raw_text
stringlengths
113
616k
normalized_text
stringlengths
98
618k
Bank of Maharashtra Recruitment: ग्रेजुएट पास हैं और सरकारी नौकरी की तलाश में हैं तो बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने बंपर वैकेंसी निकाली है. बैंक ऑफ महाराष्ट्र में स्केल II और स्केल III प्रोजेक्ट 2022-23 में जनरलिस्ट ऑफिसर (Generalist Officers) के पद के लिए ऑनलाइन आवेदन (Online Apply) प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. आवेदन प्रक्रिया 22 फरवरी तक चलेगी. इच्छुक उम्मीदवार आवेदन बैंक ऑफ महाराष्ट्र की आधिकारिक वेबसाइट (Official Website) bankofmaharashtra. in के माध्यम से कर सकते हैं. इस भर्ती अभियान के तहत 500 रिक्त पदों को भरा जाएगा, जिसमें से 203 रिक्तियां अनारक्षित श्रेणी के लिए हैं, 50 रिक्तियां ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए हैं, 137 रिक्तियां ओबीसी श्रेणी के लिए हैं, 37 रिक्तियां एसटी श्रेणी के लिए हैं और 75 रिक्तियां एससी वर्ग के लिए हैं. अधिसूचना के अनुसार सामान्य अधिकारी स्केल- II के पद के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु सीमा 25 वर्ष और उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 35 वर्ष और सामान्य अधिकारी स्केल- III के पद के लिए 38 वर्ष होनी चाहिए. अनारक्षित / ईडब्ल्यूएस / ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क ₹1180 है. एससी/एसटी वर्ग के लिए आवेदन शुल्क ₹118 है. पीडब्ल्यूबीडी / महिला उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क के शुल्क भुगतान से छूट दी गई है. Education Loan Information:
Bank of Maharashtra Recruitment: ग्रेजुएट पास हैं और सरकारी नौकरी की तलाश में हैं तो बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने बंपर वैकेंसी निकाली है. बैंक ऑफ महाराष्ट्र में स्केल II और स्केल III प्रोजेक्ट दो हज़ार बाईस-तेईस में जनरलिस्ट ऑफिसर के पद के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. आवेदन प्रक्रिया बाईस फरवरी तक चलेगी. इच्छुक उम्मीदवार आवेदन बैंक ऑफ महाराष्ट्र की आधिकारिक वेबसाइट bankofmaharashtra. in के माध्यम से कर सकते हैं. इस भर्ती अभियान के तहत पाँच सौ रिक्त पदों को भरा जाएगा, जिसमें से दो सौ तीन रिक्तियां अनारक्षित श्रेणी के लिए हैं, पचास रिक्तियां ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए हैं, एक सौ सैंतीस रिक्तियां ओबीसी श्रेणी के लिए हैं, सैंतीस रिक्तियां एसटी श्रेणी के लिए हैं और पचहत्तर रिक्तियां एससी वर्ग के लिए हैं. अधिसूचना के अनुसार सामान्य अधिकारी स्केल- II के पद के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु सीमा पच्चीस वर्ष और उम्मीदवारों की अधिकतम आयु पैंतीस वर्ष और सामान्य अधिकारी स्केल- III के पद के लिए अड़तीस वर्ष होनी चाहिए. अनारक्षित / ईडब्ल्यूएस / ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क एक हज़ार एक सौ अस्सी रुपया है. एससी/एसटी वर्ग के लिए आवेदन शुल्क एक सौ अट्ठारह रुपया है. पीडब्ल्यूबीडी / महिला उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क के शुल्क भुगतान से छूट दी गई है. Education Loan Information:
पीड़िता ने बताया कि वो काम के बाद घर के लिए निकल रही थी जहां उसने महरौली-गुरुग्राम रोड पर आरोपियों से कार में लिफ्ट ली थी. दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम (Gurugram) में सोमवार को काम से घर लौट रही एक बार टेंडर युवति को पांच लोगों ने अपनी हैवानियत का शिकार बना लिया और रेप किया (Bar Tender Girl Gang Rape). घटना महरौली-गुरुग्राम रोड की है. पुलिस के मुताबिक पिड़िता एक बार में बार टेंडर का काम करती है, सोमवार को वो करीब 3 बजे घर के लिए निकल रही थी जहां उसने महरौली-गुरुग्राम रोड पर आरोपियों से कार में लिफ्ट ली थी. जिसके बाद पीड़िता को लिफ्ट देने वाले तीनों आरोपी कथित रूप से उसे 50 किलोमीटर दूर हरियाणा के झज्जर जिले में ले गए थे, वहां उनसे 2 और लोग मिले. इसके बाद इन पांचों ने उसके साथ गैंगरेप किया. पुलिस के मुताबिक इसके बाद आरोपियों ने पीड़िता को हरियाणा के फरुखनगर में कार से फेंक दिया और मौके से फरार हो गए. घटना के बाद पिड़िता ने सोमवार को पुलिस को मदद के लिए फोन किया था. जिसके बाद सुबह 6.35 बजे पुलिस की टीम उसके पास पहुंची. जिसके बाद पुलिस पीड़िता का मेडिकल टेस्ट करवाने अस्पताल ले गई, जिसमें रेप की बात सामने आई है. पुलिस से की शिकायत में पिड़िता ने बताया कि देर रात तक शिफ्ट करने के बाद तड़के लगभग 3 बजे वह अपने घर वापस जाने के लिए सहारा मॉल के सामने एमजी रोड पर ट्रांसपोर्ट का इंतजार कर रही थी. उसी समय 3 दरिंदे एक कार में आकर उसके पास रुके. मैंने उन्हें बताया कि मुझे द्वारका मोड़ पर जाना है. उन्होंने मुझे बताया कि वे भी द्वारका मोड़ की तरफ जा रहे हैं. लेकिन जब उन्होंने दिल्ली की बजाय एक्सप्रेसवे की ओर कैब बढ़ाई तो मैंने पूछा कि वे मुझे कहां ले जा रहे हैं. इस पर उन्होंने मुझे धमकी दी और छेड़छाड़ की. एक आरोपी ने मुझे बताया कि वे झज्जर जिले के पाटोदा गांव में हैं. पीड़िता ने आगे बताया कि वे कार को खेत में ले गए और उसके साथ गैंगरेप किया. उन्होंने मुझे सड़क पर फेंक दिया. युवति की शिकायत के बाद मानेसर के महिला पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की संबंधित धाराओं के तहत आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. एसएचओ इंस्पेक्टर पूनम हुड्डा ने कहा कि हमने पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया है. आरोपियों की पहचान कर ली है, वे झज्जर जिले के रहने वाले हैं. हम उन्हें पकड़ने के लिए छापेमारी कर रहे हैं और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लेंगे.
पीड़िता ने बताया कि वो काम के बाद घर के लिए निकल रही थी जहां उसने महरौली-गुरुग्राम रोड पर आरोपियों से कार में लिफ्ट ली थी. दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम में सोमवार को काम से घर लौट रही एक बार टेंडर युवति को पांच लोगों ने अपनी हैवानियत का शिकार बना लिया और रेप किया . घटना महरौली-गुरुग्राम रोड की है. पुलिस के मुताबिक पिड़िता एक बार में बार टेंडर का काम करती है, सोमवार को वो करीब तीन बजे घर के लिए निकल रही थी जहां उसने महरौली-गुरुग्राम रोड पर आरोपियों से कार में लिफ्ट ली थी. जिसके बाद पीड़िता को लिफ्ट देने वाले तीनों आरोपी कथित रूप से उसे पचास किलोग्राममीटर दूर हरियाणा के झज्जर जिले में ले गए थे, वहां उनसे दो और लोग मिले. इसके बाद इन पांचों ने उसके साथ गैंगरेप किया. पुलिस के मुताबिक इसके बाद आरोपियों ने पीड़िता को हरियाणा के फरुखनगर में कार से फेंक दिया और मौके से फरार हो गए. घटना के बाद पिड़िता ने सोमवार को पुलिस को मदद के लिए फोन किया था. जिसके बाद सुबह छः.पैंतीस बजे पुलिस की टीम उसके पास पहुंची. जिसके बाद पुलिस पीड़िता का मेडिकल टेस्ट करवाने अस्पताल ले गई, जिसमें रेप की बात सामने आई है. पुलिस से की शिकायत में पिड़िता ने बताया कि देर रात तक शिफ्ट करने के बाद तड़के लगभग तीन बजे वह अपने घर वापस जाने के लिए सहारा मॉल के सामने एमजी रोड पर ट्रांसपोर्ट का इंतजार कर रही थी. उसी समय तीन दरिंदे एक कार में आकर उसके पास रुके. मैंने उन्हें बताया कि मुझे द्वारका मोड़ पर जाना है. उन्होंने मुझे बताया कि वे भी द्वारका मोड़ की तरफ जा रहे हैं. लेकिन जब उन्होंने दिल्ली की बजाय एक्सप्रेसवे की ओर कैब बढ़ाई तो मैंने पूछा कि वे मुझे कहां ले जा रहे हैं. इस पर उन्होंने मुझे धमकी दी और छेड़छाड़ की. एक आरोपी ने मुझे बताया कि वे झज्जर जिले के पाटोदा गांव में हैं. पीड़िता ने आगे बताया कि वे कार को खेत में ले गए और उसके साथ गैंगरेप किया. उन्होंने मुझे सड़क पर फेंक दिया. युवति की शिकायत के बाद मानेसर के महिला पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. एसएचओ इंस्पेक्टर पूनम हुड्डा ने कहा कि हमने पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया है. आरोपियों की पहचान कर ली है, वे झज्जर जिले के रहने वाले हैं. हम उन्हें पकड़ने के लिए छापेमारी कर रहे हैं और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लेंगे.
प्रभु : छवि प्रभु :- छवि जिस घर को छूने, सागर की लहरें दौड़ रही हैं, आओ, उस घर के मालिक से कुछ पहचान करें ।। प्रभुः दूर नहीं प्रभु :-प्राप्ति प्रभु :- प्राप्ति का पथ -माखन लाल चतुर्वेदी (सं. अजित कुमार : कविताएँ १९६३ ) सुषमा उसी की अवलोक के सुधाकर में, रूप सुधा पीकर चकोर न अघाते हैं । घन की घटा में नव निरख उसी की छटा, मंजुल मयूर होते मोद मद माते हैं । फूलों में उसी की शोभा देख के मिलिन्द - वृन्द, फूले न समाते 'गुन-गुन' गुण गाते हैं । दीप्यमान दीपक में देख वही छवि बाँकी, प्रेम से प्रफुल्लित पतंग जल जाते हैं ॥ १ ॥ वन उपवन में सरोज में सरोवर में, सुमन सुमन में उसी की सुघराई हैं । चम्पक चमेलियों में नवल नवेलियों में, ललित लताओं में भी उसकी लुनाई है ।। पाई जाती वही रंग रंग के विहंगमों में, कान्तिपुंज फुंज-कुज मे वही समाई है । जहां देखो वहां वही छवि दिखलाई देती, उर में समाई तथा लोचनों में छाई है ॥ २ ॥ ( गोपाल शरणसिंह) देह- देवरा पूजियो, तीन लोक तिन माँह । तीरथ षटदर्सन सँच्यो, नेरे बैठे नाँह ॥ प्रभु :--प्राप्ति का प्रथ ( बरफत उल्लाह पेमः पेमप्रकाश, पृ. १५ ) दुनिया ने कायर वन कर ही, बना लिया प्रभु-नाम अफीम; खुद को खोज ईश को पाले, मानव ! तेरी शक्ति असीम ! ( श्रीमन् नारायण : रजनी में प्रभात का अंकुर, पृ. ९२ ) आतम ही रथवान प्रमान शरीरहि जो रथ रूप वनावै । बुद्धि बने वर सारथी आय सु मानस केरि लगाम लगावै ॥
प्रभु : छवि प्रभु :- छवि जिस घर को छूने, सागर की लहरें दौड़ रही हैं, आओ, उस घर के मालिक से कुछ पहचान करें ।। प्रभुः दूर नहीं प्रभु :-प्राप्ति प्रभु :- प्राप्ति का पथ -माखन लाल चतुर्वेदी सुषमा उसी की अवलोक के सुधाकर में, रूप सुधा पीकर चकोर न अघाते हैं । घन की घटा में नव निरख उसी की छटा, मंजुल मयूर होते मोद मद माते हैं । फूलों में उसी की शोभा देख के मिलिन्द - वृन्द, फूले न समाते 'गुन-गुन' गुण गाते हैं । दीप्यमान दीपक में देख वही छवि बाँकी, प्रेम से प्रफुल्लित पतंग जल जाते हैं ॥ एक ॥ वन उपवन में सरोज में सरोवर में, सुमन सुमन में उसी की सुघराई हैं । चम्पक चमेलियों में नवल नवेलियों में, ललित लताओं में भी उसकी लुनाई है ।। पाई जाती वही रंग रंग के विहंगमों में, कान्तिपुंज फुंज-कुज मे वही समाई है । जहां देखो वहां वही छवि दिखलाई देती, उर में समाई तथा लोचनों में छाई है ॥ दो ॥ देह- देवरा पूजियो, तीन लोक तिन माँह । तीरथ षटदर्सन सँच्यो, नेरे बैठे नाँह ॥ प्रभु :--प्राप्ति का प्रथ दुनिया ने कायर वन कर ही, बना लिया प्रभु-नाम अफीम; खुद को खोज ईश को पाले, मानव ! तेरी शक्ति असीम ! आतम ही रथवान प्रमान शरीरहि जो रथ रूप वनावै । बुद्धि बने वर सारथी आय सु मानस केरि लगाम लगावै ॥
निजाम स्वतः अपने अधिकार के अन्तर्गत वैसा आर्डिनेन्स जारी करेगी जिससे उस कानून का उद्देश्य पूरा हो ३ - भारत सरकार हैदराबाद की सैन्य संख्या निश्चित कर देना आवश्यक समझती है, यह संख्या कुल २०००० से अधिक नहीं होना चाहिये । १६३६ की भारतीय रियासती सेना योजना के अनुसार इस सेना को अस्त्र शस्त्र भारत सरकार देगी । वेतन आदि भी इसी योजना के अनुसार दिया जायेगा । भारत सरकार को इस बात का अधिकार रहेगा कि वह समय समय पर उसका निरीक्षण करे और निजाम की सरकार ऐसे निरीक्षण के लिए भारत सरकार को सभी आवश्यक सुविधा देगी। निजाम की सरकार समय-समय पर भारत सरकार को आवश्यक सुविधाएँ भी देती रहेगी । ४ - निजाम की सरकार यह स्वीकार करती है कि समारोह के लिये तथा महल के पहिरेदारों के सिवाय नियमित सेना संख्या ८००० से अधिक नहीं होगी। हैदराबाद की सरकार यह स्वीकार करती है कि सैनिक ढंग के और सत्र संगठन भंग कर दिये जायेंगे । तोन मास के अन्दर रजाकार संगठन भंग कर दिया जायेगा । रजाकारों का प्रदर्शन, पैरेड, जुलूस तथा भाषण बन्द कर दिये जायेंगे । ५ - यह भी स्वीकार किया जाता है कि भारत सरकार हैदराबाद रियासत के अन्दर सशस्त्र सेना नहीं रखेगी किन्तु आवश्यकता पड़ने पर भारत सरकार रियासत के अन्दर संकट काल में सेना रखना चाहे तो उसे हैदराबाद की सरकार स्वीकार करेगी। भारत सरकार निर्णय करेगो कि स्थिति संकट पूर्ण है या नहीं। यह भी स्वीकार किया जाता
निजाम स्वतः अपने अधिकार के अन्तर्गत वैसा आर्डिनेन्स जारी करेगी जिससे उस कानून का उद्देश्य पूरा हो तीन - भारत सरकार हैदराबाद की सैन्य संख्या निश्चित कर देना आवश्यक समझती है, यह संख्या कुल बीस हज़ार से अधिक नहीं होना चाहिये । एक हज़ार छः सौ छत्तीस की भारतीय रियासती सेना योजना के अनुसार इस सेना को अस्त्र शस्त्र भारत सरकार देगी । वेतन आदि भी इसी योजना के अनुसार दिया जायेगा । भारत सरकार को इस बात का अधिकार रहेगा कि वह समय समय पर उसका निरीक्षण करे और निजाम की सरकार ऐसे निरीक्षण के लिए भारत सरकार को सभी आवश्यक सुविधा देगी। निजाम की सरकार समय-समय पर भारत सरकार को आवश्यक सुविधाएँ भी देती रहेगी । चार - निजाम की सरकार यह स्वीकार करती है कि समारोह के लिये तथा महल के पहिरेदारों के सिवाय नियमित सेना संख्या आठ हज़ार से अधिक नहीं होगी। हैदराबाद की सरकार यह स्वीकार करती है कि सैनिक ढंग के और सत्र संगठन भंग कर दिये जायेंगे । तोन मास के अन्दर रजाकार संगठन भंग कर दिया जायेगा । रजाकारों का प्रदर्शन, पैरेड, जुलूस तथा भाषण बन्द कर दिये जायेंगे । पाँच - यह भी स्वीकार किया जाता है कि भारत सरकार हैदराबाद रियासत के अन्दर सशस्त्र सेना नहीं रखेगी किन्तु आवश्यकता पड़ने पर भारत सरकार रियासत के अन्दर संकट काल में सेना रखना चाहे तो उसे हैदराबाद की सरकार स्वीकार करेगी। भारत सरकार निर्णय करेगो कि स्थिति संकट पूर्ण है या नहीं। यह भी स्वीकार किया जाता
खरोरा, निलेश गोयल। कोरोना का कहर बढ़ते ही जा रहा है। वहीं आइटीबीपी में कांस्टेबल पद में कार्यरत एक जवान का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया है। मिली जानकारी के अनुसार आइटीबीपी में कांस्टेबल पद में कार्यरत एक जवान को लगभग 3 दिनों से तेज बुखार था जिसका इलाज आइटीबीपी कैंप में स्थित हॉस्पिटल में चल रहा था । बता दें कि जवान का किसी प्रकार की अन्य जगहों से आने जाने की ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है। कांस्टेबल आइटीबीपी कैंप में ही निवासरत था। 7 तारीख को उसके कोरोना टेस्ट हेतु सैंपल एम्स भेजा गया। करोना पॉजिटिव होने की पुष्टि एम्स प्रबंधन द्वारा की गई। इस संबंध में आशीष सिन्हा बीएमओ तिल्दा ने बताया कि उक्त कांस्टेबल को इलाज हेतु एम्स रायपुर भेज दिया गया है।
खरोरा, निलेश गोयल। कोरोना का कहर बढ़ते ही जा रहा है। वहीं आइटीबीपी में कांस्टेबल पद में कार्यरत एक जवान का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया है। मिली जानकारी के अनुसार आइटीबीपी में कांस्टेबल पद में कार्यरत एक जवान को लगभग तीन दिनों से तेज बुखार था जिसका इलाज आइटीबीपी कैंप में स्थित हॉस्पिटल में चल रहा था । बता दें कि जवान का किसी प्रकार की अन्य जगहों से आने जाने की ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है। कांस्टेबल आइटीबीपी कैंप में ही निवासरत था। सात तारीख को उसके कोरोना टेस्ट हेतु सैंपल एम्स भेजा गया। करोना पॉजिटिव होने की पुष्टि एम्स प्रबंधन द्वारा की गई। इस संबंध में आशीष सिन्हा बीएमओ तिल्दा ने बताया कि उक्त कांस्टेबल को इलाज हेतु एम्स रायपुर भेज दिया गया है।
नई दिल्लीः राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की 15 से 21 मई तक जमैका और सेंट विंसेंट एंड ग्रेनाडाइन्स की यात्रा से पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को जमैका की विदेश मंत्री कैमिना जे स्मिथ के साथ बैठक की तैयारियों पर चर्चा की। यह राष्ट्रपति की दोनों कैरेबियाई देशों की पहली यात्रा है। डाॅ. जयशंकर ने एक ट्वीट में कहा कि उन्होंने जमैका की विदेश मंत्री के साथ राष्ट्रमंडल महासचिव पद के लिए उनकी उम्मीदवारी पर चर्चा की। जमैका की विदेश मंत्री ने एक ट्वीट में श्री कोविंद की आगामी यात्रा के बारे में पोस्ट करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक यात्रा दोनों पक्षों के बीच 60 साल के राजनयिक संबंधों की को मान्यता दिये जाने का हिस्सा है। स्मिथ ने 21 अप्रैल को औपचारिक रूप से लंदन में राष्ट्रमंडल के महासचिव के लिए जमैका की उम्मीदवारी की शुरुआत की। महासचिव की नियुक्ति पर निर्णय इस वर्ष 20 से 25 जून तक रवांडा के किगाली राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक के दौरान लिया जाना है। कोविंद 15 से 18 मई तक जमैका में रहेंगे, इस दौरान वह अपने समकक्ष, जमैका के गवर्नर जनरल सर पैट्रिक एलन के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। वह प्रधानमंत्री एंड्रयू होल्नेस और अन्य गणमान्य व्यक्तियों से भी मुलाकात करेंगे। वह जमैका की संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगे। गौरतलब है कि जमैका और भारत के मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। जमैका भी गिरमिटिया देशों में से एक है जिसमें 70,000 मजबूत भारतीय प्रवासी हैं, जो भारत के साथ एक जीवंत सेतु के रूप में कार्य करते हैं। इस वर्ष भारत और जमैका के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 60 वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रही यह यात्रा मील का पत्थर साबित होगी। भारत और जमैका इस वर्ष क्रमशः अपनी स्वतंत्रता की 75वीं और 60वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। (यूनिवार्ता)
नई दिल्लीः राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की पंद्रह से इक्कीस मई तक जमैका और सेंट विंसेंट एंड ग्रेनाडाइन्स की यात्रा से पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को जमैका की विदेश मंत्री कैमिना जे स्मिथ के साथ बैठक की तैयारियों पर चर्चा की। यह राष्ट्रपति की दोनों कैरेबियाई देशों की पहली यात्रा है। डाॅ. जयशंकर ने एक ट्वीट में कहा कि उन्होंने जमैका की विदेश मंत्री के साथ राष्ट्रमंडल महासचिव पद के लिए उनकी उम्मीदवारी पर चर्चा की। जमैका की विदेश मंत्री ने एक ट्वीट में श्री कोविंद की आगामी यात्रा के बारे में पोस्ट करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक यात्रा दोनों पक्षों के बीच साठ साल के राजनयिक संबंधों की को मान्यता दिये जाने का हिस्सा है। स्मिथ ने इक्कीस अप्रैल को औपचारिक रूप से लंदन में राष्ट्रमंडल के महासचिव के लिए जमैका की उम्मीदवारी की शुरुआत की। महासचिव की नियुक्ति पर निर्णय इस वर्ष बीस से पच्चीस जून तक रवांडा के किगाली राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक के दौरान लिया जाना है। कोविंद पंद्रह से अट्ठारह मई तक जमैका में रहेंगे, इस दौरान वह अपने समकक्ष, जमैका के गवर्नर जनरल सर पैट्रिक एलन के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। वह प्रधानमंत्री एंड्रयू होल्नेस और अन्य गणमान्य व्यक्तियों से भी मुलाकात करेंगे। वह जमैका की संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगे। गौरतलब है कि जमैका और भारत के मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। जमैका भी गिरमिटिया देशों में से एक है जिसमें सत्तर,शून्य मजबूत भारतीय प्रवासी हैं, जो भारत के साथ एक जीवंत सेतु के रूप में कार्य करते हैं। इस वर्ष भारत और जमैका के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की साठ वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रही यह यात्रा मील का पत्थर साबित होगी। भारत और जमैका इस वर्ष क्रमशः अपनी स्वतंत्रता की पचहत्तरवीं और साठवीं वर्षगांठ मना रहे हैं।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
सिडनी, 12 जनवरी (आईएएनएस)। सिडनी में कोरोनावायरस के स्थानीय मामलों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े शहर में पांच नए मामले पाए गए, जिसके मद्देनजर अधिकारियों ने लोगों को जांच कराने और अपने संपर्कों के बारे में बताने का आग्रह किया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को दो नए मामले पाए गए उसमें एक व्यक्ति अस्पताल के आपातकालीन विभाग और उसके घरेलू संपर्क में था। दूसरे मामले को शहर के पश्चिम और उत्तरी समुद्र तटों में पाया गया। सोमवार तक टेस्ट दर 14,738 तक पहुंची और स्वास्थ्य अधिकारियों ने प्रति दिन 25,000 से अधिक बढ़ाने की उम्मीद की। न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर ग्लेडिस बेरेकिक्लियान ने कहा, जैसा कि हम देख रहे हैं कि वायरस का प्रसारण समुदाय में फैल रहा है और हमें इसके बारे में सतर्क रहने की जरूरत है और इसलिए मैं लोगों से आगे आने और जांच करवाने की अपील कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने नतीजों के डर के कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञों से जानकारी वापस ले ली, जनता को आश्वासन दिया कि व्यक्तिगत चिकित्सा जानकारी को गोपनीय रखा जाएगा। उन्होंने कहा, ऐसी स्थितियां हैं जहां लोग हमें सब कुछ बताने से डरते हैं, क्योंकि वे मुसीबत में पड़ने के बारे में चिंतित हैं या नियमों को तोड़ने के बारे में चिंतित हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि ऐसा नहीं है। किसी भी निर्णय के बारे में चिंतित न हों, किसी भी प्रतिशोध के बारे में चिंतित न हों। इसके विपरीत सोचें।
सिडनी, बारह जनवरी । सिडनी में कोरोनावायरस के स्थानीय मामलों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े शहर में पांच नए मामले पाए गए, जिसके मद्देनजर अधिकारियों ने लोगों को जांच कराने और अपने संपर्कों के बारे में बताने का आग्रह किया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को दो नए मामले पाए गए उसमें एक व्यक्ति अस्पताल के आपातकालीन विभाग और उसके घरेलू संपर्क में था। दूसरे मामले को शहर के पश्चिम और उत्तरी समुद्र तटों में पाया गया। सोमवार तक टेस्ट दर चौदह,सात सौ अड़तीस तक पहुंची और स्वास्थ्य अधिकारियों ने प्रति दिन पच्चीस,शून्य से अधिक बढ़ाने की उम्मीद की। न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर ग्लेडिस बेरेकिक्लियान ने कहा, जैसा कि हम देख रहे हैं कि वायरस का प्रसारण समुदाय में फैल रहा है और हमें इसके बारे में सतर्क रहने की जरूरत है और इसलिए मैं लोगों से आगे आने और जांच करवाने की अपील कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने नतीजों के डर के कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञों से जानकारी वापस ले ली, जनता को आश्वासन दिया कि व्यक्तिगत चिकित्सा जानकारी को गोपनीय रखा जाएगा। उन्होंने कहा, ऐसी स्थितियां हैं जहां लोग हमें सब कुछ बताने से डरते हैं, क्योंकि वे मुसीबत में पड़ने के बारे में चिंतित हैं या नियमों को तोड़ने के बारे में चिंतित हैं। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि ऐसा नहीं है। किसी भी निर्णय के बारे में चिंतित न हों, किसी भी प्रतिशोध के बारे में चिंतित न हों। इसके विपरीत सोचें।
सूखे मेवे बहुत शक्तिवर्द्धक होते हैं। प्रोटीन से भरपूर सूखे मेवों में फाइबर, फाइटो न्यूट्रियंट्स एवं एन्टी ऑक्सीडेण्ट्स जैसे विटामिन ई एवं सेलेनियम की बहुलता होती है। बादाम, किशमिश, काजू, मूंगफली, अखरोठ आदि मेवे नॉन वेज फूड का एक अच्छा ऑप्शन भी माने जाते हैं। साथ ही 1 कप बादाम में 32 ग्राम प्रोटीन, मूंगफली में 36 ग्राम प्रोटीन और काजू में 20 ग्राम प्रोटीन मिलता है।
सूखे मेवे बहुत शक्तिवर्द्धक होते हैं। प्रोटीन से भरपूर सूखे मेवों में फाइबर, फाइटो न्यूट्रियंट्स एवं एन्टी ऑक्सीडेण्ट्स जैसे विटामिन ई एवं सेलेनियम की बहुलता होती है। बादाम, किशमिश, काजू, मूंगफली, अखरोठ आदि मेवे नॉन वेज फूड का एक अच्छा ऑप्शन भी माने जाते हैं। साथ ही एक कप बादाम में बत्तीस ग्राम प्रोटीन, मूंगफली में छत्तीस ग्राम प्रोटीन और काजू में बीस ग्राम प्रोटीन मिलता है।
ज्योतिष में कुछ ऐसे उपाय हैं जिन्हें आजमाना आपकी सेहत और आर्थिक स्थिति के लिए अच्छा माना जाता है। ऐसे ही उपायों में से एक है नहाने के पानी में कुछ चीजें मिलकर स्नान करना। आइए जानें उनके बारे में। ज्योतिष में ऐसे कई उपाय होते हैं जिनसे घर में सुख समृद्धि बनी रहती है। ऐसा माना जाता है कि हमारे लिए ज्योतिष का पालन करना लाभदायक होता है और इससे घर में खुशहाली बनी रहती है। इसी वजह से लोग कई तरह के नियमों का पालन करते हैं और उन्हें अपने जीवन में ढालने का प्रयास करते हैं। ऐसे ही ज्योतिष हमें नहाते समय पानी में कुछ ऐसी चीजें मिलाने की सलाह देता है जिससे शरीर के साथ मन मस्तिष्क में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके। नहाने से तन और मन दोनों की थकावट तो दूर होती ही है और पवित्रता बनी रहती है। स्नान हमारी दिनचर्या का वह हिस्सा है जिससे दिन की शुरुआत होती है। ज्योतिष की मानें तो यदि आप नहाने के पानी में कुछ चीजें मिलाकर स्नान करेंगी तो ये आपके जीवन में सुख समृद्धि ला सकती हैं। आइए ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ डॉ आरती दहिया जी से विस्तार से जानें इस बारे में। यदि आप नहाने के पानी में एक चुटकी हल्दी मिलाकर उस पानी से स्नान करते हैं तो इससे बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है। वैसे तो ये उपाय आप नियमित रूप से कर सकते हैं, लेकिन गुरुवार के दिन किया गया ये ज्योतिष उपाय आपके जीवन में सौभाग्य लाने में मदद करता है। यदि आपकी कुंडली में बृहस्पति की स्थिति कमजोर (बृहस्पति को मजबूत बनाने के टिप्स) है जिसकी वजह से आपको आर्थिक नुकसान या शादी में देरी जैसे समस्याएं हो रही हैं तो ये उपाय जरूर आजमाएं। यदि आप शरीर और त्वचा को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो नहाते समय पानी में एक बूंद घी मिलाएं। इस उपाय से शरीर रोग मुक्त रहता है और त्वचा में चमक भी बनी रहती है। ज्योतिष में आपको गाय के घी का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। इस उपाय को खासतौर पर यदि आप शुक्रवार के दिन आजमाती हैं तो आपके विवाह में आने वाली अड़चनों को दूर करने में मदद मिलेगी। नहाने के पानी में अगर आप एक चुटकी नमक मिला लेते हैं और उसी पानी से स्नान करते हैं तो आपके शरीर से सभी नकारात्मक ऊर्जाएं दूर हो सकती हैं। दरअसल नमक को हमेशा से नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाले तत्वों में से एक माना जाता है। यही वजह है कि घर से बुरी शक्तियों को दूर करने के लिए भी नियमित रूप से नमक के पानी से पोछा लगाने की सलाह दी जाती है। यदि आप एक चुटकी नमक को पानी में डालकर स्नान करते हैं तो आपके जीवन में सदैव सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी। गुलाब जल को सौंदर्य के लिए सबसे प्रमुख सामग्रियों में से एक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह कई शारीरिक समस्याओं को भी दूर करने में मदद करता है। यदि आप नहाने के पानी में गुलाब जल की कुछ बूंदें मिलाते हैं तो शरीर को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। ज्योतिष के अनुसार यदि किसी को बुरी नजर लग जाए तो नहाने के पानी में कच्चा दूध मिलाकर स्नान करें। इस उपाय से नजर दोष से मुक्ति मिलेगी। यह उपाय शरीर के कई दोषों को भी दूर करता है और शरीर के साथ मन को भी स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। यह उपाय यदि आप सोमवार के दिन आजमाएंगे तो ज्यादा लाभकारी होगा। यदि आप नहाते समय उसमें काले तिल के कुछ दाने मिलाएंगे तो आपको कई दोषों से मुक्ति मिल सकती है। मुख्य रूप से शनि के दोषों से मुक्ति के लिए ये उपाय आप जरूर आजमाएं। इससे आपको आर्थिक लाभ होने के साथ रोगों से भी मुक्ति नहाने के पानी में काले तिल मिलाएंगे तो आपको आर्थिक लाभ मिलेगा और शारीरिक बीमारियों से भी मुक्ति मिलेगी। काले तिल मिलाकर पानी से स्नान करने से पितृ दोषों से भी मुक्ति मिलती है। यदि आप नहाने के पानी में यहां बताई चीजें मिलाते हैं तो आपके जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है और कई दोषों से मुक्ति भी मिलती है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से। अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स में जरूर भेजें। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
ज्योतिष में कुछ ऐसे उपाय हैं जिन्हें आजमाना आपकी सेहत और आर्थिक स्थिति के लिए अच्छा माना जाता है। ऐसे ही उपायों में से एक है नहाने के पानी में कुछ चीजें मिलकर स्नान करना। आइए जानें उनके बारे में। ज्योतिष में ऐसे कई उपाय होते हैं जिनसे घर में सुख समृद्धि बनी रहती है। ऐसा माना जाता है कि हमारे लिए ज्योतिष का पालन करना लाभदायक होता है और इससे घर में खुशहाली बनी रहती है। इसी वजह से लोग कई तरह के नियमों का पालन करते हैं और उन्हें अपने जीवन में ढालने का प्रयास करते हैं। ऐसे ही ज्योतिष हमें नहाते समय पानी में कुछ ऐसी चीजें मिलाने की सलाह देता है जिससे शरीर के साथ मन मस्तिष्क में भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके। नहाने से तन और मन दोनों की थकावट तो दूर होती ही है और पवित्रता बनी रहती है। स्नान हमारी दिनचर्या का वह हिस्सा है जिससे दिन की शुरुआत होती है। ज्योतिष की मानें तो यदि आप नहाने के पानी में कुछ चीजें मिलाकर स्नान करेंगी तो ये आपके जीवन में सुख समृद्धि ला सकती हैं। आइए ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ डॉ आरती दहिया जी से विस्तार से जानें इस बारे में। यदि आप नहाने के पानी में एक चुटकी हल्दी मिलाकर उस पानी से स्नान करते हैं तो इससे बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है। वैसे तो ये उपाय आप नियमित रूप से कर सकते हैं, लेकिन गुरुवार के दिन किया गया ये ज्योतिष उपाय आपके जीवन में सौभाग्य लाने में मदद करता है। यदि आपकी कुंडली में बृहस्पति की स्थिति कमजोर है जिसकी वजह से आपको आर्थिक नुकसान या शादी में देरी जैसे समस्याएं हो रही हैं तो ये उपाय जरूर आजमाएं। यदि आप शरीर और त्वचा को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो नहाते समय पानी में एक बूंद घी मिलाएं। इस उपाय से शरीर रोग मुक्त रहता है और त्वचा में चमक भी बनी रहती है। ज्योतिष में आपको गाय के घी का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। इस उपाय को खासतौर पर यदि आप शुक्रवार के दिन आजमाती हैं तो आपके विवाह में आने वाली अड़चनों को दूर करने में मदद मिलेगी। नहाने के पानी में अगर आप एक चुटकी नमक मिला लेते हैं और उसी पानी से स्नान करते हैं तो आपके शरीर से सभी नकारात्मक ऊर्जाएं दूर हो सकती हैं। दरअसल नमक को हमेशा से नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाले तत्वों में से एक माना जाता है। यही वजह है कि घर से बुरी शक्तियों को दूर करने के लिए भी नियमित रूप से नमक के पानी से पोछा लगाने की सलाह दी जाती है। यदि आप एक चुटकी नमक को पानी में डालकर स्नान करते हैं तो आपके जीवन में सदैव सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी। गुलाब जल को सौंदर्य के लिए सबसे प्रमुख सामग्रियों में से एक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह कई शारीरिक समस्याओं को भी दूर करने में मदद करता है। यदि आप नहाने के पानी में गुलाब जल की कुछ बूंदें मिलाते हैं तो शरीर को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। ज्योतिष के अनुसार यदि किसी को बुरी नजर लग जाए तो नहाने के पानी में कच्चा दूध मिलाकर स्नान करें। इस उपाय से नजर दोष से मुक्ति मिलेगी। यह उपाय शरीर के कई दोषों को भी दूर करता है और शरीर के साथ मन को भी स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। यह उपाय यदि आप सोमवार के दिन आजमाएंगे तो ज्यादा लाभकारी होगा। यदि आप नहाते समय उसमें काले तिल के कुछ दाने मिलाएंगे तो आपको कई दोषों से मुक्ति मिल सकती है। मुख्य रूप से शनि के दोषों से मुक्ति के लिए ये उपाय आप जरूर आजमाएं। इससे आपको आर्थिक लाभ होने के साथ रोगों से भी मुक्ति नहाने के पानी में काले तिल मिलाएंगे तो आपको आर्थिक लाभ मिलेगा और शारीरिक बीमारियों से भी मुक्ति मिलेगी। काले तिल मिलाकर पानी से स्नान करने से पितृ दोषों से भी मुक्ति मिलती है। यदि आप नहाने के पानी में यहां बताई चीजें मिलाते हैं तो आपके जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है और कई दोषों से मुक्ति भी मिलती है। अगर आपको यह स्टोरी अच्छी लगी हो तो इसे फेसबुक पर शेयर और लाइक जरूर करें। इसी तरह और भी आर्टिकल पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से। अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स में जरूर भेजें। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
"(1) Whether the readjustment of salaries and emoluments of Sri P. N. Balaji, Sri K. Ratnakar and Shri A. Habib Rehman on their transfers to Chennímalai, Gangully and Palni respectively 1s justifted. If not, to what relief these employees are entitled? (2) Whether readjustment of salaries and emoluments of Sri U. Bhaskar Shenoy on his transfer in terms of option exercised by him under the Settlement dated the 11th August, 1967 1s justifted, if not, to what relief he is entitled?" [ No. L- 12025 / 3/72-LRIII.] का०या० 2053- - यतः कनारा बैंक से सम्बद्ध नियोजकों और उनके कर्मकारो जिनका प्रतिनिधित्व कनारा बैंक एम्पलाईज यूनियम, 135 मूर स्ट्रीट, मद्रास - 1, करती है, ने उस प्रौद्योगिक विवाद को, जो प्रावेदन में उपवर्णित और इससे उपाबद्ध अनुसूची में उधूत मांग के बारे में उनके बीच विद्यमान है, एक प्रौद्योगिक अधिकरण को निर्देशित करने के लिए केन्द्रीय सरकार को संयुक्त रूप से प्रावेदन किया है । भौर यतः केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो गया है कि भावेदन करने वाले व्यक्ति प्रत्येक पक्ष की बहुसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं प्रतः प्रब प्रौद्योगिक विबाद; अधिनियम, 1957 (1957 का 14) की धारा 75 और धारा 10 की उपधारा ( 2 ) द्वारा प्रवत शक्तियों का प्रयोग करते हुए केन्द्रीय सरकार एतद्द्वारा एक प्रौद्योगिक प्रधिकरण गठित करती है, जिस, पीठासीन अधिकारी श्री थिरू के सोथाराम राव होंगे जिनका मुख्यालय मद्रास में होगा और उक्त विवाद को उक्त प्रौद्योगिक प्रधिकरण को न्यायनिर्णयन के लिए निर्देशित करती है । 1. क्या श्री पी०एन० बाला जी, श्री के० रत्नाकर और श्री ए० हवीब रहमान के क्रमशः चेन्नीमलाई, गांगुली और पालनी से उनके स्थानान्तरण पर उनके वेतनों और उपलब्धियों का पुनः समायोजन न्यायोचित है। यदि नहीं तो ये कर्मचारी किस अनुतोष के हकदार हैं । 2. क्या श्री यू० भास्कर शिनोय के, तारीख 11 अगस्त, 1967 वाले समझौते के अधीन उसके द्वारा दिए गए विकल्प के अनुसार उसके स्थानान्तरण पर उसके वेतन और उपलब्धियों का पुनः समायोजन न्यायोचित है । यदि नहीं तो वह किस अनुतोष के हकदार हैं? New Delhi, the 10th March 1972 S.O. 2054. Whereas the Central Government is of opinion that an industrial dispute exists between the employers in relation to the Central Bank of India and their workmen in respect of the matter specified in the Schedule hereto annexed; [PART II Now, therefore, in exercise of the powers conferred by clause (d) of sub-section (1) of section 10 of the Industrial Disputes Act, 1947 ( 14 of 1947), the Central Government hereby refers the said dispute for adjudication, to the Industrial Tribunal, Calcutta constituted under section 7A of the said Act. "Whether the action of the management of the Central Bank of India, Calcutta in stopping from October, 1970, the payment of Daftry Allowance to Shri Sobhnath Singh No. 1. (recipient of the said allowance from November, 1966) is justified? If not, to what relief is he entitled?" [ No. L. 12012/112/71/LRIII.] B. K. SAKSENA, Under Secy. नई दिल्ली, 10 मार्च, 1972 का० प्रॉ० 2054 - यतः केन्द्रीय सरकार की राय है कि इस के उपाबद्ध अनुसूची में विनिर्दिष्ट विषयों के बारें में भारतीय सेन्ट्रल बैंक से सम्बद्ध नियोजकों और उनके कर्मकारों के बीच एक प्रौद्योगिक विवाद विद्यमान है ; भौर यतः केन्द्रीय सरकार उक्त विवाद को म्यायनिर्णयन के लिए निर्देशित करना वांछनीय समझती है ; प्रतः, पब, प्रौद्योगिक विवाद अधिनियमम 1947 (1947 का 14 ) की धारा 10 की उपधारा (1) के खड (प) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केन्द्रीय सरकार एतदद्वारा उक्त विवाद को उक्त अधिनियम की धारा 7 के प्रधीन गठित केन्द्रीय सरकार प्रौद्योगिक प्रधिकरण कलकत्ता को न्यायनिर्णयन के लिए निर्देशित करती है । "क्या प्रक्टूबर 1971 से श्री शोभनाथ सिंह स० 1 को ( जो नवम्बर 1966 से दफ़्तरी भत्ता पा रहा था ) उस भते का संदाय करना रोक देने का भारतीय सेन्ट्रल बैंक प्रबंधमंडल को कारवाई न्यायोचित है ? यदि नहीं तो वह किस अनुतोष का हकदार है ?" [सं० एल - 12012 / 112 / 710 - एल० प्रार• III] बी० के० सक्सेना, प्रवर सचिव (Department of Labour and Employment) New Delhi, the 7th June 1072 S.O. 2055. In exercise of the powers conferred by sub-section (1) of section 5 of the Mines Act, 1952 (35 of 1952), the Central Government hereby appoints Shri J. J. Nalk, Welfare Administrator-cum-Secretary under the Iron Ore Mines Labour Welfare Fund Organisation to be in Inspector of Mines subordinate to the Chief Inspector of Mines. [ No. Z / 20025/8/71-M.IV.] R. K SRIVASTAVA, Under Secy.
" Whether the readjustment of salaries and emoluments of Sri P. N. Balaji, Sri K. Ratnakar and Shri A. Habib Rehman on their transfers to Chennímalai, Gangully and Palni respectively एक सेकंड justifted. If not, to what relief these employees are entitled? Whether readjustment of salaries and emoluments of Sri U. Bhaskar Shenoy on his transfer in terms of option exercised by him under the Settlement dated the ग्यारह अगस्तust, एक हज़ार नौ सौ सरसठ एक सेकंड justifted, if not, to what relief he is entitled?" [ No. L- बारह हज़ार पच्चीस / तीन/बहत्तर-LRIII.] काशून्ययाशून्य दो हज़ार तिरेपन- - यतः कनारा बैंक से सम्बद्ध नियोजकों और उनके कर्मकारो जिनका प्रतिनिधित्व कनारा बैंक एम्पलाईज यूनियम, एक सौ पैंतीस मूर स्ट्रीट, मद्रास - एक, करती है, ने उस प्रौद्योगिक विवाद को, जो प्रावेदन में उपवर्णित और इससे उपाबद्ध अनुसूची में उधूत मांग के बारे में उनके बीच विद्यमान है, एक प्रौद्योगिक अधिकरण को निर्देशित करने के लिए केन्द्रीय सरकार को संयुक्त रूप से प्रावेदन किया है । भौर यतः केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो गया है कि भावेदन करने वाले व्यक्ति प्रत्येक पक्ष की बहुसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं प्रतः प्रब प्रौद्योगिक विबाद; अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ सत्तावन की धारा पचहत्तर और धारा दस की उपधारा द्वारा प्रवत शक्तियों का प्रयोग करते हुए केन्द्रीय सरकार एतद्द्वारा एक प्रौद्योगिक प्रधिकरण गठित करती है, जिस, पीठासीन अधिकारी श्री थिरू के सोथाराम राव होंगे जिनका मुख्यालय मद्रास में होगा और उक्त विवाद को उक्त प्रौद्योगिक प्रधिकरण को न्यायनिर्णयन के लिए निर्देशित करती है । एक. क्या श्री पीशून्यएनशून्य बाला जी, श्री केशून्य रत्नाकर और श्री एशून्य हवीब रहमान के क्रमशः चेन्नीमलाई, गांगुली और पालनी से उनके स्थानान्तरण पर उनके वेतनों और उपलब्धियों का पुनः समायोजन न्यायोचित है। यदि नहीं तो ये कर्मचारी किस अनुतोष के हकदार हैं । दो. क्या श्री यूशून्य भास्कर शिनोय के, तारीख ग्यारह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ सरसठ वाले समझौते के अधीन उसके द्वारा दिए गए विकल्प के अनुसार उसके स्थानान्तरण पर उसके वेतन और उपलब्धियों का पुनः समायोजन न्यायोचित है । यदि नहीं तो वह किस अनुतोष के हकदार हैं? New Delhi, the दस मार्चch एक हज़ार नौ सौ बहत्तर S.O. दो हज़ार चौवन. Whereas the Central Government is of opinion that an industrial dispute exists between the employers in relation to the Central Bank of India and their workmen in respect of the matter specified in the Schedule hereto annexed; [PART II Now, therefore, in exercise of the powers conferred by clause of sub-section of section दस of the Industrial Disputes Act, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस , the Central Government hereby refers the said dispute for adjudication, to the Industrial Tribunal, Calcutta constituted under section सात एम्पीयर of the said Act. "Whether the action of the management of the Central Bank of India, Calcutta in stopping from October, एक हज़ार नौ सौ सत्तर, the payment of Daftry Allowance to Shri Sobhnath Singh No. एक. is justified? If not, to what relief is he entitled?" [ No. L. बारह हज़ार बारह/एक सौ बारह/इकहत्तर/LRIII.] B. K. SAKSENA, Under Secy. नई दिल्ली, दस मार्च, एक हज़ार नौ सौ बहत्तर काशून्य प्रॉशून्य दो हज़ार चौवन - यतः केन्द्रीय सरकार की राय है कि इस के उपाबद्ध अनुसूची में विनिर्दिष्ट विषयों के बारें में भारतीय सेन्ट्रल बैंक से सम्बद्ध नियोजकों और उनके कर्मकारों के बीच एक प्रौद्योगिक विवाद विद्यमान है ; भौर यतः केन्द्रीय सरकार उक्त विवाद को म्यायनिर्णयन के लिए निर्देशित करना वांछनीय समझती है ; प्रतः, पब, प्रौद्योगिक विवाद अधिनियमम एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस की धारा दस की उपधारा के खड द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केन्द्रीय सरकार एतदद्वारा उक्त विवाद को उक्त अधिनियम की धारा सात के प्रधीन गठित केन्द्रीय सरकार प्रौद्योगिक प्रधिकरण कलकत्ता को न्यायनिर्णयन के लिए निर्देशित करती है । "क्या प्रक्टूबर एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर से श्री शोभनाथ सिंह सशून्य एक को उस भते का संदाय करना रोक देने का भारतीय सेन्ट्रल बैंक प्रबंधमंडल को कारवाई न्यायोचित है ? यदि नहीं तो वह किस अनुतोष का हकदार है ?" [संशून्य एल - बारह हज़ार बारह / एक सौ बारह / सात सौ दस - एलशून्य प्रार• III] बीशून्य केशून्य सक्सेना, प्रवर सचिव New Delhi, the सात जूनe एक हज़ार बहत्तर S.O. दो हज़ार पचपन. In exercise of the powers conferred by sub-section of section पाँच of the Mines Act, एक हज़ार नौ सौ बावन , the Central Government hereby appoints Shri J. J. Nalk, Welfare Administrator-cum-Secretary under the Iron Ore Mines Labour Welfare Fund Organisation to be in Inspector of Mines subordinate to the Chief Inspector of Mines. [ No. Z / दोइकहत्तर अगस्त पच्चीस-M.IV.] R. K SRIVASTAVA, Under Secy.
हिमाचल में कैदियों को संस्कारवान बनाने के लिए पुस्तकों का सहारा लिया जाएगा। उन्हें धार्मिक और आध्यात्मिक पुस्तकों के साथ साहित्य पढ़ाया जाएगा। हिमाचल की जेलों में कैदियों के लिए पुस्तकालय स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके लिए नेशनल बुक ट्रस्ट से बात चल रही है। डीजीपी जेल सोमेश गोयल ने शनिवार को जिला एवं मुक्त कारागार धर्मशाला में कहा कि जो सर्वे किया है, उसके आधार पर प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों में से 6 फीसदी अशिक्षित हैं। जबकि, 9 फीसदी कैदी स्नातक या उससे ऊपर पढ़े लिखे हैं। उन्होंने बताया कि 85 फीसदी कैदी ऐसे हैं, जो कि 10वीं व 12वीं पास हैं। उन्होंने कहा कि जो कैदी अशिक्षित हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से पढ़ाने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके लिए ओपन स्कूल को माध्यम बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जो कैदी पढ़े लिखे हैं, वो भी अशिक्षित कैदियों को पढ़ा सकते हैं, ऐसी व्यवस्थाएं बनाने के निर्देश जारी किए गए हैं। डीजीपी जेल ने बताया कि प्रदेश की जेलों में स्थापित किए जाने वाले पुस्तकालयों में कैदियों की संख्या के अधार पर पुस्तकें उपलब्ध हो सकें, इसके प्रयास किए जाएंगे। यही कारण है कि हमारी ओर से नेशनल बुक ट्रस्ट से इस बारे बातचीत की जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एनबीटी के सहयोग से शीघ्र ही प्रदेश की जेलों में पुस्तकालय स्थापना का कार्य पूरा होगा। इससे पहले डीजीपी जेल सोमेश गोयल ने जिला एवं मुक्त कारागार धर्मशाला में नवनिर्मित ओपन एयर ब्लॉक का उदघाटन किया। उन्होंने जेल परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों का भी जायजा लिया। इस अवसर पर जिला कारागार धर्मशाला के डिप्टी सुपरीटेंडेंट विनोद चंबियाल सहित अन्य जेल अधिकारी और स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। शिमला स्थित कंडा जेल में कैदी तैयार कर रहे होटल यूनिफार्म कंडा जेल में होटल यूनिफार्म सिलाई का काम भी कैदियों से करवाया जा रहा है, जिसके लिए जेल प्रशासन ने होटल एसोसिएशन से बात करके उन यूनीफार्म की बिक्री का भी इंतजाम किया है। अब प्रदेश जेल प्रशासन रेडीमेड कपड़ों के क्षेत्र में भी उतरने जा रहा है, जिसके माध्यम से लोगों को बाजार से सस्ते कपड़े उपलब्ध करवाए जाएंगे। कैदियों को काम देने का ही परिणाम है कि प्रदेश में 150 के लगभग कैदी बाहर काम करने जाते हैं, यही नहीं महिला कैदियों को भी इसी तरह कार्य उपलब्ध करवाया जा रहा है। जेलों में हैंडलूम कार्य को भी शामिल करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। प्रदेश की जेलों में सजा काट रहे कैदियों के हर हाथ को काम प्रोजेक्ट के तहत जिलों में काम करने वाले कैदियों के वेजिस में इजाफा होने के साथ जेलों के उत्पादों की बिक्री में वृद्धि हुई है। पहले कैदियों को वेजिस के रूप में 5 से 6 लाख रुपये दिए जाते थे, वहीं अब यह आंकड़ा 1. 05 करोड़ तक पहुंच गई है। वहीं, जेल उत्पादों का टर्न ओवर 23 लाख से बढ़कर 3. 28 करोड़ तक पहुंच गया है। कंडा जेल में होटल यूनिफार्म तैयार किए जा रहे हैं, जिसकी बिक्री के लिए होटल एसोसिएशनों से बातचीत की गई है। शीघ्र ही जेलों में हैंडलूम कार्य भी शुरू किए जाएंगे।
हिमाचल में कैदियों को संस्कारवान बनाने के लिए पुस्तकों का सहारा लिया जाएगा। उन्हें धार्मिक और आध्यात्मिक पुस्तकों के साथ साहित्य पढ़ाया जाएगा। हिमाचल की जेलों में कैदियों के लिए पुस्तकालय स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके लिए नेशनल बुक ट्रस्ट से बात चल रही है। डीजीपी जेल सोमेश गोयल ने शनिवार को जिला एवं मुक्त कारागार धर्मशाला में कहा कि जो सर्वे किया है, उसके आधार पर प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों में से छः फीसदी अशिक्षित हैं। जबकि, नौ फीसदी कैदी स्नातक या उससे ऊपर पढ़े लिखे हैं। उन्होंने बताया कि पचासी फीसदी कैदी ऐसे हैं, जो कि दसवीं व बारहवीं पास हैं। उन्होंने कहा कि जो कैदी अशिक्षित हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से पढ़ाने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके लिए ओपन स्कूल को माध्यम बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जो कैदी पढ़े लिखे हैं, वो भी अशिक्षित कैदियों को पढ़ा सकते हैं, ऐसी व्यवस्थाएं बनाने के निर्देश जारी किए गए हैं। डीजीपी जेल ने बताया कि प्रदेश की जेलों में स्थापित किए जाने वाले पुस्तकालयों में कैदियों की संख्या के अधार पर पुस्तकें उपलब्ध हो सकें, इसके प्रयास किए जाएंगे। यही कारण है कि हमारी ओर से नेशनल बुक ट्रस्ट से इस बारे बातचीत की जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एनबीटी के सहयोग से शीघ्र ही प्रदेश की जेलों में पुस्तकालय स्थापना का कार्य पूरा होगा। इससे पहले डीजीपी जेल सोमेश गोयल ने जिला एवं मुक्त कारागार धर्मशाला में नवनिर्मित ओपन एयर ब्लॉक का उदघाटन किया। उन्होंने जेल परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों का भी जायजा लिया। इस अवसर पर जिला कारागार धर्मशाला के डिप्टी सुपरीटेंडेंट विनोद चंबियाल सहित अन्य जेल अधिकारी और स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। शिमला स्थित कंडा जेल में कैदी तैयार कर रहे होटल यूनिफार्म कंडा जेल में होटल यूनिफार्म सिलाई का काम भी कैदियों से करवाया जा रहा है, जिसके लिए जेल प्रशासन ने होटल एसोसिएशन से बात करके उन यूनीफार्म की बिक्री का भी इंतजाम किया है। अब प्रदेश जेल प्रशासन रेडीमेड कपड़ों के क्षेत्र में भी उतरने जा रहा है, जिसके माध्यम से लोगों को बाजार से सस्ते कपड़े उपलब्ध करवाए जाएंगे। कैदियों को काम देने का ही परिणाम है कि प्रदेश में एक सौ पचास के लगभग कैदी बाहर काम करने जाते हैं, यही नहीं महिला कैदियों को भी इसी तरह कार्य उपलब्ध करवाया जा रहा है। जेलों में हैंडलूम कार्य को भी शामिल करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। प्रदेश की जेलों में सजा काट रहे कैदियों के हर हाथ को काम प्रोजेक्ट के तहत जिलों में काम करने वाले कैदियों के वेजिस में इजाफा होने के साथ जेलों के उत्पादों की बिक्री में वृद्धि हुई है। पहले कैदियों को वेजिस के रूप में पाँच से छः लाख रुपये दिए जाते थे, वहीं अब यह आंकड़ा एक. पाँच करोड़ तक पहुंच गई है। वहीं, जेल उत्पादों का टर्न ओवर तेईस लाख से बढ़कर तीन. अट्ठाईस करोड़ तक पहुंच गया है। कंडा जेल में होटल यूनिफार्म तैयार किए जा रहे हैं, जिसकी बिक्री के लिए होटल एसोसिएशनों से बातचीत की गई है। शीघ्र ही जेलों में हैंडलूम कार्य भी शुरू किए जाएंगे।
सभी टीमों द्वारा रिटेन और रिलीज खिलाड़ियों की लिस्ट जारी करने के बाद आखिर कार दिल्ली ने भी अपने रिटेन और रिलीज खिलाड़ियों की लिस्ट जारी कर दी है। इसी लिस्ट के साथ दिल्ली ने अपने फैन्स को काफी तगड़े झटके भी दिए हैं। पिछले साल कोलकाता का साथ छोड़ दिल्ली डेयरडेविल्स की टीम के साथ जुड़े गौतम गंभीर को दिल्ली ने रिलीज कर दिया है। जी हां, गौतम गंभीर ने दिल्ली को काफी उम्मीदों के साथ पिछले साल अपनी टीम में शामिल किया था, लेकिन अपने बल्ले और अपनी कप्तानी से छाप ना छोड़ने के बाद गंभीर ने बीच आईपीएल में ही कप्तानी छोड़ दी थी। गंभीर के इस फैसले के बाद कप्तानी की जिम्मेदारी युवा श्रेयस अय्यर को दी गई थी। दिल्ली ने गौतम गंभीर के अलावा जेसन रॉय, ग्लेन मैक्सवेल और मोहम्मद शमी जैसे बड़े नाम वाले खिलाड़ियों को भी रिलीज कर दिया है। वहीं रिटेन किए गए खिलाड़ियों में श्रेयस अय्यर, पृथ्वी शॉ, ऋषभ पंत, क्रिस मौरिस जैसे बड़े नाम है। इससे पहले दिल्ली की टीम ने सनराइजर्स से ट्रेड करते हुए अपने तीन खिलाड़ियों के बदले शिखर धवन को एक बार फिर अपनी टीम में शामिल किया था। धवन 2013 से सनराइजर्स हैदराबाद की टीम से जुड़े थे।
सभी टीमों द्वारा रिटेन और रिलीज खिलाड़ियों की लिस्ट जारी करने के बाद आखिर कार दिल्ली ने भी अपने रिटेन और रिलीज खिलाड़ियों की लिस्ट जारी कर दी है। इसी लिस्ट के साथ दिल्ली ने अपने फैन्स को काफी तगड़े झटके भी दिए हैं। पिछले साल कोलकाता का साथ छोड़ दिल्ली डेयरडेविल्स की टीम के साथ जुड़े गौतम गंभीर को दिल्ली ने रिलीज कर दिया है। जी हां, गौतम गंभीर ने दिल्ली को काफी उम्मीदों के साथ पिछले साल अपनी टीम में शामिल किया था, लेकिन अपने बल्ले और अपनी कप्तानी से छाप ना छोड़ने के बाद गंभीर ने बीच आईपीएल में ही कप्तानी छोड़ दी थी। गंभीर के इस फैसले के बाद कप्तानी की जिम्मेदारी युवा श्रेयस अय्यर को दी गई थी। दिल्ली ने गौतम गंभीर के अलावा जेसन रॉय, ग्लेन मैक्सवेल और मोहम्मद शमी जैसे बड़े नाम वाले खिलाड़ियों को भी रिलीज कर दिया है। वहीं रिटेन किए गए खिलाड़ियों में श्रेयस अय्यर, पृथ्वी शॉ, ऋषभ पंत, क्रिस मौरिस जैसे बड़े नाम है। इससे पहले दिल्ली की टीम ने सनराइजर्स से ट्रेड करते हुए अपने तीन खिलाड़ियों के बदले शिखर धवन को एक बार फिर अपनी टीम में शामिल किया था। धवन दो हज़ार तेरह से सनराइजर्स हैदराबाद की टीम से जुड़े थे।
भोपाल। मध्यप्रदेश के 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए बड़ी खबर है। दरअसल लोक शिक्षण संचालनालय ने सोमवार को 10वीं-12वीं की प्री-बोर्ड परीक्षा का टाइम टेबल जारी कर दिया है। जिसके अनुसार 10वीं कक्षा की प्री-बोर्ड परीक्षा 20 जनवरी से 28 जनवरी तक आयोजित होंगी। वहीं 12वीं की परीक्षाएं 20 जनवरी से लेकर 31 जनवरी तक आयोजित की जाएंगी। इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। जारी किए गए आदेश के अनुसार एग्जाम टेक होम पैटर्न में आयोजित होंगे। स्कूल शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2021-22 की कक्षा 10वीं एवं 12वीं की प्री-बोर्ड की परीक्षा की समय सारणी जारी की है। परीक्षाएं टेक होम पैटर्न से आयोजित होंगी जिसमें कोरोना गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन करना होगा, छात्रों को प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिकाएं परीक्षा के एक दिन पहले उपलब्ध कराने को कहा गया है। वहीं कोरोना को देखते हुए विद्यार्थी को एक साथ 2 से 3 प्रश्न पत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। 10वीं के छात्रों को उत्तर पुस्तिकाएं 28 जनवरी तक वहीं 12वीं के छात्रों को उत्तर पुस्तिकाएं 1 फरवरी तक जमा करना है। वहीं पुस्तिकाओं में हुई गलतियों को सुधारने के लिए विद्यार्थियों को 5 फरवरी तक का समय दिया जाएगा। इसके साथ सभी विद्यार्थियों को अलग-अलग समय में उत्तर पुस्तिकाएं देने के लिए स्कूल बुलाया जाएगा।
भोपाल। मध्यप्रदेश के दसवीं और बारहवीं के छात्रों के लिए बड़ी खबर है। दरअसल लोक शिक्षण संचालनालय ने सोमवार को दसवीं-बारहवीं की प्री-बोर्ड परीक्षा का टाइम टेबल जारी कर दिया है। जिसके अनुसार दसवीं कक्षा की प्री-बोर्ड परीक्षा बीस जनवरी से अट्ठाईस जनवरी तक आयोजित होंगी। वहीं बारहवीं की परीक्षाएं बीस जनवरी से लेकर इकतीस जनवरी तक आयोजित की जाएंगी। इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। जारी किए गए आदेश के अनुसार एग्जाम टेक होम पैटर्न में आयोजित होंगे। स्कूल शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र दो हज़ार इक्कीस-बाईस की कक्षा दसवीं एवं बारहवीं की प्री-बोर्ड की परीक्षा की समय सारणी जारी की है। परीक्षाएं टेक होम पैटर्न से आयोजित होंगी जिसमें कोरोना गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन करना होगा, छात्रों को प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिकाएं परीक्षा के एक दिन पहले उपलब्ध कराने को कहा गया है। वहीं कोरोना को देखते हुए विद्यार्थी को एक साथ दो से तीन प्रश्न पत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। दसवीं के छात्रों को उत्तर पुस्तिकाएं अट्ठाईस जनवरी तक वहीं बारहवीं के छात्रों को उत्तर पुस्तिकाएं एक फरवरी तक जमा करना है। वहीं पुस्तिकाओं में हुई गलतियों को सुधारने के लिए विद्यार्थियों को पाँच फरवरी तक का समय दिया जाएगा। इसके साथ सभी विद्यार्थियों को अलग-अलग समय में उत्तर पुस्तिकाएं देने के लिए स्कूल बुलाया जाएगा।
आज समाज डिजिटल, पानीपत : पानीपत। नारायण रेकी सत्संग परिवार एक सामाजिक संस्था है। जो हर बुधवार कृष्णावतिका मंदिर गोरेगांव में अपना नारायण रेकी सत्संग का आयोजन करते है। हर सोमवार और मंगलवार को नारायण रेकी क्लास और हर गुरूवार और शुक्रवार करुणा रेकी की क्लास का आयोजन किया जाता है। मासिक दौर पर यशोधम स्कूल में पारिवारिक सत्संग का आयोजन किया, ताकि परिवार का हर सदस्य इसका लाभ उठा सके। उक्त विचार राजेश्वरी मोदी ने पानीपत में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहे। नारायण रेकी सत्संग परिवार रेकी क्लास से आने वाली पूरी धनराशि का उपयोग ज़रूरतमंद बच्चों की पढाई, लड़कियों के विवाह और बच्चो के चिकित्सा के लिए करते है। इसके साथ, अनाथाश्रम, वृद्वाश्रम, रेस्क्यू फाउंडेशन में नारायण रेकी परिवार के सेवा के कार्य नियमित रूप से होते रहते है। मुंबई के अलावा अहमदाबाद, बरोदा, सूरत, नॉएडा, नासिक, जयपुर,भीलवाड़ा, इंदौर, कोलकोता, बेंगलुरू, आसाम, में नारायण रेकी सत्संग परिव्वर के रेकी हीलिंग के केंद्र है। अंतर-राष्ट्रीय स्टार पर भी बैंगकॉक और अमरीका के न्यू जर्सी व शिकागो शहरों में रेकी सेमीनार का आयों किया गया है। इतना ही नहीं, मुंबई के कई उपनगरों में रेकी क्लास व हीलिंग प्रेयर्स होती है जिसका लाभ बहुत लोग उठाते है। नारायण रेकी सत्संग परिवार की संस्थापिका के परिचय के बिना संस्थान जा परिचय अधूरा है। राजेश्वरी मोदी जिन्हें लोग प्यार से राजदीदी कहते हैं। नारायण रेकी सत्संग परिवार की संस्थापिका है। कॉमर्स ग्रेजुएट राजदीदी उसुई व करुणा रेकी की ग्रैंडमास्टर है। इसके आलावा वे एक उच्चकोटी की काउंसलर व एक्यूप्रेशर थेरेपिस्ट भी है। दीदी का आभा मंडल सकरात्मक सोच व आपसी संबंधों की दृढ़ता से भरपूर देवीयता का साक्षात स्वरुप हैं। बचपन से ही समाज सेवा के प्रति उनका रुझान था, जिसे उन्होंने दाम्पत्या जीवन व दो बच्चों की मां बनने के साथ बखूबी निभाया। क्योंकि घर परिवार उनकी सर्वप्रथम प्राथमिकता थी, इसलिए घर पर दोपहर में रेकी और एक्यूप्रेशर की क्लास शुरू की। धीरे धीरे उनकी सोच लोगों की समझ में आने लगी और तेज़ी से इसका प्रचार- प्रसार हुआ, तो दीदी ने राजस्थानी मंडल गोकुलधाम के कार्यालय में अपनी सेवा देना शुरू कर दिया। गहन साधना व सोच के बाद उन्होंने यह पाया कि सकारातमक तरीके से संबंधों को दृढ़ बनाकर समाज को सुधरा जा सकता है। इसके लिए उन्होंने नारायण जीवन चक्र का प्रतिपादन किया और बड़े ही साधारण शब्दों में लोगों को मानव जीवन का उद्देश्य बताया और समझाया कि रेकी के माध्यम से हम सकारात्मक होकर जीवन विकास कैसे कर सकते है। क्योंकि उनका मानना है की सेवा का यह भाव सकारात्मकता व संबंधो की दृढ़ता उन्होंने अपने परिवार से ही सीखी है। दीदी के जीवनसाथी रमेशजी मोदी एक सफल व्यवसायी व समाजसेवक है। उनके बड़े सुपुत्र ईएनटी स्पेशलिस्ट है, बड़ी बहू स्किन स्पेशलिस्ट हैं, छोटा बेटा रेटीना स्पेशलिस्ट व छोटी बहू कॉर्निया स्पेशलिस्ट है। पूरा परिवार समाज सेवा का उदाहरण है। समय समय पर उन्हें उनके सामाजिक कार्यों के लिए विभिन पुरस्कार व उपाध्यों से सम्मानित किया गया है, जैसे मेयर अवार्ड, नारी रत्न, समाज रत्न। दीदी का जीवन सेवा का अनोखा उदाहरण है।
आज समाज डिजिटल, पानीपत : पानीपत। नारायण रेकी सत्संग परिवार एक सामाजिक संस्था है। जो हर बुधवार कृष्णावतिका मंदिर गोरेगांव में अपना नारायण रेकी सत्संग का आयोजन करते है। हर सोमवार और मंगलवार को नारायण रेकी क्लास और हर गुरूवार और शुक्रवार करुणा रेकी की क्लास का आयोजन किया जाता है। मासिक दौर पर यशोधम स्कूल में पारिवारिक सत्संग का आयोजन किया, ताकि परिवार का हर सदस्य इसका लाभ उठा सके। उक्त विचार राजेश्वरी मोदी ने पानीपत में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहे। नारायण रेकी सत्संग परिवार रेकी क्लास से आने वाली पूरी धनराशि का उपयोग ज़रूरतमंद बच्चों की पढाई, लड़कियों के विवाह और बच्चो के चिकित्सा के लिए करते है। इसके साथ, अनाथाश्रम, वृद्वाश्रम, रेस्क्यू फाउंडेशन में नारायण रेकी परिवार के सेवा के कार्य नियमित रूप से होते रहते है। मुंबई के अलावा अहमदाबाद, बरोदा, सूरत, नॉएडा, नासिक, जयपुर,भीलवाड़ा, इंदौर, कोलकोता, बेंगलुरू, आसाम, में नारायण रेकी सत्संग परिव्वर के रेकी हीलिंग के केंद्र है। अंतर-राष्ट्रीय स्टार पर भी बैंगकॉक और अमरीका के न्यू जर्सी व शिकागो शहरों में रेकी सेमीनार का आयों किया गया है। इतना ही नहीं, मुंबई के कई उपनगरों में रेकी क्लास व हीलिंग प्रेयर्स होती है जिसका लाभ बहुत लोग उठाते है। नारायण रेकी सत्संग परिवार की संस्थापिका के परिचय के बिना संस्थान जा परिचय अधूरा है। राजेश्वरी मोदी जिन्हें लोग प्यार से राजदीदी कहते हैं। नारायण रेकी सत्संग परिवार की संस्थापिका है। कॉमर्स ग्रेजुएट राजदीदी उसुई व करुणा रेकी की ग्रैंडमास्टर है। इसके आलावा वे एक उच्चकोटी की काउंसलर व एक्यूप्रेशर थेरेपिस्ट भी है। दीदी का आभा मंडल सकरात्मक सोच व आपसी संबंधों की दृढ़ता से भरपूर देवीयता का साक्षात स्वरुप हैं। बचपन से ही समाज सेवा के प्रति उनका रुझान था, जिसे उन्होंने दाम्पत्या जीवन व दो बच्चों की मां बनने के साथ बखूबी निभाया। क्योंकि घर परिवार उनकी सर्वप्रथम प्राथमिकता थी, इसलिए घर पर दोपहर में रेकी और एक्यूप्रेशर की क्लास शुरू की। धीरे धीरे उनकी सोच लोगों की समझ में आने लगी और तेज़ी से इसका प्रचार- प्रसार हुआ, तो दीदी ने राजस्थानी मंडल गोकुलधाम के कार्यालय में अपनी सेवा देना शुरू कर दिया। गहन साधना व सोच के बाद उन्होंने यह पाया कि सकारातमक तरीके से संबंधों को दृढ़ बनाकर समाज को सुधरा जा सकता है। इसके लिए उन्होंने नारायण जीवन चक्र का प्रतिपादन किया और बड़े ही साधारण शब्दों में लोगों को मानव जीवन का उद्देश्य बताया और समझाया कि रेकी के माध्यम से हम सकारात्मक होकर जीवन विकास कैसे कर सकते है। क्योंकि उनका मानना है की सेवा का यह भाव सकारात्मकता व संबंधो की दृढ़ता उन्होंने अपने परिवार से ही सीखी है। दीदी के जीवनसाथी रमेशजी मोदी एक सफल व्यवसायी व समाजसेवक है। उनके बड़े सुपुत्र ईएनटी स्पेशलिस्ट है, बड़ी बहू स्किन स्पेशलिस्ट हैं, छोटा बेटा रेटीना स्पेशलिस्ट व छोटी बहू कॉर्निया स्पेशलिस्ट है। पूरा परिवार समाज सेवा का उदाहरण है। समय समय पर उन्हें उनके सामाजिक कार्यों के लिए विभिन पुरस्कार व उपाध्यों से सम्मानित किया गया है, जैसे मेयर अवार्ड, नारी रत्न, समाज रत्न। दीदी का जीवन सेवा का अनोखा उदाहरण है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आने के बाद से भारतीय जनता पार्टी (BJP in UP) के नेताओं के सुर बदले हुए हैं। भारी बहुमत से दोबारा सत्ता में वापसी के बाद उनका आक्रामक अंदाज सामने आ रहा है। चुनावी जीत के बाद गाजियाबाद (Loni Vidhansabha Ghaziabad) के लोनी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर (Nand Kishor Gurjar) ने पशुओं की कटाई के मामले में बड़ा हमला बोला है। दरअसल, चुनाव से पहले से यहां पर पशुओं की कटाई अवैध तरीके से शुरू होने का मामला सामने आया था। इस पर भाजपा विधायक अब अधिकारियों को ही चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। वे इस पर रोक नहीं लगाने वाले अधिकारियों पर सीधी चेतावनी जारी करते नजर आ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आने के बाद से भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के सुर बदले हुए हैं। भारी बहुमत से दोबारा सत्ता में वापसी के बाद उनका आक्रामक अंदाज सामने आ रहा है। चुनावी जीत के बाद गाजियाबाद के लोनी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने पशुओं की कटाई के मामले में बड़ा हमला बोला है। दरअसल, चुनाव से पहले से यहां पर पशुओं की कटाई अवैध तरीके से शुरू होने का मामला सामने आया था। इस पर भाजपा विधायक अब अधिकारियों को ही चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। वे इस पर रोक नहीं लगाने वाले अधिकारियों पर सीधी चेतावनी जारी करते नजर आ रहे हैं।
रेवाडी़ : रेवाड़ी जिले में पुलिस ने दिल्ली-जयपुर हाइवे पर भैंस से भरे एक ट्रक को काबू कर लिया है। पुलिस ने ट्रक चालक व उसके साथी को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि पुलिस को शुक्रवार को सूचना मिली थी कि एक ट्रक जयपुर से दिल्ली की तरफ जाने वाला है। जिसमें निर्ममता से भैंस भरी हुई है। पुलिस ने नाकाबंदी कर दी। कुछ देर बाद एक ट्रक आता दिखाई दिया। पुलिस ने टॉर्च के जरिए चालक को रुकने का इशारा किया। नाकाबंदी से आगे चालक ने ट्रक को रोका। पुलिस ने ट्रक को चैक किया तो उसमें बीच में फट्टे लगाकर ठूंस-ठूंस कर क्रूरता से 40 भैंसे भरी हुई थी। वहीं पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गाड़ी में भैसें जयपुर के हाउंसिंग बोर्ड शास्त्री नगर निवासी गाड़ी मालिक जावेद ने खरीदकर गाड़ी में भरवाकर यूपी के गाजियाबाद जिले के डासना लेकर जाने के लिए कहा है। (हरियाणा की खबरें टेलीग्राम पर भी, बस यहां क्लिक करें या फिर टेलीग्राम पर Punjab Kesari Haryana सर्च करें। )
रेवाडी़ : रेवाड़ी जिले में पुलिस ने दिल्ली-जयपुर हाइवे पर भैंस से भरे एक ट्रक को काबू कर लिया है। पुलिस ने ट्रक चालक व उसके साथी को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि पुलिस को शुक्रवार को सूचना मिली थी कि एक ट्रक जयपुर से दिल्ली की तरफ जाने वाला है। जिसमें निर्ममता से भैंस भरी हुई है। पुलिस ने नाकाबंदी कर दी। कुछ देर बाद एक ट्रक आता दिखाई दिया। पुलिस ने टॉर्च के जरिए चालक को रुकने का इशारा किया। नाकाबंदी से आगे चालक ने ट्रक को रोका। पुलिस ने ट्रक को चैक किया तो उसमें बीच में फट्टे लगाकर ठूंस-ठूंस कर क्रूरता से चालीस भैंसे भरी हुई थी। वहीं पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गाड़ी में भैसें जयपुर के हाउंसिंग बोर्ड शास्त्री नगर निवासी गाड़ी मालिक जावेद ने खरीदकर गाड़ी में भरवाकर यूपी के गाजियाबाद जिले के डासना लेकर जाने के लिए कहा है।
नई दिल्ली। मुंबई के भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान के छात्र कनिष्क कटारिया ने वर्ष 2018 के संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया है, जबकि श्रृष्टि देशमुख महिला वर्ग में शीर्ष पर हैं। यूपीएससी ने शुक्रवार को सिविल सर्विसेज की फाइनल परीक्षा के नतीजे घोषित किए, जिसके अनुसार इस वर्ष सफल हुए टॉप 25 छात्रों में 15 लड़के और 10 लड़कियां हैं। टॉप पांच उम्मीदवारों में सिर्फ लड़के शामिल हैं। वर्ष 2018 की परीक्षा में कुल 759 उम्मीदवार सफल हुए हैं, जिनमें 577 पुरुष और 182 महिलाएं शामिल हैं। two यूपीएससी द्वारा जारी नजीते के अनुसार छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा की नम्रता जैन ने 12वां स्थान हासिल किया है। पहले 10 नम्बर पर आए उम्मीदवारों की सूची निम्न प्रकार हैः
नई दिल्ली। मुंबई के भारतीय प्रौद्योगिक संस्थान के छात्र कनिष्क कटारिया ने वर्ष दो हज़ार अट्ठारह के संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया है, जबकि श्रृष्टि देशमुख महिला वर्ग में शीर्ष पर हैं। यूपीएससी ने शुक्रवार को सिविल सर्विसेज की फाइनल परीक्षा के नतीजे घोषित किए, जिसके अनुसार इस वर्ष सफल हुए टॉप पच्चीस छात्रों में पंद्रह लड़के और दस लड़कियां हैं। टॉप पांच उम्मीदवारों में सिर्फ लड़के शामिल हैं। वर्ष दो हज़ार अट्ठारह की परीक्षा में कुल सात सौ उनसठ उम्मीदवार सफल हुए हैं, जिनमें पाँच सौ सतहत्तर पुरुष और एक सौ बयासी महिलाएं शामिल हैं। two यूपीएससी द्वारा जारी नजीते के अनुसार छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा की नम्रता जैन ने बारहवां स्थान हासिल किया है। पहले दस नम्बर पर आए उम्मीदवारों की सूची निम्न प्रकार हैः
कांग्रेस के वरीय नेता गुलाम नबी आजाद ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर करारा हमला किया है. पटना में लेफ्ट की रैली भाजपा हराओ-देश बचाओ रैली में पहुंचे आजाद ने कहा कि देश में किसी सीएम का अपहरण पहली बार होते देख रहा हूं. बिहार में बीजेपी ने नीतीश का अपहरण कर लिया है. आजाद ने कहा कि गांधी मैदान में ही बिहार का महागठबंधन बना था और नीतीश को सीएम बनाने का निर्णय इसी गांधी मैदान में हुआ था. आज नीतीश को छोड़कर सभी लोग एक बार फिर से मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने नया विवाह किया है. आज सब लोग मिलकर फिर नया निर्णय लेंगे. दीपांकर ने कहा कि देश में आंदोलनों का गठबंधन होना चाहिए. बिहार को बड़े गठबंधन की अगुआई करनी चाहिए. इसके लिए वामदल और समाजवादियों को एकसाथ आना होगा. बिहार हमेशा प्रयोगशाला की धरती रही है और बिहार में फिर से एक नया प्रयोग करना होगा. . 237 से ज्यादा फिल्में, 93 रहीं सुपरहिट, शाहरुख-सलमान या अमिताभ नहीं. . . कौन है सबसे ज्यादा HIT देने वाला एक्टर?
कांग्रेस के वरीय नेता गुलाम नबी आजाद ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर करारा हमला किया है. पटना में लेफ्ट की रैली भाजपा हराओ-देश बचाओ रैली में पहुंचे आजाद ने कहा कि देश में किसी सीएम का अपहरण पहली बार होते देख रहा हूं. बिहार में बीजेपी ने नीतीश का अपहरण कर लिया है. आजाद ने कहा कि गांधी मैदान में ही बिहार का महागठबंधन बना था और नीतीश को सीएम बनाने का निर्णय इसी गांधी मैदान में हुआ था. आज नीतीश को छोड़कर सभी लोग एक बार फिर से मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने नया विवाह किया है. आज सब लोग मिलकर फिर नया निर्णय लेंगे. दीपांकर ने कहा कि देश में आंदोलनों का गठबंधन होना चाहिए. बिहार को बड़े गठबंधन की अगुआई करनी चाहिए. इसके लिए वामदल और समाजवादियों को एकसाथ आना होगा. बिहार हमेशा प्रयोगशाला की धरती रही है और बिहार में फिर से एक नया प्रयोग करना होगा. . दो सौ सैंतीस से ज्यादा फिल्में, तिरानवे रहीं सुपरहिट, शाहरुख-सलमान या अमिताभ नहीं. . . कौन है सबसे ज्यादा HIT देने वाला एक्टर?
विपक्षी दलों की एकता की मुहिम के बीच बीजेपी ने भी अपने गठबंधन एनडीए को फिर से मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। देश के कई विपक्षी दलों की शुक्रवार को पटना में बैठक हुई। बैठक के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष की बैठक की बड़ी बात यह निकली कि हम सब साथ हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी 23 जून को बिहार के मुख्यमंत्री और जद (यू) नेता नीतीश कुमार द्वारा बुलाई गई गैर-राजग दलों की बैठक से एक दिन पहले पटना पहुंचने वाली हैं। भाजपा के प्रवक्ता आरपी सिंह ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव और पंजाब में होने वाले आगामी चुनावों में भी भाजपा शिरोमणि अकाली दल (शिअद) से गठबंधन नहीं करेगी। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गत प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणामों पर सवाल उठाते हुए सोमवार को कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में लोगों को संविधान बचाने के लिए मतदान करना होगा।
विपक्षी दलों की एकता की मुहिम के बीच बीजेपी ने भी अपने गठबंधन एनडीए को फिर से मजबूत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। देश के कई विपक्षी दलों की शुक्रवार को पटना में बैठक हुई। बैठक के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष की बैठक की बड़ी बात यह निकली कि हम सब साथ हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी तेईस जून को बिहार के मुख्यमंत्री और जद नेता नीतीश कुमार द्वारा बुलाई गई गैर-राजग दलों की बैठक से एक दिन पहले पटना पहुंचने वाली हैं। भाजपा के प्रवक्ता आरपी सिंह ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव और पंजाब में होने वाले आगामी चुनावों में भी भाजपा शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन नहीं करेगी। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गत प्रदेश विधानसभा चुनाव के परिणामों पर सवाल उठाते हुए सोमवार को कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव में लोगों को संविधान बचाने के लिए मतदान करना होगा।
इसके प्यासे होते हैं ज्ञानी पुरुष । ज्ञानीपुरुष परवस्तुके प्यासे नहीं होते हैं । बहिर्मुखता एक महासंकट है क्योंकि वह कोरा भ्रम है । जहाँ मिलना-जुलना कुछ नहीं केवल भ्रम भरी कल्पनाएं बढ़ रही हैं, उनके विषय होते हैं परपदार्थ । निर्भ्रान्ति में अनाकुलताका दृष्टान्त - जैसे कोई पुरुष कुछ भ्रम करके दुःखी हो, रस्सी को साँप जान करके भ्रम करके घबड़ायेगा, पर जिसे मालूम है कि यह कोरी रस्सी है तो वह उस भ्रमी पुरुषपर बड़ी समीक्षा प्रकट करता है । अहो कुछ भी तो बात नहीं है, यह दुःखी हो रहा है । उसे समझाता है कि क्यों दुःखी होते हो, वहाँ तो कुछ भी नहीं है, कोरी रस्सी है । तब उसकी समझ में आता है. ऐसा लगता है कि अहो इतना समय व्यर्थ ही कल्पनामें बिताया है। इस घरमें तो कुछ डरकी वात ही न थी । जब ज्ञान जागृत होता है, वस्तुकी स्वतंत्रता विदित होती है, समस्त वस्तुवोंसे विविक्त यह मतत्त्व ज्ञान में आता तब समझ में बात आती है कि हो व्यर्थ ही इस भ्रमपूर्ण संकल्प विकल्पमें पड़कर इतना काल व्यतीत कर डाला । ज्ञानी परुषके यथार्थ ज्ञान होनेपर फिर शंका नहीं रहती है । सकनेका भी कारण बन जाती है। उसकी व्यवस्था बनानी पड़ती है, हो रहा है सब कुछ, पर मेरा रिश्ता किसीसे कुछ नहीं है । ये सब भी वलायें हैं, विपत्तियाँ हैं, इन सबसे विविक्त निरापद अपने स्वरूपकी जो दृष्टि करता है वह ही पुरुष निःशंक रहता है । सर्वसे प्रधान भय मरणका भय है । मरणभय ज्ञानी पुरुषके नहीं रहता है । इन्द्रिय आदिक प्राणोंके विनाश को ही तो इस लोक में मरण कहते हैं । और ये इन्द्रिय कारण परमार्थस्वरूप नहीं हैं । निश्चयसे इस आत्माका ज्ञान ही प्रारण है । वह प्राण अविनाशी है, इस कारण आत्माका मरण ही नहीं है । ऐसा स्पष्ट बोध रहनेसे ज्ञानी पुरुषके मरणका भी भय नहीं रहता । वह तो निःशंक होता हुआ अपने ज्ञानस्वरूपका ही स्वयं निरंतर अनुभव किया करता है । यों ज्ञानी पुरुष मरण भयसे अत्यन्त दूर लोकभय के अभावका पुनः संक्षिप्त विवरण - सम्यग्दृष्टि जीव सातों भयोंसे रहित होता है। उन सातों भयोंमें से ६ प्रकारके भयोंका वर्णन हो चुका है, ग्राज सप्तम भयक वर्णन चलेगा । इस ७ वें भयका नाम है ग्राकस्मिक भय । इसके पहिले ६ भय या चुके थे इह लोकभय अर्थात् मेरा इस लोक में कैसे गुजार हो, कैसे नियम कानून बनेंगे, सम्पत्ति रहेगी अथवा नहीं । इहलोक में सम्यग्दृष्टि जीवको भय नहीं होता है । इस लोकमें उसे भय नहीं होता क्योंकि इस दिखते हुए लोक को वह लोक ही नहीं मानता। जो स्वरूप है, स्वयं प्रात्मा है वह ही उसका लोक है । परलोकका भय यह कहलाता वि परभवमें मेरी कैसी गति होगी, किसी खोटी गतिमें उत्पन्न हो गया तो फिर क्या गुजरेगा इस प्रकारका भय करना परलोक भय है । ज्ञानी जीवको परलोकका भय यों नहीं होता । क्योंकि उसके लिए परलोक, परलोक ही नहीं है, किन्तु पर अर्थात् उत्कृष्ट निजलोक मायां ज्ञायकस्वभाव ही मेरा परलोक है । वह जानता है कि मैं अपने इस ज्ञायकस्वभावम उत्कृष्ट लोकमें रहता हूँ तो यहाँ कोई शंका ही नहीं आती है । मरणय व अत्राणमय के अभावका पुनः संक्षिप्त विवरण - तीसरा भय है वेदन - भय । शरीर में पीड़ा होगी तो कैसी होगी-ऐसी आशंका हो जाती अब क्या होगा ? यह रोग बढ़ जायगा तो कैसी वेदना होगी, ऐसा हो डरनेका नाम वेदनाभय है । ज्ञानीको यह वेदन का भय नहीं होता है क्योंकि वह जानता है कि जो ज्ञान वेदा जाता है वही तो वेदना है वेदना किसी दूसरे तत्त्वका नाम नहीं है । वेदना शरीरमें नहीं होती है । वेदना आत्मा होती है और वेदना ज्ञानकी वेदना होती है । वेदनाका अर्थ जानन है। किसी भी प्रसंग वह जानता है, किन्तु किसी परको न वह करता है, न भोगता है । जब वेदना मेरे स्वरूपसे बाहर ही नहीं है तो भय किसका हो उसे ? ज्ञानी जीवको प्रत्राण भय भी नहीं होता है । मेरी रक्षा कैसे हो, मेरा रक्षक कोई नहीं है ऐसा बहम सम्यग्दृष्टि पुरुषके नहीं होता है क्योंकि वह जानता है कि यहाँ भी मेरी रक्षा कर कौन रहा है ? जब तक उदय अनुकूल चलता है चार आदमी मुझे पूछ लेते हैं, अथवा वे चार आदमी भी पूछने नहीं हैं, वे भी अपने में कषाय भाव बनाते हैं और उन कषाय भावोंके अनुसार होने वाली चेष्टा हमारे सुखका निमित्तभूत होती है । ये भी कोई शरण नहीं हैं । तो अन्यत्र मेरा कौन शरण होगा ? वास्तविक शरगा तो मेरा मैं ही हूँ। मैं स्वतःसिद्ध हूँ, अतः अपने पास स्वरक्षित हूँ । सम्यग्दृष्टि पुरुष र भय नहीं होता ।
इसके प्यासे होते हैं ज्ञानी पुरुष । ज्ञानीपुरुष परवस्तुके प्यासे नहीं होते हैं । बहिर्मुखता एक महासंकट है क्योंकि वह कोरा भ्रम है । जहाँ मिलना-जुलना कुछ नहीं केवल भ्रम भरी कल्पनाएं बढ़ रही हैं, उनके विषय होते हैं परपदार्थ । निर्भ्रान्ति में अनाकुलताका दृष्टान्त - जैसे कोई पुरुष कुछ भ्रम करके दुःखी हो, रस्सी को साँप जान करके भ्रम करके घबड़ायेगा, पर जिसे मालूम है कि यह कोरी रस्सी है तो वह उस भ्रमी पुरुषपर बड़ी समीक्षा प्रकट करता है । अहो कुछ भी तो बात नहीं है, यह दुःखी हो रहा है । उसे समझाता है कि क्यों दुःखी होते हो, वहाँ तो कुछ भी नहीं है, कोरी रस्सी है । तब उसकी समझ में आता है. ऐसा लगता है कि अहो इतना समय व्यर्थ ही कल्पनामें बिताया है। इस घरमें तो कुछ डरकी वात ही न थी । जब ज्ञान जागृत होता है, वस्तुकी स्वतंत्रता विदित होती है, समस्त वस्तुवोंसे विविक्त यह मतत्त्व ज्ञान में आता तब समझ में बात आती है कि हो व्यर्थ ही इस भ्रमपूर्ण संकल्प विकल्पमें पड़कर इतना काल व्यतीत कर डाला । ज्ञानी परुषके यथार्थ ज्ञान होनेपर फिर शंका नहीं रहती है । सकनेका भी कारण बन जाती है। उसकी व्यवस्था बनानी पड़ती है, हो रहा है सब कुछ, पर मेरा रिश्ता किसीसे कुछ नहीं है । ये सब भी वलायें हैं, विपत्तियाँ हैं, इन सबसे विविक्त निरापद अपने स्वरूपकी जो दृष्टि करता है वह ही पुरुष निःशंक रहता है । सर्वसे प्रधान भय मरणका भय है । मरणभय ज्ञानी पुरुषके नहीं रहता है । इन्द्रिय आदिक प्राणोंके विनाश को ही तो इस लोक में मरण कहते हैं । और ये इन्द्रिय कारण परमार्थस्वरूप नहीं हैं । निश्चयसे इस आत्माका ज्ञान ही प्रारण है । वह प्राण अविनाशी है, इस कारण आत्माका मरण ही नहीं है । ऐसा स्पष्ट बोध रहनेसे ज्ञानी पुरुषके मरणका भी भय नहीं रहता । वह तो निःशंक होता हुआ अपने ज्ञानस्वरूपका ही स्वयं निरंतर अनुभव किया करता है । यों ज्ञानी पुरुष मरण भयसे अत्यन्त दूर लोकभय के अभावका पुनः संक्षिप्त विवरण - सम्यग्दृष्टि जीव सातों भयोंसे रहित होता है। उन सातों भयोंमें से छः प्रकारके भयोंका वर्णन हो चुका है, ग्राज सप्तम भयक वर्णन चलेगा । इस सात वें भयका नाम है ग्राकस्मिक भय । इसके पहिले छः भय या चुके थे इह लोकभय अर्थात् मेरा इस लोक में कैसे गुजार हो, कैसे नियम कानून बनेंगे, सम्पत्ति रहेगी अथवा नहीं । इहलोक में सम्यग्दृष्टि जीवको भय नहीं होता है । इस लोकमें उसे भय नहीं होता क्योंकि इस दिखते हुए लोक को वह लोक ही नहीं मानता। जो स्वरूप है, स्वयं प्रात्मा है वह ही उसका लोक है । परलोकका भय यह कहलाता वि परभवमें मेरी कैसी गति होगी, किसी खोटी गतिमें उत्पन्न हो गया तो फिर क्या गुजरेगा इस प्रकारका भय करना परलोक भय है । ज्ञानी जीवको परलोकका भय यों नहीं होता । क्योंकि उसके लिए परलोक, परलोक ही नहीं है, किन्तु पर अर्थात् उत्कृष्ट निजलोक मायां ज्ञायकस्वभाव ही मेरा परलोक है । वह जानता है कि मैं अपने इस ज्ञायकस्वभावम उत्कृष्ट लोकमें रहता हूँ तो यहाँ कोई शंका ही नहीं आती है । मरणय व अत्राणमय के अभावका पुनः संक्षिप्त विवरण - तीसरा भय है वेदन - भय । शरीर में पीड़ा होगी तो कैसी होगी-ऐसी आशंका हो जाती अब क्या होगा ? यह रोग बढ़ जायगा तो कैसी वेदना होगी, ऐसा हो डरनेका नाम वेदनाभय है । ज्ञानीको यह वेदन का भय नहीं होता है क्योंकि वह जानता है कि जो ज्ञान वेदा जाता है वही तो वेदना है वेदना किसी दूसरे तत्त्वका नाम नहीं है । वेदना शरीरमें नहीं होती है । वेदना आत्मा होती है और वेदना ज्ञानकी वेदना होती है । वेदनाका अर्थ जानन है। किसी भी प्रसंग वह जानता है, किन्तु किसी परको न वह करता है, न भोगता है । जब वेदना मेरे स्वरूपसे बाहर ही नहीं है तो भय किसका हो उसे ? ज्ञानी जीवको प्रत्राण भय भी नहीं होता है । मेरी रक्षा कैसे हो, मेरा रक्षक कोई नहीं है ऐसा बहम सम्यग्दृष्टि पुरुषके नहीं होता है क्योंकि वह जानता है कि यहाँ भी मेरी रक्षा कर कौन रहा है ? जब तक उदय अनुकूल चलता है चार आदमी मुझे पूछ लेते हैं, अथवा वे चार आदमी भी पूछने नहीं हैं, वे भी अपने में कषाय भाव बनाते हैं और उन कषाय भावोंके अनुसार होने वाली चेष्टा हमारे सुखका निमित्तभूत होती है । ये भी कोई शरण नहीं हैं । तो अन्यत्र मेरा कौन शरण होगा ? वास्तविक शरगा तो मेरा मैं ही हूँ। मैं स्वतःसिद्ध हूँ, अतः अपने पास स्वरक्षित हूँ । सम्यग्दृष्टि पुरुष र भय नहीं होता ।
Realme बहुत जल्द भारत में अपना C-Series का स्मार्टफोन लॉन्च करने वाला है. इसका नाम Realme C55 होगा. कंपनी ने देश में फोन को टीज करना शुरू कर दिया है, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसको जल्द लॉन्च किया जाएगा. अब आगामी स्मार्टफोन के लिए एक नया इवेंट पेज कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव कर दिया गया है. फोन में iPhone 14 प्रो सीरीज-जैसे डायनामिक आइलैंड की पेशकश करने जा रही है. स्क्रीन पर मिनी कैप्सूल जैसा नजर आने वाला है. Realme C55 इंडोनेशिया में पहले ही लॉन्च हो चुका है, इसलिए हम फीचर्स और स्पेक्स के बारे में जानते हैं. Realme C55 का इवेंट पेज ऑफीशियल वेबसाइट पर देखा जा सकता है. उम्मीद कर सकते हैं कि महीने के आखिर में इसे भारत में लॉन्च कर दिया जाएगा. इस ईवेंट का कैप्शन 'एंटरटेनमेंट का चैंपियन' है. रियलमी हमेशा से ही इसी तरह की टैगलाइन के साथ फोन लॉन्च करता आया है. Realme C55 में 6.52-इंच 90Hz रिफ्रेश रेट IPS LCD पैनल होगा. फोन मीडियाटेक हीलियो जी88 प्रोसेसर द्वारा संचालित होगा, जिसे 8 जीबी तक एलपीडीडीआर4एक्स रैम और 256 जीबी तक के आंतरिक स्टोरेज के साथ जोड़ा जाएगा. फोन में डुअल कैमरा सेटअप मिलेगा, जिसमें 64MP का प्राइमरी और 2MP का डेप्थ सेंसर होगा. वहीं सामने की तरफ 8MP का सेल्फी कैमरा होगा. फोन में यूएसबी टाइप-सी चार्जिंग पोर्ट पर 33W SuperVOOC फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ 5,000mAh की बैटरी होगी. Realme C55 Android 13-आधारित Realme UI 4.0 स्किन को बॉक्स से बाहर बूट करेगा. Realme C55 एक बजट स्मार्टफोन होगा. रिपोर्ट्स की मानें तो फोन के 6GB RAM+128GB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत 13,390 रुपये होगी. फोन को महीने के आखिर में लॉन्च किया जा सकता है.
Realme बहुत जल्द भारत में अपना C-Series का स्मार्टफोन लॉन्च करने वाला है. इसका नाम Realme Cपचपन होगा. कंपनी ने देश में फोन को टीज करना शुरू कर दिया है, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसको जल्द लॉन्च किया जाएगा. अब आगामी स्मार्टफोन के लिए एक नया इवेंट पेज कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव कर दिया गया है. फोन में iPhone चौदह प्रो सीरीज-जैसे डायनामिक आइलैंड की पेशकश करने जा रही है. स्क्रीन पर मिनी कैप्सूल जैसा नजर आने वाला है. Realme Cपचपन इंडोनेशिया में पहले ही लॉन्च हो चुका है, इसलिए हम फीचर्स और स्पेक्स के बारे में जानते हैं. Realme Cपचपन का इवेंट पेज ऑफीशियल वेबसाइट पर देखा जा सकता है. उम्मीद कर सकते हैं कि महीने के आखिर में इसे भारत में लॉन्च कर दिया जाएगा. इस ईवेंट का कैप्शन 'एंटरटेनमेंट का चैंपियन' है. रियलमी हमेशा से ही इसी तरह की टैगलाइन के साथ फोन लॉन्च करता आया है. Realme Cपचपन में छः.बावन-इंच नब्बे हर्ट्ज़ रिफ्रेश रेट IPS LCD पैनल होगा. फोन मीडियाटेक हीलियो जीअठासी प्रोसेसर द्वारा संचालित होगा, जिसे आठ जीबी तक एलपीडीडीआरचारएक्स रैम और दो सौ छप्पन जीबी तक के आंतरिक स्टोरेज के साथ जोड़ा जाएगा. फोन में डुअल कैमरा सेटअप मिलेगा, जिसमें चौंसठMP का प्राइमरी और दोMP का डेप्थ सेंसर होगा. वहीं सामने की तरफ आठMP का सेल्फी कैमरा होगा. फोन में यूएसबी टाइप-सी चार्जिंग पोर्ट पर तैंतीस वाट SuperVOOC फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ पाँच,शून्यmAh की बैटरी होगी. Realme Cपचपन Android तेरह-आधारित Realme UI चार.शून्य स्किन को बॉक्स से बाहर बूट करेगा. Realme Cपचपन एक बजट स्मार्टफोन होगा. रिपोर्ट्स की मानें तो फोन के छःGB RAM+एक सौ अट्ठाईसGB स्टोरेज वेरिएंट की कीमत तेरह,तीन सौ नब्बे रुपयापये होगी. फोन को महीने के आखिर में लॉन्च किया जा सकता है.
India- Pak Relations: केंद्रीय मंत्री और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष रहते शरद पवार कई बार पाकिस्तान का दौर कर चुके हैं। फिलहाल शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान पद पर विराजमान हैं। हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर खान को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से बाहर कर दिया गया था। नई दिल्ली। गुरुवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार पुणे के कोंढवा इलाके में ईद-मिलन कार्यक्रम में पहुंचे। यहां कार्यक्रम में अपने संबोधन में NCP प्रमुख शरद पवार का पाकिस्तान प्रेम देखने को मिला। शरद पवार ने यहां पाकिस्तान और भारत के बीच रिश्तों पर बात की और नाम लिए बगैर पूर्व पाक पीएम इमरान खान की तारीफ की। आगे पवार ने कहा कि चाहे वो लाहौर रहा हो या फिर करासी हम जहां भी गए वहां हमारा गर्मजोशी से स्वागत हुआ। एक किस्से का जिक्र करते हुए पवार ने कहा कि हम एक रेस्त्रां गए और नाश्ता करने के बाद, जब हमने खाने का बिल दिया तो रेस्त्रां के मालिक ने पैसा लेने से मना कर दिया। उन्होंने हमसे कहा कि हम उनके मेहमान हैं। यहां बता दें, केंद्रीय मंत्री और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष रहते शरद पवार कई बार पाकिस्तान का दौर कर चुके हैं। फिलहाल शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान पद पर विराजमान हैं। हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर खान को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से बाहर कर दिया गया था।
India- Pak Relations: केंद्रीय मंत्री और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष रहते शरद पवार कई बार पाकिस्तान का दौर कर चुके हैं। फिलहाल शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान पद पर विराजमान हैं। हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर खान को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से बाहर कर दिया गया था। नई दिल्ली। गुरुवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार पुणे के कोंढवा इलाके में ईद-मिलन कार्यक्रम में पहुंचे। यहां कार्यक्रम में अपने संबोधन में NCP प्रमुख शरद पवार का पाकिस्तान प्रेम देखने को मिला। शरद पवार ने यहां पाकिस्तान और भारत के बीच रिश्तों पर बात की और नाम लिए बगैर पूर्व पाक पीएम इमरान खान की तारीफ की। आगे पवार ने कहा कि चाहे वो लाहौर रहा हो या फिर करासी हम जहां भी गए वहां हमारा गर्मजोशी से स्वागत हुआ। एक किस्से का जिक्र करते हुए पवार ने कहा कि हम एक रेस्त्रां गए और नाश्ता करने के बाद, जब हमने खाने का बिल दिया तो रेस्त्रां के मालिक ने पैसा लेने से मना कर दिया। उन्होंने हमसे कहा कि हम उनके मेहमान हैं। यहां बता दें, केंद्रीय मंत्री और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष रहते शरद पवार कई बार पाकिस्तान का दौर कर चुके हैं। फिलहाल शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान पद पर विराजमान हैं। हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर खान को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से बाहर कर दिया गया था।
शहर में ई-रिक्शा चालकों के किराया बढ़ाने के बाद पैदा हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासन के किराया न बढ़ाने के आदेश को लेकर शनिवार को आटो चालकों ने रोष व्यक्त किया और इसे प्रशासन का एक तरफा फैसला बताया। ई-रिक्शा चालकों ने शनिवार को हिदायत नगर चौराहे पर प्रदर्शन किया और ई रिक्शों से सवारियां उतरवा कर ई रिक्शा खड़े कराए। बीते सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने केवल चार सवारियां बैठाने और आगे ड्राइवर के पास किसी सवारी के न बैठाने के निर्देश आटो चालकों को दिए थे। इसके बाद आटो चालकों ने अपने आप किराया बढ़ाकर दोगुना कर दिया। शुक्रवार को आटो चालाकों ने शहर में जिस दूरी के पांच रुपये लिए जा रहे थे वहां के दस रुपये वसूलने शुरू कर दिए। इसकी जानकारी होने पर प्रशासन ने शहर के लोगों को सूचना देकर बताया कि आटो चालकों के किराए में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं की जाएगी। वे पुराने निर्धारित किराए पर ही सवारियां भरेंगे। शनिवार को प्रशासन ने इस आशय की सूचना का शहर में रिक्शा चलवाया और आटो चालकों को इस बात की हिदायत भी दी कि यदि वे बढ़ाकर किराया वसूल करेंगे तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इसके विरोध में शनिवार को ई रिक्शा चालकों ने पुराने एसपी आवास के पास प्रदर्शन किया और आटो चालकों को रोककर सवारियां उतरवा दीं। सूचना पर पहुंचे जेल चौकी इंचार्ज ने उन्हें सड़क पर प्रदर्शन करने से मना किया और वहां से हटाया। ई रिक्शा चालकों ने कहा प्रशासन ने उनकी दिक्कतें सुनी ही नहीं पांच रुपये में एक चक्कर में बीस रुपये मिलते हैं। प्रतिदिन 90 रुपये बैटरी चार्ज कराई में चले जाते हैं। छह महीने में बैटरी बदलानी पड़ती है। पांच रुपये में सवारियां भरकर वे लोग अपनी रोजी रोटी नहीं चला सकते हैं। प्रशासन को उनकी समस्या भी देखनी चाहिए। नहीं तो वे लोग ई रिक्शा खड़़े कर देंगे। ई रिक्शा चालकों ने शनिवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान सवारियों को भी उतार दिया। इससे सवारियां अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाईं। कई सवारियां को घंटो दूसरे वाहन के लिए सड़क पर इंतजार करना पड़ा। कई छात्राएं और महिलाएं भी ई रिक्शा चालकों के प्रदर्शन के दौरान परेशान हुईं उन्हें पैदल जाना पड़ा। शहर में ई रिक्शा चालका किराया नहीं बढ़ाएंगे, यदि वे किराया बढाएंगे तो उनके खिलाफ कारवाई की जाएगी। यह सभी ई रिक्शा चालकों को बता दिया गया है। उन्हें सवारियां भी चार ही बैठानी होंगी। इससे ज्यादा सवारियां नहीं बैठा सकते हैं।
शहर में ई-रिक्शा चालकों के किराया बढ़ाने के बाद पैदा हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासन के किराया न बढ़ाने के आदेश को लेकर शनिवार को आटो चालकों ने रोष व्यक्त किया और इसे प्रशासन का एक तरफा फैसला बताया। ई-रिक्शा चालकों ने शनिवार को हिदायत नगर चौराहे पर प्रदर्शन किया और ई रिक्शों से सवारियां उतरवा कर ई रिक्शा खड़े कराए। बीते सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने केवल चार सवारियां बैठाने और आगे ड्राइवर के पास किसी सवारी के न बैठाने के निर्देश आटो चालकों को दिए थे। इसके बाद आटो चालकों ने अपने आप किराया बढ़ाकर दोगुना कर दिया। शुक्रवार को आटो चालाकों ने शहर में जिस दूरी के पांच रुपये लिए जा रहे थे वहां के दस रुपये वसूलने शुरू कर दिए। इसकी जानकारी होने पर प्रशासन ने शहर के लोगों को सूचना देकर बताया कि आटो चालकों के किराए में किसी प्रकार की वृद्धि नहीं की जाएगी। वे पुराने निर्धारित किराए पर ही सवारियां भरेंगे। शनिवार को प्रशासन ने इस आशय की सूचना का शहर में रिक्शा चलवाया और आटो चालकों को इस बात की हिदायत भी दी कि यदि वे बढ़ाकर किराया वसूल करेंगे तो उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इसके विरोध में शनिवार को ई रिक्शा चालकों ने पुराने एसपी आवास के पास प्रदर्शन किया और आटो चालकों को रोककर सवारियां उतरवा दीं। सूचना पर पहुंचे जेल चौकी इंचार्ज ने उन्हें सड़क पर प्रदर्शन करने से मना किया और वहां से हटाया। ई रिक्शा चालकों ने कहा प्रशासन ने उनकी दिक्कतें सुनी ही नहीं पांच रुपये में एक चक्कर में बीस रुपये मिलते हैं। प्रतिदिन नब्बे रुपयापये बैटरी चार्ज कराई में चले जाते हैं। छह महीने में बैटरी बदलानी पड़ती है। पांच रुपये में सवारियां भरकर वे लोग अपनी रोजी रोटी नहीं चला सकते हैं। प्रशासन को उनकी समस्या भी देखनी चाहिए। नहीं तो वे लोग ई रिक्शा खड़़े कर देंगे। ई रिक्शा चालकों ने शनिवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान सवारियों को भी उतार दिया। इससे सवारियां अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाईं। कई सवारियां को घंटो दूसरे वाहन के लिए सड़क पर इंतजार करना पड़ा। कई छात्राएं और महिलाएं भी ई रिक्शा चालकों के प्रदर्शन के दौरान परेशान हुईं उन्हें पैदल जाना पड़ा। शहर में ई रिक्शा चालका किराया नहीं बढ़ाएंगे, यदि वे किराया बढाएंगे तो उनके खिलाफ कारवाई की जाएगी। यह सभी ई रिक्शा चालकों को बता दिया गया है। उन्हें सवारियां भी चार ही बैठानी होंगी। इससे ज्यादा सवारियां नहीं बैठा सकते हैं।
(मौलिक एवं अप्रकाशित) बृजेश कुमार 'ब्रज' जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। मुद्दआ पर निलेश जी से सहमत हूँ। //मेरी पिछली ग़ज़ल में मैंने एक शब्द लिया था मियाद ..जो बहुत ही आम फ़हम व प्रचलित शब्द है लेकिन समर सर ने बताया कि उसे मीआद पढ़ा जाता है.. निलेश जी अभी तक आपने ओ बी ओ पर पोस्ट उस ग़ज़ल में मिसरा बदला नहीं है, अभी भी 'मियाद' ही है। देखियेेगा। जी बिल्कुल...आप लोगों की तीखी बहस में भी काफी कुछ सीखने को ही मिलता है। आ. बृजेश जी, आप तो आप .. मैं भी अक्सर समर सर के सानिध्य में सीखता हूँ.. कई बार तीखी बहस भी हो जाती है लेकिन यदि उनका पॉइंट वैलिड है तो माँ लेता हूँ.. मेरी पिछली ग़ज़ल में मैंने एक शब्द लिया था मियाद ..जो बहुत ही आम फ़हम व प्रचलित शब्द है लेकिन समर सर ने बताया कि उसे मीआद पढ़ा जाता है.. इस पर उन से व्हाट्स एप्प पर काफी बहस के बाद मैंने उस मिसरे को बदल दिया और मुझे लगता है कि मिसरा पहले से बेहतर हो गया. इस मंच का और सुधि जनों की तेज़ नज़रों का लाभ जितना लूटा जा सके लूटा जाना चाहिए. आप मुद्द आ का उर्दू रूप देखें .. आ. बृजेश जी, मुद्दआ को आम बोलचाल में मुद्दा ही पढ़ा जाने लगा है लेकिन साहित्य में लिखते समय शुद्ध रूप मुद्दआ लिखना ही श्रेयस्कर होगा. आप ने फ़ानी साहब का जो शे'र पेश किया है उस की तक्तीअ करें तो पाएँगे कि वहां भी मुद्द आ ए हयात पढ़ा गया है .. यही हाल शमअ का शमा होने से हुआ है . ग़ालिब के शे'र को भी पढेंगे तो पाएँगे कि बहर में पढ़ते समय मुद्दआ ही पढ़ा जाता है .. अतः आश्वस्त रहें कि सहीह शब्द मुद्द आ ही है और उर्दू में ऐसे ही बरता जाता है .
बृजेश कुमार 'ब्रज' जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। मुद्दआ पर निलेश जी से सहमत हूँ। //मेरी पिछली ग़ज़ल में मैंने एक शब्द लिया था मियाद ..जो बहुत ही आम फ़हम व प्रचलित शब्द है लेकिन समर सर ने बताया कि उसे मीआद पढ़ा जाता है.. निलेश जी अभी तक आपने ओ बी ओ पर पोस्ट उस ग़ज़ल में मिसरा बदला नहीं है, अभी भी 'मियाद' ही है। देखियेेगा। जी बिल्कुल...आप लोगों की तीखी बहस में भी काफी कुछ सीखने को ही मिलता है। आ. बृजेश जी, आप तो आप .. मैं भी अक्सर समर सर के सानिध्य में सीखता हूँ.. कई बार तीखी बहस भी हो जाती है लेकिन यदि उनका पॉइंट वैलिड है तो माँ लेता हूँ.. मेरी पिछली ग़ज़ल में मैंने एक शब्द लिया था मियाद ..जो बहुत ही आम फ़हम व प्रचलित शब्द है लेकिन समर सर ने बताया कि उसे मीआद पढ़ा जाता है.. इस पर उन से व्हाट्स एप्प पर काफी बहस के बाद मैंने उस मिसरे को बदल दिया और मुझे लगता है कि मिसरा पहले से बेहतर हो गया. इस मंच का और सुधि जनों की तेज़ नज़रों का लाभ जितना लूटा जा सके लूटा जाना चाहिए. आप मुद्द आ का उर्दू रूप देखें .. आ. बृजेश जी, मुद्दआ को आम बोलचाल में मुद्दा ही पढ़ा जाने लगा है लेकिन साहित्य में लिखते समय शुद्ध रूप मुद्दआ लिखना ही श्रेयस्कर होगा. आप ने फ़ानी साहब का जो शे'र पेश किया है उस की तक्तीअ करें तो पाएँगे कि वहां भी मुद्द आ ए हयात पढ़ा गया है .. यही हाल शमअ का शमा होने से हुआ है . ग़ालिब के शे'र को भी पढेंगे तो पाएँगे कि बहर में पढ़ते समय मुद्दआ ही पढ़ा जाता है .. अतः आश्वस्त रहें कि सहीह शब्द मुद्द आ ही है और उर्दू में ऐसे ही बरता जाता है .
Hazaribag : लोकनायक जयप्रकाश नारायण राजपथ की नहीं, बल्कि जनपद के नायक थे, जिन्होंने तानाशाही व्यवस्था के खिलाफ बिगुल फूंक कर लोकतंत्र को संरक्षित करने में कामयाबी हासिल की थी. यह बात विनोबाभावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के प्रॉक्टर डॉ मिथिलेश ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के मौके पर कही. गांधी विनोबा जयप्रकाश चिंतन केंद्र में आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज जीवन में विसंगतियां बढ़ती जा रही हैं. उपभोक्तावादी संस्कृति घर-घर में घर कर गई है. ऐसी स्थिति में लोकनायक के संपूर्ण क्रांति संबंधी विचारधारा ही सामाजिक समरसता स्थापित करने में सक्षम हो सकती है. डॉ मिथिलेश ने कहा कि आज समाज में असहिष्णुता हावी होते जा रहा है और अविश्वास का माहौल है. इससे निजात पाने के लिए जेपी की जीवन प्रक्रिया को अंगीकृत करने की आवश्यकता है. सिर्फ सुख-सुविधा ही जुटा लेना जीवन का लक्ष्य नहीं होना चाहिए. राजनीति विज्ञान विभाग के सेमेस्टर वन और थ्री के विद्यार्थियों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि भावी इतिहास तुम्हारा है. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष डॉ अंबर खातून ने कहा कि जेपी न सिर्फ लोकनायक, बल्कि महानायक थे, जिनकी विचारधारा आज भी प्रासंगिक है. संगोष्ठी को डॉक्टर जॉनी रूफीना तिर्की, डॉक्टर विनोद रंजन और डॉक्टर गंगानाथ झा ने संबोधित करते हुए लोकनायक के विचारों से संबंधित विभिन्न आयामों की जानकारी दी. कार्यक्रम का शुभारंभ लोकनायक की तस्वीर पर पुष्पांजलि करने के बाद हुआ. कार्यक्रम का संचालन केंद्र के संयोजक डॉ प्रमोद कुमार ने किया. मौके पर डॉ चंद्रशेखर सिंह, डॉक्टर सुकल्याण मोइत्रा, अजय बहादुर सिंह समेत काफी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे.
Hazaribag : लोकनायक जयप्रकाश नारायण राजपथ की नहीं, बल्कि जनपद के नायक थे, जिन्होंने तानाशाही व्यवस्था के खिलाफ बिगुल फूंक कर लोकतंत्र को संरक्षित करने में कामयाबी हासिल की थी. यह बात विनोबाभावे विश्वविद्यालय हजारीबाग के प्रॉक्टर डॉ मिथिलेश ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के मौके पर कही. गांधी विनोबा जयप्रकाश चिंतन केंद्र में आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज जीवन में विसंगतियां बढ़ती जा रही हैं. उपभोक्तावादी संस्कृति घर-घर में घर कर गई है. ऐसी स्थिति में लोकनायक के संपूर्ण क्रांति संबंधी विचारधारा ही सामाजिक समरसता स्थापित करने में सक्षम हो सकती है. डॉ मिथिलेश ने कहा कि आज समाज में असहिष्णुता हावी होते जा रहा है और अविश्वास का माहौल है. इससे निजात पाने के लिए जेपी की जीवन प्रक्रिया को अंगीकृत करने की आवश्यकता है. सिर्फ सुख-सुविधा ही जुटा लेना जीवन का लक्ष्य नहीं होना चाहिए. राजनीति विज्ञान विभाग के सेमेस्टर वन और थ्री के विद्यार्थियों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि भावी इतिहास तुम्हारा है. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष डॉ अंबर खातून ने कहा कि जेपी न सिर्फ लोकनायक, बल्कि महानायक थे, जिनकी विचारधारा आज भी प्रासंगिक है. संगोष्ठी को डॉक्टर जॉनी रूफीना तिर्की, डॉक्टर विनोद रंजन और डॉक्टर गंगानाथ झा ने संबोधित करते हुए लोकनायक के विचारों से संबंधित विभिन्न आयामों की जानकारी दी. कार्यक्रम का शुभारंभ लोकनायक की तस्वीर पर पुष्पांजलि करने के बाद हुआ. कार्यक्रम का संचालन केंद्र के संयोजक डॉ प्रमोद कुमार ने किया. मौके पर डॉ चंद्रशेखर सिंह, डॉक्टर सुकल्याण मोइत्रा, अजय बहादुर सिंह समेत काफी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे.
70 साल बाद भारत की जमीन पर चीता फिर से दौड़ने वाला है। 70 साल का इंतजार शनिवार को खत्म होने वाला है क्योंकि चीतों के गृह प्रवेश के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को चुना गया है। Cricket World Cup 2023: Pakistan ने फिर दी धमकी, कहा कि पाकिस्तानी टीम भी वर्ल्ड कप neutral venue पर ही खेलेगी! Foxconn-Vedanta की Chip-Semiconductor Deal टूटी, PM Modi की electronic manufacturing योजना का क्या होगा? Weather News: यूपी पर टूटा कुदरत का कहर, शहर-शहर आसमानी बारिश, 48 घंटे में कितनी जिंदगियां खत्म? सचिन-सीमा की मोहब्बत और 5 तस्वीरें, लेकिन शक पैदा कर रहे हैं पांच सवाल?
सत्तर साल बाद भारत की जमीन पर चीता फिर से दौड़ने वाला है। सत्तर साल का इंतजार शनिवार को खत्म होने वाला है क्योंकि चीतों के गृह प्रवेश के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को चुना गया है। Cricket World Cup दो हज़ार तेईस: Pakistan ने फिर दी धमकी, कहा कि पाकिस्तानी टीम भी वर्ल्ड कप neutral venue पर ही खेलेगी! Foxconn-Vedanta की Chip-Semiconductor Deal टूटी, PM Modi की electronic manufacturing योजना का क्या होगा? Weather News: यूपी पर टूटा कुदरत का कहर, शहर-शहर आसमानी बारिश, अड़तालीस घंटाटे में कितनी जिंदगियां खत्म? सचिन-सीमा की मोहब्बत और पाँच तस्वीरें, लेकिन शक पैदा कर रहे हैं पांच सवाल?
वाक्य-रचना । १५५ ६. ( क ) एक से अधिक कर्ता क्रिया - एक से अधिक कर्ता होने पर क्रिया बहुवचन में होती है; यथा -- मोहन और सोहन पढ़ते हैं । पुल्लिंग और स्त्रीलिंग दोनों कर्ता हों तो क्रिया पुल्लिंग में होती है; यथालड़के और लड़कियाँ खेल रहे हैं । ( ख ) कर्म क्रिया - जब कर्ता के साथ 'ने' परसर्ग हो तो सकर्मक क्रियाओं के भूतकालिक कृदन्त के रूप कर्म के लिंग वचन से प्रभावित होते हैं; यथा - मैंने एक घोड़ा देखा । मैंने कई घोड़े देखे । (ग) कर्ता पूरक - वाक्य में कर्ता का पूरक शब्द कर्ता के लिंग वचन से प्रभावित होता है; यथा -- घोड़ा काला है । घोड़े काले हैं। बिल्ली काली है । (घ) कर्म- पूरक - वाक्य में कर्म का पूरक शब्द कर्म के लिंग - वचन से प्रभावित होता है; यथानरेश कपड़े को काला कर देता है । सुरेश धोती को काली कर देता है । (च) कर्ता रीतिवाचक कृदन्त - जब वाक्य में रीतिवाचक कृदन्त प्रयुक्त होता है, तब वह कर्ता के लिंग वचन से प्रभावित होता है; यथा - लड़की दौड़ती आयी । लड़का दौड़ता आया लड़के दौड़ते आये लड़कियाँ दौड़ती आयीं । (छ) तटस्थ क्रिया - जब वाक्य में कर्ता के साथ 'ने' परसर्ग तथा कर्म के साथ 'को' परसर्ग आये तो क्रिया कर्ता या कर्म के लिंग, वचन, पुरुष से प्रभावित न होकर तटस्थ (neutral) होती है । भाववाच्य के कुछ उदाहरणों में भी क्रिया तटस्थ रहती यथागाँव वालों ने डाकुओं को पकड़ा । मेरेन से सोया नहीं जाता । नारोला से सोया नहीं जाता । मोहन को पागल समझा गया । मकान को झोपड़ी समझा गया । (ज) विशेषण- विशेष्य - पदबन्ध स्तर पर विशेषण के रूप पर उसके विशेष्य के लिंग वचन का प्रभाव पड़ता है; यथा -- छोटा लड़का, छोटे लड़के, छोटी लड़की + (झ) नियमन - हिन्दी भाषा में वाक्यगत एक प्रकार का अधिशासन होता है । वाक्यों में परसर्गों के प्रयोग के आधार पर मूल तथा तिर्यक रूपों का निर्धारण होता है ।
वाक्य-रचना । एक सौ पचपन छः. एक से अधिक कर्ता क्रिया - एक से अधिक कर्ता होने पर क्रिया बहुवचन में होती है; यथा -- मोहन और सोहन पढ़ते हैं । पुल्लिंग और स्त्रीलिंग दोनों कर्ता हों तो क्रिया पुल्लिंग में होती है; यथालड़के और लड़कियाँ खेल रहे हैं । कर्म क्रिया - जब कर्ता के साथ 'ने' परसर्ग हो तो सकर्मक क्रियाओं के भूतकालिक कृदन्त के रूप कर्म के लिंग वचन से प्रभावित होते हैं; यथा - मैंने एक घोड़ा देखा । मैंने कई घोड़े देखे । कर्ता पूरक - वाक्य में कर्ता का पूरक शब्द कर्ता के लिंग वचन से प्रभावित होता है; यथा -- घोड़ा काला है । घोड़े काले हैं। बिल्ली काली है । कर्म- पूरक - वाक्य में कर्म का पूरक शब्द कर्म के लिंग - वचन से प्रभावित होता है; यथानरेश कपड़े को काला कर देता है । सुरेश धोती को काली कर देता है । कर्ता रीतिवाचक कृदन्त - जब वाक्य में रीतिवाचक कृदन्त प्रयुक्त होता है, तब वह कर्ता के लिंग वचन से प्रभावित होता है; यथा - लड़की दौड़ती आयी । लड़का दौड़ता आया लड़के दौड़ते आये लड़कियाँ दौड़ती आयीं । तटस्थ क्रिया - जब वाक्य में कर्ता के साथ 'ने' परसर्ग तथा कर्म के साथ 'को' परसर्ग आये तो क्रिया कर्ता या कर्म के लिंग, वचन, पुरुष से प्रभावित न होकर तटस्थ होती है । भाववाच्य के कुछ उदाहरणों में भी क्रिया तटस्थ रहती यथागाँव वालों ने डाकुओं को पकड़ा । मेरेन से सोया नहीं जाता । नारोला से सोया नहीं जाता । मोहन को पागल समझा गया । मकान को झोपड़ी समझा गया । विशेषण- विशेष्य - पदबन्ध स्तर पर विशेषण के रूप पर उसके विशेष्य के लिंग वचन का प्रभाव पड़ता है; यथा -- छोटा लड़का, छोटे लड़के, छोटी लड़की + नियमन - हिन्दी भाषा में वाक्यगत एक प्रकार का अधिशासन होता है । वाक्यों में परसर्गों के प्रयोग के आधार पर मूल तथा तिर्यक रूपों का निर्धारण होता है ।
अब पड़ोसी मुल्क में रिलीज होने जा रही है। 'पठान' ने भारत में बड़े पर्दे पर जनवरी में दस्तक दी थी और रिलीज के साथ ही इसने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के कई रिकॉर्ड्स तोड़े। अब, करीब तीन महीने बाद, शाहरुख खान की यह फिल्म बांग्लादेश में रिलीज होने वाली है। , कमाई के कई रिकॉर्ड तोड़ने के बाद Pathaan आखिरकार बांग्लादेश में रिलीज होने जा रही है। खास बात यह है कि फिल्म बांग्लादेश में रिलीज होने वाली पहली हिंदी फिल्म होगी। बांग्लादेश में फिल्म की रिलीज पर खुशी व्यक्त करते हुए YRF (यश राज फिल्म्स) के नेल्सन डिसूजा ने जानकारी कहा, 'हम अविश्वसनीय रूप से एक्साइटेड हैं कि दुनिया भर में शानदार कमाई करने वाली पठान को अब बांग्लादेश में दर्शकों का मनोरंजन करने का मौका मिलेगा! पठान साल 1971 के बाद बांग्लादेश में रिलीज होने वाली पहली हिंदी फिल्म बन गई है। ' एजेंसी ने वैराइटी के हवाले से बताया, इस साल फरवरी में 19 बांग्लादेशी फिल्म एसोसिएशन के एक संघ ने देश में हिंदी भाषा की फिल्मों को रिलीज करने की अनुमति देने और हर साल 10 फिल्में रिलीज किए जाने का फैसला लिया था। पठान उनमें से एक है, और यह 12 मई को बांग्लादेश के सिनेमाघरों में उतरेगी। भले ही यह देश में रिलीज होने वाली पहली हिंदी फिल्म हो, लेकिन आपको बता दें कि 2009 में, सलमान खान की Wanted को बांग्लादेश में रिलीज किए जाने की अनुमति देने के निर्णय में ढील दी गई थी, जिसके बाद इसका विरोध हुआ, जिसमें स्थानीय फिल्म उद्योग संगठन भी शामिल था। विरोध को देखते हुए एक हफ्ते बाद सभी सिनेमाघरों से हटा दिया गया था। का कलेक्शन 541 करोड़ रुपये से कुछ अधिक रहा है, जबकि वर्ल्डवाइड कलेक्शन 1,048 करोड़ रुपये के लगभग है। पठान हिंदी सिनेमा के इतिहास की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है।
अब पड़ोसी मुल्क में रिलीज होने जा रही है। 'पठान' ने भारत में बड़े पर्दे पर जनवरी में दस्तक दी थी और रिलीज के साथ ही इसने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के कई रिकॉर्ड्स तोड़े। अब, करीब तीन महीने बाद, शाहरुख खान की यह फिल्म बांग्लादेश में रिलीज होने वाली है। , कमाई के कई रिकॉर्ड तोड़ने के बाद Pathaan आखिरकार बांग्लादेश में रिलीज होने जा रही है। खास बात यह है कि फिल्म बांग्लादेश में रिलीज होने वाली पहली हिंदी फिल्म होगी। बांग्लादेश में फिल्म की रिलीज पर खुशी व्यक्त करते हुए YRF के नेल्सन डिसूजा ने जानकारी कहा, 'हम अविश्वसनीय रूप से एक्साइटेड हैं कि दुनिया भर में शानदार कमाई करने वाली पठान को अब बांग्लादेश में दर्शकों का मनोरंजन करने का मौका मिलेगा! पठान साल एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर के बाद बांग्लादेश में रिलीज होने वाली पहली हिंदी फिल्म बन गई है। ' एजेंसी ने वैराइटी के हवाले से बताया, इस साल फरवरी में उन्नीस बांग्लादेशी फिल्म एसोसिएशन के एक संघ ने देश में हिंदी भाषा की फिल्मों को रिलीज करने की अनुमति देने और हर साल दस फिल्में रिलीज किए जाने का फैसला लिया था। पठान उनमें से एक है, और यह बारह मई को बांग्लादेश के सिनेमाघरों में उतरेगी। भले ही यह देश में रिलीज होने वाली पहली हिंदी फिल्म हो, लेकिन आपको बता दें कि दो हज़ार नौ में, सलमान खान की Wanted को बांग्लादेश में रिलीज किए जाने की अनुमति देने के निर्णय में ढील दी गई थी, जिसके बाद इसका विरोध हुआ, जिसमें स्थानीय फिल्म उद्योग संगठन भी शामिल था। विरोध को देखते हुए एक हफ्ते बाद सभी सिनेमाघरों से हटा दिया गया था। का कलेक्शन पाँच सौ इकतालीस करोड़ रुपये से कुछ अधिक रहा है, जबकि वर्ल्डवाइड कलेक्शन एक,अड़तालीस करोड़ रुपये के लगभग है। पठान हिंदी सिनेमा के इतिहास की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई है।
नूरपुर - भाषा एवं संस्कृति विभाग, जि़ला प्रशासन कांगड़ा तथा भाषा संस्कृति कला अकादमी के संयुक्त तत्त्वावधान में पहली से आठ नवंबर तक जिला कांगड़ा के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित होने वाले त्रिगर्त कांगड़ा घाटी उत्सव-2019 के कार्यक्रमों की श्रृंखला में नूरपुर के नगर परिषद हाल में पहली को कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस मौके पर विधायक राकेश पठानिया बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगे। एसडीएम डा. सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि इस मौके पर स्कूली बच्चों के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता करवाई जाएगी तथा विजेताओं को नकद पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कांगड़ा पेंटिंग पर प्रदर्शनी लगाने के साथ-साथ कवि गोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा। एसडीएम ने बताया कि इस मौके पर वजीर राम सिंह पठानिया के जीवन पर आधारित बैलेड कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा चंबा रूमाल के बारे में लोगों को जानकारी देने के अतिरिक्त इसकी प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर प्रसिद्ध लोक कलाकारों व स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे, जबकि रंगमंच के कलाकारों द्वारा पेंटिंग प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस मौके पर उपस्थित लोगों विशेषकर स्कूली बच्चों को नूरपुर के ऐतिहासिक किला के साथ-साथ बृजराज स्वामी मंदिर के इतिहास बारे में भी जानकारी दी जाएगी। एसडीएम ने सभी क्षेत्रवासियों व स्कूली बच्चों से इस उत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आग्रह किया है।
नूरपुर - भाषा एवं संस्कृति विभाग, जि़ला प्रशासन कांगड़ा तथा भाषा संस्कृति कला अकादमी के संयुक्त तत्त्वावधान में पहली से आठ नवंबर तक जिला कांगड़ा के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित होने वाले त्रिगर्त कांगड़ा घाटी उत्सव-दो हज़ार उन्नीस के कार्यक्रमों की श्रृंखला में नूरपुर के नगर परिषद हाल में पहली को कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस मौके पर विधायक राकेश पठानिया बतौर मुख्यातिथि शिरकत करेंगे। एसडीएम डा. सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि इस मौके पर स्कूली बच्चों के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता करवाई जाएगी तथा विजेताओं को नकद पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त कांगड़ा पेंटिंग पर प्रदर्शनी लगाने के साथ-साथ कवि गोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा। एसडीएम ने बताया कि इस मौके पर वजीर राम सिंह पठानिया के जीवन पर आधारित बैलेड कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा चंबा रूमाल के बारे में लोगों को जानकारी देने के अतिरिक्त इसकी प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर प्रसिद्ध लोक कलाकारों व स्कूली बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे, जबकि रंगमंच के कलाकारों द्वारा पेंटिंग प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस मौके पर उपस्थित लोगों विशेषकर स्कूली बच्चों को नूरपुर के ऐतिहासिक किला के साथ-साथ बृजराज स्वामी मंदिर के इतिहास बारे में भी जानकारी दी जाएगी। एसडीएम ने सभी क्षेत्रवासियों व स्कूली बच्चों से इस उत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आग्रह किया है।
जमुईः किरण हार्ट एकेडमी मलयपुर में रविवार को बालाजी सेवा संस्थान जमुई के सहयोग से फ्री हेल्थ चेकअप शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में जमुई के जाने माने शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एसएन झा, डॉक्टर सूर्य नंदन सिंह, डॉक्टर विशाल आनंद, डॉ सुरेश कुमार, डॉ विजय शंकर प्रसाद , डॉ कुमार गौरव, डॉ अजय कुमार सभी अपने सहयोगियों के साथ मौजूद थे। शिविर में स्कूली बच्चों सहित आसपास के लगभग 150 लोगों का स्वास्थ्य जांच कर उन्हें उचित परामर्श दिया गया । शिविर में स्कूली बच्चों में प्रायः ठंड से वायरल बुखार, व स्कीन से संबंधित फंगल डिजीज मुख्य रूप से पाया गया। वहीं ग्रामीण क्षेत्र से आए लोगों में खून की कमी, पेट में जोंक सहित सामान्य बीमारी मुख्यतः ठंड से बुखार वह माथा दर्द की शिकायत पाई गई। उपस्थित डॉक्टरों ने लोगों का इलाज कर बीमारियों से बचने का भी उपाय बताया। मौके पर विद्यालय प्रबंधक किशोर सिंह ने बताया की ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को जागरूक करने के साथ वैसे लोग जो शहर जाकर अपना इलाज नहीं करवा पाते हैं उन्हें स्वास्थ्य मुहैया कराना उनका लक्ष्य है। इस मौके पर बालाजी सेवा संस्थान के कर्मी सहित विद्यालय के सभी शिक्षकगण मौजूद थे।
जमुईः किरण हार्ट एकेडमी मलयपुर में रविवार को बालाजी सेवा संस्थान जमुई के सहयोग से फ्री हेल्थ चेकअप शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में जमुई के जाने माने शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर एसएन झा, डॉक्टर सूर्य नंदन सिंह, डॉक्टर विशाल आनंद, डॉ सुरेश कुमार, डॉ विजय शंकर प्रसाद , डॉ कुमार गौरव, डॉ अजय कुमार सभी अपने सहयोगियों के साथ मौजूद थे। शिविर में स्कूली बच्चों सहित आसपास के लगभग एक सौ पचास लोगों का स्वास्थ्य जांच कर उन्हें उचित परामर्श दिया गया । शिविर में स्कूली बच्चों में प्रायः ठंड से वायरल बुखार, व स्कीन से संबंधित फंगल डिजीज मुख्य रूप से पाया गया। वहीं ग्रामीण क्षेत्र से आए लोगों में खून की कमी, पेट में जोंक सहित सामान्य बीमारी मुख्यतः ठंड से बुखार वह माथा दर्द की शिकायत पाई गई। उपस्थित डॉक्टरों ने लोगों का इलाज कर बीमारियों से बचने का भी उपाय बताया। मौके पर विद्यालय प्रबंधक किशोर सिंह ने बताया की ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को जागरूक करने के साथ वैसे लोग जो शहर जाकर अपना इलाज नहीं करवा पाते हैं उन्हें स्वास्थ्य मुहैया कराना उनका लक्ष्य है। इस मौके पर बालाजी सेवा संस्थान के कर्मी सहित विद्यालय के सभी शिक्षकगण मौजूद थे।
नदी पर नहर जिससे ठीक विपरीत, दक्षिणमें जब ब्राह्मणेतर जनेअ मागते हैं, तब महाराष्ट्रके ब्राह्मण 'क्लो आद्यन्तयो स्थिति के वचनने अनुमार भैँसी बेहूदी जिद लेकर बैठते हैं, मानो बीचके दो वर्णं है ही नहीं। (सौभाग्यसे आज वह स्थिति नही रही ।) जिन्हे जनेअ पहननेका अधिकार है, वे असे पहननेके बारेमें अदासीन रहते हैं, और जो हाथापाओ करके भी जनेअ पहननेका अधिकार प्राप्त करना चाहते हैं, सुनके लिये अपना द्विजत्व सिद्ध करने में कठिनाजी पैदा की जाती है। यह चर्चा सुनकर वेणीप्रसादको लगा कि 'आज हमें जनेनू मिलनेवाली नहीं है।' असने दलील पेश की 'वलियुगमें क्या नहीं हो सकता ? नदी पर यदि नदी सवार हो सकती है, तो महाराष्ट्रके ब्राह्मण भी हमें जनेनू दे सकते हैं । दलील मजूर हुआ। किन्तु विषय बदला और कलियुगवे भगीरथोत्री बहादुरीके युदाहरण स्वरूप गगाकी नहरके बारेमें बातें चली । दोपहरके समय हम लोग मानवका यह प्रताप देखने शिवले । गगावी नहर दाहरवे समीपसे जाती है। लडके असमें मछलियोकी तरह ओक खेल खेल रहे थे । नहरके किनारे किनारे हम थुम अस्यात पुल तक गये । वह दृश्य सचमुच भव्य था । पुलवे नीचेगे गरीब ब्राह्मणी समान सोलाना नदी वह रही थी और अपरगावी नहर अपना चौडा पाट जरा भी सकुचित किये बिना पुल परसे दौड़ती जा रही थी । पुलके अपर पानीवा बोझ अितना ज्यादा था कि मालूम होता था, अभी दोनो ओखी दीवारे टूट जायेंगी और दोनो ओरसे हाथोकी झूलवे समान वडे प्रपात गिरना शुरू होगे। पुलकी दीवार पर खड़े रहकर नहरके चहावकी ओर देखते रहनेमे दिमाग पर अमरा असर होना था। दुग्वी मनुष्यको जिस प्रकार अद्वेगवे नये नये अभार आते हैं, अगी प्रकार नहरके जलमें भी अभार आते थे। किन्तु समुराल आयी हुआ बहू जिस प्रकार अपनी सब भावनायें नये घरमें दवा देती है, असी प्रकार गंगा नदीको यह परतत्र पुत्री अपने सब अभारोत्री दबा देती थी। असका विस्तार देखकर प्रथम दर्शनमें तो मालूम होता था मानो यह वोजी धनमत्त सेठानी है। किन्तु नजदीन जागर देखने पर श्रीमतीके नीचे परतत्रतावा दुस ही अस वदन पर दीस पड़ता था। जो-११ अपरमे नीचे देखने पर निम्नगा सोलानाका क्षोण विन्तु स्वतंत्र बहाव दोनो ओरसे आकर्षक मालूम होता था। चुभता वेवल अितना हो था कि नहरकी दोनों ओरकी दीवारोमे परिवाहके तौर पर वओ सूरास रसे गये थे, जिनमें से नहरवा थोटा पानी अिस तरह सोलानामे गिर रहा था मानो अम पर अहसान कर रहा हो। हम पुलसे नीचे अंतरे और सोलानावे किनारे जा बैठे। अचेसे दिये जानेवाले अपकारको अस्वीकार करने जितनी मानिनी शोलाना नही थी। मगर कोओ वृषा अवतरित होगी, जैसी लोभी दृष्टि रसने जितनी होन भी वह न थी । हीनता अगमे जरा भी नहीं थी। और मानिनी को वृत्ति असको शोभती भी नही । असवी निर्व्याज स्वाभाविक्ता प्रयत्न से विवसित अदात्त चारित्र्यसे भी अधिक शाभा देती थी । भगीरथ - विद्याम (अिरिगेशन अिजीनियरिंग में ) पानीके प्रवाहको ले जानेवाले छ प्रकार बताये गये है। अनमें अंक प्रवाहके अपरसे दूसरे वाहको ले जानेरी योजनाको अद्भुत और अत्यन्त कठिन प्रकार माना गया है। जिस प्रकारके रेलवे या मोटरके मार्ग हमने कभी देखे है । नगर, जहा तक मैं जानता हू, हिन्दुस्तानमें अिस प्रकारके जल-प्रवाहका यह अंक ही नमूना है । सस्कृतिके प्रवाही दृष्टिगे यदि सोचें, तो सारा भारतवर्षं असे ही प्रकारसे भरा हुआ है। यहा हरक जातिवो अपनी अलग सस्कृति है, और कओ बार आमने सामने मिलने पर भी वे अक हद तक अस्पृष्ट रह सकी है !
नदी पर नहर जिससे ठीक विपरीत, दक्षिणमें जब ब्राह्मणेतर जनेअ मागते हैं, तब महाराष्ट्रके ब्राह्मण 'क्लो आद्यन्तयो स्थिति के वचनने अनुमार भैँसी बेहूदी जिद लेकर बैठते हैं, मानो बीचके दो वर्णं है ही नहीं। जिन्हे जनेअ पहननेका अधिकार है, वे असे पहननेके बारेमें अदासीन रहते हैं, और जो हाथापाओ करके भी जनेअ पहननेका अधिकार प्राप्त करना चाहते हैं, सुनके लिये अपना द्विजत्व सिद्ध करने में कठिनाजी पैदा की जाती है। यह चर्चा सुनकर वेणीप्रसादको लगा कि 'आज हमें जनेनू मिलनेवाली नहीं है।' असने दलील पेश की 'वलियुगमें क्या नहीं हो सकता ? नदी पर यदि नदी सवार हो सकती है, तो महाराष्ट्रके ब्राह्मण भी हमें जनेनू दे सकते हैं । दलील मजूर हुआ। किन्तु विषय बदला और कलियुगवे भगीरथोत्री बहादुरीके युदाहरण स्वरूप गगाकी नहरके बारेमें बातें चली । दोपहरके समय हम लोग मानवका यह प्रताप देखने शिवले । गगावी नहर दाहरवे समीपसे जाती है। लडके असमें मछलियोकी तरह ओक खेल खेल रहे थे । नहरके किनारे किनारे हम थुम अस्यात पुल तक गये । वह दृश्य सचमुच भव्य था । पुलवे नीचेगे गरीब ब्राह्मणी समान सोलाना नदी वह रही थी और अपरगावी नहर अपना चौडा पाट जरा भी सकुचित किये बिना पुल परसे दौड़ती जा रही थी । पुलके अपर पानीवा बोझ अितना ज्यादा था कि मालूम होता था, अभी दोनो ओखी दीवारे टूट जायेंगी और दोनो ओरसे हाथोकी झूलवे समान वडे प्रपात गिरना शुरू होगे। पुलकी दीवार पर खड़े रहकर नहरके चहावकी ओर देखते रहनेमे दिमाग पर अमरा असर होना था। दुग्वी मनुष्यको जिस प्रकार अद्वेगवे नये नये अभार आते हैं, अगी प्रकार नहरके जलमें भी अभार आते थे। किन्तु समुराल आयी हुआ बहू जिस प्रकार अपनी सब भावनायें नये घरमें दवा देती है, असी प्रकार गंगा नदीको यह परतत्र पुत्री अपने सब अभारोत्री दबा देती थी। असका विस्तार देखकर प्रथम दर्शनमें तो मालूम होता था मानो यह वोजी धनमत्त सेठानी है। किन्तु नजदीन जागर देखने पर श्रीमतीके नीचे परतत्रतावा दुस ही अस वदन पर दीस पड़ता था। जो-ग्यारह अपरमे नीचे देखने पर निम्नगा सोलानाका क्षोण विन्तु स्वतंत्र बहाव दोनो ओरसे आकर्षक मालूम होता था। चुभता वेवल अितना हो था कि नहरकी दोनों ओरकी दीवारोमे परिवाहके तौर पर वओ सूरास रसे गये थे, जिनमें से नहरवा थोटा पानी अिस तरह सोलानामे गिर रहा था मानो अम पर अहसान कर रहा हो। हम पुलसे नीचे अंतरे और सोलानावे किनारे जा बैठे। अचेसे दिये जानेवाले अपकारको अस्वीकार करने जितनी मानिनी शोलाना नही थी। मगर कोओ वृषा अवतरित होगी, जैसी लोभी दृष्टि रसने जितनी होन भी वह न थी । हीनता अगमे जरा भी नहीं थी। और मानिनी को वृत्ति असको शोभती भी नही । असवी निर्व्याज स्वाभाविक्ता प्रयत्न से विवसित अदात्त चारित्र्यसे भी अधिक शाभा देती थी । भगीरथ - विद्याम पानीके प्रवाहको ले जानेवाले छ प्रकार बताये गये है। अनमें अंक प्रवाहके अपरसे दूसरे वाहको ले जानेरी योजनाको अद्भुत और अत्यन्त कठिन प्रकार माना गया है। जिस प्रकारके रेलवे या मोटरके मार्ग हमने कभी देखे है । नगर, जहा तक मैं जानता हू, हिन्दुस्तानमें अिस प्रकारके जल-प्रवाहका यह अंक ही नमूना है । सस्कृतिके प्रवाही दृष्टिगे यदि सोचें, तो सारा भारतवर्षं असे ही प्रकारसे भरा हुआ है। यहा हरक जातिवो अपनी अलग सस्कृति है, और कओ बार आमने सामने मिलने पर भी वे अक हद तक अस्पृष्ट रह सकी है !
बाड़मेर। बायतू उपखण्ड के शहर गांव में शहीद प्रेम सिंह के घर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सोमवार को पहुंचीं। यहां राजे ने शहीद की शहादत को सलाम किया। बायतू के शहर गांव के प्रेमसिंह सारण ने देश के लिए जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए कुर्बानी दी थी। मुख्यमंत्री ने शहीद के परिवार को सरकार की तरफ से 20 लाख रुपए का चेक सौंपा। राजे ने शहीद के परिवार को सांत्वना देते हुए उनके बलिदान को अमिट बताया। राजे के बाड़मेर पहुचने पर भाजपा नेताओं ने उनकी अगुवाई की। राजे ने शहीद प्रेमसिंह की शहादत को उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। वहीं मुख्यमंत्री के सामने बायतू राजकीय कॉलेज का नामकरण शहीद के नाम पर करने, शहीद के घर से दो आश्रितों को सरकारी सेवा में लेने, शहीद चौराहा, ग्राम पंचायत का नामकरण, अलग राजस्व गांव हो जिसका नाम प्रेमनगर किए जाने की मांग रखी गईं। इन मांगों पर सीएम ने शहीद परिवार की हर संभव मदद का भरोसा दिया।
बाड़मेर। बायतू उपखण्ड के शहर गांव में शहीद प्रेम सिंह के घर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सोमवार को पहुंचीं। यहां राजे ने शहीद की शहादत को सलाम किया। बायतू के शहर गांव के प्रेमसिंह सारण ने देश के लिए जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए कुर्बानी दी थी। मुख्यमंत्री ने शहीद के परिवार को सरकार की तरफ से बीस लाख रुपए का चेक सौंपा। राजे ने शहीद के परिवार को सांत्वना देते हुए उनके बलिदान को अमिट बताया। राजे के बाड़मेर पहुचने पर भाजपा नेताओं ने उनकी अगुवाई की। राजे ने शहीद प्रेमसिंह की शहादत को उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर नमन किया। वहीं मुख्यमंत्री के सामने बायतू राजकीय कॉलेज का नामकरण शहीद के नाम पर करने, शहीद के घर से दो आश्रितों को सरकारी सेवा में लेने, शहीद चौराहा, ग्राम पंचायत का नामकरण, अलग राजस्व गांव हो जिसका नाम प्रेमनगर किए जाने की मांग रखी गईं। इन मांगों पर सीएम ने शहीद परिवार की हर संभव मदद का भरोसा दिया।
जनसुनाई के लिए बने IGRS पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण में लखनऊ प्रशासन पिछले महीने प्रदेश में 10वे पायदान पर रहा। इसमें अव्वल दर्जा हासिल करने के लिए DM सूर्यपाल गंगवार ने गुरुवार को अधिकारियों की क्लास लगाई। मीटिंग में उन्हें शिकायतों के निस्तारण की बारीकियां सिखाई गई। प्रशिक्षण बैठक में ज़िलाधिकारी ने बताया कि अधिकारियों पता होना चाहिए, की प्रोग्रेस रिपोर्ट कैसे बनती है। IGRS के 10 बिंदुओं पर मार्क्स किस तरह मिलते है। उन्होंने बताया कि मई में जिले की रैंकिंग 57 थी। जून में ज़िले की रैंकिंग को 11 पर और जुलाई में 10 रैंकिंग हो गई। अब इसे नंबर वन बनाना है। DM ने बताया कि शिकायतों का बढ़ना है। पिछले 6 माह के सापेक्ष यदि शिकायतो की संख्या बढ़ती है तो रैंकिंग में ज़िले के नम्बर कटते है। उन्होंने बताया कि रैंकिंग में नम्बर कटने मतलब यह है कि विभाग द्वारा कार्य सही से नही किया जा रहा है। जिसके लिए आवश्यक है कि सभी अधिकारी अपने अपने कार्यालय में उपस्थित रहे और जनसुनवाई के समय शिकायत गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करें। DM ने कहा की अधिकारी शिकायतकर्ता के साथ कुछ समय बिताए और गंभीरता के साथ उसके प्रकरण को समझें। ऑनलाइन आई हुई शिकायतों को गंभीरता से स्वयं पढ़े। अधिकतर यह देखा गया है कि अधिकारीगण प्रकरण को बिना पढ़े ही अपने अधीनस्थ अधिकारियों को निस्तारण के लिए मार्क कर देते है। जिस वजह से प्रकरण गलत अधिकारी को मार्क हो जाता है और उसका निस्तारण नही हो पाता है। ज़िलाधिकारी ने बताया कि कुछ प्रकरण ऐसे भी होते है जो कि शिकायतकर्ताओं द्वारा आदतन बार बार भेजे जाते है। ऐसे प्रकरण भी अनावश्यक रूप से शिकायतों की संख्या को बढ़ाते है। बताया कि रिपीट प्रकरण भेजने वाले मोबाईल नम्बरो को चिन्हित किया जाए और ऐसे व्यक्तियों को अपने कार्यालय बुलाकर उनकी काउंसलिंग की जाए। लेबर, UPSRTC, चिकित्सा विभाग सहित कई विभागों द्वारा बताया गया कि उनके यहां भी ऐसे प्रकरण प्राप्त होते है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
जनसुनाई के लिए बने IGRS पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण में लखनऊ प्रशासन पिछले महीने प्रदेश में दसवे पायदान पर रहा। इसमें अव्वल दर्जा हासिल करने के लिए DM सूर्यपाल गंगवार ने गुरुवार को अधिकारियों की क्लास लगाई। मीटिंग में उन्हें शिकायतों के निस्तारण की बारीकियां सिखाई गई। प्रशिक्षण बैठक में ज़िलाधिकारी ने बताया कि अधिकारियों पता होना चाहिए, की प्रोग्रेस रिपोर्ट कैसे बनती है। IGRS के दस बिंदुओं पर मार्क्स किस तरह मिलते है। उन्होंने बताया कि मई में जिले की रैंकिंग सत्तावन थी। जून में ज़िले की रैंकिंग को ग्यारह पर और जुलाई में दस रैंकिंग हो गई। अब इसे नंबर वन बनाना है। DM ने बताया कि शिकायतों का बढ़ना है। पिछले छः माह के सापेक्ष यदि शिकायतो की संख्या बढ़ती है तो रैंकिंग में ज़िले के नम्बर कटते है। उन्होंने बताया कि रैंकिंग में नम्बर कटने मतलब यह है कि विभाग द्वारा कार्य सही से नही किया जा रहा है। जिसके लिए आवश्यक है कि सभी अधिकारी अपने अपने कार्यालय में उपस्थित रहे और जनसुनवाई के समय शिकायत गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करें। DM ने कहा की अधिकारी शिकायतकर्ता के साथ कुछ समय बिताए और गंभीरता के साथ उसके प्रकरण को समझें। ऑनलाइन आई हुई शिकायतों को गंभीरता से स्वयं पढ़े। अधिकतर यह देखा गया है कि अधिकारीगण प्रकरण को बिना पढ़े ही अपने अधीनस्थ अधिकारियों को निस्तारण के लिए मार्क कर देते है। जिस वजह से प्रकरण गलत अधिकारी को मार्क हो जाता है और उसका निस्तारण नही हो पाता है। ज़िलाधिकारी ने बताया कि कुछ प्रकरण ऐसे भी होते है जो कि शिकायतकर्ताओं द्वारा आदतन बार बार भेजे जाते है। ऐसे प्रकरण भी अनावश्यक रूप से शिकायतों की संख्या को बढ़ाते है। बताया कि रिपीट प्रकरण भेजने वाले मोबाईल नम्बरो को चिन्हित किया जाए और ऐसे व्यक्तियों को अपने कार्यालय बुलाकर उनकी काउंसलिंग की जाए। लेबर, UPSRTC, चिकित्सा विभाग सहित कई विभागों द्वारा बताया गया कि उनके यहां भी ऐसे प्रकरण प्राप्त होते है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा है कि NEC (पूर्वोत्तर परिषद) को क्षेत्र की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए खुद को एक क्षेत्रीय थिंक टैंक के रूप में पुनर्जन्म लेने की जरूरत है। अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडू ने शुक्रवार सुबह ईटानगर में एनईसी सचिव- के मूसा चलई से मुलाकात के बाद यह टिप्पणी की। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने एनईसी सचिव को उन चुनौतियों से भी अवगत कराया जिनका राज्य सामना कर रहा है और जिन्हें एनईसी 'प्रवचन' में संबोधित करने की आवश्यकता है। सीएम खांडू ने यह भी कहा कि NEC को इस क्षेत्र के लिए कहीं अधिक बड़ी भूमिका निभानी है। अरुणाचल प्रदेश के सीएम ने ट्वीट कियाः "NEC_GoI को खुद को नॉर्थईस्ट के लिए क्षेत्रीय थिंक-टैंक के रूप में पुनर्जन्म लेना है। नोडल एजेंसी के लिए कहीं अधिक बड़ी भूमिका निभाने के लिए एनईसी सचिव, श्री के मूसा चलई जी (आईएएस) के साथ आज सुबह एक बैठक। अरुणाचल को अपनी अनूठी चुनौतियों को देखते हुए एनईसी विमर्श में प्राथमिकता देने की जरूरत है।
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा है कि NEC को क्षेत्र की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए खुद को एक क्षेत्रीय थिंक टैंक के रूप में पुनर्जन्म लेने की जरूरत है। अरुणाचल प्रदेश के सीएम पेमा खांडू ने शुक्रवार सुबह ईटानगर में एनईसी सचिव- के मूसा चलई से मुलाकात के बाद यह टिप्पणी की। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने एनईसी सचिव को उन चुनौतियों से भी अवगत कराया जिनका राज्य सामना कर रहा है और जिन्हें एनईसी 'प्रवचन' में संबोधित करने की आवश्यकता है। सीएम खांडू ने यह भी कहा कि NEC को इस क्षेत्र के लिए कहीं अधिक बड़ी भूमिका निभानी है। अरुणाचल प्रदेश के सीएम ने ट्वीट कियाः "NEC_GoI को खुद को नॉर्थईस्ट के लिए क्षेत्रीय थिंक-टैंक के रूप में पुनर्जन्म लेना है। नोडल एजेंसी के लिए कहीं अधिक बड़ी भूमिका निभाने के लिए एनईसी सचिव, श्री के मूसा चलई जी के साथ आज सुबह एक बैठक। अरुणाचल को अपनी अनूठी चुनौतियों को देखते हुए एनईसी विमर्श में प्राथमिकता देने की जरूरत है।
- ऐसे लोग, जिन्हें एशियन फ्लश महसूस होता है, वो कैंसर होने के खतरे में ज्यादा रहते हैं। पेप्सिड (Pepcid) के जैसे ऐसे कई सारे प्रॉडक्ट मौजूद हैं, जो एशियन फ्लश से छुटकारा पाने का दावा करते हैं, लेकिन ये आपको अल्कोहल पीने की वजह से होने वाले लंबे समय के असर से नहीं बचाते हैं। इसलिए अगर आपको ये लक्षण नजर आ रहे हैं, तो आपको हफ्ते में केवल 5 अल्कोहोलिक ड्रिंक्स से भी कम ड्रिंक्स ही लेना चाहिए। - फ्लशिंग शायद आपके द्वारा लिए जाने वाली दवाइयों के साथ में अल्कोहल के मिलने की वजह से भी नजर आ सकती है। - हाइव्स का नजर आना आमतौर पर इस बात का संकेत होता है कि आप अल्कोहल में पाए जाने वाले इंग्रेडिएंट्स के लिए एलर्जिक हैं। ऐसा होने पर तुरंत पीना बंद कर दें और इसकी बजाय पानी की एक बॉटल ले लें। - अगर आपको हाइव्स महसूस होते हैं, तो फिर प्रभावित हिस्से पर खुजली या जलन को कम करने के लिए कूल कम्प्रेस या गीला कपड़ा लगाएँ। - अगर आपको डायरिया का शक है, तो भरपूर फ्लुइड्स (अच्छा होगा, अगर पानी) पिएं। अगर आपको दिन में कई बार पतले स्टूल्स हो रहे हैं और आप भरपूर पानी नहीं पी रहे हैं, तो आप बहुत जल्दी डिहाइड्रेटेड हो सकते हैं। - अगर आपको डायरिया के साथ में खून वाले मल, हाइ फीवर जैसे ऐसे गंभीर लक्षण महसूस हो रहे हैं, जो 24 घंटे से ज्यादा समय के लिए बने रहते हैं या फिर पेट में गंभीर दर्द महसूस हो रहा है। - वाइन और बियर में सल्फाइट (sulfites) भी होते हैं, जो ऐसे कम्पाउन्ड हैं, जिनकी भी वजह से एलर्जी के लक्षण सामने आते हैं। पता लगाने के लिए टेस्ट का इस्तेमाल करना (Using Diagnostic Tests) - आपके डॉक्टर से अल्कोहल में पाए जाने वाले फूड्स, जैसे कि अंगूर, ग्लूटेन, सीफूड और ग्रेन्स जैसे फूड्स के लिए टेस्ट करने का कहें। - इस टेस्ट के रिजल्ट्स आमतौर पर 30 मिनट के अंदर नजर आ सकते हैं। - राई (Rye) - ये गाइड अल्कोहल पीने की लीगल उम्र के लोगों के लिए सलाह देती है। - माइल्ड अल्कोहल इनटॉलेरेंस के लिए डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, अगर आपको साँस लेने में तकलीफ, सिर चकराना या बेहोशी जैसे गंभीर लक्षणों का शक है या दिल की धड़कन बढ़ी हैं, तो तुरंत इमरजेंसी सर्विस को कॉल कर लें। ये सभी ज़िंदगी को खतरे में डालने वाले एलर्जिक रिएक्शन के लक्षण हो सकते हैं।
- ऐसे लोग, जिन्हें एशियन फ्लश महसूस होता है, वो कैंसर होने के खतरे में ज्यादा रहते हैं। पेप्सिड के जैसे ऐसे कई सारे प्रॉडक्ट मौजूद हैं, जो एशियन फ्लश से छुटकारा पाने का दावा करते हैं, लेकिन ये आपको अल्कोहल पीने की वजह से होने वाले लंबे समय के असर से नहीं बचाते हैं। इसलिए अगर आपको ये लक्षण नजर आ रहे हैं, तो आपको हफ्ते में केवल पाँच अल्कोहोलिक ड्रिंक्स से भी कम ड्रिंक्स ही लेना चाहिए। - फ्लशिंग शायद आपके द्वारा लिए जाने वाली दवाइयों के साथ में अल्कोहल के मिलने की वजह से भी नजर आ सकती है। - हाइव्स का नजर आना आमतौर पर इस बात का संकेत होता है कि आप अल्कोहल में पाए जाने वाले इंग्रेडिएंट्स के लिए एलर्जिक हैं। ऐसा होने पर तुरंत पीना बंद कर दें और इसकी बजाय पानी की एक बॉटल ले लें। - अगर आपको हाइव्स महसूस होते हैं, तो फिर प्रभावित हिस्से पर खुजली या जलन को कम करने के लिए कूल कम्प्रेस या गीला कपड़ा लगाएँ। - अगर आपको डायरिया का शक है, तो भरपूर फ्लुइड्स पिएं। अगर आपको दिन में कई बार पतले स्टूल्स हो रहे हैं और आप भरपूर पानी नहीं पी रहे हैं, तो आप बहुत जल्दी डिहाइड्रेटेड हो सकते हैं। - अगर आपको डायरिया के साथ में खून वाले मल, हाइ फीवर जैसे ऐसे गंभीर लक्षण महसूस हो रहे हैं, जो चौबीस घंटाटे से ज्यादा समय के लिए बने रहते हैं या फिर पेट में गंभीर दर्द महसूस हो रहा है। - वाइन और बियर में सल्फाइट भी होते हैं, जो ऐसे कम्पाउन्ड हैं, जिनकी भी वजह से एलर्जी के लक्षण सामने आते हैं। पता लगाने के लिए टेस्ट का इस्तेमाल करना - आपके डॉक्टर से अल्कोहल में पाए जाने वाले फूड्स, जैसे कि अंगूर, ग्लूटेन, सीफूड और ग्रेन्स जैसे फूड्स के लिए टेस्ट करने का कहें। - इस टेस्ट के रिजल्ट्स आमतौर पर तीस मिनट के अंदर नजर आ सकते हैं। - राई - ये गाइड अल्कोहल पीने की लीगल उम्र के लोगों के लिए सलाह देती है। - माइल्ड अल्कोहल इनटॉलेरेंस के लिए डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, अगर आपको साँस लेने में तकलीफ, सिर चकराना या बेहोशी जैसे गंभीर लक्षणों का शक है या दिल की धड़कन बढ़ी हैं, तो तुरंत इमरजेंसी सर्विस को कॉल कर लें। ये सभी ज़िंदगी को खतरे में डालने वाले एलर्जिक रिएक्शन के लक्षण हो सकते हैं।
खैर, यहाँ पूरा स्टेप (step) दिखाया गया है। पहला स्टेप (step) जो हम पहले ही देख चुके हैं, यह स्टेप (step) हम पहले की स्लाइड (slide) में देख चुके हैं। इसलिए, जहां हमने वेरिएबल (variable) a के संबंध में फंक्शन (Function) का विस्तार किया है और हमें दो सब फंक्शन (sub Function) मिल चुके हैं b' c' + bc और केवल cl अगले स्टेप (step) में मान लें कि हम b के संबंध में विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं। तो, यह p' c' + bc यदि आप b के संबंध में शैनोन एक्सपेंशन (shannon expansion) करते हैं, तो आप इसे उसी तरह से करते हैं, b बार (bar) को नेगेटिव को फैक्टर (negative co factor) से गुणा करके b के संबंध में, b को o से बदल दिया जाता है, यह सब केवल o हो जाता है । यह ' होगा, केवल c ं और b को पॉजिटिव को फैक्टर (positive co Factor) से गुणा किया जाता है, b को 1 से प्रतिस्थापित करने पर, यह केवल c हो जाता है। इसी प्रकार, इस वेरिएबल (variable) c के लिए आप b के संबंध में एक ही कार्य करते हैं, b' को b से गुणा किया जाता है, b को o से बदल दिया गया है । कोई b नहीं है, इसलिए, यह c रहता है, b को पॉजिटिव को फैक्टर (positive co Factor) में बदल कर 1 से बदल दिया जाता है। यह c रहता है और अंतिम चरण में हम आपको विस्तार करते हुए देखते हैं। अब, हमें चार सब फंक्शन्स (sub Functions) मिलें हैं c, c, c और c'। तो, आप देखते हैं कि सब फंक्शन्स (sub Functions) का आकार आपके आगे बढ़ने के साथ छोटा और छोटा होता जा रहा है। इसलिए, अंतिम चरण में हम c द्वारा विस्तार करते हैं, आप देखते हैं कि c' को इस ' की तरह लिखा जा सकता है, जिसे नेगेटिव को-फैक्टर (negative co-Factor) द्वारा गुणा किया जाता है c को o से बदलकर 1 हो जाता है, और c नेगेटिव (negative) को पॉज़िटिव को - फैक्टर (positive co-factor) को c से 1 में बदल देता है। c हो जाता है, ठीक है, लेकिन यदि यह c है, तो c' को c से प्रतिस्थापित करके c को o से बदल दिया जाता है। इसे c को 1 से प्रतिस्थापित करने में c होता है । यह 1 है, इस तरह से मुझे यह मिलता है। अब, आप याद करते हैं कि जब आप यहां विस्तार करते हैं तो मैंने ए (a), बी (b), सी (c) दिखाया है मैं इसे किसी भी क्रम में कर सकता हूं। मैं पहली बार b का उपयोग कर सकता हूं फिर a फिर c या मैं पहले c का उपयोग कर सकता हूं फिर a फिर b और इतने पर। इसलिए, यहां मैंने केवल एक विशेष आदेश को चित्रित किया है, वेरिएबल ऑर्डरिंग (variable ordering) ए (a), बी (b), सी (c) है। इसलिए, अंत में मुझे कुछ कॉन्सटांत्स (constants) या टर्मिनल्स (terminals) मिलते हैं जिन्हें आप देखते हैं 10010101 यह याद रखें 1001010। (स्लाइड समय देखेंः 19:44 ) IT NARAGPUR NIPTEL ONLINE CERTIFICATION COURSES Switching Circuits & Logic Design तो, मैं इसे सीधे एक BDD में मैप (map) कर सकता हूं जैसे यह 10010101। इसलिए, मेरे एक्सपेंशन (expansion) का क्रम पहले था, मैं वेरिएबल (variable) a का उपयोग करता हूं। अगले स्तर पर मैं वेरिएबल (variable) c का उपयोग करता हूं, तीसरे स्तर पर मैं वेरिएबल (variable) c b और c का उपयोग किया गया था, सही, इसी प्रकार हमने एक्सपेंशन (expansion) किया है। (स्लाइड समय देखेंः 20:10 ) BAN ZA Another Example: f=a'bc+bc'+ach IT KHARASPUR HOTEL ONLINE CERTIFICATION COURSES Switching Circuits & Logic Des एक और उदाहरण लेते हैं, आइए हम इस पर काम करते हैं। मान लीजिए, हमारे पास इस तरह का एक फ़ंक्शन (Function) है a′ +bc+b'c′ +ac आइए हम कुछ विशेष का पालन करें मैं नहीं कह सकता कि ए (a), बी (b), सी (c) हमें पहले कहें कि हम वेरिएबल सी (variable c) के संबंध में एक्सपैंड (expand) करते हैं, आइए देखते हैं। तो, यह फ़ंक्शन (Function) होगा c' नेगेटिव को फैक्टर (negative co-factor) c से 0 की जगह लेगा, यह 0 हो जाएगा, यह b° या a, b° या a, b′ या a प्लस c होगा, जिसे c से 1 प्रतिस्थापित किया जाएगा, अंतिम दो 0 बन जाएंगे, यह केवल a b, a′ b बन जाएगा। तो, मुझे दो सब फंक्शन्स (sub Functions) मिल गए हैं b* + a और a' bl अगले चरण में, आइए हम a के साथ एक्सपैंड (expand) करते हैं, आइए हम बताते हैं। इसलिए, यह फ़ंक्शन (Function) यदि हम a के साथ में एक्सपैंड (expand) करते हैं, तो इसे a ' द्वारा बदल दिया जाएगा a को o से इसे केवल b' plus a किया जाएगा a को 1 से प्रतिस्थापित किया जाएगा यह कुछ प्लस (plus) 1 होगा, यह 1 होगा, सही। इसी तरह यदि आप इसे a के संबंध में विस्तृत करते हैं, तो यह a होगा और a को 0 द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा । इसलिए, यह केवल b प्लस (plus ) a होगा और a को 1 द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा यह 0 होगा । अब, हमारे पास चार सब फंक्शन्स ( sub Functions) हैं b', 1, b और 0 । अब, हम b के साथ बचे हैं, ठीक है, हम b के संबंध में विस्तार करेंगे। तो, b' के रूप में विस्तारित किया जा सकता है 10' से प्रतिस्थापित किया जा सकता है क्योंकि b को o से बदल दिया जाएगा। यह 1 प्लस (plus) b दिया जाएगा। b को 1 से बदल दिया जाएगा, यह 0 होगा और यहाँ हमारे पास एक कांस्टेंट (constant) है। इसलिए, यदि हम b से विस्तार करते हैं, तो b' को b से 0 से बदल दिया जाता है, कोई b नहीं है, यह 1 प्लस (plus) b को 1 से बदलकर b बना रहता है, यह 1 बना रहता है और b के लिए यह b' को b से 0 से बदल देगा, यह होगा 0 प्लस बी (plus b) बी (b) को 1 से प्रतिस्थापित करता है, यह 1 होगा और o के लिए यह बी प्लस (b plus) 0 में बी बार (b bar) होगा। इसलिए, अब हमारे पास 10110000 है। तो, अब, हमारा BDD इस तरह दिखाई देगा कि रूट नोड (root node) c शीर्ष स्तर पर होगा, यह फंक्शन (Function) F का प्रतिनिधित्व करेगा, अगले स्तर पर a, a और a होगा, और यह नेगेटिव एज (negative edge) 0 होगी और यह पॉजिटिव एज (positive edge) होगी। अगला स्तर b, b, b, b और b होगा। तो, यह नेगेटिव (negative) होगा, यह पॉजिटिव (positive) होगा, यह नेगेटिव (negative) होगा, यह पॉजिटिव (positive) होगा और लास्ट लेवल (last level) में c नहीं, cठीक नहीं होगा, ca b आप पहले ही ले चुके होंगे। तो, अंतिम स्तर आपके पास टर्मिनल नोड्स (terminal nodes) हैं। इसलिए, यदि आप टर्मिनल नोड (terminal node) लेते हैं। तो, हमारे पास 1 और o है। तो आप यहाँ 1 से बाहर होंगे, यहाँ 0 इस तरह से तब 1 और यहाँ 1, यहाँ से बाहर 1 यहाँ 0 और 10 यहाँ से बाहर, 1 यहाँ बाहर है और 00। तो, हमने इस फ़ंक्शन (Function) के लिए बाइनरी डिसिशन डायग्राम (binary decision diagram) प्राप्त किया है। इसलिए, किसी भी वेरिएबल ऑर्डरिंग (variable ordering) को देखते हुए, आप शैनोन'स लॉ (shannon's law) का उपयोग करके फ़ंक्शन (Function) को व्यवस्थित रूप से डेकोम्पोस (decompose) करके बीडीडी (BDD) का निर्माण कर सकते हैं। (स्लाइड समय देखेंः 24:42 )
खैर, यहाँ पूरा स्टेप दिखाया गया है। पहला स्टेप जो हम पहले ही देख चुके हैं, यह स्टेप हम पहले की स्लाइड में देख चुके हैं। इसलिए, जहां हमने वेरिएबल a के संबंध में फंक्शन का विस्तार किया है और हमें दो सब फंक्शन मिल चुके हैं b' c' + bc और केवल cl अगले स्टेप में मान लें कि हम b के संबंध में विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं। तो, यह p' c' + bc यदि आप b के संबंध में शैनोन एक्सपेंशन करते हैं, तो आप इसे उसी तरह से करते हैं, b बार को नेगेटिव को फैक्टर से गुणा करके b के संबंध में, b को o से बदल दिया जाता है, यह सब केवल o हो जाता है । यह ' होगा, केवल c ं और b को पॉजिटिव को फैक्टर से गुणा किया जाता है, b को एक से प्रतिस्थापित करने पर, यह केवल c हो जाता है। इसी प्रकार, इस वेरिएबल c के लिए आप b के संबंध में एक ही कार्य करते हैं, b' को b से गुणा किया जाता है, b को o से बदल दिया गया है । कोई b नहीं है, इसलिए, यह c रहता है, b को पॉजिटिव को फैक्टर में बदल कर एक से बदल दिया जाता है। यह c रहता है और अंतिम चरण में हम आपको विस्तार करते हुए देखते हैं। अब, हमें चार सब फंक्शन्स मिलें हैं c, c, c और c'। तो, आप देखते हैं कि सब फंक्शन्स का आकार आपके आगे बढ़ने के साथ छोटा और छोटा होता जा रहा है। इसलिए, अंतिम चरण में हम c द्वारा विस्तार करते हैं, आप देखते हैं कि c' को इस ' की तरह लिखा जा सकता है, जिसे नेगेटिव को-फैक्टर द्वारा गुणा किया जाता है c को o से बदलकर एक हो जाता है, और c नेगेटिव को पॉज़िटिव को - फैक्टर को c से एक में बदल देता है। c हो जाता है, ठीक है, लेकिन यदि यह c है, तो c' को c से प्रतिस्थापित करके c को o से बदल दिया जाता है। इसे c को एक से प्रतिस्थापित करने में c होता है । यह एक है, इस तरह से मुझे यह मिलता है। अब, आप याद करते हैं कि जब आप यहां विस्तार करते हैं तो मैंने ए , बी , सी दिखाया है मैं इसे किसी भी क्रम में कर सकता हूं। मैं पहली बार b का उपयोग कर सकता हूं फिर a फिर c या मैं पहले c का उपयोग कर सकता हूं फिर a फिर b और इतने पर। इसलिए, यहां मैंने केवल एक विशेष आदेश को चित्रित किया है, वेरिएबल ऑर्डरिंग ए , बी , सी है। इसलिए, अंत में मुझे कुछ कॉन्सटांत्स या टर्मिनल्स मिलते हैं जिन्हें आप देखते हैं एक करोड़ दस हज़ार एक सौ एक यह याद रखें दस लाख एक हज़ार दस। IT NARAGPUR NIPTEL ONLINE CERTIFICATION COURSES Switching Circuits & Logic Design तो, मैं इसे सीधे एक BDD में मैप कर सकता हूं जैसे यह एक करोड़ दस हज़ार एक सौ एक। इसलिए, मेरे एक्सपेंशन का क्रम पहले था, मैं वेरिएबल a का उपयोग करता हूं। अगले स्तर पर मैं वेरिएबल c का उपयोग करता हूं, तीसरे स्तर पर मैं वेरिएबल c b और c का उपयोग किया गया था, सही, इसी प्रकार हमने एक्सपेंशन किया है। BAN ZA Another Example: f=a'bc+bc'+ach IT KHARASPUR HOTEL ONLINE CERTIFICATION COURSES Switching Circuits & Logic Des एक और उदाहरण लेते हैं, आइए हम इस पर काम करते हैं। मान लीजिए, हमारे पास इस तरह का एक फ़ंक्शन है a′ +bc+b'c′ +ac आइए हम कुछ विशेष का पालन करें मैं नहीं कह सकता कि ए , बी , सी हमें पहले कहें कि हम वेरिएबल सी के संबंध में एक्सपैंड करते हैं, आइए देखते हैं। तो, यह फ़ंक्शन होगा c' नेगेटिव को फैक्टर c से शून्य की जगह लेगा, यह शून्य हो जाएगा, यह b° या a, b° या a, b′ या a प्लस c होगा, जिसे c से एक प्रतिस्थापित किया जाएगा, अंतिम दो शून्य बन जाएंगे, यह केवल a b, a′ b बन जाएगा। तो, मुझे दो सब फंक्शन्स मिल गए हैं b* + a और a' bl अगले चरण में, आइए हम a के साथ एक्सपैंड करते हैं, आइए हम बताते हैं। इसलिए, यह फ़ंक्शन यदि हम a के साथ में एक्सपैंड करते हैं, तो इसे a ' द्वारा बदल दिया जाएगा a को o से इसे केवल b' plus a किया जाएगा a को एक से प्रतिस्थापित किया जाएगा यह कुछ प्लस एक होगा, यह एक होगा, सही। इसी तरह यदि आप इसे a के संबंध में विस्तृत करते हैं, तो यह a होगा और a को शून्य द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा । इसलिए, यह केवल b प्लस a होगा और a को एक द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा यह शून्य होगा । अब, हमारे पास चार सब फंक्शन्स हैं b', एक, b और शून्य । अब, हम b के साथ बचे हैं, ठीक है, हम b के संबंध में विस्तार करेंगे। तो, b' के रूप में विस्तारित किया जा सकता है दस' से प्रतिस्थापित किया जा सकता है क्योंकि b को o से बदल दिया जाएगा। यह एक प्लस b दिया जाएगा। b को एक से बदल दिया जाएगा, यह शून्य होगा और यहाँ हमारे पास एक कांस्टेंट है। इसलिए, यदि हम b से विस्तार करते हैं, तो b' को b से शून्य से बदल दिया जाता है, कोई b नहीं है, यह एक प्लस b को एक से बदलकर b बना रहता है, यह एक बना रहता है और b के लिए यह b' को b से शून्य से बदल देगा, यह होगा शून्य प्लस बी बी को एक से प्रतिस्थापित करता है, यह एक होगा और o के लिए यह बी प्लस शून्य में बी बार होगा। इसलिए, अब हमारे पास एक करोड़ एक लाख दस हज़ार है। तो, अब, हमारा BDD इस तरह दिखाई देगा कि रूट नोड c शीर्ष स्तर पर होगा, यह फंक्शन F का प्रतिनिधित्व करेगा, अगले स्तर पर a, a और a होगा, और यह नेगेटिव एज शून्य होगी और यह पॉजिटिव एज होगी। अगला स्तर b, b, b, b और b होगा। तो, यह नेगेटिव होगा, यह पॉजिटिव होगा, यह नेगेटिव होगा, यह पॉजिटिव होगा और लास्ट लेवल में c नहीं, cठीक नहीं होगा, ca b आप पहले ही ले चुके होंगे। तो, अंतिम स्तर आपके पास टर्मिनल नोड्स हैं। इसलिए, यदि आप टर्मिनल नोड लेते हैं। तो, हमारे पास एक और o है। तो आप यहाँ एक से बाहर होंगे, यहाँ शून्य इस तरह से तब एक और यहाँ एक, यहाँ से बाहर एक यहाँ शून्य और दस यहाँ से बाहर, एक यहाँ बाहर है और शून्य। तो, हमने इस फ़ंक्शन के लिए बाइनरी डिसिशन डायग्राम प्राप्त किया है। इसलिए, किसी भी वेरिएबल ऑर्डरिंग को देखते हुए, आप शैनोन'स लॉ का उपयोग करके फ़ंक्शन को व्यवस्थित रूप से डेकोम्पोस करके बीडीडी का निर्माण कर सकते हैं।
फुटकर वितरण । 173 (Speciality Retailer) व (3) सौदागरी के समान के फुटकर विक्रेता ( General Merchandise Retailer ) ( 1- एक पंक्ति फुटकर विक्रेता (Single-Line Retailer) - आजकल वस्तुओं की विविधता ( variety) दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और फुटकर विक्रेताओं के लिए सभी वस्तुओं को अपनी दुकान पर रखना कठिन होता जा रहा है । अतः वे अपनी दुकान पर वस्तु- पंक्ति की केवल एक ही प्रकार की वस्तुएँ रखते हैं जैसे, फर्नीचर, खेल का सामान, दवाइयाँ, स्टेशनरी का सामान, खेती के औजार, बिजली का सामान आदि । इस प्रकार के विक्रेता सुविधाजनक व सौदे का माल ( convenience and shopping goods ) बेचते हैं । इस प्रकार के विक्रेता होने से लाभ यह है कि 'उपभोक्ता को एक प्रकार की वस्तुएँ एक ही स्थान पर मिल जाती हैं और इनके द्वारा कुछ समय के लिए उपभोक्ता को साख भी दे दी जाती है अर्थात् उपभोक्ता को वस्तुएँ उधार भी दे दी जाती हैं । इन एक पंक्ति फुटकर विक्रेताओं को एक पंक्ति भण्डार (Single-Line Stores ) भी कहते हैं । (2) विशेष फुटकर विक्रेता (Speciality Retailer ) - विशेष फुटकर विक्रेता वे हैं जो किसी वस्तु- पंक्ति के किसी एक भाग में ही विक्रय करते हैं । यह विक्रेता उस श्रेणी में आते हैं जो केवल सीमित विविध वस्तुएँ (limited variety of products ) में ही व्यवहार करते हैं । इन विक्रेताओं का मुख्य ध्येय सेवा व वस्तु `का गुण होता है लेकिन वे एकमात्र वस्तु ( exclusive merchandise) के रूप में ही कार्य करते हैं । इस प्रकार के विक्रेताओं में पुरुषों के जूते, महिलाओं के वस्त्र, बेकरी का सामान, डेरी वस्तुएँ आदि के विक्रेता आते हैं। यह विक्रेता शहर के मध्य में अपनी दुकानें खोलते हैं, जहाँ पर ग्राहकों की अधिक संख्या आने की सम्भावना रहती है । इनके द्वारा सदा ही फैशन की नयी से नयी वस्तुओं को एकत्र कर बेचने के लिए उपलब्ध किया जाता है । कभी-कभी यह प्रसिद्धि प्राप्त ब्राण्ड की एजेन्सी ले लेते हैं और फिर उसकी ही बिक्री करते है। यहाँ पर वे एकमात्र वितरक ( exclusive dealer ) के रूप में कार्य करते है । एक या कुछ ही प्रकार की वस्तुओं में व्यवहार करने के कारण इनके द्वारा • खरीद भी बड़ी मात्रा में की जाती है जिससे इनको कम मूल्य पर वस्तुएँ मिल 'जाती हैं । साथ ही एक प्रकार की वस्तु पंक्ति में व्यवहार करने से इनका ज्ञान विशेष प्रकार का हो जाता है जो उन्हें वस्तु के क्रय करने में सहायता देता है । इस प्रकार के विक्रेता को प्रतियोगिता का अधिक डर नहीं होता है। इनकी बिक्री भी अच्छी मात्रा में होती है । लेकिन ऐसे विक्रेताओं को इस सम्भावना का सदा ही डर बना रहता है कि यदि फैशन या शैली ( style ) में परिवर्तन आ गया तो इनको हानि होना अवश्यम्भावी हो जाता है ।
फुटकर वितरण । एक सौ तिहत्तर व सौदागरी के समान के फुटकर विक्रेता - आजकल वस्तुओं की विविधता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और फुटकर विक्रेताओं के लिए सभी वस्तुओं को अपनी दुकान पर रखना कठिन होता जा रहा है । अतः वे अपनी दुकान पर वस्तु- पंक्ति की केवल एक ही प्रकार की वस्तुएँ रखते हैं जैसे, फर्नीचर, खेल का सामान, दवाइयाँ, स्टेशनरी का सामान, खेती के औजार, बिजली का सामान आदि । इस प्रकार के विक्रेता सुविधाजनक व सौदे का माल बेचते हैं । इस प्रकार के विक्रेता होने से लाभ यह है कि 'उपभोक्ता को एक प्रकार की वस्तुएँ एक ही स्थान पर मिल जाती हैं और इनके द्वारा कुछ समय के लिए उपभोक्ता को साख भी दे दी जाती है अर्थात् उपभोक्ता को वस्तुएँ उधार भी दे दी जाती हैं । इन एक पंक्ति फुटकर विक्रेताओं को एक पंक्ति भण्डार भी कहते हैं । विशेष फुटकर विक्रेता - विशेष फुटकर विक्रेता वे हैं जो किसी वस्तु- पंक्ति के किसी एक भाग में ही विक्रय करते हैं । यह विक्रेता उस श्रेणी में आते हैं जो केवल सीमित विविध वस्तुएँ में ही व्यवहार करते हैं । इन विक्रेताओं का मुख्य ध्येय सेवा व वस्तु `का गुण होता है लेकिन वे एकमात्र वस्तु के रूप में ही कार्य करते हैं । इस प्रकार के विक्रेताओं में पुरुषों के जूते, महिलाओं के वस्त्र, बेकरी का सामान, डेरी वस्तुएँ आदि के विक्रेता आते हैं। यह विक्रेता शहर के मध्य में अपनी दुकानें खोलते हैं, जहाँ पर ग्राहकों की अधिक संख्या आने की सम्भावना रहती है । इनके द्वारा सदा ही फैशन की नयी से नयी वस्तुओं को एकत्र कर बेचने के लिए उपलब्ध किया जाता है । कभी-कभी यह प्रसिद्धि प्राप्त ब्राण्ड की एजेन्सी ले लेते हैं और फिर उसकी ही बिक्री करते है। यहाँ पर वे एकमात्र वितरक के रूप में कार्य करते है । एक या कुछ ही प्रकार की वस्तुओं में व्यवहार करने के कारण इनके द्वारा • खरीद भी बड़ी मात्रा में की जाती है जिससे इनको कम मूल्य पर वस्तुएँ मिल 'जाती हैं । साथ ही एक प्रकार की वस्तु पंक्ति में व्यवहार करने से इनका ज्ञान विशेष प्रकार का हो जाता है जो उन्हें वस्तु के क्रय करने में सहायता देता है । इस प्रकार के विक्रेता को प्रतियोगिता का अधिक डर नहीं होता है। इनकी बिक्री भी अच्छी मात्रा में होती है । लेकिन ऐसे विक्रेताओं को इस सम्भावना का सदा ही डर बना रहता है कि यदि फैशन या शैली में परिवर्तन आ गया तो इनको हानि होना अवश्यम्भावी हो जाता है ।
एनसीबी की स्पेशल टीम की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्यन खान ड्रग्स मामले की जांच ठीक से नहीं की गई थी। इस रिपोर्ट को मुख्यालय भेजकर कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की इजाजत मंगी गई है। फिल्म अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान से जुड़े ड्रग्स मामले में एनसीबी की रिपोर्ट में बड़ी बातें सामने आई हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की रिपोर्ट में हा गया है कि जांच में कई कमियां पाई गई हैं। इसके अलावा जांच में शामिल अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका की भी आशंका जताई गई है। मामले को लेकर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। बताते चलें कि एनसीबी ने 2021 में क्रूज पर रेव पार्टी से आर्यन खान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद काफी विवाद खड़ा हुआ। बड़ी मुश्किल से उन्हें जमानत मिली। बाद में एनसीबी ने भी आर्यन खान को क्लीन चिट दे दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब समीर वानखेड़े एनसीबी के मुंबई क्षेत्र के निदेशक थे तभी आर्यन खान को क्लीन चिट दी गई थी। यह जांच रिपोर्ट एनसीबी की स्पेशल टीम की है। रिपोर्ट को दिल्ली ऑफिस भेज दिया गया है। सात से आठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। बता दें कि खान के साथ पांच अन्य लोगों को भी क्लीन चिट दी गई थी। कहा गया था कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं। आर्यन खान को पूरे 22 दिन जेल में बिताने पड़े थे। एनसीबी के डीजी संजय सिंह ने कहा था कि अरबाद मर्जेंट ने बयान दर्ज कराया था कि उसके पास से मिली ड्रग्स आर्यन खान के लिए नहीं थी। इसके अलावा गिरफ्तारी के बाद आर्यन खान का मेडिकल ही नहीं करवाया जदा सका था। इसलिए कहा गया कि इस बात की पुष्टि नहीं हुई कि उन्होंने ड्रग्स ले रखी थी या नहीं। इसके अलावा एनसीबी ने कहा था कि किसी ड्रग्स पेडलर ने भी आर्यन को ड्रग्स देने की बात नहीं कबूली थी।
एनसीबी की स्पेशल टीम की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्यन खान ड्रग्स मामले की जांच ठीक से नहीं की गई थी। इस रिपोर्ट को मुख्यालय भेजकर कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की इजाजत मंगी गई है। फिल्म अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान से जुड़े ड्रग्स मामले में एनसीबी की रिपोर्ट में बड़ी बातें सामने आई हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की रिपोर्ट में हा गया है कि जांच में कई कमियां पाई गई हैं। इसके अलावा जांच में शामिल अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका की भी आशंका जताई गई है। मामले को लेकर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। बताते चलें कि एनसीबी ने दो हज़ार इक्कीस में क्रूज पर रेव पार्टी से आर्यन खान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद काफी विवाद खड़ा हुआ। बड़ी मुश्किल से उन्हें जमानत मिली। बाद में एनसीबी ने भी आर्यन खान को क्लीन चिट दे दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब समीर वानखेड़े एनसीबी के मुंबई क्षेत्र के निदेशक थे तभी आर्यन खान को क्लीन चिट दी गई थी। यह जांच रिपोर्ट एनसीबी की स्पेशल टीम की है। रिपोर्ट को दिल्ली ऑफिस भेज दिया गया है। सात से आठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। बता दें कि खान के साथ पांच अन्य लोगों को भी क्लीन चिट दी गई थी। कहा गया था कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं। आर्यन खान को पूरे बाईस दिन जेल में बिताने पड़े थे। एनसीबी के डीजी संजय सिंह ने कहा था कि अरबाद मर्जेंट ने बयान दर्ज कराया था कि उसके पास से मिली ड्रग्स आर्यन खान के लिए नहीं थी। इसके अलावा गिरफ्तारी के बाद आर्यन खान का मेडिकल ही नहीं करवाया जदा सका था। इसलिए कहा गया कि इस बात की पुष्टि नहीं हुई कि उन्होंने ड्रग्स ले रखी थी या नहीं। इसके अलावा एनसीबी ने कहा था कि किसी ड्रग्स पेडलर ने भी आर्यन को ड्रग्स देने की बात नहीं कबूली थी।
India News (इंडिया न्यूज़) Saharanpur News चंद्रभान सिंह सहारनपुर : सहारनपुर (Saharanpur News) में शिव भक्तों की सेवा में जुटे शहरवासी, लोग शिविरों में सेवा कर रहे है। जहां एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कावड़ यात्रा को लेकर सजग है और कावड़ यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए प्रयासरत है। वही सहारनपुर जिला प्रशासन भी किसी तरह की कोर कसर छोड़ने वाला नहीं है। डीएम दिनेश चंद्र खुद कांवड़ियों की सेवा में जुटे हैं। तवे पर रोटी सेक रहे हैं और शिवभक्तों को खीर परोसकर खिला रहे हैं। इस साल की कावड़ यात्रा शुरू हो चुकी है और कावड़िए गंगाजल लेकर अपने-अपने शिवालयों की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। भगवान आशुतोष जी के लिए गंगाजल लेकर लौट रहे कावड़ियों की सेवा में जिला प्रशासन भी जुड़ा हुआ है। डीएम दिनेश चंद्र कहीं फल वितरण करते हुए नजर आ रहे हैं तो कभी रोटियां सेकते हुए नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं डीएम दिनेश चंद्र , एडीएम एफ रजनीश मिश्र खुद कांवड़ शिविर में शिवभक्तों की सेवा करते हुए दिखाई दिए। उन्होंने कावड़ियों के लिए तवे पर रोटियां सेकी और खीर का प्रसाद भी वितरण किया। यह एक जिलाधिकारी की खास और अनूठी पहल सामने आई है। जिसमें जिला प्रशासन खुद आगे बढ़कर कावड़ियों की सेवा में हिस्सा लिया। सहारनपुर में 100 से अधिक कांवड़ शिविर लगाए गए हैं। उत्तराखंड की सीमा भगवानपुर से लेकर हरियाणा की सीमा यमुनानगर तक सहारनपुर में जगह-जगह शिविर लगे हैं । इन शिविरों में स्वयंसेवी संस्थाएं शिव भक्तों के लिए तरह तरह के शिविर लगाकर उनकी सेवा में जुटे हैं। वहीं, कई समाजसेवी संस्थाएं चिकित्सा शिविर भी लगाए हुए हैं । कावड़ मार्गों को रंगीन लाइटों से सजाया हुआ है। रूट को डायवर्ट भी किया गया है । इस बार जिला प्रशासन द्वारा पहल की गई जिसमें 12 फुट से अधिक ऊंची कांवड़ न ले जाने के निर्देश जारी किए गए। ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि ना हो सके। कावड़ मार्ग पर शराब की दुकानों को ढका गया है। वही अंडा और मांस की बिक्री को प्रतिबंधित किया गया है। जिलाधिकारी और एसएसपी लगातार सड़कों पर घूम कर कावड़ यात्रा का जायजा लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। वही जनता से भी अपील की जा रही है। खास बात है इसमें खुद जनपद के आम जनमानस भी पूरी तरह से भागीदारी करता हुआ दिखाई दे रहा है और शिविरों में शिव भक्तों की सेवा में खुद को जुटे हुए हैं।
India News Saharanpur News चंद्रभान सिंह सहारनपुर : सहारनपुर में शिव भक्तों की सेवा में जुटे शहरवासी, लोग शिविरों में सेवा कर रहे है। जहां एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कावड़ यात्रा को लेकर सजग है और कावड़ यात्रा को सकुशल संपन्न कराने के लिए प्रयासरत है। वही सहारनपुर जिला प्रशासन भी किसी तरह की कोर कसर छोड़ने वाला नहीं है। डीएम दिनेश चंद्र खुद कांवड़ियों की सेवा में जुटे हैं। तवे पर रोटी सेक रहे हैं और शिवभक्तों को खीर परोसकर खिला रहे हैं। इस साल की कावड़ यात्रा शुरू हो चुकी है और कावड़िए गंगाजल लेकर अपने-अपने शिवालयों की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। भगवान आशुतोष जी के लिए गंगाजल लेकर लौट रहे कावड़ियों की सेवा में जिला प्रशासन भी जुड़ा हुआ है। डीएम दिनेश चंद्र कहीं फल वितरण करते हुए नजर आ रहे हैं तो कभी रोटियां सेकते हुए नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं डीएम दिनेश चंद्र , एडीएम एफ रजनीश मिश्र खुद कांवड़ शिविर में शिवभक्तों की सेवा करते हुए दिखाई दिए। उन्होंने कावड़ियों के लिए तवे पर रोटियां सेकी और खीर का प्रसाद भी वितरण किया। यह एक जिलाधिकारी की खास और अनूठी पहल सामने आई है। जिसमें जिला प्रशासन खुद आगे बढ़कर कावड़ियों की सेवा में हिस्सा लिया। सहारनपुर में एक सौ से अधिक कांवड़ शिविर लगाए गए हैं। उत्तराखंड की सीमा भगवानपुर से लेकर हरियाणा की सीमा यमुनानगर तक सहारनपुर में जगह-जगह शिविर लगे हैं । इन शिविरों में स्वयंसेवी संस्थाएं शिव भक्तों के लिए तरह तरह के शिविर लगाकर उनकी सेवा में जुटे हैं। वहीं, कई समाजसेवी संस्थाएं चिकित्सा शिविर भी लगाए हुए हैं । कावड़ मार्गों को रंगीन लाइटों से सजाया हुआ है। रूट को डायवर्ट भी किया गया है । इस बार जिला प्रशासन द्वारा पहल की गई जिसमें बारह फुट से अधिक ऊंची कांवड़ न ले जाने के निर्देश जारी किए गए। ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि ना हो सके। कावड़ मार्ग पर शराब की दुकानों को ढका गया है। वही अंडा और मांस की बिक्री को प्रतिबंधित किया गया है। जिलाधिकारी और एसएसपी लगातार सड़कों पर घूम कर कावड़ यात्रा का जायजा लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। वही जनता से भी अपील की जा रही है। खास बात है इसमें खुद जनपद के आम जनमानस भी पूरी तरह से भागीदारी करता हुआ दिखाई दे रहा है और शिविरों में शिव भक्तों की सेवा में खुद को जुटे हुए हैं।
हरियाणा के पानीपत पुलिस के चर्चित हेड कॉन्स्टेबल आशीष कुमार की गिरफ्तारी प्रकरण में साध्वी देवा ठाकुर की एंट्री हुई है। उन्होंने आशीष के काम करने के तरीके की और उनका साथ दे रहे 20-30 लोगों की, यू-ट्यूबरों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि हर मुद्दे में हर कोई दिखावा कर रहा है। आशीष वाहवाही लूटने के लिए वीडियो बनाता था। उसके बाद यू-ट्यूबर इसे खबर का रुपए देते थे। कुछ भी बात होने पर ये 20-30 लोग इसे मुद्दा बनाने के लिए आगे जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर ये लोग इस मामले में न आते, तो शायद आशीष को जमानत मिल सकती थी। साध्वी देवा ठाकुर ने कहा कि पानीपत के SP ईमानदार हैं। उन्होंने बड़े-बड़े बदमाशों के घुटने टिकवा दिए। दूसरी बात ये है कि आशीष को अगर समाज सेवा के काम करने हैं, उसे देश सेवा करनी है तो मुझे नहीं लगता कि उसे वर्दी का इस्तेमाल करना चाहिए। वर्दी की एक गरिमा, एक प्रोटोकॉल और एक सिस्टम है। यूनिफॉर्म पहन कर वर्दी वाले अफसरों की ही बेइज्जती करने का प्रयास कर किया। अपने आप को दिखाने के लिए हर चीज की वीडियो बनाई। साध्वी देवी ठाकुर ने कहा कि उसकी खुद की पत्नी पर 5 लाख के लेन-देन का आरोप है। यानी वह गलत नहीं है, बाकी पूरा प्रशासन गलत है। इसका मतलब तो एक खुद, एक नवीन जयहिंद, 4-5 यू-ट्यूबर और 15-20 वे लोग जो साथ आंदोलन कर रहे हैं, क्या वे ही रह गए हैं आंदोलन करने के लिए। बाकी क्या पूरे हरियाणा का नाश हो गया है। ये 20-30-50 ही लोग हैं, जिन्हें धरना-प्रदर्शन करने का मौका चाहिए। इन्हें मंच व स्थान चाहिए। इनको धरने पर बैठने के लिए रोटी चाहिए। जहां भी विवाद होता है, वहां ये पहुंच जाते हैं। शायद आशीष को जमानत मिल सकती थी, अगर ये लोग न पहुंचते। गत दिनों आशीष ने शहर में TDI पुल के पास कुछ पुलिसकर्मियों और निजी वाहन चालकों की वीडियो बनाई थी। जिसमें आशीष ने रिश्वतखोरी का आरोप लगाया था। इसी बात पर वहां तैनात ASI और आशीष में बीच सड़क पर ही हाथापाई हो गई थी। जिसकी वीडियो भी आशीष ने बनाकर वायरल की थी। इस मामले में आशीष पर कई धाराओं में सेक्टर 13-17 थाना में केस दर्ज हुआ था। साथ ही उन निजी वाहन चालकों के कोर्ट में CRPC 164 के बयान दर्ज करवाए गए थे, जिनसे रुपए लेने की आशीष ने बात कही थी। इन बयानों में तीनों ड्राइवरों ने रुपए के लेन-देन की बात को इनकार कर दिया था। केस दर्ज होने का पता लगने के बाद आशीष ने खुद गिरफ्तारी देने की बात कही थी। मगर, इससे पहले ही पुलिस ने उसे उसके सरकारी क्वार्टर से गिरफ्तार कर लिया था। कोर्ट ने सभी पहलुओं को सुनने के बाद आशीष को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
हरियाणा के पानीपत पुलिस के चर्चित हेड कॉन्स्टेबल आशीष कुमार की गिरफ्तारी प्रकरण में साध्वी देवा ठाकुर की एंट्री हुई है। उन्होंने आशीष के काम करने के तरीके की और उनका साथ दे रहे बीस-तीस लोगों की, यू-ट्यूबरों की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि हर मुद्दे में हर कोई दिखावा कर रहा है। आशीष वाहवाही लूटने के लिए वीडियो बनाता था। उसके बाद यू-ट्यूबर इसे खबर का रुपए देते थे। कुछ भी बात होने पर ये बीस-तीस लोग इसे मुद्दा बनाने के लिए आगे जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर ये लोग इस मामले में न आते, तो शायद आशीष को जमानत मिल सकती थी। साध्वी देवा ठाकुर ने कहा कि पानीपत के SP ईमानदार हैं। उन्होंने बड़े-बड़े बदमाशों के घुटने टिकवा दिए। दूसरी बात ये है कि आशीष को अगर समाज सेवा के काम करने हैं, उसे देश सेवा करनी है तो मुझे नहीं लगता कि उसे वर्दी का इस्तेमाल करना चाहिए। वर्दी की एक गरिमा, एक प्रोटोकॉल और एक सिस्टम है। यूनिफॉर्म पहन कर वर्दी वाले अफसरों की ही बेइज्जती करने का प्रयास कर किया। अपने आप को दिखाने के लिए हर चीज की वीडियो बनाई। साध्वी देवी ठाकुर ने कहा कि उसकी खुद की पत्नी पर पाँच लाख के लेन-देन का आरोप है। यानी वह गलत नहीं है, बाकी पूरा प्रशासन गलत है। इसका मतलब तो एक खुद, एक नवीन जयहिंद, चार-पाँच यू-ट्यूबर और पंद्रह-बीस वे लोग जो साथ आंदोलन कर रहे हैं, क्या वे ही रह गए हैं आंदोलन करने के लिए। बाकी क्या पूरे हरियाणा का नाश हो गया है। ये बीस तीस पचास ही लोग हैं, जिन्हें धरना-प्रदर्शन करने का मौका चाहिए। इन्हें मंच व स्थान चाहिए। इनको धरने पर बैठने के लिए रोटी चाहिए। जहां भी विवाद होता है, वहां ये पहुंच जाते हैं। शायद आशीष को जमानत मिल सकती थी, अगर ये लोग न पहुंचते। गत दिनों आशीष ने शहर में TDI पुल के पास कुछ पुलिसकर्मियों और निजी वाहन चालकों की वीडियो बनाई थी। जिसमें आशीष ने रिश्वतखोरी का आरोप लगाया था। इसी बात पर वहां तैनात ASI और आशीष में बीच सड़क पर ही हाथापाई हो गई थी। जिसकी वीडियो भी आशीष ने बनाकर वायरल की थी। इस मामले में आशीष पर कई धाराओं में सेक्टर तेरह-सत्रह थाना में केस दर्ज हुआ था। साथ ही उन निजी वाहन चालकों के कोर्ट में CRPC एक सौ चौंसठ के बयान दर्ज करवाए गए थे, जिनसे रुपए लेने की आशीष ने बात कही थी। इन बयानों में तीनों ड्राइवरों ने रुपए के लेन-देन की बात को इनकार कर दिया था। केस दर्ज होने का पता लगने के बाद आशीष ने खुद गिरफ्तारी देने की बात कही थी। मगर, इससे पहले ही पुलिस ने उसे उसके सरकारी क्वार्टर से गिरफ्तार कर लिया था। कोर्ट ने सभी पहलुओं को सुनने के बाद आशीष को चौदह दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान कला एवं संस्कृति मंत्रालय, राजस्थान सरकार एवं केंद्रीय पुस्तकालय, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रमों की शृंखला चलाई जा रही है। बुधवार को सुनी पढ़ी लिखी व्याख्यान शृंखला के तहत व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान का विषय भारतीय प्रलेखी विरासत की सुरक्षा, संरक्षण एवं प्रोन्नति था। वक्ता राष्ट्रीय नाटक अकादमी, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. आरसी गौड़ थे। उनहाेंने भारत की पाण्डुलिपि संरक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर को पुस्तकालयों व प्राच्य संस्थानों के माध्यम से संजोकर रखने का संदेश दिया। इसके साथ-साथ इण्टरनेशनल मेमोरी ऑफ वर्ल्ड रजिस्टर में लुप्त होती भाषाओं के संकलन का उल्लेख किया। भारतीय प्रलेखों के डिजिटल संरक्षण पर जोर देने के साथ ही आम लोगों में इनकी सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता जताई। आम जन से सम्पर्क कर उनके पास उपलब्ध दुर्लभ पुस्तकें एवं पाण्डुलिपियों को पुस्तकालय में भेंट करने के लिए प्रोत्साहित करने पर जाेर दिया। उन्होनें बताया कि पुस्तकालयाध्यक्ष को एक मित्र, दार्शनिक एवं मार्गदर्शक के रूप में अपना कार्य, भूमिका को सम्पादित करना चाहिए। अकादमिक पुस्तकालयों में जनसमूह के को प्रवेश एवं उपयोग की सुविधा मिले, यह सभी ध्यान रखे। प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी डाॅ. नितिन गोयल ने उनके द्वारा संचालित संदर्भ पुस्तकालय की अकादमिक गतिविधियों, सुनी लिखी पढ़ी शृंखला आदि की जानकारी साझा की गई। मुख्य अतिथि महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनोद कुमार सिंह थे। उनका स्वागत डाॅ. राजेन्द्र कुमार ने किया। अंत में महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष उमेश शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। व्याख्यान का प्रसारण ऑनलाइन और ऑफलाइन दाेनाें मोड में किया गया। व्याख्यान में देश के 11 राज्यों से 250 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। बीकानेर से आर्किलाॅेजी एवं एपिग्राफी संस्था के सचिव डाॅ. राजेन्द्र कुमार, डाॅ. मोहम्मद फारूक चाैहान, डाॅ. नासिर जैदी, एजाज अहमद, डाॅ. सुखाराम, एमएल जांगिड़, राजाराम स्वर्णकार, कासिम बीकानेरी, सुरेन्द्र राजपुरोहित, कुलदीप चन्द, विमल कुमार, सितांशु ताखर, अजय कुमार आदि शामिल हुए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान कला एवं संस्कृति मंत्रालय, राजस्थान सरकार एवं केंद्रीय पुस्तकालय, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रमों की शृंखला चलाई जा रही है। बुधवार को सुनी पढ़ी लिखी व्याख्यान शृंखला के तहत व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान का विषय भारतीय प्रलेखी विरासत की सुरक्षा, संरक्षण एवं प्रोन्नति था। वक्ता राष्ट्रीय नाटक अकादमी, नई दिल्ली के निदेशक प्रो. आरसी गौड़ थे। उनहाेंने भारत की पाण्डुलिपि संरक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर को पुस्तकालयों व प्राच्य संस्थानों के माध्यम से संजोकर रखने का संदेश दिया। इसके साथ-साथ इण्टरनेशनल मेमोरी ऑफ वर्ल्ड रजिस्टर में लुप्त होती भाषाओं के संकलन का उल्लेख किया। भारतीय प्रलेखों के डिजिटल संरक्षण पर जोर देने के साथ ही आम लोगों में इनकी सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए जागरुकता पैदा करने की आवश्यकता जताई। आम जन से सम्पर्क कर उनके पास उपलब्ध दुर्लभ पुस्तकें एवं पाण्डुलिपियों को पुस्तकालय में भेंट करने के लिए प्रोत्साहित करने पर जाेर दिया। उन्होनें बताया कि पुस्तकालयाध्यक्ष को एक मित्र, दार्शनिक एवं मार्गदर्शक के रूप में अपना कार्य, भूमिका को सम्पादित करना चाहिए। अकादमिक पुस्तकालयों में जनसमूह के को प्रवेश एवं उपयोग की सुविधा मिले, यह सभी ध्यान रखे। प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी डाॅ. नितिन गोयल ने उनके द्वारा संचालित संदर्भ पुस्तकालय की अकादमिक गतिविधियों, सुनी लिखी पढ़ी शृंखला आदि की जानकारी साझा की गई। मुख्य अतिथि महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनोद कुमार सिंह थे। उनका स्वागत डाॅ. राजेन्द्र कुमार ने किया। अंत में महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष उमेश शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। व्याख्यान का प्रसारण ऑनलाइन और ऑफलाइन दाेनाें मोड में किया गया। व्याख्यान में देश के ग्यारह राज्यों से दो सौ पचास से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। बीकानेर से आर्किलाॅेजी एवं एपिग्राफी संस्था के सचिव डाॅ. राजेन्द्र कुमार, डाॅ. मोहम्मद फारूक चाैहान, डाॅ. नासिर जैदी, एजाज अहमद, डाॅ. सुखाराम, एमएल जांगिड़, राजाराम स्वर्णकार, कासिम बीकानेरी, सुरेन्द्र राजपुरोहित, कुलदीप चन्द, विमल कुमार, सितांशु ताखर, अजय कुमार आदि शामिल हुए। This website follows the DNPA Code of Ethics.
छतरपुर, मध्यप्रदेश। देश-प्रदेश में लगातार हादसों की तादाद बढ़ती ही जा रही है, एक के बाद एक हो रहे सड़क हादसे में लोगों को जिंदगी गंवानी पड़ रही है। अब यूपी के बांदा में हुए भीषण सड़क दुर्घटना में मध्यप्रदेश के चार लोगों की मौत दर्दनाक मौत हो गई है। हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत : मिली जानकारी के मुताबिक नई नौकरी लगने की खुशी में छतरपुर निवासी एक परिवार बनारस दर्शन करने गया था। तभी लौटते समय ये दर्दनाक हादसा हुआ है। मध्य प्रदेश के छतरपुर निवासी परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, इस भीषण सड़क हादसे में पति, पत्नी, मां और बच्ची की मौत हो गई। इस दुर्घटना की जानकारी लगते ही पुलिस मौके पर पहुंची, पुलिस ने बताया कि छतरपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में ग्रीन एवेन्यू निवासी राकेश सिंह ग्रेनाइट कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्य करते थे, उनकी नई नौकरी लगने की खुशी में राकेश सिंह अपने परिवार के साथ काशी विश्वनाथ बनारस दर्शन करके लौट रहे थे। तभी लौटते समय बांदा जिले में उनकी कार पेड़ से टकरा गई। इस दुर्घटना में परिवार के तीन सदस्यों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई जबकि 10 वर्षीय पुत्री ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। सीएम शिवराज ने ट्वीट कर जताया दुःख : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बनारस, उत्तरप्रदेश से दर्शन कर लौट रहे छतरपुर जिले के एक ही परिवार के 4 सदस्यों के सड़क दुर्घटना में असामयिक निधन पर गहन शोक व्यक्त किया है। सीएम ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति व परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। प्रदेश में बढ़ती ही जा रही है सड़क हादसों की तादाद : बताते चलें कि, प्रदेश में लगातार सड़क हादसों की तादाद बढ़ती ही जा रही है। प्रदेश में लगातार हो रहे हादसों पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करने की ज़रूरत है। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
छतरपुर, मध्यप्रदेश। देश-प्रदेश में लगातार हादसों की तादाद बढ़ती ही जा रही है, एक के बाद एक हो रहे सड़क हादसे में लोगों को जिंदगी गंवानी पड़ रही है। अब यूपी के बांदा में हुए भीषण सड़क दुर्घटना में मध्यप्रदेश के चार लोगों की मौत दर्दनाक मौत हो गई है। हादसे में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत : मिली जानकारी के मुताबिक नई नौकरी लगने की खुशी में छतरपुर निवासी एक परिवार बनारस दर्शन करने गया था। तभी लौटते समय ये दर्दनाक हादसा हुआ है। मध्य प्रदेश के छतरपुर निवासी परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, इस भीषण सड़क हादसे में पति, पत्नी, मां और बच्ची की मौत हो गई। इस दुर्घटना की जानकारी लगते ही पुलिस मौके पर पहुंची, पुलिस ने बताया कि छतरपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में ग्रीन एवेन्यू निवासी राकेश सिंह ग्रेनाइट कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्य करते थे, उनकी नई नौकरी लगने की खुशी में राकेश सिंह अपने परिवार के साथ काशी विश्वनाथ बनारस दर्शन करके लौट रहे थे। तभी लौटते समय बांदा जिले में उनकी कार पेड़ से टकरा गई। इस दुर्घटना में परिवार के तीन सदस्यों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई जबकि दस वर्षीय पुत्री ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। सीएम शिवराज ने ट्वीट कर जताया दुःख : मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बनारस, उत्तरप्रदेश से दर्शन कर लौट रहे छतरपुर जिले के एक ही परिवार के चार सदस्यों के सड़क दुर्घटना में असामयिक निधन पर गहन शोक व्यक्त किया है। सीएम ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति व परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। प्रदेश में बढ़ती ही जा रही है सड़क हादसों की तादाद : बताते चलें कि, प्रदेश में लगातार सड़क हादसों की तादाद बढ़ती ही जा रही है। प्रदेश में लगातार हो रहे हादसों पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करने की ज़रूरत है। ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
हैं। ग्रन्थके अन्तम ब्रह्मदेवके अतिरिक्त वर्णनोंकी उपेक्षा करके उन्होंने केवल शब्दशः अनुवादकी ओर ही विशेष ध्यान दिया है । 'पंडवरामहि' आदि पद्यके बाद बालचन्द्र एक और पद्य देते हैं, जो इस प्रकार हैजं अल्लीणा जीवा तरति संसारसायरमणंतं । तं भव्यजीवसज्मं णंदउ जिणसासणं सुइरं ॥ बालचन्द्र नामके अन्य लेखक-कन्नड़- साहित्य में बालचन्द नामके अनेक टीकाकार तथा ग्रन्थकार हुए हैं, और उनके बारेमें जो कुछ सूचनाएं प्राप्त होती हैं, उनके आधार पर एकको दूसरेसे पृथक् करना कठिन है। म० आर० नरसिंहाचार्य बालचन्द्र नामके चार व्यक्तियों को बतलाते हैं। अभिनवपम्पके गुरु बालचन्द्र मुनिके बारेमें लिखते हुए श्री एम्० गोविंद पै लगभग नौ बालचन्द्रौका उल्लेख करते हैं। किन्तु 'कुक्कुटासन मलधारि' पदवीके कारण यह बालचन्द्र अन्य बालचन्द्रोंसे जुड़े हो जाते हैं। अपने समाननामा अन्य व्यक्तियों से अपनेको जुदा करने के लिये कुछ साधुजन अपने नाम के साथ मलधारि विशेषण लगाते थे। श्रवणबेलगोला के शिलालेखों में ऐसे मुनियोंका उल्लेख मिलता है, जैसे, मलघारि मलिषेण, मलधारि रामचन्द्र, मलधारि हेमचन्द्र, दिगम्बर और श्वेताम्बर दोनों ही सम्प्रदायके मुनिजन इस पदवीका उपयोग करते थे । श्वेताम्बर सम्प्रदाय में भी एक मलधारि हेमचन्द्र हुए हैं, जो प्रसिद्ध हेमचन्द्रसे जुड़े हैं। मलधारि बालचन्द्रका समय - अपनेको 'कुक्कुटासन मलधारि ' लिखने के सिवा इन बालचन्द्रने अपने बारे में कुछ भी नहीं लिखा । अतः इनका समय निश्चित करना विशेष कठिन है। श्रवणबेल गोल के शिलालेखों में व्यक्तिगत नामोंके रूपमें 'मलधारिदेव' और 'कुक्कुटासन मलधारिदेव ' शब्द आते हैं। किन्तु इसमें सन्देह नहीं कि यह हमारे बालचन्द्रकी पदवी है। संभवतः यह किसी प्रसिद्ध आचार्यका नाम था, और उनकी परम्परा के साधुगण इसे पदवीके तौरपर धारण करते थे। शक सं० १२०० ( ई० १२७८ ) के अमरपुरम् समाधि-लेख में, जिसमें एक जैनमन्दिरको कुछ दान देनेका उल्लेख है, बालेन्दु मलधारिदेवका नाम आता है । यद्यपि नाम में इन्दु और चन्द्रका परस्पर में परिवर्तन देखा जाता है, फिर भी वह बालेन्दु हमारे बालचन्द्र नहीं हो सकते, क्योंकि उनके नाम के साथ कुक्कुटासन उपाधि नहीं है, तथा उनका समय भी हमारे टीकाकारसे पहले जाता है। हमारे टीकाकारके बारे में इतनी बात निश्चित है कि वे ब्रह्मदेव के बाद में हुए हैं क्योंकि उन्होंने ब्रह्मदेवकी टीकाका अनुसरण किया है, और जाँच पड़ताल करने के बाद हमने ब्रह्मदेवका समय ईसाकी तेरहवीं शताब्दी निर्णीत किया है । बालचन्द्र कर्नाटकी थे, संभवतः श्रवणबेलगोलाके निकट किसी स्थानपर वे रहते थे । किन्तु ब्रह्मदेव उत्तरप्रान्तके वासी थे अतः दोनों टीकाकारों के बीच में कमसे कम आधी शताब्दीका अन्तर अवश्य मानना होगा, क्योंकि उस समयकी यात्रा आदिकी परिस्थितिको देखते हुए, दक्षिण प्रान्तवासी बालचन्द्र के हाथ में उत्तर प्रान्तवासी ब्रह्मदेवकी टीकाके पहुँचने में इतना समय लग जाना संभव है । अतः बालचन्द्रको ईसाकी चौदहवीं शताब्दी के मध्यका विद्वान् माना जा सकता है। अध्यात्मी बालचन्द्रकी टीका - म०आर० नरसिंहाचार्यका कहना है कि अध्यात्मी बालचन्द्रने भी परमात्मप्रकाशपर कनड़ी में एक टीका बनाई थी, किन्तु इन तीनों कन्नड़टीकाओं से कोई भी उनकी नहीं है। उन्होंने मुझे सूचित किया है कि कविचरितेके उल्लेखोंको छोड़कर उनके पास इस सम्बन्ध में कोई अन्य सामग्री नहीं है। यद्यपि यह कोई अनहोनी बात नहीं है कि अध्यात्मी बालचन्द्रने कुन्दकुन्दके प्राकृत ग्रन्थोंपर अपनी कन्नड़टीकाओं की तरह परमात्मप्रकाशपर भी टीका लिखी होगी किन्तु निश्चयपूर्वक कुछ कहना कठिन है, क्योंकि एक तो कविचरितेका उल्लेख बहुत कमज़ोर है, दूसरे यह भी संभव है कि गलतीसे बालचन्द्र मलधारिके स्थान में बालचन्द्र अध्यात्मी लिखा गया हो। और एक कन्नड़टीका परमात्मप्रकाशपर दूसरी कशइटीका- यहाँ परमात्मप्रकाशकी दूसरी कन्नइटीकाका परिचय दिया जाता है। इस टीकाके समय तथा कर्ता के बारे में हम कोई बात नहीं जान सके। प्रतिके अंतमें लिखा है- "मुनिभद्रस्वामीके चरण शरण है। " इससे इतना पता चलता है कि इस कन्नड़टीकाका रचयिता या इस प्रति अथवा इस प्रतिकी मूल प्रतिका लेखक मुनिभद्रस्वामीका शिष्य था । इस टीकाका परिचय - 'क' टीकाकी तरह इस टीका में भी दोहोका केवल शब्दार्थ दिया है; किन्तु इस टीकाकी अपेक्षा 'क' टीकामै मूलका अनुसरण वगैरह अधिक तत्परता से किया गया है। बिना नामकी इन टीकाओंके देखने से पता चलता है कि धार्मिक जैनसाधुओं और गृहस्थों में परमात्मप्रकाश कितना अधिक प्रसिद्ध था। ऐसा मालूम होता है कि बहुत से नये अभ्यासी अपने अध्यापकसे दोहोंका अर्थ समझ लेनेके बाद अपनी मातृभाषा में उनके शब्दार्थ लिख लेते थे । अन्य टीकाओं के साथ इस टीकाकी तुलना- 'क' प्रतिको टीका, ब्रह्मदेवकी संस्कृतटीका और मलधारि बालचन्द्रकी कन्नइटीकाके साथ इसकी तुलना करनेपर मैं इस निर्णयपर पहुँचा हूँ कि यद्यपि इसके पाठ ' क ' टीका आदिके पाठोंसे बहुत मिलते जुलते हैं तथापि यह टीका ब्रह्मदेवकी बहुत कुछ ऋणी है । अतः इस टीकामें केवल शब्दार्थ दिया है, अतः ब्रह्मदेवके अतिरिक्त वर्णन इसमें नहीं मिलते । 'क' टीका और इस टीकाकी समानताको देखते हुए यह संभव है कि इस टीकाके कर्ताने 'क' टीका से भी सहायता ली हो । मैंने इस टीकामें ऐसी कोई मौलिक अशुद्धियाँ और पाठान्तर नहीं देखे, जिनके आधारपर इसे ब्रह्मदेवकी संस्कृतटीकासे स्वतंत्र कहा जा सके । इस टीकाका समय - ऊपरकी तुलनासे यह स्पष्ट है कि यह टीका ब्रह्मदेवसे और संभवतः मलघारि बालचन्द्र से भी बाकी हैं। यदि इसके कर्ता मुनिभद्र के शिष्य है, और यदि यह मुनिभद्र वही हैं जिनकी मृत्युका उल्लेख ई० सन् १३८८ के लगभगके उद्री शिलालेखमें पाया जाता है; तो इस टीकाकी रचना ईसाकी १४वी शताब्दीके अन्तिम भाग में हो सकती है। ऐसा मालूम होता है कि मुनिभद्र के अनेक प्रसिद्ध शिष्य थे, जिनकी मृत्युका उल्लेख कुछ शिलालेखों में पाया जाता है। पं० दौलतरामजीकृत भाषाटीका पं० दौलतरामजी और उनकी भाषाटीका-पं. दौलतरामजीकी भाषाटीका, जो इस संस्करण में मुद्रित है, उनकी भाषाका आधुनिक हिन्दी में परिवर्तित रूप है। दौलतरामजीकी भाषा, जो संभवतः उनके समयमें उनकी जन्मभूमि में प्रचलित थी, आधुनिक हिन्दीसे भिन्न है। इस विचारसे कि जैनगृहस्थों और साधुओंको यह विशेष उपयोगी होगी। पं. मनोहरलालजीने उसे आधुनिक हिन्दीका रूप दे दिया है। मामूली संशोधनके साथ यही रूपान्तर इस दूसरे संस्करण में छपा है । यहाँ मैं दौलतरामजीके अनुवादका कुछ अंश उद्धृत करता हूँ, इससे पाठक उनकी भाषाका अनुमान कर सकेंगेबहुरि तिनि सिद्धिनिके समूहिकं में वन्दू हूँ । जे सिद्धिनिके समूहि निश्चयनयकार अपने स्वरूप विषे तिष्ठे हैं, अरि विवहारिनयकरि सर्व लोकालोककूं निसन्देहपर्णे प्रत्तक्ष देखे हैं। परन्तु परिपदार्थनि विषै तन्मयी नाहीं, अपने स्वरूपविषै तन्मयी हैं। जो परपदार्थनिविषे तन्मयी होई तो पराए सुख दुखकर आप सुखी दुखी होई, सो कदापि नाहीं । विवहारिनयकार स्थूल सूक्ष्म सकलि कूं केवलिशानि करि प्रतक्ष निसन्देह जाने हैं। काहू पदार्थसु रागि द्वेष नाहीं । रागिके हेतुकार जो काहुँको जाने तो राग द्वेषमई होय, सो इह बड़ा दूषण हैं । तातैं यही निश्चयभया जो निश्चयकर अपने स्वरूप विषैतिष्ठै हैं, पर विषै नाहीं । अरि अपनी शायक शक्ति करि साबैकं प्रतक्ष देखे हैं जाने हैं। जो निश्चयकर अपने स्वरूप विषे निवास कह्या सो अपना स्वरूपही आराधिवे योग्य है यह भावार्थ है ॥ ५ ॥ सोलापुरकी एक नई प्रतिसे मैंने यह अंश उद्धृत किया है, और बम्बईकी एक प्राचीन प्रतिके सहारे श्री प्रेमीजीने इसका संशोधन किया है। पं० प्रेमीजीका कहना है कि कुछ अन्य प्राचीन प्रतियोंके साथ इसका मिलान करनेपर अब भी भाषासम्बन्धी कुछ भेद निकल सकते हैं। क्योंकि इसे प्रचलित भाषा में लाने के लिये नकल करते समय शिक्षित लेखक यहाँ वहाँ भाषासम्बन्धी सुधार कर सकता है। अपभ्रंश - साहित्यके विद्यार्थियों को इससे एक अच्छी शिक्षा मिलती है और अपभ्रंश ग्रन्थोंकी विभिन्न प्रतियों में जो स्वरभेद देखा जाता है, उसपर भी प्रकाश पड़ता है ।
हैं। ग्रन्थके अन्तम ब्रह्मदेवके अतिरिक्त वर्णनोंकी उपेक्षा करके उन्होंने केवल शब्दशः अनुवादकी ओर ही विशेष ध्यान दिया है । 'पंडवरामहि' आदि पद्यके बाद बालचन्द्र एक और पद्य देते हैं, जो इस प्रकार हैजं अल्लीणा जीवा तरति संसारसायरमणंतं । तं भव्यजीवसज्मं णंदउ जिणसासणं सुइरं ॥ बालचन्द्र नामके अन्य लेखक-कन्नड़- साहित्य में बालचन्द नामके अनेक टीकाकार तथा ग्रन्थकार हुए हैं, और उनके बारेमें जो कुछ सूचनाएं प्राप्त होती हैं, उनके आधार पर एकको दूसरेसे पृथक् करना कठिन है। मशून्य आरशून्य नरसिंहाचार्य बालचन्द्र नामके चार व्यक्तियों को बतलाते हैं। अभिनवपम्पके गुरु बालचन्द्र मुनिके बारेमें लिखते हुए श्री एम्शून्य गोविंद पै लगभग नौ बालचन्द्रौका उल्लेख करते हैं। किन्तु 'कुक्कुटासन मलधारि' पदवीके कारण यह बालचन्द्र अन्य बालचन्द्रोंसे जुड़े हो जाते हैं। अपने समाननामा अन्य व्यक्तियों से अपनेको जुदा करने के लिये कुछ साधुजन अपने नाम के साथ मलधारि विशेषण लगाते थे। श्रवणबेलगोला के शिलालेखों में ऐसे मुनियोंका उल्लेख मिलता है, जैसे, मलघारि मलिषेण, मलधारि रामचन्द्र, मलधारि हेमचन्द्र, दिगम्बर और श्वेताम्बर दोनों ही सम्प्रदायके मुनिजन इस पदवीका उपयोग करते थे । श्वेताम्बर सम्प्रदाय में भी एक मलधारि हेमचन्द्र हुए हैं, जो प्रसिद्ध हेमचन्द्रसे जुड़े हैं। मलधारि बालचन्द्रका समय - अपनेको 'कुक्कुटासन मलधारि ' लिखने के सिवा इन बालचन्द्रने अपने बारे में कुछ भी नहीं लिखा । अतः इनका समय निश्चित करना विशेष कठिन है। श्रवणबेल गोल के शिलालेखों में व्यक्तिगत नामोंके रूपमें 'मलधारिदेव' और 'कुक्कुटासन मलधारिदेव ' शब्द आते हैं। किन्तु इसमें सन्देह नहीं कि यह हमारे बालचन्द्रकी पदवी है। संभवतः यह किसी प्रसिद्ध आचार्यका नाम था, और उनकी परम्परा के साधुगण इसे पदवीके तौरपर धारण करते थे। शक संशून्य एक हज़ार दो सौ के अमरपुरम् समाधि-लेख में, जिसमें एक जैनमन्दिरको कुछ दान देनेका उल्लेख है, बालेन्दु मलधारिदेवका नाम आता है । यद्यपि नाम में इन्दु और चन्द्रका परस्पर में परिवर्तन देखा जाता है, फिर भी वह बालेन्दु हमारे बालचन्द्र नहीं हो सकते, क्योंकि उनके नाम के साथ कुक्कुटासन उपाधि नहीं है, तथा उनका समय भी हमारे टीकाकारसे पहले जाता है। हमारे टीकाकारके बारे में इतनी बात निश्चित है कि वे ब्रह्मदेव के बाद में हुए हैं क्योंकि उन्होंने ब्रह्मदेवकी टीकाका अनुसरण किया है, और जाँच पड़ताल करने के बाद हमने ब्रह्मदेवका समय ईसाकी तेरहवीं शताब्दी निर्णीत किया है । बालचन्द्र कर्नाटकी थे, संभवतः श्रवणबेलगोलाके निकट किसी स्थानपर वे रहते थे । किन्तु ब्रह्मदेव उत्तरप्रान्तके वासी थे अतः दोनों टीकाकारों के बीच में कमसे कम आधी शताब्दीका अन्तर अवश्य मानना होगा, क्योंकि उस समयकी यात्रा आदिकी परिस्थितिको देखते हुए, दक्षिण प्रान्तवासी बालचन्द्र के हाथ में उत्तर प्रान्तवासी ब्रह्मदेवकी टीकाके पहुँचने में इतना समय लग जाना संभव है । अतः बालचन्द्रको ईसाकी चौदहवीं शताब्दी के मध्यका विद्वान् माना जा सकता है। अध्यात्मी बालचन्द्रकी टीका - मशून्यआरशून्य नरसिंहाचार्यका कहना है कि अध्यात्मी बालचन्द्रने भी परमात्मप्रकाशपर कनड़ी में एक टीका बनाई थी, किन्तु इन तीनों कन्नड़टीकाओं से कोई भी उनकी नहीं है। उन्होंने मुझे सूचित किया है कि कविचरितेके उल्लेखोंको छोड़कर उनके पास इस सम्बन्ध में कोई अन्य सामग्री नहीं है। यद्यपि यह कोई अनहोनी बात नहीं है कि अध्यात्मी बालचन्द्रने कुन्दकुन्दके प्राकृत ग्रन्थोंपर अपनी कन्नड़टीकाओं की तरह परमात्मप्रकाशपर भी टीका लिखी होगी किन्तु निश्चयपूर्वक कुछ कहना कठिन है, क्योंकि एक तो कविचरितेका उल्लेख बहुत कमज़ोर है, दूसरे यह भी संभव है कि गलतीसे बालचन्द्र मलधारिके स्थान में बालचन्द्र अध्यात्मी लिखा गया हो। और एक कन्नड़टीका परमात्मप्रकाशपर दूसरी कशइटीका- यहाँ परमात्मप्रकाशकी दूसरी कन्नइटीकाका परिचय दिया जाता है। इस टीकाके समय तथा कर्ता के बारे में हम कोई बात नहीं जान सके। प्रतिके अंतमें लिखा है- "मुनिभद्रस्वामीके चरण शरण है। " इससे इतना पता चलता है कि इस कन्नड़टीकाका रचयिता या इस प्रति अथवा इस प्रतिकी मूल प्रतिका लेखक मुनिभद्रस्वामीका शिष्य था । इस टीकाका परिचय - 'क' टीकाकी तरह इस टीका में भी दोहोका केवल शब्दार्थ दिया है; किन्तु इस टीकाकी अपेक्षा 'क' टीकामै मूलका अनुसरण वगैरह अधिक तत्परता से किया गया है। बिना नामकी इन टीकाओंके देखने से पता चलता है कि धार्मिक जैनसाधुओं और गृहस्थों में परमात्मप्रकाश कितना अधिक प्रसिद्ध था। ऐसा मालूम होता है कि बहुत से नये अभ्यासी अपने अध्यापकसे दोहोंका अर्थ समझ लेनेके बाद अपनी मातृभाषा में उनके शब्दार्थ लिख लेते थे । अन्य टीकाओं के साथ इस टीकाकी तुलना- 'क' प्रतिको टीका, ब्रह्मदेवकी संस्कृतटीका और मलधारि बालचन्द्रकी कन्नइटीकाके साथ इसकी तुलना करनेपर मैं इस निर्णयपर पहुँचा हूँ कि यद्यपि इसके पाठ ' क ' टीका आदिके पाठोंसे बहुत मिलते जुलते हैं तथापि यह टीका ब्रह्मदेवकी बहुत कुछ ऋणी है । अतः इस टीकामें केवल शब्दार्थ दिया है, अतः ब्रह्मदेवके अतिरिक्त वर्णन इसमें नहीं मिलते । 'क' टीका और इस टीकाकी समानताको देखते हुए यह संभव है कि इस टीकाके कर्ताने 'क' टीका से भी सहायता ली हो । मैंने इस टीकामें ऐसी कोई मौलिक अशुद्धियाँ और पाठान्तर नहीं देखे, जिनके आधारपर इसे ब्रह्मदेवकी संस्कृतटीकासे स्वतंत्र कहा जा सके । इस टीकाका समय - ऊपरकी तुलनासे यह स्पष्ट है कि यह टीका ब्रह्मदेवसे और संभवतः मलघारि बालचन्द्र से भी बाकी हैं। यदि इसके कर्ता मुनिभद्र के शिष्य है, और यदि यह मुनिभद्र वही हैं जिनकी मृत्युका उल्लेख ईशून्य सन् एक हज़ार तीन सौ अठासी के लगभगके उद्री शिलालेखमें पाया जाता है; तो इस टीकाकी रचना ईसाकी चौदहवी शताब्दीके अन्तिम भाग में हो सकती है। ऐसा मालूम होता है कि मुनिभद्र के अनेक प्रसिद्ध शिष्य थे, जिनकी मृत्युका उल्लेख कुछ शिलालेखों में पाया जाता है। पंशून्य दौलतरामजीकृत भाषाटीका पंशून्य दौलतरामजी और उनकी भाषाटीका-पं. दौलतरामजीकी भाषाटीका, जो इस संस्करण में मुद्रित है, उनकी भाषाका आधुनिक हिन्दी में परिवर्तित रूप है। दौलतरामजीकी भाषा, जो संभवतः उनके समयमें उनकी जन्मभूमि में प्रचलित थी, आधुनिक हिन्दीसे भिन्न है। इस विचारसे कि जैनगृहस्थों और साधुओंको यह विशेष उपयोगी होगी। पं. मनोहरलालजीने उसे आधुनिक हिन्दीका रूप दे दिया है। मामूली संशोधनके साथ यही रूपान्तर इस दूसरे संस्करण में छपा है । यहाँ मैं दौलतरामजीके अनुवादका कुछ अंश उद्धृत करता हूँ, इससे पाठक उनकी भाषाका अनुमान कर सकेंगेबहुरि तिनि सिद्धिनिके समूहिकं में वन्दू हूँ । जे सिद्धिनिके समूहि निश्चयनयकार अपने स्वरूप विषे तिष्ठे हैं, अरि विवहारिनयकरि सर्व लोकालोककूं निसन्देहपर्णे प्रत्तक्ष देखे हैं। परन्तु परिपदार्थनि विषै तन्मयी नाहीं, अपने स्वरूपविषै तन्मयी हैं। जो परपदार्थनिविषे तन्मयी होई तो पराए सुख दुखकर आप सुखी दुखी होई, सो कदापि नाहीं । विवहारिनयकार स्थूल सूक्ष्म सकलि कूं केवलिशानि करि प्रतक्ष निसन्देह जाने हैं। काहू पदार्थसु रागि द्वेष नाहीं । रागिके हेतुकार जो काहुँको जाने तो राग द्वेषमई होय, सो इह बड़ा दूषण हैं । तातैं यही निश्चयभया जो निश्चयकर अपने स्वरूप विषैतिष्ठै हैं, पर विषै नाहीं । अरि अपनी शायक शक्ति करि साबैकं प्रतक्ष देखे हैं जाने हैं। जो निश्चयकर अपने स्वरूप विषे निवास कह्या सो अपना स्वरूपही आराधिवे योग्य है यह भावार्थ है ॥ पाँच ॥ सोलापुरकी एक नई प्रतिसे मैंने यह अंश उद्धृत किया है, और बम्बईकी एक प्राचीन प्रतिके सहारे श्री प्रेमीजीने इसका संशोधन किया है। पंशून्य प्रेमीजीका कहना है कि कुछ अन्य प्राचीन प्रतियोंके साथ इसका मिलान करनेपर अब भी भाषासम्बन्धी कुछ भेद निकल सकते हैं। क्योंकि इसे प्रचलित भाषा में लाने के लिये नकल करते समय शिक्षित लेखक यहाँ वहाँ भाषासम्बन्धी सुधार कर सकता है। अपभ्रंश - साहित्यके विद्यार्थियों को इससे एक अच्छी शिक्षा मिलती है और अपभ्रंश ग्रन्थोंकी विभिन्न प्रतियों में जो स्वरभेद देखा जाता है, उसपर भी प्रकाश पड़ता है ।
Gupt Navratri 2022 : 2 फरवरी से गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri) शुरू होगी। ज्योतिषियों के अनुसार माघ माह की इस गुप्त नवरात्रि में देवी व तंत्र साधकों के लिए ही होती है लेकिन अब आम श्रद्धालुओं द्वारा भी देवी मंदिरों में पूजन अर्चन के साथ दर्शन करने का लाभ लिया जाता है। साल में चार बार नवरात्रि आती है। इनमें से दो प्राकट्य व दो गुप्त होती है। प्राकट्य चैत्र व कुंवार माह में होती है। ज्योतिषियों ने बताया कि वर्ष में दो बार आने वाली गुप्त नवरात्रि गुप्त तरह की साधना करने के लिए अति श्रेष्ठ रहती है। यही कारण होता है कि उज्जैन, कामख्या, बगुलामखी जैसे सिद्ध स्थानों पर तंत्र व देवी साधम नौ दिनों में जुटकर साधना करते है। वैसे सामान्य लोगों के लिए गुप्त नवरात्रि मान्य नहीं होती है लेकिन इसके बाद भी कुछ वर्षों से ये गुप्त नवरात्रि लोगों के लिए महत्व रखने लगी है। ज्योतिषियों के अनुसार नौ दिनों तक सामान्य पूजन अर्चन करना चाहिए। सुबह शाम माता की आराधना पूजन करने के साथ यथा योग्य भोग अर्पण कर सुख समृद्धि की प्रार्थना करें तो निश्चित ही देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। तंत्र व देवी साधक उज्जैन के साथ ही अन्य शक्तिपीठों का महत्व गुप्त नवरात्रि में अधिक मानते है। उज्जैन में भी हरसिद्धि मंदिर एक शक्तिपीठ है। इस शक्तिपीठ की स्थिति को लेकर विद्वानों में मतभेद हैं। कुछ उज्जैन के निकट शिप्रा नदी के तट पर स्थित भैरवपर्वत को, तो कुछ गुजरात के गिरनार पर्वत के सन्निकट भैरवपर्वत को वास्तविक शक्तिपीठ मानते हैं। दोनों ही स्थानों पर शक्तिपीठ की मान्यता है। हिन्दू धर्म के पुराणों के अनुसार जहां-जहां सती के अंग के टुकड़े, धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ अस्तित्व में आये। देवी पुराण में 51 शक्तिपीठों का वर्णन है।
Gupt Navratri दो हज़ार बाईस : दो फरवरी से गुप्त नवरात्रि शुरू होगी। ज्योतिषियों के अनुसार माघ माह की इस गुप्त नवरात्रि में देवी व तंत्र साधकों के लिए ही होती है लेकिन अब आम श्रद्धालुओं द्वारा भी देवी मंदिरों में पूजन अर्चन के साथ दर्शन करने का लाभ लिया जाता है। साल में चार बार नवरात्रि आती है। इनमें से दो प्राकट्य व दो गुप्त होती है। प्राकट्य चैत्र व कुंवार माह में होती है। ज्योतिषियों ने बताया कि वर्ष में दो बार आने वाली गुप्त नवरात्रि गुप्त तरह की साधना करने के लिए अति श्रेष्ठ रहती है। यही कारण होता है कि उज्जैन, कामख्या, बगुलामखी जैसे सिद्ध स्थानों पर तंत्र व देवी साधम नौ दिनों में जुटकर साधना करते है। वैसे सामान्य लोगों के लिए गुप्त नवरात्रि मान्य नहीं होती है लेकिन इसके बाद भी कुछ वर्षों से ये गुप्त नवरात्रि लोगों के लिए महत्व रखने लगी है। ज्योतिषियों के अनुसार नौ दिनों तक सामान्य पूजन अर्चन करना चाहिए। सुबह शाम माता की आराधना पूजन करने के साथ यथा योग्य भोग अर्पण कर सुख समृद्धि की प्रार्थना करें तो निश्चित ही देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। तंत्र व देवी साधक उज्जैन के साथ ही अन्य शक्तिपीठों का महत्व गुप्त नवरात्रि में अधिक मानते है। उज्जैन में भी हरसिद्धि मंदिर एक शक्तिपीठ है। इस शक्तिपीठ की स्थिति को लेकर विद्वानों में मतभेद हैं। कुछ उज्जैन के निकट शिप्रा नदी के तट पर स्थित भैरवपर्वत को, तो कुछ गुजरात के गिरनार पर्वत के सन्निकट भैरवपर्वत को वास्तविक शक्तिपीठ मानते हैं। दोनों ही स्थानों पर शक्तिपीठ की मान्यता है। हिन्दू धर्म के पुराणों के अनुसार जहां-जहां सती के अंग के टुकड़े, धारण किए वस्त्र या आभूषण गिरे, वहां-वहां शक्तिपीठ अस्तित्व में आये। देवी पुराण में इक्यावन शक्तिपीठों का वर्णन है।
गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, पेशे से टीवी मैकेनिक तस्लीम फेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुप से लड़कियों के नंबर लेता था। उसके पास एक फेक आईडी से लिया हुआ सिम कार्ड भी था। पीलीभीत कोतवाली थाने के एसएचओ श्रीकांत द्विवेदी ने कहा कि आरोपी पर आईपीसी की धारा 294 (सार्वजनिक रूप से अश्लील हरकत करना) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसएचओ ने आगे कहा, "आरोपी को जेल भेज दिया गया है। " (आईएएनएस)
गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, पेशे से टीवी मैकेनिक तस्लीम फेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुप से लड़कियों के नंबर लेता था। उसके पास एक फेक आईडी से लिया हुआ सिम कार्ड भी था। पीलीभीत कोतवाली थाने के एसएचओ श्रीकांत द्विवेदी ने कहा कि आरोपी पर आईपीसी की धारा दो सौ चौरानवे और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा सरसठ के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसएचओ ने आगे कहा, "आरोपी को जेल भेज दिया गया है। "
(जीएनएस) 18 जनवरी, उज्जैन। चिकित्सक के रूप में कमतर लागत व अच्छी सेवाएं दे रहे वैकल्पिक चिकित्सकों डॉ. आकिल खान, डॉ. शकील अंसारी, राजेन्द्र सोलंकी, इमरान खान व संघ सदस्यों का सम्मान भोपाल में योद्धा अवार्ड से सम्मान हुआ। उज्जैन आने पर सभी का मशाल एज्युकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी द्वारा सम्मान किया गया।
अट्ठारह जनवरी, उज्जैन। चिकित्सक के रूप में कमतर लागत व अच्छी सेवाएं दे रहे वैकल्पिक चिकित्सकों डॉ. आकिल खान, डॉ. शकील अंसारी, राजेन्द्र सोलंकी, इमरान खान व संघ सदस्यों का सम्मान भोपाल में योद्धा अवार्ड से सम्मान हुआ। उज्जैन आने पर सभी का मशाल एज्युकेशनल एंड वेलफेयर सोसायटी द्वारा सम्मान किया गया।
सोनीपत, 12 फरवरी (निस) कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में बिजली लाइन में आई खराबी को ठीक करते हुए अचानक करंट लगने से लाइनमैन की मौत हो गई। परिजनों ने मामले में अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सामान्य अस्पताल के सामने जाम लगा दिया। बाद में बिजली निगम की अधिकारियों व पुलिस ने परिजनों व ग्रामीणों को समझाकर जाम खुलवाया। पुलिस ने मामले में लाइनमैन के पिता के बयान पर एसडीओ समेत अन्य अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। गांव भूर्री निवासी अतुल कुमार (34) बिजली निगम में ठेका कर्मी था और कुंडली में तैनात था। शनिवार दोपहर बाद औद्योगिक क्षेत्र में लाइन में खराबी आ गई। जिस पर बिजली कर्मियों ने लाइन ठीक करने के लिए परमिट लेकर बिजली आपूर्ति को बंद करा दिया। इस पर अतुल कुमार बिजली लाइन पर काम करने लगा। वहां पर अधिकारी स्वयं मौजूद थे। करीब 5 मिनट बाद ही लाइन में अचानक करंट आ गया जिससे अतुल बुरी तरह से झुलस गया। एसडीओ व अन्य कर्मी उसे तुरंत लेकर अस्पताल में पहुंचे, जहां से उसकी मौत हो गई। मामले की सूचना के बाद पुलिस टीम मौके पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया। पुलिस ने शाम को शव का पोस्टमार्टम कराया। इसी बीच शाम को परिजनों ने सामान्य अस्पताल के बाहर महाराणा प्रताप चौक पर जाम लगा दिया। जिस पर निगम के अधिकारियों व पुलिस ने समझाकर शांत किया। पुलिस ने मामले में मृतक के पिता जयपाल के बयान पर पर एसडीओ समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
सोनीपत, बारह फरवरी कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में बिजली लाइन में आई खराबी को ठीक करते हुए अचानक करंट लगने से लाइनमैन की मौत हो गई। परिजनों ने मामले में अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सामान्य अस्पताल के सामने जाम लगा दिया। बाद में बिजली निगम की अधिकारियों व पुलिस ने परिजनों व ग्रामीणों को समझाकर जाम खुलवाया। पुलिस ने मामले में लाइनमैन के पिता के बयान पर एसडीओ समेत अन्य अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। गांव भूर्री निवासी अतुल कुमार बिजली निगम में ठेका कर्मी था और कुंडली में तैनात था। शनिवार दोपहर बाद औद्योगिक क्षेत्र में लाइन में खराबी आ गई। जिस पर बिजली कर्मियों ने लाइन ठीक करने के लिए परमिट लेकर बिजली आपूर्ति को बंद करा दिया। इस पर अतुल कुमार बिजली लाइन पर काम करने लगा। वहां पर अधिकारी स्वयं मौजूद थे। करीब पाँच मिनट बाद ही लाइन में अचानक करंट आ गया जिससे अतुल बुरी तरह से झुलस गया। एसडीओ व अन्य कर्मी उसे तुरंत लेकर अस्पताल में पहुंचे, जहां से उसकी मौत हो गई। मामले की सूचना के बाद पुलिस टीम मौके पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया। पुलिस ने शाम को शव का पोस्टमार्टम कराया। इसी बीच शाम को परिजनों ने सामान्य अस्पताल के बाहर महाराणा प्रताप चौक पर जाम लगा दिया। जिस पर निगम के अधिकारियों व पुलिस ने समझाकर शांत किया। पुलिस ने मामले में मृतक के पिता जयपाल के बयान पर पर एसडीओ समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
"और केवल एक शब्द एबोलिट दोहराता है - लिम्पोपो, लिम्पोपो, लिम्पोपो" अमेरिकी राजनेताओं के कई शब्द और कर्म दर्द और दुःख का कारण बनते हैं, लेकिन कभी-कभी - ईमानदार, स्वस्थ हँसी। दूसरे दिन हम आरोपों और दावों से बहुत थक गए, मुस्कुराने का एक अच्छा कारण मिला, जो कि आप जानते हैं, जीवन को लम्बा खींचता है। हम, रूस के नागरिक, निश्चित रूप से, हमारे कर्तव्यों के खिलाफ कई शिकायतें हैं। कभी-कभी हम उनके बिलों पर फूट फूट कर हँसते हैं। लेकिन, उनके श्रेय के लिए, एक ऐसी स्थिति की कल्पना करना मुश्किल है, जहां किसी ने टेलीफोन द्वारा राज्य ड्यूमा या फेडरेशन काउंसिल के सदस्य को सूचित किया, उदाहरण के लिए, नार्निया में अमेरिकी आक्रामकता के बारे में। या - गोंडोर में तख्तापलट के बारे में, हॉगवर्ट्स पर हैकर का हमला और, कहते हैं, ओज में चुनाव में हस्तक्षेप। और संयुक्त राज्य अमेरिका में, ऐसा कुछ संभव हुआ है। अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधि सभा के सदस्य, मैक्सिन वाटर्स, कैलिफोर्निया के एक प्रतिनिधि, पूरी गंभीरता से रूस की निंदा करने के लिए इकट्ठे हुए . . . लिम्पोपो के राष्ट्रपति के चुनाव में हस्तक्षेप करने और वहां मास्को कठपुतली लगाने के लिए - डॉ। आइबोलिट। बेशक, रूस अब सोवियत संघ नहीं है, जो दुनिया में सबसे अधिक पढ़ने वाला देश था, लेकिन हम, मूल रूप से, पश्चिमी यूरोपीय और अमेरिकी परियों की कहानियों को जानते हैं। और उन्हें हमारे बारे में कोई जानकारी नहीं है। और यह अनुमेय है - ठीक है, उन्हें केरोनी चुकोव्स्की के कार्यों को जानने की आवश्यकता नहीं है। हम उन्हें धन्यवाद दे सकते हैं यदि वे कम से कम एक या दो रूसी लेखकों और कवियों (अपने पूर्व दशकों में असंतुष्ट लोगों के अलावा) को जानते हैं। और संयुक्त राज्य अमेरिका में ऐसे साहित्यिक कार्य हैं जो हमारे पाठकों के लिए पूरी तरह से अज्ञात हैं। और फिर भी, हमारे सभी मौजूदा अमेरिकी विरोधीवाद के साथ, रूस में कोई भी "मध्य-पृथ्वी पर अमेरिकी आक्रमण" या कुछ काल्पनिक देश के बारे में मजाक नहीं करेगा। एक मजाक शरारत "वोवा" और "लेक्सस" उपजाऊ जमीन पर गिर गई। वहां, जहां हर छींक के लिए रूस की निंदा करने का रिवाज है और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित दुनिया के लगभग हर कोने में अशुभ "मास्को का हाथ" का भूत देखें। "वोवन" और "लेक्सस" (व्लादिमीर कुज़नेत्सोव और एलेक्सी स्टोलारोव) ने यूक्रेन के प्रधानमंत्री वलोडिमिर ग्रॉसमैन की ओर से अमेरिकी कांग्रेस को बुलाया। ओबामा के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका मैदान जंता के समर्थन में इतना अधिक है कि उसके प्रतिनिधि के किसी भी शब्द को अच्छे के लिए लिया जा सकता है। खासकर अगर उन्हें रूस की चिंता है। सबसे पहले, बातचीत मौजूदा यूक्रेनी शहरों और "रूसी आक्रामकता" के बारे में थी जो प्रकृति में मौजूद नहीं है। वाटर्स का मानना था कि "पुतिन के नियमित सैनिकों" ने न केवल डोनेट्स्क पर कब्जा किया, बल्कि लविवि ने भी। लावोव की भौगोलिक स्थिति को निर्दिष्ट करने के बाद, वह भय में उत्तेजित हुईः "क्या आपके पास पूर्व और पश्चिम में दोनों हैं? "(वैसे, कुछ दिनों पहले वही महिला रूस पर दक्षिण कोरिया में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाने में कामयाब रही)। और फिर एक टेलीफोन बातचीत में हमने अफ्रीका की प्रसिद्ध नदी के बारे में बात की, जिसका नाम प्रैंक ने राज्य के नाम के लिए दियाः ". . . आप संयुक्त राज्य अमेरिका में हैं और हमें हाल ही में एक घटना के कारण रूसी संघ पर नए प्रतिबंध लगाने चाहिए। क्योंकि उन्होंने लिम्पोपो की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप किया। शायद आप जानते हैंः रूसी हैकर्स ने अपने सर्वर, कंप्यूटर सर्वर पर हमला किया। उन्होंने लिम्पोपो में चुनावों के दौरान यह किया . . . और उन्होंने अपने कठपुतली ऐबोलिट का शासन स्थापित किया। " «कुछ भी हो, संयुक्त राज्य अमेरिका आपकी तरफ होगा", - झूठे-Groisman वार्ताकार आश्वासन दिया। उसने जारी रखाः "और इन स्थानों में ये नई घटनाएं . . . मुझे नहीं पता कि हमारे पास हमारी खुफिया एजेंसियों से कितने लोग हैं . . . . लेकिन हमें इस पर अधिक जानकारी की आवश्यकता है। जब मैं उनसे बात करूंगा, तो मुझे एक ठोस बयान देना होगा। '. ठीक है, ठीक है . . . यह केवल "एक विशिष्ट कथन" की प्रतीक्षा करने के लिए रहता है। और प्रतिबंधों को मजबूत करना। लिम्पोपो में हैकिंग के लिए। "पीले गर्म अफ्रीका" में, जहां, यह पता चला है, आप एक उच्च तकनीक वाले इलेक्ट्रॉनिक चुनाव प्रणाली में हस्तक्षेप कर सकते हैं। और "राष्ट्रपति लिम्पोपो", जो "मॉस्को के हाथ" के कार्यों के परिणामस्वरूप हार गए, क्योंकि यह बाहर निकल गया था। उसके जीवन के लिए डर है"। वैसे, यह "राष्ट्रपति लिम्पोपो" कौन है जिसे कथित रूप से रूस ने उखाड़ फेंका? उसके नाम पर शरारत नहीं की गई थी, लेकिन, संभवतः, उनका मतलब नरभक्षी बर्माले था। इसलिए आखिरकार, चुकोवस्की के अनुसार, वह उत्सुक हो गया और लेनिनग्राद चला गया। लेकिन अब लेनिनग्राद का नाम बदल दिया गया है, रोस्तोव में जगह पर कब्जा कर लिया गया है, और बरमेली को यूक्रेन में कहीं भी नहीं भेजा जाता है। (यह जोड़ना बाकी है कि वह ओडेसा का अगला गवर्नर बन जाएगा! बाकी राष्ट्रपति कहां जाएंगे? ) मैडम वाटर्स, यहां तक कि "कार्यालय में निर्दिष्ट किए बिना", प्रसिद्ध साकी के रूप में, पहले से ही रूस पर नए प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हैं। यह पहले से ही रिफ्लेक्स स्तर पर अधिकांश अमेरिकी राजनेताओं के साथ मामला हैः जहां मानव अधिकारों का उल्लंघन किया जाता है? लोकतंत्र कहां से लाएं? वैसे, आज वास्तविक लीबिया जमाहीरिया में वास्तविक विद्रोह की शुरुआत की छठी वर्षगांठ है। वह उग्रवाद जिसके कारण नाटो और कई पीड़ितों का आक्रमण हुआ। और सीरिया में, असली आतंकवादी काल्पनिक नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से उग्र होते रहते हैं। मजाक में इसे "दलदल" कहा जाता है। - लेखकः
"और केवल एक शब्द एबोलिट दोहराता है - लिम्पोपो, लिम्पोपो, लिम्पोपो" अमेरिकी राजनेताओं के कई शब्द और कर्म दर्द और दुःख का कारण बनते हैं, लेकिन कभी-कभी - ईमानदार, स्वस्थ हँसी। दूसरे दिन हम आरोपों और दावों से बहुत थक गए, मुस्कुराने का एक अच्छा कारण मिला, जो कि आप जानते हैं, जीवन को लम्बा खींचता है। हम, रूस के नागरिक, निश्चित रूप से, हमारे कर्तव्यों के खिलाफ कई शिकायतें हैं। कभी-कभी हम उनके बिलों पर फूट फूट कर हँसते हैं। लेकिन, उनके श्रेय के लिए, एक ऐसी स्थिति की कल्पना करना मुश्किल है, जहां किसी ने टेलीफोन द्वारा राज्य ड्यूमा या फेडरेशन काउंसिल के सदस्य को सूचित किया, उदाहरण के लिए, नार्निया में अमेरिकी आक्रामकता के बारे में। या - गोंडोर में तख्तापलट के बारे में, हॉगवर्ट्स पर हैकर का हमला और, कहते हैं, ओज में चुनाव में हस्तक्षेप। और संयुक्त राज्य अमेरिका में, ऐसा कुछ संभव हुआ है। अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधि सभा के सदस्य, मैक्सिन वाटर्स, कैलिफोर्निया के एक प्रतिनिधि, पूरी गंभीरता से रूस की निंदा करने के लिए इकट्ठे हुए . . . लिम्पोपो के राष्ट्रपति के चुनाव में हस्तक्षेप करने और वहां मास्को कठपुतली लगाने के लिए - डॉ। आइबोलिट। बेशक, रूस अब सोवियत संघ नहीं है, जो दुनिया में सबसे अधिक पढ़ने वाला देश था, लेकिन हम, मूल रूप से, पश्चिमी यूरोपीय और अमेरिकी परियों की कहानियों को जानते हैं। और उन्हें हमारे बारे में कोई जानकारी नहीं है। और यह अनुमेय है - ठीक है, उन्हें केरोनी चुकोव्स्की के कार्यों को जानने की आवश्यकता नहीं है। हम उन्हें धन्यवाद दे सकते हैं यदि वे कम से कम एक या दो रूसी लेखकों और कवियों को जानते हैं। और संयुक्त राज्य अमेरिका में ऐसे साहित्यिक कार्य हैं जो हमारे पाठकों के लिए पूरी तरह से अज्ञात हैं। और फिर भी, हमारे सभी मौजूदा अमेरिकी विरोधीवाद के साथ, रूस में कोई भी "मध्य-पृथ्वी पर अमेरिकी आक्रमण" या कुछ काल्पनिक देश के बारे में मजाक नहीं करेगा। एक मजाक शरारत "वोवा" और "लेक्सस" उपजाऊ जमीन पर गिर गई। वहां, जहां हर छींक के लिए रूस की निंदा करने का रिवाज है और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित दुनिया के लगभग हर कोने में अशुभ "मास्को का हाथ" का भूत देखें। "वोवन" और "लेक्सस" ने यूक्रेन के प्रधानमंत्री वलोडिमिर ग्रॉसमैन की ओर से अमेरिकी कांग्रेस को बुलाया। ओबामा के तहत संयुक्त राज्य अमेरिका मैदान जंता के समर्थन में इतना अधिक है कि उसके प्रतिनिधि के किसी भी शब्द को अच्छे के लिए लिया जा सकता है। खासकर अगर उन्हें रूस की चिंता है। सबसे पहले, बातचीत मौजूदा यूक्रेनी शहरों और "रूसी आक्रामकता" के बारे में थी जो प्रकृति में मौजूद नहीं है। वाटर्स का मानना था कि "पुतिन के नियमित सैनिकों" ने न केवल डोनेट्स्क पर कब्जा किया, बल्कि लविवि ने भी। लावोव की भौगोलिक स्थिति को निर्दिष्ट करने के बाद, वह भय में उत्तेजित हुईः "क्या आपके पास पूर्व और पश्चिम में दोनों हैं? "। और फिर एक टेलीफोन बातचीत में हमने अफ्रीका की प्रसिद्ध नदी के बारे में बात की, जिसका नाम प्रैंक ने राज्य के नाम के लिए दियाः ". . . आप संयुक्त राज्य अमेरिका में हैं और हमें हाल ही में एक घटना के कारण रूसी संघ पर नए प्रतिबंध लगाने चाहिए। क्योंकि उन्होंने लिम्पोपो की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप किया। शायद आप जानते हैंः रूसी हैकर्स ने अपने सर्वर, कंप्यूटर सर्वर पर हमला किया। उन्होंने लिम्पोपो में चुनावों के दौरान यह किया . . . और उन्होंने अपने कठपुतली ऐबोलिट का शासन स्थापित किया। " «कुछ भी हो, संयुक्त राज्य अमेरिका आपकी तरफ होगा", - झूठे-Groisman वार्ताकार आश्वासन दिया। उसने जारी रखाः "और इन स्थानों में ये नई घटनाएं . . . मुझे नहीं पता कि हमारे पास हमारी खुफिया एजेंसियों से कितने लोग हैं . . . . लेकिन हमें इस पर अधिक जानकारी की आवश्यकता है। जब मैं उनसे बात करूंगा, तो मुझे एक ठोस बयान देना होगा। '. ठीक है, ठीक है . . . यह केवल "एक विशिष्ट कथन" की प्रतीक्षा करने के लिए रहता है। और प्रतिबंधों को मजबूत करना। लिम्पोपो में हैकिंग के लिए। "पीले गर्म अफ्रीका" में, जहां, यह पता चला है, आप एक उच्च तकनीक वाले इलेक्ट्रॉनिक चुनाव प्रणाली में हस्तक्षेप कर सकते हैं। और "राष्ट्रपति लिम्पोपो", जो "मॉस्को के हाथ" के कार्यों के परिणामस्वरूप हार गए, क्योंकि यह बाहर निकल गया था। उसके जीवन के लिए डर है"। वैसे, यह "राष्ट्रपति लिम्पोपो" कौन है जिसे कथित रूप से रूस ने उखाड़ फेंका? उसके नाम पर शरारत नहीं की गई थी, लेकिन, संभवतः, उनका मतलब नरभक्षी बर्माले था। इसलिए आखिरकार, चुकोवस्की के अनुसार, वह उत्सुक हो गया और लेनिनग्राद चला गया। लेकिन अब लेनिनग्राद का नाम बदल दिया गया है, रोस्तोव में जगह पर कब्जा कर लिया गया है, और बरमेली को यूक्रेन में कहीं भी नहीं भेजा जाता है। मैडम वाटर्स, यहां तक कि "कार्यालय में निर्दिष्ट किए बिना", प्रसिद्ध साकी के रूप में, पहले से ही रूस पर नए प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हैं। यह पहले से ही रिफ्लेक्स स्तर पर अधिकांश अमेरिकी राजनेताओं के साथ मामला हैः जहां मानव अधिकारों का उल्लंघन किया जाता है? लोकतंत्र कहां से लाएं? वैसे, आज वास्तविक लीबिया जमाहीरिया में वास्तविक विद्रोह की शुरुआत की छठी वर्षगांठ है। वह उग्रवाद जिसके कारण नाटो और कई पीड़ितों का आक्रमण हुआ। और सीरिया में, असली आतंकवादी काल्पनिक नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से उग्र होते रहते हैं। मजाक में इसे "दलदल" कहा जाता है। - लेखकः
Cancelled Train List Today: रेलवे ने आज कुल 237 ट्रेनों को रद्द करने का फैसला लिया है। जिसकी जानकारी पहले ही साझा कर दी गई है, ताकि यात्री असुविधा से बच सकें। वाली असुविधा से खुद को बचा सकते हैं। दरअसल सूचना के मुताबिक, रेलवे ने आज कुल 237 ट्रेनों को रद्द (Train Cancelled Today News) करने का फैसला लिया है, जिसमें 207 ट्रेनों को पूर्ण रूप से तो वहीं 30 ट्रेनों को आंशिक रूप से रद्द किया गया है। इसी के साथ भारतीय रेलवे ने आज 237 ट्रेनों को रद्द (Cancelled Train List) करने की सूचना जारी करने के साथ ही 17 ट्रेनों का मार्ग डाइवर्जन और 3 ट्रेनों को पुनर्निर्धारित करने का निर्णय लिया है। कुल रद्द हुई 237 ट्रेनों में से 207 ट्रेनों को पूरी तरह से रद्द करने जबकि 30 ट्रेनों को आंशिक रूप से रद्द करने का फैसला लिया है। पूर्ण रूप से रद्द हुई ट्रेनों में विशेष तौर पर भागलपुर-साहिबगंज, शाहजहांपुर-बालामऊ, भागलपुर-अजीमगंज, सीतापुर-शाहजहांपुर सहित 207 ट्रेनें तथा आंशिक रूप से रद्द हुई ट्रेनों में शाहजहांपुर-लखनऊ, मालदा टाउन-अजीमगंज सहित कुल 30 महत्वपूर्ण ट्रेनें शामिल हैं। इंटरनेट के माध्यम से आपको आसानी से डायवर्ट, रद्द और पुनर्निर्धारित हुई ट्रेनों की सूची प्राप्त हो जाएगी। इसके लिए आपको सबसे पहले गूगल पर भारतीय रेलवे की यात्रियों की सहायता के लिए जारी आधिकरिक वेबसाइट https://www. irctchelp. in/cancelled-trains-list/ पर जाना होगा। तत्पश्चात वेबसाइट पर दी गई रद्द, पुनर्निर्धारित और डायवर्ट ट्रेनों की सूची पर क्लिक करते ही आप आसानी से आज की तारीख के अनुसार संबंधित ट्रेनों के बारे में आसानी से सूचना प्राप्त कर सकेंगे। दोस्तों देश और दुनिया की खबरों को तेजी से जानने लिए बने रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलो करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
Cancelled Train List Today: रेलवे ने आज कुल दो सौ सैंतीस ट्रेनों को रद्द करने का फैसला लिया है। जिसकी जानकारी पहले ही साझा कर दी गई है, ताकि यात्री असुविधा से बच सकें। वाली असुविधा से खुद को बचा सकते हैं। दरअसल सूचना के मुताबिक, रेलवे ने आज कुल दो सौ सैंतीस ट्रेनों को रद्द करने का फैसला लिया है, जिसमें दो सौ सात ट्रेनों को पूर्ण रूप से तो वहीं तीस ट्रेनों को आंशिक रूप से रद्द किया गया है। इसी के साथ भारतीय रेलवे ने आज दो सौ सैंतीस ट्रेनों को रद्द करने की सूचना जारी करने के साथ ही सत्रह ट्रेनों का मार्ग डाइवर्जन और तीन ट्रेनों को पुनर्निर्धारित करने का निर्णय लिया है। कुल रद्द हुई दो सौ सैंतीस ट्रेनों में से दो सौ सात ट्रेनों को पूरी तरह से रद्द करने जबकि तीस ट्रेनों को आंशिक रूप से रद्द करने का फैसला लिया है। पूर्ण रूप से रद्द हुई ट्रेनों में विशेष तौर पर भागलपुर-साहिबगंज, शाहजहांपुर-बालामऊ, भागलपुर-अजीमगंज, सीतापुर-शाहजहांपुर सहित दो सौ सात ट्रेनें तथा आंशिक रूप से रद्द हुई ट्रेनों में शाहजहांपुर-लखनऊ, मालदा टाउन-अजीमगंज सहित कुल तीस महत्वपूर्ण ट्रेनें शामिल हैं। इंटरनेट के माध्यम से आपको आसानी से डायवर्ट, रद्द और पुनर्निर्धारित हुई ट्रेनों की सूची प्राप्त हो जाएगी। इसके लिए आपको सबसे पहले गूगल पर भारतीय रेलवे की यात्रियों की सहायता के लिए जारी आधिकरिक वेबसाइट https://www. irctchelp. in/cancelled-trains-list/ पर जाना होगा। तत्पश्चात वेबसाइट पर दी गई रद्द, पुनर्निर्धारित और डायवर्ट ट्रेनों की सूची पर क्लिक करते ही आप आसानी से आज की तारीख के अनुसार संबंधित ट्रेनों के बारे में आसानी से सूचना प्राप्त कर सकेंगे। दोस्तों देश और दुनिया की खबरों को तेजी से जानने लिए बने रहें न्यूजट्रैक के साथ। हमें फेसबुक पर फॉलो करने के लिए @newstrack और ट्विटर पर फॉलो करने के लिए @newstrackmedia पर क्लिक करें।
गगरेट - विधानसभा चुनावों में जहां भाजपा ने अपनी बड़ी जीत दर्ज करवा कर प्रदेश में अपना भगवा परचम लहरा दिया है। वहीं, विधानसभा क्षेत्र गगरेट से भाजपा ने कांग्रेस का दुर्ग ध्वस्त करते हुए एक बड़ी जीत हासिल की है। गगरेट से भाजपा के उम्मीदवार राजेश ठाकुर ने अपने प्रतिद्वंदी कांग्रेस के राकेश कालिया को 9320 मतों से शिकस्त दी है। विधानसभा क्षेत्र गगरेट व चिंतपूर्णी क्षेत्र से लगातार तीन बार अपनी जीत दर्ज करवा चुके कांग्रेस के राकेश कालिया अपनी जीत का चौका लगाने में नाकामयाब रहे। इस बड़ी जीत के बाद राकेश ठाकुर ने पहले डेरा बाबा रुद्रानंद में माथा टेका। इसके बाद अपना विजयी जुलूस समूचे विधानसभा क्षेत्र में निकला। इस अवसर पर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह फूल मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया। विधानसभा क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ता ढोल व डीजे की थाप पर देर रात तक झूमते रहे। इस अवसर पर राजेश ठाकुर ने गगरेट क्षेत्र की जनता का इस जीत पर आभार व धन्यावाद जताते हुए कहा कि यह जीत उनकी नहीं बल्कि गगरेट क्षेत्र की समूची जनता की जीत है। गगरेट की जनता इसके लिए बधाई की पात्र है।
गगरेट - विधानसभा चुनावों में जहां भाजपा ने अपनी बड़ी जीत दर्ज करवा कर प्रदेश में अपना भगवा परचम लहरा दिया है। वहीं, विधानसभा क्षेत्र गगरेट से भाजपा ने कांग्रेस का दुर्ग ध्वस्त करते हुए एक बड़ी जीत हासिल की है। गगरेट से भाजपा के उम्मीदवार राजेश ठाकुर ने अपने प्रतिद्वंदी कांग्रेस के राकेश कालिया को नौ हज़ार तीन सौ बीस मतों से शिकस्त दी है। विधानसभा क्षेत्र गगरेट व चिंतपूर्णी क्षेत्र से लगातार तीन बार अपनी जीत दर्ज करवा चुके कांग्रेस के राकेश कालिया अपनी जीत का चौका लगाने में नाकामयाब रहे। इस बड़ी जीत के बाद राकेश ठाकुर ने पहले डेरा बाबा रुद्रानंद में माथा टेका। इसके बाद अपना विजयी जुलूस समूचे विधानसभा क्षेत्र में निकला। इस अवसर पर भाजपा के कार्यकर्ताओं ने जगह-जगह फूल मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया। विधानसभा क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ता ढोल व डीजे की थाप पर देर रात तक झूमते रहे। इस अवसर पर राजेश ठाकुर ने गगरेट क्षेत्र की जनता का इस जीत पर आभार व धन्यावाद जताते हुए कहा कि यह जीत उनकी नहीं बल्कि गगरेट क्षेत्र की समूची जनता की जीत है। गगरेट की जनता इसके लिए बधाई की पात्र है।
यूपीए की ओर से उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाए गए गोपाल कृष्ण गांधी पर शिवसेना ने गंभीर आरोप लगाए हैं. शिवसेना के फायरब्रांड नेता संजय राउत ने ट्वीट कर कहा है कि गोपाल कृष्ण गांधी ने मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन की पैरवी की थी. ट्वीट के बाद राउत ने न्यूज18 इंडिया से खास बातचीत में कहा कि जो आदमी याकूब मेमन की फांसी का विरोध कर सकता है. उसे कोई कैसे उम्मीदवार घोषित कर सकता है. याकूब तो दाऊद का सबसे खास गुर्गा था. साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस वालों का दिमाग खराब हो गया है. ऐसा नहीं होना चाहिए था. इस बात को उन्हें ध्यान में रखना चाहिए. राउत ने कहा कि आनेवाले दिनों में हम जोर शोर से ये मुद्दा उठाएंगे. क्योंकि देश के सामने ये बात आ गई है. . क्या 'दंगल', क्या 'पठान'. . . इस धांसू मूवी के सामने सब पड़ जाएंगे फीके! रिलीज से पहले ही कमा लिए 800 करोड़!
यूपीए की ओर से उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाए गए गोपाल कृष्ण गांधी पर शिवसेना ने गंभीर आरोप लगाए हैं. शिवसेना के फायरब्रांड नेता संजय राउत ने ट्वीट कर कहा है कि गोपाल कृष्ण गांधी ने मुंबई बम धमाकों के दोषी याकूब मेमन की पैरवी की थी. ट्वीट के बाद राउत ने न्यूजअट्ठारह इंडिया से खास बातचीत में कहा कि जो आदमी याकूब मेमन की फांसी का विरोध कर सकता है. उसे कोई कैसे उम्मीदवार घोषित कर सकता है. याकूब तो दाऊद का सबसे खास गुर्गा था. साथ ही उन्होंने कहा कि कांग्रेस वालों का दिमाग खराब हो गया है. ऐसा नहीं होना चाहिए था. इस बात को उन्हें ध्यान में रखना चाहिए. राउत ने कहा कि आनेवाले दिनों में हम जोर शोर से ये मुद्दा उठाएंगे. क्योंकि देश के सामने ये बात आ गई है. . क्या 'दंगल', क्या 'पठान'. . . इस धांसू मूवी के सामने सब पड़ जाएंगे फीके! रिलीज से पहले ही कमा लिए आठ सौ करोड़!
रफ्ता रफ्ता- द स्पीड (2006)(U/A) *अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
रफ्ता रफ्ता- द स्पीड *अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
आदरणीय भाई दिनेश जी , गजल की प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद । आदरणीय भाई गणेश जी, आपकी उपस्थिति से गजल का मान बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद । आपने सही फरमाया मुंहचैर शब्द का प्रयोग प्रायः देखने को नहीं मिलता । इस अप्रचलित शब्द ( मुंहचौर ) का प्रयोग यहां संकोची स्वभाव के लिए किया गया है । हिंदी भार्गव शब्दकोषानुसार भी इसका अर्थ यही है । जबकि मुंहचोर शब्द का प्रयोग जहां तक मेरा ज्ञान है, गलत कार्य कर मुंह छिपाते फिरने से है । शेष आप प्रबुद्धजनों से मार्गदर्शन की आकांक्षा है । आदरणीय भाई अजय जी उत्साहवर्धन के लिए आभार । आदरणीय भाई हरिप्रकाश जी , प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद । आदरणीय भाई आशुतोष जी, नये काफिये को स्वीकार्यता प्रदान करने के लिए आभार । इस बह्र को २१२२ २१२२ २२१२ पढंे़ । आदरणीय भाई गोपाल नारायन जी गजल का अनुमोदन कर उत्साहवर्धन के लिए कोटि कोटि धन्यवाद ।
आदरणीय भाई दिनेश जी , गजल की प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद । आदरणीय भाई गणेश जी, आपकी उपस्थिति से गजल का मान बढ़ाने के लिए हार्दिक धन्यवाद । आपने सही फरमाया मुंहचैर शब्द का प्रयोग प्रायः देखने को नहीं मिलता । इस अप्रचलित शब्द का प्रयोग यहां संकोची स्वभाव के लिए किया गया है । हिंदी भार्गव शब्दकोषानुसार भी इसका अर्थ यही है । जबकि मुंहचोर शब्द का प्रयोग जहां तक मेरा ज्ञान है, गलत कार्य कर मुंह छिपाते फिरने से है । शेष आप प्रबुद्धजनों से मार्गदर्शन की आकांक्षा है । आदरणीय भाई अजय जी उत्साहवर्धन के लिए आभार । आदरणीय भाई हरिप्रकाश जी , प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद । आदरणीय भाई आशुतोष जी, नये काफिये को स्वीकार्यता प्रदान करने के लिए आभार । इस बह्र को दो हज़ार एक सौ बाईस दो हज़ार एक सौ बाईस दो हज़ार दो सौ बारह पढंे़ । आदरणीय भाई गोपाल नारायन जी गजल का अनुमोदन कर उत्साहवर्धन के लिए कोटि कोटि धन्यवाद ।
ILC ने DODIC A33 कॉन्फ़िगरेशन (. 555 BMG कैलिबर की मशीन-गन कारतूस) में M50 गोला-बारूद को 15% और 30% तक कम करने की संभावना को संशोधित करने का अनुरोध किया। इसके लिए, वाणिज्यिक कंपनियों को हल्का गोला-बारूद बनाने का अनुरोध भेजा गया था, कंपनी के तैयार प्रस्तावों को 1 जून को प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इसी समय, कुछ कंपनियां संकेत देती हैं कि गोला-बारूद के द्रव्यमान में और भी अधिक कमी की संभावना है। इसलिए, SHOT शो 2018 में चेसापेक कारतूस निगम ने घोषणा की कि एल्यूमीनियम आस्तीन का उपयोग करने वाले उसके नए कारतूस उनके पीतल समकक्षों की तुलना में आधे हल्के हो सकते हैं। पीसीपी गोला बारूद प्लास्टिक आस्तीन के साथ राइफल कारतूस का उत्पादन करता है, जिसके परिणामस्वरूप 30% वजन में कमी आती है। . 50 बीएमजी कारतूस की गोली का वजन 40 से 50 ग्राम तक होता है और जब निकाल दिया जाता है, तो 15-20 kJ की ऊर्जा होती है, जो 7,62 × 39 मिमी कैलिबर के सोवियत मध्यवर्ती गोला बारूद से पांच गुना अधिक होती है। . 50 बीएमजी कारतूस 20 के दशक में ब्राउनिंग एम 1921 भारी मशीनगन के लिए गोला बारूद के रूप में बनाया गया था, और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इसे नाटो सदस्य राज्यों की सेनाओं में मानक गोला बारूद के रूप में अपनाया गया था।
ILC ने DODIC Aतैंतीस कॉन्फ़िगरेशन में Mपचास गोला-बारूद को पंद्रह% और तीस% तक कम करने की संभावना को संशोधित करने का अनुरोध किया। इसके लिए, वाणिज्यिक कंपनियों को हल्का गोला-बारूद बनाने का अनुरोध भेजा गया था, कंपनी के तैयार प्रस्तावों को एक जून को प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इसी समय, कुछ कंपनियां संकेत देती हैं कि गोला-बारूद के द्रव्यमान में और भी अधिक कमी की संभावना है। इसलिए, SHOT शो दो हज़ार अट्ठारह में चेसापेक कारतूस निगम ने घोषणा की कि एल्यूमीनियम आस्तीन का उपयोग करने वाले उसके नए कारतूस उनके पीतल समकक्षों की तुलना में आधे हल्के हो सकते हैं। पीसीपी गोला बारूद प्लास्टिक आस्तीन के साथ राइफल कारतूस का उत्पादन करता है, जिसके परिणामस्वरूप तीस% वजन में कमी आती है। . पचास बीएमजी कारतूस की गोली का वजन चालीस से पचास ग्राम तक होता है और जब निकाल दिया जाता है, तो पंद्रह-बीस kJ की ऊर्जा होती है, जो सात,बासठ × उनतालीस मिमी कैलिबर के सोवियत मध्यवर्ती गोला बारूद से पांच गुना अधिक होती है। . पचास बीएमजी कारतूस बीस के दशक में ब्राउनिंग एम एक हज़ार नौ सौ इक्कीस भारी मशीनगन के लिए गोला बारूद के रूप में बनाया गया था, और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इसे नाटो सदस्य राज्यों की सेनाओं में मानक गोला बारूद के रूप में अपनाया गया था।
इंडिगो के सीईओ ने कर्मचारियों के ईमेल भेज कहा है कि एयरलाइंस इंडस्ट्री का भविष्य दांव पर है, ऐसे में सैलरी में कटौती का निर्णल किया गया है। इंडिगो की कमाई में भारी कमी आई है, एक अप्रैल से इंडिगो एयरलाइंस के सीईओ भी 25 फीसदी कम सैलरी लेंगे। इंडिगो के प्लाइट ऑपरेशन के प्रमुख आशीम मित्रा ने कहा कि विमानन क्षेत्र में आर्थिक माहौल काफी बिगड़ गया है और अगले कुछ दिनों तभा हफ्तों में सख्त कदम उठाना आवश्यक हो गया है। बताते चलें कि, कोरोना वायरस के चलते संकट का सामना कर रही घरेलू विमानन कंपनियों को 2020 की पहली तिमाही में बड़े नुकसान की संभावना है। शुरुआती दिनों में कंपनियां 150 विमानों के उड़ान भरने पर रोक लगा सकती हैं। बताते चलें कि, कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के कारण दुनियाभर में देशों के आंशिक या पूरी तरह से सीमाएं सील करने के कारण विमानन क्षेत्र को काफी निकसान पहुंचा है क्योंकि विश्वभर में ज्यादातर विमानन कंपनियों ने अपने विमान संचालन में जबरदस्त तरीके से कटौती कर दी है।
इंडिगो के सीईओ ने कर्मचारियों के ईमेल भेज कहा है कि एयरलाइंस इंडस्ट्री का भविष्य दांव पर है, ऐसे में सैलरी में कटौती का निर्णल किया गया है। इंडिगो की कमाई में भारी कमी आई है, एक अप्रैल से इंडिगो एयरलाइंस के सीईओ भी पच्चीस फीसदी कम सैलरी लेंगे। इंडिगो के प्लाइट ऑपरेशन के प्रमुख आशीम मित्रा ने कहा कि विमानन क्षेत्र में आर्थिक माहौल काफी बिगड़ गया है और अगले कुछ दिनों तभा हफ्तों में सख्त कदम उठाना आवश्यक हो गया है। बताते चलें कि, कोरोना वायरस के चलते संकट का सामना कर रही घरेलू विमानन कंपनियों को दो हज़ार बीस की पहली तिमाही में बड़े नुकसान की संभावना है। शुरुआती दिनों में कंपनियां एक सौ पचास विमानों के उड़ान भरने पर रोक लगा सकती हैं। बताते चलें कि, कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के कारण दुनियाभर में देशों के आंशिक या पूरी तरह से सीमाएं सील करने के कारण विमानन क्षेत्र को काफी निकसान पहुंचा है क्योंकि विश्वभर में ज्यादातर विमानन कंपनियों ने अपने विमान संचालन में जबरदस्त तरीके से कटौती कर दी है।
Punja Vidhan Sabha Digiticled by; पंडित भागीरथ लाल शास्त्री । डलहौजी में पिछली दो फसलें खराब हो गई। सावनी की फसल तबाह हुई, हाढ़ी की फसल बीजी नहीं जा सकी । मैं ने खुद डिप्टी कमिश्नर, गुरदासपुर को ले कर अपने इलाके की हालत का जायज़ा करवाया । वह खुद मान गए कि वहां पिछली दो फसलें नहीं हुईं । मैं ने इस के लिए चीफ़ मिनिस्टर साहिब को लिख कर और जबानी भी प्रार्थना की कि वहां के लोगों की हालत को सुधारने के लिए प्रबन्ध किए जाएं । वहां पर सस्ते भाव पर अन्न दिया जाए लेकिन सरकार ने अब तक वहां के लोगों की हालात सुधारने के लिए कोई ध्यान नहीं दिया । पिछली लड़ाई में पठानकोट के इर्द गिर्द बम्बार्डमेंट हुई और वहां का काफी नुक्सान हुआ । बम्बार्डमेंट के अन्दर काफी फसले तबाह हुई । वहाँ पर जितनी फसले खड़ी थीं, उन को कटवा दिया ताकि उन फसलों में पैरा टरूपर्ज़ छिप कर हमारी सम्पत्ति तथा व्यक्तियों को नुक्सान न करें । सरकार ने कहा कि जहां पर फसल कटवाई जा रही हैं, वहां पर मुआवजा दिया जाए लेकिन मुझे अफसोस से कहना पड़ता है कि सरकार ने उस वायदे को अभी तक पूरा नहीं किया । मैं सरकार से प्रार्थना करना चाहता हूं कि सरकार को अपने इस वायदे को पूरा करना चाहिए क्योंकि वहां के लोगों ने उस वक्त सरकार की बड़ी हिम्मत से मदद की । डिप्टी स्पीकर साहिबा, आप कई बार पठानकोट ई है । शाहपुर कंडी का इलाका देखा है । मैं उस के बारे में अर्ज़ करना चाहता हूं कि वहां पर सरकार ने लोगों को पीने के पानी का प्रबन्ध नहीं किया । इस के लिए स्कीम बनाई गई । स्कीम चालू भी हुई लेकिन पता नहीं कि उस में क्यों ढील हुई । मुझे पता नहीं चलता कि यह ढील सरकार की तरफ से है, कर्मचारियों पर रोब नहीं रहा और पता नहीं लगता कि अब सरकारी कर्मचारी अपने काम को करना नहीं चाहते हैं। मैं ने पहले अर्ज की कि वहां पर पानी के बारे में स्कीम बनी । वहां पर वाटर वर्क्स बना लेकिन वहां पर मशीनरी नहीं है । जहां पर मशीनरी है, वहां पर चलाने वाला नहीं है । अगर मशीनरी को चलाने वाला हो तो वहां पर पानी सप्लाई करने का प्रबन्ध नहीं होता है । मुझे तो सरकार की पालीसी को देख कर दुख होता है क्योंकि वहां पर सरकार ने पहले लाखों रुपए खर्च किए लेकिन अभी तक वहां पर पानी सप्लाई करने का इन्तज़ाम सरकार नहीं कर सकी। आपको मालूम है कि दुनियां 5 तत्वों पर आधारित है । उस में जल तत्व सब से प्रमुख है जल तत्व के बाद ही दूसरे तत्व हैं। मैं अर्ज करना चाहता हूँ कि पानी लोगों के लिए सब से ज़रूरी है लेकिन हमारी सरकार लोगों को पीने का पानी सप्लाई करने के प्रबन्ध नहीं कर सकी तो सरकार वहां की जनता को और क्या सुविधा दे सकेगी । मैं सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि सरकार इस ओर शीघ्र प्रबन्ध करे ताकि वहां के रहने वालों को पानी पीने के लिए मिल सके । (विघ्न) (शोर) डिप्टी स्पीकर साहिबा, पठानकोट जिला गुरदासपुर की एक बड़ी तहसील है। यह हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और लद्दाख के लिए एक दर्रा है लेकिन मुझे अफसोस से कहना पड़ता है कि सरकार ने वहां पर इंडस्ट्री लगाने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया । PUNJAB VIDHAN SABHA [14TH MARCH, 1966 Digitted by GENERAL DISCUSSION OF THE BUDGET FOR THE YEAR, 1966-67 (18)107 इस लिए मैं सरकार से प्रार्थना करना चाहता हूं कि वहां पर शीघ्र इंडस्ट्री स्थापित करने के लिये कदम उठाए ताकि वहां के लोगों को रोज़गार मिल सके । (घंटी) डिप्टी स्पीकर साहिबा, मैं ने अभी तो सरकार के नोटिस मैं काफी बातें लानी हैं । इस लिए कुछ और टाइम दिया जाए। मैं अर्ज करना चाहता हूं कि सरकार ने पठानकोट के अन्दर कोई हस्पताल नहीं खोला । सरकार को इस बारे में प्रार्थना की गई । सरकार ने कहा कि वहां पर वहां की म्युनिसिपल कमेटी का हस्पताल है । वहां पर बिल्डिंग बनाई है लेकिन उस के लिए लिखा गया कि इस को गवर्नमेंट ले लें । इसके लिए सरकार से तीन चार साल से बातचीत चल रही है लेकिन अभी तक कुछ भी हुआ नज़र नहीं आ रहा है। सरकार को इस ओर शीघ्र ध्यान देना चाहिए (घंटी) । डिप्टी स्पीकर साहिबा, मैं एजुकेशन के बारें मैं अर्ज करना चाहता हूं । इस समय हाउस में शिक्षा मंत्री बैठे हुए नहीं हैं । लेकिन मैं आप के द्वारा वित्त मंत्री से प्रार्थना करना चाहता हूं कि हमारी स्टेट में संस्कृत से अन्याय हो रहा है । संस्कृत से सारी ज़बानें निकली हैं । सारे देश के अन्दर संस्कृत का मान है और सारे देश की जनता इस का मान करती है । पंजाब की पार्टीशन से पहले लाहौर में पंजाब यूनिवर्सिटी थी । वहां पर औरियंटल की कलासें, प्राग्य, विशारद, शास्त्री तथा प्रोफीशेंसी की क्लासे थीं । लेकिन पंजाब की पार्टीशन के बाद यह क्लासें होशियारपुर के अन्दर खोली गईं जोकि स्टेट के एक कोने पर हैं । मैं समझता हूं कि इस तरह से संस्कृत का विकास नहीं हो सकता है । इस लिए मैं सरकार से प्रार्थना करना चाहता हूं कि यह क्लासे पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रेमिसिज़ में खोली जाएं । उपाध्यक्षा : आप किसी और डिमांड पर अपने विचार हाउस के अन्दर प्रकट कर लेना । आप बैठ जाइए । (He may express his views during the discussion on some other Demand. He should now resume his seat.) पंडित भागीरथ लाल शास्त्री : डिप्टी स्पीकर साहिबा, मैं हरिजन कल्याण फंड के बारे में अर्ज करना चाहता हूं। मैं मंत्री महोदय से प्रार्थना करना चाहता हूं कि उन के साथ बुरा सलूक न किया जाए । डिप्टी स्पीकर साहिबा, मैं इस सम्बन्ध में एक संस्कृत का श्लोक सुनाना चाहता हूं : मित्रद्रोही कृतघ्नश्च यश्चविश्वास घातकः, ते नरः नरकं यान्ति पावच्चन्द्रो विकारी । इस का अर्थ यह है कि मित्र से द्रोह करने वाले, एहसान फरामोश और विश्वास घात करने वाले जब तक चांद और सूर्य रहते हैं तब तक नर्क में रहते हैं । हम PUNJAB VIDHAN SABHA Digitized by [पंडित भागीरथ लाल शास्त्री] हरिजनों के साथ विश्वास घात कर रहे हैं । हम ने जो वायदे उन के साथ किये थे उन को पूरा नहीं कर रहे । हमें इस बात का दंड भुगतना पड़ेगा । ( घंटी ) डिप्टी स्पीकर साहिबा, मैं कहना चाहता हूं कि हमें उन का कल्याण करना चाहिये । मेरी एक दो बातें बड़ी ज़रूरी कहने वाली रह गई हैं। आप का शुक्रिया । श्री मंगल सेन (रोहतक) : डिप्टी स्पीकर साहिबा, 1966-67 का बजट सरदार कपूर सिंह जी ने पेश किया है जिस पर बहस का आज पाँचवाँ दिन है । जो हालात आज हमारे राज्य में अमृतसर से ले कर पानीपत तक हैं वे किसी से छिपे हुए नहीं हैं। शहरों में हड़तालें हो रही हैं, जगह जगह पर प्रदर्शन हो रहे हैं और पुरमन प्रदर्शनकारियों पर लाठियां चलाई जा रही हैं, वाजें : नो, नो, ( विघ्न) बजट पर बोलो । (विघन) श्री मंगल सेन : पंजाब की पुलिस लाठियां चला रही है । ( अकालियों की तरफ से आवाज़ें : नो नो, कुछ नहीं हो रहा ) ग्राप जोश ठंडा रखिये, मैं उसी बात पर आ रहा हूं । एक निर्णय लिया गया । इस से पहले कांग्रेस के ट्रेयरी बैंचों पर बैठने वाले मित्रों ने जनता में, हाउस में यह बात कही कि पंजाब का एक ही रहने में भला है । जिस प्रताप सिंह कैरो के सोल्हड़े, गीत और घोड़ियां गाते हुए मेरे दोस्त थकते नहीं थे, कहते थे कि वह हनीमैन है आखिर उस आनी मैन में क्या था, उस ने पंजाब के बेटवारे के आंदोलन दबा दिये थे । उस के सिर में सुर्खाब के पर इस लिये लगाए गए और कहा जाता था कि यह बड़ा मज़बूत आदमी है किसी गलत आदमी के सामने नहीं झुक सकता । डिप्टी स्पीकर साहिबा, इसमें विवाद की बात नहीं अगर भाषा का ही प्रश्न होता तो भाषा के साथ किसी का झगड़ा नहीं है । भाषा तो देश की जनता की भाषा है । भाषा के पीछे, भाषा की आड़ में कुछ और ही बात है । आज भी उन के अपने ज़िम्मेदार आदमी ने कहा है कि हमे भाषाई राज्य नहीं चाहिये हमें तो खुद मुख्तयार रियास्त चाहिए . श्रावाजें : नो, नो । कौन कहता है ? श्री मंगल सेन : मास्टर तारा सिंह कहता है, और कौन कहता है । Sardar Gurcharan Singh : We have nothing to do with Tara Singh. श्री मंगल सेन : वह कहता है कि हमें खुद मुख्तियार रियास्त चाहिए । खुले बंदों यह मांग कर रहे हैं । जो आदमी पंजाब की एकता चाहते है, श्री बलरामजी
Punja Vidhan Sabha Digiticled by; पंडित भागीरथ लाल शास्त्री । डलहौजी में पिछली दो फसलें खराब हो गई। सावनी की फसल तबाह हुई, हाढ़ी की फसल बीजी नहीं जा सकी । मैं ने खुद डिप्टी कमिश्नर, गुरदासपुर को ले कर अपने इलाके की हालत का जायज़ा करवाया । वह खुद मान गए कि वहां पिछली दो फसलें नहीं हुईं । मैं ने इस के लिए चीफ़ मिनिस्टर साहिब को लिख कर और जबानी भी प्रार्थना की कि वहां के लोगों की हालत को सुधारने के लिए प्रबन्ध किए जाएं । वहां पर सस्ते भाव पर अन्न दिया जाए लेकिन सरकार ने अब तक वहां के लोगों की हालात सुधारने के लिए कोई ध्यान नहीं दिया । पिछली लड़ाई में पठानकोट के इर्द गिर्द बम्बार्डमेंट हुई और वहां का काफी नुक्सान हुआ । बम्बार्डमेंट के अन्दर काफी फसले तबाह हुई । वहाँ पर जितनी फसले खड़ी थीं, उन को कटवा दिया ताकि उन फसलों में पैरा टरूपर्ज़ छिप कर हमारी सम्पत्ति तथा व्यक्तियों को नुक्सान न करें । सरकार ने कहा कि जहां पर फसल कटवाई जा रही हैं, वहां पर मुआवजा दिया जाए लेकिन मुझे अफसोस से कहना पड़ता है कि सरकार ने उस वायदे को अभी तक पूरा नहीं किया । मैं सरकार से प्रार्थना करना चाहता हूं कि सरकार को अपने इस वायदे को पूरा करना चाहिए क्योंकि वहां के लोगों ने उस वक्त सरकार की बड़ी हिम्मत से मदद की । डिप्टी स्पीकर साहिबा, आप कई बार पठानकोट ई है । शाहपुर कंडी का इलाका देखा है । मैं उस के बारे में अर्ज़ करना चाहता हूं कि वहां पर सरकार ने लोगों को पीने के पानी का प्रबन्ध नहीं किया । इस के लिए स्कीम बनाई गई । स्कीम चालू भी हुई लेकिन पता नहीं कि उस में क्यों ढील हुई । मुझे पता नहीं चलता कि यह ढील सरकार की तरफ से है, कर्मचारियों पर रोब नहीं रहा और पता नहीं लगता कि अब सरकारी कर्मचारी अपने काम को करना नहीं चाहते हैं। मैं ने पहले अर्ज की कि वहां पर पानी के बारे में स्कीम बनी । वहां पर वाटर वर्क्स बना लेकिन वहां पर मशीनरी नहीं है । जहां पर मशीनरी है, वहां पर चलाने वाला नहीं है । अगर मशीनरी को चलाने वाला हो तो वहां पर पानी सप्लाई करने का प्रबन्ध नहीं होता है । मुझे तो सरकार की पालीसी को देख कर दुख होता है क्योंकि वहां पर सरकार ने पहले लाखों रुपए खर्च किए लेकिन अभी तक वहां पर पानी सप्लाई करने का इन्तज़ाम सरकार नहीं कर सकी। आपको मालूम है कि दुनियां पाँच तत्वों पर आधारित है । उस में जल तत्व सब से प्रमुख है जल तत्व के बाद ही दूसरे तत्व हैं। मैं अर्ज करना चाहता हूँ कि पानी लोगों के लिए सब से ज़रूरी है लेकिन हमारी सरकार लोगों को पीने का पानी सप्लाई करने के प्रबन्ध नहीं कर सकी तो सरकार वहां की जनता को और क्या सुविधा दे सकेगी । मैं सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि सरकार इस ओर शीघ्र प्रबन्ध करे ताकि वहां के रहने वालों को पानी पीने के लिए मिल सके । डिप्टी स्पीकर साहिबा, पठानकोट जिला गुरदासपुर की एक बड़ी तहसील है। यह हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और लद्दाख के लिए एक दर्रा है लेकिन मुझे अफसोस से कहना पड़ता है कि सरकार ने वहां पर इंडस्ट्री लगाने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया । PUNJAB VIDHAN SABHA [चौदहTH MARCH, एक हज़ार नौ सौ छयासठ Digitted by GENERAL DISCUSSION OF THE BUDGET FOR THE YEAR, एक हज़ार नौ सौ छयासठ-सरसठ एक सौ सात इस लिए मैं सरकार से प्रार्थना करना चाहता हूं कि वहां पर शीघ्र इंडस्ट्री स्थापित करने के लिये कदम उठाए ताकि वहां के लोगों को रोज़गार मिल सके । डिप्टी स्पीकर साहिबा, मैं ने अभी तो सरकार के नोटिस मैं काफी बातें लानी हैं । इस लिए कुछ और टाइम दिया जाए। मैं अर्ज करना चाहता हूं कि सरकार ने पठानकोट के अन्दर कोई हस्पताल नहीं खोला । सरकार को इस बारे में प्रार्थना की गई । सरकार ने कहा कि वहां पर वहां की म्युनिसिपल कमेटी का हस्पताल है । वहां पर बिल्डिंग बनाई है लेकिन उस के लिए लिखा गया कि इस को गवर्नमेंट ले लें । इसके लिए सरकार से तीन चार साल से बातचीत चल रही है लेकिन अभी तक कुछ भी हुआ नज़र नहीं आ रहा है। सरकार को इस ओर शीघ्र ध्यान देना चाहिए । डिप्टी स्पीकर साहिबा, मैं एजुकेशन के बारें मैं अर्ज करना चाहता हूं । इस समय हाउस में शिक्षा मंत्री बैठे हुए नहीं हैं । लेकिन मैं आप के द्वारा वित्त मंत्री से प्रार्थना करना चाहता हूं कि हमारी स्टेट में संस्कृत से अन्याय हो रहा है । संस्कृत से सारी ज़बानें निकली हैं । सारे देश के अन्दर संस्कृत का मान है और सारे देश की जनता इस का मान करती है । पंजाब की पार्टीशन से पहले लाहौर में पंजाब यूनिवर्सिटी थी । वहां पर औरियंटल की कलासें, प्राग्य, विशारद, शास्त्री तथा प्रोफीशेंसी की क्लासे थीं । लेकिन पंजाब की पार्टीशन के बाद यह क्लासें होशियारपुर के अन्दर खोली गईं जोकि स्टेट के एक कोने पर हैं । मैं समझता हूं कि इस तरह से संस्कृत का विकास नहीं हो सकता है । इस लिए मैं सरकार से प्रार्थना करना चाहता हूं कि यह क्लासे पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रेमिसिज़ में खोली जाएं । उपाध्यक्षा : आप किसी और डिमांड पर अपने विचार हाउस के अन्दर प्रकट कर लेना । आप बैठ जाइए । पंडित भागीरथ लाल शास्त्री : डिप्टी स्पीकर साहिबा, मैं हरिजन कल्याण फंड के बारे में अर्ज करना चाहता हूं। मैं मंत्री महोदय से प्रार्थना करना चाहता हूं कि उन के साथ बुरा सलूक न किया जाए । डिप्टी स्पीकर साहिबा, मैं इस सम्बन्ध में एक संस्कृत का श्लोक सुनाना चाहता हूं : मित्रद्रोही कृतघ्नश्च यश्चविश्वास घातकः, ते नरः नरकं यान्ति पावच्चन्द्रो विकारी । इस का अर्थ यह है कि मित्र से द्रोह करने वाले, एहसान फरामोश और विश्वास घात करने वाले जब तक चांद और सूर्य रहते हैं तब तक नर्क में रहते हैं । हम PUNJAB VIDHAN SABHA Digitized by [पंडित भागीरथ लाल शास्त्री] हरिजनों के साथ विश्वास घात कर रहे हैं । हम ने जो वायदे उन के साथ किये थे उन को पूरा नहीं कर रहे । हमें इस बात का दंड भुगतना पड़ेगा । डिप्टी स्पीकर साहिबा, मैं कहना चाहता हूं कि हमें उन का कल्याण करना चाहिये । मेरी एक दो बातें बड़ी ज़रूरी कहने वाली रह गई हैं। आप का शुक्रिया । श्री मंगल सेन : डिप्टी स्पीकर साहिबा, एक हज़ार नौ सौ छयासठ-सरसठ का बजट सरदार कपूर सिंह जी ने पेश किया है जिस पर बहस का आज पाँचवाँ दिन है । जो हालात आज हमारे राज्य में अमृतसर से ले कर पानीपत तक हैं वे किसी से छिपे हुए नहीं हैं। शहरों में हड़तालें हो रही हैं, जगह जगह पर प्रदर्शन हो रहे हैं और पुरमन प्रदर्शनकारियों पर लाठियां चलाई जा रही हैं, वाजें : नो, नो, बजट पर बोलो । श्री मंगल सेन : पंजाब की पुलिस लाठियां चला रही है । ग्राप जोश ठंडा रखिये, मैं उसी बात पर आ रहा हूं । एक निर्णय लिया गया । इस से पहले कांग्रेस के ट्रेयरी बैंचों पर बैठने वाले मित्रों ने जनता में, हाउस में यह बात कही कि पंजाब का एक ही रहने में भला है । जिस प्रताप सिंह कैरो के सोल्हड़े, गीत और घोड़ियां गाते हुए मेरे दोस्त थकते नहीं थे, कहते थे कि वह हनीमैन है आखिर उस आनी मैन में क्या था, उस ने पंजाब के बेटवारे के आंदोलन दबा दिये थे । उस के सिर में सुर्खाब के पर इस लिये लगाए गए और कहा जाता था कि यह बड़ा मज़बूत आदमी है किसी गलत आदमी के सामने नहीं झुक सकता । डिप्टी स्पीकर साहिबा, इसमें विवाद की बात नहीं अगर भाषा का ही प्रश्न होता तो भाषा के साथ किसी का झगड़ा नहीं है । भाषा तो देश की जनता की भाषा है । भाषा के पीछे, भाषा की आड़ में कुछ और ही बात है । आज भी उन के अपने ज़िम्मेदार आदमी ने कहा है कि हमे भाषाई राज्य नहीं चाहिये हमें तो खुद मुख्तयार रियास्त चाहिए . श्रावाजें : नो, नो । कौन कहता है ? श्री मंगल सेन : मास्टर तारा सिंह कहता है, और कौन कहता है । Sardar Gurcharan Singh : We have nothing to do with Tara Singh. श्री मंगल सेन : वह कहता है कि हमें खुद मुख्तियार रियास्त चाहिए । खुले बंदों यह मांग कर रहे हैं । जो आदमी पंजाब की एकता चाहते है, श्री बलरामजी
विज एक चुनाव । १२३ 2 'आये । ए ॥ प्रहर दूसरे में सात्यकि का, दानव से संग्राम जांगे जब बलराम देखलो, उनसे भी वह नही टला ।। हारे तीनों जीता राक्षस, निकला कोई सार नही । कृष्ण उठे अपनी वारी पर, हाथों में हथियार नही । 'राक्षस ने ललकारा मैं हूँ, भूखा इनको खाऊँगा । बाधक तुम न बनोगे तो मै, तुमको नही सताऊँगा । ॥ बोले कृष्ण हमारे होते, लगा न सकते दानव कैसे सह सकता है, स्पष्ट चुनौती वाली बात ॥ खड़े हो गए कृष्ण सामने, बोले अक्षर एक नही । तनिक क्रोध आने न दिया है, खोया धर्म विवेक नही । शान्त देखकर दानव वोला, लड़ते करते क्यो न प्रहार । शुरू करो तुम लड़ना पहले, मेरे पास नही हथियार ।। तुम हो बड़े बहादुर योद्धा, वन के स्वामी बहुत अजेय । तुम्हें पराजित करने वाला, जनमा कौन यहाँ श्रद्धेय ।। सुनकर मधुर वचन राक्षस का, क्रोध हो गया है ठंडा । ठडा पडता नही क्रोध तब, जब सिर पर पड़ता डंडा ।। ज्यों-ज्यो रात बीतती जती, राक्षस का आकार घटा । थक कर लुढक गया बेचारा, नही वहाँ पर रहा डटा ।। कृष्ण जीत गये : कृष्ण का तरीका : तीनो जगे कृष्ण ने पूछा, चोटे लगी बहा क्यो रक्त । लड़ते रहे रात भर हम तो, सोये अभी अभी ही फक्त ।। क्या न तुम्हारे सन्मुख राक्षस, आया नही बताओ जी । है क्या यही तुम्हारा राक्षस, परखो आगे आओ जी ॥
विज एक चुनाव । एक सौ तेईस दो 'आये । ए ॥ प्रहर दूसरे में सात्यकि का, दानव से संग्राम जांगे जब बलराम देखलो, उनसे भी वह नही टला ।। हारे तीनों जीता राक्षस, निकला कोई सार नही । कृष्ण उठे अपनी वारी पर, हाथों में हथियार नही । 'राक्षस ने ललकारा मैं हूँ, भूखा इनको खाऊँगा । बाधक तुम न बनोगे तो मै, तुमको नही सताऊँगा । ॥ बोले कृष्ण हमारे होते, लगा न सकते दानव कैसे सह सकता है, स्पष्ट चुनौती वाली बात ॥ खड़े हो गए कृष्ण सामने, बोले अक्षर एक नही । तनिक क्रोध आने न दिया है, खोया धर्म विवेक नही । शान्त देखकर दानव वोला, लड़ते करते क्यो न प्रहार । शुरू करो तुम लड़ना पहले, मेरे पास नही हथियार ।। तुम हो बड़े बहादुर योद्धा, वन के स्वामी बहुत अजेय । तुम्हें पराजित करने वाला, जनमा कौन यहाँ श्रद्धेय ।। सुनकर मधुर वचन राक्षस का, क्रोध हो गया है ठंडा । ठडा पडता नही क्रोध तब, जब सिर पर पड़ता डंडा ।। ज्यों-ज्यो रात बीतती जती, राक्षस का आकार घटा । थक कर लुढक गया बेचारा, नही वहाँ पर रहा डटा ।। कृष्ण जीत गये : कृष्ण का तरीका : तीनो जगे कृष्ण ने पूछा, चोटे लगी बहा क्यो रक्त । लड़ते रहे रात भर हम तो, सोये अभी अभी ही फक्त ।। क्या न तुम्हारे सन्मुख राक्षस, आया नही बताओ जी । है क्या यही तुम्हारा राक्षस, परखो आगे आओ जी ॥
नाखून काटने को लेकर धर्म-शास्त्रों में कई अहम बातें बताई गई हैं। आइए जानते हैं कि नाखून किस दिन काटना शुभ होता है। हिंदू धर्म में गणपति बप्पा की पूजा का विधान बुधवार के दिन माना गया है। बुद्धि और शुभता के देवता भगवान गणेश को कहते हैं। भक्तों के जीवन में सभी कष्टों को गणेश जी दूर करते हैं। भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए हिंदू धर्म में सोमवार का दिन बताया गया है। मान्यताओं के अनुसार, सिर्फ सच्ची श्रद्धा ही भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए जरूरी होती है। हिन्दू शास्त्रों में भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना का दिन मंगलवार बताया गया है। हनुमान जी की विधि पूर्वक पूजा इस दिन करने से वह अपने भक्तों से प्रसन्न होते हैं।
नाखून काटने को लेकर धर्म-शास्त्रों में कई अहम बातें बताई गई हैं। आइए जानते हैं कि नाखून किस दिन काटना शुभ होता है। हिंदू धर्म में गणपति बप्पा की पूजा का विधान बुधवार के दिन माना गया है। बुद्धि और शुभता के देवता भगवान गणेश को कहते हैं। भक्तों के जीवन में सभी कष्टों को गणेश जी दूर करते हैं। भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए हिंदू धर्म में सोमवार का दिन बताया गया है। मान्यताओं के अनुसार, सिर्फ सच्ची श्रद्धा ही भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए जरूरी होती है। हिन्दू शास्त्रों में भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना का दिन मंगलवार बताया गया है। हनुमान जी की विधि पूर्वक पूजा इस दिन करने से वह अपने भक्तों से प्रसन्न होते हैं।
बता दें कि विश्वभर में कुल हींग उत्पादन का 40 प्रतिशत का उपयोग अकेले भारत करता है. जिसके विदेशों के आयात करने में देश को करीब 9000 करोड़ खर्च करने पड़ते हैं. हिमाचल ने हींग की खेती करने में सफलता हासिल कर ली है. किन्नौर के लिप्पा गांव में पिछले साल बोए बीज का अंकुर फूट चुका है, जिससे अब हिमाचल देश के करोड़ों रुपये बचाने की राह पर है. गौर रहे कि हिमाचल से संबंध रखने वाले डॉ. विक्रम शर्मा ने मुश्किल से ईरान से हींग का बीज लाया. हिमाचल के कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने सबसे पहले लाहौल-स्पीति में बीच आवंटित किया. जिसके बाद किन्नौर में भी बीच बांटा गया. हिमाचल में किन्नौर, लाहौल स्पीति समेत सभी ऊपरी क्षेत्रों में हींग की खेती की संभावनाएं तलाशी जा रही है. हींग का बीच हिमाचल पहुंचाने वाले डॉ. विक्रम सिंह केंद्रीय कॉफी बोर्ड के सदस्य हैं और डेढ़ दशक से विभिन्न उत्पादों को लेकर शोध कर रहे हैं. वे हींग का उत्पादन भारत में ही किए जाने को लेकर प्रयास कर रहे थे. उन्होंने मुश्किल से ईरान से हींग का बीज हासिल किया और हिमाचल के लाहौल-स्पीति, किन्नौर, चंबा समेत अन्य ऊपरी क्षेत्रों को उत्पादन के लिए उपयुक्त पाया गया है. डॉ. विक्रम द्वारा विदेश से मंगवाए गए हींग के बीज को हिमाचल के कृषि मंत्री डॉ. राम लाल मारकंडा ने चौधरी सरवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के उदयपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से यहां के किसानों को हींग का बीज दिया गया है. केंद्रीय काफी बोर्ड के सदस्य एवं वाणिज्यिक खेती को लेकर शोध में जुटे डॉ. विक्रम शर्मा के अनुसार हींग का पौधा शुष्क व सर्द मरू भूमि में पैदा होता है. हींग मुख्य रूप से ईरान, तुर्की कजाकिस्तान, रूस व अफगानिस्तान के सर्द इलाकों में पैदा किया जाता है. हींग के लिए भारत पूरी तरह से इन देशों पर निर्भर है. हर साल देश के खजाने से करोड़ों रुपये के हींग के आयात पर खर्च होते हैं. डॉ. विक्रम के अनुसार भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में हिमालयी इलाके हींग उत्पादन के लिए उपयुक्त हैं. इन इलाकों की जलवायु हींग उत्पादन के लिए सभी जरूरी शर्तों को पूरा करती है. डॉ. विक्रम कहते हैं कि उन्होंने पिछले वर्ष प्रयास करके हींग का बीज ईरान से हासिल किया था. उसके बाद तुर्की व अफगानिस्तान से भी उन्होंने बीज हासिल किया है. हींग का उत्पादन केंद्र सरकार की किसानों की आय दोगुना करने की सोच को साकार करने में योगदान देगा. डॉ. बिक्रम ने बताया कि पहाड़ी इलाकों में कमर्शियल फसलों के उत्पादन से किसानों की आय बढ़ेगी और युवाओं को रोजगार हासिल होगा. डॉ. विक्रम का कहना है कि उन्होंने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी मुलाकात की थी. राज्य सरकार ने उन्हें कमर्शियल खेती के लिए हर संभव मदद का भरोसा दिया है. इसी कड़ी में राज्य के कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने लाहौल-स्पीति और किन्नौर में हींग का प्रथम परीक्षण करने में पूरा सहयोग किया. फेरुल फोइटिडा के पौधे से रस निकाल कर उसे बर्तन में डालकर सुखाया जाता है. उसी से हींग बनता है. ये पौधा सर्द व शुष्क इलाकों में होता है. इसे कई दवाइयों में इस्तेमाल किया जाता है. दुनिया में हींग की जितनी खपत होती है. इसका एक पौधा दूध देने के लिए पांच वर्ष में तैयार होता है. शुद्ध हींग की कीमत 35 हजार रुपए किलो होती है. इसका मसालों से लेकर दवाइयों में इस्तेमाल होता है. हिमाचल की मिट्टी में पल रहा ईरान से आया बीज, देश में पहली बार हो रही इस खेती से बचेंगे हजारों करोड़ Reviewed by News Himachali on September 22, 2018 Rating:
बता दें कि विश्वभर में कुल हींग उत्पादन का चालीस प्रतिशत का उपयोग अकेले भारत करता है. जिसके विदेशों के आयात करने में देश को करीब नौ हज़ार करोड़ खर्च करने पड़ते हैं. हिमाचल ने हींग की खेती करने में सफलता हासिल कर ली है. किन्नौर के लिप्पा गांव में पिछले साल बोए बीज का अंकुर फूट चुका है, जिससे अब हिमाचल देश के करोड़ों रुपये बचाने की राह पर है. गौर रहे कि हिमाचल से संबंध रखने वाले डॉ. विक्रम शर्मा ने मुश्किल से ईरान से हींग का बीज लाया. हिमाचल के कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने सबसे पहले लाहौल-स्पीति में बीच आवंटित किया. जिसके बाद किन्नौर में भी बीच बांटा गया. हिमाचल में किन्नौर, लाहौल स्पीति समेत सभी ऊपरी क्षेत्रों में हींग की खेती की संभावनाएं तलाशी जा रही है. हींग का बीच हिमाचल पहुंचाने वाले डॉ. विक्रम सिंह केंद्रीय कॉफी बोर्ड के सदस्य हैं और डेढ़ दशक से विभिन्न उत्पादों को लेकर शोध कर रहे हैं. वे हींग का उत्पादन भारत में ही किए जाने को लेकर प्रयास कर रहे थे. उन्होंने मुश्किल से ईरान से हींग का बीज हासिल किया और हिमाचल के लाहौल-स्पीति, किन्नौर, चंबा समेत अन्य ऊपरी क्षेत्रों को उत्पादन के लिए उपयुक्त पाया गया है. डॉ. विक्रम द्वारा विदेश से मंगवाए गए हींग के बीज को हिमाचल के कृषि मंत्री डॉ. राम लाल मारकंडा ने चौधरी सरवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के उदयपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से यहां के किसानों को हींग का बीज दिया गया है. केंद्रीय काफी बोर्ड के सदस्य एवं वाणिज्यिक खेती को लेकर शोध में जुटे डॉ. विक्रम शर्मा के अनुसार हींग का पौधा शुष्क व सर्द मरू भूमि में पैदा होता है. हींग मुख्य रूप से ईरान, तुर्की कजाकिस्तान, रूस व अफगानिस्तान के सर्द इलाकों में पैदा किया जाता है. हींग के लिए भारत पूरी तरह से इन देशों पर निर्भर है. हर साल देश के खजाने से करोड़ों रुपये के हींग के आयात पर खर्च होते हैं. डॉ. विक्रम के अनुसार भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में हिमालयी इलाके हींग उत्पादन के लिए उपयुक्त हैं. इन इलाकों की जलवायु हींग उत्पादन के लिए सभी जरूरी शर्तों को पूरा करती है. डॉ. विक्रम कहते हैं कि उन्होंने पिछले वर्ष प्रयास करके हींग का बीज ईरान से हासिल किया था. उसके बाद तुर्की व अफगानिस्तान से भी उन्होंने बीज हासिल किया है. हींग का उत्पादन केंद्र सरकार की किसानों की आय दोगुना करने की सोच को साकार करने में योगदान देगा. डॉ. बिक्रम ने बताया कि पहाड़ी इलाकों में कमर्शियल फसलों के उत्पादन से किसानों की आय बढ़ेगी और युवाओं को रोजगार हासिल होगा. डॉ. विक्रम का कहना है कि उन्होंने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी मुलाकात की थी. राज्य सरकार ने उन्हें कमर्शियल खेती के लिए हर संभव मदद का भरोसा दिया है. इसी कड़ी में राज्य के कृषि मंत्री डॉ. रामलाल मारकंडा ने लाहौल-स्पीति और किन्नौर में हींग का प्रथम परीक्षण करने में पूरा सहयोग किया. फेरुल फोइटिडा के पौधे से रस निकाल कर उसे बर्तन में डालकर सुखाया जाता है. उसी से हींग बनता है. ये पौधा सर्द व शुष्क इलाकों में होता है. इसे कई दवाइयों में इस्तेमाल किया जाता है. दुनिया में हींग की जितनी खपत होती है. इसका एक पौधा दूध देने के लिए पांच वर्ष में तैयार होता है. शुद्ध हींग की कीमत पैंतीस हजार रुपए किलो होती है. इसका मसालों से लेकर दवाइयों में इस्तेमाल होता है. हिमाचल की मिट्टी में पल रहा ईरान से आया बीज, देश में पहली बार हो रही इस खेती से बचेंगे हजारों करोड़ Reviewed by News Himachali on September बाईस, दो हज़ार अट्ठारह Rating:
का संबंध से बताया जाता है। किवदंतियों के अनुसार सांवलिया सेठ मीरा बाई के वही है जिनकी वह पूजा किया करती थी। मीरा बाई संत महात्माओं की जमात में इन मूर्तियों के साथ भ्रमणशील रहती थी। ऐसी ही एक दयाराम नामक संत की जमात थी जिनके पास ये मूर्तियां थी।
का संबंध से बताया जाता है। किवदंतियों के अनुसार सांवलिया सेठ मीरा बाई के वही है जिनकी वह पूजा किया करती थी। मीरा बाई संत महात्माओं की जमात में इन मूर्तियों के साथ भ्रमणशील रहती थी। ऐसी ही एक दयाराम नामक संत की जमात थी जिनके पास ये मूर्तियां थी।
गगरेट। चुनावी साल में बिजली उपभोक्ताओं को एक सौ पच्चीस यूनिट बिजली निशुल्क देने का दाव खेल कर मतदाताओं को रिझाने वाली प्रदेश भाजपा सरकार के राज में अघोषित पावर कट ने उद्योगों की सेहत नासाज कर दी है। हालात यह हैं कि बिना कोई पूर्व सूचना के लग रहे अघोषित पावर कटों से उद्योगों के उत्पादन पर इतना प्रतिकूल असर पड़ा है कि उद्योगपतियों की कमर ही टूट कर रह गई है। उद्योगपतियों की मानें तो बिना किसी पूर्व सूचना के लग रहे इन कटों से उत्पादन तो गिर ही रहा है बल्कि कच्चे माल का भी काफी नुकसान हो रहा है। उद्योगपतियों ने सरकार से मांग की है कि उद्योगों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करे अन्यथा प्रदेश के उद्योग दूसरे राज्यों को पलायन को मजबूर होंगे। प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए उद्योगपति तभी उत्साहित हुए थे क्योंकि प्रदेश में एक तो दूसरे राज्यों की तुलना में सस्ती बिजली मिलती है तो दूसरी बात यह कि यहां निर्बाध विद्युत आपूर्ति की जाती है। पिछले कुछ दिनों से यहां भी उद्योग अन्य राज्यों जैसी परिस्थितियों का सामना करने को विवश हैं। हालात यह हैं कि औद्योगिक क्षेत्रों में बिना किसी पूर्व सूचना के ही घोषित बिजली कट लगाए जा रहे हैं। इसे लेकर अब उद्योगपतियों का भी पारा चढऩा शुरू हो गया है। औद्योगिक क्षेत्र गगरेट में स्थित एक उद्योग के मालिक ने बताया कि शनिवार को अघोषित विद्युत कट लगने पर जब उन्होंने बिजली क्यों गई ौर कब आएगी यह जानने के लिए विद्युत विभाग के सहायक अभियंता को फोन किया तो जवाब मिला कि उन्हें कुछ पता नहीं ये कट पीछे से ही है। इसके बाद उन्होंने अधिशासी अभियंता को फोन किया तो वहां से भी उन्हें यही जवाब मिला। इसके बाद उन्होंने अधीक्षण अभियंता को फोन किया तो वहां से भी उन्हें ऐसा ही जवाब मिला। अगर सक्षम अधिकारी ही यह नहीं जानते तो उद्योगों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति कैसे होगी। उधर उपमंडल औद्योगिक संघ के महासचिव सुरेश शर्मा का कहना है कि अघोषित विद्युत कटों ने उद्योगों की कमर तोड़कर रख दी है। अगर यही सिलसिला रहा तो उद्योगों के पास यहां से पलायन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। वहीं विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता अशोक परमार का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र गगरेट में पावर कट स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि पीछे से लगा था। फिर भी उच्च अधिकारियों को समस्या के बारे में अवगत करवाया गया है। जल्द ही इसका समाधान किया जाएगा।
गगरेट। चुनावी साल में बिजली उपभोक्ताओं को एक सौ पच्चीस यूनिट बिजली निशुल्क देने का दाव खेल कर मतदाताओं को रिझाने वाली प्रदेश भाजपा सरकार के राज में अघोषित पावर कट ने उद्योगों की सेहत नासाज कर दी है। हालात यह हैं कि बिना कोई पूर्व सूचना के लग रहे अघोषित पावर कटों से उद्योगों के उत्पादन पर इतना प्रतिकूल असर पड़ा है कि उद्योगपतियों की कमर ही टूट कर रह गई है। उद्योगपतियों की मानें तो बिना किसी पूर्व सूचना के लग रहे इन कटों से उत्पादन तो गिर ही रहा है बल्कि कच्चे माल का भी काफी नुकसान हो रहा है। उद्योगपतियों ने सरकार से मांग की है कि उद्योगों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करे अन्यथा प्रदेश के उद्योग दूसरे राज्यों को पलायन को मजबूर होंगे। प्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए उद्योगपति तभी उत्साहित हुए थे क्योंकि प्रदेश में एक तो दूसरे राज्यों की तुलना में सस्ती बिजली मिलती है तो दूसरी बात यह कि यहां निर्बाध विद्युत आपूर्ति की जाती है। पिछले कुछ दिनों से यहां भी उद्योग अन्य राज्यों जैसी परिस्थितियों का सामना करने को विवश हैं। हालात यह हैं कि औद्योगिक क्षेत्रों में बिना किसी पूर्व सूचना के ही घोषित बिजली कट लगाए जा रहे हैं। इसे लेकर अब उद्योगपतियों का भी पारा चढऩा शुरू हो गया है। औद्योगिक क्षेत्र गगरेट में स्थित एक उद्योग के मालिक ने बताया कि शनिवार को अघोषित विद्युत कट लगने पर जब उन्होंने बिजली क्यों गई ौर कब आएगी यह जानने के लिए विद्युत विभाग के सहायक अभियंता को फोन किया तो जवाब मिला कि उन्हें कुछ पता नहीं ये कट पीछे से ही है। इसके बाद उन्होंने अधिशासी अभियंता को फोन किया तो वहां से भी उन्हें यही जवाब मिला। इसके बाद उन्होंने अधीक्षण अभियंता को फोन किया तो वहां से भी उन्हें ऐसा ही जवाब मिला। अगर सक्षम अधिकारी ही यह नहीं जानते तो उद्योगों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति कैसे होगी। उधर उपमंडल औद्योगिक संघ के महासचिव सुरेश शर्मा का कहना है कि अघोषित विद्युत कटों ने उद्योगों की कमर तोड़कर रख दी है। अगर यही सिलसिला रहा तो उद्योगों के पास यहां से पलायन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। वहीं विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता अशोक परमार का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र गगरेट में पावर कट स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि पीछे से लगा था। फिर भी उच्च अधिकारियों को समस्या के बारे में अवगत करवाया गया है। जल्द ही इसका समाधान किया जाएगा।
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में गहमा- गहमी जारी है. शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटिल ने कहा कि मेरे पास सुप्रिया सुले का फोन आया था और उन्होंने मुझे जल्द वाईबी चव्हाण केंद्र पहुंचने को कहा. आगे उन्होंने कहा कि मुझे नही पता अजित पवार और अन्य विधायक यहां क्यों आए थे. बता दें कि बगावत के बाद बागी नेताओं की शरद पवार से पहली मुलाकात है. बगावत के बीच अजित गुट के विधायक शरद पवार से मिलने पहुंचे. अजित गुट के नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि हमारे पास सुप्रिया सुले का फोन आया था. शरद पवार से मिलने गए नेताओं में छगन भुजबल, अदिति तटकरे और हसन मशरिफ भी शामिल थे. अजित गुट के नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि हम शरद पवार का आशीर्वाद लेने आए थे. हमने पैर पकड़ कर आशीर्वाद लिया. हमने पवार साहब को मनाने की कोशिश की लेकिन वो नही मानें. लेकिन उन्होंने शांति से हमारी बात सुनी, उनसे हमने अपील की कि एनसीपी के नेता साथ में जुड़े हैं.
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में गहमा- गहमी जारी है. शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटिल ने कहा कि मेरे पास सुप्रिया सुले का फोन आया था और उन्होंने मुझे जल्द वाईबी चव्हाण केंद्र पहुंचने को कहा. आगे उन्होंने कहा कि मुझे नही पता अजित पवार और अन्य विधायक यहां क्यों आए थे. बता दें कि बगावत के बाद बागी नेताओं की शरद पवार से पहली मुलाकात है. बगावत के बीच अजित गुट के विधायक शरद पवार से मिलने पहुंचे. अजित गुट के नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि हमारे पास सुप्रिया सुले का फोन आया था. शरद पवार से मिलने गए नेताओं में छगन भुजबल, अदिति तटकरे और हसन मशरिफ भी शामिल थे. अजित गुट के नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि हम शरद पवार का आशीर्वाद लेने आए थे. हमने पैर पकड़ कर आशीर्वाद लिया. हमने पवार साहब को मनाने की कोशिश की लेकिन वो नही मानें. लेकिन उन्होंने शांति से हमारी बात सुनी, उनसे हमने अपील की कि एनसीपी के नेता साथ में जुड़े हैं.
देहरादून, 25 मई (ब्यूरो)। इस मौके पर पीएम ने उत्तराखंड में चल रही नौ महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स को नवरत्न की संज्ञा देते हुए राज्य में तेजी से हो रहे विकास कार्यों के लिए सीएम पुष्कर ङ्क्षसह धामी की पीठ भी थपथपाई। पीएम ने परिवारवाद और भ्रष्टाचार के कारण अवरुद्ध विकास के लिए पूर्ववर्ती सरकारों को दोषी बताया। थर्सडे को वंदे भारत एक्सप्रेस के इनॉग्रेशन मौके पर नई दिल्ली से पीएम नरेन्द्र मोदी वर्चुअल माध्यम से हरी झंडी दिखाई। दून में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और सीएम पुष्कर धामी ने ट्रेन को नई दिल्ली के लिए रवाना किया। पीएम ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी स्टेट के लिए कनेक्टिविटी कितनी जरूरी है, यह हम जानते हैं। कनेक्टिविटी की कमी से कैसे गांव के गांव खाली हो गए, उस पीड़ा को भी हम समझते हैं। उत्तराखंड में ही पर्यटन, खेती-किसानी, उद्योगों से रोजगार के अवसर बनें, इसके लिए हम आज परिश्रम कर रहे हैं। हमारी सीमाओं तक पहुंच आसान हो, राष्ट्ररक्षा में जुटे हमारे सैनिकों को असुविधा न हो, इसमें भी ये आधुनिक कनेक्टिविटी बहुत काम आएगी। हमारी डबल इंजन की सरकार उत्तराखंड के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। पीएम ने कहा कि जब वे बाबा केदार के दर्शन करने गए थे, तो उनके मुख से पंक्तियां निकली थीं कि यह दशक उत्तराखंड का होगा। उत्तराखंड आज जिस तरह से कानून व्यवस्था को सर्वोपरि रखते हुए विकास के अभियान को आगे बढ़ा रहा है। उत्तराखंड आस्था का केंद्र है। चारधाम यात्रा हर वर्ष रिकॉॅर्ड तोड़ रही है। वहीं, कांवड़ यात्रा और कुंभ में भी लाखों श्रद्धालु देश-दुनिया से उत्तराखंड पहुंचते हैं। जिसके लिए उत्तराखंड में विकास कार्य बहुत जरूरी हैं। केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि उत्तराखंड के रेल नेटवर्क विस्तार के लिए पहले की सरकार में 187 करोड़ रुपये दिए जाते थे। जबकि, इस वर्ष मोदी सरकार ने देवभूमि को पांच हजार करोड़ रुपये की धनराशि दी है। सीएम पुष्कर ङ्क्षसह धामी ने देवभूमि उत्तराखंड को वंदे भारत एक्सप्रेस व राज्य के समस्त रेल नेटवर्क को विद्युतीकरण की सौगात देने के लिए पीएम मोदी व केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का राज्य की जनता की ओर से आभार जताया। वंदे भारत एक्सप्रेस दून से दिल्ली की दूरी 4. 45 घंटे में पूरा करेगी। ट्रेन सप्ताह में वेडनसडे को छोड़कर 6 दिन चलेगी। दून से नई दिल्ली जाने के लिए ट्रेन हरिद्वार, रुड़की, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और मेरठ स्टेशनों पर रुककर गुजरेगी। ::दून स्टेशन से ऐसे हुई वंदे भारत रवानाः: -सुबह 10 बजे--सीएम धामी व केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पहुंचे दून रेलवे स्टेशन। -सुबह 10. 5 मिनट पर --रेल मंत्री व सीएम पहुंचे ट्रेन के लोको पायलट सीट तक। -दोनों नेताओं ने करीब 20 मिनट तक ट्रेन का विजिट किया। -सुबह 11. 39 मिनट पर पीएम ने वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना। :::वर्जनः:: वंदे भारत ट्रेन में पहली बार मैंने सफर किया है। मेरे लिए ये खास अनुभव रहा। इस ट्रेन में हर प्रकार की हाईटेक सुविधाएं देखने को मिली हैं। जिसका यात्रियों को पूरा लाभ मिलेगा। -सिमरन, स्टूडेंट, चिल्ड्रन अकेडमी। ट्रेन पूरी तरह से हाईटेक व मॉडर्न टेक्नोलॉजी से लैस है। सेंसर डोर, लाइट, कैमरा इस ट्रेन की खासियतें हैंं। सीटिंग चेयर भी आरामदायक हैं। सामान रखने के लिए टेबल भी मौजूद है। लोगों को इसका पूरा लाभ मिलेगा। -कार्तिक सिंह, स्टूडेंट, चिल्ड्रन एकेडमी। जिस प्रकार से वंदे भारत ट्रेन हाईटेक है, लोगों से उम्मीद है कि इस ट्रेन से सफर करते वक्त, उसी प्रकार से ट्रेन को मेनटेन करने में मदद करें। तभी ट्रेन में सफर करने का भी लोगों का लाभ मिल सकेगा। -उन्नति, स्टूडेंट, टचवुड। सरकार की ओर से अच्छी व सुगम जर्नी के लिए ये ट्रेन फुली फर्निश्ड किया गया है। एसी से लेकर सीट और टॉयलेट तक हाईटेक हैं। जिससे लोगों को सफर के दौरान थकावट तक महसूस नहीं होगी। -नीति सक्सेना, टीचर, टचवुड।
देहरादून, पच्चीस मई । इस मौके पर पीएम ने उत्तराखंड में चल रही नौ महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स को नवरत्न की संज्ञा देते हुए राज्य में तेजी से हो रहे विकास कार्यों के लिए सीएम पुष्कर ङ्क्षसह धामी की पीठ भी थपथपाई। पीएम ने परिवारवाद और भ्रष्टाचार के कारण अवरुद्ध विकास के लिए पूर्ववर्ती सरकारों को दोषी बताया। थर्सडे को वंदे भारत एक्सप्रेस के इनॉग्रेशन मौके पर नई दिल्ली से पीएम नरेन्द्र मोदी वर्चुअल माध्यम से हरी झंडी दिखाई। दून में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और सीएम पुष्कर धामी ने ट्रेन को नई दिल्ली के लिए रवाना किया। पीएम ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी स्टेट के लिए कनेक्टिविटी कितनी जरूरी है, यह हम जानते हैं। कनेक्टिविटी की कमी से कैसे गांव के गांव खाली हो गए, उस पीड़ा को भी हम समझते हैं। उत्तराखंड में ही पर्यटन, खेती-किसानी, उद्योगों से रोजगार के अवसर बनें, इसके लिए हम आज परिश्रम कर रहे हैं। हमारी सीमाओं तक पहुंच आसान हो, राष्ट्ररक्षा में जुटे हमारे सैनिकों को असुविधा न हो, इसमें भी ये आधुनिक कनेक्टिविटी बहुत काम आएगी। हमारी डबल इंजन की सरकार उत्तराखंड के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। पीएम ने कहा कि जब वे बाबा केदार के दर्शन करने गए थे, तो उनके मुख से पंक्तियां निकली थीं कि यह दशक उत्तराखंड का होगा। उत्तराखंड आज जिस तरह से कानून व्यवस्था को सर्वोपरि रखते हुए विकास के अभियान को आगे बढ़ा रहा है। उत्तराखंड आस्था का केंद्र है। चारधाम यात्रा हर वर्ष रिकॉॅर्ड तोड़ रही है। वहीं, कांवड़ यात्रा और कुंभ में भी लाखों श्रद्धालु देश-दुनिया से उत्तराखंड पहुंचते हैं। जिसके लिए उत्तराखंड में विकास कार्य बहुत जरूरी हैं। केंद्रीय रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि उत्तराखंड के रेल नेटवर्क विस्तार के लिए पहले की सरकार में एक सौ सत्तासी करोड़ रुपये दिए जाते थे। जबकि, इस वर्ष मोदी सरकार ने देवभूमि को पांच हजार करोड़ रुपये की धनराशि दी है। सीएम पुष्कर ङ्क्षसह धामी ने देवभूमि उत्तराखंड को वंदे भारत एक्सप्रेस व राज्य के समस्त रेल नेटवर्क को विद्युतीकरण की सौगात देने के लिए पीएम मोदी व केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का राज्य की जनता की ओर से आभार जताया। वंदे भारत एक्सप्रेस दून से दिल्ली की दूरी चार. पैंतालीस घंटाटे में पूरा करेगी। ट्रेन सप्ताह में वेडनसडे को छोड़कर छः दिन चलेगी। दून से नई दिल्ली जाने के लिए ट्रेन हरिद्वार, रुड़की, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और मेरठ स्टेशनों पर रुककर गुजरेगी। ::दून स्टेशन से ऐसे हुई वंदे भारत रवानाः: -सुबह दस बजे--सीएम धामी व केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पहुंचे दून रेलवे स्टेशन। -सुबह दस. पाँच मिनट पर --रेल मंत्री व सीएम पहुंचे ट्रेन के लोको पायलट सीट तक। -दोनों नेताओं ने करीब बीस मिनट तक ट्रेन का विजिट किया। -सुबह ग्यारह. उनतालीस मिनट पर पीएम ने वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना। :::वर्जनः:: वंदे भारत ट्रेन में पहली बार मैंने सफर किया है। मेरे लिए ये खास अनुभव रहा। इस ट्रेन में हर प्रकार की हाईटेक सुविधाएं देखने को मिली हैं। जिसका यात्रियों को पूरा लाभ मिलेगा। -सिमरन, स्टूडेंट, चिल्ड्रन अकेडमी। ट्रेन पूरी तरह से हाईटेक व मॉडर्न टेक्नोलॉजी से लैस है। सेंसर डोर, लाइट, कैमरा इस ट्रेन की खासियतें हैंं। सीटिंग चेयर भी आरामदायक हैं। सामान रखने के लिए टेबल भी मौजूद है। लोगों को इसका पूरा लाभ मिलेगा। -कार्तिक सिंह, स्टूडेंट, चिल्ड्रन एकेडमी। जिस प्रकार से वंदे भारत ट्रेन हाईटेक है, लोगों से उम्मीद है कि इस ट्रेन से सफर करते वक्त, उसी प्रकार से ट्रेन को मेनटेन करने में मदद करें। तभी ट्रेन में सफर करने का भी लोगों का लाभ मिल सकेगा। -उन्नति, स्टूडेंट, टचवुड। सरकार की ओर से अच्छी व सुगम जर्नी के लिए ये ट्रेन फुली फर्निश्ड किया गया है। एसी से लेकर सीट और टॉयलेट तक हाईटेक हैं। जिससे लोगों को सफर के दौरान थकावट तक महसूस नहीं होगी। -नीति सक्सेना, टीचर, टचवुड।
बॉलीवुड अदाकारा और मॉडल दिशा पटानी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव पाई जाती हैं और समय-समय पर वे अपनी लेटेस्ट फोटो और वीडियो पोस्ट करती ही रहती हैं. उनकी ये फोटो और वीडियो उनके फैन्स को बेहद पसंद भी आते हैं और दिशा पटानी सोशल मीडिया पर अपनी बोल्ड और सेक्सी अदाओं के चलते हमेशा से ही चर्चा में रहती है. जबकि वह टाइगर श्रॉफ के साथ भी अपने रिलेशनशिप को लेकर फैन्स के बीच चर्चा का विषय बनी हुई रहती हैं. फ़िलहाल वे एक वीडियो को लेकर सुर्ख़ियों का हिस्सा बनी हुई है. बता दें कि टाइगर और दिशा पटानी की फोटो और वीडियो अकसर सोशल मीडिया पर सामने आती रहती हैं. दिशा पटानी की एक झलक फैन्स को घायल करने का काम देती है. दिशा पटानी का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वे सड़क पर चलती है और थोड़ी हे देर में वे कर में बैठकर भीड़-भाड़ वाली सड़क से रवाना हो जाती है. उनका यह वीडियो खूब वायरल किया जा रहा है. खास बात यह है कि दिशा को जो एक बार देख लेता है वह उम्र भर के लिए उनका फैन बन जाता है. दिशा के चाहने वालों की संख्या में रोजाना इजाफा भी हो रहा है. दिशा पटानी द्वारा अपने करियर की शुरुआत तेलुगु फिल्म लॉफर से की गई थी, जो कि वरुण तेज के साथ थी. वहीं इसके बाद दिशा हिंदी स्पोर्ट्स फिल्म धोनीः द अनटोल्ड स्टोरी और एक्शन फिल्म बाघी 2 में नजर आईं है और हाल ही में उन्हें फिल्म भारत में भी देखा गया था. जिसमें उन्होंने अपने गाने से फैन्स का दिल जीत लिया था. दिशा पटानी इन दिनों अपकमिंग फिल्म मलंग की शूटिंग में व्यस्त चल रही हैं.
बॉलीवुड अदाकारा और मॉडल दिशा पटानी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव पाई जाती हैं और समय-समय पर वे अपनी लेटेस्ट फोटो और वीडियो पोस्ट करती ही रहती हैं. उनकी ये फोटो और वीडियो उनके फैन्स को बेहद पसंद भी आते हैं और दिशा पटानी सोशल मीडिया पर अपनी बोल्ड और सेक्सी अदाओं के चलते हमेशा से ही चर्चा में रहती है. जबकि वह टाइगर श्रॉफ के साथ भी अपने रिलेशनशिप को लेकर फैन्स के बीच चर्चा का विषय बनी हुई रहती हैं. फ़िलहाल वे एक वीडियो को लेकर सुर्ख़ियों का हिस्सा बनी हुई है. बता दें कि टाइगर और दिशा पटानी की फोटो और वीडियो अकसर सोशल मीडिया पर सामने आती रहती हैं. दिशा पटानी की एक झलक फैन्स को घायल करने का काम देती है. दिशा पटानी का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वे सड़क पर चलती है और थोड़ी हे देर में वे कर में बैठकर भीड़-भाड़ वाली सड़क से रवाना हो जाती है. उनका यह वीडियो खूब वायरल किया जा रहा है. खास बात यह है कि दिशा को जो एक बार देख लेता है वह उम्र भर के लिए उनका फैन बन जाता है. दिशा के चाहने वालों की संख्या में रोजाना इजाफा भी हो रहा है. दिशा पटानी द्वारा अपने करियर की शुरुआत तेलुगु फिल्म लॉफर से की गई थी, जो कि वरुण तेज के साथ थी. वहीं इसके बाद दिशा हिंदी स्पोर्ट्स फिल्म धोनीः द अनटोल्ड स्टोरी और एक्शन फिल्म बाघी दो में नजर आईं है और हाल ही में उन्हें फिल्म भारत में भी देखा गया था. जिसमें उन्होंने अपने गाने से फैन्स का दिल जीत लिया था. दिशा पटानी इन दिनों अपकमिंग फिल्म मलंग की शूटिंग में व्यस्त चल रही हैं.
इस पर श्रीकृष्ण ने पूछा- "प्रभो । उस पुरुष ने गजर कुमार को मिद्धि प्राप्त करने में क्योकर और कैसे सहायता दी ?" कृष्ण के इस प्रश्न के उत्तर में भगवान समझाते हुए बोले - "हे कृष्ण । जब तुम अपने सुभटो सहित गजारूढ होकर मेरे पास आ रहे थे, तब तुम्हें द्वारका के मध्य राजमार्ग में एक वृद्ध पुरुष मिला था, जो अपने काँपते हाथो से एक-एक ईंट उठा करके भीतर ले जा रहा था। उस पर अनुकम्पा करके तुमने ईंटो के ढेर में से एक ईंट उठाकर वृद्ध के घर में पहुंचा दी थी । तुम्हारी देखादेमी तुम्हारे अनुचर सुभटो ने भी ईंटें उठाई और पूरा ढेर वृद्ध के घर पहुंचा दिया । हे कृष्ण । तुम्हारे यस अनुकम्पाजनित सेवाकार्य से वृद्ध का कार्य शोघ्र ही पूर्ण हो गया । "हे कृष्ण ! जिस प्रकार तुमने उस वृद्ध पुरुष को सहायता को, उसी प्रकार उस पुरुष ने गजसुकुमार के सिर पर दहवते मगारे रसकर गजसुकुमार की सहायता को, "अणेगभवसय सहस्ससचियपम्म उदोरेमार्णणं बहुदरम्मणिज्जरटू साहिज्जे दिण्णे ।" क्योकि उस पुरुष के इस कार्य ने गजसुकुमार के लाखों भवो मे सचित किये हुए कम की एकान्त उदीरणा करके उनका सम्पूर्ण क्षय करने में सहायता दी है।" भगवान के इस समाधान के अनन्तर कृष्ण को उस पुरुष का परिचय, नाम मादि जानने की उत्सुकता हुई । अत. कृष्ण ने भगवान से पूछा'हे भगवन् । मैं उस पुरष को किस प्रकार जान सकूँगा ?" गगवान ने बताया. "हे कृष्ण ! जब तुम मेरे पास से वापस लोटोगे और द्वारका नगरी मे प्रवेश करोगे तभी तुम्हें एक पुरुष मिलेगा। तुम्हे देगते ही यह पुरुष अपना आयु पूर्ण कर तुम्हारे सामने हो गढ़ा नादा मृत्यु को प्राप्त होगा। उस पुरुष को ही तुम वह पुरुष समझना ।" भगवान अरिष्टनेमि से सब तरह का समाधान प्राप्त कर कृष्ण ने उन्हें चन्दन नमस्कार किया और आगिदोक्य हाथी पर बैठकर द्वारा नगरी में अपने भवन की ओर जाने नगे । दूघर सोमिल ब्राह्मण जनुकुमार के सिर पर गोसीमिट्टी की पाल बाँधकर और सिर पर ते बारे मर घर नौट जाया तो प्रात वाल उठार उसने विचार विधाय-यासुदेव भगवान अरिष्टनेमि की बन्दना करने गये है। भगवार ने मेरे द्वारा किये गये गाय का वृत्तान्त श्री कृष्ण को अवश्य यता दिया होगा, क्योकि भगयान अरिष्टनेमि तो अन्तर्यामी और भय वृद्ध जानते है । मेरे सपा से पूर्ण समर्थ कृष्णन्यासुदेव न जाने मुझे कि गौन मारे ।' यह सोच पर उसने विषय किया कि कर राजमार्ग से नौटेंगे, भाग जाना पाहिए ।
इस पर श्रीकृष्ण ने पूछा- "प्रभो । उस पुरुष ने गजर कुमार को मिद्धि प्राप्त करने में क्योकर और कैसे सहायता दी ?" कृष्ण के इस प्रश्न के उत्तर में भगवान समझाते हुए बोले - "हे कृष्ण । जब तुम अपने सुभटो सहित गजारूढ होकर मेरे पास आ रहे थे, तब तुम्हें द्वारका के मध्य राजमार्ग में एक वृद्ध पुरुष मिला था, जो अपने काँपते हाथो से एक-एक ईंट उठा करके भीतर ले जा रहा था। उस पर अनुकम्पा करके तुमने ईंटो के ढेर में से एक ईंट उठाकर वृद्ध के घर में पहुंचा दी थी । तुम्हारी देखादेमी तुम्हारे अनुचर सुभटो ने भी ईंटें उठाई और पूरा ढेर वृद्ध के घर पहुंचा दिया । हे कृष्ण । तुम्हारे यस अनुकम्पाजनित सेवाकार्य से वृद्ध का कार्य शोघ्र ही पूर्ण हो गया । "हे कृष्ण ! जिस प्रकार तुमने उस वृद्ध पुरुष को सहायता को, उसी प्रकार उस पुरुष ने गजसुकुमार के सिर पर दहवते मगारे रसकर गजसुकुमार की सहायता को, "अणेगभवसय सहस्ससचियपम्म उदोरेमार्णणं बहुदरम्मणिज्जरटू साहिज्जे दिण्णे ।" क्योकि उस पुरुष के इस कार्य ने गजसुकुमार के लाखों भवो मे सचित किये हुए कम की एकान्त उदीरणा करके उनका सम्पूर्ण क्षय करने में सहायता दी है।" भगवान के इस समाधान के अनन्तर कृष्ण को उस पुरुष का परिचय, नाम मादि जानने की उत्सुकता हुई । अत. कृष्ण ने भगवान से पूछा'हे भगवन् । मैं उस पुरष को किस प्रकार जान सकूँगा ?" गगवान ने बताया. "हे कृष्ण ! जब तुम मेरे पास से वापस लोटोगे और द्वारका नगरी मे प्रवेश करोगे तभी तुम्हें एक पुरुष मिलेगा। तुम्हे देगते ही यह पुरुष अपना आयु पूर्ण कर तुम्हारे सामने हो गढ़ा नादा मृत्यु को प्राप्त होगा। उस पुरुष को ही तुम वह पुरुष समझना ।" भगवान अरिष्टनेमि से सब तरह का समाधान प्राप्त कर कृष्ण ने उन्हें चन्दन नमस्कार किया और आगिदोक्य हाथी पर बैठकर द्वारा नगरी में अपने भवन की ओर जाने नगे । दूघर सोमिल ब्राह्मण जनुकुमार के सिर पर गोसीमिट्टी की पाल बाँधकर और सिर पर ते बारे मर घर नौट जाया तो प्रात वाल उठार उसने विचार विधाय-यासुदेव भगवान अरिष्टनेमि की बन्दना करने गये है। भगवार ने मेरे द्वारा किये गये गाय का वृत्तान्त श्री कृष्ण को अवश्य यता दिया होगा, क्योकि भगयान अरिष्टनेमि तो अन्तर्यामी और भय वृद्ध जानते है । मेरे सपा से पूर्ण समर्थ कृष्णन्यासुदेव न जाने मुझे कि गौन मारे ।' यह सोच पर उसने विषय किया कि कर राजमार्ग से नौटेंगे, भाग जाना पाहिए ।
बॉलीवुड में अपनी कमाई से सबके छक्के छुड़ा देने वाली फिल्म 'पठान' ने अब फिल्म शहज़ादा और सेल्फी के भी छक्के छुड़ा दिए हैं जिसमे पठान के मेकर्स ने दर्शको को एक ऑफर देकर 3 मार्च से लेकर 4 मार्च तक फिल्म की एक टिकट खरीदने पर एक टिकट फ्री देने का ऑफर रखा हैं। कार्तिक के फैन सिर्फ आम लोग नहीं हैं बल्कि पॉपुलर सेलेब्स के बीच भी कार्तिक की इमेज काफी अच्छी बनी हुई है। इसका सबूत हाल ही में देखने को मिला जब बॉलीवुड की पंगा क्वीन कंगना रनौत ने हाल ही में सरेआम कार्तिक आर्यन की तारीफों के पुल बांधे। वही कार्तिक आर्यन और कृति सेनन की मूवी शहजादा, बॉक्स ऑफिस पर दूसरे दिन कुछ खास कलेक्शन नहीं कर पाई है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने फिल्म ने पहले दिन भारत में सिर्फ 7 करोड़ की कमाई की है। फिल्म उम्मीदों पर खड़ी नहीं उतर पाई है। इसकी एक वजह वीकेंड और महाशिवरात्रि भी बताई जा रही है। अब कार्तिक आर्यन को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसे सुनने के बाद आप भी चौंक जाएंगे। दरअसल, एक्टर के खिलाफ मुंबई पुलिस ने एक बड़ा एक्शन लिया है। लेकिन हैरानी की बात तो ये है कि इस एक्शन का कनेक्शन मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर से है। बॉक्स ऑफिस पर रिलीज़ हुए फिल्म शहजादा और हॉलीवुड की मूवी 'एंट मैन 3' के बीच आज कलेक्शन को लेकर कमाल जंग देखने को मिलेगी जहां एक ओर दोनों ही मूवीज एडवांस बुकिंग का कलेक्शन लाखो में बताया जा रहा था वही अब देखना दिलचस्प होगा की कोनसी मूवी कलेक्शन की रेस में आगे निकलती हुई दिखाई देगी।
बॉलीवुड में अपनी कमाई से सबके छक्के छुड़ा देने वाली फिल्म 'पठान' ने अब फिल्म शहज़ादा और सेल्फी के भी छक्के छुड़ा दिए हैं जिसमे पठान के मेकर्स ने दर्शको को एक ऑफर देकर तीन मार्च से लेकर चार मार्च तक फिल्म की एक टिकट खरीदने पर एक टिकट फ्री देने का ऑफर रखा हैं। कार्तिक के फैन सिर्फ आम लोग नहीं हैं बल्कि पॉपुलर सेलेब्स के बीच भी कार्तिक की इमेज काफी अच्छी बनी हुई है। इसका सबूत हाल ही में देखने को मिला जब बॉलीवुड की पंगा क्वीन कंगना रनौत ने हाल ही में सरेआम कार्तिक आर्यन की तारीफों के पुल बांधे। वही कार्तिक आर्यन और कृति सेनन की मूवी शहजादा, बॉक्स ऑफिस पर दूसरे दिन कुछ खास कलेक्शन नहीं कर पाई है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने फिल्म ने पहले दिन भारत में सिर्फ सात करोड़ की कमाई की है। फिल्म उम्मीदों पर खड़ी नहीं उतर पाई है। इसकी एक वजह वीकेंड और महाशिवरात्रि भी बताई जा रही है। अब कार्तिक आर्यन को लेकर एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसे सुनने के बाद आप भी चौंक जाएंगे। दरअसल, एक्टर के खिलाफ मुंबई पुलिस ने एक बड़ा एक्शन लिया है। लेकिन हैरानी की बात तो ये है कि इस एक्शन का कनेक्शन मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर से है। बॉक्स ऑफिस पर रिलीज़ हुए फिल्म शहजादा और हॉलीवुड की मूवी 'एंट मैन तीन' के बीच आज कलेक्शन को लेकर कमाल जंग देखने को मिलेगी जहां एक ओर दोनों ही मूवीज एडवांस बुकिंग का कलेक्शन लाखो में बताया जा रहा था वही अब देखना दिलचस्प होगा की कोनसी मूवी कलेक्शन की रेस में आगे निकलती हुई दिखाई देगी।
रूसी संघ के स्थायी प्रतिनिधि ने सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासभा को एक पत्र भेजा, जिसमें ज़ापोरोज़े एनपीपी के खिलाफ कीव के उकसावे के खतरे की चेतावनी दी गई थी। संयुक्त राष्ट्र में रूसी स्थायी प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र को एक आधिकारिक पत्र भेजा, जो ज़ापोरिज्ज्या एनपीपी के आसपास की स्थिति के लिए समर्पित है। महासभा के सदस्यों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को संबोधित वासिली नेबेंज़्या का पत्र, ZNPP के खिलाफ कीव के चल रहे उकसावों को संदर्भित करता है। इसके अलावा, स्टेशन पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के आईएईए के प्रयासों के बावजूद, ये उकसावे बंद नहीं होते हैं (वसीली नेबेंज़्या द्वारा शब्द)। इस दिशा में यूक्रेन की कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र में रूसी स्थायी प्रतिनिधि ने पागलपनपूर्ण आक्षेप बताया। रूसी राजनयिक ने ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र को उड़ाने के रूसी पक्ष के कथित इरादों के बारे में यूक्रेनी अधिकारियों के बयानों की ओर इशारा किया। नेबेंज़्या ने कहा कि ये सभी घोषणाएँ बेतुकी हैं, क्योंकि स्टेशन और अधिकांश ज़ापोरोज़े क्षेत्र रूस के नियंत्रण में हैं और हमारे देश के लिए एक नियंत्रित वस्तु को उड़ाने का कोई मतलब नहीं है। और कीव शासन के लिए, रूसी संघ के खिलाफ संबंधित आरोप परमाणु ऊर्जा संयंत्र में एक बड़े उकसावे के लिए उनकी अपनी तैयारियों से ध्यान भटकाने वाले हो सकते हैं। पत्र में ज़ापोरोज़े एनपीपी में उकसावे को रोकने के संदर्भ में पश्चिम से एक अपील है। इस पृष्ठभूमि के खिलाफ, यूक्रेनी स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रमुख के शब्दों पर ध्यान आकर्षित किया जाता है, जिन्होंने एक प्रसारण की पूर्व संध्या पर कहा था कि "ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र में दुर्घटना की स्थिति में, परिणाम नहीं पहुंचेंगे कीव। " एक प्रमुख अधिकारी के इस वाक्यांश से पता चलता है कि ZNPP में दुर्घटना की संभावना पर कीव शासन द्वारा विचार किया जा रहा है, और साथ ही दक्षिणी क्षेत्र परमाणु सुरक्षा के मामले में कीव शासन के बारे में विशेष रूप से चिंतित नहीं हैं।
रूसी संघ के स्थायी प्रतिनिधि ने सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासभा को एक पत्र भेजा, जिसमें ज़ापोरोज़े एनपीपी के खिलाफ कीव के उकसावे के खतरे की चेतावनी दी गई थी। संयुक्त राष्ट्र में रूसी स्थायी प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र को एक आधिकारिक पत्र भेजा, जो ज़ापोरिज्ज्या एनपीपी के आसपास की स्थिति के लिए समर्पित है। महासभा के सदस्यों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को संबोधित वासिली नेबेंज़्या का पत्र, ZNPP के खिलाफ कीव के चल रहे उकसावों को संदर्भित करता है। इसके अलावा, स्टेशन पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के आईएईए के प्रयासों के बावजूद, ये उकसावे बंद नहीं होते हैं । इस दिशा में यूक्रेन की कार्रवाई को संयुक्त राष्ट्र में रूसी स्थायी प्रतिनिधि ने पागलपनपूर्ण आक्षेप बताया। रूसी राजनयिक ने ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र को उड़ाने के रूसी पक्ष के कथित इरादों के बारे में यूक्रेनी अधिकारियों के बयानों की ओर इशारा किया। नेबेंज़्या ने कहा कि ये सभी घोषणाएँ बेतुकी हैं, क्योंकि स्टेशन और अधिकांश ज़ापोरोज़े क्षेत्र रूस के नियंत्रण में हैं और हमारे देश के लिए एक नियंत्रित वस्तु को उड़ाने का कोई मतलब नहीं है। और कीव शासन के लिए, रूसी संघ के खिलाफ संबंधित आरोप परमाणु ऊर्जा संयंत्र में एक बड़े उकसावे के लिए उनकी अपनी तैयारियों से ध्यान भटकाने वाले हो सकते हैं। पत्र में ज़ापोरोज़े एनपीपी में उकसावे को रोकने के संदर्भ में पश्चिम से एक अपील है। इस पृष्ठभूमि के खिलाफ, यूक्रेनी स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रमुख के शब्दों पर ध्यान आकर्षित किया जाता है, जिन्होंने एक प्रसारण की पूर्व संध्या पर कहा था कि "ज़ापोरोज़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र में दुर्घटना की स्थिति में, परिणाम नहीं पहुंचेंगे कीव। " एक प्रमुख अधिकारी के इस वाक्यांश से पता चलता है कि ZNPP में दुर्घटना की संभावना पर कीव शासन द्वारा विचार किया जा रहा है, और साथ ही दक्षिणी क्षेत्र परमाणु सुरक्षा के मामले में कीव शासन के बारे में विशेष रूप से चिंतित नहीं हैं।
रांची. सोमवार सुबह 5. 45 के करीब देवघर शिव मंदिर परिसर में भगदड़ से 11 कावंड़ियों की मौत हो गई। 50 से अधिक लोग घायल हो गए। हादसा हुआ था जिस वक्त सावन के दूसरे सोमवार के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी थी। देवघर एसपी ने 10 लोगों की मौत की पुष्टि की है। इसी मंदिर परिसर में पिछली भगदड़ में 12 लोगों की जान चली गई थी। देवघर (झारखंड) : मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करने से बचने के लिए अखबार मालिकों द्वारा नित नये घिनौने हथकंडे अपनाये जा रहे हैं। यहां से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक 'इंडियन पंच' के मालिक ने अखबार में कार्यरत सभी कर्मियों से कहा है कि स्थानीय सहायक श्रमायुक्त ने पूरे स्टॉफ के नियुक्ति पत्र मांगे हैं, ताकि यह पता चले कि यहां कितने कर्मी कार्यरत हैं। उसके बाद हाजिरी रजिस्टर गायब कर दिया गया। फिर नोटिस दिया गया कि सभी कर्मी अपने आईडी कार्ड जमा कर दें। इसके पीछे अखबार प्रबंधन और श्रम विभाग की मिलीभगत बताई जा रही है। प्रभात खबर देवघर में काम करने वाले राकेश पुरोहितवार के भास्कर भागलपुर ज्वॉइन करने से देवघर प्रभात खबर में अंदरूनी खुशी का माहौल है। कम वेतन में देवघर में 8-10 सालों से काम कर रहे कर्मचारियों को उम्मीद है कि अब भागलपुर में उनकी सेटिंग हो जाएगी। पहले भी इस बात को इस साईट पर डाला जा चुका था कि देवघर निवासी भागलपुर में कार्यरत एक पत्रकार की जबरदस्त लाबिंग से प्रभात खबर सकते में। अब नाम खुलकर सामने आ गया।
रांची. सोमवार सुबह पाँच. पैंतालीस के करीब देवघर शिव मंदिर परिसर में भगदड़ से ग्यारह कावंड़ियों की मौत हो गई। पचास से अधिक लोग घायल हो गए। हादसा हुआ था जिस वक्त सावन के दूसरे सोमवार के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी थी। देवघर एसपी ने दस लोगों की मौत की पुष्टि की है। इसी मंदिर परिसर में पिछली भगदड़ में बारह लोगों की जान चली गई थी। देवघर : मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करने से बचने के लिए अखबार मालिकों द्वारा नित नये घिनौने हथकंडे अपनाये जा रहे हैं। यहां से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक 'इंडियन पंच' के मालिक ने अखबार में कार्यरत सभी कर्मियों से कहा है कि स्थानीय सहायक श्रमायुक्त ने पूरे स्टॉफ के नियुक्ति पत्र मांगे हैं, ताकि यह पता चले कि यहां कितने कर्मी कार्यरत हैं। उसके बाद हाजिरी रजिस्टर गायब कर दिया गया। फिर नोटिस दिया गया कि सभी कर्मी अपने आईडी कार्ड जमा कर दें। इसके पीछे अखबार प्रबंधन और श्रम विभाग की मिलीभगत बताई जा रही है। प्रभात खबर देवघर में काम करने वाले राकेश पुरोहितवार के भास्कर भागलपुर ज्वॉइन करने से देवघर प्रभात खबर में अंदरूनी खुशी का माहौल है। कम वेतन में देवघर में आठ-दस सालों से काम कर रहे कर्मचारियों को उम्मीद है कि अब भागलपुर में उनकी सेटिंग हो जाएगी। पहले भी इस बात को इस साईट पर डाला जा चुका था कि देवघर निवासी भागलपुर में कार्यरत एक पत्रकार की जबरदस्त लाबिंग से प्रभात खबर सकते में। अब नाम खुलकर सामने आ गया।
कर्नाटक के होसपेट में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज मेरा सौभाग्य है कि मैं हनुमान की इस पावन भूमि को नमन कर रहा हूं लेकिन साथ ही मैं देख रहा हूं कि आज जब मैं यहां आया हूं, उसी समय कांग्रेस पार्टी ने अपने पत्र में इसकी घोषणा की. , बजरंगबली को बंद करने का निर्णय लिया गया है। कांग्रेस ने पहले श्री राम पर प्रतिबंध लगाया था और अब उन्होंने जय बजरंगबली का नारा लगाने वालों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। कर्नाटक विधानसभा की एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि कांग्रेस पार्टी प्रभु श्रीराम से भी पीड़ित है और अब जय बजरंगबली बोलने वालों से भी पीड़ित है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बीजेपी कर्नाटक की गरिमा और संस्कृति को नुकसान नहीं पहुंचाएगी. बीजेपी कर्नाटक के लोगों को आधुनिक सुविधाएं देने के लिए... नए अवसर देने के लिए कर्नाटक के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. पीएम मोदी ने कहा कि दशकों के कांग्रेस शासन ने शहरों और गांवों के बीच की दूरी बहुत बढ़ा दी है. भाजपा सरकार गांव और शहर के बीच की दूरी को लगातार कम कर रही है। आज हमारे गांव में शहर जैसी सुविधाएं पहुंच रही हैं। भाजपा सरकार गांव से जुड़ी अन्य चुनौतियों का भी समाधान कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम्पी एक ऐसी जगह है जिस पर न केवल भारत को बल्कि पूरे विश्व को गर्व है, लेकिन गुलामी की मानसिकता से भरी कांग्रेस को कभी भी भारत के इतिहास और विरासत पर गर्व नहीं हुआ है. हम्पी जैसे स्थान भी इससे पीड़ित हुए। यह भाजपा सरकार ही है जो अब 'स्वदेश दर्शन' के जरिए हम्पी की ऐतिहासिक विरासत की रक्षा कर रही है।
कर्नाटक के होसपेट में पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज मेरा सौभाग्य है कि मैं हनुमान की इस पावन भूमि को नमन कर रहा हूं लेकिन साथ ही मैं देख रहा हूं कि आज जब मैं यहां आया हूं, उसी समय कांग्रेस पार्टी ने अपने पत्र में इसकी घोषणा की. , बजरंगबली को बंद करने का निर्णय लिया गया है। कांग्रेस ने पहले श्री राम पर प्रतिबंध लगाया था और अब उन्होंने जय बजरंगबली का नारा लगाने वालों पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। कर्नाटक विधानसभा की एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि कांग्रेस पार्टी प्रभु श्रीराम से भी पीड़ित है और अब जय बजरंगबली बोलने वालों से भी पीड़ित है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बीजेपी कर्नाटक की गरिमा और संस्कृति को नुकसान नहीं पहुंचाएगी. बीजेपी कर्नाटक के लोगों को आधुनिक सुविधाएं देने के लिए... नए अवसर देने के लिए कर्नाटक के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. पीएम मोदी ने कहा कि दशकों के कांग्रेस शासन ने शहरों और गांवों के बीच की दूरी बहुत बढ़ा दी है. भाजपा सरकार गांव और शहर के बीच की दूरी को लगातार कम कर रही है। आज हमारे गांव में शहर जैसी सुविधाएं पहुंच रही हैं। भाजपा सरकार गांव से जुड़ी अन्य चुनौतियों का भी समाधान कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम्पी एक ऐसी जगह है जिस पर न केवल भारत को बल्कि पूरे विश्व को गर्व है, लेकिन गुलामी की मानसिकता से भरी कांग्रेस को कभी भी भारत के इतिहास और विरासत पर गर्व नहीं हुआ है. हम्पी जैसे स्थान भी इससे पीड़ित हुए। यह भाजपा सरकार ही है जो अब 'स्वदेश दर्शन' के जरिए हम्पी की ऐतिहासिक विरासत की रक्षा कर रही है।
आरपीएस ममता सारस्वत ने बताया कि जयसिंहपुरा खोर ब्रह्मपुरी निवासी 40 वर्षीय महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। आरोप है कि उसके घर में रिश्तेदार सहित तीन जने घुस आए। जिन्होंने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और बच्चे के साथ मारपीट की। पीडि़ता की शिकायत पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
आरपीएस ममता सारस्वत ने बताया कि जयसिंहपुरा खोर ब्रह्मपुरी निवासी चालीस वर्षीय महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। आरोप है कि उसके घर में रिश्तेदार सहित तीन जने घुस आए। जिन्होंने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और बच्चे के साथ मारपीट की। पीडि़ता की शिकायत पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
इस प्रकार बुध गुप्त कालीन एरण पाषाण स्तम्भ लेख 8485 ईसवी 8 में अपने कर्म में रत ब्राह्मण इन्द्र विष्णु का उल्लेख है । 39 स्वः कर्मा निरतस्या यक्ष कर्ता कृतुभाजिनः । इस प्रकार शास्त्रों एवं अभिलेखों में उनके सामान्य षडकर्मों की चर्चा मिलती है परन्तु वास्तविक रूप में सामान्य कर्मों के अतिरिक्त ब्राह्मण वर्ग अन्य कई व्यवसायों को भी अपनाया करते थे, जिसके आधार पर हम उन्हें कई वर्गों में विभक्त कर सकते हैं । व्यवसाय के आधार पर ब्राह्मणों को मुख्य रूप से तीन स्तर में वर्गीकृत किया जा सकता है । प्रथम स्तर में धार्मिक तथा बौद्धिक कार्यों से सम्बन्धित पेशेवर वर्ग 8 पुरोहित, आचार्य, विद्वान, पंडित, अध्यापक गण हूँ । द्वितीय स्तर में प्रशासनिक सामरिक तथा अन्य उच्च पदाधिकारियों का वर्ग । तृतीय स्तर में उत्पादन से सम्बन्धित व्यवसाय में रत यथा कृषि, व्यापार उद्योग में संलग्न ब्राह्मणों का वर्ग । सूत्रों, स्मृतियों, पुराणों सभी स्रोतों में ब्राह्मण पुरोहित के अनेक प्रमाण प्राप्त हैं 140 हर्षचरित में राजश्री के विवाह के अवसर पर उपस्थित ब्राह्मण पुरोहितों का उल्लेख प्राप्त है 141 लक्ष्मीधर ने उद्धृत किया है कि ब्राह्मण पुरोहित के रूप में समस्त धार्मिक कृत्यों को सम्पादित करता था । 42 मानसो ल्लास में संदर्भित है कि राज्य की रक्षा हेतु पुरोहित की नियुक्ति अति आवश्यक हे 143 यश स्तलक में ब्राह्मण पुरोहितों का प्रसंग है । साहित्यिक साक्ष्यों के आलोक में पूर्वमध्य कालीन अभिलेखों में ब्राह्मण पुरोहित के अनेक उदाहरण प्राप्त होते हैं। गोविन्द चन्द्र देव के कामौली ताम्रपत्र (1125 ई०) में महापुरोहित जगुशर्मन का उल्लेख है जिन्हें गोविन्द चन्द्र देव ने हलदीय पतलाया के महसौजमौज के गाँव को दान में दिया था 145 गोविन्द चन्द्र देव ने सही ताम्रपत्र 81104 ईसवी 8 पुरोहित जी जागूक की आज्ञा से लेख उत्कीर्ण कराये जाने का प्रसंग है । 46 परमार वंशीय अर्जुन वर्मन का सीहोर ताम्र पत्र लेख 81215 ईसवी 8 में पंडित सौमदेव के पौत्र, पंडित जैतसिंह के पुत्र पुरोहित पंडित श्री गोविन्द शर्मा का वर्णन मिलता है 147 परमारों के एक अन्य लेख शेरगढ़ का जिन प्रतिमा पादपीठ अभिलेख 8 1134 ई० 8 में पुरोहित श्री ठक्कुर जी वामन स्वामी का प्रसंग मिलता है । 48 महेन्द्र पाल देव द्वितीय का परतापगढ़ प्रस्तर अभिलेख 8969 ए० डीब 8 में पुरोहित त्रिविक्रमनाथ द्वारा लेख उत्कीर्ण किये जाने का उल्लेख है 49 ब्राह्मणों के विद्वान, आचार्य, पंडित होने के अनेक उदाहरण प्राप्त होते हैं । जयवर्मन द्वितीय का मांधाता ताम्रपत्र अभिलेख 8 1270 ईसवी 8 में स्मृति शास्त्र के ज्ञाता, व्याकरण शास्त्र में पारंगत विद्वान आचार्य का प्रसंग प्राप्त होता है 150 परमारवंशीय वाक्पति राजदेव द्वितीय का धरमपुरी ताम्रपत्र 8974 ईसवी में धनिक पंडित का पुत्र ज्ञान विज्ञान में सम्पन्न बसन्ताचार्य सभी आर्य समेत भूमि के दान दिये जाने का उल्लेख है । कलिंगराज गंग राजा अनन्तवर्मन एक ताम्रपत्र 8 922 ई० 8 में विद्वान ब्राह्मण सोमाचार्य को शासक द्वारा भूमि भेंट किये जाने का विवरण प्राप्त होता है । 52 अनंग भीम तृतीय के नगरी ताम्र पत्र अभिलेख (1230 31 ईसवी) में संगत है कि श्री पुरुषोत्तम देव की प्रतिष्ठा के अवसर पर कास्यप गोत्र आचार्य ब्राह्मण चन्द्रशमन को शासक द्वारा द्वि वाटी भूमि दान में प्राप्त हुई 153 गाहड़वाल नरेश गोविन्द चन्द्र देव के एक दान पत्र 81150 ईसवी 8 में गोविन्द चन्द्र द्वारा दामोदर पंडित को एक गाँव दान में दिये जाने का उल्लेख है । 54 इस प्रकार ऐसा प्रतीत होता है कि ब्राह्मण आचार्य पंडित को दान दक्षिणा में प्राप्त धन ही जीविकोपार्जन का मुख्य साधन था । दान-दक्षिणा के अतिरिक्त इन्हें पुरुस्कार स्वरूप भी धन प्रदान किया जाता था । मानसोल्लास में वर्णित है, राजकुमार की शिक्षा समाप्त होने पर आचार्य को वस्त्र, सुवर्ग, भूमि, ग्राम इत्यादि पुरुस्कार स्वरूप दिया जाता था। 55 स्पष्ट है कि ब्राह्मण आचार्य अध्यापक की सामाजिक स्थिति अच्छी थी। समाज में विशेष रूप से उच्च कोटि के विद्वान आचार्य को प्रतिष्ठा, सम्मान सामान्तयः अधिक प्राप्त था । विद्वान ब्राह्मणों का एक वर्ग राजकीय कार्यों में संलग्न दिखायी देता है । जयवर्मन देव द्वितीय का मांधाता ताम्रपत्र अभिलेख में प्रसारित है कि श्रेष्ठतम पति छाविश के पुत्र हर्षदेव नामक विद्वान द्वारा एक विशुद्ध राजशासन लिखा गया था 156 जयवर्मन देव द्वितीय के अन्य लेख मांडी प्रस्तर लेख में ब्राह्मण विद्वान वामन द्वारा प्रशस्ति उत्कीर्ण किये जाने का उल्लेख है । विवेच्य काल में सेनापति, सैनिक, मंत्री के रूप में भी ब्राह्मणों की भूमिका महत्त्वपूर्ण थी । यद्यपि प्राचीन विधि ग्रन्थों ने उक्त व्यवसायों को आपद धर्म के अन्तर्गत ग्रहण करने का विधान है,58 किन्तु अधीत कालीन ग्रन्थों में ब्राह्मणों के सामान्य धर्म के रूप में चर्चा की गई है । 59 इस संदर्भ में अनेक उदाहरण प्राप्त होते हैं । हेमचन्द्र की द्वयाश्रय महाकाव्य में प्रसारित है कि सपादलक्ष के शासक अना की सेना का नेतृत्व राका नामक एक ब्राह्मण सेनानायक ने किया था । दश कुमार चारत में युद्ध विद्या नै निपुंग ब्राह्मण कुमार का प्रसंग है । ब्राह्मणों के सामरिक क्षेत्र में रत होने की पुष्टि अभिनेखीय साक्ष्यों के समावर्त में प्रस्तुत की जा सकती है । सेमरा ने दानपत्र से विदित होता है कि ब्राह्मण सेनापति कल्हण पुत्र अजयपाल भी सेनापति था । इच्छावर अभिलेख के अनुसार चन्देल शासक परमर्दि का सेनापति मदनपाल शर्मन भी ब्राह्मण था 163 प्रस्तुत तथ्य के संदर्भ में वीलिपटन लेख में उल्लिखित है कि शिलाहार वंश के शासक रटराज का सेनापति नागमैय ब्राह्मण वंशीय था 164 इस प्रकार ब्राह्मणों के सैनिक होने के प्रमाण भी हमें मिलते हैं । राज - तगिनी में ब्राह्मणों के युद्ध क्षेत्र में सैनिक के रूप में लड़ने का प्रसंग है । इसके अतिरिक्त विरुधा विधिविधवमास में प्रसारित है स्कन्द और उसके पौत्र स्कन्द और वामन ने सोमेश्वर और पृथ्वीराज तृतीय के मंत्री तथा साहसी सैनिक के रूप में सेवा की थी 166 अभिलेखीय साक्ष्य नरायणपाल कालीन गरूड़ स्तम्भ अभिलेख में वर्णित है कि ब्राह्मण मंत्री गौरवमिश्र एक उच्च कोटि के विद्वान के साथ-साथ एक साहसी योदा भी थे 167 ब्राह्मणों के प्रशासनिक तंत्र से जुड़े होने के प्रमाण हमें पूर्वमध्य कालीन साक्ष्यों में प्राप्त होते हैं । कादम्बरी में उल्लेख है कि कुमालपाल तथा शुकनास68 कुमशः शूद्रक और तारापीड के ब्राह्मण मंत्री थे । प्रस्तुत कथन की सुपुष्टि अभिलेखीय प्रमाणों से भी होती है । कोनी अभिलेख में कल्चुरी शासक पृथ्वीदेव प्रथम और रत्नपुर के रत्नदेव ने ब्राह्मणों को मंत्री पद पर नियुक्त किया था 169
इस प्रकार बुध गुप्त कालीन एरण पाषाण स्तम्भ लेख आठ हज़ार चार सौ पचासी ईसवी आठ में अपने कर्म में रत ब्राह्मण इन्द्र विष्णु का उल्लेख है । उनतालीस स्वः कर्मा निरतस्या यक्ष कर्ता कृतुभाजिनः । इस प्रकार शास्त्रों एवं अभिलेखों में उनके सामान्य षडकर्मों की चर्चा मिलती है परन्तु वास्तविक रूप में सामान्य कर्मों के अतिरिक्त ब्राह्मण वर्ग अन्य कई व्यवसायों को भी अपनाया करते थे, जिसके आधार पर हम उन्हें कई वर्गों में विभक्त कर सकते हैं । व्यवसाय के आधार पर ब्राह्मणों को मुख्य रूप से तीन स्तर में वर्गीकृत किया जा सकता है । प्रथम स्तर में धार्मिक तथा बौद्धिक कार्यों से सम्बन्धित पेशेवर वर्ग आठ पुरोहित, आचार्य, विद्वान, पंडित, अध्यापक गण हूँ । द्वितीय स्तर में प्रशासनिक सामरिक तथा अन्य उच्च पदाधिकारियों का वर्ग । तृतीय स्तर में उत्पादन से सम्बन्धित व्यवसाय में रत यथा कृषि, व्यापार उद्योग में संलग्न ब्राह्मणों का वर्ग । सूत्रों, स्मृतियों, पुराणों सभी स्रोतों में ब्राह्मण पुरोहित के अनेक प्रमाण प्राप्त हैं एक सौ चालीस हर्षचरित में राजश्री के विवाह के अवसर पर उपस्थित ब्राह्मण पुरोहितों का उल्लेख प्राप्त है एक सौ इकतालीस लक्ष्मीधर ने उद्धृत किया है कि ब्राह्मण पुरोहित के रूप में समस्त धार्मिक कृत्यों को सम्पादित करता था । बयालीस मानसो ल्लास में संदर्भित है कि राज्य की रक्षा हेतु पुरोहित की नियुक्ति अति आवश्यक हे एक सौ तैंतालीस यश स्तलक में ब्राह्मण पुरोहितों का प्रसंग है । साहित्यिक साक्ष्यों के आलोक में पूर्वमध्य कालीन अभिलेखों में ब्राह्मण पुरोहित के अनेक उदाहरण प्राप्त होते हैं। गोविन्द चन्द्र देव के कामौली ताम्रपत्र में महापुरोहित जगुशर्मन का उल्लेख है जिन्हें गोविन्द चन्द्र देव ने हलदीय पतलाया के महसौजमौज के गाँव को दान में दिया था एक सौ पैंतालीस गोविन्द चन्द्र देव ने सही ताम्रपत्र इक्यासी हज़ार एक सौ चार ईसवी आठ पुरोहित जी जागूक की आज्ञा से लेख उत्कीर्ण कराये जाने का प्रसंग है । छियालीस परमार वंशीय अर्जुन वर्मन का सीहोर ताम्र पत्र लेख इक्यासी हज़ार दो सौ पंद्रह ईसवी आठ में पंडित सौमदेव के पौत्र, पंडित जैतसिंह के पुत्र पुरोहित पंडित श्री गोविन्द शर्मा का वर्णन मिलता है एक सौ सैंतालीस परमारों के एक अन्य लेख शेरगढ़ का जिन प्रतिमा पादपीठ अभिलेख आठ एक हज़ार एक सौ चौंतीस ईशून्य आठ में पुरोहित श्री ठक्कुर जी वामन स्वामी का प्रसंग मिलता है । अड़तालीस महेन्द्र पाल देव द्वितीय का परतापगढ़ प्रस्तर अभिलेख आठ हज़ार नौ सौ उनहत्तर एशून्य डीब आठ में पुरोहित त्रिविक्रमनाथ द्वारा लेख उत्कीर्ण किये जाने का उल्लेख है उनचास ब्राह्मणों के विद्वान, आचार्य, पंडित होने के अनेक उदाहरण प्राप्त होते हैं । जयवर्मन द्वितीय का मांधाता ताम्रपत्र अभिलेख आठ एक हज़ार दो सौ सत्तर ईसवी आठ में स्मृति शास्त्र के ज्ञाता, व्याकरण शास्त्र में पारंगत विद्वान आचार्य का प्रसंग प्राप्त होता है एक सौ पचास परमारवंशीय वाक्पति राजदेव द्वितीय का धरमपुरी ताम्रपत्र आठ हज़ार नौ सौ चौहत्तर ईसवी में धनिक पंडित का पुत्र ज्ञान विज्ञान में सम्पन्न बसन्ताचार्य सभी आर्य समेत भूमि के दान दिये जाने का उल्लेख है । कलिंगराज गंग राजा अनन्तवर्मन एक ताम्रपत्र आठ नौ सौ बाईस ईशून्य आठ में विद्वान ब्राह्मण सोमाचार्य को शासक द्वारा भूमि भेंट किये जाने का विवरण प्राप्त होता है । बावन अनंग भीम तृतीय के नगरी ताम्र पत्र अभिलेख में संगत है कि श्री पुरुषोत्तम देव की प्रतिष्ठा के अवसर पर कास्यप गोत्र आचार्य ब्राह्मण चन्द्रशमन को शासक द्वारा द्वि वाटी भूमि दान में प्राप्त हुई एक सौ तिरेपन गाहड़वाल नरेश गोविन्द चन्द्र देव के एक दान पत्र इक्यासी हज़ार एक सौ पचास ईसवी आठ में गोविन्द चन्द्र द्वारा दामोदर पंडित को एक गाँव दान में दिये जाने का उल्लेख है । चौवन इस प्रकार ऐसा प्रतीत होता है कि ब्राह्मण आचार्य पंडित को दान दक्षिणा में प्राप्त धन ही जीविकोपार्जन का मुख्य साधन था । दान-दक्षिणा के अतिरिक्त इन्हें पुरुस्कार स्वरूप भी धन प्रदान किया जाता था । मानसोल्लास में वर्णित है, राजकुमार की शिक्षा समाप्त होने पर आचार्य को वस्त्र, सुवर्ग, भूमि, ग्राम इत्यादि पुरुस्कार स्वरूप दिया जाता था। पचपन स्पष्ट है कि ब्राह्मण आचार्य अध्यापक की सामाजिक स्थिति अच्छी थी। समाज में विशेष रूप से उच्च कोटि के विद्वान आचार्य को प्रतिष्ठा, सम्मान सामान्तयः अधिक प्राप्त था । विद्वान ब्राह्मणों का एक वर्ग राजकीय कार्यों में संलग्न दिखायी देता है । जयवर्मन देव द्वितीय का मांधाता ताम्रपत्र अभिलेख में प्रसारित है कि श्रेष्ठतम पति छाविश के पुत्र हर्षदेव नामक विद्वान द्वारा एक विशुद्ध राजशासन लिखा गया था एक सौ छप्पन जयवर्मन देव द्वितीय के अन्य लेख मांडी प्रस्तर लेख में ब्राह्मण विद्वान वामन द्वारा प्रशस्ति उत्कीर्ण किये जाने का उल्लेख है । विवेच्य काल में सेनापति, सैनिक, मंत्री के रूप में भी ब्राह्मणों की भूमिका महत्त्वपूर्ण थी । यद्यपि प्राचीन विधि ग्रन्थों ने उक्त व्यवसायों को आपद धर्म के अन्तर्गत ग्रहण करने का विधान है,अट्ठावन किन्तु अधीत कालीन ग्रन्थों में ब्राह्मणों के सामान्य धर्म के रूप में चर्चा की गई है । उनसठ इस संदर्भ में अनेक उदाहरण प्राप्त होते हैं । हेमचन्द्र की द्वयाश्रय महाकाव्य में प्रसारित है कि सपादलक्ष के शासक अना की सेना का नेतृत्व राका नामक एक ब्राह्मण सेनानायक ने किया था । दश कुमार चारत में युद्ध विद्या नै निपुंग ब्राह्मण कुमार का प्रसंग है । ब्राह्मणों के सामरिक क्षेत्र में रत होने की पुष्टि अभिनेखीय साक्ष्यों के समावर्त में प्रस्तुत की जा सकती है । सेमरा ने दानपत्र से विदित होता है कि ब्राह्मण सेनापति कल्हण पुत्र अजयपाल भी सेनापति था । इच्छावर अभिलेख के अनुसार चन्देल शासक परमर्दि का सेनापति मदनपाल शर्मन भी ब्राह्मण था एक सौ तिरेसठ प्रस्तुत तथ्य के संदर्भ में वीलिपटन लेख में उल्लिखित है कि शिलाहार वंश के शासक रटराज का सेनापति नागमैय ब्राह्मण वंशीय था एक सौ चौंसठ इस प्रकार ब्राह्मणों के सैनिक होने के प्रमाण भी हमें मिलते हैं । राज - तगिनी में ब्राह्मणों के युद्ध क्षेत्र में सैनिक के रूप में लड़ने का प्रसंग है । इसके अतिरिक्त विरुधा विधिविधवमास में प्रसारित है स्कन्द और उसके पौत्र स्कन्द और वामन ने सोमेश्वर और पृथ्वीराज तृतीय के मंत्री तथा साहसी सैनिक के रूप में सेवा की थी एक सौ छयासठ अभिलेखीय साक्ष्य नरायणपाल कालीन गरूड़ स्तम्भ अभिलेख में वर्णित है कि ब्राह्मण मंत्री गौरवमिश्र एक उच्च कोटि के विद्वान के साथ-साथ एक साहसी योदा भी थे एक सौ सरसठ ब्राह्मणों के प्रशासनिक तंत्र से जुड़े होने के प्रमाण हमें पूर्वमध्य कालीन साक्ष्यों में प्राप्त होते हैं । कादम्बरी में उल्लेख है कि कुमालपाल तथा शुकनासअड़सठ कुमशः शूद्रक और तारापीड के ब्राह्मण मंत्री थे । प्रस्तुत कथन की सुपुष्टि अभिलेखीय प्रमाणों से भी होती है । कोनी अभिलेख में कल्चुरी शासक पृथ्वीदेव प्रथम और रत्नपुर के रत्नदेव ने ब्राह्मणों को मंत्री पद पर नियुक्त किया था एक सौ उनहत्तर
बिलारी। पर्वतारोही नूर मोहम्मद ने मनाली स्थित 14 हजार फीट ऊंची माउंट पतालसू पीक पर चढ़कर तिरंगा फहराया। इसके बाद बिलारी विधायक की फोटो हाथ में लेकर अपनी फोटो सोशल मीडिया पर साझा की। उसका कहना है कि वह विधायक फहीम के व्यवहार से प्रभावित हैं। मंगलवार को कांठ निवासी पर्वतारोही नूर मोहम्मद ने सोशल मीडिया पर अपनी फोटो साझा कर बताया कि वह हिमाचल प्रदेश के मनाली स्थित माउंट पतालसु पीक पर चढ़ाई कर चुके हैं। जो 14 हजार फीट ऊंची है। इसके बाद उन्होंने बिलारी विधायक की फोटो हाथ में लेकर फोटो खिंचवाई। जिसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। उन्होंने कहा है कि वह सपा विधायक से मुलाकात करने के बाद ही अपने मिशन पर निकले थे।
बिलारी। पर्वतारोही नूर मोहम्मद ने मनाली स्थित चौदह हजार फीट ऊंची माउंट पतालसू पीक पर चढ़कर तिरंगा फहराया। इसके बाद बिलारी विधायक की फोटो हाथ में लेकर अपनी फोटो सोशल मीडिया पर साझा की। उसका कहना है कि वह विधायक फहीम के व्यवहार से प्रभावित हैं। मंगलवार को कांठ निवासी पर्वतारोही नूर मोहम्मद ने सोशल मीडिया पर अपनी फोटो साझा कर बताया कि वह हिमाचल प्रदेश के मनाली स्थित माउंट पतालसु पीक पर चढ़ाई कर चुके हैं। जो चौदह हजार फीट ऊंची है। इसके बाद उन्होंने बिलारी विधायक की फोटो हाथ में लेकर फोटो खिंचवाई। जिसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। उन्होंने कहा है कि वह सपा विधायक से मुलाकात करने के बाद ही अपने मिशन पर निकले थे।
यण के प्रकाशन का जो कार्य हुआ उनमें खड्डविलास प्रेस, बाँकीपुर का "मानस- रामायण" अद्वितीय है । उस पुस्तक को देखकर श्रीमान् ग्रियर्सन साहब के प्रेम और परिश्रम की जितनी प्रशंसा की जाय, तथा अपने को जितना लज्जित किया जाय, थोड़ा है। बड़े बड़े सुंदर अक्षरों में छपी ऐसी प्रशस्त प्रति देख कर तबियत प्रसन्न हो जाती है। यह संवत् १९४६ तदनुसार सन् १८८९ में छपी थी। बरसे परिश्रम करके, रामचरितमानस की जितनी भी छपी२ या लिखी प्रतियाँ मिल सक उन सब को मँगाकर देखने और आपस में मिलान करने के बाद इसे ग्रियर्सन साहब ने छपवाया था। अंगद के प्रण --- तेहि समाज किया कठिन पन जेहि तौल्यो कैलास । तुलसी प्रभु महिमा कहौं, सेवक को बिस्वास ॥ की तरह समझ में नहीं आता कि गोस्वामी जी के मानस की प्रशंसा की जाय या ग्रियर्सन साहब के मन की। मैं तो प्रियर्सन साहब को ही बधाई दूँ गा जिन्होंने हम लोगों को जवाहिर में काँच न मिलाने का उपदेश दिया है। "इस रामचरितमानस में ग्रंथकार के लेखानुसार मक्षिका-स्थाने मक्षिका रखी गई है। कल्पना से काम नहीं लिया गया है । " वास्तव में भूमिका के ये शब्द इसकी अच्छाई हैं। १ -- मुखपृष्ठ - श्रीयुत गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस जिसको परम परिश्रम से श्री तुलसीदास जो की हस्तलिपि से मिला तथा शोध करके मान्यवर सर स्टुअर्ट काल्विन वेली साहेब बहादुर के० सी० आई० ई० लेफ़्टिनेंट गवर्नर बंगाल की आज्ञा से रामदीन सिंह ने प्रकाशित किया । पटना खड्जविलास प्रोस, सन् १८८६ (= सं० १६४६ ) । साइज १३३" x१०३ । पृष्ठसंख्या -- बालकांड १५५, अयोध्याकांड १२८; आरण्यकांड ३६; किष्किंधाकांड १६; सुंदरकांड २७; लंकाकांड ६४; उत्तरकांड ६६ । २ - सन् १८८६ तक बाबू रामदीन सिंह का कहना है कि रामायण की १२६ प्रति अनेक सुजनों द्वारा मुद्रित हुई थीं। संवत् १८५२ में कोदेरामजी की रामायण वेंकटेश्वर प्रेस, बंबई में छपी । इसका पाठ भी सर्वथा शुद्ध और प्रामाणिक माना जाता है। कोदोरामजी ने ग्रंथकार के समय से जो परंपरागत शिष्य हुए उनका इस प्रकार वर्णन मानसमयंक से उद्धृत किया हैब्रह्म किशोरीदत्त को ग्रंथकार ही दीन्ह । अल्पदत्त पढ़ि ताहि सों चित्रकूट में। लोन्ह ॥ रामप्रसादहिँ सो दई लहि तातें शिवलाल । दत्त फणीशहि जानि निज सेो दीन्ही सुखमाल ।। इसी परिपाटी के अनुकूल रामचरितमानस की ४ प्रतियाँ लिखी गईं। प्रथम श्रीमद्गोस्वामी जू के कर-कमल की लिखी प्रति से श्री किशोरीदत्तजी ने पढ़ा। अल्पदत्तजी ने दूसरी प्रति अपने शिष्य रामप्रसादजी को दी । शिवलाल शिवलाल पाठक ने तीसरी प्रति कराई। पं० शेषदत्तजी ने सं० १९०१ में चौथी प्रति जीवलाल नामक लेखक से लिखाई । इसी चौथी प्रति का पाठ लेकर केशरिया ग्राम जिला चम्पारन निवासी कोदोरामजी ने अपनी पोथी छपवाई थी । कोदोंरामजी की प्रति बड़े बड़े अक्षरों में नवाहिक पाठ-विधि तथा अनेक प्रयोगों समेत छपी थी। इसके अयोध्याकांड का नाम "अवध कांड", आरण्य कांड का नाम "वन कांड", सुंदर कांड का नाम "सुमेर कांड " तथा लंका कांड का नाम "युद्ध कांड " रखा गया था । कोदोरामजी को "मानसमयंक" के रचयिता के ये वाक्य प्रिय थे और उन्होंने अपनी पुस्तक में क्षेपक नहीं मिलाया है, ललो पूर्व संकल्प को रस मुनि बोचे जान । अधिक मिलाए हैं अधम करिहै नरक पयान ।। अनल काम अहि क्रोध है लोभहि बिच्छू जान । पाठ फेर जे करतु हैं ते शठ नरक समान ।। इतना होने पर भी अयोध्या कांड में "चार चौपाई के बाद दोहा" वाले नियम पालन में कोदौरामजी ने अयोध्या कांड के दोहा- नंबर ७,६३, १७२, १८४,२७८ के बाद दो दो अर्धालो बढ़ाकर सात सात पंक्तियों को प्राठ आठ किया है। इसी तरह दोहा-नंबर २८ और २०१ के बाद दो दो अर्धालियाँ घटा कर नव नव पंक्तियों को आठ श्राठ किया है। यह सब होते हुए भी पोथी अच्छी और प्रामाणिक है । इनका गुटका भी छपा था जिसकी नकल इलाहाबाद और काशी ने की। काशी नागरी प्रचारिणी सभा के पाँच सभासदों ने सं० १९६० (सन् १८०३ ई०) में "रामचरितमानस" का बड़ा सुंदर संस्करण छपवाया यह इंडियन प्रेस, प्रयाग में छपा था। सुंदर बड़े बड़े अक्षर, बड़ा आकार, बीच बीच में प्रायः अस्सी चित्र देखकर चित्त प्रसन्न हो जोता है । वास्तव में रामायण छपै तो ऐसी । कोशिश तो शुद्ध पाठ देने की की गई थी पर जैसा कुछ चाहिए, हो न सका। फिर भी पुस्तक की सुंदरता को देखकर यह पाठ-दोष छिप सा जाता है । आगे चलकर इसी पाठ को लेकर इंडियन प्रेस, प्रयाग ने, साधारण अक्षरों में एक छोटा "रामचरितमानस" छापा था । संवत् १९८० में गोस्वामीजी की त्रिशत-जयंती के अवसर पर काशीनागरी प्रचारिणी सभा से "तुलसी ग्रंथावली" प्रकाशित हुई थी। इसके प्रथम भाग में "रामचरितमानस" है । पुस्तक के अंत में कथाभाग है जिसमें रामायण में आए हुए पौराणिक पुरुषों की कथा है। कहने की आवश्यकता नहीं कि यह प्रति अवसर के अनुरूप नहीं हुई । अयोध्या के महंत लोगों की दो सुंदर प्रतियाँ छपीं । एक तो बाबा माधवदास की प्रति का पाठ लेकर देशोपकारक प्रेस लखनऊ से सन् १९१२ में छपी थी। दूसरी बाबा सरयूदासजी ने बनारस में बैजनाथप्रसाद बुकसेलर, राजा दरवाजा के यहाँ सं० १९८२ में छपवाई थी । बाबा सरयूदासजी की प्रति छोटे अक्षरों में, गुटका रूप में भी, छपी थी । इन दोनों का पाठ अच्छा है । १ - ये चित्र काशिराज की प्रति के कुछ चित्रों के फोटो थे
यण के प्रकाशन का जो कार्य हुआ उनमें खड्डविलास प्रेस, बाँकीपुर का "मानस- रामायण" अद्वितीय है । उस पुस्तक को देखकर श्रीमान् ग्रियर्सन साहब के प्रेम और परिश्रम की जितनी प्रशंसा की जाय, तथा अपने को जितना लज्जित किया जाय, थोड़ा है। बड़े बड़े सुंदर अक्षरों में छपी ऐसी प्रशस्त प्रति देख कर तबियत प्रसन्न हो जाती है। यह संवत् एक हज़ार नौ सौ छियालीस तदनुसार सन् एक हज़ार आठ सौ नवासी में छपी थी। बरसे परिश्रम करके, रामचरितमानस की जितनी भी छपीदो या लिखी प्रतियाँ मिल सक उन सब को मँगाकर देखने और आपस में मिलान करने के बाद इसे ग्रियर्सन साहब ने छपवाया था। अंगद के प्रण --- तेहि समाज किया कठिन पन जेहि तौल्यो कैलास । तुलसी प्रभु महिमा कहौं, सेवक को बिस्वास ॥ की तरह समझ में नहीं आता कि गोस्वामी जी के मानस की प्रशंसा की जाय या ग्रियर्सन साहब के मन की। मैं तो प्रियर्सन साहब को ही बधाई दूँ गा जिन्होंने हम लोगों को जवाहिर में काँच न मिलाने का उपदेश दिया है। "इस रामचरितमानस में ग्रंथकार के लेखानुसार मक्षिका-स्थाने मक्षिका रखी गई है। कल्पना से काम नहीं लिया गया है । " वास्तव में भूमिका के ये शब्द इसकी अच्छाई हैं। एक -- मुखपृष्ठ - श्रीयुत गोस्वामी तुलसीदास कृत रामचरितमानस जिसको परम परिश्रम से श्री तुलसीदास जो की हस्तलिपि से मिला तथा शोध करके मान्यवर सर स्टुअर्ट काल्विन वेली साहेब बहादुर केशून्य सीशून्य आईशून्य ईशून्य लेफ़्टिनेंट गवर्नर बंगाल की आज्ञा से रामदीन सिंह ने प्रकाशित किया । पटना खड्जविलास प्रोस, सन् एक हज़ार आठ सौ छियासी । साइज एक सौ तैंतीस" xएक सौ तीन । पृष्ठसंख्या -- बालकांड एक सौ पचपन, अयोध्याकांड एक सौ अट्ठाईस; आरण्यकांड छत्तीस; किष्किंधाकांड सोलह; सुंदरकांड सत्ताईस; लंकाकांड चौंसठ; उत्तरकांड छयासठ । दो - सन् एक हज़ार आठ सौ छियासी तक बाबू रामदीन सिंह का कहना है कि रामायण की एक सौ छब्बीस प्रति अनेक सुजनों द्वारा मुद्रित हुई थीं। संवत् एक हज़ार आठ सौ बावन में कोदेरामजी की रामायण वेंकटेश्वर प्रेस, बंबई में छपी । इसका पाठ भी सर्वथा शुद्ध और प्रामाणिक माना जाता है। कोदोरामजी ने ग्रंथकार के समय से जो परंपरागत शिष्य हुए उनका इस प्रकार वर्णन मानसमयंक से उद्धृत किया हैब्रह्म किशोरीदत्त को ग्रंथकार ही दीन्ह । अल्पदत्त पढ़ि ताहि सों चित्रकूट में। लोन्ह ॥ रामप्रसादहिँ सो दई लहि तातें शिवलाल । दत्त फणीशहि जानि निज सेो दीन्ही सुखमाल ।। इसी परिपाटी के अनुकूल रामचरितमानस की चार प्रतियाँ लिखी गईं। प्रथम श्रीमद्गोस्वामी जू के कर-कमल की लिखी प्रति से श्री किशोरीदत्तजी ने पढ़ा। अल्पदत्तजी ने दूसरी प्रति अपने शिष्य रामप्रसादजी को दी । शिवलाल शिवलाल पाठक ने तीसरी प्रति कराई। पंशून्य शेषदत्तजी ने संशून्य एक हज़ार नौ सौ एक में चौथी प्रति जीवलाल नामक लेखक से लिखाई । इसी चौथी प्रति का पाठ लेकर केशरिया ग्राम जिला चम्पारन निवासी कोदोरामजी ने अपनी पोथी छपवाई थी । कोदोंरामजी की प्रति बड़े बड़े अक्षरों में नवाहिक पाठ-विधि तथा अनेक प्रयोगों समेत छपी थी। इसके अयोध्याकांड का नाम "अवध कांड", आरण्य कांड का नाम "वन कांड", सुंदर कांड का नाम "सुमेर कांड " तथा लंका कांड का नाम "युद्ध कांड " रखा गया था । कोदोरामजी को "मानसमयंक" के रचयिता के ये वाक्य प्रिय थे और उन्होंने अपनी पुस्तक में क्षेपक नहीं मिलाया है, ललो पूर्व संकल्प को रस मुनि बोचे जान । अधिक मिलाए हैं अधम करिहै नरक पयान ।। अनल काम अहि क्रोध है लोभहि बिच्छू जान । पाठ फेर जे करतु हैं ते शठ नरक समान ।। इतना होने पर भी अयोध्या कांड में "चार चौपाई के बाद दोहा" वाले नियम पालन में कोदौरामजी ने अयोध्या कांड के दोहा- नंबर सात,तिरेसठ, एक सौ बहत्तर, एक सौ चौरासी,दो सौ अठहत्तर के बाद दो दो अर्धालो बढ़ाकर सात सात पंक्तियों को प्राठ आठ किया है। इसी तरह दोहा-नंबर अट्ठाईस और दो सौ एक के बाद दो दो अर्धालियाँ घटा कर नव नव पंक्तियों को आठ श्राठ किया है। यह सब होते हुए भी पोथी अच्छी और प्रामाणिक है । इनका गुटका भी छपा था जिसकी नकल इलाहाबाद और काशी ने की। काशी नागरी प्रचारिणी सभा के पाँच सभासदों ने संशून्य एक हज़ार नौ सौ साठ में "रामचरितमानस" का बड़ा सुंदर संस्करण छपवाया यह इंडियन प्रेस, प्रयाग में छपा था। सुंदर बड़े बड़े अक्षर, बड़ा आकार, बीच बीच में प्रायः अस्सी चित्र देखकर चित्त प्रसन्न हो जोता है । वास्तव में रामायण छपै तो ऐसी । कोशिश तो शुद्ध पाठ देने की की गई थी पर जैसा कुछ चाहिए, हो न सका। फिर भी पुस्तक की सुंदरता को देखकर यह पाठ-दोष छिप सा जाता है । आगे चलकर इसी पाठ को लेकर इंडियन प्रेस, प्रयाग ने, साधारण अक्षरों में एक छोटा "रामचरितमानस" छापा था । संवत् एक हज़ार नौ सौ अस्सी में गोस्वामीजी की त्रिशत-जयंती के अवसर पर काशीनागरी प्रचारिणी सभा से "तुलसी ग्रंथावली" प्रकाशित हुई थी। इसके प्रथम भाग में "रामचरितमानस" है । पुस्तक के अंत में कथाभाग है जिसमें रामायण में आए हुए पौराणिक पुरुषों की कथा है। कहने की आवश्यकता नहीं कि यह प्रति अवसर के अनुरूप नहीं हुई । अयोध्या के महंत लोगों की दो सुंदर प्रतियाँ छपीं । एक तो बाबा माधवदास की प्रति का पाठ लेकर देशोपकारक प्रेस लखनऊ से सन् एक हज़ार नौ सौ बारह में छपी थी। दूसरी बाबा सरयूदासजी ने बनारस में बैजनाथप्रसाद बुकसेलर, राजा दरवाजा के यहाँ संशून्य एक हज़ार नौ सौ बयासी में छपवाई थी । बाबा सरयूदासजी की प्रति छोटे अक्षरों में, गुटका रूप में भी, छपी थी । इन दोनों का पाठ अच्छा है । एक - ये चित्र काशिराज की प्रति के कुछ चित्रों के फोटो थे
दामाद-ए-रसूल हजरत अली की यौमे शहादत पर मुस्लिम बहुल्य इलाक़ो में मंगलवार को माहौल संजीदा व दिल गमजदा रहा। दरियाबाद, करेली, रानीमण्डी व बख्शी बाजार से शहादत हजरत अली पर निकाला जाने वाला कोई भी जुलूस इस बार कोविड संक्रमण के कारण नहीं निकला गया। दरियाबाद इमामबाड़ा मोजिजनुमा, इमामबाड़ा अरब अली खा, रानीमण्डी के इमामबाड़ा आजम हुसैन व बख्शी बाजार मस्जिद काजी साहब से इस वर्ष कोई भी जुलूस नहीं निकाला गया। इमामबाड़ों, मस्जिदों व घरों मे ऑनलाईन या कम संख्या में लोगों की उपस्थिति में मजलिसें आयोजित कर नम आखों से हजरत अली की शहादत का जिक्र किया। मस्जिद काजी साहब बख्शी बाजार में नमाज ए फजिर के बाद मौलाना रजा अब्बास जैदी ने मसायब ए हजरत अली का जिक्र किया। हजरत अली की शहादत के मौके पर मस्जिद की लाइटों को बन्द कर मोमबत्ती की रौशनी में गुलाब और चमेली के फूलों से सजा ताबूत मौला मुशकिल कुशा बरामद किया गया। मस्जिद के अन्दुरुनी हिस्से में मातमदारों ने या अली मौला हैदर मौला की सदा बुलन्द की। उम्मुल बनीन सोसाइटी के महासचिव सै. मो। अस्करी के अनुसार मस्जिद के एक हिस्से में ताबूत को नमाज-ए-जौहर तक रखा गया। माहे रमजान की 21वीं को मस्जिद काजी साहब से उठने वाले जुलूस के आयोजक मिर्जा अजादार हुसैन के साथ तमाम नौजवान पांच- पांच लोगों को ताबूत की जियारत को मास्क लगाने के बाद ही मस्जिद में प्रवेश दिया गया। इस दौरान कोरेाना गाइड लाइन का पूरा पालन कराया गया। बड़ी संख्या मे महिलाओं ने भी ताबूत की जियारत कर मनन्ते व मुरादें मांगने के साथ पिछले साल मांगी मन्नतों को बढ़ाने और अक़ीदत का इजहार करने को पहुंची। दायरा शाह अजमल के क़दीमी इमामबाड़ा नवाब अब्बान साहब में महिलाओं की मजलिस को मुलतवी कर पुरुषों की मजलिस हुई। मौलाना हुसैन नक़वी ने मजलिस को सम्बोधित किया। शहंशाह हुसैन सोनवी ने गमगीन मíसया पढ़ी। शबीह अब्बास जाफरी व ऐजाज नक़वी ने नौहा पढ़ा। कोविड 19 और लॉकडाऊन के कारण कोई भी एक मुहल्ले से दुसरे मोहल्ले नहीं जा सका। जो जिस इलाक़े का था वहीं मजलिसो मे शिरकत की। हजरत अली मुशकिल कुशा की शहादत पर हसनी हुसैनी फाउण्डेशन के सद्र वजीर खान की ओर से सब्जी मण्डी स्थित इमामबाड़ा गढ़ी सराय में नज्रो निया कराते हुए कोरोना महामारी के खात्मे को दुआ की गई। सै. मो। अस्करी, काशान सिद्दीक़ी, सै। आसिफ हुसैन, शानू हाशमी, आसिफ अन्सारी, ताहिर उमर आदि ने शिरकत की।
दामाद-ए-रसूल हजरत अली की यौमे शहादत पर मुस्लिम बहुल्य इलाक़ो में मंगलवार को माहौल संजीदा व दिल गमजदा रहा। दरियाबाद, करेली, रानीमण्डी व बख्शी बाजार से शहादत हजरत अली पर निकाला जाने वाला कोई भी जुलूस इस बार कोविड संक्रमण के कारण नहीं निकला गया। दरियाबाद इमामबाड़ा मोजिजनुमा, इमामबाड़ा अरब अली खा, रानीमण्डी के इमामबाड़ा आजम हुसैन व बख्शी बाजार मस्जिद काजी साहब से इस वर्ष कोई भी जुलूस नहीं निकाला गया। इमामबाड़ों, मस्जिदों व घरों मे ऑनलाईन या कम संख्या में लोगों की उपस्थिति में मजलिसें आयोजित कर नम आखों से हजरत अली की शहादत का जिक्र किया। मस्जिद काजी साहब बख्शी बाजार में नमाज ए फजिर के बाद मौलाना रजा अब्बास जैदी ने मसायब ए हजरत अली का जिक्र किया। हजरत अली की शहादत के मौके पर मस्जिद की लाइटों को बन्द कर मोमबत्ती की रौशनी में गुलाब और चमेली के फूलों से सजा ताबूत मौला मुशकिल कुशा बरामद किया गया। मस्जिद के अन्दुरुनी हिस्से में मातमदारों ने या अली मौला हैदर मौला की सदा बुलन्द की। उम्मुल बनीन सोसाइटी के महासचिव सै. मो। अस्करी के अनुसार मस्जिद के एक हिस्से में ताबूत को नमाज-ए-जौहर तक रखा गया। माहे रमजान की इक्कीसवीं को मस्जिद काजी साहब से उठने वाले जुलूस के आयोजक मिर्जा अजादार हुसैन के साथ तमाम नौजवान पांच- पांच लोगों को ताबूत की जियारत को मास्क लगाने के बाद ही मस्जिद में प्रवेश दिया गया। इस दौरान कोरेाना गाइड लाइन का पूरा पालन कराया गया। बड़ी संख्या मे महिलाओं ने भी ताबूत की जियारत कर मनन्ते व मुरादें मांगने के साथ पिछले साल मांगी मन्नतों को बढ़ाने और अक़ीदत का इजहार करने को पहुंची। दायरा शाह अजमल के क़दीमी इमामबाड़ा नवाब अब्बान साहब में महिलाओं की मजलिस को मुलतवी कर पुरुषों की मजलिस हुई। मौलाना हुसैन नक़वी ने मजलिस को सम्बोधित किया। शहंशाह हुसैन सोनवी ने गमगीन मíसया पढ़ी। शबीह अब्बास जाफरी व ऐजाज नक़वी ने नौहा पढ़ा। कोविड उन्नीस और लॉकडाऊन के कारण कोई भी एक मुहल्ले से दुसरे मोहल्ले नहीं जा सका। जो जिस इलाक़े का था वहीं मजलिसो मे शिरकत की। हजरत अली मुशकिल कुशा की शहादत पर हसनी हुसैनी फाउण्डेशन के सद्र वजीर खान की ओर से सब्जी मण्डी स्थित इमामबाड़ा गढ़ी सराय में नज्रो निया कराते हुए कोरोना महामारी के खात्मे को दुआ की गई। सै. मो। अस्करी, काशान सिद्दीक़ी, सै। आसिफ हुसैन, शानू हाशमी, आसिफ अन्सारी, ताहिर उमर आदि ने शिरकत की।
नालंदा जिले के खुदागंज थाना क्षेत्र के साइड पर पैमार नदी के पास बीती शाम ट्रैक्टर से दबकर चालक की मौत हो गई। मृतक की पहचान गया जिला निवासी धीरेंद्र यादव के रूप में की गई है। चालक इंजन से दब गया था। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों के सहयोग से इंजन हटाकर चालक को बाहर निकाला। हालांकि, तब तक चालक की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाई। चालक की मौत की खबर सुन परिजन भी पहुंच गए। यहां उनकी चीख पुकार गूंज रही थी। परिजनों ने बताया कि युवक वाहन चलाकर परिवार का भरण पोषण कर रहा था। अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। खुदागंज थानाध्यक्ष श्रीमंत कुमार सुमन ने बताया ट्रैक्टर पलटने से हादसा हुआ। शव के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जारी है। सरकारी प्रावधान के अनुसार मृतक के परिजनों को सहायता उपलब्ध करा दी जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नालंदा जिले के खुदागंज थाना क्षेत्र के साइड पर पैमार नदी के पास बीती शाम ट्रैक्टर से दबकर चालक की मौत हो गई। मृतक की पहचान गया जिला निवासी धीरेंद्र यादव के रूप में की गई है। चालक इंजन से दब गया था। सूचना पाकर पहुंची पुलिस ने ग्रामीणों के सहयोग से इंजन हटाकर चालक को बाहर निकाला। हालांकि, तब तक चालक की मौत हो चुकी थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाई। चालक की मौत की खबर सुन परिजन भी पहुंच गए। यहां उनकी चीख पुकार गूंज रही थी। परिजनों ने बताया कि युवक वाहन चलाकर परिवार का भरण पोषण कर रहा था। अचानक हुई मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। खुदागंज थानाध्यक्ष श्रीमंत कुमार सुमन ने बताया ट्रैक्टर पलटने से हादसा हुआ। शव के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जारी है। सरकारी प्रावधान के अनुसार मृतक के परिजनों को सहायता उपलब्ध करा दी जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह (फाइल फोटो) केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि देशद्रोह का कानून खत्म नहीं होगा बल्कि इसे और मजबूत किया जाएगा। शनिवार को बिहार के जमुई और नवादा में चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे राजनाथ सिंह ने विरोधियों पर निशाना साधा। सिंह ने कहा कि दुनिया में मोदी के दामन पर कोई उंगली नहीं उठा सकता है। कांग्रेस के मंत्रियों ने तो जेल तक की हवा खाई है। बिहार में महागठबंधन के नेताओं का भी यही हाल है। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के शीर्ष स्थानों पर पहुंच गया है। अगले कुछ वर्षों में भारत टॉप-3 पर आ जाएगा। भारत में अटल जी के बाद मोदी ही ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत को शीर्ष पर पहुंचाने का कार्य किया है। रक्षा मसले पर सिंह ने कहा कि दुनिया की कोई ताकत भारत को आंख नहीं दिखा सकती है। पुलवामा हमले के बाद भारत की तरफ से आतंकियों को जवाब दिया गया है और वो भी उन्हीं की जुबान में। राजनाथ ने कहा कि खुफिया सूचना पर ही आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की गई थी और पीएम नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को अच्छी तरह से सबक सिखाया। उन्होंने कहा कि भारत जल, थल और नभ तीनों में अपनी शक्ति बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जब भी आई सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा यहां तक की कांग्रेस के कई मंत्री भी जेल गए। राजनाथ सिंह ने जमुई में लोजपा प्रत्याशी चिराग पासवान और नवादा में भी लोजपा प्रत्याशी चंदन कुमार के लिए प्रचार किया और लोगों से दोनों प्रत्याशियों की जीत दिलाने की अपील की। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि देशद्रोह का कानून खत्म नहीं होगा बल्कि इसे और मजबूत किया जाएगा। शनिवार को बिहार के जमुई और नवादा में चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे राजनाथ सिंह ने विरोधियों पर निशाना साधा। सिंह ने कहा कि दुनिया में मोदी के दामन पर कोई उंगली नहीं उठा सकता है। कांग्रेस के मंत्रियों ने तो जेल तक की हवा खाई है। बिहार में महागठबंधन के नेताओं का भी यही हाल है। उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया के शीर्ष स्थानों पर पहुंच गया है। अगले कुछ वर्षों में भारत टॉप-तीन पर आ जाएगा। भारत में अटल जी के बाद मोदी ही ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने भारत को शीर्ष पर पहुंचाने का कार्य किया है। रक्षा मसले पर सिंह ने कहा कि दुनिया की कोई ताकत भारत को आंख नहीं दिखा सकती है। पुलवामा हमले के बाद भारत की तरफ से आतंकियों को जवाब दिया गया है और वो भी उन्हीं की जुबान में। राजनाथ ने कहा कि खुफिया सूचना पर ही आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की गई थी और पीएम नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को अच्छी तरह से सबक सिखाया। उन्होंने कहा कि भारत जल, थल और नभ तीनों में अपनी शक्ति बढ़ाई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जब भी आई सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा यहां तक की कांग्रेस के कई मंत्री भी जेल गए। राजनाथ सिंह ने जमुई में लोजपा प्रत्याशी चिराग पासवान और नवादा में भी लोजपा प्रत्याशी चंदन कुमार के लिए प्रचार किया और लोगों से दोनों प्रत्याशियों की जीत दिलाने की अपील की। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? बुध ग्रह आकार में भले ही सबसे छोटा ग्रह है, मगर गति के लिहाज से यह चंद्रमा के बाद दूसरा सबसे तेज ग्रह है। यह मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार बुध ग्रह को संचार, बुद्धि और सजगता का कारक माना जाता है। आमतौर पर बैंकिंग, मीडिया, शिक्षा और रचनात्मक क्षेत्र इस ग्रह से जुड़े हुए हैं। बुध ग्रह 16 मार्च 2023 को भारतीय समयानुसार 6 बजकर 13 मिनट पर मीन राशि में प्रवेश कर जाएंगे। आइए जानते हैं कि बुध के मीन राशि में प्रवेश से सभी राशियों पर कैसा प्रभाव पड़ेगा और चुनौतियों से पार पाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं। आपके लिए ये समय कुछ कठिन रहेगा हालांकि आप चिंता और तनाव से निपटने में कामयाब रहेंगे। कई सारी मुश्किलें आपके रास्ते में आ सकती हैं लेकिन आप स्वयं पर विश्वास रखकर इससे पार पा लेंगे। आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। अच्छी सेहत के लिए खुद पर नियंत्रण रखने तथा ध्यान और योग करने की सलाह दी जाती है। जो लोग सर्विस सेक्टर में हैं उनके लिए समय अच्छा रहेगा। परिवार के सदस्यों के साथ आपके संबंध खराब रहेंगे और एक-दूसरे के लिए आपसी सम्मान की कमी हो सकती है, इसलिए बोलने से पहले अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करें। उपाय- भगवान गणेश की पूजा करना लाभकारी रहेगा, उन्हें दूर्वा अर्पित कर सकते हैं। इस दौरान आपकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी इसलिए बचत करना बहुत जरूरी है। इस अवधि में निवेश का विचरर अच्छा नहीं है। पैसे लगाने से बचें। अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करें अन्यथा आप मुश्किल में पड़ सकते हैं। अपने सामाजिक दायरे में ठीक से संवाद करें। छात्र इस अवधि में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। जो लोग अविवाहित हैं उनके जीवनसाथी की तलाश पूरी हो सकती है। जो संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं, उन्हें अच्छी खबर मिल सकती है। उपाय- आप अपनी जेब में अथवा बटुए में हरे रंग का रूमाल रखें। काम को लेकर अपना बर्ताव ठीक रखें। इस अवधि में आपके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास में कमी आ सकती है। आप बेहद उदास महसूस कर सकते हैं। आप अपने काम के प्रति काफी प्रयासरत रहेंगे। आपको वांछित परिणाम भी प्राप्त होने की उम्मीद है। आप इस अवधि में अपने परिवार का पूरा समर्थन प्राप्त करेंगे। आपको अपने इस समय का आनंद लेना चाहिए। उपाय- आप घर और दफ्तर में बुध यंत्र की स्थापना कर सकते हैं। इस दौरान भाग्य आपके पक्ष में रहेगा। यात्रा का योग बन सकता है। आप इस दौरान तीर्थ यात्रा या लंबी दूरी की यात्रा पर जा सकते हैं। आपके पिता को कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उनका विशेष ख्याल रखें। इस अवधि में आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। आप अपने सपनों को पूरा करने का काम करेंगे। उपाय- आप अपने पिता को कोई हरी वस्तु भेंट कर सकते हैं। पैसों की बात करें तो बीते समय में आपने जो भी किया उसका उचित परिणाम आपको नहीं मिल पाया है। इस गोचर के दौरान किसी भी वित्तीय जोखिम से बचना ही आपके लिए बेहतर होगा। किसी भी तरह के आर्थिक लेन-देन से बचें। व्यापारियों को किसी भी डील के दौरान सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। आप गले से संबंधित किसी समस्या से पीड़ित हो सकते हैं। आपके ससुराल वालों के साथ कुछ गलतफहमी हो सकती है। इस तरह की स्थिति को धैर्य के साथ हैंडल करें। उपाय - आपको किन्नरों का सम्मान करने की आवश्यकता है। संभव हो तो उन्हें हरे रंग के कपड़े दान करें। कन्या राशि के जातकों के लिए ये समय ठीक नहीं रहेगा। आपके जीवन में उतार-चढ़ाव की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। वैवाहिक रिश्ते में अनबन पैदा हो सकती है। किसी भी तरह का निवेश करने से बचें, नुकसान की आशंका ज्यादा है। व्यवसायियों के लिए भी समय अनुकूल नहीं है। आपको इस अवधि में धैर्य से काम लेना होगा तभी अपनी बुद्धिमता से चीजों का हल निकाल पाएंगे। उपाय- आप 5-6 कैरेट का पन्ना धारण कर सकते हैं। इसे चांदी या सोने की अंगूठी में जड़वाकर बुधवार के दिन धारण करने से लाभ होगा। आपको कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है इसलिए बेहतर होगा कि आप नियमित चेकअप कराएं। आपके बातचीत करने के तरीके की वजह से आपके दुश्मन बढ़ सकते हैं। पैसों की बात करें तो जरूरत से ज्यादा खर्च न करें, नहीं तो आप गहरे संकट में पड़ सकते हैं। क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल से बचें। अपना मनोबल ऊंचा रखें। इस दौरान आप कुछ ज्यादा ही यात्राएं कर सकते हैं। यदि आप इस दौरान कड़ी मेहनत करते हैं तो आपको मनचाहा परिणाम मिलेगा। उपाय- आप प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिला सकते हैं। इस दौरान आप निवेश कर सकते हैं और परिणाम आपके पक्ष में रहेंगे। आपको एकाग्रता की कमी का सामना करना पड़ सकता है। जीवनसाथी के साथ संबंधों की बात करें तो अनबन की संभावना नजर आ रही है। नौकरी को लेकर आप थोड़ा असुरक्षित महसूस कर सकते हैं, लेकिन आप अपने आत्मविश्वास से इस स्थिति को संभाल सकते हैं। आप अपने जीवन में कुछ प्रभावशाली संपर्क जोड़ने में कामयाब रहेंगे जो आपके भविष्य में काम आएंगे। उपाय- ज़रूरतमंद बच्चों और विद्यार्थियों को किताबें दान करना फ़ायदेमंद साबित होगा। आपके घर का माहौल अशांत रहेगा। इस दौरान घर पर कुछ इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स खराब हो सकते हैं। आपको अपने निजी और पेशेवर जीवन में संतुलन बनाने की जरूरत है। आपकी माता जी को स्वास्थ्य संबंधी कुछ परेशानी हो सकती है, उनका ख़ास ख्याल रखें। आपको समय की अहमियत समझनी होगी। आप कड़ी मेहनत करेंगे और मनचाहा परिणाम प्राप्त करेंगे। करियर की बात करें तो वर्तमान में चीजें भले ही थोड़ी अनिश्चित महसूस हो रही हों लेकिन स्थिति जल्द ही सही हो जाएगी। उपाय- प्रतिदिन तेल का दीपक जलाएं और तुलसी के पौधे की पूजा करें। आप बहुत अच्छी तरह से संवाद करते हैं और इस कारण आप अधिकांश परिस्थितियों को संभालने में सक्षम रहते हैं। पारिवारिक जीवन की बात करें तो भाई बहनों के साथ आपके संबंध थोड़े तनावपूर्ण रह सकते हैं। आपको सलाह दी जाती है कि अपने शब्दों का चयन सोच समझ कर करें। अक्सर झगड़े और गलतफहमी हो सकती है। आपको अपने गैजेट्स की ठीक से देखभाल करने की आवश्यकता है ताकि कोई नुकसान न हो। आप जो भी काम करेंगे उसमें आपको अपने पिता का आशीर्वाद प्राप्त होगा। उपाय- इस दौरान आप अपने छोटे भाई या कज़िन को कोई उपहार दे सकते हैं। आपके संवाद से गलतफ़हमी की स्थिति पैदा हो सकती है। इस अवधि में निवेश से बचें अन्यथा आपका पैसा डूब सकता है। आर्थिक स्थिति कुछ खास नहीं रहेगी। अपने सेहत के प्रति लापरवाही न बरतें। छात्र स्वयं में आत्मविश्वास की कमी महसूस कर सकते हैं। ससुराल पक्ष का सहयोग आपको मिलेगा। उपाय- आप प्रतिदिन तुलसी के पौधे को जल दें और प्रतिदिन 1 तुलसी का पत्ता खा सकते हैं। व्यवसायियों के लिए यह गोचर बहुत अच्छा रहेगा। हालांकि साझेदारी वाले व्यापार में उन्हें थोड़ा संभल कर रहना होगा। यदि वे सावधान नहीं रहेंगे तो इसका उन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। आपको अपने निजी और पेशेवर जीवन में संतुलन बनाने की जरूरत है, नहीं तो आपके सभी रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। जो लोग अविवाहित हैं उन्हें विवाह के कई प्रस्ताव मिलेंगे और इस अवधि में वो अपना जीवनसाथी चुनने में सक्षम होंगे। आपके जीवनसाथी के साथ कुछ अनबन होगी इसलिए बेहतर होगा कि मुद्दों पर चर्चा करें और उनका निपटारा करें। उपाय- आप प्रतिदिन बुध ग्रह के बीज मंत्र का जाप करें। नोटः यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? बुध ग्रह आकार में भले ही सबसे छोटा ग्रह है, मगर गति के लिहाज से यह चंद्रमा के बाद दूसरा सबसे तेज ग्रह है। यह मिथुन और कन्या राशि का स्वामी है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार बुध ग्रह को संचार, बुद्धि और सजगता का कारक माना जाता है। आमतौर पर बैंकिंग, मीडिया, शिक्षा और रचनात्मक क्षेत्र इस ग्रह से जुड़े हुए हैं। बुध ग्रह सोलह मार्च दो हज़ार तेईस को भारतीय समयानुसार छः बजकर तेरह मिनट पर मीन राशि में प्रवेश कर जाएंगे। आइए जानते हैं कि बुध के मीन राशि में प्रवेश से सभी राशियों पर कैसा प्रभाव पड़ेगा और चुनौतियों से पार पाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं। आपके लिए ये समय कुछ कठिन रहेगा हालांकि आप चिंता और तनाव से निपटने में कामयाब रहेंगे। कई सारी मुश्किलें आपके रास्ते में आ सकती हैं लेकिन आप स्वयं पर विश्वास रखकर इससे पार पा लेंगे। आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। अच्छी सेहत के लिए खुद पर नियंत्रण रखने तथा ध्यान और योग करने की सलाह दी जाती है। जो लोग सर्विस सेक्टर में हैं उनके लिए समय अच्छा रहेगा। परिवार के सदस्यों के साथ आपके संबंध खराब रहेंगे और एक-दूसरे के लिए आपसी सम्मान की कमी हो सकती है, इसलिए बोलने से पहले अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करें। उपाय- भगवान गणेश की पूजा करना लाभकारी रहेगा, उन्हें दूर्वा अर्पित कर सकते हैं। इस दौरान आपकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी इसलिए बचत करना बहुत जरूरी है। इस अवधि में निवेश का विचरर अच्छा नहीं है। पैसे लगाने से बचें। अपने शब्दों का चयन सोच-समझकर करें अन्यथा आप मुश्किल में पड़ सकते हैं। अपने सामाजिक दायरे में ठीक से संवाद करें। छात्र इस अवधि में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। जो लोग अविवाहित हैं उनके जीवनसाथी की तलाश पूरी हो सकती है। जो संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं, उन्हें अच्छी खबर मिल सकती है। उपाय- आप अपनी जेब में अथवा बटुए में हरे रंग का रूमाल रखें। काम को लेकर अपना बर्ताव ठीक रखें। इस अवधि में आपके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास में कमी आ सकती है। आप बेहद उदास महसूस कर सकते हैं। आप अपने काम के प्रति काफी प्रयासरत रहेंगे। आपको वांछित परिणाम भी प्राप्त होने की उम्मीद है। आप इस अवधि में अपने परिवार का पूरा समर्थन प्राप्त करेंगे। आपको अपने इस समय का आनंद लेना चाहिए। उपाय- आप घर और दफ्तर में बुध यंत्र की स्थापना कर सकते हैं। इस दौरान भाग्य आपके पक्ष में रहेगा। यात्रा का योग बन सकता है। आप इस दौरान तीर्थ यात्रा या लंबी दूरी की यात्रा पर जा सकते हैं। आपके पिता को कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। उनका विशेष ख्याल रखें। इस अवधि में आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा। आप अपने सपनों को पूरा करने का काम करेंगे। उपाय- आप अपने पिता को कोई हरी वस्तु भेंट कर सकते हैं। पैसों की बात करें तो बीते समय में आपने जो भी किया उसका उचित परिणाम आपको नहीं मिल पाया है। इस गोचर के दौरान किसी भी वित्तीय जोखिम से बचना ही आपके लिए बेहतर होगा। किसी भी तरह के आर्थिक लेन-देन से बचें। व्यापारियों को किसी भी डील के दौरान सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है। आप गले से संबंधित किसी समस्या से पीड़ित हो सकते हैं। आपके ससुराल वालों के साथ कुछ गलतफहमी हो सकती है। इस तरह की स्थिति को धैर्य के साथ हैंडल करें। उपाय - आपको किन्नरों का सम्मान करने की आवश्यकता है। संभव हो तो उन्हें हरे रंग के कपड़े दान करें। कन्या राशि के जातकों के लिए ये समय ठीक नहीं रहेगा। आपके जीवन में उतार-चढ़ाव की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। वैवाहिक रिश्ते में अनबन पैदा हो सकती है। किसी भी तरह का निवेश करने से बचें, नुकसान की आशंका ज्यादा है। व्यवसायियों के लिए भी समय अनुकूल नहीं है। आपको इस अवधि में धैर्य से काम लेना होगा तभी अपनी बुद्धिमता से चीजों का हल निकाल पाएंगे। उपाय- आप पाँच-छः कैरेट का पन्ना धारण कर सकते हैं। इसे चांदी या सोने की अंगूठी में जड़वाकर बुधवार के दिन धारण करने से लाभ होगा। आपको कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है इसलिए बेहतर होगा कि आप नियमित चेकअप कराएं। आपके बातचीत करने के तरीके की वजह से आपके दुश्मन बढ़ सकते हैं। पैसों की बात करें तो जरूरत से ज्यादा खर्च न करें, नहीं तो आप गहरे संकट में पड़ सकते हैं। क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल से बचें। अपना मनोबल ऊंचा रखें। इस दौरान आप कुछ ज्यादा ही यात्राएं कर सकते हैं। यदि आप इस दौरान कड़ी मेहनत करते हैं तो आपको मनचाहा परिणाम मिलेगा। उपाय- आप प्रतिदिन गाय को हरा चारा खिला सकते हैं। इस दौरान आप निवेश कर सकते हैं और परिणाम आपके पक्ष में रहेंगे। आपको एकाग्रता की कमी का सामना करना पड़ सकता है। जीवनसाथी के साथ संबंधों की बात करें तो अनबन की संभावना नजर आ रही है। नौकरी को लेकर आप थोड़ा असुरक्षित महसूस कर सकते हैं, लेकिन आप अपने आत्मविश्वास से इस स्थिति को संभाल सकते हैं। आप अपने जीवन में कुछ प्रभावशाली संपर्क जोड़ने में कामयाब रहेंगे जो आपके भविष्य में काम आएंगे। उपाय- ज़रूरतमंद बच्चों और विद्यार्थियों को किताबें दान करना फ़ायदेमंद साबित होगा। आपके घर का माहौल अशांत रहेगा। इस दौरान घर पर कुछ इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स खराब हो सकते हैं। आपको अपने निजी और पेशेवर जीवन में संतुलन बनाने की जरूरत है। आपकी माता जी को स्वास्थ्य संबंधी कुछ परेशानी हो सकती है, उनका ख़ास ख्याल रखें। आपको समय की अहमियत समझनी होगी। आप कड़ी मेहनत करेंगे और मनचाहा परिणाम प्राप्त करेंगे। करियर की बात करें तो वर्तमान में चीजें भले ही थोड़ी अनिश्चित महसूस हो रही हों लेकिन स्थिति जल्द ही सही हो जाएगी। उपाय- प्रतिदिन तेल का दीपक जलाएं और तुलसी के पौधे की पूजा करें। आप बहुत अच्छी तरह से संवाद करते हैं और इस कारण आप अधिकांश परिस्थितियों को संभालने में सक्षम रहते हैं। पारिवारिक जीवन की बात करें तो भाई बहनों के साथ आपके संबंध थोड़े तनावपूर्ण रह सकते हैं। आपको सलाह दी जाती है कि अपने शब्दों का चयन सोच समझ कर करें। अक्सर झगड़े और गलतफहमी हो सकती है। आपको अपने गैजेट्स की ठीक से देखभाल करने की आवश्यकता है ताकि कोई नुकसान न हो। आप जो भी काम करेंगे उसमें आपको अपने पिता का आशीर्वाद प्राप्त होगा। उपाय- इस दौरान आप अपने छोटे भाई या कज़िन को कोई उपहार दे सकते हैं। आपके संवाद से गलतफ़हमी की स्थिति पैदा हो सकती है। इस अवधि में निवेश से बचें अन्यथा आपका पैसा डूब सकता है। आर्थिक स्थिति कुछ खास नहीं रहेगी। अपने सेहत के प्रति लापरवाही न बरतें। छात्र स्वयं में आत्मविश्वास की कमी महसूस कर सकते हैं। ससुराल पक्ष का सहयोग आपको मिलेगा। उपाय- आप प्रतिदिन तुलसी के पौधे को जल दें और प्रतिदिन एक तुलसी का पत्ता खा सकते हैं। व्यवसायियों के लिए यह गोचर बहुत अच्छा रहेगा। हालांकि साझेदारी वाले व्यापार में उन्हें थोड़ा संभल कर रहना होगा। यदि वे सावधान नहीं रहेंगे तो इसका उन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। आपको अपने निजी और पेशेवर जीवन में संतुलन बनाने की जरूरत है, नहीं तो आपके सभी रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। जो लोग अविवाहित हैं उन्हें विवाह के कई प्रस्ताव मिलेंगे और इस अवधि में वो अपना जीवनसाथी चुनने में सक्षम होंगे। आपके जीवनसाथी के साथ कुछ अनबन होगी इसलिए बेहतर होगा कि मुद्दों पर चर्चा करें और उनका निपटारा करें। उपाय- आप प्रतिदिन बुध ग्रह के बीज मंत्र का जाप करें। नोटः यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीता है। मैं साहित्य का जला, साहित्य को फूंक-फूंककर पढ़ता हूं और उसकी आलोचना या समीक्षा या कहें कि समालोचना भी फूंक-फूंककर करता हूं। साहित्य है ही ऐसी चीज, तिस पर उसकी आलोचना! खतरा-दर-खतरा, जोखिम-दर-जोखिम। जरा से चूके तो गए, न चूके तो भी गए। सच समीक्षा है ही ऐसा, बेगैरत काम कि करो तो मरो, न मरो तो मरो। वैसे, साहित्य की दुनिया में आलोचक का बड़ा ही महत्व माना जाता है। माना जाता है कि आलोचक साहित्य का मानक है। वह साहित्य की तराजू है, वह साहित्य का बाट-बटखरा है, वह साहित्य का चौकीदार है, वह साहित्य की छलनी है, वह साहित्य का सूप है, वह साहित्य का परीक्षक है, वह साहित्य का मूल्यांकनकर्ता है, वह साहित्य की कसौटी है, वह साहित्य का एकाउंटेंट है, वह साहित्य का अनुशासक है, वह साहित्य का इंस्पेक्टर है, वह साहित्य का थानेदार है, वह साहित्य का दारोगा है, वह साहित्य का प्रमोटर है,वह साहित्य का विज्ञापक है, वह साहित्य का परिचायक है, वह साहित्य का अनुशंसक है, वह साहित्य का प्रशंसक है, वह साहित्य का सेल्समैन है, वह साहित्य का वकील है, वह साहित्य की 'एडवोकेसी' है। मैं इसका स्वयं भुक्तभोगी हूं। एक लेखक के कहानी संकलन का 'रिव्यू' करते हुए मैंने जरा सा 'किंतु-परंतु' कर दिया, तो जिंदगी भर का दुश्मन बन गया। ऐसे ही, एक कवि की एक कविता की एक लाइन पर एक 'क्रिटिकल कमेंट' क्या कर दिया, वह आज तक ऐसे देखता है, जैसे खा जाएगा। जिसके बारे में भी जरा सा कुछ ऐसा लिखा, वही जीवन भर का निंदक हो गया! भला हो सोशल मीडिया का कि उसने साहित्य और आलोचना की सभी अवधारणाओं को पलट दिया है। आलोचना का 'चाल, चेहरा और चरित्र' सब बदल दिया! गए दिन समीक्षा सिद्धांतों, सिद्धांतिकियों के; विचारधाराओं, साहित्य के मानकों के। गए दिन भरत मुनि, भामह, दंडी, शंकुक, भट्ट लोल्लट, रुद्रट, उद्भट के। गए दिन आचार्य विश्वनाथ, मम्मट के; गए दिन हिंदी आलोचना, आचार्य शुक्ल, हजारी प्रसाद द्विवेदी, रामविलास शर्मा, नगेंद्र, नंददुलारे वाजपेयी, राम विलास शर्मा और नामवर सिंह के; और गए दिन प्लेटो, अरस्तू, लांजाइनस, टीएस इलियट, लीविस, रिचर्ड्स के। गए दिन रेमंड विलियम्स, टेरी ईगलटन, हेरोल्ड ब्लूम के। गए दिन रोलां बार्थ, फूको, जाक देरिदा, जाक लकां या इनके-उनके। आज आलोचना का मतलब है- 'दो शब्द'। 'लाइक' और 'डिसलाइक'! कई बार तो सिर्फ अंगूठा रह जाता है। अंगूठा उठा तो 'अप', नीचे हुआ तो 'डाउन'। सारी आलोचना 'यस' या 'नो' जैसे दो शब्दों में निपट जाती है। मैं इसे देखकर बड़ा खुश हूं। सोशल मीडिया ने साहित्यालोचना को आसान कर दिया है। रचना आसान, आलोचना भी आसान। सारी आलोचना अब बस दो शब्दों में समाहित है- 'हां' या 'ना'। मैं भी अब 'हां हां' और 'हां जी, हां जी' करने लगा हूं। अब कोई दुश्मन नहीं बन रहा। यही साहित्य की नई कुंजी है।
दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंककर पीता है। मैं साहित्य का जला, साहित्य को फूंक-फूंककर पढ़ता हूं और उसकी आलोचना या समीक्षा या कहें कि समालोचना भी फूंक-फूंककर करता हूं। साहित्य है ही ऐसी चीज, तिस पर उसकी आलोचना! खतरा-दर-खतरा, जोखिम-दर-जोखिम। जरा से चूके तो गए, न चूके तो भी गए। सच समीक्षा है ही ऐसा, बेगैरत काम कि करो तो मरो, न मरो तो मरो। वैसे, साहित्य की दुनिया में आलोचक का बड़ा ही महत्व माना जाता है। माना जाता है कि आलोचक साहित्य का मानक है। वह साहित्य की तराजू है, वह साहित्य का बाट-बटखरा है, वह साहित्य का चौकीदार है, वह साहित्य की छलनी है, वह साहित्य का सूप है, वह साहित्य का परीक्षक है, वह साहित्य का मूल्यांकनकर्ता है, वह साहित्य की कसौटी है, वह साहित्य का एकाउंटेंट है, वह साहित्य का अनुशासक है, वह साहित्य का इंस्पेक्टर है, वह साहित्य का थानेदार है, वह साहित्य का दारोगा है, वह साहित्य का प्रमोटर है,वह साहित्य का विज्ञापक है, वह साहित्य का परिचायक है, वह साहित्य का अनुशंसक है, वह साहित्य का प्रशंसक है, वह साहित्य का सेल्समैन है, वह साहित्य का वकील है, वह साहित्य की 'एडवोकेसी' है। मैं इसका स्वयं भुक्तभोगी हूं। एक लेखक के कहानी संकलन का 'रिव्यू' करते हुए मैंने जरा सा 'किंतु-परंतु' कर दिया, तो जिंदगी भर का दुश्मन बन गया। ऐसे ही, एक कवि की एक कविता की एक लाइन पर एक 'क्रिटिकल कमेंट' क्या कर दिया, वह आज तक ऐसे देखता है, जैसे खा जाएगा। जिसके बारे में भी जरा सा कुछ ऐसा लिखा, वही जीवन भर का निंदक हो गया! भला हो सोशल मीडिया का कि उसने साहित्य और आलोचना की सभी अवधारणाओं को पलट दिया है। आलोचना का 'चाल, चेहरा और चरित्र' सब बदल दिया! गए दिन समीक्षा सिद्धांतों, सिद्धांतिकियों के; विचारधाराओं, साहित्य के मानकों के। गए दिन भरत मुनि, भामह, दंडी, शंकुक, भट्ट लोल्लट, रुद्रट, उद्भट के। गए दिन आचार्य विश्वनाथ, मम्मट के; गए दिन हिंदी आलोचना, आचार्य शुक्ल, हजारी प्रसाद द्विवेदी, रामविलास शर्मा, नगेंद्र, नंददुलारे वाजपेयी, राम विलास शर्मा और नामवर सिंह के; और गए दिन प्लेटो, अरस्तू, लांजाइनस, टीएस इलियट, लीविस, रिचर्ड्स के। गए दिन रेमंड विलियम्स, टेरी ईगलटन, हेरोल्ड ब्लूम के। गए दिन रोलां बार्थ, फूको, जाक देरिदा, जाक लकां या इनके-उनके। आज आलोचना का मतलब है- 'दो शब्द'। 'लाइक' और 'डिसलाइक'! कई बार तो सिर्फ अंगूठा रह जाता है। अंगूठा उठा तो 'अप', नीचे हुआ तो 'डाउन'। सारी आलोचना 'यस' या 'नो' जैसे दो शब्दों में निपट जाती है। मैं इसे देखकर बड़ा खुश हूं। सोशल मीडिया ने साहित्यालोचना को आसान कर दिया है। रचना आसान, आलोचना भी आसान। सारी आलोचना अब बस दो शब्दों में समाहित है- 'हां' या 'ना'। मैं भी अब 'हां हां' और 'हां जी, हां जी' करने लगा हूं। अब कोई दुश्मन नहीं बन रहा। यही साहित्य की नई कुंजी है।
उकलाना मंडी, 6 जुलाई (निस) मांगें नहीं मानने पर भवन निर्माण मजदूर 12 जुलाई को मंत्री के आवास का घेराव करेंगे। श्रम विभाग के अधिकारी उनका शोषण कर रहे हैं। यह बात नया गांव में बैठक को सम्बोधित करते हुए यूनियन के जिला सचिव मनोज कुमार और प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि भाजपा-जजपा सरकार की नीतियों के चलते आज महंगाई, बेरोजगारी, चरम पर पहंुच गयी है, मगर सरकार के साथ बार-बार बातचीत होने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि श्रम सचिव ने 90 दिन की तस्दीक यूनियनों को देने, सुविधा फार्म पर एक ही बार आपत्ति लगाने, शर्तें लगाने वाले अधिकारियों पर रोक लगाने समेत कई मागों पर सहमति जताई थी। मगर अब तक भी ज्यादातर मांगें पूरी नहीं हुई। आज भी कन्यादान, मृत्यु सहायता, मातृत्व, पितृत्व आदि के आवेदनों को दो-दो, 3-3 साल आवेदन किए हो गए लेकिन तमाम कागजात बार-बार पूरे करने के बावजूद भी इन आवेदनों पर आपत्तियां लगाकर निर्माण मजदूरों को सुविधाओं से वंचित कर रहे है। 90 दिन की वर्क स्लिप के लिए मजदूर अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
उकलाना मंडी, छः जुलाई मांगें नहीं मानने पर भवन निर्माण मजदूर बारह जुलाई को मंत्री के आवास का घेराव करेंगे। श्रम विभाग के अधिकारी उनका शोषण कर रहे हैं। यह बात नया गांव में बैठक को सम्बोधित करते हुए यूनियन के जिला सचिव मनोज कुमार और प्रदेश अध्यक्ष सुखबीर सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि भाजपा-जजपा सरकार की नीतियों के चलते आज महंगाई, बेरोजगारी, चरम पर पहंुच गयी है, मगर सरकार के साथ बार-बार बातचीत होने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि श्रम सचिव ने नब्बे दिन की तस्दीक यूनियनों को देने, सुविधा फार्म पर एक ही बार आपत्ति लगाने, शर्तें लगाने वाले अधिकारियों पर रोक लगाने समेत कई मागों पर सहमति जताई थी। मगर अब तक भी ज्यादातर मांगें पूरी नहीं हुई। आज भी कन्यादान, मृत्यु सहायता, मातृत्व, पितृत्व आदि के आवेदनों को दो-दो, तीन-तीन साल आवेदन किए हो गए लेकिन तमाम कागजात बार-बार पूरे करने के बावजूद भी इन आवेदनों पर आपत्तियां लगाकर निर्माण मजदूरों को सुविधाओं से वंचित कर रहे है। नब्बे दिन की वर्क स्लिप के लिए मजदूर अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
बदनावर (नईदुनिया न्यूज)। जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूलों का निरीक्षण कर प्राचार्यों की बैठक ली। कमियां पाई जाने पर फटकार लगाई। लंबित समस्याओं के त्वरित निराकरण करने, समय पर स्कूल खोलने तथा शैक्षणिक व्यवस्था चाकचौबंद करने के निर्देश दिए। जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्र शर्मा ने यहां शासकीय नंदराम चौपड़ा उत्कृष्ट उमावि में विकासखंड के शासकीय हाईस्कूल एवं हायर सेकंडरी स्कूलों के प्राचार्यों की बैठक ली। बीईओ विक्रमसिंह राठौर व बीआरसी डीएन गुजराती मौजूद थे। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि विभागीय कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाशत नहीं की जाएगी। विद्यालय समय पर खुले, शिक्षक समय पर कक्षाओं में अध्यापन कार्य करवाएं। कोई भी पीरियड खाली न रहें तथा शैक्षणिक व्यवस्था सुचारू रूप से चलना चाहिए। टेस्ट और परीक्षाओं का विश्लेषण कर विद्यार्थियों की कठिन अवधारणाओं को स्पष्ट करें। सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य करें, जिसके बेहतर परिणाम आने चाहिए। शर्मा ने कहा कि कुछ विद्यालयों में परीक्षा परिणाम कम फीसद आने पर शिक्षकों एवं प्राचार्यों द्वारा तैयार की गई रणनीति की विस्तृत समीक्षा की। विद्यार्थियों की समस्याओं का यथासंभव निराकरण करें। दिव्यांग और अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति से कोई भी विद्यार्थी वंचित नहीं रहना चाहिए। समस्त हाईस्कूल व हायर सकंडरी स्कूलों में प्रयोगशालाएं सुव्यवस्थित होना चाहिए। भौतिक, रसायन, जीव विज्ञान की प्रयोगशाला अलग-अलग, किंतु एकीकृत एक ही कक्ष में समस्त उपकरण मौजूद रहे। विद्यार्थियों से प्रतिदिन प्रैक्टिकल कार्य करवाया जाए। कंप्यूटर लैब भी सुव्यवस्थित हो तथा विद्यार्थियों को कंप्यूटर के माध्यम से डाटा एंट्री एवं आइटी के दिए गए निर्देशानुसार कंप्यूटर की शिक्षा प्रदान की जाए। राष्ट्रीय उपलब्धता सर्वे एनएएस की अद्यतन स्थिति की समीक्षा करते हुए 12 नवंबर को होने वाले टेस्ट की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि समस्त विद्यालय के शिक्षकों का सौ फीसद वैक्सीनेशन होना चाहिए। आरईएस विभाग द्वारा स्कूलों में स्वीकृत हैंडवाश यूनिट एवं प्याऊ निर्माण किया जा रहा है। प्राचार्य इन कार्यों की मानीटरिंग करें और उनकी स्थिति से अवगत कराए। जिला शिक्षा अधिकारी ने निर्देशित किया साथ ही लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा हैंडवाश एवं पेयजल की उपलब्धता विद्यालय में करवाई जा रही है, उसकी क्या स्थिति है, निर्माण कार्य शुरू है अथवा नहीं, इसकी स्पष्ट रूप से जानकारी दें। उसकी मानीटरिंग प्राचार्य करें। डिजिटल लेप द्वारा विद्यार्थियों का शिक्षण कार्य निर्बाध रूप से चलता रहे, उस पर भी मानीटरिंग करते हुए ध्यान दें। शाम चार बजे निजी विद्यालय के प्राचार्यों की भी बैठक ली। इसमें पात्र छात्र-छात्राओं को सौ फीसद छात्रवृत्ति के भुगतान करने, स्कूल फीस पोर्टल पर एंट्री दर्ज करने, स्कूल बसों का मेंटेनेंस तथा कोविड गाइड लाइन के पालन करने के निर्देश दिए।
बदनावर । जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूलों का निरीक्षण कर प्राचार्यों की बैठक ली। कमियां पाई जाने पर फटकार लगाई। लंबित समस्याओं के त्वरित निराकरण करने, समय पर स्कूल खोलने तथा शैक्षणिक व्यवस्था चाकचौबंद करने के निर्देश दिए। जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्र शर्मा ने यहां शासकीय नंदराम चौपड़ा उत्कृष्ट उमावि में विकासखंड के शासकीय हाईस्कूल एवं हायर सेकंडरी स्कूलों के प्राचार्यों की बैठक ली। बीईओ विक्रमसिंह राठौर व बीआरसी डीएन गुजराती मौजूद थे। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि विभागीय कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाशत नहीं की जाएगी। विद्यालय समय पर खुले, शिक्षक समय पर कक्षाओं में अध्यापन कार्य करवाएं। कोई भी पीरियड खाली न रहें तथा शैक्षणिक व्यवस्था सुचारू रूप से चलना चाहिए। टेस्ट और परीक्षाओं का विश्लेषण कर विद्यार्थियों की कठिन अवधारणाओं को स्पष्ट करें। सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य करें, जिसके बेहतर परिणाम आने चाहिए। शर्मा ने कहा कि कुछ विद्यालयों में परीक्षा परिणाम कम फीसद आने पर शिक्षकों एवं प्राचार्यों द्वारा तैयार की गई रणनीति की विस्तृत समीक्षा की। विद्यार्थियों की समस्याओं का यथासंभव निराकरण करें। दिव्यांग और अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति से कोई भी विद्यार्थी वंचित नहीं रहना चाहिए। समस्त हाईस्कूल व हायर सकंडरी स्कूलों में प्रयोगशालाएं सुव्यवस्थित होना चाहिए। भौतिक, रसायन, जीव विज्ञान की प्रयोगशाला अलग-अलग, किंतु एकीकृत एक ही कक्ष में समस्त उपकरण मौजूद रहे। विद्यार्थियों से प्रतिदिन प्रैक्टिकल कार्य करवाया जाए। कंप्यूटर लैब भी सुव्यवस्थित हो तथा विद्यार्थियों को कंप्यूटर के माध्यम से डाटा एंट्री एवं आइटी के दिए गए निर्देशानुसार कंप्यूटर की शिक्षा प्रदान की जाए। राष्ट्रीय उपलब्धता सर्वे एनएएस की अद्यतन स्थिति की समीक्षा करते हुए बारह नवंबर को होने वाले टेस्ट की तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि समस्त विद्यालय के शिक्षकों का सौ फीसद वैक्सीनेशन होना चाहिए। आरईएस विभाग द्वारा स्कूलों में स्वीकृत हैंडवाश यूनिट एवं प्याऊ निर्माण किया जा रहा है। प्राचार्य इन कार्यों की मानीटरिंग करें और उनकी स्थिति से अवगत कराए। जिला शिक्षा अधिकारी ने निर्देशित किया साथ ही लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा हैंडवाश एवं पेयजल की उपलब्धता विद्यालय में करवाई जा रही है, उसकी क्या स्थिति है, निर्माण कार्य शुरू है अथवा नहीं, इसकी स्पष्ट रूप से जानकारी दें। उसकी मानीटरिंग प्राचार्य करें। डिजिटल लेप द्वारा विद्यार्थियों का शिक्षण कार्य निर्बाध रूप से चलता रहे, उस पर भी मानीटरिंग करते हुए ध्यान दें। शाम चार बजे निजी विद्यालय के प्राचार्यों की भी बैठक ली। इसमें पात्र छात्र-छात्राओं को सौ फीसद छात्रवृत्ति के भुगतान करने, स्कूल फीस पोर्टल पर एंट्री दर्ज करने, स्कूल बसों का मेंटेनेंस तथा कोविड गाइड लाइन के पालन करने के निर्देश दिए।
लेकिन भाग्यवश शैतान के भी तो कई सहयोगी हैं- राष्ट्र गिर्जे, राजनैतिक संस्थाएँ । उसने लोगों की रूढ़ियों को उभारा, उनकी धारणाओं को उत्तेजना दी। लोगों ने जब अणुबम प्राप्त कर लिया था, उस समय तक तो उनके मानसिक घरातल को उसने ईसा की नवीं सदी पूर्व के लोगों के समान कर दिया था। " "और फिर", डा० पूल ने कहा - "मुझे वह स्थल अच्छा लगा जहाँ आपने पूर्व और पश्चिम के सम्बन्धों पर प्रकाश डाला - कैसे शैतान ने उन्हें सिर्फ एक दूसरे की बुराई ग्रहण करने की प्रेरणा दी। पूर्व ने पश्चिमी राष्ट्रीयता, पश्चिमी युद्ध-साधन, पश्चिमी मूवी ( movie) और पश्चिमी मार्क्सवाद को अपनाया, और इसी तरह पश्चिम ने पूर्व की स्वेच्छाचारिता, पूर्व की मूढ़-विश्वासों के प्रति आस्था और पूर्व की वैयक्तिक जीवन के प्रति उदासीनता को ग्रहण किया। सारांश यह कि शैतान ने यह प्रयत्न किया कि मनुष्य जाति पूर्व और पश्चिम दोनों दुनियाओं का नाश कर दे ।" "जरा सोचो, दुनिया का क्या नक़्शा होता यदि वे एक दूसरे के गुणों को अपनाने लगते तो ।" पादरी प्रमुख ने जोर देकर कहा - "पूर्व का आत्मवाद पश्चिम के विज्ञान का मार्ग पश्चिम की शक्ति को संस्कृत करती; और पश्चिम का व्यक्तिवाद पूर्व के सामू
लेकिन भाग्यवश शैतान के भी तो कई सहयोगी हैं- राष्ट्र गिर्जे, राजनैतिक संस्थाएँ । उसने लोगों की रूढ़ियों को उभारा, उनकी धारणाओं को उत्तेजना दी। लोगों ने जब अणुबम प्राप्त कर लिया था, उस समय तक तो उनके मानसिक घरातल को उसने ईसा की नवीं सदी पूर्व के लोगों के समान कर दिया था। " "और फिर", डाशून्य पूल ने कहा - "मुझे वह स्थल अच्छा लगा जहाँ आपने पूर्व और पश्चिम के सम्बन्धों पर प्रकाश डाला - कैसे शैतान ने उन्हें सिर्फ एक दूसरे की बुराई ग्रहण करने की प्रेरणा दी। पूर्व ने पश्चिमी राष्ट्रीयता, पश्चिमी युद्ध-साधन, पश्चिमी मूवी और पश्चिमी मार्क्सवाद को अपनाया, और इसी तरह पश्चिम ने पूर्व की स्वेच्छाचारिता, पूर्व की मूढ़-विश्वासों के प्रति आस्था और पूर्व की वैयक्तिक जीवन के प्रति उदासीनता को ग्रहण किया। सारांश यह कि शैतान ने यह प्रयत्न किया कि मनुष्य जाति पूर्व और पश्चिम दोनों दुनियाओं का नाश कर दे ।" "जरा सोचो, दुनिया का क्या नक़्शा होता यदि वे एक दूसरे के गुणों को अपनाने लगते तो ।" पादरी प्रमुख ने जोर देकर कहा - "पूर्व का आत्मवाद पश्चिम के विज्ञान का मार्ग पश्चिम की शक्ति को संस्कृत करती; और पश्चिम का व्यक्तिवाद पूर्व के सामू
किसी शख्स का पासपोर्ट महज दो दिन में बनकर उसे मिल जाए और अगले ही दिन वह विदेश निकलने की तैयारी करे सुनने में थोड़ा अजीब लगता है लेकिन ये सच है। कर्नाटक की रहने वाली एक महिला ने अपने नवजात शिशु के लिए जल्द से जल्द यानी दो दिन में पासपोर्ट बनवाने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से गुजारिश की थी। नई दिल्ली, 27 मई। किसी शख्स का पासपोर्ट महज दो दिन में बनकर उसे मिल जाए और अगले ही दिन वह विदेश निकलने की तैयारी करे सुनने में थोड़ा अजीब लगता है लेकिन ये सच है। कर्नाटक की रहने वाली एक महिला ने अपने नवजात शिशु के लिए जल्द से जल्द यानी दो दिन में पासपोर्ट बनवाने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से गुजारिश की थी। बस फिर क्या सुषमा के एक ट्वीट ने उस मां की गुजरिश को दो दिनों से भी कम समय में पूरा कर दिया। दरअसल कर्नाटक की रहने वाली इस महिला ने अपने नवजात शिशु का पासपोर्ट बनवाने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से ट्वीटर पर अपील की थी। अब जब पासपोर्ट बन गया है तो उन्होंने इस मामले सुषमा स्वराज का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने बताया कि, 'मैं जर्मनी में रहती हूं और मैं अपने नवजात के साथ वापस जाना चाहती थी लेकिन पासपोर्ट न होने के चलते ये असंभव था मैंने उन्हें ट्वीट किया और मैं बहुत खुश हूं कि उन्होंने बेहद तत्परता से मेरी मदद की है। बदा दें कि इससे पहले सोशल मीडिया के जरिए सुषमा स्वराज ने एक नेशनल खिलाड़ी को मात्र तीन घंटे में पासपोर्ट दिलाकर उसके सपनों में उड़ान भरने का काम किया था। खिलाड़ी को जब नेशनल खेलने के लिए पासपोर्ट नहीं होने पर अड़चनें आई तो उसके परिवार और उसकी एक दोस्त ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट किया। इसके बाद पासपोर्ट बनने में आ रही तमाम परेशानी खत्म हो गईं थी।
किसी शख्स का पासपोर्ट महज दो दिन में बनकर उसे मिल जाए और अगले ही दिन वह विदेश निकलने की तैयारी करे सुनने में थोड़ा अजीब लगता है लेकिन ये सच है। कर्नाटक की रहने वाली एक महिला ने अपने नवजात शिशु के लिए जल्द से जल्द यानी दो दिन में पासपोर्ट बनवाने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से गुजारिश की थी। नई दिल्ली, सत्ताईस मई। किसी शख्स का पासपोर्ट महज दो दिन में बनकर उसे मिल जाए और अगले ही दिन वह विदेश निकलने की तैयारी करे सुनने में थोड़ा अजीब लगता है लेकिन ये सच है। कर्नाटक की रहने वाली एक महिला ने अपने नवजात शिशु के लिए जल्द से जल्द यानी दो दिन में पासपोर्ट बनवाने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से गुजारिश की थी। बस फिर क्या सुषमा के एक ट्वीट ने उस मां की गुजरिश को दो दिनों से भी कम समय में पूरा कर दिया। दरअसल कर्नाटक की रहने वाली इस महिला ने अपने नवजात शिशु का पासपोर्ट बनवाने के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से ट्वीटर पर अपील की थी। अब जब पासपोर्ट बन गया है तो उन्होंने इस मामले सुषमा स्वराज का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने बताया कि, 'मैं जर्मनी में रहती हूं और मैं अपने नवजात के साथ वापस जाना चाहती थी लेकिन पासपोर्ट न होने के चलते ये असंभव था मैंने उन्हें ट्वीट किया और मैं बहुत खुश हूं कि उन्होंने बेहद तत्परता से मेरी मदद की है। बदा दें कि इससे पहले सोशल मीडिया के जरिए सुषमा स्वराज ने एक नेशनल खिलाड़ी को मात्र तीन घंटे में पासपोर्ट दिलाकर उसके सपनों में उड़ान भरने का काम किया था। खिलाड़ी को जब नेशनल खेलने के लिए पासपोर्ट नहीं होने पर अड़चनें आई तो उसके परिवार और उसकी एक दोस्त ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को ट्वीट किया। इसके बाद पासपोर्ट बनने में आ रही तमाम परेशानी खत्म हो गईं थी।
- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? सिर्फ पानी ठंडा कम करने के लिए नहीं वजन भी घटाता है आइस क्यूब, जाने कैसे? अक्सर हम आइस क्यूब का इस्तेमाल खाने में करते है या फिर शर्बत में मिलाकर पीने में करते हैं। इसके अलावा ब्यूटी टिप्स में भी किया जाता है। कई तरह के ब्यूटी टेक्निक में जैसे मसाज और फेसपैक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अब बर्फ का इस्तेमाल सिर्फ ब्यूटी का निखारने में नहीं, फैट लूज करने में भी होने लगता है। आइस थेरेपी क्या है? हम बर्फ का इस्तेमाल कोल्ड ड्रिंक्स और खाने के साथ-साथ इसका इस्तेमाल ब्यूटी सर्विसेज में भी करते हैं। इसके साथ-साथ बर्फ का इस्तेमाल मसाज में भी किया जाता है। अगर आप अपने फैट को कम करना चाहते हैं, तो अब फैट को बर्न करने के लिए बर्फ का इस्तेमाल कर सकते हैं, इसे ही आइस थेरेपी कहते हैं। स्टडी के मुताबिक, शरीर के फैट वाले हिस्से पर बर्फ लगाने से फैट बर्न होता है। आपके शरीर के जिस हिस्से पर एक्सट्रा फैट है, वहां आप बर्फ की मदद से उसे स्लिम और फर्म बना सकते हैं। आइस थेरेपी शरीर को डिटॉक्सिफाई करने में और टिश्यू को टाइट करने में सहायक होता है। जिप लॉक बैग में आइस के कुछ टुकड़ों को रखकर फैट वाली जगह लगाएं। यदि आपके पास जिप लॉक बैग नही है, तो बर्फ के आप इसे कपड़े में लपेटकर भी फैट वाली जगह पर सेंक सकते हैं। इस तरीके का प्रयोग एथलीटों या फिर स्पोर्ट्स गतिविधियों में लगे रहने वाले लोगों के लिए किया जाता है। इस तकनीक में पूरे टब में बर्फ के टुकड़े डाले जाते हैं उसके बाद मरीज को उस टब में घुसाया जाता है।
- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? सिर्फ पानी ठंडा कम करने के लिए नहीं वजन भी घटाता है आइस क्यूब, जाने कैसे? अक्सर हम आइस क्यूब का इस्तेमाल खाने में करते है या फिर शर्बत में मिलाकर पीने में करते हैं। इसके अलावा ब्यूटी टिप्स में भी किया जाता है। कई तरह के ब्यूटी टेक्निक में जैसे मसाज और फेसपैक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अब बर्फ का इस्तेमाल सिर्फ ब्यूटी का निखारने में नहीं, फैट लूज करने में भी होने लगता है। आइस थेरेपी क्या है? हम बर्फ का इस्तेमाल कोल्ड ड्रिंक्स और खाने के साथ-साथ इसका इस्तेमाल ब्यूटी सर्विसेज में भी करते हैं। इसके साथ-साथ बर्फ का इस्तेमाल मसाज में भी किया जाता है। अगर आप अपने फैट को कम करना चाहते हैं, तो अब फैट को बर्न करने के लिए बर्फ का इस्तेमाल कर सकते हैं, इसे ही आइस थेरेपी कहते हैं। स्टडी के मुताबिक, शरीर के फैट वाले हिस्से पर बर्फ लगाने से फैट बर्न होता है। आपके शरीर के जिस हिस्से पर एक्सट्रा फैट है, वहां आप बर्फ की मदद से उसे स्लिम और फर्म बना सकते हैं। आइस थेरेपी शरीर को डिटॉक्सिफाई करने में और टिश्यू को टाइट करने में सहायक होता है। जिप लॉक बैग में आइस के कुछ टुकड़ों को रखकर फैट वाली जगह लगाएं। यदि आपके पास जिप लॉक बैग नही है, तो बर्फ के आप इसे कपड़े में लपेटकर भी फैट वाली जगह पर सेंक सकते हैं। इस तरीके का प्रयोग एथलीटों या फिर स्पोर्ट्स गतिविधियों में लगे रहने वाले लोगों के लिए किया जाता है। इस तकनीक में पूरे टब में बर्फ के टुकड़े डाले जाते हैं उसके बाद मरीज को उस टब में घुसाया जाता है।
Highlightsपंजाब के बल्लेबाजों को रॉयल्स गेंदबाजी का सामना करना आसान नहीं होगा। पंजाब की बल्लेबाजी में निरंतरता का अभाव है। शिखर धवन अभी टीम के सबसे सफल बल्लेबाज हैं। IPL 2022: पंजाब किंग्स के कप्तान मयंक अग्रवाल ने शनिवार को यहां राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। पंजाब किंग्स ने अपनी अंतिम एकादश में कोई बदलाव नहीं किया है। रॉयल्स ने करूण नायर की जगह यशस्वी जायसवाल को अंतिम एकादश में मौका दिया है। राजस्थॉन रॉयल्स के सामने पंजाब किंग्स है। रॉयल्स की टीम एक समय शीर्ष स्थान के लिए गुजरात टाइटन्स को कड़ी टक्कर दे रही थी लेकिन हाल में उसका प्रदर्शन गड़बड़ा गया। कोलकाता नाइट राइडर्स और मुंबई इंडियन्स से हार झेलने के बाद अब पंजाब का सामना करेगा। दूसरी तरफ पंजाब अंकतालिका में शीर्ष पर चल रहे गुजरात पर आठ विकेट की जीत से उत्साह से भरा है। मयंक अग्रवाल की अगुवाई वाली टीम प्लेऑफ की अपनी उम्मीदें बनाये रखने के लिये अपना विजय अभियान जारी रखना चाहेगी। राजस्थान अभी अंकतालिका में तीसरे स्थान पर है और इसका मुख्य श्रेय जोस बटलर को जाता है जिन्होंने अब तक वर्तमान टूर्नामेंट में सर्वाधिक 588 रन बनाये हैं। मुंबई के खिलाफ अकेले उन्होंने ही जिम्मा संभाला था जबकि कोलकाता के खिलाफ वह नाकाम रहे। राजस्थान यह दोनों मैच हार गया था। शीर्ष क्रम के दो अन्य बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल और कप्तान संजू सैमसन टुकड़ों में ही अच्छा प्रदर्शन कर पाये हैं। इन दोनों को अधिक जिम्मेदारी लेने की जरूरत है। टीम इस प्रकार हैंः पंजाब किंग्सः शिखर धवन, मयंक अग्रवाल (कप्तान), जॉनी बेयरस्टो, भानुका राजपक्षे, लियाम लिविंगस्टोन, जितेश शर्मा (डब्ल्यू), ऋषि धवन, कगिसो रबाडा, राहुल चाहर, अर्शदीप सिंह, संदीप शर्मा। राजस्थान रॉयल्सः संजू सैमसन (कप्तान), जोस बटलर, यशस्वी जायसवाल, रविचंद्रन अश्विन, ट्रेंट बोल्ट, शिमरोन हेटमायर, देवदत्त पडिक्कल, प्रसिद्ध कृष्णा, युजवेंद्र चहल, रियान पराग, कुलदीप सेन।
Highlightsपंजाब के बल्लेबाजों को रॉयल्स गेंदबाजी का सामना करना आसान नहीं होगा। पंजाब की बल्लेबाजी में निरंतरता का अभाव है। शिखर धवन अभी टीम के सबसे सफल बल्लेबाज हैं। IPL दो हज़ार बाईस: पंजाब किंग्स के कप्तान मयंक अग्रवाल ने शनिवार को यहां राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। पंजाब किंग्स ने अपनी अंतिम एकादश में कोई बदलाव नहीं किया है। रॉयल्स ने करूण नायर की जगह यशस्वी जायसवाल को अंतिम एकादश में मौका दिया है। राजस्थॉन रॉयल्स के सामने पंजाब किंग्स है। रॉयल्स की टीम एक समय शीर्ष स्थान के लिए गुजरात टाइटन्स को कड़ी टक्कर दे रही थी लेकिन हाल में उसका प्रदर्शन गड़बड़ा गया। कोलकाता नाइट राइडर्स और मुंबई इंडियन्स से हार झेलने के बाद अब पंजाब का सामना करेगा। दूसरी तरफ पंजाब अंकतालिका में शीर्ष पर चल रहे गुजरात पर आठ विकेट की जीत से उत्साह से भरा है। मयंक अग्रवाल की अगुवाई वाली टीम प्लेऑफ की अपनी उम्मीदें बनाये रखने के लिये अपना विजय अभियान जारी रखना चाहेगी। राजस्थान अभी अंकतालिका में तीसरे स्थान पर है और इसका मुख्य श्रेय जोस बटलर को जाता है जिन्होंने अब तक वर्तमान टूर्नामेंट में सर्वाधिक पाँच सौ अठासी रन बनाये हैं। मुंबई के खिलाफ अकेले उन्होंने ही जिम्मा संभाला था जबकि कोलकाता के खिलाफ वह नाकाम रहे। राजस्थान यह दोनों मैच हार गया था। शीर्ष क्रम के दो अन्य बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल और कप्तान संजू सैमसन टुकड़ों में ही अच्छा प्रदर्शन कर पाये हैं। इन दोनों को अधिक जिम्मेदारी लेने की जरूरत है। टीम इस प्रकार हैंः पंजाब किंग्सः शिखर धवन, मयंक अग्रवाल , जॉनी बेयरस्टो, भानुका राजपक्षे, लियाम लिविंगस्टोन, जितेश शर्मा , ऋषि धवन, कगिसो रबाडा, राहुल चाहर, अर्शदीप सिंह, संदीप शर्मा। राजस्थान रॉयल्सः संजू सैमसन , जोस बटलर, यशस्वी जायसवाल, रविचंद्रन अश्विन, ट्रेंट बोल्ट, शिमरोन हेटमायर, देवदत्त पडिक्कल, प्रसिद्ध कृष्णा, युजवेंद्र चहल, रियान पराग, कुलदीप सेन।
शहर रविवार को दूसरे दिन भी हीट वेव यानी लू की चपेट में रहा। दिन का तापमान 24 घंटे में 1. 4 डिग्री लुढ़ककर 41 डिग्री पर आ गया, लेकिन गर्मी अौर थपेड़ों में रत्ती भी नरमी नहीं दिखी। इससे पहले न्यूनतम तापमान 0. 7 डिग्री की बढ़त के साथ 24 डिग्री पर पहुंच गया और रात भी तपाती रही। चिलचिलाती धूप के कारण अश्विनी बाजार, बापू बाजार, देहलीगेट, सूरजपोल समेत वाॅल सिटी के प्रमुख बाजारों में रविवार की छुट्टी के बावजूद चहलकदमी ज्यादा नहीं थी। सड़कें शाम तक तपती रहीं। फतहसागर, दूधतलाई, पिछोला किनारे भी शाम 6 बजे बाद ही आवाजाही दिखी। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में पश्चिमी विक्षाेभ सक्रिय हाे गया है। इसका असर 16 मई तक रहेगा। हालांकि संभाग में इसका प्रभाव कम ही रहने के आसार हैं। विभाग ने उदयपुर सहित संभाग के जिलों काे छाेड़कर प्रदेश के अन्य जिलाें के लिए येलाे अलर्ट जारी किया है। ऐसे में यहां फिलहाल गर्मी में राहत की संभावना कम ही है। शहर के 50 हजार से ज्यादा लाेगाें की प्यास बुझाने वाली फतहसागर झील का स्तर तेजी से गिरने लगा है। 13 फीट भराव क्षमता वाली झील में अब महज 6 फीट पानी बचा है। पीएचईडी इससे रोजाना 14 एमएलडी पानी उठा रहा है। विभाग ने अब इसके विकल्प के तौर पर बड़ी तालाब से पानी लाने की तैयारी शुरू कर दी है। रविवार काे बड़ी से जुड़ी लाइन की टेस्टिंग की गई। बड़ी तालाब में अभी 30 फीट पानी है। बता दें कि नेहरू गार्डन में रेनाेवेशन का काम चल रहा है। इससे आकोदड़ा बांध से फतहसागर में पानी नहीं लाया जा सका। This website follows the DNPA Code of Ethics.
शहर रविवार को दूसरे दिन भी हीट वेव यानी लू की चपेट में रहा। दिन का तापमान चौबीस घंटाटे में एक. चार डिग्री लुढ़ककर इकतालीस डिग्री पर आ गया, लेकिन गर्मी अौर थपेड़ों में रत्ती भी नरमी नहीं दिखी। इससे पहले न्यूनतम तापमान शून्य. सात डिग्री की बढ़त के साथ चौबीस डिग्री पर पहुंच गया और रात भी तपाती रही। चिलचिलाती धूप के कारण अश्विनी बाजार, बापू बाजार, देहलीगेट, सूरजपोल समेत वाॅल सिटी के प्रमुख बाजारों में रविवार की छुट्टी के बावजूद चहलकदमी ज्यादा नहीं थी। सड़कें शाम तक तपती रहीं। फतहसागर, दूधतलाई, पिछोला किनारे भी शाम छः बजे बाद ही आवाजाही दिखी। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में पश्चिमी विक्षाेभ सक्रिय हाे गया है। इसका असर सोलह मई तक रहेगा। हालांकि संभाग में इसका प्रभाव कम ही रहने के आसार हैं। विभाग ने उदयपुर सहित संभाग के जिलों काे छाेड़कर प्रदेश के अन्य जिलाें के लिए येलाे अलर्ट जारी किया है। ऐसे में यहां फिलहाल गर्मी में राहत की संभावना कम ही है। शहर के पचास हजार से ज्यादा लाेगाें की प्यास बुझाने वाली फतहसागर झील का स्तर तेजी से गिरने लगा है। तेरह फीट भराव क्षमता वाली झील में अब महज छः फीट पानी बचा है। पीएचईडी इससे रोजाना चौदह एमएलडी पानी उठा रहा है। विभाग ने अब इसके विकल्प के तौर पर बड़ी तालाब से पानी लाने की तैयारी शुरू कर दी है। रविवार काे बड़ी से जुड़ी लाइन की टेस्टिंग की गई। बड़ी तालाब में अभी तीस फीट पानी है। बता दें कि नेहरू गार्डन में रेनाेवेशन का काम चल रहा है। इससे आकोदड़ा बांध से फतहसागर में पानी नहीं लाया जा सका। This website follows the DNPA Code of Ethics.
ने लोगों में कर्त्तव्य - विमूढ़ता और असन्तोष पैदा किया। उसने प्रोत्स्फी को राय बदलने के लिए लिखा, लेकिन वह दृढ़ था कि नाश को जारी रखना चाहिये । २६३४ के देक ने और अधिक हिदायत के साथ बोत्स्की का एक पत्र पाया । उसमे त्रोत्स्की ने कहा था कि हिटलर का अधिकागरूढ़ होना मेरी उस बात को सच्ची कर रहा है जिसे में बराबर कहा करता था अर्थात् सोवियत् संघ एक युद्ध मे फँसने वाला है जिसमें कि उसे हार खानी पड़ेगी। इसलिए त्रोत्स्की - अनुयायियों द्वारा सरकार के स्थापित होने की एक मात्र आशा यही है कि विजेताओं से आगे से ही कुछ शर्ते ते करा ली जायं । उसने लिखा था कि में जर्मन और जापानी सरकारों से इसके बारे में समझौता कर रहा हूं। १९३४ के दिसम्बर में लेनिनमाद के साम्यवादी दल के नेता किरो को जिनोवि और कामनेफ के दल ने मार डाला । अल्द ही वह दल गिरफ्तार कर लिया गया। ध्याताकोफ का दल उक्त हत्या के प्रभाव पर विचार करने के लिए एकत्रित हुआ और उसने निश्चय किया कि हत्या का छिटपुट काम व्यर्थ ही नहीं, बहुत बुरा भी है। आतंकवाद को या तो हमे एक बार ही छोड़ देना चाहिये या उसे बड़े पैमाने पर चलाना चाहिये। उन्होने से किया कि
ने लोगों में कर्त्तव्य - विमूढ़ता और असन्तोष पैदा किया। उसने प्रोत्स्फी को राय बदलने के लिए लिखा, लेकिन वह दृढ़ था कि नाश को जारी रखना चाहिये । दो हज़ार छः सौ चौंतीस के देक ने और अधिक हिदायत के साथ बोत्स्की का एक पत्र पाया । उसमे त्रोत्स्की ने कहा था कि हिटलर का अधिकागरूढ़ होना मेरी उस बात को सच्ची कर रहा है जिसे में बराबर कहा करता था अर्थात् सोवियत् संघ एक युद्ध मे फँसने वाला है जिसमें कि उसे हार खानी पड़ेगी। इसलिए त्रोत्स्की - अनुयायियों द्वारा सरकार के स्थापित होने की एक मात्र आशा यही है कि विजेताओं से आगे से ही कुछ शर्ते ते करा ली जायं । उसने लिखा था कि में जर्मन और जापानी सरकारों से इसके बारे में समझौता कर रहा हूं। एक हज़ार नौ सौ चौंतीस के दिसम्बर में लेनिनमाद के साम्यवादी दल के नेता किरो को जिनोवि और कामनेफ के दल ने मार डाला । अल्द ही वह दल गिरफ्तार कर लिया गया। ध्याताकोफ का दल उक्त हत्या के प्रभाव पर विचार करने के लिए एकत्रित हुआ और उसने निश्चय किया कि हत्या का छिटपुट काम व्यर्थ ही नहीं, बहुत बुरा भी है। आतंकवाद को या तो हमे एक बार ही छोड़ देना चाहिये या उसे बड़े पैमाने पर चलाना चाहिये। उन्होने से किया कि
Dhanbad : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली देने वाले धनबाद (Dhanbad) जिले के जोड़ापोखर निवासी आरजू अली को पुलिस ने 25 मई को जेल भेज दिया. पीएम को गाली देते ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जोड़ापोखर थाना पुसिल ने आरजू अली को 23 मई को हिरासत में लिया था. मेंडेड कर्मी आरजू अली के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होने पर भाजपाइयों ने 24 मई को जोड़ापोखर थाना पहुंचकर पुलिस पर दबाव बनाया था. इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर बुधवार को जेल भेजा. पुलिस पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के लिए दबाव बनाने वालों में भाजपा के भागा मंडल अध्यक्ष सह पूर्व पार्षद सुजीत कुमार सिंह, उमेश यादव, उपेन्द्र विश्वकर्मा, सुजीत सिंह, विकास प्रसाद, शम्भु प्रसाद आदि शामिल थे.
Dhanbad : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली देने वाले धनबाद जिले के जोड़ापोखर निवासी आरजू अली को पुलिस ने पच्चीस मई को जेल भेज दिया. पीएम को गाली देते ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जोड़ापोखर थाना पुसिल ने आरजू अली को तेईस मई को हिरासत में लिया था. मेंडेड कर्मी आरजू अली के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होने पर भाजपाइयों ने चौबीस मई को जोड़ापोखर थाना पहुंचकर पुलिस पर दबाव बनाया था. इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर बुधवार को जेल भेजा. पुलिस पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के लिए दबाव बनाने वालों में भाजपा के भागा मंडल अध्यक्ष सह पूर्व पार्षद सुजीत कुमार सिंह, उमेश यादव, उपेन्द्र विश्वकर्मा, सुजीत सिंह, विकास प्रसाद, शम्भु प्रसाद आदि शामिल थे.
रेलवे का उपक्रम इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड ट्यूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने पिछले दिनों जो वेंडर्स की लाइसेंस फीस में 10 फीसदी की बढ़ोतरी की थी, उसे वापस ले लिया है। यह निर्णय कोरोना की दूसरी लहर में गिरते यात्री भार को देखते हुए लिया है। इस निर्णय के बाद अब वेंडर्स को केवल 20 फीसदी ही सालाना लाइसेंस फीस की दर से शुल्क देना होगा। दरअसल पिछले दिनों IRCTC स्टेशनों की फास्ट फूड यूनिट (एफएफयू), फूड प्लाजा, जन आहार, रिफ्रेशमेंट रूम, एक्जीक्यूटिव लाउंज और ट्रेन साइड वेंडिंग (टीएसवी) की लाइसेंस फीस में बढ़ोतरी की थी। इसको लेकर वेंडर्स ने आपत्ति जताई और IRCTC से निवदेन कर फीस न बढ़ाने की मांग की। उन्होंने इसके पीछे मध्य मार्च और अब अप्रैल में कोरोना के कारण यात्री भार कम होने का कारण दिया। इस पर IRCTC के एडिशनल जीएम (ओसीएस) सुधीर ने जयपुर सहित उत्तर पश्चिम रेलवे के सभी स्टेशनों पर संचालित फूड प्लाजा संचालकों को राहत देते हुए लाइसेंस फीस बढ़ाने के निर्णय को वापस ले लिया। ऐसे में अब जयपुर जंक्शन स्थित फूड प्लाजा, एक्जीक्यूटिव लाउंज और ट्रेनों की टीएसवी से अगले छह माह तक कुल लाइसेंस फीस का 20 फीसदी ही वसूल किया जाएगा। इससे कोरोना काल में मंदी से जूझ रहे वेंडर्स को राहत मिली है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
रेलवे का उपक्रम इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड ट्यूरिज्म कॉरपोरेशन ने पिछले दिनों जो वेंडर्स की लाइसेंस फीस में दस फीसदी की बढ़ोतरी की थी, उसे वापस ले लिया है। यह निर्णय कोरोना की दूसरी लहर में गिरते यात्री भार को देखते हुए लिया है। इस निर्णय के बाद अब वेंडर्स को केवल बीस फीसदी ही सालाना लाइसेंस फीस की दर से शुल्क देना होगा। दरअसल पिछले दिनों IRCTC स्टेशनों की फास्ट फूड यूनिट , फूड प्लाजा, जन आहार, रिफ्रेशमेंट रूम, एक्जीक्यूटिव लाउंज और ट्रेन साइड वेंडिंग की लाइसेंस फीस में बढ़ोतरी की थी। इसको लेकर वेंडर्स ने आपत्ति जताई और IRCTC से निवदेन कर फीस न बढ़ाने की मांग की। उन्होंने इसके पीछे मध्य मार्च और अब अप्रैल में कोरोना के कारण यात्री भार कम होने का कारण दिया। इस पर IRCTC के एडिशनल जीएम सुधीर ने जयपुर सहित उत्तर पश्चिम रेलवे के सभी स्टेशनों पर संचालित फूड प्लाजा संचालकों को राहत देते हुए लाइसेंस फीस बढ़ाने के निर्णय को वापस ले लिया। ऐसे में अब जयपुर जंक्शन स्थित फूड प्लाजा, एक्जीक्यूटिव लाउंज और ट्रेनों की टीएसवी से अगले छह माह तक कुल लाइसेंस फीस का बीस फीसदी ही वसूल किया जाएगा। इससे कोरोना काल में मंदी से जूझ रहे वेंडर्स को राहत मिली है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बिहार विधानसभा में मंगलवार को विपक्षी विधायकों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर राजद नेता तेजस्वी यादव बार-बार ट्वीट कर सीएम नीतीश कुमार पर निशाना साध रहे हैं। साथ ही तेजस्वी यादव ने ऐलान किया है कि मामले पर यदि सीएम ने माफी नहीं मांगी तो वो 5 वर्षों के लिए स्वयं को विधानसभा से बायकॉट कर लेंगे। तेजस्वी ने महिला विधायकों के साथ हुई बदसलूकी की कड़े शब्दों में निंदा की है। पटना (Patna) स्थित बिहार विधानसभा (Bihar Assembly) में कल हुए हंगामे, विपक्षी विधायकों (Opposition legislators) को सदन से बाहर करने और माननीय के साथ दुर्व्यवहार किए जाने पर राजद नेता तेजस्वी यादव (RJD leader Tejashwi Yadav) ने सोशल मीडिया के जरिए सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तेजस्वी यादव बुधवार की सुबह से ही सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ ट्वीट कर जारी कर अपने हमलों को जारी किए हुए हैं। तेजस्वी यादव ने ट्वीट करते हुए लिखा कि मेरा नाम तेजस्वी यादव है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके इशारों पर नाचने वाले अधिकारियों को जानकारी होनी चाहिए कि कोई भी सरकार स्थायी नहीं होती है। मंगलवार को विधानसभा के अंदर विधायकों के साथ मारपीट और जो दुर्व्यवहार किया गया है। यह एक अलोकतांत्रिक प्रवृत्ति है। वहीं तेजस्वी यादव ने लिखा कि यदि सीएम नीतीश कुमार कल की घटना के लिए माफी नहीं मांगते हैं तो वो अपने बाकी रह गए कार्यकाल के लिए विधानसभा का बहिष्कार कर सकते हैं। अन्य ट्वीट के माध्यम से तेजस्वी यादव ने विधानसभा में हुई महिला विधायकों की बर्बर पिटाई पर घोर निंदा जताई है। तेजस्वी यादव ने लिखा कि वो विधानसभा में नीतीश कुमार और उनके पालतू अधिकारियों द्वारा माननीय सदस्यों व महिला विधायकों की बर्बर पिटाई, गालियां और उनके साथ हुए दुर्व्यवहार को नहीं भूल पाएंगे। सीएम नीतीश कुमार के लिए जो कुछ अधिकारी लिखकर दे देते है, उसी को वो पढ़ देते हैं। तेजस्वी यादव ने लिखा कि नीतीश कुमार को बाद में याद आयेगा कि उन्होंने किस निर्लज्ज परंपरा की शुरुआत कर दी है। तेजस्वी यादव ने अपने हमले जारी रखते हुए लिखा कि नीतीश कुमार को इंद्रिय रस प्राप्त हो रहा होगा। जब सदन में उनके गुंडे महिला विधायकों की साड़ी उतार उनके ब्लाउज में हाथ डाल रहे थे। महिला विधायकों को मां-बहन की भद्दी-भद्दी गालियां देकर बाल पकड़ कर घसीटा जा रहा था। इस शर्मनाक घटना के बाद रात्रि में 'निर्लज्ज कुमार' नृत्य-संगीत का आनंद उठा रहे थे। अन्य ट्वीट में तेजस्वी यादव ने लिखा कि विधायकों को बर्बर तरीके से पुलिस द्वारा पिटाई लगवाते हुए सदन से बाहर कर लिया गया। फिर पुलिस की मौजूदगी में सदन में ही पुलिस बिल पास कराया गया। नीतीश सरकार ने मारपीट की जो असंसदीय परंपरा शुरू कराई है। उसका खमियाजा उन्हें भी भुगतना पड़ेगा। वो दिन भी आयेगा कि यही पुलिस इस कानून के सहारे नीतीश कुमार को भी घर में घुस कर पीट सकती है।
बिहार विधानसभा में मंगलवार को विपक्षी विधायकों के साथ हुए दुर्व्यवहार पर राजद नेता तेजस्वी यादव बार-बार ट्वीट कर सीएम नीतीश कुमार पर निशाना साध रहे हैं। साथ ही तेजस्वी यादव ने ऐलान किया है कि मामले पर यदि सीएम ने माफी नहीं मांगी तो वो पाँच वर्षों के लिए स्वयं को विधानसभा से बायकॉट कर लेंगे। तेजस्वी ने महिला विधायकों के साथ हुई बदसलूकी की कड़े शब्दों में निंदा की है। पटना स्थित बिहार विधानसभा में कल हुए हंगामे, विपक्षी विधायकों को सदन से बाहर करने और माननीय के साथ दुर्व्यवहार किए जाने पर राजद नेता तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया के जरिए सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तेजस्वी यादव बुधवार की सुबह से ही सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ ट्वीट कर जारी कर अपने हमलों को जारी किए हुए हैं। तेजस्वी यादव ने ट्वीट करते हुए लिखा कि मेरा नाम तेजस्वी यादव है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके इशारों पर नाचने वाले अधिकारियों को जानकारी होनी चाहिए कि कोई भी सरकार स्थायी नहीं होती है। मंगलवार को विधानसभा के अंदर विधायकों के साथ मारपीट और जो दुर्व्यवहार किया गया है। यह एक अलोकतांत्रिक प्रवृत्ति है। वहीं तेजस्वी यादव ने लिखा कि यदि सीएम नीतीश कुमार कल की घटना के लिए माफी नहीं मांगते हैं तो वो अपने बाकी रह गए कार्यकाल के लिए विधानसभा का बहिष्कार कर सकते हैं। अन्य ट्वीट के माध्यम से तेजस्वी यादव ने विधानसभा में हुई महिला विधायकों की बर्बर पिटाई पर घोर निंदा जताई है। तेजस्वी यादव ने लिखा कि वो विधानसभा में नीतीश कुमार और उनके पालतू अधिकारियों द्वारा माननीय सदस्यों व महिला विधायकों की बर्बर पिटाई, गालियां और उनके साथ हुए दुर्व्यवहार को नहीं भूल पाएंगे। सीएम नीतीश कुमार के लिए जो कुछ अधिकारी लिखकर दे देते है, उसी को वो पढ़ देते हैं। तेजस्वी यादव ने लिखा कि नीतीश कुमार को बाद में याद आयेगा कि उन्होंने किस निर्लज्ज परंपरा की शुरुआत कर दी है। तेजस्वी यादव ने अपने हमले जारी रखते हुए लिखा कि नीतीश कुमार को इंद्रिय रस प्राप्त हो रहा होगा। जब सदन में उनके गुंडे महिला विधायकों की साड़ी उतार उनके ब्लाउज में हाथ डाल रहे थे। महिला विधायकों को मां-बहन की भद्दी-भद्दी गालियां देकर बाल पकड़ कर घसीटा जा रहा था। इस शर्मनाक घटना के बाद रात्रि में 'निर्लज्ज कुमार' नृत्य-संगीत का आनंद उठा रहे थे। अन्य ट्वीट में तेजस्वी यादव ने लिखा कि विधायकों को बर्बर तरीके से पुलिस द्वारा पिटाई लगवाते हुए सदन से बाहर कर लिया गया। फिर पुलिस की मौजूदगी में सदन में ही पुलिस बिल पास कराया गया। नीतीश सरकार ने मारपीट की जो असंसदीय परंपरा शुरू कराई है। उसका खमियाजा उन्हें भी भुगतना पड़ेगा। वो दिन भी आयेगा कि यही पुलिस इस कानून के सहारे नीतीश कुमार को भी घर में घुस कर पीट सकती है।
लिए भी उसे अपने काबू में रखना हमारे लिए असम्भव है । लाख - डेढ़ लाख लोग बीस-बाईस करोड़ की संख्यावाले किसी राष्ट्र को सदा के लिए अपने अधीन नहीं रख सकते।' अठारहवीं सदी में मराठा, निजाम तथा हैदर - टीपू का मैसूर - ये ही तीन प्रमुख राज्य भारत में थे । इन तीनों का मुकाबला करने की क्षमता अंग्रेजों में नहीं थी, इतना ही नहीं बल्कि दूसरे की सहायता के सिवा किसी एक का भी मुकाबला वे नहीं कर सकते थे । इस बात को न पहचानकर इन तीनों में ब्रिटिशों के कृपाभाजन बनने के लिए होड़-सी लगी थी । देश में एकता की भावना ही नहीं रही थी । अन्दरूनी झगड़ों से ये राज्य बिल्कुल कमजोर बन गये थे । अगर उस वक्त लोगों में लोकशाही तथा राष्ट्रीयता की भावना होती तो हिन्दुस्तान अपनी आजादी बनाये रख सकता था । एक शताब्दी तक भारत को गुलामी में रहना पड़ा । गुलामी के कारण देशभर में हद दर्जे की गरीबी फैली । स्वर्गीय दादाभाई नौरोजी, लोकमान्य तिलक तथा महात्मा गांधी देश को राष्ट्रीयता की तालीम देकर संगठित करने की कोशिश कर रहे थे । इनके नेतृत्व में निःशस्त्र होने पर भी पराई हुकूमत से छुटकारा पाने की बात जनता ने ठान ली। उधर अन्तरराष्ट्रीय राजनीति में भी अंग्रेजों का प्रभाव घट ही रहा था । अंग्रेजों की संस्कृति से जागतिक संस्कृति के विकास में मदद मिलेगी, ऐसी जो भावना लोगों में फैली थी वह मिट रही थी । भारत को लोकतन्त्र तथा राष्ट्रीयता के पाठ पढ़ाने के लिए अंग्रेजों का अवतार हुआ है, ऐसी शेखी अंग्रेज बघारते थे और यहां के लोगों का उसपर विश्वास हो गया था; लेकिन दुनिया की हालत बदली और परिस्थिति ऐसी है कि पूंजीवादी प्रणाली से निर्मित वर्गयुद्ध को टालकर अपनी राष्ट्रीयता तथा अपना लोकतन्त्र कायम रखने के लिए अंग्रेजों को भारत से सबक लेना जरूरी महसूस होने लगा है । बढ़ते हुए राष्ट्रीय भावों में दरार पैदा करके प्रान्तीय स्वायत्तता के नाम पर भारत को अनेक टुकड़ों में बांट देने की अंग्रेज शासकों की ख्वाहिश थी । संयुक्त राज्य की स्थापना के नाम पर यहां के लोकतन्त्र को पूंजीवादियों तथा सरमायादारों की सहायता से परास्त करने की साजिशें गोलप्रांतीय स्वायत्तता और द्विराष्ट्रवाद मेज परिषद् के नाम पर अंग्रेजों ने कीं । लेकिन करीब सभी प्रान्तों में की इस चाल को प्रान्तीय स्वायत्तता के आधार पर कांग्रेस ने बेकार बना दिया और सच्चे लोकतन्त्र के लिए आवश्यक अहिंसक वायुमंडल देश में पैदा किया, जिससे प्रान्तीय स्वायत्तता के काल में भी निःशस्त्र क्रान्ति की ताकत बढ़ती ही गई । इस तरह लोकशाही, राष्ट्रीयता और दोनों की पुष्टि तथा परिणति के लिए आवश्यक अनत्याचारी अहिंसात्मक क्रान्तिवाद पूरे देश में फैलने लगा । क्रान्तिवाद की ये लहरें ब्रिटिश हुकूमत की सीमाओं को लांघकर देश रियासतों में भी फैल रही थीं । लोकतन्त्रात्मक भारतीय गणराज्य का निर्माण, गोलमेज परिषद् के वक्त अंग्रेजों ने जो कुटिल कार्रवाइयां कीं, उनसे नहीं, बल्कि उनको परास्त करने के लिए जो सत्याग्रही क्रान्ति-शक्ति उदित हुई, उसके कारण हुआ है। १९३७ से १९४७ तक की घटनाएं बड़ी महत्व की हैं। ब्रिटिश पार्लामेंट ने १९३५ में हिन्दुस्तान में संयुक्त राज्य स्थापन करने का एक कानून बनाया था । उस कानून के अनुसार १९३७ में प्रान्तीय स्वायत्तता की प्रस्थापना हुई। इसके बाद दो-ढाई सालों में संयुक्त राज्य पद्धति की केन्द्रीय सरकार बनाने का भी ब्रिटेन का विचार था । १९३५ का संयुक्त राज्य का कानून राष्ट्रीय नेताओं को मंजूर नहीं था । उस कानून को ठुकराकर ब्रिटिश साम्राज्य के पंजों से पूरी तरह मुक्त होकर, लोकतन्त्र तथा स्वयं निर्णय के तत्वों के अनुसार अपना विधान खुद बनाने का कार्य निःशस्त्र क्रान्ति के मार्ग से सम्पन्न करने का कांग्रेस ने निश्चय कर लिया था । कांग्रेस की इस नीति के पीछे पूरा देश खड़ा होने का सबूत, प्रान्तीय चुनावों में कांग्रेस की जो शानदार जीत हुई, उससे ब्रिटिशों को तथा सारे संसार को मिल चुका था । प्रान्तीय चुनावों के बाद भारत के ग्यारह में से आठ प्रान्तों के शासन की बागडोर कांग्रेस के प्रतिनिधियों के प्रतिनिधियों के हाथ में आ गई । पंजाब, बंगाल तथा सिन्ध ये ही ऐसे तीन प्रांत थे, जहां कांग्रेस के मन्त्रिमंडल नहीं बन सके; लेकिन कांग्रेस को विश्वास था कि निकट भविष्य में ये तीन प्रान्त भी उसके प्रतिनिधियों के शासनाधिकार के नीचे आ जायंगे । भारत के सभी प्रान्तों के शासनाधिकार प्राप्त करके पूर्ण स्वाधीनता, स्वयंनिर्णय तथा अपना शासन-विधान बनानेवाली परिषद प्राप्त करने के लिए एकाध सत्याग्रही आन्दोलन के बाद कांग्रेस सफल होगी, ऐसी आशा लोगों के दिलों में जगाने में कांग्रेस के नेता सफल हो गये थे । कांग्रेसी नेताओं की सलाह से देशी रियासतों में भी स्थानीय प्रजापरिषदों के मातहत ऐसे प्रान्दोलन शुरू हो गये थे कि जिनसे रियासती प्रजा में भी लोकतन्त्र की आशाएं पनपने लगी थीं । स्वातन्त्र्य की इस लगन से तथा निःशस्त्र प्रतिकार की भावना से कांग्रेस को आज नहीं तो कल सफलता मिलेगी, इसके बारे में दूरदर्शी ब्रिटिश राजनीतिज्ञों को भी निश्चय हो गया था । स्वातन्त्र्य और स्वयं निर्णय के लिए अगर भारत में खुला विद्रोह हुआ तो उसको कुचलने के लिए देशी रियासतें तथा फिरकापरस्त अल्पसंख्यक जमातों की सहायता प्राप्त करने की पूरी कोशिश इंग्लैंड के प्रतिगामी राजनेता कर रहे थे । ऐसे आन्दोलन के दौर में भारत का कुछ हिस्सा साम्राज्य के प्रति वफादार बना रहेगा और उसकी सहायता से ऐसे आन्दोलन को दबाया जा सकेगा, ऐसा ये राजनेता मानते थे । भारतीय राष्ट्रवाद का प्रतिनिधित्व करनेवाली कांग्रेस के हाथ में पूरा हिन्दुस्तान न आ जाय, इसलिए अलग-अलग तरीकों को १६३० से ये लोग आजमा रहे थे । देशी रियासतें स्वतन्त्र राज्य हैं, उनपर वहां के नरेशों का पूरा अधिकार है, चाहे तो वे अपनी शर्तों पर भारतीय संघराज्य में शामिल होंगी और अगर ये शर्तें नरेशों को पसन्द न हों तो वे अपनी रियासतों को स्वतन्त्र रख सकेंगे या ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन रहने की उन्हें स्वतन्त्रता होगी, ऐसे आश्वासन देकर उनको भड़काने का रवैया १९३० के पहले से प्रतिगामी ब्रिटिश राजनेता अख्तियार कर रहे थे । इस तरह का फूट का दूसरा एक विचार पाकिस्तान के नाम से भारतीय राजनीति में १९३० से आगे बढ़ रहा था । जिन प्रांतों में मुसलमान बहुसंख्यक हों, उनका शाही हुकूमत से हमेशा वफादार बनने की इच्छा रखनेवाला, एक स्वतंत्र राज्य बनाने की बात सोची जा रही थी । हिन्दुस्तान एक राष्ट्र न होकर उसमें हिन्दू और मुसलमान ऐसे दो राष्ट्र हैं, यह भावना जो कि द्विराष्ट्रवाद के नाम से पहचानी जाती है, कुछ लोगों में जगाने के प्रयास किये जा रहे थे । देशी नरेशों को स्वतंत्र रहने के अधिकार बख्शप्रान्तीय स्वायत्तता और द्विराष्ट्रवाद कर और मुसलमानों में पृथक् राष्ट्रीयता की भावना पैदा करके, उनको अपने प्रति वफादार बनाकर, अंतिम लड़ाई में भारतीय राष्ट्रीयता को परास्त करने के स्वाब ये प्रतिगामी ब्रिटिश राजनेता देखा करते थे । प्रांतीय चुनावों को जीतकर आठ प्रांतों के शासन-सूत्र जब कांग्रेस ने हथिया लिये तो ब्रिटिश कूटनीतिज्ञों की चालों की रफ्तार तेज होती गई। एक तरफ ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ अंतिम लड़ाई छेड़ने के लिए कांग्रेस के झंडे के नीचे संगठित पुरोगामी शक्ति उतावली हो रही थी तो दूसरी तरफ देशी नरेशों के अधिकार और मुसलमानों की पृथक् राष्ट्रीयता की भावना की दुहाई देकर अपने साम्राज्य की नींव मजबूत बनाने की जी-तोड़ कोशिश ये राजनीतिज्ञ कर रहे थे । अन्त में १५ अगस्त, १९४७ के दिन ब्रिटिशों के पंजों से पूरा हिन्दुस्तान मुक्त हो गया। भारत के सभी प्रांतों और देशी रियासतों से अंग्रेजों ने अपना शासन उठा लिया; लेकिन विदाई के वक्त अपने हाथों में संचित सत्ता को अंग्रेजों ने दो हिस्सों में बांटकर एक हिस्सा कांग्रेस के हवाले कर दिया और दूसरा हिस्सा अपने वफादार दोस्त मुस्लिम लीग को बख्श दिया। अपना शासन यहां से उठाते हुए अंग्रेजों ने एलान कर दिया कि पंजाब तथा बंगाल के मुस्लिम प्रधान हिस्से, सरहद प्रांत, सिंध तथा प्रासाम का कुछ हिस्सा मिलाकर पाकिस्तान के नाम से एक स्वतंत्र राज्य बनेगा और बचे हुए हिन्दुस्तान में भारत नाम का दूसरा राज्य प्रस्थापित होगा । ये दोनों राज्य संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न होंगे और अपनी इच्छा के अनुसार ब्रिटिश साम्राज्य से सम्बन्ध रख सकेंगे । अपनी इच्छा के अनुसार देशी रियासतें इन दोनों में से किसी एक राज्य में शामिल हो सकेंगी । ब्रिटेन का न उनपर कोई अधिकार रहेगा और न ब्रिटेन कोई उत्तरदायित्व ही सम्हालेगा । इसका अर्थ यह हगिज नहीं है कि यहां के नरेशों को आज़ादी बख्शकर और हिन्दुस्तान व पाकिस्तान नाम के दो राष्ट्र बनाकर अंग्रेज खुशीखुशी यहां से विदा होने की बात पहले से सोच रहे थे । वे यह सिद्ध करने की कोशिश कर रहे थे कि अगर अंग्रेज यहां से अपना शासन उठा लेंगे तो देश में अनेक छोटे-छोटे राज्य पैदा होंगे जो हमेशा आपस में लड़ते-झगड़ते रहेंगे। अगर यह भावना लोगों में जड़ें जमा सकी तो अपना शासन और मजबूत बनता जायगा, ऐसा उनको लगता था । अपने शांसन के पक्ष में समर्थन प्राप्त करने की उनकी यह चाल थी । इन कूटनीतिज्ञों को लगता था कि अगर कांग्रेस की पैदा की हुई एकराष्ट्रीयता की भावना में दरारें पैदा करने में सफलता मिल सकी तो यहां से अपना शासन उठाने की नौबत ही न आयगी । कम-ने-कम भारत को अपने अधीन रखने की अवधि बढ़ाने के लिए इससे एक कारगर बहाना मिल जायगा, ऐसी कल्पना थी, जो बहुत समय तक न टिक सकी । पहले प्रांतीय चुनावों के बाद केवल दस वर्षों में भारत के कोने-कोने से अंग्रेजों को अपना शासन हटाना पड़ा । आज यद्यपि देश में भारत और पाकि स्तान के नाम से दो नाम से दो राज्य निर्माण हुए हैं, फिर भी सभी रियासतें किसी-नकिसी राज्य में शामिल हो चुकी हैं और बहुतेरी भारत में शामिल हो गई हैं। पाकिस्तान का पहला मसविदा बनानेवालों ने सोचा था कि कश्मीर पाकिस्तान का एक अहम हिस्सा बनेगा। लेकिन फिलहाल वह एक मर्यादा में भारत के साथ जुड़ गया है और पाकिस्तान का हिस्सा बनने की कोई उम्मीद नहीं हैं। अपने भविष्य का निर्णय में कश्मीर को खुद ही करना है, इस सिद्धान्त को भारत तथा पाकिस्तान ने कबूल किया है । निजाम की रियासत को अंग्रेजी साम्राज्य का आखिरी सहारा माना जाता था, वह भी आज भारत में शामिल हो चुकी है। देशी रियासतों व फिकापरस्त जमातों को स्वयं निर्णय और स्वातंत्र्य के नाम पर खास रियायतें देकर अपने साथ रखने की अंग्रेजों की चाल ग्राज बड़े पैमाने पर बेकार साबित हो चुकी है । जागतिक राजनीति की दृष्टि से भी भारत की आजादी एक महान क्रांतिकारी घटना है। भारत आज संसार के अन्य मामी राष्ट्रों की बराबरी का स्थान पा चुका है। इस क्रांतिकारी घटना का श्रेय भारतीय कांग्रेस व उसके नेताओं के साथ-ही-साथ पुरोगामी विचार के अंग्रेज राजनीतिज्ञों को भी दिया जाना चाहिए । यह जाहिर है कि पूरे हिन्दुस्तान का एक लोकतंत्रात्मक राज्य बनाने का मकसद पूरा नहीं हो पाया है। हिन्दूस्तान के हिन्दु मुसलमानों की पिछड़ी सभ्यता, धर्म, राष्ट्र तथा राज्य के बारे में उनके मध्ययुगीन परंपरागत विचार, लोकतन्त्र तथा राष्ट्रीयता से बेमेल आचार-विचार और फिरकापती श्रादि दुर्गुणों को परास्त करने में हमारे नेताओं को पूरी सफलता नहीं मिली, यह कबूल करना चाहिए। उन्हें दो मोर्चों पर एक ही साथ लड़ना था । एक तरफ निःशस्त्र जनता को साथ में लेकर प्रबल अंग्रेजी शासन से मुकाबला करना था, तो दूसरी तरफ परंपरागत प्रतिगामी विचारों का सामना करना था । ये दोनों शक्तियां एक-दूसरे की सहायता करनेवाली थीं । शासन की बागडोर हाथ में लेकर देश में एकता पैदा करना एक तरह से आसान है; लेकिन हाथ में किसी प्रकार की सत्ता न होने पर और शासक जब एकता की भावना को मिटाने की ताक में हर पल तैयार थे तब, अज्ञानी व दरिद्री जनता में एकराष्ट्रीयत्व की भावना जगाकर, जातीयता तथा धर्म-भेद के भाव मिटाकर अपने अधिकारों के खातिर विदेशी सल्तनत से लड़ने के लिए लोगों को तैयार करना बड़ा मुश्किल था। भारतीय नेताओं की दीर्घ तपस्या का फल है कि कम-से-कम हम सब अंग्रेजों के पंजों से तो छूट सके हैं। १९३७ में जब प्रान्तीय स्वायत्तता मिली तब पाकिस्तान का सवाल इतने विकराल रूप में सामने नहीं था । लेकिन उसके बाद दो ही चार सालों में इस कल्पना ने इतना ज़ोर पकड़ा कि आखिर हारकर हमारे नेताओं को अपनी स्वतन्त्रता के साथ-ही-साथ पाकिस्तान को भी कबूल करना पड़ा । इसके कारणों की छानबीन करना लाभदायक होगा । पाकिस्तान की कल्पना पहले-पहल १९३० में लोगों के सामने आई। उस साल डॉ० मुहम्मद इकबाल की सदारत में मुस्लिम लीग का सालाना जलसा इलाहाबाद में हो रहा था। अपनी तकरीर में पंजाब, सूबा सरहद, सिन्ध तथा बिलोचिस्तान को मिलाकर एक स्वतन्त्र राज्य बनाने की मांग उन्होंने की । हिन्दुस्तान के उत्तर-पश्चिम में मुसलमानों का एक राज्य, हिन्दी संघ- राज्य से मिलाजुला, बनाने की वह मांग है, ऐसा तब माना गया । आज के पूर्व पाकिस्तान के प्रदेश का इस भाषण में बिल्कुल जिक्र नहीं है । १६३३ में तीसरी गोलमेज-परिषद के अवसर पर केम्ब्रिज विद्यापीठ के कुछ विद्यार्थियों ने पाकिस्तान की कल्पना लोगों के सामने फिर रखी। पंजाब, सरहदी सूबा, काश्मीर, सिन्धु तथा बिलोचिस्तान को मिलाकर पाकिस्तान नाम का स्वतंत्र राष्ट्र बनाने की कल्पना उसमें थी । लेकिन उस वक्त दिमागी ऐयाशी मान२२० कर उसको किसीने ज्यादा महत्व नहीं दिया । १९३३ के अगस्त में मुस्लिम लीग का एक प्रतिनिधि मण्डल, पालमेंट की ज्वाइंट सिलेक्ट कमेटी के सामने बयान देने के लिए इंग्लैंड गया हुआ था। इस मण्डल को उकसाने के लिए शायद, उसके नेता से पूछा गया, "कुछ प्रान्तों को मिलाकर पाकिस्तान के नाम से उनका एक स्वतन्त्र राज्य बनाने की क्या कोई योजना बनाई गई है ?" इसपर लीगी नुमाइन्दों ने कहा, "जहांतक हम जानते हैं वह केवल कुछ ही विद्यार्थियों को सूझ है । वह ख्याली पुलाव पकाना है, ऐसा हम मानते हैं ।" इससे पता चलता है कि तीन करोड़ मुसलमानों के प्रतिनिधि भी उस वक्त पाकिस्तान के भारे में कैसे विचार रखते थे। लेकिन इसके पांच ही साल बाद देखा गया कि मुस्लिम लीग की सियासत बड़ी तेजी के साथ पाकिस्तान की कल्पना से प्रभावित हो गई । जिन्नासाहब जैसे लोग, जो पहले कांग्रेस के नेता माने जाते थे, पाकिस्तान के नारे बुलन्द करने लगे। जातिधर्म-भेदातीत राष्ट्रीय भावना तथा लोकतंत्र - ये दो ध्येय भारतीय जनता के सामने अंग्रेजों की सल्तनत यहां कायम होने के पहले थे ही नहीं । ये विचार वहां की जनता में फैलाने का काम, उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में, राजा राममोहन राय जैसे धर्म व समाज के सुधारकों ने शुरू किया । अंग्रेजी लिखे-पढ़े लोगों में इस आन्दोलन ने जड़ें पकड़ लीं और इसीके फलस्वरूप १८८५ में कांग्रेस की स्थापना हुई । इस संस्था में हिन्दुस्तान के विभिन्न धर्म तथा जातियों के लोग शामिल हो जायं और आधुनिक राष्ट्रीयता के ध्येय के अनुरूप जाति-धर्म-भेदातीत लोकतन्त्रात्मक राजनीति को अपने देश में चलायें, यही कांग्रेस के संस्थापकों का ध्येय था । देश में उस वक्त जो उदारमतवादी अंग्रेज थे और इने-गिने अंग्रेजी पढ़ेलिखे थे, उन्होंने इस नये आन्दोलन को बढ़ावा दिया। अंग्रेजी पढ़ाई से पहले मुसलमान कुछ हिचकिचाते थे, जिससे अंग्रेजी शिक्षा में वे पिछड़ गये और नये विचारों के सम्पर्क से अछूते रह गये । फिर भी धीरे-धीरे शिक्षित मुसलमान कांग्रेस के आन्दोलन की ओर आकर्षित हो रहे थे और उनकी संख्या भी बढ़ रही । कांग्रेस का तीसरा अधिवेशन एक मुसलमान नेता न्या बद्द्दीन तय्यबजी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ था। आगे चलकर कांग्रेस आम जनता की संस्था बनने लगी । इसके फलस्वरूप १८६२ में पालमिंट ने एक कानून बनाकर धारासभाओं में अप्रत्यक्ष चुनावों से कुछ लोक-प्रतिनिधि चुने जाने का प्रबन्ध किया । हिन्दुस्तान में बढ़ती राष्ट्रीय भावना तथा लोकतन्त्रात्मक राजनीति अंग्रेज शासकों को बहुत ही प्रखरती थी। उसको रोकने के लिए सर सय्यद अहमद जैसे मुसलमान नेताओं को फुसलाना उन्होंने शुरू कर दिया। राष्ट्रीय आन्दोलन केवल हिन्दुओं का है और अगर वह सफल हुआ तो देश में हिंदुओं का राज होगा और मुसलमानों की तहजीब मटियामेट हो जायगी, ऐसी दलीलें मुसलमानों के सामने रखी जाने लगीं। उनका असर मुसलमान नेताओं पर होने लगा। इसके थोड़े समय बाद बम्बई, पूना जैसे स्थानों में हिन्दूमुसलमानों में दंगे हुए । श्रागे तो यह एक सिलसिला ही बन गया कि जब कभी देश में अंग्रेजों के खिलाफ जोरों का आन्दोलन फूट निकलता तब फौरन ही ऐसे दंगे जगह-जगह छिड़ जाते । १९०५ में जब बंग-भंग के खिलाफ स्वदेशी तथा बहिष्कार का आन्दोलन शुरू हुआ तब बंगाल में ऐसी वारदातें हुई। मुसलमानों को राष्ट्रीय श्रान्दोलन से अलग करने के लिए यहां के प्रतिगामी अंग्रेज अफसर इस तरह की तरकीबें खोज निकालते थे । लेकिन इतने से मुसलमानों की पृथक् राष्ट्रीयत्व की भावना ठोस न बन सकी। १९०६ में मोर्ले-मिण्टो सुधारों का एलान किया गया। उसके अनुसार मुसलमानों के लिए पृथक् निर्वाचन अधिकार दिये गए । इससे पृथक् राष्ट्रीयता की भावना को कानून का सहारा मिल गया और वह ज़ोर पकड़ने लगी । १९१६ में लखनऊ में कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग के नेताओं के बीच एक समझौता हुआ और पहले महायुद्ध के बाद स्वराज्य के जिन आधिकारों की मांग कांग्रेस कर रही थी, उनको मुसलमानों की अनुमति भी प्राप्त हुई। ऐसा समझौता कराने में लोकमान्य तिलक तथा जिन्नासाहब ये दो कांग्रेसी नेता प्रमुख थे । इस समझौते में मुसलमानों का पृथक् निर्वाचन का अधिकार मंजूर कर लिया गया। पहले युद्ध के बाद मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों का एलान किया गया, जिसमें साफ तौर से बताया गया था कि पृथक् निर्वा चन का तत्व एक राष्ट्रीयत्व तथा लोकतन्त्र के विकास में बाधा पहुंचानेवाला है । फिर भी मुस्लिम लीग तथा कांग्रेस के समझौते का हवाला देकर उसको नये सुधारों में जोड़ दिया गया; लेकिन समझौते में जिस राजनीतिक सत्ता की मांग दोनों ने मिलकर की थी, उसको मंजूर नहीं किया गया । मुसलमानों को दिये गए पृथक् निर्वाचन अधिकार से होनेवाले परिणामों का अन्दाजा १९३७ में प्रान्तीय स्वायत्तता की स्थापना होने तक कोई न लगा सका । पृथक् निर्वाचन का अधिकार अगर मुसलमानों को न दिया जाता तो फिरकापरस्त राजनीति की आग इतनी भभक न उठती । १९३७ में जिन आठ प्रान्तों में कांग्रेस ने शासनाधिकार हाथ में लिये, उनमें से सात प्रान्तों में मन्त्रिमंडलों में मुसलमान मंत्री लिये गये थे; लेकिन वे सब कांग्रेसी थे । मन्त्रिमंडल के सदस्य सामुदायिक रूप में धारासभा से उत्तरदायी होते हैं, अतः उनकी सफलता की दृष्टि से एकपक्षीय मन्त्रिमंडल सुविधाजनक साबित होता है । जब धारासभा में किसी भी एक दल को निर्विवाद बहुमत प्राप्त नहीं होता, तभी दो या अधिक दलों को मिलकर मन्त्रिमंडल बनाना पड़ता है । लेकिन ऐसे संयुक्त मन्त्रिमंडल अपना कारोबार एक ही ध्येय से चलाने में सफल नहीं हो पाते । कांग्रेस ने शासन की बागडोर सम्हाली तब उसको बहुत बड़ा बहुमत प्राप्त था, अतः दूसरे पक्षों से समझौता करने की कोई जरूरत नहीं थी । उसने अपने ही बल पर मन्त्रिमंडल बनाये थे । उस वक्त राज्य में गवर्नर तथा उसके मातहत काम करनेवाले अधिकारी कांग्रेस-मन्त्रिमंडलों के कारोबार में रोड़े अटकाने की फिक्र में सदा रहते थे । उससे एक तरफ मन्त्रिमंडलों को लड़ना था तो दूसरी तरफ केन्द्रीय शासनाधिकार पाने के लिए आन्दोलन की तैयारी करनी थी । ऐसी अवस्था में, जिन दलों की आनेवाले आन्दोलनों में साथ देने की संभावना नहीं थी, ऐसे दलों के लोगों को अपने मन्त्रिमण्डलों में लेकर उनकी दलगत राजनीति को अवसर देने के लिए कांग्रेस के क्रान्तिकारी नेता कभी तैयार नहीं हो सकते थे। लेकिन अल्पसंख्यक मुसलमान जमात पर वे अन्याय भी नहीं करना चाहते थे, इसीलिए मन्त्रिमंडलों में एक-एक मुसलमान मंत्री भी ले लिया गया था । मुस्लिम लीग के प्रतिनिधियों से ही मुसलमान मंत्री ले लिया जाय, ऐसा मुस्लिम लीग का आग्रह था, जिससे कांग्रेस सहमत न थी । मुसलमानों के लिए सुरक्षित बहुसंख्यक सीटों पर मुस्लिम लीगी प्रतिनिधियों ने अनेक प्रांतों में कब्जा कर लिया था, फिर भी उनको मंत्रिमंडलों में स्थान न मिला, जिससे लीगी नेता कांग्रेस से चिढ़ गये और उसके खिलाफ बेबुनियाद इल्जाम लगाने लगे। कांग्रेस मुसलमानों को व इस्लाम धर्म तथा संस्कृति को दबाकर हिन्दू राज्य की प्रस्थापना करना चाहती है, ऐसा प्रचार उन्होंने शुरू किया । अंग्रेज गवर्नर चाहते थे कि सत्ता हथियाकर जिस क्रांतिकारी आंदोलन की कांग्रेस तैयारी करना चाहती है, उसमें मुसलमान न मिलें और उस वक्त अंग्रेजों का साथ दें । कांग्रेस मुस्लिम लीग के मंत्रियों को लेकर अपने हाथ कमजोर बनाती तो वे खुश हो जाते । कांग्रेस मुस्लिम लीगियों को मंत्रिमंडल में न लेना उनको अखरा तो जरूर; लेकिन वैधानिक दृष्टि से बेचारे लाचार थे, कुछ नहीं कर सकते थे । अल्पसंख्यकों के हितरक्षा की जिम्मेदारी गवर्नरों पर थी और उसके लिए अपने खास अधिकारों का वे उपयोग भी कर सकते थे; लेकिन लीगी प्रतिनिधियों को मंत्रिमण्डल में लेने के लिए वे कांग्रेस को मजबूर नहीं कर सकते थे । मुस्लिम लीगियों को मंत्रिमंडल में न लेना अल्पसंख्यकों पर जुल्म डाना है, ऐसी बकवास कोई नहीं कर सकता था, क्योंकि अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधि के रूप में कांग्रेसी मुसलमान मंत्रिमण्डलों में थे ही । कांग्रेसी मंत्रिमण्डलों ने अल्पसंख्यक जमातों पर कोई जुल्म किया होता तो गवर्नर अपने खास अधिकारों का जरूर प्रयोग करते, चुप न बैठे रहते । कांग्रेसी नेताओं ने यह मंजूर किया था कि अल्पसंख्यकों पर किसी तरह का जुल्म होने पर अगर मंत्रिमण्डलों के काम में गवर्नर दखल देगा तो कांग्रेस उसका प्रतिवाद नहीं करेगी। इसलिए जबतक वास्तव में अल्पसंख्यकों के साथ कोई अन्याय न होता तवतक, लीगियों के नारां के बावजूद भी गवर्नर मंत्रिमण्डलों के काम में दखल नहीं दे सकते थे । कांग्रेस ने धर्मभेदातीत राष्ट्रीय वृत्ति से व लोकतंत्रात्मक ढंग से शासन यंत्र चलाया । इसका यह सबूत था कि लीगियों के नारों के बावजूद हिन्दुस्तान में कहीं भी गवर्नर ने कांग्रेसी मंत्रिमण्डलों के कारोबार में ज़रा भी दखल न दिया। महायुद्ध शुरू होने पर अपने तत्व की रक्षा के लिए जब कांग्रेस के मंत्रिमण्डलों ने इस्तीफे दे दिये, तब मुस्लिम लीग ने मुक्ति दिन मनाया और कांग्रेस के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। उस वक्त कांग्रेस ने चुनौती दी कि अगर कांग्रेस के शासन के खिलाफ किसीको शिकायत हो तो ब्रिटिश गवर्नरों को चाहिए कि वह सबूत देकर उसकी ताईद करें । कांग्रेस की इस चुनौती को किसीने स्वीकार नहीं किया । हिन्दू राज्य की स्थापना करके इस्लामी तहजीब को दबाने की कोशिश करने के जो इल्जाम कांग्रेस पर लगाये गए थे वह कभी भी सिद्ध नहीं हुए । पृथक् निर्वाचन अधिकार मुसलमानों को मिल जाने के कारण उनको चुनाव जीतने के लिए अन्य जाति के मतदाताओं के मतों का सहानुभूति की कोई प्रावश्यकता ही न रही । इससे हिन्दू-मुसलमान आदि भेदों को न माननेवाले राष्ट्रीय मुसलमानों के लिए मुस्लिम निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीतना दुश्वार हो गया। साथ ही साथ ब्रिटिश हाकिम और सरकारी बर्ताव हमेशा राष्ट्रीय मुसलमानों के खिलाफ ही रहा । आधुनिक शिक्षा के सम्पर्क से मुसलमान अछूते रहे और धर्मनिष्ठा तथा राजनीति को एक रूप समझने की मध्ययुगीन प्रवृत्ति उनमें वैसी ही कायम रही । हिन्दू समाज में अलग-अलग जमातें होने से उसकी धर्मनिष्ठा राष्ट्रीयता के विकास में काम देने की क्षमता नहीं रखती थी । साथ-ही-साथ हिन्दू राष्ट्रीय नेताओं ने जातिधर्म-भेदातीत आधुनिक राष्ट्रीय वृत्ति अपने समाज में फैलाने की जानबूझकर काफी कोशिश की, वैसी कोशिश मुसलमान नेताओं ने नहीं की । हिन्दू समाज में जिस तरह के सुधार आंदोलन हुए वैसे मुसलमानों में नहीं हुए। मुसलमानों में जागृति लाने का काम आमतौर पर ऐसे नेताओं ने किया, जो अपनेको अल्पसंख्यक जमात मानते थे और डरते थे कि हिन्दुओं के आक्रमण से शायद इस्लाम को हानि पहुंचे ! कुछ लोग ऐसे थे जो पुरानी मुसलमानी बादशाहत की डींग हांकते थे । इसके फलस्वरूप मुसलमानों में धर्म-भेदातीत राष्ट्रीय वृत्ति न फैल सकी। पृथक् - निर्वाचनअधिकार मिलने से यह फूट का पौधा दिन दूना रात चौगुना बढ़ने लगा । जिन प्रांतों में मुसलमान अल्पसंख्यक थे वहां की धारासभाओं में यद्यपि मुस्लिमों के लिए सुरक्षित करीब सभी जगहों पर लीग के प्रतिनिधि चुन आते थे, फिर भी मुस्लिम लीगियों की संख्या धारासभाओं में हमेशा अल्प ही रही । सिर्फ सिन्ध और सरहद प्रांत ये ही ऐसे दो सूबे थे कि जहां मुसलमानों की संख्या अन्य जमातों से ज्यादा थी और जहां की धारासभामों में मुसलमान प्रतिनिधि बहुमत में थे। लेकिन सरहद प्रांत के चुनावों में कांग्रेसी मुसलमान बहुसंख्या में चुनाव जीत सके थे और वहां कांग्रेस का मंत्रिमंडल बन गया था । सिन्ध प्रांत में अल्लाबक्ष के नेतृत्व में अपने अनुकूल मंत्रिमण्डल बनाने में कांग्रेस सफल हो गई थी। पंजाब तथा बंगाल में हिन्दूमुसलमान प्रतिनिधियों की संख्या करीब-करीब समान थी और वहां मुसलमान पक्षों के हाथों में सत्ता होने पर भी मुस्लिम लीग को सत्ता नहीं मिल सकी थी । इस तरह सारे देश के एक प्रांत में भी मुस्लिम लीग मंत्रिमंडल नहीं बन सका था । पृथक् निर्वाचन अधिकार और मुसलमानों की पृथक् राष्ट्र-भावना पर ही मुस्लिम लीग का आधार ऐसे फिरकापरस्त राजनैतिक दल को लोकतंत्रात्मक तरीकों से किसी सूबे में अपने दल का मंत्रिमण्डल बनाना असम्भव था । प्रांतीय स्वायत्तता के आधार पर बने मंत्रिमंडल कायम होते ही, मुसलमान नेताओं को चाहिए था कि वे अपने फिरकापरस्त दल को तोड़कर तत्त्वनिष्ठ राजनैतिक दल को कायम करते । इसके बगैर किसी भी प्रांत में अपनी खुद की ताकत पर मंत्रिमंडल कायम करना उनके लिए असम्भव था। लेकिन यह सबक सीखने के बजाय अपनी फिरकापरस्त राजनीति को जारी रखने के लिए अंग्रेजों की सहायता से हिन्दुस्तान को दो टुकड़ों में बांटकर एक टुकड़ा मुसलमानों के लिए अलग से प्राप्त करने का मक़सद उन्होंने अपने सामने रखा । भारत में हिन्दू तथा मुसलमान धर्मों को माननेवालों की तादाद यद्यपि ज्यादा है, फिर भी अल्पधर्मावलम्बी काफी लोग यहां बसे हुए हैं। हिन्दुस्तान का कोई हिस्सा ऐसा नहीं है जहां केवल हिन्दुओं या केवल मुसलमानों की बस्ती हो । इसलिए इस देश के दो विभाग किसी भी तरह से क्यों न किये जायं, दोनों विभागों में कमोबेश मात्रा में दोनों धर्म के लोग रहेंगे ही । ऐसी हालत में दोनों राज्यों के सामने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा तथा वह (राज्य) उनको अपना मालूम हो, ऐसी परिस्थिति पैदा करने का सवाल खड़ा होने ही वाला था। इस दृष्टि से देखने पर यह बात साफ हो जाती है कि हिन्दू और मुसलमानों के अलग-अलग राष्ट्र मानने से देश की कोई भी समस्या हल नहीं हो सकती थी । विवेकपूर्वक स्वीकृत की हुई अपनी धर्म-भेदातीत राष्ट्रीयता की भावना को आखिर तक कांग्रेस ने प्रज्वलित रखा और अंग्रेजी प्रभुत्व के स्थान पर भारतीय जनता के प्रभुत्व को स्थापित किया। अपने इस अखिल भारतीय धर्म-भेदातीत संगठन के आधार पर भारत की विधान परिषद को सफल बनाकर इस दल ने देश में लोकतंत्रात्मक गणराज्य की स्थापना की। मुस्लिम लीग से समझौता करने के मोह से कांग्रेस ने अपने को बचाया और भविष्य की इन गौरवशाली घटनाओं को जन्म देने की क्षमता उसने पाली । मुस्लिम लीग के अविवेकी प्रचार से अभिभूत होकर हिन्दू राष्ट्रवाद को स्वीकार करने के मोह से भी वह अपने को बचा सकी; क्योंकि हिन्दू और मुसलमानों का अलग-अलग राष्ट्र माननेवाला सिद्धांत उसको झूठा लगता था । हिन्दू-मुसलमानादि सब धर्मों का एक राष्ट्र स्थापित करने से ही भारत का भविष्य उज्ज्वल होगा और आधुनिक सुसंस्कृत राष्ट्र के नाते वह प्रतिष्ठित हो सकेगा, यह निष्ठा आधुनिक भारत के भावी की ठोस नींव है । श्राज भले ही भारत और पाकिस्तान ये दो राष्ट्र इस देश में बन गये हों; लेकिन अपनी राष्ट्रीयता का यह अधिष्ठान भारत ने क़ायम रखा है। अपनी धर्मविशिष्ट राष्ट्रीयता को आज या कल पाकिस्तान को त्यागना पड़ेगा; क्योंकि उसके बग़ैर आधुनिक संसार में सुसंस्कृत तथा पुरोगामी राष्ट्रों में उसकी गणना नहीं हो सकेगी, न वहां की मुसलमान जनता का भला होगा । हिन्दुस्तान में अलग-अलग धर्मानुयायी व अलग-अलग भाषा-भाषी लोग सदियों से एक साथ बसे हुए हैं, जिससे धर्म-भेदातीत राजनीति भी पुराने काल से यहां चली आई है। ध्यान में रखना चाहिए कि ऐसी अनेकानेक भाषाएं बोलनेवाले तथा विभिन्न धर्म के लोगों का सैकड़ों-हजारों सालों का इतिहास घनघोर लड़ाइयों का इतिहास नहीं है, न अलग-अलग राजाओं ने एक-दूसरे के खिलाफ जो षड्यंत्र किये, उनका इतिहास है । इतिहास का इस तरह संकुचित अर्थ नहीं लेना चाहिए । सदियों से हिन्दू-मुसलमान परिवार यहां के देहातों में पड़ौसियों की तरह रहे हैं। यहां का इतिहास देहातों में फैले इन हजारों-लाखों परिवारों के दैनंदिन आपसी व्यवहारों से बना है। जब हम इस व्यापक दृष्टि से इतिहास का आकलन करेंगे तब पता चलेगा कि इस प्रचंड राष्ट्र में जो धर्म - भावना फैली है, उसको सर्वसंग्राहक तथा सर्व सहिष्णु प्रेम-भावना का रूप मिल चुका है। इस देश में जो संत-महात्मा पैदा हुए, उन सबने धर्म की विविधता में एकत्व देखने का संदेश अपने के चारित्र्य उज्ज्वल उदाहरण से जनता के हृदय पर अंकित कर रखा है। यहां जो धार्मिक तथा आध्यात्मिक दर्शन-निर्माण हुआ, वह सब तरह के विचार स्वातंत्र्य को अवकाश देता है । साथ-ही-साथ शुद्ध तत्वनिष्ठा से सत्यसंशोधन करनेवालों ने जो भी तत्त्वज्ञान खोज निकाले, उनके हरेक के बारे में समुचित आदर रखकर, उसमें जो सत्यांश हो, उसको अपनाने का उपदेश वह देता है । जीवन का सत्य किसी एक वैचारिक सिद्धांत या संप्रदाय में समाया हुआ नहीं होता, यह वृत्ति यहां के निवासियों में दार्घकालीन इतिहास से जड़ें जमा चुकी है। यही वजह है कि आधुनिक भारत में जो राष्ट्रीयत्व पैदा हुआ, वह किसी संकुचित धर्माभिमान, भाषाभिमान या इतिहास की कल्पना पर अपना आधार नहीं रखता। विशिष्ट धर्म या विशिष्ट भाषा सबसे श्रेष्ठ और परमेश्वर को अधिक प्रिय है, या उसका स्वीकार किये बगैर मानव अपने जीवन को कभी सफल बना नहीं सकेगा या मुक्ति या आत्मिक शान्ति के लिए किसी विशिष्ट धर्म या भाषा का स्वीकार करना अनिवार्य है, ऐसे संकुचित धर्म- विचारों का विरोध करनेवाले अनेक संत-महात्मा इस देश में हो चुके हैं। उनके हृदय में जो विश्वात्मक प्रेम-भावना का धर्म था, उसीके आधार पर हमारे नेताओं ने आधुनिक भारत का निर्माण किया है । सहिष्णु तथा सर्वव्यापक मानव-धर्म के या सर्व धर्म समभाव के आधार पर राज चाहनेवाले राज्यकर्ता यहां हो चुके हैं। अशोक, अकबर और शिवाजी-जैसों की राजनीति भारत की आनेवाली पीढ़ियों के लिए सदा पथ-प्रदर्शन का काम करेगी । औरंगजेब जैसे तंगदिल धर्मनिष्ठ की राजनीति को भारत के इतिहास की अनुकरणीय बात नहीं माना जायगा । इतिहास में भली-बुरी बातें भरी रहती हैं; लेकिन उनमें से भली बातें चुनकर उनका अभिमान रखना और बुरी बातों को भूल जाना चाहिए। अपनी स्वतन्त्र बुद्धि से अपने कर्तव्य के बारे में निर्णय करके अपनी परिस्थिति के अनुकूल और आनेवाली पीढ़ियों को प्रेरणा देनेवाला इतिहास बनाना, यही इतिहास के अध्ययन का सही उपयोग है । प्रत्येक पीढ़ी को नये इतिहास का निर्णय करना पड़ता है और बीते ज़माने के श्रेष्ठ पुरुषों के चरित्रों में से स्फूर्ति लेनी पड़ती है । जो गलतियां उनसे हुई, उनको टालकर उनके अच्छे कामों का अनुकरण करना होता है। उनके जो ध्येय अधूरे रहे हों और उस वक्त जो ध्येय उनके दृष्टि-पथ में न हों, ऐसे ध्येयों को अपनाकर उन्हें साकार करने की कोशिश करनी पड़ती है । इसी दृष्टि से पुराने इतिहास की घटनाओं से सबक सीखकर आधुनिक भारत के निर्माताओं ने अपनी राष्ट्रीयता का विकास किया है । कुछ लोग ऐसे हैं, जो एकराष्ट्रीयत्व की दृष्टि रखनेवालों के विचारों से सहमत नहीं हैं । हिन्दू व मुसलमान ये दो अलग-अलग राष्ट्र हैं, ऐसा वे मानते हैं। इनमें से कोई एक जबतक पूरी तरह से हार नहीं जाता तबतक वह झगड़ा मिटना उनको असम्भव सा लगता है। उन्हें अगर एक ही देश में रहना है तो एक की प्रभुता को दूसरा या तो स्वयं मान ले या उसके लिए वह मज़बूर किया जाय, उसके सिवा इन दो धर्मों के लोग यहां एक-दूसरे के साथ नहीं रह सकेंगे, ऐसी द्विराष्ट्रवादियों की दृष्टि है । भेद-दृष्टि से सोचते रहने के कारण हिन्दू तथा मुसलमान धर्म की ओर समान दृष्टि से देखने की वृत्ति उनकी समझ में नहीं आती। मुस्लिम लीग ने जब इस भेद-दृष्टि का पल्ला पकड़ा और द्विराष्ट्रवाद को स्वीकार करके कांग्रेस की नीति पर टीका करने लगी तब उसको कांग्रेस के हरेक कार्यक्रम के पीछे हिन्दुओं का वर्चस्व प्रस्थापित करने का हेतु नज़र आने लगा । ऐसी ही भेद-दृष्टि से जब हिंदू राष्ट्रवादी कांग्रेस के राजनैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों की ओर देखते तब कांग्रेस के हरेक कार्यक्रम में उन्हें मुसलमानों का पक्षपात दिखाई देता । राजनैतिक सत्ता के बंटवारे के लिए द्विराष्ट्रवादियों ने जो झगड़ा उठाया वह धर्म,, भाषा, इतिहास, संस्कृति आदि जीवन के सभी अंगों तक फैल गया। ब्रिटिश शासन को मुस्लिम राष्ट्रवाद के लिए जितना पक्षपात था उतना हिंदू राष्ट्रवादियों के लिए नहीं था, जिससे हिंदू राष्ट्रवाद ज्यादा पनपने नहीं पाया । मुस्लिम राष्ट्रवाद अज्ञानी मुसलमान जनता में बेरोकटोक फैलता रहा। पूरे देश में अगर एक ही राज्य प्रस्थापित होता है तो उसका विधान कैसा ही क्यों न बने और प्रान्तीय राज्यों को तथा अल्पसंख्यक मुसलमानों को कितनी ही सहूलियतें और संरक्षित अधिकार क्यों न दिये जायं, फिर भी केन्द्रीय सरकार का बहुसंख्यक हिंदू समाज के प्रति उत्तरदायी होना अनिप्रान्तीय स्वायत्तता और द्विराष्ट्रवाद वार्य था, और वैसा होना मुसलमानों के लिए हानिकर है, ऐसी भावना उनमें पैदा करना और बढ़ाना आसान था। साथ ही उस समाज के धार्मिक और ऐतिहासिक अहंकार को जगाकर बढ़ावा देना और पाकिस्तान की प्रस्थापना के बगैर आराम न करने का जोश उनमें भड़काना कठिन नहीं था । भेदमूलक वृत्ति को रोकने के प्रयत्न शासकों ने कदापि नहीं किये, उलटे उसको प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहन ही दिया। १६३६ के सितम्बर मास में दूसरा महायुद्ध शुरू हुआ । लार्ड लिनलिथगो उस समय वाइसराय का पद सम्हाल रहे थे। उन्होंने किसी भारतीय नेता से या ग्यारह प्रान्तों में शासनसूत्र सम्हालनेवाले किसी मंत्रिमंडल से पूछे बग़ैर ही एलान कर दिया कि अंग्रेजों की तरफ से हिन्दुस्तान महायुद्ध में शरीक हो गया है। यह बात हिन्दुस्तान के स्वातन्त्र्य तथा स्वयंनिर्णय के अधिकारों को क्षति पहुंचानेवाली थी । कांग्रेस ने मांग की कि अंग्रेज अपने युद्ध - उद्देश्य जाहिर कर दें और अगर लोकतन्त्र तथा राष्ट्रीय स्वातन्त्र्य की रक्षा करना ही उनका ध्येय हो तो हिन्दुस्तान की स्वतन्त्रता को फौरन क़बूल कर लें । अगर जंग के जारी होने के कारण नया विधान अमल में लाना असम्भव मालूम होता हो तो कम-से-कम केन्द्र में फौरन भारतीय नेताओं का मंत्रिमंडल स्थापित करके उसकी सलाह मानकर यहां का कारोबार चलाया जाय । लेकिन ब्रिटिश राजनीतिज्ञ उस समय इन मांगों को कबूल करके हिन्दुस्तान को स्वातन्त्र्य और स्वयंनिर्णय का हक देने के लिए राज़ी नहीं थे। इसलिए आठ प्रान्तों के शासनसूत्र सम्हालनेवाले कांग्रेस - मंत्रिमंडलों ने त्यागपत्र दे दिये। जिस युद्ध के हेतु साफ न हों ऐसे युद्ध में कांग्रेस योग नहीं देगी और जनता को चाहिए कि वह भी योग न दे, ऐसा प्रचार कांग्रेस ने शुरू किया । कांग्रेस के बल को तोड़ने के लिए मुस्लिम लीग पर अंग्रेज अपना साया डालने लगे । मुसलमान-समाज की अनुमति के बिना कोई भी विधान हिन्दुस्तान में नहीं बनने दिया जायेगा, ऐसा उन्होंने ऐलान कर दिया और देशी नरेशों को अपने साथ रखने के लिए पुचकारने की नीति जाहिरा तौर पर की। इससे मुस्लिम नेताओं को विश्वास हो गया कि अगर हम आपस में मिलकर लीग की तरफ से अंग्रेजों से कोई मांग करेंगे तो वह से ज़रूर मिल जायगी । इसी वजह से पंजाब के सर सिकन्दर हयातखां, बंगाल के फजलुल हक तथा आसाम के मुहम्मद सादुल्ला के नेतृत्व में वे दल, जो शासन की बागडोर सम्हाले थे, मुस्लिम लीग में शामिल हो गए । १६३० के फरवरी मास में जिन्नासाहब ने खुल्लमखुल्ला पाकिस्तान का ध्येय मंजूर कर लिया और अगले महीने में कराची में मुस्लिम लीग का जो अधिवेशन हुआ, उसने भी उसपर मुहर लगा दी। पहले पंजाब तथा बंगाल में मुस्लिम लीग पक्ष की कोई हस्ती नहीं थी; लेकिन अब वहां के मुसलमान नेता पाकिस्तान के प्रचारक बन गए । फिर भी इन दो प्रान्तों में हिन्दू तथा मुसलमानों की तादाद क़रीब-क़रीब बराबर होने के कारण वहां की धारासभाओं के सिर पाकिस्तान का ध्येय मढ़ना असम्भव हो गया । पाकिस्तान में देश के कौन-से हिस्सों का समावेश होगा, उसकी सीमाएं कैसे तय की जायंगी, उन सीमाओं के बाहर जो हिन्दुस्तान बचेगा, वहां कितने मुसलमान रहेंगे और उनका भवितव्य क्या होगा, इसके बारे में साफ-साफ बात करने के लिए मुस्लिम लीग के नेता तैयार नहीं थे । अगर इसके बारे में वे तभी खुलासा करते तो उनको यह क़बूल करना पड़ता कि पाकिस्तान में बहुत थोड़ा भूभाग चला जायगा और उसमें जितने मुसलमान में बसेंगे, करीब उतने ही मुसलमानों को बाकी हिस्से में रहना होगा । मुस्लिम जनता को यह भी मालूम होता कि पूरा पंजाब तथा पूरा बंगाल पाकिस्तान में हगिज़ शामिल न हो सकेगा । साथ ही पाकिस्तान एक प्रखंड मुल्क न बनकर उत्तर पश्चिम कोने में और हजारों मील की दूरी पर पूरब में बँटा रहेगा। अगर इस तरह का एक पूरा चित्र लोगों के सामने रखा जाता और उसके बारे में मुसलमानों की सही राय ली जाती तो मुसलमान जनता और उसके प्रगुप्रा इसे ज़रूर ठुकरा देते । जिन्नासाहब इस बात को जानते थे और इसीलिए पाकिस्तान का पूरा ढांचा उन्होंने लोगों के सामने कभी नहीं रखा। जून, १९४७ में आज के पाकिस्तान की कल्पना को जिन्नासाहब ने मंजूर कर लिया; लेकिन उसके कुछ ही दिन पहले तक वे पूरा पंजाब, पूरा बंगाल तथा आसाम पाकिस्तान में मिलाने एवं पूर्वी पाकिस्तान को जोड़नेवाले मुल्क की भी मांग करते थे । देशी नरेशों को स्वातन्त्र्य तथा स्वयंनिर्णय के जो अधिकार अंग्रेजों ने दिये थे, उससे मुसलमान नेताओं को अन्त तक लग रहा था कि दक्षिण का निजाम-राज्य हमेशा मुसलमानों का राज ही बना रहेगा। इस तरह अगर हिन्दुस्तान के तीन विभागों में तीन बड़े इस्लामी राज कायम हो सके और उनमें एकता कायम की जा सकी तो हिन्दुस्तान को इस्लामी सभ्यता का एक बड़ा राष्ट्र बनाया जा सकेगा, ऐसे ख्वाब मुसलमान देखा करते थे और पाकिस्तान की हिमायत करने में उन्हें गौरव मालूम होता । ये सब निरी अवास्तव कल्पनाएं हैं, इन्हें व्यवहार में उतारना बिलकुल असम्भव है, ऐसा अंग्रेज चाहते तो अधिकृत रीति से मुसलमानों को बता सकते थे। लेकिन न अंग्रेज और न मुस्लिम लीग के नेता ही ऐसा करना चाहते थे। पाकिस्तान की प्रत्यक्ष प्रस्थापना होने तक उसका पूरा ढांचा मुसलमान जनता या संसार के सामने कभी अधिकृत रूप में न रखा गया । पूरा-पूरा स्वरूप मालूम न होने के कारण पाकिस्तान के नारों के जाल में मुसलमान जनता धीरे-धीरे फंसती गई । १९४० में लार्ड लिनलिथगो ने ऐलान कर दिया कि जिससे अल्पसंख्यक सहमत न हों और जिसमें देशी नरेशों के साथ अंग्रेजों के लिए समझौतों को और उनसे प्राप्त अधिकारों को क़बूल न किया गया हो, ऐसे किसी विधान को ब्रिटेन अपनी अनुमति कभी नहीं देगा । १९४५ के प्रारम्भ में क्रिप्ससाहब स्वातन्त्र्य तथा स्वयंनिर्णय के तत्व हिन्दुस्तान में युद्ध के बाद लागू करने का वादा करनेवाली योजना लेकर भारत में आये, तबतक किसी को पता नहीं था कि पाकिस्तान के ध्येय को अंग्रेज किस बूते पर और कितनी हद तक मंजूर करेंगे । १९४० से १९४१ के अन्त तक युद्ध - विरोधी प्रचार करने के लिए कांग्रेस ने व्यक्तिगत सत्याग्रह का आन्दोलन चलाया, जिसमें सारे भारत से करीब पच्चीस हजार सत्याग्रही जेल में गये । इससे ब्रिटेन के दोस्तों - खासकर चीन तथा अमरीका को - पता चला कि ब्रिटिश हुकूमत को युद्धकाल में सहयोग देने के लिए भारतीय जनता तैयार नहीं है । इधर जर्मनी की तरफ से जापान भी युद्ध में कूद पड़ा और देखते-देखते ब्रह्म देश की ओर लपका। ऐसे अवसर पर हिन्दुस्तान की वाजिब मांगों को पूरा करके जनता से सहयोग प्राप्त कर लेने की सलाह चीन तथा अमरीका ने अंग्रेजों को दी । इसी दबाव के कारण अंग्रेजों ने क्रिप्स साहब को भेजा । हिन्दुस्तान में स्वातंत्र्य और स्वयंनिर्णय के तत्त्व किस ढंग से अंग्रेज लागू करना चाहते हैं, इसका क्रिप्स साहब के साथ भेजी योजना में स्पष्टीकरण किया गया था । इस योजना के अनुसार भारत के हर एक प्रान्त और रियासत में स्वातंत्र्य और आत्मनिर्णय के तत्त्व लागू करने की चेष्टा की गई थी। इससे हिन्दुस्तान में अनेक संयुक्त राज्य स्थापित हो सकते थे । ब्रिटिश साम्राज्य से मिल-जुलकर रहने की आजादी भी प्रान्तों को दी गई थी। स्वयंनिर्णय के अधिकार जिस ढंग से दिये थे, इससे सम्भव था कि भारत अनेक टुकड़ों में बंट जाता । रियासतों की प्रजा को नहीं, बल्कि नरेशों को आत्मनिर्णय के हक दिये गए थे। सच कहा जाय तो यह लोकशाही एवं स्वयंनिर्णय की विडंबना मात्र थी । ये अधिकार भी युद्ध के खत्म होने पर मिलनेवाले थे । भविष्य के इस आश्वासन पर भरोसा रखकर भारतीय जनता तथा भारत के सभी पक्ष और देशी नरेश महायुद्ध में अंग्रेजों के हाथ बटाने के लिए वाइसराय के कार्यकारी मण्डल में शामिल हों, ऐसी आशा रखी गई थी । वाइसराय के कार्यकारी मण्डल के सदस्य बननेवाले नेताओं को मंत्रिमण्डल के अधिकार और दर्जा देने के लिए भी ब्रिटिश राजनेता तैयार न थे । कांग्रेस की मांग थी कि भविष्य के आश्वासनों के साथ वाइसराय के कार्यकारी मण्डल को मंत्रिमण्डल का दर्जा फौरन दे दिया जाय । इस मांग को कबूल कर लिया होता तो शासनसूत्र अपने हाथ में लेकर युद्ध का संचालन करने की जिम्मेदारी उठाने को कांग्रेस तैयार हो जाती। अगर कांग्रेस के हाथों में सत्ता देने के लिए किसी को उज्ज्र होता तो चाहे जिसके हाथ में सरकार सत्ता सौंप देती, उसके लिए कांग्रेस तैयार थी । उसका कहना इतना ही था कि जो मंत्रिमण्डल बनेगा, उसको जनता की प्रतिनिधि सभा के सामने उत्तरदायी रहना होगा । यह मांग मंजूर न हुई, अतः कांग्रेस ने इस योजना को ठुकराया । अन्य पक्षों ने भी अपनी-अपनी दलीलें देकर इस योजना को अस्वीकृत किया और क्रिप्स साहब का मिशन असफल रहा । क्रिप्स - मिशन से यह साफ हो गया कि पूर्ण स्वातन्त्र्य, स्वयं निर्णय तथा विधान परिषद की मांग अव्यवहार्य या अवास्तविक न थी और ब्रिटिश सरकार उसको मंजूर कर सकती थी । तब अन्य पक्षों ने भी अपनी राजनीति में इन तीनों तत्वों को सम्मिलित किया । ब्रिटेन जब अपना शासन यहां से हटायेगा तब यहां एक ही राज्य बनाने का उसका आग्रह होगा और देश का विभाजन करनेवाली किसी भी योजना को मंजूर नहीं किया जायगा, ऐसा जिनका विश्वास था उनको क्रिप्स साहब के दौत्य से बड़ी ठेस पहुंची; क्योंकि देश के दो ही नहीं, अनेकानेक टुकड़े करने के बीज इस योजना में छिपे पड़े थे । ब्रिटिश लोग लोकतन्त्र के हामी हैं अतः उन्होंने स्वयंनिर्णय का तत्त्व स्वीकार किया; लेकिन देशी रियासतों में स्वयंनिर्णय का तत्त्व लागू करते समय यह अधिकार रियासतों की प्रजा को न देकर नरेशों को दिया गया, इससे सबको बड़ा आश्चर्य हुआ । प्रान्तों को स्वयंनिर्णय का अधिकार देने का बहाना करके मुसलमानों को खुश करने की उनकी नीति थी; लेकिन कम से कम उसमें लोकतन्त्र का आधार मिल सकता था । देशी नरेशों के बारे में उन्होंने जो रुख रखा उसको किसी भी तरह का नैतिक बल मिलना कठिन था । क्रिप्स - मिशन से यह भी साफ हो गया कि युद्धकाल में किसी तरह का परिवर्तन करने के लिए ब्रिटेन तैयार नहीं है । वाइसराय के कार्यकारी मण्डल में सब हिन्दी सदस्य रखने के लिए वे तैयार थे, लेकिन भारतीय जनता के प्रति उत्तरदायी मंत्रिमण्डल बनाने की उनकी तैयारी नहीं थी । इसके लिए उनकी दलील यह थी कि उनकी इच्छा के वावजूद वे ऐसा नहीं कर सकते; क्योंकि मुस्लिम लीग इस बात को मंजूर नहीं करती । ब्रिटिश सरकार के रुख को देखकर अपने पक्ष को मज़बूत बनाने के लिए कांग्रेस को भी यह जाहिर करना पड़ा कि यद्यपि हिन्दुस्तान को अखण्ड रखना उसका ध्येय है, फिर भी अगर देश के किसी हिस्से के लोगों ने उसमें न रहने का बहुमत से अधिकृत रूप में फैसला कर लिया तो उसको देश के साथ जुड़े रहने पर मज़बूर नहीं किया जायगा । लेकिन इसका भी कोई असर न हुआ । क्रिप्ससाहब के साथ की समझौते की बातचीत विफल होते देख कांग्रेस ने लड़ाई छेड़ने की ठान ली। ८ अगस्त, १९४२ के दिन गांधीजी के नेतृत्व में पूर्ण स्वातन्त्र्य की प्राप्ति के लिए सत्याग्रह - संग्राम करने का प्रस्ताव कांग्रेस ने पास किया । उसी रात को सरकार ने म० गांधी प्रभृति कांग्रेस नेताओं तथा उनके हजारों अनुयायियों को एक साथ गिरफ्तार कर लिया और आजादी के आंदोलन को कुचलने के लिए सब तरह के साधनों से काम लेना शुरू किया। ब्रिटिशों के इस बर्बरतापूर्ण बर्ताव से सारे देश में आंदोलन की प्रचंड आग भभक उठी। चारों ओर अंग्रेजो, सल्तनत छोड़कर चले जाओ' के नारे गूंजने लगे । १६४४ में बीमारी के कारण गांधीजी को रिहा किया गया । तबतक आंदोलन किसी-न-किसी रूप में चलता रहा। गांधीजी ने कुछ तन्दुरुस्त होने के बाद स्वातन्त्र्य की गुत्थी सुलझाने के लिए ब्रिटिश सरकार तथा मुस्लिम लीग से बातचीत शुरू की । सितम्बर १९४४ में वह जिन्नासाहब से बम्बई में मिले । पन्द्रह रोज तक उनमें बातचीत चली । जिन्नासाहब द्विराष्ट्रवाद के उसूल को गांधीजी से कबूल करवाना चाहते थे। पाकिस्तान मंजूर किये बग़ैर बातचीत चलाना जिन्नासाहब बेकार समझते थे। गांधीजी कहते थे कि इस सिद्धान्त को क़बूल करना असम्भव है । उनका कहना था कि हिन्दुस्तान में भले ही दो राज्य बन जायं; लेकिन उनमें से हरेक राज्य में हिन्दू तथा मुसलमान दोनों जमातों के लोग रहेंगे और इसीलिए धर्मविशिष्ट राष्ट्रीयता का आग्रह रखना ग़लत है । वह यह भी कहते थे कि हिन्दुस्तान में दो राज्य क़ायम होने पर भी विदेशनीति, प्रतिरक्षा तथा यातायात के बारे में दोनों को संयुक्त नीति अख्तियार करनी होगी और दोनों राज्यों को अपने-अपने अल्पसंख्यकों के अधिकार सुरक्षित रखने के लिए उचित प्रबन्ध करना होगा। जिन्नासाहब छः प्रांतों को उनके उसी रूप में पाकिस्तान में शामिल करना चाहते थे; लेकिन गांधीजी का कहना था कि पंजाब, बंगाल तथा साम के सभी हिस्से पाकिस्तान में हगिज नहीं जायंगे। जिन विभागों को अलग करना हो, उनके सब धर्मावलम्बी निवासियों की राय लेना वह जरूरी समझते थे । मगर जिन्नासाहब का कहना था कि एक तो इन प्रांतों में मतगणना का कोई कारण ही नहीं है; और अगर मतगणना करनी ही हो तो सिर्फ मुसलमानों की ही राय ली जाय। जिन्नासाहब की ये मांगें इतनी बेजा थीं कि कोई भी उन्हें मंजूर नहीं कर सकता था। गांधीजी तथा जिन्ना की भूमिका में इतना अन्तर रहते हुए किसी प्रकार के समझौते की प्रशा करना बेकार था । इस बातचीत से इतना फायदा ज़रूर हुआ कि दोनों को अपने विचार लेखबद्ध करने पड़े और पाकिस्तान की कल्पना की रूपरेखा
लिए भी उसे अपने काबू में रखना हमारे लिए असम्भव है । लाख - डेढ़ लाख लोग बीस-बाईस करोड़ की संख्यावाले किसी राष्ट्र को सदा के लिए अपने अधीन नहीं रख सकते।' अठारहवीं सदी में मराठा, निजाम तथा हैदर - टीपू का मैसूर - ये ही तीन प्रमुख राज्य भारत में थे । इन तीनों का मुकाबला करने की क्षमता अंग्रेजों में नहीं थी, इतना ही नहीं बल्कि दूसरे की सहायता के सिवा किसी एक का भी मुकाबला वे नहीं कर सकते थे । इस बात को न पहचानकर इन तीनों में ब्रिटिशों के कृपाभाजन बनने के लिए होड़-सी लगी थी । देश में एकता की भावना ही नहीं रही थी । अन्दरूनी झगड़ों से ये राज्य बिल्कुल कमजोर बन गये थे । अगर उस वक्त लोगों में लोकशाही तथा राष्ट्रीयता की भावना होती तो हिन्दुस्तान अपनी आजादी बनाये रख सकता था । एक शताब्दी तक भारत को गुलामी में रहना पड़ा । गुलामी के कारण देशभर में हद दर्जे की गरीबी फैली । स्वर्गीय दादाभाई नौरोजी, लोकमान्य तिलक तथा महात्मा गांधी देश को राष्ट्रीयता की तालीम देकर संगठित करने की कोशिश कर रहे थे । इनके नेतृत्व में निःशस्त्र होने पर भी पराई हुकूमत से छुटकारा पाने की बात जनता ने ठान ली। उधर अन्तरराष्ट्रीय राजनीति में भी अंग्रेजों का प्रभाव घट ही रहा था । अंग्रेजों की संस्कृति से जागतिक संस्कृति के विकास में मदद मिलेगी, ऐसी जो भावना लोगों में फैली थी वह मिट रही थी । भारत को लोकतन्त्र तथा राष्ट्रीयता के पाठ पढ़ाने के लिए अंग्रेजों का अवतार हुआ है, ऐसी शेखी अंग्रेज बघारते थे और यहां के लोगों का उसपर विश्वास हो गया था; लेकिन दुनिया की हालत बदली और परिस्थिति ऐसी है कि पूंजीवादी प्रणाली से निर्मित वर्गयुद्ध को टालकर अपनी राष्ट्रीयता तथा अपना लोकतन्त्र कायम रखने के लिए अंग्रेजों को भारत से सबक लेना जरूरी महसूस होने लगा है । बढ़ते हुए राष्ट्रीय भावों में दरार पैदा करके प्रान्तीय स्वायत्तता के नाम पर भारत को अनेक टुकड़ों में बांट देने की अंग्रेज शासकों की ख्वाहिश थी । संयुक्त राज्य की स्थापना के नाम पर यहां के लोकतन्त्र को पूंजीवादियों तथा सरमायादारों की सहायता से परास्त करने की साजिशें गोलप्रांतीय स्वायत्तता और द्विराष्ट्रवाद मेज परिषद् के नाम पर अंग्रेजों ने कीं । लेकिन करीब सभी प्रान्तों में की इस चाल को प्रान्तीय स्वायत्तता के आधार पर कांग्रेस ने बेकार बना दिया और सच्चे लोकतन्त्र के लिए आवश्यक अहिंसक वायुमंडल देश में पैदा किया, जिससे प्रान्तीय स्वायत्तता के काल में भी निःशस्त्र क्रान्ति की ताकत बढ़ती ही गई । इस तरह लोकशाही, राष्ट्रीयता और दोनों की पुष्टि तथा परिणति के लिए आवश्यक अनत्याचारी अहिंसात्मक क्रान्तिवाद पूरे देश में फैलने लगा । क्रान्तिवाद की ये लहरें ब्रिटिश हुकूमत की सीमाओं को लांघकर देश रियासतों में भी फैल रही थीं । लोकतन्त्रात्मक भारतीय गणराज्य का निर्माण, गोलमेज परिषद् के वक्त अंग्रेजों ने जो कुटिल कार्रवाइयां कीं, उनसे नहीं, बल्कि उनको परास्त करने के लिए जो सत्याग्रही क्रान्ति-शक्ति उदित हुई, उसके कारण हुआ है। एक हज़ार नौ सौ सैंतीस से एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस तक की घटनाएं बड़ी महत्व की हैं। ब्रिटिश पार्लामेंट ने एक हज़ार नौ सौ पैंतीस में हिन्दुस्तान में संयुक्त राज्य स्थापन करने का एक कानून बनाया था । उस कानून के अनुसार एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में प्रान्तीय स्वायत्तता की प्रस्थापना हुई। इसके बाद दो-ढाई सालों में संयुक्त राज्य पद्धति की केन्द्रीय सरकार बनाने का भी ब्रिटेन का विचार था । एक हज़ार नौ सौ पैंतीस का संयुक्त राज्य का कानून राष्ट्रीय नेताओं को मंजूर नहीं था । उस कानून को ठुकराकर ब्रिटिश साम्राज्य के पंजों से पूरी तरह मुक्त होकर, लोकतन्त्र तथा स्वयं निर्णय के तत्वों के अनुसार अपना विधान खुद बनाने का कार्य निःशस्त्र क्रान्ति के मार्ग से सम्पन्न करने का कांग्रेस ने निश्चय कर लिया था । कांग्रेस की इस नीति के पीछे पूरा देश खड़ा होने का सबूत, प्रान्तीय चुनावों में कांग्रेस की जो शानदार जीत हुई, उससे ब्रिटिशों को तथा सारे संसार को मिल चुका था । प्रान्तीय चुनावों के बाद भारत के ग्यारह में से आठ प्रान्तों के शासन की बागडोर कांग्रेस के प्रतिनिधियों के प्रतिनिधियों के हाथ में आ गई । पंजाब, बंगाल तथा सिन्ध ये ही ऐसे तीन प्रांत थे, जहां कांग्रेस के मन्त्रिमंडल नहीं बन सके; लेकिन कांग्रेस को विश्वास था कि निकट भविष्य में ये तीन प्रान्त भी उसके प्रतिनिधियों के शासनाधिकार के नीचे आ जायंगे । भारत के सभी प्रान्तों के शासनाधिकार प्राप्त करके पूर्ण स्वाधीनता, स्वयंनिर्णय तथा अपना शासन-विधान बनानेवाली परिषद प्राप्त करने के लिए एकाध सत्याग्रही आन्दोलन के बाद कांग्रेस सफल होगी, ऐसी आशा लोगों के दिलों में जगाने में कांग्रेस के नेता सफल हो गये थे । कांग्रेसी नेताओं की सलाह से देशी रियासतों में भी स्थानीय प्रजापरिषदों के मातहत ऐसे प्रान्दोलन शुरू हो गये थे कि जिनसे रियासती प्रजा में भी लोकतन्त्र की आशाएं पनपने लगी थीं । स्वातन्त्र्य की इस लगन से तथा निःशस्त्र प्रतिकार की भावना से कांग्रेस को आज नहीं तो कल सफलता मिलेगी, इसके बारे में दूरदर्शी ब्रिटिश राजनीतिज्ञों को भी निश्चय हो गया था । स्वातन्त्र्य और स्वयं निर्णय के लिए अगर भारत में खुला विद्रोह हुआ तो उसको कुचलने के लिए देशी रियासतें तथा फिरकापरस्त अल्पसंख्यक जमातों की सहायता प्राप्त करने की पूरी कोशिश इंग्लैंड के प्रतिगामी राजनेता कर रहे थे । ऐसे आन्दोलन के दौर में भारत का कुछ हिस्सा साम्राज्य के प्रति वफादार बना रहेगा और उसकी सहायता से ऐसे आन्दोलन को दबाया जा सकेगा, ऐसा ये राजनेता मानते थे । भारतीय राष्ट्रवाद का प्रतिनिधित्व करनेवाली कांग्रेस के हाथ में पूरा हिन्दुस्तान न आ जाय, इसलिए अलग-अलग तरीकों को एक हज़ार छः सौ तीस से ये लोग आजमा रहे थे । देशी रियासतें स्वतन्त्र राज्य हैं, उनपर वहां के नरेशों का पूरा अधिकार है, चाहे तो वे अपनी शर्तों पर भारतीय संघराज्य में शामिल होंगी और अगर ये शर्तें नरेशों को पसन्द न हों तो वे अपनी रियासतों को स्वतन्त्र रख सकेंगे या ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन रहने की उन्हें स्वतन्त्रता होगी, ऐसे आश्वासन देकर उनको भड़काने का रवैया एक हज़ार नौ सौ तीस के पहले से प्रतिगामी ब्रिटिश राजनेता अख्तियार कर रहे थे । इस तरह का फूट का दूसरा एक विचार पाकिस्तान के नाम से भारतीय राजनीति में एक हज़ार नौ सौ तीस से आगे बढ़ रहा था । जिन प्रांतों में मुसलमान बहुसंख्यक हों, उनका शाही हुकूमत से हमेशा वफादार बनने की इच्छा रखनेवाला, एक स्वतंत्र राज्य बनाने की बात सोची जा रही थी । हिन्दुस्तान एक राष्ट्र न होकर उसमें हिन्दू और मुसलमान ऐसे दो राष्ट्र हैं, यह भावना जो कि द्विराष्ट्रवाद के नाम से पहचानी जाती है, कुछ लोगों में जगाने के प्रयास किये जा रहे थे । देशी नरेशों को स्वतंत्र रहने के अधिकार बख्शप्रान्तीय स्वायत्तता और द्विराष्ट्रवाद कर और मुसलमानों में पृथक् राष्ट्रीयता की भावना पैदा करके, उनको अपने प्रति वफादार बनाकर, अंतिम लड़ाई में भारतीय राष्ट्रीयता को परास्त करने के स्वाब ये प्रतिगामी ब्रिटिश राजनेता देखा करते थे । प्रांतीय चुनावों को जीतकर आठ प्रांतों के शासन-सूत्र जब कांग्रेस ने हथिया लिये तो ब्रिटिश कूटनीतिज्ञों की चालों की रफ्तार तेज होती गई। एक तरफ ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ अंतिम लड़ाई छेड़ने के लिए कांग्रेस के झंडे के नीचे संगठित पुरोगामी शक्ति उतावली हो रही थी तो दूसरी तरफ देशी नरेशों के अधिकार और मुसलमानों की पृथक् राष्ट्रीयता की भावना की दुहाई देकर अपने साम्राज्य की नींव मजबूत बनाने की जी-तोड़ कोशिश ये राजनीतिज्ञ कर रहे थे । अन्त में पंद्रह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस के दिन ब्रिटिशों के पंजों से पूरा हिन्दुस्तान मुक्त हो गया। भारत के सभी प्रांतों और देशी रियासतों से अंग्रेजों ने अपना शासन उठा लिया; लेकिन विदाई के वक्त अपने हाथों में संचित सत्ता को अंग्रेजों ने दो हिस्सों में बांटकर एक हिस्सा कांग्रेस के हवाले कर दिया और दूसरा हिस्सा अपने वफादार दोस्त मुस्लिम लीग को बख्श दिया। अपना शासन यहां से उठाते हुए अंग्रेजों ने एलान कर दिया कि पंजाब तथा बंगाल के मुस्लिम प्रधान हिस्से, सरहद प्रांत, सिंध तथा प्रासाम का कुछ हिस्सा मिलाकर पाकिस्तान के नाम से एक स्वतंत्र राज्य बनेगा और बचे हुए हिन्दुस्तान में भारत नाम का दूसरा राज्य प्रस्थापित होगा । ये दोनों राज्य संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न होंगे और अपनी इच्छा के अनुसार ब्रिटिश साम्राज्य से सम्बन्ध रख सकेंगे । अपनी इच्छा के अनुसार देशी रियासतें इन दोनों में से किसी एक राज्य में शामिल हो सकेंगी । ब्रिटेन का न उनपर कोई अधिकार रहेगा और न ब्रिटेन कोई उत्तरदायित्व ही सम्हालेगा । इसका अर्थ यह हगिज नहीं है कि यहां के नरेशों को आज़ादी बख्शकर और हिन्दुस्तान व पाकिस्तान नाम के दो राष्ट्र बनाकर अंग्रेज खुशीखुशी यहां से विदा होने की बात पहले से सोच रहे थे । वे यह सिद्ध करने की कोशिश कर रहे थे कि अगर अंग्रेज यहां से अपना शासन उठा लेंगे तो देश में अनेक छोटे-छोटे राज्य पैदा होंगे जो हमेशा आपस में लड़ते-झगड़ते रहेंगे। अगर यह भावना लोगों में जड़ें जमा सकी तो अपना शासन और मजबूत बनता जायगा, ऐसा उनको लगता था । अपने शांसन के पक्ष में समर्थन प्राप्त करने की उनकी यह चाल थी । इन कूटनीतिज्ञों को लगता था कि अगर कांग्रेस की पैदा की हुई एकराष्ट्रीयता की भावना में दरारें पैदा करने में सफलता मिल सकी तो यहां से अपना शासन उठाने की नौबत ही न आयगी । कम-ने-कम भारत को अपने अधीन रखने की अवधि बढ़ाने के लिए इससे एक कारगर बहाना मिल जायगा, ऐसी कल्पना थी, जो बहुत समय तक न टिक सकी । पहले प्रांतीय चुनावों के बाद केवल दस वर्षों में भारत के कोने-कोने से अंग्रेजों को अपना शासन हटाना पड़ा । आज यद्यपि देश में भारत और पाकि स्तान के नाम से दो नाम से दो राज्य निर्माण हुए हैं, फिर भी सभी रियासतें किसी-नकिसी राज्य में शामिल हो चुकी हैं और बहुतेरी भारत में शामिल हो गई हैं। पाकिस्तान का पहला मसविदा बनानेवालों ने सोचा था कि कश्मीर पाकिस्तान का एक अहम हिस्सा बनेगा। लेकिन फिलहाल वह एक मर्यादा में भारत के साथ जुड़ गया है और पाकिस्तान का हिस्सा बनने की कोई उम्मीद नहीं हैं। अपने भविष्य का निर्णय में कश्मीर को खुद ही करना है, इस सिद्धान्त को भारत तथा पाकिस्तान ने कबूल किया है । निजाम की रियासत को अंग्रेजी साम्राज्य का आखिरी सहारा माना जाता था, वह भी आज भारत में शामिल हो चुकी है। देशी रियासतों व फिकापरस्त जमातों को स्वयं निर्णय और स्वातंत्र्य के नाम पर खास रियायतें देकर अपने साथ रखने की अंग्रेजों की चाल ग्राज बड़े पैमाने पर बेकार साबित हो चुकी है । जागतिक राजनीति की दृष्टि से भी भारत की आजादी एक महान क्रांतिकारी घटना है। भारत आज संसार के अन्य मामी राष्ट्रों की बराबरी का स्थान पा चुका है। इस क्रांतिकारी घटना का श्रेय भारतीय कांग्रेस व उसके नेताओं के साथ-ही-साथ पुरोगामी विचार के अंग्रेज राजनीतिज्ञों को भी दिया जाना चाहिए । यह जाहिर है कि पूरे हिन्दुस्तान का एक लोकतंत्रात्मक राज्य बनाने का मकसद पूरा नहीं हो पाया है। हिन्दूस्तान के हिन्दु मुसलमानों की पिछड़ी सभ्यता, धर्म, राष्ट्र तथा राज्य के बारे में उनके मध्ययुगीन परंपरागत विचार, लोकतन्त्र तथा राष्ट्रीयता से बेमेल आचार-विचार और फिरकापती श्रादि दुर्गुणों को परास्त करने में हमारे नेताओं को पूरी सफलता नहीं मिली, यह कबूल करना चाहिए। उन्हें दो मोर्चों पर एक ही साथ लड़ना था । एक तरफ निःशस्त्र जनता को साथ में लेकर प्रबल अंग्रेजी शासन से मुकाबला करना था, तो दूसरी तरफ परंपरागत प्रतिगामी विचारों का सामना करना था । ये दोनों शक्तियां एक-दूसरे की सहायता करनेवाली थीं । शासन की बागडोर हाथ में लेकर देश में एकता पैदा करना एक तरह से आसान है; लेकिन हाथ में किसी प्रकार की सत्ता न होने पर और शासक जब एकता की भावना को मिटाने की ताक में हर पल तैयार थे तब, अज्ञानी व दरिद्री जनता में एकराष्ट्रीयत्व की भावना जगाकर, जातीयता तथा धर्म-भेद के भाव मिटाकर अपने अधिकारों के खातिर विदेशी सल्तनत से लड़ने के लिए लोगों को तैयार करना बड़ा मुश्किल था। भारतीय नेताओं की दीर्घ तपस्या का फल है कि कम-से-कम हम सब अंग्रेजों के पंजों से तो छूट सके हैं। एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में जब प्रान्तीय स्वायत्तता मिली तब पाकिस्तान का सवाल इतने विकराल रूप में सामने नहीं था । लेकिन उसके बाद दो ही चार सालों में इस कल्पना ने इतना ज़ोर पकड़ा कि आखिर हारकर हमारे नेताओं को अपनी स्वतन्त्रता के साथ-ही-साथ पाकिस्तान को भी कबूल करना पड़ा । इसके कारणों की छानबीन करना लाभदायक होगा । पाकिस्तान की कल्पना पहले-पहल एक हज़ार नौ सौ तीस में लोगों के सामने आई। उस साल डॉशून्य मुहम्मद इकबाल की सदारत में मुस्लिम लीग का सालाना जलसा इलाहाबाद में हो रहा था। अपनी तकरीर में पंजाब, सूबा सरहद, सिन्ध तथा बिलोचिस्तान को मिलाकर एक स्वतन्त्र राज्य बनाने की मांग उन्होंने की । हिन्दुस्तान के उत्तर-पश्चिम में मुसलमानों का एक राज्य, हिन्दी संघ- राज्य से मिलाजुला, बनाने की वह मांग है, ऐसा तब माना गया । आज के पूर्व पाकिस्तान के प्रदेश का इस भाषण में बिल्कुल जिक्र नहीं है । एक हज़ार छः सौ तैंतीस में तीसरी गोलमेज-परिषद के अवसर पर केम्ब्रिज विद्यापीठ के कुछ विद्यार्थियों ने पाकिस्तान की कल्पना लोगों के सामने फिर रखी। पंजाब, सरहदी सूबा, काश्मीर, सिन्धु तथा बिलोचिस्तान को मिलाकर पाकिस्तान नाम का स्वतंत्र राष्ट्र बनाने की कल्पना उसमें थी । लेकिन उस वक्त दिमागी ऐयाशी मानदो सौ बीस कर उसको किसीने ज्यादा महत्व नहीं दिया । एक हज़ार नौ सौ तैंतीस के अगस्त में मुस्लिम लीग का एक प्रतिनिधि मण्डल, पालमेंट की ज्वाइंट सिलेक्ट कमेटी के सामने बयान देने के लिए इंग्लैंड गया हुआ था। इस मण्डल को उकसाने के लिए शायद, उसके नेता से पूछा गया, "कुछ प्रान्तों को मिलाकर पाकिस्तान के नाम से उनका एक स्वतन्त्र राज्य बनाने की क्या कोई योजना बनाई गई है ?" इसपर लीगी नुमाइन्दों ने कहा, "जहांतक हम जानते हैं वह केवल कुछ ही विद्यार्थियों को सूझ है । वह ख्याली पुलाव पकाना है, ऐसा हम मानते हैं ।" इससे पता चलता है कि तीन करोड़ मुसलमानों के प्रतिनिधि भी उस वक्त पाकिस्तान के भारे में कैसे विचार रखते थे। लेकिन इसके पांच ही साल बाद देखा गया कि मुस्लिम लीग की सियासत बड़ी तेजी के साथ पाकिस्तान की कल्पना से प्रभावित हो गई । जिन्नासाहब जैसे लोग, जो पहले कांग्रेस के नेता माने जाते थे, पाकिस्तान के नारे बुलन्द करने लगे। जातिधर्म-भेदातीत राष्ट्रीय भावना तथा लोकतंत्र - ये दो ध्येय भारतीय जनता के सामने अंग्रेजों की सल्तनत यहां कायम होने के पहले थे ही नहीं । ये विचार वहां की जनता में फैलाने का काम, उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में, राजा राममोहन राय जैसे धर्म व समाज के सुधारकों ने शुरू किया । अंग्रेजी लिखे-पढ़े लोगों में इस आन्दोलन ने जड़ें पकड़ लीं और इसीके फलस्वरूप एक हज़ार आठ सौ पचासी में कांग्रेस की स्थापना हुई । इस संस्था में हिन्दुस्तान के विभिन्न धर्म तथा जातियों के लोग शामिल हो जायं और आधुनिक राष्ट्रीयता के ध्येय के अनुरूप जाति-धर्म-भेदातीत लोकतन्त्रात्मक राजनीति को अपने देश में चलायें, यही कांग्रेस के संस्थापकों का ध्येय था । देश में उस वक्त जो उदारमतवादी अंग्रेज थे और इने-गिने अंग्रेजी पढ़ेलिखे थे, उन्होंने इस नये आन्दोलन को बढ़ावा दिया। अंग्रेजी पढ़ाई से पहले मुसलमान कुछ हिचकिचाते थे, जिससे अंग्रेजी शिक्षा में वे पिछड़ गये और नये विचारों के सम्पर्क से अछूते रह गये । फिर भी धीरे-धीरे शिक्षित मुसलमान कांग्रेस के आन्दोलन की ओर आकर्षित हो रहे थे और उनकी संख्या भी बढ़ रही । कांग्रेस का तीसरा अधिवेशन एक मुसलमान नेता न्या बद्द्दीन तय्यबजी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ था। आगे चलकर कांग्रेस आम जनता की संस्था बनने लगी । इसके फलस्वरूप एक हज़ार आठ सौ बासठ में पालमिंट ने एक कानून बनाकर धारासभाओं में अप्रत्यक्ष चुनावों से कुछ लोक-प्रतिनिधि चुने जाने का प्रबन्ध किया । हिन्दुस्तान में बढ़ती राष्ट्रीय भावना तथा लोकतन्त्रात्मक राजनीति अंग्रेज शासकों को बहुत ही प्रखरती थी। उसको रोकने के लिए सर सय्यद अहमद जैसे मुसलमान नेताओं को फुसलाना उन्होंने शुरू कर दिया। राष्ट्रीय आन्दोलन केवल हिन्दुओं का है और अगर वह सफल हुआ तो देश में हिंदुओं का राज होगा और मुसलमानों की तहजीब मटियामेट हो जायगी, ऐसी दलीलें मुसलमानों के सामने रखी जाने लगीं। उनका असर मुसलमान नेताओं पर होने लगा। इसके थोड़े समय बाद बम्बई, पूना जैसे स्थानों में हिन्दूमुसलमानों में दंगे हुए । श्रागे तो यह एक सिलसिला ही बन गया कि जब कभी देश में अंग्रेजों के खिलाफ जोरों का आन्दोलन फूट निकलता तब फौरन ही ऐसे दंगे जगह-जगह छिड़ जाते । एक हज़ार नौ सौ पाँच में जब बंग-भंग के खिलाफ स्वदेशी तथा बहिष्कार का आन्दोलन शुरू हुआ तब बंगाल में ऐसी वारदातें हुई। मुसलमानों को राष्ट्रीय श्रान्दोलन से अलग करने के लिए यहां के प्रतिगामी अंग्रेज अफसर इस तरह की तरकीबें खोज निकालते थे । लेकिन इतने से मुसलमानों की पृथक् राष्ट्रीयत्व की भावना ठोस न बन सकी। एक हज़ार नौ सौ छः में मोर्ले-मिण्टो सुधारों का एलान किया गया। उसके अनुसार मुसलमानों के लिए पृथक् निर्वाचन अधिकार दिये गए । इससे पृथक् राष्ट्रीयता की भावना को कानून का सहारा मिल गया और वह ज़ोर पकड़ने लगी । एक हज़ार नौ सौ सोलह में लखनऊ में कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग के नेताओं के बीच एक समझौता हुआ और पहले महायुद्ध के बाद स्वराज्य के जिन आधिकारों की मांग कांग्रेस कर रही थी, उनको मुसलमानों की अनुमति भी प्राप्त हुई। ऐसा समझौता कराने में लोकमान्य तिलक तथा जिन्नासाहब ये दो कांग्रेसी नेता प्रमुख थे । इस समझौते में मुसलमानों का पृथक् निर्वाचन का अधिकार मंजूर कर लिया गया। पहले युद्ध के बाद मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों का एलान किया गया, जिसमें साफ तौर से बताया गया था कि पृथक् निर्वा चन का तत्व एक राष्ट्रीयत्व तथा लोकतन्त्र के विकास में बाधा पहुंचानेवाला है । फिर भी मुस्लिम लीग तथा कांग्रेस के समझौते का हवाला देकर उसको नये सुधारों में जोड़ दिया गया; लेकिन समझौते में जिस राजनीतिक सत्ता की मांग दोनों ने मिलकर की थी, उसको मंजूर नहीं किया गया । मुसलमानों को दिये गए पृथक् निर्वाचन अधिकार से होनेवाले परिणामों का अन्दाजा एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में प्रान्तीय स्वायत्तता की स्थापना होने तक कोई न लगा सका । पृथक् निर्वाचन का अधिकार अगर मुसलमानों को न दिया जाता तो फिरकापरस्त राजनीति की आग इतनी भभक न उठती । एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में जिन आठ प्रान्तों में कांग्रेस ने शासनाधिकार हाथ में लिये, उनमें से सात प्रान्तों में मन्त्रिमंडलों में मुसलमान मंत्री लिये गये थे; लेकिन वे सब कांग्रेसी थे । मन्त्रिमंडल के सदस्य सामुदायिक रूप में धारासभा से उत्तरदायी होते हैं, अतः उनकी सफलता की दृष्टि से एकपक्षीय मन्त्रिमंडल सुविधाजनक साबित होता है । जब धारासभा में किसी भी एक दल को निर्विवाद बहुमत प्राप्त नहीं होता, तभी दो या अधिक दलों को मिलकर मन्त्रिमंडल बनाना पड़ता है । लेकिन ऐसे संयुक्त मन्त्रिमंडल अपना कारोबार एक ही ध्येय से चलाने में सफल नहीं हो पाते । कांग्रेस ने शासन की बागडोर सम्हाली तब उसको बहुत बड़ा बहुमत प्राप्त था, अतः दूसरे पक्षों से समझौता करने की कोई जरूरत नहीं थी । उसने अपने ही बल पर मन्त्रिमंडल बनाये थे । उस वक्त राज्य में गवर्नर तथा उसके मातहत काम करनेवाले अधिकारी कांग्रेस-मन्त्रिमंडलों के कारोबार में रोड़े अटकाने की फिक्र में सदा रहते थे । उससे एक तरफ मन्त्रिमंडलों को लड़ना था तो दूसरी तरफ केन्द्रीय शासनाधिकार पाने के लिए आन्दोलन की तैयारी करनी थी । ऐसी अवस्था में, जिन दलों की आनेवाले आन्दोलनों में साथ देने की संभावना नहीं थी, ऐसे दलों के लोगों को अपने मन्त्रिमण्डलों में लेकर उनकी दलगत राजनीति को अवसर देने के लिए कांग्रेस के क्रान्तिकारी नेता कभी तैयार नहीं हो सकते थे। लेकिन अल्पसंख्यक मुसलमान जमात पर वे अन्याय भी नहीं करना चाहते थे, इसीलिए मन्त्रिमंडलों में एक-एक मुसलमान मंत्री भी ले लिया गया था । मुस्लिम लीग के प्रतिनिधियों से ही मुसलमान मंत्री ले लिया जाय, ऐसा मुस्लिम लीग का आग्रह था, जिससे कांग्रेस सहमत न थी । मुसलमानों के लिए सुरक्षित बहुसंख्यक सीटों पर मुस्लिम लीगी प्रतिनिधियों ने अनेक प्रांतों में कब्जा कर लिया था, फिर भी उनको मंत्रिमंडलों में स्थान न मिला, जिससे लीगी नेता कांग्रेस से चिढ़ गये और उसके खिलाफ बेबुनियाद इल्जाम लगाने लगे। कांग्रेस मुसलमानों को व इस्लाम धर्म तथा संस्कृति को दबाकर हिन्दू राज्य की प्रस्थापना करना चाहती है, ऐसा प्रचार उन्होंने शुरू किया । अंग्रेज गवर्नर चाहते थे कि सत्ता हथियाकर जिस क्रांतिकारी आंदोलन की कांग्रेस तैयारी करना चाहती है, उसमें मुसलमान न मिलें और उस वक्त अंग्रेजों का साथ दें । कांग्रेस मुस्लिम लीग के मंत्रियों को लेकर अपने हाथ कमजोर बनाती तो वे खुश हो जाते । कांग्रेस मुस्लिम लीगियों को मंत्रिमंडल में न लेना उनको अखरा तो जरूर; लेकिन वैधानिक दृष्टि से बेचारे लाचार थे, कुछ नहीं कर सकते थे । अल्पसंख्यकों के हितरक्षा की जिम्मेदारी गवर्नरों पर थी और उसके लिए अपने खास अधिकारों का वे उपयोग भी कर सकते थे; लेकिन लीगी प्रतिनिधियों को मंत्रिमण्डल में लेने के लिए वे कांग्रेस को मजबूर नहीं कर सकते थे । मुस्लिम लीगियों को मंत्रिमंडल में न लेना अल्पसंख्यकों पर जुल्म डाना है, ऐसी बकवास कोई नहीं कर सकता था, क्योंकि अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधि के रूप में कांग्रेसी मुसलमान मंत्रिमण्डलों में थे ही । कांग्रेसी मंत्रिमण्डलों ने अल्पसंख्यक जमातों पर कोई जुल्म किया होता तो गवर्नर अपने खास अधिकारों का जरूर प्रयोग करते, चुप न बैठे रहते । कांग्रेसी नेताओं ने यह मंजूर किया था कि अल्पसंख्यकों पर किसी तरह का जुल्म होने पर अगर मंत्रिमण्डलों के काम में गवर्नर दखल देगा तो कांग्रेस उसका प्रतिवाद नहीं करेगी। इसलिए जबतक वास्तव में अल्पसंख्यकों के साथ कोई अन्याय न होता तवतक, लीगियों के नारां के बावजूद भी गवर्नर मंत्रिमण्डलों के काम में दखल नहीं दे सकते थे । कांग्रेस ने धर्मभेदातीत राष्ट्रीय वृत्ति से व लोकतंत्रात्मक ढंग से शासन यंत्र चलाया । इसका यह सबूत था कि लीगियों के नारों के बावजूद हिन्दुस्तान में कहीं भी गवर्नर ने कांग्रेसी मंत्रिमण्डलों के कारोबार में ज़रा भी दखल न दिया। महायुद्ध शुरू होने पर अपने तत्व की रक्षा के लिए जब कांग्रेस के मंत्रिमण्डलों ने इस्तीफे दे दिये, तब मुस्लिम लीग ने मुक्ति दिन मनाया और कांग्रेस के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। उस वक्त कांग्रेस ने चुनौती दी कि अगर कांग्रेस के शासन के खिलाफ किसीको शिकायत हो तो ब्रिटिश गवर्नरों को चाहिए कि वह सबूत देकर उसकी ताईद करें । कांग्रेस की इस चुनौती को किसीने स्वीकार नहीं किया । हिन्दू राज्य की स्थापना करके इस्लामी तहजीब को दबाने की कोशिश करने के जो इल्जाम कांग्रेस पर लगाये गए थे वह कभी भी सिद्ध नहीं हुए । पृथक् निर्वाचन अधिकार मुसलमानों को मिल जाने के कारण उनको चुनाव जीतने के लिए अन्य जाति के मतदाताओं के मतों का सहानुभूति की कोई प्रावश्यकता ही न रही । इससे हिन्दू-मुसलमान आदि भेदों को न माननेवाले राष्ट्रीय मुसलमानों के लिए मुस्लिम निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीतना दुश्वार हो गया। साथ ही साथ ब्रिटिश हाकिम और सरकारी बर्ताव हमेशा राष्ट्रीय मुसलमानों के खिलाफ ही रहा । आधुनिक शिक्षा के सम्पर्क से मुसलमान अछूते रहे और धर्मनिष्ठा तथा राजनीति को एक रूप समझने की मध्ययुगीन प्रवृत्ति उनमें वैसी ही कायम रही । हिन्दू समाज में अलग-अलग जमातें होने से उसकी धर्मनिष्ठा राष्ट्रीयता के विकास में काम देने की क्षमता नहीं रखती थी । साथ-ही-साथ हिन्दू राष्ट्रीय नेताओं ने जातिधर्म-भेदातीत आधुनिक राष्ट्रीय वृत्ति अपने समाज में फैलाने की जानबूझकर काफी कोशिश की, वैसी कोशिश मुसलमान नेताओं ने नहीं की । हिन्दू समाज में जिस तरह के सुधार आंदोलन हुए वैसे मुसलमानों में नहीं हुए। मुसलमानों में जागृति लाने का काम आमतौर पर ऐसे नेताओं ने किया, जो अपनेको अल्पसंख्यक जमात मानते थे और डरते थे कि हिन्दुओं के आक्रमण से शायद इस्लाम को हानि पहुंचे ! कुछ लोग ऐसे थे जो पुरानी मुसलमानी बादशाहत की डींग हांकते थे । इसके फलस्वरूप मुसलमानों में धर्म-भेदातीत राष्ट्रीय वृत्ति न फैल सकी। पृथक् - निर्वाचनअधिकार मिलने से यह फूट का पौधा दिन दूना रात चौगुना बढ़ने लगा । जिन प्रांतों में मुसलमान अल्पसंख्यक थे वहां की धारासभाओं में यद्यपि मुस्लिमों के लिए सुरक्षित करीब सभी जगहों पर लीग के प्रतिनिधि चुन आते थे, फिर भी मुस्लिम लीगियों की संख्या धारासभाओं में हमेशा अल्प ही रही । सिर्फ सिन्ध और सरहद प्रांत ये ही ऐसे दो सूबे थे कि जहां मुसलमानों की संख्या अन्य जमातों से ज्यादा थी और जहां की धारासभामों में मुसलमान प्रतिनिधि बहुमत में थे। लेकिन सरहद प्रांत के चुनावों में कांग्रेसी मुसलमान बहुसंख्या में चुनाव जीत सके थे और वहां कांग्रेस का मंत्रिमंडल बन गया था । सिन्ध प्रांत में अल्लाबक्ष के नेतृत्व में अपने अनुकूल मंत्रिमण्डल बनाने में कांग्रेस सफल हो गई थी। पंजाब तथा बंगाल में हिन्दूमुसलमान प्रतिनिधियों की संख्या करीब-करीब समान थी और वहां मुसलमान पक्षों के हाथों में सत्ता होने पर भी मुस्लिम लीग को सत्ता नहीं मिल सकी थी । इस तरह सारे देश के एक प्रांत में भी मुस्लिम लीग मंत्रिमंडल नहीं बन सका था । पृथक् निर्वाचन अधिकार और मुसलमानों की पृथक् राष्ट्र-भावना पर ही मुस्लिम लीग का आधार ऐसे फिरकापरस्त राजनैतिक दल को लोकतंत्रात्मक तरीकों से किसी सूबे में अपने दल का मंत्रिमण्डल बनाना असम्भव था । प्रांतीय स्वायत्तता के आधार पर बने मंत्रिमंडल कायम होते ही, मुसलमान नेताओं को चाहिए था कि वे अपने फिरकापरस्त दल को तोड़कर तत्त्वनिष्ठ राजनैतिक दल को कायम करते । इसके बगैर किसी भी प्रांत में अपनी खुद की ताकत पर मंत्रिमंडल कायम करना उनके लिए असम्भव था। लेकिन यह सबक सीखने के बजाय अपनी फिरकापरस्त राजनीति को जारी रखने के लिए अंग्रेजों की सहायता से हिन्दुस्तान को दो टुकड़ों में बांटकर एक टुकड़ा मुसलमानों के लिए अलग से प्राप्त करने का मक़सद उन्होंने अपने सामने रखा । भारत में हिन्दू तथा मुसलमान धर्मों को माननेवालों की तादाद यद्यपि ज्यादा है, फिर भी अल्पधर्मावलम्बी काफी लोग यहां बसे हुए हैं। हिन्दुस्तान का कोई हिस्सा ऐसा नहीं है जहां केवल हिन्दुओं या केवल मुसलमानों की बस्ती हो । इसलिए इस देश के दो विभाग किसी भी तरह से क्यों न किये जायं, दोनों विभागों में कमोबेश मात्रा में दोनों धर्म के लोग रहेंगे ही । ऐसी हालत में दोनों राज्यों के सामने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा तथा वह उनको अपना मालूम हो, ऐसी परिस्थिति पैदा करने का सवाल खड़ा होने ही वाला था। इस दृष्टि से देखने पर यह बात साफ हो जाती है कि हिन्दू और मुसलमानों के अलग-अलग राष्ट्र मानने से देश की कोई भी समस्या हल नहीं हो सकती थी । विवेकपूर्वक स्वीकृत की हुई अपनी धर्म-भेदातीत राष्ट्रीयता की भावना को आखिर तक कांग्रेस ने प्रज्वलित रखा और अंग्रेजी प्रभुत्व के स्थान पर भारतीय जनता के प्रभुत्व को स्थापित किया। अपने इस अखिल भारतीय धर्म-भेदातीत संगठन के आधार पर भारत की विधान परिषद को सफल बनाकर इस दल ने देश में लोकतंत्रात्मक गणराज्य की स्थापना की। मुस्लिम लीग से समझौता करने के मोह से कांग्रेस ने अपने को बचाया और भविष्य की इन गौरवशाली घटनाओं को जन्म देने की क्षमता उसने पाली । मुस्लिम लीग के अविवेकी प्रचार से अभिभूत होकर हिन्दू राष्ट्रवाद को स्वीकार करने के मोह से भी वह अपने को बचा सकी; क्योंकि हिन्दू और मुसलमानों का अलग-अलग राष्ट्र माननेवाला सिद्धांत उसको झूठा लगता था । हिन्दू-मुसलमानादि सब धर्मों का एक राष्ट्र स्थापित करने से ही भारत का भविष्य उज्ज्वल होगा और आधुनिक सुसंस्कृत राष्ट्र के नाते वह प्रतिष्ठित हो सकेगा, यह निष्ठा आधुनिक भारत के भावी की ठोस नींव है । श्राज भले ही भारत और पाकिस्तान ये दो राष्ट्र इस देश में बन गये हों; लेकिन अपनी राष्ट्रीयता का यह अधिष्ठान भारत ने क़ायम रखा है। अपनी धर्मविशिष्ट राष्ट्रीयता को आज या कल पाकिस्तान को त्यागना पड़ेगा; क्योंकि उसके बग़ैर आधुनिक संसार में सुसंस्कृत तथा पुरोगामी राष्ट्रों में उसकी गणना नहीं हो सकेगी, न वहां की मुसलमान जनता का भला होगा । हिन्दुस्तान में अलग-अलग धर्मानुयायी व अलग-अलग भाषा-भाषी लोग सदियों से एक साथ बसे हुए हैं, जिससे धर्म-भेदातीत राजनीति भी पुराने काल से यहां चली आई है। ध्यान में रखना चाहिए कि ऐसी अनेकानेक भाषाएं बोलनेवाले तथा विभिन्न धर्म के लोगों का सैकड़ों-हजारों सालों का इतिहास घनघोर लड़ाइयों का इतिहास नहीं है, न अलग-अलग राजाओं ने एक-दूसरे के खिलाफ जो षड्यंत्र किये, उनका इतिहास है । इतिहास का इस तरह संकुचित अर्थ नहीं लेना चाहिए । सदियों से हिन्दू-मुसलमान परिवार यहां के देहातों में पड़ौसियों की तरह रहे हैं। यहां का इतिहास देहातों में फैले इन हजारों-लाखों परिवारों के दैनंदिन आपसी व्यवहारों से बना है। जब हम इस व्यापक दृष्टि से इतिहास का आकलन करेंगे तब पता चलेगा कि इस प्रचंड राष्ट्र में जो धर्म - भावना फैली है, उसको सर्वसंग्राहक तथा सर्व सहिष्णु प्रेम-भावना का रूप मिल चुका है। इस देश में जो संत-महात्मा पैदा हुए, उन सबने धर्म की विविधता में एकत्व देखने का संदेश अपने के चारित्र्य उज्ज्वल उदाहरण से जनता के हृदय पर अंकित कर रखा है। यहां जो धार्मिक तथा आध्यात्मिक दर्शन-निर्माण हुआ, वह सब तरह के विचार स्वातंत्र्य को अवकाश देता है । साथ-ही-साथ शुद्ध तत्वनिष्ठा से सत्यसंशोधन करनेवालों ने जो भी तत्त्वज्ञान खोज निकाले, उनके हरेक के बारे में समुचित आदर रखकर, उसमें जो सत्यांश हो, उसको अपनाने का उपदेश वह देता है । जीवन का सत्य किसी एक वैचारिक सिद्धांत या संप्रदाय में समाया हुआ नहीं होता, यह वृत्ति यहां के निवासियों में दार्घकालीन इतिहास से जड़ें जमा चुकी है। यही वजह है कि आधुनिक भारत में जो राष्ट्रीयत्व पैदा हुआ, वह किसी संकुचित धर्माभिमान, भाषाभिमान या इतिहास की कल्पना पर अपना आधार नहीं रखता। विशिष्ट धर्म या विशिष्ट भाषा सबसे श्रेष्ठ और परमेश्वर को अधिक प्रिय है, या उसका स्वीकार किये बगैर मानव अपने जीवन को कभी सफल बना नहीं सकेगा या मुक्ति या आत्मिक शान्ति के लिए किसी विशिष्ट धर्म या भाषा का स्वीकार करना अनिवार्य है, ऐसे संकुचित धर्म- विचारों का विरोध करनेवाले अनेक संत-महात्मा इस देश में हो चुके हैं। उनके हृदय में जो विश्वात्मक प्रेम-भावना का धर्म था, उसीके आधार पर हमारे नेताओं ने आधुनिक भारत का निर्माण किया है । सहिष्णु तथा सर्वव्यापक मानव-धर्म के या सर्व धर्म समभाव के आधार पर राज चाहनेवाले राज्यकर्ता यहां हो चुके हैं। अशोक, अकबर और शिवाजी-जैसों की राजनीति भारत की आनेवाली पीढ़ियों के लिए सदा पथ-प्रदर्शन का काम करेगी । औरंगजेब जैसे तंगदिल धर्मनिष्ठ की राजनीति को भारत के इतिहास की अनुकरणीय बात नहीं माना जायगा । इतिहास में भली-बुरी बातें भरी रहती हैं; लेकिन उनमें से भली बातें चुनकर उनका अभिमान रखना और बुरी बातों को भूल जाना चाहिए। अपनी स्वतन्त्र बुद्धि से अपने कर्तव्य के बारे में निर्णय करके अपनी परिस्थिति के अनुकूल और आनेवाली पीढ़ियों को प्रेरणा देनेवाला इतिहास बनाना, यही इतिहास के अध्ययन का सही उपयोग है । प्रत्येक पीढ़ी को नये इतिहास का निर्णय करना पड़ता है और बीते ज़माने के श्रेष्ठ पुरुषों के चरित्रों में से स्फूर्ति लेनी पड़ती है । जो गलतियां उनसे हुई, उनको टालकर उनके अच्छे कामों का अनुकरण करना होता है। उनके जो ध्येय अधूरे रहे हों और उस वक्त जो ध्येय उनके दृष्टि-पथ में न हों, ऐसे ध्येयों को अपनाकर उन्हें साकार करने की कोशिश करनी पड़ती है । इसी दृष्टि से पुराने इतिहास की घटनाओं से सबक सीखकर आधुनिक भारत के निर्माताओं ने अपनी राष्ट्रीयता का विकास किया है । कुछ लोग ऐसे हैं, जो एकराष्ट्रीयत्व की दृष्टि रखनेवालों के विचारों से सहमत नहीं हैं । हिन्दू व मुसलमान ये दो अलग-अलग राष्ट्र हैं, ऐसा वे मानते हैं। इनमें से कोई एक जबतक पूरी तरह से हार नहीं जाता तबतक वह झगड़ा मिटना उनको असम्भव सा लगता है। उन्हें अगर एक ही देश में रहना है तो एक की प्रभुता को दूसरा या तो स्वयं मान ले या उसके लिए वह मज़बूर किया जाय, उसके सिवा इन दो धर्मों के लोग यहां एक-दूसरे के साथ नहीं रह सकेंगे, ऐसी द्विराष्ट्रवादियों की दृष्टि है । भेद-दृष्टि से सोचते रहने के कारण हिन्दू तथा मुसलमान धर्म की ओर समान दृष्टि से देखने की वृत्ति उनकी समझ में नहीं आती। मुस्लिम लीग ने जब इस भेद-दृष्टि का पल्ला पकड़ा और द्विराष्ट्रवाद को स्वीकार करके कांग्रेस की नीति पर टीका करने लगी तब उसको कांग्रेस के हरेक कार्यक्रम के पीछे हिन्दुओं का वर्चस्व प्रस्थापित करने का हेतु नज़र आने लगा । ऐसी ही भेद-दृष्टि से जब हिंदू राष्ट्रवादी कांग्रेस के राजनैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों की ओर देखते तब कांग्रेस के हरेक कार्यक्रम में उन्हें मुसलमानों का पक्षपात दिखाई देता । राजनैतिक सत्ता के बंटवारे के लिए द्विराष्ट्रवादियों ने जो झगड़ा उठाया वह धर्म,, भाषा, इतिहास, संस्कृति आदि जीवन के सभी अंगों तक फैल गया। ब्रिटिश शासन को मुस्लिम राष्ट्रवाद के लिए जितना पक्षपात था उतना हिंदू राष्ट्रवादियों के लिए नहीं था, जिससे हिंदू राष्ट्रवाद ज्यादा पनपने नहीं पाया । मुस्लिम राष्ट्रवाद अज्ञानी मुसलमान जनता में बेरोकटोक फैलता रहा। पूरे देश में अगर एक ही राज्य प्रस्थापित होता है तो उसका विधान कैसा ही क्यों न बने और प्रान्तीय राज्यों को तथा अल्पसंख्यक मुसलमानों को कितनी ही सहूलियतें और संरक्षित अधिकार क्यों न दिये जायं, फिर भी केन्द्रीय सरकार का बहुसंख्यक हिंदू समाज के प्रति उत्तरदायी होना अनिप्रान्तीय स्वायत्तता और द्विराष्ट्रवाद वार्य था, और वैसा होना मुसलमानों के लिए हानिकर है, ऐसी भावना उनमें पैदा करना और बढ़ाना आसान था। साथ ही उस समाज के धार्मिक और ऐतिहासिक अहंकार को जगाकर बढ़ावा देना और पाकिस्तान की प्रस्थापना के बगैर आराम न करने का जोश उनमें भड़काना कठिन नहीं था । भेदमूलक वृत्ति को रोकने के प्रयत्न शासकों ने कदापि नहीं किये, उलटे उसको प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से प्रोत्साहन ही दिया। एक हज़ार छः सौ छत्तीस के सितम्बर मास में दूसरा महायुद्ध शुरू हुआ । लार्ड लिनलिथगो उस समय वाइसराय का पद सम्हाल रहे थे। उन्होंने किसी भारतीय नेता से या ग्यारह प्रान्तों में शासनसूत्र सम्हालनेवाले किसी मंत्रिमंडल से पूछे बग़ैर ही एलान कर दिया कि अंग्रेजों की तरफ से हिन्दुस्तान महायुद्ध में शरीक हो गया है। यह बात हिन्दुस्तान के स्वातन्त्र्य तथा स्वयंनिर्णय के अधिकारों को क्षति पहुंचानेवाली थी । कांग्रेस ने मांग की कि अंग्रेज अपने युद्ध - उद्देश्य जाहिर कर दें और अगर लोकतन्त्र तथा राष्ट्रीय स्वातन्त्र्य की रक्षा करना ही उनका ध्येय हो तो हिन्दुस्तान की स्वतन्त्रता को फौरन क़बूल कर लें । अगर जंग के जारी होने के कारण नया विधान अमल में लाना असम्भव मालूम होता हो तो कम-से-कम केन्द्र में फौरन भारतीय नेताओं का मंत्रिमंडल स्थापित करके उसकी सलाह मानकर यहां का कारोबार चलाया जाय । लेकिन ब्रिटिश राजनीतिज्ञ उस समय इन मांगों को कबूल करके हिन्दुस्तान को स्वातन्त्र्य और स्वयंनिर्णय का हक देने के लिए राज़ी नहीं थे। इसलिए आठ प्रान्तों के शासनसूत्र सम्हालनेवाले कांग्रेस - मंत्रिमंडलों ने त्यागपत्र दे दिये। जिस युद्ध के हेतु साफ न हों ऐसे युद्ध में कांग्रेस योग नहीं देगी और जनता को चाहिए कि वह भी योग न दे, ऐसा प्रचार कांग्रेस ने शुरू किया । कांग्रेस के बल को तोड़ने के लिए मुस्लिम लीग पर अंग्रेज अपना साया डालने लगे । मुसलमान-समाज की अनुमति के बिना कोई भी विधान हिन्दुस्तान में नहीं बनने दिया जायेगा, ऐसा उन्होंने ऐलान कर दिया और देशी नरेशों को अपने साथ रखने के लिए पुचकारने की नीति जाहिरा तौर पर की। इससे मुस्लिम नेताओं को विश्वास हो गया कि अगर हम आपस में मिलकर लीग की तरफ से अंग्रेजों से कोई मांग करेंगे तो वह से ज़रूर मिल जायगी । इसी वजह से पंजाब के सर सिकन्दर हयातखां, बंगाल के फजलुल हक तथा आसाम के मुहम्मद सादुल्ला के नेतृत्व में वे दल, जो शासन की बागडोर सम्हाले थे, मुस्लिम लीग में शामिल हो गए । एक हज़ार छः सौ तीस के फरवरी मास में जिन्नासाहब ने खुल्लमखुल्ला पाकिस्तान का ध्येय मंजूर कर लिया और अगले महीने में कराची में मुस्लिम लीग का जो अधिवेशन हुआ, उसने भी उसपर मुहर लगा दी। पहले पंजाब तथा बंगाल में मुस्लिम लीग पक्ष की कोई हस्ती नहीं थी; लेकिन अब वहां के मुसलमान नेता पाकिस्तान के प्रचारक बन गए । फिर भी इन दो प्रान्तों में हिन्दू तथा मुसलमानों की तादाद क़रीब-क़रीब बराबर होने के कारण वहां की धारासभाओं के सिर पाकिस्तान का ध्येय मढ़ना असम्भव हो गया । पाकिस्तान में देश के कौन-से हिस्सों का समावेश होगा, उसकी सीमाएं कैसे तय की जायंगी, उन सीमाओं के बाहर जो हिन्दुस्तान बचेगा, वहां कितने मुसलमान रहेंगे और उनका भवितव्य क्या होगा, इसके बारे में साफ-साफ बात करने के लिए मुस्लिम लीग के नेता तैयार नहीं थे । अगर इसके बारे में वे तभी खुलासा करते तो उनको यह क़बूल करना पड़ता कि पाकिस्तान में बहुत थोड़ा भूभाग चला जायगा और उसमें जितने मुसलमान में बसेंगे, करीब उतने ही मुसलमानों को बाकी हिस्से में रहना होगा । मुस्लिम जनता को यह भी मालूम होता कि पूरा पंजाब तथा पूरा बंगाल पाकिस्तान में हगिज़ शामिल न हो सकेगा । साथ ही पाकिस्तान एक प्रखंड मुल्क न बनकर उत्तर पश्चिम कोने में और हजारों मील की दूरी पर पूरब में बँटा रहेगा। अगर इस तरह का एक पूरा चित्र लोगों के सामने रखा जाता और उसके बारे में मुसलमानों की सही राय ली जाती तो मुसलमान जनता और उसके प्रगुप्रा इसे ज़रूर ठुकरा देते । जिन्नासाहब इस बात को जानते थे और इसीलिए पाकिस्तान का पूरा ढांचा उन्होंने लोगों के सामने कभी नहीं रखा। जून, एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में आज के पाकिस्तान की कल्पना को जिन्नासाहब ने मंजूर कर लिया; लेकिन उसके कुछ ही दिन पहले तक वे पूरा पंजाब, पूरा बंगाल तथा आसाम पाकिस्तान में मिलाने एवं पूर्वी पाकिस्तान को जोड़नेवाले मुल्क की भी मांग करते थे । देशी नरेशों को स्वातन्त्र्य तथा स्वयंनिर्णय के जो अधिकार अंग्रेजों ने दिये थे, उससे मुसलमान नेताओं को अन्त तक लग रहा था कि दक्षिण का निजाम-राज्य हमेशा मुसलमानों का राज ही बना रहेगा। इस तरह अगर हिन्दुस्तान के तीन विभागों में तीन बड़े इस्लामी राज कायम हो सके और उनमें एकता कायम की जा सकी तो हिन्दुस्तान को इस्लामी सभ्यता का एक बड़ा राष्ट्र बनाया जा सकेगा, ऐसे ख्वाब मुसलमान देखा करते थे और पाकिस्तान की हिमायत करने में उन्हें गौरव मालूम होता । ये सब निरी अवास्तव कल्पनाएं हैं, इन्हें व्यवहार में उतारना बिलकुल असम्भव है, ऐसा अंग्रेज चाहते तो अधिकृत रीति से मुसलमानों को बता सकते थे। लेकिन न अंग्रेज और न मुस्लिम लीग के नेता ही ऐसा करना चाहते थे। पाकिस्तान की प्रत्यक्ष प्रस्थापना होने तक उसका पूरा ढांचा मुसलमान जनता या संसार के सामने कभी अधिकृत रूप में न रखा गया । पूरा-पूरा स्वरूप मालूम न होने के कारण पाकिस्तान के नारों के जाल में मुसलमान जनता धीरे-धीरे फंसती गई । एक हज़ार नौ सौ चालीस में लार्ड लिनलिथगो ने ऐलान कर दिया कि जिससे अल्पसंख्यक सहमत न हों और जिसमें देशी नरेशों के साथ अंग्रेजों के लिए समझौतों को और उनसे प्राप्त अधिकारों को क़बूल न किया गया हो, ऐसे किसी विधान को ब्रिटेन अपनी अनुमति कभी नहीं देगा । एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस के प्रारम्भ में क्रिप्ससाहब स्वातन्त्र्य तथा स्वयंनिर्णय के तत्व हिन्दुस्तान में युद्ध के बाद लागू करने का वादा करनेवाली योजना लेकर भारत में आये, तबतक किसी को पता नहीं था कि पाकिस्तान के ध्येय को अंग्रेज किस बूते पर और कितनी हद तक मंजूर करेंगे । एक हज़ार नौ सौ चालीस से एक हज़ार नौ सौ इकतालीस के अन्त तक युद्ध - विरोधी प्रचार करने के लिए कांग्रेस ने व्यक्तिगत सत्याग्रह का आन्दोलन चलाया, जिसमें सारे भारत से करीब पच्चीस हजार सत्याग्रही जेल में गये । इससे ब्रिटेन के दोस्तों - खासकर चीन तथा अमरीका को - पता चला कि ब्रिटिश हुकूमत को युद्धकाल में सहयोग देने के लिए भारतीय जनता तैयार नहीं है । इधर जर्मनी की तरफ से जापान भी युद्ध में कूद पड़ा और देखते-देखते ब्रह्म देश की ओर लपका। ऐसे अवसर पर हिन्दुस्तान की वाजिब मांगों को पूरा करके जनता से सहयोग प्राप्त कर लेने की सलाह चीन तथा अमरीका ने अंग्रेजों को दी । इसी दबाव के कारण अंग्रेजों ने क्रिप्स साहब को भेजा । हिन्दुस्तान में स्वातंत्र्य और स्वयंनिर्णय के तत्त्व किस ढंग से अंग्रेज लागू करना चाहते हैं, इसका क्रिप्स साहब के साथ भेजी योजना में स्पष्टीकरण किया गया था । इस योजना के अनुसार भारत के हर एक प्रान्त और रियासत में स्वातंत्र्य और आत्मनिर्णय के तत्त्व लागू करने की चेष्टा की गई थी। इससे हिन्दुस्तान में अनेक संयुक्त राज्य स्थापित हो सकते थे । ब्रिटिश साम्राज्य से मिल-जुलकर रहने की आजादी भी प्रान्तों को दी गई थी। स्वयंनिर्णय के अधिकार जिस ढंग से दिये थे, इससे सम्भव था कि भारत अनेक टुकड़ों में बंट जाता । रियासतों की प्रजा को नहीं, बल्कि नरेशों को आत्मनिर्णय के हक दिये गए थे। सच कहा जाय तो यह लोकशाही एवं स्वयंनिर्णय की विडंबना मात्र थी । ये अधिकार भी युद्ध के खत्म होने पर मिलनेवाले थे । भविष्य के इस आश्वासन पर भरोसा रखकर भारतीय जनता तथा भारत के सभी पक्ष और देशी नरेश महायुद्ध में अंग्रेजों के हाथ बटाने के लिए वाइसराय के कार्यकारी मण्डल में शामिल हों, ऐसी आशा रखी गई थी । वाइसराय के कार्यकारी मण्डल के सदस्य बननेवाले नेताओं को मंत्रिमण्डल के अधिकार और दर्जा देने के लिए भी ब्रिटिश राजनेता तैयार न थे । कांग्रेस की मांग थी कि भविष्य के आश्वासनों के साथ वाइसराय के कार्यकारी मण्डल को मंत्रिमण्डल का दर्जा फौरन दे दिया जाय । इस मांग को कबूल कर लिया होता तो शासनसूत्र अपने हाथ में लेकर युद्ध का संचालन करने की जिम्मेदारी उठाने को कांग्रेस तैयार हो जाती। अगर कांग्रेस के हाथों में सत्ता देने के लिए किसी को उज्ज्र होता तो चाहे जिसके हाथ में सरकार सत्ता सौंप देती, उसके लिए कांग्रेस तैयार थी । उसका कहना इतना ही था कि जो मंत्रिमण्डल बनेगा, उसको जनता की प्रतिनिधि सभा के सामने उत्तरदायी रहना होगा । यह मांग मंजूर न हुई, अतः कांग्रेस ने इस योजना को ठुकराया । अन्य पक्षों ने भी अपनी-अपनी दलीलें देकर इस योजना को अस्वीकृत किया और क्रिप्स साहब का मिशन असफल रहा । क्रिप्स - मिशन से यह साफ हो गया कि पूर्ण स्वातन्त्र्य, स्वयं निर्णय तथा विधान परिषद की मांग अव्यवहार्य या अवास्तविक न थी और ब्रिटिश सरकार उसको मंजूर कर सकती थी । तब अन्य पक्षों ने भी अपनी राजनीति में इन तीनों तत्वों को सम्मिलित किया । ब्रिटेन जब अपना शासन यहां से हटायेगा तब यहां एक ही राज्य बनाने का उसका आग्रह होगा और देश का विभाजन करनेवाली किसी भी योजना को मंजूर नहीं किया जायगा, ऐसा जिनका विश्वास था उनको क्रिप्स साहब के दौत्य से बड़ी ठेस पहुंची; क्योंकि देश के दो ही नहीं, अनेकानेक टुकड़े करने के बीज इस योजना में छिपे पड़े थे । ब्रिटिश लोग लोकतन्त्र के हामी हैं अतः उन्होंने स्वयंनिर्णय का तत्त्व स्वीकार किया; लेकिन देशी रियासतों में स्वयंनिर्णय का तत्त्व लागू करते समय यह अधिकार रियासतों की प्रजा को न देकर नरेशों को दिया गया, इससे सबको बड़ा आश्चर्य हुआ । प्रान्तों को स्वयंनिर्णय का अधिकार देने का बहाना करके मुसलमानों को खुश करने की उनकी नीति थी; लेकिन कम से कम उसमें लोकतन्त्र का आधार मिल सकता था । देशी नरेशों के बारे में उन्होंने जो रुख रखा उसको किसी भी तरह का नैतिक बल मिलना कठिन था । क्रिप्स - मिशन से यह भी साफ हो गया कि युद्धकाल में किसी तरह का परिवर्तन करने के लिए ब्रिटेन तैयार नहीं है । वाइसराय के कार्यकारी मण्डल में सब हिन्दी सदस्य रखने के लिए वे तैयार थे, लेकिन भारतीय जनता के प्रति उत्तरदायी मंत्रिमण्डल बनाने की उनकी तैयारी नहीं थी । इसके लिए उनकी दलील यह थी कि उनकी इच्छा के वावजूद वे ऐसा नहीं कर सकते; क्योंकि मुस्लिम लीग इस बात को मंजूर नहीं करती । ब्रिटिश सरकार के रुख को देखकर अपने पक्ष को मज़बूत बनाने के लिए कांग्रेस को भी यह जाहिर करना पड़ा कि यद्यपि हिन्दुस्तान को अखण्ड रखना उसका ध्येय है, फिर भी अगर देश के किसी हिस्से के लोगों ने उसमें न रहने का बहुमत से अधिकृत रूप में फैसला कर लिया तो उसको देश के साथ जुड़े रहने पर मज़बूर नहीं किया जायगा । लेकिन इसका भी कोई असर न हुआ । क्रिप्ससाहब के साथ की समझौते की बातचीत विफल होते देख कांग्रेस ने लड़ाई छेड़ने की ठान ली। आठ अगस्त, एक हज़ार नौ सौ बयालीस के दिन गांधीजी के नेतृत्व में पूर्ण स्वातन्त्र्य की प्राप्ति के लिए सत्याग्रह - संग्राम करने का प्रस्ताव कांग्रेस ने पास किया । उसी रात को सरकार ने मशून्य गांधी प्रभृति कांग्रेस नेताओं तथा उनके हजारों अनुयायियों को एक साथ गिरफ्तार कर लिया और आजादी के आंदोलन को कुचलने के लिए सब तरह के साधनों से काम लेना शुरू किया। ब्रिटिशों के इस बर्बरतापूर्ण बर्ताव से सारे देश में आंदोलन की प्रचंड आग भभक उठी। चारों ओर अंग्रेजो, सल्तनत छोड़कर चले जाओ' के नारे गूंजने लगे । एक हज़ार छः सौ चौंतालीस में बीमारी के कारण गांधीजी को रिहा किया गया । तबतक आंदोलन किसी-न-किसी रूप में चलता रहा। गांधीजी ने कुछ तन्दुरुस्त होने के बाद स्वातन्त्र्य की गुत्थी सुलझाने के लिए ब्रिटिश सरकार तथा मुस्लिम लीग से बातचीत शुरू की । सितम्बर एक हज़ार नौ सौ चौंतालीस में वह जिन्नासाहब से बम्बई में मिले । पन्द्रह रोज तक उनमें बातचीत चली । जिन्नासाहब द्विराष्ट्रवाद के उसूल को गांधीजी से कबूल करवाना चाहते थे। पाकिस्तान मंजूर किये बग़ैर बातचीत चलाना जिन्नासाहब बेकार समझते थे। गांधीजी कहते थे कि इस सिद्धान्त को क़बूल करना असम्भव है । उनका कहना था कि हिन्दुस्तान में भले ही दो राज्य बन जायं; लेकिन उनमें से हरेक राज्य में हिन्दू तथा मुसलमान दोनों जमातों के लोग रहेंगे और इसीलिए धर्मविशिष्ट राष्ट्रीयता का आग्रह रखना ग़लत है । वह यह भी कहते थे कि हिन्दुस्तान में दो राज्य क़ायम होने पर भी विदेशनीति, प्रतिरक्षा तथा यातायात के बारे में दोनों को संयुक्त नीति अख्तियार करनी होगी और दोनों राज्यों को अपने-अपने अल्पसंख्यकों के अधिकार सुरक्षित रखने के लिए उचित प्रबन्ध करना होगा। जिन्नासाहब छः प्रांतों को उनके उसी रूप में पाकिस्तान में शामिल करना चाहते थे; लेकिन गांधीजी का कहना था कि पंजाब, बंगाल तथा साम के सभी हिस्से पाकिस्तान में हगिज नहीं जायंगे। जिन विभागों को अलग करना हो, उनके सब धर्मावलम्बी निवासियों की राय लेना वह जरूरी समझते थे । मगर जिन्नासाहब का कहना था कि एक तो इन प्रांतों में मतगणना का कोई कारण ही नहीं है; और अगर मतगणना करनी ही हो तो सिर्फ मुसलमानों की ही राय ली जाय। जिन्नासाहब की ये मांगें इतनी बेजा थीं कि कोई भी उन्हें मंजूर नहीं कर सकता था। गांधीजी तथा जिन्ना की भूमिका में इतना अन्तर रहते हुए किसी प्रकार के समझौते की प्रशा करना बेकार था । इस बातचीत से इतना फायदा ज़रूर हुआ कि दोनों को अपने विचार लेखबद्ध करने पड़े और पाकिस्तान की कल्पना की रूपरेखा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया था कि भारत ने पिछले 7 सालों में 38 हजार करोड़ से अधिक के रक्षा सामानों का निर्यात किया है और देश जल्द ही शुद्ध निर्यातक बन जाएगा. सेना को सौंपे गए अगली पीढ़ी के स्वदेशी युद्धक टैंक, आर्मी चीफ एमएम नरवणे बोले- 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में है महत्वपूर्ण कदम भारतीय सेना को स्वदेशी रूप से विकसित अगली पीढ़ी के युद्धक टैंक व अन्य उपकरणों की पहली खेप मिल गई है. सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने पुणे में इन टैंकों को सेना के बेड़े में शामिल किया. इस बीच सेना के अधिकारी ने कहा है कि यह सिस्टम भारतीय सेना की मौजूदा इंजीनियर टोही क्षमताओं को बढ़ाएगा और भविष्य के संघर्षों में मकेनाइज्ड ऑपरेशन को सपोर्ट करने में एक प्रमुख गेम-चेंजर साबित होगा. लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने कहा कि बख्तरबंद इंजीनियर टोही वाहन पूरी तरह से देश के भीतर डिजाइन और विकसित किए गए हैं. ये टैंक की गति से मेल खाते हैं और पश्चिमी मोर्चे पर मकेनाइज्ड ऑपरेशन करने में मदद करते हैं. इन टैंकों को कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर में शामिल किया गया है. कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर का काम युद्ध के दौरान कॉम्बेट इंजीनियर पुल, ट्रैक और हेलीपैड बनाकर अपनी सेवाओं को गतिशीलता प्रदान करना है. इसके अलावा यह बारूदी सुरंगे बिछाकर और पुलों को ध्वस्त कर दुश्मनों के मंसूबों पर पानी फेरता है. कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर के चार प्रमुख अंग हैं, जिसमें कॉम्बैट इंजीनियर्स, एम ई एस, बार्डर रोड्स और सैन्य सर्वेक्षण शामिल हैं. इस बीच सेना प्रमुख नरवणे ने कहा, 'इन स्वदेशी उपकरणों (एईआरवी) को शामिल करने से विशेष रूप से पश्चिमी मोर्चे पर ऑपरेशन को बढ़ावा मिलेगा और रक्षा उपकरणों के निर्माण में 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा.' भारत ने पिछले कुछ सालों में कई रक्षा उपकरणों को आयात नहीं करने का फैसला किया और इसे स्वदेशी तकनीक से बनाने का फैसला किया है. अभी हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया था कि भारत ने पिछले 7 सालों में 38 हजार करोड़ से अधिक के रक्षा सामानों का निर्यात किया है और देश जल्द ही शुद्ध निर्यातक बन जाएगा. अभी हाल ही में रक्षामंत्री ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की ओर से विकसित उत्पाद सशस्त्र बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को सौंपे थे. उन्होंने सात सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों को छह प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) समझौते भी सौंपे थे. इस दौरान उन्होंने कहा था कि पिछले कुछ वर्षों में डीआरडीओ के दृष्टिकोण में एक बड़ा बदलाव आया है जिससे यह न सिर्फ मौजूदा खतरों की गंभीरता को कम करने वाली प्रौद्योगिकी पर काम कर रहा है बल्कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी तरह की पहली प्रौद्योगिकी विकसित करने में भी जुटा है. भारत को रक्षा विनिर्माण आधार और शुद्ध रक्षा निर्यातक का एक मजबूत प्लेटफॉर्म बनाने के मकसद को लेकर डीआरडीओ ने इस प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया था कि भारत ने पिछले सात सालों में अड़तीस हजार करोड़ से अधिक के रक्षा सामानों का निर्यात किया है और देश जल्द ही शुद्ध निर्यातक बन जाएगा. सेना को सौंपे गए अगली पीढ़ी के स्वदेशी युद्धक टैंक, आर्मी चीफ एमएम नरवणे बोले- 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में है महत्वपूर्ण कदम भारतीय सेना को स्वदेशी रूप से विकसित अगली पीढ़ी के युद्धक टैंक व अन्य उपकरणों की पहली खेप मिल गई है. सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने पुणे में इन टैंकों को सेना के बेड़े में शामिल किया. इस बीच सेना के अधिकारी ने कहा है कि यह सिस्टम भारतीय सेना की मौजूदा इंजीनियर टोही क्षमताओं को बढ़ाएगा और भविष्य के संघर्षों में मकेनाइज्ड ऑपरेशन को सपोर्ट करने में एक प्रमुख गेम-चेंजर साबित होगा. लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने कहा कि बख्तरबंद इंजीनियर टोही वाहन पूरी तरह से देश के भीतर डिजाइन और विकसित किए गए हैं. ये टैंक की गति से मेल खाते हैं और पश्चिमी मोर्चे पर मकेनाइज्ड ऑपरेशन करने में मदद करते हैं. इन टैंकों को कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर में शामिल किया गया है. कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर का काम युद्ध के दौरान कॉम्बेट इंजीनियर पुल, ट्रैक और हेलीपैड बनाकर अपनी सेवाओं को गतिशीलता प्रदान करना है. इसके अलावा यह बारूदी सुरंगे बिछाकर और पुलों को ध्वस्त कर दुश्मनों के मंसूबों पर पानी फेरता है. कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर के चार प्रमुख अंग हैं, जिसमें कॉम्बैट इंजीनियर्स, एम ई एस, बार्डर रोड्स और सैन्य सर्वेक्षण शामिल हैं. इस बीच सेना प्रमुख नरवणे ने कहा, 'इन स्वदेशी उपकरणों को शामिल करने से विशेष रूप से पश्चिमी मोर्चे पर ऑपरेशन को बढ़ावा मिलेगा और रक्षा उपकरणों के निर्माण में 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा.' भारत ने पिछले कुछ सालों में कई रक्षा उपकरणों को आयात नहीं करने का फैसला किया और इसे स्वदेशी तकनीक से बनाने का फैसला किया है. अभी हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया था कि भारत ने पिछले सात सालों में अड़तीस हजार करोड़ से अधिक के रक्षा सामानों का निर्यात किया है और देश जल्द ही शुद्ध निर्यातक बन जाएगा. अभी हाल ही में रक्षामंत्री ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन की ओर से विकसित उत्पाद सशस्त्र बलों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को सौंपे थे. उन्होंने सात सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों को छह प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौते भी सौंपे थे. इस दौरान उन्होंने कहा था कि पिछले कुछ वर्षों में डीआरडीओ के दृष्टिकोण में एक बड़ा बदलाव आया है जिससे यह न सिर्फ मौजूदा खतरों की गंभीरता को कम करने वाली प्रौद्योगिकी पर काम कर रहा है बल्कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए अपनी तरह की पहली प्रौद्योगिकी विकसित करने में भी जुटा है. भारत को रक्षा विनिर्माण आधार और शुद्ध रक्षा निर्यातक का एक मजबूत प्लेटफॉर्म बनाने के मकसद को लेकर डीआरडीओ ने इस प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
पयोग में वर्तना मुनिका अपवादमार्ग है, उत्सर्गमार्ग नहीं है । शुभोपयोगी साधुओंकी दृष्टि शुद्धोपयोगकी ही तरफ रहती है, इसलिये ऐसा शुभोपयोग साधुओंके चारित्रमें हस्ताव'लम्बनरूप है, परन्तु यदि शुद्धोपयोग की भावनासहित न हो तो वह निश्चय चारित्रका सहाई न होनेसे मात्र पुण्यबांधके संसारका कारण है, मुक्तिका हेतु नहीं है। इसीलिये शुभोपयोगरूप विनयको तथा वैयावृत्यको तप संज्ञा दी है कि ये दोनों अपने तथा अन्यके स्वरूपाचरण चारित्रके उपकारी हैं । श्री मूलाचार पंचाचार अधिकारमें कहते हैंः उवग्रहणादिआ पुव्युत्ता तह भत्तिआदिया य जुगा संकादिवजणं पिय दंसणविणओ समासेण ॥ १६८ ॥ भावार्थ - उपगृहन, स्थितीकरण, वात्सल्य, प्रभावना आदि सम्यक्तके आठ अंगोंके पालने में उत्साही रहना तथा अरहंतादि पंचपरमेष्टीकी भक्ति व पूजा करनी, शंका कांक्षा आढ़ि ढोप न लगाना सो दर्शनका विनय है विणओ मोक्खद्दारं विषयादो संजमो तवो णाणं । विणपणाराहिज्जदि आइरियो सव्वसंघो व ॥ १८६ ॥ भावार्थ- विनय मोक्षका द्वार है, विनयसे संयम तथा ज्ञानकी वृद्धि होती है । विनय ही करके आचार्य और सर्व संघकी सेवा की जाती है। शुभोपयोगमें ही साधुओंकी वैयावृत्ति की जाती है। जैसा वहीं कहा हैआइरियादिल, पंचसु सवालवुड्डाउलेख गच्छेस । वेजावचं वृत्तं कादव्यं सव्वसत्तीए ।। ११२ ।। भावार्य - आचार्य, उपाध्याय, स्थविर, प्रवर्तक, गणधर इन पांच महान साधुओंकी तथा बालक, वृद्ध, रोगी व थके हुए साधुओंकी व गच्छकी सर्वशक्ति लगाकर वैयावृत्य करना कहा गया है ॥ ६७ ॥ उत्थानिका- आगे शुभोपयोगी मुनियोंकी शुभ प्रवृत्तिको और भी दर्शाने हैं । दंदगणपसणेहिं अग्भुठ्ठाणा पुगमनपडिदत्ती । सगणेमु समावणओ व जिंदिया रायचरियम्मि ।।६।। चन्दननमस्करणाभ्यामभ्युत्थानानुगमन प्रतिपत्तिः । श्रमणेषु श्रमापनयो न निन्दिता रागचर्यायाम् ॥ ६८ ॥ अन्वय सहित सामान्पार्थ(रागच रियम्मि) शुभ रागरूप आचरणमें अर्थात् सरागचारित्रकी अवस्था ( वृंदणणमंतणेहिं ) वंदना और नमस्कार के साथ २ ( अन्भुट्ठाणाणुगमणपडिवती ) आते हुए साधुको देखकर उठ खड़ा होना, उनके पीछे २ चलना आदि प्रवृत्ति तथा (समणेषु) साबुओंके सम्बन्ध में उनका (ममावणओ) खेद दूर करना आदि क्रिया (ण जिंदिया) निषेव्य या वर्जित नहीं है । विशेपार्थ - पंच परमेटियोंको वंदना नमस्कार व उनको देखकर उठना, पीछे चलना आदि प्रवृत्ति व रत्नत्रयी भावना करनेसे प्राप्त जो परिश्रमका खेढ़ उसको दूर करना आदि शुभोपयोग रूप प्रवृत्ति रत्नत्रयकी आराधना करनेवालों में करना उन साधुओंके लिये मना नहीं है किन्तु करने योग्य हैं, जो साधु शुद्धोपयोगके साधक शुभोपयोगनें ठहरे हुए हैं।
पयोग में वर्तना मुनिका अपवादमार्ग है, उत्सर्गमार्ग नहीं है । शुभोपयोगी साधुओंकी दृष्टि शुद्धोपयोगकी ही तरफ रहती है, इसलिये ऐसा शुभोपयोग साधुओंके चारित्रमें हस्ताव'लम्बनरूप है, परन्तु यदि शुद्धोपयोग की भावनासहित न हो तो वह निश्चय चारित्रका सहाई न होनेसे मात्र पुण्यबांधके संसारका कारण है, मुक्तिका हेतु नहीं है। इसीलिये शुभोपयोगरूप विनयको तथा वैयावृत्यको तप संज्ञा दी है कि ये दोनों अपने तथा अन्यके स्वरूपाचरण चारित्रके उपकारी हैं । श्री मूलाचार पंचाचार अधिकारमें कहते हैंः उवग्रहणादिआ पुव्युत्ता तह भत्तिआदिया य जुगा संकादिवजणं पिय दंसणविणओ समासेण ॥ एक सौ अड़सठ ॥ भावार्थ - उपगृहन, स्थितीकरण, वात्सल्य, प्रभावना आदि सम्यक्तके आठ अंगोंके पालने में उत्साही रहना तथा अरहंतादि पंचपरमेष्टीकी भक्ति व पूजा करनी, शंका कांक्षा आढ़ि ढोप न लगाना सो दर्शनका विनय है विणओ मोक्खद्दारं विषयादो संजमो तवो णाणं । विणपणाराहिज्जदि आइरियो सव्वसंघो व ॥ एक सौ छियासी ॥ भावार्थ- विनय मोक्षका द्वार है, विनयसे संयम तथा ज्ञानकी वृद्धि होती है । विनय ही करके आचार्य और सर्व संघकी सेवा की जाती है। शुभोपयोगमें ही साधुओंकी वैयावृत्ति की जाती है। जैसा वहीं कहा हैआइरियादिल, पंचसु सवालवुड्डाउलेख गच्छेस । वेजावचं वृत्तं कादव्यं सव्वसत्तीए ।। एक सौ बारह ।। भावार्य - आचार्य, उपाध्याय, स्थविर, प्रवर्तक, गणधर इन पांच महान साधुओंकी तथा बालक, वृद्ध, रोगी व थके हुए साधुओंकी व गच्छकी सर्वशक्ति लगाकर वैयावृत्य करना कहा गया है ॥ सरसठ ॥ उत्थानिका- आगे शुभोपयोगी मुनियोंकी शुभ प्रवृत्तिको और भी दर्शाने हैं । दंदगणपसणेहिं अग्भुठ्ठाणा पुगमनपडिदत्ती । सगणेमु समावणओ व जिंदिया रायचरियम्मि ।।छः।। चन्दननमस्करणाभ्यामभ्युत्थानानुगमन प्रतिपत्तिः । श्रमणेषु श्रमापनयो न निन्दिता रागचर्यायाम् ॥ अड़सठ ॥ अन्वय सहित सामान्पार्थ शुभ रागरूप आचरणमें अर्थात् सरागचारित्रकी अवस्था वंदना और नमस्कार के साथ दो आते हुए साधुको देखकर उठ खड़ा होना, उनके पीछे दो चलना आदि प्रवृत्ति तथा साबुओंके सम्बन्ध में उनका खेद दूर करना आदि क्रिया निषेव्य या वर्जित नहीं है । विशेपार्थ - पंच परमेटियोंको वंदना नमस्कार व उनको देखकर उठना, पीछे चलना आदि प्रवृत्ति व रत्नत्रयी भावना करनेसे प्राप्त जो परिश्रमका खेढ़ उसको दूर करना आदि शुभोपयोग रूप प्रवृत्ति रत्नत्रयकी आराधना करनेवालों में करना उन साधुओंके लिये मना नहीं है किन्तु करने योग्य हैं, जो साधु शुद्धोपयोगके साधक शुभोपयोगनें ठहरे हुए हैं।
Chakulia : चाकुलिया प्रखंड की जुगीतुपा पंचायत के सिमुलडांगा उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय का चापाकल विगत चार साल से खराब है. बच्चों के लिए मिड डे मील कूपन नदी के पानी से बनता है. चारों दिशा में रैयत खेत से घिरे विद्यालय भवन से सटा पानी से भरा विशाल गड्ढा छोटे बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. परंतु इस ओर पंचायत के जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों का ध्यान नहीं है. इस विद्यालय में 32 नामांकित बच्चे हैं. इनमें 19 बच्चे सबर जनजाति के हैं. स्कूल का चापाकल चार साल से खराब है. इसकी मरम्मत की दिशा में कोई पहल नहीं हुई है. पानी के अभाव में बच्चे शौचालय का प्रयोग भी नहीं कर पाते हैं. मध्यान भोजन बनाने के लिए सबर टोला में स्थापित सोलर संचालित जलापूर्ति योजना से पानी लेना पड़ता है. परंतु सोलर संचालित योजना से भी पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं निकल रहा है. इसके कारण मध्यान भोजन बनाने के लिए विद्यालय के पास स्थित कूपन नदी के किनारे चुंआ बनाकर पानी लेना पड़ता है. विद्यालय की शिक्षिका रीना महतो ने बताया कि चापाकल की मरम्मत के लिए कई बार आवेदन दिया गया. परंतु कोई पहल नहीं हुई. जानकारी हो कि विद्यालय से थोड़ी दूरी पर ईंट भट्ठा है. ईंट निर्माण के लिए विद्यालय भवन के करीब ही रैयती जमीन पर मिट्टी की खुदाई की गई है. मिट्टी की खुदाई से उभरा गड्ढा बरसात में पानी से भर गया है. गड्ढे से सटी पगडंडी से गुजर कर बच्चे स्कूल जाते हैं. ऐसे में कभी भी अप्रिय घटना हो सकती है.
Chakulia : चाकुलिया प्रखंड की जुगीतुपा पंचायत के सिमुलडांगा उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय का चापाकल विगत चार साल से खराब है. बच्चों के लिए मिड डे मील कूपन नदी के पानी से बनता है. चारों दिशा में रैयत खेत से घिरे विद्यालय भवन से सटा पानी से भरा विशाल गड्ढा छोटे बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. परंतु इस ओर पंचायत के जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों का ध्यान नहीं है. इस विद्यालय में बत्तीस नामांकित बच्चे हैं. इनमें उन्नीस बच्चे सबर जनजाति के हैं. स्कूल का चापाकल चार साल से खराब है. इसकी मरम्मत की दिशा में कोई पहल नहीं हुई है. पानी के अभाव में बच्चे शौचालय का प्रयोग भी नहीं कर पाते हैं. मध्यान भोजन बनाने के लिए सबर टोला में स्थापित सोलर संचालित जलापूर्ति योजना से पानी लेना पड़ता है. परंतु सोलर संचालित योजना से भी पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं निकल रहा है. इसके कारण मध्यान भोजन बनाने के लिए विद्यालय के पास स्थित कूपन नदी के किनारे चुंआ बनाकर पानी लेना पड़ता है. विद्यालय की शिक्षिका रीना महतो ने बताया कि चापाकल की मरम्मत के लिए कई बार आवेदन दिया गया. परंतु कोई पहल नहीं हुई. जानकारी हो कि विद्यालय से थोड़ी दूरी पर ईंट भट्ठा है. ईंट निर्माण के लिए विद्यालय भवन के करीब ही रैयती जमीन पर मिट्टी की खुदाई की गई है. मिट्टी की खुदाई से उभरा गड्ढा बरसात में पानी से भर गया है. गड्ढे से सटी पगडंडी से गुजर कर बच्चे स्कूल जाते हैं. ऐसे में कभी भी अप्रिय घटना हो सकती है.
Old Coins: आइये जानते हैं इस सिक्के के बारे में और किस साल के किन सिक्कों की सबसे ज़्यादा डिमांड है इस बारे में भी विस्तार से जानते हैं। Old Coins Price List: अगर आप जल्दी पैसा कमाना चाहते हैं तो इसके लिए आपकी जेब में एक रुपए का सिक्का जरूर होना चाहिए। लेकिन याद रहे कि ये सिक्का कोई साधारण सिक्का नहीं होना चाहिए बल्कि कम से कम 100 साल पुराना होना चाहिए। आइये जानते हैं इस सिक्के के बारे में और किस साल के किन सिक्कों की सबसे ज़्यादा डिमांड है इस बारे में भी विस्तार से जानते हैं। दिन-रात काम करने के बावजूद एक आम आदमी के लिए रोजाना घर का खर्च चलाना काफी मुश्किल होता जा रहा है। बढ़ती महंगाई और विभिन्न वस्तुओं की उच्च लागत के कारण सभी को भी बहुत समस्या का सामना करना पड़ता है। इसलिए आज हम आपको अमीर बनने का एक बहुत ही आसान तरीका बताते हैं। अगर हम कहें कि आप एक रुपये के सिक्के से लखपति बन सकते हैं तो आप क्या कहेंगे ? दरअसल एक रुपये के सिक्के के लिए आपको 25 लाख रूपए तक मिल सकता है। अगर आप जल्दी पैसा कमाना चाहते हैं तो आपके पास एक रुपए का ये सिक्का जरूर होना चाहिए। लेकिन याद रहे कि ये सिक्का कोई साधारण सिक्का नहीं होना चाहिए बल्कि कम से कम 100 साल पुराना होना चाहिए। अगर आपके पास साल 1913 का एक रुपये का पुराना सिक्का है तो आप आसानी से रुपये कमा सकते हैं। इस सिक्के को बेचकर आप 25 लाख रूपए आसानी से कमा सकते हैं। यहां 1913 में बने एक रुपये के सिक्के की कीमत 25 लाख रूपए आंकी गई है। ये एक रूपए का सिक्का चांदी का होगा और इसे विक्टोरियन श्रेणी में शामिल किया गया है। इंडिया मार्ट में 18वीं सदी के एक सिक्के की कीमत 10 लाख रुपए है। सन 1818 में बने ईस्ट इंडिया कंपनी के एक सिक्के की कीमत 10 लाख रुपए आंकी गई है। इस तांबे के सिक्के पर हनुमानजी का चित्र अंकित है। पुराने सिक्कों को बेचने के लिए आप किसी भी ऑनलाइन सेल्लिंग वेबसाइट पर जा सकते हैं। वेबसाइट पर आपको अपना अकाउंट बनाना होता है। अकाउंट बनाने के बाद आपको यहां खुद को सेलर के तौर पर रजिस्टर करना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद अब आप अपने सिक्के की तस्वीर अपलोड करें और उसे बिक्री के लिए रख दें। एंटीक चीजों के शौकीन लोगों को ऐसे सिक्कों की जरूरत होती है और वो ऐसी एंटीक चीजें किसी भी कीमत पर खरीद सकते हैं। तो देर किस बात की अगर आपके पास एक रुपये का पुराना सिक्का है तो उसे ऊपर दी गई किसी भी वेबसाइट पर बेच दें।
Old Coins: आइये जानते हैं इस सिक्के के बारे में और किस साल के किन सिक्कों की सबसे ज़्यादा डिमांड है इस बारे में भी विस्तार से जानते हैं। Old Coins Price List: अगर आप जल्दी पैसा कमाना चाहते हैं तो इसके लिए आपकी जेब में एक रुपए का सिक्का जरूर होना चाहिए। लेकिन याद रहे कि ये सिक्का कोई साधारण सिक्का नहीं होना चाहिए बल्कि कम से कम एक सौ साल पुराना होना चाहिए। आइये जानते हैं इस सिक्के के बारे में और किस साल के किन सिक्कों की सबसे ज़्यादा डिमांड है इस बारे में भी विस्तार से जानते हैं। दिन-रात काम करने के बावजूद एक आम आदमी के लिए रोजाना घर का खर्च चलाना काफी मुश्किल होता जा रहा है। बढ़ती महंगाई और विभिन्न वस्तुओं की उच्च लागत के कारण सभी को भी बहुत समस्या का सामना करना पड़ता है। इसलिए आज हम आपको अमीर बनने का एक बहुत ही आसान तरीका बताते हैं। अगर हम कहें कि आप एक रुपये के सिक्के से लखपति बन सकते हैं तो आप क्या कहेंगे ? दरअसल एक रुपये के सिक्के के लिए आपको पच्चीस लाख रूपए तक मिल सकता है। अगर आप जल्दी पैसा कमाना चाहते हैं तो आपके पास एक रुपए का ये सिक्का जरूर होना चाहिए। लेकिन याद रहे कि ये सिक्का कोई साधारण सिक्का नहीं होना चाहिए बल्कि कम से कम एक सौ साल पुराना होना चाहिए। अगर आपके पास साल एक हज़ार नौ सौ तेरह का एक रुपये का पुराना सिक्का है तो आप आसानी से रुपये कमा सकते हैं। इस सिक्के को बेचकर आप पच्चीस लाख रूपए आसानी से कमा सकते हैं। यहां एक हज़ार नौ सौ तेरह में बने एक रुपये के सिक्के की कीमत पच्चीस लाख रूपए आंकी गई है। ये एक रूपए का सिक्का चांदी का होगा और इसे विक्टोरियन श्रेणी में शामिल किया गया है। इंडिया मार्ट में अट्ठारहवीं सदी के एक सिक्के की कीमत दस लाख रुपए है। सन एक हज़ार आठ सौ अट्ठारह में बने ईस्ट इंडिया कंपनी के एक सिक्के की कीमत दस लाख रुपए आंकी गई है। इस तांबे के सिक्के पर हनुमानजी का चित्र अंकित है। पुराने सिक्कों को बेचने के लिए आप किसी भी ऑनलाइन सेल्लिंग वेबसाइट पर जा सकते हैं। वेबसाइट पर आपको अपना अकाउंट बनाना होता है। अकाउंट बनाने के बाद आपको यहां खुद को सेलर के तौर पर रजिस्टर करना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद अब आप अपने सिक्के की तस्वीर अपलोड करें और उसे बिक्री के लिए रख दें। एंटीक चीजों के शौकीन लोगों को ऐसे सिक्कों की जरूरत होती है और वो ऐसी एंटीक चीजें किसी भी कीमत पर खरीद सकते हैं। तो देर किस बात की अगर आपके पास एक रुपये का पुराना सिक्का है तो उसे ऊपर दी गई किसी भी वेबसाइट पर बेच दें।
हिमाचलः 10वीं कक्षा के नियमित विद्यार्थियों की टर्म-2 की परीक्षाएं शनिवार से शुरू हो रही हैं। परीक्षाओं के लिए प्रदेश भर में 2125 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं जिनमें करीब 90 हजार 625 विद्यार्थी परीक्षा देंगे। पहले दिन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विषय की परीक्षा होगी। इस बारे में जानकारी देते हुए बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार सोनी ने बताया कि परीक्षाओं के लिए बोर्ड ने पूरी तैयारियां कर ली हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल शिक्षा बोर्ड ने प्रदेश भर में 2125 परीक्षा केंद्र बनाए हैं। इसमें 85 महिला परीक्षा केंद्रों को सावित्री बाई फुले परीक्षा केंद्र का नाम दिया गया है। इन केंद्रों में अधीक्षक और उपाधीक्षक के तौर पर महिला स्टाफ को ही तैनाती दी गई है। बोर्ड परीक्षा में नकल पर रोकथाम के लिए उड़नदस्तों का गठन भी किया गया है। इसके अलावा बोर्ड परीक्षाओं के लिए नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है।
हिमाचलः दसवीं कक्षा के नियमित विद्यार्थियों की टर्म-दो की परीक्षाएं शनिवार से शुरू हो रही हैं। परीक्षाओं के लिए प्रदेश भर में दो हज़ार एक सौ पच्चीस परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं जिनमें करीब नब्बे हजार छः सौ पच्चीस विद्यार्थी परीक्षा देंगे। पहले दिन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विषय की परीक्षा होगी। इस बारे में जानकारी देते हुए बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार सोनी ने बताया कि परीक्षाओं के लिए बोर्ड ने पूरी तैयारियां कर ली हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल शिक्षा बोर्ड ने प्रदेश भर में दो हज़ार एक सौ पच्चीस परीक्षा केंद्र बनाए हैं। इसमें पचासी महिला परीक्षा केंद्रों को सावित्री बाई फुले परीक्षा केंद्र का नाम दिया गया है। इन केंद्रों में अधीक्षक और उपाधीक्षक के तौर पर महिला स्टाफ को ही तैनाती दी गई है। बोर्ड परीक्षा में नकल पर रोकथाम के लिए उड़नदस्तों का गठन भी किया गया है। इसके अलावा बोर्ड परीक्षाओं के लिए नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है।
मुरादाबाद में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के एक मामले में अदालत ने अभियुक्त को दोषसिद्ध करते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामले में पैरवी के लिए मुरादाबाद के एसएसपी बबलू कुमार की ओर से अधिकारियों को नामित किया गया था। मामला जिले के छजलैट थाना क्षेत्र के एक गांव का है। यहां रहने वाली एक दलित नाबालिग लड़की के साथ कांठ थाना क्षेत्र के गांव सिरसाठाठ निवासी कृष्ण अवतार उर्फ राहुल पाल पुत्र रामचंद्र ने रेप किया था। इा मामले में विवेचना के बाद आरोप मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दाखिल किया गया था। पीड़िता नाबालिग थी। इसलिए पुलिस ने आरोपी पर पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया था। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की कोर्ट में हुई। घटना अक्टूबर 2021 की है। पुलिस ने मामले में मजबूत पैरवी की। जिसकी वजह से महज 6 महीने में ही आरोपी को कोर्ट से सजा सुना दी गई। अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद अभियुक्त कृष्ण अवतार उर्फ राहुलपाल को नाबालिग दलित लड़की से रेप का दोषी करार दिया। अदालत ने उसके कृत्य के लिए उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास और 30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर 15 दिन का अतिरिक्त कारावास काटना होगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मुरादाबाद में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के एक मामले में अदालत ने अभियुक्त को दोषसिद्ध करते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास और तीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामले में पैरवी के लिए मुरादाबाद के एसएसपी बबलू कुमार की ओर से अधिकारियों को नामित किया गया था। मामला जिले के छजलैट थाना क्षेत्र के एक गांव का है। यहां रहने वाली एक दलित नाबालिग लड़की के साथ कांठ थाना क्षेत्र के गांव सिरसाठाठ निवासी कृष्ण अवतार उर्फ राहुल पाल पुत्र रामचंद्र ने रेप किया था। इा मामले में विवेचना के बाद आरोप मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में दाखिल किया गया था। पीड़िता नाबालिग थी। इसलिए पुलिस ने आरोपी पर पॉक्सो एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया था। मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की कोर्ट में हुई। घटना अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस की है। पुलिस ने मामले में मजबूत पैरवी की। जिसकी वजह से महज छः महीने में ही आरोपी को कोर्ट से सजा सुना दी गई। अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद अभियुक्त कृष्ण अवतार उर्फ राहुलपाल को नाबालिग दलित लड़की से रेप का दोषी करार दिया। अदालत ने उसके कृत्य के लिए उसे दस वर्ष के कठोर कारावास और तीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर पंद्रह दिन का अतिरिक्त कारावास काटना होगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
सुशांत के घर पिछले साल हुई पूजा का एक वीडियो सामने आया है. अप्रैल 2019 का ये वीडियो बांद्रा के उसी घर का है जहां सुशांत अपनी मौत से पहले रह रहे थे. नासिक से पूजा कराने आए एक पंडित ने आजतक से बातचीत की है. उनका कहना था कि सुशांत को देखकर नहीं लग रहा था कि वो सुसाइड कर सकते हैं. देखिए ये वीडियो. A video of Pooja held at the house of Sushant Singh last year has surfaced. This video of April 2019 is from the same house in Bandra where Sushant was living before his death. A pandit who came to worship from Nashik had an exclusive conversation with Aaj Tak. He said that after seeing Sushant, he did not feel that he could commit suicide.
सुशांत के घर पिछले साल हुई पूजा का एक वीडियो सामने आया है. अप्रैल दो हज़ार उन्नीस का ये वीडियो बांद्रा के उसी घर का है जहां सुशांत अपनी मौत से पहले रह रहे थे. नासिक से पूजा कराने आए एक पंडित ने आजतक से बातचीत की है. उनका कहना था कि सुशांत को देखकर नहीं लग रहा था कि वो सुसाइड कर सकते हैं. देखिए ये वीडियो. A video of Pooja held at the house of Sushant Singh last year has surfaced. This video of April दो हज़ार उन्नीस is from the same house in Bandra where Sushant was living before his death. A pandit who came to worship from Nashik had an exclusive conversation with Aaj Tak. He said that after seeing Sushant, he did not feel that he could commit suicide.
मोदी सरकार की तरफ से किसानों को आर्थिक मदद के रूप में पीएम किसान सम्मान निधि योजना को फरवरी के महीनें में पिछले साल शुरू किया गया था। सरकार तीन किस्तों में यह पैसा ट्रांसफर करती है पहली किस्त 1 दिसंबर से 31 मार्च के बीच आती है, जबकि दूसरी किस्त 1 अप्रैल से 31 जुलाई और तीसरी किस्त 1 अगस्त से 30 नवंबर के बीच में किसानों के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। अब इस साल किसानों को जल्द तीसरी क़िस्त मिलने वाली है। इस योजना में किसानों को हर साल 6 हजार रुपये की आर्थिक मदद की जाती है जिसे साल में तीन बार दो दो हजार की किस्त के रूप में किसानों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है। केंद्र सरकार अगस्त महीने के पहले सप्ताह से ही किसानों के खातों में इस योजना की छठी किस्त भेज देगी।
मोदी सरकार की तरफ से किसानों को आर्थिक मदद के रूप में पीएम किसान सम्मान निधि योजना को फरवरी के महीनें में पिछले साल शुरू किया गया था। सरकार तीन किस्तों में यह पैसा ट्रांसफर करती है पहली किस्त एक दिसंबर से इकतीस मार्च के बीच आती है, जबकि दूसरी किस्त एक अप्रैल से इकतीस जुलाई और तीसरी किस्त एक अगस्त से तीस नवंबर के बीच में किसानों के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। अब इस साल किसानों को जल्द तीसरी क़िस्त मिलने वाली है। इस योजना में किसानों को हर साल छः हजार रुपये की आर्थिक मदद की जाती है जिसे साल में तीन बार दो दो हजार की किस्त के रूप में किसानों के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया जाता है। केंद्र सरकार अगस्त महीने के पहले सप्ताह से ही किसानों के खातों में इस योजना की छठी किस्त भेज देगी।