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इंडिया न्यूज, गंगानगर।
देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन केंद्र सरकार मौन बैठी है। पेट्रो पदार्थों के कारण जहां बड़ा वर्ग हताश है वहीं आमजन की तो कमर ही टूट गई है। फेस्टिवल सीजन चल रहा है और ऊपर से महंगाई पे महंगाई बढ़ती ही जा रही है।
इस समय महंगाई के बढ़ते रूप को देखकर चहुंओर सरकार के खिलाफ आक्रोश देखा जा रहा है। देश के कई इलाकों में तो कई व्यवसायी खुले तोर पर विरोध में आ चुके हैं। राजस्थान में भी लगातार बढ़ रही पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बाद अब पंप व्यवसायी हड़ताल पर उतर आ गए हैं। सोमवार से बीकानेर संभाग समेत पाली और बाड़मेर जिलोंके करीब 750 पेट्रोल पंप अनिश्चचितकालीन समय के लिए बंद हो रहे हैं।
डीलर्स ने की हड़ताल की घोषणा (Protest Against The Prices Of Petrol-Diesle)
दअरसल, श्रीगंगानगर में पेट्रोल 120. 02 और डीजल 110. 85 रुपए प्रति लीटर बिक रहा है। इसके बाद डीलर्स ने हड़ताल की घोषणा कर दी है। इसके लिए बीकानेर संभाग के सभी पेट्रोल पंप डीलर्स ने भी इसका समर्थन किया। डीलर्स ने बताया कि राजस्थान के पड़ोसी राज्यों में पेट्रोल डीजल सस्ता होने की वजह से यहां बिक्री कम हो गई है। फिलहाल श्रीगंगानगर समेत प्रदेश के 7 जिलों में अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी गई है। यहां आज सुबह 6 बजे से ही पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं।
हर दिन होगा 32 करोड़ का नुकसान : गुप्ता (Protest Against The Prices Of Petrol-Diesle)
बेमियादी हड़ताल से हर दिन 32 करोड़ रुपए का नुकसान होगा। जिलाध्यक्ष गुप्ता ने बताया कि इतने बड़े नुकसान के बावजूद पंप संचालकों के पास कोई चारा नहीं है। उन्होंने पहले सरकार को चेतावनी भी दी थी लेकिन सरकार हर बार वैट घटाने का आश्वासन देती है, लेकिन होता कुछ नहीं है। जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे हड़ताल पर रहेंगे।
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इंडिया न्यूज, गंगानगर। देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन केंद्र सरकार मौन बैठी है। पेट्रो पदार्थों के कारण जहां बड़ा वर्ग हताश है वहीं आमजन की तो कमर ही टूट गई है। फेस्टिवल सीजन चल रहा है और ऊपर से महंगाई पे महंगाई बढ़ती ही जा रही है। इस समय महंगाई के बढ़ते रूप को देखकर चहुंओर सरकार के खिलाफ आक्रोश देखा जा रहा है। देश के कई इलाकों में तो कई व्यवसायी खुले तोर पर विरोध में आ चुके हैं। राजस्थान में भी लगातार बढ़ रही पेट्रोल-डीजल की कीमतों के बाद अब पंप व्यवसायी हड़ताल पर उतर आ गए हैं। सोमवार से बीकानेर संभाग समेत पाली और बाड़मेर जिलोंके करीब सात सौ पचास पेट्रोल पंप अनिश्चचितकालीन समय के लिए बंद हो रहे हैं। डीलर्स ने की हड़ताल की घोषणा दअरसल, श्रीगंगानगर में पेट्रोल एक सौ बीस. दो और डीजल एक सौ दस. पचासी रुपयापए प्रति लीटर बिक रहा है। इसके बाद डीलर्स ने हड़ताल की घोषणा कर दी है। इसके लिए बीकानेर संभाग के सभी पेट्रोल पंप डीलर्स ने भी इसका समर्थन किया। डीलर्स ने बताया कि राजस्थान के पड़ोसी राज्यों में पेट्रोल डीजल सस्ता होने की वजह से यहां बिक्री कम हो गई है। फिलहाल श्रीगंगानगर समेत प्रदेश के सात जिलों में अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी गई है। यहां आज सुबह छः बजे से ही पेट्रोल पंप बंद हो गए हैं। हर दिन होगा बत्तीस करोड़ का नुकसान : गुप्ता बेमियादी हड़ताल से हर दिन बत्तीस करोड़ रुपए का नुकसान होगा। जिलाध्यक्ष गुप्ता ने बताया कि इतने बड़े नुकसान के बावजूद पंप संचालकों के पास कोई चारा नहीं है। उन्होंने पहले सरकार को चेतावनी भी दी थी लेकिन सरकार हर बार वैट घटाने का आश्वासन देती है, लेकिन होता कुछ नहीं है। जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, वे हड़ताल पर रहेंगे।
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छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में माओवादी संगठन को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। पूना नर्कोम (नई सुबह-नई शुरुआत) अभियान के तहत हिंसा का रास्ता छोड़ 2 हार्डकोर माओवादी दंपति ने सरेंडर कर दिया।
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में माओवादी संगठन को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। पूना नर्कोम (नई सुबह-नई शुरुआत) अभियान के तहत हिंसा का रास्ता छोड़ 2 हार्डकोर माओवादी दंपति ने सरेंडर कर दिया। आत्मसमर्पण करने वाले महिला व पुरुष नक्सली पर 5-5 लाख का इनाम घोषित था। दोनों नक्सली हत्या, आगजनी, लूट सहित कई बड़ी घटनाओं में शामिल रहे हैं। इन नक्सलियों से पुलिस को पूछताछ में माओवादी संगठन के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। दोनों माओवादियों ने सुकमा एसपी सुनील शर्मा, सुकमा एएसपी ओम चंदेल के सामने सरेंडर किया।
मिली जानकारी के मुताबिक माओवादियों की खोखली विचारधारा, माओवादियों संगठन में भेदभाव और स्थानीय आदिवासियों पर होने वाले हिंसा से तंग आकर प्रतिबंधित नक्सली संगठन के. के. बी. एन. डिवीजन (कंधमाल, कालाहांडी, बौद्ध, नयागढ़) में कार्यरत नक्सली दंपति मडकम हिड़मा व कुराम डुंगी दोनों निवासी जिला बीजापुर ने सुकमा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एसपी सुनील शर्मा, एएसपी ओम चंदेल के समक्ष बिना हथियार के सरेंडर कर दिया। सरेंडर पर दोनों नक्सलियों को सरकार की तरफ से 10-10 हजार रुपये दी गई है। दोनों नक्सलियों से संगठन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।
पुलिस अफसरों के मुताबिक छत्तीसगढ़ नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में लोन वर्राटू और सुकमा जिले में पूना नर्कोम अभियान चलाया जा रहा है। हिंसा का रास्ता छोड़कर माओवादियों को घर वापसी की अपील की जा रही है। दोनों जिलों के थाना, शिविरों और ग्राम पंचायतों में क्षेत्र के सक्रिय माओवादियों का नाम चस्पा कर उनसे आत्मसमर्पण कर सम्मानपूर्वक जीवन जीने की अपील की जा रही है। लोन वर्राटू अभियान के तहत दंतेवाड़ा जिले में अब तक 133 इनामी नक्सलियों सहित 545 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। वहीं सुकमा जिले में भी 500 से ज्यादा नक्सली समर्पण कर चुके हैं।
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छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में माओवादी संगठन को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। पूना नर्कोम अभियान के तहत हिंसा का रास्ता छोड़ दो हार्डकोर माओवादी दंपति ने सरेंडर कर दिया। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में माओवादी संगठन को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। पूना नर्कोम अभियान के तहत हिंसा का रास्ता छोड़ दो हार्डकोर माओवादी दंपति ने सरेंडर कर दिया। आत्मसमर्पण करने वाले महिला व पुरुष नक्सली पर पाँच-पाँच लाख का इनाम घोषित था। दोनों नक्सली हत्या, आगजनी, लूट सहित कई बड़ी घटनाओं में शामिल रहे हैं। इन नक्सलियों से पुलिस को पूछताछ में माओवादी संगठन के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। दोनों माओवादियों ने सुकमा एसपी सुनील शर्मा, सुकमा एएसपी ओम चंदेल के सामने सरेंडर किया। मिली जानकारी के मुताबिक माओवादियों की खोखली विचारधारा, माओवादियों संगठन में भेदभाव और स्थानीय आदिवासियों पर होने वाले हिंसा से तंग आकर प्रतिबंधित नक्सली संगठन के. के. बी. एन. डिवीजन में कार्यरत नक्सली दंपति मडकम हिड़मा व कुराम डुंगी दोनों निवासी जिला बीजापुर ने सुकमा पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एसपी सुनील शर्मा, एएसपी ओम चंदेल के समक्ष बिना हथियार के सरेंडर कर दिया। सरेंडर पर दोनों नक्सलियों को सरकार की तरफ से दस-दस हजार रुपये दी गई है। दोनों नक्सलियों से संगठन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। पुलिस अफसरों के मुताबिक छत्तीसगढ़ नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में लोन वर्राटू और सुकमा जिले में पूना नर्कोम अभियान चलाया जा रहा है। हिंसा का रास्ता छोड़कर माओवादियों को घर वापसी की अपील की जा रही है। दोनों जिलों के थाना, शिविरों और ग्राम पंचायतों में क्षेत्र के सक्रिय माओवादियों का नाम चस्पा कर उनसे आत्मसमर्पण कर सम्मानपूर्वक जीवन जीने की अपील की जा रही है। लोन वर्राटू अभियान के तहत दंतेवाड़ा जिले में अब तक एक सौ तैंतीस इनामी नक्सलियों सहित पाँच सौ पैंतालीस नक्सलियों ने सरेंडर किया है। वहीं सुकमा जिले में भी पाँच सौ से ज्यादा नक्सली समर्पण कर चुके हैं।
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पूर्णिया जिले के मीरगंज थाना अंतर्गत मीरगंज पूर्णिया सड़क पर इमली टोला गांव के समीप सड़क पार कर रही 12 साल की बच्ची को सुधा दूध के टैंकर ने रौंद दिया। हादसे में बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई।
यह दर्दनाक हादसा सीपीएस स्कूल के सामने सोमवार को लगभग 11:30 बजे हुआ। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने मीरगंज पूर्णिया मार्ग को जाम कर दिया। मृतक बच्ची की पहचान मुस्कान कुमारी पिता मोहन मेहता ग्राम झंडापुर नवगछिया के रूप में की गई है। मुस्कान अपनी दोस्त के साथ अपनी दीदी मीरगंज निवासी बबलू भगत के यहां आई हुई थी। घटना के समय बच्ची अपने फूफेरे भाई-बहन को लंच बॉक्स पहुंचाने के लिए सीपीएस स्कूल जा रही थी इसी दौरान सड़क पार करने में दूधवाले टैंक लॉरी की चपेट में आ गई जिससे यह हादसा हुआ।
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पूर्णिया जिले के मीरगंज थाना अंतर्गत मीरगंज पूर्णिया सड़क पर इमली टोला गांव के समीप सड़क पार कर रही बारह साल की बच्ची को सुधा दूध के टैंकर ने रौंद दिया। हादसे में बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई। यह दर्दनाक हादसा सीपीएस स्कूल के सामने सोमवार को लगभग ग्यारह:तीस बजे हुआ। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने मीरगंज पूर्णिया मार्ग को जाम कर दिया। मृतक बच्ची की पहचान मुस्कान कुमारी पिता मोहन मेहता ग्राम झंडापुर नवगछिया के रूप में की गई है। मुस्कान अपनी दोस्त के साथ अपनी दीदी मीरगंज निवासी बबलू भगत के यहां आई हुई थी। घटना के समय बच्ची अपने फूफेरे भाई-बहन को लंच बॉक्स पहुंचाने के लिए सीपीएस स्कूल जा रही थी इसी दौरान सड़क पार करने में दूधवाले टैंक लॉरी की चपेट में आ गई जिससे यह हादसा हुआ।
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उसदिन आप किसी सरकारी काममें लगे हुए न थे । आप रविवारको छुट्टीम थे और छुट्टी मनाने के लियेही अपने इष्टमित्रोंके साथ लपमें जा बैठेथे । मित्रोमें बैठकर आप परमेश्वर न होनेकी चर्चामे लगे हुए और इस कारण आपको पिताके श्राद्धमे आनेकी फुरसत न थी । जन दशवीवार आनेपर रामचेरवा मालिकके हाथकी थप्पड और गालिया खाकर लौटा तो सुखदेवीका सारा उत्साह मारा गया । वह बहुत देरतक रोई झीकी, उसने अपने नसीबको बहुतेरी गालिया दी और अमे उसने श्राद्धकी सामग्री नदीमे फिकवाकर न्योते हुए ब्राह्मणोंको भोजन कराया। वह पहलेहीसे जानती थी कि पति परमेश्वरको नही मानते है इसलिये उसे ससुरके श्राद्ध न होनेका अधिक दु ख नहीं था परतु उसने मुद्दत से कहसुनकर अपनी रसोईकी कारीगरी दिखलानेका प्रण किया था, विलायती मिठाईकी देशी मिठाईसे तुलना करनेके लिये पतिको बढिया भोजन करनेपर राजी करलिया था । उसे आशाथी कि पति पसद करनेपर उसका आदर होगा । वह इस आशामें मनोराज्य बना रही थी परतु अब उसका किया कराया सब मिट्टीमे मिल गया । सुखदेवीने कुढते कुढाते, आसू वहाते ब्राह्मणोंको भोजन कराया, नौकर चाकरोंको दिया, अडौस पड़ौसवालाको दिया और इस तरह दे दिलाकर जब छुट्टी पाई तो पतिके और अपने लिये खाना अलग रखकर वह भूखीही चा केसे बाहर निकल आई। मिश्रानी और रामचेरवाने उनसे बहुतेरा कहा सुना परतु पतिके आये बिना उसने जलपानभी न किया ।
पति सवरेके गये हुए ठीक रातके नॉबजे आये। उन्होने क्लचमे रहकर अपने मित्रों के साथ चायपानी पिया था, विस्कुट खाया था और खाने और न खानेकी जो कुछ मनमे आया चीजें खाली थीं इसलिये उन्हें मुखद्वीकी मीठी सीठी मिठाईकी पर्वाहद्दी क्याथी, परतु उसकी भूखके मारे ऑवें बैठी जाती थीं । यदि अकेली मुखदेवीही भूखी होती तो कुछ बात न थी परतु वह दोजीवसे थी । उसे आठ सात महीनेका गर्भ था । जेठका महीना था। लूयें सून जोरशोरसे चल रहीं थीं। गर्मी वेटिकाने थी । ऐसे
रण २ ]
पिताका श्राद्ध ।
समयमे भूखी रहने से सुखदेवीके गर्भ में कुछ कुपेच पड़गया । उसे वमनपर वमन आरहेथे, निर्वलताके मारे आंखें बैठी जाती थी, गर्भ में असह्य वेदना थी और इस तरह सुखदेवी अवतन होरही थी। रातके साढेआठ वजजानेपरमी वाबूसाहव राजी खुशीसे न आये । स्त्रीकी भयकर बीमारीकी खबर पहुॅची तब आये । आतेही स्त्रीकी भयानक दशा देखकर उन्हें दया आई । उन्होंने सुखदेवीके हजार अनुरोध करनेपरभी वैद्यके बदले डाक्टर बुलाया । डाक्टरने उसकी भयकर दशा देखकर इलाजमें हाथ डालनेकी साफ नाही करदी तब बाबूसाहवने बहुत आनाकानीके बाद वैद्य बुलाया । आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार चिकित्सा करने से जब उसका कुछ जी ठिकाने वैठा, तब वैद्यने सुदेवीको कुछ दूध देनेकी सलाह दी । सुनतेही वह हाथ जोड कर घूँघटकी ओटसे बोलीः"जनतक स्वामी भोजन न कर लेगे में दूध न लुगी । पतिके बिना दूध क्या जल लेनेमेंभी मेरा पातिव्रत भग होता है । मैं न लूंगी।"
"अरी गवार, तैने क्या अभीतक सुबहसे पानीभी नही पिया है ? हाय ! हाय !! वडा गजव हुआ मैं इन गँवार हिन्दुस्थानी औरतोके मारे वडा हैरान होगया । मेरा नाकर्मे दमहै । वैद्यजी, आपछी कहिये । मैं इस जाहिलीका क्या इलाज करू? मैं बहुतेरा चाहताहू कि औरतें आजादीसे रहें मगर यह व्अपनी आजादी खोकर भरी आजादीभी छीनती है । अफसोस ! मुझे इसवक्त बिलकुल भूख नहीं है । तू थोडासा दूध तो लेले फिर खाना खाने के वास्ते देखा जायगा ।
वैद्यजीने बानूनीकी वातका कुछ उत्तर न दिया। वह उत्तर प्रत्युत्तर करके अपना समय खोना नहीं चाहते थे । इस कारण इस विवादको इसतरह जडसेही तोडकर चले गये । पतिके बहुत समझाने बुझाने परभी जब सुखदेवाने न माना तन उसके बहुत जाग्रहसे वनमाली बाजूने कुछ दूध लिया। उनके दो घुट लेनेनाद उसी ग्लासमे जो जूठा दूध वचाथा उसे लेकर सुखदेवीने अपना मनोरथ सफल किया अन उसे कुछ चैन हुआ । इस तरह वैद्यजीकी बताई हुई दवासे जन सुखदेवीकी दो तीन
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उसदिन आप किसी सरकारी काममें लगे हुए न थे । आप रविवारको छुट्टीम थे और छुट्टी मनाने के लियेही अपने इष्टमित्रोंके साथ लपमें जा बैठेथे । मित्रोमें बैठकर आप परमेश्वर न होनेकी चर्चामे लगे हुए और इस कारण आपको पिताके श्राद्धमे आनेकी फुरसत न थी । जन दशवीवार आनेपर रामचेरवा मालिकके हाथकी थप्पड और गालिया खाकर लौटा तो सुखदेवीका सारा उत्साह मारा गया । वह बहुत देरतक रोई झीकी, उसने अपने नसीबको बहुतेरी गालिया दी और अमे उसने श्राद्धकी सामग्री नदीमे फिकवाकर न्योते हुए ब्राह्मणोंको भोजन कराया। वह पहलेहीसे जानती थी कि पति परमेश्वरको नही मानते है इसलिये उसे ससुरके श्राद्ध न होनेका अधिक दु ख नहीं था परतु उसने मुद्दत से कहसुनकर अपनी रसोईकी कारीगरी दिखलानेका प्रण किया था, विलायती मिठाईकी देशी मिठाईसे तुलना करनेके लिये पतिको बढिया भोजन करनेपर राजी करलिया था । उसे आशाथी कि पति पसद करनेपर उसका आदर होगा । वह इस आशामें मनोराज्य बना रही थी परतु अब उसका किया कराया सब मिट्टीमे मिल गया । सुखदेवीने कुढते कुढाते, आसू वहाते ब्राह्मणोंको भोजन कराया, नौकर चाकरोंको दिया, अडौस पड़ौसवालाको दिया और इस तरह दे दिलाकर जब छुट्टी पाई तो पतिके और अपने लिये खाना अलग रखकर वह भूखीही चा केसे बाहर निकल आई। मिश्रानी और रामचेरवाने उनसे बहुतेरा कहा सुना परतु पतिके आये बिना उसने जलपानभी न किया । पति सवरेके गये हुए ठीक रातके नॉबजे आये। उन्होने क्लचमे रहकर अपने मित्रों के साथ चायपानी पिया था, विस्कुट खाया था और खाने और न खानेकी जो कुछ मनमे आया चीजें खाली थीं इसलिये उन्हें मुखद्वीकी मीठी सीठी मिठाईकी पर्वाहद्दी क्याथी, परतु उसकी भूखके मारे ऑवें बैठी जाती थीं । यदि अकेली मुखदेवीही भूखी होती तो कुछ बात न थी परतु वह दोजीवसे थी । उसे आठ सात महीनेका गर्भ था । जेठका महीना था। लूयें सून जोरशोरसे चल रहीं थीं। गर्मी वेटिकाने थी । ऐसे रण दो ] पिताका श्राद्ध । समयमे भूखी रहने से सुखदेवीके गर्भ में कुछ कुपेच पड़गया । उसे वमनपर वमन आरहेथे, निर्वलताके मारे आंखें बैठी जाती थी, गर्भ में असह्य वेदना थी और इस तरह सुखदेवी अवतन होरही थी। रातके साढेआठ वजजानेपरमी वाबूसाहव राजी खुशीसे न आये । स्त्रीकी भयकर बीमारीकी खबर पहुॅची तब आये । आतेही स्त्रीकी भयानक दशा देखकर उन्हें दया आई । उन्होंने सुखदेवीके हजार अनुरोध करनेपरभी वैद्यके बदले डाक्टर बुलाया । डाक्टरने उसकी भयकर दशा देखकर इलाजमें हाथ डालनेकी साफ नाही करदी तब बाबूसाहवने बहुत आनाकानीके बाद वैद्य बुलाया । आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार चिकित्सा करने से जब उसका कुछ जी ठिकाने वैठा, तब वैद्यने सुदेवीको कुछ दूध देनेकी सलाह दी । सुनतेही वह हाथ जोड कर घूँघटकी ओटसे बोलीः"जनतक स्वामी भोजन न कर लेगे में दूध न लुगी । पतिके बिना दूध क्या जल लेनेमेंभी मेरा पातिव्रत भग होता है । मैं न लूंगी।" "अरी गवार, तैने क्या अभीतक सुबहसे पानीभी नही पिया है ? हाय ! हाय !! वडा गजव हुआ मैं इन गँवार हिन्दुस्थानी औरतोके मारे वडा हैरान होगया । मेरा नाकर्मे दमहै । वैद्यजी, आपछी कहिये । मैं इस जाहिलीका क्या इलाज करू? मैं बहुतेरा चाहताहू कि औरतें आजादीसे रहें मगर यह व्अपनी आजादी खोकर भरी आजादीभी छीनती है । अफसोस ! मुझे इसवक्त बिलकुल भूख नहीं है । तू थोडासा दूध तो लेले फिर खाना खाने के वास्ते देखा जायगा । वैद्यजीने बानूनीकी वातका कुछ उत्तर न दिया। वह उत्तर प्रत्युत्तर करके अपना समय खोना नहीं चाहते थे । इस कारण इस विवादको इसतरह जडसेही तोडकर चले गये । पतिके बहुत समझाने बुझाने परभी जब सुखदेवाने न माना तन उसके बहुत जाग्रहसे वनमाली बाजूने कुछ दूध लिया। उनके दो घुट लेनेनाद उसी ग्लासमे जो जूठा दूध वचाथा उसे लेकर सुखदेवीने अपना मनोरथ सफल किया अन उसे कुछ चैन हुआ । इस तरह वैद्यजीकी बताई हुई दवासे जन सुखदेवीकी दो तीन
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"पिताजी ! भ्रम तो नहीं था ?'
'मैंने भी यही सोचा था पर चाचाजी'उन्होंने मरते-मरते बताया कि हंसा जीवित है और पीछे से यदि चाची न आ गई होतां ता कुछ पता चलता ।'
'अर्थात् इतने दिनों से कहीं छिपा रखा है ?'
'और क्या ! यही मेरी व्यथा है । बेटा ! अब क्या करूँ ?'
'यह आप मुझसे पूछते हैं ? अब इतना ही करना है कि यदि यह बात सच है. यदि माँ का जीते जी ऐसा कष्ट दिया है तो हम इसका बदला लेंगे। माँ को छुड़ायेंगे एवं इन चाण्डालों को ऐसी शिक्षा देंगे कि जिसे ये जन्म भर याद रखेंगे ।'
'यह सच है पर किसे पता वह कहाँ है ?'
'विमल के अपासरा में या राजगढ़ में । आपने माँ को वहीं तो देखा था ?'
'हाँ, पर राजगढ़ में ढूँढ़ना क्या कोई सरल बात है ? मीनल चाची से मैंने पूछा पर वे टस से मस नहीं होतीं ।' 'कहता क्या है ?'
'वे तो मेरा भ्रम ही बतलाती हैं । शायद वे न भी जानती हों ।' 'तत्र कौन जानता है ? त्रिभुवन के स्वर में जिज्ञासा थी । ' मीनल चाची के आने के पूर्व ही मुंजाल हंसा को उड़ा ले गया था. इससे वे शायद न जानती हो । पर चाचाजी जानें, और चाची न जाने इस पर विश्वास नहीं होता !'
विचार करते हुए त्रिभुवन वाला - चाचाजी को कैसे समझाया जाय ? विताजा ! एक मार्ग है, यदि आज्ञा दें तो करूँ । मुंजाल मामा से मैं अभा तक नहीं मिला । देखूँ मानते हैं ?
'बेटा ! तू उसे नहीं जानता । मुंजाल से कोई बात निकालना सरल नहीं।'
'मिलने में क्या हानि है ? अधिक से अधिक 'नहीं' कर देंगे। 'तो जाओ पर अपनी टेक याद रखना । अभी चाची मुझे शिक्षा देने आई थीं. वैसे ही तुम्हें भी न फँसायें ।
'यह कहने को आवश्यकता नहीं ! मैं अभी वापस आता हूँ । जोरावर ! पिताजी और मेरे लिए हाथ-मुँह धोने के लिए पानी ला ।' नौकर दाँतुन और पानी ले आया । उसने धीरे से देवप्रसाद से कहा - महाराज ! वल्लभसेन ने आदमी भेजा है। 'क्या कहलाया है ?'
'कहलाया है कि वल्लभनेन मेरल का गये ।
'बेटा ! यह भी शुभ समाचार है । तू हो आ, देखें क्या होता है ?' सेना के आगमन की बात सुनते ही मंडलेश्वर का मन निराशा से कुछ मुक्त हुआ। वे मुंजाल को सत्ताहीन कर डालना चाहते थे। स्वयं पाटन में, मेरल में बल्लभ और यदि देवस्थली को स्वतंत्र ध्वजा उड़ती रहे तब विपक्षियों की कुछ चलेगी नहीं । उन्हें विश्वास हो गया कि इस समय उन्हें छेड़ने का कोई साहस नहीं करेगा । कर्णदेव की मृत्यु के पश्चात् धाँधली का लाभ उठा कर अपनी सत्ता पाटन में पुनः जमाने का उन्होंने निश्चय कर डाला ।
मामा से मिलने के लिए जाते समय त्रिभुवन घबड़ाया । उन्हें जीवन भर उसने शत्रु समझा । उसके पहले कभी बोला तक नहीं था। उनकी ख्याति बड़े-बड़े राजनीतिज्ञों के हृदय को भी दहला देसी तथापि बालक का निश्चय दृढ़ था । अपनी माँ पर किये गये अत्याचार से उसका हृदय व्यथित हो उठा था । अत्याचारियों को उचित शिक्षा
देने के लिए उसका हाथ फड़क रहा था पर अपने पिता की अपेक्षा उसमें सांसारिक ज्ञान अधिक था । वह सब जानता था । उसे दृढ़ विश्वास था कि मुंजाल जैसे राजनीतिज़ पर क्रोध प्रकट करने का परि शाम तिरस्कृत होना है।
जब वह मुंजाल के गुमाश्ताखाना में पहुँचा तब सभी खलबला पड़े । त्रिभुवन का बचपन चेहरे पर की भव्य रेखायें नेत्रों का तेज देखते ही सब विचार में पड़ गये और पूछने लगे कि 'वह कौन है ।' साधारणतः मुंजाल इस समय किसी से भेंट न करता था; किंतु त्रिभुवन इन्कार करने का साहस किसी को न हुआ ।
'आपका नाम ?'
'त्रिभुवनपाल सोलंकी !
लोगों ने सिर उठाकर उसकी ओर देखा, चौंके, उसे पहचाना । 'ठहरिये महाराज ! देख आऊँ, शायद मंत्रीजी काम में हो ।' जी हाँ, जब फुरसत मिले तब बुला लें; मैं यहाँ हूँ गुमास्ता तुरंत वापस आकर बोला-पधारिये ।
त्रिभुवन हृदय की धड़कन शांत कर भीतर गया । सामने गद्दी पर सुंदर, तीक्ष्ण दृटि वाला एक व्यक्ति बैठा था । त्रिभुवन ने चेहरे के रूप और भव्यता से उसे तुरंत पहचान लिया । कुछ काँपते स्वर में पूछा-मामाजी ! पहचानते हैं ?
मंत्री के नुख के भाव बदले, क्षण भर के लिए बवड़ाहट की, उछलते हुए स्नेह की छाया दीख पड़ी। उसने हाथ बढ़ाया । उसमें
अदृष्ट कंपन था ।
अशांत-से स्वर में मंत्री ने पूछा- कौन ? हंसा का त्रिभुवन ? मामा को नमस्कार कर त्रिभुवन गढ़ी के नीचे बैठ गया । 'ऊपर बैठो बेटा ! देखूँ, इधर तो देख, देखूँ तेरा मुँह । इधर आओ, इधर ।'
यह देख त्रिभुवन को आश्चर्य हुआ । क्या यही त्नेह-पूर्ण भावुक पुरुष, उसका क्रूर विख्यात मामा है ! कुछ क्षण दोनों मौन रहे । 'बहुत दिनों पर तुम्हें देखा।
'शायद प्रथम बार !'
त्रिभुवन के इन शब्दों ने मंत्री की बुद्धि सचेत कर दी। वह स्वस्थ हो बैठा। त्रिभुवन ने देखा कि ऐसा कटाक्षपूर्ण वाक्य कहकर उसने भूल की । मंत्री का अंतर्वेगपूर्ण स्वर शांत और भावहीन होने लगा, उसने पूछा - कहाँ बेटा ! कैसे चले ?
किंस प्रकार प्रारंभ करे, यह न समझ पड़ने से त्रिभुवन बोलाएक भिक्षा माँगने आया हूँ ।
थोड़ा हँसकर मंत्री ने कहा - भिक्षा ! मेरे बहन का पुत्र मेरे रहते भीग्व माँगे ?
विनती करते हुए त्रिभुवन बोला -- जी हाँ, मामाजी ! भिक्षा कहिये, या चाहे जा कहिये, मुझे एक वस्तु दीजिये ।
'क्या ?'
'मेरी माँ को !"
दूसरा कोई व्यक्ति चौंक पड़ता, पर मुंजाल के चेहरे पर क्षण मात्र के लिए आश्चर्य की बिजली चमकी और अदृश्य हो गई । उसने कहा - कह क्या रहे हो ?
'सच कहता हूँ, मामा जी । सत्रह वर्ष तक मेरा जीवन रस विहीन था । आज मुझे मालूम हुआ कि क्यों नीरस है । मुझसे माँ बिना नहीं रहा जाता । उसे मुझे दीजिये ।
"बेटा ! तू पागल हुआ है ? तेरी माँ तो कभी स्वधाम 'मामाजी ! आप भी धोखा दीजियेगा ? माँ जीवित हैं ।' 'किमने कहा ?' निश्चल दृष्टि से त्रिभुवन की ओर देख मुंजाल ने पछा। उनकी आवाज में बनावटी शांत मधुरता थी; पर मंत्री की
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"पिताजी ! भ्रम तो नहीं था ?' 'मैंने भी यही सोचा था पर चाचाजी'उन्होंने मरते-मरते बताया कि हंसा जीवित है और पीछे से यदि चाची न आ गई होतां ता कुछ पता चलता ।' 'अर्थात् इतने दिनों से कहीं छिपा रखा है ?' 'और क्या ! यही मेरी व्यथा है । बेटा ! अब क्या करूँ ?' 'यह आप मुझसे पूछते हैं ? अब इतना ही करना है कि यदि यह बात सच है. यदि माँ का जीते जी ऐसा कष्ट दिया है तो हम इसका बदला लेंगे। माँ को छुड़ायेंगे एवं इन चाण्डालों को ऐसी शिक्षा देंगे कि जिसे ये जन्म भर याद रखेंगे ।' 'यह सच है पर किसे पता वह कहाँ है ?' 'विमल के अपासरा में या राजगढ़ में । आपने माँ को वहीं तो देखा था ?' 'हाँ, पर राजगढ़ में ढूँढ़ना क्या कोई सरल बात है ? मीनल चाची से मैंने पूछा पर वे टस से मस नहीं होतीं ।' 'कहता क्या है ?' 'वे तो मेरा भ्रम ही बतलाती हैं । शायद वे न भी जानती हों ।' 'तत्र कौन जानता है ? त्रिभुवन के स्वर में जिज्ञासा थी । ' मीनल चाची के आने के पूर्व ही मुंजाल हंसा को उड़ा ले गया था. इससे वे शायद न जानती हो । पर चाचाजी जानें, और चाची न जाने इस पर विश्वास नहीं होता !' विचार करते हुए त्रिभुवन वाला - चाचाजी को कैसे समझाया जाय ? विताजा ! एक मार्ग है, यदि आज्ञा दें तो करूँ । मुंजाल मामा से मैं अभा तक नहीं मिला । देखूँ मानते हैं ? 'बेटा ! तू उसे नहीं जानता । मुंजाल से कोई बात निकालना सरल नहीं।' 'मिलने में क्या हानि है ? अधिक से अधिक 'नहीं' कर देंगे। 'तो जाओ पर अपनी टेक याद रखना । अभी चाची मुझे शिक्षा देने आई थीं. वैसे ही तुम्हें भी न फँसायें । 'यह कहने को आवश्यकता नहीं ! मैं अभी वापस आता हूँ । जोरावर ! पिताजी और मेरे लिए हाथ-मुँह धोने के लिए पानी ला ।' नौकर दाँतुन और पानी ले आया । उसने धीरे से देवप्रसाद से कहा - महाराज ! वल्लभसेन ने आदमी भेजा है। 'क्या कहलाया है ?' 'कहलाया है कि वल्लभनेन मेरल का गये । 'बेटा ! यह भी शुभ समाचार है । तू हो आ, देखें क्या होता है ?' सेना के आगमन की बात सुनते ही मंडलेश्वर का मन निराशा से कुछ मुक्त हुआ। वे मुंजाल को सत्ताहीन कर डालना चाहते थे। स्वयं पाटन में, मेरल में बल्लभ और यदि देवस्थली को स्वतंत्र ध्वजा उड़ती रहे तब विपक्षियों की कुछ चलेगी नहीं । उन्हें विश्वास हो गया कि इस समय उन्हें छेड़ने का कोई साहस नहीं करेगा । कर्णदेव की मृत्यु के पश्चात् धाँधली का लाभ उठा कर अपनी सत्ता पाटन में पुनः जमाने का उन्होंने निश्चय कर डाला । मामा से मिलने के लिए जाते समय त्रिभुवन घबड़ाया । उन्हें जीवन भर उसने शत्रु समझा । उसके पहले कभी बोला तक नहीं था। उनकी ख्याति बड़े-बड़े राजनीतिज्ञों के हृदय को भी दहला देसी तथापि बालक का निश्चय दृढ़ था । अपनी माँ पर किये गये अत्याचार से उसका हृदय व्यथित हो उठा था । अत्याचारियों को उचित शिक्षा देने के लिए उसका हाथ फड़क रहा था पर अपने पिता की अपेक्षा उसमें सांसारिक ज्ञान अधिक था । वह सब जानता था । उसे दृढ़ विश्वास था कि मुंजाल जैसे राजनीतिज़ पर क्रोध प्रकट करने का परि शाम तिरस्कृत होना है। जब वह मुंजाल के गुमाश्ताखाना में पहुँचा तब सभी खलबला पड़े । त्रिभुवन का बचपन चेहरे पर की भव्य रेखायें नेत्रों का तेज देखते ही सब विचार में पड़ गये और पूछने लगे कि 'वह कौन है ।' साधारणतः मुंजाल इस समय किसी से भेंट न करता था; किंतु त्रिभुवन इन्कार करने का साहस किसी को न हुआ । 'आपका नाम ?' 'त्रिभुवनपाल सोलंकी ! लोगों ने सिर उठाकर उसकी ओर देखा, चौंके, उसे पहचाना । 'ठहरिये महाराज ! देख आऊँ, शायद मंत्रीजी काम में हो ।' जी हाँ, जब फुरसत मिले तब बुला लें; मैं यहाँ हूँ गुमास्ता तुरंत वापस आकर बोला-पधारिये । त्रिभुवन हृदय की धड़कन शांत कर भीतर गया । सामने गद्दी पर सुंदर, तीक्ष्ण दृटि वाला एक व्यक्ति बैठा था । त्रिभुवन ने चेहरे के रूप और भव्यता से उसे तुरंत पहचान लिया । कुछ काँपते स्वर में पूछा-मामाजी ! पहचानते हैं ? मंत्री के नुख के भाव बदले, क्षण भर के लिए बवड़ाहट की, उछलते हुए स्नेह की छाया दीख पड़ी। उसने हाथ बढ़ाया । उसमें अदृष्ट कंपन था । अशांत-से स्वर में मंत्री ने पूछा- कौन ? हंसा का त्रिभुवन ? मामा को नमस्कार कर त्रिभुवन गढ़ी के नीचे बैठ गया । 'ऊपर बैठो बेटा ! देखूँ, इधर तो देख, देखूँ तेरा मुँह । इधर आओ, इधर ।' यह देख त्रिभुवन को आश्चर्य हुआ । क्या यही त्नेह-पूर्ण भावुक पुरुष, उसका क्रूर विख्यात मामा है ! कुछ क्षण दोनों मौन रहे । 'बहुत दिनों पर तुम्हें देखा। 'शायद प्रथम बार !' त्रिभुवन के इन शब्दों ने मंत्री की बुद्धि सचेत कर दी। वह स्वस्थ हो बैठा। त्रिभुवन ने देखा कि ऐसा कटाक्षपूर्ण वाक्य कहकर उसने भूल की । मंत्री का अंतर्वेगपूर्ण स्वर शांत और भावहीन होने लगा, उसने पूछा - कहाँ बेटा ! कैसे चले ? किंस प्रकार प्रारंभ करे, यह न समझ पड़ने से त्रिभुवन बोलाएक भिक्षा माँगने आया हूँ । थोड़ा हँसकर मंत्री ने कहा - भिक्षा ! मेरे बहन का पुत्र मेरे रहते भीग्व माँगे ? विनती करते हुए त्रिभुवन बोला -- जी हाँ, मामाजी ! भिक्षा कहिये, या चाहे जा कहिये, मुझे एक वस्तु दीजिये । 'क्या ?' 'मेरी माँ को !" दूसरा कोई व्यक्ति चौंक पड़ता, पर मुंजाल के चेहरे पर क्षण मात्र के लिए आश्चर्य की बिजली चमकी और अदृश्य हो गई । उसने कहा - कह क्या रहे हो ? 'सच कहता हूँ, मामा जी । सत्रह वर्ष तक मेरा जीवन रस विहीन था । आज मुझे मालूम हुआ कि क्यों नीरस है । मुझसे माँ बिना नहीं रहा जाता । उसे मुझे दीजिये । "बेटा ! तू पागल हुआ है ? तेरी माँ तो कभी स्वधाम 'मामाजी ! आप भी धोखा दीजियेगा ? माँ जीवित हैं ।' 'किमने कहा ?' निश्चल दृष्टि से त्रिभुवन की ओर देख मुंजाल ने पछा। उनकी आवाज में बनावटी शांत मधुरता थी; पर मंत्री की
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हमीरपुरः हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर पुलिस को गश्त के दौरान दोसड़का सब्जी मंडी के पास एक डेड बॉडी मिली है। पूरे बाजार में यह बजुर्ग भीख मांग कर गुजारा करता था और किसी कारण से उसकी मौत हो गई है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि गश्त के दौरान यह व्यक्ति जीवित था। लेकिन आचानक यह जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद एंबुलेंस 108 को फोन किया गया तो हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया गया ।
पुलिस ने बताया कि व्यक्ति की कोविड-19 की रिपोर्ट भी नेगेटिव पाई गई है। अभी इसकी शिनाख्त नहीं हो पाई है कि कहां से है कहां से नहीं है और यह व्यक्ति मानसिक रोगी था और अभी तक इसकी मृत्यु का कारण पता नहीं चल पाया। वहीं हमीरपुर के एसपी कार्तिकेय गोकुल चंद्रन ने मामले की पुष्टि की और बताया कि व्यक्ति का पोस्टमार्टम होगा उसके बाद ही इसका पता चलेगा कि उसकी मृत्यु कैसे हुई है।
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हमीरपुरः हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर पुलिस को गश्त के दौरान दोसड़का सब्जी मंडी के पास एक डेड बॉडी मिली है। पूरे बाजार में यह बजुर्ग भीख मांग कर गुजारा करता था और किसी कारण से उसकी मौत हो गई है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि गश्त के दौरान यह व्यक्ति जीवित था। लेकिन आचानक यह जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद एंबुलेंस एक सौ आठ को फोन किया गया तो हॉस्पिटल में डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया गया । पुलिस ने बताया कि व्यक्ति की कोविड-उन्नीस की रिपोर्ट भी नेगेटिव पाई गई है। अभी इसकी शिनाख्त नहीं हो पाई है कि कहां से है कहां से नहीं है और यह व्यक्ति मानसिक रोगी था और अभी तक इसकी मृत्यु का कारण पता नहीं चल पाया। वहीं हमीरपुर के एसपी कार्तिकेय गोकुल चंद्रन ने मामले की पुष्टि की और बताया कि व्यक्ति का पोस्टमार्टम होगा उसके बाद ही इसका पता चलेगा कि उसकी मृत्यु कैसे हुई है।
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इस्लामाबादः पाकिस्तान के पंजाब एवं बलुचिस्तान प्रांत में मंगलवार को अलग-अलग जेलों में 14 कैदियों को फांसी दी गई। मीडिया रपटों से यह जानकारी मिली।
समाचार चैनल जियो न्यूज के मुताबिक, दो कैदियों को लाहौर केंद्रीय कारागार में फांसी दी गई।
सियालकोट जिला कारागार में एक लड़की के यौन उत्पीड़न के मामले में 1999 में दोषी पाए गए दो कैदियों को फांसी दी गई।
साहीवाल केंद्रीय कारागार में एक कैदी को फांसी दी गई।
फैसलाबाद केंद्रीय कारागार में तीन कैदियों को फांसी दी गई, जिनमें से दो 1998 में तीन व्यक्तियों की हत्या के दोषी पाए गए थे, जबकि एक 2004 में सात लोगों की हत्या का दोषी था।
गुजरांवाला केंद्रीय कारागार में तीन कैदियों को, मुल्तान केंद्रीय कारागार में एक को और मच्छ कारागार में दो को फांसी दी गई।
पाकिस्तान ने 10 मार्च को देश में मृत्युदंड पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया था।
पाकिस्तान में बीते साल 16 दिसंबर को एक सैन्य स्कूल में हुए आतंकवादी हमले के बाद शुरुआत में सिर्फ आतंकवाद से जुड़े मामलों के लिए मृत्युदंड पर से प्रतिबंध हटाया गया था, जिसमें 150 लोगों की जानें गई थीं, लेकिन अब सभी बड़े आपराधिक मामलों के लिए मृत्युदंड पर लगी रोक हटा दी गई है।
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इस्लामाबादः पाकिस्तान के पंजाब एवं बलुचिस्तान प्रांत में मंगलवार को अलग-अलग जेलों में चौदह कैदियों को फांसी दी गई। मीडिया रपटों से यह जानकारी मिली। समाचार चैनल जियो न्यूज के मुताबिक, दो कैदियों को लाहौर केंद्रीय कारागार में फांसी दी गई। सियालकोट जिला कारागार में एक लड़की के यौन उत्पीड़न के मामले में एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में दोषी पाए गए दो कैदियों को फांसी दी गई। साहीवाल केंद्रीय कारागार में एक कैदी को फांसी दी गई। फैसलाबाद केंद्रीय कारागार में तीन कैदियों को फांसी दी गई, जिनमें से दो एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में तीन व्यक्तियों की हत्या के दोषी पाए गए थे, जबकि एक दो हज़ार चार में सात लोगों की हत्या का दोषी था। गुजरांवाला केंद्रीय कारागार में तीन कैदियों को, मुल्तान केंद्रीय कारागार में एक को और मच्छ कारागार में दो को फांसी दी गई। पाकिस्तान ने दस मार्च को देश में मृत्युदंड पर लगे प्रतिबंध को हटा लिया था। पाकिस्तान में बीते साल सोलह दिसंबर को एक सैन्य स्कूल में हुए आतंकवादी हमले के बाद शुरुआत में सिर्फ आतंकवाद से जुड़े मामलों के लिए मृत्युदंड पर से प्रतिबंध हटाया गया था, जिसमें एक सौ पचास लोगों की जानें गई थीं, लेकिन अब सभी बड़े आपराधिक मामलों के लिए मृत्युदंड पर लगी रोक हटा दी गई है।
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भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने रविवार को ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक मिसाइल के युद्धपोत संस्करण का अरब सागर में कामयाब परीक्षण कर लिया है। इस मिसाइल में स्वदेशी सीकर एंड बूस्टर भी लगाया गया है। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने इस बारें में कहा है कि मिसाइल में लगे स्वदेशी सीकर एंड बूस्टर को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRdo) ने विकसित कर दिया है और यह रक्षा इलाके में आत्मनिर्भरता की दिशा में हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करने का काम भी करता है।
इंडिया और रूस का संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड ऐसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का उत्पादन करती है जिन्हें पनडुब्बी, युद्धपोतों, युद्धक विमानों या फिर जमीन से लांच किया जाने वाला है। ब्रह्मोस मिसाइल की रफ्तार 2. 8 मैक है जो ध्वनि की रफ्तार से लगभग तीन गुना हो चुकी है।
नौसेना की ओर से जारी किए गए एक बयान में बोला गया कि भारतीय नौसेना ने डीआरडीओ की डिजाइन की गई स्वदेशी साधक और वर्धक ब्रह्मोस मिसाइल ने अरब सागर में सटीक अटैक कर सकता है। ये आत्मनिर्भरता के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। बयान में आगे इस बारें में कहा गया है कि मिसाइल का परीक्षण कोलकाता क्लास गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर वारशिप से किया जा चुका है। मिसाइल में स्वदेशी सामग्री बढ़ाने पर ब्रह्मोस एयरोस्पेस निरंतर काम करने में लगा हुआ है।
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भारतीय नौसेना ने रविवार को ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल के युद्धपोत संस्करण का अरब सागर में कामयाब परीक्षण कर लिया है। इस मिसाइल में स्वदेशी सीकर एंड बूस्टर भी लगाया गया है। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने इस बारें में कहा है कि मिसाइल में लगे स्वदेशी सीकर एंड बूस्टर को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने विकसित कर दिया है और यह रक्षा इलाके में आत्मनिर्भरता की दिशा में हमारी प्रतिबद्धता को मजबूत करने का काम भी करता है। इंडिया और रूस का संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड ऐसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का उत्पादन करती है जिन्हें पनडुब्बी, युद्धपोतों, युद्धक विमानों या फिर जमीन से लांच किया जाने वाला है। ब्रह्मोस मिसाइल की रफ्तार दो. आठ मैक है जो ध्वनि की रफ्तार से लगभग तीन गुना हो चुकी है। नौसेना की ओर से जारी किए गए एक बयान में बोला गया कि भारतीय नौसेना ने डीआरडीओ की डिजाइन की गई स्वदेशी साधक और वर्धक ब्रह्मोस मिसाइल ने अरब सागर में सटीक अटैक कर सकता है। ये आत्मनिर्भरता के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। बयान में आगे इस बारें में कहा गया है कि मिसाइल का परीक्षण कोलकाता क्लास गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर वारशिप से किया जा चुका है। मिसाइल में स्वदेशी सामग्री बढ़ाने पर ब्रह्मोस एयरोस्पेस निरंतर काम करने में लगा हुआ है।
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Weight Loss After Eating Late Night: जबकि सही समय पर अपना भोजन करना एक अच्छी आदत है, लेकिन इसे हम हमेशा फॉलो नहीं कर पाते हैं. बहुत से लोग रात का खाना पूरी तरह से छोड़ देते हैं और भूखे पेट सो जाते हैं. जबकि उनका मानना है कि इससे उन्हें अपना वजन कम करने (Weight Loss) में मदद मिलेगी, यह रियल में लंबे समय में अच्छे से ज्यादा नुकसान करता है. देर रात के खाने को अक्सर वजन बढ़ने से जोड़ा जाता है. एक्स्ट्रा फैट (Extra Fat) के बढ़ने के डर से कुछ लोग शाम 7 बजे के बाद खाना बंद करने की समय सीमा बना देते हैं. हालांकि, यह एक मिथक है. दरअसल आपका शरीर एक ऐसी मशीन है जो लगातार कैलोरी बर्न कर रही है. यह धारणा कि शाम 7 बजे के बाद खाने से आपका वजन बढ़ जाएगा या मोटा हो जाएगा क्या ये वाकई सच है?
शाम 7 बजे के बाद खाने के बाद भी वजन कम कैसे करें? । How To Lose Weight Even After Eating After 7PM?
सुबह सबसे पहले अपने सबसे अधिक कैलोरी वाले भोजन का सेवन करें. आप जो खाते हैं उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आप इसे कब खाते हैं. ध्यान रखें कि आप सुबह या शाम को कार्ब्स का सेवन करें. मॉडरेशन में खाने की कोशिश करें.
सुनिश्चित करें कि आपकी प्लेट अच्छी तरह से बैलेंस है, जिसमें भरपूर मात्रा में फाइबर, सब्जियां, प्रोटीन और हेल्दी फैट हैं. एक अच्छी तरह से बैलेंस डाइट लेने की कोशिश करें ताकि आप दिन भर भरा हुआ महसूस करें. अपने आहार में अधिक प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट कम करने का प्रयास करें.
पाचन और मेटाबॉलिज्म में मदद करने के लिए रात के खाने के बाद 10-15 मिनट की छोटी सैर करने की सलाह दी जाती है. सोने से कम से कम 3 घंटे पहले भोजन करें ताकि आपके शरीर को भोजन पचाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके.
हाई कैलोरी, शुगर वाले फूड्स जैसे आइसक्रीम और कुकीज से बचें. फल और साबुत अनाज फाइबर में हाई होते हैं और इसमें शुगर वाले स्नैक्स की तुलना में अधिक विटामिन और पोषक तत्व होते हैं. रात की भूख से बचने के लिए भोजन के बीच पांच घंटे से अधिक इंतजार न करें.
कुछ लोग सुबह इतने भूखे नहीं होते हैं और बाद में दिन में ज्यादा मात्रा में खाना पसंद करते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि आप फिर शाम को कम या लाइट खाना खाएं. ये बेहतरीन रणनीति हो सकती है.
अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.
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Weight Loss After Eating Late Night: जबकि सही समय पर अपना भोजन करना एक अच्छी आदत है, लेकिन इसे हम हमेशा फॉलो नहीं कर पाते हैं. बहुत से लोग रात का खाना पूरी तरह से छोड़ देते हैं और भूखे पेट सो जाते हैं. जबकि उनका मानना है कि इससे उन्हें अपना वजन कम करने में मदद मिलेगी, यह रियल में लंबे समय में अच्छे से ज्यादा नुकसान करता है. देर रात के खाने को अक्सर वजन बढ़ने से जोड़ा जाता है. एक्स्ट्रा फैट के बढ़ने के डर से कुछ लोग शाम सात बजे के बाद खाना बंद करने की समय सीमा बना देते हैं. हालांकि, यह एक मिथक है. दरअसल आपका शरीर एक ऐसी मशीन है जो लगातार कैलोरी बर्न कर रही है. यह धारणा कि शाम सात बजे के बाद खाने से आपका वजन बढ़ जाएगा या मोटा हो जाएगा क्या ये वाकई सच है? शाम सात बजे के बाद खाने के बाद भी वजन कम कैसे करें? । How To Lose Weight Even After Eating After सातPM? सुबह सबसे पहले अपने सबसे अधिक कैलोरी वाले भोजन का सेवन करें. आप जो खाते हैं उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आप इसे कब खाते हैं. ध्यान रखें कि आप सुबह या शाम को कार्ब्स का सेवन करें. मॉडरेशन में खाने की कोशिश करें. सुनिश्चित करें कि आपकी प्लेट अच्छी तरह से बैलेंस है, जिसमें भरपूर मात्रा में फाइबर, सब्जियां, प्रोटीन और हेल्दी फैट हैं. एक अच्छी तरह से बैलेंस डाइट लेने की कोशिश करें ताकि आप दिन भर भरा हुआ महसूस करें. अपने आहार में अधिक प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट कम करने का प्रयास करें. पाचन और मेटाबॉलिज्म में मदद करने के लिए रात के खाने के बाद दस-पंद्रह मिनट की छोटी सैर करने की सलाह दी जाती है. सोने से कम से कम तीन घंटाटे पहले भोजन करें ताकि आपके शरीर को भोजन पचाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके. हाई कैलोरी, शुगर वाले फूड्स जैसे आइसक्रीम और कुकीज से बचें. फल और साबुत अनाज फाइबर में हाई होते हैं और इसमें शुगर वाले स्नैक्स की तुलना में अधिक विटामिन और पोषक तत्व होते हैं. रात की भूख से बचने के लिए भोजन के बीच पांच घंटे से अधिक इंतजार न करें. कुछ लोग सुबह इतने भूखे नहीं होते हैं और बाद में दिन में ज्यादा मात्रा में खाना पसंद करते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि आप फिर शाम को कम या लाइट खाना खाएं. ये बेहतरीन रणनीति हो सकती है. अस्वीकरणः सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.
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सुल्तानपुर के कुड़वार थाना क्षेत्र में 40 हजार रुपये के टप्पेबाजी का मामला सामने आया है। बुजुर्ग व्यक्ति बेटे के एकाउंट में पैसे जमा करने के लिए बैंक गया था। अशिक्षित होने के कारण बुजुर्ग ने पास खड़े युवक से फार्म भरने के लिए कहा। ऐसे में युवक ने मौका पाते ही बुजुर्ग का थैला पार कर दिया। पीड़ित शिकायत करने थाने पहुंचा।
मामला कुड़वार थाना क्षेत्र के कस्बा स्थित ग्रामीण बैंक की है। शनिवार सुबह करीब 11 बजे बहुबरा गांव निवासी विश्राम अपनी पत्नी के साथ बैंक ऑफ बड़ौदा गया था। बेटे रामू के खाते में 40 हजार रुपया जमा करना था। विश्राम ने बताया कि वह अशिक्षित है, इसलिए उसने पैसे जमा करने वाली पर्ची भरने के लिए बैंक में ही मौजूद एक युवक से मदद मांगी। उसने बुजुर्ग दंपत्ति से पर्ची लेकर भरना शुरू किया और फिर थैले में रखा 40 हजार रुपये लेकर बोला, पर्ची में थोड़ी गलती हो गई है। सुधार करना है, कहकर बैंक से पैसे लेकर बाहर निकल गया।
बैंक से टप्पेबाज बाहर निकला और मौका देखकर भाग गया। काफी देर तक इंतजार करने के बाद जब वापस नहीं आया तो पति-पत्नी युवक की खोजबीन शुरू कर दी लेकिन, उसका पता नहीं चल सका। दंपति ने इसकी सूचना कुड़वार पुलिस को दी। पुलिस मौके पर पहुंची और CCTV फुटेज खंगालकर छानबीन कर रही है। थानाध्यक्ष अखिलेश सिंह ने बताया कि पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। कहा कि शीघ्र ही घटना का खुलासा किया जायेगा। CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने क्षेत्र के संचित स्टूडियो मिक्सिंग लैब पर बैठे एक युवक को हिरासत में लिया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।
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सुल्तानपुर के कुड़वार थाना क्षेत्र में चालीस हजार रुपये के टप्पेबाजी का मामला सामने आया है। बुजुर्ग व्यक्ति बेटे के एकाउंट में पैसे जमा करने के लिए बैंक गया था। अशिक्षित होने के कारण बुजुर्ग ने पास खड़े युवक से फार्म भरने के लिए कहा। ऐसे में युवक ने मौका पाते ही बुजुर्ग का थैला पार कर दिया। पीड़ित शिकायत करने थाने पहुंचा। मामला कुड़वार थाना क्षेत्र के कस्बा स्थित ग्रामीण बैंक की है। शनिवार सुबह करीब ग्यारह बजे बहुबरा गांव निवासी विश्राम अपनी पत्नी के साथ बैंक ऑफ बड़ौदा गया था। बेटे रामू के खाते में चालीस हजार रुपया जमा करना था। विश्राम ने बताया कि वह अशिक्षित है, इसलिए उसने पैसे जमा करने वाली पर्ची भरने के लिए बैंक में ही मौजूद एक युवक से मदद मांगी। उसने बुजुर्ग दंपत्ति से पर्ची लेकर भरना शुरू किया और फिर थैले में रखा चालीस हजार रुपये लेकर बोला, पर्ची में थोड़ी गलती हो गई है। सुधार करना है, कहकर बैंक से पैसे लेकर बाहर निकल गया। बैंक से टप्पेबाज बाहर निकला और मौका देखकर भाग गया। काफी देर तक इंतजार करने के बाद जब वापस नहीं आया तो पति-पत्नी युवक की खोजबीन शुरू कर दी लेकिन, उसका पता नहीं चल सका। दंपति ने इसकी सूचना कुड़वार पुलिस को दी। पुलिस मौके पर पहुंची और CCTV फुटेज खंगालकर छानबीन कर रही है। थानाध्यक्ष अखिलेश सिंह ने बताया कि पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। कहा कि शीघ्र ही घटना का खुलासा किया जायेगा। CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने क्षेत्र के संचित स्टूडियो मिक्सिंग लैब पर बैठे एक युवक को हिरासत में लिया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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यूपीएससी ने सुपरवाइजर समेत अन्य पदों पर भर्ती निकाली है। ऑनलाइन आवेदन 22 अप्रैल से 11 मई, 2023 तक कर सकते हैं। संघ लोक सेवा आयोग ने भर्ती के संबंध में नोटिफिकेशन आधिकारिक वेबसाइट upsc. gov. in पर जारी किया है।
इस भर्ती के लिए उम्मीदवारों को केवल 25 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा। शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। इसके अलावा बता दे अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/पीडब्ल्यूबीडी/महिला उम्मीदवारों के लिए कोई आवेदन शुल्क नहीं है। जो भी उम्मीदवार इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं वे आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि के बाद कोई एप्लीकेशन फॉर्म स्वीकार नहीं किया जाएगा। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए कृपया आधिकारिक अधिसूचना देखें।
रिक्ति पदों का विवरण ?
चयन प्रक्रिया ?
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यूपीएससी ने सुपरवाइजर समेत अन्य पदों पर भर्ती निकाली है। ऑनलाइन आवेदन बाईस अप्रैल से ग्यारह मई, दो हज़ार तेईस तक कर सकते हैं। संघ लोक सेवा आयोग ने भर्ती के संबंध में नोटिफिकेशन आधिकारिक वेबसाइट upsc. gov. in पर जारी किया है। इस भर्ती के लिए उम्मीदवारों को केवल पच्चीस रुपयापये आवेदन शुल्क देना होगा। शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। इसके अलावा बता दे अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/पीडब्ल्यूबीडी/महिला उम्मीदवारों के लिए कोई आवेदन शुल्क नहीं है। जो भी उम्मीदवार इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं वे आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि के बाद कोई एप्लीकेशन फॉर्म स्वीकार नहीं किया जाएगा। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए कृपया आधिकारिक अधिसूचना देखें। रिक्ति पदों का विवरण ? चयन प्रक्रिया ?
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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सीधीः अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में बघेलखंड का दबदबा....
सीधी। खजुराहो में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जहां देशभर के कला प्रेमियों व कलाकारों ने अपनी किस्मत आजमाने के लिये पहुंचे। विंध्य व बघेलखंड के चहेते बघेली कलाकार अविनाश तिवारी जिनकी कलाकारी के लाखों दीवाने हैं। उनके लिए भी यह मौका खास अवसर रहा है। इस कार्यक्रम के 6 वें सीजन में बघेली की चार फिल्में चयनित हुई हैं जो कि विंध्य के लिये गौरव का विषय है।
बघेली कलाकार अविनाश तिवारी ने बताया कि खजुराहो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल जो कि हर साल खजुराहो में मनाया जाता है। देशभर की फिल्में आती हैं। इस बार 6 वें सीजन में बघेली की चार फिल्में चयनित हुई हैं जो मेरे लिए बहुत ही खुशी का पल है।
बघेलखंड के दर्शकों के लिए भी यह खुशी के क्षण है कि अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में बघेली की फिल्में चयनित हुई और चारों फिल्मों को सम्मानित किया गया। पहली फिल्म शौचालय। इसके प्रोड्यूसरएडायरेक्टर व एक्टर अविनाश तिवारी हैं.
दूसरी फिल्म आवास योजना इसके मुख्य कलाकार अविनाश तिवारी सुभाष मिश्रा शालू शर्मा हैंए जिसकी स्टोरी अविनाश तिवारी ने लिखी। इसी दो और फिल्में हैं। सभी फिल्मों को दर्शकों ने देखा और कलाकारों की तारीफ की।
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सीधीः अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में बघेलखंड का दबदबा.... सीधी। खजुराहो में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल का कार्यक्रम आयोजित किया गया। जहां देशभर के कला प्रेमियों व कलाकारों ने अपनी किस्मत आजमाने के लिये पहुंचे। विंध्य व बघेलखंड के चहेते बघेली कलाकार अविनाश तिवारी जिनकी कलाकारी के लाखों दीवाने हैं। उनके लिए भी यह मौका खास अवसर रहा है। इस कार्यक्रम के छः वें सीजन में बघेली की चार फिल्में चयनित हुई हैं जो कि विंध्य के लिये गौरव का विषय है। बघेली कलाकार अविनाश तिवारी ने बताया कि खजुराहो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल जो कि हर साल खजुराहो में मनाया जाता है। देशभर की फिल्में आती हैं। इस बार छः वें सीजन में बघेली की चार फिल्में चयनित हुई हैं जो मेरे लिए बहुत ही खुशी का पल है। बघेलखंड के दर्शकों के लिए भी यह खुशी के क्षण है कि अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में बघेली की फिल्में चयनित हुई और चारों फिल्मों को सम्मानित किया गया। पहली फिल्म शौचालय। इसके प्रोड्यूसरएडायरेक्टर व एक्टर अविनाश तिवारी हैं. दूसरी फिल्म आवास योजना इसके मुख्य कलाकार अविनाश तिवारी सुभाष मिश्रा शालू शर्मा हैंए जिसकी स्टोरी अविनाश तिवारी ने लिखी। इसी दो और फिल्में हैं। सभी फिल्मों को दर्शकों ने देखा और कलाकारों की तारीफ की।
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नई दिल्ली (एएनआई): भारत के विधि आयोग ने कानून मंत्रालय को सौंपी अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि राजद्रोह से निपटने वाली आईपीसी की धारा 124ए को कुछ संशोधनों के बावजूद भारतीय दंड संहिता में बनाए रखने की जरूरत है, ताकि इसे लागू किया जा सके। प्रावधान के उपयोग के संबंध में अधिक स्पष्टता।
विधि आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है, "हम आगे अनुशंसा करते हैं कि उक्त धारा के तहत प्रदान की गई सजा की योजना को यह सुनिश्चित करने के लिए संशोधित किया जाए कि इसे आईपीसी के अध्याय VI के तहत अन्य अपराधों के साथ समानता में लाया जाए। "
इसके अलावा, धारा 124ए के दुरुपयोग के संबंध में विचारों को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने सिफारिश की कि इसे रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा मॉडल दिशानिर्देश जारी किए जाएं।
इस संदर्भ में, वैकल्पिक रूप से यह भी सुझाव दिया गया है कि दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (सीआरपीसी) की धारा 196(3) के अनुरूप एक प्रावधान को सीआरपीसी की धारा 154 के परंतुक के रूप में शामिल किया जा सकता है, जो पहले आवश्यक प्रक्रियात्मक सुरक्षा प्रदान करेगा। IPC की धारा 124A के तहत एक अपराध के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करना।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सिफारिशों तक पहुंचने के कारणों पर संलग्न रिपोर्ट में विस्तार से विचार किया गया है और आयोग का दृढ़ विश्वास है कि इसे शामिल करने से इस प्रावधान के उपयोग से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में मदद मिलेगी।
भारत के 22वें विधि आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रितु राज अवस्थी ने 'देशद्रोह के कानून के उपयोग' पर आधारित रिपोर्ट में कहा, "हमने राजद्रोह से संबंधित कानून और भारत में इसके उपयोग की उत्पत्ति का पता लगाने का व्यापक अध्ययन किया। एवं विकास। "
आयोग ने औपनिवेशिक और स्वतंत्र भारत दोनों में राजद्रोह के इतिहास, विभिन्न न्यायालयों में राजद्रोह पर कानून, और विषय वस्तु पर सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के विभिन्न निर्णयों का भी विश्लेषण किया।
विधि आयोग के रिपोर्टर ने कहा कि उसे भारतीय दंड संहिता, 1860 (आईपीसी) की धारा 124ए के प्रावधान के उपयोग के अध्ययन के लिए गृह मंत्रालय से एक संदर्भ प्राप्त हुआ और संशोधन, यदि कोई हो, का सुझाव दिया।
IPC की धारा 124A की संवैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी.
भारत संघ ने सर्वोच्च न्यायालय को आश्वासन दिया कि वह धारा 124ए की फिर से जांच कर रहा है और अदालत ऐसा करने में अपना बहुमूल्य समय निवेश नहीं कर सकती है। उसी के अनुसार और 11 मई, 2022 को पारित आदेश के तहत, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को धारा 124ए के संबंध में जारी सभी जांचों को निलंबित करते हुए कोई भी प्राथमिकी दर्ज करने या कोई भी कठोर कदम उठाने से परहेज करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, यह भी निर्देश दिया कि सभी लंबित परीक्षणों, अपीलों और कार्यवाही को स्थगित रखा जाए।
22वें विधि आयोग ने 7 नवंबर, 2022 की अधिसूचना के तहत अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति के बाद तुरंत इस संदर्भ को लिया और इस अंतिम रिपोर्ट को विचार के लिए प्रस्तुत किया। (एएनआई)
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नई दिल्ली : भारत के विधि आयोग ने कानून मंत्रालय को सौंपी अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि राजद्रोह से निपटने वाली आईपीसी की धारा एक सौ चौबीसए को कुछ संशोधनों के बावजूद भारतीय दंड संहिता में बनाए रखने की जरूरत है, ताकि इसे लागू किया जा सके। प्रावधान के उपयोग के संबंध में अधिक स्पष्टता। विधि आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है, "हम आगे अनुशंसा करते हैं कि उक्त धारा के तहत प्रदान की गई सजा की योजना को यह सुनिश्चित करने के लिए संशोधित किया जाए कि इसे आईपीसी के अध्याय VI के तहत अन्य अपराधों के साथ समानता में लाया जाए। " इसके अलावा, धारा एक सौ चौबीसए के दुरुपयोग के संबंध में विचारों को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने सिफारिश की कि इसे रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा मॉडल दिशानिर्देश जारी किए जाएं। इस संदर्भ में, वैकल्पिक रूप से यह भी सुझाव दिया गया है कि दंड प्रक्रिया संहिता, एक हज़ार नौ सौ तिहत्तर की धारा एक सौ छियानवे के अनुरूप एक प्रावधान को सीआरपीसी की धारा एक सौ चौवन के परंतुक के रूप में शामिल किया जा सकता है, जो पहले आवश्यक प्रक्रियात्मक सुरक्षा प्रदान करेगा। IPC की धारा एक सौ चौबीस एम्पीयर के तहत एक अपराध के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करना। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सिफारिशों तक पहुंचने के कारणों पर संलग्न रिपोर्ट में विस्तार से विचार किया गया है और आयोग का दृढ़ विश्वास है कि इसे शामिल करने से इस प्रावधान के उपयोग से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में मदद मिलेगी। भारत के बाईसवें विधि आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रितु राज अवस्थी ने 'देशद्रोह के कानून के उपयोग' पर आधारित रिपोर्ट में कहा, "हमने राजद्रोह से संबंधित कानून और भारत में इसके उपयोग की उत्पत्ति का पता लगाने का व्यापक अध्ययन किया। एवं विकास। " आयोग ने औपनिवेशिक और स्वतंत्र भारत दोनों में राजद्रोह के इतिहास, विभिन्न न्यायालयों में राजद्रोह पर कानून, और विषय वस्तु पर सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के विभिन्न निर्णयों का भी विश्लेषण किया। विधि आयोग के रिपोर्टर ने कहा कि उसे भारतीय दंड संहिता, एक हज़ार आठ सौ साठ की धारा एक सौ चौबीसए के प्रावधान के उपयोग के अध्ययन के लिए गृह मंत्रालय से एक संदर्भ प्राप्त हुआ और संशोधन, यदि कोई हो, का सुझाव दिया। IPC की धारा एक सौ चौबीस एम्पीयर की संवैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी. भारत संघ ने सर्वोच्च न्यायालय को आश्वासन दिया कि वह धारा एक सौ चौबीसए की फिर से जांच कर रहा है और अदालत ऐसा करने में अपना बहुमूल्य समय निवेश नहीं कर सकती है। उसी के अनुसार और ग्यारह मई, दो हज़ार बाईस को पारित आदेश के तहत, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को धारा एक सौ चौबीसए के संबंध में जारी सभी जांचों को निलंबित करते हुए कोई भी प्राथमिकी दर्ज करने या कोई भी कठोर कदम उठाने से परहेज करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, यह भी निर्देश दिया कि सभी लंबित परीक्षणों, अपीलों और कार्यवाही को स्थगित रखा जाए। बाईसवें विधि आयोग ने सात नवंबर, दो हज़ार बाईस की अधिसूचना के तहत अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति के बाद तुरंत इस संदर्भ को लिया और इस अंतिम रिपोर्ट को विचार के लिए प्रस्तुत किया।
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ऊना : कंटेनमैंट जोन के नियमों को तोड़कर चोर रास्तों से बाहर घूमने पर पुलिस थाना ऊना के तहत 5 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गांव के उपप्रधान की शिकायत के बाद मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार डठवाड़ा के उपप्रधान अमित कुमार ने सूचना दी कि गांव के कंटेनमैंट जोन के कुछ लोग चोरी-छिपे बाहर जाकर घूम रहे हैं। पुलिस थाना सदर के एसआई अनिल कुमार ने टीम सहित मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और इस संबंध में गांव के 4 पुरुषों और एक महिला के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
एसपी कार्तिकेयन गोकुलचंद्रन ने बताया कि पुलिस ने इस संबंध में आरोपियों राजकुमार, कमलदेव, रमन कुमार, चैन ङ्क्षसह सहित रेखा देवी के खिलाफ आईपीसी की धारा 188, 269, 270 सहित आपदा प्रबंधन की धारा 51 के तहत मामला दर्ज किया है और आगामी कार्रवाई की जा रही है।
महंगा पड़ा कंटेनमैंट जोन से बाहर घूमना , महिला सहित 5 के खिलाफ केस दर्ज Reviewed by Himachal Fast News on 20 June Rating:
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ऊना : कंटेनमैंट जोन के नियमों को तोड़कर चोर रास्तों से बाहर घूमने पर पुलिस थाना ऊना के तहत पाँच लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गांव के उपप्रधान की शिकायत के बाद मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार डठवाड़ा के उपप्रधान अमित कुमार ने सूचना दी कि गांव के कंटेनमैंट जोन के कुछ लोग चोरी-छिपे बाहर जाकर घूम रहे हैं। पुलिस थाना सदर के एसआई अनिल कुमार ने टीम सहित मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और इस संबंध में गांव के चार पुरुषों और एक महिला के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एसपी कार्तिकेयन गोकुलचंद्रन ने बताया कि पुलिस ने इस संबंध में आरोपियों राजकुमार, कमलदेव, रमन कुमार, चैन ङ्क्षसह सहित रेखा देवी के खिलाफ आईपीसी की धारा एक सौ अठासी, दो सौ उनहत्तर, दो सौ सत्तर सहित आपदा प्रबंधन की धारा इक्यावन के तहत मामला दर्ज किया है और आगामी कार्रवाई की जा रही है। महंगा पड़ा कंटेनमैंट जोन से बाहर घूमना , महिला सहित पाँच के खिलाफ केस दर्ज Reviewed by Himachal Fast News on बीस जूनe Rating:
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अगर आप स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कस्टमर हैं तो आपके लिए यह खबर काम कि है क्योंकि बैंक की ओर से आपके सीधा घर अब कैश पहुंचाया जाएगा। दरअसल, बैंक की और से कई सारी सुविधाएं दी जाती हैं। कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए बैंक ने ग्राहकों की सुविधा के लिए डोरस्टेप बैंकिंग की शुरूआत की है, जिसके तहत आपको कैश निकालने से लेकर पे ऑर्डर्स, नया चेकबुक संबंधित कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी।
इस बारे में स्टेट बैंक ऑफ इंडिाय ने अपने ऑफिशियल ट्विटर पर जानकारी देते हुए लिखा है कि आपका बैंक अब आपके दरवाजे पर है। Doorstep banking के लिए आज ही रजिस्टर करें। अधिक जानकारी के लिए आप इस लिंक https://bank. sbi/dsb पर क्लिक कर सकते हैं।
आपका बैंक अब आपके दरवाजे पर। Doorstep banking के लिए आज ही रजिस्टर करे।
डोरस्टेप बैंकिग के लिए होम ब्रांच में रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
कॉन्टैक्ट सेंटर पर सुविधा पूरी होने तक होम ब्रांच में ही इसके लिए आवेदन करें।
पैसे जमा करने और निकालने दोनों की अधिकतम सीमा 20 हजार रुपये रोजाना है।
सभी Non-financial transactions के लिए सर्विस चार्ज 60 रुपये+जीएसटी जबकि financial transactions के लिए ये 100 रुपये+जीएसटी है।
पैसा निकालने के लिए चेक के साथ Withdrawal Form के साथ ही पासबुक की भी जरूरत होगी।
हालांकि बैंक द्वारा दी जा रही इस सुविधा का कई लोग लाभ नहीं उठा सकेंगे। ये सुविधा ज्वाइंट अकाउंट, माइनर अकाउंट, जो नॉन-पर्सनल अकाउंट, के अलावा जिन कस्टमर्स का रजिस्टर्ड एड्रेस होम ब्रांच के 5 किलोमीटर के रेडियस में है उन्हें नहीं दी जाएगी। डोरस्टेप बैंकिंग में फाइनेंशियल और नॉन फाइनेंशियल सर्विस के लिए 75 रुपए प्लस जीएसटी चार्ज का भी भुगतान करना होगा।
अगर आप बैंक द्वारा दिए जा रहे इस सुविधा का फायदा उठाना चाहते हैं तो आप टोल फ्री नंबर 1800111103 पर वर्किंग डेज में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे के बीच कॉल कर फायदा उठा सकते हैं। इसके अलावा आप डोरस्टेप बैंकिंग सर्विस का रजिस्ट्रेशन मोबाइल एप्लीकेशन, वेबसाइट या फिर कॉल सेंटर के जरिए कर सकते हैं।
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अगर आप स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कस्टमर हैं तो आपके लिए यह खबर काम कि है क्योंकि बैंक की ओर से आपके सीधा घर अब कैश पहुंचाया जाएगा। दरअसल, बैंक की और से कई सारी सुविधाएं दी जाती हैं। कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए बैंक ने ग्राहकों की सुविधा के लिए डोरस्टेप बैंकिंग की शुरूआत की है, जिसके तहत आपको कैश निकालने से लेकर पे ऑर्डर्स, नया चेकबुक संबंधित कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी। इस बारे में स्टेट बैंक ऑफ इंडिाय ने अपने ऑफिशियल ट्विटर पर जानकारी देते हुए लिखा है कि आपका बैंक अब आपके दरवाजे पर है। Doorstep banking के लिए आज ही रजिस्टर करें। अधिक जानकारी के लिए आप इस लिंक https://bank. sbi/dsb पर क्लिक कर सकते हैं। आपका बैंक अब आपके दरवाजे पर। Doorstep banking के लिए आज ही रजिस्टर करे। डोरस्टेप बैंकिग के लिए होम ब्रांच में रजिस्ट्रेशन कराना होगा। कॉन्टैक्ट सेंटर पर सुविधा पूरी होने तक होम ब्रांच में ही इसके लिए आवेदन करें। पैसे जमा करने और निकालने दोनों की अधिकतम सीमा बीस हजार रुपये रोजाना है। सभी Non-financial transactions के लिए सर्विस चार्ज साठ रुपयापये+जीएसटी जबकि financial transactions के लिए ये एक सौ रुपयापये+जीएसटी है। पैसा निकालने के लिए चेक के साथ Withdrawal Form के साथ ही पासबुक की भी जरूरत होगी। हालांकि बैंक द्वारा दी जा रही इस सुविधा का कई लोग लाभ नहीं उठा सकेंगे। ये सुविधा ज्वाइंट अकाउंट, माइनर अकाउंट, जो नॉन-पर्सनल अकाउंट, के अलावा जिन कस्टमर्स का रजिस्टर्ड एड्रेस होम ब्रांच के पाँच किलोग्राममीटर के रेडियस में है उन्हें नहीं दी जाएगी। डोरस्टेप बैंकिंग में फाइनेंशियल और नॉन फाइनेंशियल सर्विस के लिए पचहत्तर रुपयापए प्लस जीएसटी चार्ज का भी भुगतान करना होगा। अगर आप बैंक द्वारा दिए जा रहे इस सुविधा का फायदा उठाना चाहते हैं तो आप टोल फ्री नंबर एक आठ शून्य शून्य एक एक एक एक शून्य तीन पर वर्किंग डेज में सुबह नौ बजे से शाम चार बजे के बीच कॉल कर फायदा उठा सकते हैं। इसके अलावा आप डोरस्टेप बैंकिंग सर्विस का रजिस्ट्रेशन मोबाइल एप्लीकेशन, वेबसाइट या फिर कॉल सेंटर के जरिए कर सकते हैं।
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कोझिकोड । माकपा के एक प्रदेश स्तरीय नेता को आज एक मार्क्सवार्दी विदोही और रिवोल्यूशनरी मार्क्सवादी पार्टी ः आरएमपी ः के नेता चंदशेखरन की हत्या के संबंध में गिरफ्तार कर लिया गया। माकपा की प्रदेश समिति के सदस्य के रागेश को गिरफ्तारी के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया। पुलिस ने यह जानकारी देते हुए बताया कि रागेश को पूछताछ के लिए विशेष जांच दल के वडाकारा कार्यालय में तलब किया गया था। पूछताछ एक घंटा चली जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
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कोझिकोड । माकपा के एक प्रदेश स्तरीय नेता को आज एक मार्क्सवार्दी विदोही और रिवोल्यूशनरी मार्क्सवादी पार्टी ः आरएमपी ः के नेता चंदशेखरन की हत्या के संबंध में गिरफ्तार कर लिया गया। माकपा की प्रदेश समिति के सदस्य के रागेश को गिरफ्तारी के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया। पुलिस ने यह जानकारी देते हुए बताया कि रागेश को पूछताछ के लिए विशेष जांच दल के वडाकारा कार्यालय में तलब किया गया था। पूछताछ एक घंटा चली जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
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एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कुछ ऐसी एक्ट्रेसेस हैं जिन्होंने अपना बॉडी ट्रांसफोर्मेशन कर अपने फैन्स को चौंका दिया है।
हमारा शरीर बहुत ही फ्लेक्सिबल होता है और धीरे-धीरे इसको लेकर हम काफी संजीदा भी रहते हैं। यकीनन अपने शरीर को जैसा वो है वैसा ही एक्सेप्ट करना आपकी मेंटल हेल्थ के लिए काफी अच्छा हो सकता है, लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है कि आप फिट रहने के लिए कुछ भी न करें। हमारी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में भी एक्टर्स बहुत ज्यादा बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन करते हैं। कभी मोटे से पतले हो जाते हैं तो कभी पतले से मोटे। ऐसा ही कुछ टीवी एक्ट्रेसेस के साथ भी रहा है।
पिछले कुछ समय में कई टीवी एक्ट्रेसेस ने अपने बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन पर बहुत ध्यान दिया है। ऐसी कई टीवी एक्ट्रेसेस हैं जिन्हें हम हमेशा से चबी मानते थे और उन्होंने अपने बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन से सभी को चौंका दिया है। एक तरह से देखा जाए तो ये एक्ट्रेसेस अपने फिटनेस गोल्स को फॉलो करते हुए कई लोगों को प्रोत्साहित कर रही हैं। तो चलिए बात करते हैं उन्हीं एक्ट्रेसेस की।
हाल ही में भारती सिंह ने 16 किलो वजन कम किया है और उसके बाद उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में बताया। भारती सिंह की वेट लॉस जर्नी काफी कुछ इंटरमिटेंट फास्टिंग पर निर्भर करती थी और उन्होंने इस बारे में अपने एक इंटरव्यू में बताया भी था।
भारती ने अपने डाइट रूटीन को बदला और साथ ही साथ वो बहुत ज्यादा एक्सरसाइज पर फोकस कर पतले होने की जगह अपनी फिटनेस पर ज्यादा फोकस करती रहीं।
2019 में श्वेता के तलाक के बाद उन्होंने अपनी फिटनेस पर बहुत ध्यान दिया है। श्वेता जिन्होंने अपना करियर बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट शुरू किया था वो कई फिल्मों और सीरियल का हिस्सा रह चुकी हैं। श्वेता ने अपने तलाक के बाद एक फोटोशूट भी करवाया था और अब आप उनका ट्रांसफॉर्मेशन बखूबी देख सकते हैं।
श्वेता बहुत ही हार्ड वर्किंग एक्ट्रेस हैं और उनके फैन्स को उनके अलग-अलग रोल्स भी काफी पसंद आते हैं।
वो एक्ट्रेसेस जिन्होंने बहुत ज्यादा बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन किया है उनमें से एक श्वेता तिवारी भी हैं। फिलहाल वो अपने पूर्व पति अभिनव कोहली के साथ लीगल लड़ाई लड़ रही हैं और वो 'खतरों के खिलाड़ी 11' में भी दिख चुकी हैं।
40 की उम्र पार कर चुकी श्वेता अपनी बेटी पलक तिवारी के साथ फिटनेस रूटीन फॉलो करती हैं और सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं। श्वेता तिवारी महिला सशक्तिकरण को लेकर बहुत एक्टिव रहती हैं और कई लोगों को मोटिवेट भी कर चुकी हैं।
जूही परमार जो सीरियल 'कुमकुम' में बहुत ज्यादा फेमस हो गई थीं शादी के बाद एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से कुछ कट सी गई थीं। अपने पति सचिन श्रॉफ से अलग होने के बाद जूही ने 17 किलो वजन कम किया था। जूही अपने वेट लॉस और ट्रांसफॉर्मेशन को लेकर काफी वोकल रही थीं और उन्होंने अब टीवी की दुनिया में वापसी भी कर ली है।
टीवी सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' की गायत्री उर्फ कांची सिंह ने 8 किलो वजन कम किया और वो अपने फैन्स को भी फिट रहने और हेल्दी डाइट फॉलो करने के लिए मोटिवेट करती रहती हैं।
कांची कई म्यूजिक एल्बम में भी दिख चुकी हैं और वो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी काफी एक्टिव रहती हैं।
'कॉमेडी सर्कस' की छोटी और नटखट गंगूबाई किसे याद नहीं होगी। सलोनी डैनी ने अपने एक इंटरव्यू में ये बताया था कि उनके बॉडी वेट की वजह से उन्हें काफी कुछ सुनने को मिला। सलोनी ने लगभग 20 किलो वजन कम किया है। उन्होंने बहुत स्ट्रिक्ट डाइट के साथ-साथ वर्कआउट पर भी ध्यान दिया। सलोनी डैनी अब सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और वो एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपने पैर जमा रही हैं।
शहनाज गिल का वेट लॉस ट्रांसफॉर्मेशन तो हम सभी ने देखा है। 'बिग बॉस 13' के बाद से ही उन्होंने अपने वजन को कंट्रोल करना शुरू कर दिया और अब वो काफी शेप में आ गई हैं।
एक इंटरव्यू में शहनाज ने बताया था कि उन्होंने काफी ज्यादा अपनी डाइट से वो आइटम हटा दिए हैं जो नॉन-वेज थे और कैलोरी बढ़ा सकते थे। शहनाज ने लगभग 12 किलो वजन कम किया है और वो रेगुलर एक्सरसाइज भी करती रहती हैं।
अपनी हेल्थ के बारे में अविका काफी सजग रहती हैं और उन्होंने लगभग 13 किलो वजन कम कर अपनी बॉडी को ट्रांसफॉर्म भी कर लिया है। अविका ने अपनी वेट लॉस जर्नी के बारे में सोशल मीडिया पर अपडेट्स भी शेयर की हैं।
अविका ने भी डाइट और वर्कआउट दोनों का सहारा लिया है और उन्हें डांसिंग का भी बहुत शौक है। अविका ने अपने इंस्टाग्राम प्रोफाइल में कई डांस वीडियो भी शेयर किए हैं।
रश्मि देसाई उन एक्ट्रेसेस में से एक हैं जिन्हें वेट लॉस के लिए काफी ट्रोल किया गया था। 'बिग बॉस सीजन 13' में तो उन्हें इसके लिए काफी कुछ सुनना पड़ा। रश्मि अब दोबारा से शेप में आ गई हैं और वो योगा क्लासेस पर ध्यान दे रही हैं।
ये सारी एक्ट्रेसेस अपनी हेल्थ पर ध्यान दे रही हैं और इन सभी ने अपने शरीर को काफी बदला है। ये अपने फैन्स को मोटिवेट भी करती रहती हैं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से।
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कुछ ऐसी एक्ट्रेसेस हैं जिन्होंने अपना बॉडी ट्रांसफोर्मेशन कर अपने फैन्स को चौंका दिया है। हमारा शरीर बहुत ही फ्लेक्सिबल होता है और धीरे-धीरे इसको लेकर हम काफी संजीदा भी रहते हैं। यकीनन अपने शरीर को जैसा वो है वैसा ही एक्सेप्ट करना आपकी मेंटल हेल्थ के लिए काफी अच्छा हो सकता है, लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है कि आप फिट रहने के लिए कुछ भी न करें। हमारी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में भी एक्टर्स बहुत ज्यादा बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन करते हैं। कभी मोटे से पतले हो जाते हैं तो कभी पतले से मोटे। ऐसा ही कुछ टीवी एक्ट्रेसेस के साथ भी रहा है। पिछले कुछ समय में कई टीवी एक्ट्रेसेस ने अपने बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन पर बहुत ध्यान दिया है। ऐसी कई टीवी एक्ट्रेसेस हैं जिन्हें हम हमेशा से चबी मानते थे और उन्होंने अपने बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन से सभी को चौंका दिया है। एक तरह से देखा जाए तो ये एक्ट्रेसेस अपने फिटनेस गोल्स को फॉलो करते हुए कई लोगों को प्रोत्साहित कर रही हैं। तो चलिए बात करते हैं उन्हीं एक्ट्रेसेस की। हाल ही में भारती सिंह ने सोलह किलो वजन कम किया है और उसके बाद उन्होंने अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में बताया। भारती सिंह की वेट लॉस जर्नी काफी कुछ इंटरमिटेंट फास्टिंग पर निर्भर करती थी और उन्होंने इस बारे में अपने एक इंटरव्यू में बताया भी था। भारती ने अपने डाइट रूटीन को बदला और साथ ही साथ वो बहुत ज्यादा एक्सरसाइज पर फोकस कर पतले होने की जगह अपनी फिटनेस पर ज्यादा फोकस करती रहीं। दो हज़ार उन्नीस में श्वेता के तलाक के बाद उन्होंने अपनी फिटनेस पर बहुत ध्यान दिया है। श्वेता जिन्होंने अपना करियर बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट शुरू किया था वो कई फिल्मों और सीरियल का हिस्सा रह चुकी हैं। श्वेता ने अपने तलाक के बाद एक फोटोशूट भी करवाया था और अब आप उनका ट्रांसफॉर्मेशन बखूबी देख सकते हैं। श्वेता बहुत ही हार्ड वर्किंग एक्ट्रेस हैं और उनके फैन्स को उनके अलग-अलग रोल्स भी काफी पसंद आते हैं। वो एक्ट्रेसेस जिन्होंने बहुत ज्यादा बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन किया है उनमें से एक श्वेता तिवारी भी हैं। फिलहाल वो अपने पूर्व पति अभिनव कोहली के साथ लीगल लड़ाई लड़ रही हैं और वो 'खतरों के खिलाड़ी ग्यारह' में भी दिख चुकी हैं। चालीस की उम्र पार कर चुकी श्वेता अपनी बेटी पलक तिवारी के साथ फिटनेस रूटीन फॉलो करती हैं और सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं। श्वेता तिवारी महिला सशक्तिकरण को लेकर बहुत एक्टिव रहती हैं और कई लोगों को मोटिवेट भी कर चुकी हैं। जूही परमार जो सीरियल 'कुमकुम' में बहुत ज्यादा फेमस हो गई थीं शादी के बाद एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से कुछ कट सी गई थीं। अपने पति सचिन श्रॉफ से अलग होने के बाद जूही ने सत्रह किलो वजन कम किया था। जूही अपने वेट लॉस और ट्रांसफॉर्मेशन को लेकर काफी वोकल रही थीं और उन्होंने अब टीवी की दुनिया में वापसी भी कर ली है। टीवी सीरियल 'ये रिश्ता क्या कहलाता है' की गायत्री उर्फ कांची सिंह ने आठ किलो वजन कम किया और वो अपने फैन्स को भी फिट रहने और हेल्दी डाइट फॉलो करने के लिए मोटिवेट करती रहती हैं। कांची कई म्यूजिक एल्बम में भी दिख चुकी हैं और वो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी काफी एक्टिव रहती हैं। 'कॉमेडी सर्कस' की छोटी और नटखट गंगूबाई किसे याद नहीं होगी। सलोनी डैनी ने अपने एक इंटरव्यू में ये बताया था कि उनके बॉडी वेट की वजह से उन्हें काफी कुछ सुनने को मिला। सलोनी ने लगभग बीस किलो वजन कम किया है। उन्होंने बहुत स्ट्रिक्ट डाइट के साथ-साथ वर्कआउट पर भी ध्यान दिया। सलोनी डैनी अब सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव हैं और वो एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपने पैर जमा रही हैं। शहनाज गिल का वेट लॉस ट्रांसफॉर्मेशन तो हम सभी ने देखा है। 'बिग बॉस तेरह' के बाद से ही उन्होंने अपने वजन को कंट्रोल करना शुरू कर दिया और अब वो काफी शेप में आ गई हैं। एक इंटरव्यू में शहनाज ने बताया था कि उन्होंने काफी ज्यादा अपनी डाइट से वो आइटम हटा दिए हैं जो नॉन-वेज थे और कैलोरी बढ़ा सकते थे। शहनाज ने लगभग बारह किलो वजन कम किया है और वो रेगुलर एक्सरसाइज भी करती रहती हैं। अपनी हेल्थ के बारे में अविका काफी सजग रहती हैं और उन्होंने लगभग तेरह किलो वजन कम कर अपनी बॉडी को ट्रांसफॉर्म भी कर लिया है। अविका ने अपनी वेट लॉस जर्नी के बारे में सोशल मीडिया पर अपडेट्स भी शेयर की हैं। अविका ने भी डाइट और वर्कआउट दोनों का सहारा लिया है और उन्हें डांसिंग का भी बहुत शौक है। अविका ने अपने इंस्टाग्राम प्रोफाइल में कई डांस वीडियो भी शेयर किए हैं। रश्मि देसाई उन एक्ट्रेसेस में से एक हैं जिन्हें वेट लॉस के लिए काफी ट्रोल किया गया था। 'बिग बॉस सीजन तेरह' में तो उन्हें इसके लिए काफी कुछ सुनना पड़ा। रश्मि अब दोबारा से शेप में आ गई हैं और वो योगा क्लासेस पर ध्यान दे रही हैं। ये सारी एक्ट्रेसेस अपनी हेल्थ पर ध्यान दे रही हैं और इन सभी ने अपने शरीर को काफी बदला है। ये अपने फैन्स को मोटिवेट भी करती रहती हैं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिंदगी से। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
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खेतड़ी में काफी दिनों से मिल रही अवैध खनन की शिकायत पर पुलिस व वन विभाग की टीम ने शनिवार सुबह छापेमारी कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान टीम ने दो डंपर, एक जेसीबी को जब्त किया है, जबकि खनन करने में लगे लोग मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए।
मिली जानकारी के अनुसार अवैध खनन की शिकायत पर खेतड़ी के नालपुर बिस्सा में रेंजर विजय फगेडिया और मेहाड़ा थानाधिकारी सरदारमल यादव के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।
रेंजर विजय फगेडिया ने बताया कि खेतड़ी में अवैध खनन को लेकर पिछले काफी समय से शिकायतें मिल रही थी, लेकिन टीम की ओर से कार्रवाई करने से पहले ही खनन माफिया मौके से फरार हो जाते थे। टीम को सूचना मिली कि नालपुर बिस्सा में आयरन पत्थर का अवैध खनन किया जा रहा है। जिस पर मेंहाडा थानाधिकारी सरदारमल यादव पुलिस जाब्ते और वन विभाग से रेंजर विजय फगेडिया के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची।
पुलिस और वन विभाग की टीम ने मौके पर घेराबंदी कर अवैध खनन कर रहे लोगों को यथास्थिति मे रहने के लिए कहा, तो खनन माफिया मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए। कार्रवाई टीम ने मौके से दो डंपर व खनन करने के काम में ली जा रही एक जेसीबी को जब्त कर लिया।
दोनों डंपर व जेसीबी को थाने में लाकर जब्ती की कार्रवाई की गई। रेंजर फगेड़िया ने बताया कि खेतड़ी क्षेत्र में लौह अयस्क के भंडार होने के कारण यहां खनन माफिया उसका खनन कर दूसरे राज्यों में सप्लाई कर रहे है, जिससे राजस्व का नुकसान तो हो ही रहा है, लेकिन अवैध खनन को भी बढ़ावा मिल रहा है। पुलिस व वन विभाग की ओर से समय-समय पर कार्रवाई भी की जा रही है, लेकिन खनन माफिया मोटी रकम कमाने के चक्कर में पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
इस दौरान थानाधिकारी ने बताया कि अवैध खनन करने के मामले में आरोपियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है तथा उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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खेतड़ी में काफी दिनों से मिल रही अवैध खनन की शिकायत पर पुलिस व वन विभाग की टीम ने शनिवार सुबह छापेमारी कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान टीम ने दो डंपर, एक जेसीबी को जब्त किया है, जबकि खनन करने में लगे लोग मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए। मिली जानकारी के अनुसार अवैध खनन की शिकायत पर खेतड़ी के नालपुर बिस्सा में रेंजर विजय फगेडिया और मेहाड़ा थानाधिकारी सरदारमल यादव के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया। रेंजर विजय फगेडिया ने बताया कि खेतड़ी में अवैध खनन को लेकर पिछले काफी समय से शिकायतें मिल रही थी, लेकिन टीम की ओर से कार्रवाई करने से पहले ही खनन माफिया मौके से फरार हो जाते थे। टीम को सूचना मिली कि नालपुर बिस्सा में आयरन पत्थर का अवैध खनन किया जा रहा है। जिस पर मेंहाडा थानाधिकारी सरदारमल यादव पुलिस जाब्ते और वन विभाग से रेंजर विजय फगेडिया के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची। पुलिस और वन विभाग की टीम ने मौके पर घेराबंदी कर अवैध खनन कर रहे लोगों को यथास्थिति मे रहने के लिए कहा, तो खनन माफिया मौके का फायदा उठाकर फरार हो गए। कार्रवाई टीम ने मौके से दो डंपर व खनन करने के काम में ली जा रही एक जेसीबी को जब्त कर लिया। दोनों डंपर व जेसीबी को थाने में लाकर जब्ती की कार्रवाई की गई। रेंजर फगेड़िया ने बताया कि खेतड़ी क्षेत्र में लौह अयस्क के भंडार होने के कारण यहां खनन माफिया उसका खनन कर दूसरे राज्यों में सप्लाई कर रहे है, जिससे राजस्व का नुकसान तो हो ही रहा है, लेकिन अवैध खनन को भी बढ़ावा मिल रहा है। पुलिस व वन विभाग की ओर से समय-समय पर कार्रवाई भी की जा रही है, लेकिन खनन माफिया मोटी रकम कमाने के चक्कर में पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस दौरान थानाधिकारी ने बताया कि अवैध खनन करने के मामले में आरोपियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है तथा उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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साउथ सुपर स्टार अल्लू अर्जुन की फिल्म पुष्पा की जबरदस्त सफलता के बाद अब मेकर्स जल्द ही इस फिल्म का दूसरा भाग रिलीज करने की तैयारी है। दर्शक इस फिल्म के दूसरे पार्ट का बेसब्री से इंतजार करे रहे हैं। ऐसे में फिल्म के लिए बेताब लोगों के लिए फिल्म से जुड़ा एक बड़ा अपडेट सामने आया है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक 'पुष्पाः द रूल' के प्री-प्रोडक्शन का काम शुरू हो गया है। इतना ही नहीं इस फिल्म के लिए अभिनेता अल्लू अर्जुन ने हाल ही में लुक ट्रायल भी किया है।
हाल ही में एक वेबसाइट से हुई बातचीत के दौरान फिल्म के प्रोड्यूसर वाई रवि शंकर ने फिल्म से जुड़ी कई जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अल्लू अर्जुन और रश्मिका मंदाना 'पुष्पाः द रूल' के लिए अलग-अलग चीजें करने की कोशिश कर रहे हैं। बीते दिनों ही प्रीतिशील ने अल्लू अर्जुन का लुक ट्रायल कर उसे लुक फाइनल कर दिया है। फिल्म में अल्लू का लुक देहाती होने वाला है। दूसरे भाग में भी अल्लू का लुक पहले जैसा ही होगा, लेकिन इसमें थोड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। '
बातचीत के दौरान रविशंकर ने यह भी बताया कि फिल्म की शूटिंग 22 सितंबर के आस पास शुरू होने वाली है। फिल्म की शूटिंग हैदराबाद में होगी। इससे पहले फिल्म को लेकर खबरें आ रही थीं कि साउथ एक्ट्रेस साई पल्लवी भी 'पुष्पाः द रूल' का हिस्सा होंगी। हालांकि, बातचीत के दौरान रविशंकर ने इन खबरों को मजह अफवाह बताते हुए कहा कि यह सच नहीं है।
बता दें कि पिछले साल 17 दिसंबर को रिलीज हुई फिल्म पुष्पा को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। इस फिल्म ने देशभर में जमकर कमाई करते हुए काफी लोकप्रियता हासिल की थी। इसमें अल्लू अर्जुन और रश्मिका मंदाना मुख्य किरदार में नजर आए थे। मूल रूप से तेलुगु भाषा में बनी इस फिल्म को हिंदी समेत दूसरी भाषाओं में डब कर दिया गया था। वहीं इसने वर्ल्डवाइड लगभग 350 करोड़ का कारोबार किया था।
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साउथ सुपर स्टार अल्लू अर्जुन की फिल्म पुष्पा की जबरदस्त सफलता के बाद अब मेकर्स जल्द ही इस फिल्म का दूसरा भाग रिलीज करने की तैयारी है। दर्शक इस फिल्म के दूसरे पार्ट का बेसब्री से इंतजार करे रहे हैं। ऐसे में फिल्म के लिए बेताब लोगों के लिए फिल्म से जुड़ा एक बड़ा अपडेट सामने आया है। हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक 'पुष्पाः द रूल' के प्री-प्रोडक्शन का काम शुरू हो गया है। इतना ही नहीं इस फिल्म के लिए अभिनेता अल्लू अर्जुन ने हाल ही में लुक ट्रायल भी किया है। हाल ही में एक वेबसाइट से हुई बातचीत के दौरान फिल्म के प्रोड्यूसर वाई रवि शंकर ने फिल्म से जुड़ी कई जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अल्लू अर्जुन और रश्मिका मंदाना 'पुष्पाः द रूल' के लिए अलग-अलग चीजें करने की कोशिश कर रहे हैं। बीते दिनों ही प्रीतिशील ने अल्लू अर्जुन का लुक ट्रायल कर उसे लुक फाइनल कर दिया है। फिल्म में अल्लू का लुक देहाती होने वाला है। दूसरे भाग में भी अल्लू का लुक पहले जैसा ही होगा, लेकिन इसमें थोड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। ' बातचीत के दौरान रविशंकर ने यह भी बताया कि फिल्म की शूटिंग बाईस सितंबर के आस पास शुरू होने वाली है। फिल्म की शूटिंग हैदराबाद में होगी। इससे पहले फिल्म को लेकर खबरें आ रही थीं कि साउथ एक्ट्रेस साई पल्लवी भी 'पुष्पाः द रूल' का हिस्सा होंगी। हालांकि, बातचीत के दौरान रविशंकर ने इन खबरों को मजह अफवाह बताते हुए कहा कि यह सच नहीं है। बता दें कि पिछले साल सत्रह दिसंबर को रिलीज हुई फिल्म पुष्पा को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। इस फिल्म ने देशभर में जमकर कमाई करते हुए काफी लोकप्रियता हासिल की थी। इसमें अल्लू अर्जुन और रश्मिका मंदाना मुख्य किरदार में नजर आए थे। मूल रूप से तेलुगु भाषा में बनी इस फिल्म को हिंदी समेत दूसरी भाषाओं में डब कर दिया गया था। वहीं इसने वर्ल्डवाइड लगभग तीन सौ पचास करोड़ का कारोबार किया था।
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भगवान की प्राज्ञानुसार द्रभ्यत्व गुण को समझ ले तो लौकिक में भी प्रशान्ति न आवेयी और अपना अनुभव कर ले तो मोक्ष रूपो लक्ष्मी, का नाथ बन जावे ।
प्र० २६. द्रव्यत्व गुण को जानने से लौकिक में शान्ति कैसे श्रावे
(१) ५० लाख का नुकसान या लाभ हो गया (२) लड़का मर गया या हो गया (३) मकान बन गया या गिर गया (४) शरीर में बीमारी आ पई या ठीक हो गई। यह सब द्रव्यत्व गुरण के कारण पर्याय पलट गई दूसरे का हस्तक्षेप नहीं है तो तुरन्त शान्ति प्रावेगी ।
प्र० २७. शरीर में बीमारी थी, दवा खाने से ठीक हो गई है वा ? बिल्कुल नहीं। शरीर की अवस्था द्रव्यत्व गुरण के कारण बदल गई तो द्रव्यत्व गुण को माना और दवाई से बदली तो द्रव्यत्व गुरण को नहीं माना ।
प्र० २८. (१) मैंने होशियारी नहीं रखी तो दूध फट गया (२) कुम्हार ने घड़ा बनाया (३) उसने बाली दी तो क्रोध आया ( ४ ) मैंने मकान बनाया (५) बच्चे ने सावधानी नहीं रखी तो गिलास गिरकर फूट गया ( ६ ) मैंने लकड़ी से आलमारी बनाई (७) मैंने किताब बनाई (७) मैंने किताब बनाई (८) ज्ञानावर्णी के प्रभाव से केवलज्ञान हुआ ( 8 ) दर्शन मोहनीय के क्षय से क्षायिक सम्यक्त्व हुआ (१०) प्रांख से ज्ञान हुआ प्रादि वाक्यों में द्रव्यत्व गुरण को कब मावा और कब नहीं माना ?
(१) मैंने होशियारी नहीं रखी तो दूध फट गया -दूष फटाद्रव्यत्व गुरण के कारण फटने रूप अवस्था हुई ऐसा जाने माने तो द्रव्यत्व
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भगवान की प्राज्ञानुसार द्रभ्यत्व गुण को समझ ले तो लौकिक में भी प्रशान्ति न आवेयी और अपना अनुभव कर ले तो मोक्ष रूपो लक्ष्मी, का नाथ बन जावे । प्रशून्य छब्बीस. द्रव्यत्व गुण को जानने से लौकिक में शान्ति कैसे श्रावे पचास लाख का नुकसान या लाभ हो गया लड़का मर गया या हो गया मकान बन गया या गिर गया शरीर में बीमारी आ पई या ठीक हो गई। यह सब द्रव्यत्व गुरण के कारण पर्याय पलट गई दूसरे का हस्तक्षेप नहीं है तो तुरन्त शान्ति प्रावेगी । प्रशून्य सत्ताईस. शरीर में बीमारी थी, दवा खाने से ठीक हो गई है वा ? बिल्कुल नहीं। शरीर की अवस्था द्रव्यत्व गुरण के कारण बदल गई तो द्रव्यत्व गुण को माना और दवाई से बदली तो द्रव्यत्व गुरण को नहीं माना । प्रशून्य अट्ठाईस. मैंने होशियारी नहीं रखी तो दूध फट गया कुम्हार ने घड़ा बनाया उसने बाली दी तो क्रोध आया मैंने मकान बनाया बच्चे ने सावधानी नहीं रखी तो गिलास गिरकर फूट गया मैंने लकड़ी से आलमारी बनाई मैंने किताब बनाई मैंने किताब बनाई ज्ञानावर्णी के प्रभाव से केवलज्ञान हुआ दर्शन मोहनीय के क्षय से क्षायिक सम्यक्त्व हुआ प्रांख से ज्ञान हुआ प्रादि वाक्यों में द्रव्यत्व गुरण को कब मावा और कब नहीं माना ? मैंने होशियारी नहीं रखी तो दूध फट गया -दूष फटाद्रव्यत्व गुरण के कारण फटने रूप अवस्था हुई ऐसा जाने माने तो द्रव्यत्व
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कटहल शाकाहारियों के लिए नॉनवेज फू़ड के रूप में भी जाना जाता है, जो फाइबर, विटामिन-बी जैसे पोषक तत्व का खजाना है।
कच्चे कटहल को सब्जी के रूप में तो वहीं पके कटहल को फल के रुप में खाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं, हेल्थ के लिए कटहल के बीज भी काफी फायदेमंद होते हैं।
इन बीजों में थायमिन और राइबोफ्लेविन प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो आपकी आंखों, त्वचा और बालों के स्वास्थ्य को बनाए रखते हैं।
ऐसे में आइए कटहल के बीज के फायदे के बारे में जानते हैं, जिसमें जिंक, आयरन, कैल्शियम और तांबा जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।
कटहल के बीज में फाइबर पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त करने में मददगार माने जाते हैं।
कटहल के बीजों में कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो हड्डियों की स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं।
कटहल के बीज में आयरन पर्याप्त होता है, जो शरीर आयरन की पूर्ति करता और एनीमिया से बचाने में मददगार है।
कटहल के बीज प्रोटीन और अन्य खनिजों से भरपूर होते हैं, जो तनाव के स्तर को कम करता है।
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कटहल शाकाहारियों के लिए नॉनवेज फू़ड के रूप में भी जाना जाता है, जो फाइबर, विटामिन-बी जैसे पोषक तत्व का खजाना है। कच्चे कटहल को सब्जी के रूप में तो वहीं पके कटहल को फल के रुप में खाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं, हेल्थ के लिए कटहल के बीज भी काफी फायदेमंद होते हैं। इन बीजों में थायमिन और राइबोफ्लेविन प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो आपकी आंखों, त्वचा और बालों के स्वास्थ्य को बनाए रखते हैं। ऐसे में आइए कटहल के बीज के फायदे के बारे में जानते हैं, जिसमें जिंक, आयरन, कैल्शियम और तांबा जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। कटहल के बीज में फाइबर पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त करने में मददगार माने जाते हैं। कटहल के बीजों में कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो हड्डियों की स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं। कटहल के बीज में आयरन पर्याप्त होता है, जो शरीर आयरन की पूर्ति करता और एनीमिया से बचाने में मददगार है। कटहल के बीज प्रोटीन और अन्य खनिजों से भरपूर होते हैं, जो तनाव के स्तर को कम करता है।
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मुजफ्फरनगर। जनपद के शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव पलडी में आज पंचायत चुनाव को लेकर दो पक्षों के बीच पंचायत चुनाव को लेकर जमकर संघर्ष हुआ जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल होने का समाचार है। घटना के बाद उत्तेजित लोगां ने जमकर हंगामा किया, जिसे लेकर पुलिस के साथ उनकी झडप भी हुई।
जबकि इरशाद पुत्र सरफु 60 वर्ष के साथ मारपीट कर उसका गला दबा दिया। बीच बचाव में आए गांव के ही बालला को भी गंभीर चोटें आई है।
ग्रामीण घायलों को शाहपुर सीएचसी पर लेकर आये जंहा चिकित्सको ने इरशाद को मृत घोषित कर दिया। घायल बाल्ला व सलमान को जिला अस्पताल रैफर कर दिया। पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाना चाहती थी लेकिन ग्रामीण पहले आरोपितों की गिरफ्तारी की मांग करने को लेकर आक्रोशित हो गए।
उत्तेजित ग्रामीण शव को सीएचसी से उठा कर सड़क पर आ गए और जाम लगाने लगे। जंहा काफी ग्रामीण इकठ्ठा हो गए। जंहा पुलिस व ग्रामीणों के बीच नोकझोक भी हुई।
काफी देर हंगामा होने बाद ग्रामीण शांत हुए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम पर भेज दिया। घटना के मामले में अभी तक तहरीर नही दी गयी।
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मुजफ्फरनगर। जनपद के शाहपुर थाना क्षेत्र के गांव पलडी में आज पंचायत चुनाव को लेकर दो पक्षों के बीच पंचायत चुनाव को लेकर जमकर संघर्ष हुआ जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल होने का समाचार है। घटना के बाद उत्तेजित लोगां ने जमकर हंगामा किया, जिसे लेकर पुलिस के साथ उनकी झडप भी हुई। जबकि इरशाद पुत्र सरफु साठ वर्ष के साथ मारपीट कर उसका गला दबा दिया। बीच बचाव में आए गांव के ही बालला को भी गंभीर चोटें आई है। ग्रामीण घायलों को शाहपुर सीएचसी पर लेकर आये जंहा चिकित्सको ने इरशाद को मृत घोषित कर दिया। घायल बाल्ला व सलमान को जिला अस्पताल रैफर कर दिया। पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाना चाहती थी लेकिन ग्रामीण पहले आरोपितों की गिरफ्तारी की मांग करने को लेकर आक्रोशित हो गए। उत्तेजित ग्रामीण शव को सीएचसी से उठा कर सड़क पर आ गए और जाम लगाने लगे। जंहा काफी ग्रामीण इकठ्ठा हो गए। जंहा पुलिस व ग्रामीणों के बीच नोकझोक भी हुई। काफी देर हंगामा होने बाद ग्रामीण शांत हुए। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम पर भेज दिया। घटना के मामले में अभी तक तहरीर नही दी गयी।
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घोने चली जाती और वही सफ़द क
छुट्टी के दिन पहनती थी, वह ताजगी गुलाबी कपोल और गीले केश लिये वापस लौट आती।
और फिर वे सिनेमा, सर्कस या पार्क की सैर के लिए चले जाते । वे वहां जाते है, इससे अलेक्मेई के लिए कोई अंतर नही पड़ता था। वह मिनेमा के पर्दे को, सर्कस के रिंग को या इधर-उधर घूमते हुए लोगो को न देख पाता, वह सिर्फ उसी की तरफ़ निहारता और उसी की ओर देखना हुआ सोचता रह जाता, "बस, आज की रात घर की तरफ लोटते समय राह में ही मुझे प्रस्ताव रख देना चाहिए।" लेकिन राह भी में ख़त्म हो जाती और वह साहम न जुटा पाता ।
एक रविवार की सुबह वे वोल्गा के दूसरे किनारे के उपवन मे संर करने के लिए निकले। वह जब उसके घर उसे लेने गया तो वह अपनी
जैसी सफेद पतलून और खुले कालर की कमीज पहने था, जो उसकी मा के बथनानुसार उसके ताम्रवर्ण, चौडे चेहरे के साथ खूब फबती थी। जब वह पहुंचा तो ओल्या तैयार थी। उसने एक रूमाल में लिपटा पार्सल मई को थमा दिया और वे दोनो नदी को भोर चल दिये। चूहे, पर-विहीन मल्लाह ने पहले विश्वयुद्ध का पंगू वीर, भड़ोस-पडोम के - बच्चों का परमप्रिय, जिसने अलेक्सेई को बचपन में निखाया था कि छि छने पानी में मछली कैसे पकड़ी जाती है - लकड़ी के ठूटो के बल पुस्ते हुए भारी नाव को धकेला और पतवार को हल्की-हल्की चोटो से खेने लगा। धारा को तिरछे काटती हुई, इन्वे-से हिचकोले खातो हुई नाव ने दूसरी तरफ़ स्थित निचले साफ हरे रंग के किनारे तक पहुंचने के लिए गहन नदी पार करना शुरू किया। लड़की नाव के किनारे पर हाथ रखे, चिन्तन मे लोन, जड़-सी बंटी थी और अपनी उगलियों पर से पानी को बह जाने दे रही थी।
चाचा भरकादी, क्या तुम्हें हमारी याद नहीं ? " पलेक्सेई ने छ । महनाह ने इन युवा बेहरो की और उपेक्षा से देखा और बहाः "नही तो!"
"गयों, यह क्या बात ? मैं हूई मेरेस्येव तुमने मुझे लिखायादा छिटले पानी में से महीने हैं।"
शायद सिवाया हो। तुम जैसे यहां बहुत से टोकरे खेलने-फिरते थे। मैं उन सबतो नहीं याद रख सकता।"
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घोने चली जाती और वही सफ़द क छुट्टी के दिन पहनती थी, वह ताजगी गुलाबी कपोल और गीले केश लिये वापस लौट आती। और फिर वे सिनेमा, सर्कस या पार्क की सैर के लिए चले जाते । वे वहां जाते है, इससे अलेक्मेई के लिए कोई अंतर नही पड़ता था। वह मिनेमा के पर्दे को, सर्कस के रिंग को या इधर-उधर घूमते हुए लोगो को न देख पाता, वह सिर्फ उसी की तरफ़ निहारता और उसी की ओर देखना हुआ सोचता रह जाता, "बस, आज की रात घर की तरफ लोटते समय राह में ही मुझे प्रस्ताव रख देना चाहिए।" लेकिन राह भी में ख़त्म हो जाती और वह साहम न जुटा पाता । एक रविवार की सुबह वे वोल्गा के दूसरे किनारे के उपवन मे संर करने के लिए निकले। वह जब उसके घर उसे लेने गया तो वह अपनी जैसी सफेद पतलून और खुले कालर की कमीज पहने था, जो उसकी मा के बथनानुसार उसके ताम्रवर्ण, चौडे चेहरे के साथ खूब फबती थी। जब वह पहुंचा तो ओल्या तैयार थी। उसने एक रूमाल में लिपटा पार्सल मई को थमा दिया और वे दोनो नदी को भोर चल दिये। चूहे, पर-विहीन मल्लाह ने पहले विश्वयुद्ध का पंगू वीर, भड़ोस-पडोम के - बच्चों का परमप्रिय, जिसने अलेक्सेई को बचपन में निखाया था कि छि छने पानी में मछली कैसे पकड़ी जाती है - लकड़ी के ठूटो के बल पुस्ते हुए भारी नाव को धकेला और पतवार को हल्की-हल्की चोटो से खेने लगा। धारा को तिरछे काटती हुई, इन्वे-से हिचकोले खातो हुई नाव ने दूसरी तरफ़ स्थित निचले साफ हरे रंग के किनारे तक पहुंचने के लिए गहन नदी पार करना शुरू किया। लड़की नाव के किनारे पर हाथ रखे, चिन्तन मे लोन, जड़-सी बंटी थी और अपनी उगलियों पर से पानी को बह जाने दे रही थी। चाचा भरकादी, क्या तुम्हें हमारी याद नहीं ? " पलेक्सेई ने छ । महनाह ने इन युवा बेहरो की और उपेक्षा से देखा और बहाः "नही तो!" "गयों, यह क्या बात ? मैं हूई मेरेस्येव तुमने मुझे लिखायादा छिटले पानी में से महीने हैं।" शायद सिवाया हो। तुम जैसे यहां बहुत से टोकरे खेलने-फिरते थे। मैं उन सबतो नहीं याद रख सकता।"
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मानसिंह एक हाथ से दाढी लिये हंसते हुये बोला, 'यह दाढी वड़ी अभागिन निकली । काम पूरा नहीं करने दिया ।' मजदूर पैरों पर गिरने को हुआ
वर्जित किया ।
मजदूर ने हाथ जोड़े हुये कहा, 'महाराज मुझको क्षमा मिले । आपने यह क्या किया ?"
'कुछ भी तो नहीं कर पाया । धिक्कार है मुझको जो मे तो भरे पेढ सो जाऊँ और तुम भूखो-रोगो मरो ! मैं महलो मे रहूँ और तुम इस झोपडी मे भूखे ठण्डो मरो !! '
'हमारा भाग्य है, महाराज ।'
'विलकुल भ्रम की बात । हमारे भाग्य के आधार तुम्ही सब जन हो । तुम्हारा भाग्य चुरा रहा तो हमारा तो पहले ही खोटा हो चुका ।'
स्त्री ने फटे वस्त्र का लम्बा घूंघट डाल लियर और पीठ देकर चक्की के पास आ बैठी ।
'मैं पीस देता हूं बाई 1, मानसिंह ने अनुरोध किया ।
स्त्री ने हाथ जोड़े और जुड़े हुये हाथो निषेध का संकेत किया । दिया बुझने को आ रहा था ।
मानसिंह ने कहा; 'मैं अभी तेल भिजवाता हूं और ज्वर की औषधि भी । मजदूरो के लिये अच्छे मकान बनवाऊँगर, औषधालय खोलूंगा और देखूंगा, कोई भी मजूर भूखा न रहे । स्त्री की ओर देखकर बोला, 'मैं आटा भिजवाये देता हू । बीमारी से पीसोगो बाई, तो ढेर हो जाओगी।
धीरे से स्त्री ने प्रतिवाद किया, 'अब ज्वर नही रहा ।'
पुरुष ने समर्थन किया, मेरी सारी थकावट चली गई । मै अभो पीसे डालता हूँ । उठ री लेट जा । महाराज की आज्ञा मान ।' स्त्री नहीं उठी । मानसिंह जाने को हुआ । पुरुष ने अनुरोध किया 'मैं मार्ग दिखला दूं महाराज ।
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मानसिंह एक हाथ से दाढी लिये हंसते हुये बोला, 'यह दाढी वड़ी अभागिन निकली । काम पूरा नहीं करने दिया ।' मजदूर पैरों पर गिरने को हुआ वर्जित किया । मजदूर ने हाथ जोड़े हुये कहा, 'महाराज मुझको क्षमा मिले । आपने यह क्या किया ?" 'कुछ भी तो नहीं कर पाया । धिक्कार है मुझको जो मे तो भरे पेढ सो जाऊँ और तुम भूखो-रोगो मरो ! मैं महलो मे रहूँ और तुम इस झोपडी मे भूखे ठण्डो मरो !! ' 'हमारा भाग्य है, महाराज ।' 'विलकुल भ्रम की बात । हमारे भाग्य के आधार तुम्ही सब जन हो । तुम्हारा भाग्य चुरा रहा तो हमारा तो पहले ही खोटा हो चुका ।' स्त्री ने फटे वस्त्र का लम्बा घूंघट डाल लियर और पीठ देकर चक्की के पास आ बैठी । 'मैं पीस देता हूं बाई एक, मानसिंह ने अनुरोध किया । स्त्री ने हाथ जोड़े और जुड़े हुये हाथो निषेध का संकेत किया । दिया बुझने को आ रहा था । मानसिंह ने कहा; 'मैं अभी तेल भिजवाता हूं और ज्वर की औषधि भी । मजदूरो के लिये अच्छे मकान बनवाऊँगर, औषधालय खोलूंगा और देखूंगा, कोई भी मजूर भूखा न रहे । स्त्री की ओर देखकर बोला, 'मैं आटा भिजवाये देता हू । बीमारी से पीसोगो बाई, तो ढेर हो जाओगी। धीरे से स्त्री ने प्रतिवाद किया, 'अब ज्वर नही रहा ।' पुरुष ने समर्थन किया, मेरी सारी थकावट चली गई । मै अभो पीसे डालता हूँ । उठ री लेट जा । महाराज की आज्ञा मान ।' स्त्री नहीं उठी । मानसिंह जाने को हुआ । पुरुष ने अनुरोध किया 'मैं मार्ग दिखला दूं महाराज ।
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इंडिया न्यूज, खरगोन (मध्य प्रदेश)।
Khargone Nuisance dead body of Youth Missing : खरगोन से रामनवमी के दिन लापता हुए एक युवक का शव इंदौर से मिला है। युवक का शव मिलने के बाद जिला प्रशासन ने सोमवार को कर्फ्यू में दी जाने वाली ढील को निरस्त करने का फैसला किया है। वहीं, इस मामले में मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया से चर्चा में मामले की जानकारी देते हुए कहा कि 10 अप्रैल को एक शव मिला था।
11 तारीख को शव का पीएम किया गया था। पीएम रिपोर्ट के आधार पर 302 का प्रकरण दर्ज किया गया था। उसकी शिनाख्त नहीं हो पा रही थी और उस समय कोई गुमशुदगी की रिपोर्ट भी नहीं थी, 14 अप्रैल को गुमशुदगी की रिपोर्ट इब्रीस के नाम से परिवार वालों ने की थी। जिसके बाद परिजनों से शव की शिनाख्त कराई गई। परिवार वालों ने शव की शिनाख्त इब्रीस के रूप में की और उसके बाद उन्हें बॉडी सौंप दी गई।
रोजेदारों को इफ्तारी देने गया था इब्रीस (Khargone Nuisance dead body of Youth Missing)
मृतक के भाई इकलाख खान का कहना है कि रामनवमी के दिन इब्रीस रोजेदारों को शाम 7:30 बजे इफ्तारी देने गया था। पत्थरबाजी में कुछ हिन्दू समाज के लोगों ने मेरे भाई को पत्थरों, औजारों, लट्ठ-लाठियों से बहुत मारा। पुलिस उसे सबके सामने गिरफ्तार कर के ले गई। पुलिस ने भी उसे बहुत मारा। पुलिस प्रशासन ने एकतरफा फैसला किया और 8 दिन तक कुछ भी नहीं बताया। हमने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन उसके बाद भी पुलिस ने नहीं बताया कि बच्चा हमारी कस्टडी में है।
बाद में एक जवान जानकारी लेने आया तो मैंने उसे जानकारी दी, मैंने उसे बयान दिया तो उसने कहा कि मुझे बयान नहीं चाहिए। कहा कि टीआई साहब से जाकर बात करना मैं नाम, पता लिखने आया हूं, जिसके बाद मैंने कहा कि आज रविवार है मैं मीडिया नहीं बुला पाया हूं सोमवार को मीडिया बुलाउंगा, तो उसने तुंरत 5 मिनट में डेडबॉडी बता दी और कहा कि इंदौर चले जाओ।
मीडिया की धमकी देने पर बताया डेडबॉडी कहां है (Khargone Nuisance dead body of Youth Missing)
मृतक के भाई ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मीडिया की धमकी देने के बाद पुलिस प्रशासन ने 5 मिनट के भीतर बता दिया कि मेरे भाई की डेडबॉडी कहां हैं। वरना, 8 दिन से हम उसे ढूंढ रहे थे। किसी ने कुछ नहीं बताया, न ही उसके बारे में कोई सुराग दिया। प्रशासन ने भी यह नहीं बताया कि गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा रहे हो तो इब्रीस हमारी हिरासत में है।
12 तारीख को बहुत सारे लोगों ने उसे थाने में देखा भी। उसके सिर में पट्टा बंधा था। उसके सिर से खून नहीं रुक रहा था। इन लोगों ने उसे अंडरग्राउंड रखा। जानकारी के अनुसार 10 अप्रैल रामनवमी के दिन जिले में हुए उपद्रव के बाद से इब्रीस नाम का शख्स लापता था। हाल ही में पुलिस को युवक का शव इंदौर के इस्लामपुरा इलाके के एक अस्पताल से मिला है।
(Khargone Nuisance dead body of Youth Missing)
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इंडिया न्यूज, खरगोन । Khargone Nuisance dead body of Youth Missing : खरगोन से रामनवमी के दिन लापता हुए एक युवक का शव इंदौर से मिला है। युवक का शव मिलने के बाद जिला प्रशासन ने सोमवार को कर्फ्यू में दी जाने वाली ढील को निरस्त करने का फैसला किया है। वहीं, इस मामले में मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया से चर्चा में मामले की जानकारी देते हुए कहा कि दस अप्रैल को एक शव मिला था। ग्यारह तारीख को शव का पीएम किया गया था। पीएम रिपोर्ट के आधार पर तीन सौ दो का प्रकरण दर्ज किया गया था। उसकी शिनाख्त नहीं हो पा रही थी और उस समय कोई गुमशुदगी की रिपोर्ट भी नहीं थी, चौदह अप्रैल को गुमशुदगी की रिपोर्ट इब्रीस के नाम से परिवार वालों ने की थी। जिसके बाद परिजनों से शव की शिनाख्त कराई गई। परिवार वालों ने शव की शिनाख्त इब्रीस के रूप में की और उसके बाद उन्हें बॉडी सौंप दी गई। रोजेदारों को इफ्तारी देने गया था इब्रीस मृतक के भाई इकलाख खान का कहना है कि रामनवमी के दिन इब्रीस रोजेदारों को शाम सात:तीस बजे इफ्तारी देने गया था। पत्थरबाजी में कुछ हिन्दू समाज के लोगों ने मेरे भाई को पत्थरों, औजारों, लट्ठ-लाठियों से बहुत मारा। पुलिस उसे सबके सामने गिरफ्तार कर के ले गई। पुलिस ने भी उसे बहुत मारा। पुलिस प्रशासन ने एकतरफा फैसला किया और आठ दिन तक कुछ भी नहीं बताया। हमने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन उसके बाद भी पुलिस ने नहीं बताया कि बच्चा हमारी कस्टडी में है। बाद में एक जवान जानकारी लेने आया तो मैंने उसे जानकारी दी, मैंने उसे बयान दिया तो उसने कहा कि मुझे बयान नहीं चाहिए। कहा कि टीआई साहब से जाकर बात करना मैं नाम, पता लिखने आया हूं, जिसके बाद मैंने कहा कि आज रविवार है मैं मीडिया नहीं बुला पाया हूं सोमवार को मीडिया बुलाउंगा, तो उसने तुंरत पाँच मिनट में डेडबॉडी बता दी और कहा कि इंदौर चले जाओ। मीडिया की धमकी देने पर बताया डेडबॉडी कहां है मृतक के भाई ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मीडिया की धमकी देने के बाद पुलिस प्रशासन ने पाँच मिनट के भीतर बता दिया कि मेरे भाई की डेडबॉडी कहां हैं। वरना, आठ दिन से हम उसे ढूंढ रहे थे। किसी ने कुछ नहीं बताया, न ही उसके बारे में कोई सुराग दिया। प्रशासन ने भी यह नहीं बताया कि गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा रहे हो तो इब्रीस हमारी हिरासत में है। बारह तारीख को बहुत सारे लोगों ने उसे थाने में देखा भी। उसके सिर में पट्टा बंधा था। उसके सिर से खून नहीं रुक रहा था। इन लोगों ने उसे अंडरग्राउंड रखा। जानकारी के अनुसार दस अप्रैल रामनवमी के दिन जिले में हुए उपद्रव के बाद से इब्रीस नाम का शख्स लापता था। हाल ही में पुलिस को युवक का शव इंदौर के इस्लामपुरा इलाके के एक अस्पताल से मिला है।
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अब त्यौहारों के दिन शुरू हो चुके हैं। नवरात्रि आ रही है और इसी के साथ नए-नए फेस्टिवल्स आने वाले हैं। ऐसे में आप जानते ही होंगे इन सभी फेस्टिवल्स को लेकर कोई एक्साइटेड हो या ना हो लेकिन लडकियां, महिलाएं बड़ी एक्साइटेड हो जाती हैं। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं नवरात्रि, दशहरा, करवा चौथ, दिवाली और उसके बाद छठ पूजा के लिए महिलाएं इस बार कैसे ब्लाउज़ पहन सकती हैं। जी दरअसल साड़ियों को लेकर उतना झंझट नहीं होता है जितना ब्लाउज को होता है ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ब्लाउज के डिजाइंस जिन्हे आप इस बार पहन सकती हैं।
रफल स्लीव्स ब्लाउज़ - लॉन्ग स्लीव्स से लेकर डबल लेयर्स जैसे कई पैटर्न में आप इस स्टाइल को स्टिच करवा सकती हैं। जैसे साड़ी में पूरी बॉडी कवर हो जाती है वैसे ही ब्लाउज़ में भी हो जाए तो कोई बड़ी बात नहीं है।
शीयर एम्बेलिश्ड स्लीव्स - ऐसे ब्लाउज़ के साथ आप हो सके तो सिंपल साड़ी ही पहनें क्योंकि वह बेहतरीन लगेगी। अगर आप हैवी साड़ी के साथ इस तरह के ब्लाउज़ पहनती हैं तो वह इतना अच्छा लुक नहीं देंगे। वहीँ बोट नेक के साथ ब्लाउज़ की खूबसूरती बेहतरीन होगी।
पेप्लम ब्लाउज़ - पेप्लम ब्लाउज़ को आप सिंपल टॉप के अलावा बेल्ट के साथ भी टीमअप कर सकती हैं।
हाई नेक ब्लाउज़ - आजकल हॉल्टर नेक के साथ बोट और हाई नेक की डिमांड सबसे ज्यादा है। वैसे इसके अलावा बेहतरीन दिखने के लिए आप काउल और क्रू नेक भी अपना सकती हैं।
फ्रिंज बैक ब्लाउज़ - बैकलेस स्टाइल में इनवर्टेड ओपन बैक सबसे ज्यादा पॉपुलर है। वहीँ इसमें भी अलग तरह के फ्रिंज के साथ एक्सपेरिमेंट किया जा रहा है, जो इसे बेहतरीन लुक दे रहा है।
बो बैक ब्लाउज़ - टॉप और शर्ट के अलावा बो का पैटर्न ब्लाउज़ के बैक में भी ट्राय किया जा रहा है जो बेहतरीन है। आप इसे भी ट्राय कर सकती हैं।
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अब त्यौहारों के दिन शुरू हो चुके हैं। नवरात्रि आ रही है और इसी के साथ नए-नए फेस्टिवल्स आने वाले हैं। ऐसे में आप जानते ही होंगे इन सभी फेस्टिवल्स को लेकर कोई एक्साइटेड हो या ना हो लेकिन लडकियां, महिलाएं बड़ी एक्साइटेड हो जाती हैं। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं नवरात्रि, दशहरा, करवा चौथ, दिवाली और उसके बाद छठ पूजा के लिए महिलाएं इस बार कैसे ब्लाउज़ पहन सकती हैं। जी दरअसल साड़ियों को लेकर उतना झंझट नहीं होता है जितना ब्लाउज को होता है ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ब्लाउज के डिजाइंस जिन्हे आप इस बार पहन सकती हैं। रफल स्लीव्स ब्लाउज़ - लॉन्ग स्लीव्स से लेकर डबल लेयर्स जैसे कई पैटर्न में आप इस स्टाइल को स्टिच करवा सकती हैं। जैसे साड़ी में पूरी बॉडी कवर हो जाती है वैसे ही ब्लाउज़ में भी हो जाए तो कोई बड़ी बात नहीं है। शीयर एम्बेलिश्ड स्लीव्स - ऐसे ब्लाउज़ के साथ आप हो सके तो सिंपल साड़ी ही पहनें क्योंकि वह बेहतरीन लगेगी। अगर आप हैवी साड़ी के साथ इस तरह के ब्लाउज़ पहनती हैं तो वह इतना अच्छा लुक नहीं देंगे। वहीँ बोट नेक के साथ ब्लाउज़ की खूबसूरती बेहतरीन होगी। पेप्लम ब्लाउज़ - पेप्लम ब्लाउज़ को आप सिंपल टॉप के अलावा बेल्ट के साथ भी टीमअप कर सकती हैं। हाई नेक ब्लाउज़ - आजकल हॉल्टर नेक के साथ बोट और हाई नेक की डिमांड सबसे ज्यादा है। वैसे इसके अलावा बेहतरीन दिखने के लिए आप काउल और क्रू नेक भी अपना सकती हैं। फ्रिंज बैक ब्लाउज़ - बैकलेस स्टाइल में इनवर्टेड ओपन बैक सबसे ज्यादा पॉपुलर है। वहीँ इसमें भी अलग तरह के फ्रिंज के साथ एक्सपेरिमेंट किया जा रहा है, जो इसे बेहतरीन लुक दे रहा है। बो बैक ब्लाउज़ - टॉप और शर्ट के अलावा बो का पैटर्न ब्लाउज़ के बैक में भी ट्राय किया जा रहा है जो बेहतरीन है। आप इसे भी ट्राय कर सकती हैं।
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IAS एसोसिएशन के नए पदाधिकारियों की घोषणा की गई है. मनोज कुमार पिंगुआ IAS एसोसिएशन के अध्यक्ष बनाए गए हैं. रीता शांडिल्य उपाध्यक्ष बनीं हैं. आर. प्रसन्ना महासचिव बने हैं. संयुक्त सचिव धनंजय देवांगन, अय्याज तम्बोली शारदा वर्मा को कोषाध्यक्ष बनाया गया है. हिम शिखर गुप्ता सांस्कृतिक सचिव बनाए गए हैं.
त्योहारों का सीजन देखते हुए रेलवे ने 13 अक्टूबर से दुर्ग से हटिया के बीच पूजा स्पेशल ट्रेन (08186/08185) की शुरुआत की है। यह ट्रेन सप्ताह में दो दिन चलेगी। दुर्ग से ट्रेन हर बुधवार-शुक्रवार और हटिया से मंगलवार-गुरुवार को चलेगी। फिलहाल इसका परिचालन 5 नवंबर तक किए जाने का फैसला लिया गया है, लेकिन त्योहार पर यात्रियों की संख्या और भीड़ को देखते हुए इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
एटीएम से छेड़छाड़ कर 20 लाख रुपए पार करने का मामला सामने आया है. मामले में एक संदिग्ध सीसीटीवी फुटेज हाथ लगा है. पत्थलगांव थाना पुलिस मामले की विस्तृत तस्दीक में जुट चुकी है. मिली प्राथमिक जानकारी के मुताबिक स्टेट बैंक के एटीएम से अलग-अलग एटीएम कार्ड से पैसे निकाले गए हैं. 20 लाख का ट्रांजेक्शन पिछले 10 महीनों में हुआ है. पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. हालाँकि आरोपी तक पहुँचने में संदिग्ध सीसीटीवी फुटेज भी अहम माना जा रहा है.
जिले में हरिभूमि व inh न्यूज की खबर का बड़ा असर हुआ है. शिक्षकों की लापरवाही मामले में जिला शिक्षा अधिकारी बी एक्का ने कार्रवाई करते हुए एक शिक्षक को निलंबित और 3 को शोकॉज नोटिस जारी किया है.
जिले के वाड्रफनगर चौकी क्षेत्र की एक महिला पुलिसकर्मी का रोते हुए वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. वायरल वीडियो में महिला पुलिसकर्मी को बीजेपी के कार्यकर्ता धक्का देते नजर आ रहे हैं.
राज्य शासन द्वारा जारी नई गाइडलाइन के बाद कोरोना मृत्यु पर 50 हजार का अनुदान लेने गठित कोविड-19 मृत्यु विनिश्चय समिति द्वारा जारी मृत्यु प्रमाणपत्र की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। अब कोरोना के उपचार से संबंधित दस्तावेजों को भी इसके लिए मान्य किया जाएगा।
छठवें मंजिल से कूदकर युवक ने जान दे दी. स्मृति नगर पुलिस मामले की जांच में जुट चुकी है. मिली प्राथमिक जानकारी के मुताबिक न्यू खुर्सीपार निवासी ललित शर्मा ने गृह निर्माण मंडल के छठवें माले से कूदकर ख़ुदकुशी कर ली है. मामला स्मृति नगर चौकी अंतर्गत दीनदयाल कॉलोनी खमरिया की है. आत्महत्या का कारण अज्ञात है. स्मृति नगर चौकी पुलिस मामले की विस्तृत विवेचना कर रही है.
राजधानी में गुढ़ियारी के शुक्रवारी बाजार स्थित नवकार ज्वेलर्स शोरूम से फिल्मी अंदाज में एक करोड़ रुपए के सोने-चांदी के जेवरात व एक लाख 61 हजार रुपए नकद चोरी का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। झारखंड के गिरोह ने शोरूम में चोरी की घटना को अंजाम दिया था। गिरोह के दो शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह के मास्टर माइंड समेत पांच सदस्य फरार बताए जा रहे हैं। उनके पास से लाखों रुपए के चांदी के जेवरात और स्कार्पियो वाहन बरामद किया गया है।
हरिभूमि और आईएनएच द्वारा वीआईपी रोड़ स्थित होटल ग्रैंड इम्पीरिया में 13 और 14 अक्टूबर को रास गरबा का आयोजन किया गया है। सोशल मीडिया में कार्यक्रम का पोस्टर जारी कर दिया गया है। प्रशासन की गाइडलाइन मिलने के बाद युवाओं ने गरबा में बेहतर प्रस्तुति देने तैयारी भी शुरू कर दी है। बाजार में गरबा पोशाकों की खरीदी बिक्री बढ़ गई है।
प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में दाखिले का आज अंतिम दिन है। इसके एक दिन पूर्व शुक्रवार को ही मुख्य कॉलेजों में छात्रों की भीड़ देखी गई। सूत्रों के अनुसार स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों ही स्तर पर आवेदन सिर्फ शनिवार तक ही स्वीकार किए जाएंगे।
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IAS एसोसिएशन के नए पदाधिकारियों की घोषणा की गई है. मनोज कुमार पिंगुआ IAS एसोसिएशन के अध्यक्ष बनाए गए हैं. रीता शांडिल्य उपाध्यक्ष बनीं हैं. आर. प्रसन्ना महासचिव बने हैं. संयुक्त सचिव धनंजय देवांगन, अय्याज तम्बोली शारदा वर्मा को कोषाध्यक्ष बनाया गया है. हिम शिखर गुप्ता सांस्कृतिक सचिव बनाए गए हैं. त्योहारों का सीजन देखते हुए रेलवे ने तेरह अक्टूबर से दुर्ग से हटिया के बीच पूजा स्पेशल ट्रेन की शुरुआत की है। यह ट्रेन सप्ताह में दो दिन चलेगी। दुर्ग से ट्रेन हर बुधवार-शुक्रवार और हटिया से मंगलवार-गुरुवार को चलेगी। फिलहाल इसका परिचालन पाँच नवंबर तक किए जाने का फैसला लिया गया है, लेकिन त्योहार पर यात्रियों की संख्या और भीड़ को देखते हुए इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। एटीएम से छेड़छाड़ कर बीस लाख रुपए पार करने का मामला सामने आया है. मामले में एक संदिग्ध सीसीटीवी फुटेज हाथ लगा है. पत्थलगांव थाना पुलिस मामले की विस्तृत तस्दीक में जुट चुकी है. मिली प्राथमिक जानकारी के मुताबिक स्टेट बैंक के एटीएम से अलग-अलग एटीएम कार्ड से पैसे निकाले गए हैं. बीस लाख का ट्रांजेक्शन पिछले दस महीनों में हुआ है. पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. हालाँकि आरोपी तक पहुँचने में संदिग्ध सीसीटीवी फुटेज भी अहम माना जा रहा है. जिले में हरिभूमि व inh न्यूज की खबर का बड़ा असर हुआ है. शिक्षकों की लापरवाही मामले में जिला शिक्षा अधिकारी बी एक्का ने कार्रवाई करते हुए एक शिक्षक को निलंबित और तीन को शोकॉज नोटिस जारी किया है. जिले के वाड्रफनगर चौकी क्षेत्र की एक महिला पुलिसकर्मी का रोते हुए वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है. वायरल वीडियो में महिला पुलिसकर्मी को बीजेपी के कार्यकर्ता धक्का देते नजर आ रहे हैं. राज्य शासन द्वारा जारी नई गाइडलाइन के बाद कोरोना मृत्यु पर पचास हजार का अनुदान लेने गठित कोविड-उन्नीस मृत्यु विनिश्चय समिति द्वारा जारी मृत्यु प्रमाणपत्र की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। अब कोरोना के उपचार से संबंधित दस्तावेजों को भी इसके लिए मान्य किया जाएगा। छठवें मंजिल से कूदकर युवक ने जान दे दी. स्मृति नगर पुलिस मामले की जांच में जुट चुकी है. मिली प्राथमिक जानकारी के मुताबिक न्यू खुर्सीपार निवासी ललित शर्मा ने गृह निर्माण मंडल के छठवें माले से कूदकर ख़ुदकुशी कर ली है. मामला स्मृति नगर चौकी अंतर्गत दीनदयाल कॉलोनी खमरिया की है. आत्महत्या का कारण अज्ञात है. स्मृति नगर चौकी पुलिस मामले की विस्तृत विवेचना कर रही है. राजधानी में गुढ़ियारी के शुक्रवारी बाजार स्थित नवकार ज्वेलर्स शोरूम से फिल्मी अंदाज में एक करोड़ रुपए के सोने-चांदी के जेवरात व एक लाख इकसठ हजार रुपए नकद चोरी का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। झारखंड के गिरोह ने शोरूम में चोरी की घटना को अंजाम दिया था। गिरोह के दो शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह के मास्टर माइंड समेत पांच सदस्य फरार बताए जा रहे हैं। उनके पास से लाखों रुपए के चांदी के जेवरात और स्कार्पियो वाहन बरामद किया गया है। हरिभूमि और आईएनएच द्वारा वीआईपी रोड़ स्थित होटल ग्रैंड इम्पीरिया में तेरह और चौदह अक्टूबर को रास गरबा का आयोजन किया गया है। सोशल मीडिया में कार्यक्रम का पोस्टर जारी कर दिया गया है। प्रशासन की गाइडलाइन मिलने के बाद युवाओं ने गरबा में बेहतर प्रस्तुति देने तैयारी भी शुरू कर दी है। बाजार में गरबा पोशाकों की खरीदी बिक्री बढ़ गई है। प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में दाखिले का आज अंतिम दिन है। इसके एक दिन पूर्व शुक्रवार को ही मुख्य कॉलेजों में छात्रों की भीड़ देखी गई। सूत्रों के अनुसार स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों ही स्तर पर आवेदन सिर्फ शनिवार तक ही स्वीकार किए जाएंगे।
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सिरमौर जिले के पांवटा साहिब में गोवंश रक्षकों और गौशाला संचालकों ने SDM विवेक महाजन को ज्ञापन सौंपा। साथ ही मांग की कि हरियाणा सरकार के चारे यानी तूड़ी पर प्रदेश से बाहर ले जाने पर रोक के कारण जिला सिरमौर में पशुचारे का संकट खड़ा हो गया है।
सचिन ओबरॉय ने कहा कि वह गोशाला चलाते हैं। चारे की कमी से गोवंश की रक्षा करना मुश्किल हो रहा। प्रशासन को पहले अवगत कराया था, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
सोमवार दोपहर 2 बजे SDM पांवटा के माध्यम से डीसी सिरमौर को ज्ञापन भेजा गया है। इसमें मांग की है कि गोशाला में बिना चारे के गोवंश भूखा मरने के कगार पर है। 2 दिन में यदि प्रशासन चारे की व्यवस्था नहीं करता तो गौशाला के पशुओं को प्रशासन के द्वार पर लाकर खड़ा कर देंगे, कुछ भी अनहोनी होती है तो प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। प्रशासन गोवंश की रक्षा करे, उनका पालन करे।
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सिरमौर जिले के पांवटा साहिब में गोवंश रक्षकों और गौशाला संचालकों ने SDM विवेक महाजन को ज्ञापन सौंपा। साथ ही मांग की कि हरियाणा सरकार के चारे यानी तूड़ी पर प्रदेश से बाहर ले जाने पर रोक के कारण जिला सिरमौर में पशुचारे का संकट खड़ा हो गया है। सचिन ओबरॉय ने कहा कि वह गोशाला चलाते हैं। चारे की कमी से गोवंश की रक्षा करना मुश्किल हो रहा। प्रशासन को पहले अवगत कराया था, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया। सोमवार दोपहर दो बजे SDM पांवटा के माध्यम से डीसी सिरमौर को ज्ञापन भेजा गया है। इसमें मांग की है कि गोशाला में बिना चारे के गोवंश भूखा मरने के कगार पर है। दो दिन में यदि प्रशासन चारे की व्यवस्था नहीं करता तो गौशाला के पशुओं को प्रशासन के द्वार पर लाकर खड़ा कर देंगे, कुछ भी अनहोनी होती है तो प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। प्रशासन गोवंश की रक्षा करे, उनका पालन करे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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यदि आप विदेशी भाषा सीखना चाहते हैं तो एक मोबाइल ऐप इसमें आपकी मदद करेगा। घबराइए नहीं, इसके लिए आपको कुछ पढ़ना-लिखना या प्रैक्टिस नहीं करना है, बल्कि एक ऐप को इंस्टॉल करना होगा। यह ऐप अलग-अलग भाषाओं में चैटिंग की सुविधा देता है।
गूगल ने इसके लिए एक क्रोम एक्सटेंशन बनाया है, जिसका नाम 'वेट लर्निंग' है और इसे गूगल की चैट सर्विस जीचैट में उपययोग किया जा सकता है। यह रियल टाइम में आपको विदेशी भाषाओं का शब्दकोष उपलब्ध कराता है। इससे आप किसी ऐसे व्यक्ति से भी चैट कर सकते हैं, जो आपकी भाषा को नहीं समझ पाता है।
अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से पीएचडी कर रहे एक छात्र कैरी कै ने कम्प्यूटर साइंस और आर्टिफिशिएल इंटेलिजेंस लैब में अपने एक अध्ययन में इसकी वजह बताई है। कैरी के अनुसार भाषा अज्ञानता की वजह से कई बार लोगों को चैट पर जवाब देने में औसतन 15 मिनट का समय लग जाता है।
उन्होंने बताया कि ऐसे में यह ऐप काफी उपयोगी साबित होगा। क्योंकि चैटिंग के दौरान इस ऐप से यूजर्स को जवाब देने में मदद मिलेगी। इस ऐप के इस्तेमाल से चैटिंग के दौरान भाषा में मदद मिलेगी।
वेटचैटर को चैटबॉक्स में एंबेड किया जा सकता है, यानी इसे एक्टिव करने पर यह जीचैट के साथ जुड़ जाएगा। इसके बाद यह चैटिंग के दौरान एक्टिव हो जाएगा और ऐप में दर्ज किसी विदेशी भाषा में चैट आने पर उसके जवाब का सुझाव देगा।
यह एक्सटेंशन ठीक वैसे ही काम करेगा, जैसे मोबाइल में एसएमएस टाइप करने पर डिक्शनरी सपोर्ट ऑन होने पर शब्दों के सुझाव मिलते हैं।
विदेशी भाषाओं को समझने और उसी में जवाब देने के लिए डुओलिंगो भी एक अच्छा ऐप है। वेटचैटर को भी काफी हद तक इसी तरह से बनाया गया है। बस फर्क इतना है कि इसे अलग से रन करने की जरूरत नहीं है, एक बार एक्सटेंशन इंस्टॉल होने के बाद जीचैट पर साइन इन करते ही यह एक्टिव हो जाएगा। इसे अलग से ऑन करने या ऑफ करने की जरूरत नहीं है।
वेटचैटर फिलहाल फ्रेंच और स्पेनिश भाषा में ही काम करता है।
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यदि आप विदेशी भाषा सीखना चाहते हैं तो एक मोबाइल ऐप इसमें आपकी मदद करेगा। घबराइए नहीं, इसके लिए आपको कुछ पढ़ना-लिखना या प्रैक्टिस नहीं करना है, बल्कि एक ऐप को इंस्टॉल करना होगा। यह ऐप अलग-अलग भाषाओं में चैटिंग की सुविधा देता है। गूगल ने इसके लिए एक क्रोम एक्सटेंशन बनाया है, जिसका नाम 'वेट लर्निंग' है और इसे गूगल की चैट सर्विस जीचैट में उपययोग किया जा सकता है। यह रियल टाइम में आपको विदेशी भाषाओं का शब्दकोष उपलब्ध कराता है। इससे आप किसी ऐसे व्यक्ति से भी चैट कर सकते हैं, जो आपकी भाषा को नहीं समझ पाता है। अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से पीएचडी कर रहे एक छात्र कैरी कै ने कम्प्यूटर साइंस और आर्टिफिशिएल इंटेलिजेंस लैब में अपने एक अध्ययन में इसकी वजह बताई है। कैरी के अनुसार भाषा अज्ञानता की वजह से कई बार लोगों को चैट पर जवाब देने में औसतन पंद्रह मिनट का समय लग जाता है। उन्होंने बताया कि ऐसे में यह ऐप काफी उपयोगी साबित होगा। क्योंकि चैटिंग के दौरान इस ऐप से यूजर्स को जवाब देने में मदद मिलेगी। इस ऐप के इस्तेमाल से चैटिंग के दौरान भाषा में मदद मिलेगी। वेटचैटर को चैटबॉक्स में एंबेड किया जा सकता है, यानी इसे एक्टिव करने पर यह जीचैट के साथ जुड़ जाएगा। इसके बाद यह चैटिंग के दौरान एक्टिव हो जाएगा और ऐप में दर्ज किसी विदेशी भाषा में चैट आने पर उसके जवाब का सुझाव देगा। यह एक्सटेंशन ठीक वैसे ही काम करेगा, जैसे मोबाइल में एसएमएस टाइप करने पर डिक्शनरी सपोर्ट ऑन होने पर शब्दों के सुझाव मिलते हैं। विदेशी भाषाओं को समझने और उसी में जवाब देने के लिए डुओलिंगो भी एक अच्छा ऐप है। वेटचैटर को भी काफी हद तक इसी तरह से बनाया गया है। बस फर्क इतना है कि इसे अलग से रन करने की जरूरत नहीं है, एक बार एक्सटेंशन इंस्टॉल होने के बाद जीचैट पर साइन इन करते ही यह एक्टिव हो जाएगा। इसे अलग से ऑन करने या ऑफ करने की जरूरत नहीं है। वेटचैटर फिलहाल फ्रेंच और स्पेनिश भाषा में ही काम करता है।
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सरकार के आदेशों के बाद भी बिजली व्यवस्था पटरी पर नही आ रही है। स्थिति यह है कि शहर में 18 घंटे भी बिजली नहीं मिल रही है। पिछले 24 घंटे में 28 बार फाल्ट हुए और इन फाल्टो की मरम्मत तथा शट डाउन को लेकर काफी देर तक बिजली बंद रही। रात के समय बिजली गुल हो जाने के कारण लोगोें की नींद उड़ गई और पूरी रात करवटें बदलते हुए बदली। दिन मेें बिजली की आंख मिचौली जारी रही। उमस भरी गर्मी के इस दौर में जब बिना पंखे के बैठना असंभव है तब बिजली भी लोगों को खूब परेशान कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बिजली कटौती ना किए जाने के निर्देश दिए हैं, यह भी कहा कि शहरों को 24 घंटे बिजली की सप्लाई की जाए और तहसील स्तर पर 22 घंटे बिजली दी जाए, इसके बावजूद बिजली ने रातों की नींद और दिन का सुकून छीन लिया है। अकेले शहर में ही 24 घ्ांटो में शहर में 6 घंटे बिजली गुल रही। रात और दिन में हो रहे दनादन फाल्ट और ट्रांसफार्मर फुकने की घटनाओं के बीच निर्वाध बिजली सप्लाई तो सपना बनकर रह गई है, ऐसे मेें 24 घंटे बिजली कैसे मिल सकती है। स्थिति यह है कि शहर और गांव में बिजली की अघोषित कटौती परेशान कर रही है। 24 घंटे सप्लाई के निर्देश के बाद भी पिछले चौबीस घंटों में शहर में बिजली 5 घंटे गुल रही। बिजली कभी भी चली जाती है और फिर एक घंटे से पहले तो बिजली के दर्शन नहीं होते। दिन और रात में कई बार बिजली आती जाती रहती है। गमी के दिनों में बिजली की जरुरत ज्यादा होती है लेकिन हालत यह है कि शहर में तो अघोषित कटौती हो रही है। शहर के अलग अलग मोहल्लो ंमें दनादन फाल्ट हो रहे हैं जिससे बिजली गुल हो जाती है। रात हो या दिन बिजली के आने जाने का सिलसिला चलता रहता है। बिजली ना तो रात में सोने दे रही है और दिन में काम करने दे रही है।
यही हाल गांवों का भी है। ग्रामीण इलाकों में औसतन 10 से12 घंटे की आपूर्ति हो पा रही है। मांग और आपूर्ति में काफी अंतर है। इसी का नतीजा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अलग अलग समय पर 10 से12 घंटे तक की कटौती हो रही है। सरकार की मंशा के अनुरुप ना तो शहर में बिजली मिल रही है और ना ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली मिल रही है।
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सरकार के आदेशों के बाद भी बिजली व्यवस्था पटरी पर नही आ रही है। स्थिति यह है कि शहर में अट्ठारह घंटाटे भी बिजली नहीं मिल रही है। पिछले चौबीस घंटाटे में अट्ठाईस बार फाल्ट हुए और इन फाल्टो की मरम्मत तथा शट डाउन को लेकर काफी देर तक बिजली बंद रही। रात के समय बिजली गुल हो जाने के कारण लोगोें की नींद उड़ गई और पूरी रात करवटें बदलते हुए बदली। दिन मेें बिजली की आंख मिचौली जारी रही। उमस भरी गर्मी के इस दौर में जब बिना पंखे के बैठना असंभव है तब बिजली भी लोगों को खूब परेशान कर रही है। मुख्यमंत्री ने बिजली कटौती ना किए जाने के निर्देश दिए हैं, यह भी कहा कि शहरों को चौबीस घंटाटे बिजली की सप्लाई की जाए और तहसील स्तर पर बाईस घंटाटे बिजली दी जाए, इसके बावजूद बिजली ने रातों की नींद और दिन का सुकून छीन लिया है। अकेले शहर में ही चौबीस घ्ांटो में शहर में छः घंटाटे बिजली गुल रही। रात और दिन में हो रहे दनादन फाल्ट और ट्रांसफार्मर फुकने की घटनाओं के बीच निर्वाध बिजली सप्लाई तो सपना बनकर रह गई है, ऐसे मेें चौबीस घंटाटे बिजली कैसे मिल सकती है। स्थिति यह है कि शहर और गांव में बिजली की अघोषित कटौती परेशान कर रही है। चौबीस घंटाटे सप्लाई के निर्देश के बाद भी पिछले चौबीस घंटों में शहर में बिजली पाँच घंटाटे गुल रही। बिजली कभी भी चली जाती है और फिर एक घंटे से पहले तो बिजली के दर्शन नहीं होते। दिन और रात में कई बार बिजली आती जाती रहती है। गमी के दिनों में बिजली की जरुरत ज्यादा होती है लेकिन हालत यह है कि शहर में तो अघोषित कटौती हो रही है। शहर के अलग अलग मोहल्लो ंमें दनादन फाल्ट हो रहे हैं जिससे बिजली गुल हो जाती है। रात हो या दिन बिजली के आने जाने का सिलसिला चलता रहता है। बिजली ना तो रात में सोने दे रही है और दिन में काम करने दे रही है। यही हाल गांवों का भी है। ग्रामीण इलाकों में औसतन दस सेबारह घंटाटे की आपूर्ति हो पा रही है। मांग और आपूर्ति में काफी अंतर है। इसी का नतीजा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अलग अलग समय पर दस सेबारह घंटाटे तक की कटौती हो रही है। सरकार की मंशा के अनुरुप ना तो शहर में बिजली मिल रही है और ना ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली मिल रही है।
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नागपुर. इन दिनों कड़ी धूप और भीषण गर्मी ने शहरवासियों को हलाकान कर दिया है. ऐसे में यदि पीने का पानी भी नसीब न हो तो हर दिन नर्क सरीखा लगने लगता है. सिटी के कई इलाके पीने के पानी की कमी के चलते ऐसे ही नर्क वाली स्थिति में दिखाई दे रहे हैं. कई जगहों पर पाइप लाइन बिछी है तो पानी नहीं है और जहां पानी दिया जा रहा है वह अपर्याप्त साबित हो रहा है. ऐसे क्षेत्रों में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
ऐसा नहीं है कि इन इलाकों में पीने का पानी नहीं दिया जा रहा है. हर 2 से 3 दिन में यहां या तो नल से वाटर सप्लाई की जा रही है या फिर टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है. हालांकि क्षेत्र की जनसंख्या के अनुसार हो रही वाटर सप्लाई नाकाफी है. कई परिवारों के पास 1 दिन के लिए भी पर्याप्त पीने का पानी जमा नहीं हो पा रहा. ऐसे में उन्हें दूसरे क्षेत्र के नलों और अन्य जगहों से पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है. इनमें अधिकांश वे इलाके हैं जो शहरी सीमा से लगे हुए हैं और नये लेआउट हैं या नई बस्तियां हैं.
सिटी के अधिकांश भागों में वाटर सप्लाई की कमी कोई नया मुद्दा नहीं है. कई इलाके जहां दमदार जनप्रतिनिधि रहते हैं, वहां दिन में कई घंटों तक नलों में पानी आता रहता है और जहां ऐसा नहीं है, वहां हर दिन नल आये भी तो सीमित समय में वाटर सप्लाई बंद हो जाती है. ऐसी परेशानियों में शहरवासियों के बीच लंबे समय से 24 बाय 7 वाटर सप्लाई परियोजना शब्द घूमता रहा है. हालांकि वर्षों बीतने के बाद भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी. दूसरी तरफ शहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है. ऐसे में जिस गति से परियोजना पूरी होनी थी वैसा नहीं हो सका. कुल मिलाकर 24 बाय 7 वाटर सप्लाई परियोजना पर ही पलीता लग गया है.
भले ही इन इलाकों में रहने वाले लोग पीने की पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं, कई इलाकों में वर्षों से पाइप लाइन बिछा दी गई है लेकिन इन्हें चार्ज नहीं किया गया. इसलिए नलों में पीने का पानी सप्लाई नहीं किया जा रहा. वहीं हर बार की तुलना में इस बार वाटर टैंकरों की संख्या भी काफी कम नजर है. ऐसे भी लोग हैं जो अपने जनप्रतिनिधियों पर तंज कसने से पीछे नहीं हट रहे. उनका कहना है कि कुछ महीनों पहले महानगर पालिका चुनावों की सुगबुगाहट ने ही सड़क समेत अन्य काम जैसे-तैसे करवा दिये लेकिन तब गर्मी शुरू नहीं हुई थी. लोगों का कहना है कि प्रशासन अभी चुनाव करवा दे तो वोटरों को लुभाने की कोशिश में नई पाइप लाइनों में पानी बहना शुरू हो सके और जहां ऐसा नहीं है वहां पानी के टैंकर भी पहुंचने लग जायें.
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नागपुर. इन दिनों कड़ी धूप और भीषण गर्मी ने शहरवासियों को हलाकान कर दिया है. ऐसे में यदि पीने का पानी भी नसीब न हो तो हर दिन नर्क सरीखा लगने लगता है. सिटी के कई इलाके पीने के पानी की कमी के चलते ऐसे ही नर्क वाली स्थिति में दिखाई दे रहे हैं. कई जगहों पर पाइप लाइन बिछी है तो पानी नहीं है और जहां पानी दिया जा रहा है वह अपर्याप्त साबित हो रहा है. ऐसे क्षेत्रों में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसा नहीं है कि इन इलाकों में पीने का पानी नहीं दिया जा रहा है. हर दो से तीन दिन में यहां या तो नल से वाटर सप्लाई की जा रही है या फिर टैंकर से पानी पहुंचाया जा रहा है. हालांकि क्षेत्र की जनसंख्या के अनुसार हो रही वाटर सप्लाई नाकाफी है. कई परिवारों के पास एक दिन के लिए भी पर्याप्त पीने का पानी जमा नहीं हो पा रहा. ऐसे में उन्हें दूसरे क्षेत्र के नलों और अन्य जगहों से पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है. इनमें अधिकांश वे इलाके हैं जो शहरी सीमा से लगे हुए हैं और नये लेआउट हैं या नई बस्तियां हैं. सिटी के अधिकांश भागों में वाटर सप्लाई की कमी कोई नया मुद्दा नहीं है. कई इलाके जहां दमदार जनप्रतिनिधि रहते हैं, वहां दिन में कई घंटों तक नलों में पानी आता रहता है और जहां ऐसा नहीं है, वहां हर दिन नल आये भी तो सीमित समय में वाटर सप्लाई बंद हो जाती है. ऐसी परेशानियों में शहरवासियों के बीच लंबे समय से चौबीस बाय सात वाटर सप्लाई परियोजना शब्द घूमता रहा है. हालांकि वर्षों बीतने के बाद भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी. दूसरी तरफ शहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है. ऐसे में जिस गति से परियोजना पूरी होनी थी वैसा नहीं हो सका. कुल मिलाकर चौबीस बाय सात वाटर सप्लाई परियोजना पर ही पलीता लग गया है. भले ही इन इलाकों में रहने वाले लोग पीने की पानी की भारी कमी से जूझ रहे हैं, कई इलाकों में वर्षों से पाइप लाइन बिछा दी गई है लेकिन इन्हें चार्ज नहीं किया गया. इसलिए नलों में पीने का पानी सप्लाई नहीं किया जा रहा. वहीं हर बार की तुलना में इस बार वाटर टैंकरों की संख्या भी काफी कम नजर है. ऐसे भी लोग हैं जो अपने जनप्रतिनिधियों पर तंज कसने से पीछे नहीं हट रहे. उनका कहना है कि कुछ महीनों पहले महानगर पालिका चुनावों की सुगबुगाहट ने ही सड़क समेत अन्य काम जैसे-तैसे करवा दिये लेकिन तब गर्मी शुरू नहीं हुई थी. लोगों का कहना है कि प्रशासन अभी चुनाव करवा दे तो वोटरों को लुभाने की कोशिश में नई पाइप लाइनों में पानी बहना शुरू हो सके और जहां ऐसा नहीं है वहां पानी के टैंकर भी पहुंचने लग जायें.
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लोकसभा चुनाव 2019 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवारों की 10वीं सूची जारी की है, जिसमें उत्तर प्रदेश के 29 और पश्चिम बंगाल के 10 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की गई है. यूपी की लिस्ट में कई बड़े बदलाव भी देखने को मिले हैं. केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और उनके बेटे वरुण गांधी की सीटें आपस में बदल दी गई हैं, वहीं कानपुर सीट से पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी का टिकट काटकर सत्यदेव सिंह पचौरी को मौका दिया गया है.
इनके अलावा इटावा सीट से अशोक धोहरे का टिकट काटकर रमाशंकर कठेरिया को टिकट दिया गया है. रमाशंकर कठेरिया वर्तमान में आगरा से सांसद हैं, लेकिन उन्हें इटावा शिफ्ट किया गया है. जबकि भदोही से वर्तमान सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त की सीट भी बदल दी गई है, और उन्हें अब बलिया से टिकट दिया गया है. यानी बलिया सांसद भारत सिंह का टिकट काटा गया है.
बाराबंकी से मौजूदा प्रियंका रावत का टिकट काट दिया गया है, उनकी जगह मौजूदा विधायक उपेन्द्र रावत को टिकट दिया गया है. इलाहाबाद से मौजूदा सांसद श्यामचरण गुप्ता बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में चले गए हैं. जिसके चलते इलाहाबाद लोकसभा सीट से यूपी सरकार में मंत्री रीता बहुगुणा जोशी को टिकट दिया गया है. इसी तरह बहराइच से सांसद सावित्रीबाई फुले बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में चली गई हैं, जिसके चलते इस सीट से बीजेपी ने अक्षयवरलाल गौर को मौका दिया है. अक्षयवरलाल फिलहाल विधायक हैं.
समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान के गढ़ रामपुर से बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद नेपाल सिंह का टिकट काट दिया है. उनकी जगह बॉलीवुड अभिनेत्री और पूर्व सपा सांसद जया प्रदा को प्रत्याशी बनाया गया है. जया प्रदा ने हाल ही में बीजेपी ज्वाइन की है. अब उनका सीधा मुकाबला समाजवादी पार्टी के कैंडिडेड आजम खान से होगा.
बीजेपी ने अपने वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को कानपुर से टिकट नहीं दिया है. उनकी जगह यूपी सरकार के मंत्री सत्यदेव सिंह पचौरी को टिकट दिया गया है. कुशीनगर सीट से भी मौजूदा सांसद राजेश पांडेय का टिकट काट दिया गया है, उनकी जगह योगी आदित्यनाथ के करीबी माने जाने वाले विजय दुबे को मौका दिया गया है. विजय दुबे 2009 में भी इस सीट बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए थे. इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता, लेकिन राज्यसभा सांसद के चुनाव में क्रॉस वोटिंग के चलते कांग्रेस ने उन्हें निष्कासित कर दिया और वह वापस बीजेपी में आ गए. अब उन्हें कुशीनगर लोकसभा सीट से मौका दिया गया है.
यानी बीजेपी ने यूपी के 29 प्रत्याशियों की इस लिस्ट में काफी बदलाव किए हैं. कुछ पुराने सांसदों पर भरोसा जताया गया है, तो कहीं बदलाव कर क्षेत्रीय विरोध को कम करने की कोशिश की गई है. वरुण गांधी को लेकर छाए संशय के बादल भी छंट गए हैं और अंततः पार्टी ने उन्हें टिकट दे दिया है, हालांकि उनकी सीट बदलकर एक बड़ा संदेश भी देने का प्रयास किया गया है.
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लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस के लिए भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीदवारों की दसवीं सूची जारी की है, जिसमें उत्तर प्रदेश के उनतीस और पश्चिम बंगाल के दस प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की गई है. यूपी की लिस्ट में कई बड़े बदलाव भी देखने को मिले हैं. केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी और उनके बेटे वरुण गांधी की सीटें आपस में बदल दी गई हैं, वहीं कानपुर सीट से पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी का टिकट काटकर सत्यदेव सिंह पचौरी को मौका दिया गया है. इनके अलावा इटावा सीट से अशोक धोहरे का टिकट काटकर रमाशंकर कठेरिया को टिकट दिया गया है. रमाशंकर कठेरिया वर्तमान में आगरा से सांसद हैं, लेकिन उन्हें इटावा शिफ्ट किया गया है. जबकि भदोही से वर्तमान सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त की सीट भी बदल दी गई है, और उन्हें अब बलिया से टिकट दिया गया है. यानी बलिया सांसद भारत सिंह का टिकट काटा गया है. बाराबंकी से मौजूदा प्रियंका रावत का टिकट काट दिया गया है, उनकी जगह मौजूदा विधायक उपेन्द्र रावत को टिकट दिया गया है. इलाहाबाद से मौजूदा सांसद श्यामचरण गुप्ता बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में चले गए हैं. जिसके चलते इलाहाबाद लोकसभा सीट से यूपी सरकार में मंत्री रीता बहुगुणा जोशी को टिकट दिया गया है. इसी तरह बहराइच से सांसद सावित्रीबाई फुले बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में चली गई हैं, जिसके चलते इस सीट से बीजेपी ने अक्षयवरलाल गौर को मौका दिया है. अक्षयवरलाल फिलहाल विधायक हैं. समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान के गढ़ रामपुर से बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद नेपाल सिंह का टिकट काट दिया है. उनकी जगह बॉलीवुड अभिनेत्री और पूर्व सपा सांसद जया प्रदा को प्रत्याशी बनाया गया है. जया प्रदा ने हाल ही में बीजेपी ज्वाइन की है. अब उनका सीधा मुकाबला समाजवादी पार्टी के कैंडिडेड आजम खान से होगा. बीजेपी ने अपने वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी को कानपुर से टिकट नहीं दिया है. उनकी जगह यूपी सरकार के मंत्री सत्यदेव सिंह पचौरी को टिकट दिया गया है. कुशीनगर सीट से भी मौजूदा सांसद राजेश पांडेय का टिकट काट दिया गया है, उनकी जगह योगी आदित्यनाथ के करीबी माने जाने वाले विजय दुबे को मौका दिया गया है. विजय दुबे दो हज़ार नौ में भी इस सीट बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए थे. इसके बाद दो हज़ार बारह के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता, लेकिन राज्यसभा सांसद के चुनाव में क्रॉस वोटिंग के चलते कांग्रेस ने उन्हें निष्कासित कर दिया और वह वापस बीजेपी में आ गए. अब उन्हें कुशीनगर लोकसभा सीट से मौका दिया गया है. यानी बीजेपी ने यूपी के उनतीस प्रत्याशियों की इस लिस्ट में काफी बदलाव किए हैं. कुछ पुराने सांसदों पर भरोसा जताया गया है, तो कहीं बदलाव कर क्षेत्रीय विरोध को कम करने की कोशिश की गई है. वरुण गांधी को लेकर छाए संशय के बादल भी छंट गए हैं और अंततः पार्टी ने उन्हें टिकट दे दिया है, हालांकि उनकी सीट बदलकर एक बड़ा संदेश भी देने का प्रयास किया गया है.
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मुर्रा भैंस, विश्व की सबसे अच्छी भैंस की दुधारू नस्ल है. जो दूध उत्पादन के लिए पाली जाती है. यह भारत के सभी इलाकों में पायी जाती है. इसका गृह क्षेत्र हरियाणा के रोहतक, हिसार, जिन्द व करनाल जिले तथा दिल्ली व पंजाब हैं. यह जेट काला रंग की होती है. वहीं विदेशों में यह इटली, बल्गेरिया, मिस्र आदि में पाली जाती है. इस नस्ल की मुख्य विशेषता छोटे मुड़े हुए सींग तथा खुर व पूँछ के निचले हिस्से में सफेद धब्बे का होना हैं. वहीं इनका सिर छोटा होता है.
हरियाणा में इसे 'काला सोना' भी कहा जाता है. दूध में वसा उत्पादन के लिए मुर्रा सबसे अच्छी नस्ल है. इसके दूध में 7% वसा पाई जाती है. मुर्रा भैंस की गर्भा अवधि 310 दिन की होती है और अयन विकसित तथा दूध शिराएं उभरी होती है.
आमतौर पर मुर्रा भैंस की कीमत 40 से 80 हजार रूपये के बीच में होती है. यह भैंस प्रतिदिन 12 लीटर दूध दे सकती है.
अगर भैंस 12 लीटर से ज्यादा दूध देने में सक्षम है तो उसकी कीमत 45 हजार से ज्यादा हो सकती है. भारत के अलग-अलग हिस्सों में इस के दामों में अंतर हो सकता है.
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मुर्रा भैंस, विश्व की सबसे अच्छी भैंस की दुधारू नस्ल है. जो दूध उत्पादन के लिए पाली जाती है. यह भारत के सभी इलाकों में पायी जाती है. इसका गृह क्षेत्र हरियाणा के रोहतक, हिसार, जिन्द व करनाल जिले तथा दिल्ली व पंजाब हैं. यह जेट काला रंग की होती है. वहीं विदेशों में यह इटली, बल्गेरिया, मिस्र आदि में पाली जाती है. इस नस्ल की मुख्य विशेषता छोटे मुड़े हुए सींग तथा खुर व पूँछ के निचले हिस्से में सफेद धब्बे का होना हैं. वहीं इनका सिर छोटा होता है. हरियाणा में इसे 'काला सोना' भी कहा जाता है. दूध में वसा उत्पादन के लिए मुर्रा सबसे अच्छी नस्ल है. इसके दूध में सात% वसा पाई जाती है. मुर्रा भैंस की गर्भा अवधि तीन सौ दस दिन की होती है और अयन विकसित तथा दूध शिराएं उभरी होती है. आमतौर पर मुर्रा भैंस की कीमत चालीस से अस्सी हजार रूपये के बीच में होती है. यह भैंस प्रतिदिन बारह लीटरटर दूध दे सकती है. अगर भैंस बारह लीटरटर से ज्यादा दूध देने में सक्षम है तो उसकी कीमत पैंतालीस हजार से ज्यादा हो सकती है. भारत के अलग-अलग हिस्सों में इस के दामों में अंतर हो सकता है. कृषि पत्रकारिता के लिए अपना समर्थन दिखाएं. . ! ! प्रिय पाठक, हमसे जुड़ने के लिए आपका धन्यवाद। कृषि पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए आप जैसे पाठक हमारे लिए एक प्रेरणा हैं। हमें कृषि पत्रकारिता को और सशक्त बनाने और ग्रामीण भारत के हर कोने में किसानों और लोगों तक पहुंचने के लिए आपके समर्थन या सहयोग की आवश्यकता है। हमारे भविष्य के लिए आपका हर सहयोग मूल्यवान है।
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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में सोमवार को पुलिस ने एक सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा किया। दरअसल, तीन दिन पहले पुलिस ने डबल मर्डर का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को जेल भेजा था। लेकिन जेल जाने से पहले आरोपी एक और हत्याकांड से पर्दा उठा गए। एक युवक ने दो महीने से मायके में रह रही अपनी सगी बहन की हत्या इसलिए कर दी क्योंकि वह उसके चरित्र को लेकर परेशान था। मृतका के पति की तहरीर पर पुलिस ने कब्र खुदवाकर शव का पोस्टमार्टम कराया। जिस महिला की मौत का कारण बीमारी बताया जा रहा था, उसकी हत्या की गई थी।
दरअसल, नागफनी थाना क्षेत्र के किसरौल दीवान खाना में बीते शुक्रवार की रात प्रॉपर्टी डीलर नजारत और उसकी बेटी समरीन की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 6 नवंबर को पुलिस ने पड़ोसी मन्नान और उसके दोस्त यूनुस को गिरफ्तार कर जेल भेजा। लेकिन जेल जाने से पहले दोनों आरोपियों ने एक और हत्याकांड का खुलासा किया। यह हत्या उन्होंने नहीं, उनके दोस्त ने की थी।
डबल मर्डर के आरोपी मन्नान और यूनुस और अक्शा के छोटे भाई टिंकू की आपस में दोस्ती थी। अक्सर यह तीनों लोग शाम को एक साथ बैठकर शराब पीते थे। डबल मर्डर से पहले अक्शा के भाई ने शराब के नशे में दोनों आरोपियों को बताया कि मेरे बड़े भाई तारिक ने बहन की गला दबाकर हत्या कर दी और किसी को पता ही नहीं चला। यह बात सुनकर ही डबल मर्डर के आरोपियों को बल मिला कि हम भी हत्या कर देंगे तो किसी को पता नहीं चलेगा।
किसरौल अब्बासिया मस्जिद के पास रहने वाली अक्शा ने सिविल लाइन के रहने वाले मोहम्मद इरफान से 3 साल पहले प्रेम विवाह किया था। शादी के एक साल बाद अक्शा ने एक बेटे को जन्म दिया। लेकिन, अक्शा का किसरौल के ही रहने वाले एक और युवक से प्रेम प्रसंग हो गया। इसके बाद अक्शा अपने प्रेमी के साथ घर से भाग गई। कुछ समय बाद जब वह वापस आई तो सुसराल वालो ने घर में रखने से मना कर दिया। इसको लेकर दोनों परिवार के लोगो में पंचायत हुई। पंचायत में अक्शा ने सुसराल और प्रेमी के साथ रहने की जगह मायके में रहने की बात कही। पिछले तीन महीने से अक्शा मायके में ही रह रही थी।
अक्शा के भाई तारिक को यह बात बहुत नागवार गुजर रही थी कि एक बार प्रेम विवाह करने के बाद बहन ने दोबारा से इस तरह की हरकत की। 13 अक्टूबर को परिवार वाले किसी दावत में गए थे। मौका पाकर तारिक ने बहन अक्शा की गला दबाकर हत्या कर दी। जब परिवार वाले घर वापस आए तो परिवार के सदस्यों को हत्या की बात बताई। घर वालो ने भी मोहल्ले वालों से और रिश्तेदारों से दिल का दौरा पड़ने से मौत की बात कहकर अक्शा के शव को बुधशाह के कब्रिस्तान में दफन कर दिया था।
डबल मर्डर में मामले में जेल गए दोनों आरोपियों ने जब भाई द्वारा बहन की हत्या की बात बताई तो पुलिस ने उसी दिन 6 नवंबर को मृतका के पति को बुलाकर तहरीर लेकर शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम की मजिस्ट्रेट से मांग करवाई। 7 नवंबर मजिस्ट्रेट के सामने शव को कब्र से निकलवाकर डॉक्टरों का एक पैनल बनवाकर शव का पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में मृतका की मौत का कारण गला दबाने से सामने आया।
पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के बाद जब मृतका के भाई टिंकू, जिसने शराब पीकर हत्या की बात बताई थी, उससे पूछताछ की तो उसने पुलिस को बताया कि बड़े भाई तारिक ने हत्या की है। तारिक से जब हत्या का कारण पूछा तो उसने बताया कि बहन के चाल चलन और बदनामी होने से परेशान होकर उसकी हत्या की है।
पुलिस ने यह भी बताया कि अगर यह मामला की जानकारी नहीं होती और न ही पकड़ा जाता तो तारिक दो और हत्या की घटना को अंजाम देने वाला था। किन दो व्यक्तियों की हत्या करने वाला था उन व्यक्तियों के नाम नहीं बताए हैं।
क्या बोले सीओ?
सीओ अनिल कुमार यादव ने बताया कि डबल मर्डर के हत्या आरोपियों ने इस घटना की जानकारी दी थी। उसी दिन मृतका के पति द्वारा हत्या कर शव को दफन करने की तहरीर दी गयी। जिसके बाद शव को कब्र से बाहर निकलवा कर पोस्टमार्टम करवाया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की बात सामने आई है। हत्या मृतका के भाई द्वारा की गईं थी। हत्या का कारण बहन के चाल चलन सही नहीं होने की वजह से बदनामी बतायी गयी है। जिसकी गिरफ्तारी करके जेल भेज दिया गया है।
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उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में सोमवार को पुलिस ने एक सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा किया। दरअसल, तीन दिन पहले पुलिस ने डबल मर्डर का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को जेल भेजा था। लेकिन जेल जाने से पहले आरोपी एक और हत्याकांड से पर्दा उठा गए। एक युवक ने दो महीने से मायके में रह रही अपनी सगी बहन की हत्या इसलिए कर दी क्योंकि वह उसके चरित्र को लेकर परेशान था। मृतका के पति की तहरीर पर पुलिस ने कब्र खुदवाकर शव का पोस्टमार्टम कराया। जिस महिला की मौत का कारण बीमारी बताया जा रहा था, उसकी हत्या की गई थी। दरअसल, नागफनी थाना क्षेत्र के किसरौल दीवान खाना में बीते शुक्रवार की रात प्रॉपर्टी डीलर नजारत और उसकी बेटी समरीन की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में छः नवंबर को पुलिस ने पड़ोसी मन्नान और उसके दोस्त यूनुस को गिरफ्तार कर जेल भेजा। लेकिन जेल जाने से पहले दोनों आरोपियों ने एक और हत्याकांड का खुलासा किया। यह हत्या उन्होंने नहीं, उनके दोस्त ने की थी। डबल मर्डर के आरोपी मन्नान और यूनुस और अक्शा के छोटे भाई टिंकू की आपस में दोस्ती थी। अक्सर यह तीनों लोग शाम को एक साथ बैठकर शराब पीते थे। डबल मर्डर से पहले अक्शा के भाई ने शराब के नशे में दोनों आरोपियों को बताया कि मेरे बड़े भाई तारिक ने बहन की गला दबाकर हत्या कर दी और किसी को पता ही नहीं चला। यह बात सुनकर ही डबल मर्डर के आरोपियों को बल मिला कि हम भी हत्या कर देंगे तो किसी को पता नहीं चलेगा। किसरौल अब्बासिया मस्जिद के पास रहने वाली अक्शा ने सिविल लाइन के रहने वाले मोहम्मद इरफान से तीन साल पहले प्रेम विवाह किया था। शादी के एक साल बाद अक्शा ने एक बेटे को जन्म दिया। लेकिन, अक्शा का किसरौल के ही रहने वाले एक और युवक से प्रेम प्रसंग हो गया। इसके बाद अक्शा अपने प्रेमी के साथ घर से भाग गई। कुछ समय बाद जब वह वापस आई तो सुसराल वालो ने घर में रखने से मना कर दिया। इसको लेकर दोनों परिवार के लोगो में पंचायत हुई। पंचायत में अक्शा ने सुसराल और प्रेमी के साथ रहने की जगह मायके में रहने की बात कही। पिछले तीन महीने से अक्शा मायके में ही रह रही थी। अक्शा के भाई तारिक को यह बात बहुत नागवार गुजर रही थी कि एक बार प्रेम विवाह करने के बाद बहन ने दोबारा से इस तरह की हरकत की। तेरह अक्टूबर को परिवार वाले किसी दावत में गए थे। मौका पाकर तारिक ने बहन अक्शा की गला दबाकर हत्या कर दी। जब परिवार वाले घर वापस आए तो परिवार के सदस्यों को हत्या की बात बताई। घर वालो ने भी मोहल्ले वालों से और रिश्तेदारों से दिल का दौरा पड़ने से मौत की बात कहकर अक्शा के शव को बुधशाह के कब्रिस्तान में दफन कर दिया था। डबल मर्डर में मामले में जेल गए दोनों आरोपियों ने जब भाई द्वारा बहन की हत्या की बात बताई तो पुलिस ने उसी दिन छः नवंबर को मृतका के पति को बुलाकर तहरीर लेकर शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम की मजिस्ट्रेट से मांग करवाई। सात नवंबर मजिस्ट्रेट के सामने शव को कब्र से निकलवाकर डॉक्टरों का एक पैनल बनवाकर शव का पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में मृतका की मौत का कारण गला दबाने से सामने आया। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के बाद जब मृतका के भाई टिंकू, जिसने शराब पीकर हत्या की बात बताई थी, उससे पूछताछ की तो उसने पुलिस को बताया कि बड़े भाई तारिक ने हत्या की है। तारिक से जब हत्या का कारण पूछा तो उसने बताया कि बहन के चाल चलन और बदनामी होने से परेशान होकर उसकी हत्या की है। पुलिस ने यह भी बताया कि अगर यह मामला की जानकारी नहीं होती और न ही पकड़ा जाता तो तारिक दो और हत्या की घटना को अंजाम देने वाला था। किन दो व्यक्तियों की हत्या करने वाला था उन व्यक्तियों के नाम नहीं बताए हैं। क्या बोले सीओ? सीओ अनिल कुमार यादव ने बताया कि डबल मर्डर के हत्या आरोपियों ने इस घटना की जानकारी दी थी। उसी दिन मृतका के पति द्वारा हत्या कर शव को दफन करने की तहरीर दी गयी। जिसके बाद शव को कब्र से बाहर निकलवा कर पोस्टमार्टम करवाया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या की बात सामने आई है। हत्या मृतका के भाई द्वारा की गईं थी। हत्या का कारण बहन के चाल चलन सही नहीं होने की वजह से बदनामी बतायी गयी है। जिसकी गिरफ्तारी करके जेल भेज दिया गया है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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SEGRARIA PAR
'मडम्' से थोड़ा ही आगे चलने पर चढ़ाई शुरू हो गई । इस चढ़ाई में चक्कर खाता हुआ रास्ता न बनाकर सोढ़ियाँ बना दी गई हैं, जिससे चढ़ाई और कठिन हो गई है। थोड़ी ही देरमें पैर भर गये, और गति मन्द ही नहीं हुई, बल्कि हर पचास कदमपर सुस्ताने की जरूरत पड़ने लगी। श्रीवाङ् महाशय तो सबसे पीछे रहने लगे । मैंने कहा- वाङ् महाशय जेनरल चुने जायँ। लोगोंने उनके आगे न रह पीछे रह जानेकी आपत्ति उठाई । मैंने कहा, आजकलके युद्धोंमें जेनरल आगे नहीं, पीछे रहा करता है। ख सबको स्वीकार करना पड़ा ।
थोड़ी ही देरमें मुझे भी सहायक जेनरल बनना पड़ा। अब वाङ् महाशयने दुनियाकी बेवकूफीपर व्याख्यान देना शुरू किया - यह सिरसे पैरतक सिर्फ बेवकूफी है। क्या फायदा इस तरह तकलीफ उठानेसे ? मुझे यह मालूम होता, तो मैं हरगिज न आता। क्या मैं विद्यालंकार छोड़कर ऐसी बेवकूफी फिर करूँगा ! "
रात-भर बेचारे वाङ महाशय जगते आये । लारीमें हरवक्त जान जानेका खतरा था; और अब यह आफत ! फिर कैसे रोमरोमसे दुआ निकल सकती है ! आज अगले पड़ावतक यह डेढ़ घंटेकी ही यात्रा थी, तथापि इसे तय करने में बड़ा लुत्फ रहा। अपने पाँवोंके भरनेसे भी अधिक वाङ महाशयकी धारावाहिक टिप्पणियोंमें लुत्फ था !
जैसे-तैसे 'गेत्तम्-पान्' पहुँचे । दूकानवालेको चिठ्ठी दी। उसने
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SEGRARIA PAR 'मडम्' से थोड़ा ही आगे चलने पर चढ़ाई शुरू हो गई । इस चढ़ाई में चक्कर खाता हुआ रास्ता न बनाकर सोढ़ियाँ बना दी गई हैं, जिससे चढ़ाई और कठिन हो गई है। थोड़ी ही देरमें पैर भर गये, और गति मन्द ही नहीं हुई, बल्कि हर पचास कदमपर सुस्ताने की जरूरत पड़ने लगी। श्रीवाङ् महाशय तो सबसे पीछे रहने लगे । मैंने कहा- वाङ् महाशय जेनरल चुने जायँ। लोगोंने उनके आगे न रह पीछे रह जानेकी आपत्ति उठाई । मैंने कहा, आजकलके युद्धोंमें जेनरल आगे नहीं, पीछे रहा करता है। ख सबको स्वीकार करना पड़ा । थोड़ी ही देरमें मुझे भी सहायक जेनरल बनना पड़ा। अब वाङ् महाशयने दुनियाकी बेवकूफीपर व्याख्यान देना शुरू किया - यह सिरसे पैरतक सिर्फ बेवकूफी है। क्या फायदा इस तरह तकलीफ उठानेसे ? मुझे यह मालूम होता, तो मैं हरगिज न आता। क्या मैं विद्यालंकार छोड़कर ऐसी बेवकूफी फिर करूँगा ! " रात-भर बेचारे वाङ महाशय जगते आये । लारीमें हरवक्त जान जानेका खतरा था; और अब यह आफत ! फिर कैसे रोमरोमसे दुआ निकल सकती है ! आज अगले पड़ावतक यह डेढ़ घंटेकी ही यात्रा थी, तथापि इसे तय करने में बड़ा लुत्फ रहा। अपने पाँवोंके भरनेसे भी अधिक वाङ महाशयकी धारावाहिक टिप्पणियोंमें लुत्फ था ! जैसे-तैसे 'गेत्तम्-पान्' पहुँचे । दूकानवालेको चिठ्ठी दी। उसने
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उन्होंने कहा, 'भगवान मुझे आगे नहीं जाने के लिए कह रहे थे और क्योंकि मैं भगवान में विश्वास रखता हूं, इसलिए मैंने वापस लौटने का निर्णय लिया। ' रीता ने यह नहीं बताया कि उन्होंने सपने में क्या देखा था। शेरपा एवरेस्ट को देवी के रूप में पूजते हैं और उस पर चढ़ने से पहले धार्मिक रीति रिवाज का पालन करते हैं। रीता ने कहा कि वह 26वीं बार एवरेस्ट पर चढ़ने का प्रयास अगले साल जरूर करेंगे। वह 51 साल के हैं और 1994 में उन्होंने पहली बार एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी। तब से वह लगभग हर साल विश्व की सबसे ऊंची पर्वत चोटी पर चढ़ते रहे हैं।
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उन्होंने कहा, 'भगवान मुझे आगे नहीं जाने के लिए कह रहे थे और क्योंकि मैं भगवान में विश्वास रखता हूं, इसलिए मैंने वापस लौटने का निर्णय लिया। ' रीता ने यह नहीं बताया कि उन्होंने सपने में क्या देखा था। शेरपा एवरेस्ट को देवी के रूप में पूजते हैं और उस पर चढ़ने से पहले धार्मिक रीति रिवाज का पालन करते हैं। रीता ने कहा कि वह छब्बीसवीं बार एवरेस्ट पर चढ़ने का प्रयास अगले साल जरूर करेंगे। वह इक्यावन साल के हैं और एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में उन्होंने पहली बार एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी। तब से वह लगभग हर साल विश्व की सबसे ऊंची पर्वत चोटी पर चढ़ते रहे हैं।
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हैदराबादः तेलंगाना के जोगुलम्बा गडवाल जिले में एक घर की दीवार गिरने से दंपति तथा उनके तीन बच्चों की जान चली गई। वहीं दो अन्य बच्चों को हल्की चोटें आई हैं। पुलिस ने रविवार को यह खबर दी। यह मामला कोठापल्ली गांव में शनिवार तथा रविवार की दरमियानी रात में हुई। रहवासियों ने प्रातः इस हादसे के बारे में पुलिस को खबर दी। एक सीनियर पुलिस अफसर ने कहा कि झोपड़ी के अंदर की एक दीवार उस वक़्त गिर गई जब परिवार के सातों सदस्य सो रहे थे। घटनास्थल पर ही पांच व्यक्तियों की मौत हो गई।
साथ ही उन्होंने बताया कि दो अन्य बच्चों को वहां से बाहर निकाला गया। इन बच्चों को हल्की चोटें आई हैं तथा इन्हें एक सरकारी हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। अफसर से जब यह पूछा गया कि क्या दीवार वर्षा के कारण गिरी तो उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है, दीवार प्रत्यक्ष रूप से जर्जर स्थिति में थी।
वही दूसरी तरफ रविवार को हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले में एक बस एक घर से जा टकराई, जिसमें 34 व्यक्ति चोटिल हो गए। ड्राइवर का बस से काबू खो जाने के चलते यह भीषण दुर्घटना हुई तथा बस जाकर एक घर पर गिरी। इस दुर्घटना के चलते बस में यात्रा कर रहे 34 व्यक्तियों को चोटें आई हैं, जिन्हें उपचार के लिए हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। वही प्राइवेट बस के साथ यह दुर्घटना चंबा से भरमौर के मार्ग पर करियां के पास हुआ।
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हैदराबादः तेलंगाना के जोगुलम्बा गडवाल जिले में एक घर की दीवार गिरने से दंपति तथा उनके तीन बच्चों की जान चली गई। वहीं दो अन्य बच्चों को हल्की चोटें आई हैं। पुलिस ने रविवार को यह खबर दी। यह मामला कोठापल्ली गांव में शनिवार तथा रविवार की दरमियानी रात में हुई। रहवासियों ने प्रातः इस हादसे के बारे में पुलिस को खबर दी। एक सीनियर पुलिस अफसर ने कहा कि झोपड़ी के अंदर की एक दीवार उस वक़्त गिर गई जब परिवार के सातों सदस्य सो रहे थे। घटनास्थल पर ही पांच व्यक्तियों की मौत हो गई। साथ ही उन्होंने बताया कि दो अन्य बच्चों को वहां से बाहर निकाला गया। इन बच्चों को हल्की चोटें आई हैं तथा इन्हें एक सरकारी हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया। अफसर से जब यह पूछा गया कि क्या दीवार वर्षा के कारण गिरी तो उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है, दीवार प्रत्यक्ष रूप से जर्जर स्थिति में थी। वही दूसरी तरफ रविवार को हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले में एक बस एक घर से जा टकराई, जिसमें चौंतीस व्यक्ति चोटिल हो गए। ड्राइवर का बस से काबू खो जाने के चलते यह भीषण दुर्घटना हुई तथा बस जाकर एक घर पर गिरी। इस दुर्घटना के चलते बस में यात्रा कर रहे चौंतीस व्यक्तियों को चोटें आई हैं, जिन्हें उपचार के लिए हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है। वही प्राइवेट बस के साथ यह दुर्घटना चंबा से भरमौर के मार्ग पर करियां के पास हुआ।
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भोपाल। मध्य प्रदेश के कटनी जिले में सोने के आभूषणों पर ऋण उपलब्ध कराने वाले बैंक में कथित तौर पर करीब 5 करोड़ रुपये का सोना और 3.5 लाख रुपए नकद लूटने वाले बिहार के एक गिरोह के दो सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। एक पुलिस अधिकारी ने सोमवार जानकारी देते हुए बताया कि यह गिरोह कई बैंक से अब तक कथित तौर पर 300 किलोग्राम सोना लूट चुका है। सर्राफा बाजार के अनुसार, 300 किलोग्राम सोने की कीमत करीब 150 करोड़ रुपये है। कटनी के पुलिस अधीक्षक एस.के. जैन ने 'पीटीआई-भाषा' को फोन पर बताया कि इस गिरोह के छह सदस्यों ने शनिवार को कटनी जिले के बरगवां इलाके में बैंक कर्मचारियों को पिस्तौल का खौफ दिखाकर वहां से कीमती सामान और नकदी लूट लिया था।
उन्होंने बताया कि जांच से पता चला कि इस गिरोह का कथित मास्टरमाइंड बिहार में जेल में बंद है। जैन ने कहा कि इस गिरोह ने 29 अगस्त को उदयपुर के एक बैंक से कथित तौर पर 24 किलोग्राम सोना और 11 लाख रुपए नकद लूटा था। उन्होंने कहा कि इस गिरोह ने धनबाद, आगरा, हावड़ा और देश के अन्य स्थानों पर भी सोने की लूट की घटनाओं को अंजाम दिया है।
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भोपाल। मध्य प्रदेश के कटनी जिले में सोने के आभूषणों पर ऋण उपलब्ध कराने वाले बैंक में कथित तौर पर करीब पाँच करोड़ रुपये का सोना और तीन.पाँच लाख रुपए नकद लूटने वाले बिहार के एक गिरोह के दो सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। एक पुलिस अधिकारी ने सोमवार जानकारी देते हुए बताया कि यह गिरोह कई बैंक से अब तक कथित तौर पर तीन सौ किलोग्रामग्राम सोना लूट चुका है। सर्राफा बाजार के अनुसार, तीन सौ किलोग्रामग्राम सोने की कीमत करीब एक सौ पचास करोड़ रुपये है। कटनी के पुलिस अधीक्षक एस.के. जैन ने 'पीटीआई-भाषा' को फोन पर बताया कि इस गिरोह के छह सदस्यों ने शनिवार को कटनी जिले के बरगवां इलाके में बैंक कर्मचारियों को पिस्तौल का खौफ दिखाकर वहां से कीमती सामान और नकदी लूट लिया था। उन्होंने बताया कि जांच से पता चला कि इस गिरोह का कथित मास्टरमाइंड बिहार में जेल में बंद है। जैन ने कहा कि इस गिरोह ने उनतीस अगस्त को उदयपुर के एक बैंक से कथित तौर पर चौबीस किलोग्रामग्राम सोना और ग्यारह लाख रुपए नकद लूटा था। उन्होंने कहा कि इस गिरोह ने धनबाद, आगरा, हावड़ा और देश के अन्य स्थानों पर भी सोने की लूट की घटनाओं को अंजाम दिया है।
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Sarkari Naukri: सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) पाना हर किसी की इच्छा होती है। जिसके लिए लोग निरंतर प्रयास भी करते रहते हैं। दिन रात एक करते हैं लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी उनके प्रयास में कुछ न कुछ कमी रह जाती है। अगर आप भी सरकारी नौकरी का प्रयास कर रहें है और उसमें सफल नहीं हो पा रहें है। तो ऐसे में आपको कुछ उपाय आजमानें चाहिए और अगर आपकों इनके बारें में नहीं पाता तो आज हम आपकों इन उपायों के बारें में बतायेंगे।
1. जब भी आप इंटरव्यू देने जांए तो उससे पहले घर से दही और चीनी खाकर ही निकलें।
2. हमेशा घर से निकलते समय अपना दायां पैर आगे रखें जिससे आपके मार्ग में आने वाली बाधा दूर हो जाएगी।
3. जिस दिन आपका इंटरव्यू हो उस दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर लें और उस पानी में थोड़ी सी पिसी हल्दी मिला लें। इसके पश्चात् भगवान के आगे 11 अगरबत्ती जलाएं और कामयाबी हासिल करने के लिए प्रार्थना करें। यह भी नौकरी पाने का खास उपाय है।
4. यदि सफलता में अटकलें आ रही हों तो शुक्ल पक्ष के दौरान हल्दी की 7 साबुत गांठें, 7 गुड़ की डलियां, एक रुपये का सिक्का किसी पीले कपड़े में बांधकर रेलवे लाइन के पार फेंक दें। फेंकते समय कहें, काम दे. . . ऐसा करने से आपकी सफलता की संभावनाएं बढ़ने लग जाएंगी।
5. पुराणों में नौकरी के उपाय या उसमें सफलता हासिल करने के लिए पीपल के पेड़ की सेवा का उल्लेख किया गया है। शास्त्रों के मुताबिक पीपल के पेड़ पर देवताओं और पितरों का वास माना गया है। पीपल के वृक्ष पर रविवार के अलावा हर दिन सुबह जल चढ़ाएं।
6. शनिवार के दिन जल में थोड़ा सा दूध भी मिला लें और शाम को तेल का दीया जलाएं। ऐसा करने से आजीविका के साधन प्राप्त होंगे और नौकरी व व्यापार में लाभ होगा।
7. लाख प्रयासों के बावजूद भी यदि सफलता नहीं मिल रही हो तो कुंए में दूध डालें। ऐसा करते वक्त इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि कुआं सूखा न हो, उसमें पानी ज़रूर हो। इस उपाय को करते वक्त किसी से भी इस बात का ज़िक्र न करें। ये सभी नौकरी के अहम उपाय हैं।
8. सात प्रकार के अनाज को मिलाकर रोज सुबह पक्षियों को खिलाएं और मंदिर जाकर भगवान के दर्शन ज़रूर करें।
9. शाम के वक्त किसी हनुमान जी के मंदिर में जाकर "कवन सो काज कठिन जग माहि, जो नहीं होय तात तुम पाहीं" दोहे का 108 बार जाप करें। यह भी एक अचूक उपाय है।
10. प्रत्येक शनिवार को शनि देव की पूजा करनी चाहिए और पूजा करते हुए "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। इससे आपकी नौकरी या रोज़गार में आ रही समस्याएं समाप्त हो जाएंगी।
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Sarkari Naukri: सरकारी नौकरी पाना हर किसी की इच्छा होती है। जिसके लिए लोग निरंतर प्रयास भी करते रहते हैं। दिन रात एक करते हैं लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी उनके प्रयास में कुछ न कुछ कमी रह जाती है। अगर आप भी सरकारी नौकरी का प्रयास कर रहें है और उसमें सफल नहीं हो पा रहें है। तो ऐसे में आपको कुछ उपाय आजमानें चाहिए और अगर आपकों इनके बारें में नहीं पाता तो आज हम आपकों इन उपायों के बारें में बतायेंगे। एक. जब भी आप इंटरव्यू देने जांए तो उससे पहले घर से दही और चीनी खाकर ही निकलें। दो. हमेशा घर से निकलते समय अपना दायां पैर आगे रखें जिससे आपके मार्ग में आने वाली बाधा दूर हो जाएगी। तीन. जिस दिन आपका इंटरव्यू हो उस दिन सूर्योदय से पहले स्नान कर लें और उस पानी में थोड़ी सी पिसी हल्दी मिला लें। इसके पश्चात् भगवान के आगे ग्यारह अगरबत्ती जलाएं और कामयाबी हासिल करने के लिए प्रार्थना करें। यह भी नौकरी पाने का खास उपाय है। चार. यदि सफलता में अटकलें आ रही हों तो शुक्ल पक्ष के दौरान हल्दी की सात साबुत गांठें, सात गुड़ की डलियां, एक रुपये का सिक्का किसी पीले कपड़े में बांधकर रेलवे लाइन के पार फेंक दें। फेंकते समय कहें, काम दे. . . ऐसा करने से आपकी सफलता की संभावनाएं बढ़ने लग जाएंगी। पाँच. पुराणों में नौकरी के उपाय या उसमें सफलता हासिल करने के लिए पीपल के पेड़ की सेवा का उल्लेख किया गया है। शास्त्रों के मुताबिक पीपल के पेड़ पर देवताओं और पितरों का वास माना गया है। पीपल के वृक्ष पर रविवार के अलावा हर दिन सुबह जल चढ़ाएं। छः. शनिवार के दिन जल में थोड़ा सा दूध भी मिला लें और शाम को तेल का दीया जलाएं। ऐसा करने से आजीविका के साधन प्राप्त होंगे और नौकरी व व्यापार में लाभ होगा। सात. लाख प्रयासों के बावजूद भी यदि सफलता नहीं मिल रही हो तो कुंए में दूध डालें। ऐसा करते वक्त इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि कुआं सूखा न हो, उसमें पानी ज़रूर हो। इस उपाय को करते वक्त किसी से भी इस बात का ज़िक्र न करें। ये सभी नौकरी के अहम उपाय हैं। आठ. सात प्रकार के अनाज को मिलाकर रोज सुबह पक्षियों को खिलाएं और मंदिर जाकर भगवान के दर्शन ज़रूर करें। नौ. शाम के वक्त किसी हनुमान जी के मंदिर में जाकर "कवन सो काज कठिन जग माहि, जो नहीं होय तात तुम पाहीं" दोहे का एक सौ आठ बार जाप करें। यह भी एक अचूक उपाय है। दस. प्रत्येक शनिवार को शनि देव की पूजा करनी चाहिए और पूजा करते हुए "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का एक सौ आठ बार जाप करना चाहिए। इससे आपकी नौकरी या रोज़गार में आ रही समस्याएं समाप्त हो जाएंगी।
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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस ने बालीगंज विधानसभा सीट से पूर्व सांसद बाबुल सुप्रियो को उम्मीदवार बनाया है। बाबुल सुप्रियो ने इसके लिए तृणमूल प्रमुख तथा सीएम ममता बनर्जी को धन्यवाद दिया है। बाबुल ने कहा कि आदरणीय दीदी, बंगाल की जनता का सेवा का मौका देने के लिए आपकाे बहुत - बहुत धन्यवाद देता हूं। उन्होंने कहा कि काफी दुखी व हताशा के साथ भाजपा छोड़ा, दीदी ने मुझे काम करने का मौका दिया। दीदी को धन्यवाद कहना कम ही होगा। बाबुल ने कहा, आपके (दीदी) आशीर्वाद से अपने दायित्वों का पालन करता रहूंगा।
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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस ने बालीगंज विधानसभा सीट से पूर्व सांसद बाबुल सुप्रियो को उम्मीदवार बनाया है। बाबुल सुप्रियो ने इसके लिए तृणमूल प्रमुख तथा सीएम ममता बनर्जी को धन्यवाद दिया है। बाबुल ने कहा कि आदरणीय दीदी, बंगाल की जनता का सेवा का मौका देने के लिए आपकाे बहुत - बहुत धन्यवाद देता हूं। उन्होंने कहा कि काफी दुखी व हताशा के साथ भाजपा छोड़ा, दीदी ने मुझे काम करने का मौका दिया। दीदी को धन्यवाद कहना कम ही होगा। बाबुल ने कहा, आपके आशीर्वाद से अपने दायित्वों का पालन करता रहूंगा।
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वॉशिंगटन, (भाषा)। अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारतीय अमेरिकी विवेक मूर्ति को सर्जन जनरल के पद के लिए नामांकित किया है। ओबामा के इस कदम को एक शीर्ष अमेरिकी सांसद ने देश के भारतीय अमेरिकी समुदाय के लोगों के लिए ऐतिहासिक करार दिया है। व्हाइट हाउस ने कल बताया कि ओबामा ने बोस्टन में रहने वाले डॉक्टर मूर्ति को सर्जन जनरल के पद पर नामांकित करने के अपने इरादे का ऐलान बीते सप्ताह किया था। अब उन्होंने अमेरिकी सीनेट को इसके लिए औपचारिक अधिसूचना भेज दी है। अगर मूर्ति के नाम को मंजूरी मिल जाती है तो वह न केवल इस पद पर पहुंचने वाले भारतीय मूल के पहले अमेरिकी होंगे बल्कि वह देश के अब तक के सबसे कम उम्र के सर्जन जनरल भी होंगे। सीनेट को भेजे गए नामांकन पर व्हाइट हाउढस ने कहा, मेसाचुसेट्स के विवेक हालेग्रे मूर्ति की शैक्षणिक योग्यताएं ,जनस्वास्थ्य सेवा की नियमित कोर के चिकित्सीय निदेशक बनने के लिए कानून और नियमों में दिए प्रावधानों के अनुरूप हैं। रेजीना एम बेंजामिन के इस्तीफे के बाद सर्जन जनरल का कार्यकाल चार साल का होगा। डेमोक्रेटिक कॉकस के उपप्रमुख और कांग्रेशनल कॉकस ऑन इंडिया एंड इंडियन-अमेरिकन्स के सहप्रमुख कांग्रेस सदस्य जो क्रॉले ने ओबामा द्वारा किए गए नामांकन को देश भर के भारतीय-अमेरिकियों के लिए `ऐतिहासिक क्षण' बताया। क्रॉले ने एक बयान में कहा, भारतीय-अमेरिकी लोगों ने चिकित्सीय क्षेत्र समेत पूरे अमेरिकी समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं। एक और सुशिक्षित नेता को सरकार में आगे बढ़ते देखना सुखद है। सर्जन जनरल का कार्यकाल चार साल का होता है और वह जनस्वास्थ्य के मुद्दों पर प्रशासन का शीर्ष अधिकारी होता है। बरिघम के अध्यक्ष डॉक्टर बेत्से नाबेल ने मूर्ति के बारे में दिए एक बयान में कहा, हमारा मानना है कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंच एक मूल मानवाधिकार है। उन्होंने कहा, मुझे यकीन है कि वे इस क्षेत्र में पूरे जज्बे के साथ काम करेंगे और सर्जन जनरल के रूप में उनका हमारे देश पर एक अदभुत प्रभाव होगा। वर्ष 2009 से डॉक्टर्स फॉर अमेरिका के अध्यक्ष और सहसंस्थापक डॉक्टर मूर्ति हॉवर्ड मेडिकल स्कूल के बरिघम एंड वूमन्स अस्पताल में नियमित चिकित्सक और प्रशिक्षक हैं। इस पद पर वे वर्ष 2006 से हैं। वर्ष 2011 में डॉक्टर मूर्ति को रोग निवारण, स्वास्थ्य प्रोत्साहन और जनस्वास्थ्य पर बने सलाहाकार समूह का सदस्य नियुक्त किया गया था। डॉक्टर मूर्ति 2007 से बोर्ड ऑफ ट्रायलनेटवर्क्स के अध्यक्ष और सहसंस्थापक रहे हैं। इसे पहले एपरनिकस नाम से पहचाना जाता था। उन्होंने वर्ष 1995 में विजन्स वर्ल्डवाइड की सह-स्थापना की। यह एक गैर लाभकारी संग"न है जिसका मुख्य ध्यान भारत व अमेरिका में एचआईवीःएड्स शिक्षा पर है। इस संग"न में वे 1995 से 2000 तक अध्यक्ष रहे हैं। वर्ष 2000 से 2003 तक वे बोर्ड के अध्यक्ष रहे हैं। उन्होंने हॉवर्ड विश्वविद्यालय से बीए की डिग्री ली। येल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से उन्होंने एमबीए और येल स्कूल ऑफ मेडिसिन से एमडी की। नामांकन पर डॉक्टर मूर्ति को अगला सर्जन जनरल बनने की शुभकामनाएं देते हुए डॉक्टर्स फॉर अमेरिका के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर एलिस चेन ने कहा कि मूर्ति में अमेरिकी लोगों की जिंदगियों और स्वास्थ्य को संवारने के लिए बहुत समर्पण और प्रतिबद्धता का भाव है। उन्होंने कहा, वे 50 राज्यों से 16 हजार डॉक्टरों और चिकित्सा के विद्यार्थियों को देश के स्वास्थ्य-सुधार के साझे काम के लिए एकसाथ लाने वाले नेतृत्वकर्ता रहे हैं। चेन ने कहा, उनके पास स्वास्थ्य सुधार, ग"बंधन निर्माण और समुदायों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के लिए विविधता से भरे लोगों को साथ लाने का दो दशक का अनुभव है।
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वॉशिंगटन, । अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारतीय अमेरिकी विवेक मूर्ति को सर्जन जनरल के पद के लिए नामांकित किया है। ओबामा के इस कदम को एक शीर्ष अमेरिकी सांसद ने देश के भारतीय अमेरिकी समुदाय के लोगों के लिए ऐतिहासिक करार दिया है। व्हाइट हाउस ने कल बताया कि ओबामा ने बोस्टन में रहने वाले डॉक्टर मूर्ति को सर्जन जनरल के पद पर नामांकित करने के अपने इरादे का ऐलान बीते सप्ताह किया था। अब उन्होंने अमेरिकी सीनेट को इसके लिए औपचारिक अधिसूचना भेज दी है। अगर मूर्ति के नाम को मंजूरी मिल जाती है तो वह न केवल इस पद पर पहुंचने वाले भारतीय मूल के पहले अमेरिकी होंगे बल्कि वह देश के अब तक के सबसे कम उम्र के सर्जन जनरल भी होंगे। सीनेट को भेजे गए नामांकन पर व्हाइट हाउढस ने कहा, मेसाचुसेट्स के विवेक हालेग्रे मूर्ति की शैक्षणिक योग्यताएं ,जनस्वास्थ्य सेवा की नियमित कोर के चिकित्सीय निदेशक बनने के लिए कानून और नियमों में दिए प्रावधानों के अनुरूप हैं। रेजीना एम बेंजामिन के इस्तीफे के बाद सर्जन जनरल का कार्यकाल चार साल का होगा। डेमोक्रेटिक कॉकस के उपप्रमुख और कांग्रेशनल कॉकस ऑन इंडिया एंड इंडियन-अमेरिकन्स के सहप्रमुख कांग्रेस सदस्य जो क्रॉले ने ओबामा द्वारा किए गए नामांकन को देश भर के भारतीय-अमेरिकियों के लिए `ऐतिहासिक क्षण' बताया। क्रॉले ने एक बयान में कहा, भारतीय-अमेरिकी लोगों ने चिकित्सीय क्षेत्र समेत पूरे अमेरिकी समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिए हैं। एक और सुशिक्षित नेता को सरकार में आगे बढ़ते देखना सुखद है। सर्जन जनरल का कार्यकाल चार साल का होता है और वह जनस्वास्थ्य के मुद्दों पर प्रशासन का शीर्ष अधिकारी होता है। बरिघम के अध्यक्ष डॉक्टर बेत्से नाबेल ने मूर्ति के बारे में दिए एक बयान में कहा, हमारा मानना है कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंच एक मूल मानवाधिकार है। उन्होंने कहा, मुझे यकीन है कि वे इस क्षेत्र में पूरे जज्बे के साथ काम करेंगे और सर्जन जनरल के रूप में उनका हमारे देश पर एक अदभुत प्रभाव होगा। वर्ष दो हज़ार नौ से डॉक्टर्स फॉर अमेरिका के अध्यक्ष और सहसंस्थापक डॉक्टर मूर्ति हॉवर्ड मेडिकल स्कूल के बरिघम एंड वूमन्स अस्पताल में नियमित चिकित्सक और प्रशिक्षक हैं। इस पद पर वे वर्ष दो हज़ार छः से हैं। वर्ष दो हज़ार ग्यारह में डॉक्टर मूर्ति को रोग निवारण, स्वास्थ्य प्रोत्साहन और जनस्वास्थ्य पर बने सलाहाकार समूह का सदस्य नियुक्त किया गया था। डॉक्टर मूर्ति दो हज़ार सात से बोर्ड ऑफ ट्रायलनेटवर्क्स के अध्यक्ष और सहसंस्थापक रहे हैं। इसे पहले एपरनिकस नाम से पहचाना जाता था। उन्होंने वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचानवे में विजन्स वर्ल्डवाइड की सह-स्थापना की। यह एक गैर लाभकारी संग"न है जिसका मुख्य ध्यान भारत व अमेरिका में एचआईवीःएड्स शिक्षा पर है। इस संग"न में वे एक हज़ार नौ सौ पचानवे से दो हज़ार तक अध्यक्ष रहे हैं। वर्ष दो हज़ार से दो हज़ार तीन तक वे बोर्ड के अध्यक्ष रहे हैं। उन्होंने हॉवर्ड विश्वविद्यालय से बीए की डिग्री ली। येल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से उन्होंने एमबीए और येल स्कूल ऑफ मेडिसिन से एमडी की। नामांकन पर डॉक्टर मूर्ति को अगला सर्जन जनरल बनने की शुभकामनाएं देते हुए डॉक्टर्स फॉर अमेरिका के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर एलिस चेन ने कहा कि मूर्ति में अमेरिकी लोगों की जिंदगियों और स्वास्थ्य को संवारने के लिए बहुत समर्पण और प्रतिबद्धता का भाव है। उन्होंने कहा, वे पचास राज्यों से सोलह हजार डॉक्टरों और चिकित्सा के विद्यार्थियों को देश के स्वास्थ्य-सुधार के साझे काम के लिए एकसाथ लाने वाले नेतृत्वकर्ता रहे हैं। चेन ने कहा, उनके पास स्वास्थ्य सुधार, ग"बंधन निर्माण और समुदायों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने के लिए विविधता से भरे लोगों को साथ लाने का दो दशक का अनुभव है।
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- 16 min ago रवीना टंडन की बेटी से लोगों ने कर दी ऐसी डिमांड, जवाब सुनकर खुला रह जाएगा मुंह!
Don't Miss!
शो में अपने सफर के बारे में टिप्पणी करते हुए एजाज ने कहा, "मैं वहां जीतने नहीं गया था। मैं स्वयं को चुनौती देने और यह देखने गया था कि मैं वहां कब तक टिक सकता हूं। मुझे कोई पछतावा नहीं है. . रोहित शेट्टी के साथ काम करना एक सपना सच होने जैसा है और मैं उनके साथ दोबारा काम करना चाहता हूं। "
मालूम हो कि एजाज खान सुर्खियों में तब आये थे जब बिग बॉस सीजन 7 में उन्हें एंट्री मिली थी। शो के दौरान एजाज ने शो की विनर गौहर खान को पटाने की काफी कोशिश की लेकिन जब वो उसमें कामयाब नहीं हो पाये तो उन्होंने गौहर और उनके प्रेमी कुशाल टंडन के बीच में काफी झगड़ा लगवाने की कोशिश की जिसके कारण गौहर-कुशाल और एजाज के बीच में काफी झगड़े हुए।
एजाज को 'खतरों के खिलाड़ी-डर का ब्लॉकब्लॉस्टर' में भी इसीलिए ही लाया गया था लेकिन उनके आने के बाद ही कुशाल और गौहर शो से आउट हो गये, जिसकी वजह से एजाज की मौजूदगी वो आग नहीं लगा पायी जिसकी उम्मीद की गयी थी। फिलहाल गौहर-कुशाल के बाद अब एजाज खुद शो से आउट हो गये हैं।
'खतरों के खिलाड़ी-डर का ब्लॉकब्लॉस्टर' कलर्स पर शनिवार-रविवार प्रसारित होता है जिसकी मेजबानी रोहित शेट्टी कर रहे है। पूरा शो साउथ अफ्रिका में शूट हो रहा है।
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- सोलह मिनट ago रवीना टंडन की बेटी से लोगों ने कर दी ऐसी डिमांड, जवाब सुनकर खुला रह जाएगा मुंह! Don't Miss! शो में अपने सफर के बारे में टिप्पणी करते हुए एजाज ने कहा, "मैं वहां जीतने नहीं गया था। मैं स्वयं को चुनौती देने और यह देखने गया था कि मैं वहां कब तक टिक सकता हूं। मुझे कोई पछतावा नहीं है. . रोहित शेट्टी के साथ काम करना एक सपना सच होने जैसा है और मैं उनके साथ दोबारा काम करना चाहता हूं। " मालूम हो कि एजाज खान सुर्खियों में तब आये थे जब बिग बॉस सीजन सात में उन्हें एंट्री मिली थी। शो के दौरान एजाज ने शो की विनर गौहर खान को पटाने की काफी कोशिश की लेकिन जब वो उसमें कामयाब नहीं हो पाये तो उन्होंने गौहर और उनके प्रेमी कुशाल टंडन के बीच में काफी झगड़ा लगवाने की कोशिश की जिसके कारण गौहर-कुशाल और एजाज के बीच में काफी झगड़े हुए। एजाज को 'खतरों के खिलाड़ी-डर का ब्लॉकब्लॉस्टर' में भी इसीलिए ही लाया गया था लेकिन उनके आने के बाद ही कुशाल और गौहर शो से आउट हो गये, जिसकी वजह से एजाज की मौजूदगी वो आग नहीं लगा पायी जिसकी उम्मीद की गयी थी। फिलहाल गौहर-कुशाल के बाद अब एजाज खुद शो से आउट हो गये हैं। 'खतरों के खिलाड़ी-डर का ब्लॉकब्लॉस्टर' कलर्स पर शनिवार-रविवार प्रसारित होता है जिसकी मेजबानी रोहित शेट्टी कर रहे है। पूरा शो साउथ अफ्रिका में शूट हो रहा है।
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Carry Minati: यूट्यूब पर कुछ दिनों में यूथ के दिलों में छाने वाले मशहूर यूट्यूबर कैरी मिनाटी (Carry Minati) की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। कैरी मिनाटी (Carry Minati) का असली नाम अजय नागर है। बता दें कि उनके खिलाफ दिल्ली के सिविल लाइन में एक शिकायत दर्ज करवाई गई है।
मशहूर यूट्यूबर कैरी मिनाटी पर महिलाओं पर अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा है। दिल्ली के एक वकील गौरव गुलाटी ने कैरी मिनाटी के खिलाफ डीसीपी (उत्तरी दिल्ली) में यह शिकायत दर्ज करवाई है। मिनाटी पर महिलाओं पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में सेक्शन 54A509/293/IPC सेक्शन 3/6/7 और सेक्शन 67 के तहत शिकायत दर्ज कराई गई है।
जिसके बाद वकील ने अपने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर अकाउंट पर शिकायत की एक कॉपी ट्वीट करते हुए कई न्यूज चैनल को टैग किया है। कैरी मिनाटी सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले यूट्यूब की लिस्ट में शामिल है। उनके यूट्यूब चैनेल 'Carry Minati' पर करीब 31। 9 मिलियन सब्सक्राइबर्स हैं।
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Carry Minati: यूट्यूब पर कुछ दिनों में यूथ के दिलों में छाने वाले मशहूर यूट्यूबर कैरी मिनाटी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है। कैरी मिनाटी का असली नाम अजय नागर है। बता दें कि उनके खिलाफ दिल्ली के सिविल लाइन में एक शिकायत दर्ज करवाई गई है। मशहूर यूट्यूबर कैरी मिनाटी पर महिलाओं पर अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप लगा है। दिल्ली के एक वकील गौरव गुलाटी ने कैरी मिनाटी के खिलाफ डीसीपी में यह शिकायत दर्ज करवाई है। मिनाटी पर महिलाओं पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में सेक्शन चौवनAपाँच सौ नौ/दो सौ तिरानवे/IPC सेक्शन तीन/छः/सात और सेक्शन सरसठ के तहत शिकायत दर्ज कराई गई है। जिसके बाद वकील ने अपने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर अकाउंट पर शिकायत की एक कॉपी ट्वीट करते हुए कई न्यूज चैनल को टैग किया है। कैरी मिनाटी सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले यूट्यूब की लिस्ट में शामिल है। उनके यूट्यूब चैनेल 'Carry Minati' पर करीब इकतीस। नौ मिलियन सब्सक्राइबर्स हैं।
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उदाहरण के लिए देखिए । हम चन्द्रलोक में जाकर देखें तो मानदण्ड कुछ और होगा। हमारे ३२५ घण्टे तक वहां निरन्तर सूर्य दीखता रहता है । यही वहां का दिन है। इतनी ही बड़ी रात्रि है । वहां का मुहूर्त लगभग हमारे २२ घण्टे का है। बुध में ७०० घण्टे तक, शुक्र में २९४० घण्टे तक सूर्य निरन्तर दीखता रहता है। जैसे पृथिवी पर एक वर्ष में ३६५ अहोरात्र होते हैं तो बुध में हमारे ५६ दिन का एक दिन होता है अर्थात् आत्म प्रदक्षिणा करता है। एक वर्ष में शुक्र में लगभग डेढ़ १ ।। दिन होता है अर्थात् शुक्र सूर्य की परिक्रमा करता है। शुक्र में और भी विचित्रता है कि वहां वर्ष से दिन ही बड़ा है। शनि में वर्ष में २५३६२ अहोरात्र होते हैं। जब भारत में सूर्योदय हो रहा होता है उस समय आस्ट्रेलिया में लगभग प्रातः १० बजे का समय होता है। उस समय पश्चिम अफ्रिका में रात्रि में १२ बजे का समय होता है जब कि पूर्वी अफ्रिका में प्रातः ३ बजे का समय और अमेरिका में सूर्यास्त होता है। तब काल का क्या अर्थ है ? कल्पना कीजिए कि यदि हम सूर्य पर जाकर देखते हैं तो वहां सदा जब तक सूर्य है तब तक दिन ही दिन होता है हमें वहां ढूंढने पर भी रात्रि नहीं मिलेगी । जो मनुष्य वहीं का जन्मा हो और वहीं रहता हो यदि उससे पूछा जाय कि आपकी आयु क्या है ? इस का वह उत्तर नहीं दे सकता । यदि देगा भी तो हम को समझ में नहीं आएगा । यही सन्देहास्पद है कि वहां कालगणना का क्या अर्थ होता होगा। ऐसे ही एक खान में जावें। वहां विद्युत् प्रकाश के बिना कुछ भी नहीं दीखता। वहां दिन, रात, युग और मुहूर्त आदि का क्या अर्थ है ?
इसी को महर्षि पुनर्वसु जी ने चरक संहिता में लिखा है कि "कालः पुनः परिणामः" वस्तु में परिणाम हो काल है। यदि परिणाम न हो तो काल की गणना संभव नहीं है। काल जड़, निष्क्रिय और नित्य है। अनादि, अनन्त है। सर्वत्र, सर्वदा एक समान रहता है। किसी कार्य की सफलता, असफलता में निमित्त नहीं है, यदि होता तो इसका भी विचार कर्म के साथ अवश्य होता ।
निमित्त रूप में इसका चार वेदों में, छः शास्त्रों में, दस उपनिषदों में कहीं वर्णन नहीं है अपितु खण्डन है। जैसा कि सांख्य शास्त्र में लिखा हैन व्यापिनो नित्यस्यं सर्वसम्बन्धात् इस सूत्र का अर्थ पूर्वत्र लिख आए हैं। न कालनियमो वामदेववत् अर्थात् समाधि आदि की प्राप्ति कितने काल में होती है इसका कोई नियम नहीं बनाया जा सकता। अतः काल कारण नहीं है ! तुष्टिर्नवधा अर्थात् तुष्टि दोषों में से एक दोष काल से सम्बद्ध है। मनुष्य यह
समझने लगता है कि समय आने पर अपने आप समाधि, धन, धान्य, विद्या आदि प्राप्त हो जाएंगे। महर्षि कपिल कहते हैं कि यह एक दोष है। काल कारण नहीं है। यदि कोई किसी कार्य की सिद्ध में काल को कारण मानता हो तो वह भ्रान्त है। इन सूत्रों से यही ज्ञापन होता है कि कार्य की सफलता, असफलता में काल कारण नहीं । निष्क्रिय होने से भी कारण नहीं हो सकता । यह महाभारत के एक प्रसङ्ग से सुस्पष्ट हो जायगा -
यदि कालः प्रमारगं ते न वैरं कस्यचिद्रभवेत् । कस्मात्त्वपचिति यान्ति बान्धवाः बान्धवर्हतैः ॥ ५३ ॥ कस्माद्देवासुरा पूर्वमन्योन्यमभिजघ्ररे । यदि कालेन निर्यारणं सुखं दुःखं भवाभवौ ॥ ५४ ।। भिषजो भेषजं कर्तुं कस्मादिच्छन्ति रोगिणः । यदि कालेन पच्यन्ते भेषजंः कि प्रयोजनम् ॥ ५५ ॥ प्रलापः सुमहान् कस्मात् क्रियते शोकमूछितंः । यदि कालः प्रमारणं ते कस्माद्धर्मोऽस्ति कर्तृषु ॥ ५६ ॥ महा० शा० ऋ० १३९ ॥
कालो वा कारणं राज्ञो राजा वा कालकारणम् । इति ते संशयो मामूद्राजा कालस्य कारणम् ॥ भाषार्थ :- यदि तुझे काल प्रमाण है तो किसी से वैर नहीं होना चाहिए। फिर सम्बन्धी सम्बन्धियों से मारे हुए क्यों क्षय को प्राप्त होते हैं ? ।।५३।। पूर्वकाल में देव और असुरों ने एक दूसरे को क्यों मारा ? यदि सुख, दुःख, जन्म, मररण काल से ही होता है ॥ ५४ ॥ वैद्य रोगी की दवाई करने को क्यों इच्छा करते हैं, यदि काल से ही सब पकाये जाते हैं तो दवाई से क्या प्रयोजन ? ॥५५॥ शोक से मूच्छित हुए लोग महान् रोना, पोटना क्यों करते हैं ? यदि तुझे काल ही प्रमाण है तो कर्त्ता में धर्म की स्थिति क्यों है ? ।।५६।। काल राजा का कारण है या राजा काल का कारण है यह तुम को सन्देह नहीं होना चाहिए। राजा ही काल का कारण है ॥ ६६ ॥
पौ० पो० प्र० भाग १ पृ० ३१९ से
कालस्य कारणं राजा ॥
काल का कारण राजा है। अर्थात् मनुष्य कर्म करने में स्वतन्त्र है । काल के प्राधीन नहीं है। इसीलिए इसको कर्ता कहा है। महर्षि पाणिनि ने काल को कर्ता के आधीन मानकर लिखा है 'स्वतन्त्रः कर्त्ता' ।
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उदाहरण के लिए देखिए । हम चन्द्रलोक में जाकर देखें तो मानदण्ड कुछ और होगा। हमारे तीन सौ पच्चीस घण्टे तक वहां निरन्तर सूर्य दीखता रहता है । यही वहां का दिन है। इतनी ही बड़ी रात्रि है । वहां का मुहूर्त लगभग हमारे बाईस घण्टे का है। बुध में सात सौ घण्टे तक, शुक्र में दो हज़ार नौ सौ चालीस घण्टे तक सूर्य निरन्तर दीखता रहता है। जैसे पृथिवी पर एक वर्ष में तीन सौ पैंसठ अहोरात्र होते हैं तो बुध में हमारे छप्पन दिन का एक दिन होता है अर्थात् आत्म प्रदक्षिणा करता है। एक वर्ष में शुक्र में लगभग डेढ़ एक ।। दिन होता है अर्थात् शुक्र सूर्य की परिक्रमा करता है। शुक्र में और भी विचित्रता है कि वहां वर्ष से दिन ही बड़ा है। शनि में वर्ष में पच्चीस हज़ार तीन सौ बासठ अहोरात्र होते हैं। जब भारत में सूर्योदय हो रहा होता है उस समय आस्ट्रेलिया में लगभग प्रातः दस बजे का समय होता है। उस समय पश्चिम अफ्रिका में रात्रि में बारह बजे का समय होता है जब कि पूर्वी अफ्रिका में प्रातः तीन बजे का समय और अमेरिका में सूर्यास्त होता है। तब काल का क्या अर्थ है ? कल्पना कीजिए कि यदि हम सूर्य पर जाकर देखते हैं तो वहां सदा जब तक सूर्य है तब तक दिन ही दिन होता है हमें वहां ढूंढने पर भी रात्रि नहीं मिलेगी । जो मनुष्य वहीं का जन्मा हो और वहीं रहता हो यदि उससे पूछा जाय कि आपकी आयु क्या है ? इस का वह उत्तर नहीं दे सकता । यदि देगा भी तो हम को समझ में नहीं आएगा । यही सन्देहास्पद है कि वहां कालगणना का क्या अर्थ होता होगा। ऐसे ही एक खान में जावें। वहां विद्युत् प्रकाश के बिना कुछ भी नहीं दीखता। वहां दिन, रात, युग और मुहूर्त आदि का क्या अर्थ है ? इसी को महर्षि पुनर्वसु जी ने चरक संहिता में लिखा है कि "कालः पुनः परिणामः" वस्तु में परिणाम हो काल है। यदि परिणाम न हो तो काल की गणना संभव नहीं है। काल जड़, निष्क्रिय और नित्य है। अनादि, अनन्त है। सर्वत्र, सर्वदा एक समान रहता है। किसी कार्य की सफलता, असफलता में निमित्त नहीं है, यदि होता तो इसका भी विचार कर्म के साथ अवश्य होता । निमित्त रूप में इसका चार वेदों में, छः शास्त्रों में, दस उपनिषदों में कहीं वर्णन नहीं है अपितु खण्डन है। जैसा कि सांख्य शास्त्र में लिखा हैन व्यापिनो नित्यस्यं सर्वसम्बन्धात् इस सूत्र का अर्थ पूर्वत्र लिख आए हैं। न कालनियमो वामदेववत् अर्थात् समाधि आदि की प्राप्ति कितने काल में होती है इसका कोई नियम नहीं बनाया जा सकता। अतः काल कारण नहीं है ! तुष्टिर्नवधा अर्थात् तुष्टि दोषों में से एक दोष काल से सम्बद्ध है। मनुष्य यह समझने लगता है कि समय आने पर अपने आप समाधि, धन, धान्य, विद्या आदि प्राप्त हो जाएंगे। महर्षि कपिल कहते हैं कि यह एक दोष है। काल कारण नहीं है। यदि कोई किसी कार्य की सिद्ध में काल को कारण मानता हो तो वह भ्रान्त है। इन सूत्रों से यही ज्ञापन होता है कि कार्य की सफलता, असफलता में काल कारण नहीं । निष्क्रिय होने से भी कारण नहीं हो सकता । यह महाभारत के एक प्रसङ्ग से सुस्पष्ट हो जायगा - यदि कालः प्रमारगं ते न वैरं कस्यचिद्रभवेत् । कस्मात्त्वपचिति यान्ति बान्धवाः बान्धवर्हतैः ॥ तिरेपन ॥ कस्माद्देवासुरा पूर्वमन्योन्यमभिजघ्ररे । यदि कालेन निर्यारणं सुखं दुःखं भवाभवौ ॥ चौवन ।। भिषजो भेषजं कर्तुं कस्मादिच्छन्ति रोगिणः । यदि कालेन पच्यन्ते भेषजंः कि प्रयोजनम् ॥ पचपन ॥ प्रलापः सुमहान् कस्मात् क्रियते शोकमूछितंः । यदि कालः प्रमारणं ते कस्माद्धर्मोऽस्ति कर्तृषु ॥ छप्पन ॥ महाशून्य शाशून्य ऋशून्य एक सौ उनतालीस ॥ कालो वा कारणं राज्ञो राजा वा कालकारणम् । इति ते संशयो मामूद्राजा कालस्य कारणम् ॥ भाषार्थ :- यदि तुझे काल प्रमाण है तो किसी से वैर नहीं होना चाहिए। फिर सम्बन्धी सम्बन्धियों से मारे हुए क्यों क्षय को प्राप्त होते हैं ? ।।तिरेपन।। पूर्वकाल में देव और असुरों ने एक दूसरे को क्यों मारा ? यदि सुख, दुःख, जन्म, मररण काल से ही होता है ॥ चौवन ॥ वैद्य रोगी की दवाई करने को क्यों इच्छा करते हैं, यदि काल से ही सब पकाये जाते हैं तो दवाई से क्या प्रयोजन ? ॥पचपन॥ शोक से मूच्छित हुए लोग महान् रोना, पोटना क्यों करते हैं ? यदि तुझे काल ही प्रमाण है तो कर्त्ता में धर्म की स्थिति क्यों है ? ।।छप्पन।। काल राजा का कारण है या राजा काल का कारण है यह तुम को सन्देह नहीं होना चाहिए। राजा ही काल का कारण है ॥ छयासठ ॥ पौशून्य पोशून्य प्रशून्य भाग एक पृशून्य तीन सौ उन्नीस से कालस्य कारणं राजा ॥ काल का कारण राजा है। अर्थात् मनुष्य कर्म करने में स्वतन्त्र है । काल के प्राधीन नहीं है। इसीलिए इसको कर्ता कहा है। महर्षि पाणिनि ने काल को कर्ता के आधीन मानकर लिखा है 'स्वतन्त्रः कर्त्ता' ।
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गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र में बाइक से घर जा रहे शराब कारोबारी के मैनेजर को तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसे में मैनेजर की मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मृतक का शव पोस्टमार्टम को भेज दिया। मौत की सूचना पाकर शराब मैनेजर के परिवार में कोहराम मच गया।
बदायूं जिले में थाना व गांव जरीफनगर निवासी सत्यवीर सिंह बबराला में शराब कारोबारी के मैनेजर का काम देखते थे। शुक्रवार की रात वह बाइक से घर जाने के लिए निकले थे। बबराला में इंदिरा चौक के नजदीक बबराला बदायूं हाईवे पर मुरादाबाद की तरफ से आए तेज रफ्तार ट्रक ने सत्यवीर की बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर लगने से मैनेजर एवं पूर्व राशन डीलर गंभीर रूप से घायल हो गया। राहगीरों ने 108 एंबुलेंस को फोन कर सूचना दी। मौके पर पहुंची एंबुलेंस ने घायल को सीएचसी गुन्नौर पहुंचाया। जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। वहीं हादसे के बाद चालक ट्रक लेकर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इंस्पेक्टर प्रवीण सोलंकी ने बताया कि अज्ञात वाहन ने शराब कारोबारी के मैनेजर को बबराला के इंदिरा चौक के नजदीक टक्कर मार दी। शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के परिजनों ने अज्ञात वाहन के खिलाफ तहरीर दी है। मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
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गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र में बाइक से घर जा रहे शराब कारोबारी के मैनेजर को तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसे में मैनेजर की मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मृतक का शव पोस्टमार्टम को भेज दिया। मौत की सूचना पाकर शराब मैनेजर के परिवार में कोहराम मच गया। बदायूं जिले में थाना व गांव जरीफनगर निवासी सत्यवीर सिंह बबराला में शराब कारोबारी के मैनेजर का काम देखते थे। शुक्रवार की रात वह बाइक से घर जाने के लिए निकले थे। बबराला में इंदिरा चौक के नजदीक बबराला बदायूं हाईवे पर मुरादाबाद की तरफ से आए तेज रफ्तार ट्रक ने सत्यवीर की बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर लगने से मैनेजर एवं पूर्व राशन डीलर गंभीर रूप से घायल हो गया। राहगीरों ने एक सौ आठ एंबुलेंस को फोन कर सूचना दी। मौके पर पहुंची एंबुलेंस ने घायल को सीएचसी गुन्नौर पहुंचाया। जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। वहीं हादसे के बाद चालक ट्रक लेकर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। इंस्पेक्टर प्रवीण सोलंकी ने बताया कि अज्ञात वाहन ने शराब कारोबारी के मैनेजर को बबराला के इंदिरा चौक के नजदीक टक्कर मार दी। शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक के परिजनों ने अज्ञात वाहन के खिलाफ तहरीर दी है। मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
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' बोधि ' नाम रत्नत्रयका है। इस रत्नत्रयमें पहला सम्यग्दर्शन बड़ा ही दुर्लभ है। जीव, अजीव-आदि पदार्थों के श्रद्धानको सम्यग्दर्शन कहते हैं । इसे निःशंकित आदि आठ अंगसहित धारण करना चाहिए। यह रत्नकी तरह सव व्रत और सव क्रियाओंका भूषण है । ज्ञान आठ प्रकारका है । वह नेत्रसदृश पदार्थोंका ज्ञान कराता है। चारित्र तेरह प्रकार है। यह व्यवहार रत्नत्रय कहलाता है । कर्म-मलरहित शुद्ध आत्मा निश्चय रत्नत्रयरूप है ।
११ - चोधि - भावना ।
चतुर्गतिमें गिरते हुए जीवोंको न गिरने देकर उन्हें उत्तम सुख- स्थान में रखदे वह धर्म है। संसारमें इसका लाभ बड़ा दुर्लभ है । सब प्रमादों को छोड़कर दसलक्षणरूप इसी धर्मका सदा आराधन करना चाहिए । अथवा वस्तुके स्वभा वको, जीवोंकी श्रेष्ठ दयाको और ऊपर कहे हुए रत्नत्रयको भी धर्म कहते हैं । इस प्रकार धर्मका संक्षेप स्वरूप कहा गया। यह सब प्रकारके सुख और स्वर्ग- मोक्षका देनेवाला है। भव्यजनको इस धर्मका सदा सेवन करना उचित है ।
१२ - धर्म - भावना ।
इस प्रकार अनुप्रेक्षा वगैरहका विचार करते हुए त्रिजग हितकारी नेमिजिनने अपने पूर्वजन्मका भी हाल जान लिया । इसी समय पाँचवें ब्रह्मस्वर्गके अन्तमें रहनेवाले लोकान्तिक नाम देवता गण जयजयकारके साथ भग१७०
बानके ऊपर फूलोंकी वरसा करते हुए वहाँ आगये। बड़ी भक्तिसे वे भगवान्को सिर नवाकर वोले- हे भगवन, हे भुंवनोत्तम, सत्य ही इस दुर्गम संसार वनमें कहीं भी सुख नहीं है। सुख तो उसमें है जिसे आपने मनमें करना विचारा है। प्रभो, आप संसार-समुद्र से पार करनेवाले संयमको ग्रहण कीजिए और फिर केवलज्ञान प्राप्त करके जीवोंको वोध दीजिए । भगवान्.. आप स्वयंसिद्ध जिन हैं । हम सरीख क्षुद्रजन आपको मोक्षमार्ग क्या बता सकते हैं ।
परन्तु नाथ, आपकी चरण-सेवा करनेका हमारा नियोग है, वह हमें पूरा करना पड़ता हूँ । प्रभो, संसारमें कोई ऐसा वक्ता या उपदेशक नहीं जो सूरजको प्रकाश करना बतला सके । उसी तरह आप-सदृश ज्ञानियोंको कौन प्रवोध दे सकता है। हे जगन्धो, आप तो स्वयं ही केवलज्ञानी-भास्कर होकर उलटा हमीको प्रवोध दोगे । इस प्रकार भक्तिसे भगवान्की प्रार्थना कर वे सब देवतागण अपने अपने स्थान चले गये ।
इनके बाद ही अन्य देवतागण तथा विद्याधर-राजे वगैरह आये । भक्तिसे प्रणाम कर उन्होंने भगवान्को जयजयकारक साथ सिंहासन पर बैठाया। नाना प्रकारके बाजे बजने लगे। देवाझना सुन्दर गीत गाने लगीं। देवतोंने इसी समय नाना तीर्थोके जलसे भरे सौ सुवर्ण-कलशोंसे भगवानका अभिषेक किया। इसके बाद उन्होंने चन्दन, केसर आदि सुगन्धित
वस्तुओंका भगवान्के शरीरपर लेपकर उन लोक-भूषण जिनको सुन्दर वस्त्र और बहुमुल्य आभूषणोंसे सिंगारा, उन्हें फूलोंकी मनोहर माला पहराई। इस प्रकार सिंगारे हुए लोकश्रेष्ठ भगवान् ऐसे जान पड़े-मानों मुक्तिकान्ताके वर बनकर वे जा रहे हैं । इसी समय देवतोंने भगवान्के सामने 'देवकुरु' नाम रत्नमयी पालकी लाकर रक्खी। संयम ग्रहणकी इच्छा कर भगवान उसमें बैठे । देवगण उस पालखीको उठाकर चले । भगवान्के आगे आगे अनेक प्रकारके बाजे बज रहे थे । छत्र उनपर शोभित था । चँवर दुर रहे थे । अनेक राजे-महाराजे तथा विद्याधर लोग भगवान्के साथमें चल रहे थे । देवगण त्रिभुवननाथ जिनको घने छायादार वृक्षोंसे शोभित ' सहस्राम्रवन ' नाम बागमें लेगये । सुन्दर वचनोंसे सव लोगोंको खुश करनेवाले भगवान् वहाँ एक सुन्दर सजाई गई पवित्र शिलापर पद्मासन विराजे । छठे उपवासके दिन चैत सुदी छठको चित्रानक्षत्रमें सन्ध्या समय अन्य एक हजार राजोंके साथ मन-वचनकायसे सब परिग्रह छोड़कर और ' नमः सिद्धेभ्यः' कहकर नेमिजिनने जिनदीक्षा ग्रहण करली । अपने हार्थोसे भगवानने केशोंका लोच किया । कोई तीनसौ वर्षतक कुमार अव स्थामें रहकर भगवान्ने यह संयम स्वीकार किया था। आत्म-ध्यान करते हुए नेमिजिनको उसी समय मनःपर्ययज्ञान हो गया। इसके बाद भगवान्के पवित्र केशक सुरेन्द्र ने
पूजा कर उन्हें रत्नके पिटारेमें रक्खा और धर्म-प्रेमके वश होकर उत्सव करते हुए अन्य देवगणसहित उन्हें लेजाकर क्षीरसमुद्र में डाल दिया ।
देवाङ्गनासी सुन्दरी राजकुमारी राजीमतीने जब यह सब सुना तब उसे, भूखेका अमृतमय भोजन छुड़ानेके सदृश बड़ा ही दारुण दुःख हुआ। उसने बड़ा ही शोक किया । उसके कोमल मनको इस घटनासे अत्यन्त ताप पहुँचा। कुछ समय बाद जब विवेकरूपी माणिकके प्रकाश से उसके हृदयका मोहान्धकार नष्ट होगया तब वह भी जिनप्रणीत श्रेष्ठ धर्मका मर्म समझकर विषय-भोगोंसे बड़ी ही विरक्त होगई । महा वैरागिन बनकर उसने जिनको नमस्कार किया और उसी समय सव बहुमूल्य रत्नाभरणोंको त्यागकर रत्नत्रयमयी पवित्र जिनदीक्षा ग्रहण करली । कुलीन कन्याओंका यह करना उचित ही है जो वे वाग्दान ही हो जानेपर अन्य पतिको न वरें ।
इधर जहाँ रत्नत्रय पवित्र श्रीनेमिजिन आत्मध्यान करते हुए मेरु-सदृश निश्चल विराज रहे थे, देवगण वहाँ बलदेव, कृष्ण वगैरहको साथ लेकर आये । अनेक द्रव्योंसे उन्होंने भगवान्की पूजाकर बड़े आनन्दसे फिर स्तुति की। हे देव, आप त्रिभुवनके स्वामी हैं। आपने मोहरूपी महान् ग्राहको जीत लिया है। प्रभो, आप ही सव तत्वोंके जाननेवाले और त्रिलोक-पूज्य हो । आपने उद्धत काम- शत्रुको.
जीत करके स्त्री सम्बंधि सुखकी ओरसे मुँह फेरकर वड़ी वीरताका काम किया । हे मुनि श्रेष्ठ नेमिजिन, इस कारण आपको नमस्कार है । इसके बाद उन परम आनन्द देनेवाले मुनिजनसेवित नेमिजिनको नमस्कार कर और उनके गुणोंका स्मरण करते हुए वे सब अपने अपने स्थानको चले गये ।
मुनिजनोंके साथ ध्यानमें बैठे हुए नेमिजिन ऐसे जान पड़ते थे मानों पर्वतों से घिरा हुआ अंजनगिरि है। सुरासुर पूज्य नेमिजिन इस प्रकार शुभ ध्यानमें दो दिन बिताकर तीसरे दिन ईर्यासमिति करते हुए पारणा करनेको द्वारिकामें गये । उन्हें देखकर पुण्यशाली दाता जनोंको बड़ा ही आनन्द होता था । हजारों दानी उन्हें आहार देने के लिए. बड़ी सावधानी के साथ अपने अपने घरपर खड़े हुए थे । एक वरदत्त नाम राजाने, जिसका शरीर सोनेकासा सुन्दर चमक रहा था, भगवानको आते हुए देखे । उसे जान पड़ा - मानों नीलगिरि पर्वत ही चला आ रहा है या निःसङ्ग - धूल वगैरह रहित वायु पृथ्वीमण्डलको पवित्र कर रहा है अथवा शतिल चन्द्रमाका बिम्व आकाश से पृथ्वीपर आया है। देखते ही भगवान्के सामने आकर उसने उनकी तीन प्रदक्षिणा की। • मानों उसके घरमें निधि ही आ गई हो, यह समझकर वह बड़ा ही आनन्दित हुआ । इसके बाद उन त्रिलोक-बन्धु जिनको अपने महलमें ले जाकर उसने बड़ी भक्तिसे ऊँचे आसन पर बैठाया । फिर जलभरी सोनेकी झारीसे उनके
सुखकर्ता पाँव पखारकर उसने चन्दनादिसे उनकी पूजा की और मन-वचन-कायकी पवित्रतासे उन्हें प्रणाम किया। इस राजाके यहाँ वैसे तो सदा ही शुद्धता के साथ भोजन तैयार होता था, पर आज कुछ और अधिक पवित्रतासे तैयारी की गई थी। उसने तब महापात्र नेमिजिनको नवधा भक्ति और श्रद्धा, शक्ति, भक्ति, दया, क्षमा, निर्लोभता - आदि दाताके गुण - सहित मासुक आहार, जो दाताको अनन्त सुखका देनेवाळा है, कराया । भगवान्ने उस पवित्र और पथ्यरूप आहारको अच्छी तरह देखकर उदासीनता के साथ कर लिया । इतनेमें ऊपरसे देवगणने - " यह अक्षय दान है, " यह कहकर वड़े प्रेमके साथ राजाके आँगनमें कोई साढ़े १२ करोड़ दिव्यप्रकाशमयी पँचरंगी रत्नोंकी वरसा की, सुगन्धित फूल वरसाये, शीतल और सुगंधित हवा चलाई, धीरे धीरे गंधजलकी वरसा की और नगाड़े बजाये । इससे लोग बड़े सन्तुष्ट हुए । देवगणने कहा- साधु साधु राजन, तुम बड़े ही पुण्यवान हो जो भव्यजनको संसार - समुद्रसे पार करनेको जहाज सदृश जगच्चूड़ामणि नेमिजिन योगी तुम्हारे घर आहार करने आये । वरदत्त महाराज, तुमसे महा दानीको धन्य है, जो तुम्हारे महलको जगद्गुरुने पवित्र किया । तुम्हारा यह दान बड़ा ही शुद्ध और सव सुख-सम्पदा तथा पुण्यका कारण है । इसका वर्णन कौन कर सकता है ? उन पवित्र हृदय देवोंने इस प्रकार भक्तिसे वरदत्तकी बड़ी प्रशंसा की । इस मां१७५
दानके फलसे वरदत्तराजके घर पञ्चाश्चर्य हुए । उनका यश चारों ओर फैल गया । श्रेष्ठ पात्रके समागमसे क्या शुभ नहीं होता ? इस पात्रदानके उत्तम पुण्यसे दुर्गतिका नाश होता है, उज्ज्वल यश बढ़ता है, और धन-दौलत, राज्यविभव, रूप - सुन्दरता, दीर्घायु, निरोगता, श्रेष्ट-कुल, स्त्री-पुत्र आदि इस लोकका सुख तथा परम्परा मोक्ष भी प्राप्त होता है । इसी कारण सत्पुरुष वरदत्त राजाकी तरह हितकारी पात्र-दान करते हैं। उनकी देखा-देखी अन्य भन्यजनको भी अपनी शक्ति के अनुसार धर्मसिद्धिके लिए निरन्तर भक्तिसहित पात्रदान करते रहना चाहिए ।
त्रिभुवनके उद्धारकर्त्ता श्रीनेमिप्रभु आहार कर अपने स्थान चले गये । वहाँ वे पाँच महाव्रत, तीन गुप्ति, पाँच समिति, रत्नत्रय और दस धर्मका दृढ़तासे पालन करते थे । पवित्रात्मा नेमिप्रभुने राग-द्वेषोंको जीत लिया, आत्मवलसे केसरी समान वनकर काम-हाथीको चूर दिया। इस प्रकार धीरवीर नोमजिन बड़े शोभित हुए । भगवान् नेमिजिन तीर्थकर थे, इस कारण उनकी दृढ़ भावनासे छह आवश्यक कर्म अत्यन्त उत्तमता से पले । परिग्रहरूपी ग्रहसे मुक्त, सुरासुर- पूज्य और दया - लतासे वेष्टित नेमिप्रभु चलते फिरते कल्पवृक्षसे जान पड़ते थे । वे मनमें निरन्तर वारह भावनाओं और जीव, अजीव आदि सप्त तत्वोंका विचार - मनन किया करते थे । त्रिलोककी स्थितिका उन्हें ज्ञान था। वे क्रोध, मान,
नेमिजिनका निष्क्रमणं-कल्याण ।
माया, लोभादिसे रहित, वीतराग, अनन्त गुणोंके धारक थे और बड़े सुन्दर थे। उन्होंने आहार, भय, मैथुन और परिग्रह इन चार संज्ञारूप आगकी धधकती हुई महान दुःख देनेवाली ज्वालाको सन्तोष-जलसे बुझा दिया था । भूख-प्यास आदिके परीपहरूपी वीर योद्धा भी नेमिप्रभुको न जीत सके, किन्तु उलटा भगवान्ने ही उन्हें जीत लिया था। सैकड़ों प्रचण्ड हवा चलें, वे छोड़े छोटे पर्वतोंको हिला सकती हैं, पर सुरु पर्वतको कभी हिला नहीं सकतीं। नेमिजिन भी वैसे ही स्थिर थे तब उन्हें किसकी ताकत जो चला सकता था । त्रिकाल-योगी और शुभ-लेश्या युक्त जगद्वन्धु नेमिजिन इस प्रकार इच्छा-निरोध-लक्षण तप करते हुए सुराष्ट्र देशके तिलक गिरनार पर्वतपर आये । उसपर निर्मल पानी भरा हुआ था। नाना तरहके वृक्ष फल-फूल रहे थे। मुक्ति स्थानके समान उसपर जाकर भव्यजन वड़ा सुख लाभ करते थे । उनका सब दुःख-सन्ताप नष्ट हो जाता था । वह सत्पुरुष के सदृश लोगोंको आनन्दित करता था । देवतागण आकर उसकी पूजा करते थे। इसका दूसरा नाम 'ऊर्जयन्तगिरि ' है। भगवान्ने वरसायोग उसीपर बिताया था। बरसाके कारण उसकी शोभा डरावनीसी होगई थी । पानी बरसनेके कारण वह सब ओर जलमय ही जलमय हो रहा था । मेघोंके गरजने और बिजलियोंकी कड़कड़ाहट से सारा पर्वत शब्दमय हो गया था कुछ सुनाई न पड़ता था ।
प्रचण्ड हवाके झकोरोंसे टूटकर गिरे हुए शिखरोंसे वह व्याप्त हो रहा था । रात के समय वह बड़ा ही भयानक देख पड़ता था । जंगली जानवरोंकी विकराल ध्वनि सुनकर डरपोक लोगोंकी उसपर चढ़नेकी हिम्मत न होती थी । चारों ओर पत्थरोंके ढेरके ढेर पड़े हुए थे। आकाश, मेघ और अन्धकारसे छाया हुआ ही रहता था ।
बरसायोग भर भगवान् इसी पर्वतपर रहे । पानी वरसा करता था और भगवान् मेरुकी तरह स्थिर रहकर ध्यान किया करते थे। उस समय नेमिप्रभु जिसपर जल गिर रहा है ऐसे इन्द्रनीलगिरिके ऊँचे शिखर- समान देख पड़ते थे। भगवान्के शरीरकी दिव्य प्रभासे सारा पर्वत प्रकाशमय हो रहा था। इस प्रकार सुरासुर-पूज्य, निर्भय, निस्पृह, ज्ञानी, मौनी, निराकुल, निस्संग, आत्म-भावना- प्रिय और जगद्गुरु नेमि - प्रभुने शुभध्यानके घर इस बड़े ऊँचे गिरनार पर्वतपर सुखके साथ बरसाकाल पूरा किया । भगवान् जो ध्यान करते रहे उस ध्यानका क्या लक्षण है, कितने भेद हैं, कौन स्वामी - ध्याता है और क्या फल है, इन सब बातोंका आगमके अनुसार संक्षेप वर्णन यहाँ भी किया जाता है । एकाग्रचिन्तनरूप उत्कृष्ट ध्यान वज्रवृषभनाराच संहननवालेके एक अन्तर्मुहूर्त्त पर्यन्त होता है। ध्यानके - आर्चध्यान, रौद्रध्यान, धर्मध्यान और शुक्लध्यान ऐसे चार भेद हैं ।,
प्रिय वस्तुकी चाह, अप्रिय वस्तुका विनाश, रोगादिककी वेदनाके दूर करनेवाला यत्न और निदान - आगामी विषय भोगोंकी चाह इन वातका चिन्तन किया करना, ये आर्चध्यानके चार भेद हैं। ये धर्मके नाश करनेवाले और पशु वगैरह गतिके कारण हैं । अत्रती, अणुवती और प्रमच गुणस्थानवाले मुनियोंके यह आर्त्तध्यान होता है । आर्त्तध्यान ।
हिंसामें आनन्द मानना, झूठमें आनन्द मानना, चोरीमें आनन्द मानना और विपयोंके रक्षण में आनन्द मानना- ये चार रौद्रध्यानके भेद हैं। ये नरकादिकोंके महान दुःख देनेवाले हैं। यह ध्यान चौथे और पाँचवे गुणस्थानवालेके होता है। रौद्रध्यान ।
आज्ञा विचय, अपायविचय, विपाकविचय और संस्थानविचय ये चार धर्मध्यानके भेद हैं । इस ध्यानसे स्वर्गादिक शुभगति प्राप्त होती है। यह पूर्वज्ञान धारीके होता है ।
धर्मध्यान ।
पृथक्त्ववितर्कवीचार एकत्ववितर्क - अविचार, सूक्ष्मक्रिया प्रतिपाति और व्युपरतक्रियानिवर्त्ति- ये चार शुक्लध्यानके भेद हैं । इनमें आदिके सुखके कारण दो ध्यान तो पूर्व ज्ञानीके होते हैं और अन्तके दो ध्यान केवली भगवान्के होते हैं। ये मोक्ष सुखके कारण हैं।
शुक्लध्यान ।
इनमें आर्त्तध्यान और रौद्रध्यान ये दोनों दुर्गतिके कारण हैं। इस कारण तत्वज्ञानी प्रभु नेमिजिन इन दोनों ध्यानोंको छोड़कर धर्मध्यानका चिंतन करने लगे। इस प्रकार तप करते हुए सुरासुर - पूज्य भगवान कोई छप्पन दिन तक छद्मस्थ अवस्था में रहे । इसके बाद उन्होंने कर्म प्रकृतियोंका क्षय आरंभ किया । आगे के अध्याय में उसका कुछ वर्णन किया जाता है।
काम-शत्रुका नाश करनेमें जिनने बड़ी वीरता दिखलाई और जो भव्यजनोंको संसार समुद्रसे पार उतारनेमें जहाज समान हुए वे देवेन्द्र नरेन्द्र-विद्याधर- पूज्य, चारित्र-चूड़ामणि और त्रिजगद्गुरु नेमिजिन संसार में जय लाभ करेंउनका पवित्र शासन दिनों दिन बढ़े।
इति नवमः सर्गः ।
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' बोधि ' नाम रत्नत्रयका है। इस रत्नत्रयमें पहला सम्यग्दर्शन बड़ा ही दुर्लभ है। जीव, अजीव-आदि पदार्थों के श्रद्धानको सम्यग्दर्शन कहते हैं । इसे निःशंकित आदि आठ अंगसहित धारण करना चाहिए। यह रत्नकी तरह सव व्रत और सव क्रियाओंका भूषण है । ज्ञान आठ प्रकारका है । वह नेत्रसदृश पदार्थोंका ज्ञान कराता है। चारित्र तेरह प्रकार है। यह व्यवहार रत्नत्रय कहलाता है । कर्म-मलरहित शुद्ध आत्मा निश्चय रत्नत्रयरूप है । ग्यारह - चोधि - भावना । चतुर्गतिमें गिरते हुए जीवोंको न गिरने देकर उन्हें उत्तम सुख- स्थान में रखदे वह धर्म है। संसारमें इसका लाभ बड़ा दुर्लभ है । सब प्रमादों को छोड़कर दसलक्षणरूप इसी धर्मका सदा आराधन करना चाहिए । अथवा वस्तुके स्वभा वको, जीवोंकी श्रेष्ठ दयाको और ऊपर कहे हुए रत्नत्रयको भी धर्म कहते हैं । इस प्रकार धर्मका संक्षेप स्वरूप कहा गया। यह सब प्रकारके सुख और स्वर्ग- मोक्षका देनेवाला है। भव्यजनको इस धर्मका सदा सेवन करना उचित है । बारह - धर्म - भावना । इस प्रकार अनुप्रेक्षा वगैरहका विचार करते हुए त्रिजग हितकारी नेमिजिनने अपने पूर्वजन्मका भी हाल जान लिया । इसी समय पाँचवें ब्रह्मस्वर्गके अन्तमें रहनेवाले लोकान्तिक नाम देवता गण जयजयकारके साथ भगएक सौ सत्तर बानके ऊपर फूलोंकी वरसा करते हुए वहाँ आगये। बड़ी भक्तिसे वे भगवान्को सिर नवाकर वोले- हे भगवन, हे भुंवनोत्तम, सत्य ही इस दुर्गम संसार वनमें कहीं भी सुख नहीं है। सुख तो उसमें है जिसे आपने मनमें करना विचारा है। प्रभो, आप संसार-समुद्र से पार करनेवाले संयमको ग्रहण कीजिए और फिर केवलज्ञान प्राप्त करके जीवोंको वोध दीजिए । भगवान्.. आप स्वयंसिद्ध जिन हैं । हम सरीख क्षुद्रजन आपको मोक्षमार्ग क्या बता सकते हैं । परन्तु नाथ, आपकी चरण-सेवा करनेका हमारा नियोग है, वह हमें पूरा करना पड़ता हूँ । प्रभो, संसारमें कोई ऐसा वक्ता या उपदेशक नहीं जो सूरजको प्रकाश करना बतला सके । उसी तरह आप-सदृश ज्ञानियोंको कौन प्रवोध दे सकता है। हे जगन्धो, आप तो स्वयं ही केवलज्ञानी-भास्कर होकर उलटा हमीको प्रवोध दोगे । इस प्रकार भक्तिसे भगवान्की प्रार्थना कर वे सब देवतागण अपने अपने स्थान चले गये । इनके बाद ही अन्य देवतागण तथा विद्याधर-राजे वगैरह आये । भक्तिसे प्रणाम कर उन्होंने भगवान्को जयजयकारक साथ सिंहासन पर बैठाया। नाना प्रकारके बाजे बजने लगे। देवाझना सुन्दर गीत गाने लगीं। देवतोंने इसी समय नाना तीर्थोके जलसे भरे सौ सुवर्ण-कलशोंसे भगवानका अभिषेक किया। इसके बाद उन्होंने चन्दन, केसर आदि सुगन्धित वस्तुओंका भगवान्के शरीरपर लेपकर उन लोक-भूषण जिनको सुन्दर वस्त्र और बहुमुल्य आभूषणोंसे सिंगारा, उन्हें फूलोंकी मनोहर माला पहराई। इस प्रकार सिंगारे हुए लोकश्रेष्ठ भगवान् ऐसे जान पड़े-मानों मुक्तिकान्ताके वर बनकर वे जा रहे हैं । इसी समय देवतोंने भगवान्के सामने 'देवकुरु' नाम रत्नमयी पालकी लाकर रक्खी। संयम ग्रहणकी इच्छा कर भगवान उसमें बैठे । देवगण उस पालखीको उठाकर चले । भगवान्के आगे आगे अनेक प्रकारके बाजे बज रहे थे । छत्र उनपर शोभित था । चँवर दुर रहे थे । अनेक राजे-महाराजे तथा विद्याधर लोग भगवान्के साथमें चल रहे थे । देवगण त्रिभुवननाथ जिनको घने छायादार वृक्षोंसे शोभित ' सहस्राम्रवन ' नाम बागमें लेगये । सुन्दर वचनोंसे सव लोगोंको खुश करनेवाले भगवान् वहाँ एक सुन्दर सजाई गई पवित्र शिलापर पद्मासन विराजे । छठे उपवासके दिन चैत सुदी छठको चित्रानक्षत्रमें सन्ध्या समय अन्य एक हजार राजोंके साथ मन-वचनकायसे सब परिग्रह छोड़कर और ' नमः सिद्धेभ्यः' कहकर नेमिजिनने जिनदीक्षा ग्रहण करली । अपने हार्थोसे भगवानने केशोंका लोच किया । कोई तीनसौ वर्षतक कुमार अव स्थामें रहकर भगवान्ने यह संयम स्वीकार किया था। आत्म-ध्यान करते हुए नेमिजिनको उसी समय मनःपर्ययज्ञान हो गया। इसके बाद भगवान्के पवित्र केशक सुरेन्द्र ने पूजा कर उन्हें रत्नके पिटारेमें रक्खा और धर्म-प्रेमके वश होकर उत्सव करते हुए अन्य देवगणसहित उन्हें लेजाकर क्षीरसमुद्र में डाल दिया । देवाङ्गनासी सुन्दरी राजकुमारी राजीमतीने जब यह सब सुना तब उसे, भूखेका अमृतमय भोजन छुड़ानेके सदृश बड़ा ही दारुण दुःख हुआ। उसने बड़ा ही शोक किया । उसके कोमल मनको इस घटनासे अत्यन्त ताप पहुँचा। कुछ समय बाद जब विवेकरूपी माणिकके प्रकाश से उसके हृदयका मोहान्धकार नष्ट होगया तब वह भी जिनप्रणीत श्रेष्ठ धर्मका मर्म समझकर विषय-भोगोंसे बड़ी ही विरक्त होगई । महा वैरागिन बनकर उसने जिनको नमस्कार किया और उसी समय सव बहुमूल्य रत्नाभरणोंको त्यागकर रत्नत्रयमयी पवित्र जिनदीक्षा ग्रहण करली । कुलीन कन्याओंका यह करना उचित ही है जो वे वाग्दान ही हो जानेपर अन्य पतिको न वरें । इधर जहाँ रत्नत्रय पवित्र श्रीनेमिजिन आत्मध्यान करते हुए मेरु-सदृश निश्चल विराज रहे थे, देवगण वहाँ बलदेव, कृष्ण वगैरहको साथ लेकर आये । अनेक द्रव्योंसे उन्होंने भगवान्की पूजाकर बड़े आनन्दसे फिर स्तुति की। हे देव, आप त्रिभुवनके स्वामी हैं। आपने मोहरूपी महान् ग्राहको जीत लिया है। प्रभो, आप ही सव तत्वोंके जाननेवाले और त्रिलोक-पूज्य हो । आपने उद्धत काम- शत्रुको. जीत करके स्त्री सम्बंधि सुखकी ओरसे मुँह फेरकर वड़ी वीरताका काम किया । हे मुनि श्रेष्ठ नेमिजिन, इस कारण आपको नमस्कार है । इसके बाद उन परम आनन्द देनेवाले मुनिजनसेवित नेमिजिनको नमस्कार कर और उनके गुणोंका स्मरण करते हुए वे सब अपने अपने स्थानको चले गये । मुनिजनोंके साथ ध्यानमें बैठे हुए नेमिजिन ऐसे जान पड़ते थे मानों पर्वतों से घिरा हुआ अंजनगिरि है। सुरासुर पूज्य नेमिजिन इस प्रकार शुभ ध्यानमें दो दिन बिताकर तीसरे दिन ईर्यासमिति करते हुए पारणा करनेको द्वारिकामें गये । उन्हें देखकर पुण्यशाली दाता जनोंको बड़ा ही आनन्द होता था । हजारों दानी उन्हें आहार देने के लिए. बड़ी सावधानी के साथ अपने अपने घरपर खड़े हुए थे । एक वरदत्त नाम राजाने, जिसका शरीर सोनेकासा सुन्दर चमक रहा था, भगवानको आते हुए देखे । उसे जान पड़ा - मानों नीलगिरि पर्वत ही चला आ रहा है या निःसङ्ग - धूल वगैरह रहित वायु पृथ्वीमण्डलको पवित्र कर रहा है अथवा शतिल चन्द्रमाका बिम्व आकाश से पृथ्वीपर आया है। देखते ही भगवान्के सामने आकर उसने उनकी तीन प्रदक्षिणा की। • मानों उसके घरमें निधि ही आ गई हो, यह समझकर वह बड़ा ही आनन्दित हुआ । इसके बाद उन त्रिलोक-बन्धु जिनको अपने महलमें ले जाकर उसने बड़ी भक्तिसे ऊँचे आसन पर बैठाया । फिर जलभरी सोनेकी झारीसे उनके सुखकर्ता पाँव पखारकर उसने चन्दनादिसे उनकी पूजा की और मन-वचन-कायकी पवित्रतासे उन्हें प्रणाम किया। इस राजाके यहाँ वैसे तो सदा ही शुद्धता के साथ भोजन तैयार होता था, पर आज कुछ और अधिक पवित्रतासे तैयारी की गई थी। उसने तब महापात्र नेमिजिनको नवधा भक्ति और श्रद्धा, शक्ति, भक्ति, दया, क्षमा, निर्लोभता - आदि दाताके गुण - सहित मासुक आहार, जो दाताको अनन्त सुखका देनेवाळा है, कराया । भगवान्ने उस पवित्र और पथ्यरूप आहारको अच्छी तरह देखकर उदासीनता के साथ कर लिया । इतनेमें ऊपरसे देवगणने - " यह अक्षय दान है, " यह कहकर वड़े प्रेमके साथ राजाके आँगनमें कोई साढ़े बारह करोड़ दिव्यप्रकाशमयी पँचरंगी रत्नोंकी वरसा की, सुगन्धित फूल वरसाये, शीतल और सुगंधित हवा चलाई, धीरे धीरे गंधजलकी वरसा की और नगाड़े बजाये । इससे लोग बड़े सन्तुष्ट हुए । देवगणने कहा- साधु साधु राजन, तुम बड़े ही पुण्यवान हो जो भव्यजनको संसार - समुद्रसे पार करनेको जहाज सदृश जगच्चूड़ामणि नेमिजिन योगी तुम्हारे घर आहार करने आये । वरदत्त महाराज, तुमसे महा दानीको धन्य है, जो तुम्हारे महलको जगद्गुरुने पवित्र किया । तुम्हारा यह दान बड़ा ही शुद्ध और सव सुख-सम्पदा तथा पुण्यका कारण है । इसका वर्णन कौन कर सकता है ? उन पवित्र हृदय देवोंने इस प्रकार भक्तिसे वरदत्तकी बड़ी प्रशंसा की । इस मांएक सौ पचहत्तर दानके फलसे वरदत्तराजके घर पञ्चाश्चर्य हुए । उनका यश चारों ओर फैल गया । श्रेष्ठ पात्रके समागमसे क्या शुभ नहीं होता ? इस पात्रदानके उत्तम पुण्यसे दुर्गतिका नाश होता है, उज्ज्वल यश बढ़ता है, और धन-दौलत, राज्यविभव, रूप - सुन्दरता, दीर्घायु, निरोगता, श्रेष्ट-कुल, स्त्री-पुत्र आदि इस लोकका सुख तथा परम्परा मोक्ष भी प्राप्त होता है । इसी कारण सत्पुरुष वरदत्त राजाकी तरह हितकारी पात्र-दान करते हैं। उनकी देखा-देखी अन्य भन्यजनको भी अपनी शक्ति के अनुसार धर्मसिद्धिके लिए निरन्तर भक्तिसहित पात्रदान करते रहना चाहिए । त्रिभुवनके उद्धारकर्त्ता श्रीनेमिप्रभु आहार कर अपने स्थान चले गये । वहाँ वे पाँच महाव्रत, तीन गुप्ति, पाँच समिति, रत्नत्रय और दस धर्मका दृढ़तासे पालन करते थे । पवित्रात्मा नेमिप्रभुने राग-द्वेषोंको जीत लिया, आत्मवलसे केसरी समान वनकर काम-हाथीको चूर दिया। इस प्रकार धीरवीर नोमजिन बड़े शोभित हुए । भगवान् नेमिजिन तीर्थकर थे, इस कारण उनकी दृढ़ भावनासे छह आवश्यक कर्म अत्यन्त उत्तमता से पले । परिग्रहरूपी ग्रहसे मुक्त, सुरासुर- पूज्य और दया - लतासे वेष्टित नेमिप्रभु चलते फिरते कल्पवृक्षसे जान पड़ते थे । वे मनमें निरन्तर वारह भावनाओं और जीव, अजीव आदि सप्त तत्वोंका विचार - मनन किया करते थे । त्रिलोककी स्थितिका उन्हें ज्ञान था। वे क्रोध, मान, नेमिजिनका निष्क्रमणं-कल्याण । माया, लोभादिसे रहित, वीतराग, अनन्त गुणोंके धारक थे और बड़े सुन्दर थे। उन्होंने आहार, भय, मैथुन और परिग्रह इन चार संज्ञारूप आगकी धधकती हुई महान दुःख देनेवाली ज्वालाको सन्तोष-जलसे बुझा दिया था । भूख-प्यास आदिके परीपहरूपी वीर योद्धा भी नेमिप्रभुको न जीत सके, किन्तु उलटा भगवान्ने ही उन्हें जीत लिया था। सैकड़ों प्रचण्ड हवा चलें, वे छोड़े छोटे पर्वतोंको हिला सकती हैं, पर सुरु पर्वतको कभी हिला नहीं सकतीं। नेमिजिन भी वैसे ही स्थिर थे तब उन्हें किसकी ताकत जो चला सकता था । त्रिकाल-योगी और शुभ-लेश्या युक्त जगद्वन्धु नेमिजिन इस प्रकार इच्छा-निरोध-लक्षण तप करते हुए सुराष्ट्र देशके तिलक गिरनार पर्वतपर आये । उसपर निर्मल पानी भरा हुआ था। नाना तरहके वृक्ष फल-फूल रहे थे। मुक्ति स्थानके समान उसपर जाकर भव्यजन वड़ा सुख लाभ करते थे । उनका सब दुःख-सन्ताप नष्ट हो जाता था । वह सत्पुरुष के सदृश लोगोंको आनन्दित करता था । देवतागण आकर उसकी पूजा करते थे। इसका दूसरा नाम 'ऊर्जयन्तगिरि ' है। भगवान्ने वरसायोग उसीपर बिताया था। बरसाके कारण उसकी शोभा डरावनीसी होगई थी । पानी बरसनेके कारण वह सब ओर जलमय ही जलमय हो रहा था । मेघोंके गरजने और बिजलियोंकी कड़कड़ाहट से सारा पर्वत शब्दमय हो गया था कुछ सुनाई न पड़ता था । प्रचण्ड हवाके झकोरोंसे टूटकर गिरे हुए शिखरोंसे वह व्याप्त हो रहा था । रात के समय वह बड़ा ही भयानक देख पड़ता था । जंगली जानवरोंकी विकराल ध्वनि सुनकर डरपोक लोगोंकी उसपर चढ़नेकी हिम्मत न होती थी । चारों ओर पत्थरोंके ढेरके ढेर पड़े हुए थे। आकाश, मेघ और अन्धकारसे छाया हुआ ही रहता था । बरसायोग भर भगवान् इसी पर्वतपर रहे । पानी वरसा करता था और भगवान् मेरुकी तरह स्थिर रहकर ध्यान किया करते थे। उस समय नेमिप्रभु जिसपर जल गिर रहा है ऐसे इन्द्रनीलगिरिके ऊँचे शिखर- समान देख पड़ते थे। भगवान्के शरीरकी दिव्य प्रभासे सारा पर्वत प्रकाशमय हो रहा था। इस प्रकार सुरासुर-पूज्य, निर्भय, निस्पृह, ज्ञानी, मौनी, निराकुल, निस्संग, आत्म-भावना- प्रिय और जगद्गुरु नेमि - प्रभुने शुभध्यानके घर इस बड़े ऊँचे गिरनार पर्वतपर सुखके साथ बरसाकाल पूरा किया । भगवान् जो ध्यान करते रहे उस ध्यानका क्या लक्षण है, कितने भेद हैं, कौन स्वामी - ध्याता है और क्या फल है, इन सब बातोंका आगमके अनुसार संक्षेप वर्णन यहाँ भी किया जाता है । एकाग्रचिन्तनरूप उत्कृष्ट ध्यान वज्रवृषभनाराच संहननवालेके एक अन्तर्मुहूर्त्त पर्यन्त होता है। ध्यानके - आर्चध्यान, रौद्रध्यान, धर्मध्यान और शुक्लध्यान ऐसे चार भेद हैं ।, प्रिय वस्तुकी चाह, अप्रिय वस्तुका विनाश, रोगादिककी वेदनाके दूर करनेवाला यत्न और निदान - आगामी विषय भोगोंकी चाह इन वातका चिन्तन किया करना, ये आर्चध्यानके चार भेद हैं। ये धर्मके नाश करनेवाले और पशु वगैरह गतिके कारण हैं । अत्रती, अणुवती और प्रमच गुणस्थानवाले मुनियोंके यह आर्त्तध्यान होता है । आर्त्तध्यान । हिंसामें आनन्द मानना, झूठमें आनन्द मानना, चोरीमें आनन्द मानना और विपयोंके रक्षण में आनन्द मानना- ये चार रौद्रध्यानके भेद हैं। ये नरकादिकोंके महान दुःख देनेवाले हैं। यह ध्यान चौथे और पाँचवे गुणस्थानवालेके होता है। रौद्रध्यान । आज्ञा विचय, अपायविचय, विपाकविचय और संस्थानविचय ये चार धर्मध्यानके भेद हैं । इस ध्यानसे स्वर्गादिक शुभगति प्राप्त होती है। यह पूर्वज्ञान धारीके होता है । धर्मध्यान । पृथक्त्ववितर्कवीचार एकत्ववितर्क - अविचार, सूक्ष्मक्रिया प्रतिपाति और व्युपरतक्रियानिवर्त्ति- ये चार शुक्लध्यानके भेद हैं । इनमें आदिके सुखके कारण दो ध्यान तो पूर्व ज्ञानीके होते हैं और अन्तके दो ध्यान केवली भगवान्के होते हैं। ये मोक्ष सुखके कारण हैं। शुक्लध्यान । इनमें आर्त्तध्यान और रौद्रध्यान ये दोनों दुर्गतिके कारण हैं। इस कारण तत्वज्ञानी प्रभु नेमिजिन इन दोनों ध्यानोंको छोड़कर धर्मध्यानका चिंतन करने लगे। इस प्रकार तप करते हुए सुरासुर - पूज्य भगवान कोई छप्पन दिन तक छद्मस्थ अवस्था में रहे । इसके बाद उन्होंने कर्म प्रकृतियोंका क्षय आरंभ किया । आगे के अध्याय में उसका कुछ वर्णन किया जाता है। काम-शत्रुका नाश करनेमें जिनने बड़ी वीरता दिखलाई और जो भव्यजनोंको संसार समुद्रसे पार उतारनेमें जहाज समान हुए वे देवेन्द्र नरेन्द्र-विद्याधर- पूज्य, चारित्र-चूड़ामणि और त्रिजगद्गुरु नेमिजिन संसार में जय लाभ करेंउनका पवित्र शासन दिनों दिन बढ़े। इति नवमः सर्गः ।
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वोट डालने जा रहा दपंति हादसे का शिकार हुआ है. मामला हिमाचल के मंडी जिले का है. हादसे में पति की मौत हो गई है और पत्नी घायल है. हादसा रविवार तड़के हुआ है.
जानकारी के अनुसार, दंपति कार में दिल्ली से कुल्लू वोट डालने के लिए जा रहे थे और इस दौरान मंडी में उनकी कार हादसे का शिकार हो गई. हादसे में पति की मौके पर मौत हो गई, जबकि पत्नी गंभीर है. घायल का अस्पताल में उपचार चल रहा है.
बताया जा रहा है कि मंडी के बिंद्राबन में यह हादसा हुआ. स्कॉर्पियो गाड़ी व्यास नदी के किनारे जा गिरी है. जो दिल्ली से कुल्लू की तरफ आ रही थी.
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को जोनल अस्पताल मंडी ले जाया गया है, जहां डाक्टरों ने प्रकाश चंद्र बोध (42) निवासी कलेहली शारबाई, कुल्लू को मृत घोषित कर दिया.
सुनीता बोध (37) गंभीर रूप से घायल है और उसका जोनल अस्पताल मंडी में इलाज चल रहा है. हादसे के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है. पुलिस ने मामला दर्जकर जांच शुरू कर दी है.
लोकसभा चुनाव 2019: 1 दिन पहले कांग्रेस नेताओं का Temple Run!
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वोट डालने जा रहा दपंति हादसे का शिकार हुआ है. मामला हिमाचल के मंडी जिले का है. हादसे में पति की मौत हो गई है और पत्नी घायल है. हादसा रविवार तड़के हुआ है. जानकारी के अनुसार, दंपति कार में दिल्ली से कुल्लू वोट डालने के लिए जा रहे थे और इस दौरान मंडी में उनकी कार हादसे का शिकार हो गई. हादसे में पति की मौके पर मौत हो गई, जबकि पत्नी गंभीर है. घायल का अस्पताल में उपचार चल रहा है. बताया जा रहा है कि मंडी के बिंद्राबन में यह हादसा हुआ. स्कॉर्पियो गाड़ी व्यास नदी के किनारे जा गिरी है. जो दिल्ली से कुल्लू की तरफ आ रही थी. हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को जोनल अस्पताल मंडी ले जाया गया है, जहां डाक्टरों ने प्रकाश चंद्र बोध निवासी कलेहली शारबाई, कुल्लू को मृत घोषित कर दिया. सुनीता बोध गंभीर रूप से घायल है और उसका जोनल अस्पताल मंडी में इलाज चल रहा है. हादसे के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है. पुलिस ने मामला दर्जकर जांच शुरू कर दी है. लोकसभा चुनाव दो हज़ार उन्नीस: एक दिन पहले कांग्रेस नेताओं का Temple Run! .
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श्रीलंका और साउथ अफ्रीका के बीच इस समय दोनों मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जा रही है। इस सीरीज के पहले मैच में श्रीलंका ने साउथ अफ्रीका को हरा दिया था, वहीं दूसरे मैच में भी साउथ अफ्रीका हार की कगार पर हैं। ऐसे में दूसरे टेस्ट मैच से पहले मीडिया से श्रीलंका के स्टार आलराउंडर एंजेलो मैथ्यूज ने बात की। इस दौरान उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली जीत को महत्वपूर्ण बताया।
रविवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि आप जब भी टॉप टीम को हराते हो तो आप खुद से संतुष्ट होते हो। साउथ अफ्रीका पिछले कुछ समय से अच्छा खेल रही है। वो इस समय रैंक में भी नंबर दो पर है। उनका रिकॉर्ड विदेशी घरती पर भी अच्छा रहा है। हम अपने प्रदर्शन से काफी ज्यादा खुश हैं। हमने इसके लिए काफी ज्यादा मेहनत की है।
साउथ अफ्रीका के खिलाफ जीत को लेकर बोलते हुए उन्होंने कहा कि साउथ अफ्रीका को हराना हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होने वाला है। हमारे पास अनुभवहीन टीम है, ऐसे में दुनिया की नंबर दो टीम को हराना एक बड़ी उपलब्धि है।
हम जीत को जरूर सेलिब्रेट करेंगे। लेकिन हमे भी भी कल कुछ और विकेट लेने होंगे और जल्द ही मैच को खत्म करना होगा। अगर हम ऐसा कर ले जाते है तो हम जीत का आनंद उठा पाएंगे।
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श्रीलंका और साउथ अफ्रीका के बीच इस समय दोनों मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जा रही है। इस सीरीज के पहले मैच में श्रीलंका ने साउथ अफ्रीका को हरा दिया था, वहीं दूसरे मैच में भी साउथ अफ्रीका हार की कगार पर हैं। ऐसे में दूसरे टेस्ट मैच से पहले मीडिया से श्रीलंका के स्टार आलराउंडर एंजेलो मैथ्यूज ने बात की। इस दौरान उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ मिली जीत को महत्वपूर्ण बताया। रविवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि आप जब भी टॉप टीम को हराते हो तो आप खुद से संतुष्ट होते हो। साउथ अफ्रीका पिछले कुछ समय से अच्छा खेल रही है। वो इस समय रैंक में भी नंबर दो पर है। उनका रिकॉर्ड विदेशी घरती पर भी अच्छा रहा है। हम अपने प्रदर्शन से काफी ज्यादा खुश हैं। हमने इसके लिए काफी ज्यादा मेहनत की है। साउथ अफ्रीका के खिलाफ जीत को लेकर बोलते हुए उन्होंने कहा कि साउथ अफ्रीका को हराना हमारे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होने वाला है। हमारे पास अनुभवहीन टीम है, ऐसे में दुनिया की नंबर दो टीम को हराना एक बड़ी उपलब्धि है। हम जीत को जरूर सेलिब्रेट करेंगे। लेकिन हमे भी भी कल कुछ और विकेट लेने होंगे और जल्द ही मैच को खत्म करना होगा। अगर हम ऐसा कर ले जाते है तो हम जीत का आनंद उठा पाएंगे।
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मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में कोविड राहत पैकेज एवं इससे संबंधित मुख्यमंत्री की घोषणाओं की समीक्षा की।
अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी स्कूलों के 10वीं और 12वीं के छात्र-छात्राओं को 30 नवंबर तक मुफ्त मोबाइल टैबलेट देना निश्चित करें। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सभी घोषणाओं को समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए। विद्यालयी शिक्षा की समीक्षा में ऑनलाइन शिक्षा को और अधिक सुगम बनाने के निर्देश दिए गए।
पर्यटन विभाग की समीक्षा में बताया गया कि पर्यटन व्यवसाय की विभिन्न गतिविधियों के संचालन में शामिल लगभग 50,000 व्यक्तियों को दो हजार रुपये हर महीने के हिसाब से छह महीने के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा पर अब तक 1500 लाख की धनराशि जारी की जा चुुुकी है।
परिवहन विभाग की समीक्षा में बताया गया कि परिवहन विभाग के तहत सार्वजनिक सेवाओं के लगभग 1,03,235 चालकों, परिचालकों एवं क्लीनर्स को छह माह के लिए दो हजार रुपये प्रतिमाह की दर से आर्थिक सहायता संबंधी घोषणा पर 32486 लाभार्थियों के लिए 2381. 70 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।
जबकि शहरी विकास के तहत नैनीताल में पंजीकृत कुल 549 वोट संचालकों को 10,000 रुपये प्रति की दर से आर्थिक सहायता संबंधी घोषणा पर 415 लाभार्थियों के लिए 41. 50 लाख रुपये मंजूर किए जा चुके हैं। नैनी झील के तहत पंजीकृत 671 वोट संचालकों के वित्तीय वर्ष 2021-22 में लाइसेंस नवीनकरण में छूट संबंधी घोषणा के क्रम में वित्तीय एवं प्रशासकीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है।
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मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में कोविड राहत पैकेज एवं इससे संबंधित मुख्यमंत्री की घोषणाओं की समीक्षा की। अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकारी स्कूलों के दसवीं और बारहवीं के छात्र-छात्राओं को तीस नवंबर तक मुफ्त मोबाइल टैबलेट देना निश्चित करें। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सभी घोषणाओं को समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए। विद्यालयी शिक्षा की समीक्षा में ऑनलाइन शिक्षा को और अधिक सुगम बनाने के निर्देश दिए गए। पर्यटन विभाग की समीक्षा में बताया गया कि पर्यटन व्यवसाय की विभिन्न गतिविधियों के संचालन में शामिल लगभग पचास,शून्य व्यक्तियों को दो हजार रुपये हर महीने के हिसाब से छह महीने के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा पर अब तक एक हज़ार पाँच सौ लाख की धनराशि जारी की जा चुुुकी है। परिवहन विभाग की समीक्षा में बताया गया कि परिवहन विभाग के तहत सार्वजनिक सेवाओं के लगभग एक,तीन,दो सौ पैंतीस चालकों, परिचालकों एवं क्लीनर्स को छह माह के लिए दो हजार रुपये प्रतिमाह की दर से आर्थिक सहायता संबंधी घोषणा पर बत्तीस हज़ार चार सौ छियासी लाभार्थियों के लिए दो हज़ार तीन सौ इक्यासी. सत्तर लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। जबकि शहरी विकास के तहत नैनीताल में पंजीकृत कुल पाँच सौ उनचास वोट संचालकों को दस,शून्य रुपयापये प्रति की दर से आर्थिक सहायता संबंधी घोषणा पर चार सौ पंद्रह लाभार्थियों के लिए इकतालीस. पचास लाख रुपये मंजूर किए जा चुके हैं। नैनी झील के तहत पंजीकृत छः सौ इकहत्तर वोट संचालकों के वित्तीय वर्ष दो हज़ार इक्कीस-बाईस में लाइसेंस नवीनकरण में छूट संबंधी घोषणा के क्रम में वित्तीय एवं प्रशासकीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है।
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ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो कम से कम एक बार पीड़ित न होतीव्र श्वसन रोग। आम सर्दी की तरह खांसी, इन बीमारियों में से अधिकांश का लगातार साथी है। कुछ तुरंत खांसी के उपाय के लिए निकटतम फार्मेसी में जाते हैं, अन्य लोग बीमारी के खिलाफ लड़ाई में दादी की सिद्ध व्यंजनों का उपयोग करना पसंद करते हैं।
खांसी का कार्य विदेशी के शरीर से छुटकारा पाना हैपदार्थ। मैन एक दिन के बारे में 22,000 साँस, जिनमें से प्रत्येक शरीर में सिगरेट के धुएं में 55 000 धूल कणों, पराग अनाज और कणों के एक औसत हो जाता है कर रही है। नतीजतन, श्वसन प्रणाली में के लिए एक दिन धूल के लगभग 2 बड़े चम्मच हो जाता है! फेफड़ों में उनके प्रवेश को रोकने के लिए प्रकृति सांस की सिलिया विशेष कोशिकाओं है कि व्यास में बड़ा की तुलना में तीन माइक्रोन बाहर बह रहे हैं सभी कणों की एक श्लेष्मा झिल्ली प्रदान की गई है। सभी कि छोटी है, फेफड़ों में जमा किया जाता है। विभिन्न प्रतिकूल परिस्थितियों, धूम्रपान, शुष्क हवा, चिनार फुलाना, ऑटोमोबाइल निकास, औद्योगिक उत्सर्जन और इसके अलावा, एक कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली - यह सब श्वसन प्रणाली बढ़े हुए लोड से निपटने के लिए बनाता है, और इस तरह के एक अप्रिय लक्षण खांसी होती है। बलगम सुरक्षात्मक एंटीबॉडी और ब्रोन्कियल म्यूकोसा जीव की विशेषताओं के साथ धीरे-धीरे उनमें से छुटकारा हो जाता है। श्वसनी स्वस्थ व्यक्ति का उत्पादन बलगम 50-150 मिलीलीटर की राशि में हर दिन। जब कोई व्यक्ति बीमार है, बलगम अधिक उत्पादन किया, जबकि बिगड़ा वेंटिलेशन और खांसी इसके निष्कासन और श्वसन अंगों की सफाई करने के लिए योगदान देता है। बलगम की ठहराव फेफड़ों की सूजन उत्पन्न - निमोनिया। लेकिन खांसी हमेशा राहत प्रदान नहीं करता है, यह अक्सर नींद और स्वास्थ्य बाधित। इसके अलावा, यह ARI रोगों से भी ज्यादा खतरनाक का संकेत है, और दवाओं केवल मदद नहीं कर सकता की एक किस्म के उपयोग किया जा सकता है, लेकिन यह भी अपने स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा।
खांसी शरीर की श्वसन प्रणाली के किसी भी हिस्से की सूजन का एक अभिव्यक्ति हो सकती है, साथ ही निम्नलिखित बीमारियों और शर्तों का एक लक्षण भी हो सकता हैः
- लैरींगाइटिस;
- tracheitis;
- ब्रोंकाइटिस;
- निमोनिया;
- पेट्यूसिस और पैराकोटस;
- एलर्जी रोग;
- फुफ्फुसीय तपेदिक;
- अस्थमा;
- परिफुफ्फुसशोथ;
- श्वसन असुविधा;
- जुनूनी-बाध्यकारी विकार।
खांसी वाले व्यक्ति की हालत कैसे छुटकारा पाएं? खांसी से मैं क्या आवेदन कर सकता हूं? यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस लक्षण, यानी, उसकी खांसी क्या है।
खांसी सूखी और गीली में बांटा गया है। ऊपरी श्वसन पथ की जलन के कारण बीमारी की शुरुआत में सूखी खांसी अक्सर परेशान होती है, जब श्लेष्म अभी तक पर्याप्त नहीं होता है। सूखी खांसी शरीर से छुटकारा नहीं पाती है, लेकिन इसके विपरीत, कभी-कभी यह केवल एक व्यक्ति को कम कर देती है। गीले को उत्पादक के रूप में जाना जाता है, यानी, जिसमें बहुत अधिक श्लेष्म पैदा होता है, जब व्यक्ति खांसी खाता है तो उसे शरीर से हटा दिया जाता है। इस तरह की खांसी को दबाया नहीं जाना चाहिए, क्योंकि इसके साथ शरीर साफ हो जाता है।
खांसी के इलाज में मुख्य कार्य - शुष्कएक गीले, कम परेशान में अनुवाद करें। तब प्रभावित श्लेष्म ट्रेकेआ या ब्रोंची प्राकृतिक रूप से सूजन के उत्पादों से शुद्ध हो जाएंगे। और जब वे पूरी तरह से साफ़ हो जाते हैं, तो खांसी परेशान हो जाएगी।
जब खांसी गीली हो जाती है, तो यह कम होती हैरोगी चिंता करता है। गीले और कम परेशान होने के लिए, आमतौर पर यह निर्धारित माध्यम है कि श्लेष्म की मात्रा में वृद्धि और स्वाद के कमजोर पड़ने में योगदान होता है। इन्हें आम तौर पर विभिन्न प्रकार के अर्क और हर्बल-आधारित मिश्रणों के साथ-साथ सिंथेटिक माध्यमों को खांसी में खांसी में मदद करने के लिए शामिल किया जाता है। इसे जल्दी से अलग करने के लिए, यह मोटी और चिपचिपा नहीं होना चाहिए। गीली खांसी से कई मिश्रण, infusions, हर्बल सिरप हैं। वास्तव में, ज्यादातर मामलों में, किसी भी एआरडी का कोर्स कुछ कानूनों के अधीन होता है, और यदि यह एक सामान्य एआरडी या ब्रोंकाइटिस है, पर्याप्त पीने और आवश्यक हवा नमी के साथ, खांसी धीरे-धीरे गीली होती है। इसलिए, फार्मेसी में सबसे प्रभावी दवाओं का एक गुच्छा भर्ती करना हमेशा जरूरी नहीं है, क्योंकि यहां तक कि सबसे महंगी उपाय भी बिजली को तेज नहीं करेगा। आप फार्मास्युटिकल जड़ी बूटियों के शोरबा के रूप में हमेशा खांसी से सस्ता प्रभावी उपाय चुन सकते हैं। यदि रोगी की गीली खांसी होती है, और शुक्राणु को आसानी से हटा दिया जाता है, तो उसे उम्मीदवार दवाएं देने की सलाह नहीं दी जाती है, क्योंकि लगभग सभी श्वसन पथ में श्लेष्म की मात्रा में वृद्धि में योगदान देते हैं। इसके अलावा, आप डॉक्टर के पर्चे के बिना दवाएं नहीं ले सकते हैं, खासतौर पर बच्चे, जिनके लिए वे खतरनाक स्थिर स्पुतम और जटिलताओं के विकास हैं। यदि खांसी दूर नहीं जाती है, तो रोगी की जांच करने के बाद डॉक्टर द्वारा एक प्रभावी खांसी का उपाय निर्धारित किया जाना चाहिए।
दवा का लंबा इतिहास एक विशाल जानता हैइस बीमारी के लिए नुस्खे की संख्या, जो पीढ़ी से पीढ़ी तक पारित की जाती है और अभी भी मानव जाति द्वारा उपयोग की जाती है, और कुछ नई दवाओं के आधार पर बनाई जाती है।
गीले मौसम में खांसी बढ़ जाती है,इस तथ्य के कारण कि इसकी उत्पत्ति माइक्रोबियल नहीं हो सकती है, लेकिन कवक। इस तरह की ब्रोंकाइटिस पारंपरिक एंटीबायोटिक उपचार के लिए उपयुक्त नहीं है और हमेशा पुरानी हो जाती है। इसके अलावा, नम्रता मोल्ड कवक के गहन प्रजनन के लिए सबसे उपयुक्त है, उनके सबसे छोटे स्पायर धूल के साथ श्वसन पथ में प्रवेश करते हैं। एक मजबूत प्रतिरक्षा वाले व्यक्ति के लिए हानिकारक, वे पंखों में इंतजार कर रहे हैं, ताकि शरीर की प्राकृतिक रक्षा के पहले कमजोर होने पर, यह हमला करेगा। इसलिए, विश्वसनीयता के लिए आपको एंटीफंगल जड़ी बूटी बनाने की जरूरत है।
उदाहरण के लिए, सुगंधित रसीद थाइम चाय, जो रोगजनक कवक के खिलाफ सक्रिय है। यह एक कीटाणुनाशक, विरोधी भड़काऊ, सुखदायक, प्रत्याशित कार्रवाई है।
वही गुणों में थाइम है, जोशरीर को बहुत अच्छी तरह से गर्म करता है। शोरबा ऐसा करते हैंः 1 बड़ा चम्मच। एल। थाइम 200 मिलीलीटर की मात्रा में उबलते पानी डालें और कई घंटों तक लपेटें। 2 बड़ा चम्मच पीओ। एल। ब्रोंकाइटिस के साथ दिन में 4 बार, खांसी खांसी, शुष्क स्पास्टिक खांसी, ब्रोन्कियल अस्थमा।
आजकल, दवा के बिना उपचार, के साथप्रकृति के उपहारों का उपयोग तेजी से लोकप्रियता प्राप्त कर रहा है। हर्बल दवाएं अच्छी तरह से सहन की जाती हैं, वे कृत्रिम अनुरूपों की तुलना में दुर्लभ और हल्के साइड इफेक्ट्स हैं। उनमें जैविक रूप से सक्रिय पदार्थों की एक पूरी श्रृंखला शामिल होती है जो शरीर पर जटिल प्रभाव प्रदान करती हैं।
खांसी के लिए, लोक उपचार कई वयस्कों की मदद करते हैं, उदाहरण के लिएः
- लहसुन का एक टुकड़ा चॉप, एक कंटेनर में 2 कप दूध के साथ डाल दिया। उबाल लें, गर्मी से निकालें, ठंडा करें और शहद के 30 ग्राम जोड़ें। पूरे दिन उपभोग करें।
- एक चिकन अंडे उबालें, काट लें, शहद के एक चम्मच के साथ अच्छी तरह मिलाएं और खाएं।
- फोड़ा करने के लिए आधा लीटर दूध, से व्यंजन हटा देंप्लेटें और 1 बड़ा चम्मच डालना। एल। पाइन कलियों। अच्छी तरह से लपेटो, थोड़ा गर्म शोरबा जोर देते हैं। एक दिन के लिए इसका इस्तेमाल करें, अगर खांसी एक समय में गुजरती नहीं है, तो प्रक्रिया दोहराएं।
- खांसी के वयस्कों के लिए वोदका के आधार पर लोक उपचार तैयार किए जाते हैं। पाइन नट्स का गिलास पीसें, चीनी का गिलास और आधा लीटर वोदका जोड़ें। 2 सप्ताह बनाए रखने और दिन में तीन बार 5 मिलीलीटर पर स्वीकार करने के लिए।
- 2 बड़ा चम्मच। एल। आधा लीटर वोदका के लिए सामान्य गाजर के बीज, 7 दिनों के लिए भिगो दें। 1 बड़ा चम्मच का प्रयोग करें। एल। खाने के बाद कुछ घंटे बाद, पीना नहीं।
यदि एक लंबी खांसी दूर नहीं जाती है, तो एक प्रभावी खांसी का उपाय निम्नलिखित पर लागू होता हैः
- एक कच्ची जर्दी, चीनी का 100 ग्राम, मक्खन के 30 ग्राम लें और अच्छी तरह से पीस लें।
- इस मिश्रण में उबला हुआ दूध जोड़ें। बिस्तर में गर्म पीएं, अच्छी तरह से लपेटा। खांसी 3-4 ऐसी प्रक्रियाओं के बाद गुजरती है।
- अगर खांसी दूर नहीं जाती है, तो यह प्रभावी खांसी का इलाज करने में मदद करेगा। एक अंगूर के लुगदी को क्रश करें 120 ग्राम कैहर्स और शहद के 200 ग्राम जोड़ें। हर घंटे, उत्पाद का एक बड़ा चमचा लें।
फुफ्फुसीय तपेदिक के लिए एक इलाजः
- 1 बड़ा चम्मच एल। चॉकरी 1 बड़ा चम्मच के साथ कनेक्ट करें। एल। मातृभाषा, शाम को एक थर्मॉस में डालना और उबलते पानी के 400 मिलीलीटर डालना।
- पूरे दिन पीने के लिए तनावग्रस्त जलसेक। शाम को, एक बार फिर एक थर्मॉस में घास डालें और सुबह में एक नया जलसेक लें।
- जलसेक प्राप्त करने के दो महीने छड़ी कोच को नष्ट कर देते हैं।
जब खांसी दूर नहीं जाती है तो एक रगड़ भी बहुत मदद करता है।
यदि एक प्रभावी खांसी का उपाय प्राप्त किया जाता हैध्यान से एक गिलास शहद, वोदका और तला हुआ सूरजमुखी तेल मिलाएं। इस संरचना में कपास नैपकिन, और बाहर निकलने के लिए, छाती और पीठ पर बाहर रखना। संपीड़न कागज, सूती और लपेटें अच्छी तरह से कवर करें। आधा घंटा रखें। इस मामले में, आपको माथे पर पसीने की बूंदों की उपस्थिति से पहले पसीने के लिए लपेटने की जरूरत है। नुस्खा साबित होता है, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया के साथ मदद करता है।
बच्चों के लिए सबसे प्रभावी खांसी उपाय -अनाज तेल आपको अपने बच्चे के लिए एक स्वस्थ और स्वादिष्ट घरेलू उपचार बनाने के लिए एनीज तेल खरीदना चाहिए। 1 चम्मच में। शहद ड्रिप तेल की 1 बूंद, मिश्रण, गर्म चाय के साथ एक पेय दें। भोजन से एक घंटे पहले एक घंटे के लिए दिन में 4 बार पीएं। मीठी दवा ब्रोंकाइटिस, लैरींगजाइटिस, किसी भी खांसी और ठंड का इलाज करती है।
छोटे बच्चों के लिए एक और नुस्खा। सरसों, शहद, आटा और वनस्पति तेल के बराबर मात्रा लें। सभी संपीड़न के लिए गठबंधन और आवेदन करें। यह नुस्खा एंटीबायोटिक्स शक्तिहीन होने पर भी मदद करता है।
आप अरोमा के साथ खांसी शांत कर सकते हैंऔषधीय पौधों ऐसा करने के लिए, गर्म पानी के गिलास में आपको टकसाल, अनाज या लैवेंडर के आवश्यक तेल की 1-2 बूंदों को छोड़ना होगा और बच्चे के बिस्तर के बगल में व्यंजन डालना होगा।
गर्भवती महिलाओं का इलाज करने की जरूरत है,अन्यथा, एक उपेक्षित बीमारी मां के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है और बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है। उपचार गर्भावस्था की अवधि पर निर्भर करता है, क्योंकि, जैसा कि आप जानते हैं, लगभग सभी दवाएं पहले तिमाही में contraindicated हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए क्या खांसी हो सकती है विभिन्न हर्बल इनहेलेशन, शहद के साथ गर्म दूध पीना या नींबू के साथ चाय।
इस अवधि पर फार्मेसी दवाएं होनी चाहिएरसायन शास्त्र के साथ बच्चे को नुकसान पहुंचाने के लिए सावधान रहें। यदि गोलियों के बिना करना असंभव है, तो पर्यवेक्षण चिकित्सक व्यक्तिगत रूप से विकासशील भ्रूण के लिए न्यूनतम जोखिम के साथ खांसी की दवा का चयन करता है। इस तरह का एक उपकरण खांसी की गोलियां "मुकाल्टिन" हो सकता है, जो सब्जी कच्चे माल के आधार पर बनाया जाता है।
दवा के सक्रिय घटक - अल्टेरिया निकालेंऔर सोडा - नवजात शिशु पर खतरनाक प्रभाव नहीं पड़ता है, अल्टे श्वसन पथ के कार्य में सुधार करता है, जिससे शुक्राणु का गठन बढ़ता है। सोडा जो एक तैयारी का हिस्सा है, एक कफ को पतला कर देता है। यह सब खांसी उत्पादक बनाता है और भविष्य की माँ की वसूली में तेजी लाता है।
"हर्बियन" - फार्मेसी खांसी सिरप,ब्रोंकोडाइलेटर और एंटीस्पाज्मोडिक गुणों के साथ एक औषधीय द्रव का प्रतिनिधित्व करते हैं। सिरप की संरचना एक प्राकृतिक घटक है - सूखे आईवी निकालने, जो शरीर को उपचार सामग्री के साथ समृद्ध करता है।
"Gerbion" खांसी का सही ढंग से उपयोग करने के लिए, उपयोग के लिए निर्देश इस प्रकार दवा की खुराक का वर्णन करते हैंः
- 6 साल से वयस्क और बच्चे - दिन में तीन बार 5-7.5 मिलीलीटर;
- 2 से 6 साल के बच्चे - 2.5 मिलीलीटर दिन में तीन बार;
- 2 साल से कम उम्र के - केवल डॉक्टर द्वारा निर्धारित अगर।
विरोधाभास भी मौजूद हैं - ड्रग्स के घटकों के साथ-साथ फ्रक्टोज़ के असहिष्णुता वाले मरीजों द्वारा दवा नहीं ली जानी चाहिए। गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान "गेरबियन" का भी उपयोग नहीं किया जा सकता है।
इस तरह के मलम के मुख्य तत्व पशु वसा और आवश्यक तेल हैं। त्वचा के साथ उनके संपर्क की प्रक्रिया में, निम्नलिखित प्रक्रियाएं होती हैंः
- रक्त परिसंचरण में सुधार हुआ है;
- आवश्यक तेलों के फायदेमंद वाष्पीकरण श्वसन मार्ग पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है;
- शरीर गर्म हो रहा है।
मलहम छाती रगड़ - यह मदद करता हैसूजन को हटाने, रोगजनक सूक्ष्मजीवों का विनाश। वार्मिंग की मदद से, ब्रोंची का विस्तार, खांसी और झुकाव से राहत मिलती है। इस प्रभाव के अलावा, त्वचा के माध्यम से प्राप्त होने वाले घटकों, प्रतिरक्षा प्रणाली के काम को बढ़ाते हैं। उन कुछ तरीकों से इलाज करने के लिए मलम का मतलब है कि आप बच्चे को नुकसान पहुंचाने के जोखिम के बिना खांसी और ठंड के साथ गर्भवती हो सकते हैं। छोटे बच्चों के लिए भी उपयोग करना संभव है।
प्रोपोलिस के साथ खांसी क्रीम भी एक बहुत ही प्रभावी उपाय है। वह गर्भवती महिलाओं के लिए उपयुक्त वयस्कों और बच्चों में खांसी का सफलतापूर्वक इलाज करती है।
दिल के क्षेत्र को छोड़कर छाती में प्रोपोलिस मलम की थोड़ी मात्रा रगड़ें।
बीमारी की जटिलताओं को रोकने के लिए, औरसही ढंग से निदान, तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। लंबे समय तक खांसी जो एक महीने तक चलती है, अगर रक्त या सीने में दर्द होता है, तो सांस लेने में मुश्किल होती है और तेजी से, लगातार थकान, वजन घट जाता है, ठंड मनाई जाती है या तापमान 38.3 सी से ऊपर होता है, डॉक्टर की यात्रा बस जरूरी है। इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता हैः वे एक और गंभीर बीमारी का संकेत दे सकते हैं।
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ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो कम से कम एक बार पीड़ित न होतीव्र श्वसन रोग। आम सर्दी की तरह खांसी, इन बीमारियों में से अधिकांश का लगातार साथी है। कुछ तुरंत खांसी के उपाय के लिए निकटतम फार्मेसी में जाते हैं, अन्य लोग बीमारी के खिलाफ लड़ाई में दादी की सिद्ध व्यंजनों का उपयोग करना पसंद करते हैं। खांसी का कार्य विदेशी के शरीर से छुटकारा पाना हैपदार्थ। मैन एक दिन के बारे में बाईस,शून्य साँस, जिनमें से प्रत्येक शरीर में सिगरेट के धुएं में पचपन शून्य धूल कणों, पराग अनाज और कणों के एक औसत हो जाता है कर रही है। नतीजतन, श्वसन प्रणाली में के लिए एक दिन धूल के लगभग दो बड़े चम्मच हो जाता है! फेफड़ों में उनके प्रवेश को रोकने के लिए प्रकृति सांस की सिलिया विशेष कोशिकाओं है कि व्यास में बड़ा की तुलना में तीन माइक्रोन बाहर बह रहे हैं सभी कणों की एक श्लेष्मा झिल्ली प्रदान की गई है। सभी कि छोटी है, फेफड़ों में जमा किया जाता है। विभिन्न प्रतिकूल परिस्थितियों, धूम्रपान, शुष्क हवा, चिनार फुलाना, ऑटोमोबाइल निकास, औद्योगिक उत्सर्जन और इसके अलावा, एक कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली - यह सब श्वसन प्रणाली बढ़े हुए लोड से निपटने के लिए बनाता है, और इस तरह के एक अप्रिय लक्षण खांसी होती है। बलगम सुरक्षात्मक एंटीबॉडी और ब्रोन्कियल म्यूकोसा जीव की विशेषताओं के साथ धीरे-धीरे उनमें से छुटकारा हो जाता है। श्वसनी स्वस्थ व्यक्ति का उत्पादन बलगम पचास-एक सौ पचास मिलीलीटर की राशि में हर दिन। जब कोई व्यक्ति बीमार है, बलगम अधिक उत्पादन किया, जबकि बिगड़ा वेंटिलेशन और खांसी इसके निष्कासन और श्वसन अंगों की सफाई करने के लिए योगदान देता है। बलगम की ठहराव फेफड़ों की सूजन उत्पन्न - निमोनिया। लेकिन खांसी हमेशा राहत प्रदान नहीं करता है, यह अक्सर नींद और स्वास्थ्य बाधित। इसके अलावा, यह ARI रोगों से भी ज्यादा खतरनाक का संकेत है, और दवाओं केवल मदद नहीं कर सकता की एक किस्म के उपयोग किया जा सकता है, लेकिन यह भी अपने स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा। खांसी शरीर की श्वसन प्रणाली के किसी भी हिस्से की सूजन का एक अभिव्यक्ति हो सकती है, साथ ही निम्नलिखित बीमारियों और शर्तों का एक लक्षण भी हो सकता हैः - लैरींगाइटिस; - tracheitis; - ब्रोंकाइटिस; - निमोनिया; - पेट्यूसिस और पैराकोटस; - एलर्जी रोग; - फुफ्फुसीय तपेदिक; - अस्थमा; - परिफुफ्फुसशोथ; - श्वसन असुविधा; - जुनूनी-बाध्यकारी विकार। खांसी वाले व्यक्ति की हालत कैसे छुटकारा पाएं? खांसी से मैं क्या आवेदन कर सकता हूं? यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस लक्षण, यानी, उसकी खांसी क्या है। खांसी सूखी और गीली में बांटा गया है। ऊपरी श्वसन पथ की जलन के कारण बीमारी की शुरुआत में सूखी खांसी अक्सर परेशान होती है, जब श्लेष्म अभी तक पर्याप्त नहीं होता है। सूखी खांसी शरीर से छुटकारा नहीं पाती है, लेकिन इसके विपरीत, कभी-कभी यह केवल एक व्यक्ति को कम कर देती है। गीले को उत्पादक के रूप में जाना जाता है, यानी, जिसमें बहुत अधिक श्लेष्म पैदा होता है, जब व्यक्ति खांसी खाता है तो उसे शरीर से हटा दिया जाता है। इस तरह की खांसी को दबाया नहीं जाना चाहिए, क्योंकि इसके साथ शरीर साफ हो जाता है। खांसी के इलाज में मुख्य कार्य - शुष्कएक गीले, कम परेशान में अनुवाद करें। तब प्रभावित श्लेष्म ट्रेकेआ या ब्रोंची प्राकृतिक रूप से सूजन के उत्पादों से शुद्ध हो जाएंगे। और जब वे पूरी तरह से साफ़ हो जाते हैं, तो खांसी परेशान हो जाएगी। जब खांसी गीली हो जाती है, तो यह कम होती हैरोगी चिंता करता है। गीले और कम परेशान होने के लिए, आमतौर पर यह निर्धारित माध्यम है कि श्लेष्म की मात्रा में वृद्धि और स्वाद के कमजोर पड़ने में योगदान होता है। इन्हें आम तौर पर विभिन्न प्रकार के अर्क और हर्बल-आधारित मिश्रणों के साथ-साथ सिंथेटिक माध्यमों को खांसी में खांसी में मदद करने के लिए शामिल किया जाता है। इसे जल्दी से अलग करने के लिए, यह मोटी और चिपचिपा नहीं होना चाहिए। गीली खांसी से कई मिश्रण, infusions, हर्बल सिरप हैं। वास्तव में, ज्यादातर मामलों में, किसी भी एआरडी का कोर्स कुछ कानूनों के अधीन होता है, और यदि यह एक सामान्य एआरडी या ब्रोंकाइटिस है, पर्याप्त पीने और आवश्यक हवा नमी के साथ, खांसी धीरे-धीरे गीली होती है। इसलिए, फार्मेसी में सबसे प्रभावी दवाओं का एक गुच्छा भर्ती करना हमेशा जरूरी नहीं है, क्योंकि यहां तक कि सबसे महंगी उपाय भी बिजली को तेज नहीं करेगा। आप फार्मास्युटिकल जड़ी बूटियों के शोरबा के रूप में हमेशा खांसी से सस्ता प्रभावी उपाय चुन सकते हैं। यदि रोगी की गीली खांसी होती है, और शुक्राणु को आसानी से हटा दिया जाता है, तो उसे उम्मीदवार दवाएं देने की सलाह नहीं दी जाती है, क्योंकि लगभग सभी श्वसन पथ में श्लेष्म की मात्रा में वृद्धि में योगदान देते हैं। इसके अलावा, आप डॉक्टर के पर्चे के बिना दवाएं नहीं ले सकते हैं, खासतौर पर बच्चे, जिनके लिए वे खतरनाक स्थिर स्पुतम और जटिलताओं के विकास हैं। यदि खांसी दूर नहीं जाती है, तो रोगी की जांच करने के बाद डॉक्टर द्वारा एक प्रभावी खांसी का उपाय निर्धारित किया जाना चाहिए। दवा का लंबा इतिहास एक विशाल जानता हैइस बीमारी के लिए नुस्खे की संख्या, जो पीढ़ी से पीढ़ी तक पारित की जाती है और अभी भी मानव जाति द्वारा उपयोग की जाती है, और कुछ नई दवाओं के आधार पर बनाई जाती है। गीले मौसम में खांसी बढ़ जाती है,इस तथ्य के कारण कि इसकी उत्पत्ति माइक्रोबियल नहीं हो सकती है, लेकिन कवक। इस तरह की ब्रोंकाइटिस पारंपरिक एंटीबायोटिक उपचार के लिए उपयुक्त नहीं है और हमेशा पुरानी हो जाती है। इसके अलावा, नम्रता मोल्ड कवक के गहन प्रजनन के लिए सबसे उपयुक्त है, उनके सबसे छोटे स्पायर धूल के साथ श्वसन पथ में प्रवेश करते हैं। एक मजबूत प्रतिरक्षा वाले व्यक्ति के लिए हानिकारक, वे पंखों में इंतजार कर रहे हैं, ताकि शरीर की प्राकृतिक रक्षा के पहले कमजोर होने पर, यह हमला करेगा। इसलिए, विश्वसनीयता के लिए आपको एंटीफंगल जड़ी बूटी बनाने की जरूरत है। उदाहरण के लिए, सुगंधित रसीद थाइम चाय, जो रोगजनक कवक के खिलाफ सक्रिय है। यह एक कीटाणुनाशक, विरोधी भड़काऊ, सुखदायक, प्रत्याशित कार्रवाई है। वही गुणों में थाइम है, जोशरीर को बहुत अच्छी तरह से गर्म करता है। शोरबा ऐसा करते हैंः एक बड़ा चम्मच। एल। थाइम दो सौ मिलीलीटर की मात्रा में उबलते पानी डालें और कई घंटों तक लपेटें। दो बड़ा चम्मच पीओ। एल। ब्रोंकाइटिस के साथ दिन में चार बार, खांसी खांसी, शुष्क स्पास्टिक खांसी, ब्रोन्कियल अस्थमा। आजकल, दवा के बिना उपचार, के साथप्रकृति के उपहारों का उपयोग तेजी से लोकप्रियता प्राप्त कर रहा है। हर्बल दवाएं अच्छी तरह से सहन की जाती हैं, वे कृत्रिम अनुरूपों की तुलना में दुर्लभ और हल्के साइड इफेक्ट्स हैं। उनमें जैविक रूप से सक्रिय पदार्थों की एक पूरी श्रृंखला शामिल होती है जो शरीर पर जटिल प्रभाव प्रदान करती हैं। खांसी के लिए, लोक उपचार कई वयस्कों की मदद करते हैं, उदाहरण के लिएः - लहसुन का एक टुकड़ा चॉप, एक कंटेनर में दो कप दूध के साथ डाल दिया। उबाल लें, गर्मी से निकालें, ठंडा करें और शहद के तीस ग्राम जोड़ें। पूरे दिन उपभोग करें। - एक चिकन अंडे उबालें, काट लें, शहद के एक चम्मच के साथ अच्छी तरह मिलाएं और खाएं। - फोड़ा करने के लिए आधा लीटर दूध, से व्यंजन हटा देंप्लेटें और एक बड़ा चम्मच डालना। एल। पाइन कलियों। अच्छी तरह से लपेटो, थोड़ा गर्म शोरबा जोर देते हैं। एक दिन के लिए इसका इस्तेमाल करें, अगर खांसी एक समय में गुजरती नहीं है, तो प्रक्रिया दोहराएं। - खांसी के वयस्कों के लिए वोदका के आधार पर लोक उपचार तैयार किए जाते हैं। पाइन नट्स का गिलास पीसें, चीनी का गिलास और आधा लीटर वोदका जोड़ें। दो सप्ताह बनाए रखने और दिन में तीन बार पाँच मिलीलीटर पर स्वीकार करने के लिए। - दो बड़ा चम्मच। एल। आधा लीटर वोदका के लिए सामान्य गाजर के बीज, सात दिनों के लिए भिगो दें। एक बड़ा चम्मच का प्रयोग करें। एल। खाने के बाद कुछ घंटे बाद, पीना नहीं। यदि एक लंबी खांसी दूर नहीं जाती है, तो एक प्रभावी खांसी का उपाय निम्नलिखित पर लागू होता हैः - एक कच्ची जर्दी, चीनी का एक सौ ग्राम, मक्खन के तीस ग्राम लें और अच्छी तरह से पीस लें। - इस मिश्रण में उबला हुआ दूध जोड़ें। बिस्तर में गर्म पीएं, अच्छी तरह से लपेटा। खांसी तीन-चार ऐसी प्रक्रियाओं के बाद गुजरती है। - अगर खांसी दूर नहीं जाती है, तो यह प्रभावी खांसी का इलाज करने में मदद करेगा। एक अंगूर के लुगदी को क्रश करें एक सौ बीस ग्राम कैहर्स और शहद के दो सौ ग्राम जोड़ें। हर घंटे, उत्पाद का एक बड़ा चमचा लें। फुफ्फुसीय तपेदिक के लिए एक इलाजः - एक बड़ा चम्मच एल। चॉकरी एक बड़ा चम्मच के साथ कनेक्ट करें। एल। मातृभाषा, शाम को एक थर्मॉस में डालना और उबलते पानी के चार सौ मिलीलीटर डालना। - पूरे दिन पीने के लिए तनावग्रस्त जलसेक। शाम को, एक बार फिर एक थर्मॉस में घास डालें और सुबह में एक नया जलसेक लें। - जलसेक प्राप्त करने के दो महीने छड़ी कोच को नष्ट कर देते हैं। जब खांसी दूर नहीं जाती है तो एक रगड़ भी बहुत मदद करता है। यदि एक प्रभावी खांसी का उपाय प्राप्त किया जाता हैध्यान से एक गिलास शहद, वोदका और तला हुआ सूरजमुखी तेल मिलाएं। इस संरचना में कपास नैपकिन, और बाहर निकलने के लिए, छाती और पीठ पर बाहर रखना। संपीड़न कागज, सूती और लपेटें अच्छी तरह से कवर करें। आधा घंटा रखें। इस मामले में, आपको माथे पर पसीने की बूंदों की उपस्थिति से पहले पसीने के लिए लपेटने की जरूरत है। नुस्खा साबित होता है, ब्रोंकाइटिस और निमोनिया के साथ मदद करता है। बच्चों के लिए सबसे प्रभावी खांसी उपाय -अनाज तेल आपको अपने बच्चे के लिए एक स्वस्थ और स्वादिष्ट घरेलू उपचार बनाने के लिए एनीज तेल खरीदना चाहिए। एक चम्मच में। शहद ड्रिप तेल की एक बूंद, मिश्रण, गर्म चाय के साथ एक पेय दें। भोजन से एक घंटे पहले एक घंटे के लिए दिन में चार बार पीएं। मीठी दवा ब्रोंकाइटिस, लैरींगजाइटिस, किसी भी खांसी और ठंड का इलाज करती है। छोटे बच्चों के लिए एक और नुस्खा। सरसों, शहद, आटा और वनस्पति तेल के बराबर मात्रा लें। सभी संपीड़न के लिए गठबंधन और आवेदन करें। यह नुस्खा एंटीबायोटिक्स शक्तिहीन होने पर भी मदद करता है। आप अरोमा के साथ खांसी शांत कर सकते हैंऔषधीय पौधों ऐसा करने के लिए, गर्म पानी के गिलास में आपको टकसाल, अनाज या लैवेंडर के आवश्यक तेल की एक-दो बूंदों को छोड़ना होगा और बच्चे के बिस्तर के बगल में व्यंजन डालना होगा। गर्भवती महिलाओं का इलाज करने की जरूरत है,अन्यथा, एक उपेक्षित बीमारी मां के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है और बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है। उपचार गर्भावस्था की अवधि पर निर्भर करता है, क्योंकि, जैसा कि आप जानते हैं, लगभग सभी दवाएं पहले तिमाही में contraindicated हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए क्या खांसी हो सकती है विभिन्न हर्बल इनहेलेशन, शहद के साथ गर्म दूध पीना या नींबू के साथ चाय। इस अवधि पर फार्मेसी दवाएं होनी चाहिएरसायन शास्त्र के साथ बच्चे को नुकसान पहुंचाने के लिए सावधान रहें। यदि गोलियों के बिना करना असंभव है, तो पर्यवेक्षण चिकित्सक व्यक्तिगत रूप से विकासशील भ्रूण के लिए न्यूनतम जोखिम के साथ खांसी की दवा का चयन करता है। इस तरह का एक उपकरण खांसी की गोलियां "मुकाल्टिन" हो सकता है, जो सब्जी कच्चे माल के आधार पर बनाया जाता है। दवा के सक्रिय घटक - अल्टेरिया निकालेंऔर सोडा - नवजात शिशु पर खतरनाक प्रभाव नहीं पड़ता है, अल्टे श्वसन पथ के कार्य में सुधार करता है, जिससे शुक्राणु का गठन बढ़ता है। सोडा जो एक तैयारी का हिस्सा है, एक कफ को पतला कर देता है। यह सब खांसी उत्पादक बनाता है और भविष्य की माँ की वसूली में तेजी लाता है। "हर्बियन" - फार्मेसी खांसी सिरप,ब्रोंकोडाइलेटर और एंटीस्पाज्मोडिक गुणों के साथ एक औषधीय द्रव का प्रतिनिधित्व करते हैं। सिरप की संरचना एक प्राकृतिक घटक है - सूखे आईवी निकालने, जो शरीर को उपचार सामग्री के साथ समृद्ध करता है। "Gerbion" खांसी का सही ढंग से उपयोग करने के लिए, उपयोग के लिए निर्देश इस प्रकार दवा की खुराक का वर्णन करते हैंः - छः साल से वयस्क और बच्चे - दिन में तीन बार पाँच-सात दशमलव पाँच मिलीलीटर; - दो से छः साल के बच्चे - दो दशमलव पाँच मिलीलीटर दिन में तीन बार; - दो साल से कम उम्र के - केवल डॉक्टर द्वारा निर्धारित अगर। विरोधाभास भी मौजूद हैं - ड्रग्स के घटकों के साथ-साथ फ्रक्टोज़ के असहिष्णुता वाले मरीजों द्वारा दवा नहीं ली जानी चाहिए। गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान "गेरबियन" का भी उपयोग नहीं किया जा सकता है। इस तरह के मलम के मुख्य तत्व पशु वसा और आवश्यक तेल हैं। त्वचा के साथ उनके संपर्क की प्रक्रिया में, निम्नलिखित प्रक्रियाएं होती हैंः - रक्त परिसंचरण में सुधार हुआ है; - आवश्यक तेलों के फायदेमंद वाष्पीकरण श्वसन मार्ग पर लाभकारी प्रभाव पड़ता है; - शरीर गर्म हो रहा है। मलहम छाती रगड़ - यह मदद करता हैसूजन को हटाने, रोगजनक सूक्ष्मजीवों का विनाश। वार्मिंग की मदद से, ब्रोंची का विस्तार, खांसी और झुकाव से राहत मिलती है। इस प्रभाव के अलावा, त्वचा के माध्यम से प्राप्त होने वाले घटकों, प्रतिरक्षा प्रणाली के काम को बढ़ाते हैं। उन कुछ तरीकों से इलाज करने के लिए मलम का मतलब है कि आप बच्चे को नुकसान पहुंचाने के जोखिम के बिना खांसी और ठंड के साथ गर्भवती हो सकते हैं। छोटे बच्चों के लिए भी उपयोग करना संभव है। प्रोपोलिस के साथ खांसी क्रीम भी एक बहुत ही प्रभावी उपाय है। वह गर्भवती महिलाओं के लिए उपयुक्त वयस्कों और बच्चों में खांसी का सफलतापूर्वक इलाज करती है। दिल के क्षेत्र को छोड़कर छाती में प्रोपोलिस मलम की थोड़ी मात्रा रगड़ें। बीमारी की जटिलताओं को रोकने के लिए, औरसही ढंग से निदान, तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। लंबे समय तक खांसी जो एक महीने तक चलती है, अगर रक्त या सीने में दर्द होता है, तो सांस लेने में मुश्किल होती है और तेजी से, लगातार थकान, वजन घट जाता है, ठंड मनाई जाती है या तापमान अड़तीस.तीन सी से ऊपर होता है, डॉक्टर की यात्रा बस जरूरी है। इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता हैः वे एक और गंभीर बीमारी का संकेत दे सकते हैं।
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मारा गया था। जब सीज़र की हत्या होने जा रही थी, अचानक सीज़र ने ब्रूटस को अपने सामने देखा और उसके पास केवल शब्द थे जैसे उसने कहा
एट तु, ब्रूट ?, जिसका अर्थ है कि तुम भी ब्रूटस हो । मेरा मतलब है कि वह समझ नहीं पा रहे थे कि ब्रूसस सीज़र का दोस्त भी उसे मार सकता है
लेकिन फिर भी सीज़र मारा गया। अब, सीज़र के पास एक मंत्री था और वह एंटनी था। एंटनी सीज़र के अंतिम संस्कार पर बोलना चाहते थे,
लेकिन फिर जैसा कि आप जानते हैं, साजिशकर्ता एंटनी को बोलने की अनुमति नहीं देंगे। इसलिए, किसी तरह या दूसरे, एंटनी ने एक ऐसी स्थिति
बनाने की कोशिश की, जिसकी गारंटी दी जा सकती है और इसकी गारंटी दी गई है, क्योंकि हर कोई मानता है कि सीज़र एक अच्छा इंसान था,
लेकिन जब सीज़र मारा गया, तो वह इस धारणा पर मारा गया कि सीज़र एक था गद्दार, सीजर देशभक्त नहीं था। एंटनी इस आरोप को
अस्वीकार करना चाहता था और इसीलिए वह किसी न किसी तरह से कामयाब रहा और षडयंत्रकारियों को तैयार किया कि एंटनी को कैसर के
अंतिम संस्कार पर बोलने की अनुमति दी जाए, क्योंकि एंथनी रोमन को यह जानना चाहता था कि सीज़र गद्दार नहीं था। तो, आइए देखें कि
एंटनी ने अपना भाषण कैसे शुरू किया और यह शुरुआत किस तरह से खुलने और भीड़ को कैद करने की सूक्ष्मता की मिसाल है। इसलिए, एंटनी ने
जो पहले शब्द बोले, हम उस पर एक नजर डालते हैं। दोस्तों, रोम देशवासियों, मुझे अपने कान उधार दो। अब, जब एंथोनी ने ये बातें कीं, तो
दर्शकों के सदस्यों ने उन सभी को इन शब्दों से मोहित कर लिया और फिर बाद के शब्दों ने पीछा कियाः मैं सीजर को दफनाने आया था, उसकी
प्रशंसा करने के लिए नहीं। पुरुषों को उनके बाद रहने वाली बुराई; अच्छा है कि उनकी हड्डियों में बाधा है। तो, इसे सीज़र के साथ रहने दें । कुलीन
ब्रूटस ने बताया कि सीज़र महत्वाकांक्षी था; यदि ऐसा था, तो यह एक गंभीर दोष था, और दुख की बात है कि सीज़र ने इसका उत्तर दिया। यहाँ,
ब्रूटस की छुट्टी के तहत और बाकी ब्रूटस के लिए एक सम्माननीय आदमी है, इसलिए वे सभी, सभी माननीय पुरुष हैं - आओ मैं सीज़र के अंतिम
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मारा गया था। जब सीज़र की हत्या होने जा रही थी, अचानक सीज़र ने ब्रूटस को अपने सामने देखा और उसके पास केवल शब्द थे जैसे उसने कहा एट तु, ब्रूट ?, जिसका अर्थ है कि तुम भी ब्रूटस हो । मेरा मतलब है कि वह समझ नहीं पा रहे थे कि ब्रूसस सीज़र का दोस्त भी उसे मार सकता है लेकिन फिर भी सीज़र मारा गया। अब, सीज़र के पास एक मंत्री था और वह एंटनी था। एंटनी सीज़र के अंतिम संस्कार पर बोलना चाहते थे, लेकिन फिर जैसा कि आप जानते हैं, साजिशकर्ता एंटनी को बोलने की अनुमति नहीं देंगे। इसलिए, किसी तरह या दूसरे, एंटनी ने एक ऐसी स्थिति बनाने की कोशिश की, जिसकी गारंटी दी जा सकती है और इसकी गारंटी दी गई है, क्योंकि हर कोई मानता है कि सीज़र एक अच्छा इंसान था, लेकिन जब सीज़र मारा गया, तो वह इस धारणा पर मारा गया कि सीज़र एक था गद्दार, सीजर देशभक्त नहीं था। एंटनी इस आरोप को अस्वीकार करना चाहता था और इसीलिए वह किसी न किसी तरह से कामयाब रहा और षडयंत्रकारियों को तैयार किया कि एंटनी को कैसर के अंतिम संस्कार पर बोलने की अनुमति दी जाए, क्योंकि एंथनी रोमन को यह जानना चाहता था कि सीज़र गद्दार नहीं था। तो, आइए देखें कि एंटनी ने अपना भाषण कैसे शुरू किया और यह शुरुआत किस तरह से खुलने और भीड़ को कैद करने की सूक्ष्मता की मिसाल है। इसलिए, एंटनी ने जो पहले शब्द बोले, हम उस पर एक नजर डालते हैं। दोस्तों, रोम देशवासियों, मुझे अपने कान उधार दो। अब, जब एंथोनी ने ये बातें कीं, तो दर्शकों के सदस्यों ने उन सभी को इन शब्दों से मोहित कर लिया और फिर बाद के शब्दों ने पीछा कियाः मैं सीजर को दफनाने आया था, उसकी प्रशंसा करने के लिए नहीं। पुरुषों को उनके बाद रहने वाली बुराई; अच्छा है कि उनकी हड्डियों में बाधा है। तो, इसे सीज़र के साथ रहने दें । कुलीन ब्रूटस ने बताया कि सीज़र महत्वाकांक्षी था; यदि ऐसा था, तो यह एक गंभीर दोष था, और दुख की बात है कि सीज़र ने इसका उत्तर दिया। यहाँ, ब्रूटस की छुट्टी के तहत और बाकी ब्रूटस के लिए एक सम्माननीय आदमी है, इसलिए वे सभी, सभी माननीय पुरुष हैं - आओ मैं सीज़र के अंतिम
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भारत में कच्चे तेल के उत्पादन में गिरावट देखने को मिली है. देश में कच्चे तेल के उत्पादन में 3. 3 प्रतिशत घटोतरी हुई है. और इसके साथ ही सर्वजनिक और निजी क्षेत्र से भी तेल उत्पादन में गिरावट देखने को मिली है. इस विषय में पेट्रोलियम और प्राकृत गैस मंत्रालय की और से जारी एक बयान में कहा गया कि कच्चे तेल का उत्पादन नवंबर में 3. 3 प्रतिशत घटकर 30. 4 लाख टन पर पहुंच गया है, जो कि पिछले साल 31. 5 लाख टन के लगभग था.
वही सार्वजानिक क्षेत्र के ONGC का उत्पादन 1. 3 प्रतिशत घटा है और यह 18. 4 लाख टन ही रह गया है. वाही oil इंडिया का उत्पादन भी 2,64,878 टन रहा जो कि 7. 18 प्रतिशत घटा है.
वही निजी कम्पनियो का उत्पादन 6 प्रतिशत घटकर 9,36,647 टन रह गया है. वही देश के लगभग 22 रिफाइनरियों का प्रसंसकरण अपेक्षाकृत 2. 53 प्रतिशत अधिक रहा. इन रिफाइनरियों ने इस दौरान 1. 97 करोड़ टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया.
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भारत में कच्चे तेल के उत्पादन में गिरावट देखने को मिली है. देश में कच्चे तेल के उत्पादन में तीन. तीन प्रतिशत घटोतरी हुई है. और इसके साथ ही सर्वजनिक और निजी क्षेत्र से भी तेल उत्पादन में गिरावट देखने को मिली है. इस विषय में पेट्रोलियम और प्राकृत गैस मंत्रालय की और से जारी एक बयान में कहा गया कि कच्चे तेल का उत्पादन नवंबर में तीन. तीन प्रतिशत घटकर तीस. चार लाख टन पर पहुंच गया है, जो कि पिछले साल इकतीस. पाँच लाख टन के लगभग था. वही सार्वजानिक क्षेत्र के ONGC का उत्पादन एक. तीन प्रतिशत घटा है और यह अट्ठारह. चार लाख टन ही रह गया है. वाही oil इंडिया का उत्पादन भी दो,चौंसठ,आठ सौ अठहत्तर टन रहा जो कि सात. अट्ठारह प्रतिशत घटा है. वही निजी कम्पनियो का उत्पादन छः प्रतिशत घटकर नौ,छत्तीस,छः सौ सैंतालीस टन रह गया है. वही देश के लगभग बाईस रिफाइनरियों का प्रसंसकरण अपेक्षाकृत दो. तिरेपन प्रतिशत अधिक रहा. इन रिफाइनरियों ने इस दौरान एक. सत्तानवे करोड़ टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया.
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किसानों व गुर्जरों में पिछले दिनों से पशुओं को खेतों में चराने को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। इसमें पहले डरोली खुर्द के एक किसान के खेत में पशुओं के घुसने से फसल खराब हुई तो किसानों ने गुर्जरों को समझाया। इस पर दोनों पक्ष भिड़ गए।
बाद में गुर्जरों ने माफी मांगी और राजीनामा कर लिया। अब उसी किसान के बेटे व अन्य युवक को गुर्जरों ने मारपीट की, जिसके बाद किसानों ने युवकों को अस्पताल में भर्ती करवाकर जालंधर-होशियारपुर मार्ग पर आवजाही ठप करके धरना लगा दिया।
देर शाम तक किसान आरोपियों की गिरफ्तारी और केस दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे। उधर, पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। फिलहाल कोई आरोपी पुलिस के हाथ नहीं लगा है। सुबह से ही रोड जाम होने की वजह से लोगों को पूरा दिन भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
बड़े वाहनों से लेकर दोपहिया वाहन शहर की संकरी गलियों में फंसे रहे व सारे शहर में जाम की स्थिति बनी रही। इस दौरान कई बार एंबुलेंस को रास्ता देने के लिए किसानों ने बैरिकेड हटाए पर पैदल व दोपहिया वाहन चालकों को निकलने के लिए रास्ता नहीं मिला।
इसका कारण थाने के सामने पुल निर्माण होने की वजह से खोदे गए गड्ढे थे। शाम 7:15 बजे पुलिस ने तनवीर सिंह पुत्र हरभजन सिंह डरोली खुर्द व जसविंदर सिंह पुत्र हरजीत सिंह चूहड़वाली को अगवा कर मारपीट करने के आरोप में गुर्जरों के खिलाफ 364 का पर्चा दर्ज किया तो किसानों ने हाईवे से धरना खत्म किया।
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किसानों व गुर्जरों में पिछले दिनों से पशुओं को खेतों में चराने को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। इसमें पहले डरोली खुर्द के एक किसान के खेत में पशुओं के घुसने से फसल खराब हुई तो किसानों ने गुर्जरों को समझाया। इस पर दोनों पक्ष भिड़ गए। बाद में गुर्जरों ने माफी मांगी और राजीनामा कर लिया। अब उसी किसान के बेटे व अन्य युवक को गुर्जरों ने मारपीट की, जिसके बाद किसानों ने युवकों को अस्पताल में भर्ती करवाकर जालंधर-होशियारपुर मार्ग पर आवजाही ठप करके धरना लगा दिया। देर शाम तक किसान आरोपियों की गिरफ्तारी और केस दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे। उधर, पुलिस का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। फिलहाल कोई आरोपी पुलिस के हाथ नहीं लगा है। सुबह से ही रोड जाम होने की वजह से लोगों को पूरा दिन भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बड़े वाहनों से लेकर दोपहिया वाहन शहर की संकरी गलियों में फंसे रहे व सारे शहर में जाम की स्थिति बनी रही। इस दौरान कई बार एंबुलेंस को रास्ता देने के लिए किसानों ने बैरिकेड हटाए पर पैदल व दोपहिया वाहन चालकों को निकलने के लिए रास्ता नहीं मिला। इसका कारण थाने के सामने पुल निर्माण होने की वजह से खोदे गए गड्ढे थे। शाम सात:पंद्रह बजे पुलिस ने तनवीर सिंह पुत्र हरभजन सिंह डरोली खुर्द व जसविंदर सिंह पुत्र हरजीत सिंह चूहड़वाली को अगवा कर मारपीट करने के आरोप में गुर्जरों के खिलाफ तीन सौ चौंसठ का पर्चा दर्ज किया तो किसानों ने हाईवे से धरना खत्म किया। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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LIVE Moradabad UP Chunav Result 2022 News in Hindi मुरादाबाद जिले की छह विधानसभा सीट में से पांच पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों ने कब्जा जमा लिया है। भाजपा के हाथ सिर्फ एक सीट लगी है। जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को दो सीट पर जीत मिली थी।
मुरादाबाद, जेएनएन। UP Election Result 2022 : मुरादाबाद जिले की छह विधानसभा सीट में से पांच पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों ने कब्जा जमा लिया है। भाजपा के हाथ सिर्फ एक सीट लगी है। जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को दो सीट पर जीत मिली थी। यूपी चुनाव 2022 में समाजवादी पार्टी ने मुरादाबाद की देहात, कुंदरकी, कांठ, ठाकुरद्वारा और बिलारी सीट पर जीत दर्ज की है। छह में से पांच पर सपा ने जीत दर्ज की है। मुरादाबाद नगर सीट भाजपा ने जीती है। 2017 के चुनाव में भाजपा ने मुरादाबाद नगर और कांठ सीट जीती थी, जिसमें से कांठ विधायक राजेश कुमार चुन्नू हार गए हैं। जबकि मुरादाबाद नगर से विधायक रितेश गुप्ता ने जीत दर्ज की है।
नगर सीट : रितेश गुप्ता (भाजपा)(घोषणा नहीं)
देहात सीट : नासिक कुरैशी (सपा)
कांठ : कमाल अख्तर (सपा)
बिलारी : मुहम्मद फईम (सपा)
ठाकुरद्वारा : नवाज जान (सपा)
कुंदरकी : जियाउर्रहमान (सपा)
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LIVE Moradabad UP Chunav Result दो हज़ार बाईस News in Hindi मुरादाबाद जिले की छह विधानसभा सीट में से पांच पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों ने कब्जा जमा लिया है। भाजपा के हाथ सिर्फ एक सीट लगी है। जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को दो सीट पर जीत मिली थी। मुरादाबाद, जेएनएन। UP Election Result दो हज़ार बाईस : मुरादाबाद जिले की छह विधानसभा सीट में से पांच पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों ने कब्जा जमा लिया है। भाजपा के हाथ सिर्फ एक सीट लगी है। जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को दो सीट पर जीत मिली थी। यूपी चुनाव दो हज़ार बाईस में समाजवादी पार्टी ने मुरादाबाद की देहात, कुंदरकी, कांठ, ठाकुरद्वारा और बिलारी सीट पर जीत दर्ज की है। छह में से पांच पर सपा ने जीत दर्ज की है। मुरादाबाद नगर सीट भाजपा ने जीती है। दो हज़ार सत्रह के चुनाव में भाजपा ने मुरादाबाद नगर और कांठ सीट जीती थी, जिसमें से कांठ विधायक राजेश कुमार चुन्नू हार गए हैं। जबकि मुरादाबाद नगर से विधायक रितेश गुप्ता ने जीत दर्ज की है। नगर सीट : रितेश गुप्ता देहात सीट : नासिक कुरैशी कांठ : कमाल अख्तर बिलारी : मुहम्मद फईम ठाकुरद्वारा : नवाज जान कुंदरकी : जियाउर्रहमान
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देश के कोने-कोने से आए भाजपा नेताओं के खाने में लिट्टी चोखा के साथ परोसे जाएंगे दलपिट्ठी, अनारसा के साथ और भी बहुत भी कुछ. .
बिहार में राजनीतिक बदलाव की बयार : संयुक्त मोर्चा कार्यकारिणी के बहाने सभी राजनीतिक दलों को भाजपा दिखा रही शक्ति प्रदर्शन !
भाजपा MLC का नीतीश सरकार पर तंज, कहा- 'यहां शिक्षा व्यवस्था ऐसी है कि बिना पढ़े ही बच्चे पास हो जाते हैं'
Phone No.
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देश के कोने-कोने से आए भाजपा नेताओं के खाने में लिट्टी चोखा के साथ परोसे जाएंगे दलपिट्ठी, अनारसा के साथ और भी बहुत भी कुछ. . बिहार में राजनीतिक बदलाव की बयार : संयुक्त मोर्चा कार्यकारिणी के बहाने सभी राजनीतिक दलों को भाजपा दिखा रही शक्ति प्रदर्शन ! भाजपा MLC का नीतीश सरकार पर तंज, कहा- 'यहां शिक्षा व्यवस्था ऐसी है कि बिना पढ़े ही बच्चे पास हो जाते हैं' Phone No.
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पबजी गेम की खेलते हुए एक नाबालिग से फ्रेंडशिप कर उसके प्राइवेट फोटो और वीडियो मंगवाने तथा बात बंद करने पर वीडियो इंस्टाग्राम पर डालने का मामला सामने आया है। आरोपी युवक सिरसा का है जबकि युवती करनाल की है।
पुलिस पूछताछ में पता चला कि बदमाश पबजी गेम खेलता था। इसी दौरान उसकी करनाल में रहने वाली नाबालिग लड़की से फ्रेंडशिप हो गई। गेम खेलते-खेलते वह एक-दूसरे से बात करने लगे। बदमाश ने गहरी दोस्ती कर नाबालिग को भरोसे में ले लिया। इसके बाद उसे फुसलाकर उसकी प्राइवेट फोटो और वीडियो मांग ली। जिसे उसने अपने मोबाइल में सेव कर लिया। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत चलती रही। घरवालों को पता चला तो उन्होंने नाबालिग को उससे बात करने से मना कर दिया।
भड़के बदमाश ने प्राइवेट फोटो और वीडियो की स्टोरी तैयार कर इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दी। इसका पता चलते ही परिजन पुलिस के पास पहुंचे। पुलिस ने बदमाश के खिलाफ केस दर्ज कर उसे पकड़ लिया। जिसे अब जेल भेज दिया गया है।
परिजनों को चल गया पता था कि नाबालिग बेटी की किसी लड़के से फ्रेंडशिप है। उन्होंने सख्ती से पूछा तो नाबालिग लड़की ने सारा राज उगल दिया कि किस तरह उसकी बदमाश से दोस्ती हुई। यह जानकर परिजनों ने लड़की को लड़के से बात करने से मना कर दिया। उसने लड़के के मैसेज का जवाब देना बंद कर दिया।
लड़की के बात न करने पर बदमाश भड़क उठा। उसने नाबालिग लड़की को बदनाम करने की ठान ली। उसने लड़की के सभी प्राइवेट वीडियो और फोटो की स्टोरी बना इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दी। यह बात परिजनों तक पहुंच गई। जिसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को शिकायत कर दी।
परिजन 10 अक्टूबर को शिकायत लेकर करनाल पुलिस के पास पहुंचे। पुलिस ने तुरंत मां की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया। इसके बाद हाईटेक तरीके से आरोपी की तलाश शुरू कर दी। उसकी शिनाख्त सिरसा के गांव तलवाड़ा खुर्द के रहने वाले बजजिंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने रेड करते ही आरोपी का मोबाइल भी बरामद कर लिया। इसी मोबाइल पर वह लड़की से बात करता था। पुलिस उसमें से वीडियो-फोटो रिकवर करने के साथ जांच करवा रही है। पुलिस को यह भी शक है कि किसी दूसरे को तो उसने वीडियो नहीं भेजी या कहीं किसी दूसरे सोशल मीडिया पर अपलोड तो नहीं की। आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
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पबजी गेम की खेलते हुए एक नाबालिग से फ्रेंडशिप कर उसके प्राइवेट फोटो और वीडियो मंगवाने तथा बात बंद करने पर वीडियो इंस्टाग्राम पर डालने का मामला सामने आया है। आरोपी युवक सिरसा का है जबकि युवती करनाल की है। पुलिस पूछताछ में पता चला कि बदमाश पबजी गेम खेलता था। इसी दौरान उसकी करनाल में रहने वाली नाबालिग लड़की से फ्रेंडशिप हो गई। गेम खेलते-खेलते वह एक-दूसरे से बात करने लगे। बदमाश ने गहरी दोस्ती कर नाबालिग को भरोसे में ले लिया। इसके बाद उसे फुसलाकर उसकी प्राइवेट फोटो और वीडियो मांग ली। जिसे उसने अपने मोबाइल में सेव कर लिया। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत चलती रही। घरवालों को पता चला तो उन्होंने नाबालिग को उससे बात करने से मना कर दिया। भड़के बदमाश ने प्राइवेट फोटो और वीडियो की स्टोरी तैयार कर इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दी। इसका पता चलते ही परिजन पुलिस के पास पहुंचे। पुलिस ने बदमाश के खिलाफ केस दर्ज कर उसे पकड़ लिया। जिसे अब जेल भेज दिया गया है। परिजनों को चल गया पता था कि नाबालिग बेटी की किसी लड़के से फ्रेंडशिप है। उन्होंने सख्ती से पूछा तो नाबालिग लड़की ने सारा राज उगल दिया कि किस तरह उसकी बदमाश से दोस्ती हुई। यह जानकर परिजनों ने लड़की को लड़के से बात करने से मना कर दिया। उसने लड़के के मैसेज का जवाब देना बंद कर दिया। लड़की के बात न करने पर बदमाश भड़क उठा। उसने नाबालिग लड़की को बदनाम करने की ठान ली। उसने लड़की के सभी प्राइवेट वीडियो और फोटो की स्टोरी बना इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दी। यह बात परिजनों तक पहुंच गई। जिसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस को शिकायत कर दी। परिजन दस अक्टूबर को शिकायत लेकर करनाल पुलिस के पास पहुंचे। पुलिस ने तुरंत मां की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया। इसके बाद हाईटेक तरीके से आरोपी की तलाश शुरू कर दी। उसकी शिनाख्त सिरसा के गांव तलवाड़ा खुर्द के रहने वाले बजजिंदर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने रेड करते ही आरोपी का मोबाइल भी बरामद कर लिया। इसी मोबाइल पर वह लड़की से बात करता था। पुलिस उसमें से वीडियो-फोटो रिकवर करने के साथ जांच करवा रही है। पुलिस को यह भी शक है कि किसी दूसरे को तो उसने वीडियो नहीं भेजी या कहीं किसी दूसरे सोशल मीडिया पर अपलोड तो नहीं की। आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कश्मीर सहित देशभर में आतंकी घटनाओं में लिप्त दो कश्मीरियों की जमानत याचिका पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी से जवाब मांगा है। उनके खिलाफ 2021 में यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था।
एनआईए ने गृह मंत्रालय (सीटीसीआर डिवीजन) के एक आदेश के आधार प प्राथमिकी दर्ज की थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम), हिजाब जैसे विभिन्न आतंकवादी संगठनों के कैडर हैं। उल-मुजाहिदीन (एचएम), अल बद्र और उनके सहयोगी जम्मू-कश्मीर और अन्य जगहों पर सक्रिय हैं। एनआईए के अनुसार लंगू जानबूझकर कश्मीर घाटी में कई हमले करने के लिए आतंकवादियों और अन्य सह-आरोपी व्यक्तियों द्वारा रची गई साजिश में शामिल हो गया। उस पर कश्मीर घाटी और देश के अन्य हिस्सों में अशांति पैदा करने के लिए विभिन्न आतंकवादी संगठनों के निर्देशों के अनुसार आतंकवादी संगठनों की विचारधारा के लिए सक्रिय रूप से काम करने का भी आरोप लगाया गया है।
आदिल के खिलाफ एजेंसी ने आरोप लगाया है कि छापे और तलाशी के दौरान उसके पास से आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई थी। यह आरोप लगाया गया कि आदिल ने खुद खुलासा किया कि वह आतंकवादी संगठनों के नेटवर्क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ था और उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करता था। सह-आरोपी, 25 वर्षीय कश्मीर स्थित फोटो जर्नलिस्ट मोहम्मद मनन डार को निचली अदालत ने जनवरी में इस मामले में जमानत दे दी थी।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कश्मीर सहित देशभर में आतंकी घटनाओं में लिप्त दो कश्मीरियों की जमानत याचिका पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी से जवाब मांगा है। उनके खिलाफ दो हज़ार इक्कीस में यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था। एनआईए ने गृह मंत्रालय के एक आदेश के आधार प प्राथमिकी दर्ज की थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि लश्कर-ए-तैयबा , जैश-ए-मोहम्मद , हिजाब जैसे विभिन्न आतंकवादी संगठनों के कैडर हैं। उल-मुजाहिदीन , अल बद्र और उनके सहयोगी जम्मू-कश्मीर और अन्य जगहों पर सक्रिय हैं। एनआईए के अनुसार लंगू जानबूझकर कश्मीर घाटी में कई हमले करने के लिए आतंकवादियों और अन्य सह-आरोपी व्यक्तियों द्वारा रची गई साजिश में शामिल हो गया। उस पर कश्मीर घाटी और देश के अन्य हिस्सों में अशांति पैदा करने के लिए विभिन्न आतंकवादी संगठनों के निर्देशों के अनुसार आतंकवादी संगठनों की विचारधारा के लिए सक्रिय रूप से काम करने का भी आरोप लगाया गया है। आदिल के खिलाफ एजेंसी ने आरोप लगाया है कि छापे और तलाशी के दौरान उसके पास से आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई थी। यह आरोप लगाया गया कि आदिल ने खुद खुलासा किया कि वह आतंकवादी संगठनों के नेटवर्क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ था और उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करता था। सह-आरोपी, पच्चीस वर्षीय कश्मीर स्थित फोटो जर्नलिस्ट मोहम्मद मनन डार को निचली अदालत ने जनवरी में इस मामले में जमानत दे दी थी। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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नईदिल्ली। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के लिए मेयर का चुनाव आज भी नहीं हो सका। पार्षदों के हंगामे की वजह से पीठासीन अधिकारी ने सदन की कार्यवाही को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया । इस बीच, आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि आज ही एमसीडी मेयर चुनाव कराए जाए। आप नेता आतिशी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चुनाव कराने की मांग की है। आतिशी ने कहा है कि इस मामले को लेकर आप आज ही सुप्रीम कोर्ट जाएगी।
वहीं, आप नेता अतिशी ने आज सुबह आरोप लगाया था कि भाजपा की पीठासीन अधिकारी बार-बार चुनाव टाल रही हैं, क्योंकि भाजपा अबतक 'आप' पार्षद खरीद नहीं पाईं। एमसीडी सदन की बैठक छह जनवरी और 24 जनवरी को दो बार बुलाई गई थी, लेकिन भाजपा और आप के पार्षदों के हंगामे की वजह से पीठासीन अधिकारी ने मेयर का चुनाव कराए बिना कार्यवाही स्थगित कर दी थी। एमसीडी चुनाव में आप 134 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी जबकि भाजपा को 104 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस ने नौ सीटें जीती थीं।
वहीं पीठासीन अधिकारी सत्या शर्मा ने कहा कि आप पार्टी के विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी और संजीव झा को अदालत से सजा हो चुकी है इसलिए उन्हें सदन में वोट देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने दोनों को सदन से बाहर जाने का ऐलान किया, लेकिन वह नहीं गए। उसके बाद पीठासीन अधिकारी ने कहा कि सदन की गरिमा को बनाए रखने के लिए महापौर के चुनाव को अगली तारीख तक के लिए स्थगित किया जाता है।
इधर तीसरी बार चुनाव टलने के बाद आप और भाजपा में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। दोनों ही पार्टियों ने एक दूसरे को दोष देना शुरू कर दिया है। आम आदमी पार्टी का दावा है कि उसके पार्षद शांति से बैठे हुए थे और भाजपा के सदस्यों ने हंगामा किया। पार्टी ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। उधर, बीजेपी नेताओं ने 'आप' पर दोष मढ़ा है।
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नईदिल्ली। दिल्ली नगर निगम के लिए मेयर का चुनाव आज भी नहीं हो सका। पार्षदों के हंगामे की वजह से पीठासीन अधिकारी ने सदन की कार्यवाही को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया । इस बीच, आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि आज ही एमसीडी मेयर चुनाव कराए जाए। आप नेता आतिशी ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चुनाव कराने की मांग की है। आतिशी ने कहा है कि इस मामले को लेकर आप आज ही सुप्रीम कोर्ट जाएगी। वहीं, आप नेता अतिशी ने आज सुबह आरोप लगाया था कि भाजपा की पीठासीन अधिकारी बार-बार चुनाव टाल रही हैं, क्योंकि भाजपा अबतक 'आप' पार्षद खरीद नहीं पाईं। एमसीडी सदन की बैठक छह जनवरी और चौबीस जनवरी को दो बार बुलाई गई थी, लेकिन भाजपा और आप के पार्षदों के हंगामे की वजह से पीठासीन अधिकारी ने मेयर का चुनाव कराए बिना कार्यवाही स्थगित कर दी थी। एमसीडी चुनाव में आप एक सौ चौंतीस पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी जबकि भाजपा को एक सौ चार सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस ने नौ सीटें जीती थीं। वहीं पीठासीन अधिकारी सत्या शर्मा ने कहा कि आप पार्टी के विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी और संजीव झा को अदालत से सजा हो चुकी है इसलिए उन्हें सदन में वोट देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने दोनों को सदन से बाहर जाने का ऐलान किया, लेकिन वह नहीं गए। उसके बाद पीठासीन अधिकारी ने कहा कि सदन की गरिमा को बनाए रखने के लिए महापौर के चुनाव को अगली तारीख तक के लिए स्थगित किया जाता है। इधर तीसरी बार चुनाव टलने के बाद आप और भाजपा में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। दोनों ही पार्टियों ने एक दूसरे को दोष देना शुरू कर दिया है। आम आदमी पार्टी का दावा है कि उसके पार्षद शांति से बैठे हुए थे और भाजपा के सदस्यों ने हंगामा किया। पार्टी ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही है। उधर, बीजेपी नेताओं ने 'आप' पर दोष मढ़ा है।
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राजस्थान रॉयल्स ने मंगलवार को अपने घर सवाई मान सिंह स्टेडियम में खेले गए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 11वें संस्करण के मैच में किंग्स इलेवन पंजाब को 15 रनों से हरा दिया। पंजाब ने राजस्थान को 20 ओवरों में आठ विकेट के नुकसान पर 158 रनों पर ही रोक दिया था, लेकिन उसके बल्लेबाज इस आसान से लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाए और 20 ओवरों में सात विकेट खोकर सिर्फ 147 रन ही बना सके। पंजाब के लिए लोकश राहुल ने सबसे ज्यादा 95 रनों की पारी खेली। यह उनका आईपीएल में सर्वोच्च स्कोर भी है। उन्होंने अपनी पारी में 70 गेंदों का सामना किया और 11 चौकों के अलावा दो छक्के लगाए। इस जीत के साथ ही राजस्थान ने प्लेऑफ में जाने की अपनी उम्मीदों के जिंदा रखा है। राहुल के अलावा सिर्फ मार्कस स्टोइनिस ही दहाई के आंकड़े में पहुंच सके जिन्होंने 11 रन बनाए।
इससे पहले जोस बटलर की विस्फोटक पारी के बावजूद राजस्थान की टीम 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 158 रन ही बना सकी। राजस्थान के लिए सबसे अधिक 82 रन जोस बटलर ने बनाए। उन्होंने 58 गेंदों में 9 चौके और 1 छक्के की मदद से यह रन बनाए। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी राजस्थान रॉयल्स के लिए कप्तान अजिंक्य रहाणे और जोस बटलर ने पारी की शुरुआत की। दोनों नें टीम को तेज शुरुआत देने का काम किया और 3. 3 ओवर में 37 रन जोड़े लेकिन इसी ओवर में रहाणे बड़ा शॉट्स लगाने की कोशिश में कैच आउट हो गए। मिड ऑफ पर अक्षदीप नाथ ने 8 के स्कोर पर रहाणे का कैच पकड़ा।
इसके बाद बल्लेबाजी करने आए संजू सैमसन भी 22 रन बनाकर चलते बने। सैमसन को मुजीब उर रहमान ने आउट किया। इसके तुरंत बाद बटलर भी रहमान के शिकार हुए 82 रन बनाकर स्टंप आउट हो गए। इसके बाद बेन स्टोक्स भी 11 गेंदों में 14 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। वहीं पंजाब के लिए सबसे सफल गेंदबाज एंड्रयू टाइ रहे, उन्होंने चार महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए। इसके अलावा मुजीब उर रहमान को भी दो सफलता मिली।
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राजस्थान रॉयल्स ने मंगलवार को अपने घर सवाई मान सिंह स्टेडियम में खेले गए इंडियन प्रीमियर लीग के ग्यारहवें संस्करण के मैच में किंग्स इलेवन पंजाब को पंद्रह रनों से हरा दिया। पंजाब ने राजस्थान को बीस ओवरों में आठ विकेट के नुकसान पर एक सौ अट्ठावन रनों पर ही रोक दिया था, लेकिन उसके बल्लेबाज इस आसान से लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाए और बीस ओवरों में सात विकेट खोकर सिर्फ एक सौ सैंतालीस रन ही बना सके। पंजाब के लिए लोकश राहुल ने सबसे ज्यादा पचानवे रनों की पारी खेली। यह उनका आईपीएल में सर्वोच्च स्कोर भी है। उन्होंने अपनी पारी में सत्तर गेंदों का सामना किया और ग्यारह चौकों के अलावा दो छक्के लगाए। इस जीत के साथ ही राजस्थान ने प्लेऑफ में जाने की अपनी उम्मीदों के जिंदा रखा है। राहुल के अलावा सिर्फ मार्कस स्टोइनिस ही दहाई के आंकड़े में पहुंच सके जिन्होंने ग्यारह रन बनाए। इससे पहले जोस बटलर की विस्फोटक पारी के बावजूद राजस्थान की टीम बीस ओवर में आठ विकेट के नुकसान पर एक सौ अट्ठावन रन ही बना सकी। राजस्थान के लिए सबसे अधिक बयासी रन जोस बटलर ने बनाए। उन्होंने अट्ठावन गेंदों में नौ चौके और एक छक्के की मदद से यह रन बनाए। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी राजस्थान रॉयल्स के लिए कप्तान अजिंक्य रहाणे और जोस बटलर ने पारी की शुरुआत की। दोनों नें टीम को तेज शुरुआत देने का काम किया और तीन. तीन ओवर में सैंतीस रन जोड़े लेकिन इसी ओवर में रहाणे बड़ा शॉट्स लगाने की कोशिश में कैच आउट हो गए। मिड ऑफ पर अक्षदीप नाथ ने आठ के स्कोर पर रहाणे का कैच पकड़ा। इसके बाद बल्लेबाजी करने आए संजू सैमसन भी बाईस रन बनाकर चलते बने। सैमसन को मुजीब उर रहमान ने आउट किया। इसके तुरंत बाद बटलर भी रहमान के शिकार हुए बयासी रन बनाकर स्टंप आउट हो गए। इसके बाद बेन स्टोक्स भी ग्यारह गेंदों में चौदह रन बनाकर पवेलियन लौट गए। वहीं पंजाब के लिए सबसे सफल गेंदबाज एंड्रयू टाइ रहे, उन्होंने चार महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए। इसके अलावा मुजीब उर रहमान को भी दो सफलता मिली।
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युवाओं को अपना लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ना होगा, तभी सफलता प्राप्त होगी। युवाओं को सरकारी नौकरी की बजाय व्यापार की तरफ भी ध्यान देना होगा। जीवन में शत्रु, बीमारी व कर्जा नहीं होना चाहिए। यह बात शनिवार को कुशालगिरी महाराज (बॉस) ने नवलगढ़ के सूर्यमंडल में हुए कार्यक्रम लीलण- 2023 में कही। इस दौरान उन्होंने कहा कि वे राजनीति में नहीं जाएंगे।
कार्यक्रम में हरियाणा के मशहुर सिंगर विक्की काजला व राजस्थानी कलाकार शहनाज फोगा ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर सबको झूमने पर मजबूर कर दिया। युवाओं ने तालियां बजाकर कलाकारों का हौसला बढ़ाया। इस मौके पर पालिका उपाध्यक्ष कैलाश चोटिया, बीजेपी नेता ओमेंद्र चारण, पूर्व पालिकाध्यक्ष सुरेंद्र सैनी, लोहार्गल सरपंच जगमोहन, मदनसिंह बारवा, हेमंत चारण, भास्कर दुल्लड़ व महेश चौधरी मंचस्थ अतिथि थे।
छात्रनेता मधुशुदन शर्मा व बसंत सैनी ने अतिथियों का स्वागत किया। कमलकिशोर पंवार व मुकेश मारवाड़ी ने संचालन किया। इस मौके पर पार्षद हितेष थोरी, रोहित राठौड़, केतन शर्मा, सुनील गुर्जर, विनोद माली, अभिषेक शर्मा, असलम खान आदि मौजूद थे।
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युवाओं को अपना लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ना होगा, तभी सफलता प्राप्त होगी। युवाओं को सरकारी नौकरी की बजाय व्यापार की तरफ भी ध्यान देना होगा। जीवन में शत्रु, बीमारी व कर्जा नहीं होना चाहिए। यह बात शनिवार को कुशालगिरी महाराज ने नवलगढ़ के सूर्यमंडल में हुए कार्यक्रम लीलण- दो हज़ार तेईस में कही। इस दौरान उन्होंने कहा कि वे राजनीति में नहीं जाएंगे। कार्यक्रम में हरियाणा के मशहुर सिंगर विक्की काजला व राजस्थानी कलाकार शहनाज फोगा ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर सबको झूमने पर मजबूर कर दिया। युवाओं ने तालियां बजाकर कलाकारों का हौसला बढ़ाया। इस मौके पर पालिका उपाध्यक्ष कैलाश चोटिया, बीजेपी नेता ओमेंद्र चारण, पूर्व पालिकाध्यक्ष सुरेंद्र सैनी, लोहार्गल सरपंच जगमोहन, मदनसिंह बारवा, हेमंत चारण, भास्कर दुल्लड़ व महेश चौधरी मंचस्थ अतिथि थे। छात्रनेता मधुशुदन शर्मा व बसंत सैनी ने अतिथियों का स्वागत किया। कमलकिशोर पंवार व मुकेश मारवाड़ी ने संचालन किया। इस मौके पर पार्षद हितेष थोरी, रोहित राठौड़, केतन शर्मा, सुनील गुर्जर, विनोद माली, अभिषेक शर्मा, असलम खान आदि मौजूद थे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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लखनऊः 10 मार्च को यूपी चुनाव के परिणाम आने से पहले सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव में चुनाव के चलते EVM में भारी गड़बड़ी का इल्जाम लगाया तो उनके समर्थन में अब पड़ोसी प्रदेश बिहार में RJD भी उतर गई है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया है. पार्टी की ओर से केंद्रीय चुनाव आयोग पर खूब हमला बोला गया है तथा अमर्यादित भाषा का भी उपयोग किया गया है.
वही RJD के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से केंद्रीय चुनाव आयोग के आयुक्तों और अफसरों को नमक हराम कहा गया है. ट्वीट में राष्ट्रिय जनता दल ने कहा है कि देश का चुनाव आयोग अपनी मौत का स्वयं ही जश्न मना रहा है. ऐसे जिंदा मुर्दे आयोग का क्या काम? देश एवं कर्म ऐसे निकम्मे, नकारे एवं नमक हराम अफसरों के साथ बहुत बुरा करता है.
राष्ट्रिय जनता दल ने अपने ट्वीट में आगे लिखा है कि ऐसे जमीर बिकाऊ अफसरों एवं आयुक्तों को तो सबसे पहले इनके बलात्कार एवं तुच्छ कर्म और इनकी अपनी औलादें ही ठीक कर देती हैं. मंगलवार को राष्ट्रिय जनता दल नेता तेजस्वी यादव ने भी एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी की जीत को लेकर दर्ज करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी को एग्जिट पोल में जीत का लड्डू खाने दीजिए क्योंकि असली जीत का लड्डू 10 मार्च को अखिलेश यादव खाएंगे.
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लखनऊः दस मार्च को यूपी चुनाव के परिणाम आने से पहले सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव में चुनाव के चलते EVM में भारी गड़बड़ी का इल्जाम लगाया तो उनके समर्थन में अब पड़ोसी प्रदेश बिहार में RJD भी उतर गई है. राष्ट्रीय जनता दल ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया है. पार्टी की ओर से केंद्रीय चुनाव आयोग पर खूब हमला बोला गया है तथा अमर्यादित भाषा का भी उपयोग किया गया है. वही RJD के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से केंद्रीय चुनाव आयोग के आयुक्तों और अफसरों को नमक हराम कहा गया है. ट्वीट में राष्ट्रिय जनता दल ने कहा है कि देश का चुनाव आयोग अपनी मौत का स्वयं ही जश्न मना रहा है. ऐसे जिंदा मुर्दे आयोग का क्या काम? देश एवं कर्म ऐसे निकम्मे, नकारे एवं नमक हराम अफसरों के साथ बहुत बुरा करता है. राष्ट्रिय जनता दल ने अपने ट्वीट में आगे लिखा है कि ऐसे जमीर बिकाऊ अफसरों एवं आयुक्तों को तो सबसे पहले इनके बलात्कार एवं तुच्छ कर्म और इनकी अपनी औलादें ही ठीक कर देती हैं. मंगलवार को राष्ट्रिय जनता दल नेता तेजस्वी यादव ने भी एग्जिट पोल में भारतीय जनता पार्टी की जीत को लेकर दर्ज करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी को एग्जिट पोल में जीत का लड्डू खाने दीजिए क्योंकि असली जीत का लड्डू दस मार्च को अखिलेश यादव खाएंगे.
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यह तो जगजाहिर हो ही गया है की बिग बॉस10 के शो में सर्वप्रथम मेहमान के रूप में हमे बॉलीवुड की चर्चित मस्तानी बाला यानि दीपिका पादुकोण आने वाली है. अभी हाल ही में बिग बॉस ने अपनी और से दीपिका का एक वीडियो शेयर किया है. जिसमें एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण अपनी ख्वाहिश बता रही हैं.
अभिनेत्री दीपिका का कहना है कि उनकी इच्छा है कि उनकी आने वाली हॉलीवुड फिल्म 'xXx: रिटर्न ऑफ जेंडर केज' के सभी किरदारों को बिग बॉस में एंट्री मिले. अभी वैसे भी दीपिका अपनी इस हॉलीवुड की फिल्म का बढ़ी ही बेसब्री से रिलीज होने का इंतजार कर रही है.
अपनी चर्चा के दौरान अभिनेत्री दीपिका का कहना है कि वे चाहती हैं कि उनकी पहली हॉलीवुड फिल्म 'ट्रिपल एक्स : द रिटर्न ऑफ जेंडर केज' की पूरी टीम को विन डीजल सहित बिग बॉस के घर में बंद कर दिया जाए. देखा जाए तो इस फिल्म में हमे अभिनेत्री दीपिका के साथ ही साथ हॉलीवुड अभिनेता विन डीजल भी नजर आएंगे.
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यह तो जगजाहिर हो ही गया है की बिग बॉसदस के शो में सर्वप्रथम मेहमान के रूप में हमे बॉलीवुड की चर्चित मस्तानी बाला यानि दीपिका पादुकोण आने वाली है. अभी हाल ही में बिग बॉस ने अपनी और से दीपिका का एक वीडियो शेयर किया है. जिसमें एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण अपनी ख्वाहिश बता रही हैं. अभिनेत्री दीपिका का कहना है कि उनकी इच्छा है कि उनकी आने वाली हॉलीवुड फिल्म 'xXx: रिटर्न ऑफ जेंडर केज' के सभी किरदारों को बिग बॉस में एंट्री मिले. अभी वैसे भी दीपिका अपनी इस हॉलीवुड की फिल्म का बढ़ी ही बेसब्री से रिलीज होने का इंतजार कर रही है. अपनी चर्चा के दौरान अभिनेत्री दीपिका का कहना है कि वे चाहती हैं कि उनकी पहली हॉलीवुड फिल्म 'ट्रिपल एक्स : द रिटर्न ऑफ जेंडर केज' की पूरी टीम को विन डीजल सहित बिग बॉस के घर में बंद कर दिया जाए. देखा जाए तो इस फिल्म में हमे अभिनेत्री दीपिका के साथ ही साथ हॉलीवुड अभिनेता विन डीजल भी नजर आएंगे.
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कभी-कभी हमारे सपने इतने असामान्य हैं कि वे दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैंहमें लंबे समय तक स्मृति में। इसलिए, उदाहरण के लिए, एक सपने में भेड़ के झुंड को देखने के बाद, हम इस परिस्थिति से इतने प्रभावित हुए हैं कि हम तुरंत भाग्य के संदेश को समझना चाहते हैं। इस लेख में हम विस्तार से उन सपनों की व्याख्या का वर्णन करेंगे जो इन सबसे प्यारे जानवरों से जुड़े हैं।
ऐसा इसलिए हुआ कि कई संस्कृतियों में प्राचीन काल सेभेड़ें सबसे विवादास्पद गुणों के साथ संपन्न थीं। इसलिए, सपनों का एक दुभाषिया एक सपने देखने वाले झुंड को एक बहुत अच्छे संकेत के रूप में पहचान सकता है, और दूसरा, इसके विपरीत, इस सपने में भविष्य की सफलता का प्रतीक दिखाई देगा। सभी के कारण - जानवरों की विवादास्पद प्रकृति स्वयं। वह राम एक जन्मजात नेता - निर्णायक, दूरदर्शी और मजबूत, मेष के समान ही व्यक्त करता है, जो राशि चक्र चक्र को जन्म देता है। और कभी-कभी जानवरों को अविश्वास, अनिश्चितता और जिद्दीपन के साथ श्रेय दिया जाता है। और इस सुविधा का रूसी लोक कथाओं के नायकों द्वारा उपहास किया गया है। और यहां आपके पास एक सपना राम था। इस संदेश को कैसे समझें? स्थिति का आकलन करने के लिए कौन सा पक्ष शुरू करना है? हम इस बारे में हमारे लेख की सामग्रियों में बात करेंगे।
दरअसल - आप अपने आप को कैसे प्रोग्राम करते हैंऔर करेंगे यदि आप बुरे के बारे में सोचते हैं, तो जीवन में एक छोटी-छोटी व्यक्ति के साथ बैठक होगी। और आप वर्णित जानवरों के सकारात्मक गुणों के बारे में सोचेंगे - निस्संदेह आपको सफलता और समृद्धि मिलेगी, क्योंकि सपने की किताबों की जबरदस्त संख्या वित्तीय सपने और सफलता या कुछ शानदार विचारों के जन्म के रूप में सपने में भेड़ की भेड़ के झुंड की व्याख्या करती है, अंत में एक व्यक्ति को बड़ी सफलता मिलती है।
आप एक सपने की व्याख्या भी कर सकते हैंनायक एक नवजात भेड़ का बच्चा है। इसका मतलब यह है कि भाग्य एक व्यक्ति को इंगित करता है कि थोड़े समय में उसके पास एक अच्छा मौका होगा, आपको बस स्थिति का सही ढंग से प्रबंधन करने, अपनी ताकत की गणना करने और काम को अंत तक लाने की आवश्यकता है।
मेष के साथ क्या और जुड़ा हुआ है?
अगर हम नहीं जानते कि ऐसे क्या हैंजानवरों, जैसे कि भेड़िये, वे सपनों में हमारे बारे में क्या सपने देखते हैं, उन गुणों पर ध्यान देते हैं जो मेष राशि को समाप्त करते हैं। यह संकेत, पूरे वार्षिक राशि चक्र चक्र की शुरुआत के अलावा, रचनात्मक शुरुआत का भी प्रतीक है। इस अवधि के दौरान पैदा हुए लोग गतिविधि, उद्देश्यपूर्णता और उचित भाग्य के साथ संपन्न हैं। इसलिए, एक सपने में देखा जाने वाला एक बड़ा राम जीवन में अनुकूल अवधि की शुरुआत का मतलब हो सकता है। यदि आप कुछ व्यावसायिक विचारों और योजनाओं को पूरा कर रहे हैं, तो उन्हें बारीकी से देखें। शायद यह वही है जो आपको व्यवसाय और वित्तीय कल्याण में सफलता लाएगा।
भेड़ों के झुंड में इकट्ठाः इन जानवरों के क्या सपने?
यदि आप एक मापा जीवन जीते हैं, तो रहते हैंहर किसी की तरह और किसी भी व्यावसायिक परियोजनाओं में शामिल नहीं, भेड़ का सपना आपको चेतावनी के रूप में काम कर सकता है। जानें कि संपत्ति एक अप्रत्याशित विरासत के रूप में नहीं गिरती है, हमारे विशेष मामले में यह केवल उन लोगों के लिए आता है जो कड़ी मेहनत और फलपूर्वक काम करते हैं और जोखिम पर शर्त लगाते हैं। इसलिए, उन अन्य गुणों को देखें जिनके साथ जानवरों का पालन किया जाता है - आज के लेख के नायकों। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि लोग झुंड की मूर्खता के बारे में एक लोकप्रिय बयान है, जो उनके अचानक नेता के बुरे विचारों का पालन करता है। और जिन लोगों के पास उनकी राय नहीं है, और झुंड के साथ इतनी व्यक्तित्व है। इसलिए, सपनों का एक अलग दुभाषिया एक सपने में देखा गया झुंड प्रस्तुत करने के लिए तैयार है, जो एक बयान के रूप में या निकट, बेवकूफ लोगों के प्रभाव में पड़ रहा है।
हालांकि, नींद खुद ही विभिन्न ले जा सकते हैंविषयों। यदि आप एक सपने में एक झुंड देखते हैं, तो इसका मतलब यह भी हो सकता है कि आप अपने आस-पास के साथ असंतोष हो। जब आप बेहोशी से कमजोर इच्छाशक्ति से खुद को अलग करने की कोशिश करते हैं, तो आप यह भी महसूस कर सकते हैं कि बिना किसी कार्रवाई के, आप जल्द ही बहुत कमजोर इच्छाशक्ति "झुंड" का हिस्सा बन जाएंगे। खुद की चिल्लाहट और पूरी तरह से स्थिति एक सपना भी हो सकती है।
मान लीजिए कि आप इस तरह का सपना देखते हैंः झुंड में भेड़ें सफेद होती हैं, और केंद्र में या अग्रभूमि में एक काला व्यक्ति स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। आप खुद को नेता, नेता या चरवाहे के रूप में भी देख सकते हैं। ऐसा सपना बुरा नहीं है, क्योंकि हकीकत में आप झुंड वृत्ति से निर्देशित नहीं होते हैं। एक सपने में जो स्थिति आप देखते हैं वह आपके नेतृत्व के गुणों और इस तथ्य को दर्शा सकती है कि जल्द ही आप राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन के शीर्ष पर होंगे।
चलो याद रखें कि लोगों के गुण क्या हैंआवंटित भेड़ या भेड़। सबसे पहले, बेवकूफ, शॉर्ट-दृष्टि वाले और कमजोर लोगों की पहचान इन जानवरों के साथ की जाती है। सपना किताब क्या कहती है? राम, रात में भूत, कमजोर इच्छा, बयान और निष्क्रियता का प्रतीक है। लेकिन भेड़ों की सबसे महत्वपूर्ण नकारात्मक गुणवत्ता को सही मायने में जिद्दी जिद्दी माना जाता है - जैसे कि सभी सार्थक उपक्रमों में नुकसान हो सकता है।
सपने में देखा राम का रंग क्या मायने रखता है?
वास्तव में, यह कुछ भी नहीं है कि सफेद रंग हमेशा होता हैअंधेरे और बुरे लोगों के साथ, प्रकाश, स्वर्गदूतों, और काले रंग के साथ जुड़े हुए हैं। तो यह एक सपने में हैः एक सफेद राम सफलता का प्रतीक है, और एक काला राम - आसन्न मुसीबत।
एक सपने में स्टोरीलाइन अलग हो सकती है, औरउन्हें तस्वीर की सामान्य धारणा के आधार पर मूल्यांकन किया जाना चाहिए। यदि आपके द्वारा देखा गया जानवर आक्रामक था और आपके सींगों को आपके ऊपर निर्देशित करता था, तो ऐसे सपने का मतलब चेतावनी है। नींद की किताब एक समान स्थिति कैसे तय करती है? बरन, जो आपके साथ आक्रामक था, जैसा कि इंगित करता है कि वास्तव में आपके पर्यावरण में एक अप्रिय प्रकार है, जो आपको स्पष्ट रूप से परेशान करता है। यह सपना एक संभावित खुले संघर्ष की स्थिति और इस व्यक्ति के साथ वास्तविक संचार से जुड़े खतरे की चेतावनी है। आपका प्रतिद्वंद्वी जल्द ही आपके शपथ ग्रहण करने वाले दुश्मन बनने के लिए तैयार है। यही कारण है कि, इस तरह के एक सपने को देखते हुए, आपको सतर्क रहना होगा।
आपने एक सपने में देखा, जैसे कि घास के मैदान में शांतिपूर्वक चराईभेड़। जानवरों का क्या सपना है कि समग्र तस्वीर सकारात्मक वातावरण के साथ है या नहीं? ऐसा सपना कोई नकारात्मक जानकारी नहीं ले सकता है और समृद्धि और सफलता का प्रतीक है।
और फिर हमने जो देखा वह उसकी दोहरी व्याख्या होगी।स्थिति। तथ्य यह है कि दुनिया के कुछ देशों में एक राम को एक पवित्र जानवर माना जाता है, और इसे सपने में मारने का मतलब वास्तविक जीवन में त्याग करना है। लेकिन आप अपने आप को बलिदान नहीं देते हैं, लेकिन अपने रिश्तेदारों या रिश्तेदारों से किसी के साथ अपनी दोस्ती के लिए अपनी दोस्ती करते हैं।
हालांकि, आज के समय की वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुएबेवकूफ भेड़ (किस जानवर का सपना है, हमने इस आलेख में विस्तार से चर्चा की है) का मतलब बलिदान के कुछ भी नहीं हो सकता है। आखिरकार, भेड़ का बच्चा अविश्वसनीय रूप से मूल्यवान है और इसे सबसे अच्छा मांस उत्पाद माना जाता है। इसलिए, हम फिर से लौट आए जो हमने शुरू में बंद कर दिया था। वित्तीय समृद्धि और सफलता - यह निकट भविष्य में आपको इंतजार कर रहा है, अगर एक सपने में भोजन पर आपने भेड़ का मांस पकवान का आनंद लिया। इसके अलावा, नए संस्करणों के अनुसार, एक सपने में एक जानवर की हत्या का मतलब है कि वास्तव में आप अपने दुश्मनों को हराने में सक्षम होंगे।
मादा सपना किताब में, राम जानवर का प्रतीक है।शुरुआत और आधार प्रवृत्तियों। ऐसा सपना महिला को चेतावनी दे सकता है कि उसके प्रेमी को उसके लिए एक बेकार इच्छा का सामना करना पड़ रहा है और केवल वासना की संतुष्टि के लिए उत्सुक है। चुने गए व्यक्ति के हिस्से पर किसी भी भावना का कोई सवाल नहीं है। यह इतनी स्पष्ट महिला सपना किताब है।
एक सपने में एक राम की अचानक मौत को देखने के लिए एक त्वरित बीमारी, हानि या हानि का मतलब है। किसी भी मामले में, एक जानवर जो मनुष्य के हाथ से नहीं मरता है वह बहुत अच्छा संकेत नहीं है।
एकल पुरुषों के लिए एक समान सपना क्या मतलब है?
अगर एक भेड़ एक सपने में एक कठोर स्नातक देखा,इसका मतलब है कि वास्तव में यह जल्द ही बज जाएगा। ऐसा सपना भावी विवाह में खुशी और सद्भाव का वादा करता है। यहां सपने के जानवर के रंग पर ध्यान देना आवश्यक है। यदि एक सफेद भेड़ का बच्चा या भेड़ सपना देख रहा है, तो भविष्य की दुल्हन उसके विचारों में शुद्ध है और इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। और यदि भूत काला है, तो ऐसा सपना चुने हुए व्यक्ति के बारे में चेतावनी के रूप में कार्य करता है। यह शायद वह महिला नहीं है जो स्नातक खुशी लाएगी।
आम तौर पर, एक सपने में एक जीवित भेड़ को देखने के लिएन केवल वित्तीय में बल्कि निजी मामलों में भी कल्याण की प्रतीक्षा करें। हालांकि, अगर किसी के पास रैम की बिक्री या खरीद के साथ कोई साजिश है, तो इसका मतलब है कि एक त्वरित बीमारी है, जो इस स्थिति को देखने वाले व्यक्ति से ठीक से उत्पन्न होगी।
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कभी-कभी हमारे सपने इतने असामान्य हैं कि वे दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैंहमें लंबे समय तक स्मृति में। इसलिए, उदाहरण के लिए, एक सपने में भेड़ के झुंड को देखने के बाद, हम इस परिस्थिति से इतने प्रभावित हुए हैं कि हम तुरंत भाग्य के संदेश को समझना चाहते हैं। इस लेख में हम विस्तार से उन सपनों की व्याख्या का वर्णन करेंगे जो इन सबसे प्यारे जानवरों से जुड़े हैं। ऐसा इसलिए हुआ कि कई संस्कृतियों में प्राचीन काल सेभेड़ें सबसे विवादास्पद गुणों के साथ संपन्न थीं। इसलिए, सपनों का एक दुभाषिया एक सपने देखने वाले झुंड को एक बहुत अच्छे संकेत के रूप में पहचान सकता है, और दूसरा, इसके विपरीत, इस सपने में भविष्य की सफलता का प्रतीक दिखाई देगा। सभी के कारण - जानवरों की विवादास्पद प्रकृति स्वयं। वह राम एक जन्मजात नेता - निर्णायक, दूरदर्शी और मजबूत, मेष के समान ही व्यक्त करता है, जो राशि चक्र चक्र को जन्म देता है। और कभी-कभी जानवरों को अविश्वास, अनिश्चितता और जिद्दीपन के साथ श्रेय दिया जाता है। और इस सुविधा का रूसी लोक कथाओं के नायकों द्वारा उपहास किया गया है। और यहां आपके पास एक सपना राम था। इस संदेश को कैसे समझें? स्थिति का आकलन करने के लिए कौन सा पक्ष शुरू करना है? हम इस बारे में हमारे लेख की सामग्रियों में बात करेंगे। दरअसल - आप अपने आप को कैसे प्रोग्राम करते हैंऔर करेंगे यदि आप बुरे के बारे में सोचते हैं, तो जीवन में एक छोटी-छोटी व्यक्ति के साथ बैठक होगी। और आप वर्णित जानवरों के सकारात्मक गुणों के बारे में सोचेंगे - निस्संदेह आपको सफलता और समृद्धि मिलेगी, क्योंकि सपने की किताबों की जबरदस्त संख्या वित्तीय सपने और सफलता या कुछ शानदार विचारों के जन्म के रूप में सपने में भेड़ की भेड़ के झुंड की व्याख्या करती है, अंत में एक व्यक्ति को बड़ी सफलता मिलती है। आप एक सपने की व्याख्या भी कर सकते हैंनायक एक नवजात भेड़ का बच्चा है। इसका मतलब यह है कि भाग्य एक व्यक्ति को इंगित करता है कि थोड़े समय में उसके पास एक अच्छा मौका होगा, आपको बस स्थिति का सही ढंग से प्रबंधन करने, अपनी ताकत की गणना करने और काम को अंत तक लाने की आवश्यकता है। मेष के साथ क्या और जुड़ा हुआ है? अगर हम नहीं जानते कि ऐसे क्या हैंजानवरों, जैसे कि भेड़िये, वे सपनों में हमारे बारे में क्या सपने देखते हैं, उन गुणों पर ध्यान देते हैं जो मेष राशि को समाप्त करते हैं। यह संकेत, पूरे वार्षिक राशि चक्र चक्र की शुरुआत के अलावा, रचनात्मक शुरुआत का भी प्रतीक है। इस अवधि के दौरान पैदा हुए लोग गतिविधि, उद्देश्यपूर्णता और उचित भाग्य के साथ संपन्न हैं। इसलिए, एक सपने में देखा जाने वाला एक बड़ा राम जीवन में अनुकूल अवधि की शुरुआत का मतलब हो सकता है। यदि आप कुछ व्यावसायिक विचारों और योजनाओं को पूरा कर रहे हैं, तो उन्हें बारीकी से देखें। शायद यह वही है जो आपको व्यवसाय और वित्तीय कल्याण में सफलता लाएगा। भेड़ों के झुंड में इकट्ठाः इन जानवरों के क्या सपने? यदि आप एक मापा जीवन जीते हैं, तो रहते हैंहर किसी की तरह और किसी भी व्यावसायिक परियोजनाओं में शामिल नहीं, भेड़ का सपना आपको चेतावनी के रूप में काम कर सकता है। जानें कि संपत्ति एक अप्रत्याशित विरासत के रूप में नहीं गिरती है, हमारे विशेष मामले में यह केवल उन लोगों के लिए आता है जो कड़ी मेहनत और फलपूर्वक काम करते हैं और जोखिम पर शर्त लगाते हैं। इसलिए, उन अन्य गुणों को देखें जिनके साथ जानवरों का पालन किया जाता है - आज के लेख के नायकों। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि लोग झुंड की मूर्खता के बारे में एक लोकप्रिय बयान है, जो उनके अचानक नेता के बुरे विचारों का पालन करता है। और जिन लोगों के पास उनकी राय नहीं है, और झुंड के साथ इतनी व्यक्तित्व है। इसलिए, सपनों का एक अलग दुभाषिया एक सपने में देखा गया झुंड प्रस्तुत करने के लिए तैयार है, जो एक बयान के रूप में या निकट, बेवकूफ लोगों के प्रभाव में पड़ रहा है। हालांकि, नींद खुद ही विभिन्न ले जा सकते हैंविषयों। यदि आप एक सपने में एक झुंड देखते हैं, तो इसका मतलब यह भी हो सकता है कि आप अपने आस-पास के साथ असंतोष हो। जब आप बेहोशी से कमजोर इच्छाशक्ति से खुद को अलग करने की कोशिश करते हैं, तो आप यह भी महसूस कर सकते हैं कि बिना किसी कार्रवाई के, आप जल्द ही बहुत कमजोर इच्छाशक्ति "झुंड" का हिस्सा बन जाएंगे। खुद की चिल्लाहट और पूरी तरह से स्थिति एक सपना भी हो सकती है। मान लीजिए कि आप इस तरह का सपना देखते हैंः झुंड में भेड़ें सफेद होती हैं, और केंद्र में या अग्रभूमि में एक काला व्यक्ति स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। आप खुद को नेता, नेता या चरवाहे के रूप में भी देख सकते हैं। ऐसा सपना बुरा नहीं है, क्योंकि हकीकत में आप झुंड वृत्ति से निर्देशित नहीं होते हैं। एक सपने में जो स्थिति आप देखते हैं वह आपके नेतृत्व के गुणों और इस तथ्य को दर्शा सकती है कि जल्द ही आप राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन के शीर्ष पर होंगे। चलो याद रखें कि लोगों के गुण क्या हैंआवंटित भेड़ या भेड़। सबसे पहले, बेवकूफ, शॉर्ट-दृष्टि वाले और कमजोर लोगों की पहचान इन जानवरों के साथ की जाती है। सपना किताब क्या कहती है? राम, रात में भूत, कमजोर इच्छा, बयान और निष्क्रियता का प्रतीक है। लेकिन भेड़ों की सबसे महत्वपूर्ण नकारात्मक गुणवत्ता को सही मायने में जिद्दी जिद्दी माना जाता है - जैसे कि सभी सार्थक उपक्रमों में नुकसान हो सकता है। सपने में देखा राम का रंग क्या मायने रखता है? वास्तव में, यह कुछ भी नहीं है कि सफेद रंग हमेशा होता हैअंधेरे और बुरे लोगों के साथ, प्रकाश, स्वर्गदूतों, और काले रंग के साथ जुड़े हुए हैं। तो यह एक सपने में हैः एक सफेद राम सफलता का प्रतीक है, और एक काला राम - आसन्न मुसीबत। एक सपने में स्टोरीलाइन अलग हो सकती है, औरउन्हें तस्वीर की सामान्य धारणा के आधार पर मूल्यांकन किया जाना चाहिए। यदि आपके द्वारा देखा गया जानवर आक्रामक था और आपके सींगों को आपके ऊपर निर्देशित करता था, तो ऐसे सपने का मतलब चेतावनी है। नींद की किताब एक समान स्थिति कैसे तय करती है? बरन, जो आपके साथ आक्रामक था, जैसा कि इंगित करता है कि वास्तव में आपके पर्यावरण में एक अप्रिय प्रकार है, जो आपको स्पष्ट रूप से परेशान करता है। यह सपना एक संभावित खुले संघर्ष की स्थिति और इस व्यक्ति के साथ वास्तविक संचार से जुड़े खतरे की चेतावनी है। आपका प्रतिद्वंद्वी जल्द ही आपके शपथ ग्रहण करने वाले दुश्मन बनने के लिए तैयार है। यही कारण है कि, इस तरह के एक सपने को देखते हुए, आपको सतर्क रहना होगा। आपने एक सपने में देखा, जैसे कि घास के मैदान में शांतिपूर्वक चराईभेड़। जानवरों का क्या सपना है कि समग्र तस्वीर सकारात्मक वातावरण के साथ है या नहीं? ऐसा सपना कोई नकारात्मक जानकारी नहीं ले सकता है और समृद्धि और सफलता का प्रतीक है। और फिर हमने जो देखा वह उसकी दोहरी व्याख्या होगी।स्थिति। तथ्य यह है कि दुनिया के कुछ देशों में एक राम को एक पवित्र जानवर माना जाता है, और इसे सपने में मारने का मतलब वास्तविक जीवन में त्याग करना है। लेकिन आप अपने आप को बलिदान नहीं देते हैं, लेकिन अपने रिश्तेदारों या रिश्तेदारों से किसी के साथ अपनी दोस्ती के लिए अपनी दोस्ती करते हैं। हालांकि, आज के समय की वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुएबेवकूफ भेड़ का मतलब बलिदान के कुछ भी नहीं हो सकता है। आखिरकार, भेड़ का बच्चा अविश्वसनीय रूप से मूल्यवान है और इसे सबसे अच्छा मांस उत्पाद माना जाता है। इसलिए, हम फिर से लौट आए जो हमने शुरू में बंद कर दिया था। वित्तीय समृद्धि और सफलता - यह निकट भविष्य में आपको इंतजार कर रहा है, अगर एक सपने में भोजन पर आपने भेड़ का मांस पकवान का आनंद लिया। इसके अलावा, नए संस्करणों के अनुसार, एक सपने में एक जानवर की हत्या का मतलब है कि वास्तव में आप अपने दुश्मनों को हराने में सक्षम होंगे। मादा सपना किताब में, राम जानवर का प्रतीक है।शुरुआत और आधार प्रवृत्तियों। ऐसा सपना महिला को चेतावनी दे सकता है कि उसके प्रेमी को उसके लिए एक बेकार इच्छा का सामना करना पड़ रहा है और केवल वासना की संतुष्टि के लिए उत्सुक है। चुने गए व्यक्ति के हिस्से पर किसी भी भावना का कोई सवाल नहीं है। यह इतनी स्पष्ट महिला सपना किताब है। एक सपने में एक राम की अचानक मौत को देखने के लिए एक त्वरित बीमारी, हानि या हानि का मतलब है। किसी भी मामले में, एक जानवर जो मनुष्य के हाथ से नहीं मरता है वह बहुत अच्छा संकेत नहीं है। एकल पुरुषों के लिए एक समान सपना क्या मतलब है? अगर एक भेड़ एक सपने में एक कठोर स्नातक देखा,इसका मतलब है कि वास्तव में यह जल्द ही बज जाएगा। ऐसा सपना भावी विवाह में खुशी और सद्भाव का वादा करता है। यहां सपने के जानवर के रंग पर ध्यान देना आवश्यक है। यदि एक सफेद भेड़ का बच्चा या भेड़ सपना देख रहा है, तो भविष्य की दुल्हन उसके विचारों में शुद्ध है और इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। और यदि भूत काला है, तो ऐसा सपना चुने हुए व्यक्ति के बारे में चेतावनी के रूप में कार्य करता है। यह शायद वह महिला नहीं है जो स्नातक खुशी लाएगी। आम तौर पर, एक सपने में एक जीवित भेड़ को देखने के लिएन केवल वित्तीय में बल्कि निजी मामलों में भी कल्याण की प्रतीक्षा करें। हालांकि, अगर किसी के पास रैम की बिक्री या खरीद के साथ कोई साजिश है, तो इसका मतलब है कि एक त्वरित बीमारी है, जो इस स्थिति को देखने वाले व्यक्ति से ठीक से उत्पन्न होगी।
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जिनके द्वारा हम जहाँ एक ओर दुनिया के पेचीदा सवालो को आसानी से समझ सकते है, वही दूसरी ओर हम धरती पर इसके विभिन्न भागो मे वैविध्य और विषमताओ के बीच रह रहे लोगो के बीच प्रीति, प्रतीति, और प्रमोद की सभावनाओं को भी जगा सकते है । आज ऐसे शुभ प्रयत्नो की आवश्यकता है, जो एक-दूसरे को नजदीक लाते हो, जोडते हो, और आपस मे भरोसे/भाई-चारे के बीज बोते हों । आगे हम ऐसे ही गुणो की चर्चा करेगे जो जैनदर्शन के अध्ययन के परिणाम स्वरूप पल्लवित हो सकते है; व्यक्ति मे, समाज मे ।
अनेकान्त - दर्शन वस्तुत वैचारिक अहिंसा का दूसरा नाम है। जो लोग खुद को अन्तिम मानते है, वे नफरत और अहंकार के बीज बोते है, किन्तु जो यह मानते है कि किसी भी वस्तु को उसकी परिपूर्णता मे युगपत् नही रखा जा सकता, वे वैचारिक सहिष्णुता को जन्म देते है और विश्व को मैत्री तथा वन्धुत्व की दिशा मे अग्रसर करते है ।
जैनदर्शन कहता है. 'वस्तु - स्वरूप को जानने के लिए उसे सभी कोणो और आयामे मे जानो/खोजो। अपनी खोज अविराम रखो। कोई दुराग्रह मत करो। दूसरा किस कोण से किस आयाम को व्यक्त कर रहा है, इसे जानने की पूर्वाग्रह - मुक्त कोशिश करो ताकि जह एक ओर वस्तु - स्वरूप को उसकी सर्वांगीणता मे जाना जा सके, वही दूसरी ओर एक-दूस में उपजने वाली कटुताओ से बचा जा सके ।' मानव-कल्याण की दृष्टि से अनेकान्त दर्शन सन्निहित यह रचनात्मक सहिष्णुता जहाँ एक तरफ बहुत बड़ा वरदान है, वही दूसरी तरफ वस्तु - स्वरूप की गहराइयो मे डुबकियों लगाने का एक वैज्ञानिक आधार भी है।
विश्व शान्ति कायम करने के लिए आज परस्पर विरोधी विचारो को समझने की जरूरत है। जब तक हम एक-दूसरे के बीच स्वस्थ समझ को जन्म नही देगे, कटुताएँ औ खाइयाँ लगातार बढ़ती जाऐंगी, किन्तु जैसे ही हम आपसी सीमाओ को और सद्भावनाओं को समझने, वैसे ही एक-दूसरे के नजदीक आयेगे और एक व्यापक/गहरी समझ की सृष्ि करेंगे। अनेकान्त और स्याद्वाद से एक रचनात्मक समझ के लिए आवश्यक वातावरण बनाया जा सकता है और परस्पर विरोधी व्यक्तियो/ समूहों को एक-दूसरे से निकट लाया जा सकता है, क्योकि यह बिलकुल संभव है कि जिन्हें हम परस्पर विरोधी मान रहे है, एक-दूसरे के पूरक हो । जब तक हम सह-अस्तित्व और परस्पर पूरकता के रहस्य और उसमे बैठी संभावनाओं को ठीक से समझ नही लेते, विश्व शान्ति का हमारा चिरप्रतीक्षित स्वप्न पूरा नहीं हो सकता ।
जैनदर्शन का सबमे वडा प्रतिपाद्य यह है कि प्रत्येक वस्तु / पदार्थ/व्यक्ति स्वतंत्र है। उसकी अपनी अस्मिता है, अत कोई वस्तु / व्यक्ति किसी दूसरे पदार्थ/व्यक्ति की प्रभुसत्ता मे कोई विघ्न नही डाल सकता। बावजूद इस स्वतन्त्रता के, दुनिया के तमाम अस्तित्वो मे कही
१४ ८ वैन विद्या
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जिनके द्वारा हम जहाँ एक ओर दुनिया के पेचीदा सवालो को आसानी से समझ सकते है, वही दूसरी ओर हम धरती पर इसके विभिन्न भागो मे वैविध्य और विषमताओ के बीच रह रहे लोगो के बीच प्रीति, प्रतीति, और प्रमोद की सभावनाओं को भी जगा सकते है । आज ऐसे शुभ प्रयत्नो की आवश्यकता है, जो एक-दूसरे को नजदीक लाते हो, जोडते हो, और आपस मे भरोसे/भाई-चारे के बीज बोते हों । आगे हम ऐसे ही गुणो की चर्चा करेगे जो जैनदर्शन के अध्ययन के परिणाम स्वरूप पल्लवित हो सकते है; व्यक्ति मे, समाज मे । अनेकान्त - दर्शन वस्तुत वैचारिक अहिंसा का दूसरा नाम है। जो लोग खुद को अन्तिम मानते है, वे नफरत और अहंकार के बीज बोते है, किन्तु जो यह मानते है कि किसी भी वस्तु को उसकी परिपूर्णता मे युगपत् नही रखा जा सकता, वे वैचारिक सहिष्णुता को जन्म देते है और विश्व को मैत्री तथा वन्धुत्व की दिशा मे अग्रसर करते है । जैनदर्शन कहता है. 'वस्तु - स्वरूप को जानने के लिए उसे सभी कोणो और आयामे मे जानो/खोजो। अपनी खोज अविराम रखो। कोई दुराग्रह मत करो। दूसरा किस कोण से किस आयाम को व्यक्त कर रहा है, इसे जानने की पूर्वाग्रह - मुक्त कोशिश करो ताकि जह एक ओर वस्तु - स्वरूप को उसकी सर्वांगीणता मे जाना जा सके, वही दूसरी ओर एक-दूस में उपजने वाली कटुताओ से बचा जा सके ।' मानव-कल्याण की दृष्टि से अनेकान्त दर्शन सन्निहित यह रचनात्मक सहिष्णुता जहाँ एक तरफ बहुत बड़ा वरदान है, वही दूसरी तरफ वस्तु - स्वरूप की गहराइयो मे डुबकियों लगाने का एक वैज्ञानिक आधार भी है। विश्व शान्ति कायम करने के लिए आज परस्पर विरोधी विचारो को समझने की जरूरत है। जब तक हम एक-दूसरे के बीच स्वस्थ समझ को जन्म नही देगे, कटुताएँ औ खाइयाँ लगातार बढ़ती जाऐंगी, किन्तु जैसे ही हम आपसी सीमाओ को और सद्भावनाओं को समझने, वैसे ही एक-दूसरे के नजदीक आयेगे और एक व्यापक/गहरी समझ की सृष्ि करेंगे। अनेकान्त और स्याद्वाद से एक रचनात्मक समझ के लिए आवश्यक वातावरण बनाया जा सकता है और परस्पर विरोधी व्यक्तियो/ समूहों को एक-दूसरे से निकट लाया जा सकता है, क्योकि यह बिलकुल संभव है कि जिन्हें हम परस्पर विरोधी मान रहे है, एक-दूसरे के पूरक हो । जब तक हम सह-अस्तित्व और परस्पर पूरकता के रहस्य और उसमे बैठी संभावनाओं को ठीक से समझ नही लेते, विश्व शान्ति का हमारा चिरप्रतीक्षित स्वप्न पूरा नहीं हो सकता । जैनदर्शन का सबमे वडा प्रतिपाद्य यह है कि प्रत्येक वस्तु / पदार्थ/व्यक्ति स्वतंत्र है। उसकी अपनी अस्मिता है, अत कोई वस्तु / व्यक्ति किसी दूसरे पदार्थ/व्यक्ति की प्रभुसत्ता मे कोई विघ्न नही डाल सकता। बावजूद इस स्वतन्त्रता के, दुनिया के तमाम अस्तित्वो मे कही चौदह आठ वैन विद्या
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सोनभद्र के रेल इंटरमीडिएट कॉलेज चोपन में पतंजलि योग समिति और सोनांचल सेवा मंच के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित फिट इंडिया और हिट इंडिया के तहत योग गुरु आचार्य अजय कुमार पाठक के नेतृत्व में योग शिविर का भव्य आयोजन हुआ।
चोपन ब्लाक के आदिवासी एवं पिछड़े वर्ग के लोगों ने अधिक से अधिक योगाभ्यास में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। योग गुरु ने आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से स्वस्थ व निरोगी जीवन जीने के बारे में लोगों को बताया।
साथ ही आचार्य गुरु ने सभी विद्यार्थियों को योग के माध्यम से बुद्धि का सामर्थ्य बढ़ाने और लंबाई बढ़ाने और बालों का टूटना के साथ-साथ विलोम, कपालभाति, भ्रामरी, प्राणायाम प्रणव का ध्यान के साथ-साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास संबंधित आसनों का भी अभ्यास कराया ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि चोपन ब्लाक प्रमुख उस्मान अली, V. D. O. प्रदीप पांडे ने और श्री व्यास मुनि पांडे, अशोक यादव ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। योग गुरु अजय पाठक द्वारा ने कहा कि, जो भी लोग जिले के आदिवासी इलाकों में जन जागरूकता फैलाकर लोगों को योग और आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ दिया जा रहा है। निसंदेह यह सबसे बड़ी सेवा है।
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सोनभद्र के रेल इंटरमीडिएट कॉलेज चोपन में पतंजलि योग समिति और सोनांचल सेवा मंच के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित फिट इंडिया और हिट इंडिया के तहत योग गुरु आचार्य अजय कुमार पाठक के नेतृत्व में योग शिविर का भव्य आयोजन हुआ। चोपन ब्लाक के आदिवासी एवं पिछड़े वर्ग के लोगों ने अधिक से अधिक योगाभ्यास में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। योग गुरु ने आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से स्वस्थ व निरोगी जीवन जीने के बारे में लोगों को बताया। साथ ही आचार्य गुरु ने सभी विद्यार्थियों को योग के माध्यम से बुद्धि का सामर्थ्य बढ़ाने और लंबाई बढ़ाने और बालों का टूटना के साथ-साथ विलोम, कपालभाति, भ्रामरी, प्राणायाम प्रणव का ध्यान के साथ-साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास संबंधित आसनों का भी अभ्यास कराया । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि चोपन ब्लाक प्रमुख उस्मान अली, V. D. O. प्रदीप पांडे ने और श्री व्यास मुनि पांडे, अशोक यादव ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। योग गुरु अजय पाठक द्वारा ने कहा कि, जो भी लोग जिले के आदिवासी इलाकों में जन जागरूकता फैलाकर लोगों को योग और आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ दिया जा रहा है। निसंदेह यह सबसे बड़ी सेवा है।
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राज्य सरकार द्वारा इस वित्तीय वर्ष में अब तक संग्रहित दो फीसदी अतिरिक्त स्टांप शुल्क की धनराशि नगरीय निकायों को दिए जाने की स्वीकृति बुधवार को दी गई। यह धनराशि 500 करोड़ रुपये है। इस धनराशि से नगरीय निकाय अपनी देनदारियों का बोझ कम कर सकेंगे। शासनादेश में यह लिखा गया है कि स्वीकृत धनराशि से नगरीय निकाय उ. प्र. पावर कारपोरेशन की लंबित बिजली बिजली बिल का भुगतान करेंगे।
यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
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राज्य सरकार द्वारा इस वित्तीय वर्ष में अब तक संग्रहित दो फीसदी अतिरिक्त स्टांप शुल्क की धनराशि नगरीय निकायों को दिए जाने की स्वीकृति बुधवार को दी गई। यह धनराशि पाँच सौ करोड़ रुपये है। इस धनराशि से नगरीय निकाय अपनी देनदारियों का बोझ कम कर सकेंगे। शासनादेश में यह लिखा गया है कि स्वीकृत धनराशि से नगरीय निकाय उ. प्र. पावर कारपोरेशन की लंबित बिजली बिजली बिल का भुगतान करेंगे। यह हिन्दुस्तान अखबार की ऑटेमेटेड न्यूज फीड है, इसे लाइव हिन्दुस्तान की टीम ने संपादित नहीं किया है।
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लखनऊ में लेसा सिस गोमती के चौक डिवीजन में तैनात टीजी-टू (सब स्टेशन आपरेटर) प्रकाश वीर यादव ने उपकेंद्र पर तैनात जूनियर इंजीनियर के साथ हाथापाई की. शुक्रवार दोपहर मेडिकल कॉलेज उपकेन्द्र पर हुई झगड़ा और अभद्रता का वीडियो वायरल हुआ तो हड़कंप मच गया. इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए अधीक्षण अभियंता गुरजीत सिंह ने टीजी-टू प्रकाश वीर यादव को तुरन्त असर से निलंबित कर दिया है. आरोपी कर्मचारी के विरूद्ध तहरीर दी गई है. इस मुद्दे में जेई ने पुलिस को तहरीर दी है. पुलिस ने जेई की तहरीर पर मारपीट, धमकी, सरकारी कर्मचारी पर हमला और एससी/एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया है.
उपभोक्ताओं और बिजली इंजीनियर के बीच हाथापाई और गाली गलौज आम बात है. पर, शुक्रवार को बिजली कर्मी और अधिकारी के बीच झगड़ा और हाथापाई का मामला चौकाने वाला सामने आया. कर्मियों के अनुसार प्रकाश वीर यादव किसी काम को लेकर जेई के पास आए थे. बात करते-करते दुर्व्यवहार करने लगे. वायरल वीडियो में जेई को गालियां देते हुए जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है. इस बीच जेई के साथ हाथापाई करते समय बीच बचाव करने कर्मचारी पहुंचे. तब जाकर प्रकाश वीर यादव को कार्यालय से बाहर कर दिया.
वायरल वीडियो कुछ ही देर में लेसा के कई कर्मियों और इंजीनियरों के पास पहुंचा तो उन्होंने कार्रवाई के लिए आला ऑफिसरों पर दबाव बनाना प्रारम्भ कर दिए. जूनियर इंजीनियर संगठन के बढ़ते दबाव को देखते हुए अधीक्षण अभियंता ने प्रकाश को निलंबित करके जांच के आदेश दे दिए. निलंबन के दौरान प्रकाश वीर यादव रेजीडेंसी डिवीजन में सम्बद्ध रहेंगे. वहीं, अधीक्षण अभियंता गुरजीत सिंह का बोलना है कि मुद्दे के लिए दो सदस्यी कमेटी गठित की जाएगी. दोनों जांच ऑफिसरों के नामों पर विचार चल रहा है. सोमवार को नामों पर निर्णय लेकर कमेटी का गठन कर दिया जाएगा.
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लखनऊ में लेसा सिस गोमती के चौक डिवीजन में तैनात टीजी-टू प्रकाश वीर यादव ने उपकेंद्र पर तैनात जूनियर इंजीनियर के साथ हाथापाई की. शुक्रवार दोपहर मेडिकल कॉलेज उपकेन्द्र पर हुई झगड़ा और अभद्रता का वीडियो वायरल हुआ तो हड़कंप मच गया. इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए अधीक्षण अभियंता गुरजीत सिंह ने टीजी-टू प्रकाश वीर यादव को तुरन्त असर से निलंबित कर दिया है. आरोपी कर्मचारी के विरूद्ध तहरीर दी गई है. इस मुद्दे में जेई ने पुलिस को तहरीर दी है. पुलिस ने जेई की तहरीर पर मारपीट, धमकी, सरकारी कर्मचारी पर हमला और एससी/एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज किया है. उपभोक्ताओं और बिजली इंजीनियर के बीच हाथापाई और गाली गलौज आम बात है. पर, शुक्रवार को बिजली कर्मी और अधिकारी के बीच झगड़ा और हाथापाई का मामला चौकाने वाला सामने आया. कर्मियों के अनुसार प्रकाश वीर यादव किसी काम को लेकर जेई के पास आए थे. बात करते-करते दुर्व्यवहार करने लगे. वायरल वीडियो में जेई को गालियां देते हुए जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है. इस बीच जेई के साथ हाथापाई करते समय बीच बचाव करने कर्मचारी पहुंचे. तब जाकर प्रकाश वीर यादव को कार्यालय से बाहर कर दिया. वायरल वीडियो कुछ ही देर में लेसा के कई कर्मियों और इंजीनियरों के पास पहुंचा तो उन्होंने कार्रवाई के लिए आला ऑफिसरों पर दबाव बनाना प्रारम्भ कर दिए. जूनियर इंजीनियर संगठन के बढ़ते दबाव को देखते हुए अधीक्षण अभियंता ने प्रकाश को निलंबित करके जांच के आदेश दे दिए. निलंबन के दौरान प्रकाश वीर यादव रेजीडेंसी डिवीजन में सम्बद्ध रहेंगे. वहीं, अधीक्षण अभियंता गुरजीत सिंह का बोलना है कि मुद्दे के लिए दो सदस्यी कमेटी गठित की जाएगी. दोनों जांच ऑफिसरों के नामों पर विचार चल रहा है. सोमवार को नामों पर निर्णय लेकर कमेटी का गठन कर दिया जाएगा.
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गाजियाबादः आज उत्तर प्रदेश में पहले चरण में 11 जिलों की 58 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। आप सभी को बता दें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, हापुड़, बागपत, बुलंदशहर, शामली, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा जिले में वोट डाले जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ मेरठ में कई जगह ईवीएम खराब हो गई हैं. इसके अलावा कई जगह मतदाताओं की लंबी लाइन लगी है। आप सभी को बता दें कि गाजियाबाद में पहली बार मताधिकार का इस्तेमाल करके ममता फुलारा और सुगंधा अरोड़ा खुश नजर आईं। जी दरअसल युवा मतदाता ममता फुलारा ने सुरक्षा और शिक्षा के मुद्दे पर मताधिकार का इस्तेमाल किया है।
उन्होंने कहा कि, 'कानून व्यवस्था पर और काम करने की जरूरत है। ' वहीं दूसरी तरफ वसुंधरा सेक्टर 15 निवासी पुष्पा त्यागी (85) ने प्रदूषण और समाज में जाति में लड़ाई झगड़े खत्म करने के लिए वोट दिया है। इसी के साथ, कलेक्ट्रेट में पोलिंग बूथ लाइव देखने के लिए स्क्रीन लगाई गई है। वहीं गाजियाबाद के वसुंधरा में आदर्श मतदान केंद्र ( सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल) मौजूद सुरक्षा बल के बीच मतदान किया जा रहा है। इसके अलावा जैनमती इंटर कॉलेज में स्पेशल चाइल्ड ओजीता जैन पहली बार वोट डालने पहुंची। आपको बता दें कि डासना गेट कंपोजिट विद्यालय में 72 वर्षीय रामनाथ गुप्ता ने मतदान किया और डासना गेट कंपोजिट विद्यालय पर सुरक्षा कर्मी तैनात हैं। इसी के साथ, युवा मतदाता प्राची रस्तोगी ने अपनी मां के साथ मताधिकार का इस्तेमाल किया।
आपको बता दें कि इस दौरान गाजियाबाद के डीएम और एसएसपी ने इंग्रहम स्कूल और इन्द्रगढ़ी के मतदान केंद्रों पर पहुंचकर जायजा लिया। वहीं इंग्राहम गर्ल्स डिग्री कॉलेज की प्रिंसिपल डॉक्टर सरिता शर्मा ने मताधिकार का इस्तेमाल किया और पंचवटी में सुमति ज्ञान पब्लिक स्कूल में मतदाताओं ने वोट डाला। मिली जानकारी के तहत गाजियाबाद के सहकारी नगर स्थित सन इंटरनेशनल स्कूल में बने पोलिंग बूथ में बड़ी संख्या में वोटर पहुंच रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में पहले चरण में 11 जिलों की 58 सीटों पर मतदान हो रहा है। सुबह-सुबह कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया और लिखा कि 'देश को हर डर से आज़ाद करो- बाहर आओ, वोट करो! '
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गाजियाबादः आज उत्तर प्रदेश में पहले चरण में ग्यारह जिलों की अट्ठावन सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। आप सभी को बता दें कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, हापुड़, बागपत, बुलंदशहर, शामली, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा जिले में वोट डाले जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ मेरठ में कई जगह ईवीएम खराब हो गई हैं. इसके अलावा कई जगह मतदाताओं की लंबी लाइन लगी है। आप सभी को बता दें कि गाजियाबाद में पहली बार मताधिकार का इस्तेमाल करके ममता फुलारा और सुगंधा अरोड़ा खुश नजर आईं। जी दरअसल युवा मतदाता ममता फुलारा ने सुरक्षा और शिक्षा के मुद्दे पर मताधिकार का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि, 'कानून व्यवस्था पर और काम करने की जरूरत है। ' वहीं दूसरी तरफ वसुंधरा सेक्टर पंद्रह निवासी पुष्पा त्यागी ने प्रदूषण और समाज में जाति में लड़ाई झगड़े खत्म करने के लिए वोट दिया है। इसी के साथ, कलेक्ट्रेट में पोलिंग बूथ लाइव देखने के लिए स्क्रीन लगाई गई है। वहीं गाजियाबाद के वसुंधरा में आदर्श मतदान केंद्र मौजूद सुरक्षा बल के बीच मतदान किया जा रहा है। इसके अलावा जैनमती इंटर कॉलेज में स्पेशल चाइल्ड ओजीता जैन पहली बार वोट डालने पहुंची। आपको बता दें कि डासना गेट कंपोजिट विद्यालय में बहत्तर वर्षीय रामनाथ गुप्ता ने मतदान किया और डासना गेट कंपोजिट विद्यालय पर सुरक्षा कर्मी तैनात हैं। इसी के साथ, युवा मतदाता प्राची रस्तोगी ने अपनी मां के साथ मताधिकार का इस्तेमाल किया। आपको बता दें कि इस दौरान गाजियाबाद के डीएम और एसएसपी ने इंग्रहम स्कूल और इन्द्रगढ़ी के मतदान केंद्रों पर पहुंचकर जायजा लिया। वहीं इंग्राहम गर्ल्स डिग्री कॉलेज की प्रिंसिपल डॉक्टर सरिता शर्मा ने मताधिकार का इस्तेमाल किया और पंचवटी में सुमति ज्ञान पब्लिक स्कूल में मतदाताओं ने वोट डाला। मिली जानकारी के तहत गाजियाबाद के सहकारी नगर स्थित सन इंटरनेशनल स्कूल में बने पोलिंग बूथ में बड़ी संख्या में वोटर पहुंच रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश में पहले चरण में ग्यारह जिलों की अट्ठावन सीटों पर मतदान हो रहा है। सुबह-सुबह कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया और लिखा कि 'देश को हर डर से आज़ाद करो- बाहर आओ, वोट करो! '
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व्हीलचेयर पर बैठकर खेलने वाली भाविना बेन को इस हफ्ते की शुरुआत में अपने पहले ग्रुप मैच में भी झाउ के खिलाफ शिकस्त का सामना करना पड़ा था. उन्होंने कहा कि सभी देशवासियों को यह मेडल समर्पित करना चाहती हूं. उनके सहयोग से मैं यहां नहीं पहुंच सकती थी.
टोक्यो पैरालम्पिक में टेबल टेनिस स्पर्धा के महिला सिंगल्स में सिल्वर मेडल जीतने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाविना बेन पटेल से बातचीत कर उसे बधाई दी. पीएम मोदी ने फोन पर पटेल की तारीफ की और उनसे कहा कि उन्होंने इतिहास रच दिया है. पीएम ने भाविना को भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दी. इससे पहले उन्होंने ट्वीट कर इस जीत को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि इससे युवा खेलों के प्रति आकर्षित होंगे.
भाविना बेन पटेल को पैरालंपिक की टेबल टेनिस क्लास-4 स्पर्धा के महिला एकल फाइनल में रविवार को चीन की झाउ यिंग के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा. 34 साल की भाविना बेन को दो बार की स्वर्ण पदक विजेता झाउ यिंग ने सीधे मुकाबले में 7-11, 5-11, 6-11 से शिकस्त दी. हालांकि, इसके बावजूद वह तोक्यो पैरालंपिक खेलों में भारत को पहला पदक दिलाने में सफल रहीं.
PM Modi spoke to #BhavinaPatel and congratulated her on winning the Paralympics Silver medal.
PM lauded her efforts and told her that she has scripted history. He wished her the very best for her future endeavours.
भाविना बेन पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली सिर्फ दूसरी भारतीय महिला खिलाड़ी हैं. भारतीय पैरालंपिक समिति (PCI) की मौजूदा अध्यक्ष दीपा मलिक पांच साल पहले रियो पैरालंपिक में गोला फेंक में रजत पदक के साथ पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं थी.
व्हीलचेयर पर बैठकर खेलने वाली भाविना बेन को इस हफ्ते की शुरुआत में अपने पहले ग्रुप मैच में भी झाउ के खिलाफ शिकस्त का सामना करना पड़ा था. पैरा टेबल टेनिस की क्लास 1 से 5 व्हीलचेयर खिलाड़ियों के लिए होती है. क्लास 4 के खिलाड़ियों का बैठने का संतुलन ठीक-ठाक होता है और उनकी बांह और हाथ पूरी तरह काम करते हैं.
भाविना पीटीटी थाईलैंड टेबल टेनिस चैंपियनशिप में भारत के लिए रजत पदक जीतकर 2011 में दुनिया की दूसरे नंबर की खिलाड़ी बनी थी. वहीं अक्तूबर 2013 में भाविना बेन ने बीजिंग में एशियाई पैरा टेबल टेनिस चैंपियनशिप में महिला एकल क्लास 4 का रजत पदक जीता था.
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व्हीलचेयर पर बैठकर खेलने वाली भाविना बेन को इस हफ्ते की शुरुआत में अपने पहले ग्रुप मैच में भी झाउ के खिलाफ शिकस्त का सामना करना पड़ा था. उन्होंने कहा कि सभी देशवासियों को यह मेडल समर्पित करना चाहती हूं. उनके सहयोग से मैं यहां नहीं पहुंच सकती थी. टोक्यो पैरालम्पिक में टेबल टेनिस स्पर्धा के महिला सिंगल्स में सिल्वर मेडल जीतने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाविना बेन पटेल से बातचीत कर उसे बधाई दी. पीएम मोदी ने फोन पर पटेल की तारीफ की और उनसे कहा कि उन्होंने इतिहास रच दिया है. पीएम ने भाविना को भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं दी. इससे पहले उन्होंने ट्वीट कर इस जीत को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि इससे युवा खेलों के प्रति आकर्षित होंगे. भाविना बेन पटेल को पैरालंपिक की टेबल टेनिस क्लास-चार स्पर्धा के महिला एकल फाइनल में रविवार को चीन की झाउ यिंग के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा. चौंतीस साल की भाविना बेन को दो बार की स्वर्ण पदक विजेता झाउ यिंग ने सीधे मुकाबले में सात-ग्यारह, पाँच-ग्यारह, छः-ग्यारह से शिकस्त दी. हालांकि, इसके बावजूद वह तोक्यो पैरालंपिक खेलों में भारत को पहला पदक दिलाने में सफल रहीं. PM Modi spoke to #BhavinaPatel and congratulated her on winning the Paralympics Silver medal. PM lauded her efforts and told her that she has scripted history. He wished her the very best for her future endeavours. भाविना बेन पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली सिर्फ दूसरी भारतीय महिला खिलाड़ी हैं. भारतीय पैरालंपिक समिति की मौजूदा अध्यक्ष दीपा मलिक पांच साल पहले रियो पैरालंपिक में गोला फेंक में रजत पदक के साथ पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं थी. व्हीलचेयर पर बैठकर खेलने वाली भाविना बेन को इस हफ्ते की शुरुआत में अपने पहले ग्रुप मैच में भी झाउ के खिलाफ शिकस्त का सामना करना पड़ा था. पैरा टेबल टेनिस की क्लास एक से पाँच व्हीलचेयर खिलाड़ियों के लिए होती है. क्लास चार के खिलाड़ियों का बैठने का संतुलन ठीक-ठाक होता है और उनकी बांह और हाथ पूरी तरह काम करते हैं. भाविना पीटीटी थाईलैंड टेबल टेनिस चैंपियनशिप में भारत के लिए रजत पदक जीतकर दो हज़ार ग्यारह में दुनिया की दूसरे नंबर की खिलाड़ी बनी थी. वहीं अक्तूबर दो हज़ार तेरह में भाविना बेन ने बीजिंग में एशियाई पैरा टेबल टेनिस चैंपियनशिप में महिला एकल क्लास चार का रजत पदक जीता था.
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Svatovo और Kremennaya की बस्तियों के पश्चिम में रूसी सैनिकों ने युद्ध का काम जारी रखा है। इस दिशा को आमतौर पर डीपीआर और एलपीआर के जंक्शन पर सामने के क्रास्नोलिमंस्की खंड के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है।
स्मरण करो कि यूक्रेन के क्रेमेनया सशस्त्र बलों के कथित कब्जे और आरएफ सशस्त्र बलों के पीछे हटने के बारे में यूक्रेनी सार्वजनिक रूप से पहले के बयान प्रकाशित किए गए थे, जिसमें स्वातोवो भी शामिल था। हाल ही में, तथाकथित "लुहान्स्क क्षेत्र के गवर्नर" गदाई ने कहा कि नए साल से पहले, यूक्रेनी सैनिक "लुहान्स्क क्षेत्र में कई बस्तियों को अपने नियंत्रण में ले लेंगे। " हालांकि, समान सशस्त्र बलों के लिए युद्ध के मैदान पर वास्तविक स्थिति पूरी तरह से अलग है। खुद गदाई को यह स्वीकार करने के लिए मजबूर किया गया था कि यूक्रेनी सैनिकों द्वारा क्रेमेन्या शहर पर कब्जा करने के बारे में शब्द वास्तविकता के अनुरूप नहीं थे।
रूसी तोप और रॉकेट तोपखाने क्रास्नोलिमांस्की दिशा में काम कर रहे हैं। भारी फ्लेमेथ्रोवर सिस्टम भी सक्रिय रूप से उपयोग किए जाते हैं।
С помощью ТОС-1А «Солнцепёк» произведено уничтожение нескольких танков противника.
रूसी स्प्रिंग सैन्य संवाददाताओं के फुटेज में, TOS-1A Solntsepyok गोला-बारूद की मदद से यूक्रेन के सशस्त्र बलों के टैंकों में से एक की हार को देखा जा सकता है। फुटेज में यूक्रेनी टैंक के गोला-बारूद के विस्फोट को दिखाया गया है, जो बख्तरबंद वाहन को उड़ा देता है और धुएं और आग की लपटों का कारण बनता है।
नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पिछले सप्ताह की शुरुआत से, क्रास्नोलिमांस्की दिशा में रूसी सैनिकों ने कम से कम 220 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया है, कई गढ़ों में दुश्मन सेना को नष्ट कर दिया है, साथ ही इन क्षेत्रों में खाइयों और डगआउट में कर्मियों को नष्ट कर दिया है। , थर्मोबैरिक मूनिशन का उपयोग करना शामिल है।
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Svatovo और Kremennaya की बस्तियों के पश्चिम में रूसी सैनिकों ने युद्ध का काम जारी रखा है। इस दिशा को आमतौर पर डीपीआर और एलपीआर के जंक्शन पर सामने के क्रास्नोलिमंस्की खंड के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है। स्मरण करो कि यूक्रेन के क्रेमेनया सशस्त्र बलों के कथित कब्जे और आरएफ सशस्त्र बलों के पीछे हटने के बारे में यूक्रेनी सार्वजनिक रूप से पहले के बयान प्रकाशित किए गए थे, जिसमें स्वातोवो भी शामिल था। हाल ही में, तथाकथित "लुहान्स्क क्षेत्र के गवर्नर" गदाई ने कहा कि नए साल से पहले, यूक्रेनी सैनिक "लुहान्स्क क्षेत्र में कई बस्तियों को अपने नियंत्रण में ले लेंगे। " हालांकि, समान सशस्त्र बलों के लिए युद्ध के मैदान पर वास्तविक स्थिति पूरी तरह से अलग है। खुद गदाई को यह स्वीकार करने के लिए मजबूर किया गया था कि यूक्रेनी सैनिकों द्वारा क्रेमेन्या शहर पर कब्जा करने के बारे में शब्द वास्तविकता के अनुरूप नहीं थे। रूसी तोप और रॉकेट तोपखाने क्रास्नोलिमांस्की दिशा में काम कर रहे हैं। भारी फ्लेमेथ्रोवर सिस्टम भी सक्रिय रूप से उपयोग किए जाते हैं। С помощью ТОС-एकА «Солнцепёк» произведено уничтожение нескольких танков противника. रूसी स्प्रिंग सैन्य संवाददाताओं के फुटेज में, TOS-एक एम्पीयर Solntsepyok गोला-बारूद की मदद से यूक्रेन के सशस्त्र बलों के टैंकों में से एक की हार को देखा जा सकता है। फुटेज में यूक्रेनी टैंक के गोला-बारूद के विस्फोट को दिखाया गया है, जो बख्तरबंद वाहन को उड़ा देता है और धुएं और आग की लपटों का कारण बनता है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पिछले सप्ताह की शुरुआत से, क्रास्नोलिमांस्की दिशा में रूसी सैनिकों ने कम से कम दो सौ बीस वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया है, कई गढ़ों में दुश्मन सेना को नष्ट कर दिया है, साथ ही इन क्षेत्रों में खाइयों और डगआउट में कर्मियों को नष्ट कर दिया है। , थर्मोबैरिक मूनिशन का उपयोग करना शामिल है।
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2730125S WALENTI FJELISSA NEJETSFPOINTIS FERNANDA22109UJ194081GD DEPORTINGEREADORESFREERIMINALITEITSPRITE
ब्राह्मणमें छोड़ दिया गया है। पञ्चविंश ब्राह्मणका प्रथम अध्याय यजुर्मन्त्रकी एक सहिता है । द्वितीय एव तृतीय अध्यायमें विष्टुति या स्तोमरचनाकी पद्धतिका वर्णन है। सामगान सोमयागमें ही होता है अत सामवेदीय ब्राह्मणोंने केवल सोमयागका ही विवरण पाया जाता है।
हैं और उत्तरार्चिकमें यागविधिके अनुसार समन्वित हैं। पूर्वार्चिकमें मन्त्र स्वतन्त्र है उत्तरार्चिकमें सूक्तके आकारम हैं। उत्तरार्चिककी स्वरलिपि - जो भक्ति शब्दसे कही जाती हैं प्रस्ताव - जिसका गान करनेवाला प्रस्तोता उद्गीथ - जिसका गायक उद्गाता, प्रतिहर- जिसका गायक प्रतिहर्ता कहलाता है । अन्तमें ॐकारके उच्चारणका गान होता है जिसे हिङ्कार कहते हैं । ॐकार या हिङ्कारको लेकर गान सात भागों में विभक्त है । वेदमें तीन स्वर है-- उदात्त अनुदात्त और स्वरित । सामसहिताके आर्चिक ग्रन्थपाठके समय ये तीनों स्वर लगाये जाते है । नारदीय शिक्षाके अनुसार ये स्वर पञ्चम मध्यम गान्धार, ऋषभ घड्ज निषाद और धैवत शब्दक समान है ।
सामवेदके ९ ब्राह्मणामें जैमिनीय शाखाका जैमिनीय या तलवकार ब्राह्मण कौथुमीय और राणायनीय शाखाका ताण्ड्य या पञ्चविंश या प्रौढ़ ब्राह्मण तथा मन्त्र या छान्दोग्य ब्राह्मण माना गया है। अन्य ब्राह्मण अनुब्राह्मण माने गये है । जैमिनीय ब्राह्मणको प्राचीन ब्राह्मणके रूपमें माना गाया है । सायणके भाष्यमें शाङ्खायन ब्राह्मणके अनेक उद्धरण मिलते हैं । ये जैमिनीय ब्राह्मणसे मेल खाते हैं । सम्भवत यह जैमिनीय ब्राह्मणका प्राचीन ब्राह्मण था, जो इस समय मिलता है । जैमिनीय ब्राह्मण ८ अध्यायोमं विभक्त है। प्रथम तीन अध्यायमें कर्मकाण्ड है। चौथेसे सात अध्यायपर्यन्त उपनिषद् ब्राह्मण है। यह आरण्यक और उपनिषद्का सम्मिश्रण है। प्रसिद्ध तलवकार या केनोपनिषद् सप्तम अध्यायके एकादश खण्डसे आरम्भ होता है और २१वें खण्डमें समाप्त होता है।
ताण्ड्य ब्राह्मण
इसके सकलयिता ताष्ठ्य ऋषि हैं। इस ब्राह्मण में २५ अध्याय है इसीलिय इसको पञ्चविंश ग्राहह्मण भो । कहा जाता है। ताण्ड्य ब्राह्मण और जैमिनीय ब्राह्मणका विषय एक ही है किंतु जैमिनीय ब्राह्मणका आख्यान- भाग ताण्ड्य ब्राह्मणसे समृद्ध है और ऐतिहासिक मूल्य धारण करता है। उसमें कतिपय अतिप्राचीन तान्त्रिक अनुष्ठानोंका विवरण मिलता है जिसे शिष्टाचारविगति मानकर पञ्चविंश
ताण्ड्य ब्राह्मणके परिशिष्ट पड्विंश ब्राह्मणम ५ प्रपाठक हैं। तृतीय प्रपाठकमें ५ नवीन यागकर विधान है - श्येन इषु, संदाश, वज्र और विश्वदेव । तन्त्रको भाषामें यह रौद्र कर्म है। चतुर्थ प्रपाठकमें ब्राह्मणको प्रात सध्यानुष्ठानके सम्बन्ध में आलोचना का गयी है । पञ्चम प्रपाठक अद्भुत ब्राह्मण है। तन्त्रका शान्तिकर्म इससे सामञ्जस्य रखता है । इसके दशम खण्डमें देव-मन्दिर आदिका विधान किया गया है। सामवेदका एक प्रधान ब्राह्मण छान्दोग्य अथवा मन्त्र या उपनिषद् ब्राह्मण कहलाता है । इसमें १० प्रपाठक है । प्रथम य प्रपाठकमें ग्रीहकरण्डके मन्त्रोंका सग्रह है, शेष ८ प्रपाठकमे छान्दोग्योपनिषद् है। इनके अतिरिक्त ५ और ब्राह्मण जिन्हें अनुब्राह्मण कहा जाता है। कृच्छ्रचान्द्रायण आदि प्रायश्चित्तांका विधान है। इसमें तीन प्रपाठक है। प्रथम आर्षेय नाह्मण है इसके बाद दैवत ब्राह्मण है । इसमें तीन खण्ड है । इसके प्रथम खण्डमें सामका विधान और अन्त्यभागमें देवताका वर्णन है । द्वितीय खण्डमें छन्दके देवताका विवरण और तुर्लय खण्डम छन्दके नामकी व्युत्पत्ति है । संहितोपनिषद् ब्राह्मण ५ खण्डमें विभक्त है। अन्तमें वंश-ब्राह्मण ३ खण्डमे विभक्त है । इसमें सामवेदके सम्प्रदायप्रवर्तक आचार्यो वशधारियांका विवरण है। सामवेदक आदिप्रवक्ता स्वयम्भू ब्रह्मा तथा श्रोता प्रजापति है। यह प्रजापतिसे मृत्युको मृत्युसे वायुको वायुसे इन्द्रको, इन्द्रसे अग्निका हुआ है। अग्निके द्वारा ही कस्यपन मनुष्योंको इम वेदका लाभ कराया है। मार्कण्डेयपुराणमें भी प्रजापतिक्रममें वेदका विस्तार प्रदर्शित है।
यजुर्वेदका अध्वर्युवेद भी कहा जाता है। व उद्देश्यस द्रव्यत्याग यज्ञ है। त्यागकर्ता यजमान है औ
वैदिक साहित्यका सामान्य परिचय :
अथर्वा और अङ्गिरा - ये दोनों यज्ञविधि और अग्निविद्याके प्रवर्तकके रूपमें प्रसिद्ध है। भृगुने धुलोककी अग्निको भूलोकमें मनुष्योंके मध्यमें प्रतिष्ठित किया ( ऋ० के० ११५८१६) । अथर्वा एव भृगु अग्निविधाके प्रवर्तक हैं किंतु अग्नि स्वय ही अङ्गिरा है। इन तीनकि मूलमें अग्निकी दीप्तिको ध्वनि मिलती है । अथर्वसहिताके मन्त्रांका एक पञ्चमाश ऋक्सहितासे लिया गया है, जो पादबद्ध मन्त्र है। अथर्वसहिताका एक षष्ठाश यजुर्वेदके मन्त्रोंके समान गद्यमें रचित है । मन्त्र - रचनाको जो धारा तीनों वेदोंमें मिलती है अथर्ववेदमें भी उसीकी अनुवृत्ति है किंतु दोनोंक विनियोगमं बहुत भद है । तीन वेदोंका विनियोग श्रौतकर्ममें है । देवताके साथ सायुज्यके द्वारा अमृतत्वको प्राप्ति ही लक्ष्य है । अथर्ववेदका प्रधान विनियोग गृह्यकर्ममें है। अनेक शान्तिक और पौष्टिक क्रियाओंके द्वारा देवशक्तिकी सहायतासे अभ्युदयकी प्राप्ति लक्ष्य है। अथर्षसहिताकी शौनक- शाखामें २० काण्डोंमें ७३१ सूक्त और ५९५७ मन्त्र हैं । इसमें सप्तम काण्डतक अनेक आभ्युदयिक कर्मोकि मन्त्र हैं। फलत सहिताका यह भाग गार्हस्थ्य और सामाजिक जीवनका पोषक तथा लोकहितके अनुकूल है। अधिक आयु लाभके लिये भैषज्य अर्थात् आरोग्य-कामनाके लिये शान्तिक अर्थात् भूतावेश आदिको दूर करनेके लिये पौष्टिक अर्थात् लक्ष्मी लाभके लिये सौमनस्य अर्थात् परस्पर मैत्री सम्पादनके लिये आभिचारिक अर्थात् शत्रुनाशके लिये प्रायश्चित्त एव राजकर्म अर्थात् राष्ट्रके निरापद्-रूप एव उन्नतिके लिये ये आभ्युदयिक कर्म दिये गये हैं। इनके अतिरिक्त विवाह गर्भाधान आदिके भी अनेक मन्त्र इस भागमें दिये गये हैं। आठवेंसे बारहवें काण्डतक अथर्वसहिताका द्वितीय भाग है - इस भाग में भी आभ्युदयिक कर्मोकि मन्त्र दिये गये हैं किंतु उपनिषद्-भावनाका ही इस भागमें विशेष स्थान है । वेद ब्राह्मणक आरण्यक अंशमें जसे यज्ञाङ्गको लेकर रहस्याक्तिका प्राचुर्य देखा जाता है वैसा ही यहाँ भी उपलब्ध होता है ।
इसे निष्पन्न करनेवाला ऋत्विक् हे । देवताका आवाहन और प्रशस्ति पाठ स्तुतिगान और उन्हें उद्देश्य कर होमद्रव्यका आहुति दान - यही तीन यज्ञका मुख्य साधन हे । प्रशस्तिपाठ-कर्ता होता स्तुतिगानकर्ता उद्गाता और आहुति दाता अध्वर्यु है। इन मन्त्रोंका सकलन यजु सहिता है । ऋग्वदी भाषामं अध्वर्यु यशका शरीर निर्माता है । जिन मन्त्रोंकी सहायतासे यह कार्य किया जाता है वे यजुप् है। यजु सहिताकी दो धाराएँ है - कृष्ण और शुक्ल । मन्त्र और ब्राह्मणका एक साथ जहाँ निर्देश है वह कृष्ण है और जिस सहितामें केवल मन्त्रका सग्रह है वह शुक्ल है । शुक्ल यजुर्वेदके शतपथ ब्राह्मणके अन्तमें कहा गया है - आदित्यानि इमानि शुक्लानि यजूषि वाजसनेयेन याज्ञवल्क्येन आख्यायन्ते' - अर्थात् वाजसनेय याज्ञवल्क्यने आदित्यस इस शुक्ल यजुष्को प्राप्तकर इसका प्रवचन किया है ।
इस समय शुक्ल यजुर्वेदकी तीन शाखाएँ प्राप्त हैं - वाजसनेयी काण्व और माध्यदिन । वाजसनेयसहिताके शेषर्म पुरुषसूक्त सर्वमेध मन्त्र शिवसकल्पादि मन्त्र अध्यात्मवादक परिचायक हैं और अन्तम ईशोपनिषद् है । अथर्वसहिताका एक ही ब्राह्मण मिलता है जिसका नाम गोपथ है । इसके दो भाग हैं- पूर्व और उत्तर पूर्वभागमें ५ और उत्तर भागमें ६ प्रपाठक है।
सहिताके प्रधान ब्राह्मणोंका शप अश ही आरण्यक है । यह नाम सहिता और ब्राह्मणमें ही मिलता है। शतपथ ब्राह्मणका चौदहवाँ काण्ड बृहदारण्यक है ।
अथर्ववेद सहिता
अथर्ववेद - सहिताको त्रयी विद्याका परिशिष्ट या उसके परिपूरकके रूपमें माना जाता है । अथर्ववेदके प्रवर्तकके रूपमं तीन ऋषियोंका नाम पाया जाता है - अथर्वा अङ्गिरस और भृगु । ये ही तीन ऋक् सहिताके प्राचीन पितृपुरुषके रूपमें मान जाते है यथा -- अङ्गिरसोन पितरो नवग्वा अथर्वाणो भूगव सोम्यास । तेषां वय सुमतौ यज्ञियानामपि भद्रे सौमनसे स्याम ।। (ऋष्य १० ११४१६)
अथर्ववेदका पृथ्वीसूक्त पृथ्वीको स्तुतिक रूपर्म समग्र वैदिक साहित्यको अतुलनीय राजनीतिक उपलब्धि है।
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सत्ताईस लाख तीस हज़ार एक सौ पच्चीसS WALENTI FJELISSA NEJETSFPOINTIS FERNANDAबाईस हज़ार एक सौ नौUJएक लाख चौरानवे हज़ार इक्यासीGD DEPORTINGEREADORESFREERIMINALITEITSPRITE ब्राह्मणमें छोड़ दिया गया है। पञ्चविंश ब्राह्मणका प्रथम अध्याय यजुर्मन्त्रकी एक सहिता है । द्वितीय एव तृतीय अध्यायमें विष्टुति या स्तोमरचनाकी पद्धतिका वर्णन है। सामगान सोमयागमें ही होता है अत सामवेदीय ब्राह्मणोंने केवल सोमयागका ही विवरण पाया जाता है। हैं और उत्तरार्चिकमें यागविधिके अनुसार समन्वित हैं। पूर्वार्चिकमें मन्त्र स्वतन्त्र है उत्तरार्चिकमें सूक्तके आकारम हैं। उत्तरार्चिककी स्वरलिपि - जो भक्ति शब्दसे कही जाती हैं प्रस्ताव - जिसका गान करनेवाला प्रस्तोता उद्गीथ - जिसका गायक उद्गाता, प्रतिहर- जिसका गायक प्रतिहर्ता कहलाता है । अन्तमें ॐकारके उच्चारणका गान होता है जिसे हिङ्कार कहते हैं । ॐकार या हिङ्कारको लेकर गान सात भागों में विभक्त है । वेदमें तीन स्वर है-- उदात्त अनुदात्त और स्वरित । सामसहिताके आर्चिक ग्रन्थपाठके समय ये तीनों स्वर लगाये जाते है । नारदीय शिक्षाके अनुसार ये स्वर पञ्चम मध्यम गान्धार, ऋषभ घड्ज निषाद और धैवत शब्दक समान है । सामवेदके नौ ब्राह्मणामें जैमिनीय शाखाका जैमिनीय या तलवकार ब्राह्मण कौथुमीय और राणायनीय शाखाका ताण्ड्य या पञ्चविंश या प्रौढ़ ब्राह्मण तथा मन्त्र या छान्दोग्य ब्राह्मण माना गया है। अन्य ब्राह्मण अनुब्राह्मण माने गये है । जैमिनीय ब्राह्मणको प्राचीन ब्राह्मणके रूपमें माना गाया है । सायणके भाष्यमें शाङ्खायन ब्राह्मणके अनेक उद्धरण मिलते हैं । ये जैमिनीय ब्राह्मणसे मेल खाते हैं । सम्भवत यह जैमिनीय ब्राह्मणका प्राचीन ब्राह्मण था, जो इस समय मिलता है । जैमिनीय ब्राह्मण आठ अध्यायोमं विभक्त है। प्रथम तीन अध्यायमें कर्मकाण्ड है। चौथेसे सात अध्यायपर्यन्त उपनिषद् ब्राह्मण है। यह आरण्यक और उपनिषद्का सम्मिश्रण है। प्रसिद्ध तलवकार या केनोपनिषद् सप्तम अध्यायके एकादश खण्डसे आरम्भ होता है और इक्कीसवें खण्डमें समाप्त होता है। ताण्ड्य ब्राह्मण इसके सकलयिता ताष्ठ्य ऋषि हैं। इस ब्राह्मण में पच्चीस अध्याय है इसीलिय इसको पञ्चविंश ग्राहह्मण भो । कहा जाता है। ताण्ड्य ब्राह्मण और जैमिनीय ब्राह्मणका विषय एक ही है किंतु जैमिनीय ब्राह्मणका आख्यान- भाग ताण्ड्य ब्राह्मणसे समृद्ध है और ऐतिहासिक मूल्य धारण करता है। उसमें कतिपय अतिप्राचीन तान्त्रिक अनुष्ठानोंका विवरण मिलता है जिसे शिष्टाचारविगति मानकर पञ्चविंश ताण्ड्य ब्राह्मणके परिशिष्ट पड्विंश ब्राह्मणम पाँच प्रपाठक हैं। तृतीय प्रपाठकमें पाँच नवीन यागकर विधान है - श्येन इषु, संदाश, वज्र और विश्वदेव । तन्त्रको भाषामें यह रौद्र कर्म है। चतुर्थ प्रपाठकमें ब्राह्मणको प्रात सध्यानुष्ठानके सम्बन्ध में आलोचना का गयी है । पञ्चम प्रपाठक अद्भुत ब्राह्मण है। तन्त्रका शान्तिकर्म इससे सामञ्जस्य रखता है । इसके दशम खण्डमें देव-मन्दिर आदिका विधान किया गया है। सामवेदका एक प्रधान ब्राह्मण छान्दोग्य अथवा मन्त्र या उपनिषद् ब्राह्मण कहलाता है । इसमें दस प्रपाठक है । प्रथम य प्रपाठकमें ग्रीहकरण्डके मन्त्रोंका सग्रह है, शेष आठ प्रपाठकमे छान्दोग्योपनिषद् है। इनके अतिरिक्त पाँच और ब्राह्मण जिन्हें अनुब्राह्मण कहा जाता है। कृच्छ्रचान्द्रायण आदि प्रायश्चित्तांका विधान है। इसमें तीन प्रपाठक है। प्रथम आर्षेय नाह्मण है इसके बाद दैवत ब्राह्मण है । इसमें तीन खण्ड है । इसके प्रथम खण्डमें सामका विधान और अन्त्यभागमें देवताका वर्णन है । द्वितीय खण्डमें छन्दके देवताका विवरण और तुर्लय खण्डम छन्दके नामकी व्युत्पत्ति है । संहितोपनिषद् ब्राह्मण पाँच खण्डमें विभक्त है। अन्तमें वंश-ब्राह्मण तीन खण्डमे विभक्त है । इसमें सामवेदके सम्प्रदायप्रवर्तक आचार्यो वशधारियांका विवरण है। सामवेदक आदिप्रवक्ता स्वयम्भू ब्रह्मा तथा श्रोता प्रजापति है। यह प्रजापतिसे मृत्युको मृत्युसे वायुको वायुसे इन्द्रको, इन्द्रसे अग्निका हुआ है। अग्निके द्वारा ही कस्यपन मनुष्योंको इम वेदका लाभ कराया है। मार्कण्डेयपुराणमें भी प्रजापतिक्रममें वेदका विस्तार प्रदर्शित है। यजुर्वेदका अध्वर्युवेद भी कहा जाता है। व उद्देश्यस द्रव्यत्याग यज्ञ है। त्यागकर्ता यजमान है औ वैदिक साहित्यका सामान्य परिचय : अथर्वा और अङ्गिरा - ये दोनों यज्ञविधि और अग्निविद्याके प्रवर्तकके रूपमें प्रसिद्ध है। भृगुने धुलोककी अग्निको भूलोकमें मनुष्योंके मध्यमें प्रतिष्ठित किया । अथर्वा एव भृगु अग्निविधाके प्रवर्तक हैं किंतु अग्नि स्वय ही अङ्गिरा है। इन तीनकि मूलमें अग्निकी दीप्तिको ध्वनि मिलती है । अथर्वसहिताके मन्त्रांका एक पञ्चमाश ऋक्सहितासे लिया गया है, जो पादबद्ध मन्त्र है। अथर्वसहिताका एक षष्ठाश यजुर्वेदके मन्त्रोंके समान गद्यमें रचित है । मन्त्र - रचनाको जो धारा तीनों वेदोंमें मिलती है अथर्ववेदमें भी उसीकी अनुवृत्ति है किंतु दोनोंक विनियोगमं बहुत भद है । तीन वेदोंका विनियोग श्रौतकर्ममें है । देवताके साथ सायुज्यके द्वारा अमृतत्वको प्राप्ति ही लक्ष्य है । अथर्ववेदका प्रधान विनियोग गृह्यकर्ममें है। अनेक शान्तिक और पौष्टिक क्रियाओंके द्वारा देवशक्तिकी सहायतासे अभ्युदयकी प्राप्ति लक्ष्य है। अथर्षसहिताकी शौनक- शाखामें बीस काण्डोंमें सात सौ इकतीस सूक्त और पाँच हज़ार नौ सौ सत्तावन मन्त्र हैं । इसमें सप्तम काण्डतक अनेक आभ्युदयिक कर्मोकि मन्त्र हैं। फलत सहिताका यह भाग गार्हस्थ्य और सामाजिक जीवनका पोषक तथा लोकहितके अनुकूल है। अधिक आयु लाभके लिये भैषज्य अर्थात् आरोग्य-कामनाके लिये शान्तिक अर्थात् भूतावेश आदिको दूर करनेके लिये पौष्टिक अर्थात् लक्ष्मी लाभके लिये सौमनस्य अर्थात् परस्पर मैत्री सम्पादनके लिये आभिचारिक अर्थात् शत्रुनाशके लिये प्रायश्चित्त एव राजकर्म अर्थात् राष्ट्रके निरापद्-रूप एव उन्नतिके लिये ये आभ्युदयिक कर्म दिये गये हैं। इनके अतिरिक्त विवाह गर्भाधान आदिके भी अनेक मन्त्र इस भागमें दिये गये हैं। आठवेंसे बारहवें काण्डतक अथर्वसहिताका द्वितीय भाग है - इस भाग में भी आभ्युदयिक कर्मोकि मन्त्र दिये गये हैं किंतु उपनिषद्-भावनाका ही इस भागमें विशेष स्थान है । वेद ब्राह्मणक आरण्यक अंशमें जसे यज्ञाङ्गको लेकर रहस्याक्तिका प्राचुर्य देखा जाता है वैसा ही यहाँ भी उपलब्ध होता है । इसे निष्पन्न करनेवाला ऋत्विक् हे । देवताका आवाहन और प्रशस्ति पाठ स्तुतिगान और उन्हें उद्देश्य कर होमद्रव्यका आहुति दान - यही तीन यज्ञका मुख्य साधन हे । प्रशस्तिपाठ-कर्ता होता स्तुतिगानकर्ता उद्गाता और आहुति दाता अध्वर्यु है। इन मन्त्रोंका सकलन यजु सहिता है । ऋग्वदी भाषामं अध्वर्यु यशका शरीर निर्माता है । जिन मन्त्रोंकी सहायतासे यह कार्य किया जाता है वे यजुप् है। यजु सहिताकी दो धाराएँ है - कृष्ण और शुक्ल । मन्त्र और ब्राह्मणका एक साथ जहाँ निर्देश है वह कृष्ण है और जिस सहितामें केवल मन्त्रका सग्रह है वह शुक्ल है । शुक्ल यजुर्वेदके शतपथ ब्राह्मणके अन्तमें कहा गया है - आदित्यानि इमानि शुक्लानि यजूषि वाजसनेयेन याज्ञवल्क्येन आख्यायन्ते' - अर्थात् वाजसनेय याज्ञवल्क्यने आदित्यस इस शुक्ल यजुष्को प्राप्तकर इसका प्रवचन किया है । इस समय शुक्ल यजुर्वेदकी तीन शाखाएँ प्राप्त हैं - वाजसनेयी काण्व और माध्यदिन । वाजसनेयसहिताके शेषर्म पुरुषसूक्त सर्वमेध मन्त्र शिवसकल्पादि मन्त्र अध्यात्मवादक परिचायक हैं और अन्तम ईशोपनिषद् है । अथर्वसहिताका एक ही ब्राह्मण मिलता है जिसका नाम गोपथ है । इसके दो भाग हैं- पूर्व और उत्तर पूर्वभागमें पाँच और उत्तर भागमें छः प्रपाठक है। सहिताके प्रधान ब्राह्मणोंका शप अश ही आरण्यक है । यह नाम सहिता और ब्राह्मणमें ही मिलता है। शतपथ ब्राह्मणका चौदहवाँ काण्ड बृहदारण्यक है । अथर्ववेद सहिता अथर्ववेद - सहिताको त्रयी विद्याका परिशिष्ट या उसके परिपूरकके रूपमें माना जाता है । अथर्ववेदके प्रवर्तकके रूपमं तीन ऋषियोंका नाम पाया जाता है - अथर्वा अङ्गिरस और भृगु । ये ही तीन ऋक् सहिताके प्राचीन पितृपुरुषके रूपमें मान जाते है यथा -- अङ्गिरसोन पितरो नवग्वा अथर्वाणो भूगव सोम्यास । तेषां वय सुमतौ यज्ञियानामपि भद्रे सौमनसे स्याम ।। अथर्ववेदका पृथ्वीसूक्त पृथ्वीको स्तुतिक रूपर्म समग्र वैदिक साहित्यको अतुलनीय राजनीतिक उपलब्धि है।
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अनुपम फिल्मकार प्रीतीश नंदी के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ जंतर मंतर पर आमरण अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए वहां पहुंचे थे। शुक्रवार को अन्ना हजारे के आमरण अनशन का चौथा दिन है। उन्होंने कहा, मैं बतौर एक फिल्म अभिनेता नहीं बल्कि देश के एक आम नागरिक की तरह यहां आया हूं। हम यहां अन्ना हजारे का समर्थन करने के लिए आए हैं।
अन्ना हजारे का कहना है कि वर्तमान लोकपाल विधेयक भ्रष्टाचार से निपटने में उतना मजबूत नहीं है। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम आदमी से सुझाव लेकर एक अलग लोकपाल विधेयक तैयार किया है और वह चाहते हैं कि इसे लागू किया जाए।
Coming out in support of social activist Anna Hazare's fight against corruption, Bollywood actor Anupam Kher said that corruption has to be fought in real life, just as injustice is fought in reel life.
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दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों की लिस्ट मांगी थी और बताया गया कि उस पार्टी में एक वॉंटेड व्यक्ति भी शामिल था। इस मामले में अभिनेता सतीश कौशिक के कमरे से कुछ दवाइयां भी मिली थीं।
Satish Kaushik Death: दिग्गज अभिनेता सतीश कौशिक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद, दिल्ली पुलिस दिल्ली के फार्महाउस में सात घंटे के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है। यहीं पर अभिनेत सतीश कौशिक ने होली मनाई थी और उसी रात अचानक तबीयत खराब होने के बाद उनकी मौत हो गई थी। पुलिस के अनुसार, कौशिक की विस्तृत पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट से पुष्टि होती है कि मौत प्राकृतिक थी और कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मौत का कारण कोरोनरी आर्टरी ब्लॉकेज के कारण कार्डियक अरेस्ट था जो कोरोनरी आर्टरी डिजीज से जुड़ा हुआ है। पुलिस ने कहा कि विसरा को संरक्षित कर लिया गया है और फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी की गई है।
पुलिस के मुताबिक होली के दिन फार्महाउस पर हुई पार्टी में 20 से 25 मेहमान शामिल हुए थे। सतीश कौशिक ने अपने दोस्तों के साथ होली मनाई और डांस किया, जिसके बाद रात करीब साढ़े नौ बजे वे सोने चले गए और रात करीब 12 बजे उनकी तबीयत बिगड़ी. उसने मैनेजर को फोन किया और बताया कि उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही है। उनके मैनेजर उन्हें गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल ले गए जहां कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) दिए जाने के बावजूद लगभग दो बजे उनकी मौत हो गई।
दरअसल दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों की लिस्ट मांगी थी और बताया गया कि उस पार्टी में एक वॉंटेड व्यक्ति भी शामिल था। इस मामले में अभिनेता सतीश कौशिक के कमरे से कुछ दवाइयां भी मिली थीं जिसको लेकर पुलिस जांच कर रही थी।
पुलिस ने बताया कि अभी तक कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि सतीश कौशिक का हाई ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीज थे। सूत्रों ने शनिवार को बताया कि 66 वर्षीय दिग्गज अभिनेता के निधन के बाद, दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले की पुलिस की एक क्राइम ब्रांच टीम ने फार्महाउस का दौरा किया था। यहीं पर उस दिन पार्टी हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम ने फार्महाउस से कुछ 'दवाएं' बरामद की हैं। दवाएं जांच के लिए भेज दी गई हैं और रिपोर्ट अभी नहीं आई है। सूत्रों के मुताबिक कोई प्रतिबंधित दवा नहीं मिली है, हालांकि यह पता लगाया जा रहा है कि दवा में कौन सा साल्ट पाया गया।
सूत्रों के मुताबिक फार्महाउस के मालिक विकास मालू हैं। विकास मालू कुबेर ग्रुप के मालिक हैं और सतीश कौशिक के पारिवारिक मित्र हैं। विकास दिल्ली के बिजवासन के पुष्पांजलि फार्म हाउस इलाके में मालू फार्म हाउस का मालिक है।
पुलिस के मुताबिक विकास मालू की दूसरी पत्नी ने पिछले साल उसके खिलाफ रेप का केस दर्ज कराया था। दूसरी पत्नी ने भी विकास मालू के साथ मिलकर विकास मालू की बेटियों पर दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। दूसरी ओर, विकास मालू की पहली पत्नी के नाबालिग बेटे ने विकास मालू की दूसरी पत्नी के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोस्को) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस ने कहा कि वीडियो भी पुलिस के पास है। दोनों पक्षों की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ प्राथमिकी तो दर्ज कर ली, लेकिन उन्हें गिरफ्तार नहीं किया।
उधर, कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर विकास मालू द्वारा लिखित लुकआउट सर्कुलर (LOC) खोला. लेकिन बाद में कोर्ट के आदेश पर विकास मालू के एलओसी को बंद कर दिया गया, लेकिन उससे पहले ही उसका पासपोर्ट पुलिस के पास जमा करा दिया गया। इस मामले में पुलिस विकास मालू के संपर्क में थी।
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दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों की लिस्ट मांगी थी और बताया गया कि उस पार्टी में एक वॉंटेड व्यक्ति भी शामिल था। इस मामले में अभिनेता सतीश कौशिक के कमरे से कुछ दवाइयां भी मिली थीं। Satish Kaushik Death: दिग्गज अभिनेता सतीश कौशिक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद, दिल्ली पुलिस दिल्ली के फार्महाउस में सात घंटे के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है। यहीं पर अभिनेत सतीश कौशिक ने होली मनाई थी और उसी रात अचानक तबीयत खराब होने के बाद उनकी मौत हो गई थी। पुलिस के अनुसार, कौशिक की विस्तृत पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट से पुष्टि होती है कि मौत प्राकृतिक थी और कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मौत का कारण कोरोनरी आर्टरी ब्लॉकेज के कारण कार्डियक अरेस्ट था जो कोरोनरी आर्टरी डिजीज से जुड़ा हुआ है। पुलिस ने कहा कि विसरा को संरक्षित कर लिया गया है और फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी की गई है। पुलिस के मुताबिक होली के दिन फार्महाउस पर हुई पार्टी में बीस से पच्चीस मेहमान शामिल हुए थे। सतीश कौशिक ने अपने दोस्तों के साथ होली मनाई और डांस किया, जिसके बाद रात करीब साढ़े नौ बजे वे सोने चले गए और रात करीब बारह बजे उनकी तबीयत बिगड़ी. उसने मैनेजर को फोन किया और बताया कि उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही है। उनके मैनेजर उन्हें गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल ले गए जहां कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन दिए जाने के बावजूद लगभग दो बजे उनकी मौत हो गई। दरअसल दिल्ली पुलिस ने कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों की लिस्ट मांगी थी और बताया गया कि उस पार्टी में एक वॉंटेड व्यक्ति भी शामिल था। इस मामले में अभिनेता सतीश कौशिक के कमरे से कुछ दवाइयां भी मिली थीं जिसको लेकर पुलिस जांच कर रही थी। पुलिस ने बताया कि अभी तक कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि सतीश कौशिक का हाई ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीज थे। सूत्रों ने शनिवार को बताया कि छयासठ वर्षीय दिग्गज अभिनेता के निधन के बाद, दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले की पुलिस की एक क्राइम ब्रांच टीम ने फार्महाउस का दौरा किया था। यहीं पर उस दिन पार्टी हुई थी। सूत्रों के मुताबिक, जांच टीम ने फार्महाउस से कुछ 'दवाएं' बरामद की हैं। दवाएं जांच के लिए भेज दी गई हैं और रिपोर्ट अभी नहीं आई है। सूत्रों के मुताबिक कोई प्रतिबंधित दवा नहीं मिली है, हालांकि यह पता लगाया जा रहा है कि दवा में कौन सा साल्ट पाया गया। सूत्रों के मुताबिक फार्महाउस के मालिक विकास मालू हैं। विकास मालू कुबेर ग्रुप के मालिक हैं और सतीश कौशिक के पारिवारिक मित्र हैं। विकास दिल्ली के बिजवासन के पुष्पांजलि फार्म हाउस इलाके में मालू फार्म हाउस का मालिक है। पुलिस के मुताबिक विकास मालू की दूसरी पत्नी ने पिछले साल उसके खिलाफ रेप का केस दर्ज कराया था। दूसरी पत्नी ने भी विकास मालू के साथ मिलकर विकास मालू की बेटियों पर दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। दूसरी ओर, विकास मालू की पहली पत्नी के नाबालिग बेटे ने विकास मालू की दूसरी पत्नी के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इस मामले में पुलिस ने कहा कि वीडियो भी पुलिस के पास है। दोनों पक्षों की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों के खिलाफ प्राथमिकी तो दर्ज कर ली, लेकिन उन्हें गिरफ्तार नहीं किया। उधर, कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर विकास मालू द्वारा लिखित लुकआउट सर्कुलर खोला. लेकिन बाद में कोर्ट के आदेश पर विकास मालू के एलओसी को बंद कर दिया गया, लेकिन उससे पहले ही उसका पासपोर्ट पुलिस के पास जमा करा दिया गया। इस मामले में पुलिस विकास मालू के संपर्क में थी।
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भावानगर - निचार खंड के तरांडा पंचायत के थाच, ननस्पो, छौंडा, तरांडा क्षेत्र के सैकड़ों उपभोक्ता में पिछले एक महीने से गैस की सप्लाई न आने से भारी रोष है। जबकि गैस एजैंसी द्वारा महिने की 12 तारीख को इस क्षेत्र में गैस वितरित करने का दिन फिक्स किया है। स्थानीय ग्रामीणों उदय सिंह, मान सिंह, चरण सिंह, हिम्मत सिंह, अमृत, अभिषेक, सागर चंद, जय देवी, चतर सिंह, सुख चैन, गोबिंद सिंह का कहना है कि सर्प्ला५ न भेजे जाने पर गैस एजैंसी के कर्मचारियों को समय रहते क्षेत्र के लोगों को सूचना दी जानी चाहिए थी,जिससे लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही क्षेत्र के लोगों का समय व आर्थिक नुकसान न हो। भावानगर स्थित गैस एजैंसी के इंचार्ज प्रवीण कुमार का कहना है कि भारी बर्फबारी से मार्ग बंद होने के कारण सप्लाई बाधित हुई है।
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भावानगर - निचार खंड के तरांडा पंचायत के थाच, ननस्पो, छौंडा, तरांडा क्षेत्र के सैकड़ों उपभोक्ता में पिछले एक महीने से गैस की सप्लाई न आने से भारी रोष है। जबकि गैस एजैंसी द्वारा महिने की बारह तारीख को इस क्षेत्र में गैस वितरित करने का दिन फिक्स किया है। स्थानीय ग्रामीणों उदय सिंह, मान सिंह, चरण सिंह, हिम्मत सिंह, अमृत, अभिषेक, सागर चंद, जय देवी, चतर सिंह, सुख चैन, गोबिंद सिंह का कहना है कि सर्प्लापाँच न भेजे जाने पर गैस एजैंसी के कर्मचारियों को समय रहते क्षेत्र के लोगों को सूचना दी जानी चाहिए थी,जिससे लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही क्षेत्र के लोगों का समय व आर्थिक नुकसान न हो। भावानगर स्थित गैस एजैंसी के इंचार्ज प्रवीण कुमार का कहना है कि भारी बर्फबारी से मार्ग बंद होने के कारण सप्लाई बाधित हुई है।
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विपर्ययज्ञानस्वरूप इस सूत्रद्वारा निरूपण किया है। ऐसी जिज्ञासा होनेपर श्री विद्यानन्द आचार्य समाधान कहते हैं ।
इति प्रमाणात्मविवोधसंविधौ विपर्ययज्ञानमनेकधोदितम् । विपक्षविक्षेपमुखेन निर्णयं सुवोधरूपेण विधातुमुद्यतेः ॥११६ ॥
इस पूर्वोक प्रकार प्रमाणस्वरूप सम्यग्ज्ञानकी भले प्रकार विधि करनेपर विपरीत पक्षके खण्डनकी मुख्यतासे समीचीन बोधस्वरूप करके निर्णयको विधान करने के लिये उधमी हो रहे श्री उमास्वामी महाराज करके अनेक प्रकारका विपर्ययज्ञान इस सूत्रद्वारा कह दिया गया है । भावार्थ - पहिले प्रकरणों में किया गया सम्यग्ज्ञानका निरूपण समी निर्णीत हो सकता है, जब कि उनसे विपरीत हो रहे मिथ्याज्ञानोंका ज्ञान करा दिया जाय । अतः तीनों मिथ्याज्ञानों से व्यावृत्त हो रहा सम्यग्ज्ञान उपादेय है । चिकित्सक द्वारा दोषोंका प्रतिपादन किये विना रोगी उनका प्रत्याख्यान नहीं कर सकता है । विवक्षित पदार्थकी विधि हो जानेपर गम्यमान भी पदार्थोकी कंठोक व्यावृत्ति करना विशेष निर्णय हो जाने के लिये आवश्यक कार्य है ।
पूर्व सम्यगवबोधस्वरूपविधिरूपमुखेन निर्णय विधाय विपक्षविक्षेपमुखेनापि तं विघातुमुद्यतैरनेकपा विपर्ययज्ञानमुदितं वादिनोभयं कर्तव्यं स्वपरपक्षसाधनदूषणमिति न्यायानुसरणात् ।
पहिले सम्यग्ज्ञान के स्वरूपका विधिस्वरूपकी मुख्यता करके निर्णय कर पुन सम्यग्ज्ञानके विपक्ष हो रहे मिथ्याज्ञानों के निराकरणको मुख्यता करके भी उस निर्णयको विधान करने के लिये उद्यमी हो रहे सूत्रकार करके अनेक प्रकारका विपर्ययज्ञान कर दिया गया है । यद्यपि सम्यानको विधिसे ही मिथ्याज्ञानोंका अनायास निवारण हो जाता है । अथवा मिथ्याज्ञानोंका के निवारण कर देनेसे ही सम्पज्ञानोंकी परिश्रम के विना विधि हो जाती है। फिर भी वादीको दोनों कार्य करने चाहिये । अपने पक्षका साधन करना और दूसरों के प्रतिपक्ष में दूषण उठाना इस नीतिफा अनुसरण करनेसे प्रत्यकारने दोनों कार्य किये है । अथवा श्री उमास्वामी महाराजने विधि मुख और निषेध मुख दोनोंसे सम्यग्ज्ञान और मिथ्याज्ञानोका प्रतिपादन किया है । अतः सिद्ध है कि समीचीनवादी विद्वान्को स्वपक्षसाधन और परपक्षमें दूषण ये दोनों कार्य करने चाहिये । आत्माको शरीर परिमाण साथ चुकनेपर भी आमाके व्यापफपन या अणुपनका खण्डन कर देमेसे अपना सिद्धान्त अच्छा पुष्ट हो जाता है। ताळेको ताली घुमाकर लगा देते हैं। फिर भी खेचकर देख लेनेसे चितमें विशेष दृढता हो जाती है।
स्वविधिसामर्थ्यात् मतिषेधस्य सिद्धेस्तरसामर्थ्याद्वा स्त्रपक्षविधिसिद्धेनों भयवचनमर्यचदिति मवादस्यावस्थापितुमशक्तेः सर्वत्र सामर्थ्यसिद्धस्या वचनप्रसंगात् । स्वेष्टव्याघातस्यानुप॑गात् । क्वचित्सामर्थ्यसिद्धस्यापि वचने स्याद्वादन्यायस्यैव सिद्धेः सर्वे शुद्धम् ।
यदि बौद्ध यों करें कि अपने पक्षको विधि कर देनेकी सामर्थ्य से ही प्रतिपक्ष के निषेधकी सिद्धि हो जाती है । अथवा उस परपके निषेधकी सिद्धि हो जानेसे ही सामर्थ्य के बलसे स्वपक्ष को सिद्धि अर्यापत्तिसे बन जाती है। अतः दोनोंका फथन करना व्यर्थ है। किसी प्रयोजनको नहीं रखता है । व्यर्थ वचनोंको फहनेवाला वादी निप्रस्थानको प्राप्त हो जाता है। इसपर आचार्य कहते हैं कि उस उक्त प्रकार के प्रवादी व्यवस्था नहीं करायी जा सकती है। हम अन्य प्रकरणों में धर्मकीर्तिके प्रवादका निराकरण कर चुके हैं। यदि बौद्धोंका वह उक्त विचार माना जायगा तो सभी स्थलोंपर विना कई यो हो सामर्थ्य से सिद्ध हो रहे पदार्थ के नहीं कथन करनेका प्रसंग हो जायेगा । ऐसी दशा में अपने इष्ट सिद्धान्तके व्यावात हो जानेका प्रसंग आ जावेगा । आप बौद्धोंने " यत् सत् तत्मने क्षणिकं " इस व्याप्ति अनुसार समर्थन उपनय आदिका पुनरपि निरूपण किया है । किसी व्यक्तिकी विद्वत्ताका निषेध करनेपर मी मूर्खताका विधान नहीं हो जाता है। अथवा हेतुकी पक्ष में विधि कर देनेसे ही निषेध नहीं हो जाता है। बहुत से पण्डिस विश्व निर्धन नहीं होते हुये मी धनाढ्य नहीं कई जा सकते हैं। शुद्ध आत्मा या पुल परमाणु न भु है न गुरु है । हो, सामर्थ्य से सिद्ध हो रहे भी पदार्थका यदि शब्द द्वारा निरूपण करना कहीं कहीं इष्ट कर लोगे तब तो स्याद्वादन्यायको ही सिद्धि होगी । अतः अनेकान्त मत अनुसार सम्पूर्णव्यवस्था निर्दोष होकर शुद्ध बन जाती है। अन्यथा नहीं बनती है।
इति तच्चार्यश्लोकवार्तिफाळंकारे मयमस्याध्यायस्य चतुर्थमाह्निकम् ।
इस प्रकार तस्वार्थसूत्र के लोकरूप वार्तिकों के अलंकारस्वरूप माम्यमें प्रथम अध्यायका चौथा आहिक समाप्त हुआ ।
इस सूत्रके व्यापान में प्रकरण इस प्रकार है कि मिथ्याष्टि जीन और मम्यग्दष्टि जौषका ज्ञान जब समान जाना जा रहा है, तो कैसे निर्णत किया जाय ? कि मिथ्याइष्टिका ज्ञान विपर्यय है । इसको दृष्टान्तसहित प्रदर्शन करनेके लिये श्री उमास्वामी रत्नाकरसे सूत्रमणिका उद्धार हुआ है। सत् असत्का लक्षण कर सूत्र के अनुमान वाक्यको समीचीन बना दिया गया है। उम्मतका दृष्टान्त अच्छा मटा दिया है। स्वाहार्य विपर्ययके मेदोंको अनेक दार्शनिकों के मन्तव्य अनुसार समझाया है। सदमें वसीपनारूप त्रिपर्यको बताकर बस में सदकी कम्पनाको दूसरी
जातिका आहार्य विपर्यय कहा है। ज्ञार्य विपर्ययके समान सम्भवनेवाले साहार्य संशय और आहार्य अनध्यवसायको भी दृष्टान्तपूर्वक घटाया गया है। चार्वाक, शून्यवादी, बौद्ध, आदि दार्शनिकोंके यहां जो विपरीत अभिनिवेशसे अनेक ज्ञान हो रहे हैं, वे आहार्य विपर्यय है। पश्चात् मतिज्ञान के मेदोंमें सम्मव रहे विपर्ययको कहकर स्वार्थानुमानको आमास करनेवाले हेत्वाभासोंका निरूपण किया है। तीन प्रकारके हेत्याभास माने गये है। अन्य हेत्वाभासोंका इन्हींमें अन्तर्भाव हो जाता है। यहां मध्यमें बौद्ध, नैयायिक, कपिठ, आदिके सिद्धान्तोंको मिथ्या बताकर उनके साधक हेतुओंको हेवामास कर दिया है। और भी कई तत्रोंकी वर्णना की है। सादि अनन्त केवलज्ञानका अपूर्वार्थपना साधा गया है । यद्यपि केवलज्ञानीको एक ही समयमें सभी पदार्थ मास जाते हैं । फिर भी पूर्वापर -- फालसम्बन्धी विशिष्टता से वइ ज्ञान अपूर्वार्थप्राही है । फलके बासे आटेकी आज बनी हुई रोटीको आज खानेपर और कलके ताजे आटेकी कळ बनी हुई रोटीको आज बासी खानेपर स्याद न्यारा न्यारा है। धनी होकर हुये निर्धन और निर्धन होकर पीछे बनी हुये पुरुषोंके परिणाम विभिन्न हैं । अकिंचित्कर कोई पृथक् हेत्वाभास नहीं है। जैनोंके यहाँ प्रमाणसंडळ इए है । इसके पश्चात् नियोग, भावना, आदिको वाक्यका अर्थ माननेवाले मीमांसक आदिका विचार चढाया है 1 नियोगके प्राभाकारोंने ग्यारह मेद किये हैं। प्रमाण आदिक आठ विकल्प उठाकर उनका खण्डन किया गया है। वेदान्तकी रातिसे नियोगका खण्डन कराकर पुमः वेदान्तमतका भी निराकरण कर दिया है। भाट्टोंकी मानी हुयीं दोनों भावनाओं का निराकरण किया गया है । शद्भावना, अर्थभावना घटित नहीं होती हैं। शुद्ध घाटवर्थ मी वाक्यका अर्थ नहीं बन पाता है। तथा ब्रह्माद्वैत वादियोंकी मानी हुई विधि भी वाक्यका अर्थ नहीं है। इन सबका विस्तार के साथ विचार किया गया है। प्रवर्तक या अप्रवर्तक या सफळ, निष्फळ, नियोग के अनुसार विधिवाद में भी सभी दोष गिरादिये गये हैं। कुछ देरतक नियोगवादीका पक्ष लेकर आचार्य महाराजने विधिवादका विद्वत्तापूर्वक अच्छा उपहास किया है, जिसका कि अध्ययन करनेपर ही विशेष आनन्द प्राप्त होता है । नियोगके ग्यारहों भेदोंका खण्डन कर विधि, निषेच, आत्मक स्याद्वाद सिद्धान्तको साधा है। विधिमें भी प्रमाणपन आदिके विकल्प लगाकर अद्वैतवादका निराकरण किया है। यंत्रारूड पुरुष आदि भी वाक्यके अर्थ नहीं हैं। बौद्धोंफा अन्यापोह तो कथमपि चाक्यका अर्थ नहीं घटित होता है। विवक्षाका शद्ध के साथ अग्यमिचारी कार्यकारणभार सम्बन्ध नहीं है। अतः नियोग, भावना, षात्वर्थ, विधि, आदिको यदि वाक्यका अर्थ माना जायगा तो तनन्यज्ञान कुनशान सपझा जायगा। स्थवधिज्ञानों में केवल देशावधि हो कदाचिद् मिथ्यात्वका उदय हो जाने से निपर्यय रूप हो जाती है । परमावधि और सर्वावधि निपर्यय नहीं है । मनःपर्ययज्ञान भी विपरीत नहीं है । यद्यपि प्रमाश ज्ञानोंके प्रतिपादक सूत्रोंसे ही परिशेष न्यायसे मियाज्ञानको सन्विति हो सकती है। फिर भी वादीके कर्तव्य स्वपक्षसाधन, परपक्षदूषण दोनों हैं। संत्रर और निर्जरासे मोक्ष होती है ।
अनेकान्तकी उपलब्धि होते हुये भी एकान्तोंका अनुपलम्भ होना साधा जाता है। श्री भईन्त परमेष्ठीफे परमात्मपना सिद्ध हो चुकनेपर मी कपिल आदिकों में परमात्मपनका निषेध साधना अनिवार्य है । ताली फिरा देने से ही तालेका लग जाना जान चुकनेपर भी दृढ निश्चय के लिए तालेका खींचकर पुनः खटका लिया जाता है । गुणोंका ग्रहण करो और साथमें दोषोंका प्रत्याख्यान भी करते जाओ । अतः दृढ निर्णय कराकर छुढाने के लिये मिथ्याज्ञानोंको हेतु, दृष्टान्त पूर्वक प्रतिपादन करनेवाला सूत्र उमास्वामी महाराज द्वारा कहा गया है। प्रतिपक्षी दोपोंके सर्वथा निराकरण करनेसे ही शुद्ध मार्ग व्यवस्थित रह पाता है । यहातक पहिले अध्यायका चतुर्थ आहिक समाप्त किया गया है । ज्ञाने मैथ्यं विविच्य प्रमिविरससुख स्वादयन्सौगतादीन् । काचज्ञानादृते द्राक् स्वगुणमिह मणिर्व्यज्जयन्नोपलब्धः ॥ कुज्ञानाहार्यलीढं जगदुपकृतिभिः स्वाभिरुद्धर्तुमिच्छन् । श्रीविद्यानन्दसूरिजयति विगतभीर्भापितस्वामिसूत्रः ॥ १ ॥
सम्यग्दर्शन या जीव आदिक पदार्थोका अधिगम करानेवाले और अम्बई होनेसे पूर्व में प्रयुक्त किये गये प्रमाणोंका वर्णन हो चुका है। उस प्रमाणके अपवहित पश्चात् कई गये नयोंका अत्र निरूपण करना अवसर प्राप्त है । अतः निरुक्तिसे ही लक्षणको अपने पेटमें रखनेवाली नयोंकी भेदगणनाको कइनेवाळे सूत्र रसायनकी प्राप्ति यहां मोक्षमार्गको पारदीयसिद्धिको धारनेवाले श्री उमास्वामी महाराज द्वारा हो रही है, उसको अवधारिये ।
नैगमसंग्रहव्यवहारर्जुसूत्रशब्द समभिरूढैवंभृता नयाः ॥ ३३॥
नैगम, संग्रह, व्यवहार, ऋजुसूत्र, शद्व सममिरूढ, और एवंभूत, ये सात नय हैं । यद्यपि प्रमाणोंसे नय मिन्न है । फिर भी शदों द्वारा जानने योग्य विषयको जतानेवाळे श्रुतज्ञान के एक देश नय माने गये है। शद आत्मक और ज्ञान आत्मक नय हो जाते हैं। इसका विवेचन " प्रमाणनयैरधिगमः " इस सूत्रके व्याख्यान में किया जा चुका है ।
किं कृत्वाधुना किं च कर्तुमिदं सूत्रं ब्रवीतीत्याइ ।
अतक क्या करके और अब आगे क्या करने के लिये इस सूनको श्री उमास्वामी महाराज व्यक्त कर रहे हैं ? इस प्रकार तक शिष्यकी जिज्ञासा होनेपर श्री विधानन्द आचार्य सूत्रकार के हार्दिक भात्रों अनुसार समाधान कहते हैं ।
निर्देश्याधिगमोपायं प्रमाणमधुना नयान् । नयैरधिगमेत्यादि माह संक्षेपतोऽखिलान् ॥ १ ॥
"प्रमाणनयैरधिगमः" 'मतिः स्मृतिः,' 'श्रुतं मतिपूर्व' इत्यादि सूत्रों द्वारा तत्त्वोंकी अधिगति करने के प्रधान उपाय हो रहे प्रमाणका अबतक अवधारण कराके अब अधिगम के उपाय हो रहे सम्पूर्ण नयोको संक्षेपसे सूत्रकार महाराज बढ़िया कह रहे हैं । " प्रमाणनयैरधिगमः " " नयैः " कहकर नयोंको भी अधिगमका करण कहा जा चुका है।
प्रमाणनयैरधिगम इत्यनेन प्रमाणं नयायाधिगमोपाया इत्युद्दिष्टं । तत्र प्रमाणं तत्वार्याधिगमोपायं प्रपंचतो निर्देश्याधुना नर्यास्तदधिगमोपायानखिलान् संक्षेपतोन्यथा च व्याख्यातुमिदं माह भगवान् । कथं १ नयसामान्यस्य तल्लक्षणस्यैव संक्षेपतो विभागस्य विशेषलक्षणस्य च विस्तरतो नयविभागस्य अतिविस्तरतो नयमपंचस्य चात्र प्रतिपादनात् सर्वथा नयमरूपणस्य सुत्रितत्वादिति महे ।
" प्रमाणनयेरधिगमः " ऐसे आकारवाळे इस सूत्र करके प्रमाण और नय ये अधिगम करने के उपाय हैं, इस प्रकार कथन किया गया है। उन अधिगतिके उपायों में तथ्वार्थो के अधिगमका उपाय हो रहे प्रमाणको विस्तारसे निरूपण कर अब उन तत्वार्थी या उनके अंशोकी अधिगतिके उपाय हो रहे सम्पूर्ण नयोको संक्षेपसे और दूसरे प्रकारोंसे यानी विस्तार, अतिविस्तारसे व्याख्यान करने के लिये इस सूत्रको भगवान् ग्रन्थकार अच्छा कह रहे हैं। किस प्रकारसे ? इस सूत्र में नयोंका उन तीन प्रकारोंसे प्रतिपादन किया है ? इसके उत्तर में हम विधानन्द आचार्य गौरवसहित यो उत्तर कहते हैं कि प्रथम ही नय सामान्यका एक ही भेद स्वरूप निरूपण और उस नय सामान्यके लक्षणका ही संक्षेपसे प्रतिपादन किया गया है । तथा विभागका अभिप्राय करते हुये नयोंके विशेष दो मेद कर उनके लक्षणका और विस्तार के साथ नयाँके विभागका प्रतिपादन किया है । और भी नयोंके विभागका अत्यन्त विस्तारसे नपोंके मेद प्रमेदोंका इस सूत्रमें विस्तृत कथन किया गया है। बात यह है कि प्रकाण्ड पाण्डित्यको धारनेवाले श्री उमास्वामी महाराजने इस उदात्त इस उदात्त सूत्र द्वारा सभी प्रकारोंसे नयका प्ररूपण वर्णित कर दिया है। " गागरमें सागर " इसीको कहते हैं । एक ही सूत्रमें अपरिमित अर्थ मरा हुआ है ।
तत्र सामान्यतो नयसंख्यां लक्षणं च निरूपयन्नाह ।
तहां प्रथम विचारके अनुसार सामान्यरूपसे नयकी संख्याका और नपके उक्षणका मिरूपण करते हुये श्री विद्यानन्द आचार्य श्री उमास्वामी महाराजके हृध अर्थका स्पष्ट कथन करते है । उसको समझिये ।
सामान्यादेशतस्तावदेक एब नयः स्थितः । स्याद्वादप्रविभक्तार्थविशेषव्यंजनात्मकः ॥ २ ॥
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विपर्ययज्ञानस्वरूप इस सूत्रद्वारा निरूपण किया है। ऐसी जिज्ञासा होनेपर श्री विद्यानन्द आचार्य समाधान कहते हैं । इति प्रमाणात्मविवोधसंविधौ विपर्ययज्ञानमनेकधोदितम् । विपक्षविक्षेपमुखेन निर्णयं सुवोधरूपेण विधातुमुद्यतेः ॥एक सौ सोलह ॥ इस पूर्वोक प्रकार प्रमाणस्वरूप सम्यग्ज्ञानकी भले प्रकार विधि करनेपर विपरीत पक्षके खण्डनकी मुख्यतासे समीचीन बोधस्वरूप करके निर्णयको विधान करने के लिये उधमी हो रहे श्री उमास्वामी महाराज करके अनेक प्रकारका विपर्ययज्ञान इस सूत्रद्वारा कह दिया गया है । भावार्थ - पहिले प्रकरणों में किया गया सम्यग्ज्ञानका निरूपण समी निर्णीत हो सकता है, जब कि उनसे विपरीत हो रहे मिथ्याज्ञानोंका ज्ञान करा दिया जाय । अतः तीनों मिथ्याज्ञानों से व्यावृत्त हो रहा सम्यग्ज्ञान उपादेय है । चिकित्सक द्वारा दोषोंका प्रतिपादन किये विना रोगी उनका प्रत्याख्यान नहीं कर सकता है । विवक्षित पदार्थकी विधि हो जानेपर गम्यमान भी पदार्थोकी कंठोक व्यावृत्ति करना विशेष निर्णय हो जाने के लिये आवश्यक कार्य है । पूर्व सम्यगवबोधस्वरूपविधिरूपमुखेन निर्णय विधाय विपक्षविक्षेपमुखेनापि तं विघातुमुद्यतैरनेकपा विपर्ययज्ञानमुदितं वादिनोभयं कर्तव्यं स्वपरपक्षसाधनदूषणमिति न्यायानुसरणात् । पहिले सम्यग्ज्ञान के स्वरूपका विधिस्वरूपकी मुख्यता करके निर्णय कर पुन सम्यग्ज्ञानके विपक्ष हो रहे मिथ्याज्ञानों के निराकरणको मुख्यता करके भी उस निर्णयको विधान करने के लिये उद्यमी हो रहे सूत्रकार करके अनेक प्रकारका विपर्ययज्ञान कर दिया गया है । यद्यपि सम्यानको विधिसे ही मिथ्याज्ञानोंका अनायास निवारण हो जाता है । अथवा मिथ्याज्ञानोंका के निवारण कर देनेसे ही सम्पज्ञानोंकी परिश्रम के विना विधि हो जाती है। फिर भी वादीको दोनों कार्य करने चाहिये । अपने पक्षका साधन करना और दूसरों के प्रतिपक्ष में दूषण उठाना इस नीतिफा अनुसरण करनेसे प्रत्यकारने दोनों कार्य किये है । अथवा श्री उमास्वामी महाराजने विधि मुख और निषेध मुख दोनोंसे सम्यग्ज्ञान और मिथ्याज्ञानोका प्रतिपादन किया है । अतः सिद्ध है कि समीचीनवादी विद्वान्को स्वपक्षसाधन और परपक्षमें दूषण ये दोनों कार्य करने चाहिये । आत्माको शरीर परिमाण साथ चुकनेपर भी आमाके व्यापफपन या अणुपनका खण्डन कर देमेसे अपना सिद्धान्त अच्छा पुष्ट हो जाता है। ताळेको ताली घुमाकर लगा देते हैं। फिर भी खेचकर देख लेनेसे चितमें विशेष दृढता हो जाती है। स्वविधिसामर्थ्यात् मतिषेधस्य सिद्धेस्तरसामर्थ्याद्वा स्त्रपक्षविधिसिद्धेनों भयवचनमर्यचदिति मवादस्यावस्थापितुमशक्तेः सर्वत्र सामर्थ्यसिद्धस्या वचनप्रसंगात् । स्वेष्टव्याघातस्यानुप॑गात् । क्वचित्सामर्थ्यसिद्धस्यापि वचने स्याद्वादन्यायस्यैव सिद्धेः सर्वे शुद्धम् । यदि बौद्ध यों करें कि अपने पक्षको विधि कर देनेकी सामर्थ्य से ही प्रतिपक्ष के निषेधकी सिद्धि हो जाती है । अथवा उस परपके निषेधकी सिद्धि हो जानेसे ही सामर्थ्य के बलसे स्वपक्ष को सिद्धि अर्यापत्तिसे बन जाती है। अतः दोनोंका फथन करना व्यर्थ है। किसी प्रयोजनको नहीं रखता है । व्यर्थ वचनोंको फहनेवाला वादी निप्रस्थानको प्राप्त हो जाता है। इसपर आचार्य कहते हैं कि उस उक्त प्रकार के प्रवादी व्यवस्था नहीं करायी जा सकती है। हम अन्य प्रकरणों में धर्मकीर्तिके प्रवादका निराकरण कर चुके हैं। यदि बौद्धोंका वह उक्त विचार माना जायगा तो सभी स्थलोंपर विना कई यो हो सामर्थ्य से सिद्ध हो रहे पदार्थ के नहीं कथन करनेका प्रसंग हो जायेगा । ऐसी दशा में अपने इष्ट सिद्धान्तके व्यावात हो जानेका प्रसंग आ जावेगा । आप बौद्धोंने " यत् सत् तत्मने क्षणिकं " इस व्याप्ति अनुसार समर्थन उपनय आदिका पुनरपि निरूपण किया है । किसी व्यक्तिकी विद्वत्ताका निषेध करनेपर मी मूर्खताका विधान नहीं हो जाता है। अथवा हेतुकी पक्ष में विधि कर देनेसे ही निषेध नहीं हो जाता है। बहुत से पण्डिस विश्व निर्धन नहीं होते हुये मी धनाढ्य नहीं कई जा सकते हैं। शुद्ध आत्मा या पुल परमाणु न भु है न गुरु है । हो, सामर्थ्य से सिद्ध हो रहे भी पदार्थका यदि शब्द द्वारा निरूपण करना कहीं कहीं इष्ट कर लोगे तब तो स्याद्वादन्यायको ही सिद्धि होगी । अतः अनेकान्त मत अनुसार सम्पूर्णव्यवस्था निर्दोष होकर शुद्ध बन जाती है। अन्यथा नहीं बनती है। इति तच्चार्यश्लोकवार्तिफाळंकारे मयमस्याध्यायस्य चतुर्थमाह्निकम् । इस प्रकार तस्वार्थसूत्र के लोकरूप वार्तिकों के अलंकारस्वरूप माम्यमें प्रथम अध्यायका चौथा आहिक समाप्त हुआ । इस सूत्रके व्यापान में प्रकरण इस प्रकार है कि मिथ्याष्टि जीन और मम्यग्दष्टि जौषका ज्ञान जब समान जाना जा रहा है, तो कैसे निर्णत किया जाय ? कि मिथ्याइष्टिका ज्ञान विपर्यय है । इसको दृष्टान्तसहित प्रदर्शन करनेके लिये श्री उमास्वामी रत्नाकरसे सूत्रमणिका उद्धार हुआ है। सत् असत्का लक्षण कर सूत्र के अनुमान वाक्यको समीचीन बना दिया गया है। उम्मतका दृष्टान्त अच्छा मटा दिया है। स्वाहार्य विपर्ययके मेदोंको अनेक दार्शनिकों के मन्तव्य अनुसार समझाया है। सदमें वसीपनारूप त्रिपर्यको बताकर बस में सदकी कम्पनाको दूसरी जातिका आहार्य विपर्यय कहा है। ज्ञार्य विपर्ययके समान सम्भवनेवाले साहार्य संशय और आहार्य अनध्यवसायको भी दृष्टान्तपूर्वक घटाया गया है। चार्वाक, शून्यवादी, बौद्ध, आदि दार्शनिकोंके यहां जो विपरीत अभिनिवेशसे अनेक ज्ञान हो रहे हैं, वे आहार्य विपर्यय है। पश्चात् मतिज्ञान के मेदोंमें सम्मव रहे विपर्ययको कहकर स्वार्थानुमानको आमास करनेवाले हेत्वाभासोंका निरूपण किया है। तीन प्रकारके हेत्याभास माने गये है। अन्य हेत्वाभासोंका इन्हींमें अन्तर्भाव हो जाता है। यहां मध्यमें बौद्ध, नैयायिक, कपिठ, आदिके सिद्धान्तोंको मिथ्या बताकर उनके साधक हेतुओंको हेवामास कर दिया है। और भी कई तत्रोंकी वर्णना की है। सादि अनन्त केवलज्ञानका अपूर्वार्थपना साधा गया है । यद्यपि केवलज्ञानीको एक ही समयमें सभी पदार्थ मास जाते हैं । फिर भी पूर्वापर -- फालसम्बन्धी विशिष्टता से वइ ज्ञान अपूर्वार्थप्राही है । फलके बासे आटेकी आज बनी हुई रोटीको आज खानेपर और कलके ताजे आटेकी कळ बनी हुई रोटीको आज बासी खानेपर स्याद न्यारा न्यारा है। धनी होकर हुये निर्धन और निर्धन होकर पीछे बनी हुये पुरुषोंके परिणाम विभिन्न हैं । अकिंचित्कर कोई पृथक् हेत्वाभास नहीं है। जैनोंके यहाँ प्रमाणसंडळ इए है । इसके पश्चात् नियोग, भावना, आदिको वाक्यका अर्थ माननेवाले मीमांसक आदिका विचार चढाया है एक नियोगके प्राभाकारोंने ग्यारह मेद किये हैं। प्रमाण आदिक आठ विकल्प उठाकर उनका खण्डन किया गया है। वेदान्तकी रातिसे नियोगका खण्डन कराकर पुमः वेदान्तमतका भी निराकरण कर दिया है। भाट्टोंकी मानी हुयीं दोनों भावनाओं का निराकरण किया गया है । शद्भावना, अर्थभावना घटित नहीं होती हैं। शुद्ध घाटवर्थ मी वाक्यका अर्थ नहीं बन पाता है। तथा ब्रह्माद्वैत वादियोंकी मानी हुई विधि भी वाक्यका अर्थ नहीं है। इन सबका विस्तार के साथ विचार किया गया है। प्रवर्तक या अप्रवर्तक या सफळ, निष्फळ, नियोग के अनुसार विधिवाद में भी सभी दोष गिरादिये गये हैं। कुछ देरतक नियोगवादीका पक्ष लेकर आचार्य महाराजने विधिवादका विद्वत्तापूर्वक अच्छा उपहास किया है, जिसका कि अध्ययन करनेपर ही विशेष आनन्द प्राप्त होता है । नियोगके ग्यारहों भेदोंका खण्डन कर विधि, निषेच, आत्मक स्याद्वाद सिद्धान्तको साधा है। विधिमें भी प्रमाणपन आदिके विकल्प लगाकर अद्वैतवादका निराकरण किया है। यंत्रारूड पुरुष आदि भी वाक्यके अर्थ नहीं हैं। बौद्धोंफा अन्यापोह तो कथमपि चाक्यका अर्थ नहीं घटित होता है। विवक्षाका शद्ध के साथ अग्यमिचारी कार्यकारणभार सम्बन्ध नहीं है। अतः नियोग, भावना, षात्वर्थ, विधि, आदिको यदि वाक्यका अर्थ माना जायगा तो तनन्यज्ञान कुनशान सपझा जायगा। स्थवधिज्ञानों में केवल देशावधि हो कदाचिद् मिथ्यात्वका उदय हो जाने से निपर्यय रूप हो जाती है । परमावधि और सर्वावधि निपर्यय नहीं है । मनःपर्ययज्ञान भी विपरीत नहीं है । यद्यपि प्रमाश ज्ञानोंके प्रतिपादक सूत्रोंसे ही परिशेष न्यायसे मियाज्ञानको सन्विति हो सकती है। फिर भी वादीके कर्तव्य स्वपक्षसाधन, परपक्षदूषण दोनों हैं। संत्रर और निर्जरासे मोक्ष होती है । अनेकान्तकी उपलब्धि होते हुये भी एकान्तोंका अनुपलम्भ होना साधा जाता है। श्री भईन्त परमेष्ठीफे परमात्मपना सिद्ध हो चुकनेपर मी कपिल आदिकों में परमात्मपनका निषेध साधना अनिवार्य है । ताली फिरा देने से ही तालेका लग जाना जान चुकनेपर भी दृढ निश्चय के लिए तालेका खींचकर पुनः खटका लिया जाता है । गुणोंका ग्रहण करो और साथमें दोषोंका प्रत्याख्यान भी करते जाओ । अतः दृढ निर्णय कराकर छुढाने के लिये मिथ्याज्ञानोंको हेतु, दृष्टान्त पूर्वक प्रतिपादन करनेवाला सूत्र उमास्वामी महाराज द्वारा कहा गया है। प्रतिपक्षी दोपोंके सर्वथा निराकरण करनेसे ही शुद्ध मार्ग व्यवस्थित रह पाता है । यहातक पहिले अध्यायका चतुर्थ आहिक समाप्त किया गया है । ज्ञाने मैथ्यं विविच्य प्रमिविरससुख स्वादयन्सौगतादीन् । काचज्ञानादृते द्राक् स्वगुणमिह मणिर्व्यज्जयन्नोपलब्धः ॥ कुज्ञानाहार्यलीढं जगदुपकृतिभिः स्वाभिरुद्धर्तुमिच्छन् । श्रीविद्यानन्दसूरिजयति विगतभीर्भापितस्वामिसूत्रः ॥ एक ॥ सम्यग्दर्शन या जीव आदिक पदार्थोका अधिगम करानेवाले और अम्बई होनेसे पूर्व में प्रयुक्त किये गये प्रमाणोंका वर्णन हो चुका है। उस प्रमाणके अपवहित पश्चात् कई गये नयोंका अत्र निरूपण करना अवसर प्राप्त है । अतः निरुक्तिसे ही लक्षणको अपने पेटमें रखनेवाली नयोंकी भेदगणनाको कइनेवाळे सूत्र रसायनकी प्राप्ति यहां मोक्षमार्गको पारदीयसिद्धिको धारनेवाले श्री उमास्वामी महाराज द्वारा हो रही है, उसको अवधारिये । नैगमसंग्रहव्यवहारर्जुसूत्रशब्द समभिरूढैवंभृता नयाः ॥ तैंतीस॥ नैगम, संग्रह, व्यवहार, ऋजुसूत्र, शद्व सममिरूढ, और एवंभूत, ये सात नय हैं । यद्यपि प्रमाणोंसे नय मिन्न है । फिर भी शदों द्वारा जानने योग्य विषयको जतानेवाळे श्रुतज्ञान के एक देश नय माने गये है। शद आत्मक और ज्ञान आत्मक नय हो जाते हैं। इसका विवेचन " प्रमाणनयैरधिगमः " इस सूत्रके व्याख्यान में किया जा चुका है । किं कृत्वाधुना किं च कर्तुमिदं सूत्रं ब्रवीतीत्याइ । अतक क्या करके और अब आगे क्या करने के लिये इस सूनको श्री उमास्वामी महाराज व्यक्त कर रहे हैं ? इस प्रकार तक शिष्यकी जिज्ञासा होनेपर श्री विधानन्द आचार्य सूत्रकार के हार्दिक भात्रों अनुसार समाधान कहते हैं । निर्देश्याधिगमोपायं प्रमाणमधुना नयान् । नयैरधिगमेत्यादि माह संक्षेपतोऽखिलान् ॥ एक ॥ "प्रमाणनयैरधिगमः" 'मतिः स्मृतिः,' 'श्रुतं मतिपूर्व' इत्यादि सूत्रों द्वारा तत्त्वोंकी अधिगति करने के प्रधान उपाय हो रहे प्रमाणका अबतक अवधारण कराके अब अधिगम के उपाय हो रहे सम्पूर्ण नयोको संक्षेपसे सूत्रकार महाराज बढ़िया कह रहे हैं । " प्रमाणनयैरधिगमः " " नयैः " कहकर नयोंको भी अधिगमका करण कहा जा चुका है। प्रमाणनयैरधिगम इत्यनेन प्रमाणं नयायाधिगमोपाया इत्युद्दिष्टं । तत्र प्रमाणं तत्वार्याधिगमोपायं प्रपंचतो निर्देश्याधुना नर्यास्तदधिगमोपायानखिलान् संक्षेपतोन्यथा च व्याख्यातुमिदं माह भगवान् । कथं एक नयसामान्यस्य तल्लक्षणस्यैव संक्षेपतो विभागस्य विशेषलक्षणस्य च विस्तरतो नयविभागस्य अतिविस्तरतो नयमपंचस्य चात्र प्रतिपादनात् सर्वथा नयमरूपणस्य सुत्रितत्वादिति महे । " प्रमाणनयेरधिगमः " ऐसे आकारवाळे इस सूत्र करके प्रमाण और नय ये अधिगम करने के उपाय हैं, इस प्रकार कथन किया गया है। उन अधिगतिके उपायों में तथ्वार्थो के अधिगमका उपाय हो रहे प्रमाणको विस्तारसे निरूपण कर अब उन तत्वार्थी या उनके अंशोकी अधिगतिके उपाय हो रहे सम्पूर्ण नयोको संक्षेपसे और दूसरे प्रकारोंसे यानी विस्तार, अतिविस्तारसे व्याख्यान करने के लिये इस सूत्रको भगवान् ग्रन्थकार अच्छा कह रहे हैं। किस प्रकारसे ? इस सूत्र में नयोंका उन तीन प्रकारोंसे प्रतिपादन किया है ? इसके उत्तर में हम विधानन्द आचार्य गौरवसहित यो उत्तर कहते हैं कि प्रथम ही नय सामान्यका एक ही भेद स्वरूप निरूपण और उस नय सामान्यके लक्षणका ही संक्षेपसे प्रतिपादन किया गया है । तथा विभागका अभिप्राय करते हुये नयोंके विशेष दो मेद कर उनके लक्षणका और विस्तार के साथ नयाँके विभागका प्रतिपादन किया है । और भी नयोंके विभागका अत्यन्त विस्तारसे नपोंके मेद प्रमेदोंका इस सूत्रमें विस्तृत कथन किया गया है। बात यह है कि प्रकाण्ड पाण्डित्यको धारनेवाले श्री उमास्वामी महाराजने इस उदात्त इस उदात्त सूत्र द्वारा सभी प्रकारोंसे नयका प्ररूपण वर्णित कर दिया है। " गागरमें सागर " इसीको कहते हैं । एक ही सूत्रमें अपरिमित अर्थ मरा हुआ है । तत्र सामान्यतो नयसंख्यां लक्षणं च निरूपयन्नाह । तहां प्रथम विचारके अनुसार सामान्यरूपसे नयकी संख्याका और नपके उक्षणका मिरूपण करते हुये श्री विद्यानन्द आचार्य श्री उमास्वामी महाराजके हृध अर्थका स्पष्ट कथन करते है । उसको समझिये । सामान्यादेशतस्तावदेक एब नयः स्थितः । स्याद्वादप्रविभक्तार्थविशेषव्यंजनात्मकः ॥ दो ॥
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दौसा। जिला अस्पताल में मरीजों के लिए अच्छे दिन शुरू होने वाले हैं। अब मरीजों को सिटीस्कैन के लिए जयपुर नहीं भेजना पड़ेगा। राज्य सरकार की बजट घोषणा के अनुरूप पीपीपी मोड पर यहां उदयपुर की एक फर्म ने सीटी स्कैन मशीन स्थापित की हैं। प्रदेश के गृह मन्त्री गुलाबचंद कटारिया रविवार को वधिवत शुभारम्भ करेंगें। दावा किया जा रहा हैं कि यह उच्च गुणवत्ता व उच्च तकनीक से जुडी मशीन हैं और बाहरी लोगों की तुलना में मरीजों से पचास फीसदी कम फीस वसूली जाएगी। बीपीएल व अन्य ऐसे रोगी जिन के साथ परिजन नहीं होते पीएमओं की रिकमण्ड पर निशुल्क सिटिस्कैनिंग करवा सकेंगें। जिले में दुर्घटना प्रभावित क्षेत्र में हादसे का शिकार हुए 80 प्रतिशत लोंगों को जांच के लिए जयपुर जाना पड़ता था इस से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
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दौसा। जिला अस्पताल में मरीजों के लिए अच्छे दिन शुरू होने वाले हैं। अब मरीजों को सिटीस्कैन के लिए जयपुर नहीं भेजना पड़ेगा। राज्य सरकार की बजट घोषणा के अनुरूप पीपीपी मोड पर यहां उदयपुर की एक फर्म ने सीटी स्कैन मशीन स्थापित की हैं। प्रदेश के गृह मन्त्री गुलाबचंद कटारिया रविवार को वधिवत शुभारम्भ करेंगें। दावा किया जा रहा हैं कि यह उच्च गुणवत्ता व उच्च तकनीक से जुडी मशीन हैं और बाहरी लोगों की तुलना में मरीजों से पचास फीसदी कम फीस वसूली जाएगी। बीपीएल व अन्य ऐसे रोगी जिन के साथ परिजन नहीं होते पीएमओं की रिकमण्ड पर निशुल्क सिटिस्कैनिंग करवा सकेंगें। जिले में दुर्घटना प्रभावित क्षेत्र में हादसे का शिकार हुए अस्सी प्रतिशत लोंगों को जांच के लिए जयपुर जाना पड़ता था इस से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
आर्यभट (४७६-५५०) प्राचीन भारत के एक महान ज्योतिषविद् और गणितज्ञ थे। इन्होंने आर्यभटीय ग्रंथ की रचना की जिसमें ज्योतिषशास्त्र के अनेक सिद्धांतों का प्रतिपादन है। इसी ग्रंथ में इन्होंने अपना जन्मस्थान कुसुमपुर और जन्मकाल शक संवत् 398 लिखा है। बिहार में वर्तमान पटना का प्राचीन नाम कुसुमपुर था लेकिन आर्यभट का कुसुमपुर दक्षिण में था, यह अब लगभग सिद्ध हो चुका है। एक अन्य मान्यता के अनुसार उनका जन्म महाराष्ट्र के अश्मक देश में हुआ था। उनके वैज्ञानिक कार्यों का समादर राजधानी में ही हो सकता था। अतः उन्होंने लम्बी यात्रा करके आधुनिक पटना के समीप कुसुमपुर में अवस्थित होकर राजसान्निध्य में अपनी रचनाएँ पूर्ण की। . 300px तंत्रसंग्रह नीलकण्ठ सोमयाजि द्वारा संस्कृत में रचित खगोलशास्त्रीय ग्रंथ है। यह ग्रंथ 1501 ई में पूर्ण हुआ। इसमें 432 श्लोक हैं जो आठ अध्यायों में विभक्त हैं। इस ग्रन्थ में ग्रहों की गति के पारम्परिक मॉडल के स्थान पर परिस्कृत मॉडल प्रस्तुत किया गया है। इसकी दो टीकाएँ ज्ञात हैं- पहली तंत्रसंग्रहव्याख्या (रचनाकार अज्ञात) तथा युक्तिभाषा (ज्येष्ठदेव द्वारा लगभग १५५० ई में रचित)। तंत्रसंग्रह में नीलकण्ठ सोमयाजि ने बुध और शुक्र ग्रहों की गति का आर्यभट द्वारा प्रस्तुत मॉडल को पुनः सामने रखा। इस ग्रन्थ में दिया हुआ इन दो ग्रहों के केन्द्र का समीकरण १७वीं शताब्दी में केप्लर के पहले तक सबसे शुद्ध मान देता था। .
आर्यभट और तंत्रसंग्रह आम में 3 बातें हैं (यूनियनपीडिया में): बुध (बहुविकल्पी), शुक्र, संस्कृत भाषा।
बुध (बहुविकल्पी)
कोई विवरण नहीं।
शुक्र (Venus), सूर्य से दूसरा ग्रह है और प्रत्येक 224.7 पृथ्वी दिनों मे सूर्य परिक्रमा करता है। ग्रह का नामकरण प्रेम और सौंदर्य की रोमन देवी पर हुआ है। चंद्रमा के बाद यह रात्रि आकाश में सबसे चमकीली प्राकृतिक वस्तु है। इसका आभासी परिमाण -4.6 के स्तर तक पहुँच जाता है और यह छाया डालने के लिए पर्याप्त उज्जवलता है। चूँकि शुक्र एक अवर ग्रह है इसलिए पृथ्वी से देखने पर यह कभी सूर्य से दूर नज़र नहीं आता हैः इसका प्रसरकोण 47.8 डिग्री के अधिकतम तक पहुँचता है। शुक्र सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद केवल थोड़ी देर के लए ही अपनी अधिकतम चमक पर पहुँचता है। यहीं कारण है जिसके लिए यह प्राचीन संस्कृतियों के द्वारा सुबह का तारा या शाम का तारा के रूप में संदर्भित किया गया है। शुक्र एक स्थलीय ग्रह के रूप में वर्गीकृत है और समान आकार, गुरुत्वाकर्षण और संरचना के कारण कभी कभी उसे पृथ्वी का "बहन ग्रह" कहा गया है। शुक्र आकार और दूरी दोनों मे पृथ्वी के निकटतम है। हालांकि अन्य मामलों में यह पृथ्वी से एकदम अलग नज़र आता है। शुक्र सल्फ्यूरिक एसिड युक्त अत्यधिक परावर्तक बादलों की एक अपारदर्शी परत से ढँका हुआ है। जिसने इसकी सतह को दृश्य प्रकाश में अंतरिक्ष से निहारने से बचा रखा है। इसका वायुमंडल चार स्थलीय ग्रहों मे सघनतम है और अधिकाँशतः कार्बन डाईऑक्साइड से बना है। ग्रह की सतह पर वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी की तुलना मे 92 गुना है। 735° K (462°C,863°F) के औसत सतही तापमान के साथ शुक्र सौर मंडल मे अब तक का सबसे तप्त ग्रह है। कार्बन को चट्टानों और सतही भूआकृतियों में वापस जकड़ने के लिए यहाँ कोई कार्बन चक्र मौजूद नही है और ना ही ज़ीवद्रव्य को इसमे अवशोषित करने के लिए कोई कार्बनिक जीवन यहाँ नज़र आता है। शुक्र पर अतीत में महासागर हो सकते हैलेकिन अनवरत ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण बढ़ते तापमान के साथ वह वाष्पीकृत होते गये होंगे ।B.M. Jakosky, "Atmospheres of the Terrestrial Planets", in Beatty, Petersen and Chaikin (eds), The New Solar System, 4th edition 1999, Sky Publishing Company (Boston) and Cambridge University Press (Cambridge), pp.
संस्कृत (संस्कृतम्) भारतीय उपमहाद्वीप की एक शास्त्रीय भाषा है। इसे देववाणी अथवा सुरभारती भी कहा जाता है। यह विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है। संस्कृत एक हिंद-आर्य भाषा हैं जो हिंद-यूरोपीय भाषा परिवार का एक शाखा हैं। आधुनिक भारतीय भाषाएँ जैसे, हिंदी, मराठी, सिन्धी, पंजाबी, नेपाली, आदि इसी से उत्पन्न हुई हैं। इन सभी भाषाओं में यूरोपीय बंजारों की रोमानी भाषा भी शामिल है। संस्कृत में वैदिक धर्म से संबंधित लगभग सभी धर्मग्रंथ लिखे गये हैं। बौद्ध धर्म (विशेषकर महायान) तथा जैन मत के भी कई महत्त्वपूर्ण ग्रंथ संस्कृत में लिखे गये हैं। आज भी हिंदू धर्म के अधिकतर यज्ञ और पूजा संस्कृत में ही होती हैं। .
आर्यभट 87 संबंध है और तंत्रसंग्रह 11 है। वे आम 3 में है, समानता सूचकांक 3.06% है = 3 / (87 + 11)।
यह लेख आर्यभट और तंत्रसंग्रह के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। आर्यभट प्राचीन भारत के एक महान ज्योतिषविद् और गणितज्ञ थे। इन्होंने आर्यभटीय ग्रंथ की रचना की जिसमें ज्योतिषशास्त्र के अनेक सिद्धांतों का प्रतिपादन है। इसी ग्रंथ में इन्होंने अपना जन्मस्थान कुसुमपुर और जन्मकाल शक संवत् तीन सौ अट्ठानवे लिखा है। बिहार में वर्तमान पटना का प्राचीन नाम कुसुमपुर था लेकिन आर्यभट का कुसुमपुर दक्षिण में था, यह अब लगभग सिद्ध हो चुका है। एक अन्य मान्यता के अनुसार उनका जन्म महाराष्ट्र के अश्मक देश में हुआ था। उनके वैज्ञानिक कार्यों का समादर राजधानी में ही हो सकता था। अतः उन्होंने लम्बी यात्रा करके आधुनिक पटना के समीप कुसुमपुर में अवस्थित होकर राजसान्निध्य में अपनी रचनाएँ पूर्ण की। . तीन सौpx तंत्रसंग्रह नीलकण्ठ सोमयाजि द्वारा संस्कृत में रचित खगोलशास्त्रीय ग्रंथ है। यह ग्रंथ एक हज़ार पाँच सौ एक ई में पूर्ण हुआ। इसमें चार सौ बत्तीस श्लोक हैं जो आठ अध्यायों में विभक्त हैं। इस ग्रन्थ में ग्रहों की गति के पारम्परिक मॉडल के स्थान पर परिस्कृत मॉडल प्रस्तुत किया गया है। इसकी दो टीकाएँ ज्ञात हैं- पहली तंत्रसंग्रहव्याख्या तथा युक्तिभाषा । तंत्रसंग्रह में नीलकण्ठ सोमयाजि ने बुध और शुक्र ग्रहों की गति का आर्यभट द्वारा प्रस्तुत मॉडल को पुनः सामने रखा। इस ग्रन्थ में दिया हुआ इन दो ग्रहों के केन्द्र का समीकरण सत्रहवीं शताब्दी में केप्लर के पहले तक सबसे शुद्ध मान देता था। . आर्यभट और तंत्रसंग्रह आम में तीन बातें हैं : बुध , शुक्र, संस्कृत भाषा। बुध कोई विवरण नहीं। शुक्र , सूर्य से दूसरा ग्रह है और प्रत्येक दो सौ चौबीस.सात पृथ्वी दिनों मे सूर्य परिक्रमा करता है। ग्रह का नामकरण प्रेम और सौंदर्य की रोमन देवी पर हुआ है। चंद्रमा के बाद यह रात्रि आकाश में सबसे चमकीली प्राकृतिक वस्तु है। इसका आभासी परिमाण -चार.छः के स्तर तक पहुँच जाता है और यह छाया डालने के लिए पर्याप्त उज्जवलता है। चूँकि शुक्र एक अवर ग्रह है इसलिए पृथ्वी से देखने पर यह कभी सूर्य से दूर नज़र नहीं आता हैः इसका प्रसरकोण सैंतालीस.आठ डिग्री के अधिकतम तक पहुँचता है। शुक्र सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद केवल थोड़ी देर के लए ही अपनी अधिकतम चमक पर पहुँचता है। यहीं कारण है जिसके लिए यह प्राचीन संस्कृतियों के द्वारा सुबह का तारा या शाम का तारा के रूप में संदर्भित किया गया है। शुक्र एक स्थलीय ग्रह के रूप में वर्गीकृत है और समान आकार, गुरुत्वाकर्षण और संरचना के कारण कभी कभी उसे पृथ्वी का "बहन ग्रह" कहा गया है। शुक्र आकार और दूरी दोनों मे पृथ्वी के निकटतम है। हालांकि अन्य मामलों में यह पृथ्वी से एकदम अलग नज़र आता है। शुक्र सल्फ्यूरिक एसिड युक्त अत्यधिक परावर्तक बादलों की एक अपारदर्शी परत से ढँका हुआ है। जिसने इसकी सतह को दृश्य प्रकाश में अंतरिक्ष से निहारने से बचा रखा है। इसका वायुमंडल चार स्थलीय ग्रहों मे सघनतम है और अधिकाँशतः कार्बन डाईऑक्साइड से बना है। ग्रह की सतह पर वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी की तुलना मे बानवे गुना है। सात सौ पैंतीस° K के औसत सतही तापमान के साथ शुक्र सौर मंडल मे अब तक का सबसे तप्त ग्रह है। कार्बन को चट्टानों और सतही भूआकृतियों में वापस जकड़ने के लिए यहाँ कोई कार्बन चक्र मौजूद नही है और ना ही ज़ीवद्रव्य को इसमे अवशोषित करने के लिए कोई कार्बनिक जीवन यहाँ नज़र आता है। शुक्र पर अतीत में महासागर हो सकते हैलेकिन अनवरत ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण बढ़ते तापमान के साथ वह वाष्पीकृत होते गये होंगे ।B.M. Jakosky, "Atmospheres of the Terrestrial Planets", in Beatty, Petersen and Chaikin , The New Solar System, चारth edition एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे, Sky Publishing Company and Cambridge University Press , pp. संस्कृत भारतीय उपमहाद्वीप की एक शास्त्रीय भाषा है। इसे देववाणी अथवा सुरभारती भी कहा जाता है। यह विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है। संस्कृत एक हिंद-आर्य भाषा हैं जो हिंद-यूरोपीय भाषा परिवार का एक शाखा हैं। आधुनिक भारतीय भाषाएँ जैसे, हिंदी, मराठी, सिन्धी, पंजाबी, नेपाली, आदि इसी से उत्पन्न हुई हैं। इन सभी भाषाओं में यूरोपीय बंजारों की रोमानी भाषा भी शामिल है। संस्कृत में वैदिक धर्म से संबंधित लगभग सभी धर्मग्रंथ लिखे गये हैं। बौद्ध धर्म तथा जैन मत के भी कई महत्त्वपूर्ण ग्रंथ संस्कृत में लिखे गये हैं। आज भी हिंदू धर्म के अधिकतर यज्ञ और पूजा संस्कृत में ही होती हैं। . आर्यभट सत्तासी संबंध है और तंत्रसंग्रह ग्यारह है। वे आम तीन में है, समानता सूचकांक तीन.छः% है = तीन / । यह लेख आर्यभट और तंत्रसंग्रह के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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नई दिल्लीः शनाया कपूर के एक्टिंग डेब्यू को लेकर काफी समय से खबरें आ रही हैं. हालांकि, करियर शुरू करने से पहले ही उन्होंने देशभर के लोगों के बीच अपने लिए खास जगह बना ली है। शनाया सोशल मीडिया के जरिए भी अपने फैंस से जुड़ी रहती हैं. अक्सर उनके नए लुक्स की झलक उनके इंस्टाग्राम पेज पर देखी जा सकती है. ऐसे में उनके फॉलोअर्स की लिस्ट भी लंबी होती जा रही है. शनाया की एक झलक के लिए फैंस बेताब रहते हैं. अब एक बार फिर उन्होंने अपना हॉट अंदाज दिखाकर फैंस के दिलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं.
तस्वीरों में शनाया अपने फुर्सत के पलों को एन्जॉय करती नजर आ रही हैं। इस दौरान उन्होंने पिंक ब्रा के साथ व्हाइट लोअर पेयर किया है।
इस दौरान एक्ट्रेस ने नो-मेकअप लुक रखा है और बालों को खुला छोड़ सिंपल हेयरस्टाइल बनाया है. साथ ही उन्होंने बड़ी सी टोपी भी पहनी हुई है. इस लुक में शनाया बेहद खूबसूरत और आकर्षक लग रही हैं।
शनाया का बेबाक अंदाज उनके फैंस को भी खूब पसंद आ रहा है. फैंस ने एक्ट्रेस की तारीफ करते हुए खूब कमेंट्स किए हैं. कुछ ही देर में शनाया की फोटोज पर करीब एक लाख लाइक्स आ चुके हैं. फैंस उन पर खूब प्यार बरसाने लगे हैं.
वहीं अगर शनाया के अपकमिंग प्रोजेक्ट की बात करें तो वह जल्द ही साउथ सुपरस्टार मोहनलाल की पैन इंडिया फिल्म 'वृषभ' से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत करने जा रही हैं. इससे पहले करण जौहर ने शनाया की फिल्म 'बेधड़क' की घोषणा की थी। हालांकि, माना जा रहा है कि यह फिल्म बंद हो चुकी है।
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नई दिल्लीः शनाया कपूर के एक्टिंग डेब्यू को लेकर काफी समय से खबरें आ रही हैं. हालांकि, करियर शुरू करने से पहले ही उन्होंने देशभर के लोगों के बीच अपने लिए खास जगह बना ली है। शनाया सोशल मीडिया के जरिए भी अपने फैंस से जुड़ी रहती हैं. अक्सर उनके नए लुक्स की झलक उनके इंस्टाग्राम पेज पर देखी जा सकती है. ऐसे में उनके फॉलोअर्स की लिस्ट भी लंबी होती जा रही है. शनाया की एक झलक के लिए फैंस बेताब रहते हैं. अब एक बार फिर उन्होंने अपना हॉट अंदाज दिखाकर फैंस के दिलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. तस्वीरों में शनाया अपने फुर्सत के पलों को एन्जॉय करती नजर आ रही हैं। इस दौरान उन्होंने पिंक ब्रा के साथ व्हाइट लोअर पेयर किया है। इस दौरान एक्ट्रेस ने नो-मेकअप लुक रखा है और बालों को खुला छोड़ सिंपल हेयरस्टाइल बनाया है. साथ ही उन्होंने बड़ी सी टोपी भी पहनी हुई है. इस लुक में शनाया बेहद खूबसूरत और आकर्षक लग रही हैं। शनाया का बेबाक अंदाज उनके फैंस को भी खूब पसंद आ रहा है. फैंस ने एक्ट्रेस की तारीफ करते हुए खूब कमेंट्स किए हैं. कुछ ही देर में शनाया की फोटोज पर करीब एक लाख लाइक्स आ चुके हैं. फैंस उन पर खूब प्यार बरसाने लगे हैं. वहीं अगर शनाया के अपकमिंग प्रोजेक्ट की बात करें तो वह जल्द ही साउथ सुपरस्टार मोहनलाल की पैन इंडिया फिल्म 'वृषभ' से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत करने जा रही हैं. इससे पहले करण जौहर ने शनाया की फिल्म 'बेधड़क' की घोषणा की थी। हालांकि, माना जा रहा है कि यह फिल्म बंद हो चुकी है।
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राजस्थान में जारी सियासी संकट (Rajasthan Political Crisi) के बीच राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Chief Minister Ashok Gehlot) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को पत्र लिखा है। पत्र में सीएम गहलोत (CM Gehlot) ने अपनी सरकार को गिराने की साजिश रचे जाने का आरोप लगाया है। पीएम को लिखे पत्र में सीएम गहलोत ने लिखा है कि राज्यों में चुनी हुई सरकारों को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत हॉर्स ट्रेडिंग के माध्यम से गिराने के लिए कुत्सित प्रयास किए जा रहे हैं।
सीएम गहलोत ने लिखा है, "हमारे संविधान में बहुदलीय व्यवस्था के कारण राज्यों एवं केंद्र में अलग-अलग दलों की सरकारे चुनीं जाती रही है। यह हमारे लोकतंत्र की खूबसूरती ही है कि इन सरकारों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर लोकहित को सर्वोपरि रखते हुए काम किया है। "
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लिखा है कि पूर्व पीएम राजीव गांधी की सरकार द्वारा वर्ष 1985 में बनाए गए दलबदल निरोधक कानून और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा किए गए संशोधन की भावनाओं को जनहित को दरकिनार करके पिछले कुछ समय से लोकतांत्रित तरीके से चुनी गई राज्य सरकारों को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है। यह जनमत का घोर अपमान और संवैधानिक मूल्यों की खुली अवहेलना है।
'राज्य में चुनी हुई सरकार को गिराने की साजिश चल रही है'
कर्नाटक और मध्य प्रदेश में हुए घटनाक्रम का उदाहरण देते हुए गहलोत ने चिट्ठी में लिखा है कि कोरोना संकट के बीच हमारी प्राथमिकता जनता की मदद करना हैं, लेकिन राज्य में चुनी हुई सरकार को गिराने की साजिश चल रही है, लेकिन हमारी सरकार सुशासन देते हुए अपना कार्यकाल पूरा करेगी.
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राजस्थान में जारी सियासी संकट के बीच राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। पत्र में सीएम गहलोत ने अपनी सरकार को गिराने की साजिश रचे जाने का आरोप लगाया है। पीएम को लिखे पत्र में सीएम गहलोत ने लिखा है कि राज्यों में चुनी हुई सरकारों को लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत हॉर्स ट्रेडिंग के माध्यम से गिराने के लिए कुत्सित प्रयास किए जा रहे हैं। सीएम गहलोत ने लिखा है, "हमारे संविधान में बहुदलीय व्यवस्था के कारण राज्यों एवं केंद्र में अलग-अलग दलों की सरकारे चुनीं जाती रही है। यह हमारे लोकतंत्र की खूबसूरती ही है कि इन सरकारों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर लोकहित को सर्वोपरि रखते हुए काम किया है। " मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लिखा है कि पूर्व पीएम राजीव गांधी की सरकार द्वारा वर्ष एक हज़ार नौ सौ पचासी में बनाए गए दलबदल निरोधक कानून और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा किए गए संशोधन की भावनाओं को जनहित को दरकिनार करके पिछले कुछ समय से लोकतांत्रित तरीके से चुनी गई राज्य सरकारों को अस्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है। यह जनमत का घोर अपमान और संवैधानिक मूल्यों की खुली अवहेलना है। 'राज्य में चुनी हुई सरकार को गिराने की साजिश चल रही है' कर्नाटक और मध्य प्रदेश में हुए घटनाक्रम का उदाहरण देते हुए गहलोत ने चिट्ठी में लिखा है कि कोरोना संकट के बीच हमारी प्राथमिकता जनता की मदद करना हैं, लेकिन राज्य में चुनी हुई सरकार को गिराने की साजिश चल रही है, लेकिन हमारी सरकार सुशासन देते हुए अपना कार्यकाल पूरा करेगी.
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इस अवसर पर अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री आर.के.मिश्र एक विशिष्ट व्यक्तित्व थे और यह पुस्तक इस तथ्य को उजागर करती है। उन्होंने अपनी प्रभावी भूमिका को पूरी तरह से निभाया। इस अवसर पर केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री प्रणब मुखर्जी और अन्य विशिष्ट गण उपस्थित थे।
(Release ID :3782)
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इस अवसर पर अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री आर.के.मिश्र एक विशिष्ट व्यक्तित्व थे और यह पुस्तक इस तथ्य को उजागर करती है। उन्होंने अपनी प्रभावी भूमिका को पूरी तरह से निभाया। इस अवसर पर केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री प्रणब मुखर्जी और अन्य विशिष्ट गण उपस्थित थे।
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यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) हमारे शरीर के यूरिनरी सिस्टम में होने वाला इंफेक्शन है, जो कि आमतौर पर बैक्टीरिया से होता है। यह इंफेक्शन पेशाब की थैली (यूरिनरी ब्लैडर), किडनी, किडनी से ब्लैडर तक पेशाब ले जानी वाले यूरेटर्स और शरीर से पेशाब बाहर ले जाने वाले यूरेथ्रा नली को प्रभावित करता है। यह इंफेक्शन किसी को भी हो सकता है, पर महिलाओं और खासकर गर्भवती महिलाओं में यूरिनरी इंफेक्शन होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में जो बदलाव होते हैं उससे यूरिनरी इंफेक्शन का खतरा बहुत अधिक हो जाता है। प्रेग्नेंसी में होने वाले हार्मोनल बदलावों से यूरिनरी ब्लैडर में भी बदलाव हो जाता है जिससे महिलाओं को इंफेक्शन आसानी से हो जाता है। हार्मोनल बदलावों से पेशाब ब्लैडर से वापस किडनी तक चला जाता है। इससे भी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होता है। गर्भावस्था में पेशाब में शुगर, प्रोटीन और हॉर्मोन्स की मात्रा भी बेहद अधिक हो जाती है जिससे बैक्टीरिया से इंफेक्शन आसानी से हो जाते हैं। यूरिनरी इंफेक्शन अधिक होने का एक और कारण है गर्भ का ब्लैडर पर पड़ने वाला दबाव, जिससे गर्भवती महिलाओं के ब्लैडर से पूरा पेशाब कभी भी बाहर नहीं निकल पाता है। ब्लैडर में बचा हुआ पेशाब इंफेक्शन का कारण बनता है।
प्रेग्नेंसी के दौरान यूरिनरी इंफेक्शन से न केवल महिला बल्कि होने वाले बच्चे पर भी प्रभाव पड़ता है। कई बार अगर इंफेक्शन अधिक हो जाए तो बच्चा समय से पहले (प्रीमैच्योर) पैदा हो सकता है और उसका वजन भी औसत से कम रहता है। इसलिए जरूरी है कि गर्भवती महिलाएं लगातार अपने शरीर में होने वाले लक्षणों पर ध्यान दे जिससे यूरिनरी इंफेक्शन का समय रहते पता चल सके और साथ ही इसका इलाज़ भी हो सके।
बार-बार पेशाब लगना, बेहद तेज़ पेशाब लगना, पेशाब करने में दिक्कत महसूस करना, पेट के निचले हिस्से में तेज़ दर्द या क्रैम्प, पेशाब करते हुए जलन महसूस करना,पेशाब का रंग मटमैला होना या उसमें तेज़ असमान्य गंध होना तथा पेशाब में खून के चलते इसका रंग लाल, गहरा गुलाबी या कोला के रंग होना आदि ऐसे लक्षण हैं जो यूरिनरी इंफेक्शन की तरफ इशारा करते हैं। ऐसे किसी भी लक्षण की सूरत में आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
अगर यूरिनरी इंफेक्शन बढ़कर किडनी तक पहुंच जाए तो बुखार, उल्टी, चक्कर आना और कमर में दर्द जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं; जिस सूरत में और अधिक गंभीरता दिखानी चाहिए। असल बात यह है कि यूरिनरी इंफेक्शन अपने आप में ही बेहद खतरनाक है, लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान यह और अधिक खतरनाक बन जाता है। इसलिए ऊपर बताए लक्षणों में से कोई भी लक्षण अगर आपको महसूस हो तो तुरंत ही किसी अच्छे डॉक्टर के पास जाएं।
यूरिनरी इंफेक्शन से बचने के लिए आप प्रेगनेंसी के दौरान कई सावधानियां बरतें जिससे इसका खतरा कम हो सके। दिन में कम से कम 8 ग्लास पानी पीना, पेशाब करने के बाद प्राइवेट पार्ट को अच्छे से पानी से धोना, कॉटन के साफ और मुलायम अंडरवियर पहनना, बेहद टाइट कपड़े पहनने से बचना तथा शराब, तेल-मसाले के खाने व कैफीन की अधिक मात्रा वाले पेय पदार्थ जो ब्लैडर पर दबाव डालते हैं उनसे बचना- ये ऐसी कुछ सावधानियां हैं जिससे यूरिनरी इंफेक्शन होने का खतरा कम किया जा सकता है।
इन सबके बावजूद अगर आपको कोई लक्षण महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। अल्ट्रा सोनोग्राफी यानि USG के जरिये इस बात का पता चल सकता है कि यूरिनरी इंफेक्शन हुआ है या नहीं। इंफेक्शन की सूरत में आपका डॉक्टर तुरंत ही इलाज़ शुरू कर सकता है। सही समय पर इलाज़ से न केवल इंफेक्शन को फैलने से रोका जा सकता है बल्कि इसे जल्दी खत्म भी किया जा सकता है। साथ ही गर्भवती महिला व होने वाले बच्चे पर पड़ने वाले खतरे को भी कम से कम किया जा सकता है।
(इनपुट्सः डॉ अर्चना धवन बजाज - स्त्री रोग विशेषज्ञ, प्रसूति और आईवीएफ विशेषज्ञ, नर्चर क्लिनिक)
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यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन हमारे शरीर के यूरिनरी सिस्टम में होने वाला इंफेक्शन है, जो कि आमतौर पर बैक्टीरिया से होता है। यह इंफेक्शन पेशाब की थैली , किडनी, किडनी से ब्लैडर तक पेशाब ले जानी वाले यूरेटर्स और शरीर से पेशाब बाहर ले जाने वाले यूरेथ्रा नली को प्रभावित करता है। यह इंफेक्शन किसी को भी हो सकता है, पर महिलाओं और खासकर गर्भवती महिलाओं में यूरिनरी इंफेक्शन होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में जो बदलाव होते हैं उससे यूरिनरी इंफेक्शन का खतरा बहुत अधिक हो जाता है। प्रेग्नेंसी में होने वाले हार्मोनल बदलावों से यूरिनरी ब्लैडर में भी बदलाव हो जाता है जिससे महिलाओं को इंफेक्शन आसानी से हो जाता है। हार्मोनल बदलावों से पेशाब ब्लैडर से वापस किडनी तक चला जाता है। इससे भी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होता है। गर्भावस्था में पेशाब में शुगर, प्रोटीन और हॉर्मोन्स की मात्रा भी बेहद अधिक हो जाती है जिससे बैक्टीरिया से इंफेक्शन आसानी से हो जाते हैं। यूरिनरी इंफेक्शन अधिक होने का एक और कारण है गर्भ का ब्लैडर पर पड़ने वाला दबाव, जिससे गर्भवती महिलाओं के ब्लैडर से पूरा पेशाब कभी भी बाहर नहीं निकल पाता है। ब्लैडर में बचा हुआ पेशाब इंफेक्शन का कारण बनता है। प्रेग्नेंसी के दौरान यूरिनरी इंफेक्शन से न केवल महिला बल्कि होने वाले बच्चे पर भी प्रभाव पड़ता है। कई बार अगर इंफेक्शन अधिक हो जाए तो बच्चा समय से पहले पैदा हो सकता है और उसका वजन भी औसत से कम रहता है। इसलिए जरूरी है कि गर्भवती महिलाएं लगातार अपने शरीर में होने वाले लक्षणों पर ध्यान दे जिससे यूरिनरी इंफेक्शन का समय रहते पता चल सके और साथ ही इसका इलाज़ भी हो सके। बार-बार पेशाब लगना, बेहद तेज़ पेशाब लगना, पेशाब करने में दिक्कत महसूस करना, पेट के निचले हिस्से में तेज़ दर्द या क्रैम्प, पेशाब करते हुए जलन महसूस करना,पेशाब का रंग मटमैला होना या उसमें तेज़ असमान्य गंध होना तथा पेशाब में खून के चलते इसका रंग लाल, गहरा गुलाबी या कोला के रंग होना आदि ऐसे लक्षण हैं जो यूरिनरी इंफेक्शन की तरफ इशारा करते हैं। ऐसे किसी भी लक्षण की सूरत में आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। अगर यूरिनरी इंफेक्शन बढ़कर किडनी तक पहुंच जाए तो बुखार, उल्टी, चक्कर आना और कमर में दर्द जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं; जिस सूरत में और अधिक गंभीरता दिखानी चाहिए। असल बात यह है कि यूरिनरी इंफेक्शन अपने आप में ही बेहद खतरनाक है, लेकिन प्रेगनेंसी के दौरान यह और अधिक खतरनाक बन जाता है। इसलिए ऊपर बताए लक्षणों में से कोई भी लक्षण अगर आपको महसूस हो तो तुरंत ही किसी अच्छे डॉक्टर के पास जाएं। यूरिनरी इंफेक्शन से बचने के लिए आप प्रेगनेंसी के दौरान कई सावधानियां बरतें जिससे इसका खतरा कम हो सके। दिन में कम से कम आठ ग्लास पानी पीना, पेशाब करने के बाद प्राइवेट पार्ट को अच्छे से पानी से धोना, कॉटन के साफ और मुलायम अंडरवियर पहनना, बेहद टाइट कपड़े पहनने से बचना तथा शराब, तेल-मसाले के खाने व कैफीन की अधिक मात्रा वाले पेय पदार्थ जो ब्लैडर पर दबाव डालते हैं उनसे बचना- ये ऐसी कुछ सावधानियां हैं जिससे यूरिनरी इंफेक्शन होने का खतरा कम किया जा सकता है। इन सबके बावजूद अगर आपको कोई लक्षण महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। अल्ट्रा सोनोग्राफी यानि USG के जरिये इस बात का पता चल सकता है कि यूरिनरी इंफेक्शन हुआ है या नहीं। इंफेक्शन की सूरत में आपका डॉक्टर तुरंत ही इलाज़ शुरू कर सकता है। सही समय पर इलाज़ से न केवल इंफेक्शन को फैलने से रोका जा सकता है बल्कि इसे जल्दी खत्म भी किया जा सकता है। साथ ही गर्भवती महिला व होने वाले बच्चे पर पड़ने वाले खतरे को भी कम से कम किया जा सकता है। Total Wellness is now just a click away.
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(पिछले 24 घंटों में कोविड-19 से संबंधित जारी प्रेस विज्ञप्तियां, पीआईबी फील्ड कार्यालयों से मिली जानकारियां और पीआईबी का फैक्ट चेक शामिल)
ब्रिटेन में पाए गए कोरोनावायरस के नए स्वरूप सार्स सीईओवी-2 से 20 लोग संक्रमित पाए गए हैं। इनमें पहले संक्रमित पाए गए छः लोग भी शामिल हैं,जिन्हें देश की विशिष्ट प्रयोगशालाओं (निम्हान्स बेंगलुरु में 3, सीसीएमबी हैदराबाद में 2 और एनआईवी पुणे में 1) में जांच और उपचार हेतु भर्ती कराया गया है। 107 नमूनों की 10 प्रयोगशाला में जांच की गई है। नए वायरस को देखते हुए भारत सरकार ने इसके जिनोम सीक्वेंसिंग हेतु इंसाकॉग(भारतीय सार्स सीओवी-2 जिनोमिक्स कंसोर्टीयम) का गठन किया है जिसमें विशिष्ट प्रयोगशालाएं(एनआईबीएमजी कोलकाता, आईएलएस भुवनेश्वर, एनआईवी पुणे, सीसीएस पुणे, सीसीएमबी हैदराबाद, सीडीएफडी हैदराबाद, इनस्टेम बेंगलुरु,निम्हान्स बेंगलुरु, आईजीआईबी दिल्ली और एनसीडीसी दिल्ली शामिल हैं। स्थिति पर गंभीरता से निगरानी रखी जा रही है और नए वायरस से संक्रमित लोगों की पहचान करने, कंटेनमेंट और संभावित नए वायरस से संक्रमित के सैंपल इकट्ठा करने तथा उसे इंसाकॉगके लिए चिन्हित प्रयोगशालाओं को भेजने के लिए राज्यों को नियमित रूप से परामर्श जारी किए जा रहे हैं। इस बीच भारत में बीते 33 दिनों से हर दिन स्वस्थ होने वाले मरीजों की संख्या नए सामने आने वाले मामलों से ज्यादा है। पिछले 24 घंटों में 20,549 लोग कोविड-19से पॉज़िटिव पाए गए जबकि इस दौरान 26,572 लोग स्वस्थ हुए। नए मामलों की तुलना में स्वस्थ होने वाले लोगों की संख्या अधिक होने के चलते देश में सक्रिय कोविड-19मरीजों की संख्या निरंतर कम हो रही है। आज तक भारत में कुल 98,34,141 कोरोनावायरस रोगी स्वस्थ हो चुके हैं जोकि विश्व में सबसे अधिक है। स्वस्थ होने की दर भी बढ़ते हुए लगभग 96 प्रतिशत (95.99 प्रतिशत) के स्तर पर पहुंच गई है। इसके चलते सक्रिय मामलों और स्वस्थ होने वालों की संख्या में अंतर(95,71,869) लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत में इस समय सक्रिय कोविड-19 की संख्या 2,62,272 है जो कि भारत में कुल संक्रमित हुए मरीजों का मात्र 2.56 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटों के दौरान स्वस्थ हुए लोगों की संख्या नए मामलों की संख्या से 6,309अधिक है। विश्व स्तर पर तुलना करने से यह पता चलता है कि प्रति दस लाख आबादी पर कोविड-19 की संख्या भारत में न्यूनतम स्तर (7,423) पर है। स्वस्थ हुए कुल नए लोगों में 78.44 प्रतिशत लोग 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हैं। इसमें महाराष्ट्र सबसे ऊपर है, जहां पिछले 24 घंटों में 5,572 लोग स्वस्थ हुए। दूसरे स्थान पर केरल है, जहां 5,029 लोग स्वस्थ हुए जबकि तीसरे स्थान पर छत्तीसगढ़ है जहां 1607 लोग स्वस्थ हुए। इसी तरह से बीते 24 घंटों में आए कुल नए मामलों में 79.24 प्रतिशत मामले 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हैं। केरल में सबसे अधिक 5,887 नए मामले सामने आए। दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र रहा, जहां पर 3,018 नए मामले आए और तीसरे स्थान पर पश्चिम बंगाल में 1,244 नए मामले सामने आए। बीते 24 घंटों में 286 कोविड मरीजों की मृत्यु हुई। 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 79.37 प्रतिशत नई मौत के मामले हैं। महाराष्ट्र इसमें सबसे ऊपर रहा जहां 68 लोगों की मौत हुई। पश्चिम बंगाल में 30 और दिल्ली में 28 मौतें दर्ज की गईं। भारत में हर दिन होने वाली मौतों में निरंतर कमी आ रही है। भारत में प्रति दस लाख आबादी 107 लोगों की मौत हुई है जोकि दुनिया के देशों की तुलना में सबसे कम मृत्यु दर वाले देशों में है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से सिफारिश की है कि ब्रिटेन से भारत में आने वाली उड़ानों के अस्थायी निलंबन को 7 जनवरी (गुरुवार), 2021 तक और बढ़ाया जाए। यह सिफारिश स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) के नेतृत्व में संयुक्त निगरानी समूह (जेएमजी) और महानिदेशक, आईसीएमआर और सदस्य (स्वास्थ्य) नीति आयोग के संयुक्त नेतृत्व वाले नेशनल टास्क फोर्स से प्राप्त इनपुट के आधार पर की गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय को यह भी सुझाव दिया गया है कि 7 जनवरी 2021 के बाद ब्रिटेन से भारत आने वाली उड़ानों को सीमित संख्या में नियमित बहाली पर विचार किया जाए। नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ परामर्श कर ऐसी व्यवस्था बनाने के लिए मिल कर काम किया जा सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने सभी राज्यों को लिखा है कि वे ऐसे सभी कार्यक्रमों पर कड़ी निगरानी रखी जाए जहाँ से संभावित "सुपर स्प्रेडर" यानि तेजी से संक्रमण का खतरा हो सकता है। साथ ही नए साल के जश्न और इसके साथ-साथ सर्दियों के मौसम में होने वाली विभिन्न कार्यक्रमों के मद्देनजर भीड़ पर अंकुश लगाने के लिए कहा गया है। गृह मंत्रालय द्वारा राज्यों के लिए हाल ही में जारी की गई सलाह और मार्गदर्शन को स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दोहराया गया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को अंतरराष्ट्रीय टीका और प्रतिरक्षा गठबंधन, गावी के बोर्ड में नामित किया गया है। डॉ. हर्षवर्धन इस बोर्ड में दक्षिण-पूर्व क्षेत्र क्षेत्रीय कार्यालय (एसईएआरओ)/ पश्चिमी प्रशांत क्षेत्रीय कार्यालय (डब्ल्यूपीआरओ) निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनका कार्यकाल एक जनवरी, 2021 से 31 दिसंबर, 2023 तक रहेगा। वर्तमान में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व म्यांमार के श्री मिंत ह्टवे कर रहे हैं। इस बोर्ड की साल में दो बार जून और नवंबर/दिसंबर में बैठकें होती हैं। इसके अलावा मार्च या अप्रैल में एक वार्षिक रिट्रीट का आयोजन होता है। गावी बोर्ड रणनीतिक दिशा एवं नीति-निर्माण के लिए जिम्मेदार है। इसके अलावा यह टीका गठबंधन के संचालनों और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की निगरानी भी करता है। वहीं कई साझेदार संगठनों और निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ बोर्ड संतुलित रणनीतिक निर्णय लेने, नवाचार और सहयोगात्मक साझेदारी के लिए भी एक मंच उपलब्ध कराता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने चार राज्यों - असम, आंध्र प्रदेश, पंजाब और गुजरात में कोविड-19 टीकाकरण संबंधित गतिविधियों के लिए 28 और 29 दिसंबर, 2020 को दो दिवसीय पूर्वाभ्यास (ड्राई रन) का आयोजन किया गया। वैश्विक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) को शुरू करने तथा खसरा-रूबेला (एमआर) और वयस्क जापानी एन्सेफलाइटिस (जेई) जैसे राष्ट्रव्यापी मल्टीपल वाइड-रेंज इंजेक्टेबल टीकाकरण अभियान को आयोजित करने के अनुभव के साथ, कोविड -19 के लिए स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं, फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और 50 वर्ष से ऊपर के लोगों, जैसे टीकाकरण प्राथमिकता वाले जनसंख्या समूहों को टीका लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इस पूर्वाभ्यास क्रिया का उद्देश्य एक सिरे से दूसरे सिरे तक कोविड-19 टीकाकरण प्रक्रिया का परीक्षण करना है। इसमें परिचालन दिशा-निर्देशों के अनुसार योजना बनाना और तैयारियां करना, सीओ-विन एप्लिकेशन पर सुविधाओं और उपयोगकर्ताओं का सृजन, सत्र स्थल का निर्माण और स्थलों की मैपिंग, स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं (एचसीडब्लू) का डेटा अपलोड करना, जिले में वैक्सीन की प्राप्ति और आवंटन, सत्र की योजना बनाना, टीकाकरण टीम की तैनाती, सत्र स्थल पर लॉजिस्टिक प्रबंधन और ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर टीकाकरण आयोजित करने के लिए मॉक ड्रिल और समीक्षा बैठकों का आयोजन करना शामिल हैं। इस पूर्वाभ्यास का उद्देश्य आईटी प्लेटफॉर्म को-विन के क्षेत्र में कार्यान्वयन और वास्तविक कार्यान्वयन से पूर्व आगे बढ़ने के तरीकों के बारे में मार्गदर्शन करना शामिल है।
केन्द्रीय पृथ्वी विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने आज प्रौद्योगिकी सूचना, पूर्वानुमान और मूल्यांकन परिषद (टीआईएफएसी) द्वारा तैयार की गई आत्म निर्भर भारत के लिए कार्य सूची रिपोर्ट जारी की। इस अवसर पर वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा, टीआईएफएसी के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर प्रदीप श्रीवास्तव और वरिष्ठ वैज्ञानिक उपस्थित रहे।
टीआईएफएसी के जुलाई 2020 में जारी किए गए कोविड-19 के बाद के मेक-इन-इंडिया के लिए केन्द्रित हस्तक्षेप पर श्वेत पत्र के फॉलोअप के रूप में आत्म निर्भर भारत के लिए कार्य सूची रिपोर्ट जारी की गई है। श्वेत पत्र में पांच क्षेत्रों पर जोर दिया गया है। ये हैं- स्वास्थ्य सेवाओं की मशीनरी, आईसीटी, कृषि, विनिर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स जो कि कोविड-19 के काल के बाद की भारत के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होंगे। डॉ. हर्ष वर्धन ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री की सोच कोविड महामारी के दौरान हम सबको प्रेरित करती रही है। इसने देश के लोगों को विश्वास दिया है और हम वायरस को हराने में कामयाब रहे हैं। हमने विश्व के पेशेवर कौशल को पीछे छोड़ दिया है। हमने दिखा दिया है कि भारत कुछ तय करता है तो कर के दिखा देता है।
भारत सरकार ने ब्रिटेन में कोविड-19 विषाणु की नई प्रजाति सार्स कोविड-2 के पाए जाने की खबरों का संज्ञान लेते हुए इसके जीनोमअनुक्रमण का पता लगाने और तथा इसके नियंत्रण और बचाव के लिए समय से पहले ही एक सक्रिय रणनीति तैयार कर ली है। इस रणनीति में निम्नलिखित बातें शामिल हैं, लेकिन यह इतने तक ही सीमित नहीं है - 23 दिसंबर, 2020 की मध्यरात्रि से 31 दिसंबर, 2020 तक ब्रिटेन से आने वाली सभी उड़ानों पर अस्थायी रोक, ब्रिटेन से आने वाले सभी विमान यात्रियों का अनिवार्य रूप से आरटी-पीसीआर परीक्षण, आरटी-पीसीआर परीक्षण में पॉजिटिव पाए गए सभी नमूनों के जीनोम अनुक्रमण का पता लगाने के लिए इन्हें इस काम के लिए चिन्हित दस सरकारी प्रयोगशालाओं अर्थात आईएनएसएसीओजी में भेजा जाना, परीक्षण, उपचार, निगरानी और नियंत्रण रणनीति पर विचार करने और सुझाव देने के लिए कोविड-19 के संबंध में 26 दिसंबर को राष्ट्रीय कार्य बल (एनटीएफ) की बैठक का आयोजन, ब्रिटेन में पाए गए सार्स कोविड-2 के म्यूटेंट रूप से निपटने के लिए 22 दिसंबर, 2020 को राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को जारी मानक संचालन प्रोटोकॉल। 26 दिसंबर, 2020 की बैठक में राष्ट्रीय कार्यबल (एनटीएफ) की ओर से इस पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की गई और यह निष्कर्ष निकाला गया कि सार्स कोविड-2 के नए म्यूटेंट रूप को देखते हुए मौजूदा राष्ट्रीय उपचार प्रोटोकॉल या मौजूदा परीक्षण प्रोटोकॉल में किसी तरह के बदलाव की कोई आवश्यकता नहीं है। एनटीएफ ने यह भी सुझाव दिया कि मौजूदा निगरानी रणनीति के अतिरिक्त यदि कुछ करना है तो कोविड के नए रूप के जीनोम अनुक्रमण की निगरानी बढ़ाने पर ज्यादा जोर देना बेहतर होगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज भारत के पहले न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (पीसीवी) का उद्घाटन किया। इस 'न्यूमोसिल' टीके का विकास सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एसआईआईपीएल) ने बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन जैसे भागीदारों के सहयोग से किया है। टीके की खुराक की संख्या के लिहाज से एसआईआईपीएल को दुनिया की सबसे बड़ी विनिर्माता और भारत की अर्थव्यवस्था में इसके योगदान का उल्लेख करते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट के टीके का उपयोग 170 देशों में किया जाता है और दुनिया में हर तीसरे बच्चे को इस विनिर्माता के टीके से प्रतिरक्षित किया जाता है। उन्होंने याद दिलाया कि एसआईआईपीएल को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत दृष्टिकोण के अनुरूप कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान भारत सरकार से पहली स्वदेशी न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (पीसीवी) विकसित करने के लिए लाइसेंस मिला था। उन्होंने पीसीवी में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के इस प्रयास में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के असाधारण प्रयासों का भी उल्लेख किया। डॉ. हर्षवर्धन ने भारत की जरूरत के लिए टीका विकसित करने में एसआईआईपीएल की उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा,'सीरम इंस्टीट्यूट का पहला स्वदेशी न्यूमोकोकल कंजुगेट टीका एकल खुराक (शीशी और सिरिंज) में और कई खुराक वाली शीशी में न्यूमोसिल ब्रांड नाम के तहत बाजार में सस्ती कीमत के साथ उपलब्ध होगा। डॉ. हर्षवर्धन ने आत्मनिर्भर भारत के लिए प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता और मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड के उनके दृष्टिकोण के बारे में बताते हुए कहा,'न्यूमोसिल अनुसंधान एवं विकास और उच्च गुणवत्ता वाले टीके के विनिर्माण में भारत की क्षमता का एक उदाहरण है। वास्तव में कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौरान यह ऐतिहासिक उपलब्धि हमारे देश के लिए गर्व की बात है क्योंकि अब तक हम पूरी तरह से विदेशी विनिर्माताओं द्वारा तैयार न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन पर निर्भर रहे हैं जो बाजार में बहुत अधिक कीमत पर उपलब्ध हैं।'
केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने आज वीडियो कॉन्फ्रेन्स के माध्यम से अच्छे और अनुकरणीय व्यवहारों पर 7वें राष्ट्रीय सम्मेलन का डिजिटल रूप में उद्घाटन किया। डॉ. हर्ष वर्धन ने एबी-एचडब्ल्यूसी में टीबी सेवाओं के लिए संचालन दिशा निर्देशों तथा सक्रिय पहचान तथा कुष्ठ रोग के लिए नियमित निगरानी पर संचालन दिशा निर्देश 2020 के साथ नई स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) भी लॉन्च की। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय अच्छे, अनुकरणीय व्यवहारों तथा भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों में नवाचार पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करता है। डॉ. वर्धन ने सम्मेलन के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की और महामारी की स्थिति में सम्मेलन आयोजित करने के लिए सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि नवाचारी कनवरजेंस रणनीति पर फोकस आवश्यक है। यह भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को नई ऊंचाई तक ले जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा नावाचार पोर्टल पर 2020 में 210 नए कदमों को अपलोड किया गया। इन नवाचारों का अंतिम उद्देश्य एक ओर लोगों की स्वास्थ्य स्थिति को सुधारना है तो दूसरी ओर स्थायी रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा इको सिस्टम में नवाचार पर चिंतन के लिए जमीनी स्तर के स्वास्थ्य सेवा कर्मियों को शामिल और एकीकृत किया जाना चाहिए तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य डिलीवरी प्रणाली में काम कर रहे लोगों के वर्षों के अनुभव और विशेषज्ञता से प्राप्त सामूहिक समझ का लाभ उठाया जाना चाहिए। डॉ. हर्ष वर्धन ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री के रूप में पोलियो उन्नमूलन अभियान के अपने अनुभव को साझा किया और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में लोगों तथा समुदाय की भागीदारी की शक्ति के बारे में बताया।
राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने आज कहा कि कोरोना वायरस ने सामाजिक रिश्तों, आर्थिक गतिविधियों, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और जीवन के अन्य विभिन्न आयामों के तौर पर विश्व में काफी बदलाव ला दिया है, लेकिन जीवन की गति रुकी नहीं है और इसका श्रेय मुख्य रूप से सूचना और संचार तकनीकी को जाता है। तकनीकी विकास को आमतौर पर बाधा के रूप में देखा जाता है, लेकिन इस साल उसने हमें एक बड़ी 'बाधा' से पार पाने में मदद की। श्री कोविंद ने आज यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से डिजिटल इंडिया अवार्ड-2020 प्रदान किये। राष्ट्रपति ने कहा कि सक्रिय डिजिटल हस्तक्षेप के चलते हम लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद महत्वपूर्ण सरकारी सेवाओं के संचालन को जारी रखना सुनिश्चित कर सकें। उन्होंने कहा कि महामारी के कारण उत्पन्न चुनौतियों से पार पाने में देश की मदद करने के काम में डिजिटल योद्धाओं की भूमिका बहुत प्रशंसनीय रही। आरोग्य सेतु, ई-ऑफिस और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सेवाओं जैसे आईसीटी अवसंरचना समर्थित मंचों के जरिये देश महामारी की परेशानियों को कम करने में सफल रहा।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 31 दिसंबर, 2020 को सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राजकोट, गुजरात में एम्स की आधारशिला रखेंगे। गुजरात के राज्यपाल, गुजरात के मुख्यमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे। इस परियोजना के लिए 201 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 1195 करोड़ रूपये हैं। इस परियोजना का कार्य 2022 के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है। 750 बेड वाले इस अत्याधुनिक अस्पताल में 30 बेड का आयुष ब्लॉक भी होगा। इसमें एमबीबीएस की 125 सीटें और नर्सिंग की 60 सीटें होंगी।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महाराष्ट्र के संगोला से पश्चिम बंगाल के शालीमार के बीच 100वीं किसान रेल को झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर और श्री पीयूष गोयल भी उपस्थित थे। इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान रेल सेवा देश के किसानों की आय को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।उन्होंने कोविड-19 महामारी के बीच 4 महीनों में 100वीं किसान रेलचलाए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सेवा कृषि से जुड़ी अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव लेकर आएगी और देश की कोल्ड सप्लाई चेन को सशक्त करेगी।
उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने युवाओं को कोविड महामारी से उत्पन्न चुनौतियों को अवसरों में बदलने की सलाह दी है। सोमवार को विजयवाड़ा में स्वर्ण भारत ट्रस्ट के प्रशिक्षुओं को प्रमाणपत्र देने के अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए श्री नायडू ने कहा कि महामारी ने जहां कई क्षेत्रों को प्रभावित किया है, वहीं इसने दूसरे क्षेत्रों में लोगों के लिए अवसर का मार्ग भी खोला है। देश की 65 प्रतिशत आबादी के 35 वर्ष से कम आयु का होने का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यदि हम इस मानव संसाधन का सदुपयोग करें, तो युवा और महिलाएं राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भागीदार बन सकते हैं। उन्होंने कहा "इन महत्वपूर्ण मानव संसाधनों के साथ, हम भविष्य में एक बेहतर दुनिया का निर्माण कर सकते हैं"। इस संबंध में उपराष्ट्रपति ने युवाओं के कौशल विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न प्रयासों को याद किया और इन्हें और गति प्रदान करने का आह्वान किया। उन्होंने 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास पर जोर देते हुए इस क्षेत्र में निजी भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया।
उपराष्ट्रपति श्री एम.वेंकैया नायडू ने आज ऐसा मीडिया अभियान चलाने का आह्वान किया, जिससे प्लास्टिक उत्पादों के निपटान के संबंध में लोगों के व्यवहार में बदलाव लाया जा सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समस्या प्लास्टिक के साथ नहीं है, बल्कि समस्या प्लास्टिक केउपयोग के बारे में हमारे दृष्टिकोण में है।
विजयवाड़ा स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीआईपीईटी)के छात्रों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों को आज यहां संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने प्लास्टिक के स्थायित्व और लंबे समय तक कायम रहने के चलते पैदा होने वाली पर्यावरण चुनौतियों पर चिंता जताई। उन्होंने प्लास्टिककचरे के प्रबंधन की प्रक्रिया को अपनाने और जनता को तीन आर-रिड्यूस, रीयूज और रीसाइकल (यानी प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करना, दोबारा इस्तेमाल करनाऔर दोबारा इस्तेमाल योग्य उत्पाद बनाना) के संबंध में जागरूक बनाने की जरूरत पर जोर दिया। श्री नायडू ने देश में जारी कोविड-19 महामारी के दौरान प्लास्टिक की महत्ता की खासतौर से प्रशंसा की, क्योंकि इस महामारी के प्रसार को रोकने और इससे निपटने के लिए चिकित्सा सुरक्षा उपकरण और पीपीई किट के निर्माण में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। प्लास्टिक के अलावा पॉलीमर सामग्री का इस्तेमाल भी चिकित्सकीय उपकरण और इन्सुलिन पेन्स, आईवी ट्यूब्स, इम्प्लांट्स और टिश्यू इंजीनियरिंग में किया गया। भारतीय अर्थव्यवस्था में पॉलीमर्स के महत्व को बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि 30,000 से ज्यादा प्लास्टिक प्रसंस्करण इकाइयां देशभर में 40 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मुहैया करा रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष प्रति व्यक्ति करीब 12 किलोग्राम की औसत राष्ट्रीय खपत के साथ भारत का स्थान विश्व के पांच सबसे बड़े पॉलीमर उपभोक्ताओं में है।
गृह मंत्रालय (एमएचए) ने पूर्व में जारी निगरानी से संबंधित दिशा-निर्देशों को 31 जनवरी 2021 तक लागू रखने के लिए सोमवार को एक आदेश जारी कर दिया है। भले ही कोविड-19 के नए और सक्रिय मामलों की संख्या में लगातार कमी आ रही है, लेकिन वैश्विक स्तर पर मामलों में बढ़ोतरी और यूनाइटेड किंगडम (यूके) में वायरस के नए संस्करण के सामने आने के बाद निगरानी, रोकथाम और सतर्कता बनाए रखने की आवश्यकता है। इस क्रम में, नियंत्रण (कंटेनमेंट) क्षेत्रों का सावधानी से सीमांकन; इन क्षेत्रों में सुझाए गए रोकथाम के सख्त उपायों के पालन; कोविड संबंधी उपयुक्त व्यवहार को प्रोत्साहन और सख्ती से अनुपालन; और विभिन्न स्वीकृत गतिविधियों के संबंध में मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का ईमानदारी से पालन जारी रखा गया है। इस प्रकार 25 नवंबर 2020 को जारी दिशा-निर्देशों में उल्लिखित गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (एमओएचएफडब्ल्यू) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों/एसओपी की निगरानी, रोकथाम और सख्ती से पालन पर केंद्रित दृष्टिकोण को सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों द्वारा लागू किए जाने की जरूरत है।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने कोविड-19 की अवधि के दौरान जम्मू और कश्मीर में खादी कारीगरों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। इस बीच, केवीआईसी ने देश भर में स्थायी रोजगार सृजित करने के लिए अथक प्रयास किये हैं, इतना ही नहीं आयोग ने केवल जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में ही खादी संस्थानों को 29.65 करोड़ रुपये का भुगतान किया है, जिस पर भारत सरकार विशेष तौर पर ध्यान दे रही है। इस राशि को मई 2020 से लेकर सितंबर 2020 तक जम्मू-कश्मीर के 84 खादी संस्थानों में वितरित किया गया है, जिससे इन संस्थानों से जुड़े लगभग 10,800 खादी कारीगरों को लाभ पहुंचा है।
- केरलः केरल सरकार ने देश के विभिन्न हिस्सों में कोविड -19 के नए स्वरूप के मामलों और ब्रिटेन से लौटे 20 लोगों के पॉजिटिव परीक्षण के बाद बरती जा रही सतर्कता के बीच यूरोप से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग के लिए कड़े कदम उठाए हैं। ब्रिटेन से आये 18 यात्रियों के पॉजिटिव परीक्षण के बाद राज्य सरकार सतर्कता बरत रही है। पॉजिटिव नमूने जिनोम सीक्वेंसिंग हेतु एनआईवी, पुणे भेजे गए थे जिससे यह जांचा जा सके कि वे नए स्वरूप के हैं या नहीं। इसके परिणाम की अभी प्रतीक्षा की जा रही है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री के के शैलजा ने कहा है कि वायरस के नए स्वरूप से संक्रमि मामले में, मौजूदा कोविड -19 उपचार ही जारी रहेगा। केरल में हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के बाद, यह आशंका थी कि राज्य में कोविड-19 मामलों में बड़े पैमाने पर उछाल आएगा। हालांकि, पिछले पखवाड़े में दर्ज किए गए नए सकारात्मक मामलों की संख्या कम से कम इस तरह की आशंकाओं को नकारती है। राज्य में मंगलवार को 5,887 नए मामले आए और 5,029 मरीज ठीक हुए। राज्य में संक्रमण से मरने वालों की संख्या 3014 है। वर्तमान परीक्षण पॉजिटिव दर 9.5 है।
- तमिलनाडुः तमिलनाडु में आज तक कुल 8,16,132 मामले दर्ज किए गए हैं और 12,092 मौतें दर्ज की गई है। ऱाज्य मे 8747 सक्रिय मामले है और 7,95,293 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया है।
- कर्नाटकः राज्य में आज तक कुल मामले 9,17,571 और सक्रिय मामले की संख्या 11,861 है। संक्रमण से मौतों की संख्या 12074 है जबकि 8,93,617 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया है।
- आंध्र प्रदेशः गुजरात, पंजाब और असम के साथ-साथ आंध्र प्रदेश में भी कोविड -19 प्रतिरक्षण अभियान के लिये निर्धारित तंत्र की व्यवस्था के आकलन के लिए दो दिवसीय पूर्वाभायस का अभियान चलाया गया। यह अभ्यास सोमवार और मंगलवार को कृष्णा जिले में विभिन्न कार्यों के लिए गठित विशिष्ट टीमों द्वारा किया गया था। यह पूर्वाभ्यास योजना, कार्यान्वयन और रिपोर्टिंग तंत्र के अलावा, को - विन की परिचालन व्यवहार्यता की जांच करने के लिए था। अभियान के तहत डमी लाभार्थी डेटा, साइट निर्माण, वैक्सीन आवंटन और टीकाकरण, टीकाकारों के विवरण और लाभार्थियों की जानकारी अपलोड करने, और लाभार्थी एकत्र करने जैसी गतिविधियां की गईं। दिल्ली हवाई अड्डे पर कर्मचारियों को चकमा देने वाली महिला के नए कोविड स्ट्रेन के लिए पॉज़िटिव होने की पुष्टि के बाद राज्य सरकार अलर्ट पर है। राज्य में अब तक ब्रिटेन से आने वाले 1,423 लोगों की पहचान की जा चुकि है साथ ही उनके संपर्क में आने वाले 6,364 लोगों की भी पहचान की गई है। कुछ दिनों में समाप्त होने जा रहा यह साल कोविड माहामारी की वजह से प्रभावित रहा है। बहुत से लोग वायरस के प्रसार के डर से फूलों के गुलदस्ते खरीदने से डरते हैं, फूलों के खरीदार उन्हें विश्वास दिलाने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं।
- तेलंगानाः राज्य में आज तक, कुल मामलों की संख्या 2,81,730 तक पहुंच गई है। राज्य में कुल सक्रिय मामले 6590 है और इससे होने वाली मौतों की संख्या 1538 है। साथ ही 2,85,939 मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दी गई है। तेलंगाना के वारंगल में 49 वर्षीय व्यक्ति के कोविड -19 के नए स्वरूप से संक्रमित होने के बाद राज्य सरकार ने इससे निपटने के लिये कमर कस ली है। इस बीच सीसीएमबी के निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा ने लोगों से आग्रह किया है कि वे कोविड के प्रति बरती जा रही सावधानियों को कम न होने दें क्योंकि ब्रिटेन से आए वेरिएंट में संक्रमण की दूसरी लहर पैदा करने की क्षमता है। भारत बायोटेक के एमडी डॉ. कृष्णा एला ने आश्वासन दिया है कि को-वाक्सिन जो उत्पादन कर रहा है वह नए स्वरूप के खिलाफ भी करगर होगा।
- असमः असम में, कोविड-19 से 66 और लोग संक्रमित पाए गए और मंगलवार को 87 रोगियों को छुट्टी दी गई। राज्य में कुल मामले 216063 हो गए हैं। राज्य में कुल डिस्चार्ज मरीजों की संख्या 211720 है, जबकि सक्रिय मामले 3300 है और 1040 लोगों की कुल हुई है। राज्य में कल दो मरीजों की मौत हुई।
- सिक्किमः सिक्किम में मंगलवार को 19 और लोग कोविड-19 से संक्रमित पाए गए। राज्य में कुल मामलों की संख्या बढ कर 5864 हो गई है और सक्रिय मामले 537 हो गए हैं।
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Posted On: ब्रिटेन में पाए गए कोरोनावायरस के नए स्वरूप सार्स सीईओवी-दो से बीस लोग संक्रमित पाए गए हैं। इनमें पहले संक्रमित पाए गए छः लोग भी शामिल हैं,जिन्हें देश की विशिष्ट प्रयोगशालाओं में जांच और उपचार हेतु भर्ती कराया गया है। एक सौ सात नमूनों की दस प्रयोगशाला में जांच की गई है। नए वायरस को देखते हुए भारत सरकार ने इसके जिनोम सीक्वेंसिंग हेतु इंसाकॉग का गठन किया है जिसमें विशिष्ट प्रयोगशालाएं के स्तर पर पहुंच गई है। इसके चलते सक्रिय मामलों और स्वस्थ होने वालों की संख्या में अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत में इस समय सक्रिय कोविड-उन्नीस की संख्या दो,बासठ,दो सौ बहत्तर है जो कि भारत में कुल संक्रमित हुए मरीजों का मात्र दो.छप्पन प्रतिशत है। पिछले चौबीस घंटाटों के दौरान स्वस्थ हुए लोगों की संख्या नए मामलों की संख्या से छः,तीन सौ नौअधिक है। विश्व स्तर पर तुलना करने से यह पता चलता है कि प्रति दस लाख आबादी पर कोविड-उन्नीस की संख्या भारत में न्यूनतम स्तर पर है। स्वस्थ हुए कुल नए लोगों में अठहत्तर.चौंतालीस प्रतिशत लोग दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हैं। इसमें महाराष्ट्र सबसे ऊपर है, जहां पिछले चौबीस घंटाटों में पाँच,पाँच सौ बहत्तर लोग स्वस्थ हुए। दूसरे स्थान पर केरल है, जहां पाँच,उनतीस लोग स्वस्थ हुए जबकि तीसरे स्थान पर छत्तीसगढ़ है जहां एक हज़ार छः सौ सात लोग स्वस्थ हुए। इसी तरह से बीते चौबीस घंटाटों में आए कुल नए मामलों में उन्यासी.चौबीस प्रतिशत मामले दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से हैं। केरल में सबसे अधिक पाँच,आठ सौ सत्तासी नए मामले सामने आए। दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र रहा, जहां पर तीन,अट्ठारह नए मामले आए और तीसरे स्थान पर पश्चिम बंगाल में एक,दो सौ चौंतालीस नए मामले सामने आए। बीते चौबीस घंटाटों में दो सौ छियासी कोविड मरीजों की मृत्यु हुई। दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उन्यासी.सैंतीस प्रतिशत नई मौत के मामले हैं। महाराष्ट्र इसमें सबसे ऊपर रहा जहां अड़सठ लोगों की मौत हुई। पश्चिम बंगाल में तीस और दिल्ली में अट्ठाईस मौतें दर्ज की गईं। भारत में हर दिन होने वाली मौतों में निरंतर कमी आ रही है। भारत में प्रति दस लाख आबादी एक सौ सात लोगों की मौत हुई है जोकि दुनिया के देशों की तुलना में सबसे कम मृत्यु दर वाले देशों में है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय से सिफारिश की है कि ब्रिटेन से भारत में आने वाली उड़ानों के अस्थायी निलंबन को सात जनवरी , दो हज़ार इक्कीस तक और बढ़ाया जाए। यह सिफारिश स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक के नेतृत्व में संयुक्त निगरानी समूह और महानिदेशक, आईसीएमआर और सदस्य नीति आयोग के संयुक्त नेतृत्व वाले नेशनल टास्क फोर्स से प्राप्त इनपुट के आधार पर की गई है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय को यह भी सुझाव दिया गया है कि सात जनवरी दो हज़ार इक्कीस के बाद ब्रिटेन से भारत आने वाली उड़ानों को सीमित संख्या में नियमित बहाली पर विचार किया जाए। नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ परामर्श कर ऐसी व्यवस्था बनाने के लिए मिल कर काम किया जा सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने सभी राज्यों को लिखा है कि वे ऐसे सभी कार्यक्रमों पर कड़ी निगरानी रखी जाए जहाँ से संभावित "सुपर स्प्रेडर" यानि तेजी से संक्रमण का खतरा हो सकता है। साथ ही नए साल के जश्न और इसके साथ-साथ सर्दियों के मौसम में होने वाली विभिन्न कार्यक्रमों के मद्देनजर भीड़ पर अंकुश लगाने के लिए कहा गया है। गृह मंत्रालय द्वारा राज्यों के लिए हाल ही में जारी की गई सलाह और मार्गदर्शन को स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दोहराया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को अंतरराष्ट्रीय टीका और प्रतिरक्षा गठबंधन, गावी के बोर्ड में नामित किया गया है। डॉ. हर्षवर्धन इस बोर्ड में दक्षिण-पूर्व क्षेत्र क्षेत्रीय कार्यालय / पश्चिमी प्रशांत क्षेत्रीय कार्यालय निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करेंगे। उनका कार्यकाल एक जनवरी, दो हज़ार इक्कीस से इकतीस दिसंबर, दो हज़ार तेईस तक रहेगा। वर्तमान में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व म्यांमार के श्री मिंत ह्टवे कर रहे हैं। इस बोर्ड की साल में दो बार जून और नवंबर/दिसंबर में बैठकें होती हैं। इसके अलावा मार्च या अप्रैल में एक वार्षिक रिट्रीट का आयोजन होता है। गावी बोर्ड रणनीतिक दिशा एवं नीति-निर्माण के लिए जिम्मेदार है। इसके अलावा यह टीका गठबंधन के संचालनों और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन की निगरानी भी करता है। वहीं कई साझेदार संगठनों और निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ बोर्ड संतुलित रणनीतिक निर्णय लेने, नवाचार और सहयोगात्मक साझेदारी के लिए भी एक मंच उपलब्ध कराता है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने चार राज्यों - असम, आंध्र प्रदेश, पंजाब और गुजरात में कोविड-उन्नीस टीकाकरण संबंधित गतिविधियों के लिए अट्ठाईस और उनतीस दिसंबर, दो हज़ार बीस को दो दिवसीय पूर्वाभ्यास का आयोजन किया गया। वैश्विक टीकाकरण कार्यक्रम को शुरू करने तथा खसरा-रूबेला और वयस्क जापानी एन्सेफलाइटिस जैसे राष्ट्रव्यापी मल्टीपल वाइड-रेंज इंजेक्टेबल टीकाकरण अभियान को आयोजित करने के अनुभव के साथ, कोविड -उन्नीस के लिए स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं, फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और पचास वर्ष से ऊपर के लोगों, जैसे टीकाकरण प्राथमिकता वाले जनसंख्या समूहों को टीका लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इस पूर्वाभ्यास क्रिया का उद्देश्य एक सिरे से दूसरे सिरे तक कोविड-उन्नीस टीकाकरण प्रक्रिया का परीक्षण करना है। इसमें परिचालन दिशा-निर्देशों के अनुसार योजना बनाना और तैयारियां करना, सीओ-विन एप्लिकेशन पर सुविधाओं और उपयोगकर्ताओं का सृजन, सत्र स्थल का निर्माण और स्थलों की मैपिंग, स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं का डेटा अपलोड करना, जिले में वैक्सीन की प्राप्ति और आवंटन, सत्र की योजना बनाना, टीकाकरण टीम की तैनाती, सत्र स्थल पर लॉजिस्टिक प्रबंधन और ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर टीकाकरण आयोजित करने के लिए मॉक ड्रिल और समीक्षा बैठकों का आयोजन करना शामिल हैं। इस पूर्वाभ्यास का उद्देश्य आईटी प्लेटफॉर्म को-विन के क्षेत्र में कार्यान्वयन और वास्तविक कार्यान्वयन से पूर्व आगे बढ़ने के तरीकों के बारे में मार्गदर्शन करना शामिल है। केन्द्रीय पृथ्वी विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने आज प्रौद्योगिकी सूचना, पूर्वानुमान और मूल्यांकन परिषद द्वारा तैयार की गई आत्म निर्भर भारत के लिए कार्य सूची रिपोर्ट जारी की। इस अवसर पर वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रोफेसर आशुतोष शर्मा, टीआईएफएसी के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर प्रदीप श्रीवास्तव और वरिष्ठ वैज्ञानिक उपस्थित रहे। टीआईएफएसी के जुलाई दो हज़ार बीस में जारी किए गए कोविड-उन्नीस के बाद के मेक-इन-इंडिया के लिए केन्द्रित हस्तक्षेप पर श्वेत पत्र के फॉलोअप के रूप में आत्म निर्भर भारत के लिए कार्य सूची रिपोर्ट जारी की गई है। श्वेत पत्र में पांच क्षेत्रों पर जोर दिया गया है। ये हैं- स्वास्थ्य सेवाओं की मशीनरी, आईसीटी, कृषि, विनिर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स जो कि कोविड-उन्नीस के काल के बाद की भारत के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होंगे। डॉ. हर्ष वर्धन ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री की सोच कोविड महामारी के दौरान हम सबको प्रेरित करती रही है। इसने देश के लोगों को विश्वास दिया है और हम वायरस को हराने में कामयाब रहे हैं। हमने विश्व के पेशेवर कौशल को पीछे छोड़ दिया है। हमने दिखा दिया है कि भारत कुछ तय करता है तो कर के दिखा देता है। भारत सरकार ने ब्रिटेन में कोविड-उन्नीस विषाणु की नई प्रजाति सार्स कोविड-दो के पाए जाने की खबरों का संज्ञान लेते हुए इसके जीनोमअनुक्रमण का पता लगाने और तथा इसके नियंत्रण और बचाव के लिए समय से पहले ही एक सक्रिय रणनीति तैयार कर ली है। इस रणनीति में निम्नलिखित बातें शामिल हैं, लेकिन यह इतने तक ही सीमित नहीं है - तेईस दिसंबर, दो हज़ार बीस की मध्यरात्रि से इकतीस दिसंबर, दो हज़ार बीस तक ब्रिटेन से आने वाली सभी उड़ानों पर अस्थायी रोक, ब्रिटेन से आने वाले सभी विमान यात्रियों का अनिवार्य रूप से आरटी-पीसीआर परीक्षण, आरटी-पीसीआर परीक्षण में पॉजिटिव पाए गए सभी नमूनों के जीनोम अनुक्रमण का पता लगाने के लिए इन्हें इस काम के लिए चिन्हित दस सरकारी प्रयोगशालाओं अर्थात आईएनएसएसीओजी में भेजा जाना, परीक्षण, उपचार, निगरानी और नियंत्रण रणनीति पर विचार करने और सुझाव देने के लिए कोविड-उन्नीस के संबंध में छब्बीस दिसंबर को राष्ट्रीय कार्य बल की बैठक का आयोजन, ब्रिटेन में पाए गए सार्स कोविड-दो के म्यूटेंट रूप से निपटने के लिए बाईस दिसंबर, दो हज़ार बीस को राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को जारी मानक संचालन प्रोटोकॉल। छब्बीस दिसंबर, दो हज़ार बीस की बैठक में राष्ट्रीय कार्यबल की ओर से इस पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की गई और यह निष्कर्ष निकाला गया कि सार्स कोविड-दो के नए म्यूटेंट रूप को देखते हुए मौजूदा राष्ट्रीय उपचार प्रोटोकॉल या मौजूदा परीक्षण प्रोटोकॉल में किसी तरह के बदलाव की कोई आवश्यकता नहीं है। एनटीएफ ने यह भी सुझाव दिया कि मौजूदा निगरानी रणनीति के अतिरिक्त यदि कुछ करना है तो कोविड के नए रूप के जीनोम अनुक्रमण की निगरानी बढ़ाने पर ज्यादा जोर देना बेहतर होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज भारत के पहले न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन का उद्घाटन किया। इस 'न्यूमोसिल' टीके का विकास सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन जैसे भागीदारों के सहयोग से किया है। टीके की खुराक की संख्या के लिहाज से एसआईआईपीएल को दुनिया की सबसे बड़ी विनिर्माता और भारत की अर्थव्यवस्था में इसके योगदान का उल्लेख करते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट के टीके का उपयोग एक सौ सत्तर देशों में किया जाता है और दुनिया में हर तीसरे बच्चे को इस विनिर्माता के टीके से प्रतिरक्षित किया जाता है। उन्होंने याद दिलाया कि एसआईआईपीएल को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत दृष्टिकोण के अनुरूप कोविड-उन्नीस वैश्विक महामारी के दौरान भारत सरकार से पहली स्वदेशी न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन विकसित करने के लिए लाइसेंस मिला था। उन्होंने पीसीवी में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के इस प्रयास में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के असाधारण प्रयासों का भी उल्लेख किया। डॉ. हर्षवर्धन ने भारत की जरूरत के लिए टीका विकसित करने में एसआईआईपीएल की उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा,'सीरम इंस्टीट्यूट का पहला स्वदेशी न्यूमोकोकल कंजुगेट टीका एकल खुराक में और कई खुराक वाली शीशी में न्यूमोसिल ब्रांड नाम के तहत बाजार में सस्ती कीमत के साथ उपलब्ध होगा। डॉ. हर्षवर्धन ने आत्मनिर्भर भारत के लिए प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता और मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड के उनके दृष्टिकोण के बारे में बताते हुए कहा,'न्यूमोसिल अनुसंधान एवं विकास और उच्च गुणवत्ता वाले टीके के विनिर्माण में भारत की क्षमता का एक उदाहरण है। वास्तव में कोविड-उन्नीस वैश्विक महामारी के दौरान यह ऐतिहासिक उपलब्धि हमारे देश के लिए गर्व की बात है क्योंकि अब तक हम पूरी तरह से विदेशी विनिर्माताओं द्वारा तैयार न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन पर निर्भर रहे हैं जो बाजार में बहुत अधिक कीमत पर उपलब्ध हैं।' केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने आज वीडियो कॉन्फ्रेन्स के माध्यम से अच्छे और अनुकरणीय व्यवहारों पर सातवें राष्ट्रीय सम्मेलन का डिजिटल रूप में उद्घाटन किया। डॉ. हर्ष वर्धन ने एबी-एचडब्ल्यूसी में टीबी सेवाओं के लिए संचालन दिशा निर्देशों तथा सक्रिय पहचान तथा कुष्ठ रोग के लिए नियमित निगरानी पर संचालन दिशा निर्देश दो हज़ार बीस के साथ नई स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली भी लॉन्च की। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय अच्छे, अनुकरणीय व्यवहारों तथा भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों में नवाचार पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करता है। डॉ. वर्धन ने सम्मेलन के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की और महामारी की स्थिति में सम्मेलन आयोजित करने के लिए सभी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि नवाचारी कनवरजेंस रणनीति पर फोकस आवश्यक है। यह भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को नई ऊंचाई तक ले जाएगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा नावाचार पोर्टल पर दो हज़ार बीस में दो सौ दस नए कदमों को अपलोड किया गया। इन नवाचारों का अंतिम उद्देश्य एक ओर लोगों की स्वास्थ्य स्थिति को सुधारना है तो दूसरी ओर स्थायी रूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा इको सिस्टम में नवाचार पर चिंतन के लिए जमीनी स्तर के स्वास्थ्य सेवा कर्मियों को शामिल और एकीकृत किया जाना चाहिए तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य डिलीवरी प्रणाली में काम कर रहे लोगों के वर्षों के अनुभव और विशेषज्ञता से प्राप्त सामूहिक समझ का लाभ उठाया जाना चाहिए। डॉ. हर्ष वर्धन ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री के रूप में पोलियो उन्नमूलन अभियान के अपने अनुभव को साझा किया और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में लोगों तथा समुदाय की भागीदारी की शक्ति के बारे में बताया। राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने आज कहा कि कोरोना वायरस ने सामाजिक रिश्तों, आर्थिक गतिविधियों, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और जीवन के अन्य विभिन्न आयामों के तौर पर विश्व में काफी बदलाव ला दिया है, लेकिन जीवन की गति रुकी नहीं है और इसका श्रेय मुख्य रूप से सूचना और संचार तकनीकी को जाता है। तकनीकी विकास को आमतौर पर बाधा के रूप में देखा जाता है, लेकिन इस साल उसने हमें एक बड़ी 'बाधा' से पार पाने में मदद की। श्री कोविंद ने आज यहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से डिजिटल इंडिया अवार्ड-दो हज़ार बीस प्रदान किये। राष्ट्रपति ने कहा कि सक्रिय डिजिटल हस्तक्षेप के चलते हम लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद महत्वपूर्ण सरकारी सेवाओं के संचालन को जारी रखना सुनिश्चित कर सकें। उन्होंने कहा कि महामारी के कारण उत्पन्न चुनौतियों से पार पाने में देश की मदद करने के काम में डिजिटल योद्धाओं की भूमिका बहुत प्रशंसनीय रही। आरोग्य सेतु, ई-ऑफिस और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सेवाओं जैसे आईसीटी अवसंरचना समर्थित मंचों के जरिये देश महामारी की परेशानियों को कम करने में सफल रहा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी इकतीस दिसंबर, दो हज़ार बीस को सुबह ग्यारह बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राजकोट, गुजरात में एम्स की आधारशिला रखेंगे। गुजरात के राज्यपाल, गुजरात के मुख्यमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे। इस परियोजना के लिए दो सौ एक एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इस परियोजना की अनुमानित लागत एक हज़ार एक सौ पचानवे करोड़ रूपये हैं। इस परियोजना का कार्य दो हज़ार बाईस के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है। सात सौ पचास बेड वाले इस अत्याधुनिक अस्पताल में तीस बेड का आयुष ब्लॉक भी होगा। इसमें एमबीबीएस की एक सौ पच्चीस सीटें और नर्सिंग की साठ सीटें होंगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महाराष्ट्र के संगोला से पश्चिम बंगाल के शालीमार के बीच एक सौवीं किसान रेल को झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर और श्री पीयूष गोयल भी उपस्थित थे। इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि किसान रेल सेवा देश के किसानों की आय को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।उन्होंने कोविड-उन्नीस महामारी के बीच चार महीनों में एक सौवीं किसान रेलचलाए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह सेवा कृषि से जुड़ी अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव लेकर आएगी और देश की कोल्ड सप्लाई चेन को सशक्त करेगी। उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने युवाओं को कोविड महामारी से उत्पन्न चुनौतियों को अवसरों में बदलने की सलाह दी है। सोमवार को विजयवाड़ा में स्वर्ण भारत ट्रस्ट के प्रशिक्षुओं को प्रमाणपत्र देने के अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए श्री नायडू ने कहा कि महामारी ने जहां कई क्षेत्रों को प्रभावित किया है, वहीं इसने दूसरे क्षेत्रों में लोगों के लिए अवसर का मार्ग भी खोला है। देश की पैंसठ प्रतिशत आबादी के पैंतीस वर्ष से कम आयु का होने का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यदि हम इस मानव संसाधन का सदुपयोग करें, तो युवा और महिलाएं राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भागीदार बन सकते हैं। उन्होंने कहा "इन महत्वपूर्ण मानव संसाधनों के साथ, हम भविष्य में एक बेहतर दुनिया का निर्माण कर सकते हैं"। इस संबंध में उपराष्ट्रपति ने युवाओं के कौशल विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न प्रयासों को याद किया और इन्हें और गति प्रदान करने का आह्वान किया। उन्होंने इक्कीसवीं सदी की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास पर जोर देते हुए इस क्षेत्र में निजी भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया। उपराष्ट्रपति श्री एम.वेंकैया नायडू ने आज ऐसा मीडिया अभियान चलाने का आह्वान किया, जिससे प्लास्टिक उत्पादों के निपटान के संबंध में लोगों के व्यवहार में बदलाव लाया जा सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समस्या प्लास्टिक के साथ नहीं है, बल्कि समस्या प्लास्टिक केउपयोग के बारे में हमारे दृष्टिकोण में है। विजयवाड़ा स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के छात्रों, संकाय सदस्यों और कर्मचारियों को आज यहां संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने प्लास्टिक के स्थायित्व और लंबे समय तक कायम रहने के चलते पैदा होने वाली पर्यावरण चुनौतियों पर चिंता जताई। उन्होंने प्लास्टिककचरे के प्रबंधन की प्रक्रिया को अपनाने और जनता को तीन आर-रिड्यूस, रीयूज और रीसाइकल के संबंध में जागरूक बनाने की जरूरत पर जोर दिया। श्री नायडू ने देश में जारी कोविड-उन्नीस महामारी के दौरान प्लास्टिक की महत्ता की खासतौर से प्रशंसा की, क्योंकि इस महामारी के प्रसार को रोकने और इससे निपटने के लिए चिकित्सा सुरक्षा उपकरण और पीपीई किट के निर्माण में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। प्लास्टिक के अलावा पॉलीमर सामग्री का इस्तेमाल भी चिकित्सकीय उपकरण और इन्सुलिन पेन्स, आईवी ट्यूब्स, इम्प्लांट्स और टिश्यू इंजीनियरिंग में किया गया। भारतीय अर्थव्यवस्था में पॉलीमर्स के महत्व को बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि तीस,शून्य से ज्यादा प्लास्टिक प्रसंस्करण इकाइयां देशभर में चालीस लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मुहैया करा रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष प्रति व्यक्ति करीब बारह किलोग्रामग्राम की औसत राष्ट्रीय खपत के साथ भारत का स्थान विश्व के पांच सबसे बड़े पॉलीमर उपभोक्ताओं में है। गृह मंत्रालय ने पूर्व में जारी निगरानी से संबंधित दिशा-निर्देशों को इकतीस जनवरी दो हज़ार इक्कीस तक लागू रखने के लिए सोमवार को एक आदेश जारी कर दिया है। भले ही कोविड-उन्नीस के नए और सक्रिय मामलों की संख्या में लगातार कमी आ रही है, लेकिन वैश्विक स्तर पर मामलों में बढ़ोतरी और यूनाइटेड किंगडम में वायरस के नए संस्करण के सामने आने के बाद निगरानी, रोकथाम और सतर्कता बनाए रखने की आवश्यकता है। इस क्रम में, नियंत्रण क्षेत्रों का सावधानी से सीमांकन; इन क्षेत्रों में सुझाए गए रोकथाम के सख्त उपायों के पालन; कोविड संबंधी उपयुक्त व्यवहार को प्रोत्साहन और सख्ती से अनुपालन; और विभिन्न स्वीकृत गतिविधियों के संबंध में मानक संचालन प्रक्रियाओं का ईमानदारी से पालन जारी रखा गया है। इस प्रकार पच्चीस नवंबर दो हज़ार बीस को जारी दिशा-निर्देशों में उल्लिखित गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण द्वारा जारी दिशा-निर्देशों/एसओपी की निगरानी, रोकथाम और सख्ती से पालन पर केंद्रित दृष्टिकोण को सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों द्वारा लागू किए जाने की जरूरत है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने कोविड-उन्नीस की अवधि के दौरान जम्मू और कश्मीर में खादी कारीगरों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। इस बीच, केवीआईसी ने देश भर में स्थायी रोजगार सृजित करने के लिए अथक प्रयास किये हैं, इतना ही नहीं आयोग ने केवल जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में ही खादी संस्थानों को उनतीस.पैंसठ करोड़ रुपये का भुगतान किया है, जिस पर भारत सरकार विशेष तौर पर ध्यान दे रही है। इस राशि को मई दो हज़ार बीस से लेकर सितंबर दो हज़ार बीस तक जम्मू-कश्मीर के चौरासी खादी संस्थानों में वितरित किया गया है, जिससे इन संस्थानों से जुड़े लगभग दस,आठ सौ खादी कारीगरों को लाभ पहुंचा है। - केरलः केरल सरकार ने देश के विभिन्न हिस्सों में कोविड -उन्नीस के नए स्वरूप के मामलों और ब्रिटेन से लौटे बीस लोगों के पॉजिटिव परीक्षण के बाद बरती जा रही सतर्कता के बीच यूरोप से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग के लिए कड़े कदम उठाए हैं। ब्रिटेन से आये अट्ठारह यात्रियों के पॉजिटिव परीक्षण के बाद राज्य सरकार सतर्कता बरत रही है। पॉजिटिव नमूने जिनोम सीक्वेंसिंग हेतु एनआईवी, पुणे भेजे गए थे जिससे यह जांचा जा सके कि वे नए स्वरूप के हैं या नहीं। इसके परिणाम की अभी प्रतीक्षा की जा रही है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री के के शैलजा ने कहा है कि वायरस के नए स्वरूप से संक्रमि मामले में, मौजूदा कोविड -उन्नीस उपचार ही जारी रहेगा। केरल में हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के बाद, यह आशंका थी कि राज्य में कोविड-उन्नीस मामलों में बड़े पैमाने पर उछाल आएगा। हालांकि, पिछले पखवाड़े में दर्ज किए गए नए सकारात्मक मामलों की संख्या कम से कम इस तरह की आशंकाओं को नकारती है। राज्य में मंगलवार को पाँच,आठ सौ सत्तासी नए मामले आए और पाँच,उनतीस मरीज ठीक हुए। राज्य में संक्रमण से मरने वालों की संख्या तीन हज़ार चौदह है। वर्तमान परीक्षण पॉजिटिव दर नौ.पाँच है। - तमिलनाडुः तमिलनाडु में आज तक कुल आठ,सोलह,एक सौ बत्तीस मामले दर्ज किए गए हैं और बारह,बानवे मौतें दर्ज की गई है। ऱाज्य मे आठ हज़ार सात सौ सैंतालीस सक्रिय मामले है और सात,पचानवे,दो सौ तिरानवे मरीजों को डिस्चार्ज किया गया है। - कर्नाटकः राज्य में आज तक कुल मामले नौ,सत्रह,पाँच सौ इकहत्तर और सक्रिय मामले की संख्या ग्यारह,आठ सौ इकसठ है। संक्रमण से मौतों की संख्या बारह हज़ार चौहत्तर है जबकि आठ,तिरानवे,छः सौ सत्रह मरीजों को डिस्चार्ज किया गया है। - आंध्र प्रदेशः गुजरात, पंजाब और असम के साथ-साथ आंध्र प्रदेश में भी कोविड -उन्नीस प्रतिरक्षण अभियान के लिये निर्धारित तंत्र की व्यवस्था के आकलन के लिए दो दिवसीय पूर्वाभायस का अभियान चलाया गया। यह अभ्यास सोमवार और मंगलवार को कृष्णा जिले में विभिन्न कार्यों के लिए गठित विशिष्ट टीमों द्वारा किया गया था। यह पूर्वाभ्यास योजना, कार्यान्वयन और रिपोर्टिंग तंत्र के अलावा, को - विन की परिचालन व्यवहार्यता की जांच करने के लिए था। अभियान के तहत डमी लाभार्थी डेटा, साइट निर्माण, वैक्सीन आवंटन और टीकाकरण, टीकाकारों के विवरण और लाभार्थियों की जानकारी अपलोड करने, और लाभार्थी एकत्र करने जैसी गतिविधियां की गईं। दिल्ली हवाई अड्डे पर कर्मचारियों को चकमा देने वाली महिला के नए कोविड स्ट्रेन के लिए पॉज़िटिव होने की पुष्टि के बाद राज्य सरकार अलर्ट पर है। राज्य में अब तक ब्रिटेन से आने वाले एक,चार सौ तेईस लोगों की पहचान की जा चुकि है साथ ही उनके संपर्क में आने वाले छः,तीन सौ चौंसठ लोगों की भी पहचान की गई है। कुछ दिनों में समाप्त होने जा रहा यह साल कोविड माहामारी की वजह से प्रभावित रहा है। बहुत से लोग वायरस के प्रसार के डर से फूलों के गुलदस्ते खरीदने से डरते हैं, फूलों के खरीदार उन्हें विश्वास दिलाने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। - तेलंगानाः राज्य में आज तक, कुल मामलों की संख्या दो,इक्यासी,सात सौ तीस तक पहुंच गई है। राज्य में कुल सक्रिय मामले छः हज़ार पाँच सौ नब्बे है और इससे होने वाली मौतों की संख्या एक हज़ार पाँच सौ अड़तीस है। साथ ही दो,पचासी,नौ सौ उनतालीस मरीजों को अस्पताल से छुट्टी दी गई है। तेलंगाना के वारंगल में उनचास वर्षीय व्यक्ति के कोविड -उन्नीस के नए स्वरूप से संक्रमित होने के बाद राज्य सरकार ने इससे निपटने के लिये कमर कस ली है। इस बीच सीसीएमबी के निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा ने लोगों से आग्रह किया है कि वे कोविड के प्रति बरती जा रही सावधानियों को कम न होने दें क्योंकि ब्रिटेन से आए वेरिएंट में संक्रमण की दूसरी लहर पैदा करने की क्षमता है। भारत बायोटेक के एमडी डॉ. कृष्णा एला ने आश्वासन दिया है कि को-वाक्सिन जो उत्पादन कर रहा है वह नए स्वरूप के खिलाफ भी करगर होगा। - असमः असम में, कोविड-उन्नीस से छयासठ और लोग संक्रमित पाए गए और मंगलवार को सत्तासी रोगियों को छुट्टी दी गई। राज्य में कुल मामले दो लाख सोलह हज़ार तिरेसठ हो गए हैं। राज्य में कुल डिस्चार्ज मरीजों की संख्या दो लाख ग्यारह हज़ार सात सौ बीस है, जबकि सक्रिय मामले तीन हज़ार तीन सौ है और एक हज़ार चालीस लोगों की कुल हुई है। राज्य में कल दो मरीजों की मौत हुई। - सिक्किमः सिक्किम में मंगलवार को उन्नीस और लोग कोविड-उन्नीस से संक्रमित पाए गए। राज्य में कुल मामलों की संख्या बढ कर पाँच हज़ार आठ सौ चौंसठ हो गई है और सक्रिय मामले पाँच सौ सैंतीस हो गए हैं।
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द्वितीयं प
। गोवर्धनो भद्रबाहुरित्याचार्या महाधियः ॥ १४१ ॥ चतुर्दशमहाविद्यास्थानानां पारगा इमे। पुराणं योतयिष्यन्ति कात्स्येंन 'शरदः शतम् ॥ १४२ ॥ विसाखप्रोष्ठिलाचार्यो क्षत्रियो जयसाहयः । नागसेनश्च सिद्धार्थो वृतिषेणस्तथैव च ॥ १४३ ॥ विजयो बुद्धिमान् गङ्गदेवो धर्मादिशब्दनः । सेनश्च दशपूर्वाणां धारकाः स्युर्यथाक्रमम् ॥ १४४ ॥ ज्यशीति'शतमब्दाना सेतेषां कालसंग्रहः । तदा व कृत्स्नमेवेदं पुराणं विस्तरिष्यते ॥१४५ ॥ ततो नक्षत्रनामा च जयपालो महातपाः । पाण्डुश्च ध्रुवसेनश्च कंसाचार्य इति क्रमात् ॥ १४६ ॥ एकादशाङ्गविद्यानां पारगाः स्युमु नीश्वराः। विंशं द्विशतमब्दानामेतेषां काल इप्यते ॥१४७ ॥ तदा पुराणमेतत्तु पादोनं प्रथयिष्यते। भाजनाभावतो भूयो जायेत, 'ज्ञाकनिष्ठता ।। १४८ ॥ सुभद्रश्च यशोभद्रो भद्रबाहुर्महायशाः । लोहार्यश्चेत्यमी ज्ञेयाः प्रथमाङ्गाब्धिपारगाः ॥ १४९॥ 'शरदां शतमेषां स्यात् कालोऽष्टादशभिर्युतम् । तुर्यो भागः पुराणस्य तदास्य प्रतनिष्यते ॥१५० ॥ ततः क्रमाप्रहायेंद पुराणं स्वल्पमात्रया । धीप्रमोषादिदोषेण विरलैर्धारयिष्यते ॥ १५१ ॥ १० " ज्ञानविज्ञानसंपनगुरुपर्वान्वयादिदम् । प्रमाणं "यथ यावच यदा यच्च प्रकाशते ॥१५२ ॥ तदापीदमनुस्मतुं "प्रभविष्यन्ति धीधनाः । जिनसेनाग्रगाः पूज्याः कवीनां परमेश्वराः ॥१५३॥ पुराणमिदमेवाद्यं यदानातं स्वयम्भुवा । पुराणाभासमन्यत्तु केवलं वाङ्मलं विदुः ॥१५४॥
॥१४०॥ तदनन्तर सौ वर्षमें क्रम-क्रमसे विष्णु, नन्दिमित्र, अपराजित, गोवर्धन और भद्र बाहु व बुद्धिमान् आचार्य होंगे । ये आचार्य ग्यारह अङ्ग और चौदह पूर्वरूप महाविद्याओं के पारंगत अर्थात् श्रुतकेवली होंगे और पुराणको सम्पूर्ण रूप से प्रकाशित करते रहेंगे ॥ १४१-१४२॥ इनके अनन्तर क्रमसे विशाखाचार्य, प्रोष्ठिलाचार्य, क्षत्रियाचार्य, जयाचार्य, नागसेन, सिद्धार्थ, धृतिषेण, विजय, बुद्धिमान्, गङ्गदेव और धर्मसेन ये ग्यारह आचार्य ग्यारह अङ्ग और दश पूर्वके वारक होंगे। उनका काल १८३ वर्ष होगा । उस समयतक इस पुराणका पूर्ण प्रकाश होता रहेगा ॥१४३-१४५॥ इनके बाद क्रमसे नक्षत्र, जयपाल, पाण्डु, ध्रुवसेन और कंसाचार्य ये पाँच महा तपस्वी मुनि होंगे। ये सब ग्यारह अङ्गके धारक होंगे इनका समय २२० दो सौ बीस वर्ष माना जाता है। उस समय यह पुराण एक भाग कम अर्थात् तीन चतुर्थांश रूप में प्रकाशित रहेगा फिर योग्य पात्रका अभाव होनेसे भगवान्का कहा हुआ यह पुराण अवश्य ही कम होता जावेगा ॥१४६ - १४८॥ इनके बाद सुभद्र, यशोभद्र, भद्रबाहु और लोहाचार्य ये चार भाचार्य होंगे जो कि विशाल कीर्तिके धारक और प्रथम अङ्ग ( आचाररंग ) रूपी समुद्रके पारगामी होंगे । इन सबका समय अठारह वर्ष होगा। उस समय इस पुराणका एक चौथाई भाग ही प्रचलित रह जावेगा ॥१४९ - १५०। इसके अनन्तर अर्थात् वर्धमान स्वामी के मोक्ष जानेसे ६८३ छः सौ तेरासी वर्ष बाद यह पुराण क्रम-क्रमसे थोड़ा थोड़ा घटता जावेगा । उस समय लोगोंकी बुद्धि भी कम होती जावेगी इसलिए विरले आचार्य ही इसे अल्परूप में धारण कर सकेंगे ॥१५१॥ इस प्रकार ज्ञानविज्ञानसे सम्पन्न गुरुपरिपाटी द्वारा यह पुराण जब और जिस मात्रा में प्रकाशित होता रहेगा उसका स्मरण करने के लिए जिनसेन आदि महाबुद्धिमान् पूज्य और श्रेष्ठ कवि उत्पन्न होंगे ॥१५२-१५३॥ श्री वर्धमान स्वामीने जिसका
१ संवत्सरस्य । २ शब्दतः अ०, प० म०, द०, ल० । शब्दितः स० । ३ त्र्यशीतं शत- अ० स०, १०, म०, द०, लं० । ४-मेतच अ० । ५ पश्चात् । ६ जायेताशा - ल० । ७ समानां अ०, ब०, प०, म०, ल०, द० स० । ८र्युतः अ०, द०, म०, प० स० ।९ प्रहीणं भूरवा । १० ज्ञानं [ मति ज्ञानं ] विज्ञानं [ लिखितपठितादिकं श्रुतज्ञानम् ] । ११ यत्र द०, प० । १२ समर्था भविष्यन्ति । १३ प्रमाणमिद - अ० स०, पं०, द०, म०, ल० ।
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द्वितीयं प । गोवर्धनो भद्रबाहुरित्याचार्या महाधियः ॥ एक सौ इकतालीस ॥ चतुर्दशमहाविद्यास्थानानां पारगा इमे। पुराणं योतयिष्यन्ति कात्स्येंन 'शरदः शतम् ॥ एक सौ बयालीस ॥ विसाखप्रोष्ठिलाचार्यो क्षत्रियो जयसाहयः । नागसेनश्च सिद्धार्थो वृतिषेणस्तथैव च ॥ एक सौ तैंतालीस ॥ विजयो बुद्धिमान् गङ्गदेवो धर्मादिशब्दनः । सेनश्च दशपूर्वाणां धारकाः स्युर्यथाक्रमम् ॥ एक सौ चौंतालीस ॥ ज्यशीति'शतमब्दाना सेतेषां कालसंग्रहः । तदा व कृत्स्नमेवेदं पुराणं विस्तरिष्यते ॥एक सौ पैंतालीस ॥ ततो नक्षत्रनामा च जयपालो महातपाः । पाण्डुश्च ध्रुवसेनश्च कंसाचार्य इति क्रमात् ॥ एक सौ छियालीस ॥ एकादशाङ्गविद्यानां पारगाः स्युमु नीश्वराः। विंशं द्विशतमब्दानामेतेषां काल इप्यते ॥एक सौ सैंतालीस ॥ तदा पुराणमेतत्तु पादोनं प्रथयिष्यते। भाजनाभावतो भूयो जायेत, 'ज्ञाकनिष्ठता ।। एक सौ अड़तालीस ॥ सुभद्रश्च यशोभद्रो भद्रबाहुर्महायशाः । लोहार्यश्चेत्यमी ज्ञेयाः प्रथमाङ्गाब्धिपारगाः ॥ एक सौ उनचास॥ 'शरदां शतमेषां स्यात् कालोऽष्टादशभिर्युतम् । तुर्यो भागः पुराणस्य तदास्य प्रतनिष्यते ॥एक सौ पचास ॥ ततः क्रमाप्रहायेंद पुराणं स्वल्पमात्रया । धीप्रमोषादिदोषेण विरलैर्धारयिष्यते ॥ एक सौ इक्यावन ॥ दस " ज्ञानविज्ञानसंपनगुरुपर्वान्वयादिदम् । प्रमाणं "यथ यावच यदा यच्च प्रकाशते ॥एक सौ बावन ॥ तदापीदमनुस्मतुं "प्रभविष्यन्ति धीधनाः । जिनसेनाग्रगाः पूज्याः कवीनां परमेश्वराः ॥एक सौ तिरेपन॥ पुराणमिदमेवाद्यं यदानातं स्वयम्भुवा । पुराणाभासमन्यत्तु केवलं वाङ्मलं विदुः ॥एक सौ चौवन॥ ॥एक सौ चालीस॥ तदनन्तर सौ वर्षमें क्रम-क्रमसे विष्णु, नन्दिमित्र, अपराजित, गोवर्धन और भद्र बाहु व बुद्धिमान् आचार्य होंगे । ये आचार्य ग्यारह अङ्ग और चौदह पूर्वरूप महाविद्याओं के पारंगत अर्थात् श्रुतकेवली होंगे और पुराणको सम्पूर्ण रूप से प्रकाशित करते रहेंगे ॥ एक सौ इकतालीस-एक सौ बयालीस॥ इनके अनन्तर क्रमसे विशाखाचार्य, प्रोष्ठिलाचार्य, क्षत्रियाचार्य, जयाचार्य, नागसेन, सिद्धार्थ, धृतिषेण, विजय, बुद्धिमान्, गङ्गदेव और धर्मसेन ये ग्यारह आचार्य ग्यारह अङ्ग और दश पूर्वके वारक होंगे। उनका काल एक सौ तिरासी वर्ष होगा । उस समयतक इस पुराणका पूर्ण प्रकाश होता रहेगा ॥एक सौ तैंतालीस-एक सौ पैंतालीस॥ इनके बाद क्रमसे नक्षत्र, जयपाल, पाण्डु, ध्रुवसेन और कंसाचार्य ये पाँच महा तपस्वी मुनि होंगे। ये सब ग्यारह अङ्गके धारक होंगे इनका समय दो सौ बीस दो सौ बीस वर्ष माना जाता है। उस समय यह पुराण एक भाग कम अर्थात् तीन चतुर्थांश रूप में प्रकाशित रहेगा फिर योग्य पात्रका अभाव होनेसे भगवान्का कहा हुआ यह पुराण अवश्य ही कम होता जावेगा ॥एक सौ छियालीस - एक सौ अड़तालीस॥ इनके बाद सुभद्र, यशोभद्र, भद्रबाहु और लोहाचार्य ये चार भाचार्य होंगे जो कि विशाल कीर्तिके धारक और प्रथम अङ्ग रूपी समुद्रके पारगामी होंगे । इन सबका समय अठारह वर्ष होगा। उस समय इस पुराणका एक चौथाई भाग ही प्रचलित रह जावेगा ॥एक सौ उनचास - एक सौ पचास। इसके अनन्तर अर्थात् वर्धमान स्वामी के मोक्ष जानेसे छः सौ तिरासी छः सौ तेरासी वर्ष बाद यह पुराण क्रम-क्रमसे थोड़ा थोड़ा घटता जावेगा । उस समय लोगोंकी बुद्धि भी कम होती जावेगी इसलिए विरले आचार्य ही इसे अल्परूप में धारण कर सकेंगे ॥एक सौ इक्यावन॥ इस प्रकार ज्ञानविज्ञानसे सम्पन्न गुरुपरिपाटी द्वारा यह पुराण जब और जिस मात्रा में प्रकाशित होता रहेगा उसका स्मरण करने के लिए जिनसेन आदि महाबुद्धिमान् पूज्य और श्रेष्ठ कवि उत्पन्न होंगे ॥एक सौ बावन-एक सौ तिरेपन॥ श्री वर्धमान स्वामीने जिसका एक संवत्सरस्य । दो शब्दतः अशून्य, पशून्य मशून्य, दशून्य, लशून्य । शब्दितः सशून्य । तीन त्र्यशीतं शत- अशून्य सशून्य, दस, मशून्य, दशून्य, लंशून्य । चार-मेतच अशून्य । पाँच पश्चात् । छः जायेताशा - लशून्य । सात समानां अशून्य, बशून्य, पशून्य, मशून्य, लशून्य, दशून्य सशून्य । आठर्युतः अशून्य, दशून्य, मशून्य, पशून्य सशून्य ।नौ प्रहीणं भूरवा । दस ज्ञानं [ मति ज्ञानं ] विज्ञानं [ लिखितपठितादिकं श्रुतज्ञानम् ] । ग्यारह यत्र दशून्य, पशून्य । बारह समर्था भविष्यन्ति । तेरह प्रमाणमिद - अशून्य सशून्य, पंशून्य, दशून्य, मशून्य, लशून्य ।
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है और हमारी आत्मा के गम्भीरतम प्रदेश से वही प्राचीन प्रश्न उठता है कि इसके बाद क्या है ? देहान्त के बाद आत्मा की क्या गति होती है ? ठोकरें खाकर ही मनुष्य सीखता है। बिना ठोकरें खाए- सुख दुःख आदि का विना अनुभव किए हम कोई भी बात नहीं सीख सकते । हमारा तर्क, हमारा ज्ञान, विभिन्न प्रकार के अनुभव सामंजस्य पर साधारण भाव ( generalisation) पर - निर्भर रहते हैं। हम अपने चारों ओर क्या देखते हैं ? सतत परिवर्तन । बीज से वृक्ष होता है और वह फिर बीज रूप में परिणत हो जाता है। एक जीव उत्पन्न हुआ, कुछ दिन जीवित रहा, फिर मर गया, इस प्रकार मानो एक वृत्त पूरा हो गया। मनुष्य के सम्बन्ध में भी यही बात है । और तो और, पर्वत भी धीरे-धीरे, परन्तु निश्चित रूप से, चूर-चूर होते जाते हैं। नदियाँ धीरे-धीरे, पर निश्चित रूप से, सूखती जाती हैं; समुद्र से बादल उठते हैं और वर्पा करके फिर समुद्र में ही मिल जाते हैं। रान ही एक-एक वृत्त पूरा हो रहा है ---जन्म, बुद्धि और दक्षय मानो गणित के समान ठीक एक के बाद एक आते रहते हैं । यह हमारा प्रतिदिन का अनुभव है। फिर भी इस सबके अन्दर क्षुद्रतम परमाणु से लेकर उच्चतम सिद्ध पुरुष तक सप्रकारको विभिन्न नाम-रूप-मुक्त वस्तुओं के अन्तराल में हम एक अखण्ड भाव देखते हैं। हम प्रति दिन देखते है कि यह दुध दीवार, जो एक वस्तु को दूसरी वस्तु से पृथक करती प्रतीत होती थी, गिरती जा रही है और आधुनिक विज्ञान समस्त भूर्ती को एक ही पदार्थ मानने लगा है- मानो यही एक प्राणति नाना में नाना प्रकार से प्रकाशित हो रही है, मानो यह सबको जोड़नेपाली एक श्रृंखला के समान है,
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है और हमारी आत्मा के गम्भीरतम प्रदेश से वही प्राचीन प्रश्न उठता है कि इसके बाद क्या है ? देहान्त के बाद आत्मा की क्या गति होती है ? ठोकरें खाकर ही मनुष्य सीखता है। बिना ठोकरें खाए- सुख दुःख आदि का विना अनुभव किए हम कोई भी बात नहीं सीख सकते । हमारा तर्क, हमारा ज्ञान, विभिन्न प्रकार के अनुभव सामंजस्य पर साधारण भाव पर - निर्भर रहते हैं। हम अपने चारों ओर क्या देखते हैं ? सतत परिवर्तन । बीज से वृक्ष होता है और वह फिर बीज रूप में परिणत हो जाता है। एक जीव उत्पन्न हुआ, कुछ दिन जीवित रहा, फिर मर गया, इस प्रकार मानो एक वृत्त पूरा हो गया। मनुष्य के सम्बन्ध में भी यही बात है । और तो और, पर्वत भी धीरे-धीरे, परन्तु निश्चित रूप से, चूर-चूर होते जाते हैं। नदियाँ धीरे-धीरे, पर निश्चित रूप से, सूखती जाती हैं; समुद्र से बादल उठते हैं और वर्पा करके फिर समुद्र में ही मिल जाते हैं। रान ही एक-एक वृत्त पूरा हो रहा है ---जन्म, बुद्धि और दक्षय मानो गणित के समान ठीक एक के बाद एक आते रहते हैं । यह हमारा प्रतिदिन का अनुभव है। फिर भी इस सबके अन्दर क्षुद्रतम परमाणु से लेकर उच्चतम सिद्ध पुरुष तक सप्रकारको विभिन्न नाम-रूप-मुक्त वस्तुओं के अन्तराल में हम एक अखण्ड भाव देखते हैं। हम प्रति दिन देखते है कि यह दुध दीवार, जो एक वस्तु को दूसरी वस्तु से पृथक करती प्रतीत होती थी, गिरती जा रही है और आधुनिक विज्ञान समस्त भूर्ती को एक ही पदार्थ मानने लगा है- मानो यही एक प्राणति नाना में नाना प्रकार से प्रकाशित हो रही है, मानो यह सबको जोड़नेपाली एक श्रृंखला के समान है,
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वैसे तो अभी राजनीति की प्रयोगशाला कहलाने वाले बिहार में चुनाव हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस के वादों की राजनीति फ़िलहाल उत्तर प्रदेश में चल रही है। ऐसा नहीं है कि राहुल-प्रियंका ने जो शुरू किया है, वो कोई पहली घटना है। ऐसी परंपरा कॉन्ग्रेसी परिवार में राहुल-प्रियंका की दादी के दौर से ही चलती आ रही है।
इसे याद करना हो तो इंदिरा गाँधी के दौर यानी 1980 के वक्त की यूपी की राजनीति को याद करना होगा। उस समय वहाँ जनता पार्टी की सरकार थी और मुख्यमंत्री बनारसी दास हुआ करते थे।
कुशीनगर जनपद, देवरिया जिले का हिस्सा था और यहीं नारायणपुर गाँव में बसकाली नाम की एक स्त्री अपने 8 साल के पोते जयप्रकाश और 6 साल की पोती सोनकलिया के साथ रहती थी। इन बच्चों के पिता की मृत्यु हो चुकी थी और इनकी माता बच्चों को दादी के पास छोड़कर जा चुकी थी।
जैसे-तैसे गरीबी में जीवनयापन करते इस परिवार का दुर्भाग्य ने अभी पीछा नहीं छोड़ा था। एक दिन बस से कुचले जाने से बसकाली की मौत हो गई और दोनों बच्चे अनाथ रह गए। ग्रामीणों ने जब परिवार की ऐसी दुर्दशा देखी तो कम से कम सरकार से कुछ मुआवजा ही मिल जाए, इस माँग के साथ हाटा-कप्तानपुर मार्ग को जाम करके बैठ गए।
जाम हटवाने के लिए ग्रामीणों पर लाठी चार्ज हुआ और गाँव में पीएससी तैनात कर दी गई। कॉन्ग्रेस के लिए ये अच्छा अवसर था। ग्रामीणों पर हुई बर्बरता के लिए अख़बारों के पन्ने रंगे जाने लगे। नारायणपुर काण्ड के नाम से विख्यात हुई ये घटना चुनावी मुद्दा बन गई। इसके असर से बनारसी दास की सरकार 17 फ़रवरी 1980 को बर्खास्त कर दी गई। इसी हलचल के दौरान इंदिरा गाँधी नारायणपुर पहुँच गई।
ग्रामीणों को सांत्वना देते हुए उन्होंने वादा किया कि अनाथ हो चुके बच्चों को वो गोद लेंगी और उनकी शिक्षा इत्यादि का इंतजाम किया जाएगा। खूब तालियाँ बजीं। कुल 113 दिनों के राष्ट्रपति शासन के बाद राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार बनी और राजा मांडा, यानी वीपी सिंह मुख्यमंत्री हुए। बोफोर्स घोटालों का आरोप राजीव गाँधी पर लगाने से पहले वो कॉन्ग्रेसी ही थे।
सरकार बनने के बाद कॉन्ग्रेसी सरकार बहादुर को वादे कहाँ याद रहते? इंदिरा गाँधी भी अपना वादा भूल गई। अनाथ बच्चे जैसे-तैसे पलते रहे। उनकी जमीनें लोगों ने हथिया ली। थोड़े साल बाद दोनों बच्चों में से एक जयप्रकाश की डूबने से मौत हो गई।
सोनकलिया अभी भी जीवित है। वो अपने परिवार के साथ एक झोपड़े में, गरीबी में ही जीवन बिताती है। इंदिरा गाँधी या उसके बाद के कॉन्ग्रेसी नेताओं में से किसी ने जीतने के बाद उसे मुआवजा दिलवाने या उसकी कोई मदद करना जरूरी नहीं समझा। गिद्धों के झुण्ड की तरह वो लाश नोंचने के बाद अगले शिकार की तलाश में उड़ चुके थे।
हाल का हाथरस कांड देखकर भी नेताओं के वादे और उनका टूटना याद आता है। जनभावनाओं को सुलगाने और दूसरी सभी ऐसी घटनाएँ (जिनमें से कुछ तो कॉन्ग्रेस शासित राज्यों में हुई हैं) उन्हें भुलाकर, किसी एक घटना को राष्ट्रीय स्तर की बहस और विपक्ष की सरकार द्वारा जनता का शोषण बताना कॉन्ग्रेस की पुरानी परंपरा रही है। बाकी उनके किए वादे कितनी जल्दी टूटते हैं, ये तो बिहार चुनावों के बीतने तक दिख ही जाएगा!
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वैसे तो अभी राजनीति की प्रयोगशाला कहलाने वाले बिहार में चुनाव हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस के वादों की राजनीति फ़िलहाल उत्तर प्रदेश में चल रही है। ऐसा नहीं है कि राहुल-प्रियंका ने जो शुरू किया है, वो कोई पहली घटना है। ऐसी परंपरा कॉन्ग्रेसी परिवार में राहुल-प्रियंका की दादी के दौर से ही चलती आ रही है। इसे याद करना हो तो इंदिरा गाँधी के दौर यानी एक हज़ार नौ सौ अस्सी के वक्त की यूपी की राजनीति को याद करना होगा। उस समय वहाँ जनता पार्टी की सरकार थी और मुख्यमंत्री बनारसी दास हुआ करते थे। कुशीनगर जनपद, देवरिया जिले का हिस्सा था और यहीं नारायणपुर गाँव में बसकाली नाम की एक स्त्री अपने आठ साल के पोते जयप्रकाश और छः साल की पोती सोनकलिया के साथ रहती थी। इन बच्चों के पिता की मृत्यु हो चुकी थी और इनकी माता बच्चों को दादी के पास छोड़कर जा चुकी थी। जैसे-तैसे गरीबी में जीवनयापन करते इस परिवार का दुर्भाग्य ने अभी पीछा नहीं छोड़ा था। एक दिन बस से कुचले जाने से बसकाली की मौत हो गई और दोनों बच्चे अनाथ रह गए। ग्रामीणों ने जब परिवार की ऐसी दुर्दशा देखी तो कम से कम सरकार से कुछ मुआवजा ही मिल जाए, इस माँग के साथ हाटा-कप्तानपुर मार्ग को जाम करके बैठ गए। जाम हटवाने के लिए ग्रामीणों पर लाठी चार्ज हुआ और गाँव में पीएससी तैनात कर दी गई। कॉन्ग्रेस के लिए ये अच्छा अवसर था। ग्रामीणों पर हुई बर्बरता के लिए अख़बारों के पन्ने रंगे जाने लगे। नारायणपुर काण्ड के नाम से विख्यात हुई ये घटना चुनावी मुद्दा बन गई। इसके असर से बनारसी दास की सरकार सत्रह फ़रवरी एक हज़ार नौ सौ अस्सी को बर्खास्त कर दी गई। इसी हलचल के दौरान इंदिरा गाँधी नारायणपुर पहुँच गई। ग्रामीणों को सांत्वना देते हुए उन्होंने वादा किया कि अनाथ हो चुके बच्चों को वो गोद लेंगी और उनकी शिक्षा इत्यादि का इंतजाम किया जाएगा। खूब तालियाँ बजीं। कुल एक सौ तेरह दिनों के राष्ट्रपति शासन के बाद राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार बनी और राजा मांडा, यानी वीपी सिंह मुख्यमंत्री हुए। बोफोर्स घोटालों का आरोप राजीव गाँधी पर लगाने से पहले वो कॉन्ग्रेसी ही थे। सरकार बनने के बाद कॉन्ग्रेसी सरकार बहादुर को वादे कहाँ याद रहते? इंदिरा गाँधी भी अपना वादा भूल गई। अनाथ बच्चे जैसे-तैसे पलते रहे। उनकी जमीनें लोगों ने हथिया ली। थोड़े साल बाद दोनों बच्चों में से एक जयप्रकाश की डूबने से मौत हो गई। सोनकलिया अभी भी जीवित है। वो अपने परिवार के साथ एक झोपड़े में, गरीबी में ही जीवन बिताती है। इंदिरा गाँधी या उसके बाद के कॉन्ग्रेसी नेताओं में से किसी ने जीतने के बाद उसे मुआवजा दिलवाने या उसकी कोई मदद करना जरूरी नहीं समझा। गिद्धों के झुण्ड की तरह वो लाश नोंचने के बाद अगले शिकार की तलाश में उड़ चुके थे। हाल का हाथरस कांड देखकर भी नेताओं के वादे और उनका टूटना याद आता है। जनभावनाओं को सुलगाने और दूसरी सभी ऐसी घटनाएँ उन्हें भुलाकर, किसी एक घटना को राष्ट्रीय स्तर की बहस और विपक्ष की सरकार द्वारा जनता का शोषण बताना कॉन्ग्रेस की पुरानी परंपरा रही है। बाकी उनके किए वादे कितनी जल्दी टूटते हैं, ये तो बिहार चुनावों के बीतने तक दिख ही जाएगा!
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केएल राहुल ने बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे अभ्यास मैच में नंबर चार पर बल्लबाजी करते हुए 99 गेंदो में 108 रन की पारी खेली थी। पहले अभ्यास मैच में वह न्यूजीलैंड के खिलाफ 10 गेंदो में केवल 6 रन बना पाए थे। लेकिन बांग्लादेश के खिलाफ मिले दूसरे मौके पर को उन्होने बेकार नही जाने दिया और अपनी शतकीय पारी से नंबर चार की गुत्थी सुलझा दी। एमएस धोनी ने भी इस मैच में शानदार शतक लगाते हुए 78 गेंदो में 113 रन की पारी खेली और टीम को 95 रन से जीत दर्ज करवाने में अपना योगदान दिया।
हालांकि, बांग्लादेश के खिलाफ नंबर चार पर खेलते हुए शानदार शतक लगाने के बावजूद राहुल अपनी बल्लेबाजी से पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर को प्रभावित नही कर पाए। 53 वर्षीय कमेंटेटर ने राहुल की शतकीय पारी के बाद कहा था की वह शानदार बल्लेबाजी करते है लेकिन उनका स्वभाव उनके लिए एक मुद्दा है। 53 वर्षीय के अनुसार, राहुल को भारत को दक्षिण-अफ्रीका के खिलाफ प्लेइंग-11 में जगह नही मिलनी चाहिए।
मांजरेकर का मानना है कि विजय शंकर जिन्हे नंबर चार के लिए टीम में जगह दी गई है पहले उन्हें इस स्थान पर खेलने का मौका दिया जाना चाहिए अगर वह यहा पर नाकाम होते है तो राहुल को रखा जाना चाहिए। विजय जो न्यूजीलैंड के खिलाफ नही खेले थे, वह बांग्लादेश के खिलाफ नंबर-5 पर बल्लेबाजी करने आए थे और 7 गेंदो में केवल 2 रन ही बना पाए। उन्हें गेंदबाजी करते हुए कोई विकेट भी नही मिला और उन्होने अपने 6 ओवर में 46 रन दिए।
मांजेरकर ने केदार जाधव को टीम में पहले मैच के लिए रखा है और वह चाहते है कि वह टीम के लिए नंबर पांच पर खेलने आए है। उन्होने नंबर 7 पर ऑलराउंडर के रुप में हार्दिक पांड्या को रखा है वह हर मैच में अपने पूरे 10 ओवर गेंदबाजी नही करते है, तो ऐसे में पांचवे गेंदबाज के लिए जाधव को टीम में रखा गया है।
दक्षिण-अफ्रीका के खिलाफ मैच के लिए मांजरेकर की प्लेइंग-11:
शिखर धवन, रोहित शर्मा, विराट कोहली (कप्तान), विजय शंकर, केदार जाधव, एमएस धोनी (विकेटकीपर), हार्दिक पांड्या, मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह, कुलदीप यादव, युजवेंद्र चहल।
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केएल राहुल ने बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे अभ्यास मैच में नंबर चार पर बल्लबाजी करते हुए निन्यानवे गेंदो में एक सौ आठ रन की पारी खेली थी। पहले अभ्यास मैच में वह न्यूजीलैंड के खिलाफ दस गेंदो में केवल छः रन बना पाए थे। लेकिन बांग्लादेश के खिलाफ मिले दूसरे मौके पर को उन्होने बेकार नही जाने दिया और अपनी शतकीय पारी से नंबर चार की गुत्थी सुलझा दी। एमएस धोनी ने भी इस मैच में शानदार शतक लगाते हुए अठहत्तर गेंदो में एक सौ तेरह रन की पारी खेली और टीम को पचानवे रन से जीत दर्ज करवाने में अपना योगदान दिया। हालांकि, बांग्लादेश के खिलाफ नंबर चार पर खेलते हुए शानदार शतक लगाने के बावजूद राहुल अपनी बल्लेबाजी से पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर को प्रभावित नही कर पाए। तिरेपन वर्षीय कमेंटेटर ने राहुल की शतकीय पारी के बाद कहा था की वह शानदार बल्लेबाजी करते है लेकिन उनका स्वभाव उनके लिए एक मुद्दा है। तिरेपन वर्षीय के अनुसार, राहुल को भारत को दक्षिण-अफ्रीका के खिलाफ प्लेइंग-ग्यारह में जगह नही मिलनी चाहिए। मांजरेकर का मानना है कि विजय शंकर जिन्हे नंबर चार के लिए टीम में जगह दी गई है पहले उन्हें इस स्थान पर खेलने का मौका दिया जाना चाहिए अगर वह यहा पर नाकाम होते है तो राहुल को रखा जाना चाहिए। विजय जो न्यूजीलैंड के खिलाफ नही खेले थे, वह बांग्लादेश के खिलाफ नंबर-पाँच पर बल्लेबाजी करने आए थे और सात गेंदो में केवल दो रन ही बना पाए। उन्हें गेंदबाजी करते हुए कोई विकेट भी नही मिला और उन्होने अपने छः ओवर में छियालीस रन दिए। मांजेरकर ने केदार जाधव को टीम में पहले मैच के लिए रखा है और वह चाहते है कि वह टीम के लिए नंबर पांच पर खेलने आए है। उन्होने नंबर सात पर ऑलराउंडर के रुप में हार्दिक पांड्या को रखा है वह हर मैच में अपने पूरे दस ओवर गेंदबाजी नही करते है, तो ऐसे में पांचवे गेंदबाज के लिए जाधव को टीम में रखा गया है। दक्षिण-अफ्रीका के खिलाफ मैच के लिए मांजरेकर की प्लेइंग-ग्यारह: शिखर धवन, रोहित शर्मा, विराट कोहली , विजय शंकर, केदार जाधव, एमएस धोनी , हार्दिक पांड्या, मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह, कुलदीप यादव, युजवेंद्र चहल।
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देहरादूनः उत्तराखण्ड में मंगलवार को कोविड-19 से संक्रमित 12 नये रोगी मिलने से कुल प्रभावितों की संख्या 92 हजार 256 तक पहुंच गई। राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा आज शाम जारी नियमित रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक स्वस्थ होकर कुल 88 हजार 732 व्यक्ति अपने घर चले गए हैं। राज्य में फिलहाल कुल 35 सक्रिय मामले बचे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आज कोरोना से किसी की भी मृत्यु होने की सूचना नहीं मिली है।
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देहरादूनः उत्तराखण्ड में मंगलवार को कोविड-उन्नीस से संक्रमित बारह नये रोगी मिलने से कुल प्रभावितों की संख्या बानवे हजार दो सौ छप्पन तक पहुंच गई। राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा आज शाम जारी नियमित रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक स्वस्थ होकर कुल अठासी हजार सात सौ बत्तीस व्यक्ति अपने घर चले गए हैं। राज्य में फिलहाल कुल पैंतीस सक्रिय मामले बचे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आज कोरोना से किसी की भी मृत्यु होने की सूचना नहीं मिली है।
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उनकी मान्यता और उनका साहित्य अत्यन्त प्राचीन है । भी अत्यन्त प्राचीन एवं प्रसिद्ध रहा है । आचार्य भरतमुनि ने ही सर्वप्रथम "त्रिपुराह" डिम के देवों के द्वारा खेले जाने का वर्णन अपने "नाट्यशास्त्र में किया है परन्तु अलभ्य है । वेद, ब्राह्मण और पुराणों में भी त्रिपुर वर्णन आया है परन्तु कवि को इस विषय की कोई साहित्यिक कृतियाँ उपलब्ध न थी । कवि ने सर्व प्रथम शिवपुराण के आधार पर पौराणिक "त्रिपुरासुर दहन" को साहित्यिक स्वरूप प्रदान किया है । अत्यन्त सूक्ष्म श्लाघनीय परिवर्तन भी उपस्थित किया है । कवि ने "श्रीकण्ठचरितम्" के मूल कथानक और प्रबन्ध कल्पना में कोई भी उल्लेखनीय तत्त्व कहीं अन्यत्र से ग्रहण नहीं किये हैं।
प्रस्तुत देव महाकाव्य "श्रीकण्ठचरितम्" में चरितनायक के उत्कर्षमय चित्रण, सहृदयों के आवर्जन, वसन्तादि के उत्कृष्ट वर्णन, भक्तिसूक्ति संचयन, लोकोक्तिसंग्रथन और लोकोपकार के पुनीत सन्देश, कल्पना की मौलिकता, अनूठी उक्तियों सूक्ष्म विशद उत्प्रेक्षाएं, सरसभाषा मसृणपदशय्या, वैदर्भी रीति सन्तुलित अर्थगाम्भीर्य और रसों का उत्तम परिपाक जिस रूप में प्राप्त होता है वह अन्यत्र दुर्लभ है। काश्मीर की प्रकृति सुषमा में पले बढ़े हुए मड़ खक के निसर्गोज्ज्वल देवोद्गार सर्वथा अनुपम हैं ।
"किरातार्जुनीय", और "श्रीकण्ठचरित" आदि शिवपरक
ग्रन्थों पर विचार किया जाय तो "श्रीकण्ठचरित" का स्थान भी महत्त्वपूर्ण सिद्ध होता
। 'कुमारसम्भव" नामक महाकाव्य में हिमालय की पुत्री पार्वती द्वारा घोर तपस्या
के फलस्वरूप वर रूप में शिव को प्राप्त करने तथा उनसे कार्तिकेय की उत्पत्ति का वर्णन है । इस महाकाव्य के द्वितीय सर्ग में तारकासुर से पीड़ित देवो का ब्रह्मा के पास जाना और शिव पार्वती के पुत्र स्कन्द द्वारा तारकासुर के वध का उपाय ब्रह्मा के
द्वारा बताया जाना वर्णित है । जबकि महाकवि मखक ने तारकासुर के तीन पुत्रः का शिव द्वारा वध दिखाया है । कालिदास ने अष्टम् सर्ग में शिव पार्वती की रतिक्रीडा का वर्णन अश्लील ढंग से किया है । और मंखक ने नायक शिव एवं नायिका पार्वती का पवित्र दाम्पत्य जीवन प्रस्तुत किया है । वैसे "कुमारसम्भव" से महाकवि मड़.खक ने प्रेरणा अवश्य ली होगी ।
"किरातार्जुनीय" में कौरवों पर विजय प्राप्ति के लिए अर्जुन का हिमालय पर्वत पर जाकर तपस्या करने और किरात वेषधारी शिव स युद्ध तथा प्रसन्न शिव स पाशुपत अस्त्र की प्राप्ति का वर्णन है । भारिव ने इस महाकाव्य में चित्रालड़ कारों का प्रयोग कर क्लिष्ट बना दिया है । जबकि मड़.खक ने चित्र महाकाव्य परम्परा से दूर हटकर वैदर्भी रीति में "श्रीकण्ठचरितम्" की रचना की । परन्तु इसका अभिप्राय यह नहीं हो सकता कि किरातार्जुनीय में दुरूहता एवं बोझिलता ही प्रधान है । अपितु भारवि अर्थगाम्भीर्य से परिपूर्ण वचनों के विन्यास में पटु हैं । इनके वर्णन की शैली अतीव प्रौढ़ है । नूतनतम पदों के प्रयोग में ये सिद्धहस्त हैं । इन्हीं गुणों के कारण भारवि का महाकाव्य बृहत्रयी मे स्थान रखता है ।
"हरविजय" में क्रीडासक्त पार्वती ने भगवान् शड़ कर के तीनों नेत्रों को अपने हाथों से बन्द कर दिया । इससे विश्व भर में अन्धकार फैल गया । यह अन्धकार ही "अन्धक" असुर के रूप में परिणत हो गया । भगवान् शड़ कर ने उस अन्धकासुर का वध किया । तथापि इस काव्य में पाण्डित्य का बोझ इतना अधिक है कि पाठक रसास्वादन से वंचित हो जाता है । "श्रीकण्ठचरितम्" में मात्र रस सार संग्रहीत किया गया है । इसमें प्रतिभा, व्युत्पत्ति और रस के समुचित प्रयोग की न्यूनता सहृदयों को कवि की मौलिकता रसिकता के दर्शन पद पद पर होंगे। इसी लिए शिवपरक ग्रन्थों में "श्रीकण्ठचरित" का स्थान महत्त्वपूर्ण है ।
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उनकी मान्यता और उनका साहित्य अत्यन्त प्राचीन है । भी अत्यन्त प्राचीन एवं प्रसिद्ध रहा है । आचार्य भरतमुनि ने ही सर्वप्रथम "त्रिपुराह" डिम के देवों के द्वारा खेले जाने का वर्णन अपने "नाट्यशास्त्र में किया है परन्तु अलभ्य है । वेद, ब्राह्मण और पुराणों में भी त्रिपुर वर्णन आया है परन्तु कवि को इस विषय की कोई साहित्यिक कृतियाँ उपलब्ध न थी । कवि ने सर्व प्रथम शिवपुराण के आधार पर पौराणिक "त्रिपुरासुर दहन" को साहित्यिक स्वरूप प्रदान किया है । अत्यन्त सूक्ष्म श्लाघनीय परिवर्तन भी उपस्थित किया है । कवि ने "श्रीकण्ठचरितम्" के मूल कथानक और प्रबन्ध कल्पना में कोई भी उल्लेखनीय तत्त्व कहीं अन्यत्र से ग्रहण नहीं किये हैं। प्रस्तुत देव महाकाव्य "श्रीकण्ठचरितम्" में चरितनायक के उत्कर्षमय चित्रण, सहृदयों के आवर्जन, वसन्तादि के उत्कृष्ट वर्णन, भक्तिसूक्ति संचयन, लोकोक्तिसंग्रथन और लोकोपकार के पुनीत सन्देश, कल्पना की मौलिकता, अनूठी उक्तियों सूक्ष्म विशद उत्प्रेक्षाएं, सरसभाषा मसृणपदशय्या, वैदर्भी रीति सन्तुलित अर्थगाम्भीर्य और रसों का उत्तम परिपाक जिस रूप में प्राप्त होता है वह अन्यत्र दुर्लभ है। काश्मीर की प्रकृति सुषमा में पले बढ़े हुए मड़ खक के निसर्गोज्ज्वल देवोद्गार सर्वथा अनुपम हैं । "किरातार्जुनीय", और "श्रीकण्ठचरित" आदि शिवपरक ग्रन्थों पर विचार किया जाय तो "श्रीकण्ठचरित" का स्थान भी महत्त्वपूर्ण सिद्ध होता । 'कुमारसम्भव" नामक महाकाव्य में हिमालय की पुत्री पार्वती द्वारा घोर तपस्या के फलस्वरूप वर रूप में शिव को प्राप्त करने तथा उनसे कार्तिकेय की उत्पत्ति का वर्णन है । इस महाकाव्य के द्वितीय सर्ग में तारकासुर से पीड़ित देवो का ब्रह्मा के पास जाना और शिव पार्वती के पुत्र स्कन्द द्वारा तारकासुर के वध का उपाय ब्रह्मा के द्वारा बताया जाना वर्णित है । जबकि महाकवि मखक ने तारकासुर के तीन पुत्रः का शिव द्वारा वध दिखाया है । कालिदास ने अष्टम् सर्ग में शिव पार्वती की रतिक्रीडा का वर्णन अश्लील ढंग से किया है । और मंखक ने नायक शिव एवं नायिका पार्वती का पवित्र दाम्पत्य जीवन प्रस्तुत किया है । वैसे "कुमारसम्भव" से महाकवि मड़.खक ने प्रेरणा अवश्य ली होगी । "किरातार्जुनीय" में कौरवों पर विजय प्राप्ति के लिए अर्जुन का हिमालय पर्वत पर जाकर तपस्या करने और किरात वेषधारी शिव स युद्ध तथा प्रसन्न शिव स पाशुपत अस्त्र की प्राप्ति का वर्णन है । भारिव ने इस महाकाव्य में चित्रालड़ कारों का प्रयोग कर क्लिष्ट बना दिया है । जबकि मड़.खक ने चित्र महाकाव्य परम्परा से दूर हटकर वैदर्भी रीति में "श्रीकण्ठचरितम्" की रचना की । परन्तु इसका अभिप्राय यह नहीं हो सकता कि किरातार्जुनीय में दुरूहता एवं बोझिलता ही प्रधान है । अपितु भारवि अर्थगाम्भीर्य से परिपूर्ण वचनों के विन्यास में पटु हैं । इनके वर्णन की शैली अतीव प्रौढ़ है । नूतनतम पदों के प्रयोग में ये सिद्धहस्त हैं । इन्हीं गुणों के कारण भारवि का महाकाव्य बृहत्रयी मे स्थान रखता है । "हरविजय" में क्रीडासक्त पार्वती ने भगवान् शड़ कर के तीनों नेत्रों को अपने हाथों से बन्द कर दिया । इससे विश्व भर में अन्धकार फैल गया । यह अन्धकार ही "अन्धक" असुर के रूप में परिणत हो गया । भगवान् शड़ कर ने उस अन्धकासुर का वध किया । तथापि इस काव्य में पाण्डित्य का बोझ इतना अधिक है कि पाठक रसास्वादन से वंचित हो जाता है । "श्रीकण्ठचरितम्" में मात्र रस सार संग्रहीत किया गया है । इसमें प्रतिभा, व्युत्पत्ति और रस के समुचित प्रयोग की न्यूनता सहृदयों को कवि की मौलिकता रसिकता के दर्शन पद पद पर होंगे। इसी लिए शिवपरक ग्रन्थों में "श्रीकण्ठचरित" का स्थान महत्त्वपूर्ण है ।
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राजस्थान नतीजे / "जब फैसला राहुल को करना है तो रायशुमारी का कोई मतलब नहीं"
राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर विधायकों की राय जानने के लिए बुलाई गई बैठक पर कांग्रेस के एक विधायक ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब निर्णय पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को करना है तो विधायकों की राय का कोई मलतब नहीं है।
राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर विधायकों की राय जानने के लिए बुलाई गई बैठक पर कांग्रेस के एक विधायक ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब निर्णय पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को करना है तो विधायकों की राय का कोई मलतब नहीं है।
कांग्रेस मुख्यालय में बुधवार सुबह बुलाई गई विधायक दल की बैठक में एक पंक्ति का प्रस्ताव पारित कर दिया गया जिसमें विधायकों ने मुख्यमंत्री का फैसला करने का अधिकार कांग्रेस अध्यक्ष को दे दिया।
डीग कुम्हेर से विधायक विश्वेंद्र सिंह ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का निर्णय पार्टी हाईकमान को ही करना है तो व्यक्तिगत स्तर पर विधायकों की राय लेने का कोइ मतलब नहीं है। मैं अपना समय पार्टी के पर्यवेक्षक को राय देने में क्यों बर्बाद करुंगा।
विश्वेन्द्र सिंह ने पीटीआई- भाषा से कहा कि मैं इससे सहमत नहीं हूं, मैं नाराज या नाखुश नहीं हूं। मैं पार्टी अध्यक्ष को निर्णय लेने के लिए अधिकृत करने वाले प्रस्ताव से सहमत हूं लेकिन पार्टी पर्यवेक्षक का व्यक्तिगत स्तर पर विधायकों की राय जानने का कोई मतलब ही नहीं रह जाता जब यह निर्णय पार्टी हाईकमान को ही लेना है।
आपको बता दें कि राजस्थान में सात दिसंबर को हुए चुनाव में कांग्रेस ने 99 सीटों पर जीत दर्ज की है और वह राज्य में सरकार बनाने जा रही है।
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राजस्थान नतीजे / "जब फैसला राहुल को करना है तो रायशुमारी का कोई मतलब नहीं" राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर विधायकों की राय जानने के लिए बुलाई गई बैठक पर कांग्रेस के एक विधायक ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब निर्णय पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को करना है तो विधायकों की राय का कोई मलतब नहीं है। राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर विधायकों की राय जानने के लिए बुलाई गई बैठक पर कांग्रेस के एक विधायक ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब निर्णय पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को करना है तो विधायकों की राय का कोई मलतब नहीं है। कांग्रेस मुख्यालय में बुधवार सुबह बुलाई गई विधायक दल की बैठक में एक पंक्ति का प्रस्ताव पारित कर दिया गया जिसमें विधायकों ने मुख्यमंत्री का फैसला करने का अधिकार कांग्रेस अध्यक्ष को दे दिया। डीग कुम्हेर से विधायक विश्वेंद्र सिंह ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का निर्णय पार्टी हाईकमान को ही करना है तो व्यक्तिगत स्तर पर विधायकों की राय लेने का कोइ मतलब नहीं है। मैं अपना समय पार्टी के पर्यवेक्षक को राय देने में क्यों बर्बाद करुंगा। विश्वेन्द्र सिंह ने पीटीआई- भाषा से कहा कि मैं इससे सहमत नहीं हूं, मैं नाराज या नाखुश नहीं हूं। मैं पार्टी अध्यक्ष को निर्णय लेने के लिए अधिकृत करने वाले प्रस्ताव से सहमत हूं लेकिन पार्टी पर्यवेक्षक का व्यक्तिगत स्तर पर विधायकों की राय जानने का कोई मतलब ही नहीं रह जाता जब यह निर्णय पार्टी हाईकमान को ही लेना है। आपको बता दें कि राजस्थान में सात दिसंबर को हुए चुनाव में कांग्रेस ने निन्यानवे सीटों पर जीत दर्ज की है और वह राज्य में सरकार बनाने जा रही है।
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भोपाल (मध्य प्रदेश). फिल्म द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files) में जिस तरह से कश्मीरी पंडितों की दर्दभरी कहानी दिखाई है, उसे देख हर किसी का कलेजा कांप गया। हर कोई उनकी मदद करने के लिए खड़ा हो गया। इसी बीच मध्यप्रदेश सरकार भी अब कश्मीरी पंडितों की मदद करने के लिए आगे आ गई है। राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (home minister narottam mishra) ने इसको लेकर एक बड़ा बयान भी दिया है। उन्होंने कहा-जो भी जम्मू कश्मीर वापस जाना चाहते हैं तो जाए, प्रदेश सरकार विस्थापित कश्मीरी पंडितों की मदद करेगी।
दरअसल, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सोमवार को कहा कि मध्य प्रदेश में रह रहे कश्मीरी भाई-बहन अगर वापस कश्मीर जाना चाहते हैं तो वह सारी चिंता होकर वहां जाएं, गृह विभाग को सूचित करें। सरकार उनकी वापसी सुनिश्चित कराने के साथ-साथ भेजने की व्यवस्था भी करेगी। साथ ही कहा-द कश्मीर फाइल्स फिल्म नहीं देखने की बात कहने वाले कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा जी से निवेदन है कि वह #MadhyaPradesh में रह रहे उन कश्मीरी पंडितों की सूची उपलब्ध करा दें जो वापस जाना चाहते हैं।
वहीं प्रदेश के गृहमंत्री मिश्रा के इस बयान के बाद कांग्रेस के सीनियर नेता और राज्यसभा सांसद तन्खा का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा-मध्य प्रदेश के गृहमंत्री जी के प्रस्ताव का मैं स्वागत करता हूं। साथ ही विनम्र निवेदन करता हूं की कश्मीरी पंडितो को सुरक्षा और पुनर्वास की नीति चाहिए परिवहन नहीं। वो व्यवस्था तो मप्र और अन्य सरकारों बखूबी करेंगी। लेकिन मैं इतना कहना चहाता हूं कि समस्या वापस जाने की नहीं है। कश्मीरी पंडित सक्षम हैं, वापस तो वे खुद जा सकते हैं। ' सबसे बड़ी समस्या है वहां जाकर क्या उनकी परेशानियां कम होंगी। उनकी जो संपत्ति चली गई है क्या वह वापस मिलेगी। वहां जाकर उनको कैसे मुआवजा मिलेगा। क्या नौकरियां होंगी उनकी इन सब पर आपकी क्या राय है। कौन उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगा, यह भी तो बताइए।
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भोपाल . फिल्म द कश्मीर फाइल्स में जिस तरह से कश्मीरी पंडितों की दर्दभरी कहानी दिखाई है, उसे देख हर किसी का कलेजा कांप गया। हर कोई उनकी मदद करने के लिए खड़ा हो गया। इसी बीच मध्यप्रदेश सरकार भी अब कश्मीरी पंडितों की मदद करने के लिए आगे आ गई है। राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इसको लेकर एक बड़ा बयान भी दिया है। उन्होंने कहा-जो भी जम्मू कश्मीर वापस जाना चाहते हैं तो जाए, प्रदेश सरकार विस्थापित कश्मीरी पंडितों की मदद करेगी। दरअसल, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने सोमवार को कहा कि मध्य प्रदेश में रह रहे कश्मीरी भाई-बहन अगर वापस कश्मीर जाना चाहते हैं तो वह सारी चिंता होकर वहां जाएं, गृह विभाग को सूचित करें। सरकार उनकी वापसी सुनिश्चित कराने के साथ-साथ भेजने की व्यवस्था भी करेगी। साथ ही कहा-द कश्मीर फाइल्स फिल्म नहीं देखने की बात कहने वाले कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा जी से निवेदन है कि वह #MadhyaPradesh में रह रहे उन कश्मीरी पंडितों की सूची उपलब्ध करा दें जो वापस जाना चाहते हैं। वहीं प्रदेश के गृहमंत्री मिश्रा के इस बयान के बाद कांग्रेस के सीनियर नेता और राज्यसभा सांसद तन्खा का बयान भी सामने आया है। उन्होंने कहा-मध्य प्रदेश के गृहमंत्री जी के प्रस्ताव का मैं स्वागत करता हूं। साथ ही विनम्र निवेदन करता हूं की कश्मीरी पंडितो को सुरक्षा और पुनर्वास की नीति चाहिए परिवहन नहीं। वो व्यवस्था तो मप्र और अन्य सरकारों बखूबी करेंगी। लेकिन मैं इतना कहना चहाता हूं कि समस्या वापस जाने की नहीं है। कश्मीरी पंडित सक्षम हैं, वापस तो वे खुद जा सकते हैं। ' सबसे बड़ी समस्या है वहां जाकर क्या उनकी परेशानियां कम होंगी। उनकी जो संपत्ति चली गई है क्या वह वापस मिलेगी। वहां जाकर उनको कैसे मुआवजा मिलेगा। क्या नौकरियां होंगी उनकी इन सब पर आपकी क्या राय है। कौन उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेगा, यह भी तो बताइए।
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रांचीः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पिछले पांच वर्ष में किए गए कार्यों की आज से समीक्षा कर रहे है. मुख्यमंत्री ने दो दिवसीय समीक्षा बैठक के पहले दिन सोमवार को सबसे पहले स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास के कार्यों की समीक्षा की.
मुख्यमंत्री ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के कार्यों की भी समीक्षा की. इस मौके पर शिक्षामंत्री सह उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री जगरनाथ महतो के अलावा विभागीय सचिव और अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे.
मुख्यमंत्री आज अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, परिवहन विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण एवं निबंधन विभाग, महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की समीक्षा करेंगे.
इस बीच आईआईएम के निदेशक के साथ भेंटवार्ता के बाद फिर समीक्षा बैठक होगी. स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग, श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग, कृषि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की समीक्षा करेंगे.
वहीं नौकरी के लिए विदेश जा रहे गुरुकुल खूंटी के छात्रों के साथ भेंटवार्ता करेंगे. इसके बाद पेय जल एवं स्वच्छता विभाग, जल संसाधन विभाग, भवन निर्माण विभाग और सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग के कार्यों की समीक्षा करेंगे.
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रांचीः मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पिछले पांच वर्ष में किए गए कार्यों की आज से समीक्षा कर रहे है. मुख्यमंत्री ने दो दिवसीय समीक्षा बैठक के पहले दिन सोमवार को सबसे पहले स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास के कार्यों की समीक्षा की. मुख्यमंत्री ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के कार्यों की भी समीक्षा की. इस मौके पर शिक्षामंत्री सह उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री जगरनाथ महतो के अलावा विभागीय सचिव और अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे. मुख्यमंत्री आज अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, परिवहन विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण एवं निबंधन विभाग, महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की समीक्षा करेंगे. इस बीच आईआईएम के निदेशक के साथ भेंटवार्ता के बाद फिर समीक्षा बैठक होगी. स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग, श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग, कृषि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की समीक्षा करेंगे. वहीं नौकरी के लिए विदेश जा रहे गुरुकुल खूंटी के छात्रों के साथ भेंटवार्ता करेंगे. इसके बाद पेय जल एवं स्वच्छता विभाग, जल संसाधन विभाग, भवन निर्माण विभाग और सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग के कार्यों की समीक्षा करेंगे.
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Ranchi : दिवाली में भी जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (डीआरडीए) कर्मियों को वेतन नहीं मिला. सरकार ने 20 अक्टूबर तक सभी अधिकारियों और कर्मियों को वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया था. इस निर्देश से डीआरडीए कर्मियों को दिवाली में वेतन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वो उम्मीद टूट गई. डीआरडीए के अधिकारियों और कर्मचारियों को विगत छह से सात महीने से वेतन नहीं मिला है. कई कर्मचारी ऐसे भी हैं. जिन्हें 10 महीने से वेतन नहीं मिला है. दुर्गापूजा के बाद अब दिवाली में भी वेतन नहीं मिलने से राज्यभर में डीआरडीए के करीब 500 पदाधिकारियों और कर्मचारियों में निराशा है.
दरअसल केंद्र सरकार ने अप्रैल 2022 में डीआरडीए को बंद करने का फैसला किया था. फिर राज्य सरकार ने कर्मियों को समायोजित करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अबतक इन्हें किसी दूसरे विभाग में समायोजित नहीं किया गया है. वेतन भी बंद है. हाल ही में डीआरडीए कर्मियों ने ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों से बात की थी. वेतन भुगतान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन भुगतान नहीं हुआ.
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Ranchi : दिवाली में भी जिला ग्रामीण विकास एजेंसी कर्मियों को वेतन नहीं मिला. सरकार ने बीस अक्टूबर तक सभी अधिकारियों और कर्मियों को वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया था. इस निर्देश से डीआरडीए कर्मियों को दिवाली में वेतन मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वो उम्मीद टूट गई. डीआरडीए के अधिकारियों और कर्मचारियों को विगत छह से सात महीने से वेतन नहीं मिला है. कई कर्मचारी ऐसे भी हैं. जिन्हें दस महीने से वेतन नहीं मिला है. दुर्गापूजा के बाद अब दिवाली में भी वेतन नहीं मिलने से राज्यभर में डीआरडीए के करीब पाँच सौ पदाधिकारियों और कर्मचारियों में निराशा है. दरअसल केंद्र सरकार ने अप्रैल दो हज़ार बाईस में डीआरडीए को बंद करने का फैसला किया था. फिर राज्य सरकार ने कर्मियों को समायोजित करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अबतक इन्हें किसी दूसरे विभाग में समायोजित नहीं किया गया है. वेतन भी बंद है. हाल ही में डीआरडीए कर्मियों ने ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों से बात की थी. वेतन भुगतान का आश्वासन दिया गया था, लेकिन भुगतान नहीं हुआ.
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नई दिल्लीः दिल्ली की एक अदालत ने अपनी 'लिव-इन पार्टनर' श्रद्धा वालकर की हत्या (Shraddha Murder Case) करने और शव के कई टुकड़े करने के मामले में आरोपी आफताब अमीन पूनावाला (Aftab Poonawalla) की न्यायिक हिरासत मंगलवार को और 14 दिनों के लिए बढ़ा दी। पूनावाला को मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अविरल शुक्ला के समक्ष पेश किया गया था। अदालत ने उसकी न्यायिक हिरासत 14 दिनों के लिए बढ़ा दी।
पूनावाला के वकील एमएस खान ने कहा कि पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि जांच के तहत पूनावाला के डेबिट और क्रेडिट कार्ड जब्त कर लिए गए हैं और आरोपपत्र दाखिल करने के बाद उन्हें वापस कर दिया जाएगा। इससे पहले, छह जनवरी को खान ने आरोपी के डेबिट और क्रेडिट कार्ड जारी करने के लिए एक अर्जी दायर की थी और कहा था कि इस सर्दी में पूनावाला के पास जेल में पर्याप्त गर्म कपड़े नहीं हैं। अदालत ने मंगलवार को जेल के अधिकारियों को उसे गर्म कपड़े मुहैया कराने का निर्देश दिया।
खान ने कहा कि पूनावाला ने अदालत को सूचित किया कि उसने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) पर किताबें उपलब्ध कराने के लिए जेल अधिकारियों को एक लिखित आवेदन दिया था, लेकिन अनुरोध स्वीकृत होने के बावजूद किताबें उपलब्ध नहीं कराई गईं। खान के अनुसार न्यायाधीश ने कहा कि अगर किताबें उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं तो आरोपी के वकील इसके लिए अर्जी दे सकते हैं।
खान ने कहा, "न्यायाधीश ने पूनावाला से पूछा कि क्या वह अपना मुकदमा लड़ना चाहता है, इस पर उसने कहा कि वकील मेरा बचाव करेंगे लेकिन मैं इन किताबों को पढ़ने के बाद अपने वकील की सहायता करूंगा। " पिछले शुक्रवार को अदालत ने पूनावाला की न्यायिक हिरासत चार दिन के लिए बढ़ा दी थी और उसे पेश करने के लिए कहा था। आफताब पूनावाला (28) ने वालकर की कथित तौर पर हत्या कर उसके शव के 35 टुकड़े कर दिए थे और उन्हें राष्ट्रीय राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में फेंक दिया था। आरोपी को 12 नवंबर को गिरफ्तार किया गया। (एजेंसी)
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नई दिल्लीः दिल्ली की एक अदालत ने अपनी 'लिव-इन पार्टनर' श्रद्धा वालकर की हत्या करने और शव के कई टुकड़े करने के मामले में आरोपी आफताब अमीन पूनावाला की न्यायिक हिरासत मंगलवार को और चौदह दिनों के लिए बढ़ा दी। पूनावाला को मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अविरल शुक्ला के समक्ष पेश किया गया था। अदालत ने उसकी न्यायिक हिरासत चौदह दिनों के लिए बढ़ा दी। पूनावाला के वकील एमएस खान ने कहा कि पुलिस ने अदालत को सूचित किया कि जांच के तहत पूनावाला के डेबिट और क्रेडिट कार्ड जब्त कर लिए गए हैं और आरोपपत्र दाखिल करने के बाद उन्हें वापस कर दिया जाएगा। इससे पहले, छह जनवरी को खान ने आरोपी के डेबिट और क्रेडिट कार्ड जारी करने के लिए एक अर्जी दायर की थी और कहा था कि इस सर्दी में पूनावाला के पास जेल में पर्याप्त गर्म कपड़े नहीं हैं। अदालत ने मंगलवार को जेल के अधिकारियों को उसे गर्म कपड़े मुहैया कराने का निर्देश दिया। खान ने कहा कि पूनावाला ने अदालत को सूचित किया कि उसने भारतीय दंड संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता पर किताबें उपलब्ध कराने के लिए जेल अधिकारियों को एक लिखित आवेदन दिया था, लेकिन अनुरोध स्वीकृत होने के बावजूद किताबें उपलब्ध नहीं कराई गईं। खान के अनुसार न्यायाधीश ने कहा कि अगर किताबें उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं तो आरोपी के वकील इसके लिए अर्जी दे सकते हैं। खान ने कहा, "न्यायाधीश ने पूनावाला से पूछा कि क्या वह अपना मुकदमा लड़ना चाहता है, इस पर उसने कहा कि वकील मेरा बचाव करेंगे लेकिन मैं इन किताबों को पढ़ने के बाद अपने वकील की सहायता करूंगा। " पिछले शुक्रवार को अदालत ने पूनावाला की न्यायिक हिरासत चार दिन के लिए बढ़ा दी थी और उसे पेश करने के लिए कहा था। आफताब पूनावाला ने वालकर की कथित तौर पर हत्या कर उसके शव के पैंतीस टुकड़े कर दिए थे और उन्हें राष्ट्रीय राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में फेंक दिया था। आरोपी को बारह नवंबर को गिरफ्तार किया गया।
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NEET UG प्रवेश परीक्षा के जरिए देशभर में मेडिकल और डेंटल कोर्स में प्रवेश दिया जाता है। इस एग्जाम में पास होने वाले छात्रों को ही एडमिशन का मौका मिलता है। इस परीक्षा के जरिए छात्र किसी निजी या सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस या बीडीएस जैसे कोर्स में एडमिशन लेते हैं।
करियर डेस्क : नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट (NEET UG 2022) एग्जाम में अब गिने-चुने ही दिन बचे हैं। परीक्षा को स्थगित करने की मांग जोर पकड़ रही है। हालांकि अभी तक राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की तरफ से परीक्षा के स्थगन को लेकर कोई भी सूचना नहीं दी गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि 17 जुलाई को देशभर में बनाए गए एग्जाम सेंटर्स पर ऑफलाइन मोड पर यह प्रवेश परीक्षा आयोजित होगी। नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के सामने अब कम दिन का ही समय बचा है। अब उन्हें स्ट्रैटजी के साथ पढ़ाई करनी होगी ताकि कम समय में ज्यादा से ज्यादा और जरूरी टॉपिक्स कवर हो सके। आइए आपको बताते हैं जरूरी टॉपिक्स जिनके रिवीजन से आप इस परीक्षा को आसानी से क्रैक कर सकते हैं।
मेडिकल कॉलेज में एडमिशन की तैयारी कर रहे छात्रों के पास अब रिवीजन का ही मौका बचा है। एक्सपर्ट भी सलाह दे रहे हैं कि स्टूडेंट्स नए टॉपिक को पढ़ने की बजाय, अब तक जो पढ़ा है, उस पर ही फोकस करें। अपने नोट्स को रिवाइज करें। मजबूत टॉपिक्स पर पकड़ बनाने ज्यादा फोकस करें। अगर किसी कोचिंग के स्टडी मटीरियल से पढ़ाई कर रहे हैं तो उसपर भी ध्यान दें। कम समय में तीनों फिजिक्स, कैमिस्ट्री और बायोलॉजी की तैयारी के लिए अलग-अलग समय निर्धारित कर लें। उसी के हिसाब से रिवीजन स्टार्ट करें।
न्यूटन के सिद्धांत (Newton Laws System)
कण और घूर्णन गति (Particles and Rotation Motion)
आधुनिक भौतिकी और अर्धचालक उपकरण (Modern Physics and Semiconductor Devices)
चुंबकत्व और पदार्थ (Magnetism and Matter)
करंट-इलेक्ट्रिसिटी (Current Electricity)
कैमिकल बॉन्डिंग एंड मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर (Chemical Bonding and Molecular Structure)
वंशानुक्रम और भिन्नता का सिद्धांत (The Principle of Inheritance and Variation)
मानव प्रजनन (Human Reproduction)
कोशिका (Cell), शारीरिक स्वाथ्य या मानव स्वास्थ्य (Human Health), रोग-प्रतिरोध (Disease)
पादप जगत (Plant Kingdom),जंतु जगत (Animal Kingdom), पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem)
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NEET UG प्रवेश परीक्षा के जरिए देशभर में मेडिकल और डेंटल कोर्स में प्रवेश दिया जाता है। इस एग्जाम में पास होने वाले छात्रों को ही एडमिशन का मौका मिलता है। इस परीक्षा के जरिए छात्र किसी निजी या सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस या बीडीएस जैसे कोर्स में एडमिशन लेते हैं। करियर डेस्क : नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट एग्जाम में अब गिने-चुने ही दिन बचे हैं। परीक्षा को स्थगित करने की मांग जोर पकड़ रही है। हालांकि अभी तक राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की तरफ से परीक्षा के स्थगन को लेकर कोई भी सूचना नहीं दी गई है। ऐसे में माना जा रहा है कि सत्रह जुलाई को देशभर में बनाए गए एग्जाम सेंटर्स पर ऑफलाइन मोड पर यह प्रवेश परीक्षा आयोजित होगी। नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के सामने अब कम दिन का ही समय बचा है। अब उन्हें स्ट्रैटजी के साथ पढ़ाई करनी होगी ताकि कम समय में ज्यादा से ज्यादा और जरूरी टॉपिक्स कवर हो सके। आइए आपको बताते हैं जरूरी टॉपिक्स जिनके रिवीजन से आप इस परीक्षा को आसानी से क्रैक कर सकते हैं। मेडिकल कॉलेज में एडमिशन की तैयारी कर रहे छात्रों के पास अब रिवीजन का ही मौका बचा है। एक्सपर्ट भी सलाह दे रहे हैं कि स्टूडेंट्स नए टॉपिक को पढ़ने की बजाय, अब तक जो पढ़ा है, उस पर ही फोकस करें। अपने नोट्स को रिवाइज करें। मजबूत टॉपिक्स पर पकड़ बनाने ज्यादा फोकस करें। अगर किसी कोचिंग के स्टडी मटीरियल से पढ़ाई कर रहे हैं तो उसपर भी ध्यान दें। कम समय में तीनों फिजिक्स, कैमिस्ट्री और बायोलॉजी की तैयारी के लिए अलग-अलग समय निर्धारित कर लें। उसी के हिसाब से रिवीजन स्टार्ट करें। न्यूटन के सिद्धांत कण और घूर्णन गति आधुनिक भौतिकी और अर्धचालक उपकरण चुंबकत्व और पदार्थ करंट-इलेक्ट्रिसिटी कैमिकल बॉन्डिंग एंड मॉलिक्यूलर स्ट्रक्चर वंशानुक्रम और भिन्नता का सिद्धांत मानव प्रजनन कोशिका , शारीरिक स्वाथ्य या मानव स्वास्थ्य , रोग-प्रतिरोध पादप जगत ,जंतु जगत , पारिस्थितिकी तंत्र
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PATNA:डिप्टी सीएम तेजस्वी प्रसाद यादव ने सिसवन-सीवान राज्य उच्च संख्या 89 का लोकार्पण कर इसे राज्य की जनता को समर्पित किया। इस मौके पर उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता की शिक्षा-सह- सूचना प्रोवैद्यिकी मंत्री सह प्रभारी मंत्री सिवान अशोक चौधरी ने।
तेजस्वी यादव ने कहा कि यह सड़क सरकार की राज्य के हर क्षेत्र से पांच घंटे में राजधानी पहुंचने की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है। उन्होंने बिहार के विकास में बिना किसी भेद-भाव के सभी दलों और समाज के सभी वर्गो से सहयोग की अपील की। डिप्टी सीएम ने सिसवन ढ़ाले पर लगने वाले जाम को देखते हुए वहां ऊपरी पार पथ बनाने की घोषणा भी की। शिक्षा मंत्री ने छात्रों से अनुरोध किया कि हरेराम ब्रह्मचारी उच्च विद्यालय सिस्वन के जर्जर भवन का जीर्णोद्धार इसी साल कराया जाएगा।
संवेदक- मेसर्स बीएससी और सी एंड सी (जेवी) गुड़गांव (हरियाणा)
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PATNA:डिप्टी सीएम तेजस्वी प्रसाद यादव ने सिसवन-सीवान राज्य उच्च संख्या नवासी का लोकार्पण कर इसे राज्य की जनता को समर्पित किया। इस मौके पर उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता की शिक्षा-सह- सूचना प्रोवैद्यिकी मंत्री सह प्रभारी मंत्री सिवान अशोक चौधरी ने। तेजस्वी यादव ने कहा कि यह सड़क सरकार की राज्य के हर क्षेत्र से पांच घंटे में राजधानी पहुंचने की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है। उन्होंने बिहार के विकास में बिना किसी भेद-भाव के सभी दलों और समाज के सभी वर्गो से सहयोग की अपील की। डिप्टी सीएम ने सिसवन ढ़ाले पर लगने वाले जाम को देखते हुए वहां ऊपरी पार पथ बनाने की घोषणा भी की। शिक्षा मंत्री ने छात्रों से अनुरोध किया कि हरेराम ब्रह्मचारी उच्च विद्यालय सिस्वन के जर्जर भवन का जीर्णोद्धार इसी साल कराया जाएगा। संवेदक- मेसर्स बीएससी और सी एंड सी गुड़गांव
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चना तो हर घर में इस्तेमाल होने वाला अनाज है. लोग इसकी सब्जी बहुत पसंद से खाते है. चना कई ड्राई फ्रूड्स से ज्यादा फायदेमंद होता है. वहीं भिगोए हुए चने में प्रोटीन, फाइबर, मिनरल और विटामिन की भरपूर मात्रा होती है, जिनका रोज सुबह सेवन करके कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है.
1-चने में आयरन भरपूर मात्रा में होता है, जिनका रोज सुबह सेवन करने से एनीमिया की प्रॉब्लम दूर होती है.
2-चने में फॉस्फोरस और मैगनीज जैसे मिनरल्स होते है. जो रिंगवार्म और खुजली जैसी स्किन डिजीज में फायदा करते है.
3-चने में पाए जाने वाले अल्फा लिनोलेनिक और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स होते है, जो बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के लेवन को कम करते है. इसी के साथ हार्ट अटैक से बचाते है.
4-चने में दूध और दही के समान कैल्शियम पाया जाता है, जिसका रोजाना सुबह सेवन करने से हड्डियां मजबूत रहती है.
5-चने में भरपूर मात्रा में फॉस्फोरस होता है, जो हिमोग्लोबिन के लेवल को बढ़ाने का काम करता है और किडनी की सफाई करता है.
6-चने में मिनरल्स और आयरन होते हैं, पीलिया ग्रस्त रोगी को चना खिलाने से काफी राहत मिलती है.
7-चने में अमीनो एसिड, ट्रिप्टोफान और सेरोटोनिन भरपूर होते है, जो तनाव को दूर करके दिमाग को शांत करते है.
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चना तो हर घर में इस्तेमाल होने वाला अनाज है. लोग इसकी सब्जी बहुत पसंद से खाते है. चना कई ड्राई फ्रूड्स से ज्यादा फायदेमंद होता है. वहीं भिगोए हुए चने में प्रोटीन, फाइबर, मिनरल और विटामिन की भरपूर मात्रा होती है, जिनका रोज सुबह सेवन करके कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है. एक-चने में आयरन भरपूर मात्रा में होता है, जिनका रोज सुबह सेवन करने से एनीमिया की प्रॉब्लम दूर होती है. दो-चने में फॉस्फोरस और मैगनीज जैसे मिनरल्स होते है. जो रिंगवार्म और खुजली जैसी स्किन डिजीज में फायदा करते है. तीन-चने में पाए जाने वाले अल्फा लिनोलेनिक और ओमेगा-तीन फैटी एसिड्स होते है, जो बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के लेवन को कम करते है. इसी के साथ हार्ट अटैक से बचाते है. चार-चने में दूध और दही के समान कैल्शियम पाया जाता है, जिसका रोजाना सुबह सेवन करने से हड्डियां मजबूत रहती है. पाँच-चने में भरपूर मात्रा में फॉस्फोरस होता है, जो हिमोग्लोबिन के लेवल को बढ़ाने का काम करता है और किडनी की सफाई करता है. छः-चने में मिनरल्स और आयरन होते हैं, पीलिया ग्रस्त रोगी को चना खिलाने से काफी राहत मिलती है. सात-चने में अमीनो एसिड, ट्रिप्टोफान और सेरोटोनिन भरपूर होते है, जो तनाव को दूर करके दिमाग को शांत करते है.
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लखनऊ। इलाहाबाद बैंक ने चार सौ दिनों के लिए घरेलू सावधि जमाओं पर ब्याज दर को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 8. 50 प्रतिशत किया है। सावधि जमाओं पर ब्याज दर एक करोड़ रूपये से नीचे की नई जमा-राशियों पर लागू होगी। बैंक का कहना है कि उसने अपनी बेस-दर को 50 आधार-बिंदू बढ़ाते हुए 9 प्रतिशत वार्षिक से 9. 5 प्रतिशत वार्षिक, आधारभूत मूल उधार दर (बीपीएलआर) को 25 आधार-बिंदू बढ़ाते हुए 13. 25 प्रतिशत से 13. 50 प्रतिशत वार्षिक और ब्याज दरों में हो रहे परिवर्तन के परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया। ब्याज दरों में उपर्युक्त परिवर्तन 1 फरवरी 2011 से प्रभावी हो गए हैं। घरेलू सावधि जमा राशि 300 दिनों के लिए 8 प्रतिशत वार्षिक एवं 500 दिनों के लिए 8. 30 प्रतिशत वार्षिक सहित अन्य घरेलू सावधि जमा राशियों पर वर्तमान में जारी ब्याज दरें अपरिवर्तित रहेंगी। वरिष्ठ नागरिकों को पूर्व की भांति 0. 50 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज दर का लाभ मिलता रहेगा।
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लखनऊ। इलाहाबाद बैंक ने चार सौ दिनों के लिए घरेलू सावधि जमाओं पर ब्याज दर को आठ प्रतिशत से बढ़ाकर आठ. पचास प्रतिशत किया है। सावधि जमाओं पर ब्याज दर एक करोड़ रूपये से नीचे की नई जमा-राशियों पर लागू होगी। बैंक का कहना है कि उसने अपनी बेस-दर को पचास आधार-बिंदू बढ़ाते हुए नौ प्रतिशत वार्षिक से नौ. पाँच प्रतिशत वार्षिक, आधारभूत मूल उधार दर को पच्चीस आधार-बिंदू बढ़ाते हुए तेरह. पच्चीस प्रतिशत से तेरह. पचास प्रतिशत वार्षिक और ब्याज दरों में हो रहे परिवर्तन के परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया। ब्याज दरों में उपर्युक्त परिवर्तन एक फरवरी दो हज़ार ग्यारह से प्रभावी हो गए हैं। घरेलू सावधि जमा राशि तीन सौ दिनों के लिए आठ प्रतिशत वार्षिक एवं पाँच सौ दिनों के लिए आठ. तीस प्रतिशत वार्षिक सहित अन्य घरेलू सावधि जमा राशियों पर वर्तमान में जारी ब्याज दरें अपरिवर्तित रहेंगी। वरिष्ठ नागरिकों को पूर्व की भांति शून्य. पचास प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज दर का लाभ मिलता रहेगा।
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Ranchi: राजधानी रांची में पुलिस से बेखौफ अपराधी अपनी धमक दिखाने के लिए अब हथियार लिए अपनी तस्वीर भी वायरल करवा रहा है. रांची के चान्हो इलाके का अपराधी शमीम अंसारी की वायरल तस्वीर इन दिनों चर्चा में है.
हाथों में अवैध हथियार लेकर अलग-अलग पोज में फोटो खिंचवा कर वायरल करने वाला यह युवक रांची के ग्रामीण इलाकों में अपनी दहशत कायम करना चाहता है. शमीम अंसारी के साथ चान्हो ,मांडर और रातू इलाके कई दागी युवक भी रहते हैं. सभी के पास अवैध हथियार होने की सूचना पुलिस को है. यह गिरोह ग्रामीण इलाकों में फिलहाल छोटी-मोटी लूटपाट की वारदातों को अंजाम देता है लेकिन इनकी ख्वाहिश है कि यह बड़े अपराधी बने.
इसी बीच शमीम अंसारी ने अपनी कई तस्वीरें अलग-अलग प्लेटफार्म पर जारी किया है. हाथों में अवैध पिस्टल लिए शमीम अंसारी की तस्वीरें रांची के ग्रामीण इलाकों में चर्चा का विषय बना हुआ है.
रांची के चान्हो थानेदार दिलेश्वर कुमार ने बताया कि वायरल फोटो मिलने के बाद अपराधी शमीम अंसारी की गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है. पुलिस की टीम ने दो बार उसके गांव जाकर छापेमारी भी की है, वह हाथ नहीं आया. इन्होंने कहा कि जानकारी मिल रही है कि वह फिलहाल फरार हो गया है.
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Ranchi: राजधानी रांची में पुलिस से बेखौफ अपराधी अपनी धमक दिखाने के लिए अब हथियार लिए अपनी तस्वीर भी वायरल करवा रहा है. रांची के चान्हो इलाके का अपराधी शमीम अंसारी की वायरल तस्वीर इन दिनों चर्चा में है. हाथों में अवैध हथियार लेकर अलग-अलग पोज में फोटो खिंचवा कर वायरल करने वाला यह युवक रांची के ग्रामीण इलाकों में अपनी दहशत कायम करना चाहता है. शमीम अंसारी के साथ चान्हो ,मांडर और रातू इलाके कई दागी युवक भी रहते हैं. सभी के पास अवैध हथियार होने की सूचना पुलिस को है. यह गिरोह ग्रामीण इलाकों में फिलहाल छोटी-मोटी लूटपाट की वारदातों को अंजाम देता है लेकिन इनकी ख्वाहिश है कि यह बड़े अपराधी बने. इसी बीच शमीम अंसारी ने अपनी कई तस्वीरें अलग-अलग प्लेटफार्म पर जारी किया है. हाथों में अवैध पिस्टल लिए शमीम अंसारी की तस्वीरें रांची के ग्रामीण इलाकों में चर्चा का विषय बना हुआ है. रांची के चान्हो थानेदार दिलेश्वर कुमार ने बताया कि वायरल फोटो मिलने के बाद अपराधी शमीम अंसारी की गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है. पुलिस की टीम ने दो बार उसके गांव जाकर छापेमारी भी की है, वह हाथ नहीं आया. इन्होंने कहा कि जानकारी मिल रही है कि वह फिलहाल फरार हो गया है.
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Switzerland Approves Euthanasia Device: स्विटजरलैंड ने ताबूत के आकार की एक मशीन के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इच्छा मृत्यु चाहने वालों को यह मशीन बिना दर्द मौत की नींद सुला देगी।
बिना दर्द मौत की नींद सुलाएगी यह 'सूसाइड मशीन'
इच्छा मृत्यु चाहने वालों के लिए स्विटजरलैंड ने ताबूत के आकार की एक मशीन (euthanasia device) को कानूनी मंजूरी दे दी है। इस मशीन की मदद से लोग मात्र एक मिनट में बिना दर्द के मौत की नींद सो सकेंगे।
बताया जा रहा है कि मशीन के अंदर ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम हो जाता है जिससे संबंधित व्यक्ति की मौत हो जाती है। इस मशीन को सूसाइड मशीन भी कहा जा रहा है। इस ताबूत रूपी मशीन को अंदर बैठकर भी चलाया जा सकता है। यह मशीन ऐसे मरीजों के लिए मददगार है जो बीमारी के कारण बोल नहीं पाते हैं या बिस्तर से हिल भी नहीं पाते हैं।
इच्छा मृत्यु चाहने वाले को यह मशीन अपनी पसंदीदा जगह पर ले जाना होगी। इसके बाद सूसाइड मशीन का नष्ट होने योग्य कैप्सूल अलग हो जाता है। उसे ताबूत की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मशीन को 'सारको' नाम दिया गया है। इसका इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति में हाइपोक्सिया और हाइपोकेनिया की स्थिति पैदा हो जाती है। यानी संबंधित व्यक्ति के टिश्यू में अपर्याप्त ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है और खून में कार्बन डाइऑक्साइड की कमी से मृत्यु हो जाती है।
बताया जा रहा है कि सूसाइड मशीन बनाने का विचार एनजीओ 'एक्जिट इंटरनेशनल' के निदेशक और 'डॉक्टर डेथ' कहे जाने वाले डॉक्टर फिलीप निट्श्के का है।
इसे लेकर उनकी कड़ी आलोचना भी हो रही है। लोग मशीन में इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके को गलत बता रहे हैं। उनके अनुसार यह गैस चेंबर जैसी है। यह मशीन आत्महत्या को बढ़ावा देगी। वर्तमान समय में दो प्रोटो टाइप बनकर तैयार हो गए हैं। अब एक तीसरी मशीन को बनाया जा रहा है। यह अगले साल तक तैयार हो जाएगी।
स्विटजरलैंड में मदद के साथ आत्महत्या करना कानूनी माना जाता है। भारत समेत कई देशों में आत्महत्या को गैर कानूनी माना गया है। पिछले साल 1300 लोगों ने इस प्रावधान के तहत आत्महत्या की।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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Switzerland Approves Euthanasia Device: स्विटजरलैंड ने ताबूत के आकार की एक मशीन के निर्माण को मंजूरी दे दी है। इच्छा मृत्यु चाहने वालों को यह मशीन बिना दर्द मौत की नींद सुला देगी। बिना दर्द मौत की नींद सुलाएगी यह 'सूसाइड मशीन' इच्छा मृत्यु चाहने वालों के लिए स्विटजरलैंड ने ताबूत के आकार की एक मशीन को कानूनी मंजूरी दे दी है। इस मशीन की मदद से लोग मात्र एक मिनट में बिना दर्द के मौत की नींद सो सकेंगे। बताया जा रहा है कि मशीन के अंदर ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम हो जाता है जिससे संबंधित व्यक्ति की मौत हो जाती है। इस मशीन को सूसाइड मशीन भी कहा जा रहा है। इस ताबूत रूपी मशीन को अंदर बैठकर भी चलाया जा सकता है। यह मशीन ऐसे मरीजों के लिए मददगार है जो बीमारी के कारण बोल नहीं पाते हैं या बिस्तर से हिल भी नहीं पाते हैं। इच्छा मृत्यु चाहने वाले को यह मशीन अपनी पसंदीदा जगह पर ले जाना होगी। इसके बाद सूसाइड मशीन का नष्ट होने योग्य कैप्सूल अलग हो जाता है। उसे ताबूत की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। इस मशीन को 'सारको' नाम दिया गया है। इसका इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति में हाइपोक्सिया और हाइपोकेनिया की स्थिति पैदा हो जाती है। यानी संबंधित व्यक्ति के टिश्यू में अपर्याप्त ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है और खून में कार्बन डाइऑक्साइड की कमी से मृत्यु हो जाती है। बताया जा रहा है कि सूसाइड मशीन बनाने का विचार एनजीओ 'एक्जिट इंटरनेशनल' के निदेशक और 'डॉक्टर डेथ' कहे जाने वाले डॉक्टर फिलीप निट्श्के का है। इसे लेकर उनकी कड़ी आलोचना भी हो रही है। लोग मशीन में इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके को गलत बता रहे हैं। उनके अनुसार यह गैस चेंबर जैसी है। यह मशीन आत्महत्या को बढ़ावा देगी। वर्तमान समय में दो प्रोटो टाइप बनकर तैयार हो गए हैं। अब एक तीसरी मशीन को बनाया जा रहा है। यह अगले साल तक तैयार हो जाएगी। स्विटजरलैंड में मदद के साथ आत्महत्या करना कानूनी माना जाता है। भारत समेत कई देशों में आत्महत्या को गैर कानूनी माना गया है। पिछले साल एक हज़ार तीन सौ लोगों ने इस प्रावधान के तहत आत्महत्या की। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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