raw_text
stringlengths 113
616k
| normalized_text
stringlengths 98
618k
|
|---|---|
Azamgarh News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से अतिक्रमण हटाने का अभियान लगातार चला रही है। इसी क्रम में आजमगढ़ के सदर तहसील अंतर्गत आजमगढ़ से गोरखपुर मार्ग पर हाफिजपुर में स्थित करोड़ों की 2000 स्क्वायर मीटर को कब्जा मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
Azamgarh News: गोरखपुर मार्ग पर पीडब्ल्यूडी की करोड़ों की जमीन से प्रशासन ने अवैध कब्जा हटवाने की कवायद शुरू कर दी है। यहां 1975 से सपा विधायक दुर्गा प्रसाद यादव सहित अन्य लोगों के कब्जे में ये जमीन थी। जिले में तैनात एडीएम ने कहा है सरकारी जमीन हर हाल में खाली कराई जाएगी, चाहे कब्जा करने वाला कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से अतिक्रमण हटाने का अभियान लगातार चला रही है। इसी क्रम में आजमगढ़ के सदर तहसील अंतर्गत आजमगढ़ से गोरखपुर मार्ग पर हाफिजपुर में स्थित करोड़ों की 2000 स्क्वायर मीटर को कब्जा मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह जमीन लोक निर्माण विभाग की है। आरोप है कि इसपर पूर्व मंत्री और दो अन्य लोगों द्वारा अतिक्रमण किया गया है, जिसे जिला प्रशासन ने अतिक्रमण मुक्त करा रहा है।
एसडीएम सदर ज्ञान चंद गुप्ता ने बताया कि हाफिजपुर में गोरखपुर जाने वाले मार्ग पर स्थित गाटा संख्या 1515, 1510 व 751/1741 यह तीन गाटे संख्या की जमीन पीडब्ल्यूडी ने 1975 में सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित की थी। 1975 से ही इन तीन गाटा संख्या पर खातेदारों के नाम चले आ रहे थे और उनका कब्जा बरकरार था। जिसे दुरुस्त करके पुनः इस भूमि को सड़क खाते में अंकित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस जमीन पर जिन लोगों का निर्माण पाया गया उन्हें अतिक्रमण हटाने का निर्देश दे दिया गया था। निर्देश के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाने पर गाटा संख्या 1515 से जो कि पूर्व मंत्री व सदर विधायक दुर्गा प्रसाद यादव के नाम से कब्जे में था, उससे प्रशासन ने अतिक्रमण हटवाया है।
एसडीएम सदर के मुताबिक दो अन्य गाटे से भी अतिक्रमण हटाने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। तीन दिन के अंदर अगर अतिक्रमण उनके द्वारा स्वयं नहीं हटाया गया तो बलपूर्वक अतिक्रमण हटाया जाएगा। उन्होंने बताया कि गाटा संख्या 1515 पर समाजवादी पार्टी के सदर विधानसभा से विधायक दुर्गा प्रसाद यादव का कतिपय अतिक्रमण पाया गया। 1510 पर सुबास आदि का अतिक्रमण पाया गया व गोपाल कृष्ण, विजय कृष्ण का बाउंड्री बनाकर कब्जा पाया गया। गाटा संख्या 751/1741 में पूर्णमासी आदि का 10 दुकानें बनाकर कब्जा पाया गया। उन्होंने कहा कि इन सभी को अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया है। एसडीएम सदर ने बताया कि करीब 2000 स्क्वायर मीटर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया गया है। जिसे अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई लगातार जारी है।
एडीएम प्रशासन अनिल कुमार मिश्र ने बताया कि जिला प्रशासन पूरे शहर में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने का कार्य कर रहा है। इसी क्रम में हाफिजपुर में पीडब्लूडी की जमीन चिन्हित कर नोटिस जारी किया गया था। कब्जा करने वालों से अतिक्रमण हटाने को कहा गया है। अगर वह स्वयं अतिक्रमण नहीं हटाते हैं तो प्रशासन अतिक्रमण हटाकर खर्चा कब्जा करने वालों से ही वसूल करेगा, साथ ही एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
|
Azamgarh News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से अतिक्रमण हटाने का अभियान लगातार चला रही है। इसी क्रम में आजमगढ़ के सदर तहसील अंतर्गत आजमगढ़ से गोरखपुर मार्ग पर हाफिजपुर में स्थित करोड़ों की दो हज़ार स्क्वायर मीटर को कब्जा मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। Azamgarh News: गोरखपुर मार्ग पर पीडब्ल्यूडी की करोड़ों की जमीन से प्रशासन ने अवैध कब्जा हटवाने की कवायद शुरू कर दी है। यहां एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर से सपा विधायक दुर्गा प्रसाद यादव सहित अन्य लोगों के कब्जे में ये जमीन थी। जिले में तैनात एडीएम ने कहा है सरकारी जमीन हर हाल में खाली कराई जाएगी, चाहे कब्जा करने वाला कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से अतिक्रमण हटाने का अभियान लगातार चला रही है। इसी क्रम में आजमगढ़ के सदर तहसील अंतर्गत आजमगढ़ से गोरखपुर मार्ग पर हाफिजपुर में स्थित करोड़ों की दो हज़ार स्क्वायर मीटर को कब्जा मुक्त कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह जमीन लोक निर्माण विभाग की है। आरोप है कि इसपर पूर्व मंत्री और दो अन्य लोगों द्वारा अतिक्रमण किया गया है, जिसे जिला प्रशासन ने अतिक्रमण मुक्त करा रहा है। एसडीएम सदर ज्ञान चंद गुप्ता ने बताया कि हाफिजपुर में गोरखपुर जाने वाले मार्ग पर स्थित गाटा संख्या एक हज़ार पाँच सौ पंद्रह, एक हज़ार पाँच सौ दस व सात सौ इक्यावन/एक हज़ार सात सौ इकतालीस यह तीन गाटे संख्या की जमीन पीडब्ल्यूडी ने एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर में सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित की थी। एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर से ही इन तीन गाटा संख्या पर खातेदारों के नाम चले आ रहे थे और उनका कब्जा बरकरार था। जिसे दुरुस्त करके पुनः इस भूमि को सड़क खाते में अंकित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस जमीन पर जिन लोगों का निर्माण पाया गया उन्हें अतिक्रमण हटाने का निर्देश दे दिया गया था। निर्देश के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाने पर गाटा संख्या एक हज़ार पाँच सौ पंद्रह से जो कि पूर्व मंत्री व सदर विधायक दुर्गा प्रसाद यादव के नाम से कब्जे में था, उससे प्रशासन ने अतिक्रमण हटवाया है। एसडीएम सदर के मुताबिक दो अन्य गाटे से भी अतिक्रमण हटाने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। तीन दिन के अंदर अगर अतिक्रमण उनके द्वारा स्वयं नहीं हटाया गया तो बलपूर्वक अतिक्रमण हटाया जाएगा। उन्होंने बताया कि गाटा संख्या एक हज़ार पाँच सौ पंद्रह पर समाजवादी पार्टी के सदर विधानसभा से विधायक दुर्गा प्रसाद यादव का कतिपय अतिक्रमण पाया गया। एक हज़ार पाँच सौ दस पर सुबास आदि का अतिक्रमण पाया गया व गोपाल कृष्ण, विजय कृष्ण का बाउंड्री बनाकर कब्जा पाया गया। गाटा संख्या सात सौ इक्यावन/एक हज़ार सात सौ इकतालीस में पूर्णमासी आदि का दस दुकानें बनाकर कब्जा पाया गया। उन्होंने कहा कि इन सभी को अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया है। एसडीएम सदर ने बताया कि करीब दो हज़ार स्क्वायर मीटर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया गया है। जिसे अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई लगातार जारी है। एडीएम प्रशासन अनिल कुमार मिश्र ने बताया कि जिला प्रशासन पूरे शहर में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने का कार्य कर रहा है। इसी क्रम में हाफिजपुर में पीडब्लूडी की जमीन चिन्हित कर नोटिस जारी किया गया था। कब्जा करने वालों से अतिक्रमण हटाने को कहा गया है। अगर वह स्वयं अतिक्रमण नहीं हटाते हैं तो प्रशासन अतिक्रमण हटाकर खर्चा कब्जा करने वालों से ही वसूल करेगा, साथ ही एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
|
Motihari : बिहार के मोतिहारी जिले से एक अच्छी खबर सामने आयी है. यह खबर हिन्दू और मुस्लिम के मुद्दे पर राजनीति करने वालों तथा नफरत फैलानेवालों के लिए एक नसीहत भी है. शहर के गांधी चौक पर अवैध बूचड़खाने को बंद करवाने और गो हत्या पर रोक के लिए एक शख्स अनिशिचतकालीन अनशन पर बैठा है. उसका नासिर खान है.
नासिर खान शहर के खुद्दानगर मुहल्ले का रहनेवाला है. वह अपने मुहले में चल रहे अवैध बूचड़खाने को बंद करवाने और गो हत्या पर पाबंदी लगाने को लेकर पिछले कुछ दिनों से आंदोलनरत है. नासिर ने इस मुद्दे को लेकर कई दफा जिला प्रशासन से मिल अपनी बात रखते हुए नियम संगत कार्रवाई की मांग की है, लेकिन प्रशासन ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की.
वहीं दूसरी तरफ अवैध बूचड़खाने के संचालकों ने कई दफे नासिर पर हमला भी बोल दिया है. उसे बार -बार धमकी भी मिल रही है. बावजूद इसके यह शख्स डरा नहीं है और अब अपनी मांगों को लेकर अनिश्चित काल के लिये भूख हड़ताल पर बैठ गया है.
आंदोलन कर रहे नासिर खान का कहना है कि जिस बूचड़खाने का अनुबंध 2011 में प्रशासन द्वारा रद्द कर दिया गया है उसी बूचड़खाने को प्रशासन और नगर परिषद के मिलीभगत से चलाया जा रहा है. नासिर का कहना है कि जबतक बूचड़खाना बंद नहीं होता तबतक अनशन जारी रहेगा. इस आंदोलन का समर्थन अब कई अन्य संगठन भी करने लगे हैं, ऐसे में देखने वाली बात यह है कि प्रशासन क्या कार्रवाई करता है.
|
Motihari : बिहार के मोतिहारी जिले से एक अच्छी खबर सामने आयी है. यह खबर हिन्दू और मुस्लिम के मुद्दे पर राजनीति करने वालों तथा नफरत फैलानेवालों के लिए एक नसीहत भी है. शहर के गांधी चौक पर अवैध बूचड़खाने को बंद करवाने और गो हत्या पर रोक के लिए एक शख्स अनिशिचतकालीन अनशन पर बैठा है. उसका नासिर खान है. नासिर खान शहर के खुद्दानगर मुहल्ले का रहनेवाला है. वह अपने मुहले में चल रहे अवैध बूचड़खाने को बंद करवाने और गो हत्या पर पाबंदी लगाने को लेकर पिछले कुछ दिनों से आंदोलनरत है. नासिर ने इस मुद्दे को लेकर कई दफा जिला प्रशासन से मिल अपनी बात रखते हुए नियम संगत कार्रवाई की मांग की है, लेकिन प्रशासन ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की. वहीं दूसरी तरफ अवैध बूचड़खाने के संचालकों ने कई दफे नासिर पर हमला भी बोल दिया है. उसे बार -बार धमकी भी मिल रही है. बावजूद इसके यह शख्स डरा नहीं है और अब अपनी मांगों को लेकर अनिश्चित काल के लिये भूख हड़ताल पर बैठ गया है. आंदोलन कर रहे नासिर खान का कहना है कि जिस बूचड़खाने का अनुबंध दो हज़ार ग्यारह में प्रशासन द्वारा रद्द कर दिया गया है उसी बूचड़खाने को प्रशासन और नगर परिषद के मिलीभगत से चलाया जा रहा है. नासिर का कहना है कि जबतक बूचड़खाना बंद नहीं होता तबतक अनशन जारी रहेगा. इस आंदोलन का समर्थन अब कई अन्य संगठन भी करने लगे हैं, ऐसे में देखने वाली बात यह है कि प्रशासन क्या कार्रवाई करता है.
|
नई दिल्ली। जामिया मिलिया इस्लामिया की इनैक्टस टीम ने, अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित पांचवें नेशनल सोशल एंटरप्राइज आइडिया चैलेंज में पहले रनर अप के रूप में खुद को स्थापित किया। इनैक्टस जामिया टीम ने श्रीमति नामक अपने प्रोजेक्ट के जरिए एक प्रभावी छाप छोड़ी। इसका विषय बेरोजगारी, घरेलू प्रताड़ना, प्लास्टिक प्रदूषण के साथ-साथ सैनिटरी वेस्ट डिस्पोजल जैसे संवेदनशील मुद्दों पर केंद्रित था। यह आयोजन 19 दिसंबर, 2020 को हुआ था।
जामिया विश्वविद्यालय ने आधिकारिक जानकारी देते हुए कहा, "परियोजना श्रीमति का उद्देश्य केले के रेशों और इस जैसी अन्य चीजों से बने बायोडिग्रेडेबल फेस मास्क और इको-फ्रेंडली सेनेटरी नैपकिन का निर्माण करना है। इससे लक्षित समुदायों के लिए आजीविका के अवसर पैदा होने के साथ ही भारत में बायोडिग्रेडेबल तंतुओं से ज्यादा से ज्यादा चीजों को बनाने का रूझान बढ़ेगा। "
नेशनल सोशल एंटरप्राइज आइडिया चैलेंज, खास तौर पर ऐसे प्रोजेक्ट विचारों पर आधारित था, जो कोविड-19 संकट से उत्पन्न हालात से निपटने में समाज और व्यक्तियों को सशक्त बनाएं। इस प्रतियोगिता में देश भर से कई टीमों की तरफ से 85 प्रस्तुतियां भेजी गई थीं। जूरी ने इन प्रस्तुतियों को नवाचार, प्रभाव, और वित्तीय व्यवहार्यता के मानदंडों पर परखने के बाद, अंतिम दौर के लिए दस टीमों को शॉर्टलिस्ट किया था।
जामिया के मुताबिक इनैक्टस टीम की प्रस्तुति रोजगार सृजन के साथ ही एक बेहतर और अधिक स्थायी दुनिया बनाने में निहित थी। टीम ने अपनी कामयाबियों का सिलसिला जारी रखते हुए साबित कर दिया है कि वह अपने आदर्श वाक्य सोशल डिलिजन्ट को व्यवहारिक रूप से जीने की कोशिश करती है।
इनैक्टस जामिया की स्थापना 27 सितंबर 2015 को हुई थी। यह छात्रों की अगुवाई वाला एक पैन यूनिवर्सिटी अंतरराष्ट्रीय नॉट फॉर प्रॉफिट संगठन है। टीम के 200 से अधिक एसोसिएट मेंबर हैं। इसकी पूर्व और वर्तमान की छह महत्वपूर्ण परियोजनाएं, दिल्ली और उसके आसपास के पांच अलग-अलग लक्षित समुदाय को शामिल करके बनाई गई हैं।
इसका मूल विचार, देश के वंचित समुदायों में उनकी क्षमता का विकास करना और उन्हें इतना आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे वे अपनी आजीविका बनाए रखने में सक्षम बने रहें।
|
नई दिल्ली। जामिया मिलिया इस्लामिया की इनैक्टस टीम ने, अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित पांचवें नेशनल सोशल एंटरप्राइज आइडिया चैलेंज में पहले रनर अप के रूप में खुद को स्थापित किया। इनैक्टस जामिया टीम ने श्रीमति नामक अपने प्रोजेक्ट के जरिए एक प्रभावी छाप छोड़ी। इसका विषय बेरोजगारी, घरेलू प्रताड़ना, प्लास्टिक प्रदूषण के साथ-साथ सैनिटरी वेस्ट डिस्पोजल जैसे संवेदनशील मुद्दों पर केंद्रित था। यह आयोजन उन्नीस दिसंबर, दो हज़ार बीस को हुआ था। जामिया विश्वविद्यालय ने आधिकारिक जानकारी देते हुए कहा, "परियोजना श्रीमति का उद्देश्य केले के रेशों और इस जैसी अन्य चीजों से बने बायोडिग्रेडेबल फेस मास्क और इको-फ्रेंडली सेनेटरी नैपकिन का निर्माण करना है। इससे लक्षित समुदायों के लिए आजीविका के अवसर पैदा होने के साथ ही भारत में बायोडिग्रेडेबल तंतुओं से ज्यादा से ज्यादा चीजों को बनाने का रूझान बढ़ेगा। " नेशनल सोशल एंटरप्राइज आइडिया चैलेंज, खास तौर पर ऐसे प्रोजेक्ट विचारों पर आधारित था, जो कोविड-उन्नीस संकट से उत्पन्न हालात से निपटने में समाज और व्यक्तियों को सशक्त बनाएं। इस प्रतियोगिता में देश भर से कई टीमों की तरफ से पचासी प्रस्तुतियां भेजी गई थीं। जूरी ने इन प्रस्तुतियों को नवाचार, प्रभाव, और वित्तीय व्यवहार्यता के मानदंडों पर परखने के बाद, अंतिम दौर के लिए दस टीमों को शॉर्टलिस्ट किया था। जामिया के मुताबिक इनैक्टस टीम की प्रस्तुति रोजगार सृजन के साथ ही एक बेहतर और अधिक स्थायी दुनिया बनाने में निहित थी। टीम ने अपनी कामयाबियों का सिलसिला जारी रखते हुए साबित कर दिया है कि वह अपने आदर्श वाक्य सोशल डिलिजन्ट को व्यवहारिक रूप से जीने की कोशिश करती है। इनैक्टस जामिया की स्थापना सत्ताईस सितंबर दो हज़ार पंद्रह को हुई थी। यह छात्रों की अगुवाई वाला एक पैन यूनिवर्सिटी अंतरराष्ट्रीय नॉट फॉर प्रॉफिट संगठन है। टीम के दो सौ से अधिक एसोसिएट मेंबर हैं। इसकी पूर्व और वर्तमान की छह महत्वपूर्ण परियोजनाएं, दिल्ली और उसके आसपास के पांच अलग-अलग लक्षित समुदाय को शामिल करके बनाई गई हैं। इसका मूल विचार, देश के वंचित समुदायों में उनकी क्षमता का विकास करना और उन्हें इतना आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे वे अपनी आजीविका बनाए रखने में सक्षम बने रहें।
|
रेल मंत्री पीयूष गोयल का एक शर्मनाक बयान सामने आया है. जिसमे उन्होंने देश में कम होती नौकरियों को एक बेहतर संकेत करार दिया.
गुरुवार को वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम की इंडिया इकॉनमिक समिट में भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील मित्तल ने नई नौकरियां के सृजन नहीं होने पर चिंता जाहिर की थी. उन्होंने कहा था, अगर टॉप 200 कंपनियां नई नौकरियां सृजित नहीं कर पाती है तो पूरे व्यापारिक समाज के लिए समाज को साथ खींच पाना मुश्किल होगा और फिर, आप लाखों-करोड़ों को पीछे छोड़ देंगे.
ऐसे में पीयूष गोयल ने कहा कि कंपनियां रोजगार घटा रही हैं जो कि अच्छा संकेत है. उन्होने कहा, आज, कल का युवा सिर्फ नौकरी की तरफ नहीं देख रहा. वह नौकरी देने वाला बनना चाहता है. देश आज ज्यादा से ज्यादा युवाओं को एंटरप्रेन्योर बनने की इच्छा रखते देख रहा है.
|
रेल मंत्री पीयूष गोयल का एक शर्मनाक बयान सामने आया है. जिसमे उन्होंने देश में कम होती नौकरियों को एक बेहतर संकेत करार दिया. गुरुवार को वर्ल्ड इकॉनमिक फोरम की इंडिया इकॉनमिक समिट में भारती एयरटेल के चेयरमैन सुनील मित्तल ने नई नौकरियां के सृजन नहीं होने पर चिंता जाहिर की थी. उन्होंने कहा था, अगर टॉप दो सौ कंपनियां नई नौकरियां सृजित नहीं कर पाती है तो पूरे व्यापारिक समाज के लिए समाज को साथ खींच पाना मुश्किल होगा और फिर, आप लाखों-करोड़ों को पीछे छोड़ देंगे. ऐसे में पीयूष गोयल ने कहा कि कंपनियां रोजगार घटा रही हैं जो कि अच्छा संकेत है. उन्होने कहा, आज, कल का युवा सिर्फ नौकरी की तरफ नहीं देख रहा. वह नौकरी देने वाला बनना चाहता है. देश आज ज्यादा से ज्यादा युवाओं को एंटरप्रेन्योर बनने की इच्छा रखते देख रहा है.
|
नई दिल्ली के पहाडग़ंज में एक स्थानीय रेस्तरां में ओहाना ली ग्लेनेक लंच का लुत्फ उठा रही हैं। राजधानी दिल्ली आने के पांच दिन बाद ओहाना स्कार्फ और स्टोल खरीदने में ही मसरूफ रहीं। फ्रांस की ओहाना मूलतः कारोबार करती हैं और भारत से कपड़े ले जाकर अपने देश में बेचती हैं। कोविड की वजह से वह इस बार दो साल के अंतराल के बाद यहां आई हैं। वह कहती हैं, 'मैं 2019 में आखिरी बार यहां थी और उस वक्त से चीजें काफी बदल गई हैं। ' उन दिनों पहाडग़ंज में करीब 1,200-1,500 होटल थे जहां किराये की दर अलग थी और यहां अंतरराष्ट्रीय पर्यटक भरे हुए थे। उन्होंने हाल में खुले हेयर सलून की तरफ इशारा करते हुए कहा, 'कई छोटी दुकानें, चाय के स्टॉल और कैफे जहां मैं अक्सर जाती थी, वे सभी बंद हो गए। मुझे लगता है कि उनकी कमाई में घाटा होने लगा जिसकी वजह से उनका काम प्रभावित हुआ है। लेकिन कुछ नई जगहों पर भी ये दुकानें खुल गई हैं। ' ओहाना कहती हैं कि विदेशियों की वजह से इस क्षेत्र को हिप्पी हॉटस्पॉट कहा जाता था लेकिन एक बात अब यहां अच्छी दिखती है कि इस क्षेत्र में अब ज्यादा स्थानीय लोग दिखते हैं। हालांकि व्यापारी और यहां के कारोबार मालिक इतने उत्साह में नहीं दिखते हैं। उन्हें उम्मीद थी कि 27 मार्च को अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा बहाल होने के बाद विदेशी पर्यटक आएंगे। लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से उनकी उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिर गया है। हालांकि पहाडग़ंज में पर्यटकों की एक अच्छी तादाद उसी क्षेत्र से है। अरेबियन शीशा कैफे में रूस और उज्बेक व्यंजन का लुत्फ उठाया जा सकता है। इस कैफे का संचालन करने वाले श्याम राजे ने कहा, 'हमारी किस्मत ही खराब है, इसके बारे में क्या बताएं। ' उनका रेस्तरां खाली है और उन्हें नजदीक के होटलों से कुछ ऑर्डर मिल जाते हैं लेकिन यह पूरे दिन के लिए काफी नहीं है। इस क्षेत्र में ट्रैवल एजेंसी चलाने वाले रूबिन मनचंदा ने कहा, 'पहाडग़ंज के ज्यादातर पर्यटक रूस, यूक्रेन और उज्बेकिस्तान के होते थे लेकिन युद्ध की वजह से यहां की तस्वीर बदल गई है। अब यहां जो लोग कारोबार करने आते हैं उनमें स्पेन और इजरायल के लोग हैं। उनका टिकट पहले ही बुक हो चुका है (इसलिए उन्हें उनकी सेवाएं नहीं चाहिए) और उन्हें मुद्रा बदलने की भी जरूरत नहीं है क्योंकि वे कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। ' मनचंदा ट्रैवल एजेंसी के बाहर ऑर पेले हरे रामा गेस्ट हाउस जाने का रास्ता पूछ रहे हैं। इजरायल के कारोबारी पेले भारत से अगरबत्तियां खरीदते हैं और उन्हें इजरायल में बेचते हैं, जहां वह इस महीने के आखिर तक वापस जाएंगे। तीन महीने पहले के मुकाबले यहां बाजार में काफी हलचल है। लेकिन यहां ज्यादातर स्थानीय लोगों की भीड़ है। हालांकि विदेशी पर्यटकों की भीड़ कम ही है लेकिन घरेलू मांग में तेजी की वजह से पहाडग़ंज के होटलों को कुछ घाटे की रिकवरी करने में मदद मिली है। डी क्रूज होटल में एक व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'पिछले कुछ हफ्ते में हमारी बुकिंग में लगभग 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन यह 90 फीसदी घरेलू मांग के चलते हुआ है। लेकिन इससे हमें हमारे कुछ घाटे की रिकवरी करने में मदद मिलेगी जो काफी लंबे समय तक रहा है। ' होटल का हर रात का शुल्क करीब 1,800 रुपये है लेकिन महामारी के दौर के बीच जुलाई 2021 में खुलने पर इसकी दर 800 रुपये से 1,000 रुपये हो गई। प्रबंधक हरप्रीत सिंह का कहना है कि मैजिक ट्री होटल में बुकिंग 100 फीसदी तक हो गई है और यह घरेलू मांग की वजह से है। उनका कहना है, 'लगभग 60 फीसदी चेक-इन करने वाले लोग भारतीय हैं जो काम के लिए दिल्ली आए हैं। कई लोग अभी छुट्टियों पर जा रहे हैं क्योंकि गर्मी भी बहुत ज्यादा है। बुकिंग की तादाद अधिक है ऐसे में लोग काफी लंबे समय तक लोग ठहर नहीं रहे हैं। ' पहाडग़ंज मार्केट एसोसिएशन के सदस्य रमन सखूजा का कहना है कि सरकार को हस्तक्षेप करते हुए मदद करनी चाहिए जिस तरह कर्ज में छूट और आवास कर तथा बिजली शुल्क में राहत दी गई थी। उनका कहना है, 'प्रशासन को भी दिल्ली का प्रचार-प्रसार एक पर्यटन केंद्र के तौर पर करने की जरूरत है। हम होटलों की घरेलू मांग में बढ़ोतरी देख रहे हैं लेकिन यह या तो ट्रांजिट पर्यटकों के लिए है या फिर जो लोग कुछ समय के वास्ते काम के लिए रुकते हैं। ' पहाडग़ंज में लोग अन्य जगहों के बारे में भी बात कर रहे हैं मसलन मनाली, वाराणसी, कसौली। पहाडग़ंज ठहरने के लिए एक सस्ता विकल्प है। सपना होटल के बाहर केरल के करीब 20 लोगों का समूह किफायती होटल की तलाश में है। उनका बजट 300 रुपये प्रतिदिन है। अपने तीन दोस्तों के साथ यात्रा कर रहे जो उत्साह में कहते हैं, 'हम यहां एक दिन के लिए हैं क्योंकि हमें ट्रेन के लंबे सफर के बाद आराम करने की जरूरत है। ऐसे में ज्यादा भुगतान करके ठहरने का कोई मतलब नहीं है। अगली सुबह हम मनाली निकलेंगे। ' सखूजा का कहना है, 'समस्या यह है कि वे दिल्ली को ऐसे शहर के तौर पर नहीं देखते हैं जहां घूमा जा सकता है। सभी राज्यों का अपना पर्यटन विज्ञापन है। हमें दिल्ली के लिए भी कुछ ऐसा करना चाहिए। इससे हमारे क्षेत्र को भी मदद मिलेगी क्योंकि लोग शहर को न केवल एक संपर्क बिंदु के तौर पर बल्कि उससे कुछ ज्यादा देखते हैं। ' पहाडग़ंज को भी इस वक्त इससे कुछ ज्यादा की जरूरत है।
Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
|
नई दिल्ली के पहाडग़ंज में एक स्थानीय रेस्तरां में ओहाना ली ग्लेनेक लंच का लुत्फ उठा रही हैं। राजधानी दिल्ली आने के पांच दिन बाद ओहाना स्कार्फ और स्टोल खरीदने में ही मसरूफ रहीं। फ्रांस की ओहाना मूलतः कारोबार करती हैं और भारत से कपड़े ले जाकर अपने देश में बेचती हैं। कोविड की वजह से वह इस बार दो साल के अंतराल के बाद यहां आई हैं। वह कहती हैं, 'मैं दो हज़ार उन्नीस में आखिरी बार यहां थी और उस वक्त से चीजें काफी बदल गई हैं। ' उन दिनों पहाडग़ंज में करीब एक,दो सौ-एक,पाँच सौ होटल थे जहां किराये की दर अलग थी और यहां अंतरराष्ट्रीय पर्यटक भरे हुए थे। उन्होंने हाल में खुले हेयर सलून की तरफ इशारा करते हुए कहा, 'कई छोटी दुकानें, चाय के स्टॉल और कैफे जहां मैं अक्सर जाती थी, वे सभी बंद हो गए। मुझे लगता है कि उनकी कमाई में घाटा होने लगा जिसकी वजह से उनका काम प्रभावित हुआ है। लेकिन कुछ नई जगहों पर भी ये दुकानें खुल गई हैं। ' ओहाना कहती हैं कि विदेशियों की वजह से इस क्षेत्र को हिप्पी हॉटस्पॉट कहा जाता था लेकिन एक बात अब यहां अच्छी दिखती है कि इस क्षेत्र में अब ज्यादा स्थानीय लोग दिखते हैं। हालांकि व्यापारी और यहां के कारोबार मालिक इतने उत्साह में नहीं दिखते हैं। उन्हें उम्मीद थी कि सत्ताईस मार्च को अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा बहाल होने के बाद विदेशी पर्यटक आएंगे। लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से उनकी उम्मीदों पर फिलहाल पानी फिर गया है। हालांकि पहाडग़ंज में पर्यटकों की एक अच्छी तादाद उसी क्षेत्र से है। अरेबियन शीशा कैफे में रूस और उज्बेक व्यंजन का लुत्फ उठाया जा सकता है। इस कैफे का संचालन करने वाले श्याम राजे ने कहा, 'हमारी किस्मत ही खराब है, इसके बारे में क्या बताएं। ' उनका रेस्तरां खाली है और उन्हें नजदीक के होटलों से कुछ ऑर्डर मिल जाते हैं लेकिन यह पूरे दिन के लिए काफी नहीं है। इस क्षेत्र में ट्रैवल एजेंसी चलाने वाले रूबिन मनचंदा ने कहा, 'पहाडग़ंज के ज्यादातर पर्यटक रूस, यूक्रेन और उज्बेकिस्तान के होते थे लेकिन युद्ध की वजह से यहां की तस्वीर बदल गई है। अब यहां जो लोग कारोबार करने आते हैं उनमें स्पेन और इजरायल के लोग हैं। उनका टिकट पहले ही बुक हो चुका है और उन्हें मुद्रा बदलने की भी जरूरत नहीं है क्योंकि वे कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। ' मनचंदा ट्रैवल एजेंसी के बाहर ऑर पेले हरे रामा गेस्ट हाउस जाने का रास्ता पूछ रहे हैं। इजरायल के कारोबारी पेले भारत से अगरबत्तियां खरीदते हैं और उन्हें इजरायल में बेचते हैं, जहां वह इस महीने के आखिर तक वापस जाएंगे। तीन महीने पहले के मुकाबले यहां बाजार में काफी हलचल है। लेकिन यहां ज्यादातर स्थानीय लोगों की भीड़ है। हालांकि विदेशी पर्यटकों की भीड़ कम ही है लेकिन घरेलू मांग में तेजी की वजह से पहाडग़ंज के होटलों को कुछ घाटे की रिकवरी करने में मदद मिली है। डी क्रूज होटल में एक व्यक्ति ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'पिछले कुछ हफ्ते में हमारी बुकिंग में लगभग तीस फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन यह नब्बे फीसदी घरेलू मांग के चलते हुआ है। लेकिन इससे हमें हमारे कुछ घाटे की रिकवरी करने में मदद मिलेगी जो काफी लंबे समय तक रहा है। ' होटल का हर रात का शुल्क करीब एक,आठ सौ रुपयापये है लेकिन महामारी के दौर के बीच जुलाई दो हज़ार इक्कीस में खुलने पर इसकी दर आठ सौ रुपयापये से एक,शून्य रुपयापये हो गई। प्रबंधक हरप्रीत सिंह का कहना है कि मैजिक ट्री होटल में बुकिंग एक सौ फीसदी तक हो गई है और यह घरेलू मांग की वजह से है। उनका कहना है, 'लगभग साठ फीसदी चेक-इन करने वाले लोग भारतीय हैं जो काम के लिए दिल्ली आए हैं। कई लोग अभी छुट्टियों पर जा रहे हैं क्योंकि गर्मी भी बहुत ज्यादा है। बुकिंग की तादाद अधिक है ऐसे में लोग काफी लंबे समय तक लोग ठहर नहीं रहे हैं। ' पहाडग़ंज मार्केट एसोसिएशन के सदस्य रमन सखूजा का कहना है कि सरकार को हस्तक्षेप करते हुए मदद करनी चाहिए जिस तरह कर्ज में छूट और आवास कर तथा बिजली शुल्क में राहत दी गई थी। उनका कहना है, 'प्रशासन को भी दिल्ली का प्रचार-प्रसार एक पर्यटन केंद्र के तौर पर करने की जरूरत है। हम होटलों की घरेलू मांग में बढ़ोतरी देख रहे हैं लेकिन यह या तो ट्रांजिट पर्यटकों के लिए है या फिर जो लोग कुछ समय के वास्ते काम के लिए रुकते हैं। ' पहाडग़ंज में लोग अन्य जगहों के बारे में भी बात कर रहे हैं मसलन मनाली, वाराणसी, कसौली। पहाडग़ंज ठहरने के लिए एक सस्ता विकल्प है। सपना होटल के बाहर केरल के करीब बीस लोगों का समूह किफायती होटल की तलाश में है। उनका बजट तीन सौ रुपयापये प्रतिदिन है। अपने तीन दोस्तों के साथ यात्रा कर रहे जो उत्साह में कहते हैं, 'हम यहां एक दिन के लिए हैं क्योंकि हमें ट्रेन के लंबे सफर के बाद आराम करने की जरूरत है। ऐसे में ज्यादा भुगतान करके ठहरने का कोई मतलब नहीं है। अगली सुबह हम मनाली निकलेंगे। ' सखूजा का कहना है, 'समस्या यह है कि वे दिल्ली को ऐसे शहर के तौर पर नहीं देखते हैं जहां घूमा जा सकता है। सभी राज्यों का अपना पर्यटन विज्ञापन है। हमें दिल्ली के लिए भी कुछ ऐसा करना चाहिए। इससे हमारे क्षेत्र को भी मदद मिलेगी क्योंकि लोग शहर को न केवल एक संपर्क बिंदु के तौर पर बल्कि उससे कुछ ज्यादा देखते हैं। ' पहाडग़ंज को भी इस वक्त इससे कुछ ज्यादा की जरूरत है। Apple जल्द Samsung को पछाड़ बन जाएगी भारत की सबसे बड़ी स्मार्टफोन निर्यातक !
|
कोरोना वायरस के चलते पूरी दुनिया अस्त व्यस्त हो गई है। अर्थव्यवस्था की हालत बहुत पतली है, ऊपर से बच्चों की पढ़ाई का नुकसान भी हो रहा है। जब कोरोना स्टार्टिंग में आया था तो लगभग सभी देशों ने सख्त लॉकडाउन लगाए थे। हालांकि इस वायरस की वैक्सीन आने में देरी को देखते हुए अब धीरे धीरे छूट दी जा रही है। हालांकि इस छूट के दौरान भी कुछ नियम कायदे हैं जिनका पालन सभी को करना पड़ता है। अब यह पूर्ण रूप से लोगों के हाथ में है यदि वे इसका सही से पालन करेंगे तो कोरोना के नए मामले नहीं आएंगे। अब थाईलैंड के इन स्कूलों को ही देख लीजिए।
थाईलैंड में जुलाई माह से स्कूल खुल चुके हैं। दिलचस्प बात ये है कि बच्चों के स्कूल आने के बाद भी यहां इनमें एक भी नया कोरोना पॉज़िटिव मामला नहीं देखा गया है। इसकी वजह इन स्कूलों में लागू सख्त नियम है।
हर क्लास में यहां एक बार में 25 बच्चों को ही एंट्री दी जाती है। स्कूल के दरवाजे, डेस्क और बाकी के एरिया को बार बार सैनिटाइज किया जाता है।
बच्चों को हरदम मास्क पहनना अनिवार्य है। खासकर किंडरगार्डन के बच्चों को कोई छूट नहीं दी जाती है। वे पढ़ने, खेलने और अन्य कार्यों के दौरान मास्क पहने रहते हैं।
स्कूल कोरोना वायरस से बचने के लिए एक नया आइडिया भी लाया है। उन्होने हर बच्चे की डेस्क पर एक प्लास्टिक स्क्रीन लगा दी है। बच्चों को पढ़ाई के दौरान इसी प्रोटेक्टिव स्क्रीन के अंदर रहना पड़ता है।
बच्चे चंचल स्वभाव के होते हैं। उनका आपस में मिलना जुलना रोकने के लिए यह प्लास्टिक प्रोटेक्टिव स्क्रीन बड़ी काम की है। इससे अच्छे से सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहती है।
क्लासरूम में जो डेस्क रखी गई है उनके बीच भी एक उचित दूरी है। इस तरह कोरोना के फैलने का खतरा न के बराबर होगा।
बता दें कि थाईलैंड में मार्च से ही स्कूल बंद थे। ऐसे में जब इन्हें जुलाई से खोला गया तो कुछ इस तरह की तैयारी की गई।
स्कूल ने हर क्लास के बाहर एक वाश बेसिन भी लगाया है। स्टूडेंट्स को क्लास में आने के पहले और जाने के बाद यहां अपने हाथ धोने पड़ते हैं।
जो छोटे बच्चे हैं उन्हें खिलाने के दौरान पिंजरों में रखा जाता है। यह पिंजरे उनके लिए एक तरह से शील्ड का काम करते हैं।
बता दें कि इन सख्त नियमों की बदौलत ही थाईलैंड में अभी तक सिर्फ 3,351 कोरोना पॉज़िटिव केस सामने आए हैं। इनमें से भी 3,160 कोरोना को हरा ठीक हो चुके हैं। वहीं इस वायरस की वजह से अभी तक यहां सिर्फ 58 जाने ही गई हैं।
थाईलैंड के स्कूल की यह तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रही है। जहां एक तरफ कुछ लोगों को यह तरीका पसंद आया तो वहीं कुछ का कहना है कि इस तरीके से बच्चों को ट्रीट करने पर उनके ऊपर बुरा असर पड़ सकता है। भारत में कुछ लोगों का कहना है कि यदि हमारे स्कूलों में ऐसी सख्ती होती है तो हम बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार हैं।
वैसे आपको क्या लगता है, क्या भारत में भी इस तरीके से स्कूल खुलने चाहिए?
|
कोरोना वायरस के चलते पूरी दुनिया अस्त व्यस्त हो गई है। अर्थव्यवस्था की हालत बहुत पतली है, ऊपर से बच्चों की पढ़ाई का नुकसान भी हो रहा है। जब कोरोना स्टार्टिंग में आया था तो लगभग सभी देशों ने सख्त लॉकडाउन लगाए थे। हालांकि इस वायरस की वैक्सीन आने में देरी को देखते हुए अब धीरे धीरे छूट दी जा रही है। हालांकि इस छूट के दौरान भी कुछ नियम कायदे हैं जिनका पालन सभी को करना पड़ता है। अब यह पूर्ण रूप से लोगों के हाथ में है यदि वे इसका सही से पालन करेंगे तो कोरोना के नए मामले नहीं आएंगे। अब थाईलैंड के इन स्कूलों को ही देख लीजिए। थाईलैंड में जुलाई माह से स्कूल खुल चुके हैं। दिलचस्प बात ये है कि बच्चों के स्कूल आने के बाद भी यहां इनमें एक भी नया कोरोना पॉज़िटिव मामला नहीं देखा गया है। इसकी वजह इन स्कूलों में लागू सख्त नियम है। हर क्लास में यहां एक बार में पच्चीस बच्चों को ही एंट्री दी जाती है। स्कूल के दरवाजे, डेस्क और बाकी के एरिया को बार बार सैनिटाइज किया जाता है। बच्चों को हरदम मास्क पहनना अनिवार्य है। खासकर किंडरगार्डन के बच्चों को कोई छूट नहीं दी जाती है। वे पढ़ने, खेलने और अन्य कार्यों के दौरान मास्क पहने रहते हैं। स्कूल कोरोना वायरस से बचने के लिए एक नया आइडिया भी लाया है। उन्होने हर बच्चे की डेस्क पर एक प्लास्टिक स्क्रीन लगा दी है। बच्चों को पढ़ाई के दौरान इसी प्रोटेक्टिव स्क्रीन के अंदर रहना पड़ता है। बच्चे चंचल स्वभाव के होते हैं। उनका आपस में मिलना जुलना रोकने के लिए यह प्लास्टिक प्रोटेक्टिव स्क्रीन बड़ी काम की है। इससे अच्छे से सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहती है। क्लासरूम में जो डेस्क रखी गई है उनके बीच भी एक उचित दूरी है। इस तरह कोरोना के फैलने का खतरा न के बराबर होगा। बता दें कि थाईलैंड में मार्च से ही स्कूल बंद थे। ऐसे में जब इन्हें जुलाई से खोला गया तो कुछ इस तरह की तैयारी की गई। स्कूल ने हर क्लास के बाहर एक वाश बेसिन भी लगाया है। स्टूडेंट्स को क्लास में आने के पहले और जाने के बाद यहां अपने हाथ धोने पड़ते हैं। जो छोटे बच्चे हैं उन्हें खिलाने के दौरान पिंजरों में रखा जाता है। यह पिंजरे उनके लिए एक तरह से शील्ड का काम करते हैं। बता दें कि इन सख्त नियमों की बदौलत ही थाईलैंड में अभी तक सिर्फ तीन,तीन सौ इक्यावन कोरोना पॉज़िटिव केस सामने आए हैं। इनमें से भी तीन,एक सौ साठ कोरोना को हरा ठीक हो चुके हैं। वहीं इस वायरस की वजह से अभी तक यहां सिर्फ अट्ठावन जाने ही गई हैं। थाईलैंड के स्कूल की यह तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रही है। जहां एक तरफ कुछ लोगों को यह तरीका पसंद आया तो वहीं कुछ का कहना है कि इस तरीके से बच्चों को ट्रीट करने पर उनके ऊपर बुरा असर पड़ सकता है। भारत में कुछ लोगों का कहना है कि यदि हमारे स्कूलों में ऐसी सख्ती होती है तो हम बच्चों को स्कूल भेजने को तैयार हैं। वैसे आपको क्या लगता है, क्या भारत में भी इस तरीके से स्कूल खुलने चाहिए?
|
Bihar News Today: बिहार की राजधानी स्थित सीएम सचिवालय में बिहार इंवेस्टर्स मीट 2022 का आयोजन किया गया। नीतीश कुमार ने कहा कि हम लोग हर जगह काम कर रहे हैं।
Bihar News Today: बिहार की राजधानी स्थित सीएम सचिवालय में बिहार इंवेस्टर्स मीट 2022 (Bihar Investors Meet 2022) का आयोजन किया गया। मौके पर सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar), डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव (Deputy CM Tejashwi Yadav), वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी, उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ और इंवेस्टर्स माइक्रो माॉक्स से जुड़े डॉ. राजेश अग्रवाल समेत कई अधिकारी और उद्योगपति मौजूद थे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि 2007 में इथनॉल के लिए काम शुरू किया लेकिन केन्द्र सरकार ने उसी समय इसे स्वीकार कर लिया होता तो 24 हजार करोड़ रुपए का बिहार को फायदा होता। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोग हर जगह काम कर रहे हैं।
नीतीश कुमार ने सभी जिलों के डीएम, एसपी को कहा गया है कि किसी भी इंडस्ट्री वाले को कोई परेशान तो नहीं कर रहा है, इस पर पूरी निगरानी रखें। कुछ पता चले तो तुरंत सख्त कार्रवाई करें। नीतीश कुमार ने इंवेस्टर्स को आश्वासन दिया कि सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी जाएगी बियाडा के लिए लॉजिस्टिक पॉलिसी बनाई जाएगी ताकि इसे वेअर हाउस (गोदाम) को दिया जा सकेगा।
वहीं डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद लोग कह रहे हैं कि बिहार में जंगल राज की वापसी। आपको परशेप्सन बनाना हो तो डाटा देखेंगे ना. . । कोई कह देगा बिहार में जंगलराज है जंगलराज हो जाएगा। कहां से एक दिन में जंगलराज आ गया ? काम करने वाले की बड़ाई नहीं होती। तेजस्वी ने कहा कि जो भी अच्छा सुझाव आएगा उस पर सरकार काम करेगी। रोड से लेकर पुल-पुलियों पर बिहार में काफी काम किया गया है। हमारी सरकार इंवेस्टर्स के लिए बिहार में रेड कार्पेट बिछाए हुए हैं। आपलोगों का बिहार में स्वागत है।
वहीं, उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ ने कहा कि हमारी सरकार 17 हजार रोजी रोजगार करने वाले लोगों को दो माह में मालिक बनाने जा रही है। हर जिले में लैंड बैंक बनाया जा जा रहा है। वहीं जीविका के सीईओ राहुल कुमार ने कहा कि जीविका के जरिए बिहार में 10 लाख 35 हजार महिलाओं के समूह का संचालन किया जा रहा है।
|
Bihar News Today: बिहार की राजधानी स्थित सीएम सचिवालय में बिहार इंवेस्टर्स मीट दो हज़ार बाईस का आयोजन किया गया। नीतीश कुमार ने कहा कि हम लोग हर जगह काम कर रहे हैं। Bihar News Today: बिहार की राजधानी स्थित सीएम सचिवालय में बिहार इंवेस्टर्स मीट दो हज़ार बाईस का आयोजन किया गया। मौके पर सीएम नीतीश कुमार , डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव , वित्त मंत्री विजय कुमार चौधरी, उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ और इंवेस्टर्स माइक्रो माॉक्स से जुड़े डॉ. राजेश अग्रवाल समेत कई अधिकारी और उद्योगपति मौजूद थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि दो हज़ार सात में इथनॉल के लिए काम शुरू किया लेकिन केन्द्र सरकार ने उसी समय इसे स्वीकार कर लिया होता तो चौबीस हजार करोड़ रुपए का बिहार को फायदा होता। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोग हर जगह काम कर रहे हैं। नीतीश कुमार ने सभी जिलों के डीएम, एसपी को कहा गया है कि किसी भी इंडस्ट्री वाले को कोई परेशान तो नहीं कर रहा है, इस पर पूरी निगरानी रखें। कुछ पता चले तो तुरंत सख्त कार्रवाई करें। नीतीश कुमार ने इंवेस्टर्स को आश्वासन दिया कि सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी जाएगी बियाडा के लिए लॉजिस्टिक पॉलिसी बनाई जाएगी ताकि इसे वेअर हाउस को दिया जा सकेगा। वहीं डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद लोग कह रहे हैं कि बिहार में जंगल राज की वापसी। आपको परशेप्सन बनाना हो तो डाटा देखेंगे ना. . । कोई कह देगा बिहार में जंगलराज है जंगलराज हो जाएगा। कहां से एक दिन में जंगलराज आ गया ? काम करने वाले की बड़ाई नहीं होती। तेजस्वी ने कहा कि जो भी अच्छा सुझाव आएगा उस पर सरकार काम करेगी। रोड से लेकर पुल-पुलियों पर बिहार में काफी काम किया गया है। हमारी सरकार इंवेस्टर्स के लिए बिहार में रेड कार्पेट बिछाए हुए हैं। आपलोगों का बिहार में स्वागत है। वहीं, उद्योग मंत्री समीर कुमार महासेठ ने कहा कि हमारी सरकार सत्रह हजार रोजी रोजगार करने वाले लोगों को दो माह में मालिक बनाने जा रही है। हर जिले में लैंड बैंक बनाया जा जा रहा है। वहीं जीविका के सीईओ राहुल कुमार ने कहा कि जीविका के जरिए बिहार में दस लाख पैंतीस हजार महिलाओं के समूह का संचालन किया जा रहा है।
|
मूलोँ की सीमा
यहाँ स्पष्ट है कि ( श्र - प्र . ) ( श्र - श्र ३ ) (श्र - श्रत) के सब खण्ड धन हैं औौर (क - श्र१) (क - श्र३)......(क-अ) ये -सब खण्ड ऋण हैं । और ऊपर की युक्ति से फा (श्र) और फा (क) ये दोनोँ सर्वदा धन अर्थात् एक ही चिन्ह के हैं। _इसलिये फ (अ) और फ (क) ये दोनोँ क्रम से तभी एक या विरुद्ध चिन्ह के होते हैं जब सम्भाव्य मूलों की अर्थात् अ अ३,...श्रत इनकी संख्या सम या विषम होती है । ६६ - ऊपर की युक्ति की विलोम विधि से यह सिद्ध होता है कि यदि फ (य) मेँ य के स्थान में उत्थापित जो दो संख्यायें विरुद्ध चिन्ह के फल को उत्पन्न करती हैं तो उन संख्याओं के बीच फ् (य) = ० इसके मूलोँ की विषम संख्या पड़ी है और यदि वे संख्यायें एक चिन्ह के फलोँ को उत्पन्न करती है तो उनके बीच या तो समीकरण का कोई मूल नहीं है या मूलोँ की सम संख्या पड़ी है ।
ऊपर अ को भी अ, श्रृ३,... अत से छोटा मान लेने से वह क को श्र, श्रृ2,...घ्र से बड़ा मान लेने से यह स्पष्ट है कि फ (अ) और फ (क) यदि एक ही चिन्ह के हाँ तो सम्भव है कि श्र और क के बीच फ (य) = ० इसका कोई मूल न पड़ा हो ।
इस सिद्धान्त के अन्तर्गत १६वें प्रक्रम का सिद्धान्त है इसलिये इसके बल से उस में की बात सिद्ध हो जाती है।
|
मूलोँ की सीमा यहाँ स्पष्ट है कि के सब खण्ड धन हैं औौर ...... ये -सब खण्ड ऋण हैं । और ऊपर की युक्ति से फा और फा ये दोनोँ सर्वदा धन अर्थात् एक ही चिन्ह के हैं। _इसलिये फ और फ ये दोनोँ क्रम से तभी एक या विरुद्ध चिन्ह के होते हैं जब सम्भाव्य मूलों की अर्थात् अ अतीन,...श्रत इनकी संख्या सम या विषम होती है । छयासठ - ऊपर की युक्ति की विलोम विधि से यह सिद्ध होता है कि यदि फ मेँ य के स्थान में उत्थापित जो दो संख्यायें विरुद्ध चिन्ह के फल को उत्पन्न करती हैं तो उन संख्याओं के बीच फ् = शून्य इसके मूलोँ की विषम संख्या पड़ी है और यदि वे संख्यायें एक चिन्ह के फलोँ को उत्पन्न करती है तो उनके बीच या तो समीकरण का कोई मूल नहीं है या मूलोँ की सम संख्या पड़ी है । ऊपर अ को भी अ, श्रृतीन,... अत से छोटा मान लेने से वह क को श्र, श्रृदो,...घ्र से बड़ा मान लेने से यह स्पष्ट है कि फ और फ यदि एक ही चिन्ह के हाँ तो सम्भव है कि श्र और क के बीच फ = शून्य इसका कोई मूल न पड़ा हो । इस सिद्धान्त के अन्तर्गत सोलहवें प्रक्रम का सिद्धान्त है इसलिये इसके बल से उस में की बात सिद्ध हो जाती है।
|
सावन माह का यह चौथा सोमवार 16 अगस्त 2021 पड़ रहा है. कहा जाता है कि अगर किसी कारणवश आप पहले तीन सोमवार का व्रत नहीं रख सके हैं तो इस चौथे सोमवार का व्रत अवश्य रहना चाहिए. सावन के इस अंतिम सोमवार को माता पार्वती एवं भगवान शिव का षोडषोपचार विधि से पूजा करनी चाहिए. चौथे सोमवार को शिव मंदिर में शिव पुराण का पाठ करते हैं. कहते हैं शिव पुराण का पाठ करने अथवा सुनने से भक्तों पर शिवजी की विशेष कृपा बरसती है. अगर कोरोना काल के गाइड लाइन्स को फालो करते हुए घर से बाहर निकलना संभव नहीं है तो शिव-भक्तों को घर पर ही शिवलिंग की विधिवत पूजा करके शिव पुराण पढ़ना चाहिए. शिव पुराण पढ़ने से पहले शिवलिंग का गंगाजल एवं पंचामृत से अभिषेक कर बेल-पत्र, पुष्प एवं अबीर अवश्य चढ़ाना चाहिए. कहते हैं कि सावन के अंतिम सोमवार की पूजा में समस्त शिव परिवार की पूजा करने से भगवान शिव की कृपा से सुख, शांति एवं मान-सम्मान की प्राप्ति होती है.
सोमवार की प्रातःकाल उठकर स्नानादि के पश्चात स्वच्छ वस्त्र पहनकर सूर्य देव को जल अर्पित करने के बाद घर के मंदिर की अच्छे से सफाई करके उस पर गंगाजल का छिड़काव करें. अब शिव पूजन के लिए मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा करें. अगर यह संभव नहीं है तो भगवान शिव की तस्वीर की भी पूजा की जा सकती है. इसके पश्चात घर पर ही शिवलिंग को अच्छी से धोकर गंगाजल से स्नान करायें, अब दही, शक्कर, शहद, दूध, दही अर्पित करें. इसके बाद फूल, बेलपत्र, धतूरा, भस्म, शमी पत्र, बर्फी एवं नारियल चढ़ाएं. शिवलिंग की पूजा करने के बाद शिवलिंग की परिक्रमा डेढ़ परिक्रमा करें. पूजा के दरम्यान ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें. अंतिम में भगवान शिव जी की आरती करें. अगले दिन प्रातःकाल सुर्योदय से पूर्व स्नानादि करके किसी ब्राह्मण को अन्न-वस्त्र दान देने के बाद पारण करें.
|
सावन माह का यह चौथा सोमवार सोलह अगस्त दो हज़ार इक्कीस पड़ रहा है. कहा जाता है कि अगर किसी कारणवश आप पहले तीन सोमवार का व्रत नहीं रख सके हैं तो इस चौथे सोमवार का व्रत अवश्य रहना चाहिए. सावन के इस अंतिम सोमवार को माता पार्वती एवं भगवान शिव का षोडषोपचार विधि से पूजा करनी चाहिए. चौथे सोमवार को शिव मंदिर में शिव पुराण का पाठ करते हैं. कहते हैं शिव पुराण का पाठ करने अथवा सुनने से भक्तों पर शिवजी की विशेष कृपा बरसती है. अगर कोरोना काल के गाइड लाइन्स को फालो करते हुए घर से बाहर निकलना संभव नहीं है तो शिव-भक्तों को घर पर ही शिवलिंग की विधिवत पूजा करके शिव पुराण पढ़ना चाहिए. शिव पुराण पढ़ने से पहले शिवलिंग का गंगाजल एवं पंचामृत से अभिषेक कर बेल-पत्र, पुष्प एवं अबीर अवश्य चढ़ाना चाहिए. कहते हैं कि सावन के अंतिम सोमवार की पूजा में समस्त शिव परिवार की पूजा करने से भगवान शिव की कृपा से सुख, शांति एवं मान-सम्मान की प्राप्ति होती है. सोमवार की प्रातःकाल उठकर स्नानादि के पश्चात स्वच्छ वस्त्र पहनकर सूर्य देव को जल अर्पित करने के बाद घर के मंदिर की अच्छे से सफाई करके उस पर गंगाजल का छिड़काव करें. अब शिव पूजन के लिए मिट्टी की प्रतिमा बनाकर पूजा करें. अगर यह संभव नहीं है तो भगवान शिव की तस्वीर की भी पूजा की जा सकती है. इसके पश्चात घर पर ही शिवलिंग को अच्छी से धोकर गंगाजल से स्नान करायें, अब दही, शक्कर, शहद, दूध, दही अर्पित करें. इसके बाद फूल, बेलपत्र, धतूरा, भस्म, शमी पत्र, बर्फी एवं नारियल चढ़ाएं. शिवलिंग की पूजा करने के बाद शिवलिंग की परिक्रमा डेढ़ परिक्रमा करें. पूजा के दरम्यान ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें. अंतिम में भगवान शिव जी की आरती करें. अगले दिन प्रातःकाल सुर्योदय से पूर्व स्नानादि करके किसी ब्राह्मण को अन्न-वस्त्र दान देने के बाद पारण करें.
|
लंबे बाल कई लड़कियों का सपना है। स्मार्ट बालों के मालिक हमेशा किसी भी व्यक्ति की आंखों में दिलचस्प और आकर्षक होंगे। वर्तमान में, लंबे बाल के लिए कई स्टाइल और हेयर स्टाइल हैं। सच है, हर महिला स्वतंत्र रूप से उसके सिर पर कुछ खड़ा नहीं कर सकती है। इसके लिए समय और कुछ कौशल की आवश्यकता है।
लेकिन हमेशा एक सुंदर और असाधारण केश विन्यास नहींएक ब्यूटी सैलून या एक रचनात्मक बाल स्टाइलिस्ट की यात्रा की आवश्यकता है। एक नियमित कंघी की मदद से, कई हेयरपिन और, ज़ाहिर है, मिनटों के मामले में अपने खुद के बाल आप अपने आप को हेयरड्रेसिंग कला का वास्तव में उत्कृष्ट कृति बना सकते हैं। सरल लेकिन सुरुचिपूर्ण स्टाइलिंग की इस श्रेणी में बालों से बाल कटवाने "बैंट" है।
एक कदम। सबसे पहले, ध्यान से कंघी करना जरूरी हैबाल, ताकि वे चिकनी हो जाएं और भ्रमित न हों। सबसे अच्छा, "बैंट" हेयर स्टाइल बहुत ताजा बाल नहीं रखेगा, यानी रात को या उससे पहले भी धोया जाता है। बहुत साफ बाल बहुत शराबी है, और नीचे रखना मुश्किल है।
प्रारंभिक बाल फोम के साथ लागू किया जाना चाहिए(मूस) या वार्निश के साथ उन्हें छिड़के। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि तारों को बाद में खारिज नहीं किया जाता है और उन्हें फॉर्म को अच्छी तरह से रखा जाता है। बालों के लिए फोम (मूस) के बजाय, आप जेल की एक छोटी मात्रा का उपयोग कर सकते हैं, जो भविष्य के केश के मूल रूप को संरक्षित रखने में भी मदद करता है। मुख्य बात जेल के साथ बहुत दूर नहीं जाना है, अन्यथा बालों को गंदे और बेकार हो सकते हैं।
सूखे बालों पर "बैंट" बनाने के लिए बेहतर हैबिछाने की प्रक्रिया बहुत आसान होगी। लंबे बालों के मालिक पूरी तरह से जानते हैं कि गीले बालों को मिलाकर सिफारिश नहीं की जाती है, क्योंकि इससे उनकी क्षति होती है।
दो कदम। एक उच्च टट्टू पूंछ में बाल ले लीजिए। यह कहीं भी सिर पर (कशेरुक पर, तरफ से) किया जा सकता है। सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि यह वास्तव में "बैंट" की व्यवस्था करना चाहेगा।
बालों से लोचदार की आखिरी बारी में गठित किया जाता हैपाश। उसी समय, पूंछ का मुक्त अंत आगे अनुमानित है। यह कुल लंबाई के लगभग एक चौथाई होना चाहिए। यह अंत है जो भविष्य के केंद्रीय भाग "बैंट" के रूप में कार्य करेगा।
एक लोचदार बैंड के साथ बालों को सुरक्षित रूप से तेज करना महत्वपूर्ण है, ताकि पूंछ विघटित न हो और "बैंट" हेयरडोज जल्द ही खराब न हो जाए।
चरण तीन। बालों से परिणामी पाश आधा में बांटा गया है। प्रत्येक आधे से "बैंट" के दो तरफ के रूप में। एक दर्पण में सभी प्रक्रियाओं की निगरानी करना आवश्यक है कि हेयरड्रेस सटीक हो गया।
चरण चार। एक केंद्रीय बनाने के लिए बालों के निः शुल्क छोर से"बैंट" का हिस्सा। ऐसा करने के लिए, स्ट्रैंड वापस फेंक दिया जाता है, एक लोचदार बैंड के नीचे घाव, आगे लाया, फिर वापस फेंक दिया और अदृश्यता के साथ तय किया। अधिक विश्वसनीय निर्धारण के लिए, आप वार्निश का उपयोग कर सकते हैं, फिर बाल टूट जाएंगे।
चरण पांच। "बैंट" के केंद्रीय भाग के निर्माण के बाद, साइड हिस्सों को उचित रूप से आकार देने के लिए आवश्यक है। ऐसा करने के लिए, वे सीधे, थोड़ा धक्का और वार्निश के साथ छिड़काव सीधा।
|
लंबे बाल कई लड़कियों का सपना है। स्मार्ट बालों के मालिक हमेशा किसी भी व्यक्ति की आंखों में दिलचस्प और आकर्षक होंगे। वर्तमान में, लंबे बाल के लिए कई स्टाइल और हेयर स्टाइल हैं। सच है, हर महिला स्वतंत्र रूप से उसके सिर पर कुछ खड़ा नहीं कर सकती है। इसके लिए समय और कुछ कौशल की आवश्यकता है। लेकिन हमेशा एक सुंदर और असाधारण केश विन्यास नहींएक ब्यूटी सैलून या एक रचनात्मक बाल स्टाइलिस्ट की यात्रा की आवश्यकता है। एक नियमित कंघी की मदद से, कई हेयरपिन और, ज़ाहिर है, मिनटों के मामले में अपने खुद के बाल आप अपने आप को हेयरड्रेसिंग कला का वास्तव में उत्कृष्ट कृति बना सकते हैं। सरल लेकिन सुरुचिपूर्ण स्टाइलिंग की इस श्रेणी में बालों से बाल कटवाने "बैंट" है। एक कदम। सबसे पहले, ध्यान से कंघी करना जरूरी हैबाल, ताकि वे चिकनी हो जाएं और भ्रमित न हों। सबसे अच्छा, "बैंट" हेयर स्टाइल बहुत ताजा बाल नहीं रखेगा, यानी रात को या उससे पहले भी धोया जाता है। बहुत साफ बाल बहुत शराबी है, और नीचे रखना मुश्किल है। प्रारंभिक बाल फोम के साथ लागू किया जाना चाहिए या वार्निश के साथ उन्हें छिड़के। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि तारों को बाद में खारिज नहीं किया जाता है और उन्हें फॉर्म को अच्छी तरह से रखा जाता है। बालों के लिए फोम के बजाय, आप जेल की एक छोटी मात्रा का उपयोग कर सकते हैं, जो भविष्य के केश के मूल रूप को संरक्षित रखने में भी मदद करता है। मुख्य बात जेल के साथ बहुत दूर नहीं जाना है, अन्यथा बालों को गंदे और बेकार हो सकते हैं। सूखे बालों पर "बैंट" बनाने के लिए बेहतर हैबिछाने की प्रक्रिया बहुत आसान होगी। लंबे बालों के मालिक पूरी तरह से जानते हैं कि गीले बालों को मिलाकर सिफारिश नहीं की जाती है, क्योंकि इससे उनकी क्षति होती है। दो कदम। एक उच्च टट्टू पूंछ में बाल ले लीजिए। यह कहीं भी सिर पर किया जा सकता है। सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि यह वास्तव में "बैंट" की व्यवस्था करना चाहेगा। बालों से लोचदार की आखिरी बारी में गठित किया जाता हैपाश। उसी समय, पूंछ का मुक्त अंत आगे अनुमानित है। यह कुल लंबाई के लगभग एक चौथाई होना चाहिए। यह अंत है जो भविष्य के केंद्रीय भाग "बैंट" के रूप में कार्य करेगा। एक लोचदार बैंड के साथ बालों को सुरक्षित रूप से तेज करना महत्वपूर्ण है, ताकि पूंछ विघटित न हो और "बैंट" हेयरडोज जल्द ही खराब न हो जाए। चरण तीन। बालों से परिणामी पाश आधा में बांटा गया है। प्रत्येक आधे से "बैंट" के दो तरफ के रूप में। एक दर्पण में सभी प्रक्रियाओं की निगरानी करना आवश्यक है कि हेयरड्रेस सटीक हो गया। चरण चार। एक केंद्रीय बनाने के लिए बालों के निः शुल्क छोर से"बैंट" का हिस्सा। ऐसा करने के लिए, स्ट्रैंड वापस फेंक दिया जाता है, एक लोचदार बैंड के नीचे घाव, आगे लाया, फिर वापस फेंक दिया और अदृश्यता के साथ तय किया। अधिक विश्वसनीय निर्धारण के लिए, आप वार्निश का उपयोग कर सकते हैं, फिर बाल टूट जाएंगे। चरण पांच। "बैंट" के केंद्रीय भाग के निर्माण के बाद, साइड हिस्सों को उचित रूप से आकार देने के लिए आवश्यक है। ऐसा करने के लिए, वे सीधे, थोड़ा धक्का और वार्निश के साथ छिड़काव सीधा।
|
एक समतुल्यता स्थापित कर सकते हैं और हम Q* = Q*/H, × H, लिख सकते हैं। यह हमने पहले देखा था कि Q * को H½ और
H के गुणनफल के रूप में विभाजित किया जा सकता है और H2 Q * / H½ के लिए समतुल्य
इसलिए, हमने यहां जो देखा या सीखा है, वह यह है कि इस तरह के समूहों के बीच अंतर हैं। इससे पहले, हमने देखा है कि समूहों के बीच का अंतर या तो कुछ को उपसमूह के गुणनफल के रूप में - विभाजित किया जा सकता है और कुछ को उपसमूह के गुणनफल के रूप में विभाजित नहीं किया जा सकता है। यहां, एक ही अंतर को दूसरे शब्दों में भाग के इस्तेमाल करके फिर से परिभाषित किया जा रहा है। यह है कि क्या हम एक समूह को इसके भागफल के साथ उपसमूह का गुणा जिसके साथ हम भागफल कर रहे हैं, समतुल्य रूप में विभाजित कर सकते हैं। कभी-कभी आप इस तरह से यहां कर सकते हैं, कभी-कभी आप ऐसा नहीं कर सकते हैं और इस सवाल पर वापस आते हैं और मैं इसे आपके लिए खुद से करने वाली समस्या के रूप में छोड़ दूंगा, कृपया इसे हल करें।
आपको इसे दोनों तरीकों से साबित करना आना चाहिए कि जो भी तरीका सही है अगर वह यह समतुल्य है तो आपको इसे साबित करने में सक्षम होना चाहिए। यदि यह समतुल्य नहीं है, तो भी आपको साबित करने में सक्षम होना चाहिए। ठीक है, तो इसका मतलब है कि भागफल कभी-कभी हमें कोई नया समूह देता है। कभी-कभी ऐसा नहीं होता है, जैसे कि Q*/ H½ के मामले में, हमें कोई नया समूह नहीं मिलता है - यह पहले से ही Q* के उपसमूह के रूप में मौजूद है, लेकिन पूर्णांक जैसे मामले हैं जहां हमें नए समूह मिलते हैं। इसलिए, भागफल एक बहुत ही रोचक और बहुत महत्वपूर्ण संचालन है। हम बाद के व्याख्यानों में भी इसका महत्व देखेंगे और हम यह स्थापित करेंगे कि बीजगणित में यह वास्तव में महत्वपूर्ण और मौलिक संचालन है।
अब, समरूपता के साथ इसका संबंध इसके महत्व को और बढ़ाता है। इसलिए, वास्तव में अगर आपको याद है कि मैंने समरूपता के साथ शुरुआत की थी, फिर इस पर आ गए और इस पर इसलिए आये हैं, क्योंकि मैं इस संबंध का पता लगाना चाहता था कि दो समूहों के बीच की समरूपता का भागफल के बारे में क्या प्रभाव है। या, भागफल का एक समरूपता के साथ क्या करना है? और जवाब तो बहुत दिलचस्प है।
|
एक समतुल्यता स्थापित कर सकते हैं और हम Q* = Q*/H, × H, लिख सकते हैं। यह हमने पहले देखा था कि Q * को H½ और H के गुणनफल के रूप में विभाजित किया जा सकता है और Hदो Q * / H½ के लिए समतुल्य इसलिए, हमने यहां जो देखा या सीखा है, वह यह है कि इस तरह के समूहों के बीच अंतर हैं। इससे पहले, हमने देखा है कि समूहों के बीच का अंतर या तो कुछ को उपसमूह के गुणनफल के रूप में - विभाजित किया जा सकता है और कुछ को उपसमूह के गुणनफल के रूप में विभाजित नहीं किया जा सकता है। यहां, एक ही अंतर को दूसरे शब्दों में भाग के इस्तेमाल करके फिर से परिभाषित किया जा रहा है। यह है कि क्या हम एक समूह को इसके भागफल के साथ उपसमूह का गुणा जिसके साथ हम भागफल कर रहे हैं, समतुल्य रूप में विभाजित कर सकते हैं। कभी-कभी आप इस तरह से यहां कर सकते हैं, कभी-कभी आप ऐसा नहीं कर सकते हैं और इस सवाल पर वापस आते हैं और मैं इसे आपके लिए खुद से करने वाली समस्या के रूप में छोड़ दूंगा, कृपया इसे हल करें। आपको इसे दोनों तरीकों से साबित करना आना चाहिए कि जो भी तरीका सही है अगर वह यह समतुल्य है तो आपको इसे साबित करने में सक्षम होना चाहिए। यदि यह समतुल्य नहीं है, तो भी आपको साबित करने में सक्षम होना चाहिए। ठीक है, तो इसका मतलब है कि भागफल कभी-कभी हमें कोई नया समूह देता है। कभी-कभी ऐसा नहीं होता है, जैसे कि Q*/ H½ के मामले में, हमें कोई नया समूह नहीं मिलता है - यह पहले से ही Q* के उपसमूह के रूप में मौजूद है, लेकिन पूर्णांक जैसे मामले हैं जहां हमें नए समूह मिलते हैं। इसलिए, भागफल एक बहुत ही रोचक और बहुत महत्वपूर्ण संचालन है। हम बाद के व्याख्यानों में भी इसका महत्व देखेंगे और हम यह स्थापित करेंगे कि बीजगणित में यह वास्तव में महत्वपूर्ण और मौलिक संचालन है। अब, समरूपता के साथ इसका संबंध इसके महत्व को और बढ़ाता है। इसलिए, वास्तव में अगर आपको याद है कि मैंने समरूपता के साथ शुरुआत की थी, फिर इस पर आ गए और इस पर इसलिए आये हैं, क्योंकि मैं इस संबंध का पता लगाना चाहता था कि दो समूहों के बीच की समरूपता का भागफल के बारे में क्या प्रभाव है। या, भागफल का एक समरूपता के साथ क्या करना है? और जवाब तो बहुत दिलचस्प है।
|
आज के दौर में हर कोई किसी ना किसी से कुछ कहना चाहता है। चाहे वो उसके मन की बात हो या फिर उसके दिल की भड़ास , कई बार प्रेमी सिर्फ इस बात से अपने दिल के हालात बयां नहीं कर पाते की कही उनकी दोस्ती ना टुट जाए। कहना तो कुछ लोग बहुत कुछ चाहते हे लेकिन इस बात से डरते है की कही उन्हे मालूम हुआ की ये बात कौन कह रहा है तो उसका नकारात्मक असर ना पड़े।
इसी दौर में साराहा नाम के एक नये ऐप ने बाजार में अपनी पकड़ बहुत कम समय में ज्यादा मजबूत कर ली है। साराहा ऐप के जरिए आप किसी को भी कोई भी मैसेज भेज सकते है बशर्ते मैसेज पानेवाले की भी साराह में अकाउंट होना चाहिए।
दरअसल इस वेबसाईट या ऐप का इस्तेमाल कर आप किसी भी को भी कोई भी संदेश भेज सकते है। इस ऑनलाइन एप्लिकेशन से मैसेज भेजने वाले के बारे में किसी भी तरह की कोई भी जानकारी मैसेज पाने वाले को नहीं दी जाती है। इस तरह से आपकी बात दूसरो तक पहुंच जाती है वो भी बिना आपका नाम सामने आए।
आपको अपना साराहा प्रोफ़ाइल बनाना होगा जो आप साराहा ऑनलाइन या फिर ऐप डाउनलोड करके बना सकते है। इसके लिए आपको अपना इमेल आईडी और नाम देना होगा। जिसके बाद आपका साराह प्रोफाईल बनकर तैयार हो जाएगा। उपयोगकर्ता अपनी पहचान को टैग करना चुन सकते हैं। रिसीवर ऐप पर, सभी आने वाले संदेशों को इनबॉक्स में दिखाया जाता है।
आपको ये जानकर हैरानी होगी की यह ऐप कुछ ही महिने पुराना है और मिस्र और सऊदी अरब के देशों में काफी मशहुर है। भारत में भी यह ऐप धीरे धीरे बाजार में फैलता जा रहा है साथ ही युवाओं में इस ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने अच्छी खासी पकड़ बना ली है।
गोपनीयता सुविधाओं का अर्थ यहां पर ये है की आप अपने प्रोफाइल सर्च इंजिन से हटा सकते है। जिन लोगों के साथ आप अपनी प्रोफ़ाइल साझा करते हैं, उन्हें सीमित कर सकते हैं। आप अनधिकृत उपयोगकर्ताओं के लिए एक्सेस भी बंद कर सकते हैं।
हर सिक्के के दो पहलु होते है। जहां ये ऑनलाइन एप्लिकेशन आपको बिना अपनी पहचान बताए आपका मैजेस दूसरो तक पहुंचाते है तो वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसका दुरुपयोग भी कर सकते है।
डाउनलोड करें Mumbai live APP और रहें हर छोटी बड़ी खबर से अपडेट।
मुंबई से जुड़ी हर खबर की ताज़ा अपडेट पाने के लिए Mumbai live के फ़ेसबुक पेज को लाइक करें।
(नीचे दिए गये कमेंट बॉक्स में जाकर स्टोरी पर अपनी प्रतिक्रिया दे)
|
आज के दौर में हर कोई किसी ना किसी से कुछ कहना चाहता है। चाहे वो उसके मन की बात हो या फिर उसके दिल की भड़ास , कई बार प्रेमी सिर्फ इस बात से अपने दिल के हालात बयां नहीं कर पाते की कही उनकी दोस्ती ना टुट जाए। कहना तो कुछ लोग बहुत कुछ चाहते हे लेकिन इस बात से डरते है की कही उन्हे मालूम हुआ की ये बात कौन कह रहा है तो उसका नकारात्मक असर ना पड़े। इसी दौर में साराहा नाम के एक नये ऐप ने बाजार में अपनी पकड़ बहुत कम समय में ज्यादा मजबूत कर ली है। साराहा ऐप के जरिए आप किसी को भी कोई भी मैसेज भेज सकते है बशर्ते मैसेज पानेवाले की भी साराह में अकाउंट होना चाहिए। दरअसल इस वेबसाईट या ऐप का इस्तेमाल कर आप किसी भी को भी कोई भी संदेश भेज सकते है। इस ऑनलाइन एप्लिकेशन से मैसेज भेजने वाले के बारे में किसी भी तरह की कोई भी जानकारी मैसेज पाने वाले को नहीं दी जाती है। इस तरह से आपकी बात दूसरो तक पहुंच जाती है वो भी बिना आपका नाम सामने आए। आपको अपना साराहा प्रोफ़ाइल बनाना होगा जो आप साराहा ऑनलाइन या फिर ऐप डाउनलोड करके बना सकते है। इसके लिए आपको अपना इमेल आईडी और नाम देना होगा। जिसके बाद आपका साराह प्रोफाईल बनकर तैयार हो जाएगा। उपयोगकर्ता अपनी पहचान को टैग करना चुन सकते हैं। रिसीवर ऐप पर, सभी आने वाले संदेशों को इनबॉक्स में दिखाया जाता है। आपको ये जानकर हैरानी होगी की यह ऐप कुछ ही महिने पुराना है और मिस्र और सऊदी अरब के देशों में काफी मशहुर है। भारत में भी यह ऐप धीरे धीरे बाजार में फैलता जा रहा है साथ ही युवाओं में इस ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने अच्छी खासी पकड़ बना ली है। गोपनीयता सुविधाओं का अर्थ यहां पर ये है की आप अपने प्रोफाइल सर्च इंजिन से हटा सकते है। जिन लोगों के साथ आप अपनी प्रोफ़ाइल साझा करते हैं, उन्हें सीमित कर सकते हैं। आप अनधिकृत उपयोगकर्ताओं के लिए एक्सेस भी बंद कर सकते हैं। हर सिक्के के दो पहलु होते है। जहां ये ऑनलाइन एप्लिकेशन आपको बिना अपनी पहचान बताए आपका मैजेस दूसरो तक पहुंचाते है तो वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसका दुरुपयोग भी कर सकते है। डाउनलोड करें Mumbai live APP और रहें हर छोटी बड़ी खबर से अपडेट। मुंबई से जुड़ी हर खबर की ताज़ा अपडेट पाने के लिए Mumbai live के फ़ेसबुक पेज को लाइक करें।
|
नई दिल्ली। पाकिस्तान के कप्तान बाबर आजम (Babar Azam) का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कराची के नेशनल स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट में शानदार बल्लेबाजी जारी है। बाबर आजम (Babar Azam) अपने दोहरे शतक के करीब पहुंच गए हैं। ऑस्ट्रेलिया से मिले 506 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही पाकिस्तान मजबूत स्थिति में दिख रही है। बुधवार को मैच का पांचवां और अंतिम दिन है। अंतिम सेशन में पाकिस्तान 4 विकेट पर 350 से ज्यादा का स्कोर बना चुका है।
बाबर आजम (Babar Azam) ने इसके साथ ही चौथी इनिंग में बतौर कप्तान सबसे बड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है। उन्होंने बतौर कप्तान इस मामले में विराट कोहली (Virat Kohli) और रिकी पोंटिंग (Ricky Ponting) जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है। बाबर आजम (Babar Azam) अब किसी टेस्ट मैच की चौथी इनिंग में सबसे ज्यादा स्कोर बनाने वाले दुनिया के पहले कप्तान बन गए हैं।
बाबर आजम (Babar Azam) ने कराची के नेशनल स्टेडियम में ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाफ जारी दूसरे टेस्ट मैच के पांचवें और अंतिम दिन 187 रन बनाते ही यह उपलब्धि हासिल की। इससे पहले, किसी एक टेस्ट मैच की चौथी इनिंग में बतौर कप्तान सर्वाधिक स्कोर बनाने का रिकॉर्ड इंग्लैंड के माइकल अर्थटन के नाम था, जोकि उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 1995 में नाबाद 185 रन बनाए थे। इस लिस्ट में न्यूजीलैंड के बेवन कोंगडन (176), ऑस्ट्रेलिया के डॉन ब्रैडमैन (नाबाद 173), ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग (156), ग्रीम स्मिथ, ब्रायन लारा और विराट कोहली जैसे दिग्गज भी शामिल थे। हालांकि बाबर आजम (Babar Azam) अब इन सबसे आगे निकल चुके हैं।
|
नई दिल्ली। पाकिस्तान के कप्तान बाबर आजम का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कराची के नेशनल स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट में शानदार बल्लेबाजी जारी है। बाबर आजम अपने दोहरे शतक के करीब पहुंच गए हैं। ऑस्ट्रेलिया से मिले पाँच सौ छः रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही पाकिस्तान मजबूत स्थिति में दिख रही है। बुधवार को मैच का पांचवां और अंतिम दिन है। अंतिम सेशन में पाकिस्तान चार विकेट पर तीन सौ पचास से ज्यादा का स्कोर बना चुका है। बाबर आजम ने इसके साथ ही चौथी इनिंग में बतौर कप्तान सबसे बड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है। उन्होंने बतौर कप्तान इस मामले में विराट कोहली और रिकी पोंटिंग जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है। बाबर आजम अब किसी टेस्ट मैच की चौथी इनिंग में सबसे ज्यादा स्कोर बनाने वाले दुनिया के पहले कप्तान बन गए हैं। बाबर आजम ने कराची के नेशनल स्टेडियम में ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाफ जारी दूसरे टेस्ट मैच के पांचवें और अंतिम दिन एक सौ सत्तासी रन बनाते ही यह उपलब्धि हासिल की। इससे पहले, किसी एक टेस्ट मैच की चौथी इनिंग में बतौर कप्तान सर्वाधिक स्कोर बनाने का रिकॉर्ड इंग्लैंड के माइकल अर्थटन के नाम था, जोकि उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक हज़ार नौ सौ पचानवे में नाबाद एक सौ पचासी रन बनाए थे। इस लिस्ट में न्यूजीलैंड के बेवन कोंगडन , ऑस्ट्रेलिया के डॉन ब्रैडमैन , ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग , ग्रीम स्मिथ, ब्रायन लारा और विराट कोहली जैसे दिग्गज भी शामिल थे। हालांकि बाबर आजम अब इन सबसे आगे निकल चुके हैं।
|
शेखपुरा में गुरुवार की तड़के सुबह चार बजे नवगठित नगर पंचायत के शेखोपुरडीह गांव में अचानक एक घर में बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण एक घर में आग लग गई । जिसमें घर में रखे कई समान जल कर राख हो गया। इस घटना में लगभग दो लाख रूपये की संपति जलकर बर्बाद हो गई।
इस बाबत पीड़ित परिवार के महेश सिंह ने बताया कि बिजली आपूर्ति में गड़बड़ी के कारण कभी हाई और कभी लॉ विधुत प्रवाहित होने की वज़ह से घर के कमरे में रखे फ्रीज में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ। जिसके बाद आग पूरे कमरे में फैल गया । आग की चपेट में घर में रखे किसान का गेहूं, चावल, खाट , पलंग , फ्रिज और दैनिक जीवन में उपयोगी कई समान जल कर राख हो गया । शॉर्ट सर्किट का आग घर में इस तरह से फैला कि घर में सो रहे लोग किसी प्रकार से लोग अपना जान बचाने में कामयाब रहे ।
घटना के समय घर वाले गहरी निद्रा में सो रहे थे। अंधेरा होने के वजह से लोग आग पर काबू नही कर सके। बाद में आस पड़ोस के लोगों की मदद से आग पर काबू पाया जा सका। घटना में घर में सोए लोगों की जान बच गई। अन्यथा कई परिवार के लोग आग में झुलस सकते थे। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। घटना के संबंध में पीड़ित द्वारा स्थानीय शेखोपुर सराय थाना पुलिस को सूचना दी गई। पीड़ित ने प्रशासन से आपदा राहत कोष से सरकारी सहायता देने की गुहार लगाई है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
शेखपुरा में गुरुवार की तड़के सुबह चार बजे नवगठित नगर पंचायत के शेखोपुरडीह गांव में अचानक एक घर में बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण एक घर में आग लग गई । जिसमें घर में रखे कई समान जल कर राख हो गया। इस घटना में लगभग दो लाख रूपये की संपति जलकर बर्बाद हो गई। इस बाबत पीड़ित परिवार के महेश सिंह ने बताया कि बिजली आपूर्ति में गड़बड़ी के कारण कभी हाई और कभी लॉ विधुत प्रवाहित होने की वज़ह से घर के कमरे में रखे फ्रीज में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ। जिसके बाद आग पूरे कमरे में फैल गया । आग की चपेट में घर में रखे किसान का गेहूं, चावल, खाट , पलंग , फ्रिज और दैनिक जीवन में उपयोगी कई समान जल कर राख हो गया । शॉर्ट सर्किट का आग घर में इस तरह से फैला कि घर में सो रहे लोग किसी प्रकार से लोग अपना जान बचाने में कामयाब रहे । घटना के समय घर वाले गहरी निद्रा में सो रहे थे। अंधेरा होने के वजह से लोग आग पर काबू नही कर सके। बाद में आस पड़ोस के लोगों की मदद से आग पर काबू पाया जा सका। घटना में घर में सोए लोगों की जान बच गई। अन्यथा कई परिवार के लोग आग में झुलस सकते थे। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। घटना के संबंध में पीड़ित द्वारा स्थानीय शेखोपुर सराय थाना पुलिस को सूचना दी गई। पीड़ित ने प्रशासन से आपदा राहत कोष से सरकारी सहायता देने की गुहार लगाई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
ऑगस्टस III (1734-1763) के तहत रॉयल्टी का महत्व और भी कम हो गया (कैसे "ग्रेटर पोलैंड" गिर गया) पोलैंड के हिंसक चित्रमाला की तुलना में सैक्सन राजकुमार अपने मूल सैक्सोनी को बहुत प्रिय था। राजा को राज्य के मामले पसंद नहीं थे, अपने पिता की तरह, वह एक सुंदर जीवन पसंद करता था, उसने अपने दरबार और कला वस्तुओं के अधिग्रहण पर बड़ी रकम खर्च की थी।
अगस्त ने सभी मामलों को अपने पहले मंत्री और पसंदीदा, काउंट हेनरिक वॉन ब्रुहल को सौंपा। व्यर्थ और लालची ब्रुहल ने दर्जनों पदों पर कब्जा कर लिया, अपने आश्रितों की मदद से, उन्होंने देश के लिए एक विनाशकारी कर नीति अपनाई, संपत्ति अर्जित की और अपने दरबार और विलासिता पर बहुत पैसा खर्च किया। राजा और उसके पहले मंत्री की मूर्खता और लालच ने दूसरे सिलेसियन युद्ध (1744-1745) और सात साल के युद्ध में हार का नेतृत्व किया। अगस्त और ब्रुहल को पोलैंड भागना पड़ा, जहां वे सात साल के युद्ध के अंत तक बने रहे।
अगस्त राज्य की आवश्यकता के कारण पोलैंड आया, लेकिन वहां भी वह बेलोवेज़्स्काया पुचा में शिकार करने के लिए समय बिताना पसंद करता था। 1736 का केवल एक आहार सफलतापूर्वक समाप्त हो सका। कानून, न्यायिक और कर प्रणाली, वित्त और सेना को अस्त-व्यस्त कर दिया गया। कोई मजबूत कार्यकारी शक्ति नहीं थी। निर्णय लेने में सर्वसम्मति के सिद्धांत ("फ्री वीटो" - लैट। लिबरम वीटो) ने उचित प्रस्तावों सहित अधिकांश प्रस्तावों को अवरुद्ध कर दिया। इस प्रकार, 1652 से 1764 तक, 55 सीमास में से, 48 बाधित हो गए थे (केवल एक डिप्टी के वोट से एक महत्वपूर्ण हिस्सा)। समाज की नैतिक स्थिति को मैग्नेट और पैन के वर्चस्व से कम आंका गया था, जो "हमारे बाद, यहां तक कि एक बाढ़" के सिद्धांत के अनुसार रहते थे। साधारण कुलीन अपनी पत्नियों और बेटियों को किसी भी पसंद के लिए रखैल के रूप में राजघरानों को देने के लिए तैयार थे, और राजघरानों ने भी राजा को प्रभावित करने की कोशिश की।
कैथोलिक चर्च के हुक्म से स्थिति और खराब हो गई, जिसने रूढ़िवादी और प्रोटेस्टेंट पर हमेशा नए प्रतिबंध लगाने की मांग की। और राष्ट्रमंडल में रूढ़िवादी और प्रोटेस्टेंट का प्रतिशत कम से कम 40 था। पान के उत्पीड़न और धार्मिक उत्पीड़न ने अभी भी पश्चिमी रूसी भूमि (वर्तमान यूक्रेन) में विद्रोह का कारण बना।
XNUMX वीं शताब्दी में राष्ट्रमंडल की सैन्य शक्ति काफ़ी कमजोर हो गई। पड़ोसियों ने नियमित सेनाएँ बनाईं, जहाँ पैदल सेना और तोपखाने की भूमिका में काफी वृद्धि हुई। पोलिश घुड़सवार सेना, प्रत्येक घुड़सवार सेना के अच्छे व्यक्तिगत प्रशिक्षण, उसके साहस और तेज के बावजूद, स्वीडन, रूस और प्रशिया की नियमित सेनाओं का विरोध नहीं कर सकी।
इस अवधि के दौरान पोलिश क्षेत्र पड़ोसी राज्यों की सेनाओं के लिए एक वास्तविक प्रवेश द्वार बन गया। उत्तरी युद्ध के दौरान, रूसियों, स्वीडन और सैक्सन ने पोलैंड में लड़ाई लड़ी, खुद डंडे की गिनती नहीं की। 1735-1739 के रूसी-तुर्की युद्ध के दौरान। राष्ट्रमंडल के दक्षिणी क्षेत्रों में, रूसी, तुर्की और क्रीमियन सैनिकों ने काम किया। और सात साल के युद्ध के दौरान, रूस और प्रशिया पोलैंड के उत्तरी भाग में लड़े। लगभग इस समय, क्रीमियन टाटर्स ने नियमित रूप से राष्ट्रमंडल के दक्षिणी भाग में छापे मारे, जहाँ उन्होंने कभी भी एक शक्तिशाली रक्षा रेखा नहीं बनाई, जैसा कि रूस में था।
इस सबने पोलैंड को एक बेचैन पड़ोसी बना दिया, जिसकी राजनीति पर्यावरण से प्रभावित थी। स्वाभाविक रूप से, पीटर्सबर्ग को यह पसंद नहीं आया। इसके अलावा, रूस ने अपने पड़ोसी के खिलाफ छोटे-मोटे दावे भी जमा किए हैं। खासकर सीमा विवाद। इसलिए, 1753 में, क्षेत्र की टोही के परिणामों के अनुसार, यह पता चला कि, 1686 की शाश्वत शांति के विपरीत, 988 वर्ग मील की रूसी भूमि अवैध रूप से पोलिश कब्जे में रही, जिसमें स्ट्रोडब, चेर्निहाइव और कीव को सौंपे गए क्षेत्र शामिल थे। रेजिमेंट (हेटमैनेट में एक प्रशासनिक-क्षेत्रीय इकाई)। रूसी और पोलिश अधिकारियों के बीच लगातार विवादों के दौरान, सीमा केवल स्मोलेंस्क प्रांत से कीव तक तय की गई थी, इसके बाकी हिस्सों में यह खुला था। इसका लाभ उठाते हुए, पोलिश अधिकारियों ने राइट बैंक के 10 शहरों को मनमाने ढंग से आबाद किया, जो कि 1686 के समझौते के अनुसार, विवादित के रूप में पहचाने गए थे और निपटान के अधीन नहीं थे।
विवाद के और भी कारण थे। इस प्रकार, 1764 तक पोलिश सेजम ने 1686 की शाश्वत शांति की पुष्टि करने से इनकार कर दिया। यही है, डंडे ने औपचारिक रूप से रूस के लिए लेफ्ट बैंक और कीव को मान्यता देने से इनकार कर दिया। इसके अलावा, राष्ट्रमंडल यूरोपीय देशों में से अंतिम था जो रूसी संप्रभुओं के लिए शाही उपाधि को मान्यता नहीं देता था।
एक और समस्या जो रूसी साम्राज्य और पोलैंड के बीच संबंधों को जटिल बना रही थी, वह थी रूस से हजारों रूसी लोगों का राष्ट्रमंडल में जाना। रूसी सेना से हजारों रेगिस्तानी लोग पोलैंड भाग गए, वे किसान जो 120वीं शताब्दी में गंभीर रूप से गुलाम थे। केवल स्मोलेंस्क के पश्चिम के क्षेत्रों में लगभग XNUMX हजार आत्माएं थीं (केवल पुरुषों को माना जाता था)।
तथ्य यह है कि लॉर्ड्स, जिन्होंने अपने किसानों (पोलिश और रूसी दोनों) को "मवेशी" -मवेशी में बदल दिया, ने नए लोगों के साथ अलग व्यवहार किया। प्रारंभिक चरण में, उन्हें अनुग्रह दिया जाता था, पूर्व सैनिकों को अक्सर पैन और मैग्नेट के निजी दस्तों में ले जाया जाता था, कुछ को रईसों में भी नामांकित किया जाता था, जो कुलीनता के नकली पत्र बनाते थे।
सीमावर्ती भूमि में हजारों लुटेरे दिखाई दिए, पूरे गिरोह ने क्रीमियन की शैली में घेराबंदी के माध्यम से छापा मारा और लूट को "छत" - धूपदान के साथ साझा किया। स्वाभाविक रूप से, इसने रूसी कुलीनता और अधिकारियों को परेशान किया।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यदि रुरिकोविच और बोरिस गोडुनोव ने अपने शासन के तहत सभी रूसी भूमि को एकजुट करने की कोशिश की जो पुराने रूसी राज्य का हिस्सा थे, तो रोमनोव की एक अलग नीति थी। मिखाइल फेडोरोविच की सरकार ने केवल स्मोलेंस्क को वापस लेने का फैसला किया, जो मुसीबतों के समय में हार गया था, लेकिन हार गया था। मॉस्को ने राष्ट्रमंडल के मामलों में और हस्तक्षेप नहीं किया होता अगर इसके विघटन और बोगदान खमेलनित्सकी के नेतृत्व में रूसी लोगों का राष्ट्रीय मुक्ति युद्ध शुरू नहीं हुआ होता।
अलेक्सी मिखाइलोविच की सरकार, जाहिरा तौर पर पोलैंड की शक्ति से डरती थी, जिसने मुसीबतों के समय के दौरान लगभग अपने राजा को मास्को में लगाया, बहुत लंबे समय तक दक्षिण और पश्चिम रूसी मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया। बोगदान खमेलनित्सकी ने लगातार रूस में शामिल होने के लिए कहा, लेकिन tsarist सरकार ने सतर्क नीति अपनाई। केवल जब यह स्पष्ट हो गया कि राष्ट्रमंडल लिटिल रूस को पकड़ नहीं सकता है, और रूस के हस्तक्षेप के बिना, तुर्की और क्रीमियन खानटे वहां फिट होंगे, मास्को ने रूसी भूमि के पुनर्मिलन के लिए एक युद्ध शुरू किया।
पीटर I रूसी भूमि के पुनर्मिलन के मुद्दे के प्रति उदासीन था। सबसे पहले, उन्होंने बाल्टिक्स के माध्यम से यूरोप के लिए एक खिड़की काट दी, फिर जर्मन मामलों में सिर झुका लिया, जर्मन राज्यों के शासकों के साथ वंशवादी विवाहों की एक श्रृंखला आयोजित की। उस समय से, रोमनोव ने जर्मन महिलाओं से शादी की, और जर्मन मामलों (आमतौर पर यूरोपीय) अन्य क्षेत्रों की हानि के लिए प्राथमिकता में थे। यद्यपि उत्तरी युद्ध के दौरान राष्ट्रमंडल पूरी तरह से पराजित और तबाह हो गया था, यह वास्तव में केवल रूसी सेना और उदार सामग्री सहायता के समर्थन से ही जीवित रहा। इस समय, प्योत्र अलेक्सेविच ने रूसी भूमि और लोगों के पुनर्मिलन के मुद्दे को आसानी से हल कर लिया होगा। यदि रूसी ज़ार ने Cossacks को नीपर के दाहिने किनारे को लेने का आदेश दिया तो पोलैंड कोई प्रतिरोध नहीं दे सकता था।
अन्ना इयोनोव्ना और एलिजाबेथ पेत्रोव्ना की सरकारें भी लिटिल एंड व्हाइट रूस की तुलना में जर्मन मामलों में अधिक रुचि रखती थीं। एलिजाबेथ, सात साल के युद्ध में अपनी सफलताओं के दौरान, यहां तक कि पूर्वी प्रशिया को साम्राज्य में मिलाने जा रही थी।
केवल कैथरीन द्वितीय, एक वास्तविक रूसी जर्मन, ने रूस के लिए इस सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य को हल किया, साथ ही उत्तरी काला सागर क्षेत्र को हमारे नियंत्रण में वापस करने का कार्य भी हल किया। साम्राज्ञी ने जर्मनी के मामलों में रूसी हस्तक्षेप की निरर्थकता को महसूस किया और अपनी आँखें राष्ट्रमंडल की ओर मोड़ लीं। बुद्धिमान रानी ने जर्मनों की अधिक संख्या के राज्य तंत्र को साफ करना शुरू कर दिया, उन्हें रूसियों और रूसी सिंहासन और कारण के लिए समर्पित अन्य राष्ट्रों के प्रतिनिधियों के साथ बदल दिया। कैथरीन के कई जर्मन रिश्तेदारों में से किसी को भी रूस में जिम्मेदारी का पद नहीं मिला।
1750 के दशक के अंत में, पोलिश राजा अगस्त III बीमार पड़ने लगे। पोलिश दिग्गज उसके उत्तराधिकारी के बारे में सोचने लगे। पार्टियों ने आकार लेना शुरू कर दिया, जिनके सिंहासन पर उनके आश्रित थे। सैक्सन राजा स्वयं सिंहासन को अपने पुत्र फ्रेडरिक क्रिश्चियन को हस्तांतरित करना चाहता था। सैक्सन पार्टी का नेतृत्व पहले मंत्री ब्रुहल, उनके दामाद मार्शल, कोर्ट क्राउन मनिसजेक और शक्तिशाली पोटोकी परिवार ने किया था।
सक्सोन पार्टी के खिलाफ राजकुमारों का एक और शक्तिशाली कबीला Czartoryski सामने आया। इस कबीले ने पोनियातोव्स्की परिवार के साथ मिलकर राजनीतिक दल "परिवार" का गठन किया। प्रिंसेस ज़ार्टोरिस्की लिथुआनिया गेडिमिनोविच के ग्रैंड ड्यूक्स से उतरे और पोलैंड में कई सुधार करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने तर्क दिया कि केवल पियास्ट राजवंश का एक प्रतिनिधि पोलैंड का नया राजा होना चाहिए, हालांकि इस परिवार के वैध प्रतिनिधि लंबे समय से मर चुके थे। और परिवार के सदस्यों का पाइस्ट्स से कोई लेना-देना नहीं था। सेंट पीटर्सबर्ग में, उन्होंने दिखावा किया कि वे पोलिश वंशावली को नहीं समझते हैं और पियास्ट को रूस के प्रति वफादार कोई भी मैग्नेट कहा जाता है।
माज़ोविया के वॉयवोड और क्राको स्टैनिस्लाव पोनियातोव्स्की (1676-1762) के कश्तेलियन उपनाम से जुड़े। उनकी पत्नी कॉन्स्टेंस थीं, जो विल्ना कैस्टेलन की बेटी और महान लिथुआनियाई उप-कुलपति काज़िमिर ज़ार्टोरिस्की थीं, जिन्होंने स्टास के करियर में बहुत योगदान दिया। पोनियातोव्स्की, पोलिश लॉर्ड्स के विशाल बहुमत की तरह, कोई नैतिक सिद्धांत नहीं थे, कोई स्पष्ट राजनीतिक विश्वास नहीं था, और केवल अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए काम किया।
व्यक्तिगत हितों की खातिर, उन्होंने सबसे पहले स्टानिस्लाव लेशिंस्की की सेवा की, जो स्वेड्स की तरफ से लड़े। पोल्टावा के बाद, वह तुर्की भाग गया, जहाँ उसने ओटोमन्स को रूसियों के साथ युद्ध शुरू करने के लिए उकसाया। यह महसूस करते हुए कि लेशचिंस्की बिट का नक्शा, वह ऑगस्टस II के पास गया। ऑगस्टस की मृत्यु के बाद, उसने स्वयं राजाओं में रेंगने की कोशिश की, लेकिन नहीं कर सका। पोलिश उत्तराधिकार के युद्ध के दौरान, वह फिर से लेशचिंस्की की तरफ चला गया, उसके साथ डेंजिग में घेराबंदी कर बैठा (कैसे रूसी "शांतिरक्षकों" ने पोलिश राजाओं को सिंहासन पर बिठाया) जब लेशचिंस्की मामला बर्बाद हो गया, तो स्टास ने अगस्त III के शिविर के लिए उड़ान भरी, उनके मुख्य सलाहकारों में से एक बन गया।
1732 में स्टास का एक बेटा था, जिसका नाम स्टैनिस्लाव भी था। स्टानिस्लाव द यंगर ने अपना अधिकांश समय सैक्सोनी की राजधानी ड्रेसडेन में शाही दरबार में बिताया। वहां, युवक को ब्रिटिश राजदूत चार्ल्स विलियम्स (विलियम्स) से प्यार हो गया। 1755 में, विलियम्स को पीटर्सबर्ग में राजदूत के रूप में भेजा गया था। वह स्टानिस्लाव को अपने साथ ले जाता है। एलिजाबेथ पेत्रोव्ना के चरित्र को जानने के बाद, विलियम्स ने एक भी गेंद और बहाना नहीं छोड़ा, लेकिन वह साम्राज्ञी के दल में घुसपैठ नहीं कर सका। फिर उसने कैथरीन के सिंहासन के उत्तराधिकारी की पत्नी की ओर ध्यान आकर्षित किया। ग्रैंड डचेस ने ब्रिटान से पैसे लिए और पोनियातोव्स्की उसकी पसंदीदा बन गई।
विलियम्स ने 1757 में पीटर्सबर्ग छोड़ दिया, जबकि पोनियातोव्स्की सैक्सोनी के दूत और राजकुमारी के प्रेमी के रूप में बने रहे। एलिजाबेथ ने कुछ समय के लिए इन साज़िशों से आंखें मूंद लीं। सौभाग्य से, कैथरीन के पति, ग्रैंड ड्यूक पीटर, को पता था, पोनियातोव्स्की के साथ दोस्ती की, और उन्होंने एक साथ आनंद लिया। लेकिन जब राजधानी में अफवाहें फैलीं, तो स्टास को रूस से निकाल दिया गया।
1762 में, महल के तख्तापलट के परिणामस्वरूप, पीटर III को उखाड़ फेंका गया, कैथरीन सिंहासन पर चढ़ी। उसने राजधानी में पोनियातोव्स्की को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, क्योंकि उसे गार्ड और रूसी कुलीनता से नकारात्मक प्रतिक्रिया का डर था, जो अदालत में विदेशियों के प्रभुत्व से थक गए थे।
इस बीच, पोलैंड में, एक परिवार आक्रामक हो गया, जिसने राजा ऑगस्टस की मृत्यु का इंतजार भी नहीं किया। सैक्सन मंत्रियों और अधिकारियों के दुर्व्यवहार के खिलाफ एक व्यापक अभियान शुरू किया गया था। सैक्सन पार्टी ने ज़ार्टोरिस्की को गिरफ़्तार करने की धमकी दी।
कैथरीन पोलिश अदालत में अपने राजदूत, हरमन वॉन कीसरलिंग को सभी को सूचित करने के लिए निर्देश देती है कि यदि रूस के दोस्तों को पकड़ लिया जाता है, तो उसके दुश्मनों को साइबेरिया भेज दिया जाएगा, और वह ज़ापोरोज़ियन कोसैक्स को डंडे के पिछले अपमान का बदला लेने की अनुमति देगी। उसी समय, कैथरीन ने कीसरलिंग से मांग की कि वह Czartoryski पार्टी की गतिविधि पर लगाम लगाए। रूसी साम्राज्ञी पोलैंड में गृहयुद्ध नहीं चाहती थी।
उसी समय, फ्रांसीसी, जो पोलैंड को अपनी जागीर के रूप में देखते थे, ने भी पोलिश मामलों में शामिल होने का फैसला किया। उन्होंने उपनाम के साथ बातचीत शुरू की।
1763 की सर्दियों में ऑगस्टस के बिगड़ते स्वास्थ्य की खबर आई। रानी ने एक परिषद आयोजित की। काउंट बेस्टुज़ेव ने अपने बेटे ऑगस्टस के लिए आंदोलन करने की कोशिश की, लेकिन परिषद के अधिकांश सदस्य, और सबसे महत्वपूर्ण, कैथरीन खुद इसके खिलाफ थे। पियास्ट परिवार से एक राजा का चुनाव करने का प्रस्ताव था। उन्होंने अभियान के लिए रूसी सेना को पोलिश सीमा पर रखकर तैयार करना शुरू कर दिया। अक्टूबर 1763 में ऑगस्टस की मृत्यु हो गई।
हेटमैन ब्रानित्सकी ने ताज की सेना को सतर्क कर दिया, जिसमें सैक्सन शामिल हो गए। जवाब में, Czartoryski ने रूसी साम्राज्ञी से उनकी मदद के लिए रूसी सेना की "सीमित टुकड़ी" भेजने के लिए कहा। पोलैंड में छोटी रूसी टुकड़ी जुटाई गई, जो सात साल के युद्ध और संरक्षित दुकानों (गोदाम) के बाद बनी रही। अप्रैल में, पोलैंड में नई इकाइयां पेश की गईं। प्रिंस वोल्कोन्स्की का पहला स्तंभ मिन्स्क, प्रिंस डैशकोव का दूसरा स्तंभ - ग्रोड्नो के माध्यम से चला गया। 26 पोलिश दिग्गजों ने पोलैंड में रूसी सैनिकों के प्रवेश का समर्थन किया।
26 अप्रैल (7 मई), 1763 को, वारसॉ में एक दीक्षांत समारोह (राजा के चुनाव की जगह और तारीख निर्धारित) सेजम खोला गया। सैक्सन पार्टी के समर्थक और परिवार के बड़े लोग अपनी सेना लेकर आए, रूसी टुकड़ियां भी पास में स्थित थीं। Czartoryskis के विरोधियों ने संघर्ष करने की हिम्मत नहीं की और राजधानी को कहीं और एक संघ बनाने के लिए छोड़ दिया।
ऑस्ट्रिया, फ्रांस और तुर्की की धमकी के तहत, 31 मार्च, 1764 को रूस ने सेंट पीटर्सबर्ग में प्रशिया के साथ एक गठबंधन संधि संपन्न की। रूस और प्रशिया ने पारस्परिक रूप से एक-दूसरे की संपत्ति की गारंटी दी, एक अलग शांति का निष्कर्ष नहीं निकालने का संकल्प लिया। रूस ने वेसर नदी के पश्चिम क्षेत्र में युद्ध की स्थिति में प्रशिया को सैन्य सहायता प्रदान करने का वचन दिया। प्रशिया ने तुर्की और क्रीमिया खानते के साथ संघर्ष की स्थिति में रूस की मदद करने का वादा किया। कैथरीन और फ्रेडरिक स्टैनिस्लाव पोटोकी को पोलिश राजा के रूप में चुनने और पोलैंड के मौलिक कानूनों को बनाए रखने के लिए सहमत हुए। उन्होंने असंतुष्टों (रूढ़िवादी और प्रोटेस्टेंट) को उन विशेषाधिकारों, स्वतंत्रताओं और अधिकारों को वापस करने का वादा किया जो उनके पास पहले थे।
कैथरीन की योजनाओं को इस तथ्य से सुगम बनाया गया था कि ऑगस्टस III के उत्तराधिकारी, सैक्सोनी के फ्रेडरिक की मृत्यु दिसंबर 1763 में हुई थी। सैक्सन पार्टी को इसके बैनर के बिना छोड़ दिया गया था।
जून 1764 में दीक्षांत समारोह ने अपना काम पूरा किया। एक पोलिश सामान्य परिसंघ बनाया गया, जिसमें लिथुआनियाई शामिल हुआ। प्रिंस जार्टोरिस्की को इसका मार्शल चुना गया। आहार ने विदेशियों को राजा के चुनाव में भाग लेने की अनुमति नहीं देने का निर्णय लिया। Czartoryskis ने रूसी सैनिकों और रूसी धन की मदद से अपना रास्ता बना लिया। कृतज्ञता में, सेजम ने कैथरीन के शाही खिताब को मान्यता दी। रूसी सैनिकों ने Czartoryski और Poniatowski - प्रिंस रेडज़विल और हेटमैन ब्रानित्स्की के विरोधियों को हराया। वे हंगरी भाग गए।
रूस और प्रशिया ने पोनियातोव्स्की की उम्मीदवारी का समर्थन किया। राजकुमार ज़ार्टोरिस्की अपने भतीजे के खिलाफ नहीं थे। अगस्त 1764 में, चुनावी (चुनावी) सेजम ने सर्वसम्मति से पोनियातोव्स्की को राजा के रूप में चुना। वह किंग स्टैनिस्लाव II ऑगस्टस बन गया। कोई गड़बड़ी नहीं थी। पीटर्सबर्ग आनन्दित हुआ। कैथरीन ने पैनिन को लिखाः
"हमने जो राजा बनाया है उसके लिए बधाई। "
|
ऑगस्टस III के तहत रॉयल्टी का महत्व और भी कम हो गया पोलैंड के हिंसक चित्रमाला की तुलना में सैक्सन राजकुमार अपने मूल सैक्सोनी को बहुत प्रिय था। राजा को राज्य के मामले पसंद नहीं थे, अपने पिता की तरह, वह एक सुंदर जीवन पसंद करता था, उसने अपने दरबार और कला वस्तुओं के अधिग्रहण पर बड़ी रकम खर्च की थी। अगस्त ने सभी मामलों को अपने पहले मंत्री और पसंदीदा, काउंट हेनरिक वॉन ब्रुहल को सौंपा। व्यर्थ और लालची ब्रुहल ने दर्जनों पदों पर कब्जा कर लिया, अपने आश्रितों की मदद से, उन्होंने देश के लिए एक विनाशकारी कर नीति अपनाई, संपत्ति अर्जित की और अपने दरबार और विलासिता पर बहुत पैसा खर्च किया। राजा और उसके पहले मंत्री की मूर्खता और लालच ने दूसरे सिलेसियन युद्ध और सात साल के युद्ध में हार का नेतृत्व किया। अगस्त और ब्रुहल को पोलैंड भागना पड़ा, जहां वे सात साल के युद्ध के अंत तक बने रहे। अगस्त राज्य की आवश्यकता के कारण पोलैंड आया, लेकिन वहां भी वह बेलोवेज़्स्काया पुचा में शिकार करने के लिए समय बिताना पसंद करता था। एक हज़ार सात सौ छत्तीस का केवल एक आहार सफलतापूर्वक समाप्त हो सका। कानून, न्यायिक और कर प्रणाली, वित्त और सेना को अस्त-व्यस्त कर दिया गया। कोई मजबूत कार्यकारी शक्ति नहीं थी। निर्णय लेने में सर्वसम्मति के सिद्धांत ने उचित प्रस्तावों सहित अधिकांश प्रस्तावों को अवरुद्ध कर दिया। इस प्रकार, एक हज़ार छः सौ बावन से एक हज़ार सात सौ चौंसठ तक, पचपन सीमास में से, अड़तालीस बाधित हो गए थे । समाज की नैतिक स्थिति को मैग्नेट और पैन के वर्चस्व से कम आंका गया था, जो "हमारे बाद, यहां तक कि एक बाढ़" के सिद्धांत के अनुसार रहते थे। साधारण कुलीन अपनी पत्नियों और बेटियों को किसी भी पसंद के लिए रखैल के रूप में राजघरानों को देने के लिए तैयार थे, और राजघरानों ने भी राजा को प्रभावित करने की कोशिश की। कैथोलिक चर्च के हुक्म से स्थिति और खराब हो गई, जिसने रूढ़िवादी और प्रोटेस्टेंट पर हमेशा नए प्रतिबंध लगाने की मांग की। और राष्ट्रमंडल में रूढ़िवादी और प्रोटेस्टेंट का प्रतिशत कम से कम चालीस था। पान के उत्पीड़न और धार्मिक उत्पीड़न ने अभी भी पश्चिमी रूसी भूमि में विद्रोह का कारण बना। XNUMX वीं शताब्दी में राष्ट्रमंडल की सैन्य शक्ति काफ़ी कमजोर हो गई। पड़ोसियों ने नियमित सेनाएँ बनाईं, जहाँ पैदल सेना और तोपखाने की भूमिका में काफी वृद्धि हुई। पोलिश घुड़सवार सेना, प्रत्येक घुड़सवार सेना के अच्छे व्यक्तिगत प्रशिक्षण, उसके साहस और तेज के बावजूद, स्वीडन, रूस और प्रशिया की नियमित सेनाओं का विरोध नहीं कर सकी। इस अवधि के दौरान पोलिश क्षेत्र पड़ोसी राज्यों की सेनाओं के लिए एक वास्तविक प्रवेश द्वार बन गया। उत्तरी युद्ध के दौरान, रूसियों, स्वीडन और सैक्सन ने पोलैंड में लड़ाई लड़ी, खुद डंडे की गिनती नहीं की। एक हज़ार सात सौ पैंतीस-एक हज़ार सात सौ उनतालीस के रूसी-तुर्की युद्ध के दौरान। राष्ट्रमंडल के दक्षिणी क्षेत्रों में, रूसी, तुर्की और क्रीमियन सैनिकों ने काम किया। और सात साल के युद्ध के दौरान, रूस और प्रशिया पोलैंड के उत्तरी भाग में लड़े। लगभग इस समय, क्रीमियन टाटर्स ने नियमित रूप से राष्ट्रमंडल के दक्षिणी भाग में छापे मारे, जहाँ उन्होंने कभी भी एक शक्तिशाली रक्षा रेखा नहीं बनाई, जैसा कि रूस में था। इस सबने पोलैंड को एक बेचैन पड़ोसी बना दिया, जिसकी राजनीति पर्यावरण से प्रभावित थी। स्वाभाविक रूप से, पीटर्सबर्ग को यह पसंद नहीं आया। इसके अलावा, रूस ने अपने पड़ोसी के खिलाफ छोटे-मोटे दावे भी जमा किए हैं। खासकर सीमा विवाद। इसलिए, एक हज़ार सात सौ तिरेपन में, क्षेत्र की टोही के परिणामों के अनुसार, यह पता चला कि, एक हज़ार छः सौ छियासी की शाश्वत शांति के विपरीत, नौ सौ अठासी वर्ग मील की रूसी भूमि अवैध रूप से पोलिश कब्जे में रही, जिसमें स्ट्रोडब, चेर्निहाइव और कीव को सौंपे गए क्षेत्र शामिल थे। रेजिमेंट । रूसी और पोलिश अधिकारियों के बीच लगातार विवादों के दौरान, सीमा केवल स्मोलेंस्क प्रांत से कीव तक तय की गई थी, इसके बाकी हिस्सों में यह खुला था। इसका लाभ उठाते हुए, पोलिश अधिकारियों ने राइट बैंक के दस शहरों को मनमाने ढंग से आबाद किया, जो कि एक हज़ार छः सौ छियासी के समझौते के अनुसार, विवादित के रूप में पहचाने गए थे और निपटान के अधीन नहीं थे। विवाद के और भी कारण थे। इस प्रकार, एक हज़ार सात सौ चौंसठ तक पोलिश सेजम ने एक हज़ार छः सौ छियासी की शाश्वत शांति की पुष्टि करने से इनकार कर दिया। यही है, डंडे ने औपचारिक रूप से रूस के लिए लेफ्ट बैंक और कीव को मान्यता देने से इनकार कर दिया। इसके अलावा, राष्ट्रमंडल यूरोपीय देशों में से अंतिम था जो रूसी संप्रभुओं के लिए शाही उपाधि को मान्यता नहीं देता था। एक और समस्या जो रूसी साम्राज्य और पोलैंड के बीच संबंधों को जटिल बना रही थी, वह थी रूस से हजारों रूसी लोगों का राष्ट्रमंडल में जाना। रूसी सेना से हजारों रेगिस्तानी लोग पोलैंड भाग गए, वे किसान जो एक सौ बीसवीं शताब्दी में गंभीर रूप से गुलाम थे। केवल स्मोलेंस्क के पश्चिम के क्षेत्रों में लगभग XNUMX हजार आत्माएं थीं । तथ्य यह है कि लॉर्ड्स, जिन्होंने अपने किसानों को "मवेशी" -मवेशी में बदल दिया, ने नए लोगों के साथ अलग व्यवहार किया। प्रारंभिक चरण में, उन्हें अनुग्रह दिया जाता था, पूर्व सैनिकों को अक्सर पैन और मैग्नेट के निजी दस्तों में ले जाया जाता था, कुछ को रईसों में भी नामांकित किया जाता था, जो कुलीनता के नकली पत्र बनाते थे। सीमावर्ती भूमि में हजारों लुटेरे दिखाई दिए, पूरे गिरोह ने क्रीमियन की शैली में घेराबंदी के माध्यम से छापा मारा और लूट को "छत" - धूपदान के साथ साझा किया। स्वाभाविक रूप से, इसने रूसी कुलीनता और अधिकारियों को परेशान किया। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यदि रुरिकोविच और बोरिस गोडुनोव ने अपने शासन के तहत सभी रूसी भूमि को एकजुट करने की कोशिश की जो पुराने रूसी राज्य का हिस्सा थे, तो रोमनोव की एक अलग नीति थी। मिखाइल फेडोरोविच की सरकार ने केवल स्मोलेंस्क को वापस लेने का फैसला किया, जो मुसीबतों के समय में हार गया था, लेकिन हार गया था। मॉस्को ने राष्ट्रमंडल के मामलों में और हस्तक्षेप नहीं किया होता अगर इसके विघटन और बोगदान खमेलनित्सकी के नेतृत्व में रूसी लोगों का राष्ट्रीय मुक्ति युद्ध शुरू नहीं हुआ होता। अलेक्सी मिखाइलोविच की सरकार, जाहिरा तौर पर पोलैंड की शक्ति से डरती थी, जिसने मुसीबतों के समय के दौरान लगभग अपने राजा को मास्को में लगाया, बहुत लंबे समय तक दक्षिण और पश्चिम रूसी मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया। बोगदान खमेलनित्सकी ने लगातार रूस में शामिल होने के लिए कहा, लेकिन tsarist सरकार ने सतर्क नीति अपनाई। केवल जब यह स्पष्ट हो गया कि राष्ट्रमंडल लिटिल रूस को पकड़ नहीं सकता है, और रूस के हस्तक्षेप के बिना, तुर्की और क्रीमियन खानटे वहां फिट होंगे, मास्को ने रूसी भूमि के पुनर्मिलन के लिए एक युद्ध शुरू किया। पीटर I रूसी भूमि के पुनर्मिलन के मुद्दे के प्रति उदासीन था। सबसे पहले, उन्होंने बाल्टिक्स के माध्यम से यूरोप के लिए एक खिड़की काट दी, फिर जर्मन मामलों में सिर झुका लिया, जर्मन राज्यों के शासकों के साथ वंशवादी विवाहों की एक श्रृंखला आयोजित की। उस समय से, रोमनोव ने जर्मन महिलाओं से शादी की, और जर्मन मामलों अन्य क्षेत्रों की हानि के लिए प्राथमिकता में थे। यद्यपि उत्तरी युद्ध के दौरान राष्ट्रमंडल पूरी तरह से पराजित और तबाह हो गया था, यह वास्तव में केवल रूसी सेना और उदार सामग्री सहायता के समर्थन से ही जीवित रहा। इस समय, प्योत्र अलेक्सेविच ने रूसी भूमि और लोगों के पुनर्मिलन के मुद्दे को आसानी से हल कर लिया होगा। यदि रूसी ज़ार ने Cossacks को नीपर के दाहिने किनारे को लेने का आदेश दिया तो पोलैंड कोई प्रतिरोध नहीं दे सकता था। अन्ना इयोनोव्ना और एलिजाबेथ पेत्रोव्ना की सरकारें भी लिटिल एंड व्हाइट रूस की तुलना में जर्मन मामलों में अधिक रुचि रखती थीं। एलिजाबेथ, सात साल के युद्ध में अपनी सफलताओं के दौरान, यहां तक कि पूर्वी प्रशिया को साम्राज्य में मिलाने जा रही थी। केवल कैथरीन द्वितीय, एक वास्तविक रूसी जर्मन, ने रूस के लिए इस सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य को हल किया, साथ ही उत्तरी काला सागर क्षेत्र को हमारे नियंत्रण में वापस करने का कार्य भी हल किया। साम्राज्ञी ने जर्मनी के मामलों में रूसी हस्तक्षेप की निरर्थकता को महसूस किया और अपनी आँखें राष्ट्रमंडल की ओर मोड़ लीं। बुद्धिमान रानी ने जर्मनों की अधिक संख्या के राज्य तंत्र को साफ करना शुरू कर दिया, उन्हें रूसियों और रूसी सिंहासन और कारण के लिए समर्पित अन्य राष्ट्रों के प्रतिनिधियों के साथ बदल दिया। कैथरीन के कई जर्मन रिश्तेदारों में से किसी को भी रूस में जिम्मेदारी का पद नहीं मिला। एक हज़ार सात सौ पचास के दशक के अंत में, पोलिश राजा अगस्त III बीमार पड़ने लगे। पोलिश दिग्गज उसके उत्तराधिकारी के बारे में सोचने लगे। पार्टियों ने आकार लेना शुरू कर दिया, जिनके सिंहासन पर उनके आश्रित थे। सैक्सन राजा स्वयं सिंहासन को अपने पुत्र फ्रेडरिक क्रिश्चियन को हस्तांतरित करना चाहता था। सैक्सन पार्टी का नेतृत्व पहले मंत्री ब्रुहल, उनके दामाद मार्शल, कोर्ट क्राउन मनिसजेक और शक्तिशाली पोटोकी परिवार ने किया था। सक्सोन पार्टी के खिलाफ राजकुमारों का एक और शक्तिशाली कबीला Czartoryski सामने आया। इस कबीले ने पोनियातोव्स्की परिवार के साथ मिलकर राजनीतिक दल "परिवार" का गठन किया। प्रिंसेस ज़ार्टोरिस्की लिथुआनिया गेडिमिनोविच के ग्रैंड ड्यूक्स से उतरे और पोलैंड में कई सुधार करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने तर्क दिया कि केवल पियास्ट राजवंश का एक प्रतिनिधि पोलैंड का नया राजा होना चाहिए, हालांकि इस परिवार के वैध प्रतिनिधि लंबे समय से मर चुके थे। और परिवार के सदस्यों का पाइस्ट्स से कोई लेना-देना नहीं था। सेंट पीटर्सबर्ग में, उन्होंने दिखावा किया कि वे पोलिश वंशावली को नहीं समझते हैं और पियास्ट को रूस के प्रति वफादार कोई भी मैग्नेट कहा जाता है। माज़ोविया के वॉयवोड और क्राको स्टैनिस्लाव पोनियातोव्स्की के कश्तेलियन उपनाम से जुड़े। उनकी पत्नी कॉन्स्टेंस थीं, जो विल्ना कैस्टेलन की बेटी और महान लिथुआनियाई उप-कुलपति काज़िमिर ज़ार्टोरिस्की थीं, जिन्होंने स्टास के करियर में बहुत योगदान दिया। पोनियातोव्स्की, पोलिश लॉर्ड्स के विशाल बहुमत की तरह, कोई नैतिक सिद्धांत नहीं थे, कोई स्पष्ट राजनीतिक विश्वास नहीं था, और केवल अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए काम किया। व्यक्तिगत हितों की खातिर, उन्होंने सबसे पहले स्टानिस्लाव लेशिंस्की की सेवा की, जो स्वेड्स की तरफ से लड़े। पोल्टावा के बाद, वह तुर्की भाग गया, जहाँ उसने ओटोमन्स को रूसियों के साथ युद्ध शुरू करने के लिए उकसाया। यह महसूस करते हुए कि लेशचिंस्की बिट का नक्शा, वह ऑगस्टस II के पास गया। ऑगस्टस की मृत्यु के बाद, उसने स्वयं राजाओं में रेंगने की कोशिश की, लेकिन नहीं कर सका। पोलिश उत्तराधिकार के युद्ध के दौरान, वह फिर से लेशचिंस्की की तरफ चला गया, उसके साथ डेंजिग में घेराबंदी कर बैठा जब लेशचिंस्की मामला बर्बाद हो गया, तो स्टास ने अगस्त III के शिविर के लिए उड़ान भरी, उनके मुख्य सलाहकारों में से एक बन गया। एक हज़ार सात सौ बत्तीस में स्टास का एक बेटा था, जिसका नाम स्टैनिस्लाव भी था। स्टानिस्लाव द यंगर ने अपना अधिकांश समय सैक्सोनी की राजधानी ड्रेसडेन में शाही दरबार में बिताया। वहां, युवक को ब्रिटिश राजदूत चार्ल्स विलियम्स से प्यार हो गया। एक हज़ार सात सौ पचपन में, विलियम्स को पीटर्सबर्ग में राजदूत के रूप में भेजा गया था। वह स्टानिस्लाव को अपने साथ ले जाता है। एलिजाबेथ पेत्रोव्ना के चरित्र को जानने के बाद, विलियम्स ने एक भी गेंद और बहाना नहीं छोड़ा, लेकिन वह साम्राज्ञी के दल में घुसपैठ नहीं कर सका। फिर उसने कैथरीन के सिंहासन के उत्तराधिकारी की पत्नी की ओर ध्यान आकर्षित किया। ग्रैंड डचेस ने ब्रिटान से पैसे लिए और पोनियातोव्स्की उसकी पसंदीदा बन गई। विलियम्स ने एक हज़ार सात सौ सत्तावन में पीटर्सबर्ग छोड़ दिया, जबकि पोनियातोव्स्की सैक्सोनी के दूत और राजकुमारी के प्रेमी के रूप में बने रहे। एलिजाबेथ ने कुछ समय के लिए इन साज़िशों से आंखें मूंद लीं। सौभाग्य से, कैथरीन के पति, ग्रैंड ड्यूक पीटर, को पता था, पोनियातोव्स्की के साथ दोस्ती की, और उन्होंने एक साथ आनंद लिया। लेकिन जब राजधानी में अफवाहें फैलीं, तो स्टास को रूस से निकाल दिया गया। एक हज़ार सात सौ बासठ में, महल के तख्तापलट के परिणामस्वरूप, पीटर III को उखाड़ फेंका गया, कैथरीन सिंहासन पर चढ़ी। उसने राजधानी में पोनियातोव्स्की को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, क्योंकि उसे गार्ड और रूसी कुलीनता से नकारात्मक प्रतिक्रिया का डर था, जो अदालत में विदेशियों के प्रभुत्व से थक गए थे। इस बीच, पोलैंड में, एक परिवार आक्रामक हो गया, जिसने राजा ऑगस्टस की मृत्यु का इंतजार भी नहीं किया। सैक्सन मंत्रियों और अधिकारियों के दुर्व्यवहार के खिलाफ एक व्यापक अभियान शुरू किया गया था। सैक्सन पार्टी ने ज़ार्टोरिस्की को गिरफ़्तार करने की धमकी दी। कैथरीन पोलिश अदालत में अपने राजदूत, हरमन वॉन कीसरलिंग को सभी को सूचित करने के लिए निर्देश देती है कि यदि रूस के दोस्तों को पकड़ लिया जाता है, तो उसके दुश्मनों को साइबेरिया भेज दिया जाएगा, और वह ज़ापोरोज़ियन कोसैक्स को डंडे के पिछले अपमान का बदला लेने की अनुमति देगी। उसी समय, कैथरीन ने कीसरलिंग से मांग की कि वह Czartoryski पार्टी की गतिविधि पर लगाम लगाए। रूसी साम्राज्ञी पोलैंड में गृहयुद्ध नहीं चाहती थी। उसी समय, फ्रांसीसी, जो पोलैंड को अपनी जागीर के रूप में देखते थे, ने भी पोलिश मामलों में शामिल होने का फैसला किया। उन्होंने उपनाम के साथ बातचीत शुरू की। एक हज़ार सात सौ तिरेसठ की सर्दियों में ऑगस्टस के बिगड़ते स्वास्थ्य की खबर आई। रानी ने एक परिषद आयोजित की। काउंट बेस्टुज़ेव ने अपने बेटे ऑगस्टस के लिए आंदोलन करने की कोशिश की, लेकिन परिषद के अधिकांश सदस्य, और सबसे महत्वपूर्ण, कैथरीन खुद इसके खिलाफ थे। पियास्ट परिवार से एक राजा का चुनाव करने का प्रस्ताव था। उन्होंने अभियान के लिए रूसी सेना को पोलिश सीमा पर रखकर तैयार करना शुरू कर दिया। अक्टूबर एक हज़ार सात सौ तिरेसठ में ऑगस्टस की मृत्यु हो गई। हेटमैन ब्रानित्सकी ने ताज की सेना को सतर्क कर दिया, जिसमें सैक्सन शामिल हो गए। जवाब में, Czartoryski ने रूसी साम्राज्ञी से उनकी मदद के लिए रूसी सेना की "सीमित टुकड़ी" भेजने के लिए कहा। पोलैंड में छोटी रूसी टुकड़ी जुटाई गई, जो सात साल के युद्ध और संरक्षित दुकानों के बाद बनी रही। अप्रैल में, पोलैंड में नई इकाइयां पेश की गईं। प्रिंस वोल्कोन्स्की का पहला स्तंभ मिन्स्क, प्रिंस डैशकोव का दूसरा स्तंभ - ग्रोड्नो के माध्यम से चला गया। छब्बीस पोलिश दिग्गजों ने पोलैंड में रूसी सैनिकों के प्रवेश का समर्थन किया। छब्बीस अप्रैल , एक हज़ार सात सौ तिरेसठ को, वारसॉ में एक दीक्षांत समारोह सेजम खोला गया। सैक्सन पार्टी के समर्थक और परिवार के बड़े लोग अपनी सेना लेकर आए, रूसी टुकड़ियां भी पास में स्थित थीं। Czartoryskis के विरोधियों ने संघर्ष करने की हिम्मत नहीं की और राजधानी को कहीं और एक संघ बनाने के लिए छोड़ दिया। ऑस्ट्रिया, फ्रांस और तुर्की की धमकी के तहत, इकतीस मार्च, एक हज़ार सात सौ चौंसठ को रूस ने सेंट पीटर्सबर्ग में प्रशिया के साथ एक गठबंधन संधि संपन्न की। रूस और प्रशिया ने पारस्परिक रूप से एक-दूसरे की संपत्ति की गारंटी दी, एक अलग शांति का निष्कर्ष नहीं निकालने का संकल्प लिया। रूस ने वेसर नदी के पश्चिम क्षेत्र में युद्ध की स्थिति में प्रशिया को सैन्य सहायता प्रदान करने का वचन दिया। प्रशिया ने तुर्की और क्रीमिया खानते के साथ संघर्ष की स्थिति में रूस की मदद करने का वादा किया। कैथरीन और फ्रेडरिक स्टैनिस्लाव पोटोकी को पोलिश राजा के रूप में चुनने और पोलैंड के मौलिक कानूनों को बनाए रखने के लिए सहमत हुए। उन्होंने असंतुष्टों को उन विशेषाधिकारों, स्वतंत्रताओं और अधिकारों को वापस करने का वादा किया जो उनके पास पहले थे। कैथरीन की योजनाओं को इस तथ्य से सुगम बनाया गया था कि ऑगस्टस III के उत्तराधिकारी, सैक्सोनी के फ्रेडरिक की मृत्यु दिसंबर एक हज़ार सात सौ तिरेसठ में हुई थी। सैक्सन पार्टी को इसके बैनर के बिना छोड़ दिया गया था। जून एक हज़ार सात सौ चौंसठ में दीक्षांत समारोह ने अपना काम पूरा किया। एक पोलिश सामान्य परिसंघ बनाया गया, जिसमें लिथुआनियाई शामिल हुआ। प्रिंस जार्टोरिस्की को इसका मार्शल चुना गया। आहार ने विदेशियों को राजा के चुनाव में भाग लेने की अनुमति नहीं देने का निर्णय लिया। Czartoryskis ने रूसी सैनिकों और रूसी धन की मदद से अपना रास्ता बना लिया। कृतज्ञता में, सेजम ने कैथरीन के शाही खिताब को मान्यता दी। रूसी सैनिकों ने Czartoryski और Poniatowski - प्रिंस रेडज़विल और हेटमैन ब्रानित्स्की के विरोधियों को हराया। वे हंगरी भाग गए। रूस और प्रशिया ने पोनियातोव्स्की की उम्मीदवारी का समर्थन किया। राजकुमार ज़ार्टोरिस्की अपने भतीजे के खिलाफ नहीं थे। अगस्त एक हज़ार सात सौ चौंसठ में, चुनावी सेजम ने सर्वसम्मति से पोनियातोव्स्की को राजा के रूप में चुना। वह किंग स्टैनिस्लाव II ऑगस्टस बन गया। कोई गड़बड़ी नहीं थी। पीटर्सबर्ग आनन्दित हुआ। कैथरीन ने पैनिन को लिखाः "हमने जो राजा बनाया है उसके लिए बधाई। "
|
नाशिक. दिग्गज अभिनेता (Veteran Actor) दिलीप कुमार (Dilip Kumar) का मुंबई (Mumbai) में आज निधन हो गया है। दिलीप कुमार का बचपन (Childhood) और जवानी भी नाशिक के देवलाली कैंप (Devlali Camp) इलाके में बीता है। उनके माता-पिता और बड़े भाईयों की कब्रें भी देवलाली कैंप के कब्रिस्तान में हैं। कब्रिस्तान (Cemetery) के स्टाफ के मुताबिक, दिलीप कुमार अपने माता-पिता के बगल में दफन होना चाहते थे। नाशिक के साथ उनका घनिष्ठ संबंध था क्योंकि उन्होंने अपना बचपन नाशिक में बिताया था।
दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार को बुधवार की सुब्ह निधन हो गया है। वह 98 वर्ष के थे, उन्होंने मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह काफी समय से बीमार चल रहे थे, दिलीप कुमार के निधन पर बॉलीवुड समेत दुनियाभर के फैंस शोक में हैं। दिलीप कुमार भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन अपनी फिल्मों, अभिनय, गानों के जरिए वह हमेशा अमर रहेंगे।
दिलीप कुमार के पिता का नाशिक में एक बाग था, इस वजह से उनका अधिकांश जीवन नाशिक में बीता था। कुछ समय बाद वह मुंबई चले गए, हालांकि माता-पिता की मौत के बाद उन्हें नाशिक के देवलाली इलाके के कब्रिस्तान में दफनाया गया था। उनके माता-पिता के बगल में उनके बड़े भाई की कब्र भी है, जब दिलीप कुमार नाशिक आते थे, तो वे इस स्थान पर जाते थे और अपने माता-पिता और भाई की कब्रों पर फूल और चादर चढ़ाते थे। इसके बाद वह यहां के कर्मचारियों से बातचीत करते थे वहीं, उनकी मौत के बाद कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने खाली जगह में दफन होने की इच्छा जताई थी। लेकिन कहीं भी ऐसा कोई लिखित रूप नहीं होने के कारण उनका अंतिम संस्कार मुंबई के सांताक्रूज इलाके में किया गया।
|
नाशिक. दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार का मुंबई में आज निधन हो गया है। दिलीप कुमार का बचपन और जवानी भी नाशिक के देवलाली कैंप इलाके में बीता है। उनके माता-पिता और बड़े भाईयों की कब्रें भी देवलाली कैंप के कब्रिस्तान में हैं। कब्रिस्तान के स्टाफ के मुताबिक, दिलीप कुमार अपने माता-पिता के बगल में दफन होना चाहते थे। नाशिक के साथ उनका घनिष्ठ संबंध था क्योंकि उन्होंने अपना बचपन नाशिक में बिताया था। दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार को बुधवार की सुब्ह निधन हो गया है। वह अट्ठानवे वर्ष के थे, उन्होंने मुंबई के हिंदुजा अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह काफी समय से बीमार चल रहे थे, दिलीप कुमार के निधन पर बॉलीवुड समेत दुनियाभर के फैंस शोक में हैं। दिलीप कुमार भले ही आज हमारे बीच न हों, लेकिन अपनी फिल्मों, अभिनय, गानों के जरिए वह हमेशा अमर रहेंगे। दिलीप कुमार के पिता का नाशिक में एक बाग था, इस वजह से उनका अधिकांश जीवन नाशिक में बीता था। कुछ समय बाद वह मुंबई चले गए, हालांकि माता-पिता की मौत के बाद उन्हें नाशिक के देवलाली इलाके के कब्रिस्तान में दफनाया गया था। उनके माता-पिता के बगल में उनके बड़े भाई की कब्र भी है, जब दिलीप कुमार नाशिक आते थे, तो वे इस स्थान पर जाते थे और अपने माता-पिता और भाई की कब्रों पर फूल और चादर चढ़ाते थे। इसके बाद वह यहां के कर्मचारियों से बातचीत करते थे वहीं, उनकी मौत के बाद कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने खाली जगह में दफन होने की इच्छा जताई थी। लेकिन कहीं भी ऐसा कोई लिखित रूप नहीं होने के कारण उनका अंतिम संस्कार मुंबई के सांताक्रूज इलाके में किया गया।
|
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में कोरोना वायरस के नए मामले सामने आए हैं। यूएई में मौजूद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की मेडिकल कमेटी के एक सदस्य के कोरोना संक्रमित पाए जाने की खबर सामने आ रही है। एएनआई के मुताबिक बोर्ड के एक अधिकारी ने खबर की पुष्टि कर दी है। बीसीसीआई के प्रोटोकॉल के मुताबिक मेडिकल टीम के स्टाफ को पहले ही क्वारंटीन में भेज दिया गया है, जहां वे आइसोलेशन में हैं।
आईपीएल 19 सितंबर से 10 नवंबर तक यूएई के तीन स्थलों दुबई, अबुधाबी और शारजाह में खेला जाएगा। हालांकि अब तक बीसीसीआई ने शेड्यूल जारी नहीं किया है। पिछले सप्ताह चेन्नई सुपरकिंग्स के दो खिलाड़ी दीपक चाहर और ऋतुराज गायकवाड़ समेत पॉजिटिव पाए गए 13 स्टाफ फिलहाल कोरोना से उबर रहे हैं।
सीएसके के सीइओ विश्वनाथन ने बताया कि, 'दल के 13 सदस्यों के अलावा बाकी सभी कोविड-19 निगेटिव पाए गए हैं। आज सभी का एक और परीक्षण होगा। हमारे शुक्रवार, चार सितंबर से ट्रेनिंग शुरू करने की संभावना है। दीपक और ऋतुराज 14 दिन का पृथकवास पूरा करेंगे और नियमों के अनुसार निगेटिव पाए जाने के बाद ट्रेनिंग से जुड़ेंगे। '
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
इंडियन प्रीमियर लीग में कोरोना वायरस के नए मामले सामने आए हैं। यूएई में मौजूद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की मेडिकल कमेटी के एक सदस्य के कोरोना संक्रमित पाए जाने की खबर सामने आ रही है। एएनआई के मुताबिक बोर्ड के एक अधिकारी ने खबर की पुष्टि कर दी है। बीसीसीआई के प्रोटोकॉल के मुताबिक मेडिकल टीम के स्टाफ को पहले ही क्वारंटीन में भेज दिया गया है, जहां वे आइसोलेशन में हैं। आईपीएल उन्नीस सितंबर से दस नवंबर तक यूएई के तीन स्थलों दुबई, अबुधाबी और शारजाह में खेला जाएगा। हालांकि अब तक बीसीसीआई ने शेड्यूल जारी नहीं किया है। पिछले सप्ताह चेन्नई सुपरकिंग्स के दो खिलाड़ी दीपक चाहर और ऋतुराज गायकवाड़ समेत पॉजिटिव पाए गए तेरह स्टाफ फिलहाल कोरोना से उबर रहे हैं। सीएसके के सीइओ विश्वनाथन ने बताया कि, 'दल के तेरह सदस्यों के अलावा बाकी सभी कोविड-उन्नीस निगेटिव पाए गए हैं। आज सभी का एक और परीक्षण होगा। हमारे शुक्रवार, चार सितंबर से ट्रेनिंग शुरू करने की संभावना है। दीपक और ऋतुराज चौदह दिन का पृथकवास पूरा करेंगे और नियमों के अनुसार निगेटिव पाए जाने के बाद ट्रेनिंग से जुड़ेंगे। ' हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
|
प्रश्न यह उठता है कि इस ग्रन्थ के प्रणयन का उद्देश्य क्या है? क्योंकि बिना किसी प्रयोजन के मृत व्यक्ति भी कोई कार्य नहीं करता ।
वसुबन्धु ने इस ग्रन्थ के प्रणयन का प्रयोजन बताते हुए कहा कि 'धर्म-प्रविचय के बिना क्लोशों की शान्ति का कोई उपाय नहीं है और क्लेशों के कारण ही लोग इस संसार रूपी समुद्र (भवार्णव) में गोते लगा रहे हैं अर्थात् भ्रमित हो रहे हैं इसलिए इस धर्म प्रविचय हेतु शास्ता बुद्ध ने अभिधर्म का उपदेश दिया। इसके अनंतर इस अध्याय में समस्त सास्रव अनास्रव संस्कृत और असंस्कृत धर्मो का विवेचन किया गया है। यद्यपि इस अध्याय का नाम धातु निर्देश है किन्तु इसमें धर्मों का वर्गीकरण न केवल धातुओं की दृष्टि से अपितु आयतन और पंचस्कन्ध की दृष्टि से भी किया गया है। इसका विवेचन आगे किया जाएगा ।
द्वितीय कोशस्थान
द्वितीय कोशस्थान का नाम 'इन्द्रिय निर्देश है। इसमें कुल ७३ कारिकाएं हैं। इनमें १.२१ कारिकाओं मे इन्द्रिय और उसके विषयों का विवेचन किया गया है, बाईसवीं कारिका में परमाणु, तेईस से चौतीस कारिकाओं में 'चैत' पैतीस से अड़तालीस कारिकाओं में चित्तविप्रयुक्त धर्म और उन्चास से तिहत्तरवें कारिकाओं में हेतुफल का विवेचन किया गया है।" अभिधर्मकोश के सिद्धान्तों के सामान्य विवेचन के अध्ययन में द्वितीय कोश स्थान में निरूपित सिद्धान्तों का विस्तृत विवेचन किया गया है।
तृतीय कोशस्थान
तृतीय कोशस्थान का नाम 'लोक निर्देश' है। इसमें कुल १०२ कारिकाएं (श्लोक) है। इस अध्याय में सम्पूर्ण विश्व, (जो त्रिधातुक है) उसमें रहने वाले सभी प्रकार के जीवन, नात्मा और प्रतीत्यसमुत्पाद तथा उनके प्रत्येक अंग का विस्तृत विवेचन किया गया है।
कामधातु लोक में नरक, प्रेत, तिर्यक् मनुष्य और ६ देव निकाय ( चातुमहाराजिक, त्रायस्त्रिंश, भाम, तुषित, 'निर्माणरति' और परनिर्मित वशवर्तिर्न्) और भाजनलोक हैं। " कामधातु में नरक और द्वीपों के भेद से बीस निम्नलिखित स्थान हैं :
|
प्रश्न यह उठता है कि इस ग्रन्थ के प्रणयन का उद्देश्य क्या है? क्योंकि बिना किसी प्रयोजन के मृत व्यक्ति भी कोई कार्य नहीं करता । वसुबन्धु ने इस ग्रन्थ के प्रणयन का प्रयोजन बताते हुए कहा कि 'धर्म-प्रविचय के बिना क्लोशों की शान्ति का कोई उपाय नहीं है और क्लेशों के कारण ही लोग इस संसार रूपी समुद्र में गोते लगा रहे हैं अर्थात् भ्रमित हो रहे हैं इसलिए इस धर्म प्रविचय हेतु शास्ता बुद्ध ने अभिधर्म का उपदेश दिया। इसके अनंतर इस अध्याय में समस्त सास्रव अनास्रव संस्कृत और असंस्कृत धर्मो का विवेचन किया गया है। यद्यपि इस अध्याय का नाम धातु निर्देश है किन्तु इसमें धर्मों का वर्गीकरण न केवल धातुओं की दृष्टि से अपितु आयतन और पंचस्कन्ध की दृष्टि से भी किया गया है। इसका विवेचन आगे किया जाएगा । द्वितीय कोशस्थान द्वितीय कोशस्थान का नाम 'इन्द्रिय निर्देश है। इसमें कुल तिहत्तर कारिकाएं हैं। इनमें एक.इक्कीस कारिकाओं मे इन्द्रिय और उसके विषयों का विवेचन किया गया है, बाईसवीं कारिका में परमाणु, तेईस से चौतीस कारिकाओं में 'चैत' पैतीस से अड़तालीस कारिकाओं में चित्तविप्रयुक्त धर्म और उन्चास से तिहत्तरवें कारिकाओं में हेतुफल का विवेचन किया गया है।" अभिधर्मकोश के सिद्धान्तों के सामान्य विवेचन के अध्ययन में द्वितीय कोश स्थान में निरूपित सिद्धान्तों का विस्तृत विवेचन किया गया है। तृतीय कोशस्थान तृतीय कोशस्थान का नाम 'लोक निर्देश' है। इसमें कुल एक सौ दो कारिकाएं है। इस अध्याय में सम्पूर्ण विश्व, उसमें रहने वाले सभी प्रकार के जीवन, नात्मा और प्रतीत्यसमुत्पाद तथा उनके प्रत्येक अंग का विस्तृत विवेचन किया गया है। कामधातु लोक में नरक, प्रेत, तिर्यक् मनुष्य और छः देव निकाय और भाजनलोक हैं। " कामधातु में नरक और द्वीपों के भेद से बीस निम्नलिखित स्थान हैं :
|
हर दिन, घृणित रूप से प्रसिद्ध हॉलीवुड निर्माता हार्वे वेनस्टीन के खिलाफ आरोप अधिक से अधिक नए फिल्म निर्माताओं द्वारा शामिल हो जाते हैं। और, न केवल महिलाओं! यह ज्ञात हो गया कि क्वांटिन टैरेंटिनो में गड़बड़ी वेनस्टीन के निरंतर यौन उत्पीड़न के बारे में जानकारी है।
उन्होंने द न्यूयॉर्क टाइम्स को एक साक्षात्कार दिया, जिसमें उन्होंने कबूल किया कि वे वेनस्टीन के अनैतिक व्यवहार से अवगत थे। इसके अलावा, टारनटिनो बहुत शर्मिंदा है कि उसने इस जानकारी को पहले प्रकाशित नहीं किया थाः
"मैं हार्वे व्यवहार से कैसे बहुत कुछ जानता था। ये खाली अफवाहें नहीं थीं, और मैं अपनी चुप्पी से शर्मिंदा हूं। जब मैं अपनी चाल के बारे में पता चला तो मैं चौंक गया और डर गया। "
जैसा कि यह निकला, वेनस्टीन के अतिरेक के बारे में पहला निदेशक अभिनेत्री मीरा सोरविनो ने बताया था। एक समय में उसके साथ टारनटिनो मिले। यह पता चला कि फिल्म के दौरान हार्वे ने बार-बार "इसे" पछाड़ दिया, लड़की को मालिश करने की कोशिश की और रात में एक बार यात्रा पर दिखाई दिया, जाहिर है, लड़की के अपार्टमेंट को देखने के लिए।
क्वांटिन टैरेंटिनो ने अपने प्रियजन के शब्दों को गंभीरता से नहीं लिया, जो अब दृढ़ता से खेद हैः
"मैं बस अपने सिर में फिट नहीं हुआ, हार्वे इस तरह से कैसे व्यवहार कर सकता था। इसके अलावा, उन्होंने अपने व्यवहार को छिपाने की कोशिश नहीं की। मैंने तब सोचा थाः शायद वह सिर्फ दुनिया के साथ प्यार में गिर गया। मुझे यकीन था कि वह उससे बुरी तरह से निपटने में सक्षम नहीं होगा, क्योंकि हर कोई जानता था कि वह मेरी महिला थी। इस समय आदर्श मानदंड को अस्वीकार्य माना गया था। मैं हर किसी से अपील करता हूं जो हार्वे वेनस्टीन के कार्यों के बारे में जानता है, चुप मत रहो! इसके बारे में बात करने से डरो मत। "
फ्रांसीसी अभिनेता जेरार्ड डेपार्डियू ने आग में ईंधन जोड़ा। उन्होंने संवाददाताओं से संवाद करने के अप्रिय छापों के बारे में रेडियो स्टेशन फ्रांस इंटर संवाददाताओं से कहाः
"एक दिन यह पता चला कि मैंने उसे लगभग हराया था। मैंने सचमुच बालों से कार्यालय के चारों ओर खींच लिया। "
- हॉलीवुड सितारों में रुचि क्या है?
- विन्सेंट गैलोः "मैं वेनस्टीन का असली शिकार हूं, अभिनेत्री नहीं! "
प्रसिद्ध फ्रांसीसी वेनस्टीन के मुताबिक सिर्फ अपने संतान में नकद करना चाहता था।
|
हर दिन, घृणित रूप से प्रसिद्ध हॉलीवुड निर्माता हार्वे वेनस्टीन के खिलाफ आरोप अधिक से अधिक नए फिल्म निर्माताओं द्वारा शामिल हो जाते हैं। और, न केवल महिलाओं! यह ज्ञात हो गया कि क्वांटिन टैरेंटिनो में गड़बड़ी वेनस्टीन के निरंतर यौन उत्पीड़न के बारे में जानकारी है। उन्होंने द न्यूयॉर्क टाइम्स को एक साक्षात्कार दिया, जिसमें उन्होंने कबूल किया कि वे वेनस्टीन के अनैतिक व्यवहार से अवगत थे। इसके अलावा, टारनटिनो बहुत शर्मिंदा है कि उसने इस जानकारी को पहले प्रकाशित नहीं किया थाः "मैं हार्वे व्यवहार से कैसे बहुत कुछ जानता था। ये खाली अफवाहें नहीं थीं, और मैं अपनी चुप्पी से शर्मिंदा हूं। जब मैं अपनी चाल के बारे में पता चला तो मैं चौंक गया और डर गया। " जैसा कि यह निकला, वेनस्टीन के अतिरेक के बारे में पहला निदेशक अभिनेत्री मीरा सोरविनो ने बताया था। एक समय में उसके साथ टारनटिनो मिले। यह पता चला कि फिल्म के दौरान हार्वे ने बार-बार "इसे" पछाड़ दिया, लड़की को मालिश करने की कोशिश की और रात में एक बार यात्रा पर दिखाई दिया, जाहिर है, लड़की के अपार्टमेंट को देखने के लिए। क्वांटिन टैरेंटिनो ने अपने प्रियजन के शब्दों को गंभीरता से नहीं लिया, जो अब दृढ़ता से खेद हैः "मैं बस अपने सिर में फिट नहीं हुआ, हार्वे इस तरह से कैसे व्यवहार कर सकता था। इसके अलावा, उन्होंने अपने व्यवहार को छिपाने की कोशिश नहीं की। मैंने तब सोचा थाः शायद वह सिर्फ दुनिया के साथ प्यार में गिर गया। मुझे यकीन था कि वह उससे बुरी तरह से निपटने में सक्षम नहीं होगा, क्योंकि हर कोई जानता था कि वह मेरी महिला थी। इस समय आदर्श मानदंड को अस्वीकार्य माना गया था। मैं हर किसी से अपील करता हूं जो हार्वे वेनस्टीन के कार्यों के बारे में जानता है, चुप मत रहो! इसके बारे में बात करने से डरो मत। " फ्रांसीसी अभिनेता जेरार्ड डेपार्डियू ने आग में ईंधन जोड़ा। उन्होंने संवाददाताओं से संवाद करने के अप्रिय छापों के बारे में रेडियो स्टेशन फ्रांस इंटर संवाददाताओं से कहाः "एक दिन यह पता चला कि मैंने उसे लगभग हराया था। मैंने सचमुच बालों से कार्यालय के चारों ओर खींच लिया। " - हॉलीवुड सितारों में रुचि क्या है? - विन्सेंट गैलोः "मैं वेनस्टीन का असली शिकार हूं, अभिनेत्री नहीं! " प्रसिद्ध फ्रांसीसी वेनस्टीन के मुताबिक सिर्फ अपने संतान में नकद करना चाहता था।
|
चित्रकूट और बाँदा जिलों में मार्च के पहले हफ्ते से सर्राफा व्यापारियों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया था। उनका कहना था कि यह टैक्स कारीगरों पर ज्यादा भरी पड़ेगा।
39 दिनों की लगातार हड़ताल के बाद सर्राफा व्यापारियों ने अपनी दुकाने 10 अप्रैल को वापस खोली। शादियों का मौसम शुरू हो चुका है, जिसके चलते सर्राफा व्यापारियों को घाटा हो रहा था और लोगों के भी शादी-ब्याह रुके हुए थे। हालांकि अभी व्यापारियों की मांगे पूरी नहीं हुई हैं लेकिन नुकसान होता देख वह वापस आ गये। आगे भी हड़ताल जारी रखने का फैसला जल्द ही लिया जाएगा। इन दो पक्षों के बीच आम आदमी फंस गया है। छोटे व्यापारी खुद परेशान हो गये है और रोजी-रोटी के लिए सब्जी बेच रहे हैं।
रमटेकवा गाँव के निवासी रमन की बेटी की शादी 17 अप्रैल को है। जेवर बनाने बाजार गए तो सारी दूकान बंद मिली। रमन जैसे कई अन्य लोगों के घरों में भी शादियों का काम रुका पड़ा है।
पहरा गाँव की शांति के लड़के की सगाई होनी थी जिसके लिए उन्हें जेवर गिरवी रखकर कुछ रुपये लेने थे लेकिन हड़ताल के कारण उनको रस्म की तारीख बदलनी पड़ी। काशई गांव के पप्पू और सविता का कहना है कि उन्हें भी अपनी लड़की की मुंह-दिखाई को टालना पड़ा क्योंकि वह लड़के वालो के लिए कूलर का इंतजाम नहीं कर पाए।
|
चित्रकूट और बाँदा जिलों में मार्च के पहले हफ्ते से सर्राफा व्यापारियों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया था। उनका कहना था कि यह टैक्स कारीगरों पर ज्यादा भरी पड़ेगा। उनतालीस दिनों की लगातार हड़ताल के बाद सर्राफा व्यापारियों ने अपनी दुकाने दस अप्रैल को वापस खोली। शादियों का मौसम शुरू हो चुका है, जिसके चलते सर्राफा व्यापारियों को घाटा हो रहा था और लोगों के भी शादी-ब्याह रुके हुए थे। हालांकि अभी व्यापारियों की मांगे पूरी नहीं हुई हैं लेकिन नुकसान होता देख वह वापस आ गये। आगे भी हड़ताल जारी रखने का फैसला जल्द ही लिया जाएगा। इन दो पक्षों के बीच आम आदमी फंस गया है। छोटे व्यापारी खुद परेशान हो गये है और रोजी-रोटी के लिए सब्जी बेच रहे हैं। रमटेकवा गाँव के निवासी रमन की बेटी की शादी सत्रह अप्रैल को है। जेवर बनाने बाजार गए तो सारी दूकान बंद मिली। रमन जैसे कई अन्य लोगों के घरों में भी शादियों का काम रुका पड़ा है। पहरा गाँव की शांति के लड़के की सगाई होनी थी जिसके लिए उन्हें जेवर गिरवी रखकर कुछ रुपये लेने थे लेकिन हड़ताल के कारण उनको रस्म की तारीख बदलनी पड़ी। काशई गांव के पप्पू और सविता का कहना है कि उन्हें भी अपनी लड़की की मुंह-दिखाई को टालना पड़ा क्योंकि वह लड़के वालो के लिए कूलर का इंतजाम नहीं कर पाए।
|
मुंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि समय आ गया है जब महाराष्ट्र सरकार को राज्य में सड़कों की खराब हालत और गड्ढे भरने में नगर निगमों व जिला परिषदों की विफलता की ओर ध्यान देना चाहिए।
मुंबई मुंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि समय आ गया है जब महाराष्ट्र सरकार को राज्य में सड़कों की खराब हालत और गड्ढे भरने में नगर निगमों व जिला परिषदों की विफलता की ओर ध्यान देना चाहिए। न्यायमूर्ति ए एस ओका और न्यायाधीश पी. एन. देशमुख की खंडपीठ ने गड्ढों वाली सड़कों और उनकी वजह से बढ़ते सड़क हादसों पर एक जनहित याचिका पर स्वतः संज्ञान से सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।
न्यायाधीश ओका ने कहा, राज्य सरकार के लिए इस दिशा में आगे बढ़ने का और इस मुद्दे पर निगरानी शुरू करने का समय आ गया है। सरकार के पास अधिकारों की कमी नहीं है। अगर स्थानीय अधिकारी और निकाय कुछ नहीं कर रहे, तो सरकार को उनपर कार्रवाई करनी चाहिए। बीएमसी ने पीठ को सूचित किया कि उसे 31 दिसंबर'17 तक शहर में गड्ढों से संबंधित 239 शिकायतें मिली हैं, जिनमें से 157 का समाधान कर लिया गया है।
अदालत के एक अधिकारी ने पीठ को बताया कि राज्य भर में 555 शिकायतें मिलीं, जिनमें से 477 का अभी तक समाधान नहीं निकला है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या ट्रैफिक पुलिस इस मामले में कोई सहायता कर सकती है। हाई कोर्ट का कहना था कि 'ट्रैफिक पुलिस हर सड़क पर गड्डों के बारे में जानती है, क्योंकि गड्डों से यातायात जाम होता है। वे इस बारे में स्थानीय प्रशासन की सहायता कर सकते हैं। इस मुद्दे पर अगली सुनवाई 19 जनवरी को होगी।
|
मुंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि समय आ गया है जब महाराष्ट्र सरकार को राज्य में सड़कों की खराब हालत और गड्ढे भरने में नगर निगमों व जिला परिषदों की विफलता की ओर ध्यान देना चाहिए। मुंबई मुंबई उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि समय आ गया है जब महाराष्ट्र सरकार को राज्य में सड़कों की खराब हालत और गड्ढे भरने में नगर निगमों व जिला परिषदों की विफलता की ओर ध्यान देना चाहिए। न्यायमूर्ति ए एस ओका और न्यायाधीश पी. एन. देशमुख की खंडपीठ ने गड्ढों वाली सड़कों और उनकी वजह से बढ़ते सड़क हादसों पर एक जनहित याचिका पर स्वतः संज्ञान से सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। न्यायाधीश ओका ने कहा, राज्य सरकार के लिए इस दिशा में आगे बढ़ने का और इस मुद्दे पर निगरानी शुरू करने का समय आ गया है। सरकार के पास अधिकारों की कमी नहीं है। अगर स्थानीय अधिकारी और निकाय कुछ नहीं कर रहे, तो सरकार को उनपर कार्रवाई करनी चाहिए। बीएमसी ने पीठ को सूचित किया कि उसे इकतीस दिसंबर'सत्रह तक शहर में गड्ढों से संबंधित दो सौ उनतालीस शिकायतें मिली हैं, जिनमें से एक सौ सत्तावन का समाधान कर लिया गया है। अदालत के एक अधिकारी ने पीठ को बताया कि राज्य भर में पाँच सौ पचपन शिकायतें मिलीं, जिनमें से चार सौ सतहत्तर का अभी तक समाधान नहीं निकला है। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या ट्रैफिक पुलिस इस मामले में कोई सहायता कर सकती है। हाई कोर्ट का कहना था कि 'ट्रैफिक पुलिस हर सड़क पर गड्डों के बारे में जानती है, क्योंकि गड्डों से यातायात जाम होता है। वे इस बारे में स्थानीय प्रशासन की सहायता कर सकते हैं। इस मुद्दे पर अगली सुनवाई उन्नीस जनवरी को होगी।
|
देश की राजधानी का हाल आप देख रहे हैं सड़कें दरिया बन चुकी हैं सांसदों के घरों तक में पानी भर गया है. सबकुछ तिनके की तरह बह रहा है. दिल्ली की लाइव तस्वीर दिखाएंगे. . . राजधानी के हाल पर दिल्ली की मंत्री आतिशी ने क्या कुछ कहा आप भी सुनिए. .
|
देश की राजधानी का हाल आप देख रहे हैं सड़कें दरिया बन चुकी हैं सांसदों के घरों तक में पानी भर गया है. सबकुछ तिनके की तरह बह रहा है. दिल्ली की लाइव तस्वीर दिखाएंगे. . . राजधानी के हाल पर दिल्ली की मंत्री आतिशी ने क्या कुछ कहा आप भी सुनिए. .
|
नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में दिल्ली समेत अन्य शहरों में हो रहे हिंसक प्रदर्शन पर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। धर्मगुरुओं का कहना है कि सीएए व एनआरसी देश को बांटने वाला कानून है। सरकार को इस पर दोबारा गौर करना चाहिए। हिंसा करने से मुल्क की बदनामी होती है। प्रदर्शन के दौरान हुई कई लोगों की मौत के बाद धर्मगुरुओं ने प्रशासन से भी अपील की है कि वह प्रदर्शनकारियों संग नरमी से पेश आएं। सरकार बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों के लिए काम करे।
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में दिल्ली समेत अन्य शहरों में हो रहे हिंसक प्रदर्शन पर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। धर्मगुरुओं का कहना है कि सीएए व एनआरसी देश को बांटने वाला कानून है। सरकार को इस पर दोबारा गौर करना चाहिए। हिंसा करने से मुल्क की बदनामी होती है। प्रदर्शन के दौरान हुई कई लोगों की मौत के बाद धर्मगुरुओं ने प्रशासन से भी अपील की है कि वह प्रदर्शनकारियों संग नरमी से पेश आएं। सरकार बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों के लिए काम करे। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
|
दर्शनानन्द-उपनिषद् - समुचच्य
हमको कष्ट होता है। यदि वह भवन बेच दिया हो, तो उस के नाश से कोई प्रसन्नता नहीं होती । यदि किसी हमारे शत्रु का मकान हो, तो उसके नाश से प्रसन्नता होती है। एक ही मकान बुद्धि भेद से दु.ख उदासीनता और सुख का कारण होता है। अतएव यह नाश वाला संसार है, इसकी प्रत्येक वस्तु विकार वाली पाई जाती है । उत्पन्न होना, बढ़ना एक सीमा तक बढकर रुक जाना, आकृति में परिवर्त्तन करना, क्षय को प्राप्त होना तथा नष्ट होना, प्रत्येक शरीर, वृक्ष और वस्तुओं में देखा जाता है। जितना विनाश युक्त वस्तुओं में अहंकार होगा, उतना ही दु.ख अधिक होगा । जितना इन निय वस्तुओ से सम्बन्ध न्यून होगा, उतना ही दुख भी न्यून होगा। अज्ञानी समझते हैं कि धनवानो को सुख अधिक होता है । परन्तु यह सत्य नही, जितनी सम्पत्ति अधिक होती है, उतना उसका चित्त कङ्गाल होता है । इसके सम्बन्ध में एक दृष्टान्त है ।
दृष्टान्त ~~ एक बार एक राजा नगर से पर्वतो पर मृगया के हेतु गया । मार्ग में बूँदें पड़ने लगी। राजा घर की ओर लौटा, मार्ग में देखा कि एक साधु बैठा हुआ है, न तो कोई उस पर वस्त्र है, न पात्र, न कोई भोजन की सामग्री है, न कोई खाट है न झोंपडी । राजा इस साधु की दशा को देखकर चित्त मे विचार करने लगा कि मैं कैसा अयोग्य राजा हूं जिसके राज्य में ऐसे कङ्काल मनुष्य रहते हैं। यह सोचकर राजा ने २५) एक सेवक द्वारा साधु के पास भेजे । साधु ने उत्तर दिया- किसी दीन को देदो। नौकर ने आकर राजा से कहा कि रुपया कम इस कारण नहीं लिया। राजा ने ५००) रु० साधु के पास , तो भी उसने उत्तर दिया- किसी दीन को देदो । अब करों ने आकर कहा, तो राजा ने कहा अब भी थोड़ा है ।
अंतः पाँच सहल रुपया साधु के समीप भेजे । उसने उत्तर दिया- किसी दीन को देदो । राजा ने सुनकर फिर थोड़े समझकर पञ्चीस सहन्त्र भेजे । साधु ने उत्तर दिया - किसी दोन को देदो अन्तिम सत्रालक्ष लेकर राजा स्त्रयम् गये । साधु ने फिर वही उत्तर दिया-किसी दीन को देदो। राजा ने कहा-स्वामिन् ! आप से बढ़ कर दीन कौन होगा ? न तो आपके पास कपडा है न झोपड़ी, न पात्र हैं न भोजन की सामग्री साधु ने कहा हम तो राजा हैं। राजा ने सुनकर कहा राजाओ के पास तो सेना होती है, आप की सेना कहाँ है साधु ने कहा- उनको भय होता है इस कारण वह सेना रखते है हम को भय किसका
जिसके लिए सेना रक्खे । राजा ने कहा- राजाओं के पास कोप होता है, तुम्हारा कोष कहाँ है ? साधु ने कहाराजाओं को भय के रोग के कारण व्यय करना होता है। इस कारण वह को रखते है न हमको भय का रोग है, न सेना की आवश्यकता है न हमारा कोई व्यय है, फिर हम कोप क्यो रक्खे राजा ने कहा आप के समीप राज सामग्री ही क्या है । साधु ने कहा हमारे समीप रसायन है, जिस समय चाहे इन सम्पूर्ण पर्वतों के ताम्र को सुवर्ण बना दें । यह उत्तर श्रवण कर राजा चल दिये और मन में विचार किया कि यदि बह साधु रसायनी न होता, तो अवश्य इतना प्रभूत धन ले लेता । इसका रुपया न ले लेना इस बात का प्रमाण है कि अवश्य रसायनी है। राजा रात्रि को सोने लगे तो विचार कि यदि इस रसायनी कर्त्ता साधु के दस पॉच सहस्र मन सुर्वण बन वा लिया जावे तो ढो एक देश और पराजित हो सकते हैं। विचारा कि यह असर उत्तम है, क्योकि रात्री है किसी को मालूम भी न होगा । अतः राजा साधु की ओर चिना
|
दर्शनानन्द-उपनिषद् - समुचच्य हमको कष्ट होता है। यदि वह भवन बेच दिया हो, तो उस के नाश से कोई प्रसन्नता नहीं होती । यदि किसी हमारे शत्रु का मकान हो, तो उसके नाश से प्रसन्नता होती है। एक ही मकान बुद्धि भेद से दु.ख उदासीनता और सुख का कारण होता है। अतएव यह नाश वाला संसार है, इसकी प्रत्येक वस्तु विकार वाली पाई जाती है । उत्पन्न होना, बढ़ना एक सीमा तक बढकर रुक जाना, आकृति में परिवर्त्तन करना, क्षय को प्राप्त होना तथा नष्ट होना, प्रत्येक शरीर, वृक्ष और वस्तुओं में देखा जाता है। जितना विनाश युक्त वस्तुओं में अहंकार होगा, उतना ही दु.ख अधिक होगा । जितना इन निय वस्तुओ से सम्बन्ध न्यून होगा, उतना ही दुख भी न्यून होगा। अज्ञानी समझते हैं कि धनवानो को सुख अधिक होता है । परन्तु यह सत्य नही, जितनी सम्पत्ति अधिक होती है, उतना उसका चित्त कङ्गाल होता है । इसके सम्बन्ध में एक दृष्टान्त है । दृष्टान्त ~~ एक बार एक राजा नगर से पर्वतो पर मृगया के हेतु गया । मार्ग में बूँदें पड़ने लगी। राजा घर की ओर लौटा, मार्ग में देखा कि एक साधु बैठा हुआ है, न तो कोई उस पर वस्त्र है, न पात्र, न कोई भोजन की सामग्री है, न कोई खाट है न झोंपडी । राजा इस साधु की दशा को देखकर चित्त मे विचार करने लगा कि मैं कैसा अयोग्य राजा हूं जिसके राज्य में ऐसे कङ्काल मनुष्य रहते हैं। यह सोचकर राजा ने पच्चीस) एक सेवक द्वारा साधु के पास भेजे । साधु ने उत्तर दिया- किसी दीन को देदो। नौकर ने आकर राजा से कहा कि रुपया कम इस कारण नहीं लिया। राजा ने पाँच सौ) शून्य रुपया साधु के पास , तो भी उसने उत्तर दिया- किसी दीन को देदो । अब करों ने आकर कहा, तो राजा ने कहा अब भी थोड़ा है । अंतः पाँच सहल रुपया साधु के समीप भेजे । उसने उत्तर दिया- किसी दीन को देदो । राजा ने सुनकर फिर थोड़े समझकर पञ्चीस सहन्त्र भेजे । साधु ने उत्तर दिया - किसी दोन को देदो अन्तिम सत्रालक्ष लेकर राजा स्त्रयम् गये । साधु ने फिर वही उत्तर दिया-किसी दीन को देदो। राजा ने कहा-स्वामिन् ! आप से बढ़ कर दीन कौन होगा ? न तो आपके पास कपडा है न झोपड़ी, न पात्र हैं न भोजन की सामग्री साधु ने कहा हम तो राजा हैं। राजा ने सुनकर कहा राजाओ के पास तो सेना होती है, आप की सेना कहाँ है साधु ने कहा- उनको भय होता है इस कारण वह सेना रखते है हम को भय किसका जिसके लिए सेना रक्खे । राजा ने कहा- राजाओं के पास कोप होता है, तुम्हारा कोष कहाँ है ? साधु ने कहाराजाओं को भय के रोग के कारण व्यय करना होता है। इस कारण वह को रखते है न हमको भय का रोग है, न सेना की आवश्यकता है न हमारा कोई व्यय है, फिर हम कोप क्यो रक्खे राजा ने कहा आप के समीप राज सामग्री ही क्या है । साधु ने कहा हमारे समीप रसायन है, जिस समय चाहे इन सम्पूर्ण पर्वतों के ताम्र को सुवर्ण बना दें । यह उत्तर श्रवण कर राजा चल दिये और मन में विचार किया कि यदि बह साधु रसायनी न होता, तो अवश्य इतना प्रभूत धन ले लेता । इसका रुपया न ले लेना इस बात का प्रमाण है कि अवश्य रसायनी है। राजा रात्रि को सोने लगे तो विचार कि यदि इस रसायनी कर्त्ता साधु के दस पॉच सहस्र मन सुर्वण बन वा लिया जावे तो ढो एक देश और पराजित हो सकते हैं। विचारा कि यह असर उत्तम है, क्योकि रात्री है किसी को मालूम भी न होगा । अतः राजा साधु की ओर चिना
|
Don't Miss!
#FinallY: अजय देवगन की शिवाय के बारे में कुछ तो बाहर आया!
अजय देवगन की शिवाय 28 अक्टूबर को रिलीज़ हो रही है और करण जौहर की ऐ दिल है मुश्किल के साथ क्लैश हो रही है। ये दो बातें तो हर कोई जानता है। लेकिन फिल्म क्या है, इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता।
जहां शिवाय का पहला ट्रेलर लोगों को काफी पसंद आया है वहीं फिल्म के बारे में जानने की बेचैनी सबको हो रही है। तो बस जनाब, फिल्म के बारे में हाल ही में अजय देवगन ने बात करते हुए बताया कि फिल्म असली कहानी पर बनी है।
वहीं खबरें ये भी हैं कि अजय देवगन की शिवाय मशहूर हॉलीवुड फिल्म टेकन से प्रेरित है। टेकन एक सीआईए अफसर की कहानी थी जिसकी बेटी किडनैप हो जाती है और वो अपनी बेटी को ढूंढने के लिए किसी भी हद तक जाता है।
वैसे हाल ही में कई फिल्मों की कहानियां और प्लॉट बाहर आए हैं, कुछ सच और कुछ झूठ, लेकिन इन फिल्मों के बारे में जानने को सब बेचैन हो गए।
फिल्म को लेकर कई कहानियां बनाई जा रही हैं। ये भी जा रहा है कि फिल्म की कहानी ऋषि कपूर स्टारर दूसरा आदमी से इंस्पायर्ड हैं जहां राखी ने एक कामकाजी महिला की भूमिका निभाई थी जिसे अपने से कम उम्र के आदमी से प्यार हो जाता है।
शाहरूख का रईस किरदार - मियांभाई, गुजरात के एक बिज़नेसमैन अब्दुल लतीफ पर आधारित है जो 90 के दशक में गुजरात का सबसे बड़ा शराब माफिया था। लेकिन अब्दुल लतीफ के बेटे ने अब फिल्म की टीम पर केस ठोंक दिया है। उनका कहना है कि फिल्म में मियांभाई गैर कानूनी धंधों में लिप्त एक व्यक्ति है और उनके पिता दूर दूर तक इस किरदार के करीब नहीं हैं।
फिल्म 1970 में लगी इमरजेंसी की कहानी है और महारानी गायत्री देवी का किरदार इसका अहम हिस्सा माना जा रहा है। महारानी गायत्री देवी जयपुरी की तीसरी महारानी थीं और 70 की इमरजेंसी के पहले तीन बार कांग्रेस के कैंडिडेट को हरा चुकी थीं। उन्होंने इंदिरा गांधी का जमकर विरोध किया था।
शाहरूख खान ने अपना अगला सीक्रेट खोला था कि वो इम्तियाज़ अली की अगली फिल्म में काम कर रहे हैं और उन्होंने फिल्म का प्लॉट बताते हुए लिखा कि इम्तियाज़ की अगली फिल्म का प्लॉट - 'तुम मुझमें इस कदर गुम हो जाए कि मैं अपने और तुम्हारे दो छोर ढूंढ ही ना पाउं!'
ट्यूबलाइट का पहला शेड्यूल पूरा हो चुका है और सलमान खान - सोहेल खान के साथ लद्दाख में शूट कर रहे थे। ये शायद फिल्म का पहला सीन है जो दर्शकों के सामने आया। इससे पहले, भले ही सलमान खान की हीरोइन के साथ फोटो सामने आई पर वो केवल अनाउंसमेंट के लिए थी।
फिल्म रिलीज़ हो रही है 25 नवंबर को। शाहरूख से आलिया ने एक चिट्ठी में पूछा - डियर ज़िंदगी, मैं तुम्हारे बिना क्या करूंगी? मेरे पास तुम्हारे लिए बहुत सारे सवाल हैं...क्या तुम्हें सारे जवाब आते हैं? इस पर शाहरूख ने जवाब दिया - डियर आलिया, सारे जवाब तो नहीं, लेकिन काफी जवाब मालूम हैं। मैं 25 नवंबर को तुम्हारा अपॉइंटमेंट फिक्स करता हूं, सारे जवाब ले लेना।
माना जा रहा है कि फिल्म में ऋतिक रोशन एक अंधे लड़के बने हैं जो अपनी प्रेमिका या पत्नी की मौत का बदला लेने के लिए जी रहे हैं। फिल्म की शूटिंग तेज़ी से चल रही है और ये जनवरी 2017 में शाहरूख खान की रईस के साथ क्लैश होने वाली है।
अपनी अगली होम प्रोडक्शन फिल्लौरी में अनुष्का शर्मा भूत बनी नज़र आएंगी और फिल्म में उनके साथ हैं दिलजीत दोसान्ज्ह और सूरज शर्मा। फिल्म एक रोमांटिक कॉमेडी है। फिल्म के बारे में बात करते हुए अनुष्का ने बताया कि फिल्लौरी एक टिपिकल पागलपन से भरी पंजाबी शादी होगी, जिसे पूरा करने में 100 साल लग जाएंगे।
Ayodhya प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में पहुंचेंगे ये बॉलीवुड और साउथ के सितारे? चौकाने वाली लिस्ट वायरल!
बीच पर बेड डालकर बैठी हसीना ने दिखाई हॉटनेस, लोग बोले- 'हर चीज की एक सीमा होती है यार'
|
Don't Miss! #FinallY: अजय देवगन की शिवाय के बारे में कुछ तो बाहर आया! अजय देवगन की शिवाय अट्ठाईस अक्टूबर को रिलीज़ हो रही है और करण जौहर की ऐ दिल है मुश्किल के साथ क्लैश हो रही है। ये दो बातें तो हर कोई जानता है। लेकिन फिल्म क्या है, इस बारे में किसी को कुछ नहीं पता। जहां शिवाय का पहला ट्रेलर लोगों को काफी पसंद आया है वहीं फिल्म के बारे में जानने की बेचैनी सबको हो रही है। तो बस जनाब, फिल्म के बारे में हाल ही में अजय देवगन ने बात करते हुए बताया कि फिल्म असली कहानी पर बनी है। वहीं खबरें ये भी हैं कि अजय देवगन की शिवाय मशहूर हॉलीवुड फिल्म टेकन से प्रेरित है। टेकन एक सीआईए अफसर की कहानी थी जिसकी बेटी किडनैप हो जाती है और वो अपनी बेटी को ढूंढने के लिए किसी भी हद तक जाता है। वैसे हाल ही में कई फिल्मों की कहानियां और प्लॉट बाहर आए हैं, कुछ सच और कुछ झूठ, लेकिन इन फिल्मों के बारे में जानने को सब बेचैन हो गए। फिल्म को लेकर कई कहानियां बनाई जा रही हैं। ये भी जा रहा है कि फिल्म की कहानी ऋषि कपूर स्टारर दूसरा आदमी से इंस्पायर्ड हैं जहां राखी ने एक कामकाजी महिला की भूमिका निभाई थी जिसे अपने से कम उम्र के आदमी से प्यार हो जाता है। शाहरूख का रईस किरदार - मियांभाई, गुजरात के एक बिज़नेसमैन अब्दुल लतीफ पर आधारित है जो नब्बे के दशक में गुजरात का सबसे बड़ा शराब माफिया था। लेकिन अब्दुल लतीफ के बेटे ने अब फिल्म की टीम पर केस ठोंक दिया है। उनका कहना है कि फिल्म में मियांभाई गैर कानूनी धंधों में लिप्त एक व्यक्ति है और उनके पिता दूर दूर तक इस किरदार के करीब नहीं हैं। फिल्म एक हज़ार नौ सौ सत्तर में लगी इमरजेंसी की कहानी है और महारानी गायत्री देवी का किरदार इसका अहम हिस्सा माना जा रहा है। महारानी गायत्री देवी जयपुरी की तीसरी महारानी थीं और सत्तर की इमरजेंसी के पहले तीन बार कांग्रेस के कैंडिडेट को हरा चुकी थीं। उन्होंने इंदिरा गांधी का जमकर विरोध किया था। शाहरूख खान ने अपना अगला सीक्रेट खोला था कि वो इम्तियाज़ अली की अगली फिल्म में काम कर रहे हैं और उन्होंने फिल्म का प्लॉट बताते हुए लिखा कि इम्तियाज़ की अगली फिल्म का प्लॉट - 'तुम मुझमें इस कदर गुम हो जाए कि मैं अपने और तुम्हारे दो छोर ढूंढ ही ना पाउं!' ट्यूबलाइट का पहला शेड्यूल पूरा हो चुका है और सलमान खान - सोहेल खान के साथ लद्दाख में शूट कर रहे थे। ये शायद फिल्म का पहला सीन है जो दर्शकों के सामने आया। इससे पहले, भले ही सलमान खान की हीरोइन के साथ फोटो सामने आई पर वो केवल अनाउंसमेंट के लिए थी। फिल्म रिलीज़ हो रही है पच्चीस नवंबर को। शाहरूख से आलिया ने एक चिट्ठी में पूछा - डियर ज़िंदगी, मैं तुम्हारे बिना क्या करूंगी? मेरे पास तुम्हारे लिए बहुत सारे सवाल हैं...क्या तुम्हें सारे जवाब आते हैं? इस पर शाहरूख ने जवाब दिया - डियर आलिया, सारे जवाब तो नहीं, लेकिन काफी जवाब मालूम हैं। मैं पच्चीस नवंबर को तुम्हारा अपॉइंटमेंट फिक्स करता हूं, सारे जवाब ले लेना। माना जा रहा है कि फिल्म में ऋतिक रोशन एक अंधे लड़के बने हैं जो अपनी प्रेमिका या पत्नी की मौत का बदला लेने के लिए जी रहे हैं। फिल्म की शूटिंग तेज़ी से चल रही है और ये जनवरी दो हज़ार सत्रह में शाहरूख खान की रईस के साथ क्लैश होने वाली है। अपनी अगली होम प्रोडक्शन फिल्लौरी में अनुष्का शर्मा भूत बनी नज़र आएंगी और फिल्म में उनके साथ हैं दिलजीत दोसान्ज्ह और सूरज शर्मा। फिल्म एक रोमांटिक कॉमेडी है। फिल्म के बारे में बात करते हुए अनुष्का ने बताया कि फिल्लौरी एक टिपिकल पागलपन से भरी पंजाबी शादी होगी, जिसे पूरा करने में एक सौ साल लग जाएंगे। Ayodhya प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में पहुंचेंगे ये बॉलीवुड और साउथ के सितारे? चौकाने वाली लिस्ट वायरल! बीच पर बेड डालकर बैठी हसीना ने दिखाई हॉटनेस, लोग बोले- 'हर चीज की एक सीमा होती है यार'
|
केरल, केरल पुलिस ने मंगलवार को उस घटना के सिलसिले में केस दर्ज कर लिया है, जिसमें राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी नीट में शामिल होने वाली युवतियों और लड़कियों को कोल्लम जिले में परीक्षा में बैठने के लिए ब्रा उतारने को कहा गया था. पुलिस ने कहा कि जिले के अयूर में रविवार को एक निजी शिक्षण संस्थान में नीट परीक्षा का आयोजन किया गया था, यहां परीक्षा के दौरान कथित तौर पर लड़कियों को अपमान का सामना करना पड़ा.
इस मामले में केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है. मामले में रिपोर्ट मांगे जाने पर एनटीए ने इलाके का दौरा करने के लिए एक कमिटी का गठन किया है, जो तथ्यों का पता लगाएगी, इस मामले में महिला आयोग भी एनटीए को पत्र लिख चुका है और इसे शर्मनाक करार दे चुका है.
केरल में NEET 2022 मेडिकल प्रवेश परीक्षा देने गई छात्रा ने शिकायत दर्ज करवाई है कि उसे परीक्षा देने से पहले सख्ती के नाम पर उसे ब्रा उतारने पर मजबूर कर दिया गया. इस मामले में कम से कम 100 लड़कियों ने शिकायत की है. कहा जा रहा है कि सुरक्षा जांच के दौरान ब्रा में लगे मेटल के हुक के चलते मेटल डिटेक्शन मशीन में बीप हुआ था, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने लड़की को ब्रा उतारने के लिए मजबूर किया, लड़की ने स्पष्टीकरण भी दिया कि ये हुक की वजह से हुआ है लेकिन फिर भी जबरन उसकी ब्रा उतरवाई गई.
नीट परीक्षा के आयोजन के दौरान मामला सोमवार को उस वक्त सामने आया, जब 17 वर्षीय एक लड़की के पिता ने बताया कि उनकी बेटी को परीक्षा के दौरान किस तरह के अपमान का सामना करना पड़ा. लड़की के पिता का कहना है कि उनकी बेटी अब तक उस सदमे से बाहर नहीं आ पाई है. पीड़िता के पिता ने कहा कि बेटी को परीक्षा के लिए तीन घंटे से अधिक समय तक बिना अंतःवस्त्र के बैठना पड़ा था, लड़की के पिता ने बताया कि उनकी बेटी ने नीट बुलेटिन में उल्लिखित ड्रेस कोड के अनुसार ही कपड़े पहने थे, इसके बावजूद वहां के मैनेजमेंट ने इतनी बदसलूकी वाली हरकत की.
फिलहाल, इस मामले में लड़की की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 और 509 के तहत मामला दर्ज किया गया है.
|
केरल, केरल पुलिस ने मंगलवार को उस घटना के सिलसिले में केस दर्ज कर लिया है, जिसमें राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी नीट में शामिल होने वाली युवतियों और लड़कियों को कोल्लम जिले में परीक्षा में बैठने के लिए ब्रा उतारने को कहा गया था. पुलिस ने कहा कि जिले के अयूर में रविवार को एक निजी शिक्षण संस्थान में नीट परीक्षा का आयोजन किया गया था, यहां परीक्षा के दौरान कथित तौर पर लड़कियों को अपमान का सामना करना पड़ा. इस मामले में केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है. मामले में रिपोर्ट मांगे जाने पर एनटीए ने इलाके का दौरा करने के लिए एक कमिटी का गठन किया है, जो तथ्यों का पता लगाएगी, इस मामले में महिला आयोग भी एनटीए को पत्र लिख चुका है और इसे शर्मनाक करार दे चुका है. केरल में NEET दो हज़ार बाईस मेडिकल प्रवेश परीक्षा देने गई छात्रा ने शिकायत दर्ज करवाई है कि उसे परीक्षा देने से पहले सख्ती के नाम पर उसे ब्रा उतारने पर मजबूर कर दिया गया. इस मामले में कम से कम एक सौ लड़कियों ने शिकायत की है. कहा जा रहा है कि सुरक्षा जांच के दौरान ब्रा में लगे मेटल के हुक के चलते मेटल डिटेक्शन मशीन में बीप हुआ था, जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने लड़की को ब्रा उतारने के लिए मजबूर किया, लड़की ने स्पष्टीकरण भी दिया कि ये हुक की वजह से हुआ है लेकिन फिर भी जबरन उसकी ब्रा उतरवाई गई. नीट परीक्षा के आयोजन के दौरान मामला सोमवार को उस वक्त सामने आया, जब सत्रह वर्षीय एक लड़की के पिता ने बताया कि उनकी बेटी को परीक्षा के दौरान किस तरह के अपमान का सामना करना पड़ा. लड़की के पिता का कहना है कि उनकी बेटी अब तक उस सदमे से बाहर नहीं आ पाई है. पीड़िता के पिता ने कहा कि बेटी को परीक्षा के लिए तीन घंटे से अधिक समय तक बिना अंतःवस्त्र के बैठना पड़ा था, लड़की के पिता ने बताया कि उनकी बेटी ने नीट बुलेटिन में उल्लिखित ड्रेस कोड के अनुसार ही कपड़े पहने थे, इसके बावजूद वहां के मैनेजमेंट ने इतनी बदसलूकी वाली हरकत की. फिलहाल, इस मामले में लड़की की शिकायत पर भारतीय दंड संहिता की धारा तीन सौ चौवन और पाँच सौ नौ के तहत मामला दर्ज किया गया है.
|
आपने सर्च किया थाः
यूपीए काल में हैदराबाद और मुंबई से लेकर दिल्ली और पुणे तक में बम विस्फोट करने वाले आतंकी अब फिर से सक्रिय हो गए हैं। अबकी सिर्फ पाकिस्तानी संगठन ही नहीं, बल्कि ISIS और अलकायदा भी मैदान में है।
ऋचा भी ज्योतिका की तरह उच्च-शिक्षित थी। दोनों प्रयागराज की हैं और दिल्ली में उनका धर्म-परिवर्तन हुआ, ऐसे में पता लगाया जा रहा है कि दोनों के बीच कॉमन लिंक क्या है।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित भाषण में, बेंजामिन नेतान्याहू ने कहा कि हमास और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद के आतंकी समूहों को इजरायल के नागरिकों पर अपने हमलों के लिए भारी कीमत चुकानी होगी।
पाकिस्तान में फ्रांसीसी राजदूत को हटाने के लिए कट्टरपंथी समूहों का प्रदर्शन लगातार जारी है। इसी क्रम में सोमवार को चरमपंथी दल तहरीक-ए-लब्बाक के नेता साद रिजवी की गिरफ्तारी हुई।
रविंदर सिंह ने सवाल किया कि क्या यह प्रतिबंध 'हिंदू तालिबान का निर्माण' है? उनके ट्वीट में लिखा था, "अब आप मंगलवार को गुड़गाँव में मांस नहीं बेच सकते। कारण- क्योंकि इससे धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं। हिंदू तालिबान का निर्माण? "
जैश और लश्कर के पकड़े गए यह 7 आतंकी कुछ समय पहले ही आतंकवादी बने हैं। आतंकियों के पास से 2 शक्तिशाली IED और वाहन बम के लिए तैयार की जा रही कार भी बरामद हुई है।
म्यांमार की सीमा जम्मू कश्मीर से नहीं लगी हुई है, फिर भी प्रदेश में रोहिंग्या मुस्लिमों की संख्या इतनी कैसे? जानिए कैसे चल रहा था ये पूरा खेल।
अहमद शहजाद इस वीडियो में दिलशान पर इस्लाम अपनाने के लिए दबाव बनाते हुए नजर आ रहे हैं। वसीम जाफर मामले के बीच वीडियो वायरल।
ग्रूमिंग जिहादः ब्रिटेन के वेस्ट यॉर्कशायर में 32 लोगों पर 8 नाबालिग लड़कियों के साथ यौन अपराधों के 150 मामले दर्ज किए गए हैं।
|
आपने सर्च किया थाः यूपीए काल में हैदराबाद और मुंबई से लेकर दिल्ली और पुणे तक में बम विस्फोट करने वाले आतंकी अब फिर से सक्रिय हो गए हैं। अबकी सिर्फ पाकिस्तानी संगठन ही नहीं, बल्कि ISIS और अलकायदा भी मैदान में है। ऋचा भी ज्योतिका की तरह उच्च-शिक्षित थी। दोनों प्रयागराज की हैं और दिल्ली में उनका धर्म-परिवर्तन हुआ, ऐसे में पता लगाया जा रहा है कि दोनों के बीच कॉमन लिंक क्या है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित भाषण में, बेंजामिन नेतान्याहू ने कहा कि हमास और फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद के आतंकी समूहों को इजरायल के नागरिकों पर अपने हमलों के लिए भारी कीमत चुकानी होगी। पाकिस्तान में फ्रांसीसी राजदूत को हटाने के लिए कट्टरपंथी समूहों का प्रदर्शन लगातार जारी है। इसी क्रम में सोमवार को चरमपंथी दल तहरीक-ए-लब्बाक के नेता साद रिजवी की गिरफ्तारी हुई। रविंदर सिंह ने सवाल किया कि क्या यह प्रतिबंध 'हिंदू तालिबान का निर्माण' है? उनके ट्वीट में लिखा था, "अब आप मंगलवार को गुड़गाँव में मांस नहीं बेच सकते। कारण- क्योंकि इससे धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं। हिंदू तालिबान का निर्माण? " जैश और लश्कर के पकड़े गए यह सात आतंकी कुछ समय पहले ही आतंकवादी बने हैं। आतंकियों के पास से दो शक्तिशाली IED और वाहन बम के लिए तैयार की जा रही कार भी बरामद हुई है। म्यांमार की सीमा जम्मू कश्मीर से नहीं लगी हुई है, फिर भी प्रदेश में रोहिंग्या मुस्लिमों की संख्या इतनी कैसे? जानिए कैसे चल रहा था ये पूरा खेल। अहमद शहजाद इस वीडियो में दिलशान पर इस्लाम अपनाने के लिए दबाव बनाते हुए नजर आ रहे हैं। वसीम जाफर मामले के बीच वीडियो वायरल। ग्रूमिंग जिहादः ब्रिटेन के वेस्ट यॉर्कशायर में बत्तीस लोगों पर आठ नाबालिग लड़कियों के साथ यौन अपराधों के एक सौ पचास मामले दर्ज किए गए हैं।
|
अगर आप डीमैट अकाउंट के माध्यम से शेयरों की खरीद-फरोख्त करते हैं तो आपके लिए यह खबर काफी उपयोगी है. आपको 31 जुलाई यानी शनिवार तक अपना केवाईसी डिटेल अपडेट कर लेना चाहिए नहीं तो आपका अकाउंट डिएक्टिवेट हो सकता है और उसके बाद आप शेयरों की खरीद-फरोख्त नहीं कर पाएंगे. (फाइल फोटो)
डीमैट खातों का संचालन करने वाले सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) और नेशनल सिक्यूरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) ने यह चेतावनी जारी की है. इस चेतावनी के बाद से ही ब्रोकरेज हाउस अपने डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट वाले ग्राहकों को ई-मेल, मैसेज आदि के द्वारा यह सूचना भेजी है कि डेडलाइन से पहले अपने नो योर कस्टमर (KYC) डिटेल को अपडेट करा लें. ब्रोकरेज हाउस का कहना है कि अगर ग्राहक अपने डीमैट खाते को बंद होने से रोकना चाहते हैं तो 31 जुलाई तक केवाईसी अपडेट करा लें. (फाइल फोटो)
छह तरह की जानकारीः गौरतलब है कि CDSL और NDSL ने अप्रैल, 2021 में ही सर्कुलर जारी कर यह कहा था कि ग्राहकों को 31 जुलाई तक अपने डीमैट खातों को अपडेट कराना होगा. इसके मुताबिक ग्राहकों को अपनी छह तरह की जानकारी अपडेट करनी होगी-नाम, पता, परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN), वैध मोबाइल नंबर, वैध ई-मेल आईडी और आय का रेंज यानी कितनी आय है. (फाइल फोटो)
नियम के मुताबिक 1 जून, 2021 के बद जो भी डीमैट खाते खुल रहे हैं, उसमें यह सभी 6 जानकारी देनी जरूरी है. यही नहीं साथ ही यह भी कहा गया है कि ग्राहकों का पैन नंबर उनके आधार नंबर से लिंक होना चाहिए. (फाइल फोटो)
अगर आपने अपडेट नहीं किया तो क्या होगा?
अगर किसी ने केवाईसी के तहत दी गई जानकारी को अपडेट नहीं किया तो उनका खाता डीएक्टिवेट यानी निष्क्रिय कर दिया जाएगा. उनके खाते में मौजूद पोर्टफोलियो तो बना रहेगा, लेकिन वे कोई खरीद-फरोख्त नहीं कर पाएंगे. उनका खाता फिर तभी सक्रिय हो पाएगा, जब वे केवाईसी डिटेल को अपडेट कर देते हैं. (फाइल फोटोः Getty Images)
सेबी ने डिपॉजिटर्स को यह आदेश दिया था कि वे सभी छह फील्ड की जानकारी ग्राहकों से लेकर वेरिफाई करें और ग्राहकों को यह सूचना 31 मई तक भेज दें कि उन्हें केवाईसी अपडेट करनी है. (फाइल फोटो)
|
अगर आप डीमैट अकाउंट के माध्यम से शेयरों की खरीद-फरोख्त करते हैं तो आपके लिए यह खबर काफी उपयोगी है. आपको इकतीस जुलाई यानी शनिवार तक अपना केवाईसी डिटेल अपडेट कर लेना चाहिए नहीं तो आपका अकाउंट डिएक्टिवेट हो सकता है और उसके बाद आप शेयरों की खरीद-फरोख्त नहीं कर पाएंगे. डीमैट खातों का संचालन करने वाले सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड और नेशनल सिक्यूरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड ने यह चेतावनी जारी की है. इस चेतावनी के बाद से ही ब्रोकरेज हाउस अपने डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट वाले ग्राहकों को ई-मेल, मैसेज आदि के द्वारा यह सूचना भेजी है कि डेडलाइन से पहले अपने नो योर कस्टमर डिटेल को अपडेट करा लें. ब्रोकरेज हाउस का कहना है कि अगर ग्राहक अपने डीमैट खाते को बंद होने से रोकना चाहते हैं तो इकतीस जुलाई तक केवाईसी अपडेट करा लें. छह तरह की जानकारीः गौरतलब है कि CDSL और NDSL ने अप्रैल, दो हज़ार इक्कीस में ही सर्कुलर जारी कर यह कहा था कि ग्राहकों को इकतीस जुलाई तक अपने डीमैट खातों को अपडेट कराना होगा. इसके मुताबिक ग्राहकों को अपनी छह तरह की जानकारी अपडेट करनी होगी-नाम, पता, परमानेंट अकाउंट नंबर , वैध मोबाइल नंबर, वैध ई-मेल आईडी और आय का रेंज यानी कितनी आय है. नियम के मुताबिक एक जून, दो हज़ार इक्कीस के बद जो भी डीमैट खाते खुल रहे हैं, उसमें यह सभी छः जानकारी देनी जरूरी है. यही नहीं साथ ही यह भी कहा गया है कि ग्राहकों का पैन नंबर उनके आधार नंबर से लिंक होना चाहिए. अगर आपने अपडेट नहीं किया तो क्या होगा? अगर किसी ने केवाईसी के तहत दी गई जानकारी को अपडेट नहीं किया तो उनका खाता डीएक्टिवेट यानी निष्क्रिय कर दिया जाएगा. उनके खाते में मौजूद पोर्टफोलियो तो बना रहेगा, लेकिन वे कोई खरीद-फरोख्त नहीं कर पाएंगे. उनका खाता फिर तभी सक्रिय हो पाएगा, जब वे केवाईसी डिटेल को अपडेट कर देते हैं. सेबी ने डिपॉजिटर्स को यह आदेश दिया था कि वे सभी छह फील्ड की जानकारी ग्राहकों से लेकर वेरिफाई करें और ग्राहकों को यह सूचना इकतीस मई तक भेज दें कि उन्हें केवाईसी अपडेट करनी है.
|
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को इलाज के लिए पटना से दिल्ली के AIIMS लाया गया। अपने घर में गिरने की वजह से उनके के कंधे समेत तीन जगह पर फ्रैक्चर हो गया है।
उत्तर प्रदेश के सिराथू से विधायक पल्लवी पटेल की तबीयत अचानक खराब हो गई है उन्हें लखनऊ के मेदांता में भर्ती कराया गया है।
सिराथू सीट से विधायक पल्लवी पटेल लखनऊ मेदांता में भर्ती, केशव मौर्या को हराया था, ब्रेन हैमरेज की आशंका!
टीआरएस पार्टी लीडर और Hyderabad ex-Mayor बोंथू मोहन राम ने मंगलवार को मेन रोड पर अपने Birthday Celebration के लिए ट्रैफिक ब्लॉक कर दिया। टीआरएस नेता को एक विशाल काफिले के साथ चौराहे के बीच में शैंपेन (Champagn) उठाते हुए देखा गया था।
ममता बनर्जी की पार्टी TMC की सांसद महुआ मोइत्रा का एक बयान सुर्खियों में है। वो कह रही हैं कि मेरे लिए काली मांसाहारी और शराब स्वीकार करने वाली देवी हैं। इससे किसी की भावनाएं आहत नहीं होनी चाहिए। सवाल पब्लिक का है कि क्या धर्म के अपमान के मामलों में भी तुष्टीकरण की राजनीति हो रही है? आखिर मां काली को लेकर सामने आई विवादित सोच को शह क्यों दी जा रही है?
देवी काली पर महुआ मोइत्रा का बयान, क्या धर्म के अपमान के मामलों में भी तुष्टीकरण की राजनीति हो रही है?
केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी का इस्तीफा मंजूर हो गया है और अब अल्पसंख्यक मामलों का विभाग स्मृति ईरानी को दिया गया है जो अपने वर्तमान पोर्टफोलियो के साथ इसे भी संभालेंगी।
भारत के 4 दक्षिणी राज्यों के चार दिग्गजों को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया है। राज्यसभा के लिए मनोनीत होने वाले महान संगीतकार इलैयाराजा, दिग्गज एथलीट पीटी ऊषा, श्री वी विजयेंद्र प्रसाद गारु और श्री वीरेंद्र हेगड़े शामिल है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असमिया अखबार के एक कार्यक्रम में कहा कि एक सवाल हमें जरूर पूछना चाहिए। इंटेलेक्चुअल स्पेस किसी विशेष भाषा को जानने वाले कुछ लोगों तक ही सीमित क्यों रहना चाहिए? ये सवाल सिर्फ इमोशन का नहीं है, बल्कि साइनटिफिक लॉजिक का भी है।
अल्पसंख्यक मामलों में केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है।
देवी काली पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की गई टिप्पणी पर बवाल खड़ा गया है। कांग्रेस ने कहा कि प्रतीकों और हमारे विश्वास के सार में संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए और हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी एक्टिविटी और काम दूसरे धर्मों को चोट न पहुंचाए।
एकनाथ शिंदे गुट ने बड़ा दावा किया है। गुट के विधायक गुलाबराव पाटिल ने कहा है कि शिव सेना के 18 में से 12 सांसदों का उनके पास समर्थन है।
भारत के वेस्टइंडीज दौरे के लिए भारतीय वनडे टीम का ऐलान कर दिया है। एक तरफ जहां रोहित शर्मा की अगुवाई में टीम इंडिया इंग्लैंड के खिलाफ सीमित ओवर क्रिकेट सीरीज के लिए तैयार है। वहीं बीसीसीआई ने वेस्टइंडीज दौरे के लिए जिस वनडे टीम का ऐलान किया है उसकी अगुवाई शिखर धवन के हाथों में सौंपी है।
बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के वकील हस्तीमल सारस्वत को लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी। धमकी भरे लेटर में लिखा कि तुम्हारा भी वही हश्र होगा जो मूसे वाला का हुआ।
कैबिनेट मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और आरसीपी का कैबिनेट से इस्तीफा तय माना जा रहा है। नकवी और सिंह का बतौर राज्यसभा कार्यकाल गुरुवार को समाप्त हो रहा है। ऐसे में समझा जा रहा है कि दोनों नेता आज या कल अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। दरअसल, कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों मंत्रियों की तारीफ की। सूत्रों के मुताबिक कैबिनेक की बैठक में पीएम ने कहा कि दोनों मंत्रियों ने देश के विकास में बहुत बड़ा योगदान दिया है।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के सिर फिर से सेहरा सजेगा। गुरुवार (सात जुलाई, 2022) को चंडीगढ़ में वह शादी के पवित्र बंधन में बंधेंगे। दरअसल, मान की मां की लंबे समय से तमन्ना थी कि आप नेता दोबारा से अपना घर बसाएं। ऐसे में उनके लिए दूसरी पत्नी को मां और बहन ने ही चुना है।
पंजाब के सीएम भगवंत मान के सिर फिर सजेगा सेहरा, कल शादी; जानिए कौन हैं दूसरी पत्नी?
डॉक्युमेंट्री फिल्म काली पर विवाद बढ़ता जा रहा। ताजा मामला टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के मां काली पर दिए गए बयान का है। जिस पर भाजपा ने हल्ला बोल दिया है। बीजेपी ने कहा कि सांसद को उनके बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि महुआ मोइत्रा पर एक्शन होना चाहिए। एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में महुआ मोइत्रा ने हिंदू देवी को "मांस खाने वाली, शराब स्वीकार करने वाली देवी" कहा था। उनके इस बयान पर बवाल बढ़ता देख, उनकी पार्टी टीएमसी को बयान जारी करना पड़ा और महुआ के बयान की आलोचना की। टीएमसी की आलोचना के बाद, महुआ मोइत्रा ने अपनी पार्टी टीएमसी के ट्विटर अकाउंट को अन फॉलो कर दिया है। इस बीच मध्य प्रदेश में उनके खिलाफ केस भी दर्ज हो गया है।
राजस्थान के अजमेर शहर में एक खादिम की धमकी के बाद अब अंजुमन कमेटी के सेक्रेट्री का धमकी भरा वीडियो सामने आया है। क्लिप में सरवर चिश्ती किसी कार्यक्रम के दौरान साफ कहते नजर आए कि ऐसा आंदोलन किया जाएगा कि पूरा हिंदुस्तान हिल जाएगा। उनके यह बात कहते ही आस-पास खड़े लोग जोर जोर से इंशा-अल्लाह-इंशा अल्लाह के नारे लगाने लगे।
भारत के खिलाफ 378 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए एजबेस्टन टेस्ट को जीतने के बाद इंग्लैंड के दिग्गज बल्लेबाज जो रूट को ताजा आईसीसी टेस्ट रैंकिंग्स में फायदा हुआ है। जो रूट के साथ-साथ भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज रिषभ पंत ने भी पहली पारी में शतक जड़ने के दम पर बल्लेबाजों की ताजा रैंकिंग में छलांग लगाई है। वहीं भारत के दिग्गज बल्लेबाज और तकरीबन तीन साल से एक भी शतक नहीं जड़ने वाले विराट कोहली को करारा झटका लगा है। वो टॉप-10 से बाहर हो गए हैं।
देश के तीन हिस्सों से बुधवार (छह जुलाई, 2022) को ऐसे दृश्य सामने आए, जिन्होंने वीआईपी कल्चर के डिबेट को फिर से प्रासंगिक बना दिया। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले में एंबुलेंस फंस गई, हैदराबाद में टीआरएस के पूर्व मेयर ने ट्रैफिक रुकवा कर सरेराह अपना जन्मदिन मनाया और महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के लिए रातों-रात सड़क बना दी गई। रोचक बात है कि ऐसा तब हुआ जब उसी सूबे के थाणे शहर में गड्ढे की वजह से एक व्यक्ति की जान चली गई। ऐसे में सोशल मीडिया पर लोगों का एक धड़ा इन घटनाओं को वीआईपी कल्चर से जोड़कर देख रहा है।
कन्हैया लाल मर्डर केस के तार हैदराबाद से जुड़ते नजर आ रहे हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)ने उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल की हुई हत्या में बिहार के रहने वाले एक शख्स को हैदराबाद से हिरासत में लिया है। एजेंसी ने संतोष नगर इलाके से संदिग्ध शख्स को हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। इसके पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की एफआईआर में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुातबिक उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की जिस दिन हत्या हुई उस दिन दो और लोगों की हत्या होनी थी। आरोपियों ने इसका प्लान बनाया था लेकिन दो लोगों की रेकी नहीं हो पाने पर इनकी हत्या नहीं हो सकी। इसके अलावा मोहम्मद रियाज ने तालिबानी तरीके से लोगों की हत्या करने के लिए कानपुर से 6 छुरे मंगवाए थे।
मारुति सुजुकी ने ग्राहकों की चहेती ऑल्टो (Alto) हैचबैक के तीन वेरिएंट्स की बिक्री भारत में बंद कर दी है. कंपनी ने ऑल्टो लाइनअप के STD, LXi और LXi CNG वेरिएंट बंद कद दिए हैं. अब Maruti Suzuki की ये सबसे सस्ती हैचबैक कुल पांच वेरिएंट्स में उपलब्ध है जिनमें STD ऑप्शनल, LXi ऑप्शनल, LXi ऑप्शनल CNG, VXi और VXi प्लस शामिल हैं. स्टैंडर्ड वेरिएंट के बंद हो जाने से अब ऑल्टो की शुरुआती एक्सशोरूम कीमत 3. 39 लाख रुपये हो गई है.
देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़-बारिश के बीच मौसम की मार देखने को मिल रही है। बुधवार (छह जुलाई, 2022) सुबह हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में बादल फट गया। चोज गांव में इस आसमानी आपदा आने के बाद सैलाब जैसी नौबत देखने को मिली। जगह-जगह सड़कें और इलाके जलमग्न नजर आए, जबकि एक पुल टूटने की खबर है। घटना में चार लोगों के बहने की भी खबर है।
मंगलवार को सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले महीने यानी जून 2022 में भारत में बेरोजगारी दर (Unemployment Rate) कुल कार्यबल का 7. 8 फीसदी हो गई। इससे पिछले महीने यानी मई 2022 में यह आंकड़ा 7. 12 फीसदी था। सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक, बेरोजगारी दर में वृद्धि मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों की बेरोजगारी में वृद्धि के कारण हुई।
जम्मू और कश्मीर के कुलगाम में सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हो गई है। इस कार्रवाई में सेना के साथ पुलिस के जवान भी मौजूद है। मुठभेड़ कुलगाम के हादीगाम इलाके में हो रही है। सूत्रों के अनुसार सेना और पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया है। और अभी तक 2 आतंकियों ने सरेंडर कर दिया है। पुलिस के अनुसार माता-पिता और पुलिस की अपील पर छुपे 2 आतंकियों ने सरेंडर कर दिया है। और उनके पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए हैं।
झारखंड के खूंटी जिले में आईआईटी की एक छात्रा के साथ कथित रूप स छेड़छाड़ करने के आरोप में जिले के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) सैयद रियाज अहमद को पुलिस ने बीती रात हिरासत में ले लिया है। अहमद भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2019 बैच के अधिकारी हैं । छात्रा हिमाचल प्रदेश की रहने वाली है और इंटर्नशिप के लिए यहां खूंटी आई हुई थी। पुलिस के अनुसार मामला 2 जुलाई का है और छात्रा के शिकायत पर पुलिस ने आरोपी एसडीएम को हिरासत में लिया है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की निलंबित नेता नूपुर शर्मा के बारे में भड़काऊ बयान देने वाले अजमेर दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अजमेर पुलिस ने मंगलवार रात खादिम की गिरफ्तारी की। चिश्ती ने अपने एक वीडियो में कहा था कि जो कोई भी नूपुर शर्मा का सिर कलम करेगा, उसे वह अपना घर ईनाम के रूप में देगा। खादिम का यह वीडियो भी कन्हैयालाल के हत्यारे रियाज मोहम्मद एवं गौस मोहम्मद के वीडियो की तरह है।
लोगों को महंगाई की एक और मार पड़ी है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 50 रुपए का इजाफा हो गया है। दिल्ली में 14. 2 किलोग्राम गैस सिलेंडर की कीमत अब 1053 रुपए होगी। इसके अलवा पांच किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत में 18 रुपए और 19 किलोग्राम के कामर्शियल सिलेंडर के दाम में 8. 50 रुपए की वृद्धि हुई है।
कन्हैयाललाल मर्डर केस में नया खुलासा हुा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की एफआईआर में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुातबिक उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की जिस दिन हत्या हुई उस दिन दो और लोगों की हत्या होनी थी। आरोपियों ने इसका प्लान बनाया था लेकिन दो लोगों की रेकी नहीं हो पाने पर इनकी हत्या नहीं हो सकी। यही नहीं मोहम्मद रियाज ने तालिबानी तरीके से लोगों की हत्या करने के लिए कानपुर से 6 छुरे मंगवाए थे। दो अन्य लोगों की हत्या करने की जिम्मेदारी चार लोगों को सौंपी गई थी।
काली डॉक्युमेंट्री फिल्म के पोस्टर को लेकर हुए विवाद में कनाडा के म्यूजियम ने माफी मांगी है। फिल्म निर्माता लीना मणिमेकलाई की फिल्म को टोरंटो शहर के आगा खां म्यूजियम में प्रदर्शित किया गया था। भारतीय उच्चायोग द्वारा शिकायत करने के बाद म्यूजियम ने बयान जारी कर खेद जताया है। और फिल्म को प्रदर्शित नहीं करने का फैसला किया है। हालांकि अभी तक फिल्म निर्माता लीना मणिमेकलाई ने इस विवाद पर माफी नहीं मांगी है। डॉक्युमेंट्री के पोस्टर में हिंदू देवी को सिगरेट और एलजीबीटीक्यू के झंडे के साथ दिखाया गया है, जिसे लेकर विवाद शुरू हो गया है।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव गंभीर रूप से बीमार हैं। उन्हें पटना के पारस अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने फोन कर लालू यादव के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली है। पीएम मोदी ने तेजस्वी यादव को फोन कर लालू यादव का स्वास्थ्य और हालचाल जाना। बता दें कि गत रविवार को लालू यादव अपनी पत्नी राबड़ी देवी के आधिकारिक आवास पर सीढ़ियों से गिर गए थे जहां उनके दाहिने कंधे में फ्रैक्चर हुआ और पीठ में चोट लगी।
|
राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को इलाज के लिए पटना से दिल्ली के AIIMS लाया गया। अपने घर में गिरने की वजह से उनके के कंधे समेत तीन जगह पर फ्रैक्चर हो गया है। उत्तर प्रदेश के सिराथू से विधायक पल्लवी पटेल की तबीयत अचानक खराब हो गई है उन्हें लखनऊ के मेदांता में भर्ती कराया गया है। सिराथू सीट से विधायक पल्लवी पटेल लखनऊ मेदांता में भर्ती, केशव मौर्या को हराया था, ब्रेन हैमरेज की आशंका! टीआरएस पार्टी लीडर और Hyderabad ex-Mayor बोंथू मोहन राम ने मंगलवार को मेन रोड पर अपने Birthday Celebration के लिए ट्रैफिक ब्लॉक कर दिया। टीआरएस नेता को एक विशाल काफिले के साथ चौराहे के बीच में शैंपेन उठाते हुए देखा गया था। ममता बनर्जी की पार्टी TMC की सांसद महुआ मोइत्रा का एक बयान सुर्खियों में है। वो कह रही हैं कि मेरे लिए काली मांसाहारी और शराब स्वीकार करने वाली देवी हैं। इससे किसी की भावनाएं आहत नहीं होनी चाहिए। सवाल पब्लिक का है कि क्या धर्म के अपमान के मामलों में भी तुष्टीकरण की राजनीति हो रही है? आखिर मां काली को लेकर सामने आई विवादित सोच को शह क्यों दी जा रही है? देवी काली पर महुआ मोइत्रा का बयान, क्या धर्म के अपमान के मामलों में भी तुष्टीकरण की राजनीति हो रही है? केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी का इस्तीफा मंजूर हो गया है और अब अल्पसंख्यक मामलों का विभाग स्मृति ईरानी को दिया गया है जो अपने वर्तमान पोर्टफोलियो के साथ इसे भी संभालेंगी। भारत के चार दक्षिणी राज्यों के चार दिग्गजों को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया है। राज्यसभा के लिए मनोनीत होने वाले महान संगीतकार इलैयाराजा, दिग्गज एथलीट पीटी ऊषा, श्री वी विजयेंद्र प्रसाद गारु और श्री वीरेंद्र हेगड़े शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असमिया अखबार के एक कार्यक्रम में कहा कि एक सवाल हमें जरूर पूछना चाहिए। इंटेलेक्चुअल स्पेस किसी विशेष भाषा को जानने वाले कुछ लोगों तक ही सीमित क्यों रहना चाहिए? ये सवाल सिर्फ इमोशन का नहीं है, बल्कि साइनटिफिक लॉजिक का भी है। अल्पसंख्यक मामलों में केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। देवी काली पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की गई टिप्पणी पर बवाल खड़ा गया है। कांग्रेस ने कहा कि प्रतीकों और हमारे विश्वास के सार में संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए और हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हमारी एक्टिविटी और काम दूसरे धर्मों को चोट न पहुंचाए। एकनाथ शिंदे गुट ने बड़ा दावा किया है। गुट के विधायक गुलाबराव पाटिल ने कहा है कि शिव सेना के अट्ठारह में से बारह सांसदों का उनके पास समर्थन है। भारत के वेस्टइंडीज दौरे के लिए भारतीय वनडे टीम का ऐलान कर दिया है। एक तरफ जहां रोहित शर्मा की अगुवाई में टीम इंडिया इंग्लैंड के खिलाफ सीमित ओवर क्रिकेट सीरीज के लिए तैयार है। वहीं बीसीसीआई ने वेस्टइंडीज दौरे के लिए जिस वनडे टीम का ऐलान किया है उसकी अगुवाई शिखर धवन के हाथों में सौंपी है। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के वकील हस्तीमल सारस्वत को लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी। धमकी भरे लेटर में लिखा कि तुम्हारा भी वही हश्र होगा जो मूसे वाला का हुआ। कैबिनेट मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और आरसीपी का कैबिनेट से इस्तीफा तय माना जा रहा है। नकवी और सिंह का बतौर राज्यसभा कार्यकाल गुरुवार को समाप्त हो रहा है। ऐसे में समझा जा रहा है कि दोनों नेता आज या कल अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं। दरअसल, कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों मंत्रियों की तारीफ की। सूत्रों के मुताबिक कैबिनेक की बैठक में पीएम ने कहा कि दोनों मंत्रियों ने देश के विकास में बहुत बड़ा योगदान दिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के सिर फिर से सेहरा सजेगा। गुरुवार को चंडीगढ़ में वह शादी के पवित्र बंधन में बंधेंगे। दरअसल, मान की मां की लंबे समय से तमन्ना थी कि आप नेता दोबारा से अपना घर बसाएं। ऐसे में उनके लिए दूसरी पत्नी को मां और बहन ने ही चुना है। पंजाब के सीएम भगवंत मान के सिर फिर सजेगा सेहरा, कल शादी; जानिए कौन हैं दूसरी पत्नी? डॉक्युमेंट्री फिल्म काली पर विवाद बढ़ता जा रहा। ताजा मामला टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के मां काली पर दिए गए बयान का है। जिस पर भाजपा ने हल्ला बोल दिया है। बीजेपी ने कहा कि सांसद को उनके बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि महुआ मोइत्रा पर एक्शन होना चाहिए। एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में महुआ मोइत्रा ने हिंदू देवी को "मांस खाने वाली, शराब स्वीकार करने वाली देवी" कहा था। उनके इस बयान पर बवाल बढ़ता देख, उनकी पार्टी टीएमसी को बयान जारी करना पड़ा और महुआ के बयान की आलोचना की। टीएमसी की आलोचना के बाद, महुआ मोइत्रा ने अपनी पार्टी टीएमसी के ट्विटर अकाउंट को अन फॉलो कर दिया है। इस बीच मध्य प्रदेश में उनके खिलाफ केस भी दर्ज हो गया है। राजस्थान के अजमेर शहर में एक खादिम की धमकी के बाद अब अंजुमन कमेटी के सेक्रेट्री का धमकी भरा वीडियो सामने आया है। क्लिप में सरवर चिश्ती किसी कार्यक्रम के दौरान साफ कहते नजर आए कि ऐसा आंदोलन किया जाएगा कि पूरा हिंदुस्तान हिल जाएगा। उनके यह बात कहते ही आस-पास खड़े लोग जोर जोर से इंशा-अल्लाह-इंशा अल्लाह के नारे लगाने लगे। भारत के खिलाफ तीन सौ अठहत्तर रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए एजबेस्टन टेस्ट को जीतने के बाद इंग्लैंड के दिग्गज बल्लेबाज जो रूट को ताजा आईसीसी टेस्ट रैंकिंग्स में फायदा हुआ है। जो रूट के साथ-साथ भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज रिषभ पंत ने भी पहली पारी में शतक जड़ने के दम पर बल्लेबाजों की ताजा रैंकिंग में छलांग लगाई है। वहीं भारत के दिग्गज बल्लेबाज और तकरीबन तीन साल से एक भी शतक नहीं जड़ने वाले विराट कोहली को करारा झटका लगा है। वो टॉप-दस से बाहर हो गए हैं। देश के तीन हिस्सों से बुधवार को ऐसे दृश्य सामने आए, जिन्होंने वीआईपी कल्चर के डिबेट को फिर से प्रासंगिक बना दिया। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफिले में एंबुलेंस फंस गई, हैदराबाद में टीआरएस के पूर्व मेयर ने ट्रैफिक रुकवा कर सरेराह अपना जन्मदिन मनाया और महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे के लिए रातों-रात सड़क बना दी गई। रोचक बात है कि ऐसा तब हुआ जब उसी सूबे के थाणे शहर में गड्ढे की वजह से एक व्यक्ति की जान चली गई। ऐसे में सोशल मीडिया पर लोगों का एक धड़ा इन घटनाओं को वीआईपी कल्चर से जोड़कर देख रहा है। कन्हैया लाल मर्डर केस के तार हैदराबाद से जुड़ते नजर आ रहे हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने उदयपुर में दर्जी कन्हैया लाल की हुई हत्या में बिहार के रहने वाले एक शख्स को हैदराबाद से हिरासत में लिया है। एजेंसी ने संतोष नगर इलाके से संदिग्ध शख्स को हिरासत में लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। इसके पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी की एफआईआर में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुातबिक उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की जिस दिन हत्या हुई उस दिन दो और लोगों की हत्या होनी थी। आरोपियों ने इसका प्लान बनाया था लेकिन दो लोगों की रेकी नहीं हो पाने पर इनकी हत्या नहीं हो सकी। इसके अलावा मोहम्मद रियाज ने तालिबानी तरीके से लोगों की हत्या करने के लिए कानपुर से छः छुरे मंगवाए थे। मारुति सुजुकी ने ग्राहकों की चहेती ऑल्टो हैचबैक के तीन वेरिएंट्स की बिक्री भारत में बंद कर दी है. कंपनी ने ऑल्टो लाइनअप के STD, LXi और LXi CNG वेरिएंट बंद कद दिए हैं. अब Maruti Suzuki की ये सबसे सस्ती हैचबैक कुल पांच वेरिएंट्स में उपलब्ध है जिनमें STD ऑप्शनल, LXi ऑप्शनल, LXi ऑप्शनल CNG, VXi और VXi प्लस शामिल हैं. स्टैंडर्ड वेरिएंट के बंद हो जाने से अब ऑल्टो की शुरुआती एक्सशोरूम कीमत तीन. उनतालीस लाख रुपये हो गई है. देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़-बारिश के बीच मौसम की मार देखने को मिल रही है। बुधवार सुबह हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में बादल फट गया। चोज गांव में इस आसमानी आपदा आने के बाद सैलाब जैसी नौबत देखने को मिली। जगह-जगह सड़कें और इलाके जलमग्न नजर आए, जबकि एक पुल टूटने की खबर है। घटना में चार लोगों के बहने की भी खबर है। मंगलवार को सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले महीने यानी जून दो हज़ार बाईस में भारत में बेरोजगारी दर कुल कार्यबल का सात. आठ फीसदी हो गई। इससे पिछले महीने यानी मई दो हज़ार बाईस में यह आंकड़ा सात. बारह फीसदी था। सीएमआईई के आंकड़ों के मुताबिक, बेरोजगारी दर में वृद्धि मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों की बेरोजगारी में वृद्धि के कारण हुई। जम्मू और कश्मीर के कुलगाम में सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हो गई है। इस कार्रवाई में सेना के साथ पुलिस के जवान भी मौजूद है। मुठभेड़ कुलगाम के हादीगाम इलाके में हो रही है। सूत्रों के अनुसार सेना और पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया है। और अभी तक दो आतंकियों ने सरेंडर कर दिया है। पुलिस के अनुसार माता-पिता और पुलिस की अपील पर छुपे दो आतंकियों ने सरेंडर कर दिया है। और उनके पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए हैं। झारखंड के खूंटी जिले में आईआईटी की एक छात्रा के साथ कथित रूप स छेड़छाड़ करने के आरोप में जिले के सब डिविजनल मजिस्ट्रेट सैयद रियाज अहमद को पुलिस ने बीती रात हिरासत में ले लिया है। अहमद भारतीय प्रशासनिक सेवा के दो हज़ार उन्नीस बैच के अधिकारी हैं । छात्रा हिमाचल प्रदेश की रहने वाली है और इंटर्नशिप के लिए यहां खूंटी आई हुई थी। पुलिस के अनुसार मामला दो जुलाई का है और छात्रा के शिकायत पर पुलिस ने आरोपी एसडीएम को हिरासत में लिया है। भारतीय जनता पार्टी की निलंबित नेता नूपुर शर्मा के बारे में भड़काऊ बयान देने वाले अजमेर दरगाह के खादिम सलमान चिश्ती को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अजमेर पुलिस ने मंगलवार रात खादिम की गिरफ्तारी की। चिश्ती ने अपने एक वीडियो में कहा था कि जो कोई भी नूपुर शर्मा का सिर कलम करेगा, उसे वह अपना घर ईनाम के रूप में देगा। खादिम का यह वीडियो भी कन्हैयालाल के हत्यारे रियाज मोहम्मद एवं गौस मोहम्मद के वीडियो की तरह है। लोगों को महंगाई की एक और मार पड़ी है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में पचास रुपयापए का इजाफा हो गया है। दिल्ली में चौदह. दो किलोग्रामग्राम गैस सिलेंडर की कीमत अब एक हज़ार तिरेपन रुपयापए होगी। इसके अलवा पांच किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत में अट्ठारह रुपयापए और उन्नीस किलोग्रामग्राम के कामर्शियल सिलेंडर के दाम में आठ. पचास रुपयापए की वृद्धि हुई है। कन्हैयाललाल मर्डर केस में नया खुलासा हुा है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी की एफआईआर में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुातबिक उदयपुर में दर्जी कन्हैयालाल की जिस दिन हत्या हुई उस दिन दो और लोगों की हत्या होनी थी। आरोपियों ने इसका प्लान बनाया था लेकिन दो लोगों की रेकी नहीं हो पाने पर इनकी हत्या नहीं हो सकी। यही नहीं मोहम्मद रियाज ने तालिबानी तरीके से लोगों की हत्या करने के लिए कानपुर से छः छुरे मंगवाए थे। दो अन्य लोगों की हत्या करने की जिम्मेदारी चार लोगों को सौंपी गई थी। काली डॉक्युमेंट्री फिल्म के पोस्टर को लेकर हुए विवाद में कनाडा के म्यूजियम ने माफी मांगी है। फिल्म निर्माता लीना मणिमेकलाई की फिल्म को टोरंटो शहर के आगा खां म्यूजियम में प्रदर्शित किया गया था। भारतीय उच्चायोग द्वारा शिकायत करने के बाद म्यूजियम ने बयान जारी कर खेद जताया है। और फिल्म को प्रदर्शित नहीं करने का फैसला किया है। हालांकि अभी तक फिल्म निर्माता लीना मणिमेकलाई ने इस विवाद पर माफी नहीं मांगी है। डॉक्युमेंट्री के पोस्टर में हिंदू देवी को सिगरेट और एलजीबीटीक्यू के झंडे के साथ दिखाया गया है, जिसे लेकर विवाद शुरू हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव गंभीर रूप से बीमार हैं। उन्हें पटना के पारस अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया है। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने फोन कर लालू यादव के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली है। पीएम मोदी ने तेजस्वी यादव को फोन कर लालू यादव का स्वास्थ्य और हालचाल जाना। बता दें कि गत रविवार को लालू यादव अपनी पत्नी राबड़ी देवी के आधिकारिक आवास पर सीढ़ियों से गिर गए थे जहां उनके दाहिने कंधे में फ्रैक्चर हुआ और पीठ में चोट लगी।
|
लखीमपुर-खीरी।
काशीराम कालोनी मे रहने वाली इंटर की छात्रा अज्ञात कारणों के चलते छत से गिर गई। गंभीर हालत मे उसे जिलाअस्पताल लाया गया जंहा उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। छात्रा की मौत से जुडी तमाम चर्चाए क्षेत्र मे लोगों के बीच हो रही है।
जानकारी के अनुसार महिमा श्रीवास्तव उर्फ कविता (18) पुत्री राजेद्र प्रसाद श्रीवास्तव निवासी काशीराम कालोनी गढ़ी रोड़ ब्लाक 14/215 शनिवार की रात अपने चार मंजिला ब्लाक की छत पर मोबाइल से किसी से बात कर रही थी। जिसके बाद करीब रात 12 बजे के आस-पास वह छत से गिर गई। आवाज सुनकर आस पास रहने वाले लोग बाहर आए, तो महिला को खून से लथपथ पाया। आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उसकी दौरान इलाज मौत हो गई। प्रत्यदर्शी बताते हैं कि महिमा जब छत से गिरी तो पहले बीच में एक तार में फंसी, वह तार टूट गया और वह सड़क पर आ गिरी। इस मौत के बाद जहां परिवार सदमें में है, तो वहीं लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। परिवार की मानें तो छत पर लगी काई के कारण महिमा का पैर फिसल गया और वह नीचे गिर गई, तो वहीं दूसरी ओर यह भी बात सामने आ रही हैं कि महिमा फोन पर बात कर रही थी, उसी दौरान फोन पर दूसरी ओर से बात कर रहे शख्स से उसकी कुछ कहासुनी हुई, जिसके बाद उसने मोबाइल फोन हाथ में पकड़े-पकड़े ही चार मंजिला इमारत से छलांग लगा दी।
छात्रा की मौत के मामले में जहां तरह-तरह की चर्चाएं क्षेत्र में हो रही हैं। वहीं इस मौत का खुलासा होना भी बेहद जरूरी है। इंटर की छात्रा की मौत के बाद परिवार को यह तक नहीं पता है कि उनकी बेटी छत से गिरी है या कूदी ऐसे में अगर पुलिस को मौत का खुलासा करना है, तो छात्रा का वह मोबाइल जिसे लेकर वह कूदी थी, उसकी कॉल रिकार्ड निकाली जाए, तो शायद छात्रा की मौत की सही वजह सामने आ चुके।
|
लखीमपुर-खीरी। काशीराम कालोनी मे रहने वाली इंटर की छात्रा अज्ञात कारणों के चलते छत से गिर गई। गंभीर हालत मे उसे जिलाअस्पताल लाया गया जंहा उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। छात्रा की मौत से जुडी तमाम चर्चाए क्षेत्र मे लोगों के बीच हो रही है। जानकारी के अनुसार महिमा श्रीवास्तव उर्फ कविता पुत्री राजेद्र प्रसाद श्रीवास्तव निवासी काशीराम कालोनी गढ़ी रोड़ ब्लाक चौदह/दो सौ पंद्रह शनिवार की रात अपने चार मंजिला ब्लाक की छत पर मोबाइल से किसी से बात कर रही थी। जिसके बाद करीब रात बारह बजे के आस-पास वह छत से गिर गई। आवाज सुनकर आस पास रहने वाले लोग बाहर आए, तो महिला को खून से लथपथ पाया। आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उसकी दौरान इलाज मौत हो गई। प्रत्यदर्शी बताते हैं कि महिमा जब छत से गिरी तो पहले बीच में एक तार में फंसी, वह तार टूट गया और वह सड़क पर आ गिरी। इस मौत के बाद जहां परिवार सदमें में है, तो वहीं लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। परिवार की मानें तो छत पर लगी काई के कारण महिमा का पैर फिसल गया और वह नीचे गिर गई, तो वहीं दूसरी ओर यह भी बात सामने आ रही हैं कि महिमा फोन पर बात कर रही थी, उसी दौरान फोन पर दूसरी ओर से बात कर रहे शख्स से उसकी कुछ कहासुनी हुई, जिसके बाद उसने मोबाइल फोन हाथ में पकड़े-पकड़े ही चार मंजिला इमारत से छलांग लगा दी। छात्रा की मौत के मामले में जहां तरह-तरह की चर्चाएं क्षेत्र में हो रही हैं। वहीं इस मौत का खुलासा होना भी बेहद जरूरी है। इंटर की छात्रा की मौत के बाद परिवार को यह तक नहीं पता है कि उनकी बेटी छत से गिरी है या कूदी ऐसे में अगर पुलिस को मौत का खुलासा करना है, तो छात्रा का वह मोबाइल जिसे लेकर वह कूदी थी, उसकी कॉल रिकार्ड निकाली जाए, तो शायद छात्रा की मौत की सही वजह सामने आ चुके।
|
टी20 वर्ल्ड कप (T20 World Cup 2021) की तारीखों के ऐलान के बाद सभी टीमें इस टूर्नामेंट में अपना दमखम झोंकने के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गई हैं. यह वर्ल्ड कप यूएई में आयोजित होना है. ऐसे में पाकिस्तान के प्रदर्शन पर भी सभी की नजरें होंगी. आईसीसी वर्ल्ड टी20 रैंकिंग (ICC T20I Rankings) में नंबर 4 टीम पाकिस्तान को इस टूर्नामेंट में जीत के दावेदारों में शुमार किया जा रहा है. कप्तान बाबर आजम (Babar Azam) भी पाकिस्तानी थिंक टैंक के साथ मिलकर टीम की रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं.
इस बीच पाकिस्तानी क्रिकेट वेबसाइट क्रिकेट पाकिस्तान के हवाले से खबर है कि बाबर आजम ने टीम के मिडल ऑर्डर को मजबूत बनाने के लिहाज से अनुभवी बल्लेबाज और पूर्व कप्तान शोएब मलिक (Shoaib Malik) को टीम में लाना चाहते हैं लेकिन पीसीबी के सिलेक्टर्स को यह बात रास नहीं आ रही है. बाबर आजम ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चयनकर्ताओं से अपनी बात कह दी है लेकिन पीसीबी के मुख्य सिलेक्टर वसीम खान (PCB Chief Selector Wasim Khan) बाबर की इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते. उन्होंने बाबर की इस बात को मानने में कोई रुचि नहीं दिखाई है.
शोएब मलिक ने पाकिस्तान के लिए आखिरी बार सितंबर 2020 में पाकिस्तान की ओर से अपना आखिरी टी20 इंटरनेशनल खेला था. 39 वर्षीय मलिक इन दिनों टी20 फॉर्मेट में बढ़िया लय में हैं. उन्होंने पीएसएल में भी रन बनाए हैं और हाल में केपीएल में भी रन बना रहे हैं. इसीलिए बाबर आजम को लगता है कि इस अनुभवी ऑलराउंडर खिलाड़ी को टीम में लाना मिडल ऑर्डर के लिए बेहतर हो सकता है.
हालांकि पीसीबी के मुख्य चीफ वसीम खान इस बात के पक्ष में नहीं दिख रहे कि इस पूर्व कप्तान को वर्ल्ड कप टीम में लाया जाए. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या शोएब मलिक को टीम में जगह मिलती है या नहीं.
|
टीबीस वर्ल्ड कप की तारीखों के ऐलान के बाद सभी टीमें इस टूर्नामेंट में अपना दमखम झोंकने के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गई हैं. यह वर्ल्ड कप यूएई में आयोजित होना है. ऐसे में पाकिस्तान के प्रदर्शन पर भी सभी की नजरें होंगी. आईसीसी वर्ल्ड टीबीस रैंकिंग में नंबर चार टीम पाकिस्तान को इस टूर्नामेंट में जीत के दावेदारों में शुमार किया जा रहा है. कप्तान बाबर आजम भी पाकिस्तानी थिंक टैंक के साथ मिलकर टीम की रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. इस बीच पाकिस्तानी क्रिकेट वेबसाइट क्रिकेट पाकिस्तान के हवाले से खबर है कि बाबर आजम ने टीम के मिडल ऑर्डर को मजबूत बनाने के लिहाज से अनुभवी बल्लेबाज और पूर्व कप्तान शोएब मलिक को टीम में लाना चाहते हैं लेकिन पीसीबी के सिलेक्टर्स को यह बात रास नहीं आ रही है. बाबर आजम ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के चयनकर्ताओं से अपनी बात कह दी है लेकिन पीसीबी के मुख्य सिलेक्टर वसीम खान बाबर की इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते. उन्होंने बाबर की इस बात को मानने में कोई रुचि नहीं दिखाई है. शोएब मलिक ने पाकिस्तान के लिए आखिरी बार सितंबर दो हज़ार बीस में पाकिस्तान की ओर से अपना आखिरी टीबीस इंटरनेशनल खेला था. उनतालीस वर्षीय मलिक इन दिनों टीबीस फॉर्मेट में बढ़िया लय में हैं. उन्होंने पीएसएल में भी रन बनाए हैं और हाल में केपीएल में भी रन बना रहे हैं. इसीलिए बाबर आजम को लगता है कि इस अनुभवी ऑलराउंडर खिलाड़ी को टीम में लाना मिडल ऑर्डर के लिए बेहतर हो सकता है. हालांकि पीसीबी के मुख्य चीफ वसीम खान इस बात के पक्ष में नहीं दिख रहे कि इस पूर्व कप्तान को वर्ल्ड कप टीम में लाया जाए. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या शोएब मलिक को टीम में जगह मिलती है या नहीं.
|
उत्तराखंड में एक बार फिर कोरोना पॉजिटिव केसों ने डराना शुरू कर दिया है। कुछ महीनों की राहत के बाद केसों में इजाफा हुआ है। उत्तराखंड के जिलों में कोरोना केस सामने आए हैं। कोरोना पॉजिटिव केसों के बाद स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट मोड पर आ गया है।
देशभर में कोरोना केसों में इजाफा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को गाइडलाइन जारी करते हुए अलर्ट रहने के सख्त निर्देश दिए हैं। चिंता की बात है कि केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में 14 राज्यों में टेस्ट पॉजिटिविटी रेट 10 फीसदी से ज्यादा हो गया है।
उत्तराखंड में सोमवार को कोरोना के 13 नए मरीज मिले। जिसमें से सबसे ज्यादा कोरोना पॉजिटिव 9 केस देहरादून जिले में आए हैं। इसके बाद, उधम सिंह नगर में 2, पौड़ी, और नैनीताल में एक एक मरीज मिला है।
मालूम हो कि उत्तराखंड में पिछले कुछ महीनों से कोरोना संक्रमण नगण्य था। लेकिन, कुछ दिनों से इसमे मामूली इजाफा देखने को मिला है। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना बुलेटिन जारी करना बंद कर दिया था। लेकिन अब एक बार फिर से बुलेटिन जारी करना शुरू कर दिया गया है।
|
उत्तराखंड में एक बार फिर कोरोना पॉजिटिव केसों ने डराना शुरू कर दिया है। कुछ महीनों की राहत के बाद केसों में इजाफा हुआ है। उत्तराखंड के जिलों में कोरोना केस सामने आए हैं। कोरोना पॉजिटिव केसों के बाद स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट मोड पर आ गया है। देशभर में कोरोना केसों में इजाफा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें। केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को गाइडलाइन जारी करते हुए अलर्ट रहने के सख्त निर्देश दिए हैं। चिंता की बात है कि केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, देशभर में चौदह राज्यों में टेस्ट पॉजिटिविटी रेट दस फीसदी से ज्यादा हो गया है। उत्तराखंड में सोमवार को कोरोना के तेरह नए मरीज मिले। जिसमें से सबसे ज्यादा कोरोना पॉजिटिव नौ केस देहरादून जिले में आए हैं। इसके बाद, उधम सिंह नगर में दो, पौड़ी, और नैनीताल में एक एक मरीज मिला है। मालूम हो कि उत्तराखंड में पिछले कुछ महीनों से कोरोना संक्रमण नगण्य था। लेकिन, कुछ दिनों से इसमे मामूली इजाफा देखने को मिला है। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना बुलेटिन जारी करना बंद कर दिया था। लेकिन अब एक बार फिर से बुलेटिन जारी करना शुरू कर दिया गया है।
|
एनटीए द्वारा 23 से लेकर 29 जून तक जेईई मेन्स के पहले चरण का आयोजन कराया गया था। एनटीए ने इसके नतीजे जारी कर दिए हैं। 14 छात्रों ने देशभर में 100 पर्सेंटाइल हासिल किए हैं। जिनमें स्नेहा का नाम शामिल है। वहीं दिल्ली के दो छात्र अस्मित और हिमांशू ने 99. 99 पर्सेंटाइल लाकर राजधानी से टॉप किया है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी) दिल्ली के वैज्ञानिकों ने डीएसटी के सत्यम प्रोग्राम के सहयोग से किए गए शोध में पता लगाया है कि लगातार मेडिटेशन करने से दिमाग की कार्यक्षमता में वृद्धि करता है। मेडिटेशन से रिले चैनल्स की कार्यक्षमता को संशोधित करता है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आईआईटी दिल्ली 16 से 24 जून तक तकरीबन एक दर्जन कार्यक्रमों का आयोजन करेगा। आईआईटी दिल्ली के एक प्रोफेसर ने बताया कि 16 से 18 जून तक संस्थान में योग कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यशाला वेलनेस क्लब आईआईटी द्वारा आयोजित कराई जा रही है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी) दिल्ली का एफआईटीटी केंद्र हाल ही में सैमसंग द्वारा शुरू की गई शिक्षण एवं नवोन्मेष प्रतियोगिता 'सॉल्व फॉर टुमारो' में नॉलेज पार्टनर के रूप में काम करेगा। इस प्रतियोगिता के लिए 16 से 22 वर्ष तक के युवा 31 जुलाई तक आवेदन कर सकेंगे।
इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई मेन्स) के दूसरे चरण के लिए आवेदन प्रक्रिया बुधवार से शुरू हो गई है। जो उम्मीदवार जेईई मेन्स के दूसरे सत्र में शामिल होना चाहते हैं वह 30 जून तक इस परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं।
आईआईटी दिल्ली में बायोमास, औद्योगिक कचरे, कोयले, निगम के ठोस कचरे, ब्लैक लिकर को गैसीफिकेशन और फिशर ट्रोच सेंथिसिस प्रोसे के जरिए डीएमई में बदल रहा है। डाई मिथाइल ईथर आजकल डीजल का विकल्प बन रहा है। हाल ही में आईआईटी दिल्ली द्वारा फ्लेक्स फ्यूल इंजन टेक्नोलॉजी विकसित की गई है।
आईआईटी दिल्ली 9वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए लगातार आयोजित की जा रही साईं टेक स्पिन्स लेक्चर सीरीज की 8वीं कड़ी का 23 अप्रैल को आयोजन करेगा। 8वीं कड़ी में आईआईटी दिल्ली की प्रो. यामा दीक्षित 'भूतकाल से सीखें-जलवायु और सभ्यता के बदलाव' विषय पर छात्रों को संबोधित करेंगी।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान(आईआईटी) दिल्ली 18 और 19 अप्रैल को दो दिवसीय करियर फेस्ट प्रवृत्ति 2022 का आयोजन करेगा। जिसमें नॉन आईआईटी दिल्ली छात्रों को वर्चुअल मोड में शामिल होने का मौका मिलेगा। यह दो दिवसीय फेस्टिवल में 100 कंपनियां भाग लेंगी।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली के 4 प्रोग्रामों ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2022 के टॉप 100 प्रोग्रामों जगह बना ली है। आईआईटी के ये प्रोग्राम हैं इलेक्ट्रिल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर साइंस और सिविल इंजीनियरिंग।
आईआईटी दिल्ली में शुक्रवार को 2000 वर्ग मीटर में फैले एक विश्व स्तरीय इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया गया। 3 मंजिला अत्याधुनिक खेल परिसर में चार बैडमिंडन कोर्ट, दो स्क्वैश कोर्ट, दो टेबल टेनिस हॉल, एक ओपन एयर थिएटर, ऑफिस स्पेस एक कांफ्रेंस रूम और एक टेरेस गार्डन बनाया गया है।
|
एनटीए द्वारा तेईस से लेकर उनतीस जून तक जेईई मेन्स के पहले चरण का आयोजन कराया गया था। एनटीए ने इसके नतीजे जारी कर दिए हैं। चौदह छात्रों ने देशभर में एक सौ पर्सेंटाइल हासिल किए हैं। जिनमें स्नेहा का नाम शामिल है। वहीं दिल्ली के दो छात्र अस्मित और हिमांशू ने निन्यानवे. निन्यानवे पर्सेंटाइल लाकर राजधानी से टॉप किया है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के वैज्ञानिकों ने डीएसटी के सत्यम प्रोग्राम के सहयोग से किए गए शोध में पता लगाया है कि लगातार मेडिटेशन करने से दिमाग की कार्यक्षमता में वृद्धि करता है। मेडिटेशन से रिले चैनल्स की कार्यक्षमता को संशोधित करता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आईआईटी दिल्ली सोलह से चौबीस जून तक तकरीबन एक दर्जन कार्यक्रमों का आयोजन करेगा। आईआईटी दिल्ली के एक प्रोफेसर ने बताया कि सोलह से अट्ठारह जून तक संस्थान में योग कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यशाला वेलनेस क्लब आईआईटी द्वारा आयोजित कराई जा रही है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली का एफआईटीटी केंद्र हाल ही में सैमसंग द्वारा शुरू की गई शिक्षण एवं नवोन्मेष प्रतियोगिता 'सॉल्व फॉर टुमारो' में नॉलेज पार्टनर के रूप में काम करेगा। इस प्रतियोगिता के लिए सोलह से बाईस वर्ष तक के युवा इकतीस जुलाई तक आवेदन कर सकेंगे। इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा के दूसरे चरण के लिए आवेदन प्रक्रिया बुधवार से शुरू हो गई है। जो उम्मीदवार जेईई मेन्स के दूसरे सत्र में शामिल होना चाहते हैं वह तीस जून तक इस परीक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। आईआईटी दिल्ली में बायोमास, औद्योगिक कचरे, कोयले, निगम के ठोस कचरे, ब्लैक लिकर को गैसीफिकेशन और फिशर ट्रोच सेंथिसिस प्रोसे के जरिए डीएमई में बदल रहा है। डाई मिथाइल ईथर आजकल डीजल का विकल्प बन रहा है। हाल ही में आईआईटी दिल्ली द्वारा फ्लेक्स फ्यूल इंजन टेक्नोलॉजी विकसित की गई है। आईआईटी दिल्ली नौवीं से बारहवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए लगातार आयोजित की जा रही साईं टेक स्पिन्स लेक्चर सीरीज की आठवीं कड़ी का तेईस अप्रैल को आयोजन करेगा। आठवीं कड़ी में आईआईटी दिल्ली की प्रो. यामा दीक्षित 'भूतकाल से सीखें-जलवायु और सभ्यता के बदलाव' विषय पर छात्रों को संबोधित करेंगी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली अट्ठारह और उन्नीस अप्रैल को दो दिवसीय करियर फेस्ट प्रवृत्ति दो हज़ार बाईस का आयोजन करेगा। जिसमें नॉन आईआईटी दिल्ली छात्रों को वर्चुअल मोड में शामिल होने का मौका मिलेगा। यह दो दिवसीय फेस्टिवल में एक सौ कंपनियां भाग लेंगी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के चार प्रोग्रामों ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग दो हज़ार बाईस के टॉप एक सौ प्रोग्रामों जगह बना ली है। आईआईटी के ये प्रोग्राम हैं इलेक्ट्रिल और इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, कम्प्यूटर साइंस और सिविल इंजीनियरिंग। आईआईटी दिल्ली में शुक्रवार को दो हज़ार वर्ग मीटर में फैले एक विश्व स्तरीय इंडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन किया गया। तीन मंजिला अत्याधुनिक खेल परिसर में चार बैडमिंडन कोर्ट, दो स्क्वैश कोर्ट, दो टेबल टेनिस हॉल, एक ओपन एयर थिएटर, ऑफिस स्पेस एक कांफ्रेंस रूम और एक टेरेस गार्डन बनाया गया है।
|
क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट बड़ी ही आसानी से बन जाता हैं तो अब से आप अपने बच्चे को स्नैक्स में घर पर बना हेल्दी क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट ही खिलाएं। क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट से बच्चों को कैलोरी के साथ-साथ कैल्शियम और प्रोटीन भी मिलेगा। यकीन मानिए बच्चों को ये टोस्ट बहुत ही पसंद आएगा।
बढ़ती उम्र में बच्चों के लिए विटामिन, कैल्शियम, मिनरल और कैलोरी बहुत जरूरी होता हैं। हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम बहुत जरूरी होता हैं। ज्यादातर बच्चे दूध पीना पसंद नहीं करते हैं। ऐसे में मां के लिए मुश्किलें बढ़ जाती हैं। ऐसे में मां को बच्चों के लिए कैल्शियम से भरपूर डिश बनानी आनी चाहिए। लेकिन ज्यादातर पेरेंट्स की समस्या यह होती हैं कि वो अपने बच्चों को क्या बनाकर खिलाएं। हम आपको बताएंगे कि आप टेस्ट के साथ कैसे पोषक तत्व अपने बच्चे को खिलाएं। खाद्य पदार्थों में पनीर, चीज़, दही और हरी पत्तेदार सब्जियों में कैल्शियम से भरपूर मात्रा में होती हैं। तो आज हम इनमें से कुछ चीजों को मिलाकर टोस्ट बनाएंगे।
क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट बड़ी ही आसानी से बन जाता हैं तो अब से आप अपने बच्चे को स्नैक्स में घर पर बना हेल्दी क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट ही खिलाएं। क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट से बच्चों को कैलोरी के साथ-साथ कैल्शियम और प्रोटीन भी मिलेगा। यकीन मानिए बच्चों को ये टोस्ट बहुत ही पसंद आएगा। आइए जानें, क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट बनाने का आसान तरिका।
क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट बनाने के लिए सामग्रीः
क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट बनाने का तरीकाः
- सबसे पहले ब्रेड के स्लाईस को सेककर टोस्ट बना लें।
- प्याज को धोकर और छीलकर बारीक-बारीक काट लें। हरी मिर्च को भी बारीक-बारीक काट लें। पालक को लंबे आकार में बारीक-बारीक कट लें।
- अब गैस में धीमी आंच पर पैन रखें और जब पैन गर्म हो जाएं तो इसमें बटर डालें और गर्म कर लें।
- जब बटर गर्म हो जाए तो इसमें हरी मिर्च और प्याज डालें और धीमी आंच पर फ्राई कर लें। अगर घर बैठे पीनट बटर खरीदना चाहती है तो हम आपको बता दें कि 350 ग्राम पीनट बटर का मार्केट प्राइस 165 रुपये है, लेकिन इसे आप यहां से 155 रुपये में खरीद सकती हैं।
- फ्राई हरी मिर्च और प्याज में अब पालक और बेकिंग सोडा डालें और थोड़ी देर के लिए फ्राई करें।
- कोर्नफ्लार में दूध और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें और मध्यम आंच पर इस मिश्रण को गाढ़ा होने तक पकाएं। इस मिश्रण को ठंडा कर लें। अगर घर पर कोर्नफ्लार खत्म हो गया है तो आप ऑनलाइन भी मंगवा सकती हैं। कोर्नफ्लार के 400 ग्राम के पैकेट का मार्केट प्राइस 225 रुपये है, लेकिन इसे आप यहां से 200 रुपये में खरीद सकती हैं।
- अब सभी टोस्ट के स्लाईस के ऊपर टॉपिंग की तरह फ्राई पालक और कोर्नफ्लार फैलाकर लगाएं और चीज़ छिड़कें।
- इन टोस्ट को ओवन में 200°c के तापमान पर 10 मिनट के लिए बेक करें।
- आपकी क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट तैयार है और अब आप इसे स्लाईस में काट लें और तुरंत सर्व करें।
सुबह का ब्रेकफास्ट बहुत जरूरी होता है और रोज ब्रेकफास्ट बनाने के लिए हमे सोचना पड़ता है कि क्या बनाएं जो आसान भी हो और जिसमें समय भी कम लगे, साथ ही टेस्टी भी हो। तो अब आपकी यह मुश्किल कम हो गई। क्योंकि, क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट टेस्टी भी है और इसे बनाना आसान भी हैं।
Photo courtesy- (Archana's Kitchen, The Creative Bite, The Healthy Toast, Birthday Party & Deskgram)
आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
|
क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट बड़ी ही आसानी से बन जाता हैं तो अब से आप अपने बच्चे को स्नैक्स में घर पर बना हेल्दी क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट ही खिलाएं। क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट से बच्चों को कैलोरी के साथ-साथ कैल्शियम और प्रोटीन भी मिलेगा। यकीन मानिए बच्चों को ये टोस्ट बहुत ही पसंद आएगा। बढ़ती उम्र में बच्चों के लिए विटामिन, कैल्शियम, मिनरल और कैलोरी बहुत जरूरी होता हैं। हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम बहुत जरूरी होता हैं। ज्यादातर बच्चे दूध पीना पसंद नहीं करते हैं। ऐसे में मां के लिए मुश्किलें बढ़ जाती हैं। ऐसे में मां को बच्चों के लिए कैल्शियम से भरपूर डिश बनानी आनी चाहिए। लेकिन ज्यादातर पेरेंट्स की समस्या यह होती हैं कि वो अपने बच्चों को क्या बनाकर खिलाएं। हम आपको बताएंगे कि आप टेस्ट के साथ कैसे पोषक तत्व अपने बच्चे को खिलाएं। खाद्य पदार्थों में पनीर, चीज़, दही और हरी पत्तेदार सब्जियों में कैल्शियम से भरपूर मात्रा में होती हैं। तो आज हम इनमें से कुछ चीजों को मिलाकर टोस्ट बनाएंगे। क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट बड़ी ही आसानी से बन जाता हैं तो अब से आप अपने बच्चे को स्नैक्स में घर पर बना हेल्दी क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट ही खिलाएं। क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट से बच्चों को कैलोरी के साथ-साथ कैल्शियम और प्रोटीन भी मिलेगा। यकीन मानिए बच्चों को ये टोस्ट बहुत ही पसंद आएगा। आइए जानें, क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट बनाने का आसान तरिका। क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट बनाने के लिए सामग्रीः क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट बनाने का तरीकाः - सबसे पहले ब्रेड के स्लाईस को सेककर टोस्ट बना लें। - प्याज को धोकर और छीलकर बारीक-बारीक काट लें। हरी मिर्च को भी बारीक-बारीक काट लें। पालक को लंबे आकार में बारीक-बारीक कट लें। - अब गैस में धीमी आंच पर पैन रखें और जब पैन गर्म हो जाएं तो इसमें बटर डालें और गर्म कर लें। - जब बटर गर्म हो जाए तो इसमें हरी मिर्च और प्याज डालें और धीमी आंच पर फ्राई कर लें। अगर घर बैठे पीनट बटर खरीदना चाहती है तो हम आपको बता दें कि तीन सौ पचास ग्राम पीनट बटर का मार्केट प्राइस एक सौ पैंसठ रुपयापये है, लेकिन इसे आप यहां से एक सौ पचपन रुपयापये में खरीद सकती हैं। - फ्राई हरी मिर्च और प्याज में अब पालक और बेकिंग सोडा डालें और थोड़ी देर के लिए फ्राई करें। - कोर्नफ्लार में दूध और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें और मध्यम आंच पर इस मिश्रण को गाढ़ा होने तक पकाएं। इस मिश्रण को ठंडा कर लें। अगर घर पर कोर्नफ्लार खत्म हो गया है तो आप ऑनलाइन भी मंगवा सकती हैं। कोर्नफ्लार के चार सौ ग्राम के पैकेट का मार्केट प्राइस दो सौ पच्चीस रुपयापये है, लेकिन इसे आप यहां से दो सौ रुपयापये में खरीद सकती हैं। - अब सभी टोस्ट के स्लाईस के ऊपर टॉपिंग की तरह फ्राई पालक और कोर्नफ्लार फैलाकर लगाएं और चीज़ छिड़कें। - इन टोस्ट को ओवन में दो सौ°c के तापमान पर दस मिनट के लिए बेक करें। - आपकी क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट तैयार है और अब आप इसे स्लाईस में काट लें और तुरंत सर्व करें। सुबह का ब्रेकफास्ट बहुत जरूरी होता है और रोज ब्रेकफास्ट बनाने के लिए हमे सोचना पड़ता है कि क्या बनाएं जो आसान भी हो और जिसमें समय भी कम लगे, साथ ही टेस्टी भी हो। तो अब आपकी यह मुश्किल कम हो गई। क्योंकि, क्रिमी स्पिनॅच टोस्ट टेस्टी भी है और इसे बनाना आसान भी हैं। Photo courtesy- आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
|
पृथक् लीलायमान हैं। वस्तुतः शक्ति और शक्तिमान्का नित्य अभेद है। अतएव भगवान्की ह्लादिनी शक्ति भाव या अमूर्तरूपसे शक्तिमान् परात्पर तत्त्वमें नित्य ही वर्तमान हैं। यही भगवान्का निर्विशेष आनन्द - ब्रह्मरूप है। यहाँ परात्पर-तत्त्व भगवान् केवल 'ह्लादात्मा' हैं - आत्यन्तिक सुखस्वरूप हैं और जहाँ स्वरूपानन्दरूपा ये ही ह्लादिनी शक्ति मूर्तिरूपमें हैं, परात्पर-तत्त्व भगवान्से पृथक् प्रकट हैं, वहाँ भगवान् केवल 'ह्लादात्मा' या आत्यन्तिक सुखस्वरूप ही नहीं हैं, मूर्तिमती ह्लादिनीके द्वारा पृथक्-रूपसे नित्य सेवित होनेके कारण वे स्वयं सुखस्वरूप होते हुए ही अनिर्वचनीय अत्यन्त मधुर दिव्य सुखका आस्वादन भी करते हैं तथा वितरण भी । 'ह्लादात्मापि ह्लादते ह्लादयति च ।' ये ही हैं श्रीकृष्ण - ये ही हैं आनन्द - ब्रह्मके प्रतिष्ठास्वरूप परिपूर्णतम रसब्रह्म या समूर्त रसराज और इनसे पृथक् मूर्तरूपमें प्रकट परम मधुर रसताको प्राप्त इनकी स्वरूपभूता जो ह्लादिनी शक्ति हैं, वे ही नित्य पूर्ण आनन्दस्वरूपको भी आनन्द - रसास्वादन करानेवाली हैं - परिपूर्ण भाव या महाभावरूपा श्रीराधाजी ।
'रस' और 'भाव' दोनों एक ही परात्पर-तत्त्वके स्वरूप हैं। परात्पर-तत्त्व नित्य भावसमन्वित - भाव परिरम्भित है। इसी रसके प्रस्रवणसे नित्य-निस्सरित और प्रवाहित आनन्दधारासे ही अनन्त विश्वके अनन्त आनन्द - वैचित्र्यका विकास है। जो इस प्रकार समस्त भावों और समस्त रसोंके मूल हैं, वे ही महाभाव- परिरम्भित रसराज आनन्दमयी श्रीराधा और उनकी कायव्यूहरूपा गोपसुन्दरियोंसे परिवेष्टित अखिलरसामृतमूर्ति सच्चिदानन्द -विग्रह द्विभुज मुरलीमनोहर श्रीकृष्ण हैं और वे ही वस्तुतः सत्-शास्त्रों, महान् मनीषियों और सर्वोच्च स्तरपर पहुँचे हुए महात्मा प्रेमियोंके द्वारा सेव्य परम तत्त्व हैं।
जैसे एक मूर्तिमान् रसराज श्रीकृष्णके द्वारा ही समस्त रसोंका अस्तित्व और प्रकाश है, वैसे ही एकमात्र मूर्तिमती महाभावस्वरूपा श्रीराधाके द्वारा ही अमूर्त-समूर्त सभी भावोंका विकास और विस्तार है तथा उन-उन विभिन्न भावोंके अनुसार ही तदनुरूप रसतत्त्वका ग्रहण होता है। एक ही विद्युत् - ज्योति विविध विभिन्न वणोंके बल्बों - विद्युत् - प्रकाश - आधारोंके सम्पर्कमें आकर जैसे विभिन्न वर्णवाली दिखायी
देती है, वैसे ही एक ही भाव विभिन्न आधारोंके द्वारा उन-उनके अनुकूल रसतत्त्वका अनुभव करवाता है। एक ही रसका जो विभिन्न रूपोंमें आस्वादन है, उसमें आधार-भेदकी यह भाव-विभिन्नता ही कारण है । वैकुण्ठ आदिकी श्रीलक्ष्मी आदि, द्वारकाकी पट्टमहिषी आदि और विभिन्न-भावसमन्विता श्रीगोपाङ्गनाएँ - सभी इन मूल-महाभावरूपा ह्लादिनी (राधा) के ही विभिन्न विचित्र विकास हैं। इनमें गोपीभाव परम और चरम त्यागमय होनेके कारण सर्वश्रेष्ठ है।
धर्म सापेक्ष और निरपेक्ष - दो प्रकारका होता है; जिसमें दूसरी वस्तुकी अपेक्षा हो या जिससे दूसरी कोई विपरीत स्थिति उत्पन्न हो सकती हो, वह सापेक्ष है। जैसे सत्य-भाषण धर्म है, पर सत्य-भाषण में कहीं-कहीं विपरीत भावकी सृष्टि हो सकती है और कहीं-कहीं दूसरे किसीकी हानि भी हो सकती है। अतः वह सापेक्ष है। इसी प्रकार संसारके प्रायः सभी धर्म किसी-न-किसी प्रकारकी अपेक्षा रखनेके कारण सापेक्ष हैं, परंतु व्रजाङ्गनाओंका यह प्रेम-धर्म सर्वथा निरपेक्ष है। इसमें एकमात्र श्रीकृष्ण-सुखके अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है, अन्य किसीकी भी अपेक्षा नहीं है ।
अतएव गोपसुन्दरियोंका प्रेम सर्वथा विशुद्ध है। वे निर्मल प्रेमकी प्रतिमा हैं। इसीलिये वहाँ भगवान्का ऐश्वर्य भी प्रायः अप्रकट ही रहता है। उनके सामने कहीं ऐश्वर्यका प्रकाश होता भी है तो वह विरहकी स्थितिमें। मिलन और विरह दोनों ही रति हैं, पर मिलनमें रतिका स्वरूप अत्यन्त शीतल रहता है और विरहमें अत्यन्त उष्ण ! मिलनमें हृदयको ऐसी ठंढक मिलती है कि शीतलता पाकर जैसे जल घनीभूत हो जमकर बर्फ बन जाता है, वैसे ही हृदयका प्रेम भी घनीभूत होकर जम जाता है। वहाँ उस मिलनानन्दमें मुग्ध, महान् मोदसे प्रमुदित गोपी केवल माधुर्यमयी हो जाती है। अन्य सब कुछ उस माधुर्यमें छिप जाता है। 'प्रियतम श्रीकृष्ण मेरे अपने हैं, मेरे अपने प्राणवल्लभ हैं, मेरे अपने रमण हैं।' गोपीके अनुभवमें उस समय यही भान रहता है, श्रीकृष्णकी ईश्वरताका तनिक भी ज्ञान नहीं रहता। पर जब विरहकी स्थिति होती है, तब उसके तीक्ष्ण तापसे वह जमा हुआ शीतल प्रेम उष्णताको प्राप्त होकर तरल हो जाता है और नेत्रपथसे उष्ण जलधाराके रूपमें प्रवाहित होने लगता है। इसीसे रासपञ्चाध्यायीमें - विरहकी स्थितिमें ही गोपीकी दृष्टिमें श्रीकृष्णकी भगवत्ता
प्रतिभात होती है और वह कह उठती है'आप केवल यशोदानन्दन ही नहीं हैं, समस्त प्राणियोंके अन्तरात्माके साक्षी हैं और ब्रह्माजीके द्वारा विश्वरक्षाके लिये प्रार्थना किये जानेपर यदुकुलमें आविर्भूत हुए हैं -
कुले ॥
(श्रीमद्भागवत १० ।३१।४)
जैसे जमे हुए घीके बरतनमें नीचे तलेमें चमकती हुई काँचकी गोली पड़ी है, पर वह दिखायी नहीं देती; किंतु ज्यों ही घी गलता है त्यों ही वह नीचेकी गोली दीखने लगती है। इसी प्रकार भगवान्के विरहमें - भावी विरहकी आशङ्कामें भी मधुर प्रेमके तरल हो जानेपर उनके ऐश्वर्यकी झाँकी होने लगती है। जैसे रासपञ्चाध्यायीके प्रथमाध्यायमें जिस समय भगवान् श्रीकृष्ण गोपाङ्गनाओंको वापस लौट जानेको कहते हैं, उस समय भावी विरहकी आशङ्कासे गोपाङ्गनाओंका प्रेम उष्णताको प्राप्त होकर तरल हो जाता है और इससे वहाँ ऐश्वर्यको झाँकनेका अवसर मिल जाता है। तब वे कह उठती हैं -
'तुम सबके आत्मा हो, कुशल पुरुष अपने नित्य प्रिय आत्मामें प्रीति करते हैं दुःख देनेवाले पति-पुत्रादिसे - संसारसे कोई प्रयोजन नहीं रखते, इसीलिये हे परमेश्वर ! तुम हमलोगोंपर प्रसन्न हो जाओ
कुर्वन्ति हि त्वयि रतिं कुशलाः स्व आत्मन्
पतिसुतादिभिरार्तिदैः परमेश्वर
किम् ।
आदि ।
( श्रीमद्भागवत १०।२९ । ३३ )
प्रेमकी विशुद्धिमें प्रधान तत्त्व है - सहज सम्पूर्ण समर्पण । स्व-सुखकी इच्छा, कामना, वासनाका तथा ममता, पृथक् अहंकार आदि सभीका समर्पण और श्रीभगवान्में ही वर्द्धनशील अनन्य नित्यप्रियता ।
संसारमें कोई भी, कुछ भी, न तो नित्य प्रिय होता है और न किसीमें सदा सर्वदा प्रियता उत्तरोत्तर बढ़ती ही रहती है। वहाँ कुछ दिनोंके व्यवहारके पश्चात् किसी-न-किसी समय उससे मन हट जाता है, उतनी अनुरक्ति नहीं रहती, बल्कि कभी-कभी तो विरक्ति हो जाती है। एक समयकी परम प्रियतमा पत्नीका सङ्ग भी पतिको अच्छा नहीं लगता और वह कहने लगता है - 'देखो, मैं अभी आवश्यक कार्यमें व्यस्त हूँ, तुम इस समय मुझे अच्छी नहीं लगती।' पुत्र-पौत्रादिके स्नेहमें सनी बुढ़िया पत्नी भी यदि पति उसके प्रतिकूल कुछ बोलता है तो उसे बुरा मान जाती है, अलग रहना चाहती है। एक बार एक बुढ़िया माईके मुखसे यहाँतक सुना था कि 'यह बूढ़ा अब तो मर जाय तो सब सुखी हो जायँ ।' प्यारे पतिके मरणमें दुःख तो होता ही नहीं, वह मरण मनाती है। पुत्रके प्रति पिता, पिताके प्रति पुत्र आदिमें भी ऐसे कुभाव आ जाते हैं। बहुत दिनोंके बीमार अत्यन्त आत्मीयसे भी मन ऊब जाता है और प्यारे घरवाले यह मनाने लगते हैं कि 'अब तो ईश्वर इनकी सुन लें, इनको उठा लें तो ये भी सुखी हो जायँ और घरवाले भी।' बन्धु-बान्धवों और इष्ट-मित्रोंका त्याग तो मनकी प्रतिकूलतामें तुरंत हो जाता है। इसका प्रधान कारण है संसारमें सभी अपने मनके अनुकूल अपना सुख चाहते हैं। इसलिये जहाँतक जिससे सुख मिलता है या मिलनेकी आशा- सम्भावना रहती है, वहाँतक प्रेम - प्रियता रहती है। पर सुखके स्थानपर जहाँ दुःख दिखायी देता है या दुःखकी सम्भावना भी दीखने लगती है, वहीं वह प्रेम-प्रियता नष्ट हो जाती है। किंतु विशुद्ध प्रेममें स्वसुखकी वासनाका लेश भी नहीं रहता। इसीसे वहाँ प्रियतमके सुखके लिये उनके प्रति सहज ही सम्पूर्ण समर्पण हो जाता है और ऐसा वह निर्मल प्रेम पल-पल बढ़ता रहता है - 'प्रतिक्षणवर्धमानम् ।' इस विशुद्ध प्रेमामृतमें एक ऐसा सुदुर्लभ दिव्य महान् माधुर्य रहता है, जिसके रसास्वादनके लिये परम रसामृतस्वरूप स्वयं भगवान् भी नित्य प्रलुब्ध और लालायित रहते हैं और इसीलिये स्वयं ह्लादात्मा - आत्यन्तिक सुख-स्वरूप होते हुए ही वे समर्पणमय प्रेमियोंके परम विशुद्ध दिव्य मधुर रसका सुखास्वादन भी करते हैं और वितरण भी किया करते हैं। भगवान् श्रीकृष्ण स्वयं रसराजस्वरूप हैं, पर विशुद्ध भावमयी गोपसुन्दरियोंके विशुद्ध
प्रेमरसका निरन्तर आस्वादन करनेके लिये ललचाते और उसका आस्वादन करते-कराते रहते हैं। यही नित्य-रास है, जो अनादिकालसे निरन्तर चलता रहता है और अनन्त कालतक सतत चलता रहेगा।
गोपाङ्गनाओंकी इस त्यागमयी रतिका मूल उद्गम - उत्स है - भगवान्की स्वरूपभूता ह्लादिनी शक्ति श्रीराधाजी । ये सब उसी मूलसे अङ्कुरित, पल्लवित, प्रफुल्लित और फलित मधुर मनोहर अमर तरुवरकी शाखाएँ हैं, जिनके आश्रयमें - जिनकी शीतल सुखमयी छायामें नित्य केवलानन्दस्वरूप भगवान् नित्य नव आनन्दका अनुभव करते हैं। आज उन्हीं श्रीराधारानीका, जो लीलाके लिये समय-समयपर इस पुण्यभूमिमें आविर्भूत हुआ करती हैं - मङ्गलमय आविर्भाव-दिवस है।
आजके इस नीच स्वार्थ-कलुषित संसारमें 'प्रेम' शब्दका अर्थ प्रायः माना जाता है कि हम जिससे प्रेम करते हैं, वह हमें सुख दे, हमारे मनोरथ पूर्ण करे, हमारे मनके अनुकूल व्यवहार बतार्व करे, हमारे लिये त्याग करे, हमारा कृतज्ञ हो और हमारे प्रेम-ऋणका अधिक-से-अधिक बदला चुकाये। अभिप्राय यह कि प्रेमास्पदसे अपने सुखके लिये कुछ माँगने तथा प्राप्त करनेको ही 'प्रेम' की संज्ञा दे दी गयी है। पर श्रीराधारानी और उनकी कायव्यूहरूपा श्रीगोपाङ्गनाओंने इसके सर्वथा विपरीत प्रेमका एक दूसरा ही स्वरूप - दूसरा ही अर्थ अपने जीवनमें चरितार्थ किया है। उन्होंने दिया ही दिया और वे सदा देती ही रहेंगी। पर उन्होंने देनेको ही लेना माना तथा आगे भी सदा मानती रहेंगी। इसीसे उनका देना इतना मधुरातिमधुर है कि सर्वकाम, पूर्णकाम भगवान् श्रीकृष्ण उसे लालायित मनसे लेते रहते हैं और सदा लेना ही चाहते हैं। यथार्थमें विशुद्ध प्रेम देना जानता है, लेना जानता ही नहीं ।
प्रेमास्पद प्रेमीके प्रेमका आदर करें, यह बात तो दूर रही, वे चाहे उसके प्रेमको जानें ही नहीं, जानकर भी चाहे न मानें, चाहे उलटे नीच अपमान - घोर तिरस्कार करें, वरं प्रेमके बदलेमें भीषण कष्ट, भयानक यातना दें- तब भी वह प्रेमी प्रेमास्पदपर रोष तो करे ही नहीं, उसके दोष भी उसको नहीं दिखायी दें, बल्कि उन दोषों में भी उसे प्रेमास्पदके पवित्र प्रेम तथा अत्यन्त निकटकी आत्मीयताके ही दर्शन
|
पृथक् लीलायमान हैं। वस्तुतः शक्ति और शक्तिमान्का नित्य अभेद है। अतएव भगवान्की ह्लादिनी शक्ति भाव या अमूर्तरूपसे शक्तिमान् परात्पर तत्त्वमें नित्य ही वर्तमान हैं। यही भगवान्का निर्विशेष आनन्द - ब्रह्मरूप है। यहाँ परात्पर-तत्त्व भगवान् केवल 'ह्लादात्मा' हैं - आत्यन्तिक सुखस्वरूप हैं और जहाँ स्वरूपानन्दरूपा ये ही ह्लादिनी शक्ति मूर्तिरूपमें हैं, परात्पर-तत्त्व भगवान्से पृथक् प्रकट हैं, वहाँ भगवान् केवल 'ह्लादात्मा' या आत्यन्तिक सुखस्वरूप ही नहीं हैं, मूर्तिमती ह्लादिनीके द्वारा पृथक्-रूपसे नित्य सेवित होनेके कारण वे स्वयं सुखस्वरूप होते हुए ही अनिर्वचनीय अत्यन्त मधुर दिव्य सुखका आस्वादन भी करते हैं तथा वितरण भी । 'ह्लादात्मापि ह्लादते ह्लादयति च ।' ये ही हैं श्रीकृष्ण - ये ही हैं आनन्द - ब्रह्मके प्रतिष्ठास्वरूप परिपूर्णतम रसब्रह्म या समूर्त रसराज और इनसे पृथक् मूर्तरूपमें प्रकट परम मधुर रसताको प्राप्त इनकी स्वरूपभूता जो ह्लादिनी शक्ति हैं, वे ही नित्य पूर्ण आनन्दस्वरूपको भी आनन्द - रसास्वादन करानेवाली हैं - परिपूर्ण भाव या महाभावरूपा श्रीराधाजी । 'रस' और 'भाव' दोनों एक ही परात्पर-तत्त्वके स्वरूप हैं। परात्पर-तत्त्व नित्य भावसमन्वित - भाव परिरम्भित है। इसी रसके प्रस्रवणसे नित्य-निस्सरित और प्रवाहित आनन्दधारासे ही अनन्त विश्वके अनन्त आनन्द - वैचित्र्यका विकास है। जो इस प्रकार समस्त भावों और समस्त रसोंके मूल हैं, वे ही महाभाव- परिरम्भित रसराज आनन्दमयी श्रीराधा और उनकी कायव्यूहरूपा गोपसुन्दरियोंसे परिवेष्टित अखिलरसामृतमूर्ति सच्चिदानन्द -विग्रह द्विभुज मुरलीमनोहर श्रीकृष्ण हैं और वे ही वस्तुतः सत्-शास्त्रों, महान् मनीषियों और सर्वोच्च स्तरपर पहुँचे हुए महात्मा प्रेमियोंके द्वारा सेव्य परम तत्त्व हैं। जैसे एक मूर्तिमान् रसराज श्रीकृष्णके द्वारा ही समस्त रसोंका अस्तित्व और प्रकाश है, वैसे ही एकमात्र मूर्तिमती महाभावस्वरूपा श्रीराधाके द्वारा ही अमूर्त-समूर्त सभी भावोंका विकास और विस्तार है तथा उन-उन विभिन्न भावोंके अनुसार ही तदनुरूप रसतत्त्वका ग्रहण होता है। एक ही विद्युत् - ज्योति विविध विभिन्न वणोंके बल्बों - विद्युत् - प्रकाश - आधारोंके सम्पर्कमें आकर जैसे विभिन्न वर्णवाली दिखायी देती है, वैसे ही एक ही भाव विभिन्न आधारोंके द्वारा उन-उनके अनुकूल रसतत्त्वका अनुभव करवाता है। एक ही रसका जो विभिन्न रूपोंमें आस्वादन है, उसमें आधार-भेदकी यह भाव-विभिन्नता ही कारण है । वैकुण्ठ आदिकी श्रीलक्ष्मी आदि, द्वारकाकी पट्टमहिषी आदि और विभिन्न-भावसमन्विता श्रीगोपाङ्गनाएँ - सभी इन मूल-महाभावरूपा ह्लादिनी के ही विभिन्न विचित्र विकास हैं। इनमें गोपीभाव परम और चरम त्यागमय होनेके कारण सर्वश्रेष्ठ है। धर्म सापेक्ष और निरपेक्ष - दो प्रकारका होता है; जिसमें दूसरी वस्तुकी अपेक्षा हो या जिससे दूसरी कोई विपरीत स्थिति उत्पन्न हो सकती हो, वह सापेक्ष है। जैसे सत्य-भाषण धर्म है, पर सत्य-भाषण में कहीं-कहीं विपरीत भावकी सृष्टि हो सकती है और कहीं-कहीं दूसरे किसीकी हानि भी हो सकती है। अतः वह सापेक्ष है। इसी प्रकार संसारके प्रायः सभी धर्म किसी-न-किसी प्रकारकी अपेक्षा रखनेके कारण सापेक्ष हैं, परंतु व्रजाङ्गनाओंका यह प्रेम-धर्म सर्वथा निरपेक्ष है। इसमें एकमात्र श्रीकृष्ण-सुखके अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है, अन्य किसीकी भी अपेक्षा नहीं है । अतएव गोपसुन्दरियोंका प्रेम सर्वथा विशुद्ध है। वे निर्मल प्रेमकी प्रतिमा हैं। इसीलिये वहाँ भगवान्का ऐश्वर्य भी प्रायः अप्रकट ही रहता है। उनके सामने कहीं ऐश्वर्यका प्रकाश होता भी है तो वह विरहकी स्थितिमें। मिलन और विरह दोनों ही रति हैं, पर मिलनमें रतिका स्वरूप अत्यन्त शीतल रहता है और विरहमें अत्यन्त उष्ण ! मिलनमें हृदयको ऐसी ठंढक मिलती है कि शीतलता पाकर जैसे जल घनीभूत हो जमकर बर्फ बन जाता है, वैसे ही हृदयका प्रेम भी घनीभूत होकर जम जाता है। वहाँ उस मिलनानन्दमें मुग्ध, महान् मोदसे प्रमुदित गोपी केवल माधुर्यमयी हो जाती है। अन्य सब कुछ उस माधुर्यमें छिप जाता है। 'प्रियतम श्रीकृष्ण मेरे अपने हैं, मेरे अपने प्राणवल्लभ हैं, मेरे अपने रमण हैं।' गोपीके अनुभवमें उस समय यही भान रहता है, श्रीकृष्णकी ईश्वरताका तनिक भी ज्ञान नहीं रहता। पर जब विरहकी स्थिति होती है, तब उसके तीक्ष्ण तापसे वह जमा हुआ शीतल प्रेम उष्णताको प्राप्त होकर तरल हो जाता है और नेत्रपथसे उष्ण जलधाराके रूपमें प्रवाहित होने लगता है। इसीसे रासपञ्चाध्यायीमें - विरहकी स्थितिमें ही गोपीकी दृष्टिमें श्रीकृष्णकी भगवत्ता प्रतिभात होती है और वह कह उठती है'आप केवल यशोदानन्दन ही नहीं हैं, समस्त प्राणियोंके अन्तरात्माके साक्षी हैं और ब्रह्माजीके द्वारा विश्वरक्षाके लिये प्रार्थना किये जानेपर यदुकुलमें आविर्भूत हुए हैं - कुले ॥ जैसे जमे हुए घीके बरतनमें नीचे तलेमें चमकती हुई काँचकी गोली पड़ी है, पर वह दिखायी नहीं देती; किंतु ज्यों ही घी गलता है त्यों ही वह नीचेकी गोली दीखने लगती है। इसी प्रकार भगवान्के विरहमें - भावी विरहकी आशङ्कामें भी मधुर प्रेमके तरल हो जानेपर उनके ऐश्वर्यकी झाँकी होने लगती है। जैसे रासपञ्चाध्यायीके प्रथमाध्यायमें जिस समय भगवान् श्रीकृष्ण गोपाङ्गनाओंको वापस लौट जानेको कहते हैं, उस समय भावी विरहकी आशङ्कासे गोपाङ्गनाओंका प्रेम उष्णताको प्राप्त होकर तरल हो जाता है और इससे वहाँ ऐश्वर्यको झाँकनेका अवसर मिल जाता है। तब वे कह उठती हैं - 'तुम सबके आत्मा हो, कुशल पुरुष अपने नित्य प्रिय आत्मामें प्रीति करते हैं दुःख देनेवाले पति-पुत्रादिसे - संसारसे कोई प्रयोजन नहीं रखते, इसीलिये हे परमेश्वर ! तुम हमलोगोंपर प्रसन्न हो जाओ कुर्वन्ति हि त्वयि रतिं कुशलाः स्व आत्मन् पतिसुतादिभिरार्तिदैः परमेश्वर किम् । आदि । प्रेमकी विशुद्धिमें प्रधान तत्त्व है - सहज सम्पूर्ण समर्पण । स्व-सुखकी इच्छा, कामना, वासनाका तथा ममता, पृथक् अहंकार आदि सभीका समर्पण और श्रीभगवान्में ही वर्द्धनशील अनन्य नित्यप्रियता । संसारमें कोई भी, कुछ भी, न तो नित्य प्रिय होता है और न किसीमें सदा सर्वदा प्रियता उत्तरोत्तर बढ़ती ही रहती है। वहाँ कुछ दिनोंके व्यवहारके पश्चात् किसी-न-किसी समय उससे मन हट जाता है, उतनी अनुरक्ति नहीं रहती, बल्कि कभी-कभी तो विरक्ति हो जाती है। एक समयकी परम प्रियतमा पत्नीका सङ्ग भी पतिको अच्छा नहीं लगता और वह कहने लगता है - 'देखो, मैं अभी आवश्यक कार्यमें व्यस्त हूँ, तुम इस समय मुझे अच्छी नहीं लगती।' पुत्र-पौत्रादिके स्नेहमें सनी बुढ़िया पत्नी भी यदि पति उसके प्रतिकूल कुछ बोलता है तो उसे बुरा मान जाती है, अलग रहना चाहती है। एक बार एक बुढ़िया माईके मुखसे यहाँतक सुना था कि 'यह बूढ़ा अब तो मर जाय तो सब सुखी हो जायँ ।' प्यारे पतिके मरणमें दुःख तो होता ही नहीं, वह मरण मनाती है। पुत्रके प्रति पिता, पिताके प्रति पुत्र आदिमें भी ऐसे कुभाव आ जाते हैं। बहुत दिनोंके बीमार अत्यन्त आत्मीयसे भी मन ऊब जाता है और प्यारे घरवाले यह मनाने लगते हैं कि 'अब तो ईश्वर इनकी सुन लें, इनको उठा लें तो ये भी सुखी हो जायँ और घरवाले भी।' बन्धु-बान्धवों और इष्ट-मित्रोंका त्याग तो मनकी प्रतिकूलतामें तुरंत हो जाता है। इसका प्रधान कारण है संसारमें सभी अपने मनके अनुकूल अपना सुख चाहते हैं। इसलिये जहाँतक जिससे सुख मिलता है या मिलनेकी आशा- सम्भावना रहती है, वहाँतक प्रेम - प्रियता रहती है। पर सुखके स्थानपर जहाँ दुःख दिखायी देता है या दुःखकी सम्भावना भी दीखने लगती है, वहीं वह प्रेम-प्रियता नष्ट हो जाती है। किंतु विशुद्ध प्रेममें स्वसुखकी वासनाका लेश भी नहीं रहता। इसीसे वहाँ प्रियतमके सुखके लिये उनके प्रति सहज ही सम्पूर्ण समर्पण हो जाता है और ऐसा वह निर्मल प्रेम पल-पल बढ़ता रहता है - 'प्रतिक्षणवर्धमानम् ।' इस विशुद्ध प्रेमामृतमें एक ऐसा सुदुर्लभ दिव्य महान् माधुर्य रहता है, जिसके रसास्वादनके लिये परम रसामृतस्वरूप स्वयं भगवान् भी नित्य प्रलुब्ध और लालायित रहते हैं और इसीलिये स्वयं ह्लादात्मा - आत्यन्तिक सुख-स्वरूप होते हुए ही वे समर्पणमय प्रेमियोंके परम विशुद्ध दिव्य मधुर रसका सुखास्वादन भी करते हैं और वितरण भी किया करते हैं। भगवान् श्रीकृष्ण स्वयं रसराजस्वरूप हैं, पर विशुद्ध भावमयी गोपसुन्दरियोंके विशुद्ध प्रेमरसका निरन्तर आस्वादन करनेके लिये ललचाते और उसका आस्वादन करते-कराते रहते हैं। यही नित्य-रास है, जो अनादिकालसे निरन्तर चलता रहता है और अनन्त कालतक सतत चलता रहेगा। गोपाङ्गनाओंकी इस त्यागमयी रतिका मूल उद्गम - उत्स है - भगवान्की स्वरूपभूता ह्लादिनी शक्ति श्रीराधाजी । ये सब उसी मूलसे अङ्कुरित, पल्लवित, प्रफुल्लित और फलित मधुर मनोहर अमर तरुवरकी शाखाएँ हैं, जिनके आश्रयमें - जिनकी शीतल सुखमयी छायामें नित्य केवलानन्दस्वरूप भगवान् नित्य नव आनन्दका अनुभव करते हैं। आज उन्हीं श्रीराधारानीका, जो लीलाके लिये समय-समयपर इस पुण्यभूमिमें आविर्भूत हुआ करती हैं - मङ्गलमय आविर्भाव-दिवस है। आजके इस नीच स्वार्थ-कलुषित संसारमें 'प्रेम' शब्दका अर्थ प्रायः माना जाता है कि हम जिससे प्रेम करते हैं, वह हमें सुख दे, हमारे मनोरथ पूर्ण करे, हमारे मनके अनुकूल व्यवहार बतार्व करे, हमारे लिये त्याग करे, हमारा कृतज्ञ हो और हमारे प्रेम-ऋणका अधिक-से-अधिक बदला चुकाये। अभिप्राय यह कि प्रेमास्पदसे अपने सुखके लिये कुछ माँगने तथा प्राप्त करनेको ही 'प्रेम' की संज्ञा दे दी गयी है। पर श्रीराधारानी और उनकी कायव्यूहरूपा श्रीगोपाङ्गनाओंने इसके सर्वथा विपरीत प्रेमका एक दूसरा ही स्वरूप - दूसरा ही अर्थ अपने जीवनमें चरितार्थ किया है। उन्होंने दिया ही दिया और वे सदा देती ही रहेंगी। पर उन्होंने देनेको ही लेना माना तथा आगे भी सदा मानती रहेंगी। इसीसे उनका देना इतना मधुरातिमधुर है कि सर्वकाम, पूर्णकाम भगवान् श्रीकृष्ण उसे लालायित मनसे लेते रहते हैं और सदा लेना ही चाहते हैं। यथार्थमें विशुद्ध प्रेम देना जानता है, लेना जानता ही नहीं । प्रेमास्पद प्रेमीके प्रेमका आदर करें, यह बात तो दूर रही, वे चाहे उसके प्रेमको जानें ही नहीं, जानकर भी चाहे न मानें, चाहे उलटे नीच अपमान - घोर तिरस्कार करें, वरं प्रेमके बदलेमें भीषण कष्ट, भयानक यातना दें- तब भी वह प्रेमी प्रेमास्पदपर रोष तो करे ही नहीं, उसके दोष भी उसको नहीं दिखायी दें, बल्कि उन दोषों में भी उसे प्रेमास्पदके पवित्र प्रेम तथा अत्यन्त निकटकी आत्मीयताके ही दर्शन
|
विराट कोहली. . आज करोड़ों लोगों के लिए केवल क्रिकेटर नहीं बल्कि देश की आन-बान और शान हैं। पिछले दो सालों के अंदर हमने जिस विराट कोहली को देखा है वो अपने आप में अमेजिंग हैं।
Rockstar Series: जानिए कोहली क्यों बने यूं 'विराट'?
टीम इंडिया के रन मशीन कहे जाने वाले विराट कोहली की सफलता में उनकी फिटनेस का बहुत बड़ा हाथ है। उनको करीब से जानने वाले कहते हैं कि कोहली ने ना जाने कब से पराठा नहीं खाया है।
5 Points: महान सचिन के आगे कहीं नहीं ठहरते शानदार कोहली. .
लेकिन विराट हमेशा से ऐसे नहीं थे, ये बात उन्होंने खुद अपने फैंस को बोली है। दरअसल वेस्टइंडीज में प्रैक्टिस सेशन से लौटने के बाद उन्होंने इंस्ट्रागाम पर एक तस्वीर शेयर की है, जो कि उनके चाइल्डहुड की है। इस फोटो में विराट घर का बना हुआ बर्गर खाते दिख रहे हैं। विराट ने खुद तस्वीर के नीचे लिखा है कि एक वक्त था जब मैं अपने आप को बर्गर खाने से रोक नहीं पाता था और मोटा हो गया था।
लेकिन साल 2012 के बाद कोहली ने अपनी फिटनेस पर ध्यान दिया और नतीजा आपके सामने हैं। खुद भारतीय टीम के ट्रेनर शंकर बासु ने हाल ही में कहा था कि विराट दुनिया के बेस्ट एथलीट बनना चाहते हैं जिसके लिए वो दिन-रात मेहनत करते हैं।
|
विराट कोहली. . आज करोड़ों लोगों के लिए केवल क्रिकेटर नहीं बल्कि देश की आन-बान और शान हैं। पिछले दो सालों के अंदर हमने जिस विराट कोहली को देखा है वो अपने आप में अमेजिंग हैं। Rockstar Series: जानिए कोहली क्यों बने यूं 'विराट'? टीम इंडिया के रन मशीन कहे जाने वाले विराट कोहली की सफलता में उनकी फिटनेस का बहुत बड़ा हाथ है। उनको करीब से जानने वाले कहते हैं कि कोहली ने ना जाने कब से पराठा नहीं खाया है। पाँच Points: महान सचिन के आगे कहीं नहीं ठहरते शानदार कोहली. . लेकिन विराट हमेशा से ऐसे नहीं थे, ये बात उन्होंने खुद अपने फैंस को बोली है। दरअसल वेस्टइंडीज में प्रैक्टिस सेशन से लौटने के बाद उन्होंने इंस्ट्रागाम पर एक तस्वीर शेयर की है, जो कि उनके चाइल्डहुड की है। इस फोटो में विराट घर का बना हुआ बर्गर खाते दिख रहे हैं। विराट ने खुद तस्वीर के नीचे लिखा है कि एक वक्त था जब मैं अपने आप को बर्गर खाने से रोक नहीं पाता था और मोटा हो गया था। लेकिन साल दो हज़ार बारह के बाद कोहली ने अपनी फिटनेस पर ध्यान दिया और नतीजा आपके सामने हैं। खुद भारतीय टीम के ट्रेनर शंकर बासु ने हाल ही में कहा था कि विराट दुनिया के बेस्ट एथलीट बनना चाहते हैं जिसके लिए वो दिन-रात मेहनत करते हैं।
|
अरबाज खान के दुल्हा बनते ही मलाइका अरोड़ा ने किया शादी का ऐलान? बोलीं- मैं जरूर शादी करूंगी..
Seema Haider कैमरे के सामने फूट-फूटकर रोईं, कहा- 'मेरा कोई नहीं है, अगर वो मुझे पसंद करता है तो...'
पार्टी से निकलीं जान्हवी कपूर की हालत देख चौंके यूजर्स, ट्रोल करते हुए बोले- 'फुल पीकर टाइट है'
Ayodhya प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में पहुंचेंगे ये बॉलीवुड और साउथ के सितारे? चौकाने वाली लिस्ट वायरल!
Nora Fatehi की हमशक्ल को देखकर चकराया लोगों का दिमाग, वीडियो देखकर बोले- 'कौन है असली?'
|
अरबाज खान के दुल्हा बनते ही मलाइका अरोड़ा ने किया शादी का ऐलान? बोलीं- मैं जरूर शादी करूंगी.. Seema Haider कैमरे के सामने फूट-फूटकर रोईं, कहा- 'मेरा कोई नहीं है, अगर वो मुझे पसंद करता है तो...' पार्टी से निकलीं जान्हवी कपूर की हालत देख चौंके यूजर्स, ट्रोल करते हुए बोले- 'फुल पीकर टाइट है' Ayodhya प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में पहुंचेंगे ये बॉलीवुड और साउथ के सितारे? चौकाने वाली लिस्ट वायरल! Nora Fatehi की हमशक्ल को देखकर चकराया लोगों का दिमाग, वीडियो देखकर बोले- 'कौन है असली?'
|
प्रदेश की जनता ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण करवाएं और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर कोरोना के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रतिभाग करें। 7वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून यानि सोमवार को पूरे उत्तर प्रदेश में डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मनाया जाएगा।
प्रदेश के आयुष मंत्री डॉक्टर धर्म सिंह सैनी ने कहा है कि कोरोना की जटिलताओं के कारण इस साल भी 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आयोजित होगा। बता दें कि प्रदेश में योग को बढ़ावा देने के लिये आयुष विभाग ने सोशल मीडिया को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया है। उसकी ओर से विशेषज्ञों के छोटे-छोटे वीडियो बनाए गये हैं।
जो लोगों को योग का अभ्यास करने में मदद करेंगे। इन वीडियों को सोशल मीडिया प्लेटफार्म के साथ आयुष कवच एप पर अपलोड किया जाएगा। सैनी के मुताबिक सातवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर 21 जून को होने वाले मुख्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी संबोधित करेंगे। सोमवार सुबह 6:30 बजे आयोजित होने वाले कार्यक्रम में डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा।
इस साल मुख्य थीम स्वास्थ्य के लिए योग को दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम के मौके पर देश भर से विभिन्न संगठन एजेंसियां और अंतरराष्ट्रीय संगठन भी कार्यक्रम में प्रतिभाग करेंगे। कोरोना के कारण इस साल फिर से डिजिटल प्लेटफार्म पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। इससे पहले पूरी दुनिया में भी कोरोना की गैरमौजूदगी से पहले बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था।
|
प्रदेश की जनता ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण करवाएं और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर कोरोना के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रतिभाग करें। सातवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस इक्कीस जून यानि सोमवार को पूरे उत्तर प्रदेश में डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से मनाया जाएगा। प्रदेश के आयुष मंत्री डॉक्टर धर्म सिंह सैनी ने कहा है कि कोरोना की जटिलताओं के कारण इस साल भी इक्कीस जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आयोजित होगा। बता दें कि प्रदेश में योग को बढ़ावा देने के लिये आयुष विभाग ने सोशल मीडिया को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया है। उसकी ओर से विशेषज्ञों के छोटे-छोटे वीडियो बनाए गये हैं। जो लोगों को योग का अभ्यास करने में मदद करेंगे। इन वीडियों को सोशल मीडिया प्लेटफार्म के साथ आयुष कवच एप पर अपलोड किया जाएगा। सैनी के मुताबिक सातवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर इक्कीस जून को होने वाले मुख्य कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी संबोधित करेंगे। सोमवार सुबह छः:तीस बजे आयोजित होने वाले कार्यक्रम में डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। इस साल मुख्य थीम स्वास्थ्य के लिए योग को दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रम के मौके पर देश भर से विभिन्न संगठन एजेंसियां और अंतरराष्ट्रीय संगठन भी कार्यक्रम में प्रतिभाग करेंगे। कोरोना के कारण इस साल फिर से डिजिटल प्लेटफार्म पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जा रहा है। इससे पहले पूरी दुनिया में भी कोरोना की गैरमौजूदगी से पहले बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था।
|
से ही प्रगट हुआ है; उसी दर्शन से वे भगवान् तीनों लोको को सदा देखते रहते हैं, ऐसे उन अनंतनाथ भगवान् को मै नमस्कार करता हूँ ।
अनन्त मोहप्रगमादनन्तमात्मोद्भवं संतत निर्विकल्पम् । अनन्तसौख्यं विगतान्तरायमनन्तनाथः स च तत्प्रपेदे ।।४।। अर्थ- भगवान् अनन्तनाथ ने अनन्त मोह का नाश कर दिया है, इसी लिये उन को जिस का कभी अन्त नहीं होता, जो अपने आत्मा से उत्पन्न हुआ है, जो अन्तराय वा विघ्नो से रहित है और जो संकल्प विकल्पो से सदा रहित है, ऐसा अनंत सुख प्राप्त हुआ है।
चतुष्ककर्मप्रविभेदनेन, जगाम योऽनन्तचतुष्टयत्वम् । अनन्तमाहात्म्यसमन्वितं तमनन्तनाथं प्रणमामि भक्त्या ॥५॥
अर्थ-भगवान् अनन्तनाथ ने चारो घातिया कर्मों का नाश कर दिया है, इसी लिये उन्हे अनन्त माहात्म्य से सुशोभित अनन्त चतुष्टय प्राप्त हुआ हैं; ऐसे उन अनन्तनाथ भगवान् को मैं भक्तिः पूर्वक नमस्कार करता हूँ ।
स्तोत्रैरनन्तैरतिगूढशन्दैर्गीतः स्तुतोऽनन्तसुरेशभूपैः । योऽनन्तलोकाधिपतित्वमाप, ह्यनंतनाथं तमहं नमामि ॥६॥
अर्थ-हे अनन्तनाथ भगवन् ! आप अनन्त लोकालोक के अधिपतित्व को प्राप्त हुए हैं, इसी लिये अनेक इन्द्रों ने तथा अनेक राजाओं ने अत्यन्त गूढ़ शब्दों से भरे हुए अनन्त स्तोत्रों
से की स्तुति की है तथा आपका यश वर्णन किया है; ऐसे हे अनंतनाथ भगवन् ! आप को मैं नमस्कार करता हूँ । नमाम्यनन्तं दुरितं हरामि, नमाम्यनन्तं सुगतिं भजामि । नमाम्यनन्तं भवतां त्यजामि, नमाम्यनन्तं शिवतामियामि ॥७॥
- अनाथ भगवान को नमस्कार करता हूँ और पापों -मै को नष्ट करता हूँ । भगवान् अनन्तनाथ को नमस्कार करता हूँ और परम शुभ गतिया को प्राप्त होता हूँ । भगवान अनंतनाथ को नमस्कार करता हूँ और जन्म-मरण रूप ससार का त्याग करता हूँ। मैं अनन्तनाथ भगवान् को नमस्कार करता हूँ और मोक्ष अवस्था को प्राप्त होता हूँ ।
तथा हि माता न पिता न बन्धुर्न भ्रातृवर्गोन सुहृज्जनो वा । त्राता यथा त्वं भववन्धनाद्वि, ततो ह्यनन्तं जिनपं नमामि ।।८।।
- अनन्तनाथ भगवन् । इस संसार में जिस प्रकार संसार के कठोर बँधनो से रक्षा करने वाले हैं उस प्रकार से रक्षा करने वाले न तो माता है, न पिता हैं, न भाई हैं, न गोत्र में उत्पन्न होनेवाले भाई बन्धु हैं। हे जिनेन्द्रदेव अनंतनाथ भगवन् " इसी लिये मैं आपको नमस्कार करता हूँ ।
जगद्विजेतुर्हि यमस्य दंष्ट्रान्, त्राता न कोप्यस्ति भवे विशाले । हेऽनंतनाथात्र दयां विधाय, देहि स्वहस्तं मम रक्ष रक्ष ॥९॥
अर्थ- हे अनन्तनाथ भगवन् । इस अनंत संसार में आप के सिवाय समस्त संसार को जीतने वाले इस यम की डाढ़ से
रक्षा करने वाला और कोई नहीं है । इसी लिए हे नाथ । मुझ पर दया कीजिए ।
भवाग्निविध्यापकवारिधारमुर्त्तुगमोहाद्रि सुचूर्णवज्रम् । कुकर्मकाष्ठस्य धनंजयं वा, ब्रजाम्यनन्तं शरणं जिनेशम् ॥१०॥ अर्थ - भगवान् अनन्तनाथ स्वामी संसार रूपी अग्नि बुझाने के लिये मेघ की धारा के समान हैं, बहुत ऊंचे मोह रूपी पर्वत को चूर्ण करने के लिए वत्र के समान हैं और अशुभ कर्म रूपी काठ को जलाने के लिये अग्नि के समान हैं। ऐसे भगवान् जिनेन्द्र देव अनंतनाथ की मै शरण लेता हूँ ।
नमो नमोऽनन्तसुबोधदाय, नमो नमोऽनन्तसुसौख्यदाय। नमो नमोऽनन्तसुवीर्यदात्रे, नमो नमोऽनन्तजिनाय भर्त्रे ॥ ११ ॥ अर्थ-- भगवान अनन्तनाथ स्वामी अनन्त ज्ञान देने वाले है, इसी लिये मैं उन को बार बार नमस्कार करता हूँ । वे भगवान् अनन्त सुख को देने वाले हैं, इस लिये मै उन को वारवार नमस्कार करता हूँ। वे भगवान् अनन्तनाथ स्वामी अनन्त शक्ति वा अनन्त वीर्य को देने वाले हैं, इस लिये मैं उन्हे वार बार नमस्कार ६ करना हूँ तथा वे भगवान् अनन्त नाथ जिनेन्द्र हैं और सबके स्वामी हैं, इसी लिये मैं उन्हे वार वार नमस्कार करता हूँ ।
|
से ही प्रगट हुआ है; उसी दर्शन से वे भगवान् तीनों लोको को सदा देखते रहते हैं, ऐसे उन अनंतनाथ भगवान् को मै नमस्कार करता हूँ । अनन्त मोहप्रगमादनन्तमात्मोद्भवं संतत निर्विकल्पम् । अनन्तसौख्यं विगतान्तरायमनन्तनाथः स च तत्प्रपेदे ।।चार।। अर्थ- भगवान् अनन्तनाथ ने अनन्त मोह का नाश कर दिया है, इसी लिये उन को जिस का कभी अन्त नहीं होता, जो अपने आत्मा से उत्पन्न हुआ है, जो अन्तराय वा विघ्नो से रहित है और जो संकल्प विकल्पो से सदा रहित है, ऐसा अनंत सुख प्राप्त हुआ है। चतुष्ककर्मप्रविभेदनेन, जगाम योऽनन्तचतुष्टयत्वम् । अनन्तमाहात्म्यसमन्वितं तमनन्तनाथं प्रणमामि भक्त्या ॥पाँच॥ अर्थ-भगवान् अनन्तनाथ ने चारो घातिया कर्मों का नाश कर दिया है, इसी लिये उन्हे अनन्त माहात्म्य से सुशोभित अनन्त चतुष्टय प्राप्त हुआ हैं; ऐसे उन अनन्तनाथ भगवान् को मैं भक्तिः पूर्वक नमस्कार करता हूँ । स्तोत्रैरनन्तैरतिगूढशन्दैर्गीतः स्तुतोऽनन्तसुरेशभूपैः । योऽनन्तलोकाधिपतित्वमाप, ह्यनंतनाथं तमहं नमामि ॥छः॥ अर्थ-हे अनन्तनाथ भगवन् ! आप अनन्त लोकालोक के अधिपतित्व को प्राप्त हुए हैं, इसी लिये अनेक इन्द्रों ने तथा अनेक राजाओं ने अत्यन्त गूढ़ शब्दों से भरे हुए अनन्त स्तोत्रों से की स्तुति की है तथा आपका यश वर्णन किया है; ऐसे हे अनंतनाथ भगवन् ! आप को मैं नमस्कार करता हूँ । नमाम्यनन्तं दुरितं हरामि, नमाम्यनन्तं सुगतिं भजामि । नमाम्यनन्तं भवतां त्यजामि, नमाम्यनन्तं शिवतामियामि ॥सात॥ - अनाथ भगवान को नमस्कार करता हूँ और पापों -मै को नष्ट करता हूँ । भगवान् अनन्तनाथ को नमस्कार करता हूँ और परम शुभ गतिया को प्राप्त होता हूँ । भगवान अनंतनाथ को नमस्कार करता हूँ और जन्म-मरण रूप ससार का त्याग करता हूँ। मैं अनन्तनाथ भगवान् को नमस्कार करता हूँ और मोक्ष अवस्था को प्राप्त होता हूँ । तथा हि माता न पिता न बन्धुर्न भ्रातृवर्गोन सुहृज्जनो वा । त्राता यथा त्वं भववन्धनाद्वि, ततो ह्यनन्तं जिनपं नमामि ।।आठ।। - अनन्तनाथ भगवन् । इस संसार में जिस प्रकार संसार के कठोर बँधनो से रक्षा करने वाले हैं उस प्रकार से रक्षा करने वाले न तो माता है, न पिता हैं, न भाई हैं, न गोत्र में उत्पन्न होनेवाले भाई बन्धु हैं। हे जिनेन्द्रदेव अनंतनाथ भगवन् " इसी लिये मैं आपको नमस्कार करता हूँ । जगद्विजेतुर्हि यमस्य दंष्ट्रान्, त्राता न कोप्यस्ति भवे विशाले । हेऽनंतनाथात्र दयां विधाय, देहि स्वहस्तं मम रक्ष रक्ष ॥नौ॥ अर्थ- हे अनन्तनाथ भगवन् । इस अनंत संसार में आप के सिवाय समस्त संसार को जीतने वाले इस यम की डाढ़ से रक्षा करने वाला और कोई नहीं है । इसी लिए हे नाथ । मुझ पर दया कीजिए । भवाग्निविध्यापकवारिधारमुर्त्तुगमोहाद्रि सुचूर्णवज्रम् । कुकर्मकाष्ठस्य धनंजयं वा, ब्रजाम्यनन्तं शरणं जिनेशम् ॥दस॥ अर्थ - भगवान् अनन्तनाथ स्वामी संसार रूपी अग्नि बुझाने के लिये मेघ की धारा के समान हैं, बहुत ऊंचे मोह रूपी पर्वत को चूर्ण करने के लिए वत्र के समान हैं और अशुभ कर्म रूपी काठ को जलाने के लिये अग्नि के समान हैं। ऐसे भगवान् जिनेन्द्र देव अनंतनाथ की मै शरण लेता हूँ । नमो नमोऽनन्तसुबोधदाय, नमो नमोऽनन्तसुसौख्यदाय। नमो नमोऽनन्तसुवीर्यदात्रे, नमो नमोऽनन्तजिनाय भर्त्रे ॥ ग्यारह ॥ अर्थ-- भगवान अनन्तनाथ स्वामी अनन्त ज्ञान देने वाले है, इसी लिये मैं उन को बार बार नमस्कार करता हूँ । वे भगवान् अनन्त सुख को देने वाले हैं, इस लिये मै उन को वारवार नमस्कार करता हूँ। वे भगवान् अनन्तनाथ स्वामी अनन्त शक्ति वा अनन्त वीर्य को देने वाले हैं, इस लिये मैं उन्हे वार बार नमस्कार छः करना हूँ तथा वे भगवान् अनन्त नाथ जिनेन्द्र हैं और सबके स्वामी हैं, इसी लिये मैं उन्हे वार वार नमस्कार करता हूँ ।
|
जयपुर. देश भर में आज कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन किया है। महंगाई को लेकर किया जाने वाला यह प्रदर्शन राजस्थान में भी किया गया । राजस्थान के अलावा दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर का प्रदर्शन किया गया। जिसमें काले कपड़े पहनकर कांग्रेसी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और उसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मुख्यमंत्री राजस्थान अशोक गहलोत समेत कांग्रेस के दिग्गज नेता मौजूद रहे । जिन्हें पुलिस कुछ देर बाद उठाकर ले गई और उन्हें प्रदर्शन स्थल से कई किलोमीटर दूर ले जाकर छोड़ दिया। इसी तरह का प्रदर्शन राजस्थान में भी देखने को मिला। लेकिन यह प्रदर्शन कम एक नाटकीय घटनाक्रम ज्यादा लगा।
दरअसल राजस्थान में भी प्रदर्शन करने की तैयारी 2 दिन पहले ही शुरू कर दी गई थी । जयपुर में बड़ा प्रदर्शन रखा गया। जयपुर में राजभवन घेरने की तैयारी कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने की थी । इससे पहले जयपुर के सिविल लाइंस फाटक के नजदीक कांग्रेसी कार्यकर्ता और नेता जमा हुए । उसके बाद कांग्रेस के ही मुख्यमंत्री के सरकारी आवास के निकट स्थित राजभवन तक पहुंचने की कोशिश की । लेकिन पुलिस ने रास्ता रोका। इस दौरान कई कांग्रेसी सड़कों पर लोट गए। बैरीकेट पर उछलने कूदने लगे । उसके बाद पुलिस की 3 बसें आई और इन बसों में भरकर कांग्रेसियों को दूसरी जगह ले जाकर छोड़ दिया गया। कांग्रेस का यह प्रदर्शन नाटकीय अंदाज में चलता रहा।
दरअसल प्रदर्शन था तो महंगाई के खिलाफ, लेकिन असर नहीं कर सका क्योंकि वर्तमान में राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है। कार्यकर्ता भी कांग्रेस के ही हैं, और जिस जगह धरना किया। वह जगह भी कांग्रेस की ही है, और पुलिस भी कांग्रेस की ही है। ऐसे में भाजपा के नेताओं का कहना है कि यह पूरा प्रदर्शन किसी नाटक की तरह लगा और किसी ड्रामा की तरह ही खत्म हो गया। इस प्रदर्शन के दौरान बारिश में लगातार जारी रही, जिस कारण बहुत से कांग्रेसी तो प्रदर्शन में शामिल ही नहीं हो सके।
|
जयपुर. देश भर में आज कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन किया है। महंगाई को लेकर किया जाने वाला यह प्रदर्शन राजस्थान में भी किया गया । राजस्थान के अलावा दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर का प्रदर्शन किया गया। जिसमें काले कपड़े पहनकर कांग्रेसी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और उसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मुख्यमंत्री राजस्थान अशोक गहलोत समेत कांग्रेस के दिग्गज नेता मौजूद रहे । जिन्हें पुलिस कुछ देर बाद उठाकर ले गई और उन्हें प्रदर्शन स्थल से कई किलोमीटर दूर ले जाकर छोड़ दिया। इसी तरह का प्रदर्शन राजस्थान में भी देखने को मिला। लेकिन यह प्रदर्शन कम एक नाटकीय घटनाक्रम ज्यादा लगा। दरअसल राजस्थान में भी प्रदर्शन करने की तैयारी दो दिन पहले ही शुरू कर दी गई थी । जयपुर में बड़ा प्रदर्शन रखा गया। जयपुर में राजभवन घेरने की तैयारी कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने की थी । इससे पहले जयपुर के सिविल लाइंस फाटक के नजदीक कांग्रेसी कार्यकर्ता और नेता जमा हुए । उसके बाद कांग्रेस के ही मुख्यमंत्री के सरकारी आवास के निकट स्थित राजभवन तक पहुंचने की कोशिश की । लेकिन पुलिस ने रास्ता रोका। इस दौरान कई कांग्रेसी सड़कों पर लोट गए। बैरीकेट पर उछलने कूदने लगे । उसके बाद पुलिस की तीन बसें आई और इन बसों में भरकर कांग्रेसियों को दूसरी जगह ले जाकर छोड़ दिया गया। कांग्रेस का यह प्रदर्शन नाटकीय अंदाज में चलता रहा। दरअसल प्रदर्शन था तो महंगाई के खिलाफ, लेकिन असर नहीं कर सका क्योंकि वर्तमान में राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है। कार्यकर्ता भी कांग्रेस के ही हैं, और जिस जगह धरना किया। वह जगह भी कांग्रेस की ही है, और पुलिस भी कांग्रेस की ही है। ऐसे में भाजपा के नेताओं का कहना है कि यह पूरा प्रदर्शन किसी नाटक की तरह लगा और किसी ड्रामा की तरह ही खत्म हो गया। इस प्रदर्शन के दौरान बारिश में लगातार जारी रही, जिस कारण बहुत से कांग्रेसी तो प्रदर्शन में शामिल ही नहीं हो सके।
|
लॉकडाउन के बाद बेरोजगार कलाकारों की मदद के लिए बनाए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में 100 से ज्यादा देशों के 2800 कलाकारों को जोड़कर शहर के उद्यमी राजेश बत्रा और अक्षय आहुजा ने रिकॉर्ड बनाया है।
जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : मार्च में देशभर में लगे लॉकडाउन के बाद बेरोजगार कलाकारों की मदद के लिए बनाए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में 100 से ज्यादा देशों के 2800 कलाकारों को जोड़कर शहर के उद्यमी राजेश बत्रा और अक्षय आहुजा ने रिकॉर्ड बनाया है।
राजेश ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने देखा कि एक कलाकार सब्जी बेच रहा है। यह देख कर उन्हें बुरा लगा और उन्होंने सोचा कि क्यों ना ऐसे कलाकारों को एक प्लेटफार्म दिया जाए। इसके बाद उन्होंने इंटरनेशनल आर्ट एंड इमेजिनेशन फोरम का निर्माण किया। इसके लिए उन्होंने अपने कुछ साथियों की मदद भी ली। राजेश ने बताया कि इसके बाद हमने चंडीगढ़ ललित कला अकादमी से मिलकर विभिन्न कलाकारों को एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म प्रदान करने की शुरुआत की। इसके तहत हमारे साथ लगभग 2800 कलाकार जुड़ गए।
सात और आठ नवंबर को हमने ऑनलाइन इस प्रदर्शनी का आयोजन किया और साथ ही देश के कई वरिष्ठ कलाकारों के साथ विचार चर्चा भी शामिल की। इसका सबसे बड़ा फायदा कलाकारों को मिला जिन्होंने अपने काम को सीधा खरीदारों को प्रदर्शित किया। इस बीच हमने किसी भी कलाकार से अपने कार्य को प्रदर्शित करने के लिए कोई रुपया नहीं लिया। ना ही जो कार्य बिकाऊ उसमें हमने कुछ हिस्सा मांगा। राजेश ने कहा कि अभी भी हमारे पोर्टल में कई कलाकार अपनी कलाकृतियां प्रदर्शित कर रहे हैं। हमने कुल 25 तरह की कलाओं को इसमें जगह दी थी हमारे इस कार्य को लंदन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने सम्मानित किया हम आगे भी इसी तरह के आयोजन करते रहेंगे।
|
लॉकडाउन के बाद बेरोजगार कलाकारों की मदद के लिए बनाए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में एक सौ से ज्यादा देशों के दो हज़ार आठ सौ कलाकारों को जोड़कर शहर के उद्यमी राजेश बत्रा और अक्षय आहुजा ने रिकॉर्ड बनाया है। जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : मार्च में देशभर में लगे लॉकडाउन के बाद बेरोजगार कलाकारों की मदद के लिए बनाए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में एक सौ से ज्यादा देशों के दो हज़ार आठ सौ कलाकारों को जोड़कर शहर के उद्यमी राजेश बत्रा और अक्षय आहुजा ने रिकॉर्ड बनाया है। राजेश ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने देखा कि एक कलाकार सब्जी बेच रहा है। यह देख कर उन्हें बुरा लगा और उन्होंने सोचा कि क्यों ना ऐसे कलाकारों को एक प्लेटफार्म दिया जाए। इसके बाद उन्होंने इंटरनेशनल आर्ट एंड इमेजिनेशन फोरम का निर्माण किया। इसके लिए उन्होंने अपने कुछ साथियों की मदद भी ली। राजेश ने बताया कि इसके बाद हमने चंडीगढ़ ललित कला अकादमी से मिलकर विभिन्न कलाकारों को एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म प्रदान करने की शुरुआत की। इसके तहत हमारे साथ लगभग दो हज़ार आठ सौ कलाकार जुड़ गए। सात और आठ नवंबर को हमने ऑनलाइन इस प्रदर्शनी का आयोजन किया और साथ ही देश के कई वरिष्ठ कलाकारों के साथ विचार चर्चा भी शामिल की। इसका सबसे बड़ा फायदा कलाकारों को मिला जिन्होंने अपने काम को सीधा खरीदारों को प्रदर्शित किया। इस बीच हमने किसी भी कलाकार से अपने कार्य को प्रदर्शित करने के लिए कोई रुपया नहीं लिया। ना ही जो कार्य बिकाऊ उसमें हमने कुछ हिस्सा मांगा। राजेश ने कहा कि अभी भी हमारे पोर्टल में कई कलाकार अपनी कलाकृतियां प्रदर्शित कर रहे हैं। हमने कुल पच्चीस तरह की कलाओं को इसमें जगह दी थी हमारे इस कार्य को लंदन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने सम्मानित किया हम आगे भी इसी तरह के आयोजन करते रहेंगे।
|
हाल के कुछ वर्षों में सांसदों और मंत्रियों द्वारा पद का दुरुपयोग कर अवैध तरीके से भारी भरकम राशि के घोटालों के मामले प्रकाश में आते रहे हैं. बावजूद इसके कितनों को भारतीय दंड विधान की धाराओं के अंतर्गत सजा हो पाई, यह जगजाहिर है. घोटालों के आरोपी सांसद, मंत्री या राजनेता तथाकथित तौर पर अतिगणमान्य व्यक्ति का दर्जा बरकरार रखे हुए हैं और उनकी सुरक्षा व सुविधा के नाम पर 121 करोड़ भारतीयों की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा खर्च किया जाता रहा है. इसके बाद भी हैरानी होती है कि क्यों भारतीय समाज का युवा वर्ग राजनीति में जाने का ख्वाहिशमंद नहीं है? अधिकांश राजनेता भ्रष्टाचार के पर्याय बन चुके हैं, तब भी यह बात मेरी समझ में नहीं आती कि आखिर इस तरह के विचार उन लोगों के मन में भी क्यों आते हैं जो स्वयं आलसी हैं और जिनका मोहभंग हो चुका है या फिर वे भी किसी न किसी रूप में अनैतिक कार्यों में लिप्त हैं.
यह क्या कोई कम हास्यासपद है कि हमारे सांसदों को अनाधिकृत विलासिता और तमाम सुख-सुविधाएं बिल्कुल मुफ्त मिलती है! इससे भी बढ़कर यह कि कोई परिभाषित जॉब प्रोफाइल या विवरण नहीं, उम्र और शिक्षा की कोई तय सीमा नहीं, कोई जवाबदेही नहीं, कोई अनुशासन नहीं, कोई रिर्पोटिंग नहीं, जानकारी भी जरूरी नहीं! और इन्हें इन सबके लिए ही पैसे मिलते हैं. संघीय सरकार के अधीन काम करने वाले कर्मचारियों के कार्य के विपरीत सांसदों द्वारा किए जाने वाले काम के लिए न तो किसी विशेषज्ञता की जरूरत होती है और न ही किसी शैक्षिक योग्यता की, फिर भी विडंबना यह कि इसके बाद भी लोग राजनीति की तुलना में दूसरी नौकरियों को वरीयता देते हैं. यह नहीं भूलना चाहिए कि दूसरी नौकरियों में वापस बुलाए जाने, हटाए जाने, मनमाने स्थानांतरण, रिपोर्टिंग, वेतनवृद्धि में ठहराव के साथ-साथ सालाना गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) का खतरा रहता है. दूसरे कर्मचारियों के विपरीत सांसद अपने दफ्तर (संसद) में जो कुछ करते हैं, उसके लिए उन्हें पूरी आजादी होती है, यहां तक कि उसे अदालतों में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है! इससे भी बड़ी बात यह कि उनके लिए काम के घंटों के लिए कोई नियम नहीं है, संसदीय चर्चा या बहस में भागीदारी की अनिवार्यता नहीं है, उपस्थिति भी जरूरी नहीं है, यहां तक कि उनकी उत्पादकता मापने की कोई निष्पक्ष व्यवस्था भी नहीं है. इस पर तुर्रा यह कि प्रचार या हटाने का कोई क्लॉज (धारा या उपबंध) नहीं है. इसीलिए सांसदों द्वारा किए जाने वाले काम को मापा नहीं जा सकता है, फिर भी उन्हें न केवल अच्छी तनख्वाह मिलती है, बल्कि उसमें बढ़ोतरी भी होती है, फिर भी कोई करियर के तौर पर राजनीति को नहीं चुनता. यह अब गंभीर रूप से विचारणीय है. मानव सभ्यता की शुरूआत के समय से ही, जो लोक समाज की सेवा और समाज को बदलना चाहते थे, वे ही ऐसा करियर चुनते थे. उनका यह उद्देश्य नहीं होता था कि अपना आर्थिक स्तर ऊंचा करना है. लेकिन अब तो यह बस कहने की बात हो कर रह गई है. आज राजनीति में जाने की राह में सबसे बड़ी बाधा उसमें निवेश होने वाली भारी भरकम राशि है. यह हमारी राजनीतिक व्यवस्था की नंगी सच्चाई है. 15वीं लोकसभा के लिए चुने गए 543 सांसदों की कुल संपत्ति 3,000 करोड़ से भी अधिक है! इसका मतलब है कि एक सांसद की औसत संपत्ति पांच करोड़ रुपये से अधिक है. फिर वहीं लौटते हैं. मुझे हैरानी होती है कि उन्हें क्यों भुगतान किया जाना चाहिए, क्योंकि तनख्वाह के नाम पर उन्हें जो छोटी-सी रकम मिलती है, उससे उन्हें क्या फर्क पड़ने वाला है. और सबसे बुरा यह कि हमारे सांसद औसतन राष्ट्रीय निर्धनता स्तर से नौ गुना ज्यादा पाते हैं. बीते साल हम यह भी देख चुके हैं कि सांसदों के वेतन भत्ते में बढ़ोत्तरी के मुद्दे पर किस तरह सभी सांसद दलगत भावनाओं से उपर उठ कर इस विधेयक को पारित किया. यह भी भारतीयों को कम शर्मिंदा नहीं करता कि उसके रहनुमा, इस मुद्दे पर वाजिब बहस किए बगैर ही इसे संसद में पास करवा लिए. अमेरिका में, सांसदों को अपनी तनख्वाह के बाद बाहर से 15 फीसदी से ज्यादा कमाई करने की इजाजत नहीं है, जबकि भारत में सांसदों की औसत संपत्ति पिछले कार्यकाल के मुकाबले 300 गुना तक बढ़ गई. जर्मनी में सांसदों को अपनी स्वतत्रंता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पारिश्रमिक मिलता है, जबकि स्विट्जरलैंड में सांसदों को कोई वेतन नहीं मिलता, उन्हें संसद सत्र के दौरान अपने नियोक्ताओं से सिर्फ पेड लीव मिलती है. मैक्सिको में सांसद न तो कोई और काम कर सकते हैं और न ही किसी राजनीतिक दल के पदाधिकारी हो सकते हैं. ऐसे में हमारे महान सांसद स्वयं विचार करें कि वे स्वयं को कहां पाते हैं.
|
हाल के कुछ वर्षों में सांसदों और मंत्रियों द्वारा पद का दुरुपयोग कर अवैध तरीके से भारी भरकम राशि के घोटालों के मामले प्रकाश में आते रहे हैं. बावजूद इसके कितनों को भारतीय दंड विधान की धाराओं के अंतर्गत सजा हो पाई, यह जगजाहिर है. घोटालों के आरोपी सांसद, मंत्री या राजनेता तथाकथित तौर पर अतिगणमान्य व्यक्ति का दर्जा बरकरार रखे हुए हैं और उनकी सुरक्षा व सुविधा के नाम पर एक सौ इक्कीस करोड़ भारतीयों की गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा खर्च किया जाता रहा है. इसके बाद भी हैरानी होती है कि क्यों भारतीय समाज का युवा वर्ग राजनीति में जाने का ख्वाहिशमंद नहीं है? अधिकांश राजनेता भ्रष्टाचार के पर्याय बन चुके हैं, तब भी यह बात मेरी समझ में नहीं आती कि आखिर इस तरह के विचार उन लोगों के मन में भी क्यों आते हैं जो स्वयं आलसी हैं और जिनका मोहभंग हो चुका है या फिर वे भी किसी न किसी रूप में अनैतिक कार्यों में लिप्त हैं. यह क्या कोई कम हास्यासपद है कि हमारे सांसदों को अनाधिकृत विलासिता और तमाम सुख-सुविधाएं बिल्कुल मुफ्त मिलती है! इससे भी बढ़कर यह कि कोई परिभाषित जॉब प्रोफाइल या विवरण नहीं, उम्र और शिक्षा की कोई तय सीमा नहीं, कोई जवाबदेही नहीं, कोई अनुशासन नहीं, कोई रिर्पोटिंग नहीं, जानकारी भी जरूरी नहीं! और इन्हें इन सबके लिए ही पैसे मिलते हैं. संघीय सरकार के अधीन काम करने वाले कर्मचारियों के कार्य के विपरीत सांसदों द्वारा किए जाने वाले काम के लिए न तो किसी विशेषज्ञता की जरूरत होती है और न ही किसी शैक्षिक योग्यता की, फिर भी विडंबना यह कि इसके बाद भी लोग राजनीति की तुलना में दूसरी नौकरियों को वरीयता देते हैं. यह नहीं भूलना चाहिए कि दूसरी नौकरियों में वापस बुलाए जाने, हटाए जाने, मनमाने स्थानांतरण, रिपोर्टिंग, वेतनवृद्धि में ठहराव के साथ-साथ सालाना गोपनीय रिपोर्ट का खतरा रहता है. दूसरे कर्मचारियों के विपरीत सांसद अपने दफ्तर में जो कुछ करते हैं, उसके लिए उन्हें पूरी आजादी होती है, यहां तक कि उसे अदालतों में भी चुनौती नहीं दी जा सकती है! इससे भी बड़ी बात यह कि उनके लिए काम के घंटों के लिए कोई नियम नहीं है, संसदीय चर्चा या बहस में भागीदारी की अनिवार्यता नहीं है, उपस्थिति भी जरूरी नहीं है, यहां तक कि उनकी उत्पादकता मापने की कोई निष्पक्ष व्यवस्था भी नहीं है. इस पर तुर्रा यह कि प्रचार या हटाने का कोई क्लॉज नहीं है. इसीलिए सांसदों द्वारा किए जाने वाले काम को मापा नहीं जा सकता है, फिर भी उन्हें न केवल अच्छी तनख्वाह मिलती है, बल्कि उसमें बढ़ोतरी भी होती है, फिर भी कोई करियर के तौर पर राजनीति को नहीं चुनता. यह अब गंभीर रूप से विचारणीय है. मानव सभ्यता की शुरूआत के समय से ही, जो लोक समाज की सेवा और समाज को बदलना चाहते थे, वे ही ऐसा करियर चुनते थे. उनका यह उद्देश्य नहीं होता था कि अपना आर्थिक स्तर ऊंचा करना है. लेकिन अब तो यह बस कहने की बात हो कर रह गई है. आज राजनीति में जाने की राह में सबसे बड़ी बाधा उसमें निवेश होने वाली भारी भरकम राशि है. यह हमारी राजनीतिक व्यवस्था की नंगी सच्चाई है. पंद्रहवीं लोकसभा के लिए चुने गए पाँच सौ तैंतालीस सांसदों की कुल संपत्ति तीन,शून्य करोड़ से भी अधिक है! इसका मतलब है कि एक सांसद की औसत संपत्ति पांच करोड़ रुपये से अधिक है. फिर वहीं लौटते हैं. मुझे हैरानी होती है कि उन्हें क्यों भुगतान किया जाना चाहिए, क्योंकि तनख्वाह के नाम पर उन्हें जो छोटी-सी रकम मिलती है, उससे उन्हें क्या फर्क पड़ने वाला है. और सबसे बुरा यह कि हमारे सांसद औसतन राष्ट्रीय निर्धनता स्तर से नौ गुना ज्यादा पाते हैं. बीते साल हम यह भी देख चुके हैं कि सांसदों के वेतन भत्ते में बढ़ोत्तरी के मुद्दे पर किस तरह सभी सांसद दलगत भावनाओं से उपर उठ कर इस विधेयक को पारित किया. यह भी भारतीयों को कम शर्मिंदा नहीं करता कि उसके रहनुमा, इस मुद्दे पर वाजिब बहस किए बगैर ही इसे संसद में पास करवा लिए. अमेरिका में, सांसदों को अपनी तनख्वाह के बाद बाहर से पंद्रह फीसदी से ज्यादा कमाई करने की इजाजत नहीं है, जबकि भारत में सांसदों की औसत संपत्ति पिछले कार्यकाल के मुकाबले तीन सौ गुना तक बढ़ गई. जर्मनी में सांसदों को अपनी स्वतत्रंता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पारिश्रमिक मिलता है, जबकि स्विट्जरलैंड में सांसदों को कोई वेतन नहीं मिलता, उन्हें संसद सत्र के दौरान अपने नियोक्ताओं से सिर्फ पेड लीव मिलती है. मैक्सिको में सांसद न तो कोई और काम कर सकते हैं और न ही किसी राजनीतिक दल के पदाधिकारी हो सकते हैं. ऐसे में हमारे महान सांसद स्वयं विचार करें कि वे स्वयं को कहां पाते हैं.
|
पदों का विवरण : महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन ने Senior Geologist, Executive Engineer, Superintendent, Pharmacist, के 76 पदों पर भर्ती को लेकर आवेदन मांगे हैं।
योग्यता : इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता पदों के अनुसार स्नातक, एमएससी, बीई, बीटेक आदि होनी चाहिए।
चयन प्रक्रिया : महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन के इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन एग्जाम और इंटरव्यू के द्वारा होगा।
आवेदन की तिथि : इन पदों पर ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 14 नवंबर 2022 तक निर्धारित किया गया हैं। इसके बाद आवेदन समाप्त हो जायेगा।
आवेदन प्रक्रिया : इच्छुक और योग्य उम्मीदवार महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन की वेबसाइट पर जा कर नोटिश को पढ़ें और आवेदन करें।
वेतनमान : सरकारी नियमानुसार।
नौकरी करने का स्थान : महाराष्ट्र।
|
पदों का विवरण : महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन ने Senior Geologist, Executive Engineer, Superintendent, Pharmacist, के छिहत्तर पदों पर भर्ती को लेकर आवेदन मांगे हैं। योग्यता : इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता पदों के अनुसार स्नातक, एमएससी, बीई, बीटेक आदि होनी चाहिए। चयन प्रक्रिया : महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन के इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन एग्जाम और इंटरव्यू के द्वारा होगा। आवेदन की तिथि : इन पदों पर ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि चौदह नवंबर दो हज़ार बाईस तक निर्धारित किया गया हैं। इसके बाद आवेदन समाप्त हो जायेगा। आवेदन प्रक्रिया : इच्छुक और योग्य उम्मीदवार महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन की वेबसाइट पर जा कर नोटिश को पढ़ें और आवेदन करें। वेतनमान : सरकारी नियमानुसार। नौकरी करने का स्थान : महाराष्ट्र।
|
महाराष्ट्र में बारिश के चलते हालात खतरनाक बने हुए हैं। लगातार कई दिनों से हो रही बारिश की वजह से सांग्ली, सतारा, रत्नागिरी, रायगढ़, कोल्हापुर और ठाणे में भयानक हादसे हुए हैं, जिनमें 138 लोगों की मौत हुई है। यहां NDRF की 34 टीमें राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं, लेकिन बारिश और बाढ़ के बाद बर्बादी के निशान साफ देखे जा सकते हैं।
राज्य के रिलीफ एंड रिहेबिलिटेशन डिपार्टमेंट के मुताबिक, रविवार सुबह तक राज्य से कुल 1 लाख 35 हजार लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से हटाया गया है। अलग-अलग हादसों में अब तक 53 लोगों घायल हुए हैं और 999 लापता हैं।
भारतीय सेना ने सेंट्रल वॉर रूम बनाया है, ताकि एयरफोर्स और नेवी के साथ तालमेल बनाकर राहत और बचाव कार्य को अंजाम दिया जा सके। इसे ऑपरेशन को Operation Varsha 21 नाम दिया गया है। तीनों सेनाएं स्थानीय प्रशासन और राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के साथ मिलकर काम करेंगे।
अगले दो-तीन दिनों में देश के कई राज्यों में भारी बारिश के अनुमान हैं। बिहार में पहले से ही कई जिले पानी में डूबे हुए हैं। यहां पर सोमवार और मंगलवार को तेज बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने राज्य के 19 जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। वहीं उत्तर प्रदेश में 100 से ज्यादा गांवों में पानी भर जाने के कारण पलायन का खतरा बन गया है। राजस्थान में भी 5 संभागों में भारी बारिश के साथ बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है।
राज्य में लगातार हो रही बारिश के कारण बाढ़ के हालात बने हुए हैं। बारिश और लैंडस्लाइड की वजह से बीते कुछ दिनों में यहां 138 लोगों की मौत हुई है। NDRF की 34 टीमें राज्य में राहत कार्य में जुटी हैं। रायगढ़ और रत्नागिरी इलाकों में बचाव दल मलबों से शव निकाल रहे हैं। कुछ तस्वीरें आपको विचलित कर सकती हैं, लेकिन इन्हें दिखाना जरूरी है ताकि आप हालात की भयावहता का अंदाजा लगा सकें।
राज्य में 26 जुलाई से तेज बारिश होने की संभावना है। उत्तर पूर्वी बिहार के सुपौल, अररिया, मधुबनी, मधेपुरा और उत्तर मध्य दरभंगा मुजफ्फरपुर, सहरसा, समस्तीपुर, बेगूसराय व खगड़िया सहित लगभग 19 जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। सहरसा और मुजफ्फरनगर समेत बिहार के कई इलाके पहले से बाढ़ में डूबे हैं।
राज्य के 16 जिलों में बाढ़ की आशंका के चलते हाई अलर्ट जारी किया गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश की वजह से राज्य में शारदा, घाघरा, सरयू और गंगा समेत कई नदियों में जलस्तर बढ़ गया है। इन नदियों के किनारे बसे 100 से ज्यादा गांवों में पलायन का खतरा बढ़ गया है। गांवों में लोगों के घरों तक पानी भर गया है और आवाजाही के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। राज्य में सोमवार से लेकर बुधवार तक तेज बारिश की संभावना है।
अगले तीन से चार दिनों में राज्य के जयपुर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर में तेज बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग ने राज्य के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। कई इलाकों में बारिश के साथ बिजली गिरने की भी चेतावनी दी गई है। यहां 27 जुलाई तक भारी बारिश होने मानसून एक्टिव रहने की संभावना है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
महाराष्ट्र में बारिश के चलते हालात खतरनाक बने हुए हैं। लगातार कई दिनों से हो रही बारिश की वजह से सांग्ली, सतारा, रत्नागिरी, रायगढ़, कोल्हापुर और ठाणे में भयानक हादसे हुए हैं, जिनमें एक सौ अड़तीस लोगों की मौत हुई है। यहां NDRF की चौंतीस टीमें राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं, लेकिन बारिश और बाढ़ के बाद बर्बादी के निशान साफ देखे जा सकते हैं। राज्य के रिलीफ एंड रिहेबिलिटेशन डिपार्टमेंट के मुताबिक, रविवार सुबह तक राज्य से कुल एक लाख पैंतीस हजार लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से हटाया गया है। अलग-अलग हादसों में अब तक तिरेपन लोगों घायल हुए हैं और नौ सौ निन्यानवे लापता हैं। भारतीय सेना ने सेंट्रल वॉर रूम बनाया है, ताकि एयरफोर्स और नेवी के साथ तालमेल बनाकर राहत और बचाव कार्य को अंजाम दिया जा सके। इसे ऑपरेशन को Operation Varsha इक्कीस नाम दिया गया है। तीनों सेनाएं स्थानीय प्रशासन और राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के साथ मिलकर काम करेंगे। अगले दो-तीन दिनों में देश के कई राज्यों में भारी बारिश के अनुमान हैं। बिहार में पहले से ही कई जिले पानी में डूबे हुए हैं। यहां पर सोमवार और मंगलवार को तेज बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने राज्य के उन्नीस जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। वहीं उत्तर प्रदेश में एक सौ से ज्यादा गांवों में पानी भर जाने के कारण पलायन का खतरा बन गया है। राजस्थान में भी पाँच संभागों में भारी बारिश के साथ बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। राज्य में लगातार हो रही बारिश के कारण बाढ़ के हालात बने हुए हैं। बारिश और लैंडस्लाइड की वजह से बीते कुछ दिनों में यहां एक सौ अड़तीस लोगों की मौत हुई है। NDRF की चौंतीस टीमें राज्य में राहत कार्य में जुटी हैं। रायगढ़ और रत्नागिरी इलाकों में बचाव दल मलबों से शव निकाल रहे हैं। कुछ तस्वीरें आपको विचलित कर सकती हैं, लेकिन इन्हें दिखाना जरूरी है ताकि आप हालात की भयावहता का अंदाजा लगा सकें। राज्य में छब्बीस जुलाई से तेज बारिश होने की संभावना है। उत्तर पूर्वी बिहार के सुपौल, अररिया, मधुबनी, मधेपुरा और उत्तर मध्य दरभंगा मुजफ्फरपुर, सहरसा, समस्तीपुर, बेगूसराय व खगड़िया सहित लगभग उन्नीस जिलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। सहरसा और मुजफ्फरनगर समेत बिहार के कई इलाके पहले से बाढ़ में डूबे हैं। राज्य के सोलह जिलों में बाढ़ की आशंका के चलते हाई अलर्ट जारी किया गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश की वजह से राज्य में शारदा, घाघरा, सरयू और गंगा समेत कई नदियों में जलस्तर बढ़ गया है। इन नदियों के किनारे बसे एक सौ से ज्यादा गांवों में पलायन का खतरा बढ़ गया है। गांवों में लोगों के घरों तक पानी भर गया है और आवाजाही के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। राज्य में सोमवार से लेकर बुधवार तक तेज बारिश की संभावना है। अगले तीन से चार दिनों में राज्य के जयपुर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर में तेज बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग ने राज्य के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। कई इलाकों में बारिश के साथ बिजली गिरने की भी चेतावनी दी गई है। यहां सत्ताईस जुलाई तक भारी बारिश होने मानसून एक्टिव रहने की संभावना है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
|
धूल से सनी पीली कमीज़ और फटे हुए पेंट के साथ एक गमछा गले में पहने हुए खड़े आशिक ख़ान ग्वालियर के लश्कर के रहने वाले हैं। वे दैनिक मज़दूरी करते हैं। आज वे महाराज बाड़ा के सीढ़ियों पर खाली बैठे काम मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं।
आशिक उन 200 मज़दूरों में से हैं, जो ग्वालियर राजपरिवार की शान के गवाह रहे महाराज बाड़ा की सीढ़ियों पर काम की आस में बैठे हैं। अब यह बाड़ा दैनिक मज़दूरी करने वालों का केंद्र बन चुका है। यह लोग दिन ऊगते ही यहां आकर बैठ जाते हैं।
चुनाव प्रत्याशियों की घोषणा करने वाले राजनीतिक पार्टियों के ऊंचे-ऊंचे बैनर, जिनमें आने वाले उपचुनावों के लिए ढेरों वायदे किए जा रहे हैं, उनका आशिक जैसे हज़ारों लोगों के लिए कोई मतलब नहीं है। इन लोगों के लिए काम का इंतज़ार बढ़ता ही जा रहा है। लॉकडाउन हटने के बावजूद करीब़ 80 फ़ीसदी दैनिक मज़दूर दोपहर तक खाली हाथ लौट जाते हैं।
आशिक को तीन दिन से कोई काम नहीं मिला। 10 सदस्यों वाले परिवार में अविवाहित आशिक को अपनी रोटी की व्यवस्था खुद करने के लिए कह दिया गया है। क्योंकि लॉकडाउन लगने के बाद से ही परिवार काफ़ी दिक्कतों में है।
भारी आवाज़ के साथ आशिक कहते हैं, "पिछले 3-4 महीने से मेरा परिवार मुझे खाना देना बंद कर चुका है, क्योंकि मैं लॉकडाउन के दौरान उनकी आर्थिक मदद करने में नाकामयाब रहा। अब अगर मुझे काम मिलता है, तो मैं बाहर खाना खाता हूं। नहीं तो भूखे पेट ही सो जाता हूं।"
आशिक मज़दूर हैं, लेकिन उनके तीन साल बड़े एक भाई और एक छोटे भाई या तो पंचर की दुकान करते हैं या फिर तांगा चलाते हैं। आशिक कहते हैं, "परिवार के पास गरीबी रेखा कार्ड भी उपलब्ध नहीं है कि उन्हें हर महीने मुफ़्त राशन मिल जाए, ना ही उन्हें लॉकडाउन के दौरान सरकार या किसी एनजीओ से कोई मदद मिली। हम कई दिनों तक भूखे पेट सोते रहे।"
आशिक कहते हैं कि उनकी लगातार कोशिशों के बावजूद, वह 100 दिन की रोज़गार की गारंटी देने वाली "महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार योजना (मनरेगा)" के लिए पंजीकरण नहीं करवा पाए। आशिक मध्यप्रदेश स्ट्रीट वेंडर (रेहड़ी) योजना का लाभ लेने में भी नाकामयाब रहे हैं, जिसमें 10,000 रुपये का ब्याज़ रहित कर्ज़ मिलता है, ताकि संबंधित शख़्स लॉकडाउन के बाद व्यापार शुरू कर सके।
आशिक कहते हैं, "मैं बचपन से मज़दूरी कर रहा हूं। लेकिन मुझे मज़दूर कार्ड तक नहीं मिला।"
भिंड के मेगां गांव के रहने वाले संजीव यादव की कहानी भी आशिक से अलग नहीं है। वह बताते हैं कि उनके परिवार के पास गांव में 22 बीघा ज़मीन है, लेकिन फिर भी उन्हें मज़दूरी करने पर मजबूर होना पड़ा।
यादव कहते हैं, "मैं अपने परिवार के साथ ग्वालियर में रहता हूं और हर महीने की कमाई में से 1500 रुपये कमरे का किराया देता हूं।"
वह कहते हैं कि उन्हें इसलिए मज़दूरी करने पर मजबूर होना पड़ा, क्योंकि 22 बीघा ज़मीन पर खेती करने वाले उनके तीन भाईयों का परिवार बहुत बड़ा है। लॉकडाउन लागू होने के बाद, ऊंची महंगाई में मुश्किल से ही वे अपना गुजारा कर पा रहे हैं।
सुबह से लेकर शाम तक इस जगह हजारों मज़दूर इकट्ठा होते हैं, लेकिन कुछ भाग्यशाली लोगों को ही काम मिल पाता है, जबकि मज़दूरी की दर भी अभी गिर रही है।
52 साल के महेंद्र एक कांट्रेक्टर हैं, वे कहते हैं, "सीमेंट, मिट्टी और दूसरी निर्माण सामग्री की कीमत बेहद तेजी से बढ़ी है, जबकि निर्माण काम में बहुत कमी आई है।"
वह आगे कहते हैं, "अगर हम पूरे निर्माण कार्य को 100 मानें, तो फिलहाल सिर्फ 25 फ़ीसदी काम ही बचा है, खासकर लॉकडाउन के बाद।"
न्यूज़क्लिक ने 25-30 से ज़्यादा मज़दूरों से बात की, जो महाराज बाड़ा में काम की आस में पहुंचे थे। उन्होंने एकमत से कहा कि उन्हें लॉकडाउन के दौरान बहुत परेशानी झेलनी पड़ी है और मुश्किल ही किसी को सरकार से खाद्यान्न की कोई मदद मिली हो। दर्जन भर से ज़्यादा मज़दूरों ने एक आवाज में कहा, "पिछले 6-7 महीनों में हमारे गरीबी रेखा कार्ड की वैधता खत्म हो गई और उनकी वैधता को दोबारा नहीं बढ़ाया जा रहा है।"
जब उनसे मनरेगा और स्ट्रीट वेंडर योजना के बारे में पूछा, जिसके ज़रिए राज्य सरकार ने लॉकडाउन के बाद वंचित तबकों की मदद करने का दावा करते हुए खूब प्रचार किया था, ज़्यादातर ने कहा, "मनरेगा में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है, वहीं स्ट्रीट वेंडर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन बहुत जल्दी बंद कर दिया गया था।"
48 साल के मज़दूर सूरज रातक कहते हैं, "जिन लोगों की पहचान या संबंध सत्ताधारी नेताओं से है, उन्हें स्ट्रीट वेंडर योजना का फायदा मिला। जबकि जिन लोगों को वास्तविक जरूरत है, उनके हाथ कुछ नहीं लगा। ऊपर से बीच के दलालों ने योजना के तहत मिलने वाली राशि में से तीस फ़ीसदी कटौती कर ली।"
जब उपचुनाव में 28 सीटों पर वोटिंग की बात होती है, तो मज़दूरों में विभाजन है। उपचुनावों में ग्वालियर की तीन सीटों- ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व और डबरा पर भी 3 नवंबर को वोटिंग होनी है।
जब श्रीमंत या महाराज के नाम से प्रसिद्ध ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में जाने के बारे में पूछा गया, तो मज़दूरों ने कहा कि महाराज ने गलत किया और यह कदम उनकी छवि खराब कर सकता है। मज़दूरों ने यह भी कहा कि सिंधिया ने वही किया, जो उनके लिए लाभकारी था। इसके बावजूद "हम उन्हें प्यार और पसंद करते हैं।"
कई लोगों का मानना है कि कांग्रेस गरीबों और किसानों की हितैषी पार्टी है, वहीं दूसरे लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लिए सबसे अच्छा कर रहे हैं। एक मज़दूर ने कहा, "मोदी जी गलत नहीं हो सकते।"
55 साल के रवि कहते हैं, "कोई फर्क नहीं पड़ता कि कांग्रेस शासन में हो या बीजेपी, कोई भी गरीबों के लिए काम नहीं करता।"
न्यूज़क्लिक टीम ने मुरैना जिले अम्बाह प्रखंड में भी यात्रा की, जहां लॉकडाउन में सबसे बड़ी संख्या (30,000) में मज़दूर वापस आए थे।
स्थानीय पत्रकार और ट्रेवल एजेंसी के मालिकों का कहना है कि मध्यप्रदेश का इस क्षेत्र में अंतिम प्रखंड, जिस अम्बाह की सीमा उत्तरप्रदेश और राजस्थान दोनों से लगती है, वहां से एक बार फिर प्रवास चालू हो गया है। स्थानीय पत्रकार अजय जैन कहते हैं, "एक बार फिर प्रवास शुरू हो गया है, क्योंकि यहां कोई काम नहीं है और राजनीतिक दलों ने जो वायदे किए थे, वे आज तक पूरे नहीं हो पाए हैं।"
इस बीच बालाजी ट्रेवल्स के मालिक का दावा है कि करीब 18 बसें दिल्ली, जयपुर, सूरत और अहमदाबाद के लिए शहर से हर दिन निकल रही हैं और सभी बसें पूरी तरह भरी होती हैं।
इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
|
धूल से सनी पीली कमीज़ और फटे हुए पेंट के साथ एक गमछा गले में पहने हुए खड़े आशिक ख़ान ग्वालियर के लश्कर के रहने वाले हैं। वे दैनिक मज़दूरी करते हैं। आज वे महाराज बाड़ा के सीढ़ियों पर खाली बैठे काम मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं। आशिक उन दो सौ मज़दूरों में से हैं, जो ग्वालियर राजपरिवार की शान के गवाह रहे महाराज बाड़ा की सीढ़ियों पर काम की आस में बैठे हैं। अब यह बाड़ा दैनिक मज़दूरी करने वालों का केंद्र बन चुका है। यह लोग दिन ऊगते ही यहां आकर बैठ जाते हैं। चुनाव प्रत्याशियों की घोषणा करने वाले राजनीतिक पार्टियों के ऊंचे-ऊंचे बैनर, जिनमें आने वाले उपचुनावों के लिए ढेरों वायदे किए जा रहे हैं, उनका आशिक जैसे हज़ारों लोगों के लिए कोई मतलब नहीं है। इन लोगों के लिए काम का इंतज़ार बढ़ता ही जा रहा है। लॉकडाउन हटने के बावजूद करीब़ अस्सी फ़ीसदी दैनिक मज़दूर दोपहर तक खाली हाथ लौट जाते हैं। आशिक को तीन दिन से कोई काम नहीं मिला। दस सदस्यों वाले परिवार में अविवाहित आशिक को अपनी रोटी की व्यवस्था खुद करने के लिए कह दिया गया है। क्योंकि लॉकडाउन लगने के बाद से ही परिवार काफ़ी दिक्कतों में है। भारी आवाज़ के साथ आशिक कहते हैं, "पिछले तीन-चार महीने से मेरा परिवार मुझे खाना देना बंद कर चुका है, क्योंकि मैं लॉकडाउन के दौरान उनकी आर्थिक मदद करने में नाकामयाब रहा। अब अगर मुझे काम मिलता है, तो मैं बाहर खाना खाता हूं। नहीं तो भूखे पेट ही सो जाता हूं।" आशिक मज़दूर हैं, लेकिन उनके तीन साल बड़े एक भाई और एक छोटे भाई या तो पंचर की दुकान करते हैं या फिर तांगा चलाते हैं। आशिक कहते हैं, "परिवार के पास गरीबी रेखा कार्ड भी उपलब्ध नहीं है कि उन्हें हर महीने मुफ़्त राशन मिल जाए, ना ही उन्हें लॉकडाउन के दौरान सरकार या किसी एनजीओ से कोई मदद मिली। हम कई दिनों तक भूखे पेट सोते रहे।" आशिक कहते हैं कि उनकी लगातार कोशिशों के बावजूद, वह एक सौ दिन की रोज़गार की गारंटी देने वाली "महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार योजना " के लिए पंजीकरण नहीं करवा पाए। आशिक मध्यप्रदेश स्ट्रीट वेंडर योजना का लाभ लेने में भी नाकामयाब रहे हैं, जिसमें दस,शून्य रुपयापये का ब्याज़ रहित कर्ज़ मिलता है, ताकि संबंधित शख़्स लॉकडाउन के बाद व्यापार शुरू कर सके। आशिक कहते हैं, "मैं बचपन से मज़दूरी कर रहा हूं। लेकिन मुझे मज़दूर कार्ड तक नहीं मिला।" भिंड के मेगां गांव के रहने वाले संजीव यादव की कहानी भी आशिक से अलग नहीं है। वह बताते हैं कि उनके परिवार के पास गांव में बाईस बीघा ज़मीन है, लेकिन फिर भी उन्हें मज़दूरी करने पर मजबूर होना पड़ा। यादव कहते हैं, "मैं अपने परिवार के साथ ग्वालियर में रहता हूं और हर महीने की कमाई में से एक हज़ार पाँच सौ रुपयापये कमरे का किराया देता हूं।" वह कहते हैं कि उन्हें इसलिए मज़दूरी करने पर मजबूर होना पड़ा, क्योंकि बाईस बीघा ज़मीन पर खेती करने वाले उनके तीन भाईयों का परिवार बहुत बड़ा है। लॉकडाउन लागू होने के बाद, ऊंची महंगाई में मुश्किल से ही वे अपना गुजारा कर पा रहे हैं। सुबह से लेकर शाम तक इस जगह हजारों मज़दूर इकट्ठा होते हैं, लेकिन कुछ भाग्यशाली लोगों को ही काम मिल पाता है, जबकि मज़दूरी की दर भी अभी गिर रही है। बावन साल के महेंद्र एक कांट्रेक्टर हैं, वे कहते हैं, "सीमेंट, मिट्टी और दूसरी निर्माण सामग्री की कीमत बेहद तेजी से बढ़ी है, जबकि निर्माण काम में बहुत कमी आई है।" वह आगे कहते हैं, "अगर हम पूरे निर्माण कार्य को एक सौ मानें, तो फिलहाल सिर्फ पच्चीस फ़ीसदी काम ही बचा है, खासकर लॉकडाउन के बाद।" न्यूज़क्लिक ने पच्चीस-तीस से ज़्यादा मज़दूरों से बात की, जो महाराज बाड़ा में काम की आस में पहुंचे थे। उन्होंने एकमत से कहा कि उन्हें लॉकडाउन के दौरान बहुत परेशानी झेलनी पड़ी है और मुश्किल ही किसी को सरकार से खाद्यान्न की कोई मदद मिली हो। दर्जन भर से ज़्यादा मज़दूरों ने एक आवाज में कहा, "पिछले छः-सात महीनों में हमारे गरीबी रेखा कार्ड की वैधता खत्म हो गई और उनकी वैधता को दोबारा नहीं बढ़ाया जा रहा है।" जब उनसे मनरेगा और स्ट्रीट वेंडर योजना के बारे में पूछा, जिसके ज़रिए राज्य सरकार ने लॉकडाउन के बाद वंचित तबकों की मदद करने का दावा करते हुए खूब प्रचार किया था, ज़्यादातर ने कहा, "मनरेगा में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है, वहीं स्ट्रीट वेंडर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन बहुत जल्दी बंद कर दिया गया था।" अड़तालीस साल के मज़दूर सूरज रातक कहते हैं, "जिन लोगों की पहचान या संबंध सत्ताधारी नेताओं से है, उन्हें स्ट्रीट वेंडर योजना का फायदा मिला। जबकि जिन लोगों को वास्तविक जरूरत है, उनके हाथ कुछ नहीं लगा। ऊपर से बीच के दलालों ने योजना के तहत मिलने वाली राशि में से तीस फ़ीसदी कटौती कर ली।" जब उपचुनाव में अट्ठाईस सीटों पर वोटिंग की बात होती है, तो मज़दूरों में विभाजन है। उपचुनावों में ग्वालियर की तीन सीटों- ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व और डबरा पर भी तीन नवंबर को वोटिंग होनी है। जब श्रीमंत या महाराज के नाम से प्रसिद्ध ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में जाने के बारे में पूछा गया, तो मज़दूरों ने कहा कि महाराज ने गलत किया और यह कदम उनकी छवि खराब कर सकता है। मज़दूरों ने यह भी कहा कि सिंधिया ने वही किया, जो उनके लिए लाभकारी था। इसके बावजूद "हम उन्हें प्यार और पसंद करते हैं।" कई लोगों का मानना है कि कांग्रेस गरीबों और किसानों की हितैषी पार्टी है, वहीं दूसरे लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लिए सबसे अच्छा कर रहे हैं। एक मज़दूर ने कहा, "मोदी जी गलत नहीं हो सकते।" पचपन साल के रवि कहते हैं, "कोई फर्क नहीं पड़ता कि कांग्रेस शासन में हो या बीजेपी, कोई भी गरीबों के लिए काम नहीं करता।" न्यूज़क्लिक टीम ने मुरैना जिले अम्बाह प्रखंड में भी यात्रा की, जहां लॉकडाउन में सबसे बड़ी संख्या में मज़दूर वापस आए थे। स्थानीय पत्रकार और ट्रेवल एजेंसी के मालिकों का कहना है कि मध्यप्रदेश का इस क्षेत्र में अंतिम प्रखंड, जिस अम्बाह की सीमा उत्तरप्रदेश और राजस्थान दोनों से लगती है, वहां से एक बार फिर प्रवास चालू हो गया है। स्थानीय पत्रकार अजय जैन कहते हैं, "एक बार फिर प्रवास शुरू हो गया है, क्योंकि यहां कोई काम नहीं है और राजनीतिक दलों ने जो वायदे किए थे, वे आज तक पूरे नहीं हो पाए हैं।" इस बीच बालाजी ट्रेवल्स के मालिक का दावा है कि करीब अट्ठारह बसें दिल्ली, जयपुर, सूरत और अहमदाबाद के लिए शहर से हर दिन निकल रही हैं और सभी बसें पूरी तरह भरी होती हैं। इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
|
जांजगीर-चांपा। CG Accident जांजगीर-पामगढ़ मेन रोड में गुरूवार सुबह एक तेज रफ्तार स्कूटी और बाइक में भिड़ंत हो गई। इस हादसे में एक युवक की मौत हो गई। वहीं युवती सहित तीन लोग घायल है, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है।
बता दें कि मुड़पार निवासी पूर्वा खांडेकर ट्यूशन के लिए अपनी स्कूटी से पामगढ़ जा रही थी। तभी ग्राम भदरा के पास बाइक सवार तीन युवक सागर कश्यप 20 वर्ष, बजना कश्यप 20 वर्ष व चंद्रमणि कश्यप 22 वर्ष से जा भिड़ी। इस हादसे में बाइक चालक सागर कश्यप की मौत हो गई। बाइक सवार तीनों युवक कटरा के रहने वाले है। वहीं घायल युवती की स्थिति को देखते हुए रिफर किया गया है और घायल दो युवकों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया गया है। मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
|
जांजगीर-चांपा। CG Accident जांजगीर-पामगढ़ मेन रोड में गुरूवार सुबह एक तेज रफ्तार स्कूटी और बाइक में भिड़ंत हो गई। इस हादसे में एक युवक की मौत हो गई। वहीं युवती सहित तीन लोग घायल है, जिसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है। बता दें कि मुड़पार निवासी पूर्वा खांडेकर ट्यूशन के लिए अपनी स्कूटी से पामगढ़ जा रही थी। तभी ग्राम भदरा के पास बाइक सवार तीन युवक सागर कश्यप बीस वर्ष, बजना कश्यप बीस वर्ष व चंद्रमणि कश्यप बाईस वर्ष से जा भिड़ी। इस हादसे में बाइक चालक सागर कश्यप की मौत हो गई। बाइक सवार तीनों युवक कटरा के रहने वाले है। वहीं घायल युवती की स्थिति को देखते हुए रिफर किया गया है और घायल दो युवकों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया गया है। मामले में पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
|
एलोन मस्क ने एक्स, जिसे पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था, के उपयोगकर्ताओं के लिए मासिक शुल्क लेने की योजना की घोषणा की है। उन्होंने इज़रायली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बातचीत के दौरान मंच की बॉट समस्या के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए इस विचार की घोषणा की।
मस्क का मानना है कि बॉट समस्या को हल करने के लिए एक्स सेवाओं का उपयोग करने के लिए एक छोटा मासिक भुगतान लागू करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नावों के निर्माण की कम लागत (एक पैसे के दसवें हिस्से के बराबर) ने उनके प्रसार को प्रोत्साहित किया। नाव बनाने वालों से कुछ डॉलर वसूलने से नाव बनाने की लागत काफी बढ़ जाएगी, जो एक निवारक के रूप में काम करेगी।
हालाँकि मस्क ने सदस्यता मूल्य के बारे में विशेष विवरण नहीं दिया, उन्होंने इसे "छोटी राशि" के रूप में संबोधित किया। हालाँकि उपयोगकर्ताओं से शुल्क लेने का विचार नया नहीं है, मस्क ने पिछले साल इस तरह के कदम की संभावना का संकेत दिया था।
एक्स में बॉट्स से निपटने के लिए मस्क ने कई कदम उठाए हैं। इस साल जुलाई में, इसने निर्णय के कारण के रूप में नए एआई स्टार्टअप द्वारा डेटा स्क्रैपिंग का हवाला देते हुए, प्लेटफ़ॉर्म पर उपयोगकर्ता कितने ट्वीट पढ़ सकते हैं, इस पर अस्थायी सीमा लगा दी।
मस्क और नेतन्याहू के बीच बातचीत के दौरान फोकस एआई तकनीक और उसके नियमन पर था. मस्क ने कहा कि एक्स के अब 550 मिलियन उपयोगकर्ता हैं, जो प्रति दिन 100 से 200 मिलियन पोस्ट उत्पन्न करते हैं। हालाँकि, प्लेटफ़ॉर्म ने भुगतान किए गए ग्राहकों की संख्या का खुलासा नहीं किया है, और स्वतंत्र शोध से पता चलता है कि एक्स प्रीमियम उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करने में विफल रहा है।
|
एलोन मस्क ने एक्स, जिसे पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था, के उपयोगकर्ताओं के लिए मासिक शुल्क लेने की योजना की घोषणा की है। उन्होंने इज़रायली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बातचीत के दौरान मंच की बॉट समस्या के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए इस विचार की घोषणा की। मस्क का मानना है कि बॉट समस्या को हल करने के लिए एक्स सेवाओं का उपयोग करने के लिए एक छोटा मासिक भुगतान लागू करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नावों के निर्माण की कम लागत ने उनके प्रसार को प्रोत्साहित किया। नाव बनाने वालों से कुछ डॉलर वसूलने से नाव बनाने की लागत काफी बढ़ जाएगी, जो एक निवारक के रूप में काम करेगी। हालाँकि मस्क ने सदस्यता मूल्य के बारे में विशेष विवरण नहीं दिया, उन्होंने इसे "छोटी राशि" के रूप में संबोधित किया। हालाँकि उपयोगकर्ताओं से शुल्क लेने का विचार नया नहीं है, मस्क ने पिछले साल इस तरह के कदम की संभावना का संकेत दिया था। एक्स में बॉट्स से निपटने के लिए मस्क ने कई कदम उठाए हैं। इस साल जुलाई में, इसने निर्णय के कारण के रूप में नए एआई स्टार्टअप द्वारा डेटा स्क्रैपिंग का हवाला देते हुए, प्लेटफ़ॉर्म पर उपयोगकर्ता कितने ट्वीट पढ़ सकते हैं, इस पर अस्थायी सीमा लगा दी। मस्क और नेतन्याहू के बीच बातचीत के दौरान फोकस एआई तकनीक और उसके नियमन पर था. मस्क ने कहा कि एक्स के अब पाँच सौ पचास मिलियन उपयोगकर्ता हैं, जो प्रति दिन एक सौ से दो सौ मिलियन पोस्ट उत्पन्न करते हैं। हालाँकि, प्लेटफ़ॉर्म ने भुगतान किए गए ग्राहकों की संख्या का खुलासा नहीं किया है, और स्वतंत्र शोध से पता चलता है कि एक्स प्रीमियम उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करने में विफल रहा है।
|
का श्रमण परम्परापर गम्भीर प्रभाव है । वे ऋषभनाथसे नेमिनाथ तक चली आयी धर्म-परम्पराके समवेत संकरण है। इनमें ऋषभका आकिंचन्य, अपरिग्रह और कर्मठता, नमिनाथकी अनासक्तवृत्ति एवं नेमिनाथकी करुणाप्रधान अहिंसावृत्ति सामयिक धर्मचक्र के रूप में प्रतिष्ठित है। पार्श्वनाथने अहिंसाको सुव्यवस्थित सिद्धान्त के रूप में प्रतिष्ठित कर क्षमाकी धारा प्रचलित की ।
तीर्थंकर पार्श्वनाथकी वाणीमें करुणा, मधुरता और शान्तिकी त्रिवेणी एक साथ प्रवाहित है। परिमाणतः जन-जनके मनपर उनकी वाणीका मंगलकारी प्रभाव पड़ा, जिससे कोटि-कोटि जनता उनकी अनन्यभक्त बन गयी। इनके समयमें तापस-परम्पराका प्राबल्य था । लोग तपके नामपर अज्ञानपूर्वक कष्ट उठा रहे थे । इनके उपदेशसे विवेक युक्त तपश्चरण करनेकी नवप्रेरणा प्राप्त हुई । इनके उपदेशसे तपश्चरण का रूपही निखर गया ।
पार्श्वनाथकालीन साहित्यका अध्ययन करनेसे अवगत होता है कि पिप्पलादि, भारद्वाज, नचिकेता आदिपर पार्श्वनाथका पर्याप्त प्रभाव है । पिप्पलादि मान्य वैदिक ऋषि थे। उनके उपदेशों पर इनके उपदेशकी प्रतिच्छाया दिखलायी पड़ती है। पिप्पलादिका अभिमत था कि प्राण या चेतना जब शरीर से पृथक हो जाती है, तब यह शरीर नष्ट हो जाता है। यह कथन 'पुद्गलमय शरीरसे जीवके पृथक् होनेपर विघटन सिद्धान्तकी अनुकृति है।'
भारद्वाज जिनका अस्तित्व बौद्धधर्मसे पूर्व है । पार्श्वनाथ कालमें वे एक स्वतन्त्र मुण्डक सम्प्रदायके नेता थे । बुद्धोंके अंगुत्तरनिकायमें उनके मतको गणना मुण्डक श्रावकके नामसे की गयी है । मुण्डक मतके लोग वन में रहनेवाले थे । ये तापसों तथा गृहस्थ विप्रोंसे अपनेको पृथक् दिखाने के लिये सिर मुंडाकर भिक्षावृत्तिसे अपना उदर पोषण करते थे। किन्तु वेदसे उनका विरोध नहीं था । इनके मतपर पार्श्वनाथके धर्मोपदेशका प्रभाव लक्षित होता है ।
नचिकेता उपनिषद्कालके एक वैदिक ऋषि थे। उनके विचारोंपर भी पार्श्वनाथका प्रभाव दृष्टिगोचर होता है। ये भारद्वाजके समकालीन थे तथा ज्ञान यज्ञको मानते थे । इनकी मान्यताके मुख्य अंग थे - इन्द्रियनिग्रह, ध्यानवृद्धि, आत्माके अनीश्वर रूपका चिन्तन तथा शरीर और आत्मका पृथक् बोध ।
१. कैम्ब्रिज हिस्ट्री ऑफ इण्डिया, पार्ट १, पृ० १८०.
२. Dialogues of Buddha, Part 2, Page 22.
३. बृहदारण्यकोपनिषद्, ४।३।२२.
१८ : तीर्थंकर महावीर और उनकी आचार्य परम्परा
इस प्रकार पार्श्वनाथका प्रभाव उस समय के सम्प्रदायों और ऋषियों पर दिखलायी पड़ता है ।
पार्श्वनाथके धर्मको चातुर्याम धर्मं कहा गया है। इसका स्वरूप - १. सर्वथा प्राणातिपातविरमण - हिंसाका त्याग, २. सर्वथामृषावादविरमण - असत्य का त्याग, ३. सर्वथा अदत्तादानविरमण-चौर्य त्याग और ४. सर्वथा बहिस्थादानविरमण - परिग्रह त्याग रूप है । यह आत्म-साधनाका पवित्र मार्ग है । चातुर्याम धर्म का वास्तविक रहस्य चार प्रकारके पापोंसे विरक्त होना है। पार्श्वनाथके काल तक ब्रह्मचर्यव्रतको पृथक् स्थान प्राप्त नहीं हुआ था, पर इसका अर्थ यह नहीं है कि उनके समयकी श्रमण-परम्परामें ब्रह्मचर्य की उपेक्षा थी। इस परम्पराके श्रमण स्त्रीको भी परिग्रह के अन्तर्गत समझ कर, स्त्रीका त्यागकर ब्रह्मचर्य धारण करते थे । धन-धान्यके समान स्त्री भी बाह्य वस्तु होने से बहिस्थादान के अन्तर्गत थी ।
इतिहासके आलोक में पाश्र्वनाथ
तीर्थंकर पार्श्वनाथ ऐतिहासिक व्यक्ति थे, यह अनेक प्रमाणोंसे सिद्ध हो चुका है। जैन साहित्य ही नहीं, बौद्ध साहित्य भी तीर्थंकर पार्श्वनाथकी ऐतिहासिकताको स्वीकार करता है । डा० जेकोबीने बौद्ध साहित्यके उल्लेखोंके आधारपर निर्ग्रन्थसम्प्रदायका अस्तित्व प्रमाणित करते हुए लिखा है- "यदि जैन और बौद्ध सम्प्रदाय एकसे ही प्राचीन होते, जैसाकि बुद्ध और महावीरकी समकालीनता तथा इन दोनोंको इन दोनों सम्प्रदायोंका संस्थापक माननेसे अनुमान किया जाता है, तो हमें आशा करनी चाहिये कि दोनोंने ही अपनेअपने साहित्यमें अपने प्रतिद्वन्द्वका अवश्यही निर्देश किया होता, किन्तु बात ऐसी नहीं है। बौद्धोंने तो अपने साहित्य में, यहाँ तक कि त्रिपिटकोंमें भी निर्ग्रन्थों का बहुतायतसे उल्लेख किया है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि बौद्ध निर्ग्रन्थ-सम्प्रदायको एक प्रमुख सम्प्रदाय मानते थे। किन्तु निर्ग्रन्थोंकी धारणा इसके विपरीत थी और वे अपने प्रतिद्वन्द्वोकी उपेक्षा तक करते थे । इससे हम इस निर्णयपर पहुँचते हैं कि बुद्ध के समय निग्रन्थ सम्प्रदाय कोई नवीन स्थापित सम्प्रदाय नहीं था। यही मत पिटकोंका भी जान पड़ता है। "
डा० श्रीहीरालालजी जैनने लिखा है- "बौद्ध ग्रन्थ 'अंगुत्तरनिकाय', 'चत्तुक्कनिपात' (बग्ग ५) और उसकी 'अट्ठकथा' में उल्लेख है कि गौतम बुद्धका
१. Indian antiquary, volume 9th, Page 160.
तीर्थंकर महावीर और उनकी देशना : १९
|
का श्रमण परम्परापर गम्भीर प्रभाव है । वे ऋषभनाथसे नेमिनाथ तक चली आयी धर्म-परम्पराके समवेत संकरण है। इनमें ऋषभका आकिंचन्य, अपरिग्रह और कर्मठता, नमिनाथकी अनासक्तवृत्ति एवं नेमिनाथकी करुणाप्रधान अहिंसावृत्ति सामयिक धर्मचक्र के रूप में प्रतिष्ठित है। पार्श्वनाथने अहिंसाको सुव्यवस्थित सिद्धान्त के रूप में प्रतिष्ठित कर क्षमाकी धारा प्रचलित की । तीर्थंकर पार्श्वनाथकी वाणीमें करुणा, मधुरता और शान्तिकी त्रिवेणी एक साथ प्रवाहित है। परिमाणतः जन-जनके मनपर उनकी वाणीका मंगलकारी प्रभाव पड़ा, जिससे कोटि-कोटि जनता उनकी अनन्यभक्त बन गयी। इनके समयमें तापस-परम्पराका प्राबल्य था । लोग तपके नामपर अज्ञानपूर्वक कष्ट उठा रहे थे । इनके उपदेशसे विवेक युक्त तपश्चरण करनेकी नवप्रेरणा प्राप्त हुई । इनके उपदेशसे तपश्चरण का रूपही निखर गया । पार्श्वनाथकालीन साहित्यका अध्ययन करनेसे अवगत होता है कि पिप्पलादि, भारद्वाज, नचिकेता आदिपर पार्श्वनाथका पर्याप्त प्रभाव है । पिप्पलादि मान्य वैदिक ऋषि थे। उनके उपदेशों पर इनके उपदेशकी प्रतिच्छाया दिखलायी पड़ती है। पिप्पलादिका अभिमत था कि प्राण या चेतना जब शरीर से पृथक हो जाती है, तब यह शरीर नष्ट हो जाता है। यह कथन 'पुद्गलमय शरीरसे जीवके पृथक् होनेपर विघटन सिद्धान्तकी अनुकृति है।' भारद्वाज जिनका अस्तित्व बौद्धधर्मसे पूर्व है । पार्श्वनाथ कालमें वे एक स्वतन्त्र मुण्डक सम्प्रदायके नेता थे । बुद्धोंके अंगुत्तरनिकायमें उनके मतको गणना मुण्डक श्रावकके नामसे की गयी है । मुण्डक मतके लोग वन में रहनेवाले थे । ये तापसों तथा गृहस्थ विप्रोंसे अपनेको पृथक् दिखाने के लिये सिर मुंडाकर भिक्षावृत्तिसे अपना उदर पोषण करते थे। किन्तु वेदसे उनका विरोध नहीं था । इनके मतपर पार्श्वनाथके धर्मोपदेशका प्रभाव लक्षित होता है । नचिकेता उपनिषद्कालके एक वैदिक ऋषि थे। उनके विचारोंपर भी पार्श्वनाथका प्रभाव दृष्टिगोचर होता है। ये भारद्वाजके समकालीन थे तथा ज्ञान यज्ञको मानते थे । इनकी मान्यताके मुख्य अंग थे - इन्द्रियनिग्रह, ध्यानवृद्धि, आत्माके अनीश्वर रूपका चिन्तन तथा शरीर और आत्मका पृथक् बोध । एक. कैम्ब्रिज हिस्ट्री ऑफ इण्डिया, पार्ट एक, पृशून्य एक सौ अस्सी. दो. Dialogues of Buddha, Part दो, Page बाईस. तीन. बृहदारण्यकोपनिषद्, चार।तीन।बाईस. अट्ठारह : तीर्थंकर महावीर और उनकी आचार्य परम्परा इस प्रकार पार्श्वनाथका प्रभाव उस समय के सम्प्रदायों और ऋषियों पर दिखलायी पड़ता है । पार्श्वनाथके धर्मको चातुर्याम धर्मं कहा गया है। इसका स्वरूप - एक. सर्वथा प्राणातिपातविरमण - हिंसाका त्याग, दो. सर्वथामृषावादविरमण - असत्य का त्याग, तीन. सर्वथा अदत्तादानविरमण-चौर्य त्याग और चार. सर्वथा बहिस्थादानविरमण - परिग्रह त्याग रूप है । यह आत्म-साधनाका पवित्र मार्ग है । चातुर्याम धर्म का वास्तविक रहस्य चार प्रकारके पापोंसे विरक्त होना है। पार्श्वनाथके काल तक ब्रह्मचर्यव्रतको पृथक् स्थान प्राप्त नहीं हुआ था, पर इसका अर्थ यह नहीं है कि उनके समयकी श्रमण-परम्परामें ब्रह्मचर्य की उपेक्षा थी। इस परम्पराके श्रमण स्त्रीको भी परिग्रह के अन्तर्गत समझ कर, स्त्रीका त्यागकर ब्रह्मचर्य धारण करते थे । धन-धान्यके समान स्त्री भी बाह्य वस्तु होने से बहिस्थादान के अन्तर्गत थी । इतिहासके आलोक में पाश्र्वनाथ तीर्थंकर पार्श्वनाथ ऐतिहासिक व्यक्ति थे, यह अनेक प्रमाणोंसे सिद्ध हो चुका है। जैन साहित्य ही नहीं, बौद्ध साहित्य भी तीर्थंकर पार्श्वनाथकी ऐतिहासिकताको स्वीकार करता है । डाशून्य जेकोबीने बौद्ध साहित्यके उल्लेखोंके आधारपर निर्ग्रन्थसम्प्रदायका अस्तित्व प्रमाणित करते हुए लिखा है- "यदि जैन और बौद्ध सम्प्रदाय एकसे ही प्राचीन होते, जैसाकि बुद्ध और महावीरकी समकालीनता तथा इन दोनोंको इन दोनों सम्प्रदायोंका संस्थापक माननेसे अनुमान किया जाता है, तो हमें आशा करनी चाहिये कि दोनोंने ही अपनेअपने साहित्यमें अपने प्रतिद्वन्द्वका अवश्यही निर्देश किया होता, किन्तु बात ऐसी नहीं है। बौद्धोंने तो अपने साहित्य में, यहाँ तक कि त्रिपिटकोंमें भी निर्ग्रन्थों का बहुतायतसे उल्लेख किया है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि बौद्ध निर्ग्रन्थ-सम्प्रदायको एक प्रमुख सम्प्रदाय मानते थे। किन्तु निर्ग्रन्थोंकी धारणा इसके विपरीत थी और वे अपने प्रतिद्वन्द्वोकी उपेक्षा तक करते थे । इससे हम इस निर्णयपर पहुँचते हैं कि बुद्ध के समय निग्रन्थ सम्प्रदाय कोई नवीन स्थापित सम्प्रदाय नहीं था। यही मत पिटकोंका भी जान पड़ता है। " डाशून्य श्रीहीरालालजी जैनने लिखा है- "बौद्ध ग्रन्थ 'अंगुत्तरनिकाय', 'चत्तुक्कनिपात' और उसकी 'अट्ठकथा' में उल्लेख है कि गौतम बुद्धका एक. Indian antiquary, volume नौth, Page एक सौ साठ. तीर्थंकर महावीर और उनकी देशना : उन्नीस
|
रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को अकेले हिंदी वर्जन ने 37. 50 करोड़ की कमाई की हैं। 'ब्रह्मास्त्र' ने हिंदी में दो दिन में करीब 69. 50 करोड़ की कमाई कर ली है। अब यह फिल्म दक्षिण के राज्यों में भी अपना दबदबा बना रही है। इस फिल्म के लिए साउथ के दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी है। Sacnilk Entertainment ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए दक्षिणी राज्यों की कमाई के आंकड़े जारी किए हैं। कर्नाटक राज्य में 3. 2 करोड़, आंध्र प्रदेश तेलंगाना राज्य में 5. 5 करोड़ और तमिलनाडु राज्य में 1 करोड़। केरल राज्य में 90 करोड़ 0. 60 करोड़ की कमाई हुई है।
कहा जा रहा है कि यह फिल्म अगले 3 दिनों में 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लेगी। अगले सोमवार तक ये संख्या और बढ़ सकती है। ऋतिक रोशन और सैफ अली खान की 'विक्रम वेधा' 30 सितंबर को रिलीज होने के साथ, 'ब्रह्मास्त्र' के पास रिकॉर्ड तोड़ने के लिए काफी समय है। यह भी कहा जा रहा है कि कमाई के इस आंकड़े पर असर पड़ सकता है क्योंकि सोशल मीडिया पर फिर से बहिष्कार का चलन जोर पकड़ रहा है। 'ब्रह्मास्त्र' इस साल की सबसे बड़ी रिलीज मानी जा रही है। फिल्म में आलिया भट्ट और रणबीर कपूर के अलावा अमिताभ बच्चन, मौनी रॉय और नागार्जुन भी अहम भूमिकाओं में है।
|
रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को अकेले हिंदी वर्जन ने सैंतीस. पचास करोड़ की कमाई की हैं। 'ब्रह्मास्त्र' ने हिंदी में दो दिन में करीब उनहत्तर. पचास करोड़ की कमाई कर ली है। अब यह फिल्म दक्षिण के राज्यों में भी अपना दबदबा बना रही है। इस फिल्म के लिए साउथ के दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी है। Sacnilk Entertainment ने अपने ट्विटर अकाउंट के जरिए दक्षिणी राज्यों की कमाई के आंकड़े जारी किए हैं। कर्नाटक राज्य में तीन. दो करोड़, आंध्र प्रदेश तेलंगाना राज्य में पाँच. पाँच करोड़ और तमिलनाडु राज्य में एक करोड़। केरल राज्य में नब्बे करोड़ शून्य. साठ करोड़ की कमाई हुई है। कहा जा रहा है कि यह फिल्म अगले तीन दिनों में एक सौ करोड़ का आंकड़ा पार कर लेगी। अगले सोमवार तक ये संख्या और बढ़ सकती है। ऋतिक रोशन और सैफ अली खान की 'विक्रम वेधा' तीस सितंबर को रिलीज होने के साथ, 'ब्रह्मास्त्र' के पास रिकॉर्ड तोड़ने के लिए काफी समय है। यह भी कहा जा रहा है कि कमाई के इस आंकड़े पर असर पड़ सकता है क्योंकि सोशल मीडिया पर फिर से बहिष्कार का चलन जोर पकड़ रहा है। 'ब्रह्मास्त्र' इस साल की सबसे बड़ी रिलीज मानी जा रही है। फिल्म में आलिया भट्ट और रणबीर कपूर के अलावा अमिताभ बच्चन, मौनी रॉय और नागार्जुन भी अहम भूमिकाओं में है।
|
Gorakhpur News: लोग भी घरों से बाहर निकलकर खरीद्दारी कर रहे हैं। वहीं मार्केट में घूमने पर पता चला कि इस बार चाइना की राखियां नहीं बल्कि यहीं की राखियों की धूम है।
Gorakhpur News: प्रदेश में कोरोना कहर कम होने से त्यौहारों की रौनक वापस आ गयी है। बाजार राखियों और मिठाइयों से पटे नजर आ रहे हैं। इस बार लोग भी घरों से बाहर निकलकर खरीद्दारी कर रहे हैं। वहीं मार्केट में घूमने पर पता चला कि इस बार चाइना की राखियां नहीं बल्कि यहीं की राखियों की धूम है।
बता दें कि कोरोना संक्रमण के खतरों के बीच चीन में बनीं राखियां बाजार से गायब हो गई हैं। चीन से राखियों का आयात कम हुआ तो स्थानीय हुनरमंदों को रोजगार मिल गया है। कई स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़कर महिलाएं राखियां बना रही हैं। वहीं पिछले साल की तुलना में राखी की बंपर बिक्री ने दुकानदारों की झोली भर दी है। वहीं सराफा कारोबारियों की भी चांदी है। इस बार सोने-चांदी की राखियों की बंपर बिक्री हो रही है।
कोरोना संक्रमण का प्रभाव कम होने से त्यौहारों की रौनक लौटती दिख रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस साल पांडेयहाता की थोक मंडी में राखियां गायब हैं। पिछले साल जहां बमुश्किल 50 लाख की राखियां बिकीं थीं, इस बार 3 करोड़ से अधिक राखियां बिकी हैं। कोलकाता की थोक मंडी से भी राखियां गायब हो गई हैं। वहीं गोरखपुर में राखी की फैक्ट्री संचालित करने वाले नीलांक्षी कहती हैं कि 'चीन से राखियों की आवक खत्म होने से स्थानीय कारीगरों की मांग बढ़ गई है। इस साल डिमांड पूरा करना मुश्किल हो गया है। पिछले साल की तुलना में इस बार राखियों की कीमतों में भी इजाफा हो गया है। राखी की न्यूनतम कीमत 20 रुपये पहुंच गई है। ब्रांडेड राखियों की कीमत 200 से 300 रुपये तक है।
स्वयंसेवी संस्था के जरिये लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में जुटी मधु राठौड़ का कहना है कि इस बार बाजार से चीन की राखियां गायब हैं। ऐसे में स्थानीय महिलाओं और करीगरों को काम मिल गया है। कोरोना काल में 100 से अधिक महिलाओं को रोजगार मिल गया है। वह रोज 300 से 400 रुपये की कमाई कर रही हैं। रक्षा बंधन का पर्व गुजरते ही महिलाएं दीवाली के लिए दीये बनाने में जुट जाएंगी।
आभूषणों के बाजार में सोने व चांदियों की राखियों की भरमार है। सोने की राखियां 4000 से लेकर 10000 हजार तक में उपलब्ध है। बहनों में चांदी के ब्रेसलेट की सर्वाधिक डिमांड है। आकर्षक ब्रेसलेट 5000 से 8000 रुपये में उपलब्ध है। सोने की राखियां जहां एक से तीन ग्राम में उपलब्ध है, वहीं चांदी की राखी भी 5 ग्राम से लेकर 20 ग्राम तक में मिल रही हैं। बड़ी से लेकर लोकल कंपनियां मेकिंग चार्ज में छूट से लेकर अन्य ऑफरों से लोगों को लुभा रही हैं।
सराफा कारोबारी संजय अग्रवाल का कहना है कि 'राखियां कम कीमतों में मिल जा रही हैं। भाई भी बहनों के लिए गिफ्ट खरीदते हैं। इस समय लॉकेट और कान के ईयरिंग की अधिक डिमांड होती है। बहनों के नाम के पहले अक्षर का लॉकेट भाई अधिक पसंद कर रहे हैं।
गोरखपुर में मिठाई के प्रमुख कारोबारी विजय कसेरा का कहना है कि पिछली बार की तुलना में अच्छी डिमांड की उम्मीद है। बिक्री ठीक होने की उम्मीद में मिठाईयां तैयार कराई गई हैं। वहीं जेपी मौर्या का कहना है कि मिठाई की अच्छी मांग है।
|
Gorakhpur News: लोग भी घरों से बाहर निकलकर खरीद्दारी कर रहे हैं। वहीं मार्केट में घूमने पर पता चला कि इस बार चाइना की राखियां नहीं बल्कि यहीं की राखियों की धूम है। Gorakhpur News: प्रदेश में कोरोना कहर कम होने से त्यौहारों की रौनक वापस आ गयी है। बाजार राखियों और मिठाइयों से पटे नजर आ रहे हैं। इस बार लोग भी घरों से बाहर निकलकर खरीद्दारी कर रहे हैं। वहीं मार्केट में घूमने पर पता चला कि इस बार चाइना की राखियां नहीं बल्कि यहीं की राखियों की धूम है। बता दें कि कोरोना संक्रमण के खतरों के बीच चीन में बनीं राखियां बाजार से गायब हो गई हैं। चीन से राखियों का आयात कम हुआ तो स्थानीय हुनरमंदों को रोजगार मिल गया है। कई स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़कर महिलाएं राखियां बना रही हैं। वहीं पिछले साल की तुलना में राखी की बंपर बिक्री ने दुकानदारों की झोली भर दी है। वहीं सराफा कारोबारियों की भी चांदी है। इस बार सोने-चांदी की राखियों की बंपर बिक्री हो रही है। कोरोना संक्रमण का प्रभाव कम होने से त्यौहारों की रौनक लौटती दिख रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस साल पांडेयहाता की थोक मंडी में राखियां गायब हैं। पिछले साल जहां बमुश्किल पचास लाख की राखियां बिकीं थीं, इस बार तीन करोड़ से अधिक राखियां बिकी हैं। कोलकाता की थोक मंडी से भी राखियां गायब हो गई हैं। वहीं गोरखपुर में राखी की फैक्ट्री संचालित करने वाले नीलांक्षी कहती हैं कि 'चीन से राखियों की आवक खत्म होने से स्थानीय कारीगरों की मांग बढ़ गई है। इस साल डिमांड पूरा करना मुश्किल हो गया है। पिछले साल की तुलना में इस बार राखियों की कीमतों में भी इजाफा हो गया है। राखी की न्यूनतम कीमत बीस रुपयापये पहुंच गई है। ब्रांडेड राखियों की कीमत दो सौ से तीन सौ रुपयापये तक है। स्वयंसेवी संस्था के जरिये लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में जुटी मधु राठौड़ का कहना है कि इस बार बाजार से चीन की राखियां गायब हैं। ऐसे में स्थानीय महिलाओं और करीगरों को काम मिल गया है। कोरोना काल में एक सौ से अधिक महिलाओं को रोजगार मिल गया है। वह रोज तीन सौ से चार सौ रुपयापये की कमाई कर रही हैं। रक्षा बंधन का पर्व गुजरते ही महिलाएं दीवाली के लिए दीये बनाने में जुट जाएंगी। आभूषणों के बाजार में सोने व चांदियों की राखियों की भरमार है। सोने की राखियां चार हज़ार से लेकर दस हज़ार हजार तक में उपलब्ध है। बहनों में चांदी के ब्रेसलेट की सर्वाधिक डिमांड है। आकर्षक ब्रेसलेट पाँच हज़ार से आठ हज़ार रुपयापये में उपलब्ध है। सोने की राखियां जहां एक से तीन ग्राम में उपलब्ध है, वहीं चांदी की राखी भी पाँच ग्राम से लेकर बीस ग्राम तक में मिल रही हैं। बड़ी से लेकर लोकल कंपनियां मेकिंग चार्ज में छूट से लेकर अन्य ऑफरों से लोगों को लुभा रही हैं। सराफा कारोबारी संजय अग्रवाल का कहना है कि 'राखियां कम कीमतों में मिल जा रही हैं। भाई भी बहनों के लिए गिफ्ट खरीदते हैं। इस समय लॉकेट और कान के ईयरिंग की अधिक डिमांड होती है। बहनों के नाम के पहले अक्षर का लॉकेट भाई अधिक पसंद कर रहे हैं। गोरखपुर में मिठाई के प्रमुख कारोबारी विजय कसेरा का कहना है कि पिछली बार की तुलना में अच्छी डिमांड की उम्मीद है। बिक्री ठीक होने की उम्मीद में मिठाईयां तैयार कराई गई हैं। वहीं जेपी मौर्या का कहना है कि मिठाई की अच्छी मांग है।
|
एच1एन1 मामलों के संदर्भ में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और इस पर निगरानी बरती जा रही है। जैसा कि कुछ समाचार माध्यमों ने इस वायरस के अधिक घातक होने या इसके स्वरूप बदलने की ख़बरें प्रकाशित या प्रसारित की ऐसा कुछ नहीं है। राष्ट्रीय विषाणु (वायरोलॉजी) संस्थान, पुणे के निदेशक ने यह स्पष्ट किया है कि वर्तमान में फैल रहा महामारी बुखार एच1एन1 क्लेड 6 और 7 से संबंधित है। (क्लेड एक चिकित्सकीय टर्मिनोलॉजी है, जिसे किसी जीवधारी में समान पूर्वजों से बदलाव की व्याख्या के लिए उपयोग किया जाता है।) क्लेडों का विस्तार अनेक देशों में किया जा रहा है। ये सभी उपचार योग्य हैं, इसे रोकने के लिए ऑसेल्टामिविर (Oseltamivir) (ये एक एन्टीवायरल दवा है, जो फैल चुके बुखार के वायरस को कम करने के लिए उपयोग में लायी जाती है।) वर्तमान में उपलब्ध टीके को प्रतिजनिक (एंटीजेनिक) (प्रतिजनिक एक ऐसा तत्व है जो शरीर में प्रवेश करने पर प्रतिरक्षी के उत्पादन को बढ़ावा देता है। प्रतिजनों में टॉक्सिन्स, बैक्टीरिया, बाहरी रक्त कोशिकाएं और ट्रांस्प्लांट किए गए अंगों की कोशिकाएं शामिल हैं) तंत्र के रूप में उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वायरस के खतरनाक रूप लेने के कोई संकेत नहीं हैं।
अगस्त 2010 में जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एच1एन1 बुखार को महामारी घोषित किया था, तब साथ-साथ ये भी कहा था कि आने वाले कुछ वर्षों तक इसका फैलाव जारी रहेगा और एक समय बाद यह मौसमी बुखार का रुप ले लेगा । अतः महामारी घोषित किये जाने के बाद अलग-अलग जगहों पर एच1एन1 के प्रकोप के स्तर में विविधता हो सकती है। इसी घोषणा के परिप्रेक्ष्य में अगर हम देखें तो हमारे देश ने अगस्त से अक्टूबर, 2010 और मई 2011 से जुलाई 2011 के बीच एच1एन1 बुखार का काफी प्रकोप झेला। इस समय मार्च-अप्रैल 2012 में फिर से महामारी बुखार एच1एन1 के मामले कुछ राज्यों - राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में बढ़े हैं। जनसंख्या का वह भाग जो पूर्व में इस महामारी से बचा रहा है और संवेदनशील है, प्रभावित हो सकता है। मार्च के पहले सप्ताह में पुणे भेजे गए नमूनों में से तीस प्रतिशत एच1एन1 पॉजिटिव पाये गए थे, जो अब घटकर लगभग 10 प्रतिशत पर आ गए हैं।
इन मामलों में ज्यादातर सामान्य बुखार जैसी बीमारी से प्रभावित हो सकते हैं और इसके लिए किसी प्रकार के परीक्षण अथवा एन्टीवायरल उपचार की आवश्यकता नहीं है। फिर भी शुरूआत में यदि कोई बीमार हो तो उसे नजदीक के अस्पताल में परीक्षण जरूर करवाना चाहिए, ताकि अगर कोई चिंताजनक बीमारी का पता चले और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत हो तो उचित कदम उठाया जा सके।
एन्टीवायरल दवा ऑसेल्टामिविर (Oseltamivir) राज्य जन स्वास्थ्य प्रणाली के द्वारा मुफ्त में उपलब्ध है। एक्स ड्रग्स अनुसूची में सूचीबद्ध दवा केन्द्रों पर भी ये दवा उपलब्ध है। ऑसेल्टामिविर (Oseltamivir) की 80 लाख खुराकों के केन्द्रीय स्टॉक को तैयार रखा जा रहा है। चूंकि ये वायरस देश के अलग-अलग भागों में फैल रहा है इसलिए अंतर्राज्यीय सीमाओं और रेलवे स्टेशनों आदि पर आने -जाने को प्रतिबंधित किये जाने की कोई जरूरत नहीं है।
|
एचएकएनएक मामलों के संदर्भ में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और इस पर निगरानी बरती जा रही है। जैसा कि कुछ समाचार माध्यमों ने इस वायरस के अधिक घातक होने या इसके स्वरूप बदलने की ख़बरें प्रकाशित या प्रसारित की ऐसा कुछ नहीं है। राष्ट्रीय विषाणु संस्थान, पुणे के निदेशक ने यह स्पष्ट किया है कि वर्तमान में फैल रहा महामारी बुखार एचएकएनएक क्लेड छः और सात से संबंधित है। क्लेडों का विस्तार अनेक देशों में किया जा रहा है। ये सभी उपचार योग्य हैं, इसे रोकने के लिए ऑसेल्टामिविर वर्तमान में उपलब्ध टीके को प्रतिजनिक तंत्र के रूप में उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि वायरस के खतरनाक रूप लेने के कोई संकेत नहीं हैं। अगस्त दो हज़ार दस में जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एचएकएनएक बुखार को महामारी घोषित किया था, तब साथ-साथ ये भी कहा था कि आने वाले कुछ वर्षों तक इसका फैलाव जारी रहेगा और एक समय बाद यह मौसमी बुखार का रुप ले लेगा । अतः महामारी घोषित किये जाने के बाद अलग-अलग जगहों पर एचएकएनएक के प्रकोप के स्तर में विविधता हो सकती है। इसी घोषणा के परिप्रेक्ष्य में अगर हम देखें तो हमारे देश ने अगस्त से अक्टूबर, दो हज़ार दस और मई दो हज़ार ग्यारह से जुलाई दो हज़ार ग्यारह के बीच एचएकएनएक बुखार का काफी प्रकोप झेला। इस समय मार्च-अप्रैल दो हज़ार बारह में फिर से महामारी बुखार एचएकएनएक के मामले कुछ राज्यों - राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में बढ़े हैं। जनसंख्या का वह भाग जो पूर्व में इस महामारी से बचा रहा है और संवेदनशील है, प्रभावित हो सकता है। मार्च के पहले सप्ताह में पुणे भेजे गए नमूनों में से तीस प्रतिशत एचएकएनएक पॉजिटिव पाये गए थे, जो अब घटकर लगभग दस प्रतिशत पर आ गए हैं। इन मामलों में ज्यादातर सामान्य बुखार जैसी बीमारी से प्रभावित हो सकते हैं और इसके लिए किसी प्रकार के परीक्षण अथवा एन्टीवायरल उपचार की आवश्यकता नहीं है। फिर भी शुरूआत में यदि कोई बीमार हो तो उसे नजदीक के अस्पताल में परीक्षण जरूर करवाना चाहिए, ताकि अगर कोई चिंताजनक बीमारी का पता चले और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत हो तो उचित कदम उठाया जा सके। एन्टीवायरल दवा ऑसेल्टामिविर राज्य जन स्वास्थ्य प्रणाली के द्वारा मुफ्त में उपलब्ध है। एक्स ड्रग्स अनुसूची में सूचीबद्ध दवा केन्द्रों पर भी ये दवा उपलब्ध है। ऑसेल्टामिविर की अस्सी लाख खुराकों के केन्द्रीय स्टॉक को तैयार रखा जा रहा है। चूंकि ये वायरस देश के अलग-अलग भागों में फैल रहा है इसलिए अंतर्राज्यीय सीमाओं और रेलवे स्टेशनों आदि पर आने -जाने को प्रतिबंधित किये जाने की कोई जरूरत नहीं है।
|
Agra. आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सेवादल को एक बार फिर अग्रणी भूमिका में रखते हुए उसे मजबूत बनाया जा रहा है, साथ ही कांग्रेस सेवादल के कार्यकर्ताओं को चुनाव से संबंधित जिम्मेदारियां भी सौंपी जा रही हैं। मंगलवार को लखनऊ में कांग्रेस सेवा दल की प्रदेश स्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक के दौरान आगामी विधानसभा चुनाव को मजबूती से लड़ने, सेवादल को मजबूत व सशक्त बनाने पर जोर दिया गया। लखनऊ में हुई इस बैठक में आगरा से कांग्रेस सेवा दल के महानगर अध्यक्ष संजय शर्मा भी अपनी टीम के साथ शामिल हुए। उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान मुख्य रूप से तीन बातों पर मंथन किया गया है जिन्हें जल्द ही अमलीजामा पहनाया जाएगा।
उत्तर प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनाव हर पार्टी के लिए अहम बनाए हुए है। इसीलिए कांग्रेस पार्टी भी इस चुनाव को जीतने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती। कांग्रेस की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले सेवा दल की इस चुनाव में भूमिका रहेगी। कांग्रेस सेवा दल की ओर से यूपी की हर विधानसभा पर एक प्रेरक नियुक्त किया जाएगा। कांग्रेस सेवा दल के महानगर अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि यह प्रेरक उस विधानसभा के कांग्रेस कार्यकर्ताओं को मजबूती के साथ पार्टी के लिए काम करने और आम जनमानस को पार्टी से जोड़ने का काम करेंगे। यूपी विधानसभा चुनाव में यूपी की ही नहीं बल्कि आसपास के राज्यों के भी कांग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ताओं को प्रेरक के रूप में लगाया जाएगा।
संजय शर्मा ने बताया कि आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस सेवा दल की ओर से प्रत्येक विधानसभा में बूथ नायकों की नियुक्ति की जाएगी। 10 बूथों पर एक बूथ नायक नियुक्त होगा। जिसकी जिम्मेदारी बूथ को मजबूत बनाने बूथ की कार्यकारिणी का गठन और उससे पार्टी हित में काम लेने की होगी। जिससे बूथ कमेटी जमीनी स्तर पर काम करते हुए पार्टी को मजबूत बनाएं और इस चुनाव में पार्टी की जीत सुनिश्चित कराएं।
कांग्रेस सेवा दल के महानगर अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि 2 जनवरी से अमेठी में तीन दिवसीय कांग्रेस सेवा दल का प्रशिक्षण शिविर लगने जा रहा है। 3 दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण शिविर में कांग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ता व पदाधिकारी को चुनाव में किस तरह से काम करना है, इसके लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। जिससे कांग्रेस सेवा दल का अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा पार्टी को मजबूत करें।
|
Agra. आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सेवादल को एक बार फिर अग्रणी भूमिका में रखते हुए उसे मजबूत बनाया जा रहा है, साथ ही कांग्रेस सेवादल के कार्यकर्ताओं को चुनाव से संबंधित जिम्मेदारियां भी सौंपी जा रही हैं। मंगलवार को लखनऊ में कांग्रेस सेवा दल की प्रदेश स्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक के दौरान आगामी विधानसभा चुनाव को मजबूती से लड़ने, सेवादल को मजबूत व सशक्त बनाने पर जोर दिया गया। लखनऊ में हुई इस बैठक में आगरा से कांग्रेस सेवा दल के महानगर अध्यक्ष संजय शर्मा भी अपनी टीम के साथ शामिल हुए। उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान मुख्य रूप से तीन बातों पर मंथन किया गया है जिन्हें जल्द ही अमलीजामा पहनाया जाएगा। उत्तर प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनाव हर पार्टी के लिए अहम बनाए हुए है। इसीलिए कांग्रेस पार्टी भी इस चुनाव को जीतने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती। कांग्रेस की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले सेवा दल की इस चुनाव में भूमिका रहेगी। कांग्रेस सेवा दल की ओर से यूपी की हर विधानसभा पर एक प्रेरक नियुक्त किया जाएगा। कांग्रेस सेवा दल के महानगर अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि यह प्रेरक उस विधानसभा के कांग्रेस कार्यकर्ताओं को मजबूती के साथ पार्टी के लिए काम करने और आम जनमानस को पार्टी से जोड़ने का काम करेंगे। यूपी विधानसभा चुनाव में यूपी की ही नहीं बल्कि आसपास के राज्यों के भी कांग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ताओं को प्रेरक के रूप में लगाया जाएगा। संजय शर्मा ने बताया कि आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस सेवा दल की ओर से प्रत्येक विधानसभा में बूथ नायकों की नियुक्ति की जाएगी। दस बूथों पर एक बूथ नायक नियुक्त होगा। जिसकी जिम्मेदारी बूथ को मजबूत बनाने बूथ की कार्यकारिणी का गठन और उससे पार्टी हित में काम लेने की होगी। जिससे बूथ कमेटी जमीनी स्तर पर काम करते हुए पार्टी को मजबूत बनाएं और इस चुनाव में पार्टी की जीत सुनिश्चित कराएं। कांग्रेस सेवा दल के महानगर अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि दो जनवरी से अमेठी में तीन दिवसीय कांग्रेस सेवा दल का प्रशिक्षण शिविर लगने जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण शिविर में कांग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ता व पदाधिकारी को चुनाव में किस तरह से काम करना है, इसके लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। जिससे कांग्रेस सेवा दल का अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा पार्टी को मजबूत करें।
|
पूर्वी चीन में एक अनोखी चोरी का मामला सामने आया है। जिंआग्सू प्रांत में एक चोर ने कंकरीट से बनी सड़क के 800 मीटर हिस्से को रातभर के अंदर चुराकर उसे बेच दिया। चीनी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक 24 जनवरी को सुबह जब सानकेशू गांव के निवासियों ने सड़क के एक हिस्से को गायब पाया तो वे परेशान हो गए। उन्होंने पुलिस को सूचना दी और बताया कि सड़क का एक हिस्सा आश्चर्यजनक रूप गायब है। कुछ ग्रामीणों ने समझा कि संभवतः बिना घोषणा के ही सड़क मरम्मत का कार्य चल रहा है, लेकिन जब पुलिस ने जांच की तो मामला कुछ और निकला। पुलिस ने पाया कि झू नाम के व्यक्ति ने खुदाई करने वाले यंत्र की सहायता से करीब 800 मीटर सड़क को खोद डाला और उसके कंकरीट के मलबे को एक फैक्टरी को बेच दिया। पुलिस ने बताया कि झू इसके जरिए पैसे बनाना चाहता था और उसे लगता था कि कंकरीट की सड़क को खोदकर उसे बेचना, बिजनेस का एक अच्छा मौका है। झू ने कहा कि कोई भी उस सड़क से नहीं जा रहा था। मैं उसे क्यों न खोद डालूं। मैं सीमेंट के टुकड़े को बेचकर कुछ पैसे बना सकता हूं। झू ने करीब 500 टन कंकरीट को चुराया और उसे 51 हजार रुपए में बेच दिया। सड़क चोरी का पूरा मामला मीडिया में आने के बाद चीनी सोशल मीडिया में कॉमेंट की बाढ़ आ गई। इसमें कई ऐसे लोग थे जिन्होंने झू का समर्थन भी किया। एक यूजर ने लिखा कि गरीबी ने उसे रचनात्मक बना दिया। एक यूजर ने लिखा कि इस चोरी की सबसे अच्छी सजा यह होगी कि उसे सड़क बनाने के लिए कहा जाए।
|
पूर्वी चीन में एक अनोखी चोरी का मामला सामने आया है। जिंआग्सू प्रांत में एक चोर ने कंकरीट से बनी सड़क के आठ सौ मीटर हिस्से को रातभर के अंदर चुराकर उसे बेच दिया। चीनी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक चौबीस जनवरी को सुबह जब सानकेशू गांव के निवासियों ने सड़क के एक हिस्से को गायब पाया तो वे परेशान हो गए। उन्होंने पुलिस को सूचना दी और बताया कि सड़क का एक हिस्सा आश्चर्यजनक रूप गायब है। कुछ ग्रामीणों ने समझा कि संभवतः बिना घोषणा के ही सड़क मरम्मत का कार्य चल रहा है, लेकिन जब पुलिस ने जांच की तो मामला कुछ और निकला। पुलिस ने पाया कि झू नाम के व्यक्ति ने खुदाई करने वाले यंत्र की सहायता से करीब आठ सौ मीटर सड़क को खोद डाला और उसके कंकरीट के मलबे को एक फैक्टरी को बेच दिया। पुलिस ने बताया कि झू इसके जरिए पैसे बनाना चाहता था और उसे लगता था कि कंकरीट की सड़क को खोदकर उसे बेचना, बिजनेस का एक अच्छा मौका है। झू ने कहा कि कोई भी उस सड़क से नहीं जा रहा था। मैं उसे क्यों न खोद डालूं। मैं सीमेंट के टुकड़े को बेचकर कुछ पैसे बना सकता हूं। झू ने करीब पाँच सौ टन कंकरीट को चुराया और उसे इक्यावन हजार रुपए में बेच दिया। सड़क चोरी का पूरा मामला मीडिया में आने के बाद चीनी सोशल मीडिया में कॉमेंट की बाढ़ आ गई। इसमें कई ऐसे लोग थे जिन्होंने झू का समर्थन भी किया। एक यूजर ने लिखा कि गरीबी ने उसे रचनात्मक बना दिया। एक यूजर ने लिखा कि इस चोरी की सबसे अच्छी सजा यह होगी कि उसे सड़क बनाने के लिए कहा जाए।
|
विगलितदर्शनमोहैः समज्जसज्ञान षिदिततत्त्वार्थः । नित्यमपि निष्प्रकम्पैः सम्यफूचारित्रमालम्व्यम् ॥३७॥ सम्यम्वृष्टि तत्वज्ञानी सतको सम्यकुचारित्रके आलम्बनका उपदेश - जिन पुरुषांने दर्शन मोहको नष्ट कर दिया है और सम्यग्ज्ञानके द्वारा तत्त्वार्थ का अवरोध कर लिया है उन्हें बड़े निष्प्रम्प होकर धरणा सहित सभ्यक्चारित्रका आलम्बन फरना चाहिए। इसमें सर्वप्रथम यह बताया है कि जिसने दर्शन मोहको गला बाला उनको, जब तक पदार्थकी स्वतन्त्रताका भान न हो, समस्त पदार्थों से निराले निज अतरव का जब तक परिचय न हो तब तक वास्तव में सम्यक् चारित्र नहीं बनता, क्योंकि चारित्र नाम है अपने स्वभावका । अपने स्वभावका पता न हो तो रमे कहाँ ? जो बाह्य में सम्यक्चारित्र कहे जाते हैं वे साधक हैं, ५ समिति ३ गुप्ति, ५ महामन श्रावकों के लिए अरसुव्रत आदि ये सभ्यकचारित्र नाम इस लिए पाते हैं कि निश्चय चारित्र में साधक है, अन्यथा शुद्ध खानपान, देखभाल कर चलना, जीवदया पालना किस की चोज न उठाना ये तो बातें होती है। अन्तरङ्ग सम्यक चारित्र तो निज स्वभावको जानकर उसमें रमण करना है, ये सब साधक किसलिए होते हैं इसे समझना है तो इससे उल्टी घास सोचें बोई मनुष्य दया नहीं पालता, दूसरे जीषोंको सताता तो ऐसे चित्त में स्वभावधारणा नहीं बन सकती है, जो शल्यरहित हो, सत्यव्यवहार करता हो, न्याययुक्त जीवन हो ऐसे आवरण बालों में उस स्वभावकै धारण करने की योग्यता रहती है, अतएव ये सब आचरण साधक हैं। बास्तव में सम्यकचारित्र तो आत्मस्वभावमें रमण करनेका नाम है। यह बात तब बन सकती है जब दर्शन मोइ गल गया हो। जिसका मिथ्यात्व नष्ट हो गया और जिसने ७ तत्वका श्रद्धान् यथार्थ अवधारण किया वह पुरुष सम्यकचारिश्रको ग्रहण करता है, ये ३ शब्द ऐसे हैं देखना, जानना और प्रयोग करना । लौकिक कामों में भी ये श्यातें आती हैं, कोई भी काम करने जावें । यह मोक्षमार्गका प्रकरण है, इस कारण यहाँ देखनेका नाम श्रद्धान है। विश्वास होना और स्पष्ट बोध होना और उस अंतस्तत्व मे उपयोग जमाना, यही है रत्नत्रय और मोक्षका मार्ग । अब वह अतस्तत्त्व इस ज्ञानी के उपयोग मे यो बसता है कि यह ध्रुव है बिना है, किसी चीज से उत्पन्न नहीं होता और न यह किसी वस्तुको उत्पन्न करता है। जिसके मंचरण में परिणमन नाना होते हैं फिर भी किसी परिणमनरूप नहीं बनता, ऐसा जो एक चैतन्यस्वभाष वह अस्तव, चैतन्यमात्र मैं हूं, इस प्रकार की वह प्रनीति करता है और ऐसी दृष्टि जमाने की ही यत्न रखता है, अव ऐसा उपयोग बन जाय किसीका या जितने क्षण बने, स्वय बुछ थोड़ा बहुत यत्न करके अनुभव बना करे तो इस अनुभूतिके प्रसार से क्लेश दूर होते हैं और चात्मीय आनन्द प्रकट होता है । क्योंकि क्लेश तव होते हैं जब परपदार्थों में उपयोग हो । जव परपदार्थों में इष्ट अनिष्ट की बुद्धि होती है तब क्षोभ उत्पन्न होता है, इसलिए परके आत्माको कष्ट है और जब स्वयका स्वय में सत्य सहजता परिचय हो, उपयोग हो तो इसमें कोई विगाड़ नहीं रहता। ऐसी निर्विकल्परूप, अनुभूतिरूप आत्मस्वभावका उपयोग करना, यही है निश्चयदृष्टि से पारित्र ।
सवृत्ति और स्वानुभूतिका परस्पर सहयोग -8 व देख लीजिए कि फैसा परस्पर सयोग है कि अपने को शान्तवृत्तिमें रखे तो अनुभव जगे और अनुभव जगे तो शान्तवृत्ति बढे । इसमें एकान्त से हम दिसे कारण बतायें ? अन्तिसे अनुभूति होती है या अनुभूति से शान्ति होती है - इन दोनोमे एकान्ततः हम किसे पहिले रखें ? कुछ मद कपाय होकर जो शान्ति मिलती है यह तो बहुत चाहे तब अनुभूति जगे । 'और अनुभूति जगने से फिर उस शान्ति से वृद्धि घनती है और शान्ति ही एक चारित्रका रूप है । तो
पुरुषार्थ सिद्ध्युपाय प्रवचन द्वितीय भाग
अनुभव करनेके लिए सदाचरण होना बहुत आवश्यक है। जो पुरुष किसी प्रकार अच्छे ढगसे व्रत और नियमसे रहते हैं उनकी यह वृत्ति स्वानुभूतिका साधक है, वेवल एक ज्ञान कर लेने मात्र से, तत्त्वकी चर्चा कर लेने मात्र से अनुभूति नहीं जगती, क्योंकि उसमें हमारा चित्त रमे, उपयोग ग्रहण करे, चित्त शान्त हो तो आत्माकी अनुभूति जगती है। चित्तमें शान्ति तव हो सकती जब हमारी अनाचाररूपवृत्ति न हो, अभक्ष्य भक्षण को प्रवृत्ति न हो। ज्ञान तो हो गया कि मद्य मासमें जीवकी हिंसा है ऐसा ज्ञान होकर जो पुरुष उसकी प्रवृत्ति करता है तो उसके चित्त में क्रूरता है और क्रूर चित्त आत्मानुभव कर नहीं सकता और जिसके ज्ञान ही नहीं कि मांस भक्षण में दोष है, इसमें जीव दिसा है, उसके तो जीवकी पहिचान हो नहीं है, आत्मानुभव तो उसके जगेगा ही क्या ? जब मिथ्यात्व अन्याय अमक्ष्यका त्याग नहीं होता उसके सम्यक्त्व नहीं होता। जब तक बाह्य आचरण ठीक न हो तब तक आत्मानुभूतिकी पात्रता ही नहीं है, इस कारण ऐसा ही ख्याल करना चाहिए कि हमें केवल सम्यक्त्व पैदा करना है, आचरण पीछे सुधारेगे । अरे विशिष्ट आचरण तो वाद सुधरेगा पर साधारण आचरण तो पहिले चाहिए। क्योंकि सम्यक्त्व घात्मानुभूतिके साथ उत्पन्न होता है। बादमें सम्यक्त्व बना रहे और आत्मानुभूति न बने यह तो सम्भव है क्योंकि आत्मानुभषका नाम है- छात्मोका उपयोग रखना । सम्यग्दृष्टि निरन्तर आत्माका उपयोग रखता हो ऐसी बात नहीं है। गृहस्थजन दूकान पर जाते, आजीविकाका साधन बनाते, परिवार का पालन पोपण करते, अनेक घटनाओं में सुधार विगाड़का यत्न रखते, परपदार्थोंका उपयोग चलता रहता है पर सम्यक्त्व बना रहता है। सम्यक्त्व की उत्पत्ति स्वके उपयोग विना नहीं हो सकती, स्वानुभूति पूर्वक ही सम्यक्त्व उत्पन्न होता है। अपनी उस अनुभूतिको जगाने के लिए हमारा पहिले से आचरण विशुद्ध हो तो कार्य बनता है। आचरण गदा है तो हममें यह योग्यता नहीं है कि सम्यग्दर्शन उत्पन्न है कर सकें । जिसे सम्यग्दर्शन होता है और भले प्रकार तत्त्वार्थका परिज्ञान है उस पुरुषको सदाकाल दृढ चिच पूर्वक विशिष्ट उत्साह सहित सम्यक चारित्रका आलम्बन लेना चाहिए । जैसे कोई पुरुष मार्ग चलता है तो रास्ता जैसे-जैसे व्यतीत होता है वैसे ही वैसे उसका उत्साह बढता जाता है ऐसे ही सभ्यक् चारित्रके मार्ग में उत्साह वह बढ़कर यह ज्ञानी पुरुष बढ़ता है, क्योंकि उसकी दृष्टि में वह स्थान है जिस स्थानपर उसे अपना उपयोग जमाना है और अपने अन्त पुरुषार्थ से वह उस ओर बढ़ रहा है और उसे स्पष्ट विदित हो रहा है कि यह अतस्तत्त्व है । कुछ और निकट पहुचता है तो अपने उपयोगको अपने अतस्तत्त्वमें पहुंचाता है। तो उत्साहपूर्वक उस मार्ग में बढ़ना है, ऐसे उत्साहसहित दृढ सम्यग्ज्ञानो पुरुषको सम्यक चारित्रका आलम्बन लेना चाहिए।
न हि सम्यग्व्यपदेश चरित्रमज्ञानपूर्वक लभते । ज्ञानानन्तरमुक्त चारित्राराघन तस्मात ॥२८॥
श्रज्ञानपूर्वक चारित्रमे समीचीनताका प्रभाव - जो अज्ञानपूर्वक चारित्र है वह सम्यक् नाम नहीं पाता । चारित्र सम आदि धारण कर रहा तो उस सम्यक नहीं है, चारित्र सही चारित्र नहीं है, सही सयम नहीं, इसी कारण से सम्यग्ज्ञान के पश्चात् चारित्रका आराधन बताया । पहिले सम्यग्दर्शनकी आराधना, फिर सम्यग्ज्ञान को भारावना, फिर सम्यक् चारित्रकी आराधनाका जो क्रमसे प्रतिपादन है उसका तथ्य यह है कि सर्वतमभ्यस्वचादि । सम्पत्र के विना मोक्षमार्गका प्रारम्भ नहीं है। किसी भी काम में यदे विश्वास नहीं है तो उस काम को पूरा कर नहीं सकता। रसोई लोग बनाते हैं तो पूरा विश्वास है कि इनसे वाया जाता है और बन जाता है। आटेसे रोटी बन जाती है और विश्वास भी होता। कहाँ ऐवा तो न कि नोकर कि पान को धून से रोटी बने । तो सबसे पहिले विश्वासकी है सबके होते हो ज्ञानावर सम्पवत जाता है । सो सम्यग्ज्ञान
|
विगलितदर्शनमोहैः समज्जसज्ञान षिदिततत्त्वार्थः । नित्यमपि निष्प्रकम्पैः सम्यफूचारित्रमालम्व्यम् ॥सैंतीस॥ सम्यम्वृष्टि तत्वज्ञानी सतको सम्यकुचारित्रके आलम्बनका उपदेश - जिन पुरुषांने दर्शन मोहको नष्ट कर दिया है और सम्यग्ज्ञानके द्वारा तत्त्वार्थ का अवरोध कर लिया है उन्हें बड़े निष्प्रम्प होकर धरणा सहित सभ्यक्चारित्रका आलम्बन फरना चाहिए। इसमें सर्वप्रथम यह बताया है कि जिसने दर्शन मोहको गला बाला उनको, जब तक पदार्थकी स्वतन्त्रताका भान न हो, समस्त पदार्थों से निराले निज अतरव का जब तक परिचय न हो तब तक वास्तव में सम्यक् चारित्र नहीं बनता, क्योंकि चारित्र नाम है अपने स्वभावका । अपने स्वभावका पता न हो तो रमे कहाँ ? जो बाह्य में सम्यक्चारित्र कहे जाते हैं वे साधक हैं, पाँच समिति तीन गुप्ति, पाँच महामन श्रावकों के लिए अरसुव्रत आदि ये सभ्यकचारित्र नाम इस लिए पाते हैं कि निश्चय चारित्र में साधक है, अन्यथा शुद्ध खानपान, देखभाल कर चलना, जीवदया पालना किस की चोज न उठाना ये तो बातें होती है। अन्तरङ्ग सम्यक चारित्र तो निज स्वभावको जानकर उसमें रमण करना है, ये सब साधक किसलिए होते हैं इसे समझना है तो इससे उल्टी घास सोचें बोई मनुष्य दया नहीं पालता, दूसरे जीषोंको सताता तो ऐसे चित्त में स्वभावधारणा नहीं बन सकती है, जो शल्यरहित हो, सत्यव्यवहार करता हो, न्याययुक्त जीवन हो ऐसे आवरण बालों में उस स्वभावकै धारण करने की योग्यता रहती है, अतएव ये सब आचरण साधक हैं। बास्तव में सम्यकचारित्र तो आत्मस्वभावमें रमण करनेका नाम है। यह बात तब बन सकती है जब दर्शन मोइ गल गया हो। जिसका मिथ्यात्व नष्ट हो गया और जिसने सात तत्वका श्रद्धान् यथार्थ अवधारण किया वह पुरुष सम्यकचारिश्रको ग्रहण करता है, ये तीन शब्द ऐसे हैं देखना, जानना और प्रयोग करना । लौकिक कामों में भी ये श्यातें आती हैं, कोई भी काम करने जावें । यह मोक्षमार्गका प्रकरण है, इस कारण यहाँ देखनेका नाम श्रद्धान है। विश्वास होना और स्पष्ट बोध होना और उस अंतस्तत्व मे उपयोग जमाना, यही है रत्नत्रय और मोक्षका मार्ग । अब वह अतस्तत्त्व इस ज्ञानी के उपयोग मे यो बसता है कि यह ध्रुव है बिना है, किसी चीज से उत्पन्न नहीं होता और न यह किसी वस्तुको उत्पन्न करता है। जिसके मंचरण में परिणमन नाना होते हैं फिर भी किसी परिणमनरूप नहीं बनता, ऐसा जो एक चैतन्यस्वभाष वह अस्तव, चैतन्यमात्र मैं हूं, इस प्रकार की वह प्रनीति करता है और ऐसी दृष्टि जमाने की ही यत्न रखता है, अव ऐसा उपयोग बन जाय किसीका या जितने क्षण बने, स्वय बुछ थोड़ा बहुत यत्न करके अनुभव बना करे तो इस अनुभूतिके प्रसार से क्लेश दूर होते हैं और चात्मीय आनन्द प्रकट होता है । क्योंकि क्लेश तव होते हैं जब परपदार्थों में उपयोग हो । जव परपदार्थों में इष्ट अनिष्ट की बुद्धि होती है तब क्षोभ उत्पन्न होता है, इसलिए परके आत्माको कष्ट है और जब स्वयका स्वय में सत्य सहजता परिचय हो, उपयोग हो तो इसमें कोई विगाड़ नहीं रहता। ऐसी निर्विकल्परूप, अनुभूतिरूप आत्मस्वभावका उपयोग करना, यही है निश्चयदृष्टि से पारित्र । सवृत्ति और स्वानुभूतिका परस्पर सहयोग -आठ व देख लीजिए कि फैसा परस्पर सयोग है कि अपने को शान्तवृत्तिमें रखे तो अनुभव जगे और अनुभव जगे तो शान्तवृत्ति बढे । इसमें एकान्त से हम दिसे कारण बतायें ? अन्तिसे अनुभूति होती है या अनुभूति से शान्ति होती है - इन दोनोमे एकान्ततः हम किसे पहिले रखें ? कुछ मद कपाय होकर जो शान्ति मिलती है यह तो बहुत चाहे तब अनुभूति जगे । 'और अनुभूति जगने से फिर उस शान्ति से वृद्धि घनती है और शान्ति ही एक चारित्रका रूप है । तो पुरुषार्थ सिद्ध्युपाय प्रवचन द्वितीय भाग अनुभव करनेके लिए सदाचरण होना बहुत आवश्यक है। जो पुरुष किसी प्रकार अच्छे ढगसे व्रत और नियमसे रहते हैं उनकी यह वृत्ति स्वानुभूतिका साधक है, वेवल एक ज्ञान कर लेने मात्र से, तत्त्वकी चर्चा कर लेने मात्र से अनुभूति नहीं जगती, क्योंकि उसमें हमारा चित्त रमे, उपयोग ग्रहण करे, चित्त शान्त हो तो आत्माकी अनुभूति जगती है। चित्तमें शान्ति तव हो सकती जब हमारी अनाचाररूपवृत्ति न हो, अभक्ष्य भक्षण को प्रवृत्ति न हो। ज्ञान तो हो गया कि मद्य मासमें जीवकी हिंसा है ऐसा ज्ञान होकर जो पुरुष उसकी प्रवृत्ति करता है तो उसके चित्त में क्रूरता है और क्रूर चित्त आत्मानुभव कर नहीं सकता और जिसके ज्ञान ही नहीं कि मांस भक्षण में दोष है, इसमें जीव दिसा है, उसके तो जीवकी पहिचान हो नहीं है, आत्मानुभव तो उसके जगेगा ही क्या ? जब मिथ्यात्व अन्याय अमक्ष्यका त्याग नहीं होता उसके सम्यक्त्व नहीं होता। जब तक बाह्य आचरण ठीक न हो तब तक आत्मानुभूतिकी पात्रता ही नहीं है, इस कारण ऐसा ही ख्याल करना चाहिए कि हमें केवल सम्यक्त्व पैदा करना है, आचरण पीछे सुधारेगे । अरे विशिष्ट आचरण तो वाद सुधरेगा पर साधारण आचरण तो पहिले चाहिए। क्योंकि सम्यक्त्व घात्मानुभूतिके साथ उत्पन्न होता है। बादमें सम्यक्त्व बना रहे और आत्मानुभूति न बने यह तो सम्भव है क्योंकि आत्मानुभषका नाम है- छात्मोका उपयोग रखना । सम्यग्दृष्टि निरन्तर आत्माका उपयोग रखता हो ऐसी बात नहीं है। गृहस्थजन दूकान पर जाते, आजीविकाका साधन बनाते, परिवार का पालन पोपण करते, अनेक घटनाओं में सुधार विगाड़का यत्न रखते, परपदार्थोंका उपयोग चलता रहता है पर सम्यक्त्व बना रहता है। सम्यक्त्व की उत्पत्ति स्वके उपयोग विना नहीं हो सकती, स्वानुभूति पूर्वक ही सम्यक्त्व उत्पन्न होता है। अपनी उस अनुभूतिको जगाने के लिए हमारा पहिले से आचरण विशुद्ध हो तो कार्य बनता है। आचरण गदा है तो हममें यह योग्यता नहीं है कि सम्यग्दर्शन उत्पन्न है कर सकें । जिसे सम्यग्दर्शन होता है और भले प्रकार तत्त्वार्थका परिज्ञान है उस पुरुषको सदाकाल दृढ चिच पूर्वक विशिष्ट उत्साह सहित सम्यक चारित्रका आलम्बन लेना चाहिए । जैसे कोई पुरुष मार्ग चलता है तो रास्ता जैसे-जैसे व्यतीत होता है वैसे ही वैसे उसका उत्साह बढता जाता है ऐसे ही सभ्यक् चारित्रके मार्ग में उत्साह वह बढ़कर यह ज्ञानी पुरुष बढ़ता है, क्योंकि उसकी दृष्टि में वह स्थान है जिस स्थानपर उसे अपना उपयोग जमाना है और अपने अन्त पुरुषार्थ से वह उस ओर बढ़ रहा है और उसे स्पष्ट विदित हो रहा है कि यह अतस्तत्त्व है । कुछ और निकट पहुचता है तो अपने उपयोगको अपने अतस्तत्त्वमें पहुंचाता है। तो उत्साहपूर्वक उस मार्ग में बढ़ना है, ऐसे उत्साहसहित दृढ सम्यग्ज्ञानो पुरुषको सम्यक चारित्रका आलम्बन लेना चाहिए। न हि सम्यग्व्यपदेश चरित्रमज्ञानपूर्वक लभते । ज्ञानानन्तरमुक्त चारित्राराघन तस्मात ॥अट्ठाईस॥ श्रज्ञानपूर्वक चारित्रमे समीचीनताका प्रभाव - जो अज्ञानपूर्वक चारित्र है वह सम्यक् नाम नहीं पाता । चारित्र सम आदि धारण कर रहा तो उस सम्यक नहीं है, चारित्र सही चारित्र नहीं है, सही सयम नहीं, इसी कारण से सम्यग्ज्ञान के पश्चात् चारित्रका आराधन बताया । पहिले सम्यग्दर्शनकी आराधना, फिर सम्यग्ज्ञान को भारावना, फिर सम्यक् चारित्रकी आराधनाका जो क्रमसे प्रतिपादन है उसका तथ्य यह है कि सर्वतमभ्यस्वचादि । सम्पत्र के विना मोक्षमार्गका प्रारम्भ नहीं है। किसी भी काम में यदे विश्वास नहीं है तो उस काम को पूरा कर नहीं सकता। रसोई लोग बनाते हैं तो पूरा विश्वास है कि इनसे वाया जाता है और बन जाता है। आटेसे रोटी बन जाती है और विश्वास भी होता। कहाँ ऐवा तो न कि नोकर कि पान को धून से रोटी बने । तो सबसे पहिले विश्वासकी है सबके होते हो ज्ञानावर सम्पवत जाता है । सो सम्यग्ज्ञान
|
Noamundi (Sandip Kumar Prasad) : गुवा से बड़ाजामदा जाने वाले मुख्य मार्ग के पास बोकना गांव स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर के प्रांगण में आज शनिवार को मंदिर निर्माण को लेकर मंदिर कमेटी के सदस्यों ने विशेष बैठक की. साथ ही बीते दो दिवसीय मकर महोत्सव की समीक्षा भी बैठक में की गई. बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंदिर कमेटी के अध्यक्ष समीर पाठक ने कहा कि पंचमुखी हनुमान मंदिर में मूर्ति स्थापना के बाद से मंदिर का निर्माण किया जाना नितांत ही आवश्यक हो गया है. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अयोध्या में श्री राम मंदिर का निर्माण कार्य आरंभ होगा उसी दिन बोकना गांव स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर का निर्माण कार्य का शुरू किया जाएगा.
चूंकि भगवान हनुमान श्री राम के भक्त थे. बैठक में लोगों से निवेदन किया गया कि जो भी अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण में पुण्य का भागी बनना चाहते हैं वह मंदिर प्रांगण में आकर अपना नाम दर्ज करा सकते हैं. लोगों से आग्रह किया कि जो भी इस मंदिर निर्माण कार्य में सहयोग राशि देंगे उनका नाम शीलापट पर लिखा जाएगा. मंदिर निर्माण के धनराशि संग्रह के लिए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम व क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित किये जाएंगे.
कार्यक्रम के अंत में हर शनिवार की तरह इस शनिवार को भी मंदिर कमेटी के सदस्यों द्वारा खिचड़ी भोग का आयोजन किया गया. जिसमें आसपास गांव के साथ-साथ आने जाने वाले लोगों के बीच खिचड़ी भोग वितरण किया गया. बैठक में मुख्य रूप से समीर पाठक, मुकेश लाल, गणेश दास, राजा महापात्रों, विनीत जयसवाल, विनय प्रसाद, मिलन सिंह, सुदीप दास, राजकुमार तांती, राहुल वर्मा, लंकेश दास, विश्वनाथ दास, भरत पूर्ति सहित अन्य मौजूद थे.
|
Noamundi : गुवा से बड़ाजामदा जाने वाले मुख्य मार्ग के पास बोकना गांव स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर के प्रांगण में आज शनिवार को मंदिर निर्माण को लेकर मंदिर कमेटी के सदस्यों ने विशेष बैठक की. साथ ही बीते दो दिवसीय मकर महोत्सव की समीक्षा भी बैठक में की गई. बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंदिर कमेटी के अध्यक्ष समीर पाठक ने कहा कि पंचमुखी हनुमान मंदिर में मूर्ति स्थापना के बाद से मंदिर का निर्माण किया जाना नितांत ही आवश्यक हो गया है. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अयोध्या में श्री राम मंदिर का निर्माण कार्य आरंभ होगा उसी दिन बोकना गांव स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर का निर्माण कार्य का शुरू किया जाएगा. चूंकि भगवान हनुमान श्री राम के भक्त थे. बैठक में लोगों से निवेदन किया गया कि जो भी अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण में पुण्य का भागी बनना चाहते हैं वह मंदिर प्रांगण में आकर अपना नाम दर्ज करा सकते हैं. लोगों से आग्रह किया कि जो भी इस मंदिर निर्माण कार्य में सहयोग राशि देंगे उनका नाम शीलापट पर लिखा जाएगा. मंदिर निर्माण के धनराशि संग्रह के लिए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम व क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित किये जाएंगे. कार्यक्रम के अंत में हर शनिवार की तरह इस शनिवार को भी मंदिर कमेटी के सदस्यों द्वारा खिचड़ी भोग का आयोजन किया गया. जिसमें आसपास गांव के साथ-साथ आने जाने वाले लोगों के बीच खिचड़ी भोग वितरण किया गया. बैठक में मुख्य रूप से समीर पाठक, मुकेश लाल, गणेश दास, राजा महापात्रों, विनीत जयसवाल, विनय प्रसाद, मिलन सिंह, सुदीप दास, राजकुमार तांती, राहुल वर्मा, लंकेश दास, विश्वनाथ दास, भरत पूर्ति सहित अन्य मौजूद थे.
|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में गुरुवार की देर शाम को एक बार फिर बड़ा हादसा हो गया है। कालिका गली के पास एक मजदूर बिल्डिंग से गिरकर घायल हो गया। निर्माण कार्य के दौरान पैर फिसलने से गिरे मजूदर को हल्की चोटें आईं। उसे अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। घायल मजदूर संदीप(20) मथुरा निवासी है। कालिका गली स्थित भवन में पत्थर लगाने का कार्य चल रहा है। इसी दौरान मजदूर फिसलकर गिर पड़ा।
11 सितंबर को भी निर्माणाधीन श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर में ललिता घाट के पास रात को मिनी मालवाहक से शीशा उतारते समय हादसा हो गया था। विशालकाय शीशा गिरने से एक मजदूर की घटनास्थल पर मौत हो गई थी। वहीं एक मजदूर घायल हो गया। जबकि मजदूरों के राहत बचाव में एक युवक जख्मी हो गया था।
ये पहली बार नहीं है जब काशी विश्वानाथ कॉरिडोर में हादसा हुआ है। जून माह में भी नीलकंठ स्थित एक मकान की दीवार ढह गई थी। हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई थी। वहीं एक जून को ललिता घाट के पास जर्जर दो मंजिला मकान गिर जाने से मलबे में दबकर बंगाल निवासी दो मजदूरों की मौत हो गई थी।
|
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में गुरुवार की देर शाम को एक बार फिर बड़ा हादसा हो गया है। कालिका गली के पास एक मजदूर बिल्डिंग से गिरकर घायल हो गया। निर्माण कार्य के दौरान पैर फिसलने से गिरे मजूदर को हल्की चोटें आईं। उसे अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया। घायल मजदूर संदीप मथुरा निवासी है। कालिका गली स्थित भवन में पत्थर लगाने का कार्य चल रहा है। इसी दौरान मजदूर फिसलकर गिर पड़ा। ग्यारह सितंबर को भी निर्माणाधीन श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर में ललिता घाट के पास रात को मिनी मालवाहक से शीशा उतारते समय हादसा हो गया था। विशालकाय शीशा गिरने से एक मजदूर की घटनास्थल पर मौत हो गई थी। वहीं एक मजदूर घायल हो गया। जबकि मजदूरों के राहत बचाव में एक युवक जख्मी हो गया था। ये पहली बार नहीं है जब काशी विश्वानाथ कॉरिडोर में हादसा हुआ है। जून माह में भी नीलकंठ स्थित एक मकान की दीवार ढह गई थी। हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई थी। वहीं एक जून को ललिता घाट के पास जर्जर दो मंजिला मकान गिर जाने से मलबे में दबकर बंगाल निवासी दो मजदूरों की मौत हो गई थी।
|
काठमांडू, २४ आश्वीन । प्रमुख निर्वाचन आयुक्त डॉ. अयोधीप्रसाद यादव और नेकपा एमाले ने चेतावनी दिया है कि प्रधानमन्त्री शेरबहादुर देउवा चुनाव परिवर्तन संबंधी कोई भी अप्रिय निर्णय न करे । मंगलबार काभ्रे, धुलिखेल में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधन करते हुए प्रमुख निर्वाचन आयुक्त डा. अयोधी प्रसाद यादव ने कहा है- 'प्रदेशसभा और प्रतिनिधिसभा निर्वाचन की सम्पूर्ण काम अन्तिम चरण में पहुँच चुका है । निर्वाचन आयोग की अपेक्षा है कि ऐसी अवस्था में सरकार कोई भी अप्रिय निर्णय न करे ।' डॉ. यादव मुख्य निर्वाचन अधिकृत और निर्वाचन अधिकृत के लिए धुलिखेल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे । चुनावी तिथि परिवर्तन संबंधी प्रसंग का लक्षित करते हुए उन्होंने यह बात कहा है ।
इसीतरह इधर प्रमुख प्रतिपक्षी दल नेकपा एमाले ने भी सरकार को चेतावनी दी है कि चुनावी तिथि परिवर्तन संबंधी किसी मी निर्णय को एमाले स्वीकार करने वाला नहीं है । मंगलबार संसदीय दल के कार्यालय सिंहदरबार में सम्पन्न पार्टी स्थायी किमिट बैठ ने यह चेतावनी दिया है । बैठक का निष्कर्ष सुनाते हुए पार्टी उपाध्यक्ष भीम रावल ने कहा है कि निर्वाचन तिथि परिवर्तन संबंधी काम संविधान, कानुन और निर्वाचन आचारसंहिता विपरित होगा, इसीलिए यह स्वीकार नहीं हो सकता ।
स्मरणीय है, पिछली बार यह समाचार सनसनी मचा रही है कि प्रधानमन्त्री देउवा मार्गशीर्ष १० गते के लिए तय चुनावी तिथि परिवर्तन करना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति से भी बातचीत की है ।
|
काठमांडू, चौबीस आश्वीन । प्रमुख निर्वाचन आयुक्त डॉ. अयोधीप्रसाद यादव और नेकपा एमाले ने चेतावनी दिया है कि प्रधानमन्त्री शेरबहादुर देउवा चुनाव परिवर्तन संबंधी कोई भी अप्रिय निर्णय न करे । मंगलबार काभ्रे, धुलिखेल में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधन करते हुए प्रमुख निर्वाचन आयुक्त डा. अयोधी प्रसाद यादव ने कहा है- 'प्रदेशसभा और प्रतिनिधिसभा निर्वाचन की सम्पूर्ण काम अन्तिम चरण में पहुँच चुका है । निर्वाचन आयोग की अपेक्षा है कि ऐसी अवस्था में सरकार कोई भी अप्रिय निर्णय न करे ।' डॉ. यादव मुख्य निर्वाचन अधिकृत और निर्वाचन अधिकृत के लिए धुलिखेल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे । चुनावी तिथि परिवर्तन संबंधी प्रसंग का लक्षित करते हुए उन्होंने यह बात कहा है । इसीतरह इधर प्रमुख प्रतिपक्षी दल नेकपा एमाले ने भी सरकार को चेतावनी दी है कि चुनावी तिथि परिवर्तन संबंधी किसी मी निर्णय को एमाले स्वीकार करने वाला नहीं है । मंगलबार संसदीय दल के कार्यालय सिंहदरबार में सम्पन्न पार्टी स्थायी किमिट बैठ ने यह चेतावनी दिया है । बैठक का निष्कर्ष सुनाते हुए पार्टी उपाध्यक्ष भीम रावल ने कहा है कि निर्वाचन तिथि परिवर्तन संबंधी काम संविधान, कानुन और निर्वाचन आचारसंहिता विपरित होगा, इसीलिए यह स्वीकार नहीं हो सकता । स्मरणीय है, पिछली बार यह समाचार सनसनी मचा रही है कि प्रधानमन्त्री देउवा मार्गशीर्ष दस गते के लिए तय चुनावी तिथि परिवर्तन करना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति से भी बातचीत की है ।
|
जम्मू। घाटी से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जानकारी के मुताबिक भारतीय सुरक्षाबलों ने कठुआ में पाकिस्तानी नागरिक को गिरफ्तार किया है तो वहीं परगवाल सेक्टर में सेना ने एक घुसपैठिए को मार गिराया है। खबरों की मानें तो गिरफ्तार पाकिस्तान नागरिक की मानसिक हालत ठीक नहीं है। पिछले कई दिनों से जम्मू-कश्मीर में आतंकी घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे है जिसे सेना नाकाम कर रही है।
इससे पहले गुरुवार को कश्मीर के सोपियां जिले के मुलु चितरागम क्षेत्र में सेना के गश्ती दल पर आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में तीन जवान और एक स्थानीय महिला की मौत हो गई है जबकि चार जवानों के घायल हो गए थे। हालांकि आतंकी हमला करके भागने में सफल रहे। आतंकियों ने ये हमला रात करीबन 2:30 बजे सेना के काफिले पर किया जब वो एख ऑपरेशन को अंजाम देकर लौट रहे थे। शहीद जवानों की पहचान सिपाही विकास कुमार, सिपाही जीत एम जे, सिपाही गुलाम मोहम्मद राथर मेजर अमरदीप सिंह के रुप में हुई।
|
जम्मू। घाटी से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जानकारी के मुताबिक भारतीय सुरक्षाबलों ने कठुआ में पाकिस्तानी नागरिक को गिरफ्तार किया है तो वहीं परगवाल सेक्टर में सेना ने एक घुसपैठिए को मार गिराया है। खबरों की मानें तो गिरफ्तार पाकिस्तान नागरिक की मानसिक हालत ठीक नहीं है। पिछले कई दिनों से जम्मू-कश्मीर में आतंकी घुसपैठ करने की कोशिश कर रहे है जिसे सेना नाकाम कर रही है। इससे पहले गुरुवार को कश्मीर के सोपियां जिले के मुलु चितरागम क्षेत्र में सेना के गश्ती दल पर आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में तीन जवान और एक स्थानीय महिला की मौत हो गई है जबकि चार जवानों के घायल हो गए थे। हालांकि आतंकी हमला करके भागने में सफल रहे। आतंकियों ने ये हमला रात करीबन दो:तीस बजे सेना के काफिले पर किया जब वो एख ऑपरेशन को अंजाम देकर लौट रहे थे। शहीद जवानों की पहचान सिपाही विकास कुमार, सिपाही जीत एम जे, सिपाही गुलाम मोहम्मद राथर मेजर अमरदीप सिंह के रुप में हुई।
|
कोविड-19 महामारी के कारण भारत में भूख व कुपोषण की चुनौती बढ़ी है. विश्व बैंक के द्वारा तैयार किए गए 174 देशों के मानव पूंजी सूचकांक 2020 में भारत का 116वां स्थान है.
भारत में गरीबों एवं कमजोर वर्ग के कल्याण को बढ़ाने के लिए वित्तीय समावेशन (फाइनेंशियल इन्क्लूजन) के तहत वित्तीय और बैंकिंग सेवाओं के साथ-साथ डिजिटल माध्यम से स्वास्थ्य, सब्सिडी, राशन, प्रशासन आदि बहुआयामी सुविधाएं सरलतापूर्वक पहुंचाए जाने का अभूतपूर्व अभियान दिखाई दे रहा है. लेकिन अभी भी आम आदमी के लिए अधिक कल्याणकारी योजनाओं की जरूरत बनी हुई है.
हाल ही में प्रकाशिक वैश्विक खाद्य सुरक्षा सूचकांक-2021 के तहत भारत 113 देशों में 71वें स्थान पर है. ऑक्सफेम इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक भुखमरी सूचकांक 2021 में भारत का 101वां स्थान है.
कोविड-19 महामारी के कारण भारत में भूख व कुपोषण की चुनौती बढ़ी है. विश्व बैंक के द्वारा तैयार किए गए 174 देशों के मानव पूंजी सूचकांक 2020 में भारत का 116वां स्थान है.
गौरतलब है कि विगत 25 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में पिछले सात वर्षो में वंचित वर्ग के लगभग 43 करोड़ लोगों को जन-धन योजना के माध्यम से देश की बैंकिंग व्यवस्था में शामिल किया गया है.
देश में जन-धन, आधार और मोबाइल (जैम) के कारण आम आदमी डिजिटल दुनिया से जुड़ गया है. देश में 130 करोड़ आधार कार्ड, 118 करोड़ मोबाइल उपभोक्ता, लगभग 80 करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता और जन-धन बैंक खातों का विशाल एकीकृत बुनियादी डिजिटल ढांचे के माध्यम से गरीब वर्ग के करोड़ों लोगों के लिए गरिमापूर्ण जीवन के साथ सशक्तिकरण का असाधारण कार्य दुनिया के लिए मिसाल बन गया है.
निश्चित रूप से देश में एक से बाद एक शुरू किए डिजिटल मिशन आम आदमी और अर्थव्यवस्था की शक्ति बनते जा रहे हैं. 26 अक्तूबर को 64000 करोड़ रुपए निवेश योजना वाला आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन देश के करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य की खुशहाली का आधार बन सकता है.
इस मिशन के तहत देश के प्रत्येक जिले में औसतन 90 से 100 करोड़ रुपए स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे पर खर्च किए जाएंगे. इसके साथ-साथ डिजिटल आयुष्मान भारत मिशन भारत की स्वास्थ्य सुविधाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाते हुए, जीवन को बेहतर बनाने की संभावना प्रस्तुत कर रहा है.
आयुष्मान भारत-डिजिटल मिशन देश भर के अस्पतालों के डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों को एक-दूसरे से जोड़ेगा और अस्पताल की प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा.
प्रत्येक नागरिक एक हेल्थ आईडी प्राप्त कर सकेगा और उनके स्वास्थ्य का लेखा-जोखा डिजिटल रूप से संरक्षित किया जाएगा. यह पहल समाज के गरीब और मध्य वर्ग की चिकित्सा संबंधी दिक्कतों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
निःसंदेह इस समय देश के उद्योग, कारोबार और बैंकिंग क्षेत्र के साथ-साथ देश के अधिकांश लोग डिजिटल सुविधाओं और वित्तीय समावेशन का लाभ लेने के लिए आगे बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं. लेकिन देश में डिजिटल सुविधाओं की डगर पर कई बाधा और चुनौतियां भी दिखाई दे रही हैं.
हाल ही में इंटरनेट गुणवत्ता को लेकर वैश्विक साइबर सिक्योरिटी कंपनी सर्फ शार्क के द्वारा जारी किए गए डिजिटल क्वालिटी ऑफलाइन इंडेक्स-2021 में कुल 110 देशों में भारत इस साल दो स्थान फिसलकर 59वें स्थान पर रहा है.
इंटरनेट स्पीड के मामले में भारत बहुत पीछे है. भारत ई-इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में 91वें पायदान पर है और वैश्विक औसत से 30 फीसदी पीछे है. भारत ई-गवर्नमेंट के मामले में 33वें क्रम पर, इंटरनेट की वहनीयता के मामले में 47वें तथा इंटरनेट की गुणवत्ता के मामले में 67वें स्थान पर है.
ऐसे में हम उम्मीद करें कि सरकार देश में गरीबी, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों में आम आदमी को लाभान्वित करने के लिए और अधिक मजबूती से आगे बढ़ेगी.
हम उम्मीद करें कि सरकार डिजिटल समावेशी विकास के लिए इस समय उभरकर दिखाई दे रही डिजिटल ढांचे संबंधी कमियों को दूर करने के लिए रणनीतिक रूप से आगे बढ़ेगी.
इससे जहां वंचित वर्ग के करोड़ों लोग समावेशी विकास की योजनाओं से और अधिक लाभान्वित हो सकेंगे, वहीं ग्रामीण विकास, उद्योग-कारोबार और अर्थव्यवस्था की गतिशीलता भी बढ़ेगी.
|
कोविड-उन्नीस महामारी के कारण भारत में भूख व कुपोषण की चुनौती बढ़ी है. विश्व बैंक के द्वारा तैयार किए गए एक सौ चौहत्तर देशों के मानव पूंजी सूचकांक दो हज़ार बीस में भारत का एक सौ सोलहवां स्थान है. भारत में गरीबों एवं कमजोर वर्ग के कल्याण को बढ़ाने के लिए वित्तीय समावेशन के तहत वित्तीय और बैंकिंग सेवाओं के साथ-साथ डिजिटल माध्यम से स्वास्थ्य, सब्सिडी, राशन, प्रशासन आदि बहुआयामी सुविधाएं सरलतापूर्वक पहुंचाए जाने का अभूतपूर्व अभियान दिखाई दे रहा है. लेकिन अभी भी आम आदमी के लिए अधिक कल्याणकारी योजनाओं की जरूरत बनी हुई है. हाल ही में प्रकाशिक वैश्विक खाद्य सुरक्षा सूचकांक-दो हज़ार इक्कीस के तहत भारत एक सौ तेरह देशों में इकहत्तरवें स्थान पर है. ऑक्सफेम इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक भुखमरी सूचकांक दो हज़ार इक्कीस में भारत का एक सौ एकवां स्थान है. कोविड-उन्नीस महामारी के कारण भारत में भूख व कुपोषण की चुनौती बढ़ी है. विश्व बैंक के द्वारा तैयार किए गए एक सौ चौहत्तर देशों के मानव पूंजी सूचकांक दो हज़ार बीस में भारत का एक सौ सोलहवां स्थान है. गौरतलब है कि विगत पच्चीस सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के छिहत्तरवें सत्र में अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में पिछले सात वर्षो में वंचित वर्ग के लगभग तैंतालीस करोड़ लोगों को जन-धन योजना के माध्यम से देश की बैंकिंग व्यवस्था में शामिल किया गया है. देश में जन-धन, आधार और मोबाइल के कारण आम आदमी डिजिटल दुनिया से जुड़ गया है. देश में एक सौ तीस करोड़ आधार कार्ड, एक सौ अट्ठारह करोड़ मोबाइल उपभोक्ता, लगभग अस्सी करोड़ इंटरनेट उपयोगकर्ता और जन-धन बैंक खातों का विशाल एकीकृत बुनियादी डिजिटल ढांचे के माध्यम से गरीब वर्ग के करोड़ों लोगों के लिए गरिमापूर्ण जीवन के साथ सशक्तिकरण का असाधारण कार्य दुनिया के लिए मिसाल बन गया है. निश्चित रूप से देश में एक से बाद एक शुरू किए डिजिटल मिशन आम आदमी और अर्थव्यवस्था की शक्ति बनते जा रहे हैं. छब्बीस अक्तूबर को चौंसठ हज़ार करोड़ रुपए निवेश योजना वाला आयुष्मान भारत हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मिशन देश के करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य की खुशहाली का आधार बन सकता है. इस मिशन के तहत देश के प्रत्येक जिले में औसतन नब्बे से एक सौ करोड़ रुपए स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे पर खर्च किए जाएंगे. इसके साथ-साथ डिजिटल आयुष्मान भारत मिशन भारत की स्वास्थ्य सुविधाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाते हुए, जीवन को बेहतर बनाने की संभावना प्रस्तुत कर रहा है. आयुष्मान भारत-डिजिटल मिशन देश भर के अस्पतालों के डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों को एक-दूसरे से जोड़ेगा और अस्पताल की प्रक्रियाओं को सरल बनाएगा. प्रत्येक नागरिक एक हेल्थ आईडी प्राप्त कर सकेगा और उनके स्वास्थ्य का लेखा-जोखा डिजिटल रूप से संरक्षित किया जाएगा. यह पहल समाज के गरीब और मध्य वर्ग की चिकित्सा संबंधी दिक्कतों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. निःसंदेह इस समय देश के उद्योग, कारोबार और बैंकिंग क्षेत्र के साथ-साथ देश के अधिकांश लोग डिजिटल सुविधाओं और वित्तीय समावेशन का लाभ लेने के लिए आगे बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं. लेकिन देश में डिजिटल सुविधाओं की डगर पर कई बाधा और चुनौतियां भी दिखाई दे रही हैं. हाल ही में इंटरनेट गुणवत्ता को लेकर वैश्विक साइबर सिक्योरिटी कंपनी सर्फ शार्क के द्वारा जारी किए गए डिजिटल क्वालिटी ऑफलाइन इंडेक्स-दो हज़ार इक्कीस में कुल एक सौ दस देशों में भारत इस साल दो स्थान फिसलकर उनसठवें स्थान पर रहा है. इंटरनेट स्पीड के मामले में भारत बहुत पीछे है. भारत ई-इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में इक्यानवेवें पायदान पर है और वैश्विक औसत से तीस फीसदी पीछे है. भारत ई-गवर्नमेंट के मामले में तैंतीसवें क्रम पर, इंटरनेट की वहनीयता के मामले में सैंतालीसवें तथा इंटरनेट की गुणवत्ता के मामले में सरसठवें स्थान पर है. ऐसे में हम उम्मीद करें कि सरकार देश में गरीबी, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों में आम आदमी को लाभान्वित करने के लिए और अधिक मजबूती से आगे बढ़ेगी. हम उम्मीद करें कि सरकार डिजिटल समावेशी विकास के लिए इस समय उभरकर दिखाई दे रही डिजिटल ढांचे संबंधी कमियों को दूर करने के लिए रणनीतिक रूप से आगे बढ़ेगी. इससे जहां वंचित वर्ग के करोड़ों लोग समावेशी विकास की योजनाओं से और अधिक लाभान्वित हो सकेंगे, वहीं ग्रामीण विकास, उद्योग-कारोबार और अर्थव्यवस्था की गतिशीलता भी बढ़ेगी.
|
लोकसभा चुनाव को लेकर बीजेपी का संगठन कमर कसने लगा है. एक ओर जहां विधायकों को जनसंपर्क अभियान में लगाया जा रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ हारी हुई सीटों को जीतने के लिए अलग ही रणनीति तैयार की जा रही है. इसी क्रम में संगठन कई सीटों पर नए चेहरे चाहता है. खासकर ऐसे सीटों पर जहां उनके पास लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कैंडिडेट कमजोर हैं या फिर जीते हुए सांसदों के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी है. ऐसे में संगठन की नजर सरकार में शामिल कई मंत्रियों पर है. संगठन के संकेतों को अगर समझा जाए तो लगता है कि 2024 में भी योगी सरकार के कई मंत्रियों को बीजेपी चुनाव लड़वा सकती है.
संगठन की मानें तो लगभग एक चौथाई ऐसे सांसद हैं, जिनके टिकट बदले या काटे जा सकते हैं. कुछ मंत्रिमंडल के चेहरे लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे, कुछ सांसदों के टिकट कटेंगे और कुछ सांसदों के क्षेत्र भी बदले जाएंगे. यह फॉर्मूला बीजेपी के लिए नया भी नहीं है. बीजेपी चेहरों को बदलकर प्रयोग करती रहती है. उसमें वह सफल भी रही है.
रायबरेली, प्रयागराज, प्रतापगढ़, धौरहरा, पीलीभीत और कानपुर, ऐसी सीटें हैं, जहां से योगी सरकार के मंत्रियों को लड़ाने की चर्चा चल रही है.
बीजेपी को लगता है कि अमेठी में सोनिया गांधी को टक्कर देने के लिए कोई चेहरा उनके पास नहीं है. ऐसे में योगी सरकार में स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह का नाम चर्चा में है. मंत्री राकेश सचान का नाम भी लोकसभा चुनाव के लिए चर्चा में, जितिन प्रसाद भी केंद्र की राजनीति में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं और उनके बारे में भी चर्चा है कि वह 2024 का चुनाव लड़ सकते हैं.
अगर 2019 चुनाव का फॉर्मूला देखा जाए तो यूपी बीजेपी ने उस समय यही प्रयोग किए थे. योगी सरकार में पर्यटन मंत्री रही रीता बहुगुणा जोशी, पशुधन मंत्री रहे एसपी सिंह बघेल, कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी और सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा को पार्टी ने चुनाव लड़ आया था. इनमें तीन सीटों को बीजेपी जीतने में सफल रही थी जबकि मुकुट बिहारी वर्मा अंबेडकरनगर से चुनाव हार गए थे.
ऐसे में अब जबकि 2024 को लेकर बीजेपी ने अलग स्तर की तैयारियां शुरू कर दी हैं, तो उन मंत्रियों का नाम चर्चा में आ गया है, जो 2024 में लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं.
इसके अलावा अगर बात की जाए तो ऐसे चेहरे जिन्हें इस बार योगी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली और जो दिल्ली दरबार के भी करीब माने जाते रहे हैं, उनके भी 2024 में पार्लियामेंट चुनाव लड़ने की उम्मीद है. ऐसे नेताओं में पूर्व मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह श्रीकांत शर्मा, पूर्व उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा सरीखे कई दिग्गजों के नाम भी चर्चा में है. बहरहाल फिलहाल संगठन में मंथन का दौर जारी है लेकिन आने वाले वक्त में चुनाव लड़ने वाले नामों को पहले ही संकेत दिए जा सकते हैं.
|
लोकसभा चुनाव को लेकर बीजेपी का संगठन कमर कसने लगा है. एक ओर जहां विधायकों को जनसंपर्क अभियान में लगाया जा रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ हारी हुई सीटों को जीतने के लिए अलग ही रणनीति तैयार की जा रही है. इसी क्रम में संगठन कई सीटों पर नए चेहरे चाहता है. खासकर ऐसे सीटों पर जहां उनके पास लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कैंडिडेट कमजोर हैं या फिर जीते हुए सांसदों के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी है. ऐसे में संगठन की नजर सरकार में शामिल कई मंत्रियों पर है. संगठन के संकेतों को अगर समझा जाए तो लगता है कि दो हज़ार चौबीस में भी योगी सरकार के कई मंत्रियों को बीजेपी चुनाव लड़वा सकती है. संगठन की मानें तो लगभग एक चौथाई ऐसे सांसद हैं, जिनके टिकट बदले या काटे जा सकते हैं. कुछ मंत्रिमंडल के चेहरे लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे, कुछ सांसदों के टिकट कटेंगे और कुछ सांसदों के क्षेत्र भी बदले जाएंगे. यह फॉर्मूला बीजेपी के लिए नया भी नहीं है. बीजेपी चेहरों को बदलकर प्रयोग करती रहती है. उसमें वह सफल भी रही है. रायबरेली, प्रयागराज, प्रतापगढ़, धौरहरा, पीलीभीत और कानपुर, ऐसी सीटें हैं, जहां से योगी सरकार के मंत्रियों को लड़ाने की चर्चा चल रही है. बीजेपी को लगता है कि अमेठी में सोनिया गांधी को टक्कर देने के लिए कोई चेहरा उनके पास नहीं है. ऐसे में योगी सरकार में स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह का नाम चर्चा में है. मंत्री राकेश सचान का नाम भी लोकसभा चुनाव के लिए चर्चा में, जितिन प्रसाद भी केंद्र की राजनीति में ज्यादा दिलचस्पी रखते हैं और उनके बारे में भी चर्चा है कि वह दो हज़ार चौबीस का चुनाव लड़ सकते हैं. अगर दो हज़ार उन्नीस चुनाव का फॉर्मूला देखा जाए तो यूपी बीजेपी ने उस समय यही प्रयोग किए थे. योगी सरकार में पर्यटन मंत्री रही रीता बहुगुणा जोशी, पशुधन मंत्री रहे एसपी सिंह बघेल, कैबिनेट मंत्री सत्यदेव पचौरी और सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा को पार्टी ने चुनाव लड़ आया था. इनमें तीन सीटों को बीजेपी जीतने में सफल रही थी जबकि मुकुट बिहारी वर्मा अंबेडकरनगर से चुनाव हार गए थे. ऐसे में अब जबकि दो हज़ार चौबीस को लेकर बीजेपी ने अलग स्तर की तैयारियां शुरू कर दी हैं, तो उन मंत्रियों का नाम चर्चा में आ गया है, जो दो हज़ार चौबीस में लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं. इसके अलावा अगर बात की जाए तो ऐसे चेहरे जिन्हें इस बार योगी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली और जो दिल्ली दरबार के भी करीब माने जाते रहे हैं, उनके भी दो हज़ार चौबीस में पार्लियामेंट चुनाव लड़ने की उम्मीद है. ऐसे नेताओं में पूर्व मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह श्रीकांत शर्मा, पूर्व उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा सरीखे कई दिग्गजों के नाम भी चर्चा में है. बहरहाल फिलहाल संगठन में मंथन का दौर जारी है लेकिन आने वाले वक्त में चुनाव लड़ने वाले नामों को पहले ही संकेत दिए जा सकते हैं.
|
टाटा नेक्सन ( Image Source : Tata Motors )
Tata Nexon: टाटा नेक्सन एक ऐसी एसयूवी है, जिसकी डिमांड देश में कभी कम नहीं होती है, और यह हमेशा सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में शुमार रहती है. यह कार नई के साथ साथ पुरानी होने पर भी खूब बिकती है. पुरानी नेक्सन खरीदने का फायदा यह है कि कम कीमत में भी वही बेहतरीन बिल्ड क्वॉलिटी देखने को मिल जाती है. ऐसे में यदि आप भी एक पुरानी नेक्सन खरीदना चाहते हैं, तो हम आपको बताने वाले हैं कार्स 24 पर उपलब्ध कुछ ऐसे नेक्सन कारों के बारे में जो बहुत कम कीमत पर बिक्री के लिए मौजूद हैं.
कार्स 24 पर मौजूद यह एक्सएम वेरिएंट नेक्सन, 2018 मॉडल की है. यह एक फर्स्ट ओनर कार है. यह 1. 2 पेट्रोल इंजन वाला मैनुअल मॉडल है. यह कार अब तक 74,292 km चल चुकी है. इसमें यूपी 14 नंबर प्लेट मिलेगा और इसकी बिक्री नोएडा में की जा रही है. इस कार की कीमत 5. 35 लाख रुपये रखी गई है.
यह एक्सएमए वेरिएंट की टाटा नेक्सन, 2018 मॉडल की है. यह 1. 5 पेट्रोल इंजन वाला ऑटोमेटिक मॉडल है, जो कि फर्स्ट ओनर है. यह कार अब तक 94,046 km चल चुकी है. इसमें DL-8C नंबर प्लेट मिलेगा और इसकी बिक्री नोएडा में की जा रही है. इस कार की कीमत भी 5. 35 लाख रुपये रखी गई है.
वेबसाइट पर मौजूद यह नेक्सन एक्सएम वेरिएंट, 2019 मॉडल की एक फर्स्ट ओनर कार है. यह 1. 2 पेट्रोल इंजन वाला मैनुअल मॉडल है. यह कार अब तक 47,428 km चली है. इसमें एचआर 26 नंबर प्लेट मिलेगा और इसकी बिक्री नोएडा में हो रही है. इस कार की कीमत 6. 98 लाख रुपये रखी गई है.
यह टाटा नेक्सन, 2021 मॉडल XE REVOTORQ वेरिएंट कार है. यह एक डीजल इंजन मैनुअल मॉडल है, जो कि फर्स्ट ओनर है. यह कार अब तक 29,918 km चल चुकी है. इसमें DL-12 नंबर प्लेट मिलेगा और इसकी बिक्री नोएडा में की जा रही है. इस कार की कीमत भी 8. 21 लाख रुपये रखी गई है.
Car loan Information:
|
टाटा नेक्सन Tata Nexon: टाटा नेक्सन एक ऐसी एसयूवी है, जिसकी डिमांड देश में कभी कम नहीं होती है, और यह हमेशा सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में शुमार रहती है. यह कार नई के साथ साथ पुरानी होने पर भी खूब बिकती है. पुरानी नेक्सन खरीदने का फायदा यह है कि कम कीमत में भी वही बेहतरीन बिल्ड क्वॉलिटी देखने को मिल जाती है. ऐसे में यदि आप भी एक पुरानी नेक्सन खरीदना चाहते हैं, तो हम आपको बताने वाले हैं कार्स चौबीस पर उपलब्ध कुछ ऐसे नेक्सन कारों के बारे में जो बहुत कम कीमत पर बिक्री के लिए मौजूद हैं. कार्स चौबीस पर मौजूद यह एक्सएम वेरिएंट नेक्सन, दो हज़ार अट्ठारह मॉडल की है. यह एक फर्स्ट ओनर कार है. यह एक. दो पेट्रोल इंजन वाला मैनुअल मॉडल है. यह कार अब तक चौहत्तर,दो सौ बानवे किलोमीटर चल चुकी है. इसमें यूपी चौदह नंबर प्लेट मिलेगा और इसकी बिक्री नोएडा में की जा रही है. इस कार की कीमत पाँच. पैंतीस लाख रुपये रखी गई है. यह एक्सएमए वेरिएंट की टाटा नेक्सन, दो हज़ार अट्ठारह मॉडल की है. यह एक. पाँच पेट्रोल इंजन वाला ऑटोमेटिक मॉडल है, जो कि फर्स्ट ओनर है. यह कार अब तक चौरानवे,छियालीस किलोमीटर चल चुकी है. इसमें DL-आठ डिग्री सेल्सियस नंबर प्लेट मिलेगा और इसकी बिक्री नोएडा में की जा रही है. इस कार की कीमत भी पाँच. पैंतीस लाख रुपये रखी गई है. वेबसाइट पर मौजूद यह नेक्सन एक्सएम वेरिएंट, दो हज़ार उन्नीस मॉडल की एक फर्स्ट ओनर कार है. यह एक. दो पेट्रोल इंजन वाला मैनुअल मॉडल है. यह कार अब तक सैंतालीस,चार सौ अट्ठाईस किलोमीटर चली है. इसमें एचआर छब्बीस नंबर प्लेट मिलेगा और इसकी बिक्री नोएडा में हो रही है. इस कार की कीमत छः. अट्ठानवे लाख रुपये रखी गई है. यह टाटा नेक्सन, दो हज़ार इक्कीस मॉडल XE REVOTORQ वेरिएंट कार है. यह एक डीजल इंजन मैनुअल मॉडल है, जो कि फर्स्ट ओनर है. यह कार अब तक उनतीस,नौ सौ अट्ठारह किलोमीटर चल चुकी है. इसमें DL-बारह नंबर प्लेट मिलेगा और इसकी बिक्री नोएडा में की जा रही है. इस कार की कीमत भी आठ. इक्कीस लाख रुपये रखी गई है. Car loan Information:
|
गीताराम कंसवाल ने बनाई अपने सुपरहिट गीतों की समलौण्या रस्याण!
मेरी बजरिया वीडियो हुई रिलीज़ ! डांस कॉमेडी का गजब मेल !
मेरी बजारया वीडियो गीत की कोटद्धार में शूटिंग शुरू! तस्वीरें आई सामने !
Gajra अनिशा रांगड़ और संजय भंडारी की हिट जोड़ी का नया गीत रिलीज़ !
|
गीताराम कंसवाल ने बनाई अपने सुपरहिट गीतों की समलौण्या रस्याण! मेरी बजरिया वीडियो हुई रिलीज़ ! डांस कॉमेडी का गजब मेल ! मेरी बजारया वीडियो गीत की कोटद्धार में शूटिंग शुरू! तस्वीरें आई सामने ! Gajra अनिशा रांगड़ और संजय भंडारी की हिट जोड़ी का नया गीत रिलीज़ !
|
जिला मुख्यालय जांजगीर में यात्री प्रतीक्षालयों का निर्माण कराया गया है जो केवल शासन के पैसे की बर्बादी ही नजर आ रही है। जहां बसें रुकती है वहां प्रतीक्षालय बनाने के बजाए दूसरे स्थानों पर बना दिया गया है।
जांजगीर-चांपा. ऐसे में यात्री प्रतीक्षालयों की कुर्सियां खाली रहती है और यात्री तपती धूप में बसों का इंतजार करने मजबूर हो रहे हैं। गौरतलब है कि जिला मुख्यालय जांजगीर में जय स्तंभ चौक के बगल में विष्णु मंदिर मार्ग मोड़ पर यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण कराया गया है लेकिन इस रुट पर चलने वाली यात्री बसें यहां नहीं रुकती बल्कि सड़क की दूसरी ओर यातायात पुलिस थाना के बगल में रुकती है। ऐसे में यात्री यहीं पर ठेले-गुमटी और पेड़ के चबूतरा में बैठकर बस के आने का इंतजार करते हैं। क्योंकि यात्री प्रतीक्षालय में बैठने की वजह से बसें छूटने का डर सताता है। इसी तरह कलेक्टोरेट मार्ग मोड़ पर भी इसी तरह यात्री प्रतीक्षालय बनाया गया है जहां भी कभी बसें नहीं रुकती। यहां पर यात्री सड़क किनारों पर खड़े रहते हैं और बसें सड़क से ही सवारी बिठा लेते हैं।
कचहरी चौक में जहां यात्री प्रतीक्षालय बनवाया गया है वहां सामने कई दुकानदार पसरा लगाकर दुकान लगाते हैं। ऐसे में यात्री प्रतीक्षालय दुकानों से घिर जाता है। लोगों के अंदर जाने के लिए परेशानी होती है। इसके चलते यात्री प्रतीक्षालय का उपयोग ही नहीं करते। दूसरी बड़ी वजह तो यही है कि यहां पर बस खड़ी होने की जगह ही नहीं है। मुख्य मार्ग होने से दिनभर भीड़भाड़ रहता है। ऐसे में यह समझ से परे हैं कि यहां पर यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण क्यों कराया गया। कलेक्टोरेट मार्ग मोड़ पर भी इसी तरह यात्री प्रतीक्षालय बनाया गया है जहां भी कभी बसें नहीं रुकती। यहां पर यात्री सड़क किनारों पर खड़े रहते हैं और बसें सड़क से ही सवारी बिठा लेते हैं।
|
जिला मुख्यालय जांजगीर में यात्री प्रतीक्षालयों का निर्माण कराया गया है जो केवल शासन के पैसे की बर्बादी ही नजर आ रही है। जहां बसें रुकती है वहां प्रतीक्षालय बनाने के बजाए दूसरे स्थानों पर बना दिया गया है। जांजगीर-चांपा. ऐसे में यात्री प्रतीक्षालयों की कुर्सियां खाली रहती है और यात्री तपती धूप में बसों का इंतजार करने मजबूर हो रहे हैं। गौरतलब है कि जिला मुख्यालय जांजगीर में जय स्तंभ चौक के बगल में विष्णु मंदिर मार्ग मोड़ पर यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण कराया गया है लेकिन इस रुट पर चलने वाली यात्री बसें यहां नहीं रुकती बल्कि सड़क की दूसरी ओर यातायात पुलिस थाना के बगल में रुकती है। ऐसे में यात्री यहीं पर ठेले-गुमटी और पेड़ के चबूतरा में बैठकर बस के आने का इंतजार करते हैं। क्योंकि यात्री प्रतीक्षालय में बैठने की वजह से बसें छूटने का डर सताता है। इसी तरह कलेक्टोरेट मार्ग मोड़ पर भी इसी तरह यात्री प्रतीक्षालय बनाया गया है जहां भी कभी बसें नहीं रुकती। यहां पर यात्री सड़क किनारों पर खड़े रहते हैं और बसें सड़क से ही सवारी बिठा लेते हैं। कचहरी चौक में जहां यात्री प्रतीक्षालय बनवाया गया है वहां सामने कई दुकानदार पसरा लगाकर दुकान लगाते हैं। ऐसे में यात्री प्रतीक्षालय दुकानों से घिर जाता है। लोगों के अंदर जाने के लिए परेशानी होती है। इसके चलते यात्री प्रतीक्षालय का उपयोग ही नहीं करते। दूसरी बड़ी वजह तो यही है कि यहां पर बस खड़ी होने की जगह ही नहीं है। मुख्य मार्ग होने से दिनभर भीड़भाड़ रहता है। ऐसे में यह समझ से परे हैं कि यहां पर यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण क्यों कराया गया। कलेक्टोरेट मार्ग मोड़ पर भी इसी तरह यात्री प्रतीक्षालय बनाया गया है जहां भी कभी बसें नहीं रुकती। यहां पर यात्री सड़क किनारों पर खड़े रहते हैं और बसें सड़क से ही सवारी बिठा लेते हैं।
|
रचा गया दशगुणोतर का स्पष्ट उल्लेख मिलता है । पहले हीब्रू, यूनानी, अरब आदि वर्णमाला के अक्षरों से संख्या का काम लेते थे । खलीफा वलीद के समय ( ई० स ७०५-७१५ ) तक अंकों का प्रचार नहीं था। इसके पश्चात बों ने भारतवर्ष से ये ग्रंक लिये, तभी तो ये हिन्दसे कहलाते हैं । यह शब्द ही हिन्द का ऋण स्वीकार करता है । फिर ये अरब द्वारा यूरोप में गये, तभी से Arabic Figures कहलाते हैं। उन्होंने अरब का ऋण स्वीकार किया और अरबों ने हमारा । इनों का प्रवेश एक भारतीय राजदूत द्वारा सन् ७७३ में बगदाद में हुआ । वहाँ से अरब में फैला । प्राचीन रोमन दस हजार तक की गिनती जानते थे, अरब लोग १००० तक ही जानते थे । इस सम्बन्ध में बेनी लिखता है - 'जिन भिन्न-भिन्न जातियों से मेरा सम्पर्क रहा, उन सबकी भाषा में संख्या सूचक चक्र के नामों ( इकाई, दहाई, सैकडा आदि) का मैने अध्ययन किया है जिससे मालूम हुआ कोई जाति एक हजार से आगे नहीं जानती। अरब लोग भी एक हजार तक (नाम) जानते है........ अपने अङ्क क्रम में, जो हजार से अधिक जानते वे हिन्दू हैं.. वे संख्या
सूचक क्रम को अठारहवे स्थान तक ले जाते हैं जिसको परार्द्ध कहते हैं' । १०० के दश गुणन के हमारे यहाँ अलग-अलग नाम थे जैसै सहस्त्र, प्रयुत, नियुत, प्रयुत, कोटि, अर्बुद न्यर्बुद, समुद्र, मध्य अन्त, परार्द्ध । वाल्मीकीय रामायण में सुग्रीव के सेनापतियों की सेनाओं की संख्या के वर्णन में इन संख्याओं का व्यावहारिक प्रयोग हुआ है। अर्बुद की संख्या के आगे का श्लोक देखिएःअर्बुदरबु दशतैर्मध्यैश्चान्त्यैश्च वानराः ।
समुदाश्च परार्द्धाश्च हरयो हरियूथपाः ॥ वा. रा. कि का ३८१३१
अर्थात अरब ( हजार शङ्ख का एक अरब ) सौ अरब का एक मध्य तथा अन्तवाले तथा समुद्र वाले और परार्द्ध वाले वानर यूथों के यूथप या सेनापति थे ।
बीज गणित को अंग्रेजी में ऐलजेब्रा कहते हैं । जिन शब्दों में प्रल लगा होता
|
रचा गया दशगुणोतर का स्पष्ट उल्लेख मिलता है । पहले हीब्रू, यूनानी, अरब आदि वर्णमाला के अक्षरों से संख्या का काम लेते थे । खलीफा वलीद के समय तक अंकों का प्रचार नहीं था। इसके पश्चात बों ने भारतवर्ष से ये ग्रंक लिये, तभी तो ये हिन्दसे कहलाते हैं । यह शब्द ही हिन्द का ऋण स्वीकार करता है । फिर ये अरब द्वारा यूरोप में गये, तभी से Arabic Figures कहलाते हैं। उन्होंने अरब का ऋण स्वीकार किया और अरबों ने हमारा । इनों का प्रवेश एक भारतीय राजदूत द्वारा सन् सात सौ तिहत्तर में बगदाद में हुआ । वहाँ से अरब में फैला । प्राचीन रोमन दस हजार तक की गिनती जानते थे, अरब लोग एक हज़ार तक ही जानते थे । इस सम्बन्ध में बेनी लिखता है - 'जिन भिन्न-भिन्न जातियों से मेरा सम्पर्क रहा, उन सबकी भाषा में संख्या सूचक चक्र के नामों का मैने अध्ययन किया है जिससे मालूम हुआ कोई जाति एक हजार से आगे नहीं जानती। अरब लोग भी एक हजार तक जानते है........ अपने अङ्क क्रम में, जो हजार से अधिक जानते वे हिन्दू हैं.. वे संख्या सूचक क्रम को अठारहवे स्थान तक ले जाते हैं जिसको परार्द्ध कहते हैं' । एक सौ के दश गुणन के हमारे यहाँ अलग-अलग नाम थे जैसै सहस्त्र, प्रयुत, नियुत, प्रयुत, कोटि, अर्बुद न्यर्बुद, समुद्र, मध्य अन्त, परार्द्ध । वाल्मीकीय रामायण में सुग्रीव के सेनापतियों की सेनाओं की संख्या के वर्णन में इन संख्याओं का व्यावहारिक प्रयोग हुआ है। अर्बुद की संख्या के आगे का श्लोक देखिएःअर्बुदरबु दशतैर्मध्यैश्चान्त्यैश्च वानराः । समुदाश्च परार्द्धाश्च हरयो हरियूथपाः ॥ वा. रा. कि का अड़तीस हज़ार एक सौ इकतीस अर्थात अरब सौ अरब का एक मध्य तथा अन्तवाले तथा समुद्र वाले और परार्द्ध वाले वानर यूथों के यूथप या सेनापति थे । बीज गणित को अंग्रेजी में ऐलजेब्रा कहते हैं । जिन शब्दों में प्रल लगा होता
|
रांचीः श्रावण माह के शुक्ल पंचमी को प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला पर्व नाग पंचमी है जो इस वर्ष 25 जुलाई दिन शनिवार को पूरे देश में मनाई जा रही है. मान्यता के अनुसार इस दिन नागों की पूजा की जाती है वास्तविक अर्थों में नाग पंचमी का पर्व उनकी सुरक्षा संवर्धन और संरक्षण के लिए प्रेरणा देता है. देवी भागवत में उल्लेखित है पुराने समय में ऋषि-मुनियों ने नागों की पूजा अनेकों व्रत पूजन के साथ की इस दिन उनकी पूजा के साथ उनको गाय के दूध से स्नान कराया जाता है उन को दूध नहीं पिलाया जा सकता है क्योंकि वह पूर्णता शाकाहारी नहीं है.
नाग पंचमी का प्रारंभ 24 जुलाई दिन शुक्रवार दोपहर 2:35 से 25 जुलाई शनिवार 12:03 तक मनाया जाएगा विशेषकर पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः 5: 38 से 8:22 तक अति उत्तम रहेगा.
आज के दिन घर के दरवाजे पर दोनों ओर गाय के गोबर से नाग की आकृति बनाना चाहिए.
इस दिन दही दूब घास गंध कुशा अक्षत फूल आदि से पूजन करना चाहिए.
इस दिन उनके नाम से भोजन एवं दान दक्षिणा निकालकर किसी धर्म स्थल पर दान देना चाहिए.
इस दिन नागों को दुग्ध स्नान कराकर उनके डर से मुक्ति प्राप्त होती है.
नागों की पूजा में विशेषकर हल्दी का प्रयोग अवश्य करना चाहिए.
अनंत वासुकि शेष पद्मनाम कंबल धृतराष्ट्र शंखपाल कालिए तथा तक्षक आदि इन सभी नागों के नाम हल्दी चंदन के मिश्रित लेप से दीवार पर लिखना चाहिए.
लोहे की कढ़ाई में कोई भी चीज बना कर खाना वर्जित माना गया है .
आज के दिन भूमि की खुदाई करना वर्जित माना गया है.
आज के दिन नागदेव की तस्वीर या मिट्टी या धातु से बनी प्रतिमा का ही पूजन करना चाहिए. आज के दिन संभव हो तो सपेरों से नागों को खरीद कर उन्हें मुक्त कर देना चाहिए.
|
रांचीः श्रावण माह के शुक्ल पंचमी को प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला पर्व नाग पंचमी है जो इस वर्ष पच्चीस जुलाई दिन शनिवार को पूरे देश में मनाई जा रही है. मान्यता के अनुसार इस दिन नागों की पूजा की जाती है वास्तविक अर्थों में नाग पंचमी का पर्व उनकी सुरक्षा संवर्धन और संरक्षण के लिए प्रेरणा देता है. देवी भागवत में उल्लेखित है पुराने समय में ऋषि-मुनियों ने नागों की पूजा अनेकों व्रत पूजन के साथ की इस दिन उनकी पूजा के साथ उनको गाय के दूध से स्नान कराया जाता है उन को दूध नहीं पिलाया जा सकता है क्योंकि वह पूर्णता शाकाहारी नहीं है. नाग पंचमी का प्रारंभ चौबीस जुलाई दिन शुक्रवार दोपहर दो:पैंतीस से पच्चीस जुलाई शनिवार बारह:तीन तक मनाया जाएगा विशेषकर पूजा का शुभ मुहूर्त प्रातः पाँच: अड़तीस से आठ:बाईस तक अति उत्तम रहेगा. आज के दिन घर के दरवाजे पर दोनों ओर गाय के गोबर से नाग की आकृति बनाना चाहिए. इस दिन दही दूब घास गंध कुशा अक्षत फूल आदि से पूजन करना चाहिए. इस दिन उनके नाम से भोजन एवं दान दक्षिणा निकालकर किसी धर्म स्थल पर दान देना चाहिए. इस दिन नागों को दुग्ध स्नान कराकर उनके डर से मुक्ति प्राप्त होती है. नागों की पूजा में विशेषकर हल्दी का प्रयोग अवश्य करना चाहिए. अनंत वासुकि शेष पद्मनाम कंबल धृतराष्ट्र शंखपाल कालिए तथा तक्षक आदि इन सभी नागों के नाम हल्दी चंदन के मिश्रित लेप से दीवार पर लिखना चाहिए. लोहे की कढ़ाई में कोई भी चीज बना कर खाना वर्जित माना गया है . आज के दिन भूमि की खुदाई करना वर्जित माना गया है. आज के दिन नागदेव की तस्वीर या मिट्टी या धातु से बनी प्रतिमा का ही पूजन करना चाहिए. आज के दिन संभव हो तो सपेरों से नागों को खरीद कर उन्हें मुक्त कर देना चाहिए.
|
ब्रह्मपुरी/दि. 18 - आयुर्वेदिक दवा लेने हेतु अपनी कार से मध्यप्रदेश जाते समय एक दुपहिया सवार को बचाने के प्रयास में हुए भीषण सडक हादसे में ब्रह्मपुरी निवासी एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत हो गई. यह हादसा रविवार 16 अप्रैल की सुबह मध्यप्रदेश के नेवारा गांव के पास घटित हुआ. मृतकों की शिनाख्त ब्रह्मपुरी के श्रीनगर कालोनी निवासी विजय बडोले (62), कुंदा बडोले (52), गिरिश बडोले (32) व मोनाली बडोले-चौधरी के तौर पर हुई है.
जानकारी के मुताबिक श्रीनगर कालोनी निवासी रापनि के सेवानिवृत्त बस चालक विजय गणपत बडोले अपनी पत्नी कुंदा बडोले, अभियंता बेटे गिरिश बडोले, बहु बबीता बडोले, विवाहित बेटी मोनाली बडोले-चौधरी तथा 2 नातीयों के साथ अपनी कार से मध्यप्रदेश के बैहर स्थित कुमादेही जा रहे थे. इस समय कार खुद विजय बडोले चला रहे थे. मध्यप्रदेश के किरणापुर के पास नेवारा गांव में सामने से आ रहे एक दुपहिया चालक को बचाने के चक्कर में विजय बडोले का अपने वाहन से नियंत्रण छूट गया और उनकी तेज रफ्तार कार रास्ते के किनारे पेड से जा टकरी. इस हादसे में कुंदा बडोले, गिरिश बडोले व मोनाली बडोले-चौधरी की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं बुरी तरह घायल विजय बडोले की गोंदिया के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई. इस हादसे में बबीता बडोले तथा 2 बच्चे भी गंभीर रुप से घायल हुए है. जिन पर गोंदिया के अस्पताल में इलाज किया जा रहा है.
|
ब्रह्मपुरी/दि. अट्ठारह - आयुर्वेदिक दवा लेने हेतु अपनी कार से मध्यप्रदेश जाते समय एक दुपहिया सवार को बचाने के प्रयास में हुए भीषण सडक हादसे में ब्रह्मपुरी निवासी एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई. यह हादसा रविवार सोलह अप्रैल की सुबह मध्यप्रदेश के नेवारा गांव के पास घटित हुआ. मृतकों की शिनाख्त ब्रह्मपुरी के श्रीनगर कालोनी निवासी विजय बडोले , कुंदा बडोले , गिरिश बडोले व मोनाली बडोले-चौधरी के तौर पर हुई है. जानकारी के मुताबिक श्रीनगर कालोनी निवासी रापनि के सेवानिवृत्त बस चालक विजय गणपत बडोले अपनी पत्नी कुंदा बडोले, अभियंता बेटे गिरिश बडोले, बहु बबीता बडोले, विवाहित बेटी मोनाली बडोले-चौधरी तथा दो नातीयों के साथ अपनी कार से मध्यप्रदेश के बैहर स्थित कुमादेही जा रहे थे. इस समय कार खुद विजय बडोले चला रहे थे. मध्यप्रदेश के किरणापुर के पास नेवारा गांव में सामने से आ रहे एक दुपहिया चालक को बचाने के चक्कर में विजय बडोले का अपने वाहन से नियंत्रण छूट गया और उनकी तेज रफ्तार कार रास्ते के किनारे पेड से जा टकरी. इस हादसे में कुंदा बडोले, गिरिश बडोले व मोनाली बडोले-चौधरी की मौके पर ही मौत हो गई. वहीं बुरी तरह घायल विजय बडोले की गोंदिया के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हुई. इस हादसे में बबीता बडोले तथा दो बच्चे भी गंभीर रुप से घायल हुए है. जिन पर गोंदिया के अस्पताल में इलाज किया जा रहा है.
|
नयी दिल्लीः भारतीय पुरुष हॉकी टीम बेल्जियम दौरे से वापस लौट आई है. शुक्रवार देर रात टीम दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर उतरी. भारतीय टीम ने अपने बेल्जियम दौरे में सभी पांच मैच जीते. शुरुआती मैंच में भारत ने बेल्जियम को 2-0 से हराया. अगल दो मैचों में भारतीय टीम ने स्पेन पर 6-1 और 5-1 से जीत दर्ज की. दौरे के समापन से पहले भारतीय हॉकी टीम ने दो और मैचों में जीत दर्ज की.
भारतीय टीम ने हाल के दिनों मेें अपने प्रदर्शन में काफी सुधार किया है. बेल्जियम दौरे से वापस आने के बाद भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह ने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने कहा कि हमने बेल्जियम और स्पेन के खिलाफ खेला और जीत दर्ज की.
मनप्रीत सिंह ने कहा कि इस जीत की बदौलत हमारा आत्मविश्वास का स्तर काफी ऊपर है. उन्होंने कहा कि बेल्जियम और स्पेन के खिलाफ किया गया शानदार प्रदर्शन हमें ओलंपिक के लिए होने वाले क्वालीफाइंग राउंड में काफी मदद करेगा.
मनप्रीत सिंह ने कहा कि इस टूर में हमने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. अब टीम का ध्यान क्लावीफाइंग राउंड पर है जिसका आयोजन नवंबर में होने जा रहा है.
|
नयी दिल्लीः भारतीय पुरुष हॉकी टीम बेल्जियम दौरे से वापस लौट आई है. शुक्रवार देर रात टीम दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर उतरी. भारतीय टीम ने अपने बेल्जियम दौरे में सभी पांच मैच जीते. शुरुआती मैंच में भारत ने बेल्जियम को दो-शून्य से हराया. अगल दो मैचों में भारतीय टीम ने स्पेन पर छः-एक और पाँच-एक से जीत दर्ज की. दौरे के समापन से पहले भारतीय हॉकी टीम ने दो और मैचों में जीत दर्ज की. भारतीय टीम ने हाल के दिनों मेें अपने प्रदर्शन में काफी सुधार किया है. बेल्जियम दौरे से वापस आने के बाद भारतीय हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह ने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने कहा कि हमने बेल्जियम और स्पेन के खिलाफ खेला और जीत दर्ज की. मनप्रीत सिंह ने कहा कि इस जीत की बदौलत हमारा आत्मविश्वास का स्तर काफी ऊपर है. उन्होंने कहा कि बेल्जियम और स्पेन के खिलाफ किया गया शानदार प्रदर्शन हमें ओलंपिक के लिए होने वाले क्वालीफाइंग राउंड में काफी मदद करेगा. मनप्रीत सिंह ने कहा कि इस टूर में हमने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. अब टीम का ध्यान क्लावीफाइंग राउंड पर है जिसका आयोजन नवंबर में होने जा रहा है.
|
बहराइच। गायत्री विद्यापीठ पीजी कॉलेज रिसिया में बिरसा मुंडा पर शाशन के निर्देशानुसार सभा का आयोजन किया गया। आयोजन के सर्वप्रथम बीकॉम फर्स्ट सेमेस्टर की छात्रा पूजा यादव सुगंधित सिंह नैंसी गुप्ता ने हे शारदे मां सरस्वती वंदना से सभा की शुरुआत किया। सभा का संचालन कर रहे डॉ दुर्गेश कुमार श्रीवास्तव ने बिरसा मुंडा के बारे में बताते हुए कहा की बिरसा मुंडा आदिवासी जनजाति से संबंधित थे यह 25 वर्ष तक जीवित रहे इन्होंने कई हिंसा में प्रतिभाग किया और अपने जनजातियों के लिए कार्य किए तथा स्वतंत्रता आंदोलन में भी भागीदारी निभाई।
बी0ए. थर्ड सेमेस्टर की छात्रा श्रेया श्रीवास्तव ने बिरसा मुंडा की जयंती पर कहा कि यह एक आदिवासी दल के नेता तथा महान सेनानी थे और इनको लोग भगवान का अवतार मानते थे। बी ए. थर्ड सेमेस्टर की छात्रा कशिश गुप्ता ने इनके कहा अंग्रेजों से विद्रोह का नारा दिया इनकी पुण्यतिथि 9 जून को मनाई जाती है और पार्लियामेंट में इनकी फोटो भी लगी है। छात्र अनुज गुप्ता ने कहा बिरसा मुंडा तीर और धनुष के माध्यम से युद्ध में भाग लिया करते थे।
बी ए. फर्स्ट सेमेस्टर चंदन बाल्मिक ने उनके जीवन चरित्र के बारे में जानकारी दें बीकॉम फर्स्ट सेमेस्टर की छात्रा सुगंधी सिंह ने बताया कि अंग्रेजों से लड़ने के लिए उन्होंने मुंडा मंच का गठन किया डॉ सुभाष चंद्र ने बताया बिरसा मुंडा एक विशेष वर्ग से संबंधित मुंडा जनजाति थे बिरसा मुंडा की जयंती आज हम सब लोग इसलिए मना रहे हैं जिससे कि हम सबको या पता चले कि उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी भूमिका किस तरह से निभाई मुंडा जनजाति में बिरसा मुंडा को भगवान के रूप में पूजा जाता था।
डॉ भावना श्रीवास्तव ने बिरसा मुंडा पर विचार देते हुए बताया कि यह अपने समाज की समस्याओं को सुलझाने के लिए आगे आए तथा जन सेवा में रहे और बाहर नियंत्रण को समाप्त करने में अपना कदम बढ़ाया । प्रो मिथिलेश कुमार चौबे ने बताया कि ये जनजाति बहुत ही दुर्गम स्थान पर पाए जाते थे भारतवर्ष में तमाम जनजाति के लोग मिलते हैं जिसमें मुंडा जनजाति आए जन आंदोलन के लिए खड़े रहे और स्वतंत्रता में अपनी भागीदारी जमाई अंत में प्रोफेसर दिव्य दर्शन तिवारी प्राचार्य ने बताया आज बिरसा मुंडा की जयंती शासन के निर्देशानुसार मनाया जा रहा है बिरसा मुंडा झारखंड से संबंधित थे और उन्होंने अंग्रेजों से मोर्चा लिया और इनको जननायक भी कहा जाता है ऐसे महापुरुषों की जयंती मनाया जाना हम सभी का कर्तव्य है। इस अवसर पर डॉक्टर संजय कुमार श्रीवास्तव धर्मेंद्र श्रीवास्तव रविंद्र कुमार नंदन श्रीवास्तव रीकेस्वर प्रसाद आदि लोग उपस्थित रहे।
|
बहराइच। गायत्री विद्यापीठ पीजी कॉलेज रिसिया में बिरसा मुंडा पर शाशन के निर्देशानुसार सभा का आयोजन किया गया। आयोजन के सर्वप्रथम बीकॉम फर्स्ट सेमेस्टर की छात्रा पूजा यादव सुगंधित सिंह नैंसी गुप्ता ने हे शारदे मां सरस्वती वंदना से सभा की शुरुआत किया। सभा का संचालन कर रहे डॉ दुर्गेश कुमार श्रीवास्तव ने बिरसा मुंडा के बारे में बताते हुए कहा की बिरसा मुंडा आदिवासी जनजाति से संबंधित थे यह पच्चीस वर्ष तक जीवित रहे इन्होंने कई हिंसा में प्रतिभाग किया और अपने जनजातियों के लिए कार्य किए तथा स्वतंत्रता आंदोलन में भी भागीदारी निभाई। बीशून्यए. थर्ड सेमेस्टर की छात्रा श्रेया श्रीवास्तव ने बिरसा मुंडा की जयंती पर कहा कि यह एक आदिवासी दल के नेता तथा महान सेनानी थे और इनको लोग भगवान का अवतार मानते थे। बी ए. थर्ड सेमेस्टर की छात्रा कशिश गुप्ता ने इनके कहा अंग्रेजों से विद्रोह का नारा दिया इनकी पुण्यतिथि नौ जून को मनाई जाती है और पार्लियामेंट में इनकी फोटो भी लगी है। छात्र अनुज गुप्ता ने कहा बिरसा मुंडा तीर और धनुष के माध्यम से युद्ध में भाग लिया करते थे। बी ए. फर्स्ट सेमेस्टर चंदन बाल्मिक ने उनके जीवन चरित्र के बारे में जानकारी दें बीकॉम फर्स्ट सेमेस्टर की छात्रा सुगंधी सिंह ने बताया कि अंग्रेजों से लड़ने के लिए उन्होंने मुंडा मंच का गठन किया डॉ सुभाष चंद्र ने बताया बिरसा मुंडा एक विशेष वर्ग से संबंधित मुंडा जनजाति थे बिरसा मुंडा की जयंती आज हम सब लोग इसलिए मना रहे हैं जिससे कि हम सबको या पता चले कि उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी भूमिका किस तरह से निभाई मुंडा जनजाति में बिरसा मुंडा को भगवान के रूप में पूजा जाता था। डॉ भावना श्रीवास्तव ने बिरसा मुंडा पर विचार देते हुए बताया कि यह अपने समाज की समस्याओं को सुलझाने के लिए आगे आए तथा जन सेवा में रहे और बाहर नियंत्रण को समाप्त करने में अपना कदम बढ़ाया । प्रो मिथिलेश कुमार चौबे ने बताया कि ये जनजाति बहुत ही दुर्गम स्थान पर पाए जाते थे भारतवर्ष में तमाम जनजाति के लोग मिलते हैं जिसमें मुंडा जनजाति आए जन आंदोलन के लिए खड़े रहे और स्वतंत्रता में अपनी भागीदारी जमाई अंत में प्रोफेसर दिव्य दर्शन तिवारी प्राचार्य ने बताया आज बिरसा मुंडा की जयंती शासन के निर्देशानुसार मनाया जा रहा है बिरसा मुंडा झारखंड से संबंधित थे और उन्होंने अंग्रेजों से मोर्चा लिया और इनको जननायक भी कहा जाता है ऐसे महापुरुषों की जयंती मनाया जाना हम सभी का कर्तव्य है। इस अवसर पर डॉक्टर संजय कुमार श्रीवास्तव धर्मेंद्र श्रीवास्तव रविंद्र कुमार नंदन श्रीवास्तव रीकेस्वर प्रसाद आदि लोग उपस्थित रहे।
|
रायपुर। नगर पालिक निगम रायपुर के पंडित सुन्दर लाल शर्मा वार्ड क्रमांक 42 के क्षेत्र में निगम के अनुबंधित सफाई ठेकेदार राजू कश्यप द्वारा ठेका पद्धति से जारी सफाई व्यवस्था के तहत वार्ड के लिए निर्धारित 30 सफाई कामगारों के बजाए एक सप्ताह में तीन चार दिन केवल 12 ठेका सफाई कामगार सुन्दरनगर वार्ड के लिए भेजे। 18 सफाई कामगार अनुपस्थित रहे। यह स्थिति देखकर एवं इससे सफाई कार्य वार्ड में लगातार प्रभावित होते देखकर संबंधित सुन्दरनगर वार्ड पार्षद मृत्युंजय दुबे ने सघन भ्रमण के दौरान 18 सफाई कामगार कम सप्ताह में तीन चार दिन देखकर इसे लेकर गहन नाराजगी व्यक्त की एवं जोन 5 के जोन स्वास्थ्य अधिकारी को नियमानुसार तत्काल सफाई ठेकेदार को नोटिस देकर जुमार्ना करने के निर्देश दिये।
जोन स्वास्थ्य अधिकारी भूषण ठाकुर ने जोन स्वास्थ्य विभाग की ओर से तत्काल सुन्दरनगर के अनुबंधित ठेकेदार राजू कश्यप को नोटिस जारी कर निर्धारित से कम संख्या में ठेका सफाई कामगार उपलब्ध करवाने पर 15 हजार रुपये का जुमार्ना लगाया एवं अव्यवस्था पर नाराजगी व्यक्त करते हुए भविष्य के लिए व्यवस्था सुधारने की चेतावनी जोन 5 स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी।
|
रायपुर। नगर पालिक निगम रायपुर के पंडित सुन्दर लाल शर्मा वार्ड क्रमांक बयालीस के क्षेत्र में निगम के अनुबंधित सफाई ठेकेदार राजू कश्यप द्वारा ठेका पद्धति से जारी सफाई व्यवस्था के तहत वार्ड के लिए निर्धारित तीस सफाई कामगारों के बजाए एक सप्ताह में तीन चार दिन केवल बारह ठेका सफाई कामगार सुन्दरनगर वार्ड के लिए भेजे। अट्ठारह सफाई कामगार अनुपस्थित रहे। यह स्थिति देखकर एवं इससे सफाई कार्य वार्ड में लगातार प्रभावित होते देखकर संबंधित सुन्दरनगर वार्ड पार्षद मृत्युंजय दुबे ने सघन भ्रमण के दौरान अट्ठारह सफाई कामगार कम सप्ताह में तीन चार दिन देखकर इसे लेकर गहन नाराजगी व्यक्त की एवं जोन पाँच के जोन स्वास्थ्य अधिकारी को नियमानुसार तत्काल सफाई ठेकेदार को नोटिस देकर जुमार्ना करने के निर्देश दिये। जोन स्वास्थ्य अधिकारी भूषण ठाकुर ने जोन स्वास्थ्य विभाग की ओर से तत्काल सुन्दरनगर के अनुबंधित ठेकेदार राजू कश्यप को नोटिस जारी कर निर्धारित से कम संख्या में ठेका सफाई कामगार उपलब्ध करवाने पर पंद्रह हजार रुपये का जुमार्ना लगाया एवं अव्यवस्था पर नाराजगी व्यक्त करते हुए भविष्य के लिए व्यवस्था सुधारने की चेतावनी जोन पाँच स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी।
|
बसंतरायः अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर जिला महिला कांग्रेस द्वारा प्रखंड के शाहपुर बेलडीहा में कार्यक्रम आयोजित किया गया। महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सोनी झा की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं के उत्थान एवं सम्मान की चर्चा की गई। श्रीमती झा ने कहा कि वर्तमान समय में महिलाएं समाज के सभी क्षेत्र में सफलता का परचम लहरा रही हैं। सेना से लेकर अंतरिक्ष तक में महिलाएं पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। पढ़ाई के क्षेत्र में भी लड़कियां डंका बजा रही हैं। लेकिन अभी भी बहुत सारे ऐसे क्षेत्र हैं जहां महिलाओं को असमानता का सामना करना पड़ रहा है। अपने हक की लड़ाई के लिए महिलाओं को जागरूक होने की आवश्यकता है। मौके पर प्रखंड महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अनवरी बेगम, उपाध्यक्ष सविता देवी, सिफत नाज, बेबी देवी, संगीता देवी, तबस्सुम, जाहिदा, कंचन कुमारी, उषा सिंह आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
|
बसंतरायः अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर जिला महिला कांग्रेस द्वारा प्रखंड के शाहपुर बेलडीहा में कार्यक्रम आयोजित किया गया। महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सोनी झा की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं के उत्थान एवं सम्मान की चर्चा की गई। श्रीमती झा ने कहा कि वर्तमान समय में महिलाएं समाज के सभी क्षेत्र में सफलता का परचम लहरा रही हैं। सेना से लेकर अंतरिक्ष तक में महिलाएं पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। पढ़ाई के क्षेत्र में भी लड़कियां डंका बजा रही हैं। लेकिन अभी भी बहुत सारे ऐसे क्षेत्र हैं जहां महिलाओं को असमानता का सामना करना पड़ रहा है। अपने हक की लड़ाई के लिए महिलाओं को जागरूक होने की आवश्यकता है। मौके पर प्रखंड महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अनवरी बेगम, उपाध्यक्ष सविता देवी, सिफत नाज, बेबी देवी, संगीता देवी, तबस्सुम, जाहिदा, कंचन कुमारी, उषा सिंह आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
|
Don't Miss!
- Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण?
विद्या बालन स्टारर तुम्हारी सुलु का आज नया पोस्टर रिलीज किया गया है जो काफी मजेदार है। इस पोस्टर को देखने के बाद शायद आप भी फिल्म का बेसब्री से इंतजार करने लगे। इसमें भी विद्या बालन काफी मजाकिया अंदाज में नजर आ रही हैं।
तुम्हारी सुलु के ट्रेलर में भी विद्या बालन को काफी पसंद किया गया था। फिल्म में विद्या बालन के अलावा मानव कौल और नेहा धुपिया भी लीड हैं दमदार किरदार में नजर आ रहे हैं। फिल्म 17 नवंबर को रिलीज हो रही है।
विद्या बालन का इस फिल्म में किरदार बेहद मनमौजी शख्स का है। वो एक घरेलू महिला का किरदार निभा रही हैं जो रेडियो जॉकी बन जाती है। फिल्म की टैग लाइन है 'मैं कर सकती है'। विद्या के पति का किरदार मानव कौल निभा रहे हैं। आपको बता दें कि पहले फिल्म 24 नवंबर को रिलीज होने वाली थी लेकिन अब 17 नवंबर को रिलीज होगी।
विद्या बालन इसके पहले लगे रहो मुन्ना भाई में भी रेडियो जॉकी का किरदार निभा चुकी हैं। एक इंटरव्यू में विद्या बालन ने कहा था कि "मुझे पता है कि तुम्हारी सुलु को दर्शक जरूर पसंद करेंगे। ऐसी फिल्में समाज का आइना होती है। तुम्हारी सुलु और टॉयलेट एक प्रेम कथा जैसी फिल्में बननी चाहिए। "
|
Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? विद्या बालन स्टारर तुम्हारी सुलु का आज नया पोस्टर रिलीज किया गया है जो काफी मजेदार है। इस पोस्टर को देखने के बाद शायद आप भी फिल्म का बेसब्री से इंतजार करने लगे। इसमें भी विद्या बालन काफी मजाकिया अंदाज में नजर आ रही हैं। तुम्हारी सुलु के ट्रेलर में भी विद्या बालन को काफी पसंद किया गया था। फिल्म में विद्या बालन के अलावा मानव कौल और नेहा धुपिया भी लीड हैं दमदार किरदार में नजर आ रहे हैं। फिल्म सत्रह नवंबर को रिलीज हो रही है। विद्या बालन का इस फिल्म में किरदार बेहद मनमौजी शख्स का है। वो एक घरेलू महिला का किरदार निभा रही हैं जो रेडियो जॉकी बन जाती है। फिल्म की टैग लाइन है 'मैं कर सकती है'। विद्या के पति का किरदार मानव कौल निभा रहे हैं। आपको बता दें कि पहले फिल्म चौबीस नवंबर को रिलीज होने वाली थी लेकिन अब सत्रह नवंबर को रिलीज होगी। विद्या बालन इसके पहले लगे रहो मुन्ना भाई में भी रेडियो जॉकी का किरदार निभा चुकी हैं। एक इंटरव्यू में विद्या बालन ने कहा था कि "मुझे पता है कि तुम्हारी सुलु को दर्शक जरूर पसंद करेंगे। ऐसी फिल्में समाज का आइना होती है। तुम्हारी सुलु और टॉयलेट एक प्रेम कथा जैसी फिल्में बननी चाहिए। "
|
हा मैने सुना है ।
आद० । उसे रायबहादुर मिली है और इस खुशी में वह सारनाथ के अपने बागीचे में एक पार्टी देने वाला है ।
नौ । अच्छा ?
आद० । वह पार्टी सिर्फ उसके दोस्तों की ही नहीं होगी बल्कि उनकी स्त्रियां भी उसमें आवेंगी जिनके लिये सवारी का खास और बहुत अच्छा बंदोबस्त किया गया है। इसके इलावे कोई आंध्र दर्जन रंडियां भी मौजूद रहेगी।
नौ० । तब ?
आद० । हम लोगों की राय है कि उस वक्त उस बागीचे पर छापा मारा जाय । बड़ो गहरी रकम हाथ आवेगी । मौ० । हैं ! औरतों पर छापा !!
आद० । क्या हर्ज है ? हम लोगों का उद्देश्य तो सब तरह से पाक और साफ है। औरतों का केवल जेवर उतरवा लिया जायगा, और किसी तरह से उनको न तकलीफ दी जायगी न वेइजती की जायगी । जितनी औरतें आवेंगी सब अमीरो हो की होगी जिन्हें कुछ जेवर निकल जाना कुछ भी न अखरेगा मगर हम लोगों को लाख डेढ़ लाख रुपया मिल जाना कोई ताज्जुब नहीं।
आद० । यह भी मो सोचिये कि वह एक नये रायबहादुर बने हुए की दी गई पार्टी होगी। सब राय साहब राज्यहादुर
|
हा मैने सुना है । आदशून्य । उसे रायबहादुर मिली है और इस खुशी में वह सारनाथ के अपने बागीचे में एक पार्टी देने वाला है । नौ । अच्छा ? आदशून्य । वह पार्टी सिर्फ उसके दोस्तों की ही नहीं होगी बल्कि उनकी स्त्रियां भी उसमें आवेंगी जिनके लिये सवारी का खास और बहुत अच्छा बंदोबस्त किया गया है। इसके इलावे कोई आंध्र दर्जन रंडियां भी मौजूद रहेगी। नौशून्य । तब ? आदशून्य । हम लोगों की राय है कि उस वक्त उस बागीचे पर छापा मारा जाय । बड़ो गहरी रकम हाथ आवेगी । मौशून्य । हैं ! औरतों पर छापा !! आदशून्य । क्या हर्ज है ? हम लोगों का उद्देश्य तो सब तरह से पाक और साफ है। औरतों का केवल जेवर उतरवा लिया जायगा, और किसी तरह से उनको न तकलीफ दी जायगी न वेइजती की जायगी । जितनी औरतें आवेंगी सब अमीरो हो की होगी जिन्हें कुछ जेवर निकल जाना कुछ भी न अखरेगा मगर हम लोगों को लाख डेढ़ लाख रुपया मिल जाना कोई ताज्जुब नहीं। आदशून्य । यह भी मो सोचिये कि वह एक नये रायबहादुर बने हुए की दी गई पार्टी होगी। सब राय साहब राज्यहादुर
|
वहाँ लाखों ऐसी नदियाँ हैं, जिनसे जल लेकर इन्द्र वर्षा करते हैं। उनके नाम और परिमाणकी संख्या बताना कठिन ही नहीं, असम्भव है । वे सभी श्रेष्ठ नदियाँ परम पुण्यमयी हैं । उस द्वीप में लोकसम्मानित चार पवित्र जनपद हैं ।। ३५ ॥
मङ्गाश्च मशकाश्चैव मानसा मन्दगास्तथा ।
मङ्गा ब्राह्मणभूयिष्ठाः स्वकर्मनिरता नृप । ३६ ।।
उनके नाम इस प्रकार हैं - मङ्ग, मशक, मानस तथा मन्दग । नरेश्वर ! उनमें से मङ्ग जनपद में अधिकतर ब्राह्मण निवास करते हैं । वे सबके सब अपने कर्तव्य के पालन में तत्पर रहते हैं ।। ३६ ।।
मशकेषु तु राजन्या धार्मिकाः सर्वकामदाः ।
मानसाश्च महाराज वैश्यधर्मोपजीविनः ।। ३७ ।। सर्वकामसमायुक्ताः शूरा धर्मार्थनिश्चिताः ।
महाराज ! मशक जनपद में सम्पूर्ण कामनाओंके देनेवाले धर्मात्मा क्षत्रिय निवास करते हैं । मानस जनपदके निवासी वैश्यवृत्तिसे जीवन निर्वाह करते । वे सर्वभोगसम्पन्न, शूरवीर, धर्म और अर्थको समझनेवाले एवं दृढ़निश्चयी होते हैं ! ३७ ।।
शूद्रास्तु मन्दगा नित्यं पुरुषा धर्मशीनिनः ।। ३८ ।। मन्दग जनपदमें शूद्र रहते हैं । वे भी धर्मात्मा होते हैं ।। ३८ ।।
न तत्र राजा राजेन्द्र न दण्डो न च दण्डिकः । स्वधर्मर्णव धर्मज्ञास्ते रक्षन्ति परस्परम् ॥ ३६॥
राजेन्द्र ! वहाँ न कोई राजा है, न दण्ड है और न दण्ड देनेवाला है । वहाँके लोग धर्म के ज्ञाता हैं और स्वधर्मपालनके ही प्रभावसे एक दूसरेकी रक्षा करते हैं ।। ३६ ।।
एतावदेव शक्यं तु तत्र द्वीपे प्रभाषितुम् ।
एतदेव च श्रोतव्यं शाकद्वीपे महौजसि ॥ ४० ॥
महाराज ! उस महान् तेजोमय शाकद्वीपके सम्बन्धमें इतना ही कहा जा सकता है और इतना ही सुनना चाहिये ॥ ४० ॥
इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भूमिपर्वणि शाकद्वीपबर्णने एकादशोऽध्यायः ।। ११ ।।
|
वहाँ लाखों ऐसी नदियाँ हैं, जिनसे जल लेकर इन्द्र वर्षा करते हैं। उनके नाम और परिमाणकी संख्या बताना कठिन ही नहीं, असम्भव है । वे सभी श्रेष्ठ नदियाँ परम पुण्यमयी हैं । उस द्वीप में लोकसम्मानित चार पवित्र जनपद हैं ।। पैंतीस ॥ मङ्गाश्च मशकाश्चैव मानसा मन्दगास्तथा । मङ्गा ब्राह्मणभूयिष्ठाः स्वकर्मनिरता नृप । छत्तीस ।। उनके नाम इस प्रकार हैं - मङ्ग, मशक, मानस तथा मन्दग । नरेश्वर ! उनमें से मङ्ग जनपद में अधिकतर ब्राह्मण निवास करते हैं । वे सबके सब अपने कर्तव्य के पालन में तत्पर रहते हैं ।। छत्तीस ।। मशकेषु तु राजन्या धार्मिकाः सर्वकामदाः । मानसाश्च महाराज वैश्यधर्मोपजीविनः ।। सैंतीस ।। सर्वकामसमायुक्ताः शूरा धर्मार्थनिश्चिताः । महाराज ! मशक जनपद में सम्पूर्ण कामनाओंके देनेवाले धर्मात्मा क्षत्रिय निवास करते हैं । मानस जनपदके निवासी वैश्यवृत्तिसे जीवन निर्वाह करते । वे सर्वभोगसम्पन्न, शूरवीर, धर्म और अर्थको समझनेवाले एवं दृढ़निश्चयी होते हैं ! सैंतीस ।। शूद्रास्तु मन्दगा नित्यं पुरुषा धर्मशीनिनः ।। अड़तीस ।। मन्दग जनपदमें शूद्र रहते हैं । वे भी धर्मात्मा होते हैं ।। अड़तीस ।। न तत्र राजा राजेन्द्र न दण्डो न च दण्डिकः । स्वधर्मर्णव धर्मज्ञास्ते रक्षन्ति परस्परम् ॥ छत्तीस॥ राजेन्द्र ! वहाँ न कोई राजा है, न दण्ड है और न दण्ड देनेवाला है । वहाँके लोग धर्म के ज्ञाता हैं और स्वधर्मपालनके ही प्रभावसे एक दूसरेकी रक्षा करते हैं ।। छत्तीस ।। एतावदेव शक्यं तु तत्र द्वीपे प्रभाषितुम् । एतदेव च श्रोतव्यं शाकद्वीपे महौजसि ॥ चालीस ॥ महाराज ! उस महान् तेजोमय शाकद्वीपके सम्बन्धमें इतना ही कहा जा सकता है और इतना ही सुनना चाहिये ॥ चालीस ॥ इति श्रीमहाभारते भीष्मपर्वणि भूमिपर्वणि शाकद्वीपबर्णने एकादशोऽध्यायः ।। ग्यारह ।।
|
सब्जियों को पकाने से पहले हमेशा ही अच्छे से धोना चाहिए. हर एक सब्जी को धोने का विशेष तरीका होता है. लेकिन कुछ सब्जियां ऐसी होती है जो अच्छे से धोने के बाद भी खराब हो जाती है. ऐसी ही एक सब्जी है स्वाद और सेहत के गुणों से भरपूर मशरूम. मशरूम में फाइबर, प्रोटीन, विटामिन डी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. लेकिन अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि मशरूम घर पर लाते ही जल्दी खराब हो जाता है. तो चलिए आज हम आपको मशरूम के फायदे और इसे स्टोर करने का सही तरीया बताएंगे. ताकि आपके घर में रखा मशरूम जल्दी खराब ना हो.
यह भी पढ़ें : सर्दियों में मिलने वाले ये 6 साग देते हैं गजब के फायदे, जानें इनके क्या हैं लाभ?
विशेषज्ञों के अनुसार मशरूम में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है. लगभग 100 ग्राम मशरूम में 206 आईयू विटामिन डी2 होता है. इसी के कारण मशरूम हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है.
यह भी पढ़ें : ज्यादा नमक खाने से होता है नुकसान, जानें एक दिन में कितना खाना चाहिए?
मशरूम में ग्लैक्टोमेनन नाम का तत्व मौजूद होता है. जो की हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सहायक है. मसलन अगर आपकी इम्यूनिटी वीक है और आप इसके चलते बार बार बीमार पड़ते हैं तो मशरूम के सेवन से आपकी ये समस्या दूर हो जाएगी.
जो लोग खून की कमी से ग्रसित है उनके लिए मशरूम चमत्कारी फायदे दे सकता है. मशरूम में मौजूद आयरन शरीर में रेड ब्लड सेल्स की मात्रा में इजाफा करता है. इसके नियमित सेवन से हीमोग्लोबिन का स्तर बना रहता है.
मशरूम को स्टोर करने के लिए आपको सबसे पहले मशरूम को पैकेट से निकाल लें. अब एक ऐसे कंटेनर में मशरूम को डालें जिसमें हवा का प्रवाह ना हो. लेकिन इसके लिए आपको कंटेनर में टिश्यू पेपर बिछाना होगा. मशरूम को कंटेनर में बंद करने के बाद भी ऊपर से टिश्यू पेपर ढक दें. इस तारीक से आपके मशरूम लंबे समय तक फ्रेश रहेंगे.
नोटः ये जानकारी एक सामान्य सुझाव है. इसे किसी तरह के मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें. आप इसके लिए अपने डॉक्टरों से सलाह जरूर लें.
|
सब्जियों को पकाने से पहले हमेशा ही अच्छे से धोना चाहिए. हर एक सब्जी को धोने का विशेष तरीका होता है. लेकिन कुछ सब्जियां ऐसी होती है जो अच्छे से धोने के बाद भी खराब हो जाती है. ऐसी ही एक सब्जी है स्वाद और सेहत के गुणों से भरपूर मशरूम. मशरूम में फाइबर, प्रोटीन, विटामिन डी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. लेकिन अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि मशरूम घर पर लाते ही जल्दी खराब हो जाता है. तो चलिए आज हम आपको मशरूम के फायदे और इसे स्टोर करने का सही तरीया बताएंगे. ताकि आपके घर में रखा मशरूम जल्दी खराब ना हो. यह भी पढ़ें : सर्दियों में मिलने वाले ये छः साग देते हैं गजब के फायदे, जानें इनके क्या हैं लाभ? विशेषज्ञों के अनुसार मशरूम में कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है. लगभग एक सौ ग्राम मशरूम में दो सौ छः आईयू विटामिन डीदो होता है. इसी के कारण मशरूम हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है. यह भी पढ़ें : ज्यादा नमक खाने से होता है नुकसान, जानें एक दिन में कितना खाना चाहिए? मशरूम में ग्लैक्टोमेनन नाम का तत्व मौजूद होता है. जो की हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में सहायक है. मसलन अगर आपकी इम्यूनिटी वीक है और आप इसके चलते बार बार बीमार पड़ते हैं तो मशरूम के सेवन से आपकी ये समस्या दूर हो जाएगी. जो लोग खून की कमी से ग्रसित है उनके लिए मशरूम चमत्कारी फायदे दे सकता है. मशरूम में मौजूद आयरन शरीर में रेड ब्लड सेल्स की मात्रा में इजाफा करता है. इसके नियमित सेवन से हीमोग्लोबिन का स्तर बना रहता है. मशरूम को स्टोर करने के लिए आपको सबसे पहले मशरूम को पैकेट से निकाल लें. अब एक ऐसे कंटेनर में मशरूम को डालें जिसमें हवा का प्रवाह ना हो. लेकिन इसके लिए आपको कंटेनर में टिश्यू पेपर बिछाना होगा. मशरूम को कंटेनर में बंद करने के बाद भी ऊपर से टिश्यू पेपर ढक दें. इस तारीक से आपके मशरूम लंबे समय तक फ्रेश रहेंगे. नोटः ये जानकारी एक सामान्य सुझाव है. इसे किसी तरह के मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें. आप इसके लिए अपने डॉक्टरों से सलाह जरूर लें.
|
दीपिका की इस फिल्म का दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. यह फिल्म एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल के जीवन पर आधारित है.
बॉलीवुड फिल्म 'छपाक' का टाइटल ट्रैक रिलीज हो गया है. इस फिल्म में दीपिका पादुकोण और विक्रांत मेसी मुख्य भूमिका में हैं. मेघना गुलजार द्वारा निर्देशित यह फिल्म 10 फरवरी को रिलीज होगी.
दीपिका की इस फिल्म का दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. यह फिल्म एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल के जीवन पर आधारित है.
वहीं फिल्म के टाइटल ट्रैक की बात करें तो यह गाना एसिड से झुलसी कई पीड़ित लड़कियों के दर्द को बयां करता है. गाने के बोल हैं- 'छपाक से पहचान ले गया.' यह गाना आपकी आंखें नम कर सकता है. इसमें आपको दिखेगा कि कैसे लक्ष्मी अग्रवाल ने एसिट अटैक के बाद अपनी जिंदगी के साथ संघर्ष किया और कई उतार-चढ़ाव देखे.
शंकर, एहसान और लॉय द्वारा कम्पोज़ किए गए इस गाने को अपनी आवाज अरिजीत सिंह ने दी है. इससे पहले दीपिका ने गाने के शुरुआत का एक फोटो शेयर किया था, जिसके साथ ही उन्होंने यह ऐलान किया था कि आज फिल्म का टाइटल ट्रैक रिलीज होने वाला है.
लक्ष्मी अग्रवाल पर जब एसिड से अटैक किया गया था, तब वे महज 15 साल की थीं. यह हादसा उनके साथ साल 2005 में हुआ था. आरोपी ने लक्ष्मी से अपने प्यार का इजहार किया, लेकिन लक्ष्मी ने उसे ठुकरा दिया, जिसके बाद आरोपी ने उनपर एसिड डाल दिया.
इस हादसे में लक्ष्मी का चेहरा और शरीर के अन्य हिस्से बुरी तरह से झुलस गए. इस हादसे ने लक्ष्मी की पूरी जिंदगी ही बदल डाली और इसी बीच उन्हें साथ मिला आलोक दिक्षित का, जिन्होंने न केवल लक्ष्मी की मदद की, बल्कि उनसे शादी भी की. हालांकि अब खबरें ये हैं कि लक्ष्मी और आलोक अब साथ में नहीं रह रहे. उनकी एक बेटी भी है, जिसका नाम पीहू है.
|
दीपिका की इस फिल्म का दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. यह फिल्म एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल के जीवन पर आधारित है. बॉलीवुड फिल्म 'छपाक' का टाइटल ट्रैक रिलीज हो गया है. इस फिल्म में दीपिका पादुकोण और विक्रांत मेसी मुख्य भूमिका में हैं. मेघना गुलजार द्वारा निर्देशित यह फिल्म दस फरवरी को रिलीज होगी. दीपिका की इस फिल्म का दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. यह फिल्म एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल के जीवन पर आधारित है. वहीं फिल्म के टाइटल ट्रैक की बात करें तो यह गाना एसिड से झुलसी कई पीड़ित लड़कियों के दर्द को बयां करता है. गाने के बोल हैं- 'छपाक से पहचान ले गया.' यह गाना आपकी आंखें नम कर सकता है. इसमें आपको दिखेगा कि कैसे लक्ष्मी अग्रवाल ने एसिट अटैक के बाद अपनी जिंदगी के साथ संघर्ष किया और कई उतार-चढ़ाव देखे. शंकर, एहसान और लॉय द्वारा कम्पोज़ किए गए इस गाने को अपनी आवाज अरिजीत सिंह ने दी है. इससे पहले दीपिका ने गाने के शुरुआत का एक फोटो शेयर किया था, जिसके साथ ही उन्होंने यह ऐलान किया था कि आज फिल्म का टाइटल ट्रैक रिलीज होने वाला है. लक्ष्मी अग्रवाल पर जब एसिड से अटैक किया गया था, तब वे महज पंद्रह साल की थीं. यह हादसा उनके साथ साल दो हज़ार पाँच में हुआ था. आरोपी ने लक्ष्मी से अपने प्यार का इजहार किया, लेकिन लक्ष्मी ने उसे ठुकरा दिया, जिसके बाद आरोपी ने उनपर एसिड डाल दिया. इस हादसे में लक्ष्मी का चेहरा और शरीर के अन्य हिस्से बुरी तरह से झुलस गए. इस हादसे ने लक्ष्मी की पूरी जिंदगी ही बदल डाली और इसी बीच उन्हें साथ मिला आलोक दिक्षित का, जिन्होंने न केवल लक्ष्मी की मदद की, बल्कि उनसे शादी भी की. हालांकि अब खबरें ये हैं कि लक्ष्मी और आलोक अब साथ में नहीं रह रहे. उनकी एक बेटी भी है, जिसका नाम पीहू है.
|
लखनऊ . लोकसभा चुनाव के बाद की राजनीतिक टिप्पणियों और विश्लेषणों पर नजर डालें, तो उनमें से ज्यादातर में कहा जा रहा है कि देश में समाजवादी दलों का दौर खत्म हो गया है. खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार को लेकर ऐसे कई विश्लेषण आ चुके हैं. दोनों ही राज्यों में मजबूत माने जाने वाले ये दल बहुत बुरी तरह हारे हैं. ये दल समाजवादी और आंबेडकरवादी धारा के माने जाते हैं. पर क्या इस हार से ये दल खत्म हो जाएंगे, यह सवाल ज्यादातर लोगों के मन में है. दरअसल समाजवादी हों या कांग्रेसी, ये इस चुनाव में मोदी के नेतृत्व में भाजपा के हिंदू राष्ट्रवाद के एजेंडे का मुकाबला नहीं कर सके.
भाजपा के राष्ट्रवाद के केंद्र में सिर्फ हिंदू हैं, जबकि आजादी की लड़ाई और उसके बाद विभाजन के समय भी ऐसी ही स्थिति का मुकाबला गांधी ने राष्ट्रवाद के व्यापक नजरिये से किया था. गांधी के राष्ट्रवाद में वे मुस्लिम भी थे, जो विभाजन के बाद पाकिस्तान नहीं गए और जिन्होंने भारत को अपना देश माना था. सवाल उठता है कि जो काम गांधी कर गए और एक रास्ता भी दिखा गए, वही काम कांग्रेसी और समाजवादी क्यों नहीं कर पाए? लेकिन इस सवाल का जवाब खोजते समय यह नहीं भूलना चाहिए कि उत्तर प्रदेश में मोदी का जो कुछ भी मुकाबला किया, वह समाजवादियों ने ही किया. मोदी की इस आंधी में गठबंधन को पंद्रह सीट ऐसे ही नहीं मिलीं.
आगे बढ़ने से पहले, उत्तर प्रदेश और बिहार के समाजवादी आंदोलन पर एक नजर डालनी चाहिए. साठ के दशक में डॉ. राम मनोहर लोहिया के गैर-कांग्रेसवाद के नारे के बाद उत्तर भारत की राजनीति में समाजवादियों का जो उभार आया, उसे बड़ी जमीनी ताकत मंडल आयोग के बाद ही मिली. उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति पर इसका ज्यादा असर पड़ा. उसके बाद जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चौहत्तर आंदोलन (जिसे कई लोग बिहार आंदोलन या संपूर्ण क्रांति आंदोलन भी कहते हैं) हुआ और इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया.
आपातकाल के बाद हुए चुनाव में जनता पार्टी का जो प्रयोग हुआ, उसमें समाजवादियों की एक मजबूत धारा भी शामिल थी, जो बाद में जनता पार्टी/दल परिवार के रूप में वहां से बाहर निकली और लड़ते-भिड़ते कई दलों में बंट गई. जनता दल परिवार तो बंटा पर जनता दल और जनता पार्टी नाम से उसका मोह बना रहा. किसी ने इस नाम के आगे कुछ लगा लिया, तो किसी ने कुछ पीछे. जनता दल सेक्युलर, जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल, बीजू जनता दल, समाजवादी जनता पार्टी आदि इसके उदाहरण हैं.
उत्तर प्रदेश के दिग्गज समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव ने अलग नाम की पार्टी बनाई. समाजवादी पार्टी. मुलायम सिंह यादव भी लोहिया के गैर-कांग्रेसवाद के सिद्धांत के बाद दलितों-पिछड़ों को ज्यादा राजनैतिक हिस्सेदारी वाले अभियान से ही निकले थे. उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह समाजवादी आंदोलन की आवाज बने, तो बिहार में लालू प्रसाद यादव. इन दोनों नेताओं ने मंदिर आंदोलन के दौर में भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति का मुकाबला भी काफी मजबूती से किया. यही वजह है कि पिछड़ों, खासकर यादव के साथ मुस्लिम बिरादरी का जो समर्थन इन्हें मिला, उसने करीब दो दशक तक उत्तर भारत की राजनीति में न सिर्फ इनका दबदबा बनाये रखा, बल्कि इन्हें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों की दौड़ में भी शामिल कर दिया.
मुलायम सिंह साठ के दशक में गैर-कांग्रेसवाद की राजनीति से निकले, तो लालू प्रसाद यादव जयप्रकाश नारायण के चौहत्तर के आंदोलन से निकले. अस्सी, नब्बे के दशक में ये तेजी से उभर कर सामने आए. पर मध्य वर्ग इन्हें कुछ ख़ास जातियों के नेता के रूप में ही देखता रहा. मंडल विरोधी आंदोलन के बाद इनकी यह छवि और मजबूत हुई. कमोबेश यही स्थिति कांशीराम की भी थी, जो बाद में उभरे और उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति को लामबंद कर दिया.
बीते लोकसभा चुनाव की समीक्षा करते समय इस प्रस्तावना की अंतिम लाइन पर गौर करें, तो बहुत कुछ समझ में आ जायेगा. भाजपा के शीर्ष नेता नरेंद्र मोदी ने 2014 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के भ्रष्टाचार को मुद्दा बना कर लड़ा और कामयाब रहे. कांग्रेस की छवि राष्ट्रीय पार्टी की रही और उसका मुकाबला भाजपा ने राष्ट्रीय विकल्प पेश कर किया. उत्तर प्रदेश और बिहार में मजबूत माने जाने वाले क्षेत्रीय दल नरेंद्र मोदी के इस हमले के सामने नाकाम रह गए. दलित राजनीति करने वाली मायावती को तो एक भी सीट नहीं मिली. अखिलेश के सत्ता में रहने के बावजूद समाजवादी पार्टी बुरी तरह हारी. दरअसल पूरा चुनाव राष्ट्रीय विकल्प का बन चुका था, जिसमें इन क्षेत्रीय दलों की कोई भूमिका बन ही नहीं पाई.
दरअसल, समाजवादी आंदोलन की राष्ट्रीय भूमिका बयालीस में बनी और सैंतालीस तक कायम रही. लोहिया ने 1967 के दौर में भी समाजवादियों की राष्ट्रीय भूमिका को आगे बढ़ाया. जय प्रकाश नारायण ने सत्तर के दशक में समाजवादी आंदोलन को राष्ट्रीय फलक पर उभारा. लेकिन, समाजवादी धारा वाली पार्टियों के कुछ राज्यों में सत्ता में आने जाने के साथ समाजवादी आंदोलन की राष्ट्रीय भूमिका सिमटती चली गयी.
इनके नेताओं ने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर कोई ठोस पहल नहीं की. बड़े नीतिगत सवालों पर मुलायम सिंह और लालू प्रसाद ने शायद ही कभी हस्तक्षेप किया. इन सवालों को कांग्रेस, बीजेपी या कम्युनिस्टों को लिए छोड़ दिया गया. कोई भी बड़ा राष्ट्रीय किसान, मजदूर या नौजवान आंदोलन समाजवादी नेताओं ने नहीं शुरू किया. दूसरे, समाजवादी विचार को इनके नए नेताओं ने न जीवन में उतारा, न ही इनके व्यवहार में कोई समाजवाद दिखा. समाजवादी धारा के नए नेताओं ने आम लोगों से संवाद बंद किया तो साथ ही वे विचार के महत्व को भी भूल गए. जो कांग्रेसी कभी विचार को लेकर गंभीर नहीं रहे, उनकी पार्टी में तो थिंक-टैंक बन गया. लेकिन किसी समाजवादी दल में न तो नए विचार पर कोई मंथन हुआ न ही ऐसे लोगों से कोई संवाद का प्रयास हुआ, जो समाजवादी चिन्तक माने जाते हों. मुलायम सिंह तक तो ऐसा संवाद छिटपुट चला भी, पर अखिलेश यादव से लेकर तेजस्वी यादव के आते-आते ये परंपरा टूट गई. ऐसे में ये समाजवादी किस तरह मोदी के हिंदू राष्ट्रवाद के विचार का मुकाबला कर सकते हैं. यह एक गंभीर सवाल है. चाहे समाजवादी पार्टी हो या राष्ट्रीय जनता दल या बसपा के नेता, इन लोगों ने जातीय गठजोड़ को ज्यादा मजबूत माना और समाजवादी-बहुजनवादी विचारधारा की खिल्ली उड़ाते रहे. नतीजा सामने है. सिर्फ जातीय समीकरण के आधार पर सत्ता में लौटना आसान नहीं है.
Copyright @ 2019 All Right Reserved । Powred by eMag Technologies Pvt. Ltd.
|
लखनऊ . लोकसभा चुनाव के बाद की राजनीतिक टिप्पणियों और विश्लेषणों पर नजर डालें, तो उनमें से ज्यादातर में कहा जा रहा है कि देश में समाजवादी दलों का दौर खत्म हो गया है. खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार को लेकर ऐसे कई विश्लेषण आ चुके हैं. दोनों ही राज्यों में मजबूत माने जाने वाले ये दल बहुत बुरी तरह हारे हैं. ये दल समाजवादी और आंबेडकरवादी धारा के माने जाते हैं. पर क्या इस हार से ये दल खत्म हो जाएंगे, यह सवाल ज्यादातर लोगों के मन में है. दरअसल समाजवादी हों या कांग्रेसी, ये इस चुनाव में मोदी के नेतृत्व में भाजपा के हिंदू राष्ट्रवाद के एजेंडे का मुकाबला नहीं कर सके. भाजपा के राष्ट्रवाद के केंद्र में सिर्फ हिंदू हैं, जबकि आजादी की लड़ाई और उसके बाद विभाजन के समय भी ऐसी ही स्थिति का मुकाबला गांधी ने राष्ट्रवाद के व्यापक नजरिये से किया था. गांधी के राष्ट्रवाद में वे मुस्लिम भी थे, जो विभाजन के बाद पाकिस्तान नहीं गए और जिन्होंने भारत को अपना देश माना था. सवाल उठता है कि जो काम गांधी कर गए और एक रास्ता भी दिखा गए, वही काम कांग्रेसी और समाजवादी क्यों नहीं कर पाए? लेकिन इस सवाल का जवाब खोजते समय यह नहीं भूलना चाहिए कि उत्तर प्रदेश में मोदी का जो कुछ भी मुकाबला किया, वह समाजवादियों ने ही किया. मोदी की इस आंधी में गठबंधन को पंद्रह सीट ऐसे ही नहीं मिलीं. आगे बढ़ने से पहले, उत्तर प्रदेश और बिहार के समाजवादी आंदोलन पर एक नजर डालनी चाहिए. साठ के दशक में डॉ. राम मनोहर लोहिया के गैर-कांग्रेसवाद के नारे के बाद उत्तर भारत की राजनीति में समाजवादियों का जो उभार आया, उसे बड़ी जमीनी ताकत मंडल आयोग के बाद ही मिली. उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति पर इसका ज्यादा असर पड़ा. उसके बाद जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चौहत्तर आंदोलन हुआ और इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाया. आपातकाल के बाद हुए चुनाव में जनता पार्टी का जो प्रयोग हुआ, उसमें समाजवादियों की एक मजबूत धारा भी शामिल थी, जो बाद में जनता पार्टी/दल परिवार के रूप में वहां से बाहर निकली और लड़ते-भिड़ते कई दलों में बंट गई. जनता दल परिवार तो बंटा पर जनता दल और जनता पार्टी नाम से उसका मोह बना रहा. किसी ने इस नाम के आगे कुछ लगा लिया, तो किसी ने कुछ पीछे. जनता दल सेक्युलर, जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल, बीजू जनता दल, समाजवादी जनता पार्टी आदि इसके उदाहरण हैं. उत्तर प्रदेश के दिग्गज समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव ने अलग नाम की पार्टी बनाई. समाजवादी पार्टी. मुलायम सिंह यादव भी लोहिया के गैर-कांग्रेसवाद के सिद्धांत के बाद दलितों-पिछड़ों को ज्यादा राजनैतिक हिस्सेदारी वाले अभियान से ही निकले थे. उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह समाजवादी आंदोलन की आवाज बने, तो बिहार में लालू प्रसाद यादव. इन दोनों नेताओं ने मंदिर आंदोलन के दौर में भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति का मुकाबला भी काफी मजबूती से किया. यही वजह है कि पिछड़ों, खासकर यादव के साथ मुस्लिम बिरादरी का जो समर्थन इन्हें मिला, उसने करीब दो दशक तक उत्तर भारत की राजनीति में न सिर्फ इनका दबदबा बनाये रखा, बल्कि इन्हें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों की दौड़ में भी शामिल कर दिया. मुलायम सिंह साठ के दशक में गैर-कांग्रेसवाद की राजनीति से निकले, तो लालू प्रसाद यादव जयप्रकाश नारायण के चौहत्तर के आंदोलन से निकले. अस्सी, नब्बे के दशक में ये तेजी से उभर कर सामने आए. पर मध्य वर्ग इन्हें कुछ ख़ास जातियों के नेता के रूप में ही देखता रहा. मंडल विरोधी आंदोलन के बाद इनकी यह छवि और मजबूत हुई. कमोबेश यही स्थिति कांशीराम की भी थी, जो बाद में उभरे और उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति को लामबंद कर दिया. बीते लोकसभा चुनाव की समीक्षा करते समय इस प्रस्तावना की अंतिम लाइन पर गौर करें, तो बहुत कुछ समझ में आ जायेगा. भाजपा के शीर्ष नेता नरेंद्र मोदी ने दो हज़ार चौदह का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के भ्रष्टाचार को मुद्दा बना कर लड़ा और कामयाब रहे. कांग्रेस की छवि राष्ट्रीय पार्टी की रही और उसका मुकाबला भाजपा ने राष्ट्रीय विकल्प पेश कर किया. उत्तर प्रदेश और बिहार में मजबूत माने जाने वाले क्षेत्रीय दल नरेंद्र मोदी के इस हमले के सामने नाकाम रह गए. दलित राजनीति करने वाली मायावती को तो एक भी सीट नहीं मिली. अखिलेश के सत्ता में रहने के बावजूद समाजवादी पार्टी बुरी तरह हारी. दरअसल पूरा चुनाव राष्ट्रीय विकल्प का बन चुका था, जिसमें इन क्षेत्रीय दलों की कोई भूमिका बन ही नहीं पाई. दरअसल, समाजवादी आंदोलन की राष्ट्रीय भूमिका बयालीस में बनी और सैंतालीस तक कायम रही. लोहिया ने एक हज़ार नौ सौ सरसठ के दौर में भी समाजवादियों की राष्ट्रीय भूमिका को आगे बढ़ाया. जय प्रकाश नारायण ने सत्तर के दशक में समाजवादी आंदोलन को राष्ट्रीय फलक पर उभारा. लेकिन, समाजवादी धारा वाली पार्टियों के कुछ राज्यों में सत्ता में आने जाने के साथ समाजवादी आंदोलन की राष्ट्रीय भूमिका सिमटती चली गयी. इनके नेताओं ने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर कोई ठोस पहल नहीं की. बड़े नीतिगत सवालों पर मुलायम सिंह और लालू प्रसाद ने शायद ही कभी हस्तक्षेप किया. इन सवालों को कांग्रेस, बीजेपी या कम्युनिस्टों को लिए छोड़ दिया गया. कोई भी बड़ा राष्ट्रीय किसान, मजदूर या नौजवान आंदोलन समाजवादी नेताओं ने नहीं शुरू किया. दूसरे, समाजवादी विचार को इनके नए नेताओं ने न जीवन में उतारा, न ही इनके व्यवहार में कोई समाजवाद दिखा. समाजवादी धारा के नए नेताओं ने आम लोगों से संवाद बंद किया तो साथ ही वे विचार के महत्व को भी भूल गए. जो कांग्रेसी कभी विचार को लेकर गंभीर नहीं रहे, उनकी पार्टी में तो थिंक-टैंक बन गया. लेकिन किसी समाजवादी दल में न तो नए विचार पर कोई मंथन हुआ न ही ऐसे लोगों से कोई संवाद का प्रयास हुआ, जो समाजवादी चिन्तक माने जाते हों. मुलायम सिंह तक तो ऐसा संवाद छिटपुट चला भी, पर अखिलेश यादव से लेकर तेजस्वी यादव के आते-आते ये परंपरा टूट गई. ऐसे में ये समाजवादी किस तरह मोदी के हिंदू राष्ट्रवाद के विचार का मुकाबला कर सकते हैं. यह एक गंभीर सवाल है. चाहे समाजवादी पार्टी हो या राष्ट्रीय जनता दल या बसपा के नेता, इन लोगों ने जातीय गठजोड़ को ज्यादा मजबूत माना और समाजवादी-बहुजनवादी विचारधारा की खिल्ली उड़ाते रहे. नतीजा सामने है. सिर्फ जातीय समीकरण के आधार पर सत्ता में लौटना आसान नहीं है. Copyright @ दो हज़ार उन्नीस All Right Reserved । Powred by eMag Technologies Pvt. Ltd.
|
नईदिल्ली (16 May 2022)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लखनऊ सीएम आवास पर कैबिनेट मंत्रियों के साथ बैठक। लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियों के संकेत।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार सुबह नेपाल दौरे पर थे। वहां से लौटने के बाद उन्होंने कुशीनगर में पूजा की। इसके बाद वह कुशीनगर से लखनऊ पहुंचे। एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम समेत 12 कैबिनेट मंत्रियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वह सीधे सीएम आवास पहुंचे। यहां पर कैबिनेट मंत्रियों के साथ बैठक शुरू हो गई है। जानकार इसे 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देख रहे हैं।
बताया जा रहा है दूसरी बार योगी सरकार बनने के बाद पीएम की यह कैबिनेट मंत्रियों के साथ पहली बैठक है। इसमें वह लोकसभा चुनाव में जीत का मंत्र बताएंगे। इधर यूपी में योगी सरकार लगातार केंद्र सरकार की योजनाओं को आगे बढ़ा रही है। बताया जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव में यूपी को मजबूत करना जरूरी है, तभी पीएम का सपना पूरा हो पाएगा। इन सबको देखते हुए खुद पीएम मोदी अभी से सक्रिय हो गए हैं। वैसे भी कहा जाता है कि भाजपा हमेशा चुनावी मोड में रहती है।
|
नईदिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लखनऊ सीएम आवास पर कैबिनेट मंत्रियों के साथ बैठक। लोकसभा चुनाव दो हज़ार चौबीस की तैयारियों के संकेत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार सुबह नेपाल दौरे पर थे। वहां से लौटने के बाद उन्होंने कुशीनगर में पूजा की। इसके बाद वह कुशीनगर से लखनऊ पहुंचे। एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, डिप्टी सीएम समेत बारह कैबिनेट मंत्रियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद वह सीधे सीएम आवास पहुंचे। यहां पर कैबिनेट मंत्रियों के साथ बैठक शुरू हो गई है। जानकार इसे दो हज़ार चौबीस में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देख रहे हैं। बताया जा रहा है दूसरी बार योगी सरकार बनने के बाद पीएम की यह कैबिनेट मंत्रियों के साथ पहली बैठक है। इसमें वह लोकसभा चुनाव में जीत का मंत्र बताएंगे। इधर यूपी में योगी सरकार लगातार केंद्र सरकार की योजनाओं को आगे बढ़ा रही है। बताया जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव में यूपी को मजबूत करना जरूरी है, तभी पीएम का सपना पूरा हो पाएगा। इन सबको देखते हुए खुद पीएम मोदी अभी से सक्रिय हो गए हैं। वैसे भी कहा जाता है कि भाजपा हमेशा चुनावी मोड में रहती है।
|
2027 तक भारत में बंद हो जाएगी डीजल कारें, सरकारी पैनल ने की प्रतिबंध की सिफारिश. . !
इस देश में लग चुका है इस्लाम पर प्रतिबंध, मिट्टी में मिला दी गई थी मस्जिदें!
पाकिस्तान ने जिस फिल्म को किया था बैन, वो भारत में होगी रिलीज़!
|
दो हज़ार सत्ताईस तक भारत में बंद हो जाएगी डीजल कारें, सरकारी पैनल ने की प्रतिबंध की सिफारिश. . ! इस देश में लग चुका है इस्लाम पर प्रतिबंध, मिट्टी में मिला दी गई थी मस्जिदें! पाकिस्तान ने जिस फिल्म को किया था बैन, वो भारत में होगी रिलीज़!
|
मैंने इस साइट पर प्रकाशित लेखों की "छाप" के तहत यह पोस्ट बनाया है "एक नया टारपीडो" शक्वल "को बदलने के लिए", "क्या वहाँ एक टारपीडो "kkval" की तुलना में अधिक खतरनाक है? "," सबसे तेज घरेलू पनडुब्बी मिसाइल VA-111 "शक्वल"। जाहिरा तौर पर, लेखक शक्वल मिसाइल-टारपीडो के उद्देश्य को गलत समझते हैं, और मैं इसे ठीक करना चाहता हूं। मैं आपको प्रदर्शन विशेषताओं की सूची से बोर नहीं करूंगा, उन्हें इंटरनेट पर आसानी से पहचाना जा सकता है, उदाहरण के लिए, यहांः http://militaryrussia. ru/blog/topic-473. html। चलिए सीधे मुद्दे पर आते हैं।
Shkval उन वर्षों में बनाया गया था जब नाटो के सदस्यों ने सोवियत पनडुब्बियों को "बदबूदार गाय" कहा था। आखिरकार, वे तेज, अच्छी तरह से सशस्त्र थे, लेकिन बहुत ही महान थे। दूसरी ओर, नाटो पहले से ही चुपके प्रौद्योगिकी व्यंजनों (परमाणु पनडुब्बियों के लिए यह कम से कम शोर है) और "पहली हड़ताल" अवधारणा के अनुसार अपनी पनडुब्बियों का निर्माण कर रहा था। इसलिए, सोवियत डिजाइनरों को एक असममित प्रतिक्रिया की आवश्यकता थी। हालांकि, कुछ ही समय में पूरी तरह से नई पनडुब्बियों की एक श्रृंखला बनाना और बनाना असंभव था, और एक ही बार में पुराने लोगों को लिखना बंद करना एक आपराधिक बर्बादी होगी। यह तब था कि इसके उपयोग की प्रस्तावित होनहार योजना के अनुसार शेकवल का विकास शुरू हुआ। 29 नवंबर, 1977 को एम -111 रॉकेट टारपीडो के साथ VA-5 "शक्वल" कॉम्प्लेक्स को यूएसएसआर नेवी द्वारा अपनाया गया था)
यह कैसे काम करता है?
जटिलता, - नीचे)।
एक सोवियत पनडुब्बी (USSR परमाणु पनडुब्बी) और एक अमेरिकी पनडुब्बी (अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी) की लड़ाई की अनुमानित योजनाः
अमेरिकियों ने चुपके से फायदा उठाया और सोनार स्टेशन (जीएएस) की गुणवत्ता, यूएसएसआर परमाणु पनडुब्बी का पता लगाने और पहले शॉट को फायर करने के लिए पहले (निष्क्रिय जीएएस मोड) होने की बहुत अधिक संभावना थी। वायर-गाइडेड टारपीडो हमारी पनडुब्बी को उच्च परिशुद्धता के साथ हिट करने वाला था, इसे रिटर्न टारपीडो मार्गदर्शन पूरा करने से रोका गया। लेकिन, एक टॉरपीडो को निकाल दिया जाता है, यूएस परमाणु पनडुब्बी खुद को बेकार कर देती है, यूएसएसआर परमाणु पनडुब्बी अपने जीएएस को निष्क्रिय मोड से सक्रिय करती है ताकि उच्च सटीकता के साथ अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी के स्थान का निर्धारण किया जा सके, उसी समय पनडुब्बी के धनुष के साथ एक मोड़ शुरू (जहां टारपीडो ट्यूब दिशा में स्थित हैं) दिशा में स्थित हैं। . . . लक्ष्य पर सभी डेटा प्राप्त करने के बाद, Shkval को लक्ष्य स्थान (निर्देशांक) के साथ गोली मार दी जाती है - जो कि अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी है। उसके बाद, यूएसएसआर परमाणु पनडुब्बी बिना किसी प्रतिबंध के टारपीडो हमले से बचने और मुकाबला करने के लिए सभी कार्रवाई कर सकती है। अब अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी का शिकारी) खुद एक गेम में बदल जाता है, जो कार्रवाई की स्वतंत्रता में भी गंभीर रूप से सीमित है, क्योंकि उसके पास अपनी टारपीडो एक पतली तार पर लटकी हुई है, जिसके साथ वह गहन पैंतरेबाज़ी के दौरान संपर्क खोने की धमकी देता है और मंडराने पर गति सीमा से परे जाता है। गति में एक फायदा होने के नाते, "शक्वल", जल्दी से लक्ष्य के करीब पहुंचकर, अवरोधन से बचने के लिए सरल युद्धाभ्यास करने में सक्षम है, जो इसके कार्यों के कार्यक्रम में शामिल है। जब किसी दिए गए बिंदु पर पहुंच जाता है, तो एक परमाणु बीपी को विस्फोटित किया जाता है, जिसके पानी के नीचे विस्फोट के दौरान यह 100 किलोमीटर के दायरे में आधुनिक पनडुब्बियों को लगभग 1% नुकसान पहुंचाता है। भले ही अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी "Shkval" फायरिंग के तुरंत बाद टारपीडो मार्गदर्शन छोड़ देता है और प्रभावित क्षेत्र से बाहर निकलने के लिए उच्च गति प्राप्त करना शुरू कर देता है, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि इसे छोड़ने या बरकरार रहने का समय होगा, प्रभावित क्षेत्र से दूर नहीं होना चाहिए।
"हड़बड़ाहट" ने अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी और उनकी रणनीति के फायदे को कम कर दिया।
|
मैंने इस साइट पर प्रकाशित लेखों की "छाप" के तहत यह पोस्ट बनाया है "एक नया टारपीडो" शक्वल "को बदलने के लिए", "क्या वहाँ एक टारपीडो "kkval" की तुलना में अधिक खतरनाक है? "," सबसे तेज घरेलू पनडुब्बी मिसाइल VA-एक सौ ग्यारह "शक्वल"। जाहिरा तौर पर, लेखक शक्वल मिसाइल-टारपीडो के उद्देश्य को गलत समझते हैं, और मैं इसे ठीक करना चाहता हूं। मैं आपको प्रदर्शन विशेषताओं की सूची से बोर नहीं करूंगा, उन्हें इंटरनेट पर आसानी से पहचाना जा सकता है, उदाहरण के लिए, यहांः http://militaryrussia. ru/blog/topic-चार सौ तिहत्तर. html। चलिए सीधे मुद्दे पर आते हैं। Shkval उन वर्षों में बनाया गया था जब नाटो के सदस्यों ने सोवियत पनडुब्बियों को "बदबूदार गाय" कहा था। आखिरकार, वे तेज, अच्छी तरह से सशस्त्र थे, लेकिन बहुत ही महान थे। दूसरी ओर, नाटो पहले से ही चुपके प्रौद्योगिकी व्यंजनों और "पहली हड़ताल" अवधारणा के अनुसार अपनी पनडुब्बियों का निर्माण कर रहा था। इसलिए, सोवियत डिजाइनरों को एक असममित प्रतिक्रिया की आवश्यकता थी। हालांकि, कुछ ही समय में पूरी तरह से नई पनडुब्बियों की एक श्रृंखला बनाना और बनाना असंभव था, और एक ही बार में पुराने लोगों को लिखना बंद करना एक आपराधिक बर्बादी होगी। यह तब था कि इसके उपयोग की प्रस्तावित होनहार योजना के अनुसार शेकवल का विकास शुरू हुआ। उनतीस नवंबर, एक हज़ार नौ सौ सतहत्तर को एम -एक सौ ग्यारह रॉकेट टारपीडो के साथ VA-पाँच "शक्वल" कॉम्प्लेक्स को यूएसएसआर नेवी द्वारा अपनाया गया था) यह कैसे काम करता है? जटिलता, - नीचे)। एक सोवियत पनडुब्बी और एक अमेरिकी पनडुब्बी की लड़ाई की अनुमानित योजनाः अमेरिकियों ने चुपके से फायदा उठाया और सोनार स्टेशन की गुणवत्ता, यूएसएसआर परमाणु पनडुब्बी का पता लगाने और पहले शॉट को फायर करने के लिए पहले होने की बहुत अधिक संभावना थी। वायर-गाइडेड टारपीडो हमारी पनडुब्बी को उच्च परिशुद्धता के साथ हिट करने वाला था, इसे रिटर्न टारपीडो मार्गदर्शन पूरा करने से रोका गया। लेकिन, एक टॉरपीडो को निकाल दिया जाता है, यूएस परमाणु पनडुब्बी खुद को बेकार कर देती है, यूएसएसआर परमाणु पनडुब्बी अपने जीएएस को निष्क्रिय मोड से सक्रिय करती है ताकि उच्च सटीकता के साथ अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी के स्थान का निर्धारण किया जा सके, उसी समय पनडुब्बी के धनुष के साथ एक मोड़ शुरू दिशा में स्थित हैं। . . . लक्ष्य पर सभी डेटा प्राप्त करने के बाद, Shkval को लक्ष्य स्थान के साथ गोली मार दी जाती है - जो कि अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी है। उसके बाद, यूएसएसआर परमाणु पनडुब्बी बिना किसी प्रतिबंध के टारपीडो हमले से बचने और मुकाबला करने के लिए सभी कार्रवाई कर सकती है। अब अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी का शिकारी) खुद एक गेम में बदल जाता है, जो कार्रवाई की स्वतंत्रता में भी गंभीर रूप से सीमित है, क्योंकि उसके पास अपनी टारपीडो एक पतली तार पर लटकी हुई है, जिसके साथ वह गहन पैंतरेबाज़ी के दौरान संपर्क खोने की धमकी देता है और मंडराने पर गति सीमा से परे जाता है। गति में एक फायदा होने के नाते, "शक्वल", जल्दी से लक्ष्य के करीब पहुंचकर, अवरोधन से बचने के लिए सरल युद्धाभ्यास करने में सक्षम है, जो इसके कार्यों के कार्यक्रम में शामिल है। जब किसी दिए गए बिंदु पर पहुंच जाता है, तो एक परमाणु बीपी को विस्फोटित किया जाता है, जिसके पानी के नीचे विस्फोट के दौरान यह एक सौ किलोग्राममीटर के दायरे में आधुनिक पनडुब्बियों को लगभग एक% नुकसान पहुंचाता है। भले ही अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी "Shkval" फायरिंग के तुरंत बाद टारपीडो मार्गदर्शन छोड़ देता है और प्रभावित क्षेत्र से बाहर निकलने के लिए उच्च गति प्राप्त करना शुरू कर देता है, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि इसे छोड़ने या बरकरार रहने का समय होगा, प्रभावित क्षेत्र से दूर नहीं होना चाहिए। "हड़बड़ाहट" ने अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी और उनकी रणनीति के फायदे को कम कर दिया।
|
उन्होंने कहा, हमने धोनी को देखने के लिए लगभग 3860 किलोमीटर की यात्रा की और मेरा विश्वास कीजिए ये सब बेकार नहीं गया। आप सिर्फ एक बार जन्म लेते हैं तो हर वो काम कीजिये जिसे आप प्यार करते हैं। भारतीय टीम ने इस मैच में बांग्लादेश को हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। टीम को अब शनिवार को लीड्स में श्रीलंका के साथ अपना अंतिम लीग मैच खेलना है।
मोहित शर्मा ने CSK के खिलाफ दिल दहलाने वाले आखिरी ओवर पर किया खुलासाः "मैं सो नहीं पाया"
|
उन्होंने कहा, हमने धोनी को देखने के लिए लगभग तीन हज़ार आठ सौ साठ किलोग्राममीटर की यात्रा की और मेरा विश्वास कीजिए ये सब बेकार नहीं गया। आप सिर्फ एक बार जन्म लेते हैं तो हर वो काम कीजिये जिसे आप प्यार करते हैं। भारतीय टीम ने इस मैच में बांग्लादेश को हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। टीम को अब शनिवार को लीड्स में श्रीलंका के साथ अपना अंतिम लीग मैच खेलना है। मोहित शर्मा ने CSK के खिलाफ दिल दहलाने वाले आखिरी ओवर पर किया खुलासाः "मैं सो नहीं पाया"
|
हाथ ही रेखाएं बता देती हैं कि वैवाहिक जीवन में आपको सफलता मिलेगी या नहीं। या फिर जोड़ीदार के साथ कहीं आपके रिलेशनशिप में ब्रेकअप की नौबत तो नहीं आ जाएगी। हाथ में मौजूद इन रेखाओं और चिह्नों को देखकर आप भी शादीशुदा जीवन के बारे में जान सकते हैं।
यदि आपकी विवाह रेखा अंत में एक कांटे जैसे चिह्न पर समाप्त हो रही हो तो आपके रिलेशनशिप में कुछ समय बाद ब्रेकअप आ सकता है। इसके अलावा मंगल पर्वत से कोई रेखा निकलकर यदि भाग्य, मस्तिष्क रेखा और हृदय रेखा को काटते हुए बुध पर्वत पर जाकर समाप्त हो रही हो तो ऐसे लोगों के जीवन में तलाक या फिर ब्रेकअप का संकट बना रहता है।
यदि शुक्र से कोई रेखा निकले और शनि पर्वत पर एक कांटे के चिह्न के रूप में समाप्त हो तो यह ब्रेक अप का संकेत है। ऐसे लोगों के जीवन में रिश्तेदारों के हस्तक्षेप से खासी समस्या पैदा हो सकती है। यदि ऐसी कोई रेखा शुक्र पर्वत पर तारे के चिह्न में से निकले तो ऐसे लोगों के रिलेशन में देर-सवेर अलगाव की नौबत आ जाती है।
यदि हाथ में कोई रेखा बुध पर्वत से शुरू होकर गुरु पर्वत से होते हुए मंगल पर्वत पर नीचे की ओर झुक जाती है और हाथ में अंगूठे के तल में कोई काला तिल हो तो यह स्पष्ट रूप से ब्रेक अप की ओर इशारा करता है। ऐसे लोगों के जीवन में जब वैवाहिक योग और रिलेशनशिप का वक्त आता है तो कोई न कोई अप्रिय घटना अवश्य होती है। ये लोग अपने संबंधों को अधिक दिन तक नहीं चला पाते।
यदि विवाह रेखा पर कोई द्वीप बने और कोई रेखा मंगल पर्वत से शुरू होकर भाग्य रेखा, मस्तिष्क रेखा, हृदय रेखा को काटते हुए बुध पर्वत की ओर जाए तो ऐसे लोगों के लिए ब्रेक अप से बच पाना बहुत ही मुश्किल होता है। ऐसे लोगों को शत्रुओं और पीछे से वार करने वाले लोगों से भी सावधान रहने की आवश्यकता होती है।
हाथ में गुरु पर्वत पर क्रॉस का चिह्न जीवन में सुख और वैवाहिक जीवन में खुशी को दर्शाता है हालांकि कोई रेखा शुक्र पर्वत से निकलकर भाग्य रेखा को काटे तो ऐसे लोगों के जीवन में रिशतेदारों के हस्तक्षेप से संबंध विच्छेद की नौबत आ जाती है। इसी प्रकार से चंद्र पर्वत से कोई रेखा निकलकर भाग्य रेखा को काटे तो ऐसे व्यक्ति कभी अपने संबंधों में प्रतिबद्ध नहीं रह पाते।
|
हाथ ही रेखाएं बता देती हैं कि वैवाहिक जीवन में आपको सफलता मिलेगी या नहीं। या फिर जोड़ीदार के साथ कहीं आपके रिलेशनशिप में ब्रेकअप की नौबत तो नहीं आ जाएगी। हाथ में मौजूद इन रेखाओं और चिह्नों को देखकर आप भी शादीशुदा जीवन के बारे में जान सकते हैं। यदि आपकी विवाह रेखा अंत में एक कांटे जैसे चिह्न पर समाप्त हो रही हो तो आपके रिलेशनशिप में कुछ समय बाद ब्रेकअप आ सकता है। इसके अलावा मंगल पर्वत से कोई रेखा निकलकर यदि भाग्य, मस्तिष्क रेखा और हृदय रेखा को काटते हुए बुध पर्वत पर जाकर समाप्त हो रही हो तो ऐसे लोगों के जीवन में तलाक या फिर ब्रेकअप का संकट बना रहता है। यदि शुक्र से कोई रेखा निकले और शनि पर्वत पर एक कांटे के चिह्न के रूप में समाप्त हो तो यह ब्रेक अप का संकेत है। ऐसे लोगों के जीवन में रिश्तेदारों के हस्तक्षेप से खासी समस्या पैदा हो सकती है। यदि ऐसी कोई रेखा शुक्र पर्वत पर तारे के चिह्न में से निकले तो ऐसे लोगों के रिलेशन में देर-सवेर अलगाव की नौबत आ जाती है। यदि हाथ में कोई रेखा बुध पर्वत से शुरू होकर गुरु पर्वत से होते हुए मंगल पर्वत पर नीचे की ओर झुक जाती है और हाथ में अंगूठे के तल में कोई काला तिल हो तो यह स्पष्ट रूप से ब्रेक अप की ओर इशारा करता है। ऐसे लोगों के जीवन में जब वैवाहिक योग और रिलेशनशिप का वक्त आता है तो कोई न कोई अप्रिय घटना अवश्य होती है। ये लोग अपने संबंधों को अधिक दिन तक नहीं चला पाते। यदि विवाह रेखा पर कोई द्वीप बने और कोई रेखा मंगल पर्वत से शुरू होकर भाग्य रेखा, मस्तिष्क रेखा, हृदय रेखा को काटते हुए बुध पर्वत की ओर जाए तो ऐसे लोगों के लिए ब्रेक अप से बच पाना बहुत ही मुश्किल होता है। ऐसे लोगों को शत्रुओं और पीछे से वार करने वाले लोगों से भी सावधान रहने की आवश्यकता होती है। हाथ में गुरु पर्वत पर क्रॉस का चिह्न जीवन में सुख और वैवाहिक जीवन में खुशी को दर्शाता है हालांकि कोई रेखा शुक्र पर्वत से निकलकर भाग्य रेखा को काटे तो ऐसे लोगों के जीवन में रिशतेदारों के हस्तक्षेप से संबंध विच्छेद की नौबत आ जाती है। इसी प्रकार से चंद्र पर्वत से कोई रेखा निकलकर भाग्य रेखा को काटे तो ऐसे व्यक्ति कभी अपने संबंधों में प्रतिबद्ध नहीं रह पाते।
|
केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि 31 दिसंबर 2020 तक मुख्य सतर्कता अधिकारियों (सीवीओ) के पास सरकार के विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार संबंधी कुल 219 शिकायतें जांच के लिए लंबित थीं जिनमें 105 शिकायतें तीन साल से अधिक समय से लंबित थीं।
आयोग ने कहा कि आयोग की दुरस्थ शाखा के तौर पर काम करने वाले सीवीओ से अपेक्षा होती है कि वे किसी सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार को रोकेंगे और इसके बाद आदर्श स्थिति में तीन महीने के अंदर या इसके बाद जितना जल्द संभव हो, जांच को समाप्त करेंगे।
रिपोर्ट में बताया गया कि सबसे ज्यादा 22-22 शिकायतें दिल्ली सरकार, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग और प्रारंभिक शिक्षा तथा साक्षरता विभाग के पास लंबित थीं। दिल्ली सरकार के पास लंबित शिकायतों में आठ शिकायतें तीन साल से ज्यादा लंबित थीं, नौ शिकायतें एक से तीन साल से लंबित मिलीं तथा पांच शिकायतें एक साल से लंबित थीं।
इसमें कहा गया कि माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग तथा प्रारंभिक शिक्षा तथा साक्षरता विभाग में तीन साल से अधिक समय से 14 शिकायतों में जांच और रिपोर्ट लंबित थीं। इनमें सात शिकायतें एक से तीन साल से तथा एक शिकायत एक साल से लंबित थीं।
सीवीसी की वार्षिक रिपोर्ट 2020 संसद के हाल में संपन्न मानसूस सत्र में पेश की गई थी और मंगलवार को आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की गई।
रिपोर्ट के अनुसार सीवीसी द्वारा स्वास्थ्य विभाग के सीवीओ को भेजी गईं कुल 14 शिकायतों में पड़ताल लंबित थी। इनमें से चार शिकायतें तीन साल से अधिक समय से, छह शिकायतें एक से तीन साल की अवधि से और चार शिकायतें एक साल से लंबित थीं।
|
केंद्रीय सतर्कता आयोग ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि इकतीस दिसंबर दो हज़ार बीस तक मुख्य सतर्कता अधिकारियों के पास सरकार के विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार संबंधी कुल दो सौ उन्नीस शिकायतें जांच के लिए लंबित थीं जिनमें एक सौ पाँच शिकायतें तीन साल से अधिक समय से लंबित थीं। आयोग ने कहा कि आयोग की दुरस्थ शाखा के तौर पर काम करने वाले सीवीओ से अपेक्षा होती है कि वे किसी सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार को रोकेंगे और इसके बाद आदर्श स्थिति में तीन महीने के अंदर या इसके बाद जितना जल्द संभव हो, जांच को समाप्त करेंगे। रिपोर्ट में बताया गया कि सबसे ज्यादा बाईस-बाईस शिकायतें दिल्ली सरकार, माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग और प्रारंभिक शिक्षा तथा साक्षरता विभाग के पास लंबित थीं। दिल्ली सरकार के पास लंबित शिकायतों में आठ शिकायतें तीन साल से ज्यादा लंबित थीं, नौ शिकायतें एक से तीन साल से लंबित मिलीं तथा पांच शिकायतें एक साल से लंबित थीं। इसमें कहा गया कि माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग तथा प्रारंभिक शिक्षा तथा साक्षरता विभाग में तीन साल से अधिक समय से चौदह शिकायतों में जांच और रिपोर्ट लंबित थीं। इनमें सात शिकायतें एक से तीन साल से तथा एक शिकायत एक साल से लंबित थीं। सीवीसी की वार्षिक रिपोर्ट दो हज़ार बीस संसद के हाल में संपन्न मानसूस सत्र में पेश की गई थी और मंगलवार को आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की गई। रिपोर्ट के अनुसार सीवीसी द्वारा स्वास्थ्य विभाग के सीवीओ को भेजी गईं कुल चौदह शिकायतों में पड़ताल लंबित थी। इनमें से चार शिकायतें तीन साल से अधिक समय से, छह शिकायतें एक से तीन साल की अवधि से और चार शिकायतें एक साल से लंबित थीं।
|
खुदरा पेट्रोलियम कंपनियों को एलपीजी सब्सिडी मद की 22,000 करोड़ रुपये की राशि मिलनी थी। अगर खाते में इसका प्रावधान नहीं किया गया होता, तो उनका नुकसान और ज्यादा होता। अधिकारी ने कहा, 'पहली छमाही का नुकसान सार्वजनिक है। इसमें अगर एलपीजी सब्सिडी को जोड़ दिया जाए, आप उनके नुकसान का आकलन कर सकेंगे। ' उन्होंने कहा कि कीमतों को नहीं बढ़ाने से उच्च महंगाई में और वृद्धि नहीं हुई और इससे अंततः अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ है। ऐसे में अब पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों को मुआवजा दिये जाने की जरूरत है।
अधिकारी ने कहा, 'पेट्रोल और डीजल के दाम अब नियंत्रण के दायरे में नहीं है। यानी सरकार का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है। ऐसे में पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियां अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के मानक के आधार पर दैनिक आधार पर दाम तय करने को स्वतंत्र हैं। लेकिन उन्होंने अपनी मर्जी से दाम को यथावत रखने का निर्णय किया। ' पेट्रोलियम मंत्रालय पूरे वित्त वर्ष में होने वाले नुकसान का आकलन करेगा। उसके बाद वित्त मंत्रालय के पास मुआवजे के लिये जाएगा।
ऑटो फ्यूल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरम होने के बावजूद तीनों खुदरा तेल कंपनियों को अब भी नुकसान हो रहा है। उन्होंने छह अप्रैल से कीमतों में बदलाव नहीं किया। जबकि इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत एक दशक के उच्च स्तर पर पहुंच गयी थीं। सरकार ने अक्टूबर में तीनों कंपनियों को घरेलू रसोई गैस एलपीजी पर जून, 2020 से हुए नुकसान की भरपाई के लिए एकबारगी अनुदान के रूप में 22,000 करोड़ रुपये दिए। पेट्रोलियम मंत्रालय ने एलपीजी नुकसान को लेकर 28,000 करोड़ रुपये मांगे थे, लेकिन उन्हें 22,000 करोड़ रुपये ही मिले।
वैश्विक बाजार में तेल के दाम में नरमी से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की उम्मीद बंधी है। भारत जो कच्चा तेल आयात करता है, उसका मूल्य जून में बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। लेकिन अब यह कम होकर 83. 23 डॉलर पर आ गया है। पेट्रोल और डीजल के दाम में दैनिक आधार पर बदलाव की व्यवस्था है, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र की खुदरा ईंधन कंपनियों ने छह अप्रैल से दाम में कोई बदलाव नहीं किए। उत्पाद शुल्क में कटौती के कारण 22 मई को जरूर कीमत में बदलाव हुआ था।
|
खुदरा पेट्रोलियम कंपनियों को एलपीजी सब्सिडी मद की बाईस,शून्य करोड़ रुपये की राशि मिलनी थी। अगर खाते में इसका प्रावधान नहीं किया गया होता, तो उनका नुकसान और ज्यादा होता। अधिकारी ने कहा, 'पहली छमाही का नुकसान सार्वजनिक है। इसमें अगर एलपीजी सब्सिडी को जोड़ दिया जाए, आप उनके नुकसान का आकलन कर सकेंगे। ' उन्होंने कहा कि कीमतों को नहीं बढ़ाने से उच्च महंगाई में और वृद्धि नहीं हुई और इससे अंततः अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ है। ऐसे में अब पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों को मुआवजा दिये जाने की जरूरत है। अधिकारी ने कहा, 'पेट्रोल और डीजल के दाम अब नियंत्रण के दायरे में नहीं है। यानी सरकार का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है। ऐसे में पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियां अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के मानक के आधार पर दैनिक आधार पर दाम तय करने को स्वतंत्र हैं। लेकिन उन्होंने अपनी मर्जी से दाम को यथावत रखने का निर्णय किया। ' पेट्रोलियम मंत्रालय पूरे वित्त वर्ष में होने वाले नुकसान का आकलन करेगा। उसके बाद वित्त मंत्रालय के पास मुआवजे के लिये जाएगा। ऑटो फ्यूल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरम होने के बावजूद तीनों खुदरा तेल कंपनियों को अब भी नुकसान हो रहा है। उन्होंने छह अप्रैल से कीमतों में बदलाव नहीं किया। जबकि इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत एक दशक के उच्च स्तर पर पहुंच गयी थीं। सरकार ने अक्टूबर में तीनों कंपनियों को घरेलू रसोई गैस एलपीजी पर जून, दो हज़ार बीस से हुए नुकसान की भरपाई के लिए एकबारगी अनुदान के रूप में बाईस,शून्य करोड़ रुपये दिए। पेट्रोलियम मंत्रालय ने एलपीजी नुकसान को लेकर अट्ठाईस,शून्य करोड़ रुपये मांगे थे, लेकिन उन्हें बाईस,शून्य करोड़ रुपये ही मिले। वैश्विक बाजार में तेल के दाम में नरमी से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की उम्मीद बंधी है। भारत जो कच्चा तेल आयात करता है, उसका मूल्य जून में बढ़कर एक सौ सोलह डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। लेकिन अब यह कम होकर तिरासी. तेईस डॉलर पर आ गया है। पेट्रोल और डीजल के दाम में दैनिक आधार पर बदलाव की व्यवस्था है, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र की खुदरा ईंधन कंपनियों ने छह अप्रैल से दाम में कोई बदलाव नहीं किए। उत्पाद शुल्क में कटौती के कारण बाईस मई को जरूर कीमत में बदलाव हुआ था।
|
शब्द "राजशाही" यूनानी मूल का है शब्द का अर्थ "सर्वसम्मत", "स्वायत्तता" का अर्थ है राजशाही की मुख्य विशेषताएं राज्य के प्रमुख के हाथों में सर्वोच्च शक्ति की एकाग्रता है और सिंहासन के उत्तराधिकारी प्रवेश है। हालांकि, बिजली हमेशा पीढ़ी से पीढ़ी तक स्थानांतरित नहीं होती है। उदाहरण के लिए, रीस्ज़पस्पोलिता का नेतृत्व चुने हुए राजाओं ने किया था। बीजान्टियम में, जो एक राजशाही था, शासक अक्सर मारे गए थे। इस प्रकार सिंहासन पर कब्ज़ा कर लिया गया, जिसने राजा को मार डाला (जब्ती के अधिकारों पर)।
निरपेक्ष (असीमित) राजशाही अलग हैनागरिकों के अधिकारों की पूर्ण कमी, प्रतिनिधि निकायों की कमी। और जाहिर है, इस शासन के तहत, केवल एक व्यक्ति की शक्ति हैः स्वायत्तता। 18 वीं सदी से लेकर 1 9 17 के अंत तक इस प्रकार की सरकार रूस की विशेषता थी।
रूस में "पूर्ण राजतंत्र" की अवधारणा के लिए समानार्थक शब्दवहां "निरंकुश राजशाही", "स्वायत्तता" के रूप में ऐसी शर्तें थीं रूसी निरपेक्षता के मुख्य लक्षण तीन सदियों से बनते थे। अपने आदेश के अनुसार, स्वयं के स्वामित्व या उसके आदेश पर कानून जारी किए गए थे, राज्य के खजाने को खर्च या पुनः मंगाया गया था, अदालत को प्रशासित किया गया था। करों की एक एकीकृत प्रणाली देश में स्थापित की गई थी। सम्राट एक प्रशासनिक उपकरण पर निर्भर था जिसमें करीब लोगों का समावेश था। रूसी निरंकुशवाद के अविभाज्य संकेतों को भी किसानों के पूर्ण दासता, विनियमन, सार्वजनिक जीवन के सभी क्षेत्रों में अधिकारियों के हस्तक्षेप, एक स्थायी पुलिस और सेना की मौजूदगी को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
निरपेक्षता यह मानती है कि स्वायत्तता खड़ा हैहर कानून और कानून राजा को सब कुछ अनुमति है वह प्रणाली का हिस्सा माना जाता है, उसकी शक्ति कानून द्वारा स्थापित की जाती है। देश का शासक परमेश्वर, उसके विवेक और कानून के सामने अपने कर्मों के लिए उत्तरदायी है।
हालांकि, राजशाही सीमित हो सकती है सरकार के इस रूप की कई किस्में हैं इनमें से एक रूप दोहरी राजशाही है इस प्रणाली के ढांचे के भीतर, विधायी शक्ति से शासक का कुछ अलग है इसी समय, द्वैतवादी राजतंत्र राज्य के प्रमुख के ऊपर कार्यकारी की पूरी शक्ति बरकरार रखता है।
एक नियम के रूप में, द्वैतवादी राजतंत्र की सिफारिश की गईदेश के प्रमुख को संसद को भंग करने का एक असीमित अवसर है, जो मौजूदा सरकार के निरपेक्षता में बदल जाता है। ऐसे राज्य प्रणालियों में, सरकार केवल देश के प्रमुख को रिपोर्ट करती है और संसद के लिए उत्तरदायी नहीं है। उत्तरार्द्ध, बदले में, राज्य के बजट को स्वीकृति देने के अपने अधिकार को लागू करने से ही सरकारी गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। सामान्य तौर पर, द्वैतवादी राजशाही प्रतिनिधि शक्ति पर शासक की शक्ति की प्रबलता की विशेषता होती है।
|
शब्द "राजशाही" यूनानी मूल का है शब्द का अर्थ "सर्वसम्मत", "स्वायत्तता" का अर्थ है राजशाही की मुख्य विशेषताएं राज्य के प्रमुख के हाथों में सर्वोच्च शक्ति की एकाग्रता है और सिंहासन के उत्तराधिकारी प्रवेश है। हालांकि, बिजली हमेशा पीढ़ी से पीढ़ी तक स्थानांतरित नहीं होती है। उदाहरण के लिए, रीस्ज़पस्पोलिता का नेतृत्व चुने हुए राजाओं ने किया था। बीजान्टियम में, जो एक राजशाही था, शासक अक्सर मारे गए थे। इस प्रकार सिंहासन पर कब्ज़ा कर लिया गया, जिसने राजा को मार डाला । निरपेक्ष राजशाही अलग हैनागरिकों के अधिकारों की पूर्ण कमी, प्रतिनिधि निकायों की कमी। और जाहिर है, इस शासन के तहत, केवल एक व्यक्ति की शक्ति हैः स्वायत्तता। अट्ठारह वीं सदी से लेकर एक नौ सत्रह के अंत तक इस प्रकार की सरकार रूस की विशेषता थी। रूस में "पूर्ण राजतंत्र" की अवधारणा के लिए समानार्थक शब्दवहां "निरंकुश राजशाही", "स्वायत्तता" के रूप में ऐसी शर्तें थीं रूसी निरपेक्षता के मुख्य लक्षण तीन सदियों से बनते थे। अपने आदेश के अनुसार, स्वयं के स्वामित्व या उसके आदेश पर कानून जारी किए गए थे, राज्य के खजाने को खर्च या पुनः मंगाया गया था, अदालत को प्रशासित किया गया था। करों की एक एकीकृत प्रणाली देश में स्थापित की गई थी। सम्राट एक प्रशासनिक उपकरण पर निर्भर था जिसमें करीब लोगों का समावेश था। रूसी निरंकुशवाद के अविभाज्य संकेतों को भी किसानों के पूर्ण दासता, विनियमन, सार्वजनिक जीवन के सभी क्षेत्रों में अधिकारियों के हस्तक्षेप, एक स्थायी पुलिस और सेना की मौजूदगी को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। निरपेक्षता यह मानती है कि स्वायत्तता खड़ा हैहर कानून और कानून राजा को सब कुछ अनुमति है वह प्रणाली का हिस्सा माना जाता है, उसकी शक्ति कानून द्वारा स्थापित की जाती है। देश का शासक परमेश्वर, उसके विवेक और कानून के सामने अपने कर्मों के लिए उत्तरदायी है। हालांकि, राजशाही सीमित हो सकती है सरकार के इस रूप की कई किस्में हैं इनमें से एक रूप दोहरी राजशाही है इस प्रणाली के ढांचे के भीतर, विधायी शक्ति से शासक का कुछ अलग है इसी समय, द्वैतवादी राजतंत्र राज्य के प्रमुख के ऊपर कार्यकारी की पूरी शक्ति बरकरार रखता है। एक नियम के रूप में, द्वैतवादी राजतंत्र की सिफारिश की गईदेश के प्रमुख को संसद को भंग करने का एक असीमित अवसर है, जो मौजूदा सरकार के निरपेक्षता में बदल जाता है। ऐसे राज्य प्रणालियों में, सरकार केवल देश के प्रमुख को रिपोर्ट करती है और संसद के लिए उत्तरदायी नहीं है। उत्तरार्द्ध, बदले में, राज्य के बजट को स्वीकृति देने के अपने अधिकार को लागू करने से ही सरकारी गतिविधियों को प्रभावित कर सकता है। सामान्य तौर पर, द्वैतवादी राजशाही प्रतिनिधि शक्ति पर शासक की शक्ति की प्रबलता की विशेषता होती है।
|
वॉर्ड (ward) स्थानीय प्रशासन के लिए स्थापित एक छोटा भौगोलिक क्षेत्र होता है जो आमतौर पर किसी मुहल्ले, गली या अन्य भौगोलिक चीज़ पर आधारित होता है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यू ज़ीलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ़्रीका, मोनैको और कुछ अन्य क्षेत्रों में यह एक चुनावक्षेत्र भी होता है। भारत में मुम्बई और दिल्ली जैसे नगरों में यह एक प्रशासनिक विभाग होता है।, P. Jayarama Reddy, pp.
11 संबंधोंः दिल्ली, दक्षिण अफ़्रीका, न्यूज़ीलैण्ड, ब्रिटेन, भारत, मुम्बई, मुहल्ला, मोनाको, संयुक्त राज्य, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा।
दिल्ली (IPA), आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (अंग्रेज़ीः National Capital Territory of Delhi) भारत का एक केंद्र-शासित प्रदेश और महानगर है। इसमें नई दिल्ली सम्मिलित है जो भारत की राजधानी है। दिल्ली राजधानी होने के नाते केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों - कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका के मुख्यालय नई दिल्ली और दिल्ली में स्थापित हैं १४८३ वर्ग किलोमीटर में फैला दिल्ली जनसंख्या के तौर पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। यहाँ की जनसंख्या लगभग १ करोड़ ७० लाख है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैंः हिन्दी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी। भारत में दिल्ली का ऐतिहासिक महत्त्व है। इसके दक्षिण पश्चिम में अरावली पहाड़ियां और पूर्व में यमुना नदी है, जिसके किनारे यह बसा है। यह प्राचीन समय में गंगा के मैदान से होकर जाने वाले वाणिज्य पथों के रास्ते में पड़ने वाला मुख्य पड़ाव था। यमुना नदी के किनारे स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है। यह भारत का अति प्राचीन नगर है। इसके इतिहास का प्रारम्भ सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़ा हुआ है। हरियाणा के आसपास के क्षेत्रों में हुई खुदाई से इस बात के प्रमाण मिले हैं। महाभारत काल में इसका नाम इन्द्रप्रस्थ था। दिल्ली सल्तनत के उत्थान के साथ ही दिल्ली एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक शहर के रूप में उभरी। यहाँ कई प्राचीन एवं मध्यकालीन इमारतों तथा उनके अवशेषों को देखा जा सकता हैं। १६३९ में मुगल बादशाह शाहजहाँ ने दिल्ली में ही एक चारदीवारी से घिरे शहर का निर्माण करवाया जो १६७९ से १८५७ तक मुगल साम्राज्य की राजधानी रही। १८वीं एवं १९वीं शताब्दी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने लगभग पूरे भारत को अपने कब्जे में ले लिया। इन लोगों ने कोलकाता को अपनी राजधानी बनाया। १९११ में अंग्रेजी सरकार ने फैसला किया कि राजधानी को वापस दिल्ली लाया जाए। इसके लिए पुरानी दिल्ली के दक्षिण में एक नए नगर नई दिल्ली का निर्माण प्रारम्भ हुआ। अंग्रेजों से १९४७ में स्वतंत्रता प्राप्त कर नई दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित किया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों से लोगों का प्रवासन हुआ, इससे दिल्ली के स्वरूप में आमूल परिवर्तन हुआ। विभिन्न प्रान्तो, धर्मों एवं जातियों के लोगों के दिल्ली में बसने के कारण दिल्ली का शहरीकरण तो हुआ ही साथ ही यहाँ एक मिश्रित संस्कृति ने भी जन्म लिया। आज दिल्ली भारत का एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक केन्द्र है। .
दक्षिण अफ़्रीका (साउथ अफ़्रीका भी कहा जाता है, अंग्रेज़ी उच्चारणः साउथ् ऍफ़्रिक) अफ़्रीका महाद्वीप के दक्षिणी छोर पर स्थित एक गणराज्य है। इसकी सीमाएँ उत्तर में नामीबिया, बोत्सवाना और ज़िम्बाब्वे और उत्तर-पूर्व में मोज़ाम्बिक़ और स्वाज़ीलैंड के साथ लगती हैं, जबकि लेसूथो एक स्वतंत्र देश है, जो पूरी तरह से दक्षिण अफ़्रीका से घिरा हुआ है। आधुनिक मानव की बसाहट दक्षिण अफ़्रीका में एक लाख साल पुरानी है। यूरोपीय लोगों के आगमन के दौरान क्षेत्र में रहने वाले बहुसंख्यक स्थानीय लोग आदिवासी थे, जो अफ़्रीका के विभिन्न क्षेत्रों से हजार साल पहले आए थे। 4थी-5वीं सदी के दौरान बांतू भाषी आदिवासी दक्षिण को ओर बढ़े और दक्षिण अफ़्रीका के वास्तविक निवासियों, खोई सान लोगों, को विस्थापित करने के साथ-साथ उनके साथ शामिल भी हो गए। यूरोपीय लोगों के आगमन के दौरान कोसा और ज़ूलु दो बड़े समुदाय थे। केप समुद्री मार्ग की खोज के करीबन डेढ़ शताब्दी बाद 1962 में डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने उस जगह पर खानपान केंद्र (रिफ्रेशमेंट सेंटर) की स्थापना की, जिसे आज केप टाउन के नाम से जाना जाता है। 1806 में केप टाउन ब्रिटिश कॉलोनी बन गया। 1820 के दौरान बुअर (डच, फ्लेमिश, जर्मन और फ्रेंच सेटलर्ज़) और ब्रिटिश लोगों के देश के पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों में बसने के साथ ही यूरोपीय बसाहट में वृद्धि हुई। इसके साथ ही क्षेत्र पर क़ब्ज़े के लिए कोसा, जुलू और अफ़्रिकानरों के बीच झड़पें भी बढ़ती गई। हीरे और बाद में सोने की खोज के साथ ही 19वीं सदी में द्वंद शुरू हो गया, जिसे अंग्रेज़-बुअर युद्ध के नाम से जाना जाता है। हालाँकि ब्रिटिश ने बुअरों पर युद्ध में जीत हासिल कर ली थी, लेकिन 1910 में दक्षिण अफ़्रीका को ब्रिटिश डोमिनियन के तौर पर सीमित स्वतंत्रता प्रदान की। 1961 में दक्षिण अफ़्रीका को गणराज्य का दर्जा मिला। देश के भीतर और बाहर विरोध के बावजूद सरकार ने रंगभेद की नीति को जारी रखा। 20वीं सदी में देश की दमनकारी नीतियों के विरोध में बहिष्कार करना शुरू किया। काले दक्षिण अफ़्रीकी और उनके सहयोगियों के सालों के अंदरुनी विरोध, कार्रवाई और प्रदर्शन के परिणामस्वरूप आख़िरकार 1990 में दक्षिण अफ़्रीकी सरकार ने वार्ता शुरू की, जिसकी परिणति भेदभाव वाली नीति के ख़त्म होने और 1994 में लोकतांत्रिक चुनाव से हुई। देश फिर से राष्ट्रकुल देशों में शामिल हुआ। दक्षिण अफ़्रीका, अफ़्रीका में जातीय रूप से सबसे ज़्यादा विविधताओं वाला देश है और यहाँ अफ़्रीका के किसी भी देश से ज़्यादा सफ़ेद लोग रहते हैं। अफ़्रीकी जनजातियों के अलावा यहाँ कई एशियाई देशों के लोग भी हैं जिनमे सबसे ज़्यादा भारत से आये लोगों की संख्या है। .
न्यूज़ीलैंड प्रशान्त महासागर में ऑस्ट्रेलिया के पास स्थित देश है। ये दो बड़े द्वीपों से बना है। न्यूजीलैंड (माओरी भाषा मेंः Aotearoa आओटेआरोआ) दक्षिण पश्चिमि पेसिफ़िक ओशन में दो बड़े द्वीप और अन्य कई छोटे द्वीपों से बना एक देश है। न्यूजीलैंड के ४० लाख लोगों में से लगभग तीस लाख लोग उत्तरी द्वीप में रहते हैं और दस लाख लोग दक्षिणि द्वीप में। यह द्वीप दुनिया के सबसे बडे द्वीपों में गिने जाते हैं। अन्य द्वीपों में बहुत कम लोग रहतें हैं और वे बहुत छोटे हैं। इनमें मुख्य है.
ब्रिटेन शब्द का प्रयोग हालाँकि आम तौर पर हिंदी में संयुक्त राजशाही अर्थात् यूनाइटेड किंगडम देश का बोध करने के लिए होता है, परंतु इसका उपयोग अन्य सन्दर्भों के लिए भी हो सकता है.
भारत (आधिकारिक नामः भारत गणराज्य, Republic of India) दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गों और बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायोंः हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने १८वीं और १९वीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। १८५७ के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद १५ अगस्त १९४७ को आज़ादी पाई। १९५० में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को २९ राज्यों और ७ संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद 1991 के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है। ३३ लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधार पर विश्व की तीसरी और मानक मूल्यों के आधार पर विश्व की दसवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। १९९१ के बाज़ार-आधारित सुधारों के बाद भारत विश्व की सबसे तेज़ विकसित होती बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक हो गया है और इसे एक नव-औद्योगिकृत राष्ट्र माना जाता है। परंतु भारत के सामने अभी भी गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य-सेवा और आतंकवाद की चुनौतियां हैं। आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति है। .
भारत के पश्चिमी तट पर स्थित मुंंबई (पूर्व नाम बम्बई), भारतीय राज्य महाराष्ट्र की राजधानी है। इसकी अनुमानित जनसंख्या ३ करोड़ २९ लाख है जो देश की पहली सर्वाधिक आबादी वाली नगरी है। इसका गठन लावा निर्मित सात छोटे-छोटे द्वीपों द्वारा हुआ है एवं यह पुल द्वारा प्रमुख भू-खंड के साथ जुड़ा हुआ है। मुम्बई बन्दरगाह भारतवर्ष का सर्वश्रेष्ठ सामुद्रिक बन्दरगाह है। मुम्बई का तट कटा-फटा है जिसके कारण इसका पोताश्रय प्राकृतिक एवं सुरक्षित है। यूरोप, अमेरिका, अफ़्रीका आदि पश्चिमी देशों से जलमार्ग या वायुमार्ग से आनेवाले जहाज यात्री एवं पर्यटक सर्वप्रथम मुम्बई ही आते हैं इसलिए मुम्बई को भारत का प्रवेशद्वार कहा जाता है। मुम्बई भारत का सर्ववृहत्तम वाणिज्यिक केन्द्र है। जिसकी भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 5% की भागीदारी है। यह सम्पूर्ण भारत के औद्योगिक उत्पाद का 25%, नौवहन व्यापार का 40%, एवं भारतीय अर्थ व्यवस्था के पूंजी लेनदेन का 70% भागीदार है। मुंबई विश्व के सर्वोच्च दस वाणिज्यिक केन्द्रों में से एक है। भारत के अधिकांश बैंक एवं सौदागरी कार्यालयों के प्रमुख कार्यालय एवं कई महत्वपूर्ण आर्थिक संस्थान जैसे भारतीय रिज़र्व बैंक, बम्बई स्टॉक एक्स्चेंज, नेशनल स्टऑक एक्स्चेंज एवं अनेक भारतीय कम्पनियों के निगमित मुख्यालय तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियां मुम्बई में अवस्थित हैं। इसलिए इसे भारत की आर्थिक राजधानी भी कहते हैं। नगर में भारत का हिन्दी चलचित्र एवं दूरदर्शन उद्योग भी है, जो बॉलीवुड नाम से प्रसिद्ध है। मुंबई की व्यवसायिक अपॊर्ट्युनिटी, व उच्च जीवन स्तर पूरे भारतवर्ष भर के लोगों को आकर्षित करती है, जिसके कारण यह नगर विभिन्न समाजों व संस्कृतियों का मिश्रण बन गया है। मुंबई पत्तन भारत के लगभग आधे समुद्री माल की आवाजाही करता है। .
मोनैको की राजकुमारशाही (en:Monaco,.फ़्रांसिसीः Principauté de Monaco, मोनेगास्कः Principatu de Munegu, अंग्रेज़ीः Principality of Monaco) यूरोप महाद्वीप में स्थित एक देश है। फ़्रांस और इटली के बीच स्थित मोनैको दुनिया का दूसरा सबसे छोटा देश है। इसका मुख्य कस्बा है मॉन्टे कार्लो (en:Monte Carlo)। इसकी मुख्य- और राजभाषा है फ़्रांसिसी भाषा। यहाँ दुनिया के किसी भी देश से ज़्यादा प्रतिव्यक्ति करोड़पति हैं। left श्रेणीःयूरोप के देश श्रेणीःयूरोप में राजधानियाँ.
संयुक्त राज्य अमेरिका (United States of America) (यू एस ए), जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य (United States) (यू एस) या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। 48 संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। 38 लाख वर्ग मील (98 लाख किमी2)"", U.S. Census Bureau, database as of August 2010, excluding the U.S. Minor Outlying Islands.
ऑस्ट्रेलिया, सरकारी तौर पर ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रमंडल दक्षिणी गोलार्द्ध के महाद्वीप के अर्न्तगत एक देश है जो दुनिया का सबसे छोटा महाद्वीप भी है और दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप भी, जिसमे तस्मानिया और कई अन्य द्वीप हिंद और प्रशांत महासागर में है। ऑस्ट्रेलिया एकमात्र ऐसी जगह है जिसे एक ही साथ महाद्वीप, एक राष्ट्र और एक द्वीप माना जाता है। पड़ोसी देश उत्तर में इंडोनेशिया, पूर्वी तिमोर और पापुआ न्यू गिनी, उत्तर पूर्व में सोलोमन द्वीप, वानुअतु और न्यू कैलेडोनिया और दक्षिणपूर्व में न्यूजीलैंड है। 18वी सदी के आदिकाल में जब यूरोपियन अवस्थापन प्रारंभ हुआ था उसके भी लगभग 40 हज़ार वर्ष पहले, ऑस्ट्रेलियाई महाद्वीप और तस्मानिया की खोज अलग-अलग देशो के करीब 250 स्वदेशी ऑस्ट्रेलियाईयो ने की थी। तत्कालिक उत्तर से मछुआरो के छिटपुट भ्रमण और होलैंडवासियो (Dutch) द्वारा 1606, में यूरोप की खोज के बाद,1770 में ऑस्ट्रेलिया के अर्द्वपूर्वी भाग पर अंग्रेजों (British) का कब्ज़ा हो गया और 26 जनवरी 1788 में इसका निपटारा "देश निकला" दण्डस्वरुप बने न्यू साउथ वेल्स नगर के रूप में हुआ। इन वर्षों में जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हुई और महाद्वीप का पता चला,19वी सदी के दौरान दूसरे पांच बड़े स्वयं-शासित शीर्ष नगर की स्थापना की गई। 1 जनवरी 1901 को, छः नगर महासंघ हो गए और ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रमंडल का गठन हुआ। महासंघ के समय से लेकर ऑस्ट्रेलिया ने एक स्थायी उदार प्रजातांत्रिक राजनैतिक व्यवस्था का निर्वहन किया और प्रभुता संपन्न राष्ट्र बना रहा। जनसंख्या 21.7मिलियन (दस लाख) से थोडा ही ऊपर है, साथ ही लगभग 60% जनसंख्या मुख्य राज्यों सिडनी,मेलबर्न,ब्रिस्बेन,पर्थ और एडिलेड में केन्द्रित है। राष्ट्र की राजधानी केनबर्रा है जो ऑस्ट्रेलियाई प्रधान प्रदेश (ACT) में अवस्थित है। प्रौद्योगिक रूप से उन्नत और औद्योगिक ऑस्ट्रेलिया एक समृद्ध बहुसांस्कृतिक राष्ट्र है और इसका कई राष्ट्रों की तुलना में इन क्षत्रों में प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है जैसे स्वास्थ्य, आयु संभाव्यता, जीवन-स्तर, मानव विकास, जन शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और मूलभूत अधिकारों की रक्षा और राजनैतिक अधिकार.
कोई विवरण नहीं।
|
वॉर्ड स्थानीय प्रशासन के लिए स्थापित एक छोटा भौगोलिक क्षेत्र होता है जो आमतौर पर किसी मुहल्ले, गली या अन्य भौगोलिक चीज़ पर आधारित होता है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यू ज़ीलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण अफ़्रीका, मोनैको और कुछ अन्य क्षेत्रों में यह एक चुनावक्षेत्र भी होता है। भारत में मुम्बई और दिल्ली जैसे नगरों में यह एक प्रशासनिक विभाग होता है।, P. Jayarama Reddy, pp. ग्यारह संबंधोंः दिल्ली, दक्षिण अफ़्रीका, न्यूज़ीलैण्ड, ब्रिटेन, भारत, मुम्बई, मुहल्ला, मोनाको, संयुक्त राज्य, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा। दिल्ली , आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली भारत का एक केंद्र-शासित प्रदेश और महानगर है। इसमें नई दिल्ली सम्मिलित है जो भारत की राजधानी है। दिल्ली राजधानी होने के नाते केंद्र सरकार की तीनों इकाइयों - कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका के मुख्यालय नई दिल्ली और दिल्ली में स्थापित हैं एक हज़ार चार सौ तिरासी वर्ग किलोमीटर में फैला दिल्ली जनसंख्या के तौर पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर है। यहाँ की जनसंख्या लगभग एक करोड़ सत्तर लाख है। यहाँ बोली जाने वाली मुख्य भाषाएँ हैंः हिन्दी, पंजाबी, उर्दू और अंग्रेज़ी। भारत में दिल्ली का ऐतिहासिक महत्त्व है। इसके दक्षिण पश्चिम में अरावली पहाड़ियां और पूर्व में यमुना नदी है, जिसके किनारे यह बसा है। यह प्राचीन समय में गंगा के मैदान से होकर जाने वाले वाणिज्य पथों के रास्ते में पड़ने वाला मुख्य पड़ाव था। यमुना नदी के किनारे स्थित इस नगर का गौरवशाली पौराणिक इतिहास है। यह भारत का अति प्राचीन नगर है। इसके इतिहास का प्रारम्भ सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़ा हुआ है। हरियाणा के आसपास के क्षेत्रों में हुई खुदाई से इस बात के प्रमाण मिले हैं। महाभारत काल में इसका नाम इन्द्रप्रस्थ था। दिल्ली सल्तनत के उत्थान के साथ ही दिल्ली एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक शहर के रूप में उभरी। यहाँ कई प्राचीन एवं मध्यकालीन इमारतों तथा उनके अवशेषों को देखा जा सकता हैं। एक हज़ार छः सौ उनतालीस में मुगल बादशाह शाहजहाँ ने दिल्ली में ही एक चारदीवारी से घिरे शहर का निर्माण करवाया जो एक हज़ार छः सौ उन्यासी से एक हज़ार आठ सौ सत्तावन तक मुगल साम्राज्य की राजधानी रही। अट्ठारहवीं एवं उन्नीसवीं शताब्दी में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने लगभग पूरे भारत को अपने कब्जे में ले लिया। इन लोगों ने कोलकाता को अपनी राजधानी बनाया। एक हज़ार नौ सौ ग्यारह में अंग्रेजी सरकार ने फैसला किया कि राजधानी को वापस दिल्ली लाया जाए। इसके लिए पुरानी दिल्ली के दक्षिण में एक नए नगर नई दिल्ली का निर्माण प्रारम्भ हुआ। अंग्रेजों से एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस में स्वतंत्रता प्राप्त कर नई दिल्ली को भारत की राजधानी घोषित किया गया। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् दिल्ली में विभिन्न क्षेत्रों से लोगों का प्रवासन हुआ, इससे दिल्ली के स्वरूप में आमूल परिवर्तन हुआ। विभिन्न प्रान्तो, धर्मों एवं जातियों के लोगों के दिल्ली में बसने के कारण दिल्ली का शहरीकरण तो हुआ ही साथ ही यहाँ एक मिश्रित संस्कृति ने भी जन्म लिया। आज दिल्ली भारत का एक प्रमुख राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं वाणिज्यिक केन्द्र है। . दक्षिण अफ़्रीका अफ़्रीका महाद्वीप के दक्षिणी छोर पर स्थित एक गणराज्य है। इसकी सीमाएँ उत्तर में नामीबिया, बोत्सवाना और ज़िम्बाब्वे और उत्तर-पूर्व में मोज़ाम्बिक़ और स्वाज़ीलैंड के साथ लगती हैं, जबकि लेसूथो एक स्वतंत्र देश है, जो पूरी तरह से दक्षिण अफ़्रीका से घिरा हुआ है। आधुनिक मानव की बसाहट दक्षिण अफ़्रीका में एक लाख साल पुरानी है। यूरोपीय लोगों के आगमन के दौरान क्षेत्र में रहने वाले बहुसंख्यक स्थानीय लोग आदिवासी थे, जो अफ़्रीका के विभिन्न क्षेत्रों से हजार साल पहले आए थे। चारथी-पाँचवीं सदी के दौरान बांतू भाषी आदिवासी दक्षिण को ओर बढ़े और दक्षिण अफ़्रीका के वास्तविक निवासियों, खोई सान लोगों, को विस्थापित करने के साथ-साथ उनके साथ शामिल भी हो गए। यूरोपीय लोगों के आगमन के दौरान कोसा और ज़ूलु दो बड़े समुदाय थे। केप समुद्री मार्ग की खोज के करीबन डेढ़ शताब्दी बाद एक हज़ार नौ सौ बासठ में डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने उस जगह पर खानपान केंद्र की स्थापना की, जिसे आज केप टाउन के नाम से जाना जाता है। एक हज़ार आठ सौ छः में केप टाउन ब्रिटिश कॉलोनी बन गया। एक हज़ार आठ सौ बीस के दौरान बुअर और ब्रिटिश लोगों के देश के पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों में बसने के साथ ही यूरोपीय बसाहट में वृद्धि हुई। इसके साथ ही क्षेत्र पर क़ब्ज़े के लिए कोसा, जुलू और अफ़्रिकानरों के बीच झड़पें भी बढ़ती गई। हीरे और बाद में सोने की खोज के साथ ही उन्नीसवीं सदी में द्वंद शुरू हो गया, जिसे अंग्रेज़-बुअर युद्ध के नाम से जाना जाता है। हालाँकि ब्रिटिश ने बुअरों पर युद्ध में जीत हासिल कर ली थी, लेकिन एक हज़ार नौ सौ दस में दक्षिण अफ़्रीका को ब्रिटिश डोमिनियन के तौर पर सीमित स्वतंत्रता प्रदान की। एक हज़ार नौ सौ इकसठ में दक्षिण अफ़्रीका को गणराज्य का दर्जा मिला। देश के भीतर और बाहर विरोध के बावजूद सरकार ने रंगभेद की नीति को जारी रखा। बीसवीं सदी में देश की दमनकारी नीतियों के विरोध में बहिष्कार करना शुरू किया। काले दक्षिण अफ़्रीकी और उनके सहयोगियों के सालों के अंदरुनी विरोध, कार्रवाई और प्रदर्शन के परिणामस्वरूप आख़िरकार एक हज़ार नौ सौ नब्बे में दक्षिण अफ़्रीकी सरकार ने वार्ता शुरू की, जिसकी परिणति भेदभाव वाली नीति के ख़त्म होने और एक हज़ार नौ सौ चौरानवे में लोकतांत्रिक चुनाव से हुई। देश फिर से राष्ट्रकुल देशों में शामिल हुआ। दक्षिण अफ़्रीका, अफ़्रीका में जातीय रूप से सबसे ज़्यादा विविधताओं वाला देश है और यहाँ अफ़्रीका के किसी भी देश से ज़्यादा सफ़ेद लोग रहते हैं। अफ़्रीकी जनजातियों के अलावा यहाँ कई एशियाई देशों के लोग भी हैं जिनमे सबसे ज़्यादा भारत से आये लोगों की संख्या है। . न्यूज़ीलैंड प्रशान्त महासागर में ऑस्ट्रेलिया के पास स्थित देश है। ये दो बड़े द्वीपों से बना है। न्यूजीलैंड दक्षिण पश्चिमि पेसिफ़िक ओशन में दो बड़े द्वीप और अन्य कई छोटे द्वीपों से बना एक देश है। न्यूजीलैंड के चालीस लाख लोगों में से लगभग तीस लाख लोग उत्तरी द्वीप में रहते हैं और दस लाख लोग दक्षिणि द्वीप में। यह द्वीप दुनिया के सबसे बडे द्वीपों में गिने जाते हैं। अन्य द्वीपों में बहुत कम लोग रहतें हैं और वे बहुत छोटे हैं। इनमें मुख्य है. ब्रिटेन शब्द का प्रयोग हालाँकि आम तौर पर हिंदी में संयुक्त राजशाही अर्थात् यूनाइटेड किंगडम देश का बोध करने के लिए होता है, परंतु इसका उपयोग अन्य सन्दर्भों के लिए भी हो सकता है. भारत दक्षिण एशिया में स्थित भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा देश है। पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्ध में स्थित भारत, भौगोलिक दृष्टि से विश्व में सातवाँ सबसे बड़ा और जनसंख्या के दृष्टिकोण से दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर-पूर्व में चीन, नेपाल और भूटान, पूर्व में बांग्लादेश और म्यान्मार स्थित हैं। हिन्द महासागर में इसके दक्षिण पश्चिम में मालदीव, दक्षिण में श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व में इंडोनेशिया से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर की भौतिक सीमा हिमालय पर्वत से और दक्षिण में हिन्द महासागर से लगी हुई है। पूर्व में बंगाल की खाड़ी है तथा पश्चिम में अरब सागर हैं। प्राचीन सिन्धु घाटी सभ्यता, व्यापार मार्गों और बड़े-बड़े साम्राज्यों का विकास-स्थान रहे भारतीय उपमहाद्वीप को इसके सांस्कृतिक और आर्थिक सफलता के लंबे इतिहास के लिये जाना जाता रहा है। चार प्रमुख संप्रदायोंः हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्मों का यहां उदय हुआ, पारसी, यहूदी, ईसाई, और मुस्लिम धर्म प्रथम सहस्राब्दी में यहां पहुचे और यहां की विविध संस्कृति को नया रूप दिया। क्रमिक विजयों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने अट्ठारहवीं और उन्नीसवीं सदी में भारत के ज़्यादतर हिस्सों को अपने राज्य में मिला लिया। एक हज़ार आठ सौ सत्तावन के विफल विद्रोह के बाद भारत के प्रशासन का भार ब्रिटिश सरकार ने अपने ऊपर ले लिया। ब्रिटिश भारत के रूप में ब्रिटिश साम्राज्य के प्रमुख अंग भारत ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक लम्बे और मुख्य रूप से अहिंसक स्वतन्त्रता संग्राम के बाद पंद्रह अगस्त एक हज़ार नौ सौ सैंतालीस को आज़ादी पाई। एक हज़ार नौ सौ पचास में लागू हुए नये संविधान में इसे सार्वजनिक वयस्क मताधिकार के आधार पर स्थापित संवैधानिक लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित कर दिया गया और युनाईटेड किंगडम की तर्ज़ पर वेस्टमिंस्टर शैली की संसदीय सरकार स्थापित की गयी। एक संघीय राष्ट्र, भारत को उनतीस राज्यों और सात संघ शासित प्रदेशों में गठित किया गया है। लम्बे समय तक समाजवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने के बाद एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के पश्चात् भारत ने उदारीकरण और वैश्वीकरण की नयी नीतियों के आधार पर सार्थक आर्थिक और सामाजिक प्रगति की है। तैंतीस लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ भारत भौगोलिक क्षेत्रफल के आधार पर विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा राष्ट्र है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति समता के आधार पर विश्व की तीसरी और मानक मूल्यों के आधार पर विश्व की दसवीं सबसे बडी अर्थव्यवस्था है। एक हज़ार नौ सौ इक्यानवे के बाज़ार-आधारित सुधारों के बाद भारत विश्व की सबसे तेज़ विकसित होती बड़ी अर्थ-व्यवस्थाओं में से एक हो गया है और इसे एक नव-औद्योगिकृत राष्ट्र माना जाता है। परंतु भारत के सामने अभी भी गरीबी, भ्रष्टाचार, कुपोषण, अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य-सेवा और आतंकवाद की चुनौतियां हैं। आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है और भारतीय सेना एक क्षेत्रीय शक्ति है। . भारत के पश्चिमी तट पर स्थित मुंंबई , भारतीय राज्य महाराष्ट्र की राजधानी है। इसकी अनुमानित जनसंख्या तीन करोड़ उनतीस लाख है जो देश की पहली सर्वाधिक आबादी वाली नगरी है। इसका गठन लावा निर्मित सात छोटे-छोटे द्वीपों द्वारा हुआ है एवं यह पुल द्वारा प्रमुख भू-खंड के साथ जुड़ा हुआ है। मुम्बई बन्दरगाह भारतवर्ष का सर्वश्रेष्ठ सामुद्रिक बन्दरगाह है। मुम्बई का तट कटा-फटा है जिसके कारण इसका पोताश्रय प्राकृतिक एवं सुरक्षित है। यूरोप, अमेरिका, अफ़्रीका आदि पश्चिमी देशों से जलमार्ग या वायुमार्ग से आनेवाले जहाज यात्री एवं पर्यटक सर्वप्रथम मुम्बई ही आते हैं इसलिए मुम्बई को भारत का प्रवेशद्वार कहा जाता है। मुम्बई भारत का सर्ववृहत्तम वाणिज्यिक केन्द्र है। जिसकी भारत के सकल घरेलू उत्पाद में पाँच% की भागीदारी है। यह सम्पूर्ण भारत के औद्योगिक उत्पाद का पच्चीस%, नौवहन व्यापार का चालीस%, एवं भारतीय अर्थ व्यवस्था के पूंजी लेनदेन का सत्तर% भागीदार है। मुंबई विश्व के सर्वोच्च दस वाणिज्यिक केन्द्रों में से एक है। भारत के अधिकांश बैंक एवं सौदागरी कार्यालयों के प्रमुख कार्यालय एवं कई महत्वपूर्ण आर्थिक संस्थान जैसे भारतीय रिज़र्व बैंक, बम्बई स्टॉक एक्स्चेंज, नेशनल स्टऑक एक्स्चेंज एवं अनेक भारतीय कम्पनियों के निगमित मुख्यालय तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियां मुम्बई में अवस्थित हैं। इसलिए इसे भारत की आर्थिक राजधानी भी कहते हैं। नगर में भारत का हिन्दी चलचित्र एवं दूरदर्शन उद्योग भी है, जो बॉलीवुड नाम से प्रसिद्ध है। मुंबई की व्यवसायिक अपॊर्ट्युनिटी, व उच्च जीवन स्तर पूरे भारतवर्ष भर के लोगों को आकर्षित करती है, जिसके कारण यह नगर विभिन्न समाजों व संस्कृतियों का मिश्रण बन गया है। मुंबई पत्तन भारत के लगभग आधे समुद्री माल की आवाजाही करता है। . मोनैको की राजकुमारशाही यूरोप महाद्वीप में स्थित एक देश है। फ़्रांस और इटली के बीच स्थित मोनैको दुनिया का दूसरा सबसे छोटा देश है। इसका मुख्य कस्बा है मॉन्टे कार्लो । इसकी मुख्य- और राजभाषा है फ़्रांसिसी भाषा। यहाँ दुनिया के किसी भी देश से ज़्यादा प्रतिव्यक्ति करोड़पति हैं। left श्रेणीःयूरोप के देश श्रेणीःयूरोप में राजधानियाँ. संयुक्त राज्य अमेरिका , जिसे सामान्यतः संयुक्त राज्य या अमेरिका कहा जाता हैं, एक देश हैं, जिसमें राज्य, एक फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, पाँच प्रमुख स्व-शासनीय क्षेत्र, और विभिन्न अधिनस्थ क्षेत्र सम्मिलित हैं। अड़तालीस संस्पर्शी राज्य और फ़ेडरल डिस्ट्रिक्ट, कनाडा और मेक्सिको के मध्य, केन्द्रीय उत्तर अमेरिका में हैं। अलास्का राज्य, उत्तर अमेरिका के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है, जिसके पूर्व में कनाडा की सीमा एवं पश्चिम मे बेरिंग जलसन्धि रूस से घिरा हुआ है। वहीं हवाई राज्य, मध्य-प्रशान्त में स्थित हैं। अमेरिकी स्व-शासित क्षेत्र प्रशान्त महासागर और कॅरीबीयन सागर में बिखरें हुएँ हैं। अड़तीस लाख वर्ग मील "", U.S. Census Bureau, database as of August दो हज़ार दस, excluding the U.S. Minor Outlying Islands. ऑस्ट्रेलिया, सरकारी तौर पर ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रमंडल दक्षिणी गोलार्द्ध के महाद्वीप के अर्न्तगत एक देश है जो दुनिया का सबसे छोटा महाद्वीप भी है और दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप भी, जिसमे तस्मानिया और कई अन्य द्वीप हिंद और प्रशांत महासागर में है। ऑस्ट्रेलिया एकमात्र ऐसी जगह है जिसे एक ही साथ महाद्वीप, एक राष्ट्र और एक द्वीप माना जाता है। पड़ोसी देश उत्तर में इंडोनेशिया, पूर्वी तिमोर और पापुआ न्यू गिनी, उत्तर पूर्व में सोलोमन द्वीप, वानुअतु और न्यू कैलेडोनिया और दक्षिणपूर्व में न्यूजीलैंड है। अट्ठारहवी सदी के आदिकाल में जब यूरोपियन अवस्थापन प्रारंभ हुआ था उसके भी लगभग चालीस हज़ार वर्ष पहले, ऑस्ट्रेलियाई महाद्वीप और तस्मानिया की खोज अलग-अलग देशो के करीब दो सौ पचास स्वदेशी ऑस्ट्रेलियाईयो ने की थी। तत्कालिक उत्तर से मछुआरो के छिटपुट भ्रमण और होलैंडवासियो द्वारा एक हज़ार छः सौ छः, में यूरोप की खोज के बाद,एक हज़ार सात सौ सत्तर में ऑस्ट्रेलिया के अर्द्वपूर्वी भाग पर अंग्रेजों का कब्ज़ा हो गया और छब्बीस जनवरी एक हज़ार सात सौ अठासी में इसका निपटारा "देश निकला" दण्डस्वरुप बने न्यू साउथ वेल्स नगर के रूप में हुआ। इन वर्षों में जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हुई और महाद्वीप का पता चला,उन्नीसवी सदी के दौरान दूसरे पांच बड़े स्वयं-शासित शीर्ष नगर की स्थापना की गई। एक जनवरी एक हज़ार नौ सौ एक को, छः नगर महासंघ हो गए और ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रमंडल का गठन हुआ। महासंघ के समय से लेकर ऑस्ट्रेलिया ने एक स्थायी उदार प्रजातांत्रिक राजनैतिक व्यवस्था का निर्वहन किया और प्रभुता संपन्न राष्ट्र बना रहा। जनसंख्या इक्कीस.सातमिलियन से थोडा ही ऊपर है, साथ ही लगभग साठ% जनसंख्या मुख्य राज्यों सिडनी,मेलबर्न,ब्रिस्बेन,पर्थ और एडिलेड में केन्द्रित है। राष्ट्र की राजधानी केनबर्रा है जो ऑस्ट्रेलियाई प्रधान प्रदेश में अवस्थित है। प्रौद्योगिक रूप से उन्नत और औद्योगिक ऑस्ट्रेलिया एक समृद्ध बहुसांस्कृतिक राष्ट्र है और इसका कई राष्ट्रों की तुलना में इन क्षत्रों में प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा है जैसे स्वास्थ्य, आयु संभाव्यता, जीवन-स्तर, मानव विकास, जन शिक्षा, आर्थिक स्वतंत्रता और मूलभूत अधिकारों की रक्षा और राजनैतिक अधिकार. कोई विवरण नहीं।
|
बहुत कम समय में एलन मस्क के नए बर्न हेयर परफ्यूम की बिक्री नई ऊंचाई पर पहुंच गई है। आपको बता दें कि इस परफ्यूम की एक बोतल की कीमत 100 डॉलर यानी भारतीय मूल्य के हिसाब से 8400 रुपये है। अगर आप भी इस परफ्यूम को खरीदना चाहते है तो द बोरिंग कंपनी की वेबसाइट से खरीद सकते है। शुल्क का भुगतान क्रिप्टोक्यूरेंसी डॉगकोइन के माध्यम से किया जा सकता है। इस परफ्यूम की मांग अभी भी बढ़ रही है। एलोन मस्क का कहना है कि अगर इत्र की 10 लाख बोतलें बिकती हैं, तो यह देखना चाहिए कि क्या यह खबर होगी।
यह इत्र सभी के लिए है। उन्होंने यह भी कहा कि पुरुष और महिलाएं इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इस परफ्यूम का वर्णन करते हुए वेबसाइट पर 'द एसेंस ऑफ रिपग्नेंट डिजायर' लिखा हुआ है। कंपनी का दावा है कि यह परफ्यूम ऐसा होगा जैसे 'एक मोमबत्ती खाने की मेज पर आसानी से जलती है। ' उन्होंने उत्पाद के बारे में जानकारी देते हुए ऐसा विवरण लिखा है। इसके अलावा इसमें यह भी कहा गया है कि 'जब आप एयरपोर्ट जाएंगे तो आप पर ध्यान दिया जाएगा'। इससे इस परफ्यूम की खासियत दिखाने की कोशिश की गई है।
बात करें ट्विटर की तो मस्क की ट्विटर खरीद पर विवाद अभी भी लंबित है। यह मामला कोर्ट में जा चुका है। पिछले हफ्ते, एक डेलावेयर अदालत ने मस्क को ट्विटर की अपनी प्रस्तावित $ 44 बिलियन की खरीद को अंतिम रूप देने की अनुमति देने के लिए मामले को रोक दिया। मस्क पिछले 3 महीनों से अपने बायआउट ऑफर को वापस लेने की कोशिश कर रहे हैं।
मस्क ने अब ट्विटर कंपनी को खरीदने का नया प्रस्ताव दिया है। यह ट्विटर कंपनी को 54. 20 डॉलर प्रति शेयर के भाव से खरीदने का प्रस्ताव है। इसी बीच उन्होंने परफ्यूम बेचने के नए बिजनेस में कदम रखा है। इसके लिए जोरदार तरीके से मार्केटिंग भी शुरू कर दी गई है। यही वजह है कि घंटों के अंदर ही परफ्यूम की हजारों बोतलें बिक चुकी हैं।
|
बहुत कम समय में एलन मस्क के नए बर्न हेयर परफ्यूम की बिक्री नई ऊंचाई पर पहुंच गई है। आपको बता दें कि इस परफ्यूम की एक बोतल की कीमत एक सौ डॉलर यानी भारतीय मूल्य के हिसाब से आठ हज़ार चार सौ रुपयापये है। अगर आप भी इस परफ्यूम को खरीदना चाहते है तो द बोरिंग कंपनी की वेबसाइट से खरीद सकते है। शुल्क का भुगतान क्रिप्टोक्यूरेंसी डॉगकोइन के माध्यम से किया जा सकता है। इस परफ्यूम की मांग अभी भी बढ़ रही है। एलोन मस्क का कहना है कि अगर इत्र की दस लाख बोतलें बिकती हैं, तो यह देखना चाहिए कि क्या यह खबर होगी। यह इत्र सभी के लिए है। उन्होंने यह भी कहा कि पुरुष और महिलाएं इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। इस परफ्यूम का वर्णन करते हुए वेबसाइट पर 'द एसेंस ऑफ रिपग्नेंट डिजायर' लिखा हुआ है। कंपनी का दावा है कि यह परफ्यूम ऐसा होगा जैसे 'एक मोमबत्ती खाने की मेज पर आसानी से जलती है। ' उन्होंने उत्पाद के बारे में जानकारी देते हुए ऐसा विवरण लिखा है। इसके अलावा इसमें यह भी कहा गया है कि 'जब आप एयरपोर्ट जाएंगे तो आप पर ध्यान दिया जाएगा'। इससे इस परफ्यूम की खासियत दिखाने की कोशिश की गई है। बात करें ट्विटर की तो मस्क की ट्विटर खरीद पर विवाद अभी भी लंबित है। यह मामला कोर्ट में जा चुका है। पिछले हफ्ते, एक डेलावेयर अदालत ने मस्क को ट्विटर की अपनी प्रस्तावित चौंतालीस डॉलर बिलियन की खरीद को अंतिम रूप देने की अनुमति देने के लिए मामले को रोक दिया। मस्क पिछले तीन महीनों से अपने बायआउट ऑफर को वापस लेने की कोशिश कर रहे हैं। मस्क ने अब ट्विटर कंपनी को खरीदने का नया प्रस्ताव दिया है। यह ट्विटर कंपनी को चौवन. बीस डॉलर प्रति शेयर के भाव से खरीदने का प्रस्ताव है। इसी बीच उन्होंने परफ्यूम बेचने के नए बिजनेस में कदम रखा है। इसके लिए जोरदार तरीके से मार्केटिंग भी शुरू कर दी गई है। यही वजह है कि घंटों के अंदर ही परफ्यूम की हजारों बोतलें बिक चुकी हैं।
|
"मम्मा ,मुझे नानी ने आज फिंगर में जो रिंग पहनाई थी ;खेलते हुए कहीं गिर गयी । ", चैताली ने घर पर पहुँचते ही अपनी मम्मी छाया से कहा ।
"बेटा ,इसीलिए तो आपको कहा था कि रिंग पहनकर मत जाओ । ",छाया ने धैर्य के साथ कहा । छाया चैताली को अपनी गलतियाँ स्वीकार करना सिखाने की कोशिश करती थी । वह उस पर नाराज़गी दिखाने या गुस्सा करने की जगह पर उसे प्यार से उसकी गल्ती बताती थी।यही कारण था कि चैताली ने घर पर आते ही अपनी मम्मी को सच बताया ।
छाया का मानना था कि अपनी गलती स्वीकार करना एक बहुत बड़ी बात है । बच्चे डाँट या मार के डर से सच नहीं बताते । सच हमेशा कड़वा ही होता है ;जिसे हम लोग पचा भी नहीं पाते ।
छाया जब छोटी थी ;तब एक दिन उसकी दादी ने दोनों हाथों में उसे चाँदी के कड़े पहना दिए थे । 7 वर्षीय छाया अपने 1 वर्षीय छोटे भाई को लेकर घर के बाहर बैठी हुई थी । गांव में उनके घर के सामने ही पीपल का पेड़ लगा हुआ था । आसपास के घरों के लोग ,बच्चे आदि सभी वहीं बैठे रहते थे । छाया को बच्चों के साथ खेलना था और भाई को भी सम्हालना था । भाई रोये नहीं ,इसीलिए उसने अपने हाथों से कड़े निकालकर भाई को खेलने के लिए दे दिए । भाई कड़ों से खेलने लगा और छाया बच्चों के साथ । कुछ देर बाद ,छाया अपने भाई के पास आयी तो देखा कि कड़े नदारद थे । शायद किसी ने बच्चे के हाथ से ले लिए थे ।
छाया बहुत डर गयी थी ;उसकी माँ और दादी दोनों ही उसे खूब डाँटेंगे । फिर साथ ही खेल रही दीदी ने सलाह दी कि ,"तू घर पर कुछ मत बताना । "
छाया ने घर पर किसी को कुछ नहीं बताया । दादी ने सोचा कि छाया ने कड़े अपनी माँ को दे दिए हैं । माँ ने सोचा कि छाया ने कड़े अपनी दादी को दे दिए हैं । दो -तीन बाद दादी ने छाया की माँ से कहा कि ,"छाया की माँ ,चांदी के कड़े तो दे दे । दूसरे गहनों के साथ तिजोरी में सम्हालकर रख दूँ । "
"अम्माजी ,कड़े तो आप ही के पास होंगे । ",छाया की माँ के जवाब से दादी हैरान थी । दादी और माँ दोनों के पास ही कड़े नहीं थे । तब दोनों ने छाया को बुलाकर पूछा ,छाया ने सारी घटना ज्यों की त्यों सुना दी ।
"छोरी ,डाँट तो तुझे अभी भी पड़ेगी । अगर उसी दिन बता देती तो कम से कम कड़े मिल तो जाते । ",दादी ने कहा । छाया को डाँट भी पड़ी ;लेकिन यह घटना छाया के बाल मन प् ऐसी अंकित हुई कि उसे आज तक भी याद है ।
इस घटना से सीख लेते हुए ,उसने अपनी बेटी चैताली को अपनी गलती स्वीकार करना सिखाने के प्रयास किये । आज चैताली ने छाया को सब कुछ सच -सच बताया ।
"सॉरी ,मम्मा । ",चैताली ने नज़रें झुकाते हुए कहा ।
"कोई बात नहीं । चलो ,एक बार जहाँ आप खेल रहे थे ;वहाँ ढूँढकर आ जाते हैं । ",ऐसा कहकर चैताली और छाया दोनों घर से बाहर निकल गए । उनके घर के सामने स्थित पार्क में ही चैताली खेल रही थी ।दोनों ने बहुत ढूँढा ,लेकिन रिंग नहीं मिली ।
"सॉरी ,मम्मा । ",चैताली बार -बार कहे जा रही थी ।
"बेटा आपने गल्ती की है तो पनिशमेंट भी मिलेगा । ",छाया ने घर लौटते हुए रास्ते में चैताली से कहा ।
"क्या पनिशमेंट मम्मा ?",चैताली ने पूछा ।
"आपने नानी का दिया हुआ गिफ्ट खो दिया । अब आपको अपने खिलौनों में से एक खिलौना अंजू को गिफ्ट करना होगा । ",छाया ने सोचने की मुद्रा में कहा । अंजू छाया के यहाँ आने वाली घेरलू सहायिका सुमन की बेटी थी ।
"ठीक है ,मम्मा । ",ऐसा कहकर चैताली वहाँ से चली गयी थी ।
अगले दिन चैताली ने अपना टेडी बीयर सुमन को देते हुए कहा ,"आंटी ,यह आप अंजू के लिए ले जाना । "
चैताली की बात सुनकर छाया मन ही मन मुस्कुरा रही थी । उसकी बेटी गलती स्वीकारना ही नहीं ,बल्कि सुधारना भी सीख रही थी ।
|
"मम्मा ,मुझे नानी ने आज फिंगर में जो रिंग पहनाई थी ;खेलते हुए कहीं गिर गयी । ", चैताली ने घर पर पहुँचते ही अपनी मम्मी छाया से कहा । "बेटा ,इसीलिए तो आपको कहा था कि रिंग पहनकर मत जाओ । ",छाया ने धैर्य के साथ कहा । छाया चैताली को अपनी गलतियाँ स्वीकार करना सिखाने की कोशिश करती थी । वह उस पर नाराज़गी दिखाने या गुस्सा करने की जगह पर उसे प्यार से उसकी गल्ती बताती थी।यही कारण था कि चैताली ने घर पर आते ही अपनी मम्मी को सच बताया । छाया का मानना था कि अपनी गलती स्वीकार करना एक बहुत बड़ी बात है । बच्चे डाँट या मार के डर से सच नहीं बताते । सच हमेशा कड़वा ही होता है ;जिसे हम लोग पचा भी नहीं पाते । छाया जब छोटी थी ;तब एक दिन उसकी दादी ने दोनों हाथों में उसे चाँदी के कड़े पहना दिए थे । सात वर्षीय छाया अपने एक वर्षीय छोटे भाई को लेकर घर के बाहर बैठी हुई थी । गांव में उनके घर के सामने ही पीपल का पेड़ लगा हुआ था । आसपास के घरों के लोग ,बच्चे आदि सभी वहीं बैठे रहते थे । छाया को बच्चों के साथ खेलना था और भाई को भी सम्हालना था । भाई रोये नहीं ,इसीलिए उसने अपने हाथों से कड़े निकालकर भाई को खेलने के लिए दे दिए । भाई कड़ों से खेलने लगा और छाया बच्चों के साथ । कुछ देर बाद ,छाया अपने भाई के पास आयी तो देखा कि कड़े नदारद थे । शायद किसी ने बच्चे के हाथ से ले लिए थे । छाया बहुत डर गयी थी ;उसकी माँ और दादी दोनों ही उसे खूब डाँटेंगे । फिर साथ ही खेल रही दीदी ने सलाह दी कि ,"तू घर पर कुछ मत बताना । " छाया ने घर पर किसी को कुछ नहीं बताया । दादी ने सोचा कि छाया ने कड़े अपनी माँ को दे दिए हैं । माँ ने सोचा कि छाया ने कड़े अपनी दादी को दे दिए हैं । दो -तीन बाद दादी ने छाया की माँ से कहा कि ,"छाया की माँ ,चांदी के कड़े तो दे दे । दूसरे गहनों के साथ तिजोरी में सम्हालकर रख दूँ । " "अम्माजी ,कड़े तो आप ही के पास होंगे । ",छाया की माँ के जवाब से दादी हैरान थी । दादी और माँ दोनों के पास ही कड़े नहीं थे । तब दोनों ने छाया को बुलाकर पूछा ,छाया ने सारी घटना ज्यों की त्यों सुना दी । "छोरी ,डाँट तो तुझे अभी भी पड़ेगी । अगर उसी दिन बता देती तो कम से कम कड़े मिल तो जाते । ",दादी ने कहा । छाया को डाँट भी पड़ी ;लेकिन यह घटना छाया के बाल मन प् ऐसी अंकित हुई कि उसे आज तक भी याद है । इस घटना से सीख लेते हुए ,उसने अपनी बेटी चैताली को अपनी गलती स्वीकार करना सिखाने के प्रयास किये । आज चैताली ने छाया को सब कुछ सच -सच बताया । "सॉरी ,मम्मा । ",चैताली ने नज़रें झुकाते हुए कहा । "कोई बात नहीं । चलो ,एक बार जहाँ आप खेल रहे थे ;वहाँ ढूँढकर आ जाते हैं । ",ऐसा कहकर चैताली और छाया दोनों घर से बाहर निकल गए । उनके घर के सामने स्थित पार्क में ही चैताली खेल रही थी ।दोनों ने बहुत ढूँढा ,लेकिन रिंग नहीं मिली । "सॉरी ,मम्मा । ",चैताली बार -बार कहे जा रही थी । "बेटा आपने गल्ती की है तो पनिशमेंट भी मिलेगा । ",छाया ने घर लौटते हुए रास्ते में चैताली से कहा । "क्या पनिशमेंट मम्मा ?",चैताली ने पूछा । "आपने नानी का दिया हुआ गिफ्ट खो दिया । अब आपको अपने खिलौनों में से एक खिलौना अंजू को गिफ्ट करना होगा । ",छाया ने सोचने की मुद्रा में कहा । अंजू छाया के यहाँ आने वाली घेरलू सहायिका सुमन की बेटी थी । "ठीक है ,मम्मा । ",ऐसा कहकर चैताली वहाँ से चली गयी थी । अगले दिन चैताली ने अपना टेडी बीयर सुमन को देते हुए कहा ,"आंटी ,यह आप अंजू के लिए ले जाना । " चैताली की बात सुनकर छाया मन ही मन मुस्कुरा रही थी । उसकी बेटी गलती स्वीकारना ही नहीं ,बल्कि सुधारना भी सीख रही थी ।
|
एक ऐतिहासिक कदम में, भारत ने वियतनाम को अपनी इन-सर्विस मिसाइल कार्वेट, INS कृपाण उपहार में देकर एक महत्वपूर्ण यात्रा शुरू की है। यह पहली बार है कि भारत ने एक 'मित्रवत विदेशी देश' को पूरी तरह से परिचालन कार्वेट प्रदान किया है।
INS कृपाण का उपहार बहुत महत्व रखता है। किसी दूसरे देश को उपहार में दिया गया भारत का पहला पूरी तरह से संचालित कार्वेट भारत और वियतनाम के बीच मजबूत दोस्ती और विश्वास का प्रमाण है।
INS कृपाण स्वदेश निर्मित खुखरी वर्ग से संबंधित एक दुर्जेय मिसाइल कार्वेट है। वर्तमान में भारतीय नौसेना में सेवारत यह जहाज उन्नत हथियारों और सेंसर से लैस है। विभिन्न परिचालन और मानवीय सहायता मिशनों में इसकी भागीदारी इसकी क्षमताओं और विश्वसनीयता का उदाहरण है।
पूर्वी नौसेना कमान ने नौसेना डॉकयार्ड में INS कृपाण को औपचारिक विदाई दी। इसके आगमन के बाद, INS कृपाण को वियतनाम पीपल्स नेवी द्वारा प्राप्त किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में नौसैनिक क्षमताओं और सहयोग को और मजबूती मिलेगी।
जून 2022 में भारत और वियतनाम के रक्षा मंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित संयुक्त दृष्टि वक्तव्य, जिसका शीर्षक '2030 की ओर भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी पर संयुक्त दृष्टि वक्तव्य' है, रक्षा सहयोग को गहरा करने और भविष्य के सहयोग के लिए रणनीतिक लक्ष्य निर्धारित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। INS कृपाण का उपहार देना इसी दृष्टिकोण के अनुरूप है और वियतनाम की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाता है।
|
एक ऐतिहासिक कदम में, भारत ने वियतनाम को अपनी इन-सर्विस मिसाइल कार्वेट, INS कृपाण उपहार में देकर एक महत्वपूर्ण यात्रा शुरू की है। यह पहली बार है कि भारत ने एक 'मित्रवत विदेशी देश' को पूरी तरह से परिचालन कार्वेट प्रदान किया है। INS कृपाण का उपहार बहुत महत्व रखता है। किसी दूसरे देश को उपहार में दिया गया भारत का पहला पूरी तरह से संचालित कार्वेट भारत और वियतनाम के बीच मजबूत दोस्ती और विश्वास का प्रमाण है। INS कृपाण स्वदेश निर्मित खुखरी वर्ग से संबंधित एक दुर्जेय मिसाइल कार्वेट है। वर्तमान में भारतीय नौसेना में सेवारत यह जहाज उन्नत हथियारों और सेंसर से लैस है। विभिन्न परिचालन और मानवीय सहायता मिशनों में इसकी भागीदारी इसकी क्षमताओं और विश्वसनीयता का उदाहरण है। पूर्वी नौसेना कमान ने नौसेना डॉकयार्ड में INS कृपाण को औपचारिक विदाई दी। इसके आगमन के बाद, INS कृपाण को वियतनाम पीपल्स नेवी द्वारा प्राप्त किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में नौसैनिक क्षमताओं और सहयोग को और मजबूती मिलेगी। जून दो हज़ार बाईस में भारत और वियतनाम के रक्षा मंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित संयुक्त दृष्टि वक्तव्य, जिसका शीर्षक 'दो हज़ार तीस की ओर भारत-वियतनाम रक्षा साझेदारी पर संयुक्त दृष्टि वक्तव्य' है, रक्षा सहयोग को गहरा करने और भविष्य के सहयोग के लिए रणनीतिक लक्ष्य निर्धारित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। INS कृपाण का उपहार देना इसी दृष्टिकोण के अनुरूप है और वियतनाम की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाता है।
|
पति (मरते समय अपनी बीवी से)- अलमारी से तेरे सोने के गहने मैंने ही चोरी किए थे,
बीवी रोते हुए- कोई बात नहीं जी,
पति- तेरे भाई ने तुझे जो एक लाख रुपए दिए थे वह भी मैंने ही गायब किए थे,
पत्नी- कोई बात नहीं मैंने आपको माफ किया,
पति- तेरे कीमती साड़ियां भी मैंने चोरी कर अपनी प्रेमिका को दे दिए थे,
पत्नी- क्या गलतफलमी?
पति- यही, "कि मैं सो रहा था"
सोनू ने बंता से पूछा - क्या तुम चीनी भाषा पढ़ सकते हो. . . ?
मोनू ने कहा - हां. . . !
सोनू - कैसे. . . ?
पप्पू रोते- रोते बोला - धत तेरे की, अब फिर से फिसलना पड़ेगा. . . !
टीचर - इस मुहावरे को वाक्य में प्रयोग करके बताओ - "मुंह में पानी आना "....
"मेरे मुंह में पानी आ गया... ".
|
पति - अलमारी से तेरे सोने के गहने मैंने ही चोरी किए थे, बीवी रोते हुए- कोई बात नहीं जी, पति- तेरे भाई ने तुझे जो एक लाख रुपए दिए थे वह भी मैंने ही गायब किए थे, पत्नी- कोई बात नहीं मैंने आपको माफ किया, पति- तेरे कीमती साड़ियां भी मैंने चोरी कर अपनी प्रेमिका को दे दिए थे, पत्नी- क्या गलतफलमी? पति- यही, "कि मैं सो रहा था" सोनू ने बंता से पूछा - क्या तुम चीनी भाषा पढ़ सकते हो. . . ? मोनू ने कहा - हां. . . ! सोनू - कैसे. . . ? पप्पू रोते- रोते बोला - धत तेरे की, अब फिर से फिसलना पड़ेगा. . . ! टीचर - इस मुहावरे को वाक्य में प्रयोग करके बताओ - "मुंह में पानी आना ".... "मेरे मुंह में पानी आ गया... ".
|
क्रिप्टो मार्केट में गुरुवार को तेजी रही। मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin का प्राइस लगभग 1. 4 प्रतिशत बढ़ा है। व्हेल्स ने बिटकॉइन में खरीदारी शुरू की है और इससे प्राइस में और तेजी आने की संभावना है। इंटरनेशनल एक्सचेंजों पर बिटकॉइन का प्राइस लगभग 20,350 डॉलर और CoinDCX जैसे भारतीय एक्सचेंजों पर लगभग 20,998 डॉलर का था।
CoinGecko के डेटा से पता चलता है कि बिटकॉइन की वैल्यू पिछले सप्ताह गुरुवार की तुलना में लगभग 4. 4 प्रतिशत अधिक है। दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Ether में भी पिछले एक दिन में तेजी बरकरार रही है। इंटरनेशनल एक्सचेंजों पर लगभग 1. 48 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1,350 डॉलर और भारतीय एक्सचेंजों पर लगभग 2. 39 प्रतिशत की तेजी के साथ लगभग 1,428 डॉलर पर था। पिछले महीने इथेरियम ब्लॉकचेन के अपग्रेड के बाद से Ether को फायदा मिल रहा है। इस अपग्रेड से ट्रांजैक्शंस में तेजी आने और एनर्जी की खपत बहुत कम होने की संभावना है। इसमें Ethereum के डिवेलपर्स ने इसके माइनिंग प्रोटोकॉल की प्रूफ-ऑफ-वर्क (PoW) सिस्टम से प्रूफ-ऑफ-स्टेक (PoS) पर दोबारा कोडिंग की है। इस ब्लॉकचेन पर 100 अरब डॉलर से अधिक के डीसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस (DeFi) ऐप्स को सपोर्ट मिलता है और इस वजह से अपग्रेड को लेकर सतर्कता बरती गई है। अपग्रेड से stETH कहे जाने वाले क्रिप्टो डेरिवेटिव टोकन के इनवेस्टर्स को भी राहत मिल सकती है।
से पता चलता है कि ज्यादातर ऑल्टकॉइन्स के प्राइस में बढ़ोतरी हुई है। क्रिप्टो के ग्लोबल मार्केट कैपिटलाइजेशन में भी लगभग 0. 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। Avalanche, Cardano, Solana, Polygon, TRON, Monero, Chainlink और BNB में पिछले एक दिन में तेजी रही। मीमकॉइन्स Dogecoin और Shiba Inu भी कुछ बढ़े हैं। Dogecoin का प्राइस 0. 06 डॉलर और Shiba Inu का 0. 000012 डॉलर का था।
ने 67,000 डॉलर से अधिक का हाई बनाया था। इसके बाद से इसमें काफी गिरावट आई है। इसका प्राइस गिरने से इनवेस्टर्स के साथ ही इस सेगमेंट से जुड़ी फर्मों को भी बड़ा नुकसान हुआ है। बहुत से देशों में रेगुलेटर्स ने भी क्रिप्टोकरेंसीज को लेकर इनवेस्टर्स को चेतावनी दी है। इससे भी मार्केट पर प्रेशर बढ़ा है। कुछ क्रिप्टो फर्मों के डिफॉल्ट करने से इस मार्केट को लेकर आशंकाएं भी बढ़ी हैं। फास्ट फूड चेन Mcdonald ने पेमेंट के विकल्पों के तौर पर बिटकॉइन और Tether को जोड़ा है। हालांकि, पेमेंट के लिए ये विकल्प शुरुआत में स्विट्जरलैंड के लुगाना में मौजूद आउटलेट्स के लिए हैं।
|
क्रिप्टो मार्केट में गुरुवार को तेजी रही। मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin का प्राइस लगभग एक. चार प्रतिशत बढ़ा है। व्हेल्स ने बिटकॉइन में खरीदारी शुरू की है और इससे प्राइस में और तेजी आने की संभावना है। इंटरनेशनल एक्सचेंजों पर बिटकॉइन का प्राइस लगभग बीस,तीन सौ पचास डॉलर और CoinDCX जैसे भारतीय एक्सचेंजों पर लगभग बीस,नौ सौ अट्ठानवे डॉलर का था। CoinGecko के डेटा से पता चलता है कि बिटकॉइन की वैल्यू पिछले सप्ताह गुरुवार की तुलना में लगभग चार. चार प्रतिशत अधिक है। दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Ether में भी पिछले एक दिन में तेजी बरकरार रही है। इंटरनेशनल एक्सचेंजों पर लगभग एक. अड़तालीस प्रतिशत बढ़कर लगभग एक,तीन सौ पचास डॉलर और भारतीय एक्सचेंजों पर लगभग दो. उनतालीस प्रतिशत की तेजी के साथ लगभग एक,चार सौ अट्ठाईस डॉलर पर था। पिछले महीने इथेरियम ब्लॉकचेन के अपग्रेड के बाद से Ether को फायदा मिल रहा है। इस अपग्रेड से ट्रांजैक्शंस में तेजी आने और एनर्जी की खपत बहुत कम होने की संभावना है। इसमें Ethereum के डिवेलपर्स ने इसके माइनिंग प्रोटोकॉल की प्रूफ-ऑफ-वर्क सिस्टम से प्रूफ-ऑफ-स्टेक पर दोबारा कोडिंग की है। इस ब्लॉकचेन पर एक सौ अरब डॉलर से अधिक के डीसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस ऐप्स को सपोर्ट मिलता है और इस वजह से अपग्रेड को लेकर सतर्कता बरती गई है। अपग्रेड से stETH कहे जाने वाले क्रिप्टो डेरिवेटिव टोकन के इनवेस्टर्स को भी राहत मिल सकती है। से पता चलता है कि ज्यादातर ऑल्टकॉइन्स के प्राइस में बढ़ोतरी हुई है। क्रिप्टो के ग्लोबल मार्केट कैपिटलाइजेशन में भी लगभग शून्य. नौ प्रतिशत की वृद्धि हुई है। Avalanche, Cardano, Solana, Polygon, TRON, Monero, Chainlink और BNB में पिछले एक दिन में तेजी रही। मीमकॉइन्स Dogecoin और Shiba Inu भी कुछ बढ़े हैं। Dogecoin का प्राइस शून्य. छः डॉलर और Shiba Inu का शून्य. बारह डॉलर का था। ने सरसठ,शून्य डॉलर से अधिक का हाई बनाया था। इसके बाद से इसमें काफी गिरावट आई है। इसका प्राइस गिरने से इनवेस्टर्स के साथ ही इस सेगमेंट से जुड़ी फर्मों को भी बड़ा नुकसान हुआ है। बहुत से देशों में रेगुलेटर्स ने भी क्रिप्टोकरेंसीज को लेकर इनवेस्टर्स को चेतावनी दी है। इससे भी मार्केट पर प्रेशर बढ़ा है। कुछ क्रिप्टो फर्मों के डिफॉल्ट करने से इस मार्केट को लेकर आशंकाएं भी बढ़ी हैं। फास्ट फूड चेन Mcdonald ने पेमेंट के विकल्पों के तौर पर बिटकॉइन और Tether को जोड़ा है। हालांकि, पेमेंट के लिए ये विकल्प शुरुआत में स्विट्जरलैंड के लुगाना में मौजूद आउटलेट्स के लिए हैं।
|
नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके कुछ राज्य सरकारों के इस क़दम के प्रति असहमति जताई है.
पिछले दिनों भाजपा शासित मध्य प्रदेश और गुजरात ने घोषणा की थी कि वह नरेंद्र मोदी की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने जा रहे हैं.
ये ख़बरें भी आई थीं कि राजस्थान में भी मोदी की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की पहल हो रही है.
इस तरह की ख़बरों के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार अपना विरोध ज़ाहिर किया है.
'जीवित लोगों को शामिल न करें'
30 मई की सुबह मोदी ने व्यक्तिगत वेरीफ़ाइड ट्विटर खाते से इस बारे में ट्वीट किया.
पहले ट्वीट में उन्होंने कहा, "मैंने ये ख़बरें पढ़ी हैं कि कुछ राज्य नरेंद्र मोदी की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने जा रहे हैं. "
उन्होंने आगे ट्वीट किया, "मेरा स्पष्ट तौर पर मानना है कि स्कूली पाठ्यक्रम में उन लोगों की जीवनियों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए जो जीवित हों. "
इसी विषय पर उन्होंने तीसरे ट्वीट में लिखा, "भारत के इतिहास में एक से बढ़कर एक महापुरुष और महान लोग हुए हैं, जिनकी वजह से भारत आज यहां पर है. युवा लोगों को इन महान हस्तियों के बारे में पढ़ना चाहिए और उनका अनुकरण करना चाहिए. "
पिछले एक बरस में नरेंद्र मोदी पर कई किताबें बाजार में आई हैं. जो उनके जीवन पर आधारित हैं.
कुछ प्रकाशकों ने बच्चों को ध्यान में रखकर मोदी पर कॉमिक्स भी प्रकाशित की हैं.
|
नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके कुछ राज्य सरकारों के इस क़दम के प्रति असहमति जताई है. पिछले दिनों भाजपा शासित मध्य प्रदेश और गुजरात ने घोषणा की थी कि वह नरेंद्र मोदी की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने जा रहे हैं. ये ख़बरें भी आई थीं कि राजस्थान में भी मोदी की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की पहल हो रही है. इस तरह की ख़बरों के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार अपना विरोध ज़ाहिर किया है. 'जीवित लोगों को शामिल न करें' तीस मई की सुबह मोदी ने व्यक्तिगत वेरीफ़ाइड ट्विटर खाते से इस बारे में ट्वीट किया. पहले ट्वीट में उन्होंने कहा, "मैंने ये ख़बरें पढ़ी हैं कि कुछ राज्य नरेंद्र मोदी की जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने जा रहे हैं. " उन्होंने आगे ट्वीट किया, "मेरा स्पष्ट तौर पर मानना है कि स्कूली पाठ्यक्रम में उन लोगों की जीवनियों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए जो जीवित हों. " इसी विषय पर उन्होंने तीसरे ट्वीट में लिखा, "भारत के इतिहास में एक से बढ़कर एक महापुरुष और महान लोग हुए हैं, जिनकी वजह से भारत आज यहां पर है. युवा लोगों को इन महान हस्तियों के बारे में पढ़ना चाहिए और उनका अनुकरण करना चाहिए. " पिछले एक बरस में नरेंद्र मोदी पर कई किताबें बाजार में आई हैं. जो उनके जीवन पर आधारित हैं. कुछ प्रकाशकों ने बच्चों को ध्यान में रखकर मोदी पर कॉमिक्स भी प्रकाशित की हैं.
|
विरोधी हिटलर गठबंधन कहा जा सकता हैएक गठबंधन जो रातोंरात उभरा। प्रतिभागियों के बीच घर्षण और विरोधाभास ने इसे अपने अस्तित्व के दौरान हिलाकर रख दिया। इस संघ की कमजोरी का क्या कारण है?
एकीकरण का मूल, जो इतिहास में नीचे चला गया"हिटलर गठबंधन" ब्रिटेन, फ्रांस, पोलैंड और अन्य यूरोपीय राज्यों के बीच मौजूद संविदात्मक संबंधों में झूठ है। 1 9 3 9 में, जर्मनी ने पोलैंड पर हमला करने के बाद ये राज्य युद्ध में प्रवेश कर गए। इसलिए "पश्चिमी सहयोगी" के एक गठबंधन था, जिसके साथ हिटलर गठबंधन की रचना शुरू हुई।
अब सोवियत संघ और पश्चिमी राज्यों के हितोंमेल खाता है। 22 जून को, ब्रिटिश सरकार के अध्यक्ष विंस्टन चर्चिल ने युद्ध में सोवियत संघ की सहायता के लिए अपनी तत्परता की घोषणा की। कुछ दिनों बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी। रूजवेल्ट ने एक ही बयान दिया था। 1 9 40 में फ़्रांस के आत्मसमर्पण के बाद, वास्तव में, ब्रिटिश, नाजियों और उनके सहयोगी दलों के साथ एक पर रहे। वेहरमाट ब्रिटिश द्वीपों पर हमला करने में सक्षम होने के बारे में था, और प्रशांत बेसिन में ब्रिटिश उपनिवेशों को जापान द्वारा धमकाया गया था, जो जर्मनी के साथ युद्ध में लड़ रहा था। जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संघर्ष के भय, जिनके पास प्रशांत क्षेत्र में रूचि थी, वे भी डरते थे। इसलिए, विरोधी हिटलर गठबंधन को एक नए सहयोगी की जरूरत थी पहले से ही जुलाई 1 9 41 में मास्को में, ब्रिटिश प्रतिनिधियों के साथ सोवियत नेतृत्व की एक बैठक हुई थी। सितंबर 1 9 41 में, यूएसएसआर ने अटलांटिक चार्टर के प्रति अपनी वचनबद्धता की घोषणा की - जर्मनी के खिलाफ संघर्ष में ब्रिटेन और अमेरिका के बीच सहयोग पर एक घोषणा। तो विरोधी हिटलर गठबंधन का गठन एक गंभीर धक्का आगे बढ़ा।
लेकिन इस घटना के तुरंत बाद के बीच मेंगठबंधन के प्रतिभागियों में पहले घर्षण था। यूरोप में पूर्व युद्ध सीमाओं की बहाली के साथ ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों काफी खुश थे। सोवियत नेतृत्व ऐसे प्रस्तावों से सहमत नहीं होना चाहता था। आखिरकार, 1 9 41 से पहले ही पहले से संबद्ध क्षेत्रों को छोड़ देना आवश्यक होगा। इस वजह से, एंग्लो-सोवियत संघ संधि पर हस्ताक्षर किए गए।
एक और समस्या है जो का सामना करना पड़ाहिटलर विरोधी गठबंधन, यूरोप में दूसरे मोर्चे के उद्घाटन का सवाल था। वेहरमैट और जर्मनी के सहयोगी संगठनों के अधिकांश कनेक्शन यूएसएसआर के क्षेत्र में केंद्रित थे, इसलिए यह पश्चिमी यूरोप के क्षेत्र से हड़ताल करने के लिए तर्कसंगत होगा। लेकिन ब्रिटिश पक्ष ने ऊर्जा के अभाव का हवाला देते हुए उत्साह के बिना सोवियत नेतृत्व के इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। अमेरिकियों ने पहली बार सोवियत संघ की तरफ ले लिया, लेकिन फिर चर्चिल ने यूरोप में नहीं बल्कि उत्तरी अफ्रीका में सैनिकों को जमीन पर देने की पेशकश की। इन मतभेदों के कारण, दूसरा मोर्चा जल्द ही खोला गया।
और फिर भी, इन अंतरों के बावजूद,विरोधी हिटलर गठबंधन अपने लक्ष्य को हासिल करने में सक्षम था। मशीनरी और भोजन की अमेरिकी आपूर्ति सहयोगी दलों के लिए आवश्यक सहायता थी यह विशेष रूप से 1 941-19 42 में महत्वपूर्ण था, जब सोवियत संघ के कई औद्योगिक केंद्र जर्मनी के कब्जे वाले इलाके में थे। यह भी ब्रिटेन के लिए महत्वपूर्ण था, समुद्र पर प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण इसकी कालोनियों से काट दिया।
स्टेलिनग्राद की लड़ाई में सोवियत सैनिकों की विजयसहयोगियों ने अधिक निर्णायक कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया यह स्पष्ट हो गया कि युद्ध बदल रहा था, और पश्चिमी राज्यों ने द्वितीय मोर्चा के उद्घाटन के लिए सक्रिय तैयारी शुरू की, ताकि यूरोप में जल्द ही युद्ध खत्म हो जाये और लाल सेना को पश्चिम में बहुत दूर जाने से रोका जा सके। 1 9 44 में, मित्र देशों की सेना ने नॉर्मंडी में लैंडिंग की, जिसने युद्ध में जर्मनी की हार को तेज कर दिया।
|
विरोधी हिटलर गठबंधन कहा जा सकता हैएक गठबंधन जो रातोंरात उभरा। प्रतिभागियों के बीच घर्षण और विरोधाभास ने इसे अपने अस्तित्व के दौरान हिलाकर रख दिया। इस संघ की कमजोरी का क्या कारण है? एकीकरण का मूल, जो इतिहास में नीचे चला गया"हिटलर गठबंधन" ब्रिटेन, फ्रांस, पोलैंड और अन्य यूरोपीय राज्यों के बीच मौजूद संविदात्मक संबंधों में झूठ है। एक नौ तीन नौ में, जर्मनी ने पोलैंड पर हमला करने के बाद ये राज्य युद्ध में प्रवेश कर गए। इसलिए "पश्चिमी सहयोगी" के एक गठबंधन था, जिसके साथ हिटलर गठबंधन की रचना शुरू हुई। अब सोवियत संघ और पश्चिमी राज्यों के हितोंमेल खाता है। बाईस जून को, ब्रिटिश सरकार के अध्यक्ष विंस्टन चर्चिल ने युद्ध में सोवियत संघ की सहायता के लिए अपनी तत्परता की घोषणा की। कुछ दिनों बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी। रूजवेल्ट ने एक ही बयान दिया था। एक नौ चालीस में फ़्रांस के आत्मसमर्पण के बाद, वास्तव में, ब्रिटिश, नाजियों और उनके सहयोगी दलों के साथ एक पर रहे। वेहरमाट ब्रिटिश द्वीपों पर हमला करने में सक्षम होने के बारे में था, और प्रशांत बेसिन में ब्रिटिश उपनिवेशों को जापान द्वारा धमकाया गया था, जो जर्मनी के साथ युद्ध में लड़ रहा था। जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संघर्ष के भय, जिनके पास प्रशांत क्षेत्र में रूचि थी, वे भी डरते थे। इसलिए, विरोधी हिटलर गठबंधन को एक नए सहयोगी की जरूरत थी पहले से ही जुलाई एक नौ इकतालीस में मास्को में, ब्रिटिश प्रतिनिधियों के साथ सोवियत नेतृत्व की एक बैठक हुई थी। सितंबर एक नौ इकतालीस में, यूएसएसआर ने अटलांटिक चार्टर के प्रति अपनी वचनबद्धता की घोषणा की - जर्मनी के खिलाफ संघर्ष में ब्रिटेन और अमेरिका के बीच सहयोग पर एक घोषणा। तो विरोधी हिटलर गठबंधन का गठन एक गंभीर धक्का आगे बढ़ा। लेकिन इस घटना के तुरंत बाद के बीच मेंगठबंधन के प्रतिभागियों में पहले घर्षण था। यूरोप में पूर्व युद्ध सीमाओं की बहाली के साथ ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों काफी खुश थे। सोवियत नेतृत्व ऐसे प्रस्तावों से सहमत नहीं होना चाहता था। आखिरकार, एक नौ इकतालीस से पहले ही पहले से संबद्ध क्षेत्रों को छोड़ देना आवश्यक होगा। इस वजह से, एंग्लो-सोवियत संघ संधि पर हस्ताक्षर किए गए। एक और समस्या है जो का सामना करना पड़ाहिटलर विरोधी गठबंधन, यूरोप में दूसरे मोर्चे के उद्घाटन का सवाल था। वेहरमैट और जर्मनी के सहयोगी संगठनों के अधिकांश कनेक्शन यूएसएसआर के क्षेत्र में केंद्रित थे, इसलिए यह पश्चिमी यूरोप के क्षेत्र से हड़ताल करने के लिए तर्कसंगत होगा। लेकिन ब्रिटिश पक्ष ने ऊर्जा के अभाव का हवाला देते हुए उत्साह के बिना सोवियत नेतृत्व के इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। अमेरिकियों ने पहली बार सोवियत संघ की तरफ ले लिया, लेकिन फिर चर्चिल ने यूरोप में नहीं बल्कि उत्तरी अफ्रीका में सैनिकों को जमीन पर देने की पेशकश की। इन मतभेदों के कारण, दूसरा मोर्चा जल्द ही खोला गया। और फिर भी, इन अंतरों के बावजूद,विरोधी हिटलर गठबंधन अपने लक्ष्य को हासिल करने में सक्षम था। मशीनरी और भोजन की अमेरिकी आपूर्ति सहयोगी दलों के लिए आवश्यक सहायता थी यह विशेष रूप से एक नौ सौ इकतालीस-उन्नीस बयालीस में महत्वपूर्ण था, जब सोवियत संघ के कई औद्योगिक केंद्र जर्मनी के कब्जे वाले इलाके में थे। यह भी ब्रिटेन के लिए महत्वपूर्ण था, समुद्र पर प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण इसकी कालोनियों से काट दिया। स्टेलिनग्राद की लड़ाई में सोवियत सैनिकों की विजयसहयोगियों ने अधिक निर्णायक कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया यह स्पष्ट हो गया कि युद्ध बदल रहा था, और पश्चिमी राज्यों ने द्वितीय मोर्चा के उद्घाटन के लिए सक्रिय तैयारी शुरू की, ताकि यूरोप में जल्द ही युद्ध खत्म हो जाये और लाल सेना को पश्चिम में बहुत दूर जाने से रोका जा सके। एक नौ चौंतालीस में, मित्र देशों की सेना ने नॉर्मंडी में लैंडिंग की, जिसने युद्ध में जर्मनी की हार को तेज कर दिया।
|
Clash For Cash: बताया जा रहा है कि तीनों भाई राशि को बराबर भागों में बांटना चाहते थे लेकिन फिर कुछ ऐसा हो गया कि तीनों में विवाद उत्पन्न हो गया. इस विवाद ने इतना बड़ा रूप ले लिया कि भयंकर झगड़ा हो गया.
Insurance Money: बीमा के पैसों को लेकर कई बार झगड़े के मामले सामने आते रहते हैं. इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश में उन्नाव जिले से कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है जहां 3 भाइयों में ऐसा झगड़ा हुआ कि एक की मौत हो गई. यह सब तब हुआ बीमा राशि के बंटवारे को लेकर गुरुवार की रात तीन सगे भाइयों के बीच हुई झड़प में एक की मौत हो गई. पुलिस ने यह जानकारी दी है. पुलिस क्षेत्राधिकारी दीपक सिंह ने बताया कि इस घटना में मारे गये व्यक्ति के परिजनों के अनुसार मामला जिले के पुरवा कस्बे के मोहल्ला पश्चिम टोला से संबंधित है. यहां के रहने वाले रजनू की पत्नी रामरानी की लगभग नौ महीने पहले एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी.
इसके बाद रामरानी की मौत के चलते दुर्घटना बीमा के लगभग दो लाख रुपए बड़े बेटे राजबहादुर के खाते में अभी कुछ दिन पहले जमा हुए थे. उन्होंने बताया कि इसके बाद से ही दोनों छोटे भाई बड़े भाई पर बीमा राशि का बंटवारा करने का दबाव बना रहे थे. सिंह ने बताया कि इसी बात को लेकर तीनों भाइयों में विवाद हो गया. इसी दौरान सभी ने एक दूसरे पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया.
इस घटना में सबसे छोटा भाई राम आसरे (45) गंभीर रूप से घायल हो गया. उन्होंने बताया कि आसरे को पहले पुरवा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और इसके बाद जिला अस्पताल ले जाया गया. सिंह ने बताया कि आसरे की इलाज के दौरान मौत हो गई. आसरे के परिजनों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है. आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं.
फिलहाल इस घटना की जांच भी की जा रही है. बताया जा रहा है कि तीनों भाई राशि को बराबर भागों में बांटना चाहते थे लेकिन फिर कुछ ऐसा हो गया कि तीनों में विवाद उत्पन्न हो गया. इस विवाद ने इतना बड़ा रूप ले लिया कि भयंकर झगड़ा हो गया. इसी झगड़े में एक की मौत हो गई है. मामले में परिवार से संबंधित सभी लोगों से पूछताछ की जा रही है.
|
Clash For Cash: बताया जा रहा है कि तीनों भाई राशि को बराबर भागों में बांटना चाहते थे लेकिन फिर कुछ ऐसा हो गया कि तीनों में विवाद उत्पन्न हो गया. इस विवाद ने इतना बड़ा रूप ले लिया कि भयंकर झगड़ा हो गया. Insurance Money: बीमा के पैसों को लेकर कई बार झगड़े के मामले सामने आते रहते हैं. इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश में उन्नाव जिले से कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है जहां तीन भाइयों में ऐसा झगड़ा हुआ कि एक की मौत हो गई. यह सब तब हुआ बीमा राशि के बंटवारे को लेकर गुरुवार की रात तीन सगे भाइयों के बीच हुई झड़प में एक की मौत हो गई. पुलिस ने यह जानकारी दी है. पुलिस क्षेत्राधिकारी दीपक सिंह ने बताया कि इस घटना में मारे गये व्यक्ति के परिजनों के अनुसार मामला जिले के पुरवा कस्बे के मोहल्ला पश्चिम टोला से संबंधित है. यहां के रहने वाले रजनू की पत्नी रामरानी की लगभग नौ महीने पहले एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी. इसके बाद रामरानी की मौत के चलते दुर्घटना बीमा के लगभग दो लाख रुपए बड़े बेटे राजबहादुर के खाते में अभी कुछ दिन पहले जमा हुए थे. उन्होंने बताया कि इसके बाद से ही दोनों छोटे भाई बड़े भाई पर बीमा राशि का बंटवारा करने का दबाव बना रहे थे. सिंह ने बताया कि इसी बात को लेकर तीनों भाइयों में विवाद हो गया. इसी दौरान सभी ने एक दूसरे पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया. इस घटना में सबसे छोटा भाई राम आसरे गंभीर रूप से घायल हो गया. उन्होंने बताया कि आसरे को पहले पुरवा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया और इसके बाद जिला अस्पताल ले जाया गया. सिंह ने बताया कि आसरे की इलाज के दौरान मौत हो गई. आसरे के परिजनों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है. आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं. फिलहाल इस घटना की जांच भी की जा रही है. बताया जा रहा है कि तीनों भाई राशि को बराबर भागों में बांटना चाहते थे लेकिन फिर कुछ ऐसा हो गया कि तीनों में विवाद उत्पन्न हो गया. इस विवाद ने इतना बड़ा रूप ले लिया कि भयंकर झगड़ा हो गया. इसी झगड़े में एक की मौत हो गई है. मामले में परिवार से संबंधित सभी लोगों से पूछताछ की जा रही है.
|
बलरामपुर में सोमवार देर रात छोटे छोटे ओले गिरे। किसानों के लिए राहत की ख़बर है। वहीं, आम के बागवानों को ओला पड़ने से नुकसान हो सकता है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक हो सकती है बारिश, आम जनमानस को मिलेगा भीषण गर्मी से निजात। दूसरी ओर, गोरखपुर में भी मंगलवार सुबह सवा तीन बजे से मौसम ने ली करवट, तेज हवाओं के साथ बरसात हुई। 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा,मौसम बदलने से 43 डिग्री की भीषण गर्मी से लोगों को मिली राहत।
|
बलरामपुर में सोमवार देर रात छोटे छोटे ओले गिरे। किसानों के लिए राहत की ख़बर है। वहीं, आम के बागवानों को ओला पड़ने से नुकसान हो सकता है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक हो सकती है बारिश, आम जनमानस को मिलेगा भीषण गर्मी से निजात। दूसरी ओर, गोरखपुर में भी मंगलवार सुबह सवा तीन बजे से मौसम ने ली करवट, तेज हवाओं के साथ बरसात हुई। तीस से चालीस किलोग्राममीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा,मौसम बदलने से तैंतालीस डिग्री की भीषण गर्मी से लोगों को मिली राहत।
|
जनता से रिश्ता वेबडेस्क : कनाडा के सांसद चंद्रकांत आर्य, अपनी पत्नी के साथ, तुमकुरु जिले के सिरा तालुक में अपने पैतृक गांव द्वारलु गए और पड़ोसी गजजीगढ़हल्ली में देवी लक्ष्मी मंदिर में पूजा-अर्चना की। आर्य अपने बचपन के दोस्तों, रिश्तेदारों और गांव के लोगों से मिले। श्री सिद्धार्थ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस, रोटरी क्लब, लायंस क्लब, चैंबर्स ऑफ कॉमर्स, हलप्पा फाउंडेशन, आदर्श फाउंडेशन और मातृछाया संगठन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक कार्यक्रम में आर्य और उनकी पत्नी संगीता को रविंद्र कला निकेतन में सम्मानित किया गया।
मीडियाकर्मियों के साथ बातचीत के दौरान भारत में राजनीति के बारे में अपनी राय पर एक सवाल के जवाब में आर्य ने कहा, "मैं भारतीय राजनीतिक दलों और राजनीतिक व्यवस्था के बारे में नहीं जानता। इसलिए मेरी कोई टिप्पणी नहीं है। "
"कनाडा और भारत के बीच का अंतर समाज है। लोकतंत्र में, हमें वह मिलता है जिसके हम हकदार हैं और हमें सरकार और पार्टियों को दोष नहीं देना चाहिए। कनाडा में, हम लोगों से डरते हैं क्योंकि समाज मजबूत है। अगर मैं काम नहीं करता, तो मैं करूंगा निर्वाचित नहीं होना चाहिए और अगर मेरी सरकार काम नहीं करती है, तो लोग इसे नहीं चुनेंगे। समाज की ताकत तय करती है कि देश कैसे काम करता है। "एक संवाद सत्र में उन्होंने कहा, "मैं कनाडा की संसद में एक विधेयक पेश करूंगा जिसमें हर साल हिंदू विरासत माह मनाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। " उन्होंने कहा कि कनाडा बहुसांस्कृतिक देश है। उन्होंने कहा, "150 से अधिक देशों के लोग वहां रहते हैं और हम सभी की संस्कृति का सम्मान करते हैं। नवंबर को हिंदू विरासत माह के रूप में मनाने की योजना बनाई गई है। "
58 वर्षीय आर्य लिबरल पार्टी के सदस्य हैं और बैंगलोर विश्वविद्यालय और कर्नाटक विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं। पिछली बार अपने चुनाव में, आर्य ने कनाडा की संसद में कन्नड़ में एक बयान दिया, जिसकी कर्नाटक में व्यापक सराहना हुई। आर्य और उनकी पत्नी को सम्मानित करने के बाद, पूर्व डिप्टी सीएम जी परमेश्वर ने कहाः "अगर मैं ऑस्ट्रेलिया में होता, तो मैं सांसद बन जाता। " उन्होंने कहा कि उन्हें आर्य पर गर्व है, जो तीन बार सांसद रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्य नगर नियोजन और शिक्षा पर सात देशों की समिति के अध्यक्ष हैं और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समिति के सदस्य भी हैं।
|
जनता से रिश्ता वेबडेस्क : कनाडा के सांसद चंद्रकांत आर्य, अपनी पत्नी के साथ, तुमकुरु जिले के सिरा तालुक में अपने पैतृक गांव द्वारलु गए और पड़ोसी गजजीगढ़हल्ली में देवी लक्ष्मी मंदिर में पूजा-अर्चना की। आर्य अपने बचपन के दोस्तों, रिश्तेदारों और गांव के लोगों से मिले। श्री सिद्धार्थ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस, रोटरी क्लब, लायंस क्लब, चैंबर्स ऑफ कॉमर्स, हलप्पा फाउंडेशन, आदर्श फाउंडेशन और मातृछाया संगठन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक कार्यक्रम में आर्य और उनकी पत्नी संगीता को रविंद्र कला निकेतन में सम्मानित किया गया। मीडियाकर्मियों के साथ बातचीत के दौरान भारत में राजनीति के बारे में अपनी राय पर एक सवाल के जवाब में आर्य ने कहा, "मैं भारतीय राजनीतिक दलों और राजनीतिक व्यवस्था के बारे में नहीं जानता। इसलिए मेरी कोई टिप्पणी नहीं है। " "कनाडा और भारत के बीच का अंतर समाज है। लोकतंत्र में, हमें वह मिलता है जिसके हम हकदार हैं और हमें सरकार और पार्टियों को दोष नहीं देना चाहिए। कनाडा में, हम लोगों से डरते हैं क्योंकि समाज मजबूत है। अगर मैं काम नहीं करता, तो मैं करूंगा निर्वाचित नहीं होना चाहिए और अगर मेरी सरकार काम नहीं करती है, तो लोग इसे नहीं चुनेंगे। समाज की ताकत तय करती है कि देश कैसे काम करता है। "एक संवाद सत्र में उन्होंने कहा, "मैं कनाडा की संसद में एक विधेयक पेश करूंगा जिसमें हर साल हिंदू विरासत माह मनाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। " उन्होंने कहा कि कनाडा बहुसांस्कृतिक देश है। उन्होंने कहा, "एक सौ पचास से अधिक देशों के लोग वहां रहते हैं और हम सभी की संस्कृति का सम्मान करते हैं। नवंबर को हिंदू विरासत माह के रूप में मनाने की योजना बनाई गई है। " अट्ठावन वर्षीय आर्य लिबरल पार्टी के सदस्य हैं और बैंगलोर विश्वविद्यालय और कर्नाटक विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र हैं। पिछली बार अपने चुनाव में, आर्य ने कनाडा की संसद में कन्नड़ में एक बयान दिया, जिसकी कर्नाटक में व्यापक सराहना हुई। आर्य और उनकी पत्नी को सम्मानित करने के बाद, पूर्व डिप्टी सीएम जी परमेश्वर ने कहाः "अगर मैं ऑस्ट्रेलिया में होता, तो मैं सांसद बन जाता। " उन्होंने कहा कि उन्हें आर्य पर गर्व है, जो तीन बार सांसद रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्य नगर नियोजन और शिक्षा पर सात देशों की समिति के अध्यक्ष हैं और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समिति के सदस्य भी हैं।
|
खोलकर कारतूस निकाला तो उसे उसके ऊपर 'S. G.' स्टार प्रेशिया के दोनों प्रथमाक्षर खुदे हुए दिखाई दिये। फिर उसने रिवालवर के भीतरवाला कारतूस निकालकर देखा तो उस पर भी वही अक्षर खुदे हुए मिले। वह मुसकराकर उठ खड़ा हुआ। उसने अंगड़ाई लेकर मुसकराते हुए स्वतः कहा'छोटी लड़की, तुम मूर्खा नहीं हो। तुमने सोचा था कि पारो की मृत्यु द्वारा तुम मुझे सुखी बना सकोगी। निस्सन्देह तुमने मुझे सुखी बना दिया है ।'
तदनन्तर वह जोर से हँस पड़ा ।
'इसके बाद तुमने शवालय की घटना का पता लगाया, मेरे नेत्रों में नेत्र डालकर देखा, मेरी बातचीत सुनी - और अब तुम यह चाहती हो कि मैं भी श्रात्मघात कर डालूँ । इससे तुम्हें सुख मिलेगा । यदि मैं आत्मघात कर लूँ तो कदाचित् तुम भी शवालय में जाकर वैसा ही दृश्य उपस्थित करोगी, है न यही बात ? तत्पश्चात् तुम्हारा फिर से जन्म होगा। फिर तुम आत्मा के बन्धन से मुक्त हो जाओगी। तुम्हारी आत्मा को मैंने मार डाला है और तुमने उसको मेरे अन्दर प्रविष्ट
कर दिया है। प्रिय, अब तुम उसी के साथ, इसी दशा में, जीवन यापन करो। यदि वह रोग के कीट फैला दे तो तुम उसी के साथ मर जाना।'
जेल की कोठरी में जहाँ सीलन की दुर्गेधि आ रही थी और अन्धकार से जी घबराया-सा जाता था, स्टार के इन पैंसिल से लिखे हुए अशुद्ध शब्दों ने सामर को सुगन्धित सरितातट पर ले जाकर खड़ा कर दिया, रेलवे लाइन की उस सुहावनी प्रभात वेला को इस कोठरी में ला उपस्थित किया । यह सब स्मृतियाँ जाग्रत हो उठीं। इन सत्र में स्पष्टप्रेरणाएँ भरी हुई थीं। इन सभी प्रेरणाओं की छाया स्टार में विद्यमान थी। किन्तु अन्य मनुष्यों की छाया के विपरीत यह छाया
|
खोलकर कारतूस निकाला तो उसे उसके ऊपर 'S. G.' स्टार प्रेशिया के दोनों प्रथमाक्षर खुदे हुए दिखाई दिये। फिर उसने रिवालवर के भीतरवाला कारतूस निकालकर देखा तो उस पर भी वही अक्षर खुदे हुए मिले। वह मुसकराकर उठ खड़ा हुआ। उसने अंगड़ाई लेकर मुसकराते हुए स्वतः कहा'छोटी लड़की, तुम मूर्खा नहीं हो। तुमने सोचा था कि पारो की मृत्यु द्वारा तुम मुझे सुखी बना सकोगी। निस्सन्देह तुमने मुझे सुखी बना दिया है ।' तदनन्तर वह जोर से हँस पड़ा । 'इसके बाद तुमने शवालय की घटना का पता लगाया, मेरे नेत्रों में नेत्र डालकर देखा, मेरी बातचीत सुनी - और अब तुम यह चाहती हो कि मैं भी श्रात्मघात कर डालूँ । इससे तुम्हें सुख मिलेगा । यदि मैं आत्मघात कर लूँ तो कदाचित् तुम भी शवालय में जाकर वैसा ही दृश्य उपस्थित करोगी, है न यही बात ? तत्पश्चात् तुम्हारा फिर से जन्म होगा। फिर तुम आत्मा के बन्धन से मुक्त हो जाओगी। तुम्हारी आत्मा को मैंने मार डाला है और तुमने उसको मेरे अन्दर प्रविष्ट कर दिया है। प्रिय, अब तुम उसी के साथ, इसी दशा में, जीवन यापन करो। यदि वह रोग के कीट फैला दे तो तुम उसी के साथ मर जाना।' जेल की कोठरी में जहाँ सीलन की दुर्गेधि आ रही थी और अन्धकार से जी घबराया-सा जाता था, स्टार के इन पैंसिल से लिखे हुए अशुद्ध शब्दों ने सामर को सुगन्धित सरितातट पर ले जाकर खड़ा कर दिया, रेलवे लाइन की उस सुहावनी प्रभात वेला को इस कोठरी में ला उपस्थित किया । यह सब स्मृतियाँ जाग्रत हो उठीं। इन सत्र में स्पष्टप्रेरणाएँ भरी हुई थीं। इन सभी प्रेरणाओं की छाया स्टार में विद्यमान थी। किन्तु अन्य मनुष्यों की छाया के विपरीत यह छाया
|
31 जुलाई को, जब प्रेमचंद की 125 वीं सालगिरह मनाई जा रही थी, मैं उनके गाँव लमही में था. मैं स्वाभाविक रुप से चाहता था कि उनके स्मारक तक जाकर नमन कर सकूँ. लेकिन मैं ऐसा कर नहीं सका.
जब मैं दरवाज़े तक पहुँचा तो बाहर खड़े पुलिस के मुस्तैद अमले ने मुझे रोका और मेरा नाम पूछे बग़ैर कहा, "आप भीतर नहीं जा सकते क्योंकि आपका नाम इस सूची में नहीं है. "
मेरे पास भीतर जाने की अपनी वजह थी और सिपाहियों के पास मुझे रोकने की अपनी.
वहां केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री जयपाल रेड्डी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह जो आने वाले थे.
जब राजनीतिक नेता पहुँचे तो दरवाज़ा खुला भी लेकिन तब न नमन की जगह बची थी न अवसर ही था.
फिर नेता पहुँचे प्रेमचंद के उस जर्जर मकान के सामने जिसे मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव क्षण भर पहले देखकर निकले थे.
वे ख़ासे उखड़े हुए से दिख रहे थे, पता नहीं क्यों. प्रेमचंद के मकान की खस्ता हालत देखकर या फिर जयपाल रेड्डी के रवैये से, जिन्होंने पहली बार सुबह फ़ोन करके बताया था कि वे देर से पहुँच रहे हैं.
शिलान्यास होना था प्रेमचंद अध्ययन केंद्र और शोध संस्थान का. हुआ भी. लेकिन जब तालियाँ बजनी थीं तब तक नेताओं की सुरक्षा में जुटे पुलिस वालों और मीडिया के मेरे साथियों के साथ विवाद इतना बढ़ गया था कि तालियाँ सुनाई ही नहीं पड़ीं.
अलबत्ता प्रेस फ़ोटोग्राफ़रों और पुलिस के बीच गाली गलौज की आवाज़ ज़रुर सुनाई देती रही.
लोग 1936 के बाद से ही पता नहीं क्यों इंतज़ार कर रहे हैं कि किसी दिन सरकार प्रेमचंद के गाँव की सुध लेगी, कुछ कार्य करेगी. लोग भी और साहित्यकार भी. हालांकि वे अभी भी धमकी देना बंद नहीं करते कि अगर सरकार ने कुछ नहीं किया तो वे ख़ुद कुछ कर लेंगे.
वाराणसी प्रगतिशील आंदोलन के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा कि उनका संगठन सरकार को एक साल का समय देगा और यदि इस समय में कुछ नहीं होता तो वे अपनी ओर से धन संग्रह करना शुरु कर देंगे.
हालांकि वे इस बात को लेकर आश्वस्त ही दिखाई दे रहे थे कि सरकार कुछ करने वाली नहीं है.
फिर हुई जनसभा जिसमें जन कम थे और उनको घेरे हुए पुलिस वाले अधिक. मंच पर बैठे नेताओं के चेहरों पर मंच पर जाने से पहले से ही लिखा हुआ था कि वे बेहद उकताए हुए हैं.
इस कार्यक्रम को अधूरा छोड़कर दिल्ली लौटते हुए प्रेमचंद के पोते आलोक राय की टिप्पणी भी खरी थी, "एक तौर के बौखलाहट है, खीझ है और एक तरह की शर्मिंदगी भी कि ये क्या हो रहा है और यदि हो भी रहा है तो हम इसमें शामिल क्यों हो रहे हैं. "
मैं भी वापस लौटा. लमही से निकलने वाले रास्ते पर सारी दुकानें बंद थीं क्योंकि नेताओं की सुरक्षा का सवाल था. . . . रास्तों से लोगों को गुज़रने की पाबंदी थी क्योंकि वीआईपी गुज़रने वाले थे.
वही वीआईपी जो लोगों के अपने प्रेमचंद के कार्यक्रम में भाग लेने आए थे.
सरकार का कार्यक्रम असरकारी हो ही नहीं सकता.
सुपरिचित लेखक और कवि विनोद कुमार शुक्ल ठीक कहते हैं, "सत्ता का रास्ता जनता को हटाकर बनता है. "
|
इकतीस जुलाई को, जब प्रेमचंद की एक सौ पच्चीस वीं सालगिरह मनाई जा रही थी, मैं उनके गाँव लमही में था. मैं स्वाभाविक रुप से चाहता था कि उनके स्मारक तक जाकर नमन कर सकूँ. लेकिन मैं ऐसा कर नहीं सका. जब मैं दरवाज़े तक पहुँचा तो बाहर खड़े पुलिस के मुस्तैद अमले ने मुझे रोका और मेरा नाम पूछे बग़ैर कहा, "आप भीतर नहीं जा सकते क्योंकि आपका नाम इस सूची में नहीं है. " मेरे पास भीतर जाने की अपनी वजह थी और सिपाहियों के पास मुझे रोकने की अपनी. वहां केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री जयपाल रेड्डी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह जो आने वाले थे. जब राजनीतिक नेता पहुँचे तो दरवाज़ा खुला भी लेकिन तब न नमन की जगह बची थी न अवसर ही था. फिर नेता पहुँचे प्रेमचंद के उस जर्जर मकान के सामने जिसे मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव क्षण भर पहले देखकर निकले थे. वे ख़ासे उखड़े हुए से दिख रहे थे, पता नहीं क्यों. प्रेमचंद के मकान की खस्ता हालत देखकर या फिर जयपाल रेड्डी के रवैये से, जिन्होंने पहली बार सुबह फ़ोन करके बताया था कि वे देर से पहुँच रहे हैं. शिलान्यास होना था प्रेमचंद अध्ययन केंद्र और शोध संस्थान का. हुआ भी. लेकिन जब तालियाँ बजनी थीं तब तक नेताओं की सुरक्षा में जुटे पुलिस वालों और मीडिया के मेरे साथियों के साथ विवाद इतना बढ़ गया था कि तालियाँ सुनाई ही नहीं पड़ीं. अलबत्ता प्रेस फ़ोटोग्राफ़रों और पुलिस के बीच गाली गलौज की आवाज़ ज़रुर सुनाई देती रही. लोग एक हज़ार नौ सौ छत्तीस के बाद से ही पता नहीं क्यों इंतज़ार कर रहे हैं कि किसी दिन सरकार प्रेमचंद के गाँव की सुध लेगी, कुछ कार्य करेगी. लोग भी और साहित्यकार भी. हालांकि वे अभी भी धमकी देना बंद नहीं करते कि अगर सरकार ने कुछ नहीं किया तो वे ख़ुद कुछ कर लेंगे. वाराणसी प्रगतिशील आंदोलन के अध्यक्ष संजय श्रीवास्तव ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा कि उनका संगठन सरकार को एक साल का समय देगा और यदि इस समय में कुछ नहीं होता तो वे अपनी ओर से धन संग्रह करना शुरु कर देंगे. हालांकि वे इस बात को लेकर आश्वस्त ही दिखाई दे रहे थे कि सरकार कुछ करने वाली नहीं है. फिर हुई जनसभा जिसमें जन कम थे और उनको घेरे हुए पुलिस वाले अधिक. मंच पर बैठे नेताओं के चेहरों पर मंच पर जाने से पहले से ही लिखा हुआ था कि वे बेहद उकताए हुए हैं. इस कार्यक्रम को अधूरा छोड़कर दिल्ली लौटते हुए प्रेमचंद के पोते आलोक राय की टिप्पणी भी खरी थी, "एक तौर के बौखलाहट है, खीझ है और एक तरह की शर्मिंदगी भी कि ये क्या हो रहा है और यदि हो भी रहा है तो हम इसमें शामिल क्यों हो रहे हैं. " मैं भी वापस लौटा. लमही से निकलने वाले रास्ते पर सारी दुकानें बंद थीं क्योंकि नेताओं की सुरक्षा का सवाल था. . . . रास्तों से लोगों को गुज़रने की पाबंदी थी क्योंकि वीआईपी गुज़रने वाले थे. वही वीआईपी जो लोगों के अपने प्रेमचंद के कार्यक्रम में भाग लेने आए थे. सरकार का कार्यक्रम असरकारी हो ही नहीं सकता. सुपरिचित लेखक और कवि विनोद कुमार शुक्ल ठीक कहते हैं, "सत्ता का रास्ता जनता को हटाकर बनता है. "
|
अहमदाबादः गुजरात उच्च न्यायालय ने "मोदी उपनाम" वाली टिप्पणी को लेकर आपराधिक मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगाने का अनुरोध करने संबंधी उनकी याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी।
न्यायमूर्ति हेमंत प्रच्छक ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि गांधी पहले ही देशभर में 10 मामलों का सामना कर रहे हैं और निचली अदालत का कांग्रेस नेता को दोषी ठहराने का आदेश "न्यायसंगत, उचित और वैध" है।
अदालत ने कहा कि दोषसिद्धि पर रोक लगाने का कोई तर्कसंगत कारण नहीं है।
यदि दोषसिद्धि पर रोक लग जाती, तो इससे राहुल गांधी की संसद सदस्यता बहाल होने का मार्ग प्रशस्त हो जाता।
गुजरात में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक पूर्णेश मोदी द्वारा दायर 2019 के मामले में सूरत की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने 23 मार्च को राहुल गांधी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 499 और 500 (आपराधिक मानहानि) के तहत दोषी ठहराते हुए दो साल जेल की सजा सुनाई थी।
फैसले के बाद गांधी को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत संसद की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। राहुल गांधी 2019 में केरल के वायनाड से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे।
राहुल गांधी ने 13 अप्रैल, 2019 को कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी रैली के दौरान टिप्पणी की थी कि "सभी चोरों का समान उपनाम मोदी ही क्यों होता है?" इस टिप्पणी को लेकर विधायक ने गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था।
वहीं कांग्रेस ने गुजरात उच्च न्यायालय के इस फैसले को लेकर कहा कि इस निर्णय ने मामले को आगे ले जाने के उसके संकल्प को दोगुना कर दिया है ।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट किया, "राहुल गांधी की संसद से अयोग्यता पर गुजरात उच्च न्यायालय की एकल पीठ का फैसला हमारे संज्ञान में आया है। फैसले का अध्ययन किया जा रहा है, जैसा कि होना चाहिए। अभिषेक मनु सिंघवी दोपहर तीन बजे संवाददाता सम्मेलन में इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे।"
उन्होंने कहा, "उच्च न्यायलय के फ़ैसले ने इस मामले को आगे ले जाने के हमारे संकल्प को दोगुना किया है। "
कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने कहा कि मानहानि मामले में राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगाने संबंधी याचिका खारिज करने के गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।
(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)
अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
|
अहमदाबादः गुजरात उच्च न्यायालय ने "मोदी उपनाम" वाली टिप्पणी को लेकर आपराधिक मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगाने का अनुरोध करने संबंधी उनकी याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति हेमंत प्रच्छक ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि गांधी पहले ही देशभर में दस मामलों का सामना कर रहे हैं और निचली अदालत का कांग्रेस नेता को दोषी ठहराने का आदेश "न्यायसंगत, उचित और वैध" है। अदालत ने कहा कि दोषसिद्धि पर रोक लगाने का कोई तर्कसंगत कारण नहीं है। यदि दोषसिद्धि पर रोक लग जाती, तो इससे राहुल गांधी की संसद सदस्यता बहाल होने का मार्ग प्रशस्त हो जाता। गुजरात में भारतीय जनता पार्टी के विधायक पूर्णेश मोदी द्वारा दायर दो हज़ार उन्नीस के मामले में सूरत की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अदालत ने तेईस मार्च को राहुल गांधी को भारतीय दंड संहिता की धाराओं चार सौ निन्यानवे और पाँच सौ के तहत दोषी ठहराते हुए दो साल जेल की सजा सुनाई थी। फैसले के बाद गांधी को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के तहत संसद की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया था। राहुल गांधी दो हज़ार उन्नीस में केरल के वायनाड से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। राहुल गांधी ने तेरह अप्रैल, दो हज़ार उन्नीस को कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी रैली के दौरान टिप्पणी की थी कि "सभी चोरों का समान उपनाम मोदी ही क्यों होता है?" इस टिप्पणी को लेकर विधायक ने गांधी के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था। वहीं कांग्रेस ने गुजरात उच्च न्यायालय के इस फैसले को लेकर कहा कि इस निर्णय ने मामले को आगे ले जाने के उसके संकल्प को दोगुना कर दिया है । पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट किया, "राहुल गांधी की संसद से अयोग्यता पर गुजरात उच्च न्यायालय की एकल पीठ का फैसला हमारे संज्ञान में आया है। फैसले का अध्ययन किया जा रहा है, जैसा कि होना चाहिए। अभिषेक मनु सिंघवी दोपहर तीन बजे संवाददाता सम्मेलन में इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे।" उन्होंने कहा, "उच्च न्यायलय के फ़ैसले ने इस मामले को आगे ले जाने के हमारे संकल्प को दोगुना किया है। " कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने कहा कि मानहानि मामले में राहुल गांधी की दोषसिद्धि पर रोक लगाने संबंधी याचिका खारिज करने के गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
|
बुखार के बिना बच्चों में खांसीः कारण क्या है?
ऐसे लक्षणों के कारण हो सकते हैंअलग। अक्सर, बुखार के बिना बच्चों में खांसी शुरू होती है, क्योंकि एलर्जी का परिणाम है कड़ाई से बोलते हुए, यह एलर्जी की स्थिति का सबसे हद तक संकेतक है। चिकित्सक द्वारा निर्धारित एंटीरॉर्गन लेने से अवशिष्ट घटनाएं समाप्त हो जाती हैं।
कारणों की सूची में दूसरे स्थान पर है जो कारण हैबुखार के बिना बच्चों में खांसी, छोटे आइटम निगल लिया जाना चाहिए। हालांकि, वहाँ अन्य लक्षण गायब हो सकता है आवाज, चेहरा हैं और नाखून नीले छेद, मुश्किल साँस लेने की बारी है, बच्चे सुस्त हो सकता है, या यहाँ तक कि चेतना खो देते हैं। बाल पुराना है और वह माता-पिता कि गलती से कुछ निगल लिया बता देंगे, लेकिन बहुत कम यह नहीं कर सकते करने के लिए, तो यह हर छोटी बात अखाद्य अभी भी उनसे दूर साफ करने के लिए बुद्धिमान हो जाएगा। और अगर इस तरह के एक आपदा हुआ है और अपने दम पर विषय मिल काम नहीं करता है - तत्काल अस्पताल में बच्चे को ले आओ।
इसके लिए एक और संभावित कारणकीड़े के साथ संक्रमण - बुखार के बिना बच्चों में खांसी। एक सूखी खाँसी - लार्वा मंच पर, वे फेफड़ों, जो जलन का कारण बनता है और एक परिणाम के रूप पाए जाते हैं। इस कारण स्थापित करने और हटाने के लिए आसान है - मल किसी भी क्लिनिक में किया है, लेकिन आधुनिक कृमिनाशक दवाओं के बीच, वहाँ छोटे बच्चों में भी उपयोग के लिए अनुमति दी जाती है। लेकिन अगर घर में जानवरों, और भी अधिक अगर वे सड़क में बाहर जाना तो, परजीवी की रोकथाम वे एक नियमित आधार पर करने के लिए कर रहे हैं।
बुखार के बिना बच्चों में खांसी भी हो सकती हैटीकाकरण का प्रभाव। फिर भी, टीकाकरण के दौरान शरीर में विदेशी पदार्थ पेश किए जाते हैं। यदि यही कारण है, तो ऐसी खांसी समय के साथ ही गुजर जाएगी, हालांकि यह एक बुरा संकेत हो सकता है, इसलिए टीका के लिए इतनी तीव्र प्रतिक्रिया के बारे में डॉक्टर से परामर्श करना सबसे अच्छा है।
अक्सर ऐसा होता है कि बिना बच्चों में खांसीतनाव को तनाव से, एक कठिन परिस्थिति से मानसिक तनाव द्वारा तापमान समझाया जाता है। अगर कोई बच्चा स्थिति से निपट नहीं सकता है, तो कुछ डरता है, लगातार दबाव का अनुभव करता है, तो उसे एक आवाज़ गायब हो सकती है। तो यदि पिछले सभी संस्करण समाप्त हो गए हैं, तो माता-पिता से पूछना होगा कि वंश कैसे बाल विहार या स्कूल में कर रही है।
|
बुखार के बिना बच्चों में खांसीः कारण क्या है? ऐसे लक्षणों के कारण हो सकते हैंअलग। अक्सर, बुखार के बिना बच्चों में खांसी शुरू होती है, क्योंकि एलर्जी का परिणाम है कड़ाई से बोलते हुए, यह एलर्जी की स्थिति का सबसे हद तक संकेतक है। चिकित्सक द्वारा निर्धारित एंटीरॉर्गन लेने से अवशिष्ट घटनाएं समाप्त हो जाती हैं। कारणों की सूची में दूसरे स्थान पर है जो कारण हैबुखार के बिना बच्चों में खांसी, छोटे आइटम निगल लिया जाना चाहिए। हालांकि, वहाँ अन्य लक्षण गायब हो सकता है आवाज, चेहरा हैं और नाखून नीले छेद, मुश्किल साँस लेने की बारी है, बच्चे सुस्त हो सकता है, या यहाँ तक कि चेतना खो देते हैं। बाल पुराना है और वह माता-पिता कि गलती से कुछ निगल लिया बता देंगे, लेकिन बहुत कम यह नहीं कर सकते करने के लिए, तो यह हर छोटी बात अखाद्य अभी भी उनसे दूर साफ करने के लिए बुद्धिमान हो जाएगा। और अगर इस तरह के एक आपदा हुआ है और अपने दम पर विषय मिल काम नहीं करता है - तत्काल अस्पताल में बच्चे को ले आओ। इसके लिए एक और संभावित कारणकीड़े के साथ संक्रमण - बुखार के बिना बच्चों में खांसी। एक सूखी खाँसी - लार्वा मंच पर, वे फेफड़ों, जो जलन का कारण बनता है और एक परिणाम के रूप पाए जाते हैं। इस कारण स्थापित करने और हटाने के लिए आसान है - मल किसी भी क्लिनिक में किया है, लेकिन आधुनिक कृमिनाशक दवाओं के बीच, वहाँ छोटे बच्चों में भी उपयोग के लिए अनुमति दी जाती है। लेकिन अगर घर में जानवरों, और भी अधिक अगर वे सड़क में बाहर जाना तो, परजीवी की रोकथाम वे एक नियमित आधार पर करने के लिए कर रहे हैं। बुखार के बिना बच्चों में खांसी भी हो सकती हैटीकाकरण का प्रभाव। फिर भी, टीकाकरण के दौरान शरीर में विदेशी पदार्थ पेश किए जाते हैं। यदि यही कारण है, तो ऐसी खांसी समय के साथ ही गुजर जाएगी, हालांकि यह एक बुरा संकेत हो सकता है, इसलिए टीका के लिए इतनी तीव्र प्रतिक्रिया के बारे में डॉक्टर से परामर्श करना सबसे अच्छा है। अक्सर ऐसा होता है कि बिना बच्चों में खांसीतनाव को तनाव से, एक कठिन परिस्थिति से मानसिक तनाव द्वारा तापमान समझाया जाता है। अगर कोई बच्चा स्थिति से निपट नहीं सकता है, तो कुछ डरता है, लगातार दबाव का अनुभव करता है, तो उसे एक आवाज़ गायब हो सकती है। तो यदि पिछले सभी संस्करण समाप्त हो गए हैं, तो माता-पिता से पूछना होगा कि वंश कैसे बाल विहार या स्कूल में कर रही है।
|
कौन किस योनि में जन्म लेगा?
यह कैसे तय होता है कि हम कब और कहां जन्म लेंगे? क्या हम यह तय कर सकते हैं कि हमें किस गर्भ से पैदा होना है?
प्रश्न : जब कोई व्यक्ति पुनर्जन्म लेता है तो क्या वह प्रायः उसी लिंग में वापस जन्म लेता है?
ऐसा बिल्कुल जरूरी नहीं है। मेरे आसपास ऐसे कई लोग मौजूद हैं, जो पिछले जन्म में किसी दूसरे लिंग में थे। कुछ लोगों के साथ तो यह मेरा करीबी अनुभव रहा है। पुनर्जन्म की स्थिति में कोई जरूरी नहीं कि लिंग, यहां तक कि प्रजाति भी पिछले जन्म जैसी ही हो। दरअसल, ये सारी चीजें आपकी प्रकृति व प्रवृत्ति से तय होती हैं।
ऐसा कई लोगों के साथ हुआ है, कई योगियों के साथ भी हुआ है। खासतौर पर गौतम बुद्ध के आसपास तो निश्चित तौर पर हुआ है। कई बौद्ध भिक्षु दोबारा स्त्री-रूप में पैदा हुए।
जो भिक्षु एक पुरुष रूप में बुद्ध के पास थे उन्होंने यह महसूस किया कि महिला भिक्षुणियां पुरुष भिक्षुओं की अपेक्षा कहीं बेहतर तरीके से खुद को बुद्ध से जोड़ पा रही थीं। इसकी वजह थी कि महिला के लिए किसी के प्रति भावनात्मक तौर पर गहराई से जुड़ पाना स्वाभाविक सी बात है। जहां पुरुष लंबे समय तक बैठ कर कड़ी साधना कर रहे थे, वहीं महिलाएं बुद्ध को निहार रही थीं और उनके चेहरे पर आंसुओं की अविरल धारा बह रही थी। वे बुद्ध के प्रति प्रेम से आकंठ भरी थीं और बुद्ध भी उनकी ओर सौम्यता से निहार रहे थे। इससे पुरुषों को ईर्ष्या भी होती थी।
आपकी चाहत व प्रवृत्ति के आधार पर कुदरत आपको एक अनुकूल शरीर देती है। मान लीजिए आपकी चाहत लगातार कुछ न कुछ खाने की है और आप खाने के दौरान ही मर जाते हैं, तो अगले जन्म में हो सकता है कि आप किसी के घर पालतू सुअर बन कर जन्में, जो हर वक्त खाता रहता हो। लोगों को लगेगा कि सुअर के रूप में जन्म लेना अपने आप में एक सजा है। हालांकि यह कोई सजा नहीं है। कुदरत सजा या पुरस्कार के तौर पर चीजों को नहीं देखती। वह आपकी प्रवृत्तियों को देखते हुए उन्हें पूरा करने की दिशा में काम करती है। वह देखती है कि उन प्रवृत्तियों को पूरा करने में किस तरह का शरीर मददगार साबित हो सकता है, वही शरीर आप पाते हैैं। जो बौद्ध भिक्षु स्त्री-रूप में वापस लौटे यह उनकी कोई सजा नहीं थी, बल्कि यह उनकी प्रवृत्ति और चाहत का नतीजा था- चाहत उन चीजों को पाने की जो तब महिलाएं को हासिल थीं। जब वे बुद्ध से प्रेम करने व उनसे भावनात्मक रूप से जुडऩे की महिलाओं जैसी क्षमता पाने की कामना करते थे तो अनजाने में उनके भीतर स्त्री होने की आकांक्षा पैदा हो रही थी।
अगर आप अपने भीतर इसकी-उसकी चाहत पैदा करने से बचे रहते हैं, अपनी दृष्टि शून्य पर टिकाए रखते हैं और उसी में तल्लीन रहते हैं तो कदुरत समझ ही नहीं पाती कि आपके साथ क्या किया जाए। तब वह आपको इधर या उधर नहीं धकेल सकती और न ही आपके ऊपर अपना कोई फैसला थोप सकती है। अगर कुदरत आपके बारे में फैसला नहीं ले सकती तो फिर कौन फैसला लेगा, जाहिर सी बात है, तब आपका फैसला चलेगा।
संपादक की टिप्पणीः
क्या माँ के गर्भ धारण करते ही उसमें पल रहा भ्रू्ण जीवित हो जाता है? या फिर कुछ समय बाद प्रवेश करता है भ्रूण में जीवन? कैसे चुनता है कोई प्राणी अपने लिए गर्भ? आइये जानते हैं इस प्रश्न और उत्तर की श्रृंखला से जिसमें जीवन के सृजन के बारे में चर्चा हो रही है।
|
कौन किस योनि में जन्म लेगा? यह कैसे तय होता है कि हम कब और कहां जन्म लेंगे? क्या हम यह तय कर सकते हैं कि हमें किस गर्भ से पैदा होना है? प्रश्न : जब कोई व्यक्ति पुनर्जन्म लेता है तो क्या वह प्रायः उसी लिंग में वापस जन्म लेता है? ऐसा बिल्कुल जरूरी नहीं है। मेरे आसपास ऐसे कई लोग मौजूद हैं, जो पिछले जन्म में किसी दूसरे लिंग में थे। कुछ लोगों के साथ तो यह मेरा करीबी अनुभव रहा है। पुनर्जन्म की स्थिति में कोई जरूरी नहीं कि लिंग, यहां तक कि प्रजाति भी पिछले जन्म जैसी ही हो। दरअसल, ये सारी चीजें आपकी प्रकृति व प्रवृत्ति से तय होती हैं। ऐसा कई लोगों के साथ हुआ है, कई योगियों के साथ भी हुआ है। खासतौर पर गौतम बुद्ध के आसपास तो निश्चित तौर पर हुआ है। कई बौद्ध भिक्षु दोबारा स्त्री-रूप में पैदा हुए। जो भिक्षु एक पुरुष रूप में बुद्ध के पास थे उन्होंने यह महसूस किया कि महिला भिक्षुणियां पुरुष भिक्षुओं की अपेक्षा कहीं बेहतर तरीके से खुद को बुद्ध से जोड़ पा रही थीं। इसकी वजह थी कि महिला के लिए किसी के प्रति भावनात्मक तौर पर गहराई से जुड़ पाना स्वाभाविक सी बात है। जहां पुरुष लंबे समय तक बैठ कर कड़ी साधना कर रहे थे, वहीं महिलाएं बुद्ध को निहार रही थीं और उनके चेहरे पर आंसुओं की अविरल धारा बह रही थी। वे बुद्ध के प्रति प्रेम से आकंठ भरी थीं और बुद्ध भी उनकी ओर सौम्यता से निहार रहे थे। इससे पुरुषों को ईर्ष्या भी होती थी। आपकी चाहत व प्रवृत्ति के आधार पर कुदरत आपको एक अनुकूल शरीर देती है। मान लीजिए आपकी चाहत लगातार कुछ न कुछ खाने की है और आप खाने के दौरान ही मर जाते हैं, तो अगले जन्म में हो सकता है कि आप किसी के घर पालतू सुअर बन कर जन्में, जो हर वक्त खाता रहता हो। लोगों को लगेगा कि सुअर के रूप में जन्म लेना अपने आप में एक सजा है। हालांकि यह कोई सजा नहीं है। कुदरत सजा या पुरस्कार के तौर पर चीजों को नहीं देखती। वह आपकी प्रवृत्तियों को देखते हुए उन्हें पूरा करने की दिशा में काम करती है। वह देखती है कि उन प्रवृत्तियों को पूरा करने में किस तरह का शरीर मददगार साबित हो सकता है, वही शरीर आप पाते हैैं। जो बौद्ध भिक्षु स्त्री-रूप में वापस लौटे यह उनकी कोई सजा नहीं थी, बल्कि यह उनकी प्रवृत्ति और चाहत का नतीजा था- चाहत उन चीजों को पाने की जो तब महिलाएं को हासिल थीं। जब वे बुद्ध से प्रेम करने व उनसे भावनात्मक रूप से जुडऩे की महिलाओं जैसी क्षमता पाने की कामना करते थे तो अनजाने में उनके भीतर स्त्री होने की आकांक्षा पैदा हो रही थी। अगर आप अपने भीतर इसकी-उसकी चाहत पैदा करने से बचे रहते हैं, अपनी दृष्टि शून्य पर टिकाए रखते हैं और उसी में तल्लीन रहते हैं तो कदुरत समझ ही नहीं पाती कि आपके साथ क्या किया जाए। तब वह आपको इधर या उधर नहीं धकेल सकती और न ही आपके ऊपर अपना कोई फैसला थोप सकती है। अगर कुदरत आपके बारे में फैसला नहीं ले सकती तो फिर कौन फैसला लेगा, जाहिर सी बात है, तब आपका फैसला चलेगा। संपादक की टिप्पणीः क्या माँ के गर्भ धारण करते ही उसमें पल रहा भ्रू्ण जीवित हो जाता है? या फिर कुछ समय बाद प्रवेश करता है भ्रूण में जीवन? कैसे चुनता है कोई प्राणी अपने लिए गर्भ? आइये जानते हैं इस प्रश्न और उत्तर की श्रृंखला से जिसमें जीवन के सृजन के बारे में चर्चा हो रही है।
|
Subsets and Splits
No community queries yet
The top public SQL queries from the community will appear here once available.