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कल रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया की वार्षिक रिपोर्ट के बाद अंततः देश ने इत्मीनान की सांस ली कि भले पूरे पौने दो साल लगे, मगर आखिरकार वापस लौटे नोटों की गिनती पूरी हो गई । हालांकि रिपोर्ट से पहले ही रिज़र्व बैंक के सूत्रों से छनकर यह जानकारी बाहर आ चुकी थी - यह अलग बात है कि वास्तविक गिनती उस लीक सूचना से भी कहीं अधिक निकली । अब स्थिति यह है कि 8 नवम्बर 2016 को प्रतिबंधित किये गए 1000 और 500 के 15 लाख 41 हजार करोड़ रुपयों के मूल्य वाले नोटों में से 15 लाख 31 हजार करोड़ रुपयों की कीमत वाले नोट वापस बैंकों में आकर जमा हो चुके हैं । मतलब इन नोटों का 99.3 प्रतिशत साबुत सलामत लौट आया ।
काला धन दफनाने, आतंकवाद की कमर तोड़ने , नकली नोटों का प्रचलन रुक जाने, भ्रष्टाचार के निर्मूलन और 50 दिन में सफलता न दिखने पर फांसी पर लटका देने जैसे लोकप्रिय जुमलों को -एक के साथ एक मुश्किल फ्री मानकर- छोड़ भी दिया जाये तो भी यह आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है । इससे कुछ सवाल उठते हैं और ये सवाल गहरे हैं ।
जैसे, मुद्रा के प्रचलन के बाद से ही अर्थशास्त्रियों का अध्ययन इस बात पर एकमत है कि जितनी मुद्रा जारी होती है उसका 2.5 से 3.5 प्रतिशत व्यवहार के दौरान खराब हो जाता है । यहां इसका मतलब है कि वह वापसी योग्य नही रहता । इसी तरह भारत के हर तीसरे परिवार में हजार-पांच सौ के कुछ न कुछ नोट्स आज भी पड़े हुए हैं जिन्हें वे या तो समय पर लौटा नही पाये या उन्हें वे कपड़ों, किताबों, बक्सों में सफाई के दौरान तब मिले जब जमा कराने की अवधि बीत चुकी थी । (इन पंक्तियों के लेखक के विस्तारित परिवार में -अब तक- 25 हजार रुपये मूल्य के ऐसे नोट्स मिल चुके हैं। ) फिर प्रधानमंत्री ने जापान में दावा किया था कि उनके डर के मारे लोग नोटों को नदियों मे बहा रहे हैं, भट्टी में जला रहे हैं, लुगदी बना रहे हैं । इन सबको बहुत ही कम - कोई 2 प्रतिशत - मान लेते हैं । अब इनमे पड़ोसी देशों से छपकर आने वाले नकली नोटों को भी जोड़ और उनकी तादाद उतनी -10 से 15 प्रतिशत- ही माने जितनी विपक्ष में रहते भाजपा सांसद लोकसभा राज्य सभा मे बताते रहे हैं तो कुल होते हैं 15 से 20 प्रतिशत ।
सवाल यह उठता है कि ये 15 - 20 प्रतिशत नोट कहां गए ?
इसके दो ही जवाब हो सकते हैं एक : भारतीय जनता नोटों के रखरखाव में इतनी सजग हो गई है कि बाढ़ हो या आग खुद डूबे या जले नोट को सलामत रखती है और जो बचे पड़े हैं वे आंखों का भरम हैं । दो : यह वे नकली नोट हैं जिन्हे हमारी मेहरबान सरकार ने असली बना दिया । अगर ऐसा है तो इसे राष्ट्रद्रोही मूर्खत्व के सिवा और भला क्या कहा सकता है !!
दूसरा सवाल काले धन का है । प्रायः हरेक अनुमान के हिसाब से काले धन की समानांतर अर्थव्यवस्था आकार और परिमाण में वास्तविक अर्थव्यवस्था के लगभग बराबर होती है । चलिये मान लिया कि यह कुछ अतिरंजना है । मगर इतना तय है कि ये मात्र 0.7 प्रतिशत 10720 हजार करोड़ रूपये तो नही ही है । सवाल यह उठता है कि क्या यह सारी कवायद काले धन को सफेद करने के लिए ही तो नही थी । नोटबन्दी के बाद गुजरात की अमितशाह से जुड़ी कुछ सहकारी बैंकों और कुछ व्यक्तियों के हजारों हजार करोड़ रुपयों के पुराने के बदले नए नोटों के लेन देन की सार्वजनिक हुई जानकारी के बाद यह कयास सिर्फ आशंका भर नही रह जाता ।
एक और सवाल है और वह कि नकदी में कालेधन की जमाखोरी के लिए प्रचलन में अधिक मुद्रा और बड़े नोट जरूरी होते हैं । 1977 में हुई नोटबन्दी ने एक और दस हजार के नोट बन्द किये थे । फिर उतने बड़े छापे नही थे । नवम्बर 16 की नोटबन्दी के बाद 2000 के नोट जारी किए गए और कुल मुद्रा बढ़कर पहले से अधिक हो गई । यह किस तरह की आर्थिक बुध्दिमत्ता है ?
एक और इसी से जुड़ा जरूरी सवाल है और वह यह कि नोटबन्दी के बाद डिजिटल लेनदेन की मजबूरी का फायदा उठाकर पेटीएम, वीसा और मास्टर कार्ड जैसी विदेशी कम्पनियों ने कितने हजार करोड़ रुपये कमीशन में कमाये ? आखिर ये उनके बाबा जी की कमाई तो नही थी - भारत की जनता द्वारा हाड़तोड़ मेहनत से जुटाया गया धन था । इस सवाल की जवाबदेही सीधे उनकी बनती है जिन्होंने नोटबन्दी के अगले ही दिन चीन के धनकुबेर जैक मा की पेटीएम के विज्ञापन पर अपना फ़ोटो चिपकाया था ।
इन सवालों के जवाब जरूरी हैं क्योंकि इस नोटबन्दी के तुगलकी फैसले ने भारतीय अर्थव्यवस्था को जो धक्का दिया था उससे वह 21 महीने बाद भी उबर नही पाई है । कोई 15 करोड़ दिहाड़ी मजदूर महीनों तक बेरोजगार रहे, कुछ लाख छोटे संस्थान , औद्योगिक तथा उत्पादन इकाइयां बन्द हो गईं जो फिर खुली ही नही , किसानों की दो फसलों को उनकी कीमत नही मिली । न जाने कितनी शादियों के कार्ड छपे रह गए । लाखों लोगों के - असल मे करोड़ों - मानव दिवस दो महीनों तक बैंक की लाइनों में खड़े खड़े खर्च हो गए जिनमे एक सौ से अधिक लोग मर भी गये ।
इस तबाही, विनाश और मौतों का जिम्मा भी कोई लेगा क्या ? या इसे भी एक जुमला - इस मर्तबा जानलेवा जुमला - करार दे दिया जाएगा।
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कल रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया की वार्षिक रिपोर्ट के बाद अंततः देश ने इत्मीनान की सांस ली कि भले पूरे पौने दो साल लगे, मगर आखिरकार वापस लौटे नोटों की गिनती पूरी हो गई । हालांकि रिपोर्ट से पहले ही रिज़र्व बैंक के सूत्रों से छनकर यह जानकारी बाहर आ चुकी थी - यह अलग बात है कि वास्तविक गिनती उस लीक सूचना से भी कहीं अधिक निकली । अब स्थिति यह है कि आठ नवम्बर दो हज़ार सोलह को प्रतिबंधित किये गए एक हज़ार और पाँच सौ के पंद्रह लाख इकतालीस हजार करोड़ रुपयों के मूल्य वाले नोटों में से पंद्रह लाख इकतीस हजार करोड़ रुपयों की कीमत वाले नोट वापस बैंकों में आकर जमा हो चुके हैं । मतलब इन नोटों का निन्यानवे.तीन प्रतिशत साबुत सलामत लौट आया । काला धन दफनाने, आतंकवाद की कमर तोड़ने , नकली नोटों का प्रचलन रुक जाने, भ्रष्टाचार के निर्मूलन और पचास दिन में सफलता न दिखने पर फांसी पर लटका देने जैसे लोकप्रिय जुमलों को -एक के साथ एक मुश्किल फ्री मानकर- छोड़ भी दिया जाये तो भी यह आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है । इससे कुछ सवाल उठते हैं और ये सवाल गहरे हैं । जैसे, मुद्रा के प्रचलन के बाद से ही अर्थशास्त्रियों का अध्ययन इस बात पर एकमत है कि जितनी मुद्रा जारी होती है उसका दो.पाँच से तीन.पाँच प्रतिशत व्यवहार के दौरान खराब हो जाता है । यहां इसका मतलब है कि वह वापसी योग्य नही रहता । इसी तरह भारत के हर तीसरे परिवार में हजार-पांच सौ के कुछ न कुछ नोट्स आज भी पड़े हुए हैं जिन्हें वे या तो समय पर लौटा नही पाये या उन्हें वे कपड़ों, किताबों, बक्सों में सफाई के दौरान तब मिले जब जमा कराने की अवधि बीत चुकी थी । फिर प्रधानमंत्री ने जापान में दावा किया था कि उनके डर के मारे लोग नोटों को नदियों मे बहा रहे हैं, भट्टी में जला रहे हैं, लुगदी बना रहे हैं । इन सबको बहुत ही कम - कोई दो प्रतिशत - मान लेते हैं । अब इनमे पड़ोसी देशों से छपकर आने वाले नकली नोटों को भी जोड़ और उनकी तादाद उतनी -दस से पंद्रह प्रतिशत- ही माने जितनी विपक्ष में रहते भाजपा सांसद लोकसभा राज्य सभा मे बताते रहे हैं तो कुल होते हैं पंद्रह से बीस प्रतिशत । सवाल यह उठता है कि ये पंद्रह - बीस प्रतिशत नोट कहां गए ? इसके दो ही जवाब हो सकते हैं एक : भारतीय जनता नोटों के रखरखाव में इतनी सजग हो गई है कि बाढ़ हो या आग खुद डूबे या जले नोट को सलामत रखती है और जो बचे पड़े हैं वे आंखों का भरम हैं । दो : यह वे नकली नोट हैं जिन्हे हमारी मेहरबान सरकार ने असली बना दिया । अगर ऐसा है तो इसे राष्ट्रद्रोही मूर्खत्व के सिवा और भला क्या कहा सकता है !! दूसरा सवाल काले धन का है । प्रायः हरेक अनुमान के हिसाब से काले धन की समानांतर अर्थव्यवस्था आकार और परिमाण में वास्तविक अर्थव्यवस्था के लगभग बराबर होती है । चलिये मान लिया कि यह कुछ अतिरंजना है । मगर इतना तय है कि ये मात्र शून्य.सात प्रतिशत दस हज़ार सात सौ बीस हजार करोड़ रूपये तो नही ही है । सवाल यह उठता है कि क्या यह सारी कवायद काले धन को सफेद करने के लिए ही तो नही थी । नोटबन्दी के बाद गुजरात की अमितशाह से जुड़ी कुछ सहकारी बैंकों और कुछ व्यक्तियों के हजारों हजार करोड़ रुपयों के पुराने के बदले नए नोटों के लेन देन की सार्वजनिक हुई जानकारी के बाद यह कयास सिर्फ आशंका भर नही रह जाता । एक और सवाल है और वह कि नकदी में कालेधन की जमाखोरी के लिए प्रचलन में अधिक मुद्रा और बड़े नोट जरूरी होते हैं । एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर में हुई नोटबन्दी ने एक और दस हजार के नोट बन्द किये थे । फिर उतने बड़े छापे नही थे । नवम्बर सोलह की नोटबन्दी के बाद दो हज़ार के नोट जारी किए गए और कुल मुद्रा बढ़कर पहले से अधिक हो गई । यह किस तरह की आर्थिक बुध्दिमत्ता है ? एक और इसी से जुड़ा जरूरी सवाल है और वह यह कि नोटबन्दी के बाद डिजिटल लेनदेन की मजबूरी का फायदा उठाकर पेटीएम, वीसा और मास्टर कार्ड जैसी विदेशी कम्पनियों ने कितने हजार करोड़ रुपये कमीशन में कमाये ? आखिर ये उनके बाबा जी की कमाई तो नही थी - भारत की जनता द्वारा हाड़तोड़ मेहनत से जुटाया गया धन था । इस सवाल की जवाबदेही सीधे उनकी बनती है जिन्होंने नोटबन्दी के अगले ही दिन चीन के धनकुबेर जैक मा की पेटीएम के विज्ञापन पर अपना फ़ोटो चिपकाया था । इन सवालों के जवाब जरूरी हैं क्योंकि इस नोटबन्दी के तुगलकी फैसले ने भारतीय अर्थव्यवस्था को जो धक्का दिया था उससे वह इक्कीस महीने बाद भी उबर नही पाई है । कोई पंद्रह करोड़ दिहाड़ी मजदूर महीनों तक बेरोजगार रहे, कुछ लाख छोटे संस्थान , औद्योगिक तथा उत्पादन इकाइयां बन्द हो गईं जो फिर खुली ही नही , किसानों की दो फसलों को उनकी कीमत नही मिली । न जाने कितनी शादियों के कार्ड छपे रह गए । लाखों लोगों के - असल मे करोड़ों - मानव दिवस दो महीनों तक बैंक की लाइनों में खड़े खड़े खर्च हो गए जिनमे एक सौ से अधिक लोग मर भी गये । इस तबाही, विनाश और मौतों का जिम्मा भी कोई लेगा क्या ? या इसे भी एक जुमला - इस मर्तबा जानलेवा जुमला - करार दे दिया जाएगा। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
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Leh Manali route : मनाली लेह मार्ग बारालाचा दर्रे से छोटे वाहनों के लिए हर दोपहर एक बजे तक खुला रहेगा। प्रशासन ने उक्त मार्ग पर निरीक्षण किया जोकि सफल रहा। वाया शिंकुला मार्ग पहले ही खोला जा चुका है। जिलाधीश नीरज कुमार ने बताया कि छोटे वाहनों के आवाजाही खोल दी गई है।
अब लोग छोटे वाहनों के माध्यम से बारालाचा दर्रे से होकर जा सकते हैं। फिलहाल ट्रक और दोपहिया वाहनों के जाने पर पाबंदी रहेगी।
ट्रक और दोपहिया वाहनों की आवाजाही के लिए आगामी कुछ दिनों में जब मार्ग पर परिस्थिति सही होगी उसका आंकलन करने के बाद शुरू की जाएगी।
प्रशासन ने वाहन चालकों से अपील की है कि चिन्हित स्थान पर ही वाहन पार्क करें।
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Leh Manali route : मनाली लेह मार्ग बारालाचा दर्रे से छोटे वाहनों के लिए हर दोपहर एक बजे तक खुला रहेगा। प्रशासन ने उक्त मार्ग पर निरीक्षण किया जोकि सफल रहा। वाया शिंकुला मार्ग पहले ही खोला जा चुका है। जिलाधीश नीरज कुमार ने बताया कि छोटे वाहनों के आवाजाही खोल दी गई है। अब लोग छोटे वाहनों के माध्यम से बारालाचा दर्रे से होकर जा सकते हैं। फिलहाल ट्रक और दोपहिया वाहनों के जाने पर पाबंदी रहेगी। ट्रक और दोपहिया वाहनों की आवाजाही के लिए आगामी कुछ दिनों में जब मार्ग पर परिस्थिति सही होगी उसका आंकलन करने के बाद शुरू की जाएगी। प्रशासन ने वाहन चालकों से अपील की है कि चिन्हित स्थान पर ही वाहन पार्क करें।
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इतनी बड़ी गलती हो रही है, जो किसी की जान की दुश्मन बन सकती है।
इसके साथ ही पुलिस वाहनों को ब्लैक लिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरु कर दी जाएगी।
इस घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है।
करतारपुर कुकर्म मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई देखन को मिली है।
शुक्रवार की देर शाम न्यू दशमेश नगर में अमोनिया गैस लीक होने से इलाके के लोगों में दहशत फैल गई थी।
शहर में HOPPERS Restaurant के मालिक को कोर्ट की तरफ से बड़ा झटका दिया गया है।
सरकारी/अर्ध सरकारी बैंक/निजी बैंक/ए. टी. एम्स और पेट्रोल पंपों पर लूटपाट की घटनाएं बेतहाशा बढ़ गई हैं।
जालंधर के नकोदर में स्थित एक निजी अस्पताल व डी एडिक्शन सैंटर मालिक के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है।
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इतनी बड़ी गलती हो रही है, जो किसी की जान की दुश्मन बन सकती है। इसके साथ ही पुलिस वाहनों को ब्लैक लिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरु कर दी जाएगी। इस घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। करतारपुर कुकर्म मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई देखन को मिली है। शुक्रवार की देर शाम न्यू दशमेश नगर में अमोनिया गैस लीक होने से इलाके के लोगों में दहशत फैल गई थी। शहर में HOPPERS Restaurant के मालिक को कोर्ट की तरफ से बड़ा झटका दिया गया है। सरकारी/अर्ध सरकारी बैंक/निजी बैंक/ए. टी. एम्स और पेट्रोल पंपों पर लूटपाट की घटनाएं बेतहाशा बढ़ गई हैं। जालंधर के नकोदर में स्थित एक निजी अस्पताल व डी एडिक्शन सैंटर मालिक के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। Be on the top of everything happening around the world. Try Punjab Kesari E-Paper Premium Service.
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आज, रोगों के नए रूपों के उद्भव के साथ, वहाँ तरीकों और की एक निरंतर सुधार है निदान विधियों। चिकित्सा विज्ञान की आधुनिक विकास लगातार परीक्षा और रोग प्रक्रियाओं के उपचार के तरीकों में सुधार करने के लिए यह संभव बनाता है। वहाँ नए, अज्ञात से पहले वर्तमान छिद्रों तरीके हैं। लेकिन पुराने और सिद्ध तरीकों के बारे में भूल नहीं है।
तो अक्सर एक सामान्य रक्त परीक्षण (जो सबसे आम है) के रूप में इस तरह के एक पुराने और सिद्ध पद्धति, आधुनिक चिकित्सा पद्धति में इस्तेमाल किया, और। इसके बारे में बात हो रही है, मैं सफेद रक्त कोशिकाओं के अध्ययन है, जो एक रक्त WBC-विश्लेषण (- "सफेद रक्त कोशिकाओं" रूसी भाषा में संक्षिप्त नाम) है पर विशेष ध्यान देना चाहते हैं।
WBC में सफेद रक्त कोशिकाओं के एक विश्लेषण है रक्त सीरम। ल्यूकोसाइट्स का पता लगा निरपेक्ष संख्या।
संश्लेषण रक्त कोशिकाओं सफेद स्तर लिम्फ नोड्स और अस्थि मज्जा में होता है। रक्त कोशिकाओं के इस प्रकार का मुख्य कार्य एंटीबॉडी गठन करने के लिए कम है और इस तरह प्रतिरक्षा के गठन में भाग लेता है है। इस तरह के टी सहायक कोशिकाओं, टी शमन और टी हत्यारा कोशिकाओं (सभी टी कोशिकाओं) के रूप में तत्वों का अभिन्न अंग WBC हैं। यही कारण है कि प्रतिरोध प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा गठित मूल रूप से "सफेद" कोशिकाओं के स्तर पर निर्भर करेगा है।
रक्त घटकों के WBC-विश्लेषण दोनों सामान्य और जैव रासायनिक विश्लेषण, जो का प्रतिनिधित्व कर रहे है leukocytic सूत्र। संयोग से, बाद अधिक सटीक और जानकारीपूर्ण है।
रक्त WBC के विश्लेषण से ल्युकोसैट के राज्य विश्लेषण करती है। सफेद रक्त कोशिकाओं के स्तर को कम करके प्रतिरक्षा गतिविधि की इसी कमजोर होता है। अक्सर, क्षाररागीश्वेतकोशिकाल्पता किसी भी संक्रामक रोगों का एक संकेत है।
WBC रक्त विश्लेषण कोशिकाओं की न केवल निरपेक्ष संख्या, बल्कि उनके व्यक्तिगत प्रकार (न्यूट्रोफिल, लिम्फोसाइटों, monocytes, बेसोफिल और इयोस्नोफिल्स) और साथ ही अनुपात therebetween है, जो अक्सर diagnostically महत्वपूर्ण जानकारी है निर्धारित करने के लिए अनुमति देता है।
अगर कोई बीमारी के संदेह है, रोगों के लिए खुद की या नियमित निरीक्षणों के दौरान उपस्थिति से आवश्यक नैदानिक प्रक्रियाओं प्रदर्शन किया - एक रक्त परीक्षण। WBC डिक्रिप्शन रक्त कोशिकाओं की गणना के द्वारा किया जाता है।
Leukocytosis - सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि। तो बढ़ रही है ल्युकोसैट स्तर इस रोग sequelae के एक सक्रिय भड़काऊ प्रक्रिया का संकेत हो सकता।
इन rezulate का शुद्ध मान रिश्तेदार संकेतक की तुलना में अधिक जानकारी नहीं है। रक्त WBC-विश्लेषण मरीज की हालत का एक संकेत है, प्रतिरक्षा प्रणाली की गतिविधि देता है।
ल्युकोसैट में एक उल्लेखनीय वृद्धि के आदर्श के साथ तुलना में अक्सर कैंसर के विकास का संकेत कर सकते हैं। Diagnostically ट्यूमर का महत्वपूर्ण संकेत रक्त चित्र युवा और अपरिपक्व रूपों में वृद्धि हुई है। ऐसी स्थिति में एक रक्त ल्युकोसैट बाएं (युवा और अपरिपक्व कोशिकाओं) की पारी (विस्थापन) की बात करते हैं।
ल्यूकोसाइट्स की संख्या को कम मानव शरीर पर विषाक्त रेडियोधर्मी, संक्रामक प्रभावों के स्तर का न्याय कर सकते हैं के मामले में।
एक राशि आदर्श बुलाया क्षाररागीश्वेतकोशिकाल्पता से भी कम समय में उसमें रक्त में "सफेद कोशिकाओं" की संख्या को कम करना, उनकी उपस्थिति (के रूप में leukocytosis के साथ मामला है इस गिरावट या तो पूर्ण या संबंधित हो सकता है)।
इस प्रकार, एक रक्त परीक्षण सिर्फ वैकल्पिक है, लेकिन उच्च जानकारीपूर्ण नैदानिक पद्धति, जिनमें से आवेदन आज एक उच्च स्तर पर है नहीं है। उचित और सक्षम व्याख्या (डिकोडिंग) प्राप्त डेटा मानव शरीर के राज्य का न्याय और विकासशील रोग परिवर्तन का पता लगाने के लिए।
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आज, रोगों के नए रूपों के उद्भव के साथ, वहाँ तरीकों और की एक निरंतर सुधार है निदान विधियों। चिकित्सा विज्ञान की आधुनिक विकास लगातार परीक्षा और रोग प्रक्रियाओं के उपचार के तरीकों में सुधार करने के लिए यह संभव बनाता है। वहाँ नए, अज्ञात से पहले वर्तमान छिद्रों तरीके हैं। लेकिन पुराने और सिद्ध तरीकों के बारे में भूल नहीं है। तो अक्सर एक सामान्य रक्त परीक्षण के रूप में इस तरह के एक पुराने और सिद्ध पद्धति, आधुनिक चिकित्सा पद्धति में इस्तेमाल किया, और। इसके बारे में बात हो रही है, मैं सफेद रक्त कोशिकाओं के अध्ययन है, जो एक रक्त WBC-विश्लेषण है पर विशेष ध्यान देना चाहते हैं। WBC में सफेद रक्त कोशिकाओं के एक विश्लेषण है रक्त सीरम। ल्यूकोसाइट्स का पता लगा निरपेक्ष संख्या। संश्लेषण रक्त कोशिकाओं सफेद स्तर लिम्फ नोड्स और अस्थि मज्जा में होता है। रक्त कोशिकाओं के इस प्रकार का मुख्य कार्य एंटीबॉडी गठन करने के लिए कम है और इस तरह प्रतिरक्षा के गठन में भाग लेता है है। इस तरह के टी सहायक कोशिकाओं, टी शमन और टी हत्यारा कोशिकाओं के रूप में तत्वों का अभिन्न अंग WBC हैं। यही कारण है कि प्रतिरोध प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा गठित मूल रूप से "सफेद" कोशिकाओं के स्तर पर निर्भर करेगा है। रक्त घटकों के WBC-विश्लेषण दोनों सामान्य और जैव रासायनिक विश्लेषण, जो का प्रतिनिधित्व कर रहे है leukocytic सूत्र। संयोग से, बाद अधिक सटीक और जानकारीपूर्ण है। रक्त WBC के विश्लेषण से ल्युकोसैट के राज्य विश्लेषण करती है। सफेद रक्त कोशिकाओं के स्तर को कम करके प्रतिरक्षा गतिविधि की इसी कमजोर होता है। अक्सर, क्षाररागीश्वेतकोशिकाल्पता किसी भी संक्रामक रोगों का एक संकेत है। WBC रक्त विश्लेषण कोशिकाओं की न केवल निरपेक्ष संख्या, बल्कि उनके व्यक्तिगत प्रकार और साथ ही अनुपात therebetween है, जो अक्सर diagnostically महत्वपूर्ण जानकारी है निर्धारित करने के लिए अनुमति देता है। अगर कोई बीमारी के संदेह है, रोगों के लिए खुद की या नियमित निरीक्षणों के दौरान उपस्थिति से आवश्यक नैदानिक प्रक्रियाओं प्रदर्शन किया - एक रक्त परीक्षण। WBC डिक्रिप्शन रक्त कोशिकाओं की गणना के द्वारा किया जाता है। Leukocytosis - सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि। तो बढ़ रही है ल्युकोसैट स्तर इस रोग sequelae के एक सक्रिय भड़काऊ प्रक्रिया का संकेत हो सकता। इन rezulate का शुद्ध मान रिश्तेदार संकेतक की तुलना में अधिक जानकारी नहीं है। रक्त WBC-विश्लेषण मरीज की हालत का एक संकेत है, प्रतिरक्षा प्रणाली की गतिविधि देता है। ल्युकोसैट में एक उल्लेखनीय वृद्धि के आदर्श के साथ तुलना में अक्सर कैंसर के विकास का संकेत कर सकते हैं। Diagnostically ट्यूमर का महत्वपूर्ण संकेत रक्त चित्र युवा और अपरिपक्व रूपों में वृद्धि हुई है। ऐसी स्थिति में एक रक्त ल्युकोसैट बाएं की पारी की बात करते हैं। ल्यूकोसाइट्स की संख्या को कम मानव शरीर पर विषाक्त रेडियोधर्मी, संक्रामक प्रभावों के स्तर का न्याय कर सकते हैं के मामले में। एक राशि आदर्श बुलाया क्षाररागीश्वेतकोशिकाल्पता से भी कम समय में उसमें रक्त में "सफेद कोशिकाओं" की संख्या को कम करना, उनकी उपस्थिति । इस प्रकार, एक रक्त परीक्षण सिर्फ वैकल्पिक है, लेकिन उच्च जानकारीपूर्ण नैदानिक पद्धति, जिनमें से आवेदन आज एक उच्च स्तर पर है नहीं है। उचित और सक्षम व्याख्या प्राप्त डेटा मानव शरीर के राज्य का न्याय और विकासशील रोग परिवर्तन का पता लगाने के लिए।
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Meerut Couple sold newborn: मेरठ मेडिकल कॉलेज से सोमवार सुबह एक दो दिन का बच्चा गायब हो गया था। पुलिस ने मंगलवार सुबह 5 बजे उसे बरामद कर लिया। बताया जा रहा है कि मजदूर दंपती ने बेहतर परवरिश के लिए अपने बच्चे को एक लाख में बेच दिया था।
प्रेमदेव शर्मा, मेरठः मां के दिल का हाल उसके अलावा कोई और नहीं समझ सकता। अपने बच्चों की खुशी के लिए वह अपने दिल पर भी पत्थर रख सकती है। कुछ ऐसा ही हुआ मेरठ (Meerut news) में। सोमवार को मेरठ मेडिकल कॉलेज से दो दिन का नवजात गायब होने के बाद हंगामा मचा रहा। मंगलवार को पुलिस ने बच्चे को बरामद करके उसकी मां को सौंप दिया। पहले कहा जा रहा था कि उसे किसी बैंक मैनेजर को बेचा गया बाद में पता चला कि उसे एक सब्जी विक्रेता को बेचा गया था। बताया जा रहा है दंपती ने बेहतर परवरिश के लिए बच्चे को 1 लाख रुपये में बेचा (Meerut Couple sold newborn) था। पुलिस जांच में पता चला है कि ADO ऑफिस में काम करने वाले क्लर्क तेजपाल ने यह सौदा करवाया था। पुलिस ने बच्चे के पिता, क्लर्क और सब्जीवाले को अरेस्ट कर लिया है।
सोमवार को जब बच्चा गायब हुआ उस समय चर्चा रही कि बच्चे के माता-पिता ने उसे एक लाख में बेच दिया है। जब पुलिस को इस बात की जानकारी हुई तो उसने मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने जब बच्चे के माता-पिता से सवाल-जवाब किए तो उनके बयान विरोधाभासी रहे, लेकिन धीरे-धीरे बात सामने आई कि दंपती ने गरीबी के चलते बच्चे का सौदा किया था।
शास्त्रीनगर की रहने वाली एक महिला ने मेडिकल कॉलेज में तीन दिन पहले अपने पांचवें बच्चे को जन्म दिया था। सोमवार की रात वॉर्ड के बाहर तैनात गार्ड ने नोटिस किया कि नवजात गायब है। उसने इसकी सूचना डॉक्टर और पुलिस को दी। सूचना पर मेडिकल कॉलेज में गहमा-गहमी शुरू हो गई। पुलिस भी मौके पर पहुंची गई। पूछताछ के दौरान दंपती बार-बार बयान बदल रहे थे। कभी वे रिश्तेदार, तो कभी पहचान वाले को बच्चे को देना बता रहे थे। वहीं चर्चा गर्म थी कि दंपत्ति ने नवजात की मौसी के जरिए उसे किसी शख्स को एक लाख रुपये में बेच दिया।
पुलिस दंपत्ति को थाने ले आई और उनसे लंबी पूछताछ की। रात भर पुलिस नवजात की तलाश में उस व्यक्ति को खोजती रही जिसने बच्चे की कीमत चुकाई थी। एसओ मेडिकल ने बताया कि मंगलवार की सुबह 5 बजे नवजात को बरामद कर उसकी मां को सौंप दिया गया है। यह बात भी सामने आई है कि दंपती उस शख्स से कुछ रुपये भी ले चुकी है। महिला का कहना है कि उसके पहले से ही चार बच्चे हैं। उसका पति मजदूरी करता है और वह शराब पीने का आदी है, जिसके कारण वह बच्चों की परवरिश ठीक से नहीं कर पा रही है। पांचवे बच्चे की परवरिश अच्छी तरह से हो जाए इसीलिए उसे बेचने का फैसला किया था।
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Meerut Couple sold newborn: मेरठ मेडिकल कॉलेज से सोमवार सुबह एक दो दिन का बच्चा गायब हो गया था। पुलिस ने मंगलवार सुबह पाँच बजे उसे बरामद कर लिया। बताया जा रहा है कि मजदूर दंपती ने बेहतर परवरिश के लिए अपने बच्चे को एक लाख में बेच दिया था। प्रेमदेव शर्मा, मेरठः मां के दिल का हाल उसके अलावा कोई और नहीं समझ सकता। अपने बच्चों की खुशी के लिए वह अपने दिल पर भी पत्थर रख सकती है। कुछ ऐसा ही हुआ मेरठ में। सोमवार को मेरठ मेडिकल कॉलेज से दो दिन का नवजात गायब होने के बाद हंगामा मचा रहा। मंगलवार को पुलिस ने बच्चे को बरामद करके उसकी मां को सौंप दिया। पहले कहा जा रहा था कि उसे किसी बैंक मैनेजर को बेचा गया बाद में पता चला कि उसे एक सब्जी विक्रेता को बेचा गया था। बताया जा रहा है दंपती ने बेहतर परवरिश के लिए बच्चे को एक लाख रुपये में बेचा था। पुलिस जांच में पता चला है कि ADO ऑफिस में काम करने वाले क्लर्क तेजपाल ने यह सौदा करवाया था। पुलिस ने बच्चे के पिता, क्लर्क और सब्जीवाले को अरेस्ट कर लिया है। सोमवार को जब बच्चा गायब हुआ उस समय चर्चा रही कि बच्चे के माता-पिता ने उसे एक लाख में बेच दिया है। जब पुलिस को इस बात की जानकारी हुई तो उसने मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने जब बच्चे के माता-पिता से सवाल-जवाब किए तो उनके बयान विरोधाभासी रहे, लेकिन धीरे-धीरे बात सामने आई कि दंपती ने गरीबी के चलते बच्चे का सौदा किया था। शास्त्रीनगर की रहने वाली एक महिला ने मेडिकल कॉलेज में तीन दिन पहले अपने पांचवें बच्चे को जन्म दिया था। सोमवार की रात वॉर्ड के बाहर तैनात गार्ड ने नोटिस किया कि नवजात गायब है। उसने इसकी सूचना डॉक्टर और पुलिस को दी। सूचना पर मेडिकल कॉलेज में गहमा-गहमी शुरू हो गई। पुलिस भी मौके पर पहुंची गई। पूछताछ के दौरान दंपती बार-बार बयान बदल रहे थे। कभी वे रिश्तेदार, तो कभी पहचान वाले को बच्चे को देना बता रहे थे। वहीं चर्चा गर्म थी कि दंपत्ति ने नवजात की मौसी के जरिए उसे किसी शख्स को एक लाख रुपये में बेच दिया। पुलिस दंपत्ति को थाने ले आई और उनसे लंबी पूछताछ की। रात भर पुलिस नवजात की तलाश में उस व्यक्ति को खोजती रही जिसने बच्चे की कीमत चुकाई थी। एसओ मेडिकल ने बताया कि मंगलवार की सुबह पाँच बजे नवजात को बरामद कर उसकी मां को सौंप दिया गया है। यह बात भी सामने आई है कि दंपती उस शख्स से कुछ रुपये भी ले चुकी है। महिला का कहना है कि उसके पहले से ही चार बच्चे हैं। उसका पति मजदूरी करता है और वह शराब पीने का आदी है, जिसके कारण वह बच्चों की परवरिश ठीक से नहीं कर पा रही है। पांचवे बच्चे की परवरिश अच्छी तरह से हो जाए इसीलिए उसे बेचने का फैसला किया था।
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लोगो को हनीमून, पर क्यों जाना चाहिए ?
लड़कियों की यें 5 आदतें बताती है कि वह आपसे सच्चा प्यार करती है- पांचवी आदत जरूर जाने!
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Recover your password. A password will be e-mailed to you. लोगो को हनीमून, पर क्यों जाना चाहिए ? लड़कियों की यें पाँच आदतें बताती है कि वह आपसे सच्चा प्यार करती है- पांचवी आदत जरूर जाने!
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उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने एक परिपत्र (सर्कुलर) जारी कर छात्रावास में रहने वाली छात्राओं से किसी धरना-प्रदर्शन में शामिल न होने का निर्देश दिया है. ये सर्कुलर कुलानुशासक और परिसर प्रभारी (महिला छात्रावास) डॉ. सरोज यादव ने 13 दिसंबर को जारी किया है.
क्या कहा गया है सर्कुलर में?
सूत्रों ने बताया कि विश्वविद्यालय ने यह सर्कुलर देश के कई हिस्सों में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के मद्देनजर जारी किया है. बता दें, नागरिकता संशोधन बिल पर घमासान जारी है. पश्चिम बंगाल, दिल्ली, मुंबई और अगरतला में लोग बिल के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं देश की राजधानी दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में नागरिकता कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन देखा गया.
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उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने एक परिपत्र जारी कर छात्रावास में रहने वाली छात्राओं से किसी धरना-प्रदर्शन में शामिल न होने का निर्देश दिया है. ये सर्कुलर कुलानुशासक और परिसर प्रभारी डॉ. सरोज यादव ने तेरह दिसंबर को जारी किया है. क्या कहा गया है सर्कुलर में? सूत्रों ने बताया कि विश्वविद्यालय ने यह सर्कुलर देश के कई हिस्सों में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के मद्देनजर जारी किया है. बता दें, नागरिकता संशोधन बिल पर घमासान जारी है. पश्चिम बंगाल, दिल्ली, मुंबई और अगरतला में लोग बिल के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं. वहीं देश की राजधानी दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में नागरिकता कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन देखा गया.
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गुप्तेश्वर पांडेः महीनों पुरानी है राजनीति में एंट्री की स्क्रिप्ट, पर वर्षों पुरानी कसक क्या पूरी हो पाएगी ?
सुशांत (sushant singh rajput) के परिवार को न्याय दिलाने के लिए डीजीपी (DGP) पद पर होते हुए गुप्तेश्वर पांडे (gupteshwar pandey) ने जिस तरह इस मामले में अपनी रुचि दिखाई उस समय ही यह लगने लगा था कि वो अपनी वर्षों पुरानी कसक को इस बार के विधानसभा चुनावों में पूरी करना चाहते हैं.
इस साल 14 जून को सुशांत (sushant singh rajput) की मौत के बाद गुप्तेश्वर पांडे (gupteshwar pandey )का नाम किसी के लिए अनजान नहीं है. बिहार के डीजीपी ( DGP) पद से उन्हें मंगलवार को वीआरएस ( VRS) की स्वीकृति मिल गई. अपने रिटायरमेंट के 5 महीने पहले ही स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने से ये बात उठ रही है कि क्या वो बिहार विधानसभा के लिए चुनाव लड़ने जा रहे है? सुशांत के परिवार को न्याय दिलाने के लिए डीजीपी पद पर होते हुए जिस तरह उन्होंने इस मामले में अपनी रुचि दिखाई उस समय ही यह लगने लगा था कि गुप्तेश्वर पांडे अपनी वर्षों पुरानी कसक को इस बार के विधानसभा चुनावों में पूरी करना चाहते हैं। पर बिहार के स्थानीय लोगों की मानें तो इसकी स्क्रिप्ट आज से 6 महीने पहले ही लिखी जा चुकी थी। हालांकि बुधवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने चुनाव लड़ने जैसै किसी भी विचार को खारिज किया। उन्होंने कहा कि वे अपने शुभचिंतकों से इस मुद्दे पर बात करने की बाद ही कोई फैसला लेंगे.
रिया और सुशांत मामले में उनकी दिलचस्पी और नीतीश कुमार पर बयान बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले गुप्तेश्वर पांडे ने डीजीपी रहते हुए सुशांत के लिए न्याय को बिहार की अस्मिता से जोड़ दिया था. उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल से रिया, सुशांत, मुंबई पुलिस के बारे में जैसे ट्वीट किए उससे लगने लगा था कि उन्होंने बिहार की जनता के बीच जाने का मन बना लिया है. सुशांत मामले में न केवल बिहार पुलिस ने मामला दर्ज किया बल्कि एक पुलिस टीम को मुंबई भी भेजा. जब पुलिस टीम को मुंबई पुलिस का सहयोग नहीं मिला तो गुप्तेश्ववर पांडे ने एक आईपीएस अफसर को भी मुंबई भेजा । बीएमसी ने जब उक्त आईपीएस को क्वैरंटाइन कर लिया उस समय डीजीपी साहब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे। अपने ट्वीटर हैंडल पर रिया चक्रवर्ती द्वारा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ सवाल उठाए जाने पर उन्होंने रिया की औकात को लेकर सवाल खड़ा कर दिया था। इस घटना के बाद शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने गुप्तेश्वर पांडे पर शाहपुर विधानसभा ने चुनाव लड़ने की तैयारी करने का आरोप लगाया था.
कम से कम 3 महीने पहले वीआरएस के लिए किया होगा आवेदन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के बेहद करीबी गुप्तेश्वर पांडे की राजनीति में एन्ट्री इसलिए भी स्क्रिप्टेड लगती है क्योंकि वीआरएस के लिए कम से कम 3 महीने पहले आवेदन दिया होगा. गुप्तेश्वर पांडे 31 जनवरी 2019 को बिहार के डीजीपी बने थे, उनका कार्यकाल 28 फरवरी 2021 तक के लिए था. इसका मतलब कि वे 5 महीने पहले वीआरएस ले रहे हैं. आखिर 5 महीने बाद रिटायर होने वाला शख्स वीआरएस क्यों लेगा?
पहले भी चुनाव लड़ने के लिए ले चुके हैं वीआरएस 2009 में भी गुप्तेश्वर पांडेय ने एक बार वीआरएस लेकर राजनीति में आने की पूरी तैयारी कर ली थी. पर बीजेपी से चुनाव लड़ने की मंशा पर उस समय विराम लग गया जब उन्हें टिकट नहीं मिला. बक्सर लोकसभा से गुप्तेश्वर पांडे को उम्मीद थी कि लालमुनि चौबे का टिकट कट जाएगा पर ऐसा नहीं हुआ. बाद में उन्होंने राज्य सरकार को अर्जी दी कि वो फिर से पुलिस सेवा में आना चाहते हैं और तत्कालीन नीतीश सरकार ने उनकी अर्जी मंजूर कर ली.
विवादों से भी रहा है नाता 2012 में जब गुप्तेश्वर पांडेय मुजफ्फरपुर में आईजी थे तो एक बच्ची का अपहरण हो गया था. बच्ची के परिवार का कहना था कि उसका अपहरण भूमाफिया ने किया है जो उनका घर कब्जा करना चाहते हैं. नवरुणा चक्रवर्ती नाम की यह बच्ची कभी वापस अपने घर नहीं आ सकी. अगवा होने के एक महीने बाद नवरुणा का कंकाल एक नाले में मिला. बाद में डीएनए टेस्ट से पता चला कि कंकाल नवरुणा का ही था. पर परिवार वालों ने अपनी बेटी के वापस आने की उम्मीद नहीं छोड़ी. इस मामले में 2014 में गुप्तेश्वर पांडेय और बिहार पुलिस के 2 कर्मियों के खिलाफ सीबीआई ने जांच भी की थी. सीबीआई के पास 5 सालों से ये केस है और अब भी ये केस बंद नहीं हुआ है. गुप्तेश्वर पांडे के डीजीपी बनने पर नवरुणा के पिता ने कहा कि मेरी बेटी के अपहरण मामले का अभियुक्त ही बिहार का डीजीपी बन गया तो अब क्या न्याय का क्या उम्मीद रखी जाए.
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गुप्तेश्वर पांडेः महीनों पुरानी है राजनीति में एंट्री की स्क्रिप्ट, पर वर्षों पुरानी कसक क्या पूरी हो पाएगी ? सुशांत के परिवार को न्याय दिलाने के लिए डीजीपी पद पर होते हुए गुप्तेश्वर पांडे ने जिस तरह इस मामले में अपनी रुचि दिखाई उस समय ही यह लगने लगा था कि वो अपनी वर्षों पुरानी कसक को इस बार के विधानसभा चुनावों में पूरी करना चाहते हैं. इस साल चौदह जून को सुशांत की मौत के बाद गुप्तेश्वर पांडे का नाम किसी के लिए अनजान नहीं है. बिहार के डीजीपी पद से उन्हें मंगलवार को वीआरएस की स्वीकृति मिल गई. अपने रिटायरमेंट के पाँच महीने पहले ही स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने से ये बात उठ रही है कि क्या वो बिहार विधानसभा के लिए चुनाव लड़ने जा रहे है? सुशांत के परिवार को न्याय दिलाने के लिए डीजीपी पद पर होते हुए जिस तरह उन्होंने इस मामले में अपनी रुचि दिखाई उस समय ही यह लगने लगा था कि गुप्तेश्वर पांडे अपनी वर्षों पुरानी कसक को इस बार के विधानसभा चुनावों में पूरी करना चाहते हैं। पर बिहार के स्थानीय लोगों की मानें तो इसकी स्क्रिप्ट आज से छः महीने पहले ही लिखी जा चुकी थी। हालांकि बुधवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने चुनाव लड़ने जैसै किसी भी विचार को खारिज किया। उन्होंने कहा कि वे अपने शुभचिंतकों से इस मुद्दे पर बात करने की बाद ही कोई फैसला लेंगे. रिया और सुशांत मामले में उनकी दिलचस्पी और नीतीश कुमार पर बयान बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले गुप्तेश्वर पांडे ने डीजीपी रहते हुए सुशांत के लिए न्याय को बिहार की अस्मिता से जोड़ दिया था. उन्होंने अपने ट्वीटर हैंडल से रिया, सुशांत, मुंबई पुलिस के बारे में जैसे ट्वीट किए उससे लगने लगा था कि उन्होंने बिहार की जनता के बीच जाने का मन बना लिया है. सुशांत मामले में न केवल बिहार पुलिस ने मामला दर्ज किया बल्कि एक पुलिस टीम को मुंबई भी भेजा. जब पुलिस टीम को मुंबई पुलिस का सहयोग नहीं मिला तो गुप्तेश्ववर पांडे ने एक आईपीएस अफसर को भी मुंबई भेजा । बीएमसी ने जब उक्त आईपीएस को क्वैरंटाइन कर लिया उस समय डीजीपी साहब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे। अपने ट्वीटर हैंडल पर रिया चक्रवर्ती द्वारा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ सवाल उठाए जाने पर उन्होंने रिया की औकात को लेकर सवाल खड़ा कर दिया था। इस घटना के बाद शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने गुप्तेश्वर पांडे पर शाहपुर विधानसभा ने चुनाव लड़ने की तैयारी करने का आरोप लगाया था. कम से कम तीन महीने पहले वीआरएस के लिए किया होगा आवेदन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी गुप्तेश्वर पांडे की राजनीति में एन्ट्री इसलिए भी स्क्रिप्टेड लगती है क्योंकि वीआरएस के लिए कम से कम तीन महीने पहले आवेदन दिया होगा. गुप्तेश्वर पांडे इकतीस जनवरी दो हज़ार उन्नीस को बिहार के डीजीपी बने थे, उनका कार्यकाल अट्ठाईस फरवरी दो हज़ार इक्कीस तक के लिए था. इसका मतलब कि वे पाँच महीने पहले वीआरएस ले रहे हैं. आखिर पाँच महीने बाद रिटायर होने वाला शख्स वीआरएस क्यों लेगा? पहले भी चुनाव लड़ने के लिए ले चुके हैं वीआरएस दो हज़ार नौ में भी गुप्तेश्वर पांडेय ने एक बार वीआरएस लेकर राजनीति में आने की पूरी तैयारी कर ली थी. पर बीजेपी से चुनाव लड़ने की मंशा पर उस समय विराम लग गया जब उन्हें टिकट नहीं मिला. बक्सर लोकसभा से गुप्तेश्वर पांडे को उम्मीद थी कि लालमुनि चौबे का टिकट कट जाएगा पर ऐसा नहीं हुआ. बाद में उन्होंने राज्य सरकार को अर्जी दी कि वो फिर से पुलिस सेवा में आना चाहते हैं और तत्कालीन नीतीश सरकार ने उनकी अर्जी मंजूर कर ली. विवादों से भी रहा है नाता दो हज़ार बारह में जब गुप्तेश्वर पांडेय मुजफ्फरपुर में आईजी थे तो एक बच्ची का अपहरण हो गया था. बच्ची के परिवार का कहना था कि उसका अपहरण भूमाफिया ने किया है जो उनका घर कब्जा करना चाहते हैं. नवरुणा चक्रवर्ती नाम की यह बच्ची कभी वापस अपने घर नहीं आ सकी. अगवा होने के एक महीने बाद नवरुणा का कंकाल एक नाले में मिला. बाद में डीएनए टेस्ट से पता चला कि कंकाल नवरुणा का ही था. पर परिवार वालों ने अपनी बेटी के वापस आने की उम्मीद नहीं छोड़ी. इस मामले में दो हज़ार चौदह में गुप्तेश्वर पांडेय और बिहार पुलिस के दो कर्मियों के खिलाफ सीबीआई ने जांच भी की थी. सीबीआई के पास पाँच सालों से ये केस है और अब भी ये केस बंद नहीं हुआ है. गुप्तेश्वर पांडे के डीजीपी बनने पर नवरुणा के पिता ने कहा कि मेरी बेटी के अपहरण मामले का अभियुक्त ही बिहार का डीजीपी बन गया तो अब क्या न्याय का क्या उम्मीद रखी जाए.
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यह ऐतिहासिक स्थल कोलोन में सबसे महत्वपूर्ण है। इसके अलावा कोलोन कैथेड्रल दुनिया के सबसे बड़े चर्चों में सम्मान के स्थान पर है, और कुछ समय पहले इसे सबसे बड़ा माना जाता था। पर्यटक भव्य वास्तुकला और अंदर एक विशेष वातावरण से आकर्षित होते हैं, इस संरचना का इतिहास लंबा और रोमांचक है।
कोलोन कैथेड्रल कहां है?
यदि आप इस ऐतिहासिक स्थल में रुचि रखते हैं और इसे देखने की योजना बनाते हैं, तो आपको सबसे पहले जो जानने की आवश्यकता है वह कोलोन कैथेड्रल का पता है। शहर जर्मनी के पश्चिमी हिस्से में स्थित है। कैथेड्रल शहर के मुख्य स्टेशन के बहुत करीब है। यदि आप बस पसंद करते हैं, तो कोई समस्या नहीं होगी, क्योंकि मुख्य बस स्टेशन रेलवे के बहुत करीब स्थित है। यदि आप शहर के मानचित्र को देखते हैं, तो कोलोन कैथेड्रल का पता आवश्यक रूप से इंगित किया गया है और ऐसा लगता हैः डोमक्लोस्टर 4 50667 कोल्न, Deutschland।
यह इमारत अपनी भव्यता और भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। कोलोन कैथेड्रल के टावरों की ऊंचाई 157 मीटर है, और छत के शिखर तक इमारत की ऊंचाई 60 मीटर है। इन दो टावरों को शहर में कहीं से भी देखा जा सकता है, और शाम को दृश्य विशेष रूप से शानदार है। तथ्य यह है कि मुखौटा एक हरे रंग के रंग से हाइलाइट किया जाता है, जो कि अंधेरे पत्थरों पर विशेष रूप से आश्चर्यजनक दिखता है।
लेकिन न केवल कोलोन कैथेड्रल की ऊंचाई इस ऐतिहासिक को बहुत प्रसिद्ध बनाती है। इमारत खुद राजसी और अद्भुत है। कैथेड्रल की लंबाई 144 मीटर है, और इसका क्षेत्र 8500 वर्ग मीटर है। मीटर।
कई शीशियों की संरचना, सहायक पायलटों और gratings के माध्यम से नक्काशी, मूर्तिकला प्लास्टिक और संरचना के सभी घटकों की ऊंचाई में एक विशेषता ड्रॉप के रूप में कई गहने के साथ संयुक्त है।
कोलोन कैथेड्रल की गोथिक शैली राइन पत्थर के भूरे रंग के रंग से समर्थित है। अंदर, कोलोन कैथेड्रल कम सुंदर नहीं है। उनका मुख्य खजाना मागी के अवशेषों के साथ सुनहरा मकबरा है। इसके अलावा प्रसिद्ध मिलान मैडोना और ओक दो हीटर क्रॉस हीरो है।
कोलोन कैथेड्रल का निर्माण 13 वीं शताब्दी में जला चर्च की साइट पर शुरू हुआ था। बहुत शुरुआत से, जर्मनी में कोलोन कैथेड्रल एक बड़े पैमाने पर बनाया गया था और इसे भव्य और राजसी संरचना के रूप में माना गया था। इसके अलावा, इस अवधि के दौरान, मागी के अवशेष, सैन्य योग्यता के लिए चांसलर रेनल्ड वॉन दासेल को दान दिए गए, उन्हें शहर में लाया गया, इसलिए इस तरह के धन के लिए एक मंदिर की आवश्यकता थी।
कोलोन कैथेड्रल गेरहार्ड के वास्तुकार वास्तुकला की गोथिक शैली की सभी विशेषताओं को पूरी तरह से जोड़ सकते थे। निर्माण 1248 में शुरू हुआ, लेकिन पहले से ही 1450 में इसे योद्धा और महामारी के कारण निलंबित कर दिया गया था। फिर इसे 1842 में किंग फ्रेडरिक विलियम चतुर्थ द्वारा नवीनीकृत किया गया था और 1880 तक निर्माण के पूरा होने के सम्मान में एक उत्सव आयोजित किया गया था।
वर्तमान में, चर्च किसी भी अन्य में चर्च सेवाओं का आयोजन करता है। लेकिन इसके अलावा, कैथेड्रल का निर्माण भी एक संग्रहालय है, जहां आगंतुकों को चित्रों, मूर्तियों और विभिन्न गहने के विशाल संग्रह के साथ प्रस्तुत किया जाता है।
जर्मनी में कोलोन कैथेड्रल अपनी दीवारों की चीजों से रहता है जो सराहना करना असंभव है! इनमें मध्ययुगीन कला के इस तरह के स्मारक गाना बजानेवालों या मूर्तियों में बेंच के रूप में शामिल हैं, वहां आप मसीह, वर्जिन मैरी और प्रेरितों की मूर्तियां भी देख सकते हैं।
वास्तुकला की विशिष्टताओं के लिए और साथ ही, कोलोन कैथेड्रल की प्रसिद्ध रंगीन ग्लास खिड़कियों को भी माना जा सकता है। वे राजाओं, संतों और कुछ बाइबिल के दृश्यों को दर्शाते हैं। कैमरे के लेंस के साथ पूरी तस्वीर को कवर करें केवल एक सभ्य दूरी से ही। कैथेड्रल के मूल्यों में से स्टीफन लोचनर "प्रेरितों की पूजा" का काम भी है। आप मुफ्त में कैथेड्रल जा सकते हैं, केवल टावरों के दौरे के लिए पैसा लिया जाएगा।
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यह ऐतिहासिक स्थल कोलोन में सबसे महत्वपूर्ण है। इसके अलावा कोलोन कैथेड्रल दुनिया के सबसे बड़े चर्चों में सम्मान के स्थान पर है, और कुछ समय पहले इसे सबसे बड़ा माना जाता था। पर्यटक भव्य वास्तुकला और अंदर एक विशेष वातावरण से आकर्षित होते हैं, इस संरचना का इतिहास लंबा और रोमांचक है। कोलोन कैथेड्रल कहां है? यदि आप इस ऐतिहासिक स्थल में रुचि रखते हैं और इसे देखने की योजना बनाते हैं, तो आपको सबसे पहले जो जानने की आवश्यकता है वह कोलोन कैथेड्रल का पता है। शहर जर्मनी के पश्चिमी हिस्से में स्थित है। कैथेड्रल शहर के मुख्य स्टेशन के बहुत करीब है। यदि आप बस पसंद करते हैं, तो कोई समस्या नहीं होगी, क्योंकि मुख्य बस स्टेशन रेलवे के बहुत करीब स्थित है। यदि आप शहर के मानचित्र को देखते हैं, तो कोलोन कैथेड्रल का पता आवश्यक रूप से इंगित किया गया है और ऐसा लगता हैः डोमक्लोस्टर चार पचास हज़ार छः सौ सरसठ कोल्न, Deutschland। यह इमारत अपनी भव्यता और भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। कोलोन कैथेड्रल के टावरों की ऊंचाई एक सौ सत्तावन मीटर है, और छत के शिखर तक इमारत की ऊंचाई साठ मीटर है। इन दो टावरों को शहर में कहीं से भी देखा जा सकता है, और शाम को दृश्य विशेष रूप से शानदार है। तथ्य यह है कि मुखौटा एक हरे रंग के रंग से हाइलाइट किया जाता है, जो कि अंधेरे पत्थरों पर विशेष रूप से आश्चर्यजनक दिखता है। लेकिन न केवल कोलोन कैथेड्रल की ऊंचाई इस ऐतिहासिक को बहुत प्रसिद्ध बनाती है। इमारत खुद राजसी और अद्भुत है। कैथेड्रल की लंबाई एक सौ चौंतालीस मीटर है, और इसका क्षेत्र आठ हज़ार पाँच सौ वर्ग मीटर है। मीटर। कई शीशियों की संरचना, सहायक पायलटों और gratings के माध्यम से नक्काशी, मूर्तिकला प्लास्टिक और संरचना के सभी घटकों की ऊंचाई में एक विशेषता ड्रॉप के रूप में कई गहने के साथ संयुक्त है। कोलोन कैथेड्रल की गोथिक शैली राइन पत्थर के भूरे रंग के रंग से समर्थित है। अंदर, कोलोन कैथेड्रल कम सुंदर नहीं है। उनका मुख्य खजाना मागी के अवशेषों के साथ सुनहरा मकबरा है। इसके अलावा प्रसिद्ध मिलान मैडोना और ओक दो हीटर क्रॉस हीरो है। कोलोन कैथेड्रल का निर्माण तेरह वीं शताब्दी में जला चर्च की साइट पर शुरू हुआ था। बहुत शुरुआत से, जर्मनी में कोलोन कैथेड्रल एक बड़े पैमाने पर बनाया गया था और इसे भव्य और राजसी संरचना के रूप में माना गया था। इसके अलावा, इस अवधि के दौरान, मागी के अवशेष, सैन्य योग्यता के लिए चांसलर रेनल्ड वॉन दासेल को दान दिए गए, उन्हें शहर में लाया गया, इसलिए इस तरह के धन के लिए एक मंदिर की आवश्यकता थी। कोलोन कैथेड्रल गेरहार्ड के वास्तुकार वास्तुकला की गोथिक शैली की सभी विशेषताओं को पूरी तरह से जोड़ सकते थे। निर्माण एक हज़ार दो सौ अड़तालीस में शुरू हुआ, लेकिन पहले से ही एक हज़ार चार सौ पचास में इसे योद्धा और महामारी के कारण निलंबित कर दिया गया था। फिर इसे एक हज़ार आठ सौ बयालीस में किंग फ्रेडरिक विलियम चतुर्थ द्वारा नवीनीकृत किया गया था और एक हज़ार आठ सौ अस्सी तक निर्माण के पूरा होने के सम्मान में एक उत्सव आयोजित किया गया था। वर्तमान में, चर्च किसी भी अन्य में चर्च सेवाओं का आयोजन करता है। लेकिन इसके अलावा, कैथेड्रल का निर्माण भी एक संग्रहालय है, जहां आगंतुकों को चित्रों, मूर्तियों और विभिन्न गहने के विशाल संग्रह के साथ प्रस्तुत किया जाता है। जर्मनी में कोलोन कैथेड्रल अपनी दीवारों की चीजों से रहता है जो सराहना करना असंभव है! इनमें मध्ययुगीन कला के इस तरह के स्मारक गाना बजानेवालों या मूर्तियों में बेंच के रूप में शामिल हैं, वहां आप मसीह, वर्जिन मैरी और प्रेरितों की मूर्तियां भी देख सकते हैं। वास्तुकला की विशिष्टताओं के लिए और साथ ही, कोलोन कैथेड्रल की प्रसिद्ध रंगीन ग्लास खिड़कियों को भी माना जा सकता है। वे राजाओं, संतों और कुछ बाइबिल के दृश्यों को दर्शाते हैं। कैमरे के लेंस के साथ पूरी तस्वीर को कवर करें केवल एक सभ्य दूरी से ही। कैथेड्रल के मूल्यों में से स्टीफन लोचनर "प्रेरितों की पूजा" का काम भी है। आप मुफ्त में कैथेड्रल जा सकते हैं, केवल टावरों के दौरे के लिए पैसा लिया जाएगा।
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Mathura: रामलीला कमेटी गोवर्धन के तत्वाधान में आयोजित रामलीला महोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
महोत्सव कार्यक्रम के शुभारंभ शिव पार्वती संवाद लीला का आयोजन किया, जिसका संवाद कुशल मंचन कस्बे के सुप्रसिद्ध कलाकार नरेन्द्र शर्मा और नरेश उपाध्याय द्वारा मंच पर किया गया।
वहीं, शिव पार्वती संवाद लीला का मंचन पूजन अध्यक्ष गौतम खंडेलवाल और उनके पदाधिकारियों द्वारा संचालित किया गया।
इसमें शिव शंकर की भूमिका नरेन्द्र शर्मा वा माता पार्वती की भूमिका नरेश उपाध्याय निभा रहे थे। वहीं, सभी दर्शक लीला का आनंद ले रहे थे।
इस अवसर पर अध्यक्ष गौतम खंडेलवाल उपाध्यक्ष लक्ष्मण मुखिया विष्णु सेठ, पुरुषोत्तम शर्मा उर्फ दद्दा डा विनोद दीक्षित, राजेंद्र अग्रवाल, महेश स्वामी आदि तमाम लोग उपस्थित रहे। ।
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Mathura: रामलीला कमेटी गोवर्धन के तत्वाधान में आयोजित रामलीला महोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। महोत्सव कार्यक्रम के शुभारंभ शिव पार्वती संवाद लीला का आयोजन किया, जिसका संवाद कुशल मंचन कस्बे के सुप्रसिद्ध कलाकार नरेन्द्र शर्मा और नरेश उपाध्याय द्वारा मंच पर किया गया। वहीं, शिव पार्वती संवाद लीला का मंचन पूजन अध्यक्ष गौतम खंडेलवाल और उनके पदाधिकारियों द्वारा संचालित किया गया। इसमें शिव शंकर की भूमिका नरेन्द्र शर्मा वा माता पार्वती की भूमिका नरेश उपाध्याय निभा रहे थे। वहीं, सभी दर्शक लीला का आनंद ले रहे थे। इस अवसर पर अध्यक्ष गौतम खंडेलवाल उपाध्यक्ष लक्ष्मण मुखिया विष्णु सेठ, पुरुषोत्तम शर्मा उर्फ दद्दा डा विनोद दीक्षित, राजेंद्र अग्रवाल, महेश स्वामी आदि तमाम लोग उपस्थित रहे। ।
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शिवपुरी,(एजेंसी/वार्ता):मध्यप्रदेश के शिवपुरी में जन्मदिन पार्टी में डीजे बजाने को लेकर हुए विवाद के फलस्वरूप एक युवक की उसके पड़ोस में रहने वाले युवक ने गोली मारकर हत्या कर दी।
पुलिस ने कल देर रात की इस घटना के सिलसिले में आरोपियों को गिरफ्तार करके बंदूक और लगभग 5 कारतूस जप्त कर लिए हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मृतक का नाम मोनू वर्मा उर्फ भूरा (32) है। आरोपियों की पहचान योगेंद्र तोमर और बृजेंद्र तोमर के रूप में हुयी है।
रात लगभग 12 बजे अब्दुल कलाम कॉलोनी में रहने वाले मोनू वर्मा के घर जन्मदिन की पार्टी चल रही थी, जिसमें डीजे बज रहा था। उसके पड़ोस में रहने वाले योगेंद्र तोमर ने डीजे बंद करने के लिए कहा।
इसी बात को लेकर उनमें विवाद होता रहा और योगेंद्र ने बंदूक से गोली मारकर मोनू की हत्या कर दी।
पुलिस ने आरोपियों योगेंद्र और विजेंद्र तोमर को गिरफ्तार कर लिया है।
-(एजेंसी/वार्ता)
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शिवपुरी,:मध्यप्रदेश के शिवपुरी में जन्मदिन पार्टी में डीजे बजाने को लेकर हुए विवाद के फलस्वरूप एक युवक की उसके पड़ोस में रहने वाले युवक ने गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने कल देर रात की इस घटना के सिलसिले में आरोपियों को गिरफ्तार करके बंदूक और लगभग पाँच कारतूस जप्त कर लिए हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मृतक का नाम मोनू वर्मा उर्फ भूरा है। आरोपियों की पहचान योगेंद्र तोमर और बृजेंद्र तोमर के रूप में हुयी है। रात लगभग बारह बजे अब्दुल कलाम कॉलोनी में रहने वाले मोनू वर्मा के घर जन्मदिन की पार्टी चल रही थी, जिसमें डीजे बज रहा था। उसके पड़ोस में रहने वाले योगेंद्र तोमर ने डीजे बंद करने के लिए कहा। इसी बात को लेकर उनमें विवाद होता रहा और योगेंद्र ने बंदूक से गोली मारकर मोनू की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपियों योगेंद्र और विजेंद्र तोमर को गिरफ्तार कर लिया है। - यह भी पढ़ेः- वजन कम करने के लिए आप कीजिए आप ककड़ी का सेवन, ये कई पोषक तत्वों से भरपूर!
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यूक्रेन के प्रधान मंत्री एन। अजरोव ने हाल ही में बयान दिया है कि यूक्रेन द्विपक्षीय संबंधों के मामले में रूस से दूर जा रहा है। इसके अलावा, सरकार के अध्यक्ष ने कहा, रूस खुद को इसके लिए दोषी मानता है। गैस अनुबंध, जो यूक्रेन के लिए बेहद नुकसानदेह है, अपनी सरकार को पक्ष में नई भागीदारी प्राप्त करने के लिए मजबूर करता है। और ये संबंध हमेशा अप्रभावी नहीं होते हैं।
"हर दिन इस असमान समझौते की कार्रवाई एक राज्य को दूसरे से अलग करती है, उन दोनों के बीच तेजी से ठंडा होने वाला संबंध। " यूक्रेनी प्रधानमंत्री ने कहा। उनके बॉस के उन्हीं शब्दों की पुष्टि उनके प्रेस सचिव वी। लुक्यानेंको ने की। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल समझौता यूक्रेनी सरकार को न केवल नीले ईंधन की आपूर्ति में नए विकल्पों की तलाश करने के लिए मजबूर करता है, बल्कि अपने स्वयं के उत्पादन को बढ़ाने के लिए त्वरित गति से भी। तब और बड़े स्तर पर, हम यह कह सकते हैं कि यूक्रेनी प्रधान मंत्री ने रूसी सरकार पर अल्प-दर्शन का आरोप लगाया, क्योंकि थोड़े समय के लिए एक तरफा लाभ प्राप्त करना दीर्घकालिक द्विपक्षीय संबंधों की गारंटी के रूप में काम नहीं कर सकता है। और किसी भी तरह से गैस समझौता दोनों राज्यों के बीच संबंधों को मजबूत करने का काम नहीं कर सकता।
यह बयान Mykola Azarov की नीदरलैंड्स यात्रा के बाद घोषित किया गया था, जहां यूक्रेनी राजनेताओं और रॉयल डच शेल के नेतृत्व में बातचीत हुई थी। वार्ता के हिस्से के रूप में, एक निश्चित समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जो कि युज़ोवस्की क्षेत्र में शेल गैस के विकास और उत्पादन के उद्देश्य से काम की शुरुआत के रूप में काम करना चाहिए। यूक्रेनी प्रधान मंत्री के अनुसार, वर्ष 2015 के आसपास, कंपनी पहले से ही गैस के पहले बड़े संस्करणों को प्राप्त कर सकती है।
स्मरण करो कि इस वर्ष के जनवरी के अंत में, यूक्रेनी सरकार के प्रतिनिधियों और रॉयल डच शेल के प्रबंधन ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके अनुसार कंपनी ने पहले चरण के काम में 410 मिलियन डॉलर का निवेश करने के लिए खुद को प्रतिबद्ध किया। इन निवेशों को 4-5 वर्षों में महारत हासिल होनी चाहिए। कुल निवेश 10 बिलियन डॉलर के ऑर्डर पर हो सकता है।
विशेषज्ञ के अनुमानों के अनुसार, युज़ोवस्की क्षेत्र में शेल गैस का उत्पादन प्रति वर्ष 20 बिलियन क्यूबिक मीटर है, जो यूक्रेन में वर्तमान में उत्पादित प्राकृतिक गैस की मात्रा के बराबर है। कुल गैस मात्रा 4 ट्रिलियन टन गैस के घन मीटर के बारे में है। एन। अजरोव के अनुसार, काम बहुत मुश्किल है, लेकिन यह समझौता पूरी तरह से यूक्रेनी राज्य के राष्ट्रीय हितों को पूरा करता है। इसके अलावा, अंततः संधि देश को अपनी गैस उपलब्ध कराने से जुड़ी समस्याओं को हल करने में मदद करेगी।
रॉयल डच शेल कंपनी के अलावा, संयुक्त राज्य अमेरिका - शेवरॉन की एक और गंभीर ऊर्जा कंपनी - यूक्रेन में शेल गैस के विकास और उत्पादन में भी संलग्न हो सकती है। याद करें कि मई 2012 में, इस कंपनी ने ओलेस्काया क्षेत्र पर हाइड्रोकार्बन के उत्पादन के लिए प्रतियोगिता जीती थी। कंपनी के प्रतिनिधियों ने विचार के लिए यूक्रेनी सरकार के लिए एक मसौदा उत्पादन साझाकरण समझौते को प्रस्तुत किया। हस्ताक्षर करने से पहले, इसे Ivano-Frankivsk और Lviv क्षेत्रीय परिषदों द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए, क्योंकि जमा राशि इन क्षेत्रों के क्षेत्रों में स्थित है।
वर्तमान में इस परियोजना पर कोई विकास नहीं हुआ है। कारण यह है कि अगस्त में, इवानो-फ्रैंकिवस्क क्षेत्रीय परिषद ने परियोजना को अस्वीकार कर दिया, इसे संशोधन के लिए वापस भेज दिया। क्षेत्रीय परिषद की नियमित बैठक दूसरे दिन होनी चाहिए, जिस पर इस मसौदे पर विचार करने की योजना है। ऊर्जा और कोयला उद्योग के यूक्रेनी मंत्री एडुआर्ड स्टैवत्स्की ने कहा कि सभी टिप्पणियां समझौते के लिए की गई थीं, इसलिए उन्होंने उम्मीद जताई कि स्थानीय अधिकारी दस्तावेज़ को मंजूरी देंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस परियोजना के लिए भूवैज्ञानिक अन्वेषण में न्यूनतम निवेश 300 मिलियन डॉलर के बारे में हो सकता है, और क्षेत्र में गैस की मात्रा लगभग 3 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर है।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि शेल गैस उद्योग में, यूक्रेनी राज्य अच्छी तरह से पड़ोसी पोलैंड पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, जो यूरोप में पहली बार यह घोषित करने के लिए था कि उसने इस प्रकार के ईंधन का उत्पादन शुरू कर दिया था। पोलैंड के पर्यावरण मंत्री, पीटर वोज्नियाक के बयान के अनुसार, इस साल के अगस्त के अंत में बनाया गया था, जुलाई 21 पर शेल गैस का उत्पादन शुरू हुआ, और तब से यह बिना रुके चल रहा है। इसके अलावा, यूरोपीय संघ के देशों में उत्पादन की मात्रा बहुत अधिक है। साथ ही वोज्नियाक ने कहा कि वर्तमान समय में यह कहना जल्दबाजी होगी कि देश वाणिज्यिक परिचालन में जाने का इरादा रखता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि लेन ऊर्जा पोलैंड दैनिक पोलैंड के उत्तर में स्थित एक परीक्षण कुएं पर लगभग 8 हजार घन मीटर गैस का उत्पादन करता है।
हम यह भी ध्यान दें कि पोलैंड में पूरे पश्चिमी यूरोपीय क्षेत्र में शेल गैस के सबसे बड़े भंडार हैं। पोलिश भूवैज्ञानिक संस्थान द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, शेल गैस की अधिकतम मात्रा, जो पोलिश क्षेत्र पर स्थित है, लगभग 2 ट्रिलियन क्यूबिक मीटर है। पुनर्प्राप्त करने योग्य भंडार लगभग 345-770 बिलियन क्यूबिक मीटर हैं। यह राशि 35 से 65 वर्षों तक की अवधि के लिए खपत के लिए पर्याप्त है। हालांकि, हाल तक, गंभीर गैस उत्पादन स्थापित करने के सभी प्रयास असफल रहे थे। यदि पोलैंड शेल के निष्कर्षण को समायोजित करने में सफल होता है, तो राज्य रूसी नीले ईंधन पर अपनी निर्भरता को काफी कम कर सकता है।
इस प्रकार, पोलैंड में, वार्षिक गैस की खपत 15 बिलियन क्यूबिक मीटर तक पहुंच जाती है। इनमें से लगभग 70 प्रतिशत वॉल्यूम रूसी आपूर्ति द्वारा ठीक प्रदान किए जाते हैं।
अगर हम यूक्रेन के बारे में बात करते हैं, तो Ukrtransgaz द्वारा प्रदान किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश ने पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में पिछले छह महीनों में रूस से गैस की आपूर्ति लगभग 30 प्रतिशत में कटौती की है - 15,3 बिलियन क्यूबिक मीटर तक।
विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में अभी भी एक छोटी संभावना है कि यूक्रेन शेल गैस का सक्रिय विकास शुरू कर देगा, जिससे रूसी ईंधन को छोड़ना संभव होगा। यह कुछ समस्याओं के कारण हो सकता है, जिसमें राजनीतिक (विकास राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के अधीन हो सकता है), वाणिज्यिक (जमाओं को लाभप्रद रूप से विकसित किया जा सकता है), भूवैज्ञानिक (शेल के महत्वपूर्ण भंडार का पता लगाना संभव है) और पर्यावरण (पर्यावरण प्रदूषण का खतरा संभव है)।
हालांकि, यूक्रेनी खेतों में शेल गैस का उत्पादन दोनों देशों के बीच संबंधों के ठंडा होने का एकमात्र कारण नहीं है। विक्टर Yanukovych, विशेष रूप से, यूक्रेनी संसद को अपने वार्षिक संदेश में यह कहा। यह कहा जाना चाहिए कि यह संदेश काफी उत्सुक था, क्योंकि यह रूस के साथ ठीक-ठाक संबंध था जिसे उन्होंने राज्य की विदेश नीति की प्राथमिकता के रूप में पहचाना था।
उसी समय, राज्य के प्रमुख ने कहा कि दोनों देशों के प्रतिनिधि कई मूलभूत मुद्दों पर प्रगति हासिल नहीं कर सके। जो कोई भी देशों के बीच "शपथ दोस्ती" में थोड़ा दिलचस्पी लेता है, वह जानता है कि गैस की समस्या के अलावा अन्य भी हैं। इस प्रकार, रूसी ईंधन की लागत में कमी के बिना, Yanukovych ने कहा कि अज़रबैजान ईंधन की आपूर्ति के वैकल्पिक तरीके के रूप में व्हाइट स्ट्रीम परियोजना को फिर से स्थापित करना आवश्यक था। इसके अलावा, ट्रांस-कैस्पियन गैस पाइपलाइन के निर्माण की शुरुआत के मामले में, कजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान से गैस की आपूर्ति की संभावना है। यह स्पष्ट है कि ये सभी बयान रूस के "दक्षिण स्ट्रीम" के विरोध में किए जा रहे हैं।
औद्योगिक क्षेत्र में समस्याएं हैं। तो, 2012 के अंत में, रूसी उद्योग और व्यापार मंत्रालय ने रूसी कार बिल्डरों के लिए राज्य समर्थन की पेशकश की। यह एक लक्ष्य के साथ किया गया था - यूक्रेनी प्रतियोगियों से "उनके" संरक्षण के लिए बनाने के लिए - क्रायुकोवस्की कार-बिल्डिंग प्लांट और अज़ोवमाश। एक साल पहले, रूसी, बेलारूसी और कजाख कारखानों ने एक निश्चित संगठन बनाया, जिसने वास्तव में, इन उत्पादों के यूक्रेनी निर्यात को इन देशों में अवरुद्ध कर दिया। इस बीच, पूर्व समय में, रूस को यूक्रेनी वैगन निर्यात की मात्रा 45-50 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके अलावा, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि रूसी सरकार ने हाल ही में लातविया में कारों के निर्माण के अपने इरादे की घोषणा की, और यूक्रेन में नहीं।
Еще один аспект, который, по мнению ряда экспертов не способствует укреплению двусторонних отношений - это оружейный рынок.
इसलिए, बहुत पहले नहीं, यूक्रेनी सरकार ने एशिया-प्रशांत हथियारों के बाजार में रूसी प्रतियोगियों को दबाने के अपने इरादे के बारे में एक बयान दिया था। यूक्रेनी योजनाओं के अनुसार, Ukrspetsexport अगले पांच वर्षों में 5 अरबों डॉलर के बराबर राशि में भारत, चीन, थाईलैंड, वियतनाम और इंडोनेशिया को हथियार और सैन्य उपकरण निर्यात करने का इरादा रखता है। ये देश, हम याद करते हैं, रूसी सैन्य निर्यातकों के पारंपरिक खरीदार हैं।
देशों के बीच कई व्यापार युद्धों के बारे में मत भूलना। रूसियों को यूक्रेनी चीज, दूध और मांस या चिकन पसंद नहीं था। इसके अलावा, ऑटोमोबाइल युद्ध थे, जब रूस ने आयातित कारों के लिए उपयोग शुल्क पेश किया, और यूक्रेन ने जवाब में, केवल रूस के लिए आपूर्ति की गई बसों और कारों के लिए एक ही शुल्क पेश किया।
ऐसी "दोस्ती" के कई और उदाहरण हैं। और ऐसे रिश्तों को शायद ही उज्ज्वल और बादल रहित कहा जा सकता है। इसलिए, यह काफी स्पष्ट है कि यूक्रेनी राज्य के प्रमुख के शब्द कूटनीति, नियमित वाक्यांशों के लिए एक श्रद्धांजलि से ज्यादा कुछ नहीं हैं।
एक ही समय में, यूक्रेनी राजनेताओं के अनुसार, विशेष रूप से, Verkhovna Rada उप इगोर Markov, रूस की घोषणा व्यावहारिक रूप से यूक्रेन के मुख्य दुश्मन वर्तमान यूक्रेनी राजनीतिक शासन के पतन का कारण होगा। हां, वी। Yanukovych ने खुद पहले कहा था कि पर्याप्त व्यापार, ऊर्जा निर्भरता और उत्पाद बिक्री बाजारों के कारण यूक्रेन और रूस के बीच संबंधों का कोई विकल्प नहीं है। और, अगले शीतलन के बावजूद, द्विपक्षीय संबंध अभी भी विकसित हो रहे हैं। यह विमान उद्योग में संयुक्त परियोजनाओं (An-124, An-158, An-148, An-70), अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के निर्माण (Dnepr रॉकेट-स्पेस सिस्टम परियोजना), यूक्रेनी रेलवे के आधुनिकीकरण, Khmelnitsky परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पूरा होने से स्पष्ट है।
प्रयुक्त सामग्रीः
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यूक्रेन के प्रधान मंत्री एन। अजरोव ने हाल ही में बयान दिया है कि यूक्रेन द्विपक्षीय संबंधों के मामले में रूस से दूर जा रहा है। इसके अलावा, सरकार के अध्यक्ष ने कहा, रूस खुद को इसके लिए दोषी मानता है। गैस अनुबंध, जो यूक्रेन के लिए बेहद नुकसानदेह है, अपनी सरकार को पक्ष में नई भागीदारी प्राप्त करने के लिए मजबूर करता है। और ये संबंध हमेशा अप्रभावी नहीं होते हैं। "हर दिन इस असमान समझौते की कार्रवाई एक राज्य को दूसरे से अलग करती है, उन दोनों के बीच तेजी से ठंडा होने वाला संबंध। " यूक्रेनी प्रधानमंत्री ने कहा। उनके बॉस के उन्हीं शब्दों की पुष्टि उनके प्रेस सचिव वी। लुक्यानेंको ने की। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल समझौता यूक्रेनी सरकार को न केवल नीले ईंधन की आपूर्ति में नए विकल्पों की तलाश करने के लिए मजबूर करता है, बल्कि अपने स्वयं के उत्पादन को बढ़ाने के लिए त्वरित गति से भी। तब और बड़े स्तर पर, हम यह कह सकते हैं कि यूक्रेनी प्रधान मंत्री ने रूसी सरकार पर अल्प-दर्शन का आरोप लगाया, क्योंकि थोड़े समय के लिए एक तरफा लाभ प्राप्त करना दीर्घकालिक द्विपक्षीय संबंधों की गारंटी के रूप में काम नहीं कर सकता है। और किसी भी तरह से गैस समझौता दोनों राज्यों के बीच संबंधों को मजबूत करने का काम नहीं कर सकता। यह बयान Mykola Azarov की नीदरलैंड्स यात्रा के बाद घोषित किया गया था, जहां यूक्रेनी राजनेताओं और रॉयल डच शेल के नेतृत्व में बातचीत हुई थी। वार्ता के हिस्से के रूप में, एक निश्चित समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जो कि युज़ोवस्की क्षेत्र में शेल गैस के विकास और उत्पादन के उद्देश्य से काम की शुरुआत के रूप में काम करना चाहिए। यूक्रेनी प्रधान मंत्री के अनुसार, वर्ष दो हज़ार पंद्रह के आसपास, कंपनी पहले से ही गैस के पहले बड़े संस्करणों को प्राप्त कर सकती है। स्मरण करो कि इस वर्ष के जनवरी के अंत में, यूक्रेनी सरकार के प्रतिनिधियों और रॉयल डच शेल के प्रबंधन ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके अनुसार कंपनी ने पहले चरण के काम में चार सौ दस मिलियन डॉलर का निवेश करने के लिए खुद को प्रतिबद्ध किया। इन निवेशों को चार-पाँच वर्षों में महारत हासिल होनी चाहिए। कुल निवेश दस बिलियन डॉलर के ऑर्डर पर हो सकता है। विशेषज्ञ के अनुमानों के अनुसार, युज़ोवस्की क्षेत्र में शेल गैस का उत्पादन प्रति वर्ष बीस बिलियन क्यूबिक मीटर है, जो यूक्रेन में वर्तमान में उत्पादित प्राकृतिक गैस की मात्रा के बराबर है। कुल गैस मात्रा चार ट्रिलियन टन गैस के घन मीटर के बारे में है। एन। अजरोव के अनुसार, काम बहुत मुश्किल है, लेकिन यह समझौता पूरी तरह से यूक्रेनी राज्य के राष्ट्रीय हितों को पूरा करता है। इसके अलावा, अंततः संधि देश को अपनी गैस उपलब्ध कराने से जुड़ी समस्याओं को हल करने में मदद करेगी। रॉयल डच शेल कंपनी के अलावा, संयुक्त राज्य अमेरिका - शेवरॉन की एक और गंभीर ऊर्जा कंपनी - यूक्रेन में शेल गैस के विकास और उत्पादन में भी संलग्न हो सकती है। याद करें कि मई दो हज़ार बारह में, इस कंपनी ने ओलेस्काया क्षेत्र पर हाइड्रोकार्बन के उत्पादन के लिए प्रतियोगिता जीती थी। कंपनी के प्रतिनिधियों ने विचार के लिए यूक्रेनी सरकार के लिए एक मसौदा उत्पादन साझाकरण समझौते को प्रस्तुत किया। हस्ताक्षर करने से पहले, इसे Ivano-Frankivsk और Lviv क्षेत्रीय परिषदों द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए, क्योंकि जमा राशि इन क्षेत्रों के क्षेत्रों में स्थित है। वर्तमान में इस परियोजना पर कोई विकास नहीं हुआ है। कारण यह है कि अगस्त में, इवानो-फ्रैंकिवस्क क्षेत्रीय परिषद ने परियोजना को अस्वीकार कर दिया, इसे संशोधन के लिए वापस भेज दिया। क्षेत्रीय परिषद की नियमित बैठक दूसरे दिन होनी चाहिए, जिस पर इस मसौदे पर विचार करने की योजना है। ऊर्जा और कोयला उद्योग के यूक्रेनी मंत्री एडुआर्ड स्टैवत्स्की ने कहा कि सभी टिप्पणियां समझौते के लिए की गई थीं, इसलिए उन्होंने उम्मीद जताई कि स्थानीय अधिकारी दस्तावेज़ को मंजूरी देंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, इस परियोजना के लिए भूवैज्ञानिक अन्वेषण में न्यूनतम निवेश तीन सौ मिलियन डॉलर के बारे में हो सकता है, और क्षेत्र में गैस की मात्रा लगभग तीन ट्रिलियन क्यूबिक मीटर है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि शेल गैस उद्योग में, यूक्रेनी राज्य अच्छी तरह से पड़ोसी पोलैंड पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, जो यूरोप में पहली बार यह घोषित करने के लिए था कि उसने इस प्रकार के ईंधन का उत्पादन शुरू कर दिया था। पोलैंड के पर्यावरण मंत्री, पीटर वोज्नियाक के बयान के अनुसार, इस साल के अगस्त के अंत में बनाया गया था, जुलाई इक्कीस पर शेल गैस का उत्पादन शुरू हुआ, और तब से यह बिना रुके चल रहा है। इसके अलावा, यूरोपीय संघ के देशों में उत्पादन की मात्रा बहुत अधिक है। साथ ही वोज्नियाक ने कहा कि वर्तमान समय में यह कहना जल्दबाजी होगी कि देश वाणिज्यिक परिचालन में जाने का इरादा रखता है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि लेन ऊर्जा पोलैंड दैनिक पोलैंड के उत्तर में स्थित एक परीक्षण कुएं पर लगभग आठ हजार घन मीटर गैस का उत्पादन करता है। हम यह भी ध्यान दें कि पोलैंड में पूरे पश्चिमी यूरोपीय क्षेत्र में शेल गैस के सबसे बड़े भंडार हैं। पोलिश भूवैज्ञानिक संस्थान द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, शेल गैस की अधिकतम मात्रा, जो पोलिश क्षेत्र पर स्थित है, लगभग दो ट्रिलियन क्यूबिक मीटर है। पुनर्प्राप्त करने योग्य भंडार लगभग तीन सौ पैंतालीस-सात सौ सत्तर बिलियन क्यूबिक मीटर हैं। यह राशि पैंतीस से पैंसठ वर्षों तक की अवधि के लिए खपत के लिए पर्याप्त है। हालांकि, हाल तक, गंभीर गैस उत्पादन स्थापित करने के सभी प्रयास असफल रहे थे। यदि पोलैंड शेल के निष्कर्षण को समायोजित करने में सफल होता है, तो राज्य रूसी नीले ईंधन पर अपनी निर्भरता को काफी कम कर सकता है। इस प्रकार, पोलैंड में, वार्षिक गैस की खपत पंद्रह बिलियन क्यूबिक मीटर तक पहुंच जाती है। इनमें से लगभग सत्तर प्रतिशत वॉल्यूम रूसी आपूर्ति द्वारा ठीक प्रदान किए जाते हैं। अगर हम यूक्रेन के बारे में बात करते हैं, तो Ukrtransgaz द्वारा प्रदान किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, देश ने पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में पिछले छह महीनों में रूस से गैस की आपूर्ति लगभग तीस प्रतिशत में कटौती की है - पंद्रह,तीन बिलियन क्यूबिक मीटर तक। विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में अभी भी एक छोटी संभावना है कि यूक्रेन शेल गैस का सक्रिय विकास शुरू कर देगा, जिससे रूसी ईंधन को छोड़ना संभव होगा। यह कुछ समस्याओं के कारण हो सकता है, जिसमें राजनीतिक , वाणिज्यिक , भूवैज्ञानिक और पर्यावरण । हालांकि, यूक्रेनी खेतों में शेल गैस का उत्पादन दोनों देशों के बीच संबंधों के ठंडा होने का एकमात्र कारण नहीं है। विक्टर Yanukovych, विशेष रूप से, यूक्रेनी संसद को अपने वार्षिक संदेश में यह कहा। यह कहा जाना चाहिए कि यह संदेश काफी उत्सुक था, क्योंकि यह रूस के साथ ठीक-ठाक संबंध था जिसे उन्होंने राज्य की विदेश नीति की प्राथमिकता के रूप में पहचाना था। उसी समय, राज्य के प्रमुख ने कहा कि दोनों देशों के प्रतिनिधि कई मूलभूत मुद्दों पर प्रगति हासिल नहीं कर सके। जो कोई भी देशों के बीच "शपथ दोस्ती" में थोड़ा दिलचस्पी लेता है, वह जानता है कि गैस की समस्या के अलावा अन्य भी हैं। इस प्रकार, रूसी ईंधन की लागत में कमी के बिना, Yanukovych ने कहा कि अज़रबैजान ईंधन की आपूर्ति के वैकल्पिक तरीके के रूप में व्हाइट स्ट्रीम परियोजना को फिर से स्थापित करना आवश्यक था। इसके अलावा, ट्रांस-कैस्पियन गैस पाइपलाइन के निर्माण की शुरुआत के मामले में, कजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान से गैस की आपूर्ति की संभावना है। यह स्पष्ट है कि ये सभी बयान रूस के "दक्षिण स्ट्रीम" के विरोध में किए जा रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्र में समस्याएं हैं। तो, दो हज़ार बारह के अंत में, रूसी उद्योग और व्यापार मंत्रालय ने रूसी कार बिल्डरों के लिए राज्य समर्थन की पेशकश की। यह एक लक्ष्य के साथ किया गया था - यूक्रेनी प्रतियोगियों से "उनके" संरक्षण के लिए बनाने के लिए - क्रायुकोवस्की कार-बिल्डिंग प्लांट और अज़ोवमाश। एक साल पहले, रूसी, बेलारूसी और कजाख कारखानों ने एक निश्चित संगठन बनाया, जिसने वास्तव में, इन उत्पादों के यूक्रेनी निर्यात को इन देशों में अवरुद्ध कर दिया। इस बीच, पूर्व समय में, रूस को यूक्रेनी वैगन निर्यात की मात्रा पैंतालीस-पचास प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके अलावा, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि रूसी सरकार ने हाल ही में लातविया में कारों के निर्माण के अपने इरादे की घोषणा की, और यूक्रेन में नहीं। Еще один аспект, который, по мнению ряда экспертов не способствует укреплению двусторонних отношений - это оружейный рынок. इसलिए, बहुत पहले नहीं, यूक्रेनी सरकार ने एशिया-प्रशांत हथियारों के बाजार में रूसी प्रतियोगियों को दबाने के अपने इरादे के बारे में एक बयान दिया था। यूक्रेनी योजनाओं के अनुसार, Ukrspetsexport अगले पांच वर्षों में पाँच अरबों डॉलर के बराबर राशि में भारत, चीन, थाईलैंड, वियतनाम और इंडोनेशिया को हथियार और सैन्य उपकरण निर्यात करने का इरादा रखता है। ये देश, हम याद करते हैं, रूसी सैन्य निर्यातकों के पारंपरिक खरीदार हैं। देशों के बीच कई व्यापार युद्धों के बारे में मत भूलना। रूसियों को यूक्रेनी चीज, दूध और मांस या चिकन पसंद नहीं था। इसके अलावा, ऑटोमोबाइल युद्ध थे, जब रूस ने आयातित कारों के लिए उपयोग शुल्क पेश किया, और यूक्रेन ने जवाब में, केवल रूस के लिए आपूर्ति की गई बसों और कारों के लिए एक ही शुल्क पेश किया। ऐसी "दोस्ती" के कई और उदाहरण हैं। और ऐसे रिश्तों को शायद ही उज्ज्वल और बादल रहित कहा जा सकता है। इसलिए, यह काफी स्पष्ट है कि यूक्रेनी राज्य के प्रमुख के शब्द कूटनीति, नियमित वाक्यांशों के लिए एक श्रद्धांजलि से ज्यादा कुछ नहीं हैं। एक ही समय में, यूक्रेनी राजनेताओं के अनुसार, विशेष रूप से, Verkhovna Rada उप इगोर Markov, रूस की घोषणा व्यावहारिक रूप से यूक्रेन के मुख्य दुश्मन वर्तमान यूक्रेनी राजनीतिक शासन के पतन का कारण होगा। हां, वी। Yanukovych ने खुद पहले कहा था कि पर्याप्त व्यापार, ऊर्जा निर्भरता और उत्पाद बिक्री बाजारों के कारण यूक्रेन और रूस के बीच संबंधों का कोई विकल्प नहीं है। और, अगले शीतलन के बावजूद, द्विपक्षीय संबंध अभी भी विकसित हो रहे हैं। यह विमान उद्योग में संयुक्त परियोजनाओं , अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के निर्माण , यूक्रेनी रेलवे के आधुनिकीकरण, Khmelnitsky परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पूरा होने से स्पष्ट है। प्रयुक्त सामग्रीः
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Ration Card Update, Ration Card Latest Update, Ration Card News, Ration Card New Rules Big Alert 2023: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत देश के गरीब परिवार के लोगों को हर माह राशन उपलब्ध करवाया जाता है। अगर आप भी इस राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा का लाभ ले रहे हैं तो आपके लिए एक बड़ी खबर है। हाल के दिनों में सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत एक बड़ा बदलाव करते हुए इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल ईपीओएस डिवाइस को इलेक्ट्रॉनिक तराजू से जोड़ने का आदेश दिया है। सरकार का यह आदेश अवश्य ही गरीबों के लिए लाभप्रद साबित होगी।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत उचित मूल्य की दुकानों पर लगे इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल एपीओएस को अब इलेक्ट्रॉनिक तराजू के साथ जोड़ने की व्यवस्था कर दी है। जैसे ही तराजू ईपीओएस के साथ जुड़ जाएगा उपभोक्ता का आधार नंबर या समग्र आईडी नंबर दर्ज करने के बाद निश्चित पात्रता के अनुसार अनाज की तौल इलेक्ट्रॉनिक तराजू तक पहुंच जाएगी।
सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब राशन दुकान में काम करने वाले लोगों द्वारा कोई भी भ्रष्टाचार नहीं किया जा सकेगा। तौल आदि के नाम पर कई बार काफी गड़बड़ी हो रही थी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह बड़ा परिवर्तन किया है। इसके लिए सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक तराजू के साथ जुड़े जाने नियमों में संशोधन कर दिया है।
केंद्र सरकार द्वारा यह नियम देशभर में लागू किया गया है अब इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल डिवाइस को तौल कांटे के साथ जोड़ा जाएगा। सरकार के इस निर्णय के बाद गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। पूर्व मे हितग्राहियों को कम राशन दिया जाता था। खाद्यान्न में काफी भ्रष्टाचार किया जा रहा था। लेकिन अब इस परिवर्तन के बाद यह गुंजाइश भी समाप्त हो जाएगी।
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Ration Card Update, Ration Card Latest Update, Ration Card News, Ration Card New Rules Big Alert दो हज़ार तेईस: राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत देश के गरीब परिवार के लोगों को हर माह राशन उपलब्ध करवाया जाता है। अगर आप भी इस राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा का लाभ ले रहे हैं तो आपके लिए एक बड़ी खबर है। हाल के दिनों में सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत एक बड़ा बदलाव करते हुए इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल ईपीओएस डिवाइस को इलेक्ट्रॉनिक तराजू से जोड़ने का आदेश दिया है। सरकार का यह आदेश अवश्य ही गरीबों के लिए लाभप्रद साबित होगी। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत उचित मूल्य की दुकानों पर लगे इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल एपीओएस को अब इलेक्ट्रॉनिक तराजू के साथ जोड़ने की व्यवस्था कर दी है। जैसे ही तराजू ईपीओएस के साथ जुड़ जाएगा उपभोक्ता का आधार नंबर या समग्र आईडी नंबर दर्ज करने के बाद निश्चित पात्रता के अनुसार अनाज की तौल इलेक्ट्रॉनिक तराजू तक पहुंच जाएगी। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब राशन दुकान में काम करने वाले लोगों द्वारा कोई भी भ्रष्टाचार नहीं किया जा सकेगा। तौल आदि के नाम पर कई बार काफी गड़बड़ी हो रही थी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह बड़ा परिवर्तन किया है। इसके लिए सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक तराजू के साथ जुड़े जाने नियमों में संशोधन कर दिया है। केंद्र सरकार द्वारा यह नियम देशभर में लागू किया गया है अब इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल डिवाइस को तौल कांटे के साथ जोड़ा जाएगा। सरकार के इस निर्णय के बाद गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। पूर्व मे हितग्राहियों को कम राशन दिया जाता था। खाद्यान्न में काफी भ्रष्टाचार किया जा रहा था। लेकिन अब इस परिवर्तन के बाद यह गुंजाइश भी समाप्त हो जाएगी।
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हाल ही में जो अपराध का मामला सामने आया है वह भिवानी का है. इस मामले में घरेलू कलह के कारण एक सफाई कर्मचारी ने अपनी पत्नी की गर्दन कुल्हाड़ी से काट डाली जिससे मौके पर ही पत्नी की मौत हो गई तथा स्वयं भी जहर खा लिया है. वहीं खबर है कि इस मामले में जहर खाने के बाद युवक शख्स घर से बाहर निकल गया और सुबह के समय उसका शव मिला.
इस मामले में मिली जानकारी के अनुसार शख्स ने पत्नी की हत्या से पहले दो पुत्रियों को घर के ही दूसरे कमरे में बंद कर दिया था वह भी इसलिए कि उन्हें किसी प्रकार की कोई जानकारी ना हो. वहीं पुलिस ने औरत के मरने के बाद उसके पति पर हत्या का इल्जाम लगाते हुए कार्रवाई शुरू की और मामले में गाँव की रहने वाली लगभग 35 वर्षीय राहुल (बदला हुआ नाम) का अपनी पत्नी करीब 25 साल की (रेखा) के साथ झगड़ा हुआ और झगड़ा देर रात लगभग 11 बजे हुआ.
इसी झगड़े के बाद शख्स ने कुल्हाड़ी उठाई और अपनी पत्नी की गर्दन पर मार दिया. यह होने के बाद पत्नी की मौत हो गई और हत्या के बाद शख्स ने भी जहर पी लिया और उसकी भी मौत हो गई. इस मामले में पुलिस ने जांच कर पूरे मामले को बताया है.
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हाल ही में जो अपराध का मामला सामने आया है वह भिवानी का है. इस मामले में घरेलू कलह के कारण एक सफाई कर्मचारी ने अपनी पत्नी की गर्दन कुल्हाड़ी से काट डाली जिससे मौके पर ही पत्नी की मौत हो गई तथा स्वयं भी जहर खा लिया है. वहीं खबर है कि इस मामले में जहर खाने के बाद युवक शख्स घर से बाहर निकल गया और सुबह के समय उसका शव मिला. इस मामले में मिली जानकारी के अनुसार शख्स ने पत्नी की हत्या से पहले दो पुत्रियों को घर के ही दूसरे कमरे में बंद कर दिया था वह भी इसलिए कि उन्हें किसी प्रकार की कोई जानकारी ना हो. वहीं पुलिस ने औरत के मरने के बाद उसके पति पर हत्या का इल्जाम लगाते हुए कार्रवाई शुरू की और मामले में गाँव की रहने वाली लगभग पैंतीस वर्षीय राहुल का अपनी पत्नी करीब पच्चीस साल की के साथ झगड़ा हुआ और झगड़ा देर रात लगभग ग्यारह बजे हुआ. इसी झगड़े के बाद शख्स ने कुल्हाड़ी उठाई और अपनी पत्नी की गर्दन पर मार दिया. यह होने के बाद पत्नी की मौत हो गई और हत्या के बाद शख्स ने भी जहर पी लिया और उसकी भी मौत हो गई. इस मामले में पुलिस ने जांच कर पूरे मामले को बताया है.
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अनेकता में एकता ही भारतीय संस्कृति है और उस अनेकता के मूल में निश्चित रूप से भारत के विभिन्न प्रदेशों में स्थित जनजातियाँ हैं। भारत की जनजातियाँ विभिन्न क्षेत्रों में रहती हूए अपनी संस्कृति के माध्यम से भारतीय संस्कृति को एक विशिष्ट संस्कृति का रूप में देने में योगदान करती हैं। देश की संस्कृतियों पर एक दूसरे की छाप पड़ी। चूंकि जनजातियाँ अनेक थी स्वाभाविक है कि उनकी संस्कृति में भी विवधता थी। अतः इनकी वैविध्यमय संस्कृति ने जिस भारतीय संस्कृति को उभरने में योगदान किया, वह भी विविधता को धारण करने वाली हुई। भाषा के क्षेत्र में भी यही स्थिति हुई और आर्यों की भाषा से द्रविड़ों तथा अनके भाषा - भाषियों की भाषाएँ प्रभावित हुई तथा दूसरी और इनकी भाषाओँ से आर्यों की भाषाएँ भी पर्याप्त मात्रा में प्रभावित हुई।
उपर्युक्त सन्दर्भ में एक प्रश्न उठता है कि आखिर जनजाति कहेंगे किसे। इस जनजाति शब्द को परिभाषित करने में मानवशास्त्रियों में काफी मतभेद पाया जाता है। मानवशास्त्रियों ने जनजातियों को परिभाषित करने में मुख्य आधार - तत्व माना है संस्कृति को, परंतु कभी - कभी ऐसा देखने में मिलता है कि किसी एक ही क्षेत्र में यद्यपि विविध जनजातियाँ रहती हैं, फिर भी उनकी संस्कृति में एकरूपता दृष्टिगत होती है। अतः जनजातियों को परिभाषित करने में केवल संस्कृति को ही आधार - तत्व मानना एकांगीपन कहा जायेगा। इसके लिए हमें संस्कृति के अतिरिक्त भौगोलिक, भाषिक तथा राजनितिक अवस्थाओं को भी ध्यान में रखना आवश्यक होगा।
विभिन्न विद्वानों ने जनजाति शब्द के पर्याय के रूप में आदिम जाति, वन्य - जाति, आदिवासी, वनवासी, असाक्षर, निरक्षर, प्रागैतिहासिक, असभ्य जाति आदि नाम दिया है। परंतु इसमें से अधिकांश एक ही अर्थ को घोषित करने वाले हैं। परंतु इन्हें असभ्य, निरक्षर या असाक्षर आदि कहना आज पूर्णतया अनुचित और अव्यवहारिक है। यहाँ हमने जनजाति कहना हि उपयुक्त माना है।
भारतीय मानवशास्त्री प्रोफेसर धीरेन्द्र नाथ मजुमदार ने जनजाति की व्याख्या करते हुए कहा है कि जनजाति परिवारों या परिवार समूहों के समुदाय का नाम है। इन परिवारों या परिवार - समूह का एक सामान्य नाम होता है ये एक ही भू - भाग में निवास करते हैं, एक ही भाषा बोलते हैं विवाह, उद्योग - धंधों में के ही प्रकार की बातों को निबिद्ध मानते हैं। एक- दूसरे के साथ व्यवहार के संबंध में भी उन्होंने अपने पुराने अनुभव के आधार पर कुछ निश्चित नियम बना लिए होते हैं।
उक्त परिभाषाओं को देखने से स्पष्ट हो जाता है। कि विद्वानों में जनजाति की परिभाषा को लेकर काफी मतभेद है। फिर भी व्यक्तियों के ऐसे समूह को जो एक निश्चित भू - भाग के हों तथा एक निश्चित भाषा बोलते हों और अपने समूह में ही विवाह करते हों को जनजाति कहा जा सकता है। जब तक विभिन्न देशों में सम्प्रभु सरकार की स्थापना नहीं हुई थी तब तक इन जातियों का अपना राजनैतिक संगठन रहा होगा। परंतु आज जनजाति की परिभाषा करने में यह तत्व उपेक्षणीय है।
जाति और जनजाति को पृथक कर पाना भी एक कठिन प्रश्न है, परन्तु जहाँ तक भारत का संबंध है। हम जाति उसे कह सकते हैं जिसमें वर्ण व्यवस्था नहीं हो।
भारत की जनजातियों में भौगोलिक विभाजन करते हुए विभिन्न विद्वानों ने अपने - अपने दृष्टीकोण से भिन्न-भिन्न अभिमत प्रकट किए हैं। कुछेक विद्वान इन्हें दो क्षेत्रों में बांटते हैं तो कुछ तीन क्षेत्रों में और कुछ विद्वानों ने इन्हें चार भौगोलिक क्षेत्रों में विभाजित किया है। परंतु भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भारत की जनजातियों को पांच भागों में विभाजित करना उचित होगा।
1. पूर्वोत्तर क्षेत्र - पूर्वोत्तर क्षेत्र में कश्मीर, शिमला, लेह, हिमाचल प्रदेश, बंगाल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, लूसाई की पहाड़ियां, मिसमी असाम, नेचा तथा सिक्किम का इलाका आता है। इस क्षेत्र में लिम्बू लेपचा, आका, दपला, अवस्मीरी मिश्मी, रामा, कचारी, गोरो, खासी, नागा, कुकी, चकमा, लूसाई, गुरड आदि प्रमुख जनजातियाँ होती है।
2. मध्य - क्षेत्र - क्षेत्र में बंगाल मध्य क्षेत्र में बंगाल, बिहार, दक्षिणी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा उड़ीसा का इलाका जा जाता है। सभी क्षेत्रों में जनजातियों की संख्या और उनके महत्व की दृष्टि से सबसे बड़ा है। इसके अंतर्गत, मध्य प्रदेश में गोंड, उड़ीसा के कांध और खड़िया, गंजाम के सावरा, गदब और बाँदा, बस्तर के मूरिया और मरिया, बिहार के उराँव, मुंडा, संथाल, हो विरहोर, सौरिया पहाड़िया, खड़िया, आदि जनजातियाँ हैं।
3. दक्षिण क्षेत्र - इस क्षेत्र में दक्षिणी आंध्र प्रदेश, कर्णाटक, तमिलनाडु, केरल आदि का हिस्सा आता है। इस क्षेत्र में निवास करने वाली प्रमुख जनजातियाँ है हैदराबाद में चेचू, निलगिरी के टोडा, वायनाड के परियां, ट्रावनकोर - कोचीन के कादर, कणीदर तथा कुरावन आदि।
4. पश्चिम क्षेत्र - उपर्युक्त तीन क्षेत्रों के अतिरिक्त पश्चिम क्षेत्र में भी कुछ जनजातियाँ है। उसमें राजस्थान के भील प्रमुख हैं। कुछ जनजातियाँ ऐसी हैं जो खाना बदोस का जीवन व्यतीत करती हैं।
5. द्वीप समूह क्षेत्र - अंडमान निकोबार आदि द्वीपों में रहने वाली जनजातियों को इसी क्षेत्रों में रखा जाएगा। 1955 के पहले तक इन्हें जनजाति के अंतर्गत नहीं रखा जाता था परंतु उसके बाद पिछड़ी जातियों के आयोग की अनुशंसा पर इन्हें भी जनजाति माल लिया गया। वर्तमान अंडमान निकोवार में अंडमानी, जखा, सोयपेन एवं आगे जनजाति आदि प्रमुख हैं।
भारत में हजारों बोली जाती हैं, जिन्हें चार भाषा परिवारों के अंतर्गत रखा जाता है।
३. ओस्ट्रिक (आनेय)
इंडो योरोपियन परिवार की भाषाएँ आर्य मूल की बोलियाँ बोलती हैं। परंतु आज अनके जनजातियां भी आपस में संपर्क भाषा के रूप में इन भाषाओँ का व्यवहार करने लगी हैं। इंडो योरोपियन के बाद जिस भाषा परिवार की मुख्य भाषाओँ के बोलने वालों की संख्या आती है, वह है द्रविड़ परिवार। इस परिवार की मूका भाषाएँ हैं। तामिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम। बिहार के उरांव लोगों की कुडूख भाषा इसी परिवार की एक मुख्य भाषा हैं। मध्य प्रदेश के गोंड, सावरा परजा, कोया, पनियान, चेंचू, कदार, मालसर तथा मलरेयान आदि भाषाएँ भी इसी परिवार की है।
मुंडा, कोल, हो संथाल, खरिया, कोरवा, भूमिज, कुरकी, खासी आदि जनजातियों की भाषाएँ आस्ट्रिक (आग्नेय) परिवार की हैं।
यद्यपि विभिन्न भाषाओँ का पारिवारिक वर्गीकरण किया जाता है। परंतु बहुत निश्चिततापूर्वक यह नहीं कहा जा सकता है कि किस जनजाति की भाषा पूर्णतया किस परिवार में आती है।
बिहार राज्य के दक्षिणी हिस्से में ही अधिकांश जनजातियों का निवास स्थान है। छोटानागपुर प्लेटो के रांची, गुमला, लोहरदगा, हजारीबाग, धनबाद, सिहंभूम, पलामू, संथालपरगना, गिरिडीह आदि में जनजातियों की संख्या पर्याप्त मात्रा में है। इनके अतिरिक्त सासाराम, भागलपुर, मुंगेर, पूर्णिया और चंपारण में भी जनजातियों का निवास है।
बिहार की उराँव जनजाति की भाषा द्रविड़ परिवार की कुडूख है और वे भेडिरेरेयन (द्रविड़) प्रजाति है। परंतु प्रायः अन्य सभी जनजातियाँ आस्ट्रिक भाषा परिवार की भाषाएँ बोलने वाली हैं तथा वे प्रोटोआस्ट्रिलायक प्रजाति के अंतर्गत आती है।
सांस्कृतिक दृष्टि से बिहार की जनजातियों में काफी अंतर पाया जाता है। इन में उराँव, मुंडा तथा संथाल जनजातियों को छोड़कर अन्य प्रायः सभी जन - जातियाँ अभी भी पिछड़ी हुई हैं। बिरहोर तथा पहाड़ी खड़िया जनजाति के लोग अभी जंगली पशुओं तथा फलों के माध्यम से ही अपना जीवन यापन करते हैं। असुर, कोरवा, सौरिया पहाड़िया आदि झूम की खेती करते हैं। ये लोग बंजारों की तरह कभी - कभी अपना स्थान बदलते हैं। परंतु मुंडा, उराँव, संथाल और हो आदि स्थायी तौर पर रहते हुए कृषि एवं पशुपालन में लगे हुए हैं। इन लोगों के अच्छे मकान तथा गांव हैं इनके समाज में अब हर प्रकार के पेशा वाले लोग प्रर्याप्त मात्रा में विद्यमान हैं।
बिहार के भिन्न - भिन्न जनजातियों के अलग - अलग गांव है तथा अनेक गांव ऐसे भी है जहाँ अनेक जनजातियाँ एक साथ मिलकर रहते हैं और उनके साथ आर्य जाति के लोग भी विद्यमान हैं। विभिन्न जनजातियों के गांव भिन्न - भिन्न प्रकार के हैं। कुछ जनजातियाँ ऐसी है जो किसी अन्य जनजाति के साथ अपने मिश्रित नहीं कर पाती है। अतः पूर्णतया अलग रहने में ही विश्वास रखते हैं। ऐसी जनजातियों में विरहोर, विरजिया, माल - पहाड़िया आदि प्रमुख हैं। सच पूछा जाए तो ये जातियाँ अभी भी बंजारा जातियां ही है और अपनी आवश्यकता के अनुरूप उन्हें जहाँ जैसे सुविधा प्राप्त हो जाती है वहां अपना निवास स्थान बना लेती है। इनके गांव झोपड़ियों के बने होते हैं और उनमें केवल एक ही कोठरी होती है। यद्यपि आज सरकार ने इन्हें सुविधा संपन्न करने के लिए बहुत ही कल्याणकारी योजनाएं चला रखी हैं। फिर भी वे अपने को अन्य जनजातियों के साथ मिश्रित नहीं कर पाते हैं। बिहार के छोटानागपुर के पठारी क्षेत्र में अनेक ऐसे निवास स्थान बनाए गये हैं जिनमें इनके लिए हर प्रकार की सुविधा प्रदान की गई है फिर भी ये वहाँ नहीं रहते हैं।
दूसरी ओर उराँव, मुंडा, संथाल, हो आदि ऐसी जनजातियाँ हैं ओ स्थायी रूप से निवास करती हैं और आज ये राष्ट्र की मुख्य धारा के साथ जुड़ कर किसी भी अन्य जाति से कम नहीं है। इन जनजातियों के लोग प्रशासन, अध्यापन, राजनीति, इंजीनियरी, डॉक्टरी आदि सभी प्रमुख क्षेत्रों में अपने को योग्य सिद्ध कर रहे हैं। परंतु इनमें आर्य जातियों के ऊँच - नीच वाला दुर्गूण भी आने लगा है।
इन उन्नत जनजातियों का रहन - सहन भी अब काफी उन्नत हो गया है। गाँवों में भी अनेक उन्नत जनजातीय लोगों के माकन ईंट आदि के बने हुए हैं। परंतु अन्य लोगों के माकन मिट्टी के बने होने पर भी काफी विस्तृत एवं हवादार है। इनका गाँव दूर से देख कर ही के पहचाना जा सकता है। इनके माकन के अगल - बगल कुछ क्यारी ऐसाहोता हैं जिसमें अपने लिए सब्जी इत्यादि लगाते है और मवेशियों के लिए भी अलग स्थान होता है। हो लोगों के मकान के कमरा में पूर्वजों के देवी स्थान होते हैं जिन्हें ये लोगो अपनी भाषा में आदिंग कहते हैं। सभी उन्नत जनजातियों के गाँव में अखाड़ा होता हैं। जहाँ लोग संध्या समय जा कर नाचते हैं। इसी प्रकार प्रत्येक गाँव की अपनी अपनी सरना, जाहीरा और महादेव आदि के स्थान होते हैं। जहाँ अपने पूर्वजों एवं देवी देवताओं की पूजा, आराधना की जाती है। प्रत्येक गाँव के अलग - अलग शासन होते हैं, जिनमें मृत ब्यक्तियों को गाड़ा जाता है।
बिहार की जनजातियों में उराँव जनजाति एक प्रमुख जनजाति है। बिहार में 30 से भी अधिक जनजातियाँ निवास करती हैं। जिनमें तीन - चार ही आज उन्नत अवस्था में हैं, उनमें संभवताः उराँव सर्वप्रथम उल्लेखनीय है। बिहार की जनजातियों में संख्या के दृष्टिकोण से यद्यपि ये संथालों के बाद द्वितीय स्थान पर हैं परंतु जीवन स्तर तथा जागरूकता के दृष्टि से ये सर्वोपरि है। 1981 जनगणना अनुसार बिहार की जनजातियों की संख्या 5810867 है, उनमें उराँव जनजाति की संख्या 1048064 है।
उराँव जनजाति के लोग मुख्य रूप से छोटानागपुर के राँची, गुमला, लोहरदगा और सिंहभूम जिला में निवास करते हैं। इनके अतिरिक्त पूर्णिया, सासाराम, पलामु, हजारीबाग आदि जिलों में भी छिटपुट रूप में उराँव लोग निवास करते हैं। यद्यपि उरांवों का मुख्य निवास स्थान बिहार है परंतु मध्य प्रदेश तथा उड़ीसा के अतिरिक्त भारत के कुछ अन्य प्रान्तों में भी ये विद्यमान हैं। उराँव जनजाति के लोग जहाँ कहीं भी रहते है उनकी पहचान अलग से हो जाती है और वे लोग कुडूख भाषा का ही प्रयोग करते हैं। परंतु अब विभिन्न प्रजातियों तथा जातियों के साथ ये लोग मनुष्यों की तरह ही लगते थे परंतु जंगलों में निवास करते थे इस कारण इन्हें आर्यों ने बानर कहा होगा। ये लोग दक्षिण भारत के पर्वतीय अंचल में रहा करते थे और जंगली जानवरों को मारकर इससे अपना जीवन - यापन करते थे। विभिन्न स्थानों पर निवास करने के कारण इनकी बोलचाल की भाषा में परिवर्तन हो गया है और ये लोग वहां के निवासियों की अन्य भाषा को अपना भाषा के साथ सम्मिलित करके उसी का व्यवहार करते हैं। उदहारण के लिए पांचपरगना के अंतर्गत बुंडू, तमाड़, सिल्ली, ईचागढ़ और अड़की इन पांच परगनों में निवास करने वाले उराँव भी पंचपरगनिया भाषा का प्रयोग करते हैं। इस भाषा पर कुडूख भाषा के अतिरिक्त मुंडारी, बंगला, उड़ीसा, और नागपुरिया का पूर्ण प्रभाव हैं परंतु राँची के पश्चिम भाग में निवास करने वाले तथा गुमला एवं लोहरदगा के उराँव कुडूख भाषा का प्रयोग करते हैं। कुछ उराँव के गाँवों में रहने वाले अन्य जाति के लोग भी संपर्क के कारण आपस में कुडूख भाषा ही बोलते हैं। एसे गांवों में रहने वाले अनेक मुसलमान अपने परिवार से भी कुडूख भाषा में ही बोलते है उस प्रकार जे गांवों में रहने वाले अनेक जाति के लोग यद्यपि अपने परिवार में कुडूख नहीं बोलते है परंतु उरांवों के साथ वार्तालाप करने के समय कुडूख के प्रयोग करते हैं। गांवों में घूमने वाले अनेक व्यवसायी उरांवों के साथ कुडूख भाषा में ही बोलते हैं। सामान्यतः उराँव बहुल हाटों (बाजारों) में कुडूख भाषा का ही प्रयोग होता है। अनेक टाना भगत एसे हैं जिन्होंने अपने जीवन में कभी भी कुडूख भाषा के अतिरिक्त किसी अन्य भाषा का प्रयोग नहीं किया है।
उराँव द्रविड़ प्रजाति (नस्ल) के हैं इसमें किसी प्रकार की शंका नहीं होनी चाहिए। डॉ. गुहा ने अन्य जनजातियों की तरह उरांवों को भी प्रोटो - आस्ट्रेलायड प्रजाति के अंतर्गत स्वीकार किया है परंतु यह उचित नहीं जान पड़ता है। डॉ. मजुमदार तथा शरत चंद्र राय इन्हें द्रविड़ प्रजाति का ही मानते हैं।
उराँव जनजाति का बिहार आदि निवास स्थान नहीं माना जाता है। अनके विद्वानों ने ऐस सिद्ध करने का प्रयास किया है कि ये लोग दक्षिण भारत में रहा करते थे और जब रामचन्द्र ने रावण पर आक्रमण किया तो ये लोग बानर सेना के रूप में रामचन्द्र के सहयोगी बने। आज अधिकतर आलोचक यह स्वीकार करने लगे हैं कि बानर सेना पूँछ वाली कोई प्रजाति नहीं थी अपितु वे भी नर (मनुष्य) के तरह हि थे और उन्हें बानर अथवा नर कहा गया। ये लोग दक्षिण भारत के पर्वतीय अंचल में रहा करते थे और जंगली जानवरों को मारकर उससे अपना जीवन - यापन करते थे। इनके पास पत्थर और लकड़ी के हथियार होते थे, जिससे ये लोग शिकार खेलते थे और लड़ाई लड़ते थे बाद में ये लोग यात्रा करते हुए सोन नदी की तराई में आये और वहां स्थायी रूप में बसकर खेती आदि करने लगे। कुछ दिनों के बाद राजनितिक उथल - पुथल होने के कारण ये लोग रोहतास इत्यादि स्थानों से हटने लगे और कोयल नदी के किनारे किनारे ये लोग बढ़ते हुए छोटानागपुर में आकार बस गये। छोटानागपुर में उन दिनों मुंडा जनजातियों का निवास था परंतु अपने ज्ञान रुपी समृद्धि से इन्होंने मुंडाओं को भी खेती आदि करने का तरीका सिखाया। उराँव जनजाति सामाजिक राजनितिक दृष्टि से समृद्ध थी इस कारण मुंडा लोगों को वहां से हटने पर मजबूर किया और परिणाम स्वरुप मुंडा लोग छोटानागपुर में भी एक और सिमटते चले गए। उराँव जनजाति ने छोटे - छोटे गाँव बसाये और खेतों आदि में लग गए। आगे - आगे चलकर इन्होंने सामाजिक तथा राजनितिक संस्था के रूप में पाड़ह की स्थापना की। ये पाड़ह संस्थाएं एक राज्य की तरह अपने - अपने क्षेत्र में प्रशासन संबंधी कार्य करने लगी।
प्राचीनकाल में भी उराँव जनजाति बिहार की अन्य जनजातियों की अपेक्षा हर दृष्टि से उन्नत थी और वर्तमान काल में भी यह जनजाति बिहार की अन्य जनजातियों से उन्नत बनी हुई है। सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से तो यह उन्नत है ही आर्थिक, शैक्षिणक तथा राजनैतिक दृष्टि से भी अन्य जनजातीय की तुलना में श्रेष्ठ है। उराँव राजनीति में, प्रशासन में, यांत्रिकी में, चिकित्सा, विज्ञान में तथा शिक्षा के क्षेत्र में उच्च पदों पर विद्यमान है।
इस प्रकार हम देखते हैं कि भारत में जनजातियाँ प्रागैतिहासिक काल से ही निवास करती है और यह कह पाना आज असंभव से है कि कौन सी जनजाति भारत की आदि जनजाति है और कौन बाद में आई है। पूरे भारत में न्यूनाधिक रूप से जनजातियाँ निवास करती हैं जिस में बिहार का छोटानागपुर प्रमुख है। इसमें यद्यपि 30 से भी अधिक जनजातियाँ निवास करती है परंतु उनमें आज कुछ ही हर दृष्टि से उन्नत हो पाई है। इन जनजातियों में निःसंदेह उराँव जनजाति सर्वोपरि है।
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विकास एआई द्वारा संचालित संक्षिप्त सारांश के लिए 'सारांश सामग्री' पर क्लिक करें। अनेकता में एकता ही भारतीय संस्कृति है और उस अनेकता के मूल में निश्चित रूप से भारत के विभिन्न प्रदेशों में स्थित जनजातियाँ हैं। भारत की जनजातियाँ विभिन्न क्षेत्रों में रहती हूए अपनी संस्कृति के माध्यम से भारतीय संस्कृति को एक विशिष्ट संस्कृति का रूप में देने में योगदान करती हैं। देश की संस्कृतियों पर एक दूसरे की छाप पड़ी। चूंकि जनजातियाँ अनेक थी स्वाभाविक है कि उनकी संस्कृति में भी विवधता थी। अतः इनकी वैविध्यमय संस्कृति ने जिस भारतीय संस्कृति को उभरने में योगदान किया, वह भी विविधता को धारण करने वाली हुई। भाषा के क्षेत्र में भी यही स्थिति हुई और आर्यों की भाषा से द्रविड़ों तथा अनके भाषा - भाषियों की भाषाएँ प्रभावित हुई तथा दूसरी और इनकी भाषाओँ से आर्यों की भाषाएँ भी पर्याप्त मात्रा में प्रभावित हुई। उपर्युक्त सन्दर्भ में एक प्रश्न उठता है कि आखिर जनजाति कहेंगे किसे। इस जनजाति शब्द को परिभाषित करने में मानवशास्त्रियों में काफी मतभेद पाया जाता है। मानवशास्त्रियों ने जनजातियों को परिभाषित करने में मुख्य आधार - तत्व माना है संस्कृति को, परंतु कभी - कभी ऐसा देखने में मिलता है कि किसी एक ही क्षेत्र में यद्यपि विविध जनजातियाँ रहती हैं, फिर भी उनकी संस्कृति में एकरूपता दृष्टिगत होती है। अतः जनजातियों को परिभाषित करने में केवल संस्कृति को ही आधार - तत्व मानना एकांगीपन कहा जायेगा। इसके लिए हमें संस्कृति के अतिरिक्त भौगोलिक, भाषिक तथा राजनितिक अवस्थाओं को भी ध्यान में रखना आवश्यक होगा। विभिन्न विद्वानों ने जनजाति शब्द के पर्याय के रूप में आदिम जाति, वन्य - जाति, आदिवासी, वनवासी, असाक्षर, निरक्षर, प्रागैतिहासिक, असभ्य जाति आदि नाम दिया है। परंतु इसमें से अधिकांश एक ही अर्थ को घोषित करने वाले हैं। परंतु इन्हें असभ्य, निरक्षर या असाक्षर आदि कहना आज पूर्णतया अनुचित और अव्यवहारिक है। यहाँ हमने जनजाति कहना हि उपयुक्त माना है। भारतीय मानवशास्त्री प्रोफेसर धीरेन्द्र नाथ मजुमदार ने जनजाति की व्याख्या करते हुए कहा है कि जनजाति परिवारों या परिवार समूहों के समुदाय का नाम है। इन परिवारों या परिवार - समूह का एक सामान्य नाम होता है ये एक ही भू - भाग में निवास करते हैं, एक ही भाषा बोलते हैं विवाह, उद्योग - धंधों में के ही प्रकार की बातों को निबिद्ध मानते हैं। एक- दूसरे के साथ व्यवहार के संबंध में भी उन्होंने अपने पुराने अनुभव के आधार पर कुछ निश्चित नियम बना लिए होते हैं। उक्त परिभाषाओं को देखने से स्पष्ट हो जाता है। कि विद्वानों में जनजाति की परिभाषा को लेकर काफी मतभेद है। फिर भी व्यक्तियों के ऐसे समूह को जो एक निश्चित भू - भाग के हों तथा एक निश्चित भाषा बोलते हों और अपने समूह में ही विवाह करते हों को जनजाति कहा जा सकता है। जब तक विभिन्न देशों में सम्प्रभु सरकार की स्थापना नहीं हुई थी तब तक इन जातियों का अपना राजनैतिक संगठन रहा होगा। परंतु आज जनजाति की परिभाषा करने में यह तत्व उपेक्षणीय है। जाति और जनजाति को पृथक कर पाना भी एक कठिन प्रश्न है, परन्तु जहाँ तक भारत का संबंध है। हम जाति उसे कह सकते हैं जिसमें वर्ण व्यवस्था नहीं हो। भारत की जनजातियों में भौगोलिक विभाजन करते हुए विभिन्न विद्वानों ने अपने - अपने दृष्टीकोण से भिन्न-भिन्न अभिमत प्रकट किए हैं। कुछेक विद्वान इन्हें दो क्षेत्रों में बांटते हैं तो कुछ तीन क्षेत्रों में और कुछ विद्वानों ने इन्हें चार भौगोलिक क्षेत्रों में विभाजित किया है। परंतु भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भारत की जनजातियों को पांच भागों में विभाजित करना उचित होगा। एक. पूर्वोत्तर क्षेत्र - पूर्वोत्तर क्षेत्र में कश्मीर, शिमला, लेह, हिमाचल प्रदेश, बंगाल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, लूसाई की पहाड़ियां, मिसमी असाम, नेचा तथा सिक्किम का इलाका आता है। इस क्षेत्र में लिम्बू लेपचा, आका, दपला, अवस्मीरी मिश्मी, रामा, कचारी, गोरो, खासी, नागा, कुकी, चकमा, लूसाई, गुरड आदि प्रमुख जनजातियाँ होती है। दो. मध्य - क्षेत्र - क्षेत्र में बंगाल मध्य क्षेत्र में बंगाल, बिहार, दक्षिणी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा उड़ीसा का इलाका जा जाता है। सभी क्षेत्रों में जनजातियों की संख्या और उनके महत्व की दृष्टि से सबसे बड़ा है। इसके अंतर्गत, मध्य प्रदेश में गोंड, उड़ीसा के कांध और खड़िया, गंजाम के सावरा, गदब और बाँदा, बस्तर के मूरिया और मरिया, बिहार के उराँव, मुंडा, संथाल, हो विरहोर, सौरिया पहाड़िया, खड़िया, आदि जनजातियाँ हैं। तीन. दक्षिण क्षेत्र - इस क्षेत्र में दक्षिणी आंध्र प्रदेश, कर्णाटक, तमिलनाडु, केरल आदि का हिस्सा आता है। इस क्षेत्र में निवास करने वाली प्रमुख जनजातियाँ है हैदराबाद में चेचू, निलगिरी के टोडा, वायनाड के परियां, ट्रावनकोर - कोचीन के कादर, कणीदर तथा कुरावन आदि। चार. पश्चिम क्षेत्र - उपर्युक्त तीन क्षेत्रों के अतिरिक्त पश्चिम क्षेत्र में भी कुछ जनजातियाँ है। उसमें राजस्थान के भील प्रमुख हैं। कुछ जनजातियाँ ऐसी हैं जो खाना बदोस का जीवन व्यतीत करती हैं। पाँच. द्वीप समूह क्षेत्र - अंडमान निकोबार आदि द्वीपों में रहने वाली जनजातियों को इसी क्षेत्रों में रखा जाएगा। एक हज़ार नौ सौ पचपन के पहले तक इन्हें जनजाति के अंतर्गत नहीं रखा जाता था परंतु उसके बाद पिछड़ी जातियों के आयोग की अनुशंसा पर इन्हें भी जनजाति माल लिया गया। वर्तमान अंडमान निकोवार में अंडमानी, जखा, सोयपेन एवं आगे जनजाति आदि प्रमुख हैं। भारत में हजारों बोली जाती हैं, जिन्हें चार भाषा परिवारों के अंतर्गत रखा जाता है। तीन. ओस्ट्रिक इंडो योरोपियन परिवार की भाषाएँ आर्य मूल की बोलियाँ बोलती हैं। परंतु आज अनके जनजातियां भी आपस में संपर्क भाषा के रूप में इन भाषाओँ का व्यवहार करने लगी हैं। इंडो योरोपियन के बाद जिस भाषा परिवार की मुख्य भाषाओँ के बोलने वालों की संख्या आती है, वह है द्रविड़ परिवार। इस परिवार की मूका भाषाएँ हैं। तामिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम। बिहार के उरांव लोगों की कुडूख भाषा इसी परिवार की एक मुख्य भाषा हैं। मध्य प्रदेश के गोंड, सावरा परजा, कोया, पनियान, चेंचू, कदार, मालसर तथा मलरेयान आदि भाषाएँ भी इसी परिवार की है। मुंडा, कोल, हो संथाल, खरिया, कोरवा, भूमिज, कुरकी, खासी आदि जनजातियों की भाषाएँ आस्ट्रिक परिवार की हैं। यद्यपि विभिन्न भाषाओँ का पारिवारिक वर्गीकरण किया जाता है। परंतु बहुत निश्चिततापूर्वक यह नहीं कहा जा सकता है कि किस जनजाति की भाषा पूर्णतया किस परिवार में आती है। बिहार राज्य के दक्षिणी हिस्से में ही अधिकांश जनजातियों का निवास स्थान है। छोटानागपुर प्लेटो के रांची, गुमला, लोहरदगा, हजारीबाग, धनबाद, सिहंभूम, पलामू, संथालपरगना, गिरिडीह आदि में जनजातियों की संख्या पर्याप्त मात्रा में है। इनके अतिरिक्त सासाराम, भागलपुर, मुंगेर, पूर्णिया और चंपारण में भी जनजातियों का निवास है। बिहार की उराँव जनजाति की भाषा द्रविड़ परिवार की कुडूख है और वे भेडिरेरेयन प्रजाति है। परंतु प्रायः अन्य सभी जनजातियाँ आस्ट्रिक भाषा परिवार की भाषाएँ बोलने वाली हैं तथा वे प्रोटोआस्ट्रिलायक प्रजाति के अंतर्गत आती है। सांस्कृतिक दृष्टि से बिहार की जनजातियों में काफी अंतर पाया जाता है। इन में उराँव, मुंडा तथा संथाल जनजातियों को छोड़कर अन्य प्रायः सभी जन - जातियाँ अभी भी पिछड़ी हुई हैं। बिरहोर तथा पहाड़ी खड़िया जनजाति के लोग अभी जंगली पशुओं तथा फलों के माध्यम से ही अपना जीवन यापन करते हैं। असुर, कोरवा, सौरिया पहाड़िया आदि झूम की खेती करते हैं। ये लोग बंजारों की तरह कभी - कभी अपना स्थान बदलते हैं। परंतु मुंडा, उराँव, संथाल और हो आदि स्थायी तौर पर रहते हुए कृषि एवं पशुपालन में लगे हुए हैं। इन लोगों के अच्छे मकान तथा गांव हैं इनके समाज में अब हर प्रकार के पेशा वाले लोग प्रर्याप्त मात्रा में विद्यमान हैं। बिहार के भिन्न - भिन्न जनजातियों के अलग - अलग गांव है तथा अनेक गांव ऐसे भी है जहाँ अनेक जनजातियाँ एक साथ मिलकर रहते हैं और उनके साथ आर्य जाति के लोग भी विद्यमान हैं। विभिन्न जनजातियों के गांव भिन्न - भिन्न प्रकार के हैं। कुछ जनजातियाँ ऐसी है जो किसी अन्य जनजाति के साथ अपने मिश्रित नहीं कर पाती है। अतः पूर्णतया अलग रहने में ही विश्वास रखते हैं। ऐसी जनजातियों में विरहोर, विरजिया, माल - पहाड़िया आदि प्रमुख हैं। सच पूछा जाए तो ये जातियाँ अभी भी बंजारा जातियां ही है और अपनी आवश्यकता के अनुरूप उन्हें जहाँ जैसे सुविधा प्राप्त हो जाती है वहां अपना निवास स्थान बना लेती है। इनके गांव झोपड़ियों के बने होते हैं और उनमें केवल एक ही कोठरी होती है। यद्यपि आज सरकार ने इन्हें सुविधा संपन्न करने के लिए बहुत ही कल्याणकारी योजनाएं चला रखी हैं। फिर भी वे अपने को अन्य जनजातियों के साथ मिश्रित नहीं कर पाते हैं। बिहार के छोटानागपुर के पठारी क्षेत्र में अनेक ऐसे निवास स्थान बनाए गये हैं जिनमें इनके लिए हर प्रकार की सुविधा प्रदान की गई है फिर भी ये वहाँ नहीं रहते हैं। दूसरी ओर उराँव, मुंडा, संथाल, हो आदि ऐसी जनजातियाँ हैं ओ स्थायी रूप से निवास करती हैं और आज ये राष्ट्र की मुख्य धारा के साथ जुड़ कर किसी भी अन्य जाति से कम नहीं है। इन जनजातियों के लोग प्रशासन, अध्यापन, राजनीति, इंजीनियरी, डॉक्टरी आदि सभी प्रमुख क्षेत्रों में अपने को योग्य सिद्ध कर रहे हैं। परंतु इनमें आर्य जातियों के ऊँच - नीच वाला दुर्गूण भी आने लगा है। इन उन्नत जनजातियों का रहन - सहन भी अब काफी उन्नत हो गया है। गाँवों में भी अनेक उन्नत जनजातीय लोगों के माकन ईंट आदि के बने हुए हैं। परंतु अन्य लोगों के माकन मिट्टी के बने होने पर भी काफी विस्तृत एवं हवादार है। इनका गाँव दूर से देख कर ही के पहचाना जा सकता है। इनके माकन के अगल - बगल कुछ क्यारी ऐसाहोता हैं जिसमें अपने लिए सब्जी इत्यादि लगाते है और मवेशियों के लिए भी अलग स्थान होता है। हो लोगों के मकान के कमरा में पूर्वजों के देवी स्थान होते हैं जिन्हें ये लोगो अपनी भाषा में आदिंग कहते हैं। सभी उन्नत जनजातियों के गाँव में अखाड़ा होता हैं। जहाँ लोग संध्या समय जा कर नाचते हैं। इसी प्रकार प्रत्येक गाँव की अपनी अपनी सरना, जाहीरा और महादेव आदि के स्थान होते हैं। जहाँ अपने पूर्वजों एवं देवी देवताओं की पूजा, आराधना की जाती है। प्रत्येक गाँव के अलग - अलग शासन होते हैं, जिनमें मृत ब्यक्तियों को गाड़ा जाता है। बिहार की जनजातियों में उराँव जनजाति एक प्रमुख जनजाति है। बिहार में तीस से भी अधिक जनजातियाँ निवास करती हैं। जिनमें तीन - चार ही आज उन्नत अवस्था में हैं, उनमें संभवताः उराँव सर्वप्रथम उल्लेखनीय है। बिहार की जनजातियों में संख्या के दृष्टिकोण से यद्यपि ये संथालों के बाद द्वितीय स्थान पर हैं परंतु जीवन स्तर तथा जागरूकता के दृष्टि से ये सर्वोपरि है। एक हज़ार नौ सौ इक्यासी जनगणना अनुसार बिहार की जनजातियों की संख्या अट्ठावन लाख दस हज़ार आठ सौ सरसठ है, उनमें उराँव जनजाति की संख्या दस लाख अड़तालीस हज़ार चौंसठ है। उराँव जनजाति के लोग मुख्य रूप से छोटानागपुर के राँची, गुमला, लोहरदगा और सिंहभूम जिला में निवास करते हैं। इनके अतिरिक्त पूर्णिया, सासाराम, पलामु, हजारीबाग आदि जिलों में भी छिटपुट रूप में उराँव लोग निवास करते हैं। यद्यपि उरांवों का मुख्य निवास स्थान बिहार है परंतु मध्य प्रदेश तथा उड़ीसा के अतिरिक्त भारत के कुछ अन्य प्रान्तों में भी ये विद्यमान हैं। उराँव जनजाति के लोग जहाँ कहीं भी रहते है उनकी पहचान अलग से हो जाती है और वे लोग कुडूख भाषा का ही प्रयोग करते हैं। परंतु अब विभिन्न प्रजातियों तथा जातियों के साथ ये लोग मनुष्यों की तरह ही लगते थे परंतु जंगलों में निवास करते थे इस कारण इन्हें आर्यों ने बानर कहा होगा। ये लोग दक्षिण भारत के पर्वतीय अंचल में रहा करते थे और जंगली जानवरों को मारकर इससे अपना जीवन - यापन करते थे। विभिन्न स्थानों पर निवास करने के कारण इनकी बोलचाल की भाषा में परिवर्तन हो गया है और ये लोग वहां के निवासियों की अन्य भाषा को अपना भाषा के साथ सम्मिलित करके उसी का व्यवहार करते हैं। उदहारण के लिए पांचपरगना के अंतर्गत बुंडू, तमाड़, सिल्ली, ईचागढ़ और अड़की इन पांच परगनों में निवास करने वाले उराँव भी पंचपरगनिया भाषा का प्रयोग करते हैं। इस भाषा पर कुडूख भाषा के अतिरिक्त मुंडारी, बंगला, उड़ीसा, और नागपुरिया का पूर्ण प्रभाव हैं परंतु राँची के पश्चिम भाग में निवास करने वाले तथा गुमला एवं लोहरदगा के उराँव कुडूख भाषा का प्रयोग करते हैं। कुछ उराँव के गाँवों में रहने वाले अन्य जाति के लोग भी संपर्क के कारण आपस में कुडूख भाषा ही बोलते हैं। एसे गांवों में रहने वाले अनेक मुसलमान अपने परिवार से भी कुडूख भाषा में ही बोलते है उस प्रकार जे गांवों में रहने वाले अनेक जाति के लोग यद्यपि अपने परिवार में कुडूख नहीं बोलते है परंतु उरांवों के साथ वार्तालाप करने के समय कुडूख के प्रयोग करते हैं। गांवों में घूमने वाले अनेक व्यवसायी उरांवों के साथ कुडूख भाषा में ही बोलते हैं। सामान्यतः उराँव बहुल हाटों में कुडूख भाषा का ही प्रयोग होता है। अनेक टाना भगत एसे हैं जिन्होंने अपने जीवन में कभी भी कुडूख भाषा के अतिरिक्त किसी अन्य भाषा का प्रयोग नहीं किया है। उराँव द्रविड़ प्रजाति के हैं इसमें किसी प्रकार की शंका नहीं होनी चाहिए। डॉ. गुहा ने अन्य जनजातियों की तरह उरांवों को भी प्रोटो - आस्ट्रेलायड प्रजाति के अंतर्गत स्वीकार किया है परंतु यह उचित नहीं जान पड़ता है। डॉ. मजुमदार तथा शरत चंद्र राय इन्हें द्रविड़ प्रजाति का ही मानते हैं। उराँव जनजाति का बिहार आदि निवास स्थान नहीं माना जाता है। अनके विद्वानों ने ऐस सिद्ध करने का प्रयास किया है कि ये लोग दक्षिण भारत में रहा करते थे और जब रामचन्द्र ने रावण पर आक्रमण किया तो ये लोग बानर सेना के रूप में रामचन्द्र के सहयोगी बने। आज अधिकतर आलोचक यह स्वीकार करने लगे हैं कि बानर सेना पूँछ वाली कोई प्रजाति नहीं थी अपितु वे भी नर के तरह हि थे और उन्हें बानर अथवा नर कहा गया। ये लोग दक्षिण भारत के पर्वतीय अंचल में रहा करते थे और जंगली जानवरों को मारकर उससे अपना जीवन - यापन करते थे। इनके पास पत्थर और लकड़ी के हथियार होते थे, जिससे ये लोग शिकार खेलते थे और लड़ाई लड़ते थे बाद में ये लोग यात्रा करते हुए सोन नदी की तराई में आये और वहां स्थायी रूप में बसकर खेती आदि करने लगे। कुछ दिनों के बाद राजनितिक उथल - पुथल होने के कारण ये लोग रोहतास इत्यादि स्थानों से हटने लगे और कोयल नदी के किनारे किनारे ये लोग बढ़ते हुए छोटानागपुर में आकार बस गये। छोटानागपुर में उन दिनों मुंडा जनजातियों का निवास था परंतु अपने ज्ञान रुपी समृद्धि से इन्होंने मुंडाओं को भी खेती आदि करने का तरीका सिखाया। उराँव जनजाति सामाजिक राजनितिक दृष्टि से समृद्ध थी इस कारण मुंडा लोगों को वहां से हटने पर मजबूर किया और परिणाम स्वरुप मुंडा लोग छोटानागपुर में भी एक और सिमटते चले गए। उराँव जनजाति ने छोटे - छोटे गाँव बसाये और खेतों आदि में लग गए। आगे - आगे चलकर इन्होंने सामाजिक तथा राजनितिक संस्था के रूप में पाड़ह की स्थापना की। ये पाड़ह संस्थाएं एक राज्य की तरह अपने - अपने क्षेत्र में प्रशासन संबंधी कार्य करने लगी। प्राचीनकाल में भी उराँव जनजाति बिहार की अन्य जनजातियों की अपेक्षा हर दृष्टि से उन्नत थी और वर्तमान काल में भी यह जनजाति बिहार की अन्य जनजातियों से उन्नत बनी हुई है। सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से तो यह उन्नत है ही आर्थिक, शैक्षिणक तथा राजनैतिक दृष्टि से भी अन्य जनजातीय की तुलना में श्रेष्ठ है। उराँव राजनीति में, प्रशासन में, यांत्रिकी में, चिकित्सा, विज्ञान में तथा शिक्षा के क्षेत्र में उच्च पदों पर विद्यमान है। इस प्रकार हम देखते हैं कि भारत में जनजातियाँ प्रागैतिहासिक काल से ही निवास करती है और यह कह पाना आज असंभव से है कि कौन सी जनजाति भारत की आदि जनजाति है और कौन बाद में आई है। पूरे भारत में न्यूनाधिक रूप से जनजातियाँ निवास करती हैं जिस में बिहार का छोटानागपुर प्रमुख है। इसमें यद्यपि तीस से भी अधिक जनजातियाँ निवास करती है परंतु उनमें आज कुछ ही हर दृष्टि से उन्नत हो पाई है। इन जनजातियों में निःसंदेह उराँव जनजाति सर्वोपरि है।
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नई दिल्ली/शेषमणि शुक्ल। राजस्थान के सियासी संकट को खत्म करने की कोशिश में लगे कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को नसीहत दी है कि सचिन पायलट के संबंध में बोलते वक्त जबान पर कंट्रोल रखें। सूत्रों के मुताबिक गहलोत द्वारा पायलट को नाकारा-निकम्मा कहा जाना शीर्ष नेताओं को अच्छा नहीं लगा है।
कांग्रेस के शीर्ष नेता अभी भी इस प्रयास में है कि सचिन पायलट पार्टी फोरम पर आकर बात करें और जो भी विवाद है, उसे सुलझाएं। पार्टी ने अब तक उन्हें अथवा उनके समर्थक विधायकों को कांग्रेस से बाहर भी नहीं किया है।
सूत्रों के मुताबिक कई वरिष्ठ नेता पायलट की शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक करवा कर बातचीत करवाने की कोशिश में लगे हैं। यही कारण है कि जब गहलोत ने सीधे तौर पर पायलट पर भाजपा के साथ मिल कर कांग्रेस विधायकों की खरीद-फरोख्त में शामिल होने का आरोप लगाया तब कई नेताओं ने इससे बचने की सलाह दी और अब जब निकम्मा-नाकारा कहा तो नसीहत दी कि जबान पर नियंत्रण रखें। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पायलट कुछ दिन पहले तक राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष और राज्य की कांग्रेस सरकार के उपमुख्यमंत्री थे।
उनके लिए ऐसी शब्दावली का प्रयोग पार्टी नेतृत्व और अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करना होगा। इससे पायलट की नाराजगी और बढ़ेगी, जिससे सुलह का रास्ता बंद हो सकता है। परिणामस्वरूप कांग्रेस को अपनी एक और सरकार गवांनी पड़ सकती है। यह भी नहीं भूलना चाहिए कि सचिन पायलट गांधी परिवार के करीबियों में शामिल रहे हैं।
सचिन पायलट खुद भी कह चुके हैं कि वे कांग्रेस नेताओं पर कैसे भरोसा करें, जो एक तरफ सुलह की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ उनकी छवि खराब करने के लिए अनर्गल आरोप लगा रहे हैं।
कभी विधायकों की खरीद-फरोख्त में शामिल होने तो कभी पार्टी विधायक से भाजपा में जाने के लिए 35 करोड़ का ऑफर देने का आरोप लगवाया जा रहा है। उनकी और उनके समर्थक विधायकों की सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया अलग से चल रही है। सूत्रों के मुताबिक सुलह में अड़ंगा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद बन रहे हैं। वे रणनीतिक रूप से पायलट के खिलाफ ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि उनकी नाराजगी बढ़े और वे कुछ ऐसा कदम उठा लें, जिससे उन्हें कांग्रेस से बाहर करने का रास्ता बन जाए।
सूत्रों के मुताबिक गहलोत के खिलाफ जितना आगे तक सचिन पायलट जा चुके हैं, उससे कहीं आगे पायलट के खिलाफ गहलोत बढ़ चुके हैं। राजस्थान में सचिन पायलट की वापसी रोकने के लिए वे शाम-दाम-दंड-भेद, सब कुछ अपना रहे हैं। रणनीतिक रूप से ही गहलोत ने सचिन पायलट के लिए नाकारा-निकम्मा जैसे शब्द कहे। खुद के लिए भी कहा कि वे सब्जी बेचने वाला नहीं, राजस्थान का सीएम हैं। बैगन बेचने नहीं आए हैं। देखा जाए तो गहलोत ने एक तरह से साफ कर दिया कि वे अब किसी भी हाल में सचिन पायलट को राजस्थान में या कहें कि कांग्रेस में ही नहीं देखना चाहते।
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नई दिल्ली/शेषमणि शुक्ल। राजस्थान के सियासी संकट को खत्म करने की कोशिश में लगे कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को नसीहत दी है कि सचिन पायलट के संबंध में बोलते वक्त जबान पर कंट्रोल रखें। सूत्रों के मुताबिक गहलोत द्वारा पायलट को नाकारा-निकम्मा कहा जाना शीर्ष नेताओं को अच्छा नहीं लगा है। कांग्रेस के शीर्ष नेता अभी भी इस प्रयास में है कि सचिन पायलट पार्टी फोरम पर आकर बात करें और जो भी विवाद है, उसे सुलझाएं। पार्टी ने अब तक उन्हें अथवा उनके समर्थक विधायकों को कांग्रेस से बाहर भी नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक कई वरिष्ठ नेता पायलट की शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठक करवा कर बातचीत करवाने की कोशिश में लगे हैं। यही कारण है कि जब गहलोत ने सीधे तौर पर पायलट पर भाजपा के साथ मिल कर कांग्रेस विधायकों की खरीद-फरोख्त में शामिल होने का आरोप लगाया तब कई नेताओं ने इससे बचने की सलाह दी और अब जब निकम्मा-नाकारा कहा तो नसीहत दी कि जबान पर नियंत्रण रखें। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पायलट कुछ दिन पहले तक राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष और राज्य की कांग्रेस सरकार के उपमुख्यमंत्री थे। उनके लिए ऐसी शब्दावली का प्रयोग पार्टी नेतृत्व और अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करना होगा। इससे पायलट की नाराजगी और बढ़ेगी, जिससे सुलह का रास्ता बंद हो सकता है। परिणामस्वरूप कांग्रेस को अपनी एक और सरकार गवांनी पड़ सकती है। यह भी नहीं भूलना चाहिए कि सचिन पायलट गांधी परिवार के करीबियों में शामिल रहे हैं। सचिन पायलट खुद भी कह चुके हैं कि वे कांग्रेस नेताओं पर कैसे भरोसा करें, जो एक तरफ सुलह की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ उनकी छवि खराब करने के लिए अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। कभी विधायकों की खरीद-फरोख्त में शामिल होने तो कभी पार्टी विधायक से भाजपा में जाने के लिए पैंतीस करोड़ का ऑफर देने का आरोप लगवाया जा रहा है। उनकी और उनके समर्थक विधायकों की सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया अलग से चल रही है। सूत्रों के मुताबिक सुलह में अड़ंगा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खुद बन रहे हैं। वे रणनीतिक रूप से पायलट के खिलाफ ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि उनकी नाराजगी बढ़े और वे कुछ ऐसा कदम उठा लें, जिससे उन्हें कांग्रेस से बाहर करने का रास्ता बन जाए। सूत्रों के मुताबिक गहलोत के खिलाफ जितना आगे तक सचिन पायलट जा चुके हैं, उससे कहीं आगे पायलट के खिलाफ गहलोत बढ़ चुके हैं। राजस्थान में सचिन पायलट की वापसी रोकने के लिए वे शाम-दाम-दंड-भेद, सब कुछ अपना रहे हैं। रणनीतिक रूप से ही गहलोत ने सचिन पायलट के लिए नाकारा-निकम्मा जैसे शब्द कहे। खुद के लिए भी कहा कि वे सब्जी बेचने वाला नहीं, राजस्थान का सीएम हैं। बैगन बेचने नहीं आए हैं। देखा जाए तो गहलोत ने एक तरह से साफ कर दिया कि वे अब किसी भी हाल में सचिन पायलट को राजस्थान में या कहें कि कांग्रेस में ही नहीं देखना चाहते।
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दिल्ली के पूर्व खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री असीम अहमद खान ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से अपनी जान का खतरा बताया हैं. उन्होंने सरकार से सुरक्षा की भी मांग की हैं.
उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि अगर उन्हें कुछ होता है तो इसके जिम्मेदार केजरीवाल होंगे. असीम ने बताया कि उन्होंने दो महीने पहले उन्होंने अपनी हत्या की साजिश के बारे में उपराज्यपाल और गृह मंत्री को पत्र लिखकर अगाह किया था. उन्होंने अपनी सुरक्षा की मांग की थी। उन्होंने पत्र में लिखा था कि अगर भविष्य में भी उन्हें कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी केजरीवाल की होगी.
आप विधायक ने अपनी चिट्ठी की कॉपियां मीडिया में बांटते हुए दावा किया कि उनके पास केजरीवाल सरकार से जुड़े कुछ ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग्स है. वे जल्द ही इस इन सबूतों को सार्वजनिक करके केजरीवाल के असली चेहरे को लोगों के सामने लाएंग.
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दिल्ली के पूर्व खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री असीम अहमद खान ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से अपनी जान का खतरा बताया हैं. उन्होंने सरकार से सुरक्षा की भी मांग की हैं. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि अगर उन्हें कुछ होता है तो इसके जिम्मेदार केजरीवाल होंगे. असीम ने बताया कि उन्होंने दो महीने पहले उन्होंने अपनी हत्या की साजिश के बारे में उपराज्यपाल और गृह मंत्री को पत्र लिखकर अगाह किया था. उन्होंने अपनी सुरक्षा की मांग की थी। उन्होंने पत्र में लिखा था कि अगर भविष्य में भी उन्हें कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी केजरीवाल की होगी. आप विधायक ने अपनी चिट्ठी की कॉपियां मीडिया में बांटते हुए दावा किया कि उनके पास केजरीवाल सरकार से जुड़े कुछ ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग्स है. वे जल्द ही इस इन सबूतों को सार्वजनिक करके केजरीवाल के असली चेहरे को लोगों के सामने लाएंग.
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उत्तराखंड में जोशीमठ से बदरीनाथ के बीच शुक्रवार को हुए भूस्खलन की वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गया है.
इससे बदरीनाथ की यात्रा रुक गई है और करीब 1500 यात्री रास्ते में फंस गए हैं.
चमोली के ज़िला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने बीबीसी को बताया कि जोशीमठ से करीब 12 किलोमीटर आगे हाथी पर्वत के करीब पहाड़ी दरकने से 40 से 50 मीटर सड़क ब्लॉक हो गई.
सूचना पर पहुंची बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) की टीम ने रास्ता खोलने का काम शुरू कर दिया है. जेसीबी और अन्य मशीनों के जरिए मलबा हटाया जा रहा है.
ज़िला आपदा प्रबंधन अधिकारी जोशी के अनुसार रास्ते में फंसे करीब 1500 यात्री सुरक्षित हैं और उनके ठहरने की व्यवस्था कर दी गई.
जोशी ने दावा किया कि ये सड़क शनिवार दोपहर तक खुल जाएगी.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं. )
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उत्तराखंड में जोशीमठ से बदरीनाथ के बीच शुक्रवार को हुए भूस्खलन की वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गया है. इससे बदरीनाथ की यात्रा रुक गई है और करीब एक हज़ार पाँच सौ यात्री रास्ते में फंस गए हैं. चमोली के ज़िला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने बीबीसी को बताया कि जोशीमठ से करीब बारह किलोग्राममीटर आगे हाथी पर्वत के करीब पहाड़ी दरकने से चालीस से पचास मीटर सड़क ब्लॉक हो गई. सूचना पर पहुंची बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन की टीम ने रास्ता खोलने का काम शुरू कर दिया है. जेसीबी और अन्य मशीनों के जरिए मलबा हटाया जा रहा है. ज़िला आपदा प्रबंधन अधिकारी जोशी के अनुसार रास्ते में फंसे करीब एक हज़ार पाँच सौ यात्री सुरक्षित हैं और उनके ठहरने की व्यवस्था कर दी गई. जोशी ने दावा किया कि ये सड़क शनिवार दोपहर तक खुल जाएगी.
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इंदौर, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश (Madhya pradesh) के इंदौर शहर (Indore) में फ्रेंडशिप डे (Friendship day) के नाम पर एक बार फिर नियमों की धज्जियां उड़ाई गई, भले ही पुलिस ने पहले ही फ्रेंडशिप के नाम पर अश्लीलता परोसने वाले होटल और आयोजकों को चेतवानी दे दी थी। लेकिन उसका कोई असर नजर नहीं आया, यही कारण है कि बीते रविवार को फ्रेंडशिप डे के नाम पर एक बार फिर शहर के होटेल्स में जमकर शराब के जाम छलके और अश्लीलता की सारी हदें पार हुई।
शहर के सयाजी होटल से भी ऐसे नज़ारे सामने आए जिसमें ना सिर्फ मर्यादा को तार-तार कर रख दिए बल्कि सवाल भी खड़े कर दिए कि पुलिस की चेतावनी के बावजूद भी आखिर यह आयोजन कैसे किए गए। बताया जा रहा है कि फ्रेंडशिप डे के नाम पर कल इंदौर शहर के सयाजी होटल में हाईप्रोफाइल लोगों की पार्टी आयोजित की गई। जिसमें लोगों द्वारा नशाखोरी और आपत्तिजनक हरकते की है।
दरअसल, स्वच्छ इंदौर की छवि को बरकरार रखने के लिए पार्टी के एक दिन पहले ही इंदौर कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र ने आदेश देते हुए कहा था कि फ्रेंडशिप डे के दिन नशाखोरी और अश्लील पार्टियों पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी, जो भी नियमों की अनदेखी करेगा उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी, पुलिस की टीम ऐसे स्थानों की चेकिंग करेगी।
इसके बावजूद भी हाई प्रोफाइल लोगों ने पार्टी कर ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया। फिलहाल पुलिस कमिश्नर के इस आदेश की तो धज्जियां उड़ा दी गई, लेकिन अब वहीं इन इलाकों के पुलिस अधिकारी जांच की बात कह रहे है। जानकारी के मुताबिक, फ्रेंडशिप डे के दिन हाईप्रोफाइल लोगों की पूल पार्टी में अश्लीलता की सारी हदें पार कर दी गई। दरअसल, कुछ लोगों ने इस पार्टी में नशाखोरी की तो कुछ कपल्स ने सेल्फी पॉइंट पर एक दूसरे को लिप किस किया।
इतना ही नहीं लोगों ने इसके फोटो और वीडियो भी बनवाए। बताया गया है कि पुल में भी कई कपल नशे की हालत में आपत्तिजनक हरकत करते हुए नजर आए। इस दौरान कई युवक युवती नशे में धुत दिखी। बता दे, इस पार्टी का आयोजन बीते दिन कवाब विले पूल साइड में किया गया था। ये पार्टी दिन से शुरू हुई और देर रात तक चली। इसके अलावा कल यानी फ्रेंडशिप डे के दिन कनाड़िया थाना क्षेत्र के बायपास स्थित ऐडम्स एलए पब में भी ऐसी पूल पार्टी का आयोजन होने वाला था लेकिन इसको लेकर काफी विरोध होने के बाद यहां की पार्टी को निरस्त कर दिया गया।
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इंदौर, डेस्क रिपोर्ट। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में फ्रेंडशिप डे के नाम पर एक बार फिर नियमों की धज्जियां उड़ाई गई, भले ही पुलिस ने पहले ही फ्रेंडशिप के नाम पर अश्लीलता परोसने वाले होटल और आयोजकों को चेतवानी दे दी थी। लेकिन उसका कोई असर नजर नहीं आया, यही कारण है कि बीते रविवार को फ्रेंडशिप डे के नाम पर एक बार फिर शहर के होटेल्स में जमकर शराब के जाम छलके और अश्लीलता की सारी हदें पार हुई। शहर के सयाजी होटल से भी ऐसे नज़ारे सामने आए जिसमें ना सिर्फ मर्यादा को तार-तार कर रख दिए बल्कि सवाल भी खड़े कर दिए कि पुलिस की चेतावनी के बावजूद भी आखिर यह आयोजन कैसे किए गए। बताया जा रहा है कि फ्रेंडशिप डे के नाम पर कल इंदौर शहर के सयाजी होटल में हाईप्रोफाइल लोगों की पार्टी आयोजित की गई। जिसमें लोगों द्वारा नशाखोरी और आपत्तिजनक हरकते की है। दरअसल, स्वच्छ इंदौर की छवि को बरकरार रखने के लिए पार्टी के एक दिन पहले ही इंदौर कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र ने आदेश देते हुए कहा था कि फ्रेंडशिप डे के दिन नशाखोरी और अश्लील पार्टियों पर पुलिस की पैनी नजर रहेगी, जो भी नियमों की अनदेखी करेगा उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी, पुलिस की टीम ऐसे स्थानों की चेकिंग करेगी। इसके बावजूद भी हाई प्रोफाइल लोगों ने पार्टी कर ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया। फिलहाल पुलिस कमिश्नर के इस आदेश की तो धज्जियां उड़ा दी गई, लेकिन अब वहीं इन इलाकों के पुलिस अधिकारी जांच की बात कह रहे है। जानकारी के मुताबिक, फ्रेंडशिप डे के दिन हाईप्रोफाइल लोगों की पूल पार्टी में अश्लीलता की सारी हदें पार कर दी गई। दरअसल, कुछ लोगों ने इस पार्टी में नशाखोरी की तो कुछ कपल्स ने सेल्फी पॉइंट पर एक दूसरे को लिप किस किया। इतना ही नहीं लोगों ने इसके फोटो और वीडियो भी बनवाए। बताया गया है कि पुल में भी कई कपल नशे की हालत में आपत्तिजनक हरकत करते हुए नजर आए। इस दौरान कई युवक युवती नशे में धुत दिखी। बता दे, इस पार्टी का आयोजन बीते दिन कवाब विले पूल साइड में किया गया था। ये पार्टी दिन से शुरू हुई और देर रात तक चली। इसके अलावा कल यानी फ्रेंडशिप डे के दिन कनाड़िया थाना क्षेत्र के बायपास स्थित ऐडम्स एलए पब में भी ऐसी पूल पार्टी का आयोजन होने वाला था लेकिन इसको लेकर काफी विरोध होने के बाद यहां की पार्टी को निरस्त कर दिया गया।
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यूपी के कैबिनेट मंत्री व सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने शुक्रवार को कहा कि सरकार में उपेक्षा के बाद भी गठबंधन धर्म निभाऊंगा। मैं जो भी हूं, अपनी पार्टी और कार्यकर्ताओं के बल पर हूं।
गाजीपुर जिले के कासिमाबाद स्थित महाराणा प्रताप सभागार में कार्यकर्ताओं की बैठक में उन्होंने कहा कि कुछ लोग मुझे बदनाम करने में लगे हैं। मैं यह साजिश सफल नहीं होने दूंगा। कहा कि मैं जो कुछ भी हूं, कार्यकर्ताओं और पार्टी की वजह से हूं।
अभी से आप लोग हर बूथ पर लग जाएं। सरकार में मेरी उपेक्षा से आपको घबराना नहीं है। मैं गठबंधन धर्म निभाते हुए निष्ठापूर्वक कार्य करता रहूंगा। कहा कि मैंने क्षेत्र की सड़कों का प्रस्ताव सरकार को दिया है। सड़कों पर ध्यान देना सरकार का काम है।
कहा, मेरे प्रयास से सिंगेरा में फायर ब्रिगेड स्टेशन एवं तहसील परिसर में निरीक्षण गृह का प्रस्ताव मंजूर हो गया है। उन्होंने कहा कि जिस विभाग का मैं मंत्री हूं, मुझसे पहले प्रदेश की जनता इस विभाग को जानती तक नहीं थी।
मैंने इस विभाग को पुनर्जीवित कर आज इस स्थिति में ला दिया है कि यह प्रदेश में चर्चा का विषय बना है। उन्होंने पिछड़ों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को पिछड़ों का आरक्षण तीन श्रेणी में बांट कर देना चाहिए।
कहा कि पार्टी पूरे प्रदेश में हर बूथ, हर सेक्टर पर दिखाई दे रही है। लोकसभा चुनाव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी की मजबूती के लिए लग जाना चाहिए।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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यूपी के कैबिनेट मंत्री व सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने शुक्रवार को कहा कि सरकार में उपेक्षा के बाद भी गठबंधन धर्म निभाऊंगा। मैं जो भी हूं, अपनी पार्टी और कार्यकर्ताओं के बल पर हूं। गाजीपुर जिले के कासिमाबाद स्थित महाराणा प्रताप सभागार में कार्यकर्ताओं की बैठक में उन्होंने कहा कि कुछ लोग मुझे बदनाम करने में लगे हैं। मैं यह साजिश सफल नहीं होने दूंगा। कहा कि मैं जो कुछ भी हूं, कार्यकर्ताओं और पार्टी की वजह से हूं। अभी से आप लोग हर बूथ पर लग जाएं। सरकार में मेरी उपेक्षा से आपको घबराना नहीं है। मैं गठबंधन धर्म निभाते हुए निष्ठापूर्वक कार्य करता रहूंगा। कहा कि मैंने क्षेत्र की सड़कों का प्रस्ताव सरकार को दिया है। सड़कों पर ध्यान देना सरकार का काम है। कहा, मेरे प्रयास से सिंगेरा में फायर ब्रिगेड स्टेशन एवं तहसील परिसर में निरीक्षण गृह का प्रस्ताव मंजूर हो गया है। उन्होंने कहा कि जिस विभाग का मैं मंत्री हूं, मुझसे पहले प्रदेश की जनता इस विभाग को जानती तक नहीं थी। मैंने इस विभाग को पुनर्जीवित कर आज इस स्थिति में ला दिया है कि यह प्रदेश में चर्चा का विषय बना है। उन्होंने पिछड़ों को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को पिछड़ों का आरक्षण तीन श्रेणी में बांट कर देना चाहिए। कहा कि पार्टी पूरे प्रदेश में हर बूथ, हर सेक्टर पर दिखाई दे रही है। लोकसभा चुनाव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी की मजबूती के लिए लग जाना चाहिए। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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उज्जैनः Sara Ali Khan and Amrita Singh विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में फिल्म अभिनेत्री सारा अली खान अपनी मां अमृता सिंह के साथ पहुंची। इस दौरान सारा अली खान ने करीब 1 घंटे से अधिक समय महाकालेश्वर मंदिर में बिताया। सारा अली खान और अमृता सिंह महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भोग आरती में भी शामिल हुई।
Sara Ali Khan and Amrita Singh बता दें कि लुका छुपी 2 फिल्म की शूटिंग काफी दिनों से इंदौर में चल रही है और अब फ़िल्म का कुछ हिस्सा उज्जैन में शूट किया जाना हैख् जिसके लिए भरतपुरी मे सेट लगाया हुआ है। शनिवार को फिल्म की यूनिट भरत पुरी स्थित फ़िल्म का कुछ हिस्सा शूट करेंगे फ़िल्म की शूटिंग के लिए सारा अली खान और विकी कौशल उज्जैन पहुंचे।
शूटिंग से पहले अपनी मां के साथ महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन करने पहुंची सारा अली खान ने करीब 1 घंटे से अधिक समय महाकालेश्वर मंदिर में पूजन पाठ और महाकाल के ध्यान में रमी हुई नजर आई। इस दौरान सारा अपनी मां को महाकाल मंदिर के बारे में बताते रही। सारा करीब 30 मिनिट तक कोटि तीर्थ के सामने अपनी माँ के साथ ओम नमः शिवाय का जाप करती रही। इसके बाद सारा अपनी मां अमृता सिंह के साथ आरती में शामिल हुई और आरती के बाद शूटिंग के लिए निकली इस दौरान सारा से मिलने के लिए उनके फैंस मौजूद थे लेकिन सारा ने किसी को निराश नहीं किया और सभी से सहज भाव में मिलती हुई नजर आई।
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उज्जैनः Sara Ali Khan and Amrita Singh विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में फिल्म अभिनेत्री सारा अली खान अपनी मां अमृता सिंह के साथ पहुंची। इस दौरान सारा अली खान ने करीब एक घंटाटे से अधिक समय महाकालेश्वर मंदिर में बिताया। सारा अली खान और अमृता सिंह महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भोग आरती में भी शामिल हुई। Sara Ali Khan and Amrita Singh बता दें कि लुका छुपी दो फिल्म की शूटिंग काफी दिनों से इंदौर में चल रही है और अब फ़िल्म का कुछ हिस्सा उज्जैन में शूट किया जाना हैख् जिसके लिए भरतपुरी मे सेट लगाया हुआ है। शनिवार को फिल्म की यूनिट भरत पुरी स्थित फ़िल्म का कुछ हिस्सा शूट करेंगे फ़िल्म की शूटिंग के लिए सारा अली खान और विकी कौशल उज्जैन पहुंचे। शूटिंग से पहले अपनी मां के साथ महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन करने पहुंची सारा अली खान ने करीब एक घंटाटे से अधिक समय महाकालेश्वर मंदिर में पूजन पाठ और महाकाल के ध्यान में रमी हुई नजर आई। इस दौरान सारा अपनी मां को महाकाल मंदिर के बारे में बताते रही। सारा करीब तीस मिनिट तक कोटि तीर्थ के सामने अपनी माँ के साथ ओम नमः शिवाय का जाप करती रही। इसके बाद सारा अपनी मां अमृता सिंह के साथ आरती में शामिल हुई और आरती के बाद शूटिंग के लिए निकली इस दौरान सारा से मिलने के लिए उनके फैंस मौजूद थे लेकिन सारा ने किसी को निराश नहीं किया और सभी से सहज भाव में मिलती हुई नजर आई।
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Taijul Islam in vs Ireland Test: बांग्लादेश के तेज गेंदबाज तैजुल इस्लाम ने आयरलैंड के खिलाफ टेस्ट मैच में पांच विकेट हॉल हासिल हासिल किया। उन्होंने इस दौरान एक अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
बांग्लादेश और आयरलैंड के बीज एकमात्र टेस्ट मैच ढाका के मैदान पर खेला जा रहा है। दोनों टीम पहली बार टेस्ट क्रिकेट में आमने-सामने हैं। बांग्लादेशी तेज गेंदबाज तैजुल इस्लाम ने आयरलैंड के खिलाफ पहली पारी में कालिताना गेंदबाजी की। उन्होंने 28 रन देकर पांच विकेट चटकाए, जिससे आयरलैंड की पारी 214 रन पर सिमट गई। यह उनके टेस्ट करियर का 11वां पांच विकेट हॉल है। तैजुल ने एंड्रयू बालबर्नी (16), कर्टिस कैम्फर (34), लोर्कन टकर (37), मार्क अडेर (32) और पीटर मूर (1) का शिकार किया।
तैजुल ने पीटर मूर का शिकार करते ही एक अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। वह टेस्ट क्रिकेट में दो देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक ही खिलाड़ी को आउट करने वाले पहले गेंदबाज बन गए हैं। बता दें कि मूर जिम्बाब्वे के लिए भी टेस्ट मैच खेल चुके हैं। जिम्बाब्वे की टीम जब साल 2018 में बांग्लादेश दौरे पर आई थी, तब तैजुल ने मूर को पहले टेस्ट की दूसरी पारी में शून्य पर आउट किया था। मूर ने जिम्बाब्वे की ओर से आखिरी टेस्ट उसी दौरे पर खेला था।
गौरतलब है कि मूर दो देशों के लिए टेस्ट मैच खेलने वाले दुनिया के 17वें खिलाड़ी हैं। वहीं, मूर पिछले तीस सालों में दो देशों के लिए टेस्ट खेलने वाले दुनिया के तीसरे प्लेयर हैं। उनसे पहले बॉयड रैनकिन और गैरी बैलांस ने ऐसा किया। रैनकिन इंग्लैंड और आयरलैंड जबकि बैलांस इंग्लैंड और जिम्बाब्वे की तरफ से टेस्ट खेले। बांग्लादाशे और आयरलैंड टेस्ट की बात करें तो शाकिब ब्रिगेड ने पहली पारी के आधार पर 155 रन की दमदार बढ़त हासिल की। बांग्लादेश ने पहली पारी में 369 रन जुटाए। मुशफिकुर रहीम ने 126 रन की पारी खेली। बुधवार को दूसरे दिन का खेल समाप्त होने पर आयरलैंड का दूसरी पारी में स्कोर 27/4 था।
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Taijul Islam in vs Ireland Test: बांग्लादेश के तेज गेंदबाज तैजुल इस्लाम ने आयरलैंड के खिलाफ टेस्ट मैच में पांच विकेट हॉल हासिल हासिल किया। उन्होंने इस दौरान एक अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। बांग्लादेश और आयरलैंड के बीज एकमात्र टेस्ट मैच ढाका के मैदान पर खेला जा रहा है। दोनों टीम पहली बार टेस्ट क्रिकेट में आमने-सामने हैं। बांग्लादेशी तेज गेंदबाज तैजुल इस्लाम ने आयरलैंड के खिलाफ पहली पारी में कालिताना गेंदबाजी की। उन्होंने अट्ठाईस रन देकर पांच विकेट चटकाए, जिससे आयरलैंड की पारी दो सौ चौदह रन पर सिमट गई। यह उनके टेस्ट करियर का ग्यारहवां पांच विकेट हॉल है। तैजुल ने एंड्रयू बालबर्नी , कर्टिस कैम्फर , लोर्कन टकर , मार्क अडेर और पीटर मूर का शिकार किया। तैजुल ने पीटर मूर का शिकार करते ही एक अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। वह टेस्ट क्रिकेट में दो देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक ही खिलाड़ी को आउट करने वाले पहले गेंदबाज बन गए हैं। बता दें कि मूर जिम्बाब्वे के लिए भी टेस्ट मैच खेल चुके हैं। जिम्बाब्वे की टीम जब साल दो हज़ार अट्ठारह में बांग्लादेश दौरे पर आई थी, तब तैजुल ने मूर को पहले टेस्ट की दूसरी पारी में शून्य पर आउट किया था। मूर ने जिम्बाब्वे की ओर से आखिरी टेस्ट उसी दौरे पर खेला था। गौरतलब है कि मूर दो देशों के लिए टेस्ट मैच खेलने वाले दुनिया के सत्रहवें खिलाड़ी हैं। वहीं, मूर पिछले तीस सालों में दो देशों के लिए टेस्ट खेलने वाले दुनिया के तीसरे प्लेयर हैं। उनसे पहले बॉयड रैनकिन और गैरी बैलांस ने ऐसा किया। रैनकिन इंग्लैंड और आयरलैंड जबकि बैलांस इंग्लैंड और जिम्बाब्वे की तरफ से टेस्ट खेले। बांग्लादाशे और आयरलैंड टेस्ट की बात करें तो शाकिब ब्रिगेड ने पहली पारी के आधार पर एक सौ पचपन रन की दमदार बढ़त हासिल की। बांग्लादेश ने पहली पारी में तीन सौ उनहत्तर रन जुटाए। मुशफिकुर रहीम ने एक सौ छब्बीस रन की पारी खेली। बुधवार को दूसरे दिन का खेल समाप्त होने पर आयरलैंड का दूसरी पारी में स्कोर सत्ताईस/चार था।
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1958 में रेचल ने एक मुश्किल नई परियोजना शुरू की.
जब द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ उसके बाद अमरीका में रासायनिक उद्योग बहुत शक्तिशाली हो गया था.
कीड़ों को मारने के लिए रसायनों का भारी छिड़काव नियमित रूप से पार्कों और प्राकृतिक जंगलों में किया जाने लगा. यहां तक कि स्विमिंग पूल और भीड़-भाड़ वाली शहर की सड़कों पर भी रसायनों का भारी छिड़काव होने लगा. 1945 की शुरुआत में, रेचल ने देश भर में पक्षियों की घटती आबादी के बारे में पढ़ा.
हर साल शोधकर्ताओं ने कम घोंसलों और कम होते प्रवासी पक्षियों की सूचना दी.
रेचल ने जितनी अधिक छानबीन की, वो आंकड़ों से उतनी ही अधिक चिंतित होती गई.
कीटनाशक पक्षियों, कीड़ों, मछलियों और अन्य जानवरों के लिए घातक थे.
और लोगों पर उनका असर?
किसी ने भी इन बड़े व्यवसायों, रासायनों को मंजूरी देने वाली एजेंसियों, या रसायनों के प्रभावों के बारे में घटिया शोध करने वाले विश्वविद्यालयों के खिलाफ अपनी आवाज़ नहीं उठाई थी.
रेचल को पता था कि वो खतरनाक क्षेत्र में पैर रख रही थीं.
पर क्योंकि उनका उद्योग, सरकार या किसी विश्वविद्यालय से कोई संबंध नहीं था, इसलिए उन्हें लगा कि वो अधिक स्वतंत्र रूप से तथ्य एकत्र कर सकती थीं.
उन्हें लगा की जो वो लिखेगी उसे लोग पढ़ेंगे और फिर वे साफ़ हवा, स्वच्छ पानी की मांग के लिए संघर्ष करेंगे.
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एक हज़ार नौ सौ अट्ठावन में रेचल ने एक मुश्किल नई परियोजना शुरू की. जब द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ उसके बाद अमरीका में रासायनिक उद्योग बहुत शक्तिशाली हो गया था. कीड़ों को मारने के लिए रसायनों का भारी छिड़काव नियमित रूप से पार्कों और प्राकृतिक जंगलों में किया जाने लगा. यहां तक कि स्विमिंग पूल और भीड़-भाड़ वाली शहर की सड़कों पर भी रसायनों का भारी छिड़काव होने लगा. एक हज़ार नौ सौ पैंतालीस की शुरुआत में, रेचल ने देश भर में पक्षियों की घटती आबादी के बारे में पढ़ा. हर साल शोधकर्ताओं ने कम घोंसलों और कम होते प्रवासी पक्षियों की सूचना दी. रेचल ने जितनी अधिक छानबीन की, वो आंकड़ों से उतनी ही अधिक चिंतित होती गई. कीटनाशक पक्षियों, कीड़ों, मछलियों और अन्य जानवरों के लिए घातक थे. और लोगों पर उनका असर? किसी ने भी इन बड़े व्यवसायों, रासायनों को मंजूरी देने वाली एजेंसियों, या रसायनों के प्रभावों के बारे में घटिया शोध करने वाले विश्वविद्यालयों के खिलाफ अपनी आवाज़ नहीं उठाई थी. रेचल को पता था कि वो खतरनाक क्षेत्र में पैर रख रही थीं. पर क्योंकि उनका उद्योग, सरकार या किसी विश्वविद्यालय से कोई संबंध नहीं था, इसलिए उन्हें लगा कि वो अधिक स्वतंत्र रूप से तथ्य एकत्र कर सकती थीं. उन्हें लगा की जो वो लिखेगी उसे लोग पढ़ेंगे और फिर वे साफ़ हवा, स्वच्छ पानी की मांग के लिए संघर्ष करेंगे.
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अमेरिकी अख़बार "इंटरनेशनल हेराल्ड" के मुताबिकट्रिब्यून ", फिलीपींस, पालावान द्वीप के भीतरी इलाकों में, यह गुफाओं एक प्राचीन ज्वालामुखी के विशाल गड्ढा के भीतरी ढलानों पर गठन में एक जनजाति रहने मिला था। लोग क्योंकि खड़ी चट्टानों और घाटियों की दुर्गम क्षेत्रों में रहते हैं, और बाहर की दुनिया से संबंधित नहीं है।
कोलंबिया के पत्रकारों का एक समूहबौद्धों का एक गोत्रा जो कि सरकार या नेताओं को नहीं जानते हैं, और मोटीलोंस घाटी में कोलंबिया और वेनेजुएला की सीमा पर रहते हैं। आसपास के स्थानों के किसानों ने उन्हें "युकोस" कहा। एक मीटर की वृद्धि के बावजूद, बौनों का एक मजबूत शरीर, मांसपेशियों के पैरों और असंगत लंबे और बड़े हाथ हैं। उनके चेहरे की विशेषताएं मंगोलोल होती हैं, और एक खूबसूरत चॉकलेट रंग की झुर्री हुई त्वचा होती है। मुख्य भोजन बौने - युकोस - एक कच्चा या थोड़ा उबला हुआ मकई है। मांस या लकड़ी या पत्थर की युक्तियों के साथ धनुष और तीर की मदद से शिकार पर वे पैदा करते हैं।
वन्य जनजातियां भी अफ्रीका में होती हैं, बावजूदकि यह यात्रियों द्वारा चलाया जाता है और अध्ययन किया। उदाहरण के लिए, एक जनजाति जिसका निवासियों के पास उनके पैरों पर केवल दो उंगलियां हैं इस जनजाति में, जो ज़मोबी नदी के पास वाडोमा के रेगिस्तान क्षेत्र में रहता है, वहां लगभग 600 लोग हैं।
बहुत पहले नहीं, रूसी यात्रीए। खुज़्नयक के नेतृत्व ने अमेज़ॅन के खराब अध्ययन क्षेत्रों के जंगलों में खो जाने वाले भारतीयों की एक जनजाति की खोज की, जिन्होंने खुद को योनोमी कहा। वे सूरज, पानी, चंद्रमा, वन की आत्माओं का सम्मान करते हैं। वे अपने मृत कबीले को दांव पर जला देते हैं, और फिर वे अपने करीबी रिश्तेदारों को राख देते हैं। याद की त्योहार पर, राख खाती है, भोजन के साथ मिलाया जाता है जनजाति का नेता एक ही समय में मरहम और जादूगर है, जड़ी-बूटियों और मंत्रों की मदद से लोगों को बचाने के लिए।
वे हिरन झोपड़ियों में रहते हैं, वे में लगे हुए हैंमुख्य रूप से मछली पकड़ने और शिकार महिला बगीचे में काम करती हैं, साथ ही साथ फसल और जड़ें भी। एक नियम के रूप में, जनजाति के लोग मादक पदार्थों के नशेड़ी होते हैं, उन्हें नशीले पदार्थों वाले पौधों से खुद को नशा करने के लिए बनाया जाता है योनोमी - सफेद लोगों के लिए बहुत आक्रामक और शत्रुतापूर्ण।
ऑस्ट्रेलियाई आदिवासियों ने, जो एक बार जनसंख्या का केवल 1% के लिए ऑस्ट्रेलिया, आज खाता बसे हुए। वे 40-64 हजार। साल पहले महाद्वीप पर बसे और यहाँ आया, शायद एशिया से।
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अमेरिकी अख़बार "इंटरनेशनल हेराल्ड" के मुताबिकट्रिब्यून ", फिलीपींस, पालावान द्वीप के भीतरी इलाकों में, यह गुफाओं एक प्राचीन ज्वालामुखी के विशाल गड्ढा के भीतरी ढलानों पर गठन में एक जनजाति रहने मिला था। लोग क्योंकि खड़ी चट्टानों और घाटियों की दुर्गम क्षेत्रों में रहते हैं, और बाहर की दुनिया से संबंधित नहीं है। कोलंबिया के पत्रकारों का एक समूहबौद्धों का एक गोत्रा जो कि सरकार या नेताओं को नहीं जानते हैं, और मोटीलोंस घाटी में कोलंबिया और वेनेजुएला की सीमा पर रहते हैं। आसपास के स्थानों के किसानों ने उन्हें "युकोस" कहा। एक मीटर की वृद्धि के बावजूद, बौनों का एक मजबूत शरीर, मांसपेशियों के पैरों और असंगत लंबे और बड़े हाथ हैं। उनके चेहरे की विशेषताएं मंगोलोल होती हैं, और एक खूबसूरत चॉकलेट रंग की झुर्री हुई त्वचा होती है। मुख्य भोजन बौने - युकोस - एक कच्चा या थोड़ा उबला हुआ मकई है। मांस या लकड़ी या पत्थर की युक्तियों के साथ धनुष और तीर की मदद से शिकार पर वे पैदा करते हैं। वन्य जनजातियां भी अफ्रीका में होती हैं, बावजूदकि यह यात्रियों द्वारा चलाया जाता है और अध्ययन किया। उदाहरण के लिए, एक जनजाति जिसका निवासियों के पास उनके पैरों पर केवल दो उंगलियां हैं इस जनजाति में, जो ज़मोबी नदी के पास वाडोमा के रेगिस्तान क्षेत्र में रहता है, वहां लगभग छः सौ लोग हैं। बहुत पहले नहीं, रूसी यात्रीए। खुज़्नयक के नेतृत्व ने अमेज़ॅन के खराब अध्ययन क्षेत्रों के जंगलों में खो जाने वाले भारतीयों की एक जनजाति की खोज की, जिन्होंने खुद को योनोमी कहा। वे सूरज, पानी, चंद्रमा, वन की आत्माओं का सम्मान करते हैं। वे अपने मृत कबीले को दांव पर जला देते हैं, और फिर वे अपने करीबी रिश्तेदारों को राख देते हैं। याद की त्योहार पर, राख खाती है, भोजन के साथ मिलाया जाता है जनजाति का नेता एक ही समय में मरहम और जादूगर है, जड़ी-बूटियों और मंत्रों की मदद से लोगों को बचाने के लिए। वे हिरन झोपड़ियों में रहते हैं, वे में लगे हुए हैंमुख्य रूप से मछली पकड़ने और शिकार महिला बगीचे में काम करती हैं, साथ ही साथ फसल और जड़ें भी। एक नियम के रूप में, जनजाति के लोग मादक पदार्थों के नशेड़ी होते हैं, उन्हें नशीले पदार्थों वाले पौधों से खुद को नशा करने के लिए बनाया जाता है योनोमी - सफेद लोगों के लिए बहुत आक्रामक और शत्रुतापूर्ण। ऑस्ट्रेलियाई आदिवासियों ने, जो एक बार जनसंख्या का केवल एक% के लिए ऑस्ट्रेलिया, आज खाता बसे हुए। वे चालीस-चौंसठ हजार। साल पहले महाद्वीप पर बसे और यहाँ आया, शायद एशिया से।
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वाले तकुये या करघे पर लगाई हुई पूँजी का निर्धारण कई बातो पर निर्भर है, जैसे - प्रौद्योगिक इकाई की स्थिति, उसमे श्रमिको को सुलभता, अर्थ प्रबन्ध के ढङ्ग, श्रमिक कल्याण पर व्यय की जाने वाली राशि, शक्ति के उपलब्ध साधन एव उन पर किया जाने वाला खर्च, बँको से प्राप्त सुविधायें, वच्चे माल को लाने तथा पक्के माल को भेजने के उपलब्ध यातायान के साधन इत्यादि । उदाहरण के लिए, जिस इकाई वो बैंक से अधिक सुविधायें प्राप्त होती है उसे वम ब्याज पर सरलता से ऋण मिल सक्ता है । इसके विपरीत जिन इकाइयों को इस प्रकार की सुविधा नहीं होती, उनको अपनी कायशील पूंजी पर ही या अन्य लोगो से ऊंचे ब्याज पर ऋण लेने को वाध्य होना पड़ता है, जो मँहगी पडती है, फ्लन पूंजी चाहिये। जिन इकाइयो
को उपर्युक्त जितनी भी सुविधाय प्राप्त होगी, पूंजी की आवश्यक मात्रा भी उतनी कम होगी । फलत प्रति वरघा या कुये पर लगी हुई श्रीमत पूंजी को मात्रा भी कम होगी। विपरीत दशा मे श्रोसत पूँजी अधिक होगी। अत इस आधार को मापदण्ड मानना भी हमारी आवश्यकता को पूरी तरह सन्तुष्ट नहीं करता ।
( ४ ) करधो या तकुओं की संख्या - वस्त्र उद्यागों के लिये उनमें पाये जाने वाले करधो या तकुआ की संख्या पर निर्भर रहना अधिक सुविधाजनक होगा । लौह एव स्पात उद्योगो मे इकाइयों में पाई जाने वाली भट्टियो की संख्या एव क्षमता परिमाण के माप का एक विश्वसनीय आधार मानी जा सकती है ।
( ५ ) काम करने वाले श्रमिकों की संख्या - परिमारण के भाप का एक अन्य आधार विभिन्न इकाइयो म काम करने वाले श्रमिकों की संख्या हो सकती है । इस प्राधार का उपयोग केवल समान प्रकृति वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए किया जा सकता है, विभिन्न प्रकृति वाली इकाइयों के माप का यह उपयुक्त श्राधार नहीं हो सकता । उदाहरणार्थं, कुछ श्रौद्योगिक इवाइयो मे जो उत्पादन होता है वह श्रमिको के हस्त- कौशल पर निर्भर रहता है और उनकी संख्या उत्पादन की मात्रा के अनुपात पर निर्भर रहती है । यदि उत्पादन की मात्रा में वृद्धि करना हो, तो श्रमिकों की संख्या मे तत्काल वृद्धि की जा सकती है और विपरीत स्थिति में जब उत्पादन मे कमी करनी हो, तो श्रमिकों की संख्या मे मात्रा के अनुपात से आवश्यक कमी की जाती है । अन्य उद्योग स्त्रयचालित यन्न पर आश्रित रहते है । ग्रन उनमे श्रमिको की संख्या उत्पादन के अनुपात पर नही किंतु यन्त्रो को संख्या पर निर्भर रहनी है । यन्त्रो को संख्या में कमी या वृद्धि होने पर काम करने वाले श्रमिकों की संख्या मे क्मो या वृद्धि होती रहती है। यदि उपर्युक्त परिस्थितियो तथा प्रौद्योगिक इकाइयो को प्रकृति का विचार न करते हुए क्वल उन इकाइयो मे काम करने वाले श्रमिकों की संख्या को ही परिमाण का माप माना जावेगा, तो इसमें प्राप्त हुए निष्कर्ष भ्रमात्मक होगे ।
६) उपयोग की जाने वाली शक्ति की मात्रा - औद्योगिक इकाई मे उपयोग की जाने वाली शक्ति की मात्रा का भी एक माप हो सकता है। प्रतः ऐसी
निर्माण इकाइयाँ जहाँ सम्पूर्ण उत्पादन केवल शक्ति की सहायता से ही किया जाता हो, वहाँ शक्ति के परिमाण के अनुसार प्रौद्योगिक इकाई का परिमाण निश्चित करने मे मे सहायता मिल सकती है ।
( ७ ) उत्पादन की मात्रा - कुछ उद्योगो मे, जैसे सीमेट, चीनी या कोयला उद्योग, जिनका उत्पादन एक सा होता है, उत्पादन की मात्रा को परिमारण का एक उचित मापदण्ड माना जा सकता है, लेकिन सूनी वस्त्र जैसे उद्योग मे, जोकि विविध प्रकार का सामान बनाते हैं, उत्पादन की मात्रा उसके परिमाण का उचित माप नहगो ।
८) वच्चे माल की मात्रा - किसी इकाई द्वारा प्रति वर्ष कच्चे माल का जितना उपयोग होता है वह उसके परिमाण का एक उचित माप हो सकता है, बशर्ते इकाइयाँ आत्म निर्भर हो और उत्पत्ति के स्वभाव में अधिक विशेषनायें न हो ।
उपरोक्त विवरण मे यह स्पष्ट है कि एक व्यापारिक इकाई का साइज, एक निश्चित सिद्धान्त के अनुसार निकाला जाना चाहिए, क्योंकि फर्म का परिमाण फर्म को निपुराना एवं लाभदायक्ता को प्रभावित करने वाले महत्त्वपूर्ण तत्त्वो मे से एक है । परिमारण का माप प्रत्येक उद्योग के स्वभाव को देखकर nिfter four जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, जिन उद्योगों में अत्यधिक पूजी विनियोग की आवश्यकता के पड़ती है ( शक्कर साफ करना ), जिन उद्योगो को एकाधिकार प्राप्त है या जिनका विस्तृत बाजार होता है । ( जैसे कि जनसेवा उद्याग), अथवा वे उद्योग जिनमे उत्पादित वस्तु वड जटिवभावकी ( जैसे टाइपराइटर ) या बड़े आकार को ( जो रेल क इन्जन ) होतो है, प्राय बड पैमाने पर चलाये जाने योग्य हैं, जैसे वे उद्योग जिनके माल का प्रमायीकरण नहीं हो सकता, क्योंकि उनको विभिन रुचियो के अनुकूल बनाना पड़ता है ( जैसे उच्च कोटि का फर्नीचर, कला का सामान, इत्यादि ) या ऐसे उद्योग जिनका स्थानीय बाजार बहुत सीमित होता है और जिनका यातायात व्यय बहुत अधिक है ( जैस ईट) या वे उद्योग जिनमें अत्यधिक कुल श्रम को आवश्यक्ता पडती है । जैसे नक्काशी, चित्रकारी ) इलादि । कुछ ऐसे भी उद्योग हैं जो मध्यम आकार पर निपुराना में चलाये जा सकते है, जैन - दूध वितरण, - माटा पीसना इत्यादि ।
Critically examine the different standards employed to measure the siz of a business unit.
2. Explain the term Optimum Size Examine the factors which determine the size of such a unit. How can the different optima be reconciled?
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वाले तकुये या करघे पर लगाई हुई पूँजी का निर्धारण कई बातो पर निर्भर है, जैसे - प्रौद्योगिक इकाई की स्थिति, उसमे श्रमिको को सुलभता, अर्थ प्रबन्ध के ढङ्ग, श्रमिक कल्याण पर व्यय की जाने वाली राशि, शक्ति के उपलब्ध साधन एव उन पर किया जाने वाला खर्च, बँको से प्राप्त सुविधायें, वच्चे माल को लाने तथा पक्के माल को भेजने के उपलब्ध यातायान के साधन इत्यादि । उदाहरण के लिए, जिस इकाई वो बैंक से अधिक सुविधायें प्राप्त होती है उसे वम ब्याज पर सरलता से ऋण मिल सक्ता है । इसके विपरीत जिन इकाइयों को इस प्रकार की सुविधा नहीं होती, उनको अपनी कायशील पूंजी पर ही या अन्य लोगो से ऊंचे ब्याज पर ऋण लेने को वाध्य होना पड़ता है, जो मँहगी पडती है, फ्लन पूंजी चाहिये। जिन इकाइयो को उपर्युक्त जितनी भी सुविधाय प्राप्त होगी, पूंजी की आवश्यक मात्रा भी उतनी कम होगी । फलत प्रति वरघा या कुये पर लगी हुई श्रीमत पूंजी को मात्रा भी कम होगी। विपरीत दशा मे श्रोसत पूँजी अधिक होगी। अत इस आधार को मापदण्ड मानना भी हमारी आवश्यकता को पूरी तरह सन्तुष्ट नहीं करता । करधो या तकुओं की संख्या - वस्त्र उद्यागों के लिये उनमें पाये जाने वाले करधो या तकुआ की संख्या पर निर्भर रहना अधिक सुविधाजनक होगा । लौह एव स्पात उद्योगो मे इकाइयों में पाई जाने वाली भट्टियो की संख्या एव क्षमता परिमाण के माप का एक विश्वसनीय आधार मानी जा सकती है । काम करने वाले श्रमिकों की संख्या - परिमारण के भाप का एक अन्य आधार विभिन्न इकाइयो म काम करने वाले श्रमिकों की संख्या हो सकती है । इस प्राधार का उपयोग केवल समान प्रकृति वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए किया जा सकता है, विभिन्न प्रकृति वाली इकाइयों के माप का यह उपयुक्त श्राधार नहीं हो सकता । उदाहरणार्थं, कुछ श्रौद्योगिक इवाइयो मे जो उत्पादन होता है वह श्रमिको के हस्त- कौशल पर निर्भर रहता है और उनकी संख्या उत्पादन की मात्रा के अनुपात पर निर्भर रहती है । यदि उत्पादन की मात्रा में वृद्धि करना हो, तो श्रमिकों की संख्या मे तत्काल वृद्धि की जा सकती है और विपरीत स्थिति में जब उत्पादन मे कमी करनी हो, तो श्रमिकों की संख्या मे मात्रा के अनुपात से आवश्यक कमी की जाती है । अन्य उद्योग स्त्रयचालित यन्न पर आश्रित रहते है । ग्रन उनमे श्रमिको की संख्या उत्पादन के अनुपात पर नही किंतु यन्त्रो को संख्या पर निर्भर रहनी है । यन्त्रो को संख्या में कमी या वृद्धि होने पर काम करने वाले श्रमिकों की संख्या मे क्मो या वृद्धि होती रहती है। यदि उपर्युक्त परिस्थितियो तथा प्रौद्योगिक इकाइयो को प्रकृति का विचार न करते हुए क्वल उन इकाइयो मे काम करने वाले श्रमिकों की संख्या को ही परिमाण का माप माना जावेगा, तो इसमें प्राप्त हुए निष्कर्ष भ्रमात्मक होगे । छः) उपयोग की जाने वाली शक्ति की मात्रा - औद्योगिक इकाई मे उपयोग की जाने वाली शक्ति की मात्रा का भी एक माप हो सकता है। प्रतः ऐसी निर्माण इकाइयाँ जहाँ सम्पूर्ण उत्पादन केवल शक्ति की सहायता से ही किया जाता हो, वहाँ शक्ति के परिमाण के अनुसार प्रौद्योगिक इकाई का परिमाण निश्चित करने मे मे सहायता मिल सकती है । उत्पादन की मात्रा - कुछ उद्योगो मे, जैसे सीमेट, चीनी या कोयला उद्योग, जिनका उत्पादन एक सा होता है, उत्पादन की मात्रा को परिमारण का एक उचित मापदण्ड माना जा सकता है, लेकिन सूनी वस्त्र जैसे उद्योग मे, जोकि विविध प्रकार का सामान बनाते हैं, उत्पादन की मात्रा उसके परिमाण का उचित माप नहगो । आठ) वच्चे माल की मात्रा - किसी इकाई द्वारा प्रति वर्ष कच्चे माल का जितना उपयोग होता है वह उसके परिमाण का एक उचित माप हो सकता है, बशर्ते इकाइयाँ आत्म निर्भर हो और उत्पत्ति के स्वभाव में अधिक विशेषनायें न हो । उपरोक्त विवरण मे यह स्पष्ट है कि एक व्यापारिक इकाई का साइज, एक निश्चित सिद्धान्त के अनुसार निकाला जाना चाहिए, क्योंकि फर्म का परिमाण फर्म को निपुराना एवं लाभदायक्ता को प्रभावित करने वाले महत्त्वपूर्ण तत्त्वो मे से एक है । परिमारण का माप प्रत्येक उद्योग के स्वभाव को देखकर nिfter four जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, जिन उद्योगों में अत्यधिक पूजी विनियोग की आवश्यकता के पड़ती है , जिन उद्योगो को एकाधिकार प्राप्त है या जिनका विस्तृत बाजार होता है । , अथवा वे उद्योग जिनमे उत्पादित वस्तु वड जटिवभावकी या बड़े आकार को होतो है, प्राय बड पैमाने पर चलाये जाने योग्य हैं, जैसे वे उद्योग जिनके माल का प्रमायीकरण नहीं हो सकता, क्योंकि उनको विभिन रुचियो के अनुकूल बनाना पड़ता है या ऐसे उद्योग जिनका स्थानीय बाजार बहुत सीमित होता है और जिनका यातायात व्यय बहुत अधिक है या वे उद्योग जिनमें अत्यधिक कुल श्रम को आवश्यक्ता पडती है । जैसे नक्काशी, चित्रकारी ) इलादि । कुछ ऐसे भी उद्योग हैं जो मध्यम आकार पर निपुराना में चलाये जा सकते है, जैन - दूध वितरण, - माटा पीसना इत्यादि । Critically examine the different standards employed to measure the siz of a business unit. दो. Explain the term Optimum Size Examine the factors which determine the size of such a unit. How can the different optima be reconciled?
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सांख्यिकीय तथा यांत्रिक प्रविधियों का परिचय : 429
असंतत इकाइयों के एक निश्चित समूह के रूप में हों, तो मदों की सूची बनाना सम्भव है, किन्तु भूगोलवेत्ता प्रायः एक विशेष रूप से संतत चर ( continuous variable) जैसे कि भूमि की ऊँचाई, ढाल का कोण या मिट्टी की विशेषताएँ आदि का प्रतिदर्श प्राप्त करना चाहता है । इस दशा में घटना विशेष के मानचित्र पर एक ग्रिड अध्यारोपित कर दिया • जाता है और यादृच्छिक संख्याओं की सारणी से ग्रिड प्रतिच्छेदनों की एक श्रेणी का चयन किया जाता है । जहाँ पर मद असतत हैं किन्तु सभी व्यावहारिक कार्यो के लिए समूह परिमित है (उदाहरण के लिए, गोलाश्म-मृत्तिका में गुटिकाएँ या एक बड़े समुदाय में पौधे), वहाँ किसी प्रकार के क्षेत्र प्रतिचयन का उपयोग करना चाहिए ।
कुछ घटनाओं की स्थानिक विभिन्नताओं का अन्वेषण करने के लिए यादृच्छिक प्रतिदर्श विधि अनुपयुक्त हो सकती है, क्योंकि यदि अध्ययन लक्षणों के विशेष संवर्गों का असाधारण स्थानिक गुच्छन हो तो इस प्रकार से अभिनत प्रतिदर्श मिलने की सम्भावना है । अभाग्यवश, दृष्यभूमि के तत्वों में कदाचित ही यादृच्छिक प्रकीर्णन होता है जिसके फलस्वरूप इस विधि के उपयोग में सावधानी बरतनी चाहिए ।
यदिस्तरित यादृच्छिक प्रतिदर्श लिया जाय तो यह कठिनाई दूर हो सकती है। जिन विषयों का सर्वेक्षण करना हो उन्हें समस्या से सम्बद्ध एक या अधिक विशेषताओं के आधार पर स्तरों (strata) में समूहबद्ध किया जाता है । 2 व्यवसाय की संरचना के अध्ययन के लिए, बस्तियों को प्रारम्भ में जनगणना विवरणियों के आँकड़ों की सहायता से उनकी जनसंख्या के आकार के अनुसार समूहों में बाँटा जा सकता है और फिर इन समूहों में से यादृच्छिक प्रतिदर्श ले लिए जाते हैं । अथवा समूहों को क्षेत्र इकाइयों के आधार पर बनाया जा सकता है। स्पष्ट है कि स्तरित प्रतिदर्शों की विधि में अध्ययन के विषयों के बारे में बहुत सी पूर्व जानकारी आवश्यक होती है ।
इसके विपरीत, तीसरी प्रतिदर्श विधि में किसी पूर्व जानकारी की आवश्यकता नहीं पड़ती और इसीलिए वह प्रारम्भिक सर्वेक्षण सेवाओं के लिए विशेष उपयोगी है । जिस प्रदेश का परीक्षण करना हो उसे क्षेत्रीय आधार पर एक समान इकाइयों में बाँट देते हैं
i की विधि का उपयोग करता है ।
W. F. Wood, 'Use of Stratified Random Samples in a Land Use Study', Annals of the Association of American Geographers, अंक 45, पृ० 350-67 ( लंकास्टर, पे० 1955 ) ।
W. B. Taylor तथा D. V. P. Clement ने 'The New Zealand Agricultural Sample Survey', Journal of the Royal Statistical Society, A, अंक 119, पृ० 409-24 (लन्दन, 1956) में कृषि विवरणियों के लिए संस्तरण (stratification ) की अनेक विधियों की प्रयोगिता (Applicability) का विवेचन किया है ।
430 : मानचित्र तथा आरेख
और समान अन्तरालों पर एक व्यवस्थित प्रतिचयन कर लेते है । बर्च' ने आइल ऑफ़ मैन में 25 एकड़ से बड़े फ़ार्मों का 24 प्रतिशत प्रतिदर्श लेने के लिए इस विधि का उपयोग किया है । यह प्रतिदर्श नेशनल ग्रिड का उपयोग करते हुए यथा संभव कृषि दृश्यभूमि पर समान अन्तरालों पर रखा गया है । जिस फ़ार्म की भूमि पर ग्रिड प्रतिच्छेदन पड़ता है उस फार्म को चुन लेते हैं, और इसमें इस बात का ध्यान रखा जाता है कि बड़ी जोतो वी. प्रतिदर्श के बड़े समानुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाय । अथवा, एक सूची से समान अन्तरालों पर प्रतिचयन करते हुए एक व्यवस्थित प्रतिदर्श लिया जा सकता है । बचं, कृपि की विवरणियो से फार्मों के तुलनात्मक प्रतिदर्श में भी इस विधि का उपयोग करते है । यह विधि मानचित्र पर आधारित क्रमबद्ध प्रतिदर्श से कम संतोषजनक है क्योंकि इसमें प्रतिदर्शों का क्षेत्रीय वितरण उस हद तक नियन्त्रित नहीं होता ।
क्षेत्रीय आधार पर लिये गये यादृच्छिक, स्तरित यादृच्छिक, तथा व्यवस्थित प्रतिदर्शों से प्राप्त 25 स्थानों के वितरण के उदाहरण चित्र 223 में दिये गये हैं। व्यवस्थित ग्रिड का पहिला स्थान यादृच्छिक संख्याओं से लिया गया था ।
यादृच्छिक स्तरित
चित्र 223 - क्षेत्रीय आधार पर यादृच्छिक, स्तरित यादृच्छिक तथा व्यवस्थित प्रतिदर्शों से प्राप्त स्थानों का वितरण
सरल यादृच्छिक प्रतिदर्श की तुलना में स्तरित यादृच्छिक प्रतिदर्श सामान्यतः प्रतिदर्श सर्वेक्षण की परिशुद्धता को बढ़ा देता है । 2 प्रतिदर्श का आकार स्तरों में उपस्थित, ज्ञात अथवा संदिग्ध परिवर्तिता के समानुपातिक रखा जा सकता है । यदि स्थानिक घटनाओं का विषय हो तो इसे क्षेत्रीय विस्तार के समानुपातिक रख रकते हैं। कभी कभी इन विधियों
J. W. Birch, Observations on the Delimitation of Farmingtype Regions, with special reference to the Isle of Man', Transactions and Papers, 1954: Institute of British Geographers, सं० 20, पृ० 141-58 ( लन्दन, 1954 ) ।
2. उदाहरण के लिए, P. F. Bourdeau, A Test of Random versus Systematic Ecolcgical Sampling', Ecology, अंक 34, पृ० 499-512, ( डरहम, एन० सी०, 1953 ) देखिये ।
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सांख्यिकीय तथा यांत्रिक प्रविधियों का परिचय : चार सौ उनतीस असंतत इकाइयों के एक निश्चित समूह के रूप में हों, तो मदों की सूची बनाना सम्भव है, किन्तु भूगोलवेत्ता प्रायः एक विशेष रूप से संतत चर जैसे कि भूमि की ऊँचाई, ढाल का कोण या मिट्टी की विशेषताएँ आदि का प्रतिदर्श प्राप्त करना चाहता है । इस दशा में घटना विशेष के मानचित्र पर एक ग्रिड अध्यारोपित कर दिया • जाता है और यादृच्छिक संख्याओं की सारणी से ग्रिड प्रतिच्छेदनों की एक श्रेणी का चयन किया जाता है । जहाँ पर मद असतत हैं किन्तु सभी व्यावहारिक कार्यो के लिए समूह परिमित है , वहाँ किसी प्रकार के क्षेत्र प्रतिचयन का उपयोग करना चाहिए । कुछ घटनाओं की स्थानिक विभिन्नताओं का अन्वेषण करने के लिए यादृच्छिक प्रतिदर्श विधि अनुपयुक्त हो सकती है, क्योंकि यदि अध्ययन लक्षणों के विशेष संवर्गों का असाधारण स्थानिक गुच्छन हो तो इस प्रकार से अभिनत प्रतिदर्श मिलने की सम्भावना है । अभाग्यवश, दृष्यभूमि के तत्वों में कदाचित ही यादृच्छिक प्रकीर्णन होता है जिसके फलस्वरूप इस विधि के उपयोग में सावधानी बरतनी चाहिए । यदिस्तरित यादृच्छिक प्रतिदर्श लिया जाय तो यह कठिनाई दूर हो सकती है। जिन विषयों का सर्वेक्षण करना हो उन्हें समस्या से सम्बद्ध एक या अधिक विशेषताओं के आधार पर स्तरों में समूहबद्ध किया जाता है । दो व्यवसाय की संरचना के अध्ययन के लिए, बस्तियों को प्रारम्भ में जनगणना विवरणियों के आँकड़ों की सहायता से उनकी जनसंख्या के आकार के अनुसार समूहों में बाँटा जा सकता है और फिर इन समूहों में से यादृच्छिक प्रतिदर्श ले लिए जाते हैं । अथवा समूहों को क्षेत्र इकाइयों के आधार पर बनाया जा सकता है। स्पष्ट है कि स्तरित प्रतिदर्शों की विधि में अध्ययन के विषयों के बारे में बहुत सी पूर्व जानकारी आवश्यक होती है । इसके विपरीत, तीसरी प्रतिदर्श विधि में किसी पूर्व जानकारी की आवश्यकता नहीं पड़ती और इसीलिए वह प्रारम्भिक सर्वेक्षण सेवाओं के लिए विशेष उपयोगी है । जिस प्रदेश का परीक्षण करना हो उसे क्षेत्रीय आधार पर एक समान इकाइयों में बाँट देते हैं i की विधि का उपयोग करता है । W. F. Wood, 'Use of Stratified Random Samples in a Land Use Study', Annals of the Association of American Geographers, अंक पैंतालीस, पृशून्य तीन सौ पचास-सरसठ । W. B. Taylor तथा D. V. P. Clement ने 'The New Zealand Agricultural Sample Survey', Journal of the Royal Statistical Society, A, अंक एक सौ उन्नीस, पृशून्य चार सौ नौ-चौबीस में कृषि विवरणियों के लिए संस्तरण की अनेक विधियों की प्रयोगिता का विवेचन किया है । चार सौ तीस : मानचित्र तथा आरेख और समान अन्तरालों पर एक व्यवस्थित प्रतिचयन कर लेते है । बर्च' ने आइल ऑफ़ मैन में पच्चीस एकड़ से बड़े फ़ार्मों का चौबीस प्रतिशत प्रतिदर्श लेने के लिए इस विधि का उपयोग किया है । यह प्रतिदर्श नेशनल ग्रिड का उपयोग करते हुए यथा संभव कृषि दृश्यभूमि पर समान अन्तरालों पर रखा गया है । जिस फ़ार्म की भूमि पर ग्रिड प्रतिच्छेदन पड़ता है उस फार्म को चुन लेते हैं, और इसमें इस बात का ध्यान रखा जाता है कि बड़ी जोतो वी. प्रतिदर्श के बड़े समानुपात में प्रतिनिधित्व दिया जाय । अथवा, एक सूची से समान अन्तरालों पर प्रतिचयन करते हुए एक व्यवस्थित प्रतिदर्श लिया जा सकता है । बचं, कृपि की विवरणियो से फार्मों के तुलनात्मक प्रतिदर्श में भी इस विधि का उपयोग करते है । यह विधि मानचित्र पर आधारित क्रमबद्ध प्रतिदर्श से कम संतोषजनक है क्योंकि इसमें प्रतिदर्शों का क्षेत्रीय वितरण उस हद तक नियन्त्रित नहीं होता । क्षेत्रीय आधार पर लिये गये यादृच्छिक, स्तरित यादृच्छिक, तथा व्यवस्थित प्रतिदर्शों से प्राप्त पच्चीस स्थानों के वितरण के उदाहरण चित्र दो सौ तेईस में दिये गये हैं। व्यवस्थित ग्रिड का पहिला स्थान यादृच्छिक संख्याओं से लिया गया था । यादृच्छिक स्तरित चित्र दो सौ तेईस - क्षेत्रीय आधार पर यादृच्छिक, स्तरित यादृच्छिक तथा व्यवस्थित प्रतिदर्शों से प्राप्त स्थानों का वितरण सरल यादृच्छिक प्रतिदर्श की तुलना में स्तरित यादृच्छिक प्रतिदर्श सामान्यतः प्रतिदर्श सर्वेक्षण की परिशुद्धता को बढ़ा देता है । दो प्रतिदर्श का आकार स्तरों में उपस्थित, ज्ञात अथवा संदिग्ध परिवर्तिता के समानुपातिक रखा जा सकता है । यदि स्थानिक घटनाओं का विषय हो तो इसे क्षेत्रीय विस्तार के समानुपातिक रख रकते हैं। कभी कभी इन विधियों J. W. Birch, Observations on the Delimitation of Farmingtype Regions, with special reference to the Isle of Man', Transactions and Papers, एक हज़ार नौ सौ चौवन: Institute of British Geographers, संशून्य बीस, पृशून्य एक सौ इकतालीस-अट्ठावन । दो. उदाहरण के लिए, P. F. Bourdeau, A Test of Random versus Systematic Ecolcgical Sampling', Ecology, अंक चौंतीस, पृशून्य चार सौ निन्यानवे-पाँच सौ बारह, देखिये ।
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Rahul Gandhi: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को श्रीनगर के पंथाचौक से अपनी 'भारत जोड़ो यात्रा' फिर से शुरू की। राहुल गांधी की ये भारत जोड़ो यात्रा अपने अंतिम दिन में प्रवेश कर लिया है। गांधी ने अपनी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ अपनी ट्रेडमार्क सफेद टी-शर्ट में सुबह 10:45 बजे यात्रा शुरू की। राहुल की यात्रा के बीच एक विवाद शुरू हो गया है। दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर तिरंगा फहराने पहुंचे, वहां तिरंगे से बड़ा राहुल गांधी का पोस्टर लगा हुआ था। अब सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को ट्रोल किया जा रहा है। नेटिजन्स का कहना है कि तिरंगे से बड़े हैं राहुल गांधी।
वहीं, एक ट्विटर यूजर प्रिया सिंह ने राहुल गांधी के समर्थन में लिखा, "फोटो क्लिक करने का एंगल है ये कि उसने जानकर ऐसे एंगल में फोटो वीडियो बनाई। राहुल गांधी का पोस्टर काफी दूर है। ऐसी फोटो तो लोग ताजमहल पर भी क्लिक करवाते है। जिसमे ताजमहल उनसे भी छोटा होता है। पोस्टर तिरंगे से काफी दूर है। जरूरी नहीं की मीडिया जो दिखाए वो हमेशा ठीक ही हो।
हालांकि कांगेस ने अपने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें देखा जा सकता है कि राहुल गांधी तिरंगा फहरा रहे हैं उनके पीछे उनका पोस्टर लगा हुआ है।
बता दें कि एक दौर में 31 साल पहले नरेंद्र मोदी ने लाल चौक पर तिरंगा फहराने को लेकर खूब सुर्खियां बटोरी थीं। वहीं कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा अपने आखिरी पड़ाव पर है और 30 जनवरी को खत्म होने जा रही है। कांग्रेस पार्टी राहुल और अपनी भारत जोड़ो यात्रा को सफल बनाने के लिए पुरजोर आजमाइश में लगी है।
बताते चले कि लाल चौक के आसपास के पूरे इलाके को सील कर दिया गया है और सिटी सेंटर के चारों ओर बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा तैनात कर दिया गया है। लाल चौक के बाद, यात्रा शहर के बुलेवार्ड क्षेत्र में नेहरू पार्क की यात्रा करेगी, जो 4,080 किलोमीटर के वॉकथॉन के अंत को चिह्नित करेगी, जो 7 सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई और देशभर के 75 जिलों में घूमी। अब यात्रा अपने अंतिम चरण में है।
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Rahul Gandhi: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को श्रीनगर के पंथाचौक से अपनी 'भारत जोड़ो यात्रा' फिर से शुरू की। राहुल गांधी की ये भारत जोड़ो यात्रा अपने अंतिम दिन में प्रवेश कर लिया है। गांधी ने अपनी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ अपनी ट्रेडमार्क सफेद टी-शर्ट में सुबह दस:पैंतालीस बजे यात्रा शुरू की। राहुल की यात्रा के बीच एक विवाद शुरू हो गया है। दरअसल, कांग्रेस नेता राहुल गांधी श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर तिरंगा फहराने पहुंचे, वहां तिरंगे से बड़ा राहुल गांधी का पोस्टर लगा हुआ था। अब सोशल मीडिया पर राहुल गांधी को ट्रोल किया जा रहा है। नेटिजन्स का कहना है कि तिरंगे से बड़े हैं राहुल गांधी। वहीं, एक ट्विटर यूजर प्रिया सिंह ने राहुल गांधी के समर्थन में लिखा, "फोटो क्लिक करने का एंगल है ये कि उसने जानकर ऐसे एंगल में फोटो वीडियो बनाई। राहुल गांधी का पोस्टर काफी दूर है। ऐसी फोटो तो लोग ताजमहल पर भी क्लिक करवाते है। जिसमे ताजमहल उनसे भी छोटा होता है। पोस्टर तिरंगे से काफी दूर है। जरूरी नहीं की मीडिया जो दिखाए वो हमेशा ठीक ही हो। हालांकि कांगेस ने अपने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें देखा जा सकता है कि राहुल गांधी तिरंगा फहरा रहे हैं उनके पीछे उनका पोस्टर लगा हुआ है। बता दें कि एक दौर में इकतीस साल पहले नरेंद्र मोदी ने लाल चौक पर तिरंगा फहराने को लेकर खूब सुर्खियां बटोरी थीं। वहीं कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा अपने आखिरी पड़ाव पर है और तीस जनवरी को खत्म होने जा रही है। कांग्रेस पार्टी राहुल और अपनी भारत जोड़ो यात्रा को सफल बनाने के लिए पुरजोर आजमाइश में लगी है। बताते चले कि लाल चौक के आसपास के पूरे इलाके को सील कर दिया गया है और सिटी सेंटर के चारों ओर बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा तैनात कर दिया गया है। लाल चौक के बाद, यात्रा शहर के बुलेवार्ड क्षेत्र में नेहरू पार्क की यात्रा करेगी, जो चार,अस्सी किलोग्राममीटर के वॉकथॉन के अंत को चिह्नित करेगी, जो सात सितंबर को कन्याकुमारी से शुरू हुई और देशभर के पचहत्तर जिलों में घूमी। अब यात्रा अपने अंतिम चरण में है। यह भी पढ़ेंः
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ही तैयार नही और मेरे साथियों का कहना है कि अगले सौ वर्ष मे और उसके बाद हमे इसी प्रकार की समस्या का सामना करना पडेगा । निशाने पर पड़ा एक बम या ज्यादा से ज्यादा दो या तीन बर्मों से संभव है कि राष्ट्रपति पद के प्राधिकार का प्रयोग करने के लिये कोई भी न रहे और सम्भवतः उससे भी बुरी बात यह हो कि अनेक लोग राष्ट्रपति पद का दावा करे-ओर यह सब इतिहास के ऐसे काल मे होगा जब अप्रैल १८६१ की तरह हमारा भविष्य राष्ट्रपति पद की इस क्षमता में निहित होगा कि वह हमे तानाशाही नेतृत्व प्रदान कर सके। इस भयानक आकस्मिक स्थिति का भुकाबला करने के लिये हमे क्या करना चाहिये ? क्या इसके लिये कार्यकारी अधिकारियो को उत्तराधिकार के क्रम मे रखना होगा ? क्या इस बात पर बल देना होगा कि कई उच्च अधिकारी देश के विभिन्न भागो मे रहे और वहाँ काम करें, क्या न्यूयार्क के राज्यपाल को या छटी सेना के सेनापति को काम सौपना होगा ? अथवा क्या 'विधाता' या जैसा कि कुछ लोग कहना पसन्द करेगे 'विधि' पर भरोसा करना होगा ? में इस प्रश्न को भावी सर्वात पर छोडता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि उसे कभी भी इसका उत्तर न देना पडे । यदि हम ऐसा कर सकते है कि यह घोर विपत्ति हम पर कभी न भ्राये तो हमे उससे अधिक कोई चिन्ता नहीं होनी चाहिये जिससे हम भूतकाल मे चिंतित रहे है । यदि हम उस विपत्ति से नही बच सकते, यदि रूस था चीन पूरी शक्ति से हम पर बम वर्षा करे ( अथवा समय आने पर मिश्र, चाना या भडोरा ऐसा करे ) तो हम सभी चिन्ताओ से मुक्त हो जाये । एक राष्ट्र पूरी तरह कितना विनष्ट हो सकता है कि उसमे इतनी शक्ति बनी रहे जिससे उसमे जीवन का सचार करके पुनः उसे राजनैतिक दृष्टि से एक राष्ट्र का स्वरूप प्रदान किया जा सके ? हो सकता है कि यहाँ यह प्रश्न करना उपयुक्त न हो, किन्तु फिर भी मैं यह प्रश्न पूछता हूँ।
दूसरी समस्या राष्ट्रपति के चुनाव और पदावधि की उस श्रौपचारिक रीति के सम्बन्ध मे है जो हाल ही के वर्षों में विद्यमान रही है। उसका विषय यह है कि कोई व्यक्ति कितनी बार राष्ट्रपति पद के लिये निर्वाचित
हो सकता है। सविधान निर्माताओ ने इस बात पर गम्भीरता से विचार किया था कि प्रत्येक राष्ट्रपति की पदावधि एक बार तक प्रथवा ज्यादा-सेज्यादा लगातार दो वार पद-काल तक सीमित रखनी चाहिये । अन्त मे उन्होंने निश्चय किया कि राष्ट्रपति जितनी बार चाहे चुनाव लड़ सकता है। हेमिल्टन ने "दी फेडरलिस्ट" मे राष्ट्रपति को प्रनिश्चित बार चुनाव के लिए पात्रता के पक्ष मे सब युक्ति-सगत तर्क दिये थे किन्तु यह सन्देह किया जाता है कि संविधान में इस प्रकार का कोई प्रतिवन्ध न रखने का वास्तविक कारण यह था कि सविधान निर्माताओ को यह पूरी प्राशा थी कि जार्ज वाशिंगटन प्रथम राष्ट्रपति के रूप में काम करना पसन्द करेगा और उससे भी बडी आशा यह थी कि लोग यह चाहेगे कि वह मृत्यु पर्यन्त पद पर भारूढ रहे ।
यदि वाशिंगटन अप्रत्यक्ष रूप मे संविधान मे पुनः चुनाव की पात्रता सम्बन्धी प्रतिवन्धो के प्रभाव के लिये उत्तरदायी था तो वह प्रत्यक्ष रूप मे उस लाभकारी प्रथा को भारम्भ करने के लिये उत्तरदायो था जिसके कारण अमरीकी लोग १५० वर्ष से अधिक काल तक "तानाशाही के लिए खली छूट" देते हुए भी शान्ति से जीवन विता सके हैं और उस छूट को बन्द करने के हेतु संविधान में संशोधन की सहायता से किये गये सव प्रयत्नो को (जो कि सैकडो को सस्या मे हैं) विफल बना सके हैं। निस्सदेह में दो पदावधियों की उस परम्परा को भोर निर्देश कर रहा हूं जिसे उसने और प्रारम्भिक काल मे वर्जीनिया के अन्य तीन राष्ट्रपतियो ने हमारी राजनैतिक पद्धति का अनिवार्य तो नही किन्तु विवशकारी दृष्टात बना दिया था। वाशिंगटन और फ्रेंकलिन डी० रूजवेल्ट के बीच के काल मे अनेक राष्ट्रपति दो पदावधियो तक पदारूढ रहे और अनेक राष्ट्रपतियों ने अपने झूठे गवं, अपनी महत्वाकाक्षा अथवा अपने मित्रो के कारण अथवा एक साथ तीनो कारणो से तीसरी बार चुनाव जीत कर अपनी ख्याति बनाने का यत्न किया। अनेक राष्ट्रपतियो ने तीसरी बार पदारूढ होने की सम्भावना के लिये प्रयत्न न करने से इन्कार करके राजनैतिक शक्ति को दृढता से अपने हाथ मे तब तक रखा जब तक अतिम सम्भावना भी समाप्त न हो गई। किन्तु लोगो के मन मे कभी भी यह शंका पैदा नही
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ही तैयार नही और मेरे साथियों का कहना है कि अगले सौ वर्ष मे और उसके बाद हमे इसी प्रकार की समस्या का सामना करना पडेगा । निशाने पर पड़ा एक बम या ज्यादा से ज्यादा दो या तीन बर्मों से संभव है कि राष्ट्रपति पद के प्राधिकार का प्रयोग करने के लिये कोई भी न रहे और सम्भवतः उससे भी बुरी बात यह हो कि अनेक लोग राष्ट्रपति पद का दावा करे-ओर यह सब इतिहास के ऐसे काल मे होगा जब अप्रैल एक हज़ार आठ सौ इकसठ की तरह हमारा भविष्य राष्ट्रपति पद की इस क्षमता में निहित होगा कि वह हमे तानाशाही नेतृत्व प्रदान कर सके। इस भयानक आकस्मिक स्थिति का भुकाबला करने के लिये हमे क्या करना चाहिये ? क्या इसके लिये कार्यकारी अधिकारियो को उत्तराधिकार के क्रम मे रखना होगा ? क्या इस बात पर बल देना होगा कि कई उच्च अधिकारी देश के विभिन्न भागो मे रहे और वहाँ काम करें, क्या न्यूयार्क के राज्यपाल को या छटी सेना के सेनापति को काम सौपना होगा ? अथवा क्या 'विधाता' या जैसा कि कुछ लोग कहना पसन्द करेगे 'विधि' पर भरोसा करना होगा ? में इस प्रश्न को भावी सर्वात पर छोडता हूँ और प्रार्थना करता हूँ कि उसे कभी भी इसका उत्तर न देना पडे । यदि हम ऐसा कर सकते है कि यह घोर विपत्ति हम पर कभी न भ्राये तो हमे उससे अधिक कोई चिन्ता नहीं होनी चाहिये जिससे हम भूतकाल मे चिंतित रहे है । यदि हम उस विपत्ति से नही बच सकते, यदि रूस था चीन पूरी शक्ति से हम पर बम वर्षा करे तो हम सभी चिन्ताओ से मुक्त हो जाये । एक राष्ट्र पूरी तरह कितना विनष्ट हो सकता है कि उसमे इतनी शक्ति बनी रहे जिससे उसमे जीवन का सचार करके पुनः उसे राजनैतिक दृष्टि से एक राष्ट्र का स्वरूप प्रदान किया जा सके ? हो सकता है कि यहाँ यह प्रश्न करना उपयुक्त न हो, किन्तु फिर भी मैं यह प्रश्न पूछता हूँ। दूसरी समस्या राष्ट्रपति के चुनाव और पदावधि की उस श्रौपचारिक रीति के सम्बन्ध मे है जो हाल ही के वर्षों में विद्यमान रही है। उसका विषय यह है कि कोई व्यक्ति कितनी बार राष्ट्रपति पद के लिये निर्वाचित हो सकता है। सविधान निर्माताओ ने इस बात पर गम्भीरता से विचार किया था कि प्रत्येक राष्ट्रपति की पदावधि एक बार तक प्रथवा ज्यादा-सेज्यादा लगातार दो वार पद-काल तक सीमित रखनी चाहिये । अन्त मे उन्होंने निश्चय किया कि राष्ट्रपति जितनी बार चाहे चुनाव लड़ सकता है। हेमिल्टन ने "दी फेडरलिस्ट" मे राष्ट्रपति को प्रनिश्चित बार चुनाव के लिए पात्रता के पक्ष मे सब युक्ति-सगत तर्क दिये थे किन्तु यह सन्देह किया जाता है कि संविधान में इस प्रकार का कोई प्रतिवन्ध न रखने का वास्तविक कारण यह था कि सविधान निर्माताओ को यह पूरी प्राशा थी कि जार्ज वाशिंगटन प्रथम राष्ट्रपति के रूप में काम करना पसन्द करेगा और उससे भी बडी आशा यह थी कि लोग यह चाहेगे कि वह मृत्यु पर्यन्त पद पर भारूढ रहे । यदि वाशिंगटन अप्रत्यक्ष रूप मे संविधान मे पुनः चुनाव की पात्रता सम्बन्धी प्रतिवन्धो के प्रभाव के लिये उत्तरदायी था तो वह प्रत्यक्ष रूप मे उस लाभकारी प्रथा को भारम्भ करने के लिये उत्तरदायो था जिसके कारण अमरीकी लोग एक सौ पचास वर्ष से अधिक काल तक "तानाशाही के लिए खली छूट" देते हुए भी शान्ति से जीवन विता सके हैं और उस छूट को बन्द करने के हेतु संविधान में संशोधन की सहायता से किये गये सव प्रयत्नो को विफल बना सके हैं। निस्सदेह में दो पदावधियों की उस परम्परा को भोर निर्देश कर रहा हूं जिसे उसने और प्रारम्भिक काल मे वर्जीनिया के अन्य तीन राष्ट्रपतियो ने हमारी राजनैतिक पद्धति का अनिवार्य तो नही किन्तु विवशकारी दृष्टात बना दिया था। वाशिंगटन और फ्रेंकलिन डीशून्य रूजवेल्ट के बीच के काल मे अनेक राष्ट्रपति दो पदावधियो तक पदारूढ रहे और अनेक राष्ट्रपतियों ने अपने झूठे गवं, अपनी महत्वाकाक्षा अथवा अपने मित्रो के कारण अथवा एक साथ तीनो कारणो से तीसरी बार चुनाव जीत कर अपनी ख्याति बनाने का यत्न किया। अनेक राष्ट्रपतियो ने तीसरी बार पदारूढ होने की सम्भावना के लिये प्रयत्न न करने से इन्कार करके राजनैतिक शक्ति को दृढता से अपने हाथ मे तब तक रखा जब तक अतिम सम्भावना भी समाप्त न हो गई। किन्तु लोगो के मन मे कभी भी यह शंका पैदा नही
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ टेलीफोन पर बातचीत की।
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को छठी बार इज़राइल का प्रधानमंत्री चुने जाने पर बधाई देते हुए उनके एक बेहद सफल कार्यकाल की कामना की।
दोनों नेताओं ने हाल के वर्षों में भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी में तेजी से हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और विभिन्न क्षेत्रों में सामरिक सहयोग को और मजबूत बनाने की क्षमता पर भी सहमति व्यक्त की।
प्रधानमंत्री ने श्री बेंजामिन नेतन्याहू को जल्द ही भारत का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया।
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Posted On: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ टेलीफोन पर बातचीत की। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को छठी बार इज़राइल का प्रधानमंत्री चुने जाने पर बधाई देते हुए उनके एक बेहद सफल कार्यकाल की कामना की। दोनों नेताओं ने हाल के वर्षों में भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी में तेजी से हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और विभिन्न क्षेत्रों में सामरिक सहयोग को और मजबूत बनाने की क्षमता पर भी सहमति व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने श्री बेंजामिन नेतन्याहू को जल्द ही भारत का दौरा करने के लिए आमंत्रित किया। Read this release in:
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यह बात सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्य समिति की बैठक के बाद प्रेस से बात करते हुए कही। उन्होंने कहा कि मैं दिल्ली की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंतित हूं। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं के भड़काऊ बयान देने की वजह से यह सब कुछ हुआ है। उन्होंने कहा कि इसके लिए गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। उन्हें अमित शाह से इस्तीफे की मांग की। सोनिया गांधी ने सवाल उठाते हुए पूछा है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार रविवार से कहां गई थीं।
सोनिया गांधी ने कहा कि बीजेपी के नेताओं ने भड़ाकाऊ भाषण देकर इस तरह का माहौल बनाया। बीजेपी के एक नेता ने अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि तीन दिन के बाद हमें कुछ नहीं कहना है। दिल्ली पुलिस द्वारा जानबूझकर कार्रवाई नहीं करने की वजह से अब तक 20 से ज्यादा लोगों की जान चुका ही। उत्तर पूर्वी दिल्ली में चारों तरफ हिंसा फैली है।
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यह बात सोनिया गांधी ने कांग्रेस कार्य समिति की बैठक के बाद प्रेस से बात करते हुए कही। उन्होंने कहा कि मैं दिल्ली की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंतित हूं। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं के भड़काऊ बयान देने की वजह से यह सब कुछ हुआ है। उन्होंने कहा कि इसके लिए गृह मंत्री जिम्मेदार हैं। उन्हें अमित शाह से इस्तीफे की मांग की। सोनिया गांधी ने सवाल उठाते हुए पूछा है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार रविवार से कहां गई थीं। सोनिया गांधी ने कहा कि बीजेपी के नेताओं ने भड़ाकाऊ भाषण देकर इस तरह का माहौल बनाया। बीजेपी के एक नेता ने अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि तीन दिन के बाद हमें कुछ नहीं कहना है। दिल्ली पुलिस द्वारा जानबूझकर कार्रवाई नहीं करने की वजह से अब तक बीस से ज्यादा लोगों की जान चुका ही। उत्तर पूर्वी दिल्ली में चारों तरफ हिंसा फैली है।
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प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का रिकवरी रेट बढ़ने कुछ राहत मिलती नजर आ रही है। प्रदेश में बुधवार शाम तक 55 नए मामले सामने आए हैं। इसमें से 26 मामले आज के सैंपलों से पॉजिटिव पाए गए हैं जबकि बाकि के कल के पेंडिंग सैंपलों से पॉजिटिव आए हैं। वहीं, आज 202 लोग स्वस्थ हुए हैं। इसके अलावा कोरोना से प्रदेश में आज 3 मौत हुई हैं। इनमें से एक मौत शिमला, एक सौलन और एक मौत सिरमौर में हुई है। इन तीन मौत के साथ ही प्रदेश में कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 181 हो गया है।
आज आए मामलों में चंबा से 8, हमीरपुर 2, कांगड़ा 16, कुल्लू 24, लाहौल-स्पीति 3, और सिरमौर से 2 मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का कुल आंकड़ा बढ़कर 14802 हो गया है। इसमें से 3423 मामले एक्टिव हैं। प्रदेश में अब तक 11173 लोग कोरोना को हराने में सफल हो चुके हैं। बता दें कि प्रदेश में आज 1641 सैंपल जांच के लिए लगाए गए हैं। इसमें से 512 की रिपोर्ट नेगेटिव आई है जबकि 26 की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है। अभी 1103 सैंपलों की रिपोर्ट आने बाकि हैं।
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प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का रिकवरी रेट बढ़ने कुछ राहत मिलती नजर आ रही है। प्रदेश में बुधवार शाम तक पचपन नए मामले सामने आए हैं। इसमें से छब्बीस मामले आज के सैंपलों से पॉजिटिव पाए गए हैं जबकि बाकि के कल के पेंडिंग सैंपलों से पॉजिटिव आए हैं। वहीं, आज दो सौ दो लोग स्वस्थ हुए हैं। इसके अलावा कोरोना से प्रदेश में आज तीन मौत हुई हैं। इनमें से एक मौत शिमला, एक सौलन और एक मौत सिरमौर में हुई है। इन तीन मौत के साथ ही प्रदेश में कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर एक सौ इक्यासी हो गया है। आज आए मामलों में चंबा से आठ, हमीरपुर दो, कांगड़ा सोलह, कुल्लू चौबीस, लाहौल-स्पीति तीन, और सिरमौर से दो मामले सामने आए हैं। इसके साथ ही प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का कुल आंकड़ा बढ़कर चौदह हज़ार आठ सौ दो हो गया है। इसमें से तीन हज़ार चार सौ तेईस मामले एक्टिव हैं। प्रदेश में अब तक ग्यारह हज़ार एक सौ तिहत्तर लोग कोरोना को हराने में सफल हो चुके हैं। बता दें कि प्रदेश में आज एक हज़ार छः सौ इकतालीस सैंपल जांच के लिए लगाए गए हैं। इसमें से पाँच सौ बारह की रिपोर्ट नेगेटिव आई है जबकि छब्बीस की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है। अभी एक हज़ार एक सौ तीन सैंपलों की रिपोर्ट आने बाकि हैं।
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राग केदारो ॥ उघटत श्याम नृत्यत नारि । धरे अधर उपंग उपजै लेत गिरिधारि ।। ताल मुरज रबाव बीना किन्नरी रससार । शब्द संग मृदंग मिल. वत सुघर नंदकुमार ।। नागरी सब गुणनि आगरि मिलि चलति पियसंग । कबहुँ गावति कबहुँ नृत्यत कबहुँ उघटति रंग ।। मंडली गोपाल गोपी अंग अँग अनुहारि । सूर प्रभु धनि नवल भामिनि दामिनी छवि डारि ॥ ४५ ॥
राग बिहागरो ॥ नृत्यत हैं दोउ श्यामा श्याम अंग मघन पियते प्यारी अति निरखि चकित ब्रज वाम ।। तिरप लेति चपलासी चमकति झमकति भूषण अंग । या छबिपर उपमा कहूँ नाहीं निरखत विवश अनंग ।। श्रीराधिका सकलगुण पूरण जाके श्याम अधीन । संगते होत नहीं कहुँ न्यारी भई रहति अति लीन ।। रससमुद मानो उछलत भयो सुंदरताकी खानि । सूरदास प्रभु रीझि थकित भये कहत न कछु बखानि ॥ ४६ ॥
राग कल्याण ।। कचहुँ पियं हरषि हिरदय लगावै । कबहुं लै लै तान नागरी सुधर नँदसुवनको मन रिझावै ॥ कबहुँ चुंबन देति आकर्षि जिय लेति करति बिनचेत सब हेतु अपने । मिलति भुज कंठ दै रहति अँग लटकिकै जात दुख दूरि है झझकि सपने ॥ लेति गहि कुचनि बिच देत अधरनि अमृत एक कर चिषुक इक शीश धारै । सूर प्रभु स्वामिनी श्याम अति सन्मुख है निरखि मुख नैन इक टक निहारै ॥ ४७ ॥
राग आसावरी ।। जो सुख श्याम करत वृंदावन सो सुख तिहुँपुर नाहीं हो। हमको कहाँ मिलत रज उनकी यह कहि कहि अकुलाहीं हो ॥ सुनहु प्रिया श्रीसत्य कहत हौं मोते और न कोई हो । नंदकुमार रासरसमुख बिन वृंदावन नहिं होई हो ॥ हरता करताको प्रभु मैंही वह सुख मोते न्यारो हो ॥ सूर धन्य राधावर गिरिधर धाने सुख नंददुलारो हो ॥ ४८ ॥
राग बिहागरो ।। रसवश श्याम कीन्ही नारि । अधर रस अचवत परस्पर संग सब ब्रजनारि ॥ काम आतुर भजीं बाला सबनि पुरई आश। एक इक ब्रजनारि इकइक आप करचो प्रकाश ॥ कबहुँ नृत्यत कबहुँ गावत कबहुँ कोकविलास । सूरके प्रभु आश नायक करत सुख दुख नाश ॥ ४९ ॥
राग कल्याण ।। हरषि मुरली श्याम नाद कीन्हों। करषि मनतिहुँ भुवन सुनिथकि रह्यो पवन शशिहि भूल्यो गवन ज्ञान लीन्हों । तारकागण लजे बुद्धि मनमन सजे तबहि तनु सुधिं तजे शब्द लाग्यो । नाग नर मुनि थके नभ धरणि तनतके शारदास्वामी । शिव ध्यान जाग्यो । ध्यान नारद टरचो शेष आसन चल्यो गई बैकुंठ ध्वनि मगन स्वामी । कहत श्रीप्रियासों राधिकारवन ए सूर प्रभु श्यामके दरशकामी ॥ ५० ॥
राग बिहागरो ।। मुरली ध्वनि बैकुंठ गई। नारायण कमला सुनि दंपति अति रुचि हृदय भई ।। सुनहु प्रिया यह बाणी अद्भुत वृंदावन हरि देख्यो । धन्य धन्य श्रीपति मुख कहिकहि जीवन व्रजको लेख्यो । रासबिलास करत नँदनंदन सो हमते अति दूरि । धनि बन धाम धन्य ब्रजधरनी उडि लागे ज्यों धूरि ॥ यह सुख तिहूं भुवनमें जाहीं जो पल एक । सूर निरखि नारायण इकटक भूले नैन निमेक ॥ ५१ ॥
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राग केदारो ॥ उघटत श्याम नृत्यत नारि । धरे अधर उपंग उपजै लेत गिरिधारि ।। ताल मुरज रबाव बीना किन्नरी रससार । शब्द संग मृदंग मिल. वत सुघर नंदकुमार ।। नागरी सब गुणनि आगरि मिलि चलति पियसंग । कबहुँ गावति कबहुँ नृत्यत कबहुँ उघटति रंग ।। मंडली गोपाल गोपी अंग अँग अनुहारि । सूर प्रभु धनि नवल भामिनि दामिनी छवि डारि ॥ पैंतालीस ॥ राग बिहागरो ॥ नृत्यत हैं दोउ श्यामा श्याम अंग मघन पियते प्यारी अति निरखि चकित ब्रज वाम ।। तिरप लेति चपलासी चमकति झमकति भूषण अंग । या छबिपर उपमा कहूँ नाहीं निरखत विवश अनंग ।। श्रीराधिका सकलगुण पूरण जाके श्याम अधीन । संगते होत नहीं कहुँ न्यारी भई रहति अति लीन ।। रससमुद मानो उछलत भयो सुंदरताकी खानि । सूरदास प्रभु रीझि थकित भये कहत न कछु बखानि ॥ छियालीस ॥ राग कल्याण ।। कचहुँ पियं हरषि हिरदय लगावै । कबहुं लै लै तान नागरी सुधर नँदसुवनको मन रिझावै ॥ कबहुँ चुंबन देति आकर्षि जिय लेति करति बिनचेत सब हेतु अपने । मिलति भुज कंठ दै रहति अँग लटकिकै जात दुख दूरि है झझकि सपने ॥ लेति गहि कुचनि बिच देत अधरनि अमृत एक कर चिषुक इक शीश धारै । सूर प्रभु स्वामिनी श्याम अति सन्मुख है निरखि मुख नैन इक टक निहारै ॥ सैंतालीस ॥ राग आसावरी ।। जो सुख श्याम करत वृंदावन सो सुख तिहुँपुर नाहीं हो। हमको कहाँ मिलत रज उनकी यह कहि कहि अकुलाहीं हो ॥ सुनहु प्रिया श्रीसत्य कहत हौं मोते और न कोई हो । नंदकुमार रासरसमुख बिन वृंदावन नहिं होई हो ॥ हरता करताको प्रभु मैंही वह सुख मोते न्यारो हो ॥ सूर धन्य राधावर गिरिधर धाने सुख नंददुलारो हो ॥ अड़तालीस ॥ राग बिहागरो ।। रसवश श्याम कीन्ही नारि । अधर रस अचवत परस्पर संग सब ब्रजनारि ॥ काम आतुर भजीं बाला सबनि पुरई आश। एक इक ब्रजनारि इकइक आप करचो प्रकाश ॥ कबहुँ नृत्यत कबहुँ गावत कबहुँ कोकविलास । सूरके प्रभु आश नायक करत सुख दुख नाश ॥ उनचास ॥ राग कल्याण ।। हरषि मुरली श्याम नाद कीन्हों। करषि मनतिहुँ भुवन सुनिथकि रह्यो पवन शशिहि भूल्यो गवन ज्ञान लीन्हों । तारकागण लजे बुद्धि मनमन सजे तबहि तनु सुधिं तजे शब्द लाग्यो । नाग नर मुनि थके नभ धरणि तनतके शारदास्वामी । शिव ध्यान जाग्यो । ध्यान नारद टरचो शेष आसन चल्यो गई बैकुंठ ध्वनि मगन स्वामी । कहत श्रीप्रियासों राधिकारवन ए सूर प्रभु श्यामके दरशकामी ॥ पचास ॥ राग बिहागरो ।। मुरली ध्वनि बैकुंठ गई। नारायण कमला सुनि दंपति अति रुचि हृदय भई ।। सुनहु प्रिया यह बाणी अद्भुत वृंदावन हरि देख्यो । धन्य धन्य श्रीपति मुख कहिकहि जीवन व्रजको लेख्यो । रासबिलास करत नँदनंदन सो हमते अति दूरि । धनि बन धाम धन्य ब्रजधरनी उडि लागे ज्यों धूरि ॥ यह सुख तिहूं भुवनमें जाहीं जो पल एक । सूर निरखि नारायण इकटक भूले नैन निमेक ॥ इक्यावन ॥
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भारतीय सेना के कैंपों और यूनिटों में घुसने की कोशिश जानलेवा साबित हो सकती है। बेहद सख्त फरमान जारी किया गया है, हर किसी के लिए पढ़ना जरूरी है।
दरअसल, सेना ने अपनी संवदेनशील और अति संवेदनशील यूनिटों की सुरक्षा को और कड़ा कर दिया है। ये वे यूनिटें है, जो सेना की अति महत्वपूर्ण यूनिटों की फेहरिस्त में शुमार हैं और दुश्मन देशों की निगाहें भी विभिन्न माध्यमों से इन यूनिटों की हलचल व जासूसी करवाने पर टिकी रहती हैं। इतना ही नहीं, इन यूनिटों में घुसपैठ की कोशिशें भी हो चुकी है।
इसी के मद्देनजर सेना ने इन महत्वपूर्ण यूनिटों की सुरक्षा और कड़ी करने की दिशा में काफी सख्ती दिखाई है, जिसके अंतर्गत सेना ने आदेश जारी किया है कि यदि ऐसे यूनिटों में कोई घुसने का प्रयास करता है तो उसे गोली मार दी जाए। सेना की ओर से इस बाबत 'शूट एट साइट' के आदेश दिए गए हैं। सेना ने ये आदेश इन महत्वपूर्ण यूनिटों के बाहर चस्पा भी कर दिए हैं।
सेना ने कैंटोनमेंट इलाके में फोटोग्राफी भी पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दी है। ऐसा करने वाले के खिलाफ भी सख्ती से निपटा जाएगा। दरअसल, सेना के छावनी इलाके सिविल इलाकों की अपेक्षाकृत ज्यादा खूबसूरत और हरे-भरे होते हैं, इसलिए यहां से गुजरने या सैर-सपाटे के लिए आने वाले लोग यहां लगाए गए टैंकों, एयरक्राफ्ट्स, राइफल्स लिए जवानों के बुतों इत्यादि को कैमरे में कैद करते हैं।
सेना के एक आला अफसर का कहना है कि सैन्य क्षेत्र में फोटोग्राफी भी सिक्योरिटी के लिहाज से ठीक नहीं है, इसलिए सैन्य क्षेत्र में फोटोग्राफी पूरी तरह से बैन कर दी गई है। सेना अपनी अति संवेदनशील यूनिटों को पूरी तरह से कवर करेगी। इन यूनिटों की अच्छी तरह से फेंसिंग की जाएगी। यदि यूनिटों के कई एग्जिट प्वाइंट है तो वहां भी जवानों की गश्त बढ़ाई जाएगी, लेकिन इन यूनिटों में आवाजाही के लिए एक ही एग्जिट प्वाइंट रखा जाएगा।
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भारतीय सेना के कैंपों और यूनिटों में घुसने की कोशिश जानलेवा साबित हो सकती है। बेहद सख्त फरमान जारी किया गया है, हर किसी के लिए पढ़ना जरूरी है। दरअसल, सेना ने अपनी संवदेनशील और अति संवेदनशील यूनिटों की सुरक्षा को और कड़ा कर दिया है। ये वे यूनिटें है, जो सेना की अति महत्वपूर्ण यूनिटों की फेहरिस्त में शुमार हैं और दुश्मन देशों की निगाहें भी विभिन्न माध्यमों से इन यूनिटों की हलचल व जासूसी करवाने पर टिकी रहती हैं। इतना ही नहीं, इन यूनिटों में घुसपैठ की कोशिशें भी हो चुकी है। इसी के मद्देनजर सेना ने इन महत्वपूर्ण यूनिटों की सुरक्षा और कड़ी करने की दिशा में काफी सख्ती दिखाई है, जिसके अंतर्गत सेना ने आदेश जारी किया है कि यदि ऐसे यूनिटों में कोई घुसने का प्रयास करता है तो उसे गोली मार दी जाए। सेना की ओर से इस बाबत 'शूट एट साइट' के आदेश दिए गए हैं। सेना ने ये आदेश इन महत्वपूर्ण यूनिटों के बाहर चस्पा भी कर दिए हैं। सेना ने कैंटोनमेंट इलाके में फोटोग्राफी भी पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दी है। ऐसा करने वाले के खिलाफ भी सख्ती से निपटा जाएगा। दरअसल, सेना के छावनी इलाके सिविल इलाकों की अपेक्षाकृत ज्यादा खूबसूरत और हरे-भरे होते हैं, इसलिए यहां से गुजरने या सैर-सपाटे के लिए आने वाले लोग यहां लगाए गए टैंकों, एयरक्राफ्ट्स, राइफल्स लिए जवानों के बुतों इत्यादि को कैमरे में कैद करते हैं। सेना के एक आला अफसर का कहना है कि सैन्य क्षेत्र में फोटोग्राफी भी सिक्योरिटी के लिहाज से ठीक नहीं है, इसलिए सैन्य क्षेत्र में फोटोग्राफी पूरी तरह से बैन कर दी गई है। सेना अपनी अति संवेदनशील यूनिटों को पूरी तरह से कवर करेगी। इन यूनिटों की अच्छी तरह से फेंसिंग की जाएगी। यदि यूनिटों के कई एग्जिट प्वाइंट है तो वहां भी जवानों की गश्त बढ़ाई जाएगी, लेकिन इन यूनिटों में आवाजाही के लिए एक ही एग्जिट प्वाइंट रखा जाएगा।
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अभिनेता विजय सेतुपति ने निर्देशक सीनू रामासामी की समीक्षकों द्वारा प्रशंसित तमिल मनोरंजन फिल्म 'मामनिथन' में अपने प्रदर्शन के लिए इंडो फ्रेंच इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीता है। फिल्म को बेस्ट पिक्च र का अवॉर्ड भी मिल चुका है। ट्विटर पर निर्देशक सीनू रामासामी ने कहा, "सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए विजय सेतुपति और सर्वश्रेष्ठ चित्र के लिए युवान शंकर राजा को बधाई।
धन्यवाद इंडो-फ्रेंच अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव। "दिलचस्प बात यह है कि फिल्म, जिसने रिलीज के तुरंत बाद विभिन्न तिमाहियों से भारी प्रशंसा प्राप्त की थी, को निर्देशक शंकर ने इसे 'यथार्थवादी क्लासिक' कहा था। शंकर ने तो यहां तक कह दिया था कि फिल्म में विजय सेतुपति के शानदार अभिनय को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना चाहिए था।
एक हफ्ते पहले ही फिल्म ने इस साल टोक्यो फिल्म अवॉर्डस में गोल्ड मेडल जीता था। सर्वश्रेष्ठ एशियाई फिल्म श्रेणी में 'मामनिथन' ने स्वर्ण जीता जबकि ताकाहिरो कावाबे के 'लव सॉन्ग एट 5 बजे' ने रजत और मार्ट बीरा के 'नोमेडिक डॉक्टर' ने टोक्यो फिल्म अवार्डस में कांस्य पदक जीता। 'मामनिथन' की कहानी एक साधारण आदमी की है जो अपने बच्चों को एक निजी स्कूल में दाखिला दिलाकर अच्छी शिक्षा देना चाहता है।
अपनी आय बढ़ाने के लिए, वह एक रियल एस्टेट डेवलपर के साथ एक सौदा करता है और इस प्रक्रिया में ठगा जाता है। उन्हें जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, वे फिल्म में दिखाया गया है।
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अभिनेता विजय सेतुपति ने निर्देशक सीनू रामासामी की समीक्षकों द्वारा प्रशंसित तमिल मनोरंजन फिल्म 'मामनिथन' में अपने प्रदर्शन के लिए इंडो फ्रेंच इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जीता है। फिल्म को बेस्ट पिक्च र का अवॉर्ड भी मिल चुका है। ट्विटर पर निर्देशक सीनू रामासामी ने कहा, "सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए विजय सेतुपति और सर्वश्रेष्ठ चित्र के लिए युवान शंकर राजा को बधाई। धन्यवाद इंडो-फ्रेंच अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव। "दिलचस्प बात यह है कि फिल्म, जिसने रिलीज के तुरंत बाद विभिन्न तिमाहियों से भारी प्रशंसा प्राप्त की थी, को निर्देशक शंकर ने इसे 'यथार्थवादी क्लासिक' कहा था। शंकर ने तो यहां तक कह दिया था कि फिल्म में विजय सेतुपति के शानदार अभिनय को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना चाहिए था। एक हफ्ते पहले ही फिल्म ने इस साल टोक्यो फिल्म अवॉर्डस में गोल्ड मेडल जीता था। सर्वश्रेष्ठ एशियाई फिल्म श्रेणी में 'मामनिथन' ने स्वर्ण जीता जबकि ताकाहिरो कावाबे के 'लव सॉन्ग एट पाँच बजे' ने रजत और मार्ट बीरा के 'नोमेडिक डॉक्टर' ने टोक्यो फिल्म अवार्डस में कांस्य पदक जीता। 'मामनिथन' की कहानी एक साधारण आदमी की है जो अपने बच्चों को एक निजी स्कूल में दाखिला दिलाकर अच्छी शिक्षा देना चाहता है। अपनी आय बढ़ाने के लिए, वह एक रियल एस्टेट डेवलपर के साथ एक सौदा करता है और इस प्रक्रिया में ठगा जाता है। उन्हें जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, वे फिल्म में दिखाया गया है।
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सोमवार तड़के नियंत्रण रेखा के पार से आतंकवादी ने पुंछ सेक्टर में घुसपैठ करने का प्रयास किया। अलर्ट सैनिकों द्वारा चुनौती दिए जाने पर आतंकवादियों के साथ भीषण गोलाबारी हुई।
जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सेना ने घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करते हुए दो आतंकियों को मार गिराया है। मारे गए आतंकियों के शवों को बरामद कर लिया गया है। इस घटना की पुष्टि सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने की है।
उन्होंने बताया कि सोमवार तड़के नियंत्रण रेखा के पार से आतंकवादी ने पुंछ सेक्टर में घुसपैठ करने का प्रयास किया। अलर्ट सैनिकों द्वारा चुनौती दिए जाने पर आतंकवादियों के साथ भीषण गोलाबारी हुई। जिसमें पहले एक आतंकवादी को मार गिराया गया। कुछ देर बाद दूसरे आतंकी को भी ढेर कर दिया। दोनों के शव बरामद कर लिए गए हैं। उसके पास से एके -47 राइफल बरामद की गई है। इलाके में अभी तलाशी अभियान जारी है।
बता दें कि अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद जम्मू-कश्मीर में भी आतंकवाद के मोर्चे पर खतरा बढ़ा है। पता चला है कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के 38 दहशतगर्दों ने तालिबानी आतंकियों से प्रशिक्षण लिया है। अत्याधुनिक हथियार चलाने के साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षित ये दुर्दांत आतंकी एक सप्ताह पहले पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) के हजीरा में स्थित जैश के ट्रेनिंग कैंप में पहुंचे हैं। पुंछ के चक्कां दा बाग के सामने हजीरा कैंप में हलचल तेज होने के भी इनपुट हैं।
पुंछ का इलाका सीमा पार से आतंकवाद को लेकर काफी संवेदनशील है। सूत्रों के अनुसार यहां कोटली, हजीरा, बाग समेत कुछ अन्य इलाकों में आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप चल रहे हैं। इस जिले से लगी एलओसी पर 20 से ज्यादा लॉंचिंग पैड के भी सक्रिय होने की सूचना है। प्रत्येक लॉंचिंग पैड पर 10-12 आतंकियों को घुसपैठ के लिए तैयार रखा गया है।
भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से पुंछ का एलओसी से लगता इलाका काफी संवेदनशील है। गुलपुर, सलोत्री, चक्कां दा बाग आदि इलाकों से घने जंगलों के रास्ते घुसपैठ करना आसान होता है। वर्ष 2002 के आसपास अफगानी व सूडानी आतंकियों की पुंछ के इलाके में मौजूदगी भी रही है। कश्मीर के आईजी विजय कुमार का कहना है कि तालिबानी खतरे से निपटने में सुरक्षाबल पूरी तरह सक्षम हैं। हम इसके लिए सभी प्रकार की तैयारियां कर रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंटेलिजेंस ग्रिड को और मजबूत किया गया है। सीमा पार और तालिबान की गतिविधियों पर पूरी नजर रखी जा रही है। कश्मीर में एलओसी से लगते इलाके से अभी हलचल की सूचना नहीं है। वैसे भी लॉंचिंग पैड सक्रिय हैं। सरहद की सुरक्षा में लगे जवानों को अतिरिक्त मुस्तैद रहने को कहा गया है।
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सोमवार तड़के नियंत्रण रेखा के पार से आतंकवादी ने पुंछ सेक्टर में घुसपैठ करने का प्रयास किया। अलर्ट सैनिकों द्वारा चुनौती दिए जाने पर आतंकवादियों के साथ भीषण गोलाबारी हुई। जम्मू-कश्मीर के पुंछ में सेना ने घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करते हुए दो आतंकियों को मार गिराया है। मारे गए आतंकियों के शवों को बरामद कर लिया गया है। इस घटना की पुष्टि सैन्य प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल देवेंद्र आनंद ने की है। उन्होंने बताया कि सोमवार तड़के नियंत्रण रेखा के पार से आतंकवादी ने पुंछ सेक्टर में घुसपैठ करने का प्रयास किया। अलर्ट सैनिकों द्वारा चुनौती दिए जाने पर आतंकवादियों के साथ भीषण गोलाबारी हुई। जिसमें पहले एक आतंकवादी को मार गिराया गया। कुछ देर बाद दूसरे आतंकी को भी ढेर कर दिया। दोनों के शव बरामद कर लिए गए हैं। उसके पास से एके -सैंतालीस राइफल बरामद की गई है। इलाके में अभी तलाशी अभियान जारी है। बता दें कि अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद जम्मू-कश्मीर में भी आतंकवाद के मोर्चे पर खतरा बढ़ा है। पता चला है कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के अड़तीस दहशतगर्दों ने तालिबानी आतंकियों से प्रशिक्षण लिया है। अत्याधुनिक हथियार चलाने के साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षित ये दुर्दांत आतंकी एक सप्ताह पहले पाक अधिकृत कश्मीर के हजीरा में स्थित जैश के ट्रेनिंग कैंप में पहुंचे हैं। पुंछ के चक्कां दा बाग के सामने हजीरा कैंप में हलचल तेज होने के भी इनपुट हैं। पुंछ का इलाका सीमा पार से आतंकवाद को लेकर काफी संवेदनशील है। सूत्रों के अनुसार यहां कोटली, हजीरा, बाग समेत कुछ अन्य इलाकों में आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप चल रहे हैं। इस जिले से लगी एलओसी पर बीस से ज्यादा लॉंचिंग पैड के भी सक्रिय होने की सूचना है। प्रत्येक लॉंचिंग पैड पर दस-बारह आतंकियों को घुसपैठ के लिए तैयार रखा गया है। भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से पुंछ का एलओसी से लगता इलाका काफी संवेदनशील है। गुलपुर, सलोत्री, चक्कां दा बाग आदि इलाकों से घने जंगलों के रास्ते घुसपैठ करना आसान होता है। वर्ष दो हज़ार दो के आसपास अफगानी व सूडानी आतंकियों की पुंछ के इलाके में मौजूदगी भी रही है। कश्मीर के आईजी विजय कुमार का कहना है कि तालिबानी खतरे से निपटने में सुरक्षाबल पूरी तरह सक्षम हैं। हम इसके लिए सभी प्रकार की तैयारियां कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंटेलिजेंस ग्रिड को और मजबूत किया गया है। सीमा पार और तालिबान की गतिविधियों पर पूरी नजर रखी जा रही है। कश्मीर में एलओसी से लगते इलाके से अभी हलचल की सूचना नहीं है। वैसे भी लॉंचिंग पैड सक्रिय हैं। सरहद की सुरक्षा में लगे जवानों को अतिरिक्त मुस्तैद रहने को कहा गया है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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इस लिस्ट में चौथा और आखिरी नाम न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज टिम साउदी (Tim Southee) का आता है जिन्होंने कानपुर टेस्ट मैच की पहली इनिंग में अपनी जबरदस्त स्पेल से दिग्गजों को काफी ज्यादा प्रभावित किया था और विकेट भी झटके थे. कानपुर जैसी पिचें स्पिनर के लिए हमेशा से मददगार रही हैं. लेकिन, इस कंडीशन में उन्होंने 5 विकेट हासिल किए.
32 साल के कीवी टीम के अनुभवी गेंदबाजों में शामिल टिम साउदी पहली इनिंग में काफी किफायती गेंदबाज साबित रहे. उन्होंने भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ) के बीच जारी इस टेस्ट मैच की पहली पारी में 27 ओवर में 2. 50 की इकोनॉमी रेट से रन खर्च करते हुए कुल 5 विकेट झटके. जिसमें पुजारा, अय्यर, रिद्धिमान साहा, अक्षर पटेल और जडेजा का विकेट शामिल था.
साउथी कीवी टीम के मुख्य तेज गेंदबाजों में आते हैं और उन्हें टेस्ट फॉर्मेट में अच्छा खासा एक्सपीरियंस है. अभी तक उन्होंने जिस लाइन और लेंथ से गेंदबाजी की है अगर ऐसी ही बाकी पारियों में करते रहे तो जाहिर तौर पर मैन ऑफ द मैच का खिताब अपने नाम कर सकते हैं.
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इस लिस्ट में चौथा और आखिरी नाम न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज टिम साउदी का आता है जिन्होंने कानपुर टेस्ट मैच की पहली इनिंग में अपनी जबरदस्त स्पेल से दिग्गजों को काफी ज्यादा प्रभावित किया था और विकेट भी झटके थे. कानपुर जैसी पिचें स्पिनर के लिए हमेशा से मददगार रही हैं. लेकिन, इस कंडीशन में उन्होंने पाँच विकेट हासिल किए. बत्तीस साल के कीवी टीम के अनुभवी गेंदबाजों में शामिल टिम साउदी पहली इनिंग में काफी किफायती गेंदबाज साबित रहे. उन्होंने भारत और न्यूजीलैंड के बीच जारी इस टेस्ट मैच की पहली पारी में सत्ताईस ओवर में दो. पचास की इकोनॉमी रेट से रन खर्च करते हुए कुल पाँच विकेट झटके. जिसमें पुजारा, अय्यर, रिद्धिमान साहा, अक्षर पटेल और जडेजा का विकेट शामिल था. साउथी कीवी टीम के मुख्य तेज गेंदबाजों में आते हैं और उन्हें टेस्ट फॉर्मेट में अच्छा खासा एक्सपीरियंस है. अभी तक उन्होंने जिस लाइन और लेंथ से गेंदबाजी की है अगर ऐसी ही बाकी पारियों में करते रहे तो जाहिर तौर पर मैन ऑफ द मैच का खिताब अपने नाम कर सकते हैं.
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Bollywood First Female Music Composer: हिंदी सिनेमा की खूबसूरत अदाकारा की बात हो नाम याद आता है नरगिस (Nargis) का जिनके दीवाने कई अदाकार थे और इनमें राज कपूर भी शामिल थे लेकिन नरगिस ने सुनील दत्त (Sunil Dutt) को चुना। पर आज बात ना तो सुनील दत्त की होगी और ना ही नरगिस की बल्कि एक ऐसी शख्सियत के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं जिनका रिश्ता नरगिस से रहा। वो थीं उनकी मां जद्दनबाई (Jaddanbai) जिन्हें हिंदी सिनेमा की पहली स्त्री कंपोजर कहें तो कुछ गलत ना होगा।
ये बात हैरत भरी है कि अदाकारा नरगिस की मां का जन्म कोठे पर हुआ था दरअसल, जद्दनबाई इलाहबाद के एक कोठे पर तवायफ दिलीपा बाई के घर जन्मीं। वो पली बढ़ी भी वहीं पर जहां दिन रात राग, ठुमरी और संगीत का माहौल था लिहाजा बचपन से ही उनका नाता संगीत से जुड़ गया वो बाकी चीजों की बजाय संगीत से जुड़ती चली गईं और उन्हें इसी में रूचि आने लगी। बड़ी हुईं तो वो स्वयं भी जाने लगीं। बोला जाता है कि उस समय उनकी आवाज के चर्चे दूर-दूर तक होते थे और इसी वजह से दो ब्राह्मण युवा तक उनके लिए विवाह का प्रस्ताव लेकर आए थे।
वहीं जब वो बड़ी हुईं और सब समझने लगीं तब उन्होंने सिंगर बनने का निर्णय लिया। उन्होंने उस दुनिया को छोड़ दिया जहां उनका जन्म हुआ था और वो कोलकाता और फिर मुंबई जा बसीं। उस समय स्त्रियों को हिंदी सिनेमा में आना इतना आसान नहीं था। लेकिन वो कुछ करना चाहती थीं लिहाजा उन्होंने संगीत में ट्रेनिंग ली। वो गाती चली गईं और प्रसिद्ध होती गईं। वो रेडियों में गजलें गाने लगीं। शासक उन्हें बुलाने लगे और उनके गाने की गूंज दूर दूर तक बढ़ी। 1935 में जद्दनबाई ने प्रोडक्शन हाउस खोल दिया। इसी प्रोडक्शन के तले फिल्म तलाश ए अधिकार का निर्माण जिसकी वो अदाकारा भी रहीं और उसका म्यूजिक भी स्वयं ही दिया और इस तरह वो सिनेमा की पहली स्त्री संगीतकार बन गईं। हालांकि 1949 में जद्दनबाई का मृत्यु हो गया।
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Bollywood First Female Music Composer: हिंदी सिनेमा की खूबसूरत अदाकारा की बात हो नाम याद आता है नरगिस का जिनके दीवाने कई अदाकार थे और इनमें राज कपूर भी शामिल थे लेकिन नरगिस ने सुनील दत्त को चुना। पर आज बात ना तो सुनील दत्त की होगी और ना ही नरगिस की बल्कि एक ऐसी शख्सियत के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं जिनका रिश्ता नरगिस से रहा। वो थीं उनकी मां जद्दनबाई जिन्हें हिंदी सिनेमा की पहली स्त्री कंपोजर कहें तो कुछ गलत ना होगा। ये बात हैरत भरी है कि अदाकारा नरगिस की मां का जन्म कोठे पर हुआ था दरअसल, जद्दनबाई इलाहबाद के एक कोठे पर तवायफ दिलीपा बाई के घर जन्मीं। वो पली बढ़ी भी वहीं पर जहां दिन रात राग, ठुमरी और संगीत का माहौल था लिहाजा बचपन से ही उनका नाता संगीत से जुड़ गया वो बाकी चीजों की बजाय संगीत से जुड़ती चली गईं और उन्हें इसी में रूचि आने लगी। बड़ी हुईं तो वो स्वयं भी जाने लगीं। बोला जाता है कि उस समय उनकी आवाज के चर्चे दूर-दूर तक होते थे और इसी वजह से दो ब्राह्मण युवा तक उनके लिए विवाह का प्रस्ताव लेकर आए थे। वहीं जब वो बड़ी हुईं और सब समझने लगीं तब उन्होंने सिंगर बनने का निर्णय लिया। उन्होंने उस दुनिया को छोड़ दिया जहां उनका जन्म हुआ था और वो कोलकाता और फिर मुंबई जा बसीं। उस समय स्त्रियों को हिंदी सिनेमा में आना इतना आसान नहीं था। लेकिन वो कुछ करना चाहती थीं लिहाजा उन्होंने संगीत में ट्रेनिंग ली। वो गाती चली गईं और प्रसिद्ध होती गईं। वो रेडियों में गजलें गाने लगीं। शासक उन्हें बुलाने लगे और उनके गाने की गूंज दूर दूर तक बढ़ी। एक हज़ार नौ सौ पैंतीस में जद्दनबाई ने प्रोडक्शन हाउस खोल दिया। इसी प्रोडक्शन के तले फिल्म तलाश ए अधिकार का निर्माण जिसकी वो अदाकारा भी रहीं और उसका म्यूजिक भी स्वयं ही दिया और इस तरह वो सिनेमा की पहली स्त्री संगीतकार बन गईं। हालांकि एक हज़ार नौ सौ उनचास में जद्दनबाई का मृत्यु हो गया।
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उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कोटा में फंसे प्रदेश के छात्रों को लाने के लिए बसें भेजे जाने के क़दम से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नाराज हैं। नीतीश ने इस क़दम को लॉकडाउन के सिद्धांत के साथ नाइंसाफ़ी बताया है।
लॉकडाउन को महीना होने जा रहा है मगर सरकार ज़रूरतमंदों तक मदद नहीं पहुँचा पाई है। ये तब है जब अनाज भंडार भरे हुए ही नहीं हैं बल्कि अनाज सड़ रहा है, बरबाद हो रहा है, चूहे खा रहे हैं। ख़तरा यह है कि उसकी नाकामी कहीं कानून व्यवस्था का संकट न खड़ा कर दे।
मुरादाबाद में पत्थरबाज़ी का कोई बचाव या समर्थन नहीं हो सकता। लेकिन मरकज़, तबलीग और मुरादाबाद के नाम पर आम मुसलमान के खिलाफ नफ़रत फैला रहे लोगों का क्या इलाज है? आलोक अड्डा में चर्चा ताहिरा हसन, अकु श्रीवास्तव और आशुतोष के साथ।
मुरादाबाद, इंदौर और तब्लीग़ के बहाने मुसलमानों पर निशाना क्या सही है? और क्या रासुका लगा कर मज़हबी पागलपन पर क़ाबू पाया जा सकता है? आशुतोष के साथ चर्चा में - ज़फ़र सरेसवाला, पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह और आलोक जोशी।
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उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कोटा में फंसे प्रदेश के छात्रों को लाने के लिए बसें भेजे जाने के क़दम से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नाराज हैं। नीतीश ने इस क़दम को लॉकडाउन के सिद्धांत के साथ नाइंसाफ़ी बताया है। लॉकडाउन को महीना होने जा रहा है मगर सरकार ज़रूरतमंदों तक मदद नहीं पहुँचा पाई है। ये तब है जब अनाज भंडार भरे हुए ही नहीं हैं बल्कि अनाज सड़ रहा है, बरबाद हो रहा है, चूहे खा रहे हैं। ख़तरा यह है कि उसकी नाकामी कहीं कानून व्यवस्था का संकट न खड़ा कर दे। मुरादाबाद में पत्थरबाज़ी का कोई बचाव या समर्थन नहीं हो सकता। लेकिन मरकज़, तबलीग और मुरादाबाद के नाम पर आम मुसलमान के खिलाफ नफ़रत फैला रहे लोगों का क्या इलाज है? आलोक अड्डा में चर्चा ताहिरा हसन, अकु श्रीवास्तव और आशुतोष के साथ। मुरादाबाद, इंदौर और तब्लीग़ के बहाने मुसलमानों पर निशाना क्या सही है? और क्या रासुका लगा कर मज़हबी पागलपन पर क़ाबू पाया जा सकता है? आशुतोष के साथ चर्चा में - ज़फ़र सरेसवाला, पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह और आलोक जोशी।
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यह आर्टिकल लिखा गया सहयोगी लेखक द्वारा Laura Bilotta1ऑफिस में रिश्ते से संबन्धित अपनी कंपनी की पॉलिसी चेक करेंः विवाहित या अविवाहित, अपने साथ में काम करने वाले व्यक्ति के साथ रिश्ते में जाने से चीजें और भी मुश्किल बन सकती हैं। अगर आपको उनके साथ में आगे बढ़ने की इच्छा है, तो खुद से पूछें कि अपने कोवर्कर के साथ में आपका ये रिश्ता, आपके जॉब के लिए कैसा साबित हो सकता है। अगर आपका काम आपके लिए बहुत जरूरी है, तो इस तरह की कमियों पर ध्यान केंद्रित करने से आपको चीजों को निष्पक्ष रूप से देखने में मदद मिलती है।
- उदाहरण के लिए, कुछ कंपनी में एम्प्लोयी के बीच में डेटिंग या रिश्ते के संबंध में स्ट्रिक्ट पॉलिसी होती हैं। अगर ये आपके ऑफिस में भी लागू होता है, तो खुद से पूछें कि क्या आप सच में अपनी भावनाओं को सामने लाकर अपने सुपरवाइजर के साथ मुश्किल में पड़ने का रिस्क लेना चाहते हैं।
- भले आपकी कंपनी की ऑफिस रोमांस से संबन्धित स्ट्रिक्ट पॉलिसी नहीं भी हैं, लेकिन तब भी आगे होने वाले संभावित परिणामों के बारे में विचार करें। क्या इससे अन्य को-वर्कर्स के साथ में टेंशन पैदा हो सकती है? आप ऑफिस गॉसिप को किस तरह से संभालेंगे?
खुद से पूछें यदि आप आगे बढ़ते हैं, तो क्या होगा (Ask yourself what would happen if you went for it)
{"smallUrl":"https:\/\/www1ऑफिस के बाहर उनसे मिलने की इच्छा को रोकेंः आप अपने क्रश के साथ में जितना ज्यादा समय बिताएँगे, आपके लिए अपनी भावनाओं से उबर पाना उतना ही ज्यादा मुश्किल होते जाएगा। अपने कोवर्कर के साथ में अपने समय को लिमिट करना आपके लिए सच में बहुत मुश्किल होने वाला है, लेकिन उनके साथ में अपने इंटरेक्शन को छोटा और प्रोफेशनल रखने की अपनी तरफ से हर संभव कोशिश करें। जितना हो सके, उनके आसपास कम से कम रहने की कोशिश करें।
- उदाहरण के लिए, अगर आपके कोवर्कर वीकेंड पर मिलने का प्लान कर रहे हैं, और अगर आपका क्रश भी वहाँ जाने वाला है, तो आप इस प्लान से पीछे हट सकते हैं।
अपने लिए स्पष्ट सीमाएं सेट करें (Set clear boundaries for yourself)
{"smallUrl":"https:\/\/www1ऐसी एक्टिविटीज़ पर फोकस करें, जो आपको मजेदार लगें और आपको अच्छा महसूस कराएंः जब आपको किसी पर क्रश होता है, तब आपके लिए और किसी चीज के बारे में सोचना मुश्किल हो सकता है। अगली बार जब आप अपने कोवर्कर के बारे में खुद को सोचते हुए पाएँ, तब अपने ध्यान को किसी और तरफ लगाने के तरीके की तलाश करें। उदाहरण के लिए, आप अपनी पसंद की किसी हॉबी को पूरा कर सकते हैं, एक मजेदार मूवी देख सकते हैं या फिर अपने किसी एक फ्रेंड को फोन कॉल कर सकते हैं।
अन्य लोगों के साथ रिश्ते बनाने पर ध्यान दें (Focus on building relationships with other people)
- इस तरह के विचारों को नोटिस करने के बाद इन्हें एक लेबल देना आपके लिए उपयोगी हो सकता है। उदाहरण के लिए, अपने आप से ऐसा कहकर देखें, "मेरे मन में फिर से अपने क्रश के बारे में अनचाहे विचार आ रहे हैं।"
- इसके लिए बहुत अभ्यास और धैर्य की आवश्यकता होती है, इसलिए अगर आपके मन में ये विचार आते रहते हैं, तो कोशिश करें कि आप फ्रस्ट्रेट न हों। इन्हें दूर करना जरूरी नहीं है, बल्कि जरूरी है कि इन विचारों के आने पर आपको ज्यादा परेशान नहीं होना है।
स्ट्रेस घटाने वाली एक्सरसाइज करें (Do stress-relieving exercises)
{"smallUrl":"https:\/\/www1अपनी भावनाओं को कमजोरी की तरह नहीं, बल्कि एक ताकत की तरह देखेंः किसी के साथ में प्यार में पड़ने की क्षमता का होना एक बहुत ही खूबसूरत बात है - फिर चाहे आप असल में उसे पूरा नहीं भी कर सकते। अपने मन में इस तरह की अनचाही भावनाएँ आने के लिए खुद को दोषी न ठहराएँ। बल्कि, इस सच्चाई को समझने की कोशिश करें कि आप एक ऐसे व्यक्ति हैं, जो किसी को ढेर सारा प्यार दे सकते हैं और खुद को याद दिलाएँ कि आप एक ऐसे व्यक्ति के साथ में रहना डिजर्व करते हैं, जो बदले में आप से प्यार करे।
अपनी भावनाओं को खत्म होने के लिए समय दें (Give yourself time to let the feelings subside)
- एक बार जब आप उन कारणों की पहचान कर लेते हैं जिनकी वजह से आप इस व्यक्ति के प्रति आकर्षित हैं, तो विभिन्न समाधानों पर विचार करें। उदाहरण के लिए, हो सकता है कि आप समान पर्सनेलिटी वाले लोगों को डेट करना चाहते हों या किसी ऐसे अंतर्निहित कारण का सामना कर रहे हैं, जिसके कारण आप उनकी ओर आकर्षित हो सकते हैं।
अगर आवश्यक हो, तो एक थेरेपिस्ट से मिलें (See a therapist if you're overwhelmed)
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- अपने किसी फ्रेंड या फैमिली मेम्बर के साथ में अपनी भावनाओं को डिस्कस करना भी आपकी मदद कर सकता है।
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यह आर्टिकल लिखा गया सहयोगी लेखक द्वारा Laura Bilottaएकऑफिस में रिश्ते से संबन्धित अपनी कंपनी की पॉलिसी चेक करेंः विवाहित या अविवाहित, अपने साथ में काम करने वाले व्यक्ति के साथ रिश्ते में जाने से चीजें और भी मुश्किल बन सकती हैं। अगर आपको उनके साथ में आगे बढ़ने की इच्छा है, तो खुद से पूछें कि अपने कोवर्कर के साथ में आपका ये रिश्ता, आपके जॉब के लिए कैसा साबित हो सकता है। अगर आपका काम आपके लिए बहुत जरूरी है, तो इस तरह की कमियों पर ध्यान केंद्रित करने से आपको चीजों को निष्पक्ष रूप से देखने में मदद मिलती है। - उदाहरण के लिए, कुछ कंपनी में एम्प्लोयी के बीच में डेटिंग या रिश्ते के संबंध में स्ट्रिक्ट पॉलिसी होती हैं। अगर ये आपके ऑफिस में भी लागू होता है, तो खुद से पूछें कि क्या आप सच में अपनी भावनाओं को सामने लाकर अपने सुपरवाइजर के साथ मुश्किल में पड़ने का रिस्क लेना चाहते हैं। - भले आपकी कंपनी की ऑफिस रोमांस से संबन्धित स्ट्रिक्ट पॉलिसी नहीं भी हैं, लेकिन तब भी आगे होने वाले संभावित परिणामों के बारे में विचार करें। क्या इससे अन्य को-वर्कर्स के साथ में टेंशन पैदा हो सकती है? आप ऑफिस गॉसिप को किस तरह से संभालेंगे? खुद से पूछें यदि आप आगे बढ़ते हैं, तो क्या होगा {"smallUrl":"https:\/\/wwwएकऑफिस के बाहर उनसे मिलने की इच्छा को रोकेंः आप अपने क्रश के साथ में जितना ज्यादा समय बिताएँगे, आपके लिए अपनी भावनाओं से उबर पाना उतना ही ज्यादा मुश्किल होते जाएगा। अपने कोवर्कर के साथ में अपने समय को लिमिट करना आपके लिए सच में बहुत मुश्किल होने वाला है, लेकिन उनके साथ में अपने इंटरेक्शन को छोटा और प्रोफेशनल रखने की अपनी तरफ से हर संभव कोशिश करें। जितना हो सके, उनके आसपास कम से कम रहने की कोशिश करें। - उदाहरण के लिए, अगर आपके कोवर्कर वीकेंड पर मिलने का प्लान कर रहे हैं, और अगर आपका क्रश भी वहाँ जाने वाला है, तो आप इस प्लान से पीछे हट सकते हैं। अपने लिए स्पष्ट सीमाएं सेट करें {"smallUrl":"https:\/\/wwwएकऐसी एक्टिविटीज़ पर फोकस करें, जो आपको मजेदार लगें और आपको अच्छा महसूस कराएंः जब आपको किसी पर क्रश होता है, तब आपके लिए और किसी चीज के बारे में सोचना मुश्किल हो सकता है। अगली बार जब आप अपने कोवर्कर के बारे में खुद को सोचते हुए पाएँ, तब अपने ध्यान को किसी और तरफ लगाने के तरीके की तलाश करें। उदाहरण के लिए, आप अपनी पसंद की किसी हॉबी को पूरा कर सकते हैं, एक मजेदार मूवी देख सकते हैं या फिर अपने किसी एक फ्रेंड को फोन कॉल कर सकते हैं। अन्य लोगों के साथ रिश्ते बनाने पर ध्यान दें - इस तरह के विचारों को नोटिस करने के बाद इन्हें एक लेबल देना आपके लिए उपयोगी हो सकता है। उदाहरण के लिए, अपने आप से ऐसा कहकर देखें, "मेरे मन में फिर से अपने क्रश के बारे में अनचाहे विचार आ रहे हैं।" - इसके लिए बहुत अभ्यास और धैर्य की आवश्यकता होती है, इसलिए अगर आपके मन में ये विचार आते रहते हैं, तो कोशिश करें कि आप फ्रस्ट्रेट न हों। इन्हें दूर करना जरूरी नहीं है, बल्कि जरूरी है कि इन विचारों के आने पर आपको ज्यादा परेशान नहीं होना है। स्ट्रेस घटाने वाली एक्सरसाइज करें {"smallUrl":"https:\/\/wwwएकअपनी भावनाओं को कमजोरी की तरह नहीं, बल्कि एक ताकत की तरह देखेंः किसी के साथ में प्यार में पड़ने की क्षमता का होना एक बहुत ही खूबसूरत बात है - फिर चाहे आप असल में उसे पूरा नहीं भी कर सकते। अपने मन में इस तरह की अनचाही भावनाएँ आने के लिए खुद को दोषी न ठहराएँ। बल्कि, इस सच्चाई को समझने की कोशिश करें कि आप एक ऐसे व्यक्ति हैं, जो किसी को ढेर सारा प्यार दे सकते हैं और खुद को याद दिलाएँ कि आप एक ऐसे व्यक्ति के साथ में रहना डिजर्व करते हैं, जो बदले में आप से प्यार करे। अपनी भावनाओं को खत्म होने के लिए समय दें - एक बार जब आप उन कारणों की पहचान कर लेते हैं जिनकी वजह से आप इस व्यक्ति के प्रति आकर्षित हैं, तो विभिन्न समाधानों पर विचार करें। उदाहरण के लिए, हो सकता है कि आप समान पर्सनेलिटी वाले लोगों को डेट करना चाहते हों या किसी ऐसे अंतर्निहित कारण का सामना कर रहे हैं, जिसके कारण आप उनकी ओर आकर्षित हो सकते हैं। अगर आवश्यक हो, तो एक थेरेपिस्ट से मिलें {"smallUrl":"https:\/\/www.wikihow.com\/images_en\/thumb\/c\/cचार\/Get-over-a-Crush-on-a-Married-Coworker-Step-बारह-Version-तीन.jpg\/vचार-चार सौ साठpx-Get-over-a-Crush-on-a-Married-Coworker-Step-बारह-Version-तीन.jpg","bigUrl":"https:\/\/www.wikihow.com\/images\/thumb\/c\/cचार\/Get-over-a-Crush-on-a-Married-Coworker-Step-बारह-Version-तीन.jpg\/vचार-सात सौ अट्ठाईसpx-Get-over-a-Crush-on-a-Married-Coworker-Step-बारह-Version-तीन.jpg","smallWidth":चार सौ साठ,"smallHeight":तीन सौ पैंतालीस,"bigWidth":सात सौ अट्ठाईस,"bigHeight":पाँच सौ छियालीस,"licensing":"<div class=\"mw-parser-output\"><\/div>"}एकअगर आप सच में बहुत स्ट्रेस में हैं, तो मदद के लिए किसी के पास जाने में कोई बुराई नहीं हैः शादीशुदा सहकर्मी के ऊपर क्रश से निपटना किसी के लिए भी बहुत मुश्किल हो सकता है। अगर आपकी भावनाएँ आपके काम, अन्य रिश्तों या फिर आपकी रोज़मर्रा के काम के बीच में आ रही हैं, तो अपने डॉक्टर को कॉल करें या एक काउंसलर के पास जाएँ। ये आपको इससे निपटने के कुछ हेल्दी तरीके पता करने में आपकी मदद करेंगे और आपकी स्थिति से निपटने के लिए आपको प्रैक्टिकल सलाह भी देंगे। - अपने किसी फ्रेंड या फैमिली मेम्बर के साथ में अपनी भावनाओं को डिस्कस करना भी आपकी मदद कर सकता है।
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काठमांडू. नेपाल सरकार ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सोमवार को लॉकडाउन (बंद) की अवधि आठ दिन के लिए बढ़ा दी। देश में बंद अब 15 अप्रैल तक अमल में रहेगा। नेपाल में अबतक कोविड-19 के नौ मामले रिकॉर्ड हुए हैं, जिसमें से एक मरीज ठीक हो गया है। कैबिनेट की बैठक में बंद की अवधि बढ़ाने का निर्णय हुआ।
पश्चिमी नेपाल में स्थानीय तौर पर संक्रमण लगने का शुक्रवार को पहला मामला सामने आया था जिसके बाद देश कोरोना वायरस महामारी के दूसरे चरण में चला गया। यह दूसरी बार है जब सरकार ने बंद की मियाद बढ़ाई है। सरकार ने 24 मार्च को हफ्तेभर के लिए देशव्यापी बंद का ऐलान किया था और 29 मार्च को इसे सात अप्रैल तक के लिए बढ़ा दिया था।
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काठमांडू. नेपाल सरकार ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सोमवार को लॉकडाउन की अवधि आठ दिन के लिए बढ़ा दी। देश में बंद अब पंद्रह अप्रैल तक अमल में रहेगा। नेपाल में अबतक कोविड-उन्नीस के नौ मामले रिकॉर्ड हुए हैं, जिसमें से एक मरीज ठीक हो गया है। कैबिनेट की बैठक में बंद की अवधि बढ़ाने का निर्णय हुआ। पश्चिमी नेपाल में स्थानीय तौर पर संक्रमण लगने का शुक्रवार को पहला मामला सामने आया था जिसके बाद देश कोरोना वायरस महामारी के दूसरे चरण में चला गया। यह दूसरी बार है जब सरकार ने बंद की मियाद बढ़ाई है। सरकार ने चौबीस मार्च को हफ्तेभर के लिए देशव्यापी बंद का ऐलान किया था और उनतीस मार्च को इसे सात अप्रैल तक के लिए बढ़ा दिया था।
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साहित्य में प्रगतिशीलता
श्री मन्मथनाथ गुप्त
कुछ लोगों के निकट प्रगतिशील साहित्य एक हौवा हो चुका है। इसका नाम लेते ही वे ऐसे मुँह बिचका देने है मानो यह कोई गर्हित विषय है जिसका साहित्यिकों के सभ्य समाज में उल्लेख नहीं होना चाहिए था। यह परिस्थिति काफी मजेदार है क्योंकि हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ प्रगतिशील लेखक श्री प्रेमचंद केवल प्रगतिशीलों की व्याख्या के अनुसार हो प्रगतिशील ये ऐसी बात नहीं, वे स्वयं भी अपने को प्रगतिशील कहने लगे थे । १६३६ में अखिल भारतीय प्रगतिशील संघ का जो प्रथम अधिवेशन हुआ था, वे उसके सभापति थे में उन्होंने इस पद से गर्जना की थी...
"हमारी कसौटी पर वही साहित्य खरा उतरेगा, जिसमें उच्च चिन्तन हो, स्वाधीनता का भाव हो, सौंदर्य का सार हो, सृजन की ग्रात्मा हो, जीवन की सच्चाइयों का प्रकाश हो, जो हम में गति और संघर्ष और बेचेनी पैदा करे, सुलाये नहीं.......
यह तो प्रेमचन्द द्वारा प्रगति की परिभाषा हुई, हम इस पर बाद को आयेंगे कि प्रगतिशीलता क्या है और क्या नहीं, पर यहाँ पर प्रारम्भ के तौर पर इस बात को समझ लेना जरूरी है कि प्रगतिशील होना, या प्रगतिशीलता का तकाजा करना उतना बड़ा पातक नहीं है जैसा कि कुछ साहित्यकारों ने प्रचार कर रखा है।
प्रगतिशीलता के विरुद्ध यह जो वातावरण उत्पन्न हुआ है, उसके कारण को भी हूँढ़ना पड़ेगा क्योंकि ऐसा किये बगैर हम प्रगतिशीलता को उसके उचित उच्चासन पर प्रतिष्ठित करने में समर्थ न होगे। प्रगतिशीलता पार्टीबन्दी से परे की चोज है, पर भारतवर्ष में कई ऐतिहासिक कारणों से इसको एक अंश तक कम्युनिस्ट पार्टी के साथ एक करके देखा गया था। यहां इसके लिए बुरा साबित हुआ ।
जैसा कि होता आया है कम्युनिस्ट पार्टी के लिये यह स्वाभाविक था कि वह जिस भी क्षेत्र में जो भी आन्दोलन चले, उसको अपने दल के लिये काम में लगाने की चेश करे, पर इसका अर्थ यह नहीं कि प्रगतिशील साहित्य का ग्रान्दोलन कम्युनिस्ट पार्टी का आन्दोलन है। प्रेमचन्द किसी पार्टी के नहीं थे, पर वे इस समय तक हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ प्रगतिशील लेखक बने हुये हैं। इस कारण प्रगतिशील साहित्य से इस आधार पर बिना कि वह कम्युनिस्ट साहित्य है बिलकुल ऊलजलूल बात है, और ऐसा करके हम कम्युनिस्टों को ख्वामख्वाह वह महत्व देते हैं जो किसी भी तरह उनको प्राप्य नहीं है। यह तो एक विश्व-आन्दोलन है । यहाँ पर एक बात यह साफ कर दी जाय कि मैं इस लेख में भारतीय कम्युनिस्ट दल के विरुद्ध कोई फैसला सा नहीं दे रहा हूं । कम्युनिस्ट दल एक राजनैतिक दल है, राजनैतिक सहोपन की कसोटी पर ही उसका ठीक मूल्य कूता जा सकता है, और इस लेख में इस विषय पर वाद विवाद खड़ा करना मेरे लिए अनुचित होगा। मेरा केवल इस अवसर पर वक्तव्य इतना ही है कि प्रगतिशील साहित्य किसी पार्टी विशेष की सम्पदा नहीं है। हरि का भजै सो हरि का होई; जो प्रगतिशील उद्देश्यो को साहित्य में अपनी जान में या अनजान में बेल पहुंचाता है, उसकी विरोधी प्रवृत्तियों को क्षीण करता है, वही प्रगतिशील साहित्यिक है, चाहे
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साहित्य में प्रगतिशीलता श्री मन्मथनाथ गुप्त कुछ लोगों के निकट प्रगतिशील साहित्य एक हौवा हो चुका है। इसका नाम लेते ही वे ऐसे मुँह बिचका देने है मानो यह कोई गर्हित विषय है जिसका साहित्यिकों के सभ्य समाज में उल्लेख नहीं होना चाहिए था। यह परिस्थिति काफी मजेदार है क्योंकि हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ प्रगतिशील लेखक श्री प्रेमचंद केवल प्रगतिशीलों की व्याख्या के अनुसार हो प्रगतिशील ये ऐसी बात नहीं, वे स्वयं भी अपने को प्रगतिशील कहने लगे थे । एक हज़ार छः सौ छत्तीस में अखिल भारतीय प्रगतिशील संघ का जो प्रथम अधिवेशन हुआ था, वे उसके सभापति थे में उन्होंने इस पद से गर्जना की थी... "हमारी कसौटी पर वही साहित्य खरा उतरेगा, जिसमें उच्च चिन्तन हो, स्वाधीनता का भाव हो, सौंदर्य का सार हो, सृजन की ग्रात्मा हो, जीवन की सच्चाइयों का प्रकाश हो, जो हम में गति और संघर्ष और बेचेनी पैदा करे, सुलाये नहीं....... यह तो प्रेमचन्द द्वारा प्रगति की परिभाषा हुई, हम इस पर बाद को आयेंगे कि प्रगतिशीलता क्या है और क्या नहीं, पर यहाँ पर प्रारम्भ के तौर पर इस बात को समझ लेना जरूरी है कि प्रगतिशील होना, या प्रगतिशीलता का तकाजा करना उतना बड़ा पातक नहीं है जैसा कि कुछ साहित्यकारों ने प्रचार कर रखा है। प्रगतिशीलता के विरुद्ध यह जो वातावरण उत्पन्न हुआ है, उसके कारण को भी हूँढ़ना पड़ेगा क्योंकि ऐसा किये बगैर हम प्रगतिशीलता को उसके उचित उच्चासन पर प्रतिष्ठित करने में समर्थ न होगे। प्रगतिशीलता पार्टीबन्दी से परे की चोज है, पर भारतवर्ष में कई ऐतिहासिक कारणों से इसको एक अंश तक कम्युनिस्ट पार्टी के साथ एक करके देखा गया था। यहां इसके लिए बुरा साबित हुआ । जैसा कि होता आया है कम्युनिस्ट पार्टी के लिये यह स्वाभाविक था कि वह जिस भी क्षेत्र में जो भी आन्दोलन चले, उसको अपने दल के लिये काम में लगाने की चेश करे, पर इसका अर्थ यह नहीं कि प्रगतिशील साहित्य का ग्रान्दोलन कम्युनिस्ट पार्टी का आन्दोलन है। प्रेमचन्द किसी पार्टी के नहीं थे, पर वे इस समय तक हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ प्रगतिशील लेखक बने हुये हैं। इस कारण प्रगतिशील साहित्य से इस आधार पर बिना कि वह कम्युनिस्ट साहित्य है बिलकुल ऊलजलूल बात है, और ऐसा करके हम कम्युनिस्टों को ख्वामख्वाह वह महत्व देते हैं जो किसी भी तरह उनको प्राप्य नहीं है। यह तो एक विश्व-आन्दोलन है । यहाँ पर एक बात यह साफ कर दी जाय कि मैं इस लेख में भारतीय कम्युनिस्ट दल के विरुद्ध कोई फैसला सा नहीं दे रहा हूं । कम्युनिस्ट दल एक राजनैतिक दल है, राजनैतिक सहोपन की कसोटी पर ही उसका ठीक मूल्य कूता जा सकता है, और इस लेख में इस विषय पर वाद विवाद खड़ा करना मेरे लिए अनुचित होगा। मेरा केवल इस अवसर पर वक्तव्य इतना ही है कि प्रगतिशील साहित्य किसी पार्टी विशेष की सम्पदा नहीं है। हरि का भजै सो हरि का होई; जो प्रगतिशील उद्देश्यो को साहित्य में अपनी जान में या अनजान में बेल पहुंचाता है, उसकी विरोधी प्रवृत्तियों को क्षीण करता है, वही प्रगतिशील साहित्यिक है, चाहे
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भुवनेश्वर। ओडिशा के कालाहांडी जिले के एक व्यक्ति को उसके दो प्रेमिकाओं के साथ अवैध संबंध को छिपाने के लिए अपने ही दो नवजात शिशुओं की हत्या करने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, कालाहांडी जिले के गोलामुंडा ब्लॉक के निवासी त्रिपल नाइक ने अपने दो प्रेमिकाओं (एक विधवा और दूसरी अविवाहित महिला) के साथ गोवा में प्रवास के दौरान अपने दो नवजात बच्चों को मार डाला और शवों को अपने घर के पीछे दफना दिया।
इस घटना का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने आरोपी त्रिपाल को हाल ही में अविवाहित महिलाओं का अपहरण करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। धर्मगढ़ अनुमंडल पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) धीरज कुमार चोपदार ने कहा कि पूछताछ के दौरान उसने अपराध का खुलासा किया।
चोपदार ने कहा कि चूंकि यह उनके बच्चे अवांछित थे, आरोपियों ने गोवा के सापेर इलाके में अपने घर के पीछे शवों को दफना दिया था। जब आरोपी त्रिपाल ने अविवाहित महिलाओं का अपहरण करने की कोशिश की, तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान, पुलिस को पता चला कि उसने गोवा में दो नवजातों को मार डाला है।
हाल ही में कालाहांडी पुलिस की एक टीम ने गोवा का दौरा किया और शवों का पता लगाया। उन्होंने बताया कि तीनों लोगों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि दोनों महिलाएं पिछले साल काम की तलाश में लॉकडाउन से पहले गोवा गई थीं और वहां उनकी मुलाकात आरोपी त्रिपाल से हुई। जब पूरा देश लॉकडाउन में था, तब वे सभी गोवा के एक घर में एक साथ रहे।
उस अवधि के दौरान, त्रिपाल के उन दोनों महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध बन गए और बाद में एक महीने के अंतराल में उन दोनों को गर्भवती कर दिया। सूत्र ने कहा कि चूंकि बच्चे विवाहेतर संबंधों के कारण पैदा हुए थे, इसलिए उन्होंने कथित तौर पर नवजात बच्चों की हत्या कर दी और शव को अपने घर के पीछे दफना दिया और ओडिशा लौट आए थे।
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भुवनेश्वर। ओडिशा के कालाहांडी जिले के एक व्यक्ति को उसके दो प्रेमिकाओं के साथ अवैध संबंध को छिपाने के लिए अपने ही दो नवजात शिशुओं की हत्या करने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, कालाहांडी जिले के गोलामुंडा ब्लॉक के निवासी त्रिपल नाइक ने अपने दो प्रेमिकाओं के साथ गोवा में प्रवास के दौरान अपने दो नवजात बच्चों को मार डाला और शवों को अपने घर के पीछे दफना दिया। इस घटना का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने आरोपी त्रिपाल को हाल ही में अविवाहित महिलाओं का अपहरण करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। धर्मगढ़ अनुमंडल पुलिस अधिकारी धीरज कुमार चोपदार ने कहा कि पूछताछ के दौरान उसने अपराध का खुलासा किया। चोपदार ने कहा कि चूंकि यह उनके बच्चे अवांछित थे, आरोपियों ने गोवा के सापेर इलाके में अपने घर के पीछे शवों को दफना दिया था। जब आरोपी त्रिपाल ने अविवाहित महिलाओं का अपहरण करने की कोशिश की, तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान, पुलिस को पता चला कि उसने गोवा में दो नवजातों को मार डाला है। हाल ही में कालाहांडी पुलिस की एक टीम ने गोवा का दौरा किया और शवों का पता लगाया। उन्होंने बताया कि तीनों लोगों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि दोनों महिलाएं पिछले साल काम की तलाश में लॉकडाउन से पहले गोवा गई थीं और वहां उनकी मुलाकात आरोपी त्रिपाल से हुई। जब पूरा देश लॉकडाउन में था, तब वे सभी गोवा के एक घर में एक साथ रहे। उस अवधि के दौरान, त्रिपाल के उन दोनों महिलाओं के साथ शारीरिक संबंध बन गए और बाद में एक महीने के अंतराल में उन दोनों को गर्भवती कर दिया। सूत्र ने कहा कि चूंकि बच्चे विवाहेतर संबंधों के कारण पैदा हुए थे, इसलिए उन्होंने कथित तौर पर नवजात बच्चों की हत्या कर दी और शव को अपने घर के पीछे दफना दिया और ओडिशा लौट आए थे।
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मन्त्र ४१
इस नाद की ध्वनि प्रारम्भिक काल में समुद्र, मेघ, भेरी तथा झरनों से उत्पन्न ध्वनि के समान सुनायी देती है । इसके बाद बीच की अवस्था (मध्यमावस्था) में मृदङ्ग, घंटे और नगाड़े की भाँति यह ध्वनि सुनाई पड़ती है। अन्त में अर्थात् उत्तरावस्था में किङ्किणी, वंशी, वीणा एवं भ्रमर की ध्वनि के समान मधुर नादध्वनि सुनायी पड़ती है। इस प्रकार सूक्ष्मातिसूक्ष्म होते हुए नाना प्रकार के नाद सुनायी पड़ते हैं ॥३४-३५॥ महति श्रूयमाणे तु महाभेर्यादिकध्वनौ ।
तत्र सूक्ष्मं सूक्ष्मतरं नादमेव परामृशेत् ॥ ३६॥
निरन्तर नाद का अभ्यास करते हुए जब भेरी आदि की ध्वनि (आवाज) तेजी से सुनायी पड़ने लगे, तब उसमें भी सूक्ष्म से भी सूक्ष्मतर नाद के सुनने का विचार करना चाहिए ॥ ३६ ॥
घनमुत्सृज्य वा सूक्ष्मे सूक्ष्ममुत्सृज्य वा घने । रममाणमपि क्षिप्तं मनो नान्यत्र चालयेत् ॥ ३७॥
(नाद में रुचि रखने वाले साधक को चाहिए कि) वह घन नाद को छोड़कर सूक्ष्मनाद (मन्द ध्वनि) या फिर सूक्ष्म नाद का परित्याग करके घन नाद में मन को केन्द्रित करे। अन्यत्र और कहीं भी इधर- उधर मन को भ्रमित न होने दे ॥ ३७॥
यत्र कुत्रापि वा नादे लगति प्रथमं मनः ।
तत्र तत्र स्थिरीभूत्वा तेन सार्धं विलीयते ॥ ३८ ॥
साधक का मन सर्वप्रथम जहाँ-कहीं किसी भी सूक्ष्म (अतिमन्द) अथवा घननाद (अभेद्यध्वनि) में लगता है। उसको (मन को) वहीं केन्द्रित करना चाहिए। ऐसा करने से वह (चित्त) स्वयमेव तन्मय (विलीन) होने लगता है ॥ ३८ ॥
विस्मृत्य सकलं बाह्यं नादे दुग्धाम्बुवन्मनः ।
एकीभूयाथ सहसा चिदाकाशे विलीयते ॥ ३९ ॥
साधक का मन सभी सांसारिक बाह्य-प्रपंचों से विस्मृत होकर दूध में मिश्रित जल की भाँति नाद (ध्वनि) में एकीभूत हो जाता है। इस प्रकार वह (मन) नाद के साथ अकस्मात् ही चिदाकाश में स्वयं को विलय कर लेता है ॥ ३९ ॥
उदासीनस्ततो भूत्वा सदाभ्यासेन संयमी ।
उन्मनीकारकं सद्यो नादमेवावधारयेत् ॥ ४० ॥
संयमी पुरुष को चाहिए कि नाद - श्रवण से भिन्न विषयों-वासनाओं को उपेक्षित करके सतत अभ्यास द्वारा मन को तत्क्षण ही उस नाद में नियोजित करे और सदैव चिन्तन के द्वारा उसी में रमण करता रहे ॥ ४० ॥
सर्वचिन्तां समुत्सृज्य सर्वचेष्टाविवर्जितः ।
नादमेवानुसंदध्यान्नादे चित्तं विलीयते ॥ ४१ ॥
योगी साधक को चाहिए कि सतत चिन्तन करते हुए समस्त चिन्ताओं का परित्याग कर सभी तरह की चेष्टाओं से मन को हटाकर (उस) नाद का ही अनुसन्धान ( श्रवण-मनन-चिन्तन) करे; क्योंकि (चिन्तन द्वारा सहज ही) चित्त का नाद में लय हो जाता है ॥ ४१॥
मकरन्दं पिबन्भृङ्गो गन्धान्नापेक्षते यथा ।
नादासक्तं सदा चित्तं विषयं न हि काङ्क्षति ॥ ४२ ॥
जिस प्रकार भ्रमर फूलों का रस ग्रहण करता हुआ पुष्पों के गन्ध की अपेक्षा नहीं रखता है, ठीक वैसे ही सतत नाद में तल्लीन रहने वाला चित्त विषय-वासना आदि की आकांक्षा नहीं करता है ॥ ४२ ॥ बद्धः सुनादगन्धेन सद्यः संत्यक्तचापलः । नादग्रहणतश्चित्तमन्तरङ्गभुजङ्गमः ॥ ४३ ॥
यह चित्त रूपी अन्तरङ्ग भुजङ्ग (सर्प) नाद को सुनने के पश्चात् उस सुन्दर नाद की गन्ध से आबद्ध हो जाता है और तत्क्षण ही सभी तरह की चपलताओं का परित्याग कर देता है ॥ ४३ ॥
विस्मृत्य विश्वमेकाग्रः कुत्रचिन्न हि धावति । मनोमत्तगजेन्द्रस्य विषयोद्यानचारिणः ॥ ४४ ॥
नियामनसमर्थोऽयं निनादो निशिताङ्कुशः । नादोऽन्तरङ्गसारङ्गबन्धने वागुरायते ॥ ४५ ॥ अन्तरङ्गसमुद्रस्य रोधे वेलायतेऽपि वा ।
ब्रह्मप्रणवसंलग्ननादो ज्योतिर्मयात्मकः ॥ ४६॥
तदनन्तर ( वह मन) विश्व (सांसारिकता) को विस्मृत करके तथा एकाग्रता को धारण करके (विषयों में) इधर-उधर कहीं भी नहीं दौड़ता है। विषय-वासना रूपी उद्यान में विचरण करने वाले मन रूपी उन्मत्त गजेन्द्र को वश में करने में यह नादरूपी अति तीक्ष्ण अङ्कुश ही समर्थ होता है। यह नाद मनरूपी हिरण को बाँधने में जाल का कार्य करता है और मन रूपी तरङ्ग को रोकने में तट का काम करता है। ब्रह्मरूप प्रणव में संयुक्त हुआ यह नाद स्वयं ही प्रकाश स्वरूप होता है ॥ ४४-४६ ॥
मनस्तत्र लयं याति तद्विष्णोः परमं पदम् ।
तावदाकाशसंकल्पो यावच्छब्दः प्रवर्तते ॥ ४७ ॥
मन वहाँ ही (उस प्रकाश तत्त्व में) विलय को प्राप्त हो जाता है। वहीं परम श्रेष्ठ भगवान् विष्णु का परम पद है। मन में आकाश तत्त्व का संकल्प तभी तक रहता है, जब तक कि शब्दों का उच्चारण और श्रवण होता है ॥ ४७ ॥
निःशब्दं तत्परं ब्रह्म परमात्मा समीयते ।
नादो यावन्मनस्तावन्नादान्तेऽपि मनोन्मनी ।। ४८ ।।
निःशब्द (शब्दरहित ) होने पर तो वह (मन) परमब्रह्म के परमात्म-तत्त्व का अनुभव करने लगता है। नाद (ध्वनि) के रहने तक ही मन का अस्तित्व बना रहता है। नाद के समापन होने पर मन भी 'अमन' (शून्यवत् ) हो जाता है ॥ ४८ ॥
सशब्दश्चाक्षरे क्षीणे निःशब्दं परमं पदम् ।
सदा नादानुसंधानात्संक्षीणा वासना तु या ॥ ४९ ॥ निरञ्जने विलीयेते मनोवायू न संशयः । नादकोटिसहस्त्राणि बिन्दुकोटिशतानि च ॥ ५० ॥
मन्त्र ५६
सर्वे तत्र लयं यान्ति ब्रह्मप्रणवनादके । सर्वावस्थाविनिर्मुक्तः सर्वचिन्ताविवर्जितः ॥ ५१ ॥ मृतवत्तिष्ठते योगी स मुक्तो नात्र संशयः । शङ्खदुन्दुभिनादं च न शृणोति कदाचन ॥ ५२ ॥
सशब्द अर्थात् शब्दयुक्त नाद (ध्वनि) के अक्षर स्वरूप ब्रह्म में क्षीण (लय) हो जाने पर वह निःशब्द परमपद कहलाता है। जब सतत नाद का अनुसन्धान करने पर समस्त विषय-वासनाएँ पूर्णरूपेण नष्ट हो जाती हैं, तदुपरान्त मन एवं प्राण दोनों संशयरहित हो उस निराकार परमब्रह्म में लय हो जाते हैं। करोड़ों-करोड़ नाद एवं बिन्दु उस ब्रह्मरूप प्रणव नाद में विलीन हो जाते हैं। वह योगी जाग्रत् स्वप्न तथा सुषुति आदि सभी अवस्थाओं से मुक्त होकर सभी तरह की चिन्ताओं से रहित हो जाता है। ऐसी स्थिति वह योगी मरे हुए व्यक्ति की भाँति (मृतवत्) रहता है। निश्चय ही वह योगी मुक्तावस्था प्राप्त कर लेता है और वह (योगी) शङ्ख-दुन्दुभि आदि (लौकिक) नाद का श्रवण कभी भी नहीं करता ॥ ४९-५२ ॥ काष्ठवज्ज्ञायते देह उन्मन्यावस्थया ध्रुवम् ।
न जानाति स शीतोष्णं न दुःखं न सुखं तथा ॥ ५३ ॥
जिस अवस्था में मन 'अमन' हो जाता है, उस अवस्था के प्राप्त होने पर शरीर लकड़ी की भाँति चेष्टारहित सा हो जाता है । वह (मन) न शीत जानता है, न गर्मी जानता है और न ही वह सुख-दुःख का अनुभव करता है ॥ ५३॥
न मानं नावमानं च संत्यक्त्वा तु समाधिना।
अवस्थात्रयमन्वेति न चित्तं योगिनः सदा ॥ ५४॥
वह (योगी) मान-अपमान से परे हो जाता है। समाधि द्वारा वह इन सभी का पूर्णतया परित्याग कर देता है। योगी का चित्त तीनों अवस्थाओं- जाग्रत् स्वप्र, सुषुति आदि का कभी भी अनुगमन नहीं करता है ( अर्थात् उससे परे हो जाता है) ॥ ५४ ॥
जाग्रन्निद्राविनिर्मुक्तः स्वरूपावस्थतामियात् ॥ ५५ ॥
दृष्टिः स्थिरा यस्य विनासदृश्यं वायुः स्थिरो यस्य विना प्रयत्नम् । चित्तं स्थिरं यस्य विनावलम्बं स ब्रह्मतारान्तरनादरूप इत्युपनिषत् ॥ ५६ ॥
(वह) योगी जाग्रत् और निद्रा (स्वप्न) की अवस्था से मुक्त होकर अपने वास्तविक स्वरूप में स्थिर हो जाता है। दृश्य वस्तु के अभाव में भी जिसकी दृष्टि स्थिर हो जाती है, बिना प्रयास के ही जिसका प्राण अपने स्थान पर सुस्थिर हो जाता है तथा बिना किसी आश्रय अथवा अवलम्बन के ही जिसका चित्त स्थिरता को प्राप्त हो जाता है, ऐसा वह (योगी) ब्रह्ममय प्रणव नाद के अन्तर्वर्ती तुरीयावस्था (परमानंद) में सदैव स्थित हो जाता है। यही उपनिषद् (रहस्यात्मक ज्ञान ) है ॥ ५५-५६ ॥
ॐ वाड्मे मनसि...इति शान्तिः ॥ ॥ इति नादबिन्दूपनिषत्समाप्ता ॥
॥ निरालम्बोपनिषद् ॥
शुक्ल यजुर्वेद से सम्बद्ध इस उपनिषद् में ब्रह्म, ईश्वर, जीव, प्रकृति, जगत्, ज्ञान, कर्म आदि का सुन्दर विवेचन किया गया है। निर्विकार ब्रह्म जब प्रकृति के साथ सृष्टि का सृजन करके उसका ईशन-शासन-संचालन करता है, तो ईश्वर कहलाता है। इसी प्रकार विभिन्न संबोधनों को परिभाषित किया गया है। ऋषि जाति-पाँति सम्बन्धी भ्रमों का निवारण करते हुए कहते हैं कि वह आत्मा, रक्त, चमड़ा, मांस, हड्डियों आदि से सम्बन्धित नहीं है, वह तो व्यवहार के क्रम में कल्पित व्यवस्था मात्र है। इसी प्रकार अहंता, ममता आदि को त्याग कर इष्ट में समर्पित हो जाने को 'संन्यास' कहते हुए उन्हीं को मुक्त, पूज्य, योगी, परमहंस आदि उपाधियों से विभूषित होने को बात समझायी गयी है। ऐसी स्थिति प्राप्त करके ही साधक जन्म-मरण के बन्धनों को काट सकता है।
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं
इति शान्तिः ॥ (द्रष्टव्य - ईशावास्योपनिषद्)
ॐ नमः शिवाय गुरवे सच्चिदानन्दमूर्तये । निष्प्रपञ्चाय शान्ताय निरालम्बाय तेजसे । निरालम्बं समाश्रित्य सालम्बं विजहाति यः । स संन्यासी च योगी च कैवल्यं पदमश्रुते ॥ १ ॥
उस कल्याणकारी (शिव) गुरु, सत्-चित् और आनन्द की मूर्ति को नमस्कार है। उस निष्प्रपञ्च, शान्त, आलम्ब ( आश्रय) रहित, तेजः स्वरूप परमात्मा को नमन है । जो निरालम्ब (परमात्म तत्त्व) का आश्रय ग्रहण करके (सांसारिक) आलम्बन का परित्याग कर देता है, वह योगी और संन्यासी है, वही कैवल्य (मोक्ष) पद प्राप्त करता है ॥ १ ॥
एषामज्ञानजन्तूनां समस्तारिष्टशान्तये । यद्यद्बोद्धव्यमखिलं तदाशङ्क्य ब्रवीम्यहम् ॥ २॥
इस संसार के अज्ञानी जीवों के सभी अरिष्टों (कष्टों) की शान्ति के निमित्त जो-जो ज्ञान आवश्यक ( है, उसकी आशंका करके (उसके उत्तर के रूप में) मैं यहाँ कहता हूँ (पूछता हूँ) ॥ २ ॥
किं ब्रह्म । क ईश्वरः । को जीवः । का प्रकृतिः । कः परमात्मा । को ब्रह्मा । को विष्णुः । को रुद्रः। क इन्द्रः। कः शमनः । कः सूर्यः । कश्चन्द्रः । के सुराः । के असुराः । के पिशाचाः । के मनुष्याः । काः स्त्रियः । के पश्चादयः । किं स्थावरम् । के ब्राह्मणादयः । का जातिः । किं कर्म । किमकर्म । किं ज्ञानम् । किमज्ञानम् । किं सुखम् । किं दुःखम् । कः स्वर्गः । को नरकः । को बन्धः । को मोक्षः । क उपास्यः । कः शिष्यः । को विद्वान् । को मूढः । किमासुरम् । किं तपः । किं परमं पदम्। किं ग्राह्यम् । किमग्राह्यम् । कः संन्यासीत्याशङ्कयाह ब्रह्मेति ॥ ३ ॥
ब्रह्म क्या है ? ईश्वर कौन है ? जीव कौन है ? प्रकृति क्या है ? परमात्मा कौन है ? ब्रह्मा कौन है ? विष्णु कौन है ? रुद्र कौन है ? इन्द्र कौन है ? यम कौन है ? सूर्य कौन है ? चन्द्र कौन है ? देवता कौन हैं ? असुर कौन हैं? पिशाच कौन हैं ? मनुष्य क्या हैं ? स्त्रियाँ क्या हैं? पशु आदि क्या हैं ? स्थावर (जड़) क्या है ? ब्राह्मण आदि क्या हैं ? जाति क्या है ? कर्म क्या है ? अकर्म क्या है ? ज्ञान और अज्ञान क्या हैं? सुख-दुःख क्या हैं ? स्वर्ग-नरक क्या हैं? बंधन और मुक्ति क्या हैं ? उपासना करने योग्य कौन है ? शिष्य कौन है ? विद्वान् कौन है ? मूर्ख कौन है ? असुरत्व क्या है ? तप क्या है ? परमपद किसे कहते हैं ? ग्रहणीय और अग्रहणीय क्या हैं? संन्यासी कौन है ? इस प्रकार शंका व्यक्त करके उन्होंने ब्रह्म आदि का स्वरूप विवेचित किया ॥ ३ ॥
मन्त्र १०
स होवाच महदहंकारपृथिव्यप्तेजोवाय्वाकाशत्वेन कर्मज्ञानार्थरूपतया भासमानमद्वितीयमखिलोपाधिविनिर्मुक्तं पबृंहितमनाद्यनन्तं शुद्धं शिवं शान्तं निर्गुणमित्यादिवाच्यमनिर्वाच्यं चैतन्यं ब्रह्म । ईश्वर इति च । ब्रह्मैव स्वशक्तिं प्रकृत्यभिधेयामाश्रित्य लोकान्सृष्ट्वा प्रविश्यान्तर्यामित्वेन ब्रह्मादीनां बुद्धीन्द्रियनियन्तृत्वादीश्वरः ॥ ४ ॥
उन्होंने कहा कि महत् तत्त्व, अहं, पृथिवी, आप, तेजस्, वायु और आकाश रूप बृहद् ब्रह्माण्ड कोश वाला, कर्म और ज्ञान के अर्थ से प्रतिभासित होने वाला, अद्वितीय, सम्पूर्ण (नाम रूप आदि) उपाधियों से रहित, सर्व शक्तिसम्पन्न, आद्यन्तहीन, शुद्ध, शिव, शान्त, निर्गुण और अनिर्वचनीय चैतन्य स्वरूप परब्रह्म कहलाता है। अब ईश्वर के स्वरूप का कथन करते हैं । यही ब्रह्म जब अपनी प्रकृति (शक्ति) के सहारे लोकों का सृजन करता है और अन्तर्यामी स्वरूप से (उनमें) प्रविष्ट होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश तथा बुद्धि और इन्द्रियों को नियन्त्रित करता है, तब उसे ईश्वर कहते हैं ॥ ४ ॥
जीव इति च ब्रह्मविष्ण्वीशानेन्द्रादीनां नामरूपद्वारा स्थूलो ऽहमिति मिथ्याध्यासवशाज्जीवः । सोऽहमेकोऽपि देहारम्भकभेदवशाद्बहुजीवः ॥५॥
जब इस चैतन्य स्वरूप ईश्वर को ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र तथा इन्द्रादि नामों और रूपों के द्वारा देह का मिथ्याभिमान हो जाता है कि मैं स्थूल हूँ, तब उसे जीव कहते हैं । यह चैतन्य ' सोऽहं ' स्वरूप में एक होने पर भी शरीरों की भिन्नता के कारण 'जीव' अनेकविध बन जाता है ॥ ५ ॥
ब्रह्मशप्रकृतिरिति च ब्रह्मणः सकाशान्नानाविचित्रजगन्निर्माणसामर्थ्यबुद्धिरूपा
क्तिरेव प्रकृतिः ॥ ६ ॥
प्रकृति उसे कहते हैं, जो ब्रह्म के सान्निध्य से चित्र विचित्र संसार को रचने की शक्ति वाली तथा ब्रह्म की बुद्धिरूपा शक्ति वाली है ॥ ६ ॥
परमात्मेति च देहादेः परतरत्वाद् ब्रह्मैव परमात्मा ॥ ७ ॥ देहादि से परे रहने के कारण ब्रह्म को ही परमात्मा कहते हैं ॥ ७ ॥
स ब्रह्मा स विष्णुः स इन्द्रः स शमनः स सूर्यः स चन्द्रस्ते सुरास्ते असुरास्ते पिशाचास्ते मनुष्यास्ताः स्त्रियस्ते पश्वादयस्तत्स्थावरं ते ब्राह्मणादयः ॥ ८ ॥
यही परमात्मा ब्रह्मा, विष्णु, इन्द्र, यम, सूर्य और चन्द्र आदि देवता के रूप में; यही असुर, पिशाच, नर-नारी और पशु आदि के रूप में प्रकट होता है; यही जड़-पदार्थ और ब्राह्मण आदि भी है ॥ ८ ॥ सर्वं खल्विदं ब्रह्म नेह नानास्ति किंचन ॥ ९ ॥
यह समस्त विश्व ही ब्रह्म है, इसके अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है ॥ ९ ॥
जातिरिति च । न चर्मणो न रक्तस्य न मांसस्य न चास्थिनः । न जातिरात्मनो जातिर्व्यवहारप्रकल्पिता ॥ १० ॥
जाति (शरीर के) चर्म, रक्त, मांस, अस्थियों और आत्मा की नहीं होती। उसकी (मानव, पशु-पक्षी या ब्राह्मण, क्षत्रिय आदि जाति की) प्रकल्पना तो केवल व्यवहार के निमित्त की गई है ॥ १० ॥
[ ऋषि यहाँ स्पष्टता से कहते हैं कि जाति शरीर भेद से नहीं, व्यवहार भेद से निर्धारित की गयी है। ]
कर्मेति च क्रियमाणेन्द्रियैः कर्माण्यहं करोमीत्यध्यात्मनिष्ठतया कृतं कर्मैव कर्म । अकर्मेति च कर्तृत्वभोक्तृत्वाद्यहंकारतया बन्धरूपं जन्मादिकारणं नित्यनैमित्तिकयागव्रततपोदानादिषु फलाभिसंधानं यत्तदकर्म ॥ ११-१२॥
इन्द्रियों द्वारा की जाने वाली क्रियाओं को कर्म कहते हैं। जिस क्रिया को 'मैं करता हूँ' इस भावपूर्वक (अध्यात्म निष्ठा से ) किया जाता है, वही कर्म है। कर्त्तापन और भोक्तापन के अहंकार के द्वारा फल की इच्छा से किये गये बन्धन स्वरूप नित्य-नैमित्तिक यज्ञ, व्रत, तप, दान आदि कर्म' अकर्म' कहलाते हैं ॥ ११-१२॥
ज्ञानमिति देहेन्द्रियनिग्रहसद्गुरूपासनश्रवणमनननिदिध्यासनैर्यद्यद्दृग्दृश्यस्वरूपं सर्वान्तरस्थं सर्वसमं घटपटादिपदार्थमिवाविकारं विकारेषु चैतन्यं विना किंचिन्नास्तीति साक्षात्कारानुभवो ज्ञानम् ॥ १३ ॥
सृष्टि की सभी बदलने वाली वस्तुओं में एक ही अपरिवर्तनशील चैतन्य तत्त्व विद्यमान है, अन्य कुछ भी नहीं है, द्रष्टा और दृश्य जो कुछ भी है, सब कुछ चैतन्य तत्त्व ही है। सबके अन्दर यह चैतन्य तत्त्व ही विद्यमान रहने पर भी ऐसा प्रतीत होता है, मानो वह घट - वस्त्रादि रूप में ही परिवर्तित हो गया है। इसी साक्षात्कार की अनुभूति को ज्ञान कहते हैं। यह अनुभूति शरीर और इन्द्रिय आदि पर नियंत्रण रखने से और सद्गुरु की उपासना, उनके उपदेशों के श्रवण, चिन्तन, मनन और निदिध्यासन करने से होती है ॥ १३ ॥
अज्ञानमिति च रज्जौ सर्पभ्रान्तिरिवाद्वितीये सर्वानुस्यूते सर्वमये ब्रह्मणि देवतिर्यङ्नरस्थावरस्त्रीपुरुषवर्णाश्रमबन्धमोक्षोपाधिनानात्मभेदकल्पितं ज्ञानमज्ञानम् ॥ १४ ॥
जिस प्रकार रस्सी में सर्प की भ्रान्ति होती है, उसी प्रकार सब में विद्यमान ब्रह्म और देव, पशु-पक्षी, मनुष्य, स्थावर, स्त्री-पुरुष, वर्ण-आश्रम, बन्धन मुक्ति आदि सभी अनात्म वस्तुओं में भेद मानना ही 'अज्ञान' है ॥ १४ ॥ सुखमिति च सच्चिदानन्दस्वरूपं ज्ञात्वानन्दरूपा या स्थितिः सैव सुखम् ॥ १५ ॥ सत्-चित्-आनन्द स्वरूप परमात्मा के ज्ञान से जो आनन्दपूर्ण स्थिति बनती है, वही सुख है ॥ १५ ॥ दुःखमिति अनात्मरूपो विषयसंकल्प एव दुःखम् ॥ १६ ॥
अनात्म रूप (नश्वर) विषयों का सङ्कल्प (विचार) करना दुःख कहलाता है ॥ १६ ॥
स्वर्ग इति च सत्संसर्गः स्वर्गः । नरक इति च असत्संसारविषयजनसंसर्ग एव नरकः ॥ १७ ॥ सत् का (अनश्वर का) समागम (सत्पुरुषों का सत्संग) ही स्वर्ग है। असत् (नश्वर) संसार ! के विषयों (में रचे-पचे लोगों) का संसर्ग ही नरक है ॥ १७ ॥
बन्ध इति च अनाद्यविद्यावासनया जातोऽहमित्यादिसंकल्पो बन्धः ॥ १८ ॥ अनादि अविद्या की वासना (संस्कार) द्वारा उत्पन्न इस प्रकार का विचार कि 'मैं हूँ, ' यही बन्धन है । पितृमातृसहोदरदारापत्यगृहारामक्षेत्रममतासंसारावरणसङ्कल्पो बन्धः ॥ १९ ॥ माता-पिता, भ्राता, पुत्र, गृह, उद्यान तथा खेत आदि मेरे अपने हैं, यह सांसारिक विचार भी बन्धन ही हैं। कर्तृत्वाद्यहंकारसंकल्पो बन्धः ॥ २० ॥
कर्त्तापन के अहंकार का संकल्प भी बन्धनरूप है ॥ २० ॥ अणिमाद्यष्टैश्वर्याशासिद्धसंकल्पो बन्धः ॥ २१ ॥
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मन्त्र इकतालीस इस नाद की ध्वनि प्रारम्भिक काल में समुद्र, मेघ, भेरी तथा झरनों से उत्पन्न ध्वनि के समान सुनायी देती है । इसके बाद बीच की अवस्था में मृदङ्ग, घंटे और नगाड़े की भाँति यह ध्वनि सुनाई पड़ती है। अन्त में अर्थात् उत्तरावस्था में किङ्किणी, वंशी, वीणा एवं भ्रमर की ध्वनि के समान मधुर नादध्वनि सुनायी पड़ती है। इस प्रकार सूक्ष्मातिसूक्ष्म होते हुए नाना प्रकार के नाद सुनायी पड़ते हैं ॥चौंतीस-पैंतीस॥ महति श्रूयमाणे तु महाभेर्यादिकध्वनौ । तत्र सूक्ष्मं सूक्ष्मतरं नादमेव परामृशेत् ॥ छत्तीस॥ निरन्तर नाद का अभ्यास करते हुए जब भेरी आदि की ध्वनि तेजी से सुनायी पड़ने लगे, तब उसमें भी सूक्ष्म से भी सूक्ष्मतर नाद के सुनने का विचार करना चाहिए ॥ छत्तीस ॥ घनमुत्सृज्य वा सूक्ष्मे सूक्ष्ममुत्सृज्य वा घने । रममाणमपि क्षिप्तं मनो नान्यत्र चालयेत् ॥ सैंतीस॥ वह घन नाद को छोड़कर सूक्ष्मनाद या फिर सूक्ष्म नाद का परित्याग करके घन नाद में मन को केन्द्रित करे। अन्यत्र और कहीं भी इधर- उधर मन को भ्रमित न होने दे ॥ सैंतीस॥ यत्र कुत्रापि वा नादे लगति प्रथमं मनः । तत्र तत्र स्थिरीभूत्वा तेन सार्धं विलीयते ॥ अड़तीस ॥ साधक का मन सर्वप्रथम जहाँ-कहीं किसी भी सूक्ष्म अथवा घननाद में लगता है। उसको वहीं केन्द्रित करना चाहिए। ऐसा करने से वह स्वयमेव तन्मय होने लगता है ॥ अड़तीस ॥ विस्मृत्य सकलं बाह्यं नादे दुग्धाम्बुवन्मनः । एकीभूयाथ सहसा चिदाकाशे विलीयते ॥ उनतालीस ॥ साधक का मन सभी सांसारिक बाह्य-प्रपंचों से विस्मृत होकर दूध में मिश्रित जल की भाँति नाद में एकीभूत हो जाता है। इस प्रकार वह नाद के साथ अकस्मात् ही चिदाकाश में स्वयं को विलय कर लेता है ॥ उनतालीस ॥ उदासीनस्ततो भूत्वा सदाभ्यासेन संयमी । उन्मनीकारकं सद्यो नादमेवावधारयेत् ॥ चालीस ॥ संयमी पुरुष को चाहिए कि नाद - श्रवण से भिन्न विषयों-वासनाओं को उपेक्षित करके सतत अभ्यास द्वारा मन को तत्क्षण ही उस नाद में नियोजित करे और सदैव चिन्तन के द्वारा उसी में रमण करता रहे ॥ चालीस ॥ सर्वचिन्तां समुत्सृज्य सर्वचेष्टाविवर्जितः । नादमेवानुसंदध्यान्नादे चित्तं विलीयते ॥ इकतालीस ॥ योगी साधक को चाहिए कि सतत चिन्तन करते हुए समस्त चिन्ताओं का परित्याग कर सभी तरह की चेष्टाओं से मन को हटाकर नाद का ही अनुसन्धान करे; क्योंकि चित्त का नाद में लय हो जाता है ॥ इकतालीस॥ मकरन्दं पिबन्भृङ्गो गन्धान्नापेक्षते यथा । नादासक्तं सदा चित्तं विषयं न हि काङ्क्षति ॥ बयालीस ॥ जिस प्रकार भ्रमर फूलों का रस ग्रहण करता हुआ पुष्पों के गन्ध की अपेक्षा नहीं रखता है, ठीक वैसे ही सतत नाद में तल्लीन रहने वाला चित्त विषय-वासना आदि की आकांक्षा नहीं करता है ॥ बयालीस ॥ बद्धः सुनादगन्धेन सद्यः संत्यक्तचापलः । नादग्रहणतश्चित्तमन्तरङ्गभुजङ्गमः ॥ तैंतालीस ॥ यह चित्त रूपी अन्तरङ्ग भुजङ्ग नाद को सुनने के पश्चात् उस सुन्दर नाद की गन्ध से आबद्ध हो जाता है और तत्क्षण ही सभी तरह की चपलताओं का परित्याग कर देता है ॥ तैंतालीस ॥ विस्मृत्य विश्वमेकाग्रः कुत्रचिन्न हि धावति । मनोमत्तगजेन्द्रस्य विषयोद्यानचारिणः ॥ चौंतालीस ॥ नियामनसमर्थोऽयं निनादो निशिताङ्कुशः । नादोऽन्तरङ्गसारङ्गबन्धने वागुरायते ॥ पैंतालीस ॥ अन्तरङ्गसमुद्रस्य रोधे वेलायतेऽपि वा । ब्रह्मप्रणवसंलग्ननादो ज्योतिर्मयात्मकः ॥ छियालीस॥ तदनन्तर विश्व को विस्मृत करके तथा एकाग्रता को धारण करके इधर-उधर कहीं भी नहीं दौड़ता है। विषय-वासना रूपी उद्यान में विचरण करने वाले मन रूपी उन्मत्त गजेन्द्र को वश में करने में यह नादरूपी अति तीक्ष्ण अङ्कुश ही समर्थ होता है। यह नाद मनरूपी हिरण को बाँधने में जाल का कार्य करता है और मन रूपी तरङ्ग को रोकने में तट का काम करता है। ब्रह्मरूप प्रणव में संयुक्त हुआ यह नाद स्वयं ही प्रकाश स्वरूप होता है ॥ चौंतालीस-छियालीस ॥ मनस्तत्र लयं याति तद्विष्णोः परमं पदम् । तावदाकाशसंकल्पो यावच्छब्दः प्रवर्तते ॥ सैंतालीस ॥ मन वहाँ ही विलय को प्राप्त हो जाता है। वहीं परम श्रेष्ठ भगवान् विष्णु का परम पद है। मन में आकाश तत्त्व का संकल्प तभी तक रहता है, जब तक कि शब्दों का उच्चारण और श्रवण होता है ॥ सैंतालीस ॥ निःशब्दं तत्परं ब्रह्म परमात्मा समीयते । नादो यावन्मनस्तावन्नादान्तेऽपि मनोन्मनी ।। अड़तालीस ।। निःशब्द होने पर तो वह परमब्रह्म के परमात्म-तत्त्व का अनुभव करने लगता है। नाद के रहने तक ही मन का अस्तित्व बना रहता है। नाद के समापन होने पर मन भी 'अमन' हो जाता है ॥ अड़तालीस ॥ सशब्दश्चाक्षरे क्षीणे निःशब्दं परमं पदम् । सदा नादानुसंधानात्संक्षीणा वासना तु या ॥ उनचास ॥ निरञ्जने विलीयेते मनोवायू न संशयः । नादकोटिसहस्त्राणि बिन्दुकोटिशतानि च ॥ पचास ॥ मन्त्र छप्पन सर्वे तत्र लयं यान्ति ब्रह्मप्रणवनादके । सर्वावस्थाविनिर्मुक्तः सर्वचिन्ताविवर्जितः ॥ इक्यावन ॥ मृतवत्तिष्ठते योगी स मुक्तो नात्र संशयः । शङ्खदुन्दुभिनादं च न शृणोति कदाचन ॥ बावन ॥ सशब्द अर्थात् शब्दयुक्त नाद के अक्षर स्वरूप ब्रह्म में क्षीण हो जाने पर वह निःशब्द परमपद कहलाता है। जब सतत नाद का अनुसन्धान करने पर समस्त विषय-वासनाएँ पूर्णरूपेण नष्ट हो जाती हैं, तदुपरान्त मन एवं प्राण दोनों संशयरहित हो उस निराकार परमब्रह्म में लय हो जाते हैं। करोड़ों-करोड़ नाद एवं बिन्दु उस ब्रह्मरूप प्रणव नाद में विलीन हो जाते हैं। वह योगी जाग्रत् स्वप्न तथा सुषुति आदि सभी अवस्थाओं से मुक्त होकर सभी तरह की चिन्ताओं से रहित हो जाता है। ऐसी स्थिति वह योगी मरे हुए व्यक्ति की भाँति रहता है। निश्चय ही वह योगी मुक्तावस्था प्राप्त कर लेता है और वह शङ्ख-दुन्दुभि आदि नाद का श्रवण कभी भी नहीं करता ॥ उनचास-बावन ॥ काष्ठवज्ज्ञायते देह उन्मन्यावस्थया ध्रुवम् । न जानाति स शीतोष्णं न दुःखं न सुखं तथा ॥ तिरेपन ॥ जिस अवस्था में मन 'अमन' हो जाता है, उस अवस्था के प्राप्त होने पर शरीर लकड़ी की भाँति चेष्टारहित सा हो जाता है । वह न शीत जानता है, न गर्मी जानता है और न ही वह सुख-दुःख का अनुभव करता है ॥ तिरेपन॥ न मानं नावमानं च संत्यक्त्वा तु समाधिना। अवस्थात्रयमन्वेति न चित्तं योगिनः सदा ॥ चौवन॥ वह मान-अपमान से परे हो जाता है। समाधि द्वारा वह इन सभी का पूर्णतया परित्याग कर देता है। योगी का चित्त तीनों अवस्थाओं- जाग्रत् स्वप्र, सुषुति आदि का कभी भी अनुगमन नहीं करता है ॥ चौवन ॥ जाग्रन्निद्राविनिर्मुक्तः स्वरूपावस्थतामियात् ॥ पचपन ॥ दृष्टिः स्थिरा यस्य विनासदृश्यं वायुः स्थिरो यस्य विना प्रयत्नम् । चित्तं स्थिरं यस्य विनावलम्बं स ब्रह्मतारान्तरनादरूप इत्युपनिषत् ॥ छप्पन ॥ योगी जाग्रत् और निद्रा की अवस्था से मुक्त होकर अपने वास्तविक स्वरूप में स्थिर हो जाता है। दृश्य वस्तु के अभाव में भी जिसकी दृष्टि स्थिर हो जाती है, बिना प्रयास के ही जिसका प्राण अपने स्थान पर सुस्थिर हो जाता है तथा बिना किसी आश्रय अथवा अवलम्बन के ही जिसका चित्त स्थिरता को प्राप्त हो जाता है, ऐसा वह ब्रह्ममय प्रणव नाद के अन्तर्वर्ती तुरीयावस्था में सदैव स्थित हो जाता है। यही उपनिषद् है ॥ पचपन-छप्पन ॥ ॐ वाड्मे मनसि...इति शान्तिः ॥ ॥ इति नादबिन्दूपनिषत्समाप्ता ॥ ॥ निरालम्बोपनिषद् ॥ शुक्ल यजुर्वेद से सम्बद्ध इस उपनिषद् में ब्रह्म, ईश्वर, जीव, प्रकृति, जगत्, ज्ञान, कर्म आदि का सुन्दर विवेचन किया गया है। निर्विकार ब्रह्म जब प्रकृति के साथ सृष्टि का सृजन करके उसका ईशन-शासन-संचालन करता है, तो ईश्वर कहलाता है। इसी प्रकार विभिन्न संबोधनों को परिभाषित किया गया है। ऋषि जाति-पाँति सम्बन्धी भ्रमों का निवारण करते हुए कहते हैं कि वह आत्मा, रक्त, चमड़ा, मांस, हड्डियों आदि से सम्बन्धित नहीं है, वह तो व्यवहार के क्रम में कल्पित व्यवस्था मात्र है। इसी प्रकार अहंता, ममता आदि को त्याग कर इष्ट में समर्पित हो जाने को 'संन्यास' कहते हुए उन्हीं को मुक्त, पूज्य, योगी, परमहंस आदि उपाधियों से विभूषित होने को बात समझायी गयी है। ऐसी स्थिति प्राप्त करके ही साधक जन्म-मरण के बन्धनों को काट सकता है। ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं इति शान्तिः ॥ ॐ नमः शिवाय गुरवे सच्चिदानन्दमूर्तये । निष्प्रपञ्चाय शान्ताय निरालम्बाय तेजसे । निरालम्बं समाश्रित्य सालम्बं विजहाति यः । स संन्यासी च योगी च कैवल्यं पदमश्रुते ॥ एक ॥ उस कल्याणकारी गुरु, सत्-चित् और आनन्द की मूर्ति को नमस्कार है। उस निष्प्रपञ्च, शान्त, आलम्ब रहित, तेजः स्वरूप परमात्मा को नमन है । जो निरालम्ब का आश्रय ग्रहण करके आलम्बन का परित्याग कर देता है, वह योगी और संन्यासी है, वही कैवल्य पद प्राप्त करता है ॥ एक ॥ एषामज्ञानजन्तूनां समस्तारिष्टशान्तये । यद्यद्बोद्धव्यमखिलं तदाशङ्क्य ब्रवीम्यहम् ॥ दो॥ इस संसार के अज्ञानी जीवों के सभी अरिष्टों की शान्ति के निमित्त जो-जो ज्ञान आवश्यक मैं यहाँ कहता हूँ ॥ दो ॥ किं ब्रह्म । क ईश्वरः । को जीवः । का प्रकृतिः । कः परमात्मा । को ब्रह्मा । को विष्णुः । को रुद्रः। क इन्द्रः। कः शमनः । कः सूर्यः । कश्चन्द्रः । के सुराः । के असुराः । के पिशाचाः । के मनुष्याः । काः स्त्रियः । के पश्चादयः । किं स्थावरम् । के ब्राह्मणादयः । का जातिः । किं कर्म । किमकर्म । किं ज्ञानम् । किमज्ञानम् । किं सुखम् । किं दुःखम् । कः स्वर्गः । को नरकः । को बन्धः । को मोक्षः । क उपास्यः । कः शिष्यः । को विद्वान् । को मूढः । किमासुरम् । किं तपः । किं परमं पदम्। किं ग्राह्यम् । किमग्राह्यम् । कः संन्यासीत्याशङ्कयाह ब्रह्मेति ॥ तीन ॥ ब्रह्म क्या है ? ईश्वर कौन है ? जीव कौन है ? प्रकृति क्या है ? परमात्मा कौन है ? ब्रह्मा कौन है ? विष्णु कौन है ? रुद्र कौन है ? इन्द्र कौन है ? यम कौन है ? सूर्य कौन है ? चन्द्र कौन है ? देवता कौन हैं ? असुर कौन हैं? पिशाच कौन हैं ? मनुष्य क्या हैं ? स्त्रियाँ क्या हैं? पशु आदि क्या हैं ? स्थावर क्या है ? ब्राह्मण आदि क्या हैं ? जाति क्या है ? कर्म क्या है ? अकर्म क्या है ? ज्ञान और अज्ञान क्या हैं? सुख-दुःख क्या हैं ? स्वर्ग-नरक क्या हैं? बंधन और मुक्ति क्या हैं ? उपासना करने योग्य कौन है ? शिष्य कौन है ? विद्वान् कौन है ? मूर्ख कौन है ? असुरत्व क्या है ? तप क्या है ? परमपद किसे कहते हैं ? ग्रहणीय और अग्रहणीय क्या हैं? संन्यासी कौन है ? इस प्रकार शंका व्यक्त करके उन्होंने ब्रह्म आदि का स्वरूप विवेचित किया ॥ तीन ॥ मन्त्र दस स होवाच महदहंकारपृथिव्यप्तेजोवाय्वाकाशत्वेन कर्मज्ञानार्थरूपतया भासमानमद्वितीयमखिलोपाधिविनिर्मुक्तं पबृंहितमनाद्यनन्तं शुद्धं शिवं शान्तं निर्गुणमित्यादिवाच्यमनिर्वाच्यं चैतन्यं ब्रह्म । ईश्वर इति च । ब्रह्मैव स्वशक्तिं प्रकृत्यभिधेयामाश्रित्य लोकान्सृष्ट्वा प्रविश्यान्तर्यामित्वेन ब्रह्मादीनां बुद्धीन्द्रियनियन्तृत्वादीश्वरः ॥ चार ॥ उन्होंने कहा कि महत् तत्त्व, अहं, पृथिवी, आप, तेजस्, वायु और आकाश रूप बृहद् ब्रह्माण्ड कोश वाला, कर्म और ज्ञान के अर्थ से प्रतिभासित होने वाला, अद्वितीय, सम्पूर्ण उपाधियों से रहित, सर्व शक्तिसम्पन्न, आद्यन्तहीन, शुद्ध, शिव, शान्त, निर्गुण और अनिर्वचनीय चैतन्य स्वरूप परब्रह्म कहलाता है। अब ईश्वर के स्वरूप का कथन करते हैं । यही ब्रह्म जब अपनी प्रकृति के सहारे लोकों का सृजन करता है और अन्तर्यामी स्वरूप से प्रविष्ट होकर ब्रह्मा, विष्णु और महेश तथा बुद्धि और इन्द्रियों को नियन्त्रित करता है, तब उसे ईश्वर कहते हैं ॥ चार ॥ जीव इति च ब्रह्मविष्ण्वीशानेन्द्रादीनां नामरूपद्वारा स्थूलो ऽहमिति मिथ्याध्यासवशाज्जीवः । सोऽहमेकोऽपि देहारम्भकभेदवशाद्बहुजीवः ॥पाँच॥ जब इस चैतन्य स्वरूप ईश्वर को ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र तथा इन्द्रादि नामों और रूपों के द्वारा देह का मिथ्याभिमान हो जाता है कि मैं स्थूल हूँ, तब उसे जीव कहते हैं । यह चैतन्य ' सोऽहं ' स्वरूप में एक होने पर भी शरीरों की भिन्नता के कारण 'जीव' अनेकविध बन जाता है ॥ पाँच ॥ ब्रह्मशप्रकृतिरिति च ब्रह्मणः सकाशान्नानाविचित्रजगन्निर्माणसामर्थ्यबुद्धिरूपा क्तिरेव प्रकृतिः ॥ छः ॥ प्रकृति उसे कहते हैं, जो ब्रह्म के सान्निध्य से चित्र विचित्र संसार को रचने की शक्ति वाली तथा ब्रह्म की बुद्धिरूपा शक्ति वाली है ॥ छः ॥ परमात्मेति च देहादेः परतरत्वाद् ब्रह्मैव परमात्मा ॥ सात ॥ देहादि से परे रहने के कारण ब्रह्म को ही परमात्मा कहते हैं ॥ सात ॥ स ब्रह्मा स विष्णुः स इन्द्रः स शमनः स सूर्यः स चन्द्रस्ते सुरास्ते असुरास्ते पिशाचास्ते मनुष्यास्ताः स्त्रियस्ते पश्वादयस्तत्स्थावरं ते ब्राह्मणादयः ॥ आठ ॥ यही परमात्मा ब्रह्मा, विष्णु, इन्द्र, यम, सूर्य और चन्द्र आदि देवता के रूप में; यही असुर, पिशाच, नर-नारी और पशु आदि के रूप में प्रकट होता है; यही जड़-पदार्थ और ब्राह्मण आदि भी है ॥ आठ ॥ सर्वं खल्विदं ब्रह्म नेह नानास्ति किंचन ॥ नौ ॥ यह समस्त विश्व ही ब्रह्म है, इसके अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है ॥ नौ ॥ जातिरिति च । न चर्मणो न रक्तस्य न मांसस्य न चास्थिनः । न जातिरात्मनो जातिर्व्यवहारप्रकल्पिता ॥ दस ॥ जाति चर्म, रक्त, मांस, अस्थियों और आत्मा की नहीं होती। उसकी प्रकल्पना तो केवल व्यवहार के निमित्त की गई है ॥ दस ॥ [ ऋषि यहाँ स्पष्टता से कहते हैं कि जाति शरीर भेद से नहीं, व्यवहार भेद से निर्धारित की गयी है। ] कर्मेति च क्रियमाणेन्द्रियैः कर्माण्यहं करोमीत्यध्यात्मनिष्ठतया कृतं कर्मैव कर्म । अकर्मेति च कर्तृत्वभोक्तृत्वाद्यहंकारतया बन्धरूपं जन्मादिकारणं नित्यनैमित्तिकयागव्रततपोदानादिषु फलाभिसंधानं यत्तदकर्म ॥ ग्यारह-बारह॥ इन्द्रियों द्वारा की जाने वाली क्रियाओं को कर्म कहते हैं। जिस क्रिया को 'मैं करता हूँ' इस भावपूर्वक किया जाता है, वही कर्म है। कर्त्तापन और भोक्तापन के अहंकार के द्वारा फल की इच्छा से किये गये बन्धन स्वरूप नित्य-नैमित्तिक यज्ञ, व्रत, तप, दान आदि कर्म' अकर्म' कहलाते हैं ॥ ग्यारह-बारह॥ ज्ञानमिति देहेन्द्रियनिग्रहसद्गुरूपासनश्रवणमनननिदिध्यासनैर्यद्यद्दृग्दृश्यस्वरूपं सर्वान्तरस्थं सर्वसमं घटपटादिपदार्थमिवाविकारं विकारेषु चैतन्यं विना किंचिन्नास्तीति साक्षात्कारानुभवो ज्ञानम् ॥ तेरह ॥ सृष्टि की सभी बदलने वाली वस्तुओं में एक ही अपरिवर्तनशील चैतन्य तत्त्व विद्यमान है, अन्य कुछ भी नहीं है, द्रष्टा और दृश्य जो कुछ भी है, सब कुछ चैतन्य तत्त्व ही है। सबके अन्दर यह चैतन्य तत्त्व ही विद्यमान रहने पर भी ऐसा प्रतीत होता है, मानो वह घट - वस्त्रादि रूप में ही परिवर्तित हो गया है। इसी साक्षात्कार की अनुभूति को ज्ञान कहते हैं। यह अनुभूति शरीर और इन्द्रिय आदि पर नियंत्रण रखने से और सद्गुरु की उपासना, उनके उपदेशों के श्रवण, चिन्तन, मनन और निदिध्यासन करने से होती है ॥ तेरह ॥ अज्ञानमिति च रज्जौ सर्पभ्रान्तिरिवाद्वितीये सर्वानुस्यूते सर्वमये ब्रह्मणि देवतिर्यङ्नरस्थावरस्त्रीपुरुषवर्णाश्रमबन्धमोक्षोपाधिनानात्मभेदकल्पितं ज्ञानमज्ञानम् ॥ चौदह ॥ जिस प्रकार रस्सी में सर्प की भ्रान्ति होती है, उसी प्रकार सब में विद्यमान ब्रह्म और देव, पशु-पक्षी, मनुष्य, स्थावर, स्त्री-पुरुष, वर्ण-आश्रम, बन्धन मुक्ति आदि सभी अनात्म वस्तुओं में भेद मानना ही 'अज्ञान' है ॥ चौदह ॥ सुखमिति च सच्चिदानन्दस्वरूपं ज्ञात्वानन्दरूपा या स्थितिः सैव सुखम् ॥ पंद्रह ॥ सत्-चित्-आनन्द स्वरूप परमात्मा के ज्ञान से जो आनन्दपूर्ण स्थिति बनती है, वही सुख है ॥ पंद्रह ॥ दुःखमिति अनात्मरूपो विषयसंकल्प एव दुःखम् ॥ सोलह ॥ अनात्म रूप विषयों का सङ्कल्प करना दुःख कहलाता है ॥ सोलह ॥ स्वर्ग इति च सत्संसर्गः स्वर्गः । नरक इति च असत्संसारविषयजनसंसर्ग एव नरकः ॥ सत्रह ॥ सत् का समागम ही स्वर्ग है। असत् संसार ! के विषयों का संसर्ग ही नरक है ॥ सत्रह ॥ बन्ध इति च अनाद्यविद्यावासनया जातोऽहमित्यादिसंकल्पो बन्धः ॥ अट्ठारह ॥ अनादि अविद्या की वासना द्वारा उत्पन्न इस प्रकार का विचार कि 'मैं हूँ, ' यही बन्धन है । पितृमातृसहोदरदारापत्यगृहारामक्षेत्रममतासंसारावरणसङ्कल्पो बन्धः ॥ उन्नीस ॥ माता-पिता, भ्राता, पुत्र, गृह, उद्यान तथा खेत आदि मेरे अपने हैं, यह सांसारिक विचार भी बन्धन ही हैं। कर्तृत्वाद्यहंकारसंकल्पो बन्धः ॥ बीस ॥ कर्त्तापन के अहंकार का संकल्प भी बन्धनरूप है ॥ बीस ॥ अणिमाद्यष्टैश्वर्याशासिद्धसंकल्पो बन्धः ॥ इक्कीस ॥
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रिपोर्टर, मुंबई : उपनगरीय रेलवे पर मोबाइल चोरी की बढ़ती घटनाओं को अंजाम देने वाले दो आरोपियों को मध्य रेलवे जीआरपी ने गिरफ्तार किया है। लोकल स्टेशनों पर मोबाइल चोरी की बढ़ती हुई घटनाओं को देखते हुए जीआरपी आयुक्त निकेत कौशिक ने ऐसी घटनाओं पर लगाम कसने के आदेश दिए हैं। 12 दिसंबर को देर रात लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर गश्त लगाते वक्त जीआरपी ने दो मोबाइल चोरों को पकड़ा। रेलवे को काफी वक्त से इन दोनों की तलाश थी। आरोपी रघु कुमार महतो (22) और सुभान शेख (19) के पास से पुलिस ने 32 मोबाइल बरामद किए। इनकी कीमत बाजार में लगभग 4 लाख 50 हजार रुपये है।
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रिपोर्टर, मुंबई : उपनगरीय रेलवे पर मोबाइल चोरी की बढ़ती घटनाओं को अंजाम देने वाले दो आरोपियों को मध्य रेलवे जीआरपी ने गिरफ्तार किया है। लोकल स्टेशनों पर मोबाइल चोरी की बढ़ती हुई घटनाओं को देखते हुए जीआरपी आयुक्त निकेत कौशिक ने ऐसी घटनाओं पर लगाम कसने के आदेश दिए हैं। बारह दिसंबर को देर रात लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर गश्त लगाते वक्त जीआरपी ने दो मोबाइल चोरों को पकड़ा। रेलवे को काफी वक्त से इन दोनों की तलाश थी। आरोपी रघु कुमार महतो और सुभान शेख के पास से पुलिस ने बत्तीस मोबाइल बरामद किए। इनकी कीमत बाजार में लगभग चार लाख पचास हजार रुपये है।
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VARANASI: दिल्ली में विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। हर पॉलिटिकल पार्टी ने दिल्ली की गद्दी को पाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है लेकिन अगर हम ये कहें कि दिल्ली के इस चुनाव ने बनारस के कारोबार को बिगाड़ दिया है तो? जी हां, दरअसल दिल्ली में होने वाले इलेक्शन के चलते वहां आचार संहिता का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। इस वजह से दिल्ली के कारोबारियों को न चाहते हुए भी तमाम बंदिशों के बीच अपना व्यापार करना पड़ रहा है। इसका इफेक्ट दिल्ली से बनारस आने वाले सामानों की सप्लाई पर भी पड़ रहा है। खासतौर पर मोबाइल फोन्स, मोबाइल एसेसरीज समेत कई अन्य इलेक्ट्रानिक गुड्स पर। जिसके कारण यहां के कारोबारी परेशान हैं।
दिल्ली के विधानसभा के चुनाव का असर बनारस के कारोबार पर भी पड़ा है। खासतौर पर दालमंडी और हड़हा के होलसेल मार्केट पर। दालमंडी में मोबाइल एसेसरीज व मोबाइल फोन्स का कारोबार करने वाले हैदर बताते हैं कि पिछले महीने तक तो सब ठीक ठाक चल रहा था लेकिन जनवरी खत्म होते ही मुश्किलें बढ़ गई हैं। इसकी वजह है दिल्ली से माल का न आना। पिछले महीने वहां जाकर माल का ऑर्डर दिया था लेकिन अब तक नहीं आया। बार बार कॉल कर रहा हूं लेकिन वहां के कारोबारी एक ही जवाब दे रहे हैं कि चुनाव के कारण माल की डिलीवरी में लेट होगा। वहीं इलेक्ट्रानिक गुड्स का बिजनेस करने वाले दीपक साहनी का कहना है कि उन्होंने एलईडी लाइट्स समेत कई और चीजों का ऑर्डर दे रखा है लेकिन चुनाव के कारण डीलर माल भेज नहीं रहे हैं। इस वजह से उनका कारोबार ठप पड़ा है।
दिल्ली में चुनाव के कारण बहुत परेशानी हो रही है। बहुत से सामान नहीं आ पा रहे हैं। इसके कारण कस्टमर्स को लौटाना पड़ रहा है।
दिल्ली के इलेक्शन ने हमारे कारोबार को बैठा दिया है क्योंकि मोबाइल का कारोबार दिल्ली से ही होता है। इस समय वहां से माल आने में परेशानी हो रही है।
चुनाव की डेट नजदीक देख वहां के कारोबारी माल भेजने में हिचक रहे हैं। इसलिए परेशानी और बढ़ने की संभावना है।
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VARANASI: दिल्ली में विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां जोर शोर से चल रही हैं। हर पॉलिटिकल पार्टी ने दिल्ली की गद्दी को पाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है लेकिन अगर हम ये कहें कि दिल्ली के इस चुनाव ने बनारस के कारोबार को बिगाड़ दिया है तो? जी हां, दरअसल दिल्ली में होने वाले इलेक्शन के चलते वहां आचार संहिता का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। इस वजह से दिल्ली के कारोबारियों को न चाहते हुए भी तमाम बंदिशों के बीच अपना व्यापार करना पड़ रहा है। इसका इफेक्ट दिल्ली से बनारस आने वाले सामानों की सप्लाई पर भी पड़ रहा है। खासतौर पर मोबाइल फोन्स, मोबाइल एसेसरीज समेत कई अन्य इलेक्ट्रानिक गुड्स पर। जिसके कारण यहां के कारोबारी परेशान हैं। दिल्ली के विधानसभा के चुनाव का असर बनारस के कारोबार पर भी पड़ा है। खासतौर पर दालमंडी और हड़हा के होलसेल मार्केट पर। दालमंडी में मोबाइल एसेसरीज व मोबाइल फोन्स का कारोबार करने वाले हैदर बताते हैं कि पिछले महीने तक तो सब ठीक ठाक चल रहा था लेकिन जनवरी खत्म होते ही मुश्किलें बढ़ गई हैं। इसकी वजह है दिल्ली से माल का न आना। पिछले महीने वहां जाकर माल का ऑर्डर दिया था लेकिन अब तक नहीं आया। बार बार कॉल कर रहा हूं लेकिन वहां के कारोबारी एक ही जवाब दे रहे हैं कि चुनाव के कारण माल की डिलीवरी में लेट होगा। वहीं इलेक्ट्रानिक गुड्स का बिजनेस करने वाले दीपक साहनी का कहना है कि उन्होंने एलईडी लाइट्स समेत कई और चीजों का ऑर्डर दे रखा है लेकिन चुनाव के कारण डीलर माल भेज नहीं रहे हैं। इस वजह से उनका कारोबार ठप पड़ा है। दिल्ली में चुनाव के कारण बहुत परेशानी हो रही है। बहुत से सामान नहीं आ पा रहे हैं। इसके कारण कस्टमर्स को लौटाना पड़ रहा है। दिल्ली के इलेक्शन ने हमारे कारोबार को बैठा दिया है क्योंकि मोबाइल का कारोबार दिल्ली से ही होता है। इस समय वहां से माल आने में परेशानी हो रही है। चुनाव की डेट नजदीक देख वहां के कारोबारी माल भेजने में हिचक रहे हैं। इसलिए परेशानी और बढ़ने की संभावना है।
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Shree Jagannath Rath Yatra 2023. पिछले 15 दिनों से अस्वस्थ चल रहे महाप्रभु जगन्नाथ सोमवार को पूरी तरह स्वस्थ हो गए हैं. आज वे अपने श्रीमंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों के बीच जाएंगे. जिसके साथ ही रथयात्रा महोत्सव (Jagannath Rath Yatra 2023) की शुरुआत होगी.
- 1 जुलाई को नीलाद्री बीजे की परंपरा निभाई जाएगी.
रथयात्रा के दिन भगवान की मंगल आरती के बाद उन्हें यात्रा के लिए तैयार किया जाता है. इसके बाद बड़ी संख्या में भक्त अपने भगवान को पहंडी (नचाते हुए) कराते हुए रथ तक ले जाते हैं. रथ में बैठाने के बाद जगतगुरु शंकराचार्य तीनों रथों में विराजमान श्री विग्रहों की पूजा करते हैं. इसके बाद गजपति महाराज (राजा) का आगमन होता है. महाप्रभु की पूजा के बाद राजा तीनों रथों पर सोने के हत्थे वाली झाड़ू लगाते हैं. इस रस्म को 'छेरा पहरा' कहा जाता है. इसके पीछे ये संदेश होता है कि भगवान के आगे कोई छोटा, कोई बड़ा नहीं होता, सब समान होते हैं. इस रस्म के बाद रथ आगे बढ़ता है. इस बीच भगवान भक्तों से मिलते हुए मौसी के घर पहुंचते हैं.
हेरा पंचमी, रथयात्रा के दौरान निभाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण रस्म है. रथयात्रा के पांचवें दिन, यानी आषाढ़ शुक्ल पंचमी को माता महालक्ष्मी द्वारा किया जाता है. हेरा पंचमी मुख्य रूप से गुण्डिचा मंदिर में मनाई जाती है. इस दिन मुख्य मंदिर (जगन्नाथ धाम) से भगवान जगन्नाथ की पत्नी माता लक्ष्मी, सुवर्ण महालक्ष्मी के रूप में गुंडिचा मंदिर में आती हैं. उन्हें मंदिर से गुण्डिचा मंदिर तक पालकी में ले जाया जाता है. जहां पुजारी उन्हें गर्भगृह में ले जाते हैं और भगवान जगन्नाथ से मिलाते हैं. सुवर्ण महालक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से पुरी के मुख्य मंदिर अपने धाम श्रीमंदिर में वापस चलने का आग्रह करती हैं.
भगवान जगन्नाथ उनके अनुरोध को स्वीकार करते हैं और माता लक्ष्मी को उनकी सहमति के रूप में एक माला (सनमाति माला) देते हैं. फिर शाम को माता लक्ष्मी गुंडिचा मंदिर से जगन्नाथ मंदिर लौटती हैं. लेकिन मुख्य मंदिर प्रस्थान से पहले, वह क्रोधित हो जाती है और अपने एक सेवक को नंदीघोष (जगन्नाथ जी का रथ) के एक हिस्से को नुकसान पहुंचाने का आदेश देती है. जिसे रथ भंग कहा जाता है.
माता महालक्ष्मी गुंडिचा मंदिर के बाहर एक पेड़ के पीछे से इन सभी कार्यों के लिए निर्देश देती हैं. कुछ समय बाद माता हेरा गौरी साही नामक गोपनीयता मार्ग के माध्यम से शाम को जगन्नाथ मंदिर पहुंच जाती हैं.
देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान जगन्नाथ चार महीने के लिए अपनी निद्रा में चले जाते हैं. इससे पहले, भगवान जगन्नाथ को अपने मुख्य मंदिर में लौटना आवश्यक होता है. अतः रथयात्रा के 7 दिन बाद, दशमी तिथि पर अपने मुख्य मंदिर लौटते हैं. जिसे बहुड़ा यात्रा के नाम से जाना जाता है.
भगवान का रथ जब श्रीमंदिर पहुंचता है तब उन्हें तुरंत मंदिर नहीं ले जाया जाता. इससे पहले कुछ और रस्में होती हैं. इसे राजाधिराज बेशा, राजा बेशा और राजराजेश्वर बेशा के नाम से जाना जाता है. इसमें जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को सोने के गहनों से सजाया जाता है. सुनाभेषा की रस्म साल में 5 बार निभाई जाती है. यह आमतौर पर माघ पूर्णिमा, बहुड़ा एकादशी, दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा और पौस पूर्णिमा को मनाया जाता है.
जानकारी के मुताबिक देवताओं को पहनाए जाने वाले सोने के गहनों का कुल वजन 208 किलोग्राम से ज्यादा था. जो शुरू में 138 डिजाइनों में बनाया गया था. हालांकि, अब केवल 20-30 डिजाइन का उपयोग ही किया जाता है.
सुना भेषा के एक दिन बाद, जब भाई-बहन सुनहरे पोशाक में चमकते हैं, तो मीठे पेय से भरे विशाल बर्तन तीन रथों पर प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाते हैं. आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वादशी के दिन अधर पना की रस्म होती है. मिट्टी के बर्तन की उंचाई भगवान के होंठों (अधर) तक आती है. इस पेय को बाद में गिरा दिया जाता है. मान्यता है कि भगवान के साथ प्रेत भी उनकी यात्रा में शामिल रहते हैं. तो यह पेय उनके लिए ही रहता है.
नीलाद्री बीजे वार्षिक रथ यात्रा उत्सव के अंत और भगवान जगन्नाथ की गर्भगृह में वापसी का प्रतीक है. ये भी एक अद्भुत रस्म है. नीलाद्री बिजे समारोह के दिन, भगवान अपने भाई और बहन के साथ श्री मंदिर लौटते हैं. नीलाद्री बीजे के दिन भगवान जगन्नाथ देवी लक्ष्मी को उपहार के रूप में रसगुल्ला भेंट करते हैं.
दरअसल जब भगवान रथयात्रा में जाते हैं तो मां लक्ष्मी उन्हें साथ नहीं ले जाने पर रूठ जाती हैं. जब जगन्नाथ वापस लौटते हैं तब मां लक्ष्मी अपने जेठ बलभद्र और देवी सुभद्रा को तो अंदर आने दे देती हैं, लेकिन महाप्रभु जगन्नाथ को आता देख वे गर्भगृह के कपाट बंद कर लेती हैं. जिन्हें मनाने के लिए भगवान जगन्नाथ उन्हें रसगुल्ले और साड़ी भेंट करते हैं. पवित्र त्रिमूर्ति का विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा उत्सव नीलाद्रि बीजे अनुष्ठान के साथ संपन्न होता है.
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Shree Jagannath Rath Yatra दो हज़ार तेईस. पिछले पंद्रह दिनों से अस्वस्थ चल रहे महाप्रभु जगन्नाथ सोमवार को पूरी तरह स्वस्थ हो गए हैं. आज वे अपने श्रीमंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों के बीच जाएंगे. जिसके साथ ही रथयात्रा महोत्सव की शुरुआत होगी. - एक जुलाई को नीलाद्री बीजे की परंपरा निभाई जाएगी. रथयात्रा के दिन भगवान की मंगल आरती के बाद उन्हें यात्रा के लिए तैयार किया जाता है. इसके बाद बड़ी संख्या में भक्त अपने भगवान को पहंडी कराते हुए रथ तक ले जाते हैं. रथ में बैठाने के बाद जगतगुरु शंकराचार्य तीनों रथों में विराजमान श्री विग्रहों की पूजा करते हैं. इसके बाद गजपति महाराज का आगमन होता है. महाप्रभु की पूजा के बाद राजा तीनों रथों पर सोने के हत्थे वाली झाड़ू लगाते हैं. इस रस्म को 'छेरा पहरा' कहा जाता है. इसके पीछे ये संदेश होता है कि भगवान के आगे कोई छोटा, कोई बड़ा नहीं होता, सब समान होते हैं. इस रस्म के बाद रथ आगे बढ़ता है. इस बीच भगवान भक्तों से मिलते हुए मौसी के घर पहुंचते हैं. हेरा पंचमी, रथयात्रा के दौरान निभाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण रस्म है. रथयात्रा के पांचवें दिन, यानी आषाढ़ शुक्ल पंचमी को माता महालक्ष्मी द्वारा किया जाता है. हेरा पंचमी मुख्य रूप से गुण्डिचा मंदिर में मनाई जाती है. इस दिन मुख्य मंदिर से भगवान जगन्नाथ की पत्नी माता लक्ष्मी, सुवर्ण महालक्ष्मी के रूप में गुंडिचा मंदिर में आती हैं. उन्हें मंदिर से गुण्डिचा मंदिर तक पालकी में ले जाया जाता है. जहां पुजारी उन्हें गर्भगृह में ले जाते हैं और भगवान जगन्नाथ से मिलाते हैं. सुवर्ण महालक्ष्मी भगवान जगन्नाथ से पुरी के मुख्य मंदिर अपने धाम श्रीमंदिर में वापस चलने का आग्रह करती हैं. भगवान जगन्नाथ उनके अनुरोध को स्वीकार करते हैं और माता लक्ष्मी को उनकी सहमति के रूप में एक माला देते हैं. फिर शाम को माता लक्ष्मी गुंडिचा मंदिर से जगन्नाथ मंदिर लौटती हैं. लेकिन मुख्य मंदिर प्रस्थान से पहले, वह क्रोधित हो जाती है और अपने एक सेवक को नंदीघोष के एक हिस्से को नुकसान पहुंचाने का आदेश देती है. जिसे रथ भंग कहा जाता है. माता महालक्ष्मी गुंडिचा मंदिर के बाहर एक पेड़ के पीछे से इन सभी कार्यों के लिए निर्देश देती हैं. कुछ समय बाद माता हेरा गौरी साही नामक गोपनीयता मार्ग के माध्यम से शाम को जगन्नाथ मंदिर पहुंच जाती हैं. देवशयनी एकादशी के दिन से भगवान जगन्नाथ चार महीने के लिए अपनी निद्रा में चले जाते हैं. इससे पहले, भगवान जगन्नाथ को अपने मुख्य मंदिर में लौटना आवश्यक होता है. अतः रथयात्रा के सात दिन बाद, दशमी तिथि पर अपने मुख्य मंदिर लौटते हैं. जिसे बहुड़ा यात्रा के नाम से जाना जाता है. भगवान का रथ जब श्रीमंदिर पहुंचता है तब उन्हें तुरंत मंदिर नहीं ले जाया जाता. इससे पहले कुछ और रस्में होती हैं. इसे राजाधिराज बेशा, राजा बेशा और राजराजेश्वर बेशा के नाम से जाना जाता है. इसमें जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को सोने के गहनों से सजाया जाता है. सुनाभेषा की रस्म साल में पाँच बार निभाई जाती है. यह आमतौर पर माघ पूर्णिमा, बहुड़ा एकादशी, दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा और पौस पूर्णिमा को मनाया जाता है. जानकारी के मुताबिक देवताओं को पहनाए जाने वाले सोने के गहनों का कुल वजन दो सौ आठ किलोग्रामग्राम से ज्यादा था. जो शुरू में एक सौ अड़तीस डिजाइनों में बनाया गया था. हालांकि, अब केवल बीस-तीस डिजाइन का उपयोग ही किया जाता है. सुना भेषा के एक दिन बाद, जब भाई-बहन सुनहरे पोशाक में चमकते हैं, तो मीठे पेय से भरे विशाल बर्तन तीन रथों पर प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाते हैं. आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वादशी के दिन अधर पना की रस्म होती है. मिट्टी के बर्तन की उंचाई भगवान के होंठों तक आती है. इस पेय को बाद में गिरा दिया जाता है. मान्यता है कि भगवान के साथ प्रेत भी उनकी यात्रा में शामिल रहते हैं. तो यह पेय उनके लिए ही रहता है. नीलाद्री बीजे वार्षिक रथ यात्रा उत्सव के अंत और भगवान जगन्नाथ की गर्भगृह में वापसी का प्रतीक है. ये भी एक अद्भुत रस्म है. नीलाद्री बिजे समारोह के दिन, भगवान अपने भाई और बहन के साथ श्री मंदिर लौटते हैं. नीलाद्री बीजे के दिन भगवान जगन्नाथ देवी लक्ष्मी को उपहार के रूप में रसगुल्ला भेंट करते हैं. दरअसल जब भगवान रथयात्रा में जाते हैं तो मां लक्ष्मी उन्हें साथ नहीं ले जाने पर रूठ जाती हैं. जब जगन्नाथ वापस लौटते हैं तब मां लक्ष्मी अपने जेठ बलभद्र और देवी सुभद्रा को तो अंदर आने दे देती हैं, लेकिन महाप्रभु जगन्नाथ को आता देख वे गर्भगृह के कपाट बंद कर लेती हैं. जिन्हें मनाने के लिए भगवान जगन्नाथ उन्हें रसगुल्ले और साड़ी भेंट करते हैं. पवित्र त्रिमूर्ति का विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा उत्सव नीलाद्रि बीजे अनुष्ठान के साथ संपन्न होता है.
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बैंकों के फंसे हुए कर्ज (एनपीए) के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने बताया कि फिलहाल देश के 12 सरकारी बैंकों पर 4,58,512 करोड़ के एनपीए का भार है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने मार्च 2017-2022 तक बट्टे खाते में डाले 7. 34 लाख करोड़ की ऋण राशि में से 14 फीसदी की वसूली कर ली है। मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि 1. 03 लाख करोड़ की वसूली के बाद, फिलहाल सरकारी बैंकों के बट्टे खाते में 6. 31 लाख करोड़ रुपये हैं, जिनकी वसूली के प्रयास जारी हैं।
बैंकों के फंसे हुए कर्ज (एनपीए) के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने बताया कि फिलहाल देश के 12 सरकारी बैंकों पर 4,58,512 करोड़ के एनपीए का भार है। रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों और बैंक बोर्ड की तरफ से अनुमोदित नीति के मुताबिक चार वर्ष से जो एनपीए बना हुआ है, उन्हें बैंकों की बैलेंस शीट से हटाकर बट्टे खाते में डाल दिया गया है।
प्रतिस्पर्धा आयोग अमेजॉन, फ्लिपकार्ट, जोमैटो, स्विगी, बुकमाईशो, एपल, व्हाट्सएप, फेसबुक (मेटा) और गूगल के खिलाफ प्रतिस्पर्धा रोधी गतिविधियों को लेकर तीन अलग-अलग मामलों में पूछताछ कर रहा है। एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि मामलों को लेकर आदेश 31 जनवरी, 2018 से 20 अक्तूबर, 2022 के बीच जारी किए गए थे। मेकमाईट्रिप-गो और ओयो से जुड़े मामले में 19 अक्तूबर, 2022 को पूछताछ का आदेश जारी किया गया था।
31 दिसंबर, 2022 की स्थिति के मुताबिक सबसे ज्यादा 98,347 करोड़ एनपीए एसबीआई पर है। इसके बाद पीएनबी पर 83,584 करोड़, यूनियन बैंक पर 63,770 करोड़, केनरा बैंक पर 50,143 करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा पर 41,858 करोड़ एनपीए है। वहीं, 38,885 करोड़ के एनपीए के साथ बैंक ऑफ इंडिया छठे आैर 29,484 करोड़ के साथ सातवें पर इंडियन बैंक है।
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बैंकों के फंसे हुए कर्ज के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने बताया कि फिलहाल देश के बारह सरकारी बैंकों पर चार,अट्ठावन,पाँच सौ बारह करोड़ के एनपीए का भार है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने मार्च दो हज़ार सत्रह-दो हज़ार बाईस तक बट्टे खाते में डाले सात. चौंतीस लाख करोड़ की ऋण राशि में से चौदह फीसदी की वसूली कर ली है। मंगलवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि एक. तीन लाख करोड़ की वसूली के बाद, फिलहाल सरकारी बैंकों के बट्टे खाते में छः. इकतीस लाख करोड़ रुपये हैं, जिनकी वसूली के प्रयास जारी हैं। बैंकों के फंसे हुए कर्ज के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने बताया कि फिलहाल देश के बारह सरकारी बैंकों पर चार,अट्ठावन,पाँच सौ बारह करोड़ के एनपीए का भार है। रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों और बैंक बोर्ड की तरफ से अनुमोदित नीति के मुताबिक चार वर्ष से जो एनपीए बना हुआ है, उन्हें बैंकों की बैलेंस शीट से हटाकर बट्टे खाते में डाल दिया गया है। प्रतिस्पर्धा आयोग अमेजॉन, फ्लिपकार्ट, जोमैटो, स्विगी, बुकमाईशो, एपल, व्हाट्सएप, फेसबुक और गूगल के खिलाफ प्रतिस्पर्धा रोधी गतिविधियों को लेकर तीन अलग-अलग मामलों में पूछताछ कर रहा है। एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि मामलों को लेकर आदेश इकतीस जनवरी, दो हज़ार अट्ठारह से बीस अक्तूबर, दो हज़ार बाईस के बीच जारी किए गए थे। मेकमाईट्रिप-गो और ओयो से जुड़े मामले में उन्नीस अक्तूबर, दो हज़ार बाईस को पूछताछ का आदेश जारी किया गया था। इकतीस दिसंबर, दो हज़ार बाईस की स्थिति के मुताबिक सबसे ज्यादा अट्ठानवे,तीन सौ सैंतालीस करोड़ एनपीए एसबीआई पर है। इसके बाद पीएनबी पर तिरासी,पाँच सौ चौरासी करोड़, यूनियन बैंक पर तिरेसठ,सात सौ सत्तर करोड़, केनरा बैंक पर पचास,एक सौ तैंतालीस करोड़, बैंक ऑफ बड़ौदा पर इकतालीस,आठ सौ अट्ठावन करोड़ एनपीए है। वहीं, अड़तीस,आठ सौ पचासी करोड़ के एनपीए के साथ बैंक ऑफ इंडिया छठे आैर उनतीस,चार सौ चौरासी करोड़ के साथ सातवें पर इंडियन बैंक है। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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वाह ताज ! इस शब्द के कानों में पड़ते ही एक अलग अनोखी भावना उत्पन होती है, मानो क्या सच में कोई अपने प्यार के निशानी को इतना भव्य और खुबसूरत मूर्त रूप दे सकता है, प्यार के निशानी माने जाने वाले इस अजूबे को देखने की लोग अक्सर आतूर रहते है जिनमे से मै भी एक हूँ। जी हां बचपन से ताज का एक जलक पाने को बेचैन, मुझे आज वो मौका मिल ही गया ।
मै बिहार में रहने वाले एक सधाहरण मध्यवर्गीय परिवार का लड़का हूँ जो इस वक़्त दिल्ली में अपनी आगे की पढाई पूरी कर रहा हूँ । दुर्गा पूजा की छुट्टियों में मै और मेरे एक दोस्त ने बड़े सोच विचार के बाद आगरा चलने का मन बनाया ही लिया लेकिन फिर एक आम समस्या हमारे सामने आ खड़ी हुई, बजट जिसका लगभग हर साधारण भारतीयों को किसी अस्थल पर जाने से पहले समना करना होता है, बहरहाल हमने अपना बजट निर्धारित कर लिया और गुरुवार करीब 9 बजे निकल चले नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की ओर और फिर क्या था हमे जिस बात की आशंका थी वही घटित हुआ ट्रेन अपने समय से 3 घंटे लेट ,ताज के दीदार में दिल के धडकनों को थामे हम ट्रेन का इंतजार करते रहे और फिर अचानक ट्रेन का आगमन हुआ, मानो हम सिपाही भर्ती के मैदान में हो लोग जेनरल डिब्बे की तरफ ऐसे भागे की अगर वो पहले न पहुचे तो भर्ती से बहार हो जाएंगे, फिरभी हम बड़े जदोजहद के बाद जनरल डिब्बे में घुसने में कामयाब रहे फिर क्या था आगरा के लिए हमरा सफर चालू हो गया।
बहरहाल अब हम थोडा चर्चा ट्रेन के उस सफर की कर लेते है। दमघोटने वाला भीड़, पाव तक न रख पाने वाली जगह, उमस भरी गर्मी और ऊपर से बंद पड़े पंखे मानो सभी मुझ से ही बदला लेने को बेचैन हो लेकिन मै भी मन में ताज के दीदार की उत्सुकता लिए इन सभी को दर किनार किये जा रहा था इसी बीच सीट पर बैठने को लेकर कुछ लोगो ने आपस में ही लड़ाई चालू कर दी जिसका परिणाम वाहा मौजूद लोग आपस में और धक्का-मुक्की करने लगे और फिर बड़ी मशकत के बाद ही मामला शांत हुआ और हम सभी स्थिर अवस्था में आ पाए इस सरे घट्नाक्रम के दौरान मुझे ट्रेन में बैठे उन आरक्षित डिब्बे के लोगो की याद आई की कम से कम वो इस सफ़र में चैन की सास तो ले पा रहे है मगर हमारी उतनी सौभाग्य कहा, बहरहाल हमे ट्रेन में बैठे करीबन 3 घंटे से ज्यादा हो चूका था मगर अब तक आगरा पहुचने का कोई पता न था ।
पसीने से लथ-पथ कपडे, गंदे हो चुके जूते और बिखरे बालो के साथ हम खीच-खाच कर आगरा पहुच तो गये लेकिन ट्रेन ने हमरी मंजिल तक पहुचने में करीब 5 घंटे लगा दिए जो की असल में 3 घंटे थी तो कुल मिला कर ट्रेन ने हमारे 5 घंटे बर्बाद कर दिये फिर भी हमारी ताज को देखने की जिज्ञासा कम न हुई हम स्टेशन से ऑटो लेके ताज के ओर निकल चले । दिल में एक अलग सी बेचैनी, आँखों में उत्साह लिए हम तेजी से ताज की और बढे जा रहे थे और तभी मानो हामरे दिल के अरमानो पर किसी ने धारदार तलवार से वार कर टुकड़े-टुकड़े कर दिया हो ऑटो से उतरते ही किसी की आवाज आई की ताज के दीदार का वक़्त ख़त्म हो चूका है और अब मुख्य दरवाजा शनिवार को खुलेगा उस वक़्त मुझे सबसे पहला ख्याल हमरी रेलवे व्यवस्था की आई जिसके वजह से हामरे जैसे साधारण लोग बड़ी मुश्किल से अपना बजट बना इतनी दूर ताज के दीदार को आते तो है मगर सिर्फ एक ट्रेन के लेट होने के एवज में हाथ सिर्फ हातास और अपने बड़े मुश्किल से कमाए पैसो की बर्बादी पाते हैं ।
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वाह ताज ! इस शब्द के कानों में पड़ते ही एक अलग अनोखी भावना उत्पन होती है, मानो क्या सच में कोई अपने प्यार के निशानी को इतना भव्य और खुबसूरत मूर्त रूप दे सकता है, प्यार के निशानी माने जाने वाले इस अजूबे को देखने की लोग अक्सर आतूर रहते है जिनमे से मै भी एक हूँ। जी हां बचपन से ताज का एक जलक पाने को बेचैन, मुझे आज वो मौका मिल ही गया । मै बिहार में रहने वाले एक सधाहरण मध्यवर्गीय परिवार का लड़का हूँ जो इस वक़्त दिल्ली में अपनी आगे की पढाई पूरी कर रहा हूँ । दुर्गा पूजा की छुट्टियों में मै और मेरे एक दोस्त ने बड़े सोच विचार के बाद आगरा चलने का मन बनाया ही लिया लेकिन फिर एक आम समस्या हमारे सामने आ खड़ी हुई, बजट जिसका लगभग हर साधारण भारतीयों को किसी अस्थल पर जाने से पहले समना करना होता है, बहरहाल हमने अपना बजट निर्धारित कर लिया और गुरुवार करीब नौ बजे निकल चले नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की ओर और फिर क्या था हमे जिस बात की आशंका थी वही घटित हुआ ट्रेन अपने समय से तीन घंटाटे लेट ,ताज के दीदार में दिल के धडकनों को थामे हम ट्रेन का इंतजार करते रहे और फिर अचानक ट्रेन का आगमन हुआ, मानो हम सिपाही भर्ती के मैदान में हो लोग जेनरल डिब्बे की तरफ ऐसे भागे की अगर वो पहले न पहुचे तो भर्ती से बहार हो जाएंगे, फिरभी हम बड़े जदोजहद के बाद जनरल डिब्बे में घुसने में कामयाब रहे फिर क्या था आगरा के लिए हमरा सफर चालू हो गया। बहरहाल अब हम थोडा चर्चा ट्रेन के उस सफर की कर लेते है। दमघोटने वाला भीड़, पाव तक न रख पाने वाली जगह, उमस भरी गर्मी और ऊपर से बंद पड़े पंखे मानो सभी मुझ से ही बदला लेने को बेचैन हो लेकिन मै भी मन में ताज के दीदार की उत्सुकता लिए इन सभी को दर किनार किये जा रहा था इसी बीच सीट पर बैठने को लेकर कुछ लोगो ने आपस में ही लड़ाई चालू कर दी जिसका परिणाम वाहा मौजूद लोग आपस में और धक्का-मुक्की करने लगे और फिर बड़ी मशकत के बाद ही मामला शांत हुआ और हम सभी स्थिर अवस्था में आ पाए इस सरे घट्नाक्रम के दौरान मुझे ट्रेन में बैठे उन आरक्षित डिब्बे के लोगो की याद आई की कम से कम वो इस सफ़र में चैन की सास तो ले पा रहे है मगर हमारी उतनी सौभाग्य कहा, बहरहाल हमे ट्रेन में बैठे करीबन तीन घंटाटे से ज्यादा हो चूका था मगर अब तक आगरा पहुचने का कोई पता न था । पसीने से लथ-पथ कपडे, गंदे हो चुके जूते और बिखरे बालो के साथ हम खीच-खाच कर आगरा पहुच तो गये लेकिन ट्रेन ने हमरी मंजिल तक पहुचने में करीब पाँच घंटाटे लगा दिए जो की असल में तीन घंटाटे थी तो कुल मिला कर ट्रेन ने हमारे पाँच घंटाटे बर्बाद कर दिये फिर भी हमारी ताज को देखने की जिज्ञासा कम न हुई हम स्टेशन से ऑटो लेके ताज के ओर निकल चले । दिल में एक अलग सी बेचैनी, आँखों में उत्साह लिए हम तेजी से ताज की और बढे जा रहे थे और तभी मानो हामरे दिल के अरमानो पर किसी ने धारदार तलवार से वार कर टुकड़े-टुकड़े कर दिया हो ऑटो से उतरते ही किसी की आवाज आई की ताज के दीदार का वक़्त ख़त्म हो चूका है और अब मुख्य दरवाजा शनिवार को खुलेगा उस वक़्त मुझे सबसे पहला ख्याल हमरी रेलवे व्यवस्था की आई जिसके वजह से हामरे जैसे साधारण लोग बड़ी मुश्किल से अपना बजट बना इतनी दूर ताज के दीदार को आते तो है मगर सिर्फ एक ट्रेन के लेट होने के एवज में हाथ सिर्फ हातास और अपने बड़े मुश्किल से कमाए पैसो की बर्बादी पाते हैं ।
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पुलिस कप्तान के आवास में स्लैब ढहने से एक राजमिस्त्री सहित मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। मजदूर को कानपुर रेफर किया गया है। हादसे के दौरान मौजूद कुछ अन्य मजदूर मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए।
इस समय पुलिस कप्तान के आवास में जर्जर पड़े हिस्सों की मरम्मत का काम चल रहा है। सोमवार को एक बड़े हिस्से में स्लैब ढाली गई थी। स्लैब का काम पूरा होने के बाद राजमिस्त्री अनरजीत चौहान (35) पुत्र शिवलाल चौहान निवासी गोरखपुर और मजदूर इंद्रजीत (22) पुत्र सोहन निवासी गंगवा का डेरा सदर कोतवाली कमरे के अंदर से बीम में कुछ काम कर रहे थे। तभी स्लैब ढह गई। जिसकी चपेट में आकर अनरजीत और इंद्रजीत दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के समय वीरू, सुनील, सोनू, गयाराम, वीर सिंह, राजेश, हरीराम भी मौके पर थे, जो कि स्लैब के नीचे से पहले ही जा चुके थे, वरना हादसे में घायल होने वालों की संख्या और भी ज्यादा हो सकती थी। दोनों घायलों को पुलिस कर्मियों ने सदर अस्पताल में भर्ती कराया। इमरजेंसी में मौजूद डॉ. एके सिंह ने बताया कि मजदूर इंद्रजीत की हालत गंभीर है। उसे प्राथमिक उपचार के बाद कानपुर रेफर किया गया है।
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पुलिस कप्तान के आवास में स्लैब ढहने से एक राजमिस्त्री सहित मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। मजदूर को कानपुर रेफर किया गया है। हादसे के दौरान मौजूद कुछ अन्य मजदूर मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए। इस समय पुलिस कप्तान के आवास में जर्जर पड़े हिस्सों की मरम्मत का काम चल रहा है। सोमवार को एक बड़े हिस्से में स्लैब ढाली गई थी। स्लैब का काम पूरा होने के बाद राजमिस्त्री अनरजीत चौहान पुत्र शिवलाल चौहान निवासी गोरखपुर और मजदूर इंद्रजीत पुत्र सोहन निवासी गंगवा का डेरा सदर कोतवाली कमरे के अंदर से बीम में कुछ काम कर रहे थे। तभी स्लैब ढह गई। जिसकी चपेट में आकर अनरजीत और इंद्रजीत दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के समय वीरू, सुनील, सोनू, गयाराम, वीर सिंह, राजेश, हरीराम भी मौके पर थे, जो कि स्लैब के नीचे से पहले ही जा चुके थे, वरना हादसे में घायल होने वालों की संख्या और भी ज्यादा हो सकती थी। दोनों घायलों को पुलिस कर्मियों ने सदर अस्पताल में भर्ती कराया। इमरजेंसी में मौजूद डॉ. एके सिंह ने बताया कि मजदूर इंद्रजीत की हालत गंभीर है। उसे प्राथमिक उपचार के बाद कानपुर रेफर किया गया है।
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केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने आज विभिन्न प्रतिस्पर्धा प्रशिक्षण और अन्य राष्ट्रमंडल खेल स्थलों के लिए 370 करोड़ रूपये की वित्तीय लागत के साथ राष्ट्रमंडल खेल 2010 के लिए एकीकृत सुरक्षा प्रणाली (आईएसएस) के लिए मैसर्स ईसीआईएल के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।
न्न मेजबान शहर समझौते न्न के अंतर्गत राष्ट्रमंडल खेल-2010 से जुड़े सभी स्थलों को सुरक्षा सहित विशेष सुविधाएँ प्रदान की जानी हैं। सुरक्षा प्रणाली 31 मार्च, 2010 तक स्थापित की जानी है।
ऐसा प्रथम बार है जब भारत में किसी परियोजना के लिए इतने बड़े स्तर पर एकीकृत सुरक्षा प्रणाली को कार्यान्वित किया जा रहा है। स्वदेश में निर्मित यह प्रणाली ना सिर्फ सुरक्षा के मामलें में एक शानदार उदाहरण होगी बल्कि राष्ट्रमंडल खेल -2010 के लिए व्यापक सुरक्षा प्रबंधों में एक नया कीर्तिमान भी पेश करेगी।
(Release ID :991)
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केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने आज विभिन्न प्रतिस्पर्धा प्रशिक्षण और अन्य राष्ट्रमंडल खेल स्थलों के लिए तीन सौ सत्तर करोड़ रूपये की वित्तीय लागत के साथ राष्ट्रमंडल खेल दो हज़ार दस के लिए एकीकृत सुरक्षा प्रणाली के लिए मैसर्स ईसीआईएल के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। न्न मेजबान शहर समझौते न्न के अंतर्गत राष्ट्रमंडल खेल-दो हज़ार दस से जुड़े सभी स्थलों को सुरक्षा सहित विशेष सुविधाएँ प्रदान की जानी हैं। सुरक्षा प्रणाली इकतीस मार्च, दो हज़ार दस तक स्थापित की जानी है। ऐसा प्रथम बार है जब भारत में किसी परियोजना के लिए इतने बड़े स्तर पर एकीकृत सुरक्षा प्रणाली को कार्यान्वित किया जा रहा है। स्वदेश में निर्मित यह प्रणाली ना सिर्फ सुरक्षा के मामलें में एक शानदार उदाहरण होगी बल्कि राष्ट्रमंडल खेल -दो हज़ार दस के लिए व्यापक सुरक्षा प्रबंधों में एक नया कीर्तिमान भी पेश करेगी।
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मलाड-गोरेगांव इलाका मुंबई के सबसे तेजी से बढ़ते उपनगरों में से एक है। विशेष रूप से बुनियादी ढांचे के दृष्टिकोण से विभिन्न विकासों के कारण ये इलाका अब जीवंत आवासीय, वाणिज्यिक और आईटी हब में बदल गया है।(Mumbai Metro connectivity boosts housing demand in Malad, Goregaon)
दहिसर से डीएन नगर तक मेट्रो लाइन 2ए और पश्चिमी उपनगरों में दहिसर से गुंडावली, अंधेरी (ई) तक लाइन 7, जो वर्ष की शुरुआत में चालू थी, ने कनेक्टिविटी को बढ़ाया है, यात्रा में आसानी में सुधार किया है और यात्रा के समय को आधे से भी कम कर दिया है।
इन मेट्रो लाइनों के शुरू होने के बाद, पश्चिमी उपनगरों में मलाड-गोरेगांव क्षेत्र मुंबई में घर खरीदारों के बीच सबसे पसंदीदा आवास स्थान बन गया है।
नाइट फ्रैंक इंडिया द्वारा हाल ही में किए गए विश्लेषण के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2023 में थोक बिक्री पंजीकरण मुंबई शहर के पश्चिमी उपनगरों में संपत्ति के लिए थे, जो बाजार हिस्सेदारी का 57% था, जबकि मार्च 2023 में थोक बिक्री पंजीकरण फिर से पश्चिमी क्षेत्र की संपत्तियों के लिए था। उपनगरों में बाजार हिस्सेदारी का 62 प्रतिशत हिस्सा है।
ओमकार रियल्टर्स एंड डेवलपर्स के मुख्य व्यवसाय अधिकारी, उमेश जंडियाल ने क्षेत्र में मांग के बारे में बताते हुए कहा, "मलाड-गोरेगांव क्षेत्र रणनीतिक रूप से अच्छी तरह से विकसित सुविधाओं और आराम के साथ स्थित है, इसलिए आधुनिक होमबॉयर्स का सबसे पसंदीदा विकल्प, माइक्रो मार्केट के रूप में यह बेल्ट रेंटल यील्ड और आरओआई फैक्टर पर मजबूत है। यहां की परियोजनाएं बीकेसी जैसे व्यावसायिक जिलों के लिए आवागमन में आसानी प्रदान करती हैं और इसलिए यह स्थान प्रीमियम भागफल और मजबूत मांग देख रहा है। यह स्थान वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे, मेट्रो लाइन, आगामी तटीय सड़क के साथ-साथ हवाई अड्डे से उत्कृष्ट कनेक्टिविटी के भी करीब है; यह शहर के विभिन्न हिस्सों में आसान पहुंच प्रदान करता है।
यह क्षेत्र स्कूलों, अस्पतालों और अन्य जीवन के अवसरों के साथ एक स्थापित सामाजिक बुनियादी ढांचे का भी आनंद लेता है। चालू होने के बाद नई लॉन्च की गई मेट्रो लाइन 2ए और 7 ने कनेक्टिविटी में सुधार किया है और यात्रियों के लिए यात्रा को आसान बनाया है।
इसके परिणामस्वरूप मलाड-गोरेगांव क्षेत्र में आवासीय आवास की मांग और कीमत में वृद्धि हुई है। संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान की हरी-भरी हरियाली के करीब स्थित, यह निवासियों को मंत्रमुग्ध कर देने वाले दृश्यों के साथ रहने का बेहतर अनुभव प्रदान करता है।
मलाड-गोरेगांव पश्चिमी एक्सप्रेस राजमार्ग के माध्यम से अंधेरी, बीकेसी के सीबीडी के साथ-साथ जोगेश्वरी-विक्रोली लिंक रोड के माध्यम से पवई और विक्रोली के उन्नत क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। इसलिए, राजमार्ग-नेटिज़न्स, मुख्य रूप से व्यापारिक समुदाय, अपने यात्रा समय में जबरदस्त बचत कर रहे हैं।
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मलाड-गोरेगांव इलाका मुंबई के सबसे तेजी से बढ़ते उपनगरों में से एक है। विशेष रूप से बुनियादी ढांचे के दृष्टिकोण से विभिन्न विकासों के कारण ये इलाका अब जीवंत आवासीय, वाणिज्यिक और आईटी हब में बदल गया है। दहिसर से डीएन नगर तक मेट्रो लाइन दोए और पश्चिमी उपनगरों में दहिसर से गुंडावली, अंधेरी तक लाइन सात, जो वर्ष की शुरुआत में चालू थी, ने कनेक्टिविटी को बढ़ाया है, यात्रा में आसानी में सुधार किया है और यात्रा के समय को आधे से भी कम कर दिया है। इन मेट्रो लाइनों के शुरू होने के बाद, पश्चिमी उपनगरों में मलाड-गोरेगांव क्षेत्र मुंबई में घर खरीदारों के बीच सबसे पसंदीदा आवास स्थान बन गया है। नाइट फ्रैंक इंडिया द्वारा हाल ही में किए गए विश्लेषण के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी दो हज़ार तेईस में थोक बिक्री पंजीकरण मुंबई शहर के पश्चिमी उपनगरों में संपत्ति के लिए थे, जो बाजार हिस्सेदारी का सत्तावन% था, जबकि मार्च दो हज़ार तेईस में थोक बिक्री पंजीकरण फिर से पश्चिमी क्षेत्र की संपत्तियों के लिए था। उपनगरों में बाजार हिस्सेदारी का बासठ प्रतिशत हिस्सा है। ओमकार रियल्टर्स एंड डेवलपर्स के मुख्य व्यवसाय अधिकारी, उमेश जंडियाल ने क्षेत्र में मांग के बारे में बताते हुए कहा, "मलाड-गोरेगांव क्षेत्र रणनीतिक रूप से अच्छी तरह से विकसित सुविधाओं और आराम के साथ स्थित है, इसलिए आधुनिक होमबॉयर्स का सबसे पसंदीदा विकल्प, माइक्रो मार्केट के रूप में यह बेल्ट रेंटल यील्ड और आरओआई फैक्टर पर मजबूत है। यहां की परियोजनाएं बीकेसी जैसे व्यावसायिक जिलों के लिए आवागमन में आसानी प्रदान करती हैं और इसलिए यह स्थान प्रीमियम भागफल और मजबूत मांग देख रहा है। यह स्थान वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे, मेट्रो लाइन, आगामी तटीय सड़क के साथ-साथ हवाई अड्डे से उत्कृष्ट कनेक्टिविटी के भी करीब है; यह शहर के विभिन्न हिस्सों में आसान पहुंच प्रदान करता है। यह क्षेत्र स्कूलों, अस्पतालों और अन्य जीवन के अवसरों के साथ एक स्थापित सामाजिक बुनियादी ढांचे का भी आनंद लेता है। चालू होने के बाद नई लॉन्च की गई मेट्रो लाइन दोए और सात ने कनेक्टिविटी में सुधार किया है और यात्रियों के लिए यात्रा को आसान बनाया है। इसके परिणामस्वरूप मलाड-गोरेगांव क्षेत्र में आवासीय आवास की मांग और कीमत में वृद्धि हुई है। संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान की हरी-भरी हरियाली के करीब स्थित, यह निवासियों को मंत्रमुग्ध कर देने वाले दृश्यों के साथ रहने का बेहतर अनुभव प्रदान करता है। मलाड-गोरेगांव पश्चिमी एक्सप्रेस राजमार्ग के माध्यम से अंधेरी, बीकेसी के सीबीडी के साथ-साथ जोगेश्वरी-विक्रोली लिंक रोड के माध्यम से पवई और विक्रोली के उन्नत क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है। इसलिए, राजमार्ग-नेटिज़न्स, मुख्य रूप से व्यापारिक समुदाय, अपने यात्रा समय में जबरदस्त बचत कर रहे हैं।
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नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम कॉलेज में अंबेडकर जयंती (14 अप्रैल) पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरू प्रकाश पासवान को आमंत्रित किया गया था। एसएफआई कॉलेज यूनिट ने इसका विरोध किया,जिस पर उनके निमंत्रण को रद्द कर दिया गया। पासवान ने इसे असहिष्णुता की पराकाष्ठा बताया।
एलएसआर के एससी/एसटी सेल द्वारा गुरुप्रकाश को अंबेडकर जयंती के अवसर पर अम्बेडकर बियॉन्उ कांस्टीट्यूशन पर बोलने के लिए आमंत्रित किया था। भाजपा प्रवक्ता होने के साथ-साथ पासवान पटना विश्वविद्यालय में कानून के सहायक प्रोफेसर और दलित इंडिया चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सलाहकार भी हैं। पासवान को आमंत्रित किए जाने का पता लगने पर कॉलेज एसएफआई यूनिट ने इसका विरोध किया। इस पर आमंत्रित कने वाले छात्र ने आमंत्रण रद्द कर दिया। हालांकि प्रशासन की तरफ से ऐसा कोई आदेश नहीं आया ,मगर विरोध देाते हुए ऐसा किया।
कॉलेज के स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) कॉलेज यूनिट, सैक्रेटरी प्राची का कहना है कि एससी/एसटी सेल ने आमंत्रित किया था, अंबेडकर जयंती पर। हमने उनसे बात की और अपनी असहमति जताई। हम उनके तर्क से सहमत नहीं थे कि हमें इसे पॉलिटिक्ल नहीं देखना चाहिए हमें पर्सनल देखना चाहिए। मगर यदि कोई व्यक्ति भाजपा में है,तो उसने भाजपा को चुना है। बीजेपी की एंटी दलित की छवि है और अंबेडकर खुद राइट विंग पॉलिटिक्स के खिलाफ थे, ऐसे में यह कहना गलत है कि पर्सनल देखना चाहिए। हमे यहीं विरोध था,जो हमने एससी/एसटी सेल को बताया था, जिसके बाद उन्हें रद्द किया।
वहीं पासवान ने कहा कि उच्चतम स्तर की असहिष्णुता है। मेरी राजनीतिक संबद्धता के अलावा मैं एक अकादमिक पृष्ठभूमि से भी आता हूं। इसके साथ ही राजनीति दृष्टिकोण से भी किसी व्यक्ति को बोलने से रोकना सहीं नहीं है। मैं दलित समुदाय का एक दलित नेता की जयंती पर दलित मुद्दों पर बोलने को तैयार हूं। यह ठीक नहीं है।
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नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली विश्वविद्यालय से सम्बद्ध प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम कॉलेज में अंबेडकर जयंती पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरू प्रकाश पासवान को आमंत्रित किया गया था। एसएफआई कॉलेज यूनिट ने इसका विरोध किया,जिस पर उनके निमंत्रण को रद्द कर दिया गया। पासवान ने इसे असहिष्णुता की पराकाष्ठा बताया। एलएसआर के एससी/एसटी सेल द्वारा गुरुप्रकाश को अंबेडकर जयंती के अवसर पर अम्बेडकर बियॉन्उ कांस्टीट्यूशन पर बोलने के लिए आमंत्रित किया था। भाजपा प्रवक्ता होने के साथ-साथ पासवान पटना विश्वविद्यालय में कानून के सहायक प्रोफेसर और दलित इंडिया चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सलाहकार भी हैं। पासवान को आमंत्रित किए जाने का पता लगने पर कॉलेज एसएफआई यूनिट ने इसका विरोध किया। इस पर आमंत्रित कने वाले छात्र ने आमंत्रण रद्द कर दिया। हालांकि प्रशासन की तरफ से ऐसा कोई आदेश नहीं आया ,मगर विरोध देाते हुए ऐसा किया। कॉलेज के स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया कॉलेज यूनिट, सैक्रेटरी प्राची का कहना है कि एससी/एसटी सेल ने आमंत्रित किया था, अंबेडकर जयंती पर। हमने उनसे बात की और अपनी असहमति जताई। हम उनके तर्क से सहमत नहीं थे कि हमें इसे पॉलिटिक्ल नहीं देखना चाहिए हमें पर्सनल देखना चाहिए। मगर यदि कोई व्यक्ति भाजपा में है,तो उसने भाजपा को चुना है। बीजेपी की एंटी दलित की छवि है और अंबेडकर खुद राइट विंग पॉलिटिक्स के खिलाफ थे, ऐसे में यह कहना गलत है कि पर्सनल देखना चाहिए। हमे यहीं विरोध था,जो हमने एससी/एसटी सेल को बताया था, जिसके बाद उन्हें रद्द किया। वहीं पासवान ने कहा कि उच्चतम स्तर की असहिष्णुता है। मेरी राजनीतिक संबद्धता के अलावा मैं एक अकादमिक पृष्ठभूमि से भी आता हूं। इसके साथ ही राजनीति दृष्टिकोण से भी किसी व्यक्ति को बोलने से रोकना सहीं नहीं है। मैं दलित समुदाय का एक दलित नेता की जयंती पर दलित मुद्दों पर बोलने को तैयार हूं। यह ठीक नहीं है।
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इसके साथ-साथ इनका क्षेत्र भी लगभग गेहूँ के बराबर ही है। इन फसलों की सबसे उपज सतलज-गंगा के मैदान के उस भाग में होती है जहाँ रबी में गेहूँ नहीं उपजता है । इसलिए बलुए शुष्क, काँप वाले तथा सिंचाई के साधनों से रहित क्षेत्रों में इनों की पैदावार होती है। उत्तरी भारत में जहाँ धान काफी नहीं होता जौ और चना मिला कर गरीब आदमियों का भोजन है। भारत के कुल जौ का दोतिहाई और कुल चने का आधा भाग उत्तर प्रदेश में पैदा होता है। उत्तर प्रदेश में जौ के मुख्य उत्पादक जिले मुजफ्फरपुर, सारन, चम्पारन, आजमगढ़, बलिया, प्रतापगढ़, गढ़वाल, गोरखपुर, गाजीपुर, प्रयाग है। थोड़ा जौ पंजाब और राजस्थान में भी बोया जाता है । १६५७-५८ में ७५ लाख एकड़ भूमि पर २२ लाख टन जौ उत्पन्न किया गया और भारत में जौ का प्रति एकड़ उत्पादन केवल ८०२ पौंड ही है, जबकि डेनमार्क में २६५६
पौंड, जर्मनी में १,६३२ पौंड, इग्लैंड में १,८६६ पौंड
और जापान में १,६१६ पौंड जौ पैदा होता है । इन अनाजों की, विशेषकर जौ की, प्रति एकड़ उपज गेहूँ की उपज से अधिक होती है । उनके लिए गेहूँ जैसी देखभाल की भी आवश्यकता नहीं पड़ती। परन्तु ये अन्न सस्ते होते हैं और इनसे गेहूँ की भाँति लाभ नहीं होता है। इसलिए प्रकृति द्वारा विवश होने पर ही भारतीय किसान इनकी खेती करता है । साधारण दशा में उत्तर भारत में किसान गेहूँ बोना ही पसन्द करता है।
चित्र २३ - जौ के क्षेत्र
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इसके साथ-साथ इनका क्षेत्र भी लगभग गेहूँ के बराबर ही है। इन फसलों की सबसे उपज सतलज-गंगा के मैदान के उस भाग में होती है जहाँ रबी में गेहूँ नहीं उपजता है । इसलिए बलुए शुष्क, काँप वाले तथा सिंचाई के साधनों से रहित क्षेत्रों में इनों की पैदावार होती है। उत्तरी भारत में जहाँ धान काफी नहीं होता जौ और चना मिला कर गरीब आदमियों का भोजन है। भारत के कुल जौ का दोतिहाई और कुल चने का आधा भाग उत्तर प्रदेश में पैदा होता है। उत्तर प्रदेश में जौ के मुख्य उत्पादक जिले मुजफ्फरपुर, सारन, चम्पारन, आजमगढ़, बलिया, प्रतापगढ़, गढ़वाल, गोरखपुर, गाजीपुर, प्रयाग है। थोड़ा जौ पंजाब और राजस्थान में भी बोया जाता है । एक हज़ार छः सौ सत्तावन-अट्ठावन में पचहत्तर लाख एकड़ भूमि पर बाईस लाख टन जौ उत्पन्न किया गया और भारत में जौ का प्रति एकड़ उत्पादन केवल आठ सौ दो पौंड ही है, जबकि डेनमार्क में दो हज़ार छः सौ छप्पन पौंड, जर्मनी में एक,छः सौ बत्तीस पौंड, इग्लैंड में एक,आठ सौ छयासठ पौंड और जापान में एक,छः सौ सोलह पौंड जौ पैदा होता है । इन अनाजों की, विशेषकर जौ की, प्रति एकड़ उपज गेहूँ की उपज से अधिक होती है । उनके लिए गेहूँ जैसी देखभाल की भी आवश्यकता नहीं पड़ती। परन्तु ये अन्न सस्ते होते हैं और इनसे गेहूँ की भाँति लाभ नहीं होता है। इसलिए प्रकृति द्वारा विवश होने पर ही भारतीय किसान इनकी खेती करता है । साधारण दशा में उत्तर भारत में किसान गेहूँ बोना ही पसन्द करता है। चित्र तेईस - जौ के क्षेत्र
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नागपुर। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज कृषि कानूनों को लेकर चौकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा की कृषि कानून 70 साल की आजादी के बाद लाया गया सबसे बड़ा रिफॉर्म था। लेकिन कुछ लोगों के विरोध के बाद उसे वापस लेना पड़ा। उन्होंने आगे कहा कि हम एक कदम पीछे जरूर हटे हैं। लेकिन दोबारा आगे बढ़ेंगे। सरकार आगे के बारे में सोच रही है, हम निराश नहीं हैं। किसान भारत की रीढ़ हैं। सरकार निराश नहीं है। हम एक कदम पीछे हटे हैं, हम फिर आगे बढ़ेंगे क्योंकि किसान हिंदुस्तान की बैकबोन हैं। और यदि बैकबोन मजबूत होगी तो निश्चित रूप से देश मजबूत होगा। '
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को नागपुर में एग्रो विजन एक्सपो का उद्घाटन के दौरान ये बात कही। बता दें की पिछले केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री के ऐलान के बाद संसद में विधेयक पारित कर कृषि कानूनों को वापिस ले लिया है। प्रधानमंत्री द्वारा अचानक कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान ने भी को हैरान कर दिया था। इसके बाद करीब एक साल से दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों ने भी आंदोलन वापिस ले लिया था। वहीँ अब कृषि मंत्री के बयान ने सरकार की मंशा को स्पष्ट कर दिया है।
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नागपुर। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज कृषि कानूनों को लेकर चौकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा की कृषि कानून सत्तर साल की आजादी के बाद लाया गया सबसे बड़ा रिफॉर्म था। लेकिन कुछ लोगों के विरोध के बाद उसे वापस लेना पड़ा। उन्होंने आगे कहा कि हम एक कदम पीछे जरूर हटे हैं। लेकिन दोबारा आगे बढ़ेंगे। सरकार आगे के बारे में सोच रही है, हम निराश नहीं हैं। किसान भारत की रीढ़ हैं। सरकार निराश नहीं है। हम एक कदम पीछे हटे हैं, हम फिर आगे बढ़ेंगे क्योंकि किसान हिंदुस्तान की बैकबोन हैं। और यदि बैकबोन मजबूत होगी तो निश्चित रूप से देश मजबूत होगा। ' कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को नागपुर में एग्रो विजन एक्सपो का उद्घाटन के दौरान ये बात कही। बता दें की पिछले केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री के ऐलान के बाद संसद में विधेयक पारित कर कृषि कानूनों को वापिस ले लिया है। प्रधानमंत्री द्वारा अचानक कृषि कानूनों की वापसी के ऐलान ने भी को हैरान कर दिया था। इसके बाद करीब एक साल से दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों ने भी आंदोलन वापिस ले लिया था। वहीँ अब कृषि मंत्री के बयान ने सरकार की मंशा को स्पष्ट कर दिया है।
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उर्फी जावेद की इस नई ड्रेस को देखकर सिर ना चकरा जाए तो कहिए। हालांकि उर्फी ने खुद ही अपना मजाक भी बनाया है और अपनी ड्रेस की तुलना आमिर खान-सलमान खान की एक चर्चित फिल्म के सीन से कर दी है।
नई दिल्ली, जेएनएन। उर्फी जावेद सोशल मीडिया की उन सेलेब्रिटीज में शामिल हैं, जो अपने ड्रेसिंग सेंस के साथ अक्सर खबरों में रहती हैं। उर्फी बेहिचक अजीबो-गरीब ड्रेसेज पहनती हैं और पूरे आत्म-विश्वास के साथ ना सिर्फ सड़कों पर निकलती हैं, बल्कि फोटोशूट भी करवाती हैं। उनकी ड्रेसेज देखकर यूजर्स कभी हंसते हैं, कभी ताना मारते हैं, कभी मजाक उड़ाते हैं, मगर कभी-कभी उर्फी कुछ ऐसा कर देती हैं कि फैंस और यूजर्स भी उनके सेंस ऑफ ह्यूमर की तारीफ करते हैं। उर्फी ने हाल ही में एक ऐसी ड्रेस पहनकर इसकी फोटो अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर साझा की और इसकी तुलना आमिर खान-सलमान खान की बेहद लोकप्रिय फिल्म के एक दृश्य से करके इसका नाम पूछा।
तस्वीर में उर्फी ने जो पहना है, उसे समझना बेहद मुश्किल है। ऐसा लगता है कि उन्होंने डेनिम टी-शर्ट के पिछले हिस्से को फाड़ दिया और आगे का हिस्सा ऐसे ही छोड़ दिया है, जिससे उनकी पूरी पीठ दिख रही है। बीच में कुछ जंजीरें बांध दी हैं। इसके साथ उर्फी ने दूसरी फोटो शेयर की है, जिसमें एक शख्स की नंगी पीठ दिख रही है। इसके साथ उर्फी ने लिखा- काफी मिलता-जुलता है। मूवी के नाम का अनुमान लगाइए।
कई फैंस ने सही जवाब दिया भी है। दरअसल, यह आमिर-सलमान की आइकॉनिक कॉमेडी फिल्म अंदाज अपना-अपना का एक दृश्य है, जो कलाकार शहजाद खान पर फिल्माया गया था। शहजाद ने इसमें विलेन तेजा के साइड किक भल्ला का किरदार निभाया था। इस दृश्य में एक बम फटने की वजह से भल्ला की ऐसी हालत हो जाती है। अपनी ड्रेस का इस दृश्य से तुलना करना उर्फी के सेंस ऑफ ह्यूमर को जाहिर करता है। उर्फी के इस बेबाक अंदाज से प्रभावित होकर एक यूजर ने लिखा- हमें यही जज्बा चाहिए।
कुछ यूजर्स ने हमेशा की तरह उर्फी के ड्रेसिंग सेंस को लेकर ताने भी कसे हैं। कई यूजर्स ने इस फोटो में उनके लुक की तारीफ भी की है। उर्फी जावेद बिग बॉस ओटीटी में भाग लेने पर चर्चा में आयी थीं। अब एकता कपूर के शो लॉक अप में भी उनके शामिल होने की चर्चा है, जिसे कंगना रनोट होस्ट करने वाली हैं। यह शो 28 फरवरी से शुरू होना है।
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उर्फी जावेद की इस नई ड्रेस को देखकर सिर ना चकरा जाए तो कहिए। हालांकि उर्फी ने खुद ही अपना मजाक भी बनाया है और अपनी ड्रेस की तुलना आमिर खान-सलमान खान की एक चर्चित फिल्म के सीन से कर दी है। नई दिल्ली, जेएनएन। उर्फी जावेद सोशल मीडिया की उन सेलेब्रिटीज में शामिल हैं, जो अपने ड्रेसिंग सेंस के साथ अक्सर खबरों में रहती हैं। उर्फी बेहिचक अजीबो-गरीब ड्रेसेज पहनती हैं और पूरे आत्म-विश्वास के साथ ना सिर्फ सड़कों पर निकलती हैं, बल्कि फोटोशूट भी करवाती हैं। उनकी ड्रेसेज देखकर यूजर्स कभी हंसते हैं, कभी ताना मारते हैं, कभी मजाक उड़ाते हैं, मगर कभी-कभी उर्फी कुछ ऐसा कर देती हैं कि फैंस और यूजर्स भी उनके सेंस ऑफ ह्यूमर की तारीफ करते हैं। उर्फी ने हाल ही में एक ऐसी ड्रेस पहनकर इसकी फोटो अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर साझा की और इसकी तुलना आमिर खान-सलमान खान की बेहद लोकप्रिय फिल्म के एक दृश्य से करके इसका नाम पूछा। तस्वीर में उर्फी ने जो पहना है, उसे समझना बेहद मुश्किल है। ऐसा लगता है कि उन्होंने डेनिम टी-शर्ट के पिछले हिस्से को फाड़ दिया और आगे का हिस्सा ऐसे ही छोड़ दिया है, जिससे उनकी पूरी पीठ दिख रही है। बीच में कुछ जंजीरें बांध दी हैं। इसके साथ उर्फी ने दूसरी फोटो शेयर की है, जिसमें एक शख्स की नंगी पीठ दिख रही है। इसके साथ उर्फी ने लिखा- काफी मिलता-जुलता है। मूवी के नाम का अनुमान लगाइए। कई फैंस ने सही जवाब दिया भी है। दरअसल, यह आमिर-सलमान की आइकॉनिक कॉमेडी फिल्म अंदाज अपना-अपना का एक दृश्य है, जो कलाकार शहजाद खान पर फिल्माया गया था। शहजाद ने इसमें विलेन तेजा के साइड किक भल्ला का किरदार निभाया था। इस दृश्य में एक बम फटने की वजह से भल्ला की ऐसी हालत हो जाती है। अपनी ड्रेस का इस दृश्य से तुलना करना उर्फी के सेंस ऑफ ह्यूमर को जाहिर करता है। उर्फी के इस बेबाक अंदाज से प्रभावित होकर एक यूजर ने लिखा- हमें यही जज्बा चाहिए। कुछ यूजर्स ने हमेशा की तरह उर्फी के ड्रेसिंग सेंस को लेकर ताने भी कसे हैं। कई यूजर्स ने इस फोटो में उनके लुक की तारीफ भी की है। उर्फी जावेद बिग बॉस ओटीटी में भाग लेने पर चर्चा में आयी थीं। अब एकता कपूर के शो लॉक अप में भी उनके शामिल होने की चर्चा है, जिसे कंगना रनोट होस्ट करने वाली हैं। यह शो अट्ठाईस फरवरी से शुरू होना है।
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भारत के मध्यक्रम बल्लेबाज श्रेयस अय्यर अहमदाबाद टेस्ट के आखिरी दिन फील्डिंग के दौरान नहीं उतरे। उन्होंने चौथे दिन बल्लेबाजी भी नहीं की थी और अब उनके आगामी वनडे सीरीज में भी खेलने पर भी संदेह जताया जा रहा है। ऐसे में चर्चा तेज है कि उन्हें रिप्लेस कौन करेगा?
17 मार्च से शुरू होगा वनडे सीरीजभारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 3 मैच की वनडे सीरीज की शुरुआत 17 मार्च से मुंबई में होगी। दूसरा मैच 19 मार्च को विशाखापट्टनम में जबकि तीसरा और आखिरी मुकाबला 22 मार्च को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाएगा।
US में Rahul Gandhi ने PM Modi पर क्या बोला कि BJP बताने लगी देशविरोधी?
पहलवानों के प्रदर्शन पर Brij Bhushan Singh का बड़ा बयान- 'मैं खिलाड़ियों को श्राप नहीं देना चाहता'
Congress से निष्कासित नेता ने BJP के मंत्री से रो-रोकर मांगी मदद !
क्या है NATO Plus जिसमें शामिल हो सकता है India? China क्यों परेशान?
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भारत के मध्यक्रम बल्लेबाज श्रेयस अय्यर अहमदाबाद टेस्ट के आखिरी दिन फील्डिंग के दौरान नहीं उतरे। उन्होंने चौथे दिन बल्लेबाजी भी नहीं की थी और अब उनके आगामी वनडे सीरीज में भी खेलने पर भी संदेह जताया जा रहा है। ऐसे में चर्चा तेज है कि उन्हें रिप्लेस कौन करेगा? सत्रह मार्च से शुरू होगा वनडे सीरीजभारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन मैच की वनडे सीरीज की शुरुआत सत्रह मार्च से मुंबई में होगी। दूसरा मैच उन्नीस मार्च को विशाखापट्टनम में जबकि तीसरा और आखिरी मुकाबला बाईस मार्च को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाएगा। US में Rahul Gandhi ने PM Modi पर क्या बोला कि BJP बताने लगी देशविरोधी? पहलवानों के प्रदर्शन पर Brij Bhushan Singh का बड़ा बयान- 'मैं खिलाड़ियों को श्राप नहीं देना चाहता' Congress से निष्कासित नेता ने BJP के मंत्री से रो-रोकर मांगी मदद ! क्या है NATO Plus जिसमें शामिल हो सकता है India? China क्यों परेशान?
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Shubman Gill Breaks Ishan Kishan Double Century Record शुभमन गिल (Shubman Gill) ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में ODI करियर का पहला दोहरा शतक जड़ दिया। इस यादगार पारी खेलने के साथ ही गिल ने साथी खिलाड़ी ईशान किशन (Ishan Kishan) के बड़े रिकॉर्ड को धवस्त किया है।
नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। Shubman Gill Breaks Ishan Kishan Double Century Record। भारत और न्यूजीलैंड (IND vs NZ 1st ODI) के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा है। इस मैच में टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया।
टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल (Shubman Gill) ने कप्तान के फैसले को सही साबित करते हुए अपने वनडे करियर का पहला दोहरा शतक जड़ दिया। इस यादगार पारी खेलने के साथ ही शुभमन गिल ने साथी खिलाड़ी ईशान किशन (Ishan Kishan) के एक बड़े रिकॉर्ड को धवस्त किया है।
बता दें कि हाल ही में भारत और बांग्लादेश (IND vs BAN) के बीच खेली गई वनडे सीरीज में सलामी बल्लेबाज ईशान किशन (Ishan kishan) ने सिर्फ 131 गेंदों पर 210 रनों की शानदार पारी खेली थी। इस तूफानी पारी खेलने के साथ ही वो भारत के लिए सबसे कम उम्र में दोहरा शतक जड़ने वाले पहले बल्लेबाज बने थे। लेकिन, शुभमन गिल ने उनके इस रिकॉर्ड को तोड़ते हुए ये कीर्तिमान अपने नाम कर लिया है।
शुभमन गिल (Shubman Gill) ने महज 23 साल 132 दिन की उम्र में ही वनडे में दोहरा शतक जड़ने का कारनामा कर दिखाया है। जबकि ईशान किशन ने ये कारनामा 24 साल 145 दिन की उम्र में किया था।
न्यूजीलैंड (IND vs NZ 1st ODI) के खिलाफ पहले वनडे में शुभमन गिल (Shubman Gill)ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए महज 149 गेंदों में 139. 6 के स्ट्राइक रेट से 208 रनों की आतिशी पारी खेली। इस दौरान उनके बल्ले से 19 चौके और 9 गगनचुंबी छक्के देखने को मिले। गिल की इस तूफानी पारी की बदौलत भारतीय टीम 50 ओवरों में 8 विकेट के नुकसान पर 349 रनों का विशाल स्कोर खड़ने में सफल हो सकी।
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Shubman Gill Breaks Ishan Kishan Double Century Record शुभमन गिल ने न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में ODI करियर का पहला दोहरा शतक जड़ दिया। इस यादगार पारी खेलने के साथ ही गिल ने साथी खिलाड़ी ईशान किशन के बड़े रिकॉर्ड को धवस्त किया है। नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। Shubman Gill Breaks Ishan Kishan Double Century Record। भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जा रहा है। इस मैच में टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज शुभमन गिल ने कप्तान के फैसले को सही साबित करते हुए अपने वनडे करियर का पहला दोहरा शतक जड़ दिया। इस यादगार पारी खेलने के साथ ही शुभमन गिल ने साथी खिलाड़ी ईशान किशन के एक बड़े रिकॉर्ड को धवस्त किया है। बता दें कि हाल ही में भारत और बांग्लादेश के बीच खेली गई वनडे सीरीज में सलामी बल्लेबाज ईशान किशन ने सिर्फ एक सौ इकतीस गेंदों पर दो सौ दस रनों की शानदार पारी खेली थी। इस तूफानी पारी खेलने के साथ ही वो भारत के लिए सबसे कम उम्र में दोहरा शतक जड़ने वाले पहले बल्लेबाज बने थे। लेकिन, शुभमन गिल ने उनके इस रिकॉर्ड को तोड़ते हुए ये कीर्तिमान अपने नाम कर लिया है। शुभमन गिल ने महज तेईस साल एक सौ बत्तीस दिन की उम्र में ही वनडे में दोहरा शतक जड़ने का कारनामा कर दिखाया है। जबकि ईशान किशन ने ये कारनामा चौबीस साल एक सौ पैंतालीस दिन की उम्र में किया था। न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे में शुभमन गिल ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए महज एक सौ उनचास गेंदों में एक सौ उनतालीस. छः के स्ट्राइक रेट से दो सौ आठ रनों की आतिशी पारी खेली। इस दौरान उनके बल्ले से उन्नीस चौके और नौ गगनचुंबी छक्के देखने को मिले। गिल की इस तूफानी पारी की बदौलत भारतीय टीम पचास ओवरों में आठ विकेट के नुकसान पर तीन सौ उनचास रनों का विशाल स्कोर खड़ने में सफल हो सकी। यह भी पढ़ेः
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बॉलीवुड अभिनेता अभिषेक बच्चन ने अपने बॉलीवुड करियर में कई शानदार फिल्में की हैं लेकिन उनकी तुलना अक्सर उनके पिता अमिताभ बच्चन से होती रहती है और इसको लेकर वो हमेशा ही सवालों के घेरे में रहे हैं। अभिषेक बच्चन और उनके काम शुरु करने की बात करें को करीब वो 20 साल से बॉलीवुड में हैं और अपने अभिनय से लोगों का मनोरंजन कर रहे हैं। लेकिन इस समय उनको लेकर एक ऐसा किस्सा सामने आ रहा है जो कि आपको काफी ज्यादा चौकाने वाला है।
इस वाकिए को खुद अभिषेक बच्चन ने साझा किया है। अभिषेक बच्चन ने फिल्म बस इतना सा ख्वाब से जुड़ी एक पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा की है। अभिषेक बच्चन ने बताया कि एक बार उनको और उनके दोस्त गोल्डी बहल को फिल्म पुकार के शूटिंग सेट से भगा दिया गया था। गौरतलब है कि अब अभिषेक बच्चन फिल्म बस इतना सा ख्वाब है में गोल्डी बहल के साथ काम कर रहे हैं।
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मुंबई, 1 जनवरी (एजेंसी)
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैचों के लिए चुने गए सलामी बल्लेबाज रुतुराज गायकवाड़ की मुख्य चयनकर्ता चेतन शर्मा ने सराहना की और कहा कि महाराष्ट्र का यह बल्लेबाज राष्ट्रीय टीम के लिए बेहद सफल हो सकता है। भारतीय टीम को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 19, 21 और 23 जनवरी को पार्ल और केपटाउन में तीन एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले खेलने हैं। चेतन शर्मा की अगुआई वाली चयन समिति ने शुक्रवार को इस श्रृंखला के लिए टीम का चयन किया। चेतन शर्मा ने टीम चयन के बाद कहा कि देखिए, बेशक उसे सही समय पर मौका मिला है। वह टी-20 टीम में था और अब वह एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय टीम में भी है। चयनकर्ताओं को लगता है कि उसे जिस भी टीम में जगह मिलेगी वह देश के लिए बेहद सफल रहेगा। पुणे के रहने वाले 24 साल के रुतुराज 2021 आईपीएल में 635 रन बनाकर शीर्ष स्कोरर रहे और उन्होंने चेन्नई सुपरकिंग्स को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
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मुंबई, एक जनवरी दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैचों के लिए चुने गए सलामी बल्लेबाज रुतुराज गायकवाड़ की मुख्य चयनकर्ता चेतन शर्मा ने सराहना की और कहा कि महाराष्ट्र का यह बल्लेबाज राष्ट्रीय टीम के लिए बेहद सफल हो सकता है। भारतीय टीम को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्नीस, इक्कीस और तेईस जनवरी को पार्ल और केपटाउन में तीन एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मुकाबले खेलने हैं। चेतन शर्मा की अगुआई वाली चयन समिति ने शुक्रवार को इस श्रृंखला के लिए टीम का चयन किया। चेतन शर्मा ने टीम चयन के बाद कहा कि देखिए, बेशक उसे सही समय पर मौका मिला है। वह टी-बीस टीम में था और अब वह एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय टीम में भी है। चयनकर्ताओं को लगता है कि उसे जिस भी टीम में जगह मिलेगी वह देश के लिए बेहद सफल रहेगा। पुणे के रहने वाले चौबीस साल के रुतुराज दो हज़ार इक्कीस आईपीएल में छः सौ पैंतीस रन बनाकर शीर्ष स्कोरर रहे और उन्होंने चेन्नई सुपरकिंग्स को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
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प्रफुल्ल कोलख्यान
दलित राजनीति की समस्याएँ
डॉ. आंबेडकर
मेरे विचार से इस देश के दो दुश्मनों से कामगारों को निपटना होगा। ये दो दुश्मन हैं, ब्राह्मणवाद और पूँजीवाद 1... । ब्राह्मणवाद से मेरा आशय स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व की भावनाओं के निषेध से है। यद्यपि ब्राह्मण इसके जनक हैं, लेकिन यह ब्राह्मणों तक ही सीमित नहीं होकर सभी जातियों में घुसा हुआ है। - डॉ. आंबेडकर
1. स्थिति और संदर्भः राजनीति क्या है
i दलित एक विशुद्ध भारतीय स्थिति है और इसीलिए 'दलित राजनीति की समस्या' अपने मूल चरित्र में बिल्कुल भारतीय यथार्थ है। दलित का अर्थ और अभिप्राय सिर्फ भारतीय संदर्भ से हासिल किये जा सकते हैं। दलित समस्याओं से मिलती-जुलती समस्याएँ अन्य समाजों में भी हो सकती है, लेकिन उन पर प्रसंगवश ही चर्चा की जा सकती है। उनके साथ दलित समस्याओं को समीकृत
पृ. 1 कुल पृ. 33
करना समस्या के मूल से भटकाव की आशंकाओं को सघन करता है। कहना न होगा कि यह भटकाव मूल समस्या को उलझाव में डाल देता है और उसके चरित्र को समझने में बाधा उत्पन्न करता है। ऐसा कई बार शरारतन किया जाता है, तो कई बार अनजाने ही हम उस उलझन में फँस जाते हैं। कोशिश की जा सकती है कि उलझाव और भटकाव के ऐसे संदर्भों से बचा जाये। भारत बहुत बड़ा देश है, भौगोलिक रूप से ही नहीं, सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टि से भी इतना वैविध्य है कि कई बार इसके देश नहीं 'महादेश' होने का भ्रम होता है। 'महादेश' न हो, तो भी इतना तो है कि कोई भी 'भारतीय स्थिति अपनी सामाजिकता में एकार्थी नहीं हो सकती है और न पूरे भारत पर एक ही अर्थ में लागू हो सकती है। उत्तर और दक्षिण भारत की या फिर पूर्व और पूर्वोत्तर की दलित राजनीति से हिंदी क्षेत्र की दलित राजनीति भिन्न हो सकती है। इस भिन्नता के कारण वहाँ की सामाजिक-आर्थिक संरचना, समकालीन राजनीतिक, सांस्कृतिक स्थिति आदि में निहित हैं। कहना न होगा कि 'दलित राजनीति की समस्या का अपना क्षेत्रीय प्रसंग भी है। जाहिर है कि 'दलित राजनीति की समस्या' पर विचार करते हुए यहाँ व्यापक और सामान्य नजरिया ही अपनाना बेहतर होगा। विशिष्ट क्षेत्र की 'दलित राजनीति की समस्या पर केंद्रित अध्ययन में विशिष्ट नजरिया अपनाया जा सकता है।
ii. राजनीति मूलतः 'सत्ता-विमर्श' है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में 'सत्ता' की व्याप्ति होती है। यह व्याप्ति कई बार दृश्य होती है, तो कई बार अदृश्य भी रहती है। दृश्य हो या अदृश्य किंतु 'सत्ता' की उपस्थिति वहाँ होती जरूर है। तात्पर्य यह कि सत्ता राजनीति का केंद्रीय विधान है। कहना न होगा कि राजनीतिक आंदोलन का मकसद 'सत्ता की संरचना' में परिवर्त्तन के माध्यम से समाज की संरचना' में परिवर्त्तन करना होता है और सामाजिक आंदोलन का मकसद 'सामाजिक संरचना' में परिवर्त्तन के माध्यम से सत्ता की संरचना' में परिवर्त्तन करना होता है। दोनों एक दूसरे के पूरक भी हैं और एक दूसरे से टकराते भी हैं। यहीं पर यह स्मरण कर लेना जरूरी है कि सत्ता का मतलब होता है, इच्छित परिणाम पाने की क्षमता । 'इच्छा' क्या है, और यह भी कि इच्छा का निर्माण कैसे होता है, इस पर ध्यान देना जरूरी है। 'इच्छा' उपलब्ध विकल्पों में से किसी एक विकल्प के चयन में अभिव्यक्त होती है। विकल्पों का चयन प्राथमिक रूप से आर्थिक और उसके साथ-साथ सांस्कृतिक, सामाजिक, ऐतिहासिक, भौतिक आदि कारणों पर, अर्थात 'जीवन-स्थितियों' पर
पृ. 2 कुल पृ. 33
निर्भर करता है। इस प्रसंग में, यह भी ध्यान में रखने की जरूरत है कि आर्थिक आधार को विकसित करने के भी कई विकल्प हो सकते हैं। इन विकल्पों में से किसी एक के चयन का आधार प्रमुख रूप से आर्थिक स्थिति ही मुहय्या कराती है। बच्चा स्कूल जाने के 'काम' के बदले स्कूल के सामने की चाय दूकान में प्याला धोने का काम' चुनता है, तो 'विकल्प के इस चयन' में उसकी 'जीवन-स्थितियों' की भूमिका को समझना मुश्किल काम नहीं है। इस चयन से भी जीवनस्थितियाँ' बदलती है। 'स्कूल जानेवाला बच्चा' 'प्याला धोनेवाले बच्चे' से अधिक सामाजिक सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। इन्हें परस्पर जुड़ी कड़ियों के रूप में समझा जा सकता है। 'समझने के बाद प्रेक्षक के पास भी कई विकल्प होते हैं -- बच्चा के माता-पिता को भला-बुरा कहना, दूकानदार को फटकारना, व्यवस्था को दोष देना, तत्काल कुछ व्यवस्था करना या कुल्हा मटकाकर चल देना -- इनमें से एक या अनेक विकल्प को प्रेक्षक अपनी 'जीवन-स्थितियों के अनुसार चुनता है। कहना न होगा कि 'जीवन-स्थितियों' में 'व्यक्तित्व के गुण' शामिल हैं। तात्पर्य यह कि 'जीवनस्थितियों' की सामाजिकता और राजनीति से 'अर्थ' का गहरा संबंध होता है।
iii. सत्ता का सबसे अधिक सुपरिभाषित, स्वीकृत और प्रभावी रूप 'अर्थ' होता है। कहना न होगा कि 'इच्छा' और 'विकल्पों' के चयन की स्वतंत्रता का अधिकार और 'इच्छित परिणाम पाने का सीधा संबंध 'अर्थ' से है। 'अर्थ' का प्रवाह 'रोजगार' से होता है। बीसवीं सदी का बीज शब्द था 'स्वतंत्रता' और इक्कीसवीं सदी का बीज शब्द है 'रोजगार' । 'मानव विकास का महत्त्वपूर्ण आधार है
आजीविका। अधिकतर लोगों के लिए इसका अर्थ है, रोजगार। लेकिन, परेशान करनेवाला तथ्य यह है कि औद्योगिक और विकासशील देशों की आर्थिक वृद्धि से रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं बन पा रहे हैं। इसके अलावे आजीविका से बंचित रह जाने की स्थिति, रोजगारविहीन लोगों की योग्यताओं के विकास, महत्त्व और आत्मसम्मान को भी नष्ट कर देती है। तेजी से आर्थिक वृद्धि कर रही अर्थव्यवस्था में भी रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं बन रहे हैं। [1] 'राजनीति का संबंध 'सत्ता' के अर्जन की स्वतंत्रता' से है। 'स्वतंत्रता' का संबंध 'रोजगार' और रोजगार के उपलब्ध विकल्पों' में से किसी विकल्प को चुनने की स्वतंत्रता ओर आधिकारिकता से है। मतलब यह कि 'राजनीति' का संबंध 'स्वतंत्रता' और 'स्वतंत्रता का संबंध 'रोजगार' से है। राजनीति को समझने के लिए रोजगार के रूप और प्रकार पर ध्यान देना जरूरी है। रोजगार उत्पादन के बाद वस्तु के बढ़े हुए महत्त्व के कारण उसकी कीमत में हुई बढ़ोत्तरी से उत्पन्न होता है। कीमत में बढ़ोत्तरी का संबंध
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'बाजार' और 'इजारेदारी' से होता है। बढ़ी हुई कीमत के कारण प्राप्त अतिरिक्त धन के वितरण में सम्यक संतुलन के अभाव से धन एक जगह जमा होने लगता है। यह धन 'पूँजी' में बदल जाता है और फिर 'अतिरिक्त धन का सृजन करता है। जो व्यवस्था वितरण के सम्यक संतुलन में अभाव उत्पन्न करने की पद्धतियों को अपनाती है, समाज के हाथ के बदले व्यक्ति के हाथ में अतिरिक्त धन के जमाव और उसके पूँजी में अंतरण को अपना लक्ष्य बनाती है, वह व्यवस्था पूँजीवादी व्यवस्था' कहलाती है।
iv.'पूँजीवाद' का जन्म अतिरिक्त-धन के सम्यक वितरण में असंतुलन से होता है और यह असंतुलन अंततः सामाजिक विषमता में परिणत होता है। सम्यक वितरण के अभाव से उत्पन्न असंतुलन का दुष्प्रभाव पूँजीवाद की कतिपय विकृतियों में अभिव्यक्त होता है। 'सामाजिक विषमता' पूँजीवाद से पैदा होती है और पूँजीवाद को पोसती है। सामाजिक विषमता' का यह मुख्य कारण है। मुख्य कारण मानने से ही यह बात स्पष्ट है कि कारण अन्य भी हैं। इन 'अन्य' कारणों को भी समझना बहुत जरूरी है, खासकर भारतीय परिप्रेक्ष्य में इन्हें समझना बहुत जरूरी है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में 'धन की अतिरिक्तता' के जमाव का मुख्य रूप से हिंदू धर्म के ब्राह्मणवादी गर्भ से निकले जातिवाद की सामाजिक पदानुक्रमता से और इसीलिए सामाजिक विषमता से भी गहरा रिश्ता है। कहना न होगा कि विषमताओं को प्रोत्साहन पूँजीवाद' से तो मिलता ही है, भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह प्रोत्साहन 'ब्रह्मणवाद से व्युत्पन्न जातिवाद' से भी मिलता है। एक बात और जिस पर हमारा ध्यान सहज ही नहीं जा पाता है -- पुराने समय का 'ब्राह्मणवाद' ही आज के समय में अपने को 'हिंदुत्व' के रूप में अभिव्यक्त कर रहा है। ध्यान रखना चाहिए कि 'हिंदुत्व' धर्म नहीं धर्म पर आधारित एक राजनीतिक विचारधारा है। 'हिंदुत्व' को विषमता के पोषक होने का चरित्र धर्म के विषमताकारी चरित्र से विरासत में मिला है। ऐसी हालत में किसी भी कारण से और किसी भी आधार पर गठित 'जातिवाद' की प्रेरणाएँ 'हिंदुत्व' के किसी भी रूप से निर्णायक लड़ाई नहीं लड़ सकती है। बल्कि कहना यह चाहिए कि 'जातिवाद' की राजनतिक सिद्धांतिकी अंततः 'हिंदुत्व' की ही सेवा करती है। 'पूँजीवाद' अपने मूल चरित्र में ही सामाजिक विषमताओं को बढ़ावा देनेवाला होता है। स्वभावतः कोई भी सिद्धांतिकी जो सामाजिक विषमताओं को किसी भी रूप में बढ़ावा देती है पूँजीवाद' की मित्र सिद्धांतिकी ही होती है। स्वाभाविक ही है कि पूँजीवाद की सिद्धांतिकी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर
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'धर्म' की और राष्ट्रीय स्तर पर 'हिंदुत्व' की सिद्धांतिकी से अपना गठबंधन करती है। इस गठबंधन को 'धर्म' और 'बाजार' के नव-संश्रय में पढ़ा जा सकता है।
v. 'स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व' की आकांक्षा रखनेवाली किसी भी सिद्धांतिकी को भारतीय परिप्रेक्ष्य की विशिष्टता के कारण पूँजीवाद और हिंदुत्व से एक साथ लड़ना पड़ेगा। अलग-अलग नहीं। डॉ आंबेडकर के विचार महत्त्वपूर्ण हैं, 'मेरे विचार से इस देश के दो दुश्मनों से कामगारों को निपटना होगा। ये दो दुश्मन हैं, ब्राह्मणवाद और पूँजीवाद ...। ब्राह्मणवाद से मेरा आशय स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व की भावनाओं के निषेध से है। यद्यपि ब्राह्मण इसके जनक हैं, लेकिन यह ब्राह्मणों तक ही सीमित नहीं होकर सभी जातियों में घुसा हुआ है। [2] 'दलित राजनीति' की एक प्रमुख समस्या यह भी है कि इस 'एक साथ' लड़ने की जरूरत को समझते हुए भी यह इसे अपने राजनीतिक बरताव में अपना नहीं पाती है।
vi. 'दलित राजीनीति' की समस्याओं को समझने के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण सूत्र है। इसे खोलें तो कुछ बातें समझ में आती हैं (I) देश के दो दुश्मन हैं -- ब्राह्मणवाद और पूँजीवाद। ये दोनों अंतर्गुंफित[3] हैं। ये ऊपर से दो दिखते हैं, लेकिन असल में एक ही हैं, इसलिए इन से एक साथ निपटना होगा। (II) 'ब्राह्मणवाद' के जनक ब्राह्मण हैं, लेकिन यह ब्राह्मणों तक सीमित नहीं है, यह सभी जातियों में घुसा हुआ है -- दलितों में भी यह घुसा हुआ हो सकता है। इस मुहिम का लक्ष्य सिर्फ ब्राह्मण' ही नहीं हो सकते हैं । (III) इनसे कामगार ही निपट सकता है। संसदीय राजनीति, बुद्धिजीवी आदि इसमें सहायक तो हो सकते हैं, लेकिन निपटना तो कामगारों को ही होगा। इसके लिए कामगारों को संगठित होना होगा। कामगारों को ऐसे संगठनों का लक्ष्य सिर्फ रोजी-रोटी से सीधे जुड़े सवालों को ही नहीं 'ब्राह्मणवाद' से निपटने से जुड़े सवाल को भी अपने एजेंडा में स्पष्ट तौर पर शामिल करना होगा। (IV) 'ब्राह्मणवाद' से लड़ने का मतलब, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व की भावनाओं के निषेध से लड़ना है, अर्थात स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व की बहाली के लिए संघर्ष करना है।
vi. सर्वविदित ही है कि 'स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व' की सामाजिक आकांक्षा 1979 की फ्राँसिसी क्रांति' के दौरान एक विशेष राजनीतिक संदर्भ में अपनी पूरी ताकत के साथ उभर कर सामने आई
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थी। बाद के दिनों में ये आकांक्षाएँ उस राजनीतिक संदर्भ से विच्छिन्न हो गयी तो इसका मतलब यह नहीं कि ये आकांक्षाएँ पूरी या बेमानी हो गई। इसका सीधा-सा मतलब यह है कि इन आकांक्षाओं को उभारनेवाली राजनीतिक शक्ति को उसमें अपने लिए कोई लाभजनक स्थिति नहीं दिख रही थी। यह अवसर तो 'फ्राँसिसी क्रांति के पहले और बाद के मूल्यांकन का नहीं है, लेकिन यह देखने का अवसर जरूर है कि 'दलित राजनीति' के संदर्भ में 'स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व' का कुछ अपना अलग और विशिष्ट अर्थ भी है। 'दलित राजनीति' के संदर्भ में इस विशिष्टता को ठीक से स्थिर नहीं कर पाना 'दलित राजनीति' की कतिपय समस्याओं के मूल में हो सकता है और है। डॉ. आंबेडकर के मंतव्य का अर्थ समझने के लिए 'दलित राजनीति' के ऐतिहासिक संदर्भ को याद कर लेना जरूरी है।
2. दलित राजनीति का ऐतिहासिक संदर्भ
i.'दलित राजनीति' समस्याओं को समझने के लिए इसके ऐतिहासिक संदर्भ को समझना जरूरी है। ऐतिहासिक संदर्भ में यह देखने की भी खास जरूरत है कि 'दलित राजनीति' की समस्याओं का कितना संबंध इतिहास से है और कितना संबंध मुख्यधारा की राजनीति की अंतर्बाधाओं से है। ऐतिहासिक संदर्भ में देखा जाये तो, आधुनिक अर्थ में भारतीय राजनीति की शुरूआत अंग्रेजों के औपनिवेशिक वर्चस्व से बाहर निकलने की छटपटाहट के साथ शुरू हुई और उसी छटपटाहट की की मति-गति से जुड़ी रही। 'अंग्रेजों के औपनिवेशिक वर्चस्व' से कौन-सा दुख जनमा था, यह एक बार ध्यान में लाने की जरूरत है। वह दुख था धन के विदेश चले जाने का दुख -- 'अंग्रेज राज सुख साज सजे सब भारी, पै धन विदेश चलि जात इहै अति ख्वारी [4] । किसका धन ? इस धन में दलितों की साझीदारी कितनी थी ? अगर 'बहुत नहीं थी तो 'धन के विदेश चले जाने का बहुत ' दुख दलितों को क्यों होना चाहिए था ? आजादी के आंदोलन के दौरान 'आजादी' का क्या अर्थ बन रहा था, इसे ठीक से नहीं समझा जाये तो 'दलित राजनीति' का आजादी के आंदोलन से कैसा संबंध हो सकता था, इसका अनुमान भी सहज ही नहीं लगाया जा सकता है।
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ii.'दलित राजनीति की समस्याओं' को समझने के लिए आजादी के आंदोलन की मुख्यधारा से 'दलित राजनीति' के द्वंद्वात्मक रिश्ते की ऐतिहासिकता को कोरी भावुकता से ऊपर उठकर समझना जरूरी है। आजादी के आंदोलन की मुख्यधारा से 'दलित राजनीति' के द्वंद्वात्मक रिश्ते में यह बात निहित थी कि 'दलित राजनीति' का लक्ष्य अंग्रेजों के बाह्य औपनिवेशिक शक्ति से मुक्ति के साथ ही, वर्णव्यवस्था के वर्चस्व के साथ आंतरिक उपनिवेश को मजबूत करनेवाली शक्तियों के द्वारा निर्मित आजादी के आंदोलन की मुख्यधारा के भावुकतापूर्ण राष्ट्रवाद के प्रपंच से, अर्थात 'आंतरिक उपनिवेश' से भी मुक्त होना था। आजादी के आंदोलन की मुख्यधारा सिर्फ बाहरी औपनिवेशिकता से लड़ रही थी, जबकि 'दलित राजनीति' के सामने 'आंतरिक औपनिवेशिकता' का सवाल भी मुखर था। तात्पर्य यह कि 'आजादी के आंदोलन की मुख्यधारा की तुलना में 'दलित राजनीति' का संघर्ष दोहरा और अधिक पूर्ण होने के कारण कठिन भी था। जाहिर है कि 'दलित राजनीति' का टकराव आजादी के आंदोलन की मुख्यधारा से भी होता था। मुख्यधारा की राजनीति दलितों के दुख के प्रति इतनी संवेदनशील नहीं थी कि वह इस टकराव की तह में जाकर इसके वास्तविक कारणों को समझती और इसके औचित्य का प्रतिपादन करती । मुख्यधारा की राजनीति उलटे दलित राजनीति' पर मन से आजादी के आंदोलन की भागीदार नहीं बनने या रोड़ा अटकाने जैसे मिथ्या आरोपी मनोभाव से ग्रस्त हो जाती थी।
iii. आजादी के आंदोलन की मुख्यधारा' के न सिर्फ नैसर्गिक नेता थे गाँधी जी, बल्कि वे उसके प्रतीक पुरुष भी थे। 'दलित राजनीति' और 'मुख्यधारा के अंतस्संबंध को जानने के लिए गाँधीजी के दृष्टिकोण को जानना भी आवश्यक है। गाँधीजी न सिर्फ महात्मा के रूप में जाने जाते हैं, बल्कि वे महात्मा थे भी। उनकी यह बद्धमूल धारणा थी कि 'अस्पृश्यता जैसे ही खत्म होगी, स्वयं जाति प्रथा भी शुद्ध हो जायेगी, अर्थात मेरे स्वप्नों के अनुसार शुद्ध हो जायेगी। यह सच्ची वर्णाश्रम व्यवस्था बन जायेगी, जिसके अंतर्गत समाज चार भागों में विभाजित होगा और प्रत्येक भाग एक दूसरे का पूरक होगा, कोई छोटा या बड़ा नहीं होगा। हिंदू धर्म के समग्र अंग के लिए प्रत्येक भाग समान रूप से आवश्यक होगा या एक भाग उतना ही आवश्यक होगा जितना दूसरा। [5] गाँधीजी की इस धारणा को थोड़ा खोलें तो कुछ बातें साफ होती हैं : (क) सच्ची वर्ण व्यवस्था अच्छी है। (ख) इसके अंतर्गत समाज चार भागों में (श्रम के आधार पर) विभाजित होता है। (ग) सच्ची 'वर्ण व्यवस्था' के अंर्तगत
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ये चारो विभाग एक दूसरे से छोटे या बड़े नहीं होते, एक दूसरे के पूरक होते हैं। (घ) इन चारो विभागों के सदस्यों की सामाजिक समता का सवाल गाँधीजी की नजर से ओझल रहता है। (ङ) इन चारो विभागों के सदस्यों की आर्थिक समता का सवाल भी गाँधीजी की नजर से ओझल रहता है। (च) गाँधीजी वर्णव्यवस्था' को 'हिंदू धर्म' का आंतरिक मामला मानते थे और इसकी 'विकृतियों' को 'सामाजिक-धार्मिक मामला' मानते हुए इन विकृतियों को धर्म में निहित करुणा' के बल पर सामाजिक आंदोलन से दूर कर सच्ची वर्णव्यवस्था को कायम करना चाहते थे। (छ) गाँधीजी 'दलित समस्या' को 'राजनीति' से काटते थे तथा 'धर्म' और 'समाज' से जोड़ते थे। (ज) 'दलित समस्या' को 'राजनीति' से काटने तथा 'धर्म' और 'समाज' से जोड़ने के लिए गाँधीजी के द्वारा की गई 'राजनीतिक कार्रवाइयों' का गाँधीजी के 'महात्मापन से गहरा संबंध है। (झ) गाँधीजी की इन मान्यताओं को मुख्यधारा की राजनीति' से अनुमोदन और समर्थन प्राप्त था।
iv. इसका नतीजा यह था कि मुख्यधारा की राजनीति कं अंतर्मन में यह बात बनी हुई थी कि 'दलित समस्या' का 'राजनीतिक जनतांत्रिकता' से कोई सरोकार नहीं है। अतः राजनीतिक नेताओं को इससे दूर ही रहना चाहिए; इसका सरोकार 'धर्म' से है अतः धार्मिक नेता, पंडा, पुजारी, संत, महात्मा को ही 'दलित समस्या' पर कुछ सोचना और करना चाहिए। 'दलित राजनीति' इन बातों से घोर असहमत थी। 'दलित राजनीति' के अनुसार (क) 'वर्ण व्यवस्था' अपने किसी भी रूप में अच्छी नहीं हो सकती है। (ख) 'वर्ण व्यवस्था' में 'श्रम' का नहीं, जन्म के आधार पर 'श्रमिकों' का विभाजन होता है। (ग) 'वर्ण व्यवस्था' के विभाग अनिवार्यतः एक दूसरे से बड़े या छोटे होते हैं, एक दूसरे के पूरक नहीं 'स्वामी' या 'सेवक' होते हैं। (घ) 'दलित राजनीति' में सामाजिक समता मूल और मानवाधिकार का सवाल बनकर उभरता है। (ङ) 'दलित राजनीति' मूल प्रश्न में निहित सामाजिक उलझावों में पड़कर आर्थिक समता का सवाल पूरी तत्परता से नहीं उठा पाता है। हालाँकि मुख्यधारा की राजनीति भी आर्थिक समता का सवाल नहीं उठाती है। (च) 'दलित राजनीति' किसी भी रूप में 'वर्णव्यवस्था' को 'हिंदू धर्म' का आंतरिक मामला नहीं मानती थी। 'धर्म में निहित करुणा' पर उसे कत्तई विश्वास नहीं था, वह 'राजनीति में निहित अधिकार चेतना' को महत्त्व प्रदान करती थी। 'वर्णव्यवस्था' के सभी रूपों को समूल उखाड फेकना चाहती थी । (छ) 'दलित राजनीति' अपने 'राजनीतिक एजेंडे' में 'दलित समस्या' को पूरे आग्रह के साथ समेटती थी,
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प्रफुल्ल कोलख्यान दलित राजनीति की समस्याएँ डॉ. आंबेडकर मेरे विचार से इस देश के दो दुश्मनों से कामगारों को निपटना होगा। ये दो दुश्मन हैं, ब्राह्मणवाद और पूँजीवाद एक... । ब्राह्मणवाद से मेरा आशय स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व की भावनाओं के निषेध से है। यद्यपि ब्राह्मण इसके जनक हैं, लेकिन यह ब्राह्मणों तक ही सीमित नहीं होकर सभी जातियों में घुसा हुआ है। - डॉ. आंबेडकर एक. स्थिति और संदर्भः राजनीति क्या है i दलित एक विशुद्ध भारतीय स्थिति है और इसीलिए 'दलित राजनीति की समस्या' अपने मूल चरित्र में बिल्कुल भारतीय यथार्थ है। दलित का अर्थ और अभिप्राय सिर्फ भारतीय संदर्भ से हासिल किये जा सकते हैं। दलित समस्याओं से मिलती-जुलती समस्याएँ अन्य समाजों में भी हो सकती है, लेकिन उन पर प्रसंगवश ही चर्चा की जा सकती है। उनके साथ दलित समस्याओं को समीकृत पृ. एक कुल पृ. तैंतीस करना समस्या के मूल से भटकाव की आशंकाओं को सघन करता है। कहना न होगा कि यह भटकाव मूल समस्या को उलझाव में डाल देता है और उसके चरित्र को समझने में बाधा उत्पन्न करता है। ऐसा कई बार शरारतन किया जाता है, तो कई बार अनजाने ही हम उस उलझन में फँस जाते हैं। कोशिश की जा सकती है कि उलझाव और भटकाव के ऐसे संदर्भों से बचा जाये। भारत बहुत बड़ा देश है, भौगोलिक रूप से ही नहीं, सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टि से भी इतना वैविध्य है कि कई बार इसके देश नहीं 'महादेश' होने का भ्रम होता है। 'महादेश' न हो, तो भी इतना तो है कि कोई भी 'भारतीय स्थिति अपनी सामाजिकता में एकार्थी नहीं हो सकती है और न पूरे भारत पर एक ही अर्थ में लागू हो सकती है। उत्तर और दक्षिण भारत की या फिर पूर्व और पूर्वोत्तर की दलित राजनीति से हिंदी क्षेत्र की दलित राजनीति भिन्न हो सकती है। इस भिन्नता के कारण वहाँ की सामाजिक-आर्थिक संरचना, समकालीन राजनीतिक, सांस्कृतिक स्थिति आदि में निहित हैं। कहना न होगा कि 'दलित राजनीति की समस्या का अपना क्षेत्रीय प्रसंग भी है। जाहिर है कि 'दलित राजनीति की समस्या' पर विचार करते हुए यहाँ व्यापक और सामान्य नजरिया ही अपनाना बेहतर होगा। विशिष्ट क्षेत्र की 'दलित राजनीति की समस्या पर केंद्रित अध्ययन में विशिष्ट नजरिया अपनाया जा सकता है। ii. राजनीति मूलतः 'सत्ता-विमर्श' है। जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में 'सत्ता' की व्याप्ति होती है। यह व्याप्ति कई बार दृश्य होती है, तो कई बार अदृश्य भी रहती है। दृश्य हो या अदृश्य किंतु 'सत्ता' की उपस्थिति वहाँ होती जरूर है। तात्पर्य यह कि सत्ता राजनीति का केंद्रीय विधान है। कहना न होगा कि राजनीतिक आंदोलन का मकसद 'सत्ता की संरचना' में परिवर्त्तन के माध्यम से समाज की संरचना' में परिवर्त्तन करना होता है और सामाजिक आंदोलन का मकसद 'सामाजिक संरचना' में परिवर्त्तन के माध्यम से सत्ता की संरचना' में परिवर्त्तन करना होता है। दोनों एक दूसरे के पूरक भी हैं और एक दूसरे से टकराते भी हैं। यहीं पर यह स्मरण कर लेना जरूरी है कि सत्ता का मतलब होता है, इच्छित परिणाम पाने की क्षमता । 'इच्छा' क्या है, और यह भी कि इच्छा का निर्माण कैसे होता है, इस पर ध्यान देना जरूरी है। 'इच्छा' उपलब्ध विकल्पों में से किसी एक विकल्प के चयन में अभिव्यक्त होती है। विकल्पों का चयन प्राथमिक रूप से आर्थिक और उसके साथ-साथ सांस्कृतिक, सामाजिक, ऐतिहासिक, भौतिक आदि कारणों पर, अर्थात 'जीवन-स्थितियों' पर पृ. दो कुल पृ. तैंतीस निर्भर करता है। इस प्रसंग में, यह भी ध्यान में रखने की जरूरत है कि आर्थिक आधार को विकसित करने के भी कई विकल्प हो सकते हैं। इन विकल्पों में से किसी एक के चयन का आधार प्रमुख रूप से आर्थिक स्थिति ही मुहय्या कराती है। बच्चा स्कूल जाने के 'काम' के बदले स्कूल के सामने की चाय दूकान में प्याला धोने का काम' चुनता है, तो 'विकल्प के इस चयन' में उसकी 'जीवन-स्थितियों' की भूमिका को समझना मुश्किल काम नहीं है। इस चयन से भी जीवनस्थितियाँ' बदलती है। 'स्कूल जानेवाला बच्चा' 'प्याला धोनेवाले बच्चे' से अधिक सामाजिक सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। इन्हें परस्पर जुड़ी कड़ियों के रूप में समझा जा सकता है। 'समझने के बाद प्रेक्षक के पास भी कई विकल्प होते हैं -- बच्चा के माता-पिता को भला-बुरा कहना, दूकानदार को फटकारना, व्यवस्था को दोष देना, तत्काल कुछ व्यवस्था करना या कुल्हा मटकाकर चल देना -- इनमें से एक या अनेक विकल्प को प्रेक्षक अपनी 'जीवन-स्थितियों के अनुसार चुनता है। कहना न होगा कि 'जीवन-स्थितियों' में 'व्यक्तित्व के गुण' शामिल हैं। तात्पर्य यह कि 'जीवनस्थितियों' की सामाजिकता और राजनीति से 'अर्थ' का गहरा संबंध होता है। iii. सत्ता का सबसे अधिक सुपरिभाषित, स्वीकृत और प्रभावी रूप 'अर्थ' होता है। कहना न होगा कि 'इच्छा' और 'विकल्पों' के चयन की स्वतंत्रता का अधिकार और 'इच्छित परिणाम पाने का सीधा संबंध 'अर्थ' से है। 'अर्थ' का प्रवाह 'रोजगार' से होता है। बीसवीं सदी का बीज शब्द था 'स्वतंत्रता' और इक्कीसवीं सदी का बीज शब्द है 'रोजगार' । 'मानव विकास का महत्त्वपूर्ण आधार है आजीविका। अधिकतर लोगों के लिए इसका अर्थ है, रोजगार। लेकिन, परेशान करनेवाला तथ्य यह है कि औद्योगिक और विकासशील देशों की आर्थिक वृद्धि से रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं बन पा रहे हैं। इसके अलावे आजीविका से बंचित रह जाने की स्थिति, रोजगारविहीन लोगों की योग्यताओं के विकास, महत्त्व और आत्मसम्मान को भी नष्ट कर देती है। तेजी से आर्थिक वृद्धि कर रही अर्थव्यवस्था में भी रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं बन रहे हैं। [एक] 'राजनीति का संबंध 'सत्ता' के अर्जन की स्वतंत्रता' से है। 'स्वतंत्रता' का संबंध 'रोजगार' और रोजगार के उपलब्ध विकल्पों' में से किसी विकल्प को चुनने की स्वतंत्रता ओर आधिकारिकता से है। मतलब यह कि 'राजनीति' का संबंध 'स्वतंत्रता' और 'स्वतंत्रता का संबंध 'रोजगार' से है। राजनीति को समझने के लिए रोजगार के रूप और प्रकार पर ध्यान देना जरूरी है। रोजगार उत्पादन के बाद वस्तु के बढ़े हुए महत्त्व के कारण उसकी कीमत में हुई बढ़ोत्तरी से उत्पन्न होता है। कीमत में बढ़ोत्तरी का संबंध पृ. तीन कुल पृ. तैंतीस 'बाजार' और 'इजारेदारी' से होता है। बढ़ी हुई कीमत के कारण प्राप्त अतिरिक्त धन के वितरण में सम्यक संतुलन के अभाव से धन एक जगह जमा होने लगता है। यह धन 'पूँजी' में बदल जाता है और फिर 'अतिरिक्त धन का सृजन करता है। जो व्यवस्था वितरण के सम्यक संतुलन में अभाव उत्पन्न करने की पद्धतियों को अपनाती है, समाज के हाथ के बदले व्यक्ति के हाथ में अतिरिक्त धन के जमाव और उसके पूँजी में अंतरण को अपना लक्ष्य बनाती है, वह व्यवस्था पूँजीवादी व्यवस्था' कहलाती है। iv.'पूँजीवाद' का जन्म अतिरिक्त-धन के सम्यक वितरण में असंतुलन से होता है और यह असंतुलन अंततः सामाजिक विषमता में परिणत होता है। सम्यक वितरण के अभाव से उत्पन्न असंतुलन का दुष्प्रभाव पूँजीवाद की कतिपय विकृतियों में अभिव्यक्त होता है। 'सामाजिक विषमता' पूँजीवाद से पैदा होती है और पूँजीवाद को पोसती है। सामाजिक विषमता' का यह मुख्य कारण है। मुख्य कारण मानने से ही यह बात स्पष्ट है कि कारण अन्य भी हैं। इन 'अन्य' कारणों को भी समझना बहुत जरूरी है, खासकर भारतीय परिप्रेक्ष्य में इन्हें समझना बहुत जरूरी है। भारतीय परिप्रेक्ष्य में 'धन की अतिरिक्तता' के जमाव का मुख्य रूप से हिंदू धर्म के ब्राह्मणवादी गर्भ से निकले जातिवाद की सामाजिक पदानुक्रमता से और इसीलिए सामाजिक विषमता से भी गहरा रिश्ता है। कहना न होगा कि विषमताओं को प्रोत्साहन पूँजीवाद' से तो मिलता ही है, भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह प्रोत्साहन 'ब्रह्मणवाद से व्युत्पन्न जातिवाद' से भी मिलता है। एक बात और जिस पर हमारा ध्यान सहज ही नहीं जा पाता है -- पुराने समय का 'ब्राह्मणवाद' ही आज के समय में अपने को 'हिंदुत्व' के रूप में अभिव्यक्त कर रहा है। ध्यान रखना चाहिए कि 'हिंदुत्व' धर्म नहीं धर्म पर आधारित एक राजनीतिक विचारधारा है। 'हिंदुत्व' को विषमता के पोषक होने का चरित्र धर्म के विषमताकारी चरित्र से विरासत में मिला है। ऐसी हालत में किसी भी कारण से और किसी भी आधार पर गठित 'जातिवाद' की प्रेरणाएँ 'हिंदुत्व' के किसी भी रूप से निर्णायक लड़ाई नहीं लड़ सकती है। बल्कि कहना यह चाहिए कि 'जातिवाद' की राजनतिक सिद्धांतिकी अंततः 'हिंदुत्व' की ही सेवा करती है। 'पूँजीवाद' अपने मूल चरित्र में ही सामाजिक विषमताओं को बढ़ावा देनेवाला होता है। स्वभावतः कोई भी सिद्धांतिकी जो सामाजिक विषमताओं को किसी भी रूप में बढ़ावा देती है पूँजीवाद' की मित्र सिद्धांतिकी ही होती है। स्वाभाविक ही है कि पूँजीवाद की सिद्धांतिकी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पृ. चार कुल पृ. तैंतीस 'धर्म' की और राष्ट्रीय स्तर पर 'हिंदुत्व' की सिद्धांतिकी से अपना गठबंधन करती है। इस गठबंधन को 'धर्म' और 'बाजार' के नव-संश्रय में पढ़ा जा सकता है। v. 'स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व' की आकांक्षा रखनेवाली किसी भी सिद्धांतिकी को भारतीय परिप्रेक्ष्य की विशिष्टता के कारण पूँजीवाद और हिंदुत्व से एक साथ लड़ना पड़ेगा। अलग-अलग नहीं। डॉ आंबेडकर के विचार महत्त्वपूर्ण हैं, 'मेरे विचार से इस देश के दो दुश्मनों से कामगारों को निपटना होगा। ये दो दुश्मन हैं, ब्राह्मणवाद और पूँजीवाद ...। ब्राह्मणवाद से मेरा आशय स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व की भावनाओं के निषेध से है। यद्यपि ब्राह्मण इसके जनक हैं, लेकिन यह ब्राह्मणों तक ही सीमित नहीं होकर सभी जातियों में घुसा हुआ है। [दो] 'दलित राजनीति' की एक प्रमुख समस्या यह भी है कि इस 'एक साथ' लड़ने की जरूरत को समझते हुए भी यह इसे अपने राजनीतिक बरताव में अपना नहीं पाती है। vi. 'दलित राजीनीति' की समस्याओं को समझने के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण सूत्र है। इसे खोलें तो कुछ बातें समझ में आती हैं देश के दो दुश्मन हैं -- ब्राह्मणवाद और पूँजीवाद। ये दोनों अंतर्गुंफित[तीन] हैं। ये ऊपर से दो दिखते हैं, लेकिन असल में एक ही हैं, इसलिए इन से एक साथ निपटना होगा। 'ब्राह्मणवाद' के जनक ब्राह्मण हैं, लेकिन यह ब्राह्मणों तक सीमित नहीं है, यह सभी जातियों में घुसा हुआ है -- दलितों में भी यह घुसा हुआ हो सकता है। इस मुहिम का लक्ष्य सिर्फ ब्राह्मण' ही नहीं हो सकते हैं । इनसे कामगार ही निपट सकता है। संसदीय राजनीति, बुद्धिजीवी आदि इसमें सहायक तो हो सकते हैं, लेकिन निपटना तो कामगारों को ही होगा। इसके लिए कामगारों को संगठित होना होगा। कामगारों को ऐसे संगठनों का लक्ष्य सिर्फ रोजी-रोटी से सीधे जुड़े सवालों को ही नहीं 'ब्राह्मणवाद' से निपटने से जुड़े सवाल को भी अपने एजेंडा में स्पष्ट तौर पर शामिल करना होगा। 'ब्राह्मणवाद' से लड़ने का मतलब, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व की भावनाओं के निषेध से लड़ना है, अर्थात स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व की बहाली के लिए संघर्ष करना है। vi. सर्वविदित ही है कि 'स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व' की सामाजिक आकांक्षा एक हज़ार नौ सौ उन्यासी की फ्राँसिसी क्रांति' के दौरान एक विशेष राजनीतिक संदर्भ में अपनी पूरी ताकत के साथ उभर कर सामने आई पृ. पाँच कुल पृ. तैंतीस थी। बाद के दिनों में ये आकांक्षाएँ उस राजनीतिक संदर्भ से विच्छिन्न हो गयी तो इसका मतलब यह नहीं कि ये आकांक्षाएँ पूरी या बेमानी हो गई। इसका सीधा-सा मतलब यह है कि इन आकांक्षाओं को उभारनेवाली राजनीतिक शक्ति को उसमें अपने लिए कोई लाभजनक स्थिति नहीं दिख रही थी। यह अवसर तो 'फ्राँसिसी क्रांति के पहले और बाद के मूल्यांकन का नहीं है, लेकिन यह देखने का अवसर जरूर है कि 'दलित राजनीति' के संदर्भ में 'स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व' का कुछ अपना अलग और विशिष्ट अर्थ भी है। 'दलित राजनीति' के संदर्भ में इस विशिष्टता को ठीक से स्थिर नहीं कर पाना 'दलित राजनीति' की कतिपय समस्याओं के मूल में हो सकता है और है। डॉ. आंबेडकर के मंतव्य का अर्थ समझने के लिए 'दलित राजनीति' के ऐतिहासिक संदर्भ को याद कर लेना जरूरी है। दो. दलित राजनीति का ऐतिहासिक संदर्भ i.'दलित राजनीति' समस्याओं को समझने के लिए इसके ऐतिहासिक संदर्भ को समझना जरूरी है। ऐतिहासिक संदर्भ में यह देखने की भी खास जरूरत है कि 'दलित राजनीति' की समस्याओं का कितना संबंध इतिहास से है और कितना संबंध मुख्यधारा की राजनीति की अंतर्बाधाओं से है। ऐतिहासिक संदर्भ में देखा जाये तो, आधुनिक अर्थ में भारतीय राजनीति की शुरूआत अंग्रेजों के औपनिवेशिक वर्चस्व से बाहर निकलने की छटपटाहट के साथ शुरू हुई और उसी छटपटाहट की की मति-गति से जुड़ी रही। 'अंग्रेजों के औपनिवेशिक वर्चस्व' से कौन-सा दुख जनमा था, यह एक बार ध्यान में लाने की जरूरत है। वह दुख था धन के विदेश चले जाने का दुख -- 'अंग्रेज राज सुख साज सजे सब भारी, पै धन विदेश चलि जात इहै अति ख्वारी [चार] । किसका धन ? इस धन में दलितों की साझीदारी कितनी थी ? अगर 'बहुत नहीं थी तो 'धन के विदेश चले जाने का बहुत ' दुख दलितों को क्यों होना चाहिए था ? आजादी के आंदोलन के दौरान 'आजादी' का क्या अर्थ बन रहा था, इसे ठीक से नहीं समझा जाये तो 'दलित राजनीति' का आजादी के आंदोलन से कैसा संबंध हो सकता था, इसका अनुमान भी सहज ही नहीं लगाया जा सकता है। पृ. छः कुल पृ. तैंतीस ii.'दलित राजनीति की समस्याओं' को समझने के लिए आजादी के आंदोलन की मुख्यधारा से 'दलित राजनीति' के द्वंद्वात्मक रिश्ते की ऐतिहासिकता को कोरी भावुकता से ऊपर उठकर समझना जरूरी है। आजादी के आंदोलन की मुख्यधारा से 'दलित राजनीति' के द्वंद्वात्मक रिश्ते में यह बात निहित थी कि 'दलित राजनीति' का लक्ष्य अंग्रेजों के बाह्य औपनिवेशिक शक्ति से मुक्ति के साथ ही, वर्णव्यवस्था के वर्चस्व के साथ आंतरिक उपनिवेश को मजबूत करनेवाली शक्तियों के द्वारा निर्मित आजादी के आंदोलन की मुख्यधारा के भावुकतापूर्ण राष्ट्रवाद के प्रपंच से, अर्थात 'आंतरिक उपनिवेश' से भी मुक्त होना था। आजादी के आंदोलन की मुख्यधारा सिर्फ बाहरी औपनिवेशिकता से लड़ रही थी, जबकि 'दलित राजनीति' के सामने 'आंतरिक औपनिवेशिकता' का सवाल भी मुखर था। तात्पर्य यह कि 'आजादी के आंदोलन की मुख्यधारा की तुलना में 'दलित राजनीति' का संघर्ष दोहरा और अधिक पूर्ण होने के कारण कठिन भी था। जाहिर है कि 'दलित राजनीति' का टकराव आजादी के आंदोलन की मुख्यधारा से भी होता था। मुख्यधारा की राजनीति दलितों के दुख के प्रति इतनी संवेदनशील नहीं थी कि वह इस टकराव की तह में जाकर इसके वास्तविक कारणों को समझती और इसके औचित्य का प्रतिपादन करती । मुख्यधारा की राजनीति उलटे दलित राजनीति' पर मन से आजादी के आंदोलन की भागीदार नहीं बनने या रोड़ा अटकाने जैसे मिथ्या आरोपी मनोभाव से ग्रस्त हो जाती थी। iii. आजादी के आंदोलन की मुख्यधारा' के न सिर्फ नैसर्गिक नेता थे गाँधी जी, बल्कि वे उसके प्रतीक पुरुष भी थे। 'दलित राजनीति' और 'मुख्यधारा के अंतस्संबंध को जानने के लिए गाँधीजी के दृष्टिकोण को जानना भी आवश्यक है। गाँधीजी न सिर्फ महात्मा के रूप में जाने जाते हैं, बल्कि वे महात्मा थे भी। उनकी यह बद्धमूल धारणा थी कि 'अस्पृश्यता जैसे ही खत्म होगी, स्वयं जाति प्रथा भी शुद्ध हो जायेगी, अर्थात मेरे स्वप्नों के अनुसार शुद्ध हो जायेगी। यह सच्ची वर्णाश्रम व्यवस्था बन जायेगी, जिसके अंतर्गत समाज चार भागों में विभाजित होगा और प्रत्येक भाग एक दूसरे का पूरक होगा, कोई छोटा या बड़ा नहीं होगा। हिंदू धर्म के समग्र अंग के लिए प्रत्येक भाग समान रूप से आवश्यक होगा या एक भाग उतना ही आवश्यक होगा जितना दूसरा। [पाँच] गाँधीजी की इस धारणा को थोड़ा खोलें तो कुछ बातें साफ होती हैं : सच्ची वर्ण व्यवस्था अच्छी है। इसके अंतर्गत समाज चार भागों में विभाजित होता है। सच्ची 'वर्ण व्यवस्था' के अंर्तगत पृ. सात कुल पृ. तैंतीस ये चारो विभाग एक दूसरे से छोटे या बड़े नहीं होते, एक दूसरे के पूरक होते हैं। इन चारो विभागों के सदस्यों की सामाजिक समता का सवाल गाँधीजी की नजर से ओझल रहता है। इन चारो विभागों के सदस्यों की आर्थिक समता का सवाल भी गाँधीजी की नजर से ओझल रहता है। गाँधीजी वर्णव्यवस्था' को 'हिंदू धर्म' का आंतरिक मामला मानते थे और इसकी 'विकृतियों' को 'सामाजिक-धार्मिक मामला' मानते हुए इन विकृतियों को धर्म में निहित करुणा' के बल पर सामाजिक आंदोलन से दूर कर सच्ची वर्णव्यवस्था को कायम करना चाहते थे। गाँधीजी 'दलित समस्या' को 'राजनीति' से काटते थे तथा 'धर्म' और 'समाज' से जोड़ते थे। 'दलित समस्या' को 'राजनीति' से काटने तथा 'धर्म' और 'समाज' से जोड़ने के लिए गाँधीजी के द्वारा की गई 'राजनीतिक कार्रवाइयों' का गाँधीजी के 'महात्मापन से गहरा संबंध है। गाँधीजी की इन मान्यताओं को मुख्यधारा की राजनीति' से अनुमोदन और समर्थन प्राप्त था। iv. इसका नतीजा यह था कि मुख्यधारा की राजनीति कं अंतर्मन में यह बात बनी हुई थी कि 'दलित समस्या' का 'राजनीतिक जनतांत्रिकता' से कोई सरोकार नहीं है। अतः राजनीतिक नेताओं को इससे दूर ही रहना चाहिए; इसका सरोकार 'धर्म' से है अतः धार्मिक नेता, पंडा, पुजारी, संत, महात्मा को ही 'दलित समस्या' पर कुछ सोचना और करना चाहिए। 'दलित राजनीति' इन बातों से घोर असहमत थी। 'दलित राजनीति' के अनुसार 'वर्ण व्यवस्था' अपने किसी भी रूप में अच्छी नहीं हो सकती है। 'वर्ण व्यवस्था' में 'श्रम' का नहीं, जन्म के आधार पर 'श्रमिकों' का विभाजन होता है। 'वर्ण व्यवस्था' के विभाग अनिवार्यतः एक दूसरे से बड़े या छोटे होते हैं, एक दूसरे के पूरक नहीं 'स्वामी' या 'सेवक' होते हैं। 'दलित राजनीति' में सामाजिक समता मूल और मानवाधिकार का सवाल बनकर उभरता है। 'दलित राजनीति' मूल प्रश्न में निहित सामाजिक उलझावों में पड़कर आर्थिक समता का सवाल पूरी तत्परता से नहीं उठा पाता है। हालाँकि मुख्यधारा की राजनीति भी आर्थिक समता का सवाल नहीं उठाती है। 'दलित राजनीति' किसी भी रूप में 'वर्णव्यवस्था' को 'हिंदू धर्म' का आंतरिक मामला नहीं मानती थी। 'धर्म में निहित करुणा' पर उसे कत्तई विश्वास नहीं था, वह 'राजनीति में निहित अधिकार चेतना' को महत्त्व प्रदान करती थी। 'वर्णव्यवस्था' के सभी रूपों को समूल उखाड फेकना चाहती थी । 'दलित राजनीति' अपने 'राजनीतिक एजेंडे' में 'दलित समस्या' को पूरे आग्रह के साथ समेटती थी, पृ. आठ कुल पृ. तैंतीस
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भद्र योग लाभः ज्योतिष शास्त्र में कुंडली देखकर व्यक्ति का भविष्य बताया जाता है। इसी प्रकार हस्तरेखा शास्त्र में हाथ की रेखाओं और निशानों के जरिए भविष्यवाणियां की जाती हैं। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हथेली पर कुछ रेखाएं और निशान बहुत भाग्यशाली होते हैं। इनके होने से व्यक्ति जीवन में बहुत कुछ हासिल करता है। आज के लेख में हम बात करेंगे भद्र योग के बारे में. जिस व्यक्ति के हाथ में यह योग होता है उसे करोड़पति बनने से कोई नहीं रोक सकता।
जब हथेली में बुध पर्वत पूर्ण विकसित हो और बुध रेखा सीधी, पतली, गहरी और लाल रंग की हो तो व्यक्ति के हाथ में भद्र योग बनता है। ऐसे लोग अरबपति या बिजनेस टायकून होते हैं।
जिन लोगों की हथेली में शश योग बनता है। ऐसे लोग बिजनेसमैन होते हैं। ये लोग साहसी होते हैं और लोग आसानी से इनके मित्र बन जाते हैं। ये लोग बुध ग्रह से संबंधित व्यवसाय में अच्छा नाम कमाते हैं।
जिन लोगों की हथेली में बुध पर्वत पर मछली का चिन्ह होता है, ऐसे लोगों को व्यापार में बहुत सफलता मिलती है। इन लोगों पर मां लक्ष्मी हमेशा मेहरबान रहती हैं। ये लोग कंजूस नहीं होते और विलासितापूर्ण जीवन जीना पसंद करते हैं।
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भद्र योग लाभः ज्योतिष शास्त्र में कुंडली देखकर व्यक्ति का भविष्य बताया जाता है। इसी प्रकार हस्तरेखा शास्त्र में हाथ की रेखाओं और निशानों के जरिए भविष्यवाणियां की जाती हैं। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हथेली पर कुछ रेखाएं और निशान बहुत भाग्यशाली होते हैं। इनके होने से व्यक्ति जीवन में बहुत कुछ हासिल करता है। आज के लेख में हम बात करेंगे भद्र योग के बारे में. जिस व्यक्ति के हाथ में यह योग होता है उसे करोड़पति बनने से कोई नहीं रोक सकता। जब हथेली में बुध पर्वत पूर्ण विकसित हो और बुध रेखा सीधी, पतली, गहरी और लाल रंग की हो तो व्यक्ति के हाथ में भद्र योग बनता है। ऐसे लोग अरबपति या बिजनेस टायकून होते हैं। जिन लोगों की हथेली में शश योग बनता है। ऐसे लोग बिजनेसमैन होते हैं। ये लोग साहसी होते हैं और लोग आसानी से इनके मित्र बन जाते हैं। ये लोग बुध ग्रह से संबंधित व्यवसाय में अच्छा नाम कमाते हैं। जिन लोगों की हथेली में बुध पर्वत पर मछली का चिन्ह होता है, ऐसे लोगों को व्यापार में बहुत सफलता मिलती है। इन लोगों पर मां लक्ष्मी हमेशा मेहरबान रहती हैं। ये लोग कंजूस नहीं होते और विलासितापूर्ण जीवन जीना पसंद करते हैं।
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क्या मैं स्तनपान के दौरान पॉलिज़ोरब ले सकता हूं?
स्तन दूध के लिए सबसे अच्छा खाना हैएक वर्ष से कम उम्र के नवजात शिशु और बच्चे। यह कोई रहस्य नहीं है कि इसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व, विटामिन, ट्रेस तत्व और खनिज शामिल हैं। स्तनपान बच्चे में उचित पाचन और प्राकृतिक आंतों microflora की तेजी से स्थापना को बढ़ावा देता है। इस अवधि के दौरान एक महिला को कोई दवा नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि वे बच्चे को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बावजूद, बीमारी से कोई नई मां प्रतिरक्षा नहीं है।
यदि आप सोच रहे हैं कि यह कैसे प्रभावित हो सकता हैस्तनपान के दौरान बच्चे "पोलिओरब", महिलाओं की समीक्षा और चिकित्सा दृष्टिकोण के बारे में आज आपको पता चल जाएगा। उपयोग के लिए ध्यान और निर्देशों को बाहर मत करो।
स्तन में Polysorb लेने से पहलेखिलाना, एनोटेशन से परिचित होना जरूरी है। यह दवा, संकेत और आवेदन की विशेष विशेषताओं की संरचना दिखाता है। दवा "Polysorb" एक आंतों के एंटरोसॉर्बेंट है। इसमें सक्रिय पदार्थ सिलिकॉन डाइऑक्साइड होता है। निर्माता द्वितीयक घटकों का उपयोग नहीं करता है, जिसका अर्थ है कि शोर में कोई रंग, संरक्षक या कोई हानिकारक घटक नहीं हैं। दवा विभिन्न खुराक में उपलब्ध हैः एक पैकेज में 1 से 50 ग्राम तक। फार्मेसी में, आप पर्चे के बिना पैकेज या पोलिसोर्बा खरीद सकते हैं। अंदर, आपको एक सफेद पाउडर मिलेगा, जिसका उद्देश्य निलंबन की तैयारी के लिए है।
स्तनपान के दौरान क्या मैं polysorb ले सकता हूँ?
अत्यंत निश्चितता के साथ इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए, कई पहलुओं का अध्ययन किया जाना चाहिएः
- चिकित्सा दृष्टिकोण;
- इस उपकरण से निपटने वाले उपभोक्ताओं की समीक्षा;
- दवा के निर्माता से जानकारी;
- एक नर्सिंग महिला और उसके बच्चे के जीव पर एंटरोसॉर्बेंट का प्रभाव।
सबसे पहले, एनोटेशन का संदर्भ लें। इसमें एक अलग वस्तु है, जिसमें निर्माता स्तनपान कराने के दौरान गर्भवती महिलाओं और माताओं के लिए पाउडर का उपयोग करने की संभावना के बारे में बताता है। आपको यहां कोई प्रतिबंध नहीं मिलेगा। ऐसा कहा जाता है कि गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान महिलाओं द्वारा दवा का उपयोग करने का कोई नकारात्मक नतीजा स्थापित नहीं किया गया है। यह भी कहा जाता है कि कुछ संकेतों और अनुशंसित खुराक में, इस एंटरोसॉर्बेंट का उपयोग किया जा सकता है। क्या मुझे इस सिफारिश पर भरोसा करना चाहिए और दवा को आत्मविश्वास से लेना चाहिए? हम अधिक विस्तार से समझेंगे।
डॉक्टरों का मानना है कि स्तन में "Polysorb"कभी-कभी स्तनपान कराने का उपयोग करना न केवल संभव है, बल्कि यह भी आवश्यक है। एक नर्सिंग महिला के जीव से हानिकारक पदार्थों को हटाने के लिए यह उपाय आवश्यक है, जो न केवल उसके स्वास्थ्य को प्रभावित करता है बल्कि बच्चे को भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है। एंटरोसॉर्बेंट का विचार न करें। डॉक्टरों ने सिफारिश की है कि जब आपको स्वास्थ्य समस्याएं होंगी, तो आपको तुरंत चिकित्सा संस्थान जाना चाहिए, और खुद के इलाज के तरीकों की तलाश नहीं करना चाहिए। इस मामले में, आपको इस बारे में कोई सवाल नहीं होगा कि क्या पॉलिओरब का उपयोग बिना डर के (स्तनपान, गर्भावस्था, या अन्य परिस्थितियों में) के बिना करना संभव है।
Polisorba के बिना क्या मामलों में नहीं कर सकते हैंस्तनपान कराने पर? भोजन या घरेलू विषाक्तता होने पर दवा को एक नई मां के लिए जरूरी है। विषाक्त पदार्थों को बच्चे के शरीर में शामिल नहीं किया जाता है, उन्हें जल्द ही हटा दिया जाना चाहिए। "Polysorb" - इस मामले में एक उत्कृष्ट सहायक।
इसके अलावा, महिलाओं को तीव्र में स्तनपान कराने के लिए दवा की आवश्यकता हैआंत संक्रमण यह बीमारी शिशुओं के लिए काफी संक्रामक और खतरनाक है, इसलिए माँ को सबसे कम संभव समय में ठीक होना चाहिए और अपने कर्तव्यों पर वापस जाना चाहिए।
विभिन्न उत्पत्ति के दस्त से नर्सिंग महिला को रट से बाहर कर दिया जाता है, जिससे वह अपने बच्चे को पर्याप्त ध्यान देने की इजाजत नहीं देता है। एक अप्रिय लक्षण का सामना करने के लिए एक ही एंटरोसॉर्बेंट मदद करेगा।
जब एक दवा, भोजन या कुछ और एलर्जीरोगी पोलिओरब भी ले सकता है। स्तनपान के दौरान, एक विशिष्ट अनुसूची में प्रवेश के लिए निर्धारित दवा शरीर से एलर्जी को हटाने के लिए थोड़ी देर में मदद करेगी।
इस तथ्य के बावजूद कि निर्माता निषिद्ध नहीं है, लेकिनडॉक्टरों को स्तनपान के दौरान दवा का उपयोग करने की अनुमति है, कभी-कभी इसे छोड़ दिया जाना चाहिए। सिलिकॉन डाइऑक्साइड की बढ़ती संवेदनशीलता के साथ एंटरोसॉर्बेंट लेने के लिए सख्ती से मना किया जाता है। इस घटक के लिए एलर्जी दुर्लभ है, लेकिन फिर भी इसे बाहर नहीं रखा गया है। ऐसी परिस्थितियों में, डॉक्टर एक वैकल्पिक एजेंट का निर्धारण करते हैं जिसका रोगी के शरीर पर समान प्रभाव पड़ता है। पेट और आंतों, आंतरिक रक्तस्राव, एटनी और बाधा के तीव्र अल्सर में नर्सिंग माताओं और अन्य उपभोक्ताओं को परामर्श दिया गया दवा।
स्तनपान दवा निर्धारित हैआंतरिक उपयोग के लिए। इसके उपयोग और मां के शरीर की व्यक्तिगत विशेषताओं के कारण, दवा के सेवन का एक निश्चित पैटर्न चुना जाता हैः
- अगर नशा भोजन या घरेलू के कारण होता हैजहर, महिला को पोलिसोर्ब दवा के निलंबन के साथ पेट को पूर्व-धोना चाहिए। इसके बाद, दवा को दिन में 2-3 बार लिया जाना चाहिए। उपचार की अवधि नशा की गंभीरता के अनुसार निर्धारित की जाती है।
- आंतों के संक्रमण को एंटरोसॉर्बेंट के साथ 3-5 दिनों के लिए इलाज किया जाता है। पहले दिन, दवा हर घंटे उपयोग की जाती है (केवल 5 बार)। फिर दवा दिन में 4 बार ली जाती है।
- वायरल हेपेटाइटिस के जटिल उपचार में, महिलाओं को 10 दिनों के लिए दवा निर्धारित की जाती है। कभी-कभी इस बीमारी के साथ, बच्चे की रक्षा के लिए स्तनपान बंद कर दिया जाना चाहिए।
- एलर्जी प्रतिक्रिया के लिए पोलिसोर्ब के साथ दो सप्ताह के थेरेपी की आवश्यकता होती है। अगर चिड़चिड़ाहट भोजन है, तो खाने से पहले उपयोग करने के लिए उपाय की सिफारिश की जाती है।
दवा के औसत दैनिक खुराक "Polysorb" के लिएस्तनपान कराने वाली महिला 6 से 12 ग्राम के बीच है। दवा का अधिकतम हिस्सा 20 ग्राम है। चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवा को 3-4 खुराक में विभाजित करने की सिफारिश की जाती है। उपयोग से पहले, एंटरोसॉर्बेंट को चौथाई या आधे गिलास पानी में पतला किया जाना चाहिए।
प्रवेश के नतीजेः क्या "पोलिसोर्ब" बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है?
स्तनपान के लिए स्तनपान के बिना "Polysorb" का उपयोग किया जा सकता है? क्या दवा बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचाएगी? इन प्रश्नों को अक्सर नए मम्मी द्वारा पूछा जाता है।
परेशान मरीजों को आश्वस्त करना जरूरी है कि,कि एंटरोसॉर्बेंट बच्चे के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। "Polysorb" रक्त प्रवाह में अवशोषित नहीं है और स्तन दूध में प्रवेश नहीं करता है। नतीजतन, यह बच्चे के शरीर में प्रवेश नहीं करता है। अपरिवर्तित रूप में अपने कार्य के प्रदर्शन के बाद सक्रिय पदार्थ आंत से हटा दिया जाता है। यदि आप अभी भी टुकड़े के बारे में चिंतित हैं, तो यह कहा जाना चाहिए कि "Polysorb" नवजात बच्चों को भी सौंपा गया है। यह एक बिल्कुल सुरक्षित दवा है, लेकिन केवल अगर सही ढंग से उपयोग किया जाता है। महिलाओं में भी, दवा की अत्यधिक खपत कब्ज पैदा कर सकती है, और संवेदनशील व्यक्तियों में - एलर्जी।
"Polysorb" का उपयोग करने की अनुमति के बारे मेंस्तनपान के लिए निर्देश, आप पहले से ही जानते हैं। लेकिन यह दवा के उचित उपयोग के लिए पर्याप्त नहीं है। नर्सिंग माताओं के लिए एंटरोसॉर्बेंट का उपयोग करने की विशिष्टताओं के साथ खुद को परिचित करना भी महत्वपूर्ण हैः
- दीर्घकालिक उपयोग घाटे का कारण बन सकता हैकैल्शियम और पोषक तत्व। यह, ज़ाहिर है, स्वास्थ्य की स्थिति (आपके और बच्चे) को प्रभावित करेगा। इसलिए, डॉक्टर के पर्चे का सख्ती से पालन करने का प्रयास करें, एक खुराक और दवा के उपयोग की अवधि को अतिरंजित न करें।
- "Polysorbate" और अन्य दवाओं के बीच अंतराल का पालन करें। Enterosorbent, किसी भी दवा के प्रभाव को कम करने के लिए अगर आप उन्हें एक ही समय में ले जा सकते हैं।
- भोजन के एक घंटे बाद या इसे खाने से दो घंटे पहले दवा का प्रयोग करें। यह आपको पोषक तत्वों के अवशोषण को कम करने से बचने की अनुमति देगा। खाद्य एलर्जी का इलाज ही एकमात्र अपवाद है।
- अगर दवा के उपयोग से कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, तो डॉक्टर से परामर्श लें।
यदि आपको अभी भी संदेह है कि आप कर सकते हैं या नहींस्तनपान के दौरान "पोलिओर्ब", फिर इस दवा का उपयोग करने वाली महिलाओं की समीक्षा पढ़ें। लगभग सर्वसम्मति से वे चिकित्सा के सकारात्मक परिणाम के बारे में बताते हैं। एंटरोसॉर्बेंट ने रोगियों को एलर्जी की धड़कन और खुजली, नशा, मतली, उल्टी और दस्त के रूप में ऐसे अप्रिय लक्षणों से छुटकारा पाने में मदद की। ध्यान देने योग्य प्रभाव पहले ही उपयोग के पहले दिन में हासिल किया गया था। यह आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि एंटरोसॉर्बेंट तुरंत आंत में प्रवेश करता है, जहां यह इंजेक्शन के कुछ मिनट बाद काम करना शुरू कर देता है। स्तनपान के दौरान पहली बार इस दवा की कोशिश करने वाली कई महिलाओं के लिए, यह घरेलू चिकित्सा कैबिनेट में स्थायी हो गई।
इस बारे में सवाल का जवाब कि क्या पॉलिओरब पीना संभव हैजब स्तनपान - सकारात्मक। हालांकि, इस उपाय का उपयोग न केवल विषाक्त पदार्थों को हटाने के लिए किया जा सकता है। कुछ नए मम्मी ने वजन घटाने के लिए दवा का इस्तेमाल किया। दरअसल, एंटरोसॉर्बेंट अतिरिक्त वजन को हटाने में मदद करेगा, लेकिन केवल इस शर्त पर कि उसके अतिरिक्त शरीर के स्लैगिंग के कारण होता है।
दिए गए अच्छे लिंग का प्रयोग करेंदवा और अपनी सुंदरता के लिए। जन्म, हार्मोनल परिवर्तन देने के बाद। यह त्वचा की गिरावट हो सकती है। स्तनपान के दौरान, "Polisorb" यह स्पष्ट करने में मदद करेगा। तो सप्ताह में एक बार इस पाउडर का मुखौटा करने के लिए, पहले यह पानी की कुछ बूँदें से पतला है, तो बहुत जल्द ही आप त्वचा में सुधार देखेंगे।
स्तनपान के साथ पाउडर "Polysorb"कुछ महिलाएं अप्रिय होती हैं। वे कहते हैं कि पेय एक उल्टी प्रतिबिंब का कारण बनता है। इस मामले में क्या करना है? एक ऐसी दवा ढूंढना जरूरी है जो शरीर पर उसी तरह कार्य करे। यह न भूलें कि नई दवा को बच्चे के लिए पोलिओर्ब के रूप में सुरक्षित होना चाहिए। दवा के लोकप्रिय अनुरूप हैंः
- "स्मेक्टा" - नारंगी पाउडर के साथ बैग, जिनमें एंटी-डायरियल, सॉर्पशन और कारमेटिव प्रभाव होता है;
- एंटरोसेल एक जेल की तरह पेस्ट है जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को हटा देता है (यह एक सुखद स्वाद है);
- "फिल्ट्रम" - गोलियाँ, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट और सफाई प्रभाव होता है, रक्त प्रवाह में अवशोषित नहीं होते हैं।
यदि आप Polysorb का उपयोग नहीं कर सकते हैं क्योंकि आप इसके लिए एलर्जी हैं, तो वैकल्पिक चिकित्सा चुनने से पहले अपने डॉक्टर से जांच कर लें।
लेख से, आप यह पता लगाने में सक्षम थे कि क्यास्तनपान के दौरान Polysorb ले लो। नर्सिंग माताओं के लिए दवा का खुराक और इसके उपयोग की विशेषताओं को आपके ध्यान में प्रस्तुत किया जाता है। खैर, अगर आप दवा का उपयोग करने से पहले एक विशेषज्ञ से परामर्श करते हैं, लेकिन सभी मरीज़ ऐसा नहीं करते हैं। डॉक्टर कहते हैं कि एंटरोसॉर्बेंट सुरक्षित है और उचित उपयोग से नुकसान नहीं पहुंचाता है। Polysorb स्वतंत्र रूप से लेते हुए, निम्नलिखित नियमों का पालन करेंः
- उपयोग के लिए निर्देशों द्वारा निर्धारित खुराक से अधिक न करें;
- दो सप्ताह से अधिक समय तक दवा का उपयोग न करें;
- आहार और व्यायाम को समायोजित किए बिना "पोलिओर्ब" की मदद से वजन कम करने की कोशिश न करें;
- पतला दवा स्टोर न करें;
- प्रत्येक उपयोग से पहले, एक नई खुराक तैयार करें।
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क्या मैं स्तनपान के दौरान पॉलिज़ोरब ले सकता हूं? स्तन दूध के लिए सबसे अच्छा खाना हैएक वर्ष से कम उम्र के नवजात शिशु और बच्चे। यह कोई रहस्य नहीं है कि इसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व, विटामिन, ट्रेस तत्व और खनिज शामिल हैं। स्तनपान बच्चे में उचित पाचन और प्राकृतिक आंतों microflora की तेजी से स्थापना को बढ़ावा देता है। इस अवधि के दौरान एक महिला को कोई दवा नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि वे बच्चे को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बावजूद, बीमारी से कोई नई मां प्रतिरक्षा नहीं है। यदि आप सोच रहे हैं कि यह कैसे प्रभावित हो सकता हैस्तनपान के दौरान बच्चे "पोलिओरब", महिलाओं की समीक्षा और चिकित्सा दृष्टिकोण के बारे में आज आपको पता चल जाएगा। उपयोग के लिए ध्यान और निर्देशों को बाहर मत करो। स्तन में Polysorb लेने से पहलेखिलाना, एनोटेशन से परिचित होना जरूरी है। यह दवा, संकेत और आवेदन की विशेष विशेषताओं की संरचना दिखाता है। दवा "Polysorb" एक आंतों के एंटरोसॉर्बेंट है। इसमें सक्रिय पदार्थ सिलिकॉन डाइऑक्साइड होता है। निर्माता द्वितीयक घटकों का उपयोग नहीं करता है, जिसका अर्थ है कि शोर में कोई रंग, संरक्षक या कोई हानिकारक घटक नहीं हैं। दवा विभिन्न खुराक में उपलब्ध हैः एक पैकेज में एक से पचास ग्राम तक। फार्मेसी में, आप पर्चे के बिना पैकेज या पोलिसोर्बा खरीद सकते हैं। अंदर, आपको एक सफेद पाउडर मिलेगा, जिसका उद्देश्य निलंबन की तैयारी के लिए है। स्तनपान के दौरान क्या मैं polysorb ले सकता हूँ? अत्यंत निश्चितता के साथ इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए, कई पहलुओं का अध्ययन किया जाना चाहिएः - चिकित्सा दृष्टिकोण; - इस उपकरण से निपटने वाले उपभोक्ताओं की समीक्षा; - दवा के निर्माता से जानकारी; - एक नर्सिंग महिला और उसके बच्चे के जीव पर एंटरोसॉर्बेंट का प्रभाव। सबसे पहले, एनोटेशन का संदर्भ लें। इसमें एक अलग वस्तु है, जिसमें निर्माता स्तनपान कराने के दौरान गर्भवती महिलाओं और माताओं के लिए पाउडर का उपयोग करने की संभावना के बारे में बताता है। आपको यहां कोई प्रतिबंध नहीं मिलेगा। ऐसा कहा जाता है कि गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान महिलाओं द्वारा दवा का उपयोग करने का कोई नकारात्मक नतीजा स्थापित नहीं किया गया है। यह भी कहा जाता है कि कुछ संकेतों और अनुशंसित खुराक में, इस एंटरोसॉर्बेंट का उपयोग किया जा सकता है। क्या मुझे इस सिफारिश पर भरोसा करना चाहिए और दवा को आत्मविश्वास से लेना चाहिए? हम अधिक विस्तार से समझेंगे। डॉक्टरों का मानना है कि स्तन में "Polysorb"कभी-कभी स्तनपान कराने का उपयोग करना न केवल संभव है, बल्कि यह भी आवश्यक है। एक नर्सिंग महिला के जीव से हानिकारक पदार्थों को हटाने के लिए यह उपाय आवश्यक है, जो न केवल उसके स्वास्थ्य को प्रभावित करता है बल्कि बच्चे को भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है। एंटरोसॉर्बेंट का विचार न करें। डॉक्टरों ने सिफारिश की है कि जब आपको स्वास्थ्य समस्याएं होंगी, तो आपको तुरंत चिकित्सा संस्थान जाना चाहिए, और खुद के इलाज के तरीकों की तलाश नहीं करना चाहिए। इस मामले में, आपको इस बारे में कोई सवाल नहीं होगा कि क्या पॉलिओरब का उपयोग बिना डर के के बिना करना संभव है। Polisorba के बिना क्या मामलों में नहीं कर सकते हैंस्तनपान कराने पर? भोजन या घरेलू विषाक्तता होने पर दवा को एक नई मां के लिए जरूरी है। विषाक्त पदार्थों को बच्चे के शरीर में शामिल नहीं किया जाता है, उन्हें जल्द ही हटा दिया जाना चाहिए। "Polysorb" - इस मामले में एक उत्कृष्ट सहायक। इसके अलावा, महिलाओं को तीव्र में स्तनपान कराने के लिए दवा की आवश्यकता हैआंत संक्रमण यह बीमारी शिशुओं के लिए काफी संक्रामक और खतरनाक है, इसलिए माँ को सबसे कम संभव समय में ठीक होना चाहिए और अपने कर्तव्यों पर वापस जाना चाहिए। विभिन्न उत्पत्ति के दस्त से नर्सिंग महिला को रट से बाहर कर दिया जाता है, जिससे वह अपने बच्चे को पर्याप्त ध्यान देने की इजाजत नहीं देता है। एक अप्रिय लक्षण का सामना करने के लिए एक ही एंटरोसॉर्बेंट मदद करेगा। जब एक दवा, भोजन या कुछ और एलर्जीरोगी पोलिओरब भी ले सकता है। स्तनपान के दौरान, एक विशिष्ट अनुसूची में प्रवेश के लिए निर्धारित दवा शरीर से एलर्जी को हटाने के लिए थोड़ी देर में मदद करेगी। इस तथ्य के बावजूद कि निर्माता निषिद्ध नहीं है, लेकिनडॉक्टरों को स्तनपान के दौरान दवा का उपयोग करने की अनुमति है, कभी-कभी इसे छोड़ दिया जाना चाहिए। सिलिकॉन डाइऑक्साइड की बढ़ती संवेदनशीलता के साथ एंटरोसॉर्बेंट लेने के लिए सख्ती से मना किया जाता है। इस घटक के लिए एलर्जी दुर्लभ है, लेकिन फिर भी इसे बाहर नहीं रखा गया है। ऐसी परिस्थितियों में, डॉक्टर एक वैकल्पिक एजेंट का निर्धारण करते हैं जिसका रोगी के शरीर पर समान प्रभाव पड़ता है। पेट और आंतों, आंतरिक रक्तस्राव, एटनी और बाधा के तीव्र अल्सर में नर्सिंग माताओं और अन्य उपभोक्ताओं को परामर्श दिया गया दवा। स्तनपान दवा निर्धारित हैआंतरिक उपयोग के लिए। इसके उपयोग और मां के शरीर की व्यक्तिगत विशेषताओं के कारण, दवा के सेवन का एक निश्चित पैटर्न चुना जाता हैः - अगर नशा भोजन या घरेलू के कारण होता हैजहर, महिला को पोलिसोर्ब दवा के निलंबन के साथ पेट को पूर्व-धोना चाहिए। इसके बाद, दवा को दिन में दो-तीन बार लिया जाना चाहिए। उपचार की अवधि नशा की गंभीरता के अनुसार निर्धारित की जाती है। - आंतों के संक्रमण को एंटरोसॉर्बेंट के साथ तीन-पाँच दिनों के लिए इलाज किया जाता है। पहले दिन, दवा हर घंटे उपयोग की जाती है । फिर दवा दिन में चार बार ली जाती है। - वायरल हेपेटाइटिस के जटिल उपचार में, महिलाओं को दस दिनों के लिए दवा निर्धारित की जाती है। कभी-कभी इस बीमारी के साथ, बच्चे की रक्षा के लिए स्तनपान बंद कर दिया जाना चाहिए। - एलर्जी प्रतिक्रिया के लिए पोलिसोर्ब के साथ दो सप्ताह के थेरेपी की आवश्यकता होती है। अगर चिड़चिड़ाहट भोजन है, तो खाने से पहले उपयोग करने के लिए उपाय की सिफारिश की जाती है। दवा के औसत दैनिक खुराक "Polysorb" के लिएस्तनपान कराने वाली महिला छः से बारह ग्राम के बीच है। दवा का अधिकतम हिस्सा बीस ग्राम है। चिकित्सक द्वारा निर्धारित दवा को तीन-चार खुराक में विभाजित करने की सिफारिश की जाती है। उपयोग से पहले, एंटरोसॉर्बेंट को चौथाई या आधे गिलास पानी में पतला किया जाना चाहिए। प्रवेश के नतीजेः क्या "पोलिसोर्ब" बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है? स्तनपान के लिए स्तनपान के बिना "Polysorb" का उपयोग किया जा सकता है? क्या दवा बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचाएगी? इन प्रश्नों को अक्सर नए मम्मी द्वारा पूछा जाता है। परेशान मरीजों को आश्वस्त करना जरूरी है कि,कि एंटरोसॉर्बेंट बच्चे के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। "Polysorb" रक्त प्रवाह में अवशोषित नहीं है और स्तन दूध में प्रवेश नहीं करता है। नतीजतन, यह बच्चे के शरीर में प्रवेश नहीं करता है। अपरिवर्तित रूप में अपने कार्य के प्रदर्शन के बाद सक्रिय पदार्थ आंत से हटा दिया जाता है। यदि आप अभी भी टुकड़े के बारे में चिंतित हैं, तो यह कहा जाना चाहिए कि "Polysorb" नवजात बच्चों को भी सौंपा गया है। यह एक बिल्कुल सुरक्षित दवा है, लेकिन केवल अगर सही ढंग से उपयोग किया जाता है। महिलाओं में भी, दवा की अत्यधिक खपत कब्ज पैदा कर सकती है, और संवेदनशील व्यक्तियों में - एलर्जी। "Polysorb" का उपयोग करने की अनुमति के बारे मेंस्तनपान के लिए निर्देश, आप पहले से ही जानते हैं। लेकिन यह दवा के उचित उपयोग के लिए पर्याप्त नहीं है। नर्सिंग माताओं के लिए एंटरोसॉर्बेंट का उपयोग करने की विशिष्टताओं के साथ खुद को परिचित करना भी महत्वपूर्ण हैः - दीर्घकालिक उपयोग घाटे का कारण बन सकता हैकैल्शियम और पोषक तत्व। यह, ज़ाहिर है, स्वास्थ्य की स्थिति को प्रभावित करेगा। इसलिए, डॉक्टर के पर्चे का सख्ती से पालन करने का प्रयास करें, एक खुराक और दवा के उपयोग की अवधि को अतिरंजित न करें। - "Polysorbate" और अन्य दवाओं के बीच अंतराल का पालन करें। Enterosorbent, किसी भी दवा के प्रभाव को कम करने के लिए अगर आप उन्हें एक ही समय में ले जा सकते हैं। - भोजन के एक घंटे बाद या इसे खाने से दो घंटे पहले दवा का प्रयोग करें। यह आपको पोषक तत्वों के अवशोषण को कम करने से बचने की अनुमति देगा। खाद्य एलर्जी का इलाज ही एकमात्र अपवाद है। - अगर दवा के उपयोग से कोई प्रभाव नहीं पड़ता है, तो डॉक्टर से परामर्श लें। यदि आपको अभी भी संदेह है कि आप कर सकते हैं या नहींस्तनपान के दौरान "पोलिओर्ब", फिर इस दवा का उपयोग करने वाली महिलाओं की समीक्षा पढ़ें। लगभग सर्वसम्मति से वे चिकित्सा के सकारात्मक परिणाम के बारे में बताते हैं। एंटरोसॉर्बेंट ने रोगियों को एलर्जी की धड़कन और खुजली, नशा, मतली, उल्टी और दस्त के रूप में ऐसे अप्रिय लक्षणों से छुटकारा पाने में मदद की। ध्यान देने योग्य प्रभाव पहले ही उपयोग के पहले दिन में हासिल किया गया था। यह आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि एंटरोसॉर्बेंट तुरंत आंत में प्रवेश करता है, जहां यह इंजेक्शन के कुछ मिनट बाद काम करना शुरू कर देता है। स्तनपान के दौरान पहली बार इस दवा की कोशिश करने वाली कई महिलाओं के लिए, यह घरेलू चिकित्सा कैबिनेट में स्थायी हो गई। इस बारे में सवाल का जवाब कि क्या पॉलिओरब पीना संभव हैजब स्तनपान - सकारात्मक। हालांकि, इस उपाय का उपयोग न केवल विषाक्त पदार्थों को हटाने के लिए किया जा सकता है। कुछ नए मम्मी ने वजन घटाने के लिए दवा का इस्तेमाल किया। दरअसल, एंटरोसॉर्बेंट अतिरिक्त वजन को हटाने में मदद करेगा, लेकिन केवल इस शर्त पर कि उसके अतिरिक्त शरीर के स्लैगिंग के कारण होता है। दिए गए अच्छे लिंग का प्रयोग करेंदवा और अपनी सुंदरता के लिए। जन्म, हार्मोनल परिवर्तन देने के बाद। यह त्वचा की गिरावट हो सकती है। स्तनपान के दौरान, "Polisorb" यह स्पष्ट करने में मदद करेगा। तो सप्ताह में एक बार इस पाउडर का मुखौटा करने के लिए, पहले यह पानी की कुछ बूँदें से पतला है, तो बहुत जल्द ही आप त्वचा में सुधार देखेंगे। स्तनपान के साथ पाउडर "Polysorb"कुछ महिलाएं अप्रिय होती हैं। वे कहते हैं कि पेय एक उल्टी प्रतिबिंब का कारण बनता है। इस मामले में क्या करना है? एक ऐसी दवा ढूंढना जरूरी है जो शरीर पर उसी तरह कार्य करे। यह न भूलें कि नई दवा को बच्चे के लिए पोलिओर्ब के रूप में सुरक्षित होना चाहिए। दवा के लोकप्रिय अनुरूप हैंः - "स्मेक्टा" - नारंगी पाउडर के साथ बैग, जिनमें एंटी-डायरियल, सॉर्पशन और कारमेटिव प्रभाव होता है; - एंटरोसेल एक जेल की तरह पेस्ट है जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को हटा देता है ; - "फिल्ट्रम" - गोलियाँ, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट और सफाई प्रभाव होता है, रक्त प्रवाह में अवशोषित नहीं होते हैं। यदि आप Polysorb का उपयोग नहीं कर सकते हैं क्योंकि आप इसके लिए एलर्जी हैं, तो वैकल्पिक चिकित्सा चुनने से पहले अपने डॉक्टर से जांच कर लें। लेख से, आप यह पता लगाने में सक्षम थे कि क्यास्तनपान के दौरान Polysorb ले लो। नर्सिंग माताओं के लिए दवा का खुराक और इसके उपयोग की विशेषताओं को आपके ध्यान में प्रस्तुत किया जाता है। खैर, अगर आप दवा का उपयोग करने से पहले एक विशेषज्ञ से परामर्श करते हैं, लेकिन सभी मरीज़ ऐसा नहीं करते हैं। डॉक्टर कहते हैं कि एंटरोसॉर्बेंट सुरक्षित है और उचित उपयोग से नुकसान नहीं पहुंचाता है। Polysorb स्वतंत्र रूप से लेते हुए, निम्नलिखित नियमों का पालन करेंः - उपयोग के लिए निर्देशों द्वारा निर्धारित खुराक से अधिक न करें; - दो सप्ताह से अधिक समय तक दवा का उपयोग न करें; - आहार और व्यायाम को समायोजित किए बिना "पोलिओर्ब" की मदद से वजन कम करने की कोशिश न करें; - पतला दवा स्टोर न करें; - प्रत्येक उपयोग से पहले, एक नई खुराक तैयार करें।
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अमेरिकी सैनिक अमेरिकी क्रांति के बाद से एक साधारण फिटनेस गतिविधि कर रहे हैं, और यह हमारी सेना को दुनिया के इतिहास में सबसे ज्यादा, सबसे डरावनी लड़ाई बल में बदल गया है।
वह गतिविधिः चकित, या अपनी पीठ पर भारित पैक के साथ चलना।
गतिविधि का नाम "रक बोक्स" से मिलता है, जो सेना "बैकपैक" के लिए बोलती है। "रकिंग" आपके रक बेक पहनते समय चल रही है या चल रही है (जो हमेशा गियर के साथ लोड होती है)।
प्रशिक्षण शिविरों और मैदान में, सैनिक एक दिन में 25 मील (या अधिक) तक पहुंच सकते हैं, जो एक पैक को 200 पाउंड से ऊपर का वजन उठाते हैं।
लेकिन एक नौसेना के सील के शरीर का निर्माण करने के लिए, आपको उगाए हुए आदमी के बराबर वजन वाला एक पैक नहीं लेना चाहिए (न ही आपको)। बस घर के चारों ओर झूठ बोलने वाले किसी भी पुराने पैक में थोड़ा सा वजन जोड़ें, चलें, और आप फिटनेस की पूरी नई दुनिया खोल देंगे। (यहाँ हैं4 अधिक दैनिक अभ्यास प्रत्येक नौसेना के सील (और हर फिट लड़का) करना चाहिए।)
न्यू यॉर्क शहर में पीक प्रदर्शन में डॉक्टर ऑफ फिजिकल थेरेपी के डॉक्टर डॉग केचिजियन और एक पूर्व अमेरिकी विशेष बल सैनिक के अनुसार, "चकिंग औसत व्यक्ति के लिए बहुत बढ़िया है।" "यह आसान है, और यह बहुत सारे स्वास्थ्य और फिटनेस लाभ प्रदान करता है।"
औसत गतिविधियों के लिए, 30 मिनट की पैदल दूरी 125 कैलोरी जलती है, शारीरिक गतिविधियों के संग्रह के अनुसार। लेकिन एक भारित बैकपैक फेंक दें और उसी सटीक चलें, और शारीरिक गतिविधियों के संग्रह के अनुसार, आप लगभग 325 कैलोरी जलाते हैं।
इसमें कुछ वजन के साथ बस एक बैग पहनने से कैलोरी लगभग तीन गुना भड़क जाता है!
उसके बारे में सोचना। आइए मान लें कि आप हर हफ्ते तीन, 30 मिनट की पैदल दूरी पर जाते हैं। यदि आप भारित पैक पहनना शुरू करते हैं, तो आप एक वर्ष के दौरान 31,200 और कैलोरी जला देंगे। यह वसा की नौ पाउंड में कैलोरी की मात्रा है।
यूटा के साल्ट लेक सिटी में स्थित एक प्रसिद्ध ताकत कोच डैन जॉन कहते हैं, "रिंगिंग आपको बेहतर दिखने लगेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है," क्या आप जा सकते हो? "यह वसा हानि के लिए विशेष रूप से महान है।"
यदि आप काम करते हैं, तो आपको शायद कुछ समय में पीठ दर्द का अनुभव होगा। क्यूं कर?
आप शायद अपने दिन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बैठे हैं, आपकी पीठ आगे फ्लेक्स हो गई है। आपको उस स्थिति में "इस्तेमाल" मिलता है।
फिर, जब आप जिम को दबाते हैं, तो अगर आप अपनी पीठ से फ्लेक्स करते हैं तो यह संभावित रूप से दर्दनाक डिस्क बल्गे का कारण बन सकता है, स्टू मैकगिल, पीएच.डी. ओन्टारियो में वाटरलू विश्वविद्यालय में स्पाइन बायोमेकॅनिक्स के प्रोफेसर और लेखक अंतिम बैक स्वास्थ्य और प्रदर्शन.
जो लोग डिस्क बल्गे विकसित करते हैं वे अक्सर चलते समय आगे झुकते हैं। इससे आपकी स्थिति खराब हो जाती है, क्योंकि आपके शरीर को आपकी पीठ की मांसपेशियों को आग लगाना पड़ता है और आपके धड़ को पकड़ना मुश्किल होता है। मैकगिल कहते हैं, "यह डिस्क बल्गे पर अधिक तनाव डालता है।"
एक भारित बैकपैक फेंकने और चलने के लिए जाने से वास्तव में आपके धड़ को पकड़ने में मदद मिलती है, इसलिए आपकी पीठ की मांसपेशियों को कड़ी मेहनत करने की ज़रूरत नहीं है।
मैकगिल कहते हैं, "शुद्ध प्रभाव यह है कि आपकी रीढ़ की हड्डी पर कम संपीड़न लगाया जाता है, और फ्लेक्स वाली अगली मुद्रा जो डिस्क को कम करती है, कम हो जाती है।" "और यह डिस्क जेल भी काम कर सकता है (एक डिस्क बल्ज बाहर निकाले गए डिस्क जेल के कारण होता है) वापस अपनी डिस्क के बीच में, बल्ज को कम करता है।"
यह बदले में, आपके दर्द को रोकने और राहत देने में मदद कर सकता है।
(अपनी पीठ को और भी सुरक्षित रखने के लिए, फिट मैन के बैक-सेविंग कसरत करें)
चूसने से आपके आलसी चलने से हृदय स्वास्थ्य में सहनशीलता प्रयास बढ़ जाता है।
सीएससीएस के जेसन हार्टमैन कहते हैं, "चकिंग के कार्डियो लाभ अन्य लंबी, धीमी दूरी के अभ्यास जैसे जॉगिंग से प्राप्त होते हैं।" जो अमेरिकी सेना के लिए विशेष बल सैनिकों को प्रशिक्षित करता है।
लेकिन जॉगिंग के विपरीत- जिसमें 20 से 79 प्रतिशत की चोट दर है, इसमें एक अध्ययन के मुताबिक स्पोर्ट्स मेडिसिन के ब्रिटिश जर्नलहार्टमैन कहते हैं, वास्तव में आपको अधिक चोट लचीला बनाता है।
"यह आपके कूल्हे और postural स्थिरता बनाता है, और यह आपको अपनी सभी अन्य गतिविधियों में अधिक चोट का सबूत बनाता है," वे कहते हैं।
जॉन कहते हैं, "रकिंग काम की क्षमता का पवित्र अंगूर है।"
लोड के तहत जमीन को प्रभावी रूप से कवर करने के लिए सीखना अक्सर लापता लिंक होता है जो आपके फिटनेस स्तर के लिए गेम परिवर्तक हो सकता है। "भारी चीजें लेना एक मौलिक मानव कौशल है जो ज्यादातर लोग ट्रेन नहीं करते हैं।"
जॉन कहते हैं, यह आपको फिटनेस की एक और ठोस नींव बनाता है। "और एक बार जब आप नींव बनाते हैं, तो बाकी सब कुछ आसान हो जाता है।"
हां, कई अभ्यास कार्य क्षमता का निर्माण करते हैं। लेकिन जॉन इसे पसंद करते हैं क्योंकि लोड के दौरान यह सुरक्षित रूप से आपके सहनशक्ति को काम करता है।
शायद हर सुबह आप और कुत्ते चलते हैं, या आप पैर पर काम करने के लिए यात्रा करते हैं, या आप लगातार रात के खाने के लिए जाते हैं।
अब से, जब आप उन रोजमर्रा की गतिविधियों को करते हैं तो बस कुछ वजन के साथ बैकपैक पहनें। सरल, सही?
और भी, सबसे नई फिटनेस विधियों की आवश्यकता है कि आप महंगे उपकरण, जिम सदस्यता, या कसरत कार्यक्रम खरीद लें।
चूसने के साथ ऐसा नहीं है। आपके पास शायद पहले से ही एक बैकपैक और कुछ है जिसका उपयोग आप अपने घर के आसपास झूठ बोलने के लिए कर सकते हैं।
चलिए इसका सामना करते हैं, आपका औसत जिम कसरत कठिन हो सकता है। और एक बार आपका दिनचर्या नियमित हो जाता है, तो आप देखभाल और अपने फिटनेस पठार बंद कर देते हैं।
प्रकृति में चलने, रकिंग आपको बाहर ले जाती है। नेशनल स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक, यह न केवल एक स्वागत परिवर्तन है, बल्कि तनाव को भी कम कर सकता है-ब्रिटिश शोध के अनुसार- और रात में बेहतर नींद में आपकी मदद कर सकता है।
आउटडोर व्यायाम भी आपके दिमाग में कुछ नया फेंकता है।
"आधुनिक जीवन अभिसरण पर अधिक जोर देता है। हम पूरे दिन कंप्यूटर, सेल फोन और टीवी स्क्रीन पर देखते हैं और कभी नहीं जाने देते हैं, "केचियान कहते हैं। "बाहर निकलना, इलाके को पढ़ना और अनुकूलित करना आपके दिमाग को पूरी तरह से अलग तरीके से काम करता है, और यह आपके दिमाग में सकारात्मक परिवर्तन प्रदान कर सकता है।"
केचियान कहते हैं, सामान्य फिटनेस के लिए शुरू करने के लिए एक अच्छी जगह वजन का उपयोग करना है जो आपके कुल बॉडीवेट के लगभग 10 प्रतिशत के बराबर है। उदाहरण के लिए, यदि आप 150 पाउंड वजन करते हैं, तो अपने पैक को लगभग 15 पाउंड से लोड करें।
पाउंड या दो से ऊपर या नीचे जाने के बारे में बहुत ज्यादा तनाव न करें- बस सामान्य बॉलपार्क में रहें।
एक बार जब आप आरामदायक हो जाते हैं, तो आप जॉन पाउंड तक 35 पाउंड तक बढ़ सकते हैं।
"आप दिन, महीनों, वर्षों के लिए अपनी पीठ पर 35 पाउंड के साथ जा सकते हैं," वे कहते हैं। "लेकिन एक बार जब आप 35 पाउंड से ऊपर छींकना शुरू कर देते हैं, तो यह आपके शरीर को तोड़ सकता है।"
वजन के लिए, आप अपने पैक में एक डंबेल फेंक सकते हैं। या आप कुछ ईंटों या रेत के बैग का भी उपयोग कर सकते हैं।
यदि आपको फैंसी मिलना पसंद है, तो विभिन्न ऑनलाइन साइट्स विशेष रूप से रकिंग के लिए डिज़ाइन की गई वेट प्लेट्स प्रदान करती हैं।
अपने वजन के चारों ओर एक तौलिया या बुलबुला लपेटना इसे स्थिर करने में मदद करेगा, इसलिए यह बैग में चारों ओर नहीं बदलता है।
आप अपने आसपास के किसी भी बैकपैक का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन यदि आप नियमित रूप से 35 पाउंड का उपयोग करने की योजना बनाते हैं, तो गंभीर वजन कम करने के लिए डिज़ाइन किए गए पैक में निवेश करें। हम गोरक और कैमलबैक के विकल्पों को पसंद करते हैं, जिनमें से दोनों सैन्य विनिर्देशों तक हैं।
3. बकवास!
अब, अपने पैक पर टॉस करें और पैदल चलने या बढ़ने के लिए जाएं। आप जितना चाहें उतना लंबा और दूर जा सकते हैं। लेकिन जब आप अभी शुरू कर रहे हैं, तो गतिविधि में आसानी लाने के लिए सबसे अच्छा है।
जॉन कहते हैं, "बाद में, शायद आप कुछ सामान्य स्थानों पर परेशान होंगे, आपकी सामान्य फिटनेस दिनचर्या ने अनदेखा कर दिया है।" "अपने घुटनों, अपने बट, और अपनी पीठ के आसपास की मांसपेशियों की अपेक्षा निविदाएं करें। उलझन यह है कि पैक आपको उचित मुद्रा में डाल देता है, इसलिए आप काम कर रहे मांसपेशियों को काम कर रहे हैं। "
यदि आप बहुत से लोगों के साथ रुकना चाहते हैं या चुनौती में वृद्धि करना चाहते हैं, तो गोरक-एक गियर और इवेंट कंपनी स्पेशल फोर्स दिग्गजों द्वारा शुरू की गई - मेजबान देश भर में सैकड़ों चकित घटनाएं आयोजित करती हैं। वे 6, 12, 24, और 48 घंटे की सैन्य शैली चुनौतियों से दूरी-आधारित समूह बक्स तक हैं।
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अमेरिकी सैनिक अमेरिकी क्रांति के बाद से एक साधारण फिटनेस गतिविधि कर रहे हैं, और यह हमारी सेना को दुनिया के इतिहास में सबसे ज्यादा, सबसे डरावनी लड़ाई बल में बदल गया है। वह गतिविधिः चकित, या अपनी पीठ पर भारित पैक के साथ चलना। गतिविधि का नाम "रक बोक्स" से मिलता है, जो सेना "बैकपैक" के लिए बोलती है। "रकिंग" आपके रक बेक पहनते समय चल रही है या चल रही है । प्रशिक्षण शिविरों और मैदान में, सैनिक एक दिन में पच्चीस मील तक पहुंच सकते हैं, जो एक पैक को दो सौ पाउंड से ऊपर का वजन उठाते हैं। लेकिन एक नौसेना के सील के शरीर का निर्माण करने के लिए, आपको उगाए हुए आदमी के बराबर वजन वाला एक पैक नहीं लेना चाहिए । बस घर के चारों ओर झूठ बोलने वाले किसी भी पुराने पैक में थोड़ा सा वजन जोड़ें, चलें, और आप फिटनेस की पूरी नई दुनिया खोल देंगे। करना चाहिए।) न्यू यॉर्क शहर में पीक प्रदर्शन में डॉक्टर ऑफ फिजिकल थेरेपी के डॉक्टर डॉग केचिजियन और एक पूर्व अमेरिकी विशेष बल सैनिक के अनुसार, "चकिंग औसत व्यक्ति के लिए बहुत बढ़िया है।" "यह आसान है, और यह बहुत सारे स्वास्थ्य और फिटनेस लाभ प्रदान करता है।" औसत गतिविधियों के लिए, तीस मिनट की पैदल दूरी एक सौ पच्चीस कैलोरी जलती है, शारीरिक गतिविधियों के संग्रह के अनुसार। लेकिन एक भारित बैकपैक फेंक दें और उसी सटीक चलें, और शारीरिक गतिविधियों के संग्रह के अनुसार, आप लगभग तीन सौ पच्चीस कैलोरी जलाते हैं। इसमें कुछ वजन के साथ बस एक बैग पहनने से कैलोरी लगभग तीन गुना भड़क जाता है! उसके बारे में सोचना। आइए मान लें कि आप हर हफ्ते तीन, तीस मिनट की पैदल दूरी पर जाते हैं। यदि आप भारित पैक पहनना शुरू करते हैं, तो आप एक वर्ष के दौरान इकतीस,दो सौ और कैलोरी जला देंगे। यह वसा की नौ पाउंड में कैलोरी की मात्रा है। यूटा के साल्ट लेक सिटी में स्थित एक प्रसिद्ध ताकत कोच डैन जॉन कहते हैं, "रिंगिंग आपको बेहतर दिखने लगेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है," क्या आप जा सकते हो? "यह वसा हानि के लिए विशेष रूप से महान है।" यदि आप काम करते हैं, तो आपको शायद कुछ समय में पीठ दर्द का अनुभव होगा। क्यूं कर? आप शायद अपने दिन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बैठे हैं, आपकी पीठ आगे फ्लेक्स हो गई है। आपको उस स्थिति में "इस्तेमाल" मिलता है। फिर, जब आप जिम को दबाते हैं, तो अगर आप अपनी पीठ से फ्लेक्स करते हैं तो यह संभावित रूप से दर्दनाक डिस्क बल्गे का कारण बन सकता है, स्टू मैकगिल, पीएच.डी. ओन्टारियो में वाटरलू विश्वविद्यालय में स्पाइन बायोमेकॅनिक्स के प्रोफेसर और लेखक अंतिम बैक स्वास्थ्य और प्रदर्शन. जो लोग डिस्क बल्गे विकसित करते हैं वे अक्सर चलते समय आगे झुकते हैं। इससे आपकी स्थिति खराब हो जाती है, क्योंकि आपके शरीर को आपकी पीठ की मांसपेशियों को आग लगाना पड़ता है और आपके धड़ को पकड़ना मुश्किल होता है। मैकगिल कहते हैं, "यह डिस्क बल्गे पर अधिक तनाव डालता है।" एक भारित बैकपैक फेंकने और चलने के लिए जाने से वास्तव में आपके धड़ को पकड़ने में मदद मिलती है, इसलिए आपकी पीठ की मांसपेशियों को कड़ी मेहनत करने की ज़रूरत नहीं है। मैकगिल कहते हैं, "शुद्ध प्रभाव यह है कि आपकी रीढ़ की हड्डी पर कम संपीड़न लगाया जाता है, और फ्लेक्स वाली अगली मुद्रा जो डिस्क को कम करती है, कम हो जाती है।" "और यह डिस्क जेल भी काम कर सकता है वापस अपनी डिस्क के बीच में, बल्ज को कम करता है।" यह बदले में, आपके दर्द को रोकने और राहत देने में मदद कर सकता है। चूसने से आपके आलसी चलने से हृदय स्वास्थ्य में सहनशीलता प्रयास बढ़ जाता है। सीएससीएस के जेसन हार्टमैन कहते हैं, "चकिंग के कार्डियो लाभ अन्य लंबी, धीमी दूरी के अभ्यास जैसे जॉगिंग से प्राप्त होते हैं।" जो अमेरिकी सेना के लिए विशेष बल सैनिकों को प्रशिक्षित करता है। लेकिन जॉगिंग के विपरीत- जिसमें बीस से उन्यासी प्रतिशत की चोट दर है, इसमें एक अध्ययन के मुताबिक स्पोर्ट्स मेडिसिन के ब्रिटिश जर्नलहार्टमैन कहते हैं, वास्तव में आपको अधिक चोट लचीला बनाता है। "यह आपके कूल्हे और postural स्थिरता बनाता है, और यह आपको अपनी सभी अन्य गतिविधियों में अधिक चोट का सबूत बनाता है," वे कहते हैं। जॉन कहते हैं, "रकिंग काम की क्षमता का पवित्र अंगूर है।" लोड के तहत जमीन को प्रभावी रूप से कवर करने के लिए सीखना अक्सर लापता लिंक होता है जो आपके फिटनेस स्तर के लिए गेम परिवर्तक हो सकता है। "भारी चीजें लेना एक मौलिक मानव कौशल है जो ज्यादातर लोग ट्रेन नहीं करते हैं।" जॉन कहते हैं, यह आपको फिटनेस की एक और ठोस नींव बनाता है। "और एक बार जब आप नींव बनाते हैं, तो बाकी सब कुछ आसान हो जाता है।" हां, कई अभ्यास कार्य क्षमता का निर्माण करते हैं। लेकिन जॉन इसे पसंद करते हैं क्योंकि लोड के दौरान यह सुरक्षित रूप से आपके सहनशक्ति को काम करता है। शायद हर सुबह आप और कुत्ते चलते हैं, या आप पैर पर काम करने के लिए यात्रा करते हैं, या आप लगातार रात के खाने के लिए जाते हैं। अब से, जब आप उन रोजमर्रा की गतिविधियों को करते हैं तो बस कुछ वजन के साथ बैकपैक पहनें। सरल, सही? और भी, सबसे नई फिटनेस विधियों की आवश्यकता है कि आप महंगे उपकरण, जिम सदस्यता, या कसरत कार्यक्रम खरीद लें। चूसने के साथ ऐसा नहीं है। आपके पास शायद पहले से ही एक बैकपैक और कुछ है जिसका उपयोग आप अपने घर के आसपास झूठ बोलने के लिए कर सकते हैं। चलिए इसका सामना करते हैं, आपका औसत जिम कसरत कठिन हो सकता है। और एक बार आपका दिनचर्या नियमित हो जाता है, तो आप देखभाल और अपने फिटनेस पठार बंद कर देते हैं। प्रकृति में चलने, रकिंग आपको बाहर ले जाती है। नेशनल स्लीप फाउंडेशन के मुताबिक, यह न केवल एक स्वागत परिवर्तन है, बल्कि तनाव को भी कम कर सकता है-ब्रिटिश शोध के अनुसार- और रात में बेहतर नींद में आपकी मदद कर सकता है। आउटडोर व्यायाम भी आपके दिमाग में कुछ नया फेंकता है। "आधुनिक जीवन अभिसरण पर अधिक जोर देता है। हम पूरे दिन कंप्यूटर, सेल फोन और टीवी स्क्रीन पर देखते हैं और कभी नहीं जाने देते हैं, "केचियान कहते हैं। "बाहर निकलना, इलाके को पढ़ना और अनुकूलित करना आपके दिमाग को पूरी तरह से अलग तरीके से काम करता है, और यह आपके दिमाग में सकारात्मक परिवर्तन प्रदान कर सकता है।" केचियान कहते हैं, सामान्य फिटनेस के लिए शुरू करने के लिए एक अच्छी जगह वजन का उपयोग करना है जो आपके कुल बॉडीवेट के लगभग दस प्रतिशत के बराबर है। उदाहरण के लिए, यदि आप एक सौ पचास पाउंड वजन करते हैं, तो अपने पैक को लगभग पंद्रह पाउंड से लोड करें। पाउंड या दो से ऊपर या नीचे जाने के बारे में बहुत ज्यादा तनाव न करें- बस सामान्य बॉलपार्क में रहें। एक बार जब आप आरामदायक हो जाते हैं, तो आप जॉन पाउंड तक पैंतीस पाउंड तक बढ़ सकते हैं। "आप दिन, महीनों, वर्षों के लिए अपनी पीठ पर पैंतीस पाउंड के साथ जा सकते हैं," वे कहते हैं। "लेकिन एक बार जब आप पैंतीस पाउंड से ऊपर छींकना शुरू कर देते हैं, तो यह आपके शरीर को तोड़ सकता है।" वजन के लिए, आप अपने पैक में एक डंबेल फेंक सकते हैं। या आप कुछ ईंटों या रेत के बैग का भी उपयोग कर सकते हैं। यदि आपको फैंसी मिलना पसंद है, तो विभिन्न ऑनलाइन साइट्स विशेष रूप से रकिंग के लिए डिज़ाइन की गई वेट प्लेट्स प्रदान करती हैं। अपने वजन के चारों ओर एक तौलिया या बुलबुला लपेटना इसे स्थिर करने में मदद करेगा, इसलिए यह बैग में चारों ओर नहीं बदलता है। आप अपने आसपास के किसी भी बैकपैक का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन यदि आप नियमित रूप से पैंतीस पाउंड का उपयोग करने की योजना बनाते हैं, तो गंभीर वजन कम करने के लिए डिज़ाइन किए गए पैक में निवेश करें। हम गोरक और कैमलबैक के विकल्पों को पसंद करते हैं, जिनमें से दोनों सैन्य विनिर्देशों तक हैं। तीन. बकवास! अब, अपने पैक पर टॉस करें और पैदल चलने या बढ़ने के लिए जाएं। आप जितना चाहें उतना लंबा और दूर जा सकते हैं। लेकिन जब आप अभी शुरू कर रहे हैं, तो गतिविधि में आसानी लाने के लिए सबसे अच्छा है। जॉन कहते हैं, "बाद में, शायद आप कुछ सामान्य स्थानों पर परेशान होंगे, आपकी सामान्य फिटनेस दिनचर्या ने अनदेखा कर दिया है।" "अपने घुटनों, अपने बट, और अपनी पीठ के आसपास की मांसपेशियों की अपेक्षा निविदाएं करें। उलझन यह है कि पैक आपको उचित मुद्रा में डाल देता है, इसलिए आप काम कर रहे मांसपेशियों को काम कर रहे हैं। " यदि आप बहुत से लोगों के साथ रुकना चाहते हैं या चुनौती में वृद्धि करना चाहते हैं, तो गोरक-एक गियर और इवेंट कंपनी स्पेशल फोर्स दिग्गजों द्वारा शुरू की गई - मेजबान देश भर में सैकड़ों चकित घटनाएं आयोजित करती हैं। वे छः, बारह, चौबीस, और अड़तालीस घंटाटे की सैन्य शैली चुनौतियों से दूरी-आधारित समूह बक्स तक हैं।
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ऊना - ऊना के इंदिरा गांधी स्टेडियम में बुधवार को राष्ट्रीय ड्यूबाल प्रतियोगिता व भारत-जिम्बाब्वे सीरीज संपन्न हुई। सीरीज में भारतीय टीमों ने जिम्बाब्वे की महिला व पुरुष टीमों को हराकर खिताब अपने नाम किया। वहीं, प्रतियोगिता में पंजाब ने पुरुष व महिला दोनों वर्गों में खिताब जीता। प्रतियोगिता के समापन पर प्रदेश भाजपाध्यक्ष एवं प्रदेश ड्यूबाल संघ के अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की तथा विजेता टीमों को सम्मानित किया। इस मौके पर राष्ट्रीय ड्यूबाल फेडरेशन ने सतपाल सिंह सत्ती को ड्यूबाल फेडरेशन ऑफ इंडिया का चेयरमैन नियुक्त करने की घोषणा भी की। प्रतियोगिता के महिला वर्ग में चंडीगढ़ दूसरे तथा दिल्ली की टीम तीसरे स्थान पर रही, जबकि पुरुष वर्ग में गोवा की टीम दूसरे तथा महाराष्ट्र की टीम तीसरे स्थान पर रही। इसके अलावा भारत-जिम्बाब्वे सीरीज में भारत के खिलाड़ी प्रज्ज्वल को बेस्ट प्लेयर, जिम्बाब्वे के सिंबा को बेस्ट डिफेंडर तथा भारत के ही रमेश सहानी को बेस्ट गोलकीपर, जबकि महिलाओं के वर्ग में भारत की गगनदीप कौर को बेस्ट प्लेयर, जिम्बाब्वे की वनिशा को बेस्ट डिफेंडर तथा भारत की ही मेघना को बेस्ट गोलकीपर चुना गया।
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ऊना - ऊना के इंदिरा गांधी स्टेडियम में बुधवार को राष्ट्रीय ड्यूबाल प्रतियोगिता व भारत-जिम्बाब्वे सीरीज संपन्न हुई। सीरीज में भारतीय टीमों ने जिम्बाब्वे की महिला व पुरुष टीमों को हराकर खिताब अपने नाम किया। वहीं, प्रतियोगिता में पंजाब ने पुरुष व महिला दोनों वर्गों में खिताब जीता। प्रतियोगिता के समापन पर प्रदेश भाजपाध्यक्ष एवं प्रदेश ड्यूबाल संघ के अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की तथा विजेता टीमों को सम्मानित किया। इस मौके पर राष्ट्रीय ड्यूबाल फेडरेशन ने सतपाल सिंह सत्ती को ड्यूबाल फेडरेशन ऑफ इंडिया का चेयरमैन नियुक्त करने की घोषणा भी की। प्रतियोगिता के महिला वर्ग में चंडीगढ़ दूसरे तथा दिल्ली की टीम तीसरे स्थान पर रही, जबकि पुरुष वर्ग में गोवा की टीम दूसरे तथा महाराष्ट्र की टीम तीसरे स्थान पर रही। इसके अलावा भारत-जिम्बाब्वे सीरीज में भारत के खिलाड़ी प्रज्ज्वल को बेस्ट प्लेयर, जिम्बाब्वे के सिंबा को बेस्ट डिफेंडर तथा भारत के ही रमेश सहानी को बेस्ट गोलकीपर, जबकि महिलाओं के वर्ग में भारत की गगनदीप कौर को बेस्ट प्लेयर, जिम्बाब्वे की वनिशा को बेस्ट डिफेंडर तथा भारत की ही मेघना को बेस्ट गोलकीपर चुना गया।
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शिमला, जागरण संवाददाता। Hiamchal Pradesh Congress, कांग्रेस से छह साल के लिए निष्कासित नेताओं की संगठन में वापसी होने जा रही है। पहले चरण में उन्हें पार्टी में शामिल किया जाएगा, जिन्होंने अपनी गलती मानी है और पार्टी में दोबारा वापसी की गुहार लगाई है, साथ ही निष्कासन के दौरान किसी अन्य दल का रुख नहीं किया है। मंगलवार को शिमला में हुई कांग्रेस अनुशासन समिति की बैठक में इस पर विस्तृत चर्चा की गई। जुलाई में होने वाली बैठक में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने, अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लडऩे वाले 200 से ज्यादा नेताओं को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया था। हालांकि कुछ नेताओं की पहले वापसी हो चुकी है। करीब 24 नेता अभी वापसी की राह ताक रहे हैं।
अनुशासन समिति की अध्यक्ष विप्लव ठाकुर ने कहा कि पार्टी में अनुशासनहीनता के लिए कोई स्थान नहीं है। पार्टी व अग्रिम संगठनों के सभी पदाधिकारियों को अनुशासन में रहकर एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। किसी जिला या ब्लाक में संगठन के कार्यक्रम होते हैं तो उनके लिए जिला व ब्लाक कांग्रेस कमेटी और वहां के स्थानीय नेताओं को विश्वास में लेना जरूरी है। कोई भी पदाधिकारी पार्टी के किसी अन्य नेता के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी करता है तो कार्रवाई की जाएगी।
विप्लव ठाकुर ने सदस्यों को जिलावार जिम्मेदारी सौंपी है। विप्लव ठाकुर स्वयं जिला कांगड़ा देखेंगी। समिति के उपाध्यक्ष कुलदीप कुमार हमीरपुर, शिमला व किन्नौर देखेंगे। नंद लाल को सोलन व सिरमौर और सुरेश चंदेल को मंडी, कुल्लू व लाहुल स्पीति की जिम्मेदारी दी है। संजय अवस्थी बिलासपुर, ऊना व चंबा का जिम्मा संभालेंगे। बैठक में कुलदीप कुमार व संजय अवस्थी भी शामिल हुए, जबकि दो अन्य सदस्य व्यस्तता के कारण बैठक में भाग नहीं ले सके।
प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के किन्नौर और नाहन दौरे के दौरान उपजे विवाद पर भी चर्चा की गई। जिला कांग्रेस कमेटी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। प्रतिभा सिंह ने भी इसको लेकर रिपोर्ट मांगी है।
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शिमला, जागरण संवाददाता। Hiamchal Pradesh Congress, कांग्रेस से छह साल के लिए निष्कासित नेताओं की संगठन में वापसी होने जा रही है। पहले चरण में उन्हें पार्टी में शामिल किया जाएगा, जिन्होंने अपनी गलती मानी है और पार्टी में दोबारा वापसी की गुहार लगाई है, साथ ही निष्कासन के दौरान किसी अन्य दल का रुख नहीं किया है। मंगलवार को शिमला में हुई कांग्रेस अनुशासन समिति की बैठक में इस पर विस्तृत चर्चा की गई। जुलाई में होने वाली बैठक में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। दो हज़ार सत्रह के विधानसभा चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने, अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लडऩे वाले दो सौ से ज्यादा नेताओं को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया था। हालांकि कुछ नेताओं की पहले वापसी हो चुकी है। करीब चौबीस नेता अभी वापसी की राह ताक रहे हैं। अनुशासन समिति की अध्यक्ष विप्लव ठाकुर ने कहा कि पार्टी में अनुशासनहीनता के लिए कोई स्थान नहीं है। पार्टी व अग्रिम संगठनों के सभी पदाधिकारियों को अनुशासन में रहकर एकजुट होकर कार्य करना चाहिए। किसी जिला या ब्लाक में संगठन के कार्यक्रम होते हैं तो उनके लिए जिला व ब्लाक कांग्रेस कमेटी और वहां के स्थानीय नेताओं को विश्वास में लेना जरूरी है। कोई भी पदाधिकारी पार्टी के किसी अन्य नेता के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी करता है तो कार्रवाई की जाएगी। विप्लव ठाकुर ने सदस्यों को जिलावार जिम्मेदारी सौंपी है। विप्लव ठाकुर स्वयं जिला कांगड़ा देखेंगी। समिति के उपाध्यक्ष कुलदीप कुमार हमीरपुर, शिमला व किन्नौर देखेंगे। नंद लाल को सोलन व सिरमौर और सुरेश चंदेल को मंडी, कुल्लू व लाहुल स्पीति की जिम्मेदारी दी है। संजय अवस्थी बिलासपुर, ऊना व चंबा का जिम्मा संभालेंगे। बैठक में कुलदीप कुमार व संजय अवस्थी भी शामिल हुए, जबकि दो अन्य सदस्य व्यस्तता के कारण बैठक में भाग नहीं ले सके। प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के किन्नौर और नाहन दौरे के दौरान उपजे विवाद पर भी चर्चा की गई। जिला कांग्रेस कमेटी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। प्रतिभा सिंह ने भी इसको लेकर रिपोर्ट मांगी है।
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रसूलाबाद विकासखंड के ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार का खेल चरम सीमा पर खेला जा रहा है। शिकायतकर्ता शिकायत तो करता है, लेकिन जिम्मेदारों के द्वारा शिकायत में जांच के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। जहां समाजसेवी लगातार आवाज बुलंद करके हो रहे निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किए जाने का आरोप लगाकर जांच कराने के लिए लगातार उच्च अधिकारियों से शिकायत करता है, लेकिन शिकायत के बावजूद भी जांच पड़ताल में खानापूर्ति करके जिले के उच्च अधिकारियों को गुमराह किया जाता है।
रसूलाबाद विकासखंड क्षेत्र के अटिया रायपुर ग्राम पंचायत में इंटरलॉकिंग निर्माण से लेकर नाली निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग ग्राम प्रधान के द्वारा लगातार किया जा रहा है। जहां पर समाजसेवी अजीत शर्मा ने शिकायत करके जिम्मेदारों से जांच कराने की मांग की थी, लेकिन तहसील दिवस में शिकायत करने के बावजूद भी सुनवाई ना होते देख समाजसेवी ने जिले के उच्च अधिकारियों से शिकायत पत्र देकर नाली निर्माण इंटरलॉकिंग निर्माण सहित पंचायत भवन में घटिया सामग्री उपयोग किए जाने का आरोप लगाकर जांच कराने की मांग की।
जहां पर जिलाधिकारी नेहा जैन ने समाजसेवी की शिकायत के आधार पर संबंधित अधिकारी को जांच पड़ताल करने के लिए दिशा निर्देश दिए, लेकिन स्थानीय अधिकारियों के द्वारा जांच पड़ताल में खानापूर्ति की गई और हुए भ्रष्टाचार के मामले को लेकर चुप्पी साध ली गई। समाजसेवी का आरोप है जिम्मेदारों की सांठगांठ से भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है। सरकारी पैसे का दुरुपयोग हो रहा है, लेकिन जांच के नाम पर भी अब जिम्मेदार अधिकारी खानापूर्ति कर मामले को रफा-दफा करने में लगे हुए हैं।
पूरे मामले पर रसूलाबाद विकासखंड के जिम्मेदार अधिकारी कैमरे के सामने बोलने से बचते हुए नजर आए। जहां पर जांच कराने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
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रसूलाबाद विकासखंड के ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार का खेल चरम सीमा पर खेला जा रहा है। शिकायतकर्ता शिकायत तो करता है, लेकिन जिम्मेदारों के द्वारा शिकायत में जांच के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। जहां समाजसेवी लगातार आवाज बुलंद करके हो रहे निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किए जाने का आरोप लगाकर जांच कराने के लिए लगातार उच्च अधिकारियों से शिकायत करता है, लेकिन शिकायत के बावजूद भी जांच पड़ताल में खानापूर्ति करके जिले के उच्च अधिकारियों को गुमराह किया जाता है। रसूलाबाद विकासखंड क्षेत्र के अटिया रायपुर ग्राम पंचायत में इंटरलॉकिंग निर्माण से लेकर नाली निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग ग्राम प्रधान के द्वारा लगातार किया जा रहा है। जहां पर समाजसेवी अजीत शर्मा ने शिकायत करके जिम्मेदारों से जांच कराने की मांग की थी, लेकिन तहसील दिवस में शिकायत करने के बावजूद भी सुनवाई ना होते देख समाजसेवी ने जिले के उच्च अधिकारियों से शिकायत पत्र देकर नाली निर्माण इंटरलॉकिंग निर्माण सहित पंचायत भवन में घटिया सामग्री उपयोग किए जाने का आरोप लगाकर जांच कराने की मांग की। जहां पर जिलाधिकारी नेहा जैन ने समाजसेवी की शिकायत के आधार पर संबंधित अधिकारी को जांच पड़ताल करने के लिए दिशा निर्देश दिए, लेकिन स्थानीय अधिकारियों के द्वारा जांच पड़ताल में खानापूर्ति की गई और हुए भ्रष्टाचार के मामले को लेकर चुप्पी साध ली गई। समाजसेवी का आरोप है जिम्मेदारों की सांठगांठ से भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है। सरकारी पैसे का दुरुपयोग हो रहा है, लेकिन जांच के नाम पर भी अब जिम्मेदार अधिकारी खानापूर्ति कर मामले को रफा-दफा करने में लगे हुए हैं। पूरे मामले पर रसूलाबाद विकासखंड के जिम्मेदार अधिकारी कैमरे के सामने बोलने से बचते हुए नजर आए। जहां पर जांच कराने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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का शुद्ध लाभ दोगुना से अधिक हो गया है।
कंपनी का मार्च में समाप्त वित्त वर्ष की चौथी तिमाही का एकीकृत शुद्ध लाभ 156 प्रतिशत की बढ़त के साथ 749. 88 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। कंपनी ने सोमवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि मुख्य रूप से आमदनी बढ़ने की वजह से उसका मुनाफा बढ़ा है।
कंपनी का इससे एक साल पहले की समान तिमाही में शुद्ध लाभ 292. 61 करोड़ रुपये रह था।
शेयर बाजारों को भेजी सूचना में जेएसएल ने कहा कि जनवरी-मार्च, 2022 में उसकी कुल आय बढ़कर 6,582. 84 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो 2020-21 की समान तिमाही में 3,926. 30 करोड़ रुपये रही थी।
समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी का कुल खर्च 5,885. 19 करोड़ रुपये रहा, जबकि इससे पहले यह 3,564. 82 करोड़ रुपये था।
जेएसएल ने अलग से जारी बयान में कहा कि आपूर्ति श्रृंखला के लिए अनुकूल नीतियों तथा उत्पादों के बेहतर प्रबंधन की वजह से वह तिमाही के दौरान अच्छा प्रदर्शन कर पाई है।
जिंदल स्टेनलेस के प्रबंध निदेशक अभ्युदय जिंदल ने हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान पीटीआई-भाषा को बताया था कि उनकी कंपनी राजस्थान, हरियाणा और ओडिशा में 300 मेगावॉट सौर और पवन क्षमता स्थापित करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने की तैयारी कर रही है।
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का शुद्ध लाभ दोगुना से अधिक हो गया है। कंपनी का मार्च में समाप्त वित्त वर्ष की चौथी तिमाही का एकीकृत शुद्ध लाभ एक सौ छप्पन प्रतिशत की बढ़त के साथ सात सौ उनचास. अठासी करोड़ रुपये पर पहुंच गया। कंपनी ने सोमवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि मुख्य रूप से आमदनी बढ़ने की वजह से उसका मुनाफा बढ़ा है। कंपनी का इससे एक साल पहले की समान तिमाही में शुद्ध लाभ दो सौ बानवे. इकसठ करोड़ रुपये रह था। शेयर बाजारों को भेजी सूचना में जेएसएल ने कहा कि जनवरी-मार्च, दो हज़ार बाईस में उसकी कुल आय बढ़कर छः,पाँच सौ बयासी. चौरासी करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो दो हज़ार बीस-इक्कीस की समान तिमाही में तीन,नौ सौ छब्बीस. तीस करोड़ रुपये रही थी। समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी का कुल खर्च पाँच,आठ सौ पचासी. उन्नीस करोड़ रुपये रहा, जबकि इससे पहले यह तीन,पाँच सौ चौंसठ. बयासी करोड़ रुपये था। जेएसएल ने अलग से जारी बयान में कहा कि आपूर्ति श्रृंखला के लिए अनुकूल नीतियों तथा उत्पादों के बेहतर प्रबंधन की वजह से वह तिमाही के दौरान अच्छा प्रदर्शन कर पाई है। जिंदल स्टेनलेस के प्रबंध निदेशक अभ्युदय जिंदल ने हाल ही में एक साक्षात्कार के दौरान पीटीआई-भाषा को बताया था कि उनकी कंपनी राजस्थान, हरियाणा और ओडिशा में तीन सौ मेगावॉट सौर और पवन क्षमता स्थापित करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने की तैयारी कर रही है।
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प्रदेश के स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं को पढ़ाने के लिए वर्तमान सरकार के कार्यकाल में नई भर्तियां नहीं हो पाई। केंद्र से बजट भी आया, स्कूलों में प्री-प्राइमरी में बच्चे भी एनरोल हुए और इन बच्चों को पढ़ाने के लिए ट्रेंड टीचर भी थे लेकिन उसके बावजूद शिक्षकों की भर्तियां ही नहीं हो पाई। 3840 पाठशालाओं को 4847 शिक्षक नहीं मिले पाएं हैं। प्रदेश सरकार पहले इस बात का फैसला नहीं कर पाई कि किसे प्री-प्राइमरी के शिक्षकों के लिए किस योग्यता के शिक्षकों को नियुक्त किया जाए और जब एनटीटी को इसमें शामिल करने का फैसला लिया गया तो विभाग ही आपस में स्पष्टीकरण को लेकर उलझ गए। बार-बार कैबिनेट में ये एंजेंडा लगा उसके बाद भी स्कूलों में ये नियुक्तियां नहीं हो पाई।
साल 2018 में स्कूलों में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं शुरू की गई थी। तबसे लेकर पांच सालों में स्कूलों में जेबीटी शिक्षकों के सहारे ही काम चल रहा है। फिलहाल भर्ती की प्रक्रिया राज्य इलेक्ट्रॅानिक विकास निगम को सौंपी गई है और निगम ने अब इस मामले में प्रारंभिक शिक्षा विभाग से कुछ क्लेरिफिकेशन मांगी है। इस भर्ती के लिए एनटीटी का दो साल का डिप्लोमा लिया जा रहा है, जबकि एक साल के डिप्लोमा वाले अभ्यर्थियों के लिए ब्रिज कोर्स की व्यवस्था बनाई जा रही है। भर्ती शुरू करते समय एक साल के डिप्लोमा को लेना है या नहीं, इस बारे में क्लेरिफिकेशन मांगी गई है। एक सवाल यह भी है कि ब्रिज कोर्स कौन करवाएगा और उसका खर्चा कौन देगा इस बारे में भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। वर्तमान सरकार समग्र शिक्षा के बजट से इन भर्तियों को करना चाहती है और इसके लिए एनसीटीई के नियमों से अतिरिक्त भी एक साल के डिप्लोमा को जोड़ा गया है। इससे पहले आंगनबाड़ी को इसमें शामिल किए जाने की बात कही जा रही थी लेकिन फिलहाल इसमें एनटीटी को ही शामिल किया जाना है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों में सरकार के प्रति काफी रोष है। पांच साल से राहत की गुहार लगा रहे लेकिन सरकार के द्वारा आजतक केवल आश्वासन ही दिए गए है। नबंवर में होने वाले विधानसभा चुनावों में शिक्षकों का रोष गेम को गुमा सकता है।
प्रदेश के स्कूलों में प्री-प्राइमरी की कक्षाओं को शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से 859 करोड़ का बजट भी जारी हो चुका है लेकिन इस बजट को अभी तक खर्च नहीं कर पाया है। जेबीटी शिक्षकों पर भी अतिरिक्त कार्यभार पड़ रहा है। प्रदेश में कई स्कूल तो ऐसे हैं जहां पहली से पांचवी कक्षा तक एक ही शिक्षक है। ऐसे में प्री-प्राइमरी के बच्चों को भी इन्हीं शिक्षकों को पढ़ाना पड़ रहा है।
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प्रदेश के स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं को पढ़ाने के लिए वर्तमान सरकार के कार्यकाल में नई भर्तियां नहीं हो पाई। केंद्र से बजट भी आया, स्कूलों में प्री-प्राइमरी में बच्चे भी एनरोल हुए और इन बच्चों को पढ़ाने के लिए ट्रेंड टीचर भी थे लेकिन उसके बावजूद शिक्षकों की भर्तियां ही नहीं हो पाई। तीन हज़ार आठ सौ चालीस पाठशालाओं को चार हज़ार आठ सौ सैंतालीस शिक्षक नहीं मिले पाएं हैं। प्रदेश सरकार पहले इस बात का फैसला नहीं कर पाई कि किसे प्री-प्राइमरी के शिक्षकों के लिए किस योग्यता के शिक्षकों को नियुक्त किया जाए और जब एनटीटी को इसमें शामिल करने का फैसला लिया गया तो विभाग ही आपस में स्पष्टीकरण को लेकर उलझ गए। बार-बार कैबिनेट में ये एंजेंडा लगा उसके बाद भी स्कूलों में ये नियुक्तियां नहीं हो पाई। साल दो हज़ार अट्ठारह में स्कूलों में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं शुरू की गई थी। तबसे लेकर पांच सालों में स्कूलों में जेबीटी शिक्षकों के सहारे ही काम चल रहा है। फिलहाल भर्ती की प्रक्रिया राज्य इलेक्ट्रॅानिक विकास निगम को सौंपी गई है और निगम ने अब इस मामले में प्रारंभिक शिक्षा विभाग से कुछ क्लेरिफिकेशन मांगी है। इस भर्ती के लिए एनटीटी का दो साल का डिप्लोमा लिया जा रहा है, जबकि एक साल के डिप्लोमा वाले अभ्यर्थियों के लिए ब्रिज कोर्स की व्यवस्था बनाई जा रही है। भर्ती शुरू करते समय एक साल के डिप्लोमा को लेना है या नहीं, इस बारे में क्लेरिफिकेशन मांगी गई है। एक सवाल यह भी है कि ब्रिज कोर्स कौन करवाएगा और उसका खर्चा कौन देगा इस बारे में भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। वर्तमान सरकार समग्र शिक्षा के बजट से इन भर्तियों को करना चाहती है और इसके लिए एनसीटीई के नियमों से अतिरिक्त भी एक साल के डिप्लोमा को जोड़ा गया है। इससे पहले आंगनबाड़ी को इसमें शामिल किए जाने की बात कही जा रही थी लेकिन फिलहाल इसमें एनटीटी को ही शामिल किया जाना है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों में सरकार के प्रति काफी रोष है। पांच साल से राहत की गुहार लगा रहे लेकिन सरकार के द्वारा आजतक केवल आश्वासन ही दिए गए है। नबंवर में होने वाले विधानसभा चुनावों में शिक्षकों का रोष गेम को गुमा सकता है। प्रदेश के स्कूलों में प्री-प्राइमरी की कक्षाओं को शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से आठ सौ उनसठ करोड़ का बजट भी जारी हो चुका है लेकिन इस बजट को अभी तक खर्च नहीं कर पाया है। जेबीटी शिक्षकों पर भी अतिरिक्त कार्यभार पड़ रहा है। प्रदेश में कई स्कूल तो ऐसे हैं जहां पहली से पांचवी कक्षा तक एक ही शिक्षक है। ऐसे में प्री-प्राइमरी के बच्चों को भी इन्हीं शिक्षकों को पढ़ाना पड़ रहा है।
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नई दिल्ली। अगर आप भी 10वीं पास हैं और नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। दरअसल पोस्ट ऑफिस ने आंध्र प्रदेश पोस्टल सर्कल में कई पदों पर भर्ती को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया है। जारी किए गए नोटिफिकेशन के मुताबिक यह भर्ती ग्रामीण डाक सेवक के लिए निकली है। इच्छुक अभ्यार्थी इन पदों पर वेबसाइट appost.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। बता दें कि आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है जो 18 नवंबर तक जारी रहेगी।
इन पदों पर आवेदन कर रहे अभ्यार्थी को किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना जरूरी है। वहीं अभ्यार्थी की आयु 18 से 40 वर्ष होना चाहिए।
इन पदों पर अभ्यार्थियों को आवेदन शुल्क भी देना है। जहां ओसी/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस के लिए 100 रुपए आवेदन शुल्क देना है। इच्छुक अभ्यार्थी इन पदों पर आधिकारिक वेबसाइट appost.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। बता दें कि आवेदन की प्रक्रिया 18 नवंबर तक जारी रहेगी।
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नई दिल्ली। अगर आप भी दसवीं पास हैं और नौकरी की तलाश कर रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। दरअसल पोस्ट ऑफिस ने आंध्र प्रदेश पोस्टल सर्कल में कई पदों पर भर्ती को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया है। जारी किए गए नोटिफिकेशन के मुताबिक यह भर्ती ग्रामीण डाक सेवक के लिए निकली है। इच्छुक अभ्यार्थी इन पदों पर वेबसाइट appost.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। बता दें कि आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है जो अट्ठारह नवंबर तक जारी रहेगी। इन पदों पर आवेदन कर रहे अभ्यार्थी को किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से दसवीं पास होना जरूरी है। वहीं अभ्यार्थी की आयु अट्ठारह से चालीस वर्ष होना चाहिए। इन पदों पर अभ्यार्थियों को आवेदन शुल्क भी देना है। जहां ओसी/ओबीसी/ईडब्ल्यूएस के लिए एक सौ रुपयापए आवेदन शुल्क देना है। इच्छुक अभ्यार्थी इन पदों पर आधिकारिक वेबसाइट appost.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। बता दें कि आवेदन की प्रक्रिया अट्ठारह नवंबर तक जारी रहेगी।
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किम कार्दशियन के जीजा ट्रैविस बार्कर की पूर्व पत्नी ने जताई चिंता. (फोटो साभारः Twitter/Instagram @readygist/kimkardashian)
अमेरिकी मॉडल और टीवी होस्ट किम कार्दशियन (Kim Kardashian) के जीजा और कर्टनी कार्दशियन को हाल में लॉस एंजिल्स के वेस्ट हिल्स अस्पताल और मेडिकल सेंटर में भर्ती करवाया गया था. अब उनके अस्पताल में भर्ती होने की वजह का खुलासा हुआ है. ट्रैविस पैन्क्रियाटाइटिस से पीड़ित हैं. इस बीमारी में उस अंग में सूजन आती है जो पाचन में सहायता करता है और ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है. ट्रैविस के अस्पताल में भर्ती होने पर उनकी पूर्व पत्नी शना मोकलर ने चिंता जताई और उनके लिए जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की.
शना मोलकर (Shanna Moalker) ने बताया कि ट्रैविस बार्कर के बच्चे अपने पिता के बारे में चिंतित हैं. उन्होंने कहा, "मैं ट्रैविस के जल्द स्वस्थ होने और अपने बच्चों के आराम के लिए प्रार्थना करती हूं क्योंकि मुझे पता है कि वे बहुत चिंतित और हैं. " उनकी बेटी अलबामा ने सोशल मीडिया पर फैंस को उनके पिता के लिए शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद दिया क्योंकि उन्होंने पहले उनके सभी फॉलोवर्स से ट्रैविस के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करने के लिए कहा था.
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किम कार्दशियन के जीजा ट्रैविस बार्कर की पूर्व पत्नी ने जताई चिंता. अमेरिकी मॉडल और टीवी होस्ट किम कार्दशियन के जीजा और कर्टनी कार्दशियन को हाल में लॉस एंजिल्स के वेस्ट हिल्स अस्पताल और मेडिकल सेंटर में भर्ती करवाया गया था. अब उनके अस्पताल में भर्ती होने की वजह का खुलासा हुआ है. ट्रैविस पैन्क्रियाटाइटिस से पीड़ित हैं. इस बीमारी में उस अंग में सूजन आती है जो पाचन में सहायता करता है और ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है. ट्रैविस के अस्पताल में भर्ती होने पर उनकी पूर्व पत्नी शना मोकलर ने चिंता जताई और उनके लिए जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की. शना मोलकर ने बताया कि ट्रैविस बार्कर के बच्चे अपने पिता के बारे में चिंतित हैं. उन्होंने कहा, "मैं ट्रैविस के जल्द स्वस्थ होने और अपने बच्चों के आराम के लिए प्रार्थना करती हूं क्योंकि मुझे पता है कि वे बहुत चिंतित और हैं. " उनकी बेटी अलबामा ने सोशल मीडिया पर फैंस को उनके पिता के लिए शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद दिया क्योंकि उन्होंने पहले उनके सभी फॉलोवर्स से ट्रैविस के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करने के लिए कहा था. .
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अगरतला- त्रिपुरा के मुख्यमंत्री विप्लव कुमार देव ने महाराजा वीर विक्रम माणिक्य की 110वीं जयंती के अवसर पर यहां एक समारोह में विशेष सोने का सिक्का जारी किया। श्री देव ने बीर विक्रम माणिक्य के योगदान को याद करते हुए बताया कि 1923 से 1947 तक उनके शासन में राज्य में बड़े बुनियादी ढांचों को निर्माण किया गया, जिनका अब भी उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने सोने के सिक्के का डिजाइन करने वाले जौहरी की सराहना करते हुए कहा कि राजतंत्र से लोकतंत्र में बदलने के बावजूद राज्य के लोग अपने अंतिम राजा को याद करते हैं और उनका सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि सोने के सिक्के पर महाराजा का चित्र और दूसरी ओर त्रिपुरा रियासत का चिह्न दर्शाया गया है। उज्ज्यंत महल में एक विशेष स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्यमंत्री देव शामिल थे।
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अगरतला- त्रिपुरा के मुख्यमंत्री विप्लव कुमार देव ने महाराजा वीर विक्रम माणिक्य की एक सौ दसवीं जयंती के अवसर पर यहां एक समारोह में विशेष सोने का सिक्का जारी किया। श्री देव ने बीर विक्रम माणिक्य के योगदान को याद करते हुए बताया कि एक हज़ार नौ सौ तेईस से एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस तक उनके शासन में राज्य में बड़े बुनियादी ढांचों को निर्माण किया गया, जिनका अब भी उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने सोने के सिक्के का डिजाइन करने वाले जौहरी की सराहना करते हुए कहा कि राजतंत्र से लोकतंत्र में बदलने के बावजूद राज्य के लोग अपने अंतिम राजा को याद करते हैं और उनका सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि सोने के सिक्के पर महाराजा का चित्र और दूसरी ओर त्रिपुरा रियासत का चिह्न दर्शाया गया है। उज्ज्यंत महल में एक विशेष स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्यमंत्री देव शामिल थे।
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चालक और संचालक मोटरमैन को परिस्थितियों से सूचित किया जाएगा ।
[PART II - SEC, 3 (i) ]
( ) लाइन क्लियर के बिना प्रस्थान का प्राधिकार (अप एवं डाउन के लिए अलग अलग ) विहित प्ररूप पर चालक मोटरमैन को दिया जाएगा ।
( ) सिधाई पर गति को 25 कि.मी. प्रति घंटा ओर" ऐसे भाग पर जहां आगे का दृश्य स्पष्ट न दिखाई दे, 8 कि.मी. प्रति घंटा तक गति को निर्बंधित रखने का एक चेतावनी आदेश चालक मोटरमैन को सौंपा जाएगा ।
) रेलगाड़ी विशेष अनुदेशो में यथाविनिर्दिष्ट समय अंतरालों पर चलाई जाएगी ।
( ) अगले स्टेशन पर पहुंचते समय चालक मोटरमैन अपनी रेलगाड़ी को स्टॉप सिगनल के अधोमाग
के पास रोकेगा, और सिगनल या पायलट पोस्ट द्वारा यथा मार्गदर्शित आगे चलेगा ।
( ) ) पेपर लाइन क्लियर टिकट, विशेष अनुदेश के अनुसार जारी किया जाना चाहिए ।
( ) चालक मोटरमैन प्रभावित सेक्शन के अंत में प्रस्थान का प्राधिकार स्टेशन मास्टर को सौंप देगा जो इसे निरीक्षण के लिए सुरक्षित रखेगा।
(5) जब, रेडियो टेलीफोन / आपात टेलीफोन द्वारा, यातायात नियंत्रक और मोटरमैन के बीच, संचार सहित सभी संचार व्यवस्थाएं ठप्प हो जाती हैं, तो रेलगाड़ी सेवा विशेष अनुदेशों द्वारा विनियमित की जाएगी ।
8.16 रेलगाड़ी कर्मीदल और यातायात नियंत्रक के बीच रेडियो संचार का खराब हो जाना :
रेलगाड़ी कर्मीदल और यातायात नियंत्रक के बीच रेडियो संचार के ख़राब हो जाने की दशा मे रेलगाड़ी कर्मीदल आपातकालीन टेलीफोन का उपयोग करके यातायात नियंत्रक से संपर्क स्थापित करेगा ओर विशेष अनुदेशो के अनुसार कार्य करेगा । के
8.17 ब्लॉक प्रचालन उपस्कर का उपयोग और प्रचालन
ब्लॉक प्रचालन के लिए उपबंधित उपकरणों का उपयोग और प्रचालन, विशेष अनुदेशो द्वारा शासित होगा ।
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चालक और संचालक मोटरमैन को परिस्थितियों से सूचित किया जाएगा । [PART II - SEC, तीन ] लाइन क्लियर के बिना प्रस्थान का प्राधिकार विहित प्ररूप पर चालक मोटरमैन को दिया जाएगा । सिधाई पर गति को पच्चीस कि.मी. प्रति घंटा ओर" ऐसे भाग पर जहां आगे का दृश्य स्पष्ट न दिखाई दे, आठ कि.मी. प्रति घंटा तक गति को निर्बंधित रखने का एक चेतावनी आदेश चालक मोटरमैन को सौंपा जाएगा । ) रेलगाड़ी विशेष अनुदेशो में यथाविनिर्दिष्ट समय अंतरालों पर चलाई जाएगी । अगले स्टेशन पर पहुंचते समय चालक मोटरमैन अपनी रेलगाड़ी को स्टॉप सिगनल के अधोमाग के पास रोकेगा, और सिगनल या पायलट पोस्ट द्वारा यथा मार्गदर्शित आगे चलेगा । ) पेपर लाइन क्लियर टिकट, विशेष अनुदेश के अनुसार जारी किया जाना चाहिए । चालक मोटरमैन प्रभावित सेक्शन के अंत में प्रस्थान का प्राधिकार स्टेशन मास्टर को सौंप देगा जो इसे निरीक्षण के लिए सुरक्षित रखेगा। जब, रेडियो टेलीफोन / आपात टेलीफोन द्वारा, यातायात नियंत्रक और मोटरमैन के बीच, संचार सहित सभी संचार व्यवस्थाएं ठप्प हो जाती हैं, तो रेलगाड़ी सेवा विशेष अनुदेशों द्वारा विनियमित की जाएगी । आठ.सोलह रेलगाड़ी कर्मीदल और यातायात नियंत्रक के बीच रेडियो संचार का खराब हो जाना : रेलगाड़ी कर्मीदल और यातायात नियंत्रक के बीच रेडियो संचार के ख़राब हो जाने की दशा मे रेलगाड़ी कर्मीदल आपातकालीन टेलीफोन का उपयोग करके यातायात नियंत्रक से संपर्क स्थापित करेगा ओर विशेष अनुदेशो के अनुसार कार्य करेगा । के आठ.सत्रह ब्लॉक प्रचालन उपस्कर का उपयोग और प्रचालन ब्लॉक प्रचालन के लिए उपबंधित उपकरणों का उपयोग और प्रचालन, विशेष अनुदेशो द्वारा शासित होगा ।
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उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने के फैसले को लेकर कांग्रेस सहित 20 विपक्षी दलों पर निशाना साधा।
New Delhi: नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर शुक्रवार को सत्तारूढ़ दल भाजपा एवं विपक्षी दल कांग्रेस के बीच जुबानी जंग जारी रहने के साथ रस्मी राजदंड 'सेंगोल' को लेकर भी घमासान छिड़ गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि नया संसद भवन हर भारतीय को गौरवान्वित करेगा। उन्होंने नवनिर्मित परिसर का एक वीडियो भी साझा किया। वहीं, कई केंद्रीय मंत्रियों ने उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने के फैसले को लेकर कांग्रेस सहित 20 विपक्षी दलों पर निशाना साधा।
मोदी ने ट्विटर पर वीडियो पोस्ट करते हुए लोगों से 'माई पार्लियामेंट माई प्राइड' हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए अपने 'वॉयसओवर' के साथ वीडियो साझा करने का भी आग्रह किया।
नए संसद भवन का उद्घाटन रविवार को होगा। इस समारोह की शुरुआत सुबह-सुबह हवन और सर्व-धर्म प्रार्थना के साथ शुरू होगी। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा में औपचारिक उद्घाटन करेंगे। पूर्व नौकरशाहों, राजदूतों और करीब 270 विशिष्ट नागरिकों के एक समूह ने विपक्षी दलों की आलोचना की और दावा किया कि सभी "परिवार पहले" वाले दल, भारत का प्रतिनिधित्व करने वालों का बहिष्कार करने के लिए एकजुट हो गए हैं।
इस बीच, उच्चतम न्यायालय ने लोकसभा सचिवालय को नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से कराने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले पर गौर करना अदालत का काम नहीं है। .
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर नए संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष के आसन के निकट स्थापित किए जाने वाले रस्मी राजदंड के महत्व को कमतर करके "चलते समय सहारा देने के काम आने वाली छड़ी" बना देने का आरोप लगाया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका वंशवादी नेतृत्व उन्हें आपस में जोड़ता है जिनकी "राजशाही" पद्धतियों का संविधान के सिद्धांतों से टकराव है।
शाह ने कहा, "कांग्रेस अब आदिनम के इतिहास को फर्जी बता रही है। कांग्रेस को अपने व्यवहार पर मनन करने की आवश्यकता है। " शाह के इस बयान के पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि इस बात का कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है जिससे यह साबित होता हो कि लॉर्ड माउंटबेटन, सी राजगोपालाचारी और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सेंगोल को ब्रिटिश हुकूमत द्वारा भारत को सत्ता हस्तांतरित किये जाने का प्रतीक बताया हो। .
रमेश के दावों को चुनौती देते हुए तमिलनाडु में एक मठ के प्रमुख ने कहा कि सेंगोल अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को सौंपा गया था और फिर इसे 1947 में पंडित जवाहरलाल नेहरू को अंग्रेजों से सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में भेंट किया गया था तथा कुछ लोगों द्वारा इस संबंध में किए जा रहे गलत दावों से उन्हें बहुत तकलीफ हो रही है।
चेन्नई में, संवाददाताओं से बातचीत में तिरुवदुथुरै आदिनाम के अंबालावन देसिका परमाचार्य स्वामी ने कहा कि सेंगोल जो लंबे समय तक लोगों की निगाहों से दूर था, अब संसद में प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि दुनिया उसे देख सके। . सेंगोल को सौंपे जाने के प्रमाण से जुड़े एक सवाल पर आदिनाम ने कहा कि 1947 में अखबारों और पत्रिकाओं में छपी तस्वीरें व खबरों सहित इसके कई प्रमाण हैं।
परमाचार्य स्वामी ने कहा, "यह दावा करना कि सेंगोल भेंट नहीं किया गया था, गलत है। सेंगोल के संबंध में 'गलत सूचना' के प्रसार से तकलीफ हुई है। " केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि 'बहिष्कार गिरोह' अपने ही नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत का अपमान कर रहा है।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को भारतीय मूल्य और संस्कृति को बदनाम करने की आदत है। उन्होंने कहा, "आज जब दुनिया भारत की समृद्ध परंपराओं पर ध्यान दे रही है, कांग्रेस पार्टी भारत और उसकी विरासत का अपमान करने के लिए नए तरीके खोजने की कोशिश कर रही है। ऐसा लगता है कि कांग्रेस अभी भी औपनिवेशिक खुमारी में है। " विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नये संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार करने के विपक्षी दलों के फैसले को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताया और कहा कि राजनीति करने की एक सीमा होनी चाहिए।
विपक्षी दलों का तर्क है कि संसद के नये भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को करना चाहिए क्योंकि वह न केवल गणराज्य की प्रमुख हैं, बल्कि संसद की भी प्रमुख हैं क्योंकि वह उसे आहूत करती हैं, सत्रावसान करती हैं और उसके संयुक्त सत्र को संबोधित करती हैं। . विपक्षी दलों की ओर से बहिष्कार के निर्णय की आलोचना करने वाले विशिष्ट नागरिकों द्वारा संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में एनआईए के पूर्व निदेशक वाई सी मोदी, पूर्व आईएएस अधिकारी आर डी कपूर, गोपाल कृष्ण और समीरेंद्र चटर्जी और लिंगया विश्वविद्यालय के कुलपति अनिल रॉय दुबे शामिल हैं। .
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने नये संसद भवन के उद्घाटन समारोह के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आमंत्रित नहीं करने पर केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी नए संसद भवन को अपनी "जायदाद" समझते हैं क्योंकि उन्हें (मोदी) ऐसा लगता है कि इस परिसर का निर्माण उन्होंने करवाया है।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने संसद के नए भवन के उद्घाटन समारोह को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को शुभकामनाएं दीं और इस कार्यक्रम के बहिष्कार के लिए विपक्षी दलों की निंदा की। .
लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने नये संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर विवाद को "अनावश्यक" बताया। महाजन ने कहा कि संसद, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का मंदिर है और इसके नये भवन के उद्घाटन को लेकर दलगत राजनीति से बचा जाना चाहिए।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नया संसद भवन स्वागत योग्य है और यह भव्य दिखता है।
अब्दुल्ला की पार्टी ने भी रविवार के आयोजन का बहिष्कार किया है। अब्दुल्ला ने कहा कि जब वह लोकसभा सदस्य थे, तब उनके कई सहकर्मी एक नये और बेहतर संसद भवन की जरूरत को लेकर अक्सर बातें किया करते थे।
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उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने के फैसले को लेकर कांग्रेस सहित बीस विपक्षी दलों पर निशाना साधा। New Delhi: नए संसद भवन के उद्घाटन को लेकर शुक्रवार को सत्तारूढ़ दल भाजपा एवं विपक्षी दल कांग्रेस के बीच जुबानी जंग जारी रहने के साथ रस्मी राजदंड 'सेंगोल' को लेकर भी घमासान छिड़ गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि नया संसद भवन हर भारतीय को गौरवान्वित करेगा। उन्होंने नवनिर्मित परिसर का एक वीडियो भी साझा किया। वहीं, कई केंद्रीय मंत्रियों ने उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने के फैसले को लेकर कांग्रेस सहित बीस विपक्षी दलों पर निशाना साधा। मोदी ने ट्विटर पर वीडियो पोस्ट करते हुए लोगों से 'माई पार्लियामेंट माई प्राइड' हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए अपने 'वॉयसओवर' के साथ वीडियो साझा करने का भी आग्रह किया। नए संसद भवन का उद्घाटन रविवार को होगा। इस समारोह की शुरुआत सुबह-सुबह हवन और सर्व-धर्म प्रार्थना के साथ शुरू होगी। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा में औपचारिक उद्घाटन करेंगे। पूर्व नौकरशाहों, राजदूतों और करीब दो सौ सत्तर विशिष्ट नागरिकों के एक समूह ने विपक्षी दलों की आलोचना की और दावा किया कि सभी "परिवार पहले" वाले दल, भारत का प्रतिनिधित्व करने वालों का बहिष्कार करने के लिए एकजुट हो गए हैं। इस बीच, उच्चतम न्यायालय ने लोकसभा सचिवालय को नए संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से कराने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले पर गौर करना अदालत का काम नहीं है। . केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर नए संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष के आसन के निकट स्थापित किए जाने वाले रस्मी राजदंड के महत्व को कमतर करके "चलते समय सहारा देने के काम आने वाली छड़ी" बना देने का आरोप लगाया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका वंशवादी नेतृत्व उन्हें आपस में जोड़ता है जिनकी "राजशाही" पद्धतियों का संविधान के सिद्धांतों से टकराव है। शाह ने कहा, "कांग्रेस अब आदिनम के इतिहास को फर्जी बता रही है। कांग्रेस को अपने व्यवहार पर मनन करने की आवश्यकता है। " शाह के इस बयान के पहले कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि इस बात का कोई दस्तावेजी सबूत नहीं है जिससे यह साबित होता हो कि लॉर्ड माउंटबेटन, सी राजगोपालाचारी और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सेंगोल को ब्रिटिश हुकूमत द्वारा भारत को सत्ता हस्तांतरित किये जाने का प्रतीक बताया हो। . रमेश के दावों को चुनौती देते हुए तमिलनाडु में एक मठ के प्रमुख ने कहा कि सेंगोल अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को सौंपा गया था और फिर इसे एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में पंडित जवाहरलाल नेहरू को अंग्रेजों से सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में भेंट किया गया था तथा कुछ लोगों द्वारा इस संबंध में किए जा रहे गलत दावों से उन्हें बहुत तकलीफ हो रही है। चेन्नई में, संवाददाताओं से बातचीत में तिरुवदुथुरै आदिनाम के अंबालावन देसिका परमाचार्य स्वामी ने कहा कि सेंगोल जो लंबे समय तक लोगों की निगाहों से दूर था, अब संसद में प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि दुनिया उसे देख सके। . सेंगोल को सौंपे जाने के प्रमाण से जुड़े एक सवाल पर आदिनाम ने कहा कि एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में अखबारों और पत्रिकाओं में छपी तस्वीरें व खबरों सहित इसके कई प्रमाण हैं। परमाचार्य स्वामी ने कहा, "यह दावा करना कि सेंगोल भेंट नहीं किया गया था, गलत है। सेंगोल के संबंध में 'गलत सूचना' के प्रसार से तकलीफ हुई है। " केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि 'बहिष्कार गिरोह' अपने ही नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत का अपमान कर रहा है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश की आलोचना करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी को भारतीय मूल्य और संस्कृति को बदनाम करने की आदत है। उन्होंने कहा, "आज जब दुनिया भारत की समृद्ध परंपराओं पर ध्यान दे रही है, कांग्रेस पार्टी भारत और उसकी विरासत का अपमान करने के लिए नए तरीके खोजने की कोशिश कर रही है। ऐसा लगता है कि कांग्रेस अभी भी औपनिवेशिक खुमारी में है। " विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नये संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार करने के विपक्षी दलों के फैसले को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताया और कहा कि राजनीति करने की एक सीमा होनी चाहिए। विपक्षी दलों का तर्क है कि संसद के नये भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को करना चाहिए क्योंकि वह न केवल गणराज्य की प्रमुख हैं, बल्कि संसद की भी प्रमुख हैं क्योंकि वह उसे आहूत करती हैं, सत्रावसान करती हैं और उसके संयुक्त सत्र को संबोधित करती हैं। . विपक्षी दलों की ओर से बहिष्कार के निर्णय की आलोचना करने वाले विशिष्ट नागरिकों द्वारा संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में एनआईए के पूर्व निदेशक वाई सी मोदी, पूर्व आईएएस अधिकारी आर डी कपूर, गोपाल कृष्ण और समीरेंद्र चटर्जी और लिंगया विश्वविद्यालय के कुलपति अनिल रॉय दुबे शामिल हैं। . उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने नये संसद भवन के उद्घाटन समारोह के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आमंत्रित नहीं करने पर केंद्र की भाजपा नीत सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी नए संसद भवन को अपनी "जायदाद" समझते हैं क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है कि इस परिसर का निर्माण उन्होंने करवाया है। लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष चिराग पासवान ने संसद के नए भवन के उद्घाटन समारोह को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को शुभकामनाएं दीं और इस कार्यक्रम के बहिष्कार के लिए विपक्षी दलों की निंदा की। . लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने नये संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर विवाद को "अनावश्यक" बताया। महाजन ने कहा कि संसद, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का मंदिर है और इसके नये भवन के उद्घाटन को लेकर दलगत राजनीति से बचा जाना चाहिए। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नया संसद भवन स्वागत योग्य है और यह भव्य दिखता है। अब्दुल्ला की पार्टी ने भी रविवार के आयोजन का बहिष्कार किया है। अब्दुल्ला ने कहा कि जब वह लोकसभा सदस्य थे, तब उनके कई सहकर्मी एक नये और बेहतर संसद भवन की जरूरत को लेकर अक्सर बातें किया करते थे।
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पंजाब के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री विजय इंदर सिंगला ने आज अध्यापक दिवस के अवसर पर राज्य के 74 अध्यापकों को उत्कृष्ट सेवाओं के बदले राज्य स्तरीय पुरुस्कारों से सम्मानित किया। श्री विजय इंदर सिंगला ने पटियाला में थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टैक्नॉलॉजी के ऑडीटोरियम में हुए समागम के दौरान वैबीनार के द्वारा राज्यभर के पुरुस्कारों के लिए चुने गए 54 अध्यापकों को स्टेट अवार्ड, 10 अध्यापकों को युवा पुरुस्कार और 10 स्कूल मुखियों /अधिकारियों को कुशल प्रबंधक पुरुस्कार प्रदान किये। कैबिनेट मंत्री ने पटियाला के चार अध्यापकों को सर्टिफिकेट देकर निजी तौर पर सम्मानित किया जबकि बाकी के 70 अध्यापकों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा राज्य के बाकी जिला मुख्यालयों में सम्मानित किया गया। यह समागम कोविड-19 के मद्देनजर सामाजिक दूरी नियम का पालन करते हुए साधारण रूप में पंजाब के समूह जिला शिक्षा अफसरों के कार्यालयों में करवाया गया। इस अवसर पर श्री विजय इंदर सिंगला ने देश के स्वर्गीय राष्ट्रपति, विद्वान, दार्शनिक और भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, जिनका जन्म आज के दिन 1888 को हुआ था, को अपनी श्रद्धा और सत्कार भी भेंट की। श्री सिंगला ने अपने संबोधन में राज्यभर के अध्यापकों को अध्यापक दिवस की बधाई देते हुए कहा कि वह किस्मत वाले हैं कि वह कौम की निर्माता अध्यापक जमात का हिस्सा बने हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के सरकारी स्कूलों ने जो तरक्की की है उसके लिए अध्यापकों का बहुत बड़ा योगदान है। श्री सिंगला ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों की बेहतरी के लिए हर संभव यत्न किये जा रहे हैं। जिसके अंतर्गत स्कूलों का रूप बदल रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य के स्कूलों में सोलर व्यवस्था लगाने के लिए 70 करोड़ रुपए का प्रोजैक्ट मुख्यमंत्री पंजाब कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में पास हो चुका है। उन्होंने बताया कि अब तक राज्य के 45 प्रतिशत स्कूल स्मार्ट बन चुके हैं और एक साल के अंदर -अंदर राज्य के सभी स्कूल स्मार्ट स्कूलों में बदल जाएंगे। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा राज्य की शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं।
श्री विजय इंदर सिंगला ने अध्यापकों और शिक्षा विभाग के बाकी अमले की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि किसी भी देश के निर्माण में अध्यापकों की भूमिका अहम होती है, जिसके लिए वह आज अध्यापक दिवस के अवसर पर निजी तौर पर सभी अध्यापकों को नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा के मानक को ऊँचा उठाने के लिए सरकारी स्कूलों के अध्यापक अथक सेवाएं निभा रहे हैं। श्री सिंगला ने कहा कि अध्यापकों की समर्पित भावना के चलते राज्य में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिलों में 15 प्रतिशत इजाफा हुआ है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य के स्कूल कितनी तरक्की कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में किसी भी राज्य के सरकारी स्कूलों में इतनी बड़ी संख्या में कभी भी दाखिला नहीं बढ़ा। इसके अलावा इस वर्ष सरकारी स्कूलों के नतीजों ने निजी स्कूलों को भी पीछे छोड़ दिया है, यह सब अध्यापकों की मेहनत का ही नतीजा है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने इस बार अध्यापकों को दिए जाते स्टेट अवार्डों में विस्तार करते हुए युवा अध्यापकों, स्कूल मुखियों और अधिकारियों के लिए पुरुस्कार आरंभ किये हैं ताकि नौजवान अध्यापकों के उत्साह का भी लाभ लिया जाये। उन्होंने कहा कि तजुर्बे की बजाय काबलीयत को मुख्य रखकर नियुक्तियाँ की गई हैं। शिक्षा सचिव श्री कृष्ण कुमार की देख-रेख में हुए समागम के दौरान श्री विजय इंदर सिंगला ने पटियाला जिले के तीन अध्यापकों श्री दिनेश कुमार विक्टोरिया स्कूल, स. बेअंत सिंह हामझेड़ी, श्रीमती मनीषा फीलखाना स्कूल और बी. पी. ई. ओ. नीरू बाला भुन्नरहेड़ी को मौके पर ही राज्य पुरसकार प्रदान किये। इस अवसर पर सचिव श्री कृष्ण कुमार ने कहा कि सरकार के यत्नों और अध्यापकों के उद्यम स्वरूप कोरोना जैसी महामारी के दौरान भी राज्य के सरकारी स्कूलों के बच्चों को ऑनलाइन विद्या, मुफ्त किताबें और दोपहर के खाने के लिए राशन उपलब्ध करवाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य के अध्यापकों स्वरूप सरकारी स्कूलों की शिक्षा में गुणवत्ता आई है और सवैच्छा के साथ स्मार्ट स्कूल मुहिम के लिए अध्यापक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। जिसके स्वरूप स्कूलों के लगातार दूसरे साल नतीजे निजी स्कूलों से बढिय़ा रहे हैं। इससे पहले डी. जी. एस. सी. श्री मुहम्मद तैयब ने आए हुए मेहमानों का स्वागत किया और डी. पी. आई. (ऐली. ) श्री ललित किशोर घई ने सबका धन्यवाद किया।
इस अवसर पर डिप्टी डायरैक्टर (स्पोर्टस) सुनील भारद्वाज, सहायक डायरैक्टर श्रीमती करमजीत कौर और संजीव शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी (सै. ) पटियाला हरिन्दर कौर, डी. ई. ओ. (ऐली. ) इंजी. अमरजीत सिंह, डिप्टी डी. ई. ओ. सुखविन्दर कुमार, मधु बरुआ और मानविन्दर कौर भुल्लर समेत विभाग की तकनीकी टीम उपस्थित थी। स्टेट अवार्ड के लिए चुने गए अध्यापकों में मोनिका सूद स. स. स. स. एम. एस. जी. रोड, मोना कौर स. स. स. स. मजीठा, रणजीत सिंह स. स. स. स. बाल कलाँ, दलजिन्दर कौर स. स. स. स. कत्थू नंगल, (सभी जिला अमृतसर), राकेश कुमार स. स. स. स. काट्टू (जिला बरनाला), राजिन्दर सिंह स. प. स. कोठे इंदर सिंह (जिला बठिंडा), हरिन्दर कौर स. प. स. बाड़ा भाईका और कुलवंत सिंह स. प. स. लंभवाली (जिला फरीदकोट), चमकौर सिंह स. प. स. भरपूरगढ़, सरबजीत सिंह स. स. स. स. संगतपुर सोढियां और डॉ. कंवलजीत कौर स. स. स. स. (लडक़े) अमलोह (जिला फतेहगढ़ साहिब), नीलम रानी स. स. स. स. काठगढ़, ममता सचदेवा स. प. स. ढाणी अमरपुरा से अमित जुनेजा स. स. स. स. साभूआना (सभी फाजिल्का), बलजिन्दर सिंह स. प. स. अतलां कलाँ, बलविन्दर सिंह स. स. स. स. बोहा, शुशील कुमार स. स. स. स. (लड़कियाँ) मानसा (सभी जिला मानसा), शंकर कुमार स. स. स. स. गिद्दड़बाहा, मनजीत सिंह स. स. स. स. खोखर (श्री मुक्तसर साहिब), तेजिन्दर सिंह स. स. स. स. जलालाबाद ईस्ट (सभी जिला मोगा), सोहण लाल स. प. स. पप्याल (जिला पठानकोट), बेअंत सिंह स. ह. स. हामझेड़ी और मोनीशा स. स. स. स. फीलखाना, दिनेश कुमार स. स. स. स. विक्टोरिया लड़कियाँ (जिला पटियाला), महल सिंह स. प. स. भंगर और जगतार सिंह स. म. स. कबर वच्चा (सभी जिला फिरोजपुर), गुरमीत सिंह स. स. स. स. कलानौर, सतिन्दरजीत कौर स. स. स. स. (लड़कियाँ) कैंप बटाला, बलविन्दर कौर स. स. स. स. (लड़कियाँ) बटाला (सभी जिला गुरदासपुर), परमजीत कौर स. प. स. सुसाना, डॉ. यशवंत राय स. स. स. स. नसराला (जिला होशियारपुर), अमनप्रीत कौर स. प. स. अमलाला, कुलजीत कौर स. स. स. स. (लड़कियाँ) कुराली और संध्या शर्मा स. स. स. स. गोबिन्दगढ़ (जिला साहिबजादा अजीत सिंह नगर), गुरकृपाल सिंह स. ए. स. (लड़कियाँ) काईरौन और गुरमीत सिंह स. स. स. स. पंडोरी गोला (जिला तरनतारन), दिलबीर कौर स. स. स. स. रंधावा मसंदां, अमनदीप कौर स. प. स. सिंधड़, अमनदीप कौंडल स. स. स. स. पूनियां, बूटा राम स. प. स. (लड़कियां) रुडक़ां कलाँ, नीलम बाला स. प. स. बाहमणियां ब्लॉक शाहकोट-1 (जिला जालंधर), जतिन्दरपाल शर्मा स. स. स. स. सियाड़, रपविन्दर कौर स. स. स. स. थरीके और परमिन्दर कौर स. प. स. जरगड़ी (लुधियाना), कविता सबरवाल स. स. स. स. राहों (लडक़े), परमानंद स. प. स. सजावलपुर (जिला शहीद भगत सिंह नगर), तेजिन्दर कौर सोही स. स. स. स. (लड़कियाँ) मालेरकोटला, बिमलजीत कौर स. प. स. लिद्धड़ां, राजेश कुमार दानी स. प. स. बीबड़ी, जसविन्दर कौर स. प. स. खेड़ी गिल्लां, सुखविन्दर सिंह स. प. स. दौलतपुर, प्रिं. अरजोत कौर स. स. स. स. फग्गूवाला (जिला संगरूर), गुरप्रीत कौर स. प. स. पासीवाल (रूपनगर), गुरविन्दर कौर स. प. स. हरदासपुर, (जिला कपूरथला) शामिल हैं। यंग टीचर अवार्डज के लिए श्रवन कुमार यादव स. स. स. स. (लडक़े) कपूरथला, प्रितपाल सिंह स. स. स. स. राजो कि उसपार गट्टी राजोके (जिला फिरोजपुर), रुपिन्दर सिंह स. ह. स. गुरम (जिला बरनाला), अतुल कुमार स. ह. स. सूरेवाला, (श्री मुक्तसर साहिब), नवजीत कौर स. स. स. स. हीरावाली (रमसा) जिला फाजिल्का, मोनिका सोनी स. ह. स. गेट हकीमां (श्री अमृसतर), कुलविन्दर कौर स. प. स. तलवंडी नौबहार, जगदीश सिंह स. प. स. बासीअरक और निशा रानी स. प. स. हरिपुरा, (जिला संगरूर) और मनप्रीत कौर झेरियां वाली (जिला मानसा) का चयन किया गया है। प्रशासनिक पुरुस्कारों के लिए नीरू बाला ब्लॉक प्राथमिक शिक्षा अधिकारी भुनरहेड़ी-2 (जिला पटियाला), रविन्दरजीत कौर ब्लॉक प्राथमिक शिक्षा अधिकारी अमृतसर-4 हरमन्दर सिंह ब्लॉक प्राथमिक शिक्षा अधिकारी रामपुरा फूल (जिला बठिंडा) मनजीत सिंह ब्लॉक प्राथमिक शिक्षा अधिकारी दसूहा, बोध राज ब्लॉक प्राथमिक शिक्षा अधिकारी गुरदासपुर-2, राजिन्दर कौर डी. ई. ओ. (ऐली. ) लुधियाना, शिवपाल डिप्टी डी. ई. ओ. (ऐली. ) बठिंडा, कंवरप्रदीप सिंह काहलों प्रिंसिपल डाइट अमृतसर, सवरनजीत कौर डी. ई. ओ. (सै. ) लुधियाना और बृजमोहन बेदी डिप्टी डी. ई. ओ. (सै. ) फाजिल्का शामिल हैं।
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पंजाब के स्कूल शिक्षा मंत्री श्री विजय इंदर सिंगला ने आज अध्यापक दिवस के अवसर पर राज्य के चौहत्तर अध्यापकों को उत्कृष्ट सेवाओं के बदले राज्य स्तरीय पुरुस्कारों से सम्मानित किया। श्री विजय इंदर सिंगला ने पटियाला में थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टैक्नॉलॉजी के ऑडीटोरियम में हुए समागम के दौरान वैबीनार के द्वारा राज्यभर के पुरुस्कारों के लिए चुने गए चौवन अध्यापकों को स्टेट अवार्ड, दस अध्यापकों को युवा पुरुस्कार और दस स्कूल मुखियों /अधिकारियों को कुशल प्रबंधक पुरुस्कार प्रदान किये। कैबिनेट मंत्री ने पटियाला के चार अध्यापकों को सर्टिफिकेट देकर निजी तौर पर सम्मानित किया जबकि बाकी के सत्तर अध्यापकों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा राज्य के बाकी जिला मुख्यालयों में सम्मानित किया गया। यह समागम कोविड-उन्नीस के मद्देनजर सामाजिक दूरी नियम का पालन करते हुए साधारण रूप में पंजाब के समूह जिला शिक्षा अफसरों के कार्यालयों में करवाया गया। इस अवसर पर श्री विजय इंदर सिंगला ने देश के स्वर्गीय राष्ट्रपति, विद्वान, दार्शनिक और भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, जिनका जन्म आज के दिन एक हज़ार आठ सौ अठासी को हुआ था, को अपनी श्रद्धा और सत्कार भी भेंट की। श्री सिंगला ने अपने संबोधन में राज्यभर के अध्यापकों को अध्यापक दिवस की बधाई देते हुए कहा कि वह किस्मत वाले हैं कि वह कौम की निर्माता अध्यापक जमात का हिस्सा बने हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के सरकारी स्कूलों ने जो तरक्की की है उसके लिए अध्यापकों का बहुत बड़ा योगदान है। श्री सिंगला ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों की बेहतरी के लिए हर संभव यत्न किये जा रहे हैं। जिसके अंतर्गत स्कूलों का रूप बदल रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य के स्कूलों में सोलर व्यवस्था लगाने के लिए सत्तर करोड़ रुपए का प्रोजैक्ट मुख्यमंत्री पंजाब कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में पास हो चुका है। उन्होंने बताया कि अब तक राज्य के पैंतालीस प्रतिशत स्कूल स्मार्ट बन चुके हैं और एक साल के अंदर -अंदर राज्य के सभी स्कूल स्मार्ट स्कूलों में बदल जाएंगे। इसके अलावा राज्य सरकार द्वारा राज्य की शिक्षा प्रणाली में सुधार लाने के लिए निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं। श्री विजय इंदर सिंगला ने अध्यापकों और शिक्षा विभाग के बाकी अमले की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि किसी भी देश के निर्माण में अध्यापकों की भूमिका अहम होती है, जिसके लिए वह आज अध्यापक दिवस के अवसर पर निजी तौर पर सभी अध्यापकों को नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा के मानक को ऊँचा उठाने के लिए सरकारी स्कूलों के अध्यापक अथक सेवाएं निभा रहे हैं। श्री सिंगला ने कहा कि अध्यापकों की समर्पित भावना के चलते राज्य में सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के दाखिलों में पंद्रह प्रतिशत इजाफा हुआ है। जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि राज्य के स्कूल कितनी तरक्की कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में किसी भी राज्य के सरकारी स्कूलों में इतनी बड़ी संख्या में कभी भी दाखिला नहीं बढ़ा। इसके अलावा इस वर्ष सरकारी स्कूलों के नतीजों ने निजी स्कूलों को भी पीछे छोड़ दिया है, यह सब अध्यापकों की मेहनत का ही नतीजा है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने इस बार अध्यापकों को दिए जाते स्टेट अवार्डों में विस्तार करते हुए युवा अध्यापकों, स्कूल मुखियों और अधिकारियों के लिए पुरुस्कार आरंभ किये हैं ताकि नौजवान अध्यापकों के उत्साह का भी लाभ लिया जाये। उन्होंने कहा कि तजुर्बे की बजाय काबलीयत को मुख्य रखकर नियुक्तियाँ की गई हैं। शिक्षा सचिव श्री कृष्ण कुमार की देख-रेख में हुए समागम के दौरान श्री विजय इंदर सिंगला ने पटियाला जिले के तीन अध्यापकों श्री दिनेश कुमार विक्टोरिया स्कूल, स. बेअंत सिंह हामझेड़ी, श्रीमती मनीषा फीलखाना स्कूल और बी. पी. ई. ओ. नीरू बाला भुन्नरहेड़ी को मौके पर ही राज्य पुरसकार प्रदान किये। इस अवसर पर सचिव श्री कृष्ण कुमार ने कहा कि सरकार के यत्नों और अध्यापकों के उद्यम स्वरूप कोरोना जैसी महामारी के दौरान भी राज्य के सरकारी स्कूलों के बच्चों को ऑनलाइन विद्या, मुफ्त किताबें और दोपहर के खाने के लिए राशन उपलब्ध करवाया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य के अध्यापकों स्वरूप सरकारी स्कूलों की शिक्षा में गुणवत्ता आई है और सवैच्छा के साथ स्मार्ट स्कूल मुहिम के लिए अध्यापक सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। जिसके स्वरूप स्कूलों के लगातार दूसरे साल नतीजे निजी स्कूलों से बढिय़ा रहे हैं। इससे पहले डी. जी. एस. सी. श्री मुहम्मद तैयब ने आए हुए मेहमानों का स्वागत किया और डी. पी. आई. श्री ललित किशोर घई ने सबका धन्यवाद किया। इस अवसर पर डिप्टी डायरैक्टर सुनील भारद्वाज, सहायक डायरैक्टर श्रीमती करमजीत कौर और संजीव शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी पटियाला हरिन्दर कौर, डी. ई. ओ. इंजी. अमरजीत सिंह, डिप्टी डी. ई. ओ. सुखविन्दर कुमार, मधु बरुआ और मानविन्दर कौर भुल्लर समेत विभाग की तकनीकी टीम उपस्थित थी। स्टेट अवार्ड के लिए चुने गए अध्यापकों में मोनिका सूद स. स. स. स. एम. एस. जी. रोड, मोना कौर स. स. स. स. मजीठा, रणजीत सिंह स. स. स. स. बाल कलाँ, दलजिन्दर कौर स. स. स. स. कत्थू नंगल, , राकेश कुमार स. स. स. स. काट्टू , राजिन्दर सिंह स. प. स. कोठे इंदर सिंह , हरिन्दर कौर स. प. स. बाड़ा भाईका और कुलवंत सिंह स. प. स. लंभवाली , चमकौर सिंह स. प. स. भरपूरगढ़, सरबजीत सिंह स. स. स. स. संगतपुर सोढियां और डॉ. कंवलजीत कौर स. स. स. स. अमलोह , नीलम रानी स. स. स. स. काठगढ़, ममता सचदेवा स. प. स. ढाणी अमरपुरा से अमित जुनेजा स. स. स. स. साभूआना , बलजिन्दर सिंह स. प. स. अतलां कलाँ, बलविन्दर सिंह स. स. स. स. बोहा, शुशील कुमार स. स. स. स. मानसा , शंकर कुमार स. स. स. स. गिद्दड़बाहा, मनजीत सिंह स. स. स. स. खोखर , तेजिन्दर सिंह स. स. स. स. जलालाबाद ईस्ट , सोहण लाल स. प. स. पप्याल , बेअंत सिंह स. ह. स. हामझेड़ी और मोनीशा स. स. स. स. फीलखाना, दिनेश कुमार स. स. स. स. विक्टोरिया लड़कियाँ , महल सिंह स. प. स. भंगर और जगतार सिंह स. म. स. कबर वच्चा , गुरमीत सिंह स. स. स. स. कलानौर, सतिन्दरजीत कौर स. स. स. स. कैंप बटाला, बलविन्दर कौर स. स. स. स. बटाला , परमजीत कौर स. प. स. सुसाना, डॉ. यशवंत राय स. स. स. स. नसराला , अमनप्रीत कौर स. प. स. अमलाला, कुलजीत कौर स. स. स. स. कुराली और संध्या शर्मा स. स. स. स. गोबिन्दगढ़ , गुरकृपाल सिंह स. ए. स. काईरौन और गुरमीत सिंह स. स. स. स. पंडोरी गोला , दिलबीर कौर स. स. स. स. रंधावा मसंदां, अमनदीप कौर स. प. स. सिंधड़, अमनदीप कौंडल स. स. स. स. पूनियां, बूटा राम स. प. स. रुडक़ां कलाँ, नीलम बाला स. प. स. बाहमणियां ब्लॉक शाहकोट-एक , जतिन्दरपाल शर्मा स. स. स. स. सियाड़, रपविन्दर कौर स. स. स. स. थरीके और परमिन्दर कौर स. प. स. जरगड़ी , कविता सबरवाल स. स. स. स. राहों , परमानंद स. प. स. सजावलपुर , तेजिन्दर कौर सोही स. स. स. स. मालेरकोटला, बिमलजीत कौर स. प. स. लिद्धड़ां, राजेश कुमार दानी स. प. स. बीबड़ी, जसविन्दर कौर स. प. स. खेड़ी गिल्लां, सुखविन्दर सिंह स. प. स. दौलतपुर, प्रिं. अरजोत कौर स. स. स. स. फग्गूवाला , गुरप्रीत कौर स. प. स. पासीवाल , गुरविन्दर कौर स. प. स. हरदासपुर, शामिल हैं। यंग टीचर अवार्डज के लिए श्रवन कुमार यादव स. स. स. स. कपूरथला, प्रितपाल सिंह स. स. स. स. राजो कि उसपार गट्टी राजोके , रुपिन्दर सिंह स. ह. स. गुरम , अतुल कुमार स. ह. स. सूरेवाला, , नवजीत कौर स. स. स. स. हीरावाली जिला फाजिल्का, मोनिका सोनी स. ह. स. गेट हकीमां , कुलविन्दर कौर स. प. स. तलवंडी नौबहार, जगदीश सिंह स. प. स. बासीअरक और निशा रानी स. प. स. हरिपुरा, और मनप्रीत कौर झेरियां वाली का चयन किया गया है। प्रशासनिक पुरुस्कारों के लिए नीरू बाला ब्लॉक प्राथमिक शिक्षा अधिकारी भुनरहेड़ी-दो , रविन्दरजीत कौर ब्लॉक प्राथमिक शिक्षा अधिकारी अमृतसर-चार हरमन्दर सिंह ब्लॉक प्राथमिक शिक्षा अधिकारी रामपुरा फूल मनजीत सिंह ब्लॉक प्राथमिक शिक्षा अधिकारी दसूहा, बोध राज ब्लॉक प्राथमिक शिक्षा अधिकारी गुरदासपुर-दो, राजिन्दर कौर डी. ई. ओ. लुधियाना, शिवपाल डिप्टी डी. ई. ओ. बठिंडा, कंवरप्रदीप सिंह काहलों प्रिंसिपल डाइट अमृतसर, सवरनजीत कौर डी. ई. ओ. लुधियाना और बृजमोहन बेदी डिप्टी डी. ई. ओ. फाजिल्का शामिल हैं।
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नई दिल्ली। महानगर गैस लि. ने पाइप के जरिए आपूर्ति की जाने वाली रसोई गैस और वाहन ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी की कीमतों में कटौती की है। सरकार की तरफ से घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ाए जाने के बाद कंपनी ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए यह कदम उठाया है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार पीएनजी के दाम 4 रुपए प्रति घनमीटर घटाकर 48. 50 रुपए कर दिए गए हैं, वहीं सीएनजी के दाम 6 रुपए किलोग्राम घटाकर 80 रुपए प्रति किलोग्राम किए गए हैं, वहीं मुंबई के अलावा पुणे में भी सीएनजी की कीमतों में कटौती की गई है।
पुणे में सीएनजी की कीमत में 4 रुपए की कटौती की गई है। कटौती के बाद अब पुणे में 1 किलो सीएनजी की कीमत 87 रुपए हो गई है।
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नई दिल्ली। महानगर गैस लि. ने पाइप के जरिए आपूर्ति की जाने वाली रसोई गैस और वाहन ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी की कीमतों में कटौती की है। सरकार की तरफ से घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ाए जाने के बाद कंपनी ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए यह कदम उठाया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार पीएनजी के दाम चार रुपयापए प्रति घनमीटर घटाकर अड़तालीस. पचास रुपयापए कर दिए गए हैं, वहीं सीएनजी के दाम छः रुपयापए किलोग्राम घटाकर अस्सी रुपयापए प्रति किलोग्राम किए गए हैं, वहीं मुंबई के अलावा पुणे में भी सीएनजी की कीमतों में कटौती की गई है। पुणे में सीएनजी की कीमत में चार रुपयापए की कटौती की गई है। कटौती के बाद अब पुणे में एक किलो सीएनजी की कीमत सत्तासी रुपयापए हो गई है।
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हार्दिक पांड्या वर्ल्ड कप 2023 में बांग्लादेश के खिलाफ मैच में चोटिल हो गए थे, उनके टखने में चोट लगी थी, उसके बाद से वह लगातार टीम से बाहर हैं. उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज में शामिल नहीं किया गया है.
नई दिल्ली. टीम इंडिया के ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या चोट की वजह से टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं. चोटिल होने की वजह से हार्दिक पांड्या को अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज में शामिल नहीं किया गया. टी-20 टीम की घोषणा के एक दिन बाद हार्दिक पांड्या ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह पसीना बहाते नजर आ रहे हैं. हालांकि पांड्या का यह वीडियो आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर जमकर मजे लिए हैं.
हार्दिक पांड्या वर्ल्ड कप 2023 में बांग्लादेश के खिलाफ मैच में चोटिल हो गए थे, उनके टखने में चोट लगी थी, उसके बाद से वह लगातार टीम से बाहर हैं. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू टी-20 सीरीज, साउथ अफ्रीका दौरा और अब अफगानिस्तान सीरीज में भी उन्हें टीम में जगह नहीं मिल सकी. सोमवार को हार्दिक पांड्या ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वह कड़ी मेहनत करते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो के कैप्शन में हार्दिक ने लिखा, जाने के लिए सिर्फ एक दिशा है, आगे. हार्दिक पांड्या का यह वीडियो जैसे ही सामने आया, सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी खिंचाई शुरू कर दी.
सोशल मीडिया पर लोगों ने लिखा, आईपीएल का शेर तैयार हो रहा है, इसके बाद फिर वह अगले आईपीएल में खेंलेंगे. वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, मेहनत का क्या फायदा, जब फिर चोटिल ही होना है. वहीं एक यूजर से इसे एनुअल कमबैक रील भी बताया. हालांकि कई लोगों ने हार्दिक के जल्द फिट होने के लिए शुभकामनाएं भी दी है.
हार्दिक पांड्या अब आईपीएल 2024 में एक्शन में नजर आएंगे. मुंबई इंडियंस की टीम ने रोहित शर्मा की जगह हार्दिक पांड्या को टीम को नया कप्तान बनाया है, हालांकि सोशल मीडिया यूजर्स रोहित की जगह पांडया को कप्तान बनाए जाने से भी नाराज हैं. हार्दिक के इस वीडियो पर भी लोग रोहित शर्मा के समर्थन में अपनी बात रख रहे हैं.
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हार्दिक पांड्या वर्ल्ड कप दो हज़ार तेईस में बांग्लादेश के खिलाफ मैच में चोटिल हो गए थे, उनके टखने में चोट लगी थी, उसके बाद से वह लगातार टीम से बाहर हैं. उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ टी-बीस सीरीज में शामिल नहीं किया गया है. नई दिल्ली. टीम इंडिया के ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या चोट की वजह से टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं. चोटिल होने की वजह से हार्दिक पांड्या को अफगानिस्तान के खिलाफ टी-बीस सीरीज में शामिल नहीं किया गया. टी-बीस टीम की घोषणा के एक दिन बाद हार्दिक पांड्या ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह पसीना बहाते नजर आ रहे हैं. हालांकि पांड्या का यह वीडियो आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर जमकर मजे लिए हैं. हार्दिक पांड्या वर्ल्ड कप दो हज़ार तेईस में बांग्लादेश के खिलाफ मैच में चोटिल हो गए थे, उनके टखने में चोट लगी थी, उसके बाद से वह लगातार टीम से बाहर हैं. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू टी-बीस सीरीज, साउथ अफ्रीका दौरा और अब अफगानिस्तान सीरीज में भी उन्हें टीम में जगह नहीं मिल सकी. सोमवार को हार्दिक पांड्या ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वह कड़ी मेहनत करते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो के कैप्शन में हार्दिक ने लिखा, जाने के लिए सिर्फ एक दिशा है, आगे. हार्दिक पांड्या का यह वीडियो जैसे ही सामने आया, सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी खिंचाई शुरू कर दी. सोशल मीडिया पर लोगों ने लिखा, आईपीएल का शेर तैयार हो रहा है, इसके बाद फिर वह अगले आईपीएल में खेंलेंगे. वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, मेहनत का क्या फायदा, जब फिर चोटिल ही होना है. वहीं एक यूजर से इसे एनुअल कमबैक रील भी बताया. हालांकि कई लोगों ने हार्दिक के जल्द फिट होने के लिए शुभकामनाएं भी दी है. हार्दिक पांड्या अब आईपीएल दो हज़ार चौबीस में एक्शन में नजर आएंगे. मुंबई इंडियंस की टीम ने रोहित शर्मा की जगह हार्दिक पांड्या को टीम को नया कप्तान बनाया है, हालांकि सोशल मीडिया यूजर्स रोहित की जगह पांडया को कप्तान बनाए जाने से भी नाराज हैं. हार्दिक के इस वीडियो पर भी लोग रोहित शर्मा के समर्थन में अपनी बात रख रहे हैं. This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful. Strictly Necessary Cookie should be enabled at all times so that we can save your preferences for cookie settings. If you disable this cookie, we will not be able to save your preferences. This means that every time you visit this website you will need to enable or disable cookies again.
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द्वारा शरीर रूपी सोने को सिमरन की कमाई से कस लिया जाता है और इस प्रकार शरीर पर प्रभु भक्ति का सुंदर रंग चढ़ जाता है। जब परमेश्वर रूपी सराफ की कृपा हो जाये, तो फिर शरीर को विकारों की तपश में जलने नहीं दिया जाता।
ऊषाकाल के चौथे पहर को ईश्वरीय प्यार तथा नाम सिमरन में व्यतीत करने के साथ दिन के बाकी सातों पहर भी अच्छा आचरण बनाने के लिए करनी वाले विद्वानों की संगत में बिताने चाहिएं, क्योंकि उनकी संगत में ही पाप तथा पुण्य कर्मों के बारे में विचार की जाती है और झूठ की रास पूंजी घटती है। इस सतसंग के प्रभाव द्वारा ही खोटे गुण शरीर में से बाहर फैंक दिये जाते हैं और खरे ईश्वरीय गुणों को उत्साहित किया जाता है। सतसंग में ही इस बात का ज्ञान होता है कि दुःख या सुख तो मालिक परमेश्वर की रज़ा में ही मिलते हैं, इसलिए दुःखों सुखों के बारे में गिला करना निरर्थक है, क्योंकि ऐसा करना तो ईश्वरीय रज़ा के विपरीत बात है। यथा :"अठी पहरी अठ खंड, नावा खंड सरीर ।
तिस विचि नउ निधि नाम ऐक, भालहि गुणी गहीर ॥ करमवंती सालाहिआ, नानक करि गुरु पीर । चउयै पहरि सबाह के, सुरतिआ उपजै चाउ । तिना दरीआवा सिउ दोसती, मनि मुखि सचा नाउ । औये अंमृत वंडीयै, करमी होइ पसाउ । कंचन काइआ कसीयै, वंनी चढ़ चढ़ाउ ।। जे होवै नदरि सराफ की, बहुड़ि ना पाई ताउ ॥ सती पहरी सुत भला, बहीऔ पड़िआ पासि । ओवै पाप पूंन बीचारीओ, कूड़े घटे रासि ।। ओथै खोटे सटीअहि, खरे कीचहि साबासि ॥ बोलण फादल नानकाः, दुःख सुःख खसमै पासि ॥ "
(माझ की वार महला १)
परमेश्वर रूपी शाह के चलाए हुए व्यापारी इस संसार में जन्म लेते हैं और उनको परमेश्वर उनके द्वारा किए हुए कर्मों के अनुसार लिखे लेख को साथ देकर संसार में भेजता है। परमेश्वर के लिखे इस लेख के अनुसार ही जीवन पर परमेश्वर का हुकम चलता है और जीव उसी के अनुसार ही संसार में अपने लिए वस्तु संभाल लेता है।
पी बंजारे यहां अपने मतलब की वस्तु कमा कर उस वस्तु को अपने पल्ले बांध लेते हैं। कुछ जीव रूपी बंजारे अपने श्वासों की रास पूंजी खर्च करके परमेश्वर के सिमरन का लाभ कमा कर साथ ले जाते हैं और कई जीव रूपी बज़ारे अपने श्वासों की अमूल्य रास पूंजी गंवा कर और हानि उठा कर इस संसार से चल बसते हैं।
नाम की निधि मांगने वालों ने नाम की निधि अधिक से अधिक मांगी है और विषय-विकारों के प्रीतवानों ने विषयों के रस की अधिक से अधिक कामना की है। दोनों में किसी ने कम चीज़ की मांग नहीं की, पर दोनों में से शावाश किसने हासिल की और प्रभु की कृपा दृष्टि किस पर हुई ? उन जीव रूपी
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द्वारा शरीर रूपी सोने को सिमरन की कमाई से कस लिया जाता है और इस प्रकार शरीर पर प्रभु भक्ति का सुंदर रंग चढ़ जाता है। जब परमेश्वर रूपी सराफ की कृपा हो जाये, तो फिर शरीर को विकारों की तपश में जलने नहीं दिया जाता। ऊषाकाल के चौथे पहर को ईश्वरीय प्यार तथा नाम सिमरन में व्यतीत करने के साथ दिन के बाकी सातों पहर भी अच्छा आचरण बनाने के लिए करनी वाले विद्वानों की संगत में बिताने चाहिएं, क्योंकि उनकी संगत में ही पाप तथा पुण्य कर्मों के बारे में विचार की जाती है और झूठ की रास पूंजी घटती है। इस सतसंग के प्रभाव द्वारा ही खोटे गुण शरीर में से बाहर फैंक दिये जाते हैं और खरे ईश्वरीय गुणों को उत्साहित किया जाता है। सतसंग में ही इस बात का ज्ञान होता है कि दुःख या सुख तो मालिक परमेश्वर की रज़ा में ही मिलते हैं, इसलिए दुःखों सुखों के बारे में गिला करना निरर्थक है, क्योंकि ऐसा करना तो ईश्वरीय रज़ा के विपरीत बात है। यथा :"अठी पहरी अठ खंड, नावा खंड सरीर । तिस विचि नउ निधि नाम ऐक, भालहि गुणी गहीर ॥ करमवंती सालाहिआ, नानक करि गुरु पीर । चउयै पहरि सबाह के, सुरतिआ उपजै चाउ । तिना दरीआवा सिउ दोसती, मनि मुखि सचा नाउ । औये अंमृत वंडीयै, करमी होइ पसाउ । कंचन काइआ कसीयै, वंनी चढ़ चढ़ाउ ।। जे होवै नदरि सराफ की, बहुड़ि ना पाई ताउ ॥ सती पहरी सुत भला, बहीऔ पड़िआ पासि । ओवै पाप पूंन बीचारीओ, कूड़े घटे रासि ।। ओथै खोटे सटीअहि, खरे कीचहि साबासि ॥ बोलण फादल नानकाः, दुःख सुःख खसमै पासि ॥ " परमेश्वर रूपी शाह के चलाए हुए व्यापारी इस संसार में जन्म लेते हैं और उनको परमेश्वर उनके द्वारा किए हुए कर्मों के अनुसार लिखे लेख को साथ देकर संसार में भेजता है। परमेश्वर के लिखे इस लेख के अनुसार ही जीवन पर परमेश्वर का हुकम चलता है और जीव उसी के अनुसार ही संसार में अपने लिए वस्तु संभाल लेता है। पी बंजारे यहां अपने मतलब की वस्तु कमा कर उस वस्तु को अपने पल्ले बांध लेते हैं। कुछ जीव रूपी बंजारे अपने श्वासों की रास पूंजी खर्च करके परमेश्वर के सिमरन का लाभ कमा कर साथ ले जाते हैं और कई जीव रूपी बज़ारे अपने श्वासों की अमूल्य रास पूंजी गंवा कर और हानि उठा कर इस संसार से चल बसते हैं। नाम की निधि मांगने वालों ने नाम की निधि अधिक से अधिक मांगी है और विषय-विकारों के प्रीतवानों ने विषयों के रस की अधिक से अधिक कामना की है। दोनों में किसी ने कम चीज़ की मांग नहीं की, पर दोनों में से शावाश किसने हासिल की और प्रभु की कृपा दृष्टि किस पर हुई ? उन जीव रूपी
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[खंड १ : भोजपुरी : अध्याय ३]
(ग) गोधन -- कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को 'गोधन' का व्रत मनाया जाता है । भोजपुरी प्रदेश में इस दिन गोबर से मनुष्य की एक प्रतिकृति बनाकर उसकी छाती पर ईट रख दी जाती है। मनुष्य की गोबर से बनी इसी प्रतिमा को स्त्रियाँ मूसल से कूटती है । गोधन कूटने के पूर्व एक कथा कही जाती है। स्त्रियाँ भटकटैया ( एक फॅटीला पौधा ) और चना एक बर्तन में रखकर अपने घर के समस्त व्यक्तियों को मर जाने का शाप देती हैं, जिसे 'सरापना' कहा जाता है। गोधन कूटते समय जिन व्यक्तियों को भरने का शाप दिया गया है, उन्हें जीवित करने की बाद में प्रार्थना की जाती है ।
इस व्रत का प्रधान उद्देश्य भाई और बहन में पारस्परिक प्रेम की वृद्धि करना है। इसका वर्णन इन गीतों में भी पाया जाता है। शिकार करने के लिये जब भाई जाता है, तब बहन उसकी सकुशल वापसी की प्रार्थना करती है :
कवन भइया चलले अहेरिया,
कवन बहिनी देली असीस हो ना ॥ जियसु रे मोर भइया,
मोरा भउजी के बाढ़े सिर सेनुर हो ना ।। मोहन भइया चलले अहेरिया,
पारबती बहिनी देली असीस हो ना ।। जियसु रे मोर भइया,
मोर भउजी के वाढ़े सिर सेनुर हो ना ।।
छव महीनवाँ के लखिया अलवतियाँ रे ना,
ए लखिया खिरिकिनी पिएले बयरिया रे ना । घोड़वा चढ़ल तुहु दलसिंह राजावा ए दलसिंह परि गइली लखिया के नजरिया रे ना ।। का तुहु दलसिंह बंसी लगवले बाड़ हो ना। तोहरा अइसन हमरा सामी के नोहरिका' बाड़े हो ना श्राताना बचन दलसिंह सुनही ना पवले हो ना, एदल बाबू गोड़े मुड़े तानेले चदरिया हो ना ॥ पइसि जगावेले दल के मझ्या रे ना,
ए. बबुआ उठिके ना कर दतुअनिया रे ना । कइसे हम उठि आमा तोहरी बचनिया रे ना, ग श्रामा मोरी बुधिया छोरेली' लखिया रानी रे ना ॥
१ नवप्रसूता स्त्री ।
२ खिड़की ।
3 हवा । ४ नौकर । ५ पैर । ६ छीन ली है ।
चेरिया जे रहिती दल मरिती गरिभइती' हे ना, एदल बाबू लखिया के कहू ना जावाबवा देला रे ना ।।
( घ) पिंड़िया- पिंड़िया का व्रत कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से लेकर अगहन शुक्ल प्रतिपदा तक पूरे एक मास मनाया जाता है। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन गोधन की गोबर की जो प्रतिमा बनाकर पूजी जाती है, उसी गोबर में से थोड़ा सा अंश लेकर कुँवारी लड़कियाँ घर की दीवाल पर गोबर की छोटी छोटी पिंडिया और मनुष्य की सैकड़ो श्राकृतियाँ बनाती हैं। इसके साथ ही उसपर श्राटा तथा रंग से चित्रकर्म भी करती है। इस पूरी प्रक्रिया को 'पिंड़िया लगाना' कहते हैं। पिंड़िया शब्द ' पेड' से बना हुआ है, जिसमें लघु श्रर्थ सूचक 'इया' प्रत्यय लगाकर इसकी निष्पत्ति हुई है ।
पिंड़िया के गीतों में भाई बहन का अटूट प्रेम वर्णित है। एक गीत में कोई बहन अपने भाई से कह रही है, कि मैं लड्डू और चिउड़ा से पिंड़ियों को पूजूँगी । हे भइया, यह व्रत मैं तुम्हारे ही लिये कर रही
लडुआ चिउरवा से हम पूजबि पिंडियवा हो । तोहरी बधइया भइया पिंड़िया बरतिया हो ॥ मोरंग देसे तुहु जइह ए राम भइया, ले अइह ए भइया मोरंगी लडुइया हो ।। मोरंग देसे तुहु जइह ए राम भइया, ले अइह ए भइया सुरुका चिउरवा हो । लडुआ चिउरवा से हम पूजति पिड़िश्रवा हो । तोहरी बधइया' भइया पिंडिया बरतिया हो ॥ घिवही लड्डुइया बहिना भइले मँहगवा हो । छोड़ि देहु ए बहिना पिंड़िया बरतिया हो ॥ सुरुका चिउरवा महँग भइले बहिना हो । छोड़ि देहु ए बहिना पिंड़िया बरतिया हो ।। अइसन बोली जनि बोल राम भइया हो । तोहरी बधइया भइया पिंड़िया बरतिया हो ॥
(ङ ) छठी माई के गीत - छठी माता का व्रत ( षष्ठीत ) कार्तिक शुक्ल बठ्ठी का किया जाता है। इस व्रत को केवल स्त्रियाँ ही करती है, परंतु मिथिला में स्त्री तथा पुरुष दोनों ही इसे करते हैं। यह 'डाला छठ' के नाम से प्रसिद्ध है ।
१ गाली देती है
3 पतला । ४ उपलक्ष ।
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[खंड एक : भोजपुरी : अध्याय तीन] गोधन -- कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को 'गोधन' का व्रत मनाया जाता है । भोजपुरी प्रदेश में इस दिन गोबर से मनुष्य की एक प्रतिकृति बनाकर उसकी छाती पर ईट रख दी जाती है। मनुष्य की गोबर से बनी इसी प्रतिमा को स्त्रियाँ मूसल से कूटती है । गोधन कूटने के पूर्व एक कथा कही जाती है। स्त्रियाँ भटकटैया और चना एक बर्तन में रखकर अपने घर के समस्त व्यक्तियों को मर जाने का शाप देती हैं, जिसे 'सरापना' कहा जाता है। गोधन कूटते समय जिन व्यक्तियों को भरने का शाप दिया गया है, उन्हें जीवित करने की बाद में प्रार्थना की जाती है । इस व्रत का प्रधान उद्देश्य भाई और बहन में पारस्परिक प्रेम की वृद्धि करना है। इसका वर्णन इन गीतों में भी पाया जाता है। शिकार करने के लिये जब भाई जाता है, तब बहन उसकी सकुशल वापसी की प्रार्थना करती है : कवन भइया चलले अहेरिया, कवन बहिनी देली असीस हो ना ॥ जियसु रे मोर भइया, मोरा भउजी के बाढ़े सिर सेनुर हो ना ।। मोहन भइया चलले अहेरिया, पारबती बहिनी देली असीस हो ना ।। जियसु रे मोर भइया, मोर भउजी के वाढ़े सिर सेनुर हो ना ।। छव महीनवाँ के लखिया अलवतियाँ रे ना, ए लखिया खिरिकिनी पिएले बयरिया रे ना । घोड़वा चढ़ल तुहु दलसिंह राजावा ए दलसिंह परि गइली लखिया के नजरिया रे ना ।। का तुहु दलसिंह बंसी लगवले बाड़ हो ना। तोहरा अइसन हमरा सामी के नोहरिका' बाड़े हो ना श्राताना बचन दलसिंह सुनही ना पवले हो ना, एदल बाबू गोड़े मुड़े तानेले चदरिया हो ना ॥ पइसि जगावेले दल के मझ्या रे ना, ए. बबुआ उठिके ना कर दतुअनिया रे ना । कइसे हम उठि आमा तोहरी बचनिया रे ना, ग श्रामा मोरी बुधिया छोरेली' लखिया रानी रे ना ॥ एक नवप्रसूता स्त्री । दो खिड़की । तीन हवा । चार नौकर । पाँच पैर । छः छीन ली है । चेरिया जे रहिती दल मरिती गरिभइती' हे ना, एदल बाबू लखिया के कहू ना जावाबवा देला रे ना ।। पिंड़िया- पिंड़िया का व्रत कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से लेकर अगहन शुक्ल प्रतिपदा तक पूरे एक मास मनाया जाता है। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन गोधन की गोबर की जो प्रतिमा बनाकर पूजी जाती है, उसी गोबर में से थोड़ा सा अंश लेकर कुँवारी लड़कियाँ घर की दीवाल पर गोबर की छोटी छोटी पिंडिया और मनुष्य की सैकड़ो श्राकृतियाँ बनाती हैं। इसके साथ ही उसपर श्राटा तथा रंग से चित्रकर्म भी करती है। इस पूरी प्रक्रिया को 'पिंड़िया लगाना' कहते हैं। पिंड़िया शब्द ' पेड' से बना हुआ है, जिसमें लघु श्रर्थ सूचक 'इया' प्रत्यय लगाकर इसकी निष्पत्ति हुई है । पिंड़िया के गीतों में भाई बहन का अटूट प्रेम वर्णित है। एक गीत में कोई बहन अपने भाई से कह रही है, कि मैं लड्डू और चिउड़ा से पिंड़ियों को पूजूँगी । हे भइया, यह व्रत मैं तुम्हारे ही लिये कर रही लडुआ चिउरवा से हम पूजबि पिंडियवा हो । तोहरी बधइया भइया पिंड़िया बरतिया हो ॥ मोरंग देसे तुहु जइह ए राम भइया, ले अइह ए भइया मोरंगी लडुइया हो ।। मोरंग देसे तुहु जइह ए राम भइया, ले अइह ए भइया सुरुका चिउरवा हो । लडुआ चिउरवा से हम पूजति पिड़िश्रवा हो । तोहरी बधइया' भइया पिंडिया बरतिया हो ॥ घिवही लड्डुइया बहिना भइले मँहगवा हो । छोड़ि देहु ए बहिना पिंड़िया बरतिया हो ॥ सुरुका चिउरवा महँग भइले बहिना हो । छोड़ि देहु ए बहिना पिंड़िया बरतिया हो ।। अइसन बोली जनि बोल राम भइया हो । तोहरी बधइया भइया पिंड़िया बरतिया हो ॥ छठी माई के गीत - छठी माता का व्रत कार्तिक शुक्ल बठ्ठी का किया जाता है। इस व्रत को केवल स्त्रियाँ ही करती है, परंतु मिथिला में स्त्री तथा पुरुष दोनों ही इसे करते हैं। यह 'डाला छठ' के नाम से प्रसिद्ध है । एक गाली देती है तीन पतला । चार उपलक्ष ।
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शिमला - शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर आज राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। इस दौरान राज्यपाल आचार्य देवव्रत ध्वजारोहण कर गणतंत्र दिवस की शुरूआत करेंगे। इस मौके पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज भी विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। रिज मैदान में होने वाले गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम रिज मैदान पर शनिवार को सुबह 11 बजे के करीब शुरू हो जाएगा। जानकारी के अनुसार भाषा संस्कृति विभाग की दिल्ली में रिजेक्ट हुई झांकी को भी आज रिज मैदान पर बताया जाएगा। खास बात यह है कि अन्य झांकी के माध्यम सरकारी विभागों की योजनाओं को दर्शाया जाएगा। इसके साथ ही कई जिलों की संस्कृति को भी झांकी के माध्यम से दर्शाए जाने की योजना है। गणतंत्र दिवस के मौके पर पुलिस, होमगार्ड, आईटीबीपी सहित अर्द्ध सैनिक बलों के जवान परेड में हिस्सा लेकर मुख्यमंत्री को सलामी देंगे। राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस को लेकर जिला प्रशासन की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस बार रिज पर 15 झांकियां दिखाई देंगी। झांकियों के माध्यम से मुख्य रूप से प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को प्रमुखता से दिखाया जाएगा। गणतंत्र दिवस के मौके पर रिज मैदान पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए जाएंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शहर के स्कूली छात्र पहाड़ी नाटी के माध्यम से भी हिमाचल की संस्कृति को बताएंगे। वहीं, दिल्ली में रिजेक्ट हुई झांकी भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगी।
राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस के अवसर पर इस बार प्रदेश सरकार की उपलब्धियों दिखेंगी। जो झांकियों के माध्यम से जनता तक पहुंचेगी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, बागबानी, आईपीएच और वन विभाग सहित 15 झांकियांें के माध्यम प्रदेश सरकार की उपलब्धियां बताई जाएगी।
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शिमला - शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर आज राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा। इस दौरान राज्यपाल आचार्य देवव्रत ध्वजारोहण कर गणतंत्र दिवस की शुरूआत करेंगे। इस मौके पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज भी विशेष रूप से मौजूद रहेंगे। रिज मैदान में होने वाले गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम रिज मैदान पर शनिवार को सुबह ग्यारह बजे के करीब शुरू हो जाएगा। जानकारी के अनुसार भाषा संस्कृति विभाग की दिल्ली में रिजेक्ट हुई झांकी को भी आज रिज मैदान पर बताया जाएगा। खास बात यह है कि अन्य झांकी के माध्यम सरकारी विभागों की योजनाओं को दर्शाया जाएगा। इसके साथ ही कई जिलों की संस्कृति को भी झांकी के माध्यम से दर्शाए जाने की योजना है। गणतंत्र दिवस के मौके पर पुलिस, होमगार्ड, आईटीबीपी सहित अर्द्ध सैनिक बलों के जवान परेड में हिस्सा लेकर मुख्यमंत्री को सलामी देंगे। राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस को लेकर जिला प्रशासन की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस बार रिज पर पंद्रह झांकियां दिखाई देंगी। झांकियों के माध्यम से मुख्य रूप से प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को प्रमुखता से दिखाया जाएगा। गणतंत्र दिवस के मौके पर रिज मैदान पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए जाएंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शहर के स्कूली छात्र पहाड़ी नाटी के माध्यम से भी हिमाचल की संस्कृति को बताएंगे। वहीं, दिल्ली में रिजेक्ट हुई झांकी भी लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगी। राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस के अवसर पर इस बार प्रदेश सरकार की उपलब्धियों दिखेंगी। जो झांकियों के माध्यम से जनता तक पहुंचेगी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, बागबानी, आईपीएच और वन विभाग सहित पंद्रह झांकियांें के माध्यम प्रदेश सरकार की उपलब्धियां बताई जाएगी।
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याचिका पर अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव, शैलेश सिंह ने पक्ष रखा। इनका कहना था कि 6 जनवरी से माघ मेला शुरू हो रहा है। कोर्ट के आदेश के बावजूद गंगा में स्नान के लिए पर्याप्त पानी नहीं है। गंगा का पानी गंदा है। श्रद्धालु मेला क्षेत्र में आ चुके हैं। अधिकारी कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं। पॉलिथीन बैन की खानापूरी की गई है। नालों का गंदा पानी सीधे गंगा में जा रहा है।
न्याय मित्र अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ता ने कहा कि गंगा की स्वच्छता के नाम पर अधिकारी केवल पैसे खर्च कर रहे हैं। गंगा स्वच्छ नहीं हो रही है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की शोधन क्षमता से दूना पानी आ रहा है। 60 फीसदी सीवर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़े गए हैं। बाकी 40 फीसदी सीवर से सीधे गंगा में गिर रहा है। नालों के बायोरेमिडियल शोधन की अधूरी प्रणाली से खानापूरी की जा रही है। केवल गंगा में पानी छोड़ने मात्र से गंगा साफ नहीं होगी। माघ के दौरान केवल 4000 क्यूसेक पानी छोड़ने से गंगा का जल शुद्ध नहीं हो पाएगा।
इस पर कोर्ट ने सरकार की तरफ से पेश हुए अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार सिंह से स्थिति जाननी चाही। कोर्ट ने पूछा कि जल की शुद्धता के मामले में क्या किया गया। अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के आदेश के तहत उन्होंने गंगा में गिर रहे नाले टैप्ड करवा दिए हैं। इसके अलावा मेला क्षेत्र को पॉलिथीन मुक्त करने के लिए कार्रवाई की जा रही है।
अधिवक्ता शैलेश सिंह ने कहा कि कोर्ट ने अपने 21 जनवरी 2021 को पारित अपने आदेश में गंगा जल की शुद्धता, एसटीपी और ड्रेनेज में सुधार के लिए कहा था। इस पर अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट के पिछले आदेश की अनुपालन रिपोर्ट हलफनामे के जरिए कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया। कोर्ट ने उसे रेकॉर्ड पर लेते हुए पूछा कि गंगा जल शुद्धिकरण के मामले में क्या किया गया।
अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि 2 दिन पहले मुख्य सचिव और डीजीपी मेले की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए आए थे लेकिन उन्होंने गंगाजल के शुद्धिकरण पर कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसा लगता है शासन इस मामले में चिंतित नहीं है। कल्पवासी गंदे और काले पानी में स्नान करने को मजबूर हैं।
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याचिका पर अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव, शैलेश सिंह ने पक्ष रखा। इनका कहना था कि छः जनवरी से माघ मेला शुरू हो रहा है। कोर्ट के आदेश के बावजूद गंगा में स्नान के लिए पर्याप्त पानी नहीं है। गंगा का पानी गंदा है। श्रद्धालु मेला क्षेत्र में आ चुके हैं। अधिकारी कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं। पॉलिथीन बैन की खानापूरी की गई है। नालों का गंदा पानी सीधे गंगा में जा रहा है। न्याय मित्र अधिवक्ता अरुण कुमार गुप्ता ने कहा कि गंगा की स्वच्छता के नाम पर अधिकारी केवल पैसे खर्च कर रहे हैं। गंगा स्वच्छ नहीं हो रही है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की शोधन क्षमता से दूना पानी आ रहा है। साठ फीसदी सीवर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़े गए हैं। बाकी चालीस फीसदी सीवर से सीधे गंगा में गिर रहा है। नालों के बायोरेमिडियल शोधन की अधूरी प्रणाली से खानापूरी की जा रही है। केवल गंगा में पानी छोड़ने मात्र से गंगा साफ नहीं होगी। माघ के दौरान केवल चार हज़ार क्यूसेक पानी छोड़ने से गंगा का जल शुद्ध नहीं हो पाएगा। इस पर कोर्ट ने सरकार की तरफ से पेश हुए अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार सिंह से स्थिति जाननी चाही। कोर्ट ने पूछा कि जल की शुद्धता के मामले में क्या किया गया। अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कोर्ट के आदेश के तहत उन्होंने गंगा में गिर रहे नाले टैप्ड करवा दिए हैं। इसके अलावा मेला क्षेत्र को पॉलिथीन मुक्त करने के लिए कार्रवाई की जा रही है। अधिवक्ता शैलेश सिंह ने कहा कि कोर्ट ने अपने इक्कीस जनवरी दो हज़ार इक्कीस को पारित अपने आदेश में गंगा जल की शुद्धता, एसटीपी और ड्रेनेज में सुधार के लिए कहा था। इस पर अपर महाधिवक्ता ने कोर्ट के पिछले आदेश की अनुपालन रिपोर्ट हलफनामे के जरिए कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया। कोर्ट ने उसे रेकॉर्ड पर लेते हुए पूछा कि गंगा जल शुद्धिकरण के मामले में क्या किया गया। अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि दो दिन पहले मुख्य सचिव और डीजीपी मेले की तैयारियों की समीक्षा करने के लिए आए थे लेकिन उन्होंने गंगाजल के शुद्धिकरण पर कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसा लगता है शासन इस मामले में चिंतित नहीं है। कल्पवासी गंदे और काले पानी में स्नान करने को मजबूर हैं।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
पुरूषोत्तम दास टंडन (१ अगस्त १८८२ - १ जुलाई, १९६२) भारत के स्वतन्त्रता सेनानी थे। हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा के पद पर प्रतिष्ठित करवाने में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था। वे भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के अग्रणी पंक्ति के नेता तो थे ही, समर्पित राजनयिक, हिन्दी के अनन्य सेवक, कर्मठ पत्रकार, तेजस्वी वक्ता और समाज सुधारक भी थे। हिन्दी को भारत की राजभाषा का स्थान दिलवाने के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान किया। १९५० में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने। उन्हें भारत के राजनैतिक और सामाजिक जीवन में नयी चेतना, नयी लहर, नयी क्रान्ति पैदा करने वाला कर्मयोगी कहा गया। वे जन सामान्य में राजर्षि (संधि विच्छेदः राजा+ऋषि. लोक सभा, भारतीय संसद का निचला सदन है। भारतीय संसद का ऊपरी सदन राज्य सभा है। लोक सभा सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के आधार पर लोगों द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों से गठित होती है। भारतीय संविधान के अनुसार सदन में सदस्यों की अधिकतम संख्या 552 तक हो सकती है, जिसमें से 530 सदस्य विभिन्न राज्यों का और 20 सदस्य तक केन्द्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। सदन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं होने की स्थिति में भारत का राष्ट्रपति यदि चाहे तो आंग्ल-भारतीय समुदाय के दो प्रतिनिधियों को लोकसभा के लिए मनोनीत कर सकता है। लोकसभा की कार्यावधि 5 वर्ष है परंतु इसे समय से पूर्व भंग किया जा सकता है .
पुरुषोत्तम दास टंडन और लोक सभा आम में 4 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): दिल्ली, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, ओडिशा, उत्तर प्रदेश।
दिल्ली (IPA), आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (अंग्रेज़ीः National Capital Territory of Delhi) भारत का एक केंद्र-शासित प्रदेश और महानगर है। इसमें नई दिल्ली सम्मिलित है जो भारत की राजधानी है। दिल्ली राजधानी होने के नाते केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों - कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका के मुख्यालय नई दिल्ली और दिल्ली में स्थापित हैं १४८३ वर्ग किलोमीटर में फैला दिल्ली जनसंख्या के तौर पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। यहाँ की जनसंख्या लगभग १ करोड़ ७० लाख है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैंः हिन्दी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी। भारत में दिल्ली का ऐतिहासिक महत्त्व है। इसके दक्षिण पश्चिम में अरावली पहाड़ियां और पूर्व में यमुना नदी है, जिसके किनारे यह बसा है। यह प्राचीन समय में गंगा के मैदान से होकर जाने वाले वाणिज्य पथों के रास्ते में पड़ने वाला मुख्य पड़ाव था। यमुना नदी के किनारे स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है। यह भारत का अति प्राचीन नगर है। इसके इतिहास का प्रारम्भ सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़ा हुआ है। हरियाणा के आसपास के क्षेत्रों में हुई खुदाई से इस बात के प्रमाण मिले हैं। महाभारत काल में इसका नाम इन्द्रप्रस्थ था। दिल्ली सल्तनत के उत्थान के साथ ही दिल्ली एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक शहर के रूप में उभरी। यहाँ कई प्राचीन एवं मध्यकालीन इमारतों तथा उनके अवशेषों को देखा जा सकता हैं। १६३९ में मुगल बादशाह शाहजहाँ ने दिल्ली में ही एक चारदीवारी से घिरे शहर का निर्माण करवाया जो १६७९ से १८५७ तक मुगल साम्राज्य की राजधानी रही। १८वीं एवं १९वीं शताब्दी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने लगभग पूरे भारत को अपने कब्जे में ले लिया। इन लोगों ने कोलकाता को अपनी राजधानी बनाया। १९११ में अंग्रेजी सरकार ने फैसला किया कि राजधानी को वापस दिल्ली लाया जाए। इसके लिए पुरानी दिल्ली के दक्षिण में एक नए नगर नई दिल्ली का निर्माण प्रारम्भ हुआ। अंग्रेजों से १९४७ में स्वतंत्रता प्राप्त कर नई दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित किया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों से लोगों का प्रवासन हुआ, इससे दिल्ली के स्वरूप में आमूल परिवर्तन हुआ। विभिन्न प्रान्तो, धर्मों एवं जातियों के लोगों के दिल्ली में बसने के कारण दिल्ली का शहरीकरण तो हुआ ही साथ ही यहाँ एक मिश्रित संस्कृति ने भी जन्म लिया। आज दिल्ली भारत का एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक केन्द्र है। .
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, अधिकतर कांग्रेस के नाम से प्रख्यात, भारत के दो प्रमुख राजनैतिक दलों में से एक हैं, जिन में अन्य भारतीय जनता पार्टी हैं। कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिश राज में २८ दिसंबर १८८५ में हुई थी; इसके संस्थापकों में ए ओ ह्यूम (थियिसोफिकल सोसाइटी के प्रमुख सदस्य), दादा भाई नौरोजी और दिनशा वाचा शामिल थे। १९वी सदी के आखिर में और शुरूआती से लेकर मध्य २०वी सदी में, कांग्रेस भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में, अपने १.५ करोड़ से अधिक सदस्यों और ७ करोड़ से अधिक प्रतिभागियों के साथ, ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरोध में एक केन्द्रीय भागीदार बनी। १९४७ में आजादी के बाद, कांग्रेस भारत की प्रमुख राजनीतिक पार्टी बन गई। आज़ादी से लेकर २०१६ तक, १६ आम चुनावों में से, कांग्रेस ने ६ में पूर्ण बहुमत जीता हैं और ४ में सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व किया; अतः, कुल ४९ वर्षों तक वह केन्द्र सरकार का हिस्सा रही। भारत में, कांग्रेस के सात प्रधानमंत्री रह चुके हैं; पहले जवाहरलाल नेहरू (१९४७-१९६५) थे और हाल ही में मनमोहन सिंह (२००४-२०१४) थे। २०१४ के आम चुनाव में, कांग्रेस ने आज़ादी से अब तक का सबसे ख़राब आम चुनावी प्रदर्शन किया और ५४३ सदस्यीय लोक सभा में केवल ४४ सीट जीती। तब से लेकर अब तक कोंग्रेस कई विवादों में घिरी हुई है, कोंग्रेस द्वारा भारतीय आर्मी का मनोबल गिराने का देश में विरोध किया जा रहा है । http://www.allianceofdemocrats.org/index.php?option.
ओड़िशा, (ओड़िआः ଓଡ଼ିଶା) जिसे पहले उड़ीसा के नाम से जाना जाता था, भारत के पूर्वी तट पर स्थित एक राज्य है। ओड़िशा उत्तर में झारखंड, उत्तर पूर्व में पश्चिम बंगाल दक्षिण में आंध्र प्रदेश और पश्चिम में छत्तीसगढ से घिरा है तथा पूर्व में बंगाल की खाड़ी है। यह उसी प्राचीन राष्ट्र कलिंग का आधुनिक नाम है जिसपर 261 ईसा पूर्व में मौर्य सम्राट अशोक ने आक्रमण किया था और युद्ध में हुये भयानक रक्तपात से व्यथित हो अंततः बौद्ध धर्म अंगीकार किया था। आधुनिक ओड़िशा राज्य की स्थापना 1 अप्रैल 1936 को कटक के कनिका पैलेस में भारत के एक राज्य के रूप में हुई थी और इस नये राज्य के अधिकांश नागरिक ओड़िआ भाषी थे। राज्य में 1 अप्रैल को उत्कल दिवस (ओड़िशा दिवस) के रूप में मनाया जाता है। क्षेत्रफल के अनुसार ओड़िशा भारत का नौवां और जनसंख्या के हिसाब से ग्यारहवां सबसे बड़ा राज्य है। ओड़िआ भाषा राज्य की अधिकारिक और सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। भाषाई सर्वेक्षण के अनुसार ओड़िशा की 93.33% जनसंख्या ओड़िआ भाषी है। पाराद्वीप को छोड़कर राज्य की अपेक्षाकृत सपाट तटरेखा (लगभग 480 किमी लंबी) के कारण अच्छे बंदरगाहों का अभाव है। संकीर्ण और अपेक्षाकृत समतल तटीय पट्टी जिसमें महानदी का डेल्टा क्षेत्र शामिल है, राज्य की अधिकांश जनसंख्या का घर है। भौगोलिक लिहाज से इसके उत्तर में छोटानागपुर का पठार है जो अपेक्षाकृत कम उपजाऊ है लेकिन दक्षिण में महानदी, ब्राह्मणी, सालंदी और बैतरणी नदियों का उपजाऊ मैदान है। यह पूरा क्षेत्र मुख्य रूप से चावल उत्पादक क्षेत्र है। राज्य के आंतरिक भाग और कम आबादी वाले पहाड़ी क्षेत्र हैं। 1672 मीटर ऊँचा देवमाली, राज्य का सबसे ऊँचा स्थान है। ओड़िशा में तीव्र चक्रवात आते रहते हैं और सबसे तीव्र चक्रवात उष्णकटिबंधीय चक्रवात 05बी, 1 अक्टूबर 1999 को आया था, जिसके कारण जानमाल का गंभीर नुकसान हुआ और लगभग 10000 लोग मृत्यु का शिकार बन गये। ओड़िशा के संबलपुर के पास स्थित हीराकुंड बांध विश्व का सबसे लंबा मिट्टी का बांध है। ओड़िशा में कई लोकप्रिय पर्यटक स्थल स्थित हैं जिनमें, पुरी, कोणार्क और भुवनेश्वर सबसे प्रमुख हैं और जिन्हें पूर्वी भारत का सुनहरा त्रिकोण पुकारा जाता है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर जिसकी रथयात्रा विश्व प्रसिद्ध है और कोणार्क के सूर्य मंदिर को देखने प्रतिवर्ष लाखों पर्यटक आते हैं। ब्रह्मपुर के पास जौगदा में स्थित अशोक का प्रसिद्ध शिलालेख और कटक का बारबाटी किला भारत के पुरातात्विक इतिहास में महत्वपूर्ण हैं। .
आगरा और अवध संयुक्त प्रांत 1903 उत्तर प्रदेश सरकार का राजचिन्ह उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा (जनसंख्या के आधार पर) राज्य है। लखनऊ प्रदेश की प्रशासनिक व विधायिक राजधानी है और इलाहाबाद न्यायिक राजधानी है। आगरा, अयोध्या, कानपुर, झाँसी, बरेली, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, मथुरा, मुरादाबाद तथा आज़मगढ़ प्रदेश के अन्य महत्त्वपूर्ण शहर हैं। राज्य के उत्तर में उत्तराखण्ड तथा हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली तथा राजस्थान, दक्षिण में मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ और पूर्व में बिहार तथा झारखंड राज्य स्थित हैं। इनके अतिरिक्त राज्य की की पूर्वोत्तर दिशा में नेपाल देश है। सन २००० में भारतीय संसद ने उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिमी (मुख्यतः पहाड़ी) भाग से उत्तरांचल (वर्तमान में उत्तराखंड) राज्य का निर्माण किया। उत्तर प्रदेश का अधिकतर हिस्सा सघन आबादी वाले गंगा और यमुना। विश्व में केवल पाँच राष्ट्र चीन, स्वयं भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनिशिया और ब्राज़ील की जनसंख्या उत्तर प्रदेश की जनसंख्या से अधिक है। उत्तर प्रदेश भारत के उत्तर में स्थित है। यह राज्य उत्तर में नेपाल व उत्तराखण्ड, दक्षिण में मध्य प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान तथा पूर्व में बिहार तथा दक्षिण-पूर्व में झारखण्ड व छत्तीसगढ़ से घिरा हुआ है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है। यह राज्य २,३८,५६६ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहाँ का मुख्य न्यायालय इलाहाबाद में है। कानपुर, झाँसी, बाँदा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन, महोबा, ललितपुर, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, इलाहाबाद, मेरठ, गोरखपुर, नोएडा, मथुरा, मुरादाबाद, गाजियाबाद, अलीगढ़, सुल्तानपुर, फैजाबाद, बरेली, आज़मगढ़, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर यहाँ के मुख्य शहर हैं। .
पुरुषोत्तम दास टंडन 124 संबंध है और लोक सभा 47 है। वे आम 4 में है, समानता सूचकांक 2.34% है = 4 / (124 + 47)।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। पुरूषोत्तम दास टंडन भारत के स्वतन्त्रता सेनानी थे। हिंदी को भारत की राष्ट्रभाषा के पद पर प्रतिष्ठित करवाने में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था। वे भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के अग्रणी पंक्ति के नेता तो थे ही, समर्पित राजनयिक, हिन्दी के अनन्य सेवक, कर्मठ पत्रकार, तेजस्वी वक्ता और समाज सुधारक भी थे। हिन्दी को भारत की राजभाषा का स्थान दिलवाने के लिए उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान किया। एक हज़ार नौ सौ पचास में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष बने। उन्हें भारत के राजनैतिक और सामाजिक जीवन में नयी चेतना, नयी लहर, नयी क्रान्ति पैदा करने वाला कर्मयोगी कहा गया। वे जन सामान्य में राजर्षि : दिल्ली, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, ओडिशा, उत्तर प्रदेश। दिल्ली , आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली भारत का एक केंद्र-शासित प्रदेश और महानगर है। इसमें नई दिल्ली सम्मिलित है जो भारत की राजधानी है। दिल्ली राजधानी होने के नाते केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों - कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका के मुख्यालय नई दिल्ली और दिल्ली में स्थापित हैं एक हज़ार चार सौ तिरासी वर्ग किलोमीटर में फैला दिल्ली जनसंख्या के तौर पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। यहाँ की जनसंख्या लगभग एक करोड़ सत्तर लाख है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैंः हिन्दी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी। भारत में दिल्ली का ऐतिहासिक महत्त्व है। इसके दक्षिण पश्चिम में अरावली पहाड़ियां और पूर्व में यमुना नदी है, जिसके किनारे यह बसा है। यह प्राचीन समय में गंगा के मैदान से होकर जाने वाले वाणिज्य पथों के रास्ते में पड़ने वाला मुख्य पड़ाव था। यमुना नदी के किनारे स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है। यह भारत का अति प्राचीन नगर है। इसके इतिहास का प्रारम्भ सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़ा हुआ है। हरियाणा के आसपास के क्षेत्रों में हुई खुदाई से इस बात के प्रमाण मिले हैं। महाभारत काल में इसका नाम इन्द्रप्रस्थ था। दिल्ली सल्तनत के उत्थान के साथ ही दिल्ली एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक शहर के रूप में उभरी। यहाँ कई प्राचीन एवं मध्यकालीन इमारतों तथा उनके अवशेषों को देखा जा सकता हैं। एक हज़ार छः सौ उनतालीस में मुगल बादशाह शाहजहाँ ने दिल्ली में ही एक चारदीवारी से घिरे शहर का निर्माण करवाया जो एक हज़ार छः सौ उन्यासी से एक हज़ार आठ सौ सत्तावन तक मुगल साम्राज्य की राजधानी रही। अट्ठारहवीं एवं उन्नीसवीं शताब्दी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने लगभग पूरे भारत को अपने कब्जे में ले लिया। इन लोगों ने कोलकाता को अपनी राजधानी बनाया। एक हज़ार नौ सौ ग्यारह में अंग्रेजी सरकार ने फैसला किया कि राजधानी को वापस दिल्ली लाया जाए। इसके लिए पुरानी दिल्ली के दक्षिण में एक नए नगर नई दिल्ली का निर्माण प्रारम्भ हुआ। अंग्रेजों से एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में स्वतंत्रता प्राप्त कर नई दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित किया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों से लोगों का प्रवासन हुआ, इससे दिल्ली के स्वरूप में आमूल परिवर्तन हुआ। विभिन्न प्रान्तो, धर्मों एवं जातियों के लोगों के दिल्ली में बसने के कारण दिल्ली का शहरीकरण तो हुआ ही साथ ही यहाँ एक मिश्रित संस्कृति ने भी जन्म लिया। आज दिल्ली भारत का एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक केन्द्र है। . भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, अधिकतर कांग्रेस के नाम से प्रख्यात, भारत के दो प्रमुख राजनैतिक दलों में से एक हैं, जिन में अन्य भारतीय जनता पार्टी हैं। कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिश राज में अट्ठाईस दिसंबर एक हज़ार आठ सौ पचासी में हुई थी; इसके संस्थापकों में ए ओ ह्यूम , दादा भाई नौरोजी और दिनशा वाचा शामिल थे। उन्नीसवी सदी के आखिर में और शुरूआती से लेकर मध्य बीसवी सदी में, कांग्रेस भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में, अपने एक.पाँच करोड़ से अधिक सदस्यों और सात करोड़ से अधिक प्रतिभागियों के साथ, ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरोध में एक केन्द्रीय भागीदार बनी। एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में आजादी के बाद, कांग्रेस भारत की प्रमुख राजनीतिक पार्टी बन गई। आज़ादी से लेकर दो हज़ार सोलह तक, सोलह आम चुनावों में से, कांग्रेस ने छः में पूर्ण बहुमत जीता हैं और चार में सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व किया; अतः, कुल उनचास वर्षों तक वह केन्द्र सरकार का हिस्सा रही। भारत में, कांग्रेस के सात प्रधानमंत्री रह चुके हैं; पहले जवाहरलाल नेहरू थे और हाल ही में मनमोहन सिंह थे। दो हज़ार चौदह के आम चुनाव में, कांग्रेस ने आज़ादी से अब तक का सबसे ख़राब आम चुनावी प्रदर्शन किया और पाँच सौ तैंतालीस सदस्यीय लोक सभा में केवल चौंतालीस सीट जीती। तब से लेकर अब तक कोंग्रेस कई विवादों में घिरी हुई है, कोंग्रेस द्वारा भारतीय आर्मी का मनोबल गिराने का देश में विरोध किया जा रहा है । http://www.allianceofdemocrats.org/index.php?option. ओड़िशा, जिसे पहले उड़ीसा के नाम से जाना जाता था, भारत के पूर्वी तट पर स्थित एक राज्य है। ओड़िशा उत्तर में झारखंड, उत्तर पूर्व में पश्चिम बंगाल दक्षिण में आंध्र प्रदेश और पश्चिम में छत्तीसगढ से घिरा है तथा पूर्व में बंगाल की खाड़ी है। यह उसी प्राचीन राष्ट्र कलिंग का आधुनिक नाम है जिसपर दो सौ इकसठ ईसा पूर्व में मौर्य सम्राट अशोक ने आक्रमण किया था और युद्ध में हुये भयानक रक्तपात से व्यथित हो अंततः बौद्ध धर्म अंगीकार किया था। आधुनिक ओड़िशा राज्य की स्थापना एक अप्रैल एक हज़ार नौ सौ छत्तीस को कटक के कनिका पैलेस में भारत के एक राज्य के रूप में हुई थी और इस नये राज्य के अधिकांश नागरिक ओड़िआ भाषी थे। राज्य में एक अप्रैल को उत्कल दिवस के रूप में मनाया जाता है। क्षेत्रफल के अनुसार ओड़िशा भारत का नौवां और जनसंख्या के हिसाब से ग्यारहवां सबसे बड़ा राज्य है। ओड़िआ भाषा राज्य की अधिकारिक और सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। भाषाई सर्वेक्षण के अनुसार ओड़िशा की तिरानवे.तैंतीस% जनसंख्या ओड़िआ भाषी है। पाराद्वीप को छोड़कर राज्य की अपेक्षाकृत सपाट तटरेखा के कारण अच्छे बंदरगाहों का अभाव है। संकीर्ण और अपेक्षाकृत समतल तटीय पट्टी जिसमें महानदी का डेल्टा क्षेत्र शामिल है, राज्य की अधिकांश जनसंख्या का घर है। भौगोलिक लिहाज से इसके उत्तर में छोटानागपुर का पठार है जो अपेक्षाकृत कम उपजाऊ है लेकिन दक्षिण में महानदी, ब्राह्मणी, सालंदी और बैतरणी नदियों का उपजाऊ मैदान है। यह पूरा क्षेत्र मुख्य रूप से चावल उत्पादक क्षेत्र है। राज्य के आंतरिक भाग और कम आबादी वाले पहाड़ी क्षेत्र हैं। एक हज़ार छः सौ बहत्तर मीटर ऊँचा देवमाली, राज्य का सबसे ऊँचा स्थान है। ओड़िशा में तीव्र चक्रवात आते रहते हैं और सबसे तीव्र चक्रवात उष्णकटिबंधीय चक्रवात पाँचबी, एक अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे को आया था, जिसके कारण जानमाल का गंभीर नुकसान हुआ और लगभग दस हज़ार लोग मृत्यु का शिकार बन गये। ओड़िशा के संबलपुर के पास स्थित हीराकुंड बांध विश्व का सबसे लंबा मिट्टी का बांध है। ओड़िशा में कई लोकप्रिय पर्यटक स्थल स्थित हैं जिनमें, पुरी, कोणार्क और भुवनेश्वर सबसे प्रमुख हैं और जिन्हें पूर्वी भारत का सुनहरा त्रिकोण पुकारा जाता है। पुरी के जगन्नाथ मंदिर जिसकी रथयात्रा विश्व प्रसिद्ध है और कोणार्क के सूर्य मंदिर को देखने प्रतिवर्ष लाखों पर्यटक आते हैं। ब्रह्मपुर के पास जौगदा में स्थित अशोक का प्रसिद्ध शिलालेख और कटक का बारबाटी किला भारत के पुरातात्विक इतिहास में महत्वपूर्ण हैं। . आगरा और अवध संयुक्त प्रांत एक हज़ार नौ सौ तीन उत्तर प्रदेश सरकार का राजचिन्ह उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा राज्य है। लखनऊ प्रदेश की प्रशासनिक व विधायिक राजधानी है और इलाहाबाद न्यायिक राजधानी है। आगरा, अयोध्या, कानपुर, झाँसी, बरेली, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, मथुरा, मुरादाबाद तथा आज़मगढ़ प्रदेश के अन्य महत्त्वपूर्ण शहर हैं। राज्य के उत्तर में उत्तराखण्ड तथा हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली तथा राजस्थान, दक्षिण में मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ और पूर्व में बिहार तथा झारखंड राज्य स्थित हैं। इनके अतिरिक्त राज्य की की पूर्वोत्तर दिशा में नेपाल देश है। सन दो हज़ार में भारतीय संसद ने उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिमी भाग से उत्तरांचल राज्य का निर्माण किया। उत्तर प्रदेश का अधिकतर हिस्सा सघन आबादी वाले गंगा और यमुना। विश्व में केवल पाँच राष्ट्र चीन, स्वयं भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनिशिया और ब्राज़ील की जनसंख्या उत्तर प्रदेश की जनसंख्या से अधिक है। उत्तर प्रदेश भारत के उत्तर में स्थित है। यह राज्य उत्तर में नेपाल व उत्तराखण्ड, दक्षिण में मध्य प्रदेश, पश्चिम में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान तथा पूर्व में बिहार तथा दक्षिण-पूर्व में झारखण्ड व छत्तीसगढ़ से घिरा हुआ है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ है। यह राज्य दो,अड़तीस,पाँच सौ छयासठ वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। यहाँ का मुख्य न्यायालय इलाहाबाद में है। कानपुर, झाँसी, बाँदा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन, महोबा, ललितपुर, लखीमपुर खीरी, वाराणसी, इलाहाबाद, मेरठ, गोरखपुर, नोएडा, मथुरा, मुरादाबाद, गाजियाबाद, अलीगढ़, सुल्तानपुर, फैजाबाद, बरेली, आज़मगढ़, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर यहाँ के मुख्य शहर हैं। . पुरुषोत्तम दास टंडन एक सौ चौबीस संबंध है और लोक सभा सैंतालीस है। वे आम चार में है, समानता सूचकांक दो.चौंतीस% है = चार / । यह लेख पुरुषोत्तम दास टंडन और लोक सभा के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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नई दिल्ली, 27 नवंबरः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को उन बेईमानों को चेतावनी दी जो गरीबों के जरिये अपने काले धन को सफेद करने में लगे हुए हैं। मोदी ने अपने मासिक रेडियो संबोधन 'मन की बात' के 26वें संस्करण में कहा, "कुछ लोग सोचते हैं कि वे अपने काले धन को सफेद करवा सकते हैं और वे इसके लिए तमाम तरह के अनैतिक तरीके खोज रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वे इसके लिए गरीबों का इस्तेमाल कर रहे हैं। "
मोदी ने कहा, "यह उन पर है कि वे कानून का पालन करते हैं या उसे तोड़ते हैं, वे सुधरना चाहते हैं या नहीं। कानून उनसे सख्ती से निपटेगा। लेकिन गरीबों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ बंद करें। "
मोदी ने चेतावनी देते हुए कहा कि लोगों को गरीबों के जरिए अपने काले धन को सफेद करवाकर उन्हें परेशानी में नहीं डालना चाहिए।
मोदी का यह बयान उन खबरों के संदर्भ में है, जिनके मुताबिक, कई लोग गरीबों के जन धन खातों सहित अन्य बैंक खातों के जरिए अपने काले धन को सफेद करने में लगे हुए हैं।
सरकार के आठ नवंबर को लिए गए नोटबंदी के फैसले के बाद पहले ही सप्ताह में जन धन खातों में कुल जमा राशि बढ़कर 64,252 करोड़ रुपये हो गई।
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नई दिल्ली, सत्ताईस नवंबरः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को उन बेईमानों को चेतावनी दी जो गरीबों के जरिये अपने काले धन को सफेद करने में लगे हुए हैं। मोदी ने अपने मासिक रेडियो संबोधन 'मन की बात' के छब्बीसवें संस्करण में कहा, "कुछ लोग सोचते हैं कि वे अपने काले धन को सफेद करवा सकते हैं और वे इसके लिए तमाम तरह के अनैतिक तरीके खोज रहे हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वे इसके लिए गरीबों का इस्तेमाल कर रहे हैं। " मोदी ने कहा, "यह उन पर है कि वे कानून का पालन करते हैं या उसे तोड़ते हैं, वे सुधरना चाहते हैं या नहीं। कानून उनसे सख्ती से निपटेगा। लेकिन गरीबों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ बंद करें। " मोदी ने चेतावनी देते हुए कहा कि लोगों को गरीबों के जरिए अपने काले धन को सफेद करवाकर उन्हें परेशानी में नहीं डालना चाहिए। मोदी का यह बयान उन खबरों के संदर्भ में है, जिनके मुताबिक, कई लोग गरीबों के जन धन खातों सहित अन्य बैंक खातों के जरिए अपने काले धन को सफेद करने में लगे हुए हैं। सरकार के आठ नवंबर को लिए गए नोटबंदी के फैसले के बाद पहले ही सप्ताह में जन धन खातों में कुल जमा राशि बढ़कर चौंसठ,दो सौ बावन करोड़ रुपये हो गई।
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विशेष पतिनिधि नई दिल्ली। लोक सभा अध्यक्ष, श्रीमती मीरा कुमार के नेतृत्व में पाँच संसद सदस्यों (लोक सभा और राज्य सभा से), लोक सभा के महासचिव और भारतीय संसद के अन्य उच्चस्तरीय अधिकारियों का एक संसदीय शिष्टमंडल 15 से 18 जनवरी तक उरुग्वे की सरकारी यात्रा पर गया था । अध्यक्ष, श्रीमती मीरा कुमार की भारतीय संसद के महत्वपूर्ण स्तर के अधिकारी की उरुग्वे की यह प्रथम यात्रा थी । श्रीमती मीरा कुमार के अतिरिक्त बहुदलीय शिष्टमंडल में संसद सदस्य, सत्यव्रत चतुर्वेदी (राज्य सभा), एकेएस विजयन (लोक सभा), रेणुबाला प्रधान (राज्य सभा), बीके शुक्ला (लोक सभा) और प्रेमदास राय (लोक सभा) शामिल थे । लोकसभा सचिवालय की जारी विज्ञfिप्त के मुताबिक इस यात्रा के दौरान शिष्टमंडल ने सीनेट के अध्यक्ष तथा उरुग्वे के उपराष्ट्रपति, डेनिलो अस्टोरी; हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के अध्यक्ष, डॉ. लुई लाक्काले पोऊ; लिंग और समानता संबंधी विशेष संसदीय आयोग तथा भारत-उरुग्वे मैत्री समूह के साथ चर्चा की । उरुग्वे ओरिएंटल रिपब्लिक के उपराष्ट्रपति, डेनिलो अस्टोरी के साथ बैठक के दौरान श्रीमती मीरा कुमार ने दोनों देशों के बीच मैत्री संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने पर बल दिया । दोनों पक्षों ने भारत और उरुग्वे के व्यापारियों और शिष्टमंडलों के लिए दीर्घकालीन बहुप्रवेशीय वीजा जारी करने की संभावनाएं तलाशने की आवश्यकता पर बल दिया । अध्यक्ष, श्रीमती मीरा कुमार ने विश्व भर में आर्थिक मंदी के बावजूद उरुग्वे को 9 प्रतिशत विकास दर के लिए बधाई दी । श्री अस्टोरी ने दोनों देशों के बीच विभिन्न स्तरों, विशेष रूप से अवसंरचना, सूचना प्रौद्योगिकी इत्यादि क्षेत्रों में सीधे संपर्प के महत्व पर बल दिया । दोनों नेताओं का यह मत था कि दोनों देशों के प्रयास विश्व स्तर पर शक्ति संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। श्रीमती मीरा कुमार ने उरुग्वे की संसद के अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए लोक सभा के संसदीय अध्ययन तथा प्रशिक्षण ब्यूरो की सेवाओं की पेशकश की। सीनेट के अध्यक्ष, श्री डेनिलो अस्टोरी और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के अध्यक्ष डॉ. लुई लाक्काले पोऊ ने संयुक्त रूप से भारतीय संसदीय शिष्टमंडल के सम्मान में मध्याह्न भोजन का आयोजन किया । श्री अस्टोरी और डॉ. पोऊ ने उरुग्वे आने के लिए भारतीय संसदीय शिष्टमंडल को धन्यवाद दिया और कहा कि ऐसे दौरे आपसी संबंधों को और सुदृढ़ करने में बहुत सहायक होते हैं । मीरा कुमार ने भी 2010 और 2011 में भारत यात्रा पर आए उरुग्वे संसदीय शिष्टमंडल के साथ हुई बैठकों के सार्थक परिणामों को स्मरण किया । तदुपरांत, संसदीय शिष्टमंडल ने संसद भवन, मोंटेवीडियो में डॉ. पोऊ के साथ मुलाकात की । हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के अध्यक्ष ने आशा व्यक्त की कि उरुग्वे भारतीय कंपनियों द्वारा औद्योगिक एकक स्थापित करने हेतु एक आधार बन सकता है।
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विशेष पतिनिधि नई दिल्ली। लोक सभा अध्यक्ष, श्रीमती मीरा कुमार के नेतृत्व में पाँच संसद सदस्यों , लोक सभा के महासचिव और भारतीय संसद के अन्य उच्चस्तरीय अधिकारियों का एक संसदीय शिष्टमंडल पंद्रह से अट्ठारह जनवरी तक उरुग्वे की सरकारी यात्रा पर गया था । अध्यक्ष, श्रीमती मीरा कुमार की भारतीय संसद के महत्वपूर्ण स्तर के अधिकारी की उरुग्वे की यह प्रथम यात्रा थी । श्रीमती मीरा कुमार के अतिरिक्त बहुदलीय शिष्टमंडल में संसद सदस्य, सत्यव्रत चतुर्वेदी , एकेएस विजयन , रेणुबाला प्रधान , बीके शुक्ला और प्रेमदास राय शामिल थे । लोकसभा सचिवालय की जारी विज्ञfिप्त के मुताबिक इस यात्रा के दौरान शिष्टमंडल ने सीनेट के अध्यक्ष तथा उरुग्वे के उपराष्ट्रपति, डेनिलो अस्टोरी; हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के अध्यक्ष, डॉ. लुई लाक्काले पोऊ; लिंग और समानता संबंधी विशेष संसदीय आयोग तथा भारत-उरुग्वे मैत्री समूह के साथ चर्चा की । उरुग्वे ओरिएंटल रिपब्लिक के उपराष्ट्रपति, डेनिलो अस्टोरी के साथ बैठक के दौरान श्रीमती मीरा कुमार ने दोनों देशों के बीच मैत्री संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने पर बल दिया । दोनों पक्षों ने भारत और उरुग्वे के व्यापारियों और शिष्टमंडलों के लिए दीर्घकालीन बहुप्रवेशीय वीजा जारी करने की संभावनाएं तलाशने की आवश्यकता पर बल दिया । अध्यक्ष, श्रीमती मीरा कुमार ने विश्व भर में आर्थिक मंदी के बावजूद उरुग्वे को नौ प्रतिशत विकास दर के लिए बधाई दी । श्री अस्टोरी ने दोनों देशों के बीच विभिन्न स्तरों, विशेष रूप से अवसंरचना, सूचना प्रौद्योगिकी इत्यादि क्षेत्रों में सीधे संपर्प के महत्व पर बल दिया । दोनों नेताओं का यह मत था कि दोनों देशों के प्रयास विश्व स्तर पर शक्ति संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। श्रीमती मीरा कुमार ने उरुग्वे की संसद के अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए लोक सभा के संसदीय अध्ययन तथा प्रशिक्षण ब्यूरो की सेवाओं की पेशकश की। सीनेट के अध्यक्ष, श्री डेनिलो अस्टोरी और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के अध्यक्ष डॉ. लुई लाक्काले पोऊ ने संयुक्त रूप से भारतीय संसदीय शिष्टमंडल के सम्मान में मध्याह्न भोजन का आयोजन किया । श्री अस्टोरी और डॉ. पोऊ ने उरुग्वे आने के लिए भारतीय संसदीय शिष्टमंडल को धन्यवाद दिया और कहा कि ऐसे दौरे आपसी संबंधों को और सुदृढ़ करने में बहुत सहायक होते हैं । मीरा कुमार ने भी दो हज़ार दस और दो हज़ार ग्यारह में भारत यात्रा पर आए उरुग्वे संसदीय शिष्टमंडल के साथ हुई बैठकों के सार्थक परिणामों को स्मरण किया । तदुपरांत, संसदीय शिष्टमंडल ने संसद भवन, मोंटेवीडियो में डॉ. पोऊ के साथ मुलाकात की । हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के अध्यक्ष ने आशा व्यक्त की कि उरुग्वे भारतीय कंपनियों द्वारा औद्योगिक एकक स्थापित करने हेतु एक आधार बन सकता है।
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जैसे शेरों की गुगली फेंकते हुए सुना था। बचपन की नासमझी की वजह से शेरों के मायने तो नहीं समझ पाए मगर इतना जरूर लगा कि मियां ग़ालिब कोई ऐसी चीज जरूर हैं जिनका जिक्र वह हर मौके पर लाजिमी समझते हैं।
देके खत मुंह देखता है नामवर,
जवानी की दहलीज पर पहुंचे तो दूरदर्शन पर मियां ग़ालिब के किरदार के दर्शन किए। गुलज़ार के सीरियल में नसीरुद्दीन शाह ने क्या खूब किरदार निभाया था। ऐसा लगता था मानों नसीर में ग़ालिब की रूह समा गई हो। बल्लीमारान की वो गलियां और उनके घरों में लटके पोशीदा टाट के परदे।
यकीन मानिए मिर्ज़ा के उस युग को ढूंढने मैंने पुरानी दिल्ली के इलाके के कई चक्कर भी काटे। गालिब उन घरों-गलियों में तो न मिले, अलबत्ता लोगों के दिलों में पैबस्त जरूर मिले। सीलियल के जरिए ही सही, ग़ालिब की दर्दभरी जिंदगी से रूबरू हुआ तो उसके बाद उनकी शायरी और ज्यादा कीमती लगने लगी।
यारों के साथ कभी रात में चकल्लस को बैठा तो भी गालिब का ही सहारा रहा,
गो हाथ में जुंबिश नहीं, आंखों में तो दम है, रहने दो अभी सागर-ओ-मीना मेरे आगे।
ये मसाईल-ए-तसव्वुफ़ ये तिरा बयान 'ग़ालिब'
जिंदगी को ग़मों ने घेरा तो- क़ैद-ए-हयात ओ बंद-ए-ग़म अस्ल में दोनों एक हैं/ मौत से पहले आदमी ग़म से नजात पाए क्यूँ. . . जैसे शेर ढाल बन गए।
मन कभी रहस्यवाद और तत्वमीमांसा के बारे में फिक्रमंद हुआ और वेदांत की परिभाषा ढूंढनी चाही तो सोचा अपने मियां ग़ालिब को ही पकड़ते हैं और वो शेर मिल गए जिससे रहस्यवाद और वेदांत की परिभाषा गढ़ी जा सकती है।
उग रहा है दर-ओ-दीवार से सब्ज़ा 'ग़ालिब'
हम बयाबाँ में हैं और घर में बहार आई है ,
संतानों के एक-एक कर मरने का सदमा सहता, सियासी वजहों से अंग्रेजों से पेंशन के लिए संघर्ष करता यह शायर कितना जीवट भरा और जिंदादिल था, उसका अंदाजा एक घटना से लगाया जा सकता है। हुआ यूं कि एक बार ग़ालिब को पेंशन की कई बकाया किस्तें एक साथ मिल गईं।
मिर्ज़ा ग़ालिब के शेरों की अनगिनत पैरोडियां गढ़ी गईं। इसी से पता चलता है कि ग़ालिब कितने मकबूल हैं और उनका आम जीवन में कितना असर है। लोग अमरत्व की कल्पना करते हैं, गालिब ने अपनी शायरी के जरिए यह काम करके दिखाया है। मीर, दाग, मोमिन, बहादुर शाह जफर के जैसे शायरों के दौर में ग़ालिब ने अपने लिए अलग राह बनाई तो उसकी वजह भी थी।
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जैसे शेरों की गुगली फेंकते हुए सुना था। बचपन की नासमझी की वजह से शेरों के मायने तो नहीं समझ पाए मगर इतना जरूर लगा कि मियां ग़ालिब कोई ऐसी चीज जरूर हैं जिनका जिक्र वह हर मौके पर लाजिमी समझते हैं। देके खत मुंह देखता है नामवर, जवानी की दहलीज पर पहुंचे तो दूरदर्शन पर मियां ग़ालिब के किरदार के दर्शन किए। गुलज़ार के सीरियल में नसीरुद्दीन शाह ने क्या खूब किरदार निभाया था। ऐसा लगता था मानों नसीर में ग़ालिब की रूह समा गई हो। बल्लीमारान की वो गलियां और उनके घरों में लटके पोशीदा टाट के परदे। यकीन मानिए मिर्ज़ा के उस युग को ढूंढने मैंने पुरानी दिल्ली के इलाके के कई चक्कर भी काटे। गालिब उन घरों-गलियों में तो न मिले, अलबत्ता लोगों के दिलों में पैबस्त जरूर मिले। सीलियल के जरिए ही सही, ग़ालिब की दर्दभरी जिंदगी से रूबरू हुआ तो उसके बाद उनकी शायरी और ज्यादा कीमती लगने लगी। यारों के साथ कभी रात में चकल्लस को बैठा तो भी गालिब का ही सहारा रहा, गो हाथ में जुंबिश नहीं, आंखों में तो दम है, रहने दो अभी सागर-ओ-मीना मेरे आगे। ये मसाईल-ए-तसव्वुफ़ ये तिरा बयान 'ग़ालिब' जिंदगी को ग़मों ने घेरा तो- क़ैद-ए-हयात ओ बंद-ए-ग़म अस्ल में दोनों एक हैं/ मौत से पहले आदमी ग़म से नजात पाए क्यूँ. . . जैसे शेर ढाल बन गए। मन कभी रहस्यवाद और तत्वमीमांसा के बारे में फिक्रमंद हुआ और वेदांत की परिभाषा ढूंढनी चाही तो सोचा अपने मियां ग़ालिब को ही पकड़ते हैं और वो शेर मिल गए जिससे रहस्यवाद और वेदांत की परिभाषा गढ़ी जा सकती है। उग रहा है दर-ओ-दीवार से सब्ज़ा 'ग़ालिब' हम बयाबाँ में हैं और घर में बहार आई है , संतानों के एक-एक कर मरने का सदमा सहता, सियासी वजहों से अंग्रेजों से पेंशन के लिए संघर्ष करता यह शायर कितना जीवट भरा और जिंदादिल था, उसका अंदाजा एक घटना से लगाया जा सकता है। हुआ यूं कि एक बार ग़ालिब को पेंशन की कई बकाया किस्तें एक साथ मिल गईं। मिर्ज़ा ग़ालिब के शेरों की अनगिनत पैरोडियां गढ़ी गईं। इसी से पता चलता है कि ग़ालिब कितने मकबूल हैं और उनका आम जीवन में कितना असर है। लोग अमरत्व की कल्पना करते हैं, गालिब ने अपनी शायरी के जरिए यह काम करके दिखाया है। मीर, दाग, मोमिन, बहादुर शाह जफर के जैसे शायरों के दौर में ग़ालिब ने अपने लिए अलग राह बनाई तो उसकी वजह भी थी।
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हाल ही में टेलीकॉम ऑपरेटर Vodafone India ने अपने यूज़र्स के लिए एक नया prepaid plan भारत में पेश किया है। ये नया प्लान है 229 रुपये में आता है। इस नए प्लान में यूज़र्स की ज़रुरत को देखते हुए कंपनी ने पूरा पैकेज उपलब्ध कराया है जिसमें डाटा, अनलिमिटेड कॉलिंग, रोमिंग कॉल्स, SMS की सुविधा दी जा रही है।
यूज़र्स को इस प्लान के तहत रोज़ाना 2GB डाटा दिया जायेगा। इसके साथ ही UNLIMITED VOICE CALL के साथ यूज़र्स को रोज़ाना 100 SMS की सुविधा भी मिल रही है। इतना ही नहीं, कंपनी ने प्लान में 2GB 4G/ 3G data का रोज़ाना डाटा भी शामिल किया है। साथ ही अनलिमिटेड लोकल, STD और roaming calls की सुविधा भी मिल रही है। इस प्लान की वैलिडिटी 28 दिनों की रखी गयी है।
Telecom Talk की आती एक रिपोर्ट की मानें तो VODAFONE कंपनी ने अभी इस प्लान को कुछ लिमिटेड सर्किल में ही पेश किया है। इनमें Delhi NCR, Mumbai, और Rajasthan शामिल हैं। आपको बता दें कि वोडाफोन का एक प्लान 199 रुपये का भी है जिसमें कंपनी अनलिमिटेड वॉयस कॉल, 100 SMS डेली और 1.5GB डाटा रोज़ाना ऑफर कर रही है। यह प्लान भी 28 दिनों की वैलिडिटी के साथ आता है।
आपको बता दें कि वोडाफोन ने इससे पहले भी यूज़र्स को लुभाने के लिए प्रीपेड सिम की Home dellivery service शुरू की है। ऐसे ही Reliance Jio ने भी यह सर्विस भारत में शुरू की थी। इसका मतलब यह कि अब आप घर बैठे ही अपना Vodafone प्रीपेड सिम पा सकते हैं। अगर आप भी अपना सिम आर्डर करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको Vodafone India की वेबसाइट पर लॉगइन करना होगा। बाद में प्रीपेड अकाउंट सेक्शन में जाकर सिम डिलीवरी के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।
नोटः डिजिट हिंदी को अब Instagram और Tiktok पर फॉलो करें।
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हाल ही में टेलीकॉम ऑपरेटर Vodafone India ने अपने यूज़र्स के लिए एक नया prepaid plan भारत में पेश किया है। ये नया प्लान है दो सौ उनतीस रुपयापये में आता है। इस नए प्लान में यूज़र्स की ज़रुरत को देखते हुए कंपनी ने पूरा पैकेज उपलब्ध कराया है जिसमें डाटा, अनलिमिटेड कॉलिंग, रोमिंग कॉल्स, SMS की सुविधा दी जा रही है। यूज़र्स को इस प्लान के तहत रोज़ाना दोGB डाटा दिया जायेगा। इसके साथ ही UNLIMITED VOICE CALL के साथ यूज़र्स को रोज़ाना एक सौ SMS की सुविधा भी मिल रही है। इतना ही नहीं, कंपनी ने प्लान में दोGB चारG/ तीनG data का रोज़ाना डाटा भी शामिल किया है। साथ ही अनलिमिटेड लोकल, STD और roaming calls की सुविधा भी मिल रही है। इस प्लान की वैलिडिटी अट्ठाईस दिनों की रखी गयी है। Telecom Talk की आती एक रिपोर्ट की मानें तो VODAFONE कंपनी ने अभी इस प्लान को कुछ लिमिटेड सर्किल में ही पेश किया है। इनमें Delhi NCR, Mumbai, और Rajasthan शामिल हैं। आपको बता दें कि वोडाफोन का एक प्लान एक सौ निन्यानवे रुपयापये का भी है जिसमें कंपनी अनलिमिटेड वॉयस कॉल, एक सौ SMS डेली और एक.पाँचGB डाटा रोज़ाना ऑफर कर रही है। यह प्लान भी अट्ठाईस दिनों की वैलिडिटी के साथ आता है। आपको बता दें कि वोडाफोन ने इससे पहले भी यूज़र्स को लुभाने के लिए प्रीपेड सिम की Home dellivery service शुरू की है। ऐसे ही Reliance Jio ने भी यह सर्विस भारत में शुरू की थी। इसका मतलब यह कि अब आप घर बैठे ही अपना Vodafone प्रीपेड सिम पा सकते हैं। अगर आप भी अपना सिम आर्डर करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको Vodafone India की वेबसाइट पर लॉगइन करना होगा। बाद में प्रीपेड अकाउंट सेक्शन में जाकर सिम डिलीवरी के ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। नोटः डिजिट हिंदी को अब Instagram और Tiktok पर फॉलो करें।
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ALLAHABAD: एक जुलाई से चल रहे बिजली चेकिंग अभियान में जिन लोगों को नया कनेक्शन नहीं मिल सका है। उनको प्रशासन की ओर एक और मौका दिया जा रहा है। ख्9 अगस्त को जिले के सभी विद्युत केंद्रों पर कैंप लगाकर नए कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे। दो महीने से चल रहे अभियान में लक्ष्य के सापेक्ष नए कनेक्शन नहीं हो पाने पर जिला प्रशासन ने यह निर्देश जारी किए हैं। बता दें कि म्ब् हजार लक्ष्य के मुकाबले अभियान के दौरान बिजली विभाग केवल ब्8 हजार नए कनेक्शन ही दे सका है। जो कम है।
पूर्व में किए गए सर्वे के मुताबिक शहर में हाउस होल्ड बिजली कनेक्शन 90 फीसदी के आसपास बताए जाते हैं। वहीं गांव में यह संख्या महज भ्0 फीसदी के करीब है। इन सभी को नए कनेक्शन उपलब्ध कराने के बाद ही बिजली चोरी पर लगाम लगाई जा सकेगी। चेकिंग अभियान के दौरान मंडल के चार जिलों में कुल सवा लाख नए कनेक्शन जारी किए गए हैं। जिनमें से इलाहाबाद में ब्8 हजार तो कौशांबी में क्8 हजार नए कनेक्शन दिए गए हैं। जो लोग बाकी रह गए हैं वह अपने नजदीकी विद्युत केंद्र पर जाकर नए कनेक्शन के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
ख्9 अगस्त को लगने वाले कैंप में नया बिजली कनेक्शन लेने के इच्छुक उपभोक्ताओं को अपने मकान का प्रूफ देना होगा। इसके अलावा प्रमाणित फोटोग्राफ ली जाएगी। गांव में लगने वाले कैंप में ग्राम प्रधान से आईडेंटिटी प्रमाणित कराई जा सकेगी। शहर में नए कनेक्शन फीस जहां ख्म्भ्0 रुपए है वहीं गांव में इससे कम शुल्क निर्धारित किया गया है। डीएम पी गुरु प्रसाद के मुताबिक कोई भी उपभोक्ता इस कैंप के जरिए नया कनेक्शन ले सकता है।
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ALLAHABAD: एक जुलाई से चल रहे बिजली चेकिंग अभियान में जिन लोगों को नया कनेक्शन नहीं मिल सका है। उनको प्रशासन की ओर एक और मौका दिया जा रहा है। ख्नौ अगस्त को जिले के सभी विद्युत केंद्रों पर कैंप लगाकर नए कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे। दो महीने से चल रहे अभियान में लक्ष्य के सापेक्ष नए कनेक्शन नहीं हो पाने पर जिला प्रशासन ने यह निर्देश जारी किए हैं। बता दें कि म्ब् हजार लक्ष्य के मुकाबले अभियान के दौरान बिजली विभाग केवल ब्आठ हजार नए कनेक्शन ही दे सका है। जो कम है। पूर्व में किए गए सर्वे के मुताबिक शहर में हाउस होल्ड बिजली कनेक्शन नब्बे फीसदी के आसपास बताए जाते हैं। वहीं गांव में यह संख्या महज भ्शून्य फीसदी के करीब है। इन सभी को नए कनेक्शन उपलब्ध कराने के बाद ही बिजली चोरी पर लगाम लगाई जा सकेगी। चेकिंग अभियान के दौरान मंडल के चार जिलों में कुल सवा लाख नए कनेक्शन जारी किए गए हैं। जिनमें से इलाहाबाद में ब्आठ हजार तो कौशांबी में क्आठ हजार नए कनेक्शन दिए गए हैं। जो लोग बाकी रह गए हैं वह अपने नजदीकी विद्युत केंद्र पर जाकर नए कनेक्शन के लिए अप्लाई कर सकते हैं। ख्नौ अगस्त को लगने वाले कैंप में नया बिजली कनेक्शन लेने के इच्छुक उपभोक्ताओं को अपने मकान का प्रूफ देना होगा। इसके अलावा प्रमाणित फोटोग्राफ ली जाएगी। गांव में लगने वाले कैंप में ग्राम प्रधान से आईडेंटिटी प्रमाणित कराई जा सकेगी। शहर में नए कनेक्शन फीस जहां ख्म्भ्शून्य रुपयापए है वहीं गांव में इससे कम शुल्क निर्धारित किया गया है। डीएम पी गुरु प्रसाद के मुताबिक कोई भी उपभोक्ता इस कैंप के जरिए नया कनेक्शन ले सकता है।
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कारगिल में पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ाकर शहीद हुए फतेहाबाद के टीकत खंडेर पुरा निवासी जितेंद्र सिंह चौहान की शहादत को आज भी पूरा गांव याद करता है। उनकी अमर गाथा आज भी ग्रामीणों के मुंह से सुनी जा सकती है। ग्रामीण बताते हैं कि पांच पैरा बिग्रेड के जवान जितेंद्र सिंह चौहान ने कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना से जमकर लोहा लिया था। 21 जुलाई 1999 को वह शहीद हो गए थे।
शहादत के बाद सरकार द्वारा कई वायदे शहीद परिवार के लिए किए थे। कुछ को पूरा भी किया गया। शहीद जितेंद्र सिंह की पत्नी सुमन चौहान को अजीविका चलाने के लिए एक पेट्रोल पंप आवंटित किया गया है। ताजनगरी में एक आवास भी दिया गया।
गांव में शहीद का स्मारक बनाने के लिए जमीन आवंटित करने की बात कही गई थी। पर, जमीन का आवंटन न होने पर शहीद की पत्नी ने अपने खर्चे पर स्मारक बनवाया। इसका अनावरण 28 दिसंबर 2000 को किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि जितेंद्र की याद में उनकी पत्नी सुमन चौहान हर वर्ष शहादत के दिवस पर भंडारे का आयोजन करती हैं।
फतेहाबाद-बाह रोड से गांव की ओर जाने वाले मार्ग को शहीद जितेंद्र सिंह चौहान मार्ग दिया गया है। यह मार्ग इस समय क्षतिग्रस्त पड़ा है। ग्रामीणों ने इसकी मरम्मत कराए जाने की मांग की है। उनके परिवार की महिला राजा बेटी का कहना है कि कारगिल शहीद का गांव होने के बावजूद गांव में जन सुविधाओं का अभाव है। सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। बिजली भी काफी कम आती है। शौचालय और खड़जे की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने शहीद के गांव के समग्र विकास की मांग की है।
7 जुलाई का दिन, बाह के रुदमुली गांव के समीर भदौरिया की टीम ने घपाक पोस्ट पर कब्जा किया। सैनिकों के तेवर और जीत की भूख देखकर पाकिस्तानी सेना की रूह कांप गई। आलम ये था कि पाक फौजियों को जान बचाने के लाले पड़ गए। मौत को करीब देख अपनी मोटरें छोड़कर भाग खडे़ हुए। यह कहना है कारगिल जंग के हीरो रहे समीर भदौरिया का।
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कारगिल में पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ाकर शहीद हुए फतेहाबाद के टीकत खंडेर पुरा निवासी जितेंद्र सिंह चौहान की शहादत को आज भी पूरा गांव याद करता है। उनकी अमर गाथा आज भी ग्रामीणों के मुंह से सुनी जा सकती है। ग्रामीण बताते हैं कि पांच पैरा बिग्रेड के जवान जितेंद्र सिंह चौहान ने कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना से जमकर लोहा लिया था। इक्कीस जुलाई एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे को वह शहीद हो गए थे। शहादत के बाद सरकार द्वारा कई वायदे शहीद परिवार के लिए किए थे। कुछ को पूरा भी किया गया। शहीद जितेंद्र सिंह की पत्नी सुमन चौहान को अजीविका चलाने के लिए एक पेट्रोल पंप आवंटित किया गया है। ताजनगरी में एक आवास भी दिया गया। गांव में शहीद का स्मारक बनाने के लिए जमीन आवंटित करने की बात कही गई थी। पर, जमीन का आवंटन न होने पर शहीद की पत्नी ने अपने खर्चे पर स्मारक बनवाया। इसका अनावरण अट्ठाईस दिसंबर दो हज़ार को किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि जितेंद्र की याद में उनकी पत्नी सुमन चौहान हर वर्ष शहादत के दिवस पर भंडारे का आयोजन करती हैं। फतेहाबाद-बाह रोड से गांव की ओर जाने वाले मार्ग को शहीद जितेंद्र सिंह चौहान मार्ग दिया गया है। यह मार्ग इस समय क्षतिग्रस्त पड़ा है। ग्रामीणों ने इसकी मरम्मत कराए जाने की मांग की है। उनके परिवार की महिला राजा बेटी का कहना है कि कारगिल शहीद का गांव होने के बावजूद गांव में जन सुविधाओं का अभाव है। सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। बिजली भी काफी कम आती है। शौचालय और खड़जे की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने शहीद के गांव के समग्र विकास की मांग की है। सात जुलाई का दिन, बाह के रुदमुली गांव के समीर भदौरिया की टीम ने घपाक पोस्ट पर कब्जा किया। सैनिकों के तेवर और जीत की भूख देखकर पाकिस्तानी सेना की रूह कांप गई। आलम ये था कि पाक फौजियों को जान बचाने के लाले पड़ गए। मौत को करीब देख अपनी मोटरें छोड़कर भाग खडे़ हुए। यह कहना है कारगिल जंग के हीरो रहे समीर भदौरिया का।
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सम्मान्य श्रोताओं को सम्भवतः स्मरगा होगा कि, प्रथम दिवसीय वक्तव्य का उपक्रम करते हुए हमनें निवेदन किया था कि, तत्तच्छुडों के गर्भ में ही तत्तच्छब्डो का वाच्यार्थात्मक रहस्यार्थ अन्तर्गर्भित कर दिया गया है । ऋषि जिस तत्त्व का निरूपण करना चाहते हैं, उस तत्त्व की पूरी व्याख्या सङ्क ताक्षरों के माध्यम से उस शब्द के गर्भ में ही प्रतिष्ठित कर दी गई है। इसी चिरन्तन शैली के स्पष्टीकरण के सम्बन्ध में 'हृदय' शब्द आपके सम्मुख रक्खा गया था । एव दूसरे दिन किन्ही महानुभाव ने यह प्रश्न किया था कि, 'हृदयम्' शब्द के छ - द-नामक दो अक्षरों का समन्वय तो हो गया। किन्तु तीसरे 'यम्' समन्वय गतार्थ नही बन सका ? । कामना थी कि, राष्ट्रपतिभवन में 'यम' की चर्चा न की जाय । किन्तु जब जिज्ञासात्मक प्रश्न उपस्थित हो ही गया है, तो इस तृतीयाक्षर का भी शिवभावात्मक समन्वय अपेक्षित ही बन जाता है ।
करने वाली शक्ति का नाम है - 'ह', एव विसर्ग करने वाली शक्ति का नाम है - 'द' । सहज भाषानुसार 'लेना' और 'देना' । लेने' का नाम है'ह', देने का नाम है - 'द' । लेन, और देन के लिए यदि संस्कृतभाषा में हम कोई सरल शब्द ढूँढे, तो वे शब्द होगे - 'गति', और 'गति' । क्या तात्पर्य्य हुआ गति और गति का ? । केन्द्र से परिधि को र तत्त्व का जाना कहलाएगा 'गति', एव परिधि से केन्द्र की ओर तत्त्व का ना कहलाएगा 'गति' । 'आगति' का जहाँहरणार्थक 'हृ' अक्षर से सम्बन्ध माना जायगा, वहाँ 'गति ' का विसर्जनात्मक 'द' अक्षर से सम्बन्ध माना जायगा । ना, और जाना, यही क्रिया का स्वरूप है। क्रिया के लिए यह आवश्यक है कि, जबतक क्रिया को कोई निष्क्रिय धरातल नही मिल जाता, स्थिर- प्रतिष्ठित घरातल नही मिल जाता, तबतक क्रिया का सचार सर्वथा अवरुद्ध बना रहता है । प्रत्येक क्रिया के लिए, क्रियामञ्चार के लिए अवश्य ही कोई न कोई स्थिर-प्रतिष्ठात्मक आलम्बन अपेक्षित है। भूपिराड एक स्थिर धरातल है, तब हम चल सकते हैं, पादविक्षेपरूपा गति का अनुगमन कर सकते हैं । मुखविवरात्मक प्रतिष्ठित आधार पर ही हम गलाध करणानुकूल - व्यापार - लक्षण कर्म्म कर सकते हैं । नेत्ररूप स्थिर आलम्बन के माध्यम से ही रूपोका-विसर्गात्मक व्यापार सम्भव बना करता है । इसप्रकार प्रत्येक क्रिया की व्यवस्था के लिए यह अनिवार्य है कि, उसका कोई निष्क्रिय धरातल हो ।
और विसर्ग नामक क्रियाभाव जिस प्रतिष्ठातत्त्व के आधार पर नियन्त्रित-नियमित-व्यवस्थित बने रहते हैं, वही क्रिया का 'नियमन' कहलाया है
जिसका अर्थ है नियन्त्रणात्मक स्तम्भन । जिस इत्यभत तत्त्व विशेष के आधार पर गति और गतिक्रियाएँ प्रवाहित रहें, वह क्रियानियामक नीरा तत्त्वविशेष ही ती 'यम्' नामक अक्षर से गृहीत है । 'नियमयति यत् सर्वान गत्यागात-भावान्' अर्थात् जो गत्यागतिलक्षण क्रियाभावों का नियमन करता है, सय - मन करता है, वही तीमरा 'यम्' अक्षर है । इम तीसरे तत्व के लिए भी हमें लोकानुबन्धी शब्द और हूँढना पडा - 'स्थिति' शब्द । नियमनात्मक - स्तम्मनात्मक तत्त्व ही लोकव्यवहार में स्थिति कहलाया है । इसप्रकार 'हृदयम्' शब्द के - 'हृ द - यम्' इन तीन के माध्यम से क्रमश प्रगति गति-स्थिति - ये तीन तत्त्व हमारे सम्मुख उपस्थित हो गए ।
इन्ही तीन तत्त्वों के साङ्केतिक पारिभाषिक वैदिक नाम है- ब्रह्मा, विष्णु, इन्द्र । स्थितितत्त्व हो- 'ब्रह्मवै सर्वस्य प्रतिष्ठा' के अनुसार 'ब्रह्म', किंवा ब्रह्मा है, जिसे सर्वविद्याप्रतिष्ठा माना गया है । गतितत्त्व ही अपनी गत्यनुवन्विनी चलकृति से 'या च का च वलकृतिरिन्द्रमैन तत्' के अनुसार 'इन्द्र' है । एव गतितत्व ही अपने सहजसिद्धाहरणात्मक शनाया-धर्म से विष्णु है । ब्रह्मात्मिका स्थितिप्रतिष्ठा के आधार पर ही इन्द्रा विष्णू - लक्षण गत्यागतभावो की परम्पर प्रतिस्पर्द्धा होती रहती है, जिसका उदाहरण के लिए मानव के अन्नोर्कप्राणान्योऽन्य-परिग्रहलक्षण शारीरिक यज्ञ में साक्षात्कार किया जा सकता । के २५ वर्ष पर्यन्त मानव की शक्ति तो रहती है प्रवर्द्ध माना, एव विसर्गशक्ति रहती है हसीयसी । आता है अधिक एव जाता है कम । श्रगति रहती है बलवती, एव गति रहती है निर्बला व इस प्रथमावस्था में मानव की आयतनवृद्धि होती है । गतिरूप विष्णु, तथा गतिरूप इन्द्र, दोनो की प्रतिस्पर्द्धा में मानो विष्णु जीत रहे हैं, इन्द्र हार रहे हैं । २५ से ५० वर्ष पर्य्यन्त गति, और गति समान बनी रहती है । जितना आता है, उतना हीं निकल भी जाता है। इस मध्यावस्था के अनुपात से कहा जा सकता है कि - न इन्द्र विष्णु से हारते, न विष्णु इन्द्र से हारते । ५० से ७५ पर्यन्त प्रगतिबल बन जाता है शिथिल, एव रोमकूपवृद्धि - अन्यान्य सघर्षाटि के कारण गतिबल 'बन जाता है
* - ब्रह्मा देवानां प्रथमः सम्बभूव विश्वस्य कर्त्ता भुवनस्य गोप्ता । स ब्रह्मविद्यां सर्वविद्याप्रतिष्ठामथर्वाय ज्येष्ठपुत्राय प्राह ।।
- उपनिषत्
प्रवृद्ध । आय होती है कम, एवं व्यय होता है
अवस्था के
सम्बन्ध में कहा जाता है कि, इन्द्र जीत रहे हैं, और विष्णु हार रहे हैं। अन्त मे ७५ से १०० वर्ष पर्यन्त की चौथी अवस्था में गतिरूप विसर्गात्मक इन्द्र तो उत्तरोत्तर बनते जाते हैं प्रचल, एव ग्रागतिरूप विष्णु उत्तरोत्तर होते जाते हैं शिथिल । जहरणात्मक यज्ञकर्म्म सर्वथा उच्छिन्न हो जाता है, तो इन्द्रसहयोगी अग्नि विशुद्ध रुद्र में परिणत हो कर इस मानव-सस्थान को उच्छिन्न कर डालते हैं । इन तीन धारा में २५ और ५० के मध्य की जो धारा है, जिसमें विष्णु अर्थात् दोनों समान - चलशाली बने रहते हैं - लक्ष्य बना कर श्रुति ने कहा है कि - "अन्य सभी देवता इन्द्र और विष्णु ( गति और गति ) को जीत लेना चाहते हैं । किन्तु ये दोनों किसी भी प्राणदेवता से परास्त नहीं होते। साथ ही (अपनी मध्यावस्था में ) इन दोनों में भी एक दूसरे से एक दूसरा पराजित नही होता । त्राप्य पारमेष्ट्य महान् के आधार शरीर के आधार पर इस इन्द्रा - विष्णु की जो यह प्रतिस्पर्द्धा होती
रहती है, इसी से वाक - वेद - लोक-नाम की तीन साहस्त्रियों का जन्म हो पडता है", जिन इन तीनों साहस्रियों से सम्बन्ध रखने वाली साहस्त्रीविद्या का स्वरूप- विश्लेत्रण किसी स्वतन्त्र वक्तव्य का ही विषय है । गत्यागत्यात्मक इसी 'प्रतिद्वन्द्वी ' भाव का दिग्दर्शन कराती हुई श्रुति कहती हैउभा जिग्यथुर्नपराजयेथे, न पराजिग्ये कतरश्च नैनोः । इन्द्रश्च विष्णो यदपस्पृधेथां त्रेधा सहस्र वि तदैरयेथाम् ।। ~~ ऋक्सहिता ६६६।का
किं तत्सहस्र मिति १, इमे लोकाः, इमे वेदाः अथो वागितित्रयात् (ब्राह्मण) ।
अमरकोशानुबन्धी विष्णु शब्द के पर्य्यायों में 'उपेन्द्र' और 'इन्द्रावरज' शब्द आये हैं। 'उपेन्द्र इन्द्रावरजश्चक्रपारिणश्चतुर्भुजः' । श्रागतिधर्म्मा विष्णु गतिधर्म्मा इन्द्र के सन्निकट हैं, अतएव इन्हें 'उपेन्द्र' कहा गया है । आगति - गति - स्थित्यादिभाव गति के ही विवर्त्त है । गतितत्त्व ही प्रधान है। व गतितत्त्वात्मक इन्द्र अन्य प्राणों के समतुलन में ज्येष्ठ श्रेष्ठ चलिष्ठ मान लिए गए हैं, बैसाकि- 'इन्द्रो वै देवानामोजिष्टो बलिष्ठ श्रेष्ठो ज्येष्ठ.' इत्यादि वचन से
स्पष्ट है । गतिप्राधान्य से ही ज्येष्ठ इन्द्र की अपेक्षा विष्णु कनिष्ठ है। 'इन्द्रावरज' कहा गया है, जिसका लोकार्थ है- 'इन्द्र के छोटे भाई' । यह सर्वथा सर्वात्मना है कि, उपासनाकाण्ड से सम्बन्ध रखने वाले ब्रह्मेन्द्र विष्यवादि विभिन्न तत्त्व है, एवं यज्ञात्मक कर्मकाण्ड से सम्बन्ध रखने वाले इन देवताओ का स्वरूप विभिन्न ही है । साथ ही विज्ञानकाण्ड से सम्बन्ध रखने वाले ब्रह्मादि अपना विभिन्न ही स्वरूप रस रहे हैं । मूलसहितात्मक वेदशास्त्र (मन्त्रात्मक वेद), महिता व्याख्यानरूप ब्राह्मणात्मक वेदशास्त्र, एव मन्त्रब्राह्मणात्मक इस वेदशास्त्र का उपवृ हुणात्मक पुगणशास्त्र, भेद से भारतीय तत्त्ववाद क्रमश. 'विज्ञानकाण्ड, कर्म्मकाण्ड, उपासनाकाण्ड' भेद से तीन स्वतन्त्र वाराओं में प्रवाहित रहा है । मन्त्रात्मक वेदभाग के ब्रह्मादि देवता प्राकृतिक पदार्थ है, ब्राह्मणात्मक वेदभाग के ब्रह्मादि देवता प्राणविध-तथा अभिमानी विध-प्राणीविध - ग्राधिदैविक देवता है । एव पुराणशास्त्र के बहा।दि देवता आधिभौतिक उपास्य देवता हैं । ऐतिहासिक मनुष्यविध भौम देवताओ का भी इसी वर्ग में अन्तर्भाव है। बड़ा ही रहस्यपूर्ण है भारतीय देवतावाद, जिसे न समझने के कारण कल्पनावादियों नें इस दिशा में अनेक भ्रान्त कल्पनाएँ कर रखी है। किसी एक निश्चित सिद्धान्त बिन्दु के आधार पर तीनो ही देवधाराएँ अन्ततोगत्वा एक ही लक्ष्य पर विश्रान्त है। केवल अधिकारी की योग्यता के भेद से देवतत्त्व को विभिन्न तीन शैलियो से समन्वित किया हे ऋषि ने । तीनों की भाषाशैली - निरूपण पद्धति - सग्रहप्रकार सर्वथा विभिन्न ही होंगे । इस दृष्टिकोण को लक्ष्य में रखते हुए ही हमें प्रस्थान भेद से भारतीय देवतावाद के समन्वय में प्रवृत्त होना चाहिए । प्रकृत में हम विज्ञान शैली को ही लक्ष्य बना रहे हैं, जिसके माध्यम से ब्रह्मादि देवता पदार्थतत्व के रूप से ही व्याख्यात हैं ।
स्थिति का थोड़ा और स्पष्टीकरण कर लेना चाहिए । गति - आगति-स्थितिरूप से यहाँ जिन तीन देवता का दिग्दर्शन कराया जा रहा है, उनका पदार्थ - विद्यात्मक तत्त्वात्मक विज्ञान काण्ड से ही सम्बन्ध है । जब कर्म्मकाएक की मीमासा की जायगी, तो इन देवताओं का स्वरूप भिन्न प्रकार से ही उपवर्णित होगा । एव पौराणिक उपासनाकाण्ड, तथा इतिहासकाण्ड की दृष्टियों से इनका पृथक् पृथक् रूप से ही स्वरूप-विश्लेषण होगा, जिस पौराणिक विश्लेषण में - "इन्द्र विष्णु के छोटे भ्राता हैं, ब्रह्मा स्थिति तत्त्व है, गति इन्द्र तत्त्व है" इसप्रकार की तत्त्वात्मिका विज्ञानभाषा सर्वथा ही अशुद्ध मानी जायगी । श्रौपासनिक देवता के स्वरूप से तो प्रायः सभी आस्तिक परिचित होंगे । चतुर्मुख ब्रह्मा, चतुर्भुज विष्णु, त्रिनेत्र
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सम्मान्य श्रोताओं को सम्भवतः स्मरगा होगा कि, प्रथम दिवसीय वक्तव्य का उपक्रम करते हुए हमनें निवेदन किया था कि, तत्तच्छुडों के गर्भ में ही तत्तच्छब्डो का वाच्यार्थात्मक रहस्यार्थ अन्तर्गर्भित कर दिया गया है । ऋषि जिस तत्त्व का निरूपण करना चाहते हैं, उस तत्त्व की पूरी व्याख्या सङ्क ताक्षरों के माध्यम से उस शब्द के गर्भ में ही प्रतिष्ठित कर दी गई है। इसी चिरन्तन शैली के स्पष्टीकरण के सम्बन्ध में 'हृदय' शब्द आपके सम्मुख रक्खा गया था । एव दूसरे दिन किन्ही महानुभाव ने यह प्रश्न किया था कि, 'हृदयम्' शब्द के छ - द-नामक दो अक्षरों का समन्वय तो हो गया। किन्तु तीसरे 'यम्' समन्वय गतार्थ नही बन सका ? । कामना थी कि, राष्ट्रपतिभवन में 'यम' की चर्चा न की जाय । किन्तु जब जिज्ञासात्मक प्रश्न उपस्थित हो ही गया है, तो इस तृतीयाक्षर का भी शिवभावात्मक समन्वय अपेक्षित ही बन जाता है । करने वाली शक्ति का नाम है - 'ह', एव विसर्ग करने वाली शक्ति का नाम है - 'द' । सहज भाषानुसार 'लेना' और 'देना' । लेने' का नाम है'ह', देने का नाम है - 'द' । लेन, और देन के लिए यदि संस्कृतभाषा में हम कोई सरल शब्द ढूँढे, तो वे शब्द होगे - 'गति', और 'गति' । क्या तात्पर्य्य हुआ गति और गति का ? । केन्द्र से परिधि को र तत्त्व का जाना कहलाएगा 'गति', एव परिधि से केन्द्र की ओर तत्त्व का ना कहलाएगा 'गति' । 'आगति' का जहाँहरणार्थक 'हृ' अक्षर से सम्बन्ध माना जायगा, वहाँ 'गति ' का विसर्जनात्मक 'द' अक्षर से सम्बन्ध माना जायगा । ना, और जाना, यही क्रिया का स्वरूप है। क्रिया के लिए यह आवश्यक है कि, जबतक क्रिया को कोई निष्क्रिय धरातल नही मिल जाता, स्थिर- प्रतिष्ठित घरातल नही मिल जाता, तबतक क्रिया का सचार सर्वथा अवरुद्ध बना रहता है । प्रत्येक क्रिया के लिए, क्रियामञ्चार के लिए अवश्य ही कोई न कोई स्थिर-प्रतिष्ठात्मक आलम्बन अपेक्षित है। भूपिराड एक स्थिर धरातल है, तब हम चल सकते हैं, पादविक्षेपरूपा गति का अनुगमन कर सकते हैं । मुखविवरात्मक प्रतिष्ठित आधार पर ही हम गलाध करणानुकूल - व्यापार - लक्षण कर्म्म कर सकते हैं । नेत्ररूप स्थिर आलम्बन के माध्यम से ही रूपोका-विसर्गात्मक व्यापार सम्भव बना करता है । इसप्रकार प्रत्येक क्रिया की व्यवस्था के लिए यह अनिवार्य है कि, उसका कोई निष्क्रिय धरातल हो । और विसर्ग नामक क्रियाभाव जिस प्रतिष्ठातत्त्व के आधार पर नियन्त्रित-नियमित-व्यवस्थित बने रहते हैं, वही क्रिया का 'नियमन' कहलाया है जिसका अर्थ है नियन्त्रणात्मक स्तम्भन । जिस इत्यभत तत्त्व विशेष के आधार पर गति और गतिक्रियाएँ प्रवाहित रहें, वह क्रियानियामक नीरा तत्त्वविशेष ही ती 'यम्' नामक अक्षर से गृहीत है । 'नियमयति यत् सर्वान गत्यागात-भावान्' अर्थात् जो गत्यागतिलक्षण क्रियाभावों का नियमन करता है, सय - मन करता है, वही तीमरा 'यम्' अक्षर है । इम तीसरे तत्व के लिए भी हमें लोकानुबन्धी शब्द और हूँढना पडा - 'स्थिति' शब्द । नियमनात्मक - स्तम्मनात्मक तत्त्व ही लोकव्यवहार में स्थिति कहलाया है । इसप्रकार 'हृदयम्' शब्द के - 'हृ द - यम्' इन तीन के माध्यम से क्रमश प्रगति गति-स्थिति - ये तीन तत्त्व हमारे सम्मुख उपस्थित हो गए । इन्ही तीन तत्त्वों के साङ्केतिक पारिभाषिक वैदिक नाम है- ब्रह्मा, विष्णु, इन्द्र । स्थितितत्त्व हो- 'ब्रह्मवै सर्वस्य प्रतिष्ठा' के अनुसार 'ब्रह्म', किंवा ब्रह्मा है, जिसे सर्वविद्याप्रतिष्ठा माना गया है । गतितत्त्व ही अपनी गत्यनुवन्विनी चलकृति से 'या च का च वलकृतिरिन्द्रमैन तत्' के अनुसार 'इन्द्र' है । एव गतितत्व ही अपने सहजसिद्धाहरणात्मक शनाया-धर्म से विष्णु है । ब्रह्मात्मिका स्थितिप्रतिष्ठा के आधार पर ही इन्द्रा विष्णू - लक्षण गत्यागतभावो की परम्पर प्रतिस्पर्द्धा होती रहती है, जिसका उदाहरण के लिए मानव के अन्नोर्कप्राणान्योऽन्य-परिग्रहलक्षण शारीरिक यज्ञ में साक्षात्कार किया जा सकता । के पच्चीस वर्ष पर्यन्त मानव की शक्ति तो रहती है प्रवर्द्ध माना, एव विसर्गशक्ति रहती है हसीयसी । आता है अधिक एव जाता है कम । श्रगति रहती है बलवती, एव गति रहती है निर्बला व इस प्रथमावस्था में मानव की आयतनवृद्धि होती है । गतिरूप विष्णु, तथा गतिरूप इन्द्र, दोनो की प्रतिस्पर्द्धा में मानो विष्णु जीत रहे हैं, इन्द्र हार रहे हैं । पच्चीस से पचास वर्ष पर्य्यन्त गति, और गति समान बनी रहती है । जितना आता है, उतना हीं निकल भी जाता है। इस मध्यावस्था के अनुपात से कहा जा सकता है कि - न इन्द्र विष्णु से हारते, न विष्णु इन्द्र से हारते । पचास से पचहत्तर पर्यन्त प्रगतिबल बन जाता है शिथिल, एव रोमकूपवृद्धि - अन्यान्य सघर्षाटि के कारण गतिबल 'बन जाता है * - ब्रह्मा देवानां प्रथमः सम्बभूव विश्वस्य कर्त्ता भुवनस्य गोप्ता । स ब्रह्मविद्यां सर्वविद्याप्रतिष्ठामथर्वाय ज्येष्ठपुत्राय प्राह ।। - उपनिषत् प्रवृद्ध । आय होती है कम, एवं व्यय होता है अवस्था के सम्बन्ध में कहा जाता है कि, इन्द्र जीत रहे हैं, और विष्णु हार रहे हैं। अन्त मे पचहत्तर से एक सौ वर्ष पर्यन्त की चौथी अवस्था में गतिरूप विसर्गात्मक इन्द्र तो उत्तरोत्तर बनते जाते हैं प्रचल, एव ग्रागतिरूप विष्णु उत्तरोत्तर होते जाते हैं शिथिल । जहरणात्मक यज्ञकर्म्म सर्वथा उच्छिन्न हो जाता है, तो इन्द्रसहयोगी अग्नि विशुद्ध रुद्र में परिणत हो कर इस मानव-सस्थान को उच्छिन्न कर डालते हैं । इन तीन धारा में पच्चीस और पचास के मध्य की जो धारा है, जिसमें विष्णु अर्थात् दोनों समान - चलशाली बने रहते हैं - लक्ष्य बना कर श्रुति ने कहा है कि - "अन्य सभी देवता इन्द्र और विष्णु को जीत लेना चाहते हैं । किन्तु ये दोनों किसी भी प्राणदेवता से परास्त नहीं होते। साथ ही इन दोनों में भी एक दूसरे से एक दूसरा पराजित नही होता । त्राप्य पारमेष्ट्य महान् के आधार शरीर के आधार पर इस इन्द्रा - विष्णु की जो यह प्रतिस्पर्द्धा होती रहती है, इसी से वाक - वेद - लोक-नाम की तीन साहस्त्रियों का जन्म हो पडता है", जिन इन तीनों साहस्रियों से सम्बन्ध रखने वाली साहस्त्रीविद्या का स्वरूप- विश्लेत्रण किसी स्वतन्त्र वक्तव्य का ही विषय है । गत्यागत्यात्मक इसी 'प्रतिद्वन्द्वी ' भाव का दिग्दर्शन कराती हुई श्रुति कहती हैउभा जिग्यथुर्नपराजयेथे, न पराजिग्ये कतरश्च नैनोः । इन्द्रश्च विष्णो यदपस्पृधेथां त्रेधा सहस्र वि तदैरयेथाम् ।। ~~ ऋक्सहिता छः सौ छयासठ।का किं तत्सहस्र मिति एक, इमे लोकाः, इमे वेदाः अथो वागितित्रयात् । अमरकोशानुबन्धी विष्णु शब्द के पर्य्यायों में 'उपेन्द्र' और 'इन्द्रावरज' शब्द आये हैं। 'उपेन्द्र इन्द्रावरजश्चक्रपारिणश्चतुर्भुजः' । श्रागतिधर्म्मा विष्णु गतिधर्म्मा इन्द्र के सन्निकट हैं, अतएव इन्हें 'उपेन्द्र' कहा गया है । आगति - गति - स्थित्यादिभाव गति के ही विवर्त्त है । गतितत्त्व ही प्रधान है। व गतितत्त्वात्मक इन्द्र अन्य प्राणों के समतुलन में ज्येष्ठ श्रेष्ठ चलिष्ठ मान लिए गए हैं, बैसाकि- 'इन्द्रो वै देवानामोजिष्टो बलिष्ठ श्रेष्ठो ज्येष्ठ.' इत्यादि वचन से स्पष्ट है । गतिप्राधान्य से ही ज्येष्ठ इन्द्र की अपेक्षा विष्णु कनिष्ठ है। 'इन्द्रावरज' कहा गया है, जिसका लोकार्थ है- 'इन्द्र के छोटे भाई' । यह सर्वथा सर्वात्मना है कि, उपासनाकाण्ड से सम्बन्ध रखने वाले ब्रह्मेन्द्र विष्यवादि विभिन्न तत्त्व है, एवं यज्ञात्मक कर्मकाण्ड से सम्बन्ध रखने वाले इन देवताओ का स्वरूप विभिन्न ही है । साथ ही विज्ञानकाण्ड से सम्बन्ध रखने वाले ब्रह्मादि अपना विभिन्न ही स्वरूप रस रहे हैं । मूलसहितात्मक वेदशास्त्र , महिता व्याख्यानरूप ब्राह्मणात्मक वेदशास्त्र, एव मन्त्रब्राह्मणात्मक इस वेदशास्त्र का उपवृ हुणात्मक पुगणशास्त्र, भेद से भारतीय तत्त्ववाद क्रमश. 'विज्ञानकाण्ड, कर्म्मकाण्ड, उपासनाकाण्ड' भेद से तीन स्वतन्त्र वाराओं में प्रवाहित रहा है । मन्त्रात्मक वेदभाग के ब्रह्मादि देवता प्राकृतिक पदार्थ है, ब्राह्मणात्मक वेदभाग के ब्रह्मादि देवता प्राणविध-तथा अभिमानी विध-प्राणीविध - ग्राधिदैविक देवता है । एव पुराणशास्त्र के बहा।दि देवता आधिभौतिक उपास्य देवता हैं । ऐतिहासिक मनुष्यविध भौम देवताओ का भी इसी वर्ग में अन्तर्भाव है। बड़ा ही रहस्यपूर्ण है भारतीय देवतावाद, जिसे न समझने के कारण कल्पनावादियों नें इस दिशा में अनेक भ्रान्त कल्पनाएँ कर रखी है। किसी एक निश्चित सिद्धान्त बिन्दु के आधार पर तीनो ही देवधाराएँ अन्ततोगत्वा एक ही लक्ष्य पर विश्रान्त है। केवल अधिकारी की योग्यता के भेद से देवतत्त्व को विभिन्न तीन शैलियो से समन्वित किया हे ऋषि ने । तीनों की भाषाशैली - निरूपण पद्धति - सग्रहप्रकार सर्वथा विभिन्न ही होंगे । इस दृष्टिकोण को लक्ष्य में रखते हुए ही हमें प्रस्थान भेद से भारतीय देवतावाद के समन्वय में प्रवृत्त होना चाहिए । प्रकृत में हम विज्ञान शैली को ही लक्ष्य बना रहे हैं, जिसके माध्यम से ब्रह्मादि देवता पदार्थतत्व के रूप से ही व्याख्यात हैं । स्थिति का थोड़ा और स्पष्टीकरण कर लेना चाहिए । गति - आगति-स्थितिरूप से यहाँ जिन तीन देवता का दिग्दर्शन कराया जा रहा है, उनका पदार्थ - विद्यात्मक तत्त्वात्मक विज्ञान काण्ड से ही सम्बन्ध है । जब कर्म्मकाएक की मीमासा की जायगी, तो इन देवताओं का स्वरूप भिन्न प्रकार से ही उपवर्णित होगा । एव पौराणिक उपासनाकाण्ड, तथा इतिहासकाण्ड की दृष्टियों से इनका पृथक् पृथक् रूप से ही स्वरूप-विश्लेषण होगा, जिस पौराणिक विश्लेषण में - "इन्द्र विष्णु के छोटे भ्राता हैं, ब्रह्मा स्थिति तत्त्व है, गति इन्द्र तत्त्व है" इसप्रकार की तत्त्वात्मिका विज्ञानभाषा सर्वथा ही अशुद्ध मानी जायगी । श्रौपासनिक देवता के स्वरूप से तो प्रायः सभी आस्तिक परिचित होंगे । चतुर्मुख ब्रह्मा, चतुर्भुज विष्णु, त्रिनेत्र
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एक अच्छा काउबॉय बनने का क्या सपना नहीं सपना होगा? इसके अलावा, आपको छवि बनाने के लिए लगभग हर चीज बच्चों की अलमारी में मिल सकती हैः पुराने पहने जींस, पिंजरे में एक शर्ट, एक उज्ज्वल स्कार्फ, जूते और बच्चों के हैंडगन्स की एक जोड़ी। हालांकि, काउबॉय पोशाक के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात एक सुंदर चौड़ी ब्रीड वाली टोपी है जो आखिरकार इस नायक की छवि को पूरा करेगी। यही कारण है कि, हम सुझाव देते हैं कि आप अपने हाथों से एक काउबॉय टोपी बनाने की कोशिश करें, जो सटीक पैटर्न और विस्तृत विवरण के लिए धन्यवाद, यहां तक कि सबसे अकुशल शिल्पकार भी बना सकता है।
एक काउबॉय टोपी कैसे सीना है?
काम के लिए आपको इसकी आवश्यकता होगीः
- विभिन्न रंगों की 2 कट सामग्रीः मुख्य रंग - यह काला या भूरा, वैकल्पिक हो सकता है - एक उच्चारण बनाने के लिए किसी भी विपरीत रंग की सामग्री;
- उपयुक्त रंग के ऊनी धागे;
- सुई;
- मोटी तार का टुकड़ा।
चलो काम करने के लिएः
- सबसे पहले आपको प्रस्तावित योजना के अनुसार एक काउबॉय टोपी पैटर्न बनाने की जरूरत है और प्रत्येक तत्व को अलग से काट लें। ध्यान दें कि टोपी फ़ील्ड को ¼ टुकड़े के रूप में पैटर्न पर दर्शाया गया है और, इस तत्व को काटकर, आंतरिक कोने को स्पर्श न करें।
- अब आपको पैटर्न को कपड़े में स्थानांतरित करने और फिर से कटौती करने की आवश्यकता है। आरंभ करने के लिए, हम टोपी के केंद्रीय तत्व को मुख्य रंग के कपड़े, साथ ही सामने और पीछे के हिस्सों में स्थानांतरित करते हैं। केंद्रीय भाग के कपड़े से काटना, सभी तरफ कुछ सेंटीमीटर जोड़ें, फिर आप बाद में काट सकते हैं। फिर, एक काउबॉय टोपी के खेतों को काटने के लिए, प्राथमिक रंग के कपड़े के एक वर्ग टुकड़े को चार बार फोल्ड करें, ध्यान से पैटर्न को स्थानांतरित करें और अंदर के कोने से इसे काट लें। हमारी टोपी के लिए एक ही फ़ील्ड को काटने की जरूरत है और रंग के अलावा सामग्री के साथ।
- एक सिलाई मशीन के साथ केंद्रीय भाग के लंबे किनारे के साथ टोपी के सामने और पीछे सीना। आपको काउबॉय टोपी का शीर्ष होना चाहिए। आप इसे सामने की तरफ घुमा सकते हैं, या आप इसे गलत तरफ छोड़ सकते हैं। टोपी के सामने हम एक स्टार को एक अतिरिक्त रंग के कपड़े से काटते हैं।
- मशीन की मदद से हम बाहरी किनारे के साथ टोपी के खेतों को सीवन करते हैं। अंदर, हम पेग डालें, जिसके साथ फ़ील्ड आवश्यक आकार दिया जा सकता है, और तार को ठीक करने के लिए एक और मशीन लाइन रखो। फिर हम पहले से ही किनारे के साथ मार्जिन सीवन करते हैं।
- टोपी का तैयार शीर्ष भाग खेतों में लगाया जाता है और ऊनी धागे से घिरा होता है। ये वही धागे खेतों के किनारों के साथ एक सजावटी सीम बनाते हैं। हम ऊनी धागे से एक ब्रेड भी बुनाई करते हैं और दोनों तरफ सिलाई के बीच टोपी के सामने डाल देते हैं।
- और अब, अपने हाथों से बना एक काउबॉय टोपी तैयार है!
पेपर से काउबॉय टोपी कैसे बनाएं?
काम के लिए आपको इसकी आवश्यकता होगीः
- वाटमान;
- टॉयलेट पेपर रोल;
- गोंद पीवीए;
- गौचे ब्राउन;
- एक बोआ constrictor के साथ 2 laces।
तोः
- कागज़ से एक काउबॉय टोपी मॉडल करने के लिए, हमेशा के रूप में, आपको एक पैटर्न बनाने की जरूरत है। ऐसा करने के लिए, हम पेपर से टोपी के तत्वों को उचित माप, ड्रा और काटते हैं।
- अब खेतों के साथ बॉक्स गोंद, और फिर ताज और नीचे। दोनों तरफ किनारों पर टोपी के अंदर हम जूते को चिपकाते हैं।
- तैयार टोपी का एक छोटा सा हिस्सा पीवीए गोंद और टॉयलेट पेपर के साथ "पर्दे" से ढका हुआ है। इस प्रकार, हम धीरे-धीरे काउबॉय टोपी की पूरी बाहरी सतह को संसाधित करते हैं। गोंद पूरी तरह से सूखने के बाद, हम भूरे रंग के गौचे के साथ टोपी पेंट करते हैं और इसे सूखा देते हैं।
बस इतना ही है! काउबॉय की पेपर टोपी तैयार है!
जैसा कि आप देख सकते हैं, अपने हाथों से काउबॉय टोपी बनाने के कुछ तरीके हैं। खैर, और आप इसे किस तरह से पसंद करेंगे - यह पूरी तरह से आपका व्यवसाय है!
इसके अलावा, आप अन्य छवियां स्वयं बना सकते हैं, उदाहरण के लिए, एक भारतीय या समुद्री डाकू ।
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एक अच्छा काउबॉय बनने का क्या सपना नहीं सपना होगा? इसके अलावा, आपको छवि बनाने के लिए लगभग हर चीज बच्चों की अलमारी में मिल सकती हैः पुराने पहने जींस, पिंजरे में एक शर्ट, एक उज्ज्वल स्कार्फ, जूते और बच्चों के हैंडगन्स की एक जोड़ी। हालांकि, काउबॉय पोशाक के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात एक सुंदर चौड़ी ब्रीड वाली टोपी है जो आखिरकार इस नायक की छवि को पूरा करेगी। यही कारण है कि, हम सुझाव देते हैं कि आप अपने हाथों से एक काउबॉय टोपी बनाने की कोशिश करें, जो सटीक पैटर्न और विस्तृत विवरण के लिए धन्यवाद, यहां तक कि सबसे अकुशल शिल्पकार भी बना सकता है। एक काउबॉय टोपी कैसे सीना है? काम के लिए आपको इसकी आवश्यकता होगीः - विभिन्न रंगों की दो कट सामग्रीः मुख्य रंग - यह काला या भूरा, वैकल्पिक हो सकता है - एक उच्चारण बनाने के लिए किसी भी विपरीत रंग की सामग्री; - उपयुक्त रंग के ऊनी धागे; - सुई; - मोटी तार का टुकड़ा। चलो काम करने के लिएः - सबसे पहले आपको प्रस्तावित योजना के अनुसार एक काउबॉय टोपी पैटर्न बनाने की जरूरत है और प्रत्येक तत्व को अलग से काट लें। ध्यान दें कि टोपी फ़ील्ड को ¼ टुकड़े के रूप में पैटर्न पर दर्शाया गया है और, इस तत्व को काटकर, आंतरिक कोने को स्पर्श न करें। - अब आपको पैटर्न को कपड़े में स्थानांतरित करने और फिर से कटौती करने की आवश्यकता है। आरंभ करने के लिए, हम टोपी के केंद्रीय तत्व को मुख्य रंग के कपड़े, साथ ही सामने और पीछे के हिस्सों में स्थानांतरित करते हैं। केंद्रीय भाग के कपड़े से काटना, सभी तरफ कुछ सेंटीमीटर जोड़ें, फिर आप बाद में काट सकते हैं। फिर, एक काउबॉय टोपी के खेतों को काटने के लिए, प्राथमिक रंग के कपड़े के एक वर्ग टुकड़े को चार बार फोल्ड करें, ध्यान से पैटर्न को स्थानांतरित करें और अंदर के कोने से इसे काट लें। हमारी टोपी के लिए एक ही फ़ील्ड को काटने की जरूरत है और रंग के अलावा सामग्री के साथ। - एक सिलाई मशीन के साथ केंद्रीय भाग के लंबे किनारे के साथ टोपी के सामने और पीछे सीना। आपको काउबॉय टोपी का शीर्ष होना चाहिए। आप इसे सामने की तरफ घुमा सकते हैं, या आप इसे गलत तरफ छोड़ सकते हैं। टोपी के सामने हम एक स्टार को एक अतिरिक्त रंग के कपड़े से काटते हैं। - मशीन की मदद से हम बाहरी किनारे के साथ टोपी के खेतों को सीवन करते हैं। अंदर, हम पेग डालें, जिसके साथ फ़ील्ड आवश्यक आकार दिया जा सकता है, और तार को ठीक करने के लिए एक और मशीन लाइन रखो। फिर हम पहले से ही किनारे के साथ मार्जिन सीवन करते हैं। - टोपी का तैयार शीर्ष भाग खेतों में लगाया जाता है और ऊनी धागे से घिरा होता है। ये वही धागे खेतों के किनारों के साथ एक सजावटी सीम बनाते हैं। हम ऊनी धागे से एक ब्रेड भी बुनाई करते हैं और दोनों तरफ सिलाई के बीच टोपी के सामने डाल देते हैं। - और अब, अपने हाथों से बना एक काउबॉय टोपी तैयार है! पेपर से काउबॉय टोपी कैसे बनाएं? काम के लिए आपको इसकी आवश्यकता होगीः - वाटमान; - टॉयलेट पेपर रोल; - गोंद पीवीए; - गौचे ब्राउन; - एक बोआ constrictor के साथ दो laces। तोः - कागज़ से एक काउबॉय टोपी मॉडल करने के लिए, हमेशा के रूप में, आपको एक पैटर्न बनाने की जरूरत है। ऐसा करने के लिए, हम पेपर से टोपी के तत्वों को उचित माप, ड्रा और काटते हैं। - अब खेतों के साथ बॉक्स गोंद, और फिर ताज और नीचे। दोनों तरफ किनारों पर टोपी के अंदर हम जूते को चिपकाते हैं। - तैयार टोपी का एक छोटा सा हिस्सा पीवीए गोंद और टॉयलेट पेपर के साथ "पर्दे" से ढका हुआ है। इस प्रकार, हम धीरे-धीरे काउबॉय टोपी की पूरी बाहरी सतह को संसाधित करते हैं। गोंद पूरी तरह से सूखने के बाद, हम भूरे रंग के गौचे के साथ टोपी पेंट करते हैं और इसे सूखा देते हैं। बस इतना ही है! काउबॉय की पेपर टोपी तैयार है! जैसा कि आप देख सकते हैं, अपने हाथों से काउबॉय टोपी बनाने के कुछ तरीके हैं। खैर, और आप इसे किस तरह से पसंद करेंगे - यह पूरी तरह से आपका व्यवसाय है! इसके अलावा, आप अन्य छवियां स्वयं बना सकते हैं, उदाहरण के लिए, एक भारतीय या समुद्री डाकू ।
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लखनऊ, बसपा मुखिया मायावती की अध्यक्षता में हुई पार्टी विधायक दल की बैठक में बहुजन समाज पार्टी विधानमंडल दल ने वरिष्ठ विधायक गयाचरण दिनकर को विधानसभा में पार्टी और प्रतिपक्ष का नेता बनाने का निर्णय लिया है। हाल ही पार्टी छोड़ गये स्वामी प्रसाद मौर्य की जगह पर दिनकर को पार्टी एवं प्रतिपक्ष का नेता बनाने का निर्णय बसपा मुखिया मायावती की अध्यक्षता में हुई पार्टी विधायक दल की बैठक में लिया गया।
पार्टी मुखिया मायावती के खिलाफ बगावत की आवाज उठाकर मौर्य के पार्टी छोड़ जाने के बाद नेता विरोधी दल पद के लिए चार विधायकों का नाम लिया जा रहा था। मगर गयाचरण दिनकर पार्टी मुखिया की पहली पसंद बनकर उभरे। गयाचरण दिनकर दलित वर्ग के हैं और फिलहाल बुंदेलखण्ड अंचल की नरैनी (बांदा) सीट से विधायक हैं।
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लखनऊ, बसपा मुखिया मायावती की अध्यक्षता में हुई पार्टी विधायक दल की बैठक में बहुजन समाज पार्टी विधानमंडल दल ने वरिष्ठ विधायक गयाचरण दिनकर को विधानसभा में पार्टी और प्रतिपक्ष का नेता बनाने का निर्णय लिया है। हाल ही पार्टी छोड़ गये स्वामी प्रसाद मौर्य की जगह पर दिनकर को पार्टी एवं प्रतिपक्ष का नेता बनाने का निर्णय बसपा मुखिया मायावती की अध्यक्षता में हुई पार्टी विधायक दल की बैठक में लिया गया। पार्टी मुखिया मायावती के खिलाफ बगावत की आवाज उठाकर मौर्य के पार्टी छोड़ जाने के बाद नेता विरोधी दल पद के लिए चार विधायकों का नाम लिया जा रहा था। मगर गयाचरण दिनकर पार्टी मुखिया की पहली पसंद बनकर उभरे। गयाचरण दिनकर दलित वर्ग के हैं और फिलहाल बुंदेलखण्ड अंचल की नरैनी सीट से विधायक हैं।
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आहार "7" - यह क्या है?
आहार 7 पूरी तरह से चिकित्सा है,गुर्दे और उनके सामान्य ऑपरेशन के कार्यों को बहाल करने के उद्देश्य से। हालांकि, काफी बार यह उन महिलाओं द्वारा उपयोग किया जाता है जो मोटापे से ग्रस्त हैं, क्योंकि चिकित्सीय प्रभाव के अलावा, यह वजन घटाने के उत्कृष्ट परिणाम देता है। यदि इस आहार का उपयोग अतिरिक्त वजन का मुकाबला करने के लिए किया जाता है, तो हारने के लिए प्रति सप्ताह 7 किग्रा एक trifling मामला है! यह व्यावहारिक रूप से नमक मुक्त, कम कैलोरी और, महत्वपूर्ण रूप से, बहुत आसानी से सहन किया जाता है।
विभिन्न रोगियों के लिए आहार 7 की सिफारिश की जाती हैगुर्दे की बीमारियां, कुछ भड़काऊ घटनाओं के उपचारात्मक चरण में गुर्दे की शिथिलता को व्यक्त किए बिना पुरानी और तीव्र ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस सहित, साथ ही शोफ के साथ एक्जिमा, त्वचा तपेदिक और सूजन का रोना। इस आहार की ख़ासियत आहार में नमक की पूरी अनुपस्थिति है (इसे कैल्शियम और पोटेशियम लवण के साथ बदलना), कार्बोहाइड्रेट का सेवन प्रतिबंधित करना, और प्रोटीन और तरल पदार्थ का सेवन नियंत्रित करना।
अक्सर, आहार 7 को अवधि में महिलाओं को सौंपा जाता हैगर्भावस्था, गर्भाशय के आकार में वृद्धि के बाद से, एक नियम के रूप में, मास्टोपैथी और अन्य बीमारियों के बाद के विकास के साथ गुर्दे की विकृति, एडिमा, पायलोनेफ्राइटिस का विस्तार होता है। यह आहार पेशाब में सुधार करता है, न केवल गुर्दे के ऊतकों में चयापचय प्रक्रियाओं को गति देता है, बल्कि अन्य अंगों में भी, गुर्दे के कार्य के सामान्यीकरण के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाता है, और उनके प्रत्यक्ष भड़काऊ घावों के साथ।
यह आहार नमक रहित होना चाहिए और इसमें शामिल होना चाहिएमूल उत्पादों में केवल पोटेशियम और कैल्शियम लवण (लेकिन प्रति दिन 2-3 ग्राम से अधिक नहीं)। प्रोटीन (मुख्य रूप से पशु उत्पत्ति), कार्बोहाइड्रेट और वसा का सेवन काफी कम किया जाना चाहिए। इस तरह के प्रतिबंधों का शरीर पर एंटीएलर्जिक प्रभाव पड़ता है, और गुर्दे की सूजन के उन्मूलन पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है। एस्कॉर्बिक एसिड और समूह ए और बी के विटामिन सहित विटामिन का अतिरिक्त सेवन, स्वागत योग्य है।
डाइट नंबर 7 बेहद हो सकता हैविविध, क्योंकि इसमें सभी प्रकार की सब्जियां और फल, मसाले और साग शामिल हैं, जो रोगी की भूख में काफी वृद्धि करेंगे और उनके पाचन पर लाभकारी प्रभाव डालेंगे। हालांकि, हमें याद रखना चाहिए कि भोजन आंशिक और एक ही समय में होना चाहिए) आदर्श रूप से - दिन में 5-6 बार)। इसकी अपनी विशेषताओं और खुद खाना पकाने की प्रक्रिया है - इसे स्टीम किया जाना चाहिए, ओवन में या सिर्फ पकाया जाना चाहिए। सब्जियों या मक्खन में उत्पादों को भूनना भी संभव है, लेकिन उन्हें ओवरकुक करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
रोगी के लिए प्रोटीन भोजन की दैनिक दर - 80-90सी।, इस राशि का 50% जानवरों की उत्पत्ति का होना चाहिए। 80-90 ग्राम की मात्रा में वसा का भी सेवन किया जाना चाहिए। प्रति दिन (पशु वसा - कुल दर का 70% से अधिक नहीं)। यदि उनकी संख्या 400-450 ग्राम है तो कार्बोहाइड्रेट का सेवन सामान्य माना जाता है। प्रति दिन।
जब शारीरिक रूप से मानदंडों के साथ तुलना की जाती हैएक स्वस्थ व्यक्ति, भस्म विटामिन सी की मात्रा को कम से कम 3 गुना, विटामिन ए - 2 गुना, विटामिन बी - 1.5 गुना, ब्र - 1.25 गुना बढ़ाया जाना चाहिए। प्रति दिन खपत तरल पदार्थ की मात्रा 1 लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।
प्रोटीन मुक्त मक्का स्टार्च रोटी, साथ ही चोकर के साथ सफेद गेहूं की रोटी, नमक के बिना पके हुए;
नमक के बिना सूप की एक किस्म - सब्जी, फल, शाकाहारी;
मांस और मछली (केवल कम वसा वाले उबले हुए) - चिकन, खरगोश, बीफ, टर्की और वील, साथ ही पाईक, रोच, केसर, पर्च और पर्च।
अंडे और उनके डेरिवेटिव प्रोटीन आमलेट और अन्य व्यंजन हैं, लेकिन प्रति दिन 1 अंडे से अधिक नहीं।
डेयरी उत्पाद - किसी भी रूप में, लेकिन केवल सीमित मात्रा में।
सब्जियां और फल - केवल उबला हुआ और प्राकृतिक रूप में।
पुलाव और साबूदाना (दूध या पानी में) के व्यंजन पुलाव, पुडिंग, पैटीज़, दलिया, पिलाफ, आदि के रूप में।
इसे छोड़कर सभी वसा का उपयोग करने की सिफारिश की जाती हैदुर्दम्य, अर्थात्। सूअर का मांस, बीफ और भेड़ का बच्चा। ऐपेटाइज़र से, फल और सब्जी के सलाद, विनैग्रेट, वनस्पति तेल के साथ अनुभवी, जेलीयुक्त वील और मछली, हल्के पनीर की अनुमति है।
दिन के लिए नमूना मेनू, जो आहार 7 की सिफारिश करता हैः
पहले नाश्ते के लिएः दही पनीर - 120 ग्राम, मक्खन के साथ कुरकुरे अनाज, असाधारण मलाईदार, और दूध के साथ चाय।
दोपहर के भोजन के लिए (दूसरा नाश्ता): कद्दू दलिया और सूजी।
दोपहर के भोजन के लिएः शाकाहारी बोर्स्च - ings सर्विंग, तले हुए आलू, उबला हुआ मांस और कॉम्पोट, जिसमें विशेष रूप से ताजे और गट्टे फल शामिल होते हैं।
दोपहर के भोजन मेंः पके हुए सेब-गाजर चॉप।
रात के खाने के लिएः फल पिलाफ - ½ भाग।
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आहार "सात" - यह क्या है? आहार सात पूरी तरह से चिकित्सा है,गुर्दे और उनके सामान्य ऑपरेशन के कार्यों को बहाल करने के उद्देश्य से। हालांकि, काफी बार यह उन महिलाओं द्वारा उपयोग किया जाता है जो मोटापे से ग्रस्त हैं, क्योंकि चिकित्सीय प्रभाव के अलावा, यह वजन घटाने के उत्कृष्ट परिणाम देता है। यदि इस आहार का उपयोग अतिरिक्त वजन का मुकाबला करने के लिए किया जाता है, तो हारने के लिए प्रति सप्ताह सात किग्रा एक trifling मामला है! यह व्यावहारिक रूप से नमक मुक्त, कम कैलोरी और, महत्वपूर्ण रूप से, बहुत आसानी से सहन किया जाता है। विभिन्न रोगियों के लिए आहार सात की सिफारिश की जाती हैगुर्दे की बीमारियां, कुछ भड़काऊ घटनाओं के उपचारात्मक चरण में गुर्दे की शिथिलता को व्यक्त किए बिना पुरानी और तीव्र ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस सहित, साथ ही शोफ के साथ एक्जिमा, त्वचा तपेदिक और सूजन का रोना। इस आहार की ख़ासियत आहार में नमक की पूरी अनुपस्थिति है , कार्बोहाइड्रेट का सेवन प्रतिबंधित करना, और प्रोटीन और तरल पदार्थ का सेवन नियंत्रित करना। अक्सर, आहार सात को अवधि में महिलाओं को सौंपा जाता हैगर्भावस्था, गर्भाशय के आकार में वृद्धि के बाद से, एक नियम के रूप में, मास्टोपैथी और अन्य बीमारियों के बाद के विकास के साथ गुर्दे की विकृति, एडिमा, पायलोनेफ्राइटिस का विस्तार होता है। यह आहार पेशाब में सुधार करता है, न केवल गुर्दे के ऊतकों में चयापचय प्रक्रियाओं को गति देता है, बल्कि अन्य अंगों में भी, गुर्दे के कार्य के सामान्यीकरण के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाता है, और उनके प्रत्यक्ष भड़काऊ घावों के साथ। यह आहार नमक रहित होना चाहिए और इसमें शामिल होना चाहिएमूल उत्पादों में केवल पोटेशियम और कैल्शियम लवण । प्रोटीन , कार्बोहाइड्रेट और वसा का सेवन काफी कम किया जाना चाहिए। इस तरह के प्रतिबंधों का शरीर पर एंटीएलर्जिक प्रभाव पड़ता है, और गुर्दे की सूजन के उन्मूलन पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है। एस्कॉर्बिक एसिड और समूह ए और बी के विटामिन सहित विटामिन का अतिरिक्त सेवन, स्वागत योग्य है। डाइट नंबर सात बेहद हो सकता हैविविध, क्योंकि इसमें सभी प्रकार की सब्जियां और फल, मसाले और साग शामिल हैं, जो रोगी की भूख में काफी वृद्धि करेंगे और उनके पाचन पर लाभकारी प्रभाव डालेंगे। हालांकि, हमें याद रखना चाहिए कि भोजन आंशिक और एक ही समय में होना चाहिए) आदर्श रूप से - दिन में पाँच-छः बार)। इसकी अपनी विशेषताओं और खुद खाना पकाने की प्रक्रिया है - इसे स्टीम किया जाना चाहिए, ओवन में या सिर्फ पकाया जाना चाहिए। सब्जियों या मक्खन में उत्पादों को भूनना भी संभव है, लेकिन उन्हें ओवरकुक करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। रोगी के लिए प्रोटीन भोजन की दैनिक दर - अस्सी-नब्बेसी।, इस राशि का पचास% जानवरों की उत्पत्ति का होना चाहिए। अस्सी-नब्बे ग्राम की मात्रा में वसा का भी सेवन किया जाना चाहिए। प्रति दिन । यदि उनकी संख्या चार सौ-चार सौ पचास ग्राम है तो कार्बोहाइड्रेट का सेवन सामान्य माना जाता है। प्रति दिन। जब शारीरिक रूप से मानदंडों के साथ तुलना की जाती हैएक स्वस्थ व्यक्ति, भस्म विटामिन सी की मात्रा को कम से कम तीन गुना, विटामिन ए - दो गुना, विटामिन बी - एक.पाँच गुना, ब्र - एक.पच्चीस गुना बढ़ाया जाना चाहिए। प्रति दिन खपत तरल पदार्थ की मात्रा एक लीटरटर से अधिक नहीं होनी चाहिए। प्रोटीन मुक्त मक्का स्टार्च रोटी, साथ ही चोकर के साथ सफेद गेहूं की रोटी, नमक के बिना पके हुए; नमक के बिना सूप की एक किस्म - सब्जी, फल, शाकाहारी; मांस और मछली - चिकन, खरगोश, बीफ, टर्की और वील, साथ ही पाईक, रोच, केसर, पर्च और पर्च। अंडे और उनके डेरिवेटिव प्रोटीन आमलेट और अन्य व्यंजन हैं, लेकिन प्रति दिन एक अंडे से अधिक नहीं। डेयरी उत्पाद - किसी भी रूप में, लेकिन केवल सीमित मात्रा में। सब्जियां और फल - केवल उबला हुआ और प्राकृतिक रूप में। पुलाव और साबूदाना के व्यंजन पुलाव, पुडिंग, पैटीज़, दलिया, पिलाफ, आदि के रूप में। इसे छोड़कर सभी वसा का उपयोग करने की सिफारिश की जाती हैदुर्दम्य, अर्थात्। सूअर का मांस, बीफ और भेड़ का बच्चा। ऐपेटाइज़र से, फल और सब्जी के सलाद, विनैग्रेट, वनस्पति तेल के साथ अनुभवी, जेलीयुक्त वील और मछली, हल्के पनीर की अनुमति है। दिन के लिए नमूना मेनू, जो आहार सात की सिफारिश करता हैः पहले नाश्ते के लिएः दही पनीर - एक सौ बीस ग्राम, मक्खन के साथ कुरकुरे अनाज, असाधारण मलाईदार, और दूध के साथ चाय। दोपहर के भोजन के लिए : कद्दू दलिया और सूजी। दोपहर के भोजन के लिएः शाकाहारी बोर्स्च - ings सर्विंग, तले हुए आलू, उबला हुआ मांस और कॉम्पोट, जिसमें विशेष रूप से ताजे और गट्टे फल शामिल होते हैं। दोपहर के भोजन मेंः पके हुए सेब-गाजर चॉप। रात के खाने के लिएः फल पिलाफ - ½ भाग।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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Aaj Samaj (आज समाज),NCP State President Maratha Virendra Verma, पानीपत : हरियाणा प्रदेश के अंदर कांग्रेस व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का गठबंधन रहेगा और भविष्य में होने वाले लोकसभा चुनाव उक्त पार्टियां मिलकर लडेगी, ताकि देश को फिर से तरक्की के रास्ते पर लाया जा सकें। उक्त बातें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रदेशाध्यक्ष मराठा विरेन्द्र वर्मा ने जलालपुर प्रथम गांव में कृष्ण वर्मा के निवास पर जलपान के उपरांत ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कही। इससे पूर्व ग्रामीणों ने उनका फूल मालाओं से स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने हलका समालखा के विभिन्न गांवों का दौरा किया और आगामी 28 मई को समालखा की खटीक धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम मीटिंग का न्योता दिया।
एनसीपी हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष मराठा वीरेंद्र वर्मा ने कहा कि एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पंवार ने जिस प्रकार महाराष्ट्र को देश ही नहीं, बल्कि विश्व के नक्शे पर चमकाने का काम किया था। उसी प्रकार भारत को भी ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे है। उन्होने कहा कि शरद पंवार हमेशा किसानों व मजदूरों की आय बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करते है, क्योकि उन्हे पता है कि जिस देश का किसान व मजदूर तरक्की करेगा वो देश ही आगे बढेगा। इस दौरान उन्होंने कहा कि एनसीपी हरियाणा प्रदेश में सरकार आने पर 60 वर्ष से ऊपर के लोगों को 5 हजार रुपए पेंशन व शिक्षा, चिकित्सा और बिजली-पानी फ्री देगी। इतना ही नहीं, बल्कि हर गांव में स्टेडियम व पुस्तकालय का निर्माण करवाएगी।
मराठा ने कहा कि भाजपा से देश व प्रदेश की जनता तंग आ चुकी है और देश व प्रदेश में अन्याय, अत्याचार, शोषण व भ्रष्टाचार और तानाशाही के स्थान पर न्याय, सदाचार, पोषण व रोजगार की गारंटी देने वाली सरकार बनाने का मन बना चुकी है। मराठा ने कहा कि शरद पंवार दूरगामी सोच रखने वाले नेता है, जोकि हर वर्ग का भला कर सकते है। इस मौके पर एनसीपी के प्रदेश महामंत्री ऋषिपाल पांचाल, सुशील रावल, कृष्ण वर्मा, सतीश वर्मा, करेशन प्रजापत, रमेश शर्मा, सतबीर, पहलसिहं रावल, राजू कश्यप, देशराज कश्यप, तेजपाल रावल आदि अनेक मौजूद थे।
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Aaj Samaj ,NCP State President Maratha Virendra Verma, पानीपत : हरियाणा प्रदेश के अंदर कांग्रेस व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठबंधन रहेगा और भविष्य में होने वाले लोकसभा चुनाव उक्त पार्टियां मिलकर लडेगी, ताकि देश को फिर से तरक्की के रास्ते पर लाया जा सकें। उक्त बातें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मराठा विरेन्द्र वर्मा ने जलालपुर प्रथम गांव में कृष्ण वर्मा के निवास पर जलपान के उपरांत ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कही। इससे पूर्व ग्रामीणों ने उनका फूल मालाओं से स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने हलका समालखा के विभिन्न गांवों का दौरा किया और आगामी अट्ठाईस मई को समालखा की खटीक धर्मशाला में आयोजित कार्यक्रम मीटिंग का न्योता दिया। एनसीपी हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष मराठा वीरेंद्र वर्मा ने कहा कि एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पंवार ने जिस प्रकार महाराष्ट्र को देश ही नहीं, बल्कि विश्व के नक्शे पर चमकाने का काम किया था। उसी प्रकार भारत को भी ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे है। उन्होने कहा कि शरद पंवार हमेशा किसानों व मजदूरों की आय बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करते है, क्योकि उन्हे पता है कि जिस देश का किसान व मजदूर तरक्की करेगा वो देश ही आगे बढेगा। इस दौरान उन्होंने कहा कि एनसीपी हरियाणा प्रदेश में सरकार आने पर साठ वर्ष से ऊपर के लोगों को पाँच हजार रुपए पेंशन व शिक्षा, चिकित्सा और बिजली-पानी फ्री देगी। इतना ही नहीं, बल्कि हर गांव में स्टेडियम व पुस्तकालय का निर्माण करवाएगी। मराठा ने कहा कि भाजपा से देश व प्रदेश की जनता तंग आ चुकी है और देश व प्रदेश में अन्याय, अत्याचार, शोषण व भ्रष्टाचार और तानाशाही के स्थान पर न्याय, सदाचार, पोषण व रोजगार की गारंटी देने वाली सरकार बनाने का मन बना चुकी है। मराठा ने कहा कि शरद पंवार दूरगामी सोच रखने वाले नेता है, जोकि हर वर्ग का भला कर सकते है। इस मौके पर एनसीपी के प्रदेश महामंत्री ऋषिपाल पांचाल, सुशील रावल, कृष्ण वर्मा, सतीश वर्मा, करेशन प्रजापत, रमेश शर्मा, सतबीर, पहलसिहं रावल, राजू कश्यप, देशराज कश्यप, तेजपाल रावल आदि अनेक मौजूद थे।
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अमेरिका के कोलोराडो शहर स्थित एक परिवार नियोजन केंद्र पर एक बंदूकधारी ने गोलीबारी की, जिसमें एक पुलिस अधिकारी सहित कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई। पूरा घटनाक्रम पांच घंटे से भी अधिक समय तक चला। इसके बाद, बंदूकधारी ने सरेंडर कर दिया। घटना में पांच पुलिस अधिकारी सहित नौ लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि अभी तक बंदूकधारी के मकसद का पता नहीं चल पाया है।
अधिकारियों के मुताबिक, शुक्रवार शाम बंदूकधारी कोलोराडो के कोलोराडोस्प्रिंग्स स्थित 'प्लैन्ड पैरेंटहुड' क्लिनिक में घुसा और उसने कई घंटों तक वहां कर्मचारियों और मरीजों को बंधक बना कर रखा। इस दौरान पुलिस और बंदूकधारी के बीच गोलीबारी हुई। लाखों अमेरिकी लोगों के 'थैंक्सगिविंग' की छुट्टी का जश्न मनाने के महज एक दिन बाद यह घटना हुई। अमेरिका की गृह सुरक्षा सलाहकार लीजा मोनाको ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को हालात की जानकारी दी। कोलोराडो स्प्रिंग्स के मेयर जॉन सूदर्स ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, "आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है। " पुलिस ने बताया कि हमलावर के पास एक लंबी बंदूक थी और वह अपने साथ इमारत में कई "चीजें" लेकर गया था जो विस्फोटक हो सकते हैं। एफबीआई भी मामले की जांच में जुट गई है।
नेशनल एबॉर्शन फेडरेशन की अध्यक्ष एवं सीईओ विकी सापोर्टा ने कहा, "घटना में मारे गए लोगों के परिवारों और घायलों के प्रति हमारे दिल में संवेदना है। हम इस घटना से निपटने वाले अधिकारियों और हमले का सामना करते हुए मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले क्लिनिक के कर्मचारियों के बेहद शुक्रगुजार रहेंगे। " उन्होंने कहा, "गर्भपात विरोधी कार्यकर्ताओं की ओर से एक भ्रामक वीडियो जारी करने के बाद गर्भपात करने वालों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले बयानों और धमकियों में इजाफा हुआ है। ऐसी आशंका थी कि इस तरह की धमकियों के कारण हिंसक हमले होंगे और आज यह हुआ भी। " वीडियो जारी होने के बाद 'प्लैन्ड पैरेंटहुड' के कम से कम चार क्लिनिक पर आगजनी की गई है।
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अमेरिका के कोलोराडो शहर स्थित एक परिवार नियोजन केंद्र पर एक बंदूकधारी ने गोलीबारी की, जिसमें एक पुलिस अधिकारी सहित कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई। पूरा घटनाक्रम पांच घंटे से भी अधिक समय तक चला। इसके बाद, बंदूकधारी ने सरेंडर कर दिया। घटना में पांच पुलिस अधिकारी सहित नौ लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि अभी तक बंदूकधारी के मकसद का पता नहीं चल पाया है। अधिकारियों के मुताबिक, शुक्रवार शाम बंदूकधारी कोलोराडो के कोलोराडोस्प्रिंग्स स्थित 'प्लैन्ड पैरेंटहुड' क्लिनिक में घुसा और उसने कई घंटों तक वहां कर्मचारियों और मरीजों को बंधक बना कर रखा। इस दौरान पुलिस और बंदूकधारी के बीच गोलीबारी हुई। लाखों अमेरिकी लोगों के 'थैंक्सगिविंग' की छुट्टी का जश्न मनाने के महज एक दिन बाद यह घटना हुई। अमेरिका की गृह सुरक्षा सलाहकार लीजा मोनाको ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को हालात की जानकारी दी। कोलोराडो स्प्रिंग्स के मेयर जॉन सूदर्स ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, "आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है। " पुलिस ने बताया कि हमलावर के पास एक लंबी बंदूक थी और वह अपने साथ इमारत में कई "चीजें" लेकर गया था जो विस्फोटक हो सकते हैं। एफबीआई भी मामले की जांच में जुट गई है। नेशनल एबॉर्शन फेडरेशन की अध्यक्ष एवं सीईओ विकी सापोर्टा ने कहा, "घटना में मारे गए लोगों के परिवारों और घायलों के प्रति हमारे दिल में संवेदना है। हम इस घटना से निपटने वाले अधिकारियों और हमले का सामना करते हुए मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले क्लिनिक के कर्मचारियों के बेहद शुक्रगुजार रहेंगे। " उन्होंने कहा, "गर्भपात विरोधी कार्यकर्ताओं की ओर से एक भ्रामक वीडियो जारी करने के बाद गर्भपात करने वालों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले बयानों और धमकियों में इजाफा हुआ है। ऐसी आशंका थी कि इस तरह की धमकियों के कारण हिंसक हमले होंगे और आज यह हुआ भी। " वीडियो जारी होने के बाद 'प्लैन्ड पैरेंटहुड' के कम से कम चार क्लिनिक पर आगजनी की गई है।
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सामाजिक परम्पराओं में विवाह आदि तथा श्राद्ध के अवसर पर वृषोत्सर्ग, ग्रहनक्षत्र आदि की पूजा, विभिन्न द्वीपों का स्मरण तथा वर्णन, ब्राह्मणों तथा कन्याओं को दान देना तथा पूजा करना एक महत्वपूर्ण अंग है। देवीपुराण में इन सभी पहलुओं पर विचार किया गया है। मूहूर्त तथा ग्रह पूजा आदि का भी विधान बताया गया है । यहीं पर विभिन्न पुष्पों, वृक्षों तथा गुल्मलताओं का भी वर्णन किया गया है । कौन पुष्प तथा फल किस देवता के लिए उपयोगी होगा इसका सम्यक् प्रतिपादन है । 2 अध्याय चौवालिस के अध्ययन से ऐतिहासिक सामग्री का संकेत मिलता है । अध्याय पञ्चानवें में शूद्रा स्त्रियों द्वारा देवी पूजा का विधान निरूपित है ।
किसी समाज के लिए स्वस्थ्य जीवन का होना अत्यन्त आवश्यक है । कब, कौन और कैसे रोग उत्पन्न होते है । उनका निदान क्या है ? उनसे बचा कैसे जा सकता है तथा उनमें कौन-2 पौधें और औषधियाँ प्रभावकारी हो सकती है ? इनका निरूपण भी समाजिक जीवन का एक प्रधान अंग है क्योंकि शास्त्रों में ऐसा निर्देश है कि जहाँ नदी, वैद्य, राजा तथा धनिक न हों उस स्थान पर निवास नहीं करना चाहिए । देवीपुराण में आयुर्वेद से सम्बन्धित अनेक प्रकार के सिद्धान्तों का
1 देवीपुराण, अध्याय 60, 66 तथा 67 ।
देवीपुराण, अध्याय 62 ।
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सामाजिक परम्पराओं में विवाह आदि तथा श्राद्ध के अवसर पर वृषोत्सर्ग, ग्रहनक्षत्र आदि की पूजा, विभिन्न द्वीपों का स्मरण तथा वर्णन, ब्राह्मणों तथा कन्याओं को दान देना तथा पूजा करना एक महत्वपूर्ण अंग है। देवीपुराण में इन सभी पहलुओं पर विचार किया गया है। मूहूर्त तथा ग्रह पूजा आदि का भी विधान बताया गया है । यहीं पर विभिन्न पुष्पों, वृक्षों तथा गुल्मलताओं का भी वर्णन किया गया है । कौन पुष्प तथा फल किस देवता के लिए उपयोगी होगा इसका सम्यक् प्रतिपादन है । दो अध्याय चौवालिस के अध्ययन से ऐतिहासिक सामग्री का संकेत मिलता है । अध्याय पञ्चानवें में शूद्रा स्त्रियों द्वारा देवी पूजा का विधान निरूपित है । किसी समाज के लिए स्वस्थ्य जीवन का होना अत्यन्त आवश्यक है । कब, कौन और कैसे रोग उत्पन्न होते है । उनका निदान क्या है ? उनसे बचा कैसे जा सकता है तथा उनमें कौन-दो पौधें और औषधियाँ प्रभावकारी हो सकती है ? इनका निरूपण भी समाजिक जीवन का एक प्रधान अंग है क्योंकि शास्त्रों में ऐसा निर्देश है कि जहाँ नदी, वैद्य, राजा तथा धनिक न हों उस स्थान पर निवास नहीं करना चाहिए । देवीपुराण में आयुर्वेद से सम्बन्धित अनेक प्रकार के सिद्धान्तों का एक देवीपुराण, अध्याय साठ, छयासठ तथा सरसठ । देवीपुराण, अध्याय बासठ ।
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१२. तत्त्वापदेशशिखर दोहागीति
नम मंजुश्रयै ।
१. अचल कायवाचित - स्वभाव, वज्रशिखर सद्यः गीत गाने के अर्थ । जब सहज शुद्ध, नौ से बोध करै ।।
२. कारण लक्षण प्रमेय इत्यादि नहीं, ( यही ) वस्तुओं का तत्त्व । बाधन श्रौ साधन नहीं है, भेद इत्यादि का प्रभाव कहो ।।
३. प्रतिपक्षों का बन्धु कुछ नहीं, श्रौ दुःशीलता पीत- प्रतिभास । आलस्य प्रतिहिंसा विद्वेष, औ विद्या प्रहाण इत्यादि ।।
४. प्रहाणपारमिता नहीं, ( क्योंकि ) सर्व वस्तु का प्रभाव कहा है । निर्विकल्प सर्व समचित्त से रहित, संसार से अन्य ( है ) महामुद्रा ।।
५. एक भी धप ( ? ) जो न कहना, सोई संबुद्ध का मार्ग ।
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बारह. तत्त्वापदेशशिखर दोहागीति नम मंजुश्रयै । एक. अचल कायवाचित - स्वभाव, वज्रशिखर सद्यः गीत गाने के अर्थ । जब सहज शुद्ध, नौ से बोध करै ।। दो. कारण लक्षण प्रमेय इत्यादि नहीं, वस्तुओं का तत्त्व । बाधन श्रौ साधन नहीं है, भेद इत्यादि का प्रभाव कहो ।। तीन. प्रतिपक्षों का बन्धु कुछ नहीं, श्रौ दुःशीलता पीत- प्रतिभास । आलस्य प्रतिहिंसा विद्वेष, औ विद्या प्रहाण इत्यादि ।। चार. प्रहाणपारमिता नहीं, सर्व वस्तु का प्रभाव कहा है । निर्विकल्प सर्व समचित्त से रहित, संसार से अन्य महामुद्रा ।। पाँच. एक भी धप जो न कहना, सोई संबुद्ध का मार्ग ।
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भारत में केन्द्र व राज्य सरकारो के (1) राज्यों के आय स्त्रोत (States Sources of
Income) राज्य सरकार के आय स्रोत इस प्रकार -
मध्य वित्तीय सम्बन्धों की विशेषताए
CHARACTERISTICS OF CENTRE & STATE FINANCIAL RELATIONS IN INDIA
भारतीय संविधान (26 नवम्बर 1949) में केन्द्र व राज्यों के मध्य वित्तीय सम्बन्धी का वर्णन किया गया है इसके अतिरिक्त प्रत्येक पाच वर्ष पश्यत वित्तीय आयोग की नियुक्ति की जाती है जा केन्द्र व राज्य के वित्तीय सम्बन्धों के बारे में सुझाव देता है। भारतीय मघ व राज्यों क पारम्परिक सबंधों का निर्धारण संविधान के अनुच्छेद 245 से 300 के अंतर्गत समाविष्ट है। अनुसूचा 7 म केन्द्र राज्य तथा दोनों के सम्मिनित अधिकारों से सर्वाधित तीन तालिकाए दी गई है। केन्द्र व राज्यों के बीच भा वित्तीय सम्बन्ध सदैव विवाद का विषय रहे है। आधुनिक समय में कल्याणकारी राज्यों के दायित्वों म निरन्तर होने वाली वृद्धि की पूर्ति वित्त के बिना सभव नहीं लगती। संविधान निर्माताओं को भी भविष्य में उठने वाले विवादों का आभास था। अत संविधान के अनु 280 के तहत राष्ट्रपति को प्रति पाच वर्ष पश्चात एक वित्त आयोग नियुक्त करने का अधिकार प्रदान किया गया है। भारत में कन्द्र व राज्य सरकारों के वित्तीय के सम्बन्धों की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है
(1) भूमि पर लगान (2) कृषि भूमि व उत्तराधिकार पर कर ( 3 ) भूमि तथा मकानों पर वर (4) राज्यों में निर्मित मादक द्रव्यों पर उत्पादन कर (5) माल के क्रय विक्रय पर वर (6) स्थानीय क्षेत्र मवस्तुआ के आन पर कर (7) गाडियों पर वर (8) आन्तरिक जल तथा स्थल मार्ग के यात्रियों माल पर कर (9) स्टाम्प शुल्क (मुद्राक कर ) (10) कृषि आय पर कर (11) कृषि भूमि पर सम्पदा कर (12) खनिजा पर कर (13) विद्युत उत्पादन एवं उपयोग पर कर (11 विज्ञापना पर कर (समाचार पत्रों के अतिरिक्त) (15) मनोरञ्जन कर शर्त एव जुए पर कर (16) जानवरों पर कर तथा नागें पर कर (17) व्यापार व व्यवसाय पर कर (18) कोर्ट शुल्क के अतिरिक्त राज्य सूची में सम्मिलित किसी विषय पर शुल्क आदि।
(II) केन्द्र द्वारा लगाए गए तथा एकत्र किए गए कर जो राज्य सरकारों के मध्य वितरित किए जाते है
(Taxes levied & collected by the centre and
(अ) आय के साधनों का वितरण
Distribution of Sources of Income
भारतीय संविधान के अंतर्गत आय के विभिन्न सधनों के वितरण की व्यवस्था इस प्रकार की गई है
(1) केन्द्र के आय स्त्रोत (Centres Sources of Income) आय के प्रमुख संघीय माधन इस प्रकार है (1) निगम कर (2) मुद्रा सिक्के और वैधानिक मुद्रा विदशी विनिमय (3) चुगी निर्यात कर सहित (4) तम्बाकू एवं अन्य वस्तुओं पर उत्पादन कर (5) सम्पत्तियों पर लगने वाला कर ( कृषि भूमि को छोडकर ) (6) फीम (केन्द्रीय सूत्राव अनुसार) (7) विदेशी ऋण (8) लाटरी (9) डाक घर बन बैक (10) डाक तार टेलिफान व मगर व अन्य साधन (11) केन्द्र सरकार की सम्पत्तिया (12) केन्द्र सरकार वार्वजनिक ऋण (13) रेल्वे (14) विनिमय विन रेक तथा प्रतिज्ञा पत्रा पर मुद्राक कर (15) भारतीय रिजर्व कम आय (16) आयकर (कृषि आय व अतिरिक्त) (17) सम्पत्ति कर (18) विनिमय बाजार के कर (19) समाचार व क्रय विक्रय एव उनम दिए गए विज्ञापनों पर कर (20) जल स्थल एव वायु मार्ग द्वारा ढाए गए माल व यात्रियों पर कर
distributed among state) (1) कृषि भूमि के अतिरिक्त अन्य प्रकार का सम्पत्ति पर लगने वाला
उत्तराधिकार कर (2) रल हिगए तथा भावे पर कर (3) समाचार पत्र तथा विज्ञापन पर नगन वाला कर (4) यात्रियों व समाान पर लगने वाला टर्मिनल टेक्स (5) मट्टा बाजार में किए गए सौदों पर कर (6) अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में समलित वस्तुआ पर बिक्री कर
(IV) केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए लेकिन राज्यों द्वारा एकत्र व उपयोग किए जाने वाले कर (Taxes evied by the centre but coollected & used by
States) स्टाम्प शुल्क दवाइयों व सौन्दर्य प्रसाधनों को वस्तुओं पर केन्द्र सरकार द्वारा कर लगाया जाता है लेकिन ऐम कर राज्य सरकारे वसूल करती हैं और इन का से प्राप्त आय का वितरण उन्हीं के मध्य कर दिया जाता है।
(v) केन्द्र सरकार द्वारा लगाए गए एवं एकत्रित किए गए कर जिनसे प्राप्त आय का वितरण केन्द्र व राज्य सरकारों के मध्य किया जाता है (Taxe levied and collected by the centre but income is distributed among centre by states) एमे करों मे दो वर प्रमुख हैं प्रथम कृषि आय व अतिरिक्त अन्य आय पर कर तथा द्वितीय क्छ वस्तुआ प लगाए गए उत्पाद का ये दाना पर केन्द्र द्वारा गाव कत्रित किए जान है। इन क्रों में प्राप्त आय का दिन आयोग की सिफारिशा के अनुसार केन्द्र व राज्य सरकारी म बाट दिया
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भारत में केन्द्र व राज्य सरकारो के राज्यों के आय स्त्रोत राज्य सरकार के आय स्रोत इस प्रकार - मध्य वित्तीय सम्बन्धों की विशेषताए CHARACTERISTICS OF CENTRE & STATE FINANCIAL RELATIONS IN INDIA भारतीय संविधान में केन्द्र व राज्यों के मध्य वित्तीय सम्बन्धी का वर्णन किया गया है इसके अतिरिक्त प्रत्येक पाच वर्ष पश्यत वित्तीय आयोग की नियुक्ति की जाती है जा केन्द्र व राज्य के वित्तीय सम्बन्धों के बारे में सुझाव देता है। भारतीय मघ व राज्यों क पारम्परिक सबंधों का निर्धारण संविधान के अनुच्छेद दो सौ पैंतालीस से तीन सौ के अंतर्गत समाविष्ट है। अनुसूचा सात म केन्द्र राज्य तथा दोनों के सम्मिनित अधिकारों से सर्वाधित तीन तालिकाए दी गई है। केन्द्र व राज्यों के बीच भा वित्तीय सम्बन्ध सदैव विवाद का विषय रहे है। आधुनिक समय में कल्याणकारी राज्यों के दायित्वों म निरन्तर होने वाली वृद्धि की पूर्ति वित्त के बिना सभव नहीं लगती। संविधान निर्माताओं को भी भविष्य में उठने वाले विवादों का आभास था। अत संविधान के अनु दो सौ अस्सी के तहत राष्ट्रपति को प्रति पाच वर्ष पश्चात एक वित्त आयोग नियुक्त करने का अधिकार प्रदान किया गया है। भारत में कन्द्र व राज्य सरकारों के वित्तीय के सम्बन्धों की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है भूमि पर लगान कृषि भूमि व उत्तराधिकार पर कर भूमि तथा मकानों पर वर राज्यों में निर्मित मादक द्रव्यों पर उत्पादन कर माल के क्रय विक्रय पर वर स्थानीय क्षेत्र मवस्तुआ के आन पर कर गाडियों पर वर आन्तरिक जल तथा स्थल मार्ग के यात्रियों माल पर कर स्टाम्प शुल्क कृषि आय पर कर कृषि भूमि पर सम्पदा कर खनिजा पर कर विद्युत उत्पादन एवं उपयोग पर कर मनोरञ्जन कर शर्त एव जुए पर कर जानवरों पर कर तथा नागें पर कर व्यापार व व्यवसाय पर कर कोर्ट शुल्क के अतिरिक्त राज्य सूची में सम्मिलित किसी विषय पर शुल्क आदि। केन्द्र द्वारा लगाए गए तथा एकत्र किए गए कर जो राज्य सरकारों के मध्य वितरित किए जाते है आय के साधनों का वितरण Distribution of Sources of Income भारतीय संविधान के अंतर्गत आय के विभिन्न सधनों के वितरण की व्यवस्था इस प्रकार की गई है केन्द्र के आय स्त्रोत आय के प्रमुख संघीय माधन इस प्रकार है निगम कर मुद्रा सिक्के और वैधानिक मुद्रा विदशी विनिमय चुगी निर्यात कर सहित तम्बाकू एवं अन्य वस्तुओं पर उत्पादन कर सम्पत्तियों पर लगने वाला कर फीम विदेशी ऋण लाटरी डाक घर बन बैक डाक तार टेलिफान व मगर व अन्य साधन केन्द्र सरकार की सम्पत्तिया केन्द्र सरकार वार्वजनिक ऋण रेल्वे विनिमय विन रेक तथा प्रतिज्ञा पत्रा पर मुद्राक कर भारतीय रिजर्व कम आय आयकर सम्पत्ति कर विनिमय बाजार के कर समाचार व क्रय विक्रय एव उनम दिए गए विज्ञापनों पर कर जल स्थल एव वायु मार्ग द्वारा ढाए गए माल व यात्रियों पर कर distributed among state) कृषि भूमि के अतिरिक्त अन्य प्रकार का सम्पत्ति पर लगने वाला उत्तराधिकार कर रल हिगए तथा भावे पर कर समाचार पत्र तथा विज्ञापन पर नगन वाला कर यात्रियों व समाान पर लगने वाला टर्मिनल टेक्स मट्टा बाजार में किए गए सौदों पर कर अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार में समलित वस्तुआ पर बिक्री कर केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए लेकिन राज्यों द्वारा एकत्र व उपयोग किए जाने वाले कर स्टाम्प शुल्क दवाइयों व सौन्दर्य प्रसाधनों को वस्तुओं पर केन्द्र सरकार द्वारा कर लगाया जाता है लेकिन ऐम कर राज्य सरकारे वसूल करती हैं और इन का से प्राप्त आय का वितरण उन्हीं के मध्य कर दिया जाता है। केन्द्र सरकार द्वारा लगाए गए एवं एकत्रित किए गए कर जिनसे प्राप्त आय का वितरण केन्द्र व राज्य सरकारों के मध्य किया जाता है एमे करों मे दो वर प्रमुख हैं प्रथम कृषि आय व अतिरिक्त अन्य आय पर कर तथा द्वितीय क्छ वस्तुआ प लगाए गए उत्पाद का ये दाना पर केन्द्र द्वारा गाव कत्रित किए जान है। इन क्रों में प्राप्त आय का दिन आयोग की सिफारिशा के अनुसार केन्द्र व राज्य सरकारी म बाट दिया
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई है। दरअसल राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, तो बहुत जल्दी उत्तर प्रदेश में नए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है। अभी तक के राजनैतिक गुणा-गणित की पिच पर केशव प्रसाद मौर्य प्रदेश अध्यक्ष की रेस में सबसे आगे बने हुए हैं।
यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने रविवार को एक ट्वीट कर राजनीतिक गलियारों में खलबली पैदा कर दी। मौर्य ने रविवार शाम पौने छह बजे ट्वीट कर लिखा कि संगठन सरकार से बड़ा होता है। इतना लिखने के बाद बाद मौर्य ने बाकायदा अपने ट्वीट को पिन भी कर दिया। अब उनके ट्विटर अकाउंट में सबसे ऊपर यही दिख रहा है। फिलहाल "सिक्स वर्ड स्टोरी" वाले केशव प्रसाद मौर्य के इस ट्वीट को राजनीतिक गलियारों में डिकोड किया जाने लगा है। फिलहाल चर्चा यही है कि बहुत जल्द केशव प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश में पार्टी अध्यक्ष बन सकते हैं। हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी में जिम्मेदारी पाने वाले वाला कोई भी नेता पहले से सोशल मीडिया पर ऐसे ही नहीं करता है। इसलिए मौर्य के स्ट्रीट के कोई खास मायने नहीं है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई है। दरअसल राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, तो बहुत जल्दी उत्तर प्रदेश में नए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है। अभी तक के राजनैतिक गुणा-गणित की पिच पर केशव प्रसाद मौर्य प्रदेश अध्यक्ष की रेस में सबसे आगे बने हुए हैं। राजनैतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि इस वक्त केशव प्रसाद मौर्य सरकार में है। वह इस वक्त उत्तर प्रदेश सरकार में बतौर उप मुख्यमंत्री अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। इसके अलावा हाल में ही उनको विधान परिषद में नेता सदन की जिम्मेदारी भी दी गई है। ऐसे दौर में उनका यह ट्वीट कि संगठन सरकार से बड़ा होता है निश्चित तौर पर उन संभावनाओं को आगे ले जाता है, जिसमें यह कहा जा रहा है कि केशव प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश के नए प्रदेश अध्यक्ष होंगे।
शुक्ला कहते हैं कि केशव प्रसाद मौर्य ने जिस तरीके से अपने ट्वीट को 'पिंड ट्वीट' की कैटेगरी में शामिल किया है, उसके भी कई मायने हैं। वह कहते हैं कि मौर्य चाहते हैं कि उनका ट्वीट उनके अकाउंट पर जाने वालों को सबसे पहले दिखे। निश्चित तौर पर राजनीतिक गलियारों में इसका मतलब तो निकाला ही जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक ओपी मिश्रा मानते हैं कि केशव प्रसाद मौर्य इस वक्त उत्तर प्रदेश में जातिगत समीकरणों के अलावा संगठन में मजबूत चेहरे के तौर पर भी एक अपनी पहचान रखते हैं। इसकी प्रमुख वजह है कि उनका संगठन में पुराना नेतृत्व क्षमता वाला चेहरा ही है। केशव प्रसाद मौर्य ने जिस तरीके से पुराने चुनावों में अपने चेहरे के बलबूते एक बड़े समुदाय को जोड़कर भारतीय जनता पार्टी की जीत में योगदान दिया है, उसकी केंद्रीय नेतृत्व सराहना भी करता रहा है। यही बड़ी वजह है कि केशव प्रसाद पर दोबारा दांव लगाया जा सकता है।
भारतीय जनता पार्टी की राजनीति को करीब से समझने वाले राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि जो ट्वीट केशव प्रसाद मौर्य ने किया है, वह संगठन की ही लाइन है। यानी कि सरकार और संगठन की तुलना में संगठन हमेशा बड़ा ही होता है। उत्तर प्रदेश की राजनीति को करीब से समझने वाले एक जानकार कहते हैं कि एक बात तो बिल्कुल तय है कि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या आज के दौर में खुद को बहुत सहज महसूस नहीं कर रहे हैं। यही वजह है कि वह संगठन में आकर न सिर्फ अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं, बल्कि आने वाले चुनावों में अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी निभाना चाहते हैं।
सूत्रों का कहना है कि पिछले हफ्ते दिल्ली में हुई मुलाकातों के दौरान इस बात का जिक्र भी हुआ था कि केशव प्रसाद मौर्या के पास कहने को तो उपमुख्यमंत्री का पद और विभाग तो है लेकिन उनके पास ऐसा कोई बड़ा पोर्टफोलियो नहीं है जैसा कि उनके ही समानांतर दूसरे उपमुख्यमंत्री के पास है। सूत्रों का कहना है कि चर्चा इस बात की भी हो रही कि जिस तरह से सुनील बंसल उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक तौर पर मजबूत स्थिति में थे ठीक उसी तरह से प्रदेश अध्यक्ष भी मजबूत स्थिति में रहे। ऐसे में तमाम नामों के बीच में केशव प्रसाद मौर्या का नाम सबसे आगे ही चल रहा है।
भारतीय जनता पार्टी और संगठन में लंबे समय तक काम करने वाले एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि ऐसे ट्वीट महज संगठन की ताकत को बताने के लिए किए जाते हैं। उनका कहना है कि पार्टी अगर किसी बड़े नेता को कोई जिम्मेदारी देने की योजना बनाती भी है तो इस तरीके से जिम्मेदारी पाने वाला व्यक्ति ना तो सोशल मीडिया पर हो हल्ला करता है और ना ही किसी तरीके से उसको प्रचारित करता है।
संगठन से जुड़े उक्त नेता का कहना है कि पार्टी के जिम्मेदारी पाने वाले नेता ऐसा अमूमन नहीं करते हैं। उनका मानना है कि केशव प्रसाद मौर्य का किया गया यह ट्वीट संगठन की लाइन को ही दर्शाता है। हालांकि, इस बात से राजनीतिक विश्लेषक जेएस तोमर बिल्कुल वास्ता नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि केशव प्रसाद मौर्या का यह ट्वीट बिल्कुल उसी लाइन पर है जिस पर बीते कुछ दिनों से कयास लगाए जा रहे हैं। तोमर कहते हैं कि दिल्ली से लेकर लखनऊ तक चर्चा यही है कि केशव प्रसाद मौर्या को उत्तर प्रदेश का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना है। यह बात अलग है कि जब तक घोषणा ना हो जाए तब तक इसको सिर्फ कयास ही माना जाना चाहिए।
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई है। दरअसल राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, तो बहुत जल्दी उत्तर प्रदेश में नए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है। अभी तक के राजनैतिक गुणा-गणित की पिच पर केशव प्रसाद मौर्य प्रदेश अध्यक्ष की रेस में सबसे आगे बने हुए हैं। यूपी के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य ने रविवार को एक ट्वीट कर राजनीतिक गलियारों में खलबली पैदा कर दी। मौर्य ने रविवार शाम पौने छह बजे ट्वीट कर लिखा कि संगठन सरकार से बड़ा होता है। इतना लिखने के बाद बाद मौर्य ने बाकायदा अपने ट्वीट को पिन भी कर दिया। अब उनके ट्विटर अकाउंट में सबसे ऊपर यही दिख रहा है। फिलहाल "सिक्स वर्ड स्टोरी" वाले केशव प्रसाद मौर्य के इस ट्वीट को राजनीतिक गलियारों में डिकोड किया जाने लगा है। फिलहाल चर्चा यही है कि बहुत जल्द केशव प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश में पार्टी अध्यक्ष बन सकते हैं। हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी में जिम्मेदारी पाने वाले वाला कोई भी नेता पहले से सोशल मीडिया पर ऐसे ही नहीं करता है। इसलिए मौर्य के स्ट्रीट के कोई खास मायने नहीं है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई है। दरअसल राजनीतिक विश्लेषकों की मानें, तो बहुत जल्दी उत्तर प्रदेश में नए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा हो सकती है। अभी तक के राजनैतिक गुणा-गणित की पिच पर केशव प्रसाद मौर्य प्रदेश अध्यक्ष की रेस में सबसे आगे बने हुए हैं। राजनैतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि इस वक्त केशव प्रसाद मौर्य सरकार में है। वह इस वक्त उत्तर प्रदेश सरकार में बतौर उप मुख्यमंत्री अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं। इसके अलावा हाल में ही उनको विधान परिषद में नेता सदन की जिम्मेदारी भी दी गई है। ऐसे दौर में उनका यह ट्वीट कि संगठन सरकार से बड़ा होता है निश्चित तौर पर उन संभावनाओं को आगे ले जाता है, जिसमें यह कहा जा रहा है कि केशव प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश के नए प्रदेश अध्यक्ष होंगे। शुक्ला कहते हैं कि केशव प्रसाद मौर्य ने जिस तरीके से अपने ट्वीट को 'पिंड ट्वीट' की कैटेगरी में शामिल किया है, उसके भी कई मायने हैं। वह कहते हैं कि मौर्य चाहते हैं कि उनका ट्वीट उनके अकाउंट पर जाने वालों को सबसे पहले दिखे। निश्चित तौर पर राजनीतिक गलियारों में इसका मतलब तो निकाला ही जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषक ओपी मिश्रा मानते हैं कि केशव प्रसाद मौर्य इस वक्त उत्तर प्रदेश में जातिगत समीकरणों के अलावा संगठन में मजबूत चेहरे के तौर पर भी एक अपनी पहचान रखते हैं। इसकी प्रमुख वजह है कि उनका संगठन में पुराना नेतृत्व क्षमता वाला चेहरा ही है। केशव प्रसाद मौर्य ने जिस तरीके से पुराने चुनावों में अपने चेहरे के बलबूते एक बड़े समुदाय को जोड़कर भारतीय जनता पार्टी की जीत में योगदान दिया है, उसकी केंद्रीय नेतृत्व सराहना भी करता रहा है। यही बड़ी वजह है कि केशव प्रसाद पर दोबारा दांव लगाया जा सकता है। भारतीय जनता पार्टी की राजनीति को करीब से समझने वाले राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि जो ट्वीट केशव प्रसाद मौर्य ने किया है, वह संगठन की ही लाइन है। यानी कि सरकार और संगठन की तुलना में संगठन हमेशा बड़ा ही होता है। उत्तर प्रदेश की राजनीति को करीब से समझने वाले एक जानकार कहते हैं कि एक बात तो बिल्कुल तय है कि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या आज के दौर में खुद को बहुत सहज महसूस नहीं कर रहे हैं। यही वजह है कि वह संगठन में आकर न सिर्फ अपनी ताकत दिखाना चाहते हैं, बल्कि आने वाले चुनावों में अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी निभाना चाहते हैं। सूत्रों का कहना है कि पिछले हफ्ते दिल्ली में हुई मुलाकातों के दौरान इस बात का जिक्र भी हुआ था कि केशव प्रसाद मौर्या के पास कहने को तो उपमुख्यमंत्री का पद और विभाग तो है लेकिन उनके पास ऐसा कोई बड़ा पोर्टफोलियो नहीं है जैसा कि उनके ही समानांतर दूसरे उपमुख्यमंत्री के पास है। सूत्रों का कहना है कि चर्चा इस बात की भी हो रही कि जिस तरह से सुनील बंसल उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक तौर पर मजबूत स्थिति में थे ठीक उसी तरह से प्रदेश अध्यक्ष भी मजबूत स्थिति में रहे। ऐसे में तमाम नामों के बीच में केशव प्रसाद मौर्या का नाम सबसे आगे ही चल रहा है। भारतीय जनता पार्टी और संगठन में लंबे समय तक काम करने वाले एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि ऐसे ट्वीट महज संगठन की ताकत को बताने के लिए किए जाते हैं। उनका कहना है कि पार्टी अगर किसी बड़े नेता को कोई जिम्मेदारी देने की योजना बनाती भी है तो इस तरीके से जिम्मेदारी पाने वाला व्यक्ति ना तो सोशल मीडिया पर हो हल्ला करता है और ना ही किसी तरीके से उसको प्रचारित करता है। संगठन से जुड़े उक्त नेता का कहना है कि पार्टी के जिम्मेदारी पाने वाले नेता ऐसा अमूमन नहीं करते हैं। उनका मानना है कि केशव प्रसाद मौर्य का किया गया यह ट्वीट संगठन की लाइन को ही दर्शाता है। हालांकि, इस बात से राजनीतिक विश्लेषक जेएस तोमर बिल्कुल वास्ता नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि केशव प्रसाद मौर्या का यह ट्वीट बिल्कुल उसी लाइन पर है जिस पर बीते कुछ दिनों से कयास लगाए जा रहे हैं। तोमर कहते हैं कि दिल्ली से लेकर लखनऊ तक चर्चा यही है कि केशव प्रसाद मौर्या को उत्तर प्रदेश का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना है। यह बात अलग है कि जब तक घोषणा ना हो जाए तब तक इसको सिर्फ कयास ही माना जाना चाहिए। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और 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धमतरी। छतीसगढ़ में एक बार फिर कोरोना विस्फोट हुआ है। हॉस्टल में रहने वाली 19 छात्राएं कोरोना पॉजिटिव मिली है। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अमले ने पूरे छात्रावास के छात्राओं का एहतियातन कोरोना टेस्ट किया। बताया जाता है कि छात्राओं को सर्दी खांसी की शिकायत पर कोविड़ टेस्ट किया गया था। जिसमे 19 छात्राएं पॉजिटिव मिली है।
कन्या छात्रावास नगरी की छात्राओं को पिछले कुछ दिनों से सर्दी खांसी की शिकायत व बुखार की शिकायत थी। जिसके बाद छात्राएं इलाज के लिए नगरी सिविल हॉस्पिटल पहुँची थी कुछ छात्राओं का इलाज के दौरान कोविड़ टेस्ट किया गया जिसमें वे कोरोना पॉजिटिव निकली। जिसके बाद सभी बीमार छात्राओं को सिविल अस्पताल लाकर एंटीजन टेस्ट करवाया गया। जिसमें 19 छात्राओं के पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक कांटेक्ट ट्रेसिंग के तहत स्वास्थ्य विभाग का अमला हॉस्टल पहुँच कर अन्य छात्राओं की जांच कर रहा है। इसके अलावा पॉजिटिव पाई गई छात्राओं को अलग से आइसोलेशन में रखकर इलाज किया जा रहा है। कोविड़ पॉजिटिव सभी छात्राओं की हालत सामान्य बताई जा रही है।
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धमतरी। छतीसगढ़ में एक बार फिर कोरोना विस्फोट हुआ है। हॉस्टल में रहने वाली उन्नीस छात्राएं कोरोना पॉजिटिव मिली है। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अमले ने पूरे छात्रावास के छात्राओं का एहतियातन कोरोना टेस्ट किया। बताया जाता है कि छात्राओं को सर्दी खांसी की शिकायत पर कोविड़ टेस्ट किया गया था। जिसमे उन्नीस छात्राएं पॉजिटिव मिली है। कन्या छात्रावास नगरी की छात्राओं को पिछले कुछ दिनों से सर्दी खांसी की शिकायत व बुखार की शिकायत थी। जिसके बाद छात्राएं इलाज के लिए नगरी सिविल हॉस्पिटल पहुँची थी कुछ छात्राओं का इलाज के दौरान कोविड़ टेस्ट किया गया जिसमें वे कोरोना पॉजिटिव निकली। जिसके बाद सभी बीमार छात्राओं को सिविल अस्पताल लाकर एंटीजन टेस्ट करवाया गया। जिसमें उन्नीस छात्राओं के पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक कांटेक्ट ट्रेसिंग के तहत स्वास्थ्य विभाग का अमला हॉस्टल पहुँच कर अन्य छात्राओं की जांच कर रहा है। इसके अलावा पॉजिटिव पाई गई छात्राओं को अलग से आइसोलेशन में रखकर इलाज किया जा रहा है। कोविड़ पॉजिटिव सभी छात्राओं की हालत सामान्य बताई जा रही है।
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Jamshedpur : शहर में बढ़ते अपराध को देखते हुए जमशेदपुर पुलिस लगातार एंटी क्राइम चेकिंग अभियान चला रही है. इसके अलावा रैश ड्राइविंग करनेवालों तथा नशे के लिए चोरी-छिनतई करनेवालों की धर-पकड़ के लिए भी एक मोबाइल दस्ता बनाया गया है. यह दस्ता ऐसे बाइकर्स को चिन्हित करते हुए कार्रवाई करता है. मंगलवार को भी ऐसे बाइकर्स और सड़क किनारे तथा चौक-चौराहों पर अड्डाबाजी करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई की गयी. सिटी एसपी सुभाष चंद्र जाट भी खुद सड़क पर उतरे औऱ ऐसे लोगों को पकड़ा.
बता दें कि बिष्टुपुर के सर दोराबजी टाटा पार्क के पास भी शाम होते ही काफी संख्या में बाइकर्स जमा हो जाते हैं और रैश ड्राइविंग करते हैं. मंगलवार को सिटी एसपी ने खुद यहां से पांच वाहनों को जब्त किया. उन्हें इस बात का ताज्जुब हुआ जब सभी बाइकर्स नाबालिग निकले, जिनके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था. सिटी एसपी ने सभी वाहनों को जब्त कर थाने भिजवा दिया. सिटी एसपी ने बताया कि शहर में नशेड़ियों, रैश और ड्रंक एंड ड्राइव करनेवालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है. ऐसे ही लोगों द्वारा शहर में लगातार छिनतई और लूट की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि ऐसे बाइकर्स को चिन्हित कर उनकी धर-पकड़ की जा रही है. सिटी एसपी ने बताया कि अब तक पूरे शहर में कार्रवाई करते हुए दो दर्जन से ज्यादा बाइक्स को जब्त किया गया है. उन्होंने बताया कि धर-पकड़ का यह अभियान अभी जारी रहेगा.
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Jamshedpur : शहर में बढ़ते अपराध को देखते हुए जमशेदपुर पुलिस लगातार एंटी क्राइम चेकिंग अभियान चला रही है. इसके अलावा रैश ड्राइविंग करनेवालों तथा नशे के लिए चोरी-छिनतई करनेवालों की धर-पकड़ के लिए भी एक मोबाइल दस्ता बनाया गया है. यह दस्ता ऐसे बाइकर्स को चिन्हित करते हुए कार्रवाई करता है. मंगलवार को भी ऐसे बाइकर्स और सड़क किनारे तथा चौक-चौराहों पर अड्डाबाजी करनेवालों के खिलाफ कार्रवाई की गयी. सिटी एसपी सुभाष चंद्र जाट भी खुद सड़क पर उतरे औऱ ऐसे लोगों को पकड़ा. बता दें कि बिष्टुपुर के सर दोराबजी टाटा पार्क के पास भी शाम होते ही काफी संख्या में बाइकर्स जमा हो जाते हैं और रैश ड्राइविंग करते हैं. मंगलवार को सिटी एसपी ने खुद यहां से पांच वाहनों को जब्त किया. उन्हें इस बात का ताज्जुब हुआ जब सभी बाइकर्स नाबालिग निकले, जिनके पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था. सिटी एसपी ने सभी वाहनों को जब्त कर थाने भिजवा दिया. सिटी एसपी ने बताया कि शहर में नशेड़ियों, रैश और ड्रंक एंड ड्राइव करनेवालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है. ऐसे ही लोगों द्वारा शहर में लगातार छिनतई और लूट की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि ऐसे बाइकर्स को चिन्हित कर उनकी धर-पकड़ की जा रही है. सिटी एसपी ने बताया कि अब तक पूरे शहर में कार्रवाई करते हुए दो दर्जन से ज्यादा बाइक्स को जब्त किया गया है. उन्होंने बताया कि धर-पकड़ का यह अभियान अभी जारी रहेगा.
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