कफ में रुधिर आगया। डाक्टर वैद्य अनेक मौजूद थे और औषधि भी परामर्श के साथ करते थे, परन्तु 'मर्ज बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की।' प्रतिक्षण में बाबू साहब डाक्टर और वैद्यों से नींद आने और कफ के दूर होने की प्रार्थना करते थे, पर करें क्या काल दुष्ट तो सिर पर चढ़ा थो, कोई जाने क्या । अन्ततोगत्वा बात करते ही करते पौने दस बजे रात को भयंकर दृश्य उपस्थित हुआ । अन्त तक श्रीकृष्ण का ध्यान बना रहा । देहावसान समय में 'श्रीकृष्ण ! श्रीराधाकृष्ण ! हेराम ! आते हैं मुख दिखलाओ" कहा, और कोई दोहा पढ़ा जिस में से 'श्रीकृष्ण ' 'सहित स्वामिनी, इतना धीरे स्वर से स्पष्ट सुनाई दिया। देखते ही देखते प्यारे हरिश्चन्द्रजी हम लोगों की आँखों से दूर होगए । चन्द्रमुख कुम्हिला कर चारों ओर अन्धकार होगया। सारे घर में मातम छा गया, गली गली में हाहाकार मचा और सब काशीवासियों का कलेजा फटने लगा । लेखनी अब आगे नहीं बढ़ती । बाबू साहिब चरणपादुका पर...... ।
ऐसे लोकप्रिय देश हितैषी के लिये यथा योग्य शोक प्रकाश किया गया था । शोक प्रकाशक तारों और पत्रों के ढेर लग गये थे । कितनी कविताएँ, लेख तथा चरित्र छपे । एक संग्रह शोकावली के नाम से पीछे से प्रकाशित भी हुआ था। इनके स्मारक स्थापित करने की चर्चा बहुत उठी पर अब केवल 'कहेंगे सबै ही नैन नीर भरि भरि पाछे प्यारे हरिचन्द्र की कहानी रहि
जाएगी।' बस, भारत के देश से उस का कोई भी शुभचिंतक ऐसी कहानी से अधिक पुरस्कार में या स्मृति में क्या माँगने की आशा कर सकता है ?
भारतेन्दु बा० हरिश्चन्द्र का देहावसान माघ कृ० ६ सं० १९४१ वि० (६ जनवरी सन् १८८५ ई०) को हुआ था । आपकी अवस्था उस समय चौंतीस वर्ष चार महीने की थी । यद्यपि भारतेन्दु को अस्त हुए पचास वर्ष होते आए पर आज भी उसकी ज्योत्स्ना मंद नहीं हुई है । स्वर्गीय पं० श्रीधर पाठक ने ठीक ही कहा है किजब लौं भारत भूमि मध्य आरजकुज बासा । जब लौं आरज धर्म माहिं भारज विश्वासा ।। जब लौं गुन श्रागरी नागरी आरज बानी । जब लौं आरज बानी के आरज अभिमानी ॥
तब लौं यह तुम्हरो नाम थिर चिरजीवी रहिहै अटल । नित चंद सूर सम सुमिरिहैं हरिचंदहु सज्जन सकल ।।
संतति तथा स्त्री
भारतेन्दु जी को दो पुत्र और एक पुत्री हुई थी, पर प्रथम दोनों शैशवावस्था ही में जाते रहे । इनकी पुत्री भी अत्यंत निर्बल थी और शैशवकाल में सदा रुग्ण रहती थी, यहाँ तक कि इनका शिर एक ओर लटका सा रहता था । इन्हें भारतेन्दु जी की एक मात्र संतान कहलाने का सौभाग्य प्राप्त था, इससे यह सब रोगों से मुक्त हो गई। इनकी शिक्षा का भी अच्छा प्रबन्ध हुआ था। यह हिन्दी तथा बंगला अच्छी तरह जानती थीं और संस्कृत का इतना ज्ञान था कि श्रीमद्भागवत आदि का परायण कर लेती थीं। इनका विवाह सं० १९३७ वि० के वैशाख मास ( सन १८८० की मई ) में गोलोकवासी बा० बुलाकीदास जी सोनावाले के भाई बा० देवीप्रसाद जी के पुत्र स्वर्गीय बा० बलदेवदास जी से भारतेन्दु जी ने स्वयं किया था। इन्हीं के विवाह में गाली गाना बन्द किया गया था और पत्तलें परोसकर तब जाति भाइयों को बैठाया गया था। उसके पहिले जाति भाइयों को बैठाकर तब
पत्तलें परसी जाती थीं, जिस कार्य में प्रायः आघंटे लग जाते थे। इनमें
असुविधाएँ थीं। एक तो अच्छी अच्छी खाद्य वस्तु सामने रहते हुए भी लोग बैठे हुये केवल सुगंधित लिया करते थे और दूसरे उन्हें गाली सुनने का भी अधिक समय तक मज़ा मिला करता था । उसी समय से गालीगायन कम होता गया और अब प्रायः बंद सा हो गया है । यह विवाह बड़े धूमधाम से हुआ था। इनका नाम श्रीमती विद्यावती था। इन्हें पाँच पुत्र तथा तीन पुत्रियाँ हुई थीं। एक पुत्री विवाह योग्य होकर तथा दो शैशवावस्था ही में कालकवलित हो गई। पुत्र पाँचों वर्तमान हैं। इनके नाम वयानुक्रम से J बा० ब्रजरमणदास, व्रजरत्नदास ( ननिहाल का नाम रेवतीरमरणदास), ब्रजमोहनदास, ब्रजजीवनदास और ब्रजभूषणदास हैं। प्रथम हिन्दी तथा उर्दू का ज्ञान प्राप्त कर कोठो के काम में लग गए और अन्य सभी ने अंग्रेजी की शिक्षा पायी। द्वितीय इस चरित्र का लेखक है। तृतीय तथा पंचम ने एंट्रेंस पास कर आगे पढ़ना छोड़ दिया । इन्होंने गृह पर ही संस्कृत का भी अच्छा ज्ञान प्राप्त कर लिया है। इनमें अंतिम दो मातृ-भाषा की कुछ सेवा करते रहते हैं।
सं० १९५७ वि० के अगहन कृष्ण २ को श्रीमती विद्यावती का और सं० १९८६ के चैत्र कृष्ण २ को पूज्यपाद बा० बलदेवदास जी का स्वर्गवास हो गया ।
भारतेन्दु जी के छोटे भाई बा० गोकुलचंद्र जी को दो पुत्र और दो पुत्री थीं। पुत्रों का नाम बा० कृष्णचन्द्र तथा ब्रजचन्द्र था । प्रथम के तीन तथा द्वितीय के दो पुत्र वर्तमान हैं। ये सभी अभी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं । बा० कृष्णचंद्र के पुत्रों का नाम बा० मोतीचंद, बा० लक्ष्मीचंद तथा बा० नारायणचंद्र है और बा० ब्रजचंद्र के पुत्रों का नाम बा० कुमुदचंद्र और बा० मोहनचंद्र हैं ।
भारतेन्दुजी की धर्मपत्नी श्रीमती मन्नोदेवी का आषाढ़ कृष्ण ७ सं० १९८३ वि० ( सन् १९२६ ई० ) को, बयालीस वर्ष तक वैधव्य भोगकर गंगालाभ हुआ था। इनका अपने भ्रातृ-पुत्रों पर बहुत ही स्नेह था । स्वर्गीय बा०
कृष्णचन्द्र जी नित्य ही अर्द्धरात्रि के बाद एक दो बजे बाग से घर लौटते थे और यह बराबर उनके सरे बैठी रहती थीं तथा उन्हें भोजन कराकर तब सोतीं थीं । वे दोनों भाई भी इन्हें बहुत मानते थे और उन लोगों ने अंत तक उसी प्रकार निबाहा भी था । इस लंबे वैधव्य के कारण इन्हें कष्ट भी बहुत उठाना पड़ा। कई वर्ष तक आँखों से न दिखलाई पड़ने के कारण तथा रोग जर्जरित होने से घरवालों को भी तकलीफ थी। कुछ लोगों के इस कथन पर कि 'अमुक तो सर्वस्व फूँक कर चल दिए और इन्हें हम लोगों के जान अपना का ग्राहक छोड़ गए' इन्हें मानसिक कष्ट विशेष हुआ था तथा इन्होंने एक बार कहा भी था कि 'अब हम अधिक न चलेंगे, हमारी क्रिया के लिए विशेष समारोह की जरूरत नहीं है, हमारी उंगली के ये छल्ले हमें फूंकने के लिए बहुत होंगे।' समय तू जो न चाहे कर दिखलावे ।
चन्द्र में कलंक
मनुष्य का सबसे बढ़कर मनोरंजन होता है। उपन्यास, नाटक आदि भी कल्पित मनुष्यों की जीवनियाँ ही हैं। उत्तम जीवनी कभी भी समय के पीछे नहीं पड़ सकती। किसी महान् पुरुष की जीवनी से यही उपदेश प्रधानतः मिलता है कि मनुष्य क्या हो सकता है, कहाँ तक ऊँचे उठ सकता है और मानव समाज के लिये वह कहाँ तक हितकर हो सकता है। इनको पढ़ने से हमें उत्साह मिलता है, हमारा साहस बढ़ता है। महान् व्यक्तियों से, जो जब नहीं रह गए हैं या वर्तमान हैं, हम बराबर नहीं मिल सकते पर उनकी सच्ची जीवनो यदि हमारे पास है तो हम सर्वदा उनसे सत्संग रख सकते हैं। पर मनुष्य तभी मनुष्य रहेगा जब उसके दोष आदि भी प्रकट कर दिए जायेंगे । मनुष्य देवता नहीं है, उसमें दोष रहेंगे, किसी में एक है तो किसी में कुछ और है। यदि एक महात्मा की जीवनी से हम दोषों को निकाल देते हैं तो हम ऐसा निर्दोष आदर्श उपस्थित कर देते हैं जिसको अनुगमन करने का लोग साहस छोड़ बैठेंगे। उसे मनुष्योपरि या दैवी समझेंगे, जिससे जीवनी लेखक का परिश्रम निष्फल सा ही जाता है। तात्पर्य इतना ही
है कि जीवनचरित्र में गुणों का विवेचन करते हुए दोषों का भी, यदि हों, तो विश्लेषण अवश्य कर देना चाहिए। सत्य कटु होता है और नीति भी कहती है कि 'सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम् ।' पर सच्चे दिल से मृत महात्माओं के विशिष्ट दोषों का उल्लेख अवश्य होना ही चाहिए ।
साधारणतः कवि सौंदर्योपासक होता है। सौंदर्य से केवल स्त्री- सुलभ सौंदर्य ही से नहीं तात्पर्य है । गुलाब में सौंदर्य है तो उसकी नई डाल के नये निकले हुए प्याजी रंग के काँटों में भी कुछ न कुछ सौंदर्य रहता है। बड़ों के गुरण तथा दोष दोनों हो में कुछ न कुछ सार होता है। गोस्वामी तुलसीदास जी से भक्त श्रेष्ठ को भी इसी सौंदर्योपासना ही से भक्ति की दीक्षा मिली थी । भारतेन्दु जी की जीवनी देखने से यह ज्ञात होता है कि 'वर के शुभचिंतकों' ने उन्हें जितना ही 'लायक' बनाने का प्रयत्न किया उतने ही वे मीराबाई के समान 'नालायक' होते गये और दोनों ही पक्ष ने अपने प्रयास में डटे रहे । फलतः आरम्भ में यह परकीया नायिकाओं के फेर में कुछ दिन पड़ कर अपने चित्त को सान्त्वना देते रहे पर कुछ ही दिन बाद इन्होंने अपने को सँभाला और श्रीकृष्ण भगवान के रंग में ऐसे रंग गए कि अंत समय तक 'श्रीकृष्ण सहित स्वामिनी' रहते रह गये । एक बात और पहले ही कह देना चाहिए। इनकी प्रवृत्ति कुछ साधुओं की सी थी । धन के विषय में यह कथन बिल्कुल ही ठीक है। अभी दस बीस हज़ार आ गया तो दोनों हाथों से लुटाकर बाँट-बूँट सफाचट कर दिया। यह फिक्र नहीं रहती थी कि कल चिट्ठियों के लिये दो रुपये किसी से उधार लेने पड़े । संचयन की बुद्धि इनमें बिल्कुल थी ही नहीं। शरीर पर के कपड़े तक दूसरों को देकर स्वयं ठंढे में बैठे रह जाना साधु ही का काम था । वेश्या का सहवास इनके लिये आवश्यक ही था। आज इस बहाने तो कल उस बहाने जलसे होते रहते थे गुरणी गायिका अपना गुण अवश्य दिखाएगी तथा गुण-ग्राही पुरुष उसकी प्रशंसा करेगा ही। इस प्रकार वार्तालाप होते हुए आपस में परिचय होना अनि • वार्य था । अंधेर नगरी में उस समय की प्रसिद्ध गानेवाली कई वेश्याओं के नाम दिए गए हैं। ये सभी भारतेन्दु जी के दरबार में आती-जाती थीं। इन्हीं | से इन्होंने दो पत्र लिखे - एक काशिराज को और दूसरा अपने छोटे भाई साहब को। उन पत्रों का सारांश यही था कि उन्होंने अब अपने पूर्वजों की संपत्ति खाना छोड़ दिया है । इसी काल में यह प्रायः एक पक्ष तक दुर्गाकुंड में केशोराम के बाग में भी रहे थे । इस प्रकार कुछ दिनों तक यह बाहर ही बाहर रहने के अनंतर पुनः अपने पूर्वजों के गृह पर आए थे। इस प्रकार देश, समाज, मातृभाषा आदि की उन्नति तथा अपनी कौटुबिक और आदि की चिंताओं से ग्रस्त होने के कारण इनका शरीर जर्जर हो रहा था। इसी समय मेवाड़ पति महाराणा सज्जन सिंह के आग्रह तथा श्रीनाथ जी के दर्शन की लालसा से सन् एक हज़ार आठ सौ बयासी ईशून्य में यह उदयपुर गए । इतनी लम्बी यात्रा के प्रयास को इनका जीर्ण शीर्ण शरीर नहीं सह सका । ये बीमार पड़ गए और श्वास, खाँसी तथा ज्वर तीनों प्रबल हो उठे यों ही प्राणभय उपस्थित था । उस पर एकाएक एक दिन हैजा का इन पर कड़ा आक्रमण हुआ । यहाँ तक कि कुल शरीर ऐंठने लगा पर अभी आयुष्य थी, इससे ये बच गए । संशून्य एक हज़ार नौ सौ चालीस चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को लिखे गए नाटक J के समर्पण में लिखते हैं - 'नाथ ! आज एक सप्ताह होता है कि मेरे इस मनुष्य जीवन का अंतिम अंक हो चुकता, किन्तु न जाने क्या सोच कर और किस पर अनुग्रह करके उसकी आज्ञा नहीं हुई। नहीं तो यह ग्रंथ प्रकाश भी न होने पाता । यह भी आपही का खेल है कि आज इसके प्रकाश का दिन आया।' अभी ये पूर्णतया स्वस्थ नहीं हुए थे कि शरीर को चिंता छोड़कर वे अपने लिखने-पढ़ने आदि कार्यों में लग गए। दवा भी कौन करता है, जब रोग प्रबल थे सभी को चिंता थी पर जब वे निर्बल हुए तब अन्य सांसारिक विचारादि प्रबल हो गए। अस्तु, रोग इस प्रकार दब गए थे, पर जड़ मूल के नष्ट नहीं हुए थे। रोग दिन दिन अधिक होता गया, महीनों में शरीर अच्छा हुआ। लोगों ने ईश्वर को धन्यवाद दिया। यद्यपि देखने कुछ रोज तक रोग मालूम न पड़ा पर भीतर रोग बना रहा और जड़ से नहीं गया बीच में दो एक बार उभड़ आया था पर शांत होगया था। इधर दो महीने से फिर श्वास चलता था, कभी दो ज्वर का आवेश भी हो आता था औषधि होती रही, शरीर कृशित तो हो चला था पर ऐसा नहीं था कि जिस से किसी काम में हानि होती, श्वास अधिक हो चला । क्षयी के चिन्ह पैदा हुए । एकाएक दूसरी जनवरी से बीमारी बढ़ने लगी। दवा इलाज सब कुछ होता था पर रोग बढ़ता जाता था । छः वीं तारीख को प्रातःकाल के समय जब ऊपर से हाल पूछने के समय मजदूरनी आई तो आप ने कहा कि जाकर कह दो कि हमारे जीवन के नाटक का प्रोग्राम नित्य नया नया छप रहा है पहिले दिन ज्वर की, दूसरे दिन दर्द की, तीसरे दिन खाँसी की सीन हो चुकी देखें लास्ट नाइट कब होती है, उसी दिन दोपहर से श्वास वेग से आने लगा कफ में रुधिर आगया। डाक्टर वैद्य अनेक मौजूद थे और औषधि भी परामर्श के साथ करते थे, परन्तु 'मर्ज बढ़ता गया ज्यों ज्यों दवा की।' प्रतिक्षण में बाबू साहब डाक्टर और वैद्यों से नींद आने और कफ के दूर होने की प्रार्थना करते थे, पर करें क्या काल दुष्ट तो सिर पर चढ़ा थो, कोई जाने क्या । अन्ततोगत्वा बात करते ही करते पौने दस बजे रात को भयंकर दृश्य उपस्थित हुआ । अन्त तक श्रीकृष्ण का ध्यान बना रहा । देहावसान समय में 'श्रीकृष्ण ! श्रीराधाकृष्ण ! हेराम ! आते हैं मुख दिखलाओ" कहा, और कोई दोहा पढ़ा जिस में से 'श्रीकृष्ण ' 'सहित स्वामिनी, इतना धीरे स्वर से स्पष्ट सुनाई दिया। देखते ही देखते प्यारे हरिश्चन्द्रजी हम लोगों की आँखों से दूर होगए । चन्द्रमुख कुम्हिला कर चारों ओर अन्धकार होगया। सारे घर में मातम छा गया, गली गली में हाहाकार मचा और सब काशीवासियों का कलेजा फटने लगा । लेखनी अब आगे नहीं बढ़ती । बाबू साहिब चरणपादुका पर...... । ऐसे लोकप्रिय देश हितैषी के लिये यथा योग्य शोक प्रकाश किया गया था । शोक प्रकाशक तारों और पत्रों के ढेर लग गये थे । कितनी कविताएँ, लेख तथा चरित्र छपे । एक संग्रह शोकावली के नाम से पीछे से प्रकाशित भी हुआ था। इनके स्मारक स्थापित करने की चर्चा बहुत उठी पर अब केवल 'कहेंगे सबै ही नैन नीर भरि भरि पाछे प्यारे हरिचन्द्र की कहानी रहि जाएगी।' बस, भारत के देश से उस का कोई भी शुभचिंतक ऐसी कहानी से अधिक पुरस्कार में या स्मृति में क्या माँगने की आशा कर सकता है ? भारतेन्दु बाशून्य हरिश्चन्द्र का देहावसान माघ कृशून्य छः संशून्य एक हज़ार नौ सौ इकतालीस विशून्य को हुआ था । आपकी अवस्था उस समय चौंतीस वर्ष चार महीने की थी । यद्यपि भारतेन्दु को अस्त हुए पचास वर्ष होते आए पर आज भी उसकी ज्योत्स्ना मंद नहीं हुई है । स्वर्गीय पंशून्य श्रीधर पाठक ने ठीक ही कहा है किजब लौं भारत भूमि मध्य आरजकुज बासा । जब लौं आरज धर्म माहिं भारज विश्वासा ।। जब लौं गुन श्रागरी नागरी आरज बानी । जब लौं आरज बानी के आरज अभिमानी ॥ तब लौं यह तुम्हरो नाम थिर चिरजीवी रहिहै अटल । नित चंद सूर सम सुमिरिहैं हरिचंदहु सज्जन सकल ।। संतति तथा स्त्री भारतेन्दु जी को दो पुत्र और एक पुत्री हुई थी, पर प्रथम दोनों शैशवावस्था ही में जाते रहे । इनकी पुत्री भी अत्यंत निर्बल थी और शैशवकाल में सदा रुग्ण रहती थी, यहाँ तक कि इनका शिर एक ओर लटका सा रहता था । इन्हें भारतेन्दु जी की एक मात्र संतान कहलाने का सौभाग्य प्राप्त था, इससे यह सब रोगों से मुक्त हो गई। इनकी शिक्षा का भी अच्छा प्रबन्ध हुआ था। यह हिन्दी तथा बंगला अच्छी तरह जानती थीं और संस्कृत का इतना ज्ञान था कि श्रीमद्भागवत आदि का परायण कर लेती थीं। इनका विवाह संशून्य एक हज़ार नौ सौ सैंतीस विशून्य के वैशाख मास में गोलोकवासी बाशून्य बुलाकीदास जी सोनावाले के भाई बाशून्य देवीप्रसाद जी के पुत्र स्वर्गीय बाशून्य बलदेवदास जी से भारतेन्दु जी ने स्वयं किया था। इन्हीं के विवाह में गाली गाना बन्द किया गया था और पत्तलें परोसकर तब जाति भाइयों को बैठाया गया था। उसके पहिले जाति भाइयों को बैठाकर तब पत्तलें परसी जाती थीं, जिस कार्य में प्रायः आघंटे लग जाते थे। इनमें असुविधाएँ थीं। एक तो अच्छी अच्छी खाद्य वस्तु सामने रहते हुए भी लोग बैठे हुये केवल सुगंधित लिया करते थे और दूसरे उन्हें गाली सुनने का भी अधिक समय तक मज़ा मिला करता था । उसी समय से गालीगायन कम होता गया और अब प्रायः बंद सा हो गया है । यह विवाह बड़े धूमधाम से हुआ था। इनका नाम श्रीमती विद्यावती था। इन्हें पाँच पुत्र तथा तीन पुत्रियाँ हुई थीं। एक पुत्री विवाह योग्य होकर तथा दो शैशवावस्था ही में कालकवलित हो गई। पुत्र पाँचों वर्तमान हैं। इनके नाम वयानुक्रम से J बाशून्य ब्रजरमणदास, व्रजरत्नदास , ब्रजमोहनदास, ब्रजजीवनदास और ब्रजभूषणदास हैं। प्रथम हिन्दी तथा उर्दू का ज्ञान प्राप्त कर कोठो के काम में लग गए और अन्य सभी ने अंग्रेजी की शिक्षा पायी। द्वितीय इस चरित्र का लेखक है। तृतीय तथा पंचम ने एंट्रेंस पास कर आगे पढ़ना छोड़ दिया । इन्होंने गृह पर ही संस्कृत का भी अच्छा ज्ञान प्राप्त कर लिया है। इनमें अंतिम दो मातृ-भाषा की कुछ सेवा करते रहते हैं। संशून्य एक हज़ार नौ सौ सत्तावन विशून्य के अगहन कृष्ण दो को श्रीमती विद्यावती का और संशून्य एक हज़ार नौ सौ छियासी के चैत्र कृष्ण दो को पूज्यपाद बाशून्य बलदेवदास जी का स्वर्गवास हो गया । भारतेन्दु जी के छोटे भाई बाशून्य गोकुलचंद्र जी को दो पुत्र और दो पुत्री थीं। पुत्रों का नाम बाशून्य कृष्णचन्द्र तथा ब्रजचन्द्र था । प्रथम के तीन तथा द्वितीय के दो पुत्र वर्तमान हैं। ये सभी अभी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं । बाशून्य कृष्णचंद्र के पुत्रों का नाम बाशून्य मोतीचंद, बाशून्य लक्ष्मीचंद तथा बाशून्य नारायणचंद्र है और बाशून्य ब्रजचंद्र के पुत्रों का नाम बाशून्य कुमुदचंद्र और बाशून्य मोहनचंद्र हैं । भारतेन्दुजी की धर्मपत्नी श्रीमती मन्नोदेवी का आषाढ़ कृष्ण सात संशून्य एक हज़ार नौ सौ तिरासी विशून्य को, बयालीस वर्ष तक वैधव्य भोगकर गंगालाभ हुआ था। इनका अपने भ्रातृ-पुत्रों पर बहुत ही स्नेह था । स्वर्गीय बाशून्य कृष्णचन्द्र जी नित्य ही अर्द्धरात्रि के बाद एक दो बजे बाग से घर लौटते थे और यह बराबर उनके सरे बैठी रहती थीं तथा उन्हें भोजन कराकर तब सोतीं थीं । वे दोनों भाई भी इन्हें बहुत मानते थे और उन लोगों ने अंत तक उसी प्रकार निबाहा भी था । इस लंबे वैधव्य के कारण इन्हें कष्ट भी बहुत उठाना पड़ा। कई वर्ष तक आँखों से न दिखलाई पड़ने के कारण तथा रोग जर्जरित होने से घरवालों को भी तकलीफ थी। कुछ लोगों के इस कथन पर कि 'अमुक तो सर्वस्व फूँक कर चल दिए और इन्हें हम लोगों के जान अपना का ग्राहक छोड़ गए' इन्हें मानसिक कष्ट विशेष हुआ था तथा इन्होंने एक बार कहा भी था कि 'अब हम अधिक न चलेंगे, हमारी क्रिया के लिए विशेष समारोह की जरूरत नहीं है, हमारी उंगली के ये छल्ले हमें फूंकने के लिए बहुत होंगे।' समय तू जो न चाहे कर दिखलावे । चन्द्र में कलंक मनुष्य का सबसे बढ़कर मनोरंजन होता है। उपन्यास, नाटक आदि भी कल्पित मनुष्यों की जीवनियाँ ही हैं। उत्तम जीवनी कभी भी समय के पीछे नहीं पड़ सकती। किसी महान् पुरुष की जीवनी से यही उपदेश प्रधानतः मिलता है कि मनुष्य क्या हो सकता है, कहाँ तक ऊँचे उठ सकता है और मानव समाज के लिये वह कहाँ तक हितकर हो सकता है। इनको पढ़ने से हमें उत्साह मिलता है, हमारा साहस बढ़ता है। महान् व्यक्तियों से, जो जब नहीं रह गए हैं या वर्तमान हैं, हम बराबर नहीं मिल सकते पर उनकी सच्ची जीवनो यदि हमारे पास है तो हम सर्वदा उनसे सत्संग रख सकते हैं। पर मनुष्य तभी मनुष्य रहेगा जब उसके दोष आदि भी प्रकट कर दिए जायेंगे । मनुष्य देवता नहीं है, उसमें दोष रहेंगे, किसी में एक है तो किसी में कुछ और है। यदि एक महात्मा की जीवनी से हम दोषों को निकाल देते हैं तो हम ऐसा निर्दोष आदर्श उपस्थित कर देते हैं जिसको अनुगमन करने का लोग साहस छोड़ बैठेंगे। उसे मनुष्योपरि या दैवी समझेंगे, जिससे जीवनी लेखक का परिश्रम निष्फल सा ही जाता है। तात्पर्य इतना ही है कि जीवनचरित्र में गुणों का विवेचन करते हुए दोषों का भी, यदि हों, तो विश्लेषण अवश्य कर देना चाहिए। सत्य कटु होता है और नीति भी कहती है कि 'सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम् ।' पर सच्चे दिल से मृत महात्माओं के विशिष्ट दोषों का उल्लेख अवश्य होना ही चाहिए । साधारणतः कवि सौंदर्योपासक होता है। सौंदर्य से केवल स्त्री- सुलभ सौंदर्य ही से नहीं तात्पर्य है । गुलाब में सौंदर्य है तो उसकी नई डाल के नये निकले हुए प्याजी रंग के काँटों में भी कुछ न कुछ सौंदर्य रहता है। बड़ों के गुरण तथा दोष दोनों हो में कुछ न कुछ सार होता है। गोस्वामी तुलसीदास जी से भक्त श्रेष्ठ को भी इसी सौंदर्योपासना ही से भक्ति की दीक्षा मिली थी । भारतेन्दु जी की जीवनी देखने से यह ज्ञात होता है कि 'वर के शुभचिंतकों' ने उन्हें जितना ही 'लायक' बनाने का प्रयत्न किया उतने ही वे मीराबाई के समान 'नालायक' होते गये और दोनों ही पक्ष ने अपने प्रयास में डटे रहे । फलतः आरम्भ में यह परकीया नायिकाओं के फेर में कुछ दिन पड़ कर अपने चित्त को सान्त्वना देते रहे पर कुछ ही दिन बाद इन्होंने अपने को सँभाला और श्रीकृष्ण भगवान के रंग में ऐसे रंग गए कि अंत समय तक 'श्रीकृष्ण सहित स्वामिनी' रहते रह गये । एक बात और पहले ही कह देना चाहिए। इनकी प्रवृत्ति कुछ साधुओं की सी थी । धन के विषय में यह कथन बिल्कुल ही ठीक है। अभी दस बीस हज़ार आ गया तो दोनों हाथों से लुटाकर बाँट-बूँट सफाचट कर दिया। यह फिक्र नहीं रहती थी कि कल चिट्ठियों के लिये दो रुपये किसी से उधार लेने पड़े । संचयन की बुद्धि इनमें बिल्कुल थी ही नहीं। शरीर पर के कपड़े तक दूसरों को देकर स्वयं ठंढे में बैठे रह जाना साधु ही का काम था । वेश्या का सहवास इनके लिये आवश्यक ही था। आज इस बहाने तो कल उस बहाने जलसे होते रहते थे गुरणी गायिका अपना गुण अवश्य दिखाएगी तथा गुण-ग्राही पुरुष उसकी प्रशंसा करेगा ही। इस प्रकार वार्तालाप होते हुए आपस में परिचय होना अनि • वार्य था । अंधेर नगरी में उस समय की प्रसिद्ध गानेवाली कई वेश्याओं के नाम दिए गए हैं। ये सभी भारतेन्दु जी के दरबार में आती-जाती थीं। इन्हीं |
अब आपको अपने वाहन के लिए घर बैठे ही पेट्रोल मिल सकता है। दरअसल, सरकार पेट्रोल और CNG की होम डिलीवरी पर विचार कर रही है और जल्द ही तेल कंपनियों को इसकी इजाजत मिल सकती है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को इस बात का संकेत दिया कि लॉकडाउन के कारण वाहन मालिकों को हो रही परेशानी का हल करने के लिए सरकार तेल और गैस की होम डिलीवरी शुरू करने की छूट दे सकती है।
प्रधान ने कहा कि डीजल की तरह सरकार पेट्रोल, LNG और CNG की होम डिलीवरी शुरू कर सकती है। लोगों को भविष्य में घर बैठे ही ईंधन मिल सकेगा। जानकारी के लिए बता दें कि देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयरल कॉरपोरेशन ने 2018 में चुनिंदा शहरों में मोबाइल डिस्पेंसर से डीजल की होम डिलीवरी शुरू की थी। अब इसका दायरा बढ़ाकर पेट्रोल और दूसरे ईंधन भी इसके तहत लाये जा सकते हैं।
भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा तेल खरीदने वाला देश है, लेकिन लॉकडाउन के कारण यहां इसकी खपत में भारी गिरावट देखी गई है। अप्रैल महीने में भारत में ईंधन की खपत 70 प्रतिशत कम हो गई है। पेट्रोल-डीजल की मांग भी घटी है।
हाल ही में एक भारतीय स्टार्टअप रेपोस एनर्जी (Repos Energy) ने ऐलान किया था वह ईंधन की होम डिलीवरी करने के लिए मोबाइल पेट्रोल पंप लाएगा। रेपोस को टाटा ग्रुप से फंडिंग मिली है। पुणे स्थित इस स्टार्टअप ने कहा था कि वह इस वित्त वर्ष देशभर 3,200 ऐसे पेट्रोल पंप शुरू करेगा। फिलहाल रेपोस के पास ऐसे 300 पेट्रोल पंप हैं, जो चलते-चलते ईंधन की सप्लाई करते हैं। ग्राहक मोबाइल ऐप के जरिये इनकी सेवा ले सकते हैं।
प्रधान ने कहा कि कुछ पेट्रोल पंप को दोबारा से तैयार किया जाएगा ताकि वहां पर CNG, LNG और PNG समेत सभी तरह का ईंधन मिल सके। इससे ग्राहकों को काफी सहूलियत होगी और उन्हें घंटो इंतजार नहीं करना पड़ेगा। प्रधान गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के 56 नए CNG स्टेशन के उद्घाटन के मौके पर बोल रहे थे। इन स्टेशनों से रोजाना 50,000 वाहनों को फायदा होगा।
| अब आपको अपने वाहन के लिए घर बैठे ही पेट्रोल मिल सकता है। दरअसल, सरकार पेट्रोल और CNG की होम डिलीवरी पर विचार कर रही है और जल्द ही तेल कंपनियों को इसकी इजाजत मिल सकती है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को इस बात का संकेत दिया कि लॉकडाउन के कारण वाहन मालिकों को हो रही परेशानी का हल करने के लिए सरकार तेल और गैस की होम डिलीवरी शुरू करने की छूट दे सकती है। प्रधान ने कहा कि डीजल की तरह सरकार पेट्रोल, LNG और CNG की होम डिलीवरी शुरू कर सकती है। लोगों को भविष्य में घर बैठे ही ईंधन मिल सकेगा। जानकारी के लिए बता दें कि देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयरल कॉरपोरेशन ने दो हज़ार अट्ठारह में चुनिंदा शहरों में मोबाइल डिस्पेंसर से डीजल की होम डिलीवरी शुरू की थी। अब इसका दायरा बढ़ाकर पेट्रोल और दूसरे ईंधन भी इसके तहत लाये जा सकते हैं। भारत दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा तेल खरीदने वाला देश है, लेकिन लॉकडाउन के कारण यहां इसकी खपत में भारी गिरावट देखी गई है। अप्रैल महीने में भारत में ईंधन की खपत सत्तर प्रतिशत कम हो गई है। पेट्रोल-डीजल की मांग भी घटी है। हाल ही में एक भारतीय स्टार्टअप रेपोस एनर्जी ने ऐलान किया था वह ईंधन की होम डिलीवरी करने के लिए मोबाइल पेट्रोल पंप लाएगा। रेपोस को टाटा ग्रुप से फंडिंग मिली है। पुणे स्थित इस स्टार्टअप ने कहा था कि वह इस वित्त वर्ष देशभर तीन,दो सौ ऐसे पेट्रोल पंप शुरू करेगा। फिलहाल रेपोस के पास ऐसे तीन सौ पेट्रोल पंप हैं, जो चलते-चलते ईंधन की सप्लाई करते हैं। ग्राहक मोबाइल ऐप के जरिये इनकी सेवा ले सकते हैं। प्रधान ने कहा कि कुछ पेट्रोल पंप को दोबारा से तैयार किया जाएगा ताकि वहां पर CNG, LNG और PNG समेत सभी तरह का ईंधन मिल सके। इससे ग्राहकों को काफी सहूलियत होगी और उन्हें घंटो इंतजार नहीं करना पड़ेगा। प्रधान गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के छप्पन नए CNG स्टेशन के उद्घाटन के मौके पर बोल रहे थे। इन स्टेशनों से रोजाना पचास,शून्य वाहनों को फायदा होगा। |
आयुष्मान खुराना बॉलीवुड के सबसे टेलैंटेड एक्टर्स में एक माने जाने लगे हैं। फिल्म विकी डोनर, दम लगा के हईसा, शुभ मंगल सावधान और अंधाधुन जैसी अनोखी फिल्म करने की वजह से उनकी फैन अलग तरह की फैन फॉलोइंग बढ़ी है। उनकी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'अंधाधुन' और 'बधाई हो' के लिए ऑडियंस से लेकर फिल्म क्रिटीक ने भी काफी सराहना की है। दोनों ही फिल्मों को देश में अच्छा रिस्पांस मिला। लेकिन फिल्म अंधाधुन देश के बाद चीन में भी धमाल मचाए हुए है।
आयुष्मान खुराना की फिल्म अंधाधुन को चीन में अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। वहां फिल्म ने भारत से भी ज्यादा कमाई कर ली है। फिल्म ने चीन में 300 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है। फिल्म के प्रति और आयुष्मान खुराना के लिए चीन में क्रेज बढ़ता जा रहा है। दोनों चीन के लोगों का दिल जीत लिया है। हाल ही में चीन के लोगों ने सोशल मीडिया पर आयुष्मान खुराना की तारीफें की हैं। इस पर उन्होंने अपने चाइनीज फैंस के लिए एक वीडियो मैसेज दिया है। उन्होंने इस वीडियो के जरिए अपने फैंस को ऐसे ही प्यार बनाए रखने और समर्थन करने के लिए कहा है।
इतना ही नहीं आयुष्मान खुराना ने चाइनीज फैंस को फिल्म पसंद करने के लिए खुशी जताई है। इस दौरान आयुष्मान खुराना ने अपने आने वाली ती फिल्मों आर्टिकल 15, ड्रीम गर्ल और बाला की घोषणा भी की है। आपको बता दें कि चीन में फिल्म अंधाधुन 3 अप्रैल को रिलीज हुई थी। वहां, फिल्म ने पहले ही हफ्ते में लगभग 100 करोड़ रुपए की कमाई कर ली थी।
| आयुष्मान खुराना बॉलीवुड के सबसे टेलैंटेड एक्टर्स में एक माने जाने लगे हैं। फिल्म विकी डोनर, दम लगा के हईसा, शुभ मंगल सावधान और अंधाधुन जैसी अनोखी फिल्म करने की वजह से उनकी फैन अलग तरह की फैन फॉलोइंग बढ़ी है। उनकी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'अंधाधुन' और 'बधाई हो' के लिए ऑडियंस से लेकर फिल्म क्रिटीक ने भी काफी सराहना की है। दोनों ही फिल्मों को देश में अच्छा रिस्पांस मिला। लेकिन फिल्म अंधाधुन देश के बाद चीन में भी धमाल मचाए हुए है। आयुष्मान खुराना की फिल्म अंधाधुन को चीन में अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। वहां फिल्म ने भारत से भी ज्यादा कमाई कर ली है। फिल्म ने चीन में तीन सौ करोड़ रुपए की कमाई कर ली है। फिल्म के प्रति और आयुष्मान खुराना के लिए चीन में क्रेज बढ़ता जा रहा है। दोनों चीन के लोगों का दिल जीत लिया है। हाल ही में चीन के लोगों ने सोशल मीडिया पर आयुष्मान खुराना की तारीफें की हैं। इस पर उन्होंने अपने चाइनीज फैंस के लिए एक वीडियो मैसेज दिया है। उन्होंने इस वीडियो के जरिए अपने फैंस को ऐसे ही प्यार बनाए रखने और समर्थन करने के लिए कहा है। इतना ही नहीं आयुष्मान खुराना ने चाइनीज फैंस को फिल्म पसंद करने के लिए खुशी जताई है। इस दौरान आयुष्मान खुराना ने अपने आने वाली ती फिल्मों आर्टिकल पंद्रह, ड्रीम गर्ल और बाला की घोषणा भी की है। आपको बता दें कि चीन में फिल्म अंधाधुन तीन अप्रैल को रिलीज हुई थी। वहां, फिल्म ने पहले ही हफ्ते में लगभग एक सौ करोड़ रुपए की कमाई कर ली थी। |
दमं शिक्षा
पा सकते, वह गति, विराघकभाव वाले भी गृहस्य - श्रावकको, सोमिल की तरह कोई दुर्लभ नहीं होती। मास मासतक निरन्तर उग्रतप करनेवाले, और पारणेमें, अगुलीपर रहे, उतनाही खानेवाले भी मिथ्यात्रि तपस्वि लोग, सतुष्ट श्रावकों की सोलहवीं क कातक भी नहीं पहुँच सकते। हजारों वर्पतक अद्भुत गहन तवस्या करनेपर भी तामलीतापस, सुश्रावकके पाने योग्य गतिसे भी हीन गतिमें चला गया, इसलिये श्रावक धर्मकी भी पलिहारी है। संतोषी श्रावक, आधा साधु ही है। साधुपन न बन आवे, तो नहीं सही, पर श्रावक धर्मपर तो जरूर आरूढ होना चाहिये । श्रावक धर्म इस कदर पालना चाहिये, कि आशा भुजगीका पोषण न होने पावे। आशा भुजगी यदि कोपाविष्ट हो गई, तो फिर देख लो ! कैसा उसका फूत्कार छुटेगा, और अपनी आत्मवृत्तिपर उसकी निपाग्निज्वालाका असर कितना पड़ेगा। संतोष रूपी नागदमनी और पत्री अगर पास रखोगे !, तो मजाल नहीं है कि आशा-सापनी, तुम्हारे पास फटकने लगे । इसलिये आशा पिशाचनीके पराधीन नहीं बनना चाहिये, और परिग्रहका निग्रह कर सतोप ध रना चाहिये; इस प्रकार सतोपरत्ति रखनेके साथ मुनिधर्मके ऊ पर अनुराग रक्खा जाय, तो फिर कहना ही क्या ? श्रावकगृहस्थ भी, आठ भवोंकी भीतर नराबर मोक्ष पा सकता है । जिन थावकोको, साधु होने पर भीति नहीं - साधु धर्म ग्रहण कर नेकी अभिलाषा नहीं, उनको, समझो कि श्रावक पन ही वरावर नहीं फरसा । घेशक ! अतरायके जोरसे साधुपन लेना नहीं वन सके, मगर उसपर भीति तो रखनी चाहिये - उसपर खयाल तो रहना चाहिये । दीक्षा लेना, नहीं लेना दूसरी बात है, मगर साधु धर्म पानेकी प्यास - उत्कठा तो जरूर रखनी चाहिये कि-"में कव अणगार साधु भ्रमण निर्गन्य हो जाऊँ ?" । जहाँवक | दमं शिक्षा पा सकते, वह गति, विराघकभाव वाले भी गृहस्य - श्रावकको, सोमिल की तरह कोई दुर्लभ नहीं होती। मास मासतक निरन्तर उग्रतप करनेवाले, और पारणेमें, अगुलीपर रहे, उतनाही खानेवाले भी मिथ्यात्रि तपस्वि लोग, सतुष्ट श्रावकों की सोलहवीं क कातक भी नहीं पहुँच सकते। हजारों वर्पतक अद्भुत गहन तवस्या करनेपर भी तामलीतापस, सुश्रावकके पाने योग्य गतिसे भी हीन गतिमें चला गया, इसलिये श्रावक धर्मकी भी पलिहारी है। संतोषी श्रावक, आधा साधु ही है। साधुपन न बन आवे, तो नहीं सही, पर श्रावक धर्मपर तो जरूर आरूढ होना चाहिये । श्रावक धर्म इस कदर पालना चाहिये, कि आशा भुजगीका पोषण न होने पावे। आशा भुजगी यदि कोपाविष्ट हो गई, तो फिर देख लो ! कैसा उसका फूत्कार छुटेगा, और अपनी आत्मवृत्तिपर उसकी निपाग्निज्वालाका असर कितना पड़ेगा। संतोष रूपी नागदमनी और पत्री अगर पास रखोगे !, तो मजाल नहीं है कि आशा-सापनी, तुम्हारे पास फटकने लगे । इसलिये आशा पिशाचनीके पराधीन नहीं बनना चाहिये, और परिग्रहका निग्रह कर सतोप ध रना चाहिये; इस प्रकार सतोपरत्ति रखनेके साथ मुनिधर्मके ऊ पर अनुराग रक्खा जाय, तो फिर कहना ही क्या ? श्रावकगृहस्थ भी, आठ भवोंकी भीतर नराबर मोक्ष पा सकता है । जिन थावकोको, साधु होने पर भीति नहीं - साधु धर्म ग्रहण कर नेकी अभिलाषा नहीं, उनको, समझो कि श्रावक पन ही वरावर नहीं फरसा । घेशक ! अतरायके जोरसे साधुपन लेना नहीं वन सके, मगर उसपर भीति तो रखनी चाहिये - उसपर खयाल तो रहना चाहिये । दीक्षा लेना, नहीं लेना दूसरी बात है, मगर साधु धर्म पानेकी प्यास - उत्कठा तो जरूर रखनी चाहिये कि-"में कव अणगार साधु भ्रमण निर्गन्य हो जाऊँ ?" । जहाँवक |
पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद आफरीदी ने रविवार को टी20 टीम के कप्तान पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपनी इच्छा से पद छोड़ रहे हैं। अपने ट्विटर पेज पर इस्तीफे की घोषणा करते हुए आफरीदी ने लिखा, 'आज मैं पाकिस्तान और पूरे विश्व में फैले मेरे फैंस को बताना चाहता हूं कि मैं मेरी इच्छा से पाकिस्तान की टी-20 टीम के कप्तान पद से इस्तीफा दे रहा हूं। ' हालांकि, उन्होंने पाकिस्तान के लिए क्रिकेट खेलते रहने की इच्छा जाहिर की।
उन्होंने कहा कि मेरे लिए क्रिकेट के तीनों फॉरमेट में मेरे देश का नेतृत्व करना सम्मानजनक रहा। साथ ही उन्होंने अपने फैंस से निवेदन किया कि वे आगे भी मेरा एक बतौर खिलाड़ी हौसला बढ़ाते रहें।
वर्ल्डकप-टी20 में भारत के खिलाफ खेले गए मैच में हारने के बाद आफरीदी ने फेसबुक का सहारा लेते हुए अपने फैंस से माफी मांगी थी। आफरीदी की वर्ल्डकप से बाहर होने के बाद काफी आलोचना हो रही थी।
| पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद आफरीदी ने रविवार को टीबीस टीम के कप्तान पद से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपनी इच्छा से पद छोड़ रहे हैं। अपने ट्विटर पेज पर इस्तीफे की घोषणा करते हुए आफरीदी ने लिखा, 'आज मैं पाकिस्तान और पूरे विश्व में फैले मेरे फैंस को बताना चाहता हूं कि मैं मेरी इच्छा से पाकिस्तान की टी-बीस टीम के कप्तान पद से इस्तीफा दे रहा हूं। ' हालांकि, उन्होंने पाकिस्तान के लिए क्रिकेट खेलते रहने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने कहा कि मेरे लिए क्रिकेट के तीनों फॉरमेट में मेरे देश का नेतृत्व करना सम्मानजनक रहा। साथ ही उन्होंने अपने फैंस से निवेदन किया कि वे आगे भी मेरा एक बतौर खिलाड़ी हौसला बढ़ाते रहें। वर्ल्डकप-टीबीस में भारत के खिलाफ खेले गए मैच में हारने के बाद आफरीदी ने फेसबुक का सहारा लेते हुए अपने फैंस से माफी मांगी थी। आफरीदी की वर्ल्डकप से बाहर होने के बाद काफी आलोचना हो रही थी। |
गोल-गप्पों को चिकन-मटन के साथ भी खाया जा सकता है ये लोग पहली बार सुन रहे हैं और इस नॉन वेज पानी पुरी पर भरोसा ही नहीं कर पा रहे।
क्रिसिल के अनुसार बीते एक साल में थाली की कीमत में काफी बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि वेज थाली से ज्यादा कीमत नॉनवेज थाली की बढ़ी है।
दिल्ली के हंसराज कॉलेज में नानवेज पर रोक लगा दी गई है। इससे छात्र काफी परेशान हैं। इसे लेकर कॉलेज प्रशासन ने छात्रों को कहा है कि जिसे नानवेज खाना है वो हॉस्टल से बाहर रहे।
मेस में जेएनवी-औरंगाबाद के 24 छात्रों को उनके अनुरोध पर महीने में एक बार बताए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार चिकन डिश परोसी जाएगी।
Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश में एक जिले के चंदपुरा ग्राम पंचायत में एक सरकारी गौशाला में कुछ अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर शराब और मांस पार्टी की। एक अधिकारी ने बताया कि मामले के सामने आने के बाद इसकी जांच की जा रही है।
NonVeg in Mid Day Meal: शुक्रवार को एक आदेश कहा कि, "सभी स्कूलों के हेडमास्टर्स को शीर्ष अदालत के 2 मई के आदेश का पालन करने के लिए आदेशित किया जाता है, जिसमें बच्चों को पहले की तरह मांस, चिकन, मछली और अंडे सहित मिड-डे मील परोसने का निर्देश दिया गया था।
पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बाद नार्थ दिल्ली में सभी दुकानों और रेस्टोरेंट को अपने ग्राहकों को ये बताना होगा कि जो नॉनवेज वो परोस रहे हैं वो झटका है या हलाल का है।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पिछले दिनों एक ऐसा शख्स सामने आया जिसके वीडियो ने हलचल मचा दी थी।
भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली इंस्टाग्राम लाइव सेशन के जरिए इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और क्रिकेटर केविन पीटरसन से मुखातिब हुए।
अभिनेत्री तमन्ना भाटिया शाकाहारी बन गई हैं।
पशुओं के बच्चों की तस्वीरें देखने से लोगों की मांसाहार खाने की इच्छा कम होती है। एक नए अध्ययन में यह पाया गया है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं पर ऐसी तस्वीरों का असर ज्यादा होता है।
रेलवे ने ' शाकाहार दिवस ' मनाये जाने के अलावा साबरमती से गांधीजी से जुड़े विभिन्न स्टेशनों के लिए ' स्वच्छता एक्सप्रेस ' और डांडी मार्च के उपलक्ष्य में 12 मार्च को साबरमती से एक ' विशेष नमक रेल ' चलाने की योजना बनाई है।
एयर इंडिया कम दूरी की घरेलू उड़ानों में इकोनॉमी क्लास के यात्रियों को नॉनवेज उपलब्ध नहीं कराएगी। इससे पहले कंपनी फ्लाइट में सलाद बंद कर चुकी है।
| गोल-गप्पों को चिकन-मटन के साथ भी खाया जा सकता है ये लोग पहली बार सुन रहे हैं और इस नॉन वेज पानी पुरी पर भरोसा ही नहीं कर पा रहे। क्रिसिल के अनुसार बीते एक साल में थाली की कीमत में काफी बढ़ोतरी हुई है। खास बात यह है कि वेज थाली से ज्यादा कीमत नॉनवेज थाली की बढ़ी है। दिल्ली के हंसराज कॉलेज में नानवेज पर रोक लगा दी गई है। इससे छात्र काफी परेशान हैं। इसे लेकर कॉलेज प्रशासन ने छात्रों को कहा है कि जिसे नानवेज खाना है वो हॉस्टल से बाहर रहे। मेस में जेएनवी-औरंगाबाद के चौबीस छात्रों को उनके अनुरोध पर महीने में एक बार बताए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार चिकन डिश परोसी जाएगी। Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश में एक जिले के चंदपुरा ग्राम पंचायत में एक सरकारी गौशाला में कुछ अज्ञात लोगों ने कथित तौर पर शराब और मांस पार्टी की। एक अधिकारी ने बताया कि मामले के सामने आने के बाद इसकी जांच की जा रही है। NonVeg in Mid Day Meal: शुक्रवार को एक आदेश कहा कि, "सभी स्कूलों के हेडमास्टर्स को शीर्ष अदालत के दो मई के आदेश का पालन करने के लिए आदेशित किया जाता है, जिसमें बच्चों को पहले की तरह मांस, चिकन, मछली और अंडे सहित मिड-डे मील परोसने का निर्देश दिया गया था। पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बाद नार्थ दिल्ली में सभी दुकानों और रेस्टोरेंट को अपने ग्राहकों को ये बताना होगा कि जो नॉनवेज वो परोस रहे हैं वो झटका है या हलाल का है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पिछले दिनों एक ऐसा शख्स सामने आया जिसके वीडियो ने हलचल मचा दी थी। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली इंस्टाग्राम लाइव सेशन के जरिए इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और क्रिकेटर केविन पीटरसन से मुखातिब हुए। अभिनेत्री तमन्ना भाटिया शाकाहारी बन गई हैं। पशुओं के बच्चों की तस्वीरें देखने से लोगों की मांसाहार खाने की इच्छा कम होती है। एक नए अध्ययन में यह पाया गया है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं पर ऐसी तस्वीरों का असर ज्यादा होता है। रेलवे ने ' शाकाहार दिवस ' मनाये जाने के अलावा साबरमती से गांधीजी से जुड़े विभिन्न स्टेशनों के लिए ' स्वच्छता एक्सप्रेस ' और डांडी मार्च के उपलक्ष्य में बारह मार्च को साबरमती से एक ' विशेष नमक रेल ' चलाने की योजना बनाई है। एयर इंडिया कम दूरी की घरेलू उड़ानों में इकोनॉमी क्लास के यात्रियों को नॉनवेज उपलब्ध नहीं कराएगी। इससे पहले कंपनी फ्लाइट में सलाद बंद कर चुकी है। |
वीर अर्जुन संवाददाता ललितपुर। जिला संयुक्प ट्रेड यूनियन समन्वय समिति कार्यकारिणी की आवश्यक बैठक कम्पनी बाग में अध्यक्ष डी. पी. मिश्रा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में 2 सितम्बर में ट्रेड यूनियन की सफलता पर सभी पदाधिकारियों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया। बैठक का संचालन करते हुये महामंत्री के. एन. कौशिक ने ट्रेड यूनियनकी मांगों यथा लघु कारखाने एवं अन्य संस्थान बिल 2014, औद्योगिक सम्बन्ध बिल, पदस्थय फण्ड, वेतन बिल पर श्रम कोड, वेतन का भुगतान, ईपीएफ एक्ट, ईएसआई एक्ट, कारखाना (संशोधन) बिल 2014, एपेरेंटिस एक्ट 1961, न्यूनतम वेतन अधिनियम, बाल मजदूरी (निषेध व नियमन) अधिनियम 1986, राज्य सरकारों द्वारा संशोधन पर तथा 7 वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर पकाश डाला। सरकार की ट्रेड यूनियन विरोधी गतिविधियों का विरोध करने, पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल किये जाने, सभी को चिकित्सा सुविधा तथा न्यूनतम वेतन 15 हजार रुपये किये जाने की मांग की गयी। बैठक में पमुख रूप रूप से वक्पाओं में डी. पी. मिश्रा, के. एन. कौशिक, सुकुमार जैन, कैलाश नारायण तिवारी, वनवारी सिंह सेंगर, सुरेन्द पटैरिया, धर्मसिंह यादव, अनुराग शरण श्रीवास्तव, फूलचंद रजक, राजेन्द दीक्षित, सुरेश यादव आदि ने अपने विचार रखे। सभा में नीरज चतुर्वेदी, गोकुल पसाद यादव, यू. एस. त्रिपाठी, सुरेश यादव, लक्ष्मी पसाद यादव, एस. एल. पाटिल, रामबाबू, बालकिशन तिवारी, ज्ञानेन्द सिंह बुन्देला, रमाकान्त तिवारी, रघुवीर सिंह, मुन्नालाल दुबे, गेंदालाल जैन, पकाश रैकवार, आशीष कुमार साहू, सुरेश कुमार साहू, अवधेश शुक्ला, दयामरा रायकवार, श्यामलाल रायकवार, महेश कुमार व्यास, पेमनारायण शुक्ला, आर. के. दीक्षित, पमोद सैनी, अजीत सिंह परमार, अरूण गोस्वामी, अशोक श्रीवास,हृदेशचंद, हनुमन्त सिंह, रामलाल, खुशीलाल देवसिंह, सोबरन सिंह आदि मौजूद रहे। बैठक का संचालन महामंत्री के. एन. कौशिक ने किया।
| वीर अर्जुन संवाददाता ललितपुर। जिला संयुक्प ट्रेड यूनियन समन्वय समिति कार्यकारिणी की आवश्यक बैठक कम्पनी बाग में अध्यक्ष डी. पी. मिश्रा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में दो सितम्बर में ट्रेड यूनियन की सफलता पर सभी पदाधिकारियों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया। बैठक का संचालन करते हुये महामंत्री के. एन. कौशिक ने ट्रेड यूनियनकी मांगों यथा लघु कारखाने एवं अन्य संस्थान बिल दो हज़ार चौदह, औद्योगिक सम्बन्ध बिल, पदस्थय फण्ड, वेतन बिल पर श्रम कोड, वेतन का भुगतान, ईपीएफ एक्ट, ईएसआई एक्ट, कारखाना बिल दो हज़ार चौदह, एपेरेंटिस एक्ट एक हज़ार नौ सौ इकसठ, न्यूनतम वेतन अधिनियम, बाल मजदूरी अधिनियम एक हज़ार नौ सौ छियासी, राज्य सरकारों द्वारा संशोधन पर तथा सात वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर पकाश डाला। सरकार की ट्रेड यूनियन विरोधी गतिविधियों का विरोध करने, पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल किये जाने, सभी को चिकित्सा सुविधा तथा न्यूनतम वेतन पंद्रह हजार रुपये किये जाने की मांग की गयी। बैठक में पमुख रूप रूप से वक्पाओं में डी. पी. मिश्रा, के. एन. कौशिक, सुकुमार जैन, कैलाश नारायण तिवारी, वनवारी सिंह सेंगर, सुरेन्द पटैरिया, धर्मसिंह यादव, अनुराग शरण श्रीवास्तव, फूलचंद रजक, राजेन्द दीक्षित, सुरेश यादव आदि ने अपने विचार रखे। सभा में नीरज चतुर्वेदी, गोकुल पसाद यादव, यू. एस. त्रिपाठी, सुरेश यादव, लक्ष्मी पसाद यादव, एस. एल. पाटिल, रामबाबू, बालकिशन तिवारी, ज्ञानेन्द सिंह बुन्देला, रमाकान्त तिवारी, रघुवीर सिंह, मुन्नालाल दुबे, गेंदालाल जैन, पकाश रैकवार, आशीष कुमार साहू, सुरेश कुमार साहू, अवधेश शुक्ला, दयामरा रायकवार, श्यामलाल रायकवार, महेश कुमार व्यास, पेमनारायण शुक्ला, आर. के. दीक्षित, पमोद सैनी, अजीत सिंह परमार, अरूण गोस्वामी, अशोक श्रीवास,हृदेशचंद, हनुमन्त सिंह, रामलाल, खुशीलाल देवसिंह, सोबरन सिंह आदि मौजूद रहे। बैठक का संचालन महामंत्री के. एन. कौशिक ने किया। |
कुछ परस्तिथियों के कारण अगस्त 2017 में मैंने खुद को माणा के मशहूर गेट के सामने पाया। फूलों की घाटी और बद्रीनाथ की वो ट्रिप उसी दिन ख़त्म हो जानी चाहिए थी पर आप इसे गढ़वाल के बरसात का जादू कहिए या फिर प्रकोप, जिसकी वजह से लम्बागढ़ में लैंडस्लाइडिंग हो गयी थी और हम बद्रीनाथ में ही फंसे रह गये थे। हम अपने ट्रिप के आखिरी दिन पर होटल के कमरों में बंद नहीं रहना चाहते थे इसलिए हमने फैसला किया कि हम बहार निकलकर कुछ रोमांचक करेंगे। हम लम्बागढ़ को पीछे छोड़ कर बद्रीनाथ से 3 कि.मी. उत्तर की तरफ आगे बढ़े और वहाँ था आखिरी भारतीय गाँव, माणा।
बद्रीनाथ से 10 मिनट की दूरी पर है माणा और वहाँ तक जाने वाला रास्ता ही बेहद खूबसूरत है। पहाड़ी कुत्तों का हमारी तरफ बढ़ना, सरस्वती के तेज़ प्रवाह से बहने की आवाज़, हर तरफ सेना के कैंप और एक विशाल गाँव जिसके दरवाज़े के बाहर लिखा है 'द फर्स्ट इंडियन विलेज'। वहाँ मौजूद हर चीज़ हमें बता रही थी कि हम सब कुछ छोड़ कर कितनी दूर निकल आए हैं।
यह गाँव 3115 मीटर की ऊँचाई पर उत्तराखंड के चमोली जिले में बसा है। इस गाँव की दिव्यता से हम बहुत ही अनोखे ढंग से परिचित हुए। गाँव के बच्चे हमें इस गाँव से जुड़ी महाभारत की कहानियाँ सुना रहे थे। बच्चे हमें गाँव की छोटी छोटी गलियों से गुज़ारते हुए व्यास गुफ़ा तक ले गए, एक ऐसी गुफा जहाँ वेद व्यास जी ने चारों वेद लिखे थे और पहली बार महाभारत पढ़ी गयी थी।
बच्चे महाभारत के किस्से ऐसे सुना रहे थे मानो वो किसी ग्रन्थ के बारे में नहीं बल्कि पड़ोस में हुई घटना के बारे में बता रहें हो। मुझे ऐसा लगता है की माणा के निवासियों ने यह मान लिया है कि यह एक देव भूमि है और यहाँ भगवान का वास था। इसलिए जब यात्री यहाँ आते हैं तो आपका अनुभव बहुत अलग होता है।
यही अनुभव माणा को बाकि जगह से अलग बनाते हैं। व्यास गुफ़ा से कुछ ही दूरी पर गणेश गुफ़ा है और माना जाता है कि भगवान गणेश ने इसी गुफ़ा में बैठकर महाभारत लिखी थी। यह गुफा भले ही पूरे विश्व में धर्म से जुड़ी होने की वजह से प्रसिद्ध है पर यहाँ के बच्चे इस गुफा में क्रिकेट खेलते हैं और औरतें पूरे दिन यहाँ सिलाई बुनाई का काम करती हैं।
सरस्वती नदी देवी सरस्वती के नाम पर रखा गया है जिन्हें बुद्धि की देवी भी कहा जाता है। यह नाम बिलकुल इस नदी के लिए परफेक्ट है क्योंकि भारत के इतिहास का बहुत महत्वपूर्ण ग्रन्थ इसी नदी के किनारे बैठ कर लिखा गया था। इस नदी का नाम गुप्त गामिनी भी है क्योंकि यह नदी 100 मीटर तक बहने के बाद माणा के केशव प्रयाग में अलकनंदा से मिल जाती है। अगर पौराणिक कथाओं की मानें तो सरस्वती नदी की आवाज़ महर्षि व्यास के महाभारत लिखने में भंग डाल रही थी इसलिए महर्षि ने नदी को यहाँ श्राप दिया था कि नदी गायब हो जाए।
सरस्वती नदी भीम पुल के पास एक विशाल पत्थर से निकलती है। नदी के धारा बहुत पतली होती है पर नदी आवाज़ कान बंद करने वाली होती है। नदी के ऊपर पत्थरों से बना एक प्राकृतिक पुल है और माना जाता है कि जब पांडव इस नदी को पार करके सवर्ग की ओर बढ़ रहे थे तब भीम ने एक बहुत बड़ा पत्थर उठाकर वहाँ द्रौपदी के लिए रखा था ताकि उस नदी को वो आसानी से पार कर सकें। भीम पुल के बगल में ही आपको 20 फुट का एक पैर का निशान भी दिखेगा और माना जाता है कि ये पैर के निशान भीम के हैं।
व्यास गुफ़ा के नाम से प्रख्यात इस गुफ़ा में महर्षि व्यास ने वेदों को चार भाग में दोबारा बाँट कर भागवद गीता लिखी थी। ऐसा माना जाता है कि इसी गुफा में व्यास ने गणेश को महाभारत सुनाई थी और गणेश ने महाभारत लिखी थी। गुफा की छत को देख कर ऐसा लगता है कि ताड़ के पत्तों पर कुछ लिखा हुआ है। इस पत्थर को व्यास पुस्तक के नाम से जाना जाता है और ऐसा मानना है कि ये पुस्तक वर्षों के बाद पत्थर में बदल गयी है।
गणेश गुफा वो गुफा है जहाँ भगवन गणेश ने महर्षि वाल्मीकि को बुलाकर महभारत सुनी थी और उसके बाद इस महान ग्रन्थ की रचना की थी। गणेश गुफा व्यास गुफा से कुछ ही दूरी पर है और ये सोचने वाली बात है कि क्या भगवन गणेश को इस गुफा तक व्यास की आवाज़ सुनाई दी थी। पौराणिक कथाओं के बारों में इतनी गहरायी से सिर्फ माणा के लोग ही सोच सकते हैं।
यात्रियों के लिए ये चाय की दुकान बहुत ही पसंदीदा है और ये सबके लिए फोटो लेने की एक परफेक्ट जगह है। यहाँ की चाय बहित स्वादिष्ट है पर मेरा सुझाव होगा कि आप यहाँ की ग्रीन टी ज़रूर ट्राई करें।
ये मंदिरों का शहर माणा से सिर्फ 3 कि.मी. की दूरी पर है और यहाँ पर मई से नवम्बर महीने तक श्रधालुओं की भीड़ लगी होती है। इसलिए अगर आप ज्यादा धार्मिक नहीं हैं और इस शहर के बेहतर लुत्फ़ उठाना चाहते हैं तो तो बद्रीनाथ मई से नवम्बर के अलावा किसी और महीने में जाएँ।
माणा पास तक की ड्राइवः एक और एडवेंचर जिसका आप माणा में लुत्फ़ उठा सकते हैं वो है माणा पास तक की ड्राइव। माणा गाँव से 50 कि.मी. दूर चीन के बॉर्डर के पास माणा पास है। वहाँ जाने के लिए जोशीमठ आर्मी स्टेशन से आपको पहले अनुमति लेनी पड़ेगी।
माणा के आस पास के ट्रेक्सः
अगर आप यात्रा के दौरान एडवेंचर के शौक़ीन हैं तो माणा के आस पास की ट्रेकिंग आपको खुश कर देगी। स्वर्गरोहिनी, सतोपंथ लेक, और वसुंधरा फॉल्स कुछ ऐसे ट्रेक हैं जो माणा से शुरू होते हैं। आपको बद्रीनाथ में कई गाइड मिल जायेंगे जो आपको इन ट्रेक पर मदद करेंगे।
माणा के आस-पास आपको खाने की सबसे बेहतरीन जगह बद्रीनाथ है। माणा में आपको कुछ चाय और टपरी मिल जाएगी पर वहाँ ज्यादा खाने की दुकाने नहीं हैं। बद्रीनाथ में आपको कई शाकाहारी रेस्टोरेंट मिल जायेंगे। आपको यहाँ शाकाहारी थाली और साउथ इंडियन फ़ूड बहुत आसानी से मिल जाएगा।
माणा में लगातार लैंडस्लाइड होने की वजह से मेरा सुझाव होगा कि आप जोशीमठ में ही ठिकाना देखें। द स्लीपिंग ब्यूटी होटल में आपको सभी सुविधाएँ मिलेंगी। आपको वहाँ नाश्ता साथ में मिलेगा और गढ़वाल पहाड़ों के नज़ारे आपको अपनी खिड़की से दिखाई देंगे।
माणा जाने का सबसे बेहतर समय गर्मियों का मौसम है, इसलिए आप यहाँ जून से सितम्बर के बीच में ही जाएँ। अगस्त के महीने में यहाँ जाने से बचें क्योंंकि बरसात के मौसम में रास्ते बंद हो जाते हैं।
माणा कैसे पहुँचे?
ट्रेनः माणा का सबसे करीबी रेलवे स्टेशन हरिद्वार है जो वहाँ से 275 कि.मी. की दूरी पर है।
रोडः माणा पहुँचने के लिए आपको देहरादून या हरिद्वार से टैक्सी, कैब या फिर बद्रीनाथ/ गोविन्दघाट के लिए बस लेनी पड़ेगी। आपकी यह यात्रा 7-8 घंटे की होगी।
अपनी यात्राओं के किस्से Tripoto पर बाँटें। सफरनामा लिखने के लिए यहाँ क्लिक करें।
रोज़ाना वॉट्सऐप पर यात्रा की प्रेरणा के लिए 9319591229 पर HI लिखकर भेजें या यहाँ क्लिक करें।
ये आर्टिकल अनुवादित है। ओरिजनल आर्टिकल पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
| कुछ परस्तिथियों के कारण अगस्त दो हज़ार सत्रह में मैंने खुद को माणा के मशहूर गेट के सामने पाया। फूलों की घाटी और बद्रीनाथ की वो ट्रिप उसी दिन ख़त्म हो जानी चाहिए थी पर आप इसे गढ़वाल के बरसात का जादू कहिए या फिर प्रकोप, जिसकी वजह से लम्बागढ़ में लैंडस्लाइडिंग हो गयी थी और हम बद्रीनाथ में ही फंसे रह गये थे। हम अपने ट्रिप के आखिरी दिन पर होटल के कमरों में बंद नहीं रहना चाहते थे इसलिए हमने फैसला किया कि हम बहार निकलकर कुछ रोमांचक करेंगे। हम लम्बागढ़ को पीछे छोड़ कर बद्रीनाथ से तीन कि.मी. उत्तर की तरफ आगे बढ़े और वहाँ था आखिरी भारतीय गाँव, माणा। बद्रीनाथ से दस मिनट की दूरी पर है माणा और वहाँ तक जाने वाला रास्ता ही बेहद खूबसूरत है। पहाड़ी कुत्तों का हमारी तरफ बढ़ना, सरस्वती के तेज़ प्रवाह से बहने की आवाज़, हर तरफ सेना के कैंप और एक विशाल गाँव जिसके दरवाज़े के बाहर लिखा है 'द फर्स्ट इंडियन विलेज'। वहाँ मौजूद हर चीज़ हमें बता रही थी कि हम सब कुछ छोड़ कर कितनी दूर निकल आए हैं। यह गाँव तीन हज़ार एक सौ पंद्रह मीटर की ऊँचाई पर उत्तराखंड के चमोली जिले में बसा है। इस गाँव की दिव्यता से हम बहुत ही अनोखे ढंग से परिचित हुए। गाँव के बच्चे हमें इस गाँव से जुड़ी महाभारत की कहानियाँ सुना रहे थे। बच्चे हमें गाँव की छोटी छोटी गलियों से गुज़ारते हुए व्यास गुफ़ा तक ले गए, एक ऐसी गुफा जहाँ वेद व्यास जी ने चारों वेद लिखे थे और पहली बार महाभारत पढ़ी गयी थी। बच्चे महाभारत के किस्से ऐसे सुना रहे थे मानो वो किसी ग्रन्थ के बारे में नहीं बल्कि पड़ोस में हुई घटना के बारे में बता रहें हो। मुझे ऐसा लगता है की माणा के निवासियों ने यह मान लिया है कि यह एक देव भूमि है और यहाँ भगवान का वास था। इसलिए जब यात्री यहाँ आते हैं तो आपका अनुभव बहुत अलग होता है। यही अनुभव माणा को बाकि जगह से अलग बनाते हैं। व्यास गुफ़ा से कुछ ही दूरी पर गणेश गुफ़ा है और माना जाता है कि भगवान गणेश ने इसी गुफ़ा में बैठकर महाभारत लिखी थी। यह गुफा भले ही पूरे विश्व में धर्म से जुड़ी होने की वजह से प्रसिद्ध है पर यहाँ के बच्चे इस गुफा में क्रिकेट खेलते हैं और औरतें पूरे दिन यहाँ सिलाई बुनाई का काम करती हैं। सरस्वती नदी देवी सरस्वती के नाम पर रखा गया है जिन्हें बुद्धि की देवी भी कहा जाता है। यह नाम बिलकुल इस नदी के लिए परफेक्ट है क्योंकि भारत के इतिहास का बहुत महत्वपूर्ण ग्रन्थ इसी नदी के किनारे बैठ कर लिखा गया था। इस नदी का नाम गुप्त गामिनी भी है क्योंकि यह नदी एक सौ मीटर तक बहने के बाद माणा के केशव प्रयाग में अलकनंदा से मिल जाती है। अगर पौराणिक कथाओं की मानें तो सरस्वती नदी की आवाज़ महर्षि व्यास के महाभारत लिखने में भंग डाल रही थी इसलिए महर्षि ने नदी को यहाँ श्राप दिया था कि नदी गायब हो जाए। सरस्वती नदी भीम पुल के पास एक विशाल पत्थर से निकलती है। नदी के धारा बहुत पतली होती है पर नदी आवाज़ कान बंद करने वाली होती है। नदी के ऊपर पत्थरों से बना एक प्राकृतिक पुल है और माना जाता है कि जब पांडव इस नदी को पार करके सवर्ग की ओर बढ़ रहे थे तब भीम ने एक बहुत बड़ा पत्थर उठाकर वहाँ द्रौपदी के लिए रखा था ताकि उस नदी को वो आसानी से पार कर सकें। भीम पुल के बगल में ही आपको बीस फुट का एक पैर का निशान भी दिखेगा और माना जाता है कि ये पैर के निशान भीम के हैं। व्यास गुफ़ा के नाम से प्रख्यात इस गुफ़ा में महर्षि व्यास ने वेदों को चार भाग में दोबारा बाँट कर भागवद गीता लिखी थी। ऐसा माना जाता है कि इसी गुफा में व्यास ने गणेश को महाभारत सुनाई थी और गणेश ने महाभारत लिखी थी। गुफा की छत को देख कर ऐसा लगता है कि ताड़ के पत्तों पर कुछ लिखा हुआ है। इस पत्थर को व्यास पुस्तक के नाम से जाना जाता है और ऐसा मानना है कि ये पुस्तक वर्षों के बाद पत्थर में बदल गयी है। गणेश गुफा वो गुफा है जहाँ भगवन गणेश ने महर्षि वाल्मीकि को बुलाकर महभारत सुनी थी और उसके बाद इस महान ग्रन्थ की रचना की थी। गणेश गुफा व्यास गुफा से कुछ ही दूरी पर है और ये सोचने वाली बात है कि क्या भगवन गणेश को इस गुफा तक व्यास की आवाज़ सुनाई दी थी। पौराणिक कथाओं के बारों में इतनी गहरायी से सिर्फ माणा के लोग ही सोच सकते हैं। यात्रियों के लिए ये चाय की दुकान बहुत ही पसंदीदा है और ये सबके लिए फोटो लेने की एक परफेक्ट जगह है। यहाँ की चाय बहित स्वादिष्ट है पर मेरा सुझाव होगा कि आप यहाँ की ग्रीन टी ज़रूर ट्राई करें। ये मंदिरों का शहर माणा से सिर्फ तीन कि.मी. की दूरी पर है और यहाँ पर मई से नवम्बर महीने तक श्रधालुओं की भीड़ लगी होती है। इसलिए अगर आप ज्यादा धार्मिक नहीं हैं और इस शहर के बेहतर लुत्फ़ उठाना चाहते हैं तो तो बद्रीनाथ मई से नवम्बर के अलावा किसी और महीने में जाएँ। माणा पास तक की ड्राइवः एक और एडवेंचर जिसका आप माणा में लुत्फ़ उठा सकते हैं वो है माणा पास तक की ड्राइव। माणा गाँव से पचास कि.मी. दूर चीन के बॉर्डर के पास माणा पास है। वहाँ जाने के लिए जोशीमठ आर्मी स्टेशन से आपको पहले अनुमति लेनी पड़ेगी। माणा के आस पास के ट्रेक्सः अगर आप यात्रा के दौरान एडवेंचर के शौक़ीन हैं तो माणा के आस पास की ट्रेकिंग आपको खुश कर देगी। स्वर्गरोहिनी, सतोपंथ लेक, और वसुंधरा फॉल्स कुछ ऐसे ट्रेक हैं जो माणा से शुरू होते हैं। आपको बद्रीनाथ में कई गाइड मिल जायेंगे जो आपको इन ट्रेक पर मदद करेंगे। माणा के आस-पास आपको खाने की सबसे बेहतरीन जगह बद्रीनाथ है। माणा में आपको कुछ चाय और टपरी मिल जाएगी पर वहाँ ज्यादा खाने की दुकाने नहीं हैं। बद्रीनाथ में आपको कई शाकाहारी रेस्टोरेंट मिल जायेंगे। आपको यहाँ शाकाहारी थाली और साउथ इंडियन फ़ूड बहुत आसानी से मिल जाएगा। माणा में लगातार लैंडस्लाइड होने की वजह से मेरा सुझाव होगा कि आप जोशीमठ में ही ठिकाना देखें। द स्लीपिंग ब्यूटी होटल में आपको सभी सुविधाएँ मिलेंगी। आपको वहाँ नाश्ता साथ में मिलेगा और गढ़वाल पहाड़ों के नज़ारे आपको अपनी खिड़की से दिखाई देंगे। माणा जाने का सबसे बेहतर समय गर्मियों का मौसम है, इसलिए आप यहाँ जून से सितम्बर के बीच में ही जाएँ। अगस्त के महीने में यहाँ जाने से बचें क्योंंकि बरसात के मौसम में रास्ते बंद हो जाते हैं। माणा कैसे पहुँचे? ट्रेनः माणा का सबसे करीबी रेलवे स्टेशन हरिद्वार है जो वहाँ से दो सौ पचहत्तर कि.मी. की दूरी पर है। रोडः माणा पहुँचने के लिए आपको देहरादून या हरिद्वार से टैक्सी, कैब या फिर बद्रीनाथ/ गोविन्दघाट के लिए बस लेनी पड़ेगी। आपकी यह यात्रा सात-आठ घंटाटे की होगी। अपनी यात्राओं के किस्से Tripoto पर बाँटें। सफरनामा लिखने के लिए यहाँ क्लिक करें। रोज़ाना वॉट्सऐप पर यात्रा की प्रेरणा के लिए नौ तीन एक नौ पाँच नौ एक दो दो नौ पर HI लिखकर भेजें या यहाँ क्लिक करें। ये आर्टिकल अनुवादित है। ओरिजनल आर्टिकल पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें। |
दिल्ली (Delhi) में बेटियों के साथ बढ़ती बर्बरता ने महिला सुरक्षा के दावों पर सवाल खड़े कर दिये हैं। पहले श्रद्धा कांड, फिर द्वारका में तेजाब कांड, उसके बाद पांडव नगर में छात्रा के अपहरण की कोशिश और हाल ही में कंझावला कांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इन सभी वारदातों में बेटियां इंसाफ के इंतजार में बैठी हैं।
हालांकि दिल्ली की एक ऐसी ही बेटी के इंसाफ के इंतजार का सब्र टूट गया और इस बेटी ने हथियार उठाकर सभी को हैरान कर दिया। जी हां मामला दिल्ली के भजनपुरा का है। जहां एक नाबालिग रेप पीड़िता ने आरोपी की मां को सरेआम गोली मार दी।
जानकारी के मुताबिक 2021 में नाबालिग लड़की ने एक युवक पर रेप का आरोप लगाया था। पुलिस ने इस मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। लेकिन इंसाफ के इंतजार में बैठी पीड़िता ने इंतकाम लेने की ठान ली। पीड़ित लड़की ने आरोपी के घर की रेकी की और मौका देखकर उन्हें गोली मार दी। घटना के बाद घायल महिला को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनका इलाज चल रहा है। वहीं इस घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने केस दर्ज कर गोली मारने वाली लड़की को गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली के भजनपुरा की इस घटना से सभी लोग हैरान है। पीड़ित लड़की ने आरोपी की मां को गोली क्यों मारी इस बात का खुलासा तो अभी तक नहीं हुआ है।
दिल्ली में निर्भया कांड के बाद महिला सुरक्षा पर आवाज उठी, जन आंदोलन हुआ और सरकार ने कानून को और सख्त किया। इस उम्मीद में कि अब महिला अपराध में कमी आएगी । लेकिन निर्भया कांड के करीब 10 साल बाद भी महिला सुरक्षा की दशा जस की तस है। आज भी महिलाएं बर्बरता की शिकार हो रही हैं। दिल्ली में हाल के दिनों में महिलाओं से बर्बरता की कई खौफनाक वारदातें सामने आईं। जिसमें श्रद्धा हत्याकांड सबसे ज्यादा डरावना रहा। उसके बाद द्वारका में तेजाब कांड हुआ, जहां स्कूल जा रही छात्रा पर तेजाब फेंक दिया गया। पांडव नगर में खुलेआम एक लड़की के अपहरण की कोशिश की गई। कंझावला की एक लड़की को एक्सीडेंट के बाद घसीटा गया। आदर्श नगर में एक सिरफिरे ने लड़की को चाकू मार दिया। इन सभी घटनाओं में पुलिस ने एक्शन तो लिया। लेकिन इंसाफ अभी तक किसी भी पीड़िता को नहीं मिला है।
दिल्ली में हुई इन वारदातों ने महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोल कर रख दी है। जिम्मेदार लोग अभी तक शासन और प्रशासन के पुराने रवैये में उलझे हैं। घटना के बाद पुलिस आती है, कार्रवाई करती है। जिसके बाद शूरू हो जाती है कोर्ट कचहरी और इंसाफ की लड़ाई । ऐसे में अब सवाल ये है कि देश की राजधानी दिल्ली में अगर बेटियां सुरक्षित नहीं है, तो छोटे शहरों का हाल क्या होगा, क्या इंसाफ में देरी से भजनपुरा जैसी घटनाओं को बढ़ावा मिलेगा' क्या महिला अपराध रोकने के लिए पुलिस के साथ आम लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी पड़ेगी'
| दिल्ली में बेटियों के साथ बढ़ती बर्बरता ने महिला सुरक्षा के दावों पर सवाल खड़े कर दिये हैं। पहले श्रद्धा कांड, फिर द्वारका में तेजाब कांड, उसके बाद पांडव नगर में छात्रा के अपहरण की कोशिश और हाल ही में कंझावला कांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इन सभी वारदातों में बेटियां इंसाफ के इंतजार में बैठी हैं। हालांकि दिल्ली की एक ऐसी ही बेटी के इंसाफ के इंतजार का सब्र टूट गया और इस बेटी ने हथियार उठाकर सभी को हैरान कर दिया। जी हां मामला दिल्ली के भजनपुरा का है। जहां एक नाबालिग रेप पीड़िता ने आरोपी की मां को सरेआम गोली मार दी। जानकारी के मुताबिक दो हज़ार इक्कीस में नाबालिग लड़की ने एक युवक पर रेप का आरोप लगाया था। पुलिस ने इस मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। लेकिन इंसाफ के इंतजार में बैठी पीड़िता ने इंतकाम लेने की ठान ली। पीड़ित लड़की ने आरोपी के घर की रेकी की और मौका देखकर उन्हें गोली मार दी। घटना के बाद घायल महिला को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनका इलाज चल रहा है। वहीं इस घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस ने केस दर्ज कर गोली मारने वाली लड़की को गिरफ्तार कर लिया है। दिल्ली के भजनपुरा की इस घटना से सभी लोग हैरान है। पीड़ित लड़की ने आरोपी की मां को गोली क्यों मारी इस बात का खुलासा तो अभी तक नहीं हुआ है। दिल्ली में निर्भया कांड के बाद महिला सुरक्षा पर आवाज उठी, जन आंदोलन हुआ और सरकार ने कानून को और सख्त किया। इस उम्मीद में कि अब महिला अपराध में कमी आएगी । लेकिन निर्भया कांड के करीब दस साल बाद भी महिला सुरक्षा की दशा जस की तस है। आज भी महिलाएं बर्बरता की शिकार हो रही हैं। दिल्ली में हाल के दिनों में महिलाओं से बर्बरता की कई खौफनाक वारदातें सामने आईं। जिसमें श्रद्धा हत्याकांड सबसे ज्यादा डरावना रहा। उसके बाद द्वारका में तेजाब कांड हुआ, जहां स्कूल जा रही छात्रा पर तेजाब फेंक दिया गया। पांडव नगर में खुलेआम एक लड़की के अपहरण की कोशिश की गई। कंझावला की एक लड़की को एक्सीडेंट के बाद घसीटा गया। आदर्श नगर में एक सिरफिरे ने लड़की को चाकू मार दिया। इन सभी घटनाओं में पुलिस ने एक्शन तो लिया। लेकिन इंसाफ अभी तक किसी भी पीड़िता को नहीं मिला है। दिल्ली में हुई इन वारदातों ने महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोल कर रख दी है। जिम्मेदार लोग अभी तक शासन और प्रशासन के पुराने रवैये में उलझे हैं। घटना के बाद पुलिस आती है, कार्रवाई करती है। जिसके बाद शूरू हो जाती है कोर्ट कचहरी और इंसाफ की लड़ाई । ऐसे में अब सवाल ये है कि देश की राजधानी दिल्ली में अगर बेटियां सुरक्षित नहीं है, तो छोटे शहरों का हाल क्या होगा, क्या इंसाफ में देरी से भजनपुरा जैसी घटनाओं को बढ़ावा मिलेगा' क्या महिला अपराध रोकने के लिए पुलिस के साथ आम लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी पड़ेगी' |
पिछले कुछ समय से बॉलीवुड में नेपोटिज्म व इनसाइडर- आउटसाइडर को लेकर बहस छिड़ी हुई है। एंटरटेनमेंट जगत इसे लेकर दो हिस्सों में बंट गया है जहां अब तक कई सेलेब्स नेपोटिज्म से जुड़े किस्सों का खुलासा कर चुके हैं तो वहीं दूसरी तरफ कुछ का कहना है इंडस्ट्री से ना होते हुए भी उन्हें स्वीकार किया गया।
नेपोटिज्म के मुद्दे पर बात करते हुए करीना कपूर खान ने कहा कि लाइफ में हर इंसान को वहीं मिलता है जो वो डिजर्व करता है। खबर के मुताबिक करीना ने कहा कि जिसकी किस्मत में जो होता है उसे वहीं मिलता है।
करीना ने अपने बेटे तैमूर के बारे में बात करते हुए कहा, 'सिर्फ इसलिए कि तैमूर इस देश का ऐसा बच्चा है जिसकी सबसे ज्यादा फोटो खींची गई है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह इस देश का सबसे बड़ा स्टार बनेगा। ' करीना ने कहा कि वो चाहती हैं कि उनका बेटा आत्मनिर्भर बने और खुद पर विश्वास रखे। उन्होंने कहा कि तैमूर जो चाहते हैं वो बन सकते हैं।
करीना ने आगे इस बारे में बात करते हुए कहा कि सिर्फ इसलिए कि उसके पेरेंट्स सफल हैं, वो भी सफल होगा। करीना ने कहा कि जब तैमूर चाहेंगे तभी उनका सफर शुरू होगा और वो अपना रास्ता खुद बनाएंगे। करीना ने कहा कि पेरेंट्स के तौर पर वो किसी भी तरह तैमूर की मदद नहीं करेंगे।
मालूम हो कि करीना कपूर खान जल्द ही दूसरी बार मां बनने वाली हैं। हाल ही में उन्होंने और सैफ ने फैंस को यह खुशखबरी दी थी। दोनों ने 16 अक्टूबर 2012 को मुंबई के बांद्र में एक प्राइवेट सेरेमनी के दौरान शादी की थी। इसके बाद दिसंबर 2016 को उनके बेटे तैमूर को जन्म दिया।
वर्कफ्रंट की बात करें तो करीना एक्टर आमिर खान के साथ फिल्म लाल सिंह चड्ढा में नजर आएंगी। इसके अलावा वो फिल्म तख्त में भी काम करती दिखेंगी जिसमें उनके अलावा आलिया भट्ट, रणवीर सिंह, विक्की कौशल, भूमि पेडनेकर, जान्हवी कपूर और अनिल कपूर होंगे।
| पिछले कुछ समय से बॉलीवुड में नेपोटिज्म व इनसाइडर- आउटसाइडर को लेकर बहस छिड़ी हुई है। एंटरटेनमेंट जगत इसे लेकर दो हिस्सों में बंट गया है जहां अब तक कई सेलेब्स नेपोटिज्म से जुड़े किस्सों का खुलासा कर चुके हैं तो वहीं दूसरी तरफ कुछ का कहना है इंडस्ट्री से ना होते हुए भी उन्हें स्वीकार किया गया। नेपोटिज्म के मुद्दे पर बात करते हुए करीना कपूर खान ने कहा कि लाइफ में हर इंसान को वहीं मिलता है जो वो डिजर्व करता है। खबर के मुताबिक करीना ने कहा कि जिसकी किस्मत में जो होता है उसे वहीं मिलता है। करीना ने अपने बेटे तैमूर के बारे में बात करते हुए कहा, 'सिर्फ इसलिए कि तैमूर इस देश का ऐसा बच्चा है जिसकी सबसे ज्यादा फोटो खींची गई है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह इस देश का सबसे बड़ा स्टार बनेगा। ' करीना ने कहा कि वो चाहती हैं कि उनका बेटा आत्मनिर्भर बने और खुद पर विश्वास रखे। उन्होंने कहा कि तैमूर जो चाहते हैं वो बन सकते हैं। करीना ने आगे इस बारे में बात करते हुए कहा कि सिर्फ इसलिए कि उसके पेरेंट्स सफल हैं, वो भी सफल होगा। करीना ने कहा कि जब तैमूर चाहेंगे तभी उनका सफर शुरू होगा और वो अपना रास्ता खुद बनाएंगे। करीना ने कहा कि पेरेंट्स के तौर पर वो किसी भी तरह तैमूर की मदद नहीं करेंगे। मालूम हो कि करीना कपूर खान जल्द ही दूसरी बार मां बनने वाली हैं। हाल ही में उन्होंने और सैफ ने फैंस को यह खुशखबरी दी थी। दोनों ने सोलह अक्टूबर दो हज़ार बारह को मुंबई के बांद्र में एक प्राइवेट सेरेमनी के दौरान शादी की थी। इसके बाद दिसंबर दो हज़ार सोलह को उनके बेटे तैमूर को जन्म दिया। वर्कफ्रंट की बात करें तो करीना एक्टर आमिर खान के साथ फिल्म लाल सिंह चड्ढा में नजर आएंगी। इसके अलावा वो फिल्म तख्त में भी काम करती दिखेंगी जिसमें उनके अलावा आलिया भट्ट, रणवीर सिंह, विक्की कौशल, भूमि पेडनेकर, जान्हवी कपूर और अनिल कपूर होंगे। |
साठ-सत्तर सालों में ज्यादा कुछ बदला नहीं है, पहले विद्रोहियों को गोली मारी जाती थी अब गाली. इधर जबसे आई टी एक्ट की धारा 66-A हटी है आम धारणा सी बन गई है कि अब खुलकर गालियां दी जा सकती है, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी शायद ऐसा सोचने वालों में से हैं, उनकी यही सोच दिल्ली गोलीकाण्ड की एक वजह बनी. दिल्ली में दोबारा सरकार बनने के बाद स्टिंग ऑपरेशन के तौर पर आये चौतीस लाख सैंतीस हजार नौ सौ छप्पनवें ऑडियो में केजरीवाल पार्टी के विद्रोही नेताओं को गालियाँ देते सुने जा सकते हैं.
दूर से देखें तो केजरीवाल की पार्टी में सबकुछ ठीक है अब तो खाँसी भी! एकतरफ़ा चुनाव जीते हैं, फिर से मुख्यमंत्री बन गए हैं,विपक्ष न के बराबर है, फेसबुक पर लाइक्स आ रहे हैं, ट्विटर पर रीट्वीट्स आ रहे हैं, इंसान को जिंदगी से और चाहिए भी क्या? समझ नही आता फिर पार्टी में इतने मतभेद क्यों हैं? दरअसल आम आदमी पार्टी की विडंबना है कि वोटों से ज्यादा उन पर स्टिंग्स हुए हैं और नेताओं से ज्यादा पार्टी में मतभेद हैं.
केजरीवाल को गालियाँ देते सुन लोगों में हैरानगी है, कोई इसे एआईबी रोस्ट जैसे कार्यक्रमों का दुष्प्रभाव बताता है तो कोई रोडीज वालों को साथ रखने का असर, वहीं कईयों को इसमें कुछ नया नजर नही आ रहा, केजरीवाल नेता भले अब बने हों इसके पहले वो इंजीनियरिंग स्टूडेंट रह चुके हैं. केजरीवाल के विरोधियों ने गालीकाण्ड में भी उनकी अयोग्यता खोज निकाली है, दिल्ली का मुख्यमंत्री दिल्ली का प्रतिनिधित्व करता है,कम से कम गालियाँ तो दिल्ली वाली देनीं थी.
विरोधी धड़ों से अब तो ये आवाजें भी उठने लगी हैं कि सेमीफाइनल हारकर जल्दी घर लौटने से आईपीएल शुरू होने के बीच के समय अंतराल में केजरीवाल को विराट कोहली से गाढ़ी-गाढ़ी गालियां सीख लेनी चाहिए, जैसे पार्टी के हाल हैं उन्हें आगे भी इस सबकी जरूरत पड़ने वाली है. क्रिकेट से उनका संबंध आज का नही है, ऑडियो क्लिप में केजरीवाल ये भी कहते नजर आ रहे हैं कि जिसे चलाना हो वो आम आदमी पार्टी चला सकता वो अपने 67 विधायक लेकर एक अलग पार्टी बना लेंगे, साफ़ जाहिर होता है ये बचपन से उन बच्चों में रहे हैं जो ढंग से न खिलाये जाने पर अपना बैट-बॉल लेकर अलग खेलने निकल जाते थे.
| साठ-सत्तर सालों में ज्यादा कुछ बदला नहीं है, पहले विद्रोहियों को गोली मारी जाती थी अब गाली. इधर जबसे आई टी एक्ट की धारा छयासठ-A हटी है आम धारणा सी बन गई है कि अब खुलकर गालियां दी जा सकती है, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल भी शायद ऐसा सोचने वालों में से हैं, उनकी यही सोच दिल्ली गोलीकाण्ड की एक वजह बनी. दिल्ली में दोबारा सरकार बनने के बाद स्टिंग ऑपरेशन के तौर पर आये चौतीस लाख सैंतीस हजार नौ सौ छप्पनवें ऑडियो में केजरीवाल पार्टी के विद्रोही नेताओं को गालियाँ देते सुने जा सकते हैं. दूर से देखें तो केजरीवाल की पार्टी में सबकुछ ठीक है अब तो खाँसी भी! एकतरफ़ा चुनाव जीते हैं, फिर से मुख्यमंत्री बन गए हैं,विपक्ष न के बराबर है, फेसबुक पर लाइक्स आ रहे हैं, ट्विटर पर रीट्वीट्स आ रहे हैं, इंसान को जिंदगी से और चाहिए भी क्या? समझ नही आता फिर पार्टी में इतने मतभेद क्यों हैं? दरअसल आम आदमी पार्टी की विडंबना है कि वोटों से ज्यादा उन पर स्टिंग्स हुए हैं और नेताओं से ज्यादा पार्टी में मतभेद हैं. केजरीवाल को गालियाँ देते सुन लोगों में हैरानगी है, कोई इसे एआईबी रोस्ट जैसे कार्यक्रमों का दुष्प्रभाव बताता है तो कोई रोडीज वालों को साथ रखने का असर, वहीं कईयों को इसमें कुछ नया नजर नही आ रहा, केजरीवाल नेता भले अब बने हों इसके पहले वो इंजीनियरिंग स्टूडेंट रह चुके हैं. केजरीवाल के विरोधियों ने गालीकाण्ड में भी उनकी अयोग्यता खोज निकाली है, दिल्ली का मुख्यमंत्री दिल्ली का प्रतिनिधित्व करता है,कम से कम गालियाँ तो दिल्ली वाली देनीं थी. विरोधी धड़ों से अब तो ये आवाजें भी उठने लगी हैं कि सेमीफाइनल हारकर जल्दी घर लौटने से आईपीएल शुरू होने के बीच के समय अंतराल में केजरीवाल को विराट कोहली से गाढ़ी-गाढ़ी गालियां सीख लेनी चाहिए, जैसे पार्टी के हाल हैं उन्हें आगे भी इस सबकी जरूरत पड़ने वाली है. क्रिकेट से उनका संबंध आज का नही है, ऑडियो क्लिप में केजरीवाल ये भी कहते नजर आ रहे हैं कि जिसे चलाना हो वो आम आदमी पार्टी चला सकता वो अपने सरसठ विधायक लेकर एक अलग पार्टी बना लेंगे, साफ़ जाहिर होता है ये बचपन से उन बच्चों में रहे हैं जो ढंग से न खिलाये जाने पर अपना बैट-बॉल लेकर अलग खेलने निकल जाते थे. |
रामपुर में आजम खान अपने परिवार के साथ बुधवार को एसआईटी के समक्ष पेश हुए.
रामपुर. समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के वरिष्ठ नेता और रामपुर से सांसद आज़म खान (Azam Khan) बुधवार को एसआईटी (SIT) के समक्ष (सामने) पेश हुए. रामपुर के महिला थाने में आज़म खान अपनी पत्नी तंजीन फातिमा (Tazeen Fatima) और बेटे अब्दुल्ला आज़म (Abdullah Azam) के साथ पहुंचे. बता दें कि आज़म दूसरी बार एसआईटी के सामने पेश हुए हैं. जानकारी के अनुसार एसआईटी के सामने आज़म खान के बयान दर्ज किए जा रहे हैं.
इससे पहले मंगलवार को जल निगम घोटाला मामले में आरोपी आज़म खान लखनऊ में एसआईटी के सामने पेश हुए थे. यहां उनसे घंटों पूछताछ की गई. वैसे रामपुर में स्थानीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने पिछले दिनों सपा सांसद आज़म खान को फिर नोटिस जारी किया था. दरअसल आज़म खान, जौहर यूनिवर्सिटी (Mohammad Ali Jauhar University) के चांसलर हैं और किसानों की जमीन कब्जा करने के मामले में एसआईटी (SIT) को उनका बयान दर्ज करना है. इससे पहले एसआईटी ने 25 सितंबर को आज़म खान को तलब किया था, लेकिन तब वो नहीं पहुंचे थे.
इससे पहले जौहर यूनिवर्सिटी के लिए जमीन अतिक्रमण से लेकर भैंस चोरी और डकैती तक के मामले में फंसे सांसद आज़म खान के घर की तस्वीर सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हुई. आज़म के घर के गेट के बाहर चस्पा हुए अदालती नोटिसों की फोटो सोशल मीडिया पर जमकर शेयर की गई. आज़म के घर के बाहर गंज थाने की पुलिस ने उनके साथ ही उनकी पत्नी राज्यसभा सदस्य डॉ. तंजीन फातिमा और बेटे विधायक अब्दुल्ला के नाम से नोटिस चस्पा किए.
बता दें कि सांसद बनने के बाद से ही आज़म खान पर 84 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हो चुके हैं. इसमें जौहर यूनिवर्सिटी की जमीनों से संबंधित 30 मुकदमे भी शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक आज़म खान के घर पर किसी के द्वारा नोटिस रिसीव नहीं किए जाने के बाद ये नोटिस चस्पा किए गए हैं.
(रिपोर्टः विशाल सक्सेना)
ये भी पढ़ेंः
.
| रामपुर में आजम खान अपने परिवार के साथ बुधवार को एसआईटी के समक्ष पेश हुए. रामपुर. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और रामपुर से सांसद आज़म खान बुधवार को एसआईटी के समक्ष पेश हुए. रामपुर के महिला थाने में आज़म खान अपनी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आज़म के साथ पहुंचे. बता दें कि आज़म दूसरी बार एसआईटी के सामने पेश हुए हैं. जानकारी के अनुसार एसआईटी के सामने आज़म खान के बयान दर्ज किए जा रहे हैं. इससे पहले मंगलवार को जल निगम घोटाला मामले में आरोपी आज़म खान लखनऊ में एसआईटी के सामने पेश हुए थे. यहां उनसे घंटों पूछताछ की गई. वैसे रामपुर में स्थानीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने पिछले दिनों सपा सांसद आज़म खान को फिर नोटिस जारी किया था. दरअसल आज़म खान, जौहर यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं और किसानों की जमीन कब्जा करने के मामले में एसआईटी को उनका बयान दर्ज करना है. इससे पहले एसआईटी ने पच्चीस सितंबर को आज़म खान को तलब किया था, लेकिन तब वो नहीं पहुंचे थे. इससे पहले जौहर यूनिवर्सिटी के लिए जमीन अतिक्रमण से लेकर भैंस चोरी और डकैती तक के मामले में फंसे सांसद आज़म खान के घर की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई. आज़म के घर के गेट के बाहर चस्पा हुए अदालती नोटिसों की फोटो सोशल मीडिया पर जमकर शेयर की गई. आज़म के घर के बाहर गंज थाने की पुलिस ने उनके साथ ही उनकी पत्नी राज्यसभा सदस्य डॉ. तंजीन फातिमा और बेटे विधायक अब्दुल्ला के नाम से नोटिस चस्पा किए. बता दें कि सांसद बनने के बाद से ही आज़म खान पर चौरासी से ज्यादा मुकदमे दर्ज हो चुके हैं. इसमें जौहर यूनिवर्सिटी की जमीनों से संबंधित तीस मुकदमे भी शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक आज़म खान के घर पर किसी के द्वारा नोटिस रिसीव नहीं किए जाने के बाद ये नोटिस चस्पा किए गए हैं. ये भी पढ़ेंः . |
महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीरथ ने आज नई दिल्ली में महिलाओं की स्थिति के बारे में पहली उच्चस्तरीय सलाहकार समिति का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में महिलओं ने काफी प्रगति की है और महिलाओं को आर्थिक विकास का लाभ भी मिला है।
श्रीमती तीरथ ने बताया की महिलाओं की साक्षारता दर भी बढ़ी है। 2001 में यह दर 53.67 प्रतिशत थी जो 2011 में बढ़कर 65.45 प्रतिशत हो गई। महिलाओं की मृत्यु दर में भी कमी आई है। यह दर 2001 - 2003 प्रति लाख 301 थी जो 2007 - 2009 में 212 हो गई। लेकिन श्रीमती तीरथ ने कहा कि बाल लिंग अनुपात में गिरावट चिंता का विषय है । यह अनुपात 2001 की जनगणना में प्रति 1000 लड़कों के तुलना में 927 था जो 2011 में प्रति 1000 लड़कों की तुलना में 914 हो गया। यह स्थिति दक्षिण सहित लगभग सभी राज्यों में हैं। महिला और बाल विकास मंत्री ने कहा कि महिलाओं को हिंसा और शोषण से बचाना आवश्यक है । इसलिए उनके मंत्रालय ने कई योजनाएं शुरू की गई है। कई विधयेक भी लाये गये है। पिछले साल दिसम्बर में हुए सामूहिक बलात्कार कांड के बाद सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए काफी सक्रियता दिखाई है। 2013-2014 के बजट में 1000 करोड़ रूपये के निर्भय कोष का प्रावधान किया गया है और अकेली रहने वाली महिलाओं और विधवाओं के लिए 200 करोड़ रूपए की योजना भी बनी है। महिला और बाल विकास सचिव श्री प्रेम नारायण ने कहा कि महिलाओं से जुड़े मुद्दे सरकार की प्राथमिकता के केंद्र में है। इस बात का प्रमाण उच्चस्तरीय समिति का गठन है। उन्होंने बाल लिंग अनुपात में आ रही गिरावट और महिलाओं के साथ होने वाली अपराध की घटनाओं पर चिंता प्रकट की। उच्चस्तरीय सलाहकार समिति की सदस्य सचिव श्रीमती दीपा जैन सिंह ने कहा कि हाशिये पर खड़ी महिलाओं की स्थिति सुधारना बहुत आवश्यक है। महिलाओं की स्थिति पर उच्चस्तरीय समिति का गठन राज्यपालों की समिति की सिफारिशों के अधार पर किया गया। राज्यपालों की समिति ने कहा था कि महिलाओं की स्थिति पर व्यापक रिपोर्ट बनाना आवश्यक है। दो दिन के इस बैठक में श्री मणि शंकर अय्यर, श्री सुभाष मेंधापुरकर, श्रीमती इन्द्राणी मजुमदार और श्रीमती शांता सिंहा सहित प्रमुख लोग भाग ले रहे हैं।
| महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्णा तीरथ ने आज नई दिल्ली में महिलाओं की स्थिति के बारे में पहली उच्चस्तरीय सलाहकार समिति का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में महिलओं ने काफी प्रगति की है और महिलाओं को आर्थिक विकास का लाभ भी मिला है। श्रीमती तीरथ ने बताया की महिलाओं की साक्षारता दर भी बढ़ी है। दो हज़ार एक में यह दर तिरेपन.सरसठ प्रतिशत थी जो दो हज़ार ग्यारह में बढ़कर पैंसठ.पैंतालीस प्रतिशत हो गई। महिलाओं की मृत्यु दर में भी कमी आई है। यह दर दो हज़ार एक - दो हज़ार तीन प्रति लाख तीन सौ एक थी जो दो हज़ार सात - दो हज़ार नौ में दो सौ बारह हो गई। लेकिन श्रीमती तीरथ ने कहा कि बाल लिंग अनुपात में गिरावट चिंता का विषय है । यह अनुपात दो हज़ार एक की जनगणना में प्रति एक हज़ार लड़कों के तुलना में नौ सौ सत्ताईस था जो दो हज़ार ग्यारह में प्रति एक हज़ार लड़कों की तुलना में नौ सौ चौदह हो गया। यह स्थिति दक्षिण सहित लगभग सभी राज्यों में हैं। महिला और बाल विकास मंत्री ने कहा कि महिलाओं को हिंसा और शोषण से बचाना आवश्यक है । इसलिए उनके मंत्रालय ने कई योजनाएं शुरू की गई है। कई विधयेक भी लाये गये है। पिछले साल दिसम्बर में हुए सामूहिक बलात्कार कांड के बाद सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए काफी सक्रियता दिखाई है। दो हज़ार तेरह-दो हज़ार चौदह के बजट में एक हज़ार करोड़ रूपये के निर्भय कोष का प्रावधान किया गया है और अकेली रहने वाली महिलाओं और विधवाओं के लिए दो सौ करोड़ रूपए की योजना भी बनी है। महिला और बाल विकास सचिव श्री प्रेम नारायण ने कहा कि महिलाओं से जुड़े मुद्दे सरकार की प्राथमिकता के केंद्र में है। इस बात का प्रमाण उच्चस्तरीय समिति का गठन है। उन्होंने बाल लिंग अनुपात में आ रही गिरावट और महिलाओं के साथ होने वाली अपराध की घटनाओं पर चिंता प्रकट की। उच्चस्तरीय सलाहकार समिति की सदस्य सचिव श्रीमती दीपा जैन सिंह ने कहा कि हाशिये पर खड़ी महिलाओं की स्थिति सुधारना बहुत आवश्यक है। महिलाओं की स्थिति पर उच्चस्तरीय समिति का गठन राज्यपालों की समिति की सिफारिशों के अधार पर किया गया। राज्यपालों की समिति ने कहा था कि महिलाओं की स्थिति पर व्यापक रिपोर्ट बनाना आवश्यक है। दो दिन के इस बैठक में श्री मणि शंकर अय्यर, श्री सुभाष मेंधापुरकर, श्रीमती इन्द्राणी मजुमदार और श्रीमती शांता सिंहा सहित प्रमुख लोग भाग ले रहे हैं। |
होली को लेकर आज भी इतना सम्मोहन क्यों है?
होली हमारी सांस्कृतिक परंपरा की देन है। सबको मिलाकर एक कर देती है, ऐसी ताकत है इसमें। जहां तक होली की बात है तो यह तो पूरे हिन्दुस्थान में मनाई जाती है और दुनिया के तमाम देशों में भी, जहां भारत के लोग रहते हैं। गायन की बात करें तो राधा-कृष्ण की होली तो बहुत लोग गाते हैं, जैसे वृंदावन की होली।
...और काशी की होली!
(जैसे उनकी आंखों में कोई फिल्म चलने लगी हो) हमारी काशी में भी खूब होली मनाई जाती थी। परंपरा ऐसी थी कि महिलाएं घर में पकवान बनाती थीं, और गाना-बजाना भी चलता रहता था। पुरुष सुबह से ही खूब रंग खेलते थे। और फिर शाम को शहनाई बजाते हुए पचासों की तादाद में इकट्ठे होकर दूसरे मोहल्ले में जाते थे होली मिलने। लोग अबीर लगाते थे, गले मिलते थे, हिन्दू-मुसलमान सभी। होली के रंग सबको ऐसा मिला देते थे कि हिन्दू-मुसलमान के बीच फर्क मालूम ही नहीं होता था। अब कुछ तो वातावरण बदला है और कुछ लोगों के पास समय कम है, काम ज्यादा। सबको घर चलाने के लिए पैसे की जरूरत है। उसी के जुगाड़ में लोग खटते रहते हैं। फुर्सत बची ही नहीं। तो इस तरह काशी की जो होली पूरी दुनिया में मशहूर हुआ करती थी, उसमें अब बहुत कमी आ गई है।
बदलाव क्या आया है होली मनाने में?
अब बड़े लोग अपने घरों में ही होली खेलते हैं, या फिर अपने दोस्तों-रिश्तेदारों के यहां चले जाते हैं होली खेलने। लेकिन उस समय तो हलवाई लोग, कहार लोग, तमाम छोटे-छोटे काम-धंधों में लगे लोग भी समाज के जाने-माने, बड़े और ओहदेदार लोगों के साथ होली खेलते थे। छोटे-बड़े का कोई फर्क नहीं होता था। कौन पैसे वाला है, कौन कम पैसेवाला, कौन बड़े पद पर है, कौन कम पढ़ा-लिखा सफाई या धोबी का काम करने वाला... सब एक-दूसरे को होली के रंग में ऐसा रंगते थे कि पूछिए मत। ऐसा खुशी और जोश का माहौल होता था होली पर। तब ओहदे, जात-बिरादरी का कोई फासला नहीं था। लेकिन पिछले कई सालों से यह सब कम होते-होते अब तो यह होली का माहौल न के बराबर तक पहुंच गया है। समय भी अब नहीं रहा किसी के पास, क्या बच्चे, क्या बड़े। बच्चों पर भी पढ़ाई का बहुत बोझ है। हर कोई इंजीनियर, मैनेजर बनने के लिए बेचैन है। वो भी क्या करें। ढंग की नौकरी नहीं मिली तो जिंदगी कैसे काट पाएंगे आज के माहौल में। घर चलाना कितना मुश्किल हो गया है।
होली जो है, वह धमार को बोलते है- ध्रुपद धमार। धमार में होली के ही शब्द रहते हैं सब। वो लयकारी और तबले-मृदंग के साथ होती है। उसमें तिहाइयां बहुत बड़ी-बड़ी बनती हैं। लेकिन अब होली के कई और रंग भी आए हैं। वृंदावन में जो लोग गाते हैं, उसे डफ की होली कहते हैं, क्योंकि वे उसे डफ बजाकर गाते हैं। कीर्तन में होली हो गई है। ठुमरी होली है। चैती होली गाते हैं बनारस में। बनारस में कुछ अनूठा, अलग ही रंग है होली में। तो हम जो देखे हैं, सुने हैं, वही हम अपने शागिर्दों को और बच्चों को बताते हैं।
काशी के संगीतज्ञों और कलाकारों की होली भी मशहूर रही है?
संगीतज्ञों की भी होली ऐसी ही होती थी। वो सबसे मिलते-जुलते थे। रंग चलता रहता था। खूब गाना-बजाना होता था। पर वे बाहर नहीं गाते थे होली। बनारस तो गलियों का ही शहर है। तो यहां गली जो हैं, लगभग हर गली में किसी न किसी संगीतज्ञ का घर होता है। वहीं वे खूब गाते थे और लोग भी उनसे मिलने आते-जाते रहते थे। क्या महफिल सजती थी? एक से एक बड़े कलाकार। आज तो आपको सिर्फ याद ही दिला सकती हूं लेकिन मेरी आंखों के आगे तो वह पूरा दृश्य खिंचा हुआ है, जब काशी में गली-गली होली गाई जाती थी।
हां, हमारी काशी में होलिका जलने के बाद से ही महिलाओं का घर से बाहर निकलना बंद हो जाता था। तो बाहर पुरुष लोग ही होली गाते थे, और वैसे ही फाग भी।
आप तो भारतीय संगीत की धरोहर के तौर पर जानी जाती हैं। कजरी, चैती जैसी तमाम विधाओं में होली गायन की क्या खासियत है?
होली जो है, वह धमार को बोलते है- ध्रुपद धमार। धमार में होली के ही शब्द रहते हैं सब। वो लयकारी और तबले-मृदंग के साथ होती है। उसमें तिहाइयां बहुत बड़ी-बड़ी बनती हैं। लेकिन अब होली के कई और रंग भी आए हैं। वृंदावन में जो लोग गाते हैं, उसे डफ की होली कहते हैं, क्योंकि वे उसे डफ बजाकर गाते हैं। कीर्तन में होली हो गई है। ठुमरी होली है। चैती होली गाते हैं बनारस में। बनारस में कुछ अनूठा, अलग ही रंग है होली में। तो हम जो देखे हैं, सुने हैं, वही हम अपने शागिर्दों को और बच्चों को बताते हैं।
समय के साथ क्या कुछ बदला है?
अब समय नहीं रहा किसी के पास कि फुर्सत से सुन सके। तो बस आधे घंटे में जैसे-तैसे निपटाना पड़ता है। इन विधाओं को बचाने के लिए कुछ किया जाना चाहिए। संगीत के गुणी लोग और संगीतप्रेमी आगे आएं, छोटी-छोटी कमेटियां बनें, फिर उनकी एक बड़ी कमेटी हो। इस तरह से संगीत की तमाम विधाओं को, जो सैकड़ों साल से हमारी परंपरा रही हैं, बचाया जा सकता है।
आज इसकी क्या उपयोगिता है?
आज ही तो इसकी सबसे ज्यादा उपयोगिता है। लोग जितने तनाव में हैं, निराशा में हैं, उन्हें हिन्दुस्थानी संगीत ही मिटा सकता है। परिवार खुशहाल हो सकते हैं, लोग अपना काम और अच्छे से कर सकते हैं। बीमारी कम होगी।
| होली को लेकर आज भी इतना सम्मोहन क्यों है? होली हमारी सांस्कृतिक परंपरा की देन है। सबको मिलाकर एक कर देती है, ऐसी ताकत है इसमें। जहां तक होली की बात है तो यह तो पूरे हिन्दुस्थान में मनाई जाती है और दुनिया के तमाम देशों में भी, जहां भारत के लोग रहते हैं। गायन की बात करें तो राधा-कृष्ण की होली तो बहुत लोग गाते हैं, जैसे वृंदावन की होली। ...और काशी की होली! हमारी काशी में भी खूब होली मनाई जाती थी। परंपरा ऐसी थी कि महिलाएं घर में पकवान बनाती थीं, और गाना-बजाना भी चलता रहता था। पुरुष सुबह से ही खूब रंग खेलते थे। और फिर शाम को शहनाई बजाते हुए पचासों की तादाद में इकट्ठे होकर दूसरे मोहल्ले में जाते थे होली मिलने। लोग अबीर लगाते थे, गले मिलते थे, हिन्दू-मुसलमान सभी। होली के रंग सबको ऐसा मिला देते थे कि हिन्दू-मुसलमान के बीच फर्क मालूम ही नहीं होता था। अब कुछ तो वातावरण बदला है और कुछ लोगों के पास समय कम है, काम ज्यादा। सबको घर चलाने के लिए पैसे की जरूरत है। उसी के जुगाड़ में लोग खटते रहते हैं। फुर्सत बची ही नहीं। तो इस तरह काशी की जो होली पूरी दुनिया में मशहूर हुआ करती थी, उसमें अब बहुत कमी आ गई है। बदलाव क्या आया है होली मनाने में? अब बड़े लोग अपने घरों में ही होली खेलते हैं, या फिर अपने दोस्तों-रिश्तेदारों के यहां चले जाते हैं होली खेलने। लेकिन उस समय तो हलवाई लोग, कहार लोग, तमाम छोटे-छोटे काम-धंधों में लगे लोग भी समाज के जाने-माने, बड़े और ओहदेदार लोगों के साथ होली खेलते थे। छोटे-बड़े का कोई फर्क नहीं होता था। कौन पैसे वाला है, कौन कम पैसेवाला, कौन बड़े पद पर है, कौन कम पढ़ा-लिखा सफाई या धोबी का काम करने वाला... सब एक-दूसरे को होली के रंग में ऐसा रंगते थे कि पूछिए मत। ऐसा खुशी और जोश का माहौल होता था होली पर। तब ओहदे, जात-बिरादरी का कोई फासला नहीं था। लेकिन पिछले कई सालों से यह सब कम होते-होते अब तो यह होली का माहौल न के बराबर तक पहुंच गया है। समय भी अब नहीं रहा किसी के पास, क्या बच्चे, क्या बड़े। बच्चों पर भी पढ़ाई का बहुत बोझ है। हर कोई इंजीनियर, मैनेजर बनने के लिए बेचैन है। वो भी क्या करें। ढंग की नौकरी नहीं मिली तो जिंदगी कैसे काट पाएंगे आज के माहौल में। घर चलाना कितना मुश्किल हो गया है। होली जो है, वह धमार को बोलते है- ध्रुपद धमार। धमार में होली के ही शब्द रहते हैं सब। वो लयकारी और तबले-मृदंग के साथ होती है। उसमें तिहाइयां बहुत बड़ी-बड़ी बनती हैं। लेकिन अब होली के कई और रंग भी आए हैं। वृंदावन में जो लोग गाते हैं, उसे डफ की होली कहते हैं, क्योंकि वे उसे डफ बजाकर गाते हैं। कीर्तन में होली हो गई है। ठुमरी होली है। चैती होली गाते हैं बनारस में। बनारस में कुछ अनूठा, अलग ही रंग है होली में। तो हम जो देखे हैं, सुने हैं, वही हम अपने शागिर्दों को और बच्चों को बताते हैं। काशी के संगीतज्ञों और कलाकारों की होली भी मशहूर रही है? संगीतज्ञों की भी होली ऐसी ही होती थी। वो सबसे मिलते-जुलते थे। रंग चलता रहता था। खूब गाना-बजाना होता था। पर वे बाहर नहीं गाते थे होली। बनारस तो गलियों का ही शहर है। तो यहां गली जो हैं, लगभग हर गली में किसी न किसी संगीतज्ञ का घर होता है। वहीं वे खूब गाते थे और लोग भी उनसे मिलने आते-जाते रहते थे। क्या महफिल सजती थी? एक से एक बड़े कलाकार। आज तो आपको सिर्फ याद ही दिला सकती हूं लेकिन मेरी आंखों के आगे तो वह पूरा दृश्य खिंचा हुआ है, जब काशी में गली-गली होली गाई जाती थी। हां, हमारी काशी में होलिका जलने के बाद से ही महिलाओं का घर से बाहर निकलना बंद हो जाता था। तो बाहर पुरुष लोग ही होली गाते थे, और वैसे ही फाग भी। आप तो भारतीय संगीत की धरोहर के तौर पर जानी जाती हैं। कजरी, चैती जैसी तमाम विधाओं में होली गायन की क्या खासियत है? होली जो है, वह धमार को बोलते है- ध्रुपद धमार। धमार में होली के ही शब्द रहते हैं सब। वो लयकारी और तबले-मृदंग के साथ होती है। उसमें तिहाइयां बहुत बड़ी-बड़ी बनती हैं। लेकिन अब होली के कई और रंग भी आए हैं। वृंदावन में जो लोग गाते हैं, उसे डफ की होली कहते हैं, क्योंकि वे उसे डफ बजाकर गाते हैं। कीर्तन में होली हो गई है। ठुमरी होली है। चैती होली गाते हैं बनारस में। बनारस में कुछ अनूठा, अलग ही रंग है होली में। तो हम जो देखे हैं, सुने हैं, वही हम अपने शागिर्दों को और बच्चों को बताते हैं। समय के साथ क्या कुछ बदला है? अब समय नहीं रहा किसी के पास कि फुर्सत से सुन सके। तो बस आधे घंटे में जैसे-तैसे निपटाना पड़ता है। इन विधाओं को बचाने के लिए कुछ किया जाना चाहिए। संगीत के गुणी लोग और संगीतप्रेमी आगे आएं, छोटी-छोटी कमेटियां बनें, फिर उनकी एक बड़ी कमेटी हो। इस तरह से संगीत की तमाम विधाओं को, जो सैकड़ों साल से हमारी परंपरा रही हैं, बचाया जा सकता है। आज इसकी क्या उपयोगिता है? आज ही तो इसकी सबसे ज्यादा उपयोगिता है। लोग जितने तनाव में हैं, निराशा में हैं, उन्हें हिन्दुस्थानी संगीत ही मिटा सकता है। परिवार खुशहाल हो सकते हैं, लोग अपना काम और अच्छे से कर सकते हैं। बीमारी कम होगी। |
शरणार्थियों की अंतर्राष्ट्रीय संस्था ने इराक़ के मूसिल नगर में मानवीय स्थिति के बारे में सचेत किया है।
आज़रबाइजान गणराज्य और ज़ायोनी शासन, बाकू की ओर से इस्राईल के आयरन डोन नामक मीज़ाइल भेदी सिस्टम को ख़रीदने पर सहमत हो गए हैं।
अमरीका ने दाइश प्रमुख अबुबक्र बग़दादी के ऊपर रखी गई रक़म को बढ़ाकर ढाई करोड़ डालर कर दी है।
ज़ायोनी शासन की गुप्तचर सेवा मुसाद के प्रमुख ने एक सुरक्षा प्रतिनिधि मंडल के साथ अमरीका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प से मुलाक़ात करके क्षेत्र के अहम सुरक्षा विषयों के बारे में बात की है।
यमन के दक्षिणी बंदरगाही शहर अदन में इस देश के पूर्व राष्ट्रपति मंसूर हादी के 40 किराए के मिलिटेंट्स मारे गए। ये मिलिटेंट्स एक आत्मघाती हमले में मारे गए।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीरिया के पश्चिमोत्तरी शहर अलेप्पो या हलब में कथित रूप से मानव सहायता पहुंचाने व लोगों को वहां से निकालने से संबंधित फ़्रांस के प्रस्ताव पर वोट होने जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र संघ ने अतिग्रहित फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में ज़ायोनी शासन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय क़ानून और मानवाधिकार के हर रोज़ उल्लंघन की कड़ी निंदा की है।
इराक़ के शहर मूसिल में दो कार बम धमाकों में कम से कम 18 नागरिकों की मौत हो गई है।
सऊदी अरब में 5167 नागरिक आतंकवाद के आरोपों में जेल में बंद हैं।
इराक़ के नैनवा प्रांत की स्वतंत्रता का अभियान सफलतापूर्वक जारी है और सेना ने इस कार्यवाही के दौरान 174 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया।
| शरणार्थियों की अंतर्राष्ट्रीय संस्था ने इराक़ के मूसिल नगर में मानवीय स्थिति के बारे में सचेत किया है। आज़रबाइजान गणराज्य और ज़ायोनी शासन, बाकू की ओर से इस्राईल के आयरन डोन नामक मीज़ाइल भेदी सिस्टम को ख़रीदने पर सहमत हो गए हैं। अमरीका ने दाइश प्रमुख अबुबक्र बग़दादी के ऊपर रखी गई रक़म को बढ़ाकर ढाई करोड़ डालर कर दी है। ज़ायोनी शासन की गुप्तचर सेवा मुसाद के प्रमुख ने एक सुरक्षा प्रतिनिधि मंडल के साथ अमरीका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प से मुलाक़ात करके क्षेत्र के अहम सुरक्षा विषयों के बारे में बात की है। यमन के दक्षिणी बंदरगाही शहर अदन में इस देश के पूर्व राष्ट्रपति मंसूर हादी के चालीस किराए के मिलिटेंट्स मारे गए। ये मिलिटेंट्स एक आत्मघाती हमले में मारे गए। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीरिया के पश्चिमोत्तरी शहर अलेप्पो या हलब में कथित रूप से मानव सहायता पहुंचाने व लोगों को वहां से निकालने से संबंधित फ़्रांस के प्रस्ताव पर वोट होने जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने अतिग्रहित फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में ज़ायोनी शासन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय क़ानून और मानवाधिकार के हर रोज़ उल्लंघन की कड़ी निंदा की है। इराक़ के शहर मूसिल में दो कार बम धमाकों में कम से कम अट्ठारह नागरिकों की मौत हो गई है। सऊदी अरब में पाँच हज़ार एक सौ सरसठ नागरिक आतंकवाद के आरोपों में जेल में बंद हैं। इराक़ के नैनवा प्रांत की स्वतंत्रता का अभियान सफलतापूर्वक जारी है और सेना ने इस कार्यवाही के दौरान एक सौ चौहत्तर आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया। |
Born on 31 May 1992 (Age 31)
*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
| Born on इकतीस मई एक हज़ार नौ सौ बानवे *अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे। |
स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती देने सहित छात्रों की प्रतिभा को प्रत्येक स्तर पर आंकने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही कुछ और बड़े कदम उठा सकती है। इसके तहत तीसरी, पांचवीं और आठवीं कक्षा की परीक्षाएं भी दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं जैसी आयोजित की जा सकती हैं। फिलहाल यह बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, बल्कि उसके जैसी होगी। इनका आयोजन भी क्षेत्रीय स्तर पर किसी उपयुक्त प्राधिकरण की देखरेख में होगा। केंद्र राज्यों के साथ व्यापक चर्चा शुरू कर चुका है।
कई राज्यों में पहले भी पांचवीं व आठवीं के स्तर पर ऐसी परीक्षाएं आयोजित होती थीं। हालांकि, वर्ष 2009 में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून आने के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई, क्योंकि इस कानून के तहत आठवीं तक किसी छात्र को फेल नहीं किया जा सकता था। इस बीच कई राज्यों ने शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती देने के लिए पांचवीं और आठवीं की परीक्षाओं को फिर से शुरू करने की पहल की है। राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने इसे शुरू भी कर दिया है। लेकिन तीसरी के स्तर पर अब तक इसे कहीं नहीं अपनाया गया है।
शिक्षा मंत्रलय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती देने की इस पहल के तहत नए कदम की तैयारी है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी इसे लेकर सिफारिश की गई है। इसमें कहा गया है कि स्कूलों में छात्रों को रटकर याद कराने के बजाय उन्हें वास्तविक ज्ञान दिया जाए। साथ ही उन्हें कौशल विकास से भी जोड़ा जाए। यही वजह है कि शिक्षा मंत्रलय अब निचले स्तर पर एक मानक तय करना चाहता है।
शिक्षा मंत्रलय ने इस पहल को शैक्षणिक सत्र 2022-23 से ही आयोजित करने की योजना बनाई है। इस पर अंतिम फैसला राज्यों की सहमति के बाद ही होगा। योजना के तहत स्कूली स्तर पर होने वाली परीक्षा वार्षिक परीक्षा की तरह ही होगी, लेकिन इसका आयोजन क्षेत्रीय स्तर पर होगा।
| स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती देने सहित छात्रों की प्रतिभा को प्रत्येक स्तर पर आंकने के लिए केंद्र सरकार जल्द ही कुछ और बड़े कदम उठा सकती है। इसके तहत तीसरी, पांचवीं और आठवीं कक्षा की परीक्षाएं भी दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं जैसी आयोजित की जा सकती हैं। फिलहाल यह बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, बल्कि उसके जैसी होगी। इनका आयोजन भी क्षेत्रीय स्तर पर किसी उपयुक्त प्राधिकरण की देखरेख में होगा। केंद्र राज्यों के साथ व्यापक चर्चा शुरू कर चुका है। कई राज्यों में पहले भी पांचवीं व आठवीं के स्तर पर ऐसी परीक्षाएं आयोजित होती थीं। हालांकि, वर्ष दो हज़ार नौ में शिक्षा का अधिकार कानून आने के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई, क्योंकि इस कानून के तहत आठवीं तक किसी छात्र को फेल नहीं किया जा सकता था। इस बीच कई राज्यों ने शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती देने के लिए पांचवीं और आठवीं की परीक्षाओं को फिर से शुरू करने की पहल की है। राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने इसे शुरू भी कर दिया है। लेकिन तीसरी के स्तर पर अब तक इसे कहीं नहीं अपनाया गया है। शिक्षा मंत्रलय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूती देने की इस पहल के तहत नए कदम की तैयारी है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी इसे लेकर सिफारिश की गई है। इसमें कहा गया है कि स्कूलों में छात्रों को रटकर याद कराने के बजाय उन्हें वास्तविक ज्ञान दिया जाए। साथ ही उन्हें कौशल विकास से भी जोड़ा जाए। यही वजह है कि शिक्षा मंत्रलय अब निचले स्तर पर एक मानक तय करना चाहता है। शिक्षा मंत्रलय ने इस पहल को शैक्षणिक सत्र दो हज़ार बाईस-तेईस से ही आयोजित करने की योजना बनाई है। इस पर अंतिम फैसला राज्यों की सहमति के बाद ही होगा। योजना के तहत स्कूली स्तर पर होने वाली परीक्षा वार्षिक परीक्षा की तरह ही होगी, लेकिन इसका आयोजन क्षेत्रीय स्तर पर होगा। |
बॉलीवुड एक्टर मिलिंद सोमन अकसर सुर्खियों में छाए रहते हैं कभी अपनी फिटेस्ट पर्सनालिटी को लेकर तो कभी अपनी कम उम्र के प्यार को लेकर... लेकिन इस बार मिलिंद सोमन इनमें से किसी वजह से नहीं बल्कि अपनी नयी किताब को लेकर चर्चा में बनें हुए हैं। मिलिंद सोमन ने अपने अनुभवों के साथ किताब लिखी है। उनकी किताब का नाम 'मेड इन इंडिया' है। इस बुक में उन्होंने अपनी जिंदगी से जुड़े कुछ किस्सों को भी साझा किया है।
अपने बचपन की कुछ बातों का खुलासा करते हुए 'मेड इन इंडिया' में मिलिंद ने लिखा कि एक वक्त वो था जब मैं आरएसएस के साथ जुड़ा था। मेरे बाबा को ये लगता था कि आरएसएस से एक युवा लड़के के अंदर अनुशासन, जीवन जीने का सही तरीका, फिटनेस और अच्छी समझ आती है। जब मैं छोटा था तो मुझे याद है कि हमारे करीबी ऐसा ही सोचते थे। हमारे यहां आरएसएस की लोकल शाखा शिवाजी पार्क में होती थी। शिवाजी पार्क जाना तो जैसे हमारा रूटीन हुआ करता था।
मिलिंद सोमन ने अपने आरएसएस ज्वाइन करने के अनुभव पर आगे लिखा कि मैं उस समय सोचता था कि आखिर मेरे माता-पिता में मुझ जैसे खुश रहने वाले लड़के को यहां क्यों भेज दिया यहां कितनी ताकत लगती है। मैं हमेशा सबसे पीछे खड़ा रहता था। जब मैंने आरएसएस को ज्वाइन किया था तब मेरी उम्र 10 साल की थी। मुझ हमेशा इस बात पर गुस्सा आता रहता था कि मेरे मां-बाप से ऐसा क्यों किया, मुझे यहां क्यों भेजा। आरएसएस में जो मेरे साथी थे उनमें ज्यादातर बुजुर्ग थे ये सभी काफी अनुशासन से रहते थे। कोई फन मस्ती नहीं हुआ करती थी। एकदम बॉक्सर वाले अंदाज में जीने का तरीका हुआ करता था।
धीरे-धीरे मैंने इसे अपना लिया और आरएसएस ने मेरी रोजमर्जा जिंदगी से कुछ चीजों को जोड़ दिया जैसे हर रोज शाम को वॉक पर जाना मेरी आदत में आ गया था। मैं हमेशा शाम को वॉक करता हूं। आज के समय में मीडिया में दिखाया जाता है कि आरएसएस सांप्रदायिक है, नुकसानदेह प्रोपैगैंडा वाला कहा जाता है शाखा के बारे में जब मैं यह सब सुनता हूं तो मुझे दुख होता है। हम जिस आरएसएस शाखा को जानते हैं वो तो काफी अलग है। मेरी यादों में जो शाखा है वो शाखा तो काफी अलग है। जब हम शाखा में जाते थे तो वहां हम खाकी कलर का शाॉर्ट्स पहते थे, साथ में मार्च करते, गाना गाते थे। हम साथ में मिलकर संस्कृत के मंत्रों का उच्चारण भी करते थे जिसका हमें अर्थ भी नहीं पता होता था। शाखा में हम साथियों के साथ मस्ती करते थे, खेलते थे, साथ में हमें बहुत मजा आता था। मिलिंद आगे लिखते है कि मेरे पिता भी आरएसएस का हिस्सा रहे हैं। वो हमेशा कहते थे कि मैं हिंदू हूं और इस बात पर मुझे गर्व है। हिंदू होने पर गर्व क्यों? ये बात मुझे समझ नहीं आती थी लेकिन मुझे इसमें कुछ एतराज करने वाला कभी लगा भी नहीं।
| बॉलीवुड एक्टर मिलिंद सोमन अकसर सुर्खियों में छाए रहते हैं कभी अपनी फिटेस्ट पर्सनालिटी को लेकर तो कभी अपनी कम उम्र के प्यार को लेकर... लेकिन इस बार मिलिंद सोमन इनमें से किसी वजह से नहीं बल्कि अपनी नयी किताब को लेकर चर्चा में बनें हुए हैं। मिलिंद सोमन ने अपने अनुभवों के साथ किताब लिखी है। उनकी किताब का नाम 'मेड इन इंडिया' है। इस बुक में उन्होंने अपनी जिंदगी से जुड़े कुछ किस्सों को भी साझा किया है। अपने बचपन की कुछ बातों का खुलासा करते हुए 'मेड इन इंडिया' में मिलिंद ने लिखा कि एक वक्त वो था जब मैं आरएसएस के साथ जुड़ा था। मेरे बाबा को ये लगता था कि आरएसएस से एक युवा लड़के के अंदर अनुशासन, जीवन जीने का सही तरीका, फिटनेस और अच्छी समझ आती है। जब मैं छोटा था तो मुझे याद है कि हमारे करीबी ऐसा ही सोचते थे। हमारे यहां आरएसएस की लोकल शाखा शिवाजी पार्क में होती थी। शिवाजी पार्क जाना तो जैसे हमारा रूटीन हुआ करता था। मिलिंद सोमन ने अपने आरएसएस ज्वाइन करने के अनुभव पर आगे लिखा कि मैं उस समय सोचता था कि आखिर मेरे माता-पिता में मुझ जैसे खुश रहने वाले लड़के को यहां क्यों भेज दिया यहां कितनी ताकत लगती है। मैं हमेशा सबसे पीछे खड़ा रहता था। जब मैंने आरएसएस को ज्वाइन किया था तब मेरी उम्र दस साल की थी। मुझ हमेशा इस बात पर गुस्सा आता रहता था कि मेरे मां-बाप से ऐसा क्यों किया, मुझे यहां क्यों भेजा। आरएसएस में जो मेरे साथी थे उनमें ज्यादातर बुजुर्ग थे ये सभी काफी अनुशासन से रहते थे। कोई फन मस्ती नहीं हुआ करती थी। एकदम बॉक्सर वाले अंदाज में जीने का तरीका हुआ करता था। धीरे-धीरे मैंने इसे अपना लिया और आरएसएस ने मेरी रोजमर्जा जिंदगी से कुछ चीजों को जोड़ दिया जैसे हर रोज शाम को वॉक पर जाना मेरी आदत में आ गया था। मैं हमेशा शाम को वॉक करता हूं। आज के समय में मीडिया में दिखाया जाता है कि आरएसएस सांप्रदायिक है, नुकसानदेह प्रोपैगैंडा वाला कहा जाता है शाखा के बारे में जब मैं यह सब सुनता हूं तो मुझे दुख होता है। हम जिस आरएसएस शाखा को जानते हैं वो तो काफी अलग है। मेरी यादों में जो शाखा है वो शाखा तो काफी अलग है। जब हम शाखा में जाते थे तो वहां हम खाकी कलर का शाॉर्ट्स पहते थे, साथ में मार्च करते, गाना गाते थे। हम साथ में मिलकर संस्कृत के मंत्रों का उच्चारण भी करते थे जिसका हमें अर्थ भी नहीं पता होता था। शाखा में हम साथियों के साथ मस्ती करते थे, खेलते थे, साथ में हमें बहुत मजा आता था। मिलिंद आगे लिखते है कि मेरे पिता भी आरएसएस का हिस्सा रहे हैं। वो हमेशा कहते थे कि मैं हिंदू हूं और इस बात पर मुझे गर्व है। हिंदू होने पर गर्व क्यों? ये बात मुझे समझ नहीं आती थी लेकिन मुझे इसमें कुछ एतराज करने वाला कभी लगा भी नहीं। |
नई दिल्ली. अंडर 19 वर्ल्ड कप (Under 19 World Cup) में भारत का सफर निराशजनक रूप से खत्म हुआ. फाइनल में भारत को बांग्लादेश के हाथों तीन विकेट से हार का सामना करना पड़ा था. मुकाबले में भारतीय बल्लेबाज और गेंदबाज दोनों ही विफल रहे. मगर भारतीय खेमे में एक ऐसा प्लेयर मौजूद था, जो टूनामेंट के पहले मैच से लेकर आखिरी तक मैदान पर टिका रहा. सिर्फ बल्ले से ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर गेंदबाजी भी की और सफलता हासिल की, मगर जब टीम मैच हार रही थी तो 18 साल के इस बल्लेबाज की एक फोटो ने पूरे देश के दिल को दहला दिया. फोटो थी- हाथ जोड़कर आसमान की ओर देखने की, जिससे भारत का यह युवा बल्लेबाज भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि कुछ तो कर दो. इस बल्लेबाज को लगने लगा था कि बल्लेबाजी, गेंदबाजी, सब कुछ करने के बाद भी वह टीम को जीत नहीं दिला पा रहा तो शायद ऊपर वाले से की गई एक प्रार्थना ही टीम को जीत दिला दे.
मगर शायद ऊपर वाले ने इस बल्लेबाज के लिए कुछ बड़ा सोच रखा है, इसीलिए उस समय बात नहीं मानी. आंसूओं के साथ अंडर 19 वर्ल्ड कप (Under 19 World Cup) में इस बल्लेबाज का भी सफर खत्म हो गया. मगर अंत ही आरंभ है, ये तो सबने सुना होगा. वर्ल्ड कप में निराशजनक सफर खत्म होने के साथ ही इस बल्लेबाज का एक नया सफर शुरू हो गया और यह बल्लेबाज अपने सफर पर निकल भी गया. . . . अपनी मंजिल हासिल करने, अपना अधूरा सपना पूरा करने, अपने संघर्ष को अंजाम तक पहुंचाने, दुनिया को अपने बल्ले की ताकत दिखाने और ये बताने की यशस्वी जायसवाल (Yashasvi Jaiswal) को एक हार तोड़ नहीं सकती. अभी बहुत जीत हासिल करना बाकी है.
अंडर 19 वर्ल्ड कप के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट यशस्वी ने News 18 हिंदी से खास बातचीत में अपने अनुभवों को शेयर किया.
टूर्नामेंट का अनुभव कैसा रहा?
अनुभव काफी शानदार रहा. इस टूर्नामेंट से काफी कुछ सीखने को मिला. इंटरनेशनल स्तर पर आईसीसी (ICC) के बड़े इवेंट में दबाव में खेलने का अनुभव मिला. सभी टीम से चुनौती मिली और उस चुनौती को किस रणनीति के साथ हैंडल करना है, पाकिस्तान के खिलाफ अतिरिक्त दबाव वाले मुकाबले में किस मानसिकता के साथ उतरना है. ये सब कुछ इसी टूर्नामेंट से सीखने को मिला.
पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले के दौरान दिमाग में क्या चल रहा था?
इस मुकाबले को बाकी मुकाबलों की ही तरह लिया. मैदान पर सिर्फ यही सोचकर उतरा कि विकेट नहीं गंवाना. इसके बाद बल्ले से अच्छे शॉट्स लगने शुरू हो गए और काफी कुछ कंट्रोल में आ गया था. जिसके बाद शतक जड़ दिया. मगर पारी के दौरान शतक के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोच रहा था.
बांग्लादेश से मिली हार का जिम्मेदार कौन?
फाइनल में पूरी टीम ने मेहनत की थी. बांग्लादेश की चुनौती को भी आसान नहीं समझा था. हमारी रणनीति विपक्षी टीम को 230 रनों के आस पास का लक्ष्य देने की थी, मगर ऐसा नहीं हो पाया और हम सिर्फ 177 रन ही बना पाए. अगर हम अतिरिक्त 33 रन नहीं देते तो शायद परिणाम कुछ और होता. ये 33 रन भारी पड़े. हमारी टीम एकजुट होकर खेली. हार जीत तो चलती रहती है.
फाइनल में भगवान ही आखिरी उम्मीद?
जब हार दिखने लगी थी तो भगवान ही आखिरी उम्मीद बचे थे. इसीलिए बाउंड्री पर फील्डिंग करते हुए हाथ जोड़कर उनसे यही कह रहा था कि भगवान कुछ कमाल कर दो. ये करने के अलावा कुछ बचा भी नहीं था.
फाइनल में बाद दोनों टीमों के बीच क्या हुआ था, बाद में क्या इस पर बात हुई?
मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता, क्योंकि इस दौरान मैं मैदान से बाहर था. ड्रेसिंग रूम में भी हम सबने इस मामले पर कोई बात नहीं की. बस इतना ही कहा कि जो हो गया, उसे जाने दो.
प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट की ट्रॉफी ट्रैवलिंग में ही टूटी?
हर किसी को ऐसा लग रहा है कि वो मैंने तोड़ी है. मगर ऐसा नहीं हैं. मैं इस ट्रॉफी का सम्मान करता हूं, क्योंकि इस ट्रॉफी को हासिल करने के लिए मैंने काफी मेहनत की है. मुझे मालूम ही नहीं चला कि वो कब टूट गई. शायद ट्रैवलिंग के दौरान सामान इधर से उधर करने में टूट गई. मैं फाइनल ही हार से सिर्फ दुखी था, नाराज नहीं था कि ट्रॉफी ही तोड़ दूं.
सीनियर टीम के लिए पृथ्वी शॉ, शुभमन गिल से मुकाबला मानते हैं?
नहीं, बिल्कुल नहीं, इस मामले में मेरा मानना है कि वो अपना काम कर रहे हैं और मैं अपना काम कर रहा हूं. अगर मैं अच्छा करूंगा तो मुझे मौका मिलेगा, वो लोग करेंगे तो उन्हें मौका मिलेगा. बाकी काम चयनकर्ताओं का हैं. मुझे जब भी मौका मिलेगा, मैं प्रदर्शन करुंगा.
अपने पहले आईपीएल को लेकर कितने उत्साहित हैं?
राजस्थान रॉयल्स से मौका मिला. टीम में स्टीव स्मिथ (Steve Smith), बेन स्टोक्स (Ben Stokes) जैसे वर्ल्ड क्लास खिलाड़ी हैं. जिनसे काफी कुछ सीखने को मिलेगा. आईपीएल की तैयारियां शुरू की दी है और मौका मिला तो वहां पर कोई कमी नहीं छोडूंगा.
मुंबई की सड़कों पर पानी पूरी बेचने की पूरी कहानी क्या है?
जब मुंबई आया तो आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. टेंट में रहता था, तो उसी समय एक पानी पूरी बेचने वाले अंकल के यहां पर काम करने लग गया, जिससे थोड़ा बहुत खर्चा निकल जाता था. करीब दो साल तक पानी पूरी बेची. मगर ज्वाला सर के पास आने के बाद पूरा ध्यान सिर्फ खेल पर लगाया और इस बात को करीब छह साल हो गए हैं.
Sunday Special: ओलिंपिक ईयर में घुसा कोराेना वायरस, खेल जगत को कर दिया 'बीमार'
संडे स्पेशलः 4 दिन के हुए टेस्ट मैच तो क्रिकेट में हो जाएगी बगावत!
.
| नई दिल्ली. अंडर उन्नीस वर्ल्ड कप में भारत का सफर निराशजनक रूप से खत्म हुआ. फाइनल में भारत को बांग्लादेश के हाथों तीन विकेट से हार का सामना करना पड़ा था. मुकाबले में भारतीय बल्लेबाज और गेंदबाज दोनों ही विफल रहे. मगर भारतीय खेमे में एक ऐसा प्लेयर मौजूद था, जो टूनामेंट के पहले मैच से लेकर आखिरी तक मैदान पर टिका रहा. सिर्फ बल्ले से ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर गेंदबाजी भी की और सफलता हासिल की, मगर जब टीम मैच हार रही थी तो अट्ठारह साल के इस बल्लेबाज की एक फोटो ने पूरे देश के दिल को दहला दिया. फोटो थी- हाथ जोड़कर आसमान की ओर देखने की, जिससे भारत का यह युवा बल्लेबाज भगवान से प्रार्थना कर रहा था कि कुछ तो कर दो. इस बल्लेबाज को लगने लगा था कि बल्लेबाजी, गेंदबाजी, सब कुछ करने के बाद भी वह टीम को जीत नहीं दिला पा रहा तो शायद ऊपर वाले से की गई एक प्रार्थना ही टीम को जीत दिला दे. मगर शायद ऊपर वाले ने इस बल्लेबाज के लिए कुछ बड़ा सोच रखा है, इसीलिए उस समय बात नहीं मानी. आंसूओं के साथ अंडर उन्नीस वर्ल्ड कप में इस बल्लेबाज का भी सफर खत्म हो गया. मगर अंत ही आरंभ है, ये तो सबने सुना होगा. वर्ल्ड कप में निराशजनक सफर खत्म होने के साथ ही इस बल्लेबाज का एक नया सफर शुरू हो गया और यह बल्लेबाज अपने सफर पर निकल भी गया. . . . अपनी मंजिल हासिल करने, अपना अधूरा सपना पूरा करने, अपने संघर्ष को अंजाम तक पहुंचाने, दुनिया को अपने बल्ले की ताकत दिखाने और ये बताने की यशस्वी जायसवाल को एक हार तोड़ नहीं सकती. अभी बहुत जीत हासिल करना बाकी है. अंडर उन्नीस वर्ल्ड कप के प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट यशस्वी ने News अट्ठारह हिंदी से खास बातचीत में अपने अनुभवों को शेयर किया. टूर्नामेंट का अनुभव कैसा रहा? अनुभव काफी शानदार रहा. इस टूर्नामेंट से काफी कुछ सीखने को मिला. इंटरनेशनल स्तर पर आईसीसी के बड़े इवेंट में दबाव में खेलने का अनुभव मिला. सभी टीम से चुनौती मिली और उस चुनौती को किस रणनीति के साथ हैंडल करना है, पाकिस्तान के खिलाफ अतिरिक्त दबाव वाले मुकाबले में किस मानसिकता के साथ उतरना है. ये सब कुछ इसी टूर्नामेंट से सीखने को मिला. पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले के दौरान दिमाग में क्या चल रहा था? इस मुकाबले को बाकी मुकाबलों की ही तरह लिया. मैदान पर सिर्फ यही सोचकर उतरा कि विकेट नहीं गंवाना. इसके बाद बल्ले से अच्छे शॉट्स लगने शुरू हो गए और काफी कुछ कंट्रोल में आ गया था. जिसके बाद शतक जड़ दिया. मगर पारी के दौरान शतक के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोच रहा था. बांग्लादेश से मिली हार का जिम्मेदार कौन? फाइनल में पूरी टीम ने मेहनत की थी. बांग्लादेश की चुनौती को भी आसान नहीं समझा था. हमारी रणनीति विपक्षी टीम को दो सौ तीस रनों के आस पास का लक्ष्य देने की थी, मगर ऐसा नहीं हो पाया और हम सिर्फ एक सौ सतहत्तर रन ही बना पाए. अगर हम अतिरिक्त तैंतीस रन नहीं देते तो शायद परिणाम कुछ और होता. ये तैंतीस रन भारी पड़े. हमारी टीम एकजुट होकर खेली. हार जीत तो चलती रहती है. फाइनल में भगवान ही आखिरी उम्मीद? जब हार दिखने लगी थी तो भगवान ही आखिरी उम्मीद बचे थे. इसीलिए बाउंड्री पर फील्डिंग करते हुए हाथ जोड़कर उनसे यही कह रहा था कि भगवान कुछ कमाल कर दो. ये करने के अलावा कुछ बचा भी नहीं था. फाइनल में बाद दोनों टीमों के बीच क्या हुआ था, बाद में क्या इस पर बात हुई? मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता, क्योंकि इस दौरान मैं मैदान से बाहर था. ड्रेसिंग रूम में भी हम सबने इस मामले पर कोई बात नहीं की. बस इतना ही कहा कि जो हो गया, उसे जाने दो. प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट की ट्रॉफी ट्रैवलिंग में ही टूटी? हर किसी को ऐसा लग रहा है कि वो मैंने तोड़ी है. मगर ऐसा नहीं हैं. मैं इस ट्रॉफी का सम्मान करता हूं, क्योंकि इस ट्रॉफी को हासिल करने के लिए मैंने काफी मेहनत की है. मुझे मालूम ही नहीं चला कि वो कब टूट गई. शायद ट्रैवलिंग के दौरान सामान इधर से उधर करने में टूट गई. मैं फाइनल ही हार से सिर्फ दुखी था, नाराज नहीं था कि ट्रॉफी ही तोड़ दूं. सीनियर टीम के लिए पृथ्वी शॉ, शुभमन गिल से मुकाबला मानते हैं? नहीं, बिल्कुल नहीं, इस मामले में मेरा मानना है कि वो अपना काम कर रहे हैं और मैं अपना काम कर रहा हूं. अगर मैं अच्छा करूंगा तो मुझे मौका मिलेगा, वो लोग करेंगे तो उन्हें मौका मिलेगा. बाकी काम चयनकर्ताओं का हैं. मुझे जब भी मौका मिलेगा, मैं प्रदर्शन करुंगा. अपने पहले आईपीएल को लेकर कितने उत्साहित हैं? राजस्थान रॉयल्स से मौका मिला. टीम में स्टीव स्मिथ , बेन स्टोक्स जैसे वर्ल्ड क्लास खिलाड़ी हैं. जिनसे काफी कुछ सीखने को मिलेगा. आईपीएल की तैयारियां शुरू की दी है और मौका मिला तो वहां पर कोई कमी नहीं छोडूंगा. मुंबई की सड़कों पर पानी पूरी बेचने की पूरी कहानी क्या है? जब मुंबई आया तो आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. टेंट में रहता था, तो उसी समय एक पानी पूरी बेचने वाले अंकल के यहां पर काम करने लग गया, जिससे थोड़ा बहुत खर्चा निकल जाता था. करीब दो साल तक पानी पूरी बेची. मगर ज्वाला सर के पास आने के बाद पूरा ध्यान सिर्फ खेल पर लगाया और इस बात को करीब छह साल हो गए हैं. Sunday Special: ओलिंपिक ईयर में घुसा कोराेना वायरस, खेल जगत को कर दिया 'बीमार' संडे स्पेशलः चार दिन के हुए टेस्ट मैच तो क्रिकेट में हो जाएगी बगावत! . |
New Labour Law Date: कर्मचारी के लिए नए श्रम कानून (New Labour Code) आने की बात लंबे समय से हो रही है। अब इसको लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। श्रम राज्य मंत्री रामेश्वर तेली (Rameshwar Teli) ने लोकसभा (Lok Sabha) में लिखित जवाब में कहा गया है कि जल्द से जल्द इस कानून को लागू कर दिया जाएगा। परंतु इसको लेकर कोई तारीख तय नहीं की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मोदी सरकार (PM Modi) नए श्रम कानूनों को 1 अक्टूबर से लागू कर सकती है। पहले से इसे एक जुलाई से लागू करने की चर्चा हो रही थी।
| New Labour Law Date: कर्मचारी के लिए नए श्रम कानून आने की बात लंबे समय से हो रही है। अब इसको लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। श्रम राज्य मंत्री रामेश्वर तेली ने लोकसभा में लिखित जवाब में कहा गया है कि जल्द से जल्द इस कानून को लागू कर दिया जाएगा। परंतु इसको लेकर कोई तारीख तय नहीं की है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मोदी सरकार नए श्रम कानूनों को एक अक्टूबर से लागू कर सकती है। पहले से इसे एक जुलाई से लागू करने की चर्चा हो रही थी। |
Don't Miss!
हैं।
मौका।
आएंगे।
हां,
है।
फर्नांडीज़।
है।
हैं।
वरूण की आने वाली फिल्म बदलापर में उनका अलग अंदाज दर्शको को देखेने को मिलेगा। फिल्म में वरूण का किरदार उनकी रोमांटिक छवि के उलट है। ऐसे किरदारों को निभाने में जोखिम होता है। लेकिन वरूण का कहना है कि बदलाव तभी आएगा जब हम इसका हिस्सा बनेंगे। मैं वही फिल्में करना चाहता हूं जिन्हें देखने में आनंद आए।
अब वरूण - जैकलीन का पेयर परदे पर धमाल दिखाएगा या जॉन बाज़ी मारेंगे ये तो ढिशुम के फ्लोर पर जाने के बाद ही तय होगा लेकिन तब तक वरूण को उनके नए प्रोजेक्ट की बधाइयां।
जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. .
| Don't Miss! हैं। मौका। आएंगे। हां, है। फर्नांडीज़। है। हैं। वरूण की आने वाली फिल्म बदलापर में उनका अलग अंदाज दर्शको को देखेने को मिलेगा। फिल्म में वरूण का किरदार उनकी रोमांटिक छवि के उलट है। ऐसे किरदारों को निभाने में जोखिम होता है। लेकिन वरूण का कहना है कि बदलाव तभी आएगा जब हम इसका हिस्सा बनेंगे। मैं वही फिल्में करना चाहता हूं जिन्हें देखने में आनंद आए। अब वरूण - जैकलीन का पेयर परदे पर धमाल दिखाएगा या जॉन बाज़ी मारेंगे ये तो ढिशुम के फ्लोर पर जाने के बाद ही तय होगा लेकिन तब तक वरूण को उनके नए प्रोजेक्ट की बधाइयां। जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. . |
बाड़मेरः राजस्थान के बाड़मेर जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने शनिवार को रिश्वतखोर ग्राम विकास अधिकारी को गिरफ्तार किया है। यहां धोरीमन्ना पंचायत समिति के भीलों की ढाणी कल्ला ग्राम पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी ने रिश्वत में 6000 रुपए लिए। एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामनिवास सुंडा ने बताया कि परिवादी ने एसीबी में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में बताया गया था कि उसके पिता के नाम से नरेगा के तहत टांका स्वीकृत हुआ है। लेकिन ग्राम विकास अधिकारी जुझाराम जॉब कार्ड बनाने पर 100 दिन की हाजरी चढ़ाने की एवज में रिश्वत की मांग कर रहा है।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने शिकायत का गोपनीय सत्यापन करवाया। सके बाद शनिवार को कार्यवाही को अंजाम देते हुए 6 हजार की रिश्वत लेते हुए घूसखोर ग्राम विकास अधिकारी जुझाराम को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। एसीबी निरीक्षक मुकुंद दान के नेतृत्व में टीम लगातार ग्राम विकास अधिकारी के घर और कार्यालय में सर्च ऑपरेशन चला रही है। वहीं एसीबी भी अब घूसखोर ग्राम विकास अधिकारी से पूछताछ करने में जुट गई है।
परिवादी चौहाटन पुलिस थाना इलाके के आलमसर खुर्द के मूल निवासी ग्राम विकास अधिकारी जूझाराम को रिश्वत देने पहुंचा था। यह रिश्वत की राशि उसने धोरीमन्ना स्थित अधिकारी के घर पर दी। यही पर पहले से जाल बिछाए बैठी एसीबी की टीम ने उसी समय आरोपी को धरदबोचा। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद से धोरीमन्ना थाने लाया गया, जहां उससे पूछताछ की जा रही है ।
| बाड़मेरः राजस्थान के बाड़मेर जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने शनिवार को रिश्वतखोर ग्राम विकास अधिकारी को गिरफ्तार किया है। यहां धोरीमन्ना पंचायत समिति के भीलों की ढाणी कल्ला ग्राम पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी ने रिश्वत में छः हज़ार रुपयापए लिए। एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामनिवास सुंडा ने बताया कि परिवादी ने एसीबी में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में बताया गया था कि उसके पिता के नाम से नरेगा के तहत टांका स्वीकृत हुआ है। लेकिन ग्राम विकास अधिकारी जुझाराम जॉब कार्ड बनाने पर एक सौ दिन की हाजरी चढ़ाने की एवज में रिश्वत की मांग कर रहा है। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने शिकायत का गोपनीय सत्यापन करवाया। सके बाद शनिवार को कार्यवाही को अंजाम देते हुए छः हजार की रिश्वत लेते हुए घूसखोर ग्राम विकास अधिकारी जुझाराम को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। एसीबी निरीक्षक मुकुंद दान के नेतृत्व में टीम लगातार ग्राम विकास अधिकारी के घर और कार्यालय में सर्च ऑपरेशन चला रही है। वहीं एसीबी भी अब घूसखोर ग्राम विकास अधिकारी से पूछताछ करने में जुट गई है। परिवादी चौहाटन पुलिस थाना इलाके के आलमसर खुर्द के मूल निवासी ग्राम विकास अधिकारी जूझाराम को रिश्वत देने पहुंचा था। यह रिश्वत की राशि उसने धोरीमन्ना स्थित अधिकारी के घर पर दी। यही पर पहले से जाल बिछाए बैठी एसीबी की टीम ने उसी समय आरोपी को धरदबोचा। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद से धोरीमन्ना थाने लाया गया, जहां उससे पूछताछ की जा रही है । |
'शानदार' चिकन वफ़ल्स, नॉन वेजिटेरियन्स को तो स्योर ये डिश बहुत पसंद आएगी। तो आइए जानते हैं इसे बनाने और खाने का तरीका।
सामग्री :
विधि :
एक बाउल में आटा, चीनी और नमक मिलाकर इस तरह से फैलाएं कि बीचों-बीच गहरी जगह बन जाए। अब इसमें दूध, अण्डा, पिघला मक्खन और वनीला डालें। फिर सभी चीज़ों को मिलाकर तब तक फेंटे जब जब की स्मूद बैटर न बन जाएं। बहुत ज़्यादा नहीं हिलाना है।
अपने वफ़ल आयरन को पहले से गर्म करने के लिए प्लग-इन कर लें। गर्म आयरन के दोनों ओर ब्रश से पिघला हुआ मक्खन लगाएं और इसमें बैटर डाल दें। आपकी आयरन के मुताबिक निर्धारित समय के अनुसार वफल्स को पकाएं।
| 'शानदार' चिकन वफ़ल्स, नॉन वेजिटेरियन्स को तो स्योर ये डिश बहुत पसंद आएगी। तो आइए जानते हैं इसे बनाने और खाने का तरीका। सामग्री : विधि : एक बाउल में आटा, चीनी और नमक मिलाकर इस तरह से फैलाएं कि बीचों-बीच गहरी जगह बन जाए। अब इसमें दूध, अण्डा, पिघला मक्खन और वनीला डालें। फिर सभी चीज़ों को मिलाकर तब तक फेंटे जब जब की स्मूद बैटर न बन जाएं। बहुत ज़्यादा नहीं हिलाना है। अपने वफ़ल आयरन को पहले से गर्म करने के लिए प्लग-इन कर लें। गर्म आयरन के दोनों ओर ब्रश से पिघला हुआ मक्खन लगाएं और इसमें बैटर डाल दें। आपकी आयरन के मुताबिक निर्धारित समय के अनुसार वफल्स को पकाएं। |
साउथ इंडियन फ़ूड डोसा तो आपने बहुत खाया होगा, लेकिन क्या आपने कभी पिंक डोसा के बारे में सोचा है? अगर आपका आंसर ना है तो आज की इस खाबे में आपको साउथ इंडियन फ़ूड डोसा का एक नया रूप देखने को मील सकता है और ये भी हो कि इस वीडियो को देखने के बाद आप इसके दीवाने बन सकते है। डोसा को साउथ इंडिया में खूब पसंद किया जाता है, लेकिन इसके चाहने वाले की संख्या पूरे देश-विदेश में हैं। इसके कई वीडियो आपने सोशल मीडिया पर देखें होंगे, इसी सिलसिले में एक नया वीडियो सामने आया है, जिसने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा है।
भारतीय शहर जयपुर जिसको पिंक सिटी के नाम से जाना जाता है। ये वीडियो वही का बताया जा रहा है। वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर @jaipurfoodblogs के नाम से शेयर किया गया है। खबर लिखे जाने तक इस वीडियो को लाइक करने वालों की संख्या 13 हजार से अधिक हो चुकी है। इस वीडियो को हाल ही में पांच दिन पहले शेयर किया गया था। सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि स्ट्रीट फ़ूड वेंडर डोसा बैटर में गुलाबी रंग के लिए चुकंदर के रस का उपयोग करता हैं।
इस वीडियो के सामने आने के बाद कुछ यूजर ने कमेंट किया "लड़कियों का पसंदीदा डोसा, हमको तो खेर काला रंग पसंद हैं कोयले वाला ले आना। " एक और यूजर लिखता है "लेडीज़ स्पेशल डोसा। " एक अन्य लिखता है "अंततः, कुछ ऐसा जो बेकार नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए अच्छा है"।
| साउथ इंडियन फ़ूड डोसा तो आपने बहुत खाया होगा, लेकिन क्या आपने कभी पिंक डोसा के बारे में सोचा है? अगर आपका आंसर ना है तो आज की इस खाबे में आपको साउथ इंडियन फ़ूड डोसा का एक नया रूप देखने को मील सकता है और ये भी हो कि इस वीडियो को देखने के बाद आप इसके दीवाने बन सकते है। डोसा को साउथ इंडिया में खूब पसंद किया जाता है, लेकिन इसके चाहने वाले की संख्या पूरे देश-विदेश में हैं। इसके कई वीडियो आपने सोशल मीडिया पर देखें होंगे, इसी सिलसिले में एक नया वीडियो सामने आया है, जिसने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। भारतीय शहर जयपुर जिसको पिंक सिटी के नाम से जाना जाता है। ये वीडियो वही का बताया जा रहा है। वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर @jaipurfoodblogs के नाम से शेयर किया गया है। खबर लिखे जाने तक इस वीडियो को लाइक करने वालों की संख्या तेरह हजार से अधिक हो चुकी है। इस वीडियो को हाल ही में पांच दिन पहले शेयर किया गया था। सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि स्ट्रीट फ़ूड वेंडर डोसा बैटर में गुलाबी रंग के लिए चुकंदर के रस का उपयोग करता हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद कुछ यूजर ने कमेंट किया "लड़कियों का पसंदीदा डोसा, हमको तो खेर काला रंग पसंद हैं कोयले वाला ले आना। " एक और यूजर लिखता है "लेडीज़ स्पेशल डोसा। " एक अन्य लिखता है "अंततः, कुछ ऐसा जो बेकार नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए अच्छा है"। |
नई दिल्लीः सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस जारी हो चूकी है. अविश्वास प्रस्ताव से पहले बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी के खिलाफ ट्वीट में लिखा है- भूकंप के मज़े लेने के लिए तैयार हो जाइए. राहुल ने अपने एक बयां में कहा था कि अगर उन्हें संसद में 15 मिनट बोलने दिया जाए तो भूकंप आ जाएगा. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर मैं 15 मिनट संसद में भाषण दूं तो प्रधानमंत्री मेरे सामने खड़े नहीं हो पाएंगे. गिरिराज के ट्वीट को इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है.
जानिए आखिर है क्या अविश्वास प्रस्ताव?
राहुल गांधी के 15 मिनट मांगने वाले बयान का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि 'कांग्रेस अध्यक्ष ने मुझे चुनौती दी है कि अगर वह 15 मिनट संसद में बोलेंगे तो मैं वहां बैठ नहीं पाऊंगा, लेकिन वह अगर 15 मिनट बोलेंगे यह भी बड़ी बात है और मैं बैठ नहीं पाऊंगा तो मुझे याद आता है कि क्या सीन है. '
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तंज करते हुए कहा था कि हम कांग्रेस के अध्यक्ष के सामने नहीं बैठ सकते हैं, आप नामदार हैं हम कामदार हैं. हम तो अच्छे कपड़े भी नहीं पहन सकते हैं, आपके सामने कैसे बैठेंगे. उन्होंने कहा कि राहुल बिना कागज के 15 मिनट केवल बोलकर दिखाएं. राहुल गांधी 15 मिनट में केवल 5 बार विश्वेश्वरैया का नाम लेकर दिखाएं. बहरहाल अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के चल रही है और वोटिंग शाम को किये जाने की सुचना है .
| नई दिल्लीः सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस जारी हो चूकी है. अविश्वास प्रस्ताव से पहले बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी के खिलाफ ट्वीट में लिखा है- भूकंप के मज़े लेने के लिए तैयार हो जाइए. राहुल ने अपने एक बयां में कहा था कि अगर उन्हें संसद में पंद्रह मिनट बोलने दिया जाए तो भूकंप आ जाएगा. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि अगर मैं पंद्रह मिनट संसद में भाषण दूं तो प्रधानमंत्री मेरे सामने खड़े नहीं हो पाएंगे. गिरिराज के ट्वीट को इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है. जानिए आखिर है क्या अविश्वास प्रस्ताव? राहुल गांधी के पंद्रह मिनट मांगने वाले बयान का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि 'कांग्रेस अध्यक्ष ने मुझे चुनौती दी है कि अगर वह पंद्रह मिनट संसद में बोलेंगे तो मैं वहां बैठ नहीं पाऊंगा, लेकिन वह अगर पंद्रह मिनट बोलेंगे यह भी बड़ी बात है और मैं बैठ नहीं पाऊंगा तो मुझे याद आता है कि क्या सीन है. ' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तंज करते हुए कहा था कि हम कांग्रेस के अध्यक्ष के सामने नहीं बैठ सकते हैं, आप नामदार हैं हम कामदार हैं. हम तो अच्छे कपड़े भी नहीं पहन सकते हैं, आपके सामने कैसे बैठेंगे. उन्होंने कहा कि राहुल बिना कागज के पंद्रह मिनट केवल बोलकर दिखाएं. राहुल गांधी पंद्रह मिनट में केवल पाँच बार विश्वेश्वरैया का नाम लेकर दिखाएं. बहरहाल अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के चल रही है और वोटिंग शाम को किये जाने की सुचना है . |
पुस्तकों, हथियारों, कलाकृतियों और चित्रों के संग्रहालय तो आपने देखे होंगे मगर क्या आपने कभी शौचालयों का संग्रहालय देखा है?
भारत की स्वयंसेवी संस्था सुलभ इंटरनेशनल ने शौचालयों का एक ऐसा संग्रहालय बनाया है जिसमें शौचालयों और मानव सभ्यता संस्कृति के गहरे रिश्तों को दिखाया गया है.
यहाँ फ़्रांस के सम्राट लुई तेरहवें के राजगद्दीनुमा शौचालय से लेकर महारानी विक्टोरिया के शौचालय की अनुकृति मौजूद है, जिसमें हीरे-जवाहरात लगे हैं.
संग्रहालय में दिखाई गई जानकारी के अनुसार शौचालयों का इतिहास हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की सभ्यता जितना ही पुराना है. मोहनजोदजड़ो में शौचालय के अवशेष मिले हैं.
मुग़लकाल में अकबर के राजभवन के अलावा राजस्थान के गोलकुंडा सहित कई किलों पर शौचालय बने मिले जो अब भी देखे जा सकते हैं.
इस संग्रहालय में एक ऐसा अमरीकी शौचालय भी है जो दो तलों वाला है. ऊपर के तल में मालिक जाता था और नीचे मज़दूर.
संग्रहालय के प्रभारी बागेश्वर झा सभी शौचालयों की बारीक़ियाँ बताते हैं लेकिन लुई तेरहवें की राजगद्दी के पास आकर रुकते हैं.
इस राजगद्दीनुमा कुर्सी के नीचे लगे शौचालय के बारे में उनका कहना है, "दुनिया की यह इकलौती राजगद्दी होगी जिसमें शौचालय लगा है. "
लुई तेरहवें के बारे में कहा जाता है कि वह मंत्रियों के साथ गहरे विचार-विमर्श के बीच भी ज़रूरत पड़ने पर शौच कार्य करने लगते थे.
यूरोप और फ्रांस के कई शौचालय और उनके चित्र यहाँ मौजूद हैं. कुछ शौचालय किताबों की शक्ल में हैं तो कुछ मेज़ की तरह.
बुकशेल्फ़ के आकार का भी एक शौचालय है जिसे देखकर अंदाज़ा लगाना मुश्किल है कि ये शौचालय भी हो सकता है.
तेरहवीं-चौदहवीं सदी में लकड़ी के शौचालयों का प्रचलन बंद होते ही सेरेमिक्स के शौचालय बनने लगे.
झा बताते हैं कि ये मनुष्य के विकास का काल था. जीवन के हर क्षेत्र में प्रयोग हो रहे थे. शौचालय भी इससे अछूता नहीं था.
सेरेमिक्स के डिज़ाइनर शौचालय बने. कुछ शौचालयों में हीरे-जवाहरात भी लगा दिए गए.
ये आराम के साथ-साथ फ़ैशन की वस्तु भी बनने लगी. इसके बाद शौचालय आधुनिक होते चले गए.
मानव और शौचालयों का संबंध अब भी वैसा ही है. पिछले साल प्रसिद्ध गायक जेनिफ़र लोपेज़ को उनके पूर्व प्रेमी बेन एफ़्लेक ने जन्मदिन पर महँगा शौचालय उपहार में दिया.
संग्रहालय में यूरोप में प्रयोग होने वाले 'रासायनिक शौचालय' हैं, जिनमें मल की सफ़ाई रसायनों से होती है. ये ऐसा शौचालय है जिसे यात्रा पर भी ले जाया जा सकता है.
पानी डालिए, रसायन डालिए सब कुछ साफ़.
शौचालय में अब तक का सबसे आधुनिक शौचालय भी मौजूद है, जिसे 1993 में अमरीका ने बाज़ार में उतारा.
इंसिनोलेट नाम का ये शौचालय माइक्रोवेव ओवन के सिद्धांत पर काम करता है. इसमें मल की सफ़ाई के लिए पानी की ज़रूरत ही नहीं पड़ती.
बिजली के ज़रिए यह मल को चुटकी भर राख़ में बदल देता है.
विचार कैसे आया?
ऐसा संग्रहालय बनाने का विचार सुलभ को कैसे आया? इसके बारे में बताया इस संस्था के अध्यक्ष बिंदेश्वरी पाठक ने, "जब मैं लंदन गया था तो मैडम तुसॉद का वैक्स म्यूज़ियम देखा. उसी से मुझे एक अनोखा संग्रहालय बनाने की प्रेरणा मिली. "
इसके उद्देश्य के बारे में उनका कहना था, "कोई भी शौचालय के बारे में बात करना ही नहीं चाहता. साथ ही इस काम में लगे लोगों को सभी हीनभावना से देखते हैं. "
उनके अनुसार ऐसा संग्रहालय बनाने के पीछे कोशिश है कि लोगों को इस बारे में जागरूक किया जाए.
भारत की 60 प्रतिशत से भी अधिक आबादी के पास शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है. ऐसे में शौचालय संस्कृति के प्रचार-प्रसार से आज भी सिर पर मैला ढोने वालों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आ सकता है.
| पुस्तकों, हथियारों, कलाकृतियों और चित्रों के संग्रहालय तो आपने देखे होंगे मगर क्या आपने कभी शौचालयों का संग्रहालय देखा है? भारत की स्वयंसेवी संस्था सुलभ इंटरनेशनल ने शौचालयों का एक ऐसा संग्रहालय बनाया है जिसमें शौचालयों और मानव सभ्यता संस्कृति के गहरे रिश्तों को दिखाया गया है. यहाँ फ़्रांस के सम्राट लुई तेरहवें के राजगद्दीनुमा शौचालय से लेकर महारानी विक्टोरिया के शौचालय की अनुकृति मौजूद है, जिसमें हीरे-जवाहरात लगे हैं. संग्रहालय में दिखाई गई जानकारी के अनुसार शौचालयों का इतिहास हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की सभ्यता जितना ही पुराना है. मोहनजोदजड़ो में शौचालय के अवशेष मिले हैं. मुग़लकाल में अकबर के राजभवन के अलावा राजस्थान के गोलकुंडा सहित कई किलों पर शौचालय बने मिले जो अब भी देखे जा सकते हैं. इस संग्रहालय में एक ऐसा अमरीकी शौचालय भी है जो दो तलों वाला है. ऊपर के तल में मालिक जाता था और नीचे मज़दूर. संग्रहालय के प्रभारी बागेश्वर झा सभी शौचालयों की बारीक़ियाँ बताते हैं लेकिन लुई तेरहवें की राजगद्दी के पास आकर रुकते हैं. इस राजगद्दीनुमा कुर्सी के नीचे लगे शौचालय के बारे में उनका कहना है, "दुनिया की यह इकलौती राजगद्दी होगी जिसमें शौचालय लगा है. " लुई तेरहवें के बारे में कहा जाता है कि वह मंत्रियों के साथ गहरे विचार-विमर्श के बीच भी ज़रूरत पड़ने पर शौच कार्य करने लगते थे. यूरोप और फ्रांस के कई शौचालय और उनके चित्र यहाँ मौजूद हैं. कुछ शौचालय किताबों की शक्ल में हैं तो कुछ मेज़ की तरह. बुकशेल्फ़ के आकार का भी एक शौचालय है जिसे देखकर अंदाज़ा लगाना मुश्किल है कि ये शौचालय भी हो सकता है. तेरहवीं-चौदहवीं सदी में लकड़ी के शौचालयों का प्रचलन बंद होते ही सेरेमिक्स के शौचालय बनने लगे. झा बताते हैं कि ये मनुष्य के विकास का काल था. जीवन के हर क्षेत्र में प्रयोग हो रहे थे. शौचालय भी इससे अछूता नहीं था. सेरेमिक्स के डिज़ाइनर शौचालय बने. कुछ शौचालयों में हीरे-जवाहरात भी लगा दिए गए. ये आराम के साथ-साथ फ़ैशन की वस्तु भी बनने लगी. इसके बाद शौचालय आधुनिक होते चले गए. मानव और शौचालयों का संबंध अब भी वैसा ही है. पिछले साल प्रसिद्ध गायक जेनिफ़र लोपेज़ को उनके पूर्व प्रेमी बेन एफ़्लेक ने जन्मदिन पर महँगा शौचालय उपहार में दिया. संग्रहालय में यूरोप में प्रयोग होने वाले 'रासायनिक शौचालय' हैं, जिनमें मल की सफ़ाई रसायनों से होती है. ये ऐसा शौचालय है जिसे यात्रा पर भी ले जाया जा सकता है. पानी डालिए, रसायन डालिए सब कुछ साफ़. शौचालय में अब तक का सबसे आधुनिक शौचालय भी मौजूद है, जिसे एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में अमरीका ने बाज़ार में उतारा. इंसिनोलेट नाम का ये शौचालय माइक्रोवेव ओवन के सिद्धांत पर काम करता है. इसमें मल की सफ़ाई के लिए पानी की ज़रूरत ही नहीं पड़ती. बिजली के ज़रिए यह मल को चुटकी भर राख़ में बदल देता है. विचार कैसे आया? ऐसा संग्रहालय बनाने का विचार सुलभ को कैसे आया? इसके बारे में बताया इस संस्था के अध्यक्ष बिंदेश्वरी पाठक ने, "जब मैं लंदन गया था तो मैडम तुसॉद का वैक्स म्यूज़ियम देखा. उसी से मुझे एक अनोखा संग्रहालय बनाने की प्रेरणा मिली. " इसके उद्देश्य के बारे में उनका कहना था, "कोई भी शौचालय के बारे में बात करना ही नहीं चाहता. साथ ही इस काम में लगे लोगों को सभी हीनभावना से देखते हैं. " उनके अनुसार ऐसा संग्रहालय बनाने के पीछे कोशिश है कि लोगों को इस बारे में जागरूक किया जाए. भारत की साठ प्रतिशत से भी अधिक आबादी के पास शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है. ऐसे में शौचालय संस्कृति के प्रचार-प्रसार से आज भी सिर पर मैला ढोने वालों के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन आ सकता है. |
नई दिल्ली, 29 जुलाई । अभिनेत्री प्रियांशा भारद्वाज धीरे-धीरे वेब सीरीज में जगह बना रही हैं और निश्चित रूप से वह इस फॉरमेट को पसंद कर रही हैं।
आर्या, काफिर और आगामी मिजार्पुर 2 जैसे शो में काम कर चुकीं प्रियांशा ने आईएएनएस को बताया, मुझे वेब सीरीज का फॉरमेट बहुत पसंद है। यह एक अभिनेता को किरदार के इतर जाकर गहरी खोज करने की अनुमति देता है। इसके अलावा फिल्मों की तुलना में स्क्रीन पर ज्यादा समय देता है।
पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा, मेरा पहला प्रोजेक्ट मेड इन हेवन एक सीरीज ही थी, जिसमें मैंने एक बहुत छोटा सा आईसीयू की नर्स का किरदार निभाया था। मैंने इन दो लाइन के किरदार में भी अपना बेस्ट देने की कोशिश की थी। निर्देशक नित्या मेहरा ने कहा भी था, तुम सच में बहुत अच्छी हो! तब मैंने मुस्कुराकर कहा था कि भले ही मेरे डायलॉग अच्छे नहीं थे लेकिन आपने उन्हें नोटिस किया, ये जानकार मैं खुश हूं।
कई फिल्मों और वेब सीरीज के लिए ऑडिशन देने के बाद, उन्हें पिछले साल दीया मिर्जा द्वारा अभिनीत वेब सीरीज काफिर के लिए साइन किया गया था। इसके बाद आर्या में उन्होंने सौंदर्या की भूमिका निभाई।
उन्होंने बताया, मैंने एक पत्रकार नैना बलसारा की भूमिका निभाई। मैं अभी भी एक ऐसे किरदार को निभाने के लिए तरस रही हूं।
प्रियांशा को फिल्मों में भी काम करने की उम्मीद है।
Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service.
| नई दिल्ली, उनतीस जुलाई । अभिनेत्री प्रियांशा भारद्वाज धीरे-धीरे वेब सीरीज में जगह बना रही हैं और निश्चित रूप से वह इस फॉरमेट को पसंद कर रही हैं। आर्या, काफिर और आगामी मिजार्पुर दो जैसे शो में काम कर चुकीं प्रियांशा ने आईएएनएस को बताया, मुझे वेब सीरीज का फॉरमेट बहुत पसंद है। यह एक अभिनेता को किरदार के इतर जाकर गहरी खोज करने की अनुमति देता है। इसके अलावा फिल्मों की तुलना में स्क्रीन पर ज्यादा समय देता है। पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा, मेरा पहला प्रोजेक्ट मेड इन हेवन एक सीरीज ही थी, जिसमें मैंने एक बहुत छोटा सा आईसीयू की नर्स का किरदार निभाया था। मैंने इन दो लाइन के किरदार में भी अपना बेस्ट देने की कोशिश की थी। निर्देशक नित्या मेहरा ने कहा भी था, तुम सच में बहुत अच्छी हो! तब मैंने मुस्कुराकर कहा था कि भले ही मेरे डायलॉग अच्छे नहीं थे लेकिन आपने उन्हें नोटिस किया, ये जानकार मैं खुश हूं। कई फिल्मों और वेब सीरीज के लिए ऑडिशन देने के बाद, उन्हें पिछले साल दीया मिर्जा द्वारा अभिनीत वेब सीरीज काफिर के लिए साइन किया गया था। इसके बाद आर्या में उन्होंने सौंदर्या की भूमिका निभाई। उन्होंने बताया, मैंने एक पत्रकार नैना बलसारा की भूमिका निभाई। मैं अभी भी एक ऐसे किरदार को निभाने के लिए तरस रही हूं। प्रियांशा को फिल्मों में भी काम करने की उम्मीद है। Disclaimer: This story is auto-generated from IANS service. |
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
| चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन |
राज वाराँनवो
सम्प्रति उर्दू अध्यापक, बारों ।
इस क्षेत्र के उर्दू अदब मे जिस शख्सियत को लोग सबसे ज्यादा सम्मान देते हैं, उन्ही मफ्तू कोटची की शागिर्द परम्परा की प्रतिभाशाली उपलब्धि है 'राज' वारनिवी । दरअस्ल इस पूरे क्षेत्र मे 'राज' को टक्कर के कुछ ही शायर हैं। 'राज' की शायरी मौजूदा दौर को तरजुमानी करती है ।
पाँच गजलें
मजहब को फिरको मे बाँटा धर्म के ठेकेदारो ने मिल्लत को तकसीम किया है तफरीको' बंटवारों ने वक्ते मुसीबत रोते हमको साथी अपने छोड़ गये जैसे उलझी नाव भँवर में छोड़ा साथ किनारी ने साकी ने झुझलाकर सारे पैमानों को तोड़ दिया मैख़ाने में धूम मचाई जब सरकश मैस्वारो ने जाहिद सा वहरूप बनाकर लूटा उसने दुनियाँ को लोगो को धोसे में रखखा सजदो के अम्बारों ने
( २ ) आतिशे-गम' में सुलगती दास्ता है ज़िन्दगी नीम सोज़ां लकड़ियो का सा धुआँ है जिन्दगी टूटते है बारहा जिन पर मुसीवत के पहाड़ वास्ते उनके बला-ए-नागहां है ज़िन्दगी जो उगाता है बड़ी मेहनत से खेतों में अनाज क्यों उसी के वास्ते ना-मेहरवां है ज़िन्दगी इसकी पानी पर है जड़, इसका हवा पर है मदार रेत की दीवार वाला इक मकां है जिन्दगी देखकर फुटपाथ पर अफलास के मारों की भीड़ ऐसा लगता है कि दर्दो - गम की मां है जिन्दगी देखकर मुँह फेर लेते हैं वो जाने हमसे क्यों आजकल लगता है हमसे बदगुमां है जिन्दगी गुमशुदा मंजिल की ख़ातिर तपते सहरा मे ऐ 'राज' राह से भटका हुआ सा कारवां है ज़िन्दगी
फूलों में पलने वाले कांटों पे चल रहे हैं हासिल जिन्हें थी खुशियां वो गम में जल रहे हैं चालें वही पुरानी उनकी बिसात की है है फर्क सिर्फ इतना मोहरे बदल रहे हैं तहजीबे-मशरिको को ठुकरा के हुस्न वाले ख़ातिर नुमाइशों को सजकर निकल रहे है
१ . दुःखो की अग्नि २. आकस्मिक मुसीबत ३. आश्रय ४. पूर्व की सभ्यता | राज वाराँनवो सम्प्रति उर्दू अध्यापक, बारों । इस क्षेत्र के उर्दू अदब मे जिस शख्सियत को लोग सबसे ज्यादा सम्मान देते हैं, उन्ही मफ्तू कोटची की शागिर्द परम्परा की प्रतिभाशाली उपलब्धि है 'राज' वारनिवी । दरअस्ल इस पूरे क्षेत्र मे 'राज' को टक्कर के कुछ ही शायर हैं। 'राज' की शायरी मौजूदा दौर को तरजुमानी करती है । पाँच गजलें मजहब को फिरको मे बाँटा धर्म के ठेकेदारो ने मिल्लत को तकसीम किया है तफरीको' बंटवारों ने वक्ते मुसीबत रोते हमको साथी अपने छोड़ गये जैसे उलझी नाव भँवर में छोड़ा साथ किनारी ने साकी ने झुझलाकर सारे पैमानों को तोड़ दिया मैख़ाने में धूम मचाई जब सरकश मैस्वारो ने जाहिद सा वहरूप बनाकर लूटा उसने दुनियाँ को लोगो को धोसे में रखखा सजदो के अम्बारों ने आतिशे-गम' में सुलगती दास्ता है ज़िन्दगी नीम सोज़ां लकड़ियो का सा धुआँ है जिन्दगी टूटते है बारहा जिन पर मुसीवत के पहाड़ वास्ते उनके बला-ए-नागहां है ज़िन्दगी जो उगाता है बड़ी मेहनत से खेतों में अनाज क्यों उसी के वास्ते ना-मेहरवां है ज़िन्दगी इसकी पानी पर है जड़, इसका हवा पर है मदार रेत की दीवार वाला इक मकां है जिन्दगी देखकर फुटपाथ पर अफलास के मारों की भीड़ ऐसा लगता है कि दर्दो - गम की मां है जिन्दगी देखकर मुँह फेर लेते हैं वो जाने हमसे क्यों आजकल लगता है हमसे बदगुमां है जिन्दगी गुमशुदा मंजिल की ख़ातिर तपते सहरा मे ऐ 'राज' राह से भटका हुआ सा कारवां है ज़िन्दगी फूलों में पलने वाले कांटों पे चल रहे हैं हासिल जिन्हें थी खुशियां वो गम में जल रहे हैं चालें वही पुरानी उनकी बिसात की है है फर्क सिर्फ इतना मोहरे बदल रहे हैं तहजीबे-मशरिको को ठुकरा के हुस्न वाले ख़ातिर नुमाइशों को सजकर निकल रहे है एक . दुःखो की अग्नि दो. आकस्मिक मुसीबत तीन. आश्रय चार. पूर्व की सभ्यता |
लातेहारः प्रगतिशील शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष हीरा प्रसाद यादव सचिव प्रदीप कुमार समशेर आलम ने नए उपायुक्त भोर सिंह यादव से मिलकर बुके देकर शुभकामनाएं दी।
उपायुक्त भोर सिंह यादव ने संघ को कहा की शिक्षा को ऊंचाई तक ले जाने का प्रयास करे। संघ ने सर को भरोसा दिया की जिला को शिक्षा के क्षेत्र में पहले स्थान पर ले जाने का सामूहिक प्रयास करेंगे।
आगे उन्होंने कहा की सभी संगठनों के साथ जल्द ही एक बैठक आहुत की जायेगी।
| लातेहारः प्रगतिशील शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष हीरा प्रसाद यादव सचिव प्रदीप कुमार समशेर आलम ने नए उपायुक्त भोर सिंह यादव से मिलकर बुके देकर शुभकामनाएं दी। उपायुक्त भोर सिंह यादव ने संघ को कहा की शिक्षा को ऊंचाई तक ले जाने का प्रयास करे। संघ ने सर को भरोसा दिया की जिला को शिक्षा के क्षेत्र में पहले स्थान पर ले जाने का सामूहिक प्रयास करेंगे। आगे उन्होंने कहा की सभी संगठनों के साथ जल्द ही एक बैठक आहुत की जायेगी। |
नितंबों का एक सुंदर आकार प्राप्त करने के लिए, तरफ, नीचे और ऊपर अलग से ट्रेन करने की सिफारिश की जाती है। इसके लिए धन्यवाद, फॉर्म से संबंधित कमियों को छिपाना और आंकड़े की उपस्थिति में सुधार करना संभव होगा। अच्छा परिणाम प्राप्त करने के लिए लड़की को नितंबों के ऊपरी भाग को पंप करने के तरीके को समझना आवश्यक है। सप्ताह में तीन बार ट्रेन करें, कम से कम 40 मिनट तक खेल पर ध्यान दें। प्रत्येक अभ्यास को 3 दृष्टिकोण बनाने के लिए 20-25 बार दोहराया जाना चाहिए।
नितंबों के ऊपरी भाग को पंप कैसे करें?
- डंबेल के साथ Squats । सबसे प्रभावी बुनियादी अभ्यास squats है , और अतिरिक्त वजन के उपयोग के लिए धन्यवाद, परिणाम बढ़ गया है। प्रशिक्षण के लिए, दो डंबेल ले लो और उन्हें किनारों पर रखें। घुटनों में दाहिने कोण का गठन करने से पहले, श्रोणि को वापस खिलाकर नीचे खींचना।
- माखी पैर नितंबों के ऊपरी हिस्से को पंप करने के तरीके को समझना, आप इस अभ्यास को याद नहीं कर सकते हैं, जो सही मांसपेशियों पर एक उत्कृष्ट भार देता है। हम एक विस्तारक का उपयोग करने का सुझाव देते हैं जो शरीर को महान प्रयास के साथ काम करेगा। अपने कोहनी पर जोर देने, सभी चौकों पर खड़े हो जाओ। अपने हाथों में विस्तारक के हैंडल रखें, और अपने पैर को रबर बैंड के केंद्र में रखें, जो आपके पैर को उठाते समय बढ़ाया जाएगा। जितना संभव हो सके पैर को उठाकर माही करो।
- आधा पुल इस अभ्यास को करने के लिए अतिरिक्त वजन की आवश्यकता होगी, यह बार या एक भारी किताब से पैनकेक हो सकता है। मंजिल पर रखें, अपने घुटनों को झुकाएं, और पैनकेक को अपने हाथों से पकड़ें, जिसे श्रोणि क्षेत्र में रखा जाना चाहिए। अपने पैरों को ऊँची एड़ी पर रखो, जो नितंबों पर भार बढ़ाएंगे। शीर्ष बिंदु पर स्थिति को ठीक करने, धीमी गति से श्रोणि को बढ़ाएं और कम करें।
- एक फिटबॉल के साथ एक नाव । नितंबों के ऊपरी हिस्से के लिए एक और प्रभावी व्यायाम। फर्श के चेहरे पर नीचे लेटें और पैर के बीच फिटबॉल पकड़ो। हाथ आपके सामने फैला हुआ है। उसी समय, अपने पैरों को उठाओ और अपनी बाहों को अपनी छाती पर खींचें, उन्हें अपनी कोहनी में झुकाएं।
| नितंबों का एक सुंदर आकार प्राप्त करने के लिए, तरफ, नीचे और ऊपर अलग से ट्रेन करने की सिफारिश की जाती है। इसके लिए धन्यवाद, फॉर्म से संबंधित कमियों को छिपाना और आंकड़े की उपस्थिति में सुधार करना संभव होगा। अच्छा परिणाम प्राप्त करने के लिए लड़की को नितंबों के ऊपरी भाग को पंप करने के तरीके को समझना आवश्यक है। सप्ताह में तीन बार ट्रेन करें, कम से कम चालीस मिनट तक खेल पर ध्यान दें। प्रत्येक अभ्यास को तीन दृष्टिकोण बनाने के लिए बीस-पच्चीस बार दोहराया जाना चाहिए। नितंबों के ऊपरी भाग को पंप कैसे करें? - डंबेल के साथ Squats । सबसे प्रभावी बुनियादी अभ्यास squats है , और अतिरिक्त वजन के उपयोग के लिए धन्यवाद, परिणाम बढ़ गया है। प्रशिक्षण के लिए, दो डंबेल ले लो और उन्हें किनारों पर रखें। घुटनों में दाहिने कोण का गठन करने से पहले, श्रोणि को वापस खिलाकर नीचे खींचना। - माखी पैर नितंबों के ऊपरी हिस्से को पंप करने के तरीके को समझना, आप इस अभ्यास को याद नहीं कर सकते हैं, जो सही मांसपेशियों पर एक उत्कृष्ट भार देता है। हम एक विस्तारक का उपयोग करने का सुझाव देते हैं जो शरीर को महान प्रयास के साथ काम करेगा। अपने कोहनी पर जोर देने, सभी चौकों पर खड़े हो जाओ। अपने हाथों में विस्तारक के हैंडल रखें, और अपने पैर को रबर बैंड के केंद्र में रखें, जो आपके पैर को उठाते समय बढ़ाया जाएगा। जितना संभव हो सके पैर को उठाकर माही करो। - आधा पुल इस अभ्यास को करने के लिए अतिरिक्त वजन की आवश्यकता होगी, यह बार या एक भारी किताब से पैनकेक हो सकता है। मंजिल पर रखें, अपने घुटनों को झुकाएं, और पैनकेक को अपने हाथों से पकड़ें, जिसे श्रोणि क्षेत्र में रखा जाना चाहिए। अपने पैरों को ऊँची एड़ी पर रखो, जो नितंबों पर भार बढ़ाएंगे। शीर्ष बिंदु पर स्थिति को ठीक करने, धीमी गति से श्रोणि को बढ़ाएं और कम करें। - एक फिटबॉल के साथ एक नाव । नितंबों के ऊपरी हिस्से के लिए एक और प्रभावी व्यायाम। फर्श के चेहरे पर नीचे लेटें और पैर के बीच फिटबॉल पकड़ो। हाथ आपके सामने फैला हुआ है। उसी समय, अपने पैरों को उठाओ और अपनी बाहों को अपनी छाती पर खींचें, उन्हें अपनी कोहनी में झुकाएं। |
ईडीएलआई स्कीम की मदद से ईपीएफओ अपने सदस्यों के परिजनों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए आर्थिक मदद देता है.
इस योजना की शुरुआत 1976 में हुई थी और इसका मकसद कर्मचारी की मौत के बाद उसके परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान कराना है। EDLI के तहत मिलने वाली बीमा राशि पिछले 12 महीनों की सैलरी पर निर्भर करती है। यह 12 महीने की सैलरी का 35 गुना होता है और अगर किसी की सैलरी 10 हजार रुपये हैं तो उसके परिवार को 3,50,000 रुपये दिए जाएंगे।
- ईडीएलआई स्कीम यानि एंप्लाई डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम ईपीएफओ की एक योजना है, जो अपने सदस्यों को मुफ्त में बीमा की सुविधा देती है. कर्मचारी की आकस्मिक मृत्यु पर ये पैसा उसके परिजनो को मिलता है.
- ईपीएफओ के एक एक्टिव सदस्य के नॉमिनी को सेवा अवधि के दौरान सदस्य की मृत्यु हो जाने पर 7 लाख रुपये तक का एकमुश्त भुगतान मिलता है.
- ईपीएफओ के सदस्य स्वयं ही ईडीएलआई योजना में जुड़ जाते हैं. हालांकि ईपीएफओ सदस्य के परिजन इस योजना का फायदा तब ही पा सकते हैं जब तक कि वो ईपीएफ का एक्टिव सदस्य होता है.
- ईडीएलआई की सेवाओं का फायदा उठाने के लिए सेवा अवधि की कोई न्यूनतम सीमा नहीं है.
- ईडीएलआई के तहत मिलने वाली बीमा राशि पिछले 12 महीने के औसत मूल वेतन का 35 गुना होती है जिसकी सीमा 7 लाख रुपये है.
- इस योजना के तहत बोनस का भी प्रावधान है.
| ईडीएलआई स्कीम की मदद से ईपीएफओ अपने सदस्यों के परिजनों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए आर्थिक मदद देता है. इस योजना की शुरुआत एक हज़ार नौ सौ छिहत्तर में हुई थी और इसका मकसद कर्मचारी की मौत के बाद उसके परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान कराना है। EDLI के तहत मिलने वाली बीमा राशि पिछले बारह महीनों की सैलरी पर निर्भर करती है। यह बारह महीने की सैलरी का पैंतीस गुना होता है और अगर किसी की सैलरी दस हजार रुपये हैं तो उसके परिवार को तीन,पचास,शून्य रुपयापये दिए जाएंगे। - ईडीएलआई स्कीम यानि एंप्लाई डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम ईपीएफओ की एक योजना है, जो अपने सदस्यों को मुफ्त में बीमा की सुविधा देती है. कर्मचारी की आकस्मिक मृत्यु पर ये पैसा उसके परिजनो को मिलता है. - ईपीएफओ के एक एक्टिव सदस्य के नॉमिनी को सेवा अवधि के दौरान सदस्य की मृत्यु हो जाने पर सात लाख रुपये तक का एकमुश्त भुगतान मिलता है. - ईपीएफओ के सदस्य स्वयं ही ईडीएलआई योजना में जुड़ जाते हैं. हालांकि ईपीएफओ सदस्य के परिजन इस योजना का फायदा तब ही पा सकते हैं जब तक कि वो ईपीएफ का एक्टिव सदस्य होता है. - ईडीएलआई की सेवाओं का फायदा उठाने के लिए सेवा अवधि की कोई न्यूनतम सीमा नहीं है. - ईडीएलआई के तहत मिलने वाली बीमा राशि पिछले बारह महीने के औसत मूल वेतन का पैंतीस गुना होती है जिसकी सीमा सात लाख रुपये है. - इस योजना के तहत बोनस का भी प्रावधान है. |
नया संस्करण मॉडल के 'एक्सवी' वेरियंट पर आधारित है। यह वाई-फाई कनेक्टिविटी और आठ इंच के टचस्क्रीन के साथ-साथ अन्य आधुनिक तकनीकों एवं सुविधाओं से लैस है।
नए संस्करण की कीमत 7. 86 से 9. 99 लाख रुपये के बीच है।
| नया संस्करण मॉडल के 'एक्सवी' वेरियंट पर आधारित है। यह वाई-फाई कनेक्टिविटी और आठ इंच के टचस्क्रीन के साथ-साथ अन्य आधुनिक तकनीकों एवं सुविधाओं से लैस है। नए संस्करण की कीमत सात. छियासी से नौ. निन्यानवे लाख रुपये के बीच है। |
माना जा रहा है कि बीसीसीआई ने दक्षिण अफ्रीका को पहले ही इसके बारे में जानकारी दे दी थी। दोनों बोर्ड के बीच बातचीत जारी है और दोनों बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में जुटे हैं। दक्षिण अफ्रीका खिलाड़ी संघ के प्रमुख टोनी आयरिश ने कहा है कि भारत अगर पहले टेस्ट से पहले 2-3 दिन का अभ्यास मैच खेलता है तो इससे टेस्ट अपनी निर्धारित तारीख पर शुरू हो सकता है। हालांकि बीसीसीआई ने कहा है कि इससे खिलाड़ी माहौल के मुताबिक तालमेल नहीं बैठा पाएंगे और उन्हें हालात में ढलने का भरपूर समय नहीं मिलेगा।
| माना जा रहा है कि बीसीसीआई ने दक्षिण अफ्रीका को पहले ही इसके बारे में जानकारी दे दी थी। दोनों बोर्ड के बीच बातचीत जारी है और दोनों बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में जुटे हैं। दक्षिण अफ्रीका खिलाड़ी संघ के प्रमुख टोनी आयरिश ने कहा है कि भारत अगर पहले टेस्ट से पहले दो-तीन दिन का अभ्यास मैच खेलता है तो इससे टेस्ट अपनी निर्धारित तारीख पर शुरू हो सकता है। हालांकि बीसीसीआई ने कहा है कि इससे खिलाड़ी माहौल के मुताबिक तालमेल नहीं बैठा पाएंगे और उन्हें हालात में ढलने का भरपूर समय नहीं मिलेगा। |
Quick links:
Ghaziabad Couple Viral Video: गाजियाबाद में एक कपल को बीच सड़क पर आशिकी करना भारी पड़ गया। इस घटना का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें दिख रहा है कि कैसे एक युवक और युवती एक-दूसरे की बाहों में बाहें डाले बैठे हैं। इस दौरान, युवक बाइक चला रहा होता है जबकि युवती सीट पर उल्टी बैठी उसे गले लगाए दिख रही है।
इस वीडियो को देख सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। ये वीडियो गाजियाबाद के इंदिरापुरम का बताया जा रहा है। बीच सड़क पर आशिकी करते कपल की इस हरकत को लोग 'अश्लील' बता रहे हैं। ये कपल जब इश्क फरमा रहा होता है, तभी पास से गुजर रहे एक शख्स ने उनका वीडियो बना लिया और गाजियाबाद पुलिस से उनके खिलाफ एक्शन लेने की मांग की जिसके बाद ट्रैफिक पुलिस ने उनका चालान काट लिया है।
जैसे ही ये वीडियो सामने आया, आग की तरह फैल गया। लोग इसे 'अमर्यादित और अश्लील' बता रहे हैं। वहीं कुछ लोगों ने ये भी नोट किया कि ऐसा करके वे अपनी जान को भी जोखिम में डाल रहे हैं। लड़के ने हेल्मेट नहीं लगाया होता है। वहीं, लड़की भी पेट्रोल की टंकी पर उल्टी बैठी उससे चिपकी हुई होती है। रात का समय होता है और वे गाड़ियों से भरी सड़क के बीचो-बीच ये स्टंट अंजाम दे रहे होते हैं।
जैसे ही ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, गाजियाबाद ट्रैफिक पुलिस की नजरों में आ गया। उन्होंने वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए चालान की कॉपी अटैच की और लिखा- 'ट्विटर से प्राप्त शिकायत का संज्ञान लेते हुए, चालानी कार्रवाई की गई। आवश्यक कार्रवाई हेतु, संबंधित को अवगत कराया जा रहा है'।
आपको बता दें कि ये ऐसा पहला वीडियो नहीं है जिसने लोगों का ध्यान खींचा हो। इससे पहले भी बाइक पर सरेआम किस करते एक कपल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था जिसपर पुलिस ने एक्शन लिया।
| Quick links: Ghaziabad Couple Viral Video: गाजियाबाद में एक कपल को बीच सड़क पर आशिकी करना भारी पड़ गया। इस घटना का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें दिख रहा है कि कैसे एक युवक और युवती एक-दूसरे की बाहों में बाहें डाले बैठे हैं। इस दौरान, युवक बाइक चला रहा होता है जबकि युवती सीट पर उल्टी बैठी उसे गले लगाए दिख रही है। इस वीडियो को देख सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। ये वीडियो गाजियाबाद के इंदिरापुरम का बताया जा रहा है। बीच सड़क पर आशिकी करते कपल की इस हरकत को लोग 'अश्लील' बता रहे हैं। ये कपल जब इश्क फरमा रहा होता है, तभी पास से गुजर रहे एक शख्स ने उनका वीडियो बना लिया और गाजियाबाद पुलिस से उनके खिलाफ एक्शन लेने की मांग की जिसके बाद ट्रैफिक पुलिस ने उनका चालान काट लिया है। जैसे ही ये वीडियो सामने आया, आग की तरह फैल गया। लोग इसे 'अमर्यादित और अश्लील' बता रहे हैं। वहीं कुछ लोगों ने ये भी नोट किया कि ऐसा करके वे अपनी जान को भी जोखिम में डाल रहे हैं। लड़के ने हेल्मेट नहीं लगाया होता है। वहीं, लड़की भी पेट्रोल की टंकी पर उल्टी बैठी उससे चिपकी हुई होती है। रात का समय होता है और वे गाड़ियों से भरी सड़क के बीचो-बीच ये स्टंट अंजाम दे रहे होते हैं। जैसे ही ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, गाजियाबाद ट्रैफिक पुलिस की नजरों में आ गया। उन्होंने वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए चालान की कॉपी अटैच की और लिखा- 'ट्विटर से प्राप्त शिकायत का संज्ञान लेते हुए, चालानी कार्रवाई की गई। आवश्यक कार्रवाई हेतु, संबंधित को अवगत कराया जा रहा है'। आपको बता दें कि ये ऐसा पहला वीडियो नहीं है जिसने लोगों का ध्यान खींचा हो। इससे पहले भी बाइक पर सरेआम किस करते एक कपल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था जिसपर पुलिस ने एक्शन लिया। |
नमस्तलं पल्लवयन्निव त्वं,
सहस्रपन्नाम्बुजगर्भचारैः ।
पादाम्बुजैः पातितमारदपों, भूमौ प्रजानां विजहर्थ' भूत्यै ॥
९ ३१४ एत्थ सजोगिनिणस्स पढमसमयप्पहुडि जाव समुग्धादाहिमुहकेवलिपढमसमयो त्ति ताव गुणसेढिणिक्लेव कमो अवट्ठिदेगरूपो त्ति घेत्तव्वो; परिणामेसु पडिसमयमवद्विदेसु तण्णिवंधणपदेसोकडुणाए गुणसेढिणिक्खेवायामस्स च सरिसत्तं मोत्तूण विसरिसभावाणुववत्तीदो । णवरि खीणकसायेण गुणसेढिणिमित्तभोकडिज्जमाणदव्वादो सजोगिकेवलिणा ओकड्डिज्जमाणदेव्वमसंखेज्जगुणं, तत्थतणगुणसेढिणि - क्खेवायामादो एत्थतणगुणसेढिणिक्खेवायामो संखेज्जगुणहीणो त्ति घेत्तव्वो, छदुमत्थ परिणामेहिंतो केवलिपरिणामाणमइ विसुद्धत्तादो एक्कारसगुणसेढिपरूवणाए तहा भणिदत्तादो च । तम्हा आउगवज्जाणं तिहमघादिकम्माणं पदेसग्गमसंखेज्जगुणाए सेढीए णिज्जरेमाणो एसो उक्कस्सेण देसूणपुव्व कोडिमेत्तकालं धम्मतित्थं पवत्तेमाणो विहरदि त्ति सुणिरूविदं ।
१. आ० प्रती विजहर्ष इति पाठः ।
हजार पाँखुड़ीवाले कमलोंके मध्य चलते हुए चरणकमलोंसे आकाशतलको पल्लवित करते हुएके समान कर्मभूमिक्षेत्र में प्रजाजनों में मोक्षमार्गकी समृद्धिकेलिये कामदेवके दर्पका पतन करनेवाले आपने विहार किया । इति ॥
§ ३१४ यहाँपर संयोगीजिनके प्रथम समयसे लेकर समुद्धातके अभिमुख हुए केवली जिनके प्रथम समय तक गुणश्रेणिके निक्षेपका क्रम अवस्थित एकरूप होता है ऐसा ग्रहण करना चाहिये, क्योंकि परिणामोंके प्रतिसमय अवस्थित रहनेपर उनके निमित्तसे होनेवाला प्रदेशोंका अपकर्षण और गुणश्रेणिनिक्षेपका आयाम सदृशपनेको छोड़कर विसदृशरूप नहीं होता । इतनी विशेषता है कि क्षीणकषाय जोवकेद्वारा गुणश्रेणिके निमित्त अपकर्षित हुए द्रव्यसे सयोगिकेवली जिनकेद्वारा अपकर्षित होनेवाला द्रव्य असंख्यातगुणा होता है तथा वहाँ हुए गुणश्रेणिनिक्षेपके आयामसे यहाँके गुणश्रेणिनिक्षेपका आयाम संख्यातगुणाहीन ग्रहण करना चाहिये, क्योंकि एक तो छद्मस्थके परिणामोंसे केवली जिनके परिणाम अतिविशुद्ध होते हैं तथा दूसरे ग्यारह गुणश्रेणिप्ररूपणामें वैसा कहा गया है । इसलिये आयुक्रमँको छोड़कर तीन अघातिकर्मोके कर्मंप्रदेशोंकी असंख्यातगुणीश्रेणिरूप से निर्जरा करता हुआ यह केवली जिन उत्कृष्टसे कुछ कम पूर्वकोटिप्रमाण कालतक धर्मतीर्थको प्रवृत्त करता हुआ विहार करता है, यह अच्छी तरहसे निरूपण किया है । | नमस्तलं पल्लवयन्निव त्वं, सहस्रपन्नाम्बुजगर्भचारैः । पादाम्बुजैः पातितमारदपों, भूमौ प्रजानां विजहर्थ' भूत्यै ॥ नौ तीन सौ चौदह एत्थ सजोगिनिणस्स पढमसमयप्पहुडि जाव समुग्धादाहिमुहकेवलिपढमसमयो त्ति ताव गुणसेढिणिक्लेव कमो अवट्ठिदेगरूपो त्ति घेत्तव्वो; परिणामेसु पडिसमयमवद्विदेसु तण्णिवंधणपदेसोकडुणाए गुणसेढिणिक्खेवायामस्स च सरिसत्तं मोत्तूण विसरिसभावाणुववत्तीदो । णवरि खीणकसायेण गुणसेढिणिमित्तभोकडिज्जमाणदव्वादो सजोगिकेवलिणा ओकड्डिज्जमाणदेव्वमसंखेज्जगुणं, तत्थतणगुणसेढिणि - क्खेवायामादो एत्थतणगुणसेढिणिक्खेवायामो संखेज्जगुणहीणो त्ति घेत्तव्वो, छदुमत्थ परिणामेहिंतो केवलिपरिणामाणमइ विसुद्धत्तादो एक्कारसगुणसेढिपरूवणाए तहा भणिदत्तादो च । तम्हा आउगवज्जाणं तिहमघादिकम्माणं पदेसग्गमसंखेज्जगुणाए सेढीए णिज्जरेमाणो एसो उक्कस्सेण देसूणपुव्व कोडिमेत्तकालं धम्मतित्थं पवत्तेमाणो विहरदि त्ति सुणिरूविदं । एक. आशून्य प्रती विजहर्ष इति पाठः । हजार पाँखुड़ीवाले कमलोंके मध्य चलते हुए चरणकमलोंसे आकाशतलको पल्लवित करते हुएके समान कर्मभूमिक्षेत्र में प्रजाजनों में मोक्षमार्गकी समृद्धिकेलिये कामदेवके दर्पका पतन करनेवाले आपने विहार किया । इति ॥ § तीन सौ चौदह यहाँपर संयोगीजिनके प्रथम समयसे लेकर समुद्धातके अभिमुख हुए केवली जिनके प्रथम समय तक गुणश्रेणिके निक्षेपका क्रम अवस्थित एकरूप होता है ऐसा ग्रहण करना चाहिये, क्योंकि परिणामोंके प्रतिसमय अवस्थित रहनेपर उनके निमित्तसे होनेवाला प्रदेशोंका अपकर्षण और गुणश्रेणिनिक्षेपका आयाम सदृशपनेको छोड़कर विसदृशरूप नहीं होता । इतनी विशेषता है कि क्षीणकषाय जोवकेद्वारा गुणश्रेणिके निमित्त अपकर्षित हुए द्रव्यसे सयोगिकेवली जिनकेद्वारा अपकर्षित होनेवाला द्रव्य असंख्यातगुणा होता है तथा वहाँ हुए गुणश्रेणिनिक्षेपके आयामसे यहाँके गुणश्रेणिनिक्षेपका आयाम संख्यातगुणाहीन ग्रहण करना चाहिये, क्योंकि एक तो छद्मस्थके परिणामोंसे केवली जिनके परिणाम अतिविशुद्ध होते हैं तथा दूसरे ग्यारह गुणश्रेणिप्ररूपणामें वैसा कहा गया है । इसलिये आयुक्रमँको छोड़कर तीन अघातिकर्मोके कर्मंप्रदेशोंकी असंख्यातगुणीश्रेणिरूप से निर्जरा करता हुआ यह केवली जिन उत्कृष्टसे कुछ कम पूर्वकोटिप्रमाण कालतक धर्मतीर्थको प्रवृत्त करता हुआ विहार करता है, यह अच्छी तरहसे निरूपण किया है । |
Don't Miss!
झलक दिखला जा 10 में सभी सेलेब्स डांस में परफेक्ट 30 का स्कोर पाने के लिए सारी हद पार करने के लिए तैयार हैं। ऐसा ही कुछ नजारा देखना को मिला रूबीना दिलैक के मामले में। डांस के मामले में रुबीना दिलैक का मुकाबला करना आसान नहीं है। इस वीक ऐसा ही कुछ जलवा दिखाते हुए रुबीना नजर आने वाली हैं। स्टंट में रुबीना कितनी माहिर हैं , इसका सबूत हाल ही में उनका यह वीडियो दे रहा है। झलक के मंच पर रुबीना स्टंट के साथ डांस कर रही थीं। वह इसके बाद घायल हो जाती हैं।
इसका एक वीडियो रुबीना दिलैक ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। रुबीना दिलैक अपने लेटेस्ट डांस एक्ट के दौरान सिर पर आग का घड़ा लेकर 500 कीलों के बिस्तर पर 31 किलो का लहंगा पहनकर डांस करते हुए दिखाई देंगी। उनका यह डांस देखकर माधुरी दीक्षित और करण जौहर के साथ वहां पर बैठे सभी दर्शक और कंटेस्टेंट हैरान हो जाते हैं।
लेकिन इसके पीछे की कड़ी मेहनत और दर्द क्या रहा है, इसी का नजारा एक्ट्रेस ने शेयर किया है। रुबीना दिलैक ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में एक्ट्रेस दर्द से चिल्लाते हुए नजर आ रही हैं। 2 लोग मिलकर रुबीना दिलैक के पैर में लगी हुई इस चोट को ठीक करने की कोशिश में हैं। रुबीना दर्द से चिल्ला रही हैं।
रुबीना के पैर में पट्टी भी लगी हुई नजर आ रही है। इस वीडियो को शेयर करते हुए रुबीना दिलैक ने कैप्शन में लिखा है कि नया फॅार्म,नई इंजरी..अब आगे क्या। बता दें कि बिग बॅास में बॅास लेडी बनने के बाद झलक दिखला जा के साथ रुबीना दिलैक ने साबित कर दिया है कि वह डांस की क्वीन हैं। आप भी देखिए रुबीना दिलैक का यह वायरल होता हुआ वीडियो। फैंस इस वीडियो पर रुबीना की हिम्मत और बहादुरी की तारीफ कर रहे हैं।
हाथ में गिलास लेकर नाइट क्लब में मचलती हसीना का वीडियो वायरल, सेक्सी मूव्स देख डोल जाएगा ईमान!
| Don't Miss! झलक दिखला जा दस में सभी सेलेब्स डांस में परफेक्ट तीस का स्कोर पाने के लिए सारी हद पार करने के लिए तैयार हैं। ऐसा ही कुछ नजारा देखना को मिला रूबीना दिलैक के मामले में। डांस के मामले में रुबीना दिलैक का मुकाबला करना आसान नहीं है। इस वीक ऐसा ही कुछ जलवा दिखाते हुए रुबीना नजर आने वाली हैं। स्टंट में रुबीना कितनी माहिर हैं , इसका सबूत हाल ही में उनका यह वीडियो दे रहा है। झलक के मंच पर रुबीना स्टंट के साथ डांस कर रही थीं। वह इसके बाद घायल हो जाती हैं। इसका एक वीडियो रुबीना दिलैक ने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। रुबीना दिलैक अपने लेटेस्ट डांस एक्ट के दौरान सिर पर आग का घड़ा लेकर पाँच सौ कीलों के बिस्तर पर इकतीस किलो का लहंगा पहनकर डांस करते हुए दिखाई देंगी। उनका यह डांस देखकर माधुरी दीक्षित और करण जौहर के साथ वहां पर बैठे सभी दर्शक और कंटेस्टेंट हैरान हो जाते हैं। लेकिन इसके पीछे की कड़ी मेहनत और दर्द क्या रहा है, इसी का नजारा एक्ट्रेस ने शेयर किया है। रुबीना दिलैक ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में एक्ट्रेस दर्द से चिल्लाते हुए नजर आ रही हैं। दो लोग मिलकर रुबीना दिलैक के पैर में लगी हुई इस चोट को ठीक करने की कोशिश में हैं। रुबीना दर्द से चिल्ला रही हैं। रुबीना के पैर में पट्टी भी लगी हुई नजर आ रही है। इस वीडियो को शेयर करते हुए रुबीना दिलैक ने कैप्शन में लिखा है कि नया फॅार्म,नई इंजरी..अब आगे क्या। बता दें कि बिग बॅास में बॅास लेडी बनने के बाद झलक दिखला जा के साथ रुबीना दिलैक ने साबित कर दिया है कि वह डांस की क्वीन हैं। आप भी देखिए रुबीना दिलैक का यह वायरल होता हुआ वीडियो। फैंस इस वीडियो पर रुबीना की हिम्मत और बहादुरी की तारीफ कर रहे हैं। हाथ में गिलास लेकर नाइट क्लब में मचलती हसीना का वीडियो वायरल, सेक्सी मूव्स देख डोल जाएगा ईमान! |
जरूर पढ़ें, जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़े हुए ये रहस्य (Jagannath Puri Temple)
जगन्नाथ पुरी मंदिर (Jagannath Puri Mandir) भगवान विष्णु को समर्पित है और इस मंदिर में भगवान विष्णु को जगन्नाथ के नाम से जाना जाता है। जगन्नाथ पुरी मंदिर पर करोड़ों लोगों की आस्था है और इस मंदिर से कई सारी कथाएं जुड़ी हुई हैं। जगन्नाथ पुरी मंदिर भगवान विष्णु के चार धामों में से एक है और ऐसी मान्यता है कि इस जगह पर आकर विष्णु भगवान भोजन करते हैं। जबकि अन्य तीन धामों बद्रीनाथ में स्नान करते हैं, गुजरात के द्वारिका में वस्त्र पहनते हैं और रामेश्वरम में विश्राम करते हैं।
किंवदंती के अनुसार, पहले जगन्नाथ मंदिर का निर्माण भरत और सुनंदा के पुत्र राजा इंद्रद्युम्न (King Indradyumna) द्वारा किया गया था।
हिन्दू धर्म के प्राचीन धर्मग्रन्थ एवं कुछ ओडिया शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान जगन्नाथ को मूल रूप से विश्ववासु (Viswashu) नामक एक सवर राजा (आदिवासी ) द्वारा भगवान नील माधब (Neela madhava) के रूप में पूजा जाता था। जब राजा इंद्रद्युम्न ( King Indradyumna) ने नील माधव के बारे में सुना तो उन्होंने ने राज पुरोहित विद्यापति को नील माधब का पता लगाने के लिए भेजा, विद्यापति ने पता लगाया की सवर राजा ने गुप्त रूप से घने जंगल में नीला माधव की पूजा करता है। विद्यापति (Vidyapati) ने बहुत कोशिश की लेकिन उस जगह का पता नहीं लगा सके जहां सबर राजा भगवान नील माधव की पूजा करता है । आखिरी में कोई उपाय न देख कर विद्यापति नील माधव का पता करने के लिए कबीले के राजा विश्ववासु की बेटी ललिता से शादी कर लेते हैं। शादी के बाद विद्यापति बार बार विश्ववासु को अनुरोध करता है नील माधव के दर्शन के लिए । विद्यापति के बार-बार अनुरोध पर, विश्ववासु (Viswavasu) ने अपने दामाद को उस गुफा में ले जाते हैं, जहाँ भगवान निल माधब (Nila Madhav) की पूजा की जाती थी।
राज पुरोहित विद्यापति (Vidyapati) बहुत बुद्धिमान व्यक्ति थे। जब वो नील माधव का दर्शन करने गुफा की और जा रहे थे रास्ते में वो राई जमीन परगिराते जाते थे। कुछ दिनों के बाद राई अंकुरित हुए, तो उन्हें में गुफा का पता लगाने में मदद मिली।
जब विद्यापति ने वापस लौट कर राजा इंद्रद्युम्न को पूरी कहानी सुनाई तो उनकी बात सुनकर, राजा इंद्रद्युम्न नील माधव भगवान जगन्नाथ को देखने और उनकी पूजा करने के लिए तीर्थ यात्रा पर तुरंत ओडिशा (Odisha) के लिए रवाना हुए। लेकिन जब वो गुफा में पहुँच तो भगवान नीलमाधव तो अंतर्ध्यान हो गए थे। भगवान को अंतरध्यान देख कर राजा निराश हो गए। राजा ने ठान लिया था कि वह नीलमाधव के दर्शन किए बिना वापस नहीं लौटेंगे और नील पर्वत पर अन्न जल का परित्याग किया , तब एक दिव्य आवाज ने पुकारा ' बाद में, राजा भगवान विष्णु के लिए एक भव्य मंदिर का निर्माण किया।
नारद द्वारा लाई गई नरसिंह मूर्ति को मंदिर में स्थापित किया गया था। नींद के दौरान राजा को भगवान जगन्नाथ के दर्शन हुए। साथ ही एक सूक्ष्म आवाज ने उन्हें समुद्र के किनारे नीम वृक्ष प्राप्त करने और उससे मूर्तियाँ बनाने का निर्देश दिया। तदनुसार, राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और चक्र सुदर्शन की छवि को दिव्य वृक्ष की लकड़ी से बना कर मंदिर में स्थापित कर दिया।
जगन्नाथ पुरी मंदिर (Jagannath Puri Mandir) में रखी गई जगन्नाथ भगवान की मूर्ति अधूरी है और इस मूर्ति के अधूरी होने से एक कथा भी जुड़ी हुई है।
भगवान जगन्नाथ की मूर्ति बनाने के लिए देवताओं के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा (Viswakarma) एक वृद्ध व्यक्ति का रुप लेकर राजा इंद्रद्युम्न के पास आए और उन्होंने राजा से कहा कि वो 21 दिनों में मूर्ति का निर्माण कर देंगे। साथ में ही उन्होंने ये शर्त भी रखी ही वो मूर्ति को अकेले एक बंद कमरे में बनवाएंगे और कोई भी कमरे में ना आए। वहीं कुछ दिनों बाद राजा की पत्नी ने मूर्ति देखने की इच्छा जाहिर की और जैसे ही राजा की पत्नी ने कमरे का दरवाजा खोला, वैसे ही कमरा से विश्वकर्मा गायब हो गए। और इस तरह से भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की मूर्ति अधूरी रहे गई। राजा ने बाद में इन्हीं अधूरी मूर्तियों को मंदिर के अंदर स्थापित करा दिया।
जगन्नाथ पुरी यात्रा (Jagannath Puri Yatra)
जगन्नाथ पुरी यात्रा हर साल निकलती है और इस यात्रा का हिस्सा बनने के लिए लाखों की संख्या में लोग इस मंदिर में आते हैं। ये यात्रा हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को निकाली जाती है। जगन्नाथ पुरी यात्रा के दौरान तीन रथ निकलते हैं। जिसमें से एक रथ पर भगवान जगन्नाथ जी, दूसरे पर बलभद्र जी और तीसरे रथ पर सुभद्रा जी की मूर्ति रखी जाती है और इन रथों को भक्तों द्वारा खींचा जाता है। ये रथ गुंडीचा मंदिर में लाए जाते हैं और इस मंदिर में मूर्तियों को रख दिया जाता है। जिसके बाद भगवान जगन्नाथ (Jagannath Puri Mandir) सात दिनों तक यहां पर आराम करते हैं और आठवें दिन फिर से इनकी मूर्ति को रथ पर रख दिया जाता है और वापस से पुरी के मंदिर में ले जाया जाता है। रथ को वापस से पुरी के मंदिर ले जाने वाली यात्रों को बहुड़ा यात्रा (Bahua Yatra) कहा जाता है।
- जगन्नाथ धाम को धरती का बैकुंठ भी कहा गया है। जगन्नाथ पुरी मंदिर में भगवान जगन्नाथ के साथ उनके भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा की पूजा भी की जाती है।
- मंदिर में भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा को दाई तरफ रखा गया है। जबकि उनकी बहन सुभद्रा की प्रतिमा बीच में है और दाई तरफ उनके बड़े भाई बलभद्र की मूर्ति स्थापिक की गई है।
- जगन्नाथ पुरी मंदिर से एक रहस्यमय कहानी भी जुड़ी हुई है। ऐसा कहा जाता है कि पुरी मंदिर में रखी गई भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के अंदर स्वयं ब्रह्मा जी विराजमान हैं।
- जगन्नाथ पुरी मंदिर में हमेशा 20 फीट का एक ध्वज लहराता है और ये ध्वज रोज बदला जाता है। ऐसी मान्यता है कि अगर ध्वज रोज नहीं बदला जाए, तो ये मंदिर अपने आप ही 18 सालों तक के लिए बंद हो जाएगा।
- जगन्नाथ पुरी यात्रा के दौरान तीन रथ होते हैं जिसमें से पहले रथ पर भगवान जगन्नाथ विराजमान होते हैं। दूसरे रथ में बलभद्र और तीसरे रथ में सुभद्रा जी।
जगन्नाथ पुरी मंदिर (Jagannath Puri Mandir) उड़ीसा के पुरी शहर में स्थित है जो कि उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से थोड़ी सी दूरी पर है। हर साल लाखों की संख्या में लोग उड़ीसा राज्य के पुरी शहर में आकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन किया करते हैं।
| जरूर पढ़ें, जगन्नाथ पुरी मंदिर से जुड़े हुए ये रहस्य जगन्नाथ पुरी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और इस मंदिर में भगवान विष्णु को जगन्नाथ के नाम से जाना जाता है। जगन्नाथ पुरी मंदिर पर करोड़ों लोगों की आस्था है और इस मंदिर से कई सारी कथाएं जुड़ी हुई हैं। जगन्नाथ पुरी मंदिर भगवान विष्णु के चार धामों में से एक है और ऐसी मान्यता है कि इस जगह पर आकर विष्णु भगवान भोजन करते हैं। जबकि अन्य तीन धामों बद्रीनाथ में स्नान करते हैं, गुजरात के द्वारिका में वस्त्र पहनते हैं और रामेश्वरम में विश्राम करते हैं। किंवदंती के अनुसार, पहले जगन्नाथ मंदिर का निर्माण भरत और सुनंदा के पुत्र राजा इंद्रद्युम्न द्वारा किया गया था। हिन्दू धर्म के प्राचीन धर्मग्रन्थ एवं कुछ ओडिया शास्त्रों में कहा गया है कि भगवान जगन्नाथ को मूल रूप से विश्ववासु नामक एक सवर राजा द्वारा भगवान नील माधब के रूप में पूजा जाता था। जब राजा इंद्रद्युम्न ने नील माधव के बारे में सुना तो उन्होंने ने राज पुरोहित विद्यापति को नील माधब का पता लगाने के लिए भेजा, विद्यापति ने पता लगाया की सवर राजा ने गुप्त रूप से घने जंगल में नीला माधव की पूजा करता है। विद्यापति ने बहुत कोशिश की लेकिन उस जगह का पता नहीं लगा सके जहां सबर राजा भगवान नील माधव की पूजा करता है । आखिरी में कोई उपाय न देख कर विद्यापति नील माधव का पता करने के लिए कबीले के राजा विश्ववासु की बेटी ललिता से शादी कर लेते हैं। शादी के बाद विद्यापति बार बार विश्ववासु को अनुरोध करता है नील माधव के दर्शन के लिए । विद्यापति के बार-बार अनुरोध पर, विश्ववासु ने अपने दामाद को उस गुफा में ले जाते हैं, जहाँ भगवान निल माधब की पूजा की जाती थी। राज पुरोहित विद्यापति बहुत बुद्धिमान व्यक्ति थे। जब वो नील माधव का दर्शन करने गुफा की और जा रहे थे रास्ते में वो राई जमीन परगिराते जाते थे। कुछ दिनों के बाद राई अंकुरित हुए, तो उन्हें में गुफा का पता लगाने में मदद मिली। जब विद्यापति ने वापस लौट कर राजा इंद्रद्युम्न को पूरी कहानी सुनाई तो उनकी बात सुनकर, राजा इंद्रद्युम्न नील माधव भगवान जगन्नाथ को देखने और उनकी पूजा करने के लिए तीर्थ यात्रा पर तुरंत ओडिशा के लिए रवाना हुए। लेकिन जब वो गुफा में पहुँच तो भगवान नीलमाधव तो अंतर्ध्यान हो गए थे। भगवान को अंतरध्यान देख कर राजा निराश हो गए। राजा ने ठान लिया था कि वह नीलमाधव के दर्शन किए बिना वापस नहीं लौटेंगे और नील पर्वत पर अन्न जल का परित्याग किया , तब एक दिव्य आवाज ने पुकारा ' बाद में, राजा भगवान विष्णु के लिए एक भव्य मंदिर का निर्माण किया। नारद द्वारा लाई गई नरसिंह मूर्ति को मंदिर में स्थापित किया गया था। नींद के दौरान राजा को भगवान जगन्नाथ के दर्शन हुए। साथ ही एक सूक्ष्म आवाज ने उन्हें समुद्र के किनारे नीम वृक्ष प्राप्त करने और उससे मूर्तियाँ बनाने का निर्देश दिया। तदनुसार, राजा इंद्रद्युम्न ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और चक्र सुदर्शन की छवि को दिव्य वृक्ष की लकड़ी से बना कर मंदिर में स्थापित कर दिया। जगन्नाथ पुरी मंदिर में रखी गई जगन्नाथ भगवान की मूर्ति अधूरी है और इस मूर्ति के अधूरी होने से एक कथा भी जुड़ी हुई है। भगवान जगन्नाथ की मूर्ति बनाने के लिए देवताओं के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा एक वृद्ध व्यक्ति का रुप लेकर राजा इंद्रद्युम्न के पास आए और उन्होंने राजा से कहा कि वो इक्कीस दिनों में मूर्ति का निर्माण कर देंगे। साथ में ही उन्होंने ये शर्त भी रखी ही वो मूर्ति को अकेले एक बंद कमरे में बनवाएंगे और कोई भी कमरे में ना आए। वहीं कुछ दिनों बाद राजा की पत्नी ने मूर्ति देखने की इच्छा जाहिर की और जैसे ही राजा की पत्नी ने कमरे का दरवाजा खोला, वैसे ही कमरा से विश्वकर्मा गायब हो गए। और इस तरह से भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा की मूर्ति अधूरी रहे गई। राजा ने बाद में इन्हीं अधूरी मूर्तियों को मंदिर के अंदर स्थापित करा दिया। जगन्नाथ पुरी यात्रा जगन्नाथ पुरी यात्रा हर साल निकलती है और इस यात्रा का हिस्सा बनने के लिए लाखों की संख्या में लोग इस मंदिर में आते हैं। ये यात्रा हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को निकाली जाती है। जगन्नाथ पुरी यात्रा के दौरान तीन रथ निकलते हैं। जिसमें से एक रथ पर भगवान जगन्नाथ जी, दूसरे पर बलभद्र जी और तीसरे रथ पर सुभद्रा जी की मूर्ति रखी जाती है और इन रथों को भक्तों द्वारा खींचा जाता है। ये रथ गुंडीचा मंदिर में लाए जाते हैं और इस मंदिर में मूर्तियों को रख दिया जाता है। जिसके बाद भगवान जगन्नाथ सात दिनों तक यहां पर आराम करते हैं और आठवें दिन फिर से इनकी मूर्ति को रथ पर रख दिया जाता है और वापस से पुरी के मंदिर में ले जाया जाता है। रथ को वापस से पुरी के मंदिर ले जाने वाली यात्रों को बहुड़ा यात्रा कहा जाता है। - जगन्नाथ धाम को धरती का बैकुंठ भी कहा गया है। जगन्नाथ पुरी मंदिर में भगवान जगन्नाथ के साथ उनके भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा की पूजा भी की जाती है। - मंदिर में भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा को दाई तरफ रखा गया है। जबकि उनकी बहन सुभद्रा की प्रतिमा बीच में है और दाई तरफ उनके बड़े भाई बलभद्र की मूर्ति स्थापिक की गई है। - जगन्नाथ पुरी मंदिर से एक रहस्यमय कहानी भी जुड़ी हुई है। ऐसा कहा जाता है कि पुरी मंदिर में रखी गई भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के अंदर स्वयं ब्रह्मा जी विराजमान हैं। - जगन्नाथ पुरी मंदिर में हमेशा बीस फीट का एक ध्वज लहराता है और ये ध्वज रोज बदला जाता है। ऐसी मान्यता है कि अगर ध्वज रोज नहीं बदला जाए, तो ये मंदिर अपने आप ही अट्ठारह सालों तक के लिए बंद हो जाएगा। - जगन्नाथ पुरी यात्रा के दौरान तीन रथ होते हैं जिसमें से पहले रथ पर भगवान जगन्नाथ विराजमान होते हैं। दूसरे रथ में बलभद्र और तीसरे रथ में सुभद्रा जी। जगन्नाथ पुरी मंदिर उड़ीसा के पुरी शहर में स्थित है जो कि उड़ीसा की राजधानी भुवनेश्वर से थोड़ी सी दूरी पर है। हर साल लाखों की संख्या में लोग उड़ीसा राज्य के पुरी शहर में आकर भगवान जगन्नाथ के दर्शन किया करते हैं। |
गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर द्वारा स्थापित विश्व भारती विश्वविद्यालय या शान्ति निकेतन अनिश्चितकाल तक के लिए बन्द कर दिया गया है। यह स्वयं में आश्चर्य का विषय है कि विश्वविद्यालय ऐसे कारण की वजह से बन्द किया गया है जिसका सम्बन्ध पं. बंगाल की महान बांग्ला संस्कृति से है। इस खुले विश्वविद्यालय के परिसर में आने वाले एक मैदान में ही प्रतिवर्ष दिसम्बर महीने में 'पौष उत्सव' का आयोजन होता है जिसमें आसपास के गांवों व जिलों तक के लोग शामिल होते हैं और पौष मेले में इन इलाकों में रहने वाले दस्तकार, शिल्पकार व कारीगर अपनी कलात्मक कृतियों का प्रदर्शन एक अस्थायी बाजार लगा कर करते हैं। इस महोत्सव का बांग्ला संस्कृति में बहुत महत्व है। सर्दियों के मौसम में पड़ने वाले इस पर्व पर बंगाली लोग प्रकृति की रंग-बिरंगी छटा का उत्सव उसी प्रकार मनाते हैं जिस प्रकार 'पोहला बैशाख' पर्व पर, जो कि बांग्ला संस्कृति में 'नव वर्ष' होता है। पौहला बैशाख का महत्व इतना है कि बांग्लादेश में भी यह पर्व राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाया जाता है। बंगाल के तीज-त्यौहार धर्म की सीमा से ऊपर होकर मनाये जाते हैं। मजहब का इनसे कोई खास लेना-देना नहीं होता। पौष और बैशाख उत्सव भी इसी श्रेणी में आते हैं, परन्तु शान्ति निकेतन के अधिकारियों ने एेसा फैसला किया जिससे इस विश्व विद्यालय के करीब रहने वाले लोगों में रोष फैल गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने मैदान में दीवार खड़ी करने का फैसला किया और उसका काम भी शुरू कर दिया गया। इस पर लोगों में रोष व्याप्त हो गया और तृणमूल कांग्रेस के एक विधायक श्री नरेश बावरी के नेतृत्व में इस दीवार और नये बने दरवाजे को तोड़ डाला गया। वास्तव में विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ संघर्ष करने के लिए स्थानीय लोगों ने 'पौष मेला मठ बचाओ समिति' का गठन किया था। इसी समिति ने दीवार स्थल पर जाकर आन्दोलन करना शुरू किया और अन्ततः श्री बावरी के नेतृत्व में उसे तोड़ डाला और बुलडोजर तक का इस्तेमाल किया। इस समिति के साथ स्थानीय व आसपास के दुकानदारों का संगठन भी है और जब से उसे पता चला कि प्रशासन मैदान की चारदीवारी या उसे बन्द करने की योजना बना रहा है, तो उसने आंदोलन करना शुरू कर दिया। 'बोलपुर व्यवसायी समिति' का कहना है कि प्रशासन का यह कार्य बांग्ला संस्कृति के विरुद्ध है।
वर्षों से विश्वविद्यालय के खुले परिसर के दायरे में ही पौष उत्सव मनता आ रहा है और इस पर कभी आपत्ति नहीं की गई। शान्ति निकेतन तो सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए ही गुरुदेव ने स्थापित किया था और इसी दृष्टि से इस महोत्सव में विश्वविद्यालय के छात्र व स्थानीय लोग मिल-जुल कर हिस्सा लेते हैं। ठीक एेसा ही मत राज्य की मुख्यमन्त्री सुश्री ममता बनर्जी का भी है। उन्होंने दीवार बनाने को बंगाल की मान्यताओं व संस्कृति के खिलाफ बताया और कहा कि यह गुरुदेव की परिकल्पना कभी नहीं रही थी, परन्तु वर्ष 2017 में एनजीटी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी थी कि वह पर्यावरण के सन्तुलन का ध्यान रखे। उसके बाद प्रशासन ने विगत जुलाई महीने में फैसला किया कि उस स्थान की सीमा बांध दी जाये जहां हर वर्ष पौष उत्सव होता है। विश्वविद्यालय की अधिशासी परिषद द्वारा यह फैसला किया गया। परिषद विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्रशासनिक इकाई होती है।
कुलपति बिद्युत चक्रवर्ती का यह कहना है कि विश्वविद्यालय पौष महोत्सव जैसे पर्व का इन्तजाम नहीं देख सकता और इसके बाद की चीजों को नहीं संभाल सकता। अतः यह अपने भूभाग का अहाता सुनिश्चित कर देगा। जब यह अहाता बनने लगा तो स्थानीय व आसपास के लोगों ने इसका पुरजोर विरोध किया। बोलपुर व वीरभूमि जिले शान्ति निकेतन के आसपास ही पड़ते हैं और पौष उत्सव में इन जिलों के लोग व व्यवसायी व दस्तकार भाग लेने आते हैं मगर हर बात पर बीच में टांग अड़ाने में माहिर इस राज्य के राज्यपाल महामहिम जगदीप धनखड़ इस विवाद पर भी बोल पड़े और उन्होंने मुख्यमन्त्री ममता दी को सलाह दी कि वह उन लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाये जिनका इस मामले में दोष है। वह राजनीतिक आग्रहों से ऊपर उठ कर कार्रवाई करें। राज्यपाल का इस प्रकार दैनन्दिन के कामों में हस्तक्षेप किसी भी प्रकार उचित नहीं कहा जा सकता मगर धनखड़ साहब खड़-खड़ करने के आदी हो चुके हैं। इस पर ममता दी ने भी कह दिया कि जो कुछ भी विश्वविद्यालय में हुआ है वह बांग्ला संस्कृति के विरुद्ध है।
गुरुदेव तो शान्ति निकेतन को खुला (ओपन एयर) विश्वविद्यालय देखना चाहते थे। दीवार बनाना ही उनके विश्वविद्यालय के चरित्र के विरुद्ध है। हालांकि दीवार गिराये जाने वाले दिन पुलिस भी हरकत में नजर आयी और उसने आठ लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया है मगर इसके बाद विश्वविद्यालय को अगले आदेश तक बन्द कर दिया गया। पूरे पश्चिम बंगाल में शान्ति निकेतन ही एकमात्र केन्द्रीय विश्वविद्यालय है। अतः विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में केन्द्र सरकार के सम्बन्धित विभागों को भी सूचित कर रहा है, परन्तु मूल प्रश्न तो बांग्ला संस्कृति व परंपराओं का है। जरूरी यह है कि शान्ति निकेतन की परंपराओं का ध्यान रखते हुए इस समस्या का हल निकाला जाये और जल्दी से जल्दी विश्वविद्यालय खोला जाए।
| गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर द्वारा स्थापित विश्व भारती विश्वविद्यालय या शान्ति निकेतन अनिश्चितकाल तक के लिए बन्द कर दिया गया है। यह स्वयं में आश्चर्य का विषय है कि विश्वविद्यालय ऐसे कारण की वजह से बन्द किया गया है जिसका सम्बन्ध पं. बंगाल की महान बांग्ला संस्कृति से है। इस खुले विश्वविद्यालय के परिसर में आने वाले एक मैदान में ही प्रतिवर्ष दिसम्बर महीने में 'पौष उत्सव' का आयोजन होता है जिसमें आसपास के गांवों व जिलों तक के लोग शामिल होते हैं और पौष मेले में इन इलाकों में रहने वाले दस्तकार, शिल्पकार व कारीगर अपनी कलात्मक कृतियों का प्रदर्शन एक अस्थायी बाजार लगा कर करते हैं। इस महोत्सव का बांग्ला संस्कृति में बहुत महत्व है। सर्दियों के मौसम में पड़ने वाले इस पर्व पर बंगाली लोग प्रकृति की रंग-बिरंगी छटा का उत्सव उसी प्रकार मनाते हैं जिस प्रकार 'पोहला बैशाख' पर्व पर, जो कि बांग्ला संस्कृति में 'नव वर्ष' होता है। पौहला बैशाख का महत्व इतना है कि बांग्लादेश में भी यह पर्व राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाया जाता है। बंगाल के तीज-त्यौहार धर्म की सीमा से ऊपर होकर मनाये जाते हैं। मजहब का इनसे कोई खास लेना-देना नहीं होता। पौष और बैशाख उत्सव भी इसी श्रेणी में आते हैं, परन्तु शान्ति निकेतन के अधिकारियों ने एेसा फैसला किया जिससे इस विश्व विद्यालय के करीब रहने वाले लोगों में रोष फैल गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने मैदान में दीवार खड़ी करने का फैसला किया और उसका काम भी शुरू कर दिया गया। इस पर लोगों में रोष व्याप्त हो गया और तृणमूल कांग्रेस के एक विधायक श्री नरेश बावरी के नेतृत्व में इस दीवार और नये बने दरवाजे को तोड़ डाला गया। वास्तव में विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ संघर्ष करने के लिए स्थानीय लोगों ने 'पौष मेला मठ बचाओ समिति' का गठन किया था। इसी समिति ने दीवार स्थल पर जाकर आन्दोलन करना शुरू किया और अन्ततः श्री बावरी के नेतृत्व में उसे तोड़ डाला और बुलडोजर तक का इस्तेमाल किया। इस समिति के साथ स्थानीय व आसपास के दुकानदारों का संगठन भी है और जब से उसे पता चला कि प्रशासन मैदान की चारदीवारी या उसे बन्द करने की योजना बना रहा है, तो उसने आंदोलन करना शुरू कर दिया। 'बोलपुर व्यवसायी समिति' का कहना है कि प्रशासन का यह कार्य बांग्ला संस्कृति के विरुद्ध है। वर्षों से विश्वविद्यालय के खुले परिसर के दायरे में ही पौष उत्सव मनता आ रहा है और इस पर कभी आपत्ति नहीं की गई। शान्ति निकेतन तो सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए ही गुरुदेव ने स्थापित किया था और इसी दृष्टि से इस महोत्सव में विश्वविद्यालय के छात्र व स्थानीय लोग मिल-जुल कर हिस्सा लेते हैं। ठीक एेसा ही मत राज्य की मुख्यमन्त्री सुश्री ममता बनर्जी का भी है। उन्होंने दीवार बनाने को बंगाल की मान्यताओं व संस्कृति के खिलाफ बताया और कहा कि यह गुरुदेव की परिकल्पना कभी नहीं रही थी, परन्तु वर्ष दो हज़ार सत्रह में एनजीटी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी दी थी कि वह पर्यावरण के सन्तुलन का ध्यान रखे। उसके बाद प्रशासन ने विगत जुलाई महीने में फैसला किया कि उस स्थान की सीमा बांध दी जाये जहां हर वर्ष पौष उत्सव होता है। विश्वविद्यालय की अधिशासी परिषद द्वारा यह फैसला किया गया। परिषद विश्वविद्यालय की सर्वोच्च प्रशासनिक इकाई होती है। कुलपति बिद्युत चक्रवर्ती का यह कहना है कि विश्वविद्यालय पौष महोत्सव जैसे पर्व का इन्तजाम नहीं देख सकता और इसके बाद की चीजों को नहीं संभाल सकता। अतः यह अपने भूभाग का अहाता सुनिश्चित कर देगा। जब यह अहाता बनने लगा तो स्थानीय व आसपास के लोगों ने इसका पुरजोर विरोध किया। बोलपुर व वीरभूमि जिले शान्ति निकेतन के आसपास ही पड़ते हैं और पौष उत्सव में इन जिलों के लोग व व्यवसायी व दस्तकार भाग लेने आते हैं मगर हर बात पर बीच में टांग अड़ाने में माहिर इस राज्य के राज्यपाल महामहिम जगदीप धनखड़ इस विवाद पर भी बोल पड़े और उन्होंने मुख्यमन्त्री ममता दी को सलाह दी कि वह उन लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाये जिनका इस मामले में दोष है। वह राजनीतिक आग्रहों से ऊपर उठ कर कार्रवाई करें। राज्यपाल का इस प्रकार दैनन्दिन के कामों में हस्तक्षेप किसी भी प्रकार उचित नहीं कहा जा सकता मगर धनखड़ साहब खड़-खड़ करने के आदी हो चुके हैं। इस पर ममता दी ने भी कह दिया कि जो कुछ भी विश्वविद्यालय में हुआ है वह बांग्ला संस्कृति के विरुद्ध है। गुरुदेव तो शान्ति निकेतन को खुला विश्वविद्यालय देखना चाहते थे। दीवार बनाना ही उनके विश्वविद्यालय के चरित्र के विरुद्ध है। हालांकि दीवार गिराये जाने वाले दिन पुलिस भी हरकत में नजर आयी और उसने आठ लोगों को गिरफ्तार भी कर लिया है मगर इसके बाद विश्वविद्यालय को अगले आदेश तक बन्द कर दिया गया। पूरे पश्चिम बंगाल में शान्ति निकेतन ही एकमात्र केन्द्रीय विश्वविद्यालय है। अतः विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में केन्द्र सरकार के सम्बन्धित विभागों को भी सूचित कर रहा है, परन्तु मूल प्रश्न तो बांग्ला संस्कृति व परंपराओं का है। जरूरी यह है कि शान्ति निकेतन की परंपराओं का ध्यान रखते हुए इस समस्या का हल निकाला जाये और जल्दी से जल्दी विश्वविद्यालय खोला जाए। |
थेरेसा मैरी मे (उर्फ़ ब्रेसियर; जन्म 1 अक्टूबर 1956) यूनाइटेड किंगडम की प्रधानमंत्री और कंजर्वेटिव पार्टी की नेता है। वे 1997 से मेडनहैड सीट से संसद के सदस्य (सांसद) हैं। उन्हें एक एक-राष्ट्र रूढ़िवादी और एक उदार रूढ़िवादी के रूप में जाना जाता है। इससे पूर्व मार्गरेट थैचर वर्ष 1979 से 1990 तक ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं। गौरतलब है कि डेविड कैमरून ने जनमत संग्रह के जरिए ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर आने के फैसले के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद 13 जुलाई, 2016 को उन्होने ब्रिटेन की दूसरी महिला प्रधानमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण किया। .
9 संबंधोंः एलिज़ाबेथ द्वितीय, डेविड कैमरन, प्रदत्त नाम, ब्रिटेन, मारग्रेट थैचर, यूरोपीय संघ, सांसद, संयुक्त राजशाही के प्रधानमंत्री, जनसत्ता।
एलिज़ाबेथ द्वितीय (Elizabeth II) (एलिजाबेथ ऐलैग्ज़ैण्ड्रा मैरी, जन्मः २१ अप्रैल १९२६) यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैण्ड, जमैका, बारबाडोस, बहामास, ग्रेनेडा, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन द्वीपसमूह, तुवालू, सन्त लूसिया, सन्त विन्सेण्ट और ग्रेनाडाइन्स, बेलीज़, अण्टीगुआ और बारबूडा और सन्त किट्स और नेविस की महारानी हैं। इसके अतिरिक्त वह राष्ट्रमण्डल के ५४ राष्ट्रों और राज्यक्षेत्रों की प्रमुख हैं और ब्रिटिश साम्राज्ञी के रूप में, वह अंग्रेज़ी चर्च की सर्वोच्च राज्यपाल हैं और राष्ट्रमण्डल के सोलह स्वतन्त्र सम्प्रभु देशों की संवैधानिक महारानी हैं। एलिज़ाबेथ को निजी रूप से पर घर पर शिक्षित किया गया था। उनके पिता, जॉर्ज षष्ठम को १९३६ में ब्रिटेन और ब्रिटिश उपनिवेश भारत का सम्राट बनाया गया था। ६ फरवरी १९५२ को अपने राज्याभिषेक के बाद एलिज़ाबेथ राष्ट्रकुल की अध्यक्ष व साथ स्वतंत्र देशों यूनाइटेड किंगडम, पाकिस्तान अभिराज्य, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका व सिलोन की शासक रानी बन गयीं। उनका राज्याभिषेक समारोह अपने तरह का पहला ऐसा राज्याभिषेक था जिसका दूरदर्शन पर प्रसारण हुआ था। 1956 से 1992 के दौरान विभिन्न देशों को स्वतंत्रता मिलते रहने से उनकी रियासतों की संख्या कम होती गई। वह विश्व में सबसे वृद्ध शासक और ब्रिटेन पर सबसे ज्यादा समय तक शासन करने वाली रानी है। ९ सितम्बर २०१५ को उन्होंने अपनी परदादी महारानी विक्टोरिया के सबसे लंबे शासनकाल के कीर्तिमान को तोड़ दिया व ब्रिटेन पर सर्वाधिक समय तक शासन करने वाली व साम्राज्ञी बन गयीं। एलिज़ाबेथ का जन्म लंदन में ड्यूक जॉर्ज़ षष्टम व राजमाता रानी एलिज़ाबेथ के यहाँ पैदा हुईं व उनकी पढाई घर में ही हुई। उनके पिता ने १९३६ में एडवर्ड ८ के राज-पाठ त्यागने के बाद राज ग्रहण किया। तब वह राज्य की उत्तराधिकारी हो गयी थीं। उन्होंने दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जनसेवाओं में हिस्सा लेना शुरु किया व सहायक प्रादेशिक सेवा में हिस्सा लिया। १९४७ में उनका विवाह राजकुमार फिलिप से हुआ जिनसे उनके चार बच्चे, चार्ल्स, ऐने, राजकुमार एँड्रयू और राजकुमार एडवर्ड हैं। एलिज़ाबेथ के शासन के दौरान यूनाइटेड किंगडम में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए, जैसे अफ्रीका की ब्रिटिश उपनिवेशीकरण से स्वतंत्रता, यूके की संसद की शक्तियों का वेल्स, स्कॉटलैंड, इंग्लैंड व आयरलैंड की संसदों में विभाजन इत्यादि। अपने शासनकाल के दौरान उन्होंने विभिन्न युद्धों के दौरान अपने राज्य का नेतृत्व किया। .
डैविड विलियम डोनाल्ड कैमरन (जन्म ९ अक्तूबर, १९६६) २०१० से जुलाई २०१६ तक संयुक्त राजशाही के प्रधान मंत्री रह चुके हैं। वे कंज़र्वेटिव पार्टी के नेता थे तथा ये विटने से संसद सदस्य थे। यूरोपीय संघ की सदस्यता पर हुए जनमत संग्रह में जनता ने संघ को छोड़ने का निर्णय दिया तो उन्होंने इस्तीफे की घोषणा कर दी। कैमरन ने ब्रेज़नोज़ महाविद्यालय, ऑक्स्फ़ोर्ड से दर्शनशास्त्र, अर्थशास्त्र एवं राजनीतिशास्त्र (पीपीई) विषय में १९८८ में प्रथम श्रेणी (ऑनर्स) में स्नातक किया है। इन्हें इनके पढ़ाने वाले प्रोफ़ेसर वर्नॉन बोगडेनॉर "समर्थतम छात्रों में से एक" कहा करते थे। अपने ऑक्सफोर्ड प्रवास काल में ये बुलिंग्डब क्लब के सदस्य रहे थे। इन्हॊने कंज़र्वेटिव अनुसंधान विभाग ज्वाइन किया और नॉर्मन लेमाउण्ट एवं माईकल हावर्ड के विशेष सलाहकार बने। फ़िर ये कार्ल्टन कम्युनिकेशंस के कारपोरेट मामलों के निदेशक पद पर सात वर्ष तक आसीन रहे। कैमरन पहली बार संसद के लिये १९९७ में स्टैफ़्फ़ोर्ड निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में आए। ये यूरोस्केप्टिक मंच पर अपनी पार्टी से उसकी एकल-यूरोपीय मुद्रा (यूरो) में ब्रिटिश सदस्यता विरोधी विचारधारा के कारण उससे अलग हो गए। हालांकि राष्ट्रीय औसत वोटों से कुछ न्यून रहने पर वे हारे भी। इसके बाद उनको संसद सदस्यता हेतु प्रथम विजय २००१ के आम चुनावों में ऑक्स्फ़ोर्डशायर की विट्टने निर्वाचन क्षेत्र से मिली। तब इन्हें आधिकारिक विपक्ष का स्थान मिला। २००५ के आम चुनावों में नीति समन्वय अध्यक्ष भी बने। अपनी युवा एवं उदारवादी प्रत्याशी की छवि के कारण ही २००५ में इन्होंने कंज़र्वेटिव पार्टी के चुनावों में विजय पाई। तब ये प्रथम बार ब्रिटेन के प्रधान मंत्रीबने। .
प्रदत्त नाम या दिया हुआ नाम एक ऐसा व्यक्तिगत नाम है जो कि लोगों के समूह में सदस्यों की पहचान कराता है, विशेषकर परिवार में, जहां सभी सदस्य आम तौर पर एकसमान पारिवारिक नाम (कुलनाम) साझा करते हैं, उनके बीच अंतर स्पष्ट करता है। एक प्रदत्त नाम किसी व्यक्ति को दिया गया नाम है, जो पारिवारिक नाम की तरह विरासत में नहीं मिलता। अधिकांश यूरोपीय देशों में और ऐसे देशों में जहां की संस्कृति मुख्य रूप से यूरोप से प्रभावित है (जैसे कि उत्तर और दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, आदि में बसे यूरोपीय आनुवंशिकता वाले व्यक्ति), आम तौर पर प्रदत्त नाम पारिवारिक नाम से पहले आता है (हालांकि सामान्यतः सूचियों और कैटलॉग में नहीं) और इसलिए पूर्व नाम या प्रथम नाम के रूप में जाना जाता है। लेकिन विश्व की कई संस्कृतियों में - जैसे कि हंगरी, अफ्रीका की विभिन्न संस्कृतियों और पूर्व एशिया की अधिकांश संस्कृतियों (उदा. चीन, जापान, कोरिया और वियतनाम) में - प्रदत्त नाम परंपरागत रूप से परिवार के नाम के बाद आते हैं। पूर्वी एशिया में, प्रदत्त नाम का अंश भी परिवार की किसी विशिष्ट पीढ़ी के सभी सदस्यों के बीच साझा किया जा सकता है, ताकि एक पीढ़ी की दूसरी पीढ़ी से अलग पहचान की जा सके। सामान्य पश्चिमी नामकरण परंपरा के तहत, आम तौर पर लोगों के एक या अधिक पूर्व नाम (या तो दिए गए या प्राप्त) होते हैं। यदि एक से अधिक है, तो आम तौर पर (हर रोज़ के इस्तेमाल के लिए) एक मुख्य पूर्व नाम और एक या अधिक पूरक पूर्व नाम मौजूद होते हैं। लेकिन कभी-कभी दो या अधिक एकसमान महत्व वाले होते हैं। इस तथ्य के परे कि पूर्व नाम उपनाम से पहले होते हैं, इनके लिए कोई विशिष्ट क्रमांकन नियम मौजूद नहीं है। अक्सर मुख्य पूर्व नाम शुरूआत में होता है, जिसके परिणामस्वरूप एक प्रथम नाम और एक या अधिक मध्यम नाम बनते हैं, लेकिन अन्य व्यवस्थाएं भी काफ़ी प्रचलित है। प्रदत्त नाम का उपयोग अक्सर अनौपचारिक स्थितियों में एक परिचित और मैत्रीपूर्ण ढंग से किया जाता है। अधिक औपचारिक स्थितियों में इसके बजाय उपनाम का प्रयोग किया जाता है, जब तक कि एक ही उपनाम वाले लोगों के बीच अंतर करना ज़रूरी न हो। मुहावरा "प्रथम-नाम के आधार पर" (या "प्रथम-नाम संबोधन") इस तथ्य का संकेत देता है कि व्यक्ति के प्रदत्त नाम का उपयोग, सुपरिचय जताता है। .
ब्रिटेन शब्द का प्रयोग हालाँकि आम तौर पर हिंदी में संयुक्त राजशाही अर्थात् यूनाइटेड किंगडम देश का बोध करने के लिए होता है, परंतु इसका उपयोग अन्य सन्दर्भों के लिए भी हो सकता है.
मारग्रेट हिल्डा थैचर, बैरोनेस थैचर (13 अक्टूबर 1925 - 8 अप्रैल 2013) ब्रिटिश राजनीतिज्ञ थीं, जो बीसवी शताब्दी में सबसे लंबी अवधि (1979-1990) के लिए यूनाईटेड किंगडम की प्रधानमंत्री रही थीं और एकमात्र महिला जिन्होंने यह कार्यभार संभाला हो। .
यूरोपियन संघ (यूरोपियन यूनियन) मुख्यतः यूरोप में स्थित 28 देशों का एक राजनैतिक एवं आर्थिक मंच है जिनमें आपस में प्रशासकीय साझेदारी होती है जो संघ के कई या सभी राष्ट्रो पर लागू होती है। इसका अभ्युदय 1957 में रोम की संधि द्वारा यूरोपिय आर्थिक परिषद के माध्यम से छह यूरोपिय देशों की आर्थिक भागीदारी से हुआ था। तब से इसमें सदस्य देशों की संख्या में लगातार बढोत्तरी होती रही और इसकी नीतियों में बहुत से परिवर्तन भी शामिल किये गये। 1993 में मास्त्रिख संधि द्वारा इसके आधुनिक वैधानिक स्वरूप की नींव रखी गयी। दिसम्बर 2007 में लिस्बन समझौता जिसके द्वारा इसमें और व्यापक सुधारों की प्रक्रिया 1 जनवरी 2008 से शुरु की गयी है। यूरोपिय संघ सदस्य राष्ट्रों को एकल बाजार के रूप में मान्यता देता है एवं इसके कानून सभी सदस्य राष्ट्रों पर लागू होता है जो सदस्य राष्ट्र के नागरिकों की चार तरह की स्वतंत्रताएँ सुनिश्चित करता हैः- लोगों, सामान, सेवाएँ एवं पूँजी का स्वतंत्र आदान-प्रदान.
सांसद, संसद में मतदाताओं का प्रतिनिधि होता है। अनेक देशों में इस शब्द का प्रयोग विशेष रूप से निम्न सदन के सदस्यों के लिए किया जाता है। क्योंकि अक्सर उच्च सदन के लिए एक अलग उपाधि जैसे कि सीनेट एवं इसके सदस्यों के लिये सीनेटर का प्रयोग किया जाता है सांसद अपनी राजनीतिक पार्टी के सदस्यों के साथ मिलकर संसदीय दल का गठन करते हैं। रोजमर्रा के व्यवहार में अक्सरसांसद शब्द के स्थान पर मीडिया में इसके लघु रूप "MP"का प्रयोग किया जाता है। .
ब्रिटेन के प्रधान मन्त्री.
जनसत्ता हिन्दी का प्रमुख दैनिक समाचार पत्र है। .
| थेरेसा मैरी मे यूनाइटेड किंगडम की प्रधानमंत्री और कंजर्वेटिव पार्टी की नेता है। वे एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे से मेडनहैड सीट से संसद के सदस्य हैं। उन्हें एक एक-राष्ट्र रूढ़िवादी और एक उदार रूढ़िवादी के रूप में जाना जाता है। इससे पूर्व मार्गरेट थैचर वर्ष एक हज़ार नौ सौ उन्यासी से एक हज़ार नौ सौ नब्बे तक ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री रहीं। गौरतलब है कि डेविड कैमरून ने जनमत संग्रह के जरिए ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर आने के फैसले के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद तेरह जुलाई, दो हज़ार सोलह को उन्होने ब्रिटेन की दूसरी महिला प्रधानमंत्री के रूप में पदभार ग्रहण किया। . नौ संबंधोंः एलिज़ाबेथ द्वितीय, डेविड कैमरन, प्रदत्त नाम, ब्रिटेन, मारग्रेट थैचर, यूरोपीय संघ, सांसद, संयुक्त राजशाही के प्रधानमंत्री, जनसत्ता। एलिज़ाबेथ द्वितीय यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैण्ड, जमैका, बारबाडोस, बहामास, ग्रेनेडा, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन द्वीपसमूह, तुवालू, सन्त लूसिया, सन्त विन्सेण्ट और ग्रेनाडाइन्स, बेलीज़, अण्टीगुआ और बारबूडा और सन्त किट्स और नेविस की महारानी हैं। इसके अतिरिक्त वह राष्ट्रमण्डल के चौवन राष्ट्रों और राज्यक्षेत्रों की प्रमुख हैं और ब्रिटिश साम्राज्ञी के रूप में, वह अंग्रेज़ी चर्च की सर्वोच्च राज्यपाल हैं और राष्ट्रमण्डल के सोलह स्वतन्त्र सम्प्रभु देशों की संवैधानिक महारानी हैं। एलिज़ाबेथ को निजी रूप से पर घर पर शिक्षित किया गया था। उनके पिता, जॉर्ज षष्ठम को एक हज़ार नौ सौ छत्तीस में ब्रिटेन और ब्रिटिश उपनिवेश भारत का सम्राट बनाया गया था। छः फरवरी एक हज़ार नौ सौ बावन को अपने राज्याभिषेक के बाद एलिज़ाबेथ राष्ट्रकुल की अध्यक्ष व साथ स्वतंत्र देशों यूनाइटेड किंगडम, पाकिस्तान अभिराज्य, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका व सिलोन की शासक रानी बन गयीं। उनका राज्याभिषेक समारोह अपने तरह का पहला ऐसा राज्याभिषेक था जिसका दूरदर्शन पर प्रसारण हुआ था। एक हज़ार नौ सौ छप्पन से एक हज़ार नौ सौ बानवे के दौरान विभिन्न देशों को स्वतंत्रता मिलते रहने से उनकी रियासतों की संख्या कम होती गई। वह विश्व में सबसे वृद्ध शासक और ब्रिटेन पर सबसे ज्यादा समय तक शासन करने वाली रानी है। नौ सितम्बर दो हज़ार पंद्रह को उन्होंने अपनी परदादी महारानी विक्टोरिया के सबसे लंबे शासनकाल के कीर्तिमान को तोड़ दिया व ब्रिटेन पर सर्वाधिक समय तक शासन करने वाली व साम्राज्ञी बन गयीं। एलिज़ाबेथ का जन्म लंदन में ड्यूक जॉर्ज़ षष्टम व राजमाता रानी एलिज़ाबेथ के यहाँ पैदा हुईं व उनकी पढाई घर में ही हुई। उनके पिता ने एक हज़ार नौ सौ छत्तीस में एडवर्ड आठ के राज-पाठ त्यागने के बाद राज ग्रहण किया। तब वह राज्य की उत्तराधिकारी हो गयी थीं। उन्होंने दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जनसेवाओं में हिस्सा लेना शुरु किया व सहायक प्रादेशिक सेवा में हिस्सा लिया। एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में उनका विवाह राजकुमार फिलिप से हुआ जिनसे उनके चार बच्चे, चार्ल्स, ऐने, राजकुमार एँड्रयू और राजकुमार एडवर्ड हैं। एलिज़ाबेथ के शासन के दौरान यूनाइटेड किंगडम में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए, जैसे अफ्रीका की ब्रिटिश उपनिवेशीकरण से स्वतंत्रता, यूके की संसद की शक्तियों का वेल्स, स्कॉटलैंड, इंग्लैंड व आयरलैंड की संसदों में विभाजन इत्यादि। अपने शासनकाल के दौरान उन्होंने विभिन्न युद्धों के दौरान अपने राज्य का नेतृत्व किया। . डैविड विलियम डोनाल्ड कैमरन दो हज़ार दस से जुलाई दो हज़ार सोलह तक संयुक्त राजशाही के प्रधान मंत्री रह चुके हैं। वे कंज़र्वेटिव पार्टी के नेता थे तथा ये विटने से संसद सदस्य थे। यूरोपीय संघ की सदस्यता पर हुए जनमत संग्रह में जनता ने संघ को छोड़ने का निर्णय दिया तो उन्होंने इस्तीफे की घोषणा कर दी। कैमरन ने ब्रेज़नोज़ महाविद्यालय, ऑक्स्फ़ोर्ड से दर्शनशास्त्र, अर्थशास्त्र एवं राजनीतिशास्त्र विषय में एक हज़ार नौ सौ अठासी में प्रथम श्रेणी में स्नातक किया है। इन्हें इनके पढ़ाने वाले प्रोफ़ेसर वर्नॉन बोगडेनॉर "समर्थतम छात्रों में से एक" कहा करते थे। अपने ऑक्सफोर्ड प्रवास काल में ये बुलिंग्डब क्लब के सदस्य रहे थे। इन्हॊने कंज़र्वेटिव अनुसंधान विभाग ज्वाइन किया और नॉर्मन लेमाउण्ट एवं माईकल हावर्ड के विशेष सलाहकार बने। फ़िर ये कार्ल्टन कम्युनिकेशंस के कारपोरेट मामलों के निदेशक पद पर सात वर्ष तक आसीन रहे। कैमरन पहली बार संसद के लिये एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे में स्टैफ़्फ़ोर्ड निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में आए। ये यूरोस्केप्टिक मंच पर अपनी पार्टी से उसकी एकल-यूरोपीय मुद्रा में ब्रिटिश सदस्यता विरोधी विचारधारा के कारण उससे अलग हो गए। हालांकि राष्ट्रीय औसत वोटों से कुछ न्यून रहने पर वे हारे भी। इसके बाद उनको संसद सदस्यता हेतु प्रथम विजय दो हज़ार एक के आम चुनावों में ऑक्स्फ़ोर्डशायर की विट्टने निर्वाचन क्षेत्र से मिली। तब इन्हें आधिकारिक विपक्ष का स्थान मिला। दो हज़ार पाँच के आम चुनावों में नीति समन्वय अध्यक्ष भी बने। अपनी युवा एवं उदारवादी प्रत्याशी की छवि के कारण ही दो हज़ार पाँच में इन्होंने कंज़र्वेटिव पार्टी के चुनावों में विजय पाई। तब ये प्रथम बार ब्रिटेन के प्रधान मंत्रीबने। . प्रदत्त नाम या दिया हुआ नाम एक ऐसा व्यक्तिगत नाम है जो कि लोगों के समूह में सदस्यों की पहचान कराता है, विशेषकर परिवार में, जहां सभी सदस्य आम तौर पर एकसमान पारिवारिक नाम साझा करते हैं, उनके बीच अंतर स्पष्ट करता है। एक प्रदत्त नाम किसी व्यक्ति को दिया गया नाम है, जो पारिवारिक नाम की तरह विरासत में नहीं मिलता। अधिकांश यूरोपीय देशों में और ऐसे देशों में जहां की संस्कृति मुख्य रूप से यूरोप से प्रभावित है , आम तौर पर प्रदत्त नाम पारिवारिक नाम से पहले आता है और इसलिए पूर्व नाम या प्रथम नाम के रूप में जाना जाता है। लेकिन विश्व की कई संस्कृतियों में - जैसे कि हंगरी, अफ्रीका की विभिन्न संस्कृतियों और पूर्व एशिया की अधिकांश संस्कृतियों में - प्रदत्त नाम परंपरागत रूप से परिवार के नाम के बाद आते हैं। पूर्वी एशिया में, प्रदत्त नाम का अंश भी परिवार की किसी विशिष्ट पीढ़ी के सभी सदस्यों के बीच साझा किया जा सकता है, ताकि एक पीढ़ी की दूसरी पीढ़ी से अलग पहचान की जा सके। सामान्य पश्चिमी नामकरण परंपरा के तहत, आम तौर पर लोगों के एक या अधिक पूर्व नाम होते हैं। यदि एक से अधिक है, तो आम तौर पर एक मुख्य पूर्व नाम और एक या अधिक पूरक पूर्व नाम मौजूद होते हैं। लेकिन कभी-कभी दो या अधिक एकसमान महत्व वाले होते हैं। इस तथ्य के परे कि पूर्व नाम उपनाम से पहले होते हैं, इनके लिए कोई विशिष्ट क्रमांकन नियम मौजूद नहीं है। अक्सर मुख्य पूर्व नाम शुरूआत में होता है, जिसके परिणामस्वरूप एक प्रथम नाम और एक या अधिक मध्यम नाम बनते हैं, लेकिन अन्य व्यवस्थाएं भी काफ़ी प्रचलित है। प्रदत्त नाम का उपयोग अक्सर अनौपचारिक स्थितियों में एक परिचित और मैत्रीपूर्ण ढंग से किया जाता है। अधिक औपचारिक स्थितियों में इसके बजाय उपनाम का प्रयोग किया जाता है, जब तक कि एक ही उपनाम वाले लोगों के बीच अंतर करना ज़रूरी न हो। मुहावरा "प्रथम-नाम के आधार पर" इस तथ्य का संकेत देता है कि व्यक्ति के प्रदत्त नाम का उपयोग, सुपरिचय जताता है। . ब्रिटेन शब्द का प्रयोग हालाँकि आम तौर पर हिंदी में संयुक्त राजशाही अर्थात् यूनाइटेड किंगडम देश का बोध करने के लिए होता है, परंतु इसका उपयोग अन्य सन्दर्भों के लिए भी हो सकता है. मारग्रेट हिल्डा थैचर, बैरोनेस थैचर ब्रिटिश राजनीतिज्ञ थीं, जो बीसवी शताब्दी में सबसे लंबी अवधि के लिए यूनाईटेड किंगडम की प्रधानमंत्री रही थीं और एकमात्र महिला जिन्होंने यह कार्यभार संभाला हो। . यूरोपियन संघ मुख्यतः यूरोप में स्थित अट्ठाईस देशों का एक राजनैतिक एवं आर्थिक मंच है जिनमें आपस में प्रशासकीय साझेदारी होती है जो संघ के कई या सभी राष्ट्रो पर लागू होती है। इसका अभ्युदय एक हज़ार नौ सौ सत्तावन में रोम की संधि द्वारा यूरोपिय आर्थिक परिषद के माध्यम से छह यूरोपिय देशों की आर्थिक भागीदारी से हुआ था। तब से इसमें सदस्य देशों की संख्या में लगातार बढोत्तरी होती रही और इसकी नीतियों में बहुत से परिवर्तन भी शामिल किये गये। एक हज़ार नौ सौ तिरानवे में मास्त्रिख संधि द्वारा इसके आधुनिक वैधानिक स्वरूप की नींव रखी गयी। दिसम्बर दो हज़ार सात में लिस्बन समझौता जिसके द्वारा इसमें और व्यापक सुधारों की प्रक्रिया एक जनवरी दो हज़ार आठ से शुरु की गयी है। यूरोपिय संघ सदस्य राष्ट्रों को एकल बाजार के रूप में मान्यता देता है एवं इसके कानून सभी सदस्य राष्ट्रों पर लागू होता है जो सदस्य राष्ट्र के नागरिकों की चार तरह की स्वतंत्रताएँ सुनिश्चित करता हैः- लोगों, सामान, सेवाएँ एवं पूँजी का स्वतंत्र आदान-प्रदान. सांसद, संसद में मतदाताओं का प्रतिनिधि होता है। अनेक देशों में इस शब्द का प्रयोग विशेष रूप से निम्न सदन के सदस्यों के लिए किया जाता है। क्योंकि अक्सर उच्च सदन के लिए एक अलग उपाधि जैसे कि सीनेट एवं इसके सदस्यों के लिये सीनेटर का प्रयोग किया जाता है सांसद अपनी राजनीतिक पार्टी के सदस्यों के साथ मिलकर संसदीय दल का गठन करते हैं। रोजमर्रा के व्यवहार में अक्सरसांसद शब्द के स्थान पर मीडिया में इसके लघु रूप "MP"का प्रयोग किया जाता है। . ब्रिटेन के प्रधान मन्त्री. जनसत्ता हिन्दी का प्रमुख दैनिक समाचार पत्र है। . |
केजरीवाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधते हुए पूछा कि वह दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में कथित अनियमितताओं की जांच से क्यों डरे हुए हैं? मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, "केंद्रीय वित्त मंत्री ने कल (मंगलवार) संसद में झूठ बोला था। जेटली जी डीडीसीए पर जांच से डरे हुए क्यों हैं? उनकी डीडीसीए घोटाले में क्या भूमिका है? " उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने मंगलवार को भ्रष्टाचार के मामले को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार के आवास और दफ्तर पर छापेमारी की थी।
| केजरीवाल ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधते हुए पूछा कि वह दिल्ली और जिला क्रिकेट संघ में कथित अनियमितताओं की जांच से क्यों डरे हुए हैं? मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, "केंद्रीय वित्त मंत्री ने कल संसद में झूठ बोला था। जेटली जी डीडीसीए पर जांच से डरे हुए क्यों हैं? उनकी डीडीसीए घोटाले में क्या भूमिका है? " उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने मंगलवार को भ्रष्टाचार के मामले को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेन्द्र कुमार के आवास और दफ्तर पर छापेमारी की थी। |
बुलढाणा/नागपुर, 29 मई (वार्ता) महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में समृद्धि एक्सप्रेसवे पर सोमवार को कार के डिवाइडर से टकरा जाने से उसमें सवार तीन लोगों की मौत हो गयी।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यूनीवार्ता को बताया कि दुर्घटना समृद्धि एक्सप्रेसवे पर देवुलगांव कोल गांव के समीप आज सुबह लगभग साढ़े पांच बजे हुई। कार में तीन लोग सवार थे और जब दुर्घटना हुई तब उनमें से दो लोगों की कार में ही मौत हो गई जबकि उनमें से एक व्यक्ति वाहन से बाहर गिर गया।
उन्होंने बताया कि डिवाइडर से कार के टकराते ही उसमें आग लग गई। आग इतनी भीषण थी कि कार में सवार दो लोगों को इससे बाहर निकलने का भी अवसर नहीं मिला और कार के अंदर ही जलकर उनकी मौत हो गई जबकि वाहन से बाहर गिरे एक व्यक्ति को स्थानीय अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती किया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया।
मृतकों की तत्काल पहचान नहीं हो सकी है और आगे की जांच चल रही है।
गौरतलब है कि दिसंबर, 2022 में शुरू किए गए मुंबई-नागपुर समृद्धि एक्सप्रेसवे पर अबतक हुई दुर्घटनाओं में 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 150 लोग घायल हो चुके हैं।
| बुलढाणा/नागपुर, उनतीस मई महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में समृद्धि एक्सप्रेसवे पर सोमवार को कार के डिवाइडर से टकरा जाने से उसमें सवार तीन लोगों की मौत हो गयी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यूनीवार्ता को बताया कि दुर्घटना समृद्धि एक्सप्रेसवे पर देवुलगांव कोल गांव के समीप आज सुबह लगभग साढ़े पांच बजे हुई। कार में तीन लोग सवार थे और जब दुर्घटना हुई तब उनमें से दो लोगों की कार में ही मौत हो गई जबकि उनमें से एक व्यक्ति वाहन से बाहर गिर गया। उन्होंने बताया कि डिवाइडर से कार के टकराते ही उसमें आग लग गई। आग इतनी भीषण थी कि कार में सवार दो लोगों को इससे बाहर निकलने का भी अवसर नहीं मिला और कार के अंदर ही जलकर उनकी मौत हो गई जबकि वाहन से बाहर गिरे एक व्यक्ति को स्थानीय अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती किया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। मृतकों की तत्काल पहचान नहीं हो सकी है और आगे की जांच चल रही है। गौरतलब है कि दिसंबर, दो हज़ार बाईस में शुरू किए गए मुंबई-नागपुर समृद्धि एक्सप्रेसवे पर अबतक हुई दुर्घटनाओं में चालीस से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि एक सौ पचास लोग घायल हो चुके हैं। |
का साधन है । इस पुनीत भाव को लेकर वह इस क्षेत्र में सुधार की पताका लेकर आगे आए ।
एक अनोखी बात
श्री पं० ईश्वर चन्द्र जी भूतपूर्व पुरोहित आर्यसमाज के विवाह को केवल चार साढ़े चार वर्ष ही बीते थे कि दोनों पति पत्नी ने वानप्रस्थी के रूप में जीवन बिताने का निश्चय कर लिया । पंडित जी के एक पुत्र था एक पुत्री । पति पत्नी ने यही निर्णय किया कि इन दो बच्चों का लालन पालन करके इनका ठीक २ निर्माण किया जाए और वानप्रस्थ के रूप में अपना भविष्य संवारा जाए ।
पंडित जी ने अपने निश्चय की सूचना आर्यसमाज के प्रधान ला० शेरसिंह जी बजाज को दे दी । ला० जी बड़े नमू, दक्ष व अनुभवी पुरुष थे । आपने पंडित जी की आयु का ध्यान करते हुए उनको आश्रम परिवर्तन से रोका । बहुत समझाया कि छुरेकी धार पर चलने लगे हो । सोचो, सम्भलो और भावुकता में आकर यह पग न उठायो । बड़ बड़ फिसल गये तो आप कैसे यह व्रत निभा सकेंगे । यदि व्रत पर अडिग न रह पाए तो लोग हंसी उड़ायेंगे और आर्यसमाज की भी बहुत अपकीति होगी । ला० जी ने समझाया कि कुछ वर्ष संयम से गृहस्थ में रहो फिर आश्रम
बदल लेना । व्रत लेना सुगम है परन्तु व्रत का पालन करना कठिन है ।
इधर पंडित जी व उनकी संगिनी दृढ़ निश्चय कर चुके थे । प्रधान जी ने यह विषय अन्तरंग में रख दिया । पंडित जी ने अन्तरग के निर्णय की प्रतीक्षा किये बिना आश्रम परिवर्तन की तिथि भी निश्चित कर दी । बात किसी प्रकार से नगर में भी फैल गई। आर्यसमाज के एक विद्वान श्री पं० श्रीराम जी ने संस्कार कराना स्वीकार कर लिया ।
जिस दिन पं० ईश्वर चन्द्र जी ने आश्रम बदलना था, लोगों की भारी भीड़ आर्य समाज मन्दिर में आ गई । अन्तरंग में इस विषय पर एक मत न था । ला० शेर सिंह जी इस के विरुद्ध थे । उनके साथ कई अन्य सज्जन भी थे । ला० शेर सिंह अपनी बात पर अड़ गये कि समाज मन्दिर में यह संस्कार नहीं हो सकता । कई घंटे यह विवाद होता रहा । लोग जाने लगे । अन्तरंग ने ला० जी के प्रभाव में आश्रम परिवर्तन के निषेध का प्रस्ताव स्वीकार कर दिया ।
पं० श्री राम जी ने बहुत समझाया कि यह सिद्धांत विरुद्ध बात नहीं पर कुछ भी लाभ न हुआ । महाराय मुकन्द लाल, महाशय धर्मचन्द व श्री पं० विश्वनाथ जो
आश्रम परिवर्तन के पक्ष में थे । महाशय मुकन्द लाल जी ने प्रधान जी को अलग कर के कहा कि शास्त्रों का मत है कि जब वैराग्य हो जाये तो सन्यास की दीक्षा ली जा सकती है तो वह तो उस से पहले की अवस्था है । फिर आप यह क्यों पहले ही कल्पना कर लेते हैं कि वे दोनों अवश्य ही फिसलेंगे ।
आपने प्रधान जी से कहा कि वह पंडित जी व उन की पत्नी से अलग अलग बात कर देखें । यदि दोनों स्वेच्छा से यह व्रत ले रहे हैं तो आप को क्या आपत्ति है ? ये दोनों सहसा तो वानप्रस्थ में आ नहीं रहे । गृहस्थ के सुख दुख देखं चुके हैं । बच्चे भी नहीं । दोनों पढ़ लिखे समझदार हैं । हमें इन्हें उत्साहित करना ही चाहिए । महाराय जी का सुझाव प्रधान जी को जंच गया । ऐसा ही किया गया अन्तरंग ने सर्वसम्मति से आश्रम परिवर्तन की स्वीकृति दे दी ।
पाठकगण । स्मरण रहे कि जिस समय की यह बात है तब महाशय जी भी युवा अवस्था में थे । युवा अवस्था में ही उन की बुद्धि कितनी परिपक्व थी यह उन के उपरोक्त सुझाव से अनुमान लगा लें I | का साधन है । इस पुनीत भाव को लेकर वह इस क्षेत्र में सुधार की पताका लेकर आगे आए । एक अनोखी बात श्री पंशून्य ईश्वर चन्द्र जी भूतपूर्व पुरोहित आर्यसमाज के विवाह को केवल चार साढ़े चार वर्ष ही बीते थे कि दोनों पति पत्नी ने वानप्रस्थी के रूप में जीवन बिताने का निश्चय कर लिया । पंडित जी के एक पुत्र था एक पुत्री । पति पत्नी ने यही निर्णय किया कि इन दो बच्चों का लालन पालन करके इनका ठीक दो निर्माण किया जाए और वानप्रस्थ के रूप में अपना भविष्य संवारा जाए । पंडित जी ने अपने निश्चय की सूचना आर्यसमाज के प्रधान लाशून्य शेरसिंह जी बजाज को दे दी । लाशून्य जी बड़े नमू, दक्ष व अनुभवी पुरुष थे । आपने पंडित जी की आयु का ध्यान करते हुए उनको आश्रम परिवर्तन से रोका । बहुत समझाया कि छुरेकी धार पर चलने लगे हो । सोचो, सम्भलो और भावुकता में आकर यह पग न उठायो । बड़ बड़ फिसल गये तो आप कैसे यह व्रत निभा सकेंगे । यदि व्रत पर अडिग न रह पाए तो लोग हंसी उड़ायेंगे और आर्यसमाज की भी बहुत अपकीति होगी । लाशून्य जी ने समझाया कि कुछ वर्ष संयम से गृहस्थ में रहो फिर आश्रम बदल लेना । व्रत लेना सुगम है परन्तु व्रत का पालन करना कठिन है । इधर पंडित जी व उनकी संगिनी दृढ़ निश्चय कर चुके थे । प्रधान जी ने यह विषय अन्तरंग में रख दिया । पंडित जी ने अन्तरग के निर्णय की प्रतीक्षा किये बिना आश्रम परिवर्तन की तिथि भी निश्चित कर दी । बात किसी प्रकार से नगर में भी फैल गई। आर्यसमाज के एक विद्वान श्री पंशून्य श्रीराम जी ने संस्कार कराना स्वीकार कर लिया । जिस दिन पंशून्य ईश्वर चन्द्र जी ने आश्रम बदलना था, लोगों की भारी भीड़ आर्य समाज मन्दिर में आ गई । अन्तरंग में इस विषय पर एक मत न था । लाशून्य शेर सिंह जी इस के विरुद्ध थे । उनके साथ कई अन्य सज्जन भी थे । लाशून्य शेर सिंह अपनी बात पर अड़ गये कि समाज मन्दिर में यह संस्कार नहीं हो सकता । कई घंटे यह विवाद होता रहा । लोग जाने लगे । अन्तरंग ने लाशून्य जी के प्रभाव में आश्रम परिवर्तन के निषेध का प्रस्ताव स्वीकार कर दिया । पंशून्य श्री राम जी ने बहुत समझाया कि यह सिद्धांत विरुद्ध बात नहीं पर कुछ भी लाभ न हुआ । महाराय मुकन्द लाल, महाशय धर्मचन्द व श्री पंशून्य विश्वनाथ जो आश्रम परिवर्तन के पक्ष में थे । महाशय मुकन्द लाल जी ने प्रधान जी को अलग कर के कहा कि शास्त्रों का मत है कि जब वैराग्य हो जाये तो सन्यास की दीक्षा ली जा सकती है तो वह तो उस से पहले की अवस्था है । फिर आप यह क्यों पहले ही कल्पना कर लेते हैं कि वे दोनों अवश्य ही फिसलेंगे । आपने प्रधान जी से कहा कि वह पंडित जी व उन की पत्नी से अलग अलग बात कर देखें । यदि दोनों स्वेच्छा से यह व्रत ले रहे हैं तो आप को क्या आपत्ति है ? ये दोनों सहसा तो वानप्रस्थ में आ नहीं रहे । गृहस्थ के सुख दुख देखं चुके हैं । बच्चे भी नहीं । दोनों पढ़ लिखे समझदार हैं । हमें इन्हें उत्साहित करना ही चाहिए । महाराय जी का सुझाव प्रधान जी को जंच गया । ऐसा ही किया गया अन्तरंग ने सर्वसम्मति से आश्रम परिवर्तन की स्वीकृति दे दी । पाठकगण । स्मरण रहे कि जिस समय की यह बात है तब महाशय जी भी युवा अवस्था में थे । युवा अवस्था में ही उन की बुद्धि कितनी परिपक्व थी यह उन के उपरोक्त सुझाव से अनुमान लगा लें I |
।भाग्यावी (Bhagyavi)
धनु राशि का स्वामी ग्रह बृहस्पति को माना जाता है। धनु राशि के आराध्य देव दत्तोत्रय होते हैं। भाग्यावी नाम की लड़कियाँ नितम्बों और धमिनयों की समस्याओं से ग्रस्त हो सकते हैं। इन भाग्यावी नाम की लड़कियों का मांसल शरीर होता है। इस राशि के भाग्यावी नाम की लड़कियाँ यकृत और रीढ़ की हड्डी और कमज़ोर दृष्टि से परेशान रह सकते हैं। धनु राशि के भाग्यावी नाम की लड़कियाँ घूमने और नई चीजें सीखने में माहिर होते हैं। ये आध्यात्मिक प्रवृत्ति के होते हैं इन्हें मंदिरों आदि की यात्रा करना और साधुओं के साथ रहना अच्छा लगता है।
भाग्यावी नाम बहुत सुंदर और आकर्षक माना जाता है। इतना ही नहीं इसका मतलब भी बहुत अच्छा होता है। आपको बता दें कि भाग्यावी नाम का अर्थ मेरे शरीर में होता है। भाग्यावी नाम का खास महत्व है क्योंकि इसका मतलब मेरे शरीर में है जिसे काफी अच्छा माना जाता है। आपको बता दें कि अपने शिशु को भाग्यावी नाम देकर आप उसके जीवन में सकारात्मक संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं। भाग्यावी नाम रखने से आपका बच्चा भी वो गुण ले लेता है जो इसके अर्थ में समाहित होता है। माना जाता है कि भाग्यावी नाम वाले व्यक्ति के स्वभाव में मेरे शरीर में होने की झलक देख सकते हैं। आगे भाग्यावी नाम की राशि व लकी नंबर अथवा भाग्यावी नाम के मेरे शरीर में अर्थ के बारे में विस्तार से बताया गया है।
भाग्यावी नाम का स्वामी ग्रह बृहस्पति है एवं इनका शुभ अंक 3 होता है। भाग्यावी नाम वाली लड़कियां क्रिएटिव होती हैं और अपनी बातों से दूसरों को प्रभावित करने में निपुण होती हैं। भाग्यावी नाम की लड़कियों को अनुशासन पसन्द हैं। इन्हें अपने घर-परिवार के लोगों से बहुत प्यार मिलता है। इस अंक से संबंधित महिलाएं भाग्यशाली होती हैं और मुश्किल समय में कोई न कोई भाग्यावी नाम की लड़कियों की परेशानी को हल कर ही देता है। भाग्यावी नाम की लड़कियां मजबूत शरीर वाली और सेहतमंद होती हैं। 3 अंक वाली भाग्यावी नाम की महिलाएं पैसे की कीमत को जल्दी ही समझ जाती हैं, जिस कारण इन्हें कभी धन की कमी महसूस नहीं होती है।
भाग्यावी नाम की लड़कियों की राशि धनु होती है। इस नाम की लड़कियां अन्य लोगों के साथ अच्छे से पेश आती हैं और इन्हें अपने आसपास रूढ़िवादी लोग व विचार अच्छे नहीं लगते। धनु राशि की महिलाएं जिनका नाम भाग्यावी है, वे घमंडी किस्म के होती हैं। यही वजह है कि दूसरे इन्हें आसानी से समझ नहीं पाते और न ही इनकी अच्छाइयों को देख पाते हैं। भाग्यावी नाम वाली लड़कियां धर्म को काफी मानती हैं, लेकिन अंधविश्वासी बिल्कुल नहीं होतीं। जिन लड़कियों का नाम भाग्यावी है, उनकी ज़िंदगी में किसी चीज का अभाव नहीं होता। भाग्यावी नाम की लड़कियां अपने माता-पिता से बहुत प्यार करती हैं, लेकिन इन्हें हर रिश्ते में थोड़ा स्पेस चाहिए होता है।
| ।भाग्यावी धनु राशि का स्वामी ग्रह बृहस्पति को माना जाता है। धनु राशि के आराध्य देव दत्तोत्रय होते हैं। भाग्यावी नाम की लड़कियाँ नितम्बों और धमिनयों की समस्याओं से ग्रस्त हो सकते हैं। इन भाग्यावी नाम की लड़कियों का मांसल शरीर होता है। इस राशि के भाग्यावी नाम की लड़कियाँ यकृत और रीढ़ की हड्डी और कमज़ोर दृष्टि से परेशान रह सकते हैं। धनु राशि के भाग्यावी नाम की लड़कियाँ घूमने और नई चीजें सीखने में माहिर होते हैं। ये आध्यात्मिक प्रवृत्ति के होते हैं इन्हें मंदिरों आदि की यात्रा करना और साधुओं के साथ रहना अच्छा लगता है। भाग्यावी नाम बहुत सुंदर और आकर्षक माना जाता है। इतना ही नहीं इसका मतलब भी बहुत अच्छा होता है। आपको बता दें कि भाग्यावी नाम का अर्थ मेरे शरीर में होता है। भाग्यावी नाम का खास महत्व है क्योंकि इसका मतलब मेरे शरीर में है जिसे काफी अच्छा माना जाता है। आपको बता दें कि अपने शिशु को भाग्यावी नाम देकर आप उसके जीवन में सकारात्मक संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं। भाग्यावी नाम रखने से आपका बच्चा भी वो गुण ले लेता है जो इसके अर्थ में समाहित होता है। माना जाता है कि भाग्यावी नाम वाले व्यक्ति के स्वभाव में मेरे शरीर में होने की झलक देख सकते हैं। आगे भाग्यावी नाम की राशि व लकी नंबर अथवा भाग्यावी नाम के मेरे शरीर में अर्थ के बारे में विस्तार से बताया गया है। भाग्यावी नाम का स्वामी ग्रह बृहस्पति है एवं इनका शुभ अंक तीन होता है। भाग्यावी नाम वाली लड़कियां क्रिएटिव होती हैं और अपनी बातों से दूसरों को प्रभावित करने में निपुण होती हैं। भाग्यावी नाम की लड़कियों को अनुशासन पसन्द हैं। इन्हें अपने घर-परिवार के लोगों से बहुत प्यार मिलता है। इस अंक से संबंधित महिलाएं भाग्यशाली होती हैं और मुश्किल समय में कोई न कोई भाग्यावी नाम की लड़कियों की परेशानी को हल कर ही देता है। भाग्यावी नाम की लड़कियां मजबूत शरीर वाली और सेहतमंद होती हैं। तीन अंक वाली भाग्यावी नाम की महिलाएं पैसे की कीमत को जल्दी ही समझ जाती हैं, जिस कारण इन्हें कभी धन की कमी महसूस नहीं होती है। भाग्यावी नाम की लड़कियों की राशि धनु होती है। इस नाम की लड़कियां अन्य लोगों के साथ अच्छे से पेश आती हैं और इन्हें अपने आसपास रूढ़िवादी लोग व विचार अच्छे नहीं लगते। धनु राशि की महिलाएं जिनका नाम भाग्यावी है, वे घमंडी किस्म के होती हैं। यही वजह है कि दूसरे इन्हें आसानी से समझ नहीं पाते और न ही इनकी अच्छाइयों को देख पाते हैं। भाग्यावी नाम वाली लड़कियां धर्म को काफी मानती हैं, लेकिन अंधविश्वासी बिल्कुल नहीं होतीं। जिन लड़कियों का नाम भाग्यावी है, उनकी ज़िंदगी में किसी चीज का अभाव नहीं होता। भाग्यावी नाम की लड़कियां अपने माता-पिता से बहुत प्यार करती हैं, लेकिन इन्हें हर रिश्ते में थोड़ा स्पेस चाहिए होता है। |
पटना (ब्यूरो)। अब बाइपास का प्रमुख इलाका बारिश के दौरान डूबने से बच जाएगा। वार्ड 11 से वार्ड 19 तक का एरिया न्यू बाइपास एरिया के हिस्से में आता है और यहां पर बेऊर से चाणक्य कॉलेज तक संप हाउस और नाला का काम जून से पहले पूरा हो जाएगा। 15 जून तक इसका उद्घाटन भी कर दिया जाएगा. गुरूवार को पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने चल रहे काम की समीक्षा की। पथ निर्माण मंत्री ने सीआईएमपी पटना के समांतर इसके डेवलपमेंट वर्क को बुडको और नगर निगम के अधिकारियों के बीच जाकर देखा। इस मौके पर बुडको के एमडी धर्मेंद्र कुमार समेत अन्य उपस्थित रहे। उन्होंने कार्यों की प्रगति के संबंध में पथ निर्माण मंत्री से विस्तार से चर्चा की।
मौके पर मौजूद पदाधिकारियों और मीडिया से बातचीत करते हुए पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने बताया कि इस नाले और संपहाऊस के बन जाने के बाद वार्ड नं. - 11 से 19 एवं 29 के निवासियों को इसका लाभ मिलेगा, इससे जयप्रकाश नगर, अनीशाबाद, गर्दनीबाद, करबिगहिया और सिपारा के जनता को बरसात में जल-जमाव से मुक्ति मिल जायेगी। इसी क्रम में, नितिन नवीन ने इस क्रम में 68 करोड़ रूपये की लागत से बन रहे मंदिरी नाले के ऊपर बन रहे पथ का भी निरीक्षण किया।
जानकारी हो कि पटना स्मार्ट सिटी मिशन के अंर्तगत आयकर गोलंबर से अशोकराज पथ पर काली मंदिर तक यह पथ जुडेगा। लगभग 1289 मी। नाले को ढक कर दो लेन की 5. 5 मीटर चौड़ाई वाली सड़क के निर्माण से आयकर गोलंबर से सीधे अशोकराज पथ पहुंचा जा सकेगा। इसके बन जाने से डाकबंगला, फ्रेजर रोड, गोलघर, गांधी मैदान मैदान के सड़कों पर यातायात का दबाव कम हो जाएगा। नितिन नवीन ने कहा कि सड़क के दोनों ओर फुटपाथ, वेडिंग जोन, लैंडस्केपिंग और ग्रीन जोन का विकास किया जायेगा। पूरे सड्क पर पर्याप्त लाईटिंग की भी व्य्वस्था की जाएगी। स्मार्टसिटी परियोजना के तहत बननेवाले नौ वि़द्युत शवदाह गृह के निर्माण कार्य की अपडेट कंडीशन की जानकारी उपस्थित अधिकारियों से ली। उन्होंने बांसघाट जाकर निर्माण की प्रगति की जानकारी ली। विजिट में पटना नगर निगम के कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर और संबंधित एजेंसियों के अधिकारी मौजूद थे।
वार्ड 11 के अंतर्गत बेऊर के इलाकों में जल जमाव की भीषण समस्या रही है। बीते वर्ष भी बारिश के समाप्त होने के बाद भी इसके कॉलोनियों में जलजमाव से लोग परेशान रहे। साथ ही बुडको के नए एसटीपी बनने के काम में देरी की वजह से भी यहां पर खराब सड़कों और निचले इलाकों में जलभराव की समस्या से लोगों प्रभावित होते रहे हैं। स्थानीय निवासी मंटू पासवान ने बताया कि बेऊर की मेन रोड में बेऊर जेल और इसके आगे भी सड़क और इसके आस-पास के इलाकों में जलजमाव और खराब सड़कों से वाहनों के फंसने की समस्या बनी रहती है।
| पटना । अब बाइपास का प्रमुख इलाका बारिश के दौरान डूबने से बच जाएगा। वार्ड ग्यारह से वार्ड उन्नीस तक का एरिया न्यू बाइपास एरिया के हिस्से में आता है और यहां पर बेऊर से चाणक्य कॉलेज तक संप हाउस और नाला का काम जून से पहले पूरा हो जाएगा। पंद्रह जून तक इसका उद्घाटन भी कर दिया जाएगा. गुरूवार को पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने चल रहे काम की समीक्षा की। पथ निर्माण मंत्री ने सीआईएमपी पटना के समांतर इसके डेवलपमेंट वर्क को बुडको और नगर निगम के अधिकारियों के बीच जाकर देखा। इस मौके पर बुडको के एमडी धर्मेंद्र कुमार समेत अन्य उपस्थित रहे। उन्होंने कार्यों की प्रगति के संबंध में पथ निर्माण मंत्री से विस्तार से चर्चा की। मौके पर मौजूद पदाधिकारियों और मीडिया से बातचीत करते हुए पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने बताया कि इस नाले और संपहाऊस के बन जाने के बाद वार्ड नं. - ग्यारह से उन्नीस एवं उनतीस के निवासियों को इसका लाभ मिलेगा, इससे जयप्रकाश नगर, अनीशाबाद, गर्दनीबाद, करबिगहिया और सिपारा के जनता को बरसात में जल-जमाव से मुक्ति मिल जायेगी। इसी क्रम में, नितिन नवीन ने इस क्रम में अड़सठ करोड़ रूपये की लागत से बन रहे मंदिरी नाले के ऊपर बन रहे पथ का भी निरीक्षण किया। जानकारी हो कि पटना स्मार्ट सिटी मिशन के अंर्तगत आयकर गोलंबर से अशोकराज पथ पर काली मंदिर तक यह पथ जुडेगा। लगभग एक हज़ार दो सौ नवासी मी। नाले को ढक कर दो लेन की पाँच. पाँच मीटर चौड़ाई वाली सड़क के निर्माण से आयकर गोलंबर से सीधे अशोकराज पथ पहुंचा जा सकेगा। इसके बन जाने से डाकबंगला, फ्रेजर रोड, गोलघर, गांधी मैदान मैदान के सड़कों पर यातायात का दबाव कम हो जाएगा। नितिन नवीन ने कहा कि सड़क के दोनों ओर फुटपाथ, वेडिंग जोन, लैंडस्केपिंग और ग्रीन जोन का विकास किया जायेगा। पूरे सड्क पर पर्याप्त लाईटिंग की भी व्य्वस्था की जाएगी। स्मार्टसिटी परियोजना के तहत बननेवाले नौ वि़द्युत शवदाह गृह के निर्माण कार्य की अपडेट कंडीशन की जानकारी उपस्थित अधिकारियों से ली। उन्होंने बांसघाट जाकर निर्माण की प्रगति की जानकारी ली। विजिट में पटना नगर निगम के कमिश्नर, डिप्टी कमिश्नर और संबंधित एजेंसियों के अधिकारी मौजूद थे। वार्ड ग्यारह के अंतर्गत बेऊर के इलाकों में जल जमाव की भीषण समस्या रही है। बीते वर्ष भी बारिश के समाप्त होने के बाद भी इसके कॉलोनियों में जलजमाव से लोग परेशान रहे। साथ ही बुडको के नए एसटीपी बनने के काम में देरी की वजह से भी यहां पर खराब सड़कों और निचले इलाकों में जलभराव की समस्या से लोगों प्रभावित होते रहे हैं। स्थानीय निवासी मंटू पासवान ने बताया कि बेऊर की मेन रोड में बेऊर जेल और इसके आगे भी सड़क और इसके आस-पास के इलाकों में जलजमाव और खराब सड़कों से वाहनों के फंसने की समस्या बनी रहती है। |
तिलक लगाने से हमारी बहुत-सी समस्याओं का अंत हो सकता है साथ ही ग्रहों के दोष भी दूर हो सकते हैं। वार के अनुसार अगर रोज अलग-अलग तिलक लगाया जाए तो बहुत से फायदे हो सकते हैं।
मनुस्मृति ग्रंथ में स्त्रियों से संबंधित अनेक नियम बताए गए हैं जिनके अनुसार स्त्रियों को ये 6 काम नहीं करना चाहिए।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, नए घर का भूमि पूजन करते समय नींव में कुछ चीजें डाली जाती हैं। इनमें चांदी के नाग-नागिन को जोड़ा प्रमुख है। मान्यता है कि ऐसा करने से भूमि का दोष खत्म हो जाता है।
उज्जैन. अशुभ सपने, अपशकुन आदि के बुरे परिणामों के बारे में सोचकर ही दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं। हमारे प्राचीन शास्त्रों में विद्वानों ने इनसे बचने के लिए अनेक सरल उपाय बताए हैं, जिनमें दान, भजन-पूजन, जप-तप, यंत्र-मंत्र-तंत्र आदि प्रमुख हैं। इन सभी में दान को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। यदि आपने भी कोई अशुभ सपना देखा या फिर आपके साथ कुछ अपशकुन हुआ है और आप उसके बुरे परिणाम से बचना चाहते हैं तो तिथि अनुसार, दान करने से अपशकुन का प्रभाव टल सकता है।
हमें सामाजिक दायरों में रहते हुए किसी के साथ हंसी-मजाक करना चाहिए। मनु स्मृति में बताया गया है कि हमें किन लोगों का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए।
हिंदू धर्म में अनेक परंपराएं प्रचलित हैं, जैसे- तुलसी की पूजा करना, सूर्य को अर्घ्य देना आदि। इन सभी परंपराओं के पीछे न सिर्फ धार्मिक बल्कि वैज्ञानिक तथ्य भी छिपे हैं।
इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्र 3 से 10 जुलाई तक मनाई जाएगी। अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन होने से इस बार गुप्त नवरात्र 8 दिनों की होगी।
गुप्त नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, देवी का यह नाम हिमालय के यहां जन्म होने से पड़ा। मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक भीमाना जाता है। स्त्रियों के लिए उनकी पूजा करना ही श्रेष्ठ और मंगलकारी है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार- घर में सजावट के लिए रखे गए पौधे भी हमारे जीवन पर अच्छा व बुरा प्रभाव डालते हैं। जाने-अनजाने में हम कई बार ऐसे पौधे घर में रख लेते हैं जिनके कारण वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है।
हर साल आषाढ़ शुक्ल द्वितिया तिथि को उड़ीसा स्थित पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा निकाली जाती है। इस बार यह रथयात्रा 4 जुलाई, गुरुवार से शुरू होगी।
| तिलक लगाने से हमारी बहुत-सी समस्याओं का अंत हो सकता है साथ ही ग्रहों के दोष भी दूर हो सकते हैं। वार के अनुसार अगर रोज अलग-अलग तिलक लगाया जाए तो बहुत से फायदे हो सकते हैं। मनुस्मृति ग्रंथ में स्त्रियों से संबंधित अनेक नियम बताए गए हैं जिनके अनुसार स्त्रियों को ये छः काम नहीं करना चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्ट के अनुसार, नए घर का भूमि पूजन करते समय नींव में कुछ चीजें डाली जाती हैं। इनमें चांदी के नाग-नागिन को जोड़ा प्रमुख है। मान्यता है कि ऐसा करने से भूमि का दोष खत्म हो जाता है। उज्जैन. अशुभ सपने, अपशकुन आदि के बुरे परिणामों के बारे में सोचकर ही दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं। हमारे प्राचीन शास्त्रों में विद्वानों ने इनसे बचने के लिए अनेक सरल उपाय बताए हैं, जिनमें दान, भजन-पूजन, जप-तप, यंत्र-मंत्र-तंत्र आदि प्रमुख हैं। इन सभी में दान को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। यदि आपने भी कोई अशुभ सपना देखा या फिर आपके साथ कुछ अपशकुन हुआ है और आप उसके बुरे परिणाम से बचना चाहते हैं तो तिथि अनुसार, दान करने से अपशकुन का प्रभाव टल सकता है। हमें सामाजिक दायरों में रहते हुए किसी के साथ हंसी-मजाक करना चाहिए। मनु स्मृति में बताया गया है कि हमें किन लोगों का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए। हिंदू धर्म में अनेक परंपराएं प्रचलित हैं, जैसे- तुलसी की पूजा करना, सूर्य को अर्घ्य देना आदि। इन सभी परंपराओं के पीछे न सिर्फ धार्मिक बल्कि वैज्ञानिक तथ्य भी छिपे हैं। इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्र तीन से दस जुलाई तक मनाई जाएगी। अष्टमी और नवमी तिथि एक ही दिन होने से इस बार गुप्त नवरात्र आठ दिनों की होगी। गुप्त नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, देवी का यह नाम हिमालय के यहां जन्म होने से पड़ा। मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक भीमाना जाता है। स्त्रियों के लिए उनकी पूजा करना ही श्रेष्ठ और मंगलकारी है। वास्तु शास्त्र के अनुसार- घर में सजावट के लिए रखे गए पौधे भी हमारे जीवन पर अच्छा व बुरा प्रभाव डालते हैं। जाने-अनजाने में हम कई बार ऐसे पौधे घर में रख लेते हैं जिनके कारण वास्तु दोष उत्पन्न हो जाता है। हर साल आषाढ़ शुक्ल द्वितिया तिथि को उड़ीसा स्थित पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा निकाली जाती है। इस बार यह रथयात्रा चार जुलाई, गुरुवार से शुरू होगी। |
गुना। पश्चिम मध्य रेलवे जोन के महाप्रबंधक रमेश चंद्र ने आज गुना स्टेशन का निरीक्षण किया। उन्होंने सबसे पहले स्टेशन की ऑटो लेन को देखा लेकिन यहां अव्यवस्थित खड़े ऑटो को देखकर वे नाराज हुए। जीएम ने कहा कि ऑटो के स्टेशन में आने तथा जाने के अलग-अलग रास्ते होना चाहिए। इसके बाद जीएम ने आरओबी का निरीक्षण किया और यार्ड की व्यवस्थाओं को देखा। रुठियाई से मऊगढ़ के बीच चल रहे रेलवे लाइन के दोहरीकरण के काम का बारीकी से निरीक्षण किया। इस मौके पर भोपाल रेल मंडल प्रबंधक आलोक कुमार सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी थे।
| गुना। पश्चिम मध्य रेलवे जोन के महाप्रबंधक रमेश चंद्र ने आज गुना स्टेशन का निरीक्षण किया। उन्होंने सबसे पहले स्टेशन की ऑटो लेन को देखा लेकिन यहां अव्यवस्थित खड़े ऑटो को देखकर वे नाराज हुए। जीएम ने कहा कि ऑटो के स्टेशन में आने तथा जाने के अलग-अलग रास्ते होना चाहिए। इसके बाद जीएम ने आरओबी का निरीक्षण किया और यार्ड की व्यवस्थाओं को देखा। रुठियाई से मऊगढ़ के बीच चल रहे रेलवे लाइन के दोहरीकरण के काम का बारीकी से निरीक्षण किया। इस मौके पर भोपाल रेल मंडल प्रबंधक आलोक कुमार सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी थे। |
अध्याय २८
दूसरे दिन जब कृष्ण संध्या- बंदन ग्रादि नित्य कर्मों से निवृत्त हुए तो दुर्योधन और शकुनि उन्हें बुलाने आ गये । महाराज ने यथाविधि ब्राह्मणों को दान दिया और अपने सारथि को रथ तैयार करने का आदेश दिया । रथ पर आरूढ़ होकर महाराज ने सभा भवन की ओर प्रस्थान किया । सात्यकि, कृतवर्मा आदि वृष्णि-वंशी महारथी भी उनके साथ थे । सभा में पहुँचने पर महाराज के स्वागत के लिए भीष्म, द्रोण आदि सभी कौरव-प्रमुख महापुरुष उठ खड़े हुए और उन्हें एक श्रेष्ठ आसन प्रदान किया। कुशल प्रश्न पूछने के अनन्तर सब यथास्थान बैठे। इसी समय वे ऋषि भी आ गये जो महाराज से रास्ते में मिले थे और जिन्होंने उनकी संधि-विषयक वक्तृता सुनने की इच्छा प्रकट की थी। सबके स्थान ग्रहण करने के अन्तर सभा में सर्वत्र शान्ति छा गई ।'
महाराज ने इस सन्नाटे को भंग करते हुए और धृतराष्ट्र को सम्बोधन कर एक लम्बी वक्तृता दी जिसके प्रारम्भ में उन्होंने अपने आगमन का उद्देश्य बताते हुए कहा कि आपका कुरु वंश क्षत्रियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, परन्तु इसमें दुर्योधन- जैसे कुपुत्रों का जन्म हो जाने के कारण भाई-भाई के बीच आज विरोध का प्रसंग उत्पन्न हुआ है । यदि चाहें तो इस युद्धाग्नि को शान्त कर सकते हैं । उन्होंने युद्ध की विभीषिका का यथार्थ, किन्तु भयोत्पादक चित्र उपस्थित करते हुए यह भी कहा कि यदि कौरव और पाण्डव मिलकर रहेंगे तो संसार में ऐसा कौन-सा कार्य है जिसे वे सिद्ध नहीं कर सकते ! अन्त में उन्होंने कहा कि पाण्डव लोग आपकी सेवा करने के लिए तैयार हैं, परन्तु प्रतिकूल परिस्थिति उत्पन्न होने पर युद्ध के लिए भी सन्नद्ध हैं । १. उद्योगपर्व, ६४५४
इसमें जो आपको उत्तम तथा हितकारी प्रतीत हो, उसी का अनुष्ठान कीजिये ।
कृष्ण के बोलने के पश्चात् ऋषियों ने भी धृतराष्ट्र को अनेक प्रकार से समझाया, परतु उसने यही उत्तर दिया कि संधि करना मेरे बस की बात नहीं है । इसके लिए आपको दुर्योधन को समझाना चाहिए । इसपर कृष्ण, भीष्म, द्रोण और विदुर आदि सभी ने क्रम से दुर्योधन को समझाया, पर वह अपनी जिद पर अड़ा रहा । धृतराष्ट्र ने भी अपने पुत्र से स्पष्ट कह दिया कि कृष्ण ने जो धर्म और अर्थ से ने युक्त वचन कहे हैं, यदि तुम उनपर ध्यान नहीं दोगे तो तुम्हारी पराजय निश्चित है ।
अब दुर्योधन के वोलने की बारी आई। उसने कहा "आप सब लोग मुझे ही दोषी बता रहे हैं, परन्तु मेरी समझ में यह नहीं आया कि मैं किस प्रकार दोषी हूँ ? यदि पाण्डवों ने जुआ खेला और उसमें वे अपने राज्य को हार गये तो इसमें मेरा क्या दोष है ? यदि उन्हें प्रक्षकीड़ा ( पासे का खेल ) में पराजित होने पर वनवास मिला तो इसमें मेरा क्या अपराध है ? इतने पर भी यदि वे लड़ने पर ही उतारू हैं तो हम भी उनसे डरनेवाले नहीं हैं। पहले मेरे बाल्यकाल में मेरे पिता ने चाहे उन्हें आधा राज्य दे दिया हो, किन्तु अब इस समय वे मेरे जीते-जी राज्य के पुनः अधिकारी कदापि नहीं हो सकते । अधिक क्या कहूँ, तीक्ष्ण सुई की नोक से जितनी भूमि बींधी जा सकती है, मेरे राज्य से उतनी भूमि भी पाण्डवों को नहीं दी जा सकती ।"
दुर्योधन की इस बात का श्री कृष्ण ने मुँहतोड़ उत्तर दिया। उन्होंने विस्तार पूर्वक बताया कि पाण्डवों को मारने और उनका राज्य हथियाने के लिए कौरवों ने क्या-क्या चालें चली थीं । दुर्योधन की सारी धूर्तता और कुकर्मों का पर्दा फ़ाश हो गया । वह सभा छोड़कर चला गया । अब कृष्ण ने धृतराष्ट्र से कहा कि देश में शान्ति स्थापित
१. स्थिताः शुश्रूषितुं पार्थाः स्थिता योद्धुमरिंदमाः । यत् ते पथ्यतमं राजंस्तस्मिस्तिष्ठ परंतप ।। ( ९५ ६३ ) २. शमं चेद् याचमानं त्वं प्रत्याख्यास्यसि केशवम् । त्वदर्थमभिजल्पन्तं न तवास्त्यपराभवः ।। (१२५।२७)
यावद्धि तीक्ष्णया सूच्या विध्येदग्रेण केशव । तावदप्यपरित्याज्यं भूमेः पाण्डवान् प्रति ।। ( १२७।२५) | अध्याय अट्ठाईस दूसरे दिन जब कृष्ण संध्या- बंदन ग्रादि नित्य कर्मों से निवृत्त हुए तो दुर्योधन और शकुनि उन्हें बुलाने आ गये । महाराज ने यथाविधि ब्राह्मणों को दान दिया और अपने सारथि को रथ तैयार करने का आदेश दिया । रथ पर आरूढ़ होकर महाराज ने सभा भवन की ओर प्रस्थान किया । सात्यकि, कृतवर्मा आदि वृष्णि-वंशी महारथी भी उनके साथ थे । सभा में पहुँचने पर महाराज के स्वागत के लिए भीष्म, द्रोण आदि सभी कौरव-प्रमुख महापुरुष उठ खड़े हुए और उन्हें एक श्रेष्ठ आसन प्रदान किया। कुशल प्रश्न पूछने के अनन्तर सब यथास्थान बैठे। इसी समय वे ऋषि भी आ गये जो महाराज से रास्ते में मिले थे और जिन्होंने उनकी संधि-विषयक वक्तृता सुनने की इच्छा प्रकट की थी। सबके स्थान ग्रहण करने के अन्तर सभा में सर्वत्र शान्ति छा गई ।' महाराज ने इस सन्नाटे को भंग करते हुए और धृतराष्ट्र को सम्बोधन कर एक लम्बी वक्तृता दी जिसके प्रारम्भ में उन्होंने अपने आगमन का उद्देश्य बताते हुए कहा कि आपका कुरु वंश क्षत्रियों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, परन्तु इसमें दुर्योधन- जैसे कुपुत्रों का जन्म हो जाने के कारण भाई-भाई के बीच आज विरोध का प्रसंग उत्पन्न हुआ है । यदि चाहें तो इस युद्धाग्नि को शान्त कर सकते हैं । उन्होंने युद्ध की विभीषिका का यथार्थ, किन्तु भयोत्पादक चित्र उपस्थित करते हुए यह भी कहा कि यदि कौरव और पाण्डव मिलकर रहेंगे तो संसार में ऐसा कौन-सा कार्य है जिसे वे सिद्ध नहीं कर सकते ! अन्त में उन्होंने कहा कि पाण्डव लोग आपकी सेवा करने के लिए तैयार हैं, परन्तु प्रतिकूल परिस्थिति उत्पन्न होने पर युद्ध के लिए भी सन्नद्ध हैं । एक. उद्योगपर्व, छः हज़ार चार सौ चौवन इसमें जो आपको उत्तम तथा हितकारी प्रतीत हो, उसी का अनुष्ठान कीजिये । कृष्ण के बोलने के पश्चात् ऋषियों ने भी धृतराष्ट्र को अनेक प्रकार से समझाया, परतु उसने यही उत्तर दिया कि संधि करना मेरे बस की बात नहीं है । इसके लिए आपको दुर्योधन को समझाना चाहिए । इसपर कृष्ण, भीष्म, द्रोण और विदुर आदि सभी ने क्रम से दुर्योधन को समझाया, पर वह अपनी जिद पर अड़ा रहा । धृतराष्ट्र ने भी अपने पुत्र से स्पष्ट कह दिया कि कृष्ण ने जो धर्म और अर्थ से ने युक्त वचन कहे हैं, यदि तुम उनपर ध्यान नहीं दोगे तो तुम्हारी पराजय निश्चित है । अब दुर्योधन के वोलने की बारी आई। उसने कहा "आप सब लोग मुझे ही दोषी बता रहे हैं, परन्तु मेरी समझ में यह नहीं आया कि मैं किस प्रकार दोषी हूँ ? यदि पाण्डवों ने जुआ खेला और उसमें वे अपने राज्य को हार गये तो इसमें मेरा क्या दोष है ? यदि उन्हें प्रक्षकीड़ा में पराजित होने पर वनवास मिला तो इसमें मेरा क्या अपराध है ? इतने पर भी यदि वे लड़ने पर ही उतारू हैं तो हम भी उनसे डरनेवाले नहीं हैं। पहले मेरे बाल्यकाल में मेरे पिता ने चाहे उन्हें आधा राज्य दे दिया हो, किन्तु अब इस समय वे मेरे जीते-जी राज्य के पुनः अधिकारी कदापि नहीं हो सकते । अधिक क्या कहूँ, तीक्ष्ण सुई की नोक से जितनी भूमि बींधी जा सकती है, मेरे राज्य से उतनी भूमि भी पाण्डवों को नहीं दी जा सकती ।" दुर्योधन की इस बात का श्री कृष्ण ने मुँहतोड़ उत्तर दिया। उन्होंने विस्तार पूर्वक बताया कि पाण्डवों को मारने और उनका राज्य हथियाने के लिए कौरवों ने क्या-क्या चालें चली थीं । दुर्योधन की सारी धूर्तता और कुकर्मों का पर्दा फ़ाश हो गया । वह सभा छोड़कर चला गया । अब कृष्ण ने धृतराष्ट्र से कहा कि देश में शान्ति स्थापित एक. स्थिताः शुश्रूषितुं पार्थाः स्थिता योद्धुमरिंदमाः । यत् ते पथ्यतमं राजंस्तस्मिस्तिष्ठ परंतप ।। दो. शमं चेद् याचमानं त्वं प्रत्याख्यास्यसि केशवम् । त्वदर्थमभिजल्पन्तं न तवास्त्यपराभवः ।। यावद्धि तीक्ष्णया सूच्या विध्येदग्रेण केशव । तावदप्यपरित्याज्यं भूमेः पाण्डवान् प्रति ।। |
मंडी - जोनल अस्पताल मंडी में दो चिकित्सा अधीक्षक सेवाएं दे रहे हैं। जी हां, जहां प्रदेश में डाक्टरों की भारी कमी है, वहीं जोनल अस्पताल मंडी में एक ही अस्पताल में मौजूदा समय में दो वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक सेवारत हैं। दरअसल सरकार ने हाल ही में जोनल अस्पताल मंडी के चिकित्सा अधीक्षक को कुल्लू रीजनल अस्पताल ट्रांसफर कर दिया था। इसके साथ ही कुल्लू के चिकित्सा अधीक्षक को स्थानांतरित कर जोनल अस्पताल मंडी भेजा गया। ट्रांसफर ऑर्डर के अगले ही दिन एमएस कुल्लू ने जोनल अस्पताल मंडी में ज्वाइन कर लिया, जबकि कुछ दिन बाद ही जोनल अस्पताल मंडी के एमएस डा. टीसी महंत ने भी ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटा कर स्टे ऑर्डर ले लिया। ऐसे में अब जोनल अस्पताल में एक नहीं बल्कि दो-दो चिकित्सा अधीक्षक तैनात हो गए हैं। दरअसल यह स्थिति इसलिए उत्पन्न हुए क्योंकि सरकार ने मंडी अस्पताल के एमएस डा. टीसी महंत को रिटायरमेंट के महज चार माह पहले ही ट्रांसफर कर दिया। जानकारी के अनुसार डा. टीसी महंत जुलाई में रिटायर होने वाले हैं, ऐसे में रिटायरमेंट से चार माह पहले ट्रांसफर आर्डर कर सरकार भी किरकिरी करवा चुकी है। अब हालात ये हो गए हैं कि कर्मचारी भी गफलत में हैं। कर्मचारी यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि फाइल साइन करवाने के लिए किसके पास ले जाएं। इसके साथ नए एमएस को भी बैठने के लिए एक अलग कमरा दिया गया है। यही नहीं, एमएस मंडी डा. टीसी महंत के कुल्लू ज्वाइन नहीं करने से वहां भी अतिरिक्त कार्यभार सौंपकर काम चलाया जा रहा है। उधर, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. टीसी महंत ने बताया कि ट्रिब्यूनल से ट्रांसफर आर्डर पर स्टे मिल गया है।
हाल ही में सरकार ने दो बड़े अधिकारियों एमएस मंडी अस्पताल और सीएमओ मंडी को मार्च का आधा माह बीतने पर ट्रांसफर किया था। ऐसे में स्वास्थ्य महकमों में चर्चा जोरों पर है कि एक ओर वित्तीय वर्ष खत्म होने वाला है। ऐसे में ऑडिट से लेकर तमाम कार्य निपटाने में भी दिक्कतें होती हैं। इसलिए वित्तीय वर्ष खत्म होने के बाद ही बड़े अधिकारियों की ट्रांसफर होनी चाहिए।
| मंडी - जोनल अस्पताल मंडी में दो चिकित्सा अधीक्षक सेवाएं दे रहे हैं। जी हां, जहां प्रदेश में डाक्टरों की भारी कमी है, वहीं जोनल अस्पताल मंडी में एक ही अस्पताल में मौजूदा समय में दो वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक सेवारत हैं। दरअसल सरकार ने हाल ही में जोनल अस्पताल मंडी के चिकित्सा अधीक्षक को कुल्लू रीजनल अस्पताल ट्रांसफर कर दिया था। इसके साथ ही कुल्लू के चिकित्सा अधीक्षक को स्थानांतरित कर जोनल अस्पताल मंडी भेजा गया। ट्रांसफर ऑर्डर के अगले ही दिन एमएस कुल्लू ने जोनल अस्पताल मंडी में ज्वाइन कर लिया, जबकि कुछ दिन बाद ही जोनल अस्पताल मंडी के एमएस डा. टीसी महंत ने भी ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटा कर स्टे ऑर्डर ले लिया। ऐसे में अब जोनल अस्पताल में एक नहीं बल्कि दो-दो चिकित्सा अधीक्षक तैनात हो गए हैं। दरअसल यह स्थिति इसलिए उत्पन्न हुए क्योंकि सरकार ने मंडी अस्पताल के एमएस डा. टीसी महंत को रिटायरमेंट के महज चार माह पहले ही ट्रांसफर कर दिया। जानकारी के अनुसार डा. टीसी महंत जुलाई में रिटायर होने वाले हैं, ऐसे में रिटायरमेंट से चार माह पहले ट्रांसफर आर्डर कर सरकार भी किरकिरी करवा चुकी है। अब हालात ये हो गए हैं कि कर्मचारी भी गफलत में हैं। कर्मचारी यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि फाइल साइन करवाने के लिए किसके पास ले जाएं। इसके साथ नए एमएस को भी बैठने के लिए एक अलग कमरा दिया गया है। यही नहीं, एमएस मंडी डा. टीसी महंत के कुल्लू ज्वाइन नहीं करने से वहां भी अतिरिक्त कार्यभार सौंपकर काम चलाया जा रहा है। उधर, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. टीसी महंत ने बताया कि ट्रिब्यूनल से ट्रांसफर आर्डर पर स्टे मिल गया है। हाल ही में सरकार ने दो बड़े अधिकारियों एमएस मंडी अस्पताल और सीएमओ मंडी को मार्च का आधा माह बीतने पर ट्रांसफर किया था। ऐसे में स्वास्थ्य महकमों में चर्चा जोरों पर है कि एक ओर वित्तीय वर्ष खत्म होने वाला है। ऐसे में ऑडिट से लेकर तमाम कार्य निपटाने में भी दिक्कतें होती हैं। इसलिए वित्तीय वर्ष खत्म होने के बाद ही बड़े अधिकारियों की ट्रांसफर होनी चाहिए। |
न्यूज डेस्कः बिहार में कोरोना का तांडव जारी हैं। प्रतिदिन हजारों मरीज मिलने से राज्य में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही हैं तथा कुछ जिलों में लोगों को रहना भी मुश्किल होता जा रहा हैं। लोगों को कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सावधानी बरतने की जरुरत हैं।
बिहार स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट के मुताबिक बिहार के 11 जिलों में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा हैं। साथ ही साथ इन जिलों में प्रतिदिन कोरोना वायरस के मरीज मिल रहे हैं। जिससे कोरोना की लंबी चेन बनती जा रही हैं।
बिहार में कोरोना का तांडव, 11 जिलों में रहना मुश्किल।
| न्यूज डेस्कः बिहार में कोरोना का तांडव जारी हैं। प्रतिदिन हजारों मरीज मिलने से राज्य में मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही हैं तथा कुछ जिलों में लोगों को रहना भी मुश्किल होता जा रहा हैं। लोगों को कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सावधानी बरतने की जरुरत हैं। बिहार स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट के मुताबिक बिहार के ग्यारह जिलों में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा हैं। साथ ही साथ इन जिलों में प्रतिदिन कोरोना वायरस के मरीज मिल रहे हैं। जिससे कोरोना की लंबी चेन बनती जा रही हैं। बिहार में कोरोना का तांडव, ग्यारह जिलों में रहना मुश्किल। |
इथियोपिया का डेनेकिल डिप्रेशन दुनिया का सबसे गर्म इलाका है। इस पूरे क्षेत्र में कई जिंदा ज्वालामुखी हैं, जिनसे हर वक्त लावा और धुआं निकलता रहता है। हां पूरे साल मौसम बेहद-बेहद गर्म रहता है।
वॉशिंगटनः अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित डेथ वैली (Death Valley) को हाई टेंपरेचर के लिए जाना जाता है, जहां लाल रंग की चट्टानों और पहाड़ों से बनी डेथ वैली में सूरज की तपिश बेहद ज्यादा होती है। लेकिन क्या आप इथियोपिया (Ethiopia) के डेनेकिल डिप्रेशन (Danakil Depression) के बारे में जानते हैं, जहां पूरे साल तापमान में कोई बदलाव नहीं होता है। यहां पूरे साल मौसम बेहद-बेहद गर्म रहता है। दिसंबर-जनवरी में जब दुनिया के ज्यादातर हिस्से ठंडे हो जाते हैं, तब भी यहां टेंपरेचर औसतन 35 डिग्री सेल्सियस बना रहता है।
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर यहां ऐसा क्या है, जिस कारण पूरे साल इतनी गर्मी बनी रहती है, तो चलिए आपको इसी के बारे में बताते हैं। वैसे, तो डेनेकिल डिप्रेशन के गर्म होने की वजह कई हैं, लेकिन सबसे अहम धरती के नीचे की हलचल है। यहां धरती के नीचे तीन टेक्टॉनिक प्लेटें हैं, जो काफी तेजी से एक-दूसरे से दूर जा रही हैं। इस अंदरुनी मूवमेंट का असर ऊपर भी दिखता है।
इसके अलावा इस पूरे क्षेत्र में कई जिंदा ज्वालामुखी हैं, जिनसे हर वक्त लावा और धुआं निकलता रहता है। चाहे कोई भी मौसम हो, यहां हर समय हवा में आग की धधक और जलने की गंध आती है। इस वजह से यहां लोग आने से बचते हैं। जानकारी के मुताबिक यहां अर्टा एले नाम का एक ज्वालामुखी है, जो लगभग सवा 6 सौ मीटर ऊंचा है। इस के शिखर पर दो लावा झीलें बनी हुई हैं।
साल 1906 में यहां पहली लावा झील बनी थी। गौरतलब है कि ये झीलें पानी नहीं बल्कि खौलते हुए लावा से बनी है। हैरान करने वाली बात यह है कि यहां ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा ठंडा नहीं पड़ता। वैज्ञानिक इसकी वजह भी टेक्टॉनिक प्लेट्स को ही मानते हैं। इसके अलावा यहां कई औऱ छोटे-बड़े ज्वालामुखी हैं, जो सक्रिय हैं।
यहां की मिट्टी और चट्टानें बाकी दुनिया से अलग हैं। देखने पर ये कोई दूसरा ग्रह लगता है। हैरान करने वाली बात यह है कि डेनेकिल में गर्मी होने के बावजूद पानी की एक नदी भी है। इसे अवाश नदी कहते हैं। यह नदी भी बाकी नदिंयो से अलग है। नदी लंबी होने के बावजूद कभी समुद्र तक नहीं पहुंच पाती है। इसका पानी कुछ-कुछ महीनों में सूख जाता है और नीचे नमक इकट्ठा हो जाता है।
ज्वालामुखी और गर्म पानी के सोतों की वजह से यह नदी पूरी तरह से एसिडिट हो चुकी है। हालांकि, यही चीज वहां रहने वालों के काम आती है। स्थानीय लोग नदी में जमा होने वाले नमक को इकठ्ठा करके बाजार में बेच देते हैं। इसे यहां 'व्हाइट गोल्ड' कहा जाता है। बता दें कि यहां के लोगों के पास नमक बेचने के अलावा इनकम का कोई दूसरा सोर्स नहीं है।
यहां सालभर में बारिश भी सौ से 2 सौ मिलीमीटर तक ही होती है। यह भारत में होने वाली औसतन वर्षा लगभग डेढ़ सौ सेंटीमीटर है। इतनी भीषण गर्मी के बाद भी यहां अफार जनजाति के लोग रहते हैं। घुमंतु समुदाय के इन लोगों की आबादी वैसे तो लगभग 30 लाख है, लेकिन सालभर डेनेकिल में रहने की बजाए वे आसपास घूमते रहते हैं। खासकर यह गर्मियों के मौसम में पड़ोसी इलाकों में चले जाते हैं।
डेनेकिल में भले ही प्रस्थितियां रहने के लिए मुश्किल हों, लेकिन यहां भी वनस्पतियां और कीटाणु पल रहे हैं। वैज्ञानिक भाषा में इन्हें एक्सट्रीमोफाइल कहा जाता है, यानी वो चीजें, जो बेहद विषम हालातों में भी जिंदा रह सकें। इनकी स्टडी से साइंटिस्ट्स ये भी समझना चाह रहे हैं कि क्या आगे चलकर एक्सट्रीम हालातों में दूसरे ग्रहों पर जीवन संभव हो सकेगा।
यह भी पढ़ें- यूरोप में नहीं इस देश में बसा था दुनिया का पहला शहर, 1985 में हुई थी खोज, जानिए कैसे थे रीति-रिवाज?
| इथियोपिया का डेनेकिल डिप्रेशन दुनिया का सबसे गर्म इलाका है। इस पूरे क्षेत्र में कई जिंदा ज्वालामुखी हैं, जिनसे हर वक्त लावा और धुआं निकलता रहता है। हां पूरे साल मौसम बेहद-बेहद गर्म रहता है। वॉशिंगटनः अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित डेथ वैली को हाई टेंपरेचर के लिए जाना जाता है, जहां लाल रंग की चट्टानों और पहाड़ों से बनी डेथ वैली में सूरज की तपिश बेहद ज्यादा होती है। लेकिन क्या आप इथियोपिया के डेनेकिल डिप्रेशन के बारे में जानते हैं, जहां पूरे साल तापमान में कोई बदलाव नहीं होता है। यहां पूरे साल मौसम बेहद-बेहद गर्म रहता है। दिसंबर-जनवरी में जब दुनिया के ज्यादातर हिस्से ठंडे हो जाते हैं, तब भी यहां टेंपरेचर औसतन पैंतीस डिग्री सेल्सियस बना रहता है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर यहां ऐसा क्या है, जिस कारण पूरे साल इतनी गर्मी बनी रहती है, तो चलिए आपको इसी के बारे में बताते हैं। वैसे, तो डेनेकिल डिप्रेशन के गर्म होने की वजह कई हैं, लेकिन सबसे अहम धरती के नीचे की हलचल है। यहां धरती के नीचे तीन टेक्टॉनिक प्लेटें हैं, जो काफी तेजी से एक-दूसरे से दूर जा रही हैं। इस अंदरुनी मूवमेंट का असर ऊपर भी दिखता है। इसके अलावा इस पूरे क्षेत्र में कई जिंदा ज्वालामुखी हैं, जिनसे हर वक्त लावा और धुआं निकलता रहता है। चाहे कोई भी मौसम हो, यहां हर समय हवा में आग की धधक और जलने की गंध आती है। इस वजह से यहां लोग आने से बचते हैं। जानकारी के मुताबिक यहां अर्टा एले नाम का एक ज्वालामुखी है, जो लगभग सवा छः सौ मीटर ऊंचा है। इस के शिखर पर दो लावा झीलें बनी हुई हैं। साल एक हज़ार नौ सौ छः में यहां पहली लावा झील बनी थी। गौरतलब है कि ये झीलें पानी नहीं बल्कि खौलते हुए लावा से बनी है। हैरान करने वाली बात यह है कि यहां ज्वालामुखी से निकलने वाला लावा ठंडा नहीं पड़ता। वैज्ञानिक इसकी वजह भी टेक्टॉनिक प्लेट्स को ही मानते हैं। इसके अलावा यहां कई औऱ छोटे-बड़े ज्वालामुखी हैं, जो सक्रिय हैं। यहां की मिट्टी और चट्टानें बाकी दुनिया से अलग हैं। देखने पर ये कोई दूसरा ग्रह लगता है। हैरान करने वाली बात यह है कि डेनेकिल में गर्मी होने के बावजूद पानी की एक नदी भी है। इसे अवाश नदी कहते हैं। यह नदी भी बाकी नदिंयो से अलग है। नदी लंबी होने के बावजूद कभी समुद्र तक नहीं पहुंच पाती है। इसका पानी कुछ-कुछ महीनों में सूख जाता है और नीचे नमक इकट्ठा हो जाता है। ज्वालामुखी और गर्म पानी के सोतों की वजह से यह नदी पूरी तरह से एसिडिट हो चुकी है। हालांकि, यही चीज वहां रहने वालों के काम आती है। स्थानीय लोग नदी में जमा होने वाले नमक को इकठ्ठा करके बाजार में बेच देते हैं। इसे यहां 'व्हाइट गोल्ड' कहा जाता है। बता दें कि यहां के लोगों के पास नमक बेचने के अलावा इनकम का कोई दूसरा सोर्स नहीं है। यहां सालभर में बारिश भी सौ से दो सौ मिलीमीटर तक ही होती है। यह भारत में होने वाली औसतन वर्षा लगभग डेढ़ सौ सेंटीमीटर है। इतनी भीषण गर्मी के बाद भी यहां अफार जनजाति के लोग रहते हैं। घुमंतु समुदाय के इन लोगों की आबादी वैसे तो लगभग तीस लाख है, लेकिन सालभर डेनेकिल में रहने की बजाए वे आसपास घूमते रहते हैं। खासकर यह गर्मियों के मौसम में पड़ोसी इलाकों में चले जाते हैं। डेनेकिल में भले ही प्रस्थितियां रहने के लिए मुश्किल हों, लेकिन यहां भी वनस्पतियां और कीटाणु पल रहे हैं। वैज्ञानिक भाषा में इन्हें एक्सट्रीमोफाइल कहा जाता है, यानी वो चीजें, जो बेहद विषम हालातों में भी जिंदा रह सकें। इनकी स्टडी से साइंटिस्ट्स ये भी समझना चाह रहे हैं कि क्या आगे चलकर एक्सट्रीम हालातों में दूसरे ग्रहों पर जीवन संभव हो सकेगा। यह भी पढ़ें- यूरोप में नहीं इस देश में बसा था दुनिया का पहला शहर, एक हज़ार नौ सौ पचासी में हुई थी खोज, जानिए कैसे थे रीति-रिवाज? |
Don't Miss!
परमाणु को मिली जबरदस्त सफलता के बाद जॉन अब्राहम एक और धमाका करने की तैयारी कर रहे हैं। ये धमाका कितना तगड़ा होने वाला है ये बात उनकी लीक हुई तस्वीरों से पता चल रही है। ये तस्वीर जॉन की आने वाली फिल्म की हैं। जिसमें जॉन अब्राहम अपने चिर-परिचित एक्शन अवतार में नजर आने वाले हैं लेकिन इस बार उनका अंदाज एकदम ही अलग होगा। सिर्फ लुक ही नहीं इस फिल्म में जॉन के कई जबरदस्त ट्रांस्फॉर्मेशन देखने को मिलेंगे।
दरअसल, ये तस्वीरें जॉन अब्राहम की आने वाली फिल्म RAW यानी Romeo Akbar Walter की हैं। इस स्पाई थ्रिलर फिल्म में जॉन अब्राहम स्पाई के किरदार में नजर आएंगे। हाल ही में इस फिल्म की शूटिंग गुजरात के जूनागढ़ में हो रही है। उसी दौरान जॉन का फिल्म में फर्स्ट लुक लीक हो गया। सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ जो फिल्म के किसी चेजिंग सीक्वेंस का मालूम होता है। वहीं रोमियो अकबर वॉल्टर में जॉन के इस लुक के सभी दीवाने हुए जा रहे हैं।
| Don't Miss! परमाणु को मिली जबरदस्त सफलता के बाद जॉन अब्राहम एक और धमाका करने की तैयारी कर रहे हैं। ये धमाका कितना तगड़ा होने वाला है ये बात उनकी लीक हुई तस्वीरों से पता चल रही है। ये तस्वीर जॉन की आने वाली फिल्म की हैं। जिसमें जॉन अब्राहम अपने चिर-परिचित एक्शन अवतार में नजर आने वाले हैं लेकिन इस बार उनका अंदाज एकदम ही अलग होगा। सिर्फ लुक ही नहीं इस फिल्म में जॉन के कई जबरदस्त ट्रांस्फॉर्मेशन देखने को मिलेंगे। दरअसल, ये तस्वीरें जॉन अब्राहम की आने वाली फिल्म RAW यानी Romeo Akbar Walter की हैं। इस स्पाई थ्रिलर फिल्म में जॉन अब्राहम स्पाई के किरदार में नजर आएंगे। हाल ही में इस फिल्म की शूटिंग गुजरात के जूनागढ़ में हो रही है। उसी दौरान जॉन का फिल्म में फर्स्ट लुक लीक हो गया। सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ जो फिल्म के किसी चेजिंग सीक्वेंस का मालूम होता है। वहीं रोमियो अकबर वॉल्टर में जॉन के इस लुक के सभी दीवाने हुए जा रहे हैं। |
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.