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प्राकृतिक विपदाओं में राहत कार्य श्री महता ने अपनी सामान्य रचनात्मक प्रवृत्तियो को जारी रखते हुए क्षेत्र में समय-समय पर आने वाली प्राकृतिक विपदाओं के समय जनता को बडी सेवा की। उनकी इन सेवाओ के लिए माडलगढ क्षेत्र आज भी मुक्त कठ से प्रशसा करता है। ऐसे ही कुछ प्रसगो की यहाँ चर्चा करना उपयुक्त होगा। मेवाड मे सन् 1939 में भयकर अकाल पड़ा था। इसके बाद भी कई बार छोटे मोटे अकाल पड़ते रहे। इन अकालो मे श्री महता ने माडलगढ़ क्षेत्र के लोगो को भूखमरी से बचाने के लिए अनेक प्रकार के रचनात्मक काम प्रारम्भ किए। क्षेत्र मे सेवा सघ के अन्तर्गत जगह-जगह कताई, बुनाई केन्द्र खोल ओर उनके द्वारा पिंजारो, कतवारियो, बुनकरो आदि को काम में लगाया। इससे हजारो लोगो को अकाल से राहत मिली। माडलगढ क्षेत्र में बड़े जगल थे। वहाँ से सूखी लकडी लाकर गावों में बेचने की स्वतन्त्रता थी। अकाल के समय जब लकडी लाने वालो को सख्या बढ गई तो उपभोक्ता लोग उनका शोषण करने लगा लकडी अत्यन्त सस्ते भावो मे खरीदने लगे। श्री महता ने सेवासघ के अन्तर्गत एक लकड़ी का डिपो खोला और अकाल पीडित लोगो से लकडी खरीदकर उचित कीमत देना शुरू किया। इसका प्रभाव उपभोक्ताओ पर भी पड़ा। इस प्रकार लकडहारो का शोषण बच गया। सेवा सघ ने अकाल के दिनों में जरूरतमद किसान लोगों को कर्ज देकर नए कुए खुदवाये एव पुराने कुओ को गहरा करवाया। इससे एक ओर कई लोगों को मजदूरी मिली तो दूसरी और सिचाई के साधन भी बढे । अकाल के दिनों में माडलगढ क्षेत्र में अनाज स्थानीय व्यापारियो द्वारा भीलवाडा मडी से भगाया जाता था। यातायात के साधन नहीं होने के कारण यह अनाज क्षेत्र में बहुत महगा पडता था। अत सेवा सघ ने भीलवाडा से अनाज भगवाना शुरू किया और अपनी दुकानो पर घाटा उठाकर बेचना प्रारम्भ किया। इससे हजारों गरीब लोगों को लाभ हुआ। सेवा सघ ने इन सब कामों से हुए घाटे को लोगो से नकद सहायता प्राप्त कर पूरा किया।
प्राकृतिक विपदाओं में राहत कार्य श्री महता ने अपनी सामान्य रचनात्मक प्रवृत्तियो को जारी रखते हुए क्षेत्र में समय-समय पर आने वाली प्राकृतिक विपदाओं के समय जनता को बडी सेवा की। उनकी इन सेवाओ के लिए माडलगढ क्षेत्र आज भी मुक्त कठ से प्रशसा करता है। ऐसे ही कुछ प्रसगो की यहाँ चर्चा करना उपयुक्त होगा। मेवाड मे सन् एक हज़ार नौ सौ उनतालीस में भयकर अकाल पड़ा था। इसके बाद भी कई बार छोटे मोटे अकाल पड़ते रहे। इन अकालो मे श्री महता ने माडलगढ़ क्षेत्र के लोगो को भूखमरी से बचाने के लिए अनेक प्रकार के रचनात्मक काम प्रारम्भ किए। क्षेत्र मे सेवा सघ के अन्तर्गत जगह-जगह कताई, बुनाई केन्द्र खोल ओर उनके द्वारा पिंजारो, कतवारियो, बुनकरो आदि को काम में लगाया। इससे हजारो लोगो को अकाल से राहत मिली। माडलगढ क्षेत्र में बड़े जगल थे। वहाँ से सूखी लकडी लाकर गावों में बेचने की स्वतन्त्रता थी। अकाल के समय जब लकडी लाने वालो को सख्या बढ गई तो उपभोक्ता लोग उनका शोषण करने लगा लकडी अत्यन्त सस्ते भावो मे खरीदने लगे। श्री महता ने सेवासघ के अन्तर्गत एक लकड़ी का डिपो खोला और अकाल पीडित लोगो से लकडी खरीदकर उचित कीमत देना शुरू किया। इसका प्रभाव उपभोक्ताओ पर भी पड़ा। इस प्रकार लकडहारो का शोषण बच गया। सेवा सघ ने अकाल के दिनों में जरूरतमद किसान लोगों को कर्ज देकर नए कुए खुदवाये एव पुराने कुओ को गहरा करवाया। इससे एक ओर कई लोगों को मजदूरी मिली तो दूसरी और सिचाई के साधन भी बढे । अकाल के दिनों में माडलगढ क्षेत्र में अनाज स्थानीय व्यापारियो द्वारा भीलवाडा मडी से भगाया जाता था। यातायात के साधन नहीं होने के कारण यह अनाज क्षेत्र में बहुत महगा पडता था। अत सेवा सघ ने भीलवाडा से अनाज भगवाना शुरू किया और अपनी दुकानो पर घाटा उठाकर बेचना प्रारम्भ किया। इससे हजारों गरीब लोगों को लाभ हुआ। सेवा सघ ने इन सब कामों से हुए घाटे को लोगो से नकद सहायता प्राप्त कर पूरा किया।
नई दिल्लीः भारतीय क्रिकेट टीम के ओपनर बल्लेबाज गौतम गंभीर का दिल्ली क्रिकेट टीम के कोच केपी भास्कर के साथ आपसी विवाद को लेकर सफाई दी है. गंभीर का कहना है कि युवा खिलाड़िया का पक्ष लेना अपराध है तो मैं दोषी हूं. गौतम गंभीर ने एक साक्षात्कार में कहा कि अगर युवा खिलाड़ियों का बचाव करना अपराध है तो मैं दोषी हूं. उनका कहना है कि भास्कर अगर उन्मुक्त चंद और नितीश राणा जैसे युवा खिलाड़ियों के करियर से खेलता रहे और मैं चुप बैठा रहूं ऐसा नहीं हो सकता. अगर 20-22 साल के खिलाड़ियों को सुरक्षा का अहसास दिलाना अपराध है तो मैं दोषी हूं. गौतम गंभीर पर आरोप है कि उन्होंने केपी भास्कर के साथ गाली गलौच की. हालांकि गंभीर ने अभद्र भाषा के इस्तेमाल या गाली गलौच की बात का खंडन किया है. लेकिन उन्होंने कोच के साथ बहस होने की बात स्वीकार की है. गंभीर का कहना है कि दिल्ली के मुख्य कोच केपी भास्कर ने प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों में असुरक्षा की भावना इस कदर भर रखी है कि उनके पास उनसे कुछ कड़े सवाल पूछने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था. बता दें कि उत्तर प्रदेश के खिलाफ खेले गए विजय हजारे ट्रॉफी मैच के बाद ड्रेसिंग रूम में दिल्ली के कप्तान गौतम गंभीर अपने कोच केपी भास्कर से भिड़ गए थे. खबर है कि उन्होंने इस दौरान अभद्र भाषा के साथ धमकाने वाले अंदाज में उनसे बात की. भास्कर इस घटना से इतने आहत हैं कि उन्होंने DDCA और BCCI से इस घटना की जांच की मांग की है.
नई दिल्लीः भारतीय क्रिकेट टीम के ओपनर बल्लेबाज गौतम गंभीर का दिल्ली क्रिकेट टीम के कोच केपी भास्कर के साथ आपसी विवाद को लेकर सफाई दी है. गंभीर का कहना है कि युवा खिलाड़िया का पक्ष लेना अपराध है तो मैं दोषी हूं. गौतम गंभीर ने एक साक्षात्कार में कहा कि अगर युवा खिलाड़ियों का बचाव करना अपराध है तो मैं दोषी हूं. उनका कहना है कि भास्कर अगर उन्मुक्त चंद और नितीश राणा जैसे युवा खिलाड़ियों के करियर से खेलता रहे और मैं चुप बैठा रहूं ऐसा नहीं हो सकता. अगर बीस-बाईस साल के खिलाड़ियों को सुरक्षा का अहसास दिलाना अपराध है तो मैं दोषी हूं. गौतम गंभीर पर आरोप है कि उन्होंने केपी भास्कर के साथ गाली गलौच की. हालांकि गंभीर ने अभद्र भाषा के इस्तेमाल या गाली गलौच की बात का खंडन किया है. लेकिन उन्होंने कोच के साथ बहस होने की बात स्वीकार की है. गंभीर का कहना है कि दिल्ली के मुख्य कोच केपी भास्कर ने प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों में असुरक्षा की भावना इस कदर भर रखी है कि उनके पास उनसे कुछ कड़े सवाल पूछने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था. बता दें कि उत्तर प्रदेश के खिलाफ खेले गए विजय हजारे ट्रॉफी मैच के बाद ड्रेसिंग रूम में दिल्ली के कप्तान गौतम गंभीर अपने कोच केपी भास्कर से भिड़ गए थे. खबर है कि उन्होंने इस दौरान अभद्र भाषा के साथ धमकाने वाले अंदाज में उनसे बात की. भास्कर इस घटना से इतने आहत हैं कि उन्होंने DDCA और BCCI से इस घटना की जांच की मांग की है.
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया (शुभ दिन माना) जाता है. मान्यता है कि इस दिन किया गया काम अक्षय हो जाता है. लोग स्थाई धन की लालसा में अक्षय तृतीया पर आभूषण, प्रॉपर्टी और वाहन आदि की खूब खरीदारी करते हैं। 22 अप्रैल को दोपहर 12:01 बजे से 12:51 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में खरीदारी का योग बन रहा है. इस दिन अधिकांश लोग पूजा पाठ कराते हैं.
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया जाता है. मान्यता है कि इस दिन किया गया काम अक्षय हो जाता है. लोग स्थाई धन की लालसा में अक्षय तृतीया पर आभूषण, प्रॉपर्टी और वाहन आदि की खूब खरीदारी करते हैं। बाईस अप्रैल को दोपहर बारह:एक बजे से बारह:इक्यावन बजे तक अभिजीत मुहूर्त में खरीदारी का योग बन रहा है. इस दिन अधिकांश लोग पूजा पाठ कराते हैं.
दंबग सलमान खान कहीं ही भी जाए। सुर्खियों में तो वो आ ही जाते हैं। सलमान खान हाल ही में दंबग 3 की टीम के साथ जयपुर पहुंचे। जहां उन्होंने उमंग फाउंडेशन के बच्चों के साथ टाइम स्पेंट किया। एक्ट्रेस बीना काक ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कुछ वीडियोज शेयर किए है। जिसमें सलमान खान चुलबुल पांडे के अंदाज में बच्चों के साथ डांस करते नजर आ रहे हैं। बच्चे सलमान के साथ डांस कर काफी खुश नजर आ रहे हैं। वीडियो में सलमान खान ग्रीन कलर शर्ट और ब्लैक पेंट में काफी डैसिंग लग रहे हैं। वैसे भी सलमान को चुलबुल पांडे के लुक में देखने के लिए फैंस बेताब है। सलमान जिस गाने पर बच्चों के साथ डांस कर रहे हैं। वो दंबग 3 का नया सॉन्ग यू करके हैं। इस सॉन्ग को सलमान खान और सोनाक्षी सिन्हा पर फिल्माया गया है। शेयर किए गए वीडियोज में सलमान के साथ सोनाक्षी भी बच्चों के साथ डांस कर रही है। सोनाक्षी ने ग्रीन कलर की साड़ी पहनी है। बता दें आज ही दबंग 3 का वीडियो सॉन्ग यूं करके रिलीज किया गया है। सॉन्ग में चुलबुल पांडे और रज्जो का धमाकेदार डांस देखने को मिल रहा है। बता दें सलमान खान सोनाक्षी सिन्हा स्टारर फिल्म दंबग 3 अगले महीने 20 दिसंबर को रिलीज हो रही हैं। फिल्म को प्रभु देवा ने डायरेक्ट किया है। इस फिल्म से महेश माजंरेकर की बेटी साईं माजरेंकर भी बॉलीवुड डेब्यू करने जा रही है। वहीं फिल्म में विलेन का रोल किच्चा सुदीप कर रहे हैं। वहीं एक्टर के वर्क फ्रंट की बात करें तो सलमान ने हाल ही में फिल्म राधे की शूटिंग भी शुरु की। इस फिल्म को भी प्रभु देवा ही डायरेक्ट कर रहे हैं। फिल्म में दिशा पाटनी फीमेल लीड में है।
दंबग सलमान खान कहीं ही भी जाए। सुर्खियों में तो वो आ ही जाते हैं। सलमान खान हाल ही में दंबग तीन की टीम के साथ जयपुर पहुंचे। जहां उन्होंने उमंग फाउंडेशन के बच्चों के साथ टाइम स्पेंट किया। एक्ट्रेस बीना काक ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कुछ वीडियोज शेयर किए है। जिसमें सलमान खान चुलबुल पांडे के अंदाज में बच्चों के साथ डांस करते नजर आ रहे हैं। बच्चे सलमान के साथ डांस कर काफी खुश नजर आ रहे हैं। वीडियो में सलमान खान ग्रीन कलर शर्ट और ब्लैक पेंट में काफी डैसिंग लग रहे हैं। वैसे भी सलमान को चुलबुल पांडे के लुक में देखने के लिए फैंस बेताब है। सलमान जिस गाने पर बच्चों के साथ डांस कर रहे हैं। वो दंबग तीन का नया सॉन्ग यू करके हैं। इस सॉन्ग को सलमान खान और सोनाक्षी सिन्हा पर फिल्माया गया है। शेयर किए गए वीडियोज में सलमान के साथ सोनाक्षी भी बच्चों के साथ डांस कर रही है। सोनाक्षी ने ग्रीन कलर की साड़ी पहनी है। बता दें आज ही दबंग तीन का वीडियो सॉन्ग यूं करके रिलीज किया गया है। सॉन्ग में चुलबुल पांडे और रज्जो का धमाकेदार डांस देखने को मिल रहा है। बता दें सलमान खान सोनाक्षी सिन्हा स्टारर फिल्म दंबग तीन अगले महीने बीस दिसंबर को रिलीज हो रही हैं। फिल्म को प्रभु देवा ने डायरेक्ट किया है। इस फिल्म से महेश माजंरेकर की बेटी साईं माजरेंकर भी बॉलीवुड डेब्यू करने जा रही है। वहीं फिल्म में विलेन का रोल किच्चा सुदीप कर रहे हैं। वहीं एक्टर के वर्क फ्रंट की बात करें तो सलमान ने हाल ही में फिल्म राधे की शूटिंग भी शुरु की। इस फिल्म को भी प्रभु देवा ही डायरेक्ट कर रहे हैं। फिल्म में दिशा पाटनी फीमेल लीड में है।
उम्मीदवार जो DEBEL भर्ती 2023 के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं और Graduate Apprenticeship Trainee रिक्तियों के लिए आवेदन कर सकते हैं, आधिकारिक लिंक और अन्य विवरण भी यहां अपडेट किए गए हैं। रिक्ति गणना, वेतन, आयु सीमा, नौकरी स्थान, पात्रता मानदंड और DEBEL भर्ती 2023 के बारे में विस्तृत जानकारी के बारे में जानने के लिए आगे पढ़ें। DEBEL भर्ती 2023 के मानदंड में आवश्यक कौशल के साथ प्रोफ़ाइल के आधार पर शैक्षिक योग्यता को पूरा करना शामिल है। इस भर्ती अभियान में DEBEL उपयुक्त योग्यता के साथ B. Com, B. Sc, B. Tech/B. E, B. Lib की भर्ती कर रहा है। आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार यहां DEBEL Graduate Apprenticeship Trainee भर्ती 2023 का पूरा विवरण देख सकते हैं। DEBEL भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 20/01/2023 है और DEBEL भर्ती 2023 रिक्ति गणना 8 है। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें DEBEL में Graduate Apprenticeship Trainee के रूप में रखा जाएगा। DEBEL ने Bangalore में Graduate Apprenticeship Trainee पद की रिक्ति के लिए एक अधिसूचना जारी की है। उम्मीदवार यहां स्थान विवरण प्राप्त कर सकते हैं और DEBEL भर्ती 2023 के लिए आवेदन कर सकते हैं। केवल पात्रता मानदंड को पूरा करने वाले उम्मीदवार नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। अंतिम तिथि के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे, इसलिए 20/01/2023 से पहले आवेदन करें। How to apply for DEBEL Recruitment 2023? यदि आप DEBEL Graduate Apprenticeship Trainee भर्ती 2023 के लिए आवेदन करने में रुचि रखते हैं, तो 20/01/2023 से पहले आवेदन करें। यदि आप DEBEL Graduate Apprenticeship Trainee भर्ती 2023 के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया जानना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए चरणों का पालन करें। चरण 2: एक बार जब आप वेबसाइट में प्रवेश करते हैं तो DEBEL भर्ती 2023 अधिसूचना देखें। चरण 4: अब उम्मीदवार सभी आवश्यक विवरण भरें। सुनिश्चित करें कि आप आवेदन में किसी भी अनुभाग को याद नहीं करते हैं। चरण 5: आवेदन करने के लिए सबमिट बटन पर क्लिक करें।
उम्मीदवार जो DEBEL भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं और Graduate Apprenticeship Trainee रिक्तियों के लिए आवेदन कर सकते हैं, आधिकारिक लिंक और अन्य विवरण भी यहां अपडेट किए गए हैं। रिक्ति गणना, वेतन, आयु सीमा, नौकरी स्थान, पात्रता मानदंड और DEBEL भर्ती दो हज़ार तेईस के बारे में विस्तृत जानकारी के बारे में जानने के लिए आगे पढ़ें। DEBEL भर्ती दो हज़ार तेईस के मानदंड में आवश्यक कौशल के साथ प्रोफ़ाइल के आधार पर शैक्षिक योग्यता को पूरा करना शामिल है। इस भर्ती अभियान में DEBEL उपयुक्त योग्यता के साथ B. Com, B. Sc, B. Tech/B. E, B. Lib की भर्ती कर रहा है। आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार यहां DEBEL Graduate Apprenticeship Trainee भर्ती दो हज़ार तेईस का पूरा विवरण देख सकते हैं। DEBEL भर्ती के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि बीस जनवरी दो हज़ार तेईस है और DEBEL भर्ती दो हज़ार तेईस रिक्ति गणना आठ है। उम्मीदवारों का चयन लिखित परीक्षा / व्यक्तिगत साक्षात्कार / चिकित्सा परीक्षण / वॉकिन साक्षात्कार के आधार पर किया जाएगा। एक बार एक उम्मीदवार का चयन हो जाने के बाद उन्हें DEBEL में Graduate Apprenticeship Trainee के रूप में रखा जाएगा। DEBEL ने Bangalore में Graduate Apprenticeship Trainee पद की रिक्ति के लिए एक अधिसूचना जारी की है। उम्मीदवार यहां स्थान विवरण प्राप्त कर सकते हैं और DEBEL भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन कर सकते हैं। केवल पात्रता मानदंड को पूरा करने वाले उम्मीदवार नौकरी के लिए आवेदन कर सकते हैं। अंतिम तिथि के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे, इसलिए बीस जनवरी दो हज़ार तेईस से पहले आवेदन करें। How to apply for DEBEL Recruitment दो हज़ार तेईस? यदि आप DEBEL Graduate Apprenticeship Trainee भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करने में रुचि रखते हैं, तो बीस जनवरी दो हज़ार तेईस से पहले आवेदन करें। यदि आप DEBEL Graduate Apprenticeship Trainee भर्ती दो हज़ार तेईस के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया जानना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए चरणों का पालन करें। चरण दो: एक बार जब आप वेबसाइट में प्रवेश करते हैं तो DEBEL भर्ती दो हज़ार तेईस अधिसूचना देखें। चरण चार: अब उम्मीदवार सभी आवश्यक विवरण भरें। सुनिश्चित करें कि आप आवेदन में किसी भी अनुभाग को याद नहीं करते हैं। चरण पाँच: आवेदन करने के लिए सबमिट बटन पर क्लिक करें।
रोहतास, 03 जुलाईः बिहार के रोहतास में प्रसिद्ध भलुनी धाम उस वक्त युद्ध का मैदान बन गया, जब भलुनी धाम देवी मंदिर परिसर के अंदर दो पुजारियों में जमकर लट्ठ चलना शुरू हो गए। मामला इतना बिगड़ गया कि दोनों तरफ के पक्षों की ओर से लोग अपने-अपने हाथ में लाठी लेकर लड़ाई करने आ गए। हालांकि इस इस झगड़े में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन पुजारियों के बीच हुई लट्ठीबाजी का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा गया। मंदिर के अंदर लड़ाई को लेकर यूजर जमकर पुजारियों की आलोचना कर रहे हैं। मंदिर में लोग अपनी आस्था के मुताबिक भगवान को चढ़ावा चढ़ाते हैं, लेकिन यही दान भलुनी धाम देवी मंदिर में पुजारियों के बीच झगड़े की वजह बन गया। मंदिर में भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार दान पेटी में पैसे डालते हैं। इन पैसों को पुजारी अपने पास रखते हैं या फिर मंदिर के विकास कार्य या फिर अनुष्ठान कार्यक्रम खर्च करते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुई पुजारियों के युद्ध की असल वजह भी यही दान के पैसे थे। जानकारी के मुताबिक दान के पैसों को लेकर मंदिर के अंदर दो पुजारी आमने-सामने हो गए। इतना ही नहीं हाथ में लाठी लेकर दोनों एक दूसरे का सिर फोड़ने पर उतारू थे। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे पैसों के चक्कर में झगड़ा इतना बढ़ गया कि लाठी पर लाठी एक दूसरे पर बरसाईं जा रही हैं। ऐसा लग रहा जैसे यह लोग दान के पैसों के लिए एक दूसरे की जान लेकर ही मानेंगे। पुजारी ही नहीं उनके साथ के बाकी लोग भी एक दूसरे पर लाठियों से हमला कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर पुजारियों की लड़ाई का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। घटना बिहार के रोहतास के दिनारा थाना इलाके के भवानी मंदिर का है। यहां भलुनी धाम में दान के पैसों के लिए झगड़ा हुआ था। हाालंकि थोड़ी देर बाद लोगों ने बीच बचाव करते हुए लड़ाई को शांत कराया, जिसके बाद माहौल पहले जैसा हो गया। इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। वहीं इस घटना के बाद मंदिर की प्रतिष्ठा को लेकर पहुंची हानि के मद्देनजर बैठक बुलाई गई है। स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक मंदिर में पुरानी परंपरा है कि भलुनी, बडीहां और खरीका तीन गांव के पुजारी बारी-बारी से एक-एक दिन करके मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं। ऐसे में आने वाले चढ़ावे को आपस में बांटा जाता है। ऐसे ही शुक्रवार को खरीका गांव की बारी थी, जिसके बाद पंडितों के बीच विवाद खड़ा हो गया।
रोहतास, तीन जुलाईः बिहार के रोहतास में प्रसिद्ध भलुनी धाम उस वक्त युद्ध का मैदान बन गया, जब भलुनी धाम देवी मंदिर परिसर के अंदर दो पुजारियों में जमकर लट्ठ चलना शुरू हो गए। मामला इतना बिगड़ गया कि दोनों तरफ के पक्षों की ओर से लोग अपने-अपने हाथ में लाठी लेकर लड़ाई करने आ गए। हालांकि इस इस झगड़े में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन पुजारियों के बीच हुई लट्ठीबाजी का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा गया। मंदिर के अंदर लड़ाई को लेकर यूजर जमकर पुजारियों की आलोचना कर रहे हैं। मंदिर में लोग अपनी आस्था के मुताबिक भगवान को चढ़ावा चढ़ाते हैं, लेकिन यही दान भलुनी धाम देवी मंदिर में पुजारियों के बीच झगड़े की वजह बन गया। मंदिर में भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार दान पेटी में पैसे डालते हैं। इन पैसों को पुजारी अपने पास रखते हैं या फिर मंदिर के विकास कार्य या फिर अनुष्ठान कार्यक्रम खर्च करते हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुई पुजारियों के युद्ध की असल वजह भी यही दान के पैसे थे। जानकारी के मुताबिक दान के पैसों को लेकर मंदिर के अंदर दो पुजारी आमने-सामने हो गए। इतना ही नहीं हाथ में लाठी लेकर दोनों एक दूसरे का सिर फोड़ने पर उतारू थे। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे पैसों के चक्कर में झगड़ा इतना बढ़ गया कि लाठी पर लाठी एक दूसरे पर बरसाईं जा रही हैं। ऐसा लग रहा जैसे यह लोग दान के पैसों के लिए एक दूसरे की जान लेकर ही मानेंगे। पुजारी ही नहीं उनके साथ के बाकी लोग भी एक दूसरे पर लाठियों से हमला कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर पुजारियों की लड़ाई का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। घटना बिहार के रोहतास के दिनारा थाना इलाके के भवानी मंदिर का है। यहां भलुनी धाम में दान के पैसों के लिए झगड़ा हुआ था। हाालंकि थोड़ी देर बाद लोगों ने बीच बचाव करते हुए लड़ाई को शांत कराया, जिसके बाद माहौल पहले जैसा हो गया। इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। वहीं इस घटना के बाद मंदिर की प्रतिष्ठा को लेकर पहुंची हानि के मद्देनजर बैठक बुलाई गई है। स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक मंदिर में पुरानी परंपरा है कि भलुनी, बडीहां और खरीका तीन गांव के पुजारी बारी-बारी से एक-एक दिन करके मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं। ऐसे में आने वाले चढ़ावे को आपस में बांटा जाता है। ऐसे ही शुक्रवार को खरीका गांव की बारी थी, जिसके बाद पंडितों के बीच विवाद खड़ा हो गया।
नेशनल डेस्कः पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा में दक्षिण 24 परगना से एक और व्यक्ति का शव मिलने तथा दो घायलों की मौत के बाद मरने वालों की संख्या 15 हो गई है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुलताली पुलिस थाना क्षेत्र के पश्चिमी गबताला में मतदान केंद्र के पास से एक व्यक्ति का शव मिला, जिसकी पहचान अबु सलेम खान के रूप में हुई है। उसके सिर पर चोट लगी थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि उसे इलाके में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता था। पुलिस ने कहा कि मौत के पीछे की वजह का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। इलाके में तनाव है तथा हालात और बिगड़ने से रोकने के लिये पुलिस की बड़ी टुकड़ी को तैनात किया गया है। एक अन्य टीएमसी कार्यकर्ता अजहर लश्कर, जो जिले के बसंती इलाके में रविवार को हिंसा में घायल हो गया था, उसने कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल में दम तोड़ दिया। कार्यकर्ता का उपचार कर रहे चिकित्सों ने यह पुष्टि की। अधिकारियों ने बताया कि मालदा जिले के बैसननगर में टीएमसी कार्यकर्ता मोतिउर रहमान को मतदान केंद्र के बाहर चाकू घोंप दिया गया। यह घटना बरकामत इलाके के केबीसी प्राथमिक विद्यालय के पास हुई। टीएससी ने आरोप लगाया कि यह घटना उस समय हुई, जब कांग्रेस के कार्यकर्ता मतदान पेटी से छेडछाड़ का प्रयास कर रहे थे और उसने उन्हें रोकने की कोशिश की। कांग्रेस ने इस आरोप का खंडन किया है। अधिकारी ने कहा कि रहमान की मालदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में मौत हो गई। राज्य में चुनाव के दौरान हुई हिंसा में शनिवार रात तक 12 लोगों की मौत की सूचना मिली थी। इनमें से आठ व्यक्ति सत्तारूढ़ टीमसी के समर्थक थे और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और कांग्रेस का एक-एक समर्थक था। हालांकि, विभिन्न राजनीतिक दलों ने मृतकों की संख्या अधिक बताई है, जोकि कुल 18 है। टीएमसी ने दावा किया है कि उसके नौ कार्यकर्ता मारे गए हैं, जबकि कांग्रेस ने अपने तीन समर्थकों की मौत का दावा किया है। भाजपा ने कहा है कि उसके दो कार्यकर्ताओं की मौत हुई है और माकपा ने भी अपने दो सदस्यों की मौत की सूचना दी है। मृतकों में से दो लोगों की राजनीतिक संबद्धता की पुष्टि नहीं हुई है। राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) ने कहा कि उसने जिलाधिकारियों से पंचायत चुनाव के दौरान हुई मौतों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। एक अधिकारी ने कहा,"हमने जिलाधिकारियों से मौतों पर 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। " अधिकारियों ने कहा कि राज्य की त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत 73,887 सीट पर चुनाव हुए, जिसके लिये 2। 06 लाख उम्मीदवार मैदान में थे। अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, 66। 28 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि कूचबिहार जिले के दिनहाटा में 32 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान चल रहा है।
नेशनल डेस्कः पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा में दक्षिण चौबीस परगना से एक और व्यक्ति का शव मिलने तथा दो घायलों की मौत के बाद मरने वालों की संख्या पंद्रह हो गई है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुलताली पुलिस थाना क्षेत्र के पश्चिमी गबताला में मतदान केंद्र के पास से एक व्यक्ति का शव मिला, जिसकी पहचान अबु सलेम खान के रूप में हुई है। उसके सिर पर चोट लगी थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि उसे इलाके में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता था। पुलिस ने कहा कि मौत के पीछे की वजह का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। इलाके में तनाव है तथा हालात और बिगड़ने से रोकने के लिये पुलिस की बड़ी टुकड़ी को तैनात किया गया है। एक अन्य टीएमसी कार्यकर्ता अजहर लश्कर, जो जिले के बसंती इलाके में रविवार को हिंसा में घायल हो गया था, उसने कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल में दम तोड़ दिया। कार्यकर्ता का उपचार कर रहे चिकित्सों ने यह पुष्टि की। अधिकारियों ने बताया कि मालदा जिले के बैसननगर में टीएमसी कार्यकर्ता मोतिउर रहमान को मतदान केंद्र के बाहर चाकू घोंप दिया गया। यह घटना बरकामत इलाके के केबीसी प्राथमिक विद्यालय के पास हुई। टीएससी ने आरोप लगाया कि यह घटना उस समय हुई, जब कांग्रेस के कार्यकर्ता मतदान पेटी से छेडछाड़ का प्रयास कर रहे थे और उसने उन्हें रोकने की कोशिश की। कांग्रेस ने इस आरोप का खंडन किया है। अधिकारी ने कहा कि रहमान की मालदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में मौत हो गई। राज्य में चुनाव के दौरान हुई हिंसा में शनिवार रात तक बारह लोगों की मौत की सूचना मिली थी। इनमें से आठ व्यक्ति सत्तारूढ़ टीमसी के समर्थक थे और भारतीय जनता पार्टी , मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और कांग्रेस का एक-एक समर्थक था। हालांकि, विभिन्न राजनीतिक दलों ने मृतकों की संख्या अधिक बताई है, जोकि कुल अट्ठारह है। टीएमसी ने दावा किया है कि उसके नौ कार्यकर्ता मारे गए हैं, जबकि कांग्रेस ने अपने तीन समर्थकों की मौत का दावा किया है। भाजपा ने कहा है कि उसके दो कार्यकर्ताओं की मौत हुई है और माकपा ने भी अपने दो सदस्यों की मौत की सूचना दी है। मृतकों में से दो लोगों की राजनीतिक संबद्धता की पुष्टि नहीं हुई है। राज्य चुनाव आयोग ने कहा कि उसने जिलाधिकारियों से पंचायत चुनाव के दौरान हुई मौतों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। एक अधिकारी ने कहा,"हमने जिलाधिकारियों से मौतों पर चौबीस घंटाटे के अंदर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। " अधिकारियों ने कहा कि राज्य की त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत तिहत्तर,आठ सौ सत्तासी सीट पर चुनाव हुए, जिसके लिये दो। छः लाख उम्मीदवार मैदान में थे। अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, छयासठ। अट्ठाईस प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। उन्होंने बताया कि कूचबिहार जिले के दिनहाटा में बत्तीस मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान चल रहा है।
मजेदार, चुनौतीपूर्ण अभ्यास एक खिलाड़ी के सुधार में तेजी ला सकता है। शुरुआती, मध्यवर्ती और उन्नत खिलाड़ियों के लिए सर्वश्रेष्ठ टेनिस ड्रिल यहां दिए गए हैं। वे व्यक्तियों या समूहों द्वारा उपयोग किया जा सकता है। ये अभ्यास शुरुआती लोगों को वॉली और फोरहैंड और बैकहैंड के लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का एक मजेदार तरीका देते हैं . groundstrokes। पांच मुख्य विशेषताओं में से टेनिस खिलाड़ी अपने शॉट्स में विकास करना चाहते हैं - स्थिरता, गहराई, शक्ति, दिशा, और स्पिन - दिशा शायद प्रति कठिनाई की उपलब्धि की सबसे बड़ी भावना लाती है। शुरुआत के लिए, विशेष रूप से, यह देखना मजेदार है कि गेंद जितनी अधिक हो उतनी कम या कम हो। कई शुरुआती कभी भी इन दो अभ्यासों पर काम करना बंद नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि वे तेजी से कठिन स्तरों के माध्यम से काम करने की चुनौती में फंस जाते हैं। एक ड्रिल तेजता में सुधार करता है और दौड़ पर मारने पर कौशल बनाता है, जबकि दूसरा टेनिस में सबसे कम अभ्यास वाले शॉट्स में से एक में सुधार करता हैः सेवा की वापसी। यहां दो सर्वश्रेष्ठ शुरुआती टेनिस ड्रिल चलाने का तरीका बताया गया है जो फोरहैंड और बैकहैंड वॉलीज़ और ग्राउंडस्ट्रोक की स्थिरता पर काम करते हैं। दोनों में एक स्तर तत्व शामिल है जो उन्हें विशेष रूप से मजेदार बनाता है, और दूसरी बात यह है कि वास्तव में टेनिस खेलने के उस आवश्यक सीमा पर शुरुआत करने वालों के लिए एक शानदार तरीका हैः एक रैली को बनाए रखने की क्षमता। एक बार जब खिलाड़ी शुरुआती ड्रिल को काफी अच्छी तरह से संभाल सकता है, तो इन इंटरमीडिएट ड्रिल चुनौतियों की पेशकश करेंगे जो उन्हें लगभग अनिश्चित काल तक व्यस्त रखेंगे, क्योंकि ये अभ्यास भी उन्नत स्तर पर मजेदार और दिलचस्प रहते हैं। वॉली और ओवरहेड्स पर काम करने के लिए इंटरमीडिएट प्लेयर के तीन पसंदीदा यहां दिए गए हैं। उनमें से दो बड़े समूह को आगे बढ़ने और आकर्षक आवृत्ति के साथ मारने के लिए असाधारण रूप से अच्छे हैं, और तीसरा एक समय में दो खिलाड़ियों को एक गहन कसरत देता है जिससे वे ठीक करना चाहते हैं जबकि एक और दो मोड़ लेते हैं। इन तीन अभ्यासों की लोकप्रियता, एक लॉब प्रतियोगिता और दो प्रकार के ओवरहेड स्मैश प्रतियोगिता, शायद उनके समानता से खेल के लिए उपजी है। तेजी से कठिन स्तरों के माध्यम से काम करना नशे की लत प्रतीत होता है - सर्वोत्तम संभव तरीके से। गेंदों का पीछा करने और उपरोक्त शुरुआती ड्रिल में दिखाई देने वाली सेवा लौटने पर केंद्रित दो अभ्यासों के ये अधिक कठिन संस्करण हैं। खिलाड़ियों को इन दो अभ्यासों के स्कोर के माध्यम से अपने सुधार को ट्रैक करने का आनंद मिलता है। पहला ड्रिल ग्राउंडस्ट्रोक पर बिजली, गहराई और स्थिरता के निर्माण पर उत्कृष्टता प्राप्त करता है, और दूसरा अभ्यास छह अलग-अलग स्ट्रोक करता है। उन्नत खिलाड़ियों को इन दो अभ्यासों में अच्छी तरह से चुनौती दी जाती है जो लक्ष्य और कताई पर काम करते हैं और स्पिन की पूरी श्रृंखला को लौटते हैं। यह ड्रॉप वॉली प्रतियोगिता, साइड पॉकेट प्रतियोगिता , और ड्रॉप शॉट प्रतियोगिता उन्नत खिलाड़ियों को चपलता पैदा करने का मौका देती है।
मजेदार, चुनौतीपूर्ण अभ्यास एक खिलाड़ी के सुधार में तेजी ला सकता है। शुरुआती, मध्यवर्ती और उन्नत खिलाड़ियों के लिए सर्वश्रेष्ठ टेनिस ड्रिल यहां दिए गए हैं। वे व्यक्तियों या समूहों द्वारा उपयोग किया जा सकता है। ये अभ्यास शुरुआती लोगों को वॉली और फोरहैंड और बैकहैंड के लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का एक मजेदार तरीका देते हैं . groundstrokes। पांच मुख्य विशेषताओं में से टेनिस खिलाड़ी अपने शॉट्स में विकास करना चाहते हैं - स्थिरता, गहराई, शक्ति, दिशा, और स्पिन - दिशा शायद प्रति कठिनाई की उपलब्धि की सबसे बड़ी भावना लाती है। शुरुआत के लिए, विशेष रूप से, यह देखना मजेदार है कि गेंद जितनी अधिक हो उतनी कम या कम हो। कई शुरुआती कभी भी इन दो अभ्यासों पर काम करना बंद नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि वे तेजी से कठिन स्तरों के माध्यम से काम करने की चुनौती में फंस जाते हैं। एक ड्रिल तेजता में सुधार करता है और दौड़ पर मारने पर कौशल बनाता है, जबकि दूसरा टेनिस में सबसे कम अभ्यास वाले शॉट्स में से एक में सुधार करता हैः सेवा की वापसी। यहां दो सर्वश्रेष्ठ शुरुआती टेनिस ड्रिल चलाने का तरीका बताया गया है जो फोरहैंड और बैकहैंड वॉलीज़ और ग्राउंडस्ट्रोक की स्थिरता पर काम करते हैं। दोनों में एक स्तर तत्व शामिल है जो उन्हें विशेष रूप से मजेदार बनाता है, और दूसरी बात यह है कि वास्तव में टेनिस खेलने के उस आवश्यक सीमा पर शुरुआत करने वालों के लिए एक शानदार तरीका हैः एक रैली को बनाए रखने की क्षमता। एक बार जब खिलाड़ी शुरुआती ड्रिल को काफी अच्छी तरह से संभाल सकता है, तो इन इंटरमीडिएट ड्रिल चुनौतियों की पेशकश करेंगे जो उन्हें लगभग अनिश्चित काल तक व्यस्त रखेंगे, क्योंकि ये अभ्यास भी उन्नत स्तर पर मजेदार और दिलचस्प रहते हैं। वॉली और ओवरहेड्स पर काम करने के लिए इंटरमीडिएट प्लेयर के तीन पसंदीदा यहां दिए गए हैं। उनमें से दो बड़े समूह को आगे बढ़ने और आकर्षक आवृत्ति के साथ मारने के लिए असाधारण रूप से अच्छे हैं, और तीसरा एक समय में दो खिलाड़ियों को एक गहन कसरत देता है जिससे वे ठीक करना चाहते हैं जबकि एक और दो मोड़ लेते हैं। इन तीन अभ्यासों की लोकप्रियता, एक लॉब प्रतियोगिता और दो प्रकार के ओवरहेड स्मैश प्रतियोगिता, शायद उनके समानता से खेल के लिए उपजी है। तेजी से कठिन स्तरों के माध्यम से काम करना नशे की लत प्रतीत होता है - सर्वोत्तम संभव तरीके से। गेंदों का पीछा करने और उपरोक्त शुरुआती ड्रिल में दिखाई देने वाली सेवा लौटने पर केंद्रित दो अभ्यासों के ये अधिक कठिन संस्करण हैं। खिलाड़ियों को इन दो अभ्यासों के स्कोर के माध्यम से अपने सुधार को ट्रैक करने का आनंद मिलता है। पहला ड्रिल ग्राउंडस्ट्रोक पर बिजली, गहराई और स्थिरता के निर्माण पर उत्कृष्टता प्राप्त करता है, और दूसरा अभ्यास छह अलग-अलग स्ट्रोक करता है। उन्नत खिलाड़ियों को इन दो अभ्यासों में अच्छी तरह से चुनौती दी जाती है जो लक्ष्य और कताई पर काम करते हैं और स्पिन की पूरी श्रृंखला को लौटते हैं। यह ड्रॉप वॉली प्रतियोगिता, साइड पॉकेट प्रतियोगिता , और ड्रॉप शॉट प्रतियोगिता उन्नत खिलाड़ियों को चपलता पैदा करने का मौका देती है।
Tandwa (Chatra) : टंडवा के आम्रपाली कोल परियोजना क्षेत्र के शिवपुर कोल ट्रांसपोर्टिंग सड़क पर रविवार की रात हाइवा की चपेट में आने से 18 वर्षीय बाइक सवार मो. तमजीत की मौत घटनास्थल पर ही हो गई. वहीं इस घटना के बाद शिवपुर रेलवे साइडिंग में कोल डिस्पैच ठप हो गया. जानकारी के अनुसार मृतक उत्तर प्रदेश के अलीगढ का रहने वाला था. वह अपने पिता के साथ उडसू मोड़ में टायर पंक्चर की दुकान चलाता था. वह अपने दो दोस्तों सद्दाम व इमरान के साथ बाइक में ट्रिपल लोड होकर कुछ काम को लेकर शिवपुर की ओर जा रहा था. इसी बीच अनियंत्रित होकर कोल ट्रांसपोर्टिंग में लगे हाइवा की चपेट में सभी आ गये. बताया गया कि ट्रांसपोर्टिंग रोड पर पानी बहने के कारण बाइक स्लिप कर अनियंत्रित होकर कोल वाहन के नीचे चली गई, जिसमें मो. तमजीत की मौत हो गई.
Tandwa : टंडवा के आम्रपाली कोल परियोजना क्षेत्र के शिवपुर कोल ट्रांसपोर्टिंग सड़क पर रविवार की रात हाइवा की चपेट में आने से अट्ठारह वर्षीय बाइक सवार मो. तमजीत की मौत घटनास्थल पर ही हो गई. वहीं इस घटना के बाद शिवपुर रेलवे साइडिंग में कोल डिस्पैच ठप हो गया. जानकारी के अनुसार मृतक उत्तर प्रदेश के अलीगढ का रहने वाला था. वह अपने पिता के साथ उडसू मोड़ में टायर पंक्चर की दुकान चलाता था. वह अपने दो दोस्तों सद्दाम व इमरान के साथ बाइक में ट्रिपल लोड होकर कुछ काम को लेकर शिवपुर की ओर जा रहा था. इसी बीच अनियंत्रित होकर कोल ट्रांसपोर्टिंग में लगे हाइवा की चपेट में सभी आ गये. बताया गया कि ट्रांसपोर्टिंग रोड पर पानी बहने के कारण बाइक स्लिप कर अनियंत्रित होकर कोल वाहन के नीचे चली गई, जिसमें मो. तमजीत की मौत हो गई.
E-Commerce Job Tips: आज सभी लोग ऑनलाइन शॉपिंग में काफी दिलचस्पी लेते हैं शायद ही कोई ऐसा हो जो ऑनलाइन शॉपिंग के बारे में ना जानता हो। घर की जरूरत की चीजें हो या फैशन के संबंधित चीजें सभी लोग इन चीजों को खरीदने के लिए एक कॉमर्स वेबसाइट पर जाते हैं। देश भर के करोड़ों लोग e-commerce वेबसाइट से शॉपिंग करते हैं। और जब से कोविड-19 तब से तो ई-कॉमर्स शॉपिंग का एक नया ट्रेंड बन चुका है। कोविड-19 घर से बाहर जाना तो बंद ही कर दिया और ऑनलाइन शॉपिंग का ही सहारा लिया। इसके अतिरिक्त ऑनलाइन शॉपिंग में बहुत सी अच्छी मिलती है जिसके जरिए अच्छे-अच्छे सामान को काफी कमरों में लगाया जा सकता है। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 2025 तक ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले लोगों की संख्या काफी बढ़ जाएगी। इसी को देखते हुए कंपनियां इस क्षेत्र में रोजगार के कई अवसर ला रही है। आजकल कई छोटी-बड़ी कंपनियां अपने कस्टमर को ऑनलाइन शॉपिंग का विकल्प देती है, ऑनलाइन शॉपिंग के लिए बहुत से नए स्टार्टअप भी सामने आ रहे हैं। इन सभी को अपने विभाग में एक्सपर्ट की जरूरत होती है जैसे कि कस्टमर सर्विस, लॉजिस्टिक, वेब डिजाइनिंग, फाइनेंस आदि। यह सभी कंपनियां युवाओं को अपना प्लेटफार्म ज्वाइन करने के लिए काफी मौके दे रही हैं। तो चलिए जानते हैं कि इन कंपनियों में किस तरह की जॉब प्राप्त कर सकते हैं। ई-कॉमर्स की कंपनियां आजकल अन्य कंपनियों की तरह बहुत ही लेवल के जॉब प्रोवाइड कराती है। एंट्री लेवल जॉब की बात करें तो आप यहां पर कस्टमर सर्विस रिप्रेजेंटेटिव, डिलीवरी ब्वॉय या वेयर हाउस आदि पदों के लिए अप्लाइ कर सकते हैं। ई-कॉमर्स के क्षेत्रों में आजकल यूजर एक्सपीरियंस डिजाइनर की मांग बढ़ चुकी है, इसके अंतर्गत यूजर एक्सपीरियंस को और भी बेहतर बनाने के लिए डिजाइनर को जॉब प्रोवाइड कराई जाती है तो अगर आपके पास एक्सपीरियंस है तो आप इस क्षेत्र में ट्राई कर सकते हैं इसके अलावा आप डेवलपर, ग्राफिक डिजाइनर, बिजनेस एनालिस्ट, आईटी टेक्नीशियन आदि पदों के लिए भी अप्लाई कर सकते हैं। इन पदों के लिए आपके पास अच्छे अनुभव की आवश्यकता होगी।
E-Commerce Job Tips: आज सभी लोग ऑनलाइन शॉपिंग में काफी दिलचस्पी लेते हैं शायद ही कोई ऐसा हो जो ऑनलाइन शॉपिंग के बारे में ना जानता हो। घर की जरूरत की चीजें हो या फैशन के संबंधित चीजें सभी लोग इन चीजों को खरीदने के लिए एक कॉमर्स वेबसाइट पर जाते हैं। देश भर के करोड़ों लोग e-commerce वेबसाइट से शॉपिंग करते हैं। और जब से कोविड-उन्नीस तब से तो ई-कॉमर्स शॉपिंग का एक नया ट्रेंड बन चुका है। कोविड-उन्नीस घर से बाहर जाना तो बंद ही कर दिया और ऑनलाइन शॉपिंग का ही सहारा लिया। इसके अतिरिक्त ऑनलाइन शॉपिंग में बहुत सी अच्छी मिलती है जिसके जरिए अच्छे-अच्छे सामान को काफी कमरों में लगाया जा सकता है। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि दो हज़ार पच्चीस तक ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले लोगों की संख्या काफी बढ़ जाएगी। इसी को देखते हुए कंपनियां इस क्षेत्र में रोजगार के कई अवसर ला रही है। आजकल कई छोटी-बड़ी कंपनियां अपने कस्टमर को ऑनलाइन शॉपिंग का विकल्प देती है, ऑनलाइन शॉपिंग के लिए बहुत से नए स्टार्टअप भी सामने आ रहे हैं। इन सभी को अपने विभाग में एक्सपर्ट की जरूरत होती है जैसे कि कस्टमर सर्विस, लॉजिस्टिक, वेब डिजाइनिंग, फाइनेंस आदि। यह सभी कंपनियां युवाओं को अपना प्लेटफार्म ज्वाइन करने के लिए काफी मौके दे रही हैं। तो चलिए जानते हैं कि इन कंपनियों में किस तरह की जॉब प्राप्त कर सकते हैं। ई-कॉमर्स की कंपनियां आजकल अन्य कंपनियों की तरह बहुत ही लेवल के जॉब प्रोवाइड कराती है। एंट्री लेवल जॉब की बात करें तो आप यहां पर कस्टमर सर्विस रिप्रेजेंटेटिव, डिलीवरी ब्वॉय या वेयर हाउस आदि पदों के लिए अप्लाइ कर सकते हैं। ई-कॉमर्स के क्षेत्रों में आजकल यूजर एक्सपीरियंस डिजाइनर की मांग बढ़ चुकी है, इसके अंतर्गत यूजर एक्सपीरियंस को और भी बेहतर बनाने के लिए डिजाइनर को जॉब प्रोवाइड कराई जाती है तो अगर आपके पास एक्सपीरियंस है तो आप इस क्षेत्र में ट्राई कर सकते हैं इसके अलावा आप डेवलपर, ग्राफिक डिजाइनर, बिजनेस एनालिस्ट, आईटी टेक्नीशियन आदि पदों के लिए भी अप्लाई कर सकते हैं। इन पदों के लिए आपके पास अच्छे अनुभव की आवश्यकता होगी।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) बुधवार दोपहर दिल्ली पहुंच रहे हैं। दोनों मुख्यमंत्री कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ आज मुलाकात करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान आने वाले लोकसभा चुनाव पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा राजस्थान और छत्तीसगढ़ के मौजूदा राजनीतिक हालात को लेकर भी चर्चा संभव है। अशोक गहलोत और भूपेश बघेल राजस्थान और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक स्थिति के बारे में बताएंगे। बैठक में भविष्य के रोड मैप पर भी चर्चा की जाएगी। गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ अपने आवास पर चार दिनों में तीन मुलाकातें कर चुकी हैं। मंगलवार को भी प्रशांत किशोर ने सोनिया गांधी और कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की थी। इस बैठक में प्रशांत किशोर के अलावा अंबिका सोनी, एके एंटनी, कमलनाथ, मुकुल वासनिक, दिग्विजय सिंह, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश और रणदीप सुरजेवाला शामिल हुए थे। वहीं, सोमवार को हुई बैठक में पी चिदंबरम, प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश आदि शामिल हुए थे। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के पुनरुत्थान से जुड़े प्रस्तावों को लेकर इन बैठकों में कांग्रेस नेता पीके से कई सवाल भी कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि प्रशांत किशोर की ऐसी कुछ बैठके आने वाले दिनों में और हो सकती हैं।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बुधवार दोपहर दिल्ली पहुंच रहे हैं। दोनों मुख्यमंत्री कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ आज मुलाकात करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान आने वाले लोकसभा चुनाव पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा राजस्थान और छत्तीसगढ़ के मौजूदा राजनीतिक हालात को लेकर भी चर्चा संभव है। अशोक गहलोत और भूपेश बघेल राजस्थान और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक स्थिति के बारे में बताएंगे। बैठक में भविष्य के रोड मैप पर भी चर्चा की जाएगी। गौरतलब है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ अपने आवास पर चार दिनों में तीन मुलाकातें कर चुकी हैं। मंगलवार को भी प्रशांत किशोर ने सोनिया गांधी और कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की थी। इस बैठक में प्रशांत किशोर के अलावा अंबिका सोनी, एके एंटनी, कमलनाथ, मुकुल वासनिक, दिग्विजय सिंह, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश और रणदीप सुरजेवाला शामिल हुए थे। वहीं, सोमवार को हुई बैठक में पी चिदंबरम, प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश आदि शामिल हुए थे। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के पुनरुत्थान से जुड़े प्रस्तावों को लेकर इन बैठकों में कांग्रेस नेता पीके से कई सवाल भी कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि प्रशांत किशोर की ऐसी कुछ बैठके आने वाले दिनों में और हो सकती हैं।
नई दिल्ली, अगस्त 2। देश में प्रत्येक वर्ष अगस्त से नवंबर के बीच प्याज की किल्लत बढ़ जाती है और प्याज के पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होने के कारण मंडियों से लेकर उपभोक्ता मंडियों के बीच आपूर्ति का समस्या बनी रहती है, मगर इस बार इस तरह की समस्या नहीं है। भारत में प्याज जरूरत के हिसाब की उपलब्ध है और निर्यात की मांग भी नही है। प्याज की कीमतों में वृद्धि को रोकने के लिए भारत सरकार ने ढाई लाख टन का बड़ा स्टॉक बना रखा है, जो मार्केट में बढ़ती प्याज की कीमतों को काबू करने के लिए काफी है। हर साल देश में अगस्त महीने के खत्म होते होते रबी सीजन की प्याज का स्टॉक भी खत्म होने लगता है। जिस वजह से कई लोग प्याज को स्टॉक करके रखने लगते है। जिस कारण प्याज के दाम बढ़ जाते है फिर वे उसको महंगे में बेचने लगते है। विदेशी बाजारों में प्याज के अच्छे भाव देखते हुए। इस वर्ष प्याज का अच्छा निर्यात नही हुआ है। श्रीलंका में आर्थिक संकट के कारण प्याज का निर्यात प्रभावित हुआ है जबकि भारतीय प्याज के सबसे बड़े आयातक देश बांग्लादेश ने प्याज आयात पर सीमा शुल्क बढ़ा दिया है। ऐसे ही रूस और यूक्रेन युद्ध के कारण पैदा हुई। स्थितियों में प्याज के पाउडर और सूखे प्याज का निर्यात को भी बीस प्रतिशत ज्यादा प्रभावित देखा गया है। वर्ष 2021-22 चालू हार्टिकल्चर के दौरान प्याज का उत्पादन 311 लाख टन होने का संभावना लगाया गया है, ये संभावना पिछले वर्ष के मुकाबले ज्यादा है। इसी कारण प्याज का भाव बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र के प्याज उत्पादकों ने सरकार से प्याज निर्यात को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया है।
नई दिल्ली, अगस्त दो। देश में प्रत्येक वर्ष अगस्त से नवंबर के बीच प्याज की किल्लत बढ़ जाती है और प्याज के पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होने के कारण मंडियों से लेकर उपभोक्ता मंडियों के बीच आपूर्ति का समस्या बनी रहती है, मगर इस बार इस तरह की समस्या नहीं है। भारत में प्याज जरूरत के हिसाब की उपलब्ध है और निर्यात की मांग भी नही है। प्याज की कीमतों में वृद्धि को रोकने के लिए भारत सरकार ने ढाई लाख टन का बड़ा स्टॉक बना रखा है, जो मार्केट में बढ़ती प्याज की कीमतों को काबू करने के लिए काफी है। हर साल देश में अगस्त महीने के खत्म होते होते रबी सीजन की प्याज का स्टॉक भी खत्म होने लगता है। जिस वजह से कई लोग प्याज को स्टॉक करके रखने लगते है। जिस कारण प्याज के दाम बढ़ जाते है फिर वे उसको महंगे में बेचने लगते है। विदेशी बाजारों में प्याज के अच्छे भाव देखते हुए। इस वर्ष प्याज का अच्छा निर्यात नही हुआ है। श्रीलंका में आर्थिक संकट के कारण प्याज का निर्यात प्रभावित हुआ है जबकि भारतीय प्याज के सबसे बड़े आयातक देश बांग्लादेश ने प्याज आयात पर सीमा शुल्क बढ़ा दिया है। ऐसे ही रूस और यूक्रेन युद्ध के कारण पैदा हुई। स्थितियों में प्याज के पाउडर और सूखे प्याज का निर्यात को भी बीस प्रतिशत ज्यादा प्रभावित देखा गया है। वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस चालू हार्टिकल्चर के दौरान प्याज का उत्पादन तीन सौ ग्यारह लाख टन होने का संभावना लगाया गया है, ये संभावना पिछले वर्ष के मुकाबले ज्यादा है। इसी कारण प्याज का भाव बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र के प्याज उत्पादकों ने सरकार से प्याज निर्यात को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया है।
नई दिल्ली । कौन बनेगा करोड़पति का सीजन 12 भारत के दर्शकों को काफी लुभा रहा है ,पूरे देश में इस शो की चर्चा की जा रही है साथ ही इस शो में आने वाले खिलाडियों को भी काफी सरहाना की जा रही है वही इस शो में कई लोगों के अधूरे सपनों को पूरा करने का दमखम रखता है, इस सीजन ने पहले ही तीन करोड़पति दे चुका है. आपको बता दें अब एक कोरियर बॉय भी हॉट सीट पर पहुंच गए हैं और 14 सवालों का सही जवाब देकर 50 लाख रुपये अपने नाम कर चुके हैं. जी हाँ हम बात कर रहे है विजय पाल सिंह की बता दें विजय मध्यप्रदेश के धार जिले के गांव सलवा में रहने वाले है जो की खेती के साथ साथ कुरियर का भी काम करते हैं. उनका सपना पुलिस ऑफिसर बनने का है. उन्हें महीना केवल 8000 सैलरी मिलती है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि वो आज 1 करोड़ के सवाल का जवाब देने में कामयाब होंगे या नहीं. दरअसल केबीसी के इस पूरे सफर में विजय ने कियारा की तस्वीर अपनी जेब में रखी थी. उन्हें वो अपना लकी चार्म मानते हैं दीवानगी की हद तो तब हुई जब विजय ने बताया की उनके घर में सभी तरफ कियारा के पोस्टर लगे हुए हैं. वे चाहते हैं कि या तो उनकी शादी कियारा से हो जाए या फिर उन्हें अपने लिए कोई देसी कियारा मिल जाए. ये सब सुन अमिताभ बच्चन भी हैरान रह गए हैं. वे उन्हें काफी विचित्र बता रहे हैं. कंटेस्टेंट की बातों को सुन महानायक भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए . अमिताभ मजाकिया अंदाज में कह रहे हैं कि कियारा को उनका मिस्टर राइट मिल गया है. इसके साथ ही आपको बता दें विजय को इस सीजन का सबसे स्मार्ट प्रतियोगी माना जा रहा है, एमपी के रहने वाले विजय ने केबीसी-12 पर जीत के पैसे के साथ स्मार्ट विलेज बनाने की इच्छा भी जताई है। विजय पाल सिंह राठौड़ अपने सरासर ज्ञान और इच्छाशक्ति की मदद से ऐसा करने की इच्छा रखते हैं। वही विजय अब 1 करोड़ रुपये के लिए सवाल उठाते नजर आएंगे, उन्होंने निश्चित रूप से दर्शकों को अभिनेत्री कियारा आडवाणी के प्रति अपने प्यार और इस तथ्य के साथ आश्चर्यचकित कर दिया है अब देखना यह है की वो इस सीजन के विजेताओं की सूची में अपना नाम दाखिल करवा पाएंगे या नहीं।
नई दिल्ली । कौन बनेगा करोड़पति का सीजन बारह भारत के दर्शकों को काफी लुभा रहा है ,पूरे देश में इस शो की चर्चा की जा रही है साथ ही इस शो में आने वाले खिलाडियों को भी काफी सरहाना की जा रही है वही इस शो में कई लोगों के अधूरे सपनों को पूरा करने का दमखम रखता है, इस सीजन ने पहले ही तीन करोड़पति दे चुका है. आपको बता दें अब एक कोरियर बॉय भी हॉट सीट पर पहुंच गए हैं और चौदह सवालों का सही जवाब देकर पचास लाख रुपये अपने नाम कर चुके हैं. जी हाँ हम बात कर रहे है विजय पाल सिंह की बता दें विजय मध्यप्रदेश के धार जिले के गांव सलवा में रहने वाले है जो की खेती के साथ साथ कुरियर का भी काम करते हैं. उनका सपना पुलिस ऑफिसर बनने का है. उन्हें महीना केवल आठ हज़ार सैलरी मिलती है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि वो आज एक करोड़ के सवाल का जवाब देने में कामयाब होंगे या नहीं. दरअसल केबीसी के इस पूरे सफर में विजय ने कियारा की तस्वीर अपनी जेब में रखी थी. उन्हें वो अपना लकी चार्म मानते हैं दीवानगी की हद तो तब हुई जब विजय ने बताया की उनके घर में सभी तरफ कियारा के पोस्टर लगे हुए हैं. वे चाहते हैं कि या तो उनकी शादी कियारा से हो जाए या फिर उन्हें अपने लिए कोई देसी कियारा मिल जाए. ये सब सुन अमिताभ बच्चन भी हैरान रह गए हैं. वे उन्हें काफी विचित्र बता रहे हैं. कंटेस्टेंट की बातों को सुन महानायक भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए . अमिताभ मजाकिया अंदाज में कह रहे हैं कि कियारा को उनका मिस्टर राइट मिल गया है. इसके साथ ही आपको बता दें विजय को इस सीजन का सबसे स्मार्ट प्रतियोगी माना जा रहा है, एमपी के रहने वाले विजय ने केबीसी-बारह पर जीत के पैसे के साथ स्मार्ट विलेज बनाने की इच्छा भी जताई है। विजय पाल सिंह राठौड़ अपने सरासर ज्ञान और इच्छाशक्ति की मदद से ऐसा करने की इच्छा रखते हैं। वही विजय अब एक करोड़ रुपये के लिए सवाल उठाते नजर आएंगे, उन्होंने निश्चित रूप से दर्शकों को अभिनेत्री कियारा आडवाणी के प्रति अपने प्यार और इस तथ्य के साथ आश्चर्यचकित कर दिया है अब देखना यह है की वो इस सीजन के विजेताओं की सूची में अपना नाम दाखिल करवा पाएंगे या नहीं।
80 साल पहले गांव-देहात में लगने वाले मेला (नुमायश) में बेचने के लिए मुरैना के सीताराम शिवहरे ने गुड़ में तिली मिलाकर एक ऐसी मिठाई तैयार की, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सर्दियों में सेहत के लिए भी फायदेमंद थी। आगे चलकर इसी गुड़ की पट्टी को नाम मिला "गजक'। अपने विशेष स्वाद की वजह से देश-विदेश में फेमस गजक की मुरैना में 30 से अधिक वैरायटियां उपलब्ध है। मुरैना की गजक की प्रसिद्धि का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक वर्ष पूर्व इस गजक को जीआई टैग (भौगोलिक क्षेत्र के हिसाब से वहां बनने वाली विशेष व्यंजन की पहचान) दिलाने के प्रयास शुरू हुए। आत्मनिर्भर मप्र की परिकल्पना संजोए बैठे मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को खुद ट्वीट कर मुरैना की गजक की प्रशंसा की। सर्दी की मिठाई के नाम से 80 साल पहले गजक ईजाद करने वाले सीताराम शिवहरे के बेटे व वैष्णो गजक भंउार के संचालक सूरज शिवहरे बताते हैं कि पहले गुड़-शक्कर में तिली मिलाकर पट्टी वाली गजक बनती थी। लेकिन अब तो गजक रोल, समोसे, गजक की गुजिया, गजक की बाटी, डोंड़ा बर्फी, चॉकलेट बर्फी, काजी पट्टी, मावा तिली के लड्डू, तिल-पापड़ी, खस्ता गजक सहित 30 तरह की वैरायटियां बन रही हैं। शहर में गजक की 100 से अधिक छोटी बड़ी दुकानें हैं, जिनमें एक सीजन में 1500 क्विंटल से अधिक गजक का उत्पादन होता है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, कनाडा, साउथ अफ्रीका, थाइलैंड, बैंकॉक, सिंगापुर, मलेशिया जैसे देशों तक भी लोग अपने रिश्तेदारों को गजक भेजते हैं। वहीं मुरैना में बनी रेडीमेड गजक देशभर में एक्सपोर्ट होती है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
अस्सी साल पहले गांव-देहात में लगने वाले मेला में बेचने के लिए मुरैना के सीताराम शिवहरे ने गुड़ में तिली मिलाकर एक ऐसी मिठाई तैयार की, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सर्दियों में सेहत के लिए भी फायदेमंद थी। आगे चलकर इसी गुड़ की पट्टी को नाम मिला "गजक'। अपने विशेष स्वाद की वजह से देश-विदेश में फेमस गजक की मुरैना में तीस से अधिक वैरायटियां उपलब्ध है। मुरैना की गजक की प्रसिद्धि का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक वर्ष पूर्व इस गजक को जीआई टैग दिलाने के प्रयास शुरू हुए। आत्मनिर्भर मप्र की परिकल्पना संजोए बैठे मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को खुद ट्वीट कर मुरैना की गजक की प्रशंसा की। सर्दी की मिठाई के नाम से अस्सी साल पहले गजक ईजाद करने वाले सीताराम शिवहरे के बेटे व वैष्णो गजक भंउार के संचालक सूरज शिवहरे बताते हैं कि पहले गुड़-शक्कर में तिली मिलाकर पट्टी वाली गजक बनती थी। लेकिन अब तो गजक रोल, समोसे, गजक की गुजिया, गजक की बाटी, डोंड़ा बर्फी, चॉकलेट बर्फी, काजी पट्टी, मावा तिली के लड्डू, तिल-पापड़ी, खस्ता गजक सहित तीस तरह की वैरायटियां बन रही हैं। शहर में गजक की एक सौ से अधिक छोटी बड़ी दुकानें हैं, जिनमें एक सीजन में एक हज़ार पाँच सौ क्विंटल से अधिक गजक का उत्पादन होता है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, कनाडा, साउथ अफ्रीका, थाइलैंड, बैंकॉक, सिंगापुर, मलेशिया जैसे देशों तक भी लोग अपने रिश्तेदारों को गजक भेजते हैं। वहीं मुरैना में बनी रेडीमेड गजक देशभर में एक्सपोर्ट होती है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
{ म्यू } सारदेखि फिर घर-घर में पार्यो, नेक नहीं रोय, काको नाम लीजिए ! कहत मौलाराम आयो चत्तर जमानो यह, मिलत न जगौर औ रोजीना जा सो जीजिए, केहिता हूँ पुकार, निराधार के अचार, चली पोटी यह बयार, इसे जल्दी थाम दीजिए ! ५ कहिए तो मुस्किल जो न कहिए तो मुस्किल; द्वेपि रहिए तो सुस्किल, महा मुस्किल आन छाई है रहिए तो मुस्किल जो न रहिए तो मुस्किल तो मुस्किल कठिन मी बनि आई हैं; कहत मोलारा । यहवाल भयो आलम मैं, गुण-माहक रहे नवनीच प्रभुताई है, करिता हूँ पुकार निराधार के अधार, सभी भई मुस्किल नाव ऐसी भरि आई है ! २ श्रीन व अब नाहि रह्यो त विप्र भयौं, कब लौं-लहिना, गढ़वाल में हाल रह्यौ न कछु, दुख-सुक्ख परे कव लौ सहिना : निरमानुषता पुर होय रही, इन नीचन के संग क्या कहना ! रेहना क्यों कीमत नाहि जहाँ, गुनि कौन उचित वहाँ रहिना । २ गुण आहक ते नरनाह किते, गुण चाड़ जिते नहीं रहना, निज सह परदेस भलो, अपनो जह जाय भिर्दे लेहना, लेहना जहँ चार आचार भलो, उन के दरबारहि को गहिना, रहना क्यो कीमत नाँहि जहाँ, गुनि कोन उचित्त तहाँ रहिना ३ कवि की कविता न सुनै ये विथा अपनी प्रभुता मैं करें कहिना, कब हूँ कवि होय के कंद पढ़ें, कबहूँ सुर ताल करै गहिना, जस कोरत जानत नाहि कळू. उन के संग मैं जो कहा लहिना,
{ म्यू } सारदेखि फिर घर-घर में पार्यो, नेक नहीं रोय, काको नाम लीजिए ! कहत मौलाराम आयो चत्तर जमानो यह, मिलत न जगौर औ रोजीना जा सो जीजिए, केहिता हूँ पुकार, निराधार के अचार, चली पोटी यह बयार, इसे जल्दी थाम दीजिए ! पाँच कहिए तो मुस्किल जो न कहिए तो मुस्किल; द्वेपि रहिए तो सुस्किल, महा मुस्किल आन छाई है रहिए तो मुस्किल जो न रहिए तो मुस्किल तो मुस्किल कठिन मी बनि आई हैं; कहत मोलारा । यहवाल भयो आलम मैं, गुण-माहक रहे नवनीच प्रभुताई है, करिता हूँ पुकार निराधार के अधार, सभी भई मुस्किल नाव ऐसी भरि आई है ! दो श्रीन व अब नाहि रह्यो त विप्र भयौं, कब लौं-लहिना, गढ़वाल में हाल रह्यौ न कछु, दुख-सुक्ख परे कव लौ सहिना : निरमानुषता पुर होय रही, इन नीचन के संग क्या कहना ! रेहना क्यों कीमत नाहि जहाँ, गुनि कौन उचित वहाँ रहिना । दो गुण आहक ते नरनाह किते, गुण चाड़ जिते नहीं रहना, निज सह परदेस भलो, अपनो जह जाय भिर्दे लेहना, लेहना जहँ चार आचार भलो, उन के दरबारहि को गहिना, रहना क्यो कीमत नाँहि जहाँ, गुनि कोन उचित्त तहाँ रहिना तीन कवि की कविता न सुनै ये विथा अपनी प्रभुता मैं करें कहिना, कब हूँ कवि होय के कंद पढ़ें, कबहूँ सुर ताल करै गहिना, जस कोरत जानत नाहि कळू. उन के संग मैं जो कहा लहिना,
क्रेडिट कार्ड यूज़ करने वालों को एक नई खुशखबरी मिली है। अब क्रेडिट कार्ड को भी UPI से लिंक किया जा सकेगा। लिंक होने पर इससे ट्रांजैक्शन करना ज्यादा आसान हो जाएगा। अभी तक UPI नेटवर्क से केवल डेबिट कार्ड और अकाउंट ही लिंक किए जा सकते हैं। अभी तक तीन बैंकों पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक ने इसकी सुविधा दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक UPI से क्रेडिट कार्ड लिंक करके UPI पेमेंट करने के लिए किसी तरह का MDR नहीं वसूला जाएगा। हालांकि इसका एक छोटा इंटरचेंज चार्ज वसूला जाएगा। हालांकि ये चार्ज कितना होगा अभी इसके बारे में जानकारी नहीं दी गई है। RBI ने UPI लाइट सर्विस भी लॉन्च की है। यह कम वैल्यू के ट्रांजैक्शन के लिए होगा जो ऑन-डिवाइस वॉलेट की मदद से काम करेगा। UPI लाइट की मदद से कस्टमर बिना इंटरनेट के भी पेमेंट कर पाएंगे। UPI लाइट से 200 रुपए तक की रकम को बिना इंटरनेट के ट्रांसफर किया जा सकेगा। इसके लिए आपको सबसे पहले अपने कार्ड को UPI ऐप में जोड़ना होगा। गूगल पे की वेबसाइट के मुताबिक, यूजर्स ऐप से बैंकों के डेबिट, क्रेडिट कार्ड जोड़ सकता है, लेकिन वे वीजा और मास्टरकार्ड पेमेंट गेटवे पर ऑपरेट होता हो।
क्रेडिट कार्ड यूज़ करने वालों को एक नई खुशखबरी मिली है। अब क्रेडिट कार्ड को भी UPI से लिंक किया जा सकेगा। लिंक होने पर इससे ट्रांजैक्शन करना ज्यादा आसान हो जाएगा। अभी तक UPI नेटवर्क से केवल डेबिट कार्ड और अकाउंट ही लिंक किए जा सकते हैं। अभी तक तीन बैंकों पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक ने इसकी सुविधा दी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक UPI से क्रेडिट कार्ड लिंक करके UPI पेमेंट करने के लिए किसी तरह का MDR नहीं वसूला जाएगा। हालांकि इसका एक छोटा इंटरचेंज चार्ज वसूला जाएगा। हालांकि ये चार्ज कितना होगा अभी इसके बारे में जानकारी नहीं दी गई है। RBI ने UPI लाइट सर्विस भी लॉन्च की है। यह कम वैल्यू के ट्रांजैक्शन के लिए होगा जो ऑन-डिवाइस वॉलेट की मदद से काम करेगा। UPI लाइट की मदद से कस्टमर बिना इंटरनेट के भी पेमेंट कर पाएंगे। UPI लाइट से दो सौ रुपयापए तक की रकम को बिना इंटरनेट के ट्रांसफर किया जा सकेगा। इसके लिए आपको सबसे पहले अपने कार्ड को UPI ऐप में जोड़ना होगा। गूगल पे की वेबसाइट के मुताबिक, यूजर्स ऐप से बैंकों के डेबिट, क्रेडिट कार्ड जोड़ सकता है, लेकिन वे वीजा और मास्टरकार्ड पेमेंट गेटवे पर ऑपरेट होता हो।
अभिनेत्री कंगना के दफ्तर का एक हिस्सा तोड़े जाने से मुरादाबाद के लोग भी आहत हैं। कई संगठन खुलकर इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। शुक्रवार को पूर्व पार्षद के समर्थकों ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर उनका पुतला फूंका। पूर्व पार्षद विवेक शर्मा समर्थकों के साथ लाजपत नगर में कंगना रनौत के समर्थन में सड़क पर उतर आए। वक्ताओं ने कहा सुशांत सिंह राजपूत के मौत के मामले में कंगना रनौत ने सबसे पहले सीबीआई जांच की मांग की थी। इसी वजह से महाराष्ट्र सरकार तिलमिला गई थी और अब महाराष्ट्र सरकार कंगना रनौत के खिलाफ बदले की भावना से काम कर रही है। इसका विरोध जारी रहेगा। इसी क्रम में उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर पुतला फूंका।
अभिनेत्री कंगना के दफ्तर का एक हिस्सा तोड़े जाने से मुरादाबाद के लोग भी आहत हैं। कई संगठन खुलकर इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। शुक्रवार को पूर्व पार्षद के समर्थकों ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर उनका पुतला फूंका। पूर्व पार्षद विवेक शर्मा समर्थकों के साथ लाजपत नगर में कंगना रनौत के समर्थन में सड़क पर उतर आए। वक्ताओं ने कहा सुशांत सिंह राजपूत के मौत के मामले में कंगना रनौत ने सबसे पहले सीबीआई जांच की मांग की थी। इसी वजह से महाराष्ट्र सरकार तिलमिला गई थी और अब महाराष्ट्र सरकार कंगना रनौत के खिलाफ बदले की भावना से काम कर रही है। इसका विरोध जारी रहेगा। इसी क्रम में उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर पुतला फूंका।
भुवनेश्वर। सुपर चक्रवात अम्फान के जमीन से टकराने में करीब 4 घंटे लगेंगे। मौसम विभाग के अनुसार चक्रवात दोपहर ढाई बजे के करीब पश्चिम घाट सुंदरबन के टकराया। ये 18-19 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। ओडिशा के तटीय इलाकों में हवा की रफ्तार बढ़ी है और पारादीप में बारिश के साथ 100 प्रति घंटे की रफ्तार से हवा बह रही है। हालांकि पश्चिम बंगाल में हवा की गति तेज नहीं है। संकट की स्थिति को देखते हुए ओडिशा में बालासोर और भद्रक 1. 5 लाख और पश्चिम बंगाल के 3. 3 लाख को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है। एनडीआरएफ की टीम ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों में एनडीआरएफ काम कर रही हैं। 20 टीमें ओडिशा और 19 टीमें पश्चिम बंगाल में हैं। एनडीआरएफ के डीजी एसएन प्रधान ने बताया की दोनों राज्यों में हमारा मुख्य काम लैंडफाल के बाद शुरू होगा। प्रभावित जिलों में 4-4 टीमों को तैनात किया गया है। 24 टीमें एयरलिफ्ट के लिए स्टैंडबाय में हैं। ये 15 मिनट में तैयार होकर एयरलिफ्ट हो सकती हैं। कोरोना संक्रमण के चलते एनडीआरएफ की टीमें इन क्षेत्रों में पीपीई किट पहनकर काम कर रहीं है। तेज हवाओं के चलने के कारण कई जगह पेड़ टूटकर गए है। जिन्हें एनडीआरएफ की टीम द्वारा हटाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में 5 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। वहीँ ओडिशा में 1 लाख 98 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। एनडीआरएफ का कहना है कि प्रभावित होने वाले जिलों में लोगों को एसएमएस से अलर्ट किया जा रहा है। मोबाइल कंपनियों को पर्याप्त मात्रा में डीजी सेट, जेनरेटर, पार्ट्स और पावर इक्विपमेंट तैयार रखने के लिए कहा गया है। चक्रवात से किसी मोबाइल कंपनी के टॉवर या केबल को नुकसान पहुंचा तो उपभोक्ता को दूसरी कंपनी के टॉवर से सुविधा दी जाएगी। देश में 21 साल के बाद कोई सुपर साइक्लोन आया है। 1999 में एक चक्रवात ओडिशा के तट से टकराया था। उसे साइक्लोन ओ5 बी या पारादीप साइक्लोन का नाम दिया गया था। यह बंगाल की खाड़ी में सुंदरबन के समीप पश्चिम बंगाल के दीघा और बांग्लादेश के हटिया के बीच कहीं टकराएगा। इस तूफ़ान से पश्चिम बंगाल के तीन तटीय जिले पूर्वी मिदनापुर, 24 दक्षिण और उत्तरी परगना के साथ ही हावड़ा, हुगली, पश्चिमी मिदनापुर और कोलकाता पर इसका असर नजर आएगा। वही ओडिशा के 9 जिले पुरी, गंजाम, जगतसिंहपुर, कटक, केंद्रापाड़ा, जाजपुर, गंजाम, भद्रक और बालासोर इससे प्रभावित होंगे।
भुवनेश्वर। सुपर चक्रवात अम्फान के जमीन से टकराने में करीब चार घंटाटे लगेंगे। मौसम विभाग के अनुसार चक्रवात दोपहर ढाई बजे के करीब पश्चिम घाट सुंदरबन के टकराया। ये अट्ठारह-उन्नीस किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। ओडिशा के तटीय इलाकों में हवा की रफ्तार बढ़ी है और पारादीप में बारिश के साथ एक सौ प्रति घंटे की रफ्तार से हवा बह रही है। हालांकि पश्चिम बंगाल में हवा की गति तेज नहीं है। संकट की स्थिति को देखते हुए ओडिशा में बालासोर और भद्रक एक. पाँच लाख और पश्चिम बंगाल के तीन. तीन लाख को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है। एनडीआरएफ की टीम ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों में एनडीआरएफ काम कर रही हैं। बीस टीमें ओडिशा और उन्नीस टीमें पश्चिम बंगाल में हैं। एनडीआरएफ के डीजी एसएन प्रधान ने बताया की दोनों राज्यों में हमारा मुख्य काम लैंडफाल के बाद शुरू होगा। प्रभावित जिलों में चार-चार टीमों को तैनात किया गया है। चौबीस टीमें एयरलिफ्ट के लिए स्टैंडबाय में हैं। ये पंद्रह मिनट में तैयार होकर एयरलिफ्ट हो सकती हैं। कोरोना संक्रमण के चलते एनडीआरएफ की टीमें इन क्षेत्रों में पीपीई किट पहनकर काम कर रहीं है। तेज हवाओं के चलने के कारण कई जगह पेड़ टूटकर गए है। जिन्हें एनडीआरएफ की टीम द्वारा हटाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में पाँच लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। वहीँ ओडिशा में एक लाख अट्ठानवे हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। एनडीआरएफ का कहना है कि प्रभावित होने वाले जिलों में लोगों को एसएमएस से अलर्ट किया जा रहा है। मोबाइल कंपनियों को पर्याप्त मात्रा में डीजी सेट, जेनरेटर, पार्ट्स और पावर इक्विपमेंट तैयार रखने के लिए कहा गया है। चक्रवात से किसी मोबाइल कंपनी के टॉवर या केबल को नुकसान पहुंचा तो उपभोक्ता को दूसरी कंपनी के टॉवर से सुविधा दी जाएगी। देश में इक्कीस साल के बाद कोई सुपर साइक्लोन आया है। एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में एक चक्रवात ओडिशा के तट से टकराया था। उसे साइक्लोन ओपाँच बी या पारादीप साइक्लोन का नाम दिया गया था। यह बंगाल की खाड़ी में सुंदरबन के समीप पश्चिम बंगाल के दीघा और बांग्लादेश के हटिया के बीच कहीं टकराएगा। इस तूफ़ान से पश्चिम बंगाल के तीन तटीय जिले पूर्वी मिदनापुर, चौबीस दक्षिण और उत्तरी परगना के साथ ही हावड़ा, हुगली, पश्चिमी मिदनापुर और कोलकाता पर इसका असर नजर आएगा। वही ओडिशा के नौ जिले पुरी, गंजाम, जगतसिंहपुर, कटक, केंद्रापाड़ा, जाजपुर, गंजाम, भद्रक और बालासोर इससे प्रभावित होंगे।
'चंद्रयान-2′ का लैंडर 'विक्रम' शुक्रवार और शनिवार को देर रात 1. 30 बजे चांद की सतह पर उतरना शुरू होगा। इसरो के वैज्ञानिकों के साथ-साथ पूरे विश्व के लोग इस ऐतिहासिक क्षण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसके साथ ही भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला विश्व का पहला देश बन जाएगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात चंद्रयान-2 की लैंडिंग का साक्षी बनने के लिए बेंगलुरु में इसरो के सेंटर में वैज्ञानिकों के साथ मौजूद रहेंगे, उनके साथ देशभर से चुने हुए बच्चे भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा, 'मैं भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास के असाधारण क्षण का गवाह बनने के लिए बेंगलुरु के इसरो केंद्र में आकर बेहद उत्साहित हूं। उन विशेष पलों को देखने के लिए विभिन्न राज्यों के युवा भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा भूटान के युवा भी मौजूद रहेंगे। I am extremely excited to be at the ISRO Centre in Bengaluru to witness the extraordinary moment in the history of India's space programme. Youngsters from different states will also be present to watch those special moments! There would also be youngsters from Bhutan.
'चंद्रयान-दो′ का लैंडर 'विक्रम' शुक्रवार और शनिवार को देर रात एक. तीस बजे चांद की सतह पर उतरना शुरू होगा। इसरो के वैज्ञानिकों के साथ-साथ पूरे विश्व के लोग इस ऐतिहासिक क्षण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसके साथ ही भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला विश्व का पहला देश बन जाएगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात चंद्रयान-दो की लैंडिंग का साक्षी बनने के लिए बेंगलुरु में इसरो के सेंटर में वैज्ञानिकों के साथ मौजूद रहेंगे, उनके साथ देशभर से चुने हुए बच्चे भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा, 'मैं भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास के असाधारण क्षण का गवाह बनने के लिए बेंगलुरु के इसरो केंद्र में आकर बेहद उत्साहित हूं। उन विशेष पलों को देखने के लिए विभिन्न राज्यों के युवा भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा भूटान के युवा भी मौजूद रहेंगे। I am extremely excited to be at the ISRO Centre in Bengaluru to witness the extraordinary moment in the history of India's space programme. Youngsters from different states will also be present to watch those special moments! There would also be youngsters from Bhutan.
सफदरजंग अस्पताल में एक शख्स ने अस्पताल से कूदकर खुदकुशी कर ली। वह कोरोना वायरस संदिग्ध मरीज था और आज ही सिडनी ऑस्ट्रेलिया से आया था। एयरपोर्ट से इसे अस्पताल में आज ही भर्ती कराया गया था। तनवीर सिंह नाम का ये शख्स पंजाब का रहने वाला था। दिल्ली पुलिस ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि उसे आज रात 9 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
सफदरजंग अस्पताल में एक शख्स ने अस्पताल से कूदकर खुदकुशी कर ली। वह कोरोना वायरस संदिग्ध मरीज था और आज ही सिडनी ऑस्ट्रेलिया से आया था। एयरपोर्ट से इसे अस्पताल में आज ही भर्ती कराया गया था। तनवीर सिंह नाम का ये शख्स पंजाब का रहने वाला था। दिल्ली पुलिस ने भी इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि उसे आज रात नौ बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
"बेचारी ?" सामने वाली झुग्गी में इस नई ब्याही को।पति रोज काम पर जाते बाहर से ताला ठोक जाता है जैसे उसकी दिल की रानी को कोई चोर न ले जाय पीछे से। छुटकी, बड़की को देख फिस्स से हँस दी। " उसकी नज़र से देखा जाय तो ये मेहरारू ही उसका धन है।गज़ब की सुंदर जो है ।" बड़की ने हँसी में साथ दिया। वे दोनों रोज उसकी खूबसूरत पनीली बड़ी-बड़ी आँखें छुपकर देखने का मोह नहीं छोड़ पाती हैं ।जब से वह आई है उनका नीरस जीवन सरस हो उठा है। वर्ना सारा दिन यूहीं निकल जाता है जब से पढ़ाई छुड़वाई बापू ने। " हाय ! उसके पास कितने चमकदार कपड़े और जेवर हैं।देख-देख मन ललचता है। दीदी !" " तो अम्मा और बापू से कहकर ब्याह रचवा ले अपना ,सब मिल जायेगा तुझे।" बड़की ने चुहल की। " कह तो दें दीदी ! पर तू जो बैठी है मेरे आगे ?अभी कहाँ अपन का नम्बर ?" छुटकी ने चुटकी लेते हुए एक गहरी साँस भरने का नाटक किया। " माँ ! तुम क्यों हमें ताले में बन्द कर जाती हो? " तो माँ बोली-" तू दोनों की सुरक्छा के लिए रानी बिटिया।" " लगता है दीदी ! इस नवेली का पति भी येई बोलता होगा कि रानी ! तेरी सुरक्छा के वास्ते ताला मार के जाता हूँ।" " मालूम नहीं रे ! ये मरद जाति अगर कुठरिया में बन्द कर रानी बनाये तो मुझे नहीं करना ऐसा ब्याह।पता चले इस नवेली की तरह ही सीलन भरे कमरे में बन्द कर जाए ? रानी -रानी बोल के ? काहे की रानी ?
"बेचारी ?" सामने वाली झुग्गी में इस नई ब्याही को।पति रोज काम पर जाते बाहर से ताला ठोक जाता है जैसे उसकी दिल की रानी को कोई चोर न ले जाय पीछे से। छुटकी, बड़की को देख फिस्स से हँस दी। " उसकी नज़र से देखा जाय तो ये मेहरारू ही उसका धन है।गज़ब की सुंदर जो है ।" बड़की ने हँसी में साथ दिया। वे दोनों रोज उसकी खूबसूरत पनीली बड़ी-बड़ी आँखें छुपकर देखने का मोह नहीं छोड़ पाती हैं ।जब से वह आई है उनका नीरस जीवन सरस हो उठा है। वर्ना सारा दिन यूहीं निकल जाता है जब से पढ़ाई छुड़वाई बापू ने। " हाय ! उसके पास कितने चमकदार कपड़े और जेवर हैं।देख-देख मन ललचता है। दीदी !" " तो अम्मा और बापू से कहकर ब्याह रचवा ले अपना ,सब मिल जायेगा तुझे।" बड़की ने चुहल की। " कह तो दें दीदी ! पर तू जो बैठी है मेरे आगे ?अभी कहाँ अपन का नम्बर ?" छुटकी ने चुटकी लेते हुए एक गहरी साँस भरने का नाटक किया। " माँ ! तुम क्यों हमें ताले में बन्द कर जाती हो? " तो माँ बोली-" तू दोनों की सुरक्छा के लिए रानी बिटिया।" " लगता है दीदी ! इस नवेली का पति भी येई बोलता होगा कि रानी ! तेरी सुरक्छा के वास्ते ताला मार के जाता हूँ।" " मालूम नहीं रे ! ये मरद जाति अगर कुठरिया में बन्द कर रानी बनाये तो मुझे नहीं करना ऐसा ब्याह।पता चले इस नवेली की तरह ही सीलन भरे कमरे में बन्द कर जाए ? रानी -रानी बोल के ? काहे की रानी ?
कोलकाताः हावड़ा में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, यहां तालाब से सटे एक झाड़ी के पास कंटेनरों में 24 भ्रूण पाए गए. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इन भरे हुए कंटेनरों को एक बोरी के अंदर रखा गया था. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं ये भ्रूण आसपास के नर्सिंग होम में अवैध गर्भपात के तो नहीं है. ये भ्रूण मानव मांस के छोटे टुकड़े की तरह दिखाई दे रहे थे. ये मामला सामने तब आया जब स्थानीय लोग मछली पकड़ने के लिए तालाब के पास गए थे. इस साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश में ऐसी ही एक घटना सामने आई थी जहां एक पांच महीने की बच्ची का भ्रूण तरबूज के छिलके के अंदर पाया गया, जिसे नाले में फेंक दिया गया था. ऐसा ही एक दूसरा मामला इस साल अगस्त में सामने आया था. एक कचरे के डिब्बे में प्लास्टिक की थैली में एक 4 महीने के भ्रूण को लिपटे हुए पाया गया था. इस घटना के बारे में जब स्थानीय लोगों को पता चला तो उन्होंने पुलिस से संपर्क किया.
कोलकाताः हावड़ा में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, यहां तालाब से सटे एक झाड़ी के पास कंटेनरों में चौबीस भ्रूण पाए गए. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इन भरे हुए कंटेनरों को एक बोरी के अंदर रखा गया था. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं ये भ्रूण आसपास के नर्सिंग होम में अवैध गर्भपात के तो नहीं है. ये भ्रूण मानव मांस के छोटे टुकड़े की तरह दिखाई दे रहे थे. ये मामला सामने तब आया जब स्थानीय लोग मछली पकड़ने के लिए तालाब के पास गए थे. इस साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश में ऐसी ही एक घटना सामने आई थी जहां एक पांच महीने की बच्ची का भ्रूण तरबूज के छिलके के अंदर पाया गया, जिसे नाले में फेंक दिया गया था. ऐसा ही एक दूसरा मामला इस साल अगस्त में सामने आया था. एक कचरे के डिब्बे में प्लास्टिक की थैली में एक चार महीने के भ्रूण को लिपटे हुए पाया गया था. इस घटना के बारे में जब स्थानीय लोगों को पता चला तो उन्होंने पुलिस से संपर्क किया.
Muri: मूरी में मंगलवार को दोपहर करीब 1. 20 बजे एक ऐसी आफत आयी जो चंद सेकेंडों में ही विकराल हो गयी. यह कैसी आफत रही होगी इसका अंदाजा मलबे के उस पहाड़ को ही देख कर लग रहा था जिसका टूटा हिस्सा सिल्ली से ही दिख रहा था. लगाम (घटनास्थल) पहुंचने के बाद जो लोग दिखे उनकी आंखों में इस हादसे का खौफ अब तक बरकरार था. कुछ आगे कर उस घटना की भयावहता को बताना चाह रहे थे, तो कुछ अब भी डर के मारे चुप थे. जहां यह हादसा हुआ था वहां से मुरी स्टेशन करीब आधा किलोमीटर है. क्या हुआ वहां इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 35 फीट ऊंचा और करीब 40 इंच चौड़ा गार्ड वॉल आधा किलोमीटर तक बह कर मुरी स्टेशन पहुंच गया था. हाईवा और जेसीबी इस तरह से गिरे पड़े थे जैसे किसी बच्चे ने अपने खिलौने को बिखेर रखा हो. इतना सब कुछ सिर्फ छह सेकेंड में हुआ था. मुरी के लगाम, मारदू और कुसमाटांड़ के बीच में बनी हिंडालको कंपनी का रेड मड कास्टिक तालाब महज छह सेकेंड में तबाह हो गया. ग्रामीणों की मानें तो इसी छह सेकेंड के अंदर ही करीब 70 से 80 मजदूरों की जान उसके मलबे में फंस गयी. लंच के समय दुर्घटना घटी, नहीं तो करीब 200 लोगों की जान चली जाती. राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की टीम पहुंच चुकी है, पर राहत का काम रास्ता नहीं मिलने की वजह से 24 घंटे के बाद भी शुरू नहीं हो पाया है. ग्रामीणों के अनुसार दिन में यहां करीब 200 से 250 मजदूर ठेका के तहत काम करने पहुंचते थे. काम मेकाफेरी नामक कंपनी को मिला हुआ था. ग्रामीणों ने कहा कि फंसनेवालों की संख्या और अधिक होती अगर हादसा लंच के समय नहीं हुआ होता. प्रत्यक्षदर्शी धनंजय महतो ने बताया कि 1 बज कर 15 मिनट पर जब घटना घटी उस वक्त आसपास के ग्रामीण अपने घर चले गये थे. बंगाल से आनेवाले मजदूर अपना टिफिन लाकर वहीं खाते और आराम करते थे. उसी वक्त ये घटना घटी और छह सकेंड में ही पूरा पहाड़ गार्ड वाल के साथ बह गया. 15 मिनट के बाद जाकर धंसान रुका. हिंडाल्को भले ही किसी के हताहत होने की बात से इंकार कर रही हो, पर जांच को पहुंची प्रमंडलीय आयुक्त ग्रामीणों को कह रहीं थी कि जो लोग वहां फंसे हैं, उनकी भी जान है, समय रहते रास्ता मिलने पर जान बचायी जा सकती है. सिल्ली थाना के असुरकोडा गांव के 12 लोगों के गायब होने की बात ग्रामीण कर रहे हैं. 48 वर्षीय धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि गायब लोगों में 3 महिलाएं और 9 युवक हैं. इस मलबे के कारण दो तालाब भी भर चुके हैं, जिसमें नहा रहे ग्रामीणों के भी दब जाने की बात वे कह रहे हैं. धर्मेंद्र आगे बताते हैं कि कंपनी के लोग गांव में जाकर मामले को सामने नहीं लाने के लिए छिप कर मीटिंग कर रहे हैं. चौंकाने वाली बात ये थी कि आसपास के गांव के लोग घटनास्थल पर आने से बच रहे हैं. वे कहते हैं कि सिल्ली बहुत राजनीतिवाला गांव है. कुछ बोल कर फंसना नहीं चाहते. मलबा जहां जमा है उसके पूरब में स्वर्णरेखा नदी है, पश्चिम में रेलवे ट्रैक है. दक्षिण में लगाम गांव है और उत्तर में रांची-पुरुलिया रोड है. मलबा हटाने का फिलहाल कोई रास्ता नहीं दिख रहा है. दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल की आयुक्त शुभ्रा वर्मा घटनास्थल पर पहुंची थीं. वे ग्रामीणों से ही पूछ रहीं थी कि रास्ता किधर से दीजियेगा. साथ ही कहा कि स्टेशन को प्रभावित नहीं करना है. ग्रामीणों की मानें तो सिर्फ एक रास्ता बचता है स्वर्णरेखा नदी होकर हटाना पड़ेगा, जिससे नदी पूरी तरह से पॉल्यूटेड हो जाएगी. हिंडाल्को प्लांट का मलबा 40 साल से जमा था. ग्रामीणों ने बताया ये जितना ऊंचा अभी दिख रहा है, उससे दोगुने गड्ढे से ही चालू हुआ था. 40 साल से जमा हो रहे इस मलबे के किनारे मात्र दो साल पहले ही गार्ड वाल बनाया गया है. उसका काम अब भी चल ही रहा था. ग्रामीणों ने बताया कि सीपीसीबी ने जब कंपनी को बंद कराने के आदेश जारी किये थे, तब आइआइटी मुंबई और रुड़की से जांच करा कर बोल दिया कि 40 साल तक कुछ नहीं होगा. विडियो रिकॉर्डिंग नहीं करने की शर्त पर बताया कि कंपनी और पॉल्यूशन बोर्ड की मिलीभगत से ऐसा हुआ है. अगर वे सतर्क रहते तो ऐसी घटना नहीं होती. लगाम गांव के पास पटरी के किनारे जमा मलबा देख कर ही वीभत्स मंजर का अंदाजा लगाया जा सकता है. शुरुआत में ही एक हाईवा गिरा दिख गया. 35 फीट ऊंचा और 40 इंच चौड़ा मजबूत गार्ड वाल आधा किलोमीटर तक पहुंच गया है. मलबा तक पहुंचने से भी ग्रामीण और भीड़ डर रही है. आपस में वे बात करते हुए कह रहे हैं कि लाश तक नहीं मिल पाएगी. पौंड का मलबा आधे किलोमीटर तक फैल चुका है. जिसमें चार पांच गाड़ियां सामने से फंसी दिख रही हैं. एनडीआरएफ की टीम का कहना है कि रास्ता मिलने पर ही बचाव कार्य शुरू किया जा सकेगा. रेलवे साइडिंग पर काम करनेवाले गैंगमैन ने बताया कि यहां करीब 200 लोग हर दिन काम करने आते हैं. वे बताते हैं कि बहुत लोग फंस गये हैं. निकालना भी मुश्किल है. एक बजे से पहले होता तो 200 से अधिक लोगों की जान चली जाती. उन्होंने बताया कि ट्रैक के किनारे माल लदी मालगाड़ी खड़ी थी इसलिए मलबी पूरी पटरी तक नहीं पहुंच पाया. खाली रहने पर या पैसेंजर ट्रेन रहने पर ट्रेन को ही पलट देता. ग्रामीण और मौके पर मौजूद लोग दावा कर रहे हैं कि 48 घंटे तक राहत कार्य चालू नहीं होने पर लाश भी नहीं मिल सकेगी. मलवे में एसीड होने के वजह से तुरंत गल जाएगी. अगर मिलेगा तो सिर्फ हड्डी. लोगों का कहना है कि पहले मिट्टी हटाने के लिए रास्ता तय होगा उसके बाद मिट्टी को हटाया जाएगा. तब जाकर लाश निकलेगा जिसमें अभी देरी है. हिंडाल्को भले ही किसी के हताहत होने की बात नहीं स्वीकार कर रहा हो पर मौके पर पहुंचीं प्रमंडलीय आयुक्त लोगों से यह कह रहीं थीं कि रास्ता तो दीजिये इंसान फंसे हुए हैं, हमारी तरह उनकी भी जान है. समय रहने पर उन्हें बचाया जा सकता है. दुर्घटनास्थल पर जब हम पहुंचे तो हमें लगा था कि कंपनी के लोग वहां होंगे. हमारे वहां पहुंचते ही यह भ्रम टूट गया. तीन से चार घंटे में हमने दर्जनों ग्रामीण से बात की. मौके पर ग्रामीण एसपी, सिल्ली डीएसपी और प्रमंडलीय आयुक्त पहुंची थीं. एनडीआरएफ की टीम भी पहुंची थी. दूर दराज के ग्रामीण भी इस मंजर को देखने पहुंचे पर कंपनी के एक भी कर्मचारी और अधिकारी का वहां नहीं पहुंचना हमें चौंका रहा था. कंपनी के अलावा ठेका कंपनी के एक भी लोग मौजूद नहीं थे.
Muri: मूरी में मंगलवार को दोपहर करीब एक. बीस बजे एक ऐसी आफत आयी जो चंद सेकेंडों में ही विकराल हो गयी. यह कैसी आफत रही होगी इसका अंदाजा मलबे के उस पहाड़ को ही देख कर लग रहा था जिसका टूटा हिस्सा सिल्ली से ही दिख रहा था. लगाम पहुंचने के बाद जो लोग दिखे उनकी आंखों में इस हादसे का खौफ अब तक बरकरार था. कुछ आगे कर उस घटना की भयावहता को बताना चाह रहे थे, तो कुछ अब भी डर के मारे चुप थे. जहां यह हादसा हुआ था वहां से मुरी स्टेशन करीब आधा किलोमीटर है. क्या हुआ वहां इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पैंतीस फीट ऊंचा और करीब चालीस इंच चौड़ा गार्ड वॉल आधा किलोमीटर तक बह कर मुरी स्टेशन पहुंच गया था. हाईवा और जेसीबी इस तरह से गिरे पड़े थे जैसे किसी बच्चे ने अपने खिलौने को बिखेर रखा हो. इतना सब कुछ सिर्फ छह सेकेंड में हुआ था. मुरी के लगाम, मारदू और कुसमाटांड़ के बीच में बनी हिंडालको कंपनी का रेड मड कास्टिक तालाब महज छह सेकेंड में तबाह हो गया. ग्रामीणों की मानें तो इसी छह सेकेंड के अंदर ही करीब सत्तर से अस्सी मजदूरों की जान उसके मलबे में फंस गयी. लंच के समय दुर्घटना घटी, नहीं तो करीब दो सौ लोगों की जान चली जाती. राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की टीम पहुंच चुकी है, पर राहत का काम रास्ता नहीं मिलने की वजह से चौबीस घंटाटे के बाद भी शुरू नहीं हो पाया है. ग्रामीणों के अनुसार दिन में यहां करीब दो सौ से दो सौ पचास मजदूर ठेका के तहत काम करने पहुंचते थे. काम मेकाफेरी नामक कंपनी को मिला हुआ था. ग्रामीणों ने कहा कि फंसनेवालों की संख्या और अधिक होती अगर हादसा लंच के समय नहीं हुआ होता. प्रत्यक्षदर्शी धनंजय महतो ने बताया कि एक बज कर पंद्रह मिनट पर जब घटना घटी उस वक्त आसपास के ग्रामीण अपने घर चले गये थे. बंगाल से आनेवाले मजदूर अपना टिफिन लाकर वहीं खाते और आराम करते थे. उसी वक्त ये घटना घटी और छह सकेंड में ही पूरा पहाड़ गार्ड वाल के साथ बह गया. पंद्रह मिनट के बाद जाकर धंसान रुका. हिंडाल्को भले ही किसी के हताहत होने की बात से इंकार कर रही हो, पर जांच को पहुंची प्रमंडलीय आयुक्त ग्रामीणों को कह रहीं थी कि जो लोग वहां फंसे हैं, उनकी भी जान है, समय रहते रास्ता मिलने पर जान बचायी जा सकती है. सिल्ली थाना के असुरकोडा गांव के बारह लोगों के गायब होने की बात ग्रामीण कर रहे हैं. अड़तालीस वर्षीय धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि गायब लोगों में तीन महिलाएं और नौ युवक हैं. इस मलबे के कारण दो तालाब भी भर चुके हैं, जिसमें नहा रहे ग्रामीणों के भी दब जाने की बात वे कह रहे हैं. धर्मेंद्र आगे बताते हैं कि कंपनी के लोग गांव में जाकर मामले को सामने नहीं लाने के लिए छिप कर मीटिंग कर रहे हैं. चौंकाने वाली बात ये थी कि आसपास के गांव के लोग घटनास्थल पर आने से बच रहे हैं. वे कहते हैं कि सिल्ली बहुत राजनीतिवाला गांव है. कुछ बोल कर फंसना नहीं चाहते. मलबा जहां जमा है उसके पूरब में स्वर्णरेखा नदी है, पश्चिम में रेलवे ट्रैक है. दक्षिण में लगाम गांव है और उत्तर में रांची-पुरुलिया रोड है. मलबा हटाने का फिलहाल कोई रास्ता नहीं दिख रहा है. दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल की आयुक्त शुभ्रा वर्मा घटनास्थल पर पहुंची थीं. वे ग्रामीणों से ही पूछ रहीं थी कि रास्ता किधर से दीजियेगा. साथ ही कहा कि स्टेशन को प्रभावित नहीं करना है. ग्रामीणों की मानें तो सिर्फ एक रास्ता बचता है स्वर्णरेखा नदी होकर हटाना पड़ेगा, जिससे नदी पूरी तरह से पॉल्यूटेड हो जाएगी. हिंडाल्को प्लांट का मलबा चालीस साल से जमा था. ग्रामीणों ने बताया ये जितना ऊंचा अभी दिख रहा है, उससे दोगुने गड्ढे से ही चालू हुआ था. चालीस साल से जमा हो रहे इस मलबे के किनारे मात्र दो साल पहले ही गार्ड वाल बनाया गया है. उसका काम अब भी चल ही रहा था. ग्रामीणों ने बताया कि सीपीसीबी ने जब कंपनी को बंद कराने के आदेश जारी किये थे, तब आइआइटी मुंबई और रुड़की से जांच करा कर बोल दिया कि चालीस साल तक कुछ नहीं होगा. विडियो रिकॉर्डिंग नहीं करने की शर्त पर बताया कि कंपनी और पॉल्यूशन बोर्ड की मिलीभगत से ऐसा हुआ है. अगर वे सतर्क रहते तो ऐसी घटना नहीं होती. लगाम गांव के पास पटरी के किनारे जमा मलबा देख कर ही वीभत्स मंजर का अंदाजा लगाया जा सकता है. शुरुआत में ही एक हाईवा गिरा दिख गया. पैंतीस फीट ऊंचा और चालीस इंच चौड़ा मजबूत गार्ड वाल आधा किलोमीटर तक पहुंच गया है. मलबा तक पहुंचने से भी ग्रामीण और भीड़ डर रही है. आपस में वे बात करते हुए कह रहे हैं कि लाश तक नहीं मिल पाएगी. पौंड का मलबा आधे किलोमीटर तक फैल चुका है. जिसमें चार पांच गाड़ियां सामने से फंसी दिख रही हैं. एनडीआरएफ की टीम का कहना है कि रास्ता मिलने पर ही बचाव कार्य शुरू किया जा सकेगा. रेलवे साइडिंग पर काम करनेवाले गैंगमैन ने बताया कि यहां करीब दो सौ लोग हर दिन काम करने आते हैं. वे बताते हैं कि बहुत लोग फंस गये हैं. निकालना भी मुश्किल है. एक बजे से पहले होता तो दो सौ से अधिक लोगों की जान चली जाती. उन्होंने बताया कि ट्रैक के किनारे माल लदी मालगाड़ी खड़ी थी इसलिए मलबी पूरी पटरी तक नहीं पहुंच पाया. खाली रहने पर या पैसेंजर ट्रेन रहने पर ट्रेन को ही पलट देता. ग्रामीण और मौके पर मौजूद लोग दावा कर रहे हैं कि अड़तालीस घंटाटे तक राहत कार्य चालू नहीं होने पर लाश भी नहीं मिल सकेगी. मलवे में एसीड होने के वजह से तुरंत गल जाएगी. अगर मिलेगा तो सिर्फ हड्डी. लोगों का कहना है कि पहले मिट्टी हटाने के लिए रास्ता तय होगा उसके बाद मिट्टी को हटाया जाएगा. तब जाकर लाश निकलेगा जिसमें अभी देरी है. हिंडाल्को भले ही किसी के हताहत होने की बात नहीं स्वीकार कर रहा हो पर मौके पर पहुंचीं प्रमंडलीय आयुक्त लोगों से यह कह रहीं थीं कि रास्ता तो दीजिये इंसान फंसे हुए हैं, हमारी तरह उनकी भी जान है. समय रहने पर उन्हें बचाया जा सकता है. दुर्घटनास्थल पर जब हम पहुंचे तो हमें लगा था कि कंपनी के लोग वहां होंगे. हमारे वहां पहुंचते ही यह भ्रम टूट गया. तीन से चार घंटे में हमने दर्जनों ग्रामीण से बात की. मौके पर ग्रामीण एसपी, सिल्ली डीएसपी और प्रमंडलीय आयुक्त पहुंची थीं. एनडीआरएफ की टीम भी पहुंची थी. दूर दराज के ग्रामीण भी इस मंजर को देखने पहुंचे पर कंपनी के एक भी कर्मचारी और अधिकारी का वहां नहीं पहुंचना हमें चौंका रहा था. कंपनी के अलावा ठेका कंपनी के एक भी लोग मौजूद नहीं थे.
हिन्दी फिल्मों के सुपर सितारे सलमान खान अपनी आगामी फिल्म ट्यूबलाइट को लेकर काफी सतर्क नजर आ रहे हैं। वे अपनी फिल्म को आमिर खान की दंगल से ज्यादा बडी साबित करने की पुरजोर कोशिशों में हैं। उनकी चाह है कि ट्यूबलाइट बॉक्स ऑफिस पर 400 करोड का कारोबार करने में सफल हो। वे इस फिल्म को लेकर कोई भी रिस्क नहीं उठाना चाहते। साल में सिर्फ एक या दो फिल्म करने वाले सलमान खान की फिल्म ट्यूबलाईट इस ईद पर प्रदर्शित होने वाली है। इस फिल्म के प्रचार-प्रसार के लिए सलमान ने अपनी कमर कस ली थी। लेकिन जब सलमान खान को इस बात का पता चला कि अप्रैल के अंतिम दिनों में राजामौली की फिल्म बाहुबली-2 का प्रदर्शन होने जा रहा है, उन्होंने अपनी फिल्म के प्रचार करने की तारीख टाल दी। सलमान अपनी फिल्म का प्रमोशन एक महीने पहले से ही करना चाहते है पर अब वे इस योजना में फेरबदल कर रहे है। दरअसल सलमान खान को पता चला है कि, उन्ही दिनों साउथ की सुपर डुपर हिट फिल्म 'बाहुबली 2' भी रिलीज हो रही है। ऐसे में सलमान इतनी बडी फिल्म के साथ अपनी फिल्म सफलता पर कोई भी जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं। सलमान खान अपनी फिल्म के ट्रेलर को बाहुबली-2 के प्रदर्शित होने के बाद लांच करेंगे। सलमान नहीं चाहते कि उनकी फिल्म 'ट्यूबलाइट' भारी-भरकम बाहुबली के सामने दब जाए और प्रदर्शन के वक्त वह बॉक्स ऑफिस पर मात खा जाये। सलमान खान ने इस बात का कडा निर्देश अपनी मार्केटिंग टीम को दे भी दिया है। अभिनेता प्रभास स्टारर फिल्म 'बाहुबली 2' का क्रेज दर्शकों में तेजी से बढ रहा है। इस बात का बखूबी अंदाजा सलमान खान को भी है। वैसे सचाई है भी कि, 'बाहुबली 2' के रिलीजिंग के बाद ही दर्शक सलमान को और उनकी फिल्म 'ट्यूबलाईट' को ज्यादा अटेंशन देंगे।
हिन्दी फिल्मों के सुपर सितारे सलमान खान अपनी आगामी फिल्म ट्यूबलाइट को लेकर काफी सतर्क नजर आ रहे हैं। वे अपनी फिल्म को आमिर खान की दंगल से ज्यादा बडी साबित करने की पुरजोर कोशिशों में हैं। उनकी चाह है कि ट्यूबलाइट बॉक्स ऑफिस पर चार सौ करोड का कारोबार करने में सफल हो। वे इस फिल्म को लेकर कोई भी रिस्क नहीं उठाना चाहते। साल में सिर्फ एक या दो फिल्म करने वाले सलमान खान की फिल्म ट्यूबलाईट इस ईद पर प्रदर्शित होने वाली है। इस फिल्म के प्रचार-प्रसार के लिए सलमान ने अपनी कमर कस ली थी। लेकिन जब सलमान खान को इस बात का पता चला कि अप्रैल के अंतिम दिनों में राजामौली की फिल्म बाहुबली-दो का प्रदर्शन होने जा रहा है, उन्होंने अपनी फिल्म के प्रचार करने की तारीख टाल दी। सलमान अपनी फिल्म का प्रमोशन एक महीने पहले से ही करना चाहते है पर अब वे इस योजना में फेरबदल कर रहे है। दरअसल सलमान खान को पता चला है कि, उन्ही दिनों साउथ की सुपर डुपर हिट फिल्म 'बाहुबली दो' भी रिलीज हो रही है। ऐसे में सलमान इतनी बडी फिल्म के साथ अपनी फिल्म सफलता पर कोई भी जोखिम नहीं उठाना चाहते हैं। सलमान खान अपनी फिल्म के ट्रेलर को बाहुबली-दो के प्रदर्शित होने के बाद लांच करेंगे। सलमान नहीं चाहते कि उनकी फिल्म 'ट्यूबलाइट' भारी-भरकम बाहुबली के सामने दब जाए और प्रदर्शन के वक्त वह बॉक्स ऑफिस पर मात खा जाये। सलमान खान ने इस बात का कडा निर्देश अपनी मार्केटिंग टीम को दे भी दिया है। अभिनेता प्रभास स्टारर फिल्म 'बाहुबली दो' का क्रेज दर्शकों में तेजी से बढ रहा है। इस बात का बखूबी अंदाजा सलमान खान को भी है। वैसे सचाई है भी कि, 'बाहुबली दो' के रिलीजिंग के बाद ही दर्शक सलमान को और उनकी फिल्म 'ट्यूबलाईट' को ज्यादा अटेंशन देंगे।
*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
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श्रीनगरः केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष और पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने धारा 370 को लेकर एक बार फिर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि धारा 370, अनुच्छेद 35 (ए) और डोमिसाइल कानून विदेश द्वारा नहीं दिए गए थे. इससे पहले कि देश हमें ये देता, महाराजा इसे जम्मू-कश्मीर के लोगों की पहचान की रक्षा के लिए लेकर आए थे. जब लोगों ने भारत का हिस्सा बनने का निर्णय लिया, तो उन्होंने कहा कि हमारे पास ये कानून हैं जिन्हें कायम रखना है. पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू में इतनी महंगाई है कि यहां के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं, बिजली नहीं है, बेरोजगारी रोज़ाना बढ़ रही है. जम्मू में माइनिंग बंद है. वे कहते थे कि जम्मू में दूध की नदियां बहेंगी. जबकि यहां इतनी समस्याएं हैं. परिसीमन पूरे देश में 2026 में हो रहा है तो यहां क्या जल्दी है. पीएम मोदी 20 मिनट पार्टी से मिले तो क्या 20 मिनट में निर्णय हो सकता है? केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में परिसीमन प्रक्रिया और चुनावी मुद्दे को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी की नेताओं के साथ बैठक के बाद महबूबा मुफ्ती निरंतर बयानबाजी करती नजर आ रही हैं. इससे पहले भी उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर के लोग 5 अगस्त 2019 के बाद काफी दिक्कत में हैं. वे गुस्से में हैं, परेशान हैं और भावनात्मक रूप से टूट चुके हैं. वे अपमानित महसूस कर रहे हैं.
श्रीनगरः केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने धारा तीन सौ सत्तर को लेकर एक बार फिर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि धारा तीन सौ सत्तर, अनुच्छेद पैंतीस और डोमिसाइल कानून विदेश द्वारा नहीं दिए गए थे. इससे पहले कि देश हमें ये देता, महाराजा इसे जम्मू-कश्मीर के लोगों की पहचान की रक्षा के लिए लेकर आए थे. जब लोगों ने भारत का हिस्सा बनने का निर्णय लिया, तो उन्होंने कहा कि हमारे पास ये कानून हैं जिन्हें कायम रखना है. पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू में इतनी महंगाई है कि यहां के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं, बिजली नहीं है, बेरोजगारी रोज़ाना बढ़ रही है. जम्मू में माइनिंग बंद है. वे कहते थे कि जम्मू में दूध की नदियां बहेंगी. जबकि यहां इतनी समस्याएं हैं. परिसीमन पूरे देश में दो हज़ार छब्बीस में हो रहा है तो यहां क्या जल्दी है. पीएम मोदी बीस मिनट पार्टी से मिले तो क्या बीस मिनट में निर्णय हो सकता है? केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में परिसीमन प्रक्रिया और चुनावी मुद्दे को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी की नेताओं के साथ बैठक के बाद महबूबा मुफ्ती निरंतर बयानबाजी करती नजर आ रही हैं. इससे पहले भी उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर के लोग पाँच अगस्त दो हज़ार उन्नीस के बाद काफी दिक्कत में हैं. वे गुस्से में हैं, परेशान हैं और भावनात्मक रूप से टूट चुके हैं. वे अपमानित महसूस कर रहे हैं.
सेलिब्रिटीज लोगों की आए दिन किसी न किसी बात को लेकर चर्चा होती रहती है। और वहीं आपकी और हमारी आदतों के बारे कोई चर्चा नहीं होती क्योंकि हम आम इंसान है, मगर सेलिब्रिटी जो होते हैं वह लोगों के रोल मॉडल होते हैं, तो उनकी हर छोटी-बड़ी बात लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाती हैं। चाहे वह उनका स्टाइल हो या फिर कोई आदत ही क्यों न हो। हम बान कर रहे हैं इन सितारों के सोने की, इनके सोने के भी कुछ खास तरीके होते हैं। वैसे तो हर कोई सोते समय कंफर्टेबल कपड़े पहनना पसंद करता है, मगर आपके कुछ फेवरेट सितारों को बिना कपड़ों के मतलब नग्न सोना पसंद है। पूनम पांडे : हॉट पूनम पांडे अक्सर अपनी उट पटांग हरकतों को लेकर अक्सर सुर्खियों बनी रहती हैं। वहीं सेक्सी फोटो से लोगों का ध्यान खींचने वाली पूनम को बिना कपड़ों के ही सोना पसंद है। उनके मुताबिक, सोते समय उन्हें अपने शरीर पर एक कपड़ा रखना भी अच्छा नहीं लगता। वैसे सोना तो दूर की बात है जगते हि वक्त वह कैसे कपड़े पहनती हैं सबको पता है तभी तो उनके बदन पर अक्सर नाम मात्र के ही कपड़े नजर आते हैं। जैकलीन फर्नांडीज : सेक्सी जैकलीन का भी जवाब नहीं है। लडक़े श्रीलंकन ब्यूटी जैकलीन की सेक्सी टांगों के दीवाने हैं, उन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई है। जैकलीन ने इंटरव्यू में अपनी एक खास आदत का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें बहुत कम कपड़ों सोने को कह दिया जाए तो वो सारी रात सो नहीं पाएंगी। उन्हें बिना कपड़े के सोना पसंद है। कंगना रनौत : कंगना रनौत को भी न्यूड होकर सोना पसंद है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि यदि वो कपड़े पहन कर सोती हैं तो उन्हें नींद ही नहीं आती। सनी लियॉन : सनी लियोनी भी अगर कपड़े पहनकर सोती हैं तो उन्हें नींद नहीं आती। उनका कहना है कि यदि कोई उन्हें कपड़े पहनकर सोने के लिए कह दे तो वे सारी रात सो नहीं पाएंगी। वैसे लडक़ों को वह कम कपड़ों में ही अच्छी लगती है। राखी सावंत : अक्सर ऊट पटाक बयान और बेमतलब की हरकतों के कारण सुर्खियों में रहने वाली राखी सांवत भी बिना कपड़ों के सोती हैं। इन्हें कपड़ों के साथ सोना अच्छा नहीं लगता। जॉन अब्राहम : ऐसी हीरोइनों के साथ साथ बॉलीवुड के इस डैशिंग हीरो को भी सोते समय कपड़े पहनना पसंद नहीं है। काफी समय पहले हॉटस्टार पर प्रकाशित हुए एक शो के बीच जब उनसे सोने को लेकर सवाल किया गया था। तब जॉन ने कहा था कि उन्हें न्यूड सोना अच्छा लगता है। हमको और आपको ये सब सुनकर बड़ा अजीब लगता होगा कि ये कैसे सितारे हैं जो नग्न सोना पसंद करते हैं , तो भाई लगे इससे इनको क्या फर्क पडऩे वाला है ये तो इनके लिए आराम का मामला है और इनके आराम में खलल डालने का हक किसी को नहीं है।
सेलिब्रिटीज लोगों की आए दिन किसी न किसी बात को लेकर चर्चा होती रहती है। और वहीं आपकी और हमारी आदतों के बारे कोई चर्चा नहीं होती क्योंकि हम आम इंसान है, मगर सेलिब्रिटी जो होते हैं वह लोगों के रोल मॉडल होते हैं, तो उनकी हर छोटी-बड़ी बात लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाती हैं। चाहे वह उनका स्टाइल हो या फिर कोई आदत ही क्यों न हो। हम बान कर रहे हैं इन सितारों के सोने की, इनके सोने के भी कुछ खास तरीके होते हैं। वैसे तो हर कोई सोते समय कंफर्टेबल कपड़े पहनना पसंद करता है, मगर आपके कुछ फेवरेट सितारों को बिना कपड़ों के मतलब नग्न सोना पसंद है। पूनम पांडे : हॉट पूनम पांडे अक्सर अपनी उट पटांग हरकतों को लेकर अक्सर सुर्खियों बनी रहती हैं। वहीं सेक्सी फोटो से लोगों का ध्यान खींचने वाली पूनम को बिना कपड़ों के ही सोना पसंद है। उनके मुताबिक, सोते समय उन्हें अपने शरीर पर एक कपड़ा रखना भी अच्छा नहीं लगता। वैसे सोना तो दूर की बात है जगते हि वक्त वह कैसे कपड़े पहनती हैं सबको पता है तभी तो उनके बदन पर अक्सर नाम मात्र के ही कपड़े नजर आते हैं। जैकलीन फर्नांडीज : सेक्सी जैकलीन का भी जवाब नहीं है। लडक़े श्रीलंकन ब्यूटी जैकलीन की सेक्सी टांगों के दीवाने हैं, उन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई है। जैकलीन ने इंटरव्यू में अपनी एक खास आदत का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्हें बहुत कम कपड़ों सोने को कह दिया जाए तो वो सारी रात सो नहीं पाएंगी। उन्हें बिना कपड़े के सोना पसंद है। कंगना रनौत : कंगना रनौत को भी न्यूड होकर सोना पसंद है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि यदि वो कपड़े पहन कर सोती हैं तो उन्हें नींद ही नहीं आती। सनी लियॉन : सनी लियोनी भी अगर कपड़े पहनकर सोती हैं तो उन्हें नींद नहीं आती। उनका कहना है कि यदि कोई उन्हें कपड़े पहनकर सोने के लिए कह दे तो वे सारी रात सो नहीं पाएंगी। वैसे लडक़ों को वह कम कपड़ों में ही अच्छी लगती है। राखी सावंत : अक्सर ऊट पटाक बयान और बेमतलब की हरकतों के कारण सुर्खियों में रहने वाली राखी सांवत भी बिना कपड़ों के सोती हैं। इन्हें कपड़ों के साथ सोना अच्छा नहीं लगता। जॉन अब्राहम : ऐसी हीरोइनों के साथ साथ बॉलीवुड के इस डैशिंग हीरो को भी सोते समय कपड़े पहनना पसंद नहीं है। काफी समय पहले हॉटस्टार पर प्रकाशित हुए एक शो के बीच जब उनसे सोने को लेकर सवाल किया गया था। तब जॉन ने कहा था कि उन्हें न्यूड सोना अच्छा लगता है। हमको और आपको ये सब सुनकर बड़ा अजीब लगता होगा कि ये कैसे सितारे हैं जो नग्न सोना पसंद करते हैं , तो भाई लगे इससे इनको क्या फर्क पडऩे वाला है ये तो इनके लिए आराम का मामला है और इनके आराम में खलल डालने का हक किसी को नहीं है।
अगर आप गार्डनिंग का शौक रखते हैं, तो केले के छिलके को यूं ही फेंकने की गलती कभी ना करें. केला एक ऐसा फल है, जिसे सेहत के लिए बेहद ही लाभकारी माना गया है. पोटेशियम का पावरहाउस यह फल बच्चों से लेकर बूढ़ों तक हर किसी को जरूर खाना चाहिए. लेकिन हम केला तो खा लेती हैं और उसका छिलका यूं ही कचरे के डिब्बे में फेंक देती हैं. केले के छिलकों को गार्डन में इस्तेमाल करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप उससे खाद के रूप में इस्तेमाल करें. बस आपको इतना करना है कि आप केले के छिलके को पानी में उबालें और फिर उसे तीन-चार दिन के लिए ऐसे ही छोड़ दें. आप चाहें तो पानी में केले के छिलकों को ऐसे भी रखकर छोड़ सकती हैं. तीन-चार दिन में नेचुरल फर्टिलाइजर तैयार हो जाएगा. इसके बाद आप इसे अपने गार्डन एरिया में इस्तेमाल करें.
अगर आप गार्डनिंग का शौक रखते हैं, तो केले के छिलके को यूं ही फेंकने की गलती कभी ना करें. केला एक ऐसा फल है, जिसे सेहत के लिए बेहद ही लाभकारी माना गया है. पोटेशियम का पावरहाउस यह फल बच्चों से लेकर बूढ़ों तक हर किसी को जरूर खाना चाहिए. लेकिन हम केला तो खा लेती हैं और उसका छिलका यूं ही कचरे के डिब्बे में फेंक देती हैं. केले के छिलकों को गार्डन में इस्तेमाल करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप उससे खाद के रूप में इस्तेमाल करें. बस आपको इतना करना है कि आप केले के छिलके को पानी में उबालें और फिर उसे तीन-चार दिन के लिए ऐसे ही छोड़ दें. आप चाहें तो पानी में केले के छिलकों को ऐसे भी रखकर छोड़ सकती हैं. तीन-चार दिन में नेचुरल फर्टिलाइजर तैयार हो जाएगा. इसके बाद आप इसे अपने गार्डन एरिया में इस्तेमाल करें.
नई दिल्लीः- आदित्य चोपड़ा के निर्देशन में बनने वाली फिल्म 'बेफिक्रे' इस साल 9 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस फिल्म में रणवीर सिंह और वाणी कपूर मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। इस चर्चित फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा बुधवार को रणवीर और वाणी ने एक वीडियो के जरिए की है। इस वीडियो को यशराज फिल्म (वाईआरएफ) के आधिकारिक हैंडल पर जारी किया गया। इस 30 सेकंड के वीडियो में वाणी फ्रेंच भाषा में फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा कर रही हैं, जबकि रणवीर इसका अनुवाद हिन्दी में करते हुए नजर आ रहे हैं। 'बेफिक्रे' के बारे में रणवीर ने पहले बताया था कि, "मैं खुश हूं कि मैं आदित्य सर के साथ उनकी नई कहानी पर काम कर रहा हूं। उनकी फिल्मों में हमेशा कुछ नया होता है। " बताया जा रहा है कि, आदित्य करीब सात के साल बाद इस फिल्म से निर्देशन के क्षेत्र में वापसी कर रहे हैं। उन्होंने आखिरी बार वर्ष 2008 में आई शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा अभिनित फिल्म 'रब ने बना दी जोड़ी' का निर्देशित किया था। आदित्य ने अपने पिता यश चोपड़ा के जन्मदिन 27 सितम्बर को इस बात की घोषणा की थी कि, वह फिल्म 'बेफिक्रे' का निर्देशन करने वाले हैं। यह पहली बार होगा कि जब आदित्य चोपड़ा किसी ऐसी फिल्म का निर्देशन करने जा रहे हैं, जिसमें मुख्य भूमिका में शाहरुख खान नहीं हैं। आदित्य 'दिलवाले दुल्हानिया ले जाएगें', 'मोहब्बतें' और 'रब ने बनी दी जोड़ी' जैसी बेहतरीन फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं।
नई दिल्लीः- आदित्य चोपड़ा के निर्देशन में बनने वाली फिल्म 'बेफिक्रे' इस साल नौ दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस फिल्म में रणवीर सिंह और वाणी कपूर मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। इस चर्चित फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा बुधवार को रणवीर और वाणी ने एक वीडियो के जरिए की है। इस वीडियो को यशराज फिल्म के आधिकारिक हैंडल पर जारी किया गया। इस तीस सेकंड के वीडियो में वाणी फ्रेंच भाषा में फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा कर रही हैं, जबकि रणवीर इसका अनुवाद हिन्दी में करते हुए नजर आ रहे हैं। 'बेफिक्रे' के बारे में रणवीर ने पहले बताया था कि, "मैं खुश हूं कि मैं आदित्य सर के साथ उनकी नई कहानी पर काम कर रहा हूं। उनकी फिल्मों में हमेशा कुछ नया होता है। " बताया जा रहा है कि, आदित्य करीब सात के साल बाद इस फिल्म से निर्देशन के क्षेत्र में वापसी कर रहे हैं। उन्होंने आखिरी बार वर्ष दो हज़ार आठ में आई शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा अभिनित फिल्म 'रब ने बना दी जोड़ी' का निर्देशित किया था। आदित्य ने अपने पिता यश चोपड़ा के जन्मदिन सत्ताईस सितम्बर को इस बात की घोषणा की थी कि, वह फिल्म 'बेफिक्रे' का निर्देशन करने वाले हैं। यह पहली बार होगा कि जब आदित्य चोपड़ा किसी ऐसी फिल्म का निर्देशन करने जा रहे हैं, जिसमें मुख्य भूमिका में शाहरुख खान नहीं हैं। आदित्य 'दिलवाले दुल्हानिया ले जाएगें', 'मोहब्बतें' और 'रब ने बनी दी जोड़ी' जैसी बेहतरीन फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं।
पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ 14 मई को फेसबुक लाइव हुए और Good Luck. . GoodBye. . . कहकर कांग्रेस से अपना करीब 50 साल पुराना नाता तोड़ दिया. उन्होंने बताया कि उनकी तीन पीढ़ी कांग्रेस में रही लेकिन 'पंजे' का साथ छोड़कर उन्होंने पांचवें दिन 'कमल' हाथ में थाम लिया. बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उन्हें गुरुवार को पार्टी में शामिल कर लिया. तीन बार विधायक रह चुके सुनील जाखड़ ने 2001 में पहली बार पंजाब में विधानसभा चुनाव लड़ा था. वह 2002 से 2017 तक अबोहर विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक चुने गए. जाखड़ 2012-2017 के बीच पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे. इसके बाद वह 2017 से 2021 तक पंजाब कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) के अध्यक्ष थे. जाखड़ ने विनोद खन्ना के निधन के बाद 2017 में गुरदासपुर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा उपचुनाव भी जीता था. जाखड़ ने 2022 में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा क्योंकि उन्होंने फरवरी 2022 में चुनावी राजनीति छोड़ने की घोषणा कर दी थी. हालांकि इस साल की शुरुआत में मुख्यमंत्री के संभावित उम्मीदवारों की सूची में से उनका नाम बाहर करने के बाद जाखड़ कांग्रेस आलाकमान से नाराज चल रहे थे. - जाखड़ ने अक्टूबर 2021 में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के स्थायी आमंत्रित सदस्य के रूप में जगदीश टाइटलर्स की नियुक्ति का भी विरोध किया था. - 5 जनवरी को फिरोजपुर में प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोकने के बाद जाखड़ ने अपनी ही सरकार की आलोचना की थी. - कांग्रेस की वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी और पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी की आलोचना करने के बाद उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था. AICC के अनुशासनात्मक पैनल ने जाखड़ को पार्टी विरोधी बयानबाजी करने पर कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया था, जिससे वह बहुत आहत हुए थे. उन्होंने नोटिस जारी करने को अपमान करार दिया था. कांग्रेस की अनुशासन समिति ने 26 अप्रैल को जाखड़ के निलंबन की सिफारिश की थी. इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने 14 मई को एक फेसबुक लाइव वीडियो में कांग्रेस को अलविदा कह दिया था.
पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ चौदह मई को फेसबुक लाइव हुए और Good Luck. . GoodBye. . . कहकर कांग्रेस से अपना करीब पचास साल पुराना नाता तोड़ दिया. उन्होंने बताया कि उनकी तीन पीढ़ी कांग्रेस में रही लेकिन 'पंजे' का साथ छोड़कर उन्होंने पांचवें दिन 'कमल' हाथ में थाम लिया. बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उन्हें गुरुवार को पार्टी में शामिल कर लिया. तीन बार विधायक रह चुके सुनील जाखड़ ने दो हज़ार एक में पहली बार पंजाब में विधानसभा चुनाव लड़ा था. वह दो हज़ार दो से दो हज़ार सत्रह तक अबोहर विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक चुने गए. जाखड़ दो हज़ार बारह-दो हज़ार सत्रह के बीच पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे. इसके बाद वह दो हज़ार सत्रह से दो हज़ार इक्कीस तक पंजाब कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष थे. जाखड़ ने विनोद खन्ना के निधन के बाद दो हज़ार सत्रह में गुरदासपुर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा उपचुनाव भी जीता था. जाखड़ ने दो हज़ार बाईस में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा क्योंकि उन्होंने फरवरी दो हज़ार बाईस में चुनावी राजनीति छोड़ने की घोषणा कर दी थी. हालांकि इस साल की शुरुआत में मुख्यमंत्री के संभावित उम्मीदवारों की सूची में से उनका नाम बाहर करने के बाद जाखड़ कांग्रेस आलाकमान से नाराज चल रहे थे. - जाखड़ ने अक्टूबर दो हज़ार इक्कीस में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के स्थायी आमंत्रित सदस्य के रूप में जगदीश टाइटलर्स की नियुक्ति का भी विरोध किया था. - पाँच जनवरी को फिरोजपुर में प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रोकने के बाद जाखड़ ने अपनी ही सरकार की आलोचना की थी. - कांग्रेस की वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी और पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी की आलोचना करने के बाद उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था. AICC के अनुशासनात्मक पैनल ने जाखड़ को पार्टी विरोधी बयानबाजी करने पर कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया था, जिससे वह बहुत आहत हुए थे. उन्होंने नोटिस जारी करने को अपमान करार दिया था. कांग्रेस की अनुशासन समिति ने छब्बीस अप्रैल को जाखड़ के निलंबन की सिफारिश की थी. इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने चौदह मई को एक फेसबुक लाइव वीडियो में कांग्रेस को अलविदा कह दिया था.
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। जनता दल (यूनाइटेड) भारत का एक राजनीतिक दल है। इस राजनीतिक दल की उपस्थिति मुख्य रूप से बिहार और झारखंड में है।. लालू प्रसाद यादव (जन्मः 11 जून 1948) भारत के बिहार राज्य के राजनेता व राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष हैं। वे 1990 से 1997 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। बाद में उन्हें 2004 से 2009 तक केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार में रेल मन्त्री का कार्यभार सौंपा गया। जबकि वे 15वीं लोक सभा में सारण (बिहार) से सांसद थे उन्हें बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में रांची स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अदालत ने पांच साल कारावास की सजा सुनाई थी। इस सजा के लिए उन्हें बिरसा मुण्डा केन्द्रीय कारागार रांची में रखा गया था। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के विशेष न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रखा जबकि उन पर कथित चारा घोटाले में भ्रष्टाचार का गम्भीर आरोप सिद्ध हो चुका था। 3 अक्टूबर 2013 को न्यायालय ने उन्हें पाँच साल की कैद और पच्चीस लाख रुपये के जुर्माने की सजा दी। दो महीने तक जेल में रहने के बाद 13 दिसम्बर को लालू प्रसाद को सुप्रीम कोर्ट से बेल मिली। यादव और जनता दल यूनाइटेड नेता जगदीश शर्मा को घोटाला मामले में दोषी करार दिये जाने के बाद लोक सभा से अयोग्य ठहराया गया। इसके बाद राँची जेल में सजा भुगत रहे लालू प्रसाद यादव की लोक सभा की सदस्यता समाप्त कर दी गयी। चुनाव के नये नियमों के अनुसार लालू प्रसाद अब 11 साल तक लोक सभा चुनाव नहीं लड़ पायेंगे। लोक सभा के महासचिव ने यादव को सदन की सदस्यता के अयोग्य ठहराये जाने की अधिसूचना जारी कर दी। इस अधिसूचना के बाद संसद की सदस्यता गँवाने वाले लालू प्रसाद यादव भारतीय इतिहास में लोक सभा के पहले सांसद हो गये हैं। . जनता दल (यूनाइटेड) और लालू प्रसाद यादव आम में 2 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): नितीश कुमार, नई दिल्ली। नीतीश कुमार (जन्म १ मार्च १९५१, बख्तियारपुर, बिहार, भारत) एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो बिहार के मुख्य मंत्री हैं, 2017 के बाद से पूर्वी भारत में एक राज्य है। इससे पहले उन्होंने 2005 से 2014 तक बिहार के मुख्यमंत्री और 2015 से 2017; उन्होंने भारत सरकार के एक मंत्री के रूप में भी सेवा की। वह जनता दल यू राजनीतिक दल के प्रमुख नेताओं में से हैं। उन्होंने खुद को बिहारीओं के साथ मिलकर पिछली सरकारों से कम उम्मीदों का सामना किया, जब मुख्यमंत्री के रूप में, उनकी समाजवादी नीतियों ने 100,000 से अधिक स्कूल शिक्षकों को नियुक्त करने में लाभांश दिया, यह सुनिश्चित करना कि डॉक्टर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में काम करते हैं, गांवों के विद्युतीकरण, सड़कों पर, आधे से मादा निरक्षरता को काटने, अपराधियों पर टूटकर और औसत बिहारी की आय को दोगुना करके एक अराजक अवस्था में बदल दिया। उस अवधि के लिए अन्य राज्यों की तुलना में मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान बिहार के जीडीपी का संचयी विकास दर सर्वोच्च है। 17 मई 2014 को उन्होंने भारतीय आम चुनाव, 2014 में अपने पार्टी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी संभालने से इस्तीफा दे दिया और वह जीतन राम मांझी के पद पर रहे। हालांकि, वह बिहार में राजनीतिक संकट से फरवरी 2015 में कार्यालय में लौट आया और नवंबर 2015 की बिहार विधान सभा चुनाव,२०१५ जीता। वह 10 अप्रैल 2016 को अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित हुए। 2019 के आगामी चुनाव में सहित कई राजनेताओं लालू यादव, तेजसवी यादव और अन्य ने भारत में प्रधान मंत्री पद के लिए उन्हें प्रस्तावित किया हालांकि उन्होंने ऐसी आकांक्षाओं से इनकार किया है उन्होंने 26 जुलाई, 2017 को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में गठबंधन सहयोगी आरजेडी के बीच मतभेद के साथ फिर से इस्तीफा दे दिया था, सीबीआई द्वारा एफआईआर में उपमुख्यमंत्री और लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेजस्वी यादव के नामकरण के कारण। कुछ घंटे बाद, वह एनडीए गठबंधन में शामिल हो गए, जो इस प्रकार अब तक विरोध कर रहे थे, और विधानसभा में बहुमत हासिल कर लेते थे, अगले दिन ही मुख्यमंत्री पद का त्याग कर रहे थे। . नई दिल्ली भारत की राजधानी है। यह भारत सरकार और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के केंद्र के रूप में कार्य करता है। नई दिल्ली दिल्ली महानगर के भीतर स्थित है, और यह दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र के ग्यारह ज़िलों में से एक है। भारत पर अंग्रेज शासनकाल के दौरान सन् 1911 तक भारत की राजधानी कलकत्ता (अब कोलकाता) था। अंग्रेज शासकों ने यह महसूस किया कि देश का शासन बेहतर तरीके से चलाने के लिए कलकत्ता की जगह यदि दिल्ली को राजधानी बनाया जाए तो बेहतर होगा क्योंकि यह देश के उत्तर में है और यहां से शासन का संचालन अधिक प्रभावी होगा। इस पर विचार करने के बाद अंग्रेज महाराजा जॉर्ज पंचम ने देश की राजधानी को दिल्ली ले जाने के आदेश दे दिए। वर्ष 2011 में दिल्ली महानगर की जनसंख्या 22 लाख थी। दिल्ली की जनसंख्या उसे दुनिया में पाँचवीं सबसे अधिक आबादी वाला, और भारत का सबसे बड़ा महानगर बनाती है। क्षेत्रफल के अनुसार भी, दिल्ली दुनिया के बड़े महानगरों में से एक है। मुम्बई के बाद, वह देश का दूसरा सबसे अमीर शहर है, और दिल्ली का सकल घरेलू उत्पाद दक्षिण, पश्चिम और मध्य एशिया के शहरों में दूसरे नम्बर पर आता है। नई दिल्ली अपनी चौड़ी सड़कों, वृक्ष-अच्छादित मार्गों और देश के कई शीर्ष संस्थानो और स्थलचिह्नों के लिए जानी जाती है। 1911 के दिल्ली दरबार के दौरान, 15 दिसम्बर को शहर की नींव भारत के सम्राट, जॉर्ज पंचम ने रखी, और प्रमुख ब्रिटिश वास्तुकार सर एड्विन लुट्यन्स और सर हर्बर्ट बेकर ने इसकी रूपरेखा तैयार की। ब्रिटिश भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड इर्विन द्वारा 13 फ़रवरी 1931 को नई दिल्ली का उद्घाटन हुआ। बोलचाल की भाषा में हालाँकि दिल्ली और नयी दिल्ली यह दोनों नाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के अधिकार क्षेत्र को संदर्भित करने के लिए के प्रयोग किये जाते हैं, मगर यह दो अलग-अलग संस्था हैं और नयी दिल्ली, दिल्ली महानगर का छोटा सा हिस्सा है। . जनता दल (यूनाइटेड) 6 संबंध है और लालू प्रसाद यादव 42 है। वे आम 2 में है, समानता सूचकांक 4.17% है = 2 / (6 + 42)। यह लेख जनता दल (यूनाइटेड) और लालू प्रसाद यादव के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। जनता दल भारत का एक राजनीतिक दल है। इस राजनीतिक दल की उपस्थिति मुख्य रूप से बिहार और झारखंड में है।. लालू प्रसाद यादव भारत के बिहार राज्य के राजनेता व राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष हैं। वे एक हज़ार नौ सौ नब्बे से एक हज़ार नौ सौ सत्तानवे तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। बाद में उन्हें दो हज़ार चार से दो हज़ार नौ तक केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में रेल मन्त्री का कार्यभार सौंपा गया। जबकि वे पंद्रहवीं लोक सभा में सारण से सांसद थे उन्हें बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाला मामले में रांची स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो की अदालत ने पांच साल कारावास की सजा सुनाई थी। इस सजा के लिए उन्हें बिरसा मुण्डा केन्द्रीय कारागार रांची में रखा गया था। केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के विशेष न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रखा जबकि उन पर कथित चारा घोटाले में भ्रष्टाचार का गम्भीर आरोप सिद्ध हो चुका था। तीन अक्टूबर दो हज़ार तेरह को न्यायालय ने उन्हें पाँच साल की कैद और पच्चीस लाख रुपये के जुर्माने की सजा दी। दो महीने तक जेल में रहने के बाद तेरह दिसम्बर को लालू प्रसाद को सुप्रीम कोर्ट से बेल मिली। यादव और जनता दल यूनाइटेड नेता जगदीश शर्मा को घोटाला मामले में दोषी करार दिये जाने के बाद लोक सभा से अयोग्य ठहराया गया। इसके बाद राँची जेल में सजा भुगत रहे लालू प्रसाद यादव की लोक सभा की सदस्यता समाप्त कर दी गयी। चुनाव के नये नियमों के अनुसार लालू प्रसाद अब ग्यारह साल तक लोक सभा चुनाव नहीं लड़ पायेंगे। लोक सभा के महासचिव ने यादव को सदन की सदस्यता के अयोग्य ठहराये जाने की अधिसूचना जारी कर दी। इस अधिसूचना के बाद संसद की सदस्यता गँवाने वाले लालू प्रसाद यादव भारतीय इतिहास में लोक सभा के पहले सांसद हो गये हैं। . जनता दल और लालू प्रसाद यादव आम में दो बातें हैं : नितीश कुमार, नई दिल्ली। नीतीश कुमार एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो बिहार के मुख्य मंत्री हैं, दो हज़ार सत्रह के बाद से पूर्वी भारत में एक राज्य है। इससे पहले उन्होंने दो हज़ार पाँच से दो हज़ार चौदह तक बिहार के मुख्यमंत्री और दो हज़ार पंद्रह से दो हज़ार सत्रह; उन्होंने भारत सरकार के एक मंत्री के रूप में भी सेवा की। वह जनता दल यू राजनीतिक दल के प्रमुख नेताओं में से हैं। उन्होंने खुद को बिहारीओं के साथ मिलकर पिछली सरकारों से कम उम्मीदों का सामना किया, जब मुख्यमंत्री के रूप में, उनकी समाजवादी नीतियों ने एक सौ,शून्य से अधिक स्कूल शिक्षकों को नियुक्त करने में लाभांश दिया, यह सुनिश्चित करना कि डॉक्टर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में काम करते हैं, गांवों के विद्युतीकरण, सड़कों पर, आधे से मादा निरक्षरता को काटने, अपराधियों पर टूटकर और औसत बिहारी की आय को दोगुना करके एक अराजक अवस्था में बदल दिया। उस अवधि के लिए अन्य राज्यों की तुलना में मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान बिहार के जीडीपी का संचयी विकास दर सर्वोच्च है। सत्रह मई दो हज़ार चौदह को उन्होंने भारतीय आम चुनाव, दो हज़ार चौदह में अपने पार्टी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी संभालने से इस्तीफा दे दिया और वह जीतन राम मांझी के पद पर रहे। हालांकि, वह बिहार में राजनीतिक संकट से फरवरी दो हज़ार पंद्रह में कार्यालय में लौट आया और नवंबर दो हज़ार पंद्रह की बिहार विधान सभा चुनाव,दो हज़ार पंद्रह जीता। वह दस अप्रैल दो हज़ार सोलह को अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में निर्वाचित हुए। दो हज़ार उन्नीस के आगामी चुनाव में सहित कई राजनेताओं लालू यादव, तेजसवी यादव और अन्य ने भारत में प्रधान मंत्री पद के लिए उन्हें प्रस्तावित किया हालांकि उन्होंने ऐसी आकांक्षाओं से इनकार किया है उन्होंने छब्बीस जुलाई, दो हज़ार सत्रह को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में गठबंधन सहयोगी आरजेडी के बीच मतभेद के साथ फिर से इस्तीफा दे दिया था, सीबीआई द्वारा एफआईआर में उपमुख्यमंत्री और लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेजस्वी यादव के नामकरण के कारण। कुछ घंटे बाद, वह एनडीए गठबंधन में शामिल हो गए, जो इस प्रकार अब तक विरोध कर रहे थे, और विधानसभा में बहुमत हासिल कर लेते थे, अगले दिन ही मुख्यमंत्री पद का त्याग कर रहे थे। . नई दिल्ली भारत की राजधानी है। यह भारत सरकार और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के केंद्र के रूप में कार्य करता है। नई दिल्ली दिल्ली महानगर के भीतर स्थित है, और यह दिल्ली संघ राज्य क्षेत्र के ग्यारह ज़िलों में से एक है। भारत पर अंग्रेज शासनकाल के दौरान सन् एक हज़ार नौ सौ ग्यारह तक भारत की राजधानी कलकत्ता था। अंग्रेज शासकों ने यह महसूस किया कि देश का शासन बेहतर तरीके से चलाने के लिए कलकत्ता की जगह यदि दिल्ली को राजधानी बनाया जाए तो बेहतर होगा क्योंकि यह देश के उत्तर में है और यहां से शासन का संचालन अधिक प्रभावी होगा। इस पर विचार करने के बाद अंग्रेज महाराजा जॉर्ज पंचम ने देश की राजधानी को दिल्ली ले जाने के आदेश दे दिए। वर्ष दो हज़ार ग्यारह में दिल्ली महानगर की जनसंख्या बाईस लाख थी। दिल्ली की जनसंख्या उसे दुनिया में पाँचवीं सबसे अधिक आबादी वाला, और भारत का सबसे बड़ा महानगर बनाती है। क्षेत्रफल के अनुसार भी, दिल्ली दुनिया के बड़े महानगरों में से एक है। मुम्बई के बाद, वह देश का दूसरा सबसे अमीर शहर है, और दिल्ली का सकल घरेलू उत्पाद दक्षिण, पश्चिम और मध्य एशिया के शहरों में दूसरे नम्बर पर आता है। नई दिल्ली अपनी चौड़ी सड़कों, वृक्ष-अच्छादित मार्गों और देश के कई शीर्ष संस्थानो और स्थलचिह्नों के लिए जानी जाती है। एक हज़ार नौ सौ ग्यारह के दिल्ली दरबार के दौरान, पंद्रह दिसम्बर को शहर की नींव भारत के सम्राट, जॉर्ज पंचम ने रखी, और प्रमुख ब्रिटिश वास्तुकार सर एड्विन लुट्यन्स और सर हर्बर्ट बेकर ने इसकी रूपरेखा तैयार की। ब्रिटिश भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड इर्विन द्वारा तेरह फ़रवरी एक हज़ार नौ सौ इकतीस को नई दिल्ली का उद्घाटन हुआ। बोलचाल की भाषा में हालाँकि दिल्ली और नयी दिल्ली यह दोनों नाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के अधिकार क्षेत्र को संदर्भित करने के लिए के प्रयोग किये जाते हैं, मगर यह दो अलग-अलग संस्था हैं और नयी दिल्ली, दिल्ली महानगर का छोटा सा हिस्सा है। . जनता दल छः संबंध है और लालू प्रसाद यादव बयालीस है। वे आम दो में है, समानता सूचकांक चार.सत्रह% है = दो / । यह लेख जनता दल और लालू प्रसाद यादव के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
भूपेन हजारिका के बेटे तेज हजारिका ने नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में हाल ही में भारत रत्न सम्मान लौटाने का निर्णय लिया है. भूपेन हजारिका को 25 जनवरी को ही मोदी सरकार ने सबसे बड़े पुरस्कार से नवाजने का ऐलान किया था. नागरिकता संशोधन विधेयक पर असम सहित पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी हैं. आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी सहित भूपेन हजारिका मरणोपंरात और नानाजी देशमुख, मरणोपरांत को भारत रत्न देने का ऐलान किया था. यह पहली बार है जब एक साल में तीन लोगों को भारत रत्न दिया था. भारत रत्न के अलावा उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म भूषण और संगीत-नाटक अकादमी रत्न पुरस्कार भी मिल चुके हैं. Dear Readers, As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
भूपेन हजारिका के बेटे तेज हजारिका ने नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में हाल ही में भारत रत्न सम्मान लौटाने का निर्णय लिया है. भूपेन हजारिका को पच्चीस जनवरी को ही मोदी सरकार ने सबसे बड़े पुरस्कार से नवाजने का ऐलान किया था. नागरिकता संशोधन विधेयक पर असम सहित पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी हैं. आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी सहित भूपेन हजारिका मरणोपंरात और नानाजी देशमुख, मरणोपरांत को भारत रत्न देने का ऐलान किया था. यह पहली बार है जब एक साल में तीन लोगों को भारत रत्न दिया था. भारत रत्न के अलावा उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, पद्म भूषण और संगीत-नाटक अकादमी रत्न पुरस्कार भी मिल चुके हैं. Dear Readers, As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future. As an independent media platform, we do not take advertisements from governments and corporate houses. It is you, our readers, who have supported us on our journey to do honest and unbiased journalism. Please contribute, so that we can continue to do the same in future.
Arun Jaitley Health Highlights: पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के थिंक टैंक में शामिल दिग्गज नेता अरुण जेटली नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती हैं। सूत्रों के मुताबिक, उनकी की हालत बेहद नाजुक है, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। जेटली कार्डियो-न्यूरो सेंटर में एक्सट्रॉकोर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन (ECMO) और इंट्रा-एओर्टिक बैलून पंप (IABP) के सपोर्ट पर हैं। AIIMS सूत्रों के मुताबिक, अब उनका डायलिसिस होगा। भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सहित कई नेता पूर्व वित्त मंत्री का हालचाल जानने के लिए सोमवार को एम्स पहुंचे। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और थावरचंद गहलोत, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और पार्टी सांसद मेनका गांधी ने भी एम्स पहुंचकर जेटली की सेहत की जानकारी ली।
Arun Jaitley Health Highlights: पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के थिंक टैंक में शामिल दिग्गज नेता अरुण जेटली नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती हैं। सूत्रों के मुताबिक, उनकी की हालत बेहद नाजुक है, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। जेटली कार्डियो-न्यूरो सेंटर में एक्सट्रॉकोर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन और इंट्रा-एओर्टिक बैलून पंप के सपोर्ट पर हैं। AIIMS सूत्रों के मुताबिक, अब उनका डायलिसिस होगा। भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सहित कई नेता पूर्व वित्त मंत्री का हालचाल जानने के लिए सोमवार को एम्स पहुंचे। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और थावरचंद गहलोत, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह और पार्टी सांसद मेनका गांधी ने भी एम्स पहुंचकर जेटली की सेहत की जानकारी ली।
मध्य प्रदेश के महू में मंगलवार को एक बांध में नहाने गये 16 वर्षीय दो लड़कों की डूबने से मौत हो गई। महूः मध्य प्रदेश के महू में मंगलवार को एक बांध में नहाने गये 16 वर्षीय दो लड़कों की डूबने से मौत हो गई। बड़गोन्दा थाने के सहायक उपनिरीक्षक मुनेश यादव ने बताया कि यह घटना यहां से करीब 22 किलोमीटर दूर चोरल बांध में दोपहर में हुई। उन्होंने कहा कि लड़के अपने दोस्तों के साथ बांध में नहाने गए थे तभी जलाशय में डूबने से उनकी मौत हो गई। यादव ने बताया कि पुलिस दल मौके पर पहुंचा और होमगार्ड के गोताखोरों ने दोनों शवों को बांध से बाहर निकाला। उन्होंने कहा कि दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
मध्य प्रदेश के महू में मंगलवार को एक बांध में नहाने गये सोलह वर्षीय दो लड़कों की डूबने से मौत हो गई। महूः मध्य प्रदेश के महू में मंगलवार को एक बांध में नहाने गये सोलह वर्षीय दो लड़कों की डूबने से मौत हो गई। बड़गोन्दा थाने के सहायक उपनिरीक्षक मुनेश यादव ने बताया कि यह घटना यहां से करीब बाईस किलोग्राममीटर दूर चोरल बांध में दोपहर में हुई। उन्होंने कहा कि लड़के अपने दोस्तों के साथ बांध में नहाने गए थे तभी जलाशय में डूबने से उनकी मौत हो गई। यादव ने बताया कि पुलिस दल मौके पर पहुंचा और होमगार्ड के गोताखोरों ने दोनों शवों को बांध से बाहर निकाला। उन्होंने कहा कि दोनों शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
भगोड़े व्यवसायी मेहुल चोकसी की सुनवाई 25 जून तक के लिए स्थगित कर दी गई है। चोकसी 13,500 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) धोखाधड़ी मामले में भारत में वांछित है। भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बृहस्पतिवार को ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में नियमित सुनवाई के लिए पेश किया जाएगा। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के दो अरब डॉलर के धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी नीरव मोदी ने बृहस्पतिवार को एक विशेष अदालत से अनुरोध किया कि वह उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दें।
भगोड़े व्यवसायी मेहुल चोकसी की सुनवाई पच्चीस जून तक के लिए स्थगित कर दी गई है। चोकसी तेरह,पाँच सौ करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी मामले में भारत में वांछित है। भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बृहस्पतिवार को ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट की अदालत में नियमित सुनवाई के लिए पेश किया जाएगा। पंजाब नेशनल बैंक के दो अरब डॉलर के धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी नीरव मोदी ने बृहस्पतिवार को एक विशेष अदालत से अनुरोध किया कि वह उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दें।
दिल्ली से देवघर पहली फ्लाइट 30 जुलाई को आएगी। सप्ताह में चार दिन फ्लाइट चलेगी। इस कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल होंगे। देवघर में पीएम मोदी के दौरे को लेकर स्वागत के कड़े इंतजाम हैं। गुजरात ATS ने मुंद्रा बंदरगाह के पास 350 करोड़ रुपये से अधिक की हेरोइन जब्त की। ऐसा पहली बार नहीं है। मुंद्रा पोर्ट से पहले भी कई बार ड्रग्स पकड़े गए हैं। यह ड्रग्स की खेप अफगानिस्तान या अन्य दूसरे देशों से यहां लाई जाती है। हालांकि कड़ी चेकिंग के चलते लगातार ड्रग्स की खेप पकड़ी जा रही है। घटना के बाद ग्रामीणों में चीख पुकार मच गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर दी है। मौके पर पहुंची पुलिस लोगों को समझाने का प्रयास कर रही है। हादसे में तीन बच्चों की मौत से लोगों में हुआ है। राजधानी लखनऊ में पीएसी रिक्रूट आरक्षियों के दीक्षांत परेड समारोह में सीएम योगी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने परेड की सलामी ली और चार सर्वश्रेष्ठ परेड कमांडर को सम्मानित भी किया। राज्य में कुल 15,487 जवानों ने प्रशिक्षण समाप्त कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) मंगलवार यानी 12 जुलाई 2022 की शाम करीब 5 बजकर 20 मिनट पर पटना पहुंचेंगे। पीएम यहां 1 घंटे 45 मिनट रूकेंगे और शताब्दी स्तंभ का लोकार्पण करेंगे। वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद मामला कोर्ट में है। हिंदू पक्ष ने ट्रस्ट बनाने की घोषणा की है। श्री आदि महादेव काशी धर्मालय मुक्ति न्यास ट्रस्ट के नाम से हिन्दू पक्ष ट्रस्ट बनाएगा। हिंदू पक्ष मलदहिया विवेकनगर कॉलोनी में इस ट्रस्ट के उद्घाटन की घोषणा करेंगे। राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक गजब मामला सामने आया है। जहां एक टूरिस्ट ने हाथी के सफारी के दौरान हथिनी मुस्कान के साथ सेल्फी लेनी चाही तो उसका मूड खराब हो गया। हथिनी को इतना गुस्सा आया कि उसने दो लोगो पर हमला कर दिया। वीडियो में मुबीन के साथ की गई हरकत को लेकर बनाई गई वीडियो में एक युवक उसके साथ जबरदस्ती करते नजर आ रहा है। दूसरा युवक पास ही बाइक पर खड़ा है। एक युवक उसके साथ सड़क की ओर से आता दिखाई दे रहा है। 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के बाद शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। एकनाथ शिंदे और देवेन्द्र फडणवीस ने हाल ही में पीएम मोदी, अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। राजस्थान के पाली मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर रैगिंग का मामला सामने आया है। आरोप है कि एमबीबीएस के सीनियर छात्रों ने जुनियर स्टूडेंट की जमकर पिटाई की। यह सब एक फ्रेशर पार्टी के दौरान हुआ। एक को मुर्गा बनाकर उसे इतनी बुरी तरह पीटा कि वह बेहोश हो गया।
दिल्ली से देवघर पहली फ्लाइट तीस जुलाई को आएगी। सप्ताह में चार दिन फ्लाइट चलेगी। इस कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल होंगे। देवघर में पीएम मोदी के दौरे को लेकर स्वागत के कड़े इंतजाम हैं। गुजरात ATS ने मुंद्रा बंदरगाह के पास तीन सौ पचास करोड़ रुपये से अधिक की हेरोइन जब्त की। ऐसा पहली बार नहीं है। मुंद्रा पोर्ट से पहले भी कई बार ड्रग्स पकड़े गए हैं। यह ड्रग्स की खेप अफगानिस्तान या अन्य दूसरे देशों से यहां लाई जाती है। हालांकि कड़ी चेकिंग के चलते लगातार ड्रग्स की खेप पकड़ी जा रही है। घटना के बाद ग्रामीणों में चीख पुकार मच गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर दी है। मौके पर पहुंची पुलिस लोगों को समझाने का प्रयास कर रही है। हादसे में तीन बच्चों की मौत से लोगों में हुआ है। राजधानी लखनऊ में पीएसी रिक्रूट आरक्षियों के दीक्षांत परेड समारोह में सीएम योगी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने परेड की सलामी ली और चार सर्वश्रेष्ठ परेड कमांडर को सम्मानित भी किया। राज्य में कुल पंद्रह,चार सौ सत्तासी जवानों ने प्रशिक्षण समाप्त कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार यानी बारह जुलाई दो हज़ार बाईस की शाम करीब पाँच बजकर बीस मिनट पर पटना पहुंचेंगे। पीएम यहां एक घंटाटे पैंतालीस मिनट रूकेंगे और शताब्दी स्तंभ का लोकार्पण करेंगे। वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद मामला कोर्ट में है। हिंदू पक्ष ने ट्रस्ट बनाने की घोषणा की है। श्री आदि महादेव काशी धर्मालय मुक्ति न्यास ट्रस्ट के नाम से हिन्दू पक्ष ट्रस्ट बनाएगा। हिंदू पक्ष मलदहिया विवेकनगर कॉलोनी में इस ट्रस्ट के उद्घाटन की घोषणा करेंगे। राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक गजब मामला सामने आया है। जहां एक टूरिस्ट ने हाथी के सफारी के दौरान हथिनी मुस्कान के साथ सेल्फी लेनी चाही तो उसका मूड खराब हो गया। हथिनी को इतना गुस्सा आया कि उसने दो लोगो पर हमला कर दिया। वीडियो में मुबीन के साथ की गई हरकत को लेकर बनाई गई वीडियो में एक युवक उसके साथ जबरदस्ती करते नजर आ रहा है। दूसरा युवक पास ही बाइक पर खड़ा है। एक युवक उसके साथ सड़क की ओर से आता दिखाई दे रहा है। अट्ठारह जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के बाद शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। एकनाथ शिंदे और देवेन्द्र फडणवीस ने हाल ही में पीएम मोदी, अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। राजस्थान के पाली मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर रैगिंग का मामला सामने आया है। आरोप है कि एमबीबीएस के सीनियर छात्रों ने जुनियर स्टूडेंट की जमकर पिटाई की। यह सब एक फ्रेशर पार्टी के दौरान हुआ। एक को मुर्गा बनाकर उसे इतनी बुरी तरह पीटा कि वह बेहोश हो गया।
समस्तीपुर में प्रशासन की नाक के नीचे सजी अदालत, करोड़ी समाज का ये कैसा न्याय? जीतनराम मांझी की पार्टी 'हम' ने 26 जिलों के लिए घोषित किए जिला अध्यक्ष,देखें लिस्ट. . Phone No.
समस्तीपुर में प्रशासन की नाक के नीचे सजी अदालत, करोड़ी समाज का ये कैसा न्याय? जीतनराम मांझी की पार्टी 'हम' ने छब्बीस जिलों के लिए घोषित किए जिला अध्यक्ष,देखें लिस्ट. . Phone No.
नयी दिल्ली, 13 दिसंबर खाद्य उत्पाद महंगा होने से खुदरा मुद्रास्फीति नवंबर महीने में मामूली बढ़कर 4. 91 प्रतिशत पर पहुंच गयी। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति इस साल अक्टूबर में 4. 48 प्रतिशत और नवंबर, 2020 में 6. 93 प्रतिशत थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के अनुसार, इस साल नवंबर महीने में खाद्य मुद्रास्फीति 1. 87 प्रतिशत रही जो इससे पिछले महीने में 0. 85 प्रतिशत थी। भारतीय रिजर्व बैंक द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा तय करते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई दर पर गौर करता है। उसका मानना है कि मुद्रास्फीति का आंकड़ा चालू वित्त वर्ष की बची हुई अवधि में ऊंचा रहेगा क्योंकि तुलनात्मक आधार का प्रभाव अब प्रतिकूल हो गया है। रिजर्व बैंक के अनुसार, मुख्य मुद्रास्फीति चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में उच्चस्तर पर रहेगी। उसके बाद इसमें नरमी आएगी। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
नयी दिल्ली, तेरह दिसंबर खाद्य उत्पाद महंगा होने से खुदरा मुद्रास्फीति नवंबर महीने में मामूली बढ़कर चार. इक्यानवे प्रतिशत पर पहुंच गयी। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति इस साल अक्टूबर में चार. अड़तालीस प्रतिशत और नवंबर, दो हज़ार बीस में छः. तिरानवे प्रतिशत थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, इस साल नवंबर महीने में खाद्य मुद्रास्फीति एक. सत्तासी प्रतिशत रही जो इससे पिछले महीने में शून्य. पचासी प्रतिशत थी। भारतीय रिजर्व बैंक द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा तय करते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई दर पर गौर करता है। उसका मानना है कि मुद्रास्फीति का आंकड़ा चालू वित्त वर्ष की बची हुई अवधि में ऊंचा रहेगा क्योंकि तुलनात्मक आधार का प्रभाव अब प्रतिकूल हो गया है। रिजर्व बैंक के अनुसार, मुख्य मुद्रास्फीति चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में उच्चस्तर पर रहेगी। उसके बाद इसमें नरमी आएगी। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
धर्म डेस्कः बर्फीली हवाओं व सर्द मौसम के बीच 'सोमवती अमावस्या' के अवसर पर सोमवार को हजारों श्रद्धालुओं ने उत्तराखंड में कई जगहों पर गंगा में पवित्र डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने कड़ी सुरक्षा के बीच हरिद्वार व ऋषिकेश में गंगा घाटों पर डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने गंगा किनारे गरीबों व निराश्रितों को भिक्षा दी और पूजा-अर्चना की। हरिद्वार के हर की पौड़ी में काफी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए और नारायण शिला व कुश्वार्ट घाट में अपने करीबी दिवंगतों के लिए प्रार्थना की। भविष्यद्रष्टाओं का मानना है कि यह 'विशेष शुभ संजोग' 12 वर्ष बाद आया है। इस तरह का विशेष अवसर वर्ष 2005 में आया था। इस दिन दिवंगत हो चुके अपने करीबियों व रिश्तेदारों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। बता दें कि 18 दिसंबर की सुबह 9 बजकर 30 मिनट पर चतुर्दशी तिथि यानि अमावस्या थी। अतः पौष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या थी। इस बार अमावस्या के दिन बहुत ही दुर्लभ संयोग बन रहा था। ऐसा संय़ोग 12 साल बाद बन रहा था। इस बार सोमवती अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्ध योग बन रहा है। जिसके कारण इस दिन किया गया अच्छा काम आपको दोगुना अधिक फल देगा। बता दें कि अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध करने की परंपरा है। आज के दिन पितरों का श्राद्ध करने और कुछ उपाय करने से आपकी बहुत-सी समस्याओं का हल निकलेगा। आपकी बिजनेस संबंधी समस्याओं का हल निकलेगा। आपके कामों को तरक्की मिलेगी। आर्थिक परेशानियों से छुटकारा मिलेगा। परिवार में खुशियों का आगमन होगा। आपको अपनी मेहनत का उचित फल मिलेगा और साथ ही जीवन से अस्थिरता दूर होगी। जानिए इस दिन किया उपाय करना चाहिए।
धर्म डेस्कः बर्फीली हवाओं व सर्द मौसम के बीच 'सोमवती अमावस्या' के अवसर पर सोमवार को हजारों श्रद्धालुओं ने उत्तराखंड में कई जगहों पर गंगा में पवित्र डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने कड़ी सुरक्षा के बीच हरिद्वार व ऋषिकेश में गंगा घाटों पर डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं ने गंगा किनारे गरीबों व निराश्रितों को भिक्षा दी और पूजा-अर्चना की। हरिद्वार के हर की पौड़ी में काफी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए और नारायण शिला व कुश्वार्ट घाट में अपने करीबी दिवंगतों के लिए प्रार्थना की। भविष्यद्रष्टाओं का मानना है कि यह 'विशेष शुभ संजोग' बारह वर्ष बाद आया है। इस तरह का विशेष अवसर वर्ष दो हज़ार पाँच में आया था। इस दिन दिवंगत हो चुके अपने करीबियों व रिश्तेदारों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। बता दें कि अट्ठारह दिसंबर की सुबह नौ बजकर तीस मिनट पर चतुर्दशी तिथि यानि अमावस्या थी। अतः पौष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या थी। इस बार अमावस्या के दिन बहुत ही दुर्लभ संयोग बन रहा था। ऐसा संय़ोग बारह साल बाद बन रहा था। इस बार सोमवती अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्ध योग बन रहा है। जिसके कारण इस दिन किया गया अच्छा काम आपको दोगुना अधिक फल देगा। बता दें कि अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त श्राद्ध करने की परंपरा है। आज के दिन पितरों का श्राद्ध करने और कुछ उपाय करने से आपकी बहुत-सी समस्याओं का हल निकलेगा। आपकी बिजनेस संबंधी समस्याओं का हल निकलेगा। आपके कामों को तरक्की मिलेगी। आर्थिक परेशानियों से छुटकारा मिलेगा। परिवार में खुशियों का आगमन होगा। आपको अपनी मेहनत का उचित फल मिलेगा और साथ ही जीवन से अस्थिरता दूर होगी। जानिए इस दिन किया उपाय करना चाहिए।
प्रसव के दौरान सभी महिलाएंवे सही ढंग से और तर्कसंगत रूप से खाने की कोशिश करते हैं, एक स्वस्थ जीवन शैली का नेतृत्व करते हैं और हर संभव तरीके से अपने अजन्मे बच्चे को हर तरह की परेशानियों से बचाते हैं। लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता कि क्या प्रयास किए गए थे, अक्सर भविष्य की मां का शरीर कुछ विफलताएं देता है। इसके कई कारण हैं, समाधान भी, और हमेशा उपचार के विकल्प भी होते हैं। विभिन्न समस्याओं से जुड़े अलग-अलग समय पर गर्भावस्था के दौरान पैरों में ऐंठन। पहली तिमाही में दौरे कम पड़ते हैंबाद के समय की तुलना में अक्सर। हालांकि, वे सबसे बड़ा खतरा हैं, क्योंकि अभी आपके बच्चे के भविष्य के स्वास्थ्य और उपयोगिता की सभी नींव रखी जा रही हैं। इस अवधि के दौरान गर्भवती महिलाओं में आक्षेप अधिक बार फास्फोरस और कैल्शियम के अपर्याप्त चयापचय के कारण होता है। इसका कारण पैराथायराइड ग्रंथि का बिगड़ा हुआ काम हो सकता है। अधिक बार ऐसे आक्षेप हाथों, पैरों को कम करते हैं। यदि वे शरीर या चेहरे को ढंकते हैं, तो अनिवार्य और तत्काल अस्पताल में भर्ती होना आवश्यक है। प्रारंभिक अवधि के गर्भवती महिलाओं में पक्षाघात, ग्रंथि के लिए विशेष हार्मोनल तैयारी के साथ इलाज किया जाता है, कैल्शियम युक्त परिसरों का एक कोर्स, शरीर में विटामिन डी 2 की मात्रा में वृद्धि। गर्भावस्था के दौरान पैर की ऐंठन सबसे ज्यादा होती हैलगातार दूसरी छमाही में समस्या। इस तरह की परेशानियों के कारण कई हो सकते हैंः तंत्रिका तंतुओं पर गर्भाशय का दबाव, लंबे समय तक चलना, नींद के दौरान असहज मुद्रा, मैग्नीशियम या कैल्शियम की कमी। आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान ऐंठन रात में दिखाई देती है। ठीक है, अगर आपके बगल में एक प्यार करने वाला, देखभाल करने वाला व्यक्ति है, जो पैर की मालिश करेगा या धीरे से और धीरे से सुई से पैर को मारेगा, तो कुछ ऐसे व्यायाम किए जाएंगे जो क्रैम्प द्वारा कवर की गई मांसपेशियों से तनाव दूर करते हैं। तथ्य यह है कि इस समय के भविष्य के ममी काफी कठिन और समस्याग्रस्त होंगे, यह सब अपने दम पर करना होगा। आराम के लिए मांसपेशियों को बहुत मदद मिलती हैअंग और मूल स्थिति में लौटते हैं। तो आप आसानी से तनाव से राहत पा सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान पैर की ऐंठन को रोकना अब भी आसान है क्योंकि उन्हें ठीक किया जा सकता है। बुनियादी नियमः पक्ष पर आरामदायक आराम, अधिमानतः पैरों के साथ (उदाहरण के लिए, पैरों के निचले हिस्से के नीचे एक छोटा रोलर या कम तकिया फैलाएं), पेट के लिए एक पट्टी पहनें, 5 सेमी से अधिक ऊँची एड़ी के साथ जूते पसंद न करें, मैग्नीशियम युक्त बड़ी संख्या में उत्पादों का उपयोग करें और कैल्शियम। गर्भावस्था के दौरान दौरे पड़ सकते हैंसक्रिय या निष्क्रिय धूम्रपान, जो ऑक्सीजन के शरीर को वंचित करता है, जो जरूरी रूप से मांसपेशियों और भ्रूण के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। हाइपोक्सिया एक बहुत ही गंभीर मामला है और इसे अपनी पूरी ताकत से बचना बेहतर है, क्योंकि पर्याप्त ऑक्सीजन के बिना, बच्चे के सामान्य विकास को बाहर रखा गया है। अक्सर सड़कों से दूर, ताजी हवा में चलते हैं। वैरिकाज़ नसों के कारण भी दौरे पड़ सकते हैं।गर्भवती महिलाओं। इस स्थिति में उससे लड़ना मुश्किल है, लेकिन सबसे प्रभावी तरीका विशेष चड्डी और अंडरवियर पहनना है जो पैरों को निचोड़ते हैं और नसों को विस्तारित होने से रोकते हैं। आप के लिए किस निचोड़ने वाले बल पेंटीहोज की जरूरत है, फेलोबोलॉजिस्ट बताएगा। अधिक गंभीर मामलों में, वह उपचार लिख सकता है। मैग्नीशियम या कैल्शियम की कमी के साथ निर्धारित हैइन पदार्थों की एक बड़ी मात्रा वाले परिसर। इसके अलावा, इन ट्रेस तत्वों वाले उत्पादों को बायपास न करें। मैग्नीशियम के लिए, ये हैंः नट, समुद्री भोजन (विशेष रूप से, समुद्री केल या केल्प), सूखे फल, फलियां, दलिया, गेहूं की भूसी, आदि। डेयरी उत्पादों, हड्डियों के शोरबा, हड्डियों के साथ मछली (डिब्बाबंद भोजन), सूखे फल, सूरजमुखी के बीज और कद्दू के बीज, नट, साग, चॉकलेट (दूध की तुलना में दूध में बहुत अधिक) के दैनिक आहार में कैल्शियम को फिर से भरा जा सकता है। लेकिन ध्यान रखें कि हालांकि गर्भावस्था के दौरान शरीर भोजन की साधारण सर्विंग्स से अधिक उपयोगी चीजें लेता है, लेकिन यह अभी भी बहुत कुछ छोड़ देता है। यही कारण है कि, आक्षेप के अनंतिम और कमजोर मामलों के मामले में, भोजन मदद कर सकता है, लेकिन व्यवस्थित विकल्पों के साथ, केवल दवा समस्या को हल कर सकती है। रोगियों में गर्भावस्था के दौरान पैर में ऐंठनमिर्गी अक्सर होती है। इन महिलाओं को गर्भवती होने की सिफारिश नहीं की जाती है, क्योंकि उनकी मुख्य बीमारी एक जब्ती के दौरान एक बच्चे की हानि का कारण बन सकती है। जिन लोगों ने अभी भी बच्चे को सहन किया है वे सिजेरियन सेक्शन करते हैं।
प्रसव के दौरान सभी महिलाएंवे सही ढंग से और तर्कसंगत रूप से खाने की कोशिश करते हैं, एक स्वस्थ जीवन शैली का नेतृत्व करते हैं और हर संभव तरीके से अपने अजन्मे बच्चे को हर तरह की परेशानियों से बचाते हैं। लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता कि क्या प्रयास किए गए थे, अक्सर भविष्य की मां का शरीर कुछ विफलताएं देता है। इसके कई कारण हैं, समाधान भी, और हमेशा उपचार के विकल्प भी होते हैं। विभिन्न समस्याओं से जुड़े अलग-अलग समय पर गर्भावस्था के दौरान पैरों में ऐंठन। पहली तिमाही में दौरे कम पड़ते हैंबाद के समय की तुलना में अक्सर। हालांकि, वे सबसे बड़ा खतरा हैं, क्योंकि अभी आपके बच्चे के भविष्य के स्वास्थ्य और उपयोगिता की सभी नींव रखी जा रही हैं। इस अवधि के दौरान गर्भवती महिलाओं में आक्षेप अधिक बार फास्फोरस और कैल्शियम के अपर्याप्त चयापचय के कारण होता है। इसका कारण पैराथायराइड ग्रंथि का बिगड़ा हुआ काम हो सकता है। अधिक बार ऐसे आक्षेप हाथों, पैरों को कम करते हैं। यदि वे शरीर या चेहरे को ढंकते हैं, तो अनिवार्य और तत्काल अस्पताल में भर्ती होना आवश्यक है। प्रारंभिक अवधि के गर्भवती महिलाओं में पक्षाघात, ग्रंथि के लिए विशेष हार्मोनल तैयारी के साथ इलाज किया जाता है, कैल्शियम युक्त परिसरों का एक कोर्स, शरीर में विटामिन डी दो की मात्रा में वृद्धि। गर्भावस्था के दौरान पैर की ऐंठन सबसे ज्यादा होती हैलगातार दूसरी छमाही में समस्या। इस तरह की परेशानियों के कारण कई हो सकते हैंः तंत्रिका तंतुओं पर गर्भाशय का दबाव, लंबे समय तक चलना, नींद के दौरान असहज मुद्रा, मैग्नीशियम या कैल्शियम की कमी। आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान ऐंठन रात में दिखाई देती है। ठीक है, अगर आपके बगल में एक प्यार करने वाला, देखभाल करने वाला व्यक्ति है, जो पैर की मालिश करेगा या धीरे से और धीरे से सुई से पैर को मारेगा, तो कुछ ऐसे व्यायाम किए जाएंगे जो क्रैम्प द्वारा कवर की गई मांसपेशियों से तनाव दूर करते हैं। तथ्य यह है कि इस समय के भविष्य के ममी काफी कठिन और समस्याग्रस्त होंगे, यह सब अपने दम पर करना होगा। आराम के लिए मांसपेशियों को बहुत मदद मिलती हैअंग और मूल स्थिति में लौटते हैं। तो आप आसानी से तनाव से राहत पा सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान पैर की ऐंठन को रोकना अब भी आसान है क्योंकि उन्हें ठीक किया जा सकता है। बुनियादी नियमः पक्ष पर आरामदायक आराम, अधिमानतः पैरों के साथ , पेट के लिए एक पट्टी पहनें, पाँच सेमी से अधिक ऊँची एड़ी के साथ जूते पसंद न करें, मैग्नीशियम युक्त बड़ी संख्या में उत्पादों का उपयोग करें और कैल्शियम। गर्भावस्था के दौरान दौरे पड़ सकते हैंसक्रिय या निष्क्रिय धूम्रपान, जो ऑक्सीजन के शरीर को वंचित करता है, जो जरूरी रूप से मांसपेशियों और भ्रूण के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। हाइपोक्सिया एक बहुत ही गंभीर मामला है और इसे अपनी पूरी ताकत से बचना बेहतर है, क्योंकि पर्याप्त ऑक्सीजन के बिना, बच्चे के सामान्य विकास को बाहर रखा गया है। अक्सर सड़कों से दूर, ताजी हवा में चलते हैं। वैरिकाज़ नसों के कारण भी दौरे पड़ सकते हैं।गर्भवती महिलाओं। इस स्थिति में उससे लड़ना मुश्किल है, लेकिन सबसे प्रभावी तरीका विशेष चड्डी और अंडरवियर पहनना है जो पैरों को निचोड़ते हैं और नसों को विस्तारित होने से रोकते हैं। आप के लिए किस निचोड़ने वाले बल पेंटीहोज की जरूरत है, फेलोबोलॉजिस्ट बताएगा। अधिक गंभीर मामलों में, वह उपचार लिख सकता है। मैग्नीशियम या कैल्शियम की कमी के साथ निर्धारित हैइन पदार्थों की एक बड़ी मात्रा वाले परिसर। इसके अलावा, इन ट्रेस तत्वों वाले उत्पादों को बायपास न करें। मैग्नीशियम के लिए, ये हैंः नट, समुद्री भोजन , सूखे फल, फलियां, दलिया, गेहूं की भूसी, आदि। डेयरी उत्पादों, हड्डियों के शोरबा, हड्डियों के साथ मछली , सूखे फल, सूरजमुखी के बीज और कद्दू के बीज, नट, साग, चॉकलेट के दैनिक आहार में कैल्शियम को फिर से भरा जा सकता है। लेकिन ध्यान रखें कि हालांकि गर्भावस्था के दौरान शरीर भोजन की साधारण सर्विंग्स से अधिक उपयोगी चीजें लेता है, लेकिन यह अभी भी बहुत कुछ छोड़ देता है। यही कारण है कि, आक्षेप के अनंतिम और कमजोर मामलों के मामले में, भोजन मदद कर सकता है, लेकिन व्यवस्थित विकल्पों के साथ, केवल दवा समस्या को हल कर सकती है। रोगियों में गर्भावस्था के दौरान पैर में ऐंठनमिर्गी अक्सर होती है। इन महिलाओं को गर्भवती होने की सिफारिश नहीं की जाती है, क्योंकि उनकी मुख्य बीमारी एक जब्ती के दौरान एक बच्चे की हानि का कारण बन सकती है। जिन लोगों ने अभी भी बच्चे को सहन किया है वे सिजेरियन सेक्शन करते हैं।
पटना, दीपावली के अवसर पर गणेश-लक्ष्मी की पूजा के साथ-साथ घरौंदा और रंगोली बनाकर उसकी पूजा करने की परंपरा रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम जब चौदह वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या लौटे तो उनके आने की खुशी में अयोध्यावासियों ने अपने-अपने घरों में दीपक जलाकर उनका स्वागत किया था। लोगों ने यह माना कि अयोध्या नगरी उनके आगमन से एक बार फिर बस गई है। इसी परम्परा के कारण घरौंदा बनाकर उसे सजाने का प्रचलन बढ़ा। कार्तिक माह का आरंभ होते ही लोग अपने अपने घरों में साफ सफाई का काम शुरू कर देते हैं। इस दौरान घरों में घरौंदा बनाने का निर्माण आरंभ हो जाता है। घरौंदा 'घर' शब्द से बना है। माह के आरंभ से ही सामान्य तौर पर दीपावली के आगमन पर अविवाहित लड़कियां घरौंदा का निर्माण करती है। अविवाहित लड़कियों द्वारा इसके निर्माण के पीछे मान्यता है कि इसके निर्माण से उनका घर भरा पूरा बना रहेगा। हालांकि कई जगहों पर घरौंदा बनाने का प्रचलन दीपावली के दिन होता है।
पटना, दीपावली के अवसर पर गणेश-लक्ष्मी की पूजा के साथ-साथ घरौंदा और रंगोली बनाकर उसकी पूजा करने की परंपरा रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम जब चौदह वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या लौटे तो उनके आने की खुशी में अयोध्यावासियों ने अपने-अपने घरों में दीपक जलाकर उनका स्वागत किया था। लोगों ने यह माना कि अयोध्या नगरी उनके आगमन से एक बार फिर बस गई है। इसी परम्परा के कारण घरौंदा बनाकर उसे सजाने का प्रचलन बढ़ा। कार्तिक माह का आरंभ होते ही लोग अपने अपने घरों में साफ सफाई का काम शुरू कर देते हैं। इस दौरान घरों में घरौंदा बनाने का निर्माण आरंभ हो जाता है। घरौंदा 'घर' शब्द से बना है। माह के आरंभ से ही सामान्य तौर पर दीपावली के आगमन पर अविवाहित लड़कियां घरौंदा का निर्माण करती है। अविवाहित लड़कियों द्वारा इसके निर्माण के पीछे मान्यता है कि इसके निर्माण से उनका घर भरा पूरा बना रहेगा। हालांकि कई जगहों पर घरौंदा बनाने का प्रचलन दीपावली के दिन होता है।
कृषि, सहकारिता मंत्री बादल ने बेरमो विधायक सह कांग्रेस के वरिष्ट नेता राजेंद्र सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक जीवन में राजेंद्र सिंह का अहम रोल रहा है। आज वे जहां खड़े हैं उसमें उनका अहम योगदान रहा है। वे आज भी उनके आदर्श के रूप में रहे हैं। उन्होंने बताया कि पेड़ के नीचे छांव मिलती है ठीक वैसे ही उन्हें उन के सानिध्य में रहकर हमेशा से छांव का एहसास होता रहा। एक ऐसा छाव जिसने राजनीति में उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी, आज वे खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। उन्होंनेएक ऐसे अभिभावक को खो दिया है, जिन्होंने उन्हें कई सीख दी। 2014 के विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट दिलवाने की बात हो या चुनाव लड़ाने की बात हर कदम वह हमारे साथ रहे। मंत्री पद की शपथ का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जब वे मंत्री बनने के लिए शपथ लेने राजभवन के बिरसा मंडप जाने वाले थे, उससे ठीक पहले उनका आशीर्वाद लेने रांची स्थित उनके आवास पहुंचे थे। जहां उन्होंने कई प्रेरक बाते कही थी।
कृषि, सहकारिता मंत्री बादल ने बेरमो विधायक सह कांग्रेस के वरिष्ट नेता राजेंद्र सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक जीवन में राजेंद्र सिंह का अहम रोल रहा है। आज वे जहां खड़े हैं उसमें उनका अहम योगदान रहा है। वे आज भी उनके आदर्श के रूप में रहे हैं। उन्होंने बताया कि पेड़ के नीचे छांव मिलती है ठीक वैसे ही उन्हें उन के सानिध्य में रहकर हमेशा से छांव का एहसास होता रहा। एक ऐसा छाव जिसने राजनीति में उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी, आज वे खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। उन्होंनेएक ऐसे अभिभावक को खो दिया है, जिन्होंने उन्हें कई सीख दी। दो हज़ार चौदह के विधानसभा चुनाव में उन्हें टिकट दिलवाने की बात हो या चुनाव लड़ाने की बात हर कदम वह हमारे साथ रहे। मंत्री पद की शपथ का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जब वे मंत्री बनने के लिए शपथ लेने राजभवन के बिरसा मंडप जाने वाले थे, उससे ठीक पहले उनका आशीर्वाद लेने रांची स्थित उनके आवास पहुंचे थे। जहां उन्होंने कई प्रेरक बाते कही थी।
प्रोफेसर दिलीप मंडल ने ट्विटर के नए CEO पराग अग्रवाल की सराहना करते हुए कहा कि वह IIT में ब्राह्मणों के प्रभुत्व को हिलाने वाले अकेले नहीं हैं। गिरिराज सिंह ने कहा कि राष्ट्रगीत हमारी आत्मा में बसा है। लोगों ने तो यह भी कहा था कि राम मंदिर नहीं बनेगा, लेकिन वह बना। जेएनयू के लेफ्ट यूनियन ने बाबरी पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की घोषणा की है। इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई की चेतावनी दी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को देखने के बाद लोगों में काफी गुस्सा है। यूजर्स ने इसे परेशान करने वाला और घृणित बताया है। अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद विनोद दुआ ने कहा था कि हमारे यहाँ एक बहुत बड़ा दिखावा/पाखंड होता है कि देहांत के बाद किसी को भी महापुरुष बना दिया जाता है। वृंदावन में कंगना रनौत ने कहा, "जो राष्ट्रवादी हैं, मैं उनके लिए कैम्पेनिंग करूँगी। मैं किसी पार्टी से बिलॉन्ग नहीं करती हूँ। " बिहार के अररिया में मोहम्मद मेजर ने 6 साल की दलित बच्ची से रेप किया रेप, जबकि जिले में ही बच्ची से छेड़छाड़ के आरोपित प्रिंसिपल शमसूल सस्पेंड। दिल्ली सरकार स्पा में क्रॉस-जेंडर मसाज पर रोक लगा चुकी है। इसके अलावा रिहायशी इलाकों में नए मसाज सेंटर खोलने पर भी रोक लगा दी गई है।
प्रोफेसर दिलीप मंडल ने ट्विटर के नए CEO पराग अग्रवाल की सराहना करते हुए कहा कि वह IIT में ब्राह्मणों के प्रभुत्व को हिलाने वाले अकेले नहीं हैं। गिरिराज सिंह ने कहा कि राष्ट्रगीत हमारी आत्मा में बसा है। लोगों ने तो यह भी कहा था कि राम मंदिर नहीं बनेगा, लेकिन वह बना। जेएनयू के लेफ्ट यूनियन ने बाबरी पर बनी डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग की घोषणा की है। इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई की चेतावनी दी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को देखने के बाद लोगों में काफी गुस्सा है। यूजर्स ने इसे परेशान करने वाला और घृणित बताया है। अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद विनोद दुआ ने कहा था कि हमारे यहाँ एक बहुत बड़ा दिखावा/पाखंड होता है कि देहांत के बाद किसी को भी महापुरुष बना दिया जाता है। वृंदावन में कंगना रनौत ने कहा, "जो राष्ट्रवादी हैं, मैं उनके लिए कैम्पेनिंग करूँगी। मैं किसी पार्टी से बिलॉन्ग नहीं करती हूँ। " बिहार के अररिया में मोहम्मद मेजर ने छः साल की दलित बच्ची से रेप किया रेप, जबकि जिले में ही बच्ची से छेड़छाड़ के आरोपित प्रिंसिपल शमसूल सस्पेंड। दिल्ली सरकार स्पा में क्रॉस-जेंडर मसाज पर रोक लगा चुकी है। इसके अलावा रिहायशी इलाकों में नए मसाज सेंटर खोलने पर भी रोक लगा दी गई है।
जो कि शुद्धा के दो भेद हैं, ये तीनो ही लक्षणा दो प्रकार की होती है- सारोपा और साध्यवसाना । जैसा कि तालिका में दिखलाया गया है। इन ( सारोपा और साध्यवसाना ) की स्पष्टता इस प्रकार हैसारोपा लक्षणा जहाँ श्रारोप्यमाण (विषयी) रोप के विषय, दोनो का शब्द द्वारा कथन किया जाय, वहाँ सारोपा लक्षणा होती है। पृथक-पृथक् शब्दों द्वारा कही हुई दो वस्तुओं में एक वस्तु के स्वरूप की दूसरी वस्तु में तादात्म्य प्रतीति ( अभेद ज्ञान ) को आरोप कहते हैं। और जिस वस्तु का आरोप किया जाय, उसे आरोग्यमाण और जिस वस्तु में दूसरी वस्तु का आरोप किया जाय, उसे आरोप का विषय कहते हैं । 'सारोपा' लक्षणा में विषयी (जिसका आरोप किया जाय) और विषय (जिसमें किया जाय), दोनो का शब्द द्वारा स्पष्ट कथन किया जाता है। और, विषयी के साथ विषय की तादात्म्य प्रतीति होती है, अर्थात् उन दोनों में अभेद ज्ञान रहता है। सारोपा गौणी लक्षरणा का उदाहरण'वाहीक बैल है' ( गौर्वाहीकः ) । वाहीक कहते हैं असभ्य । ( गँवार ) को । यहाँ गँवार में बैल का आरोप है । वाहीक जो आरोपका विषय है, और द्वितीय स्तंवक बैल जो आरोप्यमाण है, उन दोनो का शब्द से स्पष्ट कथन है अतः सारोपा है। गँवार को बैल कहने में मुख्यार्थ का बाध है। बैल में जड़ता, मंदता आदि धर्म है, गँवार में भी जड़ता और मंदता होती है, अतः इस सादृश्य-संबंध से 'वाहीक बैल के समान है' यह लक्ष्यार्थ ग्रहण किया जाता है, अतः गौणी है । वाहोक ( गँवार ) में मूर्खता का आधिक्य सूचन किया जाना प्रयोजन है। पूर्वोक्त 'मुखचंद्र' उदाहरण में भी यही सारोपा गौरणी लक्षरणा है । रूपक अलंकार में यही लक्षणा अंतर्गत रहती है। सारोपा शुद्धा उपादान लक्षणा का उदाहरण - 'वे भाले आ रहे हैं। इस पूर्वोक उदाहरण में 'भाले' आरोप्यमाण है, और भालेवाले पुरुष आरोप के विषय हैं, इन दोनो का शब्द द्वारा स्पष्ट कथन है, क्योंकि 'वे' इस सर्वनाम से भाले धारण करनेवाले पुरुषों का भी शब्द द्वारा कथन है, अतः सारोपा है । लक्ष्यार्थ जो भालेवाले पुरुष है, उनके साथ मुख्यार्थ जो 'भाले' हैं, वह भी लगा रहता है, अतः उपादान लक्षणा है। यहाँ धार्य-धारक संबंध है, जैसा कि पहले वतलाया गया है, अतः शुद्धा है । सारोपा शुद्धा लक्षण-लक्षणा का उदाहरण'घृत आयु है' (आयुघृतम् ) । इसमें घृत को आयु कहा गया है। अतः घृत आरोपका विषय है, औरोप्यमाण है। घृत को आयु कहने में मुख्यार्थ का बाध है; अतः घृत आयु बढ़ानेवाला है, आयु का कारण है, यह लक्ष्यार्थ ग्रहण किया जाता है। घृत आयु का कारण है। और 'आयु' कार्य है, अतः कार्य-कारण संबंध होने से शुद्धा है। घृत ने अपना मुख्यार्थ सर्वथा छोड़ दिया है, अतः लक्षण - लक्षणा है । अन्य पदार्थों से घृत को विलक्षण आयु-वर्द्धक सूचन करना यहाँ प्रयोजन है । आयु के साथ घृत की तादास्य प्रतीति अर्थात् अभेद बतलाया गया है, और घृत तथा आयु दोनो का स्पष्ट शब्द द्वारा कथन है, अतः सारोपा है। इसका पद्यात्मक उदाहरण"कोऊ कोरिक संग्रहो, कोऊ लाख हजार । मो संपति यदुपति सदा विपद-विदारन हार ॥ " ( विहारी ) यहाँ यदुपति में संपत्ति का आरोप है - यदुपति को ही संपत्ति कहा गया है। इन दोनो का शब्द द्वारा कथन होने से सारोपा है । मुख्यार्थ संपत्ति का त्याग है। संपत्ति का लदयार्थ पालक, सुखद आदि ग्रहण किया जाता है, अतः लक्षण - लक्षणा है । तारकर्म्य संबंध होने से शुद्धा है । भगवान् श्रीकृष्णचंद्र में प्रेम सूचन करना ही प्रयोजन है, अतः प्रयोजनवती है। साध्यवसाना लक्षणा जहा आरोप के विषय का शब्द द्वारा निर्देश ( कथन ) न होकर केवल रोप्यमाण का ही कथन हो, वहाँ साध्यवसाना लक्षणा होती है साध्यवसाना गौणी लक्षणा का उदाहरण - जैसे किसी गँवार को देखकर कहा जाय कि 'यह बैल है' ( गौरयम् ) । इसकी स्पष्टता पूर्वोक्त सारोपा गौणी के 'वाहीक बैल है' इस उदाहरण में की जा चुकी है। किंतु वहाँ आरोप का विषय जो वाहीक ( गँवार) है, उसका और रोयमाण बैल दोनो का शब्द द्वारा कथन है। और, यहाँ आरोप के विषय 'वाहीक' का कथन नहीं, केवल आरोग्यमाण 'बैल' का ही कथन है, अतः साव्यवसाना है । वस सारोपा और साध्यवसाना में यही अंतर है । इसके सिवा वहाँ बैलपन और गँवारपन आदि परस्पर में विरुद्ध धर्मो की प्रतीति होने पर भी अत्यंत सादृश्य के प्रभाव से तादात्म्य अर्थात् अभेद की प्रतीति कराना. मात्र प्रयोजन है, किंतु यहाँ - साध्यवसाना के 'यह बैल है' इस उदाहरण में 'वाहीक' पद नहीं है, जो विशेष्य-वाचक है, अतएव लक्ष्यार्थ के समझने के प्रथम ही मुख्यार्थ के ज्ञानमात्र से ही बैलपन और गँवारपन जो परस्पर में इनके भेद बतलानेवाले धर्म हैं, उनको प्रतीति के विना ही सर्वथा अभेद कथित है । तात्पर्य यह है कि यद्यपि गँवार को बैल के समान जड़ और मंद तो दोनो ही में सूचन किया गया है, तथापि सारोपा में भेद की प्रतीति होते हुए अर्थात् गँवार और
जो कि शुद्धा के दो भेद हैं, ये तीनो ही लक्षणा दो प्रकार की होती है- सारोपा और साध्यवसाना । जैसा कि तालिका में दिखलाया गया है। इन की स्पष्टता इस प्रकार हैसारोपा लक्षणा जहाँ श्रारोप्यमाण रोप के विषय, दोनो का शब्द द्वारा कथन किया जाय, वहाँ सारोपा लक्षणा होती है। पृथक-पृथक् शब्दों द्वारा कही हुई दो वस्तुओं में एक वस्तु के स्वरूप की दूसरी वस्तु में तादात्म्य प्रतीति को आरोप कहते हैं। और जिस वस्तु का आरोप किया जाय, उसे आरोग्यमाण और जिस वस्तु में दूसरी वस्तु का आरोप किया जाय, उसे आरोप का विषय कहते हैं । 'सारोपा' लक्षणा में विषयी और विषय , दोनो का शब्द द्वारा स्पष्ट कथन किया जाता है। और, विषयी के साथ विषय की तादात्म्य प्रतीति होती है, अर्थात् उन दोनों में अभेद ज्ञान रहता है। सारोपा गौणी लक्षरणा का उदाहरण'वाहीक बैल है' । वाहीक कहते हैं असभ्य । को । यहाँ गँवार में बैल का आरोप है । वाहीक जो आरोपका विषय है, और द्वितीय स्तंवक बैल जो आरोप्यमाण है, उन दोनो का शब्द से स्पष्ट कथन है अतः सारोपा है। गँवार को बैल कहने में मुख्यार्थ का बाध है। बैल में जड़ता, मंदता आदि धर्म है, गँवार में भी जड़ता और मंदता होती है, अतः इस सादृश्य-संबंध से 'वाहीक बैल के समान है' यह लक्ष्यार्थ ग्रहण किया जाता है, अतः गौणी है । वाहोक में मूर्खता का आधिक्य सूचन किया जाना प्रयोजन है। पूर्वोक्त 'मुखचंद्र' उदाहरण में भी यही सारोपा गौरणी लक्षरणा है । रूपक अलंकार में यही लक्षणा अंतर्गत रहती है। सारोपा शुद्धा उपादान लक्षणा का उदाहरण - 'वे भाले आ रहे हैं। इस पूर्वोक उदाहरण में 'भाले' आरोप्यमाण है, और भालेवाले पुरुष आरोप के विषय हैं, इन दोनो का शब्द द्वारा स्पष्ट कथन है, क्योंकि 'वे' इस सर्वनाम से भाले धारण करनेवाले पुरुषों का भी शब्द द्वारा कथन है, अतः सारोपा है । लक्ष्यार्थ जो भालेवाले पुरुष है, उनके साथ मुख्यार्थ जो 'भाले' हैं, वह भी लगा रहता है, अतः उपादान लक्षणा है। यहाँ धार्य-धारक संबंध है, जैसा कि पहले वतलाया गया है, अतः शुद्धा है । सारोपा शुद्धा लक्षण-लक्षणा का उदाहरण'घृत आयु है' । इसमें घृत को आयु कहा गया है। अतः घृत आरोपका विषय है, औरोप्यमाण है। घृत को आयु कहने में मुख्यार्थ का बाध है; अतः घृत आयु बढ़ानेवाला है, आयु का कारण है, यह लक्ष्यार्थ ग्रहण किया जाता है। घृत आयु का कारण है। और 'आयु' कार्य है, अतः कार्य-कारण संबंध होने से शुद्धा है। घृत ने अपना मुख्यार्थ सर्वथा छोड़ दिया है, अतः लक्षण - लक्षणा है । अन्य पदार्थों से घृत को विलक्षण आयु-वर्द्धक सूचन करना यहाँ प्रयोजन है । आयु के साथ घृत की तादास्य प्रतीति अर्थात् अभेद बतलाया गया है, और घृत तथा आयु दोनो का स्पष्ट शब्द द्वारा कथन है, अतः सारोपा है। इसका पद्यात्मक उदाहरण"कोऊ कोरिक संग्रहो, कोऊ लाख हजार । मो संपति यदुपति सदा विपद-विदारन हार ॥ " यहाँ यदुपति में संपत्ति का आरोप है - यदुपति को ही संपत्ति कहा गया है। इन दोनो का शब्द द्वारा कथन होने से सारोपा है । मुख्यार्थ संपत्ति का त्याग है। संपत्ति का लदयार्थ पालक, सुखद आदि ग्रहण किया जाता है, अतः लक्षण - लक्षणा है । तारकर्म्य संबंध होने से शुद्धा है । भगवान् श्रीकृष्णचंद्र में प्रेम सूचन करना ही प्रयोजन है, अतः प्रयोजनवती है। साध्यवसाना लक्षणा जहा आरोप के विषय का शब्द द्वारा निर्देश न होकर केवल रोप्यमाण का ही कथन हो, वहाँ साध्यवसाना लक्षणा होती है साध्यवसाना गौणी लक्षणा का उदाहरण - जैसे किसी गँवार को देखकर कहा जाय कि 'यह बैल है' । इसकी स्पष्टता पूर्वोक्त सारोपा गौणी के 'वाहीक बैल है' इस उदाहरण में की जा चुकी है। किंतु वहाँ आरोप का विषय जो वाहीक है, उसका और रोयमाण बैल दोनो का शब्द द्वारा कथन है। और, यहाँ आरोप के विषय 'वाहीक' का कथन नहीं, केवल आरोग्यमाण 'बैल' का ही कथन है, अतः साव्यवसाना है । वस सारोपा और साध्यवसाना में यही अंतर है । इसके सिवा वहाँ बैलपन और गँवारपन आदि परस्पर में विरुद्ध धर्मो की प्रतीति होने पर भी अत्यंत सादृश्य के प्रभाव से तादात्म्य अर्थात् अभेद की प्रतीति कराना. मात्र प्रयोजन है, किंतु यहाँ - साध्यवसाना के 'यह बैल है' इस उदाहरण में 'वाहीक' पद नहीं है, जो विशेष्य-वाचक है, अतएव लक्ष्यार्थ के समझने के प्रथम ही मुख्यार्थ के ज्ञानमात्र से ही बैलपन और गँवारपन जो परस्पर में इनके भेद बतलानेवाले धर्म हैं, उनको प्रतीति के विना ही सर्वथा अभेद कथित है । तात्पर्य यह है कि यद्यपि गँवार को बैल के समान जड़ और मंद तो दोनो ही में सूचन किया गया है, तथापि सारोपा में भेद की प्रतीति होते हुए अर्थात् गँवार और
दिगम्बर मुनि. २६३ भाषाओ का ज्ञान प्राप्त होता है जिससे वे अनेक शास्त्रो के अर्थ को समझ लेते है । और उन-उन भाषाओ मे जनना को समझा देते है। यह अतिशयरूप कुशलता गुण होता है । जिस क्षेत्र मे सयम के अनुकूल विहार होता है और सुलभता से आहार मिलता है उस क्षेत्र को सल्लेखना के अनुकूल समझ लेते है इसलिए अनियत विहार से क्षेत्र का अन्वेषण होता है । विहार करते समय साधु प्रात कालीन क्रियाओं को करके सघ के साथ अपनी शक्ति के अनुरूप चलते हैं । हरियाली, काई, कीचड, कुहरा, बर्फ आदि से रहित प्रासुक मार्ग मे चलते है । जिस मार्ग से मनुष्य, गायभैस आदि चल रहे हैं। आज के गाडी, मोटर आदि वाहन चल रहे है । वह मार्ग प्रासुक हो जाता है । मार्ग मे चलते हुए हँसी विनोद या वार्ता - लाप नही करते है । आतप-प से छाया मे जाते समय और छाया से धूप मे जाते समय पिच्छिका से अपना शरीर मार्जन करके पैरो की धूली भी झाड देते है । कदाचित मार्ग मे जल भरी नदियाँ आ जावें तो द्रोणी से भी पार कर सकते है । सो ही कहा है"जल मे प्रवेश करते हुए पैरो मे लगी हुई सचित्त-अचित्त धूलि को पिच्छिका से परिमार्जित करके जल मे प्रवेश करते है पुन बाहर निकल कर जब तक पैर सूख न जायें तब तक जल के किनारे ही खडे रहते है। कदाचित् बड़ी नदियो को पार करने मे पहले नदी के इसी तरफ सिद्धवदना करके "जब तक मै उस पार न पहुँच जाऊँ तब तक मुझे सर्वशरीर, आहार और उपकरण का त्याग है।" ऐसा प्रत्याख्यान ग्रहण करके समाहित चित्त होते हुए द्रोणी- नौका आदि पर चढते है और अगले तटपर पहुँच कर उसकी शुद्धि के लिए कायोत्सर्ग करते है । बडे जगलो मे प्रवेश करने निकलने के समय भी इसी प्रकार से चतुराहार आदि त्यागरूप पूर्वोक्त सभी विधि की जाती है।" १. तथा जल प्रविणता सचित्ताचित्तरजसो पदादिषु लग्नयोर्निरास । यावच्च पादौ गुप्यतस्तावन्न गच्छेज्जलातिक एव तिष्ठेत् । महतीना नदीना उत्तरणे आराद्भागे कृतसिद्धवदन यावत्प्रतिकूल प्राप्तिस्तावन्मया सर्व शरीर भोजनमुपकरण च परित्यक्तमिति गृहीतप्रत्याख्यान समाहितचित्तो द्रोण्यादिकमारोहेत, परकूले च कायोत्मर्गेण तिष्ठेत् तदतिचारव्यपोहाथं । एवमेव महत कातारस्य प्रवेशनि क्रमणयो । - मूलारावना, टी० पृ० ३४४ २६४ वीर ज्ञानोदय ग्रन्थमाला अन्यत्र भी कहा है - "घुटने पर्यन्त पानी मे होकर जावे तो एक कायोत्सर्ग प्रायश्चित्त है। घुटने से चार अगुल ऊपर पानी मे होकर जाने का एक उपवास प्रायश्चित्त है। इसके चार-चार अगुल ऊपर पानी मे होकर जाने का दूने दूने उपवास प्रायश्चित्त है । ये जो कायोत्सर्ग और उपवास कहे गये हैं वे सोलह धनुप (चौसठ हाथ ) पर्यन्त लम्बे फैले हुए जल जतुओ से रहित जल मे होकर जाने के है । तथा जल जतु से भरे हुए जल मे होकर जाने का प्रायश्चित्त पहले विधि से अधिक है जो कि 'गुरु से ही ग्रहण किया जाता है। उपर्युक्त प्रायश्चित्त भी गुरु से हो लिया जाता है स्वत प्रायश्चित्त कर लेने से दोपो की शुद्धि नही होती है । अपने निमित्त या पर के निमित्त प्रयुक्त नाव आदि के द्वारा नदी आदि पार करने पर काल आदि जानने वाला आचार्य यथोचित प्रायश्चित्त देते है । "" यदि कदाचित् कोई साधु असमर्थ वृद्ध या अस्वस्थ है, पैदल चलने की शक्ति नहीं है और सघ के साथ मे विहार करना आवश्यक है तो उन्हे डोली मे बिठाकर विहार कराते है । यथा - " डोली आदि मे बैठकर गमन करने पर आचार्य उस मद, गेगी आदि साधु को जानकर उसके दोष को दूर करने वाली मार्ग-शुद्धि से दूनी शुद्धि देते है । अर्थात् मार्ग गमन के शोधन मे जो शुद्धि कही है उससे दूनी शुद्धि देते है ।" इस प्रकार विहार करता हुआ साधुओ का विशाल सघ अथवा कतिपय साधु जहाँ पहुचते है, श्रावक भक्ति विभोर होकर यथोचित वसतिका दान आदि देकर उनकी भक्ति, सेवा, आराधना, पूजा आदि करते है । १ जानुदध्ने तनूत्सर्ग क्षमण चतुरगुले । द्विगुणा द्विगुणास्तस्मादुपवासा स्युरभसि ।।३९।। दडे षोडशभिर्मेये भवन्त्येते जलेऽजसा । कार्योत्सर्गोपवामान्तु जतुकीर्णे ततोऽधिका ॥४०॥ स्वपरार्थप्रयुक्तैश्च नावाद्यैस्तरणे सति । स्वल्प वा वहु वा दद्याज्ज्ञातकालाविको गणी ॥४१॥ - प्राय० चू० २ युग्यादिगमने शुद्धि द्विगुणा पथि शुद्धित । ज्ञात्वा नृजात बाचोर्या दद्यात्तद्दोषघातिनी ॥४३॥ vs Byalagyyty -प्राय० चू०
दिगम्बर मुनि. दो सौ तिरेसठ भाषाओ का ज्ञान प्राप्त होता है जिससे वे अनेक शास्त्रो के अर्थ को समझ लेते है । और उन-उन भाषाओ मे जनना को समझा देते है। यह अतिशयरूप कुशलता गुण होता है । जिस क्षेत्र मे सयम के अनुकूल विहार होता है और सुलभता से आहार मिलता है उस क्षेत्र को सल्लेखना के अनुकूल समझ लेते है इसलिए अनियत विहार से क्षेत्र का अन्वेषण होता है । विहार करते समय साधु प्रात कालीन क्रियाओं को करके सघ के साथ अपनी शक्ति के अनुरूप चलते हैं । हरियाली, काई, कीचड, कुहरा, बर्फ आदि से रहित प्रासुक मार्ग मे चलते है । जिस मार्ग से मनुष्य, गायभैस आदि चल रहे हैं। आज के गाडी, मोटर आदि वाहन चल रहे है । वह मार्ग प्रासुक हो जाता है । मार्ग मे चलते हुए हँसी विनोद या वार्ता - लाप नही करते है । आतप-प से छाया मे जाते समय और छाया से धूप मे जाते समय पिच्छिका से अपना शरीर मार्जन करके पैरो की धूली भी झाड देते है । कदाचित मार्ग मे जल भरी नदियाँ आ जावें तो द्रोणी से भी पार कर सकते है । सो ही कहा है"जल मे प्रवेश करते हुए पैरो मे लगी हुई सचित्त-अचित्त धूलि को पिच्छिका से परिमार्जित करके जल मे प्रवेश करते है पुन बाहर निकल कर जब तक पैर सूख न जायें तब तक जल के किनारे ही खडे रहते है। कदाचित् बड़ी नदियो को पार करने मे पहले नदी के इसी तरफ सिद्धवदना करके "जब तक मै उस पार न पहुँच जाऊँ तब तक मुझे सर्वशरीर, आहार और उपकरण का त्याग है।" ऐसा प्रत्याख्यान ग्रहण करके समाहित चित्त होते हुए द्रोणी- नौका आदि पर चढते है और अगले तटपर पहुँच कर उसकी शुद्धि के लिए कायोत्सर्ग करते है । बडे जगलो मे प्रवेश करने निकलने के समय भी इसी प्रकार से चतुराहार आदि त्यागरूप पूर्वोक्त सभी विधि की जाती है।" एक. तथा जल प्रविणता सचित्ताचित्तरजसो पदादिषु लग्नयोर्निरास । यावच्च पादौ गुप्यतस्तावन्न गच्छेज्जलातिक एव तिष्ठेत् । महतीना नदीना उत्तरणे आराद्भागे कृतसिद्धवदन यावत्प्रतिकूल प्राप्तिस्तावन्मया सर्व शरीर भोजनमुपकरण च परित्यक्तमिति गृहीतप्रत्याख्यान समाहितचित्तो द्रोण्यादिकमारोहेत, परकूले च कायोत्मर्गेण तिष्ठेत् तदतिचारव्यपोहाथं । एवमेव महत कातारस्य प्रवेशनि क्रमणयो । - मूलारावना, टीशून्य पृशून्य तीन सौ चौंतालीस दो सौ चौंसठ वीर ज्ञानोदय ग्रन्थमाला अन्यत्र भी कहा है - "घुटने पर्यन्त पानी मे होकर जावे तो एक कायोत्सर्ग प्रायश्चित्त है। घुटने से चार अगुल ऊपर पानी मे होकर जाने का एक उपवास प्रायश्चित्त है। इसके चार-चार अगुल ऊपर पानी मे होकर जाने का दूने दूने उपवास प्रायश्चित्त है । ये जो कायोत्सर्ग और उपवास कहे गये हैं वे सोलह धनुप पर्यन्त लम्बे फैले हुए जल जतुओ से रहित जल मे होकर जाने के है । तथा जल जतु से भरे हुए जल मे होकर जाने का प्रायश्चित्त पहले विधि से अधिक है जो कि 'गुरु से ही ग्रहण किया जाता है। उपर्युक्त प्रायश्चित्त भी गुरु से हो लिया जाता है स्वत प्रायश्चित्त कर लेने से दोपो की शुद्धि नही होती है । अपने निमित्त या पर के निमित्त प्रयुक्त नाव आदि के द्वारा नदी आदि पार करने पर काल आदि जानने वाला आचार्य यथोचित प्रायश्चित्त देते है । "" यदि कदाचित् कोई साधु असमर्थ वृद्ध या अस्वस्थ है, पैदल चलने की शक्ति नहीं है और सघ के साथ मे विहार करना आवश्यक है तो उन्हे डोली मे बिठाकर विहार कराते है । यथा - " डोली आदि मे बैठकर गमन करने पर आचार्य उस मद, गेगी आदि साधु को जानकर उसके दोष को दूर करने वाली मार्ग-शुद्धि से दूनी शुद्धि देते है । अर्थात् मार्ग गमन के शोधन मे जो शुद्धि कही है उससे दूनी शुद्धि देते है ।" इस प्रकार विहार करता हुआ साधुओ का विशाल सघ अथवा कतिपय साधु जहाँ पहुचते है, श्रावक भक्ति विभोर होकर यथोचित वसतिका दान आदि देकर उनकी भक्ति, सेवा, आराधना, पूजा आदि करते है । एक जानुदध्ने तनूत्सर्ग क्षमण चतुरगुले । द्विगुणा द्विगुणास्तस्मादुपवासा स्युरभसि ।।उनतालीस।। दडे षोडशभिर्मेये भवन्त्येते जलेऽजसा । कार्योत्सर्गोपवामान्तु जतुकीर्णे ततोऽधिका ॥चालीस॥ स्वपरार्थप्रयुक्तैश्च नावाद्यैस्तरणे सति । स्वल्प वा वहु वा दद्याज्ज्ञातकालाविको गणी ॥इकतालीस॥ - प्रायशून्य चूशून्य दो युग्यादिगमने शुद्धि द्विगुणा पथि शुद्धित । ज्ञात्वा नृजात बाचोर्या दद्यात्तद्दोषघातिनी ॥तैंतालीस॥ vs Byalagyyty -प्रायशून्य चूशून्य
बीओडी "एडमिरल लेवचेंको" को उसी प्रकार के उदाहरण के रूप में आधुनिक बनाया जा रहा है "मार्शल शापोशनिकोव" प्रोजेक्ट 1155 के बड़े एंटी-सबमरीन शिप (BOD) "एडमिरल लेवचेंको" को उसी प्रकार के "मार्शल शापोशनिकोव" के उदाहरण के बाद आधुनिक बनाया जाएगा। यह TASS द्वारा जहाज निर्माण उद्योग में एक स्रोत के संदर्भ में बताया गया है। स्रोत के अनुसार, BPK, जो कि उत्तरी का हिस्सा है बेड़ा, वर्तमान में Severomorsk में आधुनिकीकरण और मरम्मत शुरू करने के निर्णय का इंतजार कर रहा है। आज तक, काम का स्थान अभी तक निर्धारित नहीं किया गया है। इसके अलावा, स्रोत ने जहाज पर काम की अनुमानित शुरुआत के बारे में कुछ नहीं कहा। समुद्र में जहाज की आखिरी नौकायन 2018 में हुई। आपको याद दिला दें कि मार्शल शापानशिकोव BPK आधुनिकीकरण और फ्रिगेट के रूप में पीछे हटने वाले प्रोजेक्ट 1155 का पहला जहाज बन गया। प्रशांत बेड़े में जहाज की वापसी इस वर्ष के अंत से पहले की योजना बनाई गई है। जैसा कि पहले रक्षा मंत्रालय में कहा गया था, परियोजना 1155 के सभी शेष बीओडी को आधुनिक बनाने की योजना है। पनडुब्बी रोधी जहाज "एडमिरल लेवचेंको" को 27 जनवरी, 1982 को "खाबरोवस्क" नाम से रखा गया था, 24 मई, 1982 को इसका नाम बदलकर "एडमिरल लेवचेंको" कर दिया गया। 21 फरवरी, 1985 को लॉन्च किया गया। 30 सितंबर, 1988 को कमीशन किया गया। 1 मई, 1989 को लाल बैनर उत्तरी बेड़े के विमान वाहक समूह में शामिल किया गया। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
बीओडी "एडमिरल लेवचेंको" को उसी प्रकार के उदाहरण के रूप में आधुनिक बनाया जा रहा है "मार्शल शापोशनिकोव" प्रोजेक्ट एक हज़ार एक सौ पचपन के बड़े एंटी-सबमरीन शिप "एडमिरल लेवचेंको" को उसी प्रकार के "मार्शल शापोशनिकोव" के उदाहरण के बाद आधुनिक बनाया जाएगा। यह TASS द्वारा जहाज निर्माण उद्योग में एक स्रोत के संदर्भ में बताया गया है। स्रोत के अनुसार, BPK, जो कि उत्तरी का हिस्सा है बेड़ा, वर्तमान में Severomorsk में आधुनिकीकरण और मरम्मत शुरू करने के निर्णय का इंतजार कर रहा है। आज तक, काम का स्थान अभी तक निर्धारित नहीं किया गया है। इसके अलावा, स्रोत ने जहाज पर काम की अनुमानित शुरुआत के बारे में कुछ नहीं कहा। समुद्र में जहाज की आखिरी नौकायन दो हज़ार अट्ठारह में हुई। आपको याद दिला दें कि मार्शल शापानशिकोव BPK आधुनिकीकरण और फ्रिगेट के रूप में पीछे हटने वाले प्रोजेक्ट एक हज़ार एक सौ पचपन का पहला जहाज बन गया। प्रशांत बेड़े में जहाज की वापसी इस वर्ष के अंत से पहले की योजना बनाई गई है। जैसा कि पहले रक्षा मंत्रालय में कहा गया था, परियोजना एक हज़ार एक सौ पचपन के सभी शेष बीओडी को आधुनिक बनाने की योजना है। पनडुब्बी रोधी जहाज "एडमिरल लेवचेंको" को सत्ताईस जनवरी, एक हज़ार नौ सौ बयासी को "खाबरोवस्क" नाम से रखा गया था, चौबीस मई, एक हज़ार नौ सौ बयासी को इसका नाम बदलकर "एडमिरल लेवचेंको" कर दिया गया। इक्कीस फरवरी, एक हज़ार नौ सौ पचासी को लॉन्च किया गया। तीस सितंबर, एक हज़ार नौ सौ अठासी को कमीशन किया गया। एक मई, एक हज़ार नौ सौ नवासी को लाल बैनर उत्तरी बेड़े के विमान वाहक समूह में शामिल किया गया। - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
मैंने न तो सत्संग, योग, जप अथवा यज्ञ ही किए हैं और न प्रभु के चरणकमलों में मेरा दृढ़ अनुराग ही है। हाँ, दया के भंडार प्रभु की एक बान है कि जिसे किसी दूसरे का सहारा नहीं है, वह उन्हें प्रिय होता है।।4।। होइहैं सुफल आजु मम लोचन । देखि बदन पंकज भव मोचन।। निर्भर प्रेम मगन मुनि ग्यानी । कहि न जाइ सो दसा भवानी ॥5॥ (भगवान की इस बान का स्मरण आते ही मुनि आनंदमग्न होकर मन ही मन कहने लगे-) अहा! भव बंधन से छुड़ाने वाले प्रभु के मुखारविंद को देखकर आज मेरे नेत्र सफल होंगे। (शिवजी कहते हैं-) हे भवानी! ज्ञानी मुनि प्रेम में पूर्ण रूप से निमग्न हैं। उनकी वह दशा कहीं नहीं जाती ॥5॥ दिसि अरु बिदिसि पंथ नहिं सूझा । को मैं चलेउँ कहाँ नहिं बूझा ।। कबहुँक फिरि पाछें पुनि जाई। कबहुँक नृत्य करइ गुन गाई।।6।। उन्हें दिशा-विदिशा (दिशाएँ और उनके कोण आदि) और रास्ता, कुछ भी नहीं सूझ रहा है। मैं कौन हूँ और कहाँ जा रहा हूँ, यह भी नहीं जानते ( इसका भी ज्ञान नहीं है)। वे कभी पीछे घूमकर फिर आगे चलने लगते हैं और कभी (प्रभु के) गुण गागाकर नाचने लगते हैं। 6 ॥ अबिरल प्रेम भगति मुनि पाई। प्रभु देखें तरु ओट लुकाई ।। अतिसय प्रीति देखि रघुबीरा । प्रगटे हृदयँ हरन भव भीरा।।7।। मुनि ने प्रगाढ़ प्रेमाभक्ति प्राप्त कर ली। प्रभु श्री रामजी वृक्ष की आड़ में छिपकर (भक्त की प्रेमोन्मत्त दशा) देख रहे हैं। मुनि का अत्यन्त प्रेम देखकर भवभय (आवागमन के भय) को हरने वाले श्री रघुनाथजी मुनि के हृदय में प्रकट हो गए।।7।। मुनि मग माझ अचल होइ बैसा । पुलक सरीर पनस फल जैसा।। तब रघुनाथ निकट चलि आए । देखि दसा निज जन मन भाए।।8।। ( हृदय में प्रभु के दर्शन पाकर) मुनि बीच रास्ते में अचल (स्थिर) होकर बैठ गए। उनका शरीर रोमांच से कटहल के फल के समान (कण्टकित) हो गया। तब श्री रघुनाथजी उनके पास चले आए और अपने भक्त की प्रेम दशा देखकर मन में बहुत प्रसन्न हुए।।8।। मुनिहि राम बहु भाँति जगावा। जाग न ध्यान जनित सुख पावा।। भूप रूप तब राम दुरावा । हृदयँ चतुर्भुज रूप देखावा।।9।। श्री रामजी ने मुनि को बहुत प्रकार से जगाया, पर मुनि नहीं जागे, क्योंकि उन्हें प्रभु के ध्यान का सुख प्राप्त हो रहा था। तब श्री रामजी ने अपने राजरूप को छिपा लिया और उनके हृदय में अपना चतुर्भुज रूप प्रकट किया।।9।। मुनि अकुलाइ उठा तब कैसें । बिकल हीन मनि फनिबर जैसें।। आगें देखि राम तन स्यामा। सीता अनुज सहित सुख धामा।।10।। तब (अपने इष्ट स्वरूप के अंतर्धान होते ही) मुनि कैसे व्याकुल होकर उठे, जैसे श्रेष्ठ (मणिधर) सर्प मणि के बिना व्याकुल हो जाता है। मुनि ने अपने सामने सीताजी और लक्ष्मणजी सहित श्यामसुंदर विग्रह सुखधाम श्री रामजी को देखा।।10। परेउ लकुट इव चरनन्हि लागी । प्रेम मगन मुनिबर बड़भागी ।। भुज बिसाल गहि लिए उठाई। परम प्रीति राखे उर लाई ।।1।। प्रेम में मग्न हुए वे बड़भागी श्रेष्ठ मुनि लाठी की तरह गिरकर श्री रामजी के चरणों में लग गए। श्री रामजी ने अपनी विशाल भुजाओं से पकड़कर उन्हें उठा लिया और बड़े प्रेम से हृदय से लगा रखा।।1।। मुनिहि मिलत अस सोह कृपाला । कनक तरुहि जनु भेंट तमाला ।। राम बदनु बिलोक मुनि ठाढ़ा। मानहुँ चित्र माझ लिखि काढ़ा।।12।।
मैंने न तो सत्संग, योग, जप अथवा यज्ञ ही किए हैं और न प्रभु के चरणकमलों में मेरा दृढ़ अनुराग ही है। हाँ, दया के भंडार प्रभु की एक बान है कि जिसे किसी दूसरे का सहारा नहीं है, वह उन्हें प्रिय होता है।।चार।। होइहैं सुफल आजु मम लोचन । देखि बदन पंकज भव मोचन।। निर्भर प्रेम मगन मुनि ग्यानी । कहि न जाइ सो दसा भवानी ॥पाँच॥ अहा! भव बंधन से छुड़ाने वाले प्रभु के मुखारविंद को देखकर आज मेरे नेत्र सफल होंगे। हे भवानी! ज्ञानी मुनि प्रेम में पूर्ण रूप से निमग्न हैं। उनकी वह दशा कहीं नहीं जाती ॥पाँच॥ दिसि अरु बिदिसि पंथ नहिं सूझा । को मैं चलेउँ कहाँ नहिं बूझा ।। कबहुँक फिरि पाछें पुनि जाई। कबहुँक नृत्य करइ गुन गाई।।छः।। उन्हें दिशा-विदिशा और रास्ता, कुछ भी नहीं सूझ रहा है। मैं कौन हूँ और कहाँ जा रहा हूँ, यह भी नहीं जानते । वे कभी पीछे घूमकर फिर आगे चलने लगते हैं और कभी गुण गागाकर नाचने लगते हैं। छः ॥ अबिरल प्रेम भगति मुनि पाई। प्रभु देखें तरु ओट लुकाई ।। अतिसय प्रीति देखि रघुबीरा । प्रगटे हृदयँ हरन भव भीरा।।सात।। मुनि ने प्रगाढ़ प्रेमाभक्ति प्राप्त कर ली। प्रभु श्री रामजी वृक्ष की आड़ में छिपकर देख रहे हैं। मुनि का अत्यन्त प्रेम देखकर भवभय को हरने वाले श्री रघुनाथजी मुनि के हृदय में प्रकट हो गए।।सात।। मुनि मग माझ अचल होइ बैसा । पुलक सरीर पनस फल जैसा।। तब रघुनाथ निकट चलि आए । देखि दसा निज जन मन भाए।।आठ।। मुनि बीच रास्ते में अचल होकर बैठ गए। उनका शरीर रोमांच से कटहल के फल के समान हो गया। तब श्री रघुनाथजी उनके पास चले आए और अपने भक्त की प्रेम दशा देखकर मन में बहुत प्रसन्न हुए।।आठ।। मुनिहि राम बहु भाँति जगावा। जाग न ध्यान जनित सुख पावा।। भूप रूप तब राम दुरावा । हृदयँ चतुर्भुज रूप देखावा।।नौ।। श्री रामजी ने मुनि को बहुत प्रकार से जगाया, पर मुनि नहीं जागे, क्योंकि उन्हें प्रभु के ध्यान का सुख प्राप्त हो रहा था। तब श्री रामजी ने अपने राजरूप को छिपा लिया और उनके हृदय में अपना चतुर्भुज रूप प्रकट किया।।नौ।। मुनि अकुलाइ उठा तब कैसें । बिकल हीन मनि फनिबर जैसें।। आगें देखि राम तन स्यामा। सीता अनुज सहित सुख धामा।।दस।। तब मुनि कैसे व्याकुल होकर उठे, जैसे श्रेष्ठ सर्प मणि के बिना व्याकुल हो जाता है। मुनि ने अपने सामने सीताजी और लक्ष्मणजी सहित श्यामसुंदर विग्रह सुखधाम श्री रामजी को देखा।।दस। परेउ लकुट इव चरनन्हि लागी । प्रेम मगन मुनिबर बड़भागी ।। भुज बिसाल गहि लिए उठाई। परम प्रीति राखे उर लाई ।।एक।। प्रेम में मग्न हुए वे बड़भागी श्रेष्ठ मुनि लाठी की तरह गिरकर श्री रामजी के चरणों में लग गए। श्री रामजी ने अपनी विशाल भुजाओं से पकड़कर उन्हें उठा लिया और बड़े प्रेम से हृदय से लगा रखा।।एक।। मुनिहि मिलत अस सोह कृपाला । कनक तरुहि जनु भेंट तमाला ।। राम बदनु बिलोक मुनि ठाढ़ा। मानहुँ चित्र माझ लिखि काढ़ा।।बारह।।
उन्होंने बोला कि राष्ट्र के पूर्वे हिस्से में पार्टी का विस्तार मेरा मकसद है. इसमें बिहार, बंगाल व पूर्वी उत्तरप्रदेश शामिल है. यह कोई छोटा कार्य नहीं है. इससे पहले 25 जनवरी को भुवनेश्वर में राहुल गांधी ने बोला था कि प्रियंका को लेकर किया गया निर्णय दस दिन में नहीं हुआ बल्कि वर्षों पहले ले लिया गया था. प्रियंका के बच्चे छोटे थे, इस वजह से देरी हुई. प्रियंका के विदेश से लौटने के बाद यह पहली बार है जब राहुल गांधी ने उनको लेकर कोई बात कही है. बताते चलें कि यूपी में बसपा व समाजवादी पार्टी के साथ साझेदारी नहीं हो पाने के बाद कांग्रेस पार्टी ने अकेले लड़ने का निर्णय किया था. जिसको लेकर राहुल गांधी ने पार्टी को कम नहीं आंकने की बात कही थी. कांग्रेस पार्टी ने पूर्वी उत्तरप्रदेश की 33 सीटों का जिम्मा प्रियंका गांधी को जबकि पश्चिम उत्तरप्रदेश की सीटों की जिम्मेदारी ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौंपी है. राम मंदिर के मसले पर बोलते हुए कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बोला कि हम संवैधानिक संस्थानों का सम्मान करते हैं. यह मामला अभी सुप्रीम सपोर्ट में लंबित है व मेरे लिए अभी इस समय उस पर कोई विचार देना सही नहीं होगा. इस मसले पर सुप्रीम न्यायालय जो निर्णय लेगा वह कांग्रेस व हम सब को स्वीकार होगा. उत्तर प्रदेश में अकेले लड़ने के सवाल पर उन्होंने बोला कि हम विचारधारा के आधार पर चुनाव लड़ेंगे. हमारी विचारधारा व सपा-बसपा साझेदारी की विचारधारा में समानताएं हैं. मैं अखिलेश यादव व मायावती का सम्मान करता हूं. लेकिन अब कांग्रेस पार्टी दम लगाकर चुनाव लड़ेगी. पीएम मोदी की अपनी दादी से तुलना के सवाल पर उन्होंने बोला कि यह पूर्व पीएम का अपमान होगा. जहां एक तरफ मेरी दादी के हर निर्णय प्यार से भरे हुए थे वहीं नरेंद्र मोदी के हर निर्णय का आधार नफरत है. उनके दिल में गरीबों के लिए प्यार नहीं है. किसानों को 6000 सालाना देना उनके साथ एक मजाक है. किसानों को 17 रुपए रोजाना देना नाकाफी है. कांग्रेस पार्टी शासित राज्यों ने किसानों की जो मदद की उसके सामने यह मदद कुछ भी नहीं है.
उन्होंने बोला कि राष्ट्र के पूर्वे हिस्से में पार्टी का विस्तार मेरा मकसद है. इसमें बिहार, बंगाल व पूर्वी उत्तरप्रदेश शामिल है. यह कोई छोटा कार्य नहीं है. इससे पहले पच्चीस जनवरी को भुवनेश्वर में राहुल गांधी ने बोला था कि प्रियंका को लेकर किया गया निर्णय दस दिन में नहीं हुआ बल्कि वर्षों पहले ले लिया गया था. प्रियंका के बच्चे छोटे थे, इस वजह से देरी हुई. प्रियंका के विदेश से लौटने के बाद यह पहली बार है जब राहुल गांधी ने उनको लेकर कोई बात कही है. बताते चलें कि यूपी में बसपा व समाजवादी पार्टी के साथ साझेदारी नहीं हो पाने के बाद कांग्रेस पार्टी ने अकेले लड़ने का निर्णय किया था. जिसको लेकर राहुल गांधी ने पार्टी को कम नहीं आंकने की बात कही थी. कांग्रेस पार्टी ने पूर्वी उत्तरप्रदेश की तैंतीस सीटों का जिम्मा प्रियंका गांधी को जबकि पश्चिम उत्तरप्रदेश की सीटों की जिम्मेदारी ज्योतिरादित्य सिंधिया को सौंपी है. राम मंदिर के मसले पर बोलते हुए कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बोला कि हम संवैधानिक संस्थानों का सम्मान करते हैं. यह मामला अभी सुप्रीम सपोर्ट में लंबित है व मेरे लिए अभी इस समय उस पर कोई विचार देना सही नहीं होगा. इस मसले पर सुप्रीम न्यायालय जो निर्णय लेगा वह कांग्रेस व हम सब को स्वीकार होगा. उत्तर प्रदेश में अकेले लड़ने के सवाल पर उन्होंने बोला कि हम विचारधारा के आधार पर चुनाव लड़ेंगे. हमारी विचारधारा व सपा-बसपा साझेदारी की विचारधारा में समानताएं हैं. मैं अखिलेश यादव व मायावती का सम्मान करता हूं. लेकिन अब कांग्रेस पार्टी दम लगाकर चुनाव लड़ेगी. पीएम मोदी की अपनी दादी से तुलना के सवाल पर उन्होंने बोला कि यह पूर्व पीएम का अपमान होगा. जहां एक तरफ मेरी दादी के हर निर्णय प्यार से भरे हुए थे वहीं नरेंद्र मोदी के हर निर्णय का आधार नफरत है. उनके दिल में गरीबों के लिए प्यार नहीं है. किसानों को छः हज़ार सालाना देना उनके साथ एक मजाक है. किसानों को सत्रह रुपयापए रोजाना देना नाकाफी है. कांग्रेस पार्टी शासित राज्यों ने किसानों की जो मदद की उसके सामने यह मदद कुछ भी नहीं है.
पटना। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह "संपर्क फॉर समर्थन" कार्यक्रम के तहत 12 जुलाई को पटना आने की खबर है। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह इस दिन सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात करेंगे। वहीं इस मुलाकात के दौरान ही दोनो दलों के नेता लोकसभा चुनाव को लेकर सीटों के तालमेल पर चर्चा भी हो सकती है। वहीं शाह के इस दौरे से पहले जनता दल यूनाइटेड़ ने एक बार फिर से दावा किया है कि बिहार में नीतीश कुमार ही NDA का चेहरा हैं और गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका में हैं। गौरतलब है, इससे पहले भी कई बार जदयू के नेताओं ने दावा किया है कि बिहार में 40 लोकसभा सीटों में से 25 से कम पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं है। हालांकि, अमित शाह के दौरे को लेकर जदयू ने केवल यह कहा कि बिहार में वह सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। बीजेपी और जदयू के बीच लोकसभा चुनाव में सीटों के ताजमहल को लेकर तनातनी पर बोलते हुए बीजेपी के वरिष्ठ नेता और भवन निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव ने कहा कि दोनों के बीच में सीटों को लेकर कोई समस्या नहीं है और दोनों दल एक साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।
पटना। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह "संपर्क फॉर समर्थन" कार्यक्रम के तहत बारह जुलाई को पटना आने की खबर है। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह इस दिन सीएम नीतीश कुमार से मुलाकात करेंगे। वहीं इस मुलाकात के दौरान ही दोनो दलों के नेता लोकसभा चुनाव को लेकर सीटों के तालमेल पर चर्चा भी हो सकती है। वहीं शाह के इस दौरे से पहले जनता दल यूनाइटेड़ ने एक बार फिर से दावा किया है कि बिहार में नीतीश कुमार ही NDA का चेहरा हैं और गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका में हैं। गौरतलब है, इससे पहले भी कई बार जदयू के नेताओं ने दावा किया है कि बिहार में चालीस लोकसभा सीटों में से पच्चीस से कम पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं है। हालांकि, अमित शाह के दौरे को लेकर जदयू ने केवल यह कहा कि बिहार में वह सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। बीजेपी और जदयू के बीच लोकसभा चुनाव में सीटों के ताजमहल को लेकर तनातनी पर बोलते हुए बीजेपी के वरिष्ठ नेता और भवन निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव ने कहा कि दोनों के बीच में सीटों को लेकर कोई समस्या नहीं है और दोनों दल एक साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।
श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर में कड़ाके की ठंड और कड़े सुरक्षा इंतजाम के बीच जिला विकास परिषद (डीडीसी) के दूसरे चरण के लिए मतदान शुरू हो गया है. उन्होंने कहा कि दिन चढ़ने और तापमान बढ़ने के साथ मतदान में तेजी आने की संभावना है. डीडीसी के दूसरे चरण के चुनाव के लिए 321 उम्मीदवार मैदान में हैं और इस चरण में पंजीकृत 7. 90 लाख मतदाताओं के लिए 2,142 मतदान केन्द्र बनाए गए हैं. जम्मू-कश्मीर में 280 सीटें हैं जिनमें से दूसरे चरण में 43 पर चुनाव हो रहा है. इनमें से 25 कश्मीर में और 18 जम्मू में हैं. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. केन्द्र शासित प्रदेश में 83 सरपंच पदों के लिए चुनाव हो रहा है जिसके लिए 223 उम्मीदवार मैदान में हैं. इसके अलावा 331 पंच पदों पर उपचुनाव हो रहे हैं जिसके लिए 700 से ज्यादा प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. प्रशासन ने घाटी के सभी 1,300 मतदान केन्द्रों को संवेदनशील घोषित किया है.
श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर में कड़ाके की ठंड और कड़े सुरक्षा इंतजाम के बीच जिला विकास परिषद के दूसरे चरण के लिए मतदान शुरू हो गया है. उन्होंने कहा कि दिन चढ़ने और तापमान बढ़ने के साथ मतदान में तेजी आने की संभावना है. डीडीसी के दूसरे चरण के चुनाव के लिए तीन सौ इक्कीस उम्मीदवार मैदान में हैं और इस चरण में पंजीकृत सात. नब्बे लाख मतदाताओं के लिए दो,एक सौ बयालीस मतदान केन्द्र बनाए गए हैं. जम्मू-कश्मीर में दो सौ अस्सी सीटें हैं जिनमें से दूसरे चरण में तैंतालीस पर चुनाव हो रहा है. इनमें से पच्चीस कश्मीर में और अट्ठारह जम्मू में हैं. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. केन्द्र शासित प्रदेश में तिरासी सरपंच पदों के लिए चुनाव हो रहा है जिसके लिए दो सौ तेईस उम्मीदवार मैदान में हैं. इसके अलावा तीन सौ इकतीस पंच पदों पर उपचुनाव हो रहे हैं जिसके लिए सात सौ से ज्यादा प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं. प्रशासन ने घाटी के सभी एक,तीन सौ मतदान केन्द्रों को संवेदनशील घोषित किया है.
हिन्द मजदूर-किसान समिति ने छेड़ा अभियान, गुरू चन्द्रमोहन की मौजूदगी में मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में होगा भव्य मूर्ति अभिषेक शनिवार को होगा, इस कार्यक्रम में भारी संख्या में लोगों के जुटने का दावा किया गया है। कोरोना संकट काल के दौरान लगे लाकडाउन में सर्वाधिक बन्दी की मार झेलने वाले हेयर सैलून संचालकों को अभी तक भी आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। ऐसे ही एक सैलून संचालक ने अपने मंदे धंधे को दोबारा खड़ा करने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। दिल्ली नगर निगम के चुनाव में अरविन्द केजरीवाल के नाम पर जनता ने फिर से दिल खोलकर वोटिंग की और आम आदमी पार्टी के विजन डवलपमेंट के आगे भाजपा को दरकिनार कर दिया। निगम के पांच वार्डों में हुए चुनाव में चार सीटों पर आप प्रत्याशियों ने कब्जा किया। यूपी में शासन द्वारा देर रात छह जिलों के डीएम व चार मंडलों के आयुक्त बदल दिए गए। मुजफ्फरनगर जनपद में समाजवादी पार्टी द्वारा नौजवान सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें युवजन सभा की जिला कार्यकारिणी का गठन करते हुए पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिये गये। उत्तर प्रदेश के साथ ही देश की सियासत में महत्वपूर्ण योगदान रखने वाले वेस्ट यूपी के जनपद मुजफ्फरनगर में समाजवादी पार्टी का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। बसपा छोड़कर अखिलेश यादव के साथ आये पूर्व विधायक अनिल कुमार लगातार पार्टी को मजबूती देने का काम कर रहे हैं। कोरोना टीकाकरण अभियान में शासन ने अब बड़ा फैसला लेते हुए प्राइवेट हाॅस्पिटल में निःशुल्क कोविड-19 वैक्सीन नहीं लगाये जाने का आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत अब मुजफ्फरनगर में हेल्थ वर्कर्स और फ्रंटलाइन वर्कर्स को इन निजी अस्पतालों में दूसरी डोज नहीं लगेगी। मुजफ्फरनगर जनपद के जिला पंचायत के 43 वार्डों के आरक्षण की अनन्तिम सूची मंगलवार देर रात जिलाधिकारी द्वारा जारी कर दी गयी है। आप भी जानिए कौन सा जिला पंचायत वार्ड किस श्रेणी में रखा गया है। पंचायत चुनाव-मुजफ्फरनगर में आबकारी विभाग ने छोड़ा आनलाइन मुखबिर! त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर मुजफ्फरनगर जनपद में जिला आबकारी अधिकारी उदय प्रकाश ने गोपनीय टीमों को सक्रिय कर दिया है। बार्डर पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मुखबिर भी गांव गांव काॅकटेल की खबर लेने में जुटे गये हैं। पति द्वारा पत्नी का शोषण करने और प्रताड़ित करने के मामले में गाहे बगाहे सुन ही लेते है। अहमदाबाद की आयशा का मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर छाया हुआ है, लेकिन वेस्ट यूपी में आज एक ऐसा मामला एसएसपी कार्यालय पहुंचा, जिसमें पत्नी के जुल्म की दास्तां सुनाई दी।
हिन्द मजदूर-किसान समिति ने छेड़ा अभियान, गुरू चन्द्रमोहन की मौजूदगी में मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में होगा भव्य मूर्ति अभिषेक शनिवार को होगा, इस कार्यक्रम में भारी संख्या में लोगों के जुटने का दावा किया गया है। कोरोना संकट काल के दौरान लगे लाकडाउन में सर्वाधिक बन्दी की मार झेलने वाले हेयर सैलून संचालकों को अभी तक भी आर्थिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। ऐसे ही एक सैलून संचालक ने अपने मंदे धंधे को दोबारा खड़ा करने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। दिल्ली नगर निगम के चुनाव में अरविन्द केजरीवाल के नाम पर जनता ने फिर से दिल खोलकर वोटिंग की और आम आदमी पार्टी के विजन डवलपमेंट के आगे भाजपा को दरकिनार कर दिया। निगम के पांच वार्डों में हुए चुनाव में चार सीटों पर आप प्रत्याशियों ने कब्जा किया। यूपी में शासन द्वारा देर रात छह जिलों के डीएम व चार मंडलों के आयुक्त बदल दिए गए। मुजफ्फरनगर जनपद में समाजवादी पार्टी द्वारा नौजवान सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें युवजन सभा की जिला कार्यकारिणी का गठन करते हुए पदाधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिये गये। उत्तर प्रदेश के साथ ही देश की सियासत में महत्वपूर्ण योगदान रखने वाले वेस्ट यूपी के जनपद मुजफ्फरनगर में समाजवादी पार्टी का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। बसपा छोड़कर अखिलेश यादव के साथ आये पूर्व विधायक अनिल कुमार लगातार पार्टी को मजबूती देने का काम कर रहे हैं। कोरोना टीकाकरण अभियान में शासन ने अब बड़ा फैसला लेते हुए प्राइवेट हाॅस्पिटल में निःशुल्क कोविड-उन्नीस वैक्सीन नहीं लगाये जाने का आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत अब मुजफ्फरनगर में हेल्थ वर्कर्स और फ्रंटलाइन वर्कर्स को इन निजी अस्पतालों में दूसरी डोज नहीं लगेगी। मुजफ्फरनगर जनपद के जिला पंचायत के तैंतालीस वार्डों के आरक्षण की अनन्तिम सूची मंगलवार देर रात जिलाधिकारी द्वारा जारी कर दी गयी है। आप भी जानिए कौन सा जिला पंचायत वार्ड किस श्रेणी में रखा गया है। पंचायत चुनाव-मुजफ्फरनगर में आबकारी विभाग ने छोड़ा आनलाइन मुखबिर! त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर मुजफ्फरनगर जनपद में जिला आबकारी अधिकारी उदय प्रकाश ने गोपनीय टीमों को सक्रिय कर दिया है। बार्डर पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। मुखबिर भी गांव गांव काॅकटेल की खबर लेने में जुटे गये हैं। पति द्वारा पत्नी का शोषण करने और प्रताड़ित करने के मामले में गाहे बगाहे सुन ही लेते है। अहमदाबाद की आयशा का मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर छाया हुआ है, लेकिन वेस्ट यूपी में आज एक ऐसा मामला एसएसपी कार्यालय पहुंचा, जिसमें पत्नी के जुल्म की दास्तां सुनाई दी।
[R.46] परिचितेहि सेदावक्खित्तेहि धम्मिकेहि धम्मलद्धेहि ये ते समणब्राह्मणा मदप्पमादा पटिविरता खन्तिसोरच्चे निविट्ठा एकमत्तानं दमेन्ति, एकमत्तानं समेन्ति एकमत्तानं परिनिब्बापेन्ति, तथारूपेसु समणब्राह्मणेसु उद्धग्गिकं दक्खिणं पतिद्वापेति सोवग्गिकं सुखविपाकं, सग्गसंवत्तनिकं । अयं पञ्चमो भोगानं आदियो । इमे खो, गहपति, पञ्च भोगानं आदिया। ६. "तस्स चे, गहपति, अरियसावकस्स इमे पञ्च भोगानं आदिये आदियतो भोगा परिक्खयं गच्छन्ति, तस्स एवं होति - 'ये वत भोगानं आदिया ते चाहं आदियामि भोगा च मे परिक्खयं गच्छन्ती' ति । इतिस्स होति अविप्पटिसारो । तस्स चे, गहपति, [B.40] अरियसावकस्स इमे पञ्च भोगानं आदिये आदियतो भोगा अभिवड्ढन्ति, तस्स एवं होति - 'ये वत भोगानं आदिया ते चाहं आदियामि भोगा च मे अभिवढन्ती' ति । इतिस्स होति उभयेनेव अविप्पटिसारो ति । " भुत्ता भोगा भता भच्चा, वितिण्णा आपदासु मे। उद्धग्गा दक्खिणा दिन्ना, अथो पञ्चबलीकता । उपट्टिता सीलवन्तो, सञता ब्रह्मचारयो । "यदत्थं भोगं इच्छेय्य, पण्डितो घरमावसं । सो मे अत्थो अनुप्पत्तो, कतं अननुतापियं ॥ "एतं अनुस्सरं मच्चो, अरियधम्मे ठितो नरो। इधेव नं पसंसन्ति, पेच्च सग्गे पमोदती" ति॥ ५. "पुनः, गृहपति ! वह आर्यश्रावक ... पूर्ववत्... उन अपने कामभोगों में से कुछ अंश उन श्रमण ब्राह्मणों को दान करता रहता है; जो दान उसको देहपात के बाद सुगतिमय स्वर्ग में पहुँचाने की सामर्थ्य रखता है। वे श्रमण ब्राह्मण मद एवं प्रमाद से दूर रहते हैं, क्षान्ति एवं नम्रता की साक्षात् मूर्ति हैं; जो अपने शम दम एवं निर्वाण की साधना में सतत दत्तचित्त रहते हैं। यह उसके कामभोगों का पञ्चम आरम्भ है। इस प्रकार, गृहपति ! कामभोगों के ये पाँच आरम्भ होते हैं । (५) ६. "गृहपति ! यदि उस आर्यश्रावक द्वारा इन पाँच कामभोगों को लेने के आरम्भ में ही इनका क्षय होने लगे तो उसको यह खेद नहीं होता कि जिन कामभोगों की प्राप्ति का मैं आरम्भ कर रहा हूँ वे कामभोग पहले ही नष्ट होते जा रहे हैं। तथा इन कामभोगों के आरम्भ करने के बाद इनकी क्रमशः वृद्धि होने लगे तो उसको उसका हर्ष भी नहीं होता कि मेरे आरब्ध कामभोग वृद्धि प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रकार, गृहपति! उस आर्यश्रावक को उभय प्रकार से कहीं भी खेद या हर्ष नहीं होता । 'कामभोगों का यथेष्ट उपभोग किया, उनसे पालनीय लोगों का पालन पोषण किया, आपत्तियों से उनकी रक्षा की । उपरि लोक में गये परिवारजनों के हेतु दान किया तथा उससे अतिथि आदि को पाँच आगन्तुक दान किये एवं सदाचारियों का सत्कार किया ॥ "विद्वानों द्वारा जिसके लिये कामभोग चाहे जाते हैं वह सब मैंने यथेच्छ और विना किसी कष्ट के प्राप्त किया । २. सप्पुरिससुत्तं : १. "सप्पुरिसो, भिक्खवे, कुले जायमानो बहुनो [N.312] जनस्स अत्थाय हिताय सुखाय होति; मातापितूनं अत्थाय हिताय सुखाय होति; पुत्तदारस्स अत्थाय हिताय सुखाय होति; दासकम्मकरपोरिसस्स अत्थाय हिताय सुखाय होति; मित्तामच्चानं अत्थाय हिताय सुखाय होति; समणब्राह्मणानं अत्थाय हिताय सुखाय होति । २. "सेय्यथापि, भिक्खवे, महामेघो सब्बसस्सानि सम्पादेन्तो बहुनो [R.47] जनस्स अत्थाय हिताय सुखाय होति; एवमेव खो, भिक्खवे, सप्पुरिसो कुले जायमानो बहुनो जनस्स अत्थाय हिताय सुखाय होति; मातापितूनं अत्थाय हिताय सुखाय होति; पुत्तदारस्स अत्थाय हिताय सुखाय होति; मित्तामच्चानं अत्थाय हिताय सुखाय होति; समणब्राह्मणानं अत्थाय हिताय सुखाय होती ति । "हितो बहुन्नं पटिपज्ज भोगे, तं देवता रक्खति धम्मगुत्तं । बहुस्सुतं सीलवतूपपन्नं, धम्मे ठितं न विजहाति कित्ति ॥ धम्म सीलसम्पन्नं, हिरीमनं । नेक्खं जम्बोनदस्सेव को तं निन्दितुमरहति । देवा पि नं पसंसन्ति, ब्रह्म॒ना पि पसंसितो" ति॥ ३. इट्ठसुत्तं : १. अथ खो अनाथपिण्डिको गहपति येन भगवा तेनुपसङ्कमि; उपसङ्कमित्वा भगवन्तं अभिवादेत्वा एकमन्तं निसीदि। एकमन्तं निसिन्नं खो अनाथपिण्डिकं गहपतिं भगवा एतदवोच[B.41] "आर्यधर्म में प्रतिष्ठित किसी भी पुरुष को निरन्तर यह बात स्मरण रखनी चाहिये। ऐसे पुरुष की इस लोक में भी प्रशंसा होती है तथा मरणानन्तर स्वर्ग में भी वह दिव्य सुख का अनुभव करता है ॥ " सत्पुरुष के पाँच लाभ १. "भिक्षुओ ! कुल में उत्पन्न हुआ सत्पुरुष अनेक जनों के हित एवं सुख का साधक होता है। वह (१) माता पिता के...; (२) पुत्र एवं पत्नी के...; (३) दास एवं भृत्य आदि के...; (४) मित्र एवं साथियों के...; एवं (५) श्रमणों ब्राह्मणों के हितसुख का साधक होता है। २. "जैसे, भिक्षुओ! महामेघ (वर्षा का जल) सभी धान्यों को उत्पन्न करता हुआ बहुत लोगों के हित सुख का सम्पादन करता है; इसी प्रकार, भिक्षुओ! कुल में उत्पन्न सत्पुरुष बहुत लोगों के ... पूर्ववत्... श्रमण ब्राह्मणों के हित एवं सुख का सम्पादक होता है। "जो कामभोगों को प्राप्त कर बहुत से लोगों के हित में लगा रहता है, ऐसे धर्म से रक्षित सत्पुरुष की देवता भी रक्षा करते हैं। जो बहुश्रुत होता है, सदाचार एवं व्रतपालन से सम्पन्न है, धर्माचरण में तत्पर है ऐसे पुरुष का यश साथ नहीं छोड़ता ॥ "धर्मनिष्ठ, सदाचारपरायण, सत्यवादी, पापकर्म में लज्जित होनेवाला पुरुष किसी की निन्दा का पात्र नहीं होता; जैसे कसौटी पर चढ़ा हुआ शुद्ध सुवर्ण । उसकी देवता भी प्रशंसा करते हैं तथा वह देवाधिदेव ब्रह्मा द्वारा भी प्रशंसित होता है । " २. "पञ्चिमे, गहपति, धम्मा इट्ठा कन्ता मनापा दुल्लभा लोकस्मि । कतमे पञ्च ? आयु, गहपति, इट्ठो कन्तो मनापो दुल्लभो लोकस्मि; वण्णो इट्ठो कन्तो मनापो दुल्लभो लोकस्मि; सुखं इट्टं कन्तं मनापं दुल्लभं लोकस्मि; यसो इट्ठो कन्तो मनापो दुल्लभो [N.313] लोकस्मि; सग्गा इट्ठा कन्ता मनापा दुल्लभा लोकस्मि । इमे खो, गहपति, पञ्च धम्मा इट्ठा कन्ता मनापा दुल्लभा लोकस्मि । ३. "इमेसं खो, गहपति, पञ्चन्नं धम्मानं इट्टानं कन्तानं मनापानं दुल्लभानं लोकस्मि न आयाचनहेतु वा पत्थनाहेतु वा पटिलाभं वदामि । इमेसं खो, गहपति, पञ्चन्नं [R.48] धम्मानं इट्ठानं कन्तानं मनापानं दुल्लभानं लोकस्मि आयाचनहेतु वा पत्थनाहेतु वा पटिलाभो अभविस्स, को इध केन हायेथ! ४. "न खो, गहपति, अरहति अरियसावको आयुकामो आयुं आयाचितुं वा अभिनन्दितुं वा आयुस्स वा पि हेतु। आयुकामेन, गहपति, अरियसावकेन आयुसंवत्तनिका पटिपदा पटिपज्जितब्बा आयुसंवत्तनिका हिस्स पटिपदा पटिपन्ना आयुपटिलाभाय संवत्तति। सो लाभी होति आयुस्स दिब्बस्स वा मानुसस्स वा । ५. "न खो, गहपति, अरहति अरियसावको वण्णकामो वण्णं आयाचितुं वा अभिनन्दितुं वा वण्णस्स वा पि हेतु । वण्णकामेन, गहपति, अरियसावकेन वण्णसंवत्तनिका पटिपदा पटिपज्जितब्बा। वण्णसंवत्तनिका हिस्स पटिपदा पटिपन्ना वण्णपटिलाभाय संवत्तति । सो लाभी होति वण्णस्स दिब्बस्स वा मानुसस्स वा । लोक में दुर्लभ पाँच धर्म १. ...तब अनाथपिण्डिक गृहपति भगवान् के सम्मुख पहुँचे। पहुँचकर उनको प्रणाम कर एक ओर बैठ गये। एक ओर बैठे गृहपति को भगवान् यों बोले२. "गृहपति! लोक में ये पाँच इष्ट, कान्त, मनाप धर्म दुर्लभ है। कौन पाँच ? गृहपति इष्ट कान्त मनाप आयु लोक में दुर्लभ हैं; इष्ट, कान्त मनाप वर्ण लोक में दुर्लभ हैं; इष्ट, कान्त मनाप सुख लोक में दुर्लभ हैं; इष्ट कान्त मनाप यश लोक में दुर्लभ हैं; इष्ट कान्त मनाप स्वर्ग लोक में दुर्लभ है। गृहपति ! लोक में ये पाँच इष्ट कान्त मनाप धर्म लोक में दुर्लभ हैं । ३. "गृहपति! इन पाँचों इष्ट कान्त मनाप धर्मों को लोक में किसी से माँगने, याच्या करने में मैं कोई लाभ नहीं देखता; क्योंकि माँगने या याच्या करने से यदि ये मिल जाते तो कोई इनको क्यों छोड़ता । ४. "गृहपति! आयुर्वृद्धि की इच्छा रखने वाले किसी आर्य श्रावक का किसी से आयु का माँगना उचित नहीं; अपितु इसे आयु बढ़ाने वाले मार्ग का स्वयं अनुसरण करना चाहिये । इस आयुर्वर्धक मार्ग के अनुसरण से ही उसकी आयु बढ़ सकेगी। और वह दिव्य एवं लौकिक दीर्घायु प्राप्त कर सकेगा । (१) ५. "गृहपति! वर्णवृद्धि की इच्छा रखनेवाले ... पूर्ववत्... वह दिव्य एवं लौकिक वर्ण प्राप्त कर सकेगा । (२)
[R.छियालीस] परिचितेहि सेदावक्खित्तेहि धम्मिकेहि धम्मलद्धेहि ये ते समणब्राह्मणा मदप्पमादा पटिविरता खन्तिसोरच्चे निविट्ठा एकमत्तानं दमेन्ति, एकमत्तानं समेन्ति एकमत्तानं परिनिब्बापेन्ति, तथारूपेसु समणब्राह्मणेसु उद्धग्गिकं दक्खिणं पतिद्वापेति सोवग्गिकं सुखविपाकं, सग्गसंवत्तनिकं । अयं पञ्चमो भोगानं आदियो । इमे खो, गहपति, पञ्च भोगानं आदिया। छः. "तस्स चे, गहपति, अरियसावकस्स इमे पञ्च भोगानं आदिये आदियतो भोगा परिक्खयं गच्छन्ति, तस्स एवं होति - 'ये वत भोगानं आदिया ते चाहं आदियामि भोगा च मे परिक्खयं गच्छन्ती' ति । इतिस्स होति अविप्पटिसारो । तस्स चे, गहपति, [B.चालीस] अरियसावकस्स इमे पञ्च भोगानं आदिये आदियतो भोगा अभिवड्ढन्ति, तस्स एवं होति - 'ये वत भोगानं आदिया ते चाहं आदियामि भोगा च मे अभिवढन्ती' ति । इतिस्स होति उभयेनेव अविप्पटिसारो ति । " भुत्ता भोगा भता भच्चा, वितिण्णा आपदासु मे। उद्धग्गा दक्खिणा दिन्ना, अथो पञ्चबलीकता । उपट्टिता सीलवन्तो, सञता ब्रह्मचारयो । "यदत्थं भोगं इच्छेय्य, पण्डितो घरमावसं । सो मे अत्थो अनुप्पत्तो, कतं अननुतापियं ॥ "एतं अनुस्सरं मच्चो, अरियधम्मे ठितो नरो। इधेव नं पसंसन्ति, पेच्च सग्गे पमोदती" ति॥ पाँच. "पुनः, गृहपति ! वह आर्यश्रावक ... पूर्ववत्... उन अपने कामभोगों में से कुछ अंश उन श्रमण ब्राह्मणों को दान करता रहता है; जो दान उसको देहपात के बाद सुगतिमय स्वर्ग में पहुँचाने की सामर्थ्य रखता है। वे श्रमण ब्राह्मण मद एवं प्रमाद से दूर रहते हैं, क्षान्ति एवं नम्रता की साक्षात् मूर्ति हैं; जो अपने शम दम एवं निर्वाण की साधना में सतत दत्तचित्त रहते हैं। यह उसके कामभोगों का पञ्चम आरम्भ है। इस प्रकार, गृहपति ! कामभोगों के ये पाँच आरम्भ होते हैं । छः. "गृहपति ! यदि उस आर्यश्रावक द्वारा इन पाँच कामभोगों को लेने के आरम्भ में ही इनका क्षय होने लगे तो उसको यह खेद नहीं होता कि जिन कामभोगों की प्राप्ति का मैं आरम्भ कर रहा हूँ वे कामभोग पहले ही नष्ट होते जा रहे हैं। तथा इन कामभोगों के आरम्भ करने के बाद इनकी क्रमशः वृद्धि होने लगे तो उसको उसका हर्ष भी नहीं होता कि मेरे आरब्ध कामभोग वृद्धि प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रकार, गृहपति! उस आर्यश्रावक को उभय प्रकार से कहीं भी खेद या हर्ष नहीं होता । 'कामभोगों का यथेष्ट उपभोग किया, उनसे पालनीय लोगों का पालन पोषण किया, आपत्तियों से उनकी रक्षा की । उपरि लोक में गये परिवारजनों के हेतु दान किया तथा उससे अतिथि आदि को पाँच आगन्तुक दान किये एवं सदाचारियों का सत्कार किया ॥ "विद्वानों द्वारा जिसके लिये कामभोग चाहे जाते हैं वह सब मैंने यथेच्छ और विना किसी कष्ट के प्राप्त किया । दो. सप्पुरिससुत्तं : एक. "सप्पुरिसो, भिक्खवे, कुले जायमानो बहुनो [N.तीन सौ बारह] जनस्स अत्थाय हिताय सुखाय होति; मातापितूनं अत्थाय हिताय सुखाय होति; पुत्तदारस्स अत्थाय हिताय सुखाय होति; दासकम्मकरपोरिसस्स अत्थाय हिताय सुखाय होति; मित्तामच्चानं अत्थाय हिताय सुखाय होति; समणब्राह्मणानं अत्थाय हिताय सुखाय होति । दो. "सेय्यथापि, भिक्खवे, महामेघो सब्बसस्सानि सम्पादेन्तो बहुनो [R.सैंतालीस] जनस्स अत्थाय हिताय सुखाय होति; एवमेव खो, भिक्खवे, सप्पुरिसो कुले जायमानो बहुनो जनस्स अत्थाय हिताय सुखाय होति; मातापितूनं अत्थाय हिताय सुखाय होति; पुत्तदारस्स अत्थाय हिताय सुखाय होति; मित्तामच्चानं अत्थाय हिताय सुखाय होति; समणब्राह्मणानं अत्थाय हिताय सुखाय होती ति । "हितो बहुन्नं पटिपज्ज भोगे, तं देवता रक्खति धम्मगुत्तं । बहुस्सुतं सीलवतूपपन्नं, धम्मे ठितं न विजहाति कित्ति ॥ धम्म सीलसम्पन्नं, हिरीमनं । नेक्खं जम्बोनदस्सेव को तं निन्दितुमरहति । देवा पि नं पसंसन्ति, ब्रह्म॒ना पि पसंसितो" ति॥ तीन. इट्ठसुत्तं : एक. अथ खो अनाथपिण्डिको गहपति येन भगवा तेनुपसङ्कमि; उपसङ्कमित्वा भगवन्तं अभिवादेत्वा एकमन्तं निसीदि। एकमन्तं निसिन्नं खो अनाथपिण्डिकं गहपतिं भगवा एतदवोच[B.इकतालीस] "आर्यधर्म में प्रतिष्ठित किसी भी पुरुष को निरन्तर यह बात स्मरण रखनी चाहिये। ऐसे पुरुष की इस लोक में भी प्रशंसा होती है तथा मरणानन्तर स्वर्ग में भी वह दिव्य सुख का अनुभव करता है ॥ " सत्पुरुष के पाँच लाभ एक. "भिक्षुओ ! कुल में उत्पन्न हुआ सत्पुरुष अनेक जनों के हित एवं सुख का साधक होता है। वह माता पिता के...; पुत्र एवं पत्नी के...; दास एवं भृत्य आदि के...; मित्र एवं साथियों के...; एवं श्रमणों ब्राह्मणों के हितसुख का साधक होता है। दो. "जैसे, भिक्षुओ! महामेघ सभी धान्यों को उत्पन्न करता हुआ बहुत लोगों के हित सुख का सम्पादन करता है; इसी प्रकार, भिक्षुओ! कुल में उत्पन्न सत्पुरुष बहुत लोगों के ... पूर्ववत्... श्रमण ब्राह्मणों के हित एवं सुख का सम्पादक होता है। "जो कामभोगों को प्राप्त कर बहुत से लोगों के हित में लगा रहता है, ऐसे धर्म से रक्षित सत्पुरुष की देवता भी रक्षा करते हैं। जो बहुश्रुत होता है, सदाचार एवं व्रतपालन से सम्पन्न है, धर्माचरण में तत्पर है ऐसे पुरुष का यश साथ नहीं छोड़ता ॥ "धर्मनिष्ठ, सदाचारपरायण, सत्यवादी, पापकर्म में लज्जित होनेवाला पुरुष किसी की निन्दा का पात्र नहीं होता; जैसे कसौटी पर चढ़ा हुआ शुद्ध सुवर्ण । उसकी देवता भी प्रशंसा करते हैं तथा वह देवाधिदेव ब्रह्मा द्वारा भी प्रशंसित होता है । " दो. "पञ्चिमे, गहपति, धम्मा इट्ठा कन्ता मनापा दुल्लभा लोकस्मि । कतमे पञ्च ? आयु, गहपति, इट्ठो कन्तो मनापो दुल्लभो लोकस्मि; वण्णो इट्ठो कन्तो मनापो दुल्लभो लोकस्मि; सुखं इट्टं कन्तं मनापं दुल्लभं लोकस्मि; यसो इट्ठो कन्तो मनापो दुल्लभो [N.तीन सौ तेरह] लोकस्मि; सग्गा इट्ठा कन्ता मनापा दुल्लभा लोकस्मि । इमे खो, गहपति, पञ्च धम्मा इट्ठा कन्ता मनापा दुल्लभा लोकस्मि । तीन. "इमेसं खो, गहपति, पञ्चन्नं धम्मानं इट्टानं कन्तानं मनापानं दुल्लभानं लोकस्मि न आयाचनहेतु वा पत्थनाहेतु वा पटिलाभं वदामि । इमेसं खो, गहपति, पञ्चन्नं [R.अड़तालीस] धम्मानं इट्ठानं कन्तानं मनापानं दुल्लभानं लोकस्मि आयाचनहेतु वा पत्थनाहेतु वा पटिलाभो अभविस्स, को इध केन हायेथ! चार. "न खो, गहपति, अरहति अरियसावको आयुकामो आयुं आयाचितुं वा अभिनन्दितुं वा आयुस्स वा पि हेतु। आयुकामेन, गहपति, अरियसावकेन आयुसंवत्तनिका पटिपदा पटिपज्जितब्बा आयुसंवत्तनिका हिस्स पटिपदा पटिपन्ना आयुपटिलाभाय संवत्तति। सो लाभी होति आयुस्स दिब्बस्स वा मानुसस्स वा । पाँच. "न खो, गहपति, अरहति अरियसावको वण्णकामो वण्णं आयाचितुं वा अभिनन्दितुं वा वण्णस्स वा पि हेतु । वण्णकामेन, गहपति, अरियसावकेन वण्णसंवत्तनिका पटिपदा पटिपज्जितब्बा। वण्णसंवत्तनिका हिस्स पटिपदा पटिपन्ना वण्णपटिलाभाय संवत्तति । सो लाभी होति वण्णस्स दिब्बस्स वा मानुसस्स वा । लोक में दुर्लभ पाँच धर्म एक. ...तब अनाथपिण्डिक गृहपति भगवान् के सम्मुख पहुँचे। पहुँचकर उनको प्रणाम कर एक ओर बैठ गये। एक ओर बैठे गृहपति को भगवान् यों बोलेदो. "गृहपति! लोक में ये पाँच इष्ट, कान्त, मनाप धर्म दुर्लभ है। कौन पाँच ? गृहपति इष्ट कान्त मनाप आयु लोक में दुर्लभ हैं; इष्ट, कान्त मनाप वर्ण लोक में दुर्लभ हैं; इष्ट, कान्त मनाप सुख लोक में दुर्लभ हैं; इष्ट कान्त मनाप यश लोक में दुर्लभ हैं; इष्ट कान्त मनाप स्वर्ग लोक में दुर्लभ है। गृहपति ! लोक में ये पाँच इष्ट कान्त मनाप धर्म लोक में दुर्लभ हैं । तीन. "गृहपति! इन पाँचों इष्ट कान्त मनाप धर्मों को लोक में किसी से माँगने, याच्या करने में मैं कोई लाभ नहीं देखता; क्योंकि माँगने या याच्या करने से यदि ये मिल जाते तो कोई इनको क्यों छोड़ता । चार. "गृहपति! आयुर्वृद्धि की इच्छा रखने वाले किसी आर्य श्रावक का किसी से आयु का माँगना उचित नहीं; अपितु इसे आयु बढ़ाने वाले मार्ग का स्वयं अनुसरण करना चाहिये । इस आयुर्वर्धक मार्ग के अनुसरण से ही उसकी आयु बढ़ सकेगी। और वह दिव्य एवं लौकिक दीर्घायु प्राप्त कर सकेगा । पाँच. "गृहपति! वर्णवृद्धि की इच्छा रखनेवाले ... पूर्ववत्... वह दिव्य एवं लौकिक वर्ण प्राप्त कर सकेगा ।
घर वापसी के बाद दिल्ली भाजपा नेता तजिंदर बग्गा ने आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को चैलेंज कर दिया है। बग्गा ने कहा कि उन पर 1 नहीं बल्कि 100 FIR कर दो, तब भी वह डरने वाले नहीं हैं। वह कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। बग्गा को कल पंजाब पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था। हालांकि रास्ते में हरियाणा पुलिस ने पंजाब पुलिस को रोक लिया। जिसके बाद बग्गा को दिल्ली पुलिस वापस ले गई। जहां मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। तजिंदर बग्गा ने कहा कि 8 बजे 2 पुलिसकर्मी आए। उन्होंने कहा कि नोटिस देने आए हैं। फिर उनमें से एक ने दरवाजा खोला और 14-15 लोग सादे कपड़ों में अंदर आ गए। उन्होंने मुझे बात नहीं करने दी। वारंट नहीं दिखाया। लोकल पुलिस को इन्फॉर्म नहीं किया। 14-15 लोग मुझे ऐसे बाहर उठाकर ले गए, जैसे मैं कोई आतंकवादी हूं। करीब 50 लोगों के साथ मुझे ले जाने लगे। मेरा कसूर यह है कि मैं उनसे रोज सवाल पूछता हूं। अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि श्री गुरू ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों को 24 घंटे में जेल में डालूंगा। मैं यही पूछ रहा हूं कि अब तक ऐसा क्यों नहीं किया गया? । उन्हें लगता है कि केस दर्ज कर वह मुझे सवाल पूछने से रोक लेंगे। कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को झूठ बोलने पर माफी मांगने की मांग छोड़ देंगे। हम रुकने और डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सोमवार को मैं पूरा बयान दूंगा। जिन लोगों ने हाथ उठाया और अवैध हिरासत में लिया, उनके खिलाफ कार्रवाई करवाऊंगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
घर वापसी के बाद दिल्ली भाजपा नेता तजिंदर बग्गा ने आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को चैलेंज कर दिया है। बग्गा ने कहा कि उन पर एक नहीं बल्कि एक सौ FIR कर दो, तब भी वह डरने वाले नहीं हैं। वह कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। बग्गा को कल पंजाब पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार किया था। हालांकि रास्ते में हरियाणा पुलिस ने पंजाब पुलिस को रोक लिया। जिसके बाद बग्गा को दिल्ली पुलिस वापस ले गई। जहां मजिस्ट्रेट के सामने पेशी के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। तजिंदर बग्गा ने कहा कि आठ बजे दो पुलिसकर्मी आए। उन्होंने कहा कि नोटिस देने आए हैं। फिर उनमें से एक ने दरवाजा खोला और चौदह-पंद्रह लोग सादे कपड़ों में अंदर आ गए। उन्होंने मुझे बात नहीं करने दी। वारंट नहीं दिखाया। लोकल पुलिस को इन्फॉर्म नहीं किया। चौदह-पंद्रह लोग मुझे ऐसे बाहर उठाकर ले गए, जैसे मैं कोई आतंकवादी हूं। करीब पचास लोगों के साथ मुझे ले जाने लगे। मेरा कसूर यह है कि मैं उनसे रोज सवाल पूछता हूं। अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि श्री गुरू ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने वालों को चौबीस घंटाटे में जेल में डालूंगा। मैं यही पूछ रहा हूं कि अब तक ऐसा क्यों नहीं किया गया? । उन्हें लगता है कि केस दर्ज कर वह मुझे सवाल पूछने से रोक लेंगे। कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को झूठ बोलने पर माफी मांगने की मांग छोड़ देंगे। हम रुकने और डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सोमवार को मैं पूरा बयान दूंगा। जिन लोगों ने हाथ उठाया और अवैध हिरासत में लिया, उनके खिलाफ कार्रवाई करवाऊंगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
उलार सूर्य मंदिर के महंत अवधबिहारी दास की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित बैठक में छठ के मौके पर उलार में मेला नहीं लगाए जाने का निर्णय लिया गया। इस दौरान एसडीओ ने लोगों से छठ महापर्व को घर में ही रहकर मनाने की अपील की। पटना के उलार सूर्य मंदिर में इस बार नहीं लगेगा मेला। कोरोना की वजह से जारी बिहार सरकार की गाइड लाइन पर लिया गया फैसला। हनुमतेश्वर दयाल,पालीगंज लोकआस्था को पर्व छठ पूजा के मौके पर श्रीकृष्ण के वंशज शाम्ब द्वारा निर्मित विश्व प्रसिद्ध उलार सूर्य मंदिर परिसर में विरानी छाए रहने की संभावना प्रबल हो गई है। कोविड-19 के कारण छठ को लेकर जिला प्रशासन की ओर से जारी गाइड लाइन की वजह से इस बार उलार में न मेला लगेगा और न ही व्रतियों का सैलाब ही उमड़ेगा। सोमवार को जिला प्रशासन के निर्देश पर अनुमंडल पदाधिकारी मुकेश कुमार व उलार सूर्य मंदिर के महंत अवधबिहारी दास की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित बैठक में छठ के मौके पर उलार में मेला नहीं लगाए जाने का निर्णय लिया गया। इस दौरान एसडीओ ने लोगों से छठ महापर्व को घर में ही रहकर मनाने की अपील की। वहीं महंत अवधबिहारी दास ने कहा कि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है और न ही खत्म होने की अभी कोई संभावना दिख रही है। कोरोना का हर दिन विस्तार हो रहा है। ऐसे में छठ के अवसर पर पुण्यफलदायनी तालाब में डुबकी लगाना खतरे से खाली नहीं होगा। महंत ने भी लोगों को घर में ही सूर्योपासना की सलाह दी है। उलार में छठ पर्व को लेकर जारी प्रतिबंधात्मक आदेशों को लेकर लोगों में नाराजगी उधर उलार में इस बार छठ पर्व को लेकर जारी प्रतिबंधात्मक आदेशों से आम लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। उलार, अलीपुर, दुल्हीनबाजार, रकसिया आदि गांवों के लोगों ने प्रशासनिक आदेशों पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जैसे राष्ट्रीय पर्व में प्रचार के दौरान उमड़े जनसैलाब से कोरोना नही फैला तो धर्म-कर्म, पर्व-त्योहार व छठ पूजा से कोरोना कैसे फैल सकता है। प्रशासन के इस रवैये से इलाके के लोगों मे मायूसी छाई हुई है। बता दें कि इस बार चैती छठ में भी उलार में छठ करना पूर्ण प्रतिबंधित था। कोरोना का व्यापक पैमाने पर विस्तार होने के कारण चैत में छठ के दौर सूर्यमंदिर का कपाट बंद कर दिया गया था। विशेष महत्व का है उलार का तालाब ऐसा कहा जाता है कि देश के 12 प्रसिद्ध सूर्यमन्दिरों में से एक उलार (ऑलार्क) सूर्यमन्दिर में छठ व्रत करने और तालाब में अर्घ्य देने से मनोकामना पूर्ण होती है। मान्यता है कि यहां छठ कर मनौती मानने से मनौती पूर्ण होती है। वहीं तालाब में स्नान करने से कुष्ठ जैसे असाध्य रोगों से मुक्ति मिल जाती है। महंत अवधबिहारी दास की माने तो बिहार के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों से पांच से छः लाख की संख्या में व्रती यहां छठ करने हर साल आते हैं। बकौल महंत यह पहला मौका है, जब कोरोना की वजह से इसबार यहां न तो मेला लगेगा, न ही व्रत होगा और न ही लाखों की भीड़ जमा होगी।
उलार सूर्य मंदिर के महंत अवधबिहारी दास की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित बैठक में छठ के मौके पर उलार में मेला नहीं लगाए जाने का निर्णय लिया गया। इस दौरान एसडीओ ने लोगों से छठ महापर्व को घर में ही रहकर मनाने की अपील की। पटना के उलार सूर्य मंदिर में इस बार नहीं लगेगा मेला। कोरोना की वजह से जारी बिहार सरकार की गाइड लाइन पर लिया गया फैसला। हनुमतेश्वर दयाल,पालीगंज लोकआस्था को पर्व छठ पूजा के मौके पर श्रीकृष्ण के वंशज शाम्ब द्वारा निर्मित विश्व प्रसिद्ध उलार सूर्य मंदिर परिसर में विरानी छाए रहने की संभावना प्रबल हो गई है। कोविड-उन्नीस के कारण छठ को लेकर जिला प्रशासन की ओर से जारी गाइड लाइन की वजह से इस बार उलार में न मेला लगेगा और न ही व्रतियों का सैलाब ही उमड़ेगा। सोमवार को जिला प्रशासन के निर्देश पर अनुमंडल पदाधिकारी मुकेश कुमार व उलार सूर्य मंदिर के महंत अवधबिहारी दास की संयुक्त अध्यक्षता में आयोजित बैठक में छठ के मौके पर उलार में मेला नहीं लगाए जाने का निर्णय लिया गया। इस दौरान एसडीओ ने लोगों से छठ महापर्व को घर में ही रहकर मनाने की अपील की। वहीं महंत अवधबिहारी दास ने कहा कि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है और न ही खत्म होने की अभी कोई संभावना दिख रही है। कोरोना का हर दिन विस्तार हो रहा है। ऐसे में छठ के अवसर पर पुण्यफलदायनी तालाब में डुबकी लगाना खतरे से खाली नहीं होगा। महंत ने भी लोगों को घर में ही सूर्योपासना की सलाह दी है। उलार में छठ पर्व को लेकर जारी प्रतिबंधात्मक आदेशों को लेकर लोगों में नाराजगी उधर उलार में इस बार छठ पर्व को लेकर जारी प्रतिबंधात्मक आदेशों से आम लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। उलार, अलीपुर, दुल्हीनबाजार, रकसिया आदि गांवों के लोगों ने प्रशासनिक आदेशों पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जैसे राष्ट्रीय पर्व में प्रचार के दौरान उमड़े जनसैलाब से कोरोना नही फैला तो धर्म-कर्म, पर्व-त्योहार व छठ पूजा से कोरोना कैसे फैल सकता है। प्रशासन के इस रवैये से इलाके के लोगों मे मायूसी छाई हुई है। बता दें कि इस बार चैती छठ में भी उलार में छठ करना पूर्ण प्रतिबंधित था। कोरोना का व्यापक पैमाने पर विस्तार होने के कारण चैत में छठ के दौर सूर्यमंदिर का कपाट बंद कर दिया गया था। विशेष महत्व का है उलार का तालाब ऐसा कहा जाता है कि देश के बारह प्रसिद्ध सूर्यमन्दिरों में से एक उलार सूर्यमन्दिर में छठ व्रत करने और तालाब में अर्घ्य देने से मनोकामना पूर्ण होती है। मान्यता है कि यहां छठ कर मनौती मानने से मनौती पूर्ण होती है। वहीं तालाब में स्नान करने से कुष्ठ जैसे असाध्य रोगों से मुक्ति मिल जाती है। महंत अवधबिहारी दास की माने तो बिहार के अलावा देश के अलग-अलग राज्यों से पांच से छः लाख की संख्या में व्रती यहां छठ करने हर साल आते हैं। बकौल महंत यह पहला मौका है, जब कोरोना की वजह से इसबार यहां न तो मेला लगेगा, न ही व्रत होगा और न ही लाखों की भीड़ जमा होगी।
हमारे संवाददाता नई दिल्ली। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा ने दिल्लीभर में बैठकें आयोजित करके कांग्रेस सरकार की कथित जनविरोधी नीतियों के खिलाफ अलख जगाना पारम्भ कर दिया है। मोर्चा 20 नवम्बर की जन चेतना यात्रा समापन रैली में दिल्ली के सभी कोनों से दलित समाज के लोगों कोश्री आडवाणी का उदबोधन सुनने के लिए रामलीला मैदान पहुंचने के लिए पयत्नशील है। पार्टी के पदेश कार्यालय में आयोजित मोर्चा की एक बड़ी बैठक में पदेश अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि कांग्रेसीराज में दिल्ली में स्थितियां भयावह हैं। राजधानी में कोई भी स्वयं को सुरक्षित नहीं महसूस करता। कांग्रेस सरकार अपने दायित्वों के निर्वहन में पूरी तरह फैल हो गई है। लोग कमरतोड़ महंगांई और टैक्सों कीमार से परेशान हैं। परिवार पालन मुश्किल हो रहा है। दिल्ली सरकार ने अनुसूचित जाति कल्याण फंड का 680 करोड़ रुपए की केंद्रीय मदद खेलों पर खर्च कर दी थी। यह पैसा मुख्यमंत्री ने वापस करने का वायदा किया था लेकिन आज तक वायदा निभाया नहीं गया। इससे अनुसूचित समाज के घोर रोष व्याप्त है। मोर्चा के पदेश अध्यक्ष कृष्णलाल ढिलोड़ ने बताया कि अभी तक चांदीन चौक, नजफगढ़, हस्तसाल गांव, त्रिलोकपुरी, मयूर विहार, आजादपुर गांव, केशवपुरम आदि क्षेत्रों में अनुसूचित समाज की बड़ी बैठकें आयोजित करके मोर्चा के लोगों ने उन्हें कांग्रेस सरकार के अत्याचारों के बारे में अवगत कराया है। अनुसूचित समाज के लोगों का आह्वान किया गया कि वे दिल्ली से जनविरोधी कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेकें।
हमारे संवाददाता नई दिल्ली। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा ने दिल्लीभर में बैठकें आयोजित करके कांग्रेस सरकार की कथित जनविरोधी नीतियों के खिलाफ अलख जगाना पारम्भ कर दिया है। मोर्चा बीस नवम्बर की जन चेतना यात्रा समापन रैली में दिल्ली के सभी कोनों से दलित समाज के लोगों कोश्री आडवाणी का उदबोधन सुनने के लिए रामलीला मैदान पहुंचने के लिए पयत्नशील है। पार्टी के पदेश कार्यालय में आयोजित मोर्चा की एक बड़ी बैठक में पदेश अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि कांग्रेसीराज में दिल्ली में स्थितियां भयावह हैं। राजधानी में कोई भी स्वयं को सुरक्षित नहीं महसूस करता। कांग्रेस सरकार अपने दायित्वों के निर्वहन में पूरी तरह फैल हो गई है। लोग कमरतोड़ महंगांई और टैक्सों कीमार से परेशान हैं। परिवार पालन मुश्किल हो रहा है। दिल्ली सरकार ने अनुसूचित जाति कल्याण फंड का छः सौ अस्सी करोड़ रुपए की केंद्रीय मदद खेलों पर खर्च कर दी थी। यह पैसा मुख्यमंत्री ने वापस करने का वायदा किया था लेकिन आज तक वायदा निभाया नहीं गया। इससे अनुसूचित समाज के घोर रोष व्याप्त है। मोर्चा के पदेश अध्यक्ष कृष्णलाल ढिलोड़ ने बताया कि अभी तक चांदीन चौक, नजफगढ़, हस्तसाल गांव, त्रिलोकपुरी, मयूर विहार, आजादपुर गांव, केशवपुरम आदि क्षेत्रों में अनुसूचित समाज की बड़ी बैठकें आयोजित करके मोर्चा के लोगों ने उन्हें कांग्रेस सरकार के अत्याचारों के बारे में अवगत कराया है। अनुसूचित समाज के लोगों का आह्वान किया गया कि वे दिल्ली से जनविरोधी कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेकें।
Amruta Fadnavis : महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला एक करोड़ रुपए की रिश्वत से जुड़ा है। उन्होने मुंबई में एक डिजाइनर के खिलाफ धमकी और साजिश के आरोपों से जुड़े एक मामले में शिकायत दर्ज कराई है। उनकी ओर से दर्ज इस एफआईआर में अनिक्षा नाम की एक महिला और उसके पिता का नाम है। अमृता फडणवीस ने आरोप लगाया है कि महिला ने एक डिजाइनर होने का दावा करते हुए अपने पिता से जुड़े एक आपराधिक मामले में हस्तक्षेप करने के लिए 1 करोड़ रुपये की रिश्वत देने के लिए कहा था। मुंबई पुलिस ने महिला और उसके पिता के खिलाफ साजिश रचने और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। कौन है यह महिला और कैसे अमृता फडणवीस के संपर्क में आई? अनिक्षा नाम की इस महिला ने कथित तौर पर नवंबर 2021 में पहली बार अमृता फडणवीस से संपर्क किया था। एफआईआर के मुताबिक अमृता फडणवीस ने कहा कि महिला ने 18 और 19 फरवरी को एक अज्ञात नंबर से अपने वीडियो क्लिप, वॉयस नोट्स और संदेश भेजे। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमृता फडणवीस ने पुलिस को बताया कि महिला ने कपड़े, ज्वेलरी, और जूते की डिजाइनर होने का दावा किया था। अमृता फडणवीस ने कहा कि वह एक डिजाइनर के तौर पर उनके करीब आई थी लेकिन एक बार वह महिला मेरे बॉडीगार्ड से से झूठ बोलकर मेरी कार में बैठ गयी। उसने मुझे बताया कि उसके पिता पुलिस को सटोरियों के बारे में जानकारी देते रहे हैं और पेशकश की कि वे या तो पुलिस को सटोरियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश देकर पैसा कमा सकती हैं या वे उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न करके सटोरियों से भी पैसे बना सकती हैं। मैंने यह सुनकर उसे अपनी कार से उतार दिया। दर्ज एफआईआर में यह दावा किया गया है कि 16 फरवरी को रात 9. 30 बजे अनीक्षा ने अमृता फडणवीस से संपर्क किया और उन्हें बताया कि उनके पिता एक मामले में आरोपी हैं और उन्होंने उन्हें बचाने के लिए 1 करोड़ रुपये की पेशकश की। द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अमृता फडणवीस ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा कि जैसे ही मैंने यह सुना मैंने कॉल रख दिया और उसे ब्लॉक कर दिया।
Amruta Fadnavis : महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला एक करोड़ रुपए की रिश्वत से जुड़ा है। उन्होने मुंबई में एक डिजाइनर के खिलाफ धमकी और साजिश के आरोपों से जुड़े एक मामले में शिकायत दर्ज कराई है। उनकी ओर से दर्ज इस एफआईआर में अनिक्षा नाम की एक महिला और उसके पिता का नाम है। अमृता फडणवीस ने आरोप लगाया है कि महिला ने एक डिजाइनर होने का दावा करते हुए अपने पिता से जुड़े एक आपराधिक मामले में हस्तक्षेप करने के लिए एक करोड़ रुपये की रिश्वत देने के लिए कहा था। मुंबई पुलिस ने महिला और उसके पिता के खिलाफ साजिश रचने और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। कौन है यह महिला और कैसे अमृता फडणवीस के संपर्क में आई? अनिक्षा नाम की इस महिला ने कथित तौर पर नवंबर दो हज़ार इक्कीस में पहली बार अमृता फडणवीस से संपर्क किया था। एफआईआर के मुताबिक अमृता फडणवीस ने कहा कि महिला ने अट्ठारह और उन्नीस फरवरी को एक अज्ञात नंबर से अपने वीडियो क्लिप, वॉयस नोट्स और संदेश भेजे। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमृता फडणवीस ने पुलिस को बताया कि महिला ने कपड़े, ज्वेलरी, और जूते की डिजाइनर होने का दावा किया था। अमृता फडणवीस ने कहा कि वह एक डिजाइनर के तौर पर उनके करीब आई थी लेकिन एक बार वह महिला मेरे बॉडीगार्ड से से झूठ बोलकर मेरी कार में बैठ गयी। उसने मुझे बताया कि उसके पिता पुलिस को सटोरियों के बारे में जानकारी देते रहे हैं और पेशकश की कि वे या तो पुलिस को सटोरियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश देकर पैसा कमा सकती हैं या वे उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न करके सटोरियों से भी पैसे बना सकती हैं। मैंने यह सुनकर उसे अपनी कार से उतार दिया। दर्ज एफआईआर में यह दावा किया गया है कि सोलह फरवरी को रात नौ. तीस बजे अनीक्षा ने अमृता फडणवीस से संपर्क किया और उन्हें बताया कि उनके पिता एक मामले में आरोपी हैं और उन्होंने उन्हें बचाने के लिए एक करोड़ रुपये की पेशकश की। द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अमृता फडणवीस ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा कि जैसे ही मैंने यह सुना मैंने कॉल रख दिया और उसे ब्लॉक कर दिया।
इटालियन सोनिया की नीति और नियत दोनों ही लोकतंत्र के लिए खतरनाक है . सोनिया गाँधी जब से कांग्रेस की सर्वेसर्वा बनी है तब से ही सोनिया जी का एक मात्र उद्देश है सत्ता प्राप्ति वो चाहे जैसे भी मिले है . बिहार में विधान सभा चुनाव की सरगर्मी है और प्रायः सभी दल जोर तोड़ करने में लगी है की कैसे सत्ता की कुर्शी तक पंहुचा जाये. कांग्रेस भी बिहार की सत्ता पर काबिज होना चाहती है जिसके लिए पूरी कांग्रेस पार्टी अपना जनाधार मजबूत करने में लगी हुई है. प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ,सोनिया गाँधी ,राहुल सभी बिहार के मतदाता को लुभाने की कोशिस कर रहे है . सोनिया गाँधी ने बिहार के किशनगंज जैसे मुस्लिम बहुल इलाके में चुनावी सभा कर मुस्लिम मदताओ को खूब भरमाया और कहा की कांग्रेस जैसे सेकुलर पार्टी कोई नहीं यदि बिहार में विकाश चाहते है तो कांग्रेस को सत्ता की चाभी सौप दे . सोनिया जी आप यह बताये की 40 सालो तक बिहार में आप का साशन रहा और 40 साल किशी भी राज्य को विकाश की पटरी पर ले जाने के लिए काफी होते है तब आप की कांग्रेस पार्टी क्या कर रही थी कहा कुम्भ्करनी निंद्रा में सोया हुआ था आप का परिवार आज क्यों विकाश की याद आ रही है वही अगर हम कर्णाटक की बात करे तो सत्ता कई लिए सोनिया एंड पार्टी ने कोई कसर नहीं छोड़ी जब से सोनिया ने कांग्रेस की कमान सम्हाली है तब से उनकी सत्ता प्राप्ति की ललक बढ़ती ही गई कहने को तो देश कई प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह है लेकिन सत्ता की चाभी सोनिया कई पास है यह जगजाहिर हो चूका है बिहार में सत्ता प्राप्ति के लिए सोनिया ने जम कर धार्मिक समीकरणों का ख्याल उमिद्वारो के टिकट वितरण मई किया उसपर नारा यह की कांग्रेस जात और धर्म की राजनीती नहीं करती जनता सब जानती है की कांग्रेस नै ही देश मई जातिवाद के बिज बोये और आज भी लगातार यह जरी है अलग अलग रूपों में और यह एक कटु सत्य है जिसका जवाब सायद ही सोनिया को मिल पाए .
इटालियन सोनिया की नीति और नियत दोनों ही लोकतंत्र के लिए खतरनाक है . सोनिया गाँधी जब से कांग्रेस की सर्वेसर्वा बनी है तब से ही सोनिया जी का एक मात्र उद्देश है सत्ता प्राप्ति वो चाहे जैसे भी मिले है . बिहार में विधान सभा चुनाव की सरगर्मी है और प्रायः सभी दल जोर तोड़ करने में लगी है की कैसे सत्ता की कुर्शी तक पंहुचा जाये. कांग्रेस भी बिहार की सत्ता पर काबिज होना चाहती है जिसके लिए पूरी कांग्रेस पार्टी अपना जनाधार मजबूत करने में लगी हुई है. प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ,सोनिया गाँधी ,राहुल सभी बिहार के मतदाता को लुभाने की कोशिस कर रहे है . सोनिया गाँधी ने बिहार के किशनगंज जैसे मुस्लिम बहुल इलाके में चुनावी सभा कर मुस्लिम मदताओ को खूब भरमाया और कहा की कांग्रेस जैसे सेकुलर पार्टी कोई नहीं यदि बिहार में विकाश चाहते है तो कांग्रेस को सत्ता की चाभी सौप दे . सोनिया जी आप यह बताये की चालीस सालो तक बिहार में आप का साशन रहा और चालीस साल किशी भी राज्य को विकाश की पटरी पर ले जाने के लिए काफी होते है तब आप की कांग्रेस पार्टी क्या कर रही थी कहा कुम्भ्करनी निंद्रा में सोया हुआ था आप का परिवार आज क्यों विकाश की याद आ रही है वही अगर हम कर्णाटक की बात करे तो सत्ता कई लिए सोनिया एंड पार्टी ने कोई कसर नहीं छोड़ी जब से सोनिया ने कांग्रेस की कमान सम्हाली है तब से उनकी सत्ता प्राप्ति की ललक बढ़ती ही गई कहने को तो देश कई प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह है लेकिन सत्ता की चाभी सोनिया कई पास है यह जगजाहिर हो चूका है बिहार में सत्ता प्राप्ति के लिए सोनिया ने जम कर धार्मिक समीकरणों का ख्याल उमिद्वारो के टिकट वितरण मई किया उसपर नारा यह की कांग्रेस जात और धर्म की राजनीती नहीं करती जनता सब जानती है की कांग्रेस नै ही देश मई जातिवाद के बिज बोये और आज भी लगातार यह जरी है अलग अलग रूपों में और यह एक कटु सत्य है जिसका जवाब सायद ही सोनिया को मिल पाए .
अगर आपकी परफॉर्मेंस में लगातार गिरावट आ रही है, तो इसके चलते आप नौकरी खो सकते हैं। अगर आपकी पर्सनल लाइफ, प्रोफेशनल लाइफ को ज्यादा प्रभावित करने लगती है, तो इसका आपके काम पर असर दिखने लगता है। ये जॉब को खतरे में डाल सकता है। अगर आपको काम दिए जाते हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर आप डेड लाइन पर पूरे नहीं करते, तो आपकी नौकरी खतरे में है। दी गई जिम्मेदारी को न निभाने का मतलब है कर्मचारी काम के मामले में सक्षम नहीं है। ऐसे में नौकरी को बचा पाना मुश्किल है। गलतियां हर किसी से होती हैं, लेकिन जब ये ज्यादा हो जाएं, तो वो लापरवाही मानी जाने लगती है। लापरवाह कर्मचारी को कोई कंपनी रखना पसंद नहीं करेगी। गॉसिप एक मोमेंट का आनंद दे सकते हैं, लेकिन ये आपकी वर्क प्लेस इमेज को सबसे ज्यादा नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। अगर आप बहुत ज्यादा छुट्टियां लेते हैं, जिसके कारण काम प्रभावित होता है, तो इसका बुरा असर आपकी नौकरी पर पड़ता दिखेगा। अगर कंपनी की कोई पॉलिसी है और कर्मचारी उसके खिलाफ जाता है, तो नौकरी जाना लगभग पक्का हो जाता है। अगर आप ऑफिस बुली हैं या आपको किसी भी तरह का हैरेसमेंट का दोषी पाया जाता है, तो आपकी नौकरी छिन जाएगी। Thanks For Reading!
अगर आपकी परफॉर्मेंस में लगातार गिरावट आ रही है, तो इसके चलते आप नौकरी खो सकते हैं। अगर आपकी पर्सनल लाइफ, प्रोफेशनल लाइफ को ज्यादा प्रभावित करने लगती है, तो इसका आपके काम पर असर दिखने लगता है। ये जॉब को खतरे में डाल सकता है। अगर आपको काम दिए जाते हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर आप डेड लाइन पर पूरे नहीं करते, तो आपकी नौकरी खतरे में है। दी गई जिम्मेदारी को न निभाने का मतलब है कर्मचारी काम के मामले में सक्षम नहीं है। ऐसे में नौकरी को बचा पाना मुश्किल है। गलतियां हर किसी से होती हैं, लेकिन जब ये ज्यादा हो जाएं, तो वो लापरवाही मानी जाने लगती है। लापरवाह कर्मचारी को कोई कंपनी रखना पसंद नहीं करेगी। गॉसिप एक मोमेंट का आनंद दे सकते हैं, लेकिन ये आपकी वर्क प्लेस इमेज को सबसे ज्यादा नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं। अगर आप बहुत ज्यादा छुट्टियां लेते हैं, जिसके कारण काम प्रभावित होता है, तो इसका बुरा असर आपकी नौकरी पर पड़ता दिखेगा। अगर कंपनी की कोई पॉलिसी है और कर्मचारी उसके खिलाफ जाता है, तो नौकरी जाना लगभग पक्का हो जाता है। अगर आप ऑफिस बुली हैं या आपको किसी भी तरह का हैरेसमेंट का दोषी पाया जाता है, तो आपकी नौकरी छिन जाएगी। Thanks For Reading!
सब्जियों के राजा आलू से बनाएं लजीज "आलू का हलवा" आलू सब्जियों का राजा है और खाने में आलू का होना मतलब खाने का स्वाद और बढ़ जाना होता है। आलू को लोग व्रत में नमकीन आलू फ्राई बनाकर तो खाते ही है, आलू का हलवा भी बनाया जाता है, ये आलू का हलवा अधिकतर व्रत के समय बनाकर खाया जाता है, ये हलवा भी बहुत ही स्वादिष्ट बनता है और बड़ी जल्दी बन जाता है, बनाने में बड़ा आसान भी है। आलू में पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है जो शरीर के लिए जरूरी ऊर्जा देता है। सुबह के समय अगर नास्ते में आलू का हलवा बनाया जाय तो हेल्थ के लिए फायदेमंद भी है। व्रत के समय कार्बोहाइड्रेट का पोषण आलू के सेवन से मिलता है। अगर आप भी इस बार व्रत रहें तो इस हलवे को जरूर ट्राई करें। तो आइए जानते हैं आलू का हलवा बनाने की विधि। यह भी पढ़ेंः संडे स्पेशलः दही वड़ा, जी हां बहुत आसन है बनाना। - कटे हुए सूखे मेवे (बादाम, काजू, पिस्ता,) - उबले हुए आलू को एक बाउल में मसल लें। - अब एक नॉन स्टिक पैन में घी गर्म करें और उसमें मसले हुए आलू डाल कर मध्यम आंच पर पकाएं। - आलू को लगातार चलाती रहें, ताकि वह पैन में न चिपके। - जब आलू घी छोड़ने लगे तब उसमें चीनी मिला दें। - आलू को लगातार चलाती रहें जब तक कि चीनी उसमें पूरी तरह घुल न जाए। - अब इसमें किशमिश और सूखे मेवे डालकर 5 मिनट तक और पकाएं। - गैस बंद कर दें और इसे प्लेट या कटोरी में डालें और कद्दूकस किए नारियल को इस पर बुरक कर गर्मागर्म सर्व करें। यह भी पढ़ेंः बचे हुए चावल से बनाएं स्वादिष्ट "चावल रसमलाई", जानें बनाने की विधि। Total Wellness is now just a click away.
सब्जियों के राजा आलू से बनाएं लजीज "आलू का हलवा" आलू सब्जियों का राजा है और खाने में आलू का होना मतलब खाने का स्वाद और बढ़ जाना होता है। आलू को लोग व्रत में नमकीन आलू फ्राई बनाकर तो खाते ही है, आलू का हलवा भी बनाया जाता है, ये आलू का हलवा अधिकतर व्रत के समय बनाकर खाया जाता है, ये हलवा भी बहुत ही स्वादिष्ट बनता है और बड़ी जल्दी बन जाता है, बनाने में बड़ा आसान भी है। आलू में पर्याप्त मात्रा में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है जो शरीर के लिए जरूरी ऊर्जा देता है। सुबह के समय अगर नास्ते में आलू का हलवा बनाया जाय तो हेल्थ के लिए फायदेमंद भी है। व्रत के समय कार्बोहाइड्रेट का पोषण आलू के सेवन से मिलता है। अगर आप भी इस बार व्रत रहें तो इस हलवे को जरूर ट्राई करें। तो आइए जानते हैं आलू का हलवा बनाने की विधि। यह भी पढ़ेंः संडे स्पेशलः दही वड़ा, जी हां बहुत आसन है बनाना। - कटे हुए सूखे मेवे - उबले हुए आलू को एक बाउल में मसल लें। - अब एक नॉन स्टिक पैन में घी गर्म करें और उसमें मसले हुए आलू डाल कर मध्यम आंच पर पकाएं। - आलू को लगातार चलाती रहें, ताकि वह पैन में न चिपके। - जब आलू घी छोड़ने लगे तब उसमें चीनी मिला दें। - आलू को लगातार चलाती रहें जब तक कि चीनी उसमें पूरी तरह घुल न जाए। - अब इसमें किशमिश और सूखे मेवे डालकर पाँच मिनट तक और पकाएं। - गैस बंद कर दें और इसे प्लेट या कटोरी में डालें और कद्दूकस किए नारियल को इस पर बुरक कर गर्मागर्म सर्व करें। यह भी पढ़ेंः बचे हुए चावल से बनाएं स्वादिष्ट "चावल रसमलाई", जानें बनाने की विधि। Total Wellness is now just a click away.
इस दुनिया में जब खूबसूरती की बात आती है तो आमतौर पर किसी एक्ट्रेस या मॉडल का चेहरा दिमाग में आता है। आज हम आपको जिसके बारे में बताने जा रहे हैं वह भले ही एक टीवी होस्ट हैं लेकिन खूबसूरती में उनके सामने दुनिया की सभी अभिनेत्रियां फीकी पड़ जाती हैं। मैक्सिकन टीवी होस्ट यानेट गार्सिया अपनी खूबसूरती के लिए दुनिया भर में जानी जाती हैं। हॉटेस्ट वेदर गर्ल के नाम से मशहूर यानेट का एक अलग ही क्रेज है। इंस्टाग्राम पर उनके करीब 15 मिलियन फैंस हैं. यह संख्या कुछ देशों की जनसंख्या से भी अधिक है। यानेट का कहना है कि वह अपने प्रशंसकों की पसंद को लेकर बहुत सावधान रहती हैं और उसी के अनुसार खुद को पेश करती हैं। उनकी फोटो देखकर फैन्स भी लगातार रिएक्शन दे रहे हैं. यह मैक्सिकन टीवी होस्ट अपनी खूबसूरती से पूरे मेक्सिको को दीवाना बना रही है। यानेट गार्सिया की हॉटनेस और बोल्डनेस का कोई जवाब नहीं है. इस बात को साबित करता है उनका इंस्टाग्राम अकाउंट. यानेट सिर्फ एक टीवी होस्ट नहीं है। वह अपनी हॉट और ग्लैमरस तस्वीरों से फैन्स के साथ जुड़ी रहती हैं। यानेट का इंस्टाग्राम उनकी हॉट और बोल्ड तस्वीरों से भरा हुआ है।
इस दुनिया में जब खूबसूरती की बात आती है तो आमतौर पर किसी एक्ट्रेस या मॉडल का चेहरा दिमाग में आता है। आज हम आपको जिसके बारे में बताने जा रहे हैं वह भले ही एक टीवी होस्ट हैं लेकिन खूबसूरती में उनके सामने दुनिया की सभी अभिनेत्रियां फीकी पड़ जाती हैं। मैक्सिकन टीवी होस्ट यानेट गार्सिया अपनी खूबसूरती के लिए दुनिया भर में जानी जाती हैं। हॉटेस्ट वेदर गर्ल के नाम से मशहूर यानेट का एक अलग ही क्रेज है। इंस्टाग्राम पर उनके करीब पंद्रह मिलियन फैंस हैं. यह संख्या कुछ देशों की जनसंख्या से भी अधिक है। यानेट का कहना है कि वह अपने प्रशंसकों की पसंद को लेकर बहुत सावधान रहती हैं और उसी के अनुसार खुद को पेश करती हैं। उनकी फोटो देखकर फैन्स भी लगातार रिएक्शन दे रहे हैं. यह मैक्सिकन टीवी होस्ट अपनी खूबसूरती से पूरे मेक्सिको को दीवाना बना रही है। यानेट गार्सिया की हॉटनेस और बोल्डनेस का कोई जवाब नहीं है. इस बात को साबित करता है उनका इंस्टाग्राम अकाउंट. यानेट सिर्फ एक टीवी होस्ट नहीं है। वह अपनी हॉट और ग्लैमरस तस्वीरों से फैन्स के साथ जुड़ी रहती हैं। यानेट का इंस्टाग्राम उनकी हॉट और बोल्ड तस्वीरों से भरा हुआ है।
01:- बताइये कोर्नेड संगमा का सम्बन्ध किस राज्य से है ? जवाब : मेघालय से। 02:- बताइये 2018 का हॉकी वर्ल्ड कप कहाँ पर होगा ? 01:- बताइये कोर्नेड संगमा का सम्बन्ध किस राज्य से है ? जवाब : मेघालय से। 02:- बताइये 2018 का हॉकी वर्ल्ड कप कहाँ पर होगा ? जवाब : भारत। 03:- बताइये अभी हाल ही में किस भारतीय गेंदबाज ने टी20 के अन्दर 5 विकेट लिए हैं ? जवाब : कुलदीप यादव। 04:- बताइये श्रीलंका की राजधानी क्या है ? जवाब : जय वेर्धनेपुरम कोट्टे। 05:- बताइये शेन वोर्न की ऑटो बायोग्राफी का नाम क्या है ? जवाब : नो स्पिन। 06:- बताइये मानव और बाल विकास मंत्री ? जवाब : मेनका गाँधी। 07:- बताइये बिम्सटेक फिल्म फेस्टिवल कहाँ पर हुआ ? जवाब : न्यू दिल्ली। 08:- पृथ्वी पर आने वाला प्रथम मनुष्य कौन था ? जवाब : इस बारे में अभी विज्ञान ने कोई पुष्टिकरण नहीं किया है लेकिन इतिहास के मुताबिक पृथ्वी पर सबसे पहले दो लोगों ने कदम रखा था जिसमें एक पुरुष और एक महिला थी। पुरुष का नाम 'Adam' था और महिला का नाम 'Hawa' or Eve था। पृथ्वी पर आने वाला प्रथम मनुष्य कौन था ? 99% लोग नहीं जानते Reviewed by news himachali on March 18, 2020 Rating:
एक:- बताइये कोर्नेड संगमा का सम्बन्ध किस राज्य से है ? जवाब : मेघालय से। दो:- बताइये दो हज़ार अट्ठारह का हॉकी वर्ल्ड कप कहाँ पर होगा ? एक:- बताइये कोर्नेड संगमा का सम्बन्ध किस राज्य से है ? जवाब : मेघालय से। दो:- बताइये दो हज़ार अट्ठारह का हॉकी वर्ल्ड कप कहाँ पर होगा ? जवाब : भारत। तीन:- बताइये अभी हाल ही में किस भारतीय गेंदबाज ने टीबीस के अन्दर पाँच विकेट लिए हैं ? जवाब : कुलदीप यादव। चार:- बताइये श्रीलंका की राजधानी क्या है ? जवाब : जय वेर्धनेपुरम कोट्टे। पाँच:- बताइये शेन वोर्न की ऑटो बायोग्राफी का नाम क्या है ? जवाब : नो स्पिन। छः:- बताइये मानव और बाल विकास मंत्री ? जवाब : मेनका गाँधी। सात:- बताइये बिम्सटेक फिल्म फेस्टिवल कहाँ पर हुआ ? जवाब : न्यू दिल्ली। आठ:- पृथ्वी पर आने वाला प्रथम मनुष्य कौन था ? जवाब : इस बारे में अभी विज्ञान ने कोई पुष्टिकरण नहीं किया है लेकिन इतिहास के मुताबिक पृथ्वी पर सबसे पहले दो लोगों ने कदम रखा था जिसमें एक पुरुष और एक महिला थी। पुरुष का नाम 'Adam' था और महिला का नाम 'Hawa' or Eve था। पृथ्वी पर आने वाला प्रथम मनुष्य कौन था ? निन्यानवे% लोग नहीं जानते Reviewed by news himachali on March अट्ठारह, दो हज़ार बीस Rating:
कुसुम अग्निहोत्री, जालंधर। जोश और जुनून जिस पर सवार हो जाए, उसके लिए कोई भी काम मुश्किल नहीं होता। चाहे वह फिर अहमदाबाद की पूनम का बुलेट पर सवार होकर मंडप तक आना हो या फिर पंजाब पुलिस में कार्यरत सुखविंदर कौर का बुलेट पर स्टंट करना। पूनम और सुखविंदर की तरह ही जालंधर की भी कई छात्राएं भारी भरकम बुलेट की क्रेजी हैं। शहर के विभिन्ना कालेजों में पढ़ने वाली ये छात्राएं (मुटियार) इन दिनों बुलेट पर ही कालेज पहुंच कर लड़कों को चुनौती दे रही हैं। उनका यह शौक उन्हें दूसरे से अलग भी बना रहा है। गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी रीजनल कैंपस लद्देवाली में बीए एलएलबी की छात्रा मुस्कान एक बिजनेसमैन परिवार से संबंध रखती है। वह तीन बहनों में सबसे छोटी है। लेकिन दूसरों से कुछ अलग करने के शौक ने उसे एक अलग पहचान दी है। 9 साल की उम्र में खुद ही बाइक चलाना सीख लिया था। मुस्कान कहती है उसे रोमांच काफी पसंद हैं। इसी वजह से उसने लड़कों की शान की सवारी कहे जाने वाली बुलेट को आजमाया। उसके दोस्तों ने बुलेट को काफी खतरनाक बताते हुए उसे इससे परहेज करने की सलाह दी, कुछ पल के लिए वह भी सहम गई थी पर जोश व जुनून ने इस डर पर काबू कर लिया। मुस्कान कहती है कि आज जब भी घर से बुलेट पर सवार होकर निकलती है तो उसे खुद पर काफी गर्व होता है। हरसिमरन को मां से मिली प्रेरणा लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रही हरसिमरन का कहना है कि उसे बुलेट चलाने की प्रेरणा उसकी मां से मिली। वह स्कूल लेवल से ही खेलों में भाग लेती आई है। कहीं भी मैच होता था तो उसे लड़कों के साथ उनकी मोटरसाइकिल पर पीछे बैठकर जाना पड़ता था, लेकिन उसने जब अपनी मां को बुलेट चलाते देखा तो उसने भी फैसला किया कि वह भी कोई दूसरी बाइक नहीं बल्कि शान की सवारी कही जाने वाली बुलेट ही चलाएगी। दसवीं कक्षा से ही हरसिमरन ने बुलेट चलाना शुरू कर दिया था। हरसिमरन अब यूनिवर्सिटी आना हो या फिर कहीं और जाना, बुलेट पर ही जाती है। डीएवी कालेज में फर्स्ट ईयर की छात्रा मनजोत सुल्तानपुर लोधी से रोजाना कालेज बुलेट पर कालेज पहुंचती है। वह बताती है कि उसके कुछ अलग करने के जज्बे ने ही उसे बुलेट चलाने के लिए विवश किया। हालांकि मनजोत एक छोटे शहर से संबंधित है लेकिन वह एनआरआइ होने के कारण काफी बोल्ड व स्वतंत्र विचारों की है। वह कहती है कि जब वह अपनी सहेली के साथ मॉडल टाउन चर लगाने जाती है तो उन्हें लड़के कई तरह के कमेंट करते हैं लेकिन वह उनकी बातों पर गौर नहीं करती हैं। वह कहती है कि बुलेट चला उसमें आत्मविश्र्वास तो पैदा होता ही है साथ ही वह दूसरों से भिन्ना दिखती हैं। मनजोत ने बताया कि उसकी मां उसे हमेशा आगे बढ़ने को काफी प्रोत्साहित करती है। शहर भर में इस समय 100 से ऊपर छात्राएं बुलेट चला रही हैं। इनमें से 60 फीसदी तो खिलाड़ी हैं व बाकी 40 फीसदी अपने शौक व आत्मविश्र्वास और दूसरों से अलग दिखने के लिए इसका इस्तेमाल कर रही हैं। बुलेट कंपनी में कार्यरत पंकज ने बताया कि अक्सर छात्राएं बुलेट लेते समय साइलेंसर से निकलने वाली आवाज को थोड़ा तेज करवा लेती हैं।
कुसुम अग्निहोत्री, जालंधर। जोश और जुनून जिस पर सवार हो जाए, उसके लिए कोई भी काम मुश्किल नहीं होता। चाहे वह फिर अहमदाबाद की पूनम का बुलेट पर सवार होकर मंडप तक आना हो या फिर पंजाब पुलिस में कार्यरत सुखविंदर कौर का बुलेट पर स्टंट करना। पूनम और सुखविंदर की तरह ही जालंधर की भी कई छात्राएं भारी भरकम बुलेट की क्रेजी हैं। शहर के विभिन्ना कालेजों में पढ़ने वाली ये छात्राएं इन दिनों बुलेट पर ही कालेज पहुंच कर लड़कों को चुनौती दे रही हैं। उनका यह शौक उन्हें दूसरे से अलग भी बना रहा है। गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी रीजनल कैंपस लद्देवाली में बीए एलएलबी की छात्रा मुस्कान एक बिजनेसमैन परिवार से संबंध रखती है। वह तीन बहनों में सबसे छोटी है। लेकिन दूसरों से कुछ अलग करने के शौक ने उसे एक अलग पहचान दी है। नौ साल की उम्र में खुद ही बाइक चलाना सीख लिया था। मुस्कान कहती है उसे रोमांच काफी पसंद हैं। इसी वजह से उसने लड़कों की शान की सवारी कहे जाने वाली बुलेट को आजमाया। उसके दोस्तों ने बुलेट को काफी खतरनाक बताते हुए उसे इससे परहेज करने की सलाह दी, कुछ पल के लिए वह भी सहम गई थी पर जोश व जुनून ने इस डर पर काबू कर लिया। मुस्कान कहती है कि आज जब भी घर से बुलेट पर सवार होकर निकलती है तो उसे खुद पर काफी गर्व होता है। हरसिमरन को मां से मिली प्रेरणा लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई कर रही हरसिमरन का कहना है कि उसे बुलेट चलाने की प्रेरणा उसकी मां से मिली। वह स्कूल लेवल से ही खेलों में भाग लेती आई है। कहीं भी मैच होता था तो उसे लड़कों के साथ उनकी मोटरसाइकिल पर पीछे बैठकर जाना पड़ता था, लेकिन उसने जब अपनी मां को बुलेट चलाते देखा तो उसने भी फैसला किया कि वह भी कोई दूसरी बाइक नहीं बल्कि शान की सवारी कही जाने वाली बुलेट ही चलाएगी। दसवीं कक्षा से ही हरसिमरन ने बुलेट चलाना शुरू कर दिया था। हरसिमरन अब यूनिवर्सिटी आना हो या फिर कहीं और जाना, बुलेट पर ही जाती है। डीएवी कालेज में फर्स्ट ईयर की छात्रा मनजोत सुल्तानपुर लोधी से रोजाना कालेज बुलेट पर कालेज पहुंचती है। वह बताती है कि उसके कुछ अलग करने के जज्बे ने ही उसे बुलेट चलाने के लिए विवश किया। हालांकि मनजोत एक छोटे शहर से संबंधित है लेकिन वह एनआरआइ होने के कारण काफी बोल्ड व स्वतंत्र विचारों की है। वह कहती है कि जब वह अपनी सहेली के साथ मॉडल टाउन चर लगाने जाती है तो उन्हें लड़के कई तरह के कमेंट करते हैं लेकिन वह उनकी बातों पर गौर नहीं करती हैं। वह कहती है कि बुलेट चला उसमें आत्मविश्र्वास तो पैदा होता ही है साथ ही वह दूसरों से भिन्ना दिखती हैं। मनजोत ने बताया कि उसकी मां उसे हमेशा आगे बढ़ने को काफी प्रोत्साहित करती है। शहर भर में इस समय एक सौ से ऊपर छात्राएं बुलेट चला रही हैं। इनमें से साठ फीसदी तो खिलाड़ी हैं व बाकी चालीस फीसदी अपने शौक व आत्मविश्र्वास और दूसरों से अलग दिखने के लिए इसका इस्तेमाल कर रही हैं। बुलेट कंपनी में कार्यरत पंकज ने बताया कि अक्सर छात्राएं बुलेट लेते समय साइलेंसर से निकलने वाली आवाज को थोड़ा तेज करवा लेती हैं।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
नई दिल्लीः दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की क्राइम ब्रांच (Crime Branch) ने बड़े 'सेक्सटॉर्शन' (Sextortion ) मामले का पर्दाफाश किया है। पुलिस (Police) ने सेक्सटोर्शन गैंग (Gang) से जुड़े पांच लोगों को गिरफ्तार (Arrest) किया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये गैंग पहले डेटिंग एप के ज़रिए लोगों को अपना शिकार बनता था और बाद में उनसे पैसे ऐंठता था। इससे पहले भी दिल्ली पुलिस ने पिछले दिनों ऐसे ही एक बड़े 'सेक्सटॉर्शन रैकेट' का भंडाफोड़ किया था। पुलिस ने इस मामले से जुड़े गैंग के कुछ सदस्यों को अलग-अलग हिस्सों से गिरफ्तार किया था। गैंग पर देश के कई राज्यों में लोगों से सेक्सटोर्शन करने का आरोप है। मामले में पुलिस ने खुलासा किया था कि, आरोपी सोशल मीडिया पर खूबसूरत लड़कियों की फर्जी IDs बनाकर और लोगों को झांसा देखकर फंसाता था। सेक्स चैट चलने के कुछ दिन के बाद अपने टारगेट को विडियो कॉल (Video Call) करने के लिए कहा जाता था। कॉल पर लड़की सारे कपड़े उतारती थी और उनसे भी कपड़ें उतारने के लिए कहती थी। जिसके बाद पूरी कॉल को रिकॉर्ड कर लिए जाता था जो ब्लैकमेल का जरिया होता था।
नई दिल्लीः दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बड़े 'सेक्सटॉर्शन' मामले का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने सेक्सटोर्शन गैंग से जुड़े पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये गैंग पहले डेटिंग एप के ज़रिए लोगों को अपना शिकार बनता था और बाद में उनसे पैसे ऐंठता था। इससे पहले भी दिल्ली पुलिस ने पिछले दिनों ऐसे ही एक बड़े 'सेक्सटॉर्शन रैकेट' का भंडाफोड़ किया था। पुलिस ने इस मामले से जुड़े गैंग के कुछ सदस्यों को अलग-अलग हिस्सों से गिरफ्तार किया था। गैंग पर देश के कई राज्यों में लोगों से सेक्सटोर्शन करने का आरोप है। मामले में पुलिस ने खुलासा किया था कि, आरोपी सोशल मीडिया पर खूबसूरत लड़कियों की फर्जी IDs बनाकर और लोगों को झांसा देखकर फंसाता था। सेक्स चैट चलने के कुछ दिन के बाद अपने टारगेट को विडियो कॉल करने के लिए कहा जाता था। कॉल पर लड़की सारे कपड़े उतारती थी और उनसे भी कपड़ें उतारने के लिए कहती थी। जिसके बाद पूरी कॉल को रिकॉर्ड कर लिए जाता था जो ब्लैकमेल का जरिया होता था।
सीएम चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के मोगा शहर में होने वाले एक क्रिश्चियन समाज के कार्यक्रम में जाने को लेकर सियासी बवाल मच गया है. सीएम जिस कार्यक्रम में जाने वाले हैं वो एक विवादित चेहरा है. पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (CM Charanjit Singh Channi) के गुरुवार को राज्य के मोगा शहर में होने वाले एक क्रिश्चियन समाज के कार्यक्रम में जाने को लेकर सियासी बवाल मच गया है. मुख्यमंत्री जिस कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं उन पर रेप के आरोप भी लग चुके हैं. दरअसल, जिस पादरी बजिंदर सिंह (prophet bajinder singh) के कार्यक्रम में सीएम चरणजीत सिंह चन्नी जाने वाले हैं वो एक विवादित चेहरा है और खुद को प्रभु यीशु मसीह का मैसेंजर बताते हुए चमत्कारी तरीके से बीमार लोगों को ठीक करने का दावा करता है. इसके अलावा बिजेंद्र सिंह रेप केस में जेल भी होकर आ चुका है. हालांकि बाद में रेप का आरोप लगाने वाली लड़की अपने बयान से पलट गई थी. पंजाब के मोगा जिले में गुरुवार शाम को होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी शाम करीब 7:30 पर शिरकत करेंगे. विवादित पादरी बजिंदर सिंह एक बार फिर से सुर्खियों में है. बजिंदर सिंह का एक वीडियो बुधवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. बजिंदर सिंह के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर जारी किए गए विज्ञापन वीडियो में जानकारी दी गई, 'आपको जानकर यह खुशी होगी कि 'प्रोफेट बजिंदर सिंह मिनिस्ट्री' की ब्रांच अब आपके अपने शहर मोगा में भी खुलने जा रही है, जिसकी भव्य शुरुआत गुरुवार (25 नवंबर) को की जा रही है. इस अवसर पर विशाल सत्संग करवाया जा रहा है. हालांकि, इस यूट्यूब वीडियो में यह नहीं बताया गया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में किसे आमंत्रित किया गया है. दूसरी ओर, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर बड़ा हमला करते हुए उन्हें रेत माफिया करार दिया. सुखबीर बादल ने कहा कि पंजाब से रेत माफिया खत्म करने की बात करने वाले मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अपने इलाके में खुद ही सबसे बड़े रेत माफिया हैं और कॉलोनाइजर भी हैं. अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा कि अगर सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब में रेत सस्ती करनी है और रेत माफिया को खत्म करना है तो नवजोत सिंह सिद्धू को सबसे पहले अपनी ही पार्टी के विधायकों को जेल में डालना होगा और मुख्यमंत्री चन्नी को भी देखना होगा जो की रेत तस्करी के सबसे बड़े माफिया हैं. Punjab: 3 साल पुराने #MeToo मामले में फंसे मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सीएम के खिलाफ जाने का नतीजा?
सीएम चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के मोगा शहर में होने वाले एक क्रिश्चियन समाज के कार्यक्रम में जाने को लेकर सियासी बवाल मच गया है. सीएम जिस कार्यक्रम में जाने वाले हैं वो एक विवादित चेहरा है. पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के गुरुवार को राज्य के मोगा शहर में होने वाले एक क्रिश्चियन समाज के कार्यक्रम में जाने को लेकर सियासी बवाल मच गया है. मुख्यमंत्री जिस कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं उन पर रेप के आरोप भी लग चुके हैं. दरअसल, जिस पादरी बजिंदर सिंह के कार्यक्रम में सीएम चरणजीत सिंह चन्नी जाने वाले हैं वो एक विवादित चेहरा है और खुद को प्रभु यीशु मसीह का मैसेंजर बताते हुए चमत्कारी तरीके से बीमार लोगों को ठीक करने का दावा करता है. इसके अलावा बिजेंद्र सिंह रेप केस में जेल भी होकर आ चुका है. हालांकि बाद में रेप का आरोप लगाने वाली लड़की अपने बयान से पलट गई थी. पंजाब के मोगा जिले में गुरुवार शाम को होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी शाम करीब सात:तीस पर शिरकत करेंगे. विवादित पादरी बजिंदर सिंह एक बार फिर से सुर्खियों में है. बजिंदर सिंह का एक वीडियो बुधवार को सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. बजिंदर सिंह के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर जारी किए गए विज्ञापन वीडियो में जानकारी दी गई, 'आपको जानकर यह खुशी होगी कि 'प्रोफेट बजिंदर सिंह मिनिस्ट्री' की ब्रांच अब आपके अपने शहर मोगा में भी खुलने जा रही है, जिसकी भव्य शुरुआत गुरुवार को की जा रही है. इस अवसर पर विशाल सत्संग करवाया जा रहा है. हालांकि, इस यूट्यूब वीडियो में यह नहीं बताया गया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में किसे आमंत्रित किया गया है. दूसरी ओर, शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पर बड़ा हमला करते हुए उन्हें रेत माफिया करार दिया. सुखबीर बादल ने कहा कि पंजाब से रेत माफिया खत्म करने की बात करने वाले मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अपने इलाके में खुद ही सबसे बड़े रेत माफिया हैं और कॉलोनाइजर भी हैं. अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कहा कि अगर सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब में रेत सस्ती करनी है और रेत माफिया को खत्म करना है तो नवजोत सिंह सिद्धू को सबसे पहले अपनी ही पार्टी के विधायकों को जेल में डालना होगा और मुख्यमंत्री चन्नी को भी देखना होगा जो की रेत तस्करी के सबसे बड़े माफिया हैं. Punjab: तीन साल पुराने #MeToo मामले में फंसे मंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सीएम के खिलाफ जाने का नतीजा?
Don't Miss! वे इस किस्म की फिल्में नहीं बल्कि कुछ और करना चाहते हैं। जिसके बारे में सलमान ने खुद खुलासा किया है। बॉलीवुड के दबंग खान की फिल्में इन दिनों कुछ खास कर नहीं पा रही हैं। कुछ समय पहले आई ट्यूबलाइट से लोगों को उम्मीदें तो बहुत थीं लेकिन फिल्म उतना इम्प्रेस नहीं कर पाई। फिल्म के बाद खबरें तो यहां तक आई थीं कि सलमान ने डिस्ट्रीब्यूटर्स को हुए नुकसान भरपाई की थी। बाद में सलमान के पिता सलीम खान ने भी ट्यूबलाइट को अक्षय की फिल्म से कमतर बता कर रही बची कसर पूरी कर दी थी। वहीं अब सलमान ऐसी फिल्मों से ऊब चुके हैं। यही वजह है कि अब वे इस किस्म की फिल्में नहीं बल्कि कुछ और करना चाहते हैं। जिसके बारे में सलमान ने खुद खुलासा किया है। सलमान का कहना है कि अब वे कॉमेडी फिल्में करना चाहते हैं।
Don't Miss! वे इस किस्म की फिल्में नहीं बल्कि कुछ और करना चाहते हैं। जिसके बारे में सलमान ने खुद खुलासा किया है। बॉलीवुड के दबंग खान की फिल्में इन दिनों कुछ खास कर नहीं पा रही हैं। कुछ समय पहले आई ट्यूबलाइट से लोगों को उम्मीदें तो बहुत थीं लेकिन फिल्म उतना इम्प्रेस नहीं कर पाई। फिल्म के बाद खबरें तो यहां तक आई थीं कि सलमान ने डिस्ट्रीब्यूटर्स को हुए नुकसान भरपाई की थी। बाद में सलमान के पिता सलीम खान ने भी ट्यूबलाइट को अक्षय की फिल्म से कमतर बता कर रही बची कसर पूरी कर दी थी। वहीं अब सलमान ऐसी फिल्मों से ऊब चुके हैं। यही वजह है कि अब वे इस किस्म की फिल्में नहीं बल्कि कुछ और करना चाहते हैं। जिसके बारे में सलमान ने खुद खुलासा किया है। सलमान का कहना है कि अब वे कॉमेडी फिल्में करना चाहते हैं।
चेन्नईः तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे राज्य का राजनीतिक माहौल गर्म होता जा रहा है। इस बीच कुछ नए चुनावी गठबंधन बन रहे हैं, तो कुछ टूट रहे हैं। 20 साल बाद एक बार फिर पट्टलि मक्कल काटची (पीएमके), सत्ताधारी एआईएडीएमके के साथ विधानसभा चुनावों में गठबंधन करने जा रही है। 2019 के लोकसभा चुनावों में भी पार्टी ने एआईएडीएमके के साथ गठबंधन किया था, लेकिन पीएमके कोई खाता भी नहीं खोल पाई थी। चलिए हम पीएमके के बदलते गठबंधनों पर नज़र डालते हैं और जानने की कोशिश करते हैं कि पार्टी आज की चुनावी तस्वीर में कहां खड़ी है। पीएमके की स्थापना 1989 में एस. रामदास ने प्रभावशाली वन्नियार जाति के चुनावी चेहरे के तौर पर की थी। वन्नियार वर्ग के पास उत्तरी तमिलनाडु के कांचीपुरम, वेल्लोर, धरमपुरी, सेलम और थिरुवनामलाई जिलों में बहुत राजनीतिक प्रभुत्व है। यह पार्टी राजनीतिक फायदे के लिए हिंसा और दलित समुदायों के लिए नफरत के लिए जानी जाती है। वन्नियार लोगों को पहले 'पल्ली' नाम से जाना जाता था, इस जाति को शूद्र के तौर पर वर्गीकृत किया जाता था। 1931 तक समुदाय मद्रास जनगणना में अपने नाम से 'पल्ली' हटवाने में कामयाब हो गया। इस जनगणना में समुदाय को 'वन्निया कुल क्षत्रिय' नाम से दर्ज किया गया। वक़्त के साथ-साथ राज्य का विकास हुआ और अपने राजनीतिक प्रभुत्व का इस्तेमाल कर वन्नियार जाति का एक बड़ा वर्ग ग्रामीण इलाकों में श्रम जाति से भूमि स्वामित्व वाली कृषि जाति बनने में कामयाब रहा। पीएमके का दावा है कि राज्य की कुल आबादी में वन्नियार जाति की हिस्सेदारी 25 फ़ीसदी है। लेकिन इस बारे में कई अलग-अलग दावे हैं। एक सूत्र के मुताबिक़, 1985 के एक अध्ययन से पता चलता है कि वन्नियार जाति की राज्य में 13 फ़ीसदी आबादी है, वहीं एक दूसरा अध्ययन इस हिस्सेदारी को 22 फ़ीसदी बताता है। लेकिन तथ्य यह है कि पीएमके 2019 के लोकसभा चुनावों में सिर्फ़ 5.42 फ़ीसदी वोट हासिल करने में ही कामयाब रही थी। पार्टी तब एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। पार्टी के संस्थापक एस रामदास इस बात से नाराज हैं कि पार्टी बनने के तीन दशक बाद भी इसे सिर्फ़ 5 फ़ीसदी मतदाताओं का ही समर्थन है और पीएमके काफ़ी संघर्ष कर रही है। यह बात तार्किक भी लगती है। उन्होंने हाल में पार्टी के कार्यकर्ताओं से मैदान पर ज़्यादा काम करने और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मॉडल का पालन करने के लिए कहा। वह आने वाले विधानसभा चुनावों में कम से कम 60 सीटें हासिल करना चाहते हैं। पार्टी का लक्ष्य है कि एक वन्नियार तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बने, इसके लिए पार्टी संस्थापक एस रामदास के बेटे डॉ अंबुमणि रामदास के लिए ज़मीन भी तैयार की जा रही है। अंबुमणि रामदास मनमोहन सिंह की सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। इस लक्ष्य को हासिल करने, पार्टी का विस्तार करने और समुदाय का राजनीतिक प्रभुत्व बढ़ाने के लिए पीएमके अकसर महत्वकांक्षी ढंग से राजनीतिक ताकत की खोज में राज्य में अपना रवैया बदलती रहती है। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि पार्टी लगातार अपने चुनावी साझेदार बदलती रही है और एक व्यापक नज़रिए की कमी के चलते आज पार्टी के पास ना तो राज्य में और न ही केंद्र में कोई सीट है। 2001 के विधानसभा चुनावों में पीएमके ने 20 सीटें जीती थीं। लेकिन फिलहाल उसके पास संसद और तमिलनाडु विधानसभा में एक भी सीट नहीं है। जल्दी-जल्दी साझेदार बदलने के चलते पीएमके की छवि भरोसा न कर सकने लायक राजनीतिक दल की बन गई है। एक वक़्त था जब पार्टी को किसी गठबंधन में मतदाताओं का अपना खास हिस्सा लाने के लिए पहचान जाता था, जिससे सीटों की संख्या बढ़ती थी और गठबंधन जीत तक पहुंचता था। लेकिन 2009 में चुनावी हार के बाद पार्टी के लिए मुश्किल भरी राह रही है। तबसे अब तक पीएमके अपनी खोई हुई साख वापस नहीं ला पाई है। 2001 के विधानसभा चुनाव में पीएमके, एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल थी। लेकिन 2006 और 2011 के विधानसभा चुनाव में पार्टी DMK के साथ चली गई। 2011 में यह गठबंधन चुनाव हार गया और पीएमके की सीटें 18 से महज 3 ही रह गईं। 2016 के चुनावों में पीएमके ने स्वतंत्र तरीके से चुनाव लड़ा। पार्टी ने खुद से सिर्फ़ वन्नियार वर्ग की पार्टी होने का ठप्पा हटाने और अपना आधार ज़्यादा व्यापक करने की कोशिश की। ताकि दो बड़ी द्रविड़ पार्टियों- DMK और एआईएडीएमके के अलावा तीसरा विकल्प तैयार किया जा सके। लेकिन इसका कोई अच्छा नतीज़ा नहीं निकला। पार्टी ने बड़ी महत्वाकांक्षा के साथ 234 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन 212 में इसके प्रत्याशियों की जमानत जब़्त हो गई। आने वाले चुनावों में 20 साल बाद पीएमके ने एक बार फिर एआईएडीएमके के साथ हाथ मिलाया है। लोकसभा चुनावों में भी पार्टी ने अपने साझेदारों में लगातार फेरबदल किया है। 1999 में पीएमके वाजपेयी के नेतृत्व वाले NDA का हिस्सा थी। 2004 में पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व वाले UPA में शामिल हो गई। 2009 में तीसरे मोर्चे में नाकाम रहने के बाद एक बार फिर पार्टी 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में NDA में शामिल हो गई। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि पीएमके के राजनीतिक प्रभाव में कमी आने का एक अहम कारण पार्टी का पिछले दो दशकों में वैचारिक आधार का अस्थायित्व है। अपने गठन के वक़्त पार्टी वन्नियार समुदाय का चुनावी चेहरा थी। जब पार्टी को महसूस हुआ कि केवल वन्नियार वोट के दम पर वो कभी राज्य में बहुमत हासिल नहीं कर पाएगी, तो पीएमके ने अपना आधार बढ़ाना शुरू कर दिया। कुछ थोड़े वक़्त के लिए पार्टी ने अखिल-तमिल पहचान की राजनीति की। पीएमके ने दलित वर्ग पर आधारित पार्टी विदुधलाई चिरुथाईगल काची (वीसीके) से भी अच्छे संबंध बरकरार रखे। दोनों ही पार्टियों कई मौकों पर एक दूसरे को चुनावी समर्थन देती रहती थीं। लेकिन 2009 में लोकसभा चुनाव और 2011 में विधानसभा चुनाव में अपनी हार के बाद पीएमके ने फिर जातिगत हिंसा का सहारा लेना शुरू कर दिया। 2012 में हुई धरमपुरी हिंसा को पीएमके की चुनावी हार का नतीज़ा ही माना जाता है, इस घटना में कथित तौर पर पीएमके ने प्रभुत्वशाली जातियों को दलितों के खिलाफ़ भड़काया। इससे हिंसा हुई और बड़े पैमाने पर संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। इस हिंसा से पीएमके को लाभ भी मिला और अंबुमणि रामदास धरमपुरी लोकसभा क्षेत्र से 2014 में चुनाव जीतने में कामयाब रहे। उस साल पार्टी ने यही एकमात्र सीट जीती थी। खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के क्रम में पीएमके ने 2012 में दलित विरोधी OBC मोर्चा बनाने की कोशिश की। ताकि पार्टी खुद को पिछड़ा वर्ग के मसीहा के तौर पर पेश कर सके। लेकिन OBC मोर्चा एक समग्र राजनीतिक शक्ति केंद्र बनाने में नाकामयाब रहा। 2021 के चुनाव में पीएमके ने एक बार फिर अपना राजनीतिक दृष्टिकोण बदल लिया है और पार्टी वापस अपनी वन्नियार पहचान पर केंद्रित हो गई है। लेकिन इस बार पीएमके ने अपनी राजनीतिक पैंतरेबाजी तेज कर दी है, ताकि एआईएडीएमके-BJP गठबंधन में ज़्यादा मोलभाव की शक्ति पार्टी को हासिल हो सके। पार्टी ने गठबंधन में बातचीत से पहले, एआईएडीएमके की सरकार के खिलाफ़ वन्नियार समुदाय को अति पिछड़े वर्ग (MBC) आरक्षण के भीतर 20 फ़ीसदी आरक्षण की मांग के साथ धरना प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। पार्टी ने इस बदलाव को यह कहते हुए सही ठहराया है कि पीएमके की मातृसंस्था वन्नियार संगम ने MBC आरक्षण का गठन करने में अहम भूमिका निभाई थी, पार्टी का कहना है कि MBC में शामिल दूसरी जातियों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। पीएमके का मानना है कि MBC आरक्षण से वन्नियार समुदाय को जो लाभ मिलना था, वह नहीं मिला है। क्योंकि इस आरक्षण वर्ग में 108 जातियां शामिल हैं। हालांकि एआईएडीएमके सरकार का कहना है कि पीएमके की वन्नियार आरक्षण की मांग को लागू करने के पहले वो कोर्ट के आदेश का इंतज़ार कर रही है। कोर्ट को जरूरी आंकड़े उपलब्ध करवाने के लिए मुख्यमंत्री ई पलनीसामी ने 1 दिसंबर 2020 को राज्य में जातिगत सर्वे करवाने के लिए एक आयोग के गठन का फ़ैसला किया है। पीएमके विपक्षी DMK गठबंधन की तरफ भी कुछ इशारे कर रही है। लेकिन यहां उसकी सबसे बड़ी बाधा विदुथलाई सिरुथाईगल काची (वीसीके) है। वीसीके के नेता और सांसद थोल थिरुमालवन साफ़ कह चुके हैं कि वे ऐसे किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेंगे, जिसमें बीजेपी या पीएमके शामिल होगी। इस लेख को मूल अंग्रेजी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
चेन्नईः तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे राज्य का राजनीतिक माहौल गर्म होता जा रहा है। इस बीच कुछ नए चुनावी गठबंधन बन रहे हैं, तो कुछ टूट रहे हैं। बीस साल बाद एक बार फिर पट्टलि मक्कल काटची , सत्ताधारी एआईएडीएमके के साथ विधानसभा चुनावों में गठबंधन करने जा रही है। दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनावों में भी पार्टी ने एआईएडीएमके के साथ गठबंधन किया था, लेकिन पीएमके कोई खाता भी नहीं खोल पाई थी। चलिए हम पीएमके के बदलते गठबंधनों पर नज़र डालते हैं और जानने की कोशिश करते हैं कि पार्टी आज की चुनावी तस्वीर में कहां खड़ी है। पीएमके की स्थापना एक हज़ार नौ सौ नवासी में एस. रामदास ने प्रभावशाली वन्नियार जाति के चुनावी चेहरे के तौर पर की थी। वन्नियार वर्ग के पास उत्तरी तमिलनाडु के कांचीपुरम, वेल्लोर, धरमपुरी, सेलम और थिरुवनामलाई जिलों में बहुत राजनीतिक प्रभुत्व है। यह पार्टी राजनीतिक फायदे के लिए हिंसा और दलित समुदायों के लिए नफरत के लिए जानी जाती है। वन्नियार लोगों को पहले 'पल्ली' नाम से जाना जाता था, इस जाति को शूद्र के तौर पर वर्गीकृत किया जाता था। एक हज़ार नौ सौ इकतीस तक समुदाय मद्रास जनगणना में अपने नाम से 'पल्ली' हटवाने में कामयाब हो गया। इस जनगणना में समुदाय को 'वन्निया कुल क्षत्रिय' नाम से दर्ज किया गया। वक़्त के साथ-साथ राज्य का विकास हुआ और अपने राजनीतिक प्रभुत्व का इस्तेमाल कर वन्नियार जाति का एक बड़ा वर्ग ग्रामीण इलाकों में श्रम जाति से भूमि स्वामित्व वाली कृषि जाति बनने में कामयाब रहा। पीएमके का दावा है कि राज्य की कुल आबादी में वन्नियार जाति की हिस्सेदारी पच्चीस फ़ीसदी है। लेकिन इस बारे में कई अलग-अलग दावे हैं। एक सूत्र के मुताबिक़, एक हज़ार नौ सौ पचासी के एक अध्ययन से पता चलता है कि वन्नियार जाति की राज्य में तेरह फ़ीसदी आबादी है, वहीं एक दूसरा अध्ययन इस हिस्सेदारी को बाईस फ़ीसदी बताता है। लेकिन तथ्य यह है कि पीएमके दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनावों में सिर्फ़ पाँच.बयालीस फ़ीसदी वोट हासिल करने में ही कामयाब रही थी। पार्टी तब एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। पार्टी के संस्थापक एस रामदास इस बात से नाराज हैं कि पार्टी बनने के तीन दशक बाद भी इसे सिर्फ़ पाँच फ़ीसदी मतदाताओं का ही समर्थन है और पीएमके काफ़ी संघर्ष कर रही है। यह बात तार्किक भी लगती है। उन्होंने हाल में पार्टी के कार्यकर्ताओं से मैदान पर ज़्यादा काम करने और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मॉडल का पालन करने के लिए कहा। वह आने वाले विधानसभा चुनावों में कम से कम साठ सीटें हासिल करना चाहते हैं। पार्टी का लक्ष्य है कि एक वन्नियार तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बने, इसके लिए पार्टी संस्थापक एस रामदास के बेटे डॉ अंबुमणि रामदास के लिए ज़मीन भी तैयार की जा रही है। अंबुमणि रामदास मनमोहन सिंह की सरकार में कैबिनेट मंत्री थे। इस लक्ष्य को हासिल करने, पार्टी का विस्तार करने और समुदाय का राजनीतिक प्रभुत्व बढ़ाने के लिए पीएमके अकसर महत्वकांक्षी ढंग से राजनीतिक ताकत की खोज में राज्य में अपना रवैया बदलती रहती है। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि पार्टी लगातार अपने चुनावी साझेदार बदलती रही है और एक व्यापक नज़रिए की कमी के चलते आज पार्टी के पास ना तो राज्य में और न ही केंद्र में कोई सीट है। दो हज़ार एक के विधानसभा चुनावों में पीएमके ने बीस सीटें जीती थीं। लेकिन फिलहाल उसके पास संसद और तमिलनाडु विधानसभा में एक भी सीट नहीं है। जल्दी-जल्दी साझेदार बदलने के चलते पीएमके की छवि भरोसा न कर सकने लायक राजनीतिक दल की बन गई है। एक वक़्त था जब पार्टी को किसी गठबंधन में मतदाताओं का अपना खास हिस्सा लाने के लिए पहचान जाता था, जिससे सीटों की संख्या बढ़ती थी और गठबंधन जीत तक पहुंचता था। लेकिन दो हज़ार नौ में चुनावी हार के बाद पार्टी के लिए मुश्किल भरी राह रही है। तबसे अब तक पीएमके अपनी खोई हुई साख वापस नहीं ला पाई है। दो हज़ार एक के विधानसभा चुनाव में पीएमके, एआईएडीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन में शामिल थी। लेकिन दो हज़ार छः और दो हज़ार ग्यारह के विधानसभा चुनाव में पार्टी DMK के साथ चली गई। दो हज़ार ग्यारह में यह गठबंधन चुनाव हार गया और पीएमके की सीटें अट्ठारह से महज तीन ही रह गईं। दो हज़ार सोलह के चुनावों में पीएमके ने स्वतंत्र तरीके से चुनाव लड़ा। पार्टी ने खुद से सिर्फ़ वन्नियार वर्ग की पार्टी होने का ठप्पा हटाने और अपना आधार ज़्यादा व्यापक करने की कोशिश की। ताकि दो बड़ी द्रविड़ पार्टियों- DMK और एआईएडीएमके के अलावा तीसरा विकल्प तैयार किया जा सके। लेकिन इसका कोई अच्छा नतीज़ा नहीं निकला। पार्टी ने बड़ी महत्वाकांक्षा के साथ दो सौ चौंतीस विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन दो सौ बारह में इसके प्रत्याशियों की जमानत जब़्त हो गई। आने वाले चुनावों में बीस साल बाद पीएमके ने एक बार फिर एआईएडीएमके के साथ हाथ मिलाया है। लोकसभा चुनावों में भी पार्टी ने अपने साझेदारों में लगातार फेरबदल किया है। एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में पीएमके वाजपेयी के नेतृत्व वाले NDA का हिस्सा थी। दो हज़ार चार में पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व वाले UPA में शामिल हो गई। दो हज़ार नौ में तीसरे मोर्चे में नाकाम रहने के बाद एक बार फिर पार्टी दो हज़ार चौदह और दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनावों में NDA में शामिल हो गई। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि पीएमके के राजनीतिक प्रभाव में कमी आने का एक अहम कारण पार्टी का पिछले दो दशकों में वैचारिक आधार का अस्थायित्व है। अपने गठन के वक़्त पार्टी वन्नियार समुदाय का चुनावी चेहरा थी। जब पार्टी को महसूस हुआ कि केवल वन्नियार वोट के दम पर वो कभी राज्य में बहुमत हासिल नहीं कर पाएगी, तो पीएमके ने अपना आधार बढ़ाना शुरू कर दिया। कुछ थोड़े वक़्त के लिए पार्टी ने अखिल-तमिल पहचान की राजनीति की। पीएमके ने दलित वर्ग पर आधारित पार्टी विदुधलाई चिरुथाईगल काची से भी अच्छे संबंध बरकरार रखे। दोनों ही पार्टियों कई मौकों पर एक दूसरे को चुनावी समर्थन देती रहती थीं। लेकिन दो हज़ार नौ में लोकसभा चुनाव और दो हज़ार ग्यारह में विधानसभा चुनाव में अपनी हार के बाद पीएमके ने फिर जातिगत हिंसा का सहारा लेना शुरू कर दिया। दो हज़ार बारह में हुई धरमपुरी हिंसा को पीएमके की चुनावी हार का नतीज़ा ही माना जाता है, इस घटना में कथित तौर पर पीएमके ने प्रभुत्वशाली जातियों को दलितों के खिलाफ़ भड़काया। इससे हिंसा हुई और बड़े पैमाने पर संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। इस हिंसा से पीएमके को लाभ भी मिला और अंबुमणि रामदास धरमपुरी लोकसभा क्षेत्र से दो हज़ार चौदह में चुनाव जीतने में कामयाब रहे। उस साल पार्टी ने यही एकमात्र सीट जीती थी। खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के क्रम में पीएमके ने दो हज़ार बारह में दलित विरोधी OBC मोर्चा बनाने की कोशिश की। ताकि पार्टी खुद को पिछड़ा वर्ग के मसीहा के तौर पर पेश कर सके। लेकिन OBC मोर्चा एक समग्र राजनीतिक शक्ति केंद्र बनाने में नाकामयाब रहा। दो हज़ार इक्कीस के चुनाव में पीएमके ने एक बार फिर अपना राजनीतिक दृष्टिकोण बदल लिया है और पार्टी वापस अपनी वन्नियार पहचान पर केंद्रित हो गई है। लेकिन इस बार पीएमके ने अपनी राजनीतिक पैंतरेबाजी तेज कर दी है, ताकि एआईएडीएमके-BJP गठबंधन में ज़्यादा मोलभाव की शक्ति पार्टी को हासिल हो सके। पार्टी ने गठबंधन में बातचीत से पहले, एआईएडीएमके की सरकार के खिलाफ़ वन्नियार समुदाय को अति पिछड़े वर्ग आरक्षण के भीतर बीस फ़ीसदी आरक्षण की मांग के साथ धरना प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। पार्टी ने इस बदलाव को यह कहते हुए सही ठहराया है कि पीएमके की मातृसंस्था वन्नियार संगम ने MBC आरक्षण का गठन करने में अहम भूमिका निभाई थी, पार्टी का कहना है कि MBC में शामिल दूसरी जातियों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। पीएमके का मानना है कि MBC आरक्षण से वन्नियार समुदाय को जो लाभ मिलना था, वह नहीं मिला है। क्योंकि इस आरक्षण वर्ग में एक सौ आठ जातियां शामिल हैं। हालांकि एआईएडीएमके सरकार का कहना है कि पीएमके की वन्नियार आरक्षण की मांग को लागू करने के पहले वो कोर्ट के आदेश का इंतज़ार कर रही है। कोर्ट को जरूरी आंकड़े उपलब्ध करवाने के लिए मुख्यमंत्री ई पलनीसामी ने एक दिसंबर दो हज़ार बीस को राज्य में जातिगत सर्वे करवाने के लिए एक आयोग के गठन का फ़ैसला किया है। पीएमके विपक्षी DMK गठबंधन की तरफ भी कुछ इशारे कर रही है। लेकिन यहां उसकी सबसे बड़ी बाधा विदुथलाई सिरुथाईगल काची है। वीसीके के नेता और सांसद थोल थिरुमालवन साफ़ कह चुके हैं कि वे ऐसे किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेंगे, जिसमें बीजेपी या पीएमके शामिल होगी। इस लेख को मूल अंग्रेजी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
मीठापुर से थोक सब्जी दुकानदारों को 5 मई को चितकोहरा शिफ्ट कर दिया गया। भास्कर ने खबर चलाई थी कि पटना की सबसे बड़ी मीठापुर सब्जी मंडी बंद रही तो पटना में सब्जियां महंगी हो सकती हैं। मीठापुर के थोक विक्रेताओं ने ही सब्जी मंडी को दूसरी जगह शिफ्ट करने की मांग की थी और जगह नहीं देने पर दुकान बंद रखने की बात कही थी। कई दिन दुकानें बंद भी रहीं। खबर आने के बाद पटना जिलाधिकारी ने तत्परता दिखाई और थोक सब्जी मंडी को चितकोहरा और खुदरा सब्जी मंडी को संजय गांधी स्टेडियम गर्दनीबाग शिफ्ट किया। कुछ थोक सब्जी विक्रेता चालाकी दिखा रहे हैं। अभी भी मीठापुर सब्जी मंडी से ही बिक्री कर रहे हैं। इसमें ज्यादातर आलू-प्याज वाले दुकानदार हैं। ये थोक दुकानदार पुल के नीचे की जगह को अतिक्रमित भी किए हुए हैं। इनकी वजह से सुबह के समय भीड़ भी हो रही है। हद यह है कि मीठापुर सब्जी मंडी में जक्कनपुर पुलिस का पहरा है, लेकिन इन्हें मना करने वाला कोई नहीं है। प्रशासन ने पटना DM के आदेश की धज्जियां उड़ाने वाले दुकानदारों पर दबिश बनाते हुए भोला कुमार और राम प्रवेश नामक दुकानदार की दुकान सील भी की। 16 मई को एक दुकानदार जितेन्द्र की गिरफ्तारी की भी जानकारी है, जिन्हें बाद में चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। मजिस्ट्रेट अरविंद कुमार ने 16 मई को दबिश बनाई थी। भास्कर ने 17 मई की सुबह मीठापुर सब्जी मंडी का जायजा लिया तो पाया कि 7-8 आलू-प्याज के थोक विक्रेता ठाठ से पटना DM के आदेश की आवहेलना कर रहे हैं। गेट खोलकर आराम से बिक्री करते दुकानदार देखे गए। पुल के नीचे भी वही स्थिति रही। इन दुकानदारों को किसी का डर क्यों नहीं है, इसके पीछे का राज स्थानीय लोग ही खोलते हैं। लोग बताते हैं कि यह सब मिलीभगत के साथ हो रहा है, नहीं तो जहां पुलिस पहरा दे रही हो कि भीड़भाड़ नहीं करना है, वहां मनमानी जारी रहने का कोई मतलब नहीं। बाकी आप खुद समझ लीजिए। दर्जनों दुकानदारों को यहां से हटाने का मकसद यह है कि भीड़ कम हो और कोरोना के प्रसार को रोका जा सके, लेकिन इस मकसद को आधा दर्जन आलू-प्याज के थोक विक्रेता पूरा नहीं होने दे रहे। भास्कर ने मजिस्ट्रेट अरविंद कुमार से बात की तो उन्होंने बताया कि 16 मई को तो लाठीचार्ज की नौबत आ गई थी। इन सबों को कई बार समझाया जा चुका है। कुछ दुकानें सीज भी की गई हैं। अगर ये बात नहीं मानेंगे तो बाद में भी परेशानी में पड़ेंगे। महामारी की स्थिति में कोरोना गाइडलाइन का पालन हर हाल में इन्हें करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मैं फिर से दिखवाता हूं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
मीठापुर से थोक सब्जी दुकानदारों को पाँच मई को चितकोहरा शिफ्ट कर दिया गया। भास्कर ने खबर चलाई थी कि पटना की सबसे बड़ी मीठापुर सब्जी मंडी बंद रही तो पटना में सब्जियां महंगी हो सकती हैं। मीठापुर के थोक विक्रेताओं ने ही सब्जी मंडी को दूसरी जगह शिफ्ट करने की मांग की थी और जगह नहीं देने पर दुकान बंद रखने की बात कही थी। कई दिन दुकानें बंद भी रहीं। खबर आने के बाद पटना जिलाधिकारी ने तत्परता दिखाई और थोक सब्जी मंडी को चितकोहरा और खुदरा सब्जी मंडी को संजय गांधी स्टेडियम गर्दनीबाग शिफ्ट किया। कुछ थोक सब्जी विक्रेता चालाकी दिखा रहे हैं। अभी भी मीठापुर सब्जी मंडी से ही बिक्री कर रहे हैं। इसमें ज्यादातर आलू-प्याज वाले दुकानदार हैं। ये थोक दुकानदार पुल के नीचे की जगह को अतिक्रमित भी किए हुए हैं। इनकी वजह से सुबह के समय भीड़ भी हो रही है। हद यह है कि मीठापुर सब्जी मंडी में जक्कनपुर पुलिस का पहरा है, लेकिन इन्हें मना करने वाला कोई नहीं है। प्रशासन ने पटना DM के आदेश की धज्जियां उड़ाने वाले दुकानदारों पर दबिश बनाते हुए भोला कुमार और राम प्रवेश नामक दुकानदार की दुकान सील भी की। सोलह मई को एक दुकानदार जितेन्द्र की गिरफ्तारी की भी जानकारी है, जिन्हें बाद में चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। मजिस्ट्रेट अरविंद कुमार ने सोलह मई को दबिश बनाई थी। भास्कर ने सत्रह मई की सुबह मीठापुर सब्जी मंडी का जायजा लिया तो पाया कि सात-आठ आलू-प्याज के थोक विक्रेता ठाठ से पटना DM के आदेश की आवहेलना कर रहे हैं। गेट खोलकर आराम से बिक्री करते दुकानदार देखे गए। पुल के नीचे भी वही स्थिति रही। इन दुकानदारों को किसी का डर क्यों नहीं है, इसके पीछे का राज स्थानीय लोग ही खोलते हैं। लोग बताते हैं कि यह सब मिलीभगत के साथ हो रहा है, नहीं तो जहां पुलिस पहरा दे रही हो कि भीड़भाड़ नहीं करना है, वहां मनमानी जारी रहने का कोई मतलब नहीं। बाकी आप खुद समझ लीजिए। दर्जनों दुकानदारों को यहां से हटाने का मकसद यह है कि भीड़ कम हो और कोरोना के प्रसार को रोका जा सके, लेकिन इस मकसद को आधा दर्जन आलू-प्याज के थोक विक्रेता पूरा नहीं होने दे रहे। भास्कर ने मजिस्ट्रेट अरविंद कुमार से बात की तो उन्होंने बताया कि सोलह मई को तो लाठीचार्ज की नौबत आ गई थी। इन सबों को कई बार समझाया जा चुका है। कुछ दुकानें सीज भी की गई हैं। अगर ये बात नहीं मानेंगे तो बाद में भी परेशानी में पड़ेंगे। महामारी की स्थिति में कोरोना गाइडलाइन का पालन हर हाल में इन्हें करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मैं फिर से दिखवाता हूं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Agneepath Scheme Protest latest Update: अग्निपथ योजना पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी तक चुप्पी साधे हुए हैं। अभी तक नीतीश कुमार ने इस बाबत कोई भी बयान नहीं दिया है। नीतीश कुमार के इस रवैए को लेकर बिहार के सियासी हलकों में सवाल उठने लगे हैं। Agneepath Scheme Protest: केंद्र सरकार (Central Government) की ओर से सेना में भर्ती के लिए घोषित की गई नई योजना अग्निपथ (AGNIPATH SCHEME) का सबसे तीखा विरोध बिहार में ही किया जा रहा है। इस स्कीम के विरोध की शुरुआत भी बिहार से ही हुई और बाद में यह आंदोलन देश के दूसरे राज्यों में फैल गया। आंदोलन का सबसे उग्र विरोध बिहार में ही किया जा रहा है और अभी तक आगजनी और तोड़फोड़ की सर्वाधिक घटनाएं बिहार में ही हुई हैं। नाराज युवाओं की ओर से भाजपा नेताओं के ठिकानों पर भी हमले किए जा रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Bihar CM Nitish Kumar) अभी तक चुप्पी साधे हुए हैं। हालांकि उनकी पार्टी के नेताओं की ओर से इस स्कीम को लेकर सवाल जरूर खड़े किए गए हैं मगर अभी तक नीतीश कुमार ने इस बाबत कोई भी बयान नहीं दिया है। यहां तक कि उन्होंने राज्य के युवाओं से शांति बनाए रखने की अपील तक नहीं की है। नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के इस रवैए को लेकर बिहार के सियासी हलकों में सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि इसके जरिए नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) भाजपा (BJP) पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्र सरकार (Central Government) की ओर से मंगलवार को अग्निपथ की स्कीम की घोषणा की गई थी और बुधवार की सुबह से ही बिहार में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं की शुरुआत हो गई। हिंसा की शुरुआत के बाद तीन दिन बीत चुके हैं और अभी तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। बिहार के स्टेशनों पर पूरी तरह अराजकता का माहौल दिख रहा है और ट्रेनों की बोगियां आग के हवाले की जा रही हैं। विक्रमशिला एक्सप्रेस की सभी 23 बोगियों को उपद्रवियों ने फूंक डाला। इस ट्रेन के अलावा कई और ट्रेनों को भी उपद्रवियों ने निशाना बनाया है। इस पूरे मामले में सबसे काबिलेगौर बात बिहार पुलिस की निष्क्रियता है। बिहार के किसी भी जिले में पुलिस अभी तक आंदोलनकारियों से निपटने में मुस्तैद नहीं दिख रही है। कई स्टेशनों पर यात्रियों की जान पर खतरा भी पैदा हो गया मगर बिहार पुलिस ज्यादा सक्रिय नहीं दिखी। बिहार पुलिस के इस रवैए को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बिहार में नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) भाजपा के समर्थन की बदौलत ही मुख्यमंत्री बने हुए हैं मगर भाजपा नेताओं को निशाना बनाए जाने पर भी उनका कोई बयान अभी तक नहीं आया है। जदयू के अध्यक्ष ललन सिंह, विजेंद्र यादव, केसी त्यागी और हम के नेता जीतन राम मांझी केंद्र सरकार से इस स्कीम पर पुनर्विचार की मांग कर चुके हैं। जदयू के इस रवैए को देखते हुए माना जा रहा है कि नीतीश कुमार भी इस स्कीम से सहमत नहीं हैं मगर खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं। अभी तक उन्होंने इस स्कीम को लेकर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं जताई है। उन्होंने अभी तक अग्निवीरों को बिहार में प्राथमिकता देने का ऐलान भी नहीं किया है जबकि भाजपा की ओर से यह मांग खुलकर की जा चुकी है। अब ऐसे में नीतीश कुमार का रुख सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। सियासी जानकारों का मानना है कि इस मुद्दे पर नीतीश कुमार भाजपा पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल के दिनों में भाजपा और नीतीश कुमार के बीच भीतरी तौर पर तनातनी की खबरें बाहर आती रही हैं। राजद की ओर से आयोजित इफ्तार पार्टी के बाद राजद और जदयू में बढ़ती नजदीकी भी सियासी हलकों में चर्चा का विषय बनी थी। बिहार के मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RLD) ने खुलकर अग्निपथ स्कीम का विरोध किया है। युवाओं के समर्थन में राजद की ओर से शनिवार को बिहार बंद का आह्वान भी किया गया है। जदयू नेताओं ने आंदोलन जैसा कोई बयान तो नहीं दिया है मगर इस स्कीम पर पुनर्विचार की मांग करके जदयू ने अपना रुख जरूर स्पष्ट कर दिया है। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के कहने पर ही जदयू नेताओं की ओर से इस तरह का बयान दिया जा रहा है। ऐसे में अग्निपथ स्कीम का बिहार की सियासत पर गहरा असर पड़ता दिख रहा है। अब ऐसे में सबकी निगाहें नीतीश कुमार पर टिकी हुई हैं कि आने वाले दिनों में वे इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।
Agneepath Scheme Protest latest Update: अग्निपथ योजना पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी तक चुप्पी साधे हुए हैं। अभी तक नीतीश कुमार ने इस बाबत कोई भी बयान नहीं दिया है। नीतीश कुमार के इस रवैए को लेकर बिहार के सियासी हलकों में सवाल उठने लगे हैं। Agneepath Scheme Protest: केंद्र सरकार की ओर से सेना में भर्ती के लिए घोषित की गई नई योजना अग्निपथ का सबसे तीखा विरोध बिहार में ही किया जा रहा है। इस स्कीम के विरोध की शुरुआत भी बिहार से ही हुई और बाद में यह आंदोलन देश के दूसरे राज्यों में फैल गया। आंदोलन का सबसे उग्र विरोध बिहार में ही किया जा रहा है और अभी तक आगजनी और तोड़फोड़ की सर्वाधिक घटनाएं बिहार में ही हुई हैं। नाराज युवाओं की ओर से भाजपा नेताओं के ठिकानों पर भी हमले किए जा रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी तक चुप्पी साधे हुए हैं। हालांकि उनकी पार्टी के नेताओं की ओर से इस स्कीम को लेकर सवाल जरूर खड़े किए गए हैं मगर अभी तक नीतीश कुमार ने इस बाबत कोई भी बयान नहीं दिया है। यहां तक कि उन्होंने राज्य के युवाओं से शांति बनाए रखने की अपील तक नहीं की है। नीतीश कुमार के इस रवैए को लेकर बिहार के सियासी हलकों में सवाल उठने लगे हैं। माना जा रहा है कि इसके जरिए नीतीश कुमार भाजपा पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से मंगलवार को अग्निपथ की स्कीम की घोषणा की गई थी और बुधवार की सुबह से ही बिहार में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं की शुरुआत हो गई। हिंसा की शुरुआत के बाद तीन दिन बीत चुके हैं और अभी तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। बिहार के स्टेशनों पर पूरी तरह अराजकता का माहौल दिख रहा है और ट्रेनों की बोगियां आग के हवाले की जा रही हैं। विक्रमशिला एक्सप्रेस की सभी तेईस बोगियों को उपद्रवियों ने फूंक डाला। इस ट्रेन के अलावा कई और ट्रेनों को भी उपद्रवियों ने निशाना बनाया है। इस पूरे मामले में सबसे काबिलेगौर बात बिहार पुलिस की निष्क्रियता है। बिहार के किसी भी जिले में पुलिस अभी तक आंदोलनकारियों से निपटने में मुस्तैद नहीं दिख रही है। कई स्टेशनों पर यात्रियों की जान पर खतरा भी पैदा हो गया मगर बिहार पुलिस ज्यादा सक्रिय नहीं दिखी। बिहार पुलिस के इस रवैए को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। बिहार में नीतीश कुमार भाजपा के समर्थन की बदौलत ही मुख्यमंत्री बने हुए हैं मगर भाजपा नेताओं को निशाना बनाए जाने पर भी उनका कोई बयान अभी तक नहीं आया है। जदयू के अध्यक्ष ललन सिंह, विजेंद्र यादव, केसी त्यागी और हम के नेता जीतन राम मांझी केंद्र सरकार से इस स्कीम पर पुनर्विचार की मांग कर चुके हैं। जदयू के इस रवैए को देखते हुए माना जा रहा है कि नीतीश कुमार भी इस स्कीम से सहमत नहीं हैं मगर खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं। अभी तक उन्होंने इस स्कीम को लेकर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं जताई है। उन्होंने अभी तक अग्निवीरों को बिहार में प्राथमिकता देने का ऐलान भी नहीं किया है जबकि भाजपा की ओर से यह मांग खुलकर की जा चुकी है। अब ऐसे में नीतीश कुमार का रुख सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। सियासी जानकारों का मानना है कि इस मुद्दे पर नीतीश कुमार भाजपा पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल के दिनों में भाजपा और नीतीश कुमार के बीच भीतरी तौर पर तनातनी की खबरें बाहर आती रही हैं। राजद की ओर से आयोजित इफ्तार पार्टी के बाद राजद और जदयू में बढ़ती नजदीकी भी सियासी हलकों में चर्चा का विषय बनी थी। बिहार के मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल ने खुलकर अग्निपथ स्कीम का विरोध किया है। युवाओं के समर्थन में राजद की ओर से शनिवार को बिहार बंद का आह्वान भी किया गया है। जदयू नेताओं ने आंदोलन जैसा कोई बयान तो नहीं दिया है मगर इस स्कीम पर पुनर्विचार की मांग करके जदयू ने अपना रुख जरूर स्पष्ट कर दिया है। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार के कहने पर ही जदयू नेताओं की ओर से इस तरह का बयान दिया जा रहा है। ऐसे में अग्निपथ स्कीम का बिहार की सियासत पर गहरा असर पड़ता दिख रहा है। अब ऐसे में सबकी निगाहें नीतीश कुमार पर टिकी हुई हैं कि आने वाले दिनों में वे इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।
कोरोना वायरस से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयास जारी हैं. इस बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को फरमान जारी किया है. उन्होंने कहा है कि वह सीएम हेल्पलाइन के फोन पर ये नहीं सुनना चाहते कि अभी भोजन नहीं पहुंचा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट तौर पर जिले के आला अधिकारियों से कहा है कि अगर कहीं भी भोजन पहुंचे में विलंब हुआ तो उसका स्पस्टीकरण सीधे जिलाधिकारियों को देना होगा. उन्होंने कहा कि प्रदेश में सभी जगह सुबह 10 बजे से 2 बजे के बीच दोपहर का खाना पहुंच जाए. इसी तरह 6 बजे से 8 बजे के बीच रात का भोजन पहुंच जाना चाहिए। सीएम खुद सीएम हेल्पलाइन नंबरों की समीक्षा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन पर जिस जिले से ज्यादा लोगों के फोन मदद के लिए आएंगे, उन जिलाधिकारियों के बारे में फैसला लूंगा. उन्होंने कहा कि 23 करोड़ जनता का हित मेरी प्राथमिकता है. जिलाधिकारी की जिम्मेदारी है उनके रहते हुए जिले मे कोई भी भूखा न सोये. बिना किसी भेदभाव के उनके हक का भोजन और राशन उनके पास पहुंचे. योगी आदित्यनाथः- यूपी की जनता को नहीं मिला टाइम पर भोजन तो खामियाजा भुगतेंगे जिले के कलेक्टर Reviewed by News pari on April 05, 2020 Rating:
कोरोना वायरस से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयास जारी हैं. इस बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को फरमान जारी किया है. उन्होंने कहा है कि वह सीएम हेल्पलाइन के फोन पर ये नहीं सुनना चाहते कि अभी भोजन नहीं पहुंचा है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट तौर पर जिले के आला अधिकारियों से कहा है कि अगर कहीं भी भोजन पहुंचे में विलंब हुआ तो उसका स्पस्टीकरण सीधे जिलाधिकारियों को देना होगा. उन्होंने कहा कि प्रदेश में सभी जगह सुबह दस बजे से दो बजे के बीच दोपहर का खाना पहुंच जाए. इसी तरह छः बजे से आठ बजे के बीच रात का भोजन पहुंच जाना चाहिए। सीएम खुद सीएम हेल्पलाइन नंबरों की समीक्षा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हेल्पलाइन पर जिस जिले से ज्यादा लोगों के फोन मदद के लिए आएंगे, उन जिलाधिकारियों के बारे में फैसला लूंगा. उन्होंने कहा कि तेईस करोड़ जनता का हित मेरी प्राथमिकता है. जिलाधिकारी की जिम्मेदारी है उनके रहते हुए जिले मे कोई भी भूखा न सोये. बिना किसी भेदभाव के उनके हक का भोजन और राशन उनके पास पहुंचे. योगी आदित्यनाथः- यूपी की जनता को नहीं मिला टाइम पर भोजन तो खामियाजा भुगतेंगे जिले के कलेक्टर Reviewed by News pari on April पाँच, दो हज़ार बीस Rating:
नई दिल्ली। टीम डिजिटल। हाल ही में सोशल मीडिया के जरिये एक लड़की ने जोर बाग मेट्रो स्टेशन पर एक व्यक्ति द्वारा पता पूछे जाने के बहाने उसके साथ यौन उत्पीडऩ करने की कोशिश की शिकायत की थी। जिसमें लड़की ने सीआईएसएफ सुरक्षा कर्मियों व दिल्ली पुलिस द्वारा त्वरित मदद नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए थे। यह घटना 2 जून दोपहर 2 बजे की थी। इस मामले में दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) ने 3 जून को दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी। इस मामले में पुलिस ने डीसीडब्ल्यू को बताया है कि आईएनए मेट्रो थाने में आईपीसी की धारा 354, 354ए/354डी के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। लेकिन गिरफ्तारी की जानकारी डीसीडब्ल्यू को नहीं दिए जाने पर अब इसी मामले में डीसीडब्ल्यू ने दिल्ली पुलिस को समन व सीआईएसएफ को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा डीसीडब्ल्यू ने कथित तौर पर लड़की की मदद नहीं करने के लिए पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी भी दिल्ली पुलिस से मांगी थी। दिल्ली पुलिस ने डीसीडब्ल्यू को बताया कि दिल्ली मेट्रो में तैनात सुरक्षाकर्मी सीआईएसएफ के हैं। इस संबंध में आयोग की अध्यक्ष ने सीआईएसएफ को नोटिस जारी कर सुरक्षाकर्मियों पर की गयी कार्रवाई का ब्योरा मांगा है। आयोग ने सीआईएसएफ से दिल्ली मेट्रो में यात्रा करने वाली महिलाओं और बच्चों के साथ यौन उत्पीडऩ की घटना के मामले में सीआईएसएफ द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की जानकारी भी देने को कहा है। डीसीडब्ल्यू की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा कि यह घटना बहुत ही चौंकाने वाली और दुर्भाग्यपूर्ण थी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है, लेकिन अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी का ब्योरा नहीं दिया है। मैं दिल्ली पुलिस को समन जारी कर रही हूं और हमने आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी मांगी है। हम सीआईएसएफ को कथित तौर पर लड़की की मदद करने से इंकार करने वाले सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए नोटिस भी जारी कर रहे हैं।
नई दिल्ली। टीम डिजिटल। हाल ही में सोशल मीडिया के जरिये एक लड़की ने जोर बाग मेट्रो स्टेशन पर एक व्यक्ति द्वारा पता पूछे जाने के बहाने उसके साथ यौन उत्पीडऩ करने की कोशिश की शिकायत की थी। जिसमें लड़की ने सीआईएसएफ सुरक्षा कर्मियों व दिल्ली पुलिस द्वारा त्वरित मदद नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए थे। यह घटना दो जून दोपहर दो बजे की थी। इस मामले में दिल्ली महिला आयोग ने तीन जून को दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी। इस मामले में पुलिस ने डीसीडब्ल्यू को बताया है कि आईएनए मेट्रो थाने में आईपीसी की धारा तीन सौ चौवन, तीन सौ चौवनए/तीन सौ चौवनडी के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। लेकिन गिरफ्तारी की जानकारी डीसीडब्ल्यू को नहीं दिए जाने पर अब इसी मामले में डीसीडब्ल्यू ने दिल्ली पुलिस को समन व सीआईएसएफ को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा डीसीडब्ल्यू ने कथित तौर पर लड़की की मदद नहीं करने के लिए पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी भी दिल्ली पुलिस से मांगी थी। दिल्ली पुलिस ने डीसीडब्ल्यू को बताया कि दिल्ली मेट्रो में तैनात सुरक्षाकर्मी सीआईएसएफ के हैं। इस संबंध में आयोग की अध्यक्ष ने सीआईएसएफ को नोटिस जारी कर सुरक्षाकर्मियों पर की गयी कार्रवाई का ब्योरा मांगा है। आयोग ने सीआईएसएफ से दिल्ली मेट्रो में यात्रा करने वाली महिलाओं और बच्चों के साथ यौन उत्पीडऩ की घटना के मामले में सीआईएसएफ द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की जानकारी भी देने को कहा है। डीसीडब्ल्यू की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने कहा कि यह घटना बहुत ही चौंकाने वाली और दुर्भाग्यपूर्ण थी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है, लेकिन अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी का ब्योरा नहीं दिया है। मैं दिल्ली पुलिस को समन जारी कर रही हूं और हमने आरोपी की गिरफ्तारी की जानकारी मांगी है। हम सीआईएसएफ को कथित तौर पर लड़की की मदद करने से इंकार करने वाले सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए नोटिस भी जारी कर रहे हैं।
वाशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि उत्तर कोरिया के साथ वार्ता जारी रहने को लेकर वॉशिंगटन अभी भी आशान्वित है। पोम्पयो ने कहा कि उनके और उनके उत्तर कोरियाई समकक्षों के बीच 'बहुत ही पेशेवर बातचीत' हुई है और उम्मीद है कि हम ऐसा करना जारी रखेंगे। उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग उन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हालिया शिखर सम्मेलन की विफलता के लिए प्योंगयांग द्वारा अमेरिका को दोषी ठहराए जाने के कुछ घंटों बाद पोम्पयो की टिप्पणी आई है। आरएसएस प्रमुख ने कहा, 'कुछ ताकतें भारत के गौरव को कम कर रही हैं'
वाशिंगटन। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि उत्तर कोरिया के साथ वार्ता जारी रहने को लेकर वॉशिंगटन अभी भी आशान्वित है। पोम्पयो ने कहा कि उनके और उनके उत्तर कोरियाई समकक्षों के बीच 'बहुत ही पेशेवर बातचीत' हुई है और उम्मीद है कि हम ऐसा करना जारी रखेंगे। उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग उन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हालिया शिखर सम्मेलन की विफलता के लिए प्योंगयांग द्वारा अमेरिका को दोषी ठहराए जाने के कुछ घंटों बाद पोम्पयो की टिप्पणी आई है। आरएसएस प्रमुख ने कहा, 'कुछ ताकतें भारत के गौरव को कम कर रही हैं'
भारतीय क्रिकेटर रोहित शर्मा पत्नी रितिका सजदेह के साथ एक बार फिर हनीमून पर निकले हैं। रोहित ने टि्वटर पर अपने दूसरे हनीमून की तस्वीरें शेयर की हैं। पिछले साल दिसंबर में शादी में बंधने वाले रोहित और रितिका कुछ दिनों बाद ही हनीमून पर निकले थे। उसके बाद रोहित शर्मा क्रिकेट में बिजी हो गए। भारतीय टीम घर और विदेश में लगातार मैच खेल रही थी। अब जैसे ही उन्हें वक्त मिला तो वे पत्नी के साथ दोबारा से हनीमून पर इटली निकल गए।
भारतीय क्रिकेटर रोहित शर्मा पत्नी रितिका सजदेह के साथ एक बार फिर हनीमून पर निकले हैं। रोहित ने टि्वटर पर अपने दूसरे हनीमून की तस्वीरें शेयर की हैं। पिछले साल दिसंबर में शादी में बंधने वाले रोहित और रितिका कुछ दिनों बाद ही हनीमून पर निकले थे। उसके बाद रोहित शर्मा क्रिकेट में बिजी हो गए। भारतीय टीम घर और विदेश में लगातार मैच खेल रही थी। अब जैसे ही उन्हें वक्त मिला तो वे पत्नी के साथ दोबारा से हनीमून पर इटली निकल गए।
सौरव गांगुली का BCCI में ही अपमान, खराब प्रदर्शन के नाम पर अध्यक्ष पद से छुट्टी! सौरव गांगुली 2019 में BCCI के अध्यक्ष बने थे और हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें लगातार दूसरे कार्यकाल की इजाजत मिली थी, लेकिन पूर्व भारतीय कप्तान अपने ही बोर्ड से हार गए. भारतीय क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया में टी20 विश्व कप के लिए खुद को तैयार कर रही है. वहीं भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) भी एक अलग मैच खेल रहा है, जिसमें भारत के सबसे सफल पूर्व कप्तान और मौजूदा अध्यक्ष सौरव गांगुली की हार तय हो गई है. जानकारी के मुताबिक, गांगुली की बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर छुट्टी हो गई है और अब वह नया कार्यकाल नहीं संभालेंगे. जानकारी के मुताबिक, बोर्ड के मौजूदा अधिकारी अध्यक्ष के रूप में गांगुली के प्रदर्शन से बिल्कुल खुश नहीं हैं. क्रिकेट वेबसाइट क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 अक्टूबर को होने वाले ऐलान में गांगुली दोबारा बीसीसीआई के बॉस के रूप में नहीं दिखेंगे. उनकी जगह पूर्व दिग्गज ऑलराउंर रॉजर बिन्नी का अध्यक्ष बनना अब लगभग तय है. 2019 में BCCI अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने वाले पहले पूर्व क्रिकेटर बने गांगुली समेत पूरे बोर्ड को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से लगातार दूसरा कार्यकाल जारी रखने की इजाजत मिली थी. हालांकि, इसके बावजूद गांगुली इस बदलाव का फायदा नहीं उठा पाएंगे क्योंकि बोर्ड के मौजूदा प्रबंधन में गांगुली को लेकर नाखुशी है. भारत के सबसे सफल कप्तानों में से रहे गांगुली को अब अपने ही बोर्ड में अपमान का सामना करना पड़ रहा है. क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में दिल्ली में बोर्ड पदाधिकारियों की बैठक में गांगुली की जमकर आलोचना हुई. अधिकारियों ने अध्यक्ष के रूप में सही से काम न करने के लिए गांगुली की आलोचना की और यहीं से उनके अध्यक्ष बनने का रास्ता बंद हो गया. बीसीसीआई के अध्यक्ष पद के लिए 1983 वर्ल्ड कप टीम के खिलाड़ी रहे रॉजर बिन्नी ने अपना नॉमिनेशन फाइल कर दिया है जबकि जय शाह ने बीसीसीआई सचिव के लिए नॉमिनेशन फाइल किया है वही कोषाध्यक्ष पद के लिए मुंबई बीजेपी के अध्यक्ष आशीष शेलार ने अपना नॉमिनेशन फाइल किया है. ऐसा माना जा रहा है कि 18 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले ही यह सभी निर्विरोध चुन लिए जाएंगे. बीसीसीआई के पूर्व सचिव निरंजन शाह का कहना है कि अध्यक्ष पद के लिए रॉजर बिन्नी ने अपना नॉमिनेशन भरा है जबकि सेक्रेटरी के लिए जय शाह ने लगातार दूसरी बार पर्चा भरा है वही आशीष शेलार ने कोषाध्यक्ष के लिए नामांकन दाखिल किया है। निरंजन शाह का कहना है कि ऐसा लगता है कि बीसीसीआई का चुनाव निर्विरोध हो जाएगा क्योंकि इन सभी उम्मीदवारों के खिलाफ किसी ने पर्चा दाखिल नहीं किया है. आशीष ने बीसीसीआई के लिए पर्चा भरा है.
सौरव गांगुली का BCCI में ही अपमान, खराब प्रदर्शन के नाम पर अध्यक्ष पद से छुट्टी! सौरव गांगुली दो हज़ार उन्नीस में BCCI के अध्यक्ष बने थे और हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें लगातार दूसरे कार्यकाल की इजाजत मिली थी, लेकिन पूर्व भारतीय कप्तान अपने ही बोर्ड से हार गए. भारतीय क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया में टीबीस विश्व कप के लिए खुद को तैयार कर रही है. वहीं भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड भी एक अलग मैच खेल रहा है, जिसमें भारत के सबसे सफल पूर्व कप्तान और मौजूदा अध्यक्ष सौरव गांगुली की हार तय हो गई है. जानकारी के मुताबिक, गांगुली की बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर छुट्टी हो गई है और अब वह नया कार्यकाल नहीं संभालेंगे. जानकारी के मुताबिक, बोर्ड के मौजूदा अधिकारी अध्यक्ष के रूप में गांगुली के प्रदर्शन से बिल्कुल खुश नहीं हैं. क्रिकेट वेबसाइट क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, अट्ठारह अक्टूबर को होने वाले ऐलान में गांगुली दोबारा बीसीसीआई के बॉस के रूप में नहीं दिखेंगे. उनकी जगह पूर्व दिग्गज ऑलराउंर रॉजर बिन्नी का अध्यक्ष बनना अब लगभग तय है. दो हज़ार उन्नीस में BCCI अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने वाले पहले पूर्व क्रिकेटर बने गांगुली समेत पूरे बोर्ड को हाल ही में सुप्रीम कोर्ट से लगातार दूसरा कार्यकाल जारी रखने की इजाजत मिली थी. हालांकि, इसके बावजूद गांगुली इस बदलाव का फायदा नहीं उठा पाएंगे क्योंकि बोर्ड के मौजूदा प्रबंधन में गांगुली को लेकर नाखुशी है. भारत के सबसे सफल कप्तानों में से रहे गांगुली को अब अपने ही बोर्ड में अपमान का सामना करना पड़ रहा है. क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में दिल्ली में बोर्ड पदाधिकारियों की बैठक में गांगुली की जमकर आलोचना हुई. अधिकारियों ने अध्यक्ष के रूप में सही से काम न करने के लिए गांगुली की आलोचना की और यहीं से उनके अध्यक्ष बनने का रास्ता बंद हो गया. बीसीसीआई के अध्यक्ष पद के लिए एक हज़ार नौ सौ तिरासी वर्ल्ड कप टीम के खिलाड़ी रहे रॉजर बिन्नी ने अपना नॉमिनेशन फाइल कर दिया है जबकि जय शाह ने बीसीसीआई सचिव के लिए नॉमिनेशन फाइल किया है वही कोषाध्यक्ष पद के लिए मुंबई बीजेपी के अध्यक्ष आशीष शेलार ने अपना नॉमिनेशन फाइल किया है. ऐसा माना जा रहा है कि अट्ठारह अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले ही यह सभी निर्विरोध चुन लिए जाएंगे. बीसीसीआई के पूर्व सचिव निरंजन शाह का कहना है कि अध्यक्ष पद के लिए रॉजर बिन्नी ने अपना नॉमिनेशन भरा है जबकि सेक्रेटरी के लिए जय शाह ने लगातार दूसरी बार पर्चा भरा है वही आशीष शेलार ने कोषाध्यक्ष के लिए नामांकन दाखिल किया है। निरंजन शाह का कहना है कि ऐसा लगता है कि बीसीसीआई का चुनाव निर्विरोध हो जाएगा क्योंकि इन सभी उम्मीदवारों के खिलाफ किसी ने पर्चा दाखिल नहीं किया है. आशीष ने बीसीसीआई के लिए पर्चा भरा है.
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
- #Bollywood NewsBipasha Basu ने एयरपोर्ट पर हाथ से छिपाया बेटी देवी का चेहरा, पैप्स को कहा- 'बेटी की फोटो मत क्लिक करो' Cannes Film Festival: बॉलीवुड एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया इन दिनों अपने रिलेशनशिप को लेकर सुर्खियों में छाई हुई हैं। खबर है कि तमन्ना भाटिया पिछले कुछ समय बॉलीवुड के दमदार एक्टर विजय वर्मा को डेट कर रही हैं। पिछले कुछ समय से इस कपल को अक्सर एक साथ कई जगहों पर स्पॉट किया जा रहा है। दोनों कई बार डिनर डेट से लेकर इवेंट्स और पार्टीज तक में एक दूसरे के साथ पहुंच रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अब ये कपल विदेश में भी अपनी केमिस्ट्री दिखाने वाला है। खबर है कि विजय वर्मा और तमन्ना भाटिया कान्स फिल्म फेस्टिवल 2023 में एक साथ रेड कार्पेट पर चल सकते हैं। इससे पहले इस साल न्यू ईयर की पार्टी में तमन्ना भाटिया और विजय वर्मा को किस करते हुए भी देखा गया था जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। आपको बता दें कि विजय वर्मा ने साल 2013 में 'मॉनसून शूटआउट' फिल्म के लिए कान्स फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर वॉक किया था। वहीं एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया भी साल 2022 में कान्स में डेब्यू कर चुकी हैं। हालांकि अब दोनों साथ में कान्स के रेड कार्पेट पर वॉक करते नजर आ सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा बनने के लिए फ्रेंच रिवेरा के लिए रवाना हो चुके हैं। दोनों को मुंबई एयरपोर्ट पर अलग-अलग स्पॉट किया गया। तमन्ना भाटिया और विजय वर्मा के फैंस दोनों को एकसाथ कान्स में वॉक करते हुए देखने के लिए उत्सुक नजर आ रहे हैं। इससे पहले विजय वर्मा और तमन्ना साथ में डिनर डेट पर गए थे। उस समय इस कपल ने मुस्कुराते हुए पैपराजी को हाथ भी हिलाया था।
- #Bollywood NewsBipasha Basu ने एयरपोर्ट पर हाथ से छिपाया बेटी देवी का चेहरा, पैप्स को कहा- 'बेटी की फोटो मत क्लिक करो' Cannes Film Festival: बॉलीवुड एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया इन दिनों अपने रिलेशनशिप को लेकर सुर्खियों में छाई हुई हैं। खबर है कि तमन्ना भाटिया पिछले कुछ समय बॉलीवुड के दमदार एक्टर विजय वर्मा को डेट कर रही हैं। पिछले कुछ समय से इस कपल को अक्सर एक साथ कई जगहों पर स्पॉट किया जा रहा है। दोनों कई बार डिनर डेट से लेकर इवेंट्स और पार्टीज तक में एक दूसरे के साथ पहुंच रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अब ये कपल विदेश में भी अपनी केमिस्ट्री दिखाने वाला है। खबर है कि विजय वर्मा और तमन्ना भाटिया कान्स फिल्म फेस्टिवल दो हज़ार तेईस में एक साथ रेड कार्पेट पर चल सकते हैं। इससे पहले इस साल न्यू ईयर की पार्टी में तमन्ना भाटिया और विजय वर्मा को किस करते हुए भी देखा गया था जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। आपको बता दें कि विजय वर्मा ने साल दो हज़ार तेरह में 'मॉनसून शूटआउट' फिल्म के लिए कान्स फिल्म फेस्टिवल के रेड कार्पेट पर वॉक किया था। वहीं एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया भी साल दो हज़ार बाईस में कान्स में डेब्यू कर चुकी हैं। हालांकि अब दोनों साथ में कान्स के रेड कार्पेट पर वॉक करते नजर आ सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा बनने के लिए फ्रेंच रिवेरा के लिए रवाना हो चुके हैं। दोनों को मुंबई एयरपोर्ट पर अलग-अलग स्पॉट किया गया। तमन्ना भाटिया और विजय वर्मा के फैंस दोनों को एकसाथ कान्स में वॉक करते हुए देखने के लिए उत्सुक नजर आ रहे हैं। इससे पहले विजय वर्मा और तमन्ना साथ में डिनर डेट पर गए थे। उस समय इस कपल ने मुस्कुराते हुए पैपराजी को हाथ भी हिलाया था।
Dhanbad : री एडमिशन फीस से नाराज अभिभावकों ने गुरुवार 31 मार्च को डीएवी स्कूल कोयलानगर के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया. अभिभावकों का कहना है कि झारखंड सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा निजी विद्यालयों को ट्यूशन फीस के अलावा, रीएडमिशन, डेवलपमेंट, सालाना फीस यानी सभी तरह के अनवांटेड फीस नहीं लिए जाने संबंधी आदेश दिया गया है. परंतु डीएवी स्कूल प्रबंधन कोयलानगर उस आदेश के विपरीत अभिभावकों के शोषण में जुटा है. वैसे बच्चे जिनके अभिभावकों ने ट्यूशन फीस जमा किया है, लेकिन अन्य फीस जमा नहीं किया है. उनके बच्चे का रिजल्ट नहीं दिया जा रहा है एवं क्लास में प्रताड़ित किया जा रहा है. ट्यूशन फीस भी बगैर सरकारी आदेश का बढ़ा दिया गया है. इन तमाम मामलों को लेकर गुरुवार को डीएवी स्कूल कोयला नगर के सामने अभिभावकों ने जोरदार प्रदर्शन किया एवं स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की कि शिक्षा के मंदिर में चल रहे व्यवसाय पर रोक लगाएं और अभिभावकों को शोषण से निजात दिलाते हुए स्कूल प्रबंधन की मनमानी को रोकें.
Dhanbad : री एडमिशन फीस से नाराज अभिभावकों ने गुरुवार इकतीस मार्च को डीएवी स्कूल कोयलानगर के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया. अभिभावकों का कहना है कि झारखंड सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा निजी विद्यालयों को ट्यूशन फीस के अलावा, रीएडमिशन, डेवलपमेंट, सालाना फीस यानी सभी तरह के अनवांटेड फीस नहीं लिए जाने संबंधी आदेश दिया गया है. परंतु डीएवी स्कूल प्रबंधन कोयलानगर उस आदेश के विपरीत अभिभावकों के शोषण में जुटा है. वैसे बच्चे जिनके अभिभावकों ने ट्यूशन फीस जमा किया है, लेकिन अन्य फीस जमा नहीं किया है. उनके बच्चे का रिजल्ट नहीं दिया जा रहा है एवं क्लास में प्रताड़ित किया जा रहा है. ट्यूशन फीस भी बगैर सरकारी आदेश का बढ़ा दिया गया है. इन तमाम मामलों को लेकर गुरुवार को डीएवी स्कूल कोयला नगर के सामने अभिभावकों ने जोरदार प्रदर्शन किया एवं स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की कि शिक्षा के मंदिर में चल रहे व्यवसाय पर रोक लगाएं और अभिभावकों को शोषण से निजात दिलाते हुए स्कूल प्रबंधन की मनमानी को रोकें.
काहिराः काहिरा में स्थित भारतीय दूतावास ने मुसलमानों के पाक महीने रमज़ान को मनाने के लिए वार्षिक परंपरा के अनुसार इफ्तार दावत का आयोजन किया। मिस्र में भारीतय राजदूत संजय भट्टाचार्य ने कल आयोजित इफ्तार में मेहमानों को अरबी भाषा में रमज़ान की बधाई दी। (खाड़ी देशों में तनाव के बीच तुर्की के मंत्री करेंगे कतर का दौरा) भट्टाचार्य ने कहा, यह ऐसा वक्त है जब मुसलमानों की आबादी में दूसरे नम्बर पर आने वाला देश मिलकर प्रार्थना और दान, रोज़ा और इफ्तार करता है। मेरे देश में कई धर्मों में प्रार्थना और उपवास सामान्य हैं। उन्होंने कहा कि भारत देश की विविधता की वजह से सभी धर्मों का सम्मान करता है और सभी के प्रति सहिष्णु है। भट्टाचार्य ने मेहमानों से कहा, इस रमज़ान केरल के एक मंदिर ने भारत के 500 मुसलमानों के लिए इफ्तार दावत का आयोजन किया है। केरल में दुनिया की कुछ सबसे पुरानी मस्जिदें हैं जिसमें चेरामन जुमा मस्जिद शामिल है। इसका निर्माण पैंगबर मोहम्मद र्के 622 ई. मेीं मदीना जाने के सिर्फ सात साल के बाद तकरीबन 629 ई. में हुआ था।
काहिराः काहिरा में स्थित भारतीय दूतावास ने मुसलमानों के पाक महीने रमज़ान को मनाने के लिए वार्षिक परंपरा के अनुसार इफ्तार दावत का आयोजन किया। मिस्र में भारीतय राजदूत संजय भट्टाचार्य ने कल आयोजित इफ्तार में मेहमानों को अरबी भाषा में रमज़ान की बधाई दी। भट्टाचार्य ने कहा, यह ऐसा वक्त है जब मुसलमानों की आबादी में दूसरे नम्बर पर आने वाला देश मिलकर प्रार्थना और दान, रोज़ा और इफ्तार करता है। मेरे देश में कई धर्मों में प्रार्थना और उपवास सामान्य हैं। उन्होंने कहा कि भारत देश की विविधता की वजह से सभी धर्मों का सम्मान करता है और सभी के प्रति सहिष्णु है। भट्टाचार्य ने मेहमानों से कहा, इस रमज़ान केरल के एक मंदिर ने भारत के पाँच सौ मुसलमानों के लिए इफ्तार दावत का आयोजन किया है। केरल में दुनिया की कुछ सबसे पुरानी मस्जिदें हैं जिसमें चेरामन जुमा मस्जिद शामिल है। इसका निर्माण पैंगबर मोहम्मद र्के छः सौ बाईस ई. मेीं मदीना जाने के सिर्फ सात साल के बाद तकरीबन छः सौ उनतीस ई. में हुआ था।
लोग कहते हैं कि जैसा कुछ हम बोलते-चालते हैं, वही सर्वथा स्वाभाविक है और जिसमें ऐसा वर्णन है, वही उत्तम कविता है। हमारा कहना यही है कि स्वाभाविकता वस्तुस्थितिके प्रदर्शन में होनी चाहिए, वर्णनके ढँगमें नहीं । वर्णनका ढंग तो विशेष रोचक ही होना चाहिए; तभी तो हम उसे काव्य कहेंगे । अन्यथा साधारण वाक्य-विन्यासमें और कवितामें अन्तर ही क्या रहेगा ? फिर तो हम-तुम जो कुछ बोलते-चालते हैं, बेधड़क सब काव्य ही हैं; क्योंकि सब स्वाभाविक ही बोलते हैं, कोई शब्दार्थ में विशेष बनाव- सिंगार करता ही नहीं है। यदि ऐसा है, तब तो काव्य बड़ा सस्ता पदार्थ है। फिर उसकी इतनी इज्जत क्यों ? और फिर कवियों या काव्योंकी गणना कैसी ? सब जगत् कुवि है - सभी स्वाभाविक बोलते हैं। क्या खूब तमाशा है । अजी, काव्यकी गिनती कलामें है। कलामें बनाव- सिंगार होता ही है। किसी प्राकृतिक पदार्थको कौशलविशेषस अधिक चमत्कृत और आकर्षक बना देनेका नाम ही तो कला है न ? तो फिर प्राकृतिक पदार्थ - शब्दार्थको विशेष ढँगसे प्रयुक्त करके उसमें चमत्कार पैदा कर देना ही तो काव्य हुआ न ? यदि यह बात स्वीकार है, तो फिर अपने आप नवमत- निराकरण हो गया । और यदि यह स्वीकार नहीं है, तो निवेदन यही है कि कलाका लक्षण तो आप कीजिए। देखें, आप कला किसे कहते हैं ? कलाका लक्षण करके यह भी बतलाना होगा कि काव्यकी गिनती कलामें है कि नहीं। यदि कलाका वही लक्षण है, जो हमने किया है और अगर काव्य भी कला है, तो यह कपोलकल्पित प्रलाप सहज ही उड़ जाता है। और कुछ इसके
लोग कहते हैं कि जैसा कुछ हम बोलते-चालते हैं, वही सर्वथा स्वाभाविक है और जिसमें ऐसा वर्णन है, वही उत्तम कविता है। हमारा कहना यही है कि स्वाभाविकता वस्तुस्थितिके प्रदर्शन में होनी चाहिए, वर्णनके ढँगमें नहीं । वर्णनका ढंग तो विशेष रोचक ही होना चाहिए; तभी तो हम उसे काव्य कहेंगे । अन्यथा साधारण वाक्य-विन्यासमें और कवितामें अन्तर ही क्या रहेगा ? फिर तो हम-तुम जो कुछ बोलते-चालते हैं, बेधड़क सब काव्य ही हैं; क्योंकि सब स्वाभाविक ही बोलते हैं, कोई शब्दार्थ में विशेष बनाव- सिंगार करता ही नहीं है। यदि ऐसा है, तब तो काव्य बड़ा सस्ता पदार्थ है। फिर उसकी इतनी इज्जत क्यों ? और फिर कवियों या काव्योंकी गणना कैसी ? सब जगत् कुवि है - सभी स्वाभाविक बोलते हैं। क्या खूब तमाशा है । अजी, काव्यकी गिनती कलामें है। कलामें बनाव- सिंगार होता ही है। किसी प्राकृतिक पदार्थको कौशलविशेषस अधिक चमत्कृत और आकर्षक बना देनेका नाम ही तो कला है न ? तो फिर प्राकृतिक पदार्थ - शब्दार्थको विशेष ढँगसे प्रयुक्त करके उसमें चमत्कार पैदा कर देना ही तो काव्य हुआ न ? यदि यह बात स्वीकार है, तो फिर अपने आप नवमत- निराकरण हो गया । और यदि यह स्वीकार नहीं है, तो निवेदन यही है कि कलाका लक्षण तो आप कीजिए। देखें, आप कला किसे कहते हैं ? कलाका लक्षण करके यह भी बतलाना होगा कि काव्यकी गिनती कलामें है कि नहीं। यदि कलाका वही लक्षण है, जो हमने किया है और अगर काव्य भी कला है, तो यह कपोलकल्पित प्रलाप सहज ही उड़ जाता है। और कुछ इसके
सुरक्षित रूप से दवा के सक्रिय पदार्थकॉर्निया के माध्यम से प्रवेश करती है, जहां इसका जल निकास (अपघटन) होता है। "लेटानोप्रोस्ट" नमी के बहिर्वाह को बढ़ाने में मदद करता है, जिसके कारण इंट्राकुलर दबाव घट जाता है। प्रभाव 2 घंटे के बाद देखा जा सकता है, अधिकतम प्रभाव 9-12 घंटे में होगा। दवा का प्रभाव एक दिन के बारे में रहता है। खुले कोण मोतियाबिंद और बुलंद intraocular दबाव में (आई ड्रॉप) सौंपा "Latanoprost" है। उपयोग के निर्देश निम्न मतभेदों को इंगित करते हैंः आवेदन में प्रतिबंध भी हैं नेत्रगोलक में भड़काऊ प्रक्रिया और लेंस को नुकसान पहुंचाते हुए, पूरी तरह से जांच के बाद दवा को सावधानी के साथ प्रशासित किया जाता है। जन्मजात मोतियाबिंद और आंख के कुछ विकारों के साथ, दवा निर्धारित की जा सकती है, लेकिन केवल एक चिकित्सक की देखरेख में आवेदन के साथ। लोगों का उपयोग करते हुए सावधानी को ध्यान में रखा जाना चाहिएसंपर्क लेंस "लेटानोप्रोस्ट" में इसकी संरचना एक विशेष पदार्थ - बेंज़ॉकोनियम क्लोराइड है, जो लेंस की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से, यह पदार्थ लेंस की सतह पर जमा होगा। उपचार के समय चश्मे का उपयोग करना सबसे अच्छा है। यदि यह व्यवहार्य नहीं है, तो दवा के प्रसार से पहले, लेंस को हटा दिया जाना चाहिए, लेकिन प्रक्रिया के बाद केवल 15 मिनट बाद ही इसे वापस किया जाना चाहिए। बाकी दवा "लाटानोप्रोस्ट" (आई ड्रॉप) के उपयोग में काफी आसान है। गर्भावस्था के दौरान, महिला का शरीर कमजोर है औरसभी प्रकार के बीमारियों के लिए अधिक संवेदी। आँखों में शामिल नहीं रहें और समस्याएं न दें यदि आवश्यक हो, तो लैटानोप्रॉस्ट को इस अवधि के दौरान निर्धारित किया जा सकता है, लेकिन परीक्षा के बाद। साथ ही, समय पर स्वास्थ्य स्थिति में नकारात्मक विचलन को ध्यान देने के लिए नियमित रूप से एक विशेषज्ञ से मिलने के लिए आवश्यक है। हालांकि दवा अच्छी तरह से सहन है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान, शरीर की प्रतिक्रिया अप्रत्याशित हो सकती है। यह दवा "लेटानोप्रोस्ट" है एनालॉग्स को भी इस अवधि के दौरान सावधानी के साथ नियुक्त किया जाता है। जब स्तनपान का उपयोग करना बेहतर नहीं हैदवाइयां, चूंकि सभी रसायनों को स्तन के दूध में उत्सर्जित किया जाता है यदि कोई दवा महत्वपूर्ण है, तो बच्चे को कृत्रिम भोजन में स्थानांतरित करने के लिए सबसे अच्छा होना चाहिए। दवा के सही आवेदन के साथ, अप्रिय परिणाम शायद ही कभी उठते हैं, और उनकी उपस्थिति को डॉक्टर को सूचित किया जाना चाहिए। तैयारी "लेटानोप्रॉस्ट" के उपयोग के लिए निर्देश निम्नानुसार संभावित साइड इफेक्ट्स का वर्णन करता हैः ये आंखों से ही साइड इफेक्ट हैं,लेकिन पूरे शरीर में परिवर्तन हो सकते हैं। कभी-कभी त्वचा पर दाने लगते हैं, और पलक क्षेत्र में त्वचा स्पष्ट रूप से अंधेरा हो सकती है। चक्कर आना अक्सर उल्लेख किया जाता है, खासकर वृद्ध लोगों में मांसपेशियों में दर्द और तनाव हो सकता है, उदाहरण के लिए छाती क्षेत्र में सांस की तकलीफ और ब्रोन्कियल अस्थमा के तीव्र हमलों को भी नोट किया गया है। "लेटानोप्रोस्ट" की सुविधा एक बदलाव हैआँखों के परितारिका का रंग इस दवा के लंबे समय तक उपयोग के साथ, भूरे वर्णक का संचय होता है। ऐसे परिवर्तन अपरिवर्तनीय हो सकते हैं, लेकिन यह सभी जीव की व्यक्तिगत विशेषताओं पर निर्भर करता है। उपचार से पहले, कोई भी भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि आंखों का रंग कैसे बदल जाएगा। विशेष रूप से सावधानी बरतने के लिए आवश्यक है, अगर दवा डालना केवल एक आंख में ही हो। दवा एक सुविधाजनक में बेची जाती हैपैकेजिंग ड्रॉपर। यहां तक कि रोगी भी आसानी से दवा को सही मात्रा में आंखों में लगा सकते हैं। दवा को सीधे धूप से दूर रखें, लेकिन रेफ्रिजरेटर में नहीं। दवा जब्त करने में भी असंभव है, क्योंकि यह अपनी संपत्ति खो देगा एक माह के लिए +2 से +8 डिग्री के तापमान पर संग्रहीत पैकेज खोलें, फिर उत्पाद का उपयोग अब संभव नहीं है। तैयारी "लाटानोप्रोस्ट" निर्देश परएनालॉग का उपयोग संकेत नहीं करता है लेकिन फिर भी वे बड़ी संख्या में हैं मुख्य पदार्थ को सक्रिय करने वाला सक्रिय पदार्थ समान होगा। केवल अतिरिक्त घटकों को प्रतिष्ठित किया जाता है इसके अलावा, इसी तरह की दवाएं मूल्य में भिन्न हो सकती हैं, जिससे रोगियों को अधिक स्वीकार्य विकल्प चुनने की अनुमति मिलती है। इसी तरह के रोगियों की समीक्षादवाओं, ज्यादातर सकारात्मक, क्योंकि समान सक्रिय पदार्थ की वजह से, दवाओं का औषधीय प्रभाव एक ही है। जो लोग इस तरह फिट नहीं करते थे या एनालॉग अक्सर हृदय की समस्या थी या उनके मामले निर्देशों में निर्दिष्ट अन्य मतभेद के अधीन थे। दवा "लैटानोप्रोस्ट" एनालॉग के लिए एनालॉग निम्नानुसार हैंः दवाइयों में, दवा "लेटानोप्रोस्ट" का उपयोग करता हैलोकप्रियता। यह विश्व भर में एक प्रभावी उपाय माना जाता है, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा संकलित आवश्यक दवाइयों की सूची में है। इसकी औषधीय क्षमता अस्थिर आंतरायिक दबाव से मुकाबला करने की अनुमति देती है, जिससे मोतियाबिंद के संभावित विकास से आंखों की सुरक्षा होती है। दवा ठीक से स्थानांतरित होती है, यहां तक कि बुजुर्गों में भी, दुष्प्रभाव बहुत असुविधा नहीं लाते हैं। साइड इफेक्ट न केवल "लैटानोप्रोस्ट" हैं, एनालॉग भी हैं आंख के ड्रॉप के दुष्प्रभाव उपयोग के पहले वर्ष में प्रकट होते हैं, बाद में उनकी तीव्रता में कमी आती है।
सुरक्षित रूप से दवा के सक्रिय पदार्थकॉर्निया के माध्यम से प्रवेश करती है, जहां इसका जल निकास होता है। "लेटानोप्रोस्ट" नमी के बहिर्वाह को बढ़ाने में मदद करता है, जिसके कारण इंट्राकुलर दबाव घट जाता है। प्रभाव दो घंटाटे के बाद देखा जा सकता है, अधिकतम प्रभाव नौ-बारह घंटाटे में होगा। दवा का प्रभाव एक दिन के बारे में रहता है। खुले कोण मोतियाबिंद और बुलंद intraocular दबाव में सौंपा "Latanoprost" है। उपयोग के निर्देश निम्न मतभेदों को इंगित करते हैंः आवेदन में प्रतिबंध भी हैं नेत्रगोलक में भड़काऊ प्रक्रिया और लेंस को नुकसान पहुंचाते हुए, पूरी तरह से जांच के बाद दवा को सावधानी के साथ प्रशासित किया जाता है। जन्मजात मोतियाबिंद और आंख के कुछ विकारों के साथ, दवा निर्धारित की जा सकती है, लेकिन केवल एक चिकित्सक की देखरेख में आवेदन के साथ। लोगों का उपयोग करते हुए सावधानी को ध्यान में रखा जाना चाहिएसंपर्क लेंस "लेटानोप्रोस्ट" में इसकी संरचना एक विशेष पदार्थ - बेंज़ॉकोनियम क्लोराइड है, जो लेंस की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से, यह पदार्थ लेंस की सतह पर जमा होगा। उपचार के समय चश्मे का उपयोग करना सबसे अच्छा है। यदि यह व्यवहार्य नहीं है, तो दवा के प्रसार से पहले, लेंस को हटा दिया जाना चाहिए, लेकिन प्रक्रिया के बाद केवल पंद्रह मिनट बाद ही इसे वापस किया जाना चाहिए। बाकी दवा "लाटानोप्रोस्ट" के उपयोग में काफी आसान है। गर्भावस्था के दौरान, महिला का शरीर कमजोर है औरसभी प्रकार के बीमारियों के लिए अधिक संवेदी। आँखों में शामिल नहीं रहें और समस्याएं न दें यदि आवश्यक हो, तो लैटानोप्रॉस्ट को इस अवधि के दौरान निर्धारित किया जा सकता है, लेकिन परीक्षा के बाद। साथ ही, समय पर स्वास्थ्य स्थिति में नकारात्मक विचलन को ध्यान देने के लिए नियमित रूप से एक विशेषज्ञ से मिलने के लिए आवश्यक है। हालांकि दवा अच्छी तरह से सहन है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान, शरीर की प्रतिक्रिया अप्रत्याशित हो सकती है। यह दवा "लेटानोप्रोस्ट" है एनालॉग्स को भी इस अवधि के दौरान सावधानी के साथ नियुक्त किया जाता है। जब स्तनपान का उपयोग करना बेहतर नहीं हैदवाइयां, चूंकि सभी रसायनों को स्तन के दूध में उत्सर्जित किया जाता है यदि कोई दवा महत्वपूर्ण है, तो बच्चे को कृत्रिम भोजन में स्थानांतरित करने के लिए सबसे अच्छा होना चाहिए। दवा के सही आवेदन के साथ, अप्रिय परिणाम शायद ही कभी उठते हैं, और उनकी उपस्थिति को डॉक्टर को सूचित किया जाना चाहिए। तैयारी "लेटानोप्रॉस्ट" के उपयोग के लिए निर्देश निम्नानुसार संभावित साइड इफेक्ट्स का वर्णन करता हैः ये आंखों से ही साइड इफेक्ट हैं,लेकिन पूरे शरीर में परिवर्तन हो सकते हैं। कभी-कभी त्वचा पर दाने लगते हैं, और पलक क्षेत्र में त्वचा स्पष्ट रूप से अंधेरा हो सकती है। चक्कर आना अक्सर उल्लेख किया जाता है, खासकर वृद्ध लोगों में मांसपेशियों में दर्द और तनाव हो सकता है, उदाहरण के लिए छाती क्षेत्र में सांस की तकलीफ और ब्रोन्कियल अस्थमा के तीव्र हमलों को भी नोट किया गया है। "लेटानोप्रोस्ट" की सुविधा एक बदलाव हैआँखों के परितारिका का रंग इस दवा के लंबे समय तक उपयोग के साथ, भूरे वर्णक का संचय होता है। ऐसे परिवर्तन अपरिवर्तनीय हो सकते हैं, लेकिन यह सभी जीव की व्यक्तिगत विशेषताओं पर निर्भर करता है। उपचार से पहले, कोई भी भविष्यवाणी नहीं कर सकता कि आंखों का रंग कैसे बदल जाएगा। विशेष रूप से सावधानी बरतने के लिए आवश्यक है, अगर दवा डालना केवल एक आंख में ही हो। दवा एक सुविधाजनक में बेची जाती हैपैकेजिंग ड्रॉपर। यहां तक कि रोगी भी आसानी से दवा को सही मात्रा में आंखों में लगा सकते हैं। दवा को सीधे धूप से दूर रखें, लेकिन रेफ्रिजरेटर में नहीं। दवा जब्त करने में भी असंभव है, क्योंकि यह अपनी संपत्ति खो देगा एक माह के लिए +दो से +आठ डिग्री के तापमान पर संग्रहीत पैकेज खोलें, फिर उत्पाद का उपयोग अब संभव नहीं है। तैयारी "लाटानोप्रोस्ट" निर्देश परएनालॉग का उपयोग संकेत नहीं करता है लेकिन फिर भी वे बड़ी संख्या में हैं मुख्य पदार्थ को सक्रिय करने वाला सक्रिय पदार्थ समान होगा। केवल अतिरिक्त घटकों को प्रतिष्ठित किया जाता है इसके अलावा, इसी तरह की दवाएं मूल्य में भिन्न हो सकती हैं, जिससे रोगियों को अधिक स्वीकार्य विकल्प चुनने की अनुमति मिलती है। इसी तरह के रोगियों की समीक्षादवाओं, ज्यादातर सकारात्मक, क्योंकि समान सक्रिय पदार्थ की वजह से, दवाओं का औषधीय प्रभाव एक ही है। जो लोग इस तरह फिट नहीं करते थे या एनालॉग अक्सर हृदय की समस्या थी या उनके मामले निर्देशों में निर्दिष्ट अन्य मतभेद के अधीन थे। दवा "लैटानोप्रोस्ट" एनालॉग के लिए एनालॉग निम्नानुसार हैंः दवाइयों में, दवा "लेटानोप्रोस्ट" का उपयोग करता हैलोकप्रियता। यह विश्व भर में एक प्रभावी उपाय माना जाता है, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा संकलित आवश्यक दवाइयों की सूची में है। इसकी औषधीय क्षमता अस्थिर आंतरायिक दबाव से मुकाबला करने की अनुमति देती है, जिससे मोतियाबिंद के संभावित विकास से आंखों की सुरक्षा होती है। दवा ठीक से स्थानांतरित होती है, यहां तक कि बुजुर्गों में भी, दुष्प्रभाव बहुत असुविधा नहीं लाते हैं। साइड इफेक्ट न केवल "लैटानोप्रोस्ट" हैं, एनालॉग भी हैं आंख के ड्रॉप के दुष्प्रभाव उपयोग के पहले वर्ष में प्रकट होते हैं, बाद में उनकी तीव्रता में कमी आती है।
उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रभारी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, सह प्रभारी चुनाव सरदार आरपी सिंह व सांसद लॉकेट चटर्जी अपने दो दिवसीय प्रवास में 10 कार्यक्रमो में भाग लेंगे। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि तीनो चुनाव प्रभारी व सह प्रभारी 16 सितंबर की प्रातः 10. 30 जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर पहुचेंगे। यंहा से लेकर दिलाराम चौक तक करीब 10 स्थानों पर कार्यकर्ताओं द्वारा उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। स्वागत कार्यक्रम के पश्चात सबसे पहले घंटाघर स्थित बाबा भीमराव अंबेडकर की मूर्ति पर जाकर माल्यापर्ण करेंगे। तत्पश्चात दीन दयाल उपाध्याय पार्क में दीन दयाल की मूर्ति पर माल्यार्पण का कार्यक्रम सुनिश्चित किया गया है। इसके बाद भाजपा चुनाव प्रभारी उत्तराखंड आन्दोलन में शहीद हुए शहीदों को श्रदा सुमन अर्पण करने के लिए शहीद स्मारक में जाएंगे। उक्त कार्यक्रमो के पश्चात प्रह्लाद जोशी अपराह्न 3 बजे भाजपा मुख्यालय में प्रदेश पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों व जिला प्रभारियों की बैठक लेंगे। सांय 4 बजे सिक्ख समाज के लोगों के साथ बैठक में भाग लेंगे। उसके पश्चात शांय 5 बजे से मीडिया व सोशल मीडिया के प्रदेश पदाधिकारियों के साथ बैठक निश्चित है। रात्रि 8 बजे प्रदेश टोली बैठक आयोजित होगी जिसमे मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष व महामंत्री उपस्थित रहेंगे और आगामी कार्यक्रमो के बारे में विचार विमर्श करेंगे। चौहान ने बताया कि दूसरे दिन 17 सितंबर को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित सेवा समर्पण दिवस के तहत स्वछता अभियान में भाग लेंगे। स्वछता कार्यक्रम गोविंदगढ़ के गोविंद गढ़ सेवा बस्ती में प्रातः 9 बजे रखा गया है। इसके पश्चात कोरनेशन हॉस्पिटल में फल वितरण के कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। इसके बाद कोर्नेसन हॉस्पिटल से भाजपा मुख्यालय में विधानसभाओं में नियुक्त चुनाव प्रभारियों की बैठक में शिरकत करेंगे। बैठक के पश्चात 11. 50 बजे भाजपा मुख्यालय पत्रकार वार्ता को संबोधित करेंगे। अपराह्न 1 बजे भाजपा मुख्यालय में प्रदेश कोर ग्रुप की बैठक में हिस्सा लेंगे। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रभारी केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, सह प्रभारी चुनाव सरदार आरपी सिंह व सांसद लॉकेट चटर्जी अपने दो दिवसीय प्रवास में दस कार्यक्रमो में भाग लेंगे। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि तीनो चुनाव प्रभारी व सह प्रभारी सोलह सितंबर की प्रातः दस. तीस जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर पहुचेंगे। यंहा से लेकर दिलाराम चौक तक करीब दस स्थानों पर कार्यकर्ताओं द्वारा उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। स्वागत कार्यक्रम के पश्चात सबसे पहले घंटाघर स्थित बाबा भीमराव अंबेडकर की मूर्ति पर जाकर माल्यापर्ण करेंगे। तत्पश्चात दीन दयाल उपाध्याय पार्क में दीन दयाल की मूर्ति पर माल्यार्पण का कार्यक्रम सुनिश्चित किया गया है। इसके बाद भाजपा चुनाव प्रभारी उत्तराखंड आन्दोलन में शहीद हुए शहीदों को श्रदा सुमन अर्पण करने के लिए शहीद स्मारक में जाएंगे। उक्त कार्यक्रमो के पश्चात प्रह्लाद जोशी अपराह्न तीन बजे भाजपा मुख्यालय में प्रदेश पदाधिकारियों, जिलाध्यक्षों व जिला प्रभारियों की बैठक लेंगे। सांय चार बजे सिक्ख समाज के लोगों के साथ बैठक में भाग लेंगे। उसके पश्चात शांय पाँच बजे से मीडिया व सोशल मीडिया के प्रदेश पदाधिकारियों के साथ बैठक निश्चित है। रात्रि आठ बजे प्रदेश टोली बैठक आयोजित होगी जिसमे मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष व महामंत्री उपस्थित रहेंगे और आगामी कार्यक्रमो के बारे में विचार विमर्श करेंगे। चौहान ने बताया कि दूसरे दिन सत्रह सितंबर को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित सेवा समर्पण दिवस के तहत स्वछता अभियान में भाग लेंगे। स्वछता कार्यक्रम गोविंदगढ़ के गोविंद गढ़ सेवा बस्ती में प्रातः नौ बजे रखा गया है। इसके पश्चात कोरनेशन हॉस्पिटल में फल वितरण के कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। इसके बाद कोर्नेसन हॉस्पिटल से भाजपा मुख्यालय में विधानसभाओं में नियुक्त चुनाव प्रभारियों की बैठक में शिरकत करेंगे। बैठक के पश्चात ग्यारह. पचास बजे भाजपा मुख्यालय पत्रकार वार्ता को संबोधित करेंगे। अपराह्न एक बजे भाजपा मुख्यालय में प्रदेश कोर ग्रुप की बैठक में हिस्सा लेंगे। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
संदीप शर्मा, विदिशा। जिले का सरकारी सिस्टम ऐसा है कि कलेक्टर के आदेश का भी पालन नहीं हो पा रहा है। मामला यह है कि आशा सुपरवाइजरों की शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने तीन दिनों के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। कलेक्टर के तीन दिनों के भीतर कार्रवाई के आश्वासन को 7 दिन बीत गए और मामला जस का तस है। जिले के लटेरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डॉ सुरेंद्र धाकड़ के खिलाफ आशा सुपरवाइजर ने लिखित में शिकायत की थी। शिकायत के बाद एक ज्ञापन कलेक्टर को भी सौंपा था। इस दौरान कलेक्टर ने तीन दिनों के भीतर मामले की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। कलेक्टर के आश्वासन को ही 7 दिन हो गए किंतु कार्रवाई अब-तक नहीं हुई है। आज फिर आशा सुपरवाइजरों ने कलेक्टर को स्मरण पत्र सौंपकर उनके दिए आश्वासन को याद दिलाया है। जानकारी के अनुसार मंगलवार को एक बार फिर आशा सुपरवाइजरों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के जरिए उन्होंने कलेक्टर द्वारा दिए गए आश्वासन पर अब तक अमल न होने की बात कही है, साथ ही स्मरण पत्र के जरिए बीएमओ पर कार्रवाई की मांग की। आशा सुपरवाइजरों का कहना है कि 14 तारीख को उन्होंने कलेक्टर को शिकायत की थी, जिसमें 3 दिन के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। उनके आश्वासन के 7 दिन बीतने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं उन्हें काम पर लौटने की धमकियां मिल रही हैं, साथ ही साथ यह भी कहा जा रहा है कि कहीं भी शिकायत कर लो हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा। बता दें कि आशा सुपरवाइजरों ने समय पर मानदेय नहीं देने सहित बीएसओ पर दुर्व्यवहार की शिकायत की थी। बताया जाता है कि बीएमओ का शुरू से ही विवादों से नाता रहा है। इसके पहले भी अस्पताल के कीमती मशीनों को जान बूझकर कबाड़ करने, कबाड़ होने के बाद बेचने के आरोप भी लग चुके है।
संदीप शर्मा, विदिशा। जिले का सरकारी सिस्टम ऐसा है कि कलेक्टर के आदेश का भी पालन नहीं हो पा रहा है। मामला यह है कि आशा सुपरवाइजरों की शिकायत पर तत्काल संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने तीन दिनों के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। कलेक्टर के तीन दिनों के भीतर कार्रवाई के आश्वासन को सात दिन बीत गए और मामला जस का तस है। जिले के लटेरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएमओ डॉ सुरेंद्र धाकड़ के खिलाफ आशा सुपरवाइजर ने लिखित में शिकायत की थी। शिकायत के बाद एक ज्ञापन कलेक्टर को भी सौंपा था। इस दौरान कलेक्टर ने तीन दिनों के भीतर मामले की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। कलेक्टर के आश्वासन को ही सात दिन हो गए किंतु कार्रवाई अब-तक नहीं हुई है। आज फिर आशा सुपरवाइजरों ने कलेक्टर को स्मरण पत्र सौंपकर उनके दिए आश्वासन को याद दिलाया है। जानकारी के अनुसार मंगलवार को एक बार फिर आशा सुपरवाइजरों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के जरिए उन्होंने कलेक्टर द्वारा दिए गए आश्वासन पर अब तक अमल न होने की बात कही है, साथ ही स्मरण पत्र के जरिए बीएमओ पर कार्रवाई की मांग की। आशा सुपरवाइजरों का कहना है कि चौदह तारीख को उन्होंने कलेक्टर को शिकायत की थी, जिसमें तीन दिन के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। उनके आश्वासन के सात दिन बीतने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं उन्हें काम पर लौटने की धमकियां मिल रही हैं, साथ ही साथ यह भी कहा जा रहा है कि कहीं भी शिकायत कर लो हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा। बता दें कि आशा सुपरवाइजरों ने समय पर मानदेय नहीं देने सहित बीएसओ पर दुर्व्यवहार की शिकायत की थी। बताया जाता है कि बीएमओ का शुरू से ही विवादों से नाता रहा है। इसके पहले भी अस्पताल के कीमती मशीनों को जान बूझकर कबाड़ करने, कबाड़ होने के बाद बेचने के आरोप भी लग चुके है।
देश के मध्य भागों पर बने डिप्रेशन के चलते मॉनसून व्यापक रूप में सक्रिय हुआ है। मध्य प्रदेश के दक्षिणी जिलों में पिछले दो दिनों से भारी बारिश हो रही है। बीते 24 घंटों के दौरान राज्य के मध्य भागों और दक्षिणी जिलों में मूसलाधार वर्षा दर्ज की गई है जिसके चलते कई स्थानों पर जल भराव और बाढ़ से सामान्य जन-जीवन प्रभावित हुआ है। कुछ स्थानों पर अथाह वर्षा रिकॉर्ड की गई है। बृहस्पतिवार सुबह 8:30 बजे से पिछले 24 घंटों में धार में 158 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसी तरह रायसेन में 154 मिमी, खंडवा में 135 मिमी, खरगौन में 108 मिमी, भोपाल में 98 मिमी, उज्जैन में 89 मिमी, मंडला में 86 मिमी, इंदौर में 78 मिमी, पंचमढ़ी में 65 मिमी, सागर में 55 मिमी, रतलाम में 40 मिमी और बेतुल में 34 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। मध्य प्रदेश के उत्तरी जिलों में फिलहाल कहीं हल्की तो कहीं मध्यम मॉनसूनी बौछारें दर्ज की गई हैं। उत्तरी जिलों में अभी भारी बारिश के आसार भी नहीं हैं। स्काइमेट के मौसम विशेषज्ञों के अनुसार डिप्रेशन आगे बढ़ते हुए कमजोर हो रहा है लेकिन यह अभी भी इतना प्रभावशाली है कि मध्य प्रदेश के दक्षिण और पश्चिमी भागों में बारिश देता रहेगा। यह सिस्टम पश्चिमी दिशा में जा रहा है। आज उम्मीद है कि यह कमजोर होकर निम्न दबाव का क्षेत्र बन जाएगा। पूर्वी मध्य प्रदेश के भागों में पहले से बारिश में कमी आई है अब और घट जाएगी। लेकिन भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, धार, मंदसौर सहित मध्य और दक्षिण-पश्चिमी भागों में मध्यम से भारी बारिश कम से कम अगले 18 से 24 घंटों तक रुक-रुक कर होती रहेगी। अनुमान है कि 10 अगस्त यानि शनिवार से समूचे मध्य प्रदेश में बारिश में भारी कमी आ जाएगी जिससे बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को राहत मिलेगी और राहत एवं बचाव कार्यों में आसानी होगी। 10 अगस्त को संभावना छिटपुट बारिश की है। उसके बाद 11 अगस्त से बारिश व्यापक रूप में घट जाएगी। देश भर के मौसम का पूर्वानुमान जानने के लिए देखें विडियोः हालांकि मध्य प्रदेश पर मॉनसून की मेहरबानी आगे भी बनी रहेगी। उम्मीद है कि 12 अगस्त से फिर से बारिश की गतिविधियां मध्य प्रदेश के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों से शुरू हो जाएंगी। उस दौरान रीवा, सतना, उमरिया, दमोह, जबलपुर, मंडला, सागर, होशंगाबाद और बेतुल जैसे शहरों में भी बारिश होगी। उस दौरान 14 अगस्त तक बारिश के आसार हैं। कृपया ध्यान देंः स्काइमेट की वेबसाइट पर उपलब्ध किसी भी सूचना या लेख को प्रसारित या प्रकाशित करने पर साभारः skymetweather.com अवश्य लिखें।
देश के मध्य भागों पर बने डिप्रेशन के चलते मॉनसून व्यापक रूप में सक्रिय हुआ है। मध्य प्रदेश के दक्षिणी जिलों में पिछले दो दिनों से भारी बारिश हो रही है। बीते चौबीस घंटाटों के दौरान राज्य के मध्य भागों और दक्षिणी जिलों में मूसलाधार वर्षा दर्ज की गई है जिसके चलते कई स्थानों पर जल भराव और बाढ़ से सामान्य जन-जीवन प्रभावित हुआ है। कुछ स्थानों पर अथाह वर्षा रिकॉर्ड की गई है। बृहस्पतिवार सुबह आठ:तीस बजे से पिछले चौबीस घंटाटों में धार में एक सौ अट्ठावन मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। इसी तरह रायसेन में एक सौ चौवन मिमी, खंडवा में एक सौ पैंतीस मिमी, खरगौन में एक सौ आठ मिमी, भोपाल में अट्ठानवे मिमी, उज्जैन में नवासी मिमी, मंडला में छियासी मिमी, इंदौर में अठहत्तर मिमी, पंचमढ़ी में पैंसठ मिमी, सागर में पचपन मिमी, रतलाम में चालीस मिमी और बेतुल में चौंतीस मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। मध्य प्रदेश के उत्तरी जिलों में फिलहाल कहीं हल्की तो कहीं मध्यम मॉनसूनी बौछारें दर्ज की गई हैं। उत्तरी जिलों में अभी भारी बारिश के आसार भी नहीं हैं। स्काइमेट के मौसम विशेषज्ञों के अनुसार डिप्रेशन आगे बढ़ते हुए कमजोर हो रहा है लेकिन यह अभी भी इतना प्रभावशाली है कि मध्य प्रदेश के दक्षिण और पश्चिमी भागों में बारिश देता रहेगा। यह सिस्टम पश्चिमी दिशा में जा रहा है। आज उम्मीद है कि यह कमजोर होकर निम्न दबाव का क्षेत्र बन जाएगा। पूर्वी मध्य प्रदेश के भागों में पहले से बारिश में कमी आई है अब और घट जाएगी। लेकिन भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, धार, मंदसौर सहित मध्य और दक्षिण-पश्चिमी भागों में मध्यम से भारी बारिश कम से कम अगले अट्ठारह से चौबीस घंटाटों तक रुक-रुक कर होती रहेगी। अनुमान है कि दस अगस्त यानि शनिवार से समूचे मध्य प्रदेश में बारिश में भारी कमी आ जाएगी जिससे बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को राहत मिलेगी और राहत एवं बचाव कार्यों में आसानी होगी। दस अगस्त को संभावना छिटपुट बारिश की है। उसके बाद ग्यारह अगस्त से बारिश व्यापक रूप में घट जाएगी। देश भर के मौसम का पूर्वानुमान जानने के लिए देखें विडियोः हालांकि मध्य प्रदेश पर मॉनसून की मेहरबानी आगे भी बनी रहेगी। उम्मीद है कि बारह अगस्त से फिर से बारिश की गतिविधियां मध्य प्रदेश के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों से शुरू हो जाएंगी। उस दौरान रीवा, सतना, उमरिया, दमोह, जबलपुर, मंडला, सागर, होशंगाबाद और बेतुल जैसे शहरों में भी बारिश होगी। उस दौरान चौदह अगस्त तक बारिश के आसार हैं। कृपया ध्यान देंः स्काइमेट की वेबसाइट पर उपलब्ध किसी भी सूचना या लेख को प्रसारित या प्रकाशित करने पर साभारः skymetweather.com अवश्य लिखें।
क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूट और डाटा इंटरप्रिटेशन की तैयारी को बेहतर करने के लिए गणित के रूल के अलावा ८-१२ कक्षा एनसीईआरटी की गणित की किताबों का अध्ययन कर सकते हैं। साथ ही डाटा इंटरप्रिटेशन के लिए कैल्कुलेशन टेक्नीक के अलावा टेबल्स, चार्ट, लाइन ग्राफ, बार ग्राफ आदि की प्रैक्टिस कर सकते हैं। आप जितना अधिक प्रैक्टिस करेंगे उतना ही लाभ मिलेगा। विभिन्न स्तर पर बैंकिंग कार्यप्रणाली को बेहतर करने के लिए सरकार योजनाओं और संवैधानिक ढांचे के अनुसार बैंकिंग स्कीम्स व पॉलिसी को बनाती हैं। इन पर नजर बनाए रखें। इसके अलावा इस क्षेत्र में हुई नियुक्तियों और सेवानिवृत्तियों की सूची बनाएं। इनको जानने का तरीका यह है कि न्यूज देखें और अखबार पढ़ें। इसका फायदा छात्रों को शुरू से ही दिखने लगेगा।
क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूट और डाटा इंटरप्रिटेशन की तैयारी को बेहतर करने के लिए गणित के रूल के अलावा आठ-बारह कक्षा एनसीईआरटी की गणित की किताबों का अध्ययन कर सकते हैं। साथ ही डाटा इंटरप्रिटेशन के लिए कैल्कुलेशन टेक्नीक के अलावा टेबल्स, चार्ट, लाइन ग्राफ, बार ग्राफ आदि की प्रैक्टिस कर सकते हैं। आप जितना अधिक प्रैक्टिस करेंगे उतना ही लाभ मिलेगा। विभिन्न स्तर पर बैंकिंग कार्यप्रणाली को बेहतर करने के लिए सरकार योजनाओं और संवैधानिक ढांचे के अनुसार बैंकिंग स्कीम्स व पॉलिसी को बनाती हैं। इन पर नजर बनाए रखें। इसके अलावा इस क्षेत्र में हुई नियुक्तियों और सेवानिवृत्तियों की सूची बनाएं। इनको जानने का तरीका यह है कि न्यूज देखें और अखबार पढ़ें। इसका फायदा छात्रों को शुरू से ही दिखने लगेगा।
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज शाहीन अफरीदी (Shaheen Afridi) अपने मुल्क के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी शाहिद अफरीदी (Shahid Afridi) के दामाद है। पारिवारिक रिश्ते के अलावा इन दोनों शख्सियतों के बीच क्रिकेट का भी रिश्ता है। शाहिद अफरीदी अक्सर मौजूदा समय की क्रिकेट और खिलाड़ियों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते रहते हैं। पाकिस्तान सुपर लीग के 7वें सीजन के फाइनल से पहले शाहिद अफरीदी ने अपने दामाद शाहीन अफरीदी की एक आदत के बारे में खुलासा किया है। शाहीन अफरीदी (Shaheen Afridi) PSL 2022 में अपने बल्ले से आतिशी पारी भी खेल चुके हैं। इस गेंदबाज ने पेशावर जालमी के खिलाफ खेले गए मुकाबले के आखिरी ओवर में 3 छक्के और 2 चौके जड़ दिए थे। शाहीन ने 20 गेंदों में दो चौके और चार छक्के की मदद से 39 रन बनाए और नाबाद रहे। इस मुकाबले में पेशावर जलमी ने 158 रन बनाए थे। जिसके जवाब में शाहीन अफरीदी (Shaheen Afridi) की बल्लेबाजी के बूते पर लाहौर कलंदर्स ने इस मैच को टाई किया। हालांकि लाहौर कलंदर्स इस मैच को हार गई थी लेकिन, शाहीन के इस बल्लेबाजी करने के तरीके से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शाहीन अफरीदी को बल्लेबाजी करना भी बेहद पसंद है। अब पाकिस्तान सुपर लीग की ट्रॉफी लाहौर कलंदर्स की झोली में डालने के लिए शाहीन अफरीदी (Shaheen Afridi) को गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी से भी कमाल का प्रदर्शन करने की जरूरत होगी। हालांकि उन्होंने इस साल PSL में बेहतरीन गेंदबाजी की है। इस साल खेले गए 12 मैचों में शाहीन ने लाहौर टीम की ओर से 17 विकेट हासिल किये हैं। लाहौर कलंदर्स बनाम मुल्तान सुल्तांस फाइनल मुकाबला आज यानी 27 फरवरी को रात 8 बजे शुरू हो जाएगा।
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज शाहीन अफरीदी अपने मुल्क के पूर्व दिग्गज खिलाड़ी शाहिद अफरीदी के दामाद है। पारिवारिक रिश्ते के अलावा इन दोनों शख्सियतों के बीच क्रिकेट का भी रिश्ता है। शाहिद अफरीदी अक्सर मौजूदा समय की क्रिकेट और खिलाड़ियों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते रहते हैं। पाकिस्तान सुपर लीग के सातवें सीजन के फाइनल से पहले शाहिद अफरीदी ने अपने दामाद शाहीन अफरीदी की एक आदत के बारे में खुलासा किया है। शाहीन अफरीदी PSL दो हज़ार बाईस में अपने बल्ले से आतिशी पारी भी खेल चुके हैं। इस गेंदबाज ने पेशावर जालमी के खिलाफ खेले गए मुकाबले के आखिरी ओवर में तीन छक्के और दो चौके जड़ दिए थे। शाहीन ने बीस गेंदों में दो चौके और चार छक्के की मदद से उनतालीस रन बनाए और नाबाद रहे। इस मुकाबले में पेशावर जलमी ने एक सौ अट्ठावन रन बनाए थे। जिसके जवाब में शाहीन अफरीदी की बल्लेबाजी के बूते पर लाहौर कलंदर्स ने इस मैच को टाई किया। हालांकि लाहौर कलंदर्स इस मैच को हार गई थी लेकिन, शाहीन के इस बल्लेबाजी करने के तरीके से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शाहीन अफरीदी को बल्लेबाजी करना भी बेहद पसंद है। अब पाकिस्तान सुपर लीग की ट्रॉफी लाहौर कलंदर्स की झोली में डालने के लिए शाहीन अफरीदी को गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी से भी कमाल का प्रदर्शन करने की जरूरत होगी। हालांकि उन्होंने इस साल PSL में बेहतरीन गेंदबाजी की है। इस साल खेले गए बारह मैचों में शाहीन ने लाहौर टीम की ओर से सत्रह विकेट हासिल किये हैं। लाहौर कलंदर्स बनाम मुल्तान सुल्तांस फाइनल मुकाबला आज यानी सत्ताईस फरवरी को रात आठ बजे शुरू हो जाएगा।
Doceaqualip 80 Injection डॉक्टर के लिखे गए पर्चे पर मिलने वाली दवा है। यह दवाई इंजेक्शन में मिलती है। इस दवा का उपयोग विशेष रूप से ब्रैस्ट कैंसर, नॉन स्मॉल सेल लंग कैंसर, सिर और गर्दन का कैंसर का इलाज करने के लिए किया जाता है। Doceaqualip 80 Injection का उपयोग कुछ अन्य स्थितियों के लिए भी किया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है। मरीज की उम्र, लिंग व स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी के आधार पर ही Doceaqualip 80 Injection की खुराक निर्धारित की जाती है। इसकी सही मात्रा इस पर भी निर्भर करती है, कि मरीज की मुख्य समस्या क्या है और उसे किस तरीके से दवा दी जा रही है। विस्तारपूर्वक जानने के लिए खुराक वाले भाग में पढ़ें। इनके अलावा Doceaqualip 80 Injection के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, जो नीचे दिए गए हैं। Doceaqualip 80 Injection के ये दुष्प्रभाव आमतौर पर अस्थायी होते हैं और इलाज के पूरा होने के साथ ही समाप्त हो जाते हैं। अगर ये दुष्प्रभाव और ज्यादा बिगड़ जाते हैं या ठीक नहीं होते तो अपने डॉक्टर से तुरंत बात करें। इसके अलावा Doceaqualip 80 Injection का प्रभाव प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए गंभीर है और जो महिलाएं बच्चों को दूध पिलाती हैं, उन पर इसका प्रभाव गंभीर है। आगे Doceaqualip 80 Injection से जुड़ी चेतावनियों के सेक्शन में बताया गया है कि Doceaqualip 80 Injection का लिवर, हार्ट, किडनी पर क्या असर होता है। अगर आपको पहले से लिवर रोग, न्यूट्रोपेनिया, संक्रमण जैसी कोई समस्या है, तो Doceaqualip 80 Injection देने की सलाह नहीं दी जाती क्योंकि इसके दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। इनके आलावा, अगर नीचे दिए गए सेक्शन में मौजूद समस्याओं में से कोई भी समस्या आपको है, तो आप Doceaqualip 80 Injection को न लें। Doceaqualip 80 Injection के साथ कुछ अन्य दवाएं लेने से शरीर में गंभीर प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। पूरी जानकारी के लिए नीचे दी गई जानकारी देखें। ऊपर दी गई सावधानियों के अलावा ये जानना भी आवश्यक है कि गाडी चलाते समय Doceaqualip 80 Injection लेना असुरक्षित है और इसकी लत नहीं लग सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Doceaqualip 80 Injection की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Doceaqualip 80 Injection की खुराक अलग हो सकती है। क्या Doceaqualip 80 Injection का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? प्रेेग्नेंट स्त्रियों को Doceaqualip लेने से कई परेशानियां होती हैं। इसलिए कभी भी इसका सेवन अपनी इच्छा से ना करें। इसको केवल और केवल डॉक्टर के बताएं जानें पर ही लें। क्या Doceaqualip 80 Injection का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? Doceaqualip के स्तनपान कराने वाली स्त्रियों पर घातक दुष्प्रभाव होते हैं। इस कारण डॉक्टर से पूछे बिना इसका सेवन न करें। Doceaqualip 80 Injection का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Doceaqualip किडनी के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित है। Doceaqualip 80 Injection का जिगर (लिवर) पर क्या असर होता है? Doceaqualip का बुरा प्रभाव आप आपने लीवर पर अनुभव कर सकते हैं, ऐसा होने पर दवा को तुरंत बंद कर दें और चिकित्सक से परामर्श के बाद ही दोबारा शुरू करें। क्या ह्रदय पर Doceaqualip 80 Injection का प्रभाव पड़ता है? Doceaqualip हृदय के लिए सुरक्षित है। क्या Doceaqualip 80 Injection आदत या लत बन सकती है? नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं है कि Doceaqualip 80 Injection को लेने से आपको इसकी लत पड़ जाएगी। कोई भी दवा डॉक्टर से पूछ कर ही लें, जिससे कोई हानि न हो। क्या Doceaqualip 80 Injection को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? नहींं, Doceaqualip 80 Injection लेने के बाद आपको नींद आने लगेगी और कोई काम ठीक से नहीं कर पाएंगे। क्या Doceaqualip 80 Injection को लेना सुरखित है? हां, डॉक्टरी सलाह के बाद। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Doceaqualip 80 Injection इस्तेमाल की जा सकती है? नहीं, Doceaqualip 80 Injection किसी भी तरह के दिमागी विकार का इलाज नहीं कर पाती है। क्या Doceaqualip 80 Injection को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? कुछ भोजन ऐसे होते हैं, जिनको Doceaqualip 80 Injection के साथ लेने से दवा अपना असर कुछ समय के बाद दिखाना शुरू करती है। जब Doceaqualip 80 Injection ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? Doceaqualip 80 Injection व शराब का सेवन आपके स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Docetaxel (docetaxel) US Food and Drug Administration (FDA) [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Taxotere (docetaxel) Therapeutic Goods Administration (TGA): Department of Health [Internet]. Governmet of Australia; Package leaflet information for the user; Oncotaxel (docetaxel)
Doceaqualip अस्सी Injection डॉक्टर के लिखे गए पर्चे पर मिलने वाली दवा है। यह दवाई इंजेक्शन में मिलती है। इस दवा का उपयोग विशेष रूप से ब्रैस्ट कैंसर, नॉन स्मॉल सेल लंग कैंसर, सिर और गर्दन का कैंसर का इलाज करने के लिए किया जाता है। Doceaqualip अस्सी Injection का उपयोग कुछ अन्य स्थितियों के लिए भी किया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है। मरीज की उम्र, लिंग व स्वास्थ्य संबंधी पिछली जानकारी के आधार पर ही Doceaqualip अस्सी Injection की खुराक निर्धारित की जाती है। इसकी सही मात्रा इस पर भी निर्भर करती है, कि मरीज की मुख्य समस्या क्या है और उसे किस तरीके से दवा दी जा रही है। विस्तारपूर्वक जानने के लिए खुराक वाले भाग में पढ़ें। इनके अलावा Doceaqualip अस्सी Injection के कुछ अन्य दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, जो नीचे दिए गए हैं। Doceaqualip अस्सी Injection के ये दुष्प्रभाव आमतौर पर अस्थायी होते हैं और इलाज के पूरा होने के साथ ही समाप्त हो जाते हैं। अगर ये दुष्प्रभाव और ज्यादा बिगड़ जाते हैं या ठीक नहीं होते तो अपने डॉक्टर से तुरंत बात करें। इसके अलावा Doceaqualip अस्सी Injection का प्रभाव प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए गंभीर है और जो महिलाएं बच्चों को दूध पिलाती हैं, उन पर इसका प्रभाव गंभीर है। आगे Doceaqualip अस्सी Injection से जुड़ी चेतावनियों के सेक्शन में बताया गया है कि Doceaqualip अस्सी Injection का लिवर, हार्ट, किडनी पर क्या असर होता है। अगर आपको पहले से लिवर रोग, न्यूट्रोपेनिया, संक्रमण जैसी कोई समस्या है, तो Doceaqualip अस्सी Injection देने की सलाह नहीं दी जाती क्योंकि इसके दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। इनके आलावा, अगर नीचे दिए गए सेक्शन में मौजूद समस्याओं में से कोई भी समस्या आपको है, तो आप Doceaqualip अस्सी Injection को न लें। Doceaqualip अस्सी Injection के साथ कुछ अन्य दवाएं लेने से शरीर में गंभीर प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। पूरी जानकारी के लिए नीचे दी गई जानकारी देखें। ऊपर दी गई सावधानियों के अलावा ये जानना भी आवश्यक है कि गाडी चलाते समय Doceaqualip अस्सी Injection लेना असुरक्षित है और इसकी लत नहीं लग सकती है। यह अधिकतर मामलों में दी जाने वाली Doceaqualip अस्सी Injection की खुराक है। कृपया याद रखें कि हर रोगी और उनका मामला अलग हो सकता है। इसलिए रोग, दवाई देने के तरीके, रोगी की आयु, रोगी का चिकित्सा इतिहास और अन्य कारकों के आधार पर Doceaqualip अस्सी Injection की खुराक अलग हो सकती है। क्या Doceaqualip अस्सी Injection का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है? प्रेेग्नेंट स्त्रियों को Doceaqualip लेने से कई परेशानियां होती हैं। इसलिए कभी भी इसका सेवन अपनी इच्छा से ना करें। इसको केवल और केवल डॉक्टर के बताएं जानें पर ही लें। क्या Doceaqualip अस्सी Injection का उपयोग स्तनपान करने वाली महिलाओं के लिए ठीक है? Doceaqualip के स्तनपान कराने वाली स्त्रियों पर घातक दुष्प्रभाव होते हैं। इस कारण डॉक्टर से पूछे बिना इसका सेवन न करें। Doceaqualip अस्सी Injection का प्रभाव गुर्दे पर क्या होता है? Doceaqualip किडनी के लिए पूर्ण रूप से सुरक्षित है। Doceaqualip अस्सी Injection का जिगर पर क्या असर होता है? Doceaqualip का बुरा प्रभाव आप आपने लीवर पर अनुभव कर सकते हैं, ऐसा होने पर दवा को तुरंत बंद कर दें और चिकित्सक से परामर्श के बाद ही दोबारा शुरू करें। क्या ह्रदय पर Doceaqualip अस्सी Injection का प्रभाव पड़ता है? Doceaqualip हृदय के लिए सुरक्षित है। क्या Doceaqualip अस्सी Injection आदत या लत बन सकती है? नहीं, इसका कोई प्रमाण नहीं है कि Doceaqualip अस्सी Injection को लेने से आपको इसकी लत पड़ जाएगी। कोई भी दवा डॉक्टर से पूछ कर ही लें, जिससे कोई हानि न हो। क्या Doceaqualip अस्सी Injection को लेते समय गाड़ी चलाना या कैसी भी बड़ी मशीन संचालित करना सुरक्षित है? नहींं, Doceaqualip अस्सी Injection लेने के बाद आपको नींद आने लगेगी और कोई काम ठीक से नहीं कर पाएंगे। क्या Doceaqualip अस्सी Injection को लेना सुरखित है? हां, डॉक्टरी सलाह के बाद। क्या मनोवैज्ञानिक विकार या मानसिक समस्याओं के इलाज में Doceaqualip अस्सी Injection इस्तेमाल की जा सकती है? नहीं, Doceaqualip अस्सी Injection किसी भी तरह के दिमागी विकार का इलाज नहीं कर पाती है। क्या Doceaqualip अस्सी Injection को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है? कुछ भोजन ऐसे होते हैं, जिनको Doceaqualip अस्सी Injection के साथ लेने से दवा अपना असर कुछ समय के बाद दिखाना शुरू करती है। जब Doceaqualip अस्सी Injection ले रहे हों, तब शराब पीने से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्या? Doceaqualip अस्सी Injection व शराब का सेवन आपके स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। US Food and Drug Administration [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Docetaxel US Food and Drug Administration [Internet]. Maryland. USA; Package leaflet information for the user; Taxotere Therapeutic Goods Administration : Department of Health [Internet]. Governmet of Australia; Package leaflet information for the user; Oncotaxel
नहीं है और ईश्वर कुछ नहीं है की वे अभ्रभेदी ध्वनियाँ भी गूजेंगी जो केवल अपने कर्कश कोलाहल में जीवन के बहुत से मधुर और श्रेयमंडित स्वरों को दबाने का प्रयत्न करेंगी । श्री० एम० एन० राम ने एक स्थान पर स्पष्टता और निर्भीकता से लिखा है कि यूरोप में भी जहाँ के मार्क्स रहने वाले थे, परिवर्तन ठीक उसी प्रकार से नहीं हुआ जैसी मार्क्स ने कल्पना की थी, फिर भारत के विषय में उनकी धारणा को समझना पागलपन होगा । विवश होकर उन्हें यहाँ तक लिखना पड़ाः - But it pains me that many are not realising the far reaching implications of Marxism. They don't take pains to understand and study Marxsim. but simply behave like parrots, reading a few books and repeating phrases learned by heart. And every body who does not repeat those phrases literally, is a counter-revolutionary. जैसा राय महोदय की बातों से झलकता है यदि मार्क्स सत्य के सम्बन्ध में अन्तिम बात कहने नहीं आये थे तब हमें उनकी बातों का करना चाहिये । यदि १६ वीं शताब्दी में एक मनीषी द्वारा सत्य की घोषणा हो सकती थी, तब उपनिषद काल में भी यही सम्भावना थी । और यदि इस चात पर हठ हो कि १६ वीं शताब्दी उपनिषद् काल से अधिक विकसित शताब्दी थी, तब विकास का पथ भी रुक नहीं गया है । प्रगतिवादी मूलतः अभी साहित्यसेवी नहीं है । उसे हमारे साहित्य के सौंदर्य की परख तो तब हो जब अपने साहित्य से उसे ममता हो । वह एक विदेशी राजनीतिक गुट्ट का भारतीय सदस्यमात्र है। यह गुट्ट अपने लक्ष्य की सिद्धि के लिए साहित्य को एक अस्त्र मात्र समझता है; अतः उससे अधिक आशा करना व्यर्थ है । जैसे वह भारतीय राजनीति के मंच को अधिकृत करने का प्रयत्न कर रहा है, उसी प्रकार यहाँ के साहित्य को भी अपने प्रचार का साधन बनाने के प्रयत्न में सभी उपायों का अवलंब ले रहा है। पर प्रारंभ से हो उसने जिस विध्वंस की वृत्ति को अपनाया है, वह उसी के लिए हानिकर सिद्ध होगी । निर्माण को छोड़कर जब कोई शक्ति केवल विरोध में दत्तचित्त होती है, तब उसकी सफलता सदैव संशयात्मक रहती है। इसमें तो कुछ कहना नहीं कि किसी वाद की सफलता उसके समर्थकों की शक्ति पर निर्भर करती है । राजनीति में इस समय भारत की श्रेष्ठतम चेतनाएँ (best intellect) । इस युग की साहित्यिक चेतनाएँ उज्ज्वल भारतीयों के निर्माण की ओर, राष्ट्रप्रेम की ओर, मानवता के विश्लेषण की रहस्यवाद की रही हैं। वर्तमान राजनीतिक परिधि से दूर होकर कुछ राजनीतिज्ञों ने अपने पृथक पथ निर्माण करने की असफलता देख भी ली है । इससे हम किसी को छोटा बड़ा कहना नहीं चाहते; पर जो आगे वह कोई ठोस सुझाव लेकर तो आवे । केवल किसी जीवित शक्ति की 'शव-परीक्षा' करने से तो काम नहीं चलता । यही बात साहित्य के लिए भी लागू होती है । एक ओर प्रगतिवाद के नाम पर हिन्दी में जो रहा है वह निश्चय ही रूखा, अरुचिकर निःशक्त है और दूसरी ओर हम तुलसी, प्रसाद, मैथिलीशरण और महादेवी का विरोध करना चाहते हैं - उनकी शक्ति को परखे बिना ! कैसे पश्चात्ताप की बात है कि लोक कल्याण की कामना का दम भरने वाला व्यक्ति इतने विकृत रूप में अपना हृदय उड़ेल रहा है ? कितनी पीड़ा की बात है कि जर्जर रूढ़ियों को छिन्न-भिन्न करके मानवता की भावना को जन-मन में भरने वाला उत्साही इतनी संकुचित दृष्टिवाला हो गया है ? कितने संकोच की बात है कि राजनीति और समाजनीति के ऐसे स्वस्थ दृष्टिकोण को स्पष्ट करने का भार ऐसे व्यक्तियों के हाथ में दे दिया गया है जो अपनी बात तक समझाना नहीं जानते ? और कितनी हँसी की बात है कि साहित्य में यों की गिनती गिनाने की धुन में रहस्यवाद के बड़े-से-बड़े कवि तिरस्कार करता हुआ प्रगतिवाद का समर्थक अपने यहाँ के दुधमुँहें बच्चों तक की सामान्य से सामान्य रचनाओं की प्रतिशयोक्तिपूर्ण प्रशंसा करने से नहीं हिचकता ? प्रगतिवाद के भीतर एक सत्य है, एक शक्ति है । पर उस सत्य की अभिव्यक्ति उधकारी श्रलोचक, और उस शक्ति की अभिव्यक्ति प्रभावशाली लेखक उत्पन्न करके ही हो सकती है । उसकालोचक अपने मुक्त पलो में इन बातों को कभी-कभी सोचता है, और विवश होकर कभी हँसी के छींटों से और कभी खीझ की नोंक से सचेत भी कर ही देता है :"कभी-कभी स्त्रियों को स्वाधीन करने के उत्साह में वह अपने साथ ही कर बैठते हैं। कहते हैं - 'जाँघों में पौरुष भरला ।' यह गुण उन्हें लिए ही सुरक्षित रखना चाहिए । " - डा० रामविलास । "यदि कोई प्रगतिशीलता के नाम पर हमारे पुराने कलाकारोंवाल्मीकि, अश्वघोष, कालिदास, भवभूति, बाण, सरहपा, जायसी, सूर, तुलसी से लेकर प्रेमचन्द और प्रसाद तक - से हाथ धो लेना अपना कर्त्तव्य समझता है तो यह प्रगतिशीलता नहीं है । प्रगतिशीलता के नाम पर उनको अपमा ति और स्थानच्युत करने का प्रयत्न एक पागलपन, एक लड़कपन के सिवा और कुछ नहीं है । " - श्री राहुल सांकृत्यायन यह सैद्धांतिक मतभेद की बात हुई । चिंतकों में मतभेद बहुत स्वाभाविक है। जीवन के विकास के लिए यह स्वस्थ लक्षण माना जायगा कि वह किसी रूढ़ि से बद्ध न हो जाय। विचारकों को यह स्वतंत्रता सदैव मिलनी चाहिए कि वे स्वतंत्र रूप से चिंतन करके अपनी मौलिक प्रतिभा का प्रमाण देते हुए जगत का कल्याण करते रहें । दर्शन के क्षेत्र में हमारे यहाँ न्याय ( गौतम ) वैशेषिक (कणाद) सांख्य (कपिल ) योग (पतंजलि ) पूर्व मीमांसा (जैमिनी) और उत्तर मीमांसा या वेदांत (व्यास) प्रसिद्ध हैं; पर ये एक दूसरे के विरोधी नहीं समझे जाते । षट् दर्शन की ये चिंतन-प्रणालियाँ अपने-अपने ढंग से आत्मा, ब्रह्म, सृष्टि, देश ( Space ) और काल ( Time ) आदि की व्याख्या प्रस्तुत करती हैं । संसार के सभी दर्शनों के समान साम्यवाद का भी एक दर्शन है और सभी विचार पद्धतियों के समान उसका भी अपना मूल्य है । इन दर्शनों के कबीर की भावना निर्गुण ब्रह्म के प्रति है; पर जब यह भावना प्रेम का रूप धारण करती है, तो ब्रह्म का भी एक स्वरूप हो जाता है और आत्मा को उससे कोई संबंध स्थापित करके चलना पड़ता है। कबीर ने यद्यपि ईश्वर को कहीं मा, कहीं पिता और कहीं मित्र कहकर पुकारा है; पर अधिकतर उन्होंने उसे प्रेमी ही माना है। उनकी इस प्रकार की रचनाओं में आत्मा सभी कहीं नारी और परमात्मा पुरुष के रूप में है । कबीर का विश्वास था कि भगवान से मिलन ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य है और जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक व्यक्ति की आत्मा बहुत व्याकुल रहती है। अपने मन की कामना प्रकट करते हुए इसी से एक स्थान पर वे कहते हैंवे दिन कब आयेंगे जा कारन हम देह धरी है, मिलिबो अंग लगाइ । यह अरदास दास की सुनिए, तन की तपन बुझाइ । कहै 'कबीर' मिलें जे साई, मिलि करि मंगल गाइ । कबीर ने शरीर और संसार को कोई महत्त्व नहीं दिया; अतः यह स्पष्ट है कि उन्होंने जो कुछ कहा है, वह आत्मा को लक्ष्य करके ही । ऐसी दशा में पुरुष होकर यदि वे अपने को परमपुरुष की प्रियतमा या पत्नी बतलाते हैं, तो यह बात स्वाभाविक नहीं लगनी चाहिए । आत्मा का कोई स्वरूप नहीं होता । साधक की भावना के अनुकूल उसे स्त्री या पुरुष कुछ भी माना जा सकता है । सूफी लोग ईश्वर को स्त्री मानकर अपने को पुरुष मानते ही हैं। जायसी इसके उदाहरण हैं । लेकिन संतों की धारणा इसके विल्कुल विप रीत है । वे ईश्वर को पुरुषत्मा को स्त्री के रूप में देखते हैं । कबीर के भाव-जगत के संबंध में दूसरी स्पष्ट करने योग्य बात यह है कि यद्यपि उनका प्रेम तो आध्यात्मिक ही है; पर उसे प्रकट किया है उन्होंने लौकिक संबंधों के द्वारा । यदि वे ऐसा न करते तो उनके पाठकों की समझ में उनकी बात ही न श्राती। उनके भाव-लोक से संबधित तोसरी बात यह है कि बहुत सी बातें स्पष्ट न कहकर उन्होंने संकेत से कही हैं । आध्यात्मिक अनुभूति को ज्यों का त्यों व्यक्त करना बहुत कठिन काम है; इसी से काव्य में बहुत से प्रतीकों और संकेतों का सहारा कवि को लेना पड़ता है। इससे उनकी बात कहीं-कहीं दुरूह भी हो गई है । इसी से मिलती-जुलती कला-संबंधी एक चौथी बात है और वह यह कि उन्होंने अपनी भावना को व्यक्त करते समय हठयोग के बहुत से पारिभाषिक शब्दों का प्रयोग किया है। जो व्यक्ति हठयोग में प्रयुक्त होने वाले ऐसे शब्दों जैसे सुन्न महल, हद, सुरति-निरति, सबद, हंस, मानसरोबर आदि का अर्थ नहीं जानता, वह कबीर की भावना को पूरी तरह समझ ही नहीं पायेगा। कबीर के इस प्रसिद्ध पद को ही लीजिए जो उनकी भावना को सामान्यरूप से व्यक्त करता है - तो को पीव मिलेंगे, घूंघट के पट खोल रे ! सुन्न महल में दियना बार ले, असा सों मत डोल रे ! जौग जुगत सो रंग महल में, पिय पायो अनमोल रे ! कहै कबीर आनंद भयो है, बाजत अनहद ढोल रे ! परन्तु बहुत से स्थानो पर भावना अत्यंत सरल और स्पष्ट होकर भी आई है । उससे पता चलता है कि कबीर को प्रेम भाव का बहुत अच्छा ज्ञान था और उसकी अनुभूति वे अत्यंत तीव्रता से करते थे। एक स्थान पर वे प्रियदर्शन की प्यास से बावले से घूम रहे हैं। एक दूसरे स्थान पर उन्होंने बतलाया है कि प्रेमियों का संसार बहुत सीमित होता है और उसका सुख एकांत में ही लिया जा सकता है । एक तीसरे स्थान पर उन्होंने एक मार्मिक स्वप्न की चर्चा की है और अत्यंत विदग्ध वाणी में मन के आकर्षण को व्यक्त करके दिखलाया है - बिरह कमंडल कर लिए, वैरागी दो नैन, माँगें दरस मधूकरी, छके रहें दिन रैन । नैनातू, ज्यौं हौं नयन झपेडं, ना हौं देखौं और कौं, ना तोहि देखन देउं । सपने में साई मिले, सोते लिया जगाइ, आँखिन खोलूं डरपता, मत सपनाह जाइ । सांसारिक प्रेम की प्रथा तो यह है कि पहले हम किसी को देखते हैं; देखते ही आकर्षण होता है, परिचय बढ़ता है और एक दिन मिलन या विरह में वह प्रेम समाप्त हो जाता है । पर संतों के आध्यात्मिक प्रेम में दर्शन की बात प्रारंभ में नहीं उठती । उनका ऐसा विश्वास है कि आत्मा का वास्तविक निवास स्थान किसी ऐसे लोक में है जहाँ सूर्य-चंद्र प्रकाश नहीं करते, जहाँ पवन पहुँच नहीं पाता । उस लोक में उनका प्रेमी रहता है । उससे बिछुड़कर त्यहाँ गई है; पर लौटकर उसे वहीं जाना है। अतः प्रारंभ होता है इस चेतना से कि श्रात्मा प्रियतम सेवियुक्त है । इस चेतना को जगाने वाला कोई सतगुरु होता है । यही कारण है कि संत साहित्य में गुरु की बड़ी भारी महिमा बतलाई गई है। वियोग का ध्यान ही वियोग की व्यथा जग पड़ती है। मिलन प्रायः अंत में होता है। इसका नाम मृत्यु है । कबीर मृत्यु की भयंकरता स्वीकार नहीं करते । वे उसे दूती के रूप में देखते हैं जो आत्मा को परमात्मा से मिलाती है । मिलन से पूर्व जैसे लौकिक प्रेम में कई अवस्थाएँ होती हैं, वैसे ही आध्यात्मिक विवाह और सीढ़ियाँ चढ़कर रंग-कक्ष में पहुँचने को चर्चा भी कबीर ने अपने पदों में की है। एक स्थिति यह है -- सतगुरु सोइ दया कर दीन्हा, ताते अन चिन्हार मैं चीन्हा । चंद न सूर, दिवस नहिं रजनी, तहाँ सुरत लौ लाई । बिना मृत रस भोजन, बिन जल तृषा बुझाई । जहाँ हरख तहँ पूरन सुख है, यह सुख कासौं कहना । कह 'कबीर' बलि- बलि सतगुरु की, धन्य सिष्य का लहना, दूसरी यह - दुलहिन गावहु मंगलचार । हम घर आए हो राजा राम भरतार । तन रत करि मैं मन रत करि हौं, पंचतत्त्व बराती । रामदेव मोरे पांहुने आए, मैं जोबन में माती । सरीर सरोवर वेदी करि हौं, ब्रह्मा वेद उचार । रामदेव संग भाँवरि लैहूँ, धनि धनि भाग हमार ।
नहीं है और ईश्वर कुछ नहीं है की वे अभ्रभेदी ध्वनियाँ भी गूजेंगी जो केवल अपने कर्कश कोलाहल में जीवन के बहुत से मधुर और श्रेयमंडित स्वरों को दबाने का प्रयत्न करेंगी । श्रीशून्य एमशून्य एनशून्य राम ने एक स्थान पर स्पष्टता और निर्भीकता से लिखा है कि यूरोप में भी जहाँ के मार्क्स रहने वाले थे, परिवर्तन ठीक उसी प्रकार से नहीं हुआ जैसी मार्क्स ने कल्पना की थी, फिर भारत के विषय में उनकी धारणा को समझना पागलपन होगा । विवश होकर उन्हें यहाँ तक लिखना पड़ाः - But it pains me that many are not realising the far reaching implications of Marxism. They don't take pains to understand and study Marxsim. but simply behave like parrots, reading a few books and repeating phrases learned by heart. And every body who does not repeat those phrases literally, is a counter-revolutionary. जैसा राय महोदय की बातों से झलकता है यदि मार्क्स सत्य के सम्बन्ध में अन्तिम बात कहने नहीं आये थे तब हमें उनकी बातों का करना चाहिये । यदि सोलह वीं शताब्दी में एक मनीषी द्वारा सत्य की घोषणा हो सकती थी, तब उपनिषद काल में भी यही सम्भावना थी । और यदि इस चात पर हठ हो कि सोलह वीं शताब्दी उपनिषद् काल से अधिक विकसित शताब्दी थी, तब विकास का पथ भी रुक नहीं गया है । प्रगतिवादी मूलतः अभी साहित्यसेवी नहीं है । उसे हमारे साहित्य के सौंदर्य की परख तो तब हो जब अपने साहित्य से उसे ममता हो । वह एक विदेशी राजनीतिक गुट्ट का भारतीय सदस्यमात्र है। यह गुट्ट अपने लक्ष्य की सिद्धि के लिए साहित्य को एक अस्त्र मात्र समझता है; अतः उससे अधिक आशा करना व्यर्थ है । जैसे वह भारतीय राजनीति के मंच को अधिकृत करने का प्रयत्न कर रहा है, उसी प्रकार यहाँ के साहित्य को भी अपने प्रचार का साधन बनाने के प्रयत्न में सभी उपायों का अवलंब ले रहा है। पर प्रारंभ से हो उसने जिस विध्वंस की वृत्ति को अपनाया है, वह उसी के लिए हानिकर सिद्ध होगी । निर्माण को छोड़कर जब कोई शक्ति केवल विरोध में दत्तचित्त होती है, तब उसकी सफलता सदैव संशयात्मक रहती है। इसमें तो कुछ कहना नहीं कि किसी वाद की सफलता उसके समर्थकों की शक्ति पर निर्भर करती है । राजनीति में इस समय भारत की श्रेष्ठतम चेतनाएँ । इस युग की साहित्यिक चेतनाएँ उज्ज्वल भारतीयों के निर्माण की ओर, राष्ट्रप्रेम की ओर, मानवता के विश्लेषण की रहस्यवाद की रही हैं। वर्तमान राजनीतिक परिधि से दूर होकर कुछ राजनीतिज्ञों ने अपने पृथक पथ निर्माण करने की असफलता देख भी ली है । इससे हम किसी को छोटा बड़ा कहना नहीं चाहते; पर जो आगे वह कोई ठोस सुझाव लेकर तो आवे । केवल किसी जीवित शक्ति की 'शव-परीक्षा' करने से तो काम नहीं चलता । यही बात साहित्य के लिए भी लागू होती है । एक ओर प्रगतिवाद के नाम पर हिन्दी में जो रहा है वह निश्चय ही रूखा, अरुचिकर निःशक्त है और दूसरी ओर हम तुलसी, प्रसाद, मैथिलीशरण और महादेवी का विरोध करना चाहते हैं - उनकी शक्ति को परखे बिना ! कैसे पश्चात्ताप की बात है कि लोक कल्याण की कामना का दम भरने वाला व्यक्ति इतने विकृत रूप में अपना हृदय उड़ेल रहा है ? कितनी पीड़ा की बात है कि जर्जर रूढ़ियों को छिन्न-भिन्न करके मानवता की भावना को जन-मन में भरने वाला उत्साही इतनी संकुचित दृष्टिवाला हो गया है ? कितने संकोच की बात है कि राजनीति और समाजनीति के ऐसे स्वस्थ दृष्टिकोण को स्पष्ट करने का भार ऐसे व्यक्तियों के हाथ में दे दिया गया है जो अपनी बात तक समझाना नहीं जानते ? और कितनी हँसी की बात है कि साहित्य में यों की गिनती गिनाने की धुन में रहस्यवाद के बड़े-से-बड़े कवि तिरस्कार करता हुआ प्रगतिवाद का समर्थक अपने यहाँ के दुधमुँहें बच्चों तक की सामान्य से सामान्य रचनाओं की प्रतिशयोक्तिपूर्ण प्रशंसा करने से नहीं हिचकता ? प्रगतिवाद के भीतर एक सत्य है, एक शक्ति है । पर उस सत्य की अभिव्यक्ति उधकारी श्रलोचक, और उस शक्ति की अभिव्यक्ति प्रभावशाली लेखक उत्पन्न करके ही हो सकती है । उसकालोचक अपने मुक्त पलो में इन बातों को कभी-कभी सोचता है, और विवश होकर कभी हँसी के छींटों से और कभी खीझ की नोंक से सचेत भी कर ही देता है :"कभी-कभी स्त्रियों को स्वाधीन करने के उत्साह में वह अपने साथ ही कर बैठते हैं। कहते हैं - 'जाँघों में पौरुष भरला ।' यह गुण उन्हें लिए ही सुरक्षित रखना चाहिए । " - डाशून्य रामविलास । "यदि कोई प्रगतिशीलता के नाम पर हमारे पुराने कलाकारोंवाल्मीकि, अश्वघोष, कालिदास, भवभूति, बाण, सरहपा, जायसी, सूर, तुलसी से लेकर प्रेमचन्द और प्रसाद तक - से हाथ धो लेना अपना कर्त्तव्य समझता है तो यह प्रगतिशीलता नहीं है । प्रगतिशीलता के नाम पर उनको अपमा ति और स्थानच्युत करने का प्रयत्न एक पागलपन, एक लड़कपन के सिवा और कुछ नहीं है । " - श्री राहुल सांकृत्यायन यह सैद्धांतिक मतभेद की बात हुई । चिंतकों में मतभेद बहुत स्वाभाविक है। जीवन के विकास के लिए यह स्वस्थ लक्षण माना जायगा कि वह किसी रूढ़ि से बद्ध न हो जाय। विचारकों को यह स्वतंत्रता सदैव मिलनी चाहिए कि वे स्वतंत्र रूप से चिंतन करके अपनी मौलिक प्रतिभा का प्रमाण देते हुए जगत का कल्याण करते रहें । दर्शन के क्षेत्र में हमारे यहाँ न्याय वैशेषिक सांख्य योग पूर्व मीमांसा और उत्तर मीमांसा या वेदांत प्रसिद्ध हैं; पर ये एक दूसरे के विरोधी नहीं समझे जाते । षट् दर्शन की ये चिंतन-प्रणालियाँ अपने-अपने ढंग से आत्मा, ब्रह्म, सृष्टि, देश और काल आदि की व्याख्या प्रस्तुत करती हैं । संसार के सभी दर्शनों के समान साम्यवाद का भी एक दर्शन है और सभी विचार पद्धतियों के समान उसका भी अपना मूल्य है । इन दर्शनों के कबीर की भावना निर्गुण ब्रह्म के प्रति है; पर जब यह भावना प्रेम का रूप धारण करती है, तो ब्रह्म का भी एक स्वरूप हो जाता है और आत्मा को उससे कोई संबंध स्थापित करके चलना पड़ता है। कबीर ने यद्यपि ईश्वर को कहीं मा, कहीं पिता और कहीं मित्र कहकर पुकारा है; पर अधिकतर उन्होंने उसे प्रेमी ही माना है। उनकी इस प्रकार की रचनाओं में आत्मा सभी कहीं नारी और परमात्मा पुरुष के रूप में है । कबीर का विश्वास था कि भगवान से मिलन ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य है और जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक व्यक्ति की आत्मा बहुत व्याकुल रहती है। अपने मन की कामना प्रकट करते हुए इसी से एक स्थान पर वे कहते हैंवे दिन कब आयेंगे जा कारन हम देह धरी है, मिलिबो अंग लगाइ । यह अरदास दास की सुनिए, तन की तपन बुझाइ । कहै 'कबीर' मिलें जे साई, मिलि करि मंगल गाइ । कबीर ने शरीर और संसार को कोई महत्त्व नहीं दिया; अतः यह स्पष्ट है कि उन्होंने जो कुछ कहा है, वह आत्मा को लक्ष्य करके ही । ऐसी दशा में पुरुष होकर यदि वे अपने को परमपुरुष की प्रियतमा या पत्नी बतलाते हैं, तो यह बात स्वाभाविक नहीं लगनी चाहिए । आत्मा का कोई स्वरूप नहीं होता । साधक की भावना के अनुकूल उसे स्त्री या पुरुष कुछ भी माना जा सकता है । सूफी लोग ईश्वर को स्त्री मानकर अपने को पुरुष मानते ही हैं। जायसी इसके उदाहरण हैं । लेकिन संतों की धारणा इसके विल्कुल विप रीत है । वे ईश्वर को पुरुषत्मा को स्त्री के रूप में देखते हैं । कबीर के भाव-जगत के संबंध में दूसरी स्पष्ट करने योग्य बात यह है कि यद्यपि उनका प्रेम तो आध्यात्मिक ही है; पर उसे प्रकट किया है उन्होंने लौकिक संबंधों के द्वारा । यदि वे ऐसा न करते तो उनके पाठकों की समझ में उनकी बात ही न श्राती। उनके भाव-लोक से संबधित तोसरी बात यह है कि बहुत सी बातें स्पष्ट न कहकर उन्होंने संकेत से कही हैं । आध्यात्मिक अनुभूति को ज्यों का त्यों व्यक्त करना बहुत कठिन काम है; इसी से काव्य में बहुत से प्रतीकों और संकेतों का सहारा कवि को लेना पड़ता है। इससे उनकी बात कहीं-कहीं दुरूह भी हो गई है । इसी से मिलती-जुलती कला-संबंधी एक चौथी बात है और वह यह कि उन्होंने अपनी भावना को व्यक्त करते समय हठयोग के बहुत से पारिभाषिक शब्दों का प्रयोग किया है। जो व्यक्ति हठयोग में प्रयुक्त होने वाले ऐसे शब्दों जैसे सुन्न महल, हद, सुरति-निरति, सबद, हंस, मानसरोबर आदि का अर्थ नहीं जानता, वह कबीर की भावना को पूरी तरह समझ ही नहीं पायेगा। कबीर के इस प्रसिद्ध पद को ही लीजिए जो उनकी भावना को सामान्यरूप से व्यक्त करता है - तो को पीव मिलेंगे, घूंघट के पट खोल रे ! सुन्न महल में दियना बार ले, असा सों मत डोल रे ! जौग जुगत सो रंग महल में, पिय पायो अनमोल रे ! कहै कबीर आनंद भयो है, बाजत अनहद ढोल रे ! परन्तु बहुत से स्थानो पर भावना अत्यंत सरल और स्पष्ट होकर भी आई है । उससे पता चलता है कि कबीर को प्रेम भाव का बहुत अच्छा ज्ञान था और उसकी अनुभूति वे अत्यंत तीव्रता से करते थे। एक स्थान पर वे प्रियदर्शन की प्यास से बावले से घूम रहे हैं। एक दूसरे स्थान पर उन्होंने बतलाया है कि प्रेमियों का संसार बहुत सीमित होता है और उसका सुख एकांत में ही लिया जा सकता है । एक तीसरे स्थान पर उन्होंने एक मार्मिक स्वप्न की चर्चा की है और अत्यंत विदग्ध वाणी में मन के आकर्षण को व्यक्त करके दिखलाया है - बिरह कमंडल कर लिए, वैरागी दो नैन, माँगें दरस मधूकरी, छके रहें दिन रैन । नैनातू, ज्यौं हौं नयन झपेडं, ना हौं देखौं और कौं, ना तोहि देखन देउं । सपने में साई मिले, सोते लिया जगाइ, आँखिन खोलूं डरपता, मत सपनाह जाइ । सांसारिक प्रेम की प्रथा तो यह है कि पहले हम किसी को देखते हैं; देखते ही आकर्षण होता है, परिचय बढ़ता है और एक दिन मिलन या विरह में वह प्रेम समाप्त हो जाता है । पर संतों के आध्यात्मिक प्रेम में दर्शन की बात प्रारंभ में नहीं उठती । उनका ऐसा विश्वास है कि आत्मा का वास्तविक निवास स्थान किसी ऐसे लोक में है जहाँ सूर्य-चंद्र प्रकाश नहीं करते, जहाँ पवन पहुँच नहीं पाता । उस लोक में उनका प्रेमी रहता है । उससे बिछुड़कर त्यहाँ गई है; पर लौटकर उसे वहीं जाना है। अतः प्रारंभ होता है इस चेतना से कि श्रात्मा प्रियतम सेवियुक्त है । इस चेतना को जगाने वाला कोई सतगुरु होता है । यही कारण है कि संत साहित्य में गुरु की बड़ी भारी महिमा बतलाई गई है। वियोग का ध्यान ही वियोग की व्यथा जग पड़ती है। मिलन प्रायः अंत में होता है। इसका नाम मृत्यु है । कबीर मृत्यु की भयंकरता स्वीकार नहीं करते । वे उसे दूती के रूप में देखते हैं जो आत्मा को परमात्मा से मिलाती है । मिलन से पूर्व जैसे लौकिक प्रेम में कई अवस्थाएँ होती हैं, वैसे ही आध्यात्मिक विवाह और सीढ़ियाँ चढ़कर रंग-कक्ष में पहुँचने को चर्चा भी कबीर ने अपने पदों में की है। एक स्थिति यह है -- सतगुरु सोइ दया कर दीन्हा, ताते अन चिन्हार मैं चीन्हा । चंद न सूर, दिवस नहिं रजनी, तहाँ सुरत लौ लाई । बिना मृत रस भोजन, बिन जल तृषा बुझाई । जहाँ हरख तहँ पूरन सुख है, यह सुख कासौं कहना । कह 'कबीर' बलि- बलि सतगुरु की, धन्य सिष्य का लहना, दूसरी यह - दुलहिन गावहु मंगलचार । हम घर आए हो राजा राम भरतार । तन रत करि मैं मन रत करि हौं, पंचतत्त्व बराती । रामदेव मोरे पांहुने आए, मैं जोबन में माती । सरीर सरोवर वेदी करि हौं, ब्रह्मा वेद उचार । रामदेव संग भाँवरि लैहूँ, धनि धनि भाग हमार ।
महाराष्ट्र के अमरावती सिटी में शनिवार को बुलाए गए एक बंद के दौरान हिंसा भड़क गई जिसके चलते यहां इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं और इसके साथ ही चार दिन के लिए कर्फ्यू लगाने का एलान किया गया है। पुलिस ने बताया कि यह बंद कथित तौर पर भाजपा के स्थानीय नेताओं ने हाल ही में त्रिपुरा में हुई हिंसा के विरोध में मुस्लिम संगठनों की शुक्रवार को निकाली गई रैलियों में हुई हिंसा के विरोध में बुलाया था। इस दौरान किसी ने एक दुकान पर पत्थरबाजी कर दी थी। शनिवार की सुबह भगवा झंडे लिए सैकड़ों व्यक्ति राजकमल चौर में सड़कों पर उतर आए थे। शहर की पुलिस कमिश्नर आरती सिंह ने बताया कि अफवाहें हिंसा को बढ़ा सकती हैं इसलिए इस स्थिति से बचने के लिए इंटरनेट सेवाओं को अगले तीन दिन तक बंद रखने का फैसला लिया गया है। उन्होंने बताया कि कर्फ्यू अगले चार दिन तक प्रभाव में रहेगा। बंद के दौरान हिंसा भड़क उठी जब कुछ शरारती तत्वों ने पत्थरबाजी को अंजाम दिया, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर जमकर लाठियां बरसाईं। इसके बाद जिले में धारा 144 लगाने का एलान किया गया था। एक पुलिस अफसर ने बताया कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया गया। फिलहाल शहर की ज्यादातर जगहों पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। वहीं, पुलिस ने अब तक दंगा सहित विभिन्न आरोपों में 20 प्राथमिकी दर्ज कर 20 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान चार अन्य को हिरासत में भी लिया गया है। पार्श्व गायिका वैशाली म्हाडे ने शनिवार को पूर्वी महाराष्ट्र में अपने गृहनगर अमरावती में शांति और सद्भाव की अपील की। अमरावती की रहने वाले म्हाडे ने एक वीडियो क्लिप जारी की उसमें उन्होंने लोगों से सद्भाव बनाए रखने और हिंसा का सहारा नहीं लेने का आग्रह किया। गायिका ने कहा यह बहुत दुखद है क्योंकि यह मेरा शहर है और मेरे अपने लोग आहत हो रहे हैं। कृपया किसी के बहकावे में न आएं। उन्होंने कहा कोरोना का डर अभी भी हम पर मंडरा रहा है और अगर ऐसी घटनाएं होती हैं तो शायद तीसरी या चौथी लहर आ सकती है। आगे कहा कि ऐसा कोई कार्य न करें जिससे हम सभी के लिए समस्या उत्पन्न हो, किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन न करें। यह हमारा शहर और हमारे लोग हैं और शांति और सद्भाव बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। शिवसेना सांसद संजय राउत ने शनिवार को कहा कि अमरावती और अन्य स्थानों पर हिंसा का उद्देश्य महाविकास अघाड़ी सरकार को अस्थिर करना है। औरंगाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए राउत ने कहा कि राज्य सरकार की सब पर नजर है। हिंसा के अपराधियों के असली चेहरे जल्द ही सामने आ जाएंगे। साथ ही इस मामले पर राज्यपाल से भी मुलाकात करेंगे। महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक संजय पांडे ने नागरिकों से शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से इस तरह की घटनाओं में शामिल लोगों को कोई फायदा नहीं होता है, लेकिन घटनाओं में शामिल युवा अपराधियों का भविष्य संकट में पड़ जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि ऐसे अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ पुलिस कड़ी कार्रवाई करेगी और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग भी करेगी। त्रिपुरा के उप मुख्यमंत्री जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि महाराष्ट्र के कुछ चुनिंदा शहरों में त्रिपुरा का नाम लेकर हुई घटनाएं हमारे लिए शर्मनाक हैं। लोग अपने संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए फर्जी खबरें, तस्वीरें फैलाकर त्रिपुरा की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में शांति कायम है। रचनात्मक आलोचना किसी भी सरकार के लिए अच्छी होती है लेकिन इस तरह की अफवाह फैलाना साजिश के समान है और त्रिपुरा के गौरवशाली इतिहास पर इस तरह के नृशंस हमले बर्दाश्त नहीं किए जाने चाहिए। - इस बीच गृह मंत्रालय ने भी बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि त्रिपुरा के गोमती जिले में एक मस्जिद के क्षतिग्रस्त होने और तोड़फोड़ के बारे में सोशल मीडिया में प्रसारित समाचार फर्जी है और तथ्यों की पूरी तरह से गलत बयानी है। लोगों को शांत रहना चाहिए और ऐसी खबरों से गुमराह नहीं होना चाहिए। - इसमें कहा गया कि हाल के दिनों में त्रिपुरा में किसी मस्जिद के ढांचे के क्षतिग्रस्त होने का कोई मामला सामने नहीं आया है। जैसा कि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया गया है, इन घटनाओं में किसी व्यक्ति की साधारण या गंभीर चोट या बलात्कार या मौत की कोई रिपोर्ट नहीं है। - उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में, त्रिपुरा के बारे में फर्जी खबरों के आधार पर हिंसा और आपत्तिजनक बयानों की खबरें आई हैं, जिनका उद्देश्य शांति और सद्भाव को बिगाड़ना है। यह बहुत ही चिंताजनक है और यह आग्रह किया जाता है कि हर कीमत पर शांति बनी रहे। वहीं, महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि त्रिपुरा में जो घटना कभी नहीं हुई उसके लिए राज्य में रैलियों का आयोजन करना गलत था। उन्होंने लोगों से संयम बरतने की अपील की क्योंकि अमरावती शहर से लगातार दूसरे दिन हिंसा की घटनाओं की सूचना मिली थी जिसके बाद पुलिस ने कर्फ्यू लगा दिया। फडणवीस ने कहा कि त्रिपुरा सरकार और स्थानीय पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अल्पसंख्यक समुदाय के किसी भी धार्मिक स्थल को नहीं जलाया गया। उन्होंने इसकी तस्वीरें भी जारी की हैं। मैं दोनों समुदायों से संयम बरतने की अपील करता हूं। पूर्व सीएम ने यह भी कहा कि राज्य सरकार में राजनीतिक दलों को भड़काऊ बयान नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो त्रिपुरा में हुआ ही नहीं, उसके लिए महाराष्ट्र में रैलियां करना बिल्कुल गलत है। एक विशेष समुदाय की दुकानों पर हमला करना गलत है। इससे पहले शुक्रवार को हुई घटना को लेकर महाराष्ट्र के गृह मंत्री दिलीप वल्से ने कहा, "त्रिपुरा में हुई हिंसा के खिलाफ राज्यभर के मुस्लिमों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान नांदेड़, मालेगांव और अमरावती समेत कई जगहों पर पत्थरबाजी हुई। मैंने हिंदू, मुस्लिमों से शांति बनाए रखने की अपील की। " उन्होंने कहा, "अब स्थिति नियंत्रण में है। मैं खुद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के जरिए इस पर नजर रख रहा हूं। अगर कोई दोषी पाया गया, तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा। " अमरावती की सांसद नवनीत आर राणा ने कहा कि जिले में कल जो कुछ हुआ उसकी निंदा करती हूं। मैं सभी नागरिकों और नेताओं से शांति बनाए रखने की अपील करते हैं। मैं बड़े मंत्रियों से अपील करती हूं कि इसे राजनीतिक रंग देने की जगह लोगों की सुरक्षा के बारे में बात की जाए।
महाराष्ट्र के अमरावती सिटी में शनिवार को बुलाए गए एक बंद के दौरान हिंसा भड़क गई जिसके चलते यहां इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं और इसके साथ ही चार दिन के लिए कर्फ्यू लगाने का एलान किया गया है। पुलिस ने बताया कि यह बंद कथित तौर पर भाजपा के स्थानीय नेताओं ने हाल ही में त्रिपुरा में हुई हिंसा के विरोध में मुस्लिम संगठनों की शुक्रवार को निकाली गई रैलियों में हुई हिंसा के विरोध में बुलाया था। इस दौरान किसी ने एक दुकान पर पत्थरबाजी कर दी थी। शनिवार की सुबह भगवा झंडे लिए सैकड़ों व्यक्ति राजकमल चौर में सड़कों पर उतर आए थे। शहर की पुलिस कमिश्नर आरती सिंह ने बताया कि अफवाहें हिंसा को बढ़ा सकती हैं इसलिए इस स्थिति से बचने के लिए इंटरनेट सेवाओं को अगले तीन दिन तक बंद रखने का फैसला लिया गया है। उन्होंने बताया कि कर्फ्यू अगले चार दिन तक प्रभाव में रहेगा। बंद के दौरान हिंसा भड़क उठी जब कुछ शरारती तत्वों ने पत्थरबाजी को अंजाम दिया, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर जमकर लाठियां बरसाईं। इसके बाद जिले में धारा एक सौ चौंतालीस लगाने का एलान किया गया था। एक पुलिस अफसर ने बताया कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया गया। फिलहाल शहर की ज्यादातर जगहों पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। वहीं, पुलिस ने अब तक दंगा सहित विभिन्न आरोपों में बीस प्राथमिकी दर्ज कर बीस लोगों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान चार अन्य को हिरासत में भी लिया गया है। पार्श्व गायिका वैशाली म्हाडे ने शनिवार को पूर्वी महाराष्ट्र में अपने गृहनगर अमरावती में शांति और सद्भाव की अपील की। अमरावती की रहने वाले म्हाडे ने एक वीडियो क्लिप जारी की उसमें उन्होंने लोगों से सद्भाव बनाए रखने और हिंसा का सहारा नहीं लेने का आग्रह किया। गायिका ने कहा यह बहुत दुखद है क्योंकि यह मेरा शहर है और मेरे अपने लोग आहत हो रहे हैं। कृपया किसी के बहकावे में न आएं। उन्होंने कहा कोरोना का डर अभी भी हम पर मंडरा रहा है और अगर ऐसी घटनाएं होती हैं तो शायद तीसरी या चौथी लहर आ सकती है। आगे कहा कि ऐसा कोई कार्य न करें जिससे हम सभी के लिए समस्या उत्पन्न हो, किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन न करें। यह हमारा शहर और हमारे लोग हैं और शांति और सद्भाव बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। शिवसेना सांसद संजय राउत ने शनिवार को कहा कि अमरावती और अन्य स्थानों पर हिंसा का उद्देश्य महाविकास अघाड़ी सरकार को अस्थिर करना है। औरंगाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए राउत ने कहा कि राज्य सरकार की सब पर नजर है। हिंसा के अपराधियों के असली चेहरे जल्द ही सामने आ जाएंगे। साथ ही इस मामले पर राज्यपाल से भी मुलाकात करेंगे। महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक संजय पांडे ने नागरिकों से शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से इस तरह की घटनाओं में शामिल लोगों को कोई फायदा नहीं होता है, लेकिन घटनाओं में शामिल युवा अपराधियों का भविष्य संकट में पड़ जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि ऐसे अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ पुलिस कड़ी कार्रवाई करेगी और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग भी करेगी। त्रिपुरा के उप मुख्यमंत्री जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि महाराष्ट्र के कुछ चुनिंदा शहरों में त्रिपुरा का नाम लेकर हुई घटनाएं हमारे लिए शर्मनाक हैं। लोग अपने संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए फर्जी खबरें, तस्वीरें फैलाकर त्रिपुरा की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में शांति कायम है। रचनात्मक आलोचना किसी भी सरकार के लिए अच्छी होती है लेकिन इस तरह की अफवाह फैलाना साजिश के समान है और त्रिपुरा के गौरवशाली इतिहास पर इस तरह के नृशंस हमले बर्दाश्त नहीं किए जाने चाहिए। - इस बीच गृह मंत्रालय ने भी बयान जारी किया। इसमें कहा गया कि त्रिपुरा के गोमती जिले में एक मस्जिद के क्षतिग्रस्त होने और तोड़फोड़ के बारे में सोशल मीडिया में प्रसारित समाचार फर्जी है और तथ्यों की पूरी तरह से गलत बयानी है। लोगों को शांत रहना चाहिए और ऐसी खबरों से गुमराह नहीं होना चाहिए। - इसमें कहा गया कि हाल के दिनों में त्रिपुरा में किसी मस्जिद के ढांचे के क्षतिग्रस्त होने का कोई मामला सामने नहीं आया है। जैसा कि कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया गया है, इन घटनाओं में किसी व्यक्ति की साधारण या गंभीर चोट या बलात्कार या मौत की कोई रिपोर्ट नहीं है। - उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में, त्रिपुरा के बारे में फर्जी खबरों के आधार पर हिंसा और आपत्तिजनक बयानों की खबरें आई हैं, जिनका उद्देश्य शांति और सद्भाव को बिगाड़ना है। यह बहुत ही चिंताजनक है और यह आग्रह किया जाता है कि हर कीमत पर शांति बनी रहे। वहीं, महाराष्ट्र में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि त्रिपुरा में जो घटना कभी नहीं हुई उसके लिए राज्य में रैलियों का आयोजन करना गलत था। उन्होंने लोगों से संयम बरतने की अपील की क्योंकि अमरावती शहर से लगातार दूसरे दिन हिंसा की घटनाओं की सूचना मिली थी जिसके बाद पुलिस ने कर्फ्यू लगा दिया। फडणवीस ने कहा कि त्रिपुरा सरकार और स्थानीय पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अल्पसंख्यक समुदाय के किसी भी धार्मिक स्थल को नहीं जलाया गया। उन्होंने इसकी तस्वीरें भी जारी की हैं। मैं दोनों समुदायों से संयम बरतने की अपील करता हूं। पूर्व सीएम ने यह भी कहा कि राज्य सरकार में राजनीतिक दलों को भड़काऊ बयान नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो त्रिपुरा में हुआ ही नहीं, उसके लिए महाराष्ट्र में रैलियां करना बिल्कुल गलत है। एक विशेष समुदाय की दुकानों पर हमला करना गलत है। इससे पहले शुक्रवार को हुई घटना को लेकर महाराष्ट्र के गृह मंत्री दिलीप वल्से ने कहा, "त्रिपुरा में हुई हिंसा के खिलाफ राज्यभर के मुस्लिमों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान नांदेड़, मालेगांव और अमरावती समेत कई जगहों पर पत्थरबाजी हुई। मैंने हिंदू, मुस्लिमों से शांति बनाए रखने की अपील की। " उन्होंने कहा, "अब स्थिति नियंत्रण में है। मैं खुद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के जरिए इस पर नजर रख रहा हूं। अगर कोई दोषी पाया गया, तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा। " अमरावती की सांसद नवनीत आर राणा ने कहा कि जिले में कल जो कुछ हुआ उसकी निंदा करती हूं। मैं सभी नागरिकों और नेताओं से शांति बनाए रखने की अपील करते हैं। मैं बड़े मंत्रियों से अपील करती हूं कि इसे राजनीतिक रंग देने की जगह लोगों की सुरक्षा के बारे में बात की जाए।
पटना 23 जून (वार्ता) अगले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एकता बनाने के उद्देश्य से अट्ठारह दलों के शीर्ष विपक्षी नेताओं की पहली बड़ी बैठक आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी आवास पर होने जा रही है । आगे देखे. . पटना 23 जून (वार्ता) अगले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एकता बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित शीर्ष विपक्षी नेता आज पटना पहुंचे वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कल पहुंचने की संभावना है। आगे देखे. . मुंगेर 22 जून (वार्ता) बिहार में मुंगेर जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के नौवागढ़ी गांव स्थित स्टेट बैंक (एसबीबाई) के एटीएम से आज चोरों ने 29 लाख 71 हजार रुपए की चोरी कर ली। आगे देखे. . पटना, 22 जून (वार्ता) पटना में जी 20 के सदस्य देशों की दो दिवसीय एल 20 बैठक के पहले दिन सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे पर साझा दृष्टिकोण अपनाने के लिए व्यापक चर्चा हुई। आगे देखे. . रांची, 22 जून (वार्ता) झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के हाथों आज 2550 युवाओं को जब नियुक्ति पत्र मिला तो उनकी खुशियां देखते ही बन रही थी। आगे देखे. . पटना 22 जून (वार्ता) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि देश को विनाशकारी स्थिति से बचाने के लिए वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराना होगा। आगे देखे. . जमुई, 22 जून (वार्ता) बिहार में जमुई जिले के नगर थाना क्षेत्र से पुलिस ने गुरूवार को कुख्यात अपराधी वीरप्पन और उसके एक सहयोगी को हथियार के साथ गिरफ्तार कर लिया। आगे देखे. . दरभंगा, 22 जून (वार्ता) बिहार में दरभंगा जिला के बहेड़ी थाना क्षेत्र में गुरुवार को वर्चस्व को लेकर हुयी लड़ाई में तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गयी तथा एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। आगे देखे. . पटना, 22 जून (वार्ता) बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने आज जी20 के सदस्य देशों के एल20 (श्रम भागीदारी समूह) के दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। आगे देखे. . रांची, 22 जून (वार्ता)भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि पूरी दुनिया मोदी की प्रशंसा कर रही है, विश्व में प्रधानमंत्री और भारत का डंका बज रहा है परंतु कांग्रेस के पेट में दर्द हो रहा है। आगे देखे. . जमुई, 22 जून (वार्ता) बिहार मे जमुई जिले के बरहट थाना क्षेत्र मे एक युवती ने गुरूवार को गले में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। आगे देखे. . जमुई, 22 जून (वार्ता) बिहार में जमुई जिले के मलयपुर थाना क्षेत्र में गुरूवार की सुबह सांप के डसने से एक बच्चे की मौत हो गयी। आगे देखे. .
पटना तेईस जून अगले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एकता बनाने के उद्देश्य से अट्ठारह दलों के शीर्ष विपक्षी नेताओं की पहली बड़ी बैठक आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सरकारी आवास पर होने जा रही है । आगे देखे. . पटना तेईस जून अगले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एकता बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित शीर्ष विपक्षी नेता आज पटना पहुंचे वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कल पहुंचने की संभावना है। आगे देखे. . मुंगेर बाईस जून बिहार में मुंगेर जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के नौवागढ़ी गांव स्थित स्टेट बैंक के एटीएम से आज चोरों ने उनतीस लाख इकहत्तर हजार रुपए की चोरी कर ली। आगे देखे. . पटना, बाईस जून पटना में जी बीस के सदस्य देशों की दो दिवसीय एल बीस बैठक के पहले दिन सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे पर साझा दृष्टिकोण अपनाने के लिए व्यापक चर्चा हुई। आगे देखे. . रांची, बाईस जून झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के हाथों आज दो हज़ार पाँच सौ पचास युवाओं को जब नियुक्ति पत्र मिला तो उनकी खुशियां देखते ही बन रही थी। आगे देखे. . पटना बाईस जून पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि देश को विनाशकारी स्थिति से बचाने के लिए वर्ष दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को हराना होगा। आगे देखे. . जमुई, बाईस जून बिहार में जमुई जिले के नगर थाना क्षेत्र से पुलिस ने गुरूवार को कुख्यात अपराधी वीरप्पन और उसके एक सहयोगी को हथियार के साथ गिरफ्तार कर लिया। आगे देखे. . दरभंगा, बाईस जून बिहार में दरभंगा जिला के बहेड़ी थाना क्षेत्र में गुरुवार को वर्चस्व को लेकर हुयी लड़ाई में तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गयी तथा एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। आगे देखे. . पटना, बाईस जून बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने आज जीबीस के सदस्य देशों के एलबीस के दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। आगे देखे. . रांची, बाईस जून भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि पूरी दुनिया मोदी की प्रशंसा कर रही है, विश्व में प्रधानमंत्री और भारत का डंका बज रहा है परंतु कांग्रेस के पेट में दर्द हो रहा है। आगे देखे. . जमुई, बाईस जून बिहार मे जमुई जिले के बरहट थाना क्षेत्र मे एक युवती ने गुरूवार को गले में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। आगे देखे. . जमुई, बाईस जून बिहार में जमुई जिले के मलयपुर थाना क्षेत्र में गुरूवार की सुबह सांप के डसने से एक बच्चे की मौत हो गयी। आगे देखे. .
Nawab Jafar Mir Abdullah: लखनऊ की जानीमानी शख्सियत नवाब जफर मीर अब्दुल्ला का मंगलवार को निधन हो गया है। नवाब जफर मीर की उम्र 73 वर्ष थी, उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, जिसके बाद उन्हें विवेकानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रिपोर्ट के अनुसार नवाब मीर जाफर लंबी बीमारी से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। नवाब मीर जाफर की डायलसिस चल रही थी। सनतकता लखनऊ फेस्टिवल की आयोजक माधवी कुकरेजा ने बताया कि वह हमे लखनऊ और अवध की थी रिसर्च में हर साल मदद करते थे। नवाब मीर जाफर शाही अवध परिवार से आते थे, उनके निधन पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मायावती ने भी शोक जाहिर किया है। मायावती ने ट्वीट करके लिखा, लखनऊ में यहाँ की पुरानी मशहूर लखनवी तहज़ीब, नफासत व नज़ाकत का जाना-पहचाना नाम व चेहरा नवाब जाफर मीर अब्दुल्ला, 72 के इंतकाल की ख़बर अति-दुःखद। उनके परिवार तथा उनके तमाम जानने व चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी संवेदना। अखिलेश यादव ने ट्वीट करके लिखा, शीश महल लखनऊ के नवाब जाफर मीर अब्दुल्लाह साहब का इंतकाल एक युग का अंत है। भावभीनी श्रद्धांजलि व शोकाकुल परिजनों के प्रति संवेदना। नवाब मीर जाफर अब्दुल्ला तबीयत खराब होने की वजह से घर से कम निकलते थे। नवाब मीर जाफर कई फिल्मों में भी नजर आए हैं। वह गोमती किनारे स्थित शीशमहल में रहते थे। नवाब साहब को लखनऊ की एक धरोहर के तौर पर उन्हें जाना जाता था। अपनी जुबान, लहजा और अदब के लिए वह काफी लोकप्रिय थे। नवाब मीर जाफर के पास लखनऊ के तमाम ऐसे किस्से थे, जिसे वह लोगों को बताया करते थे। लखनऊ के नवाबों और यहां की विरासत की उन्हें काफी जानकारी थी। नवाबों के पकवान से लेकर रस्म और रिवाज की उन्हें गहरी जानकारी थी। लखनऊ से जुड़ी शायद ही ऐसी कोई बात रही होगी जिसके बारे में नवाब साहब को ना पता हो। अवध की तहज़ीब, सक़ाफ़त व नवाबी विरासत एवं ऐश्वर्य के ध्वजवाहक और शीश महल लखनऊ के नवाब जाफ़र मीर अब्दुल्लाह साहब के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ है। आप लखनऊ से और लखनऊ आपसे अलहदा नहीं हो सकता। नवाब जाफ़र मीर अब्दुल्लाह साहब का निधन एक युग का अंत है। लखनऊ की शान नवाब जाफर मीर अब्दुल्ला का इंतकाल हो गया है। शीश महल लखनऊ के नवाब जाफर मीर अब्दुल्लाह साहब का इंतकाल एक युग का अंत है।
Nawab Jafar Mir Abdullah: लखनऊ की जानीमानी शख्सियत नवाब जफर मीर अब्दुल्ला का मंगलवार को निधन हो गया है। नवाब जफर मीर की उम्र तिहत्तर वर्ष थी, उन्हें सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, जिसके बाद उन्हें विवेकानंद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रिपोर्ट के अनुसार नवाब मीर जाफर लंबी बीमारी से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। नवाब मीर जाफर की डायलसिस चल रही थी। सनतकता लखनऊ फेस्टिवल की आयोजक माधवी कुकरेजा ने बताया कि वह हमे लखनऊ और अवध की थी रिसर्च में हर साल मदद करते थे। नवाब मीर जाफर शाही अवध परिवार से आते थे, उनके निधन पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और मायावती ने भी शोक जाहिर किया है। मायावती ने ट्वीट करके लिखा, लखनऊ में यहाँ की पुरानी मशहूर लखनवी तहज़ीब, नफासत व नज़ाकत का जाना-पहचाना नाम व चेहरा नवाब जाफर मीर अब्दुल्ला, बहत्तर के इंतकाल की ख़बर अति-दुःखद। उनके परिवार तथा उनके तमाम जानने व चाहने वालों के प्रति मेरी गहरी संवेदना। अखिलेश यादव ने ट्वीट करके लिखा, शीश महल लखनऊ के नवाब जाफर मीर अब्दुल्लाह साहब का इंतकाल एक युग का अंत है। भावभीनी श्रद्धांजलि व शोकाकुल परिजनों के प्रति संवेदना। नवाब मीर जाफर अब्दुल्ला तबीयत खराब होने की वजह से घर से कम निकलते थे। नवाब मीर जाफर कई फिल्मों में भी नजर आए हैं। वह गोमती किनारे स्थित शीशमहल में रहते थे। नवाब साहब को लखनऊ की एक धरोहर के तौर पर उन्हें जाना जाता था। अपनी जुबान, लहजा और अदब के लिए वह काफी लोकप्रिय थे। नवाब मीर जाफर के पास लखनऊ के तमाम ऐसे किस्से थे, जिसे वह लोगों को बताया करते थे। लखनऊ के नवाबों और यहां की विरासत की उन्हें काफी जानकारी थी। नवाबों के पकवान से लेकर रस्म और रिवाज की उन्हें गहरी जानकारी थी। लखनऊ से जुड़ी शायद ही ऐसी कोई बात रही होगी जिसके बारे में नवाब साहब को ना पता हो। अवध की तहज़ीब, सक़ाफ़त व नवाबी विरासत एवं ऐश्वर्य के ध्वजवाहक और शीश महल लखनऊ के नवाब जाफ़र मीर अब्दुल्लाह साहब के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ है। आप लखनऊ से और लखनऊ आपसे अलहदा नहीं हो सकता। नवाब जाफ़र मीर अब्दुल्लाह साहब का निधन एक युग का अंत है। लखनऊ की शान नवाब जाफर मीर अब्दुल्ला का इंतकाल हो गया है। शीश महल लखनऊ के नवाब जाफर मीर अब्दुल्लाह साहब का इंतकाल एक युग का अंत है।
क्या पदक के दबाव में खिलाड़ी टूट रहे हैं ? क्या पदक से निराश होकर आत्महत्या कर रहे हैं ? धनबाद की राष्ट्रीय स्तर की शूटर कोनिका लायक की आत्महत्या के बाद खेल जगत हिल गया है। क्योंकि पिछले चार महीने में ही देश के चार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों ने आत्महत्या की है। कोनिका भी खेल में अच्छा प्रदर्शन करना चाहती थी। वह गरीब परिवार से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही थी। उसके पास प्रैक्टिस के लिए अच्छी राइफल नहीं थी तो अभिनेता सोनू सूद ने जर्मनी निर्मित राइफल गिफ्ट में दी थी। सूद ने कोनिका को देश के लिए पदक जीतने को कहा था। कोनिका ने भी पदक जीतने का वादा किया था। यह वादा अब कभी पूरा नहीं होगा। शूटर कोनिका की आत्महत्या का मामला कोई पहला नहीं है। इस साल चार महीने में चार शूटरों ने की आत्महत्या की है। दस 10 दिन पहले ही पंजाब की इंटरनेशनल शूटर खुशी सीरत कौर ने अपनी ही पिस्टल से गोली मारकर आत्महत्या कर ली है। कोनिका धनबाद शहर की रहने वाली थी। वह कोलकाता में हॉस्टल में रहती थी। पिछले दिनों अभिनेता सोनू सूद ने उनहें जर्मन मेड राइफल दिलाई थी। वह एक फेमस शूटिंग एकेडमी में प्रेक्टिस कर रहीं थी। पुलिस को साथी छात्रों ने बताया कि वह तीन- चार दिनों से प्रेक्टिस के लिए भी नहीं आ रही थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में माैत की वजह दम घूंटने की बताई जा रही है। बृहस्पतिवार सुबह साथियों ने कोनिका लायक को हॉस्टल में फंदे पर लटका पाया। लायक ने आत्महत्या की है। पुलिस घटना की पूरी जांच में लग गई है। 2021 में एक टूर्नामेंट हुआ था जिसमें कोनिका को टार्गेट से छेड़छाड़ का दोषी पाया गया था। जिसकिे बाद से भी वह काफी परेशान थी। कोनिका लायक एक शानदार खिलाड़ी थीं। वह राज्य स्तर पर चार स्वण पदक व सिल्वर मेडर जीत चुकी थी। उनका चेयन नेशनल में भी हुआ। खुद की रायफल ना होने के चलते वह टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले पाई थीं। अभिनेता सोनू सूद से संपर्क करने पर उन्होंने 2. 70 लाख रुपये कीमत की जर्मन मेडल रायफल कोनिका को भिजवाई थी। दस 10 दिन पहले ही पंजाब की इंटरनेशनल शूटर खुशी सीरत कौर ने अपनी ही पिस्टल से गोली मारकर आत्महत्या कर ली है। शूटरों के आत्महत्या करने का यह नया मामला नहीं है। यह सोचने वाली बात है कि पिछले चार माह के दौरान 2 पुरुष् व 2 महिला शूटरों ने आत्महत्या कर ली है। सबसे बड़ी बात यह है कि किसी का भी आत्महत्या का सही कारण पता नहीं चल सकता है। कुछ दिन पहले ही पंजाब की खिलाड़ी 17 साल की खुशी ने खुद की पिस्टल से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। वह नेशनल शूटिंग प्रतियोगिता अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थीं। जिसके चलते वह परेशान थी। इससे पहले अक्टूबर में पंजाब के हुनरदीरप सिंह सोहल और उससे पहले मोहाली निवासी नमनवीर सिंह बराड़ ने आत्महत्या की थी।
क्या पदक के दबाव में खिलाड़ी टूट रहे हैं ? क्या पदक से निराश होकर आत्महत्या कर रहे हैं ? धनबाद की राष्ट्रीय स्तर की शूटर कोनिका लायक की आत्महत्या के बाद खेल जगत हिल गया है। क्योंकि पिछले चार महीने में ही देश के चार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों ने आत्महत्या की है। कोनिका भी खेल में अच्छा प्रदर्शन करना चाहती थी। वह गरीब परिवार से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही थी। उसके पास प्रैक्टिस के लिए अच्छी राइफल नहीं थी तो अभिनेता सोनू सूद ने जर्मनी निर्मित राइफल गिफ्ट में दी थी। सूद ने कोनिका को देश के लिए पदक जीतने को कहा था। कोनिका ने भी पदक जीतने का वादा किया था। यह वादा अब कभी पूरा नहीं होगा। शूटर कोनिका की आत्महत्या का मामला कोई पहला नहीं है। इस साल चार महीने में चार शूटरों ने की आत्महत्या की है। दस दस दिन पहले ही पंजाब की इंटरनेशनल शूटर खुशी सीरत कौर ने अपनी ही पिस्टल से गोली मारकर आत्महत्या कर ली है। कोनिका धनबाद शहर की रहने वाली थी। वह कोलकाता में हॉस्टल में रहती थी। पिछले दिनों अभिनेता सोनू सूद ने उनहें जर्मन मेड राइफल दिलाई थी। वह एक फेमस शूटिंग एकेडमी में प्रेक्टिस कर रहीं थी। पुलिस को साथी छात्रों ने बताया कि वह तीन- चार दिनों से प्रेक्टिस के लिए भी नहीं आ रही थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में माैत की वजह दम घूंटने की बताई जा रही है। बृहस्पतिवार सुबह साथियों ने कोनिका लायक को हॉस्टल में फंदे पर लटका पाया। लायक ने आत्महत्या की है। पुलिस घटना की पूरी जांच में लग गई है। दो हज़ार इक्कीस में एक टूर्नामेंट हुआ था जिसमें कोनिका को टार्गेट से छेड़छाड़ का दोषी पाया गया था। जिसकिे बाद से भी वह काफी परेशान थी। कोनिका लायक एक शानदार खिलाड़ी थीं। वह राज्य स्तर पर चार स्वण पदक व सिल्वर मेडर जीत चुकी थी। उनका चेयन नेशनल में भी हुआ। खुद की रायफल ना होने के चलते वह टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले पाई थीं। अभिनेता सोनू सूद से संपर्क करने पर उन्होंने दो. सत्तर लाख रुपये कीमत की जर्मन मेडल रायफल कोनिका को भिजवाई थी। दस दस दिन पहले ही पंजाब की इंटरनेशनल शूटर खुशी सीरत कौर ने अपनी ही पिस्टल से गोली मारकर आत्महत्या कर ली है। शूटरों के आत्महत्या करने का यह नया मामला नहीं है। यह सोचने वाली बात है कि पिछले चार माह के दौरान दो पुरुष् व दो महिला शूटरों ने आत्महत्या कर ली है। सबसे बड़ी बात यह है कि किसी का भी आत्महत्या का सही कारण पता नहीं चल सकता है। कुछ दिन पहले ही पंजाब की खिलाड़ी सत्रह साल की खुशी ने खुद की पिस्टल से गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। वह नेशनल शूटिंग प्रतियोगिता अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थीं। जिसके चलते वह परेशान थी। इससे पहले अक्टूबर में पंजाब के हुनरदीरप सिंह सोहल और उससे पहले मोहाली निवासी नमनवीर सिंह बराड़ ने आत्महत्या की थी।
भारत में कुछ लोग मुंगेरीलाल के हसीन सपनों में हर वक्त खोए रहते हैं। मेट्रोमैन के नाम से मशहूर ई श्रीधरन की बीजेपी में आमद से केरल को छोड़ कर शेष भारत में लोग इतने खुश हैं, मानों रातों रात कुछ चमत्कार होने वाला है। यह बात अच्छी जरूर है कि अगर साफ सुथरी छवि के लोग राजनीति में प्रवेश करते हैं तो उससे बदलाव की उम्मीद बढ़ती है, लेकिन यह देश साफ सुथरी छवि के लोगों को राजनीति में गंदगी फैलाते हुए भी देख चुका है। केरल की जरूरतें अलग हैं और सौ फीसदी साक्षरता वाले केरल के लोग बाकी देश से अलग सोचते हैं। ये तस्वीर बार-बार सामने भी आती रही है। शेष भारत जब आडवाणी की रथयात्रा और भाजपा-आरएसएस की देश को बांटने वाली राजनीति पर मगन होकर उसे वोट देता है तो केरल में भाजपा एक सीट पर भी अपनी जमानत नहीं बचा पाती। केरल से दूर रह कर जिंदगी भर इंजीनियरिंग ओढ़ने-बिछाने वाले ई श्रीधरन केरल में भाजपा की जड़ें कितना जमा पाएंगे, उसके लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। निकट भविष्य में संभावित केरल के अगले विधानसभा चुनाव में श्रीधरन नामक घोड़े पर लगाए गए दांव का रेट सामने आ जाएगा। हालांकि ई श्रीधरन को कांग्रेस ने खोजा था और मौका दिया था, लेकिन सिर्फ इस वजह से श्रीधरन कांग्रेस में क्यों जाते! किसी को उनके इस कदम का बुरा नहीं मानना चाहिए। भारतीय राजनीति में ऐसे प्रयोग जारी रहने चाहिए, तभी उसमें निखार आएगा। भाजपा और आरएसएस ई श्रीधरन को कितना मौका देंगे, यह ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल हो सकता है। मोदी की राह आसान बनाने के लिए आरएसएस ने खुद तय किया था कि उसके राजनीतिक मुखौटे भाजपा में 75 साल से ज्यादा उम्र वाले नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में भेज दिया जाए। संघ ने रथयात्री आडवाणी और वैज्ञानिक दृष्टि वाले विद्वान डॉ. मुरली मनोहर जोशी समेत कइयों को नेपथ्य में भेज दिया, लेकिन अब 85 साल के श्रीधरन को संघ और भाजपा किस शुचिता के साथ स्थापित करेंगे, उसकी तस्वीर भी जल्द साफ होगी। सेहत के हिसाब से ई श्रीधरन इन हालात में नहीं हैं कि भाजपा उन्हें केरल के सीएम के चेहरे के तौर पर पेश करे। अलबत्ता श्रीधरन की आमद यह जरूर बताती है कि बंगाल के बाद भाजपा केरल विधानसभा चुनाव को पूरी गंभीरता के साथ लेने जा रही है। हालांकि कुछ लोग श्रीधरन घटनाक्रम की आड़ में केरल में लेफ्ट और कांग्रेस के खात्मे का एलान कर बैठे हैं। मैं समझता हूं कि वो जरा जल्दी में हैं। केरल ने हमेशा शेष देश से अलग हटकर सोचा है। सरकारी बजट के जिस ट्रैक पर मेट्रो रेल चलाई गई, जरूरी नहीं कि उसी ट्रैक पर राजनीति भी चले। भारत का कोई भी राजनीतिक दल पूरी तरह भ्रष्टाचार मुक्त नहीं है। उसमें भी भाजपा और कांग्रेस तो वैसे भी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उसमें ईमानदार और साफ सुथरी छवि वाले ई श्रीधरन का दम कब घुटता है, यह देखने के लिए मैं और मेरे जैसे तमाम लोग बेताब हैं। मैंने जैसा ऊपर लिखा है कि यह देश स्वच्छ छवि वालों को गंदगी फैलाते देख चुका है। यह देश अच्छी छवि वालों का राजनीति में दम घुटते भी देख चुका है। यह देश ईमानदारी का लबादा ओढ़कर पैदा हुए तमाम नौकरशाहों, कानूनविदों, पूर्व जजों को गिरगिट की तरह रंग बदलते भी देख चुका है। इसके सबसे बड़े उदाहरण अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल हैं। दोनों ने ईमानदारी और साफ सुथरी छवि का दावा पेश किया था। भ्रष्टाचार से त्रस्त भारत में फर्जी गांधीवादी अन्ना हजारे रामलीला मैदान पर गरीबों, मजदूरों, मध्यम वर्ग की आवाज बनकर प्रकट हुए, लेकिन अपना इलाज वो गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में कराते हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट से नेता बने केजरीवाल के कई रूप हमारे सामने हैं। उनके द्वारा चलाई जा रही दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार भ्रष्ट नहीं है, ऐसा दावा आज कौन कर सकता है। आम आदमी पार्टी सेकुलर भी नहीं रही, ऐसा दावा उस पार्टी के लोग भी अब नहीं करते। छात्र नेता उमर खालिद पर यूएपीए जैसे काले कानून की अनुमति देना केजरीवाल सरकार का काम है। दिल्ली नरसंहार 2020 में भी इस पार्टी की भूमिका देखी जा चुकी है। ब्लैक मनी समेत न जाने क्या-क्या भारत में वापस लाने वाला योग गुरु बिजनेसमैन के रूप में सामने आ गया, जिसके प्रोडक्ट में नकली और मिलावटी शहद से लेकर फटी जींस तक शामिल है। बहरहाल, कुछ पत्रकारों ने श्रीधरन और रंजन गोगोई की तुलना करने की कोशिश की है, लेकिन ईमानदारी नहीं बरती है। आइए उस पर भी ई श्रीधरन के संदर्भ में बात करते हैं। मुझे याद है कि वह 12 जनवरी 2018 में सर्दियों की सुबह थी। धूप खिली हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के लॉन में अचानक जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस मदन लोकूर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाते हैं और कहते हैं कि तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट ठीक ढंग से काम नहीं कर रहा है। जजों की सुनवाई का रोस्टर सिस्टम इतना गलत बनाया गया है कि सारे महत्वपूर्ण केस या तो दीपक मिश्रा की कोर्ट या उनकी पसंद की जजों के पास जा रहे हैं। एक तरह से सीधे-सीधे सुप्रीम कोर्ट में फैले भ्रष्टाचार की तरफ इन चार जजों ने इशारा कर दिया। इसके बाद तहलका मच गया, लेकिन कुछ भी बदला नहीं। दीपक मिश्रा रिटायर हो गए। रंजन गोगोई अगले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बन गए। गोगोई की ईमानदारी के इतने कसीदे पढ़े गए कि सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र भी स्वर्गलोक में शरमा गए होंगे, लेकिन इस शख्स ने अयोध्या विवाद पर विवादास्पद फैसला देकर अपना भविष्य सुरक्षित करने की कोशिश शुरू कर दी। अयोध्या पर जब रंजन गोगोई सुनवाई कर रहे थे तो सुप्रीम कोर्ट में कुछ और भी घटित हो रहा था, जिसकी तरफ मीडिया का ध्यान या तो नहीं था या जानबूझकर नहीं था। अदालत की एक महिला कर्मचारी गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगातार लगा रही थी, लेकिन आमतौर पर ऐसे मामलों को ब्लैकमेलिंग से जोड़ कर खारिज कर दिया जाता है। मीडिया ने भी वही किया। फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने कथित महानता दिखाते हुए इस मामले की जांच के लिए जजों की एक कमेटी बना दी, जिसकी अगुआई मौजूदा चीफ जस्टिस बोबडे साहब को सौंपी गई, लेकिन इसके बाद हुआ क्या। तो इस तरह 2018 में जो शख्स हमें विद्रोही जज दिख रहा था और सुप्रीम कोर्ट में फैले कथित भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए राबिनहुड बनकर आया था, वो दरअसल राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखता था या राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने के लिए मजबूर किया गया। आज रंजन गोगोई की क्या हैसियत है। वह मात्र राज्यसभा के एक सदस्य भर हैं, लेकिन विश्व ज्यूडीशियल सिस्टम में उनकी इज्जत का जनाजा निकल चुका है। अयोध्या पर विवादास्पद फैसला देकर उन्होंने उस पार्टी को राजनीतिक फायदा पहुंचाया जो अयोध्या के जरिए केंद्र की सत्ता तक पहुंची है। उम्मीद है ई श्रीधरन दूसरे रंजन गोगोई नहीं बनेंगे। अगर वो भी केरल विधानसभा के मात्र भाजपा विधायक बनकर रह गए तो इस देश को बहुत अफसोस होगा। (यूसुफ किरमानी वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।)
भारत में कुछ लोग मुंगेरीलाल के हसीन सपनों में हर वक्त खोए रहते हैं। मेट्रोमैन के नाम से मशहूर ई श्रीधरन की बीजेपी में आमद से केरल को छोड़ कर शेष भारत में लोग इतने खुश हैं, मानों रातों रात कुछ चमत्कार होने वाला है। यह बात अच्छी जरूर है कि अगर साफ सुथरी छवि के लोग राजनीति में प्रवेश करते हैं तो उससे बदलाव की उम्मीद बढ़ती है, लेकिन यह देश साफ सुथरी छवि के लोगों को राजनीति में गंदगी फैलाते हुए भी देख चुका है। केरल की जरूरतें अलग हैं और सौ फीसदी साक्षरता वाले केरल के लोग बाकी देश से अलग सोचते हैं। ये तस्वीर बार-बार सामने भी आती रही है। शेष भारत जब आडवाणी की रथयात्रा और भाजपा-आरएसएस की देश को बांटने वाली राजनीति पर मगन होकर उसे वोट देता है तो केरल में भाजपा एक सीट पर भी अपनी जमानत नहीं बचा पाती। केरल से दूर रह कर जिंदगी भर इंजीनियरिंग ओढ़ने-बिछाने वाले ई श्रीधरन केरल में भाजपा की जड़ें कितना जमा पाएंगे, उसके लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। निकट भविष्य में संभावित केरल के अगले विधानसभा चुनाव में श्रीधरन नामक घोड़े पर लगाए गए दांव का रेट सामने आ जाएगा। हालांकि ई श्रीधरन को कांग्रेस ने खोजा था और मौका दिया था, लेकिन सिर्फ इस वजह से श्रीधरन कांग्रेस में क्यों जाते! किसी को उनके इस कदम का बुरा नहीं मानना चाहिए। भारतीय राजनीति में ऐसे प्रयोग जारी रहने चाहिए, तभी उसमें निखार आएगा। भाजपा और आरएसएस ई श्रीधरन को कितना मौका देंगे, यह ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल हो सकता है। मोदी की राह आसान बनाने के लिए आरएसएस ने खुद तय किया था कि उसके राजनीतिक मुखौटे भाजपा में पचहत्तर साल से ज्यादा उम्र वाले नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में भेज दिया जाए। संघ ने रथयात्री आडवाणी और वैज्ञानिक दृष्टि वाले विद्वान डॉ. मुरली मनोहर जोशी समेत कइयों को नेपथ्य में भेज दिया, लेकिन अब पचासी साल के श्रीधरन को संघ और भाजपा किस शुचिता के साथ स्थापित करेंगे, उसकी तस्वीर भी जल्द साफ होगी। सेहत के हिसाब से ई श्रीधरन इन हालात में नहीं हैं कि भाजपा उन्हें केरल के सीएम के चेहरे के तौर पर पेश करे। अलबत्ता श्रीधरन की आमद यह जरूर बताती है कि बंगाल के बाद भाजपा केरल विधानसभा चुनाव को पूरी गंभीरता के साथ लेने जा रही है। हालांकि कुछ लोग श्रीधरन घटनाक्रम की आड़ में केरल में लेफ्ट और कांग्रेस के खात्मे का एलान कर बैठे हैं। मैं समझता हूं कि वो जरा जल्दी में हैं। केरल ने हमेशा शेष देश से अलग हटकर सोचा है। सरकारी बजट के जिस ट्रैक पर मेट्रो रेल चलाई गई, जरूरी नहीं कि उसी ट्रैक पर राजनीति भी चले। भारत का कोई भी राजनीतिक दल पूरी तरह भ्रष्टाचार मुक्त नहीं है। उसमें भी भाजपा और कांग्रेस तो वैसे भी एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उसमें ईमानदार और साफ सुथरी छवि वाले ई श्रीधरन का दम कब घुटता है, यह देखने के लिए मैं और मेरे जैसे तमाम लोग बेताब हैं। मैंने जैसा ऊपर लिखा है कि यह देश स्वच्छ छवि वालों को गंदगी फैलाते देख चुका है। यह देश अच्छी छवि वालों का राजनीति में दम घुटते भी देख चुका है। यह देश ईमानदारी का लबादा ओढ़कर पैदा हुए तमाम नौकरशाहों, कानूनविदों, पूर्व जजों को गिरगिट की तरह रंग बदलते भी देख चुका है। इसके सबसे बड़े उदाहरण अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल हैं। दोनों ने ईमानदारी और साफ सुथरी छवि का दावा पेश किया था। भ्रष्टाचार से त्रस्त भारत में फर्जी गांधीवादी अन्ना हजारे रामलीला मैदान पर गरीबों, मजदूरों, मध्यम वर्ग की आवाज बनकर प्रकट हुए, लेकिन अपना इलाज वो गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में कराते हैं। आरटीआई एक्टिविस्ट से नेता बने केजरीवाल के कई रूप हमारे सामने हैं। उनके द्वारा चलाई जा रही दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार भ्रष्ट नहीं है, ऐसा दावा आज कौन कर सकता है। आम आदमी पार्टी सेकुलर भी नहीं रही, ऐसा दावा उस पार्टी के लोग भी अब नहीं करते। छात्र नेता उमर खालिद पर यूएपीए जैसे काले कानून की अनुमति देना केजरीवाल सरकार का काम है। दिल्ली नरसंहार दो हज़ार बीस में भी इस पार्टी की भूमिका देखी जा चुकी है। ब्लैक मनी समेत न जाने क्या-क्या भारत में वापस लाने वाला योग गुरु बिजनेसमैन के रूप में सामने आ गया, जिसके प्रोडक्ट में नकली और मिलावटी शहद से लेकर फटी जींस तक शामिल है। बहरहाल, कुछ पत्रकारों ने श्रीधरन और रंजन गोगोई की तुलना करने की कोशिश की है, लेकिन ईमानदारी नहीं बरती है। आइए उस पर भी ई श्रीधरन के संदर्भ में बात करते हैं। मुझे याद है कि वह बारह जनवरी दो हज़ार अट्ठारह में सर्दियों की सुबह थी। धूप खिली हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के लॉन में अचानक जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस मदन लोकूर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाते हैं और कहते हैं कि तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट ठीक ढंग से काम नहीं कर रहा है। जजों की सुनवाई का रोस्टर सिस्टम इतना गलत बनाया गया है कि सारे महत्वपूर्ण केस या तो दीपक मिश्रा की कोर्ट या उनकी पसंद की जजों के पास जा रहे हैं। एक तरह से सीधे-सीधे सुप्रीम कोर्ट में फैले भ्रष्टाचार की तरफ इन चार जजों ने इशारा कर दिया। इसके बाद तहलका मच गया, लेकिन कुछ भी बदला नहीं। दीपक मिश्रा रिटायर हो गए। रंजन गोगोई अगले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बन गए। गोगोई की ईमानदारी के इतने कसीदे पढ़े गए कि सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र भी स्वर्गलोक में शरमा गए होंगे, लेकिन इस शख्स ने अयोध्या विवाद पर विवादास्पद फैसला देकर अपना भविष्य सुरक्षित करने की कोशिश शुरू कर दी। अयोध्या पर जब रंजन गोगोई सुनवाई कर रहे थे तो सुप्रीम कोर्ट में कुछ और भी घटित हो रहा था, जिसकी तरफ मीडिया का ध्यान या तो नहीं था या जानबूझकर नहीं था। अदालत की एक महिला कर्मचारी गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगातार लगा रही थी, लेकिन आमतौर पर ऐसे मामलों को ब्लैकमेलिंग से जोड़ कर खारिज कर दिया जाता है। मीडिया ने भी वही किया। फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने कथित महानता दिखाते हुए इस मामले की जांच के लिए जजों की एक कमेटी बना दी, जिसकी अगुआई मौजूदा चीफ जस्टिस बोबडे साहब को सौंपी गई, लेकिन इसके बाद हुआ क्या। तो इस तरह दो हज़ार अट्ठारह में जो शख्स हमें विद्रोही जज दिख रहा था और सुप्रीम कोर्ट में फैले कथित भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए राबिनहुड बनकर आया था, वो दरअसल राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखता था या राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने के लिए मजबूर किया गया। आज रंजन गोगोई की क्या हैसियत है। वह मात्र राज्यसभा के एक सदस्य भर हैं, लेकिन विश्व ज्यूडीशियल सिस्टम में उनकी इज्जत का जनाजा निकल चुका है। अयोध्या पर विवादास्पद फैसला देकर उन्होंने उस पार्टी को राजनीतिक फायदा पहुंचाया जो अयोध्या के जरिए केंद्र की सत्ता तक पहुंची है। उम्मीद है ई श्रीधरन दूसरे रंजन गोगोई नहीं बनेंगे। अगर वो भी केरल विधानसभा के मात्र भाजपा विधायक बनकर रह गए तो इस देश को बहुत अफसोस होगा।
Xiaomi Mix Fold 3 Launch: पिछले कुछ समय में Motorola, Oppo, Google समेत दूसरी स्मार्टफोन कंपनियां फोल्डेबल फोन पर अपना ध्यान दे रही हैं। सालों पुरानी डिजाइन वाले इन फ्लिप और फोल्ड स्मार्टफोन का ट्रेंड बढ़ा है और यूजर्स में भी क्रेज देखने को मिला है। हाल ही में Motorola ने अपने क्लासिक फ्लिप फोन रेज़र के मॉडर्न वेरियंट Motorola Razr 40 Ultra और Razr 40 लॉन्च किए हैं। अब खबर है कि Xiaomi भी अपना नेक्स्ट-जेनरेशन फोल्डेबल स्मार्टफोन Mix Fold 3 लॉन्च करने के लिए तैयार है। चीन की सोशल मीडिया साइट वीबो (Weibo) पर कंपनी के लेटेस्ट फैक्ट्री अपग्रेड से जुड़े एक सवाल के जवाब में शाओमी के प्रेसिडेंट Lu Weibing ने कहा कि Mix Fold 3 स्मार्टफोन अगस्त 2023 में लॉन्च होगा। उन्होंने आगे बताया कि आने वाला फोल्डेबल फोन पिछले Mix Fold 2 की तुलना में ज्यादा मजबूत और पतला होगा। सैमसंग के लेटेस्ट फोल्डेबल स्मार्टफोन को Galaxy Fold 4 से कड़ी टक्कर मिली थी। कुछ लीक में पता चला है कि आने वाला मिक्स फोल्ड 3 स्मार्टफोन Flex मोड के साथ आएगा। और इसमें 4800mAh की बड़ी बैटरी मिलेगी। बैटरी 120W फास्ट चार्जिंग और 50W वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट करती है। फोन में फ्रंट कैमरे के लिए 5x पेरिस्कोप ज़ूम लेंस मिलने की उम्मीद है। पिछले मिक्स फोल्ड 2 की तरह ही उम्मीद है कि शाओमी का नया फोल्डेबल डिवाइस चीन तक ही सीमित रहेगा। शाओमी ने अगस्त 2023 में अपना मिक्स फोल्ड 2 स्मार्टफोन लॉन्च किया था। इस फोन में क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 8+ Gen 1 चिपसेट दिया गया है। इस डिवाइस में 6. 56 इंच AMOLED कवर स्क्रीन मिलती है। स्क्रीन का रिफ्रेश रेट 120 हर्ट्ज़ है। हैंडसेट प्रोटेक्शन के लिए गोरिल्ला ग्लास विक्टस दिया गया है। इनर स्क्रीन 8. 02 इंच की है जो सैमसंग के लेटेस्ट फोल्डेबल फोन की तुलना में आधा इंच ज्यादा है।
Xiaomi Mix Fold तीन Launch: पिछले कुछ समय में Motorola, Oppo, Google समेत दूसरी स्मार्टफोन कंपनियां फोल्डेबल फोन पर अपना ध्यान दे रही हैं। सालों पुरानी डिजाइन वाले इन फ्लिप और फोल्ड स्मार्टफोन का ट्रेंड बढ़ा है और यूजर्स में भी क्रेज देखने को मिला है। हाल ही में Motorola ने अपने क्लासिक फ्लिप फोन रेज़र के मॉडर्न वेरियंट Motorola Razr चालीस Ultra और Razr चालीस लॉन्च किए हैं। अब खबर है कि Xiaomi भी अपना नेक्स्ट-जेनरेशन फोल्डेबल स्मार्टफोन Mix Fold तीन लॉन्च करने के लिए तैयार है। चीन की सोशल मीडिया साइट वीबो पर कंपनी के लेटेस्ट फैक्ट्री अपग्रेड से जुड़े एक सवाल के जवाब में शाओमी के प्रेसिडेंट Lu Weibing ने कहा कि Mix Fold तीन स्मार्टफोन अगस्त दो हज़ार तेईस में लॉन्च होगा। उन्होंने आगे बताया कि आने वाला फोल्डेबल फोन पिछले Mix Fold दो की तुलना में ज्यादा मजबूत और पतला होगा। सैमसंग के लेटेस्ट फोल्डेबल स्मार्टफोन को Galaxy Fold चार से कड़ी टक्कर मिली थी। कुछ लीक में पता चला है कि आने वाला मिक्स फोल्ड तीन स्मार्टफोन Flex मोड के साथ आएगा। और इसमें चार हज़ार आठ सौmAh की बड़ी बैटरी मिलेगी। बैटरी एक सौ बीस वाट फास्ट चार्जिंग और पचास वाट वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट करती है। फोन में फ्रंट कैमरे के लिए पाँचx पेरिस्कोप ज़ूम लेंस मिलने की उम्मीद है। पिछले मिक्स फोल्ड दो की तरह ही उम्मीद है कि शाओमी का नया फोल्डेबल डिवाइस चीन तक ही सीमित रहेगा। शाओमी ने अगस्त दो हज़ार तेईस में अपना मिक्स फोल्ड दो स्मार्टफोन लॉन्च किया था। इस फोन में क्वालकॉम स्नैपड्रैगन आठ+ Gen एक चिपसेट दिया गया है। इस डिवाइस में छः. छप्पन इंच AMOLED कवर स्क्रीन मिलती है। स्क्रीन का रिफ्रेश रेट एक सौ बीस हर्ट्ज़ है। हैंडसेट प्रोटेक्शन के लिए गोरिल्ला ग्लास विक्टस दिया गया है। इनर स्क्रीन आठ. दो इंच की है जो सैमसंग के लेटेस्ट फोल्डेबल फोन की तुलना में आधा इंच ज्यादा है।
(ब्यूरो कार्यालय) सिवनी (साई)। कोरोना वायरस के कहर के चलते पूरे भारत देश में 14 अप्रैल तक का लॉकडाउन है। इसीलिए लॉकडाउन के दौरान ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन जैसे मोटर वाहनों से जुड़े कागजात एक्सपायर्ड हो रहे हों तो घबराइए मत। ऐसा इसलिए क्योंकि आपके ये कागजात 30 जून तक वैध रहेंगे। इसके लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने जरूरी निर्देश राज्यों को जारी कर दिया है। जी हां, केंद्र सरकार ने एक फरवरी से खत्म ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट और रजिस्ट्रेशन जैसे दस्तावेज की वैधता 30 जून तक के लिये बढ़ाने का फैसला किया है। इस फैसले से पूरे मध्यप्रदेश में कई लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों परामर्श दिया है। उनसे ऐसे दस्तावेज को 30 जून तक वैध माने जाने को कहा है जिनकी 30 जून 2020 के पहले किसी भी तारीख के बीच वैधता समाप्त हो चुकी है या होने वाली है। इसमें ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट और रजिस्ट्रेशन जैसे दस्तावेज हैं। आपको बता दें कि यह कदम उन नागरिकों की मदद के लिये उठाया गया है जिन्हें मोटर वाहन कानून और केंद्रीय मोटर वाहन नियम के तहत 'लॉकडाउन' के दौरान परिवहन दफ्तर बंद होने के कारण विभिन्न दस्तावेजों की वैलिडिटी को रिन्यू कराने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने कामर्शल परमिट पर टैक्सीकृबस आदि जैसे वाहन चलाने वालों को भी राहत दी है। परिवहन मंत्रालय ने राज्यों से कहा है लॉकडाउन की अवधि में टैक्सी बस आदि तो चल नहीं रहे हैं। ऐसे में इन कामर्शल परमिट धारकों को इस अवधि के लिए कर के भुगतान से छूट दी जाए।
सिवनी । कोरोना वायरस के कहर के चलते पूरे भारत देश में चौदह अप्रैल तक का लॉकडाउन है। इसीलिए लॉकडाउन के दौरान ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन जैसे मोटर वाहनों से जुड़े कागजात एक्सपायर्ड हो रहे हों तो घबराइए मत। ऐसा इसलिए क्योंकि आपके ये कागजात तीस जून तक वैध रहेंगे। इसके लिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने जरूरी निर्देश राज्यों को जारी कर दिया है। जी हां, केंद्र सरकार ने एक फरवरी से खत्म ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट और रजिस्ट्रेशन जैसे दस्तावेज की वैधता तीस जून तक के लिये बढ़ाने का फैसला किया है। इस फैसले से पूरे मध्यप्रदेश में कई लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों परामर्श दिया है। उनसे ऐसे दस्तावेज को तीस जून तक वैध माने जाने को कहा है जिनकी तीस जून दो हज़ार बीस के पहले किसी भी तारीख के बीच वैधता समाप्त हो चुकी है या होने वाली है। इसमें ड्राइविंग लाइसेंस, परमिट और रजिस्ट्रेशन जैसे दस्तावेज हैं। आपको बता दें कि यह कदम उन नागरिकों की मदद के लिये उठाया गया है जिन्हें मोटर वाहन कानून और केंद्रीय मोटर वाहन नियम के तहत 'लॉकडाउन' के दौरान परिवहन दफ्तर बंद होने के कारण विभिन्न दस्तावेजों की वैलिडिटी को रिन्यू कराने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने कामर्शल परमिट पर टैक्सीकृबस आदि जैसे वाहन चलाने वालों को भी राहत दी है। परिवहन मंत्रालय ने राज्यों से कहा है लॉकडाउन की अवधि में टैक्सी बस आदि तो चल नहीं रहे हैं। ऐसे में इन कामर्शल परमिट धारकों को इस अवधि के लिए कर के भुगतान से छूट दी जाए।
*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
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(१) किवणाणं धनं णाआणं फणमणी केशराई सीहाणं । कुलवालिआणं त्यणआ कुत्तो छिप्पन्ति अगुआणं ॥ ४५८ ।। [कृपणानां धनं नागानां फणमणिः केसराः सिहानाम् । कुलबालिकानां स्तनाः कुतः सुश्यन्तेऽमृतानाम् ।। इति संस्कृतम् ] कारकस्य च बहीपु क्रियासु सद्वृत्तिपिकम् गथा---- (२) स्त्रियति कूणति वेति विचलति निमिपति विलोकगति तिर्यक् । अन्तर्नन्दति चुम्चितुमिच्छति नवपरिणया वः शने ॥४५९॥ साथ एकका सम्बन्ध होनेपर प्रथम प्रकारका] दीपकालद्वार होता है। [इस क्रियाका उदाहरण] जैसे(१) कृपणांके धन सपके फणकी मणि, सिंहों के केसर और कुलीन नालिकाओं के को उनके जीवित रहते [विना मरे] कैसे हुआ जा सकता है ॥ ४९८ ॥ एक ही किया है। उसके ही साथ मन, फणमणि, केगर और सन ने समन्ध होनेगे यह श्लोक 'किपदीपक कारण होता है। हमे वर्णनी -निकाणी सन प्रात हैं और कान, नागी फणकी गणि. देख देगा असणं होनेगे अग्रस्त है और उसमान से प्रतीत होते हैं । (२) [इसी प्रकार] बहुत सी क्रियाओंमें एक नाम कारकका ग्रहण [अर्थात् अनेक गाव एक कारकासन्ध] [कारकदीपक नागको प्रका] []होता है। नवोटा व उ [पतिकै] पटैग[फा कभी] वर्तत हो जाती है पति निसरनेके लिए होनेपर ] सनित हो उसी [दर भी पतिव मासे बचने के लिए गिनानी के देवी ती आर्गे कटकर लेती [परन्त उत्सनापन] विरली गोगे इंगती है, सेवी और चपन करना चाहती ॥ १५ ॥
किवणाणं धनं णाआणं फणमणी केशराई सीहाणं । कुलवालिआणं त्यणआ कुत्तो छिप्पन्ति अगुआणं ॥ चार सौ अट्ठावन ।। [कृपणानां धनं नागानां फणमणिः केसराः सिहानाम् । कुलबालिकानां स्तनाः कुतः सुश्यन्तेऽमृतानाम् ।। इति संस्कृतम् ] कारकस्य च बहीपु क्रियासु सद्वृत्तिपिकम् गथा---- स्त्रियति कूणति वेति विचलति निमिपति विलोकगति तिर्यक् । अन्तर्नन्दति चुम्चितुमिच्छति नवपरिणया वः शने ॥चार सौ उनसठ॥ साथ एकका सम्बन्ध होनेपर प्रथम प्रकारका] दीपकालद्वार होता है। [इस क्रियाका उदाहरण] जैसे कृपणांके धन सपके फणकी मणि, सिंहों के केसर और कुलीन नालिकाओं के को उनके जीवित रहते [विना मरे] कैसे हुआ जा सकता है ॥ चार सौ अट्ठानवे ॥ एक ही किया है। उसके ही साथ मन, फणमणि, केगर और सन ने समन्ध होनेगे यह श्लोक 'किपदीपक कारण होता है। हमे वर्णनी -निकाणी सन प्रात हैं और कान, नागी फणकी गणि. देख देगा असणं होनेगे अग्रस्त है और उसमान से प्रतीत होते हैं । [इसी प्रकार] बहुत सी क्रियाओंमें एक नाम कारकका ग्रहण [अर्थात् अनेक गाव एक कारकासन्ध] [कारकदीपक नागको प्रका] []होता है। नवोटा व उ [पतिकै] पटैग[फा कभी] वर्तत हो जाती है पति निसरनेके लिए होनेपर ] सनित हो उसी [दर भी पतिव मासे बचने के लिए गिनानी के देवी ती आर्गे कटकर लेती [परन्त उत्सनापन] विरली गोगे इंगती है, सेवी और चपन करना चाहती ॥ पंद्रह ॥
गुजरात टाइटंस के असिस्टेंट कोच आशीष कपूर ने बताया कि कप्तान हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) ने मुंबई इंडियंस (Mumbai Indians) के खिलाफ मुकाबले में गेंदबाजी क्यों नहीं की। उन्होंने इसके पीछे बड़ा कारण बताया है। आशीष कपूर के मुताबिक मैच से पहले हार्दिक पांड्या थोड़ा इंजरी का शिकार हो गए थे और इसी वजह से उन्होंने गेंदबाजी नहीं की और मोहित शर्मा से शुरूआती ओवर्स डलवाने पड़े। हार्दिक पांड्या गुजरात टाइटंस के लिए नई गेंद से गेंदबाजी करते थे और दबाव बनाकर रखते थे। हालांकि मुंबई इंडियंस के खिलाफ मैच में उन्होंने बिल्कुल भी गेंदबाजी नहीं की और इससे टीम को काफी नुकसान उठाना पड़ा। मुंबई की टीम ने 200 से ज्यादा रन इस मैच में बना दिए और राशिद खान के अलावा बाकी गेंदबाज बेअसर रहे। मोहित शर्मा और मोहम्मद शमी काफी ज्यादा महंगे साबित हुए। मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आशीष कपूर से पूछा गया कि कप्तान हार्दिक पांड्या ने एक भी ओवर गेंदबाजी नहीं की, जबकि दूसरे गेंदबाज महंगे साबित हो रहे थे। इसके जवाब में उन्होंने कहा, हमें प्लान में थोड़ा बदलाव लाना पड़ा क्योंकि मैच से तुरंत पहले हार्दिक को इंजरी हो गई। इसी वजह से वो गेंदबाजी नहीं कर पाए। इसलिए हमें पूरी प्लानिंग ही चेंज करनी पड़ी कि कौन गेंदबाजी करेगा। अभी तक हार्दिक हमारे लिए गेंदबाजी में ओपन कर रहे थे लेकिन उनके चोटिल होने के बाद मोहित शर्मा ने शुरूआत में गेंदबाजी की। आपको बता दें कि मुंबई इंडियंस ने वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में गुजरात टाइटंस को 27 रनों से हरा दिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए मुंबई इंडियंस ने निर्धारित 20 ओवरों में 5 विकेट के नुकसान पर 218 रनों का विशाल स्कोर बनाया। इस विशाल स्कोर के जवाब में गुजरात टाइटंस की टीम 8 विकेट खोकर 191 रन ही बना पाई।
गुजरात टाइटंस के असिस्टेंट कोच आशीष कपूर ने बताया कि कप्तान हार्दिक पांड्या ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ मुकाबले में गेंदबाजी क्यों नहीं की। उन्होंने इसके पीछे बड़ा कारण बताया है। आशीष कपूर के मुताबिक मैच से पहले हार्दिक पांड्या थोड़ा इंजरी का शिकार हो गए थे और इसी वजह से उन्होंने गेंदबाजी नहीं की और मोहित शर्मा से शुरूआती ओवर्स डलवाने पड़े। हार्दिक पांड्या गुजरात टाइटंस के लिए नई गेंद से गेंदबाजी करते थे और दबाव बनाकर रखते थे। हालांकि मुंबई इंडियंस के खिलाफ मैच में उन्होंने बिल्कुल भी गेंदबाजी नहीं की और इससे टीम को काफी नुकसान उठाना पड़ा। मुंबई की टीम ने दो सौ से ज्यादा रन इस मैच में बना दिए और राशिद खान के अलावा बाकी गेंदबाज बेअसर रहे। मोहित शर्मा और मोहम्मद शमी काफी ज्यादा महंगे साबित हुए। मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आशीष कपूर से पूछा गया कि कप्तान हार्दिक पांड्या ने एक भी ओवर गेंदबाजी नहीं की, जबकि दूसरे गेंदबाज महंगे साबित हो रहे थे। इसके जवाब में उन्होंने कहा, हमें प्लान में थोड़ा बदलाव लाना पड़ा क्योंकि मैच से तुरंत पहले हार्दिक को इंजरी हो गई। इसी वजह से वो गेंदबाजी नहीं कर पाए। इसलिए हमें पूरी प्लानिंग ही चेंज करनी पड़ी कि कौन गेंदबाजी करेगा। अभी तक हार्दिक हमारे लिए गेंदबाजी में ओपन कर रहे थे लेकिन उनके चोटिल होने के बाद मोहित शर्मा ने शुरूआत में गेंदबाजी की। आपको बता दें कि मुंबई इंडियंस ने वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में गुजरात टाइटंस को सत्ताईस रनों से हरा दिया। पहले बल्लेबाजी करते हुए मुंबई इंडियंस ने निर्धारित बीस ओवरों में पाँच विकेट के नुकसान पर दो सौ अट्ठारह रनों का विशाल स्कोर बनाया। इस विशाल स्कोर के जवाब में गुजरात टाइटंस की टीम आठ विकेट खोकर एक सौ इक्यानवे रन ही बना पाई।
कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने कंबाइंड हायर सेकेंडरी लेवल (CHSL) टियर- I भर्ती परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिया है। जो उम्मीदवार परीक्षा में बैठेंगे, वे सभी क्षेत्रीय आधारित आधिकारिक वेबसाइटों के माध्यम से हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं। टियर- I भर्ती परीक्षा 12 से 27 अप्रैल के बीच आयोजित की जाएगी, जबकि पोल बाउंड पश्चिम बंगाल के उम्मीदवारों के लिए परीक्षा का आयोजन 21, 22 मई को किया जाएगा। उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया के तीन चरणों में उपस्थित होना होगा। पहला चरण कंप्यूटर-आधारित परीक्षा है जो 200 अंकों के लिए आयोजित की जाएगी और प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 0. 5 अंक की नेगेटिव मार्किंग होगी। लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) / जूनियर सचिवालय सहायक (JSA) के पद के लिए चयनित उम्मीदवारों को 63,200 रुपये का भुगतान किया जाएगा। डीईओ और डीईओ ग्रेड ए के पद के लिए चयनित लोगों को 81,100 रुपये तक का वेतन मिलेगा। पीए और एसए के लिए वेतन भी 81,100 रुपये तक होगा। एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वेबसाइट के होमपेज पर आपको 'download admit card' का लिंक मिलेगा। उसपर क्लिक करें। क्लिक करने के बाद नया पेज खुल जाएगा। अब यहां आपको मांगी गईं जरूरी डिटेल्स रजिस्ट्रेशन नंबर, जन्मतिथि आदि डालनी होंगी। डिटेल्स डालने के बाद सबमिट करने पर आपका एडमिट कार्ड आपके सामने स्क्रीन पर होगा। अब आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं। इसका प्रिंट आउट भी ले सकते हैं।
कर्मचारी चयन आयोग ने कंबाइंड हायर सेकेंडरी लेवल टियर- I भर्ती परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिया है। जो उम्मीदवार परीक्षा में बैठेंगे, वे सभी क्षेत्रीय आधारित आधिकारिक वेबसाइटों के माध्यम से हॉल टिकट डाउनलोड कर सकते हैं। टियर- I भर्ती परीक्षा बारह से सत्ताईस अप्रैल के बीच आयोजित की जाएगी, जबकि पोल बाउंड पश्चिम बंगाल के उम्मीदवारों के लिए परीक्षा का आयोजन इक्कीस, बाईस मई को किया जाएगा। उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया के तीन चरणों में उपस्थित होना होगा। पहला चरण कंप्यूटर-आधारित परीक्षा है जो दो सौ अंकों के लिए आयोजित की जाएगी और प्रत्येक गलत उत्तर के लिए शून्य. पाँच अंक की नेगेटिव मार्किंग होगी। लोअर डिवीजन क्लर्क / जूनियर सचिवालय सहायक के पद के लिए चयनित उम्मीदवारों को तिरेसठ,दो सौ रुपयापये का भुगतान किया जाएगा। डीईओ और डीईओ ग्रेड ए के पद के लिए चयनित लोगों को इक्यासी,एक सौ रुपयापये तक का वेतन मिलेगा। पीए और एसए के लिए वेतन भी इक्यासी,एक सौ रुपयापये तक होगा। एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। वेबसाइट के होमपेज पर आपको 'download admit card' का लिंक मिलेगा। उसपर क्लिक करें। क्लिक करने के बाद नया पेज खुल जाएगा। अब यहां आपको मांगी गईं जरूरी डिटेल्स रजिस्ट्रेशन नंबर, जन्मतिथि आदि डालनी होंगी। डिटेल्स डालने के बाद सबमिट करने पर आपका एडमिट कार्ड आपके सामने स्क्रीन पर होगा। अब आप इसे डाउनलोड कर सकते हैं। इसका प्रिंट आउट भी ले सकते हैं।
'अरे छोड़िये! ', नीतीश कुमार ने इस टिप्पणी के साथ ही अपने पूर्व सहयोगी आर. सी. पी सिंह के उस बयान पर पूछे गए सवालों को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि जनता दल (यूनाइटेड) और लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल का विलय होगा. बिहार के सीएम की तरफ से ऐसी प्रतिक्रिया आम बात है. वह अक्सर अपने अगले कदम के बारे में किसी भी कयास को इसी तरह पूरी शिद्दत से खारिज कर देते हैं - शायद इसलिए भी कि जब तक वह कोई कदम नहीं उठाते तब तक खुद उस पर अटकलों को हवा नहीं दे सकते. 1994 में जब उन्होंने लालू यादव से नाता तोड़ा तब किसी ने सोचा था कि दो दशक बाद वह फिर से उनके साथ होंगे? इसके बाद जब 2015 में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर उन्हें साथ लेकर आए तब किसे पता था कि नीतीश दो साल बाद लालू से फिर अलग हो जाएंगे - और वह भी नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाने के लिए, जिनकी प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी भारतीय जनता पार्टी के साथ उनका 17 साल पुराना गठजोड़ टूटने की वजह थी? और 2017 में भी, कौन अनुमान लगा सकता था कि वह पांच साल बाद फिर लालू के साथ होंगे? तो, इसे छोड़ ही दीजिए! आने वाले महीनों में वह क्या करने वाले हैं, इसका अंदाजा शायद खुद नीतीश कुमार भी नहीं लगा सकते. लेकिन ऐसा लगता है कि लालू और तेजस्वी यादव को पता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले वे क्या करना चाहते हैं. लालू और तेजस्वी की रणनीति का संकेत पिछले सोमवार को दिल्ली में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पारित प्रस्ताव से मिलता है. इसमें कहा गया है कि राजद का नाम, उसका चुनाव चिह्न बदलने और उससे जुड़े मुद्दों पर अंतिम फैसला लालू यादव या तेजस्वी यादव करेंगे. इस प्रस्ताव ने तो राजद नेताओं को भी हैरानी में डाल दिया. आखिर इस रिजोल्यूशन की जरूरत क्या थी? और इसके पीछे संदर्भ और उद्देश्य! यही वजह है कि जदयू-राजद विलय को लेकर अटकलें एक बार फिर तेज हो गईं. वैसे यह कोई नई बात नहीं है. इससे पहले, मुलायम सिंह यादव भी जनता दल के टूटकर बने गुटों को साथ लाने के प्रयास कर चुके हैं. लालू यादव 2015 में जब नीतीश कुमार को सीएम पद के उम्मीदवार के तौर स्वीकारने को तैयार नहीं दिख रहे थे, तब वो जनता दल घटकों को साथ लाने की महत्वाकांक्षा पाले रहे मुलायम ही थे जिन्होंने उन्हें इसके लिए राजी किया. अब समाजवादी पार्टी नेता इस दुनिया में नहीं हैं तो इस कवायद को आगे बढ़ाने वाली किसी बड़ी ताकत का भी अभाव हो गया है. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. लेकिन लालू और तेजस्वी इसे आगे बढ़ाने के इच्छुक नजर आ रहे हैं, हालांकि थोड़े कम तामझाम के साथ, जैसा राजद के प्रस्ताव से स्पष्ट है. उनके पास कारण भी हैं. वैसे भी, इस व्यापक उद्देश्य के बिना तेजस्वी के लिए नीतीश कुमार के साथ फिर गठबंधन का कोई मतलब नहीं था, जिन्होंने 2017 में राजद से किनारा करने और भाजपा के साथ फिर गठबंधन के लिए उस समय अपने डिप्टी रहे तेजस्वी के खिलाफ सीबीआई के एफआईआर को अपना हथियार बनाया था. तेजस्वी क्यों चाहेंगे कि नीतीश उन्हें फिर से इस्तेमाल कर पाएं? आखिरकार, यह युवा राजद नेता पिछले पांच सालों में सियासत की राह में काफी आगे आ चुका है. पिछले विधानसभा चुनाव में युवाओं को अपने साथ जोड़ने और अपने पिता के मुस्लिम-यादव समीकरण को भुनाने में काफी हद तक सफल भी रहे. वह यकीनन आज बिहार में सबसे लोकप्रिय नेता हैं, और नीतीश कुमार के साथ छोड़ने के बाद भाजपा के पास पूरे बिहार में जनाधार वाला कोई चेहरा भी नहीं है. नीतीश जब भाजपा के साथ और उनके रिश्ते दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे थे, तेजस्वी उनके रास्ते अलग होने का इंतजार कर सकते थे. लेकिन वह लोगों की सोच से ज्यादा चतुर राजनेता बनकर उभरे हैं. आखिरकार, जदयू-भाजपा के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर का जोखिम मोल लेकर और 2020 के अपने मुख्य जनाधार को दांव पर लगाकर वह फिर डिप्टी सीएम क्यों बने होंगे? और राजद ने क्यों अपने दो मंत्रियों - कार्तिक कुमार और सुधाकर सिंह - की बलि दी, जबकि नीतीश कुमार खुद बैकफुट पर हैं? अपने बलबूते ही एक लोकप्रिय, सशक्त नेता के तौर पर उभरने के बाद तेजस्वी आखिर नीतीश के बाद नंबर दो की भूमिका निभाने और अपने और अपने दल के दीर्घकालिक हितों से समझौता करने को क्यों तैयार हुए होंगे? यही सवाल हमें राजद के प्रस्ताव और कभी नीतीश कुमार के विश्वस्त सहयोग रहे आरसीपी सिंह जदयू-राजद विलय संबंधी बयान के बारे में सोचने को विवश करता है. लालू-तेजस्वी अच्छी तरह जानते हैं कि मजबूरी ने नीतीश कुमार को उनके पास लौटने को बाध्य किया है. भाजपा उन्हें राजनीतिक तौर पर खत्म करने की जुगत में लगी थी. मोदी की पार्टी बिहार में कब तक नीतीश कुमार के आगे छोटा भाई बनी रहती? वह 2010 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री को नीचा दिखाने वाले नीतीश कुमार के दिए घाव - पहले पटना में भाजपा नेताओं के लिए रात्रिभोज रद्द करना और फिर गुजरात की तरफ से पांच करोड़ रुपये की बाढ़ राहत राशि अस्वीकारना - कब तक सह सकती थी? इसीलिए, 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 243 सदस्यीय विधानसभा में जदयू का आंकड़ा 43 पर सिमटा देने के लिए मोदी के स्वयंभू 'हनुमान' चिराग पासवान का इस्तेमाल किया. भाजपा अब गठबंधन में बड़ा भाई बन चुकी थी और भाजपा नेताओं ने नीतीश को हर दिन इसका एहसास कराया, जैसे कि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर उनकी सरकार पर ताने कसे और उनकी आलोचना की. पिछले विधानसभा चुनाव ने यह भी दिखाया कि नीतीश की खुद की पुरानी छाया ही बिहार में उन पर भारी पड़ी. तार्किक आधार पर 'बड़े भाई' का अगला कदम - जैसा उसका ट्रैक रिकॉर्ड भी है - यही होना था कि वह सियासी तौर पर खुद पर भारी पड़ते रहे नीतीश कुमार को किसी भी तरह से किनारे लगा दे. जब शिवसेना के 56 में से 40 विधायक अपनी पार्टी से टूट सकते हैं तो यहां तो जदयू के पास कुल 45 विधायक ही बचे थे और नीतीश की हैसियत घटने के साथ वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित भी थे. भाजपा के लिए सवाल बस यही था कि समय क्या चुना जाए - अगले लोकसभा चुनाव से पहले का या बाद का? बहरहाल, जब भी ऐसा होता नीतीश के पास कुछ नहीं बचता - नजर आते तो बस दूर हो चुके सहयोगी, खत्म जनाधार और एक अंधकारमय भविष्य. यहां तक कि अगर वह एक बार पूरा दमखम लगाकर आखिरी लड़ाई लड़ने की सोचते भी तो उन्हें भाजपा से लेकर राजद, चिराग पासवान और न जाने किस-किस सियासी दुश्मन का मुकाबला करना पड़ता, जिसके आगे टिक पाना आसान नहीं होता. ऐसी परिस्थितियों में नीतीश कुमार के लिए आगे की सियासी राह हर दिन जीवन-मरण का सवाल बन जाती. उनकी स्थिति किस कदर कमजोर हो जाती, यह बात वह भलीभांति समझ गए होंगे. ऐसे में लालू यादव और तेजस्वी शायद उन्हें अधिक सुरक्षित नजर आए होंगे. लेकिन उन्हें तो इस सौदे में इस सबसे ज्यादा बड़ा ही कुछ चाहिए. यदि नीतीश अपनी पार्टी के राजद में विलय पर सहमत हो जाते हैं, तो तेजस्वी के नेतृत्व वाला एकीकृत संगठन बिहार में एक मजबूत ताकत बनकर उभर सकता है. बदले में यादव पिता-पुत्र अपनी पूरी ताकत नीतीश की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में लगा देंगे. ऐसे में भले ही मोदी की भाजपा 2024 में अपनी सत्ता बरकरार रखे, नीतीश कुमार राजद - या फिर नए संगठन का नाम जो भी नाम रखा जाए - उसका राष्ट्रीय चेहरा बन सकते हैं और तेजस्वी को भी एक साल या उससे अधिक समय के लिए सीएम की कुर्सी पर बैठने का मौका मिल सकता है. लालू यादव और नीतीश कुमार दोनों की राजनीतिक विरासत के उत्तराधिकारी के तौर पर तेजस्वी आगे लंबे समय के लिए बिहार की एक मजबूत सियासी ताकत बन सकते हैं. नीतीश कुमार को भी इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी. वैसे भी उन्हें पता होना चाहिए कि भाजपा के साथ या उसके बिना किसी भी तरह से वह अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा नहीं कर सकते थे. लेकिन लालू और तेजस्वी के साथ सही सामंजस्य बैठाकर वह राष्ट्रीय राजनीतिक मंच पर अपनी प्रासंगिकता बनी रहने की उम्मीद जरूर कर सकते हैं. यदि नीतीश कुमार किसी अन्य विकल्प पर विचार करते हैं तो उन्हें कई दलों की तरफ से 'शत्रुतापूर्ण टेकओवर' की कोशिशें झेलने के लिए तैयार होना चाहिए. वैसे वह काफी होशियार खिलाड़ी हैं. कोई अचरज की बात नहीं होगी अगर नीतीश कुमार को राजद का राजनीतिक प्रस्ताव पेश होने के पहले से ही उसके बारे में पता हो. डीके सिंह दिप्रिंट के राजनीतिक संपादक हैं. @dksingh73 हैंडल से ट्वीट करते हैं. यहां व्यक्त विचार निजी हैं. (इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
'अरे छोड़िये! ', नीतीश कुमार ने इस टिप्पणी के साथ ही अपने पूर्व सहयोगी आर. सी. पी सिंह के उस बयान पर पूछे गए सवालों को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि जनता दल और लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल का विलय होगा. बिहार के सीएम की तरफ से ऐसी प्रतिक्रिया आम बात है. वह अक्सर अपने अगले कदम के बारे में किसी भी कयास को इसी तरह पूरी शिद्दत से खारिज कर देते हैं - शायद इसलिए भी कि जब तक वह कोई कदम नहीं उठाते तब तक खुद उस पर अटकलों को हवा नहीं दे सकते. एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में जब उन्होंने लालू यादव से नाता तोड़ा तब किसी ने सोचा था कि दो दशक बाद वह फिर से उनके साथ होंगे? इसके बाद जब दो हज़ार पंद्रह में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर उन्हें साथ लेकर आए तब किसे पता था कि नीतीश दो साल बाद लालू से फिर अलग हो जाएंगे - और वह भी नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाने के लिए, जिनकी प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी भारतीय जनता पार्टी के साथ उनका सत्रह साल पुराना गठजोड़ टूटने की वजह थी? और दो हज़ार सत्रह में भी, कौन अनुमान लगा सकता था कि वह पांच साल बाद फिर लालू के साथ होंगे? तो, इसे छोड़ ही दीजिए! आने वाले महीनों में वह क्या करने वाले हैं, इसका अंदाजा शायद खुद नीतीश कुमार भी नहीं लगा सकते. लेकिन ऐसा लगता है कि लालू और तेजस्वी यादव को पता है कि दो हज़ार चौबीस के लोकसभा चुनाव से पहले वे क्या करना चाहते हैं. लालू और तेजस्वी की रणनीति का संकेत पिछले सोमवार को दिल्ली में राष्ट्रीय जनता दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पारित प्रस्ताव से मिलता है. इसमें कहा गया है कि राजद का नाम, उसका चुनाव चिह्न बदलने और उससे जुड़े मुद्दों पर अंतिम फैसला लालू यादव या तेजस्वी यादव करेंगे. इस प्रस्ताव ने तो राजद नेताओं को भी हैरानी में डाल दिया. आखिर इस रिजोल्यूशन की जरूरत क्या थी? और इसके पीछे संदर्भ और उद्देश्य! यही वजह है कि जदयू-राजद विलय को लेकर अटकलें एक बार फिर तेज हो गईं. वैसे यह कोई नई बात नहीं है. इससे पहले, मुलायम सिंह यादव भी जनता दल के टूटकर बने गुटों को साथ लाने के प्रयास कर चुके हैं. लालू यादव दो हज़ार पंद्रह में जब नीतीश कुमार को सीएम पद के उम्मीदवार के तौर स्वीकारने को तैयार नहीं दिख रहे थे, तब वो जनता दल घटकों को साथ लाने की महत्वाकांक्षा पाले रहे मुलायम ही थे जिन्होंने उन्हें इसके लिए राजी किया. अब समाजवादी पार्टी नेता इस दुनिया में नहीं हैं तो इस कवायद को आगे बढ़ाने वाली किसी बड़ी ताकत का भी अभाव हो गया है. हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें. लेकिन लालू और तेजस्वी इसे आगे बढ़ाने के इच्छुक नजर आ रहे हैं, हालांकि थोड़े कम तामझाम के साथ, जैसा राजद के प्रस्ताव से स्पष्ट है. उनके पास कारण भी हैं. वैसे भी, इस व्यापक उद्देश्य के बिना तेजस्वी के लिए नीतीश कुमार के साथ फिर गठबंधन का कोई मतलब नहीं था, जिन्होंने दो हज़ार सत्रह में राजद से किनारा करने और भाजपा के साथ फिर गठबंधन के लिए उस समय अपने डिप्टी रहे तेजस्वी के खिलाफ सीबीआई के एफआईआर को अपना हथियार बनाया था. तेजस्वी क्यों चाहेंगे कि नीतीश उन्हें फिर से इस्तेमाल कर पाएं? आखिरकार, यह युवा राजद नेता पिछले पांच सालों में सियासत की राह में काफी आगे आ चुका है. पिछले विधानसभा चुनाव में युवाओं को अपने साथ जोड़ने और अपने पिता के मुस्लिम-यादव समीकरण को भुनाने में काफी हद तक सफल भी रहे. वह यकीनन आज बिहार में सबसे लोकप्रिय नेता हैं, और नीतीश कुमार के साथ छोड़ने के बाद भाजपा के पास पूरे बिहार में जनाधार वाला कोई चेहरा भी नहीं है. नीतीश जब भाजपा के साथ और उनके रिश्ते दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे थे, तेजस्वी उनके रास्ते अलग होने का इंतजार कर सकते थे. लेकिन वह लोगों की सोच से ज्यादा चतुर राजनेता बनकर उभरे हैं. आखिरकार, जदयू-भाजपा के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर का जोखिम मोल लेकर और दो हज़ार बीस के अपने मुख्य जनाधार को दांव पर लगाकर वह फिर डिप्टी सीएम क्यों बने होंगे? और राजद ने क्यों अपने दो मंत्रियों - कार्तिक कुमार और सुधाकर सिंह - की बलि दी, जबकि नीतीश कुमार खुद बैकफुट पर हैं? अपने बलबूते ही एक लोकप्रिय, सशक्त नेता के तौर पर उभरने के बाद तेजस्वी आखिर नीतीश के बाद नंबर दो की भूमिका निभाने और अपने और अपने दल के दीर्घकालिक हितों से समझौता करने को क्यों तैयार हुए होंगे? यही सवाल हमें राजद के प्रस्ताव और कभी नीतीश कुमार के विश्वस्त सहयोग रहे आरसीपी सिंह जदयू-राजद विलय संबंधी बयान के बारे में सोचने को विवश करता है. लालू-तेजस्वी अच्छी तरह जानते हैं कि मजबूरी ने नीतीश कुमार को उनके पास लौटने को बाध्य किया है. भाजपा उन्हें राजनीतिक तौर पर खत्म करने की जुगत में लगी थी. मोदी की पार्टी बिहार में कब तक नीतीश कुमार के आगे छोटा भाई बनी रहती? वह दो हज़ार दस में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री को नीचा दिखाने वाले नीतीश कुमार के दिए घाव - पहले पटना में भाजपा नेताओं के लिए रात्रिभोज रद्द करना और फिर गुजरात की तरफ से पांच करोड़ रुपये की बाढ़ राहत राशि अस्वीकारना - कब तक सह सकती थी? इसीलिए, दो हज़ार बीस के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने दो सौ तैंतालीस सदस्यीय विधानसभा में जदयू का आंकड़ा तैंतालीस पर सिमटा देने के लिए मोदी के स्वयंभू 'हनुमान' चिराग पासवान का इस्तेमाल किया. भाजपा अब गठबंधन में बड़ा भाई बन चुकी थी और भाजपा नेताओं ने नीतीश को हर दिन इसका एहसास कराया, जैसे कि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर उनकी सरकार पर ताने कसे और उनकी आलोचना की. पिछले विधानसभा चुनाव ने यह भी दिखाया कि नीतीश की खुद की पुरानी छाया ही बिहार में उन पर भारी पड़ी. तार्किक आधार पर 'बड़े भाई' का अगला कदम - जैसा उसका ट्रैक रिकॉर्ड भी है - यही होना था कि वह सियासी तौर पर खुद पर भारी पड़ते रहे नीतीश कुमार को किसी भी तरह से किनारे लगा दे. जब शिवसेना के छप्पन में से चालीस विधायक अपनी पार्टी से टूट सकते हैं तो यहां तो जदयू के पास कुल पैंतालीस विधायक ही बचे थे और नीतीश की हैसियत घटने के साथ वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित भी थे. भाजपा के लिए सवाल बस यही था कि समय क्या चुना जाए - अगले लोकसभा चुनाव से पहले का या बाद का? बहरहाल, जब भी ऐसा होता नीतीश के पास कुछ नहीं बचता - नजर आते तो बस दूर हो चुके सहयोगी, खत्म जनाधार और एक अंधकारमय भविष्य. यहां तक कि अगर वह एक बार पूरा दमखम लगाकर आखिरी लड़ाई लड़ने की सोचते भी तो उन्हें भाजपा से लेकर राजद, चिराग पासवान और न जाने किस-किस सियासी दुश्मन का मुकाबला करना पड़ता, जिसके आगे टिक पाना आसान नहीं होता. ऐसी परिस्थितियों में नीतीश कुमार के लिए आगे की सियासी राह हर दिन जीवन-मरण का सवाल बन जाती. उनकी स्थिति किस कदर कमजोर हो जाती, यह बात वह भलीभांति समझ गए होंगे. ऐसे में लालू यादव और तेजस्वी शायद उन्हें अधिक सुरक्षित नजर आए होंगे. लेकिन उन्हें तो इस सौदे में इस सबसे ज्यादा बड़ा ही कुछ चाहिए. यदि नीतीश अपनी पार्टी के राजद में विलय पर सहमत हो जाते हैं, तो तेजस्वी के नेतृत्व वाला एकीकृत संगठन बिहार में एक मजबूत ताकत बनकर उभर सकता है. बदले में यादव पिता-पुत्र अपनी पूरी ताकत नीतीश की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में लगा देंगे. ऐसे में भले ही मोदी की भाजपा दो हज़ार चौबीस में अपनी सत्ता बरकरार रखे, नीतीश कुमार राजद - या फिर नए संगठन का नाम जो भी नाम रखा जाए - उसका राष्ट्रीय चेहरा बन सकते हैं और तेजस्वी को भी एक साल या उससे अधिक समय के लिए सीएम की कुर्सी पर बैठने का मौका मिल सकता है. लालू यादव और नीतीश कुमार दोनों की राजनीतिक विरासत के उत्तराधिकारी के तौर पर तेजस्वी आगे लंबे समय के लिए बिहार की एक मजबूत सियासी ताकत बन सकते हैं. नीतीश कुमार को भी इसमें कोई आपत्ति नहीं होगी. वैसे भी उन्हें पता होना चाहिए कि भाजपा के साथ या उसके बिना किसी भी तरह से वह अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा नहीं कर सकते थे. लेकिन लालू और तेजस्वी के साथ सही सामंजस्य बैठाकर वह राष्ट्रीय राजनीतिक मंच पर अपनी प्रासंगिकता बनी रहने की उम्मीद जरूर कर सकते हैं. यदि नीतीश कुमार किसी अन्य विकल्प पर विचार करते हैं तो उन्हें कई दलों की तरफ से 'शत्रुतापूर्ण टेकओवर' की कोशिशें झेलने के लिए तैयार होना चाहिए. वैसे वह काफी होशियार खिलाड़ी हैं. कोई अचरज की बात नहीं होगी अगर नीतीश कुमार को राजद का राजनीतिक प्रस्ताव पेश होने के पहले से ही उसके बारे में पता हो. डीके सिंह दिप्रिंट के राजनीतिक संपादक हैं. @dksinghतिहत्तर हैंडल से ट्वीट करते हैं. यहां व्यक्त विचार निजी हैं.
बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर इन दिनों प्रेग्नेंसी पीरियड एंजॉय कर रही है। सोनम कपूर अपने मैटरनिटी शूट की तस्वीरें लगातार फैंस के साथ शेयर कर रही हैं। वहीं सोनम के भाई हर्षवर्धन कपूर ने अपनी बहन के लिए प्राइवेसी का अनुरोध किया है। एक इंटरव्यू के दौरान हर्षवर्धन कपूर ने मुझे लगता है कि, यह अच्छा है कि हर कोई उनके बारे में जानना चाहता है, क्योंकि सोनम इतनी बड़ी शख्सियत हैं। इसलिए, जाहिर है, हर कोई उस खुशी को साझा करना चाहता है। लेकिन साथ ही, मुझे लगता है कि यह दोनों के लिए एक बहुत ही इंटीमेट और पर्सनल अनुभव है। उन्होंने कहा, लोगों का उनकी प्राइवेसी का एक तरह से सम्मान करना भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि मुझे लगता है कि, जब आप किसी से प्यार करते हैं और वे किसी ऐसे व्यक्ति को जन्म दे रही हैं, जिससे वह प्यार करती हैं, तो यह एक तरह का पवित्र प्यार है। यह किसी के लिए कुछ भी साबित नहीं करना है या यह दुनिया के लिए नहीं है। यह आपके लिए है। इसलिए अच्छा होगा कि, उन्हें भी वह स्थान दिया जाए। वहीं सोनम के पिता अनिल कपूर ने कहा, वह भगवान से केवल यही चाहते हैं कि, बच्चा स्वस्थ रहे। अभी हम सिर्फ भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं और बहुत खुश हैं। हम बस उस दिन का इंतजार कर रहे हैं और प्रार्थना कर रहे हैं कि, बच्चा स्वस्थ हो। अभी हमारी सभी भावनाओं को शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है, लेकिन निश्चित रूप से, हम खुश और उत्साहित हैं। बता दें कि सोनम कपूर ने बीते महीने अपनी प्रेग्नेंसी की घोषणा की थी। उन्होंने अपने पति आनंद आहूजा संग तस्वीर शेयर करके लिखा था, चार हाथ, आपको सबसे अच्छी तरह से उठाने के लिए हैं। दो दिल, वह आपके साथ, हर कदम पर एक सुर में होगा। एक परिवार, जो आपको प्यार और समर्थन से सराबोर कर देगा। हम आपका स्वागत करने के लिए और इंतजार नहीं कर सकते।
बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर इन दिनों प्रेग्नेंसी पीरियड एंजॉय कर रही है। सोनम कपूर अपने मैटरनिटी शूट की तस्वीरें लगातार फैंस के साथ शेयर कर रही हैं। वहीं सोनम के भाई हर्षवर्धन कपूर ने अपनी बहन के लिए प्राइवेसी का अनुरोध किया है। एक इंटरव्यू के दौरान हर्षवर्धन कपूर ने मुझे लगता है कि, यह अच्छा है कि हर कोई उनके बारे में जानना चाहता है, क्योंकि सोनम इतनी बड़ी शख्सियत हैं। इसलिए, जाहिर है, हर कोई उस खुशी को साझा करना चाहता है। लेकिन साथ ही, मुझे लगता है कि यह दोनों के लिए एक बहुत ही इंटीमेट और पर्सनल अनुभव है। उन्होंने कहा, लोगों का उनकी प्राइवेसी का एक तरह से सम्मान करना भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि मुझे लगता है कि, जब आप किसी से प्यार करते हैं और वे किसी ऐसे व्यक्ति को जन्म दे रही हैं, जिससे वह प्यार करती हैं, तो यह एक तरह का पवित्र प्यार है। यह किसी के लिए कुछ भी साबित नहीं करना है या यह दुनिया के लिए नहीं है। यह आपके लिए है। इसलिए अच्छा होगा कि, उन्हें भी वह स्थान दिया जाए। वहीं सोनम के पिता अनिल कपूर ने कहा, वह भगवान से केवल यही चाहते हैं कि, बच्चा स्वस्थ रहे। अभी हम सिर्फ भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं और बहुत खुश हैं। हम बस उस दिन का इंतजार कर रहे हैं और प्रार्थना कर रहे हैं कि, बच्चा स्वस्थ हो। अभी हमारी सभी भावनाओं को शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है, लेकिन निश्चित रूप से, हम खुश और उत्साहित हैं। बता दें कि सोनम कपूर ने बीते महीने अपनी प्रेग्नेंसी की घोषणा की थी। उन्होंने अपने पति आनंद आहूजा संग तस्वीर शेयर करके लिखा था, चार हाथ, आपको सबसे अच्छी तरह से उठाने के लिए हैं। दो दिल, वह आपके साथ, हर कदम पर एक सुर में होगा। एक परिवार, जो आपको प्यार और समर्थन से सराबोर कर देगा। हम आपका स्वागत करने के लिए और इंतजार नहीं कर सकते।