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दस्तावेज़ के लेखकों के अनुसार, अब यूक्रेन में "आक्रामक राज्य के प्रतिनिधियों" के क्षेत्र में अवैध प्रवेश के लिए देश का कानून केवल प्रशासनिक दायित्व के लिए प्रदान करता है। Deputies के अनुसार, "अवैध सीमा पार अपराधीकरण करने के लिए एक सार्वजनिक आवश्यकता है," जो यूक्रेन की "राज्य संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के संरक्षण" में योगदान देगा। मसौदा कानून "यूक्रेन के राष्ट्रीय हितों के विपरीत" आक्रामक राज्य के हितों में एक व्यक्ति की नागरिकता (नागरिकता) रखने वाले व्यक्ति या यूक्रेन के राष्ट्रीय हितों के विपरीत किसी अन्य व्यक्ति के देश में प्रवेश को अपराधी बनाता है। इस तरह के कृत्य में तीन साल तक की कैद की सजा होगी। - लेखकों को निर्दिष्ट करें। बार-बार उल्लंघन करने पर तीन से पांच साल तक की कैद की सजा का प्रस्ताव है। जनवरी 2015 में, वर्खोव्ना राडा ने एक बयान अपनाया, जिसमें रूस को "आक्रामक देश" कहा गया था, क्योंकि कीव का मानना है कि रूस यूक्रेन के मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है और डोनबास में संघर्ष के लिए एक पार्टी है।
दस्तावेज़ के लेखकों के अनुसार, अब यूक्रेन में "आक्रामक राज्य के प्रतिनिधियों" के क्षेत्र में अवैध प्रवेश के लिए देश का कानून केवल प्रशासनिक दायित्व के लिए प्रदान करता है। Deputies के अनुसार, "अवैध सीमा पार अपराधीकरण करने के लिए एक सार्वजनिक आवश्यकता है," जो यूक्रेन की "राज्य संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के संरक्षण" में योगदान देगा। मसौदा कानून "यूक्रेन के राष्ट्रीय हितों के विपरीत" आक्रामक राज्य के हितों में एक व्यक्ति की नागरिकता रखने वाले व्यक्ति या यूक्रेन के राष्ट्रीय हितों के विपरीत किसी अन्य व्यक्ति के देश में प्रवेश को अपराधी बनाता है। इस तरह के कृत्य में तीन साल तक की कैद की सजा होगी। - लेखकों को निर्दिष्ट करें। बार-बार उल्लंघन करने पर तीन से पांच साल तक की कैद की सजा का प्रस्ताव है। जनवरी दो हज़ार पंद्रह में, वर्खोव्ना राडा ने एक बयान अपनाया, जिसमें रूस को "आक्रामक देश" कहा गया था, क्योंकि कीव का मानना है कि रूस यूक्रेन के मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है और डोनबास में संघर्ष के लिए एक पार्टी है।
नई दिल्लीः जेईई और नीट परीक्षा आयोजित कराए जाने को लेकर मोदी सरकार की आलोचना के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने इस मामले में आगे आकर परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की मदद करने का फैसला किया है. आरएसएस से जुड़े सूत्रों के अनुसार, हालांकि संघ ने आधिकारिक तौर पर कोई अभियान शुरू नहीं किया है लेकिन इसकी स्थानीय इकाइयों को सक्रिय कर दिया गया है और मौजूदा स्थिति पर नजर रखी जा रही है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आरएसएस ने अपनी राज्य और जिला इकाइयों को छात्रों के ठहरने, आने-जाने की व्यवस्था करने के अलावा भोजन के पैकेट वितरित करने तक की जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार रहने को कहा है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) आगामी 1 सितंबर से 6 सितंबर के बीच जेईई मेन 2020 का आयोजन करेगी जबकि नेशनल एंट्रेंस कम एलिजिबिलिटी टेस्ट (नीट) का आयोजन 13 सितंबर को किया जाना है. इस काम को लेकर सक्रिय ज्यादातर स्थानीय इकाइयां बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात के बाढ़ प्रभावित इलाकों में हैं. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. कोरोनावायरस महामारी और देश के कई हिस्सों के बाढ़ प्रभावित होने के कारण तमाम छात्र नीट और जेईई परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग कर रहे हैं. कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) सहित कई विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर महामारी के बीच छात्रों की जान जोखिम में डालने का आरोप लगाते हुए परीक्षा के आयोजन का विरोध किया है. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और कांग्रेस से जुड़े नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) सहित कई छात्र संगठनों ने भी दोनों परीक्षाएं स्थगित करने की मांग की है. भाजपा शासित राज्यों को यह सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत योजना भेजने को कहा गया है कि छात्रों को ठहरने और आने-जाने में कोई समस्या न आए. JEE/NEET 2020 की परीक्षा में सम्मिलित होने वाले मेरे प्यारे बच्चों ब्लॉक/जिला मुख्यालय से परीक्षा केंद्र तक जाने की मैंने निःशुल्क परिवहन की व्यवस्था की है। इस सुविधा का लाभ आप 31 अगस्त से 181 पर संपर्क कर या https/mapit. gov. in/covid-19 पर रजिस्टर कर प्राप्त कर सकते हो। संघ की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) को भी अपनी गतिविधियां तेज करने और छात्रों की कोई भी समस्या सुलझाना सुनिश्चित करने को कहा गया है. एबीवीपी पहले ही नीट, जेईई और यूनिवर्सिटी परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के लिए देशव्यापी हेल्पलाइन शुरू कर चुका है. एबीवीपी के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक राहुल चौधरी ने कहा, 'हम यह सुनिश्चित करेंगे कि छात्र बिना किसी मुसीबत समय पर परीक्षा केंद्रों तक पहुंच सकें. इसके अलावा हम उस समय जरूरत पड़ने को ध्यान में रखकर भोजन के पैकेट भी तैयार कर रहे हैं. ' साथ ही कहा कि हेल्पलाइन नंबरों के जरिये ठहरने और भोजन की व्यवस्था करने की भी कोशिश की जाएगी. केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने तैयारियों की समीक्षा के लिए हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, गोवा, उत्तराखंड, त्रिपुरा, मणिपुर, गुजरात सहित कई भाजपा शासित कई राज्यों के साथ बैठकें की हैं. पोखरियाल ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से अपील की है कि वे छात्रों की सुविधा का खयाल रखें और सुनिश्चित करें कि मंगलवार को उन्हें किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े. (इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
नई दिल्लीः जेईई और नीट परीक्षा आयोजित कराए जाने को लेकर मोदी सरकार की आलोचना के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस मामले में आगे आकर परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों की मदद करने का फैसला किया है. आरएसएस से जुड़े सूत्रों के अनुसार, हालांकि संघ ने आधिकारिक तौर पर कोई अभियान शुरू नहीं किया है लेकिन इसकी स्थानीय इकाइयों को सक्रिय कर दिया गया है और मौजूदा स्थिति पर नजर रखी जा रही है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आरएसएस ने अपनी राज्य और जिला इकाइयों को छात्रों के ठहरने, आने-जाने की व्यवस्था करने के अलावा भोजन के पैकेट वितरित करने तक की जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार रहने को कहा है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी आगामी एक सितंबर से छः सितंबर के बीच जेईई मेन दो हज़ार बीस का आयोजन करेगी जबकि नेशनल एंट्रेंस कम एलिजिबिलिटी टेस्ट का आयोजन तेरह सितंबर को किया जाना है. इस काम को लेकर सक्रिय ज्यादातर स्थानीय इकाइयां बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात के बाढ़ प्रभावित इलाकों में हैं. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. कोरोनावायरस महामारी और देश के कई हिस्सों के बाढ़ प्रभावित होने के कारण तमाम छात्र नीट और जेईई परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग कर रहे हैं. कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित कई विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर महामारी के बीच छात्रों की जान जोखिम में डालने का आरोप लगाते हुए परीक्षा के आयोजन का विरोध किया है. ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन और कांग्रेस से जुड़े नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया सहित कई छात्र संगठनों ने भी दोनों परीक्षाएं स्थगित करने की मांग की है. भाजपा शासित राज्यों को यह सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत योजना भेजने को कहा गया है कि छात्रों को ठहरने और आने-जाने में कोई समस्या न आए. JEE/NEET दो हज़ार बीस की परीक्षा में सम्मिलित होने वाले मेरे प्यारे बच्चों ब्लॉक/जिला मुख्यालय से परीक्षा केंद्र तक जाने की मैंने निःशुल्क परिवहन की व्यवस्था की है। इस सुविधा का लाभ आप इकतीस अगस्त से एक सौ इक्यासी पर संपर्क कर या https/mapit. gov. in/covid-उन्नीस पर रजिस्टर कर प्राप्त कर सकते हो। संघ की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को भी अपनी गतिविधियां तेज करने और छात्रों की कोई भी समस्या सुलझाना सुनिश्चित करने को कहा गया है. एबीवीपी पहले ही नीट, जेईई और यूनिवर्सिटी परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों के लिए देशव्यापी हेल्पलाइन शुरू कर चुका है. एबीवीपी के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक राहुल चौधरी ने कहा, 'हम यह सुनिश्चित करेंगे कि छात्र बिना किसी मुसीबत समय पर परीक्षा केंद्रों तक पहुंच सकें. इसके अलावा हम उस समय जरूरत पड़ने को ध्यान में रखकर भोजन के पैकेट भी तैयार कर रहे हैं. ' साथ ही कहा कि हेल्पलाइन नंबरों के जरिये ठहरने और भोजन की व्यवस्था करने की भी कोशिश की जाएगी. केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने तैयारियों की समीक्षा के लिए हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, गोवा, उत्तराखंड, त्रिपुरा, मणिपुर, गुजरात सहित कई भाजपा शासित कई राज्यों के साथ बैठकें की हैं. पोखरियाल ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से अपील की है कि वे छात्रों की सुविधा का खयाल रखें और सुनिश्चित करें कि मंगलवार को उन्हें किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े.
Chakradharpur (Shambhu Kumar) : चक्रधरपुर के संत जेवियर्स इंग्लिश मीडियम स्कूल में शनिवार को विज्ञान सह हस्तकला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि चक्रधरपुर नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष कृष्णदेव साह उपस्थित थे. कृष्ण देव साह ने फीता काटकर विज्ञान सह हस्तकला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया. मौके पर उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए प्रदर्शनी को देखा और खूब तारीफ की. उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन से बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर प्राप्त होता है. नन्हें वैज्ञानिकों ने एक से बढ़कर एक मॉडल बना कर यह साबित किया कि वह किसी से कम नहीं है. इस दौरान स्कूल के प्राचार्य फादर पुथुमाई राज व अन्य शिक्षकों ने विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए विज्ञान प्रदर्शनी के सभी मॉडल को देखा. प्राचार्य फादर पुथुमाई ने विद्यार्थियों के मॉडल को देखकर सराहना की. बच्चों ने भी अपने मॉडल के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी. विज्ञान प्रदर्शनी के दौरान विद्यार्थियों ने पर्यावरण सुरक्षा, व्यवस्था, मानव तंत्र, जलवायु परिवर्तन, देश की संस्कृति, मिसाइल, व्यवस्थित शहर, साफ सफाई समेत अन्य कई विषयों पर मॉडल बनाकर स्टॉल लगाए थे. इस मौके पर स्कूल के सभी शिक्षक शिक्षिकाएं व बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे.
Chakradharpur : चक्रधरपुर के संत जेवियर्स इंग्लिश मीडियम स्कूल में शनिवार को विज्ञान सह हस्तकला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि चक्रधरपुर नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष कृष्णदेव साह उपस्थित थे. कृष्ण देव साह ने फीता काटकर विज्ञान सह हस्तकला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया. मौके पर उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए प्रदर्शनी को देखा और खूब तारीफ की. उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन से बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर प्राप्त होता है. नन्हें वैज्ञानिकों ने एक से बढ़कर एक मॉडल बना कर यह साबित किया कि वह किसी से कम नहीं है. इस दौरान स्कूल के प्राचार्य फादर पुथुमाई राज व अन्य शिक्षकों ने विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए विज्ञान प्रदर्शनी के सभी मॉडल को देखा. प्राचार्य फादर पुथुमाई ने विद्यार्थियों के मॉडल को देखकर सराहना की. बच्चों ने भी अपने मॉडल के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी. विज्ञान प्रदर्शनी के दौरान विद्यार्थियों ने पर्यावरण सुरक्षा, व्यवस्था, मानव तंत्र, जलवायु परिवर्तन, देश की संस्कृति, मिसाइल, व्यवस्थित शहर, साफ सफाई समेत अन्य कई विषयों पर मॉडल बनाकर स्टॉल लगाए थे. इस मौके पर स्कूल के सभी शिक्षक शिक्षिकाएं व बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे.
मृतक सुभाष रविदास और कारु रविदास के चचेरा भाई संजीव रविदास ने बताया कि 10 दिन पहले ही गांव से उनके दो चचेरे भाई और अन्य लोग केमिकल फैक्ट्री में काम करने के लिए आंध्र प्रदेश गए थे। दोनों करीब 2011 से ही आंध्र प्रदेश में केमिकल फैक्ट्री में काम करते थे। होली की छुट्टी पर घर आए थे और 10 दिन पूर्व ही फिर से काम पर लौटे थे। किसे पता था कि दोनों की अर्थी ही लौट कर आए। दोनों अपने घर में इकलौते कमाने वाले थे। सुभाष रविदास अपने पीछे तीन बेटे और दो बेटियों को छोड़कर चला गया। वहीं, कारु रविदास के जाने के बाद एक बेटी और दो बेटे का रो-रोकर बुरा हाल है। सुभाष रविदास और कारु रविदास की बेटियां अब बड़ी हो गई है, जो शादी के लायक है। अब ऐसे में परिवार को यह भी चिंता सता रही है कि अब उनकी बेटियों की शादी कैसे होगी। हरनौत प्रखंड के रामसंग डीहरा गांव निवासी मनोज मोची और बसनीमा गांव निवासी अवधेश रविदास की भी इस घटना में मौत हो गई है। अहले सुबह घर वालों को जब मौत की खबर मिली तो गांव में चीख पुकार मच गई। परिजनों का कहना है कि लॉकडाउन की मार झेलने के बाद करीब पांच माह पूर्व रोजी रोटी कमाने के लिए मनोज मोची और अवधेश रविदास आंध्र प्रदेश गए थे। मजदूर मनोज मोची अपने पीछे एक बेटी, जबकि अवधेश 1 पुत्र और 2 पुत्री को छोड़कर चले गए। पत्नी और बच्चों के चीत्कार से पूरे गांव का माहौल गमगीन है। आसपास के घरों में सुबह से चूल्हे नहीं जले। मामले पर जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने बताया कि राज्य सरकार शवों को लाने की तैयारी में जुट गई है। मृतक के परिजनों को हरसंभव मदद की जाएगी। आंध्र प्रदेश के CM वायएस जगन मोहन रेड्डी ने मृतकों के परिजन को 25 लाख रुपए, गंभीर घायलों को 5 लाख और मामूली घायल लोगों को 2 लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मृतक सुभाष रविदास और कारु रविदास के चचेरा भाई संजीव रविदास ने बताया कि दस दिन पहले ही गांव से उनके दो चचेरे भाई और अन्य लोग केमिकल फैक्ट्री में काम करने के लिए आंध्र प्रदेश गए थे। दोनों करीब दो हज़ार ग्यारह से ही आंध्र प्रदेश में केमिकल फैक्ट्री में काम करते थे। होली की छुट्टी पर घर आए थे और दस दिन पूर्व ही फिर से काम पर लौटे थे। किसे पता था कि दोनों की अर्थी ही लौट कर आए। दोनों अपने घर में इकलौते कमाने वाले थे। सुभाष रविदास अपने पीछे तीन बेटे और दो बेटियों को छोड़कर चला गया। वहीं, कारु रविदास के जाने के बाद एक बेटी और दो बेटे का रो-रोकर बुरा हाल है। सुभाष रविदास और कारु रविदास की बेटियां अब बड़ी हो गई है, जो शादी के लायक है। अब ऐसे में परिवार को यह भी चिंता सता रही है कि अब उनकी बेटियों की शादी कैसे होगी। हरनौत प्रखंड के रामसंग डीहरा गांव निवासी मनोज मोची और बसनीमा गांव निवासी अवधेश रविदास की भी इस घटना में मौत हो गई है। अहले सुबह घर वालों को जब मौत की खबर मिली तो गांव में चीख पुकार मच गई। परिजनों का कहना है कि लॉकडाउन की मार झेलने के बाद करीब पांच माह पूर्व रोजी रोटी कमाने के लिए मनोज मोची और अवधेश रविदास आंध्र प्रदेश गए थे। मजदूर मनोज मोची अपने पीछे एक बेटी, जबकि अवधेश एक पुत्र और दो पुत्री को छोड़कर चले गए। पत्नी और बच्चों के चीत्कार से पूरे गांव का माहौल गमगीन है। आसपास के घरों में सुबह से चूल्हे नहीं जले। मामले पर जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने बताया कि राज्य सरकार शवों को लाने की तैयारी में जुट गई है। मृतक के परिजनों को हरसंभव मदद की जाएगी। आंध्र प्रदेश के CM वायएस जगन मोहन रेड्डी ने मृतकों के परिजन को पच्चीस लाख रुपए, गंभीर घायलों को पाँच लाख और मामूली घायल लोगों को दो लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
इस ससीम संसृति में जिसका अस्तित्व पृथक् ? अपने को खो देना अपने को पाना है हम उठते रहते हैं! प्रस्फुटित उमंगों पर, हम गिरते रहते हैं, घुटती आहों पर ! चलना है बहुत कठिन लेकिन हम चलते हैं पथरीली राहों पर! प्राणों में कांटों-से चुभते कितने भ्रम हों! पर हमको चलना है, चलते ही रहना है। एक और रास्ता है, जिस पर चलना नहीं होता। एक और मार्ग है, जिस पर बैठना होता है, रुकना होता है। न ऊंची-नीची राहें हैं, न कंटरीले मार्ग हैं--चुपचाप सन्नाटा है, न शोरगुल है। न क्रम है, न विधि है। उस क्रमविधि-हीन शांत बैठ जाने का नाम ध्यान है। मन तो गति है; ध्यान गति - मुक्ति है। मन तो चलता ही रहता है। मन का तो चलना ही जीवन है। जिस क्षण तुम्हारे भीतर मन नहीं चलता उस क्षण ध्यान है। कैसे वह अपूर्व घड़ी आए जब मन न चले? साक्षी की कुंजी है। बैठो! बैठ कर देखते रहो। चलने दो मन को; न रोकना, न झगड़ना, न निंदा करना, न संग-साथ हो लेना। निरपेक्ष, तटस्थ! जैसे कुछ लेना-देना नहीं है--असंलग्न, दूर! जैसे मन कोई और है। जैसे राह पर चलते हुए
इस ससीम संसृति में जिसका अस्तित्व पृथक् ? अपने को खो देना अपने को पाना है हम उठते रहते हैं! प्रस्फुटित उमंगों पर, हम गिरते रहते हैं, घुटती आहों पर ! चलना है बहुत कठिन लेकिन हम चलते हैं पथरीली राहों पर! प्राणों में कांटों-से चुभते कितने भ्रम हों! पर हमको चलना है, चलते ही रहना है। एक और रास्ता है, जिस पर चलना नहीं होता। एक और मार्ग है, जिस पर बैठना होता है, रुकना होता है। न ऊंची-नीची राहें हैं, न कंटरीले मार्ग हैं--चुपचाप सन्नाटा है, न शोरगुल है। न क्रम है, न विधि है। उस क्रमविधि-हीन शांत बैठ जाने का नाम ध्यान है। मन तो गति है; ध्यान गति - मुक्ति है। मन तो चलता ही रहता है। मन का तो चलना ही जीवन है। जिस क्षण तुम्हारे भीतर मन नहीं चलता उस क्षण ध्यान है। कैसे वह अपूर्व घड़ी आए जब मन न चले? साक्षी की कुंजी है। बैठो! बैठ कर देखते रहो। चलने दो मन को; न रोकना, न झगड़ना, न निंदा करना, न संग-साथ हो लेना। निरपेक्ष, तटस्थ! जैसे कुछ लेना-देना नहीं है--असंलग्न, दूर! जैसे मन कोई और है। जैसे राह पर चलते हुए
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। राजस्थान (rajasthan) के भीलवाड़ा जिले में शनिवार रात भीषण सड़क हादसा हो गया। एक वैन और ट्रेलर के बीच टक्कर होने से सात लोगों की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने बताया कि मृतकों में 6 लोग सिंगोली गांव के निवासी है, जबकि 1 सालावटिया का है। दरअसल, शनिवार रात सिंगोली श्याम से कोटा के रावतभाटा की ओर जा रही वैन को आरोली टोल नाके के नजदीक ट्रेलर ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि 4 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि तीन लोगों ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इस हादसे की तुरंत बाद राष्ट्रीय राज मार्ग पर आवाजाही ठप हो गई और मार्ग पर जाम लग गया गया। घटना की जानकारी मिलते ही बिजौलिया थाना प्रभारी विनोद मीणा पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे गए। हादसे में घायल तीन लोगों को पुलिस ने राहगीरों की मदद से बाहर निकाला और बिजौलियां अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचाया गया, विनोद मीणा ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 27 भीलवाड़ा कोटा पर नया नगर मोड़ के पास मारुति वैन और ट्रेलर की टक्कर में ये भीषण हादसा हुआ। बिजौलिया पुलिस ने शवों को अपने कब्जे में लिया। पुलिस ने बताया कि मृतकों में 6 लोग भीलवाड़ा जिले के सिंगोली गांव के रहने वाले और 1 भीलवाड़ा जिले के सालावटिया का रहने वाला है। मृतकों में उमेश जायसवाल, मुकेश नट, जमुनालाल नट, अमरचंद नट, राजू नट और शिवलाल की पहचान सिंगोली निवासी के रूप में हुई है, जबकि 1 मृतक राधेश्याम की पहचान सालावटीया के निवासी के रूप में की गई है।
नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में शनिवार रात भीषण सड़क हादसा हो गया। एक वैन और ट्रेलर के बीच टक्कर होने से सात लोगों की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंच गई। पुलिस ने बताया कि मृतकों में छः लोग सिंगोली गांव के निवासी है, जबकि एक सालावटिया का है। दरअसल, शनिवार रात सिंगोली श्याम से कोटा के रावतभाटा की ओर जा रही वैन को आरोली टोल नाके के नजदीक ट्रेलर ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि तीन लोगों ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इस हादसे की तुरंत बाद राष्ट्रीय राज मार्ग पर आवाजाही ठप हो गई और मार्ग पर जाम लग गया गया। घटना की जानकारी मिलते ही बिजौलिया थाना प्रभारी विनोद मीणा पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे गए। हादसे में घायल तीन लोगों को पुलिस ने राहगीरों की मदद से बाहर निकाला और बिजौलियां अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचाया गया, विनोद मीणा ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग सत्ताईस भीलवाड़ा कोटा पर नया नगर मोड़ के पास मारुति वैन और ट्रेलर की टक्कर में ये भीषण हादसा हुआ। बिजौलिया पुलिस ने शवों को अपने कब्जे में लिया। पुलिस ने बताया कि मृतकों में छः लोग भीलवाड़ा जिले के सिंगोली गांव के रहने वाले और एक भीलवाड़ा जिले के सालावटिया का रहने वाला है। मृतकों में उमेश जायसवाल, मुकेश नट, जमुनालाल नट, अमरचंद नट, राजू नट और शिवलाल की पहचान सिंगोली निवासी के रूप में हुई है, जबकि एक मृतक राधेश्याम की पहचान सालावटीया के निवासी के रूप में की गई है।
नयी दिल्ली (एजेंसी/वार्ता): मैकडॉनल्ड्स इंडिया (उत्तर और पूर्व) ने लोकप्रिय और करिश्माई अभिनेता कार्तिक आर्यन को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया है। अभिनेता का युवाओं से मजबूत जुड़ाव मैकडॉनल्ड्स और उसके प्रशंसकों के बीच के बंधन को और मजबूत करेगा। अभिनेता कार्तिक ने इस अवसर पर कहा, "मैकडॉनल्ड्स मेरे बड़े होने के वर्षों का हिस्सा रहा है। यह नाम मेरे किशोरावस्था के दिनों की बहुत सारी खुशियों भरी यादों को ताजा करता है और यह ब्रांड मेरे जीवन में विशेष बना हुआ है। मैकडॉनल्ड्स के साथ जुड़कर मुझे बेहद खुशी हो रही है।
नयी दिल्ली : मैकडॉनल्ड्स इंडिया ने लोकप्रिय और करिश्माई अभिनेता कार्तिक आर्यन को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया है। अभिनेता का युवाओं से मजबूत जुड़ाव मैकडॉनल्ड्स और उसके प्रशंसकों के बीच के बंधन को और मजबूत करेगा। अभिनेता कार्तिक ने इस अवसर पर कहा, "मैकडॉनल्ड्स मेरे बड़े होने के वर्षों का हिस्सा रहा है। यह नाम मेरे किशोरावस्था के दिनों की बहुत सारी खुशियों भरी यादों को ताजा करता है और यह ब्रांड मेरे जीवन में विशेष बना हुआ है। मैकडॉनल्ड्स के साथ जुड़कर मुझे बेहद खुशी हो रही है।
भाव क्या खुलेंगे ? और क्या बन्द होंगे? इस यन्त्र की गिनती किस प्रकार से करना चाहिए । इस यन्त्र की आम्नाय गुरू नाम से प्राप्त हो जाय तो कार्य सिद्ध होते देर नहीं लगती। इस यन्त्र को द्रव्य प्राप्ति हेतु चितामणि यन्त्र भी कह देना तो अतिशयोक्ति नही है। नसीब जोरदार हो तो देर नहीं लगती। यह यन्त्र विशेष करके सटोरियों के काम का है। इसकी गिनती का अभ्यास करने से जानकारी होगी। इष्ट देव के स्मरण को नहीं भूलना चाहिये । दान-पुण्य करने से इच्छाएँ फलती है ॥ ५४॥ यन्त्र नं० ५४
भाव क्या खुलेंगे ? और क्या बन्द होंगे? इस यन्त्र की गिनती किस प्रकार से करना चाहिए । इस यन्त्र की आम्नाय गुरू नाम से प्राप्त हो जाय तो कार्य सिद्ध होते देर नहीं लगती। इस यन्त्र को द्रव्य प्राप्ति हेतु चितामणि यन्त्र भी कह देना तो अतिशयोक्ति नही है। नसीब जोरदार हो तो देर नहीं लगती। यह यन्त्र विशेष करके सटोरियों के काम का है। इसकी गिनती का अभ्यास करने से जानकारी होगी। इष्ट देव के स्मरण को नहीं भूलना चाहिये । दान-पुण्य करने से इच्छाएँ फलती है ॥ चौवन॥ यन्त्र नंशून्य चौवन
India vs West Indies भारतीय कप्तान विराट कोहली ने वेेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में लगातार दूसरा शतक लगाया। नई दिल्ली, जेएनएन। India vs West Indies: टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) ने वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में एक बार फिर से बेहतरीन पारी खेलते हुए शतक जड़ दिया। इस वनडे सीरीज में ये विराट कोहली का लगातार दूसरा शतक रहा जबकि ये उनके वनडे करियर का 43वां शतक था। वहीं वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे क्रिकेट में विराट का ये 9वां शतक रहा। विराट ने अपनी इस पारी के दम पर भारतीय टीम को तीसरे वनडे में आसान जीत दिला दी। विराट कोहली को तीन मैचों की वनडे सीरीज में 'मैन ऑफ द सीरीज' चुना गया। पोर्ट ऑफ स्पेन में तीसरे वनडे मुकाबले में विराट कोहली का बल्ला एक बार फिर से जमकर बोला। विराट ने इस मैच में एक बार फिर से पिछले यानी दूसरे वनडे की कहानी दोहराते हुए शतकीय पारी खेली। विराट ने ये शतक 94 गेंदों पर पूरा किया। इससे पहले उन्होंने अपना अर्धशतक 48 गेंदों पर पांच चौकों की मदद से पूरी की थी। इस मैच में विराट कोहली ने 99 गेेंदों पर नाबाद 114 रन की पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में 14 चौके लगाए। उनका स्ट्राइक रेट 115. 15 का रहा। विराट ने इससे पहले यानी दूसरे वनडे मैच में भी शतकीय पारी खेली थी और 120 रन बनाए थे। किसी एक टीम के खिलाफ वनडे में सबसे ज्यादा शतक लगाने के मामले में विराट कोहली ने सचिन तेंदुलकर की बराबरी कर ली। सचिन ने वनडे क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कुल नौ शतक लगाए थे। विराट ने वेस्टइंडीज के खिलाफ ये कमाल किया। हालांकि सचिन ने कंगारू टीम के खिलाफ इतने शतक 70 पारियों में लगाए थे वहीं विराट ने सिर्फ 35 पारियों में ये कमाल किया। यानी पारियों के मामले में विराट ने सचिन को काफी पीछे छोड़ दिया। -9 S Tendulkar vs Aus (70) -8 V Kohli vs Aus (35) -8 V Kohli vs SL (46) -8 S Tendulkar vs SL (80) विराट कोहली वेस्टइंडीज में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले विदेशी खिलाड़ी बन गए हैं। विराट से पहले ये रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के पूर्व बल्लेबाज मैथ्यू हेडेन के नाम पर था। अब विराट उनसे आगे निकल गए हैं। ये विराट का वेस्टइंडीज में चौथा वनडे शतक था। उन्होंने हाशिम अमला व जो रूट को भी पीछे छोड़ दिया। Most ODI 100s by a visiting batsman in WI: वनडे कप्तान के तौर पर विराट कोहली ने 21वां शतक लगाया। अब इस मामले में उनसे आगे सिर्फ रिकी पोंटिंग हैं जिनके नाम पर वनडे कप्तान के तौर पर 22 शतक है। पोंटिंग ने 220 पारियों में कप्तान के तौर पर 22 वनडे शतक लगाया था जबकि विराट ने 76 पारियों में ही 21 शतक लगा दिए। -22 R Ponting (220 inngs) -13 AB de Villiers (98) -11 S Ganguly (143)
India vs West Indies भारतीय कप्तान विराट कोहली ने वेेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज में लगातार दूसरा शतक लगाया। नई दिल्ली, जेएनएन। India vs West Indies: टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में एक बार फिर से बेहतरीन पारी खेलते हुए शतक जड़ दिया। इस वनडे सीरीज में ये विराट कोहली का लगातार दूसरा शतक रहा जबकि ये उनके वनडे करियर का तैंतालीसवां शतक था। वहीं वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे क्रिकेट में विराट का ये नौवां शतक रहा। विराट ने अपनी इस पारी के दम पर भारतीय टीम को तीसरे वनडे में आसान जीत दिला दी। विराट कोहली को तीन मैचों की वनडे सीरीज में 'मैन ऑफ द सीरीज' चुना गया। पोर्ट ऑफ स्पेन में तीसरे वनडे मुकाबले में विराट कोहली का बल्ला एक बार फिर से जमकर बोला। विराट ने इस मैच में एक बार फिर से पिछले यानी दूसरे वनडे की कहानी दोहराते हुए शतकीय पारी खेली। विराट ने ये शतक चौरानवे गेंदों पर पूरा किया। इससे पहले उन्होंने अपना अर्धशतक अड़तालीस गेंदों पर पांच चौकों की मदद से पूरी की थी। इस मैच में विराट कोहली ने निन्यानवे गेेंदों पर नाबाद एक सौ चौदह रन की पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में चौदह चौके लगाए। उनका स्ट्राइक रेट एक सौ पंद्रह. पंद्रह का रहा। विराट ने इससे पहले यानी दूसरे वनडे मैच में भी शतकीय पारी खेली थी और एक सौ बीस रन बनाए थे। किसी एक टीम के खिलाफ वनडे में सबसे ज्यादा शतक लगाने के मामले में विराट कोहली ने सचिन तेंदुलकर की बराबरी कर ली। सचिन ने वनडे क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कुल नौ शतक लगाए थे। विराट ने वेस्टइंडीज के खिलाफ ये कमाल किया। हालांकि सचिन ने कंगारू टीम के खिलाफ इतने शतक सत्तर पारियों में लगाए थे वहीं विराट ने सिर्फ पैंतीस पारियों में ये कमाल किया। यानी पारियों के मामले में विराट ने सचिन को काफी पीछे छोड़ दिया। -नौ S Tendulkar vs Aus -आठ वोल्ट Kohli vs Aus -आठ वोल्ट Kohli vs SL -आठ S Tendulkar vs SL विराट कोहली वेस्टइंडीज में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले विदेशी खिलाड़ी बन गए हैं। विराट से पहले ये रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के पूर्व बल्लेबाज मैथ्यू हेडेन के नाम पर था। अब विराट उनसे आगे निकल गए हैं। ये विराट का वेस्टइंडीज में चौथा वनडे शतक था। उन्होंने हाशिम अमला व जो रूट को भी पीछे छोड़ दिया। Most ODI एक सौ सेकंड by a visiting batsman in WI: वनडे कप्तान के तौर पर विराट कोहली ने इक्कीसवां शतक लगाया। अब इस मामले में उनसे आगे सिर्फ रिकी पोंटिंग हैं जिनके नाम पर वनडे कप्तान के तौर पर बाईस शतक है। पोंटिंग ने दो सौ बीस पारियों में कप्तान के तौर पर बाईस वनडे शतक लगाया था जबकि विराट ने छिहत्तर पारियों में ही इक्कीस शतक लगा दिए। -बाईस R Ponting -तेरह AB de Villiers -ग्यारह S Ganguly
एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा की सगाई की खबरें लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। इस बात को और बल मिला जब उनके ब्वॉयफ्रेंड और अमेरिकन सिंगर निक जोनस को अपने माता-पिता के साथ मुंबई एयरपोर्ट पर देखा गया। जिसके बाद तय माना जा रहा है कि प्रियंका चोपड़ा अपने रिश्ते को नया नाम देने के लिए बिल्कुल तैयार हैं। निक जोनस अपने पैरेंट्स के साथ एयरपोर्ट से सीधे प्रियंका के जुहू स्थित बंगले पर पहुंचे। सूत्रों के मुताबिक, 18 अगस्त को प्रियंका और निक अपने परिवार और करीबी दोस्तों के बीच सगाई की रस्मों को पूरा करेंगे। सगाई से पहले प्रियंका का बंगला पूरी तरह रंग-बिरंगी लाइटों से शानदार तरीके से सज चुका है। इससे पहले प्रियंका के घर 15 अगस्त के दिन एक पंडित को घर से निकलते देखा गया जिसके बाद इन कयासों को बल मिला। प्रियंका के घर की तैयारियों को देखकर तो ऐसा ही लग रहा है कि सगाई की रस्में हिंदू रीति रिवाजों के साथ होंगी। ये दूसरी बार है जब निक भारत आए हैं। इससे पहले निक अकेले ही प्रियंका के साथ आए थे और उनके परिवारवालों से मुलाकात की थी। बता दें कि प्रियंका पहले ही निक की फैमिली से मिल चुकी हैं। वो निक के साथ उनके कजिन की शादी में शामिल हुई थीं। इससे पहले प्रियंका चोपड़ा को अपनी अंगूठी छुपाते हुए स्पॉट किया गया था जिससे साफ था कि वो फिलहाल सगाई की किसी खबर पर बात नहीं करना चाहतीं। भले ही प्रियंका अपनी अंगूठी छुपा रही हो लेकिन निक को जब उनके एक फैन ने सगाई की बधाई दी तो उन्होंने थैंक्यू कहा था। इसके बाद ही दोनों की सगाई की खबर कंफर्म हो गई थी।
एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा की सगाई की खबरें लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। इस बात को और बल मिला जब उनके ब्वॉयफ्रेंड और अमेरिकन सिंगर निक जोनस को अपने माता-पिता के साथ मुंबई एयरपोर्ट पर देखा गया। जिसके बाद तय माना जा रहा है कि प्रियंका चोपड़ा अपने रिश्ते को नया नाम देने के लिए बिल्कुल तैयार हैं। निक जोनस अपने पैरेंट्स के साथ एयरपोर्ट से सीधे प्रियंका के जुहू स्थित बंगले पर पहुंचे। सूत्रों के मुताबिक, अट्ठारह अगस्त को प्रियंका और निक अपने परिवार और करीबी दोस्तों के बीच सगाई की रस्मों को पूरा करेंगे। सगाई से पहले प्रियंका का बंगला पूरी तरह रंग-बिरंगी लाइटों से शानदार तरीके से सज चुका है। इससे पहले प्रियंका के घर पंद्रह अगस्त के दिन एक पंडित को घर से निकलते देखा गया जिसके बाद इन कयासों को बल मिला। प्रियंका के घर की तैयारियों को देखकर तो ऐसा ही लग रहा है कि सगाई की रस्में हिंदू रीति रिवाजों के साथ होंगी। ये दूसरी बार है जब निक भारत आए हैं। इससे पहले निक अकेले ही प्रियंका के साथ आए थे और उनके परिवारवालों से मुलाकात की थी। बता दें कि प्रियंका पहले ही निक की फैमिली से मिल चुकी हैं। वो निक के साथ उनके कजिन की शादी में शामिल हुई थीं। इससे पहले प्रियंका चोपड़ा को अपनी अंगूठी छुपाते हुए स्पॉट किया गया था जिससे साफ था कि वो फिलहाल सगाई की किसी खबर पर बात नहीं करना चाहतीं। भले ही प्रियंका अपनी अंगूठी छुपा रही हो लेकिन निक को जब उनके एक फैन ने सगाई की बधाई दी तो उन्होंने थैंक्यू कहा था। इसके बाद ही दोनों की सगाई की खबर कंफर्म हो गई थी।
नई दिल्ली, 15 दिसम्बर (आईएएनएस)। दिल्ली की एक अदालत ने ब्रिटिश नागरिक क्रिश्चियन मिशेल की सीबीआई हिरासत शनिवार को अतिरिक्त चार दिनों के लिए बढ़ा दी। बिचौलिया मिशेल 3,600 करोड़ रुपये के अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदा मामले में आरोपी है। विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को और चार दिन तक बिचौलिए से पूछताछ करने की इजाजत दी है। सीबीआई ने मिशेल की पांच दिनों की हिरासत मांगी थी। विशेष लोक अभियोजक डी. पी. सिंह ने अदालत को बताया कि आरोपी को मुंबई ले जाए जाने की जरूरत है। साथ ही कुछ दस्तावेजों से उसका सामना कराया जाना भी बहुत जरूरी है। मिशेल के वकील ने अतिरिक्त हिरासत बढ़ाने वाली याचिका का विरोध किया था। बिचौलिए की पांच दिनों की सीबीआई हिरासत समाप्त होने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया। उसे चार दिसंबर की रात संयुक्त अरब अमीरात से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था।
नई दिल्ली, पंद्रह दिसम्बर । दिल्ली की एक अदालत ने ब्रिटिश नागरिक क्रिश्चियन मिशेल की सीबीआई हिरासत शनिवार को अतिरिक्त चार दिनों के लिए बढ़ा दी। बिचौलिया मिशेल तीन,छः सौ करोड़ रुपये के अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदा मामले में आरोपी है। विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को और चार दिन तक बिचौलिए से पूछताछ करने की इजाजत दी है। सीबीआई ने मिशेल की पांच दिनों की हिरासत मांगी थी। विशेष लोक अभियोजक डी. पी. सिंह ने अदालत को बताया कि आरोपी को मुंबई ले जाए जाने की जरूरत है। साथ ही कुछ दस्तावेजों से उसका सामना कराया जाना भी बहुत जरूरी है। मिशेल के वकील ने अतिरिक्त हिरासत बढ़ाने वाली याचिका का विरोध किया था। बिचौलिए की पांच दिनों की सीबीआई हिरासत समाप्त होने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया। उसे चार दिसंबर की रात संयुक्त अरब अमीरात से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था।
नई दिल्लीः बंदर हमेशा कुछ ना कुछ अजीबोगरीब हरकतें करते रहते हैं। जब उनके हाथ में कुछ आ जाता है तो वे उसे कोई नाम नहीं देते। आप बंदर और टोपीवाले की कहानी जानते हैं। साथ ही आपने इससे जुड़े कई वीडियो भी देखे होंगे। जिसमें बंदर कभी लोगों का खाना तो कभी कोई वस्तु लेकर भाग जाता है। लेकिन बंदर से जुड़ी एक ऐसी खबर सामने आई है। जिसे सुनकर आपके पैरों तले की जमीन खिसक जाएगी। जी हां, क्योंकि इस बंदर ने एक महिला के करीब एक लाख रुपए चुरा लिए हैं। ये खबर थाईलैंड से सामने आई है। वहां एक बंदर महिला का बैग लेकर भाग गया। इस बैग में एक लाख रुपए नकद और कुछ दस्तावेज भी मिले। दरअसल, ये घटना थाईलैंड के एक प्रांत की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बंदरों का एक समूह पार्क में टहलने निकली एक महिला के पास पहुंचा। महिला को यह बात समझ नहीं आई और तभी उनमें से एक बंदर महिला के पास गया और उसका बैग छीनकर भाग गया। महिला ने पीछे मुड़कर देखा तो बंदर काफी दूर जा चुका था। महिला ने बंदर का पीछा किया लेकिन वह भाग गया। इसके बाद बंदर ने महिला का बैग उठाकर गहरी खाई में फेंक दिया। महिला उस पर चिल्लाने लगी, उसकी आवाज सुनकर पार्क के कर्मचारी वहां पहुंचे और महिला ने पूरी सच्चाई बताई। इसके बाद पार्क के कई कर्मचारियों ने बैग को घाटी से बाहर निकालने के लिए अभियान चलाया। अंत में रस्सियों व अन्य सामान की मदद से महिला के बैग को कुछ देर बाद बाहर निकाला गया। इन सबके बीच अच्छी बात यह रही कि बंदर बैग की चेन नहीं खोल सका। जिससे एक लाख रुपए व महिला के कई दस्तावेज उस बैग में सुरक्षित निकल गए। इस महिला ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया है। हालांकि सोशल मीडिया पर लोग महिला को दोष दे रहे हैं तो कुछ यह भी कह रहे हैं कि इसमें किसी की गलती नहीं है।
नई दिल्लीः बंदर हमेशा कुछ ना कुछ अजीबोगरीब हरकतें करते रहते हैं। जब उनके हाथ में कुछ आ जाता है तो वे उसे कोई नाम नहीं देते। आप बंदर और टोपीवाले की कहानी जानते हैं। साथ ही आपने इससे जुड़े कई वीडियो भी देखे होंगे। जिसमें बंदर कभी लोगों का खाना तो कभी कोई वस्तु लेकर भाग जाता है। लेकिन बंदर से जुड़ी एक ऐसी खबर सामने आई है। जिसे सुनकर आपके पैरों तले की जमीन खिसक जाएगी। जी हां, क्योंकि इस बंदर ने एक महिला के करीब एक लाख रुपए चुरा लिए हैं। ये खबर थाईलैंड से सामने आई है। वहां एक बंदर महिला का बैग लेकर भाग गया। इस बैग में एक लाख रुपए नकद और कुछ दस्तावेज भी मिले। दरअसल, ये घटना थाईलैंड के एक प्रांत की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बंदरों का एक समूह पार्क में टहलने निकली एक महिला के पास पहुंचा। महिला को यह बात समझ नहीं आई और तभी उनमें से एक बंदर महिला के पास गया और उसका बैग छीनकर भाग गया। महिला ने पीछे मुड़कर देखा तो बंदर काफी दूर जा चुका था। महिला ने बंदर का पीछा किया लेकिन वह भाग गया। इसके बाद बंदर ने महिला का बैग उठाकर गहरी खाई में फेंक दिया। महिला उस पर चिल्लाने लगी, उसकी आवाज सुनकर पार्क के कर्मचारी वहां पहुंचे और महिला ने पूरी सच्चाई बताई। इसके बाद पार्क के कई कर्मचारियों ने बैग को घाटी से बाहर निकालने के लिए अभियान चलाया। अंत में रस्सियों व अन्य सामान की मदद से महिला के बैग को कुछ देर बाद बाहर निकाला गया। इन सबके बीच अच्छी बात यह रही कि बंदर बैग की चेन नहीं खोल सका। जिससे एक लाख रुपए व महिला के कई दस्तावेज उस बैग में सुरक्षित निकल गए। इस महिला ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया है। हालांकि सोशल मीडिया पर लोग महिला को दोष दे रहे हैं तो कुछ यह भी कह रहे हैं कि इसमें किसी की गलती नहीं है।
शिक्षक का कर्तव्य बोध / १२५ कन्फ्यूशियस बहुत वडा दार्शनिक था, बहुत बडा सतथा । वह बोला, 'नैवक उम आदमी को चाहिए जो आलसी होता है। मैं आलसी नही हू, इसलिए मेरे साम्राज्य मे सेवक की जरूरत नहीं हैं।' सम्राट् ने पूछा, 'वताओ, तुम्हारे पास सेना है क्या ? बिना सेना के कोई सम्राट् कम हो सकता है ?" कन्फ्युणियस बोला, 'सेना उसे चाहिए जिसके शत्रु हो । दुनिया मे मेरा मे कोई शत्रु नही है। इसलिए मेरे साम्राज्य मे सेना की आवश्यकता नहीं है।' फिर पूछा, 'क्या तुम्हारे पास धन और वैभव है उत्तर मिला, 'धन और वैभव उसे चाहिए जो दरिद्र हो । मैं दरिद्र नही हू, इसलिए मुझे धन और वैभव की आवश्यकता नही है ।' फिर पूछा, 'तुम्हारा वेश भी सुन्दर नहीं हैं, फिर तुम कैसे सम्राट् हुए 'नुन्दर वेश उसे चाहिए जो कुरूप हो और अपनी कुरुपता को छिपाने के लिए उत्सुक हो । मैं अन्त सुन्दर हू । मुझे सुन्दर वेश की जरूरत नहीं है।' सम्राट् का सिर झुक गया । वेचारा क्या वोलता ? वह कुरूप था, इसलिए सुन्दर वेश बनाकर अपने को सुरूप दिखाना चाहता था। वह आलसी था, इन लिए दूसरों के मिर पर, दूसरो के कन्धो पर अपने मारे जीवन का सारा भार लादकर अपने ऐश्वर्य को प्रकट करना चाहता था । उसके हजारों-हजारो शत्रु थे । उनके साथ सैनिक नहीं होते तो न जाने कब गोली लग जाती । कब का वह मर जाता । इसलिए सेता उसे रखनी पड़ती थी । वह दरिद्र था । अपनी दरिद्रता को छिपाने के लिए बहुत वडे वैभव का अम्बार लगाना उसके लिए आवश्यक था । किन्तु कन्फ्युशियम का साम्राज्य इन सव वातो से परे था । वह वास्तव में दुनिया का सम्राट् था । हमारे जीवन की जो उपलब्धिया हैं, हमारे जीवन की जो विशेषताए हैं वे हमारी आन्तरिकता मे निहित होनी चाहिए और जो ज्ञान केवल दरिद्रता और शक्तिहीनता की दिशा मे मनुष्य को ले जाता है, वह ज्ञान, ज्ञान नही हो सकता । में शक्ति का उपासक नही हू किन्तु शक्ति मे बहुत विश्वास करता हू और यह निश्चित मानता हू कि जो व्यक्ति शक्तिहीन होता है उसे दुनिया मे न्याय पाने का अधिकार कभी नही मिल सकता । न्याय उसी व्यक्ति को मिलता हैं, जिसके हाथ में शक्ति होती है। शक्तिहीन और दुर्बल व्यक्ति न्याय की भीख मागता फिरे, पर दुनिया मे कोई भगवान् भी ऐसा दयालु नही है कि शक्तिहीन को न्याय दे दे। न्याय उन्हीं लोगों को मिला है जिसके पीछे शक्ति का वरदान रहा है। कमजोर को न्याय देने के लिए न कोई दुनिया मे भगवान् पहले आया, न आज आ सकता है, न भविष्य मे जाने वाला है। हमारे जितने भी भगवान् हुए है, हम जिनको भगवान् मानते रहे है, मानते चले जा रहे हैं, उनके साथ आप शक्ति को
शिक्षक का कर्तव्य बोध / एक सौ पच्चीस कन्फ्यूशियस बहुत वडा दार्शनिक था, बहुत बडा सतथा । वह बोला, 'नैवक उम आदमी को चाहिए जो आलसी होता है। मैं आलसी नही हू, इसलिए मेरे साम्राज्य मे सेवक की जरूरत नहीं हैं।' सम्राट् ने पूछा, 'वताओ, तुम्हारे पास सेना है क्या ? बिना सेना के कोई सम्राट् कम हो सकता है ?" कन्फ्युणियस बोला, 'सेना उसे चाहिए जिसके शत्रु हो । दुनिया मे मेरा मे कोई शत्रु नही है। इसलिए मेरे साम्राज्य मे सेना की आवश्यकता नहीं है।' फिर पूछा, 'क्या तुम्हारे पास धन और वैभव है उत्तर मिला, 'धन और वैभव उसे चाहिए जो दरिद्र हो । मैं दरिद्र नही हू, इसलिए मुझे धन और वैभव की आवश्यकता नही है ।' फिर पूछा, 'तुम्हारा वेश भी सुन्दर नहीं हैं, फिर तुम कैसे सम्राट् हुए 'नुन्दर वेश उसे चाहिए जो कुरूप हो और अपनी कुरुपता को छिपाने के लिए उत्सुक हो । मैं अन्त सुन्दर हू । मुझे सुन्दर वेश की जरूरत नहीं है।' सम्राट् का सिर झुक गया । वेचारा क्या वोलता ? वह कुरूप था, इसलिए सुन्दर वेश बनाकर अपने को सुरूप दिखाना चाहता था। वह आलसी था, इन लिए दूसरों के मिर पर, दूसरो के कन्धो पर अपने मारे जीवन का सारा भार लादकर अपने ऐश्वर्य को प्रकट करना चाहता था । उसके हजारों-हजारो शत्रु थे । उनके साथ सैनिक नहीं होते तो न जाने कब गोली लग जाती । कब का वह मर जाता । इसलिए सेता उसे रखनी पड़ती थी । वह दरिद्र था । अपनी दरिद्रता को छिपाने के लिए बहुत वडे वैभव का अम्बार लगाना उसके लिए आवश्यक था । किन्तु कन्फ्युशियम का साम्राज्य इन सव वातो से परे था । वह वास्तव में दुनिया का सम्राट् था । हमारे जीवन की जो उपलब्धिया हैं, हमारे जीवन की जो विशेषताए हैं वे हमारी आन्तरिकता मे निहित होनी चाहिए और जो ज्ञान केवल दरिद्रता और शक्तिहीनता की दिशा मे मनुष्य को ले जाता है, वह ज्ञान, ज्ञान नही हो सकता । में शक्ति का उपासक नही हू किन्तु शक्ति मे बहुत विश्वास करता हू और यह निश्चित मानता हू कि जो व्यक्ति शक्तिहीन होता है उसे दुनिया मे न्याय पाने का अधिकार कभी नही मिल सकता । न्याय उसी व्यक्ति को मिलता हैं, जिसके हाथ में शक्ति होती है। शक्तिहीन और दुर्बल व्यक्ति न्याय की भीख मागता फिरे, पर दुनिया मे कोई भगवान् भी ऐसा दयालु नही है कि शक्तिहीन को न्याय दे दे। न्याय उन्हीं लोगों को मिला है जिसके पीछे शक्ति का वरदान रहा है। कमजोर को न्याय देने के लिए न कोई दुनिया मे भगवान् पहले आया, न आज आ सकता है, न भविष्य मे जाने वाला है। हमारे जितने भी भगवान् हुए है, हम जिनको भगवान् मानते रहे है, मानते चले जा रहे हैं, उनके साथ आप शक्ति को
Patna, Beforeprint : बिहार में इन दिनों सरकारी बंगलों को लेकर सियासी घमासान तेज है। सरकार द्वारा पूर्व डिप्टी सीएम रेणू देवी और तारकिशोर प्रसाद को बंगला खाली करने का नोटिस क्या जारी किया बीजेपी ने सरकार की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने सरकार पर ही सवाल खड़े कर दिये। उन्होंने आरोप लगाया कि जेडीयू की अनुकंपा से तमाम ऐसे लोगों को बंगला मिला है जो एमएलए और एमएलसी नहीं हैं। वहीं, बीजेपी के पूर्व उप मुख्यमंत्रियों को नोटिस जारी किया जा रहा है। संजय जायसवाल के इस बयान के बाद जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने बड़ी बात कह दी है। उन्होंने कहा है कि संजय जायसवाल और सुशील मोदी के बीच खुद को साबित करने की प्रतियोगिता चल रही है। और इसी के चलते दोनों बेमतलब की बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जेडीयू (JDU) संजय जायसवाल और सुशील मोदी की बातों को तरजीह नहीं देती है। उन्होंने कहा है कि जायसवाल और सुशील के बीच ज्यादा बोलने की भी प्रतिस्पर्धा चल रही है। हो क्या रहा है कि आज संजय जायसवाल कुछ बोलेंगे तो कल सुशील मोदी कुछ कहेंगे। इसलिए उनकी बातों का जवाब देना वह उचित नहीं समझते हैं। संजय जायसवाल और सुशील मोदी अगर कोई मतलब की बात करें तब तो उसका जवाब दिया जाएगा। वहीं एक सवाल के बारे में ललन सिंह ने कुढ़नी विधानसभा उपचुनाव में जीत का दावा करते हुए कहा कि यहां महागठबंधन की जीत पहले से तय है। वहीं JDU के 70 लाख सदस्य बनाने पर उन्होंने कहा कि युवा देश के भविष्य होते हैं। राजनीति और देश के भविष्य तो युवा ही हैं, हम लोग कितने दिन राजनीति करेंगे। जेडीयू ने युवाओं पर फोकस किया है। तभी युवा जेडीयू के साथ जुड़ रहे हैं।
Patna, Beforeprint : बिहार में इन दिनों सरकारी बंगलों को लेकर सियासी घमासान तेज है। सरकार द्वारा पूर्व डिप्टी सीएम रेणू देवी और तारकिशोर प्रसाद को बंगला खाली करने का नोटिस क्या जारी किया बीजेपी ने सरकार की मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने सरकार पर ही सवाल खड़े कर दिये। उन्होंने आरोप लगाया कि जेडीयू की अनुकंपा से तमाम ऐसे लोगों को बंगला मिला है जो एमएलए और एमएलसी नहीं हैं। वहीं, बीजेपी के पूर्व उप मुख्यमंत्रियों को नोटिस जारी किया जा रहा है। संजय जायसवाल के इस बयान के बाद जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने बड़ी बात कह दी है। उन्होंने कहा है कि संजय जायसवाल और सुशील मोदी के बीच खुद को साबित करने की प्रतियोगिता चल रही है। और इसी के चलते दोनों बेमतलब की बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जेडीयू संजय जायसवाल और सुशील मोदी की बातों को तरजीह नहीं देती है। उन्होंने कहा है कि जायसवाल और सुशील के बीच ज्यादा बोलने की भी प्रतिस्पर्धा चल रही है। हो क्या रहा है कि आज संजय जायसवाल कुछ बोलेंगे तो कल सुशील मोदी कुछ कहेंगे। इसलिए उनकी बातों का जवाब देना वह उचित नहीं समझते हैं। संजय जायसवाल और सुशील मोदी अगर कोई मतलब की बात करें तब तो उसका जवाब दिया जाएगा। वहीं एक सवाल के बारे में ललन सिंह ने कुढ़नी विधानसभा उपचुनाव में जीत का दावा करते हुए कहा कि यहां महागठबंधन की जीत पहले से तय है। वहीं JDU के सत्तर लाख सदस्य बनाने पर उन्होंने कहा कि युवा देश के भविष्य होते हैं। राजनीति और देश के भविष्य तो युवा ही हैं, हम लोग कितने दिन राजनीति करेंगे। जेडीयू ने युवाओं पर फोकस किया है। तभी युवा जेडीयू के साथ जुड़ रहे हैं।
(छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल, फाइल फोटो) ( Image Source : Bhupesh Baghel Twitter ) Raigarh Ramayan Mahotsav: छत्तीसगढ़ में पहली बार राष्ट्रीय रामायण महोत्सव होने जा रहा है जिसको लेकर तैयारियां जोरों पर है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस महोत्सव में शामिल होने के लिए देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित राज्यों के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर आग्रह किया है. आपको बता दें कि राष्ट्रीय रामायण महोत्सव 1 जून से 3 जून तक छत्तीसगढ़ के रायगढ़ रामलीला मैदान पर होगा. मुख्यमंत्री भुपेश बघेल ने अपने पत्र में लिखा है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी से इस राष्ट्रीय रामायण महोत्सव की भव्यता एवं गरिमा और बढ़ेगी. सीएम बघेल ने पत्र में यह भी लिखा है कि राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के अंतर्गत प्रतियोगी कार्यक्रम होंगे, जिसमें प्रस्तुत की जाने वाली नृत्य नाटिका का विषय महाकाव्य रामायण के अरण्य-कांड पर आधारित होगा. छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति की नगरी रायगढ़ के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. 'माता कौशल्या की जन्मभूमि होने का विशेष गौरव प्राप्त है' मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में लिखा है कि छत्तीसगढ़ राज्य धार्मिक व सांस्कृतिक विरासतों से समृद्ध एक ऐसा प्रदेश है. जिसका श्री राम, माता कौशल्या व उनके जीवन चरित्र पर आधारित महाकाव्य रामायण से बहुत गहरा संबंध है. हमारे राज्य को श्रीराम की माता कौशल्या की जन्मभूमि होने का विशेष गौरव प्राप्त है. माता कौशल्या का जन्म तत्कालीन दक्षिण कोसल में हुआ था, जो वर्तमान छत्तीसगढ़ में है. माता कौशल्या को उनके उदार भाव, उनके ज्ञान व श्री राम के प्रति उनके वात्सल्य भाव के लिये जाना जाता है, यही कारण है कि उन्हें मातृत्व भाव के प्रतीक के रूप में कई स्थानों पर पूजा जाता है. 'छत्तीसगढ़ एकमात्र राज्य है जहां माता कौशल्या का मंदिर है' आगे सीएम ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य एक मात्र ऐसा राज्य है जहां माता कौशल्या को समर्पित मंदिर स्थापित है. यह मंदिर रायपुर जिले में चन्द्रखुरी नामक स्थान पर स्थित है. मुख्यमंत्री ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि भगवान राम धर्म व सदाचार के प्रतीक के रूप में हमारे देश सहित विदेशों में भी सर्वाधिक पूजनीय देवता है. श्रीराम के चरित्र को सदैव ही एक आदर्श राजा, एक आदर्श पति, एक आदर्श भाई व एक आदर्श पुत्र के रूप में चित्रित किया गया है. रामायण में उनके द्वारा किये गये कार्यों व उनकी शिक्षाओं ने प्राचीन काल से पीढ़ियों को नैतिकता के मार्ग पर चलने व उनका अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देश के सभी मुख्यमंत्री और केंद्र शासित राज्यों के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर इस महोत्सव में शामिल होने का आग्रह किया है. मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि राज्य द्वारा राष्ट्रीय रामायण महोत्सव आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है. जो 01 जून 2023 से 03 जून 2023 तक छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के राम लीला मैदान में आयोजित होना प्रस्तावित है. यह एक प्रकार का प्रतियोगिता वाला कार्यक्रम होगा. सीएम ने कहा कि आपके राज्य से रामायण 'झांकी प्रदर्शन' समूह के प्रतिनिधि मंडल को आमंत्रित करते हुए हमें अत्यंत हर्ष का अनुभव हो रहा है. नृत्य नाटिका का विषय महाकाव्य रामायण के अरण्यकांड पर आधारित होगा. मुख्यमंत्री ने आग्रह किया है कि राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में आपके राज्य की गरिमामय उपस्थिति से कार्यक्रम की भव्यता व उत्साह में और अधिक वृद्धि होगी.
Raigarh Ramayan Mahotsav: छत्तीसगढ़ में पहली बार राष्ट्रीय रामायण महोत्सव होने जा रहा है जिसको लेकर तैयारियां जोरों पर है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस महोत्सव में शामिल होने के लिए देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित राज्यों के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर आग्रह किया है. आपको बता दें कि राष्ट्रीय रामायण महोत्सव एक जून से तीन जून तक छत्तीसगढ़ के रायगढ़ रामलीला मैदान पर होगा. मुख्यमंत्री भुपेश बघेल ने अपने पत्र में लिखा है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी से इस राष्ट्रीय रामायण महोत्सव की भव्यता एवं गरिमा और बढ़ेगी. सीएम बघेल ने पत्र में यह भी लिखा है कि राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के अंतर्गत प्रतियोगी कार्यक्रम होंगे, जिसमें प्रस्तुत की जाने वाली नृत्य नाटिका का विषय महाकाव्य रामायण के अरण्य-कांड पर आधारित होगा. छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति की नगरी रायगढ़ के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. 'माता कौशल्या की जन्मभूमि होने का विशेष गौरव प्राप्त है' मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में लिखा है कि छत्तीसगढ़ राज्य धार्मिक व सांस्कृतिक विरासतों से समृद्ध एक ऐसा प्रदेश है. जिसका श्री राम, माता कौशल्या व उनके जीवन चरित्र पर आधारित महाकाव्य रामायण से बहुत गहरा संबंध है. हमारे राज्य को श्रीराम की माता कौशल्या की जन्मभूमि होने का विशेष गौरव प्राप्त है. माता कौशल्या का जन्म तत्कालीन दक्षिण कोसल में हुआ था, जो वर्तमान छत्तीसगढ़ में है. माता कौशल्या को उनके उदार भाव, उनके ज्ञान व श्री राम के प्रति उनके वात्सल्य भाव के लिये जाना जाता है, यही कारण है कि उन्हें मातृत्व भाव के प्रतीक के रूप में कई स्थानों पर पूजा जाता है. 'छत्तीसगढ़ एकमात्र राज्य है जहां माता कौशल्या का मंदिर है' आगे सीएम ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य एक मात्र ऐसा राज्य है जहां माता कौशल्या को समर्पित मंदिर स्थापित है. यह मंदिर रायपुर जिले में चन्द्रखुरी नामक स्थान पर स्थित है. मुख्यमंत्री ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि भगवान राम धर्म व सदाचार के प्रतीक के रूप में हमारे देश सहित विदेशों में भी सर्वाधिक पूजनीय देवता है. श्रीराम के चरित्र को सदैव ही एक आदर्श राजा, एक आदर्श पति, एक आदर्श भाई व एक आदर्श पुत्र के रूप में चित्रित किया गया है. रामायण में उनके द्वारा किये गये कार्यों व उनकी शिक्षाओं ने प्राचीन काल से पीढ़ियों को नैतिकता के मार्ग पर चलने व उनका अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देश के सभी मुख्यमंत्री और केंद्र शासित राज्यों के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर इस महोत्सव में शामिल होने का आग्रह किया है. मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि राज्य द्वारा राष्ट्रीय रामायण महोत्सव आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है. जो एक जून दो हज़ार तेईस से तीन जून दो हज़ार तेईस तक छत्तीसगढ़ के रायगढ़ के राम लीला मैदान में आयोजित होना प्रस्तावित है. यह एक प्रकार का प्रतियोगिता वाला कार्यक्रम होगा. सीएम ने कहा कि आपके राज्य से रामायण 'झांकी प्रदर्शन' समूह के प्रतिनिधि मंडल को आमंत्रित करते हुए हमें अत्यंत हर्ष का अनुभव हो रहा है. नृत्य नाटिका का विषय महाकाव्य रामायण के अरण्यकांड पर आधारित होगा. मुख्यमंत्री ने आग्रह किया है कि राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में आपके राज्य की गरिमामय उपस्थिति से कार्यक्रम की भव्यता व उत्साह में और अधिक वृद्धि होगी.
नई दिल्ली,टीम डिजिटल। एक्ट्रेस आलिया भट्ट ने अपने इंस्टाग्राम पर नई फोटोज पोस्ट कीं हैं और फैंस उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं। आलिया हाल ही में अपने पति, रणबीर कपूर के साथ राधिका मर्चेंट और अनंत अंबानी की सगाई की ग्रैंड पार्टी में शामिल हुईं थी, उन्होंने इवेंट से अपने लुक की क्लोजअप फोटोज शेयर की। पार्टी के लिए आलिया ने शरारा के साथ मिंट ग्रीन ब्लेजर कुर्ता पहना था। एक्ट्रेस ने इसे अपने सिग्नेचर ग्लोइंग मेकअप के साथ पेयर किया साथ ही आलिया ने अपने बालों को खुला छोड़ा। फोटोज को शेयर करते हुए, आलिया ने कैप्शन में केवल एक स्नोफ्लेक इमोजी जोड़ा। ये सभी फोटोज आलिया और रणबीर के घर पर क्लिक की गई लग रही थीं। बीते गुरुवार रात आलिया रणबीर कपूर के साथ नज़र आई थी। नवंबर में अपनी बच्ची राहा के जन्म के बाद यह उनकी पहली पार्टी थी। इस पार्टी में शाहरुख खान, सलमान खान, रणवीर सिंह, जाह्नवी कपूर और जाह्नवी कपूर भी मौजूद थे। आलिया जल्द ही करण जौहर की अपकमिंग फिल्म "रॉकी और रानी की प्रेम कहानी" में रणवीर सिंह के साथ नजर आएंगी। इसमें धर्मेंद्र, जया बच्चन और शबाना आजमी भी हैं। यह फिल्म 28 अप्रैल 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। आलिया, कैटरीना कैफ और प्रियंका चोपड़ा के साथ फरहान अख्तर की फिल्म 'जी ले जरा' का भी हिस्सा हैं। इसके अलावा उनके पास "हार्ट ऑफ स्टोन" भी है। A post shared by Alia Bhatt 💛 (@aliaabhatt) A post shared by Alia Bhatt 💛 (@aliaabhatt)
नई दिल्ली,टीम डिजिटल। एक्ट्रेस आलिया भट्ट ने अपने इंस्टाग्राम पर नई फोटोज पोस्ट कीं हैं और फैंस उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं। आलिया हाल ही में अपने पति, रणबीर कपूर के साथ राधिका मर्चेंट और अनंत अंबानी की सगाई की ग्रैंड पार्टी में शामिल हुईं थी, उन्होंने इवेंट से अपने लुक की क्लोजअप फोटोज शेयर की। पार्टी के लिए आलिया ने शरारा के साथ मिंट ग्रीन ब्लेजर कुर्ता पहना था। एक्ट्रेस ने इसे अपने सिग्नेचर ग्लोइंग मेकअप के साथ पेयर किया साथ ही आलिया ने अपने बालों को खुला छोड़ा। फोटोज को शेयर करते हुए, आलिया ने कैप्शन में केवल एक स्नोफ्लेक इमोजी जोड़ा। ये सभी फोटोज आलिया और रणबीर के घर पर क्लिक की गई लग रही थीं। बीते गुरुवार रात आलिया रणबीर कपूर के साथ नज़र आई थी। नवंबर में अपनी बच्ची राहा के जन्म के बाद यह उनकी पहली पार्टी थी। इस पार्टी में शाहरुख खान, सलमान खान, रणवीर सिंह, जाह्नवी कपूर और जाह्नवी कपूर भी मौजूद थे। आलिया जल्द ही करण जौहर की अपकमिंग फिल्म "रॉकी और रानी की प्रेम कहानी" में रणवीर सिंह के साथ नजर आएंगी। इसमें धर्मेंद्र, जया बच्चन और शबाना आजमी भी हैं। यह फिल्म अट्ठाईस अप्रैल दो हज़ार तेईस को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। आलिया, कैटरीना कैफ और प्रियंका चोपड़ा के साथ फरहान अख्तर की फिल्म 'जी ले जरा' का भी हिस्सा हैं। इसके अलावा उनके पास "हार्ट ऑफ स्टोन" भी है। A post shared by Alia Bhatt 💛 A post shared by Alia Bhatt 💛
समुदाय के अधिकारों और सुरक्षा के लिए खड़े होने के लिए समर्पित हैं, "डिज्नी के प्रवक्ता ने कहा समय। रिपब्लिकन गॉव रॉन डेसेंटिस और द वॉल्ट डिज़नी कंपनी के बीच विवाद बुधवार को सार्वजनिक रूप से जारी रहा जब फ्लोरिडा राज्य सीनेट ने एक विधेयक पारित किया जो राज्य में वॉल्ट डिज़नी वर्ल्ड के विशेष जिले को खत्म कर देगा। कानून, जिसे पुनर्वितरण पर केंद्रित विधायिका के एक विशेष सत्र के दौरान मतदान किया गया था, को रिपब्लिकन द्वारा आगे रखा गया था जब डिज्नी ने फ्लोरिडा के शिक्षा कानून में अत्यधिक विवादास्पद माता-पिता के अधिकारों का विरोध किया था, जिसे आलोचकों ने "डोंट से गे" बिल के रूप में करार दिया था। "मैं आज घोषणा कर रहा हूं कि हम इस सप्ताह जो विचार करने जा रहे हैं, उसका विस्तार कर रहे हैं। और हां, वे कांग्रेस के नक्शे पर विचार करेंगे, लेकिन वे उन सभी विशेष जिलों को समाप्त करने पर भी विचार करेंगे जो पहले फ्लोरिडा में अधिनियमित किए गए थे। 1968 तक, और इसमें रेडी क्रीक इम्प्रूवमेंट डिस्ट्रिक्ट भी शामिल है," डिसेंटिस ने मंगलवार को डिज्नी के जिले का जिक्र करते हुए कहा। फ़्लोरिडा सीनेट ने बिल को 23-16 वोटों से पारित कर दिया, और गुरुवार तक वोट के लिए तेजी से सदन में जाने की उम्मीद है। यदि सदन द्वारा पारित किया जाता है और कानून में हस्ताक्षर किए जाते हैं, तो यह उस विशेष जिले को समाप्त कर देगा जिसका उपयोग वॉल्ट डिज़नी वर्ल्ड अपनी नगरपालिका के रूप में करता है और थीम पार्कों के भविष्य पर अदालती लड़ाई लड़ सकता है। एबीसी न्यूज का स्वामित्व वॉल्ट डिज़नी कंपनी के पास है, जो वॉल्ट डिज़नी वर्ल्ड का भी मालिक है। राज्य प्रतिनिधि रैंडी फाइन, उपाय के प्रायोजक, बिल के बारे में सहयोगियों के सवालों का सामना करने के लिए बुधवार को समिति में थे, और कुछ ने पूछा कि क्या इरादा वॉल्ट डिज़नी कंपनी को लक्षित करना था। रेप कार्लोस गिलर्मो स्मिथ ने फाइन से पूछा कि अन्य विशेष जिलों का क्या होगा जिन्हें कानून के तहत समाप्त कर दिया जाएगा और यदि वे "डिज्नी के खिलाफ इस प्रतिशोध की हताहत" बन जाएंगे। फाइन ने यह कहते हुए पीछे धकेल दिया कि रिपब्लिकन सभी विशेष जिलों में देख रहे हैं, न कि केवल डिज्नी के। रेडी क्रीक इम्प्रूवमेंट डिस्ट्रिक्ट उन छह जिलों में से एक है जिसे बिल खत्म कर देगा। यह 25,000 एकड़ में फैला है और अपने स्वयं के भूमि उपयोग और पर्यावरण सुरक्षा की देखरेख करता है और साथ ही आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और अग्नि सुरक्षा जैसी आवश्यक सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करता है। मीडिया समूह द्वारा फ़्लोरिडा के नए कानून के बारे में बात करने के बाद डिज़नी की स्थिति डीसेंटिस की सार्वजनिक जांच का विषय बन गई, जो कक्षाओं में लिंग पहचान और यौन अभिविन्यास के शिक्षण को सीमित करता है और मार्च के अंत में डेसेंटिस ने कानून में हस्ताक्षर किए। वॉल्ट डिज़नी कंपनी ने अपील में मदद करने की कसम खाई थी। यह। "फ्लोरिडा का 'डोंट से गे' बिल, कभी भी पारित नहीं होना चाहिए था और कभी भी कानून में हस्ताक्षर नहीं किया जाना चाहिए था। एक कंपनी के रूप में हमारा लक्ष्य इस कानून को विधायिका द्वारा निरस्त किया जाना है या अदालतों में मारा जाना है, और हम प्रतिबद्ध हैं इसे हासिल करने के लिए काम कर रहे राष्ट्रीय और राज्य संगठनों का समर्थन करने के लिए। हम डिज्नी परिवार के एलजीबीटीक्यू+ सदस्यों के अधिकारों और सुरक्षा के साथ-साथ फ्लोरिडा और देश भर में एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के अधिकारों और सुरक्षा के लिए खड़े होने के लिए समर्पित हैं, "डिज्नी के प्रवक्ता ने कहा समय।
समुदाय के अधिकारों और सुरक्षा के लिए खड़े होने के लिए समर्पित हैं, "डिज्नी के प्रवक्ता ने कहा समय। रिपब्लिकन गॉव रॉन डेसेंटिस और द वॉल्ट डिज़नी कंपनी के बीच विवाद बुधवार को सार्वजनिक रूप से जारी रहा जब फ्लोरिडा राज्य सीनेट ने एक विधेयक पारित किया जो राज्य में वॉल्ट डिज़नी वर्ल्ड के विशेष जिले को खत्म कर देगा। कानून, जिसे पुनर्वितरण पर केंद्रित विधायिका के एक विशेष सत्र के दौरान मतदान किया गया था, को रिपब्लिकन द्वारा आगे रखा गया था जब डिज्नी ने फ्लोरिडा के शिक्षा कानून में अत्यधिक विवादास्पद माता-पिता के अधिकारों का विरोध किया था, जिसे आलोचकों ने "डोंट से गे" बिल के रूप में करार दिया था। "मैं आज घोषणा कर रहा हूं कि हम इस सप्ताह जो विचार करने जा रहे हैं, उसका विस्तार कर रहे हैं। और हां, वे कांग्रेस के नक्शे पर विचार करेंगे, लेकिन वे उन सभी विशेष जिलों को समाप्त करने पर भी विचार करेंगे जो पहले फ्लोरिडा में अधिनियमित किए गए थे। एक हज़ार नौ सौ अड़सठ तक, और इसमें रेडी क्रीक इम्प्रूवमेंट डिस्ट्रिक्ट भी शामिल है," डिसेंटिस ने मंगलवार को डिज्नी के जिले का जिक्र करते हुए कहा। फ़्लोरिडा सीनेट ने बिल को तेईस-सोलह वोटों से पारित कर दिया, और गुरुवार तक वोट के लिए तेजी से सदन में जाने की उम्मीद है। यदि सदन द्वारा पारित किया जाता है और कानून में हस्ताक्षर किए जाते हैं, तो यह उस विशेष जिले को समाप्त कर देगा जिसका उपयोग वॉल्ट डिज़नी वर्ल्ड अपनी नगरपालिका के रूप में करता है और थीम पार्कों के भविष्य पर अदालती लड़ाई लड़ सकता है। एबीसी न्यूज का स्वामित्व वॉल्ट डिज़नी कंपनी के पास है, जो वॉल्ट डिज़नी वर्ल्ड का भी मालिक है। राज्य प्रतिनिधि रैंडी फाइन, उपाय के प्रायोजक, बिल के बारे में सहयोगियों के सवालों का सामना करने के लिए बुधवार को समिति में थे, और कुछ ने पूछा कि क्या इरादा वॉल्ट डिज़नी कंपनी को लक्षित करना था। रेप कार्लोस गिलर्मो स्मिथ ने फाइन से पूछा कि अन्य विशेष जिलों का क्या होगा जिन्हें कानून के तहत समाप्त कर दिया जाएगा और यदि वे "डिज्नी के खिलाफ इस प्रतिशोध की हताहत" बन जाएंगे। फाइन ने यह कहते हुए पीछे धकेल दिया कि रिपब्लिकन सभी विशेष जिलों में देख रहे हैं, न कि केवल डिज्नी के। रेडी क्रीक इम्प्रूवमेंट डिस्ट्रिक्ट उन छह जिलों में से एक है जिसे बिल खत्म कर देगा। यह पच्चीस,शून्य एकड़ में फैला है और अपने स्वयं के भूमि उपयोग और पर्यावरण सुरक्षा की देखरेख करता है और साथ ही आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और अग्नि सुरक्षा जैसी आवश्यक सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करता है। मीडिया समूह द्वारा फ़्लोरिडा के नए कानून के बारे में बात करने के बाद डिज़नी की स्थिति डीसेंटिस की सार्वजनिक जांच का विषय बन गई, जो कक्षाओं में लिंग पहचान और यौन अभिविन्यास के शिक्षण को सीमित करता है और मार्च के अंत में डेसेंटिस ने कानून में हस्ताक्षर किए। वॉल्ट डिज़नी कंपनी ने अपील में मदद करने की कसम खाई थी। यह। "फ्लोरिडा का 'डोंट से गे' बिल, कभी भी पारित नहीं होना चाहिए था और कभी भी कानून में हस्ताक्षर नहीं किया जाना चाहिए था। एक कंपनी के रूप में हमारा लक्ष्य इस कानून को विधायिका द्वारा निरस्त किया जाना है या अदालतों में मारा जाना है, और हम प्रतिबद्ध हैं इसे हासिल करने के लिए काम कर रहे राष्ट्रीय और राज्य संगठनों का समर्थन करने के लिए। हम डिज्नी परिवार के एलजीबीटीक्यू+ सदस्यों के अधिकारों और सुरक्षा के साथ-साथ फ्लोरिडा और देश भर में एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के अधिकारों और सुरक्षा के लिए खड़े होने के लिए समर्पित हैं, "डिज्नी के प्रवक्ता ने कहा समय।
कोलकाता से गुवाहाटी के लिए उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद इंडिगो एयरलाइंस की एक फ्लाइट की नेताजी सुभाषचंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट आपात लैंडिंग करानी पड़ी. जब विमान ने उड़ान भरा था उस वक्त फ्लाइट में 76 लोग सवार थे. इंडिगो की फ्लाईट ने जैसे ही उड़ान भरने के 15 मिनट बाद ही कारगो एरिया से धुआं निकलने लगा और काकपिट का स्मोक अलार्म बजने लगा. जिसके बाद सुरक्षा की लिहाज से फ्लाइट की तुरंत आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी. फिलहाल विमान में 76 यात्री सवार थे और सभी सुरक्षित हैं. बता दें कि 8:30 बजे उड़ान भरी थी. जिसके बाद विमान के कारगो एरिया में से धुआं निकलने पर काकपिट में स्मोक अलार्म बज गया. वहीं इस बात की जानकारी जैसे पायलट को पता चली तो उन्होंने तत्काल इसकी जानकारी एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को दी और लगभग 15 मिनट बाद ही उसे लैंड करना पड़ा. फिलहाल अब इस घटना के बाद कारणों की जांच की जा रही है. गौरतलब हो कि कुछ महीने पहले जेट एयरवेज की मुंबई से जयपुर जा रही फ्लाइट में क्रू की लापरवाही से 100 से अधिक यात्रियों की जान पर बन आई. खबरों के मुताबिक विमान में सवार क्रू मेंबर केबिन प्रेशर को नियंत्रित रखने वाले स्विच का चयन करना भूल गए. जिसके कारण विमान में सवार 166 में से 30 यात्रियों की नाक और कान से खून बहने लगा और टेकऑफ के तुरंत बाद वापस मुंबई उतारना पड़ा था.
कोलकाता से गुवाहाटी के लिए उड़ान भरने के कुछ ही मिनट बाद इंडिगो एयरलाइंस की एक फ्लाइट की नेताजी सुभाषचंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट आपात लैंडिंग करानी पड़ी. जब विमान ने उड़ान भरा था उस वक्त फ्लाइट में छिहत्तर लोग सवार थे. इंडिगो की फ्लाईट ने जैसे ही उड़ान भरने के पंद्रह मिनट बाद ही कारगो एरिया से धुआं निकलने लगा और काकपिट का स्मोक अलार्म बजने लगा. जिसके बाद सुरक्षा की लिहाज से फ्लाइट की तुरंत आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी. फिलहाल विमान में छिहत्तर यात्री सवार थे और सभी सुरक्षित हैं. बता दें कि आठ:तीस बजे उड़ान भरी थी. जिसके बाद विमान के कारगो एरिया में से धुआं निकलने पर काकपिट में स्मोक अलार्म बज गया. वहीं इस बात की जानकारी जैसे पायलट को पता चली तो उन्होंने तत्काल इसकी जानकारी एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को दी और लगभग पंद्रह मिनट बाद ही उसे लैंड करना पड़ा. फिलहाल अब इस घटना के बाद कारणों की जांच की जा रही है. गौरतलब हो कि कुछ महीने पहले जेट एयरवेज की मुंबई से जयपुर जा रही फ्लाइट में क्रू की लापरवाही से एक सौ से अधिक यात्रियों की जान पर बन आई. खबरों के मुताबिक विमान में सवार क्रू मेंबर केबिन प्रेशर को नियंत्रित रखने वाले स्विच का चयन करना भूल गए. जिसके कारण विमान में सवार एक सौ छयासठ में से तीस यात्रियों की नाक और कान से खून बहने लगा और टेकऑफ के तुरंत बाद वापस मुंबई उतारना पड़ा था.
DESK : लियोनल मेसी की बदौलत अर्जेंटीना का फुटबॉल वर्ल्ड चैंपियन बनने का सपना पूरा हो गया। अर्जेंटीना ने रविवार देर रात खेले गए फीफा वर्ल्ड कप फाइनल में फ्रांस को पेनल्टी शूट आउट में 4-2 से हरा दिया। इस मैच के तय 90 मिनट तक दोनों टीमें 2-2 की बराबरी पर रही। इसके बाद भी एक्स्ट्रा टाइम के बाद मुकाबला 3 -2 पर रहा था। इसके बाद पेनल्टी शूटआउट से फैसला हुआ। फाइनल में मेसी ने दो गोल किए। वहीं, फ्रांस के लिए किलियन एमबाप्पे ने हैट्रिक जमाई। बता दें कि, अर्जेंटीना ने 36 साल बाद फीफा वर्ल्ड कप जीता है। इससे पहले उसे 1986 में इस टीम को खिताबी कामयाबी मिली थी। अर्जेंटीना का यह ओवरऑल तीसरा खिताब है। टीम 1978 में पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बनी थी। वहीं, फ्रांस का लगातार दूसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बनने का सपना अधूरा रहा गया। टीम 2018 में चैंपियन बनी थी। फ्रांस दूसरी बार वर्ल्ड कप के फाइनल में पेनल्टी शूटआउट में हारा है। इससे पहले उसे 2006 में इटली के खिलाफ फाइनल मुकाबले में पेनल्टी शूटआउट में हार मिली थी। इसके साथ हीअपना आखिरी विश्व कप खेल रहे लियोनेल मेसी की अधूरी ख्वाहिश पूरी हो गयी जिससे वह 2014 में चूक गये थे। डिएगो माराडोना (1986) के बाद उन्होंने अपनी टीम को दूसरी बार विश्व कप दिलाकर महानतम खिलाड़ियों की सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया। गौरतलब हो कि, मैदान पर भारी तादाद में जमा दर्शकों और दुनिया भर में टीवी के सामने नजरें गड़ाये बैठे फुटबॉल प्रेमियों की सांसें रोक देने वाले रोमांचक मैच में पासा पल पल पलटता रहा। अर्जेंटीना ने 80वें मिनट तक मेस्सी (23वां मिनट) और एंजेल डि मारियो (36वां मिनट) के गोलों के दम पर 2-0 की बढत बना ली थी। लेकिन, एमबाप्पे ने 80वें और 81वें मिनट में दो गोल करके मैच को अतिरिक्त समय तक खींच दिया। अतिरिक्त समय में मेसी ने 108वें मिनट में गोल दागा तो एमबाप्पे ने दस मिनट बाद फिर बराबरी करके मैच को पेनल्टी शूटआउट तक पहुंचा दिया। शूटआउट में सब्स्टीट्यूट गोंजालो मोंटियेल ने निर्णायक पेनल्टी पर गोल दागा जबकि फ्रांस के किंग्स्ले कोमैन और ओरेलियेन चोउआमेनी गोल करने से चूक गये।
DESK : लियोनल मेसी की बदौलत अर्जेंटीना का फुटबॉल वर्ल्ड चैंपियन बनने का सपना पूरा हो गया। अर्जेंटीना ने रविवार देर रात खेले गए फीफा वर्ल्ड कप फाइनल में फ्रांस को पेनल्टी शूट आउट में चार-दो से हरा दिया। इस मैच के तय नब्बे मिनट तक दोनों टीमें दो-दो की बराबरी पर रही। इसके बाद भी एक्स्ट्रा टाइम के बाद मुकाबला तीन -दो पर रहा था। इसके बाद पेनल्टी शूटआउट से फैसला हुआ। फाइनल में मेसी ने दो गोल किए। वहीं, फ्रांस के लिए किलियन एमबाप्पे ने हैट्रिक जमाई। बता दें कि, अर्जेंटीना ने छत्तीस साल बाद फीफा वर्ल्ड कप जीता है। इससे पहले उसे एक हज़ार नौ सौ छियासी में इस टीम को खिताबी कामयाबी मिली थी। अर्जेंटीना का यह ओवरऑल तीसरा खिताब है। टीम एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर में पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बनी थी। वहीं, फ्रांस का लगातार दूसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बनने का सपना अधूरा रहा गया। टीम दो हज़ार अट्ठारह में चैंपियन बनी थी। फ्रांस दूसरी बार वर्ल्ड कप के फाइनल में पेनल्टी शूटआउट में हारा है। इससे पहले उसे दो हज़ार छः में इटली के खिलाफ फाइनल मुकाबले में पेनल्टी शूटआउट में हार मिली थी। इसके साथ हीअपना आखिरी विश्व कप खेल रहे लियोनेल मेसी की अधूरी ख्वाहिश पूरी हो गयी जिससे वह दो हज़ार चौदह में चूक गये थे। डिएगो माराडोना के बाद उन्होंने अपनी टीम को दूसरी बार विश्व कप दिलाकर महानतम खिलाड़ियों की सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया। गौरतलब हो कि, मैदान पर भारी तादाद में जमा दर्शकों और दुनिया भर में टीवी के सामने नजरें गड़ाये बैठे फुटबॉल प्रेमियों की सांसें रोक देने वाले रोमांचक मैच में पासा पल पल पलटता रहा। अर्जेंटीना ने अस्सीवें मिनट तक मेस्सी और एंजेल डि मारियो के गोलों के दम पर दो-शून्य की बढत बना ली थी। लेकिन, एमबाप्पे ने अस्सीवें और इक्यासीवें मिनट में दो गोल करके मैच को अतिरिक्त समय तक खींच दिया। अतिरिक्त समय में मेसी ने एक सौ आठवें मिनट में गोल दागा तो एमबाप्पे ने दस मिनट बाद फिर बराबरी करके मैच को पेनल्टी शूटआउट तक पहुंचा दिया। शूटआउट में सब्स्टीट्यूट गोंजालो मोंटियेल ने निर्णायक पेनल्टी पर गोल दागा जबकि फ्रांस के किंग्स्ले कोमैन और ओरेलियेन चोउआमेनी गोल करने से चूक गये।
मुजफ्फरपुर के मोतीपुर थाना के भवानीडीह गाँव में चौकीदार पर हुए हमले के आरोपियों को पकड़ने गई पुलिस ग्रामीणों ने धावा बोल दिया ,जिसमे आठ पुलिस के जवान घायल हो गए। ग्रामीणों ने पुलिस के दो गाड़ियों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया और गिरफ्तार किये गए आरोपित को छुड़ा लिया। बता दे कि शुक्रवार की देर रात मोतीपुर चीनीमिल की जमीन पर अतिक्रमण करने गए लोगों ने चौकीदार भोला राम पर हमला कर दिया। जब इसकी खबर मोतीपुर थाना मिली तो उक्त गाँव में पुलिस टीम पहुंची। पुलिस ने दो आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया। गिरफ्तारी की खबर सुनते ग्रामीण उग्र हो गए और उन्होंने पुलिस पर हमला कर दिया। हमले में पुलिस के आठ जवान घायल हो गए जिन्हे पीएचसी में भर्ती कराया गया। उग्र ग्रामीणों ने एक आरोपी को पुलिस के अभिरक्षा से छुड़ा लिया और पुलिस के वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया।
मुजफ्फरपुर के मोतीपुर थाना के भवानीडीह गाँव में चौकीदार पर हुए हमले के आरोपियों को पकड़ने गई पुलिस ग्रामीणों ने धावा बोल दिया ,जिसमे आठ पुलिस के जवान घायल हो गए। ग्रामीणों ने पुलिस के दो गाड़ियों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया और गिरफ्तार किये गए आरोपित को छुड़ा लिया। बता दे कि शुक्रवार की देर रात मोतीपुर चीनीमिल की जमीन पर अतिक्रमण करने गए लोगों ने चौकीदार भोला राम पर हमला कर दिया। जब इसकी खबर मोतीपुर थाना मिली तो उक्त गाँव में पुलिस टीम पहुंची। पुलिस ने दो आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया। गिरफ्तारी की खबर सुनते ग्रामीण उग्र हो गए और उन्होंने पुलिस पर हमला कर दिया। हमले में पुलिस के आठ जवान घायल हो गए जिन्हे पीएचसी में भर्ती कराया गया। उग्र ग्रामीणों ने एक आरोपी को पुलिस के अभिरक्षा से छुड़ा लिया और पुलिस के वाहन को क्षतिग्रस्त कर दिया।
एशियन पेंट, एनटीपीसी, मारुति, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक, एलटी, भारती एयरटेल, आईटीसी, एमएंडएम, इंफी, टाइटन, रिलायंस, टीसीएस, नेस्लेइंडिया, एचडीएफसी बैंक आदि लाल निशान पर चल रहे हैं। इंफी, बजाज फाइनेंस, टाटा स्टील, सनफार्मा, आईटीसी, सनफार्मा, रिलायंस, विप्रो आदि हरे निशान पर बने हुए हैं। वहीं मारुति, एलटी, आईसीआईसीआई बैंक, भारती, एशियन पेंट लाल निशान पर ब्लिंक कर रहा है। जानकारी के अनुसार ग्लोबल मार्केट से लगातार कमजोर संकेत मिल रहे हैं। पांच दिन की लगातार तेजी के बाद अमेरिकी बाजार में गिरावट देखने को मिली। बीते बुधवार को भी मार्केट में अच्छे संकेत देखने को मिले थे। आज दिग्गज कंपनी और आईटी सेक्टर में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। निफ्टी 139 अंक ऊपर गया। इसे देखते ही निवेशकों के चेहरे खिल उठे। ग्लोबल बाजारों में हल्का सुधार का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है। सरार्फा कारोबार में आज सोना लुढ़का हुआ है वहीं चांदी का भाव स्थिर बना हुआ है। 24 कैरेट प्रति 10 ग्राम सोने का भाव आज 52,030 रुपये है। जबकि 1 किलोग्राम चांदी का भाव आज 57,400 रुपये पर स्थिर बना हुआ है। सरार्फा कारोबार में आज सोना और चांदी दोनों मजबूत हैं। राजधानी दिल्ली के सरार्फा कारोबार में आज प्रति 10 ग्राम 22 कैरेट सोने का भाव 47,650 रुपये है। 1 किलोग्राम चांदी का भाव 57,700 रुपये प्रति किलोग्राम है। आज सरार्फा कारोबार में सोना और चांदी दोनों की धातुओं के दाम गिरे हैं। राजधानी दिल्ली के वायदा कारोबार में आज 22 कैरेट प्रति 10 ग्राम सोने का भाव 47,300 रुपये पहुंच गया है।
एशियन पेंट, एनटीपीसी, मारुति, बजाज फाइनेंस, एचसीएल टेक, एलटी, भारती एयरटेल, आईटीसी, एमएंडएम, इंफी, टाइटन, रिलायंस, टीसीएस, नेस्लेइंडिया, एचडीएफसी बैंक आदि लाल निशान पर चल रहे हैं। इंफी, बजाज फाइनेंस, टाटा स्टील, सनफार्मा, आईटीसी, सनफार्मा, रिलायंस, विप्रो आदि हरे निशान पर बने हुए हैं। वहीं मारुति, एलटी, आईसीआईसीआई बैंक, भारती, एशियन पेंट लाल निशान पर ब्लिंक कर रहा है। जानकारी के अनुसार ग्लोबल मार्केट से लगातार कमजोर संकेत मिल रहे हैं। पांच दिन की लगातार तेजी के बाद अमेरिकी बाजार में गिरावट देखने को मिली। बीते बुधवार को भी मार्केट में अच्छे संकेत देखने को मिले थे। आज दिग्गज कंपनी और आईटी सेक्टर में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। निफ्टी एक सौ उनतालीस अंक ऊपर गया। इसे देखते ही निवेशकों के चेहरे खिल उठे। ग्लोबल बाजारों में हल्का सुधार का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है। सरार्फा कारोबार में आज सोना लुढ़का हुआ है वहीं चांदी का भाव स्थिर बना हुआ है। चौबीस कैरेट प्रति दस ग्राम सोने का भाव आज बावन,तीस रुपयापये है। जबकि एक किलोग्रामग्राम चांदी का भाव आज सत्तावन,चार सौ रुपयापये पर स्थिर बना हुआ है। सरार्फा कारोबार में आज सोना और चांदी दोनों मजबूत हैं। राजधानी दिल्ली के सरार्फा कारोबार में आज प्रति दस ग्राम बाईस कैरेट सोने का भाव सैंतालीस,छः सौ पचास रुपयापये है। एक किलोग्रामग्राम चांदी का भाव सत्तावन,सात सौ रुपयापये प्रति किलोग्राम है। आज सरार्फा कारोबार में सोना और चांदी दोनों की धातुओं के दाम गिरे हैं। राजधानी दिल्ली के वायदा कारोबार में आज बाईस कैरेट प्रति दस ग्राम सोने का भाव सैंतालीस,तीन सौ रुपयापये पहुंच गया है।
भारतीय कप्तान रोहित शर्मा को उम्मीद है कि देश में आगामी एकदिवसीय विश्व कप अत्यधिक प्रतिस्पर्धी होगा। उनकी मानें तो इस खेल की गति काफी बढ़ गई है। खेल के ताबड़तोड़ प्रारूप टी20 क्रिकेट ने सभी प्रारूपों को प्रभावित किया है। इससे पारंपरिक पांच दिवसीय प्रारूप भी अछूता नहीं है। अब टेस्ट मैच में भी बल्लेबाज आक्रामक शॉट लगाने से गुरेज नहीं करते हैं। भारत विश्व कप में आठ अक्टूबर को चेन्नई में पांच बार के चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना अभियान शुरू करेगा। उसका लक्ष्य अपना तीसरा और घरेलू मैदान पर दूसरा खिताब जीतना होगा। भारत को लीग चरण के अपने नौ मैचों को कोलकाता, मुंबई, नई दिल्ली, लखनऊ और बेंगलुरु सहित विभिन्न स्थानों पर खेलना है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच के बाद भारतीय टीम दिल्ली में 11 अक्टूबर को अफगानिस्तान का सामना करेगी। भारत और चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के बीच खेला जाना वाला बहुचर्चित मुकाबला 15 अक्टूबर को अहमदाबाद में होगा। राजनयिक तनाव के कारण दोनों पड़ोसी अब केवल आईसीसी और एसीसी (एशियाई क्रिकेट परिषद) आयोजनों में एक-दूसरे के खिलाफ खेलते हैं। दोनों देशों के बीच पिछला मुकाबला साल 2022 में ऑस्ट्रेलिया में टी20 विश्व कप के दौरान हुआ था। भारत और पाकिस्तान ने वनडे विश्व कप में सात बार (1992, 1996, 1999, 2003, 2011, 2015 और 2019) एक दूसरे का सामना किया है। हर बार भारतीय टीम विजेता रही है। दोनों टीमों ने 50 ओवर के प्रारूप के विश्व कप में 1987 और 2007 में एक दूसरे का सामना नहीं किया था। साल 2007 में दोनों टीमें ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ पाईं थीं, जबकि 1987 में दोनों अलग-अलग ग्रुप में थीं। तब दोनों ही टीमों को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा था। भारत के अन्य बड़े मुकाबलों में न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ क्रमशः 22 और 29 अक्टूबर को धर्मशाला और लखनऊ में होने वाले मैच शामिल हैं। टूर्नामेंट में पिछली बार के राउंड-रॉबिन प्रारूप को बरकरार रखा गया है। इसमें सभी टीमें कुल 45 लीग मैचों के दौरान एक-दूसरे के खिलाफ खेलेंगी। टूर्नामेंट में छह मुकाबले दिन (सुबह 10:30 से शुरू) के होंगे, जबकि बाकी के मैच दिन-रात्रि (दोपहर दो बजे से) में खेले जाएंगे। नॉकआउट मुकाबले भी दिन-रात्रि के होंगे। शीर्ष चार टीमें 15 नवंबर को मुंबई और 16 नवंबर को कोलकाता में खेले जाने वाले क्रमशः पहले और दूसरे सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करेंगी। सेमीफाइनल मुकाबलों और फाइनल मैच के लिए आरक्षित दिन भी है। भारत अगर सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करता है, तो वह अपना मैच मुंबई में खेलेगा।
भारतीय कप्तान रोहित शर्मा को उम्मीद है कि देश में आगामी एकदिवसीय विश्व कप अत्यधिक प्रतिस्पर्धी होगा। उनकी मानें तो इस खेल की गति काफी बढ़ गई है। खेल के ताबड़तोड़ प्रारूप टीबीस क्रिकेट ने सभी प्रारूपों को प्रभावित किया है। इससे पारंपरिक पांच दिवसीय प्रारूप भी अछूता नहीं है। अब टेस्ट मैच में भी बल्लेबाज आक्रामक शॉट लगाने से गुरेज नहीं करते हैं। भारत विश्व कप में आठ अक्टूबर को चेन्नई में पांच बार के चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना अभियान शुरू करेगा। उसका लक्ष्य अपना तीसरा और घरेलू मैदान पर दूसरा खिताब जीतना होगा। भारत को लीग चरण के अपने नौ मैचों को कोलकाता, मुंबई, नई दिल्ली, लखनऊ और बेंगलुरु सहित विभिन्न स्थानों पर खेलना है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच के बाद भारतीय टीम दिल्ली में ग्यारह अक्टूबर को अफगानिस्तान का सामना करेगी। भारत और चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के बीच खेला जाना वाला बहुचर्चित मुकाबला पंद्रह अक्टूबर को अहमदाबाद में होगा। राजनयिक तनाव के कारण दोनों पड़ोसी अब केवल आईसीसी और एसीसी आयोजनों में एक-दूसरे के खिलाफ खेलते हैं। दोनों देशों के बीच पिछला मुकाबला साल दो हज़ार बाईस में ऑस्ट्रेलिया में टीबीस विश्व कप के दौरान हुआ था। भारत और पाकिस्तान ने वनडे विश्व कप में सात बार एक दूसरे का सामना किया है। हर बार भारतीय टीम विजेता रही है। दोनों टीमों ने पचास ओवर के प्रारूप के विश्व कप में एक हज़ार नौ सौ सत्तासी और दो हज़ार सात में एक दूसरे का सामना नहीं किया था। साल दो हज़ार सात में दोनों टीमें ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ पाईं थीं, जबकि एक हज़ार नौ सौ सत्तासी में दोनों अलग-अलग ग्रुप में थीं। तब दोनों ही टीमों को सेमीफाइनल में हार का सामना करना पड़ा था। भारत के अन्य बड़े मुकाबलों में न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ क्रमशः बाईस और उनतीस अक्टूबर को धर्मशाला और लखनऊ में होने वाले मैच शामिल हैं। टूर्नामेंट में पिछली बार के राउंड-रॉबिन प्रारूप को बरकरार रखा गया है। इसमें सभी टीमें कुल पैंतालीस लीटरग मैचों के दौरान एक-दूसरे के खिलाफ खेलेंगी। टूर्नामेंट में छह मुकाबले दिन के होंगे, जबकि बाकी के मैच दिन-रात्रि में खेले जाएंगे। नॉकआउट मुकाबले भी दिन-रात्रि के होंगे। शीर्ष चार टीमें पंद्रह नवंबर को मुंबई और सोलह नवंबर को कोलकाता में खेले जाने वाले क्रमशः पहले और दूसरे सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करेंगी। सेमीफाइनल मुकाबलों और फाइनल मैच के लिए आरक्षित दिन भी है। भारत अगर सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करता है, तो वह अपना मैच मुंबई में खेलेगा।
यह एक सत्य और आंखों देखी घटना है। हमारा गांव गोंडा जिले में पड़ता है । यह उस समय की बात है। जब गांव में 18-19 साल की उम्र में सब लड़को की शादी हो जाती थी। उनमें से एक मेरा मित्र रमाकांत भी है। उसकी शादी 3 साल पहले हो चुकी थी. और अब उसका गौना भी आ गया था। उसकी बीवी बहुत निडर थी। इसको मैं निडर इसलिए बता रहा हूं कि उसकी निडरता एक दिन बहुत भारी पड़ गई थी। 3-4 सा पहले तक गांव की अधिकतर औरतें सुबह - सुबह उठकर लोटा लेकर नित्यक्रीया के लिए कोई खेत में तो कोई खुले मैदान में जाती थी। वो भी जब गांव के पुरूष लोग सो रहे हो तब जाती थी। कुछ दिन बीत गया। तो अब रमाकांत को एक सुंदर सी बेटी हुई। बेटी अभी 8 महीने की थी। उस समय उसकी बीवी सुबह-सुबह अकेले उठकर खेत में चली गई. और अपने सासू मां को या फिर अपनी जेठानी को भी नहीं जगाया। वह अकेले ही चली गई। क्योंकि वह तो बहुत निडर थी। लेकिन उस समय वह ना तो हाथ में चक्कू और ना ही माचिस लिया। जिस घर को बच्चा पैदा होता है। उसके एक साल तक उस घर की औरत को बाहर अकेले नहीं भेजा जाता। वह भी सुबह-सुबह बिना किसी को साथ लिए। क्योंकि उस औरत पे भूत प्रेत इन लोगों का साया जल्दी पड़ता है। लेकिन वह अकेले गई थी। तभी वहां बेल का पेड़ लगा था। उस पर एक चुड़ैल घूम रही थी। जो इसके साथ नहीं आना चाहती थी। लेकिन फिर भी वह आ गई। जब रमाकांत की औरत खेत से आई तो लौटा फेंककर पलंग पर बैठकर गाना गाने लगी। बगल में ही खाट पर लेटी हुई उसकी बच्ची जोर-जोर से रो रही थी। लेकिन वह तो गाने में व्यस्त थी। इसीलिए उसे सुनाई नहीं दिया। इतना देखकर रमाकांत चिल्लाने लगा। कि बेटी को उठाओ क्या तुम्हें सुनाई नहीं दे रहा है। कि वह रो रही है। फिर भी बीवी ने जवाब नहीं दिया। तब तक रमाकांत की भाभी आ गई. और वह समझ गई कि यह कौन है? और रमाकांत को इशारा किया कि जाओ दादा जी को बुला लाओ। इतना सुनते ही रामाकांत समझ गया कि मेरी बीवी के ऊपर कोई चुड़ैल का साया है। तभी भाभी ने दादाजी का नाम लिया। तब तो रामाकांत पलंग पर बैठ कर दादागिरी झाड़ने लगा और बोला कि तुम कौन हो? यहां पर क्यों आई हो? क्या तुम मुझसे शादी करना चाहती हो? (तब तक गांव की कुछ औरतें और कुछ पुरुष मजा लेने के लिए इकट्ठा हो गए) चुड़ैल ने कहा कि मुझमें तुम्हें क्यों दिलचस्पी हो रही है। क्यों मुझसे शादी करने के लिए आतुर हो। तो रमाकांत झट से बोला कि मैं कुछ काम धंधा तो करता नहीं। लेकिन अगर तुम साथ रहोगी तो धन दौलत लाती रहोगी। चुड़ैल ने हंसकर बोला ऐसा कुछ नहीं होता। हमारे में भी कोई ना कोई मुखिया जरूर रहता है। जो धन दौलत की रखवाली करता है। तुम चाहो तो हमारी दुनिया में चलो। तब मैं तुम्हें सब कुछ दूंगी पर अभी नहीं क्योंकि तुम जीवित हो। रमाकांत समझ गया कि अब मेरे हाथ कुछ नहीं आने वाला है। तो उसने बोला कि ब्राह्मण परिवार में आते हुए तुम्हें डर नही लगा। (और नीचे बैठे हुए सब लोग मजे लेते हंस रहे थे) तब तक दादाजी भी आ गए और बोला कि यहां से सब लोग हट जाओ और अपने-अपने घर जाओ। इतने में रमाकांत की बीवी भी पलंग से नीचे उतर कर सिर पर पल्लू डाल दिया और चुड़ैल भी चली गई। तब रामाकांत मन ही मन बड़-बडाने लगा। कि इनको भी अभी आना था। अगर थोड़ी देर बाद आते तो क्या पता मैं भी मालामाल हो जाता। बेचारा रमाकांत बहुत दुखी हो गया।
यह एक सत्य और आंखों देखी घटना है। हमारा गांव गोंडा जिले में पड़ता है । यह उस समय की बात है। जब गांव में अट्ठारह-उन्नीस साल की उम्र में सब लड़को की शादी हो जाती थी। उनमें से एक मेरा मित्र रमाकांत भी है। उसकी शादी तीन साल पहले हो चुकी थी. और अब उसका गौना भी आ गया था। उसकी बीवी बहुत निडर थी। इसको मैं निडर इसलिए बता रहा हूं कि उसकी निडरता एक दिन बहुत भारी पड़ गई थी। तीन-चार सा पहले तक गांव की अधिकतर औरतें सुबह - सुबह उठकर लोटा लेकर नित्यक्रीया के लिए कोई खेत में तो कोई खुले मैदान में जाती थी। वो भी जब गांव के पुरूष लोग सो रहे हो तब जाती थी। कुछ दिन बीत गया। तो अब रमाकांत को एक सुंदर सी बेटी हुई। बेटी अभी आठ महीने की थी। उस समय उसकी बीवी सुबह-सुबह अकेले उठकर खेत में चली गई. और अपने सासू मां को या फिर अपनी जेठानी को भी नहीं जगाया। वह अकेले ही चली गई। क्योंकि वह तो बहुत निडर थी। लेकिन उस समय वह ना तो हाथ में चक्कू और ना ही माचिस लिया। जिस घर को बच्चा पैदा होता है। उसके एक साल तक उस घर की औरत को बाहर अकेले नहीं भेजा जाता। वह भी सुबह-सुबह बिना किसी को साथ लिए। क्योंकि उस औरत पे भूत प्रेत इन लोगों का साया जल्दी पड़ता है। लेकिन वह अकेले गई थी। तभी वहां बेल का पेड़ लगा था। उस पर एक चुड़ैल घूम रही थी। जो इसके साथ नहीं आना चाहती थी। लेकिन फिर भी वह आ गई। जब रमाकांत की औरत खेत से आई तो लौटा फेंककर पलंग पर बैठकर गाना गाने लगी। बगल में ही खाट पर लेटी हुई उसकी बच्ची जोर-जोर से रो रही थी। लेकिन वह तो गाने में व्यस्त थी। इसीलिए उसे सुनाई नहीं दिया। इतना देखकर रमाकांत चिल्लाने लगा। कि बेटी को उठाओ क्या तुम्हें सुनाई नहीं दे रहा है। कि वह रो रही है। फिर भी बीवी ने जवाब नहीं दिया। तब तक रमाकांत की भाभी आ गई. और वह समझ गई कि यह कौन है? और रमाकांत को इशारा किया कि जाओ दादा जी को बुला लाओ। इतना सुनते ही रामाकांत समझ गया कि मेरी बीवी के ऊपर कोई चुड़ैल का साया है। तभी भाभी ने दादाजी का नाम लिया। तब तो रामाकांत पलंग पर बैठ कर दादागिरी झाड़ने लगा और बोला कि तुम कौन हो? यहां पर क्यों आई हो? क्या तुम मुझसे शादी करना चाहती हो? चुड़ैल ने कहा कि मुझमें तुम्हें क्यों दिलचस्पी हो रही है। क्यों मुझसे शादी करने के लिए आतुर हो। तो रमाकांत झट से बोला कि मैं कुछ काम धंधा तो करता नहीं। लेकिन अगर तुम साथ रहोगी तो धन दौलत लाती रहोगी। चुड़ैल ने हंसकर बोला ऐसा कुछ नहीं होता। हमारे में भी कोई ना कोई मुखिया जरूर रहता है। जो धन दौलत की रखवाली करता है। तुम चाहो तो हमारी दुनिया में चलो। तब मैं तुम्हें सब कुछ दूंगी पर अभी नहीं क्योंकि तुम जीवित हो। रमाकांत समझ गया कि अब मेरे हाथ कुछ नहीं आने वाला है। तो उसने बोला कि ब्राह्मण परिवार में आते हुए तुम्हें डर नही लगा। तब तक दादाजी भी आ गए और बोला कि यहां से सब लोग हट जाओ और अपने-अपने घर जाओ। इतने में रमाकांत की बीवी भी पलंग से नीचे उतर कर सिर पर पल्लू डाल दिया और चुड़ैल भी चली गई। तब रामाकांत मन ही मन बड़-बडाने लगा। कि इनको भी अभी आना था। अगर थोड़ी देर बाद आते तो क्या पता मैं भी मालामाल हो जाता। बेचारा रमाकांत बहुत दुखी हो गया।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने मंगलवार को पाकिस्तानी संसद को संबोधित करते हुए कहा कि 'इसमें कोई शक नहीं है कि भारत कराची स्टॉक एक्सचेंज पर हमले का ज़िम्मेदार है'। अतिशयोक्ति और झूठ बोलना नेताओं में प्रायः आम बात होती है लेकिन यह कथन वास्तव में सबसे बदतर है! इस दावे के समर्थन में सबूत कहाँ हैं? या अब इन सबूतों का निर्माण किया जाएगा? इमरान ख़ान ने यह भी कहा कि उनके मंत्रिमंडल को इस हमले के बारे में दो महीने पहले ही पता चल गया था। लेकिन न तो उन्होंने और न ही उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों, जैसे उनके विश्वस्त फवाद चौधरी, ने पहले कभी इसका उल्लेख किया। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के मजीद ब्रिगेड ने हमले की ज़िम्मेदारी ली है जिसमें ग्रेनेड और राइफल का इस्तेमाल किया गया और कई लोग मारे गए। कुछ पाकिस्तानियों ने जैसे कि अमजद शोएब, एक पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषक और सेवानिवृत्त जनरल, बिना किसी विलम्ब के ये बयान दिए कि भारत बी एल ए को हथियार, प्रशिक्षण और धन मुहैया करा रहा है। लेकिन इसका सबूत कहाँ है? भारत और बलूचिस्तान के बीच कोई सन्निहित सीमा नहीं है। भारतीय सीमा सिंध और पंजाब से लगी हुई है और इस सीमा पर बहुत कड़ी सुरक्षा है। फिर भारतीय हथियार बलूचिस्तान तक कैसे पहुँच सकते हैं? और भारत द्वारा बी एल ए को प्रशिक्षण या धन उपलब्ध करावाने का प्रमाण कहाँ है। पाकिस्तान सरकार के कुप्रबंधन के कारण आज पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी है, लोग घोर संकट में हैं, व्यापक पैमाने पर भयंकर ग़रीबी, बढ़ती बेरोज़गारी, बाल कुपोषण के चौंकाने वाले आँकड़े सामने आ रहे हैं, स्वास्थ्य सेवायें अत्यंत दुर्लभ हैं और अधिकाँश जनता के लिए अच्छी शिक्षा या शैक्षणिक संस्थान तक उपलब्ध नहीं है। इसलिए जनता का ध्यान हटाने के लिए ऐसे मुद्दों और बहानों का इजाद किया जा रहा है। पाकिस्तानी अधिकारियों के लिए ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीक़ा है, भारत को पाकिस्तान की सभी बीमारियों के लिए दोषी ठहराना। एसप की दंतकथाओं (Aesop's fables ) में एक ऐसे लड़के की कहानी है जो 'भेड़िया आया, भेड़िया आया' चिल्ला कर गाँव वालों को बेवक़ूफ़ बनाता है मानो भेड़ के झुंड पर भेड़िया हमला करने वाला हो। बाद में जब एक असली भेड़िये ने भेड़ पर हमला किया और जब लड़के ने मदद की गुहार की तब इस बार गाँव वालों ने उस पर विश्वास नहीं किया और भेड़िये ने सभी भेड़ों को मार डाला। इमरान ख़ान को अच्छी तरह से इस कहानी को पढ़ने की ज़रूरत है, और जनता की नज़र में ख़ुद को हर बार मूर्ख साबित करना बंद करने की भी।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने मंगलवार को पाकिस्तानी संसद को संबोधित करते हुए कहा कि 'इसमें कोई शक नहीं है कि भारत कराची स्टॉक एक्सचेंज पर हमले का ज़िम्मेदार है'। अतिशयोक्ति और झूठ बोलना नेताओं में प्रायः आम बात होती है लेकिन यह कथन वास्तव में सबसे बदतर है! इस दावे के समर्थन में सबूत कहाँ हैं? या अब इन सबूतों का निर्माण किया जाएगा? इमरान ख़ान ने यह भी कहा कि उनके मंत्रिमंडल को इस हमले के बारे में दो महीने पहले ही पता चल गया था। लेकिन न तो उन्होंने और न ही उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों, जैसे उनके विश्वस्त फवाद चौधरी, ने पहले कभी इसका उल्लेख किया। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के मजीद ब्रिगेड ने हमले की ज़िम्मेदारी ली है जिसमें ग्रेनेड और राइफल का इस्तेमाल किया गया और कई लोग मारे गए। कुछ पाकिस्तानियों ने जैसे कि अमजद शोएब, एक पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषक और सेवानिवृत्त जनरल, बिना किसी विलम्ब के ये बयान दिए कि भारत बी एल ए को हथियार, प्रशिक्षण और धन मुहैया करा रहा है। लेकिन इसका सबूत कहाँ है? भारत और बलूचिस्तान के बीच कोई सन्निहित सीमा नहीं है। भारतीय सीमा सिंध और पंजाब से लगी हुई है और इस सीमा पर बहुत कड़ी सुरक्षा है। फिर भारतीय हथियार बलूचिस्तान तक कैसे पहुँच सकते हैं? और भारत द्वारा बी एल ए को प्रशिक्षण या धन उपलब्ध करावाने का प्रमाण कहाँ है। पाकिस्तान सरकार के कुप्रबंधन के कारण आज पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चरमरा गयी है, लोग घोर संकट में हैं, व्यापक पैमाने पर भयंकर ग़रीबी, बढ़ती बेरोज़गारी, बाल कुपोषण के चौंकाने वाले आँकड़े सामने आ रहे हैं, स्वास्थ्य सेवायें अत्यंत दुर्लभ हैं और अधिकाँश जनता के लिए अच्छी शिक्षा या शैक्षणिक संस्थान तक उपलब्ध नहीं है। इसलिए जनता का ध्यान हटाने के लिए ऐसे मुद्दों और बहानों का इजाद किया जा रहा है। पाकिस्तानी अधिकारियों के लिए ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीक़ा है, भारत को पाकिस्तान की सभी बीमारियों के लिए दोषी ठहराना। एसप की दंतकथाओं में एक ऐसे लड़के की कहानी है जो 'भेड़िया आया, भेड़िया आया' चिल्ला कर गाँव वालों को बेवक़ूफ़ बनाता है मानो भेड़ के झुंड पर भेड़िया हमला करने वाला हो। बाद में जब एक असली भेड़िये ने भेड़ पर हमला किया और जब लड़के ने मदद की गुहार की तब इस बार गाँव वालों ने उस पर विश्वास नहीं किया और भेड़िये ने सभी भेड़ों को मार डाला। इमरान ख़ान को अच्छी तरह से इस कहानी को पढ़ने की ज़रूरत है, और जनता की नज़र में ख़ुद को हर बार मूर्ख साबित करना बंद करने की भी।
Salman Khan New film : सलमान खान (Salman Khan) की फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' बॉक्स ऑफिस पर कठिन समय का सामना कर रही है, क्योंकि यह 100 करोड़ रुपये तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रही है. फेस्टिव रिलीज होने के बावजूद, फिल्म अभी तक प्रतिष्ठित निशान को छू नहीं पाई है. इसके चलते सलमान खान अपनी परियोजनाओं की पसंद के बारे में पूर्वव्यापी मूड में आ गए हैं. एक न्यूज पोर्टल के मुताबिक, सलमान को छह प्रोजेक्ट्स ऑफर किए गए हैं लेकिन वह अभी कुछ भी नया साइन करने से परहेज कर रहे हैं. एक्टर स्पष्ट रूप से अपनी अगली फिल्म - 'टाइगर 3' के स्वागत के लिए नवंबर तक इंतजार करना चाहते हैं. अपनी दिवाली रिलीज की प्रतिक्रिया के बाद, सलमान अपने अगले उद्यम का फैसला करेंगे. अगर ऐसा है तो अभिनेता के पास ईद 2024 के लिए कोई फिल्म नहीं होगी. मनीष शर्मा द्वारा निर्देशित, 'टाइगर 3' में कैटरीना कैफ प्रमुख महिला के रूप में हैं और शाहरुख खान फिल्म में कैमियो करते नजर आएंगे. सलमान अपनी फिल्मों के अलावा जान से मारने की कई तरह की धमकियों को लेकर भी चर्चा में रहे हैं. अभिनेता ने हाल ही में एक शो में इसके बारे में खोला था और कहा था, "सुरक्षा असुरक्षा से बेहतर है. हां, वहां सुरक्षा है. अब सड़क पर साइकिल चलाकर अकेले कहीं जाना मुमकिन नहीं है. और उससे भी बड़ी बात यह है कि अब मुझे यह समस्या होती है कि जब मैं ट्रैफिक में होता हूं तो इतनी सुरक्षा होती है, वाहन दूसरे लोगों को असुविधा पैदा करते हैं. वे मुझे भी दर्शन देते हैं. और मेरे गरीब प्रशंसक. एक गंभीर खतरा है इसलिए सुरक्षा है."
Salman Khan New film : सलमान खान की फिल्म 'किसी का भाई किसी की जान' बॉक्स ऑफिस पर कठिन समय का सामना कर रही है, क्योंकि यह एक सौ करोड़ रुपये तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रही है. फेस्टिव रिलीज होने के बावजूद, फिल्म अभी तक प्रतिष्ठित निशान को छू नहीं पाई है. इसके चलते सलमान खान अपनी परियोजनाओं की पसंद के बारे में पूर्वव्यापी मूड में आ गए हैं. एक न्यूज पोर्टल के मुताबिक, सलमान को छह प्रोजेक्ट्स ऑफर किए गए हैं लेकिन वह अभी कुछ भी नया साइन करने से परहेज कर रहे हैं. एक्टर स्पष्ट रूप से अपनी अगली फिल्म - 'टाइगर तीन' के स्वागत के लिए नवंबर तक इंतजार करना चाहते हैं. अपनी दिवाली रिलीज की प्रतिक्रिया के बाद, सलमान अपने अगले उद्यम का फैसला करेंगे. अगर ऐसा है तो अभिनेता के पास ईद दो हज़ार चौबीस के लिए कोई फिल्म नहीं होगी. मनीष शर्मा द्वारा निर्देशित, 'टाइगर तीन' में कैटरीना कैफ प्रमुख महिला के रूप में हैं और शाहरुख खान फिल्म में कैमियो करते नजर आएंगे. सलमान अपनी फिल्मों के अलावा जान से मारने की कई तरह की धमकियों को लेकर भी चर्चा में रहे हैं. अभिनेता ने हाल ही में एक शो में इसके बारे में खोला था और कहा था, "सुरक्षा असुरक्षा से बेहतर है. हां, वहां सुरक्षा है. अब सड़क पर साइकिल चलाकर अकेले कहीं जाना मुमकिन नहीं है. और उससे भी बड़ी बात यह है कि अब मुझे यह समस्या होती है कि जब मैं ट्रैफिक में होता हूं तो इतनी सुरक्षा होती है, वाहन दूसरे लोगों को असुविधा पैदा करते हैं. वे मुझे भी दर्शन देते हैं. और मेरे गरीब प्रशंसक. एक गंभीर खतरा है इसलिए सुरक्षा है."
KANPUR : ट्यूजडे को दिल्ली के होटल में लगी भीषण आग से हुई मौतों को देखकर कानपुर के लोग भी सहम गए हैं। एक बार फिर से यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या कानपुर के होटल आग लगने पर सेफ हैं ? तो जवाब है नहीं फायर डिपार्टमेंट के आंकड़े बयां कर रहे हैं कि शहर में 75 परसेंट होटल आग के 'साये' में हैं। अगर, इनमें आग लगी तो जान-माल का कितना नुकसान होगा, बयां करना मुश्किल होगा। घंटाघर, फजलगंज, कानपुर-लखनऊ हाईवे के किनारे, मोतीझील चौराहा और जीटी रोड पर दर्जनों ऐसे होटल और बडे़ रेस्टोरेंट हैं। चीफ फायर ऑफिसर एमपी सिंह के अनुसार 2005 से पहले बने होटल्स और बिल्डिंग्स को सेट बैक में छूट का प्रावधान है। इसके बाद जो भी निर्माण हुए है, उन्हें मानकों को पूरा करना जरूरी है। समय-समय पर इनकी जांच कर नोटिस दिया जाता है। सीएफओ के मुताबिक फायर विभाग की एनओसी लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। इसके बाद आवेदन रसीद के साथ चार प्रतियों में फायर प्लान के साथ सारे प्रमाणपत्र देने पड़ते हैं। यह प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद फाइल उनके पास पहुंचती है। वह अपने स्तर से एप्लीकेंट के दावों और प्रतिष्ठानों एवं घरों की गहन जांच करते हैं। पड़ताल में मानक पूरे होने के बाद फायर विभाग की एनओसी जारी की जाती है। - सेट बैक (होटल के चोरों ओर खुला स्थान होना जरूरी) - होटल में कम से कम दो चौड़ी और ढलान युक्त सीढि़यां। - फायर स्केप, होटल में इमरजेंसी बाहरी सीढ़ी जरूरी। - आग लगने पर बजने वाला अलार्म जरूरी। - होजरिल (यह इंस्ट्रूमेंट आग बुझाने में सहायक होता है)। - होटल परिसर में या आसपास फायर हाइड्रेंट जरूरी। - फायररोधी यंत्रों की जांच का होना चाहिए प्रमाणपत्र। - होटलों के कमरों में एयर पासिंग व खिड़की का इंतजाम। - दिन और रात के वक्त होटल में सुरक्षा गार्डो की उपस्थिति। - होटल तक फायर गाड़ी पहुंचने का सुगम मार्ग जरूरी। नोटः फायर विभाग के मुताबिक। - 75 परसेंट होटल के पास नहीं है फायर सेफ्टी एनओसी। - 1000 से अधिक होटल्स हैं कानपुर शहर के अंदर। - 500 वर्ग मीटर से ज्यादा और 15 मीटर की हाइट की बिल्डिंग को एनओसी जरूरी। शहर के अधिकांश होटल फायर डिपार्टमेंट के मानकों को पूरा नहीं करते हैं। घंटाघर जैसी जगह पर तो लगभग सभी होटल्स में सेटबैक नहीं है। जांच का अधिकार हमारे पास नहीं है। होटल पर कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को भेज दिया जाता है।
KANPUR : ट्यूजडे को दिल्ली के होटल में लगी भीषण आग से हुई मौतों को देखकर कानपुर के लोग भी सहम गए हैं। एक बार फिर से यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या कानपुर के होटल आग लगने पर सेफ हैं ? तो जवाब है नहीं फायर डिपार्टमेंट के आंकड़े बयां कर रहे हैं कि शहर में पचहत्तर परसेंट होटल आग के 'साये' में हैं। अगर, इनमें आग लगी तो जान-माल का कितना नुकसान होगा, बयां करना मुश्किल होगा। घंटाघर, फजलगंज, कानपुर-लखनऊ हाईवे के किनारे, मोतीझील चौराहा और जीटी रोड पर दर्जनों ऐसे होटल और बडे़ रेस्टोरेंट हैं। चीफ फायर ऑफिसर एमपी सिंह के अनुसार दो हज़ार पाँच से पहले बने होटल्स और बिल्डिंग्स को सेट बैक में छूट का प्रावधान है। इसके बाद जो भी निर्माण हुए है, उन्हें मानकों को पूरा करना जरूरी है। समय-समय पर इनकी जांच कर नोटिस दिया जाता है। सीएफओ के मुताबिक फायर विभाग की एनओसी लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। इसके बाद आवेदन रसीद के साथ चार प्रतियों में फायर प्लान के साथ सारे प्रमाणपत्र देने पड़ते हैं। यह प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद फाइल उनके पास पहुंचती है। वह अपने स्तर से एप्लीकेंट के दावों और प्रतिष्ठानों एवं घरों की गहन जांच करते हैं। पड़ताल में मानक पूरे होने के बाद फायर विभाग की एनओसी जारी की जाती है। - सेट बैक - होटल में कम से कम दो चौड़ी और ढलान युक्त सीढि़यां। - फायर स्केप, होटल में इमरजेंसी बाहरी सीढ़ी जरूरी। - आग लगने पर बजने वाला अलार्म जरूरी। - होजरिल । - होटल परिसर में या आसपास फायर हाइड्रेंट जरूरी। - फायररोधी यंत्रों की जांच का होना चाहिए प्रमाणपत्र। - होटलों के कमरों में एयर पासिंग व खिड़की का इंतजाम। - दिन और रात के वक्त होटल में सुरक्षा गार्डो की उपस्थिति। - होटल तक फायर गाड़ी पहुंचने का सुगम मार्ग जरूरी। नोटः फायर विभाग के मुताबिक। - पचहत्तर परसेंट होटल के पास नहीं है फायर सेफ्टी एनओसी। - एक हज़ार से अधिक होटल्स हैं कानपुर शहर के अंदर। - पाँच सौ वर्ग मीटर से ज्यादा और पंद्रह मीटर की हाइट की बिल्डिंग को एनओसी जरूरी। शहर के अधिकांश होटल फायर डिपार्टमेंट के मानकों को पूरा नहीं करते हैं। घंटाघर जैसी जगह पर तो लगभग सभी होटल्स में सेटबैक नहीं है। जांच का अधिकार हमारे पास नहीं है। होटल पर कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को भेज दिया जाता है।
जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर शहर के बाहरी इलाके में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ में बुधवार को तीन आतंकवादी मारे गए। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि शहर के नौगाम इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने वहां घेराबंदी की और तलाश अभियान चलाया। उन्होंने बताया कि इसी दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की और मुठभेड़ शुरू हो गई। अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ में तीन आतंकवादी मारे गए। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ स्थल से हथियारों और गोला-बारूद समेत आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है। कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) विजय कुमार ने पहले बताया था कि बल ने जिन आतंकवादियों को घेरा है, उनमें शहर के खोनमोह इलाके में नौ मार्च को एक सरपंच की हत्या में शामिल आतंकवादी भी शामिल हैं।
जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर शहर के बाहरी इलाके में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ में बुधवार को तीन आतंकवादी मारे गए। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि शहर के नौगाम इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने वहां घेराबंदी की और तलाश अभियान चलाया। उन्होंने बताया कि इसी दौरान आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की और मुठभेड़ शुरू हो गई। अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ में तीन आतंकवादी मारे गए। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ स्थल से हथियारों और गोला-बारूद समेत आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है। कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक विजय कुमार ने पहले बताया था कि बल ने जिन आतंकवादियों को घेरा है, उनमें शहर के खोनमोह इलाके में नौ मार्च को एक सरपंच की हत्या में शामिल आतंकवादी भी शामिल हैं।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सरकारी खर्च घटाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार की ओर कहा गया है कि सरकारी कैलेंडर, डायरी, शेड्यूलर और इस तरह की अन्य सामग्री की छपाई बंद करने का फैसला किया है। मौजूदा परिस्थितियों, जिसमें दुनिया उत्पादकता के लिए बड़ी तेजी से डिजिटल साधनों को अपनाने की ओर से बढ़ रही है। इसको देखते हुए भारत सरकार ने इस सर्वोत्तम कार्य प्रणाली को व्यवहार में लाने का फैसला लिया है। किसी भी मंत्रालय/ विभाग/ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों/बैंकों और सरकार के अन्य सभी अंगों द्वारा आने वाले वर्ष में उपयोग के लिए दीवार कैलेंडर, डेस्कटॉप कैलेंडर, डायरी और ऐसी अन्य सामग्री की प्रिंटिंग की दिशा में कोई गतिविधि नहीं की जाएगी। वित्त मंत्रालय ने आज कहा कि दुनिया तेजी से डिजिटल तरीकों को अपना रही है और भारत सरकार ने भी बेस्ट प्रैक्टिस को अपनाने का फैसला किया है। सभी कैलेंडर, डायरी, शेड्यूलर और इस तरह की अन्य सामग्री, जो पहले भौतिक प्रारूप में छापी जाती थी, अब मंत्रालयों / विभागों / सार्वजनिक उपक्रमों / सार्वजनिक बैंकों द्वारा डिजिटल रूप में किया जाएगा। ऐसी सभी गतिविधियां डिजिटल और ऑनलाइन होंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके शासन मॉडल ने हमेशा प्रौद्योगिकी को एक सहायक के रूप में देखा है। हमारे काम काज में प्रौद्योगिकी को शामिल करना उनकी दूरदर्शिता के अनुरूप है। इसलिए सभी कैलेंडर, डायरी, शेड्यूलर और इस तरह की अन्य सामग्री, जो पहले भौतिक प्रारूप में छापी जाती थी, को अब डिजिटल रूप में तैयार किया जाएगा। ये भी पढ़ेः आखिर भारत और चीन के बीच चल क्या रहा है ?
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सरकारी खर्च घटाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार की ओर कहा गया है कि सरकारी कैलेंडर, डायरी, शेड्यूलर और इस तरह की अन्य सामग्री की छपाई बंद करने का फैसला किया है। मौजूदा परिस्थितियों, जिसमें दुनिया उत्पादकता के लिए बड़ी तेजी से डिजिटल साधनों को अपनाने की ओर से बढ़ रही है। इसको देखते हुए भारत सरकार ने इस सर्वोत्तम कार्य प्रणाली को व्यवहार में लाने का फैसला लिया है। किसी भी मंत्रालय/ विभाग/ सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों/बैंकों और सरकार के अन्य सभी अंगों द्वारा आने वाले वर्ष में उपयोग के लिए दीवार कैलेंडर, डेस्कटॉप कैलेंडर, डायरी और ऐसी अन्य सामग्री की प्रिंटिंग की दिशा में कोई गतिविधि नहीं की जाएगी। वित्त मंत्रालय ने आज कहा कि दुनिया तेजी से डिजिटल तरीकों को अपना रही है और भारत सरकार ने भी बेस्ट प्रैक्टिस को अपनाने का फैसला किया है। सभी कैलेंडर, डायरी, शेड्यूलर और इस तरह की अन्य सामग्री, जो पहले भौतिक प्रारूप में छापी जाती थी, अब मंत्रालयों / विभागों / सार्वजनिक उपक्रमों / सार्वजनिक बैंकों द्वारा डिजिटल रूप में किया जाएगा। ऐसी सभी गतिविधियां डिजिटल और ऑनलाइन होंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनके शासन मॉडल ने हमेशा प्रौद्योगिकी को एक सहायक के रूप में देखा है। हमारे काम काज में प्रौद्योगिकी को शामिल करना उनकी दूरदर्शिता के अनुरूप है। इसलिए सभी कैलेंडर, डायरी, शेड्यूलर और इस तरह की अन्य सामग्री, जो पहले भौतिक प्रारूप में छापी जाती थी, को अब डिजिटल रूप में तैयार किया जाएगा। ये भी पढ़ेः आखिर भारत और चीन के बीच चल क्या रहा है ?
Lok Sabha Election 2019: गुजरात की हाईप्रोफाइल सीट गांधी नगर से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह चुनाव मैदान में हैं। पार्टी ने वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के बदले शाह को यहां से मैदान में उतारने का फैसला लिया है। आडवाणी का टिकट कटने और शाह को यहां से लड़ाने के फैसले पर कई लोगों को हैरानी जरूर हुई। भाजपा के स्थानीय नेतृत्व का कहना है कि विधानसभा चुनाव में औसत प्रदर्शन के बाद अमित शाह के यहां से मैदान में उतरने से पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश और उत्साह भरेगा। इससे पार्टी के राज्य की सभी 26 सीटों को जीतने की संभावना और मजबूत होगी। कांग्रेस की तरफ से यहां से गांधीनगर (नॉर्थ) के विधायक सीजे चावड़ा को उतारे जाने की उम्मीद है। गांधीनगर से ही शुरू हुआ शाह का संसदीय कॅरिअरः शाह ने 1997 सरखेज विधानसभा सीट से ही अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत की थी। उस समय यह सीट गांधीनगर का ही हिस्सा थी। सरखेज से विधायक के रूप में ही शाह ने चुनावी रणनीति का अपना कौशल दिखाना शुरु किया था। आडवाणी के प्रमुख चुनावी रणनीतिकार के रूप में शाह यह अपने विधानसभी सीट से अधिकतकम बढ़त सुनिश्चित करते थे जिससे कि अन्य सीटों पर वोटों की कमी को पूरा किया जा सके। हमेशा हाईप्रोफाइल रही है यह सीटः भाजपा का 1989 से ही इस सीट पर कब्जा रहा है। 1989 में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके बाद 1991-1996 में आडवाणी और एक बार 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी इस सीट का प्रतिनिधत्व कर चुके हैं। 1998 से आडवाणी पांच पर लगातार इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं। आडवाणी, वाजपेयी और शाह के अलावा कई अन्य हाईप्रोफाइल उम्मीदवार भी इस सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। इनमें पूर्व चुनाव आयुक्त टीएन शेषन(1999), राजनीतिक विज्ञानी पुरुषोत्तम मावलंकर (1977) , विट्ठल पांड्या (2004) और गुजरात के पूर्व गृहमंत्री हरेन पंड्या शामिल हैं। गुजरात भाजपा प्रवक्ता भारत पंड्या का कहना है कि गांधीनगर वीआईपी सीट है। अमित भाई के यहां से चुनाव लड़ने से हमारे कैडर में नया जोश भर जाएगा। वहीं कांग्रेस गांधीनगर सीट को लेकर भाजपा पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। पार्टी का कहना है कि भाजपा हमेशा यहां से हाईप्रोफाइल उम्मीदवार उतारती रही हैं लेकिन यहां विकास के नाम पर कुछ भी नहीं है। गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष दोषी कहते हैं कि यहां की करीब 35 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर कर रही है। यहां लोगों को अभी भी किफायती शिक्षा, स्वास्थ्य व पेयजल उपलब्ध नहीं है। अब भी विकास की आसः भाजपा भले ही यहां अहमदाबाद-गांधीनगर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट, जीआईएफटी फाइनेंशियल हब व अन्य विकास के काम गिनवाए लेकिन यहां उवरसाड़ गांव के किसान जगजी ठाकोर का कहना है कि वे और विकास कर सकते थे। हमारे गांव में सीवेज लाइन नहीं है। अभी हमारे गांव का कचरा पास के ही तालाब में गिरता है। मुझे उम्मीद है कि वे लोग इस दिशा में भी कुछ करेंगे। लाइव मिंट में प्रकाशित इंडिकस एनालिटिक्स की साल 2014 की रिपोर्ट के अनुसार गुजरात के गांधीनगर में राजकोट, अहमदाबाद, सूरत, मेहसाणा से अधिक (करीब 12. 59 फीसदी) लोग गरीबी रेखा से नीचे रह रहे थे। गरीबी का यह निर्धारण तेंडुलकर समिति की 2011-12 की गरीबी रेखा पर आधारित थी। जिन क्षेत्रों में सबसे अधिक गरीबी थी वहां शैक्षणिक संस्थानों की संख्या सबसे कम थी। साथ ही इन इलाकों में एससी/एसटी आबादी अधिक है। गुजरात सरकार ने साल 2018 में विधानसभा में पेश एक रिपोर्ट में कहा था कि राज्य में 31. 46 करोड़ गरीब परिवार है। यदि एक परिवार में पांच सदस्य माना जाए तो यह संख्या 1. 5 करोड़ के आसपास पहुंचती हैं। सरकार ने बताया था कि प्रदेश मे पिछले दो साल में करीब 19 हजार गरीब परिवार बढ़े हैं। गांधीनगर के तहत सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इसमें गांधीनगर (नॉर्थ), कलोल, साणंद, घटलोडिया, वेजलपुर, नारनपुरा और साबरमती शामिल है। गांधी नगर और कलोल को छोड़कर साल 2015 में पांच सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार चुनाव जीते थे। इस लोकसभा क्षेत्र में 19. 20 लाख मतदाता है। यहां तीसरे चरण में 23 अप्रैल को वोट डाला जाएगा।
Lok Sabha Election दो हज़ार उन्नीस: गुजरात की हाईप्रोफाइल सीट गांधी नगर से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह चुनाव मैदान में हैं। पार्टी ने वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी के बदले शाह को यहां से मैदान में उतारने का फैसला लिया है। आडवाणी का टिकट कटने और शाह को यहां से लड़ाने के फैसले पर कई लोगों को हैरानी जरूर हुई। भाजपा के स्थानीय नेतृत्व का कहना है कि विधानसभा चुनाव में औसत प्रदर्शन के बाद अमित शाह के यहां से मैदान में उतरने से पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश और उत्साह भरेगा। इससे पार्टी के राज्य की सभी छब्बीस सीटों को जीतने की संभावना और मजबूत होगी। कांग्रेस की तरफ से यहां से गांधीनगर के विधायक सीजे चावड़ा को उतारे जाने की उम्मीद है। गांधीनगर से ही शुरू हुआ शाह का संसदीय कॅरिअरः शाह ने एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे सरखेज विधानसभा सीट से ही अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत की थी। उस समय यह सीट गांधीनगर का ही हिस्सा थी। सरखेज से विधायक के रूप में ही शाह ने चुनावी रणनीति का अपना कौशल दिखाना शुरु किया था। आडवाणी के प्रमुख चुनावी रणनीतिकार के रूप में शाह यह अपने विधानसभी सीट से अधिकतकम बढ़त सुनिश्चित करते थे जिससे कि अन्य सीटों पर वोटों की कमी को पूरा किया जा सके। हमेशा हाईप्रोफाइल रही है यह सीटः भाजपा का एक हज़ार नौ सौ नवासी से ही इस सीट पर कब्जा रहा है। एक हज़ार नौ सौ नवासी में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके बाद एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे-एक हज़ार नौ सौ छियानवे में आडवाणी और एक बार एक हज़ार नौ सौ छियानवे में अटल बिहारी वाजपेयी इस सीट का प्रतिनिधत्व कर चुके हैं। एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे से आडवाणी पांच पर लगातार इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं। आडवाणी, वाजपेयी और शाह के अलावा कई अन्य हाईप्रोफाइल उम्मीदवार भी इस सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। इनमें पूर्व चुनाव आयुक्त टीएन शेषन, राजनीतिक विज्ञानी पुरुषोत्तम मावलंकर , विट्ठल पांड्या और गुजरात के पूर्व गृहमंत्री हरेन पंड्या शामिल हैं। गुजरात भाजपा प्रवक्ता भारत पंड्या का कहना है कि गांधीनगर वीआईपी सीट है। अमित भाई के यहां से चुनाव लड़ने से हमारे कैडर में नया जोश भर जाएगा। वहीं कांग्रेस गांधीनगर सीट को लेकर भाजपा पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। पार्टी का कहना है कि भाजपा हमेशा यहां से हाईप्रोफाइल उम्मीदवार उतारती रही हैं लेकिन यहां विकास के नाम पर कुछ भी नहीं है। गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष दोषी कहते हैं कि यहां की करीब पैंतीस फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर कर रही है। यहां लोगों को अभी भी किफायती शिक्षा, स्वास्थ्य व पेयजल उपलब्ध नहीं है। अब भी विकास की आसः भाजपा भले ही यहां अहमदाबाद-गांधीनगर मेट्रो रेल प्रोजेक्ट, जीआईएफटी फाइनेंशियल हब व अन्य विकास के काम गिनवाए लेकिन यहां उवरसाड़ गांव के किसान जगजी ठाकोर का कहना है कि वे और विकास कर सकते थे। हमारे गांव में सीवेज लाइन नहीं है। अभी हमारे गांव का कचरा पास के ही तालाब में गिरता है। मुझे उम्मीद है कि वे लोग इस दिशा में भी कुछ करेंगे। लाइव मिंट में प्रकाशित इंडिकस एनालिटिक्स की साल दो हज़ार चौदह की रिपोर्ट के अनुसार गुजरात के गांधीनगर में राजकोट, अहमदाबाद, सूरत, मेहसाणा से अधिक लोग गरीबी रेखा से नीचे रह रहे थे। गरीबी का यह निर्धारण तेंडुलकर समिति की दो हज़ार ग्यारह-बारह की गरीबी रेखा पर आधारित थी। जिन क्षेत्रों में सबसे अधिक गरीबी थी वहां शैक्षणिक संस्थानों की संख्या सबसे कम थी। साथ ही इन इलाकों में एससी/एसटी आबादी अधिक है। गुजरात सरकार ने साल दो हज़ार अट्ठारह में विधानसभा में पेश एक रिपोर्ट में कहा था कि राज्य में इकतीस. छियालीस करोड़ गरीब परिवार है। यदि एक परिवार में पांच सदस्य माना जाए तो यह संख्या एक. पाँच करोड़ के आसपास पहुंचती हैं। सरकार ने बताया था कि प्रदेश मे पिछले दो साल में करीब उन्नीस हजार गरीब परिवार बढ़े हैं। गांधीनगर के तहत सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इसमें गांधीनगर , कलोल, साणंद, घटलोडिया, वेजलपुर, नारनपुरा और साबरमती शामिल है। गांधी नगर और कलोल को छोड़कर साल दो हज़ार पंद्रह में पांच सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार चुनाव जीते थे। इस लोकसभा क्षेत्र में उन्नीस. बीस लाख मतदाता है। यहां तीसरे चरण में तेईस अप्रैल को वोट डाला जाएगा।
बीवित रह सकता है। अतः वायुका हर एक भाग हमारे बहुत काम का है । पृथ्वीके चारों तरफ वायु काफी ऊँचाई तक फैली हुई है और इसी भागको वायु-मंडल कहते हैं । जिस विज्ञान शास्त्र में वायुमंडल और इसकी गति आदिके विषयका वर्णन होता है उसे अंतरिक्ष विज्ञान (meteorolcgy) कहते हैं । अभी यह शास्त्र अपनी रैशव अवस्था में है। जो वैज्ञानिक इस विषयपर खोज कर रहे हैं वे अधिकतर भिन्न-भिन्न स्थानों पर, दिनके भिन्न-भिन्न समय, तथा तमाम वर्षके लिये तापक्रम दबाव और आर्द्रताकी मापका संग्रह करते हैं । परन्तु पृथ्वीकी सतहके सब स्थानोंमें इन चीजोंके एक-सा न होने के कारण इन मापका संग्रह इतना जटिल हो जाता है कि इनसे एक साधारण नियम निकालना कि इन सबका स्थान तथा समय के साथ विस तरहसे परिवर्तन होता है, बहुत कठिन है। इसीलिये कुछ वैज्ञानिकों ने सोचा कि यदि हम पृथ्वीसे चार-पाँच मोल ऊपर वायुमंडलके लिये इन मापोंका संग्रह करें तो काफी सुविधा हो और इस तरहसे उपरी चाटु-मंडलकी खोज करनेका विचार वैज्ञानिकोंको आाया । चित्र १ में यह बताया गया है कि वायुमंडल में क्या है तथा यह किन-किन भागों में विभाजित किया जा सकता है।
बीवित रह सकता है। अतः वायुका हर एक भाग हमारे बहुत काम का है । पृथ्वीके चारों तरफ वायु काफी ऊँचाई तक फैली हुई है और इसी भागको वायु-मंडल कहते हैं । जिस विज्ञान शास्त्र में वायुमंडल और इसकी गति आदिके विषयका वर्णन होता है उसे अंतरिक्ष विज्ञान कहते हैं । अभी यह शास्त्र अपनी रैशव अवस्था में है। जो वैज्ञानिक इस विषयपर खोज कर रहे हैं वे अधिकतर भिन्न-भिन्न स्थानों पर, दिनके भिन्न-भिन्न समय, तथा तमाम वर्षके लिये तापक्रम दबाव और आर्द्रताकी मापका संग्रह करते हैं । परन्तु पृथ्वीकी सतहके सब स्थानोंमें इन चीजोंके एक-सा न होने के कारण इन मापका संग्रह इतना जटिल हो जाता है कि इनसे एक साधारण नियम निकालना कि इन सबका स्थान तथा समय के साथ विस तरहसे परिवर्तन होता है, बहुत कठिन है। इसीलिये कुछ वैज्ञानिकों ने सोचा कि यदि हम पृथ्वीसे चार-पाँच मोल ऊपर वायुमंडलके लिये इन मापोंका संग्रह करें तो काफी सुविधा हो और इस तरहसे उपरी चाटु-मंडलकी खोज करनेका विचार वैज्ञानिकोंको आाया । चित्र एक में यह बताया गया है कि वायुमंडल में क्या है तथा यह किन-किन भागों में विभाजित किया जा सकता है।
Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? 350 करोड़ क्लब. . 'टाईगर जिंदा है'. . और सलमान खान का धमाकेदार रिकॉर्ड! सलमान खान की फिल्म टाईगर जिंदा है जिस गति से आगे बढ़ रही है. . काफी उम्मीद है कि फिल्म सारे रिकॉर्ड्स तोड़ने वाली है। महज एक हफ्ता में फिल्म 200 करोड़ क्लब में एंट्री लेगी। जबकि न्यू ईयर पर फिल्म की कमाई फिर से बढ़ने वाली है। ट्रेड पंडितों की मानें तो न्यू ईयर तक फिल्म 280 करोड़ का आंकड़ा आराम से पार कर लेगी। वहीं, फिल्म के पास फिलहाल कमाने के लिए काफी ज्यादा समय है। 26 जनवरी को अक्षय कुमार की पैडमैन से पहले टाईगर के सामने कोई फिल्म नहीं है। जाहिर है 1 जनवरी से 25 जनवरी तक तो सलमान खान बॉक्स ऑफिस पर आग लगा देंगे। फिल्म हर दिन यदि 5 करोड़ का कलेक्शन भी करती है. . तो भी 125 करोड़ की कमाई हो गई। OMG. . यानि की फिल्म आमिर खान की पीके और दंगल को भी पीछे कर सकती है। Tiger Zinda Hai will enter 300 cr club and cross lifetime collection of PK. Know how.
Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? तीन सौ पचास करोड़ क्लब. . 'टाईगर जिंदा है'. . और सलमान खान का धमाकेदार रिकॉर्ड! सलमान खान की फिल्म टाईगर जिंदा है जिस गति से आगे बढ़ रही है. . काफी उम्मीद है कि फिल्म सारे रिकॉर्ड्स तोड़ने वाली है। महज एक हफ्ता में फिल्म दो सौ करोड़ क्लब में एंट्री लेगी। जबकि न्यू ईयर पर फिल्म की कमाई फिर से बढ़ने वाली है। ट्रेड पंडितों की मानें तो न्यू ईयर तक फिल्म दो सौ अस्सी करोड़ का आंकड़ा आराम से पार कर लेगी। वहीं, फिल्म के पास फिलहाल कमाने के लिए काफी ज्यादा समय है। छब्बीस जनवरी को अक्षय कुमार की पैडमैन से पहले टाईगर के सामने कोई फिल्म नहीं है। जाहिर है एक जनवरी से पच्चीस जनवरी तक तो सलमान खान बॉक्स ऑफिस पर आग लगा देंगे। फिल्म हर दिन यदि पाँच करोड़ का कलेक्शन भी करती है. . तो भी एक सौ पच्चीस करोड़ की कमाई हो गई। OMG. . यानि की फिल्म आमिर खान की पीके और दंगल को भी पीछे कर सकती है। Tiger Zinda Hai will enter तीन सौ cr club and cross lifetime collection of PK. Know how.
रोशनी की दस्तक के साथ बैरक तो खुलती है, लेकिन पता चलता है कि जेल की दुनिया में तो अंधेरा कुंडली मारकर बैठा है। ऐसा लगता है कि जैसे इस रात का सुबह नहीं। लेकिन ऐसा भी नहीं है...सुबह तो होनी ही है, और होती भी है। लेकिन इस बीच उजाले से अंधेरे और अंधेरे से उजाले का लंबा सफ़र है और इसी सफ़र, इसी जद्दोजहद, इसी संघर्ष की ही कहानी है बंद घड़ियां। कहानीकार कहता तो है कि - समय में सलवटें कहां...लेकिन महिला जेल और स्त्री जीवन के समय में बहुत सलवटें हैं...तभी तो वह कहती हैं - यहां हमारे लिए समय ठहरा हुआ है। इसी ठहरे हुए समय की कहानी कहती हैं - बंद घड़ियां। शोभा सिंह जो एक समर्थ कवि हैं अब कहानीकार की भूमिका में आईं हैं। जो कहानियां उन्होंने अपनी कविताओं में समेटी अब उन्हीं कविताओं को बिखेर कर वे कहानी कह रही हैं। शोभा सिंह के अब तक दो कविता संग्रह - "अर्द्ध विधवा" और "यह मिट्टी दस्तावेज़ हमारा" आ चुके हैं। अपनी कविताएं भी उन्होंने बहुत सहज ढंग से रची हैं तो अब कहानियां भी उसी सहज ढंग से बुन रही हैं। उनकी कविताओं में भी स्त्री पात्र अपने पूरी ताक़त से सामने आते हैं और ऐसा ही उनकी कहानियों में भी हैं। उनकी कविताएं घरेलू औरत, सुईं-धागा, अर्द्ध विधवा, शाहीन बाग़, रुक़ैया बानो, औरत बीड़ी मज़दूर, भुट्टेवाली और ऐसी कई कविताओं में स्त्री पात्र जितने सशक्त ढंग से आते हैं उनकी कहानी में भी ऐसे ही आते हैं। "जन-अदालत में औरत" इस पूरी कविता की अनुगूंज उनकी कहानी "बंद घड़ियां" में मिलती है। "जन-अदालत" की यही आवाज़ें "बंद घड़ियां" में भी अपनी कहानी कहने को आतुर हैं.... बस थोड़ा भरोसा जगने के बाद। और कहानीकार शोभा सिंह इसी भरोसे और बहनापे के साथ उनकी कहानी सुनती और कहती हैं। और इस और ऐसे ही कई "अपराध" जानने और बताने की कहानी कही है शोभा सिंह ने। यह एक भारतीय महिला जेल की कहानी है। यह किसी भी राज्य या ज़िला-शहर की जेल की कहानी हो सकती है। यह जेल के बहाने हमारी पुलिस, हमारी पूरी क़ानून व्यवस्था, न्यायिक प्रणाली की भी कहानी है और हमारी समाज व्यवस्था की भी कहानी है, जो पितृसत्ता से संचालित होता है। कुल मिलाकर यह भारतीय महिला जेल के बहाने भारतीय महिला की कहानी है। जो निरपराध होकर भी अपराधी है। जो एक तरफ़ परिवार में पिट रही है, पिस रही है दूसरी तरफ़ समाज और व्यवस्था का हंटर भी उसके ऊपर बरस रहा है, लेकिन साथ ही वो पूरी ताक़त से प्रतिकार भी कर रही है। वह निरीह, बेबस नहीं बल्कि प्रतिरोध करना जानती है, पूरी ताक़त से लड़ना जानती है। इस परिप्रेक्ष्य में यह महिला क़ैदियों की बेबसी नहीं बल्कि उनके संघर्ष की कहानी है। जिसे एक राजनीतिक कैदी के तौर पर कहानीकार शोभा ख़ुद दर्ज करती हैं। यह देवंती की कहानी है, जो अपने पति की हत्या के आरोप में अपनी बहन और बेटी के साथ जेल में है। वह पति जो हर समय न सिर्फ़ शराब पीता है बल्कि देवंती को मारता-पीटता भी है और हद तो यह कि वह शराब और जुए की लत में अपनी बेटी तक को दांव पर लगा आता है। जी हां, सरकार नारा लगाने वालों से भी डरती है, जेल में डालती है। इस कहानी का यह एक वाक्य बहुत महत्वपूर्ण है जो इस कहानी को और बड़ा आयाम देता है। और एक आम कहानी से आगे जाकर राजनीतिक कहानी बनाता है। इस कहानी में और भी कई बेगुनाह औरतों की उपस्थिति है, हालांकि लेखिका उनके विस्तार में नहीं गईं, लेकिन उनके केस के इशारे भर से बहुत कुछ बातें साफ़ हो गईं। जैसे - "एक केस तो ग़ज़ब का था अपने भूखे बच्चे लिए ब्रेड चुराती औरत पकड़ी गई। दुकानदार ने चोरी की गई चीजों की लंबी लिस्ट पुलिस को लिखवा दी। हरजाना भरा नहीं वह जेल में है।... कुछ आदिवासी महिलाएं माओवादी होने के आरोप में जेल में बंद हैं। कानून की कौनसी दफा में वे बंद हैं, उन्हें मालूम नहीं।... एक बैरक में मुस्लिम महिलाएं हैं। इनमें से ज्यादातर वे हैं जिनके वीजा की अवधि खत्म हो गई थी। अपनों के बीच आकर वे तेजी से गुजरने वाले दिनों को गिनना भूल गईं। वापसी का रेल टिकट समय पर नहीं हुआ। रेल रिजर्वेशन नहीं मिला। यूं विलंब का कोई भी कारण हो बस उन्हें धर लिया गया। पाकिस्तान और हिंदुस्तान दोनों ओर यह समस्या है। इन महिलाओं का होना भर इस कहानी को बहुत व्यापक आयाम देता है। इसी कहानी का पाठ, 7 जून, 2023 को गुलमोहर किताब के बैनर तले दिल्ली के पटेल नगर में आयोजित हुआ। जिसमें कवि-लेखक और अन्य प्रबुद्ध जन मौजूद थे। सबसे पहले शोभा सिंह ने अपनी कहानी बंद घड़ियां का पाठ किया उसके बाद उपस्थित लोगों ने अपने विचार रखे, प्रतिक्रिया जाहिर की। लेखक-नाटककार राजेश कुमार कहते हैं कि शोभा सिंह की कहानी ने जिस महिला जेल की कहानी लिखी वास्तव में यह पूरे देश की जेलों ख़ासकर महिला जेलों की कहानी है। कहानीकार ने केवल एक महिला पात्र के जरिये ही अपनी कहानी नहीं कही बल्कि कई पात्रों को शामिल किया है, और सबसे ख़ास बात कि उन्होंने इन महिला क़ैदियों या पात्रों की केवल बेबसी, लाचारगी ही नहीं दिखाई, जिस तरह के आजकल के कलावादी लेखक करते हैं, बल्कि उनके लड़ने की ताक़त को भी दिखाया। इसलिए मैं इसे एक अच्छी कहानी कहूंगा। पत्रकार देवाशीष मुखर्जी ने कहा कि यह एक अच्छी कहानी है, हालांकि इसे लंबी कहानी कहा गया लेकिन सुनने में यह बिल्कुल लंबी नहीं लगती। शायर ओमप्रकाश नदीम ने कहा कि उन्हें लगता है कि चाहे जो भी रचना हो कविता हो या कहानी, जिसमें रचनाकार शरीक होता है वो निश्चित रूप से प्रभावित करती है। संस्कृतिकर्मी और शिक्षक अखिलेश ने कहा कि उन्हें कहानी की अपेक्षा यह एक रिपोतार्ज ज़्यादा लगा। यह कहानी एक रिपोर्ट की तरह कही गई, इसमें थोड़ी कल्पनाशक्ति का प्रयोग और किया जाता, थोड़ा और कसाव होता तो यह और बेहतर बन सकती थी। कवि-पत्रकार मुकुल सरल ने कहा कि शोभा सिंह अब अपनी कविताओं को ही कहानी के रूप में विस्तार दे रही हैं। उनकी भाषा-शैली, उनका कहन सबकुछ कविता के अंदाज़ में ही कहानी में आता है जो कहानी को और रोचक और पठनीय बनाता है। लेखक स्वदेश सिन्हा ने महिला जेलों पर लिखी गईं कुछ किताबों का ज़िक्र करते हुए कहा कि कहानी तो अच्छी है, लेकिन रिपोर्टिंग लगती है। अगर फोकस किसी एक पात्र पर किया जाता तो बेहतर होता। एक्टिविस्ट सुलेखा सिंह ने कहा कि जिस तरह हमारे पितृसत्तात्मक समाज में औरतों को देखने का नज़रिया है उसे अपनी कहानी के ज़रिये शोभा जी ने पूरी तरह उघाड़ कर रख दिया। बिम्बों का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया गया है। डॉ. ज़रीना हलीम ने कहा कि यह कहानी तो एक वास्तविक चलचित्र की तरह उनके सामने आ गई। सारे पात्र एकदम आंखों के सामने जीवित हो गए। हालांकि मुझे जेल की दुनिया या जीवन का अनुभव नहीं है, लेकिन इस कहानी को पढ़कर जेल की दुनिया ख़ासकर निर्दोष लोगों की कहानियां जानने की इच्छा और तेज़ हो गई है। लिटिल इप्टा, लखनऊ की संयोजक सुमन श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें भी एक आंदोलनकारी की भूमिका में जेल देखने का मौका मिला और जैसा उन्होंने सागर और बाराबंकी की जेलों में देखा, वैसा ही आंखों देखा हाल इस कहानी में सुनने को मिला। सफाई कर्मचारी आंदोलन के संयोजक बैजवाड़ा विल्सन ने कहा कि महिला दृष्टिकोण से यह पूरी कहानी कही गई है जो बहुत पावरफुल है। कहानी में अपराध के क़ानूनी पक्ष आदि को छोड़कर उसका मानवीय और महिला पक्ष रखा गया है और ख़ासकर यह बताया गया कि - तुम अगर मुझे मारोगे तो मैं तुम्हें नहीं छोड़ूगीं। और कहानी का अंत भी बहुत सुखद आश्चर्य पैदा करता है। पत्रकार और यायावर उपेंद्र स्वामी ने कहा कि इस दौर का पूरा रिफ्लेक्शन इस कहानी में है। कहीं नक्सलवादी से लड़ाई के नाम पर आदिवासी महिलाओं के साथ जो हो रहा है, वो भी कहानी में है, हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच के रिश्ते का जो एक पहलू है, वो भी रिफ्लेक्ट हो रहा है और जेंडर के नज़रिये से बाक़ी सारी चीज़ें आ जाती हैं। इस दौर की राजनीति के सारे पहलुओं को वो एक तरह से इस कहानी में समेट रही हैं। अगर जेल जीवन की जटिलताएं कुछ और इस कहानी में नज़र आती तो शायद उसका एक पहलू और मज़बूत होता। कवि-पत्रकार भाषा सिंह ने कहा कि जेलों पर रिपोर्ट, जेल जाने के बाद अपने अनुभव लिखना, जेल डायरी लिखना, रिपोतार्ज लिखना एक लंबा सिलसिला है। लेकिन यह कहानियों या उपन्यास के रूप में नहीं आईं। इसलिए हिंदी साहित्य में उस अनुभव को कहानी के रूप में महसूस करना और कहना एक महत्वपूर्ण बात है। इस कहानी में भी जेल के भीतर के जितने आयाम हो सकते हैं, खाने से लेकर यौन शोषण तक, पितृसत्ता से लेकर जेलर के रिश्ते तक सभी को छुआ। कहानी में हर चीज़ को बहुत विस्तार से कहना ज़रूरी नहीं है, कुछ इशारे भी महत्वपूर्ण होते हैं और शोभा सिंह ने यह काम बखूबी किया है। इस कहानी में जितने किरदार हैं, ख़ुद लेखिका के साथ तमाम विपरीत परिस्थितियों में लड़ने की जो कला है वो अनूठी है। क्योंकि सबकी लड़ाइयों का एक ही धरातल नहीं है, सबकी अलग-अलग लड़ाइयां हैं। और साथ ही जेल में एक अलग ज़िंदा रहने की भी लड़ाई है। इसे बहुत ख़ामोशी से सहज ढंग से सामने लाया गया है। यह कहानियां कई पहलुओं को छूती हुई ख़ामोशी से अपनी बात कह जाती है। कवि-लेखक अजय सिंह ने अंत में अपनी बात रखते हुए कहा कि शोभा की कहानी दरअसल एक कहानी भी है, रिपोतार्ज भी है, एक संस्मरण भी है। इसमें उनके ऑब्जर्वेशन भी हैं। जो कहानियां अब लिखी जा रही हैं, अब एक ही विधा तक वे नहीं हैं। उसमें कई चीज़ें शामिल हो रही हैं। यह एक अच्छी बात भी है। अब क्योंकि लेखिका कई साल पहले ख़ुद आंदोलन के सिलसिले में लखनऊ और फ़ैज़ाबाद की जेलों में रह चुकी हैं तो इसमें उनका बहुत सारा ऑब्जर्वेशन भी है। यह कहानी जिस तरह से कही गई है, बताई गई है उसके हिसाब से यह कहानी प्रतिरोध की भी कहानी है, ऑब्जर्वेशन भी कहानी है, उसके साथ-साथ जो पूरा माहौल है उस पर टिप्पणी करती हुई भी कहानी है। अगर आप पारंपरिक ढंग से देखे तो इसमें आपको कहानीपन कम दिखाई देगा, लेकिन अगर आप फिर मुक्तिबोध की कहानियां पढ़ें तो आपको लगेगा कि इनको कहानी कहना ही मुश्किल है। लेकिन मेरा कहना है कि कहानी कई तरह से लिखी जा सकती है और जब लेखक इसे कहानी के तौर पर कह रहा है तो हमें इसे कहानी मानना चाहिए। इसके अलावा जिस तरह जेल का विवरण दिया गया है, वह काफी कुछ बताता है। क्योंकि जेल हमारे समाज का ही आईना है, जिस तरह जेल में वर्गीय, जातीय, वर्ण व्यवस्था, स्त्री का उत्पीड़न, उसके साथ भेदभाव उसी तरीके से हैं जैसे बाहर भारतीय समाज में हैं। इसको उन्होंने काफी संवेदनशीलता के साथ पकड़ा है। इस नाते मुझे यह कहानी अच्छी लगती है। इस कहानी को जहां वे ले गई हैं कि कुछ साल के बाद देवंती जीत जाती है, वो लगता है कि एक उम्मीद अभी भी बची हुई है। क्योंकि लड़ने के अलावा आपके पास कोई और उपाय नहीं है और जो जीत है वो लड़ने से ही मिलेगी। ज़रूरी नहीं कि हर बार जीत मिले ही, लेकिन अगर मिलेगी तो लड़ने से ही मिलेगी। यह कहानी उस तरफ़ एक संकेत भी करती है। शोभा की कहानी में आशा का एक टोन, उम्मीद का एक टोन रहता है, जो कई बार लोगों को लग सकता है कि यह एक क्लीशे है, घिसापिटा है, लेकिन यह चीज़ भी ज़रूरी है, ख़ासतौर पर हम जो साहित्य के माध्यम से कुछ हस्तक्षेप करना चाह रहे हैं तो उस हस्तक्षेपकारी भूमिका में अगर हम उम्मीद को नहीं लाएंगे, तमाम निराशाओं के बीच में तो हमारे लिखने का मकसद ही क्या है। उस नाते यह कहानी एक ज़रूरी हस्तक्षेप करती है। कार्यक्रम में पुष्पा वर्मा, आशीष वर्मा, स्वप्ना, रेनू छच्छर, लालसा मौर्य, नीतीश, वरुण पाल, धम्म दर्शन आदि मौजूद थे। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
रोशनी की दस्तक के साथ बैरक तो खुलती है, लेकिन पता चलता है कि जेल की दुनिया में तो अंधेरा कुंडली मारकर बैठा है। ऐसा लगता है कि जैसे इस रात का सुबह नहीं। लेकिन ऐसा भी नहीं है...सुबह तो होनी ही है, और होती भी है। लेकिन इस बीच उजाले से अंधेरे और अंधेरे से उजाले का लंबा सफ़र है और इसी सफ़र, इसी जद्दोजहद, इसी संघर्ष की ही कहानी है बंद घड़ियां। कहानीकार कहता तो है कि - समय में सलवटें कहां...लेकिन महिला जेल और स्त्री जीवन के समय में बहुत सलवटें हैं...तभी तो वह कहती हैं - यहां हमारे लिए समय ठहरा हुआ है। इसी ठहरे हुए समय की कहानी कहती हैं - बंद घड़ियां। शोभा सिंह जो एक समर्थ कवि हैं अब कहानीकार की भूमिका में आईं हैं। जो कहानियां उन्होंने अपनी कविताओं में समेटी अब उन्हीं कविताओं को बिखेर कर वे कहानी कह रही हैं। शोभा सिंह के अब तक दो कविता संग्रह - "अर्द्ध विधवा" और "यह मिट्टी दस्तावेज़ हमारा" आ चुके हैं। अपनी कविताएं भी उन्होंने बहुत सहज ढंग से रची हैं तो अब कहानियां भी उसी सहज ढंग से बुन रही हैं। उनकी कविताओं में भी स्त्री पात्र अपने पूरी ताक़त से सामने आते हैं और ऐसा ही उनकी कहानियों में भी हैं। उनकी कविताएं घरेलू औरत, सुईं-धागा, अर्द्ध विधवा, शाहीन बाग़, रुक़ैया बानो, औरत बीड़ी मज़दूर, भुट्टेवाली और ऐसी कई कविताओं में स्त्री पात्र जितने सशक्त ढंग से आते हैं उनकी कहानी में भी ऐसे ही आते हैं। "जन-अदालत में औरत" इस पूरी कविता की अनुगूंज उनकी कहानी "बंद घड़ियां" में मिलती है। "जन-अदालत" की यही आवाज़ें "बंद घड़ियां" में भी अपनी कहानी कहने को आतुर हैं.... बस थोड़ा भरोसा जगने के बाद। और कहानीकार शोभा सिंह इसी भरोसे और बहनापे के साथ उनकी कहानी सुनती और कहती हैं। और इस और ऐसे ही कई "अपराध" जानने और बताने की कहानी कही है शोभा सिंह ने। यह एक भारतीय महिला जेल की कहानी है। यह किसी भी राज्य या ज़िला-शहर की जेल की कहानी हो सकती है। यह जेल के बहाने हमारी पुलिस, हमारी पूरी क़ानून व्यवस्था, न्यायिक प्रणाली की भी कहानी है और हमारी समाज व्यवस्था की भी कहानी है, जो पितृसत्ता से संचालित होता है। कुल मिलाकर यह भारतीय महिला जेल के बहाने भारतीय महिला की कहानी है। जो निरपराध होकर भी अपराधी है। जो एक तरफ़ परिवार में पिट रही है, पिस रही है दूसरी तरफ़ समाज और व्यवस्था का हंटर भी उसके ऊपर बरस रहा है, लेकिन साथ ही वो पूरी ताक़त से प्रतिकार भी कर रही है। वह निरीह, बेबस नहीं बल्कि प्रतिरोध करना जानती है, पूरी ताक़त से लड़ना जानती है। इस परिप्रेक्ष्य में यह महिला क़ैदियों की बेबसी नहीं बल्कि उनके संघर्ष की कहानी है। जिसे एक राजनीतिक कैदी के तौर पर कहानीकार शोभा ख़ुद दर्ज करती हैं। यह देवंती की कहानी है, जो अपने पति की हत्या के आरोप में अपनी बहन और बेटी के साथ जेल में है। वह पति जो हर समय न सिर्फ़ शराब पीता है बल्कि देवंती को मारता-पीटता भी है और हद तो यह कि वह शराब और जुए की लत में अपनी बेटी तक को दांव पर लगा आता है। जी हां, सरकार नारा लगाने वालों से भी डरती है, जेल में डालती है। इस कहानी का यह एक वाक्य बहुत महत्वपूर्ण है जो इस कहानी को और बड़ा आयाम देता है। और एक आम कहानी से आगे जाकर राजनीतिक कहानी बनाता है। इस कहानी में और भी कई बेगुनाह औरतों की उपस्थिति है, हालांकि लेखिका उनके विस्तार में नहीं गईं, लेकिन उनके केस के इशारे भर से बहुत कुछ बातें साफ़ हो गईं। जैसे - "एक केस तो ग़ज़ब का था अपने भूखे बच्चे लिए ब्रेड चुराती औरत पकड़ी गई। दुकानदार ने चोरी की गई चीजों की लंबी लिस्ट पुलिस को लिखवा दी। हरजाना भरा नहीं वह जेल में है।... कुछ आदिवासी महिलाएं माओवादी होने के आरोप में जेल में बंद हैं। कानून की कौनसी दफा में वे बंद हैं, उन्हें मालूम नहीं।... एक बैरक में मुस्लिम महिलाएं हैं। इनमें से ज्यादातर वे हैं जिनके वीजा की अवधि खत्म हो गई थी। अपनों के बीच आकर वे तेजी से गुजरने वाले दिनों को गिनना भूल गईं। वापसी का रेल टिकट समय पर नहीं हुआ। रेल रिजर्वेशन नहीं मिला। यूं विलंब का कोई भी कारण हो बस उन्हें धर लिया गया। पाकिस्तान और हिंदुस्तान दोनों ओर यह समस्या है। इन महिलाओं का होना भर इस कहानी को बहुत व्यापक आयाम देता है। इसी कहानी का पाठ, सात जून, दो हज़ार तेईस को गुलमोहर किताब के बैनर तले दिल्ली के पटेल नगर में आयोजित हुआ। जिसमें कवि-लेखक और अन्य प्रबुद्ध जन मौजूद थे। सबसे पहले शोभा सिंह ने अपनी कहानी बंद घड़ियां का पाठ किया उसके बाद उपस्थित लोगों ने अपने विचार रखे, प्रतिक्रिया जाहिर की। लेखक-नाटककार राजेश कुमार कहते हैं कि शोभा सिंह की कहानी ने जिस महिला जेल की कहानी लिखी वास्तव में यह पूरे देश की जेलों ख़ासकर महिला जेलों की कहानी है। कहानीकार ने केवल एक महिला पात्र के जरिये ही अपनी कहानी नहीं कही बल्कि कई पात्रों को शामिल किया है, और सबसे ख़ास बात कि उन्होंने इन महिला क़ैदियों या पात्रों की केवल बेबसी, लाचारगी ही नहीं दिखाई, जिस तरह के आजकल के कलावादी लेखक करते हैं, बल्कि उनके लड़ने की ताक़त को भी दिखाया। इसलिए मैं इसे एक अच्छी कहानी कहूंगा। पत्रकार देवाशीष मुखर्जी ने कहा कि यह एक अच्छी कहानी है, हालांकि इसे लंबी कहानी कहा गया लेकिन सुनने में यह बिल्कुल लंबी नहीं लगती। शायर ओमप्रकाश नदीम ने कहा कि उन्हें लगता है कि चाहे जो भी रचना हो कविता हो या कहानी, जिसमें रचनाकार शरीक होता है वो निश्चित रूप से प्रभावित करती है। संस्कृतिकर्मी और शिक्षक अखिलेश ने कहा कि उन्हें कहानी की अपेक्षा यह एक रिपोतार्ज ज़्यादा लगा। यह कहानी एक रिपोर्ट की तरह कही गई, इसमें थोड़ी कल्पनाशक्ति का प्रयोग और किया जाता, थोड़ा और कसाव होता तो यह और बेहतर बन सकती थी। कवि-पत्रकार मुकुल सरल ने कहा कि शोभा सिंह अब अपनी कविताओं को ही कहानी के रूप में विस्तार दे रही हैं। उनकी भाषा-शैली, उनका कहन सबकुछ कविता के अंदाज़ में ही कहानी में आता है जो कहानी को और रोचक और पठनीय बनाता है। लेखक स्वदेश सिन्हा ने महिला जेलों पर लिखी गईं कुछ किताबों का ज़िक्र करते हुए कहा कि कहानी तो अच्छी है, लेकिन रिपोर्टिंग लगती है। अगर फोकस किसी एक पात्र पर किया जाता तो बेहतर होता। एक्टिविस्ट सुलेखा सिंह ने कहा कि जिस तरह हमारे पितृसत्तात्मक समाज में औरतों को देखने का नज़रिया है उसे अपनी कहानी के ज़रिये शोभा जी ने पूरी तरह उघाड़ कर रख दिया। बिम्बों का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया गया है। डॉ. ज़रीना हलीम ने कहा कि यह कहानी तो एक वास्तविक चलचित्र की तरह उनके सामने आ गई। सारे पात्र एकदम आंखों के सामने जीवित हो गए। हालांकि मुझे जेल की दुनिया या जीवन का अनुभव नहीं है, लेकिन इस कहानी को पढ़कर जेल की दुनिया ख़ासकर निर्दोष लोगों की कहानियां जानने की इच्छा और तेज़ हो गई है। लिटिल इप्टा, लखनऊ की संयोजक सुमन श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें भी एक आंदोलनकारी की भूमिका में जेल देखने का मौका मिला और जैसा उन्होंने सागर और बाराबंकी की जेलों में देखा, वैसा ही आंखों देखा हाल इस कहानी में सुनने को मिला। सफाई कर्मचारी आंदोलन के संयोजक बैजवाड़ा विल्सन ने कहा कि महिला दृष्टिकोण से यह पूरी कहानी कही गई है जो बहुत पावरफुल है। कहानी में अपराध के क़ानूनी पक्ष आदि को छोड़कर उसका मानवीय और महिला पक्ष रखा गया है और ख़ासकर यह बताया गया कि - तुम अगर मुझे मारोगे तो मैं तुम्हें नहीं छोड़ूगीं। और कहानी का अंत भी बहुत सुखद आश्चर्य पैदा करता है। पत्रकार और यायावर उपेंद्र स्वामी ने कहा कि इस दौर का पूरा रिफ्लेक्शन इस कहानी में है। कहीं नक्सलवादी से लड़ाई के नाम पर आदिवासी महिलाओं के साथ जो हो रहा है, वो भी कहानी में है, हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच के रिश्ते का जो एक पहलू है, वो भी रिफ्लेक्ट हो रहा है और जेंडर के नज़रिये से बाक़ी सारी चीज़ें आ जाती हैं। इस दौर की राजनीति के सारे पहलुओं को वो एक तरह से इस कहानी में समेट रही हैं। अगर जेल जीवन की जटिलताएं कुछ और इस कहानी में नज़र आती तो शायद उसका एक पहलू और मज़बूत होता। कवि-पत्रकार भाषा सिंह ने कहा कि जेलों पर रिपोर्ट, जेल जाने के बाद अपने अनुभव लिखना, जेल डायरी लिखना, रिपोतार्ज लिखना एक लंबा सिलसिला है। लेकिन यह कहानियों या उपन्यास के रूप में नहीं आईं। इसलिए हिंदी साहित्य में उस अनुभव को कहानी के रूप में महसूस करना और कहना एक महत्वपूर्ण बात है। इस कहानी में भी जेल के भीतर के जितने आयाम हो सकते हैं, खाने से लेकर यौन शोषण तक, पितृसत्ता से लेकर जेलर के रिश्ते तक सभी को छुआ। कहानी में हर चीज़ को बहुत विस्तार से कहना ज़रूरी नहीं है, कुछ इशारे भी महत्वपूर्ण होते हैं और शोभा सिंह ने यह काम बखूबी किया है। इस कहानी में जितने किरदार हैं, ख़ुद लेखिका के साथ तमाम विपरीत परिस्थितियों में लड़ने की जो कला है वो अनूठी है। क्योंकि सबकी लड़ाइयों का एक ही धरातल नहीं है, सबकी अलग-अलग लड़ाइयां हैं। और साथ ही जेल में एक अलग ज़िंदा रहने की भी लड़ाई है। इसे बहुत ख़ामोशी से सहज ढंग से सामने लाया गया है। यह कहानियां कई पहलुओं को छूती हुई ख़ामोशी से अपनी बात कह जाती है। कवि-लेखक अजय सिंह ने अंत में अपनी बात रखते हुए कहा कि शोभा की कहानी दरअसल एक कहानी भी है, रिपोतार्ज भी है, एक संस्मरण भी है। इसमें उनके ऑब्जर्वेशन भी हैं। जो कहानियां अब लिखी जा रही हैं, अब एक ही विधा तक वे नहीं हैं। उसमें कई चीज़ें शामिल हो रही हैं। यह एक अच्छी बात भी है। अब क्योंकि लेखिका कई साल पहले ख़ुद आंदोलन के सिलसिले में लखनऊ और फ़ैज़ाबाद की जेलों में रह चुकी हैं तो इसमें उनका बहुत सारा ऑब्जर्वेशन भी है। यह कहानी जिस तरह से कही गई है, बताई गई है उसके हिसाब से यह कहानी प्रतिरोध की भी कहानी है, ऑब्जर्वेशन भी कहानी है, उसके साथ-साथ जो पूरा माहौल है उस पर टिप्पणी करती हुई भी कहानी है। अगर आप पारंपरिक ढंग से देखे तो इसमें आपको कहानीपन कम दिखाई देगा, लेकिन अगर आप फिर मुक्तिबोध की कहानियां पढ़ें तो आपको लगेगा कि इनको कहानी कहना ही मुश्किल है। लेकिन मेरा कहना है कि कहानी कई तरह से लिखी जा सकती है और जब लेखक इसे कहानी के तौर पर कह रहा है तो हमें इसे कहानी मानना चाहिए। इसके अलावा जिस तरह जेल का विवरण दिया गया है, वह काफी कुछ बताता है। क्योंकि जेल हमारे समाज का ही आईना है, जिस तरह जेल में वर्गीय, जातीय, वर्ण व्यवस्था, स्त्री का उत्पीड़न, उसके साथ भेदभाव उसी तरीके से हैं जैसे बाहर भारतीय समाज में हैं। इसको उन्होंने काफी संवेदनशीलता के साथ पकड़ा है। इस नाते मुझे यह कहानी अच्छी लगती है। इस कहानी को जहां वे ले गई हैं कि कुछ साल के बाद देवंती जीत जाती है, वो लगता है कि एक उम्मीद अभी भी बची हुई है। क्योंकि लड़ने के अलावा आपके पास कोई और उपाय नहीं है और जो जीत है वो लड़ने से ही मिलेगी। ज़रूरी नहीं कि हर बार जीत मिले ही, लेकिन अगर मिलेगी तो लड़ने से ही मिलेगी। यह कहानी उस तरफ़ एक संकेत भी करती है। शोभा की कहानी में आशा का एक टोन, उम्मीद का एक टोन रहता है, जो कई बार लोगों को लग सकता है कि यह एक क्लीशे है, घिसापिटा है, लेकिन यह चीज़ भी ज़रूरी है, ख़ासतौर पर हम जो साहित्य के माध्यम से कुछ हस्तक्षेप करना चाह रहे हैं तो उस हस्तक्षेपकारी भूमिका में अगर हम उम्मीद को नहीं लाएंगे, तमाम निराशाओं के बीच में तो हमारे लिखने का मकसद ही क्या है। उस नाते यह कहानी एक ज़रूरी हस्तक्षेप करती है। कार्यक्रम में पुष्पा वर्मा, आशीष वर्मा, स्वप्ना, रेनू छच्छर, लालसा मौर्य, नीतीश, वरुण पाल, धम्म दर्शन आदि मौजूद थे। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
पच्छिमी राजस्थान के भी हिन्दी - मण्डल मे चले जाने से पच्छिम-खण्ड मे गुजरात और सिन्ध बचे । गुजरात गुजराती भाषा का क्षेत्र है। कच्छ भी उसा में सम्मिलित है। सिन्ध सब दृष्टियो से एक पृथक् र स्वतन्त्र जातीय भूमि है । उसका भाषा सिन्धी है जो आजकल के 'बलोचिस्तान' की लास बेला रियासत मे भी बाली जाती और पच्छिमी पजाब की बोली हिन्दकी से बहुत मिलती है । सिन्धी मैदान का उत्तरपच्छिमी बढाव कच्छी गन्दावड भी, जो मूला, बोलान, नारी आदि बरसाती नदियों का कच्छ है, और आजकल 'बलांचिस्तान' मे शामिल है, वास्तव मे सिन्ध का है। उसी मे सिबी जिला या सिबिस्तान है जो बहुत पुराने समय से सिन्ध का अग समझा जाता रहा है । प्राचीन परिभाषा मे जिसे उत्तरापथ कहा जाता था, उस के मैदान अंश मे केवल पजाब का प्रान्त बचता है, और उसे अब उत्तरपच्छिम कहना अधिक ठीक है। पंजाब की भाषा विषयक स्थिति कुछ पेचीदा है । साधारण जनता मोटे तौर पर पंजाबियो की बोली को पजाबी कहती और यह भी जानती है कि मुलतानी बोली साधारण पजाबी से कुछ भिन्न और सिन्धी से मिलती है। आधुनिक नैरुक्त लोग पजाबी नाम केवल उस बाली को देते हैं जो पूरबी पजाब मे बोली जाती है। पच्छिम पजाब की बोली को, जिस का एक रूप मुलतानी है, वे पछाँहीं पजाबी भी नही कहना चाहते, क्याकि वैसा कहने से उस का पूरबी पंजाब की बोली से नाता दीख पड़ेगा जो कि है नहीं। इस पछाँही बोली का नाम हिन्दुकी है। नैरुक्को के मत मे पजाबी तो हिन्दी की खडी बोली के इतनी नजदीक है जितनी राजस्थानी भी नहीं, लेकिन हिन्दकी इतनी दूर है जितनी बिहारी हिन्दी या मराठी । लेकिन इन बारीक भेदो के बावजूद अपनी भौगोलिक स्थिति और अपने इतिहास के कारण पंजाब की १. मीचे ४ २ ।
पच्छिमी राजस्थान के भी हिन्दी - मण्डल मे चले जाने से पच्छिम-खण्ड मे गुजरात और सिन्ध बचे । गुजरात गुजराती भाषा का क्षेत्र है। कच्छ भी उसा में सम्मिलित है। सिन्ध सब दृष्टियो से एक पृथक् र स्वतन्त्र जातीय भूमि है । उसका भाषा सिन्धी है जो आजकल के 'बलोचिस्तान' की लास बेला रियासत मे भी बाली जाती और पच्छिमी पजाब की बोली हिन्दकी से बहुत मिलती है । सिन्धी मैदान का उत्तरपच्छिमी बढाव कच्छी गन्दावड भी, जो मूला, बोलान, नारी आदि बरसाती नदियों का कच्छ है, और आजकल 'बलांचिस्तान' मे शामिल है, वास्तव मे सिन्ध का है। उसी मे सिबी जिला या सिबिस्तान है जो बहुत पुराने समय से सिन्ध का अग समझा जाता रहा है । प्राचीन परिभाषा मे जिसे उत्तरापथ कहा जाता था, उस के मैदान अंश मे केवल पजाब का प्रान्त बचता है, और उसे अब उत्तरपच्छिम कहना अधिक ठीक है। पंजाब की भाषा विषयक स्थिति कुछ पेचीदा है । साधारण जनता मोटे तौर पर पंजाबियो की बोली को पजाबी कहती और यह भी जानती है कि मुलतानी बोली साधारण पजाबी से कुछ भिन्न और सिन्धी से मिलती है। आधुनिक नैरुक्त लोग पजाबी नाम केवल उस बाली को देते हैं जो पूरबी पजाब मे बोली जाती है। पच्छिम पजाब की बोली को, जिस का एक रूप मुलतानी है, वे पछाँहीं पजाबी भी नही कहना चाहते, क्याकि वैसा कहने से उस का पूरबी पंजाब की बोली से नाता दीख पड़ेगा जो कि है नहीं। इस पछाँही बोली का नाम हिन्दुकी है। नैरुक्को के मत मे पजाबी तो हिन्दी की खडी बोली के इतनी नजदीक है जितनी राजस्थानी भी नहीं, लेकिन हिन्दकी इतनी दूर है जितनी बिहारी हिन्दी या मराठी । लेकिन इन बारीक भेदो के बावजूद अपनी भौगोलिक स्थिति और अपने इतिहास के कारण पंजाब की एक. मीचे चार दो ।
लखनऊ (ब्यूरो)। प्रदेश के अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि भवनों में सबसे ज्यादा बिजली की खपत एयरकंडीशनर के कारण होती है। यह आंकलित किया गया है कि एयरकंडीशनर का तापमान एक डिग्री बढ़ाने से लगभग 6 फीसद बिजली की बचत होती है। सामान्य तौर पर एयरकंडीशनर का तापमान 18 से 21 डिग्री रखा जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं होता है। यदि तापमान 24-25 डिग्री सेंटीग्रेट रखा जाए, तो बिजली की बचत भी होती है और यह स्वास्थ्य के लिए भी उपयुक्त होता है। यदि हम एयरकंडीशनर का तापमान 20 से 24 डिग्री कर देते है तो इस चार डिग्री बढ़ोत्तरी के सापेक्ष हम 24 फीसद बिजली की बचत कर सकते है। वे सोमवार को यूपीनेडा में 'एयरकंडीशनर का तापमान 24 डिग्री या उससे अधिक रखें' विषयक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर ब्रजेश पाठक ने जन जागरण के लिए जागरूकता वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि यह वैन पूरे प्रदेश में बिजली के उपयोग एवं बचत के बारे में आम लोगों को जागरूक करेगी। देश में वर्ष 2005 में व्यवसायिक फ्लोर स्पेस लगभग 425 मिलियन वर्गमीटर था, जिसमें लगभग 36 बिलियन यूनिट बिजली की खपत होती थी। जिसके आधार पर वर्ष 2017 में 1,114 मिलियन वर्गमीटर फ्लोर स्पेस आंकलित था जिसके लिए 241 बिलियन यूनिट विद्युत खपत आंकलित थी। लगातार विकास से बिजली की खपत भी बढ़ जाती है। वहीं प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने बताया कि एसी का तापमान 24 सेंटीग्रेड रखे जाने पर लगभग 960 यूनिट की बचत तथा 6240 रुपये की वार्षिक बचत होगी। इस अवसर पर सचिव यूपीनेडा अनिल कुमार, वरिष्ठ परियोजना अधिकारी अशोक कुमार श्रीवास्तव तथा यूपीनेडा के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
लखनऊ । प्रदेश के अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत मंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि भवनों में सबसे ज्यादा बिजली की खपत एयरकंडीशनर के कारण होती है। यह आंकलित किया गया है कि एयरकंडीशनर का तापमान एक डिग्री बढ़ाने से लगभग छः फीसद बिजली की बचत होती है। सामान्य तौर पर एयरकंडीशनर का तापमान अट्ठारह से इक्कीस डिग्री रखा जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त नहीं होता है। यदि तापमान चौबीस-पच्चीस डिग्री सेंटीग्रेट रखा जाए, तो बिजली की बचत भी होती है और यह स्वास्थ्य के लिए भी उपयुक्त होता है। यदि हम एयरकंडीशनर का तापमान बीस से चौबीस डिग्री कर देते है तो इस चार डिग्री बढ़ोत्तरी के सापेक्ष हम चौबीस फीसद बिजली की बचत कर सकते है। वे सोमवार को यूपीनेडा में 'एयरकंडीशनर का तापमान चौबीस डिग्री या उससे अधिक रखें' विषयक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर ब्रजेश पाठक ने जन जागरण के लिए जागरूकता वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि यह वैन पूरे प्रदेश में बिजली के उपयोग एवं बचत के बारे में आम लोगों को जागरूक करेगी। देश में वर्ष दो हज़ार पाँच में व्यवसायिक फ्लोर स्पेस लगभग चार सौ पच्चीस मिलियन वर्गमीटर था, जिसमें लगभग छत्तीस बिलियन यूनिट बिजली की खपत होती थी। जिसके आधार पर वर्ष दो हज़ार सत्रह में एक,एक सौ चौदह मिलियन वर्गमीटर फ्लोर स्पेस आंकलित था जिसके लिए दो सौ इकतालीस बिलियन यूनिट विद्युत खपत आंकलित थी। लगातार विकास से बिजली की खपत भी बढ़ जाती है। वहीं प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने बताया कि एसी का तापमान चौबीस सेंटीग्रेड रखे जाने पर लगभग नौ सौ साठ यूनिट की बचत तथा छः हज़ार दो सौ चालीस रुपयापये की वार्षिक बचत होगी। इस अवसर पर सचिव यूपीनेडा अनिल कुमार, वरिष्ठ परियोजना अधिकारी अशोक कुमार श्रीवास्तव तथा यूपीनेडा के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
अंबाला/कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र जिले के प्रतापगढ़ गांव में सत्संग में जाती विधवा महिला से दो युवक उसका ढाई साल का बच्चा छीनकर फरार हो गए। महिला की सूचना पर पुलिस ने नाकाबंदी की तो खुद को घिरा देख युवक नेशनल हाईवे पर डीआरएम कॉलोनी कट के पास बीच सड़क बच्चे काे गाड़ी में छोड़ तालाब में कूद गए। मामले को संदिग्ध देख बाबा भी कूद गए तालाब में, दबोच लाए आरोपियों को. . - खेड़ी मारकंडा से प्रतापगढ़ रोड पर एक कार के सामने अचानक एक कार आकर रुकी, जिससे कई लड़के उतरे और कार सवार व्यक्ति से करीब ढाई साल का बच्चा छीनकर गाड़ी में लेकर फरार हो गए। - पिपली के नजदीक बच्चे को किडनैप करके ले जाने वाले युवकों की गाड़ी अंबाला की ओर जाने की सूचना अंबाला पुलिस को दी गई। - पिपली के नजदीक बच्चे को किडनैप करके ले जाने वाले युवकों की गाड़ी अंबाला की ओर जाने की सूचना अंबाला पुलिस को दी गई। - अंबाला पुलिस के पास रविवार सुबह 11:35 पर बीटी आई कि कुरुक्षेत्र साइड से फोर्स गाड़ी एचआर-0-3एन-7072 अंबाला की ओर आ रही है, जिसमें एक बच्चे को किडनैप करके ले जाया जा रहा है। इसके तुरंत बाद मोहड़ी के नजदीक अंबाला पुलिस ने नाका लगा दिया। - युवकों ने नाका तोड़ा तो शाहाबाद पुलिस की पीसीआर पीछे लग गई, लेकिन पुलिस युवकों ने पीसीआर को पीछे छोड़ दिया। वहीं मोहड़ा के नजदीक पड़ाव थाना पुलिस की स्काॅर्पियो पीसीआर गाड़ी के पीछे लग गई। उन्होंने दो से तीन बार गाड़ी को पीछे छोड़ा, लेकिन युवकों ने चालाकी से पीसीआर को पीछे छोड़ दिया। - इसके बाद आगे अंबाला के थाना पड़ाव की पुलिस पीछे पड़ गई तो खुद को घिरा पाकर युवक डीआरएम काॅलोनी को जाने वाली सड़क के कट पर गाड़ी में ही बच्चे को छोड़ शनि मंदिर के पीछे तालाब में कूद गए। - मंदिर के बाबा संजय कुमार और वहां काम कर रहे मजदूर मदन ने युवकों को पानी में कूदते देख लिया। - बाबा व मजदूर हाथों में डंडे लेकर तालाब में कूद गए और युवकों को एक-एक करके बाहर निकाला। बाहर निकालते ही पहले तो दोनों युवकों की जमकर धुनाई की गई और बाद में रस्सी से हाथ-पैर बांधकर इन्हें गाड़ी में बिठाया। - युवकों को गाड़ी समेत पड़ाव थाने में लाया गया, फिर कुछ देर बाद ही बच्चे समेत शाहाबाद पुलिस के हवाले कर दिया, जहां का मामला था। हालांकि युवकों की गाड़ी पड़ाव थाने में ही रखी गई। इसके बाद शाहाबाद पुलिस ने इन्हें थानेसर पुलिस के सुपुर्द कर दिया। - इन युवकों को तालाब में से बाहर निकालने में अहम भूमिका मंदिर के बाबा और मजदूर ने निभाई, लेकिन जब बच्चे और युवकों को पड़ाव पुलिस थाने में लाया गया तो यहां पीसीआर कर्मी अपनी वाहवाही दिखाने लगे कि उन्होंने युवकों को तालाब में जाकर पकड़ा है। - दूसरी ओर इस घटनाक्रम का वीडियो वायरल होने के बाद सामने आया कि पुलिस तालाब के बाहर खड़ी है और बाबा डंडे के साथ युवक को बाहर निकालकर लाता है। - करीब दो साल पहले अंबाला-अमृतसर नेशनल हाइवे पर काली पलटन पुल के पास एक कार हादसा हुआ था। उस हादसे में रामगढ़ निवासी रविपाल की मौत हो गई थी। जिस बच्चे का अब अपहरण किया गया है यह उसी मृतक रविपाल का बेटा है। - इस हादसे के बाद रवि पाल की पत्नी अपने बच्चे को लेकर कुरुक्षेत्र स्थित प्रतापगढ़ अपने मायके में ही आकर रहने लग गई थी। अब विधवा बहू सुनीता और उसके ससुराल वालों के बीच पारिवारिक विवाद के चलते मामला कोर्ट में विचाराधीन है। - बताया जाता है कि सुनीता अपने बच्चे मोहित को उसके दादा गुरदेव या अन्य किसी को भी मिलने नहीं देती थी जो कि उनका वंशज था। ऐसे में पोते की याद बार-बार परिजनों को सताती थी और इसीलिए गुरदेव सिंह ने अपने दो भतीते शैंटी और नरेंद्र को गाड़ी देकर बच्चे को किडनैप करने भेज दिया। रामगढ़ निवासी शैंटी और नरेंद्र के अलावा बच्चे मोहित के दादा गुरदेव के खिलाफ किडनैपिंग व मार-पिटाई की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बच्चे के दादा ने ही उसका दो युवकों को भेजकर किडनैप करवाया था, लेकिन युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया है और बच्चे के दादा गुरदेव को भी जल्द हिरासत में ले लिया जाएगा। -दलीप सिंह, थानेसर थाना प्रभारी। रामगढ़ निवासी शैंटी और नरेंद्र के अलावा बच्चे मोहित के दादा गुरदेव के खिलाफ किडनैपिंग व मार-पिटाई की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बच्चे के दादा ने ही उसका दो युवकों को भेजकर किडनैप करवाया था, लेकिन युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया है और बच्चे के दादा गुरदेव को भी जल्द हिरासत में ले लिया जाएगा। -दलीप सिंह, थानेसर थाना प्रभारी।
अंबाला/कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र जिले के प्रतापगढ़ गांव में सत्संग में जाती विधवा महिला से दो युवक उसका ढाई साल का बच्चा छीनकर फरार हो गए। महिला की सूचना पर पुलिस ने नाकाबंदी की तो खुद को घिरा देख युवक नेशनल हाईवे पर डीआरएम कॉलोनी कट के पास बीच सड़क बच्चे काे गाड़ी में छोड़ तालाब में कूद गए। मामले को संदिग्ध देख बाबा भी कूद गए तालाब में, दबोच लाए आरोपियों को. . - खेड़ी मारकंडा से प्रतापगढ़ रोड पर एक कार के सामने अचानक एक कार आकर रुकी, जिससे कई लड़के उतरे और कार सवार व्यक्ति से करीब ढाई साल का बच्चा छीनकर गाड़ी में लेकर फरार हो गए। - पिपली के नजदीक बच्चे को किडनैप करके ले जाने वाले युवकों की गाड़ी अंबाला की ओर जाने की सूचना अंबाला पुलिस को दी गई। - पिपली के नजदीक बच्चे को किडनैप करके ले जाने वाले युवकों की गाड़ी अंबाला की ओर जाने की सूचना अंबाला पुलिस को दी गई। - अंबाला पुलिस के पास रविवार सुबह ग्यारह:पैंतीस पर बीटी आई कि कुरुक्षेत्र साइड से फोर्स गाड़ी एचआर-शून्य-तीनएन-सात हज़ार बहत्तर अंबाला की ओर आ रही है, जिसमें एक बच्चे को किडनैप करके ले जाया जा रहा है। इसके तुरंत बाद मोहड़ी के नजदीक अंबाला पुलिस ने नाका लगा दिया। - युवकों ने नाका तोड़ा तो शाहाबाद पुलिस की पीसीआर पीछे लग गई, लेकिन पुलिस युवकों ने पीसीआर को पीछे छोड़ दिया। वहीं मोहड़ा के नजदीक पड़ाव थाना पुलिस की स्काॅर्पियो पीसीआर गाड़ी के पीछे लग गई। उन्होंने दो से तीन बार गाड़ी को पीछे छोड़ा, लेकिन युवकों ने चालाकी से पीसीआर को पीछे छोड़ दिया। - इसके बाद आगे अंबाला के थाना पड़ाव की पुलिस पीछे पड़ गई तो खुद को घिरा पाकर युवक डीआरएम काॅलोनी को जाने वाली सड़क के कट पर गाड़ी में ही बच्चे को छोड़ शनि मंदिर के पीछे तालाब में कूद गए। - मंदिर के बाबा संजय कुमार और वहां काम कर रहे मजदूर मदन ने युवकों को पानी में कूदते देख लिया। - बाबा व मजदूर हाथों में डंडे लेकर तालाब में कूद गए और युवकों को एक-एक करके बाहर निकाला। बाहर निकालते ही पहले तो दोनों युवकों की जमकर धुनाई की गई और बाद में रस्सी से हाथ-पैर बांधकर इन्हें गाड़ी में बिठाया। - युवकों को गाड़ी समेत पड़ाव थाने में लाया गया, फिर कुछ देर बाद ही बच्चे समेत शाहाबाद पुलिस के हवाले कर दिया, जहां का मामला था। हालांकि युवकों की गाड़ी पड़ाव थाने में ही रखी गई। इसके बाद शाहाबाद पुलिस ने इन्हें थानेसर पुलिस के सुपुर्द कर दिया। - इन युवकों को तालाब में से बाहर निकालने में अहम भूमिका मंदिर के बाबा और मजदूर ने निभाई, लेकिन जब बच्चे और युवकों को पड़ाव पुलिस थाने में लाया गया तो यहां पीसीआर कर्मी अपनी वाहवाही दिखाने लगे कि उन्होंने युवकों को तालाब में जाकर पकड़ा है। - दूसरी ओर इस घटनाक्रम का वीडियो वायरल होने के बाद सामने आया कि पुलिस तालाब के बाहर खड़ी है और बाबा डंडे के साथ युवक को बाहर निकालकर लाता है। - करीब दो साल पहले अंबाला-अमृतसर नेशनल हाइवे पर काली पलटन पुल के पास एक कार हादसा हुआ था। उस हादसे में रामगढ़ निवासी रविपाल की मौत हो गई थी। जिस बच्चे का अब अपहरण किया गया है यह उसी मृतक रविपाल का बेटा है। - इस हादसे के बाद रवि पाल की पत्नी अपने बच्चे को लेकर कुरुक्षेत्र स्थित प्रतापगढ़ अपने मायके में ही आकर रहने लग गई थी। अब विधवा बहू सुनीता और उसके ससुराल वालों के बीच पारिवारिक विवाद के चलते मामला कोर्ट में विचाराधीन है। - बताया जाता है कि सुनीता अपने बच्चे मोहित को उसके दादा गुरदेव या अन्य किसी को भी मिलने नहीं देती थी जो कि उनका वंशज था। ऐसे में पोते की याद बार-बार परिजनों को सताती थी और इसीलिए गुरदेव सिंह ने अपने दो भतीते शैंटी और नरेंद्र को गाड़ी देकर बच्चे को किडनैप करने भेज दिया। रामगढ़ निवासी शैंटी और नरेंद्र के अलावा बच्चे मोहित के दादा गुरदेव के खिलाफ किडनैपिंग व मार-पिटाई की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बच्चे के दादा ने ही उसका दो युवकों को भेजकर किडनैप करवाया था, लेकिन युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया है और बच्चे के दादा गुरदेव को भी जल्द हिरासत में ले लिया जाएगा। -दलीप सिंह, थानेसर थाना प्रभारी। रामगढ़ निवासी शैंटी और नरेंद्र के अलावा बच्चे मोहित के दादा गुरदेव के खिलाफ किडनैपिंग व मार-पिटाई की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। बच्चे के दादा ने ही उसका दो युवकों को भेजकर किडनैप करवाया था, लेकिन युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया है और बच्चे के दादा गुरदेव को भी जल्द हिरासत में ले लिया जाएगा। -दलीप सिंह, थानेसर थाना प्रभारी।
राजस्थान राज्य भारत स्काउट गाइड राज्य मुख्यालय जयपुर द्वारा करौली जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह को सम्मानित किया जाएगा। विश्व स्काउट गाइड दिवस के मौके पर आयोजित राज्य स्तरीय राज्यपाल पुरस्कार अवार्ड रैली में राज्यपाल कलराज मिश्र द्वारा कलेक्टर को सम्मानित किया जाएगा। सीओ स्काउट अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि 4 से 10 जनवरी तक रोहट पाली में आयोजित राष्ट्रीय स्काउट गाइड जंबूरी में उल्लेखनीय योगदान प्रदान करने के लिए करौली कलेक्टर अंकित कुमार सिंह को राज्यपाल कलराज मिश्र द्वारा धन्यवाद वैज से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रीय स्काउट गाइड जंबूरी में करौली जिले के 230 स्काउट गाइड, स्काउटर गाइडर और पदाधिकारियों ने भाग लिया था। जिन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर ने उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। उसके साथ-साथ आर्थिक सहयोग भी करवाया। जिससे कि सभी ग्रुप पूर्ण सुविधा के साथ जंबूरी में सहभागिता कर सके। सीओ स्काउट करौली के अनुसार जिला कलेक्टर करौली अंकित कुमार सिंह ने राष्ट्रीय जंबूरी के सफल आयोजन के लिए 2 कमेटियों, प्रतीक चिन्ह, पुरस्कार वितरण और प्रिंटिंग कार्य, प्रचार प्रसार प्रमाण पत्र, जंबूरी बुलेटिन आदि कमेटी के अध्यक्ष भी रहे। दोनों ही कमेटियों के सदस्यों ने उत्कृष्ट श्रेणी का कार्य किया। करौली जिले की स्काउट गाइड की उपलब्धियां भी अच्छी रही हैं। जिसके आधार पर जिला कलेक्टर को राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। इससे पहले बांसवाड़ा जिले में भी बांसवाड़ा कलेक्टर रहते हुए अंकित कुमार सिंह ने राष्ट्रीय जनजाति जंबोरेट का सफल आयोजन करवाया था। जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह के राज्य स्तर पर धन्यवाद बैज के लिए चयनित होने पर करौली जिला स्काउट गाइड, स्काउटर, गाइडर ने जिला कलेक्टर का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। साथ ही जिला कलेक्टर का मुंह मीठा कराया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
राजस्थान राज्य भारत स्काउट गाइड राज्य मुख्यालय जयपुर द्वारा करौली जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह को सम्मानित किया जाएगा। विश्व स्काउट गाइड दिवस के मौके पर आयोजित राज्य स्तरीय राज्यपाल पुरस्कार अवार्ड रैली में राज्यपाल कलराज मिश्र द्वारा कलेक्टर को सम्मानित किया जाएगा। सीओ स्काउट अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि चार से दस जनवरी तक रोहट पाली में आयोजित राष्ट्रीय स्काउट गाइड जंबूरी में उल्लेखनीय योगदान प्रदान करने के लिए करौली कलेक्टर अंकित कुमार सिंह को राज्यपाल कलराज मिश्र द्वारा धन्यवाद वैज से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रीय स्काउट गाइड जंबूरी में करौली जिले के दो सौ तीस स्काउट गाइड, स्काउटर गाइडर और पदाधिकारियों ने भाग लिया था। जिन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और जिला कलेक्टर ने उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया। उसके साथ-साथ आर्थिक सहयोग भी करवाया। जिससे कि सभी ग्रुप पूर्ण सुविधा के साथ जंबूरी में सहभागिता कर सके। सीओ स्काउट करौली के अनुसार जिला कलेक्टर करौली अंकित कुमार सिंह ने राष्ट्रीय जंबूरी के सफल आयोजन के लिए दो कमेटियों, प्रतीक चिन्ह, पुरस्कार वितरण और प्रिंटिंग कार्य, प्रचार प्रसार प्रमाण पत्र, जंबूरी बुलेटिन आदि कमेटी के अध्यक्ष भी रहे। दोनों ही कमेटियों के सदस्यों ने उत्कृष्ट श्रेणी का कार्य किया। करौली जिले की स्काउट गाइड की उपलब्धियां भी अच्छी रही हैं। जिसके आधार पर जिला कलेक्टर को राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। इससे पहले बांसवाड़ा जिले में भी बांसवाड़ा कलेक्टर रहते हुए अंकित कुमार सिंह ने राष्ट्रीय जनजाति जंबोरेट का सफल आयोजन करवाया था। जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह के राज्य स्तर पर धन्यवाद बैज के लिए चयनित होने पर करौली जिला स्काउट गाइड, स्काउटर, गाइडर ने जिला कलेक्टर का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया। साथ ही जिला कलेक्टर का मुंह मीठा कराया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में कुल 251 सदस्य होते हैं. (सांकेतिक तस्वीर) UCC and AIMPLB: देश के 22वें विधि आयोग के समान नागरिक संहिता को लागू करने को लेकर सभी पक्षों से 14 जुलाई 2023 तक सुझाव मांगने के बाद से देश में इस मुद्दे पर बहस फिर तेज हो गई है. यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध करने वालों में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का नाम सबसे ऊपर आता है. एआईएमपीएलबी के महासचिव मुहम्मद फजल उर रहीम मुजद्दिदी का कहना है कि देश में मुस्लिम लॉ की सुरक्षा करना उसका मुख्य उद्देश्य है. साथ ही ऐसे हर कानून को रोकना उसका काम है, जो मुस्लिम पर्सनल को प्रभावित कर रहा हो. उन्होंने कहा कि बोर्ड स्थापना के समय से ही समान नागरिक संहिता का विरोध रहा है. क्या आप जानते हैं कि यूसीसी का विरोध करने वाला एआईएमपीएलबी क्या है और इसका इतिहास क्या है? बोर्ड के महासचिव ने कहा कि सरकार और सरकारी संगठन यूसीसी के मुद्दे को बार-बार उठाते रहे हैं. भारत के 21वें विधि आयोग ने 2016 में इस पर सभी पक्षों से सुझाव मांगे थे. इसके बाद बोर्ड ने अपना जवाब दाखिल कर दिया था. इसमें साफ तौर पर कहा गया था कि समान नागरिक संहिता देश के संविधान की भावना के खिलाफ है और देशहित में भी नहीं है. अब उनका कहना है कि समान नागरिक संहिता देश की बहुलवादी संरचना को नुकसान पहुंचाएगा. ये संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता के भी विरुद्ध होगा. इससे यूसीसी को लागू नहीं की जाना चाहिए. साथ ही संविधान के दिशानिर्देशों के अनुच्छेद-44 को हटाना सही रहेगा. क्या है ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड? ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की स्थापना 7-8 अप्रैल 1973 को हुई थी. बोर्ड ऐसे समय बनाया गया था, जब सरकार समानांतर कानून के जरिये भारतीय मुसलमानों पर लागू होने वाले शरिया कानून को खत्म करने की कोशिश कर रही थी. तब दत्तक ग्रहण विधेयक संसद में पेश किया गया था. तत्कालीन केंद्रीय कानून मंत्री एचआर गोखले ने विधेयक को यूसीसी की दिशा में पहला कदम बताया था. तब उलेमा, नेताओं और कई मुस्लिम संगठनों ने भारतीय मुस्लिम समुदाय को समझाया कि इससे शरिया कानूनों के खोने का जोखिम है. साथ ही कहा था कि इसे नाकाम करने के लिए मुस्लिम समुदाय को ठोस कदम उठाने की जरूरत है. खिलाफत आंदोलन के बाद देश के इतिहास में पहली बार भारतीय मुस्लिम समुदाय के लोग और संगठन मुस्लिम पर्सनल लॉ की सुरक्षा के लिए एक प्लेटफॉर्म पर इकट्ठा हुए थे. इसके लिए पहली बैठक हजरत मौलाना सैयद शाह मिन्नतुल्लाह रहमानी, अमीर शरीयत, बिहार व उड़ीसा और हकीमुल इस्लाम हजरत मौलाना कारी मोहम्मद तैयब, मोहतमिम, दारुल उलूम, देवबंद की पहल पर देवबंद में बुलाई गई थी. बैठक में मुंबई में एक सामान्य प्रतिनिधि सम्मेलन करने का फैसला हुआ. मुंबई में 27-28 दिसंबर, 1972 को सम्मेलन आयोजित हुआ. सम्मेलन में सभी की सहमति से ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का गठन करने का फैसला लिया गया. कैसा है एआईएमपीएलबी का स्ट्रक्चर? भारत में इस्लामी शरीयत की रक्षा के लिए इस आंदोलन का नेतृत्व करने वाले हजरत मौलाना कारी तैय्यब कासमी एआईएमपीएलबी के संस्थापक अध्यक्ष और हजरत मौलाना सैयद शाह मिन्नतुल्लाह रहमानी महासचिव बनाए गए. इस समय बोर्ड के महासचिव मौलाना सैयद निजामुद्दीन हैं. वहीं, बोर्ड के सबसे पहले अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद तैय्यब थे. दूसरे अध्यक्ष अली मियां, तीसरे मुजाहिदुल इस्लाम और चौथे अध्यक्ष मौलाना सैय्यद मोहम्मद राबे हसनी नदवी रहे. वह 2002 से लगातार 21 साल तक मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष रहे. बता दें कि बोर्ड में 251 सदस्य हैं. इसके 102 संस्थापक सदस्य है. साथ ही 149 आम सदस्य हैं. सदस्यों को चुनने के लिए हर तीन साल बाद चुनाव होते हैं. बोर्ड में कौन होता है सबसे ताकतवर? एआईएमपीएलबी में सबसे ताकतवर मजलिस-ए-आमला को माना जाता है. ज्यादातर अधिकार इसके हाथ में ही होती हैं. इसके सदस्यों की संख्या 51 है. इनमें 5 महिला और 46 पुरुष शामिल होते हैं. ये सदस्य भी बोर्ड के 251 सदस्यों में से ही चुने जाते हैं. इसे मुसलमानों का सबसे शक्तिशाली संगठन कहा जाता है. दरअसल, संगठन में मुसलमानों के सभी समुदाय एकसाथ एक ही मंच पर हैं. इसमें सुन्नी-शिया के सभी संप्रदाय एकसाथ हैं. इस संगठन में बड़ी तादाद में मुसलमानों का पढ़ा-लिखा तबका जुड़ा हुआ है. इसमें मौलाना, वकील, डॉक्टर, पत्रकार, समाजसेवी, पूर्व सिविल सेवा अधिकारी, पुलिस अधिकारी और जज तक शामिल हैं. बोर्ड के ज्यादातर अध्यक्ष उत्तर भारत के सुन्नी समुदाय से रहे हैं. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के तहत कुल छह समितियां आती हैं. इनमें इस्लाम मआशरा कमेटी हैदराबाद, दारुल कजा कमेटी लखनऊ, लीगल सेल कमेटी मुंबई, निकाहनामा कमेटी जयपुर, लाजमी निकाह रजिस्ट्रेशन दिल्ली शामिल हैं. बता दें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कोई सरकारी संस्था नहीं है. ये एक एनजीओ है, जो सोसाइटी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड है. बोर्ड का मकसद देश में मुसलमानों के मुद्दों को सरकार के सामने रखना भी है. इसका मुख्यालय देश की राजधानी दिल्ली के ओखला में है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड क शाह बानो केस को लेकर काफी आलोचना की जाती है. दरअसल, 1932 में मध्य प्रदेश के इंदौर की शाह बानो का मुहम्मद अली खान से निकाह हुआ. मुहम्मद अली खान ने 1946 में हलीमा बेगम से दूसरा निकाह किया. साल 1975 में उसने शाह बानो को घर से निकाल दिया. ये मामला निचली कोर्ट से हाईकोर्ट पहुंचा तो शौहर ने दलील दी की कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक तलाक की स्थिति में शौहर को सिर्फ इद्दत की मियाद यानी 3 महीने तक तलाकशुदा बीवी को गुजारा भत्ता देना होता है. वहीं, हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि सीआरपीसी की धारा-125 के तहत छोड़ी गई या तलाकशुदा औरत को पति से मदद पाने का हक है. अगर पति खुद मोहताज है तो इसमें छूट दी जा सकती है. सीआरपीसी की धारा-125 के तहत असहाय माता-पिता भी मदद के लिए अधिकार मांग सकते हैं. जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो शाह बानो के वकील डैनियल लतीफ ने मुस्लिम पर्सनल लॉ की व्याख्या पर सवाल उठाया. इस पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में सुधार की जरूरत है. साथ ही देश में समान नागरिक संहिता लागू करने का सुझाव भी दिया. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कोर्ट के इस फैसले को इस्लाम पर हमला माना. साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ फतवा जारी किया. इससे देश में जगह-जगह प्रदर्शन शुरू हो गए. फरवरी 1986 में बोर्ड तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को समझाने में कामयाब हो गया कि वही भारत में मुसलमानों की अकेली आवाज हैं. फरवरी 1986 में सरकार ने संसद में 'द मुस्लिम वुमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन डाइवोर्स) एक्ट 1986 ' पेश किया. नए कानून के तहत मुस्लिम महिलाएं धारा-125 के तहत गुजारे भत्ते का हक नहीं मांग सकती थीं. .
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में कुल दो सौ इक्यावन सदस्य होते हैं. UCC and AIMPLB: देश के बाईसवें विधि आयोग के समान नागरिक संहिता को लागू करने को लेकर सभी पक्षों से चौदह जुलाई दो हज़ार तेईस तक सुझाव मांगने के बाद से देश में इस मुद्दे पर बहस फिर तेज हो गई है. यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध करने वालों में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का नाम सबसे ऊपर आता है. एआईएमपीएलबी के महासचिव मुहम्मद फजल उर रहीम मुजद्दिदी का कहना है कि देश में मुस्लिम लॉ की सुरक्षा करना उसका मुख्य उद्देश्य है. साथ ही ऐसे हर कानून को रोकना उसका काम है, जो मुस्लिम पर्सनल को प्रभावित कर रहा हो. उन्होंने कहा कि बोर्ड स्थापना के समय से ही समान नागरिक संहिता का विरोध रहा है. क्या आप जानते हैं कि यूसीसी का विरोध करने वाला एआईएमपीएलबी क्या है और इसका इतिहास क्या है? बोर्ड के महासचिव ने कहा कि सरकार और सरकारी संगठन यूसीसी के मुद्दे को बार-बार उठाते रहे हैं. भारत के इक्कीसवें विधि आयोग ने दो हज़ार सोलह में इस पर सभी पक्षों से सुझाव मांगे थे. इसके बाद बोर्ड ने अपना जवाब दाखिल कर दिया था. इसमें साफ तौर पर कहा गया था कि समान नागरिक संहिता देश के संविधान की भावना के खिलाफ है और देशहित में भी नहीं है. अब उनका कहना है कि समान नागरिक संहिता देश की बहुलवादी संरचना को नुकसान पहुंचाएगा. ये संविधान में दी गई धार्मिक स्वतंत्रता के भी विरुद्ध होगा. इससे यूसीसी को लागू नहीं की जाना चाहिए. साथ ही संविधान के दिशानिर्देशों के अनुच्छेद-चौंतालीस को हटाना सही रहेगा. क्या है ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड? ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की स्थापना सात-आठ अप्रैल एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर को हुई थी. बोर्ड ऐसे समय बनाया गया था, जब सरकार समानांतर कानून के जरिये भारतीय मुसलमानों पर लागू होने वाले शरिया कानून को खत्म करने की कोशिश कर रही थी. तब दत्तक ग्रहण विधेयक संसद में पेश किया गया था. तत्कालीन केंद्रीय कानून मंत्री एचआर गोखले ने विधेयक को यूसीसी की दिशा में पहला कदम बताया था. तब उलेमा, नेताओं और कई मुस्लिम संगठनों ने भारतीय मुस्लिम समुदाय को समझाया कि इससे शरिया कानूनों के खोने का जोखिम है. साथ ही कहा था कि इसे नाकाम करने के लिए मुस्लिम समुदाय को ठोस कदम उठाने की जरूरत है. खिलाफत आंदोलन के बाद देश के इतिहास में पहली बार भारतीय मुस्लिम समुदाय के लोग और संगठन मुस्लिम पर्सनल लॉ की सुरक्षा के लिए एक प्लेटफॉर्म पर इकट्ठा हुए थे. इसके लिए पहली बैठक हजरत मौलाना सैयद शाह मिन्नतुल्लाह रहमानी, अमीर शरीयत, बिहार व उड़ीसा और हकीमुल इस्लाम हजरत मौलाना कारी मोहम्मद तैयब, मोहतमिम, दारुल उलूम, देवबंद की पहल पर देवबंद में बुलाई गई थी. बैठक में मुंबई में एक सामान्य प्रतिनिधि सम्मेलन करने का फैसला हुआ. मुंबई में सत्ताईस-अट्ठाईस दिसंबर, एक हज़ार नौ सौ बहत्तर को सम्मेलन आयोजित हुआ. सम्मेलन में सभी की सहमति से ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का गठन करने का फैसला लिया गया. कैसा है एआईएमपीएलबी का स्ट्रक्चर? भारत में इस्लामी शरीयत की रक्षा के लिए इस आंदोलन का नेतृत्व करने वाले हजरत मौलाना कारी तैय्यब कासमी एआईएमपीएलबी के संस्थापक अध्यक्ष और हजरत मौलाना सैयद शाह मिन्नतुल्लाह रहमानी महासचिव बनाए गए. इस समय बोर्ड के महासचिव मौलाना सैयद निजामुद्दीन हैं. वहीं, बोर्ड के सबसे पहले अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद तैय्यब थे. दूसरे अध्यक्ष अली मियां, तीसरे मुजाहिदुल इस्लाम और चौथे अध्यक्ष मौलाना सैय्यद मोहम्मद राबे हसनी नदवी रहे. वह दो हज़ार दो से लगातार इक्कीस साल तक मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष रहे. बता दें कि बोर्ड में दो सौ इक्यावन सदस्य हैं. इसके एक सौ दो संस्थापक सदस्य है. साथ ही एक सौ उनचास आम सदस्य हैं. सदस्यों को चुनने के लिए हर तीन साल बाद चुनाव होते हैं. बोर्ड में कौन होता है सबसे ताकतवर? एआईएमपीएलबी में सबसे ताकतवर मजलिस-ए-आमला को माना जाता है. ज्यादातर अधिकार इसके हाथ में ही होती हैं. इसके सदस्यों की संख्या इक्यावन है. इनमें पाँच महिला और छियालीस पुरुष शामिल होते हैं. ये सदस्य भी बोर्ड के दो सौ इक्यावन सदस्यों में से ही चुने जाते हैं. इसे मुसलमानों का सबसे शक्तिशाली संगठन कहा जाता है. दरअसल, संगठन में मुसलमानों के सभी समुदाय एकसाथ एक ही मंच पर हैं. इसमें सुन्नी-शिया के सभी संप्रदाय एकसाथ हैं. इस संगठन में बड़ी तादाद में मुसलमानों का पढ़ा-लिखा तबका जुड़ा हुआ है. इसमें मौलाना, वकील, डॉक्टर, पत्रकार, समाजसेवी, पूर्व सिविल सेवा अधिकारी, पुलिस अधिकारी और जज तक शामिल हैं. बोर्ड के ज्यादातर अध्यक्ष उत्तर भारत के सुन्नी समुदाय से रहे हैं. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के तहत कुल छह समितियां आती हैं. इनमें इस्लाम मआशरा कमेटी हैदराबाद, दारुल कजा कमेटी लखनऊ, लीगल सेल कमेटी मुंबई, निकाहनामा कमेटी जयपुर, लाजमी निकाह रजिस्ट्रेशन दिल्ली शामिल हैं. बता दें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कोई सरकारी संस्था नहीं है. ये एक एनजीओ है, जो सोसाइटी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड है. बोर्ड का मकसद देश में मुसलमानों के मुद्दों को सरकार के सामने रखना भी है. इसका मुख्यालय देश की राजधानी दिल्ली के ओखला में है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड क शाह बानो केस को लेकर काफी आलोचना की जाती है. दरअसल, एक हज़ार नौ सौ बत्तीस में मध्य प्रदेश के इंदौर की शाह बानो का मुहम्मद अली खान से निकाह हुआ. मुहम्मद अली खान ने एक हज़ार नौ सौ छियालीस में हलीमा बेगम से दूसरा निकाह किया. साल एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में उसने शाह बानो को घर से निकाल दिया. ये मामला निचली कोर्ट से हाईकोर्ट पहुंचा तो शौहर ने दलील दी की कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक तलाक की स्थिति में शौहर को सिर्फ इद्दत की मियाद यानी तीन महीने तक तलाकशुदा बीवी को गुजारा भत्ता देना होता है. वहीं, हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि सीआरपीसी की धारा-एक सौ पच्चीस के तहत छोड़ी गई या तलाकशुदा औरत को पति से मदद पाने का हक है. अगर पति खुद मोहताज है तो इसमें छूट दी जा सकती है. सीआरपीसी की धारा-एक सौ पच्चीस के तहत असहाय माता-पिता भी मदद के लिए अधिकार मांग सकते हैं. जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो शाह बानो के वकील डैनियल लतीफ ने मुस्लिम पर्सनल लॉ की व्याख्या पर सवाल उठाया. इस पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में सुधार की जरूरत है. साथ ही देश में समान नागरिक संहिता लागू करने का सुझाव भी दिया. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कोर्ट के इस फैसले को इस्लाम पर हमला माना. साथ ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ फतवा जारी किया. इससे देश में जगह-जगह प्रदर्शन शुरू हो गए. फरवरी एक हज़ार नौ सौ छियासी में बोर्ड तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी को समझाने में कामयाब हो गया कि वही भारत में मुसलमानों की अकेली आवाज हैं. फरवरी एक हज़ार नौ सौ छियासी में सरकार ने संसद में 'द मुस्लिम वुमेन एक्ट एक हज़ार नौ सौ छियासी ' पेश किया. नए कानून के तहत मुस्लिम महिलाएं धारा-एक सौ पच्चीस के तहत गुजारे भत्ते का हक नहीं मांग सकती थीं. .
सोनू एक सिनेमा हॉल के सामने खड़ा था तभी एक आदमी स्कूटर से आया और पूछ बैठा.... आदमी- भाईसाहब, स्कूटर स्टैंड कहां है ? सोनू- भाईसाहब, पहले आप अपना नाम बताइए ? सोनू- आपके माता-पिता क्या करते हैं ? आदमी- क्यों ? भाईसाहब जल्दी बता दीजिए नहीं तो देर हो जाएगी और पिक्चर शुरू हो जाएगी। सोनू- तो जल्दी बता दो माता-पिता क्या करते हैं ? आदमी- मेरी मां डॉक्टर है और पिता जी इंजीनियर हैं। अब बता दीजिए। सोनू- आपके नाम कोई जमीन जायदाद है ? आदमी- जी भाईसाहब, गांव में मेरे नाम पर कुछ जमीन है। प्लीज भाईसाहब अब तो बता दीजिए स्कूटर का स्टैंड कहां है ? सोनू- आखिरी सवाल, तुम पढ़े लिखे हो ? आदमी- जी हांं मैं मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा हूं। अब जल्दी से बता दीजिए। सोनू- भाईसाहब, देखिए आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि इतनी अच्छी है, आपके माता-पिता दोनों उच्च शिक्षित हैं, आप खुद भी इतने पढ़े लिखे हैं, पर मुझे अफसोस है कि आप इतनी-सी बात नहीं जानते की स्कूटर का स्टैंड उसके नीचे लगता है। पत्नी- सुनो मेरे मुहं में मच्छर चला गया, अब क्या करूं...? पति- पगली ऑल आउट पी ले. . छह सेकंड में काम शुरू...! गर्लफ्रेंड (गुस्साते हुए)- इतना लेट क्यों हो गए? मैं कबसे वेट कर रही हूं। बॉयफ्रेंड- बॉस ने रोक लिया था, उनके साथ डिनर कर रहा था। गर्लफ्रेंड- अच्छा क्या खाया?
सोनू एक सिनेमा हॉल के सामने खड़ा था तभी एक आदमी स्कूटर से आया और पूछ बैठा.... आदमी- भाईसाहब, स्कूटर स्टैंड कहां है ? सोनू- भाईसाहब, पहले आप अपना नाम बताइए ? सोनू- आपके माता-पिता क्या करते हैं ? आदमी- क्यों ? भाईसाहब जल्दी बता दीजिए नहीं तो देर हो जाएगी और पिक्चर शुरू हो जाएगी। सोनू- तो जल्दी बता दो माता-पिता क्या करते हैं ? आदमी- मेरी मां डॉक्टर है और पिता जी इंजीनियर हैं। अब बता दीजिए। सोनू- आपके नाम कोई जमीन जायदाद है ? आदमी- जी भाईसाहब, गांव में मेरे नाम पर कुछ जमीन है। प्लीज भाईसाहब अब तो बता दीजिए स्कूटर का स्टैंड कहां है ? सोनू- आखिरी सवाल, तुम पढ़े लिखे हो ? आदमी- जी हांं मैं मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा हूं। अब जल्दी से बता दीजिए। सोनू- भाईसाहब, देखिए आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि इतनी अच्छी है, आपके माता-पिता दोनों उच्च शिक्षित हैं, आप खुद भी इतने पढ़े लिखे हैं, पर मुझे अफसोस है कि आप इतनी-सी बात नहीं जानते की स्कूटर का स्टैंड उसके नीचे लगता है। पत्नी- सुनो मेरे मुहं में मच्छर चला गया, अब क्या करूं...? पति- पगली ऑल आउट पी ले. . छह सेकंड में काम शुरू...! गर्लफ्रेंड - इतना लेट क्यों हो गए? मैं कबसे वेट कर रही हूं। बॉयफ्रेंड- बॉस ने रोक लिया था, उनके साथ डिनर कर रहा था। गर्लफ्रेंड- अच्छा क्या खाया?
भारतीय टीम के ऑलराउंडर आर. अश्विन इस दिनों भारतीय टीम के डूबती नैया को पार लगाने का काम कर रहे हैं. जहां टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज लगातार फ्लॉप साबित हो रहे हैं, वहीं अश्विन पीछे से आकर संकट के घड़ी से भारतीय टीम को बचा ले जाते हैं. रविवार को खत्म हुए भारत-बांग्लादेश के मुकाबले में इस खिलाड़ी ने कमाल कर दिया था। जहां भारतीय टीम के 4 टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज सस्ते में निपट गए थे और 74 रन पर सात खिलाड़ी पवेलियन वापस लौट चुकी थी, वहीं आठवें विकेट के लिए इस खिलाड़ी ने श्रेयस अय्यर के साथ 71 रन की अटूट साझेदारी कर टीम को 145 जैसे छोटे से लक्ष्य तक पहुंचाया। वहीं इस खिलाड़ी के दूसरी पारी में 42 रन के महत्वपूर्ण पारी के लिए मैन ऑफ द मैच भी चुना गया। मैन ऑफ द मैच बनते ही इस खिलाड़ी ने खास उपलब्धि हासिल कर ली. वो उपलब्धि क्या हैं, आइए जानते हैं इस वीडियो के जरिए. दरअसल भारतीय टीम बांग्लादेश के खिलाफ हुए 2 मैचों की टेस्ट सीरीज को 2-0 से तो जीत लिया, मगर दूसरे मुकाबले में भारतीय टीम एक समय के लिए बांग्लादेश की जाल में फंस चुकी थी. भारतीय टीम को दूसरे मैच की दूसरी पारी में सिर्फ 145 रन का लक्ष्य मिला था, जिसे भारतीय फैंस होने के नाते क्यास लगाए जाने लगे थे कि भारत 1 से 2 विकेट खोकर इस मैच को आसानी से जीत लेगा, पर ऐसा हुआ नहीं। पहले से ही आउट ऑफ फॉर्म चल रहे टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज सस्ते में निपटते चले गए जिसके बाद 8वें विकेट पर एक महत्वपूर्ण साझेदारी हुए अय्यर और अश्विन के बीच। दोनों ने मिलकर भारत को जीत की दहलीज पर पहुंचाया। जोकि अश्विन ने पहली इनिंग में भी गेंद से 4 विकेट हासिल किए थे, तो उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया। इस मैन ऑफ द मैच को पाते ही अश्विन महान खिलाड़ी विराट कोहली की बराबरी कर ली। अब वो विराट के साथ 9 मैन ऑफ द मैच पा कर भारतीय टीम की लिस्ट में चौथे स्थान पर पहुंच चुके हैं। विराट कोहली और अश्विन से ज्यादा भारतीय टीम की तरफ से सबसे ज्यादा मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को यह उपलब्धि हासिल हुई है। उन्हें 14 बार टेस्ट क्रिकेट में मैन ऑफ द मैच से नवाजा गया हैं। इसके बाद नाम आता है भारतीय टीम के वर्तमान कोच राहुल द्रविड़ का, जिन्हें 11 बार मैन ऑफ द मैच मिला हैं। तीसरे स्थान पर है, भारत के जम्बो ने नाम से जाने-जाने वाले अनिल कुंबले। इस करिश्माई लेग स्पिनर को 10 बार टेस्ट करियर में मैन ऑफ द मैच चुना गया था। वहीं अब कल विराट कोहली के बराबरी पर आर. अश्विन 9 मैन ऑफ द मैच के साथ हैं। वहीं अश्विन के इस महत्वपूर्ण पारी की तारीफ पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने अपने अलग अंदाज में की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर ट्वीट करते हुए लिखा है कि साइंटिस्ट ने यह जीत दिलाई। किसी तरह भारत को जीत मिला। अश्विन की शानदार पारी और श्रेयस अय्यर के साथ शानदार साझेदारी की वजह से टीम इंडिया जीती। इस पारी के बदौलत अश्विन ने विराट और केएल राहुल को रन के मामले में भी पीछे छोड़ दिया हैं। इस खिलाड़ी ने टेस्ट क्रिकेट के अपने अंतिम 10 इंनिंग में 270 रन बनाए हैं। वहीं विराट कोहली 11 इंनिंग में 265 रन और केएल राहुल 8 इंनिंग में 137 रन ही बनाए हैं। तो इससे भी पता चलता है कि वर्तमान में अश्विन भारतीय टीम में कितने अहम हैं। वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय टीम 2-0 से जीत हासिल कर वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के अंत तालिका में दूसरे स्थान पर रह कर अपनी पकड़ और भी ज्यादा मजबूत कर ली हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया का वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने की संभावने लगभग पक्की हैं. संसय है भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच। दक्षिण अफ्रीका फिलहाल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चल रहे तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-0 से पीछे है। वहीं भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 4 टेस्ट मैचों की सीरीज भारत में ही खेलनी है, जिसकी शुरुआत 2023 के फरवरी महिने में होगी।
भारतीय टीम के ऑलराउंडर आर. अश्विन इस दिनों भारतीय टीम के डूबती नैया को पार लगाने का काम कर रहे हैं. जहां टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज लगातार फ्लॉप साबित हो रहे हैं, वहीं अश्विन पीछे से आकर संकट के घड़ी से भारतीय टीम को बचा ले जाते हैं. रविवार को खत्म हुए भारत-बांग्लादेश के मुकाबले में इस खिलाड़ी ने कमाल कर दिया था। जहां भारतीय टीम के चार टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज सस्ते में निपट गए थे और चौहत्तर रन पर सात खिलाड़ी पवेलियन वापस लौट चुकी थी, वहीं आठवें विकेट के लिए इस खिलाड़ी ने श्रेयस अय्यर के साथ इकहत्तर रन की अटूट साझेदारी कर टीम को एक सौ पैंतालीस जैसे छोटे से लक्ष्य तक पहुंचाया। वहीं इस खिलाड़ी के दूसरी पारी में बयालीस रन के महत्वपूर्ण पारी के लिए मैन ऑफ द मैच भी चुना गया। मैन ऑफ द मैच बनते ही इस खिलाड़ी ने खास उपलब्धि हासिल कर ली. वो उपलब्धि क्या हैं, आइए जानते हैं इस वीडियो के जरिए. दरअसल भारतीय टीम बांग्लादेश के खिलाफ हुए दो मैचों की टेस्ट सीरीज को दो-शून्य से तो जीत लिया, मगर दूसरे मुकाबले में भारतीय टीम एक समय के लिए बांग्लादेश की जाल में फंस चुकी थी. भारतीय टीम को दूसरे मैच की दूसरी पारी में सिर्फ एक सौ पैंतालीस रन का लक्ष्य मिला था, जिसे भारतीय फैंस होने के नाते क्यास लगाए जाने लगे थे कि भारत एक से दो विकेट खोकर इस मैच को आसानी से जीत लेगा, पर ऐसा हुआ नहीं। पहले से ही आउट ऑफ फॉर्म चल रहे टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज सस्ते में निपटते चले गए जिसके बाद आठवें विकेट पर एक महत्वपूर्ण साझेदारी हुए अय्यर और अश्विन के बीच। दोनों ने मिलकर भारत को जीत की दहलीज पर पहुंचाया। जोकि अश्विन ने पहली इनिंग में भी गेंद से चार विकेट हासिल किए थे, तो उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया। इस मैन ऑफ द मैच को पाते ही अश्विन महान खिलाड़ी विराट कोहली की बराबरी कर ली। अब वो विराट के साथ नौ मैन ऑफ द मैच पा कर भारतीय टीम की लिस्ट में चौथे स्थान पर पहुंच चुके हैं। विराट कोहली और अश्विन से ज्यादा भारतीय टीम की तरफ से सबसे ज्यादा मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को यह उपलब्धि हासिल हुई है। उन्हें चौदह बार टेस्ट क्रिकेट में मैन ऑफ द मैच से नवाजा गया हैं। इसके बाद नाम आता है भारतीय टीम के वर्तमान कोच राहुल द्रविड़ का, जिन्हें ग्यारह बार मैन ऑफ द मैच मिला हैं। तीसरे स्थान पर है, भारत के जम्बो ने नाम से जाने-जाने वाले अनिल कुंबले। इस करिश्माई लेग स्पिनर को दस बार टेस्ट करियर में मैन ऑफ द मैच चुना गया था। वहीं अब कल विराट कोहली के बराबरी पर आर. अश्विन नौ मैन ऑफ द मैच के साथ हैं। वहीं अश्विन के इस महत्वपूर्ण पारी की तारीफ पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने अपने अलग अंदाज में की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर ट्वीट करते हुए लिखा है कि साइंटिस्ट ने यह जीत दिलाई। किसी तरह भारत को जीत मिला। अश्विन की शानदार पारी और श्रेयस अय्यर के साथ शानदार साझेदारी की वजह से टीम इंडिया जीती। इस पारी के बदौलत अश्विन ने विराट और केएल राहुल को रन के मामले में भी पीछे छोड़ दिया हैं। इस खिलाड़ी ने टेस्ट क्रिकेट के अपने अंतिम दस इंनिंग में दो सौ सत्तर रन बनाए हैं। वहीं विराट कोहली ग्यारह इंनिंग में दो सौ पैंसठ रन और केएल राहुल आठ इंनिंग में एक सौ सैंतीस रन ही बनाए हैं। तो इससे भी पता चलता है कि वर्तमान में अश्विन भारतीय टीम में कितने अहम हैं। वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय टीम दो-शून्य से जीत हासिल कर वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के अंत तालिका में दूसरे स्थान पर रह कर अपनी पकड़ और भी ज्यादा मजबूत कर ली हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया का वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने की संभावने लगभग पक्की हैं. संसय है भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच। दक्षिण अफ्रीका फिलहाल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चल रहे तीन मैचों की टेस्ट सीरीज में एक-शून्य से पीछे है। वहीं भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चार टेस्ट मैचों की सीरीज भारत में ही खेलनी है, जिसकी शुरुआत दो हज़ार तेईस के फरवरी महिने में होगी।
पीएम मोदी ने कहा कि आज देश मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। गरीबों को घर मिल रहे हैं। देश के घर-घर में शौचालय है। गांव के गांव शौचमुक्त हुए हैं। लोकसभा में आज सोमवार को पीएम मोदी ने सदन को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कोरोना महामारी के दौरान विपक्ष द्वारा गलत कार्यों का भी जिक्र किया और उनकी गलतियां गिनाईं। पीएम मोदी के संबोधन के दौरान ऐसा भी मौका आया जब विपक्ष के सांसदों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। जब सदन के अध्यक्ष ओम बिड़ला ने उन्हें रोकना चाहा तो पीएम मोदी ने कहा -"सदन में थोड़ी बहुत टोका टाकी ठीक है। गर्मी रहती है, लेकिन जब सीमा से बाहर जाता है तो लगता है हमारे साथी ऐसे हैं। " पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि विपक्ष के पार्टी के सांसद ने चर्चा की शुरुआत की थी। हमारे मंत्री ने सब को रोका, लेकिन उस तरफ से चुनौती आई कि हमारे नेता को रोक रहे हो। हम तुम्हारे नेता को रोकेंगे। क्या यहां वही चल रहा है? जिन लोगों को रजिस्टर करना था, आपके इस पराक्रम को नोट कर लिया है। इस सत्र में आपको कोई निकालेगा नहीं, मैं आपको गारंटी देता हूं। पीएम ने विपक्ष के आपत्तिजनक बयानों को लेकर भी बात की। उन्होंने विपक्ष से कहा - अपने कार्यक्रमों से जिस तरह आप बोलते हैं, जिस तरह मुद्दों को जोड़ते हैं। ऐसा लगता है आपने मन बना लिया है कि 100 साल तक आपको सत्ता में नहीं आना है। थोड़ी भी आशा होती कि जनता आपका साथ देगी तो आप ऐसा नहीं करते। आपने 100 साल न आने की तैयारी कर ली है, तो मैने भी तैयारी कर ली है। अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने सरकार की कई उपलब्धियों को गिनाया। उन्होंने कहा कि कोरोना के दौरान सभी यह आशंका जता रहे थे कि भारत इतनी बड़ी लड़ाई नहीं लड़ पाएगा। भारत खुद को नहीं बचा पाएगा। लेकिन आज मेड इन इंडिया वैक्सीन दुनिया में सबसे अधिक प्रभावी हैं। पीएम ने कहा कि देश मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। गरीबों को घर मिल रहे हैं। देश के घर-घर में शौचालय है। गांव के गांव खुले में शौचमुक्त हुए हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
पीएम मोदी ने कहा कि आज देश मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। गरीबों को घर मिल रहे हैं। देश के घर-घर में शौचालय है। गांव के गांव शौचमुक्त हुए हैं। लोकसभा में आज सोमवार को पीएम मोदी ने सदन को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कोरोना महामारी के दौरान विपक्ष द्वारा गलत कार्यों का भी जिक्र किया और उनकी गलतियां गिनाईं। पीएम मोदी के संबोधन के दौरान ऐसा भी मौका आया जब विपक्ष के सांसदों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। जब सदन के अध्यक्ष ओम बिड़ला ने उन्हें रोकना चाहा तो पीएम मोदी ने कहा -"सदन में थोड़ी बहुत टोका टाकी ठीक है। गर्मी रहती है, लेकिन जब सीमा से बाहर जाता है तो लगता है हमारे साथी ऐसे हैं। " पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि विपक्ष के पार्टी के सांसद ने चर्चा की शुरुआत की थी। हमारे मंत्री ने सब को रोका, लेकिन उस तरफ से चुनौती आई कि हमारे नेता को रोक रहे हो। हम तुम्हारे नेता को रोकेंगे। क्या यहां वही चल रहा है? जिन लोगों को रजिस्टर करना था, आपके इस पराक्रम को नोट कर लिया है। इस सत्र में आपको कोई निकालेगा नहीं, मैं आपको गारंटी देता हूं। पीएम ने विपक्ष के आपत्तिजनक बयानों को लेकर भी बात की। उन्होंने विपक्ष से कहा - अपने कार्यक्रमों से जिस तरह आप बोलते हैं, जिस तरह मुद्दों को जोड़ते हैं। ऐसा लगता है आपने मन बना लिया है कि एक सौ साल तक आपको सत्ता में नहीं आना है। थोड़ी भी आशा होती कि जनता आपका साथ देगी तो आप ऐसा नहीं करते। आपने एक सौ साल न आने की तैयारी कर ली है, तो मैने भी तैयारी कर ली है। अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने सरकार की कई उपलब्धियों को गिनाया। उन्होंने कहा कि कोरोना के दौरान सभी यह आशंका जता रहे थे कि भारत इतनी बड़ी लड़ाई नहीं लड़ पाएगा। भारत खुद को नहीं बचा पाएगा। लेकिन आज मेड इन इंडिया वैक्सीन दुनिया में सबसे अधिक प्रभावी हैं। पीएम ने कहा कि देश मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। गरीबों को घर मिल रहे हैं। देश के घर-घर में शौचालय है। गांव के गांव खुले में शौचमुक्त हुए हैं। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
West Bengal CBI investigation: पश्चिम बंगाल के बीरभूम हिंसा मामले में कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश के बाद शुक्रवार यानी आज से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो(CBI) ने जांच शुरू कर दिया है. कोलकाता हाई कोर्ट ने राज्य के बीरभूम जिले के रामपुरहाट में तृणमूल कांग्रेस के नेता की हत्या के बाद भड़की हिंसा मामले में सीबीआई को जांच के आदेश दिए थे. वहीं, खबरों के अनुसार कोर्ट ने सीबीआइ को जांच करने के आदेश देते हुए ममता बनर्जी का अगुवाई वाली टीएमसी सरकार की तरफ से गठित एसआईटी को इस मामले से जुड़े दस्तावेजों के अलावा मामले में गिरफ्तार हुए लोगों को भी सीबीआई को सौंपने को कहा था. न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि सीबीआई ने पश्चिम बंगाल में रामपुरहाट बीरभूम हिंसा मामले को अपने कब्जे में ले लिया है और मामले की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारी और सीएफएसएल विशेषज्ञों सहित टीम भेजी है. वहीं, खबरों के मुताबिक कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ तौर पर कहा कि सबूतों और घटना का असर बताता है कि राज्य की पुलिस इसकी जांच नहीं कर सकती. वहीं,कोर्ट ने सीबीआई को अपने जांच की प्रोगेस रिपोर्ट 7 अप्रैल तक पेश करने को कहा है. बता दें कि इस मामले में पहले ही कोलकाता हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की थी. हालांकि उस वक्त इस मामले में सीबीआई जांच की मांग को नकारते हुए मामले के जांच का पहला मौका राज्य को देने का निर्णय सुनाया था. इस मामले के फोरेंसिक रिपोर्ट चौंकाने वाले हैं. पश्चिम बंगाल के बीरभूम के रामपुरहाट ब्लॉक के बागटुई गांव में दो बच्चों और तीन महिलाओं समेत आठ लोगों को जिंदा जलाने से पहले बुरी तरह पीटा गया था. ऐसे संकेत शवों के पोस्टमॉर्टम की प्राथमिक रिपोर्ट से मिले हैं. यह जानकारी पुलिस सूत्रों से मिली है. रामपुरहाट अस्पताल के एक सूत्र की मानें, तो शवों के अंत्यपरीक्षण और फोरेंसिक विशेषज्ञों की प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि पहले उस गांव में पीड़ितों को बुरी तरह पीटा गया. फिर उन्हें घर में बंद कर आग लगा दी गयी.
West Bengal CBI investigation: पश्चिम बंगाल के बीरभूम हिंसा मामले में कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश के बाद शुक्रवार यानी आज से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने जांच शुरू कर दिया है. कोलकाता हाई कोर्ट ने राज्य के बीरभूम जिले के रामपुरहाट में तृणमूल कांग्रेस के नेता की हत्या के बाद भड़की हिंसा मामले में सीबीआई को जांच के आदेश दिए थे. वहीं, खबरों के अनुसार कोर्ट ने सीबीआइ को जांच करने के आदेश देते हुए ममता बनर्जी का अगुवाई वाली टीएमसी सरकार की तरफ से गठित एसआईटी को इस मामले से जुड़े दस्तावेजों के अलावा मामले में गिरफ्तार हुए लोगों को भी सीबीआई को सौंपने को कहा था. न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि सीबीआई ने पश्चिम बंगाल में रामपुरहाट बीरभूम हिंसा मामले को अपने कब्जे में ले लिया है और मामले की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारी और सीएफएसएल विशेषज्ञों सहित टीम भेजी है. वहीं, खबरों के मुताबिक कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ तौर पर कहा कि सबूतों और घटना का असर बताता है कि राज्य की पुलिस इसकी जांच नहीं कर सकती. वहीं,कोर्ट ने सीबीआई को अपने जांच की प्रोगेस रिपोर्ट सात अप्रैल तक पेश करने को कहा है. बता दें कि इस मामले में पहले ही कोलकाता हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की थी. हालांकि उस वक्त इस मामले में सीबीआई जांच की मांग को नकारते हुए मामले के जांच का पहला मौका राज्य को देने का निर्णय सुनाया था. इस मामले के फोरेंसिक रिपोर्ट चौंकाने वाले हैं. पश्चिम बंगाल के बीरभूम के रामपुरहाट ब्लॉक के बागटुई गांव में दो बच्चों और तीन महिलाओं समेत आठ लोगों को जिंदा जलाने से पहले बुरी तरह पीटा गया था. ऐसे संकेत शवों के पोस्टमॉर्टम की प्राथमिक रिपोर्ट से मिले हैं. यह जानकारी पुलिस सूत्रों से मिली है. रामपुरहाट अस्पताल के एक सूत्र की मानें, तो शवों के अंत्यपरीक्षण और फोरेंसिक विशेषज्ञों की प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि पहले उस गांव में पीड़ितों को बुरी तरह पीटा गया. फिर उन्हें घर में बंद कर आग लगा दी गयी.
मुवा जिन राम न जाना । साकत मरैं संत जन जीव, भरि भरि राम-रसायन पीवैं । हरि मरिहैं तो हमहूँ मरिहैं, हरिन रैं हम काहे को मरि । कहँहि कबिर मन मनहिं मिलावा, श्रमर भये सुख-सागर पावा । भावार्थ - सतगुरु ऐसा कीजिये, जौं दिवले की लोय । पड़ोसिन ले चलीं, दिवला (से) दिवला जोय । ( ६७ ) देह हिलाये भगति न होई * स्वांग धरे नर बहु-विधि जोई । धींगी धींगा भलो न माना * जो काहू मोहि ह्रिदया जाना । मुख किछु आन ह्रिदय किछुआना सपनेहु काहु मोहि नहिं जाना । ते दुख पै हैं ई संसारा # जो चेतहु तो होय उबारा । जो गुरु किंचित निंदा करई * सूकर स्वान जन्म सो धरई । साखी-लख-चौरासी जीव-जानि महँ, भटक भटकि दुख पाय । कहँहि कबिर जो रामहिं जाने, सो मोहि नीके भाय । टि० - [ मरत और अमरतों के लक्षण, तथा श्रात्म सन्देश ] १ - जो लोग अनेक प्रकार के वेप बना बना कर केवल बहिर्मुख क्रियाओं में ही लगे रहते हैं और कभी अन्तरंग -वृत्ति करने का कष्ट नहीं उठाते हैं, वे आत्मरति तथा आत्म-पूजा-रूप सच्ची भक्ति को नहीं पा सकते हैं । २ - जिसने मुझ राम को सबों के हृदय निवास करने वाला जान लिया है, वह लड़भिड़ कर किसी के तोड़ना या उखाड़ना अच्छा नहीं समझता है । ३ - यह भी ' हरि- पद ' भावार्थ - " अस बाहर तस भीतर जाना. बाहर भीतर एक समाना"
मुवा जिन राम न जाना । साकत मरैं संत जन जीव, भरि भरि राम-रसायन पीवैं । हरि मरिहैं तो हमहूँ मरिहैं, हरिन रैं हम काहे को मरि । कहँहि कबिर मन मनहिं मिलावा, श्रमर भये सुख-सागर पावा । भावार्थ - सतगुरु ऐसा कीजिये, जौं दिवले की लोय । पड़ोसिन ले चलीं, दिवला दिवला जोय । देह हिलाये भगति न होई * स्वांग धरे नर बहु-विधि जोई । धींगी धींगा भलो न माना * जो काहू मोहि ह्रिदया जाना । मुख किछु आन ह्रिदय किछुआना सपनेहु काहु मोहि नहिं जाना । ते दुख पै हैं ई संसारा # जो चेतहु तो होय उबारा । जो गुरु किंचित निंदा करई * सूकर स्वान जन्म सो धरई । साखी-लख-चौरासी जीव-जानि महँ, भटक भटकि दुख पाय । कहँहि कबिर जो रामहिं जाने, सो मोहि नीके भाय । टिशून्य - [ मरत और अमरतों के लक्षण, तथा श्रात्म सन्देश ] एक - जो लोग अनेक प्रकार के वेप बना बना कर केवल बहिर्मुख क्रियाओं में ही लगे रहते हैं और कभी अन्तरंग -वृत्ति करने का कष्ट नहीं उठाते हैं, वे आत्मरति तथा आत्म-पूजा-रूप सच्ची भक्ति को नहीं पा सकते हैं । दो - जिसने मुझ राम को सबों के हृदय निवास करने वाला जान लिया है, वह लड़भिड़ कर किसी के तोड़ना या उखाड़ना अच्छा नहीं समझता है । तीन - यह भी ' हरि- पद ' भावार्थ - " अस बाहर तस भीतर जाना. बाहर भीतर एक समाना"
पाक अधिकारियों के साथ कांग्रेस के निलंबित नेता मणिशंकर अय्यर के घर मीटिंग के आरोप पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जवाब दिया है. मनमोहन सिंह ने बयान जारी कर कहा, "प्रधानमंत्री मोदी को गुजरात में हार का डर सता रहा है, इसलिए राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे आरोप लगा रहे हैं. मैं ऐसे आरोपों से दुखी और व्यथित हूं. मनमोहन सिहं ने अपने बयान के साथ एक लिस्ट भी जारी की. इस लिस्ट में उन लोगों के नाम हैं जो मणिशंकर अय्यर के घर हुए बैठक में शामिल हुए थे. प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा था? इस विवाद में पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय भी कूद पड़ा है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि चुनावी बहस में भारत पाकिस्तान को घसीटना बंद करे. अपनी ताकत पर चुनाव जीतें. आधारहीन और मनगढ़ंत साजिश की गैर जिम्मेदाराना बात न करें.
पाक अधिकारियों के साथ कांग्रेस के निलंबित नेता मणिशंकर अय्यर के घर मीटिंग के आरोप पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जवाब दिया है. मनमोहन सिंह ने बयान जारी कर कहा, "प्रधानमंत्री मोदी को गुजरात में हार का डर सता रहा है, इसलिए राजनीतिक लाभ के लिए ऐसे आरोप लगा रहे हैं. मैं ऐसे आरोपों से दुखी और व्यथित हूं. मनमोहन सिहं ने अपने बयान के साथ एक लिस्ट भी जारी की. इस लिस्ट में उन लोगों के नाम हैं जो मणिशंकर अय्यर के घर हुए बैठक में शामिल हुए थे. प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा था? इस विवाद में पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय भी कूद पड़ा है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि चुनावी बहस में भारत पाकिस्तान को घसीटना बंद करे. अपनी ताकत पर चुनाव जीतें. आधारहीन और मनगढ़ंत साजिश की गैर जिम्मेदाराना बात न करें.
नई दिल्लीः कोविड-19 के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने का फैसला किया है. यह लॉकडाउन दो सप्ताह के लिए और बढ़ाया गया है. अब यह लॉकडाउन 17 मई तक जारी रहेगा. इस बीच खबर है कि लॉकडाउन को आगे बढ़ाया गया है. रिपोर्ट के अनुसार कोरोना संकट से निपटने के लिए देश में लॉकडाउन को दो हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया है.
नई दिल्लीः कोविड-उन्नीस के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने का फैसला किया है. यह लॉकडाउन दो सप्ताह के लिए और बढ़ाया गया है. अब यह लॉकडाउन सत्रह मई तक जारी रहेगा. इस बीच खबर है कि लॉकडाउन को आगे बढ़ाया गया है. रिपोर्ट के अनुसार कोरोना संकट से निपटने के लिए देश में लॉकडाउन को दो हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया है.
Deoghar: नगर विकास एवं आवास विभाग एवं झारखण्ड उच्च न्यायलय द्वारा पारित आदेश के आलोक में झारखण्ड राज्य में सभी शहरी नगर निकायों आदि अंतर्गत बहुमंजिला भवनों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में नियमानुसार अग्निशमन संबंधी सभी सुरक्षा मानकों का अनुपालन किया जाना है. इस क्रम में देवघर नगर निगम कार्यालय द्वारा सर्वसाधारण से संबंधित भवनों में अग्निशमन संबंधी सभी सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु अनुरोध किया गया था. सोमवार को नगर आयुक्त सह प्रशासक शैलेंद्र कुमार लाल के निर्देश पर देवघर नगर निगम एवं अग्निशमन पदाधिकारी की संयुक्त टीम द्वारा देवघर के बहुमंजिला भवनों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में नियमानुसार अग्निशमन संबंधी सभी सुरक्षा मानकों की जांच की गयी. जहां अधिक से अधिक मात्रा में भीड़ एकत्रित होती है. जांच में संबंधित भवन द्वारा अग्निशमन संबंधी वैध अनापत्ति प्रमाण पत्र एवं पारित नक़्शे के बारे में पूछताछ की गयी. संयुक्त टीम द्वारा शहर के होटल देवघर पैलेस, भी मार्ट, भी 2 मॉल, विरोय इन होटल, विरोय मॉल, होटल इम्पीरियल हाइट, होटल रामेश्वरम, होटल मधुमाला इंटरनेशनल, होटल क्लार्क्स इन आदि भवनों की जांच की गयी. जांच के क्रम में सिर्फ होटल क्लार्क्स इन एवं होटल इम्पीरियल हाइट्स द्वारा ही वैध अग्निशमन अनापत्ति प्रमाण पत्र पाया गया. शेष समस्त बहुमंजिला इमारतों के पास वर्तमान में अग्निशमन सुरक्षा से संबंधित कोई प्रमाण पत्र अथवा नियमानुसार सुरक्षा मानक नहीं पाए गए. टीम द्वारा संबंधित को सख्त चेतावनी देते हुए दोषियों के विरुद्ध नियमनुसार कार्रवाई किये जाने की बात कही गयी. टीम में अग्निशमन पदाधिकारी गोपाल यादव, कार्यपालक अभियंता अरविन्द कुमार सिंह, प्रशिक्षु सहायक नगर आयुक्त सारजेन मरांडी, नगर निवेशक विवेक हर्षिल, कनीय अभियंता प्रफुल चंद्र राय, टैक्स दरोगा जयशंकर साह एवं सन्नी कुमार शर्मा समेत अन्य निगम कर्मी शामिल थे.
Deoghar: नगर विकास एवं आवास विभाग एवं झारखण्ड उच्च न्यायलय द्वारा पारित आदेश के आलोक में झारखण्ड राज्य में सभी शहरी नगर निकायों आदि अंतर्गत बहुमंजिला भवनों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में नियमानुसार अग्निशमन संबंधी सभी सुरक्षा मानकों का अनुपालन किया जाना है. इस क्रम में देवघर नगर निगम कार्यालय द्वारा सर्वसाधारण से संबंधित भवनों में अग्निशमन संबंधी सभी सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु अनुरोध किया गया था. सोमवार को नगर आयुक्त सह प्रशासक शैलेंद्र कुमार लाल के निर्देश पर देवघर नगर निगम एवं अग्निशमन पदाधिकारी की संयुक्त टीम द्वारा देवघर के बहुमंजिला भवनों व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में नियमानुसार अग्निशमन संबंधी सभी सुरक्षा मानकों की जांच की गयी. जहां अधिक से अधिक मात्रा में भीड़ एकत्रित होती है. जांच में संबंधित भवन द्वारा अग्निशमन संबंधी वैध अनापत्ति प्रमाण पत्र एवं पारित नक़्शे के बारे में पूछताछ की गयी. संयुक्त टीम द्वारा शहर के होटल देवघर पैलेस, भी मार्ट, भी दो मॉल, विरोय इन होटल, विरोय मॉल, होटल इम्पीरियल हाइट, होटल रामेश्वरम, होटल मधुमाला इंटरनेशनल, होटल क्लार्क्स इन आदि भवनों की जांच की गयी. जांच के क्रम में सिर्फ होटल क्लार्क्स इन एवं होटल इम्पीरियल हाइट्स द्वारा ही वैध अग्निशमन अनापत्ति प्रमाण पत्र पाया गया. शेष समस्त बहुमंजिला इमारतों के पास वर्तमान में अग्निशमन सुरक्षा से संबंधित कोई प्रमाण पत्र अथवा नियमानुसार सुरक्षा मानक नहीं पाए गए. टीम द्वारा संबंधित को सख्त चेतावनी देते हुए दोषियों के विरुद्ध नियमनुसार कार्रवाई किये जाने की बात कही गयी. टीम में अग्निशमन पदाधिकारी गोपाल यादव, कार्यपालक अभियंता अरविन्द कुमार सिंह, प्रशिक्षु सहायक नगर आयुक्त सारजेन मरांडी, नगर निवेशक विवेक हर्षिल, कनीय अभियंता प्रफुल चंद्र राय, टैक्स दरोगा जयशंकर साह एवं सन्नी कुमार शर्मा समेत अन्य निगम कर्मी शामिल थे.
फर्रुखाबाद, 12 अप्रैल (हि.स.)। कायमगंज में जहां एक तरफ़ असहाय एवं गरीबों पर लॉक डाउन की वजह से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वहीं बेसहारा पशुओं और बंदरों की भी हालत दयनीय हो चुकी है। ऐसे में जिले के प्रमुख समाजसेवी डॉ महेंद्र गुप्ता द्वारा पहले से ही अपने महेंद्रा आई हॉस्पिटल जटवारा रोड कायमगंज मे भोजनशाला चल रही है। जिसमें वह गरीब मजदूरों जरूरतमंदों को भोजन और राशन उपलब्ध करा रहे हैं। उनकी टीम महेंद्रा टास्क फोर्स एवं कल्याणम रैपिड एक्शन फोर्स ने डॉ महेंद्र गुप्ता के निर्देशन में आवारा पशुओं और बंदरों की देखभाल का जिम्मा उठाया है। लॉक डाउन के बाद से ही निरंतर डॉ महेंद्र व उनकी टीमें गरीब परिवारों एवं बेसहारा आवारा और बेजुबान पशुओं और बंदरों के खाने की व्यवस्था कर रही है। एक ऐसे समय में जब पूरा देश महामारी से जूझ रहा है। जहां हर व्यक्ति सिर्फ अपने स्वास्थ्य एवं खाने-पीने की वस्तुओं के संग्रह के लिए व्याकुल है। ऐसे में डॉ महेंद्र बेसहारा पशुओं के मसीहा के रूप में प्रचलित हैं। और निशुल्क सेवा प्रदान कर रहे हैं। डॉ महेंद्रा टास्क फोर्स टीम में उनके साथ कल्लू कौशल, मोहित कौशल, अनिल बजाज ,संजय चौहान ,राजू कौशल, मोहित राठौर, राजेश हलवाई ,माधव गुप्ता, तशकील खान, कमाल मिर्जा,अतुल जाटव, सचिन जाटव,पाइप भूरा खान अताई पुर आज कई समाजसेवी दिन-रात मेहनत और लगन से लोगों की सेवा कार्य में लगे हैं।
फर्रुखाबाद, बारह अप्रैल । कायमगंज में जहां एक तरफ़ असहाय एवं गरीबों पर लॉक डाउन की वजह से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। वहीं बेसहारा पशुओं और बंदरों की भी हालत दयनीय हो चुकी है। ऐसे में जिले के प्रमुख समाजसेवी डॉ महेंद्र गुप्ता द्वारा पहले से ही अपने महेंद्रा आई हॉस्पिटल जटवारा रोड कायमगंज मे भोजनशाला चल रही है। जिसमें वह गरीब मजदूरों जरूरतमंदों को भोजन और राशन उपलब्ध करा रहे हैं। उनकी टीम महेंद्रा टास्क फोर्स एवं कल्याणम रैपिड एक्शन फोर्स ने डॉ महेंद्र गुप्ता के निर्देशन में आवारा पशुओं और बंदरों की देखभाल का जिम्मा उठाया है। लॉक डाउन के बाद से ही निरंतर डॉ महेंद्र व उनकी टीमें गरीब परिवारों एवं बेसहारा आवारा और बेजुबान पशुओं और बंदरों के खाने की व्यवस्था कर रही है। एक ऐसे समय में जब पूरा देश महामारी से जूझ रहा है। जहां हर व्यक्ति सिर्फ अपने स्वास्थ्य एवं खाने-पीने की वस्तुओं के संग्रह के लिए व्याकुल है। ऐसे में डॉ महेंद्र बेसहारा पशुओं के मसीहा के रूप में प्रचलित हैं। और निशुल्क सेवा प्रदान कर रहे हैं। डॉ महेंद्रा टास्क फोर्स टीम में उनके साथ कल्लू कौशल, मोहित कौशल, अनिल बजाज ,संजय चौहान ,राजू कौशल, मोहित राठौर, राजेश हलवाई ,माधव गुप्ता, तशकील खान, कमाल मिर्जा,अतुल जाटव, सचिन जाटव,पाइप भूरा खान अताई पुर आज कई समाजसेवी दिन-रात मेहनत और लगन से लोगों की सेवा कार्य में लगे हैं।
ईमानदारी से काम करने को कहा। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने झारखंड में भाजपा कार्यकर्ताओं से 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भगवा पार्टी की जीत के लिए कड़ी मेहनत करने और ईमानदारी से काम करने को कहा। दास, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे संभाग के लोगों के साथ बातचीत करें और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तहत केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जागरूक करें। शनिवार को भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दास ने चुनाव जीतने के लिए बूथ स्तर की समितियों को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार सभी मोर्चों पर काम करने में विफल रही है. पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि झारखंड में बिना 'कट मनी' के कोई काम नहीं होता. भाजपा झारखंड इकाई के अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि पार्टी के पास समर्पित कार्यकर्ता हैं और वे अपनी कड़ी मेहनत से भगवा पार्टी को 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव जीतने में मदद करेंगे।
ईमानदारी से काम करने को कहा। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने झारखंड में भाजपा कार्यकर्ताओं से दो हज़ार चौबीस के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भगवा पार्टी की जीत के लिए कड़ी मेहनत करने और ईमानदारी से काम करने को कहा। दास, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे संभाग के लोगों के साथ बातचीत करें और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तहत केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जागरूक करें। शनिवार को भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दास ने चुनाव जीतने के लिए बूथ स्तर की समितियों को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार सभी मोर्चों पर काम करने में विफल रही है. पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि झारखंड में बिना 'कट मनी' के कोई काम नहीं होता. भाजपा झारखंड इकाई के अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि पार्टी के पास समर्पित कार्यकर्ता हैं और वे अपनी कड़ी मेहनत से भगवा पार्टी को दो हज़ार चौबीस के लोकसभा और विधानसभा चुनाव जीतने में मदद करेंगे।
उत्तर दिया : "जैसे काष्ठ पानी में डालने से स्वयं तिरता है उसे नीचे से कोई सहारा नहीं देता अपने हल्केपन के स्वभाव से ही ऊपर तिरता है इसी तरह से 'करनी' ( धर्म कृत्यों ) से हल्का बन कर जीव स्वर्ग को जाता है और कर्म से सम्पूर्ण रहित होने पर मोक्ष को ।" स्वामीजी को एक बार किसी ने पूछा : "जीव कैसे तरे ?" स्वामीजी ने उदाहरण पूर्वक उत्तर दिया : "पैसे को पानी में डालो वह तुरन्त डूब जाता है परन्तु उसी पैसे को तपा कर और पीट कर उसकी कटोरी ( प्याला ) बना लो फिर वह पानी पर तिरने लगेगा । इस कटोरी में अन्य पैसे को रख दो वह भी कटोरी के साथ तिरने लगेगा। उसी तरह संयम और तप की साधना से आत्मा को हल्का बनाओ। कर्म भार के दूर होने से वह स्वयं भी संसार समुद्र से तिरेगा और दूसरों को तारने में भी समर्थ होगा।" स्वामीजी का सैकड़ों हजारों लोगों से चर्चा करने का काम पड़ा था। कई उनसे सिद्धान्तों के सम्बन्ध में चर्चा करने आते, कई उनकी बुद्धि की जाच करने और कई उनकी परीक्षा करने आते। परन्तु स्वामीजी की हमेशा जीत होती । कुतर्कियों के तो वे ऐसे पित्त शांत करते कि उन्हें जन्म जन्मान्तर तक याद रहे । एक बार स्वामीजी देसूरी जा रहे थे। रास्ते में एक सज्जन मिले जो स्वामीजी से बड़ा द्वेष रखते थे। नाम पूछा । स्वामीजी ने अपना नाम बतलाया । तब वे
उत्तर दिया : "जैसे काष्ठ पानी में डालने से स्वयं तिरता है उसे नीचे से कोई सहारा नहीं देता अपने हल्केपन के स्वभाव से ही ऊपर तिरता है इसी तरह से 'करनी' से हल्का बन कर जीव स्वर्ग को जाता है और कर्म से सम्पूर्ण रहित होने पर मोक्ष को ।" स्वामीजी को एक बार किसी ने पूछा : "जीव कैसे तरे ?" स्वामीजी ने उदाहरण पूर्वक उत्तर दिया : "पैसे को पानी में डालो वह तुरन्त डूब जाता है परन्तु उसी पैसे को तपा कर और पीट कर उसकी कटोरी बना लो फिर वह पानी पर तिरने लगेगा । इस कटोरी में अन्य पैसे को रख दो वह भी कटोरी के साथ तिरने लगेगा। उसी तरह संयम और तप की साधना से आत्मा को हल्का बनाओ। कर्म भार के दूर होने से वह स्वयं भी संसार समुद्र से तिरेगा और दूसरों को तारने में भी समर्थ होगा।" स्वामीजी का सैकड़ों हजारों लोगों से चर्चा करने का काम पड़ा था। कई उनसे सिद्धान्तों के सम्बन्ध में चर्चा करने आते, कई उनकी बुद्धि की जाच करने और कई उनकी परीक्षा करने आते। परन्तु स्वामीजी की हमेशा जीत होती । कुतर्कियों के तो वे ऐसे पित्त शांत करते कि उन्हें जन्म जन्मान्तर तक याद रहे । एक बार स्वामीजी देसूरी जा रहे थे। रास्ते में एक सज्जन मिले जो स्वामीजी से बड़ा द्वेष रखते थे। नाम पूछा । स्वामीजी ने अपना नाम बतलाया । तब वे
17 Mar 2020भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय प्राशासनिक सेवा (IAS) देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में से एक है। इसके लिए लोगों को कड़ी मेहनत करनी होती है। बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद (BCECE Board) ने डिप्लोमा प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा (DECE) 2020 के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। नेशनल टेस्ट एजेंसी (NTA) भारत के टॉप इंजीनियरिंग संस्थानों जैसे IITs, NITs आदि में प्रवेश के लिए अप्रैल में ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन (JEE) मेन का आयोजन करने जा रही है। नौकरी की तलाश करने वाले उम्मीदवारों के लिए हम एक अच्छी खबर लेकर आए हैं। 12वीं के बाद सभी एक ऐसे करियर विकल्प का चयन करना चाहते हैं, जिसमें वे अच्छा भविष्य बना सकें। इसके लिए छात्र प्रवेश परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। गर्मियों की छुट्टियों के साथ-साथ छात्रों के लिए नई स्किल सीखने का समय भी आने वाला है। इस समय का सही उपयोग करना बहुत जरुरी है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) रांची PhD करने वाले उम्मीदवारों को फेलोशिप का मौका दे रही है। IIT दिल्ली ने 13 मार्च, 2020 को ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) 2020 का रिजल्ट जारी कर दिया है। GATE 2020 में 18. 8% छात्रों पास हुए हैं। अगर आप बिहार में रहते हैं या बिहार में नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो आपके लिए ये लेख पढ़ना बहुत जरुरी है। नौकरी की तलाश करने वाले उम्मीदवारों के लिए हम एक अच्छी खबर लेकर आए हैं। विदेश में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए ये लेख पढ़ना जरुरी है। अधिकांश भारतीय विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने या विदेशी स्थानों में काम करने का सपना देखते हैं। आज कल सभी एक अच्छी नौकरी करना चाहते हैं और एक अच्छा करियर बनाना चाहते हैं। इसके लिए आप कई स्किल सीखते हैं। आप में जितनी स्किल होंगी, आप उतना ही अच्छा करियर बना सकेंगे। जवाहरलाल नहरु यूनिवर्सिटी (JNU) में प्रवेश लेने का सपना ज्यादातर छात्र देखते हैं। JNU द्वारा ऑफर किए जा रहे विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 11-14 मई, 2020 तक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (JNUEE) 2020 का आयोजन किया जाएगा। एक अच्छे जीवन के लिए अच्छी नौकरी करना महत्वपूर्ण है। नौकरी की तलाश करने वाले उम्मीदवारों के लिए हम एक अच्छा लेख लेकर आए हैं। 16 Mar 2020NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) साल में दो बार आयोजित होने वाली यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (NET) के लिए नेशनल टेस्ट एजेंसी (NTA) ने आवेदन आमंत्रित किए हैं। अगर आप भी नौकरी की तलाश में हैं तो आपके लिए हम एक अच्छी खबर लेकर आए हैं। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) ने विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। आज के समय में ज्यादातर छात्र एक ऐसा करियर विकल्प चुनना चाहते हैं, जिसमें काफी स्कोप हो। 12वीं के बाद सभी एक ऐसा करियर विकल्प चुनना चाहते है, जिसमें वे एक अच्छा भविष्य बना सकें। मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (MCA) सबसे लोकप्रिय पोस्ट ग्रेजुएशन पाठ्यक्रमों में से एक है। यह कंप्यूटर और संबंधित क्षेत्रों में करियर बनाने के इच्छुक लोगों के लिए बहुत अच्छा है। आज के समय में सभी लोग अपना अच्छा करियर और अच्छा भविष्य बनाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, कई तरीके की स्किल्स सीखते हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली ने 13 मार्च को ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) 2020 का रिजल्ट जारी कर दिया है। अगर आप भी नौकरी की तलाश कर रहै हैं तो हम आपके लिए एक बहुत उपयोगी खबर लेकर आए हैं। सभी अच्छी नौकरी और अच्छा भविष्य चाहते हैं, जिस कारण सभी चीजों में काफी कम्पटीशन बढ़ गया है। किसी भी परीक्षा में अच्छा करने के लिए अच्छी तैयारी का होना जरुरी है और अच्छी तैयारी के लिए सेल्फ स्डीट यानी खुद से पढ़ाई करना जरुरी है। आजकल सभी एक अच्छा भविष्य बनाने के बारे में सोचते हैं, जिसके लिए वे अच्छी नौकरी की तलाश में रहते हैं। साथ ही कुछ लोग ऐसे हैं, जो नौकरी की जगह खुद का बिजनेस करके आत्रंप्रन्योर बनना चाहते हैं। हर साल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में क्लर्क के पदों पर भर्ती के लिए होने वाली परीक्षा में लाखों की संख्या में उम्मीदवार शामिल होते हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन किया जा चुका है। परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र अब अपनी परीक्षाओं के रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। बिहार में नौकरी करने की इच्छा रखने वालों के लिए एक सुनहरा मौका है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने सिविल जज के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली ने 13 मार्च को ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) 2020 का रिजल्ट जारी कर दिया है। नौकरी की तलाश करने वाले लोगों के लिए हम एक बहुत उपयोगी खबर लेकर आए हैं। हरियाणा की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं। इस बार परीक्षा में नकल रोकने के लिए कई कड़े इंतजाम किए गए हैं, लेकिन इन इंतजामों के बावजूद परीक्षा में नकल पर लगाम नहीं लग पा रही। आज के समय में सभी एक अच्छा करियर विकल्प चुनना चाहते हैं, जिससे कि वे एक अच्छा भविष्य बना सकें। इसके लिए वे कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करते हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) देश की सबसे प्रतिष्ठित और अधिक मांग वाली सिविल सेवा है। नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए एक अच्छी खबर है। ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (BECIL) ने स्किल्ड और अनस्किल्ड मैनपावर के हजारों पदों पर भर्ती के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित किए हैं। परीक्षा का समय छात्रों के लिए काफी तनावपूर्ण होता है, लेकिन अब लगभग सभी छात्रों की परीक्षाएं समाप्त हो गई हैं। विदेश में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए ये लेख पढ़ना बहुत जरुरी है। अधिकांश भारतीय विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने या विदेशी स्थानों में काम करने का सपना देखते हैं। 10वीं पास वाले छात्रों के पास एक बेहतरीन स्कॉलरशिप प्राप्त करने का मौका है। समय के साथ-साथ नौकरी करने वालों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। आज के समय में सभी एक अच्छी नौकरी की तलाश में रहते हैं। अगर आप नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो आपके लिए ये लेख पढ़ना बहुत जरुरी है। अगर आप 12वीं पास हैं और नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो आपके लिए एक बहुत अच्छा मौका है। सभी छात्र एक ऐसे करियर विकल्प की तलाश में होते हैं, जिसमें वे अच्छा भविष्य बना सकें। छात्रों के पास कई करियर विकल्प होते हैं। जब आप स्कूली पढ़ाई पूरी कर लेते हैं तो आप अपने भविष्य के बारे में सोचते हैं।
सत्रह मार्च दो हज़ार बीसभारतीय प्रशासनिक सेवा भारतीय प्राशासनिक सेवा देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में से एक है। इसके लिए लोगों को कड़ी मेहनत करनी होती है। बिहार संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा पर्षद ने डिप्लोमा प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा दो हज़ार बीस के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। नेशनल टेस्ट एजेंसी भारत के टॉप इंजीनियरिंग संस्थानों जैसे IITs, NITs आदि में प्रवेश के लिए अप्रैल में ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन मेन का आयोजन करने जा रही है। नौकरी की तलाश करने वाले उम्मीदवारों के लिए हम एक अच्छी खबर लेकर आए हैं। बारहवीं के बाद सभी एक ऐसे करियर विकल्प का चयन करना चाहते हैं, जिसमें वे अच्छा भविष्य बना सकें। इसके लिए छात्र प्रवेश परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। गर्मियों की छुट्टियों के साथ-साथ छात्रों के लिए नई स्किल सीखने का समय भी आने वाला है। इस समय का सही उपयोग करना बहुत जरुरी है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट रांची PhD करने वाले उम्मीदवारों को फेलोशिप का मौका दे रही है। IIT दिल्ली ने तेरह मार्च, दो हज़ार बीस को ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग दो हज़ार बीस का रिजल्ट जारी कर दिया है। GATE दो हज़ार बीस में अट्ठारह. आठ% छात्रों पास हुए हैं। अगर आप बिहार में रहते हैं या बिहार में नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो आपके लिए ये लेख पढ़ना बहुत जरुरी है। नौकरी की तलाश करने वाले उम्मीदवारों के लिए हम एक अच्छी खबर लेकर आए हैं। विदेश में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए ये लेख पढ़ना जरुरी है। अधिकांश भारतीय विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने या विदेशी स्थानों में काम करने का सपना देखते हैं। आज कल सभी एक अच्छी नौकरी करना चाहते हैं और एक अच्छा करियर बनाना चाहते हैं। इसके लिए आप कई स्किल सीखते हैं। आप में जितनी स्किल होंगी, आप उतना ही अच्छा करियर बना सकेंगे। जवाहरलाल नहरु यूनिवर्सिटी में प्रवेश लेने का सपना ज्यादातर छात्र देखते हैं। JNU द्वारा ऑफर किए जा रहे विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए ग्यारह-चौदह मई, दो हज़ार बीस तक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा दो हज़ार बीस का आयोजन किया जाएगा। एक अच्छे जीवन के लिए अच्छी नौकरी करना महत्वपूर्ण है। नौकरी की तलाश करने वाले उम्मीदवारों के लिए हम एक अच्छा लेख लेकर आए हैं। सोलह मार्च दो हज़ार बीसNTA साल में दो बार आयोजित होने वाली यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट के लिए नेशनल टेस्ट एजेंसी ने आवेदन आमंत्रित किए हैं। अगर आप भी नौकरी की तलाश में हैं तो आपके लिए हम एक अच्छी खबर लेकर आए हैं। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ने विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। आज के समय में ज्यादातर छात्र एक ऐसा करियर विकल्प चुनना चाहते हैं, जिसमें काफी स्कोप हो। बारहवीं के बाद सभी एक ऐसा करियर विकल्प चुनना चाहते है, जिसमें वे एक अच्छा भविष्य बना सकें। मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन सबसे लोकप्रिय पोस्ट ग्रेजुएशन पाठ्यक्रमों में से एक है। यह कंप्यूटर और संबंधित क्षेत्रों में करियर बनाने के इच्छुक लोगों के लिए बहुत अच्छा है। आज के समय में सभी लोग अपना अच्छा करियर और अच्छा भविष्य बनाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, कई तरीके की स्किल्स सीखते हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली ने तेरह मार्च को ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग दो हज़ार बीस का रिजल्ट जारी कर दिया है। अगर आप भी नौकरी की तलाश कर रहै हैं तो हम आपके लिए एक बहुत उपयोगी खबर लेकर आए हैं। सभी अच्छी नौकरी और अच्छा भविष्य चाहते हैं, जिस कारण सभी चीजों में काफी कम्पटीशन बढ़ गया है। किसी भी परीक्षा में अच्छा करने के लिए अच्छी तैयारी का होना जरुरी है और अच्छी तैयारी के लिए सेल्फ स्डीट यानी खुद से पढ़ाई करना जरुरी है। आजकल सभी एक अच्छा भविष्य बनाने के बारे में सोचते हैं, जिसके लिए वे अच्छी नौकरी की तलाश में रहते हैं। साथ ही कुछ लोग ऐसे हैं, जो नौकरी की जगह खुद का बिजनेस करके आत्रंप्रन्योर बनना चाहते हैं। हर साल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में क्लर्क के पदों पर भर्ती के लिए होने वाली परीक्षा में लाखों की संख्या में उम्मीदवार शामिल होते हैं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन किया जा चुका है। परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र अब अपनी परीक्षाओं के रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। बिहार में नौकरी करने की इच्छा रखने वालों के लिए एक सुनहरा मौका है। बिहार लोक सेवा आयोग ने सिविल जज के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली ने तेरह मार्च को ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग दो हज़ार बीस का रिजल्ट जारी कर दिया है। नौकरी की तलाश करने वाले लोगों के लिए हम एक बहुत उपयोगी खबर लेकर आए हैं। हरियाणा की दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं। इस बार परीक्षा में नकल रोकने के लिए कई कड़े इंतजाम किए गए हैं, लेकिन इन इंतजामों के बावजूद परीक्षा में नकल पर लगाम नहीं लग पा रही। आज के समय में सभी एक अच्छा करियर विकल्प चुनना चाहते हैं, जिससे कि वे एक अच्छा भविष्य बना सकें। इसके लिए वे कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करते हैं। भारतीय प्रशासनिक सेवा देश की सबसे प्रतिष्ठित और अधिक मांग वाली सिविल सेवा है। नौकरी की तलाश कर रहे उम्मीदवारों के लिए एक अच्छी खबर है। ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड ने स्किल्ड और अनस्किल्ड मैनपावर के हजारों पदों पर भर्ती के लिए आवेदन पत्र आमंत्रित किए हैं। परीक्षा का समय छात्रों के लिए काफी तनावपूर्ण होता है, लेकिन अब लगभग सभी छात्रों की परीक्षाएं समाप्त हो गई हैं। विदेश में पढ़ाई करने का सपना देखने वाले उम्मीदवारों के लिए ये लेख पढ़ना बहुत जरुरी है। अधिकांश भारतीय विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने या विदेशी स्थानों में काम करने का सपना देखते हैं। दसवीं पास वाले छात्रों के पास एक बेहतरीन स्कॉलरशिप प्राप्त करने का मौका है। समय के साथ-साथ नौकरी करने वालों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। आज के समय में सभी एक अच्छी नौकरी की तलाश में रहते हैं। अगर आप नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो आपके लिए ये लेख पढ़ना बहुत जरुरी है। अगर आप बारहवीं पास हैं और नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो आपके लिए एक बहुत अच्छा मौका है। सभी छात्र एक ऐसे करियर विकल्प की तलाश में होते हैं, जिसमें वे अच्छा भविष्य बना सकें। छात्रों के पास कई करियर विकल्प होते हैं। जब आप स्कूली पढ़ाई पूरी कर लेते हैं तो आप अपने भविष्य के बारे में सोचते हैं।
विकास का इतिहास केन्द्रीय बैंकिंग (Central Banking ) विल रोजर्स के विचारानुसार केन्द्रीय बैंकिंग उन तीन महान आविष्कारों में से एक है ( अन्य दो महान आविष्कार आग तथा पहिया है) जो अतीत से लेकर अब तक हुये हैं । यद्यपि केन्द्रीय बैंक को महान आविष्कार की श्रेणी में रखने के सम्बन्ध में सन्देह किया जा सकता है परन्तु इस से किसी को इन्कार नहीं हो सकता है कि केन्द्रीय बैंक मनुष्य द्वारा स्थापित एक अत्यधिक उपयोगी वित्तिय संस्था है। वर्तमान समय में केन्द्रीय बैंक प्रत्येक देश की अर्थव्यवस्था के मौद्रिक तथा राजकोषीय ढाँचे का केन्द्रीय स्तम्भ है । केन्द्रीय बैंक की क्रियायें अर्थव्यवस्था के सुचारु रूप से कार्य करने तथा सरकार के राजकोषीय लेनदेन के लिये अनिवार्य हैं । यद्यपि कुछ केन्द्रीय बैंकों का आरम्भ २०० वर्ष से भी अधिक पूर्व हुआ था परन्तु केन्द्रीय बैंक का विकास तथा लोकप्रियता गत १०० वर्षों की विशेषता कही जा सकती है। केन्द्रीय बैंक की संस्था प्रमुखतः १९ वीं शताब्दी की उत्पत्ति है । यद्यपि स्वीडन में रिक्सबैंक की स्थापना १६५६ ई० में हुई थी परन्तु बैंक ऑफ इंगलैण्ड ने, जो १६९४ ई० में स्थापित हुई थी, १८४४ ई० में सर्वप्रथम केन्द्रीय बैंक के रूप में कार्य किया था। इस प्रकार बैंक ऑफ इंगलैण्ड का इतिहास केन्द्रीय बैंकिंग के विकास के इतिहास का प्रतिरूप है । बैंक ऑफ फ्रांस तथा जर्मनी में रीच्सबैंक (Reichsbank) क्रमशः १८०० ई० तथा १८७५ ई० में स्थापित हुई थीं। बैंक ऑफ नंदरलैण्डस की (Bank of Netherlands) पुरानी बैंक ऑफ एमस्ट्रड्राम (Bank of Amsterdam) के स्थान पर १८१४ ई० में स्थापना हुई थी । बैंक ऑफ नारवे (Bank of Norway); नेशनल बैंक ऑफ डेनमार्क (National Bank of Denmark); नेशनल बैंक ऑफ बेल्जियम (National Bank of Belgium) तथा बैंक ऑफ स्पेन (Bank of Spain ) की स्थापना क्रमशः १८१७ ई०, १८१८ ई० १८५० ई० तथा १८५६ ई० में हुई थी । १८६० ई० में रूस में बैंक ऑफ रशा (Bank of Russia) की स्थापना हुई थी । जापान में देश की मुद्रा प्रणाली का सुधार करने के उद्देश्य से बैंक ऑफ जापान १८८२ ई० में स्थापित की गई थी। इन देशों में केन्द्रीय बैंकों की स्थापना होने के अतिरिक्त १९ वीं शताब्दी में पुर्तगाल; जावा; मिस्र; तुर्की; तथा बलगारिया में भी केन्द्रीय बैंक स्थापित की गई थीं । १९ वीं शताब्दी का केन्द्रीय बैकिंग के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण स्थान है तथा १९ वीं शताब्दी को संसार के भिन्न देशों में, विशेष रूप से यूरोप के देशों में, केन्द्रीय बैंकों की स्थापना - शताब्दी कहा जा सकता है । यूरोप के देशों में स्थापित इन केन्द्रीय बैंकों को विशेष अधिकार प्राप्त थे । यद्यपि १९ वीं शताब्दी के अन्त तक यूरोप के अधिकांश देशों में केन्द्रीय बैंकों की स्थापना हो चुकी थी परन्तु पूरबी संसार में जावा, जापान तथा मिस्र को छोड़कर अधिकांश देशों में केन्द्रीय बैंकों की स्थापना नहीं हुई थी । १६ वीं शताब्दी के अन्त तक तथा २० वीं शताब्दी के आरम्भ होने पर भी भारत तथा चीन के समान विशाल देशों में केन्द्रीय बैंक नहीं थीं। इस प्रकार २० वीं शताब्दी में केन्द्रीय बैंकिंग के विकास का क्रम जारी रहा था । प्रथम महायुद्ध के पश्चात् राष्ट्रीयता की भावना तथा आर्थिक जीवन में राजकीय नियन्त्रण की आवश्यकता उत्पन्न होने से केन्द्रीय बैंकिंग के विकास को विशेष प्रोत्साहन प्राप्त हुआ था । अन्तर्राष्ट्रीय वित्त सम्मेलन, जो १९२० ई० में ब्रसेल्स में हुआ था, ने केन्द्रीय बैंकिंग के विकास को और अधिक प्रगति प्रदान की थी क्योंकि इस सम्मेलन मे यह प्रस्ताव स्वीकार किया गया था कि "जिन देशों में उस समय तक केन्द्रीय बैंक स्थापित नहीं हुई थी उन देशों की सरकारों को अपने देश में यथाशीघ्र केन्द्रीय बैंक स्थापित करके देश की मौद्रिक तथा बैंकिंग प्रणालियों में स्थिरता तथा विश्व सहयोग को प्राप्त करने की चेष्टा करनी चाहिए । " अन्तरर्राष्ट्रीय वित्त सम्मेलन में प्रस्ताव पास होने के लगभग ३० वर्ष के अल्प समय में केन्द्रीय बैंकिंग का संसार के विभिन्न देशों में आश्चर्यजनक तीव्र गति के साथ विकास हुआ । १९२० ई० से लेकर (केवल १९२९ ई० तथा १९३० ई० को छोड़कर क्योंकि ये दोनों वर्ष महान् मन्दी संकट के वर्ष थे ) १९३७ ई० तक प्रति वर्ष संसार के किसी न किसी देश में केन्द्रीय बैंक की स्थापना होती रही थी । आज संसार के लगभग सभी स्वाधीन देशों में केन्द्रीय बैंक स्थापित हैं । केन्द्रीय बैंक की परिभाषा केन्द्रीय बैंक को व्यापक तथा सही परिभाषा करना कठिन है । अर्थशास्त्रियों तथा वित्त विशेषज्ञों ने केन्द्रीय बैंक की भिन्न प्रकार से परिभाषा की है । प्रत्येक अर्थशास्त्री ने अपनी परिभाषा में केन्द्रीय बैंक के भिन्न कार्यों को महत्व दिया है । वेरा स्मिथ ( Vera Smith) ने केन्द्रीय बैंक के मुद्रा प्रचालन कार्य को अधिक महत्व देते हुए लिखा है कि "केन्द्रीय बैंकिंग का अभिप्राय उस बैंकिंग प्रणाली से है जिसके अन्तर्गत किसी एक बैंक को नोट प्रचालन का पूर्ण अथवा अवशेष एकाधिकार प्राप्त होता है ।"2 अन्तर्राष्ट्रीय भुगतान बैंक (Bank of International Settlements ) के अनुसार " केन्द्रीय बैंक उस बैंक को कहते हैं जिसका प्रमुख कार्य देश में मुद्रा तथा साख- मुद्रा का नियमन करना होता है । "8 शॉ (Shaw ) के विचार में केन्द्रीय बैंक वह बैंक होती है जो देश में साख - मुद्रा पर नियन्त्रण रखती है । हाटरे के विचार में "केन्द्रीय बैंक बैंकों की बैंक होती है तथा बैंकों के लिये अन्तिम ऋणदाता का कार्य करना इसकी प्रमुख विशेषता है ।' किश तथा एलकिन्स के (Kisch and Elkins) के अनुसार केन्द्रीय बैंक वह बैंक है जिसका प्रमुख M H. de Kock: Central Banking, 3rd ed., p. 19. Vera Smith : Rationale of Central Banking, p. 148. ... ... ... is the bank in any country to which has been entrusted the duty of regulating the volume of currency and credit in the country." (The Bank of International Settlement) 6. R. G. Hawtrey : The Art of Central Banking, p. 116. कार्य मुद्रामान की स्थिरता को बनाए रखना होता है । स्प्रेग के अनुसार "केन्द्रीय बैंकों के तीन विशेष कार्य होते है, अर्थात् केन्द्रीय बैंक के कार्य सरकार के राजकोषीय अभिकर्ता, एकाधिकारी के रूप में मुद्रा प्रचालन तथा साख- मुद्रा प्रणाली की आधारशिला के तीन भिन्न कार्य करना है । यह अन्तिम कार्य केन्द्रीय बैंक का सबसे अधिक आवश्यक कार्य है । "5 १९२६ ई० के भारतीय राजकीय मुद्रा तथा वित्त आयोग के सम्मुख बैंक ऑफ इंगलैंड के गवर्नर ने केन्द्रीय बैंक के सम्बन्ध में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा था कि "केन्द्रीय बैंक को नोट प्रचालन का एकाधिकार प्राप्त होना चाहिये । इसे बंध ग्राह्य मुद्रा का प्रचालन करने तथा उसको संचलन से हटाने का एक मात्र अधिकार प्राप्त होना चाहिये । सरकार की सभी सारी नकदी रोकड़ तथा देश की अन्य बैंकों व उनकी शाखाओं की सारी नकदी रोकड़ इसी के पास रहनी चाहिए । इसे एक ऐसे अभिकर्ता का कार्य करना चाहिये जो देश के आन्तरिक तथा विदेशी आर्थिक कार्य सम्पन्न कर सके । केन्द्रीय बैंक को देश की मुद्रा इकाई के आन्तरिक मूल्य में स्थिरता बनाए रखनी चाहिए । यह आवश्यकता अथवा संकट काल में ऋण प्राप्त करने का ऐसा अन्तिम स्रोत होना चाहिए जहाँ से स्वीकृत हुण्डियों को बट्टा करके अग्रिमों के रूप में अथवा सरकारी हुण्डियों की जमानत की आड़ पर वित्तीय सहायता प्राप्त हो सके । " " डो कौक के विचारानुसार "केन्द्रीय बैंक उस बैंक को कहते हैं जो देश की मौद्रिक तथा बैंकिंग प्रणाली का शिखर होती है तथा जो सम्पूर्ण देश के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर निम्नलिखित कार्यों को सम्पन्न करती है । ( १ ) देश में वाणिज्य तथा जनता की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर मुद्रा का नियमन करना जिसके लिए इसे नोट प्रचालन का पूर्ण एकाधिकार अथवा आंशिक एकाधिकार प्राप्त होता है । (२) राज्य के लिए साधारण बैंकिंग तथा अभिकर्ता सेवाएं प्रदान करना । (३) वाणिज्य बैंकों की नकदी रोकड़ का संरक्षण करना । (४) राष्ट्र के अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा आरक्षणों का संरक्षण करना । ( ५ ) देश में वाणिज्य बैकों तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं को विनिमय हुण्डियों, राजकोषीय हुण्डियों तथा अन्य उपयुक्त हुण्डियों व ऋणपत्रों को बट्टा करके वित्तय सहायता प्रदान करना । 5. "The special functions of the central banks may be grouped under three heads: they serve as fiscal agents of Governments: they have large power of control over currency through the more or less complete monopoly of note issue and finally, since they hold a large part of the reserves of other banks, they are directly responsible for the fundation of the entire structure of credit. This last is by far the most important function of the Central Bank'. (O. M. W Sprague : Theory and History of Banking.) "It should have the sole right of note-issue, it should be the channel, and the only channcl, for the output and intake of legal ender currency. It should be the holder of all the Government balances, the holder of all the reserves of other banks and the branches of all banks in the country. It should be the agent 'so to speak' through which the financial operations at home and abroad of the Government would be performed. It would further be the duty of the Central Bank to effect, as far as it could, suitable contraction and suitable expansion, in addition to aiming at general stability, and to maintain that stability within as well as without. When necessary it would be the ultimate source from which necessary funds might be obtained in the form of rediscounting of approved bills or advances on approved short securities of Government paper (Governor Bank of England-vide Report of Royal Commission on Indian Currency and Finance 1926.)
विकास का इतिहास केन्द्रीय बैंकिंग विल रोजर्स के विचारानुसार केन्द्रीय बैंकिंग उन तीन महान आविष्कारों में से एक है जो अतीत से लेकर अब तक हुये हैं । यद्यपि केन्द्रीय बैंक को महान आविष्कार की श्रेणी में रखने के सम्बन्ध में सन्देह किया जा सकता है परन्तु इस से किसी को इन्कार नहीं हो सकता है कि केन्द्रीय बैंक मनुष्य द्वारा स्थापित एक अत्यधिक उपयोगी वित्तिय संस्था है। वर्तमान समय में केन्द्रीय बैंक प्रत्येक देश की अर्थव्यवस्था के मौद्रिक तथा राजकोषीय ढाँचे का केन्द्रीय स्तम्भ है । केन्द्रीय बैंक की क्रियायें अर्थव्यवस्था के सुचारु रूप से कार्य करने तथा सरकार के राजकोषीय लेनदेन के लिये अनिवार्य हैं । यद्यपि कुछ केन्द्रीय बैंकों का आरम्भ दो सौ वर्ष से भी अधिक पूर्व हुआ था परन्तु केन्द्रीय बैंक का विकास तथा लोकप्रियता गत एक सौ वर्षों की विशेषता कही जा सकती है। केन्द्रीय बैंक की संस्था प्रमुखतः उन्नीस वीं शताब्दी की उत्पत्ति है । यद्यपि स्वीडन में रिक्सबैंक की स्थापना एक हज़ार छः सौ छप्पन ईशून्य में हुई थी परन्तु बैंक ऑफ इंगलैण्ड ने, जो एक हज़ार छः सौ चौरानवे ईशून्य में स्थापित हुई थी, एक हज़ार आठ सौ चौंतालीस ईशून्य में सर्वप्रथम केन्द्रीय बैंक के रूप में कार्य किया था। इस प्रकार बैंक ऑफ इंगलैण्ड का इतिहास केन्द्रीय बैंकिंग के विकास के इतिहास का प्रतिरूप है । बैंक ऑफ फ्रांस तथा जर्मनी में रीच्सबैंक क्रमशः एक हज़ार आठ सौ ईशून्य तथा एक हज़ार आठ सौ पचहत्तर ईशून्य में स्थापित हुई थीं। बैंक ऑफ नंदरलैण्डस की पुरानी बैंक ऑफ एमस्ट्रड्राम के स्थान पर एक हज़ार आठ सौ चौदह ईशून्य में स्थापना हुई थी । बैंक ऑफ नारवे ; नेशनल बैंक ऑफ डेनमार्क ; नेशनल बैंक ऑफ बेल्जियम तथा बैंक ऑफ स्पेन की स्थापना क्रमशः एक हज़ार आठ सौ सत्रह ईशून्य, एक हज़ार आठ सौ अट्ठारह ईशून्य एक हज़ार आठ सौ पचास ईशून्य तथा एक हज़ार आठ सौ छप्पन ईशून्य में हुई थी । एक हज़ार आठ सौ साठ ईशून्य में रूस में बैंक ऑफ रशा की स्थापना हुई थी । जापान में देश की मुद्रा प्रणाली का सुधार करने के उद्देश्य से बैंक ऑफ जापान एक हज़ार आठ सौ बयासी ईशून्य में स्थापित की गई थी। इन देशों में केन्द्रीय बैंकों की स्थापना होने के अतिरिक्त उन्नीस वीं शताब्दी में पुर्तगाल; जावा; मिस्र; तुर्की; तथा बलगारिया में भी केन्द्रीय बैंक स्थापित की गई थीं । उन्नीस वीं शताब्दी का केन्द्रीय बैकिंग के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण स्थान है तथा उन्नीस वीं शताब्दी को संसार के भिन्न देशों में, विशेष रूप से यूरोप के देशों में, केन्द्रीय बैंकों की स्थापना - शताब्दी कहा जा सकता है । यूरोप के देशों में स्थापित इन केन्द्रीय बैंकों को विशेष अधिकार प्राप्त थे । यद्यपि उन्नीस वीं शताब्दी के अन्त तक यूरोप के अधिकांश देशों में केन्द्रीय बैंकों की स्थापना हो चुकी थी परन्तु पूरबी संसार में जावा, जापान तथा मिस्र को छोड़कर अधिकांश देशों में केन्द्रीय बैंकों की स्थापना नहीं हुई थी । सोलह वीं शताब्दी के अन्त तक तथा बीस वीं शताब्दी के आरम्भ होने पर भी भारत तथा चीन के समान विशाल देशों में केन्द्रीय बैंक नहीं थीं। इस प्रकार बीस वीं शताब्दी में केन्द्रीय बैंकिंग के विकास का क्रम जारी रहा था । प्रथम महायुद्ध के पश्चात् राष्ट्रीयता की भावना तथा आर्थिक जीवन में राजकीय नियन्त्रण की आवश्यकता उत्पन्न होने से केन्द्रीय बैंकिंग के विकास को विशेष प्रोत्साहन प्राप्त हुआ था । अन्तर्राष्ट्रीय वित्त सम्मेलन, जो एक हज़ार नौ सौ बीस ईशून्य में ब्रसेल्स में हुआ था, ने केन्द्रीय बैंकिंग के विकास को और अधिक प्रगति प्रदान की थी क्योंकि इस सम्मेलन मे यह प्रस्ताव स्वीकार किया गया था कि "जिन देशों में उस समय तक केन्द्रीय बैंक स्थापित नहीं हुई थी उन देशों की सरकारों को अपने देश में यथाशीघ्र केन्द्रीय बैंक स्थापित करके देश की मौद्रिक तथा बैंकिंग प्रणालियों में स्थिरता तथा विश्व सहयोग को प्राप्त करने की चेष्टा करनी चाहिए । " अन्तरर्राष्ट्रीय वित्त सम्मेलन में प्रस्ताव पास होने के लगभग तीस वर्ष के अल्प समय में केन्द्रीय बैंकिंग का संसार के विभिन्न देशों में आश्चर्यजनक तीव्र गति के साथ विकास हुआ । एक हज़ार नौ सौ बीस ईशून्य से लेकर एक हज़ार नौ सौ सैंतीस ईशून्य तक प्रति वर्ष संसार के किसी न किसी देश में केन्द्रीय बैंक की स्थापना होती रही थी । आज संसार के लगभग सभी स्वाधीन देशों में केन्द्रीय बैंक स्थापित हैं । केन्द्रीय बैंक की परिभाषा केन्द्रीय बैंक को व्यापक तथा सही परिभाषा करना कठिन है । अर्थशास्त्रियों तथा वित्त विशेषज्ञों ने केन्द्रीय बैंक की भिन्न प्रकार से परिभाषा की है । प्रत्येक अर्थशास्त्री ने अपनी परिभाषा में केन्द्रीय बैंक के भिन्न कार्यों को महत्व दिया है । वेरा स्मिथ ने केन्द्रीय बैंक के मुद्रा प्रचालन कार्य को अधिक महत्व देते हुए लिखा है कि "केन्द्रीय बैंकिंग का अभिप्राय उस बैंकिंग प्रणाली से है जिसके अन्तर्गत किसी एक बैंक को नोट प्रचालन का पूर्ण अथवा अवशेष एकाधिकार प्राप्त होता है ।"दो अन्तर्राष्ट्रीय भुगतान बैंक के अनुसार " केन्द्रीय बैंक उस बैंक को कहते हैं जिसका प्रमुख कार्य देश में मुद्रा तथा साख- मुद्रा का नियमन करना होता है । "आठ शॉ के विचार में केन्द्रीय बैंक वह बैंक होती है जो देश में साख - मुद्रा पर नियन्त्रण रखती है । हाटरे के विचार में "केन्द्रीय बैंक बैंकों की बैंक होती है तथा बैंकों के लिये अन्तिम ऋणदाता का कार्य करना इसकी प्रमुख विशेषता है ।' किश तथा एलकिन्स के के अनुसार केन्द्रीय बैंक वह बैंक है जिसका प्रमुख M H. de Kock: Central Banking, तीनrd ed., p. उन्नीस. Vera Smith : Rationale of Central Banking, p. एक सौ अड़तालीस. ... ... ... is the bank in any country to which has been entrusted the duty of regulating the volume of currency and credit in the country." छः. R. G. Hawtrey : The Art of Central Banking, p. एक सौ सोलह. कार्य मुद्रामान की स्थिरता को बनाए रखना होता है । स्प्रेग के अनुसार "केन्द्रीय बैंकों के तीन विशेष कार्य होते है, अर्थात् केन्द्रीय बैंक के कार्य सरकार के राजकोषीय अभिकर्ता, एकाधिकारी के रूप में मुद्रा प्रचालन तथा साख- मुद्रा प्रणाली की आधारशिला के तीन भिन्न कार्य करना है । यह अन्तिम कार्य केन्द्रीय बैंक का सबसे अधिक आवश्यक कार्य है । "पाँच एक हज़ार नौ सौ छब्बीस ईशून्य के भारतीय राजकीय मुद्रा तथा वित्त आयोग के सम्मुख बैंक ऑफ इंगलैंड के गवर्नर ने केन्द्रीय बैंक के सम्बन्ध में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा था कि "केन्द्रीय बैंक को नोट प्रचालन का एकाधिकार प्राप्त होना चाहिये । इसे बंध ग्राह्य मुद्रा का प्रचालन करने तथा उसको संचलन से हटाने का एक मात्र अधिकार प्राप्त होना चाहिये । सरकार की सभी सारी नकदी रोकड़ तथा देश की अन्य बैंकों व उनकी शाखाओं की सारी नकदी रोकड़ इसी के पास रहनी चाहिए । इसे एक ऐसे अभिकर्ता का कार्य करना चाहिये जो देश के आन्तरिक तथा विदेशी आर्थिक कार्य सम्पन्न कर सके । केन्द्रीय बैंक को देश की मुद्रा इकाई के आन्तरिक मूल्य में स्थिरता बनाए रखनी चाहिए । यह आवश्यकता अथवा संकट काल में ऋण प्राप्त करने का ऐसा अन्तिम स्रोत होना चाहिए जहाँ से स्वीकृत हुण्डियों को बट्टा करके अग्रिमों के रूप में अथवा सरकारी हुण्डियों की जमानत की आड़ पर वित्तीय सहायता प्राप्त हो सके । " " डो कौक के विचारानुसार "केन्द्रीय बैंक उस बैंक को कहते हैं जो देश की मौद्रिक तथा बैंकिंग प्रणाली का शिखर होती है तथा जो सम्पूर्ण देश के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर निम्नलिखित कार्यों को सम्पन्न करती है । देश में वाणिज्य तथा जनता की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर मुद्रा का नियमन करना जिसके लिए इसे नोट प्रचालन का पूर्ण एकाधिकार अथवा आंशिक एकाधिकार प्राप्त होता है । राज्य के लिए साधारण बैंकिंग तथा अभिकर्ता सेवाएं प्रदान करना । वाणिज्य बैंकों की नकदी रोकड़ का संरक्षण करना । राष्ट्र के अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा आरक्षणों का संरक्षण करना । देश में वाणिज्य बैकों तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं को विनिमय हुण्डियों, राजकोषीय हुण्डियों तथा अन्य उपयुक्त हुण्डियों व ऋणपत्रों को बट्टा करके वित्तय सहायता प्रदान करना । पाँच. "The special functions of the central banks may be grouped under three heads: they serve as fiscal agents of Governments: they have large power of control over currency through the more or less complete monopoly of note issue and finally, since they hold a large part of the reserves of other banks, they are directly responsible for the fundation of the entire structure of credit. This last is by far the most important function of the Central Bank'. "It should have the sole right of note-issue, it should be the channel, and the only channcl, for the output and intake of legal ender currency. It should be the holder of all the Government balances, the holder of all the reserves of other banks and the branches of all banks in the country. It should be the agent 'so to speak' through which the financial operations at home and abroad of the Government would be performed. It would further be the duty of the Central Bank to effect, as far as it could, suitable contraction and suitable expansion, in addition to aiming at general stability, and to maintain that stability within as well as without. When necessary it would be the ultimate source from which necessary funds might be obtained in the form of rediscounting of approved bills or advances on approved short securities of Government paper
भानुप्रतापपुर. ग्राम पंचायत कन्हारगांव में पानी टंकी के लिए खोदे गए गड्ढे में 4 वर्षीय मासूम की डूबने से मौत हो गई. गुरुवार को अपनी छोटी बहन के साथ माखन खेलते-खेलते गड्ढे के पास पहुंचा था और अचानक वह गड्ढे में गिर गया, जिसमें पानी भरे होने से डूबने से उसकी मौत हो गई. हादसे के बाद ग्रामीणों ने पीएचई विभाग पर आक्रोश जताया. आज ग्रामीणों ने भानुप्रतापपुर थाने का घेराव कर पीएचई विभाग एवं ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज करने और मृतक के परिवार को मुआवजा देने की मांग उठाई. पीएचई विभाग द्वारा जल जीवन मिशन अंतर्गत ग्राम पंचायत कन्हारगांव में पानी टंकी का निर्माण कराया जा रहा है. इस टंकी के निर्माण के लिए बरसात के पहले लगभग 8 फीट गहरा गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया था, जिसमें आज एक मासूम की डूबने से मौत हो गई. अपनी छोटी बहन के साथ माखन खेलते-खेलते गड्ढे के पास पहुंचा था और अचानक वह गड्ढे में गिर गया. घटना की जानकारी डूबने के 2 घंटे बाद परिजनों को मिली. जब मृतक की मां ने उसकी छोटी बहन से पूछा कि भाई कहां है, तब बहन ने बताया कि वह गड्ढे में गिर गया है. आनन-फानन में गड्ढे से मासूम को निकालकर निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम भानुप्रतापपुर मनीष साहू, एसडीओपी प्रशांत पैकरा दलबल सहित मौके पर पहुंचे. घटना के बाद ग्रामीणों ने पीएचई विभाग पर आक्रोश जताया. तत्काल गड्ढे को बंद कराने एवं मुआवजे की मांग की. आज ग्रामीणों ने भानुप्रतापपुर थाने का घेराव कर पीएचई विभाग एवं ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज करने और उनके परिवार को मुआवजा देने की मांग उठाई. एसडीएम मनीष साहू थाना परिसर पहुंचकर ग्रामीणों को शांत कराकर उनसे चर्चा की. उन्होंने कहा कि मामले को उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है. एफआईआर की कार्रवाई की जा रही है. गड्ढे को तत्काल बंद कर प्रतिवेदन देने सभी विभागों को निर्देश दे दिया है.
भानुप्रतापपुर. ग्राम पंचायत कन्हारगांव में पानी टंकी के लिए खोदे गए गड्ढे में चार वर्षीय मासूम की डूबने से मौत हो गई. गुरुवार को अपनी छोटी बहन के साथ माखन खेलते-खेलते गड्ढे के पास पहुंचा था और अचानक वह गड्ढे में गिर गया, जिसमें पानी भरे होने से डूबने से उसकी मौत हो गई. हादसे के बाद ग्रामीणों ने पीएचई विभाग पर आक्रोश जताया. आज ग्रामीणों ने भानुप्रतापपुर थाने का घेराव कर पीएचई विभाग एवं ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज करने और मृतक के परिवार को मुआवजा देने की मांग उठाई. पीएचई विभाग द्वारा जल जीवन मिशन अंतर्गत ग्राम पंचायत कन्हारगांव में पानी टंकी का निर्माण कराया जा रहा है. इस टंकी के निर्माण के लिए बरसात के पहले लगभग आठ फीट गहरा गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया था, जिसमें आज एक मासूम की डूबने से मौत हो गई. अपनी छोटी बहन के साथ माखन खेलते-खेलते गड्ढे के पास पहुंचा था और अचानक वह गड्ढे में गिर गया. घटना की जानकारी डूबने के दो घंटाटे बाद परिजनों को मिली. जब मृतक की मां ने उसकी छोटी बहन से पूछा कि भाई कहां है, तब बहन ने बताया कि वह गड्ढे में गिर गया है. आनन-फानन में गड्ढे से मासूम को निकालकर निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम भानुप्रतापपुर मनीष साहू, एसडीओपी प्रशांत पैकरा दलबल सहित मौके पर पहुंचे. घटना के बाद ग्रामीणों ने पीएचई विभाग पर आक्रोश जताया. तत्काल गड्ढे को बंद कराने एवं मुआवजे की मांग की. आज ग्रामीणों ने भानुप्रतापपुर थाने का घेराव कर पीएचई विभाग एवं ठेकेदार पर एफआईआर दर्ज करने और उनके परिवार को मुआवजा देने की मांग उठाई. एसडीएम मनीष साहू थाना परिसर पहुंचकर ग्रामीणों को शांत कराकर उनसे चर्चा की. उन्होंने कहा कि मामले को उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है. एफआईआर की कार्रवाई की जा रही है. गड्ढे को तत्काल बंद कर प्रतिवेदन देने सभी विभागों को निर्देश दे दिया है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कश्मीर मसले को लेकर विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर मसले को सुलझाने में अमेरिका की मदद मांगी थी. ट्रंप ने यह बात सोमवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात के दौरान कही. असल में, इमरान खान ने सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात की. इस मुलाकात के दौरान इमरान खान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने कश्मीर मुद्दे को रखा. इस पर ट्रंप ने कहा कि हम मध्यस्थता को तैयार हैं, और भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने हमसे इस मुद्दे को सुलझाने में मदद मांगी थी. ट्रंप ने दावा किया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कश्मीर मुद्दे पर मदद करने के लिए कहा है. ट्रंप ने कहा कि अगर मैं इस विवाद को सुलझाने में मदद कर सकता हूं तो मैं मदद करना चाहूंगा. ट्रंप का दावा था कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनसे कहा था कि वह कश्मीर में विवाद के निपटारे में मदद करें और उन्हें मध्यस्थता करने में खुशी होगी. ट्रंप ने न्यौता मिलने पर पाकिस्तान जाने की भी बात कही.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कश्मीर मसले को लेकर विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर मसले को सुलझाने में अमेरिका की मदद मांगी थी. ट्रंप ने यह बात सोमवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात के दौरान कही. असल में, इमरान खान ने सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में मुलाकात की. इस मुलाकात के दौरान इमरान खान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने कश्मीर मुद्दे को रखा. इस पर ट्रंप ने कहा कि हम मध्यस्थता को तैयार हैं, और भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने हमसे इस मुद्दे को सुलझाने में मदद मांगी थी. ट्रंप ने दावा किया कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कश्मीर मुद्दे पर मदद करने के लिए कहा है. ट्रंप ने कहा कि अगर मैं इस विवाद को सुलझाने में मदद कर सकता हूं तो मैं मदद करना चाहूंगा. ट्रंप का दावा था कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनसे कहा था कि वह कश्मीर में विवाद के निपटारे में मदद करें और उन्हें मध्यस्थता करने में खुशी होगी. ट्रंप ने न्यौता मिलने पर पाकिस्तान जाने की भी बात कही.
लड़कियां अपने चेहरे के रंग को गोरा बनाने के लिए महंगी महंगी क्रीम और फेस वॉश का इस्तेमाल करती हैं. पर इन सभी चीजों के इस्तेमाल के बाद भी कोई फायदा नहीं होता है. अगर आप अपने चेहरे के रंग को गोरा बनाना चाहते हैं तो आज हम आपको घर पर ही साबुन बनाने का एक ऐसा तरीका बताने जा रहे हैं. जिसके इस्तेमाल से आपके चेहरे का रंग दूध के समान गोरा हो जाएगा. साबुन को बनाने के लिए सबसे पहले एक पियर्स साबुन को ले ले. अब इसे कद्दूकस कर ले. इसके बाद एक नींबू को दूसरी कटोरी में लेकर कद्दूकस करें. अब एक बर्तन में पानी को गर्म कर ले. जब पानी गर्म हो जाए तो इसमें कद्दूकस किया हुआ साबुन डालकर अच्छे से मिलाएं. जब साबुन अच्छे से पिघल जाए तो इसमें नींबू के छिलके को डालकर मिलाएं. अब इसमें थोड़ा सा एलोवेरा जेल डालकर अच्छे से मिक्स करें. अब इसे एक गिलास में डालकर जमने के लिए छोड़ दें. 1 घंटे बाद इस साबुन को गिलास से निकाल ले. 1 हफ्ते तक लगातार इस साबुन का इस्तेमाल करने से आपकी त्वचा का रंग गोरा और चमकदार हो जाएगा.
लड़कियां अपने चेहरे के रंग को गोरा बनाने के लिए महंगी महंगी क्रीम और फेस वॉश का इस्तेमाल करती हैं. पर इन सभी चीजों के इस्तेमाल के बाद भी कोई फायदा नहीं होता है. अगर आप अपने चेहरे के रंग को गोरा बनाना चाहते हैं तो आज हम आपको घर पर ही साबुन बनाने का एक ऐसा तरीका बताने जा रहे हैं. जिसके इस्तेमाल से आपके चेहरे का रंग दूध के समान गोरा हो जाएगा. साबुन को बनाने के लिए सबसे पहले एक पियर्स साबुन को ले ले. अब इसे कद्दूकस कर ले. इसके बाद एक नींबू को दूसरी कटोरी में लेकर कद्दूकस करें. अब एक बर्तन में पानी को गर्म कर ले. जब पानी गर्म हो जाए तो इसमें कद्दूकस किया हुआ साबुन डालकर अच्छे से मिलाएं. जब साबुन अच्छे से पिघल जाए तो इसमें नींबू के छिलके को डालकर मिलाएं. अब इसमें थोड़ा सा एलोवेरा जेल डालकर अच्छे से मिक्स करें. अब इसे एक गिलास में डालकर जमने के लिए छोड़ दें. एक घंटाटे बाद इस साबुन को गिलास से निकाल ले. एक हफ्ते तक लगातार इस साबुन का इस्तेमाल करने से आपकी त्वचा का रंग गोरा और चमकदार हो जाएगा.
महिलाओं और बच्चियों के सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद रेप (Rape) की वारदातें रुक नहीं रही हैं. ताजा घटना बिहार (Bihar) के दरभंगा (Drabhanga) की है जहां एक टेंपो चालक (ऑटो ड्राइवर) ने पांच साल की बच्ची से हैवानियत की है. पीड़ित बच्ची को खून से लथपथ हालत में दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (DMCH) में भर्ती करवाया गया है. यहां बच्ची का ऑपरेशन किया गया है. पुलिस का दावा है कि मामला सामने आने के बाद देर रात आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए कई थानों की पुलिस के साथ डीएसपी अनोज कुमार भी पीड़िता को देखने दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे. मीडिया से बातचीत करते हुए कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि बच्ची को एक टेंपो चालक बहला-फुसला कर ले गया था और कुछ दूरी पर एक गाछी (बगीचा) में उसके साथ रेप किया. पीड़ित बच्ची के परिवार के मुताबिक वो घर के बाहर एक छोटे लड़के के साथ खेल रही थी तभी आरोपी वहां आया और उसने बहला-फुसलाकर दोनों बच्चों को अपने ऑटो में बिठा लिया और चला गया. इस दौरान सुनसान इलाके वाले एक गाछी (बगीचे) में उसने बच्ची के साथ रेप किया. इस बीच बच्ची को घर के पास न पाकर घरवाले उसे खोजने लगे तभी किसी ने ऑटो पर बैठे होने की खबर दी. यह सुनकर परिजन बदहवास हालत में इधर-उधर बच्ची को ढूंढ़ने लगे. तभी बच्ची के पिता की नजर सड़क किनारे लावारिस हालत में खड़े एक ऑटो पर पड़ी. नजदीक पहुंचने पर गाछी से बच्ची के रोने की आवाज आई तो लोग मोबाइल की रोशनी जलाकर उस ओर दौड़ पड़े. तभी आरोपी मौका पाकर वहां से भाग निकला और परिजनों ने बच्ची को दरिंदे को चंगुल से बचा लिया. पीड़ित बच्ची के पिता की मानें तो दोनों बच्चे अगल-बगल में मिले. अगर कुछ पल की देरी होती तो आरोपी उनकी जान लेने की फिराक में था. बताया जा रहा है कि आरोपी ऑटो ड्राइवर के हाथ में चाक़ू भी देखा गया था. आरोपी की पहचान भगवानपुर निवासी तेतर साहनी के रूप में की गयी है. वहीं पीड़ित बच्ची गरीब परिवार से है और उसके पिता बाहर रहकर मजदूरी करते हैं.
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कानपुर (ब्यूरो) एनआरआई सिटी निवासी रमन नेमानी ने नवाबगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उनके घर पर फैक्ट्री कर्मचारी उमा काम करती थी। मगरवारा स्थिति खटई गांव निवासी नाबालिग लड़की को उमा उनके घर काम करने लाई थी। नाबालिग के माता-पिता की आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से परिवार वालों की मर्जी से रमन नेमानी ने उसे घर में रहने की अनुमति दे दी। एफआईआर के मुताबिक 17 अप्रैल को सुबह नाबालिग जरूरी काम बता कर चली गई। रमन के मुताबिक अगले दिन जेवर समेत कई सामान गायब मिले। रमन ने नाबालिग के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। नवाबगंज पुलिस मगरवारा निवासी नाबालिग लड़की की मां 34 साल की सुदामा को लेकर आई थी। जिसका नाम भी एफआईआर मेें दर्ज नहीं था। रविवार को मगरवारा से लाने के बाद चोरी के माल की पूछताछ में पुलिस ने सुदामा से पूछताछ की। बेटी ने बताया कि उसकी मां को पुलिस लाई थी। रात के समय उसे छोड़कर गई थी। सुबह मम्मी बैग उसे देकर टॉयलेट चली गई थी। इसी दौरान उन्होंने साड़ी से एग्जास्ट में फांसी लगा ली। कई घंटे बाद जब जानकारी हुई तो पुलिस को सूचना दी गई। सुबह 8 बजे घटना की जानकारी पुलिस को हो गई थी। इसके बाद भी दो बजे तक वारदात की जानकारी मीडिया या किसी को भी नहीं दी गई, जो लोग अंदर थे। उन्हें अंदर ही नजरबंद कर दिया गया। दो बजे जानकारी होने पर जब मीडिया कर्मी कवरेज को पहुंचे तो काफी देर बाद एसीपी स्वरूप नगर वीबी सिंह ने बाहर आकर मामले की जानकारी दी। अपने ही साथियों की इस करतूत को छिपाने के लिए पुलिस ने छह घंटे तक घटना का खुलासा न होने दिया। सुदामा के परिवार वाले देर शाम पोस्टमार्टम हाउस पहुंच सके। देर शाम उर्सला डॉ। सुनील कुमार और डॉ। वीकेएस कटियार के पैनल ने सुदामा का पोस्टमार्टम किया। जिसमें मौत की वजह हैैंगिंग बताई गई। वीडियो ग्राफी भी कराई गई। विसरा जांच के लिए भेजा जाएगा। बाबू पुरवा मेें पुलिस की पिटाई से हुई मौत का मामला कुछ दिन पहले ही सामने आया था। दूसरी घटना में डॉ। मधू कपूर के घर लूट के बाद हत्या के मामले में ससपेक्टेड सावित्री से पूछताछ के दौरान थर्ड डिग्री इस्तेमाल किया गया। जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई थी। चोरी के आरोप में मगरवारा से लाई गई सुदामा ने सखी वन स्टॉप सेंटर में फांसी लगाकर जान दे दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
कानपुर एनआरआई सिटी निवासी रमन नेमानी ने नवाबगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उनके घर पर फैक्ट्री कर्मचारी उमा काम करती थी। मगरवारा स्थिति खटई गांव निवासी नाबालिग लड़की को उमा उनके घर काम करने लाई थी। नाबालिग के माता-पिता की आर्थिक स्थिति ठीक न होने की वजह से परिवार वालों की मर्जी से रमन नेमानी ने उसे घर में रहने की अनुमति दे दी। एफआईआर के मुताबिक सत्रह अप्रैल को सुबह नाबालिग जरूरी काम बता कर चली गई। रमन के मुताबिक अगले दिन जेवर समेत कई सामान गायब मिले। रमन ने नाबालिग के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। नवाबगंज पुलिस मगरवारा निवासी नाबालिग लड़की की मां चौंतीस साल की सुदामा को लेकर आई थी। जिसका नाम भी एफआईआर मेें दर्ज नहीं था। रविवार को मगरवारा से लाने के बाद चोरी के माल की पूछताछ में पुलिस ने सुदामा से पूछताछ की। बेटी ने बताया कि उसकी मां को पुलिस लाई थी। रात के समय उसे छोड़कर गई थी। सुबह मम्मी बैग उसे देकर टॉयलेट चली गई थी। इसी दौरान उन्होंने साड़ी से एग्जास्ट में फांसी लगा ली। कई घंटे बाद जब जानकारी हुई तो पुलिस को सूचना दी गई। सुबह आठ बजे घटना की जानकारी पुलिस को हो गई थी। इसके बाद भी दो बजे तक वारदात की जानकारी मीडिया या किसी को भी नहीं दी गई, जो लोग अंदर थे। उन्हें अंदर ही नजरबंद कर दिया गया। दो बजे जानकारी होने पर जब मीडिया कर्मी कवरेज को पहुंचे तो काफी देर बाद एसीपी स्वरूप नगर वीबी सिंह ने बाहर आकर मामले की जानकारी दी। अपने ही साथियों की इस करतूत को छिपाने के लिए पुलिस ने छह घंटे तक घटना का खुलासा न होने दिया। सुदामा के परिवार वाले देर शाम पोस्टमार्टम हाउस पहुंच सके। देर शाम उर्सला डॉ। सुनील कुमार और डॉ। वीकेएस कटियार के पैनल ने सुदामा का पोस्टमार्टम किया। जिसमें मौत की वजह हैैंगिंग बताई गई। वीडियो ग्राफी भी कराई गई। विसरा जांच के लिए भेजा जाएगा। बाबू पुरवा मेें पुलिस की पिटाई से हुई मौत का मामला कुछ दिन पहले ही सामने आया था। दूसरी घटना में डॉ। मधू कपूर के घर लूट के बाद हत्या के मामले में ससपेक्टेड सावित्री से पूछताछ के दौरान थर्ड डिग्री इस्तेमाल किया गया। जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई थी। चोरी के आरोप में मगरवारा से लाई गई सुदामा ने सखी वन स्टॉप सेंटर में फांसी लगाकर जान दे दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
- 46 min ago बीच सड़क पर जमकर नाचे सलमान खान के फैंस, जन्मदिन पर बोले- 'आज ईद, दिवाली और क्रिसमस' Don't Miss! - Travel सब तीर्थ बार-बार, गंगासागर एक बार : कब से शुरू होगा मेला, कब है पूण्यस्नान का मुहूर्त, कैसी है तैयारी? - News Bihar Politics: पीएम पद पर फिर नीतीश की दावेदारी, JDU ने लगाए पोस्टर- 'प्रदेश ने पहचान, अब देश भी पहचानेगा' GHKKPM Spoiler Alert : टीवी सीरियल गुम है किसी के प्यार में आस सभी को बीते एपिसोड में देखने के लिए मिला था कि कैसे ईशान रीवा को उसके मन पसंद का पैन गिफ्ट करता है। जिसे रीवा बेहद खुश हो जाती है। वहीं अक्का साहिब ईशान और रीवा की शादी का फैसला करती है जिसे सुनने के बाद हर कोई बेहद हैरान रहता है,लेकिन इस सीरियल के अपकमिंग एपिसोड में देखने को मिलेगा कि कैसे ईशान बेहद खास अंदाज में रीवा को घुटनों पर बैठ कर शादी के लिए प्रपोज करता है। दरअसल, आने वाले एपिसोड में आका देखेंगे की कैसे ईशा हॉस्पिटल अक्का साहिब से मिलने जाएगी। बीमारी हालत में भी अक्का साहिब का शातिराना दिमाग चलाना नहीं छुटेगा। वो अपने तीखे शब्दों से ईशा पर वार करती नजर आएगी,लेकिन ईशा उनकी बातों को ज्यादा सीरियस नहीं लेती और इग्नोर करते नजर आएगी। अक्का साहिब ईशान को छीनने की भी बात कहेगी। ईशा और अक्का साबिह की सारी बातें सानतनु सुनता रहेगा। जहां एक तरफ अक्का साहिब और ईशा के बीच ईशान की शादी को लेकर बातें हो रही होगी। वहीं दूसरी ओर सवी के घर पर गिफ्ट का बवछार होने नजर आएगा। जिसके वजह से सभी लोग डर जाएंगे खास कर सवी की बड़ी आजी को उसकी फिक्र होते नजर आएगी। सवी की बहन हरणी सवी की तरफ दारी करेगी,लेकिन इसके बावजूद वो सब के एक वादा करेगी की अब कोई और गिफ्ट आया तो मैं उसे दबोच लूगी। इस सीरियल के आने वाले एपिसोड में देखने को मिलेगा कि कैसे अक्का साबिह के फैसले के बाद ईशान रीवा को एक रेस्टोरेंट में शादी के लिए प्रपोज करेगा। इसके अलावा ईशान अपनी सारी बरसो से दिल में दबाए रखें अरमानो को रीवा के सामने खोल कर रख देगा। रीवा को प्रपोज करने के लिए ईशान अपने घुटनों के बल बैठ कर रीवा से शादी के लिए पूछते नजर आएगा। रीवा बेहद खुश हो जाएगी और वो ईशान के प्रपोज को एक्सेप्ट कर लेगी,लेकिन फिर कुछ ऐसा होगा जिसे सब कुछ बिखर जाएगा।
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इंडिया न्यूज, नई दिल्लीः देश में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है और तारीखों का ऐलान चुनाव आयोग ने कर दिया है। उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी से लेकर 7 मार्च तक सात चरणों में मतदान होंगे। जबकि पंजाब, उत्तराखण्ड व गोवा में 14 फरवरी को और मणिपुर में 27 व 3 मार्च को मतदान होंगे। देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा और 403 विधानसभा सीटें हैं। 2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 312 सीटों पर कब्जा किया था। जबकि 2012 से लेकर 17 तक सत्ता में रहने वाली सपा मात्र 47 सीटों पर आकर सिमट गई थी। वहीं पंजाब में 117 विधानसभा सीटें हैं। यहां कैप्टन अमिरंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने मोदी लहर को नाकाम करते हुए 77 सीटें जीती थी जबकि अकाली दल को 15 सीटें मिली थी। यहां भाजपा ने सिर्फ 3 सीटें ही जीतें थी। सबसे बड़ी बात यह थी कि पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रही आप ने 20 सीटें जीतें थी। इससे पहले 10 साल तक अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन वाली सरकार सत्ता में रही थी। उधर उत्तराखंड 70 विधानसभा सीटें हैं। यहां 5 भाजपा ने ने 56 सीटें जीती थी, जबकि कांग्रेस के खाते में 11 सीटें आई थी। बीजेपी यहां पर 5 साल में 3 मुख्यमंत्री भी बदल चुकी है। वहीं गोवा में 40 विधानसभा सीटें हैं। 2017 में यहां कांग्रेस 17 सीटें जीती थी जबकि भाजपा ने 13 सीटें जीती थी। एनसीपी के खाते में 1 और अन्य के खाते में 9 सीटें आई थी। भाजपा ने यहां दूसरी पार्टियों के सहयोग से सरकार बना ली थी। मणिपुर में कुल 60 विधानसभा सीटें हैं। 2017 में यहां कांग्रेस 28 सीटें जीती थी जबकि भाजपा ने 21 सीटें जीती थी। एनपीफ के खाते में 4 और अन्य के खाते में 7 सीटें आई थी।
इंडिया न्यूज, नई दिल्लीः देश में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है और तारीखों का ऐलान चुनाव आयोग ने कर दिया है। उत्तर प्रदेश में दस फरवरी से लेकर सात मार्च तक सात चरणों में मतदान होंगे। जबकि पंजाब, उत्तराखण्ड व गोवा में चौदह फरवरी को और मणिपुर में सत्ताईस व तीन मार्च को मतदान होंगे। देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में अस्सी लोकसभा और चार सौ तीन विधानसभा सीटें हैं। दो हज़ार सत्रह में उत्तर प्रदेश में भाजपा ने तीन सौ बारह सीटों पर कब्जा किया था। जबकि दो हज़ार बारह से लेकर सत्रह तक सत्ता में रहने वाली सपा मात्र सैंतालीस सीटों पर आकर सिमट गई थी। वहीं पंजाब में एक सौ सत्रह विधानसभा सीटें हैं। यहां कैप्टन अमिरंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने मोदी लहर को नाकाम करते हुए सतहत्तर सीटें जीती थी जबकि अकाली दल को पंद्रह सीटें मिली थी। यहां भाजपा ने सिर्फ तीन सीटें ही जीतें थी। सबसे बड़ी बात यह थी कि पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रही आप ने बीस सीटें जीतें थी। इससे पहले दस साल तक अकाली दल और बीजेपी के गठबंधन वाली सरकार सत्ता में रही थी। उधर उत्तराखंड सत्तर विधानसभा सीटें हैं। यहां पाँच भाजपा ने ने छप्पन सीटें जीती थी, जबकि कांग्रेस के खाते में ग्यारह सीटें आई थी। बीजेपी यहां पर पाँच साल में तीन मुख्यमंत्री भी बदल चुकी है। वहीं गोवा में चालीस विधानसभा सीटें हैं। दो हज़ार सत्रह में यहां कांग्रेस सत्रह सीटें जीती थी जबकि भाजपा ने तेरह सीटें जीती थी। एनसीपी के खाते में एक और अन्य के खाते में नौ सीटें आई थी। भाजपा ने यहां दूसरी पार्टियों के सहयोग से सरकार बना ली थी। मणिपुर में कुल साठ विधानसभा सीटें हैं। दो हज़ार सत्रह में यहां कांग्रेस अट्ठाईस सीटें जीती थी जबकि भाजपा ने इक्कीस सीटें जीती थी। एनपीफ के खाते में चार और अन्य के खाते में सात सीटें आई थी।
जानकारी के अनुसार करैरा के वार्ड क्रमांक 8 में स्थित ब्लॉग वाली गली में निवास करने वाली आंगनबाड़ी सहायिका सुखबती जाटव उम्र 35 साल आज दोपहर अपने घर थी। पति अमर सिंह आया और पत्नी की गारंटी पर 2 लाख की लोन निकल वाने की जिद करने लगा। बताया जा रहा है कि सुखवती ने उसे लोन में अपनी गारंटी देने से मना कर दिया इस कारण वह गुस्से में आ गया और उसने अपनी पत्नी की लात घूसो से मारपीट करना शुरू कर दिया और अपने दांत से पत्नी की नाक काट दी। बताया जा रहा है कि जब अमर सिंह अपनी पत्नि सुखवती की मारपीट कर रहा था तो वह जोर जोर से चीख रही थी। सुखवती की आवाज सुंनकर पडौसी इकठ्ठा हो गए ओर सुखवती को अमर सिंह से बचाया और डायल 100 को कॉल किया। कॉल पर डायल 100 पहुंची जब तक अमर सिंह फरार हो गया था। घायल सुखवती को लेकर डायल 100 करैरा अस्पताल पहुंची। बताया जा रहा है कि आंगनबाड़ी सुखवती जाटव का पति अमरसिंह शराब का नशा करता है और बेरोजगार है। इसलिए वह काम धंधे के लिए लोन निकालना चाह रहा था लेकिन सुखवती को अपने पति पर विश्वास नही हो रहा था इसलिए वह लॉन नही निकलना चाह रही थी,क्योंकि वह कई बार धंधे के लिए गए पैसो से नशा कर चुका था।
जानकारी के अनुसार करैरा के वार्ड क्रमांक आठ में स्थित ब्लॉग वाली गली में निवास करने वाली आंगनबाड़ी सहायिका सुखबती जाटव उम्र पैंतीस साल आज दोपहर अपने घर थी। पति अमर सिंह आया और पत्नी की गारंटी पर दो लाख की लोन निकल वाने की जिद करने लगा। बताया जा रहा है कि सुखवती ने उसे लोन में अपनी गारंटी देने से मना कर दिया इस कारण वह गुस्से में आ गया और उसने अपनी पत्नी की लात घूसो से मारपीट करना शुरू कर दिया और अपने दांत से पत्नी की नाक काट दी। बताया जा रहा है कि जब अमर सिंह अपनी पत्नि सुखवती की मारपीट कर रहा था तो वह जोर जोर से चीख रही थी। सुखवती की आवाज सुंनकर पडौसी इकठ्ठा हो गए ओर सुखवती को अमर सिंह से बचाया और डायल एक सौ को कॉल किया। कॉल पर डायल एक सौ पहुंची जब तक अमर सिंह फरार हो गया था। घायल सुखवती को लेकर डायल एक सौ करैरा अस्पताल पहुंची। बताया जा रहा है कि आंगनबाड़ी सुखवती जाटव का पति अमरसिंह शराब का नशा करता है और बेरोजगार है। इसलिए वह काम धंधे के लिए लोन निकालना चाह रहा था लेकिन सुखवती को अपने पति पर विश्वास नही हो रहा था इसलिए वह लॉन नही निकलना चाह रही थी,क्योंकि वह कई बार धंधे के लिए गए पैसो से नशा कर चुका था।
मिलक कोतवाली क्षेत्र के जाफराबाद निवासी राजपाल को उसके बेटे ने ही गोली मार दी। उसने पुत्र, पत्नी और दामाद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। राजपाल बुधवार को कोतवाली पहुंचे और पुलिस को बताया कि रविवार की शाम वह रामपुर से घर लौट रहे थे। खाता चिंतामन के पास साढ़े सात बजे उनकी पत्नी ब्रह्मा देवी, पुत्र अंकित और कुढेसरी निवासी दामाद नेत्रपाल कश्यप ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की। वह भागे तो पुत्र ने तमंचे से उनके ऊपर फायर किया। कमर में गोली लगने से वह घायल हो गए। कोतवाल राजेश बैसला ने बताया कि घायल को मेडिकल के लिए भेज दिया गया था। उनके द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामला संदिग्ध है। पीठ में 16 छर्रे लगे हैं। कुर्ते पर खून भी लगा है, लेकिन कुर्ते पर छर्रे के निशान नहीं है। जांच पड़ताल में पता चला है कि राजपाल का अपनी पत्नी और बेटे से विवाद है। उसने एक हिस्ट्रीशीटर को जमीन भी बेच दी है। अब घर भी बेचना चाहता है, जबकि पत्नी और बेटा इसी का विरोध करते हैं। पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है।
मिलक कोतवाली क्षेत्र के जाफराबाद निवासी राजपाल को उसके बेटे ने ही गोली मार दी। उसने पुत्र, पत्नी और दामाद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। राजपाल बुधवार को कोतवाली पहुंचे और पुलिस को बताया कि रविवार की शाम वह रामपुर से घर लौट रहे थे। खाता चिंतामन के पास साढ़े सात बजे उनकी पत्नी ब्रह्मा देवी, पुत्र अंकित और कुढेसरी निवासी दामाद नेत्रपाल कश्यप ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की। वह भागे तो पुत्र ने तमंचे से उनके ऊपर फायर किया। कमर में गोली लगने से वह घायल हो गए। कोतवाल राजेश बैसला ने बताया कि घायल को मेडिकल के लिए भेज दिया गया था। उनके द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामला संदिग्ध है। पीठ में सोलह छर्रे लगे हैं। कुर्ते पर खून भी लगा है, लेकिन कुर्ते पर छर्रे के निशान नहीं है। जांच पड़ताल में पता चला है कि राजपाल का अपनी पत्नी और बेटे से विवाद है। उसने एक हिस्ट्रीशीटर को जमीन भी बेच दी है। अब घर भी बेचना चाहता है, जबकि पत्नी और बेटा इसी का विरोध करते हैं। पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है।
कुंडहित। जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार ने बुधवार को सुदूरवर्ती गांव सूद्राक्षीपुर गांव पहुंचकर अपने हाथों से धान रोपाई की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने खुद खेत में उतरे और अपने हाथों से धान के बिचड़ा को खेत में रोपा। जिला कृषि पदाधिकारी को देखकर क्षेत्र के किसानों काफी उत्साहित दिखे। उल्लेखनीय है कि जिले में इस वर्ष मानसून की स्थिति सामान्य नहीं है विशेषकर कुंडहित प्रखंड क्षेत्र में अभी तक अपेक्षित बारिश नहीं हो पाई है। हालांकि बंगाल सीमावर्ती सुद्राक्षीपुर इलाके में थोड़ी बहुत बारिश हुई है। जिससे वहां धान की खेती का काम शुरू हुआ है। इसी बीच बुधवार को जामताड़ा के नए जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार अपने अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मियों के साथ खेत तक पहुंचे और अपने हाथों से धान रोपाई की शुरुआत की। मौके पर अधिकारियों ने किसानों को बीजोपचार तथा रोपनी से पहले बिचड़ो को उपचारित करने की विधि भी बताई। विभागीय अधिकारियों का मानना है अगर जुलाई के अंत तक भी बारिश अपेक्षित बारिश हो जाती है तो क्षेत्र के किसान धान रोपनी का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। हालांकि मानसून की वजह से हो रही देरी से उत्पादन के प्रभावित होने की आशंका दिनोंदिन मजबूत होती जा रही है। किसानों के बीच पहुंचे जिला कृषि पदाधिकारी ने कहा जिले में खेती और किसानी को आगे बढ़ाने के लिए विभाग अपनी ओर से हर संभव प्रयास करेगा। किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। बहरहाल यह पहला मौका रहा जब कोई जिला स्तरीय पदाधिकारी खेतों में उतर कर अपने हाथों से धान की रोपाई कर रहा हो। मौके पर अनुमंडल उद्यान पदाधिकारी समसुद्दीन अंसारी बीटीएम सुजीत कुमार सिंह कृषि मित्र काजल रजवार राजीव गोप दिलीप मंडल जिन्नाली खान सतीलाल टूडू के अलावा स्थानीय किसानगण उपस्थित थे।
कुंडहित। जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार ने बुधवार को सुदूरवर्ती गांव सूद्राक्षीपुर गांव पहुंचकर अपने हाथों से धान रोपाई की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने खुद खेत में उतरे और अपने हाथों से धान के बिचड़ा को खेत में रोपा। जिला कृषि पदाधिकारी को देखकर क्षेत्र के किसानों काफी उत्साहित दिखे। उल्लेखनीय है कि जिले में इस वर्ष मानसून की स्थिति सामान्य नहीं है विशेषकर कुंडहित प्रखंड क्षेत्र में अभी तक अपेक्षित बारिश नहीं हो पाई है। हालांकि बंगाल सीमावर्ती सुद्राक्षीपुर इलाके में थोड़ी बहुत बारिश हुई है। जिससे वहां धान की खेती का काम शुरू हुआ है। इसी बीच बुधवार को जामताड़ा के नए जिला कृषि पदाधिकारी लव कुमार अपने अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मियों के साथ खेत तक पहुंचे और अपने हाथों से धान रोपाई की शुरुआत की। मौके पर अधिकारियों ने किसानों को बीजोपचार तथा रोपनी से पहले बिचड़ो को उपचारित करने की विधि भी बताई। विभागीय अधिकारियों का मानना है अगर जुलाई के अंत तक भी बारिश अपेक्षित बारिश हो जाती है तो क्षेत्र के किसान धान रोपनी का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। हालांकि मानसून की वजह से हो रही देरी से उत्पादन के प्रभावित होने की आशंका दिनोंदिन मजबूत होती जा रही है। किसानों के बीच पहुंचे जिला कृषि पदाधिकारी ने कहा जिले में खेती और किसानी को आगे बढ़ाने के लिए विभाग अपनी ओर से हर संभव प्रयास करेगा। किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। बहरहाल यह पहला मौका रहा जब कोई जिला स्तरीय पदाधिकारी खेतों में उतर कर अपने हाथों से धान की रोपाई कर रहा हो। मौके पर अनुमंडल उद्यान पदाधिकारी समसुद्दीन अंसारी बीटीएम सुजीत कुमार सिंह कृषि मित्र काजल रजवार राजीव गोप दिलीप मंडल जिन्नाली खान सतीलाल टूडू के अलावा स्थानीय किसानगण उपस्थित थे।
बलौदाबाजा . कोतवाली थाना में पदस्थ आरक्षक मिलनसार की सड़क हादसे में मौत हो गई। जवान मार्निंग वॉक पर निकला था। तभी एक अज्ञात वाहन ने आरक्षक को टक्कर मार दी, जिससे मौके पर उसकी मौत हो गई। बता दे की यह घटना भाटापारा के ग्राम राजाढार पेट्रोल पंप के पास की है। हादसे की सूचना के बाद भाटापारा ग्रामीण पुलिस मौके पर पहुंची। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। वहीं मिलनसार आरक्षक की मौत से पुलिस विभाग में शोक की लहर है। एसपी आई के एलेसेला ने आकस्मिक निधन पर शोक जताया है।
बलौदाबाजा . कोतवाली थाना में पदस्थ आरक्षक मिलनसार की सड़क हादसे में मौत हो गई। जवान मार्निंग वॉक पर निकला था। तभी एक अज्ञात वाहन ने आरक्षक को टक्कर मार दी, जिससे मौके पर उसकी मौत हो गई। बता दे की यह घटना भाटापारा के ग्राम राजाढार पेट्रोल पंप के पास की है। हादसे की सूचना के बाद भाटापारा ग्रामीण पुलिस मौके पर पहुंची। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। वहीं मिलनसार आरक्षक की मौत से पुलिस विभाग में शोक की लहर है। एसपी आई के एलेसेला ने आकस्मिक निधन पर शोक जताया है।
एंटिगुआ। वेस्टइंडीज रविवार को भारत के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में गहरे संकट में घिर गया। 419 रनों के विशाल टारगेट का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज ने चौथे दिन दूसरी पारी में 16 ओवरों में 37 रनों पर 7 विकेट खो दिए हैं। रोस्टन चेस 6 और केमार बगैर खाता खोले क्रीज पर हैं। उसे अभी जीत के लिए 382 रन और बनाने होंगे जबकि उसके 3 विकेट शेष हैं। इससे पहले भारत ने अजिंक्य रहाणे के शतक (102) और हनुमा विहारी के 93 रनों की मदद से दूसरी पारी 7 विकेट पर 343 रन बनाकर घोषित की। विशाल टारगेट का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज की शुरुआत बेहद खराब रही जब जसप्रीत बुमराह ने उसके दोनों ओपनर्स को चलता किया। क्रैग ब्रैथवेट 1 रन बनाकर रिषभ पंत को कैच थमा बैठे जबकि जॉन कैंपबेल 7 रन बनाकर बोल्ड हुए। ईशांत शर्मा ने एस. ब्रूक्स (2) को एलबीडब्ल्यू किया और मेजबान टीम 11 रनों पर 3 विकेट खोकर संकट में घिर गई। ईशांत ने इसके बाद शिमरोन हेटमायर (1) को गली में रहाणे के हाथों झिलवाया। डैरेन ब्रावो ने 2 रन ही बनाए थे कि बुमराह ने उनके डंडे बिखेर दिए और विंडीज 15 रनों पर 5 विकेट खोकर गहरे संकट में आ गया। शाई होप के पास अपनी प्रतिभा साबित करने का मौका था लेकिन वे मात्र 2 रन बनाकर बुमराह के चौथे शिकार बने। कप्तान जेसन होल्डर तो बुमराह की गेंद को समझ ही नहीं पाए और बोल्ड हुए, उन्होंने 8 रन बनाए। यह बुमराह का पारी में पांचवां शिकार है। इससे पहले भारत ने चौथे दिन सुबह दूसरी पारी में 185/3 से आगे खेलना शुरू किया और उसे दिन के दूसरे ओवर में ही पहली सफलता मिल गई जब विराट कोहली ने रोस्टन चेस की गेंद पर एकस्ट्रा कवर पर जॉन कैंपबेल को कैच थमा दिया। वे अपने कल के स्कोर में कोई इजाफा नहीं कर पाए और 51 रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने रहाणे के साथ चौथे विकेट के लिए 106 रनों की भागीदारी की। विराट के आउट होने के बाद रहाणे का साथ देने हनुमा विहारी क्रीज पर उतरे और दोनों ने आसानी से रन जुटाए। रहाणे ने केमार रोच की गेंद पर 1 रन लेकर शतक पूरा किया। वे 235 गेंदों में 5 चौकों की मदद से अपने 10वें टेस्ट शतक तक पहुंचे। रहाणे ने दो साल बाद टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाया, उन्होंने पिछला शतक (132) अगस्त 2017 में कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ लगाया था। वे 102 रन बनाकर गेब्रिएल की गेंद पर मिडऑफ पर कप्तान होल्डर को कैच थमा बैठे। उन्होंने विहारी के साथ पांचवें विकेट के लिए 135 रनों की भागीदारी की। रिषभ पंत फिर असफल रहे और 7 रन बनाकर रोस्टन चेस के शिकार बने। विराट ने पारी घोषित नहीं की क्योंकि वे विहारी को शतक का मौका देना चाहते थे लेकिन विहारी 93 रन बनाकर होल्डर की गेंद पर शाई होप को कैच थमा बैठे। उन्होंने 128 गेंदों का सामना कर 10 चौके और 1 छक्का लगाया। इसी के साथ विराट ने पारी घोषित की। रवींद्र जडेजा 1 रन बनाकर नाबाद रहे। भारत की दूसरी पारी : इससे पहले भारत की दूसरी पारी में केएल राहुल और मयंक अग्रवाल ने संभलकर शुरुआत की। लेकिन पारी के 14वें ओवर में भारत ने मयंक का विकेट खोया। 30 के कुल स्कोर पर रोस्टन चेस ने मयंक को एलबीडब्ल्यू कर दिया। मयंक केवल 16 रन बना पाए, वे रिव्यू लेना चाहते थे लेकिन राहुल ने उन्हें मना किया। इसके बाद रिप्ले में दिखा कि गेंद लेग स्टंप को मिस कर रही थी और यदि वे रिव्यू लेते तो नॉटआउट करार देते। इसके बाद केएल राहुल और चेतेश्वर पुजारा ने भारतीय पारी को आगे बढ़ाया। दोनों बड़ी साझेदारी की ओर बढ़ रहे थे कि चेस ने राहुल को बोल्ड कर दिया। राहुल ने 85 गेंदों का सामना करते हुए 38 रन (4 चौके) बनाए। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 43 रन जोड़े। अगले ही ओवर में भारत ने पुजारा का विकेट दिया। पुजारा को रोच ने बोल्ड किया। उन्होंने 25 रन (53 गेंद) बनाए। इसके बाद कोहली और रहाणे ने भारतीय पारी को संभाला। विराट ने टेस्ट क्रिकेट में 21वां और रहाणे ने 18वां अर्द्धशतक पूरा किया। खेल समाप्ति के समय रहाणे 53 और विराट 51 रन बनाकर क्रीज पर थे। ये दोनों चौथे विकेट के लिए 104 रनों की अविजित भागीदारी कर चुके थे।
एंटिगुआ। वेस्टइंडीज रविवार को भारत के खिलाफ पहले टेस्ट मैच में गहरे संकट में घिर गया। चार सौ उन्नीस रनों के विशाल टारगेट का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज ने चौथे दिन दूसरी पारी में सोलह ओवरों में सैंतीस रनों पर सात विकेट खो दिए हैं। रोस्टन चेस छः और केमार बगैर खाता खोले क्रीज पर हैं। उसे अभी जीत के लिए तीन सौ बयासी रन और बनाने होंगे जबकि उसके तीन विकेट शेष हैं। इससे पहले भारत ने अजिंक्य रहाणे के शतक और हनुमा विहारी के तिरानवे रनों की मदद से दूसरी पारी सात विकेट पर तीन सौ तैंतालीस रन बनाकर घोषित की। विशाल टारगेट का पीछा करते हुए वेस्टइंडीज की शुरुआत बेहद खराब रही जब जसप्रीत बुमराह ने उसके दोनों ओपनर्स को चलता किया। क्रैग ब्रैथवेट एक रन बनाकर रिषभ पंत को कैच थमा बैठे जबकि जॉन कैंपबेल सात रन बनाकर बोल्ड हुए। ईशांत शर्मा ने एस. ब्रूक्स को एलबीडब्ल्यू किया और मेजबान टीम ग्यारह रनों पर तीन विकेट खोकर संकट में घिर गई। ईशांत ने इसके बाद शिमरोन हेटमायर को गली में रहाणे के हाथों झिलवाया। डैरेन ब्रावो ने दो रन ही बनाए थे कि बुमराह ने उनके डंडे बिखेर दिए और विंडीज पंद्रह रनों पर पाँच विकेट खोकर गहरे संकट में आ गया। शाई होप के पास अपनी प्रतिभा साबित करने का मौका था लेकिन वे मात्र दो रन बनाकर बुमराह के चौथे शिकार बने। कप्तान जेसन होल्डर तो बुमराह की गेंद को समझ ही नहीं पाए और बोल्ड हुए, उन्होंने आठ रन बनाए। यह बुमराह का पारी में पांचवां शिकार है। इससे पहले भारत ने चौथे दिन सुबह दूसरी पारी में एक सौ पचासी/तीन से आगे खेलना शुरू किया और उसे दिन के दूसरे ओवर में ही पहली सफलता मिल गई जब विराट कोहली ने रोस्टन चेस की गेंद पर एकस्ट्रा कवर पर जॉन कैंपबेल को कैच थमा दिया। वे अपने कल के स्कोर में कोई इजाफा नहीं कर पाए और इक्यावन रन बनाकर आउट हुए। उन्होंने रहाणे के साथ चौथे विकेट के लिए एक सौ छः रनों की भागीदारी की। विराट के आउट होने के बाद रहाणे का साथ देने हनुमा विहारी क्रीज पर उतरे और दोनों ने आसानी से रन जुटाए। रहाणे ने केमार रोच की गेंद पर एक रन लेकर शतक पूरा किया। वे दो सौ पैंतीस गेंदों में पाँच चौकों की मदद से अपने दसवें टेस्ट शतक तक पहुंचे। रहाणे ने दो साल बाद टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाया, उन्होंने पिछला शतक अगस्त दो हज़ार सत्रह में कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ लगाया था। वे एक सौ दो रन बनाकर गेब्रिएल की गेंद पर मिडऑफ पर कप्तान होल्डर को कैच थमा बैठे। उन्होंने विहारी के साथ पांचवें विकेट के लिए एक सौ पैंतीस रनों की भागीदारी की। रिषभ पंत फिर असफल रहे और सात रन बनाकर रोस्टन चेस के शिकार बने। विराट ने पारी घोषित नहीं की क्योंकि वे विहारी को शतक का मौका देना चाहते थे लेकिन विहारी तिरानवे रन बनाकर होल्डर की गेंद पर शाई होप को कैच थमा बैठे। उन्होंने एक सौ अट्ठाईस गेंदों का सामना कर दस चौके और एक छक्का लगाया। इसी के साथ विराट ने पारी घोषित की। रवींद्र जडेजा एक रन बनाकर नाबाद रहे। भारत की दूसरी पारी : इससे पहले भारत की दूसरी पारी में केएल राहुल और मयंक अग्रवाल ने संभलकर शुरुआत की। लेकिन पारी के चौदहवें ओवर में भारत ने मयंक का विकेट खोया। तीस के कुल स्कोर पर रोस्टन चेस ने मयंक को एलबीडब्ल्यू कर दिया। मयंक केवल सोलह रन बना पाए, वे रिव्यू लेना चाहते थे लेकिन राहुल ने उन्हें मना किया। इसके बाद रिप्ले में दिखा कि गेंद लेग स्टंप को मिस कर रही थी और यदि वे रिव्यू लेते तो नॉटआउट करार देते। इसके बाद केएल राहुल और चेतेश्वर पुजारा ने भारतीय पारी को आगे बढ़ाया। दोनों बड़ी साझेदारी की ओर बढ़ रहे थे कि चेस ने राहुल को बोल्ड कर दिया। राहुल ने पचासी गेंदों का सामना करते हुए अड़तीस रन बनाए। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए तैंतालीस रन जोड़े। अगले ही ओवर में भारत ने पुजारा का विकेट दिया। पुजारा को रोच ने बोल्ड किया। उन्होंने पच्चीस रन बनाए। इसके बाद कोहली और रहाणे ने भारतीय पारी को संभाला। विराट ने टेस्ट क्रिकेट में इक्कीसवां और रहाणे ने अट्ठारहवां अर्द्धशतक पूरा किया। खेल समाप्ति के समय रहाणे तिरेपन और विराट इक्यावन रन बनाकर क्रीज पर थे। ये दोनों चौथे विकेट के लिए एक सौ चार रनों की अविजित भागीदारी कर चुके थे।
महाराष्ट्र में राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार विजेता 12 वर्षीय जेन सदावर्ते ने अमरावती के एक गर्ल्स कॉलेज के विवादित फैसले को लेकर एडीजीपी से मुलाकात की। यहां कॉलेज प्रशासन ने वेलेंटाइन डे पर प्रेम विवाह नहीं करने के लिए छात्रों को कसम खिलवाई थी। इसे लेकर अब भारी विवाद हो रहा है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
महाराष्ट्र में राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार विजेता बारह वर्षीय जेन सदावर्ते ने अमरावती के एक गर्ल्स कॉलेज के विवादित फैसले को लेकर एडीजीपी से मुलाकात की। यहां कॉलेज प्रशासन ने वेलेंटाइन डे पर प्रेम विवाह नहीं करने के लिए छात्रों को कसम खिलवाई थी। इसे लेकर अब भारी विवाद हो रहा है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
सभी वरिष्ठ महानुभाव। मैं इस फोरम से काफी परिचित हूं, लेकिन पहले मैं वहां बैठता था, आज मैं यहां बैठा हूं, और वहां जब बैठता था, तो एक छोटे कमरे में मुख्यमंत्री और राज्य High Court के chief justice के बीच में एक छोटे फोरम में बैठते थे, Media नहीं होता था, Camera नहीं होता था, बड़ी खुलकर के बात होती थी और मेरी भी छवि ऐसी थी कि मैं जरा थोड़ा खुलकर के बोलता था। लेकिन अब शायद मैं इतना बोल पाऊंगा कि नहीं, मुझे पता नहीं। लेकिन यह भी मैं मानता हूं कि मैं काफी खुलकर के बोलता था फिर भी मैं कह सकता हूं कि मैं बहुत कुछ बोलने से डरता था। और शायद यहां भी जो मुख्यमंत्री हैं, उनके मन में भी यह रहता होगा, कि भई हम कहे या न कहे, हमारी कठिनाईयां बताएं या न बताएं और इस स्थिति का मैंने अनुभव किया हुआ है और आज मैं यहां बैठा हूं तब मैं आवश्यक मानता हूं इन दोनों मुख्यधाराओं के बीच में हमारी संवादिता कैसे बढ़े, खुलापन कैसे आए, एक-दूसरे को मजबूती कैसे दें, जो मजबूती भारत की मजबूती के लिए हो। अगर हम इन चीजों को पूरा कर सकते हैं, तो हम इस देश की बहुत बड़ी सेवा कर सकते हैं। मैं उन विषयों को स्पर्श करना नहीं चाहता हूं, जो सामान्य तौर पर इस फोरम में हर बार चर्चा में रहे हैं। ज्यादातर रहा है चर्चा में विषय Pendency का। सबरवाल जी साहब थे, लाहौटी साहब थे, बालकृष्ण साहब थे, इन सबके कालखंड में मैं यह सुनता आया हूं। और आज भी उसकी चर्चा हो रही है। पूर्व प्रधानमंत्रियों के भाषण देखेंगे तो उसमें भी इस बात का जिक्र है। दूसरा विषय है हर किसी ने हर फोरम में भ्रष्टाचार के प्रति चिंता जताई है और इसलिए मुझे उसमें अब नया कुछ जोड़ना नहीं है और इसलिए मैं उस विषय को स्पर्श नहीं करता हूं। हर कोई इसकी चिंता कर रहा है, लेकिन समाधान हम अभी तक नहीं ढूंढ पाएं हैं, हो सकता है आज के फोरम की मीटिंग के बाद इस मंथन से भी हो सकता है सारी चीजों के रास्ते निकलेंगे। लेकिन मुझे हमेशा यह बात ध्यान में आती है कि हम सब एक प्रकार के समान मनुष्य जीव है, अलग-अलग जिम्मेवारियां हम निभा रहे हैं। अलग-अलग कामों को अपनी योग्यता, क्षमता और संजोग के अनुसार हरेक को मिला है। लेकिन जो न्याय क्षेत्र में है, उनका वैसा नहीं है। वो भले हरेक के बीच में से आए है, हम जैसे लोगों के बीच में से आए हैं, लेकिन ईश्वर ने उनको Divine काम के लिए पसंद किया है। आपके पास जो काम है वो एक Divine काम है। आपके पास जो काम है, जो ईश्वर आपके माध्यम से करवाना चाहता है और इसलिए हम लोगों के पास जो काम है और देश के और जो सवा सौ करोड़ नागरिक के पास जो काम है, उससे आपका काम भिन्न है। और इसलिए आपकी जिम्मेवारियां भी बहुत हैं और देश की आपसे अपेक्षाएं भी बहुत है और सामान्य नागरिक की सर्वाधिक अपेक्षाएं हैं क्योंकि लेकिनउसको लगता है कि मैं भगवान के पास तो नहीं पहुंच पाता हूं, लेकिन एक जगह है जहां मेरा कुछ होगा। उसके लिए भगवान के पास नहीं पहुंच पाता हूं तो कहां पहुंचु, तो वो आपकी तरफ देखता है और उस अर्थ में कितना बड़ा Divine काम आपके पास है और मुझे विश्वास है कि आप जहां बैठे हैं, वहां हर पल उसी बात को स्मरण रखते हुए काम करते हैं और यह भाव किताबों में पढ़ाया गया नहीं है सामान्य नागरिक को। इस Institute ने अपने व्यवहार के कारण, अपनी परंपरा के कारण, अपने चरित्र के कारण सामान्य मानव के मन में यह आस्था पैदा की है। यह आस्था Inject की हुई आस्था नहीं है। यह Evolve हुई है और जब Evolve हुई है आस्था, तो उसकी ताकत भी बहुत ज्यादा होती है और इसलिए मुझे विश्वास है कि इस महान परंपरा को हम और अधिक उजागर कैसे करें और अधिक ओजस्वी, तेजस्वी कैसे बनाएं, यह हमारा दायित्व है। अभी दत्तू साहब कह रहे थे Quality Man Power के लिए। आज तो हम भाग्यवान है कि आज हमारे पास इस क्षेत्र में जो Man Power है, उसके लिए हम गर्व का अनुभव करते हैं। लेकिन हमारा यह भी दायित्व है कि आने वाली पीढि़यों में कैसा Man Power इस क्षेत्र में आएगा और इसलिए हमारी जितनी चिंता Infrastructure को लेकर के है, जितनी चिंता Digital Form में, आधुनिक Technology के Form अपनी इस व्यवस्था को ढ़ालने की है, उससे अधिक हमारे लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है कि हम आने वाली पीढि़यों को तैयार के लिए इस field के लिए Human Resource development का हमारा Mechanism क्या होगा। उत्तम-से-उत्तम Breed, Law Faculty में कैसे आए। उत्तम-से-उत्तम Breed, Judiciary में कैसे जाए। और इसलिए हमारे इस काम के लिए जो Institutions हैं राज्य सरकारों की सर्वश्रेष्ठ जिम्मेवारी है कि हमारी Law Collages हो, Law Universities उसको हम किस प्रकार से समयानुकूल और भविष्य को ध्यान में रखकर के कैसे तैयार करें। और जितनी बड़ी मात्रा में हम इस क्षेत्र को बल देंगे, हमारी बहुत सारी आवश्यकताओं की पूर्ति होगी। जब मैं मुख्यमंत्री था यहां बैठता था सामने। एक बार हमारी मीटिंग में एक विषय आया था, Pendency की चर्चा हो रही थी। एक High Court Judge ने जो Reporting किया वो कम से कम मुझे तो चौंकाने वाला था, उन्होंने कहा हमारी Court तो सप्ताह में दो-तीन दिन चलती है और चलती है वो भी दो-तीन घंटे चलती है, तो बोले हम Pendency कहां से कर सकते हैं। तो ऐसे ही मेरा मन कर गया कि पुछुँ तो सही क्या बात है यह? तो बोले नहीं कुछ कारण नहीं है लेकिन जो Building में हम बैठते हैं, उसमें उजाला नहीं है और बिजली आती नहीं है। आप कल्पना कर सकते हैं हम न्यायपालिका को बार-बार पूछते तो हैं कि भई Pendency क्यों है लेकिन कोई तो सोचो कि बिजली तक मुहैया नहीं है तो फिर वो Court कितने घंटे चलेगी। कितने दिन चलेगी, न्याय प्रक्रिया बढेगी कैसे। और इसलिए सारी जिम्मेवारियां एक एकतरफा नहीं है। और फिर कभी यह भी पता चलता है कि इसमें बिजली क्यों नहीं है, तो बोले कोई Five Star activist court में चला गया था तो वो Stay ले आया था तो वहां वो खम्भा डालने मना है। अब बताइये कहां जाए, बात कहां जाकर के रूकती है? और इसलिए हम एक comprehensive एक Integrated approach के साथ, सभी ईकाईयां मिलकर के सही दिशा में एक लक्ष्य निर्धारित करके चलेंगे, तो इन चीजों को पार करना कठिन नहीं है। Digital India भारत सरकार का एक बहुत बड़ा Mission का है। यह Digital India में मेरा अनुभव भी कहता है हम जितना जल्दी Technology का उपयोग हमारी न्यायिक व्यवस्थाओं में लाएंगे हमारी सुविधा बहुत बढ़ेगी, हमारी Qualitative change आएगा, हमारे काम में और आवश्यकता है Qualitative change की। कोई जमाना था जब Reference ढूंढना है तो 10 ग्रंथ हाथ लगाने पड़ते थे। आज कोई भी Reference ढूंढना है, just google गुरू के पास चले जाओ। दो मिनट में गुरू जी लेकर के आ जाते हैं। यह सुविधा बड़ी है, इस सुविधा का लाभ जितना तेजी से हम हमारी न्यायिक व्यवस्था की हर चीजें पुराने सारे Judgement वगैरह। कल मुझे हमारे चंद्रचूड़ साहब मिले थे तो मुझे कह रहे थे कि इलाहबाद में कोई 50 करोड़ Pages already digital हो चुके हैं। बहुत बड़ा काम है, बहुत काम हुआ है। और यह मैं समझता हूं कि जितना तेजी से होगा, उतना आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में Efficiency लाने में बहुत काम आने वाला है। कभी-कभार यह भी लगता है कि देश को सशक्त न्यापालिका चाहिए या समर्थ न्यायपालिका चाहिए। Powerful Judiciary चाहिए या Perfect Judiciary चाहिए। मैं चाहूंगा कि इस फोरम में बैठे हुए सभी महानुभाव अपने-अपने दायरे में चर्चा करे। हम Powerful तो होते चले जा रहे हैं जितनी तेजी से Powerful हो रहे हैं और Powerful होना गलत नहीं है। लेकिन उतनी ही तेजी से Perfect अनिवार्य हो गया है। हमारी Judiciary Powerful हो, हमारी Judiciary Perfect भी हो। हम सशक्त भी हो, हम समर्थ भी हो, और यह आवश्यकता इसलिए है कि सामान्य मानव के लिए यह एक जगह है। मैं उस बिरादरी से हूं, मैं अपने आप को उस बिरादरी से होने के कारण भाग्यवान मानता हूं। भाग्यवान इसलिए मानता हूं कि हम चौबीसों घंटे हमारी scrutiny होती है। हर पल, हमने बायां पैर रखा कि दायां पैर रखा, हमारी बिरादरी की scrutiny होती है और वक्त इतना बदल चुका कि आज से दस साल पहले जो खबर Gossip Column में भी जगह नहीं लेती थी, वो आज Breaking News बन गई है। इतना अंतर आया है, जिसको कभी Gossip Column में भी जगह देने से Editor पचास बार सोचता था इसको Gossip Column में रखूं या न रखूं, वो आज Breaking News बन गया है। और हम चौबीसों घंटे उसकी Scrutiny होती है। उस बिरादरी से मैं हूं मुझे गर्व है, यह Scrutiny होती है मुझे उसका गर्व है। और इसके कारण, और हर पांच साल में जनता में जाकर हिसाब भी देना पड़ता है। यह Institution जिस बिरादरी से हम आते हैं, उसको काफी बदनामी मिली हुई है। लेकिन उसके बावजूद भी मैं आज कह सकता हूं कि इस बिरादरी ने, उस व्यवस्था ने शासक में बैठे राजनेताओं ने भी अपने पर बंधन लाने के लिए इतनी Institutions को जन्म दिया है। कानून उन्होंने खुद ने बनाए हैं। Election Commissions उसकी स्वतंत्रता हम पर बंधन डालती है, लेकिन हमने किया है। RTI हम पर बंधन डालती है, हमने किया है। इतना ही नहीं लोकपाल की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। हम पर बंधन डाल रहा है, हम कर रहे हैं, क्योंकि हम चाहते हैं कि व्यक्ति कितना ही अच्छा क्यों न हो, अगर Institutional Network अच्छा नहीं होगा, तो गिरावट आने की संभावना कभी भी हो सकती है। और मैं हमेशा मानता हूं कि घर के अंदर मां-बाप पैसे Lock and Key में रखते हैं। क्या चोर से बचने के लिए? Lock and Key चोर के लिए बहुत छोटी चीज होती है। वो तो पूरी तिजोरी उठाकर के ले जा सकता है। मां-बाप घर में Lock and Key इसलिए रखते हैं कि बच्चे की आदत खराब न हो। इसलिए इस व्यवस्था को विकसित करते हैं। हमारे लिए भी आवश्यक है। हम भाग्यवान है कि दुनिया हमें देखती है, हमें डांटती है, हमारी आलोचना करती है, हमारी चमड़ी उधेड़ देती है। आपको वो सौभाग्य नहीं है। आपको न कभी आलोचना सुनने को मिलती है, न कोई आपको, इतना हीं नहीं जिसको सजा हो गई होगी, फांसी पर लटक गया होगा वो भी बाहर आकर बयान देता है कि मुझे न्यायतंत्र में विश्वास है, ऊपर मुझे न्याय मिलेगा। यानी इतनी credibility है इस Institution की। और जब आलोचना असंभव रहती हो, तब इन Inbuilt हमारी अपनी आत्मपरीक्षण की व्यवस्थाएं विकसित करने की समय की मांग है। हम उस प्रकार के Inbuilt Dynamic Mechanism को Develop करें। और जिसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। राजनेताओं का तो बिल्कुल नहीं होना चाहिए। इसी faculty के लोग, हम वो क्या करें कि आज अगर हम इस व्यवस्थाओं को विकसित नहीं करेंगे। हम inherent उस DNA को Develop नहीं करेंगे तो जो आस्था जो कि evolve हुई है उसको छोटी-सी भी चोट आ जाएगी। मैं मानता हूं देश को बहुत नुकसान हो जाएगा। हम सरकार बनाने वाले लोग यह गलती करेंगे, तो गलती ठीक करने की जगह है और वो जगह आप है। लेकिन अगर आप गलती करेंगे तो फिर तो इसके सिवा कुछ नहीं बचा है। इसलिए हमें गलती करने का अधिकार नहीं है, लेकिन फिर भी अगर हम गलती करें तो कोई एक जगह है जहां सुधार हो सकेगा। बच जाएंगे, लेकिन अगर आप गलती करेंगे तो कुछ नहीं बचेगा। और इस अर्थ में मैं एक Divine Power के रूप में आपको देखता हूं और उस Divine Power के रूप में देखता हूं तब हम सब मिलकर के हम मान कर चले हमारी आलोचना नहीं होने वाली है तो हमें ही बार-बार अपने आपकी आलोचना करनी है और यह कठिन काम है, मैं जानता हूं कि यह कठिन काम है। संविधान के दायरे में, नियमों में दायरे में न्याय देना कठिन नहीं है, क्योंकि आपके लिए दो मिनट में दूध का दूध और पानी का पानी कार्य करना ईश्वरदत आपको एक शक्ति होती है, एक तीसरी आंख आपके पास होती है, आप चीजों को देख पाते हैं, क्योंकि आपका विकास वैसा हुआ है, लेकिन Perception और Realty के बीच से खोजने के लिए बड़ी कठिनाई होती है। कभी हमें सोचना होगा कि आज कहीं Five Star activist तो हमारी पूरी Judiciary को Drive तो नहीं कर रहे। क्या एक प्रकार का हऊआ फैला कर के Judiciary को Drive करने का प्रयास नहीं हो रहा है? संविधान के दायरे में न्याय देना मुश्किल नहीं है? लेकिन Perception के माहौल में न्याय देना बहुत कठिन काम हो गया है और इसलिए आज से 15 साल 20 साल पहले Judiciary के लिए जो मुक्ति का आनंद था वो आनंद आज नहीं है। वो भी डरता है कि बाहर तो यह चल रहा है और मैं यह करूंगा तो क्या होगा। यह माहौल बन गया है और तब जाकर के Judiciary को जितनी हिम्मत ज्यादा मिले उसके लिए सभी को प्रयास करना पड़ेगा। चाहे वो सरकार में बैठे हुए लोग हो, चाहे Media में बैठे हुए लोग हो, चाहे Five Star activist की जमात हो। अगर हम इस Institution को ताकत नहीं देंगे तो हम ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारेंगे। और इसलिए मैं मानता हूं कि इन चीजों में बदलाव की आवश्यकता है और मुझे विश्वास है कि हम बदलाव ला सकते हैं। जहां तक Infrastructure का सवाल है मैं स्वभावतः अच्छी व्यवस्थाओं का पक्षकार हूं। Poverty is a virtue इस Philosophy को मैं belong नहीं करता हूं। वरना हम लोग सदियों से यही पढ़ते आए हैं कि एक बेचारा गरीब ब्राह्मण, वहीं से शुरू होता है कि उसके फटे कपड़े थे और उसको सब बड़ा ही तपस्वी और वो मानने की फैशन नहीं है। वक्त बदल चुका है। उत्तम से उत्तम Infrastructure क्यों नहीं होना चाहिए। व्यवस्थाएं उत्तम से उत्तम क्यों नहीं होनी चाहिए और उस दिशा में प्रयास होना चाहिए। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि इस सरकार में इस बात की प्राथमिकता है। इस बार भी करीब Nine thousand seven hundred forty nine crore Rupees 14th Finance Commission के कारण सीधे सीधे राज्यों के पास Specifically Earmark करके Judiciary के लिए दिये गये है और मैं राज्यों से आग्रह करूंगा कि वो पैसे कहीं इधर-उधर न जाए, न्यायपालिका के काम में जाए। तो आपने आप जो छोटी-मोटी समस्याएं है अपने आप सुलझ जाएगी। और मैं आशा करूंगा कि राज्य के मुख्यमंत्री इस बात पर ध्यान देंगे, व्यक्तिगत ध्यान देंगे और यह कैसे हो सके इस बात पर चिंता करेंगे। हम लोगों ने आखिरकर कुछ चीजें हैं, मतलब जिस राज्य से मैं रहा गुजरात में लोक अदालत का सफल प्रयोग मैंने वहां देखा है। और एक बार मैंने हिसाब लगाया था कि 35 पैसे में न्याय मिलता था। Thirty Five Paisa, मैंने कल फिर रात को खाना खाते हुए कुछ Judges से बात हुई तो मुझे लगा कि मैं फिर एक बार Verify कर लूं। तो मैंने रात को ही थोड़ा पूछताछ की तो मुझे पता चला कि 35 पैसा में अब नहीं मिलता है, लेकिन Average 50-55 रुपये तक में न्याय मिल जाता है, खर्च होता है। मैं समझता हूं भारत जैसे देश में यह व्यवस्था बहुत ताकतवर है। हम देखेंगे कि इतनी सारी Pendency है, लेकिन Below Poverty line family के case minimum होंगे जी। यह बड़े-बड़े लोगों के ही case होते है जी, क्योंकि छोटे लोगों को तो वकील भी कहां मिलता है, वो बेचारा कहां जाएगा। और इसलिए गरीब के लिए जो जगह है वो इन छोटी-छोटी व्यवस्थाओं में है। हम इन लोक अदालत Type व्यवस्थाओं को बल दें, उसका Expansion करें, Judiciary के प्रवर्तमान लोग, judiciary के निवृत्त लोग एक ऐसा framework हम विस्तृत करें, अगर गरीब से और मैं देख रहा हूं कि बडे-बड़े मामले भी बैठकर के Solution आ रहा है। हो सकता है कि हम इस काम को करे तो उसकी चिंता हम लोगों को होगी। एक विषय शायद मेरी बात लाहोटी साहब से हो रही थी। ऐसे ही बातों-बातों में उन्होंने चिंता व्यक्त की थी। इन दिनों जो परिवार टूट रहे हैं, तेजी से परिवार टूट रहे हैं बड़ी वो चिंता व्यक्त कर रहे थे, और यह दौर बढ़ता चला रहा है। हो सकता है कि इस प्रकार की संवाद वाले Institution जितनी family Court develop होगी, भारत जैसे देश में परिवार टूटना हमारे लिए एक बहुत बड़ा कष्टदायक होगा। हम उस वक्त Focus करके सामाजिक व्यवस्थाओं को बचाने में कैसे काम कर सकते हैं। इस पर हम संवदेनाओं को लाकर के उन चिंताओं को कैसे बढ़ा सकते हैं। अगर गरीब को न्याय देने के लिए अगर लोक अदालत है, तो परिवार को न्याय देने के लिए family अदालत है। खासकर के नारीशक्ति के कल्याण के लिए यह वयस्थाएं बहुत ताकतवर बनी है। उसको हम और अधिक आधुनिक कैसे बनाएं, आधुनिक Speedy कैसे बनाए और उसमें एक विश्वास बना हुआ है। वहां जाने वाले व्यक्ति को लगता है कि ठीक है भई चलो दो कदम मैं चला दो कदम तुम चलो रास्ता निकल गया छोड़ो अब नहीं जाना है अब अपना काम करो। यह मूड बन रहा है। और मैं मानता हूं इस मूड का और अधिक सार्थक बनने का हमें प्रयास करना चाहिए और वो प्रयास हम करेंगे, तो अवश्य ही लाभ होगा ऐसा मुझे लगता है। सरकार में भी व्यवस्थाएं विकसित हुई कि भई हर चीज court में चली जाती है चलो inbuilt कोई ही Arrangement करे उसमें से Tribunals पैदा हुई। Tribunals को भी ज्यादातर lead करते हैं निवृत Judge, लेकिन मैंने आकर के देखा है कि मैं बहुत निराश हो गया हूँ। शायद आज भारत सरकार में, मुझे लगता है करीब-करीब हम सौ tribunals की ओर पहुंच रहे हैं और एक-एक Ministry की तीन-तीन-चार-चार tribunals बन गई हैं। और Tribunals का disposal तो और चिंताजनक है। मैं चाहूंगा कि Supreme Court के वरिष्ठजन बैठें, मंथन करें कि भई यह Tribunal नाम की व्यवस्था से सचमुच में प्रक्रियाएं तेज हो रही है, नहीं हो रही है, न्याय मिल रहा ,है नहीं मिल रहा है कि और एक Barrier खड़ा हो रहा है। एक बार देखा जाए कि इतनी Tribunal की जरूरत है या नहीं है, क्योंकि फिर Tribunal है तो बाकी तो Budget वहीं चला जाता है। शायद Tribunal का Budget Court को चला जाए तो Court की ताकत बढ़ जाएगी, इतना Budget Tribunal में जा रहा है। हो सकता है कि हम इन चीजों को एक बार देखना चाहिए और तू-तू, मैं-मैं के रूप में नहीं है। अपनेपन के भाव से, साथ मिलकर करने के भाव से इसको एक बार देखने की आवश्यकता है। यहां पर काफी चीजों का उल्लेख हुआ है इसलिए मैं इन सारी बातों में नहीं जाता हूं, लेकिन हम जिस महान परंपरा में पले-बढ़े हैं उन महान परंपरा में कानून और न्याय इन दो मुख्यधाराओं को कभी compromise नहीं कर सकते वरना समाज और व्यवस्था चल नहीं सकती। कानून और न्याय दोनों की ओर जाना है, लेकिन अब जगत बदलता जा रहा है। पहले के समय में जितने हम चीजों को Handle करते थे, उससे रूप बदल गए। अब criminal offenses उसकी तुलना में economic offenses बढ़ रहे हैं। अब हमारी Expertise उस ओर जाए ऐसी आवश्यकता हो गई है। दुनिया Cyber crime में आ रही है। cyber crime की कोई सीमा नहीं है, वे Global Community है। हमारे अपने कानूनों को हमने उस प्रकार से नये विधा के साथ तैयार करना पड़ेगा। हमारे लोगों को भी उस प्रकार से तैयार करना पड़ेगा। हमने कभी सोचा भी नहीं होगा आने वाले दिनों में Maritime law एक बहुत बड़ा कारण बनने वाला है। Maritime Security को लेकर के Issue बनने वाले हैं। यानी बदलते हुए युग में उन नए-नए challenges और मैं मानता हूं कि शायद 20-25 साल के बाद Space Related Law के बीच स्थिति पैदा हो जाएगी। इस Space पर किसका कब्जा है, किसका नहीं। International court के दायरे में आ जाएगा यह दिन आने वाले हैं। इसका मतलब अपने आप को हमें सजग करना होगा। आज कानूनी न्याय प्रक्रिया के अंदर Forensic Science एक बहुत बड़ा Role play कर सकता है। लेकिन हमारे पास न Bar के पास न Bench के पास, उसका scientific knowledge अभी तक.. क्योंकि उस पीढ़ी के पास यह था नहीं। मैंने एक प्रयास जब गुजरात में था तो हमने गुजरात में एक Forensic Science university बनाई थी और दुनिया में एकमात्र Forensic Science university है और वो गुजरात में है। बाकी जगह पर colleges भी है Forensic Science के Department हुआ करते हैं, तो Forensic Science University में Judiciary के लोगों को हमने replace की थी और गुजरात high court के judges ने मेरी मदद की थी और करीब-करीब सभी district judges का Forensic Science University का दो-दो दिन का courses हुआ था। क्योंकि यह एक ऐसा विज्ञान develop हो रहा है जो आने वाले दिनों में judicial process के अंदर एक बहुत बड़ा महत्वपूर्ण role play करने वाला है। हम उस बात में कैसे ध्यान दें। हम उसमें Forensic Science की जानकारियों के लिए क्या व्यवस्था करें, तब जाकर के आने वाले दिनों में न्याय की प्रक्रिया में Technology और विज्ञान का भी role किस प्रकार से उपयोग में हो उस पर हमें सोचने की आवश्यकता बनने वाली है। हमारी law universities के student के लिए भी यह कैसे हो। एक और समस्या जो हम अनुभव कर रहे हैं, जनता ने हमको चुनकर के भेजा है कानून बनाने के लिए लेकिन हमारा काफी समय और कामों में जाता है। संसद में हम क्या करते हैं आपका मालूम है और अनुभव यह आ रहा है कि जो Act के drafts, drafting है कानून का यह सारी pendency के मूड में एक वो भी कारण है कि कानून बनाने में, उसकी शब्द रचना में कुछ न कुछ ऐसी कमी रह जाती है कि ultimately वो न्यायपालिका के पास जाकर उसके interpretation में सालों लग जाते हैं और तब तक कई निर्णय हो जाते हैं फिर बेकार हो जाते हैं। जब तक हमारी law universities वगैरह में drafting के लिए हम proper manpower तैयार नहीं करेंगे और कानून बनाते समय ही हम इस पर care नहीं करेंगे तो हो सकता है कि समयाएं हमारी बढ़ती जाएगी। कोई हम ऋषिमुनि तो है नहीं कि एकदम से Zero defect वाला कानून बना पाएंगे। लेकिन minimum grey area हो वो दिशा में तो प्रयास करे। यह हमारे सामने बहुत बड़ा challenge है। और मैंने अनुभव किया है कि इस प्रकार का Man Power हमें उपलब्ध नहीं होता है। आने वाले दिनों में इस काम को कैसे किया जाए। यह एक आवश्यक काम है जिसको कभी न कभी हमकों करना होगा। और विशेषकर के वो हमारी जिम्मेदारी है हम अगर इस काम को ठीक तरह से करेंगे तो हो सकता है कि आने वाले दिनों में कानून जितना अच्छा होगा और संविधान के सारी मर्यादाओं के पालन करते हुए बनेगा तो मैं नहीं मानता हूं कि कानून के कारण समस्याएं पैदा हुई। दूसरा हमारे देश में यह भी विषय आ गया कि भई हर चीज के लिए कानून बनाओ। मैं मानता हूं कि संविधान अपने आप में हर काम करने के लिए बहुत सारी हमारी व्यवस्थाएं देता है, लेकिन एक बन गया है और मेरे मन में विचार आया है कि मैं कानूनों को खत्म करता चलू। इतना बोझ बन गया है जी, मैंने एक कमिटी बनाई है। उस कमिटी में मेरी कोशिश है कि तुम कानून खत्म करो अभी अभी मैंने सात सौ कानून खत्म करने के लिए तो कैबिनेट से approve ले लिया। लेकिन अभी-अभी मेरे सामने नजर में 1700 कानून आए। one thousand seven hundred और मेरा एक सपना था मैं per day एक कानून खत्म करूं। 5 साल के मेरे Tenure में per day एक कानून खत्म करने का यह सपना मैं पूरा करूंगा। यह कानूनों के जंजाल में हमारा पूरा न्याय तंत्र फंसा पड़ा है और यह जिम्मेवारी executives की है कि वो इसको ठीक से चिंता करे और मैं तो राज्यों को भी कहूंगा आपके यहां भी एक छोटी-छोटी टीम बैठाकर के जितने बेफिजूल कानून है उसको निकालिए। जितना सरलीकरण हम लाएंगे सामान्य मानव को खुद को समझ आएगा कि यह हो सकता है या नहीं हो सकता है और व्यक्ति को अगर समझ आता है तो सामान्य नागरिक कानून तोड़ने के स्वभाव का नहीं होता है। वो कानून के साथ चलने के लिए स्वभाव का होता है। लेकिन उसको कानून के साथ चलने के लिए सुविधा पैदा करना यह हम सबका दायित्व है। उन दायित्वों को हम पूरा करेंगे तो हो सकता है जो बोझिल माहौल है, उस बोझिल माहौल में से हम काफी एक मुक्ति का सांस ले सकते हैं और यह मुक्ति का सांस भी एक नई आस्था को उजागर कर सकता है, नई आस्था को जन्म दे सकता है और उस दिशा में हमारा प्रयास रहे। यही मेरे मन में कुछ विचार है। हम आने वाले दिशा में उसको करे। जहां तक राजनीतिक जीवन में बेठे हैं मेरे जैसे लोग हैं, चाहे हम शासन व्यवस्था में हो, हमारे संविधान ने तो हमारे लिए मर्यादाएं तय की है, लेकिन हमारे शास्त्रों ने भी हमारे लिए मर्यादाएं तय की हैं। अगर हम कहें, अगर हमारे उपनिषद की तरफ नजर करे तो हमारी उपनिषद कहती है शस्त्रय शत्रम यतः धर्मः ,शस्त्रय शत्रम यतः धर्मस्य, यानी कानून नरेशों का भी सम्राट होता है। राजा का भी राजा होता है। और इसलिए आज अगर शासन में बैठा हुआ कितना ही ओजस्वी तेजस्वी व्यक्ति क्यों न हो लेकिन कानून उससे बड़ा होता है। इस मूलमंत्र को लेकर के चलना। चाहे हम किसी पद पर बैठे हो तो भी हमारी जिम्मेवारी बनती है और उसको हमें करना पड़ेगा और महाभारत के अंदर भीष्म ने एक बात कही है भीष्म ने वो बात कही है वो शायद समाज जीवन को चलाने के लिए उसकी अपनी एक ताकत है और महाभारत में भीष्म इस बात का उल्लेख करते हुए कहते हैं, धर्मनः प्रजाः सर्वाः रक्षन्ति स्मः परस्परम्। कानून के प्रति सम्मान की भावना रखना ही वो मुख्य शक्ति है जो समाज को एकजुट बनाए रखती है। देश की एकता और अखंडता के लिए यह मूल मंत्र जो हमें सहस्त्र वर्षों से प्राप्त हुए हैं, उन संस्कारों को लेकर के हम चलेंगे। हम बहुत कुछ कर सकते हैं। मैं फिर एक बार...आप सबने मुझे आकर के आप सबसे बात करने का अवसर दिया मैं आपका आभारी हूं। मुझे विश्वास है, मैं कागजी कार्रवाई थोड़ी कम करने वाला इंसान हूं, ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं हूं तो जो मन में आया वो बोला है और मैं नहीं चाहूंगा कि आप उसको judicial तराजू से देखें, एक सामान्य नागरिक के मन के भाव है उसी प्रकार से देखना और उसमें से कुछ अच्छा है तो उसको आगे बढ़ाना नहीं है, तो मुझे वापस करना। बहुत-बहुत धन्यवाद।
सभी वरिष्ठ महानुभाव। मैं इस फोरम से काफी परिचित हूं, लेकिन पहले मैं वहां बैठता था, आज मैं यहां बैठा हूं, और वहां जब बैठता था, तो एक छोटे कमरे में मुख्यमंत्री और राज्य High Court के chief justice के बीच में एक छोटे फोरम में बैठते थे, Media नहीं होता था, Camera नहीं होता था, बड़ी खुलकर के बात होती थी और मेरी भी छवि ऐसी थी कि मैं जरा थोड़ा खुलकर के बोलता था। लेकिन अब शायद मैं इतना बोल पाऊंगा कि नहीं, मुझे पता नहीं। लेकिन यह भी मैं मानता हूं कि मैं काफी खुलकर के बोलता था फिर भी मैं कह सकता हूं कि मैं बहुत कुछ बोलने से डरता था। और शायद यहां भी जो मुख्यमंत्री हैं, उनके मन में भी यह रहता होगा, कि भई हम कहे या न कहे, हमारी कठिनाईयां बताएं या न बताएं और इस स्थिति का मैंने अनुभव किया हुआ है और आज मैं यहां बैठा हूं तब मैं आवश्यक मानता हूं इन दोनों मुख्यधाराओं के बीच में हमारी संवादिता कैसे बढ़े, खुलापन कैसे आए, एक-दूसरे को मजबूती कैसे दें, जो मजबूती भारत की मजबूती के लिए हो। अगर हम इन चीजों को पूरा कर सकते हैं, तो हम इस देश की बहुत बड़ी सेवा कर सकते हैं। मैं उन विषयों को स्पर्श करना नहीं चाहता हूं, जो सामान्य तौर पर इस फोरम में हर बार चर्चा में रहे हैं। ज्यादातर रहा है चर्चा में विषय Pendency का। सबरवाल जी साहब थे, लाहौटी साहब थे, बालकृष्ण साहब थे, इन सबके कालखंड में मैं यह सुनता आया हूं। और आज भी उसकी चर्चा हो रही है। पूर्व प्रधानमंत्रियों के भाषण देखेंगे तो उसमें भी इस बात का जिक्र है। दूसरा विषय है हर किसी ने हर फोरम में भ्रष्टाचार के प्रति चिंता जताई है और इसलिए मुझे उसमें अब नया कुछ जोड़ना नहीं है और इसलिए मैं उस विषय को स्पर्श नहीं करता हूं। हर कोई इसकी चिंता कर रहा है, लेकिन समाधान हम अभी तक नहीं ढूंढ पाएं हैं, हो सकता है आज के फोरम की मीटिंग के बाद इस मंथन से भी हो सकता है सारी चीजों के रास्ते निकलेंगे। लेकिन मुझे हमेशा यह बात ध्यान में आती है कि हम सब एक प्रकार के समान मनुष्य जीव है, अलग-अलग जिम्मेवारियां हम निभा रहे हैं। अलग-अलग कामों को अपनी योग्यता, क्षमता और संजोग के अनुसार हरेक को मिला है। लेकिन जो न्याय क्षेत्र में है, उनका वैसा नहीं है। वो भले हरेक के बीच में से आए है, हम जैसे लोगों के बीच में से आए हैं, लेकिन ईश्वर ने उनको Divine काम के लिए पसंद किया है। आपके पास जो काम है वो एक Divine काम है। आपके पास जो काम है, जो ईश्वर आपके माध्यम से करवाना चाहता है और इसलिए हम लोगों के पास जो काम है और देश के और जो सवा सौ करोड़ नागरिक के पास जो काम है, उससे आपका काम भिन्न है। और इसलिए आपकी जिम्मेवारियां भी बहुत हैं और देश की आपसे अपेक्षाएं भी बहुत है और सामान्य नागरिक की सर्वाधिक अपेक्षाएं हैं क्योंकि लेकिनउसको लगता है कि मैं भगवान के पास तो नहीं पहुंच पाता हूं, लेकिन एक जगह है जहां मेरा कुछ होगा। उसके लिए भगवान के पास नहीं पहुंच पाता हूं तो कहां पहुंचु, तो वो आपकी तरफ देखता है और उस अर्थ में कितना बड़ा Divine काम आपके पास है और मुझे विश्वास है कि आप जहां बैठे हैं, वहां हर पल उसी बात को स्मरण रखते हुए काम करते हैं और यह भाव किताबों में पढ़ाया गया नहीं है सामान्य नागरिक को। इस Institute ने अपने व्यवहार के कारण, अपनी परंपरा के कारण, अपने चरित्र के कारण सामान्य मानव के मन में यह आस्था पैदा की है। यह आस्था Inject की हुई आस्था नहीं है। यह Evolve हुई है और जब Evolve हुई है आस्था, तो उसकी ताकत भी बहुत ज्यादा होती है और इसलिए मुझे विश्वास है कि इस महान परंपरा को हम और अधिक उजागर कैसे करें और अधिक ओजस्वी, तेजस्वी कैसे बनाएं, यह हमारा दायित्व है। अभी दत्तू साहब कह रहे थे Quality Man Power के लिए। आज तो हम भाग्यवान है कि आज हमारे पास इस क्षेत्र में जो Man Power है, उसके लिए हम गर्व का अनुभव करते हैं। लेकिन हमारा यह भी दायित्व है कि आने वाली पीढि़यों में कैसा Man Power इस क्षेत्र में आएगा और इसलिए हमारी जितनी चिंता Infrastructure को लेकर के है, जितनी चिंता Digital Form में, आधुनिक Technology के Form अपनी इस व्यवस्था को ढ़ालने की है, उससे अधिक हमारे लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है कि हम आने वाली पीढि़यों को तैयार के लिए इस field के लिए Human Resource development का हमारा Mechanism क्या होगा। उत्तम-से-उत्तम Breed, Law Faculty में कैसे आए। उत्तम-से-उत्तम Breed, Judiciary में कैसे जाए। और इसलिए हमारे इस काम के लिए जो Institutions हैं राज्य सरकारों की सर्वश्रेष्ठ जिम्मेवारी है कि हमारी Law Collages हो, Law Universities उसको हम किस प्रकार से समयानुकूल और भविष्य को ध्यान में रखकर के कैसे तैयार करें। और जितनी बड़ी मात्रा में हम इस क्षेत्र को बल देंगे, हमारी बहुत सारी आवश्यकताओं की पूर्ति होगी। जब मैं मुख्यमंत्री था यहां बैठता था सामने। एक बार हमारी मीटिंग में एक विषय आया था, Pendency की चर्चा हो रही थी। एक High Court Judge ने जो Reporting किया वो कम से कम मुझे तो चौंकाने वाला था, उन्होंने कहा हमारी Court तो सप्ताह में दो-तीन दिन चलती है और चलती है वो भी दो-तीन घंटे चलती है, तो बोले हम Pendency कहां से कर सकते हैं। तो ऐसे ही मेरा मन कर गया कि पुछुँ तो सही क्या बात है यह? तो बोले नहीं कुछ कारण नहीं है लेकिन जो Building में हम बैठते हैं, उसमें उजाला नहीं है और बिजली आती नहीं है। आप कल्पना कर सकते हैं हम न्यायपालिका को बार-बार पूछते तो हैं कि भई Pendency क्यों है लेकिन कोई तो सोचो कि बिजली तक मुहैया नहीं है तो फिर वो Court कितने घंटे चलेगी। कितने दिन चलेगी, न्याय प्रक्रिया बढेगी कैसे। और इसलिए सारी जिम्मेवारियां एक एकतरफा नहीं है। और फिर कभी यह भी पता चलता है कि इसमें बिजली क्यों नहीं है, तो बोले कोई Five Star activist court में चला गया था तो वो Stay ले आया था तो वहां वो खम्भा डालने मना है। अब बताइये कहां जाए, बात कहां जाकर के रूकती है? और इसलिए हम एक comprehensive एक Integrated approach के साथ, सभी ईकाईयां मिलकर के सही दिशा में एक लक्ष्य निर्धारित करके चलेंगे, तो इन चीजों को पार करना कठिन नहीं है। Digital India भारत सरकार का एक बहुत बड़ा Mission का है। यह Digital India में मेरा अनुभव भी कहता है हम जितना जल्दी Technology का उपयोग हमारी न्यायिक व्यवस्थाओं में लाएंगे हमारी सुविधा बहुत बढ़ेगी, हमारी Qualitative change आएगा, हमारे काम में और आवश्यकता है Qualitative change की। कोई जमाना था जब Reference ढूंढना है तो दस ग्रंथ हाथ लगाने पड़ते थे। आज कोई भी Reference ढूंढना है, just google गुरू के पास चले जाओ। दो मिनट में गुरू जी लेकर के आ जाते हैं। यह सुविधा बड़ी है, इस सुविधा का लाभ जितना तेजी से हम हमारी न्यायिक व्यवस्था की हर चीजें पुराने सारे Judgement वगैरह। कल मुझे हमारे चंद्रचूड़ साहब मिले थे तो मुझे कह रहे थे कि इलाहबाद में कोई पचास करोड़ Pages already digital हो चुके हैं। बहुत बड़ा काम है, बहुत काम हुआ है। और यह मैं समझता हूं कि जितना तेजी से होगा, उतना आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में Efficiency लाने में बहुत काम आने वाला है। कभी-कभार यह भी लगता है कि देश को सशक्त न्यापालिका चाहिए या समर्थ न्यायपालिका चाहिए। Powerful Judiciary चाहिए या Perfect Judiciary चाहिए। मैं चाहूंगा कि इस फोरम में बैठे हुए सभी महानुभाव अपने-अपने दायरे में चर्चा करे। हम Powerful तो होते चले जा रहे हैं जितनी तेजी से Powerful हो रहे हैं और Powerful होना गलत नहीं है। लेकिन उतनी ही तेजी से Perfect अनिवार्य हो गया है। हमारी Judiciary Powerful हो, हमारी Judiciary Perfect भी हो। हम सशक्त भी हो, हम समर्थ भी हो, और यह आवश्यकता इसलिए है कि सामान्य मानव के लिए यह एक जगह है। मैं उस बिरादरी से हूं, मैं अपने आप को उस बिरादरी से होने के कारण भाग्यवान मानता हूं। भाग्यवान इसलिए मानता हूं कि हम चौबीसों घंटे हमारी scrutiny होती है। हर पल, हमने बायां पैर रखा कि दायां पैर रखा, हमारी बिरादरी की scrutiny होती है और वक्त इतना बदल चुका कि आज से दस साल पहले जो खबर Gossip Column में भी जगह नहीं लेती थी, वो आज Breaking News बन गई है। इतना अंतर आया है, जिसको कभी Gossip Column में भी जगह देने से Editor पचास बार सोचता था इसको Gossip Column में रखूं या न रखूं, वो आज Breaking News बन गया है। और हम चौबीसों घंटे उसकी Scrutiny होती है। उस बिरादरी से मैं हूं मुझे गर्व है, यह Scrutiny होती है मुझे उसका गर्व है। और इसके कारण, और हर पांच साल में जनता में जाकर हिसाब भी देना पड़ता है। यह Institution जिस बिरादरी से हम आते हैं, उसको काफी बदनामी मिली हुई है। लेकिन उसके बावजूद भी मैं आज कह सकता हूं कि इस बिरादरी ने, उस व्यवस्था ने शासक में बैठे राजनेताओं ने भी अपने पर बंधन लाने के लिए इतनी Institutions को जन्म दिया है। कानून उन्होंने खुद ने बनाए हैं। Election Commissions उसकी स्वतंत्रता हम पर बंधन डालती है, लेकिन हमने किया है। RTI हम पर बंधन डालती है, हमने किया है। इतना ही नहीं लोकपाल की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। हम पर बंधन डाल रहा है, हम कर रहे हैं, क्योंकि हम चाहते हैं कि व्यक्ति कितना ही अच्छा क्यों न हो, अगर Institutional Network अच्छा नहीं होगा, तो गिरावट आने की संभावना कभी भी हो सकती है। और मैं हमेशा मानता हूं कि घर के अंदर मां-बाप पैसे Lock and Key में रखते हैं। क्या चोर से बचने के लिए? Lock and Key चोर के लिए बहुत छोटी चीज होती है। वो तो पूरी तिजोरी उठाकर के ले जा सकता है। मां-बाप घर में Lock and Key इसलिए रखते हैं कि बच्चे की आदत खराब न हो। इसलिए इस व्यवस्था को विकसित करते हैं। हमारे लिए भी आवश्यक है। हम भाग्यवान है कि दुनिया हमें देखती है, हमें डांटती है, हमारी आलोचना करती है, हमारी चमड़ी उधेड़ देती है। आपको वो सौभाग्य नहीं है। आपको न कभी आलोचना सुनने को मिलती है, न कोई आपको, इतना हीं नहीं जिसको सजा हो गई होगी, फांसी पर लटक गया होगा वो भी बाहर आकर बयान देता है कि मुझे न्यायतंत्र में विश्वास है, ऊपर मुझे न्याय मिलेगा। यानी इतनी credibility है इस Institution की। और जब आलोचना असंभव रहती हो, तब इन Inbuilt हमारी अपनी आत्मपरीक्षण की व्यवस्थाएं विकसित करने की समय की मांग है। हम उस प्रकार के Inbuilt Dynamic Mechanism को Develop करें। और जिसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। राजनेताओं का तो बिल्कुल नहीं होना चाहिए। इसी faculty के लोग, हम वो क्या करें कि आज अगर हम इस व्यवस्थाओं को विकसित नहीं करेंगे। हम inherent उस DNA को Develop नहीं करेंगे तो जो आस्था जो कि evolve हुई है उसको छोटी-सी भी चोट आ जाएगी। मैं मानता हूं देश को बहुत नुकसान हो जाएगा। हम सरकार बनाने वाले लोग यह गलती करेंगे, तो गलती ठीक करने की जगह है और वो जगह आप है। लेकिन अगर आप गलती करेंगे तो फिर तो इसके सिवा कुछ नहीं बचा है। इसलिए हमें गलती करने का अधिकार नहीं है, लेकिन फिर भी अगर हम गलती करें तो कोई एक जगह है जहां सुधार हो सकेगा। बच जाएंगे, लेकिन अगर आप गलती करेंगे तो कुछ नहीं बचेगा। और इस अर्थ में मैं एक Divine Power के रूप में आपको देखता हूं और उस Divine Power के रूप में देखता हूं तब हम सब मिलकर के हम मान कर चले हमारी आलोचना नहीं होने वाली है तो हमें ही बार-बार अपने आपकी आलोचना करनी है और यह कठिन काम है, मैं जानता हूं कि यह कठिन काम है। संविधान के दायरे में, नियमों में दायरे में न्याय देना कठिन नहीं है, क्योंकि आपके लिए दो मिनट में दूध का दूध और पानी का पानी कार्य करना ईश्वरदत आपको एक शक्ति होती है, एक तीसरी आंख आपके पास होती है, आप चीजों को देख पाते हैं, क्योंकि आपका विकास वैसा हुआ है, लेकिन Perception और Realty के बीच से खोजने के लिए बड़ी कठिनाई होती है। कभी हमें सोचना होगा कि आज कहीं Five Star activist तो हमारी पूरी Judiciary को Drive तो नहीं कर रहे। क्या एक प्रकार का हऊआ फैला कर के Judiciary को Drive करने का प्रयास नहीं हो रहा है? संविधान के दायरे में न्याय देना मुश्किल नहीं है? लेकिन Perception के माहौल में न्याय देना बहुत कठिन काम हो गया है और इसलिए आज से पंद्रह साल बीस साल पहले Judiciary के लिए जो मुक्ति का आनंद था वो आनंद आज नहीं है। वो भी डरता है कि बाहर तो यह चल रहा है और मैं यह करूंगा तो क्या होगा। यह माहौल बन गया है और तब जाकर के Judiciary को जितनी हिम्मत ज्यादा मिले उसके लिए सभी को प्रयास करना पड़ेगा। चाहे वो सरकार में बैठे हुए लोग हो, चाहे Media में बैठे हुए लोग हो, चाहे Five Star activist की जमात हो। अगर हम इस Institution को ताकत नहीं देंगे तो हम ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारेंगे। और इसलिए मैं मानता हूं कि इन चीजों में बदलाव की आवश्यकता है और मुझे विश्वास है कि हम बदलाव ला सकते हैं। जहां तक Infrastructure का सवाल है मैं स्वभावतः अच्छी व्यवस्थाओं का पक्षकार हूं। Poverty is a virtue इस Philosophy को मैं belong नहीं करता हूं। वरना हम लोग सदियों से यही पढ़ते आए हैं कि एक बेचारा गरीब ब्राह्मण, वहीं से शुरू होता है कि उसके फटे कपड़े थे और उसको सब बड़ा ही तपस्वी और वो मानने की फैशन नहीं है। वक्त बदल चुका है। उत्तम से उत्तम Infrastructure क्यों नहीं होना चाहिए। व्यवस्थाएं उत्तम से उत्तम क्यों नहीं होनी चाहिए और उस दिशा में प्रयास होना चाहिए। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि इस सरकार में इस बात की प्राथमिकता है। इस बार भी करीब Nine thousand seven hundred forty nine crore Rupees चौदहth Finance Commission के कारण सीधे सीधे राज्यों के पास Specifically Earmark करके Judiciary के लिए दिये गये है और मैं राज्यों से आग्रह करूंगा कि वो पैसे कहीं इधर-उधर न जाए, न्यायपालिका के काम में जाए। तो आपने आप जो छोटी-मोटी समस्याएं है अपने आप सुलझ जाएगी। और मैं आशा करूंगा कि राज्य के मुख्यमंत्री इस बात पर ध्यान देंगे, व्यक्तिगत ध्यान देंगे और यह कैसे हो सके इस बात पर चिंता करेंगे। हम लोगों ने आखिरकर कुछ चीजें हैं, मतलब जिस राज्य से मैं रहा गुजरात में लोक अदालत का सफल प्रयोग मैंने वहां देखा है। और एक बार मैंने हिसाब लगाया था कि पैंतीस पैसे में न्याय मिलता था। Thirty Five Paisa, मैंने कल फिर रात को खाना खाते हुए कुछ Judges से बात हुई तो मुझे लगा कि मैं फिर एक बार Verify कर लूं। तो मैंने रात को ही थोड़ा पूछताछ की तो मुझे पता चला कि पैंतीस पैसा में अब नहीं मिलता है, लेकिन Average पचास-पचपन रुपयापये तक में न्याय मिल जाता है, खर्च होता है। मैं समझता हूं भारत जैसे देश में यह व्यवस्था बहुत ताकतवर है। हम देखेंगे कि इतनी सारी Pendency है, लेकिन Below Poverty line family के case minimum होंगे जी। यह बड़े-बड़े लोगों के ही case होते है जी, क्योंकि छोटे लोगों को तो वकील भी कहां मिलता है, वो बेचारा कहां जाएगा। और इसलिए गरीब के लिए जो जगह है वो इन छोटी-छोटी व्यवस्थाओं में है। हम इन लोक अदालत Type व्यवस्थाओं को बल दें, उसका Expansion करें, Judiciary के प्रवर्तमान लोग, judiciary के निवृत्त लोग एक ऐसा framework हम विस्तृत करें, अगर गरीब से और मैं देख रहा हूं कि बडे-बड़े मामले भी बैठकर के Solution आ रहा है। हो सकता है कि हम इस काम को करे तो उसकी चिंता हम लोगों को होगी। एक विषय शायद मेरी बात लाहोटी साहब से हो रही थी। ऐसे ही बातों-बातों में उन्होंने चिंता व्यक्त की थी। इन दिनों जो परिवार टूट रहे हैं, तेजी से परिवार टूट रहे हैं बड़ी वो चिंता व्यक्त कर रहे थे, और यह दौर बढ़ता चला रहा है। हो सकता है कि इस प्रकार की संवाद वाले Institution जितनी family Court develop होगी, भारत जैसे देश में परिवार टूटना हमारे लिए एक बहुत बड़ा कष्टदायक होगा। हम उस वक्त Focus करके सामाजिक व्यवस्थाओं को बचाने में कैसे काम कर सकते हैं। इस पर हम संवदेनाओं को लाकर के उन चिंताओं को कैसे बढ़ा सकते हैं। अगर गरीब को न्याय देने के लिए अगर लोक अदालत है, तो परिवार को न्याय देने के लिए family अदालत है। खासकर के नारीशक्ति के कल्याण के लिए यह वयस्थाएं बहुत ताकतवर बनी है। उसको हम और अधिक आधुनिक कैसे बनाएं, आधुनिक Speedy कैसे बनाए और उसमें एक विश्वास बना हुआ है। वहां जाने वाले व्यक्ति को लगता है कि ठीक है भई चलो दो कदम मैं चला दो कदम तुम चलो रास्ता निकल गया छोड़ो अब नहीं जाना है अब अपना काम करो। यह मूड बन रहा है। और मैं मानता हूं इस मूड का और अधिक सार्थक बनने का हमें प्रयास करना चाहिए और वो प्रयास हम करेंगे, तो अवश्य ही लाभ होगा ऐसा मुझे लगता है। सरकार में भी व्यवस्थाएं विकसित हुई कि भई हर चीज court में चली जाती है चलो inbuilt कोई ही Arrangement करे उसमें से Tribunals पैदा हुई। Tribunals को भी ज्यादातर lead करते हैं निवृत Judge, लेकिन मैंने आकर के देखा है कि मैं बहुत निराश हो गया हूँ। शायद आज भारत सरकार में, मुझे लगता है करीब-करीब हम सौ tribunals की ओर पहुंच रहे हैं और एक-एक Ministry की तीन-तीन-चार-चार tribunals बन गई हैं। और Tribunals का disposal तो और चिंताजनक है। मैं चाहूंगा कि Supreme Court के वरिष्ठजन बैठें, मंथन करें कि भई यह Tribunal नाम की व्यवस्था से सचमुच में प्रक्रियाएं तेज हो रही है, नहीं हो रही है, न्याय मिल रहा ,है नहीं मिल रहा है कि और एक Barrier खड़ा हो रहा है। एक बार देखा जाए कि इतनी Tribunal की जरूरत है या नहीं है, क्योंकि फिर Tribunal है तो बाकी तो Budget वहीं चला जाता है। शायद Tribunal का Budget Court को चला जाए तो Court की ताकत बढ़ जाएगी, इतना Budget Tribunal में जा रहा है। हो सकता है कि हम इन चीजों को एक बार देखना चाहिए और तू-तू, मैं-मैं के रूप में नहीं है। अपनेपन के भाव से, साथ मिलकर करने के भाव से इसको एक बार देखने की आवश्यकता है। यहां पर काफी चीजों का उल्लेख हुआ है इसलिए मैं इन सारी बातों में नहीं जाता हूं, लेकिन हम जिस महान परंपरा में पले-बढ़े हैं उन महान परंपरा में कानून और न्याय इन दो मुख्यधाराओं को कभी compromise नहीं कर सकते वरना समाज और व्यवस्था चल नहीं सकती। कानून और न्याय दोनों की ओर जाना है, लेकिन अब जगत बदलता जा रहा है। पहले के समय में जितने हम चीजों को Handle करते थे, उससे रूप बदल गए। अब criminal offenses उसकी तुलना में economic offenses बढ़ रहे हैं। अब हमारी Expertise उस ओर जाए ऐसी आवश्यकता हो गई है। दुनिया Cyber crime में आ रही है। cyber crime की कोई सीमा नहीं है, वे Global Community है। हमारे अपने कानूनों को हमने उस प्रकार से नये विधा के साथ तैयार करना पड़ेगा। हमारे लोगों को भी उस प्रकार से तैयार करना पड़ेगा। हमने कभी सोचा भी नहीं होगा आने वाले दिनों में Maritime law एक बहुत बड़ा कारण बनने वाला है। Maritime Security को लेकर के Issue बनने वाले हैं। यानी बदलते हुए युग में उन नए-नए challenges और मैं मानता हूं कि शायद बीस-पच्चीस साल के बाद Space Related Law के बीच स्थिति पैदा हो जाएगी। इस Space पर किसका कब्जा है, किसका नहीं। International court के दायरे में आ जाएगा यह दिन आने वाले हैं। इसका मतलब अपने आप को हमें सजग करना होगा। आज कानूनी न्याय प्रक्रिया के अंदर Forensic Science एक बहुत बड़ा Role play कर सकता है। लेकिन हमारे पास न Bar के पास न Bench के पास, उसका scientific knowledge अभी तक.. क्योंकि उस पीढ़ी के पास यह था नहीं। मैंने एक प्रयास जब गुजरात में था तो हमने गुजरात में एक Forensic Science university बनाई थी और दुनिया में एकमात्र Forensic Science university है और वो गुजरात में है। बाकी जगह पर colleges भी है Forensic Science के Department हुआ करते हैं, तो Forensic Science University में Judiciary के लोगों को हमने replace की थी और गुजरात high court के judges ने मेरी मदद की थी और करीब-करीब सभी district judges का Forensic Science University का दो-दो दिन का courses हुआ था। क्योंकि यह एक ऐसा विज्ञान develop हो रहा है जो आने वाले दिनों में judicial process के अंदर एक बहुत बड़ा महत्वपूर्ण role play करने वाला है। हम उस बात में कैसे ध्यान दें। हम उसमें Forensic Science की जानकारियों के लिए क्या व्यवस्था करें, तब जाकर के आने वाले दिनों में न्याय की प्रक्रिया में Technology और विज्ञान का भी role किस प्रकार से उपयोग में हो उस पर हमें सोचने की आवश्यकता बनने वाली है। हमारी law universities के student के लिए भी यह कैसे हो। एक और समस्या जो हम अनुभव कर रहे हैं, जनता ने हमको चुनकर के भेजा है कानून बनाने के लिए लेकिन हमारा काफी समय और कामों में जाता है। संसद में हम क्या करते हैं आपका मालूम है और अनुभव यह आ रहा है कि जो Act के drafts, drafting है कानून का यह सारी pendency के मूड में एक वो भी कारण है कि कानून बनाने में, उसकी शब्द रचना में कुछ न कुछ ऐसी कमी रह जाती है कि ultimately वो न्यायपालिका के पास जाकर उसके interpretation में सालों लग जाते हैं और तब तक कई निर्णय हो जाते हैं फिर बेकार हो जाते हैं। जब तक हमारी law universities वगैरह में drafting के लिए हम proper manpower तैयार नहीं करेंगे और कानून बनाते समय ही हम इस पर care नहीं करेंगे तो हो सकता है कि समयाएं हमारी बढ़ती जाएगी। कोई हम ऋषिमुनि तो है नहीं कि एकदम से Zero defect वाला कानून बना पाएंगे। लेकिन minimum grey area हो वो दिशा में तो प्रयास करे। यह हमारे सामने बहुत बड़ा challenge है। और मैंने अनुभव किया है कि इस प्रकार का Man Power हमें उपलब्ध नहीं होता है। आने वाले दिनों में इस काम को कैसे किया जाए। यह एक आवश्यक काम है जिसको कभी न कभी हमकों करना होगा। और विशेषकर के वो हमारी जिम्मेदारी है हम अगर इस काम को ठीक तरह से करेंगे तो हो सकता है कि आने वाले दिनों में कानून जितना अच्छा होगा और संविधान के सारी मर्यादाओं के पालन करते हुए बनेगा तो मैं नहीं मानता हूं कि कानून के कारण समस्याएं पैदा हुई। दूसरा हमारे देश में यह भी विषय आ गया कि भई हर चीज के लिए कानून बनाओ। मैं मानता हूं कि संविधान अपने आप में हर काम करने के लिए बहुत सारी हमारी व्यवस्थाएं देता है, लेकिन एक बन गया है और मेरे मन में विचार आया है कि मैं कानूनों को खत्म करता चलू। इतना बोझ बन गया है जी, मैंने एक कमिटी बनाई है। उस कमिटी में मेरी कोशिश है कि तुम कानून खत्म करो अभी अभी मैंने सात सौ कानून खत्म करने के लिए तो कैबिनेट से approve ले लिया। लेकिन अभी-अभी मेरे सामने नजर में एक हज़ार सात सौ कानून आए। one thousand seven hundred और मेरा एक सपना था मैं per day एक कानून खत्म करूं। पाँच साल के मेरे Tenure में per day एक कानून खत्म करने का यह सपना मैं पूरा करूंगा। यह कानूनों के जंजाल में हमारा पूरा न्याय तंत्र फंसा पड़ा है और यह जिम्मेवारी executives की है कि वो इसको ठीक से चिंता करे और मैं तो राज्यों को भी कहूंगा आपके यहां भी एक छोटी-छोटी टीम बैठाकर के जितने बेफिजूल कानून है उसको निकालिए। जितना सरलीकरण हम लाएंगे सामान्य मानव को खुद को समझ आएगा कि यह हो सकता है या नहीं हो सकता है और व्यक्ति को अगर समझ आता है तो सामान्य नागरिक कानून तोड़ने के स्वभाव का नहीं होता है। वो कानून के साथ चलने के लिए स्वभाव का होता है। लेकिन उसको कानून के साथ चलने के लिए सुविधा पैदा करना यह हम सबका दायित्व है। उन दायित्वों को हम पूरा करेंगे तो हो सकता है जो बोझिल माहौल है, उस बोझिल माहौल में से हम काफी एक मुक्ति का सांस ले सकते हैं और यह मुक्ति का सांस भी एक नई आस्था को उजागर कर सकता है, नई आस्था को जन्म दे सकता है और उस दिशा में हमारा प्रयास रहे। यही मेरे मन में कुछ विचार है। हम आने वाले दिशा में उसको करे। जहां तक राजनीतिक जीवन में बेठे हैं मेरे जैसे लोग हैं, चाहे हम शासन व्यवस्था में हो, हमारे संविधान ने तो हमारे लिए मर्यादाएं तय की है, लेकिन हमारे शास्त्रों ने भी हमारे लिए मर्यादाएं तय की हैं। अगर हम कहें, अगर हमारे उपनिषद की तरफ नजर करे तो हमारी उपनिषद कहती है शस्त्रय शत्रम यतः धर्मः ,शस्त्रय शत्रम यतः धर्मस्य, यानी कानून नरेशों का भी सम्राट होता है। राजा का भी राजा होता है। और इसलिए आज अगर शासन में बैठा हुआ कितना ही ओजस्वी तेजस्वी व्यक्ति क्यों न हो लेकिन कानून उससे बड़ा होता है। इस मूलमंत्र को लेकर के चलना। चाहे हम किसी पद पर बैठे हो तो भी हमारी जिम्मेवारी बनती है और उसको हमें करना पड़ेगा और महाभारत के अंदर भीष्म ने एक बात कही है भीष्म ने वो बात कही है वो शायद समाज जीवन को चलाने के लिए उसकी अपनी एक ताकत है और महाभारत में भीष्म इस बात का उल्लेख करते हुए कहते हैं, धर्मनः प्रजाः सर्वाः रक्षन्ति स्मः परस्परम्। कानून के प्रति सम्मान की भावना रखना ही वो मुख्य शक्ति है जो समाज को एकजुट बनाए रखती है। देश की एकता और अखंडता के लिए यह मूल मंत्र जो हमें सहस्त्र वर्षों से प्राप्त हुए हैं, उन संस्कारों को लेकर के हम चलेंगे। हम बहुत कुछ कर सकते हैं। मैं फिर एक बार...आप सबने मुझे आकर के आप सबसे बात करने का अवसर दिया मैं आपका आभारी हूं। मुझे विश्वास है, मैं कागजी कार्रवाई थोड़ी कम करने वाला इंसान हूं, ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं हूं तो जो मन में आया वो बोला है और मैं नहीं चाहूंगा कि आप उसको judicial तराजू से देखें, एक सामान्य नागरिक के मन के भाव है उसी प्रकार से देखना और उसमें से कुछ अच्छा है तो उसको आगे बढ़ाना नहीं है, तो मुझे वापस करना। बहुत-बहुत धन्यवाद।
best smartphones under 20000: Redmi Note 9 Pro और Redmi Note 9 Pro Max को भारत में लॉन्च कर दिया गया है। अहम खासियतों की बात करें तो फोन में जान फूंकने के लिए 5020 एमएएच की बैटरी दी गई है। आइए अब आपको रेडमी नोट 9 प्रो और रेडमी 9 प्रो मैक्स की भारत में कीमत, उपलब्धता और फीचर्स के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं। रेडमी नोट 9 प्रो के 4 जीबी रैम और 64 जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 12,999 रुपये है। फोन के 6 जीबी रैम और 128 जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 15,999 रुपये है। रेडमी नोट 9 प्रो की बिक्री 16 मार्च से मी होम, मी स्टूडियो, अमेजन पर होगी। रेडमी नोट 9 प्रो मैक्स के 6 जीबी रैम और 64 जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 14,999 रुपये है। 6 जीबी रैम और 128 जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 16,999 रुपये है। 8 जीबी रैम और 128 जीबी वाले टॉप वेरिएंट की कीमत 18,999 रुपये है। वहीं, रेडमी नोट 9 प्रो मैक्स 25 मार्च से Amazon, मी होम, मी स्टूडियो पर मिलने लगेगा। भारत में रेडमी नोट 9 प्रो मैक्स के तीन कलर वेरिएंट उतारे गए हैं, ऑरोरा ब्लू, ग्लेशियर व्हाइट और इंटरस्टेलर ब्लैक। रेडमी नोट 9 प्रो नए ऑरा ब्लैंस डिज़ाइन के साथ उतारा गया है। यह शाओमी का पहला ऐसा स्मार्टफोन है जिसे पंच-होल डिज़ाइन के साथ उतारा गया है। इस रेडमी फोन में 6. 67 इंच डिस्प्ले है। स्पीड और मल्टीटास्किंग के लिए क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 720जी 8nm प्रोसेसर के साथ 8 जीबी तक रैम और 128 जीबी तक स्टोरेज (यूएफएस 2. 1) के साथ उतारा गया है। माइक्रोएसडी कार्ड की मदद से स्टोरेज को 51 जीबी तक बढ़ाना संभव है। फोन में जान फूंकने के लिए 5020mAh की बैटरी मिलेगी। रिटेल बॉक्स में 33 वॉट फास्ट चार्जर मिलेगा, फोन 30 मिनट में 50 प्रतिशत तक चार्ज हो जाएगा। ग्राफिक्स के लिए ऐड्रेनो 618 जीपीयू है। चिपसेट गेमिंग-सेंट्रिक फीचर्स से लैस है और यह एलाइट गेमिंग एक्सीपीरियंस सपोर्ट प्रदान करता है। यह 2×2 MIMO WiFi के साथ आता है। स्मार्टफोन में 3. 5 मिलीमीटर हेडफोन जैक के साथ आईआर ब्लास्टर और यूएसबी टाइप-सी पोर्ट शामिल है। फोन में ट्रिपल कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 5 प्रोटेक्शन का इस्तेमाल हुआ, इसका मतलब आपको फ्रंट, बैक और कैमरा मॉड्यूल पर ग्लास प्रोटेक्शन मिलेगा। सिक्योरिटी के लिए फोन में साइड-माउंट फिंगरप्रिंट सेंसर भी है। रेडमी नोट 9 प्रो मैक्स के पिछले हिस्से में भी चार रियर कैमरे मिलेंगे, 64MP प्राइमरी कैमरा सेंसर, 119 डिग्री फील्ड ऑफ व्यू के साथ 8MP अल्ट्रा वाइड-एंगल लेंस, 5MP मैक्रो कैमरा सेंसर और 2MP डेप्थ कैमरा सेंसर भी है। कंपनी का दावा है कि रेडमी नोट 9 प्रो मैक्स कलर्स को बैलेंस करता है और तस्वीरों में डिटेल भी सही से कैप्चर होती है। यह RAW फोटोग्राफी सपोर्ट के साथ आता है। यह एन्हांस नाइट मोड के साथ आता है। डिस्प्ले की बात करें तो इस फोन में 6. 67 इंच फुल एचडी+ (2400 1080) डिस्प्ले है। इसका आस्पेक्ट रेशियो 20:9 है। स्क्रीन प्रोटेक्शन के लिए कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 5 का इस्तेमाल हुआ है। स्पीड और मल्टीटास्किंग के लिए 2. 3 गीगाहर्ट्ज़ क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 720जी प्रोसेसर के साथ 6 जीबी तक रैम और 128 जीबी तक स्टोरेज है। ग्राफिक्स के लिए ऐड्रेनो 618 जीपीयू है। डुअल-सिम वाले इस फोन की स्टोरेज को माइक्रोएसडी कार्ड की मदद 512 जीबी तक बढ़ाना संभव है। इसके अलावा फोन के फ्रंट और बैक पैनल पर कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 5 का इस्तेमाल किया गया है। कनेक्टिविटी की बात करें तो फोन में वाई-फाई 802. 11 ए/बी/जी/एन/एसी, ब्लूटूथ वर्जन 5, जीपीएस/ए-जीपीएस, 3. 5 मिलीमीटर हेडफोन जैक और ग्लोनॉस शामिल है। सिक्योरिटी के लिए साइड-माउंड फिंगरप्रिंट सेंसर को भी जगह मिली है। बैटरी क्षमता की बात करें तो 5020 mAh की बैटरी फोन में जान फूंकने का काम करती है, यह 18 वॉट फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आता है। ग्राहकों को रिटेल बॉक्स में 18 वॉट फास्ट चार्जर भी मिलेगा। रेडमी नोट 9 प्रो के कैमरा सेटअप की बात करें तो फोन के पिछले हिस्से में चार रियर कैमरे दिए गए हैं, इसमें 48MP प्राइमरी कैमरा सेंसर, अपर्चर एफ/1. 79 है। साथ में 120 डिग्री फील्ड ऑफ व्यू के साथ 8MP अल्ट्रा-वाइड कैमरा सेंसर, 5MP मैक्रो कैमरा सेंसर और 2MP का डेप्थ कैमरा सेंसर मिलेगा। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 16MP एआई कैमरा सेंसर दिया गया है। रेडमी नोट 9 प्रो की लंबाई-चौड़ाई की बात करें तो 165. 7 76. 6 8. 8 मिलीमीटर और वज़न 209 ग्राम है।
best smartphones under बीस हज़ार: Redmi Note नौ Pro और Redmi Note नौ Pro Max को भारत में लॉन्च कर दिया गया है। अहम खासियतों की बात करें तो फोन में जान फूंकने के लिए पाँच हज़ार बीस एमएएच की बैटरी दी गई है। आइए अब आपको रेडमी नोट नौ प्रो और रेडमी नौ प्रो मैक्स की भारत में कीमत, उपलब्धता और फीचर्स के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं। रेडमी नोट नौ प्रो के चार जीबी रैम और चौंसठ जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत बारह,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है। फोन के छः जीबी रैम और एक सौ अट्ठाईस जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत पंद्रह,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है। रेडमी नोट नौ प्रो की बिक्री सोलह मार्च से मी होम, मी स्टूडियो, अमेजन पर होगी। रेडमी नोट नौ प्रो मैक्स के छः जीबी रैम और चौंसठ जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत चौदह,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है। छः जीबी रैम और एक सौ अट्ठाईस जीबी स्टोरेज वेरिएंट की कीमत सोलह,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है। आठ जीबी रैम और एक सौ अट्ठाईस जीबी वाले टॉप वेरिएंट की कीमत अट्ठारह,नौ सौ निन्यानवे रुपयापये है। वहीं, रेडमी नोट नौ प्रो मैक्स पच्चीस मार्च से Amazon, मी होम, मी स्टूडियो पर मिलने लगेगा। भारत में रेडमी नोट नौ प्रो मैक्स के तीन कलर वेरिएंट उतारे गए हैं, ऑरोरा ब्लू, ग्लेशियर व्हाइट और इंटरस्टेलर ब्लैक। रेडमी नोट नौ प्रो नए ऑरा ब्लैंस डिज़ाइन के साथ उतारा गया है। यह शाओमी का पहला ऐसा स्मार्टफोन है जिसे पंच-होल डिज़ाइन के साथ उतारा गया है। इस रेडमी फोन में छः. सरसठ इंच डिस्प्ले है। स्पीड और मल्टीटास्किंग के लिए क्वालकॉम स्नैपड्रैगन सात सौ बीसजी आठnm प्रोसेसर के साथ आठ जीबी तक रैम और एक सौ अट्ठाईस जीबी तक स्टोरेज के साथ उतारा गया है। माइक्रोएसडी कार्ड की मदद से स्टोरेज को इक्यावन जीबी तक बढ़ाना संभव है। फोन में जान फूंकने के लिए पाँच हज़ार बीसmAh की बैटरी मिलेगी। रिटेल बॉक्स में तैंतीस वॉट फास्ट चार्जर मिलेगा, फोन तीस मिनट में पचास प्रतिशत तक चार्ज हो जाएगा। ग्राफिक्स के लिए ऐड्रेनो छः सौ अट्ठारह जीपीयू है। चिपसेट गेमिंग-सेंट्रिक फीचर्स से लैस है और यह एलाइट गेमिंग एक्सीपीरियंस सपोर्ट प्रदान करता है। यह दो×दो MIMO WiFi के साथ आता है। स्मार्टफोन में तीन. पाँच मिलीमीटर हेडफोन जैक के साथ आईआर ब्लास्टर और यूएसबी टाइप-सी पोर्ट शामिल है। फोन में ट्रिपल कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास पाँच प्रोटेक्शन का इस्तेमाल हुआ, इसका मतलब आपको फ्रंट, बैक और कैमरा मॉड्यूल पर ग्लास प्रोटेक्शन मिलेगा। सिक्योरिटी के लिए फोन में साइड-माउंट फिंगरप्रिंट सेंसर भी है। रेडमी नोट नौ प्रो मैक्स के पिछले हिस्से में भी चार रियर कैमरे मिलेंगे, चौंसठMP प्राइमरी कैमरा सेंसर, एक सौ उन्नीस डिग्री फील्ड ऑफ व्यू के साथ आठMP अल्ट्रा वाइड-एंगल लेंस, पाँचMP मैक्रो कैमरा सेंसर और दोMP डेप्थ कैमरा सेंसर भी है। कंपनी का दावा है कि रेडमी नोट नौ प्रो मैक्स कलर्स को बैलेंस करता है और तस्वीरों में डिटेल भी सही से कैप्चर होती है। यह RAW फोटोग्राफी सपोर्ट के साथ आता है। यह एन्हांस नाइट मोड के साथ आता है। डिस्प्ले की बात करें तो इस फोन में छः. सरसठ इंच फुल एचडी+ डिस्प्ले है। इसका आस्पेक्ट रेशियो बीस:नौ है। स्क्रीन प्रोटेक्शन के लिए कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास पाँच का इस्तेमाल हुआ है। स्पीड और मल्टीटास्किंग के लिए दो. तीन गीगाहर्ट्ज़ क्वालकॉम स्नैपड्रैगन सात सौ बीसजी प्रोसेसर के साथ छः जीबी तक रैम और एक सौ अट्ठाईस जीबी तक स्टोरेज है। ग्राफिक्स के लिए ऐड्रेनो छः सौ अट्ठारह जीपीयू है। डुअल-सिम वाले इस फोन की स्टोरेज को माइक्रोएसडी कार्ड की मदद पाँच सौ बारह जीबी तक बढ़ाना संभव है। इसके अलावा फोन के फ्रंट और बैक पैनल पर कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास पाँच का इस्तेमाल किया गया है। कनेक्टिविटी की बात करें तो फोन में वाई-फाई आठ सौ दो. ग्यारह ए/बी/जी/एन/एसी, ब्लूटूथ वर्जन पाँच, जीपीएस/ए-जीपीएस, तीन. पाँच मिलीमीटर हेडफोन जैक और ग्लोनॉस शामिल है। सिक्योरिटी के लिए साइड-माउंड फिंगरप्रिंट सेंसर को भी जगह मिली है। बैटरी क्षमता की बात करें तो पाँच हज़ार बीस mAh की बैटरी फोन में जान फूंकने का काम करती है, यह अट्ठारह वॉट फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आता है। ग्राहकों को रिटेल बॉक्स में अट्ठारह वॉट फास्ट चार्जर भी मिलेगा। रेडमी नोट नौ प्रो के कैमरा सेटअप की बात करें तो फोन के पिछले हिस्से में चार रियर कैमरे दिए गए हैं, इसमें अड़तालीसMP प्राइमरी कैमरा सेंसर, अपर्चर एफ/एक. उन्यासी है। साथ में एक सौ बीस डिग्री फील्ड ऑफ व्यू के साथ आठMP अल्ट्रा-वाइड कैमरा सेंसर, पाँचMP मैक्रो कैमरा सेंसर और दोMP का डेप्थ कैमरा सेंसर मिलेगा। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए सोलहMP एआई कैमरा सेंसर दिया गया है। रेडमी नोट नौ प्रो की लंबाई-चौड़ाई की बात करें तो एक सौ पैंसठ. सात छिहत्तर. छः आठ. आठ मिलीमीटर और वज़न दो सौ नौ ग्राम है।
Uttarakhand Big Accident: इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है जहां पर ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाईवे पर रुद्रप्रयाग से छह किलोमीटर दूर नारकोटा के पास निर्माणाधीन पुल गिरने से आधा दर्जन से ज्यादा मजदूर घायल हो गए। जिन्हें अस्पताल पहुंचाया गया है। आपको बताते चलें कि, इस हादसे को लेकर एसडीआरएफ ने जानकारी देते हुए कहा कि, 6 लोगों को निकाला गया और जिला अस्पताल ले जाया गया। 4-5 लोगों के फंसे होने की आशंका है।
Uttarakhand Big Accident: इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है जहां पर ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाईवे पर रुद्रप्रयाग से छह किलोमीटर दूर नारकोटा के पास निर्माणाधीन पुल गिरने से आधा दर्जन से ज्यादा मजदूर घायल हो गए। जिन्हें अस्पताल पहुंचाया गया है। आपको बताते चलें कि, इस हादसे को लेकर एसडीआरएफ ने जानकारी देते हुए कहा कि, छः लोगों को निकाला गया और जिला अस्पताल ले जाया गया। चार-पाँच लोगों के फंसे होने की आशंका है।
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश का सियासी मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। भाजपा ने तुरंत फ्लोर टेस्ट की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। शिवराज सिंह चौहान की याचिका पर कल यानि 17 मार्च को सुनवाई संभव है। अभी शिवराज सिंह के वकील ने मामले को रजिस्टार के समक्ष मेंशन कर जल्द सुनवाई की गुहार लगाई है। रजिस्टार ने कहा कि याचिका में कुछ खामियां हैं और अगर वो दूर कर लेते हैं तो मामले की सुनवाई 17 मार्च को होगी। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 26 मार्च तक विधानसभा की कार्यवाही स्थगित रखने के स्पीकर के फैसले को चुनौती दी है। याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट स्पीकर को आदेश दे कि 12 घंटे में बहुमत परीक्षण कराए। (एजेंसी हिस. )
नई दिल्ली। मध्यप्रदेश का सियासी मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। भाजपा ने तुरंत फ्लोर टेस्ट की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। शिवराज सिंह चौहान की याचिका पर कल यानि सत्रह मार्च को सुनवाई संभव है। अभी शिवराज सिंह के वकील ने मामले को रजिस्टार के समक्ष मेंशन कर जल्द सुनवाई की गुहार लगाई है। रजिस्टार ने कहा कि याचिका में कुछ खामियां हैं और अगर वो दूर कर लेते हैं तो मामले की सुनवाई सत्रह मार्च को होगी। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छब्बीस मार्च तक विधानसभा की कार्यवाही स्थगित रखने के स्पीकर के फैसले को चुनौती दी है। याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट स्पीकर को आदेश दे कि बारह घंटाटे में बहुमत परीक्षण कराए।
जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाक अधिकृत कश्मीर के कार्यकर्ता मोहम्मद सज्जाद राजा ने एक बड़ी अपील की है। जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाक अधिकृत कश्मीर के कार्यकर्ता मोहम्मद सज्जाद राजा ने एक बड़ी अपील की है। संयुक्त राष्ट्र में पीओके कार्यकर्ता मोहम्मद सज्जाद राजा ने कहा कि पाकिस्तान की अधिकृत वाले कश्मीर में लोगों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार हो रहा है। यूएन में संबोधन के दौरान पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए मोहम्मद सज्जाद राजा ने कहा कि हम पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों ने संयुक्त राष्ट्र से अनुरोध किया है कि पाक को हमारे साथ जानवरों जैसा व्यवहार करने से रोकें। पीओके में पाक ने हमसे हमारे अधिकारों को छिन लिया है। आगे कहा कि आजाद कश्मीर चुनाव अधिनियम 2020 लागू होने से हमारे राजनीतिक, नागरिक और संवैधानिक अधिकारों को छीन लिया है। हम अपने ही घर में गद्दार माने जाते हैं। ऐसे में हमारे लोगों की अपील है कि पाकिस्तान इससे रोका जाए। सज्जाद राजा ने जेनेवा में यूएन के 45 वें सत्र के दौरान कहा कि पीओके चुनाव अधिनियम 2020 ने पीओके क्षेत्र के नागरिकों के सभी संवैधानिक, नागरिक और राजनीतिक अधिकारों को छीन लिया है। हम पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। हमारी आप से अपील है कि इसे रोकने के लिए परिषद कदम उठाए। बता दें राजा ने कहा कि पाकिस्तान जम्मू और कश्मीर में सीमा के दोनों तरफ से युवाओं का ब्रेनवॉश किया जा रहा है। पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में सीमा के दोनों ओर निर्दोष युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहा है, जिससे भारत के साथ युद्ध में उन्हें मदद मिल रही है। पाकिस्तान पीओके से आतंकी कैंप चलाता है।
जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाक अधिकृत कश्मीर के कार्यकर्ता मोहम्मद सज्जाद राजा ने एक बड़ी अपील की है। जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाक अधिकृत कश्मीर के कार्यकर्ता मोहम्मद सज्जाद राजा ने एक बड़ी अपील की है। संयुक्त राष्ट्र में पीओके कार्यकर्ता मोहम्मद सज्जाद राजा ने कहा कि पाकिस्तान की अधिकृत वाले कश्मीर में लोगों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार हो रहा है। यूएन में संबोधन के दौरान पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए मोहम्मद सज्जाद राजा ने कहा कि हम पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों ने संयुक्त राष्ट्र से अनुरोध किया है कि पाक को हमारे साथ जानवरों जैसा व्यवहार करने से रोकें। पीओके में पाक ने हमसे हमारे अधिकारों को छिन लिया है। आगे कहा कि आजाद कश्मीर चुनाव अधिनियम दो हज़ार बीस लागू होने से हमारे राजनीतिक, नागरिक और संवैधानिक अधिकारों को छीन लिया है। हम अपने ही घर में गद्दार माने जाते हैं। ऐसे में हमारे लोगों की अपील है कि पाकिस्तान इससे रोका जाए। सज्जाद राजा ने जेनेवा में यूएन के पैंतालीस वें सत्र के दौरान कहा कि पीओके चुनाव अधिनियम दो हज़ार बीस ने पीओके क्षेत्र के नागरिकों के सभी संवैधानिक, नागरिक और राजनीतिक अधिकारों को छीन लिया है। हम पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के लोगों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। हमारी आप से अपील है कि इसे रोकने के लिए परिषद कदम उठाए। बता दें राजा ने कहा कि पाकिस्तान जम्मू और कश्मीर में सीमा के दोनों तरफ से युवाओं का ब्रेनवॉश किया जा रहा है। पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में सीमा के दोनों ओर निर्दोष युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहा है, जिससे भारत के साथ युद्ध में उन्हें मदद मिल रही है। पाकिस्तान पीओके से आतंकी कैंप चलाता है।
पिछले तीन-चार दिनों से वाइरल की चपेट में हूँ चिट्ठा पढ़ना लिखना बेहद कम हो गया है। पर आज मन फिर भी बेहद खुश है। आखिर वो दिन आ ही गया जिसका मुझे कई दिनों से बेसब्री से इंतजार था। छोटे शहरों में निजी एफ एम चैनल का हाल के दिनों में तेजी से विस्तार हो रहा है और इसी क्रम में हुआ है राँची में तीन नए चैनल का एक साथ प्रवेश : बिग एफ एम, दैनिक जागरण वालों का रेडियो मंत्रा और रेडियो धमाल। ये खुशी सिर्फ मेरी आँखों में हो ऍसी बात नहीं। कल जब मैं बिस्तर पर पड़े पड़े रेडिओ के गानों पर अपने बच्चे और हमारे यहाँ काम करने वाली लड़की को थिरकते देख रहा था तो मुझे बिलकुल संदेह नहीं रहा कि इनके चेहरे से निकलने वाली खुशी सारे राँची वासियों की खुशी का प्रतिनिधित्व करती है जिनके लिए रेडिओ अभी भी मनोरंजन का प्रमुख साधन है। पर एक सहज प्रश्न जो किसी भी संगीत प्रेमी के मन में जरूर आता है वो ये है कि आखिर निजी रेडिओ चैनल के बढ़ते प्रचार प्रसार से 'विविध भारती' के भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा ? क्या आपको नहीं लगता कि जहाँ भी विकल्प मौजूद है, किशोरों और युवा वर्ग में निजी चैनल विविध भारती की तुलना में कहीं ज्यादा लोकप्रिय होते जा रहे हैं? इस बदलते समय में आपकी विविध भारती से क्या अपेक्षाएँ रही हैं? मैंने इसी विषय को रेडिओनामा पर यहाँ विचार विमर्श के लिए उठाया है। आशा है इस बहस का आप हिस्सा बनेंगे।
पिछले तीन-चार दिनों से वाइरल की चपेट में हूँ चिट्ठा पढ़ना लिखना बेहद कम हो गया है। पर आज मन फिर भी बेहद खुश है। आखिर वो दिन आ ही गया जिसका मुझे कई दिनों से बेसब्री से इंतजार था। छोटे शहरों में निजी एफ एम चैनल का हाल के दिनों में तेजी से विस्तार हो रहा है और इसी क्रम में हुआ है राँची में तीन नए चैनल का एक साथ प्रवेश : बिग एफ एम, दैनिक जागरण वालों का रेडियो मंत्रा और रेडियो धमाल। ये खुशी सिर्फ मेरी आँखों में हो ऍसी बात नहीं। कल जब मैं बिस्तर पर पड़े पड़े रेडिओ के गानों पर अपने बच्चे और हमारे यहाँ काम करने वाली लड़की को थिरकते देख रहा था तो मुझे बिलकुल संदेह नहीं रहा कि इनके चेहरे से निकलने वाली खुशी सारे राँची वासियों की खुशी का प्रतिनिधित्व करती है जिनके लिए रेडिओ अभी भी मनोरंजन का प्रमुख साधन है। पर एक सहज प्रश्न जो किसी भी संगीत प्रेमी के मन में जरूर आता है वो ये है कि आखिर निजी रेडिओ चैनल के बढ़ते प्रचार प्रसार से 'विविध भारती' के भविष्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा ? क्या आपको नहीं लगता कि जहाँ भी विकल्प मौजूद है, किशोरों और युवा वर्ग में निजी चैनल विविध भारती की तुलना में कहीं ज्यादा लोकप्रिय होते जा रहे हैं? इस बदलते समय में आपकी विविध भारती से क्या अपेक्षाएँ रही हैं? मैंने इसी विषय को रेडिओनामा पर यहाँ विचार विमर्श के लिए उठाया है। आशा है इस बहस का आप हिस्सा बनेंगे।
RANCHI : इस साल भी बारिश के मौसम में बिजली खूब सताएगी, क्योंकि अब तक बिजली विभाग द्वारा बारिश से पहले की मेंटेनेंस ड्राइव नहीं चलाई गई है। ऐसे में बारिश होने पर बिजली गुल होने का खतरा बना रहेगा। दरअसल, शुरूआती बारिश ने ही बिजली के जर्जर तारों, खंभों, इंसुलेटर, जंफर आदि की पोल खोल दी है। 15 दिनों में जब-जब बारिश हुई है, शहर के अधिकांश इलाकों की बिजली घंटों गुल रही है। इतना ही नहीं, लोड शेडिंग का भी सिलसिला जारी है। अगर यह हाल मॉनसून के शुरूआती दिनों की है तो आने वाले दिनों में भारी बारिश हुई तो बिजली के लिए भी भारी संकट पैदा हो जाएगा। हर वर्ष मई माह तक बिजली विभाग द्वारा मेंटिनेंस ड्राइव चलाई जाती थी. इस दौरान कमजोर तार, इंसुलेटर, जंफर और ट्रांसफार्मर आदि बदलने का काम किया जाता था, लेकिन इस साल जिस गति से मेंटनेंस ड्राइव होना चाहिए, वह विभाग की ओर से नहीं चलाया जा सका। ऐसे में बरसात के मौसम में बिजली संकट लोगों के लिए परेशानियों का सबब बना रहेगा। गर्मी के मौसम में तार, पोल व जंफर के मेंटनेंस व मरम्मत के नाम पर घंटों बिजली काटी जाती रही ताकि बरसात के मौैसम में बिजली संकट पैदा नहीं हो। लेकिन, विभाग की आधी-अधूरी तैयारियों का असर बारिश के दौरान फिर देखने को मिल रहा है। न तो पोल शिफ्टिंग का काम पूरा हुआ है और न ही ट्रांसफार्मर की मरम्मत हो सकी है। हालिया दिनों में हुई छिटपुट बारिश के दौैरान भी घंटों-घंटों तक बिजली गुल रहना इसका गवाह है। रविवार को रांची को जरूरतों के हिसाब से 297 मेगावाट बिजली मिली, लेकिन इसके बाद भी कई मुहल्ले अंधेरे में रहे। कोकर फीडर से बिजली नही रहने के कारण बरियातू, चेशायर होम, गाडी गांव इलाके मे छह घंटे तक बिजली गुल रही। यहां दोपहर एक बजे से शाम छह बजे तक पावर कट की स्थिति बनी रही। बुटी मोड इलाके में सुबह नौ बजे से देर शाम तक बिजली के आने-जाने का सिलसिला जारी रहा। लालपुर इलाके मे तीन बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक बिजली की सप्लाई बाधित रही। इसके अलावे रातू रोड, हरमू, कडरू, डोरंडा, मेन रोड, मोरहाबादी, कुसुम बिहार इलाके मे भी पावर कट का सामना लोगों को करना पड़ा।
RANCHI : इस साल भी बारिश के मौसम में बिजली खूब सताएगी, क्योंकि अब तक बिजली विभाग द्वारा बारिश से पहले की मेंटेनेंस ड्राइव नहीं चलाई गई है। ऐसे में बारिश होने पर बिजली गुल होने का खतरा बना रहेगा। दरअसल, शुरूआती बारिश ने ही बिजली के जर्जर तारों, खंभों, इंसुलेटर, जंफर आदि की पोल खोल दी है। पंद्रह दिनों में जब-जब बारिश हुई है, शहर के अधिकांश इलाकों की बिजली घंटों गुल रही है। इतना ही नहीं, लोड शेडिंग का भी सिलसिला जारी है। अगर यह हाल मॉनसून के शुरूआती दिनों की है तो आने वाले दिनों में भारी बारिश हुई तो बिजली के लिए भी भारी संकट पैदा हो जाएगा। हर वर्ष मई माह तक बिजली विभाग द्वारा मेंटिनेंस ड्राइव चलाई जाती थी. इस दौरान कमजोर तार, इंसुलेटर, जंफर और ट्रांसफार्मर आदि बदलने का काम किया जाता था, लेकिन इस साल जिस गति से मेंटनेंस ड्राइव होना चाहिए, वह विभाग की ओर से नहीं चलाया जा सका। ऐसे में बरसात के मौसम में बिजली संकट लोगों के लिए परेशानियों का सबब बना रहेगा। गर्मी के मौसम में तार, पोल व जंफर के मेंटनेंस व मरम्मत के नाम पर घंटों बिजली काटी जाती रही ताकि बरसात के मौैसम में बिजली संकट पैदा नहीं हो। लेकिन, विभाग की आधी-अधूरी तैयारियों का असर बारिश के दौरान फिर देखने को मिल रहा है। न तो पोल शिफ्टिंग का काम पूरा हुआ है और न ही ट्रांसफार्मर की मरम्मत हो सकी है। हालिया दिनों में हुई छिटपुट बारिश के दौैरान भी घंटों-घंटों तक बिजली गुल रहना इसका गवाह है। रविवार को रांची को जरूरतों के हिसाब से दो सौ सत्तानवे मेगावाट बिजली मिली, लेकिन इसके बाद भी कई मुहल्ले अंधेरे में रहे। कोकर फीडर से बिजली नही रहने के कारण बरियातू, चेशायर होम, गाडी गांव इलाके मे छह घंटे तक बिजली गुल रही। यहां दोपहर एक बजे से शाम छह बजे तक पावर कट की स्थिति बनी रही। बुटी मोड इलाके में सुबह नौ बजे से देर शाम तक बिजली के आने-जाने का सिलसिला जारी रहा। लालपुर इलाके मे तीन बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक बिजली की सप्लाई बाधित रही। इसके अलावे रातू रोड, हरमू, कडरू, डोरंडा, मेन रोड, मोरहाबादी, कुसुम बिहार इलाके मे भी पावर कट का सामना लोगों को करना पड़ा।
भारत के शानदार स्विंग गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के तारीफों के पुल बांधे है। भुवी ने साल 2012-13 में ही धोनी की कप्तानी में क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में डेब्यू किया था। उसके बाद भुवी ने भारत के लिए तीनों ही क्रिकेट फॉर्मेट में जबरदस्त गेंदबाजी की और टीम इंडिया के लिए कई मैच जिताऊ प्रदर्शन भी किया है। बीसीसीआई ने हाल ही में ट्विटर पर भुवनेश्वर कुमार की एक वीडियो शेयर की है जिसमें उन्होंने थाला की तारीफ की है। उन्होंने वीडियो में कहा कि धोनी हमेशा सबकी मदद करते थे और युवा खिलाड़ियों को अच्छी तरीके से गाइड करते थे। भुवी ने वीडियो में कहा," मुझे लगता है की मैंने उनको रिटायरमेंट के समय यह पोस्ट किया था। सभी जानते थे कि वो किस तरह के खिलाड़ी है। लेकिन मैंने पोस्ट किया था कि वो बतौर इंसान कैसे है। वो हमेशा दूसरों की मदद करते हैं। अगर आप किसी से भी धोनी से बात करे तो वो आपको बताएंगे की को कितने मददगार थे। वो हमेशा युवा खिलाड़ियों को सही राह दिखाते थे।" बता दें कि धोनी ने साल 2020 में 15 अगस्त को इंटरनेशनल क्रिकेट से अलविदा कहा था। धोनी के अलावा उसी दिन टीम इंडिया के उनके साथी खिलाड़ी सुरेश रैना ने भी इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहा।
भारत के शानदार स्विंग गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के तारीफों के पुल बांधे है। भुवी ने साल दो हज़ार बारह-तेरह में ही धोनी की कप्तानी में क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में डेब्यू किया था। उसके बाद भुवी ने भारत के लिए तीनों ही क्रिकेट फॉर्मेट में जबरदस्त गेंदबाजी की और टीम इंडिया के लिए कई मैच जिताऊ प्रदर्शन भी किया है। बीसीसीआई ने हाल ही में ट्विटर पर भुवनेश्वर कुमार की एक वीडियो शेयर की है जिसमें उन्होंने थाला की तारीफ की है। उन्होंने वीडियो में कहा कि धोनी हमेशा सबकी मदद करते थे और युवा खिलाड़ियों को अच्छी तरीके से गाइड करते थे। भुवी ने वीडियो में कहा," मुझे लगता है की मैंने उनको रिटायरमेंट के समय यह पोस्ट किया था। सभी जानते थे कि वो किस तरह के खिलाड़ी है। लेकिन मैंने पोस्ट किया था कि वो बतौर इंसान कैसे है। वो हमेशा दूसरों की मदद करते हैं। अगर आप किसी से भी धोनी से बात करे तो वो आपको बताएंगे की को कितने मददगार थे। वो हमेशा युवा खिलाड़ियों को सही राह दिखाते थे।" बता दें कि धोनी ने साल दो हज़ार बीस में पंद्रह अगस्त को इंटरनेशनल क्रिकेट से अलविदा कहा था। धोनी के अलावा उसी दिन टीम इंडिया के उनके साथी खिलाड़ी सुरेश रैना ने भी इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहा।
Donal Bisht (Photo Credit: social media) नई दिल्लीः Donal Bisht: टीवी एक्ट्रेस डोनल बिष्ट फ्रॉड का शिकार हो गई हैं. एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी दी है. डोनल बिष्ट ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर कर बताया कि उन्हें करण जौहर के नाम पर बने फेक प्रोडक्शन हाउस से लगातार कॉल और ईमेल आ रहे थे. यहां फ्रॉड एक्ट्रेस से करण जौहर बनकर बात करने की कोशिश कर रहे थे. हालांकि, एक्ट्रेस ने इसे फेक समझा और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया. डोनल बिष्ट ने मुंबई में फर्जी कास्टिंग और फ्रॉड को लेकर लोगों को अलर्ट किया है. एक्ट्रेस ने एक्टिंग करने वाले लोगों से ऐसे धोखेबाजों से सावधान रहने की चेतावनी दी. उन्होंने एक लंबे इंस्टा पोस्ट में बताया कि किस तरह फ्रॉड करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन हाउस के नाम का इस्तेमाल करके फर्जी आईडी बनाकर कास्टिंग के नाम पर ठगी करते हैं. एक्ट्रेस ने इसका स्क्रीनशॉट अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया है. स्क्रीनशॉट में एक मेल दिखाया गया है जिसमें डोनल से प्रोजेक्ट के बारे में कन्फर्मेशन भेजने के लिए कहा गया है ताकि वे आगे बढ़ सकें. मेल का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए डोनल ने लिखा, "कोई मुझे लगातार मेल कर रहा है, मुझे लगता है कि फर्जी #Dharmaproductions ईमेल आईडी से ऐसा हो रहा है. कृपया इस पर गौर करें. मुझे उम्मीद है कि लोग इसमें नहीं फंसेंगे. " डोनल ने करण जौहर और उनके प्रोडक्शन हाउस को भी टैग किया ताकि लोगों को इसके बारे में पता चले. फैंस भी डोनल के इस पोस्ट पर रिएक्शन दे रहे हैं. ज्यादातर लोगों ने इंटरनेट पर इस तरह के फ्रॉड से बचने की सलाह दी. कुछ फैंस ने डोनल की हिम्मत की दाद देते हुए उनके इस कदम की तारीफ भी की. इससे पहले डोनल ने बॉलीवुड में काम करने को लेकर अपनी इच्छा जाहिर की थी. उन्होंने कहा था कि, "सिल्वर स्क्रीन पर काम करना हर किसी का सपना होता है तो मेरा भी है. मैं स्क्रीन पर ऐश्वर्या, करीना को देखते हुए बड़ी हुई हूं. मैं 'छैंया-छैंया' पर डांस करती थी. मैं कड़ी मेहनत करना जारी रखूंगी. मैं एक्शन से लेकर हर तरह के रोल करना चाहूंगी. डोनल के वर्क फ्रंट की बात करें तो वो गश्मीर महाजनी के साथ एक वेब शो में नजर आई थीं.
Donal Bisht नई दिल्लीः Donal Bisht: टीवी एक्ट्रेस डोनल बिष्ट फ्रॉड का शिकार हो गई हैं. एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी दी है. डोनल बिष्ट ने अपने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर कर बताया कि उन्हें करण जौहर के नाम पर बने फेक प्रोडक्शन हाउस से लगातार कॉल और ईमेल आ रहे थे. यहां फ्रॉड एक्ट्रेस से करण जौहर बनकर बात करने की कोशिश कर रहे थे. हालांकि, एक्ट्रेस ने इसे फेक समझा और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया. डोनल बिष्ट ने मुंबई में फर्जी कास्टिंग और फ्रॉड को लेकर लोगों को अलर्ट किया है. एक्ट्रेस ने एक्टिंग करने वाले लोगों से ऐसे धोखेबाजों से सावधान रहने की चेतावनी दी. उन्होंने एक लंबे इंस्टा पोस्ट में बताया कि किस तरह फ्रॉड करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन हाउस के नाम का इस्तेमाल करके फर्जी आईडी बनाकर कास्टिंग के नाम पर ठगी करते हैं. एक्ट्रेस ने इसका स्क्रीनशॉट अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया है. स्क्रीनशॉट में एक मेल दिखाया गया है जिसमें डोनल से प्रोजेक्ट के बारे में कन्फर्मेशन भेजने के लिए कहा गया है ताकि वे आगे बढ़ सकें. मेल का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए डोनल ने लिखा, "कोई मुझे लगातार मेल कर रहा है, मुझे लगता है कि फर्जी #Dharmaproductions ईमेल आईडी से ऐसा हो रहा है. कृपया इस पर गौर करें. मुझे उम्मीद है कि लोग इसमें नहीं फंसेंगे. " डोनल ने करण जौहर और उनके प्रोडक्शन हाउस को भी टैग किया ताकि लोगों को इसके बारे में पता चले. फैंस भी डोनल के इस पोस्ट पर रिएक्शन दे रहे हैं. ज्यादातर लोगों ने इंटरनेट पर इस तरह के फ्रॉड से बचने की सलाह दी. कुछ फैंस ने डोनल की हिम्मत की दाद देते हुए उनके इस कदम की तारीफ भी की. इससे पहले डोनल ने बॉलीवुड में काम करने को लेकर अपनी इच्छा जाहिर की थी. उन्होंने कहा था कि, "सिल्वर स्क्रीन पर काम करना हर किसी का सपना होता है तो मेरा भी है. मैं स्क्रीन पर ऐश्वर्या, करीना को देखते हुए बड़ी हुई हूं. मैं 'छैंया-छैंया' पर डांस करती थी. मैं कड़ी मेहनत करना जारी रखूंगी. मैं एक्शन से लेकर हर तरह के रोल करना चाहूंगी. डोनल के वर्क फ्रंट की बात करें तो वो गश्मीर महाजनी के साथ एक वेब शो में नजर आई थीं.
शिमला, कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में लंच फेयरवेल और रिटायरमेंट पार्टियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने जिला अधिकारियों और प्रधानाचार्यों को इस सम्बंध में निर्देश जारी किये हैं। शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि इन कार्यक्रमों से कोविड 19 से बचाव के नियमों का उल्लंघन हो रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों और शिक्षकों के हित में ऐसे कार्यक्रम शिक्षण संस्थानों में आयोजित नहीं किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि स्कूलों-कॉलेजों में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के बाद प्रदेश सरकार ने 15 दिन के लिए 25 नवम्बर तक शिक्षण संस्थान बंद कर दिये हैं। अब 26 नवम्बर से शिक्षण संस्थान पुनः खुलेंगे। ऐसे में एहतियात बरतते हुए सरकार ने शिक्षण संस्थानों में फेयरवेल, लंच और रिटायरमेंट पार्टियों के आयोजनों पर रोक लगाने का फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि गत दिनों प्रदेश के कुछ स्कूलों में इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन हुआ है जहां कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए तय एसओपी की अनदेखी होने से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े। भविष्य में ऐसा न हो, इसके लिए ऐसे कार्यक्रमों के आयोजनों पर रोक लगा दी गई है।
शिमला, कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर हिमाचल प्रदेश सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों में लंच फेयरवेल और रिटायरमेंट पार्टियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने जिला अधिकारियों और प्रधानाचार्यों को इस सम्बंध में निर्देश जारी किये हैं। शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने बताया कि इन कार्यक्रमों से कोविड उन्नीस से बचाव के नियमों का उल्लंघन हो रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों और शिक्षकों के हित में ऐसे कार्यक्रम शिक्षण संस्थानों में आयोजित नहीं किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि स्कूलों-कॉलेजों में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के बाद प्रदेश सरकार ने पंद्रह दिन के लिए पच्चीस नवम्बर तक शिक्षण संस्थान बंद कर दिये हैं। अब छब्बीस नवम्बर से शिक्षण संस्थान पुनः खुलेंगे। ऐसे में एहतियात बरतते हुए सरकार ने शिक्षण संस्थानों में फेयरवेल, लंच और रिटायरमेंट पार्टियों के आयोजनों पर रोक लगाने का फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि गत दिनों प्रदेश के कुछ स्कूलों में इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन हुआ है जहां कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए तय एसओपी की अनदेखी होने से कोरोना संक्रमण के मामले बढ़े। भविष्य में ऐसा न हो, इसके लिए ऐसे कार्यक्रमों के आयोजनों पर रोक लगा दी गई है।
दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु ने सैयद मोदी इंटरनेशनल बैडमिंटन टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम कर लिया है. रविवार को हुए फाइनल में पूर्व विश्व चैम्पियन सिंधु ने भारत की ही मालविका बंसोद को 21-13 और 21-16 से हरा दिया . सैयद मोदी इंटरनेशल बैडमिंटन टूर्नामेंट में सिन्धु की यह दूसरी जीत है. इससे पहले उन्होंने 2017 में भी इस बीडब्लयूएफ विश्व टूर सुपर 300 टूर्नामेंट का खिताब जीता था. इससे पहले इशान भटनागर और तनीषा क्रास्टो की भारतीय जोड़ी ने हमवतन टी हेमा नागेंद्र बाबू और श्रीवेद्या गुराजादा को सीधे गेम में हराकर मिश्रित युगल का खिताब अपने नाम किया. कोविड-19 के कई मामलों के कारण कई शीर्ष खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में हो रहे इस टूर्नामेंट में शीर्ष वरीय सिंधू को एकतरफा फाइनल में मालविका के खिलाफ 21-13 21-16 की जीत के दौरान ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी. सिंधू ने फाइनल में जीत सिर्फ 35 मिनट में दर्ज कर ली. इशान और तनीषा ने गैरवरीय भारतीय जोड़ी के खिलाफ सिर्फ 29 मिनट में 21-16 21-12 से जीत दर्ज की. अर्नाड मर्कल और लुकास क्लेयरबाउट के बीच पुरुष एकल खिताबी मुकाबले को 'नो मैच' (मैच नहीं हुआ) घोषित किया गया जब एक फाइनलिस्ट कोविड-19 पॉजिटिव पाया गया. इससे पहले पीवी सिंधु ने शनिवार को 5वीं वरीयता प्राप्त रूसी प्रतिद्वंद्वी इवजेनिया कोसेतस्काया के सेमीफाइनल में रिटायर्ड हर्ट होने से सैयद मोदी इंटरनेशनल बैडमिंटन टूर्नामेंट के महिला सिंगल्स फाइनल में प्रवेश किया था. शीर्ष वरीय सिंधु ने आसानी से पहला गेम 21-11 से जीत लिया था, जिसके बाद कोसेतस्कया ने दूसरे महिला एकल सेमीफाइनल मैच से रिटायर्ड हर्ट होकर हटने का फैसला किया था.
दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु ने सैयद मोदी इंटरनेशनल बैडमिंटन टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम कर लिया है. रविवार को हुए फाइनल में पूर्व विश्व चैम्पियन सिंधु ने भारत की ही मालविका बंसोद को इक्कीस-तेरह और इक्कीस-सोलह से हरा दिया . सैयद मोदी इंटरनेशल बैडमिंटन टूर्नामेंट में सिन्धु की यह दूसरी जीत है. इससे पहले उन्होंने दो हज़ार सत्रह में भी इस बीडब्लयूएफ विश्व टूर सुपर तीन सौ टूर्नामेंट का खिताब जीता था. इससे पहले इशान भटनागर और तनीषा क्रास्टो की भारतीय जोड़ी ने हमवतन टी हेमा नागेंद्र बाबू और श्रीवेद्या गुराजादा को सीधे गेम में हराकर मिश्रित युगल का खिताब अपने नाम किया. कोविड-उन्नीस के कई मामलों के कारण कई शीर्ष खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में हो रहे इस टूर्नामेंट में शीर्ष वरीय सिंधू को एकतरफा फाइनल में मालविका के खिलाफ इक्कीस-तेरह इक्कीस-सोलह की जीत के दौरान ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी. सिंधू ने फाइनल में जीत सिर्फ पैंतीस मिनट में दर्ज कर ली. इशान और तनीषा ने गैरवरीय भारतीय जोड़ी के खिलाफ सिर्फ उनतीस मिनट में इक्कीस-सोलह इक्कीस-बारह से जीत दर्ज की. अर्नाड मर्कल और लुकास क्लेयरबाउट के बीच पुरुष एकल खिताबी मुकाबले को 'नो मैच' घोषित किया गया जब एक फाइनलिस्ट कोविड-उन्नीस पॉजिटिव पाया गया. इससे पहले पीवी सिंधु ने शनिवार को पाँचवीं वरीयता प्राप्त रूसी प्रतिद्वंद्वी इवजेनिया कोसेतस्काया के सेमीफाइनल में रिटायर्ड हर्ट होने से सैयद मोदी इंटरनेशनल बैडमिंटन टूर्नामेंट के महिला सिंगल्स फाइनल में प्रवेश किया था. शीर्ष वरीय सिंधु ने आसानी से पहला गेम इक्कीस-ग्यारह से जीत लिया था, जिसके बाद कोसेतस्कया ने दूसरे महिला एकल सेमीफाइनल मैच से रिटायर्ड हर्ट होकर हटने का फैसला किया था.
व्यक्तिगत (Individual) ही ठहरती है क्योंकि यह मत को आलोच्य रचना के अपने रूप से समझने और समझाने तथा उसकी श्लाघा करने से पूर्ण स्वतंत्रता दे देता है । इस प्रकार की स्वतंत्रता मे यह भय रहता है कि आलोचक को अपने उस उत्तरदायित्व की उपेक्षा करने का प्रोत्साहन प्राप्त होता है जो उसके लिए अनिवार्य है और जिसकी उससे समस्त पाठक-समाज आशा करता है। उसकी आलोचना की ज़िम्मेदारी उसके ऊपर इसलिए नही रहती चूँकि वह किसी सर्वमान्य विधान से बाध्य नही होता, और कह सकता है कि मैं जैसा इस रचना का अनुभव करता हूँ, वैसा ही प्रकट करता हूँ और यही मेरा व्यक्तिगत अनुभव या विचार है, मुझे इससे कोई भी मतलब नही कि दूसरे इसे कैसा समझते तथा अनुभवित करते हैं । अस्तु ऐसी दशा मे आलोचक के लिए कोई नियम ही नही रह जाता। इस कठिनाई के दूर करने का प्रयत्न कुछ विद्वानों ने जैसे महाशय मैंज़नी आदि ने किया है और यह विधान बनाया है कि आलोचक के लिए वे नियम, जिनके आधार पर अपनी आलोच्य रचना का निरीक्षण और निर्णय करेगा. उसी आलोच्य रचना के अन्दर प्राप्त होगे, उसे उन नियमो को खोज कर अपने लिए निकाल लेना चाहिए । प्रायः इस प्रकार के प्रश्नों से इन नियमो की प्राप्ति होती - १ - रचयिता का रचना करने में क्या विचार या उद्देश्य था, किस इरादे से उसने यह रचना की है, २ - और उसका वह विचार, उद्देश्य या इरादा सर्वथा न्याय संगत, उपयुक्त और उपाय है या नहीं, यदि है तो कहाँ तक और किस रूप में, ३ - उसने अपने उद्देश्य का सफलता पूर्वक निर्वाह किया है या नहीं, इसके लिए उसे उसके मंतव्य की छानबीन करते हुए उसके मूल्य का भी निर्णय करना चाहिए तथा उसकी विशेषतायें देखनी चाहिए । यद्यपि ऐसे विधान के बनाने से सौष्ठव - बाद के सिद्धान्त को कुछ आघात-सा अवश्य पहुॅचता है, तथापि है यह उपयुक्त ही। इस व्यवस्था पर कुछ विद्वानो ने आपत्तियाँ भी उठाई हैं और कहा है कि रचयिता का मंतव्य या उद्देश्य - चूँकि वह उसकी स्पष्ट विज्ञप्ति तो देता ही नहीं और यदि दे भी तो वह सर्वथा मान्य नहीं होती - निश्चित रूप से जाना ही नहीं जा सकता, केवल उसका अनुमान ही किया जा सकता है, वह सर्वथा सत्य और सम्भव न होकर केवल सम्भावना की निकटवर्ती सूचना ही- सी हो सकती है। रचना के प्रभाव से ही कुछ अनुमान उसके सम्बन्ध में किया जा सकता है, किन्तु यह प्रभाव सब पर समान रूप से नही पड़ता । हॉ यदि उद्देश्य सफलता के साथ प्रकट किया गया है तो अवश्य ज्ञात हो जाता है । किन्तु इस प्रकार उत्त द्वितीय प्रश्न व्यर्थ ही सा हो जाता है । अव केवल विशेषताओं का प्रश्न रह जाता है, इसके लिए उनकी व्यापक प्रकृति, तथा उनका मूल
व्यक्तिगत ही ठहरती है क्योंकि यह मत को आलोच्य रचना के अपने रूप से समझने और समझाने तथा उसकी श्लाघा करने से पूर्ण स्वतंत्रता दे देता है । इस प्रकार की स्वतंत्रता मे यह भय रहता है कि आलोचक को अपने उस उत्तरदायित्व की उपेक्षा करने का प्रोत्साहन प्राप्त होता है जो उसके लिए अनिवार्य है और जिसकी उससे समस्त पाठक-समाज आशा करता है। उसकी आलोचना की ज़िम्मेदारी उसके ऊपर इसलिए नही रहती चूँकि वह किसी सर्वमान्य विधान से बाध्य नही होता, और कह सकता है कि मैं जैसा इस रचना का अनुभव करता हूँ, वैसा ही प्रकट करता हूँ और यही मेरा व्यक्तिगत अनुभव या विचार है, मुझे इससे कोई भी मतलब नही कि दूसरे इसे कैसा समझते तथा अनुभवित करते हैं । अस्तु ऐसी दशा मे आलोचक के लिए कोई नियम ही नही रह जाता। इस कठिनाई के दूर करने का प्रयत्न कुछ विद्वानों ने जैसे महाशय मैंज़नी आदि ने किया है और यह विधान बनाया है कि आलोचक के लिए वे नियम, जिनके आधार पर अपनी आलोच्य रचना का निरीक्षण और निर्णय करेगा. उसी आलोच्य रचना के अन्दर प्राप्त होगे, उसे उन नियमो को खोज कर अपने लिए निकाल लेना चाहिए । प्रायः इस प्रकार के प्रश्नों से इन नियमो की प्राप्ति होती - एक - रचयिता का रचना करने में क्या विचार या उद्देश्य था, किस इरादे से उसने यह रचना की है, दो - और उसका वह विचार, उद्देश्य या इरादा सर्वथा न्याय संगत, उपयुक्त और उपाय है या नहीं, यदि है तो कहाँ तक और किस रूप में, तीन - उसने अपने उद्देश्य का सफलता पूर्वक निर्वाह किया है या नहीं, इसके लिए उसे उसके मंतव्य की छानबीन करते हुए उसके मूल्य का भी निर्णय करना चाहिए तथा उसकी विशेषतायें देखनी चाहिए । यद्यपि ऐसे विधान के बनाने से सौष्ठव - बाद के सिद्धान्त को कुछ आघात-सा अवश्य पहुॅचता है, तथापि है यह उपयुक्त ही। इस व्यवस्था पर कुछ विद्वानो ने आपत्तियाँ भी उठाई हैं और कहा है कि रचयिता का मंतव्य या उद्देश्य - चूँकि वह उसकी स्पष्ट विज्ञप्ति तो देता ही नहीं और यदि दे भी तो वह सर्वथा मान्य नहीं होती - निश्चित रूप से जाना ही नहीं जा सकता, केवल उसका अनुमान ही किया जा सकता है, वह सर्वथा सत्य और सम्भव न होकर केवल सम्भावना की निकटवर्ती सूचना ही- सी हो सकती है। रचना के प्रभाव से ही कुछ अनुमान उसके सम्बन्ध में किया जा सकता है, किन्तु यह प्रभाव सब पर समान रूप से नही पड़ता । हॉ यदि उद्देश्य सफलता के साथ प्रकट किया गया है तो अवश्य ज्ञात हो जाता है । किन्तु इस प्रकार उत्त द्वितीय प्रश्न व्यर्थ ही सा हो जाता है । अव केवल विशेषताओं का प्रश्न रह जाता है, इसके लिए उनकी व्यापक प्रकृति, तथा उनका मूल
लखनऊ के बाजारखाला के ऐशबाग में बुधवार दोपहर को सिरफिरे आशिक ने प्रेमिका की बेवफाई से आजिज होकर उसके घर में आग लगा दी। सिरफिरा अपनी प्रेमिका को वापस बुला रहा था, न आने पर उसके घर में आग लगा देने की धमकी दे रहा था। उसके बुलाने पर प्रेमिका नहीं पहुंची। आक्रोशित प्रेमी बुधवार को प्रेमिका के घर में घुस गया और किचन में रखे गैस सिलेण्डर के जरिए आग लगा दी। आग ने कुछ ही पलों में विभत्स रूप ले लिया। सूचना पाकर मौके पर स्थानीय पुलिस पहुंच गई। दमकल की गाडिय़ां आने से पूर्व ही पुलिस कर्मियों ने आरोपित युवक और जलते हुए सिलेण्डर को बाहर निकाल लिया, लेकिन तब तक घर में रखा काफी समान जल कर खाक हो गया था। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक ऐशबाग निवासी 47 वर्षीय चेतराम लोधी पुताई का काम करता है। वर्ष 2006 वह स्थानीय निवासिनी तलाक शुदा महिला के घर में पुताई कर रहा था। इस दौरान महिला और चेतराम के बीच प्रेम प्रसंग हो गया था। कुछ समय पश्चात दोनों लिव इन रिलेशन में रहने लगे थे। जबकि चेतराम पहले से शादीशुदा था। उसकी पत्नी प्रेमलता लोधी व बेटी आरती, मोना, अनन्या बेटा आदित्य है, जो करेहटा में रहते है। बताया जा रहा है कि इस बीच महिला का प्रेम प्रसंग किसी और से हो गया था। उसने चेतराम से बातचीत करना छोड़ दी थी। बस यही बात चेतराम को बुरी लग गई थी। चेतराम अक्सर उससे मिलने के लिए कहता था, लेकिन महिला नहीं मिलती थी। कुछ दिनों पूर्व चेतराम दवाई के रैपर पर महिला से मिलने के लिए लिखा था, न मिलने पर घर जला देने की धमकी दी थी। महिला के न मिलने पर चेतराम बुधवार दोपहर उसके घर पहुंच गया। जबरन किचन में घुस गया और गैस सिलेण्डर का पाइप खोलकर उसने आग लगा दी। एलपीजी गैस के चलते आग ने तत्काल विभत्स रूप ले लिया। कुछ ही पलों में घर से धुंए का गुबार निकलने लगा। स्थानीय लोग दहशत में आ गये। सूचना पाकर मौके पर तत्काल स्थानीय पुलिस पहुंच गई। पुलिस दमकल विभाग को सूचना दी, लेकिन आग हर पल और भी विभत्स होती जा रही थी। इस पर पुलिस कर्मी अपनी जान की परवाह न करते हुए घर में घुस गया और अन्दर मौजूद युवक व जलते सिलेण्डर को घसीट लाया। दमकल गाड़ी के आने के पूर्व ही पुलिस कर्मियों ने कुछ ही देर में आग पर काबू पा लिया। हालांकि तब तक आग की चपेट में आकर घर में रखा काफी सामान जल कर खाक हो गया था। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। चेतराम और महिला पिछले कई वर्षों से लिव-इन रिलेशन में रह रहे थे। इसकी जानकारी महिला के परिजनों को भी थी। महिला से संबंध को लेकर चेतराम का उसकी पत्नी से विवाद भी हुआ करता था। पिछले कुछ दिनों पूर्व महिला की दोस्ती फेसबुक के जरिए राजस्थान में रहने वाले एक युवक से हो गई थी। जिसके बाद से वह चेतराम से दूर हो गई थी। राजस्थान में रहने वाले युवक से महिला मिलने जाया करती थी। बस यही बात चेतराम को बुरी लग गई थी और उसने बदला लेने की ठान ली थी।
लखनऊ के बाजारखाला के ऐशबाग में बुधवार दोपहर को सिरफिरे आशिक ने प्रेमिका की बेवफाई से आजिज होकर उसके घर में आग लगा दी। सिरफिरा अपनी प्रेमिका को वापस बुला रहा था, न आने पर उसके घर में आग लगा देने की धमकी दे रहा था। उसके बुलाने पर प्रेमिका नहीं पहुंची। आक्रोशित प्रेमी बुधवार को प्रेमिका के घर में घुस गया और किचन में रखे गैस सिलेण्डर के जरिए आग लगा दी। आग ने कुछ ही पलों में विभत्स रूप ले लिया। सूचना पाकर मौके पर स्थानीय पुलिस पहुंच गई। दमकल की गाडिय़ां आने से पूर्व ही पुलिस कर्मियों ने आरोपित युवक और जलते हुए सिलेण्डर को बाहर निकाल लिया, लेकिन तब तक घर में रखा काफी समान जल कर खाक हो गया था। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के मुताबिक ऐशबाग निवासी सैंतालीस वर्षीय चेतराम लोधी पुताई का काम करता है। वर्ष दो हज़ार छः वह स्थानीय निवासिनी तलाक शुदा महिला के घर में पुताई कर रहा था। इस दौरान महिला और चेतराम के बीच प्रेम प्रसंग हो गया था। कुछ समय पश्चात दोनों लिव इन रिलेशन में रहने लगे थे। जबकि चेतराम पहले से शादीशुदा था। उसकी पत्नी प्रेमलता लोधी व बेटी आरती, मोना, अनन्या बेटा आदित्य है, जो करेहटा में रहते है। बताया जा रहा है कि इस बीच महिला का प्रेम प्रसंग किसी और से हो गया था। उसने चेतराम से बातचीत करना छोड़ दी थी। बस यही बात चेतराम को बुरी लग गई थी। चेतराम अक्सर उससे मिलने के लिए कहता था, लेकिन महिला नहीं मिलती थी। कुछ दिनों पूर्व चेतराम दवाई के रैपर पर महिला से मिलने के लिए लिखा था, न मिलने पर घर जला देने की धमकी दी थी। महिला के न मिलने पर चेतराम बुधवार दोपहर उसके घर पहुंच गया। जबरन किचन में घुस गया और गैस सिलेण्डर का पाइप खोलकर उसने आग लगा दी। एलपीजी गैस के चलते आग ने तत्काल विभत्स रूप ले लिया। कुछ ही पलों में घर से धुंए का गुबार निकलने लगा। स्थानीय लोग दहशत में आ गये। सूचना पाकर मौके पर तत्काल स्थानीय पुलिस पहुंच गई। पुलिस दमकल विभाग को सूचना दी, लेकिन आग हर पल और भी विभत्स होती जा रही थी। इस पर पुलिस कर्मी अपनी जान की परवाह न करते हुए घर में घुस गया और अन्दर मौजूद युवक व जलते सिलेण्डर को घसीट लाया। दमकल गाड़ी के आने के पूर्व ही पुलिस कर्मियों ने कुछ ही देर में आग पर काबू पा लिया। हालांकि तब तक आग की चपेट में आकर घर में रखा काफी सामान जल कर खाक हो गया था। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। चेतराम और महिला पिछले कई वर्षों से लिव-इन रिलेशन में रह रहे थे। इसकी जानकारी महिला के परिजनों को भी थी। महिला से संबंध को लेकर चेतराम का उसकी पत्नी से विवाद भी हुआ करता था। पिछले कुछ दिनों पूर्व महिला की दोस्ती फेसबुक के जरिए राजस्थान में रहने वाले एक युवक से हो गई थी। जिसके बाद से वह चेतराम से दूर हो गई थी। राजस्थान में रहने वाले युवक से महिला मिलने जाया करती थी। बस यही बात चेतराम को बुरी लग गई थी और उसने बदला लेने की ठान ली थी।
Road Safety With Jagran पठानकोट-मंडी एनएच पर वाहनों का दबाव बहुत ज्यादा है। लेकिन मार्ग अभी तक फोरलेन नहीं बन पाया है। कई जगह यह हाईवे सिंगल लेन भी है। यहां कई हादसे होते हैं। हादसे रोकने के लिए तीखे मोड़ पर अब हनुमान जी के मंदिर बना दिए हैं। बैजनाथ, संवाद सहयोगी। Road Safety With Jagran, पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। हिमाचल, पंजाब व जम्मू के एक बड़े हिस्से को यह मार्ग मंडी, मनाली व शिमला से जोड़ता है। करीब 219 किलोमीटर लंबे इस मार्ग में रोजाना हजारों वाहन आवाजाही करते हैं। इस मार्ग को अब फोरलेन बनाया जा रहा है, लेकिन मौजूदा समय में इसका अधिकांश हिस्सा टूलेन और काफी जगह पर सिंगल लेन ही है। इस हाईवे में ऐसे कई ब्लैक स्पाट हैं, जहां अब तक हजारों हादसे हो चुके हैं। हादसों को रोकने के लिए नेशनल हाइवे अथारिटी आफ इंडिया ने अभी कदम उठाना शुरू किया है। कुछ जगह पर क्रैश बैरियर लगाए जा रहे हैं तो चेतावनी बोर्ड लगाने का क्रम भी शुरू हो रहा है। पिछले दो दशक से इस मार्ग में अधिकांश ब्लैक स्पाट में जब हादसों का क्रम नहीं रुका तो जहां भी हादसे हुए वहां लोगों ने हनुमान जी के मंदिर बनाना शुरू कर दिए। इस मार्ग में अगर आप सफर करेंगे तो आपको 50 से अधिक स्थानों में भगवान हनुमान जी के मंदिर नजर आएंगे। कुछ कठिन मोड़ों में भगवान हनुमान जी की मूर्तियां भी प्रतिष्ठापित की गई हैं। सबसे पहले यहां हनुमान जी का मंदिर त्रिलोकपुर और कोटला के बीच में प्रतिष्ठापित किया गया था। वहां भी काफी हादसे होते थे लेकिन अब इस मार्ग में आपको जगह-जगह हनुमान जी के मंदिर मिल जाएंगे। जहां भी हनुमान जी के मंदिर बने हैं, उन स्थानों में पहले कई हादसे हुए थे। मंदिर बनने के बाद अब हादसों का क्रम थम गया है। हालांकि इसे लेकर विभागीय अधिकारी आधिकारिक तौर पर तो कुछ नहीं कहते, लेकिन नेशनल हाईवे और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि निश्चित रूप से मूर्तियां लगाने से ब्लैक स्पाट में हादसे थमे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि जब लोग हनुमान जी का मंदिर देखते हैं तो माथा टेकने के लिए अपने वाहन की गति को धीमा कर देते हैं। साथ ही उन्हें ब्लैक स्पाट की भी याद आती है। ऐसे में इस हाईवे के एक बड़े हिस्से में हनुमान जी ही रक्षा करते हैं। जहां पर ये मंदिर बने हैं, वहां वाहन चालक खुद ही वाहनों की गति को कम कर वहां पूजा-अर्चना के लिए रुकते हैं।
Road Safety With Jagran पठानकोट-मंडी एनएच पर वाहनों का दबाव बहुत ज्यादा है। लेकिन मार्ग अभी तक फोरलेन नहीं बन पाया है। कई जगह यह हाईवे सिंगल लेन भी है। यहां कई हादसे होते हैं। हादसे रोकने के लिए तीखे मोड़ पर अब हनुमान जी के मंदिर बना दिए हैं। बैजनाथ, संवाद सहयोगी। Road Safety With Jagran, पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है। हिमाचल, पंजाब व जम्मू के एक बड़े हिस्से को यह मार्ग मंडी, मनाली व शिमला से जोड़ता है। करीब दो सौ उन्नीस किलोग्राममीटर लंबे इस मार्ग में रोजाना हजारों वाहन आवाजाही करते हैं। इस मार्ग को अब फोरलेन बनाया जा रहा है, लेकिन मौजूदा समय में इसका अधिकांश हिस्सा टूलेन और काफी जगह पर सिंगल लेन ही है। इस हाईवे में ऐसे कई ब्लैक स्पाट हैं, जहां अब तक हजारों हादसे हो चुके हैं। हादसों को रोकने के लिए नेशनल हाइवे अथारिटी आफ इंडिया ने अभी कदम उठाना शुरू किया है। कुछ जगह पर क्रैश बैरियर लगाए जा रहे हैं तो चेतावनी बोर्ड लगाने का क्रम भी शुरू हो रहा है। पिछले दो दशक से इस मार्ग में अधिकांश ब्लैक स्पाट में जब हादसों का क्रम नहीं रुका तो जहां भी हादसे हुए वहां लोगों ने हनुमान जी के मंदिर बनाना शुरू कर दिए। इस मार्ग में अगर आप सफर करेंगे तो आपको पचास से अधिक स्थानों में भगवान हनुमान जी के मंदिर नजर आएंगे। कुछ कठिन मोड़ों में भगवान हनुमान जी की मूर्तियां भी प्रतिष्ठापित की गई हैं। सबसे पहले यहां हनुमान जी का मंदिर त्रिलोकपुर और कोटला के बीच में प्रतिष्ठापित किया गया था। वहां भी काफी हादसे होते थे लेकिन अब इस मार्ग में आपको जगह-जगह हनुमान जी के मंदिर मिल जाएंगे। जहां भी हनुमान जी के मंदिर बने हैं, उन स्थानों में पहले कई हादसे हुए थे। मंदिर बनने के बाद अब हादसों का क्रम थम गया है। हालांकि इसे लेकर विभागीय अधिकारी आधिकारिक तौर पर तो कुछ नहीं कहते, लेकिन नेशनल हाईवे और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि निश्चित रूप से मूर्तियां लगाने से ब्लैक स्पाट में हादसे थमे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि जब लोग हनुमान जी का मंदिर देखते हैं तो माथा टेकने के लिए अपने वाहन की गति को धीमा कर देते हैं। साथ ही उन्हें ब्लैक स्पाट की भी याद आती है। ऐसे में इस हाईवे के एक बड़े हिस्से में हनुमान जी ही रक्षा करते हैं। जहां पर ये मंदिर बने हैं, वहां वाहन चालक खुद ही वाहनों की गति को कम कर वहां पूजा-अर्चना के लिए रुकते हैं।
कोच्चि। केरल उच्च न्यायालय ने केंद्र को निर्देश दिया है कि Corona Vaccine जो लोग कोविशील्ड टीके की पहली खुराक के बाद, वर्तमान में सुझाए गए 84 दिनों के अंतराल से पहले दूसरी खुराक लेना चाहते हैं, उनके लिए पहली खुराक लेने के चार सप्ताह बाद को-विन पोर्टल पर दूसरी खुराक का समय लेने की अनुमति दी जाए। न्यायमूर्ति पी बी सुरेश कुमार ने कहा कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें विदेश यात्रा करने वाले व्यक्तियों को कोविड-19 से जल्दी Corona Vaccine और बेहतर सुरक्षा के बीच चयन करने की अनुमति दे सकती हैं, तो कोई कारण नहीं है कि समान विशेषाधिकार यहां उन लोगों को नहीं दिया जा सकता है जो अपने रोजगार या शिक्षा के संबंध में जल्द सुरक्षा चाहते हैं। अदालत ने कहा, " सभी लोग ऐसे नहीं हैं जोकि स्थायी रूप से विदेश में रहते हैं या वहां बस गए हैं। अधिकतर लोग ऐसे हैं जिन्हें अपना काम पूरा होने के बाद जल्द ही वापस भारत आना होगा।" सोमवार को उपलब्ध कराए गए अपने तीन सितंबर के आदेश में Corona Vaccine उच्च न्यायालय ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की नीति के अनुसार भी लोगों के पास जल्दी टीकाकरण कराने का विकल्प है, जिसके कार्यान्वयन के लिए निजी अस्पतालों के माध्यम से भी भुगतान के आधार पर टीका वितरित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र के अनुसार टीकाकरण स्वैच्छिक था और Corona Vaccine यह अनिवार्य नहीं था इसलिए टीके के बेहतर प्रभाव के मद्देनजर दोनों खुराक के बीच के अंतराल के सुझाव को केवल परामर्श के तौर पर लिया जा सकता है। अदालत ने कहा कि जब लोगों को टीका लेने या इससे इंकार करने का अधिकार है, तो कोई कारण नहीं है कि राज्य को यह रुख अपनाना चाहिए कि उन्हें मूल प्रोटोकॉल के संदर्भ में चार सप्ताह के बाद दूसरी खुराक लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अदालत ने काइटेक्स गारमेंट्स Corona Vaccine लिमिटेड की याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्देश दिए, जिसमें 84 दिनों तक इंतजार किए बिना अपने कर्मचारियों को कोविशील्ड टीके की दूसरी खुराक देने की अनुमति प्रदान करने का अनुरोध किया गया था। कंपनी ने अपनी याचिका में कहा कि वह पहले ही अपने 5,000 से अधिक कामगारों को टीके की पहली खुराक लगवा Corona Vaccine चुकी है और उसने लगभग 93 लाख रुपये की लागत से दूसरी खुराक की व्यवस्था भी की है, लेकिन मौजूदा प्रतिबंधों के कारण इसे कामगारों को लगवाने में वह असमर्थ है। केंद्र ने टीका संबंधी विशेषज्ञों की अनुशंसा का हवाला देते हुए याचिका का विरोध किया और दलील Corona Vaccine दी थी कि कोविशील्ड की दो खुराक के बीच 84 दिनों का अंतराल टीके की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए तय किया गया था।
कोच्चि। केरल उच्च न्यायालय ने केंद्र को निर्देश दिया है कि Corona Vaccine जो लोग कोविशील्ड टीके की पहली खुराक के बाद, वर्तमान में सुझाए गए चौरासी दिनों के अंतराल से पहले दूसरी खुराक लेना चाहते हैं, उनके लिए पहली खुराक लेने के चार सप्ताह बाद को-विन पोर्टल पर दूसरी खुराक का समय लेने की अनुमति दी जाए। न्यायमूर्ति पी बी सुरेश कुमार ने कहा कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें विदेश यात्रा करने वाले व्यक्तियों को कोविड-उन्नीस से जल्दी Corona Vaccine और बेहतर सुरक्षा के बीच चयन करने की अनुमति दे सकती हैं, तो कोई कारण नहीं है कि समान विशेषाधिकार यहां उन लोगों को नहीं दिया जा सकता है जो अपने रोजगार या शिक्षा के संबंध में जल्द सुरक्षा चाहते हैं। अदालत ने कहा, " सभी लोग ऐसे नहीं हैं जोकि स्थायी रूप से विदेश में रहते हैं या वहां बस गए हैं। अधिकतर लोग ऐसे हैं जिन्हें अपना काम पूरा होने के बाद जल्द ही वापस भारत आना होगा।" सोमवार को उपलब्ध कराए गए अपने तीन सितंबर के आदेश में Corona Vaccine उच्च न्यायालय ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की नीति के अनुसार भी लोगों के पास जल्दी टीकाकरण कराने का विकल्प है, जिसके कार्यान्वयन के लिए निजी अस्पतालों के माध्यम से भी भुगतान के आधार पर टीका वितरित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र के अनुसार टीकाकरण स्वैच्छिक था और Corona Vaccine यह अनिवार्य नहीं था इसलिए टीके के बेहतर प्रभाव के मद्देनजर दोनों खुराक के बीच के अंतराल के सुझाव को केवल परामर्श के तौर पर लिया जा सकता है। अदालत ने कहा कि जब लोगों को टीका लेने या इससे इंकार करने का अधिकार है, तो कोई कारण नहीं है कि राज्य को यह रुख अपनाना चाहिए कि उन्हें मूल प्रोटोकॉल के संदर्भ में चार सप्ताह के बाद दूसरी खुराक लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अदालत ने काइटेक्स गारमेंट्स Corona Vaccine लिमिटेड की याचिका को स्वीकार करते हुए यह निर्देश दिए, जिसमें चौरासी दिनों तक इंतजार किए बिना अपने कर्मचारियों को कोविशील्ड टीके की दूसरी खुराक देने की अनुमति प्रदान करने का अनुरोध किया गया था। कंपनी ने अपनी याचिका में कहा कि वह पहले ही अपने पाँच,शून्य से अधिक कामगारों को टीके की पहली खुराक लगवा Corona Vaccine चुकी है और उसने लगभग तिरानवे लाख रुपये की लागत से दूसरी खुराक की व्यवस्था भी की है, लेकिन मौजूदा प्रतिबंधों के कारण इसे कामगारों को लगवाने में वह असमर्थ है। केंद्र ने टीका संबंधी विशेषज्ञों की अनुशंसा का हवाला देते हुए याचिका का विरोध किया और दलील Corona Vaccine दी थी कि कोविशील्ड की दो खुराक के बीच चौरासी दिनों का अंतराल टीके की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए तय किया गया था।
महोबाः महोबा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसे जानकर आप भी दंग रह जायेंगे। दरअसल, महोबा शहर कोतवाली इलाके में सब्जी मंडी परिसर के बाहर एक शख्स ठंड से बचने के लिए लाखों रुपए के नोट में आग जलाकर अपने आप को सेंक रहा था। युवक के इस हरकत के बारे में आस-पास के लोगो को जैसे ही पता लगा। वहां लोगो की भीड़ जमा हो गई। इस घटना को देखकर वहां मौजूद लोग हैरत में आ गये। शख्स ने कूड़े के ढेर में 500-500 के नोटों के लाखों की नकदी, 2 एंड्राइड मोबाइल और सोने-चांदी के गहनों को आग में स्वाहा कर दिया। आसपास के सफाई कर्मियों ने बताया कि युवक मानसिक रुप से विक्षिप्त है। अक्सर मंडी वाले इलाके में बैठा मिलता है। लेकिन आपको बता दें कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतना पैसा उसके पास आया कहां से, जिसको उसने आग में स्वाहा कर दिया। कूड़े के ढेर में लाखों की नकदी जला देने के बाद यह युवक हंसी के ठहाके लगा रहा था। लोगो ने बताया कि वह कहता कि मैं क्या करूं मुझे ठंड इतनी तेज लग रही थी कि मैं क्या करता। शीतलहर से बचने के लिए ही मैंने यह उपाय किया है। इस सनसनी खेज मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर इतना पैसा इस युवक के पास कहां से आया? एक पागल कैसे लाखों रुपए या सोने-चांदी के गहने रखे हुए था। कहीं यह सब चोरी का माल तो नहीं है।
महोबाः महोबा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसे जानकर आप भी दंग रह जायेंगे। दरअसल, महोबा शहर कोतवाली इलाके में सब्जी मंडी परिसर के बाहर एक शख्स ठंड से बचने के लिए लाखों रुपए के नोट में आग जलाकर अपने आप को सेंक रहा था। युवक के इस हरकत के बारे में आस-पास के लोगो को जैसे ही पता लगा। वहां लोगो की भीड़ जमा हो गई। इस घटना को देखकर वहां मौजूद लोग हैरत में आ गये। शख्स ने कूड़े के ढेर में पाँच सौ-पाँच सौ के नोटों के लाखों की नकदी, दो एंड्राइड मोबाइल और सोने-चांदी के गहनों को आग में स्वाहा कर दिया। आसपास के सफाई कर्मियों ने बताया कि युवक मानसिक रुप से विक्षिप्त है। अक्सर मंडी वाले इलाके में बैठा मिलता है। लेकिन आपको बता दें कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतना पैसा उसके पास आया कहां से, जिसको उसने आग में स्वाहा कर दिया। कूड़े के ढेर में लाखों की नकदी जला देने के बाद यह युवक हंसी के ठहाके लगा रहा था। लोगो ने बताया कि वह कहता कि मैं क्या करूं मुझे ठंड इतनी तेज लग रही थी कि मैं क्या करता। शीतलहर से बचने के लिए ही मैंने यह उपाय किया है। इस सनसनी खेज मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर इतना पैसा इस युवक के पास कहां से आया? एक पागल कैसे लाखों रुपए या सोने-चांदी के गहने रखे हुए था। कहीं यह सब चोरी का माल तो नहीं है।
सुनील जाखड़ ने कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोनिया गाँधी से पंजाब में राजनीति नहीं करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यूपी में कॉन्ग्रेस उम्मीदवारों को पंचायत से भी कम वोट मिले। पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश की स्टार्टअप नीति का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि देश में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। 'हिंदी बोलने वाले पानीपुरी बेचते हैं': तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा- अंग्रेजी ज्यादा मूल्यवान, दूसरी भाषा सीखने की क्या जरूरत? तमिलनाडु सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री पोनमुडी ने कहा कि हिंदी पढ़ने वाले पानीपुरी बेचते हैं। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी अधिक मूल्यवान है। ओखला से आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान को गुरुवार को ही दिल्ली पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में गिरफ्तार किया था। "निजाम की औलाद आकर शिवाराया के महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र का दर्शन करके चली जाती है। किसके आशीर्वाद से यह सब चल रहा है? " सुनील देवधर ने ट्वीट किया, "शरद पवार ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है और हिंदू देवताओं को 'साला' कहकर उनके भक्तों को नीचा दिखाया है। " भाजपा नेता प्रेम शुक्ला ने कहा कि मुलायम सिंह यादव की तत्कालीन सरकार ने माँ श्रृंगार गौरी मंदिर में हिंदुओं का पूजा-पाठ रोका था। वाराणसी के ज्ञानवापी मुद्दे पर डिबेट के दौरान भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने औरंगजेब की तारीफ करते इस्लामिक स्कॉलर हाजिक खान पर चुटकी ली। झारखंड के पूर्व सीएम रघुवर दास ने सीएम हेमंत सोरेन की पत्नी पर आदिवासियों की जमीन अवैध तरीके से खरीदने का आरोप लगाया है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने गुरुवार को बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के जगदल में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) नेता के बेटे को गिरफ्तार किया।
सुनील जाखड़ ने कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोनिया गाँधी से पंजाब में राजनीति नहीं करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यूपी में कॉन्ग्रेस उम्मीदवारों को पंचायत से भी कम वोट मिले। पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश की स्टार्टअप नीति का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि देश में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। 'हिंदी बोलने वाले पानीपुरी बेचते हैं': तमिलनाडु के उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा- अंग्रेजी ज्यादा मूल्यवान, दूसरी भाषा सीखने की क्या जरूरत? तमिलनाडु सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री पोनमुडी ने कहा कि हिंदी पढ़ने वाले पानीपुरी बेचते हैं। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी अधिक मूल्यवान है। ओखला से आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान को गुरुवार को ही दिल्ली पुलिस ने सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में गिरफ्तार किया था। "निजाम की औलाद आकर शिवाराया के महाराष्ट्र में औरंगजेब की कब्र का दर्शन करके चली जाती है। किसके आशीर्वाद से यह सब चल रहा है? " सुनील देवधर ने ट्वीट किया, "शरद पवार ने अपना मानसिक संतुलन खो दिया है और हिंदू देवताओं को 'साला' कहकर उनके भक्तों को नीचा दिखाया है। " भाजपा नेता प्रेम शुक्ला ने कहा कि मुलायम सिंह यादव की तत्कालीन सरकार ने माँ श्रृंगार गौरी मंदिर में हिंदुओं का पूजा-पाठ रोका था। वाराणसी के ज्ञानवापी मुद्दे पर डिबेट के दौरान भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने औरंगजेब की तारीफ करते इस्लामिक स्कॉलर हाजिक खान पर चुटकी ली। झारखंड के पूर्व सीएम रघुवर दास ने सीएम हेमंत सोरेन की पत्नी पर आदिवासियों की जमीन अवैध तरीके से खरीदने का आरोप लगाया है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने गुरुवार को बंगाल के उत्तर चौबीस परगना जिले के जगदल में तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता के बेटे को गिरफ्तार किया।
प्रसाद जी हिन्दी ही नहीं, समस्त भारतीय साहित्य की उत्कृष्टतम विभूतियों में थे, यह बात कम से कम हिन्दी के पाठकों से तो नहीं छिपी है। वह जैसे उच्चकोटि के कलाकार थे, वैसे ही प्राचीन भारतीय साहित्य तथा आर्य संस्कृति के प्रकाण्ड तथा मर्मज्ञ ज्ञाता थे । और इससे भी बड़ी पात यह है कि उनमें वह सच्ची सहानुभूति थी जिसके द्वारा मनुष्य सब प्रकार के भेदभाव को भूल कर अपने मानव वन्धुत्रों की भावनाओं को आत्मसात करके उनके सुख-दुख की वास्तविक अनुभूति कर सकता है और जिसके बिना कोई कवियशःप्रार्थी व्यक्ति अमर कलाकार तो क्या महान साहित्यिक के पद का भी अधिकारी नहीं हो सकता । और अपनी इस अद्भुत सृजन-शक्ति, असाधारण ज्ञान-राशि तथा उदार सहानुभूति का उन्होंने जीवन भर हिन्दी साहित्य के भण्डार की रिक्तता को कम करने तथा उसे सर्वागीण रूप से भरा-पूरा बनाने में ही सदुपयोग किया। हमारे जिन मनस्वियों ने हिन्दी साहित्य को इस योग्य बनाने में सहयोग प्रदान किया है कि वह अन्य भारतीय साहित्यों के बीच अपना मस्तक गर्व के साथ और बिना संकोच के ऊँचा उठा सके, उनमें प्रसादजी का बड़ा ऊँचा स्थान है। उन्होंने हिन्दी को क्या नहीं दिया ? गीति काव्य, महाकाव्य, नाटक, उपन्यास, कहानी और निबन्ध, आदि, हिन्दी साहित्य के सभी विभागों में उनका कलात्मक सदुद्योग दिखाई दे रहा है और उनकी कीर्ति-पताका फहरा रही है। हिन्दी संसार उनका ऋणी है और रहेगा, क्योंकि अपनी कृतियों से अपने लिए अमर कलाकारों में स्थान प्राप्त करने के साथ ही वे हिन्दी का भी मुख उज्ज्वल कर गए हैं। हिन्दी का साहित्याकाश
प्रसाद जी हिन्दी ही नहीं, समस्त भारतीय साहित्य की उत्कृष्टतम विभूतियों में थे, यह बात कम से कम हिन्दी के पाठकों से तो नहीं छिपी है। वह जैसे उच्चकोटि के कलाकार थे, वैसे ही प्राचीन भारतीय साहित्य तथा आर्य संस्कृति के प्रकाण्ड तथा मर्मज्ञ ज्ञाता थे । और इससे भी बड़ी पात यह है कि उनमें वह सच्ची सहानुभूति थी जिसके द्वारा मनुष्य सब प्रकार के भेदभाव को भूल कर अपने मानव वन्धुत्रों की भावनाओं को आत्मसात करके उनके सुख-दुख की वास्तविक अनुभूति कर सकता है और जिसके बिना कोई कवियशःप्रार्थी व्यक्ति अमर कलाकार तो क्या महान साहित्यिक के पद का भी अधिकारी नहीं हो सकता । और अपनी इस अद्भुत सृजन-शक्ति, असाधारण ज्ञान-राशि तथा उदार सहानुभूति का उन्होंने जीवन भर हिन्दी साहित्य के भण्डार की रिक्तता को कम करने तथा उसे सर्वागीण रूप से भरा-पूरा बनाने में ही सदुपयोग किया। हमारे जिन मनस्वियों ने हिन्दी साहित्य को इस योग्य बनाने में सहयोग प्रदान किया है कि वह अन्य भारतीय साहित्यों के बीच अपना मस्तक गर्व के साथ और बिना संकोच के ऊँचा उठा सके, उनमें प्रसादजी का बड़ा ऊँचा स्थान है। उन्होंने हिन्दी को क्या नहीं दिया ? गीति काव्य, महाकाव्य, नाटक, उपन्यास, कहानी और निबन्ध, आदि, हिन्दी साहित्य के सभी विभागों में उनका कलात्मक सदुद्योग दिखाई दे रहा है और उनकी कीर्ति-पताका फहरा रही है। हिन्दी संसार उनका ऋणी है और रहेगा, क्योंकि अपनी कृतियों से अपने लिए अमर कलाकारों में स्थान प्राप्त करने के साथ ही वे हिन्दी का भी मुख उज्ज्वल कर गए हैं। हिन्दी का साहित्याकाश
जनपद के हण्डिया थाना क्षेत्र के शाहपुर डांडी गांव में पेड़ काटने को लेकर दो पक्षों में सोमवार दोपहर हुई मारपीट के दौरान एक अधेड़ की मौत हो गई। वारदात में घायल दो लोगों को उपचार के लिए भर्ती कराया गया है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक गंगापार अभिषेक कुमार अग्रवाल ने बताया कि हण्डिया के शाहपुर डांडी गांव निवासी संकठा प्रसाद और नेब्बू लाल के परिवार से सोमवार दोपहर पेड़ काटने को लेकर शुरू हुए विवाद के दौरान लाठी, डण्डे एवं अन्य धारदार हथियार लेकर भिड़ गए। इस दौरान दोनों पक्ष के लोग घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल भर्ती कराया। जहां संकठा प्रसाद की मौत हो गई। जबकि मृतक के परिवार के दो लोगों का उपचार जारी है। वारदात में शामिल तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। मृतक के परिवार से तहरीर लेकर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
जनपद के हण्डिया थाना क्षेत्र के शाहपुर डांडी गांव में पेड़ काटने को लेकर दो पक्षों में सोमवार दोपहर हुई मारपीट के दौरान एक अधेड़ की मौत हो गई। वारदात में घायल दो लोगों को उपचार के लिए भर्ती कराया गया है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक गंगापार अभिषेक कुमार अग्रवाल ने बताया कि हण्डिया के शाहपुर डांडी गांव निवासी संकठा प्रसाद और नेब्बू लाल के परिवार से सोमवार दोपहर पेड़ काटने को लेकर शुरू हुए विवाद के दौरान लाठी, डण्डे एवं अन्य धारदार हथियार लेकर भिड़ गए। इस दौरान दोनों पक्ष के लोग घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल भर्ती कराया। जहां संकठा प्रसाद की मौत हो गई। जबकि मृतक के परिवार के दो लोगों का उपचार जारी है। वारदात में शामिल तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। मृतक के परिवार से तहरीर लेकर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
कोई भी आपसे तभी इमोशनल होगा या खुलकर अपनी निजी जिंदगी की सारी बातें साझा करेगा जब वो आपको अपने बहुत करीब समझता हो। फ्लर्ट करना सिर्फ लड़को को नहीं आता लड़कियां भी इसमें माहिर होती हैं। आज कल की लड़कियां इतनी खुले दिल की होती हैं कि अपने दिल की बातें साफ-साफ कह देती हैं। कुछ ऐसी भी होती हैं जो लड़कों से फ्लर्ट करने और उन्हें प्रपोज करने में पीछे नहीं हटती। वहीं ज्यादातर पुरुषों को समझ नहीं आता कि लड़कियां उनसे फ्लर्ट कर रही हैं या नहीं? लड़कियों का लड़कों से फ्लर्ट करना कोई आश्चर्य की बात नहीं। हजारों पुरुष इस बात पर संशय में रहते हैं कि उनकी महिला मित्र उनसे इशारों-इशारों में दिल की बातें कह रही हैं या सिर्फ अच्छी दोस्त हैं। हलांकि कुछ टिप्स को समझकर आप इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि वो आपसे फ्लर्ट कर रही हैं या नहीं। कोई भी आपसे तभी इमोशनल होगा या खुलकर अपनी निजी जिंदगी की सारी बातें साझा करेगा जब वो आपको अपने बहुत करीब समझता हो। जब वो जानता हो कि आप उसकी हर संभव मदद करेंगे या उनका साथ देंगे। लड़कियां कुछ ज्यादा ही इमोशनल होती हैं मगर अपनी निजी जिंदगी की सबसे निजी बात अगर वो आपको बताने लगें तो समझिए वो आपके बहुत करीब हैं। आपको अपने दिल के बहुत पास मानती हैं। ये चीजें तभी होती है जब आप बहुत ज्यादा अच्छे दोस्त हों या आपके बीच कमाल की केमेस्ट्री हो। जब किसी तीसरे आदमी के सामने आप दोनों के बीच इशारों-इशारों में बातें होने लगे। या आपकी कही हुई कुछ अटपटी बातों का मतलब सिर्फ वहीं निकाल पाएं तो समझिए वो आपको अपने दिल के पास समझती हैं। महिलाओं को उपनाम से बुलाना पसंद होता है। अगर वो आपको निक नेम से बुलाती हैं या उपनाम से बुलाती हैं तो समझिए कहीं ना कहीं वो आपको पसंद करती हैं। कहीं ना कहीं वो आपकी पर्सनैलिटी से प्रभावित हैं। मगर इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं कि वो आपसे फ्लर्ट कर रही हैं इसलिए जब तक वो अपनी बात साफ-साफ ना कहें तब तक कुछ अपने से अज्यूम ना करें। अगर कोई लड़की आपसे फ्लर्ट करती है या आपको बहुत अच्छी दोस्त समझती है तो भी अपनी सीमाओं को समझना आपके लिए जरूरी है। गलती से भी इस हंसी-मजाक के चक्कर में लड़की से टची होने की कोशिश ना करें। हो सकता है आपकी ये हरकत उन्हें पसंद ना आएं। ये भी संभव हैं कि वो आपसे इस हरकत के लिए नाराज हो जाएं और कभी बात ना करें। इसलिए टची होना आपके लिए सही नहीं।
कोई भी आपसे तभी इमोशनल होगा या खुलकर अपनी निजी जिंदगी की सारी बातें साझा करेगा जब वो आपको अपने बहुत करीब समझता हो। फ्लर्ट करना सिर्फ लड़को को नहीं आता लड़कियां भी इसमें माहिर होती हैं। आज कल की लड़कियां इतनी खुले दिल की होती हैं कि अपने दिल की बातें साफ-साफ कह देती हैं। कुछ ऐसी भी होती हैं जो लड़कों से फ्लर्ट करने और उन्हें प्रपोज करने में पीछे नहीं हटती। वहीं ज्यादातर पुरुषों को समझ नहीं आता कि लड़कियां उनसे फ्लर्ट कर रही हैं या नहीं? लड़कियों का लड़कों से फ्लर्ट करना कोई आश्चर्य की बात नहीं। हजारों पुरुष इस बात पर संशय में रहते हैं कि उनकी महिला मित्र उनसे इशारों-इशारों में दिल की बातें कह रही हैं या सिर्फ अच्छी दोस्त हैं। हलांकि कुछ टिप्स को समझकर आप इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि वो आपसे फ्लर्ट कर रही हैं या नहीं। कोई भी आपसे तभी इमोशनल होगा या खुलकर अपनी निजी जिंदगी की सारी बातें साझा करेगा जब वो आपको अपने बहुत करीब समझता हो। जब वो जानता हो कि आप उसकी हर संभव मदद करेंगे या उनका साथ देंगे। लड़कियां कुछ ज्यादा ही इमोशनल होती हैं मगर अपनी निजी जिंदगी की सबसे निजी बात अगर वो आपको बताने लगें तो समझिए वो आपके बहुत करीब हैं। आपको अपने दिल के बहुत पास मानती हैं। ये चीजें तभी होती है जब आप बहुत ज्यादा अच्छे दोस्त हों या आपके बीच कमाल की केमेस्ट्री हो। जब किसी तीसरे आदमी के सामने आप दोनों के बीच इशारों-इशारों में बातें होने लगे। या आपकी कही हुई कुछ अटपटी बातों का मतलब सिर्फ वहीं निकाल पाएं तो समझिए वो आपको अपने दिल के पास समझती हैं। महिलाओं को उपनाम से बुलाना पसंद होता है। अगर वो आपको निक नेम से बुलाती हैं या उपनाम से बुलाती हैं तो समझिए कहीं ना कहीं वो आपको पसंद करती हैं। कहीं ना कहीं वो आपकी पर्सनैलिटी से प्रभावित हैं। मगर इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं कि वो आपसे फ्लर्ट कर रही हैं इसलिए जब तक वो अपनी बात साफ-साफ ना कहें तब तक कुछ अपने से अज्यूम ना करें। अगर कोई लड़की आपसे फ्लर्ट करती है या आपको बहुत अच्छी दोस्त समझती है तो भी अपनी सीमाओं को समझना आपके लिए जरूरी है। गलती से भी इस हंसी-मजाक के चक्कर में लड़की से टची होने की कोशिश ना करें। हो सकता है आपकी ये हरकत उन्हें पसंद ना आएं। ये भी संभव हैं कि वो आपसे इस हरकत के लिए नाराज हो जाएं और कभी बात ना करें। इसलिए टची होना आपके लिए सही नहीं।
केन्द्र सरकार ने दिवाली पर पेट्रोलियम की एक्साइज ड्यूटी कम कर पेट्रोल पर 5 रुपए और डीजल पर 10 रुपए घटाए हैं। राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का दावा है कि केन्द्र सरकार ने विधानसभा उप चुनाव में मिली करारी हार के बाद यह कदम उठाया है। खाचरियावास ने उप चुनाव के दौरान वल्लभनगर में पब्लिक मीटिंग का अपना सम्बोधन वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है,जो तेजी से वायरल हो रहा है। खाचरियावास ने वीडियो ट्वीट कर कहा है कि मैंने चुनाव से पहले ही यह बात कह दी थी कि अगर जनता मोदी के गाल पर वोट की चोट करके सबक सिखाएगी,तब पेट्रोल डीजल,गैस के दाम कम होंगे। वल्लभनगर और धरियावद में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को विधानसभा उपचुनाव में मिली बम्पर जीत और बीजेपी प्रत्याशियों की करारी हार से सियासी भूचाल मचा है। विपक्षी पार्टी में हार के कारणों पर मंथन का दौर जारी है। इस बीच राजस्थान के कैबिनेट मंत्री और उदयपुर के प्रभारी मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने महंगाई और पेट्रोलियम की बढ़ी कीमतों को लेकर बड़ा सियासी निशाना केन्द्र की मोदी सरकार और बीजेपी पर लगाया है। खाचरियावास ने वल्लभनगर विधानसभा उपचुनाव मतदान से पहले एक पब्लिक मीटिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। जिसमें महंगाई और पेट्रोलियम की बढ़ी कीमतों के पीछे केन्द्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया है। खाचरियावास ये कहते नजर आ रहे हैं कि जब बीजेपी की उपचुनाव में हार होगी,तो पेट्रोल-डीजल-गैस के दाम कम होंगे। वीडियो में खाचरियावास चुनाव से पहले लोकल वोटर्स को यह कहते नजर आ रहे हैं कि उप चुनाव का अपना महत्व होता है। जब मोदी जी के गाल पर (वोट का) थप्पड़ पड़ेगा। तो पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम कम होंगे। आवाज इतनी तेज होनी चाहिए कि 40 हजार वोटों से जीतकर प्रीति शक्तावत जाए, तो दिल्ली तक गूंज सुनाई देगी। वीडियो में खाचरियावास यह भी कहते नजर आ रहे हैं कि गहलोत सरकार जनता का सम्मान और काम करती है। लेकिन मोदी सरकार पेट्रोल, डीजल और गैस की रेट बढ़कर जनता की जेब काटती है। जनता की पीठ में खंजर घोंपती है। मोदी जी ने कहा था कि अब और नहीं पेट्रोल डीजल की मार, अबकी बार मोदी सरकार। लेकिन गैस सिलेंडर की सब्सिडी आजादी के बाद पहली बार खत्म हुई है। खाचरियावास यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि केन्द्र सरकार को आम जनता की नहीं, बल्कि अडानी और अम्बानी की चिन्ता है। दूसरी ओर राजस्थान आज मॉडल स्टेट है। जहां दवाई, जांच फ्री है। सरकारी अस्पताल में डिलीवरी पर महिला को पैसे देकर विदा किया जाता है। एग्जाम देने वाले कैंडिडेट्स के लिए रोडवेज बसें फ्री कर दी हैं। हिमाचल प्रदेश उपचुनाव में भी बीजेपी का प्रदर्शन बहुत निराश करने वाला रहा। वहां 1 लोकसभा सीट और 3 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी एक भी सीट नहीं बचा पाई। कांग्रेस ने इन सभी सीटों पर जीत दर्ज की है। हार के बाद हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने एक बयान में केंद्र सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। जिसमें उन्होंने भी कहा है कि मंहगाई के चलते बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है। क्योंकि ऐसे परिणाम की उम्मीद नहीं थी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
केन्द्र सरकार ने दिवाली पर पेट्रोलियम की एक्साइज ड्यूटी कम कर पेट्रोल पर पाँच रुपयापए और डीजल पर दस रुपयापए घटाए हैं। राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास का दावा है कि केन्द्र सरकार ने विधानसभा उप चुनाव में मिली करारी हार के बाद यह कदम उठाया है। खाचरियावास ने उप चुनाव के दौरान वल्लभनगर में पब्लिक मीटिंग का अपना सम्बोधन वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है,जो तेजी से वायरल हो रहा है। खाचरियावास ने वीडियो ट्वीट कर कहा है कि मैंने चुनाव से पहले ही यह बात कह दी थी कि अगर जनता मोदी के गाल पर वोट की चोट करके सबक सिखाएगी,तब पेट्रोल डीजल,गैस के दाम कम होंगे। वल्लभनगर और धरियावद में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी को विधानसभा उपचुनाव में मिली बम्पर जीत और बीजेपी प्रत्याशियों की करारी हार से सियासी भूचाल मचा है। विपक्षी पार्टी में हार के कारणों पर मंथन का दौर जारी है। इस बीच राजस्थान के कैबिनेट मंत्री और उदयपुर के प्रभारी मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने महंगाई और पेट्रोलियम की बढ़ी कीमतों को लेकर बड़ा सियासी निशाना केन्द्र की मोदी सरकार और बीजेपी पर लगाया है। खाचरियावास ने वल्लभनगर विधानसभा उपचुनाव मतदान से पहले एक पब्लिक मीटिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। जिसमें महंगाई और पेट्रोलियम की बढ़ी कीमतों के पीछे केन्द्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया है। खाचरियावास ये कहते नजर आ रहे हैं कि जब बीजेपी की उपचुनाव में हार होगी,तो पेट्रोल-डीजल-गैस के दाम कम होंगे। वीडियो में खाचरियावास चुनाव से पहले लोकल वोटर्स को यह कहते नजर आ रहे हैं कि उप चुनाव का अपना महत्व होता है। जब मोदी जी के गाल पर थप्पड़ पड़ेगा। तो पेट्रोल, डीजल और गैस के दाम कम होंगे। आवाज इतनी तेज होनी चाहिए कि चालीस हजार वोटों से जीतकर प्रीति शक्तावत जाए, तो दिल्ली तक गूंज सुनाई देगी। वीडियो में खाचरियावास यह भी कहते नजर आ रहे हैं कि गहलोत सरकार जनता का सम्मान और काम करती है। लेकिन मोदी सरकार पेट्रोल, डीजल और गैस की रेट बढ़कर जनता की जेब काटती है। जनता की पीठ में खंजर घोंपती है। मोदी जी ने कहा था कि अब और नहीं पेट्रोल डीजल की मार, अबकी बार मोदी सरकार। लेकिन गैस सिलेंडर की सब्सिडी आजादी के बाद पहली बार खत्म हुई है। खाचरियावास यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि केन्द्र सरकार को आम जनता की नहीं, बल्कि अडानी और अम्बानी की चिन्ता है। दूसरी ओर राजस्थान आज मॉडल स्टेट है। जहां दवाई, जांच फ्री है। सरकारी अस्पताल में डिलीवरी पर महिला को पैसे देकर विदा किया जाता है। एग्जाम देने वाले कैंडिडेट्स के लिए रोडवेज बसें फ्री कर दी हैं। हिमाचल प्रदेश उपचुनाव में भी बीजेपी का प्रदर्शन बहुत निराश करने वाला रहा। वहां एक लोकसभा सीट और तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी एक भी सीट नहीं बचा पाई। कांग्रेस ने इन सभी सीटों पर जीत दर्ज की है। हार के बाद हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने एक बयान में केंद्र सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। जिसमें उन्होंने भी कहा है कि मंहगाई के चलते बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है। क्योंकि ऐसे परिणाम की उम्मीद नहीं थी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अंजलि अरोड़ा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. अंजलि अक्सर इंस्टाग्राम पर अपनी हॉट एंड बोल्ड तस्वीरें फैंस के साथ साझा करती हैं. इस बार अंजलि की कुछ बेहद ही बोल्ड तस्वीरें वायरल हो रही हैं. अंजलि अरोड़ा अपने दोस्त और बिग बॉस ओटीटी कंटेस्टेंट रहे अली मर्चेंट के जन्मदिन पर एक खास लुक में पहुंचीं. अली के जन्मदिन के खास मौके पर अंजलि अरोड़ा के साथ उमर रियाज, दिव्या अग्रवाल और उनके मंगेतर अपूर्व पडगांवकर भी नजर आए. साथ में ब्लैक बूट और छोटा सा पर्स कैरी कर रखा था.
अंजलि अरोड़ा सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. अंजलि अक्सर इंस्टाग्राम पर अपनी हॉट एंड बोल्ड तस्वीरें फैंस के साथ साझा करती हैं. इस बार अंजलि की कुछ बेहद ही बोल्ड तस्वीरें वायरल हो रही हैं. अंजलि अरोड़ा अपने दोस्त और बिग बॉस ओटीटी कंटेस्टेंट रहे अली मर्चेंट के जन्मदिन पर एक खास लुक में पहुंचीं. अली के जन्मदिन के खास मौके पर अंजलि अरोड़ा के साथ उमर रियाज, दिव्या अग्रवाल और उनके मंगेतर अपूर्व पडगांवकर भी नजर आए. साथ में ब्लैक बूट और छोटा सा पर्स कैरी कर रखा था.
Dhanbad : युवा जदयू के प्रदेश अध्यक्ष निर्मल सिंह की मौजूदगी में 50 से अधिक युवा-युवतियों ने 7 अगस्त को सर्किट हाउस में पार्टी की सदस्यता ली. निर्मल सिंह संथाल परगना के दौरे से लौटे हैं. उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि जनता दल [यूनाइटेड] भ्रष्टाचार से समझौता नहीं करती. पार्टी जेपी और लोहियाजी के बताए हुए रास्ते पर चलने का काम करती है. झारखंड में भ्रष्टाचार फैला हुआ है. सरकारी कार्यालयोंं में बिना पैसे के काम नहीं होता.
Dhanbad : युवा जदयू के प्रदेश अध्यक्ष निर्मल सिंह की मौजूदगी में पचास से अधिक युवा-युवतियों ने सात अगस्त को सर्किट हाउस में पार्टी की सदस्यता ली. निर्मल सिंह संथाल परगना के दौरे से लौटे हैं. उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि जनता दल [यूनाइटेड] भ्रष्टाचार से समझौता नहीं करती. पार्टी जेपी और लोहियाजी के बताए हुए रास्ते पर चलने का काम करती है. झारखंड में भ्रष्टाचार फैला हुआ है. सरकारी कार्यालयोंं में बिना पैसे के काम नहीं होता.
आमतौर पर बुद्धिमान लोग सामूहिकता की तरह औद्योगीकरण पर हमला नहीं करते हैं। लेकिन यह वे कुछ भी नहीं है - औद्योगिकीकरण और सामूहिकता अविवेकी प्रक्रियाएं हैं, जिनमें से एक के बिना असंभव है। सामूहिकता के बिना, अर्थव्यवस्था को जल्दी से मजबूत और मशीनीकृत करना असंभव था। और खेतों के समेकन और गाँव के मशीनीकरण के बिना औद्योगीकरण के लिए मानव संसाधनों को मुक्त करना असंभव था। आखिरकार, क्या किसी को औद्योगिक केंद्रों का निर्माण करना चाहिए और औद्योगिक उद्यमों में काम करना चाहिए? लेकिन औद्योगिकीकरण - यह किस लिए है? आखिरकार, यह अपने आप में एक अंत नहीं है। औद्योगिकीकरण को सोवियत संघ को एक आधुनिक कृषि-औद्योगिक शक्ति में एक पिछड़े कृषिवादी से चालू करना था। जनसंख्या के जीवन स्तर और देश की रक्षा क्षमता औद्योगिक विकास से जुड़ी थी। लेकिन बस लोगों को गांव से बाहर निकालने के लिए, अपने हाथों से कार्यशालाओं का निर्माण करें और सोने के लिए मशीन टूल्स खरीदें - यह उद्योग बनाने का तरीका नहीं है। परिवहन बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, बिक्री प्रणाली, प्रशिक्षण और बहुत कुछ की आवश्यकता है। रूसी साम्राज्य के स्तर पर, थोड़े समय में यह सब बनाना असंभव था। देश के औद्योगीकरण की दिशा में पहला कदम GOELRO योजना के कार्यान्वयन पर विचार किया जा सकता है। रूसी साम्राज्य में, वास्तव में, कोई केंद्रीकृत बिजली की आपूर्ति नहीं थी। बड़े उद्यमों या भूमि कार्यकाल को आमतौर पर अपने स्वयं के पावर स्टेशन के साथ बनाया गया था। 1913 में, 2 बिलियन kWh का उत्पादन रूस में किया गया था। GOELRO योजना के अनुसार, 1931-1936 वर्षों तक 30 बड़े पावर स्टेशन बनाने और बिजली उत्पादन 4,5 बार बढ़ाने की योजना बनाई गई थी। वास्तव में, वर्ष 1932 द्वारा बिजली का उत्पादन 13,5 बिलियन kWh की राशि है, अर्थात, 7 गुना बढ़ा। ऊर्जा के तेजी से विकास, विकसित परिवहन और उद्योग के आधार पर। लेकिन हालांकि पहले से ही 1926 वर्ष में, उद्योग के साथ क्षेत्रों के भाग के नुकसान और गृह युद्ध के परिणामों के बावजूद, यूएसएसआर ने औद्योगिक स्तर में रूसी साम्राज्य को पीछे छोड़ दिया - विकास की गति अभी भी अपर्याप्त थी। और सोवियत नेतृत्व ने इसे स्पष्ट रूप से समझा। जैसा कि आई। स्टालिन ने समाजवादी उद्योग 4 फरवरी 1931 g के श्रमिकों के पहले अखिल-यूनियन सम्मेलन में कहाः "हम 50-100 वर्षों से उन्नत देशों से पीछे हैं। हमें यह दूरी दस वर्षों में चलानी होगी। या तो हम इसे करेंगे, या हमें कुचल दिया जाएगा। " वैसे, 22 जून 1941 ने हमें कुचलने की कोशिश की। आप स्टालिनवादी पूर्वानुमान की सटीकता का अनुमान लगा सकते हैं। और अब 2 एक पंचवर्षीय योजना है, जिसके वर्ष आमतौर पर औद्योगिकीकरण से जुड़े हैं। उद्योग का तेजी से विकास और आधुनिकीकरण हो रहा है, नई तकनीकों में महारत हासिल है। अगर स्टील और लोहे के 1913 वर्ष में 9 मिलियन टन को गलाना पड़ा, तो 1937 में - 32 मिलियन से अधिक। पांच साल की योजना के अंत तक उत्पन्न हुई बिजली पहले से ही 36 बिलियन khh है। (वर्ष के 1913 का स्तर पहले ही 18 बार पार कर चुका है)। बाह्य रूप से, मेट्रो के निर्माण में औद्योगिकीकरण प्रकट होता है, इलेक्ट्रिक वेल्डिंग का व्यापक उपयोग, कृषि का व्यापक मशीनीकरण। देश ने गैसोलीन और बिजली पर स्विच किया। लेकिन इससे भी आगे, केवल गति बढ़ी - 1939 से 1941 तक बिजली उत्पादन 36 से बढ़कर 48 बिलियन kWh वर्ष हो गया। आपको याद दिला दूं कि केवल 2 बिलियन kWh का आउटपुट जनरेशन ऑफ इंगुशेटिया में उत्पन्न हुआ था। बढ़ती और शहरी आबादी। यदि 1926 में यह पूरी आबादी से 1 / 6 था, तो 1939 में यह 1 / 3 था। 3,7 में USSR में लगभग 30 मिलियन रूसी साम्राज्य में 1941 मिलियन से - श्रमिकों की संख्या में वृद्धि से उद्योग की वृद्धि अच्छी तरह से चित्रित की गई है। बेशक, बड़ी संख्या में लोगों को बड़ी कठिनाइयों को दूर करना पड़ा, बहुत से काम करने और खराब जीवन जीने के लिए। मुख्य प्रेरणा बड़ा वेतन नहीं था, लेकिन भविष्य के लिए कड़ी मेहनत थी। लेकिन यह भविष्य हमारी आंखों के सामने आ गया। और हमें जीवन स्तर के विकास के अलावा, औद्योगिकीकरण क्या दिया? उसने एक विकसित परिवहन नेटवर्क दिया, उत्तर और साइबेरिया के विकास, मशीन टूल्स और उपकरण, हवाई जहाज और जहाजों के साथ आत्मनिर्भरता, शहरों को मेट्रो और ट्रॉली बसें, बिजली, गैस और पानी दिया। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात, उसने सुरक्षा दी। सब के बाद, बिना हथियारों, उपकरण और गोला बारूद कोई भी वीरता जीतने में मदद नहीं करेगा। पूर्व में उद्योग की निकासी और कब्जे वाले क्षेत्रों में उद्योग के हिस्से के नुकसान के बावजूद, लाल सेना को प्रमुख विश्व शक्तियों के स्तर पर हथियारों और गोला-बारूद के साथ प्रदान किया गया था। तुलना के लिए, रूसी साम्राज्य ने प्रथम विश्व युद्ध के 3,5 वर्षों में 11,7 हजार बंदूकें, सोवियत संघ - 3,5 हजार बंदूकें और महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध के 480 वर्षों में 350 हजार मोर्टार का उत्पादन किया। यदि रूसी साम्राज्य ने 28 हजार मशीन गन जारी किए और सहयोगियों से 36 हजार (आधे से अधिक) प्राप्त किए, तो यूएसएसआर ने 1,5 मिलियन मशीन गन जारी किए। और यह हवाई जहाज या जैसे नए हथियारों के उत्पादन को ध्यान में नहीं रख रहा है टैंक. लेकिन दुश्मन के साथ तुलना भी स्पष्ट है। यदि रूसी साम्राज्य ने जर्मनी की तुलना में बंदूकें 6 गुना कम उत्पादन किया, मशीन गन - 10 बार, और हवाई जहाज - 14 बार, तो सेना के लिए हथियारों के उत्पादन के लिए सोवियत संघ ने जर्मनी को पार कर लिया। . . . औद्योगीकरण हुआ है - और हम कुचल नहीं सकते। - मूल स्रोतः
आमतौर पर बुद्धिमान लोग सामूहिकता की तरह औद्योगीकरण पर हमला नहीं करते हैं। लेकिन यह वे कुछ भी नहीं है - औद्योगिकीकरण और सामूहिकता अविवेकी प्रक्रियाएं हैं, जिनमें से एक के बिना असंभव है। सामूहिकता के बिना, अर्थव्यवस्था को जल्दी से मजबूत और मशीनीकृत करना असंभव था। और खेतों के समेकन और गाँव के मशीनीकरण के बिना औद्योगीकरण के लिए मानव संसाधनों को मुक्त करना असंभव था। आखिरकार, क्या किसी को औद्योगिक केंद्रों का निर्माण करना चाहिए और औद्योगिक उद्यमों में काम करना चाहिए? लेकिन औद्योगिकीकरण - यह किस लिए है? आखिरकार, यह अपने आप में एक अंत नहीं है। औद्योगिकीकरण को सोवियत संघ को एक आधुनिक कृषि-औद्योगिक शक्ति में एक पिछड़े कृषिवादी से चालू करना था। जनसंख्या के जीवन स्तर और देश की रक्षा क्षमता औद्योगिक विकास से जुड़ी थी। लेकिन बस लोगों को गांव से बाहर निकालने के लिए, अपने हाथों से कार्यशालाओं का निर्माण करें और सोने के लिए मशीन टूल्स खरीदें - यह उद्योग बनाने का तरीका नहीं है। परिवहन बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, बिक्री प्रणाली, प्रशिक्षण और बहुत कुछ की आवश्यकता है। रूसी साम्राज्य के स्तर पर, थोड़े समय में यह सब बनाना असंभव था। देश के औद्योगीकरण की दिशा में पहला कदम GOELRO योजना के कार्यान्वयन पर विचार किया जा सकता है। रूसी साम्राज्य में, वास्तव में, कोई केंद्रीकृत बिजली की आपूर्ति नहीं थी। बड़े उद्यमों या भूमि कार्यकाल को आमतौर पर अपने स्वयं के पावर स्टेशन के साथ बनाया गया था। एक हज़ार नौ सौ तेरह में, दो बिलियन kWh का उत्पादन रूस में किया गया था। GOELRO योजना के अनुसार, एक हज़ार नौ सौ इकतीस-एक हज़ार नौ सौ छत्तीस वर्षों तक तीस बड़े पावर स्टेशन बनाने और बिजली उत्पादन चार,पाँच बार बढ़ाने की योजना बनाई गई थी। वास्तव में, वर्ष एक हज़ार नौ सौ बत्तीस द्वारा बिजली का उत्पादन तेरह,पाँच बिलियन kWh की राशि है, अर्थात, सात गुना बढ़ा। ऊर्जा के तेजी से विकास, विकसित परिवहन और उद्योग के आधार पर। लेकिन हालांकि पहले से ही एक हज़ार नौ सौ छब्बीस वर्ष में, उद्योग के साथ क्षेत्रों के भाग के नुकसान और गृह युद्ध के परिणामों के बावजूद, यूएसएसआर ने औद्योगिक स्तर में रूसी साम्राज्य को पीछे छोड़ दिया - विकास की गति अभी भी अपर्याप्त थी। और सोवियत नेतृत्व ने इसे स्पष्ट रूप से समझा। जैसा कि आई। स्टालिन ने समाजवादी उद्योग चार फरवरी एक हज़ार नौ सौ इकतीस ग्राम के श्रमिकों के पहले अखिल-यूनियन सम्मेलन में कहाः "हम पचास-एक सौ वर्षों से उन्नत देशों से पीछे हैं। हमें यह दूरी दस वर्षों में चलानी होगी। या तो हम इसे करेंगे, या हमें कुचल दिया जाएगा। " वैसे, बाईस जून एक हज़ार नौ सौ इकतालीस ने हमें कुचलने की कोशिश की। आप स्टालिनवादी पूर्वानुमान की सटीकता का अनुमान लगा सकते हैं। और अब दो एक पंचवर्षीय योजना है, जिसके वर्ष आमतौर पर औद्योगिकीकरण से जुड़े हैं। उद्योग का तेजी से विकास और आधुनिकीकरण हो रहा है, नई तकनीकों में महारत हासिल है। अगर स्टील और लोहे के एक हज़ार नौ सौ तेरह वर्ष में नौ मिलियन टन को गलाना पड़ा, तो एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में - बत्तीस मिलियन से अधिक। पांच साल की योजना के अंत तक उत्पन्न हुई बिजली पहले से ही छत्तीस बिलियन khh है। । बाह्य रूप से, मेट्रो के निर्माण में औद्योगिकीकरण प्रकट होता है, इलेक्ट्रिक वेल्डिंग का व्यापक उपयोग, कृषि का व्यापक मशीनीकरण। देश ने गैसोलीन और बिजली पर स्विच किया। लेकिन इससे भी आगे, केवल गति बढ़ी - एक हज़ार नौ सौ उनतालीस से एक हज़ार नौ सौ इकतालीस तक बिजली उत्पादन छत्तीस से बढ़कर अड़तालीस बिलियन kWh वर्ष हो गया। आपको याद दिला दूं कि केवल दो बिलियन kWh का आउटपुट जनरेशन ऑफ इंगुशेटिया में उत्पन्न हुआ था। बढ़ती और शहरी आबादी। यदि एक हज़ार नौ सौ छब्बीस में यह पूरी आबादी से एक / छः था, तो एक हज़ार नौ सौ उनतालीस में यह एक / तीन था। तीन,सात में USSR में लगभग तीस मिलियन रूसी साम्राज्य में एक हज़ार नौ सौ इकतालीस मिलियन से - श्रमिकों की संख्या में वृद्धि से उद्योग की वृद्धि अच्छी तरह से चित्रित की गई है। बेशक, बड़ी संख्या में लोगों को बड़ी कठिनाइयों को दूर करना पड़ा, बहुत से काम करने और खराब जीवन जीने के लिए। मुख्य प्रेरणा बड़ा वेतन नहीं था, लेकिन भविष्य के लिए कड़ी मेहनत थी। लेकिन यह भविष्य हमारी आंखों के सामने आ गया। और हमें जीवन स्तर के विकास के अलावा, औद्योगिकीकरण क्या दिया? उसने एक विकसित परिवहन नेटवर्क दिया, उत्तर और साइबेरिया के विकास, मशीन टूल्स और उपकरण, हवाई जहाज और जहाजों के साथ आत्मनिर्भरता, शहरों को मेट्रो और ट्रॉली बसें, बिजली, गैस और पानी दिया। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात, उसने सुरक्षा दी। सब के बाद, बिना हथियारों, उपकरण और गोला बारूद कोई भी वीरता जीतने में मदद नहीं करेगा। पूर्व में उद्योग की निकासी और कब्जे वाले क्षेत्रों में उद्योग के हिस्से के नुकसान के बावजूद, लाल सेना को प्रमुख विश्व शक्तियों के स्तर पर हथियारों और गोला-बारूद के साथ प्रदान किया गया था। तुलना के लिए, रूसी साम्राज्य ने प्रथम विश्व युद्ध के तीन,पाँच वर्षों में ग्यारह,सात हजार बंदूकें, सोवियत संघ - तीन,पाँच हजार बंदूकें और महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध के चार सौ अस्सी वर्षों में तीन सौ पचास हजार मोर्टार का उत्पादन किया। यदि रूसी साम्राज्य ने अट्ठाईस हजार मशीन गन जारी किए और सहयोगियों से छत्तीस हजार प्राप्त किए, तो यूएसएसआर ने एक,पाँच मिलियन मशीन गन जारी किए। और यह हवाई जहाज या जैसे नए हथियारों के उत्पादन को ध्यान में नहीं रख रहा है टैंक. लेकिन दुश्मन के साथ तुलना भी स्पष्ट है। यदि रूसी साम्राज्य ने जर्मनी की तुलना में बंदूकें छः गुना कम उत्पादन किया, मशीन गन - दस बार, और हवाई जहाज - चौदह बार, तो सेना के लिए हथियारों के उत्पादन के लिए सोवियत संघ ने जर्मनी को पार कर लिया। . . . औद्योगीकरण हुआ है - और हम कुचल नहीं सकते। - मूल स्रोतः
Ranchi : मैनहर्ट मामले पर पूर्व सीएम रघुवर दास ने कहा है कि सरकार इसपर बोले नहीं कार्रवाई करे. उन्होंने कहा कि सांच को आंच क्या. अगर गलती है तो सरकार स्वतंत्र है जांच कराने के लिए. कानूनी तरीके से पूरी निष्पक्षता के साथ जांच और कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि 16 साल पुराना मामला है. इसके बीच राज्य में कई सरकारें आई और गई, लेकिन हेमंत सरकार में ही यह मामला तूल पकड़ा. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार उनके पूरे 5 साल के मुख्यमंत्री काल की भी जांच करा ले. मैनहर्ट मामले में अपने उपर लगे आरोप से रघुवर काफी परेशान लग रहे हैं. उनके चेहरे पर मैनहर्ट को लेकर बेचैनी साफ दिख रही है. lagatar. in से बातचीत में रघुवर दास अपने मुख्यमंत्री काल में हुई गड़बड़ियों के आरोपों को मुस्कुरा कर सुन रहे थे, लेकिन जैसे ही मैनहर्ट का नाम आया. उन्होंने रिएक्ट किया और कहा कि बोलें नहीं गलती है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई करें. गौरतलब है कि एसीबी की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि मैनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति में अनियमितता बरती गयी थी. इस मामले में डीएसपी स्तर की जांच हो चुकी है. इसमें पाया गया है कि नियम और शर्तों में फेरबदल करते हुए मैनहर्ट को परामर्शी के रूप में नियुक्त कर दिया गया. इस मामले में जांच के दौरान 24 जून को तत्कालीन नगर विकास मंत्री रघुवर दास और आइएएस अधिकारी शशिरंजन को एसीबी ने नोटिस भेजा था. रघुवर दास की ओर से एसीबी को अपना पक्ष उपलब्ध कराया जा चुका है. मामला 2005 का है, जब रघुवर दास अर्जुन मुंडा की सरकार में नगर विकास मंत्री थे. ORG/SPAM Private Limited नामक की कंपनी रांची शहर में सीवरेज और ड्रेनेज का डीपीआर बना रही थी. करीब 75 फीसदी डीपीआर बनाने के बाद कंपनी से काम वापस ले लिया गया. यह काम मैनहर्ट कंपनी को दे दिया गया. आरोप है कि मैनहर्ट को काम देने के लिए विभाग ने टेंडर की शर्तों का उल्लंघन किया. मामला विधानसभा में उठा. विधानसभा ने जांच के लिये एक कमेटी बनायी. इसमें सरयू राय, प्रदीप यादव और सुखदेव भगत सदस्य थे. समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मैनहर्ट को काम देने में गड़बड़ी हुई है. साथ ही एक स्वतंत्र एजेंसी से जांच करने की सिफारिश की, लेकिन जांच नहीं हुई. फिर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 1 अक्तूबर 2020 को मामले की जांच एसीबी से कराने का निर्देश दिया.
Ranchi : मैनहर्ट मामले पर पूर्व सीएम रघुवर दास ने कहा है कि सरकार इसपर बोले नहीं कार्रवाई करे. उन्होंने कहा कि सांच को आंच क्या. अगर गलती है तो सरकार स्वतंत्र है जांच कराने के लिए. कानूनी तरीके से पूरी निष्पक्षता के साथ जांच और कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि सोलह साल पुराना मामला है. इसके बीच राज्य में कई सरकारें आई और गई, लेकिन हेमंत सरकार में ही यह मामला तूल पकड़ा. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार उनके पूरे पाँच साल के मुख्यमंत्री काल की भी जांच करा ले. मैनहर्ट मामले में अपने उपर लगे आरोप से रघुवर काफी परेशान लग रहे हैं. उनके चेहरे पर मैनहर्ट को लेकर बेचैनी साफ दिख रही है. lagatar. in से बातचीत में रघुवर दास अपने मुख्यमंत्री काल में हुई गड़बड़ियों के आरोपों को मुस्कुरा कर सुन रहे थे, लेकिन जैसे ही मैनहर्ट का नाम आया. उन्होंने रिएक्ट किया और कहा कि बोलें नहीं गलती है तो कानून के मुताबिक कार्रवाई करें. गौरतलब है कि एसीबी की प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि मैनहर्ट परामर्शी की नियुक्ति में अनियमितता बरती गयी थी. इस मामले में डीएसपी स्तर की जांच हो चुकी है. इसमें पाया गया है कि नियम और शर्तों में फेरबदल करते हुए मैनहर्ट को परामर्शी के रूप में नियुक्त कर दिया गया. इस मामले में जांच के दौरान चौबीस जून को तत्कालीन नगर विकास मंत्री रघुवर दास और आइएएस अधिकारी शशिरंजन को एसीबी ने नोटिस भेजा था. रघुवर दास की ओर से एसीबी को अपना पक्ष उपलब्ध कराया जा चुका है. मामला दो हज़ार पाँच का है, जब रघुवर दास अर्जुन मुंडा की सरकार में नगर विकास मंत्री थे. ORG/SPAM Private Limited नामक की कंपनी रांची शहर में सीवरेज और ड्रेनेज का डीपीआर बना रही थी. करीब पचहत्तर फीसदी डीपीआर बनाने के बाद कंपनी से काम वापस ले लिया गया. यह काम मैनहर्ट कंपनी को दे दिया गया. आरोप है कि मैनहर्ट को काम देने के लिए विभाग ने टेंडर की शर्तों का उल्लंघन किया. मामला विधानसभा में उठा. विधानसभा ने जांच के लिये एक कमेटी बनायी. इसमें सरयू राय, प्रदीप यादव और सुखदेव भगत सदस्य थे. समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि मैनहर्ट को काम देने में गड़बड़ी हुई है. साथ ही एक स्वतंत्र एजेंसी से जांच करने की सिफारिश की, लेकिन जांच नहीं हुई. फिर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक अक्तूबर दो हज़ार बीस को मामले की जांच एसीबी से कराने का निर्देश दिया.
चेन्नईः हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ दान (एचआर एंड सीई) मंत्री पीके सेकरबाबू ने बुधवार को राज्य विधानसभा को बताया कि डीएमके सरकार 'राजगोपुरम' की तरह खड़ी होगी क्योंकि यह द्रविड़ चौकड़ी के नक्शेकदम पर चलती है - पेरियार ईवी रामासामी, सीएन अन्नादुराई, एम करुणानिधि और एमके स्टालिन। "यह सरकार गायों के नाम पर लोगों को नहीं बांटती है और न ही किसी मौजूदा ढांचे को कुछ और बनाने के लिए गिराती है। इसके बजाय, यह सरकार गाय आश्रयों का निर्माण करती है और यह कामधेनु जैसे भक्तों की सेवा करती है और जीर्ण-शीर्ण इमारतों का नवीनीकरण करती है, "मानव संसाधन और सीई मंत्री ने विभाग के लिए अनुदान की मांग पर बहस का जवाब देते हुए भाजपा और इसकी हिंदुत्व विचारधारा पर कटाक्ष करते हुए कहा। उन्होंने उसी नस में जारी रखा और कहा कि एचआर एंड सीई विभाग को द्रविड़ मॉडल सरकार के तहत सबसे अधिक लक्षित किया गया था। "इस बात को लेकर हंगामा हो रहा था कि अगर डीएमके सत्ता में वापस आती है तो एचआर एंड सीई विभाग को खत्म कर दिया जाएगा। जब तक हमारे मुख्यमंत्री (एमके स्टालिन) हैं, तब तक कोई भी इस विभाग का कुछ नहीं कर सकता है, जिसे जस्टिस पार्टी ने अध्यात्म में सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए बनाया था, "सेकरबाबू ने कहा और इससे भाजपा विधायकों में एक दृश्य बेचैनी पैदा हो गई। पूर्व मंत्री और उनके पूर्ववर्ती सेवुर एस रामचंद्रन को यह कहने के लिए फटकार लगाते हुए कि कुछ विभाग के बजाय खुद को प्रोजेक्ट कर रहे थे और "प्रचार" में लिप्त थे, सेकरबाबू ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान विभाग में कुछ भी ठोस नहीं हुआ था। चूंकि घोषित और कार्यान्वित योजनाओं को जनता और मीडिया द्वारा अच्छी तरह से प्राप्त किया गया था, उन्होंने कहा और कहा कि पिछले दो वर्षों में 502 धार्मिक संस्थानों की अचल संपत्तियों के 4,236 करोड़ रुपये को अतिक्रमण से हटा दिया गया है। AIADMK सरकार ने अपने शासन के 10 वर्षों में 3,819 करोड़ रुपये की मंदिर संपत्तियों को पुनः प्राप्त किया था। विभाग ने मंदिर में राजस्व उत्पन्न करने के लिए भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने के गहनों के मुद्रीकरण को भी फिर से शुरू किया है। उन्होंने कहा कि ब्याज के माध्यम से उत्पन्न राजस्व विभाग को श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने में मदद करता है।
चेन्नईः हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ दान मंत्री पीके सेकरबाबू ने बुधवार को राज्य विधानसभा को बताया कि डीएमके सरकार 'राजगोपुरम' की तरह खड़ी होगी क्योंकि यह द्रविड़ चौकड़ी के नक्शेकदम पर चलती है - पेरियार ईवी रामासामी, सीएन अन्नादुराई, एम करुणानिधि और एमके स्टालिन। "यह सरकार गायों के नाम पर लोगों को नहीं बांटती है और न ही किसी मौजूदा ढांचे को कुछ और बनाने के लिए गिराती है। इसके बजाय, यह सरकार गाय आश्रयों का निर्माण करती है और यह कामधेनु जैसे भक्तों की सेवा करती है और जीर्ण-शीर्ण इमारतों का नवीनीकरण करती है, "मानव संसाधन और सीई मंत्री ने विभाग के लिए अनुदान की मांग पर बहस का जवाब देते हुए भाजपा और इसकी हिंदुत्व विचारधारा पर कटाक्ष करते हुए कहा। उन्होंने उसी नस में जारी रखा और कहा कि एचआर एंड सीई विभाग को द्रविड़ मॉडल सरकार के तहत सबसे अधिक लक्षित किया गया था। "इस बात को लेकर हंगामा हो रहा था कि अगर डीएमके सत्ता में वापस आती है तो एचआर एंड सीई विभाग को खत्म कर दिया जाएगा। जब तक हमारे मुख्यमंत्री हैं, तब तक कोई भी इस विभाग का कुछ नहीं कर सकता है, जिसे जस्टिस पार्टी ने अध्यात्म में सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए बनाया था, "सेकरबाबू ने कहा और इससे भाजपा विधायकों में एक दृश्य बेचैनी पैदा हो गई। पूर्व मंत्री और उनके पूर्ववर्ती सेवुर एस रामचंद्रन को यह कहने के लिए फटकार लगाते हुए कि कुछ विभाग के बजाय खुद को प्रोजेक्ट कर रहे थे और "प्रचार" में लिप्त थे, सेकरबाबू ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान विभाग में कुछ भी ठोस नहीं हुआ था। चूंकि घोषित और कार्यान्वित योजनाओं को जनता और मीडिया द्वारा अच्छी तरह से प्राप्त किया गया था, उन्होंने कहा और कहा कि पिछले दो वर्षों में पाँच सौ दो धार्मिक संस्थानों की अचल संपत्तियों के चार,दो सौ छत्तीस करोड़ रुपये को अतिक्रमण से हटा दिया गया है। AIADMK सरकार ने अपने शासन के दस वर्षों में तीन,आठ सौ उन्नीस करोड़ रुपये की मंदिर संपत्तियों को पुनः प्राप्त किया था। विभाग ने मंदिर में राजस्व उत्पन्न करने के लिए भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने के गहनों के मुद्रीकरण को भी फिर से शुरू किया है। उन्होंने कहा कि ब्याज के माध्यम से उत्पन्न राजस्व विभाग को श्रद्धालुओं के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने में मदद करता है।
पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह और आर्मी जनरल परवेज मुशर्रफ का दुबई में निधन हो गया है। मुशर्रफ ने 79 साल की उम्र में दुबई के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। मुशर्रफ का मुहब्बत की नगरी आगरा से भी नाता रहा है। सन 2001 में 15-16 जुलाई को अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने पाकिस्तान के साथ शिखर वार्ता रखी थी। वार्ता में शामिल होने तत्कालीन राष्ट्रपति मुशर्रफ आगरा पहुंचे थे। हालांकि यह वार्ता फेल रही थी। पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने शिखर वार्ता के बाद अपनी पत्नी सबा मुशर्रफ के साथ ताजमहल देखा था। इसके लिए ताज में बीएचईएल द्वारा इंदौर में बनाई गई वातानुकूलित बैटरी बस पहली बार लाई गई। जिस मार्ग से मुशर्रफ गुजरे, उस क्षेत्र के सभी मकानों, इमारतों को एक ही रंग में रंगा गया था। माल रोड की इमारतों को सफेद रंग में और ताजगंज, फतेहाबाद रोड को स्टोन कलर दिया गया था। मुशर्रफ अमर विलास होटल के कोहिनूर सुईट में ठहरे थे। इस दौरे के बाद उसकी मांग बढ़ गई और होटल ने पहली बार चांदी की कटलरी का प्रयोग किया। ताज पूर्वी गेट पर शिल्पग्राम में लाउंज को तैयार किया गया। उस समय ताज की मरम्मत के लिए लगाई गई पाड़ को मुशर्रफ के दौरे के लिए हटाया गया था। इससे वह पत्नी के साथ ताज को निहार सकें। उन्हें कोई दाग नजर न आए। ताजमहल में शाहजहां और मुमताज की भूमिगत असली कब्रें मुशर्रफ और सबा को दिखाई गई थीं, जबकि वीवीआईपी मेहमानों को ऊपर की प्रतिकृति ही दिखाई जाती रहीं हैं। आगरा किला में शीशमहल को खोलकर साफ किया गया। साथ ही एत्माद्दौला पर मखमली शू कवर शुरू कराए गए थे। हालांकि आगरा में शिखर वार्ता होने के बाद इसका दर्जा पूरी दुनिया की निगाहों में और बढ़ गया। इसके बाद से इंटरनेशनल इवेंट के लिए आगरा पहली पसंद बन गया। इसके बाद से यहां लगातार महत्वपूर्ण सम्मेलन और सेमिनार हो रहे हैं। इस समय शिखर वार्ता के लिए शहर में काफी विकास कार्य और सफाई कार्य हुआ। इसका असर पर्यटकों पर भी पड़ा। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह और आर्मी जनरल परवेज मुशर्रफ का दुबई में निधन हो गया है। मुशर्रफ ने उन्यासी साल की उम्र में दुबई के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। मुशर्रफ का मुहब्बत की नगरी आगरा से भी नाता रहा है। सन दो हज़ार एक में पंद्रह-सोलह जुलाई को अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने पाकिस्तान के साथ शिखर वार्ता रखी थी। वार्ता में शामिल होने तत्कालीन राष्ट्रपति मुशर्रफ आगरा पहुंचे थे। हालांकि यह वार्ता फेल रही थी। पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने शिखर वार्ता के बाद अपनी पत्नी सबा मुशर्रफ के साथ ताजमहल देखा था। इसके लिए ताज में बीएचईएल द्वारा इंदौर में बनाई गई वातानुकूलित बैटरी बस पहली बार लाई गई। जिस मार्ग से मुशर्रफ गुजरे, उस क्षेत्र के सभी मकानों, इमारतों को एक ही रंग में रंगा गया था। माल रोड की इमारतों को सफेद रंग में और ताजगंज, फतेहाबाद रोड को स्टोन कलर दिया गया था। मुशर्रफ अमर विलास होटल के कोहिनूर सुईट में ठहरे थे। इस दौरे के बाद उसकी मांग बढ़ गई और होटल ने पहली बार चांदी की कटलरी का प्रयोग किया। ताज पूर्वी गेट पर शिल्पग्राम में लाउंज को तैयार किया गया। उस समय ताज की मरम्मत के लिए लगाई गई पाड़ को मुशर्रफ के दौरे के लिए हटाया गया था। इससे वह पत्नी के साथ ताज को निहार सकें। उन्हें कोई दाग नजर न आए। ताजमहल में शाहजहां और मुमताज की भूमिगत असली कब्रें मुशर्रफ और सबा को दिखाई गई थीं, जबकि वीवीआईपी मेहमानों को ऊपर की प्रतिकृति ही दिखाई जाती रहीं हैं। आगरा किला में शीशमहल को खोलकर साफ किया गया। साथ ही एत्माद्दौला पर मखमली शू कवर शुरू कराए गए थे। हालांकि आगरा में शिखर वार्ता होने के बाद इसका दर्जा पूरी दुनिया की निगाहों में और बढ़ गया। इसके बाद से इंटरनेशनल इवेंट के लिए आगरा पहली पसंद बन गया। इसके बाद से यहां लगातार महत्वपूर्ण सम्मेलन और सेमिनार हो रहे हैं। इस समय शिखर वार्ता के लिए शहर में काफी विकास कार्य और सफाई कार्य हुआ। इसका असर पर्यटकों पर भी पड़ा। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। प्राधिकरण के मुताबिक डीपीआर पर सैद्धांतिक सहमति बनने के बाद अब विशेषज्ञ कमेटी जल्द ही गोरखपुर आएगी। कमेटी, पार्क के लिए गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के पास चिह्नित जमीन का निरीक्षण करेगी जिसके बाद प्लास्टिक पार्क की स्थापना को अंतिम मंजूरी मिल जाने की उम्मीद है। गोरखपुर शहर। - फोटो : अमर उजाला। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) क्षेत्र में प्रस्तावित प्लास्टिक पार्क की स्थापना की राह थोड़ी और आसान हो गई है। पार्क के लिए तैयार की गई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) पर राज्य सरकार की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार की विशेषज्ञ समिति ने भी सैद्धांतिक सहमति जताई है। गीडा की तरफ से मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए डीपीआर का प्रेजेंटेशन दिया गया था। प्राधिकरण के मुताबिक डीपीआर पर सैद्धांतिक सहमति बनने के बाद अब विशेषज्ञ कमेटी जल्द ही गोरखपुर आएगी। कमेटी, पार्क के लिए गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के पास चिह्नित जमीन का निरीक्षण करेगी जिसके बाद प्लास्टिक पार्क की स्थापना को अंतिम मंजूरी मिल जाने की उम्मीद है। प्राधिकरण का कहना है कि मंजूरी मिलते ही पार्क विकसित करने का काम शुरू करा दिया जाएगा। प्लास्टिक पार्क की डीपीआर 12 अक्तूबर को राज्य सरकार को भेजी गई थी। वहां से मंजूरी के बाद 20 अक्तूबर को इसे केंद्र सरकार को भेज दिया गया था। मंगलवार यानी नौ नवंबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से डीपीआर का प्रेजेंटेशन रसायन एवं पेट्रो रसायन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जनरल एनके संतोषी की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति के सामने दिया गया। पार्क की स्थापना के लिए 71 एकड़ जमीन प्रस्तावित है। इसमें 90 औद्योगिक भूखंड होंगे। इनमें 600 से लेकर 17 हजार वर्ग मीटर तक के भूखंड शामिल हैं। इसके साथ ही प्रशासनिक भवन, यूटिलिटी शॉप, भंडारण इकाइयां संचालित होंगी। प्रशासनिक भवन 600 वर्ग मीटर में होगा। इसमें भूतल पर बैंक, कैंटीन एवं प्राथमिक चिकित्सा केंद्र होगा। प्रथम तल पर श्रमिकों के लिए डॉरमेट्री व प्रबंधकीय आवास भी उपलब्ध होंगे। प्लास्टिक पार्क की स्थापना से करीब पांच हजार लोगों को परोक्ष और अपरोक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। वहीं सीपेट के लिए चिह्नित 1200 वर्ग मीटर जमीन पर कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) की स्थापना की जाएगी। इस सेंटर में प्लास्टिक से बनी वस्तुओं के निर्माण के लिए आधुनिक प्लांट एवं मशीनरी लगाई जाएगी। टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन तथा रिसर्च की सुविधा भी दी जाएगी। प्लास्टिक पार्क में केवल प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाली औद्योगिक इकाइयां स्थापित होंगी। विशेष क्षेत्र होने से बड़े पैमाने पर निवेश की भी उम्मीद है। प्लास्टिक पार्क में भूमि विकास एवं अन्य आधारभूत संरचना पर करीब 81 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। भारत सरकार से 40 करोड़ रुपये मिलेंगे जबकि बाकी रकम का इंतजाम गीडा को खुद करना होगा। गीडा सीईओ पवन अग्रवाल ने बताया कि केंद्र सरकार की विशेषज्ञ समिति ने प्लास्टिक पार्क की डीपीआर पर सैद्धांतिक सहमति जताई है। जल्द ही यह समिति जमीन देखने गोरखपुर आएगी। इसके बाद अंतिम मंजूरी मिल जाएगी और पार्क विकसित करने का काम शुरू हो जाएगा। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। प्राधिकरण के मुताबिक डीपीआर पर सैद्धांतिक सहमति बनने के बाद अब विशेषज्ञ कमेटी जल्द ही गोरखपुर आएगी। कमेटी, पार्क के लिए गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के पास चिह्नित जमीन का निरीक्षण करेगी जिसके बाद प्लास्टिक पार्क की स्थापना को अंतिम मंजूरी मिल जाने की उम्मीद है। गोरखपुर शहर। - फोटो : अमर उजाला। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र में प्रस्तावित प्लास्टिक पार्क की स्थापना की राह थोड़ी और आसान हो गई है। पार्क के लिए तैयार की गई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट पर राज्य सरकार की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार की विशेषज्ञ समिति ने भी सैद्धांतिक सहमति जताई है। गीडा की तरफ से मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए डीपीआर का प्रेजेंटेशन दिया गया था। प्राधिकरण के मुताबिक डीपीआर पर सैद्धांतिक सहमति बनने के बाद अब विशेषज्ञ कमेटी जल्द ही गोरखपुर आएगी। कमेटी, पार्क के लिए गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के पास चिह्नित जमीन का निरीक्षण करेगी जिसके बाद प्लास्टिक पार्क की स्थापना को अंतिम मंजूरी मिल जाने की उम्मीद है। प्राधिकरण का कहना है कि मंजूरी मिलते ही पार्क विकसित करने का काम शुरू करा दिया जाएगा। प्लास्टिक पार्क की डीपीआर बारह अक्तूबर को राज्य सरकार को भेजी गई थी। वहां से मंजूरी के बाद बीस अक्तूबर को इसे केंद्र सरकार को भेज दिया गया था। मंगलवार यानी नौ नवंबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से डीपीआर का प्रेजेंटेशन रसायन एवं पेट्रो रसायन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जनरल एनके संतोषी की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति के सामने दिया गया। पार्क की स्थापना के लिए इकहत्तर एकड़ जमीन प्रस्तावित है। इसमें नब्बे औद्योगिक भूखंड होंगे। इनमें छः सौ से लेकर सत्रह हजार वर्ग मीटर तक के भूखंड शामिल हैं। इसके साथ ही प्रशासनिक भवन, यूटिलिटी शॉप, भंडारण इकाइयां संचालित होंगी। प्रशासनिक भवन छः सौ वर्ग मीटर में होगा। इसमें भूतल पर बैंक, कैंटीन एवं प्राथमिक चिकित्सा केंद्र होगा। प्रथम तल पर श्रमिकों के लिए डॉरमेट्री व प्रबंधकीय आवास भी उपलब्ध होंगे। प्लास्टिक पार्क की स्थापना से करीब पांच हजार लोगों को परोक्ष और अपरोक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। वहीं सीपेट के लिए चिह्नित एक हज़ार दो सौ वर्ग मीटर जमीन पर कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना की जाएगी। इस सेंटर में प्लास्टिक से बनी वस्तुओं के निर्माण के लिए आधुनिक प्लांट एवं मशीनरी लगाई जाएगी। टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन तथा रिसर्च की सुविधा भी दी जाएगी। प्लास्टिक पार्क में केवल प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाली औद्योगिक इकाइयां स्थापित होंगी। विशेष क्षेत्र होने से बड़े पैमाने पर निवेश की भी उम्मीद है। प्लास्टिक पार्क में भूमि विकास एवं अन्य आधारभूत संरचना पर करीब इक्यासी करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। भारत सरकार से चालीस करोड़ रुपये मिलेंगे जबकि बाकी रकम का इंतजाम गीडा को खुद करना होगा। गीडा सीईओ पवन अग्रवाल ने बताया कि केंद्र सरकार की विशेषज्ञ समिति ने प्लास्टिक पार्क की डीपीआर पर सैद्धांतिक सहमति जताई है। जल्द ही यह समिति जमीन देखने गोरखपुर आएगी। इसके बाद अंतिम मंजूरी मिल जाएगी और पार्क विकसित करने का काम शुरू हो जाएगा। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
Jamshedpur (Mujtaba Haider Rizvi) : बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी जलापूर्ति योजना की मोटर सोमवार की सुबह ठीक कर ली गई है. मोटर गर्म हो जाने की वजह से इसमें खराबी आ गई थी. इस यांत्रिक खराबी को ठीक करने के बाद सोमवार की सुबह से बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी के 1140 घरों में पानी की आपूर्ति चालू कर दी गई है. पानी की आपूर्ति शुरू होने से बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी के लोगों को राहत मिली है. यह मोटर कभी भी दोबारा जल सकती है. ऐसा भाजपा के नेता सुबोध झा का कहना है. सुबोध झा इलाके के जलपुरुष कहे जाते हैं. उन्होंने इलाके में पानी पर काफी काम किया है. उनका कहना है कि मिस्त्रियों ने उन्हें बताया है कि मोटर की स्थिति ठीक नहीं है. इसे जिला प्रशासन को ठीक कराना होगा. वरना कभी भी यह दोबारा जल सकती है.
Jamshedpur : बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी जलापूर्ति योजना की मोटर सोमवार की सुबह ठीक कर ली गई है. मोटर गर्म हो जाने की वजह से इसमें खराबी आ गई थी. इस यांत्रिक खराबी को ठीक करने के बाद सोमवार की सुबह से बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी के एक हज़ार एक सौ चालीस घरों में पानी की आपूर्ति चालू कर दी गई है. पानी की आपूर्ति शुरू होने से बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी के लोगों को राहत मिली है. यह मोटर कभी भी दोबारा जल सकती है. ऐसा भाजपा के नेता सुबोध झा का कहना है. सुबोध झा इलाके के जलपुरुष कहे जाते हैं. उन्होंने इलाके में पानी पर काफी काम किया है. उनका कहना है कि मिस्त्रियों ने उन्हें बताया है कि मोटर की स्थिति ठीक नहीं है. इसे जिला प्रशासन को ठीक कराना होगा. वरना कभी भी यह दोबारा जल सकती है.
Kuwait Indian Job Update: कुवैत में विदेशियों को नौकरी से हटाने की नीति का 48 हजार भारतीय शिकार हो गए हैं। साल 2021 में इन भारतीयों को कुवैत छोड़ना पड़ा है। कुवैत से जाने वाले विदेशी कामगारों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। दोहा कोरोना की मार के बीच खाड़ी देश कतर से भारतीय कामगारों के लिए बुरी खबर है। साल 2021 के पहले 9 महीने में 1,68,000 प्रवासी कामगारों को कुवैत छोड़ना पड़ा है। दुखद बात यह है कि इसमें सबसे ज्यादा भारतीय हैं। जिन लोगों को कुवैत छोड़ना पड़ा है, उनमें प्राइवेट और सरकारी क्षेत्र में 60,400 घरेलू वर्कर और 107,900 प्रवासी कामगार शामिल हैं। इससे कुवैत में कुल घरेलू कामगारों की संख्या में 9 फीसदी की गिरावट आई है। अल अन्बा अखबार के मुताबिक कुवैत के कुल घरेलू वर्कर्स की संख्या में 9 फीसदी की गिरावट आई है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि 60,400 कामगार लेबर मार्केट से चले गए हैं। इससे सितंबर 2021 में कुल कामगारों की संख्या गिरकर 6,08,230 पहुंच गई। साल 2021 की शुरुआत में कुल कामगारों की संख्या कुवैत में 668,615 थी। जिन कामगारों को कुवैत छोड़ना पड़ा है, उनमें सबसे ज्यादा 48 हजार भारतीय हैं। Golden Visa: यूएई के बाद अब बहरीन देगा गोल्डन वीजा, जानें क्या है योग्यता और कैसे पा सकतें हैं आप? कुवैत की कुल आबादी में 75 फीसदी प्रवासी इसके साथ ही अब कुवैत में काम करने वाले कुल भारतीयों की संख्या अब 499,400 से घटकर 451,380 पहुंच गई है। अगर इसे प्रतिशत में देखें तो कुवैत में काम करने वाले भारतीयों की संख्या में 10 फीसदी की कमी आई है। वहीं कुवैत में काम करने वाले मिस्र के मजदूरों की संख्या में करीब 5 फीसदी की गिरावट आई है। इसके बाद तीसरे नंबर पर बांग्लादेश के कामगारों का नंबर है। साल 2021 में नेपाल के कामगारों को भी झटका लगा और उनकी संख्या भी 7 हजार घटी है। इसके अलावा फिलीपीन्स और पाकिस्तान के मजदूरों की संख्या में कमी आई है। एक तरफ विदेशी कामगार जहां कुवैत से जा रहे हैं, वहीं देश के नागरिकों की नौकरी में बढ़ोत्तरी हुई है। कुवैत के 17,511 लोगों को नौकरी मिली है। दरअसल, कुवैत नौकरियों में विदेशी नागरिकों की जगह पर अपने नागरिकों को तरजीह दे रहा है और उसकी यह योजना इस साल अगस्त तक पूरी हो जाएगी। कुवैत की कुल आबादी में 75 फीसदी प्रवासी हैं जिसमें सबसे ज्यादा भारतीय हैं। इससे भारत को बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा मिलती है। कुवैत के इस कदम से भारतीयों को बड़ा झटका लगा है।
Kuwait Indian Job Update: कुवैत में विदेशियों को नौकरी से हटाने की नीति का अड़तालीस हजार भारतीय शिकार हो गए हैं। साल दो हज़ार इक्कीस में इन भारतीयों को कुवैत छोड़ना पड़ा है। कुवैत से जाने वाले विदेशी कामगारों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। दोहा कोरोना की मार के बीच खाड़ी देश कतर से भारतीय कामगारों के लिए बुरी खबर है। साल दो हज़ार इक्कीस के पहले नौ महीने में एक,अड़सठ,शून्य प्रवासी कामगारों को कुवैत छोड़ना पड़ा है। दुखद बात यह है कि इसमें सबसे ज्यादा भारतीय हैं। जिन लोगों को कुवैत छोड़ना पड़ा है, उनमें प्राइवेट और सरकारी क्षेत्र में साठ,चार सौ घरेलू वर्कर और एक सौ सात,नौ सौ प्रवासी कामगार शामिल हैं। इससे कुवैत में कुल घरेलू कामगारों की संख्या में नौ फीसदी की गिरावट आई है। अल अन्बा अखबार के मुताबिक कुवैत के कुल घरेलू वर्कर्स की संख्या में नौ फीसदी की गिरावट आई है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि साठ,चार सौ कामगार लेबर मार्केट से चले गए हैं। इससे सितंबर दो हज़ार इक्कीस में कुल कामगारों की संख्या गिरकर छः,आठ,दो सौ तीस पहुंच गई। साल दो हज़ार इक्कीस की शुरुआत में कुल कामगारों की संख्या कुवैत में छः सौ अड़सठ,छः सौ पंद्रह थी। जिन कामगारों को कुवैत छोड़ना पड़ा है, उनमें सबसे ज्यादा अड़तालीस हजार भारतीय हैं। Golden Visa: यूएई के बाद अब बहरीन देगा गोल्डन वीजा, जानें क्या है योग्यता और कैसे पा सकतें हैं आप? कुवैत की कुल आबादी में पचहत्तर फीसदी प्रवासी इसके साथ ही अब कुवैत में काम करने वाले कुल भारतीयों की संख्या अब चार सौ निन्यानवे,चार सौ से घटकर चार सौ इक्यावन,तीन सौ अस्सी पहुंच गई है। अगर इसे प्रतिशत में देखें तो कुवैत में काम करने वाले भारतीयों की संख्या में दस फीसदी की कमी आई है। वहीं कुवैत में काम करने वाले मिस्र के मजदूरों की संख्या में करीब पाँच फीसदी की गिरावट आई है। इसके बाद तीसरे नंबर पर बांग्लादेश के कामगारों का नंबर है। साल दो हज़ार इक्कीस में नेपाल के कामगारों को भी झटका लगा और उनकी संख्या भी सात हजार घटी है। इसके अलावा फिलीपीन्स और पाकिस्तान के मजदूरों की संख्या में कमी आई है। एक तरफ विदेशी कामगार जहां कुवैत से जा रहे हैं, वहीं देश के नागरिकों की नौकरी में बढ़ोत्तरी हुई है। कुवैत के सत्रह,पाँच सौ ग्यारह लोगों को नौकरी मिली है। दरअसल, कुवैत नौकरियों में विदेशी नागरिकों की जगह पर अपने नागरिकों को तरजीह दे रहा है और उसकी यह योजना इस साल अगस्त तक पूरी हो जाएगी। कुवैत की कुल आबादी में पचहत्तर फीसदी प्रवासी हैं जिसमें सबसे ज्यादा भारतीय हैं। इससे भारत को बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा मिलती है। कुवैत के इस कदम से भारतीयों को बड़ा झटका लगा है।
रामगोपाल यादव के बाद राज्यसभा में कौन होगा सपा का नेता ? टीपू सुल्तान जयंती समारोह में पॉर्न देखते पकड़े गए कांग्रेसी मंत्री तनवीर सेठ ! मुलायम सिंह यादव ने की पीएम मोदी से अपील, एक हफ्ते टाला जाए नोटों को बैन करने का फैसला ! मोकामा में जीत और गोपालगंज में हार पर आया तेजस्वी का रिएक्शन, कहा- महागठबंधन ने सेंधमारी. .
रामगोपाल यादव के बाद राज्यसभा में कौन होगा सपा का नेता ? टीपू सुल्तान जयंती समारोह में पॉर्न देखते पकड़े गए कांग्रेसी मंत्री तनवीर सेठ ! मुलायम सिंह यादव ने की पीएम मोदी से अपील, एक हफ्ते टाला जाए नोटों को बैन करने का फैसला ! मोकामा में जीत और गोपालगंज में हार पर आया तेजस्वी का रिएक्शन, कहा- महागठबंधन ने सेंधमारी. .
मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने रविवार को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए एक युवक को अस्पताल पहुंचाया। रास्ते से जाते समय उन्होंने एक्सीडेंट देखते ही गाड़ी रुकवा दी थी। मौके से ही घायल को अपनी कार में बैठाया। उन्होंने मौके से ही अस्पताल प्रबंधन से बात कर इलाज की व्यवस्था भी करवाई। अन्ना नगर के पास दो गाड़ी के आपस में टकराने से एक युवक घायल हो गया था। सारंग रविवार दोपहर अपने विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। इस बीच अन्ना नगर सिक्योरिटी लाइन के पास उन्हें सड़क पर एक युवक बहुत ही गंभीर हालत में खून से लथपथ दिखाई दिया। उन्होंने तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई और एम्बुलेंस का इंतजार किए बिना घायल को अपनी गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया। राहगिरों ने घायल युवक को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस 108 को फोन किया था, लेकिन उसे आने में देरी हो रही थी। युवक घायल हालत में सड़क पर ही पड़ा हुआ था। युवक के सिर से काफी ज्यादा खून बह रहा था, तभी गाड़ी से उतरे विश्वास ने कहा कि इन्हें मेरी ही गाड़ी से अस्पताल लेजाते है। इतना ही नहीं विश्वास ने अस्पताल में फोन लगाकर घायल को तुरंत इलाज करने के आदेश भी दिए है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने रविवार को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए एक युवक को अस्पताल पहुंचाया। रास्ते से जाते समय उन्होंने एक्सीडेंट देखते ही गाड़ी रुकवा दी थी। मौके से ही घायल को अपनी कार में बैठाया। उन्होंने मौके से ही अस्पताल प्रबंधन से बात कर इलाज की व्यवस्था भी करवाई। अन्ना नगर के पास दो गाड़ी के आपस में टकराने से एक युवक घायल हो गया था। सारंग रविवार दोपहर अपने विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। इस बीच अन्ना नगर सिक्योरिटी लाइन के पास उन्हें सड़क पर एक युवक बहुत ही गंभीर हालत में खून से लथपथ दिखाई दिया। उन्होंने तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई और एम्बुलेंस का इंतजार किए बिना घायल को अपनी गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया। राहगिरों ने घायल युवक को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस एक सौ आठ को फोन किया था, लेकिन उसे आने में देरी हो रही थी। युवक घायल हालत में सड़क पर ही पड़ा हुआ था। युवक के सिर से काफी ज्यादा खून बह रहा था, तभी गाड़ी से उतरे विश्वास ने कहा कि इन्हें मेरी ही गाड़ी से अस्पताल लेजाते है। इतना ही नहीं विश्वास ने अस्पताल में फोन लगाकर घायल को तुरंत इलाज करने के आदेश भी दिए है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
इन दिनों टीवी शो नागिन 3 खूब पॉपुलर हो रहा है और इस शो में बेला और माहिर के बीच मे नजदीकियाँ बढ़ती जा रही है और अब यह बात विष और विक्रांत को पसंद नहीं आ रही है. अब इन सबके बीच विष और विक्रांत एक हो जाएंगे और बेला अकेली. इसी के साथ अब नागिन 3 मे एक और विलेन की एंट्री हो गई है जिसका राज जल्द ही खुलने वाला है. जी हाँ, खबरों के अनुसार विक्रांत बीते एपिसोड में एक नागिन से बात कर रहा था और वह नागिन इंसानी रूप में नहीं आई और वह नागिन की पोल खुलने वाली है. जी हाँ, शो की स्टोरी मे अब एक मेजर ट्विस्ट देखने को मिलने वाला है जिसके बाद शो की स्टोरी एक दम ही बदल जाएगी. जी हाँ, आने वाली खबरों के अनुसार शो में बहुत जल्द अब माहिर की माँ का राज खुलने वाला है यानी सुमित्रा का राज. खबरों के अनुसार शो में अब पता चलेगा की माहिर की माँ सुमित्रा नहीं है बल्कि वह तो सबसे बड़ी और मैं विलेन है वहीं माहिर की असली माँ शिवन्या है वहीं शिवन्या जिन्हे आप सभी ने बीते एपिसोड में देखा होगा. अब यह सामने आएगा कि सुमित्रा शो की मैंने विलन है जोकि विक्रांत से मिली हुई है और यह सब नागमणि को पाने के लिए कर रही है. शो में अब मौनी रॉय की झलक नजर आ सकती है जो माहिर की माँ के किरदार में वापसी करेंगी.
इन दिनों टीवी शो नागिन तीन खूब पॉपुलर हो रहा है और इस शो में बेला और माहिर के बीच मे नजदीकियाँ बढ़ती जा रही है और अब यह बात विष और विक्रांत को पसंद नहीं आ रही है. अब इन सबके बीच विष और विक्रांत एक हो जाएंगे और बेला अकेली. इसी के साथ अब नागिन तीन मे एक और विलेन की एंट्री हो गई है जिसका राज जल्द ही खुलने वाला है. जी हाँ, खबरों के अनुसार विक्रांत बीते एपिसोड में एक नागिन से बात कर रहा था और वह नागिन इंसानी रूप में नहीं आई और वह नागिन की पोल खुलने वाली है. जी हाँ, शो की स्टोरी मे अब एक मेजर ट्विस्ट देखने को मिलने वाला है जिसके बाद शो की स्टोरी एक दम ही बदल जाएगी. जी हाँ, आने वाली खबरों के अनुसार शो में बहुत जल्द अब माहिर की माँ का राज खुलने वाला है यानी सुमित्रा का राज. खबरों के अनुसार शो में अब पता चलेगा की माहिर की माँ सुमित्रा नहीं है बल्कि वह तो सबसे बड़ी और मैं विलेन है वहीं माहिर की असली माँ शिवन्या है वहीं शिवन्या जिन्हे आप सभी ने बीते एपिसोड में देखा होगा. अब यह सामने आएगा कि सुमित्रा शो की मैंने विलन है जोकि विक्रांत से मिली हुई है और यह सब नागमणि को पाने के लिए कर रही है. शो में अब मौनी रॉय की झलक नजर आ सकती है जो माहिर की माँ के किरदार में वापसी करेंगी.
नयी दिल्लीः अपना नाम वैश्विक आतंकवादियों की सूची से हटाने की जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद की याचिका के संयुक्त राष्ट्र में खारिज होने से जुड़ी जानकारी के सार्वजनिक होने से चिढ़े पाकिस्तान ने वैश्विक निकाय से इस बात की जांच का अनुरोध किया है कि भारतीय समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) को यह जानकारी कैसे मिली। यह उन दुर्लभ मौकों में से एक है जब किसी देश ने वैश्विक निकाय के घटनाक्रम के प्रकाशन की जांच के लिये संयुक्त राष्ट्र को लिखा है। Nirmala Sitharaman in Aap ki Adalat: 'कांग्रेस को सत्ता में आने के लिए अभी अगले 5 साल और इंतजार करना होगा' सरकार के एक सूत्र ने यहां कहा, "संयुक्त राष्ट्र को पिछले हफ्ते लिखे एक खत में संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी राजदूत मलीहा लोधी ने यह पता लगाने के लिये जांच की मांग की है कि 15 सदस्यीय समिति में से किसने भारत की 'सरकारी समाचार एजेंसी' को संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकवादी की सूची से हटाने की हाफिज सईद की याचिका खारिज होने की जानकारी दी। " लोधी ने प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया को गलती से "सरकारी समाचार एजेंसी" बताया और पीटीआई के समाचार की क्लीपिंग भी संलग्न की। लोधी खुद भी पत्रकार रही हैं। संवाद समिति पीटीआई ने सात मार्च को अपनी खबर में बताया था कि संयुक्त राष्ट्र ने 2008 के मुंबई हमलों के सरगना का नाम प्रतिबंधित आतंकवादियों की सूची से हटाने की अपील खारिज कर दी है। सूत्रों ने पीटीआई को बताया था कि भारत ने सईद की गतिविधियों से संबंधित "बेहद गोपनीय सूचनाओं" समेत विस्तृत साक्ष्य साझा किया था जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र का यह फैसला आया था। पाकिस्तान के कदम पर प्रतिक्रिया करते हुए अधिकारियों ने कहा कि यह कदम भारतीय मीडिया द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकवाद के अनवरत कवरेज पर अंकुश लगाने का प्रयास है। इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा, "लोधी ने पीटीआई की खबर की सच्चाई पर सवाल नहीं उठाए हैं बल्कि प्रतिबंध जारी रखने के बारे में सूचना के प्रवाह को बाधित करने की मांग की है और इच्छा जताई है कि भविष्य में ऐसी सूचनाओं को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। " सूत्रों ने कहा कि लोधी के अनुरोध को कोई समर्थन नहीं मिला है।
नयी दिल्लीः अपना नाम वैश्विक आतंकवादियों की सूची से हटाने की जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद की याचिका के संयुक्त राष्ट्र में खारिज होने से जुड़ी जानकारी के सार्वजनिक होने से चिढ़े पाकिस्तान ने वैश्विक निकाय से इस बात की जांच का अनुरोध किया है कि भारतीय समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया को यह जानकारी कैसे मिली। यह उन दुर्लभ मौकों में से एक है जब किसी देश ने वैश्विक निकाय के घटनाक्रम के प्रकाशन की जांच के लिये संयुक्त राष्ट्र को लिखा है। Nirmala Sitharaman in Aap ki Adalat: 'कांग्रेस को सत्ता में आने के लिए अभी अगले पाँच साल और इंतजार करना होगा' सरकार के एक सूत्र ने यहां कहा, "संयुक्त राष्ट्र को पिछले हफ्ते लिखे एक खत में संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी राजदूत मलीहा लोधी ने यह पता लगाने के लिये जांच की मांग की है कि पंद्रह सदस्यीय समिति में से किसने भारत की 'सरकारी समाचार एजेंसी' को संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकवादी की सूची से हटाने की हाफिज सईद की याचिका खारिज होने की जानकारी दी। " लोधी ने प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया को गलती से "सरकारी समाचार एजेंसी" बताया और पीटीआई के समाचार की क्लीपिंग भी संलग्न की। लोधी खुद भी पत्रकार रही हैं। संवाद समिति पीटीआई ने सात मार्च को अपनी खबर में बताया था कि संयुक्त राष्ट्र ने दो हज़ार आठ के मुंबई हमलों के सरगना का नाम प्रतिबंधित आतंकवादियों की सूची से हटाने की अपील खारिज कर दी है। सूत्रों ने पीटीआई को बताया था कि भारत ने सईद की गतिविधियों से संबंधित "बेहद गोपनीय सूचनाओं" समेत विस्तृत साक्ष्य साझा किया था जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र का यह फैसला आया था। पाकिस्तान के कदम पर प्रतिक्रिया करते हुए अधिकारियों ने कहा कि यह कदम भारतीय मीडिया द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकवाद के अनवरत कवरेज पर अंकुश लगाने का प्रयास है। इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा, "लोधी ने पीटीआई की खबर की सच्चाई पर सवाल नहीं उठाए हैं बल्कि प्रतिबंध जारी रखने के बारे में सूचना के प्रवाह को बाधित करने की मांग की है और इच्छा जताई है कि भविष्य में ऐसी सूचनाओं को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। " सूत्रों ने कहा कि लोधी के अनुरोध को कोई समर्थन नहीं मिला है।
अजमेर शहर व्यापार महासंघ के प्रवक्ता सीए विकास अग्रवाल व प्रवक्ता कमल गंगवाल ने आर्थिक मामलों का विभाग 'जन भागीदारी' की भावना को बढ़ावा देने के लिए, वित्त मंत्रालय की बजट बनाने की प्रक्रिया में सहभागी और समावेशी बनाने के लिए नागरिकों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं जिसमें जरिए सरकार द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया कि "कृपया अपने विचार और सुझाव साझा करें, जो कि समावेशी विकास के साथ भारत को एक वैश्विक आर्थिक शक्ति में बदलने में मदद कर सकते हैं।" इसी संदर्भ में अजमेर शहर व्यापार महासंघ प्रवक्ता सीए विकास अग्रवाल व प्रवक्ता कमल गंगवाल द्वारा सुझाव देते हुए मांग की कि मध्यम वर्ग के ऊपर कर का बोझ कम करने का प्रयास किया जाना चाहिए। शिक्षा पर अधिक ध्यान दिया जाए व शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने पर जोर दिए जाने की अधिक आवश्यकता है। नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन में और अधिक तेजी लाई जाए। इसके अलावा, आगामी बजट में भारत में स्वास्थ्य के क्षेत्रों में सुधार पर अधिक जोर दिया जाना जरूरी है। महासंघ के अध्यक्ष किशन गुप्ता वा महामंत्री प्रवीण जैन ने बताया कि विभिन्न आयकर दाताओं की उम्मीदें बजट को लेकर वेतनभोगी वर्ग की उम्मीदें हैं कि आगामी बजट में इनकम टैक्स सीमा में कुछ बदलाव करने चाहिए। वित्त वर्ष 2017-18 से कर दरों में संशोधन के लिए विचार नहीं किया गया है। सीए अग्रवाल के अनुसार एक नई कर व्यवस्था शुरू की गई थी, लेकिन पुरानी कर व्यवस्था की तुलना में इसकी अव्यवहार्यता के कारण अधिकांश करदाताओं द्वारा इसे नहीं अपनाया गया है। इस प्रकार, अधिक क्रय शक्ति का लाभ उठाने के लिए और कुछ कर राहत प्रदान करने के लिए 30 प्रतिशत की उच्चतम कर दर को घटाकर 25 प्रतिशत करने की आवश्यकता है और उच्चतम कर दर के लिए सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर रुपये 20 लाख करने की आवश्यकता है। अतिरिक्त इसके लगातार दो वर्षों तक कोविड-19 के प्रभाव और वैश्विक मुद्रास्फीति और रेपो दरों में लगातार संशोधन के कारण 'मध्यम वर्ग' और 'निम्न मध्यम वर्ग' काफी हद तक प्रभावित हुए हैं। प्रवक्ता गंगवाल ने बताया कि बजट में धारा 80 सी के तहत सीमा बढ़ाने पर भी गौर करने की जरूरत है। धारा 80 सी के तहत सीमा को 2 लाख रुपये से 2.5 लाख रुपये के बीच कहीं भी बढ़ाया जा सकता है, जिससे बचत और निवेश उन्मुख अर्थव्यवस्था के प्रतिमान को स्थानांतरित किया जा सके। इसके अलावा, चिकित्सा उपचार और चिकित्सा बीमा की बढ़ी हुई दरों पर विचार करते हुए, धारा 80 डी के तहत 25,000-50,000 रुपये की मौजूदा सीमा की समीक्षा की जानी चाहिए और मुद्रास्फीति की वृद्धि के अनुरूप वृद्धि की जानी चाहिए। महासंघ के सचिव गिरीश लालवानी ने सुझाव दिया कि व्यापारियों को जीएसटी के सरलीकरण व यूजर फ्रेंडली की बहुत अधिक आवश्यकता है जिसके जटिल होने के कारण नए व्यवहारी जीएसटी की जटिलता के कारण व्यापार शुरू करने में भी कतरानें लगें हैं। महासंघ ने आगामी आम बजट को विकासोन्मुखी व आम जनता और व्यापारियों के हित में पेश करने की मांग की है। सीए विकास अग्रवाल,
अजमेर शहर व्यापार महासंघ के प्रवक्ता सीए विकास अग्रवाल व प्रवक्ता कमल गंगवाल ने आर्थिक मामलों का विभाग 'जन भागीदारी' की भावना को बढ़ावा देने के लिए, वित्त मंत्रालय की बजट बनाने की प्रक्रिया में सहभागी और समावेशी बनाने के लिए नागरिकों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं जिसमें जरिए सरकार द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया कि "कृपया अपने विचार और सुझाव साझा करें, जो कि समावेशी विकास के साथ भारत को एक वैश्विक आर्थिक शक्ति में बदलने में मदद कर सकते हैं।" इसी संदर्भ में अजमेर शहर व्यापार महासंघ प्रवक्ता सीए विकास अग्रवाल व प्रवक्ता कमल गंगवाल द्वारा सुझाव देते हुए मांग की कि मध्यम वर्ग के ऊपर कर का बोझ कम करने का प्रयास किया जाना चाहिए। शिक्षा पर अधिक ध्यान दिया जाए व शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने पर जोर दिए जाने की अधिक आवश्यकता है। नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन में और अधिक तेजी लाई जाए। इसके अलावा, आगामी बजट में भारत में स्वास्थ्य के क्षेत्रों में सुधार पर अधिक जोर दिया जाना जरूरी है। महासंघ के अध्यक्ष किशन गुप्ता वा महामंत्री प्रवीण जैन ने बताया कि विभिन्न आयकर दाताओं की उम्मीदें बजट को लेकर वेतनभोगी वर्ग की उम्मीदें हैं कि आगामी बजट में इनकम टैक्स सीमा में कुछ बदलाव करने चाहिए। वित्त वर्ष दो हज़ार सत्रह-अट्ठारह से कर दरों में संशोधन के लिए विचार नहीं किया गया है। सीए अग्रवाल के अनुसार एक नई कर व्यवस्था शुरू की गई थी, लेकिन पुरानी कर व्यवस्था की तुलना में इसकी अव्यवहार्यता के कारण अधिकांश करदाताओं द्वारा इसे नहीं अपनाया गया है। इस प्रकार, अधिक क्रय शक्ति का लाभ उठाने के लिए और कुछ कर राहत प्रदान करने के लिए तीस प्रतिशत की उच्चतम कर दर को घटाकर पच्चीस प्रतिशत करने की आवश्यकता है और उच्चतम कर दर के लिए सीमा को दस लाख रुपये से बढ़ाकर बीस रुपया लाख करने की आवश्यकता है। अतिरिक्त इसके लगातार दो वर्षों तक कोविड-उन्नीस के प्रभाव और वैश्विक मुद्रास्फीति और रेपो दरों में लगातार संशोधन के कारण 'मध्यम वर्ग' और 'निम्न मध्यम वर्ग' काफी हद तक प्रभावित हुए हैं। प्रवक्ता गंगवाल ने बताया कि बजट में धारा अस्सी सी के तहत सीमा बढ़ाने पर भी गौर करने की जरूरत है। धारा अस्सी सी के तहत सीमा को दो लाख रुपये से दो.पाँच लाख रुपये के बीच कहीं भी बढ़ाया जा सकता है, जिससे बचत और निवेश उन्मुख अर्थव्यवस्था के प्रतिमान को स्थानांतरित किया जा सके। इसके अलावा, चिकित्सा उपचार और चिकित्सा बीमा की बढ़ी हुई दरों पर विचार करते हुए, धारा अस्सी डी के तहत पच्चीस,शून्य-पचास,शून्य रुपयापये की मौजूदा सीमा की समीक्षा की जानी चाहिए और मुद्रास्फीति की वृद्धि के अनुरूप वृद्धि की जानी चाहिए। महासंघ के सचिव गिरीश लालवानी ने सुझाव दिया कि व्यापारियों को जीएसटी के सरलीकरण व यूजर फ्रेंडली की बहुत अधिक आवश्यकता है जिसके जटिल होने के कारण नए व्यवहारी जीएसटी की जटिलता के कारण व्यापार शुरू करने में भी कतरानें लगें हैं। महासंघ ने आगामी आम बजट को विकासोन्मुखी व आम जनता और व्यापारियों के हित में पेश करने की मांग की है। सीए विकास अग्रवाल,
- 21 min ago ब्लैक फ़िल्म में छोटी रानी मुखर्जी का किरदार निभाने वाली आयशा को रणबीर ने दी थी ट्रेनिंग, अब कहां है ये बच्ची? - 37 min ago 'कौन बनेगा करोड़पति 15' को अलविदा कर गए अमिताभ बच्चन, रुआंसा होकर बोले- 'एक नए भारत का बना गवाह' Don't Miss! - Automobiles इलेक्ट्रिक वाहन स्टार्ट-अप Creatara ने पेश किए दो शानदार ईवी, जानें खासियत और कीमत? Khatron Ke Khiladi Update: 'खतरों के खिलाड़ी 13' का सभी फैंस को बेसब्री से इंतजार है। इस शो के हर अपडेट को फैंस जानना चाहते हैं। पिछले दिनों रोहित रॉय के चोट लगने की वजह से उन्हें शो से बाहर जाना पड़ा लेकिन अब खबर है कि एक और कंटेस्टेंट शो से बाहर हो चुका है। अंजुम फकीह शो से बाहर! ताजा चर्चा यह है कि अंजुम फकीह शो से बाहर हो गई हैं। जैसा कि हम जानते हैं, रोहित शेट्टी का शो सबसे कठिन शोज में से एक है। अंजुम फकीह को शो की सबसे मजबूत प्रतियोगियों में से एक माना जाता था। लेकिन अगर अफवाह सच है, तो यह असल में फैंस के लिए निराशाजनक हो सकता है। 'बिग बॉस' की तरह, 'खतरों के खिलाड़ी' एक ऐसा शो है जिससे लोग शुरुआत में ही बेदखल होने से नफरत करते हैं। यह एक बड़ा टिकट शो है जिसे जीतने वाले को बहुत सारा पैसा और फेम मिलात है। आपको बता दें, कुंडली भाग्य के प्रशंसक अंजुम फकीह को सृष्टि के नाम से जानते हैं, जो श्रद्धा आर्या द्वारा निभाई गई प्रीता की बहन है। खतरों के खिलाड़ी 13 में भी एक्ट्रेस रूही चतुर्वेदी का सफर ज्यादा लंबा नहीं रहा। कहा जा रहा है कि वह शो से बाहर होने वाली पहली महिला थीं। कुंडली भाग्य में रूही चतुर्वेदी ने शर्लिन की भूमिका निभाई है। रोहित रॉय पहले ही घर वापस आ चुके हैं। स्टंट करने के दौरान उन्हें गंभीर चोट लग गई थी। लेकिन अंजुम फकीह अभी भी दक्षिण अफ्रीका से तस्वीरें पोस्ट कर रही हैं। यह संभव है कि शो के मेकर्स उन्हें वाइल्ड कार्ड के रूप में वापस ला सकते हैं। खतरों के खिलाड़ी 13 के कंटेस्टेंट की बात करें तो इस लिस्ट में शिव ठाकरे, अर्चना गौतम, अंजलि आनंद, ऐश्वर्या शर्मा, साउंडस मौफकीर, अर्जित तनेजा, शीजान एम खान, डिनो जेम्स और रश्मीत कौर हैं अब एक-दूसरे ट्रॉफी जीतने की जंग में लगे हुए हैं। 69 की उम्र, आधा दर्जन से ज्यादा अफेयर, शादी भी रही नाकाम, क्या आप जानते हैं इस हसीना का नाम?
- इक्कीस मिनट ago ब्लैक फ़िल्म में छोटी रानी मुखर्जी का किरदार निभाने वाली आयशा को रणबीर ने दी थी ट्रेनिंग, अब कहां है ये बच्ची? - सैंतीस मिनट ago 'कौन बनेगा करोड़पति पंद्रह' को अलविदा कर गए अमिताभ बच्चन, रुआंसा होकर बोले- 'एक नए भारत का बना गवाह' Don't Miss! - Automobiles इलेक्ट्रिक वाहन स्टार्ट-अप Creatara ने पेश किए दो शानदार ईवी, जानें खासियत और कीमत? Khatron Ke Khiladi Update: 'खतरों के खिलाड़ी तेरह' का सभी फैंस को बेसब्री से इंतजार है। इस शो के हर अपडेट को फैंस जानना चाहते हैं। पिछले दिनों रोहित रॉय के चोट लगने की वजह से उन्हें शो से बाहर जाना पड़ा लेकिन अब खबर है कि एक और कंटेस्टेंट शो से बाहर हो चुका है। अंजुम फकीह शो से बाहर! ताजा चर्चा यह है कि अंजुम फकीह शो से बाहर हो गई हैं। जैसा कि हम जानते हैं, रोहित शेट्टी का शो सबसे कठिन शोज में से एक है। अंजुम फकीह को शो की सबसे मजबूत प्रतियोगियों में से एक माना जाता था। लेकिन अगर अफवाह सच है, तो यह असल में फैंस के लिए निराशाजनक हो सकता है। 'बिग बॉस' की तरह, 'खतरों के खिलाड़ी' एक ऐसा शो है जिससे लोग शुरुआत में ही बेदखल होने से नफरत करते हैं। यह एक बड़ा टिकट शो है जिसे जीतने वाले को बहुत सारा पैसा और फेम मिलात है। आपको बता दें, कुंडली भाग्य के प्रशंसक अंजुम फकीह को सृष्टि के नाम से जानते हैं, जो श्रद्धा आर्या द्वारा निभाई गई प्रीता की बहन है। खतरों के खिलाड़ी तेरह में भी एक्ट्रेस रूही चतुर्वेदी का सफर ज्यादा लंबा नहीं रहा। कहा जा रहा है कि वह शो से बाहर होने वाली पहली महिला थीं। कुंडली भाग्य में रूही चतुर्वेदी ने शर्लिन की भूमिका निभाई है। रोहित रॉय पहले ही घर वापस आ चुके हैं। स्टंट करने के दौरान उन्हें गंभीर चोट लग गई थी। लेकिन अंजुम फकीह अभी भी दक्षिण अफ्रीका से तस्वीरें पोस्ट कर रही हैं। यह संभव है कि शो के मेकर्स उन्हें वाइल्ड कार्ड के रूप में वापस ला सकते हैं। खतरों के खिलाड़ी तेरह के कंटेस्टेंट की बात करें तो इस लिस्ट में शिव ठाकरे, अर्चना गौतम, अंजलि आनंद, ऐश्वर्या शर्मा, साउंडस मौफकीर, अर्जित तनेजा, शीजान एम खान, डिनो जेम्स और रश्मीत कौर हैं अब एक-दूसरे ट्रॉफी जीतने की जंग में लगे हुए हैं। उनहत्तर की उम्र, आधा दर्जन से ज्यादा अफेयर, शादी भी रही नाकाम, क्या आप जानते हैं इस हसीना का नाम?
रसवादी आचार्यों ने काव्य में रस को काव्य का जीवातु माना है । वे अलंकारों को गौण अथवा काव्य के शोभाधायक अंग रूप में ही मानते हैं । आचार्य मम्मट ने काव्य में अलंकारों की अनिवार्यता को असिद्ध कर दिया । जिन आचार्यों ने काव्य में अलंकारों की प्रधानता को मान्यता नहीं दी है उन्होंने भी अलंकारों को उपेक्षित नहीं किया है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि अलंकार काव्य में आत्मतत्त्व का स्थान भले ही न प्राप्त कर सकें तथापि काव्य की दृष्टि से वे उपेक्षित नहीं किये जा सकते । इसलिये समन्वयवादी आचार्य भोज ने अपने सरस्वतीकण्ठाभरण में रस, गुण के साथ ही अलंकारों का भी उल्लेख किया है। अलंकारों के भेदों के सम्बन्ध में प्राचीनकाल से ही अलंकारशास्त्रियों में वैमत्य रहा है । आनन्दवर्धन ने लिखा है कि सहस्रों मनीषियों द्वारा अलंकारों के भेदों का प्रकाशन हुआ है और निरन्तर हो रहा है । इस तथ्य को आचार्य दण्डी भी स्वीकार करते हैं । स्थूलतः अलंकारशास्त्रियों ने अलंकारों का दो वर्गो में विभाजन किया है - (१) शब्दालंकार (२) अर्थालंकार । इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के बन्ध भी अलंकारों के ही अन्तर्गत माने गये हैं जिन्हें चित्रालंकार के भेद के रूप में मान सकते हैं । ये चित्रालंकार भी शब्दालंकार में अन्तभूत माने जाते हैं । रुद्रट ने अपने काव्यालंकार में चित्रालंकारों का निर्देश किया है ।" इसका पूर्ण स्पष्टीकरण रुद्रट द्वारा की गयी काव्यालंकार की टीका से हो जाता है। उनके अनुसार जहाँ काव्य में चक्रादि रूपों का निबन्धन होता है, वे चित्रालंकार हैं । यहाँ यह ध्यात१. तददोषौ शब्दार्थी सगुणावनलंकृती पुनः क्वापि । -काव्यप्रकाश १।४ २. निर्दोषं गुणवत्काव्यमलकारैरलंकृतम् । - सरस्वतीकण्ठाभरण, ११२ ३. सहस्रो हि महात्मभिरन्यैरलंकारप्रकाराः प्रकाशिताः प्रकाश्यन्ते च । - ध्वन्यालोक, १।१ ४. काव्यादर्श २२ ५. काव्यालंकार, ५१ ६. यत्र काव्ये वस्तूनां चक्रादीनां रूपाणि संस्थानानि रच्यन्ते । निबद्धयन्ते तच्चित्रसादृश्यादाश्चर्याद् वा चित्रं नामालंकारः ॥ - काव्यालंकार, ५११ पर टीका
रसवादी आचार्यों ने काव्य में रस को काव्य का जीवातु माना है । वे अलंकारों को गौण अथवा काव्य के शोभाधायक अंग रूप में ही मानते हैं । आचार्य मम्मट ने काव्य में अलंकारों की अनिवार्यता को असिद्ध कर दिया । जिन आचार्यों ने काव्य में अलंकारों की प्रधानता को मान्यता नहीं दी है उन्होंने भी अलंकारों को उपेक्षित नहीं किया है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि अलंकार काव्य में आत्मतत्त्व का स्थान भले ही न प्राप्त कर सकें तथापि काव्य की दृष्टि से वे उपेक्षित नहीं किये जा सकते । इसलिये समन्वयवादी आचार्य भोज ने अपने सरस्वतीकण्ठाभरण में रस, गुण के साथ ही अलंकारों का भी उल्लेख किया है। अलंकारों के भेदों के सम्बन्ध में प्राचीनकाल से ही अलंकारशास्त्रियों में वैमत्य रहा है । आनन्दवर्धन ने लिखा है कि सहस्रों मनीषियों द्वारा अलंकारों के भेदों का प्रकाशन हुआ है और निरन्तर हो रहा है । इस तथ्य को आचार्य दण्डी भी स्वीकार करते हैं । स्थूलतः अलंकारशास्त्रियों ने अलंकारों का दो वर्गो में विभाजन किया है - शब्दालंकार अर्थालंकार । इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के बन्ध भी अलंकारों के ही अन्तर्गत माने गये हैं जिन्हें चित्रालंकार के भेद के रूप में मान सकते हैं । ये चित्रालंकार भी शब्दालंकार में अन्तभूत माने जाते हैं । रुद्रट ने अपने काव्यालंकार में चित्रालंकारों का निर्देश किया है ।" इसका पूर्ण स्पष्टीकरण रुद्रट द्वारा की गयी काव्यालंकार की टीका से हो जाता है। उनके अनुसार जहाँ काव्य में चक्रादि रूपों का निबन्धन होता है, वे चित्रालंकार हैं । यहाँ यह ध्यातएक. तददोषौ शब्दार्थी सगुणावनलंकृती पुनः क्वापि । -काव्यप्रकाश एक।चार दो. निर्दोषं गुणवत्काव्यमलकारैरलंकृतम् । - सरस्वतीकण्ठाभरण, एक सौ बारह तीन. सहस्रो हि महात्मभिरन्यैरलंकारप्रकाराः प्रकाशिताः प्रकाश्यन्ते च । - ध्वन्यालोक, एक।एक चार. काव्यादर्श बाईस पाँच. काव्यालंकार, इक्यावन छः. यत्र काव्ये वस्तूनां चक्रादीनां रूपाणि संस्थानानि रच्यन्ते । निबद्धयन्ते तच्चित्रसादृश्यादाश्चर्याद् वा चित्रं नामालंकारः ॥ - काव्यालंकार, पाँच सौ ग्यारह पर टीका