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आईपीएल 2023 सीजन में रिंकू सिंह ने शानदार बल्लेबाजी का नजारा पेश किया. इस सीजन रिंकू सिंह 14 मैचों में 474 रन बनाए. (Photo Credit - Instagram) आईपीएल 2023 सीजन में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाड़ी रिंकू सिंह ने 59. 25 की एवरेज से रन बनाए. हालांकि, रिंकू सिंह की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई करने में नाकाम रही. (Photo Credit - Instagram) फिलहाल, रिंकू सिंह मालदीव में छुट्टियां मना रहे हैं. कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाड़ी ने इंस्टाग्राम पर एक फोटो शेयर किया है. इस फोटो में वह शर्टलेस नजर आ रहे हैं. (Photo Credit - Instagram) सोशल मीडिया पर रिंकू सिंह की तस्वीर तेजी से वायरल हो रही हैं. इसके अलावा सोशल मीडिया यूजर्स लगातार कमेंट्स कर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. (Photo Credit - Instagram) दरअसल, आईपीएल 2023 सीजन में गुजरात टाइटंस के खिलाफ मैच में यश दयाल की आखिरी 5 गेंदों पर 5 छक्के लगाकर रिंकू सिंह ने कोलकाता नाइट राइडर्स को जीत दिलाई थी. जिसके बाद इस खिलाड़ी ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं. (Photo Credit - Instagram) आईपीएल 2023 सीजन में रिंकू सिंह कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे. जबकि इस सीजन वह ओवरऑल नौवें सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे. (Photo Credit - Instagram)
आईपीएल दो हज़ार तेईस सीजन में रिंकू सिंह ने शानदार बल्लेबाजी का नजारा पेश किया. इस सीजन रिंकू सिंह चौदह मैचों में चार सौ चौहत्तर रन बनाए. आईपीएल दो हज़ार तेईस सीजन में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाड़ी रिंकू सिंह ने उनसठ. पच्चीस की एवरेज से रन बनाए. हालांकि, रिंकू सिंह की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स प्लेऑफ के लिए क्वालीफाई करने में नाकाम रही. फिलहाल, रिंकू सिंह मालदीव में छुट्टियां मना रहे हैं. कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाड़ी ने इंस्टाग्राम पर एक फोटो शेयर किया है. इस फोटो में वह शर्टलेस नजर आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर रिंकू सिंह की तस्वीर तेजी से वायरल हो रही हैं. इसके अलावा सोशल मीडिया यूजर्स लगातार कमेंट्स कर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. दरअसल, आईपीएल दो हज़ार तेईस सीजन में गुजरात टाइटंस के खिलाफ मैच में यश दयाल की आखिरी पाँच गेंदों पर पाँच छक्के लगाकर रिंकू सिंह ने कोलकाता नाइट राइडर्स को जीत दिलाई थी. जिसके बाद इस खिलाड़ी ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं. आईपीएल दो हज़ार तेईस सीजन में रिंकू सिंह कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे. जबकि इस सीजन वह ओवरऑल नौवें सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे.
४० / बैठक की बिल्ली ने बसो का इन्तजाम कर दिया है । बैठक रंगमंच का जुटाव प्रतीत होता है । सोफासेट की पीठ सांची के मुख्य द्वार की तरह है। पुष्पाकार पीतल को गाँठों ने शोभा, कीमत दोनो बढ़ाई है। फ़र्श पर विछी असली ईरानो कालीन के नीले आम सोफ़े पर मढी नीली मखमल को मैच करते हैं । सोफा और बाईं साइड-चेयर के बीच कांसे का हाथी नकली नगीने जड़ाये जगमगा रहा है । किताबो को अलमारियो की बहुतायत है। इनके ऊपर अपने ढंग की नुमाइश है। चीनी मिट्टी की अंग्रेजी चरवाहिन हाथ में डंडा नज़ाकत से थामे चीनी भेडो से आंखें परे किए खड़ी है । अप्रेज़ो लहँगा खूब घेरेदार है। पास ही किमोनो पहने जापानी महिलाएँ कतार में खड़ी हैं। कुछ ही दूरी पर आइफल टावर रोब जमाता है । आइफल टावर को कोलोन का कल धमकाता है । महँगे कैबिनेट में नाना प्रकार की शराब की शीशियां कैद है। कैबिनेट के ऊपर अनगिनत फ़ोटो फ्रेम चढ़ाये और फेम उतारे खड़ी हैं । अचकन और चूड़ीदार पायजामा पहने एक प्रभावशाली व्यक्ति भारत के प्रथम राष्ट्रपति को हार पहना रहा है। अचकन और चूड़ीदार पायजामा पहने वही प्रभावशाली व्यक्ति भारत के दूसरे राष्ट्रपति को मुसकराते हुए हार पहना रहा है। अचकन और चूडीदार पायजामा पहने वही प्रभावशाली व्यक्ति भारत की विश्वविख्यात नर्तको से हार बैठक की बिल्ली / ४१ पहनवा रहा है। अचकन और चूड़ीदार पायजामा पहने प्रभावशाली व्यक्ति एक छोटी बच्ची का सिर अपनी हथेली से थपथपा रहा है । अचकन और चूडीदार पायजामे वाला व्यक्ति पडित जवाहरलाल नेहरू के साथ हँस रहा है । जवाहर जैकेट और पतलून में अचकन-पायजामे वाला व्यक्ति श्रीमती इंदिरा गांधी के मज़ाक पर ठहाका मार रहा है । जवाहर जैकेट वाला व्यक्ति अव चशमा चढाए स्व० हैमरशेल्ड की वात भक्ति-भाव से सुन रहा है। चेहरे से भक्ति-भाव ऊ थांथ को बात सुनते-सुनते हट गई है। स्व० गामल अब्दल नासर को तो भारत के विदेश मन्त्रालय के प्रथम सैक्रेटरी श्रीमान् ए० एस० आर० अय्यंगार नाचीज़ ही समझते है, शायद । श्रीमती वेदवल्ली अय्यंगार आजकल इन चित्रो से विशेष प्रभावित नही होती है । दैनिक न सही, अब तो यह अय्यंगार साहिब की साप्ताहिक परिपाटी हो चुकी है। देश-विदेश के अति प्रतिष्ठित अथवा केवल प्रतिष्ठित सज्जनों को हवाई अड्डे पर मुसकुराते मिलना और फ़ोटो खँचवाकर भारत का गौरव सप्ताहान्त होते-होते और बढ़ाना पन्द्रह वरस पहले बात और थी। उन दिनों अय्यंगार साहिब विदेश मंत्रालय के केवल थर्ड सेक्रेटरी थे । 'अपनी लियाकत से ही तो.... वेदवल्ली अय्यंगार अपने को सँभालती हैं। अपनी लियाकत वाली बात फिर मन में सिर उठाती है। श्रीमती अय्यंगार विचार को फिर दबाती हैं । शान्त-मन बैठक को खिड़की के पास खड़े-खड़े श्रीमती अय्यंगार ४२ / बैठक की बिल्ली आनन्द में डूब जाती हैं । दृश्य है भी मनोहारी । लॉन आँखों को टंडक पहुंचाती है। फूलो की अनगिनत क्यारियां महाती है...खूबसूरत झाडियां ठीक कतरी हुई हैं... सबसे अधिक खूबसूरत है नई मसेंडिस, अभी-अभी जर्मनी से आई । गाडी हे तो मंत्रालय की, पर कभी-कभार निजी काम के लिए भी बुलवाई जा सकती है । निजी काम से आज श्रीमती अय्यंगार दरीवे का और कनाट प्लेस के कई चक्कर काट चुकी है । मर्सेडिस मसॅडिस ही है, आखिर ! छा गया था रोव कनॉट प्लेस में । अय्यंगार साहिव आज मन्त्रालय ऐम्बैसडर में गए हैं। कान फाड़ती हुई. सैल्यूट मारता दरवान गेट खोलता है । नई-नवेली फियेट नई-नवेली मसॅडिस के पीछे खड़ी हो गई है । गाडी चन्द्रा ने चलाई है। राघवन् के हाथ घेरते है । चालक के कन्धों को दोनों गाड़ी से उतरते है। अब मंत्रालय का ड्राइवर भी दोनों को सलाम करता है । राधवन और चन्द्रा अभिवादन को अंगीकार करते हैं । प्रतिष्ठापूर्वक वातावरण भंग हो जाता है । अय्यंगार साहिब का कुत्ता, जो एक बढ़ा पाँच एल्सेशियन भी है, भौंकते-भौकते स्वागत् करता है । बैठक की बिल्ली / ४३ चन्द्रा व्हिस्की को थप्पड़ मारकर साडी ठीक करना शुरू करती है । राघवन् सहम जाते हैं। डर छिपाने की कोशिश जारी रखते वह सीढियाँ चन्द्रा के साथ-साथ चढ़ते हैं । 'व्हिस्की से डरना नही चाहिए ।' श्रीमती अय्यगार बरामदे पर खड़ेखड़े भावी दामाद को प्यार से तमिल में समझाती है । 'डरता नहीं हूँ मैं ।' रावधन् अंग्रेजी मे झल्लाते है । सीनों बैठक में आ गए हैं। पास हो के कमरे में हँसी दबाने का प्रयत्न कुछ देर से हो रहा है । 'आ जाओ न सब !" राघवन् आवाज़ देते है। व्हिस्की गेट पर खड़े दरवान की तरफ भाग गया है । चन्द्रा ने माँ से साड़ियों का रोना शुरू कर दिया है। कोई भी नहीं मिली आज काम को । कुछ-कुछ हिचकिचाती तीन लड़कियाँ अब अन्दर आ गई हैं । राघवन् का चेहरा खिल गया है । इन्दिरा अय्यगार साहित्र को दूसरी लडकी है । चन्द्रा ही की तरह चश्मा पहने पर फेम खूब भोटा और काला है । चन्द्रा का फेम तो माफी मांगता है। इन्दिरा की साड़ी हथकरघा है, काले फूलों वाली माँ और बड़ी वहिन के कांचीपुरम् रेशम को चिढाती हुई । ४४ / वैठक की बिल्ली जुड़वाँ बहिनें पद्मा और कमला मुश्किल से पन्द्रह की होंगी । अंग्रेजी लिबास है। हाथ में ट्रांजिस्टर और कौमिक्स का ढेर । अय्यंगार साहिब की एक लडकी भी माँ पर नहीं गई है । पहली झलक मे श्रीमती वेदवल्ली अय्यंगार हीरों और रेशम में लदी पुतली लगती हैं । अद्भुत सौदर्य का पता धीरे-धीरे ही मिलता है । आँखें यदि चेतना-शून्य होती, तो देवी लगती श्रीमती अय्यंगार ! रंग चांदनी की तरह निर्दोष है और बाल काले और घने । 'सुना आप न्यूयॉर्क नहीं जा रहे हैं.... इन्दिरा राघवन् को गौर से देख रही है । चन्द्रा बहिन की तरफ घूरती है । जताना चाहती है शायद कि वह शिष्टता का नियम निभाए रखे। 'चांद ने कुछ नहीं बताया तुम्हे ?" नया नामकरण बैठक में सनसनी फैलाता है । राघवन् पतलून की जेब से सिगरेट का डिब्बा निकालने की कोशिश जुट गए हैं। टांग लम्बी नही तानी है। देर हो जाती है हिब्वे को निकालने में । कौतूहलपूर्वक इन्दिरा बहिन को और भावी जीजाजी को देखती है। अय 'मे आई' कहते राघवन् सिगरेट सुलगाने में लग जाते हैं। पांचव
चालीस / बैठक की बिल्ली ने बसो का इन्तजाम कर दिया है । बैठक रंगमंच का जुटाव प्रतीत होता है । सोफासेट की पीठ सांची के मुख्य द्वार की तरह है। पुष्पाकार पीतल को गाँठों ने शोभा, कीमत दोनो बढ़ाई है। फ़र्श पर विछी असली ईरानो कालीन के नीले आम सोफ़े पर मढी नीली मखमल को मैच करते हैं । सोफा और बाईं साइड-चेयर के बीच कांसे का हाथी नकली नगीने जड़ाये जगमगा रहा है । किताबो को अलमारियो की बहुतायत है। इनके ऊपर अपने ढंग की नुमाइश है। चीनी मिट्टी की अंग्रेजी चरवाहिन हाथ में डंडा नज़ाकत से थामे चीनी भेडो से आंखें परे किए खड़ी है । अप्रेज़ो लहँगा खूब घेरेदार है। पास ही किमोनो पहने जापानी महिलाएँ कतार में खड़ी हैं। कुछ ही दूरी पर आइफल टावर रोब जमाता है । आइफल टावर को कोलोन का कल धमकाता है । महँगे कैबिनेट में नाना प्रकार की शराब की शीशियां कैद है। कैबिनेट के ऊपर अनगिनत फ़ोटो फ्रेम चढ़ाये और फेम उतारे खड़ी हैं । अचकन और चूड़ीदार पायजामा पहने एक प्रभावशाली व्यक्ति भारत के प्रथम राष्ट्रपति को हार पहना रहा है। अचकन और चूड़ीदार पायजामा पहने वही प्रभावशाली व्यक्ति भारत के दूसरे राष्ट्रपति को मुसकराते हुए हार पहना रहा है। अचकन और चूडीदार पायजामा पहने वही प्रभावशाली व्यक्ति भारत की विश्वविख्यात नर्तको से हार बैठक की बिल्ली / इकतालीस पहनवा रहा है। अचकन और चूड़ीदार पायजामा पहने प्रभावशाली व्यक्ति एक छोटी बच्ची का सिर अपनी हथेली से थपथपा रहा है । अचकन और चूडीदार पायजामे वाला व्यक्ति पडित जवाहरलाल नेहरू के साथ हँस रहा है । जवाहर जैकेट और पतलून में अचकन-पायजामे वाला व्यक्ति श्रीमती इंदिरा गांधी के मज़ाक पर ठहाका मार रहा है । जवाहर जैकेट वाला व्यक्ति अव चशमा चढाए स्वशून्य हैमरशेल्ड की वात भक्ति-भाव से सुन रहा है। चेहरे से भक्ति-भाव ऊ थांथ को बात सुनते-सुनते हट गई है। स्वशून्य गामल अब्दल नासर को तो भारत के विदेश मन्त्रालय के प्रथम सैक्रेटरी श्रीमान् एशून्य एसशून्य आरशून्य अय्यंगार नाचीज़ ही समझते है, शायद । श्रीमती वेदवल्ली अय्यंगार आजकल इन चित्रो से विशेष प्रभावित नही होती है । दैनिक न सही, अब तो यह अय्यंगार साहिब की साप्ताहिक परिपाटी हो चुकी है। देश-विदेश के अति प्रतिष्ठित अथवा केवल प्रतिष्ठित सज्जनों को हवाई अड्डे पर मुसकुराते मिलना और फ़ोटो खँचवाकर भारत का गौरव सप्ताहान्त होते-होते और बढ़ाना पन्द्रह वरस पहले बात और थी। उन दिनों अय्यंगार साहिब विदेश मंत्रालय के केवल थर्ड सेक्रेटरी थे । 'अपनी लियाकत से ही तो.... वेदवल्ली अय्यंगार अपने को सँभालती हैं। अपनी लियाकत वाली बात फिर मन में सिर उठाती है। श्रीमती अय्यंगार विचार को फिर दबाती हैं । शान्त-मन बैठक को खिड़की के पास खड़े-खड़े श्रीमती अय्यंगार बयालीस / बैठक की बिल्ली आनन्द में डूब जाती हैं । दृश्य है भी मनोहारी । लॉन आँखों को टंडक पहुंचाती है। फूलो की अनगिनत क्यारियां महाती है...खूबसूरत झाडियां ठीक कतरी हुई हैं... सबसे अधिक खूबसूरत है नई मसेंडिस, अभी-अभी जर्मनी से आई । गाडी हे तो मंत्रालय की, पर कभी-कभार निजी काम के लिए भी बुलवाई जा सकती है । निजी काम से आज श्रीमती अय्यंगार दरीवे का और कनाट प्लेस के कई चक्कर काट चुकी है । मर्सेडिस मसॅडिस ही है, आखिर ! छा गया था रोव कनॉट प्लेस में । अय्यंगार साहिव आज मन्त्रालय ऐम्बैसडर में गए हैं। कान फाड़ती हुई. सैल्यूट मारता दरवान गेट खोलता है । नई-नवेली फियेट नई-नवेली मसॅडिस के पीछे खड़ी हो गई है । गाडी चन्द्रा ने चलाई है। राघवन् के हाथ घेरते है । चालक के कन्धों को दोनों गाड़ी से उतरते है। अब मंत्रालय का ड्राइवर भी दोनों को सलाम करता है । राधवन और चन्द्रा अभिवादन को अंगीकार करते हैं । प्रतिष्ठापूर्वक वातावरण भंग हो जाता है । अय्यंगार साहिब का कुत्ता, जो एक बढ़ा पाँच एल्सेशियन भी है, भौंकते-भौकते स्वागत् करता है । बैठक की बिल्ली / तैंतालीस चन्द्रा व्हिस्की को थप्पड़ मारकर साडी ठीक करना शुरू करती है । राघवन् सहम जाते हैं। डर छिपाने की कोशिश जारी रखते वह सीढियाँ चन्द्रा के साथ-साथ चढ़ते हैं । 'व्हिस्की से डरना नही चाहिए ।' श्रीमती अय्यगार बरामदे पर खड़ेखड़े भावी दामाद को प्यार से तमिल में समझाती है । 'डरता नहीं हूँ मैं ।' रावधन् अंग्रेजी मे झल्लाते है । सीनों बैठक में आ गए हैं। पास हो के कमरे में हँसी दबाने का प्रयत्न कुछ देर से हो रहा है । 'आ जाओ न सब !" राघवन् आवाज़ देते है। व्हिस्की गेट पर खड़े दरवान की तरफ भाग गया है । चन्द्रा ने माँ से साड़ियों का रोना शुरू कर दिया है। कोई भी नहीं मिली आज काम को । कुछ-कुछ हिचकिचाती तीन लड़कियाँ अब अन्दर आ गई हैं । राघवन् का चेहरा खिल गया है । इन्दिरा अय्यगार साहित्र को दूसरी लडकी है । चन्द्रा ही की तरह चश्मा पहने पर फेम खूब भोटा और काला है । चन्द्रा का फेम तो माफी मांगता है। इन्दिरा की साड़ी हथकरघा है, काले फूलों वाली माँ और बड़ी वहिन के कांचीपुरम् रेशम को चिढाती हुई । चौंतालीस / वैठक की बिल्ली जुड़वाँ बहिनें पद्मा और कमला मुश्किल से पन्द्रह की होंगी । अंग्रेजी लिबास है। हाथ में ट्रांजिस्टर और कौमिक्स का ढेर । अय्यंगार साहिब की एक लडकी भी माँ पर नहीं गई है । पहली झलक मे श्रीमती वेदवल्ली अय्यंगार हीरों और रेशम में लदी पुतली लगती हैं । अद्भुत सौदर्य का पता धीरे-धीरे ही मिलता है । आँखें यदि चेतना-शून्य होती, तो देवी लगती श्रीमती अय्यंगार ! रंग चांदनी की तरह निर्दोष है और बाल काले और घने । 'सुना आप न्यूयॉर्क नहीं जा रहे हैं.... इन्दिरा राघवन् को गौर से देख रही है । चन्द्रा बहिन की तरफ घूरती है । जताना चाहती है शायद कि वह शिष्टता का नियम निभाए रखे। 'चांद ने कुछ नहीं बताया तुम्हे ?" नया नामकरण बैठक में सनसनी फैलाता है । राघवन् पतलून की जेब से सिगरेट का डिब्बा निकालने की कोशिश जुट गए हैं। टांग लम्बी नही तानी है। देर हो जाती है हिब्वे को निकालने में । कौतूहलपूर्वक इन्दिरा बहिन को और भावी जीजाजी को देखती है। अय 'मे आई' कहते राघवन् सिगरेट सुलगाने में लग जाते हैं। पांचव
उसकी सास स्वयं उसे भोजन करवा रही थी और बार-बार उससे मूंग लेने का आग्रह कर रही थी । लेकिन कुछ समय पूर्व दामाद ने मूंगों का संग्रह किया था और उसमें उसे पर्याप्त घाटा लग रहा था इसलिए उसने सोचा कि उसकी सास उसे ताना मार रही है, अतः जब पुनः सास ने और मूंग लेने का आग्रह किया तो दामाद खीझ कर बोल पड़ा - मूंग लिये नहीं, या - लेंगे नही, नफा-नुकसान तो यों ही होता रहता है । २७०५. 'मूं' चिलकै, पेट बिलकै । ऊपर से तो टीप-टाप, लेकिन पेट भूखा । २७०६ 'मूडा देख कर टोका काढ़ । संदर्भ कथा - एक बार दो दामाद साथ-साथ अपनी सुसराल पहुँचे । एक मालदार था और दूसरा सर्वथा निर्धन हो गया था। सास ने मालदार दामाद की तो खूब खातिर की, उसे अनेक प्रकार के पकवान परोसे और वह स्वयं उसके पास बैठकर उसे जिमाने लगी, लकिन निर्धन दामाद की कोई कद्र नहीं थी, उसे दूर विठलाया गया और साधारण खाना परोसा गया । इस पर उसने सास से कहा -- कै सासुजी म्हारा भाग पातळा, कै थे म्हांनै भूली ? वां नै घाली माल-मळाई, म्हांनै घाली थूली । इस पर सास ने उत्तर दियानां कंवरजी थारा भाग पातळा, नां मैं थांनै भूली । ' मूंडा देखकर टीका काढया, मार गबागब थूली । रू० 'मूं लैर थप्पड़ । २७०७. 'मूड कै लाळ लाग्योड़ी बुरी । मुँह को लार लगी हुई बुरी होती है । सदर्भ कथा - एक जाट गायें भैंसे रखता था और घी वेचने का काम किया करता था । एक दिन उसकी स्त्री ने देखा कि 'कढावनी' मे दूध गरम हो गया है और उस पर मलाई आ गई है, लेकिन मलाई मे एक तिनका पड़ा हुआ है । तिनके को फेंक देने से पहले उसने सोचा कि तिनके में जो मलाई लग गई है उसे व्यर्थ क्यों जाने दूं ? यह सोचकर उसने तिनके को चूस लिया । मलाई उसे बड़ी स्वाद लगी और उसके मुँह लार लग गई । अब वह नित्य दूध पर से मलाई उतार कर खाने लगी, जिसके फलस्वरूप घी की मात्रा बहुत कम हो गई । उसका पति घर आया और उसने घी की कमी का कारण पूछा तो पहले तो वह चुप रही, लेकिन जाट के जोर देने पर उसने सारी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहातिरणकलिये डबोई रावत, तिरगकलिये डबोई ।
उसकी सास स्वयं उसे भोजन करवा रही थी और बार-बार उससे मूंग लेने का आग्रह कर रही थी । लेकिन कुछ समय पूर्व दामाद ने मूंगों का संग्रह किया था और उसमें उसे पर्याप्त घाटा लग रहा था इसलिए उसने सोचा कि उसकी सास उसे ताना मार रही है, अतः जब पुनः सास ने और मूंग लेने का आग्रह किया तो दामाद खीझ कर बोल पड़ा - मूंग लिये नहीं, या - लेंगे नही, नफा-नुकसान तो यों ही होता रहता है । दो हज़ार सात सौ पाँच. 'मूं' चिलकै, पेट बिलकै । ऊपर से तो टीप-टाप, लेकिन पेट भूखा । दो हज़ार सात सौ छः 'मूडा देख कर टोका काढ़ । संदर्भ कथा - एक बार दो दामाद साथ-साथ अपनी सुसराल पहुँचे । एक मालदार था और दूसरा सर्वथा निर्धन हो गया था। सास ने मालदार दामाद की तो खूब खातिर की, उसे अनेक प्रकार के पकवान परोसे और वह स्वयं उसके पास बैठकर उसे जिमाने लगी, लकिन निर्धन दामाद की कोई कद्र नहीं थी, उसे दूर विठलाया गया और साधारण खाना परोसा गया । इस पर उसने सास से कहा -- कै सासुजी म्हारा भाग पातळा, कै थे म्हांनै भूली ? वां नै घाली माल-मळाई, म्हांनै घाली थूली । इस पर सास ने उत्तर दियानां कंवरजी थारा भाग पातळा, नां मैं थांनै भूली । ' मूंडा देखकर टीका काढया, मार गबागब थूली । रूशून्य 'मूं लैर थप्पड़ । दो हज़ार सात सौ सात. 'मूड कै लाळ लाग्योड़ी बुरी । मुँह को लार लगी हुई बुरी होती है । सदर्भ कथा - एक जाट गायें भैंसे रखता था और घी वेचने का काम किया करता था । एक दिन उसकी स्त्री ने देखा कि 'कढावनी' मे दूध गरम हो गया है और उस पर मलाई आ गई है, लेकिन मलाई मे एक तिनका पड़ा हुआ है । तिनके को फेंक देने से पहले उसने सोचा कि तिनके में जो मलाई लग गई है उसे व्यर्थ क्यों जाने दूं ? यह सोचकर उसने तिनके को चूस लिया । मलाई उसे बड़ी स्वाद लगी और उसके मुँह लार लग गई । अब वह नित्य दूध पर से मलाई उतार कर खाने लगी, जिसके फलस्वरूप घी की मात्रा बहुत कम हो गई । उसका पति घर आया और उसने घी की कमी का कारण पूछा तो पहले तो वह चुप रही, लेकिन जाट के जोर देने पर उसने सारी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहातिरणकलिये डबोई रावत, तिरगकलिये डबोई ।
PATNA : बिहार के उर्जा मंत्री विजेन्द्र यादव ने बिना नाम लिए आरएलएसपी प्रमुख और केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा पर निशाना साधा है। पटना में उर्जा विभाग के कार्यक्रम में सीएम नीतीश कुमार की उपस्थिति में विजेन्द्र यादव ने कहा कि यदि सीएम थक गए हैं तो काम कैसे हो रहा है. . . जो थकता है वो रुकता है। गौरतलब है कि बुधवार को पटना के एक कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा था कि नीतीश कुमार ने मुझसे कहा था कि मुख्यमंत्री पद से उनका मन भर गया है। उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा था कि नीतीश कुमार नेमुझसे कहा कि 15 साल मुख्यमंत्री रहना बहुत होता है। अब मन संतृप्त हो चुका है। अब मुख्यमंत्री की यह कुर्सी खाली होने वाली है। उन्होंने जदयू और रालोसपा नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि मेरे और नीतीश के बीच में आएंगे तो फेर में पड़ जाएंगे। कुशवाहा ने कहा कि नीतीश जी और मेरे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। जितना नीतीश जी को मैं जानता हूं, कोई दूसरा नहीं। वे मेरे बड़े भाई हैं। एनडीए में आने के बाद कई बार मुलाकात हो चुकी है। माना जा रहा है कि कुशवाहा के इसी बयान का आज विजेन्द्र यादव ने जवाब दिया है।
PATNA : बिहार के उर्जा मंत्री विजेन्द्र यादव ने बिना नाम लिए आरएलएसपी प्रमुख और केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा पर निशाना साधा है। पटना में उर्जा विभाग के कार्यक्रम में सीएम नीतीश कुमार की उपस्थिति में विजेन्द्र यादव ने कहा कि यदि सीएम थक गए हैं तो काम कैसे हो रहा है. . . जो थकता है वो रुकता है। गौरतलब है कि बुधवार को पटना के एक कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा था कि नीतीश कुमार ने मुझसे कहा था कि मुख्यमंत्री पद से उनका मन भर गया है। उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा था कि नीतीश कुमार नेमुझसे कहा कि पंद्रह साल मुख्यमंत्री रहना बहुत होता है। अब मन संतृप्त हो चुका है। अब मुख्यमंत्री की यह कुर्सी खाली होने वाली है। उन्होंने जदयू और रालोसपा नेताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि मेरे और नीतीश के बीच में आएंगे तो फेर में पड़ जाएंगे। कुशवाहा ने कहा कि नीतीश जी और मेरे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। जितना नीतीश जी को मैं जानता हूं, कोई दूसरा नहीं। वे मेरे बड़े भाई हैं। एनडीए में आने के बाद कई बार मुलाकात हो चुकी है। माना जा रहा है कि कुशवाहा के इसी बयान का आज विजेन्द्र यादव ने जवाब दिया है।
किसी बदनामी देने वाले काण्ड में फंसने के कारण कुलदीप यादव की प्रतिष्ठा पर आंच आयेगी। स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह कोई अच्छा समय नहीं है। अचानक धन प्रात की संभावना है। लेकिन साथ ही साथ खर्चे भी बढेंगे। गुप्त और निगूढ सुखों को भोगने वाली प्रवृति पर अंकुश लगाये नहीं तो बड़ी शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। वैसे परिवारजनों का सहयोग पूरा रहेगा। यद्यपि कभी कभी मतभेद भी रह सकता है। जहां तक संभव हो यात्राएं न करें। इस अवधि में मिले जुले फल मिलेंगे। लम्बी यात्राएं सफल नहीं होंगी न सफलदायक ही सिद्ध होगी। उच्च पद प्रतिष्ठा प्राप्त लोगों से भेंट होगी और उनकी कृपा रहेगी। माता पिता बीमार रह सकते हैं। धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण करेंगे। साख अच्छी रहने से काम भी खूब मिलेगा। रूपये पैसे के लिहाज से भी यह समय अच्छा है। कुलदीप यादव बेहद प्रसन्न रहेंगे। इस अवधि में आर्थिक लाभ प्राप्त होंगे। परिवार में मेल-जोल रहेगा और परिजनों के साथ अच्छा व्यवहार रहेगा। मित्र और सहयोगी काफी सहायक सिद्ध होंगे। यात्राएं शुभ सिद्ध होंगी। इस समय का जितना सदुपयोग करेंगे उतना ही अच्छा रहेगा। इस अवधि में कुलदीप यादव काफी सुखी रहेंगे। नौकरी के हालात सुधरेंगे। प्रचुर लाभ होने की संभावना है। पारिवारिक वातावरण भी सुखद रहेगा। कुलदीप यादव अपनी अड़चनें और बाधाएं दूर करने और शत्रुओं का दमन करने के लिये चेष्टारत रहेंगे। कार इत्यादि चलाते समय सावधानी बरतें। इस अवधि के दौरान दुर्घटनायें मानसिक शांति भंग कर सकती हैं। प्रयासों में असफलता ही हाथ लगेगी। कुलदीप यादव के भ्रम भयकारी मनोविकृति बन सकते हैं। कुलदीप यादव की साथी का बर्ताव कुलदीप यादव को असहनीय मालूम पड़ेगा। धन्धे / व्यापार में भी काम अच्छा नहीं चलेगा। कुछ न कुछ परेशानियां कुलदीप यादव को सदैव घेरे रहेंगी। स्वास्थ्य की समस्याओं के कारण कुलदीप यादव सही प्रकार से अपने वचन नहीं निभा पायेंगे। गूढ विज्ञान की ओर कुलदीप यादव की रूचि जागृत होगी और कुछ अतीन्द्रिय अनुभव भी प्राप्त कर सकते हैं। इस वर्ष यह अवधि कुलदीप यादव के लिये सर्वश्रेष्ठ सिद्ध होगी। कुलदीप यादव प्रचुर सफलता और सम्मान प्राप्त करेंगे। इस अवधि का उपयोग कुलदीप यादव मन को एकाग्र करने समाधि और योग क्रियाओं को करने के लिए भी कर सकते हैं। धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र के किसी मुखिया से भी कुलदीप यादव का सम्पर्क हो सकता है। अपने काम को पूरा करने के लिये कुलदीप यादव में प्रचुर उत्साह और विश्वास रहेगा। परिवारिक माहौल से भी सहारा मिलेगा। लम्बी यात्रा सफलदायक सिद्ध होगी। परिवार में नये सदस्य की बढोत्तरी होगी। इस अवधि में जीवन शक्ति में कमी होने के कारण कुलदीप यादव बेहद अशक्त महसूस करेंगे। फालतू के कामों में कुलदीप यादव अपनी ऊर्जा बर्बाद करेंगे। धन हानि होगी। परिवारजनों की बीमारी कुलदीप यादव की मानसिक शांति भंग कर देगी। व्यय करने की प्रवृति बढ़ेगी। अवांछित स्थान पर कुलदीप यादव को निवास करना पड़ सकता है। लेकिन यह इद्रयातीत अनुभव प्राप्त करने के लिये बुरा समय नहीं है। धार्मिक क्रियाकलापों में कुछ समय बिताने की सलाह दी जाती है। सांसारिक मामलों के लिहाज सेयह श्रेष्ठ समय नहीं है। प्रभावशाली वाणी होने के कारण लोगों से कुलदीप यादव अपनी बात मनवा लेते हैं। प्रसिद्ध व्यक्तियों के कुलदीप यादव सम्पर्क में आयेंगे। कुलदीप यादव की ख्याति और प्रतिष्ठा सम्मान में बढ़ोत्तरी होगी। अपनी बुद्धिमत्ता के कारण कुलदीप यादव प्रचुर लाभ पायेंगे। अपने व्यवसाय में कुलदीप यादव अच्छा काम करेंगे। यात्रा से निश्चित लाभ प्राप्त करेंगे। गन्दी भाषा बोलने के कारण अपने लोगों से भी कुलदीप यादव की दुश्मनी होने की संभावना है। इसलिये कुलदीप यादव को अपनी वाणी पर पूरा नियंत्रण रखना चाहिए। खास तौर पर उन लोगों के प्रति जिनसे कुलदीप यादव की घनिष्टता है। नहीं तो गलतफहमी हो जायेगी। पैसे रूपये की हानि होने की संभावना है। अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ कुलदीप यादव के निर्वाह में मुश्किलें पेश आयेंगी। इस अवधि में कोई नये उघम न शुरू करें। इसी माह में कुलदीप यादव के व्याधिग्रस्त होने की भी संभावना है। आत्मविश्वास की कमी कुलदीप यादव में स्पष्ट परिलक्षित होगी। यात्राओं का कोई व्यवहारिक अर्थ नहीं निकलेगा। साधारण तौर पर यह समय कुलदीप यादव के लिये अच्छा नहीं है क्योंकि आत्मीय जन भी काफीदूर हो जायेंगे।
किसी बदनामी देने वाले काण्ड में फंसने के कारण कुलदीप यादव की प्रतिष्ठा पर आंच आयेगी। स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह कोई अच्छा समय नहीं है। अचानक धन प्रात की संभावना है। लेकिन साथ ही साथ खर्चे भी बढेंगे। गुप्त और निगूढ सुखों को भोगने वाली प्रवृति पर अंकुश लगाये नहीं तो बड़ी शर्मनाक स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। वैसे परिवारजनों का सहयोग पूरा रहेगा। यद्यपि कभी कभी मतभेद भी रह सकता है। जहां तक संभव हो यात्राएं न करें। इस अवधि में मिले जुले फल मिलेंगे। लम्बी यात्राएं सफल नहीं होंगी न सफलदायक ही सिद्ध होगी। उच्च पद प्रतिष्ठा प्राप्त लोगों से भेंट होगी और उनकी कृपा रहेगी। माता पिता बीमार रह सकते हैं। धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्थलों का भ्रमण करेंगे। साख अच्छी रहने से काम भी खूब मिलेगा। रूपये पैसे के लिहाज से भी यह समय अच्छा है। कुलदीप यादव बेहद प्रसन्न रहेंगे। इस अवधि में आर्थिक लाभ प्राप्त होंगे। परिवार में मेल-जोल रहेगा और परिजनों के साथ अच्छा व्यवहार रहेगा। मित्र और सहयोगी काफी सहायक सिद्ध होंगे। यात्राएं शुभ सिद्ध होंगी। इस समय का जितना सदुपयोग करेंगे उतना ही अच्छा रहेगा। इस अवधि में कुलदीप यादव काफी सुखी रहेंगे। नौकरी के हालात सुधरेंगे। प्रचुर लाभ होने की संभावना है। पारिवारिक वातावरण भी सुखद रहेगा। कुलदीप यादव अपनी अड़चनें और बाधाएं दूर करने और शत्रुओं का दमन करने के लिये चेष्टारत रहेंगे। कार इत्यादि चलाते समय सावधानी बरतें। इस अवधि के दौरान दुर्घटनायें मानसिक शांति भंग कर सकती हैं। प्रयासों में असफलता ही हाथ लगेगी। कुलदीप यादव के भ्रम भयकारी मनोविकृति बन सकते हैं। कुलदीप यादव की साथी का बर्ताव कुलदीप यादव को असहनीय मालूम पड़ेगा। धन्धे / व्यापार में भी काम अच्छा नहीं चलेगा। कुछ न कुछ परेशानियां कुलदीप यादव को सदैव घेरे रहेंगी। स्वास्थ्य की समस्याओं के कारण कुलदीप यादव सही प्रकार से अपने वचन नहीं निभा पायेंगे। गूढ विज्ञान की ओर कुलदीप यादव की रूचि जागृत होगी और कुछ अतीन्द्रिय अनुभव भी प्राप्त कर सकते हैं। इस वर्ष यह अवधि कुलदीप यादव के लिये सर्वश्रेष्ठ सिद्ध होगी। कुलदीप यादव प्रचुर सफलता और सम्मान प्राप्त करेंगे। इस अवधि का उपयोग कुलदीप यादव मन को एकाग्र करने समाधि और योग क्रियाओं को करने के लिए भी कर सकते हैं। धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र के किसी मुखिया से भी कुलदीप यादव का सम्पर्क हो सकता है। अपने काम को पूरा करने के लिये कुलदीप यादव में प्रचुर उत्साह और विश्वास रहेगा। परिवारिक माहौल से भी सहारा मिलेगा। लम्बी यात्रा सफलदायक सिद्ध होगी। परिवार में नये सदस्य की बढोत्तरी होगी। इस अवधि में जीवन शक्ति में कमी होने के कारण कुलदीप यादव बेहद अशक्त महसूस करेंगे। फालतू के कामों में कुलदीप यादव अपनी ऊर्जा बर्बाद करेंगे। धन हानि होगी। परिवारजनों की बीमारी कुलदीप यादव की मानसिक शांति भंग कर देगी। व्यय करने की प्रवृति बढ़ेगी। अवांछित स्थान पर कुलदीप यादव को निवास करना पड़ सकता है। लेकिन यह इद्रयातीत अनुभव प्राप्त करने के लिये बुरा समय नहीं है। धार्मिक क्रियाकलापों में कुछ समय बिताने की सलाह दी जाती है। सांसारिक मामलों के लिहाज सेयह श्रेष्ठ समय नहीं है। प्रभावशाली वाणी होने के कारण लोगों से कुलदीप यादव अपनी बात मनवा लेते हैं। प्रसिद्ध व्यक्तियों के कुलदीप यादव सम्पर्क में आयेंगे। कुलदीप यादव की ख्याति और प्रतिष्ठा सम्मान में बढ़ोत्तरी होगी। अपनी बुद्धिमत्ता के कारण कुलदीप यादव प्रचुर लाभ पायेंगे। अपने व्यवसाय में कुलदीप यादव अच्छा काम करेंगे। यात्रा से निश्चित लाभ प्राप्त करेंगे। गन्दी भाषा बोलने के कारण अपने लोगों से भी कुलदीप यादव की दुश्मनी होने की संभावना है। इसलिये कुलदीप यादव को अपनी वाणी पर पूरा नियंत्रण रखना चाहिए। खास तौर पर उन लोगों के प्रति जिनसे कुलदीप यादव की घनिष्टता है। नहीं तो गलतफहमी हो जायेगी। पैसे रूपये की हानि होने की संभावना है। अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ कुलदीप यादव के निर्वाह में मुश्किलें पेश आयेंगी। इस अवधि में कोई नये उघम न शुरू करें। इसी माह में कुलदीप यादव के व्याधिग्रस्त होने की भी संभावना है। आत्मविश्वास की कमी कुलदीप यादव में स्पष्ट परिलक्षित होगी। यात्राओं का कोई व्यवहारिक अर्थ नहीं निकलेगा। साधारण तौर पर यह समय कुलदीप यादव के लिये अच्छा नहीं है क्योंकि आत्मीय जन भी काफीदूर हो जायेंगे।
मुंबई : बिग बॉस 13 (Bigg Boss 13) फेम (Fame) शहनाज गिल (Shehnaaz Gill) ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर अपना एक वीडियो शेयर की है। जिसको देखकर फैंस वीडियो से अपनी निगाहें नहीं हटा पा रहे है। वीडियो में अभिनेत्री पिंक कलर के थाई-हाई स्लिट ड्रेस में में अपनी दिलकश अदाएं दिखाती नजर आ रही है। वो अपने चेहरे पर परफेक्ट मेकअप भी की है। उनका ये वीडियो उनके फैंस को काफी पसंद आ रहा है। घंटों पहले शेयर इस वीडियो को अब तक चार लाख से अधिक लाइक्स मिल चुके है।
मुंबई : बिग बॉस तेरह फेम शहनाज गिल ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पर अपना एक वीडियो शेयर की है। जिसको देखकर फैंस वीडियो से अपनी निगाहें नहीं हटा पा रहे है। वीडियो में अभिनेत्री पिंक कलर के थाई-हाई स्लिट ड्रेस में में अपनी दिलकश अदाएं दिखाती नजर आ रही है। वो अपने चेहरे पर परफेक्ट मेकअप भी की है। उनका ये वीडियो उनके फैंस को काफी पसंद आ रहा है। घंटों पहले शेयर इस वीडियो को अब तक चार लाख से अधिक लाइक्स मिल चुके है।
महाराष्ट्र के नेशनल पार्क में गेट पार करते दिखा भूत, लोग हैरान.... वीडियो वायरल! इस हरियाणवी छोरी ने स्कूल में किया ऐसा हॉट डांस की सभी शिक्षक के मुँह खुले के खुले रह गए.... वीडियो वायरल! मोदी सरकार ने ठोका रिलायंस ग्रुप पर 10 हजार करोड़ का जुर्माना, इस खबर से बंद होगा विरोधियों का मुँह! BREAKING NEWS: 24 नवंबर के बाद आप नहीं बदल पाएंगे नोट, हो जाइये सावधान! नोटबंदी के फायदे, तथ्यों को जानकर आपकी आँखे खुल जायेंगी! देखिये क्या हुआ जब नोटबंदी का विरोध करने केजरीवाल आजादपुर मंडी पहुँचे.... वीडियो वायरल! केंद्र सरकार ने किये ये 7 नए ऐलान, आज से होंगे लागू... जान लें बैंक जाने से पहले इनके बारे में! अगर आप के पास ५०० और १००० के नोट बच गए हैं तो उन्हें ऐसे करें उपयोग . . ! अमेरिकी चुनाव में ट्रम्प की जीत पर मार्क जुकरबर्ग ने कही बहुत ही अच्छी बातः देखें वीडियो! चार साल के इस बच्चे को क्रिकेट खेलता देख आप सचिन को भूल जायेंगे, यकीन ना हो तो खुद ही देख लीजिये!
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- टाइगर श्रॉफ ने कर दिया ऐलान, जल्द ही बनेंगें इस हॉलीवुड फिल्म का हिस्सा! - Simmba Song: सिंबा के साथ सिंघम का धमाका, रिलीज हुआ 'मेरा वाला Dance' Nora Fatehi: ముత్యాల వంటి డ్రెస్సులో నోరా ఫతేహి హొయలు. . హాట్ లుక్స్ వైరల్!
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खीर किसे पसंद नहीं होता. हर कोई खीर का दीवाना होता है. इसे खाने के लिए लोग किसी भी हद तक चले जाते हैं और अगर बात हेरीज वाली खीर का हो तो कहने ही क्या. हर शाम कुछ जायके वाली चीज खाने की इच्छा होती है और हर सुबह कुछ मीठा खाने की. खाने के बाद अक्सर मीठा खाने की इच्छा होती है लेकिन क्या खाएं और क्या झटपट बनाएं ये समझ नहीं आथा जिसकी वजह से हम कुछ भी तय कर पाने में असमर्थ होते हैं. मीठे की तो बात ही निराली होती है और जब बात खीर की हो तो भई कहने ही क्या? खीर का नाम जुबान पर आते ही उसके मीठे जायके का अहसास होने लगता है. और उसे खाने की कोशिश में न जाने हम क्या-क्या करने लगते हैं और वही खीर अगर हमें नहीं मिलता तो हम बेहद निराश हो जाते हैं. खास तौर पर जब बात त्योहारों की हो और खीर खाने को न मिले तो निराशा ही हाथ लगती है. लेकिन अगर आपको ये पता चले कि खीर की एक शानदार रेसिपी है जिसमें कुछ एक्स्ट्रा फैक्टर्स एड होते हैं और वो बनाने में बेहद आसान है तो आपकी क्रेविंग क्या कहेगी? यही न कि जल्द से जल्द इस रेसिपी को बना लें और अपने टेस्ट बड्स को शांत करें. मोटी मलाईदार खीर के बिना भारतीय त्योहारों और अवसरों को मनाना असंभव है. लेकिन क्या होगा अगर हम आपको बता दें कि ये फ्यूजन खीर देसी मिठाइयों के लिए आपके प्यार को बदल देगी. जी हां, ये हेल्दी और स्वादिष्ट बेरी खीर आपके फेस्टिव मेन्यू में एक बढ़िया एक्स्ट्रा होगी. बस कुछ दूध, क्रीम, चीनी/गुड़ और ढेर सारी बेरीज लें और आनंद लें. इस झटपट खीर रेसिपी को बनाने के लिए, बासमती चावल को 2-3 घंटे के लिए भिगो दें. इस बीच, एक पैन लें और उसमें दूध डालें और चलाते रहें. दूध के आधा रह जाने पर आंच धीमी कर दें और चावल, व्हीप्ड क्रीम चीनी के साथ डालें, हिलाएं और खीर को 2-3 मिनट तक उबलने दें और सूखे क्रैनबेरी डालें. एक बार खीर पक गई दिखाई दे. आंच बंद कर दें और सर्विंग बाउल में डालें और ताजी रसभरी और ब्लूबेरी से सजाएं. थोड़े से भुने हुए कद्दू के बीज डालें और ठंडा-ठंडा परोसें और आनंद लें. इसे और स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें कंडेंस्ड मिल्क मिलाएं. इसे और स्वादिष्ट बनाने के लिए आप इसमें कुछ नट्स और ट्राई फ्रूट्स मिला सकते हैं. आप चीनी को स्टीविया/शहद/गुड़ से बदल सकते हैं.
खीर किसे पसंद नहीं होता. हर कोई खीर का दीवाना होता है. इसे खाने के लिए लोग किसी भी हद तक चले जाते हैं और अगर बात हेरीज वाली खीर का हो तो कहने ही क्या. हर शाम कुछ जायके वाली चीज खाने की इच्छा होती है और हर सुबह कुछ मीठा खाने की. खाने के बाद अक्सर मीठा खाने की इच्छा होती है लेकिन क्या खाएं और क्या झटपट बनाएं ये समझ नहीं आथा जिसकी वजह से हम कुछ भी तय कर पाने में असमर्थ होते हैं. मीठे की तो बात ही निराली होती है और जब बात खीर की हो तो भई कहने ही क्या? खीर का नाम जुबान पर आते ही उसके मीठे जायके का अहसास होने लगता है. और उसे खाने की कोशिश में न जाने हम क्या-क्या करने लगते हैं और वही खीर अगर हमें नहीं मिलता तो हम बेहद निराश हो जाते हैं. खास तौर पर जब बात त्योहारों की हो और खीर खाने को न मिले तो निराशा ही हाथ लगती है. लेकिन अगर आपको ये पता चले कि खीर की एक शानदार रेसिपी है जिसमें कुछ एक्स्ट्रा फैक्टर्स एड होते हैं और वो बनाने में बेहद आसान है तो आपकी क्रेविंग क्या कहेगी? यही न कि जल्द से जल्द इस रेसिपी को बना लें और अपने टेस्ट बड्स को शांत करें. मोटी मलाईदार खीर के बिना भारतीय त्योहारों और अवसरों को मनाना असंभव है. लेकिन क्या होगा अगर हम आपको बता दें कि ये फ्यूजन खीर देसी मिठाइयों के लिए आपके प्यार को बदल देगी. जी हां, ये हेल्दी और स्वादिष्ट बेरी खीर आपके फेस्टिव मेन्यू में एक बढ़िया एक्स्ट्रा होगी. बस कुछ दूध, क्रीम, चीनी/गुड़ और ढेर सारी बेरीज लें और आनंद लें. इस झटपट खीर रेसिपी को बनाने के लिए, बासमती चावल को दो-तीन घंटाटे के लिए भिगो दें. इस बीच, एक पैन लें और उसमें दूध डालें और चलाते रहें. दूध के आधा रह जाने पर आंच धीमी कर दें और चावल, व्हीप्ड क्रीम चीनी के साथ डालें, हिलाएं और खीर को दो-तीन मिनट तक उबलने दें और सूखे क्रैनबेरी डालें. एक बार खीर पक गई दिखाई दे. आंच बंद कर दें और सर्विंग बाउल में डालें और ताजी रसभरी और ब्लूबेरी से सजाएं. थोड़े से भुने हुए कद्दू के बीज डालें और ठंडा-ठंडा परोसें और आनंद लें. इसे और स्वादिष्ट बनाने के लिए इसमें कंडेंस्ड मिल्क मिलाएं. इसे और स्वादिष्ट बनाने के लिए आप इसमें कुछ नट्स और ट्राई फ्रूट्स मिला सकते हैं. आप चीनी को स्टीविया/शहद/गुड़ से बदल सकते हैं.
जालंधर - कन्या महाविद्यालय (केएमवी)-ऑटोनॉमस कालेज, जालंधर की छात्राओं ने एक बार फिर अपनी मेहनत, लगन तथा कठोर परिश्रम का परिणाम पेश करते हुए गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर द्वारा आयोजित जोन सी के यूथ फेस्टीवल में शानदार प्राप्तियों से विद्यालय का नाम रोशन किया। इस दौरान आयोजित हुए विभिन्न मुकाबलों में केएमवी की छात्राओं ने फुलकारी, कार्टूनिंग, आन दि स्पॉट पेंटिंग, कास्टियूम परेड, गिद्दा, वेर्स्टन ग्रुप सांग, रंगोली, माइम, प्ले, गीत गजल, क्लासिकल वोकल तथा जनरल डांस जैसे 21 मुकाबलों में टॉप पोजीशंस हासिल की। विद्यालय प्राचार्या प्रो. अतिमा शर्मा द्विवेदी ने इस शानदार सफलता पर हार्दिक प्रसन्नता जाहिर करते हुए विजेता छात्राओं को बधाई दी तथा ईसीए विभाग की डीन डा. गुरजोत कौर तथा उनकी टीम के प्रयासों की भरपूर सराहना की।
जालंधर - कन्या महाविद्यालय -ऑटोनॉमस कालेज, जालंधर की छात्राओं ने एक बार फिर अपनी मेहनत, लगन तथा कठोर परिश्रम का परिणाम पेश करते हुए गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर द्वारा आयोजित जोन सी के यूथ फेस्टीवल में शानदार प्राप्तियों से विद्यालय का नाम रोशन किया। इस दौरान आयोजित हुए विभिन्न मुकाबलों में केएमवी की छात्राओं ने फुलकारी, कार्टूनिंग, आन दि स्पॉट पेंटिंग, कास्टियूम परेड, गिद्दा, वेर्स्टन ग्रुप सांग, रंगोली, माइम, प्ले, गीत गजल, क्लासिकल वोकल तथा जनरल डांस जैसे इक्कीस मुकाबलों में टॉप पोजीशंस हासिल की। विद्यालय प्राचार्या प्रो. अतिमा शर्मा द्विवेदी ने इस शानदार सफलता पर हार्दिक प्रसन्नता जाहिर करते हुए विजेता छात्राओं को बधाई दी तथा ईसीए विभाग की डीन डा. गुरजोत कौर तथा उनकी टीम के प्रयासों की भरपूर सराहना की।
द्दह्रक्त्रन्य॥ क्कक्त्रः छात्र संघ चुनाव बहाली का रास्ता क्लीयर होता नजर आ रहा है। यूपी सरकार की तरफ से प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा कल्पना अवस्थी और कुलपतियों के बीच हुए मीटिंग में लगभग सभी कुलपतियों ने छात्रसंघ चुनाव की बहाली पर अपनी सहमति जता दी है। वहीं डीडीयूजीयू के वीसी ने भी अपनी इच्छा जाहिर कर दी है। हालांकि इस बात का निर्णय अगली बार होने वाले कुलपतियों की मीटिंग में तय होगा कि चुनाव कब और कैसे होंगे? ट्यूज्डे को पहले से डिसाइडेड प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा कल्पना अवस्थी और कुलपतियों के बीच मीटिंग हुई। मीटिंग के दौरान मैक्सिमम कुलपतियों ने छात्रसंघ चुनाव की बहाली के लिए अपने-अपने ढंग से रिपोर्ट दी। मैक्सिमम कुलपति छात्रसंघ चुनाव कराने के पक्ष में रहे। डीडीयूजीयू के वीसी प्रो। अशोक कुमार ने बताया कि प्रमुख सचिव ने सभी कुलपतियों से लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के तहत चुनाव सम्पन्न कराने की बात कही। उन्होंने कहा है कि सभी यूनिवर्सिटी में एक समान नियमों से छात्रसंघ चुनाव हो, इसके लिए सभी कुलपति अपने स्तर से कॉमन मॉडल बनाएं। ताकि चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिल सके। शीघ्र ही इस पर मुद्दे पर दोबारा मीटिंग कर निर्णय लिए जाएंगे। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा और कुलपतियों के बीच हुई मीटिंग के दौरान मैंने छात्रसंघ चुनाव की बहाली के लिए सहमति जता दी है। कॉमन माडल बनाने की बात कही गई है, जिसे बनाया जाएगा।
द्दह्रक्त्रन्य॥ क्कक्त्रः छात्र संघ चुनाव बहाली का रास्ता क्लीयर होता नजर आ रहा है। यूपी सरकार की तरफ से प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा कल्पना अवस्थी और कुलपतियों के बीच हुए मीटिंग में लगभग सभी कुलपतियों ने छात्रसंघ चुनाव की बहाली पर अपनी सहमति जता दी है। वहीं डीडीयूजीयू के वीसी ने भी अपनी इच्छा जाहिर कर दी है। हालांकि इस बात का निर्णय अगली बार होने वाले कुलपतियों की मीटिंग में तय होगा कि चुनाव कब और कैसे होंगे? ट्यूज्डे को पहले से डिसाइडेड प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा कल्पना अवस्थी और कुलपतियों के बीच मीटिंग हुई। मीटिंग के दौरान मैक्सिमम कुलपतियों ने छात्रसंघ चुनाव की बहाली के लिए अपने-अपने ढंग से रिपोर्ट दी। मैक्सिमम कुलपति छात्रसंघ चुनाव कराने के पक्ष में रहे। डीडीयूजीयू के वीसी प्रो। अशोक कुमार ने बताया कि प्रमुख सचिव ने सभी कुलपतियों से लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के तहत चुनाव सम्पन्न कराने की बात कही। उन्होंने कहा है कि सभी यूनिवर्सिटी में एक समान नियमों से छात्रसंघ चुनाव हो, इसके लिए सभी कुलपति अपने स्तर से कॉमन मॉडल बनाएं। ताकि चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिल सके। शीघ्र ही इस पर मुद्दे पर दोबारा मीटिंग कर निर्णय लिए जाएंगे। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा और कुलपतियों के बीच हुई मीटिंग के दौरान मैंने छात्रसंघ चुनाव की बहाली के लिए सहमति जता दी है। कॉमन माडल बनाने की बात कही गई है, जिसे बनाया जाएगा।
आईएमएच (Institute of Medical Health) चेन्नई ने दो ट्रांसजेंडर को रोजगार ऑफर करके उनके जीवन को एकदम नई दिशा दी है. उन्हें फिलहाल ये नौकरी कॉन्ट्रैक्ट पर दी गई है, जिसकी आय स्थिर होती है. IMH की निदेशक पूर्णा चंद्रिका ने कहा कि वो ट्रांसजेंडर से मिलती थीं क्योंकि उन्हें ट्रांसजेंडर वेलफेयर कार्ड प्राप्त करने के लिए IMH से प्रमाण पत्र प्राप्त करने की आवश्यकता होती थी. उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा सोचा कि यदि इन्हें एक स्थिर नौकरी दी जाए तो वे जीवन में उत्कृष्टता हासिल करेंगे. निदेशक ने कहा कि हम चर्चा कर रहे थे कि ट्रांसजेंडर दुनिया में कई तरह की समस्याओं का सामना करते हैं, इनमें सबसे मुख्य एक बेरोजगारी है. जब उनके पास नौकरी नहीं होती तभी उन्हें व्यावसायिक यौनकर्मी बनने के लिए मजबूर होना पड़ता है. या फिर कई बार वो एक दुकान से दूसरी दुकान जाकर पैसा मांगते हैं. वो कहती हैं कि मुझे बहुत आश्चर्य होता है कि काबिलियत होने के बावजूद सिर्फ ट्रांसजेंडर होने के कारण बहुत से युवाओं को मरीन इंजीनियर, लेक्चरर और तमाम प्रोफेशनल जॉब नहीं मिल सके. इसीलिए मनीषा और वैष्णवी को देखकर उन्हें तुरंत जॉब ऑफर की. 27 वर्षीय मनीषा चेन्नई के एक प्रमुख सरकारी अस्पताल में सुरक्षा टीम के साथ काम करती थी. उसकी तीन बहनें हैं और बचपन में उसे बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा. मनीषा को यह भी याद है कि एक बार उसके पिता ने उसे छत से लटका दिया था क्योंकि वो उसे एक्सेप्ट नहीं कर पा रहे थे. अंत में बाहर आने के बाद, मनीषा को सामाजिक कलंक होने जैसा फील कराया गया. उन्हें कहीं भी नौकरी नहीं मिली. हालांकि पूर्णा से मिलने के बाद उसकी किस्मत बदल गई, क्योंकि पूर्णा ने उसे एक टेलीफोन ऑपरेटर के रूप में नियुक्त किया. मनीषा कहती हैं कि एक ट्रांसजेंडर के लिए ऐसी नौकरी पाना आसान नहीं है. नौकरी मिलने पर मैं बहुत आभारी हूं. हमें यहां कोई समस्या नहीं है और केवल यही चाहते हैं कि हमारी कम्युनिटी को भी शिक्षा और नौकरियों में समान अवसर मिले. हम जहां भी नौकरी की तलाश में गए, नियोक्ता ने हमें अगले दिन आने का आश्वासन देकर लौटा दिया और कुछ नहीं हुआ. मनीषा ने कहा कि मेरा अब एकमात्र उद्देश्य किसी अन्य सामान्य महिला की तरह जीवन जीना है. मनीषा ने कहा कि मेरा उद्देश्य उन लोगों की मानसिकता को भी बदलना है जिन्होंने हमें कलंकित किया है. काश, वे भी हमारे साथ समान व्यवहार करें. वहीं वैष्णवी के दो भाई और दो बहनें हैं. उसके पिता एक ड्राइवर थे, वो भी वैष्णवी को मन से अपना नहीं पाए थे. सात साल की उम्र में जब उसने अपनी आईब्रो को सेट कराया तो ये बात पिता को अच्छी नहीं लगी थी. फिर 17 साल की उम्र में वैष्णवी को अपना घर छोड़ना पड़ा. इसके बाद उन्हें जीवन में कई अकथनीय कठिनाईयों का सामना करना पड़ा. वो भी अब IMH में हाउसकीपिंग का काम करती हैं. वैष्णवी ने कहा कि मैं वास्तव में खुश हूं क्योंकि मुझे यहां नौकरी मिल गई है. मैं बस यही चाहती हूं कि अन्य ट्रांसजेंडरों को भी ऐसे अवसर मिले. 15 साल की उम्र में मुझे मरने के लिए कहा गया. मेरे पिता मां से पूछते थे कि इसे खाना क्यों दे रही हो. फिलहाल अब मेरे परिवार ने मुझे स्वीकार कर लिया है. वैष्णवी ने यह भी कहा कि उन्हें लगा कि एक व्यावसायिक यौनकर्मी बनने से कहीं अच्छा भीख मांगकर जीविका चलाना है. मनीषा और वैष्णवी को अनुश्री द्वारा संचालित 'सेल्फ कॉन्फिडेंस ट्रांसजेंडर सोशल वेलफेयर ट्रस्ट' के जरिए पूर्णा से मिलने का मौका मिला, जो ट्रांसजेंडरों को बेहतर अवसर दिलाने के लिए भी संघर्ष कर रही है. मनीषा और वैष्णवी ने सीएम एमके स्टालिन से ट्रांसजेंडर को आरक्षण और काम का कोई भी साधन प्रदान करने का अनुरोध किया है क्योंकि उन्हें भी इस दुनिया में एक अच्छा जीवन जीने का अधिकार है.
आईएमएच चेन्नई ने दो ट्रांसजेंडर को रोजगार ऑफर करके उनके जीवन को एकदम नई दिशा दी है. उन्हें फिलहाल ये नौकरी कॉन्ट्रैक्ट पर दी गई है, जिसकी आय स्थिर होती है. IMH की निदेशक पूर्णा चंद्रिका ने कहा कि वो ट्रांसजेंडर से मिलती थीं क्योंकि उन्हें ट्रांसजेंडर वेलफेयर कार्ड प्राप्त करने के लिए IMH से प्रमाण पत्र प्राप्त करने की आवश्यकता होती थी. उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा सोचा कि यदि इन्हें एक स्थिर नौकरी दी जाए तो वे जीवन में उत्कृष्टता हासिल करेंगे. निदेशक ने कहा कि हम चर्चा कर रहे थे कि ट्रांसजेंडर दुनिया में कई तरह की समस्याओं का सामना करते हैं, इनमें सबसे मुख्य एक बेरोजगारी है. जब उनके पास नौकरी नहीं होती तभी उन्हें व्यावसायिक यौनकर्मी बनने के लिए मजबूर होना पड़ता है. या फिर कई बार वो एक दुकान से दूसरी दुकान जाकर पैसा मांगते हैं. वो कहती हैं कि मुझे बहुत आश्चर्य होता है कि काबिलियत होने के बावजूद सिर्फ ट्रांसजेंडर होने के कारण बहुत से युवाओं को मरीन इंजीनियर, लेक्चरर और तमाम प्रोफेशनल जॉब नहीं मिल सके. इसीलिए मनीषा और वैष्णवी को देखकर उन्हें तुरंत जॉब ऑफर की. सत्ताईस वर्षीय मनीषा चेन्नई के एक प्रमुख सरकारी अस्पताल में सुरक्षा टीम के साथ काम करती थी. उसकी तीन बहनें हैं और बचपन में उसे बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ा. मनीषा को यह भी याद है कि एक बार उसके पिता ने उसे छत से लटका दिया था क्योंकि वो उसे एक्सेप्ट नहीं कर पा रहे थे. अंत में बाहर आने के बाद, मनीषा को सामाजिक कलंक होने जैसा फील कराया गया. उन्हें कहीं भी नौकरी नहीं मिली. हालांकि पूर्णा से मिलने के बाद उसकी किस्मत बदल गई, क्योंकि पूर्णा ने उसे एक टेलीफोन ऑपरेटर के रूप में नियुक्त किया. मनीषा कहती हैं कि एक ट्रांसजेंडर के लिए ऐसी नौकरी पाना आसान नहीं है. नौकरी मिलने पर मैं बहुत आभारी हूं. हमें यहां कोई समस्या नहीं है और केवल यही चाहते हैं कि हमारी कम्युनिटी को भी शिक्षा और नौकरियों में समान अवसर मिले. हम जहां भी नौकरी की तलाश में गए, नियोक्ता ने हमें अगले दिन आने का आश्वासन देकर लौटा दिया और कुछ नहीं हुआ. मनीषा ने कहा कि मेरा अब एकमात्र उद्देश्य किसी अन्य सामान्य महिला की तरह जीवन जीना है. मनीषा ने कहा कि मेरा उद्देश्य उन लोगों की मानसिकता को भी बदलना है जिन्होंने हमें कलंकित किया है. काश, वे भी हमारे साथ समान व्यवहार करें. वहीं वैष्णवी के दो भाई और दो बहनें हैं. उसके पिता एक ड्राइवर थे, वो भी वैष्णवी को मन से अपना नहीं पाए थे. सात साल की उम्र में जब उसने अपनी आईब्रो को सेट कराया तो ये बात पिता को अच्छी नहीं लगी थी. फिर सत्रह साल की उम्र में वैष्णवी को अपना घर छोड़ना पड़ा. इसके बाद उन्हें जीवन में कई अकथनीय कठिनाईयों का सामना करना पड़ा. वो भी अब IMH में हाउसकीपिंग का काम करती हैं. वैष्णवी ने कहा कि मैं वास्तव में खुश हूं क्योंकि मुझे यहां नौकरी मिल गई है. मैं बस यही चाहती हूं कि अन्य ट्रांसजेंडरों को भी ऐसे अवसर मिले. पंद्रह साल की उम्र में मुझे मरने के लिए कहा गया. मेरे पिता मां से पूछते थे कि इसे खाना क्यों दे रही हो. फिलहाल अब मेरे परिवार ने मुझे स्वीकार कर लिया है. वैष्णवी ने यह भी कहा कि उन्हें लगा कि एक व्यावसायिक यौनकर्मी बनने से कहीं अच्छा भीख मांगकर जीविका चलाना है. मनीषा और वैष्णवी को अनुश्री द्वारा संचालित 'सेल्फ कॉन्फिडेंस ट्रांसजेंडर सोशल वेलफेयर ट्रस्ट' के जरिए पूर्णा से मिलने का मौका मिला, जो ट्रांसजेंडरों को बेहतर अवसर दिलाने के लिए भी संघर्ष कर रही है. मनीषा और वैष्णवी ने सीएम एमके स्टालिन से ट्रांसजेंडर को आरक्षण और काम का कोई भी साधन प्रदान करने का अनुरोध किया है क्योंकि उन्हें भी इस दुनिया में एक अच्छा जीवन जीने का अधिकार है.
दिया है। अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सुभाषचंद्र शाक्य ने शुक्रवार को बताया कि डोलापुर गांव में तीन माह पूर्व बासदेव नामक व्यक्ति की अपहरण कर हत्या करने के बाद शव जमीन में दफना दिया गया था। पुलिस ने इस घटना का खुलासा करते हुए उसके छोटे भाई रामनिवास और भाड़े के बदमाशों अजय कुशवाहा, धीर सिंह व बजरंगबली को गिरफ्तार उनकी निशानदेही पर जमीन में गड़ा शव बरामद करने के बाद जेल भेज दिया है। उन्होंने बताया कि 70 बीघा जमीन हथियाने के लालच में रामनिवास ने बदमाशों से अपने बड़े भाई बासदेव का अपहरण और उसके बाद हत्या करवाने का अपराध स्वीकार कर लिया है।
दिया है। अपर पुलिस अधीक्षक सुभाषचंद्र शाक्य ने शुक्रवार को बताया कि डोलापुर गांव में तीन माह पूर्व बासदेव नामक व्यक्ति की अपहरण कर हत्या करने के बाद शव जमीन में दफना दिया गया था। पुलिस ने इस घटना का खुलासा करते हुए उसके छोटे भाई रामनिवास और भाड़े के बदमाशों अजय कुशवाहा, धीर सिंह व बजरंगबली को गिरफ्तार उनकी निशानदेही पर जमीन में गड़ा शव बरामद करने के बाद जेल भेज दिया है। उन्होंने बताया कि सत्तर बीघा जमीन हथियाने के लालच में रामनिवास ने बदमाशों से अपने बड़े भाई बासदेव का अपहरण और उसके बाद हत्या करवाने का अपराध स्वीकार कर लिया है।
मुकेश अंबानी के इवेंट में शाहरुख ने लिया बनारसी पान का मजा, वीडियो देख फैंस ने कहा- 'क्यूट खान' Shah Rukh Khan tasted Banarsi Paan at Ambani event: बॉलीवुड के किंग खान यानी शाहरुख खान का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वो बनारसी पान खाते नजर आ रहे हैं। शाहरुख का ये क्लिप मुकेश अंबानी के इवेंट का है। Shah Rukh Khan New Video: हाल ही में मुकेश अंबानी और नीता अंबानी के कल्चर सेंट्रल इवेंट (एनएमएसीसी) का उद्घाटन किया गया है। इस इवेंट में बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक के सितारे शामिल हुए। इस इवेंट की वजह से प्रियंका चोपड़ा की भारत वापसी हुई। एक्ट्रेस के साथ उनके पति निक जोनस भी इंडिया आए और मुकेश अंबानी के इस कार्यक्रम में शामिल हुए। वहीं बीते दिनों शाहरुख खान का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वो अपनी वाइफ गौरी खान से लड़ते नजर आ रहे थे। इल क्लिप की वजह से शाहरुख को जमकर ट्रोल किया गया था। इसी बीच शाहरुख खान का एक क्लिप इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रहा है जिसे देखने के बाद फैंस जमकर रिएक्ट कर रहे हैं। दरअसल, बॉलीवुड बबल ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट को अपडेट करते हुए शाहरुख खान का एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें एक्टर पान खाते हुए नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर शाहरुख खान का ये क्लिप चर्चा का विषय बन गया है। इस वीडियो में शाहरुख खान का स्टाइल देखने लायक है। वो ब्लैक कुर्ते में बेहद स्टाइलिश लग रहे हैं। किंग खान के इस क्लिप पर फैंस जमकर कमेंट कर रहे हैं। शाहरुख का ये अंदाज फैंस को काफी पसंद आ रहा है। बता दें कि शाहरुख का ये वीडियो मुकेश अंबानी के इवेंट का है। यहां देखें शाहरुख खान का वीडियोः बताते चलें कि हाल ही में शाहरुख खान का एक क्लिप सामने आया था जिसकी वजह से उन्हें जमकर ट्रोल किया गया था। दरअसल, एक वीडियो में शाहरुख खान अपनी वाइफ गौरी खान से लड़ते नजर आ रहे थे। बताया जा रहा है कि अंबानी के इवेंट में प्रियंका जब परफॉर्म कर रही थी तब गौरी भी थिरक रही थी। शाहरुख खान ने इसी वजह से गौरी खान को खरीखोटी सुना दी थी। वैसे भी शाहरुख और प्रियंका के बीच इन दिनों कोल्ड वॉर चल रहा है। दोनों सोशल मीडिया पर बिना नाम लिए एक दूसरे पर निशाना साधते नजर आते हैं। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
मुकेश अंबानी के इवेंट में शाहरुख ने लिया बनारसी पान का मजा, वीडियो देख फैंस ने कहा- 'क्यूट खान' Shah Rukh Khan tasted Banarsi Paan at Ambani event: बॉलीवुड के किंग खान यानी शाहरुख खान का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वो बनारसी पान खाते नजर आ रहे हैं। शाहरुख का ये क्लिप मुकेश अंबानी के इवेंट का है। Shah Rukh Khan New Video: हाल ही में मुकेश अंबानी और नीता अंबानी के कल्चर सेंट्रल इवेंट का उद्घाटन किया गया है। इस इवेंट में बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक के सितारे शामिल हुए। इस इवेंट की वजह से प्रियंका चोपड़ा की भारत वापसी हुई। एक्ट्रेस के साथ उनके पति निक जोनस भी इंडिया आए और मुकेश अंबानी के इस कार्यक्रम में शामिल हुए। वहीं बीते दिनों शाहरुख खान का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वो अपनी वाइफ गौरी खान से लड़ते नजर आ रहे थे। इल क्लिप की वजह से शाहरुख को जमकर ट्रोल किया गया था। इसी बीच शाहरुख खान का एक क्लिप इंटरनेट पर जमकर वायरल हो रहा है जिसे देखने के बाद फैंस जमकर रिएक्ट कर रहे हैं। दरअसल, बॉलीवुड बबल ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट को अपडेट करते हुए शाहरुख खान का एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें एक्टर पान खाते हुए नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर शाहरुख खान का ये क्लिप चर्चा का विषय बन गया है। इस वीडियो में शाहरुख खान का स्टाइल देखने लायक है। वो ब्लैक कुर्ते में बेहद स्टाइलिश लग रहे हैं। किंग खान के इस क्लिप पर फैंस जमकर कमेंट कर रहे हैं। शाहरुख का ये अंदाज फैंस को काफी पसंद आ रहा है। बता दें कि शाहरुख का ये वीडियो मुकेश अंबानी के इवेंट का है। यहां देखें शाहरुख खान का वीडियोः बताते चलें कि हाल ही में शाहरुख खान का एक क्लिप सामने आया था जिसकी वजह से उन्हें जमकर ट्रोल किया गया था। दरअसल, एक वीडियो में शाहरुख खान अपनी वाइफ गौरी खान से लड़ते नजर आ रहे थे। बताया जा रहा है कि अंबानी के इवेंट में प्रियंका जब परफॉर्म कर रही थी तब गौरी भी थिरक रही थी। शाहरुख खान ने इसी वजह से गौरी खान को खरीखोटी सुना दी थी। वैसे भी शाहरुख और प्रियंका के बीच इन दिनों कोल्ड वॉर चल रहा है। दोनों सोशल मीडिया पर बिना नाम लिए एक दूसरे पर निशाना साधते नजर आते हैं। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
पीठ दर्द की समस्या पहले जहां हड्डियां, मांसपेशियां कमजोर होने की वजह से 40 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों को होती थी, वहीं आज बदलती जीवनशैली व असंतुलित खान-पान से युवाओं में भी देखने को मिल रही है। madhya pradeshSun, 27 Nov 2022 09:31 AM (IST) Madhya Pradesh News: जगह उपलब्ध कराने के संबंध में स्वास्थ्य आयुक्त ने सीएमएचओ व अस्पताल अधीक्षकों को पत्र लिखा। जिला अस्पतालों में जगह उपलब्ध होने पर डेढ़ साल के भीतर भवन तैयार हो जाएंगे, जहां पहले से भवन उपलब्ध हैं, वह. . . madhya pradeshSun, 09 Oct 2022 07:34 PM (IST) पाचन न केवल निरोगी रहने की कुंजी है बल्कि यह हमें कई बीमारियों से बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। magazineTue, 31 May 2022 04:27 PM (IST) प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के तत्वाधान में कांकेर जिले के अंतर्गत चारामा विकासखंड में लर्निंग फाउंडेशन के तहत बच्चों को पढ़ाने वाले सभी स्वयंसेवक को पायलेट प्रोजेक्ट के तहत फर्स्ट ऐड(प्राथमिक उपचार) कोर्स कराया जा रहा है। chhattisgarhThu, 21 Apr 2022 01:38 AM (IST) वेद आपके द्वार योजना को जल्द ही प्रदेश में लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसे लेकर देवास जिले में भी आयुष विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। चिकित्सक, कंपाउंडर और एक महिला स्वास्थ्य कर्मी घर घर जाकर हेल्थ कार्ड तैयार करेंग. . . madhya pradeshThu, 25 Feb 2021 10:51 PM (IST) वैज्ञानिकों ने एचआईवी के इलाज के लिए नई कारगर पद्धति खोजने का दावा किया है। worldThu, 02 Jul 2015 07:00 PM (IST)
पीठ दर्द की समस्या पहले जहां हड्डियां, मांसपेशियां कमजोर होने की वजह से चालीस वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों को होती थी, वहीं आज बदलती जीवनशैली व असंतुलित खान-पान से युवाओं में भी देखने को मिल रही है। madhya pradeshSun, सत्ताईस नवंबर दो हज़ार बाईस नौ:इकतीस AM Madhya Pradesh News: जगह उपलब्ध कराने के संबंध में स्वास्थ्य आयुक्त ने सीएमएचओ व अस्पताल अधीक्षकों को पत्र लिखा। जिला अस्पतालों में जगह उपलब्ध होने पर डेढ़ साल के भीतर भवन तैयार हो जाएंगे, जहां पहले से भवन उपलब्ध हैं, वह. . . madhya pradeshSun, नौ अक्टूबर दो हज़ार बाईस सात:चौंतीस PM पाचन न केवल निरोगी रहने की कुंजी है बल्कि यह हमें कई बीमारियों से बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। magazineTue, इकतीस मई दो हज़ार बाईस चार:सत्ताईस PM प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के तत्वाधान में कांकेर जिले के अंतर्गत चारामा विकासखंड में लर्निंग फाउंडेशन के तहत बच्चों को पढ़ाने वाले सभी स्वयंसेवक को पायलेट प्रोजेक्ट के तहत फर्स्ट ऐड कोर्स कराया जा रहा है। chhattisgarhThu, इक्कीस अप्रैल दो हज़ार बाईस एक:अड़तीस AM वेद आपके द्वार योजना को जल्द ही प्रदेश में लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसे लेकर देवास जिले में भी आयुष विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। चिकित्सक, कंपाउंडर और एक महिला स्वास्थ्य कर्मी घर घर जाकर हेल्थ कार्ड तैयार करेंग. . . madhya pradeshThu, पच्चीस फ़रवरी दो हज़ार इक्कीस दस:इक्यावन PM वैज्ञानिकों ने एचआईवी के इलाज के लिए नई कारगर पद्धति खोजने का दावा किया है। worldThu, दो जुलाई दो हज़ार पंद्रह सात:शून्य PM
(२) दानोपदेश :: ९७ भावार्थ - उत्तम पात्र को निर्मल भाव से दिया हुआ दान सम्यग्दृष्टि को तो स्वर्ग मोक्ष आदि उत्तम फल का देने वाला है तथा वही दान मिथ्यादृष्टि को उत्तम भोगभूमि के सुख को देने वाला है तथा मध्यम पात्र में दिया हुआ दान सम्यग्दृष्टि को तो स्वर्ग फल का देने वाला है और मिथ्यादृष्टि को मध्यम भोगभूमि के सुख का देने वाला है तथा जघन्य पात्र को दिया हुआ दान सम्यग्दृष्टि को तो स्वर्ग फल का देने वाला है और मिथ्यादृष्टि को जघन्य भोगभूमियों के सुख का देने वाला है इस प्रकार तो पात्रदान का फल है तथा कुपात्र को दिया हुआ दान कुभोगभूमि के फल को देने वाला है और अपात्र में दिया हुआ दान व्यर्थ जाता है अथवा दुर्गति के फल को देने वाला है तथा दुष्ट परिणामों से दिया हुआ दान ऊँचे-नीचे फल का देने वाला है इस प्रकार दान कुछ न कुछ फल अवश्य देता है इसलिए भव्य जीवों को तो अपने आत्महित के लिए उत्तम आदि पात्रों में निर्मल भाव से दान देना ही चाहिए । अब आचार्य दान के भेदों को बतलाते हैं(वसंततिलका) यान्यभयभेषजभुक्तिशास्त्रदानानि तानि कथितानि महाफलानि । नान्यानि गोकनकभूमिरथाङ्गनादिदानानि निश्चितमवद्यकराणि यस्मात् ॥५०॥ अर्थ - अभय, औषध, आहार, शास्त्र इस प्रकार से दान चार प्रकार का है तथा वह चार प्रकार का दान तो महाफल का देने वाला कहा है परन्तु इससे भिन्न गौ, सुवर्ण, जमीन, रथ, स्त्री आदि दान महाफल का देने वाला नहीं कहा है वह निन्दा का कराने वाला ही कहा है इसलिए महाफल के अभिलाषियों को ऊपर कहा हुआ चार प्रकार का ही दान देना चाहिए। आचार्य और भी दान का उपदेश देते हैंयद्दीयते जिनगृहाय धरादि किंचित्तत्तत्र संस्कृतिनिमित्तमिह प्ररूढम् । आस्ते ततस्तदतिदीर्घतरं हि कालं जैनञ्च शासनमतः कृतमस्ति दातुः ॥५१॥ अर्थ- जो जिन मन्दिर के बनाने के लिए अथवा सुधार के लिए जमीन, धन आदिक दिये जाते हैं उससे जिनमन्दिर अच्छा बनता है तथा उस जिनमन्दिर के प्रभाव से बहुत काल तक जिनेन्द्र का मत इस पृथ्वी मण्डल पर विराजमान रहता है इसलिए दाता ने जिनमन्दिर के लिए जमीन धन आदि देकर जैन मत का उद्धार किया ऐसा समझना चाहिए । रोचतेऽदः । दोषोज्झितं सकललोकसुखप्रदायि तेजोरवेरिव सदा हतकौशिकाय ॥५२॥ अर्थ-आचार्य कहते हैं कि खोटा जो मिथ्यात्वरूपी कर्म उसका कार्य जो कृपणता उससे १. संस्कृत
दानोपदेश :: सत्तानवे भावार्थ - उत्तम पात्र को निर्मल भाव से दिया हुआ दान सम्यग्दृष्टि को तो स्वर्ग मोक्ष आदि उत्तम फल का देने वाला है तथा वही दान मिथ्यादृष्टि को उत्तम भोगभूमि के सुख को देने वाला है तथा मध्यम पात्र में दिया हुआ दान सम्यग्दृष्टि को तो स्वर्ग फल का देने वाला है और मिथ्यादृष्टि को मध्यम भोगभूमि के सुख का देने वाला है तथा जघन्य पात्र को दिया हुआ दान सम्यग्दृष्टि को तो स्वर्ग फल का देने वाला है और मिथ्यादृष्टि को जघन्य भोगभूमियों के सुख का देने वाला है इस प्रकार तो पात्रदान का फल है तथा कुपात्र को दिया हुआ दान कुभोगभूमि के फल को देने वाला है और अपात्र में दिया हुआ दान व्यर्थ जाता है अथवा दुर्गति के फल को देने वाला है तथा दुष्ट परिणामों से दिया हुआ दान ऊँचे-नीचे फल का देने वाला है इस प्रकार दान कुछ न कुछ फल अवश्य देता है इसलिए भव्य जीवों को तो अपने आत्महित के लिए उत्तम आदि पात्रों में निर्मल भाव से दान देना ही चाहिए । अब आचार्य दान के भेदों को बतलाते हैं यान्यभयभेषजभुक्तिशास्त्रदानानि तानि कथितानि महाफलानि । नान्यानि गोकनकभूमिरथाङ्गनादिदानानि निश्चितमवद्यकराणि यस्मात् ॥पचास॥ अर्थ - अभय, औषध, आहार, शास्त्र इस प्रकार से दान चार प्रकार का है तथा वह चार प्रकार का दान तो महाफल का देने वाला कहा है परन्तु इससे भिन्न गौ, सुवर्ण, जमीन, रथ, स्त्री आदि दान महाफल का देने वाला नहीं कहा है वह निन्दा का कराने वाला ही कहा है इसलिए महाफल के अभिलाषियों को ऊपर कहा हुआ चार प्रकार का ही दान देना चाहिए। आचार्य और भी दान का उपदेश देते हैंयद्दीयते जिनगृहाय धरादि किंचित्तत्तत्र संस्कृतिनिमित्तमिह प्ररूढम् । आस्ते ततस्तदतिदीर्घतरं हि कालं जैनञ्च शासनमतः कृतमस्ति दातुः ॥इक्यावन॥ अर्थ- जो जिन मन्दिर के बनाने के लिए अथवा सुधार के लिए जमीन, धन आदिक दिये जाते हैं उससे जिनमन्दिर अच्छा बनता है तथा उस जिनमन्दिर के प्रभाव से बहुत काल तक जिनेन्द्र का मत इस पृथ्वी मण्डल पर विराजमान रहता है इसलिए दाता ने जिनमन्दिर के लिए जमीन धन आदि देकर जैन मत का उद्धार किया ऐसा समझना चाहिए । रोचतेऽदः । दोषोज्झितं सकललोकसुखप्रदायि तेजोरवेरिव सदा हतकौशिकाय ॥बावन॥ अर्थ-आचार्य कहते हैं कि खोटा जो मिथ्यात्वरूपी कर्म उसका कार्य जो कृपणता उससे एक. संस्कृत
इराक़ की राजधानी बग़दाद के उत्तरी क्षेत्र में कार बम के एक धमाके में कम से कम 16 लोग मारे गए हैं। बुधवार की शाम बग़दाद के उत्तर में स्थित शिया बहुल इलाक़े काज़ेमैन में कार बम के एक धमाके में 16 लोगों की मौत हो गई और 30 अन्य घायल हो गए। इसी तरह पश्चिमी बग़दाद में हुए एक धमाके में चार व्यक्ति हताहत और 20 अन्य घायल हो गए। इससे पहले बुधवार की सुबह उत्तरी बग़दाद के शिया बहुल इलाक़े सद्र सिटी में भी कार बम के एक धमाके में 65 लोगों की मौत हो गई थी और 70 अन्य घायल हो गए थे। मारे जाने वालों में बड़ी संख्या बच्चों और महिलाओं की है। आतंकी गुट दाइश ने इस धमाके की ज़िम्मेदारी ली है। इराक़ के विभिन्न क्षेत्रों में सेना और स्वयं सेवी बल से मिल रही निरंतर पराजय से बौखलाए हुए आतंकी नागरिक क्षेत्रों विशेष कर राजधानी बग़दाद में आम नागरिकों को अपने हमलों का निशाना बना रहे हैं। (HN)
इराक़ की राजधानी बग़दाद के उत्तरी क्षेत्र में कार बम के एक धमाके में कम से कम सोलह लोग मारे गए हैं। बुधवार की शाम बग़दाद के उत्तर में स्थित शिया बहुल इलाक़े काज़ेमैन में कार बम के एक धमाके में सोलह लोगों की मौत हो गई और तीस अन्य घायल हो गए। इसी तरह पश्चिमी बग़दाद में हुए एक धमाके में चार व्यक्ति हताहत और बीस अन्य घायल हो गए। इससे पहले बुधवार की सुबह उत्तरी बग़दाद के शिया बहुल इलाक़े सद्र सिटी में भी कार बम के एक धमाके में पैंसठ लोगों की मौत हो गई थी और सत्तर अन्य घायल हो गए थे। मारे जाने वालों में बड़ी संख्या बच्चों और महिलाओं की है। आतंकी गुट दाइश ने इस धमाके की ज़िम्मेदारी ली है। इराक़ के विभिन्न क्षेत्रों में सेना और स्वयं सेवी बल से मिल रही निरंतर पराजय से बौखलाए हुए आतंकी नागरिक क्षेत्रों विशेष कर राजधानी बग़दाद में आम नागरिकों को अपने हमलों का निशाना बना रहे हैं।
Viral Video: सुनिधि चौहान के सुपरहिट गाने 'दीदार दे' पर एक देसी लड़की के आकर्षक डांस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हंगामा मचा दिया है। ब्लैक ड्रेस पहने हुए, लड़की हॉट स्टेप्स करते हुए सभी का दिल जीत रही है। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए उनके डांस वीडियो में उन्हें ब्लॉकबस्टर फिल्म 'दस' के लोकप्रिय गाने 'दीदार दे' पर डांस करते हुए देखा जा सकता है। ऑनलाइन साझा किए जाने के बाद से, डांस वीडियो को फोटो-शेयरिंग ऐप पर हजारों बार देखा और लाइक किया गया है। फ़ॉलोअर्स ने कमेंट बॉक्स में जाकर मनमोहक डांस मूव्स की प्रशंसा की।
Viral Video: सुनिधि चौहान के सुपरहिट गाने 'दीदार दे' पर एक देसी लड़की के आकर्षक डांस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हंगामा मचा दिया है। ब्लैक ड्रेस पहने हुए, लड़की हॉट स्टेप्स करते हुए सभी का दिल जीत रही है। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए उनके डांस वीडियो में उन्हें ब्लॉकबस्टर फिल्म 'दस' के लोकप्रिय गाने 'दीदार दे' पर डांस करते हुए देखा जा सकता है। ऑनलाइन साझा किए जाने के बाद से, डांस वीडियो को फोटो-शेयरिंग ऐप पर हजारों बार देखा और लाइक किया गया है। फ़ॉलोअर्स ने कमेंट बॉक्स में जाकर मनमोहक डांस मूव्स की प्रशंसा की।
तान्या और बॉबी करण देओल के चाचा चाची हैं. करण देओल की शादी में चाची तान्या देआल का लुक बना आकर्षण. तान्या देओल आमतौर पर लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करती हैं. बॉबी देओल और तान्या आहूजा की साल 1996 में शादी हुई थी. बॉबी देओल, पहली बार तान्या आहूजा से एक पार्टी में मिले थे. बॉबी के पहली नजर में तान्या पसंद आ गई थीं और वे उनसे मिलने लगे थे. बॉबी ने तान्या को उसी जगह प्रपोज किया जहां वे दोनों पहली बार मिले थे. तान्या बॉबी के प्रपोजल को इनकार नहीं कर सकीं और शादी के लिए हामी भर दी. बॉबी और तान्या के दो बच्चे हैं आर्यमान और धरम देओल.
तान्या और बॉबी करण देओल के चाचा चाची हैं. करण देओल की शादी में चाची तान्या देआल का लुक बना आकर्षण. तान्या देओल आमतौर पर लाइमलाइट से दूर रहना पसंद करती हैं. बॉबी देओल और तान्या आहूजा की साल एक हज़ार नौ सौ छियानवे में शादी हुई थी. बॉबी देओल, पहली बार तान्या आहूजा से एक पार्टी में मिले थे. बॉबी के पहली नजर में तान्या पसंद आ गई थीं और वे उनसे मिलने लगे थे. बॉबी ने तान्या को उसी जगह प्रपोज किया जहां वे दोनों पहली बार मिले थे. तान्या बॉबी के प्रपोजल को इनकार नहीं कर सकीं और शादी के लिए हामी भर दी. बॉबी और तान्या के दो बच्चे हैं आर्यमान और धरम देओल.
गोरखपुर के कोतवाली इलाके के बक्शीपुर में दयानंद इंटर कालेज रोड पर मंगलवार की दोपहर छात्रा से मोबाइल लूट लिया। यही नहीं आसपास मौजूद लोगों ने पकड़ने का प्रयास किया तो उनपर तमंचा तान दिया। तभी पुलिस का सायरन सुन बदमाश भागने लगे। इस दौरान बदमाश एक टैंपो से टकराकर गिर गए। गिरने के बाद लुटेरों ने लूटा हुआ मोबाइल फेंक दिया और बाइक छोड़कर फरार हो गए। पूरा घटनाक्रम पास लगे एक सीसीटीवी में कैद हो गया है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बाइक को कब्जे में ले लिया और मोबाइल को पीड़िता को सौंप दिया। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और बाइक नंबर के आधार पर लुटेरों की पहचान में जुटी है। कोतवाली थाना क्षेत्र के दयानंद इंटर कालेज नक्खास चौक बक्शीपुर के पास मंगलवार की दोपहर बाइक सवार दो बदमाशों ने एक छात्रा से मोबाइल लूट लिया और भागने लगे। वहीं के रहने वाले विभूती बरनवाल ने पुलिस को डॉयल 112 पर सूचना दी और खुद बाइक सवारों का पीछा करने लगे। इस बीच कुछ दूर आगे जाकर बाइक सवार एक आटो से टकराकर गिर गए। स्थानीय लोग जब पकड़ने के लिए उनके करीब आए तो बदमाशों ने मोबाइल फेंक दिया। यही नहीं खुद को लोगों से बचाने के लिए उनमें से एक ने असलहा निकालकर तान दिया और लहराना शुरू कर दिया। इस बीच पुलिस की पीआरवी 3872 नम्बर की वैन भी पहुंच गई। पुलिस की गाड़ी का सायरन सुनकर बाइक बिना लिए ही दोनों बदमाश पैदल ही फरार हो गए। पुलिस के मुताबिक बाइक (नम्बर यूपी53 डीबी 6717) है। पुलिस ने मोबाइल को छात्रों को सुपुर्द कर बदमाशों की तलाश शुरू कर दी है। उधर इतनी भीड़ में पुलिस के सामने से बदमाश पैदल ही फरार हो गए और उन्हें पकड़ने में नाकाम पुलिस गुडवर्क जारी कर अपनी पीठ थपथपाने में जुट गई। This website follows the DNPA Code of Ethics.
गोरखपुर के कोतवाली इलाके के बक्शीपुर में दयानंद इंटर कालेज रोड पर मंगलवार की दोपहर छात्रा से मोबाइल लूट लिया। यही नहीं आसपास मौजूद लोगों ने पकड़ने का प्रयास किया तो उनपर तमंचा तान दिया। तभी पुलिस का सायरन सुन बदमाश भागने लगे। इस दौरान बदमाश एक टैंपो से टकराकर गिर गए। गिरने के बाद लुटेरों ने लूटा हुआ मोबाइल फेंक दिया और बाइक छोड़कर फरार हो गए। पूरा घटनाक्रम पास लगे एक सीसीटीवी में कैद हो गया है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बाइक को कब्जे में ले लिया और मोबाइल को पीड़िता को सौंप दिया। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और बाइक नंबर के आधार पर लुटेरों की पहचान में जुटी है। कोतवाली थाना क्षेत्र के दयानंद इंटर कालेज नक्खास चौक बक्शीपुर के पास मंगलवार की दोपहर बाइक सवार दो बदमाशों ने एक छात्रा से मोबाइल लूट लिया और भागने लगे। वहीं के रहने वाले विभूती बरनवाल ने पुलिस को डॉयल एक सौ बारह पर सूचना दी और खुद बाइक सवारों का पीछा करने लगे। इस बीच कुछ दूर आगे जाकर बाइक सवार एक आटो से टकराकर गिर गए। स्थानीय लोग जब पकड़ने के लिए उनके करीब आए तो बदमाशों ने मोबाइल फेंक दिया। यही नहीं खुद को लोगों से बचाने के लिए उनमें से एक ने असलहा निकालकर तान दिया और लहराना शुरू कर दिया। इस बीच पुलिस की पीआरवी तीन हज़ार आठ सौ बहत्तर नम्बर की वैन भी पहुंच गई। पुलिस की गाड़ी का सायरन सुनकर बाइक बिना लिए ही दोनों बदमाश पैदल ही फरार हो गए। पुलिस के मुताबिक बाइक है। पुलिस ने मोबाइल को छात्रों को सुपुर्द कर बदमाशों की तलाश शुरू कर दी है। उधर इतनी भीड़ में पुलिस के सामने से बदमाश पैदल ही फरार हो गए और उन्हें पकड़ने में नाकाम पुलिस गुडवर्क जारी कर अपनी पीठ थपथपाने में जुट गई। This website follows the DNPA Code of Ethics.
नई दिल्ली। भारत के कप्तान विराट कोहली ऑस्ट्रेलिया दौरे पर बाएं हाथ के तेज गेंदबाज टी नटराजन के प्रदर्शन से प्रभावित हैं। नटराजन ने दाैरे में अभी तक खेले चार मैचों में आठ विकेट लिए, जिसमें तीन मैचों की टी 20 आई श्रृंखला में छह विकेट शामिल रहे। नटराजन श्रृंखला के सबसे अधिक विकेट लेने वाले खिलाड़ी के रूप में उभरे और उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के जरिए टीम में जगह बनाई थी। एक साल से भी कम समय में टी20 विश्व कप के साथ, उनकी गेंदबाजी यॉर्कर्स की क्षमता और विपक्ष के रन-स्कोरिंग पर अपनी पकड़ बनाए रखना टीम इंडिया के लिए एक बड़ी चुनाैती है। और कोहली को लगता है कि नटराजन टी20 विश्व कप टीम का हिस्सा हो सकते हैं अगर वह इस अच्छी शुरुआत का निर्माण करते हैं और इसी तरह गेंदबाजी करते रहते हैं। तीसरे टी20 आई के अंत के बाद, भारतीय कप्तान ने टी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति में टी नटराजन को इस कार्य के लिए बधाई दी। कोहली ने कहा, "नटराजन उनके लिए विशेष उल्लेख क्योंकि [मोहम्मद] शमी और बुमराह की अनुपस्थिति में, उसने दवाब की स्थिति में भी खेला है। " विराट कोहली ने टी नटराजन को एक विनम्र और मेहनती खिलाड़ी करार दिया और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे उसी नस में बने रहेंगे। वह जो कुछ भी करना चाहता है, उसके बारे में बहुत ही निश्चित है। वह बहुत मेहनती लड़का है, बहुत विनम्र लड़का है, और आप उन लोगों के लिए खुश हैं जो प्रतिबद्ध हैं और टीम के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं जब वे परिणाम प्राप्त करते हैं और टीम को जीत दिलाते हैं। उन्होंने कहा, "मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं और मुझे उम्मीद है कि वह अपने खेल में लगातार मेहनत करते रहेंगे और बेहतर बने रहेंगे क्योंकि बाएं हाथ का गेंदबाज हमेशा किसी भी टीम के लिए एक अहम हिस्सा होता है। अगर वह अच्छी तरह से लगातार गेंदबाजी कर सकते हैं तो यह हमारे लिए अगले साल होने वाले टी 20 विश्व कप में प्रवेश करने के लिए बहुत अच्छी बात होगी।
नई दिल्ली। भारत के कप्तान विराट कोहली ऑस्ट्रेलिया दौरे पर बाएं हाथ के तेज गेंदबाज टी नटराजन के प्रदर्शन से प्रभावित हैं। नटराजन ने दाैरे में अभी तक खेले चार मैचों में आठ विकेट लिए, जिसमें तीन मैचों की टी बीस आई श्रृंखला में छह विकेट शामिल रहे। नटराजन श्रृंखला के सबसे अधिक विकेट लेने वाले खिलाड़ी के रूप में उभरे और उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग के जरिए टीम में जगह बनाई थी। एक साल से भी कम समय में टीबीस विश्व कप के साथ, उनकी गेंदबाजी यॉर्कर्स की क्षमता और विपक्ष के रन-स्कोरिंग पर अपनी पकड़ बनाए रखना टीम इंडिया के लिए एक बड़ी चुनाैती है। और कोहली को लगता है कि नटराजन टीबीस विश्व कप टीम का हिस्सा हो सकते हैं अगर वह इस अच्छी शुरुआत का निर्माण करते हैं और इसी तरह गेंदबाजी करते रहते हैं। तीसरे टीबीस आई के अंत के बाद, भारतीय कप्तान ने टी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति में टी नटराजन को इस कार्य के लिए बधाई दी। कोहली ने कहा, "नटराजन उनके लिए विशेष उल्लेख क्योंकि [मोहम्मद] शमी और बुमराह की अनुपस्थिति में, उसने दवाब की स्थिति में भी खेला है। " विराट कोहली ने टी नटराजन को एक विनम्र और मेहनती खिलाड़ी करार दिया और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे उसी नस में बने रहेंगे। वह जो कुछ भी करना चाहता है, उसके बारे में बहुत ही निश्चित है। वह बहुत मेहनती लड़का है, बहुत विनम्र लड़का है, और आप उन लोगों के लिए खुश हैं जो प्रतिबद्ध हैं और टीम के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं जब वे परिणाम प्राप्त करते हैं और टीम को जीत दिलाते हैं। उन्होंने कहा, "मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं और मुझे उम्मीद है कि वह अपने खेल में लगातार मेहनत करते रहेंगे और बेहतर बने रहेंगे क्योंकि बाएं हाथ का गेंदबाज हमेशा किसी भी टीम के लिए एक अहम हिस्सा होता है। अगर वह अच्छी तरह से लगातार गेंदबाजी कर सकते हैं तो यह हमारे लिए अगले साल होने वाले टी बीस विश्व कप में प्रवेश करने के लिए बहुत अच्छी बात होगी।
११ --जिस मास में शुक्र कुम्भ राशि पर हो, उस मास का फलादेश कुण्डली नं० ९२७ के अनुसार मालूम करिये । १२-- जिस भास में शुक्र मीन राशि पर हो, उस मास का फलादेश कुण्डली नं० ९२८ के अनुसार मालूम करिये । १--जिस मास में शुक्र मेष राशि पर हो, उस मास का फलादेश कुण्डली नं० ९२९ के अनुसार मालूम करिये । २-- जित मास में शुक्र वृषभ राशि पर हो उस मास का फलादेश कुण्डली नं० ९३० के अनुसार मालूम करिये । ३--जिस मास में शुक्र मिथुन राशि पर हो, उस मास का फलादेश कुण्डली नं० ९३१ के अनुसार मालूम करिये। ४-- जिस मास में शुक्र कर्क राशि पर हो, उस मास का फलादेश कुण्डली नं० ९३२ के अनुसार मालूम करिये । ५- जिस मास में शुक्र सिंह राशि पर हो, उस मास का फलादेश फुण्डली नं० ९३३ के अनुसार मालूम करिये । ६-- जिस मास में शुक्र कन्या राशि पर हो, उस मास का फलादेश कुण्डली नं० ९३४ के अनुसार मालूम करिये। ७-जिस मास में शुक्र तुला राशि पर हो, उस मास का फलादेश कुण्डली नं० ९३५ के अनुसार मालूम करिये। --जिस मास में शुक्र वृश्चिक राशि पर हो, उस मास का फलादेश कुण्डली नं० ९३६ के अनुसार मालूम करिये। ६-धन लग्न वालों को समस्त जीवन के लिए जोवन के दोनों किनारों पर-हानिफल जन्म कालीन शनि का फल कुण्डली नं० ९३७ से ९४८ तह में देखिये और समय कालीन शनि का फल निम्न प्रकार से देखिये ।
ग्यारह --जिस मास में शुक्र कुम्भ राशि पर हो, उस मास का फलादेश कुण्डली नंशून्य नौ सौ सत्ताईस के अनुसार मालूम करिये । बारह-- जिस भास में शुक्र मीन राशि पर हो, उस मास का फलादेश कुण्डली नंशून्य नौ सौ अट्ठाईस के अनुसार मालूम करिये । एक--जिस मास में शुक्र मेष राशि पर हो, उस मास का फलादेश कुण्डली नंशून्य नौ सौ उनतीस के अनुसार मालूम करिये । दो-- जित मास में शुक्र वृषभ राशि पर हो उस मास का फलादेश कुण्डली नंशून्य नौ सौ तीस के अनुसार मालूम करिये । तीन--जिस मास में शुक्र मिथुन राशि पर हो, उस मास का फलादेश कुण्डली नंशून्य नौ सौ इकतीस के अनुसार मालूम करिये। चार-- जिस मास में शुक्र कर्क राशि पर हो, उस मास का फलादेश कुण्डली नंशून्य नौ सौ बत्तीस के अनुसार मालूम करिये । पाँच- जिस मास में शुक्र सिंह राशि पर हो, उस मास का फलादेश फुण्डली नंशून्य नौ सौ तैंतीस के अनुसार मालूम करिये । छः-- जिस मास में शुक्र कन्या राशि पर हो, उस मास का फलादेश कुण्डली नंशून्य नौ सौ चौंतीस के अनुसार मालूम करिये। सात-जिस मास में शुक्र तुला राशि पर हो, उस मास का फलादेश कुण्डली नंशून्य नौ सौ पैंतीस के अनुसार मालूम करिये। --जिस मास में शुक्र वृश्चिक राशि पर हो, उस मास का फलादेश कुण्डली नंशून्य नौ सौ छत्तीस के अनुसार मालूम करिये। छः-धन लग्न वालों को समस्त जीवन के लिए जोवन के दोनों किनारों पर-हानिफल जन्म कालीन शनि का फल कुण्डली नंशून्य नौ सौ सैंतीस से नौ सौ अड़तालीस तह में देखिये और समय कालीन शनि का फल निम्न प्रकार से देखिये ।
Dhanbad : भूली ओपी अंतर्गत आजाद नगर में मंगलवार को अज्ञात अपराधियों ने दिनदहाड़े बैंक के कलेक्शन एजेंट को गोली मार दी. बताया जाता है कि झरिया निवासी राजा कुमार सिंह बैंक के पैसे के लिए तगादा करने गए थे. इसी दौरान अज्ञात अपराधियों ने उन पर गोली चला दी, जो कि उसके पैर में लगी. गोली की आवाज सुनकर स्थानीय लोग मौके पर जुट गए और घायल व्यक्ति को आनन-फानन में इलाज के लिए हीरक रोड के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया. जहां उनकी हालत गंभीर बताई जाती है. पुलिस मामले की जांच में जुटी है. बताते चलें कोयलांचल धनबाद में लगातार ऐसी घटनाएं घटती रहती हैं. गोलीबारी में अक्सर कई लोग घायल हो जाते हैं तो कई अपनी जिंदगी गंवा देते हैं.
Dhanbad : भूली ओपी अंतर्गत आजाद नगर में मंगलवार को अज्ञात अपराधियों ने दिनदहाड़े बैंक के कलेक्शन एजेंट को गोली मार दी. बताया जाता है कि झरिया निवासी राजा कुमार सिंह बैंक के पैसे के लिए तगादा करने गए थे. इसी दौरान अज्ञात अपराधियों ने उन पर गोली चला दी, जो कि उसके पैर में लगी. गोली की आवाज सुनकर स्थानीय लोग मौके पर जुट गए और घायल व्यक्ति को आनन-फानन में इलाज के लिए हीरक रोड के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया. जहां उनकी हालत गंभीर बताई जाती है. पुलिस मामले की जांच में जुटी है. बताते चलें कोयलांचल धनबाद में लगातार ऐसी घटनाएं घटती रहती हैं. गोलीबारी में अक्सर कई लोग घायल हो जाते हैं तो कई अपनी जिंदगी गंवा देते हैं.
के भावी नाटको का श्रादर्श बना देती है । कवित्व और कला का ऐसा सयोग किसी सामान्य लेखक की कलम से सम्भव नही । विषय पक्ष में, एक ग्रन्तर्धारा कला और जीवन के प्रश्न को लेकर चली है। उधर राष्ट्रीय सामाजिक समस्या के रूप मे, ग्रन्तर्जातीय विवाह व सामाजिक-वन्धनो की दुरन्तता भी स्पष्ट हुई है । कलापक्ष एक नया आदर्श कला पक्ष मे, लेखक की सब से बडी देन है, उसका नव प्रयोग । उसने तीन ऋकों के इस नाटक के दोनो छोरो पर 'ध्वनि प्रयोग' रखकर एक नई दिशा प्रदर्शित की है। स्वतन्त्र रूप में इन दोनो प्रयोगो को 'उपक्रम और 'उपतहार' कहकर, उसने रंगमचीय नावश्यकताओं के चूडान्त ज्ञान का परिचय दिया है । रेडियो नाटको एव फिल्मो मे 'ध्वनि' का प्रभाव ख्यात ही है। माथुर ने उसीका प्रयोग नाटक की भूमिका के निर्माण में किया है । उनका यह प्रयोग भारतीय 'रस-सिद्धान्त' से सर्वथा मेल खाता है । 'साधारणीकरण' की अवस्था के लिये जिस निर्वैयक्तिकता की आवश्यकता होती है, उसे लेखक ने 'प्रस्तावना' या 'ज्ञापना' आदि के स्थान पर इस 'उपक्रम' के ध्वनि प्रयोग द्वारा पूरा किया है । साधारणतधुनिक नाटको मे नाटक का विषय बिना किसी भूमिका के प्रारम्भ हो जाता है। इससे दर्शक को साधारणीकरण मे - विषय के सात्मीकरण मे - कठिनाई अनुभव होती है। फिर, तीन को के छोटे से अवकाश को 'रसोद्बोध' ( भावोदय ) मोर 'भावशान्ति' की स्थिति में लाकर हम नाटक की रसमयता की स्थिति को कम कर देते हैं । ' उपक्रम' का प्रयोग, पृष्ठभूमि के क्रमश. उच्चतर होते स्वरो के रूप मे, वस्तु की भूमिका देने के हेतु ही किया गया है । इन स्वरो व उनके द्वारा प्रेषित वक्तव्यो से दर्शक मे विषय के प्रति जिज्ञासा एवं रस-भावना उद्बुद्ध हो जाती है। उसके बाद उसी तरगित मानसिक अवस्था में ही कथा प्रारम्भ हो जाती है । तृतीय ग्रंक की समाप्ति भी लेखक भाव- बोध तथा उत्सुकता की चरम सीमा पर ही करता है । स्वभावत दर्शक को उस अवस्था से 'भावशान्ति' की स्थिति तक लाने का उत्तरदायित्व भी लेखक ने अपना ही समझा है । इसीलिये 'उपसंहार' मे वह पृष्ठभूमिगत ध्वनियो के क्रमश. क्षीयमाण स्वरो का प्रयोग करके वस्तु का उसी क्रम से उपसंहार करता है । इस प्रकार यह नाटक कला की दृष्टि से एक नया प्रयोग है । इसे कुछ स्थानो पर सफलतापूर्वक खेला भी गया है ।
के भावी नाटको का श्रादर्श बना देती है । कवित्व और कला का ऐसा सयोग किसी सामान्य लेखक की कलम से सम्भव नही । विषय पक्ष में, एक ग्रन्तर्धारा कला और जीवन के प्रश्न को लेकर चली है। उधर राष्ट्रीय सामाजिक समस्या के रूप मे, ग्रन्तर्जातीय विवाह व सामाजिक-वन्धनो की दुरन्तता भी स्पष्ट हुई है । कलापक्ष एक नया आदर्श कला पक्ष मे, लेखक की सब से बडी देन है, उसका नव प्रयोग । उसने तीन ऋकों के इस नाटक के दोनो छोरो पर 'ध्वनि प्रयोग' रखकर एक नई दिशा प्रदर्शित की है। स्वतन्त्र रूप में इन दोनो प्रयोगो को 'उपक्रम और 'उपतहार' कहकर, उसने रंगमचीय नावश्यकताओं के चूडान्त ज्ञान का परिचय दिया है । रेडियो नाटको एव फिल्मो मे 'ध्वनि' का प्रभाव ख्यात ही है। माथुर ने उसीका प्रयोग नाटक की भूमिका के निर्माण में किया है । उनका यह प्रयोग भारतीय 'रस-सिद्धान्त' से सर्वथा मेल खाता है । 'साधारणीकरण' की अवस्था के लिये जिस निर्वैयक्तिकता की आवश्यकता होती है, उसे लेखक ने 'प्रस्तावना' या 'ज्ञापना' आदि के स्थान पर इस 'उपक्रम' के ध्वनि प्रयोग द्वारा पूरा किया है । साधारणतधुनिक नाटको मे नाटक का विषय बिना किसी भूमिका के प्रारम्भ हो जाता है। इससे दर्शक को साधारणीकरण मे - विषय के सात्मीकरण मे - कठिनाई अनुभव होती है। फिर, तीन को के छोटे से अवकाश को 'रसोद्बोध' मोर 'भावशान्ति' की स्थिति में लाकर हम नाटक की रसमयता की स्थिति को कम कर देते हैं । ' उपक्रम' का प्रयोग, पृष्ठभूमि के क्रमश. उच्चतर होते स्वरो के रूप मे, वस्तु की भूमिका देने के हेतु ही किया गया है । इन स्वरो व उनके द्वारा प्रेषित वक्तव्यो से दर्शक मे विषय के प्रति जिज्ञासा एवं रस-भावना उद्बुद्ध हो जाती है। उसके बाद उसी तरगित मानसिक अवस्था में ही कथा प्रारम्भ हो जाती है । तृतीय ग्रंक की समाप्ति भी लेखक भाव- बोध तथा उत्सुकता की चरम सीमा पर ही करता है । स्वभावत दर्शक को उस अवस्था से 'भावशान्ति' की स्थिति तक लाने का उत्तरदायित्व भी लेखक ने अपना ही समझा है । इसीलिये 'उपसंहार' मे वह पृष्ठभूमिगत ध्वनियो के क्रमश. क्षीयमाण स्वरो का प्रयोग करके वस्तु का उसी क्रम से उपसंहार करता है । इस प्रकार यह नाटक कला की दृष्टि से एक नया प्रयोग है । इसे कुछ स्थानो पर सफलतापूर्वक खेला भी गया है ।
Posted On: - 19 देशों के प्रतिनिधियों के रूप में खरीदारों और विक्रेताओं के बीच कई बैठकों ने एक्सपो में प्रदर्शकों के साथ कई उत्पाद श्रेणियों में रुचि दिखाते हुये बातचीत की गई। - भारत, ताजिकिस्तान, आर्मेनिया, उज्बेकिस्तान, मंगोलिया, कजाकिस्तान, बहरीन और श्रीलंका जैसे देशों ने पारंपरिक चिकित्सा में व्यापार के लिए अपनी रुचि व्यक्त की। - सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, "भारतीय आयुष बाजार के लिए यह बहुत मजबूती है, क्योंकि इस आयोजन ने लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए एससीओ सदस्य देशों के बीच व्यापार क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए मंच प्रदान किया।" - एक्सपो के रूप में असम और पूर्वोत्तर में आयुष क्षेत्र के लिए व्यापक संभावनाः श्री सर्बानंद सोनोवाल। पहला 'एससीओ बी2बी सम्मेलन और पारंपरिक चिकित्सा पर एक्सपो' सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ, क्योंकि इसने लोगों की जरूरतों को पूरा करने के बारे में व्यापार क्षमता का पता लगाने के लिए विभिन्न देशों के खरीदारों और विक्रेताओं को एक मंच उपलब्ध कराया। सम्मेलन में खरीदारों और विक्रेताओं के बीच दो दिनों की गहन बैठकों के दौरान 590 करोड़ रुपये से अधिक के व्यापार की संभावना बनी। एससीओ पहल के तहत अपनी तरह के इस पहले सम्मेलन और एक्सपो का उद्घाटन केंद्रीय आयुष और पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने दो मार्च, 2023 को गुवाहाटी, असम में किया था। दो दिवसीय सम्मेलन और चार दिवसीय एक्सपो में 150 देशों के 17 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, "यह बहुत ही सुखद क्षण है कि इस अद्भुत पहल ने इस आयोजन के दौरान 590 करोड़ रुपये से अधिक के व्यापार की संभावना बनी है। हालांकि यह एक्सपो की तत्काल सफलता का प्रतीक है, सम्मेलन ने एससीओ पहल के तहत राज्यों के बीच बातचीत और सहयोग के विस्तार की नींव भी रखी। मैं इस प्रसंग में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को धन्यवाद देता हूं क्योंकि उनकी परिकल्पना के तहत एससीओ के सदस्य राज्यों के बीच पारंपरिक चिकित्सा की अवधारणा बनी। दूसरी तरफ, आयुष बाजार में व्यापार का दायरा उत्साहजनक बना हुआ है, इस आयोजन ने पारंपरिक चिकित्सा की मदद से जीवन की समृद्ध गुणवत्ता प्रदान करने के एक महान उद्देश्य के साथ व्यापक अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए अपनी संभावनाओं का विस्तार करने में मदद की। यह भारतीय आयुष बाजार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि इस आयोजन ने लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए एससीओ सदस्य देशों के बीच व्यापार क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए मंच प्रदान किया है। आयुष मंत्रालय के तत्वावधान में, इन्वेस्ट इंडिया ने आयुष ए-क्सिल (आयुष निर्यात संवर्धन परिषद) के समर्थन से इस कार्यक्रम में एक समर्पित बी2बी लाउंज में बी 2 बी बैठकें आयोजित कीं। एक्सपो में भाग लेने वाले 56 से अधिक प्रदर्शकों और 19 देशों के खरीदारों ने पारंपरिक चिकित्सा के व्यापार में रुचि दिखाई। सम्मेलन के पहले दिन खरीदारों और विक्रेताओं के बीच 50 से अधिक वन-टू-वन बैठकें आयोजित की गईं। पारंपरिक औषधीय उत्पादों के परिधि में, आयुर्वेदिक दवाओं, हर्बल न्यूट्रास्यूटिकल्स, आयुर्वेदिक सौंदर्य प्रसाधनों आदि जैसे उत्पाद श्रेणियों में अधिकतम रुचि देखी गई। कार्यक्रम के दूसरे दिन 75 से अधिक बैठकें हुईं, जहां भारत, ताजिकिस्तान, आर्मेनिया, उजबेकिस्तान, मंगोलिया, कजाकिस्तान, बहरीन और श्रीलंका के प्रतिभागियों ने भाग लिया। बी2बी बैठकों में दमैरा फार्मा, एमिल ग्लोबल, हर्बल स्ट्रेटेगी होमकेयर, अल्माटी, दीनदयाल इंडस्ट्रीज, फिडाल्गो हेल्थकेयर और कई अन्य कंपनियों से दो करोड़ रुपये का कारोबार मिला। यह कारोबार आयुर्वेदिक जैल और तेल, कैप्सूल, आयुर्वेदिक हेयर रेमेडी उत्पादों, न्यूट्रास्यूटिकल्स, आयुर्वेदिक होम केयर और स्वच्छता और पशु चिकित्सा उत्पादों जैसी उत्पाद श्रेणियों से सम्बंधित था। उद्योग को 590 आशय-पत्र (एलओआई) भी प्राप्त हुए। एससीओ सम्मेलन के उद्घाटन सत्र दो मार्च को गुवाहाटी में सम्पन्न हुआ, जिसमें केंद्रीय आयुष और महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. महेंद्रभाई मुंजपरा ने भी भाग लिया था। म्यांमार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री, डॉ. थेट खाइंग विन; मालदीव सरकार के स्वास्थ्य उप मंत्री सफिया मोहम्मद सईद और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। सम्मेलन और एक्सपो ने सभी एससीओ और साझेदार देशों में नियामकों, उद्योगों और व्यापारिक नेताओं को पारंपरिक चिकित्सा के विभिन्न पहलुओं, जैसे उत्पादों, सेवाओं, शिक्षा, कौशल विकास, सौंदर्य प्रसाधन और नीतियों पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्रदान किया। यह पारंपरिक चिकित्सा और संबद्ध क्षेत्र में एक-दूसरे के बीच व्यापार और दोस्ती को और गहरा करता है। भारत सहित 150 देशों के 17 से अधिक प्रतिनिधियों ने इस आयोजन में भाग लिया, जिसमें स्वास्थ्य मंत्रियों, आधिकारिक प्रतिनिधियों और एससीओ और साझेदार देशों के विदेशी खरीदारों जैसे उच्च स्तरीय प्रतिनिधि शामिल थे। तेरह देशों के अधिकारियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने व्यक्तिगत रूप से भाग लिया। चीन, उजबेकिस्तान, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान के आधिकारिक प्रतिनिधि इंटरनेट के माध्यम से वर्चुअल रूप से शामिल हुए। बी2बी सम्मेलन में एससीओ और साझेदार देशों ने फार्माकोपिया, गुणवत्ता आश्वासन और अनुसंधान सहित 'पारंपरिक चिकित्सा के लिए नियामक ढांचे' उत्पादों और व्यवहारों पर विस्तृत प्रस्तुतियां और विचार-विमर्श किया। पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के तरीके पर विचार-विमर्श किया गया। विशिष्ट उत्पाद-वार, निर्यात और आयात के अवसरों और गहरी आर्थिक साझेदारी पर चर्चा करने के लिए 'अपने खरीदार को जानें' और 'बी2बी बैठकें' जैसे सत्रों ने एससीओ देशों में बाजार पहुंच के लिए रुचि बढ़ाने में मदद की। इस आयोजन का उद्देश्य एससीओ और साझेदार देशों के बीच पारंपरिक चिकित्सा में व्यापार के अवसरों को खोलना है। आयुष और विदेशी पारंपरिक चिकित्सा उद्योगों/निर्यातकों/आयातकों ने एक्सपो में अपने उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन किया। चर्चा का उद्देश्य फार्मा और दवा निर्माताओं के दृष्टिकोण से व्यापार पैटर्न और बाजार परिदृश्यों को समझना था। यह उम्मीद की गई कि स्वदेशी महत्व और लोकप्रियता, व्यापार के अवसर और नवाचार पर चर्चा के उत्पादों का प्रदर्शन, एससीओ देशों के बीच व्यापक बाजार पहुंच के साथ गहरे सहयोग और आर्थिक साझेदारी के लिए वातावरण को बढ़ावा देगा। भारत ने 17 सितंबर, 2022 को उज्बेकिस्तान के समरकंद में वर्ष 2023 के लिए एससीओ राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की अध्यक्षता ग्रहण की। समरकंद में एससीओ शिखर सम्मेलन में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत पारंपरिक चिकित्सा पर एक नए एससीओ विशेषज्ञ कार्य समूह के लिए पहल करेगा। आयुष मंत्रालय एससीओ अधिकारों के तहत विभिन्न पहलों पर काम कर रहा है। इस साल फरवरी में, पारंपरिक चिकित्सा के विशेषज्ञों और चिकित्सकों का एक वर्चुअल सम्मेलन आयोजित किया गया था, जहां एससीओ के 25 देशों के विशेषज्ञों ने भाग लिया था। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की परिकल्पना के अनुसार, पिछले महीने नई दिल्ली में आयोजित विशेषज्ञों की बैठक के दौरान पारंपरिक चिकित्सा पर विशेषज्ञ कार्य समूह के विचारार्थ विषयों के मसौदे को मंजूरी दी गई थी। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), या शंघाई संधि, आठ सदस्यीय बहुपक्षीय संगठन का एक यूरेशियन राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा गठबंधन है, जिसे 15 जून 2001 को शंघाई, चीन में स्थापित किया गया था। एससीओ में 08 सदस्य देश, 03 पर्यवेक्षक और 14 संवाद सहयोगी देश शामिल हैं। भारत को जुलाई 2005 के अस्ताना शिखर सम्मेलन में पर्यवेक्षक का दर्जा दिया गया था और नौ जून, 2017 को कजाकिस्तान के अस्ताना में एससीओ शिखर सम्मेलन में पूर्ण सदस्य का दर्जा दिया गया था। उल्लेखनीय है कि विशेषज्ञ स्तर पर अनुमोदित मसौदा अब अन्य संबंधित देश प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अधीन होगा और अंत में राज्यों के प्रमुख शिखर सम्मेलन में अपनाया जाएगा।
Posted On: - उन्नीस देशों के प्रतिनिधियों के रूप में खरीदारों और विक्रेताओं के बीच कई बैठकों ने एक्सपो में प्रदर्शकों के साथ कई उत्पाद श्रेणियों में रुचि दिखाते हुये बातचीत की गई। - भारत, ताजिकिस्तान, आर्मेनिया, उज्बेकिस्तान, मंगोलिया, कजाकिस्तान, बहरीन और श्रीलंका जैसे देशों ने पारंपरिक चिकित्सा में व्यापार के लिए अपनी रुचि व्यक्त की। - सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, "भारतीय आयुष बाजार के लिए यह बहुत मजबूती है, क्योंकि इस आयोजन ने लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए एससीओ सदस्य देशों के बीच व्यापार क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए मंच प्रदान किया।" - एक्सपो के रूप में असम और पूर्वोत्तर में आयुष क्षेत्र के लिए व्यापक संभावनाः श्री सर्बानंद सोनोवाल। पहला 'एससीओ बीदोबी सम्मेलन और पारंपरिक चिकित्सा पर एक्सपो' सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ, क्योंकि इसने लोगों की जरूरतों को पूरा करने के बारे में व्यापार क्षमता का पता लगाने के लिए विभिन्न देशों के खरीदारों और विक्रेताओं को एक मंच उपलब्ध कराया। सम्मेलन में खरीदारों और विक्रेताओं के बीच दो दिनों की गहन बैठकों के दौरान पाँच सौ नब्बे करोड़ रुपये से अधिक के व्यापार की संभावना बनी। एससीओ पहल के तहत अपनी तरह के इस पहले सम्मेलन और एक्सपो का उद्घाटन केंद्रीय आयुष और पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने दो मार्च, दो हज़ार तेईस को गुवाहाटी, असम में किया था। दो दिवसीय सम्मेलन और चार दिवसीय एक्सपो में एक सौ पचास देशों के सत्रह से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, "यह बहुत ही सुखद क्षण है कि इस अद्भुत पहल ने इस आयोजन के दौरान पाँच सौ नब्बे करोड़ रुपये से अधिक के व्यापार की संभावना बनी है। हालांकि यह एक्सपो की तत्काल सफलता का प्रतीक है, सम्मेलन ने एससीओ पहल के तहत राज्यों के बीच बातचीत और सहयोग के विस्तार की नींव भी रखी। मैं इस प्रसंग में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को धन्यवाद देता हूं क्योंकि उनकी परिकल्पना के तहत एससीओ के सदस्य राज्यों के बीच पारंपरिक चिकित्सा की अवधारणा बनी। दूसरी तरफ, आयुष बाजार में व्यापार का दायरा उत्साहजनक बना हुआ है, इस आयोजन ने पारंपरिक चिकित्सा की मदद से जीवन की समृद्ध गुणवत्ता प्रदान करने के एक महान उद्देश्य के साथ व्यापक अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के लिए अपनी संभावनाओं का विस्तार करने में मदद की। यह भारतीय आयुष बाजार के लिए एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि इस आयोजन ने लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए एससीओ सदस्य देशों के बीच व्यापार क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए मंच प्रदान किया है। आयुष मंत्रालय के तत्वावधान में, इन्वेस्ट इंडिया ने आयुष ए-क्सिल के समर्थन से इस कार्यक्रम में एक समर्पित बीदोबी लाउंज में बी दो बी बैठकें आयोजित कीं। एक्सपो में भाग लेने वाले छप्पन से अधिक प्रदर्शकों और उन्नीस देशों के खरीदारों ने पारंपरिक चिकित्सा के व्यापार में रुचि दिखाई। सम्मेलन के पहले दिन खरीदारों और विक्रेताओं के बीच पचास से अधिक वन-टू-वन बैठकें आयोजित की गईं। पारंपरिक औषधीय उत्पादों के परिधि में, आयुर्वेदिक दवाओं, हर्बल न्यूट्रास्यूटिकल्स, आयुर्वेदिक सौंदर्य प्रसाधनों आदि जैसे उत्पाद श्रेणियों में अधिकतम रुचि देखी गई। कार्यक्रम के दूसरे दिन पचहत्तर से अधिक बैठकें हुईं, जहां भारत, ताजिकिस्तान, आर्मेनिया, उजबेकिस्तान, मंगोलिया, कजाकिस्तान, बहरीन और श्रीलंका के प्रतिभागियों ने भाग लिया। बीदोबी बैठकों में दमैरा फार्मा, एमिल ग्लोबल, हर्बल स्ट्रेटेगी होमकेयर, अल्माटी, दीनदयाल इंडस्ट्रीज, फिडाल्गो हेल्थकेयर और कई अन्य कंपनियों से दो करोड़ रुपये का कारोबार मिला। यह कारोबार आयुर्वेदिक जैल और तेल, कैप्सूल, आयुर्वेदिक हेयर रेमेडी उत्पादों, न्यूट्रास्यूटिकल्स, आयुर्वेदिक होम केयर और स्वच्छता और पशु चिकित्सा उत्पादों जैसी उत्पाद श्रेणियों से सम्बंधित था। उद्योग को पाँच सौ नब्बे आशय-पत्र भी प्राप्त हुए। एससीओ सम्मेलन के उद्घाटन सत्र दो मार्च को गुवाहाटी में सम्पन्न हुआ, जिसमें केंद्रीय आयुष और महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. महेंद्रभाई मुंजपरा ने भी भाग लिया था। म्यांमार सरकार के स्वास्थ्य मंत्री, डॉ. थेट खाइंग विन; मालदीव सरकार के स्वास्थ्य उप मंत्री सफिया मोहम्मद सईद और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। सम्मेलन और एक्सपो ने सभी एससीओ और साझेदार देशों में नियामकों, उद्योगों और व्यापारिक नेताओं को पारंपरिक चिकित्सा के विभिन्न पहलुओं, जैसे उत्पादों, सेवाओं, शिक्षा, कौशल विकास, सौंदर्य प्रसाधन और नीतियों पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्रदान किया। यह पारंपरिक चिकित्सा और संबद्ध क्षेत्र में एक-दूसरे के बीच व्यापार और दोस्ती को और गहरा करता है। भारत सहित एक सौ पचास देशों के सत्रह से अधिक प्रतिनिधियों ने इस आयोजन में भाग लिया, जिसमें स्वास्थ्य मंत्रियों, आधिकारिक प्रतिनिधियों और एससीओ और साझेदार देशों के विदेशी खरीदारों जैसे उच्च स्तरीय प्रतिनिधि शामिल थे। तेरह देशों के अधिकारियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों ने व्यक्तिगत रूप से भाग लिया। चीन, उजबेकिस्तान, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान के आधिकारिक प्रतिनिधि इंटरनेट के माध्यम से वर्चुअल रूप से शामिल हुए। बीदोबी सम्मेलन में एससीओ और साझेदार देशों ने फार्माकोपिया, गुणवत्ता आश्वासन और अनुसंधान सहित 'पारंपरिक चिकित्सा के लिए नियामक ढांचे' उत्पादों और व्यवहारों पर विस्तृत प्रस्तुतियां और विचार-विमर्श किया। पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के तरीके पर विचार-विमर्श किया गया। विशिष्ट उत्पाद-वार, निर्यात और आयात के अवसरों और गहरी आर्थिक साझेदारी पर चर्चा करने के लिए 'अपने खरीदार को जानें' और 'बीदोबी बैठकें' जैसे सत्रों ने एससीओ देशों में बाजार पहुंच के लिए रुचि बढ़ाने में मदद की। इस आयोजन का उद्देश्य एससीओ और साझेदार देशों के बीच पारंपरिक चिकित्सा में व्यापार के अवसरों को खोलना है। आयुष और विदेशी पारंपरिक चिकित्सा उद्योगों/निर्यातकों/आयातकों ने एक्सपो में अपने उत्पादों और सेवाओं का प्रदर्शन किया। चर्चा का उद्देश्य फार्मा और दवा निर्माताओं के दृष्टिकोण से व्यापार पैटर्न और बाजार परिदृश्यों को समझना था। यह उम्मीद की गई कि स्वदेशी महत्व और लोकप्रियता, व्यापार के अवसर और नवाचार पर चर्चा के उत्पादों का प्रदर्शन, एससीओ देशों के बीच व्यापक बाजार पहुंच के साथ गहरे सहयोग और आर्थिक साझेदारी के लिए वातावरण को बढ़ावा देगा। भारत ने सत्रह सितंबर, दो हज़ार बाईस को उज्बेकिस्तान के समरकंद में वर्ष दो हज़ार तेईस के लिए एससीओ राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की अध्यक्षता ग्रहण की। समरकंद में एससीओ शिखर सम्मेलन में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत पारंपरिक चिकित्सा पर एक नए एससीओ विशेषज्ञ कार्य समूह के लिए पहल करेगा। आयुष मंत्रालय एससीओ अधिकारों के तहत विभिन्न पहलों पर काम कर रहा है। इस साल फरवरी में, पारंपरिक चिकित्सा के विशेषज्ञों और चिकित्सकों का एक वर्चुअल सम्मेलन आयोजित किया गया था, जहां एससीओ के पच्चीस देशों के विशेषज्ञों ने भाग लिया था। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की परिकल्पना के अनुसार, पिछले महीने नई दिल्ली में आयोजित विशेषज्ञों की बैठक के दौरान पारंपरिक चिकित्सा पर विशेषज्ञ कार्य समूह के विचारार्थ विषयों के मसौदे को मंजूरी दी गई थी। शंघाई सहयोग संगठन , या शंघाई संधि, आठ सदस्यीय बहुपक्षीय संगठन का एक यूरेशियन राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा गठबंधन है, जिसे पंद्रह जून दो हज़ार एक को शंघाई, चीन में स्थापित किया गया था। एससीओ में आठ सदस्य देश, तीन पर्यवेक्षक और चौदह संवाद सहयोगी देश शामिल हैं। भारत को जुलाई दो हज़ार पाँच के अस्ताना शिखर सम्मेलन में पर्यवेक्षक का दर्जा दिया गया था और नौ जून, दो हज़ार सत्रह को कजाकिस्तान के अस्ताना में एससीओ शिखर सम्मेलन में पूर्ण सदस्य का दर्जा दिया गया था। उल्लेखनीय है कि विशेषज्ञ स्तर पर अनुमोदित मसौदा अब अन्य संबंधित देश प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अधीन होगा और अंत में राज्यों के प्रमुख शिखर सम्मेलन में अपनाया जाएगा।
NewDelhi : नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने कर्नाटक हिजाब पर कहा है कि स्कूलों में लड़कियों को हिजाब पहनकर प्रवेश देने से रोकना भयावह है. मलाला यूसुफजई ने ट्वीट किया कि हिजाब पहने हुई लड़कियों को स्कूलों में एंट्री देने से मना करना भयावह है. कम या ज्यादा कपड़े पहनने के लिए महिलाओं का वस्तुकरण किया जाता है. भारतीय नेताओं को मुस्लिम महिलाओं को हाशिये पर जाने से रोकना चाहिए. "College is forcing us to choose between studies and the hijab". भारत के कर्नाटक राज्य में स्कूलों में मुस्लिम लड़कियों के हिजाब पहनने को लेकर चल रहे विवाद में अब पाकिस्तान सरकार भी कूद पड़ी है. इमरान खान सरकार के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने पीएम मोदी और भारत को लेकर जहरीले बयान दिये हैं. फवाद चौधरी ने कहा कि मोदी के भारत में जो कुछ चल रहा है, वह डरावना है. कहा कि भारतीय समाज एक अस्थिर नेतृत्व के अंतर्गत बहुत तेजी से पतन की ओर जा रहा है. पाकिस्तानी मंत्री फवाद चौधरी ने ट्वीट किया, भारत में जो कुछ चल रहा है, वह डरावना है. भारतीय समाज अस्थिर नेतृत्व में सुपर स्पीड से पतन की ओर जा रहा है. हिजाब पहनना अन्य ड्रेस की तरह से एक निजी पसंद का मामला है. नागरिकों को मुक्त होकर अपने फैसले लेने का अधिकार दिया जाना चाहिए. अल्लाह हू अकबर. जान लें कि हिजाब विवाद कर्नाटक के उडुपी के मणिपाल स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल कॉलेज से शुरू हुआ था. कुछ लड़कियों ने यहां आरोप लगाया था कि हिजाब पहनने के कारण उन्हें कॉलेज कैंपस और क्लास में प्रवेश करने से रोका गया. इसी क्रम में कुंडापुर और बिंदूर के कुछ अन्य कॉलेजों में भी ऐसे मामले सामने आये. खबरों के अनुसार राज्य में ऐसी कई घटनाएं हुई, जहां मुस्लिम छात्राओं को हिजाब में कॉलेजों या कक्षाओं में जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है. साथ ही हिजाब के जवाब में हिंदू स्टूडेंट भगवा शॉल पहन कर शैक्षणिक संस्थानों में आ रहे हैं. बदलते घटनाक्रम के बीच हिजाब विवाद को लेकर राज्य की भाजपा सरकार ने कर्नाटक के सभी स्कूल-कॉलेजों में यूनिफॉर्म अनिवार्य कर दिया है. कर्नाटक हाई कोर्ट भी इस बात को लेकर सुनवाई कर रहा है कि स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहना जा सकता है या नहीं. हाई कोर्ट ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में बढ़ते हिजाब विवाद के बीच विद्यार्थियों और आम लोगों से शांति एवं सौहार्द बनाये रखने की अपील की है. तटीय शहर उडुपी में सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी महिला कॉलेज में पढ़ने वाली कुछ छात्राओं द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के बाद मंगलवार को अदालत ने कहा कि इस पर अब बुधवार को सुनवाई होगी. हिजाब मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है. कांग्रेस हिजाब पहनने के अधिकार पर मुस्लिम छात्राओं के समर्थन में आ गयी है. राहुल गांधी ने इस मामले में शनिवार को ट्वीट कर भाजपा पर हल्ला बोला था. इसके बाद भाजपा ने भी पलटवार किया, और मामला सियासी संग्राम में बदल गया. बता दें कि हिजाब पर मचे बवाल को लेकर केद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आपत्तिजनक टिप्पणी कर विवादों में आ गये. गिरिराज सिंह ने हिजाब विवाद को गजवा-ए-हिंद से लेकर इस्लामिक स्टेट से जोड़ दिया था.
NewDelhi : नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने कर्नाटक हिजाब पर कहा है कि स्कूलों में लड़कियों को हिजाब पहनकर प्रवेश देने से रोकना भयावह है. मलाला यूसुफजई ने ट्वीट किया कि हिजाब पहने हुई लड़कियों को स्कूलों में एंट्री देने से मना करना भयावह है. कम या ज्यादा कपड़े पहनने के लिए महिलाओं का वस्तुकरण किया जाता है. भारतीय नेताओं को मुस्लिम महिलाओं को हाशिये पर जाने से रोकना चाहिए. "College is forcing us to choose between studies and the hijab". भारत के कर्नाटक राज्य में स्कूलों में मुस्लिम लड़कियों के हिजाब पहनने को लेकर चल रहे विवाद में अब पाकिस्तान सरकार भी कूद पड़ी है. इमरान खान सरकार के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने पीएम मोदी और भारत को लेकर जहरीले बयान दिये हैं. फवाद चौधरी ने कहा कि मोदी के भारत में जो कुछ चल रहा है, वह डरावना है. कहा कि भारतीय समाज एक अस्थिर नेतृत्व के अंतर्गत बहुत तेजी से पतन की ओर जा रहा है. पाकिस्तानी मंत्री फवाद चौधरी ने ट्वीट किया, भारत में जो कुछ चल रहा है, वह डरावना है. भारतीय समाज अस्थिर नेतृत्व में सुपर स्पीड से पतन की ओर जा रहा है. हिजाब पहनना अन्य ड्रेस की तरह से एक निजी पसंद का मामला है. नागरिकों को मुक्त होकर अपने फैसले लेने का अधिकार दिया जाना चाहिए. अल्लाह हू अकबर. जान लें कि हिजाब विवाद कर्नाटक के उडुपी के मणिपाल स्थित महात्मा गांधी मेमोरियल कॉलेज से शुरू हुआ था. कुछ लड़कियों ने यहां आरोप लगाया था कि हिजाब पहनने के कारण उन्हें कॉलेज कैंपस और क्लास में प्रवेश करने से रोका गया. इसी क्रम में कुंडापुर और बिंदूर के कुछ अन्य कॉलेजों में भी ऐसे मामले सामने आये. खबरों के अनुसार राज्य में ऐसी कई घटनाएं हुई, जहां मुस्लिम छात्राओं को हिजाब में कॉलेजों या कक्षाओं में जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है. साथ ही हिजाब के जवाब में हिंदू स्टूडेंट भगवा शॉल पहन कर शैक्षणिक संस्थानों में आ रहे हैं. बदलते घटनाक्रम के बीच हिजाब विवाद को लेकर राज्य की भाजपा सरकार ने कर्नाटक के सभी स्कूल-कॉलेजों में यूनिफॉर्म अनिवार्य कर दिया है. कर्नाटक हाई कोर्ट भी इस बात को लेकर सुनवाई कर रहा है कि स्कूल-कॉलेजों में हिजाब पहना जा सकता है या नहीं. हाई कोर्ट ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में बढ़ते हिजाब विवाद के बीच विद्यार्थियों और आम लोगों से शांति एवं सौहार्द बनाये रखने की अपील की है. तटीय शहर उडुपी में सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी महिला कॉलेज में पढ़ने वाली कुछ छात्राओं द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के बाद मंगलवार को अदालत ने कहा कि इस पर अब बुधवार को सुनवाई होगी. हिजाब मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है. कांग्रेस हिजाब पहनने के अधिकार पर मुस्लिम छात्राओं के समर्थन में आ गयी है. राहुल गांधी ने इस मामले में शनिवार को ट्वीट कर भाजपा पर हल्ला बोला था. इसके बाद भाजपा ने भी पलटवार किया, और मामला सियासी संग्राम में बदल गया. बता दें कि हिजाब पर मचे बवाल को लेकर केद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आपत्तिजनक टिप्पणी कर विवादों में आ गये. गिरिराज सिंह ने हिजाब विवाद को गजवा-ए-हिंद से लेकर इस्लामिक स्टेट से जोड़ दिया था.
एह्येति त्वमितः कासि कृष्णांजनसमन्विते । कालसुन्दरि मत्पाइवें धवले त्वमुपाविश ।। १२ एवमुत्क्षिप्तमनसा देवी संक्रुद्धमानसा । श्वासयामास ताम्राक्षी बाष्पगद्गदया गिरा ।।१३ रुरोद सस्वरं बाला तत्रस्था स्फुरिताधरा । किं दैव योगात्ताम्रा गौगौरी चेत्यभिधीयते ॥ १४ यस्मान्ममोपमा दत्ता कृष्णवर्णेन शङ्कर हरकालीति वाहूता देवर्षिगणसेविता ॥१५ तस्माद्देहमिमं कृष्णं जुहोनि ज्वलितेऽनले । इत्युक्त्वा वार्यमाणा तु हरकाली रुषान्विता ॥१६ मुमोच हरितच्छायाकान्तिं हरितशाद्वले । दिक्षेप दोषं रागेण ज्वलिते हव्यवाहने ॥ १७ पुनः पर्वतराजस्य गृहे गौरी बभूव सा । महादेवस्य देहार्द्ध स्थिता पूज्यते सुरैः ॥१८ एवं सा हरकालीति गौरीशस्य व्यवस्थिता । पूजनीया महादेवी मन्त्रेणानेन पाण्डद ।। १९ हरकर्मसनुत्पन्ने हरकाये हरप्रिये । मां नाहीशस्य मूर्तिस्ये प्रगतास्तु नमोनमः ॥२० इत्थं सम्पूज्य नैवेद्यं दद्याद्विप्राय पाण्डव । तां च प्रातर्जले रम्ये मन्त्रेणैव विसर्जयेत् ॥ २१ आचितासि मया भक्त्या गच्छ देवि सुरालयम् । हरकाले शिदे गौरि पुनरागमनाय च ॥ २२ एवं यः पाण्डवश्रेष्ठ हरकालीव्रतं चरेत् । वर्षेवर्षे विधानेन नारी नरपते शुभा ॥२३ सा यत्फलमवाप्नोति तच्छृणुष्द नराधिप । मर्त्यलोके चिरं तिष्ठेत्सर्वरोगविवर्जिता ॥ २४ सर्वभोगसमायुक्ता सौभाग्यबलगर्विता । पुत्रपौत्रसुहृन्मित्रनप्तृदौहित्रसकुला ।।२५ मातृगणों से संयुक्त थी - कालि, काले अंजन की भाँति वर्ण वाली काल सुन्दरि आओ, इसी धवल आसन पर मेरे पार्श्व में आकर तुम भी बैठो। इस प्रकार की उपेक्षा दृष्टि से अपमानित होने पर हरिकाली देवी अत्यन्त क्रुद्ध होकर दीर्घ निःश्वास लेने लगी और पश्चात् वह ताम्राक्षी होकर आंसुओं से कण्ठ के अवरुद्ध होने पर गदगदवाणी द्वारा रुदन करने लगी । उस समय उस देवी का अधरोष्ठ क्रोध से फड़क रहा था । उन्होंने कहा-शंकर ! क्या आप के साथ बैठने से गौरवर्ण हो जाऊँगी : जो आप कृष्ण वर्ण से मेरी उपमा दे रहे हैं । इस देव ऋषि गणों के सामने आप ने हरिकाली नाम से बुलाकर कृष्ण वर्ण की उपमा दी है, इसलिए मैं इस कृष्ण वर्ण की देह को इसी प्रज्वलित अग्नि में आहुति रूप में डाल दूँगी । इतना कहकर हरि काली ने देवों के मना करने पर भी अत्यन्त रोषपूर्ण होने के नाते अपनी श्यामल कान्ति हरी घासों में डालकर देह को प्रज्वलित अग्नि में डाल दिया । पश्चात् वही गिरिराज के यहाँ गौरी के नाम से उत्पन्न होकर पुनः श्री महादेव जी की अर्धांगिनी हुई, जो देवों से पूजित हैं । पाण्डव ! इस प्रकार गौरी शंकर भगवान् की हरिकाली की कथा जानकर उन महादेव की इस मंत्र द्वारा पूजा करनी चाहिए । ६ - १९ । हर कर्म के लिए उत्पन्न हर की देहार्द्धिनी, और हरप्रिये, मेरी रक्षा करो, शिवमूर्तिस्थ आप को विनय पूर्वक नमस्कार कर रहा हूँ । पाण्डव इस भाँति उनकी पूजा करके उन्हें नैवेद्य अर्पित करे, और इसी दिन प्रातः काल मंत्र पूर्वक जल में विसर्जन करे-देवि ! भक्ति पूर्वक मैंने आपकी अर्चना की है, हर कालि, शिवे एवं गौरि अब आप देव लोक चली जांय और पुनः आवाहित होने पर आने की कृपा करती रहे । २०-२२ । पाण्डव राजन् ! प्रति वर्ष जो स्त्री इस हरिकाली व्रत को संविधान सुसम्पन्न करती है, उसे जिस फल की प्राप्ति होती है मैं बता रहा हूँ सुनो ! नराधिप ! वह इस मर्त्यलोक में समस्त रोग से मुक्त होकर चिरकाल तक समस्त भोगों का उपभोग करती है उसका सौभाग्य फल अत्यन्त महत्वपूर्ण रहता है, तथा पुत्र, पौत्र, मित्र, नप्ता (नाती) और दोहित्र आदि परिवार से संयुक्त रहकर सौ वर्ष तक इस भूमण्डल पर सम्पूर्ण भोगों के उपभोग करने
एह्येति त्वमितः कासि कृष्णांजनसमन्विते । कालसुन्दरि मत्पाइवें धवले त्वमुपाविश ।। बारह एवमुत्क्षिप्तमनसा देवी संक्रुद्धमानसा । श्वासयामास ताम्राक्षी बाष्पगद्गदया गिरा ।।तेरह रुपयारोद सस्वरं बाला तत्रस्था स्फुरिताधरा । किं दैव योगात्ताम्रा गौगौरी चेत्यभिधीयते ॥ चौदह यस्मान्ममोपमा दत्ता कृष्णवर्णेन शङ्कर हरकालीति वाहूता देवर्षिगणसेविता ॥पंद्रह तस्माद्देहमिमं कृष्णं जुहोनि ज्वलितेऽनले । इत्युक्त्वा वार्यमाणा तु हरकाली रुषान्विता ॥सोलह मुमोच हरितच्छायाकान्तिं हरितशाद्वले । दिक्षेप दोषं रागेण ज्वलिते हव्यवाहने ॥ सत्रह पुनः पर्वतराजस्य गृहे गौरी बभूव सा । महादेवस्य देहार्द्ध स्थिता पूज्यते सुरैः ॥अट्ठारह एवं सा हरकालीति गौरीशस्य व्यवस्थिता । पूजनीया महादेवी मन्त्रेणानेन पाण्डद ।। उन्नीस हरकर्मसनुत्पन्ने हरकाये हरप्रिये । मां नाहीशस्य मूर्तिस्ये प्रगतास्तु नमोनमः ॥बीस इत्थं सम्पूज्य नैवेद्यं दद्याद्विप्राय पाण्डव । तां च प्रातर्जले रम्ये मन्त्रेणैव विसर्जयेत् ॥ इक्कीस आचितासि मया भक्त्या गच्छ देवि सुरालयम् । हरकाले शिदे गौरि पुनरागमनाय च ॥ बाईस एवं यः पाण्डवश्रेष्ठ हरकालीव्रतं चरेत् । वर्षेवर्षे विधानेन नारी नरपते शुभा ॥तेईस सा यत्फलमवाप्नोति तच्छृणुष्द नराधिप । मर्त्यलोके चिरं तिष्ठेत्सर्वरोगविवर्जिता ॥ चौबीस सर्वभोगसमायुक्ता सौभाग्यबलगर्विता । पुत्रपौत्रसुहृन्मित्रनप्तृदौहित्रसकुला ।।पच्चीस मातृगणों से संयुक्त थी - कालि, काले अंजन की भाँति वर्ण वाली काल सुन्दरि आओ, इसी धवल आसन पर मेरे पार्श्व में आकर तुम भी बैठो। इस प्रकार की उपेक्षा दृष्टि से अपमानित होने पर हरिकाली देवी अत्यन्त क्रुद्ध होकर दीर्घ निःश्वास लेने लगी और पश्चात् वह ताम्राक्षी होकर आंसुओं से कण्ठ के अवरुद्ध होने पर गदगदवाणी द्वारा रुदन करने लगी । उस समय उस देवी का अधरोष्ठ क्रोध से फड़क रहा था । उन्होंने कहा-शंकर ! क्या आप के साथ बैठने से गौरवर्ण हो जाऊँगी : जो आप कृष्ण वर्ण से मेरी उपमा दे रहे हैं । इस देव ऋषि गणों के सामने आप ने हरिकाली नाम से बुलाकर कृष्ण वर्ण की उपमा दी है, इसलिए मैं इस कृष्ण वर्ण की देह को इसी प्रज्वलित अग्नि में आहुति रूप में डाल दूँगी । इतना कहकर हरि काली ने देवों के मना करने पर भी अत्यन्त रोषपूर्ण होने के नाते अपनी श्यामल कान्ति हरी घासों में डालकर देह को प्रज्वलित अग्नि में डाल दिया । पश्चात् वही गिरिराज के यहाँ गौरी के नाम से उत्पन्न होकर पुनः श्री महादेव जी की अर्धांगिनी हुई, जो देवों से पूजित हैं । पाण्डव ! इस प्रकार गौरी शंकर भगवान् की हरिकाली की कथा जानकर उन महादेव की इस मंत्र द्वारा पूजा करनी चाहिए । छः - उन्नीस । हर कर्म के लिए उत्पन्न हर की देहार्द्धिनी, और हरप्रिये, मेरी रक्षा करो, शिवमूर्तिस्थ आप को विनय पूर्वक नमस्कार कर रहा हूँ । पाण्डव इस भाँति उनकी पूजा करके उन्हें नैवेद्य अर्पित करे, और इसी दिन प्रातः काल मंत्र पूर्वक जल में विसर्जन करे-देवि ! भक्ति पूर्वक मैंने आपकी अर्चना की है, हर कालि, शिवे एवं गौरि अब आप देव लोक चली जांय और पुनः आवाहित होने पर आने की कृपा करती रहे । बीस-बाईस । पाण्डव राजन् ! प्रति वर्ष जो स्त्री इस हरिकाली व्रत को संविधान सुसम्पन्न करती है, उसे जिस फल की प्राप्ति होती है मैं बता रहा हूँ सुनो ! नराधिप ! वह इस मर्त्यलोक में समस्त रोग से मुक्त होकर चिरकाल तक समस्त भोगों का उपभोग करती है उसका सौभाग्य फल अत्यन्त महत्वपूर्ण रहता है, तथा पुत्र, पौत्र, मित्र, नप्ता और दोहित्र आदि परिवार से संयुक्त रहकर सौ वर्ष तक इस भूमण्डल पर सम्पूर्ण भोगों के उपभोग करने
मंगोलपुरी इलाके में एक युवक ने नशे में अपनी पत्नी से गाली-गलौज और जमकर पिटाई कर दी। इतना ही नहीं उसने अपनी नौ और पांच साल की बेटियों को गला दबाकर मारने की कोशिश की। महिला ने दोनों बच्चियों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया। जहां एक बच्ची की हालत नाजुक बनी हुई है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
मंगोलपुरी इलाके में एक युवक ने नशे में अपनी पत्नी से गाली-गलौज और जमकर पिटाई कर दी। इतना ही नहीं उसने अपनी नौ और पांच साल की बेटियों को गला दबाकर मारने की कोशिश की। महिला ने दोनों बच्चियों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया। जहां एक बच्ची की हालत नाजुक बनी हुई है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर आरोपी पति को गिरफ्तार कर लिया है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
राध, रूप में जो छन्द==तृष्णा है, और जो यहाँ लगा है, चेतरह लगा है, इसी से यह सक्त' कहा जाता है। वेदना संज्ञा संस्कार विज्ञान...। राध ! जैसे, लड़के या लड़िकयाँ वालू के घर से खेलते हैं। जन तक बालू के घरों में उन ग = छन्द = प्रेम = पिपासा = परिल = तृष्णा बनी रहती है तब तक वे उनमें बहो रहते हैं, उनसे खेलते हैं, उन पर प्याल रखते हैं, उनको अपना समझते हैं । राध ! ...जब बालू के घरों में उनका राग...नहीं रहता है, तब वे हाथ-पैर से उन घरों को तोड़ फोड़ कर नष्ट कर देते हैं और बिखेर देते है । राध ! तुम इसी तरह रूप को तोड-फोड़कर नष्ट कर दो और विसेर दो। तृष्णा को क्षय करने में लग जाओ । वेदना । संज्ञा ... संस्कार । विज्ञान । राध ! तृष्णा का क्षय होना ही निर्वाण है। ९ ३ भवनेत्ति सुत्त ( २२. १. ३ ) संसार की टोरी ...एक ओर बैठ, आयुष्मान् राध भगवान् से बोले, "भन्ते लोग 'भवनेत्ति, ' और भवनेतिनिरोध' कहा करते हैं । भन्ते ! यह "भवनेत्ति और भवनेत्तिनिरोध" क्या है ? राध ! रूप में जो छन्द = राग = नन्दि = तृष्णा = उपाय = उपादान = चित का अधिष्ठान, अभिनिवेश, अनुराय है, उसे कहते हैं 'भवनेत्ति' । उनके निरुद्ध हो जाने को कहते हैं, 'भवनेत्तिनिरोध' । वेदना में जो । संज्ञा। संस्कार । विज्ञान । ९ ४. परिन्जेय्य सुत्त ( २२. १. ४ ), परिशेय, परिक्षा और परिक्षाता एक ओर बैठे आयुष्मान् राध से भगवान् बोले, "राध ! मैं तुम्हें परिज्ञेय धर्म, परिशा और परिक्षाता पुहल के विषय में उपदेश करूंगा । उसे सुनो...। ...भगवान् बोले, "राध ! परिज्ञेय धर्म कौन से हैं ? राध ! रूप परिज्ञेय धर्म है । वेदना... संज्ञा...। संस्कार... विज्ञान...। राध ! इन्हें कहते हैं परिज्ञेय धर्म । राध ! परिक्षा क्या है ? राध ! जो राग-क्षय, द्वेपक्षय और मोहक्षय है वही परिक्षा कही जाती है । राध ! परिज्ञाता पुल क्या है ? अर्हत्, जो आयुष्मान् इस नाम और गोत्र के हैं वही परि जाता पुगल कहे जाते हैं। § ५. पठम समग सुत्त ( २२. १, ५ ) उपादान रुकन्धों के ज्ञाता ही श्रमण-ब्राह्मण एक ओर बैठे आयुष्मान् गध से भगवान् बोले, "राध ! यह पाँच उपादानस्कन्ध है। कौन से पाँच ? जो यह रूप उपादानन्य विज्ञान उपादानस्सन्ध । १. भवनेत्ति - 'भवरज्जु', अटूटकथा । = ससार की छोरी । ९. पठम छन्द्रराग सुत्त राध ! जो श्रमण या इन पाँच उपादानस्कन्धों के आस्वाद, दोष और मोक्ष को यथार्थतः नही जानते हैं ये श्रमण न तो भ्रमण कहलाने के योग्य है; और न चे ब्राह्मण कहलाने के ये आयुष्मान् श्रमण या माहाग के परमार्थ को अपने देखते ही देखते जान, देस और प्राप्त कर नही विहार करते है । राध ! जो यथार्थतः जानते हैं...वे आयुष्मान् घमण या ब्राह्मण के परमार्थ को अपने देसते ही देखते जान, देस और प्राप्त कर विहार करते हैं । ९ ६. दुतिय समण सुत्त ( २२. १. ६ ) उपादान सन्धों के ज्ञाता हो श्रमण ब्राह्मण एक ओर बैठ आयुष्मान राध से भगवान् बोले, 'राध ! यह पाँच उपादान स्कन्ध है ।... राध ! जो श्रमण या इन पाँच उपादान स्कन्धों के समुद्रय, अस्त होने, आस्वाद, दोप, ओर मोक्ष को यथार्थतः नहीं जानते हैं · जानते हैं । ९ ७. सोतापन्न सुत्त ( २२.०१. ७ ) स्रोतापन निश्चय ही ज्ञान प्राप्त करेगा एक ओर बैठे आयुष्मान राध से भगवान् बोले, "राध ! यह पाँच उपादान-सन्न है। राध ! क्योंकि आर्यश्रावक इन पाँच उपादानस्कन्धों के समुद्रय, अस्त होने, आस्वाद, दोष और मोक्ष को यथार्थतः जानता है इमोसे वह स्रोतापन्न कहा जाता है । यह मार्ग से च्युत नहीं हो सकता, निर्माण की ओर जा रहा है, निचयपूर्वक परम ज्ञान प्राप्त करेंगे । ९ ८. अरहा सुत्त ( २२. १. ८ ) उपादान स्कन्धों के यथार्थ मान से अर्हत्व की प्राप्ति श्रावस्ती ? एक ओर बैठे आयुष्मान् राध से भगवान् बोले, "राध ! क्योकि भिक्षु इन पाँच उपादान स्कन्धों के समुदय, अस्त होने, आस्वाद, दोप और मोक्ष को यथार्थतः जान उपादान-रहित हो विमुक्त हो जाता है, इसी से यह अर्हत् = क्षोणाश्रव= जिसने ब्रह्मचर्यवास पूरा कर लिया है = कृतकृय=जियने भार रस दिया है= अनुप्रासमदर्थ - परिक्षण भवसंयोजन=परम ज्ञान से विमुक्त कहा जाता है। ६९. पठम छन्दराग सुत्त ( २२.१.९ ) रूप के छन्दराग का त्याग एक ओर बैठे आयुष्मान् राध से भगवान् बोटे, "राध ! रूप में जो छन्द्र= राग... है उसे छोड़ दो। इस तरह रूप महीण हो जायगा = उच्छिसमूल = भिर घंटे ताल के समान = मिटा हुआ = फिर कभी उत्पन्न होने में असमर्थ । वेदना मे जो...। संज्ञा। संस्कार.1 विज्ञान...!
राध, रूप में जो छन्द==तृष्णा है, और जो यहाँ लगा है, चेतरह लगा है, इसी से यह सक्त' कहा जाता है। वेदना संज्ञा संस्कार विज्ञान...। राध ! जैसे, लड़के या लड़िकयाँ वालू के घर से खेलते हैं। जन तक बालू के घरों में उन ग = छन्द = प्रेम = पिपासा = परिल = तृष्णा बनी रहती है तब तक वे उनमें बहो रहते हैं, उनसे खेलते हैं, उन पर प्याल रखते हैं, उनको अपना समझते हैं । राध ! ...जब बालू के घरों में उनका राग...नहीं रहता है, तब वे हाथ-पैर से उन घरों को तोड़ फोड़ कर नष्ट कर देते हैं और बिखेर देते है । राध ! तुम इसी तरह रूप को तोड-फोड़कर नष्ट कर दो और विसेर दो। तृष्णा को क्षय करने में लग जाओ । वेदना । संज्ञा ... संस्कार । विज्ञान । राध ! तृष्णा का क्षय होना ही निर्वाण है। नौ तीन भवनेत्ति सुत्त संसार की टोरी ...एक ओर बैठ, आयुष्मान् राध भगवान् से बोले, "भन्ते लोग 'भवनेत्ति, ' और भवनेतिनिरोध' कहा करते हैं । भन्ते ! यह "भवनेत्ति और भवनेत्तिनिरोध" क्या है ? राध ! रूप में जो छन्द = राग = नन्दि = तृष्णा = उपाय = उपादान = चित का अधिष्ठान, अभिनिवेश, अनुराय है, उसे कहते हैं 'भवनेत्ति' । उनके निरुद्ध हो जाने को कहते हैं, 'भवनेत्तिनिरोध' । वेदना में जो । संज्ञा। संस्कार । विज्ञान । नौ चार. परिन्जेय्य सुत्त , परिशेय, परिक्षा और परिक्षाता एक ओर बैठे आयुष्मान् राध से भगवान् बोले, "राध ! मैं तुम्हें परिज्ञेय धर्म, परिशा और परिक्षाता पुहल के विषय में उपदेश करूंगा । उसे सुनो...। ...भगवान् बोले, "राध ! परिज्ञेय धर्म कौन से हैं ? राध ! रूप परिज्ञेय धर्म है । वेदना... संज्ञा...। संस्कार... विज्ञान...। राध ! इन्हें कहते हैं परिज्ञेय धर्म । राध ! परिक्षा क्या है ? राध ! जो राग-क्षय, द्वेपक्षय और मोहक्षय है वही परिक्षा कही जाती है । राध ! परिज्ञाता पुल क्या है ? अर्हत्, जो आयुष्मान् इस नाम और गोत्र के हैं वही परि जाता पुगल कहे जाते हैं। § पाँच. पठम समग सुत्त उपादान रुकन्धों के ज्ञाता ही श्रमण-ब्राह्मण एक ओर बैठे आयुष्मान् गध से भगवान् बोले, "राध ! यह पाँच उपादानस्कन्ध है। कौन से पाँच ? जो यह रूप उपादानन्य विज्ञान उपादानस्सन्ध । एक. भवनेत्ति - 'भवरज्जु', अटूटकथा । = ससार की छोरी । नौ. पठम छन्द्रराग सुत्त राध ! जो श्रमण या इन पाँच उपादानस्कन्धों के आस्वाद, दोष और मोक्ष को यथार्थतः नही जानते हैं ये श्रमण न तो भ्रमण कहलाने के योग्य है; और न चे ब्राह्मण कहलाने के ये आयुष्मान् श्रमण या माहाग के परमार्थ को अपने देखते ही देखते जान, देस और प्राप्त कर नही विहार करते है । राध ! जो यथार्थतः जानते हैं...वे आयुष्मान् घमण या ब्राह्मण के परमार्थ को अपने देसते ही देखते जान, देस और प्राप्त कर विहार करते हैं । नौ छः. दुतिय समण सुत्त उपादान सन्धों के ज्ञाता हो श्रमण ब्राह्मण एक ओर बैठ आयुष्मान राध से भगवान् बोले, 'राध ! यह पाँच उपादान स्कन्ध है ।... राध ! जो श्रमण या इन पाँच उपादान स्कन्धों के समुद्रय, अस्त होने, आस्वाद, दोप, ओर मोक्ष को यथार्थतः नहीं जानते हैं · जानते हैं । नौ सात. सोतापन्न सुत्त स्रोतापन निश्चय ही ज्ञान प्राप्त करेगा एक ओर बैठे आयुष्मान राध से भगवान् बोले, "राध ! यह पाँच उपादान-सन्न है। राध ! क्योंकि आर्यश्रावक इन पाँच उपादानस्कन्धों के समुद्रय, अस्त होने, आस्वाद, दोष और मोक्ष को यथार्थतः जानता है इमोसे वह स्रोतापन्न कहा जाता है । यह मार्ग से च्युत नहीं हो सकता, निर्माण की ओर जा रहा है, निचयपूर्वक परम ज्ञान प्राप्त करेंगे । नौ आठ. अरहा सुत्त उपादान स्कन्धों के यथार्थ मान से अर्हत्व की प्राप्ति श्रावस्ती ? एक ओर बैठे आयुष्मान् राध से भगवान् बोले, "राध ! क्योकि भिक्षु इन पाँच उपादान स्कन्धों के समुदय, अस्त होने, आस्वाद, दोप और मोक्ष को यथार्थतः जान उपादान-रहित हो विमुक्त हो जाता है, इसी से यह अर्हत् = क्षोणाश्रव= जिसने ब्रह्मचर्यवास पूरा कर लिया है = कृतकृय=जियने भार रस दिया है= अनुप्रासमदर्थ - परिक्षण भवसंयोजन=परम ज्ञान से विमुक्त कहा जाता है। उनहत्तर. पठम छन्दराग सुत्त रूप के छन्दराग का त्याग एक ओर बैठे आयुष्मान् राध से भगवान् बोटे, "राध ! रूप में जो छन्द्र= राग... है उसे छोड़ दो। इस तरह रूप महीण हो जायगा = उच्छिसमूल = भिर घंटे ताल के समान = मिटा हुआ = फिर कभी उत्पन्न होने में असमर्थ । वेदना मे जो...। संज्ञा। संस्कार.एक विज्ञान...!
XNUMX के दशक के मध्य से, अमेरिकी नौसेना, कई वैज्ञानिक और डिजाइन संगठनों के सहयोग से, तथाकथित के अध्ययन, निर्माण और सुधार पर काम कर रही है। रेल बंदूकें। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन (ईएमआरजी) कार्यक्रम के कुछ निश्चित परिणाम मिले हैं, और भविष्य में इस तरह के हथियार इसे युद्धपोतों पर लगाने की योजना थी। हालांकि, अब तक स्थिति बदल चुकी है और अगले कुछ महीनों में इस दिशा में सभी काम बंद कर दिए जाएंगे। मई के अंत में, अगले वित्त वर्ष 2022 के लिए अमेरिकी सैन्य बजट का मसौदा प्रकाशित किया गया था। इस दस्तावेज़ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नौसेना बलों के रखरखाव और विकास पर नियोजित खर्च के लिए समर्पित है। अन्य बातों के अलावा, होनहार विकास की लागतों पर चर्चा की जाती है - और इस खंड में बहुत ही रोचक डेटा है। नया ड्राफ्ट इंगित करता है कि वित्त वर्ष 2021 का बजट है "प्रोटोटाइप के अनुप्रयुक्त अनुसंधान" के ढांचे के भीतर बेड़ा(इनोवेटिव नेवल प्रोटोटाइप, आईएनपी) बेड़े ने रेलगनों के विकास के लिए 9,5 मिलियन डॉलर का अनुरोध किया और प्राप्त किया। इसके अलावा, कांग्रेस ने अपनी पहल पर, आईएनपी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के माध्यम से, इस कार्यक्रम के लिए $ 20 मिलियन आवंटित किए। जाहिर है, इस पैसे का विकास अभी भी जारी है, लेकिन यह आने वाले महीनों में - चालू वित्त वर्ष के अंत तक पूरा हो जाएगा। FY2022 के लिए आईएनपी फंडिंग का अनुरोध नहीं किया जा रहा है। INP ATD तालिका में भी शून्य होते हैं। इसके कारणों के रूप में शोध कार्य के पूर्ण होने तथा एक आशाजनक दिशा के विकास का संकेत मिलता है। ईएमआरजी कार्यक्रम के लिए प्रलेखन को बरकरार रखा जाएगा, लेकिन आगे उपयोग के लिए किसी योजना का उल्लेख नहीं किया गया है। यह सब हमें काम की पूर्ण समाप्ति के बारे में बात करने की अनुमति देता है - अनुसंधान चरण से प्रयोगात्मक डिजाइन चरण में संक्रमण के बिना। इस प्रकार, ईएमआरजी जहाजों के लिए एक लड़ाकू रेलगन के विकास का कार्यक्रम कम से कम अनिश्चित काल के लिए बंद हो जाता है। डेढ़ दशक का सक्रिय कार्य, अनुसंधान और परीक्षण निकट भविष्य में वांछित परिणाम नहीं देंगे। पेंटागन ने पिछली सदी के अस्सी के दशक में रेल तोपों पर शोध करना शुरू किया था। उसी समय, पहले प्रयोगशाला प्रोटोटाइप दिखाई दिए, जो इस तरह के लड़ाकू सिस्टम बनाने की मौलिक संभावना दिखाते हैं। नौसेना के लिए रेलगनों पर काम बाद में शुरू हुआ। ईएमआरजी कार्यक्रम XNUMX के दशक के मध्य में ही शुरू हुआ था, लेकिन जल्दी ही इसने वास्तविक परिणाम दिए। पहले से ही 2019 के दशक के मध्य में, जनरल एटॉमिक्स और बीएई सिस्टम्स ने अपने रेल गन प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। जल्द ही, प्रोटोटाइप बनाए गए, जिनके परीक्षण लंबे समय तक नौसेना सतह युद्ध केंद्र डाहलग्रेन डिवीजन में टुकड़ों में किए गए। वर्जीनिया। XNUMX में, परीक्षणों को न्यू मैक्सिको में व्हाइट सैंड्स साबित करने वाले मैदान में ले जाया गया। शुरुआती अनुमानों के अनुसार, युद्ध के लिए तैयार मॉडल बनाने में लगभग दस साल लगे। 2015-16 में। एक वास्तविक जहाज पर एक अनुभवी तोप का परीक्षण किया जा सकता है। इसे फाइन-ट्यूनिंग पर कई और साल बिताने की योजना थी, और बिसवां दशा के मध्य तक, नौसेना को पूर्ण युद्ध के लिए तैयार हथियार प्राप्त हो गए होंगे। हालाँकि, किसी न किसी कारण से, तिथियों को बार-बार दाईं ओर स्थानांतरित किया गया था। एक प्रायोगिक पोत पर परीक्षण अभी तक नहीं किए गए हैं - और, जैसा कि अब स्पष्ट है, अब नहीं होगा। हाल के वर्षों में, रेल बंदूकों के विषय के आसपास एक विशिष्ट स्थिति विकसित हुई है। उदाहरण के लिए, नौसेना और ईएमआरजी कार्यक्रम के सदस्यों ने शायद ही कभी अपनी सफलताओं के बारे में बात की। 2018 की शुरुआत में समाचार रेलगन के विकास की संभावित अस्वीकृति के बारे में - इस तरह विदेशी मीडिया ने कार्यक्रम के लिए धन में तेज कमी की व्याख्या की। हालांकि, काम जारी रहा, हालांकि भविष्य में नौसेना ने उनके लिए सालाना 8-10 मिलियन डॉलर से अधिक का आवंटन नहीं किया। FY2021 रक्षा वर्तमान बजट ईएमआरजी कार्यक्रम को जारी रखने की अनुमति देता है, लेकिन अब यह केवल वर्तमान कार्य को पूरा करने के बारे में है। हाल के समाचारों से पता चलता है कि नौसेना अब नए हथियारों के विकास को जारी रखने की योजना नहीं बना रही है। हालांकि, रेल तोपों में अभी भी कुछ संभावनाएं हैं। नौसेना कार्यक्रम को गुप्त बजट मदों में स्थानांतरित कर सकती है, और कांग्रेस को परियोजना की निरंतरता पर जोर देने और आवश्यक धन आवंटित करने का अधिकार है। अमेरिकी नौसेना के आदेश से बनाई गई पहली रेल गन को 2006 में दिखाया गया था। स्थिर साबित करने वाले ग्राउंड मॉडल ने 3,2 एमजे की थूथन ऊर्जा के साथ 8 किलोग्राम प्रक्षेप्य को बाहर निकाल दिया। अपनी ऊर्जा और संबंधित विशेषताओं के संदर्भ में, ऐसा उत्पाद मानक के करीब पहुंच गया टैंक नाटो बंदूकें। साथ ही इस डिजाइन के फायदे ही नहीं बल्कि नुकसान भी दिखाए गए। प्रोटोटाइप बंदूक अत्यधिक बड़ी और भारी थी, और शक्तिशाली बिजली आपूर्ति और शीतलन प्रणाली की आवश्यकता थी। 2008 की शुरुआत में, जनरल एटॉमिक्स ने एक नए प्रकार की बिजली व्यवस्था से लैस अपनी पहली रेल तोप को निकाल दिया। 10,6 MJ से अधिक की थूथन ऊर्जा और 2500 m / s से अधिक की प्रारंभिक गति प्राप्त करना संभव था। 2010 के अंत में, बीएई सिस्टम्स ने एक नया रिकॉर्ड बनाया। उसके हथियार ने 33 MJ की ऊर्जा दिखाई। दो साल बाद, जनरल एटॉमिक्स ने समान विशेषताओं और कम आयामों के साथ अपनी तोप के साथ प्रतिक्रिया दी। इस तरह के उत्पाद को पहले से ही जहाज के आयुध के रूप में माना जा सकता है। पिछले दशक के मध्य में, काम की निरंतरता और नौसेना के जहाजों पर स्थापना के लिए उपयुक्त एक पूर्ण बंदूक माउंट के अपेक्षित निर्माण के बारे में बताया गया था। 2014 में, दो डेवलपर्स ने आर्टिलरी सिस्टम के पूर्ण आकार के मॉक-अप प्रस्तुत किए। उन्हें प्रदर्शन के लिए जहाज के डेक पर भी रखा गया था। अंडरडेक इकाइयां, जहां तक ज्ञात है, इस तरह से प्रदर्शित नहीं की गई हैं। रेलगनों के मुख्य वाहक के रूप में, एक उच्च शक्ति वाले बिजली संयंत्र द्वारा प्रतिष्ठित ज़ुमवाल्ट प्रकार के विध्वंसक पर विचार किया गया था। उनके जनरेटर की कुल क्षमता 78 मेगावाट है, जो सभी ऑनबोर्ड सिस्टम को बिजली की आपूर्ति करने के लिए पर्याप्त है और साथ ही रेल गन के कुशल संचालन को सुनिश्चित करता है। अन्य जहाजों के हथियारों के परिसर में एकीकरण से इंकार नहीं किया गया था, लेकिन यह गंभीर कठिनाइयों से जुड़ा हो सकता है। विशेष रूप से, सभी नई इकाइयों को समायोजित करने के लिए मौजूदा हथियारों की बलि देनी होगी। ईएमआरजी पर कुछ सामग्रियों में रेल बंदूकें के साथ एक स्थिर तटीय तोपखाने की बैटरी की अवधारणा को दिखाया गया है। अपने सभी अग्नि लाभों के लिए, इस तरह के परिसर में स्पष्ट नुकसान हैं, और इस विचार को बाद में छोड़ दिया गया था। प्रक्षेपण के समय विशिष्ट भार के अनुरूप एक आशाजनक निर्देशित प्रक्षेप्य का विकास और सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पर उड़ान भरने में सक्षम। सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं की घोषणा की गई थी, लेकिन जहां तक हम जानते हैं, व्यावहारिक अनुप्रयोग के लिए उपयुक्त कोई वास्तविक परिणाम अभी तक नहीं मिले हैं। अमेरिकी नौसेना के लिए एक रेल गन विकसित करने में लगभग 17-18 साल और 500 मिलियन डॉलर से अधिक का समय लगा। तमाम कोशिशों और खर्चों के बावजूद, होनहार हथियार एक जहाज पर परीक्षण के चरण तक भी नहीं पहुंचा है। इसके अलावा, वे कम से कम कुछ समय के लिए परियोजना को छोड़ने की योजना बना रहे हैं। जाहिर है, इस तरह के नकारात्मक निर्णय के अच्छे कारण होने चाहिए। नौसेना और पेंटागन ने अभी तक इस विषय को नहीं उठाया है, लेकिन कुछ अनुमान और निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। ईएमआरजी कार्यक्रम के दौरान, बेड़े और उसके ठेकेदारों को अत्यधिक जटिलता की समस्या का सामना करना पड़ा। रेल गन का निर्माण - एक स्थिर परीक्षण बेंच या जहाज परीक्षण के लिए एक प्रोटोटाइप - कठिन, समय लेने वाली और महंगी थी। उसी समय, जैसा कि आंका जा सकता है, सौंपे गए कार्यों को पूरी तरह से हल नहीं किया जा सकता है। तदनुसार, कार्यक्रम के सफल समापन की कोई गारंटी नहीं होने के कारण और भी लंबा और अधिक महंगा होने का जोखिम था। हालांकि, जहाज की स्थापना का सफल निर्माण भी सफलता की गारंटी नहीं देगा। ऐसे हथियार लंबे समय से संभावित वाहक के बिना छोड़े गए हैं। प्रारंभिक योजनाओं में 32 ज़ुमवाल्ट विध्वंसक के निर्माण के लिए बुलाया गया था, जिनमें से प्रत्येक को रेलगन प्राप्त हो सकता था। इसके बाद, जहाज निर्माण कार्यक्रम को घटाकर तीन पतवार कर दिया गया। तुलनीय बिजली संयंत्र से लैस एक करीबी वर्ग के नए जहाज के विकास के बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं है। इस प्रकार, एक नई बंदूक के विकास के सफल समापन से लघु और मध्यम अवधि में केवल तीन जहाजों को फिर से लैस करने की अनुमति मिल जाएगी। लड़ाकू रेलगनों का और उत्पादन संदिग्ध होगा - साथ ही इस तरह की परियोजना पर खर्च करने की व्यवहार्यता भी। अंतिम निर्णय संभवतः इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर किया गया था। वर्तमान स्थिति में, अपनी जरूरतों, क्षमताओं और क्षमता का गंभीरता से आकलन करने के बाद, अमेरिकी नौसेना इस निष्कर्ष पर पहुंची कि दिलचस्प और आशाजनक, लेकिन विवादास्पद EMRG कार्यक्रम को बंद करना आवश्यक था। नतीजतन, जहाजों को बैरल वाले तोपखाने का उपयोग करना जारी रखना होगा, ज्यादातर पुराने प्रकार के। इसके लिए मौलिक रूप से नया गोला बारूद भी रद्द कर दिया गया है। हालांकि, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि रेल गन का विचार अभी भी वापस आएगा। मध्यम या लंबी अवधि में, अमेरिकी नौसेना और उद्योग कई महत्वपूर्ण तकनीकी मुद्दों को हल कर सकते हैं, जो पहले से ही वास्तविक संभावनाओं के साथ, रेलगनों के विकास को फिर से शुरू करने के लिए एक आधार तैयार करेंगे। यह कितनी जल्दी होगा और इसके क्या परिणाम होंगे - यह जल्द ही पता नहीं चलेगा। - लेखकः - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
XNUMX के दशक के मध्य से, अमेरिकी नौसेना, कई वैज्ञानिक और डिजाइन संगठनों के सहयोग से, तथाकथित के अध्ययन, निर्माण और सुधार पर काम कर रही है। रेल बंदूकें। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेलगन कार्यक्रम के कुछ निश्चित परिणाम मिले हैं, और भविष्य में इस तरह के हथियार इसे युद्धपोतों पर लगाने की योजना थी। हालांकि, अब तक स्थिति बदल चुकी है और अगले कुछ महीनों में इस दिशा में सभी काम बंद कर दिए जाएंगे। मई के अंत में, अगले वित्त वर्ष दो हज़ार बाईस के लिए अमेरिकी सैन्य बजट का मसौदा प्रकाशित किया गया था। इस दस्तावेज़ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नौसेना बलों के रखरखाव और विकास पर नियोजित खर्च के लिए समर्पित है। अन्य बातों के अलावा, होनहार विकास की लागतों पर चर्चा की जाती है - और इस खंड में बहुत ही रोचक डेटा है। नया ड्राफ्ट इंगित करता है कि वित्त वर्ष दो हज़ार इक्कीस का बजट है "प्रोटोटाइप के अनुप्रयुक्त अनुसंधान" के ढांचे के भीतर बेड़ा बेड़े ने रेलगनों के विकास के लिए नौ,पाँच मिलियन डॉलर का अनुरोध किया और प्राप्त किया। इसके अलावा, कांग्रेस ने अपनी पहल पर, आईएनपी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट के माध्यम से, इस कार्यक्रम के लिए बीस डॉलर मिलियन आवंटित किए। जाहिर है, इस पैसे का विकास अभी भी जारी है, लेकिन यह आने वाले महीनों में - चालू वित्त वर्ष के अंत तक पूरा हो जाएगा। FYदो हज़ार बाईस के लिए आईएनपी फंडिंग का अनुरोध नहीं किया जा रहा है। INP ATD तालिका में भी शून्य होते हैं। इसके कारणों के रूप में शोध कार्य के पूर्ण होने तथा एक आशाजनक दिशा के विकास का संकेत मिलता है। ईएमआरजी कार्यक्रम के लिए प्रलेखन को बरकरार रखा जाएगा, लेकिन आगे उपयोग के लिए किसी योजना का उल्लेख नहीं किया गया है। यह सब हमें काम की पूर्ण समाप्ति के बारे में बात करने की अनुमति देता है - अनुसंधान चरण से प्रयोगात्मक डिजाइन चरण में संक्रमण के बिना। इस प्रकार, ईएमआरजी जहाजों के लिए एक लड़ाकू रेलगन के विकास का कार्यक्रम कम से कम अनिश्चित काल के लिए बंद हो जाता है। डेढ़ दशक का सक्रिय कार्य, अनुसंधान और परीक्षण निकट भविष्य में वांछित परिणाम नहीं देंगे। पेंटागन ने पिछली सदी के अस्सी के दशक में रेल तोपों पर शोध करना शुरू किया था। उसी समय, पहले प्रयोगशाला प्रोटोटाइप दिखाई दिए, जो इस तरह के लड़ाकू सिस्टम बनाने की मौलिक संभावना दिखाते हैं। नौसेना के लिए रेलगनों पर काम बाद में शुरू हुआ। ईएमआरजी कार्यक्रम XNUMX के दशक के मध्य में ही शुरू हुआ था, लेकिन जल्दी ही इसने वास्तविक परिणाम दिए। पहले से ही दो हज़ार उन्नीस के दशक के मध्य में, जनरल एटॉमिक्स और बीएई सिस्टम्स ने अपने रेल गन प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। जल्द ही, प्रोटोटाइप बनाए गए, जिनके परीक्षण लंबे समय तक नौसेना सतह युद्ध केंद्र डाहलग्रेन डिवीजन में टुकड़ों में किए गए। वर्जीनिया। XNUMX में, परीक्षणों को न्यू मैक्सिको में व्हाइट सैंड्स साबित करने वाले मैदान में ले जाया गया। शुरुआती अनुमानों के अनुसार, युद्ध के लिए तैयार मॉडल बनाने में लगभग दस साल लगे। दो हज़ार पंद्रह-सोलह में। एक वास्तविक जहाज पर एक अनुभवी तोप का परीक्षण किया जा सकता है। इसे फाइन-ट्यूनिंग पर कई और साल बिताने की योजना थी, और बिसवां दशा के मध्य तक, नौसेना को पूर्ण युद्ध के लिए तैयार हथियार प्राप्त हो गए होंगे। हालाँकि, किसी न किसी कारण से, तिथियों को बार-बार दाईं ओर स्थानांतरित किया गया था। एक प्रायोगिक पोत पर परीक्षण अभी तक नहीं किए गए हैं - और, जैसा कि अब स्पष्ट है, अब नहीं होगा। हाल के वर्षों में, रेल बंदूकों के विषय के आसपास एक विशिष्ट स्थिति विकसित हुई है। उदाहरण के लिए, नौसेना और ईएमआरजी कार्यक्रम के सदस्यों ने शायद ही कभी अपनी सफलताओं के बारे में बात की। दो हज़ार अट्ठारह की शुरुआत में समाचार रेलगन के विकास की संभावित अस्वीकृति के बारे में - इस तरह विदेशी मीडिया ने कार्यक्रम के लिए धन में तेज कमी की व्याख्या की। हालांकि, काम जारी रहा, हालांकि भविष्य में नौसेना ने उनके लिए सालाना आठ-दस मिलियन डॉलर से अधिक का आवंटन नहीं किया। FYदो हज़ार इक्कीस रक्षा वर्तमान बजट ईएमआरजी कार्यक्रम को जारी रखने की अनुमति देता है, लेकिन अब यह केवल वर्तमान कार्य को पूरा करने के बारे में है। हाल के समाचारों से पता चलता है कि नौसेना अब नए हथियारों के विकास को जारी रखने की योजना नहीं बना रही है। हालांकि, रेल तोपों में अभी भी कुछ संभावनाएं हैं। नौसेना कार्यक्रम को गुप्त बजट मदों में स्थानांतरित कर सकती है, और कांग्रेस को परियोजना की निरंतरता पर जोर देने और आवश्यक धन आवंटित करने का अधिकार है। अमेरिकी नौसेना के आदेश से बनाई गई पहली रेल गन को दो हज़ार छः में दिखाया गया था। स्थिर साबित करने वाले ग्राउंड मॉडल ने तीन,दो एमजे की थूथन ऊर्जा के साथ आठ किलोग्रामग्राम प्रक्षेप्य को बाहर निकाल दिया। अपनी ऊर्जा और संबंधित विशेषताओं के संदर्भ में, ऐसा उत्पाद मानक के करीब पहुंच गया टैंक नाटो बंदूकें। साथ ही इस डिजाइन के फायदे ही नहीं बल्कि नुकसान भी दिखाए गए। प्रोटोटाइप बंदूक अत्यधिक बड़ी और भारी थी, और शक्तिशाली बिजली आपूर्ति और शीतलन प्रणाली की आवश्यकता थी। दो हज़ार आठ की शुरुआत में, जनरल एटॉमिक्स ने एक नए प्रकार की बिजली व्यवस्था से लैस अपनी पहली रेल तोप को निकाल दिया। दस,छः MJ से अधिक की थूथन ऊर्जा और दो हज़ार पाँच सौ मीटर / s से अधिक की प्रारंभिक गति प्राप्त करना संभव था। दो हज़ार दस के अंत में, बीएई सिस्टम्स ने एक नया रिकॉर्ड बनाया। उसके हथियार ने तैंतीस MJ की ऊर्जा दिखाई। दो साल बाद, जनरल एटॉमिक्स ने समान विशेषताओं और कम आयामों के साथ अपनी तोप के साथ प्रतिक्रिया दी। इस तरह के उत्पाद को पहले से ही जहाज के आयुध के रूप में माना जा सकता है। पिछले दशक के मध्य में, काम की निरंतरता और नौसेना के जहाजों पर स्थापना के लिए उपयुक्त एक पूर्ण बंदूक माउंट के अपेक्षित निर्माण के बारे में बताया गया था। दो हज़ार चौदह में, दो डेवलपर्स ने आर्टिलरी सिस्टम के पूर्ण आकार के मॉक-अप प्रस्तुत किए। उन्हें प्रदर्शन के लिए जहाज के डेक पर भी रखा गया था। अंडरडेक इकाइयां, जहां तक ज्ञात है, इस तरह से प्रदर्शित नहीं की गई हैं। रेलगनों के मुख्य वाहक के रूप में, एक उच्च शक्ति वाले बिजली संयंत्र द्वारा प्रतिष्ठित ज़ुमवाल्ट प्रकार के विध्वंसक पर विचार किया गया था। उनके जनरेटर की कुल क्षमता अठहत्तर मेगावाट है, जो सभी ऑनबोर्ड सिस्टम को बिजली की आपूर्ति करने के लिए पर्याप्त है और साथ ही रेल गन के कुशल संचालन को सुनिश्चित करता है। अन्य जहाजों के हथियारों के परिसर में एकीकरण से इंकार नहीं किया गया था, लेकिन यह गंभीर कठिनाइयों से जुड़ा हो सकता है। विशेष रूप से, सभी नई इकाइयों को समायोजित करने के लिए मौजूदा हथियारों की बलि देनी होगी। ईएमआरजी पर कुछ सामग्रियों में रेल बंदूकें के साथ एक स्थिर तटीय तोपखाने की बैटरी की अवधारणा को दिखाया गया है। अपने सभी अग्नि लाभों के लिए, इस तरह के परिसर में स्पष्ट नुकसान हैं, और इस विचार को बाद में छोड़ दिया गया था। प्रक्षेपण के समय विशिष्ट भार के अनुरूप एक आशाजनक निर्देशित प्रक्षेप्य का विकास और सैकड़ों किलोमीटर की दूरी पर उड़ान भरने में सक्षम। सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं की घोषणा की गई थी, लेकिन जहां तक हम जानते हैं, व्यावहारिक अनुप्रयोग के लिए उपयुक्त कोई वास्तविक परिणाम अभी तक नहीं मिले हैं। अमेरिकी नौसेना के लिए एक रेल गन विकसित करने में लगभग सत्रह-अट्ठारह साल और पाँच सौ मिलियन डॉलर से अधिक का समय लगा। तमाम कोशिशों और खर्चों के बावजूद, होनहार हथियार एक जहाज पर परीक्षण के चरण तक भी नहीं पहुंचा है। इसके अलावा, वे कम से कम कुछ समय के लिए परियोजना को छोड़ने की योजना बना रहे हैं। जाहिर है, इस तरह के नकारात्मक निर्णय के अच्छे कारण होने चाहिए। नौसेना और पेंटागन ने अभी तक इस विषय को नहीं उठाया है, लेकिन कुछ अनुमान और निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं। ईएमआरजी कार्यक्रम के दौरान, बेड़े और उसके ठेकेदारों को अत्यधिक जटिलता की समस्या का सामना करना पड़ा। रेल गन का निर्माण - एक स्थिर परीक्षण बेंच या जहाज परीक्षण के लिए एक प्रोटोटाइप - कठिन, समय लेने वाली और महंगी थी। उसी समय, जैसा कि आंका जा सकता है, सौंपे गए कार्यों को पूरी तरह से हल नहीं किया जा सकता है। तदनुसार, कार्यक्रम के सफल समापन की कोई गारंटी नहीं होने के कारण और भी लंबा और अधिक महंगा होने का जोखिम था। हालांकि, जहाज की स्थापना का सफल निर्माण भी सफलता की गारंटी नहीं देगा। ऐसे हथियार लंबे समय से संभावित वाहक के बिना छोड़े गए हैं। प्रारंभिक योजनाओं में बत्तीस ज़ुमवाल्ट विध्वंसक के निर्माण के लिए बुलाया गया था, जिनमें से प्रत्येक को रेलगन प्राप्त हो सकता था। इसके बाद, जहाज निर्माण कार्यक्रम को घटाकर तीन पतवार कर दिया गया। तुलनीय बिजली संयंत्र से लैस एक करीबी वर्ग के नए जहाज के विकास के बारे में कुछ भी ज्ञात नहीं है। इस प्रकार, एक नई बंदूक के विकास के सफल समापन से लघु और मध्यम अवधि में केवल तीन जहाजों को फिर से लैस करने की अनुमति मिल जाएगी। लड़ाकू रेलगनों का और उत्पादन संदिग्ध होगा - साथ ही इस तरह की परियोजना पर खर्च करने की व्यवहार्यता भी। अंतिम निर्णय संभवतः इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर किया गया था। वर्तमान स्थिति में, अपनी जरूरतों, क्षमताओं और क्षमता का गंभीरता से आकलन करने के बाद, अमेरिकी नौसेना इस निष्कर्ष पर पहुंची कि दिलचस्प और आशाजनक, लेकिन विवादास्पद EMRG कार्यक्रम को बंद करना आवश्यक था। नतीजतन, जहाजों को बैरल वाले तोपखाने का उपयोग करना जारी रखना होगा, ज्यादातर पुराने प्रकार के। इसके लिए मौलिक रूप से नया गोला बारूद भी रद्द कर दिया गया है। हालांकि, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि रेल गन का विचार अभी भी वापस आएगा। मध्यम या लंबी अवधि में, अमेरिकी नौसेना और उद्योग कई महत्वपूर्ण तकनीकी मुद्दों को हल कर सकते हैं, जो पहले से ही वास्तविक संभावनाओं के साथ, रेलगनों के विकास को फिर से शुरू करने के लिए एक आधार तैयार करेंगे। यह कितनी जल्दी होगा और इसके क्या परिणाम होंगे - यह जल्द ही पता नहीं चलेगा। - लेखकः - इस्तेमाल की गई तस्वीरेंः
बिलासपुर आढ़ती एसोसिएशन के सदस्य सोमवार को मार्केट कमेटी कार्यालय में मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए। आढ़तियों ने सरकार विरोधी नारेबाजी की। उनका कहना था कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती तब तक धान का एक भी दाना नहीं खरीदा जाएगा। उनकी हड़ताल जारी रहेगा। एसोसिएशन के प्रधान बरखा राम, उप प्रधान संदीप कुमार व मनीष बंसल ने कहा कि बारीक धान की खरीद के लिए सरकार ने ई-नेम पोर्टल शुरू किया है। उसे बंद कर पहले जैसे बारीक धान की खरीद की जाती थी अब भी वैसे ही की जाए। मौके पर बरखा राम, मनीष बंसल, संदीप कुमार, अवध बंसल, चंद्रपाल शर्मा, ठाठसिंह, लाभ सिंह, केसर सिंह, अमित बंसल, भूषण लाल, कपिल गोयल भी मौजूद रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
बिलासपुर आढ़ती एसोसिएशन के सदस्य सोमवार को मार्केट कमेटी कार्यालय में मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए। आढ़तियों ने सरकार विरोधी नारेबाजी की। उनका कहना था कि जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती तब तक धान का एक भी दाना नहीं खरीदा जाएगा। उनकी हड़ताल जारी रहेगा। एसोसिएशन के प्रधान बरखा राम, उप प्रधान संदीप कुमार व मनीष बंसल ने कहा कि बारीक धान की खरीद के लिए सरकार ने ई-नेम पोर्टल शुरू किया है। उसे बंद कर पहले जैसे बारीक धान की खरीद की जाती थी अब भी वैसे ही की जाए। मौके पर बरखा राम, मनीष बंसल, संदीप कुमार, अवध बंसल, चंद्रपाल शर्मा, ठाठसिंह, लाभ सिंह, केसर सिंह, अमित बंसल, भूषण लाल, कपिल गोयल भी मौजूद रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
दत्तात्रय मंदिर गुरू दत्तात्रय को समर्पित है। यह अरावली श्रृंखला की सबसे ऊँची चोटी गुरू शिखर पर स्थित है। ऐसा विश्वास है कि भगवान दत्तात्रय दिव्य त्रिमूर्ति भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव के अवतार हैं। इसके अलावा पर्यटक गुरू दत्तात्रय की माता अहिल्या को समर्पित मंदिर का भ्रमण भी कर सकते हैं। यह मंदिर गुरू शिखर के उत्तर पश्चिम में स्थित है।
दत्तात्रय मंदिर गुरू दत्तात्रय को समर्पित है। यह अरावली श्रृंखला की सबसे ऊँची चोटी गुरू शिखर पर स्थित है। ऐसा विश्वास है कि भगवान दत्तात्रय दिव्य त्रिमूर्ति भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव के अवतार हैं। इसके अलावा पर्यटक गुरू दत्तात्रय की माता अहिल्या को समर्पित मंदिर का भ्रमण भी कर सकते हैं। यह मंदिर गुरू शिखर के उत्तर पश्चिम में स्थित है।
गोवा : इंडियन सुपर लीग (ISL) के दूसरे सीजन के 39वें मैच में FC गोवा ने अपने घरेलू मैदान पर मुंबई सिटी FC को 7-0 से करारी हार का सामना कराया है। गोवा के लिए थोंगहोसीम हाओकिप और मैकफर्लिन डुडु ने हैट्रिक लगाए, जबकि रीनाल्डो ने इंजुरी टाइम में एक गोल दागा और इंडियन सुपर लीग (ISL) के इतिहास की सबसे बड़ी और बेहतरीन जीत दर्ज की। इस जीत के साथ गोवा ने शीर्ष पर अपनी स्थिति और काफी मजबूत कर ली। गोवा के 10 मैचों से पांच जीत के साथ 18 अंक हो गए हैं। दूसरी तरफ पिछले तीन मैचों से जीत के लिए तरस रही मुंबई की टीम छठे स्थान पर खिसक गए। मुंबई के अब 10 मैचों में तीन जीत के साथ 12 अंक हैं। दो बदलाव के साथ मैदान पर उतरी निकोलस एनेल्का की टीम की दुगर्ति मैच के 34वें मिनट से शुरू हुई। हाओकिप ने गोवा के लिए पहला गोल दागा। डूडू ने इसके बाद 42वें मिनट में किए गए गोल की मदद से गोवा ने मध्यांतर तक 2-0 की बढ़त बना ली है। मध्यांतर के बाद घरेलू टीम कहीं ज्यादा आक्रामकता के साथ मैदान पर उतरी और 52वें मिनट में हाओकिप ने अपना दूसरा गोल कर टीम की बढ़त को 3-0 कर दिया। इसके बाद तो जैसे गोलों की बारिश होने लगी। डुडू ने 64वें मिनट में चौथा और 67वें मिनट में पांचवां गोल कर अपनी हैट्रिक पूरी की, जबकि हाओकिप ने 79वें मिनट में अपनी हैट्रिक पूरी करते हुए छठा गोल किया। इंजुरी टाइम में रीनाल्डो ने गोवा का सातवां गोल कर मुंबई को करारी हार का सामना करना पड़ा। गोवा अब 22 नवंबर को एटलेटिको डी कोलकाता से उन्हीं के मैदान पर भिड़ेगी, जबकि मुंबई 20 नवंबर को नॉर्थईस्ट युनाइटेड से भिड़ने गुवाहाटी जाएगी।
गोवा : इंडियन सुपर लीग के दूसरे सीजन के उनतालीसवें मैच में FC गोवा ने अपने घरेलू मैदान पर मुंबई सिटी FC को सात-शून्य से करारी हार का सामना कराया है। गोवा के लिए थोंगहोसीम हाओकिप और मैकफर्लिन डुडु ने हैट्रिक लगाए, जबकि रीनाल्डो ने इंजुरी टाइम में एक गोल दागा और इंडियन सुपर लीग के इतिहास की सबसे बड़ी और बेहतरीन जीत दर्ज की। इस जीत के साथ गोवा ने शीर्ष पर अपनी स्थिति और काफी मजबूत कर ली। गोवा के दस मैचों से पांच जीत के साथ अट्ठारह अंक हो गए हैं। दूसरी तरफ पिछले तीन मैचों से जीत के लिए तरस रही मुंबई की टीम छठे स्थान पर खिसक गए। मुंबई के अब दस मैचों में तीन जीत के साथ बारह अंक हैं। दो बदलाव के साथ मैदान पर उतरी निकोलस एनेल्का की टीम की दुगर्ति मैच के चौंतीसवें मिनट से शुरू हुई। हाओकिप ने गोवा के लिए पहला गोल दागा। डूडू ने इसके बाद बयालीसवें मिनट में किए गए गोल की मदद से गोवा ने मध्यांतर तक दो-शून्य की बढ़त बना ली है। मध्यांतर के बाद घरेलू टीम कहीं ज्यादा आक्रामकता के साथ मैदान पर उतरी और बावनवें मिनट में हाओकिप ने अपना दूसरा गोल कर टीम की बढ़त को तीन-शून्य कर दिया। इसके बाद तो जैसे गोलों की बारिश होने लगी। डुडू ने चौंसठवें मिनट में चौथा और सरसठवें मिनट में पांचवां गोल कर अपनी हैट्रिक पूरी की, जबकि हाओकिप ने उन्यासीवें मिनट में अपनी हैट्रिक पूरी करते हुए छठा गोल किया। इंजुरी टाइम में रीनाल्डो ने गोवा का सातवां गोल कर मुंबई को करारी हार का सामना करना पड़ा। गोवा अब बाईस नवंबर को एटलेटिको डी कोलकाता से उन्हीं के मैदान पर भिड़ेगी, जबकि मुंबई बीस नवंबर को नॉर्थईस्ट युनाइटेड से भिड़ने गुवाहाटी जाएगी।
रांचीः पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने कहा कि राज्य सरकार ने पूर्व में जारी किये गये कई विज्ञापनों को रद्द कर कर दिया है। इनमें कई ऐसे भी थे, जिनके संबंध में चयन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी। इसके अलावा नये सिरे से नई नियमावली इत्यादि बनाकर नए सिरे से नियुक्तियां करने के लिए विज्ञापन जारी किया जा रहा है। नए विज्ञापन जारी करने के क्रम में उम्र सीमा से संबंधित कट ऑफ डेट को भी बदल दिया गया है। ऐसे में लाखों अभ्यर्थियों के सामने अवसर परीक्षा में बैठने के मौके सीमित होने की आशंका बन गयी है। दास ने सरकार के ऐसे फैसलों पर आपत्ति जतायी है। उन्होंने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में यह माना गया था कि राज्य के गठन के बाद कई वर्षों तक विभिन्न पदों पर नियुक्तियां नहीं की जा सकी थीं। अधिक से अधिक युवाओं, अभ्यर्थियों को परीक्षाओं में शामिल होने का मौका मिले। इस उद्देश्य से 2010 अथवा 2016 को कट ऑफ डेट निर्धारित किया गया था। उसी कट ऑफ डेट के आधार पर 2019 तक विज्ञापन निकाले गए। इसमें अभ्यर्थी शामिल भी हुए। कई मामलों में सफल भी हुए लेकिन अब राज्य सरकार ने कट ऑफ डेट को बदलकर 2021 कर दिया है। इसमें भारी संख्या में अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया से बाहर हो गये हैं। राज्य सरकार के सभी विज्ञापनों में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि सारी नियुक्तियां रमेश हांसदा के मामले में होने वाले निर्णय से प्रभावित होंगी। जाहिर है कि रमेश हांसदा के मामले में हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी भी की है कि राज्य के द्वारा बनाई गई नियमावली असंवैधानिक है। ऐसे में नियुक्तियों का विज्ञापन जारी कर और नियुक्तियों के लिए प्रक्रियाओं को आरंभ कर राज्य सरकार झारखंड के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
रांचीः पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने कहा कि राज्य सरकार ने पूर्व में जारी किये गये कई विज्ञापनों को रद्द कर कर दिया है। इनमें कई ऐसे भी थे, जिनके संबंध में चयन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई थी। इसके अलावा नये सिरे से नई नियमावली इत्यादि बनाकर नए सिरे से नियुक्तियां करने के लिए विज्ञापन जारी किया जा रहा है। नए विज्ञापन जारी करने के क्रम में उम्र सीमा से संबंधित कट ऑफ डेट को भी बदल दिया गया है। ऐसे में लाखों अभ्यर्थियों के सामने अवसर परीक्षा में बैठने के मौके सीमित होने की आशंका बन गयी है। दास ने सरकार के ऐसे फैसलों पर आपत्ति जतायी है। उन्होंने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में यह माना गया था कि राज्य के गठन के बाद कई वर्षों तक विभिन्न पदों पर नियुक्तियां नहीं की जा सकी थीं। अधिक से अधिक युवाओं, अभ्यर्थियों को परीक्षाओं में शामिल होने का मौका मिले। इस उद्देश्य से दो हज़ार दस अथवा दो हज़ार सोलह को कट ऑफ डेट निर्धारित किया गया था। उसी कट ऑफ डेट के आधार पर दो हज़ार उन्नीस तक विज्ञापन निकाले गए। इसमें अभ्यर्थी शामिल भी हुए। कई मामलों में सफल भी हुए लेकिन अब राज्य सरकार ने कट ऑफ डेट को बदलकर दो हज़ार इक्कीस कर दिया है। इसमें भारी संख्या में अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया से बाहर हो गये हैं। राज्य सरकार के सभी विज्ञापनों में यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि सारी नियुक्तियां रमेश हांसदा के मामले में होने वाले निर्णय से प्रभावित होंगी। जाहिर है कि रमेश हांसदा के मामले में हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी भी की है कि राज्य के द्वारा बनाई गई नियमावली असंवैधानिक है। ऐसे में नियुक्तियों का विज्ञापन जारी कर और नियुक्तियों के लिए प्रक्रियाओं को आरंभ कर राज्य सरकार झारखंड के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
देश कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहा है। इसके संक्रमण को को रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लगा है। इस बीच ईरान से भारतीय लोगों का नया जत्था वापस लौटा है। इस दल में 275 लोग शामिल है। उन्हें भारतीय सेना के वेलनेस सेंटर में रखा जाएगा। इससे पहले ईरान में फंसे से 277 भारतीयों को भी वापस लाया गया था, जो इसी सेंटर अभी मौजूद हैं। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का कहर देश में लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार तक देश में संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 1029 हो गई है। इसमें 85 से ज्यादा मरीज स्वस्थ्य हो चुके हैं या उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। वहीं 19 मरीजों की मौत हो चुकी है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
देश कोरोना वायरस के संकट से जूझ रहा है। इसके संक्रमण को को रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लगा है। इस बीच ईरान से भारतीय लोगों का नया जत्था वापस लौटा है। इस दल में दो सौ पचहत्तर लोग शामिल है। उन्हें भारतीय सेना के वेलनेस सेंटर में रखा जाएगा। इससे पहले ईरान में फंसे से दो सौ सतहत्तर भारतीयों को भी वापस लाया गया था, जो इसी सेंटर अभी मौजूद हैं। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस का कहर देश में लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार तक देश में संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर एक हज़ार उनतीस हो गई है। इसमें पचासी से ज्यादा मरीज स्वस्थ्य हो चुके हैं या उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। वहीं उन्नीस मरीजों की मौत हो चुकी है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
देशभर में बढ़ती महंगाई से लोग परेशान हैं। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस के अलावा खाने-पीने के सामान के साथ अब पढ़ाई भी महंगी हो गई है। निजी स्कूल हर साल सिलेबस बदलते ही हैं। अब किताबों के दाम भी 10% से 20% बढ़ चुके हैं। बुक की दुकानों पर अभिभावकों और बच्चों की लाइन लगी है। अभिभावक महंगाई पर कुछ बोलने से भी कतरा रहे हैं। उनका मानना है कि बोलेंगे तो कहीं स्कूल से बच्चों का नाम न कट जाए। एक अप्रैल से CBSE का नया सत्र शुरू हो रहा है। स्कूलों ने नए सेशन के सिलेबस की लिस्ट भी अभिभावकों के हाथों में थमा दी है। स्टेशनरी बाजार में नर्सरी से लेकर 12वीं तक की कापी-किताबों के दामों में करीब 10% से 20% की वृद्धि हुई है। निजी प्रकाशनों से नर्सरी का कोर्स 1200 से 1500 रुपए तक मिल रहा है। जबकि कक्षा एक से पांचवी तक का कोर्स 2000 से 3500 रुपए में मिल रहा है। छठी से आठवीं तक का कोर्स 3300 से 3800 रुपए तक मिल रहा है। वहीं, इंटरमीडिएट की किताबों के दाम 4000 से 4500 रुपए तक हो गए है। जबकि नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की यही किताबें सिर्फ 400 से 500 रुपए तक में मिल जाती है। स्टेशनरी बाजार में नेशनल कॉउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की किताबों के दाम अभी भी कम हैं। लेकिन बुक सेलर्स के पास NCERT की किताबों को स्टॉक कम है। शहर के प्रमुख पुस्तक विक्रेता का कहना है कि डिपो से ही NCERT की पुस्तकें नहीं आ रही है। जबकि निजी संस्थाओं यानी प्राइवेट स्कूलों की तादाद बढ़ती जा रही है। खास बात यह है कि सस्ती मिलने वाली NCERT की किताबों को CBSE और ICSE बोर्ड के स्कूल लागू नहीं करते हैं। सभी स्कूलों की चिन्हित दुकानें हैं। अभिभावकों को लिस्ट थमा कर दुकान का पता भी बताया जा रहा है। सहारनपुर में CBSE बोर्ड के 135 और ICSE बोर्ड के मात्र दो ही स्कूल है। जिनमें करीब 85 हजार बच्चे पढ़ते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
देशभर में बढ़ती महंगाई से लोग परेशान हैं। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस के अलावा खाने-पीने के सामान के साथ अब पढ़ाई भी महंगी हो गई है। निजी स्कूल हर साल सिलेबस बदलते ही हैं। अब किताबों के दाम भी दस% से बीस% बढ़ चुके हैं। बुक की दुकानों पर अभिभावकों और बच्चों की लाइन लगी है। अभिभावक महंगाई पर कुछ बोलने से भी कतरा रहे हैं। उनका मानना है कि बोलेंगे तो कहीं स्कूल से बच्चों का नाम न कट जाए। एक अप्रैल से CBSE का नया सत्र शुरू हो रहा है। स्कूलों ने नए सेशन के सिलेबस की लिस्ट भी अभिभावकों के हाथों में थमा दी है। स्टेशनरी बाजार में नर्सरी से लेकर बारहवीं तक की कापी-किताबों के दामों में करीब दस% से बीस% की वृद्धि हुई है। निजी प्रकाशनों से नर्सरी का कोर्स एक हज़ार दो सौ से एक हज़ार पाँच सौ रुपयापए तक मिल रहा है। जबकि कक्षा एक से पांचवी तक का कोर्स दो हज़ार से तीन हज़ार पाँच सौ रुपयापए में मिल रहा है। छठी से आठवीं तक का कोर्स तीन हज़ार तीन सौ से तीन हज़ार आठ सौ रुपयापए तक मिल रहा है। वहीं, इंटरमीडिएट की किताबों के दाम चार हज़ार से चार हज़ार पाँच सौ रुपयापए तक हो गए है। जबकि नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग की यही किताबें सिर्फ चार सौ से पाँच सौ रुपयापए तक में मिल जाती है। स्टेशनरी बाजार में नेशनल कॉउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग की किताबों के दाम अभी भी कम हैं। लेकिन बुक सेलर्स के पास NCERT की किताबों को स्टॉक कम है। शहर के प्रमुख पुस्तक विक्रेता का कहना है कि डिपो से ही NCERT की पुस्तकें नहीं आ रही है। जबकि निजी संस्थाओं यानी प्राइवेट स्कूलों की तादाद बढ़ती जा रही है। खास बात यह है कि सस्ती मिलने वाली NCERT की किताबों को CBSE और ICSE बोर्ड के स्कूल लागू नहीं करते हैं। सभी स्कूलों की चिन्हित दुकानें हैं। अभिभावकों को लिस्ट थमा कर दुकान का पता भी बताया जा रहा है। सहारनपुर में CBSE बोर्ड के एक सौ पैंतीस और ICSE बोर्ड के मात्र दो ही स्कूल है। जिनमें करीब पचासी हजार बच्चे पढ़ते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
यशोधारा राजे का फोटो एडिट करके हटाया? देवेंद्र जैन पूर्व विधायक ने फेसबुक के माध्यम से 20 जुलाई का कार्यक्रम का पोस्टर जारी किया है। इस पोस्टर में देवेंद्र जैन ने अपने नेताओं के फोटो प्रदर्शित किए हैं। मोदी, शाह और नड्डा के बाद मध्यप्रदेश में नरेंद्र सिंह तोमर उनके नेता हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज सिंह चौहान उनके लिए दूसरे और तीसरे नंबर के नेता है, जबकि यशोधरा राजे सिंधिया का फोटो गायब है। पोस्टर को ध्यान से देखने पर समझ आता है कि शिवराज सिंह चौहान के बाद एक फोटो और था, जिसे बाद में एडिट करके हटाया गया। इस पोस्टर में एक और गजब की बात हुई है। देवेंद्र जैन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष का फोटो लगाया है लेकिन प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा का फोटो नहीं लगाया। यहां तक तो फिर भी ठीक था लेकिन प्रदेश अध्यक्ष विष्णु शर्मा को यह पोस्टर टैग करके शायद यह भी बताया है कि, आज से तुम हमारे नेता नहीं। तीसरी खास बात यह है कि इस पोस्टर को केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल को टैग किया गया है। शायद उन्हें संदेश दिया गया है कि जैसा आपने कहा था वैसा कर दिया है, देख लो।
यशोधारा राजे का फोटो एडिट करके हटाया? देवेंद्र जैन पूर्व विधायक ने फेसबुक के माध्यम से बीस जुलाई का कार्यक्रम का पोस्टर जारी किया है। इस पोस्टर में देवेंद्र जैन ने अपने नेताओं के फोटो प्रदर्शित किए हैं। मोदी, शाह और नड्डा के बाद मध्यप्रदेश में नरेंद्र सिंह तोमर उनके नेता हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज सिंह चौहान उनके लिए दूसरे और तीसरे नंबर के नेता है, जबकि यशोधरा राजे सिंधिया का फोटो गायब है। पोस्टर को ध्यान से देखने पर समझ आता है कि शिवराज सिंह चौहान के बाद एक फोटो और था, जिसे बाद में एडिट करके हटाया गया। इस पोस्टर में एक और गजब की बात हुई है। देवेंद्र जैन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष का फोटो लगाया है लेकिन प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा का फोटो नहीं लगाया। यहां तक तो फिर भी ठीक था लेकिन प्रदेश अध्यक्ष विष्णु शर्मा को यह पोस्टर टैग करके शायद यह भी बताया है कि, आज से तुम हमारे नेता नहीं। तीसरी खास बात यह है कि इस पोस्टर को केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल को टैग किया गया है। शायद उन्हें संदेश दिया गया है कि जैसा आपने कहा था वैसा कर दिया है, देख लो।
नई दिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक के नव नियुक्त गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति में तीन सदस्यो की नियुक्ति की गई है. जिसमे भारतीय सांख्यिकी संस्थान के प्रोफेसर चेतन घाटे, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक पमी दुआ और आईआईएम अहमदाबाद के प्रोफेसर रवींद्र एच ढोलकिया मौजूद रहेंगे. इन तीनो सदस्यो का काम होगा रिजर्व बैंक के नामित सदस्यो के साथ मिलकर आगामी मौद्रिक समिति समीक्षा में मुख्या नीतिगत दर का फैसला लेना. यह सदस्य खुदरा मुद्रास्फीति को चार फीसदी के लक्षित स्तर पर रखने के मकसद से ही मौद्रिक नीति की समीक्षा करेंगे. एक सरकारी नोटिस के हवाले से मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) इन तीनों विशेषज्ञों के नाम मौद्रिक नीति समिति के सदस्य के तौर पर नियुक्त किये गए है जो 4 साल तक कार्यकाल संभालेंगे.
नई दिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक के नव नियुक्त गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति में तीन सदस्यो की नियुक्ति की गई है. जिसमे भारतीय सांख्यिकी संस्थान के प्रोफेसर चेतन घाटे, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक पमी दुआ और आईआईएम अहमदाबाद के प्रोफेसर रवींद्र एच ढोलकिया मौजूद रहेंगे. इन तीनो सदस्यो का काम होगा रिजर्व बैंक के नामित सदस्यो के साथ मिलकर आगामी मौद्रिक समिति समीक्षा में मुख्या नीतिगत दर का फैसला लेना. यह सदस्य खुदरा मुद्रास्फीति को चार फीसदी के लक्षित स्तर पर रखने के मकसद से ही मौद्रिक नीति की समीक्षा करेंगे. एक सरकारी नोटिस के हवाले से मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति इन तीनों विशेषज्ञों के नाम मौद्रिक नीति समिति के सदस्य के तौर पर नियुक्त किये गए है जो चार साल तक कार्यकाल संभालेंगे.
अहिंसा, सत्य, अस्तेय, शौचाचार और इंद्रिय निग्रह - ये चारों वर्णों के लिए निर्धारित धर्म हैं । इससे अधिक धर्म की उत्कृष्ट भावना और क्या होगी ? प्रत्येक वर्णवाला, अर्थात् प्रत्येक मनुष्य इन कर्तव्यों का पालन करे, तो समाज में अशांति, हिंसा, वेईमानी, चोरी, संग्रह, गंदगी और स्वेच्छाचारिता आदि के लिए स्थान हो कहाँ रह जाएगा ? महात्मा गाँधी ने धर्म के इस मूल रहस्य को हृदयंगम किया था। उन्होंने लिखा है कि 'धर्म से मेरा मतलब उस मूल धर्म से है, जो मनुष्य के स्वभाव तक को परिवर्तन कर देता है, जो भीतरी सत्य के साथ हमारा अटूट संबंध जोड़ता है और जो हमें निरंतर शुद्ध और अधिक पवित्र करता रहता है । वह मानव स्वभाव का शाश्वत तत्व है, जो अपनी संपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार रहता है। धर्म का अर्थ कट्टरपंथ नहीं है । उसका अर्थ है, विश्व की एक भौतिक सुव्यवस्था में श्रद्धा । यह धर्म हिंदू धर्म, इस्लाम, ईसाई धर्म आदि सबसे परे है । यह उन धर्मों का समन्वय करता है और उन्हें वास्तविक धर्म बनाता है । ? भारतीय समाज व्यवस्था में धर्म को सर्वप्रथम स्थान दिया गया है । यह धर्म मूलतः मानव धर्म ही है । वेद में, स्मृति में, भागवत में, गीता में, रामायण में धर्म के सभी ग्रंथों में, धर्मशास्त्रों में सर्वत्र इस धर्म की ही व्यापक विवेचना की गयी है । भागवत में इस सार्ववणिक धर्म का संक्षेप में यह लक्षण बताया गया है-अहिंसा सत्यमस्तेयमकामक्रोधलोभता । भूताप्रियहितेहा च धर्मोऽयं सार्ववणिकः ॥ ३ सार्ववणिक धर्म है - अहिंसा, सत्य, अस्तेय, काम, क्रोध और लोभ से मुक्ति । धर्म है वह जिससे सभी प्राणी प्रसन्न रहें और सबका कल्याण हो । 'सत्यान्नास्ति परोधर्मः ।' सत्य से उत्तम अन्य कोई धर्म नहीं । वेद में पृथ्वी को धारण करनेवाले ६ आधार बताए गये हैंसत्यं बृहद् ऋतम् उग्र दीक्षा तपो ब्रह्म यज्ञः पृथिवीं धारयन्ति ॥४ १. निर्मल कुमार बसु : सिलेक्शंस फ्रॉम गाँधी, १६४८, पृष्ठ २२३ । २. मो० क० गाँधीः हरिजन सेवक (हिन्दी), १००२-४०, पृष्ठ ४११ ३. श्रीमद्भागवत १०/२/२६ ४. बर्ववेद १२/१/१
अहिंसा, सत्य, अस्तेय, शौचाचार और इंद्रिय निग्रह - ये चारों वर्णों के लिए निर्धारित धर्म हैं । इससे अधिक धर्म की उत्कृष्ट भावना और क्या होगी ? प्रत्येक वर्णवाला, अर्थात् प्रत्येक मनुष्य इन कर्तव्यों का पालन करे, तो समाज में अशांति, हिंसा, वेईमानी, चोरी, संग्रह, गंदगी और स्वेच्छाचारिता आदि के लिए स्थान हो कहाँ रह जाएगा ? महात्मा गाँधी ने धर्म के इस मूल रहस्य को हृदयंगम किया था। उन्होंने लिखा है कि 'धर्म से मेरा मतलब उस मूल धर्म से है, जो मनुष्य के स्वभाव तक को परिवर्तन कर देता है, जो भीतरी सत्य के साथ हमारा अटूट संबंध जोड़ता है और जो हमें निरंतर शुद्ध और अधिक पवित्र करता रहता है । वह मानव स्वभाव का शाश्वत तत्व है, जो अपनी संपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए कोई भी कीमत चुकाने को तैयार रहता है। धर्म का अर्थ कट्टरपंथ नहीं है । उसका अर्थ है, विश्व की एक भौतिक सुव्यवस्था में श्रद्धा । यह धर्म हिंदू धर्म, इस्लाम, ईसाई धर्म आदि सबसे परे है । यह उन धर्मों का समन्वय करता है और उन्हें वास्तविक धर्म बनाता है । ? भारतीय समाज व्यवस्था में धर्म को सर्वप्रथम स्थान दिया गया है । यह धर्म मूलतः मानव धर्म ही है । वेद में, स्मृति में, भागवत में, गीता में, रामायण में धर्म के सभी ग्रंथों में, धर्मशास्त्रों में सर्वत्र इस धर्म की ही व्यापक विवेचना की गयी है । भागवत में इस सार्ववणिक धर्म का संक्षेप में यह लक्षण बताया गया है-अहिंसा सत्यमस्तेयमकामक्रोधलोभता । भूताप्रियहितेहा च धर्मोऽयं सार्ववणिकः ॥ तीन सार्ववणिक धर्म है - अहिंसा, सत्य, अस्तेय, काम, क्रोध और लोभ से मुक्ति । धर्म है वह जिससे सभी प्राणी प्रसन्न रहें और सबका कल्याण हो । 'सत्यान्नास्ति परोधर्मः ।' सत्य से उत्तम अन्य कोई धर्म नहीं । वेद में पृथ्वी को धारण करनेवाले छः आधार बताए गये हैंसत्यं बृहद् ऋतम् उग्र दीक्षा तपो ब्रह्म यज्ञः पृथिवीं धारयन्ति ॥चार एक. निर्मल कुमार बसु : सिलेक्शंस फ्रॉम गाँधी, एक हज़ार छः सौ अड़तालीस, पृष्ठ दो सौ तेईस । दो. मोशून्य कशून्य गाँधीः हरिजन सेवक , एक हज़ार दो-चालीस, पृष्ठ चार सौ ग्यारह तीन. श्रीमद्भागवत दस फ़रवरी छब्बीस चार. बर्ववेद बारह/एक/एक
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में बनी नई सरकार के आने के बाद कारोबारी विश्वास बढ़ा है। उद्योग संगठन सीआईआई के व्यापारिक परिदृश्य सर्वे में यह बात कही गई है। सीआईआई ने रविवार को सर्वे जारी करते हुए कहा कि कारोबार अनुकूल सरकार से अपेक्षाओं के बीच निवेशकों का मनोबल बढ़ा है। अप्रैल-जून, 2014 की तिमाही के लिए सीआईआई का कारोबारी विश्वास सूचकांक 53. 7 पर पहुंच गया है। इससे पूर्व तिमाही में यह 49. 9 पर था। सर्वे के सूचकांक पर 50 का बिंदु सकारात्मक और कमजोर कारोबारी विश्वास के बीच विभाजक है। मोदी के नेतृत्व में नई सरकार ने 26 मई को शपथ ग्रहण की थी। यह सर्वे मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र से जुड़ी बड़ी, मझोली, लघु और सूक्ष्म कंपनियों के 150 से अधिक औद्योगिक सदस्यों के बीच कराया गया। उन्होंने महंगाई और घाटे में कमी, निर्यात में सुधार, विदेशी पूंजी प्रवाह और रुपये की मजबूती के आधार पर आर्थिक विकास को लेकर भरोसा जताया। सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि सूचकांक में आने वाले दिनों में और तेजी के आसार हैं। सर्वे कहता है कि 2013-14 में 4. 7 फीसद की आर्थिक विकास दर से इसके वित्त वर्ष 2014-15 में बढ़कर 5. 5 और 6 फीसद पहुंच जाने के आसार हैं। चालू वित्त वर्ष में थोक वस्तुओं पर आधारित महंगाई दर 5. 5 फीसद से छह फीसद रहने की उम्मीद है। सीआईआई ने आर्थिक अनिश्चितता, धीमी विकास दर और महंगाई को चिंता का विषय बताया। उसने कारोबारियों के भरोसे में वृद्धि और आपूर्ति की बाधाओं को दूर करने के प्रयास को अहम करार दिया है।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में बनी नई सरकार के आने के बाद कारोबारी विश्वास बढ़ा है। उद्योग संगठन सीआईआई के व्यापारिक परिदृश्य सर्वे में यह बात कही गई है। सीआईआई ने रविवार को सर्वे जारी करते हुए कहा कि कारोबार अनुकूल सरकार से अपेक्षाओं के बीच निवेशकों का मनोबल बढ़ा है। अप्रैल-जून, दो हज़ार चौदह की तिमाही के लिए सीआईआई का कारोबारी विश्वास सूचकांक तिरेपन. सात पर पहुंच गया है। इससे पूर्व तिमाही में यह उनचास. नौ पर था। सर्वे के सूचकांक पर पचास का बिंदु सकारात्मक और कमजोर कारोबारी विश्वास के बीच विभाजक है। मोदी के नेतृत्व में नई सरकार ने छब्बीस मई को शपथ ग्रहण की थी। यह सर्वे मैन्यूफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र से जुड़ी बड़ी, मझोली, लघु और सूक्ष्म कंपनियों के एक सौ पचास से अधिक औद्योगिक सदस्यों के बीच कराया गया। उन्होंने महंगाई और घाटे में कमी, निर्यात में सुधार, विदेशी पूंजी प्रवाह और रुपये की मजबूती के आधार पर आर्थिक विकास को लेकर भरोसा जताया। सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि सूचकांक में आने वाले दिनों में और तेजी के आसार हैं। सर्वे कहता है कि दो हज़ार तेरह-चौदह में चार. सात फीसद की आर्थिक विकास दर से इसके वित्त वर्ष दो हज़ार चौदह-पंद्रह में बढ़कर पाँच. पाँच और छः फीसद पहुंच जाने के आसार हैं। चालू वित्त वर्ष में थोक वस्तुओं पर आधारित महंगाई दर पाँच. पाँच फीसद से छह फीसद रहने की उम्मीद है। सीआईआई ने आर्थिक अनिश्चितता, धीमी विकास दर और महंगाई को चिंता का विषय बताया। उसने कारोबारियों के भरोसे में वृद्धि और आपूर्ति की बाधाओं को दूर करने के प्रयास को अहम करार दिया है।
लड़की विदा हुई या फिर बिक गई, परिजनों को पता नहीं चला. अपने सुनहरे सपने सजाये रुपा कुमारी गजियाबाद शादी कर पति के साथ गयी. लेकिन पति के रुप में हैवान निकाला, जिसकी दास्तां सुनकर आपके भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे. यह वाक्या पाकुड़ की बेटी के साथ घटी है. पाकुड़ में 80% लोग गरीब हैं. गरीबों की बेटी को निशाना गाजियाबाद और दूसरे शहरों के लोग बना रहे हैं. कुछ ऐसा ही हुआ रिक्शा चालक की बेटी रूपा तुरी के साथ. गाजियाबाद जिला के पंकज चौधरी, पिता-सुरेश चौधरी, गांव पुथारी, थाना पोस्ट-मोदीनगर आए और पाकुड़ में शादी करने की इच्छा जाहिर की. रिक्शा चालक की बेटी रुपा तुरी को निशाना बनाया. अपने मंसूबे को पूरा करने के लिए पैसे देकर एक स्थानीय बिचौलिया को पकड़ा. बिचौलिया ने परिजनों को बातों से पटाया और रुपा कुमारी वो सपना दिखाया जो शादी के लिए एक लड़की देखती है. फिर 18 नवम्बर 2014 को कोर्ट से शपथ पत्र के माध्यम से शादी कर गाजियाबाद ले गया. पिता को पांच हजार रुपए दिए गए. साथ में भाई और मां गई. एक सप्ताह तक एक किराए के घर में रखा और पूरा सम्मान किया. जैसे ही माँ और भाई वापस गए, उसे गांव लेकर चला गया. वहां पति ने अपना हैवान रूप दिखाना शुरू किया. 17 महीने अमानवीय शोषण के बीते. हाल के दिनों में तो रुपा को खाना तक बंद कर दिया गया. जंजीर में बांध कर बेरहमी से पीटा जाता. शादी में दी गई राशि वापस मांगी जाती. जाति सूचक गालियां दी जाती. रात में शरीर से वस्त्र हटाकर मच्छर कटवाता था. निर्वस्त्र मवेशी की तरह उसके पास खड़े रहने को विवश करता. फिर सुबह कपड़े देकर मवेशियों की सेवा में लगाता. गाय भैंस की साफ सफाई, खाने-पीने की व्यवस्था के बाद का समय गोबर से गोयठा यानी उपले बनाने में बीतता. इन सबके बाद यदि भूखी रूपा खाना मांग लेती तो उसे परिवार बेतरह पीटता. फिर एक दिन जीवन का अंतिम दिन मान कर छत से रुपा कूद गयी. लेकिन गोबर की ढेर में गिरी तो बच गयी. वापस उस नरक में जाने की बजाय उसी हालत में सड़क पर भागती रही. भागने के क्रम में बैलगाड़ी वाला मिला जो पहले पागल समझा. रूपा की बात सुनी तो द्रवित हो गया. कुछ दिन बेटी की तरह घर रखकर उसक इलाज कराया. ठीक होने पर दिल्ली से कोलकाता जाने वाली गाड़ी पर बैठा दिया. ट्रेन पर कुछ मजदूर बैठे थे. बातचीत में उनसे भी रूपा ने दर्द साझा किया. उन लोगों ने उसे पाकुड़ जाने वाली गाड़ी पर बैठाने में मदद की. पाकुड़ पहुंचने पर पूरा परिवार रूपा के साथ महिला थाना शिकायत के लिए गया. पर जैसा कि पीड़िता के पिता नीमचंद तूरी ने बताया कि पूरे परिवार को थाने वालों ने भगा दिया क्योंकि बिचौलिए के साथ थाना वालों की सांठगांठ थी. बाद में जानकारी मिलने पर डीएसपी नवनीत हेम्रब और एसडीपीओ संतोष कुमार रुपा कुमार के घर पहुंचे. दास्तां सुनकर पुलिस वालों के भी रोंगटे खड़े हो गए. मामले में प्राथमिकी दर्ज कर लिया गया. पुलिस ने परिजनों को आर्थिक सहायता देने की आश्वसन दिया है क्योंकि पूरे परिवार को दो जून की रोटी नसीब नहीं होती है. अधेड़ उम्र में पिता रिक्शा चलाता है तो माँ दूसरे के घरों में चौका बर्तन करती है. भाई मजदूरी का काम करता है. ऐसे में रुपा का क्या होगा, उसे यह चिन्ता दीमक की तरह खाये जा रही है.
लड़की विदा हुई या फिर बिक गई, परिजनों को पता नहीं चला. अपने सुनहरे सपने सजाये रुपा कुमारी गजियाबाद शादी कर पति के साथ गयी. लेकिन पति के रुप में हैवान निकाला, जिसकी दास्तां सुनकर आपके भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे. यह वाक्या पाकुड़ की बेटी के साथ घटी है. पाकुड़ में अस्सी% लोग गरीब हैं. गरीबों की बेटी को निशाना गाजियाबाद और दूसरे शहरों के लोग बना रहे हैं. कुछ ऐसा ही हुआ रिक्शा चालक की बेटी रूपा तुरी के साथ. गाजियाबाद जिला के पंकज चौधरी, पिता-सुरेश चौधरी, गांव पुथारी, थाना पोस्ट-मोदीनगर आए और पाकुड़ में शादी करने की इच्छा जाहिर की. रिक्शा चालक की बेटी रुपा तुरी को निशाना बनाया. अपने मंसूबे को पूरा करने के लिए पैसे देकर एक स्थानीय बिचौलिया को पकड़ा. बिचौलिया ने परिजनों को बातों से पटाया और रुपा कुमारी वो सपना दिखाया जो शादी के लिए एक लड़की देखती है. फिर अट्ठारह नवम्बर दो हज़ार चौदह को कोर्ट से शपथ पत्र के माध्यम से शादी कर गाजियाबाद ले गया. पिता को पांच हजार रुपए दिए गए. साथ में भाई और मां गई. एक सप्ताह तक एक किराए के घर में रखा और पूरा सम्मान किया. जैसे ही माँ और भाई वापस गए, उसे गांव लेकर चला गया. वहां पति ने अपना हैवान रूप दिखाना शुरू किया. सत्रह महीने अमानवीय शोषण के बीते. हाल के दिनों में तो रुपा को खाना तक बंद कर दिया गया. जंजीर में बांध कर बेरहमी से पीटा जाता. शादी में दी गई राशि वापस मांगी जाती. जाति सूचक गालियां दी जाती. रात में शरीर से वस्त्र हटाकर मच्छर कटवाता था. निर्वस्त्र मवेशी की तरह उसके पास खड़े रहने को विवश करता. फिर सुबह कपड़े देकर मवेशियों की सेवा में लगाता. गाय भैंस की साफ सफाई, खाने-पीने की व्यवस्था के बाद का समय गोबर से गोयठा यानी उपले बनाने में बीतता. इन सबके बाद यदि भूखी रूपा खाना मांग लेती तो उसे परिवार बेतरह पीटता. फिर एक दिन जीवन का अंतिम दिन मान कर छत से रुपा कूद गयी. लेकिन गोबर की ढेर में गिरी तो बच गयी. वापस उस नरक में जाने की बजाय उसी हालत में सड़क पर भागती रही. भागने के क्रम में बैलगाड़ी वाला मिला जो पहले पागल समझा. रूपा की बात सुनी तो द्रवित हो गया. कुछ दिन बेटी की तरह घर रखकर उसक इलाज कराया. ठीक होने पर दिल्ली से कोलकाता जाने वाली गाड़ी पर बैठा दिया. ट्रेन पर कुछ मजदूर बैठे थे. बातचीत में उनसे भी रूपा ने दर्द साझा किया. उन लोगों ने उसे पाकुड़ जाने वाली गाड़ी पर बैठाने में मदद की. पाकुड़ पहुंचने पर पूरा परिवार रूपा के साथ महिला थाना शिकायत के लिए गया. पर जैसा कि पीड़िता के पिता नीमचंद तूरी ने बताया कि पूरे परिवार को थाने वालों ने भगा दिया क्योंकि बिचौलिए के साथ थाना वालों की सांठगांठ थी. बाद में जानकारी मिलने पर डीएसपी नवनीत हेम्रब और एसडीपीओ संतोष कुमार रुपा कुमार के घर पहुंचे. दास्तां सुनकर पुलिस वालों के भी रोंगटे खड़े हो गए. मामले में प्राथमिकी दर्ज कर लिया गया. पुलिस ने परिजनों को आर्थिक सहायता देने की आश्वसन दिया है क्योंकि पूरे परिवार को दो जून की रोटी नसीब नहीं होती है. अधेड़ उम्र में पिता रिक्शा चलाता है तो माँ दूसरे के घरों में चौका बर्तन करती है. भाई मजदूरी का काम करता है. ऐसे में रुपा का क्या होगा, उसे यह चिन्ता दीमक की तरह खाये जा रही है.
बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' 9 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। सोशल मीडिया पर बायकॉट ब्रह्मास्त्र ट्रेंड होने के बावजूद इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। वहीं अब दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की बहन मीतू सिंह ने 'ब्रह्मास्त्र' को लेकर एक पोस्ट साझा किया है। मीतू सिंह ने ब्रह्मास्त्र के जरिए रणबीर कपूर और आलिया भट्ट पर कटाक्ष किया है। मीतू सिंह ने लिखा, इस बॉलीवुड को नष्ट करने के लिए केवल सुशांत का ब्रह्मास्त्र काफी था। बॉलीवुड हमेशा जनता पर हुक्म चलाना चाहता है, यह आपसी सम्मान और विनम्रता दिखाने के लिए कभी नहीं रुकता। मीतू ने कहा, हम ऐसे लोगों को अपने देश का चेहरा कैसे बना सकते हैं जो नैतिक मूल्यों में इतना समृद्ध है? जनता का प्यार और दिखावा जीतने का उनका खेदजनक प्रयास विफल रहा है। क्वालिटी और नैतिक मूल्य ही केवल एक चीज है जो प्रशंसा और सम्मान जीतेगी। मीतू सिंह के इस पोस्ट पर सुशांत सिंह राजपूत के फैंस जमकर कमेंट कर अपना सपोर्ट दे रहे हैं। 'ब्रह्मास्त्र' की बात करें तो अयान मुखर्जी द्वारा निर्देशित फिल्म में रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, अमिताभ बच्चन, नागार्जुन और मौनी रॉय मुख्य भूमिका में है।
बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर और आलिया भट्ट की मोस्ट अवेटेड फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' नौ सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। सोशल मीडिया पर बायकॉट ब्रह्मास्त्र ट्रेंड होने के बावजूद इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। वहीं अब दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की बहन मीतू सिंह ने 'ब्रह्मास्त्र' को लेकर एक पोस्ट साझा किया है। मीतू सिंह ने ब्रह्मास्त्र के जरिए रणबीर कपूर और आलिया भट्ट पर कटाक्ष किया है। मीतू सिंह ने लिखा, इस बॉलीवुड को नष्ट करने के लिए केवल सुशांत का ब्रह्मास्त्र काफी था। बॉलीवुड हमेशा जनता पर हुक्म चलाना चाहता है, यह आपसी सम्मान और विनम्रता दिखाने के लिए कभी नहीं रुकता। मीतू ने कहा, हम ऐसे लोगों को अपने देश का चेहरा कैसे बना सकते हैं जो नैतिक मूल्यों में इतना समृद्ध है? जनता का प्यार और दिखावा जीतने का उनका खेदजनक प्रयास विफल रहा है। क्वालिटी और नैतिक मूल्य ही केवल एक चीज है जो प्रशंसा और सम्मान जीतेगी। मीतू सिंह के इस पोस्ट पर सुशांत सिंह राजपूत के फैंस जमकर कमेंट कर अपना सपोर्ट दे रहे हैं। 'ब्रह्मास्त्र' की बात करें तो अयान मुखर्जी द्वारा निर्देशित फिल्म में रणबीर कपूर, आलिया भट्ट, अमिताभ बच्चन, नागार्जुन और मौनी रॉय मुख्य भूमिका में है।
[ प्रथम दृश्य शायद कभी क्षुण्ण और कभी ग्लान हो जाता; मगर अब वह डर नहीं रहा। मिलनका अब विच्छेद नहीं है, अलका, यही अच्छा है। ( षोड़शी बात नहीं कर सकती, दुःसद् रोदनके वेगसे उसका सम्पूर्ण वक्षःस्थल उफन उफन उठता है । ) जीवानन्द - उफ ! दुनिया में अब क्या हवा नहीं रही प्रफुल्ल ! प्रफुल्ल - तकलीफ क्या बहुत ज्यादा हो रही है भइया ? क्या डाक्टरको बुलवाऊँ । जीवानन्द - नहीं नहीं, अब डाक्टर-वैद्यकी जरूरत नहीं, प्रफुल्ल । - सिर्फ तुम और अलका, बस ! उफ, कैसा घोर अन्धकार है । सूर्य क्या अस्त हो ! गया भाई ?. प्रफुल्ल - अभी हाल ही हुआ है भइया । जीवानन्द -- इसीसे । हवा नहीं, प्रकाश नहीं, विश्वदेव ! इस जीवनका शेष दान क्या निःशेष करके ही ले लिया ! ओःफ-षोड़शी-पंतिदेव, स्वामी ! प्रफुल्ल - प्रफुल्लको क्या आज सचमुच ही छुट्टी दे दी, भइया !
[ प्रथम दृश्य शायद कभी क्षुण्ण और कभी ग्लान हो जाता; मगर अब वह डर नहीं रहा। मिलनका अब विच्छेद नहीं है, अलका, यही अच्छा है। जीवानन्द - उफ ! दुनिया में अब क्या हवा नहीं रही प्रफुल्ल ! प्रफुल्ल - तकलीफ क्या बहुत ज्यादा हो रही है भइया ? क्या डाक्टरको बुलवाऊँ । जीवानन्द - नहीं नहीं, अब डाक्टर-वैद्यकी जरूरत नहीं, प्रफुल्ल । - सिर्फ तुम और अलका, बस ! उफ, कैसा घोर अन्धकार है । सूर्य क्या अस्त हो ! गया भाई ?. प्रफुल्ल - अभी हाल ही हुआ है भइया । जीवानन्द -- इसीसे । हवा नहीं, प्रकाश नहीं, विश्वदेव ! इस जीवनका शेष दान क्या निःशेष करके ही ले लिया ! ओःफ-षोड़शी-पंतिदेव, स्वामी ! प्रफुल्ल - प्रफुल्लको क्या आज सचमुच ही छुट्टी दे दी, भइया !
परकीया नायिका और चुम्बन पुरानी बाते है पर स्थान और ढंग की कल्पना बिहारी की है । विपरीत सुरत आदि के भी उन्होंने चित्र खीचे है जिन पर विचार करना यहाँ अभीष्ट और उपयुक्त प्रतीत नहीं होता । अनुभाव-विधानबिहारी मार्मिक अनुभाव-व्यञ्जना के धनी हैं । भाव को हृदयङ्गम कराने के लिये वे भाँति-भाँति की सहज चेष्टाओं का विधान करके अभीष्ट घटना का सजीव चित्र प्रस्तुत कर देते है जिसमें अनुभावो की रेखाएं इतनी स्पष्ट, उचित एवं उपयुक्त होती हैं कि उनका सौन्दर्य आँखों को बरबस आकृष्ट कर लेता है । अनुभाव की सत्ता अपने लिये नही होती उसके अस्तित्व की सार्थकता मनोभाव विशेष के अभिव्यञ्जन में ही है यह उसके नाम से ही प्रकट है । भाव विशेष का आविर्भाव होने पर ही अस्तित्व में आना अनुः पीछे + भाव - होना) तथा उस भाव का अनुभव कराना ही तो 'अनुभाव' के नामकरण का कारण है। रस के रूप में विपरिणत होने वाले स्थायी भाव की प्रतीति सहृदयों को अनुभावों के द्वारा ही होती है । नायिका के हृद्गत स्थायी भाव के सूचक प्रनुभाव नायक के रतिभाव को जागरित करने के कारण उद्दीपन हो जाते हैं। इसीलिये विश्वनाथ महापात्र ने स्त्रियो के शारीरिक लावण्य विकास से लेकर छोटी मोटी सभी चेष्टाओं को अनुभाव की सीमा में परिगरिगत किया है।' भावों की भाँति अनुभाव भी कायिक, वाचिक सात्त्विक और आहार्य भेद से चार प्रकार के हो सकते है बिहारी ने सभी प्रकार के अनुभावों का मार्मिक चित्ररण कर रसोभूति को सबलता प्रदान की है । कायिक अनुभाव के उदाहरण देखिये - - इत तैं उत उततै इतैं, छिन न कहूँ ठहराति । जक न परति चकरी भई, फिरि आवत फिरि जाति ।।२८।। नायिका की यह अस्थिरता की स्थिति 'श्रोत्सुक्य' की अभिव्यक्ति करती है । इसी प्रकार निम्ननिर्दिष्ट दोहे में 'चपलता' का भाव अनुभावों द्वारा स्पष्टरूप से प्रत्यक्ष हो उठता है - उड़ति गुड़ी लखि लाल की अँगना अंगना माँहि । बौरी लौं दौरी फिर छुप्रत छबीली छहि ॥ मिलन उत्साह में पगी हुई वधू निशा के निकट आते आते किस प्रकार घरेलू, धन्धों को सोत्साह पूरा कर रही है - १ साहित्यदर्पण -३-१४२
परकीया नायिका और चुम्बन पुरानी बाते है पर स्थान और ढंग की कल्पना बिहारी की है । विपरीत सुरत आदि के भी उन्होंने चित्र खीचे है जिन पर विचार करना यहाँ अभीष्ट और उपयुक्त प्रतीत नहीं होता । अनुभाव-विधानबिहारी मार्मिक अनुभाव-व्यञ्जना के धनी हैं । भाव को हृदयङ्गम कराने के लिये वे भाँति-भाँति की सहज चेष्टाओं का विधान करके अभीष्ट घटना का सजीव चित्र प्रस्तुत कर देते है जिसमें अनुभावो की रेखाएं इतनी स्पष्ट, उचित एवं उपयुक्त होती हैं कि उनका सौन्दर्य आँखों को बरबस आकृष्ट कर लेता है । अनुभाव की सत्ता अपने लिये नही होती उसके अस्तित्व की सार्थकता मनोभाव विशेष के अभिव्यञ्जन में ही है यह उसके नाम से ही प्रकट है । भाव विशेष का आविर्भाव होने पर ही अस्तित्व में आना अनुः पीछे + भाव - होना) तथा उस भाव का अनुभव कराना ही तो 'अनुभाव' के नामकरण का कारण है। रस के रूप में विपरिणत होने वाले स्थायी भाव की प्रतीति सहृदयों को अनुभावों के द्वारा ही होती है । नायिका के हृद्गत स्थायी भाव के सूचक प्रनुभाव नायक के रतिभाव को जागरित करने के कारण उद्दीपन हो जाते हैं। इसीलिये विश्वनाथ महापात्र ने स्त्रियो के शारीरिक लावण्य विकास से लेकर छोटी मोटी सभी चेष्टाओं को अनुभाव की सीमा में परिगरिगत किया है।' भावों की भाँति अनुभाव भी कायिक, वाचिक सात्त्विक और आहार्य भेद से चार प्रकार के हो सकते है बिहारी ने सभी प्रकार के अनुभावों का मार्मिक चित्ररण कर रसोभूति को सबलता प्रदान की है । कायिक अनुभाव के उदाहरण देखिये - - इत तैं उत उततै इतैं, छिन न कहूँ ठहराति । जक न परति चकरी भई, फिरि आवत फिरि जाति ।।अट्ठाईस।। नायिका की यह अस्थिरता की स्थिति 'श्रोत्सुक्य' की अभिव्यक्ति करती है । इसी प्रकार निम्ननिर्दिष्ट दोहे में 'चपलता' का भाव अनुभावों द्वारा स्पष्टरूप से प्रत्यक्ष हो उठता है - उड़ति गुड़ी लखि लाल की अँगना अंगना माँहि । बौरी लौं दौरी फिर छुप्रत छबीली छहि ॥ मिलन उत्साह में पगी हुई वधू निशा के निकट आते आते किस प्रकार घरेलू, धन्धों को सोत्साह पूरा कर रही है - एक साहित्यदर्पण -तीन-एक सौ बयालीस
PUBG Mobile Season 14 का ट्रेलर लीक हो गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कहा जा रहा है कि नया पबजी सीज़न जल्द शुरू होने जा रहा है। अब एक YouTuber ने सीज़न 14 का एक टीज़र वीडियो भी शेयर कर दिया है। इस वीडियो को शेयर करने के साथ ही यूट्यूबर ने ये भी बताया कि इसके अपकमिंग सीज़न को 'Spark the Fame' कहा जाएगा। इस वीडियो में प्लेयर्स की स्किन से लेकर गाड़ियों तक को दिखाया गया है। हालांकि अभी तक पबजी मोबाइल ने अपनी तरफ से आधिकारिक तौर पर आगामी सीज़न की कोई भी जानकारी नहीं दी है। PUBG Mobile से संबंधित गेमिंग यूट्यूब चैनल Mr Ghost Gaming द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में 1 मिनट की क्लिप दिखाई गई है। लीक हुई छोटी सी क्लिप को ही सीज़न 14 का ट्रेलर बताया जा रहा है। जो कि मैड मैक्स स्किन वाले वाहनों में रेगिस्तान में कार का पीछा करने के साथ शुरू होता है। इसमें नए प्लेयर स्किन, हेडगियर और आउटफिट भी देखें जा सकते हैं। इसके बाद नए Livik मैप और इसके विभिन्न क्षेत्रों में ज्वालामुखी और कुछ बर्फीले पहाड़ों की कुछ क्लिप दिखाई देती हैं। YouTuber ने यह भी साझा बताया कि इसके आने वाले सीज़न 14 में डायमंड टियर में M24 स्नाइपर राइफल के लिए एक नई स्किन होगी। इसके अलावा 100RP के रिवार्ड में एक हेलमेट स्किन, एक M416 असॉल्ट राइफल स्किन, एक डासिया और एक UAZ स्किन भी शामिल होगी। इसकी रिलीज़ डेट को साझा नहीं किया गया है, लेकिन सीज़न 13 आगामी 12 जुलाई को समाप्त हो रहा है। इसलिए अगले सीज़न को जल्द ही शुरू होना चाहिए। इसके अलावा, पबजी मोबाइल ने ट्वीट किया है कि अगला अपडेट 0. 19. 0 7 जुलाई को जारी किया जाएगा, जो नए लिविक मैप के साथ पेश किया जाएगा। एक अलग ट्वीट में कंपनी ने एक नई यामाहा बाइक को टीज़ किया, जो जल्द ही गेम में दिखाई देगी।
PUBG Mobile Season चौदह का ट्रेलर लीक हो गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कहा जा रहा है कि नया पबजी सीज़न जल्द शुरू होने जा रहा है। अब एक YouTuber ने सीज़न चौदह का एक टीज़र वीडियो भी शेयर कर दिया है। इस वीडियो को शेयर करने के साथ ही यूट्यूबर ने ये भी बताया कि इसके अपकमिंग सीज़न को 'Spark the Fame' कहा जाएगा। इस वीडियो में प्लेयर्स की स्किन से लेकर गाड़ियों तक को दिखाया गया है। हालांकि अभी तक पबजी मोबाइल ने अपनी तरफ से आधिकारिक तौर पर आगामी सीज़न की कोई भी जानकारी नहीं दी है। PUBG Mobile से संबंधित गेमिंग यूट्यूब चैनल Mr Ghost Gaming द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में एक मिनट की क्लिप दिखाई गई है। लीक हुई छोटी सी क्लिप को ही सीज़न चौदह का ट्रेलर बताया जा रहा है। जो कि मैड मैक्स स्किन वाले वाहनों में रेगिस्तान में कार का पीछा करने के साथ शुरू होता है। इसमें नए प्लेयर स्किन, हेडगियर और आउटफिट भी देखें जा सकते हैं। इसके बाद नए Livik मैप और इसके विभिन्न क्षेत्रों में ज्वालामुखी और कुछ बर्फीले पहाड़ों की कुछ क्लिप दिखाई देती हैं। YouTuber ने यह भी साझा बताया कि इसके आने वाले सीज़न चौदह में डायमंड टियर में Mचौबीस स्नाइपर राइफल के लिए एक नई स्किन होगी। इसके अलावा एक सौRP के रिवार्ड में एक हेलमेट स्किन, एक Mचार सौ सोलह असॉल्ट राइफल स्किन, एक डासिया और एक UAZ स्किन भी शामिल होगी। इसकी रिलीज़ डेट को साझा नहीं किया गया है, लेकिन सीज़न तेरह आगामी बारह जुलाई को समाप्त हो रहा है। इसलिए अगले सीज़न को जल्द ही शुरू होना चाहिए। इसके अलावा, पबजी मोबाइल ने ट्वीट किया है कि अगला अपडेट शून्य. उन्नीस. शून्य सात जुलाई को जारी किया जाएगा, जो नए लिविक मैप के साथ पेश किया जाएगा। एक अलग ट्वीट में कंपनी ने एक नई यामाहा बाइक को टीज़ किया, जो जल्द ही गेम में दिखाई देगी।
प्रयागराजः उमेश पाल हत्याकांड मामले में एसटीएफ और पुलिस ने शनिवार देर रात तीन युवकों को मुस्लिम बोर्डिंग से उठा लिया. तीनों युवक हत्याकांड में शामिल शूटर गुलाम के करीबी बताये जा रहे हैं. तीनों ही गुलाम के संपर्क में थे. एसटीएफ की कार्रवाई से मुस्लिम बोर्डिंग में हड़कंप मच गया. तीनों से अज्ञात स्थान पर पूछताछ की जा रही है. उमेश पाल हत्याकांड के खुलासे के लिये एसटीएफ और पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. इसी कड़ी में एसटीएफ पुलिस के ज्वाइंट ऑपरेशन में मुस्लिम बोर्डिंग में छापेमारी की गयी. यहां से तीन युवकों को उठाया गया. पहले तो बोर्डिंग में रहने वालों ने विरोध की कोशिश की लेकिन भारी पुलिस बल को देखकर वहां शांति बनी रही. इसके अलावा जिस गुड्डू मुस्लिम को पुलिस ने एफआईआर में नामजद किया है, उसका आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है. पता चला है कि गुड्डू मुस्लिम यूपी और बिहार के कई माफियाओं का करीबी है. इसके अलावा गुड्डू के करीबी संबंध पूर्वांचल के एक बाहुबली पूर्व सांसद और फैजाबाद के बाहुबली विधायक से भी रहे हैं. गुड्डू मुस्लिम को बम बनाने का एक्सपर्ट माना जाता है. उसने ही उमेश पाल हत्याकांड के दौरान बमबाजी भी की थी. करीब 15 वर्ष पहले गुड्डू को गोरखपुर पुलिस ने पटना जेल के बाहर गिरफ्तार किया था. बाद में माफिया अतीक अहमद ने उसकी जमानत कराई थी. गुड्डू रियल एस्टेट के धंधे में शामिल था. उसके लखनऊ के ओसीआर विधायक निवास में भी लंबे समय तक रहने की जानकारी मिली है. गुड्डू मुस्लिम हत्याकांड के दौरान सफेद शर्ट पहने था. पहले तो उसने दहशत फैलाने के लिये बम के धमाके किये. इसके बाद उमेश पाल को बम से निशाना बनाने की कोशिश की. गुड्डू मुस्लिम जिस तरह से बम धमाके कर रहा था, उससे पूरे धूमनगंज क्षेत्र में दहशत फैल गयी थी. पुलिस गुड्डू की तलाश के तेजी से छापेमारी कर रही है.
प्रयागराजः उमेश पाल हत्याकांड मामले में एसटीएफ और पुलिस ने शनिवार देर रात तीन युवकों को मुस्लिम बोर्डिंग से उठा लिया. तीनों युवक हत्याकांड में शामिल शूटर गुलाम के करीबी बताये जा रहे हैं. तीनों ही गुलाम के संपर्क में थे. एसटीएफ की कार्रवाई से मुस्लिम बोर्डिंग में हड़कंप मच गया. तीनों से अज्ञात स्थान पर पूछताछ की जा रही है. उमेश पाल हत्याकांड के खुलासे के लिये एसटीएफ और पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. इसी कड़ी में एसटीएफ पुलिस के ज्वाइंट ऑपरेशन में मुस्लिम बोर्डिंग में छापेमारी की गयी. यहां से तीन युवकों को उठाया गया. पहले तो बोर्डिंग में रहने वालों ने विरोध की कोशिश की लेकिन भारी पुलिस बल को देखकर वहां शांति बनी रही. इसके अलावा जिस गुड्डू मुस्लिम को पुलिस ने एफआईआर में नामजद किया है, उसका आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है. पता चला है कि गुड्डू मुस्लिम यूपी और बिहार के कई माफियाओं का करीबी है. इसके अलावा गुड्डू के करीबी संबंध पूर्वांचल के एक बाहुबली पूर्व सांसद और फैजाबाद के बाहुबली विधायक से भी रहे हैं. गुड्डू मुस्लिम को बम बनाने का एक्सपर्ट माना जाता है. उसने ही उमेश पाल हत्याकांड के दौरान बमबाजी भी की थी. करीब पंद्रह वर्ष पहले गुड्डू को गोरखपुर पुलिस ने पटना जेल के बाहर गिरफ्तार किया था. बाद में माफिया अतीक अहमद ने उसकी जमानत कराई थी. गुड्डू रियल एस्टेट के धंधे में शामिल था. उसके लखनऊ के ओसीआर विधायक निवास में भी लंबे समय तक रहने की जानकारी मिली है. गुड्डू मुस्लिम हत्याकांड के दौरान सफेद शर्ट पहने था. पहले तो उसने दहशत फैलाने के लिये बम के धमाके किये. इसके बाद उमेश पाल को बम से निशाना बनाने की कोशिश की. गुड्डू मुस्लिम जिस तरह से बम धमाके कर रहा था, उससे पूरे धूमनगंज क्षेत्र में दहशत फैल गयी थी. पुलिस गुड्डू की तलाश के तेजी से छापेमारी कर रही है.
आपका स्वागत है! बेहतर अनुभव के लिये कृपया लॉग इन करें या रजिस्टर करें। पुरानी वेबसाइट में किया गया रजिस्ट्रेशन नई वेबसाइट में मान्य नहीं होगा। नई वेबसाइट का इस्तेमाल करने के लिये नए एवं पुराने अभ्यर्थियो को दोबारा रजिस्ट्रेशन करना होगा। यदि आपने अभी तक अपना अकाउंट नहीं बनाया है, तो कृपया यहाँ रजिस्टर करें।
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गुरुग्राम के बादशाहपुर सोसाइटी में गार्ड के साथ मारपीट करने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे। नोएडा से प्रकाश में आए मामले अब जिले में भी देखे जा रहे है। सेक्टर-69 ट्यूलिप वॉयलेट में बुधवार दोपहर को सोसाइटी निवासी महिला ने सुरक्षाकर्मी महिला के साथ झगड़ा कर दिया। झगड़ा इतना बढ़ा कि महिला ने एक डंडे से उसके साथ मारपीट करनी शुरू कर दी। सुरक्षाकर्मी महिला को सोसाइटी निवासी और अन्य सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह बचाया। सोसाइटी निवासियों ने इसकी शिकायत पुलिस को भी दी। ट्यूलिप वॉयलेट के प्रधान आरके यादव ने बताया कि महिला पहले भी सोसाइटी में कई बार हंगामा कर चुकी है। इससे पहले आरोपी महिला ने घर में काम करने वाली महिला पर चोरी का आरोप लगाकर झगड़ा किया था। इस मामले की शिकायत पुलिस को दी तो आरोपी महिला ने सुरक्षाकर्मी की कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधक को भी झूठे केस में फंसाने की धमकी देने लगी। बादशाहपुर थाना प्रभारी मदन लाल ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद पीड़िता की मेडिकल जांच कराई गई थी। मामले की जांच जारी है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
गुरुग्राम के बादशाहपुर सोसाइटी में गार्ड के साथ मारपीट करने के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे। नोएडा से प्रकाश में आए मामले अब जिले में भी देखे जा रहे है। सेक्टर-उनहत्तर ट्यूलिप वॉयलेट में बुधवार दोपहर को सोसाइटी निवासी महिला ने सुरक्षाकर्मी महिला के साथ झगड़ा कर दिया। झगड़ा इतना बढ़ा कि महिला ने एक डंडे से उसके साथ मारपीट करनी शुरू कर दी। सुरक्षाकर्मी महिला को सोसाइटी निवासी और अन्य सुरक्षाकर्मियों ने किसी तरह बचाया। सोसाइटी निवासियों ने इसकी शिकायत पुलिस को भी दी। ट्यूलिप वॉयलेट के प्रधान आरके यादव ने बताया कि महिला पहले भी सोसाइटी में कई बार हंगामा कर चुकी है। इससे पहले आरोपी महिला ने घर में काम करने वाली महिला पर चोरी का आरोप लगाकर झगड़ा किया था। इस मामले की शिकायत पुलिस को दी तो आरोपी महिला ने सुरक्षाकर्मी की कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधक को भी झूठे केस में फंसाने की धमकी देने लगी। बादशाहपुर थाना प्रभारी मदन लाल ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद पीड़िता की मेडिकल जांच कराई गई थी। मामले की जांच जारी है। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
Google ने पिछले साल नवंबर में पहली बार अनुवाद ठीक करने के लिए neural machine translation को लॉन्च किया था. लेकिन तब ये केवल 8 भाषाओं को ही सपोर्ट करता था. अब गूगल ने अनुवाद को और आसान बनाने के लिए इसे कुछ और भाषाओें के लिए लॉन्च किया है. अब ये हिंदी, रूसी और वियतनामी अनुवादों को आसान बनाएगा. कंपनी ने बताया कि न्यूरल मशीन ट्रांसलेशन किसी एक शब्द की जगह पूरे वाक्य को ही ट्रांसलेट करता है. पहले की अनुवाद प्रक्रिया में केवल शब्दों के अनुवाद की वजह से पूरे वाक्य का अर्थ कभी-कभी गलत आ जाता था. बहरहाल, इसके बाद से अब आपको पहले से बेहतर अनुवाद मिलेगा. गूगल ने अपने बयान में कहा कि ये पहले की तकनीक से कहीं ज्यादा बेहतर है क्योंकि हम अनुवाद करते कभी भी एक शब्द का अनुवाद नहीं करते बल्कि पूरे वाक्य का अनुवाद करते हैं. नए सपोर्ट में हिंदी के जुड़ने के साथ ही देश में आने वाले पर्यटकों के लिए ये बहुत फायदेमंद रहेगा.
Google ने पिछले साल नवंबर में पहली बार अनुवाद ठीक करने के लिए neural machine translation को लॉन्च किया था. लेकिन तब ये केवल आठ भाषाओं को ही सपोर्ट करता था. अब गूगल ने अनुवाद को और आसान बनाने के लिए इसे कुछ और भाषाओें के लिए लॉन्च किया है. अब ये हिंदी, रूसी और वियतनामी अनुवादों को आसान बनाएगा. कंपनी ने बताया कि न्यूरल मशीन ट्रांसलेशन किसी एक शब्द की जगह पूरे वाक्य को ही ट्रांसलेट करता है. पहले की अनुवाद प्रक्रिया में केवल शब्दों के अनुवाद की वजह से पूरे वाक्य का अर्थ कभी-कभी गलत आ जाता था. बहरहाल, इसके बाद से अब आपको पहले से बेहतर अनुवाद मिलेगा. गूगल ने अपने बयान में कहा कि ये पहले की तकनीक से कहीं ज्यादा बेहतर है क्योंकि हम अनुवाद करते कभी भी एक शब्द का अनुवाद नहीं करते बल्कि पूरे वाक्य का अनुवाद करते हैं. नए सपोर्ट में हिंदी के जुड़ने के साथ ही देश में आने वाले पर्यटकों के लिए ये बहुत फायदेमंद रहेगा.
सहारनपुर, लोकसभा चुनाव के लिये समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल ने संयुक्त चुनाव प्रचार का आगाज सहारनपुर के देवबंद से कर दिया। यूपी मे महागठबंधन के तहत अपनी पहली चुनावी रैली करते हुए बीएसपी अध्यक्ष मायावती और एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर जमकर हमला बोला। दोनों ही नेताओं ने लोगों से अपील की है कि महागठबंधन का वोट बंटने न दें। एक ओर जहां मायावती ने कहा कि महागठबंधन की महारैली में उमड़ी भीड़ के बारे में जब पीएम मोदी को जानकारी मिलेगी तो वह घबराकर पगला जाएंगे और 'सराब-सराब' करने लगेंगे, तो वहीं अखिलेश ने कहा कि 'सराब' बताने वाले लोग खुद सत्ता के नशे में चूर हैं। अखिलेश यादव ने 2019 के लोकसभा चुनाव को इतिहास बनाने का चुनाव बताया। उन्होने कहा कि यहां ऐसे भी नेता आए होंगे जो नफरत के अलावा कुछ नहीं बोले होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को बांटकर अंग्रेजों ने राज किया था, उससे ज्यादा देश और समाज को बांटने का काम बीजेपी के लोग हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी के लोगों को नवरात्रि के दिन यह संकल्प करना चाहिए कि झूठ नहीं बोलेंगे। गोरखपुर, फूलपुर और कैराना में मिली जीत की मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी गठबंधन से घबरा गई है। उन्होंने लोगों से कहा, 'एक भी वोट घटने न पाए, बंटने न पाए'।
सहारनपुर, लोकसभा चुनाव के लिये समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल ने संयुक्त चुनाव प्रचार का आगाज सहारनपुर के देवबंद से कर दिया। यूपी मे महागठबंधन के तहत अपनी पहली चुनावी रैली करते हुए बीएसपी अध्यक्ष मायावती और एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार पर जमकर हमला बोला। दोनों ही नेताओं ने लोगों से अपील की है कि महागठबंधन का वोट बंटने न दें। एक ओर जहां मायावती ने कहा कि महागठबंधन की महारैली में उमड़ी भीड़ के बारे में जब पीएम मोदी को जानकारी मिलेगी तो वह घबराकर पगला जाएंगे और 'सराब-सराब' करने लगेंगे, तो वहीं अखिलेश ने कहा कि 'सराब' बताने वाले लोग खुद सत्ता के नशे में चूर हैं। अखिलेश यादव ने दो हज़ार उन्नीस के लोकसभा चुनाव को इतिहास बनाने का चुनाव बताया। उन्होने कहा कि यहां ऐसे भी नेता आए होंगे जो नफरत के अलावा कुछ नहीं बोले होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को बांटकर अंग्रेजों ने राज किया था, उससे ज्यादा देश और समाज को बांटने का काम बीजेपी के लोग हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी के लोगों को नवरात्रि के दिन यह संकल्प करना चाहिए कि झूठ नहीं बोलेंगे। गोरखपुर, फूलपुर और कैराना में मिली जीत की मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी गठबंधन से घबरा गई है। उन्होंने लोगों से कहा, 'एक भी वोट घटने न पाए, बंटने न पाए'।
लेखक : पुस्तक का साइज़ : कुल पृष्ठ : श्रेणी : लेखकों के बारे में अधिक जानकारी : पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश(Click to expand) 12 - चाह बालक को खुद खाना है, आप उसे खिलाइए मत। बालक को खुद नहाना है, आप उसे नहलाइए मत। बालक को खुद चलना है, आप उसका हाथ पकड़िए मत। बालक को खुद गाना है, आप उससे गवाइए मत। बालक को खुद खेलना है, आप उसके बीच में आइए मत। क्योंकि बालक स्वावलम्बन चाहता है। 13 - क्या इतना भी नहीं करेंगे? क्लब में जाना छोड़कर बालक को बगीचे में ले जाइए। गपशप करने के बदले बालक को चिडियाघर दिखाने ले जाइए। अखबार पढ़ना छोड़कर बालक की बातें सुनिए। रात सुलाते समय बालक को बढ़िया कहानियां सुनाइए। बालक के हर काम में गहरी दिलचस्पी दिखाइए। 14 - नौकर की दया सचमुच वह घर बड़भागी घर है। जहां पति-पत्नी प्रेमपूर्वक रहते हें। जिसके आंगन में गुलाब के फूल के से बालक खेलते-कूदते हैं। जहां माता-पिता बालकों को अपने प्राणों की तरह सहेजते हैं। जहां बालक बड़ों से आदर पाते हैं। और जहां बालकों को घर के नौकरों की दया पर जीना नहीं पड़ता है। सचमुच वह घर एक बड़भागी घर है। 15 - आत्म सुधार बालक का सम्मान इसलिए कीजिए, कि हममें आत्म-सम्मान की भावना जागे। बालक को डाटिए-डपटिए मत, जिससे डांटने-डपटने की हमारी गलत आदत छूटने लगे। बालक को मारिए-पीटिए मत, जिससे मारने-पीटने की हमारी पशु-वृत्ति नष्ट हो सके। इस तरह अपने को सुधारकर ही हम अपने बालकों का सही विकास कर सकेंगे। 16 - भय और लालच मां-बाप और शिक्षक समझ लें कि मारने से या ललचाने से बालक सुधर नहीं सकते, उलटे बे बिगड़ते हैं। मारने से बालक में गुंडापन आ जाता है। ललचाने से बालक लालची बन जाता है। भय और लालच से बालक बेशरम, ढीठ और दीन-हीन बन जाता है।
लेखक : पुस्तक का साइज़ : कुल पृष्ठ : श्रेणी : लेखकों के बारे में अधिक जानकारी : पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश बारह - चाह बालक को खुद खाना है, आप उसे खिलाइए मत। बालक को खुद नहाना है, आप उसे नहलाइए मत। बालक को खुद चलना है, आप उसका हाथ पकड़िए मत। बालक को खुद गाना है, आप उससे गवाइए मत। बालक को खुद खेलना है, आप उसके बीच में आइए मत। क्योंकि बालक स्वावलम्बन चाहता है। तेरह - क्या इतना भी नहीं करेंगे? क्लब में जाना छोड़कर बालक को बगीचे में ले जाइए। गपशप करने के बदले बालक को चिडियाघर दिखाने ले जाइए। अखबार पढ़ना छोड़कर बालक की बातें सुनिए। रात सुलाते समय बालक को बढ़िया कहानियां सुनाइए। बालक के हर काम में गहरी दिलचस्पी दिखाइए। चौदह - नौकर की दया सचमुच वह घर बड़भागी घर है। जहां पति-पत्नी प्रेमपूर्वक रहते हें। जिसके आंगन में गुलाब के फूल के से बालक खेलते-कूदते हैं। जहां माता-पिता बालकों को अपने प्राणों की तरह सहेजते हैं। जहां बालक बड़ों से आदर पाते हैं। और जहां बालकों को घर के नौकरों की दया पर जीना नहीं पड़ता है। सचमुच वह घर एक बड़भागी घर है। पंद्रह - आत्म सुधार बालक का सम्मान इसलिए कीजिए, कि हममें आत्म-सम्मान की भावना जागे। बालक को डाटिए-डपटिए मत, जिससे डांटने-डपटने की हमारी गलत आदत छूटने लगे। बालक को मारिए-पीटिए मत, जिससे मारने-पीटने की हमारी पशु-वृत्ति नष्ट हो सके। इस तरह अपने को सुधारकर ही हम अपने बालकों का सही विकास कर सकेंगे। सोलह - भय और लालच मां-बाप और शिक्षक समझ लें कि मारने से या ललचाने से बालक सुधर नहीं सकते, उलटे बे बिगड़ते हैं। मारने से बालक में गुंडापन आ जाता है। ललचाने से बालक लालची बन जाता है। भय और लालच से बालक बेशरम, ढीठ और दीन-हीन बन जाता है।
मनीष सिसोदिया ने सीबीआई के सामने पेश होने के लिए 1 हफ्ते का मांगा समय. . उत्तराखंड में भाजपा विधायकों और कार्यकर्ताओं की दिल की धड़कनें एक बार फिर हुई तेज, पढ़ें पूरी खबर . . जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली में नॉन टीचिंग पदों पर निकली 388 वैकेंसी. . उत्तर कोरिया ने एक बार फिर से बैलिस्टिक मिसाइल का किया टेस्ट, पढ़ें पूरी खबर . . हरिद्वार में प्रशासन ने महाशिवरात्रि के दिन शोभा यात्रा की नहीं दी अनुमति. .
मनीष सिसोदिया ने सीबीआई के सामने पेश होने के लिए एक हफ्ते का मांगा समय. . उत्तराखंड में भाजपा विधायकों और कार्यकर्ताओं की दिल की धड़कनें एक बार फिर हुई तेज, पढ़ें पूरी खबर . . जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली में नॉन टीचिंग पदों पर निकली तीन सौ अठासी वैकेंसी. . उत्तर कोरिया ने एक बार फिर से बैलिस्टिक मिसाइल का किया टेस्ट, पढ़ें पूरी खबर . . हरिद्वार में प्रशासन ने महाशिवरात्रि के दिन शोभा यात्रा की नहीं दी अनुमति. .
इंदौर की लापता कांग्रेस नेता ट्विंकल डांगरे की तलाश में पुलिस ने गुरुवार को अवंतिका नगर में खुदाई शुरू की है. शक है कि ट्विंकल की लाश यहीं कहीं दफन है. ट्विंकल के परिवार ने इलाके के बीजेपी नेता जगदीश करोतिया और उसके परिवार पर हत्या का आरोप लगाया था. ट्विंकल डांगरे करीब ढाई साल पहले रहस्यमय हालात में लापता हो गईं थीं. वे 16 अक्टूबर 2016 को नाश्ते के लिए पोहा लेने घर से निकली थी लेकिन लौटकर नहीं आई. परिवार ने उन्हें हरसंभव ठिकाने पर तलाशा लेकिन ट्विंकल का कहीं पता नहीं चल पाया. घरवालों के मुताबिक लापता होने के दो दिन बाद ट्विंकल का फोन आया था कि ये लोग मुझे टॉयलेट सीट के नीचे ज़िंदा गाड़ रहे हैं. फोन पर उन्होंने लोकेशन बाणगंगा इलाका बताया था. बेटी की निशानदेही पर परिवार ने पूरा इलाका छान मारा लेकिन ट्विंकल का कहीं पता नहीं चल पाया. बाद में उनका फोन भी बंद हो गया. मामला पुलिस और फिर कोर्ट में पहुंचा. ट्विंकल के परिवार ने इलाके के बीजेपी के पूर्व पार्षद जगदीश करोतिया और उनके परिवार पर शक़ ज़ाहिर किया. करोतिया परिवार इन्ही के मोहल्ले में रहता है और दोनों परिवारों के बीच विवाद चल रहा था. ट्विंकल भी पहले बीजेपी में थी. कुछ दिन पहले ही बीजेपी छोड़कर वह कांग्रेस में शामिल हुई थी. शक़ की वजह यह थी कि ट्विंकल ने जो लोकेशन बताई थी उसी इलाके में जगदीश करोतिया की भी फैक्ट्री है. ट्विंकल का कहीं पता नहीं चलने पर मामला अदालत गया और कोर्ट ने पुलिस को तलब किया. पुलिस को हर 15 दिन में इस मामले की रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया. पुलिस ने SIT का गठन किया. जांच के दौरान मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने जगदीश करोतिया और उनके परिवार के सदस्यों को गिरफ़्तार कर लिया. संदेहियों की निशानदेही पर सांवेर रोड पर एक फैक्ट्री में गुरुवार सुबह से खुदाई शुरू की गई. अदालत के आदेश के बाद कई संदेहियों के बीआईओएस टेस्ट भी हुए हैं. टेस्ट रिपोर्ट के बाद खुदाई शुरू की गई लेकिन अभी तक ट्विंकल की लाश नहीं मिल पाई है. .
इंदौर की लापता कांग्रेस नेता ट्विंकल डांगरे की तलाश में पुलिस ने गुरुवार को अवंतिका नगर में खुदाई शुरू की है. शक है कि ट्विंकल की लाश यहीं कहीं दफन है. ट्विंकल के परिवार ने इलाके के बीजेपी नेता जगदीश करोतिया और उसके परिवार पर हत्या का आरोप लगाया था. ट्विंकल डांगरे करीब ढाई साल पहले रहस्यमय हालात में लापता हो गईं थीं. वे सोलह अक्टूबर दो हज़ार सोलह को नाश्ते के लिए पोहा लेने घर से निकली थी लेकिन लौटकर नहीं आई. परिवार ने उन्हें हरसंभव ठिकाने पर तलाशा लेकिन ट्विंकल का कहीं पता नहीं चल पाया. घरवालों के मुताबिक लापता होने के दो दिन बाद ट्विंकल का फोन आया था कि ये लोग मुझे टॉयलेट सीट के नीचे ज़िंदा गाड़ रहे हैं. फोन पर उन्होंने लोकेशन बाणगंगा इलाका बताया था. बेटी की निशानदेही पर परिवार ने पूरा इलाका छान मारा लेकिन ट्विंकल का कहीं पता नहीं चल पाया. बाद में उनका फोन भी बंद हो गया. मामला पुलिस और फिर कोर्ट में पहुंचा. ट्विंकल के परिवार ने इलाके के बीजेपी के पूर्व पार्षद जगदीश करोतिया और उनके परिवार पर शक़ ज़ाहिर किया. करोतिया परिवार इन्ही के मोहल्ले में रहता है और दोनों परिवारों के बीच विवाद चल रहा था. ट्विंकल भी पहले बीजेपी में थी. कुछ दिन पहले ही बीजेपी छोड़कर वह कांग्रेस में शामिल हुई थी. शक़ की वजह यह थी कि ट्विंकल ने जो लोकेशन बताई थी उसी इलाके में जगदीश करोतिया की भी फैक्ट्री है. ट्विंकल का कहीं पता नहीं चलने पर मामला अदालत गया और कोर्ट ने पुलिस को तलब किया. पुलिस को हर पंद्रह दिन में इस मामले की रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया. पुलिस ने SIT का गठन किया. जांच के दौरान मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने जगदीश करोतिया और उनके परिवार के सदस्यों को गिरफ़्तार कर लिया. संदेहियों की निशानदेही पर सांवेर रोड पर एक फैक्ट्री में गुरुवार सुबह से खुदाई शुरू की गई. अदालत के आदेश के बाद कई संदेहियों के बीआईओएस टेस्ट भी हुए हैं. टेस्ट रिपोर्ट के बाद खुदाई शुरू की गई लेकिन अभी तक ट्विंकल की लाश नहीं मिल पाई है. .
दमिश्कः सीरिया के दीर अल-जौर प्रांत में सीरियाई सेना ने इस्लामिक स्टेट (आईएस) के एक हमले को नाकाम कर कम से कम 150 आतंकवादियों को मार गिराया। दीर अल-जौर के ग्रामीण इलाके ताल ब्रुक में सेना ने सैन्य ठिकानों पर आईएस के हमलों का मुकाबला किया। दीर-अल जौर के अधिकांश ग्रामीण इलाकों पर आईएस का नियंत्रण है। केवल इस शहर पर आईएस का नियंत्रण नहीं है और यह अब भी सरकार के नियंत्रण में है, जिसे आईएस ने चारों तरफ से घेर रखा है और सरकारी ठिकानों पर बार-बार हमले करते हैं। रूसी विमान समय-समय पर इस शहर के लोगों के लिए सहायता सामग्री तथा खाने का सामान गिराते रहे हैं।
दमिश्कः सीरिया के दीर अल-जौर प्रांत में सीरियाई सेना ने इस्लामिक स्टेट के एक हमले को नाकाम कर कम से कम एक सौ पचास आतंकवादियों को मार गिराया। दीर अल-जौर के ग्रामीण इलाके ताल ब्रुक में सेना ने सैन्य ठिकानों पर आईएस के हमलों का मुकाबला किया। दीर-अल जौर के अधिकांश ग्रामीण इलाकों पर आईएस का नियंत्रण है। केवल इस शहर पर आईएस का नियंत्रण नहीं है और यह अब भी सरकार के नियंत्रण में है, जिसे आईएस ने चारों तरफ से घेर रखा है और सरकारी ठिकानों पर बार-बार हमले करते हैं। रूसी विमान समय-समय पर इस शहर के लोगों के लिए सहायता सामग्री तथा खाने का सामान गिराते रहे हैं।
दुबई. आईपीएल के 13 वें सीजन का चौथा मैच चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) और राजस्थान रॉयल्स (आरआर) के बीच शारजाह में खेला गया। मैच में राजस्थान की ओर से संजू सैमसन ने आतिशी पारी खेली। संजू सैमसन ने 32 गेंद में 74 रन बनाए। उन्होंने मैच में 19 गेंद पर फिफ्टी जमाई। यह इस आईपीएल की सबसे तेज फिफ्टी है। दुबई. आईपीएल के 13 वें सीजन का चौथा मैच चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) और राजस्थान रॉयल्स (आरआर) के बीच शारजाह में खेला जा रहा है। इस मैच में राजस्थान की तरफ से यशस्वी जायसवाल ने डेब्यू किया। यशस्वी का आईपीएल तक का सफर आसान नहीं रहा। एक समय था, जब उनके पास बल्ला लेने तक के पैसे नहीं थे। कभी उन्होंने सड़कों पर पानी पुरी बेची तो कभी उन्हें भूखा ही सोना पड़ा। आईपीएल (IPL) के तीसरे मुकाबले में विराट कोहली (Virat Kohli) की रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (Royal Challengers Bangalore) ने सनराइजर्स हैदराबाद (Sunrisers Hyderabad) को 10 रन से हराया। इसी के साथ आरसीबी ने टूर्नामेंट में पहली जीत हासिल कर ली। मैच में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में आरसीबी ने शानदार प्रदर्शन किया। आरसीबी की जीत में युवा जोश देखने को मिला। ऐसे में आइए जानते हैं उन पांच पांडवों के बारे में जिन्होंने टीम की जीत में निभाई अहम भूमिका। दुबई. आईपीएल के तीसरे मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने सोमवार को सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) को 10 रन से मात दी। मैच में शानदार प्रदर्शन करने के लिए गेंदबाज यजुवेंद्र चहल को मैन ऑफ द मैच मिला। मैच के बाद यजुवेंद्र चहल ने गेंदबाजी करते एक फोटो शेयर की। इस पर उनकी मंगेतर धनाश्री वर्मा ने अपना रिएक्शन दिया। इस पर लोग तरह तरह के कमेंट कर रहे हैं। स्पोर्ट्स डेस्कः एक्ट्रेस पायल घोष इन दिनों चर्चा में है। सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड के बाद मामले ने नेपोटिज्म से लेकर ड्रग्स और मी टू जैसे मामलों में तेजी ला दी है। इस केस की वजह से बॉलीवुड के कई डार्क साइड्स सामने आने लगे हैं। इसी बीच अचानक एक्ट्रेस पायल घोष ने फिल्मेमकर अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा दिया। उन्होने अनुराग पर काफी संगीन आरोप लगाए जिसके बाद हड़कंप मच गया। इस क्रम में अनुराग के समर्थन में सामने आए फिल्ममेकर आनंद कुमार ने पायल के इतिहास के बहाने मामले में क्रिकेटर इरफ़ान पठान को भी घसीट लिया। आनंद कुमार ने एक ट्वीट किया, जिसमें पायल का एक पुराना ट्वीट है, जिसमें एक्ट्रेस ने इस क्रिकेटर पर भी यौन उत्पीड़न का और प्यार में धोखा देने का आरोप लगाया था। आईपीएल के 13 वें सीजन के चौथे मैच में राजस्थान रॉयल्स (आरआर) ने चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) को 16 रन से मात दी। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी राजस्थान ने तय ओवरों में 216 रन बनाए। जवाब में चेन्नई सिर्फ 200 रन ही बना पाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 सितंबर को फिट इंडिया मूवमेंट की पहली वर्षगांठ के मौके पर फिटनेस से जुड़े लोगों से बात करेंगे। इस बातचीत में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और अभिनेता मिलिंद सोमण के अलावा और लोग भी हिस्सा लेंगे जिनकी फिटनेस से लोग प्रेरित होते हैं। वीडियो डेस्क। पीएम मोदी(PM MODI) 24 सितंबर टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली से बात करेंगे। दरअसल 24 सितंबर को फिट इंडिया मूवमेंट की पहली वर्षगांठ है। इस उपलक्ष्य में एक राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन फिट इंडिया संवाद के दौरान पीएम मोदी फिटनेस के लिए प्रभावित करने वाले लोगों के साथ बातचीत करेंगे। वीडियो डेस्क। आईपीएल (IPL2020) में सोमवार को खेले गए तीसरे मुकाबले में विराट कोहली की रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी- RCB) ने सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) को 10 रन से मात दी। 164 रन के जवाब में उतरी डेविड वॉर्नर की सेना 19. 4 ओवर में सिर्फ 153 रन ही बना सकी। हैदराबाद के कप्तान डेविड वार्नर ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी आरसीबी की शुरुआत अच्छी रही। टीम ने निर्धारित 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 163 रन बनाए। टीम की ओर से सबसे ज्यादा रन देवदत्त पडिकल ने 56 (42 गेंद) और एबी डिविलियर्स ने 51 रन (30 गेंद) बनाए। हैदराबाद की ओर से जॉनी बेयरस्टो ने 43 गेंद पर 61 रन की पारी खेली। उन्होंने पारी में 6 चौके और 2 छक्के भी लगाए। उनके अलावा मनीष पांडेय ने 34 रन (33 गेंद) और प्रियम गर्ग ने 12 रन बनाए। आरसीबी की ओर से यजुवेंद्र चहल ने शानदार गेंदबाजी की। उन्होंने 18 रन देकर 3 विकेट लिए। चहल के अलावा शिवम दुबे और नवदीप सैनी ने 2-2 विकेट लिए। आखिर क्या रहा इस मैच का टरनिंग पाइंट हमारे क्रिकेट एक्सपर्ट अमिताभ वर्मा से जाने।
दुबई. आईपीएल के तेरह वें सीजन का चौथा मैच चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच शारजाह में खेला गया। मैच में राजस्थान की ओर से संजू सैमसन ने आतिशी पारी खेली। संजू सैमसन ने बत्तीस गेंद में चौहत्तर रन बनाए। उन्होंने मैच में उन्नीस गेंद पर फिफ्टी जमाई। यह इस आईपीएल की सबसे तेज फिफ्टी है। दुबई. आईपीएल के तेरह वें सीजन का चौथा मैच चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच शारजाह में खेला जा रहा है। इस मैच में राजस्थान की तरफ से यशस्वी जायसवाल ने डेब्यू किया। यशस्वी का आईपीएल तक का सफर आसान नहीं रहा। एक समय था, जब उनके पास बल्ला लेने तक के पैसे नहीं थे। कभी उन्होंने सड़कों पर पानी पुरी बेची तो कभी उन्हें भूखा ही सोना पड़ा। आईपीएल के तीसरे मुकाबले में विराट कोहली की रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने सनराइजर्स हैदराबाद को दस रन से हराया। इसी के साथ आरसीबी ने टूर्नामेंट में पहली जीत हासिल कर ली। मैच में बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में आरसीबी ने शानदार प्रदर्शन किया। आरसीबी की जीत में युवा जोश देखने को मिला। ऐसे में आइए जानते हैं उन पांच पांडवों के बारे में जिन्होंने टीम की जीत में निभाई अहम भूमिका। दुबई. आईपीएल के तीसरे मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने सोमवार को सनराइजर्स हैदराबाद को दस रन से मात दी। मैच में शानदार प्रदर्शन करने के लिए गेंदबाज यजुवेंद्र चहल को मैन ऑफ द मैच मिला। मैच के बाद यजुवेंद्र चहल ने गेंदबाजी करते एक फोटो शेयर की। इस पर उनकी मंगेतर धनाश्री वर्मा ने अपना रिएक्शन दिया। इस पर लोग तरह तरह के कमेंट कर रहे हैं। स्पोर्ट्स डेस्कः एक्ट्रेस पायल घोष इन दिनों चर्चा में है। सुशांत सिंह राजपूत के सुसाइड के बाद मामले ने नेपोटिज्म से लेकर ड्रग्स और मी टू जैसे मामलों में तेजी ला दी है। इस केस की वजह से बॉलीवुड के कई डार्क साइड्स सामने आने लगे हैं। इसी बीच अचानक एक्ट्रेस पायल घोष ने फिल्मेमकर अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा दिया। उन्होने अनुराग पर काफी संगीन आरोप लगाए जिसके बाद हड़कंप मच गया। इस क्रम में अनुराग के समर्थन में सामने आए फिल्ममेकर आनंद कुमार ने पायल के इतिहास के बहाने मामले में क्रिकेटर इरफ़ान पठान को भी घसीट लिया। आनंद कुमार ने एक ट्वीट किया, जिसमें पायल का एक पुराना ट्वीट है, जिसमें एक्ट्रेस ने इस क्रिकेटर पर भी यौन उत्पीड़न का और प्यार में धोखा देने का आरोप लगाया था। आईपीएल के तेरह वें सीजन के चौथे मैच में राजस्थान रॉयल्स ने चेन्नई सुपर किंग्स को सोलह रन से मात दी। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी राजस्थान ने तय ओवरों में दो सौ सोलह रन बनाए। जवाब में चेन्नई सिर्फ दो सौ रन ही बना पाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चौबीस सितंबर को फिट इंडिया मूवमेंट की पहली वर्षगांठ के मौके पर फिटनेस से जुड़े लोगों से बात करेंगे। इस बातचीत में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और अभिनेता मिलिंद सोमण के अलावा और लोग भी हिस्सा लेंगे जिनकी फिटनेस से लोग प्रेरित होते हैं। वीडियो डेस्क। पीएम मोदी चौबीस सितंबर टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली से बात करेंगे। दरअसल चौबीस सितंबर को फिट इंडिया मूवमेंट की पहली वर्षगांठ है। इस उपलक्ष्य में एक राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन फिट इंडिया संवाद के दौरान पीएम मोदी फिटनेस के लिए प्रभावित करने वाले लोगों के साथ बातचीत करेंगे। वीडियो डेस्क। आईपीएल में सोमवार को खेले गए तीसरे मुकाबले में विराट कोहली की रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने सनराइजर्स हैदराबाद को दस रन से मात दी। एक सौ चौंसठ रन के जवाब में उतरी डेविड वॉर्नर की सेना उन्नीस. चार ओवर में सिर्फ एक सौ तिरेपन रन ही बना सकी। हैदराबाद के कप्तान डेविड वार्नर ने टॉस जीतकर गेंदबाजी का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी आरसीबी की शुरुआत अच्छी रही। टीम ने निर्धारित बीस ओवर में पाँच विकेट खोकर एक सौ तिरेसठ रन बनाए। टीम की ओर से सबसे ज्यादा रन देवदत्त पडिकल ने छप्पन और एबी डिविलियर्स ने इक्यावन रन बनाए। हैदराबाद की ओर से जॉनी बेयरस्टो ने तैंतालीस गेंद पर इकसठ रन की पारी खेली। उन्होंने पारी में छः चौके और दो छक्के भी लगाए। उनके अलावा मनीष पांडेय ने चौंतीस रन और प्रियम गर्ग ने बारह रन बनाए। आरसीबी की ओर से यजुवेंद्र चहल ने शानदार गेंदबाजी की। उन्होंने अट्ठारह रन देकर तीन विकेट लिए। चहल के अलावा शिवम दुबे और नवदीप सैनी ने दो-दो विकेट लिए। आखिर क्या रहा इस मैच का टरनिंग पाइंट हमारे क्रिकेट एक्सपर्ट अमिताभ वर्मा से जाने।
नई दिल्लीः बिते दिन गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों द्वारा दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च के दौरान हुई हिंसा पर दिल्ली पुलिस की अब बड़ी कर्रवाई की खबर सामने आ रही। न्यूज एजैंसी के मुताबिक पुलिस ने आपराधिक साजिश के साथ लाल किले में डकैती का मामला दर्ज किया है। और आरोपियों के खिलाफ पुलिस थाने में 10 से ज्यादा विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जिनमें धारा 395, धारा 397 और धारा 120बी जैसी गंभीर आपराधिक धाराएं भी शामिल की गई हैं। शिकायत के मुताबिक, लाल किले के अंदर आपराधिक साजिश के तहत डकैती डाली गई और वहां से कुछ सामान भी ले जाया गया।
नई दिल्लीः बिते दिन गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों द्वारा दिल्ली में ट्रैक्टर मार्च के दौरान हुई हिंसा पर दिल्ली पुलिस की अब बड़ी कर्रवाई की खबर सामने आ रही। न्यूज एजैंसी के मुताबिक पुलिस ने आपराधिक साजिश के साथ लाल किले में डकैती का मामला दर्ज किया है। और आरोपियों के खिलाफ पुलिस थाने में दस से ज्यादा विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जिनमें धारा तीन सौ पचानवे, धारा तीन सौ सत्तानवे और धारा एक सौ बीसबी जैसी गंभीर आपराधिक धाराएं भी शामिल की गई हैं। शिकायत के मुताबिक, लाल किले के अंदर आपराधिक साजिश के तहत डकैती डाली गई और वहां से कुछ सामान भी ले जाया गया।
यमन की राजधानी सना में रमजान के पवित्र महीने के लिए आर्थिक सहायता बांटने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में बुधवार देर रात भगदड़ मच गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान मची भगदड़ में 85 लोगों की मौत हो गई। साथ ही दर्जनों लोगों के घायल होने की भी खबर है. घायलों में 13 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है. यह जानकारी हौथी विद्रोहियों के अधिकारियों ने दी है। जानकारी के मुताबिक, हादसा ईद-उल-फितर से ठीक पहले हुआ। हौथी द्वारा संचालित यमन के आंतरिक मंत्रालय के अनुसार, घटना के समय सैकड़ों गरीब लोग कार्यक्रम में एकत्र हुए थे। हौथिस ने मृतकों के परिवारों को 2,000 डॉलर और घायलों को लगभग 400 डॉलर के मुआवजे की घोषणा की है। विद्रोही संगठन हौथी के एक पदाधिकारी ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि इस घटना में 73 लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर अब्देल-खालिक अल-अघरी ने कहा कि घटना स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय के बिना वित्तीय सहायता के अनुचित वितरण के कारण हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक स्कूल में सहायता वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. घटना के बाद स्कूल को नक्सलियों ने सील कर दिया है. साथ ही पत्रकारों समेत अन्य लोगों को यहां आने से रोक दिया गया है. प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि सशस्त्र हौथी विद्रोहियों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हवा में गोलियां चलाईं और गोली बिजली की लाइन में जा लगी, जिससे विस्फोट हो गया। इससे कार्यक्रम में मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और लोग इधर-उधर भागने लगे। गृह मंत्रालय ने कहा कि उसने दो प्रशासकों को हिरासत में लिया है और मामले की जांच की जा रही है।
यमन की राजधानी सना में रमजान के पवित्र महीने के लिए आर्थिक सहायता बांटने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में बुधवार देर रात भगदड़ मच गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान मची भगदड़ में पचासी लोगों की मौत हो गई। साथ ही दर्जनों लोगों के घायल होने की भी खबर है. घायलों में तेरह लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है. यह जानकारी हौथी विद्रोहियों के अधिकारियों ने दी है। जानकारी के मुताबिक, हादसा ईद-उल-फितर से ठीक पहले हुआ। हौथी द्वारा संचालित यमन के आंतरिक मंत्रालय के अनुसार, घटना के समय सैकड़ों गरीब लोग कार्यक्रम में एकत्र हुए थे। हौथिस ने मृतकों के परिवारों को दो,शून्य डॉलर और घायलों को लगभग चार सौ डॉलर के मुआवजे की घोषणा की है। विद्रोही संगठन हौथी के एक पदाधिकारी ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि इस घटना में तिहत्तर लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है. आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर अब्देल-खालिक अल-अघरी ने कहा कि घटना स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय के बिना वित्तीय सहायता के अनुचित वितरण के कारण हुई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक स्कूल में सहायता वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. घटना के बाद स्कूल को नक्सलियों ने सील कर दिया है. साथ ही पत्रकारों समेत अन्य लोगों को यहां आने से रोक दिया गया है. प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि सशस्त्र हौथी विद्रोहियों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हवा में गोलियां चलाईं और गोली बिजली की लाइन में जा लगी, जिससे विस्फोट हो गया। इससे कार्यक्रम में मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और लोग इधर-उधर भागने लगे। गृह मंत्रालय ने कहा कि उसने दो प्रशासकों को हिरासत में लिया है और मामले की जांच की जा रही है।
गांव में घुसा बाइसन ! Share This Post: सिलीगुड़ी जिला अस्पताल पर लगा लापरवाही का आरोप ! दोस्त की गर्दन पर ब्लेड से किया वार ! रहस्यमय तरीके से लापता हुआ कॉलेज का छात्र ! अचानक सड़क पर गिरा आम का पेड़ !
गांव में घुसा बाइसन ! Share This Post: सिलीगुड़ी जिला अस्पताल पर लगा लापरवाही का आरोप ! दोस्त की गर्दन पर ब्लेड से किया वार ! रहस्यमय तरीके से लापता हुआ कॉलेज का छात्र ! अचानक सड़क पर गिरा आम का पेड़ !
उसके बाहर निकलते ही रमा शेखर के ऊपर चिल्लाई ये क्या किया तुमने शेखर ? तुमने मेरी ओर क्यों देखा। तुमने उस लड़की का नाम क्यों नहीं बताया, और अगर नहीं बताना था तो अनुज को क्यों नहीं बताया कि मैं वो लड़की नहीं हूँ। तुम जानते हो शेखर इस एक गलती की सजा मुझे जीवन भर मिलने वाली है। कैसे रमा ? तुम क्या बोल रही हो मैं समझ नहीं पा रहा हूँ। अरे यार। उस दिन जब तुम कान्फ्रैंस रूम में मेरे साथ पै्रक्टिस कर रहे थे तब अनुज वहीं बाहर खड़ा होकर हमारी बातें सुन लिया था और अब उसे लगता है कि तुम्हारे मेरे बीच कोई चक्कर चल रहा है। ओह! पर ऐसी तो कोई बात नहीं है रमा। तो फिर मेरी ओर देखें क्यूँ। तुमने मेरी ओर देखकर इस बात को पुख्ता कर दिया कि हम दोनों के बीच कुछ है। वो तो मैं इसलिए देखा कि मैं सचमुच उस लड़की का नाम नहीं बता सकता था क्योंकि वों लड़की उसकी मंगेतर है। क्या !!! क्या कहा तुमने ? तुम आभा से प्यार करते हो ? हाँ रमा। आभा वही लड़की है जिसके पापा की जान मैनें बचाई थी। मैं उसे बहुत चाहता हूँ रमा। पर जब अनुज ने उसका नाम पूछा तो मैं असमंजस की स्थिति में आ गया इसलिए तुम्हारी ओर देख बैठा। ओ गॉड। ये कैसे उलझा दिया तुमने सारे रिश्ते भगवान, रमा बोली। मतलब ? शेखर ने पूछा। मतलब ये कि जाओ और बताओ कि मैं वो लड़की मैं नहीं हूँ। मैं कैसे बता दूँ रमा कि तुम वो लड़की नहीं हो और आभा ही वो लड़की है। तो मत बताओ कि आभा वो लड़की है किसी और का नाम ले दो। रमा अब भी नाराज थी। इस तरह तो मैं आभा को खो दूँगा रमा। शेखर उदास होते हुए बोला। पर मैं तो बदनाम हो रही हूँ शेखर। प्लीज इस बात को समझो। वो तो यही समझ रहा है कि हम दोनों के बीच कुछ है। वह बात तो खुद ही समाप्त हो जाएगी रमा जब आभा मेरे पास आ जाएगी। तुम भी इस बात को समझो ना ? शेखर बोला। अरे यार। तुम दोनों के बीच मैं पिसी जा रही हूँ। तो क्या हुआ तुम मेरी दोस्त नहीं हो। मुझे आभा दिला दो। अनुज खुद ही समझ जाएगा कि हम दोनों के बीच कुछ भी नहीं है। रमा ने सिर पकड़ लिया पर शेखर कुछ सुनने के लिए तैयार ही नहीं था और वो अपने और अनुज के बारे में शेखर को कुछ बताना नहीं चाह रही थी। ठीक है शेखर पहली बात तो ये है कि आभा जानती ही नहीं है कि तुम उससे प्यार करते हो। उसको भी बता पाओगे या नहीं बता पाओगे। बताऊँगा ना पर कैसे बताऊँ ? वो हम देख लेंगे पर वो तुम्हारे प्यार को स्वीकार कर लेगी इस बात की क्या गारंटी है ? हाँ इसकी तो कोई गारंटी नहीं है, पर बोलूँगा तभी तो पता चलेगा। तो फिर ठीक है मैं आज कल में उसे अपने विभाग बुलाती हूँ, अगर वो आई तो मैं तुम्हें फोन कर दूँगी तुम आ जाना। मैं तो बता ही दूँगी और संभव हुआ तो तुम छत में चले जाना मैं उसे वहीं भेज दूँगी। तुम दोनो अकेले में बात कर पाओगे। इधर अनुज को यकीन हो चला था कि शेखर और रमा के बीच पक्का रिश्ता है रमा चाहे उसे माने या ना माने। हो सकता है वो झूठ बोल रही हो पर शेखर क्यूँ झूठ बोलेगा। उसने तो रमा की ओर ही देखा था जब मैंने उस लड़की का नाम पूछा था। चलो आभा मुझे घर जाना है। अनुज आभा को बोला। अचानक अनुज ? अचानक क्या हो गया तुम्हें , कोई दिक्कत है क्या ? आभा पूछी। नहीं कोई दिक्कत नहीं है बस मेरा मूड ठीक नहीं है। तुम अपने मम्मी-पापा से बात करो मुझे जल्द ही शादी करनी है तुमसे। आभा आश्चर्यचकित थी। ठीक है चलो मैं बात करती हूँ अपने घर में। कहकर उठी और बाहर निकल गई। दोनो कार में बैठकर निकल गए। अनुज आभा को छोड़कर वापस आ गया था। घर में घुसते ही उसका सामना मधु से हो गया। मधु ने देखा कि अनुज का मूड कुछ उखड़ा उखड़ा है। क्या हुआ भाई ? नाराज दिख रहे हो फिर कुछ हुआ क्या ? कुछ नहीं बस मूड ठीक नहीं है। तो बताओ क्या बात है। ठीक है कहकर वो बेडरूम में चली गई और वहीं से उसने रमा को फोन लगाया। हेलो रमा ? हाँ मधु ? कैसी हो तुम ? अच्छी हूँ रमा। तुम ठीक हो ? हाँ। बताओ कैसे फोन किया ? आज कुछ बात हुई क्या ? भैया को मूड ठीक नहीं है। बहुत नाराज है। हाँ मधु। अनुज को लगता है कि शेखर और मेरे बीच कुछ चल रहा है। जबकि ऐसा संभव ही नहीं है। असल में शेखर एक लड़की को चाहता है कहकर प्रपोज करने की प्रैक्टिस मेरे साथ कर रहा था जिसको अनुज ने चुपके से सुन लिया और आज जब शेखर से उसने उसका नाम पूछा तो वो बता नहीं पाया क्योंकि आभा ही वो लड़की है जिससे वो प्यार करता है। मेरी अन्य तीन किताबे उड़ान, नमकीन चाय और मीता भी मातृभारती पर उपलब्ध है। कृपया पढ़कर समीक्षा अवश्य दे - भूपेंद्र कुलदीप।
उसके बाहर निकलते ही रमा शेखर के ऊपर चिल्लाई ये क्या किया तुमने शेखर ? तुमने मेरी ओर क्यों देखा। तुमने उस लड़की का नाम क्यों नहीं बताया, और अगर नहीं बताना था तो अनुज को क्यों नहीं बताया कि मैं वो लड़की नहीं हूँ। तुम जानते हो शेखर इस एक गलती की सजा मुझे जीवन भर मिलने वाली है। कैसे रमा ? तुम क्या बोल रही हो मैं समझ नहीं पा रहा हूँ। अरे यार। उस दिन जब तुम कान्फ्रैंस रूम में मेरे साथ पै्रक्टिस कर रहे थे तब अनुज वहीं बाहर खड़ा होकर हमारी बातें सुन लिया था और अब उसे लगता है कि तुम्हारे मेरे बीच कोई चक्कर चल रहा है। ओह! पर ऐसी तो कोई बात नहीं है रमा। तो फिर मेरी ओर देखें क्यूँ। तुमने मेरी ओर देखकर इस बात को पुख्ता कर दिया कि हम दोनों के बीच कुछ है। वो तो मैं इसलिए देखा कि मैं सचमुच उस लड़की का नाम नहीं बता सकता था क्योंकि वों लड़की उसकी मंगेतर है। क्या !!! क्या कहा तुमने ? तुम आभा से प्यार करते हो ? हाँ रमा। आभा वही लड़की है जिसके पापा की जान मैनें बचाई थी। मैं उसे बहुत चाहता हूँ रमा। पर जब अनुज ने उसका नाम पूछा तो मैं असमंजस की स्थिति में आ गया इसलिए तुम्हारी ओर देख बैठा। ओ गॉड। ये कैसे उलझा दिया तुमने सारे रिश्ते भगवान, रमा बोली। मतलब ? शेखर ने पूछा। मतलब ये कि जाओ और बताओ कि मैं वो लड़की मैं नहीं हूँ। मैं कैसे बता दूँ रमा कि तुम वो लड़की नहीं हो और आभा ही वो लड़की है। तो मत बताओ कि आभा वो लड़की है किसी और का नाम ले दो। रमा अब भी नाराज थी। इस तरह तो मैं आभा को खो दूँगा रमा। शेखर उदास होते हुए बोला। पर मैं तो बदनाम हो रही हूँ शेखर। प्लीज इस बात को समझो। वो तो यही समझ रहा है कि हम दोनों के बीच कुछ है। वह बात तो खुद ही समाप्त हो जाएगी रमा जब आभा मेरे पास आ जाएगी। तुम भी इस बात को समझो ना ? शेखर बोला। अरे यार। तुम दोनों के बीच मैं पिसी जा रही हूँ। तो क्या हुआ तुम मेरी दोस्त नहीं हो। मुझे आभा दिला दो। अनुज खुद ही समझ जाएगा कि हम दोनों के बीच कुछ भी नहीं है। रमा ने सिर पकड़ लिया पर शेखर कुछ सुनने के लिए तैयार ही नहीं था और वो अपने और अनुज के बारे में शेखर को कुछ बताना नहीं चाह रही थी। ठीक है शेखर पहली बात तो ये है कि आभा जानती ही नहीं है कि तुम उससे प्यार करते हो। उसको भी बता पाओगे या नहीं बता पाओगे। बताऊँगा ना पर कैसे बताऊँ ? वो हम देख लेंगे पर वो तुम्हारे प्यार को स्वीकार कर लेगी इस बात की क्या गारंटी है ? हाँ इसकी तो कोई गारंटी नहीं है, पर बोलूँगा तभी तो पता चलेगा। तो फिर ठीक है मैं आज कल में उसे अपने विभाग बुलाती हूँ, अगर वो आई तो मैं तुम्हें फोन कर दूँगी तुम आ जाना। मैं तो बता ही दूँगी और संभव हुआ तो तुम छत में चले जाना मैं उसे वहीं भेज दूँगी। तुम दोनो अकेले में बात कर पाओगे। इधर अनुज को यकीन हो चला था कि शेखर और रमा के बीच पक्का रिश्ता है रमा चाहे उसे माने या ना माने। हो सकता है वो झूठ बोल रही हो पर शेखर क्यूँ झूठ बोलेगा। उसने तो रमा की ओर ही देखा था जब मैंने उस लड़की का नाम पूछा था। चलो आभा मुझे घर जाना है। अनुज आभा को बोला। अचानक अनुज ? अचानक क्या हो गया तुम्हें , कोई दिक्कत है क्या ? आभा पूछी। नहीं कोई दिक्कत नहीं है बस मेरा मूड ठीक नहीं है। तुम अपने मम्मी-पापा से बात करो मुझे जल्द ही शादी करनी है तुमसे। आभा आश्चर्यचकित थी। ठीक है चलो मैं बात करती हूँ अपने घर में। कहकर उठी और बाहर निकल गई। दोनो कार में बैठकर निकल गए। अनुज आभा को छोड़कर वापस आ गया था। घर में घुसते ही उसका सामना मधु से हो गया। मधु ने देखा कि अनुज का मूड कुछ उखड़ा उखड़ा है। क्या हुआ भाई ? नाराज दिख रहे हो फिर कुछ हुआ क्या ? कुछ नहीं बस मूड ठीक नहीं है। तो बताओ क्या बात है। ठीक है कहकर वो बेडरूम में चली गई और वहीं से उसने रमा को फोन लगाया। हेलो रमा ? हाँ मधु ? कैसी हो तुम ? अच्छी हूँ रमा। तुम ठीक हो ? हाँ। बताओ कैसे फोन किया ? आज कुछ बात हुई क्या ? भैया को मूड ठीक नहीं है। बहुत नाराज है। हाँ मधु। अनुज को लगता है कि शेखर और मेरे बीच कुछ चल रहा है। जबकि ऐसा संभव ही नहीं है। असल में शेखर एक लड़की को चाहता है कहकर प्रपोज करने की प्रैक्टिस मेरे साथ कर रहा था जिसको अनुज ने चुपके से सुन लिया और आज जब शेखर से उसने उसका नाम पूछा तो वो बता नहीं पाया क्योंकि आभा ही वो लड़की है जिससे वो प्यार करता है। मेरी अन्य तीन किताबे उड़ान, नमकीन चाय और मीता भी मातृभारती पर उपलब्ध है। कृपया पढ़कर समीक्षा अवश्य दे - भूपेंद्र कुलदीप।
4 मई को महाराष्ट्र में कोल्हापुर जिले के जिलाधिकारी ने कोविड-19 संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए 10 दिनों के सख्त लॉकडाउन की घोषणा कर दी है। इसके एक दिन पहले, इसी प्रकार के लॉकडाउन की घोषणा सांगली जिले में घोषित की जा चुकी है। ये दोनों जिले पश्चिमी महाराष्ट्र में स्थित हैं। वहीं मराठवाड़ा, बीड और परभणी पहले से ही लॉकडाउन लगा हुआ है। इसके बावजूद महाराष्ट्र में 16 जिलों में मामले बढ़ते ही जा रहे हैं, जो कि राज्य प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। हालात कुछ ऐसे हैं कि महाराष्ट्र मुख्य सचिव को भारत के कैबिनेट सचिव राजीव गौबा को पत्र लिखकर उनसे राज्य के ऑक्सीजन कोटे में प्रतिदिन 200 मीट्रिक टन की बढ़ोत्तरी करने के लिए निवेदन करना पड़ा है। पत्र में जिन 16 जिलों का हवाला दिया गया है उनमें पालघर, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, सतारा, सांगली, कोल्हापुर, सोलापुर, नंदुरबार, बीड, परभनी, हिंगोली, अमरावती, बुल्ढाना, वर्धा, गडचिरोली और चंद्रपुर शामिल हैं, जहाँ पर कोविड-19 के मामलों में दैनिक वृद्धि देखने को मिल रही है। महाराष्ट्र के मुख्य सचिव की ओर से भारत के कैबिनेट सचिव को पत्र। इस बीच मुंबई और इसके आस-पास के शहरों में महामारी की दूसरी लहर के अंतर्गत नए मामलों में रोजाना बढ़ोत्तरी के क्रम में कमी देखने को मिलनी शुरू हो गई है। जहाँ पहली लहर के दौरान मुंबई सहित आठ नगरपालिकाओं में सबसे अधिक मौतों की खबर थी, वहीँ दूसरी लहर में लगभग 15 दिनों के बाद इस महामारी संकट ने ग्रामीण महाराष्ट्र को बुरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लिया है। 4 मई को राज्य में 51,880 नए रोगियों के पाए जाने की खबर है, जिससे कुल संक्रमित व्यक्तियों की संख्या 6,63,758 हो चुकी है। इनमें से 78,884 लोग ऑक्सीजन पर हैं और 24,878 आईसीयू में हैं। मंगलवार को कुल 891 लोगों की मौत का आंकड़ा दर्ज किया गया था, और राज्य में अभी तक कुल 71,742 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके चलते महामारी की जारी दूसरी लहर में यह सबसे अधिक हताहतों वाला राज्य बन गया है। जैसे-जैसे ग्रामीण महाराष्ट्र में संकट गहराता जा रहा है, राज्य की स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था और भी अधिक गंभीर दबाव में आ गई है। सिंधुदुर्ग जिले में स्थित मालवान तहसील के सुकलवाड़ गाँव में लवू सारंग जब कोरोनावायरस की जाँच में पॉजिटिव पाए गए तो उनके नाते-रिश्तेदारों ने उनके इलाज के लिए जिले में वेंटीलेटर की तलाश करनी शुरू कर दी, क्योंकि उनका स्वास्थ्य तेजी से खराब होने लगा था। भले ही उनका घर जिला मुख्यालय से मात्र 10 किमी की दूरी पर है, लेकिन बिस्तरों की किल्लत के कारण उन्हें वेंटीलेटर उपलब्ध न हो सका। बाद में उनके रिश्तेदारों ने उन्हें पास के कोल्हापुर जिले में स्थानांतरित कर दिया, जहाँ पर अंततः उन्हें एक निजी अस्पताल में दाखिला मिल गया। इस बारे में लवू के छोटे भाई उमेश सारंग का कहना था "सारे जिले में एक भी वेंटीलेटर बेड उपलब्ध नहीं था। हमने सभी निजी अस्पतालों से संपर्क साधा था। इसलिए हमारे पास मरीज की जान को खतरे में डालकर चार घंटे की सड़क यात्रा कराकर कोल्हापुर ले जाने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचा था। महाराष्ट्र के बाकी के छोटे जिलों और दूर-दराज के कस्बों में भी हालात इसी प्रकार से खराब बने हुए हैं। खबरों के मुताबिक लोगों को आईसीयू बेड, वेंटीलेटर, ऑक्सीजन, रेमडेसिविर इंजेक्शन इत्यादि उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। राज्य में रोजाना 50,000 से अधिक नए मामलों की रिपोर्टिंग की वजह से राज्य सरकार के सामने स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सुचारू रूप से चला पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। सरकार ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ग्रामीण स्तर पर नए कोविड-19 केंद्रों को स्थापित करें। चंद्रपुर में 865 ग्रामीणों को आइसोलेशन सेंटर और छोटे कोविड-19 केंद्र शुरू करने के लिए कहा गया है, जहाँ पर जो मरीज गंभीर रूप से बीमार नहीं हैं, उनका स्थानीय स्तर पर इलाज किया जा सकता है। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
चार मई को महाराष्ट्र में कोल्हापुर जिले के जिलाधिकारी ने कोविड-उन्नीस संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए दस दिनों के सख्त लॉकडाउन की घोषणा कर दी है। इसके एक दिन पहले, इसी प्रकार के लॉकडाउन की घोषणा सांगली जिले में घोषित की जा चुकी है। ये दोनों जिले पश्चिमी महाराष्ट्र में स्थित हैं। वहीं मराठवाड़ा, बीड और परभणी पहले से ही लॉकडाउन लगा हुआ है। इसके बावजूद महाराष्ट्र में सोलह जिलों में मामले बढ़ते ही जा रहे हैं, जो कि राज्य प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। हालात कुछ ऐसे हैं कि महाराष्ट्र मुख्य सचिव को भारत के कैबिनेट सचिव राजीव गौबा को पत्र लिखकर उनसे राज्य के ऑक्सीजन कोटे में प्रतिदिन दो सौ मीट्रिक टन की बढ़ोत्तरी करने के लिए निवेदन करना पड़ा है। पत्र में जिन सोलह जिलों का हवाला दिया गया है उनमें पालघर, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, सतारा, सांगली, कोल्हापुर, सोलापुर, नंदुरबार, बीड, परभनी, हिंगोली, अमरावती, बुल्ढाना, वर्धा, गडचिरोली और चंद्रपुर शामिल हैं, जहाँ पर कोविड-उन्नीस के मामलों में दैनिक वृद्धि देखने को मिल रही है। महाराष्ट्र के मुख्य सचिव की ओर से भारत के कैबिनेट सचिव को पत्र। इस बीच मुंबई और इसके आस-पास के शहरों में महामारी की दूसरी लहर के अंतर्गत नए मामलों में रोजाना बढ़ोत्तरी के क्रम में कमी देखने को मिलनी शुरू हो गई है। जहाँ पहली लहर के दौरान मुंबई सहित आठ नगरपालिकाओं में सबसे अधिक मौतों की खबर थी, वहीँ दूसरी लहर में लगभग पंद्रह दिनों के बाद इस महामारी संकट ने ग्रामीण महाराष्ट्र को बुरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लिया है। चार मई को राज्य में इक्यावन,आठ सौ अस्सी नए रोगियों के पाए जाने की खबर है, जिससे कुल संक्रमित व्यक्तियों की संख्या छः,तिरेसठ,सात सौ अट्ठावन हो चुकी है। इनमें से अठहत्तर,आठ सौ चौरासी लोग ऑक्सीजन पर हैं और चौबीस,आठ सौ अठहत्तर आईसीयू में हैं। मंगलवार को कुल आठ सौ इक्यानवे लोगों की मौत का आंकड़ा दर्ज किया गया था, और राज्य में अभी तक कुल इकहत्तर,सात सौ बयालीस लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके चलते महामारी की जारी दूसरी लहर में यह सबसे अधिक हताहतों वाला राज्य बन गया है। जैसे-जैसे ग्रामीण महाराष्ट्र में संकट गहराता जा रहा है, राज्य की स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था और भी अधिक गंभीर दबाव में आ गई है। सिंधुदुर्ग जिले में स्थित मालवान तहसील के सुकलवाड़ गाँव में लवू सारंग जब कोरोनावायरस की जाँच में पॉजिटिव पाए गए तो उनके नाते-रिश्तेदारों ने उनके इलाज के लिए जिले में वेंटीलेटर की तलाश करनी शुरू कर दी, क्योंकि उनका स्वास्थ्य तेजी से खराब होने लगा था। भले ही उनका घर जिला मुख्यालय से मात्र दस किमी की दूरी पर है, लेकिन बिस्तरों की किल्लत के कारण उन्हें वेंटीलेटर उपलब्ध न हो सका। बाद में उनके रिश्तेदारों ने उन्हें पास के कोल्हापुर जिले में स्थानांतरित कर दिया, जहाँ पर अंततः उन्हें एक निजी अस्पताल में दाखिला मिल गया। इस बारे में लवू के छोटे भाई उमेश सारंग का कहना था "सारे जिले में एक भी वेंटीलेटर बेड उपलब्ध नहीं था। हमने सभी निजी अस्पतालों से संपर्क साधा था। इसलिए हमारे पास मरीज की जान को खतरे में डालकर चार घंटे की सड़क यात्रा कराकर कोल्हापुर ले जाने के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचा था। महाराष्ट्र के बाकी के छोटे जिलों और दूर-दराज के कस्बों में भी हालात इसी प्रकार से खराब बने हुए हैं। खबरों के मुताबिक लोगों को आईसीयू बेड, वेंटीलेटर, ऑक्सीजन, रेमडेसिविर इंजेक्शन इत्यादि उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। राज्य में रोजाना पचास,शून्य से अधिक नए मामलों की रिपोर्टिंग की वजह से राज्य सरकार के सामने स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सुचारू रूप से चला पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। सरकार ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे ग्रामीण स्तर पर नए कोविड-उन्नीस केंद्रों को स्थापित करें। चंद्रपुर में आठ सौ पैंसठ ग्रामीणों को आइसोलेशन सेंटर और छोटे कोविड-उन्नीस केंद्र शुरू करने के लिए कहा गया है, जहाँ पर जो मरीज गंभीर रूप से बीमार नहीं हैं, उनका स्थानीय स्तर पर इलाज किया जा सकता है। अपने टेलीग्राम ऐप पर जनवादी नज़रिये से ताज़ा ख़बरें, समसामयिक मामलों की चर्चा और विश्लेषण, प्रतिरोध, आंदोलन और अन्य विश्लेषणात्मक वीडियो प्राप्त करें। न्यूज़क्लिक के टेलीग्राम चैनल की सदस्यता लें और हमारी वेबसाइट पर प्रकाशित हर न्यूज़ स्टोरी का रीयल-टाइम अपडेट प्राप्त करें।
एक इस्राईली वेबसाइट ने हिज्बुल्लाह के हमले में घायल होने या मरने वालों सैनिकों की वीडियो फ़ुटेज जारी की है। हालांकि इस्राईली प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू ने दावा किया था कि हिज़्बुल्लाह की जवाबी कार्यवाही में किसी ज़ायोनी सैनिक को एक खरोंच तक नहीं आई है। यह वीडियो फ़ुटेज येदियोथ अहारनोथ की वेबसाइट पर जारी किया गया है, जिसमें देखा जा सकता है कि रविवार की शाम हुए हमले में घायल होने वाले इस्राईली सैनिकों को एक हेलिकॉप्टर द्वारा अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। हिज़्बुल्लाह ने एक बयान जारी करके कहा है कि रविवार को उसके कमांडोज़ की दो टीमों ने इस्राईली सैन्य वाहनों को निशाना बनाया। इस सैन्य कार्यवाही में एक वाहन नष्ट हो गया और उसमें सवार सभी सैनिक या तो मारे गए या घायल हो गए, जबकि दूसरा बच निकलने में सफल रहा। हिज़्बुल्लाह ने यह जवाबी कार्यवाही अपने प्रमुख सैय्यद हसन नसरुल्लाह की उस चेतावनी के एक दिन बाद की है, जिसमें उन्होंने कहा था कि लेबनानी वायु सीमा का उल्लंघन करने के लिए इस्राईल को दंडित किया जाएगा। 25 अगस्त को इस्राईली ड्रोन विमानों ने बेरूत के दक्षिणी इलाक़े पर असफल हमले का प्रयास किया था, लेकिन इन ड्रोन विमानों को हवा में नष्ट कर दिया गया था। रविवार को टाइम्स ऑफ़ इस्राईल ने दावा किया था कि बचाव अभियान की यह वीडियो इस तरह से बनाई गई है, ताकि हिज़्बुल्लाह आश्वस्त हो जाए कि उसने इस्राईली हमले का बदला ले लिया है। लेकिन यह दावा नेतनयाहू के उस बयान को पूरी तरह से झुटलाता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हिज़्बुल्लाह की जवाबी कार्यवाही में किसी सैनिक को एक खरोंच भी नहीं पहुंची है।
एक इस्राईली वेबसाइट ने हिज्बुल्लाह के हमले में घायल होने या मरने वालों सैनिकों की वीडियो फ़ुटेज जारी की है। हालांकि इस्राईली प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू ने दावा किया था कि हिज़्बुल्लाह की जवाबी कार्यवाही में किसी ज़ायोनी सैनिक को एक खरोंच तक नहीं आई है। यह वीडियो फ़ुटेज येदियोथ अहारनोथ की वेबसाइट पर जारी किया गया है, जिसमें देखा जा सकता है कि रविवार की शाम हुए हमले में घायल होने वाले इस्राईली सैनिकों को एक हेलिकॉप्टर द्वारा अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। हिज़्बुल्लाह ने एक बयान जारी करके कहा है कि रविवार को उसके कमांडोज़ की दो टीमों ने इस्राईली सैन्य वाहनों को निशाना बनाया। इस सैन्य कार्यवाही में एक वाहन नष्ट हो गया और उसमें सवार सभी सैनिक या तो मारे गए या घायल हो गए, जबकि दूसरा बच निकलने में सफल रहा। हिज़्बुल्लाह ने यह जवाबी कार्यवाही अपने प्रमुख सैय्यद हसन नसरुल्लाह की उस चेतावनी के एक दिन बाद की है, जिसमें उन्होंने कहा था कि लेबनानी वायु सीमा का उल्लंघन करने के लिए इस्राईल को दंडित किया जाएगा। पच्चीस अगस्त को इस्राईली ड्रोन विमानों ने बेरूत के दक्षिणी इलाक़े पर असफल हमले का प्रयास किया था, लेकिन इन ड्रोन विमानों को हवा में नष्ट कर दिया गया था। रविवार को टाइम्स ऑफ़ इस्राईल ने दावा किया था कि बचाव अभियान की यह वीडियो इस तरह से बनाई गई है, ताकि हिज़्बुल्लाह आश्वस्त हो जाए कि उसने इस्राईली हमले का बदला ले लिया है। लेकिन यह दावा नेतनयाहू के उस बयान को पूरी तरह से झुटलाता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हिज़्बुल्लाह की जवाबी कार्यवाही में किसी सैनिक को एक खरोंच भी नहीं पहुंची है।
लखनऊ। आजमगढ़ और रामपुर लोक सभा क्षेत्र सपा के मजबूत गढ़ माने जाते हैं। इसी वजह से इन दोनों सीटों का उपचुनाव सपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है लेकिन इस बार चुनाव प्रचार के लिए अखिलेश यादव आजमगढ़ और रामपुर दोनों जगह नहीं गए तो सवाल उठे कि आखिर क्यों नहीं गए? इस मुद्ïदे पर वरिष्ठï पत्रकार सुशील दुबे, अनिल रॉयल, डॉ. राकेश पाठक, शीतल पी सिंह, किसान नेता डॉ. सुनीलम और 4पीएम के संपादक संजय शर्मा ने एक लंबी परिचर्चा की। अनिल रॉयल ने कहा कि रामपुर में आजम खां की वजह से ही जीत-हार होती है और आजमगढ़ की सीट ऐसी है जहां मुलायम सिंह परिवार का दबदबा है और उसी परिवार के धर्मेंद्र यादव लड़ रहे हैं तो जीत पक्की ही है। वोटरों का मूड क्या होगा, यह अभी कहना ठीक नहीं है। कभी-कभी समीकरण बदल भी जाते हैं। सुशील दुबे ने कहा, आजम खां के रामपुर में 40 फीसदी वोट पड़ा है और आजमगढ़ में तो सपा की रजिस्ट्री समझो। कई सालों से लगातार हर चुनाव जीतते आ रहे हैं। इस बार अखिलेश को मालमू है कि वन टू वन या तो इधर आएगा या उधर जाएगा इसलिए उपचुनाव में प्रचार करने नहीं गए। निरहुआ की किस्मत में चुनाव जीतना ही नहीं। डॉ. राकेश पाठक ने कहा, राजनीति संदेशन का पेशा है, खेती है। अखिलेश नहीं गए कोई कारण जरूर रहा होगा। नड्ïडा, शाह जैसे लोग जब निकाय चुनाव में रोड शो कर आए तो यहां नहीं आए तो कोई बड़ी बात नहीं। मायावती यूपी की राजनीति में हाशिए पर चली गई है। अखिलेश ने आजम खां की एक तरह से परीक्षा भी ली कि आप का गढ़ है, आप ही जिताइए। क्षेत्रीय पार्टी के मुखिया को प्रचार करना चाहिए यह अखिलेश की भूल है। शीतल पी सिंह ने कहा जो लोग 24 घंटे राजनीति कर रहे हैं। सरकारें बना रहे, सरकारें गिरा रहे, पैसों के स्रोत्र पर बड़ा काम कर रहे हैं। ऐसे में क्षेत्रीय पार्टियों को बहुत ज्यादा एक्टिविटी की जरूरत है। वही लोग राजनीति कर पा रहे हैं जो 24 घंटे एक्टिव है ममता बैनर्जी हो या केजरीवाल। डॉ. सुनीलम ने कहा, दोनों उपचुनाव में मतदान प्रतिशत कम है। ऐसे में सपा-भाजपा दोनों दल चिंतित है। सपा का गढ़ कहे जाने के चलते उनके खाते में दोनों सीट जानी चाहिए। फिलहाल कल पता चलेगा?
लखनऊ। आजमगढ़ और रामपुर लोक सभा क्षेत्र सपा के मजबूत गढ़ माने जाते हैं। इसी वजह से इन दोनों सीटों का उपचुनाव सपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है लेकिन इस बार चुनाव प्रचार के लिए अखिलेश यादव आजमगढ़ और रामपुर दोनों जगह नहीं गए तो सवाल उठे कि आखिर क्यों नहीं गए? इस मुद्ïदे पर वरिष्ठï पत्रकार सुशील दुबे, अनिल रॉयल, डॉ. राकेश पाठक, शीतल पी सिंह, किसान नेता डॉ. सुनीलम और चारपीएम के संपादक संजय शर्मा ने एक लंबी परिचर्चा की। अनिल रॉयल ने कहा कि रामपुर में आजम खां की वजह से ही जीत-हार होती है और आजमगढ़ की सीट ऐसी है जहां मुलायम सिंह परिवार का दबदबा है और उसी परिवार के धर्मेंद्र यादव लड़ रहे हैं तो जीत पक्की ही है। वोटरों का मूड क्या होगा, यह अभी कहना ठीक नहीं है। कभी-कभी समीकरण बदल भी जाते हैं। सुशील दुबे ने कहा, आजम खां के रामपुर में चालीस फीसदी वोट पड़ा है और आजमगढ़ में तो सपा की रजिस्ट्री समझो। कई सालों से लगातार हर चुनाव जीतते आ रहे हैं। इस बार अखिलेश को मालमू है कि वन टू वन या तो इधर आएगा या उधर जाएगा इसलिए उपचुनाव में प्रचार करने नहीं गए। निरहुआ की किस्मत में चुनाव जीतना ही नहीं। डॉ. राकेश पाठक ने कहा, राजनीति संदेशन का पेशा है, खेती है। अखिलेश नहीं गए कोई कारण जरूर रहा होगा। नड्ïडा, शाह जैसे लोग जब निकाय चुनाव में रोड शो कर आए तो यहां नहीं आए तो कोई बड़ी बात नहीं। मायावती यूपी की राजनीति में हाशिए पर चली गई है। अखिलेश ने आजम खां की एक तरह से परीक्षा भी ली कि आप का गढ़ है, आप ही जिताइए। क्षेत्रीय पार्टी के मुखिया को प्रचार करना चाहिए यह अखिलेश की भूल है। शीतल पी सिंह ने कहा जो लोग चौबीस घंटाटे राजनीति कर रहे हैं। सरकारें बना रहे, सरकारें गिरा रहे, पैसों के स्रोत्र पर बड़ा काम कर रहे हैं। ऐसे में क्षेत्रीय पार्टियों को बहुत ज्यादा एक्टिविटी की जरूरत है। वही लोग राजनीति कर पा रहे हैं जो चौबीस घंटाटे एक्टिव है ममता बैनर्जी हो या केजरीवाल। डॉ. सुनीलम ने कहा, दोनों उपचुनाव में मतदान प्रतिशत कम है। ऐसे में सपा-भाजपा दोनों दल चिंतित है। सपा का गढ़ कहे जाने के चलते उनके खाते में दोनों सीट जानी चाहिए। फिलहाल कल पता चलेगा?
लखनऊः देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर देश आज उनको नमन कर रहा है। आज देश भर में सरदार वल्लभ भाई पटेल की 146वीं जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। इस दिन को पूरे देश में राष्ट्रीय एकता दिवस (राष्ट्रीय एकता दिवस) के रूप में भी मनाया जाता है। गोसाईगंज ब्लॉक क्षेत्र के रसूलपुर आशिक अली में आधुनिक भारत के शिल्पकार, राष्ट्रीय एकता के सूत्रधार, किसान हित चिंतक लौह पुरुष 'भारत रत्न' श्रद्धेय सरदार वल्लभ भाई पटेल जी और संविधान शिल्पकार डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा का अनावरण केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री और सांसद कौशल किशोर, स्नातक एमएलसी लखनऊ खंड अवनीश कुमार सिंह पटेल, गोसाईगंज ब्लाक प्रमुख विनय वर्मा (डिंपल) एवं नगर पंचायत अध्यक्ष गोसाईगंज, निखिल मिश्र (टोटी मिश्रा) के द्वारा किया गया। डॉ. अम्बेडकर भारत में सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं उन्होंने देश में सभी वर्गों के लिए काम किया। वह किसी वर्ग व जाति के बंधन नहीं रहे। इस कार्यक्रम का आयोजन प्रधान रामचंद्र वर्मा, ग्राम रसूल पुर आशिक अली एवं ग्राम सभा सहजादेपुर के द्वारा किया गया। व कार्यक्रम संचालक पंकज नयन की अध्यक्षता में हुआ। इस मौके पर रामनारायन वर्मा, प्रेम शंकर, सतीश पटेल (अंशु वर्मा), प्रेमचंद्र वर्मा (नेता जी), नवनीत वर्मा, रामेशर कुमार, संतोष वर्मा, राहुल वर्मा, बिहारी लाल पर्जापति, मुरारी लाल प्रजापति व भईया राम जी व समस्त ग्रामवासी मौजूद रहे।
लखनऊः देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर देश आज उनको नमन कर रहा है। आज देश भर में सरदार वल्लभ भाई पटेल की एक सौ छियालीसवीं जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। इस दिन को पूरे देश में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। गोसाईगंज ब्लॉक क्षेत्र के रसूलपुर आशिक अली में आधुनिक भारत के शिल्पकार, राष्ट्रीय एकता के सूत्रधार, किसान हित चिंतक लौह पुरुष 'भारत रत्न' श्रद्धेय सरदार वल्लभ भाई पटेल जी और संविधान शिल्पकार डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा का अनावरण केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री और सांसद कौशल किशोर, स्नातक एमएलसी लखनऊ खंड अवनीश कुमार सिंह पटेल, गोसाईगंज ब्लाक प्रमुख विनय वर्मा एवं नगर पंचायत अध्यक्ष गोसाईगंज, निखिल मिश्र के द्वारा किया गया। डॉ. अम्बेडकर भारत में सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं उन्होंने देश में सभी वर्गों के लिए काम किया। वह किसी वर्ग व जाति के बंधन नहीं रहे। इस कार्यक्रम का आयोजन प्रधान रामचंद्र वर्मा, ग्राम रसूल पुर आशिक अली एवं ग्राम सभा सहजादेपुर के द्वारा किया गया। व कार्यक्रम संचालक पंकज नयन की अध्यक्षता में हुआ। इस मौके पर रामनारायन वर्मा, प्रेम शंकर, सतीश पटेल , प्रेमचंद्र वर्मा , नवनीत वर्मा, रामेशर कुमार, संतोष वर्मा, राहुल वर्मा, बिहारी लाल पर्जापति, मुरारी लाल प्रजापति व भईया राम जी व समस्त ग्रामवासी मौजूद रहे।
अष्टपाहुडमें भोक्षपांडुडकी भाषावचनिका । भावार्थ बहिरात्माकूं छोडि अंतरात्मारूप होय परमात्माकूं ध्यावनां, या मोक्ष होय है ॥ ४ ॥ आगैं तीन प्रकार आत्माका स्वरूप दिखावै है; गाथा - अक्खाणि वाहिरप्पा अंतरअप्पा हु अप्पसंकप्पो । कम्मकलंकविमुको परमप्पा भण्णए देवो ।।५।। संस्कृत - अक्षाणि वहिरात्मा अन्तरात्मा स्फुटं आत्मसंकल्पः । कर्मकलंक विमुक्तः परमात्मा भण्यते देवः ॥ ५॥ अर्थ - अक्ष जे इंद्रिय स्पर्शनादिक तेतो बाह्य आत्मा हैं जातें इंद्रियनिकरि स्पर्श आदि विषयनिका ज्ञान होय तब लोक कहे ऐसैं ही जो इंद्रिय है सो ही आत्मा है, ऐसैं जो इंद्रियनिकू वाह्य आत्मा कहिये । बहुरि अंतरात्मा है सो अन्तरंगवि आत्माका प्रगट अनुभवगोचर संकल्प है, शरीर इंद्रियनितैं न्यारा मनके द्वारे देखने जाननेवाला है सो मैं हूं, ऐसैं स्वसंवेदनगोचर संकल्प सो ही अन्तरात्मा है । बहुरि कर्म जो द्रव्यकर्म ज्ञानावरणादिक अर भावकर्म राग द्वेप मोहादिक नोकर्म शरीरादिक सो ही भया कलंकमल तिसकरि विमुक्त रहित अनंतज्ञानादिकगुणसहित सो ही परमात्मा है, सो ही देव है, अन्य देव कहनां उपचार है ।। भावार्थ - बाह्य आत्मा तौ इंद्रियनिकं कह्या, अर अंतरात्मा देहमैं तिष्ठता देखनां जाननां जाकै पाइये ऐसा भनकै द्वारे संकल्प सो है, बहरि परमात्मा कर्मकलंकसूं रहित कया । सो इहां ऐसा जनाया है जोयह जीवही जेतैं बाह्य शरीरादिकहकिं आत्मा जाने है तेतैं तो बहिरात्मा है संसारी है, बहुरि जब येही जीव अंतरंगविषै आत्माकूं जानै है तब यह सम्यग्दृष्टी होय है तब अंतरात्मा है, अर यह जीव जब परमात्माका ध्यान करि कर्मकलंकसूं राहत होय तब पहलै तौ केवलज्ञान उपजाय
अष्टपाहुडमें भोक्षपांडुडकी भाषावचनिका । भावार्थ बहिरात्माकूं छोडि अंतरात्मारूप होय परमात्माकूं ध्यावनां, या मोक्ष होय है ॥ चार ॥ आगैं तीन प्रकार आत्माका स्वरूप दिखावै है; गाथा - अक्खाणि वाहिरप्पा अंतरअप्पा हु अप्पसंकप्पो । कम्मकलंकविमुको परमप्पा भण्णए देवो ।।पाँच।। संस्कृत - अक्षाणि वहिरात्मा अन्तरात्मा स्फुटं आत्मसंकल्पः । कर्मकलंक विमुक्तः परमात्मा भण्यते देवः ॥ पाँच॥ अर्थ - अक्ष जे इंद्रिय स्पर्शनादिक तेतो बाह्य आत्मा हैं जातें इंद्रियनिकरि स्पर्श आदि विषयनिका ज्ञान होय तब लोक कहे ऐसैं ही जो इंद्रिय है सो ही आत्मा है, ऐसैं जो इंद्रियनिकू वाह्य आत्मा कहिये । बहुरि अंतरात्मा है सो अन्तरंगवि आत्माका प्रगट अनुभवगोचर संकल्प है, शरीर इंद्रियनितैं न्यारा मनके द्वारे देखने जाननेवाला है सो मैं हूं, ऐसैं स्वसंवेदनगोचर संकल्प सो ही अन्तरात्मा है । बहुरि कर्म जो द्रव्यकर्म ज्ञानावरणादिक अर भावकर्म राग द्वेप मोहादिक नोकर्म शरीरादिक सो ही भया कलंकमल तिसकरि विमुक्त रहित अनंतज्ञानादिकगुणसहित सो ही परमात्मा है, सो ही देव है, अन्य देव कहनां उपचार है ।। भावार्थ - बाह्य आत्मा तौ इंद्रियनिकं कह्या, अर अंतरात्मा देहमैं तिष्ठता देखनां जाननां जाकै पाइये ऐसा भनकै द्वारे संकल्प सो है, बहरि परमात्मा कर्मकलंकसूं रहित कया । सो इहां ऐसा जनाया है जोयह जीवही जेतैं बाह्य शरीरादिकहकिं आत्मा जाने है तेतैं तो बहिरात्मा है संसारी है, बहुरि जब येही जीव अंतरंगविषै आत्माकूं जानै है तब यह सम्यग्दृष्टी होय है तब अंतरात्मा है, अर यह जीव जब परमात्माका ध्यान करि कर्मकलंकसूं राहत होय तब पहलै तौ केवलज्ञान उपजाय
राज्य सरकार ने इस साल स्टेट बोर्ड के स्कूलों में पहली से 12वीं कक्षा तक पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम में 25 प्रतिशत कटौती करने का ऐलान किया है। राज्य की शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड ने शनिवार को इसकी घोषणा की। उन्होंने बताया, 'सिलेबस कम करने का प्रस्ताव राज्य शैक्षणिक संशोधन व प्रशिक्षण परिषद (एमएससीईआरटी) ने भेजा था, जिसे सरकार ने मंजूरी दे दी है। ' सरकार के इस फैसले से विद्यार्थियों और अध्यापकों को बड़ी राहत मिली है क्योंकि कोरोना की वजह से अब तक स्कूल शुरू नहीं हो पाए हैं। बता दें, राज्य में हर साल जून में स्कूल खुल जाते हैं, लेकिन इस साल कोरोना की वजह से अब तक स्कूल नहीं खुले हैं। हालात को देखते हुए अगस्त-सितंबर तक स्कूलों के खुलने की संभावना भी नजर नहीं आ रही है। ऐसे में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को यह चिंता सता रही थी कि लगभग 3 महीने लेट चल रहे राज्य के शैक्षणिक सत्र में सिलेबस कैसे पूरा होगा। शनिवार को इस बारे में जारी शासनादेश में कहा गया है कि इस साल जो 25 प्रतिशत सिलेबस कम किया गया है, उसके तहत हटाए गए अध्यायों की जानकारी राज्य एमएससीईआरटी की वेबसाइट पर दी जाएगी। उचित माध्यम से स्कूलों और विद्यार्थियों तक भी यह जानकारी पहुंचाने का इंतजााम किया जाएगा। महामारी के कारण स्कूलों को नहीं खोला जा सका है और सरकार विद्यार्थियों का बोझ कम करना चाहती है। इसीलिए शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए पाठ्यक्रम को 25 प्रतिशत तक कम किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि वैसे तो 15 जून से राज्य में शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन कोरोना के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सरकार ने अब तक स्कूलों को खोलने की अनुमति नहीं दी है। इस बीच, कुछ साधन-संपन्न स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी है, लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर भी सरकार के पास कई तरह की शिकायतें आ रही हैं। इनमें विद्यार्थियों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव और तनाव की शिकायत प्रमुख है। वहीं, ग्रामीण और जिला परिषद स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था न होने जैसी तमाम तकलीफों के मद्देनजर सिलेबस कम करने का फैसला लिया गया है।
राज्य सरकार ने इस साल स्टेट बोर्ड के स्कूलों में पहली से बारहवीं कक्षा तक पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम में पच्चीस प्रतिशत कटौती करने का ऐलान किया है। राज्य की शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड ने शनिवार को इसकी घोषणा की। उन्होंने बताया, 'सिलेबस कम करने का प्रस्ताव राज्य शैक्षणिक संशोधन व प्रशिक्षण परिषद ने भेजा था, जिसे सरकार ने मंजूरी दे दी है। ' सरकार के इस फैसले से विद्यार्थियों और अध्यापकों को बड़ी राहत मिली है क्योंकि कोरोना की वजह से अब तक स्कूल शुरू नहीं हो पाए हैं। बता दें, राज्य में हर साल जून में स्कूल खुल जाते हैं, लेकिन इस साल कोरोना की वजह से अब तक स्कूल नहीं खुले हैं। हालात को देखते हुए अगस्त-सितंबर तक स्कूलों के खुलने की संभावना भी नजर नहीं आ रही है। ऐसे में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को यह चिंता सता रही थी कि लगभग तीन महीने लेट चल रहे राज्य के शैक्षणिक सत्र में सिलेबस कैसे पूरा होगा। शनिवार को इस बारे में जारी शासनादेश में कहा गया है कि इस साल जो पच्चीस प्रतिशत सिलेबस कम किया गया है, उसके तहत हटाए गए अध्यायों की जानकारी राज्य एमएससीईआरटी की वेबसाइट पर दी जाएगी। उचित माध्यम से स्कूलों और विद्यार्थियों तक भी यह जानकारी पहुंचाने का इंतजााम किया जाएगा। महामारी के कारण स्कूलों को नहीं खोला जा सका है और सरकार विद्यार्थियों का बोझ कम करना चाहती है। इसीलिए शैक्षणिक वर्ष दो हज़ार बीस-इक्कीस के लिए पाठ्यक्रम को पच्चीस प्रतिशत तक कम किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि वैसे तो पंद्रह जून से राज्य में शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन कोरोना के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सरकार ने अब तक स्कूलों को खोलने की अनुमति नहीं दी है। इस बीच, कुछ साधन-संपन्न स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी है, लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर भी सरकार के पास कई तरह की शिकायतें आ रही हैं। इनमें विद्यार्थियों पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव और तनाव की शिकायत प्रमुख है। वहीं, ग्रामीण और जिला परिषद स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था न होने जैसी तमाम तकलीफों के मद्देनजर सिलेबस कम करने का फैसला लिया गया है।
मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक बार फिर मोदी सरकार पर जोरदार हमला किया है। मलिक ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसते हुए कहा है कि वे जानते हैं कि उनके बोलने से कुछ लोगों को दिक्कत होगी। किसान आंदोलन शुरू होने के बाद से ही मलिक लगातार कुछ न कुछ ऐसा बोलते रहे हैं, जिससे बीजेपी व मोदी सरकार की खासी किरकिरी हुई है। किसान आंदोलन से ख़ासे प्रभावित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ से आने वाले मलिक यहीं नहीं रुके और जोरदार हमले करते रहे। उन्होंने आगे कहा, "पहले दिन जब मैं किसानों के हक़ में बोला था, यह तय करके बोला था कि मैं फ़ौरन छोड़ दूंगा और किसानों के धरने में आकर बैठ जाऊंगा। " इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने जमकर तालियां बजाई और किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगाए। मलिक ने कहा कि न तो सिखों को हराया जा सकता है और न ही जाटों को। बताना होगा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर हरियाणा, राजस्थान और पंजाब में हिंदू के साथ ही सिख जाट भी इस आंदोलन में खासे सक्रिय हैं। मलिक ने कुछ दिन पहले एक बयान देकर सियासत में खलबली मचा दी थी। मलिक ने कहा था कि जब वे कश्मीर के उप राज्यपाल बने, तब उनके पास दो फ़ाइलें आयी थीं। मलिक के मुताबिक़, एक फ़ाइल में अंबानी शामिल थे जबकि दूसरी फ़ाइल में आरएसएस के एक बड़े अफ़सर। राज्यपाल ने कहा था कि जिन विभागों की ये फ़ाइलें थीं, उनके सचिवों ने उन्हें बताया था कि इन फ़ाइलों में घपला है और इन दोनों फ़ाइलों में उन्हें 150-150 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। मलिक के इस बयान पर कि 'दूसरी फ़ाइल में आरएसएस के एक बड़े अफ़सर' शामिल थे, इसे लेकर जोरदार चर्चा पत्रकारिता से लेकर सियासी गलियारों में हो चुकी है। चर्चा इसी बात को लेकर हुई कि आख़िर वह आरएसएस के बड़े अफ़सर कौन थे। मलिक ने कहा था कि आरएसएस के उस अफ़सर का नाम लेना सही नहीं होगा लेकिन सब जानते हैं कि उस वक़्त जम्मू-कश्मीर में आरएसएस का प्रभारी कौन था। लेकिन बीजेपी के बड़े नेता राम माधव ने कहा था कि मलिक जब तक जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल रहे, तब तक हुए सभी समझौतों की जांच होनी चाहिए। मलिक ने बस नाम नहीं लिया बाक़ी उनका साफ इशारा राम माधव की ही ओर था। मलिक ने कुछ दिन पहले कहा था कि कश्मीर के उप राज्यपाल पद से हटने के बाद उन्होंने किसानों को लेकर बेधड़क होकर कई बयान दिए, अगर वे कश्मीर में कुछ ग़लत कर देते तो उनके घर ईडी और इनकम टैक्स वाले पहुंच जाते। मलिक ने हाल ही में केंद्र सरकार से अपील की थी कि वह आंदोलनकारी किसानों की मांगों को मान ले। उन्होंने कहा था कि अगर किसानों की मांगें नहीं मानी गईं तो ये सरकार दोबारा सत्ता में नहीं आएगी। उनके इस बयान को सोशल मीडिया से लेकर मेन स्ट्रीम मीडिया में ख़ूब जगह मिली थी। मलिक ने कहा था कि बीजेपी का कोई नेता उत्तर प्रदेश के मेरठ, बाग़पत, मुज़फ्फरनगर के किसी गांव में घुस तक नहीं सकता।
मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक बार फिर मोदी सरकार पर जोरदार हमला किया है। मलिक ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तंज कसते हुए कहा है कि वे जानते हैं कि उनके बोलने से कुछ लोगों को दिक्कत होगी। किसान आंदोलन शुरू होने के बाद से ही मलिक लगातार कुछ न कुछ ऐसा बोलते रहे हैं, जिससे बीजेपी व मोदी सरकार की खासी किरकिरी हुई है। किसान आंदोलन से ख़ासे प्रभावित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ से आने वाले मलिक यहीं नहीं रुके और जोरदार हमले करते रहे। उन्होंने आगे कहा, "पहले दिन जब मैं किसानों के हक़ में बोला था, यह तय करके बोला था कि मैं फ़ौरन छोड़ दूंगा और किसानों के धरने में आकर बैठ जाऊंगा। " इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने जमकर तालियां बजाई और किसान एकता जिंदाबाद के नारे लगाए। मलिक ने कहा कि न तो सिखों को हराया जा सकता है और न ही जाटों को। बताना होगा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर हरियाणा, राजस्थान और पंजाब में हिंदू के साथ ही सिख जाट भी इस आंदोलन में खासे सक्रिय हैं। मलिक ने कुछ दिन पहले एक बयान देकर सियासत में खलबली मचा दी थी। मलिक ने कहा था कि जब वे कश्मीर के उप राज्यपाल बने, तब उनके पास दो फ़ाइलें आयी थीं। मलिक के मुताबिक़, एक फ़ाइल में अंबानी शामिल थे जबकि दूसरी फ़ाइल में आरएसएस के एक बड़े अफ़सर। राज्यपाल ने कहा था कि जिन विभागों की ये फ़ाइलें थीं, उनके सचिवों ने उन्हें बताया था कि इन फ़ाइलों में घपला है और इन दोनों फ़ाइलों में उन्हें एक सौ पचास-एक सौ पचास करोड़ रुपये मिल सकते हैं। मलिक के इस बयान पर कि 'दूसरी फ़ाइल में आरएसएस के एक बड़े अफ़सर' शामिल थे, इसे लेकर जोरदार चर्चा पत्रकारिता से लेकर सियासी गलियारों में हो चुकी है। चर्चा इसी बात को लेकर हुई कि आख़िर वह आरएसएस के बड़े अफ़सर कौन थे। मलिक ने कहा था कि आरएसएस के उस अफ़सर का नाम लेना सही नहीं होगा लेकिन सब जानते हैं कि उस वक़्त जम्मू-कश्मीर में आरएसएस का प्रभारी कौन था। लेकिन बीजेपी के बड़े नेता राम माधव ने कहा था कि मलिक जब तक जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल रहे, तब तक हुए सभी समझौतों की जांच होनी चाहिए। मलिक ने बस नाम नहीं लिया बाक़ी उनका साफ इशारा राम माधव की ही ओर था। मलिक ने कुछ दिन पहले कहा था कि कश्मीर के उप राज्यपाल पद से हटने के बाद उन्होंने किसानों को लेकर बेधड़क होकर कई बयान दिए, अगर वे कश्मीर में कुछ ग़लत कर देते तो उनके घर ईडी और इनकम टैक्स वाले पहुंच जाते। मलिक ने हाल ही में केंद्र सरकार से अपील की थी कि वह आंदोलनकारी किसानों की मांगों को मान ले। उन्होंने कहा था कि अगर किसानों की मांगें नहीं मानी गईं तो ये सरकार दोबारा सत्ता में नहीं आएगी। उनके इस बयान को सोशल मीडिया से लेकर मेन स्ट्रीम मीडिया में ख़ूब जगह मिली थी। मलिक ने कहा था कि बीजेपी का कोई नेता उत्तर प्रदेश के मेरठ, बाग़पत, मुज़फ्फरनगर के किसी गांव में घुस तक नहीं सकता।
भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बैठक करने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. सिंधिया के बाद उनके समर्थक के 19 विधायकों ने भी कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, सभी ने 2 अटैचमेंट में इमेल राजभवन से सचिवालय को भेज दिया है. इसके साथ ही सिंधिया गुट के जिला समर्थकों का इस्तीफा देने का दौर शुरु हो गया है. इस तरह मध्यप्रदेश में कांग्रेस को एक के बाद एक बड़ा झटका लग रहा है. कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ जाएगी और इसके बाद शिवराज सिंह चौहान सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं. पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में शाम को बीजेपी की बैठक होने वाली है. बैठक में विधायक शिवराज को विधायक दल का नेता चुन सकते हैं. सूत्र बताते हैं कि बीजेपी ने राज्यसभा सीट और केंद्र में मंत्रिपद का आफर दिया है. हालांकि अभी तक ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस बात की घोषणा नहीं किया है कि वो बीजेपी में शामिल हो रहे है कि नहीं. लेकिन यह तय माना जा रहा है कि सिंधिया बीजेपी में भी शामिल होंगे.
भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बैठक करने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. सिंधिया के बाद उनके समर्थक के उन्नीस विधायकों ने भी कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है, सभी ने दो अटैचमेंट में इमेल राजभवन से सचिवालय को भेज दिया है. इसके साथ ही सिंधिया गुट के जिला समर्थकों का इस्तीफा देने का दौर शुरु हो गया है. इस तरह मध्यप्रदेश में कांग्रेस को एक के बाद एक बड़ा झटका लग रहा है. कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ जाएगी और इसके बाद शिवराज सिंह चौहान सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं. पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में शाम को बीजेपी की बैठक होने वाली है. बैठक में विधायक शिवराज को विधायक दल का नेता चुन सकते हैं. सूत्र बताते हैं कि बीजेपी ने राज्यसभा सीट और केंद्र में मंत्रिपद का आफर दिया है. हालांकि अभी तक ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस बात की घोषणा नहीं किया है कि वो बीजेपी में शामिल हो रहे है कि नहीं. लेकिन यह तय माना जा रहा है कि सिंधिया बीजेपी में भी शामिल होंगे.
नई दिल्ली। इस समय अमेरिका में गन कल्चर को लेकर बहस छिड़ी हुई है दूसरी ओर फ्लोरिडा में 2 साल के एक बच्चे ने अपने पिता को गोली मार दी। इस घटना में उनकी मौत हो गई। इसके बाद मां को आपराधिक धाराओं का सामना करना पड़ रहा है। रेगी मैब्री नाम के 26 वर्षीय शख्स को पिछले महीने के आखिर में उस वक्त गोली मारी गई थी जब वो वीडियो गेम खेल रहे थे। ऑरेंज काउंटी शेरिफ ऑफिस के अनुसार, मैब्री का परिवार मेट्रो ओरलैंडो में रहता है और उसमें तीन बच्चे व पत्नी मैरी अयाला शामिल हैं। ऑरेंज काउंटी के शेरिफ जॉन मीना ने कहा, 'बंदूक को ठीक से सुरक्षित जगह पर नहीं रखा गया था। इसके चलते दो साल का एक बच्चे इस तक पहुंच गया और दुर्घटनावश अपने पिता को गोली मार दी। ' मीना का कहना है कि 28 वर्षीय अयाला पर लापरवाही के कारण गैर-इरादतन हत्या का आरोप तय किया गया है। अयाला और मैब्री, दोनों बच्चों की उपेक्षा करने और नशीले पदार्थों का सेवन करने के आरोप में परोल पर थे। अधिकारियों के मुताबिक, अयाला ने जांचकर्ताओं को बताया कि उसके पांच साल के बेटे ने उसे बताया कि उसके दो साल के भाई ने बंदूक चलाई थी, लेकिन बड़ा भाई यह नहीं बता सका कि उसके छोटे भाई ने हथियार कैसे हासिल किया। अधिकारियों के अनुसार, घटना में बच्चों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और उन्हें फ्लोरिडा बाल एवं परिवार विभाग की देखरेख में भेज दिया गया है। शेरिफ ने कहा, 'अगर बंदूक को सुरक्षित स्थान पर रखा गया होता तो घटना रोकी जा सकती थी। अब इन छोटे बच्चों ने अपने माता-पिता, दोनों को प्रभावी रूप से खो दिया है। एक छोटे बच्चे को इस सदमे के साथ जीवन जीना पड़ेगा कि उसने अपने पिता को गोली मार दी। '
नई दिल्ली। इस समय अमेरिका में गन कल्चर को लेकर बहस छिड़ी हुई है दूसरी ओर फ्लोरिडा में दो साल के एक बच्चे ने अपने पिता को गोली मार दी। इस घटना में उनकी मौत हो गई। इसके बाद मां को आपराधिक धाराओं का सामना करना पड़ रहा है। रेगी मैब्री नाम के छब्बीस वर्षीय शख्स को पिछले महीने के आखिर में उस वक्त गोली मारी गई थी जब वो वीडियो गेम खेल रहे थे। ऑरेंज काउंटी शेरिफ ऑफिस के अनुसार, मैब्री का परिवार मेट्रो ओरलैंडो में रहता है और उसमें तीन बच्चे व पत्नी मैरी अयाला शामिल हैं। ऑरेंज काउंटी के शेरिफ जॉन मीना ने कहा, 'बंदूक को ठीक से सुरक्षित जगह पर नहीं रखा गया था। इसके चलते दो साल का एक बच्चे इस तक पहुंच गया और दुर्घटनावश अपने पिता को गोली मार दी। ' मीना का कहना है कि अट्ठाईस वर्षीय अयाला पर लापरवाही के कारण गैर-इरादतन हत्या का आरोप तय किया गया है। अयाला और मैब्री, दोनों बच्चों की उपेक्षा करने और नशीले पदार्थों का सेवन करने के आरोप में परोल पर थे। अधिकारियों के मुताबिक, अयाला ने जांचकर्ताओं को बताया कि उसके पांच साल के बेटे ने उसे बताया कि उसके दो साल के भाई ने बंदूक चलाई थी, लेकिन बड़ा भाई यह नहीं बता सका कि उसके छोटे भाई ने हथियार कैसे हासिल किया। अधिकारियों के अनुसार, घटना में बच्चों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और उन्हें फ्लोरिडा बाल एवं परिवार विभाग की देखरेख में भेज दिया गया है। शेरिफ ने कहा, 'अगर बंदूक को सुरक्षित स्थान पर रखा गया होता तो घटना रोकी जा सकती थी। अब इन छोटे बच्चों ने अपने माता-पिता, दोनों को प्रभावी रूप से खो दिया है। एक छोटे बच्चे को इस सदमे के साथ जीवन जीना पड़ेगा कि उसने अपने पिता को गोली मार दी। '
- कृष 3 से बदलेगी विवेक की किस्मत? - एकता की अगली फिल्म में इमरान-सोनाक्षी! - क्या 'मोगैंबो' की तरह हिट होगा कृष 3 का 'काल'? - 'चेन्नई एक्सप्रेस' से बचेगी शाहरूख की बादशाहत! Nora Fatehi: ముత్యాల వంటి డ్రెస్సులో నోరా ఫతేహి హొయలు.. హాట్ లుక్స్ వైరల్!
- कृष तीन से बदलेगी विवेक की किस्मत? - एकता की अगली फिल्म में इमरान-सोनाक्षी! - क्या 'मोगैंबो' की तरह हिट होगा कृष तीन का 'काल'? - 'चेन्नई एक्सप्रेस' से बचेगी शाहरूख की बादशाहत! Nora Fatehi: ముత్యాల వంటి డ్రెస్సులో నోరా ఫతేహి హొయలు.. హాట్ లుక్స్ వైరల్!
Highlightsटॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी पर्थ स्कॉर्चर्स की टीम ने 167 रन बनाए। इस लक्ष्य को सिडनी की टीम ने बहुत ही आसानी के साथ सिर्फ एक विकेट खोकर हासिल कर लिया। मैच के दौरान सिडनी सिक्सर्स के बल्लेबाज जेम्स विन्स अपने शतक से चूक गए। पर्थ स्कॉर्चर्स और सिडनी सिक्सर्स के बीच शनिवार को बिग बैश लीग का पहला सेमीफाइनल मैच खेला गया। इस मुकाबले को सिडनी सिक्सर्स ने 9 विकेट से जीतकर फाइनल में प्रवेश कर लिया। लेकिन इस मैच के दौरान हुई एक घटना लोगों के बीच चर्चा में आ गई है। दरअसल, सिडनी सिक्सर्स के बल्लेबाज जेम्स विन्स अपने शतक से महज दो रन दूर थे, लेकिन तभी गेंदबाज ने कुछ ऐसा किया कि वह अपना शतक पूरा नहीं कर सके। विन्स अपने शतक से सिर्फ 2 रन दूर थे और उनके पास इसे पूरा करने का शानदार मौका था। सिडनी को जीत के लिए एक रन की जरूरत थी और टीम के पास 3 ओवर पड़े थे। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी ऑलराउंडर एंड्रू टाय गेंदबाजी करने आए और उन्होंने वाइड फेंककर सिडनी को इस मैच में जीत दिला दी। एंड्रू टाय की इस हरकत को देखकर बल्लेबाज भी हैरान रह गया। स्ट्राइक पर खड़े विन्स लंबे समय तक गेंदबाज को देखते रह गए और उन्हें इस पर यकीन नहीं हुआ। शतक के करीब आकर गेंदबाज की ऐसी हरकत के कारण वह अपने शानदार शतक से चूक गए। सिडनी को जीत के लिए 20 ओवरों में 168 रनों की जरूरत थी। जिसके बाद सिडनी के बल्लेबाजों ने सिर्फ 17 ओवरों में ही 9 विकेट से मैच जीत लिया।
Highlightsटॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी पर्थ स्कॉर्चर्स की टीम ने एक सौ सरसठ रन बनाए। इस लक्ष्य को सिडनी की टीम ने बहुत ही आसानी के साथ सिर्फ एक विकेट खोकर हासिल कर लिया। मैच के दौरान सिडनी सिक्सर्स के बल्लेबाज जेम्स विन्स अपने शतक से चूक गए। पर्थ स्कॉर्चर्स और सिडनी सिक्सर्स के बीच शनिवार को बिग बैश लीग का पहला सेमीफाइनल मैच खेला गया। इस मुकाबले को सिडनी सिक्सर्स ने नौ विकेट से जीतकर फाइनल में प्रवेश कर लिया। लेकिन इस मैच के दौरान हुई एक घटना लोगों के बीच चर्चा में आ गई है। दरअसल, सिडनी सिक्सर्स के बल्लेबाज जेम्स विन्स अपने शतक से महज दो रन दूर थे, लेकिन तभी गेंदबाज ने कुछ ऐसा किया कि वह अपना शतक पूरा नहीं कर सके। विन्स अपने शतक से सिर्फ दो रन दूर थे और उनके पास इसे पूरा करने का शानदार मौका था। सिडनी को जीत के लिए एक रन की जरूरत थी और टीम के पास तीन ओवर पड़े थे। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी ऑलराउंडर एंड्रू टाय गेंदबाजी करने आए और उन्होंने वाइड फेंककर सिडनी को इस मैच में जीत दिला दी। एंड्रू टाय की इस हरकत को देखकर बल्लेबाज भी हैरान रह गया। स्ट्राइक पर खड़े विन्स लंबे समय तक गेंदबाज को देखते रह गए और उन्हें इस पर यकीन नहीं हुआ। शतक के करीब आकर गेंदबाज की ऐसी हरकत के कारण वह अपने शानदार शतक से चूक गए। सिडनी को जीत के लिए बीस ओवरों में एक सौ अड़सठ रनों की जरूरत थी। जिसके बाद सिडनी के बल्लेबाजों ने सिर्फ सत्रह ओवरों में ही नौ विकेट से मैच जीत लिया।
Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? एयरलिफ्ट तो था 2016 का प्लान. . . ये रहा 2017 का पहला अक्षय DHAMAKA! है। है। है। हैं। की। दरअसल, रीमेक। इस फिल्म में अक्षय कुमार मुरगोदास के साथ हॉलीडे के बाद एक बार फिर काम कर रहे हैं और फिल्म किसान और उनकी आत्महत्या की समस्याओं पर बन रही हैं। अक्षय को फिल्म बहुत ही पसंद आई है। और अब वो जल्द इस पर काम शुरू कर देंगे। फिल्म का नाम होगा इक्का और इसे जनवरी 2017 में रिलीज़ करने की पूरी तैयारी है।
Don't Miss! - Travel आखिर क्यों कोई नहीं कर पाया कैलाश पर्वत की चढ़ाई? क्या है इसका वैज्ञानिक कारण? एयरलिफ्ट तो था दो हज़ार सोलह का प्लान. . . ये रहा दो हज़ार सत्रह का पहला अक्षय DHAMAKA! है। है। है। हैं। की। दरअसल, रीमेक। इस फिल्म में अक्षय कुमार मुरगोदास के साथ हॉलीडे के बाद एक बार फिर काम कर रहे हैं और फिल्म किसान और उनकी आत्महत्या की समस्याओं पर बन रही हैं। अक्षय को फिल्म बहुत ही पसंद आई है। और अब वो जल्द इस पर काम शुरू कर देंगे। फिल्म का नाम होगा इक्का और इसे जनवरी दो हज़ार सत्रह में रिलीज़ करने की पूरी तैयारी है।
एक्ट्रेस के साथ भागने की फिराक में नित्यानंद! नई दिल्ली। सेक्स स्कैण्डल में आरोपी स्वामी नित्यानंद एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार विवाद दिल्ली से उनका और दक्षिण भारतीय एक्ट्रेस रंजीता का पासपोर्ट मिलने को लेकर खड़ा हुआ है। कहा जा रहा है कि स्वामी नित्यानंद अपनी करीबी रंजीता के साथ भारत से फरार होने की फिराक में हैं। दिल्ली एयरपोर्ट से नित्यानंद और रंजीता के पासपोर्ट मिले हैं। नित्यानंद फिलहाल नेपाल में हैं। दिल्ली से नित्यानंद के 32 समर्थकों के भी पासपोर्ट मिले हैं। कस्टम विभाग ने नितिन कौशिक नामक व्यक्ति से ये पासपोर्ट बरामद किए थे। नितिन एक ट्रेवल एजेंसी से जुड़ा हुआ है। वह महत्वपूर्ण लोगों की यात्रा का इंतजाम करता है। नितिन ने पूछताछ के दौरान बताया कि एयरपोर्ट के बाहर कोई उसका इंतजार कर रहा था। यह व्यक्ति कौन था इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब नित्यानंद नेपाल में है तो वह कौन था जो नितिन का इंतजार कर रहा था। सूत्रों के मुताबिक जो व्यक्ति एयरपोर्ट के बाहर नितिन का इंतजार कर रहा था उसके हाथ में प्लेकार्ड थे। सीसीटीवी फुटेज से उसकी पहचान उजागर हो गई है। उसका पूरा विवरण पुलिस को दे दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक जो पासपोर्ट मिले हैं वे सभी सही हैं। हालांकि उनके साथ वीजा नहीं थे। सवाल इस बात को लेकर भी खड़े हो रहे हैं कि पासपोर्ट नेपाल कैसे पहुंचे और वहां से दिल्ली कैसे आए?
एक्ट्रेस के साथ भागने की फिराक में नित्यानंद! नई दिल्ली। सेक्स स्कैण्डल में आरोपी स्वामी नित्यानंद एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार विवाद दिल्ली से उनका और दक्षिण भारतीय एक्ट्रेस रंजीता का पासपोर्ट मिलने को लेकर खड़ा हुआ है। कहा जा रहा है कि स्वामी नित्यानंद अपनी करीबी रंजीता के साथ भारत से फरार होने की फिराक में हैं। दिल्ली एयरपोर्ट से नित्यानंद और रंजीता के पासपोर्ट मिले हैं। नित्यानंद फिलहाल नेपाल में हैं। दिल्ली से नित्यानंद के बत्तीस समर्थकों के भी पासपोर्ट मिले हैं। कस्टम विभाग ने नितिन कौशिक नामक व्यक्ति से ये पासपोर्ट बरामद किए थे। नितिन एक ट्रेवल एजेंसी से जुड़ा हुआ है। वह महत्वपूर्ण लोगों की यात्रा का इंतजाम करता है। नितिन ने पूछताछ के दौरान बताया कि एयरपोर्ट के बाहर कोई उसका इंतजार कर रहा था। यह व्यक्ति कौन था इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब नित्यानंद नेपाल में है तो वह कौन था जो नितिन का इंतजार कर रहा था। सूत्रों के मुताबिक जो व्यक्ति एयरपोर्ट के बाहर नितिन का इंतजार कर रहा था उसके हाथ में प्लेकार्ड थे। सीसीटीवी फुटेज से उसकी पहचान उजागर हो गई है। उसका पूरा विवरण पुलिस को दे दिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक जो पासपोर्ट मिले हैं वे सभी सही हैं। हालांकि उनके साथ वीजा नहीं थे। सवाल इस बात को लेकर भी खड़े हो रहे हैं कि पासपोर्ट नेपाल कैसे पहुंचे और वहां से दिल्ली कैसे आए?
आदित्य बिड़ला समूह की प्रमुख धातु हिंडाल्को इंडस्ट्रीज का एकीकृत शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 62. 9 फीसदी घटकर 1,362 करोड़ रुपये पर आ गया। लागत में बढ़ोतरी तथा मुद्रास्फीति के प्रभाव की वजह से कंपनी के मुनाफे में कमी आई है। कंपनी ने गुरुवार को शेयर बाजारों को यह जानकारी दी। हिंडाल्को ने पिछले वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही 3,675 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध लाभ कमाया था। हालांकि, इस दौरान कंपनी परिचालन आय 50,272 करोड़ रुपये से बढ़कर 53,151 करोड़ रुपये हो गई।
आदित्य बिड़ला समूह की प्रमुख धातु हिंडाल्को इंडस्ट्रीज का एकीकृत शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में बासठ. नौ फीसदी घटकर एक,तीन सौ बासठ करोड़ रुपये पर आ गया। लागत में बढ़ोतरी तथा मुद्रास्फीति के प्रभाव की वजह से कंपनी के मुनाफे में कमी आई है। कंपनी ने गुरुवार को शेयर बाजारों को यह जानकारी दी। हिंडाल्को ने पिछले वित्त वर्ष की दिसंबर तिमाही तीन,छः सौ पचहत्तर करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध लाभ कमाया था। हालांकि, इस दौरान कंपनी परिचालन आय पचास,दो सौ बहत्तर करोड़ रुपये से बढ़कर तिरेपन,एक सौ इक्यावन करोड़ रुपये हो गई।
चिकित्सा के क्षेत्र में इस साल का नोबेल पुरस्कार पैरासाइट यानी परजीवी से होने वाले संक्रमण से लड़ने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले तीन वैज्ञानिकों को देने की घोषणा की गई है. इन तीन वैज्ञानिकों में चीन की यूयू तू ने मलेरिया के इलाज की नई थेरेपी में अहम योगदान दिया है जबकि आयरलैंड में जन्मे विलियम सी कैम्पबेल और जापान में जन्मे सातोशी ओमूरा को राउन्ड वर्म पैरासइट्स से होने वाले संक्रमण की नई दवा बनाने के लिए के लिए नोबेल पुरस्कार मिलेगा. नोबेल समिति ने कहा कि इन वैज्ञानिकों की खोजें उन बीमारियों से लड़ने में मददगार हैं जो दुनिया में करोड़ों लोगों को प्रभावित करती हैं. मच्छरों से होने वाले मलेरिया से दुनिया भर में हर साल करीब 4. 5 लाख लोगों की मौत हो जाती है और करोड़ों लोग इसके संक्रमण का ख़तरा झेलते हैं. वहीं पैरासाइट वर्म दुनिया की एक तिहाई जनसंख्या को प्रभावित करता है. इससे रिवर ब्लाइन्डनेस और लिम्फ़ैटिक फिलारियासिस जैसी बीमारियां होती हैं. (बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं. )
चिकित्सा के क्षेत्र में इस साल का नोबेल पुरस्कार पैरासाइट यानी परजीवी से होने वाले संक्रमण से लड़ने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले तीन वैज्ञानिकों को देने की घोषणा की गई है. इन तीन वैज्ञानिकों में चीन की यूयू तू ने मलेरिया के इलाज की नई थेरेपी में अहम योगदान दिया है जबकि आयरलैंड में जन्मे विलियम सी कैम्पबेल और जापान में जन्मे सातोशी ओमूरा को राउन्ड वर्म पैरासइट्स से होने वाले संक्रमण की नई दवा बनाने के लिए के लिए नोबेल पुरस्कार मिलेगा. नोबेल समिति ने कहा कि इन वैज्ञानिकों की खोजें उन बीमारियों से लड़ने में मददगार हैं जो दुनिया में करोड़ों लोगों को प्रभावित करती हैं. मच्छरों से होने वाले मलेरिया से दुनिया भर में हर साल करीब चार. पाँच लाख लोगों की मौत हो जाती है और करोड़ों लोग इसके संक्रमण का ख़तरा झेलते हैं. वहीं पैरासाइट वर्म दुनिया की एक तिहाई जनसंख्या को प्रभावित करता है. इससे रिवर ब्लाइन्डनेस और लिम्फ़ैटिक फिलारियासिस जैसी बीमारियां होती हैं.
नई दिल्ली. कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को शुक्रवार यानी कि आज सौ दिन पूरे हो गए हैं. 7 सितंबर से कन्याकुमारी से शुरू हुई ये यात्रा अब कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान पहुँच गई है, ऐसे में आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जयपुर में एक प्रेस कांफ्रेंस की और चीन-भारत के सैनिकों के बीच तवांग में हुई झड़प को लेकर सरकार को घेरा. ऐसे में राहुल गाँधी ने विदेश मंत्री को भी चेताया. अब राहुल गाँधी के इस बयान पर भाजपा की प्रतिक्रिया आई है. राहुल गाँधी के बयान पर भाजपा सांसद की प्रतिक्रिया आई है. राहुल गाँधी के बयान पर भाजपा सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौर ने बड़ा हमला बोला है. राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि, राहुल गांधी के नाना जी सो रहे थे और सोते-सोते उन्होंने भारत की 37000 स्क्वायर किमी क्षेत्र गंवा दी थी. तब तो राहुल गांधी को लगा कि चीन से दोस्ती करनी चाहिए और अब दोस्ती इतनी गहरी है कि चीन क्या करने वाला है ये उन्हें पता है. राहुल गांधी ने कहा है कि हमारे जवान पिट रहे हैं उन्हें एक बार ऐसे कहने से पहले सोचना चाहिए कि जब हमारे जवानों को इस बारे में पता चलेगा तो उन्हें कैसा लगेगा. राहुल ने कहा- चीन के मसले को सरकार लगातार इग्नोर करती आ रही है सरकार को मामले की गंभीरता समझ नहीं आ रही, लेकिन ना तो इस मसले को इग्नोर किया जा सकता है, ना ही इसे छिपाया जा सकता है. चीन का ऑपरेशन चल रहा है और वो भारत पर हमला करने की तैयारी में है, लेकिन हिंदुस्तान की सरकार सोई हुई है. जो कोई भी इन बातों को समझता है वो उनके हथियार साफ़ तौर पर देख सकता है. चीन युद्ध की तैयारी कर रहा है, लेकिन हिंदुस्तान की सरकार इवेंट बेस्ड काम करती है. सरकार को समझना चाहिए इंटरनेशनल मसले पर इवेंट नहीं, शक्ति काम करती है. मैंने तीन-चार बार बोला है कि सरकार को इसपर एक्शन लेना चाहिए. सिर्फ विदेश मंत्री के बयान आते रहते हैं, इन मुद्दों पर विदेश मंत्री को भी अपनी सोच अच्छी करनी चाहिए. तवांग तो सिर्फ बहाना है, चीन का मकसद इन पांच क्षेत्रों पर कब्जा जमाना है... जानिए क्या है ड्रैगन की 5 फिंगर पॉलिसी?
नई दिल्ली. कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को शुक्रवार यानी कि आज सौ दिन पूरे हो गए हैं. सात सितंबर से कन्याकुमारी से शुरू हुई ये यात्रा अब कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान पहुँच गई है, ऐसे में आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जयपुर में एक प्रेस कांफ्रेंस की और चीन-भारत के सैनिकों के बीच तवांग में हुई झड़प को लेकर सरकार को घेरा. ऐसे में राहुल गाँधी ने विदेश मंत्री को भी चेताया. अब राहुल गाँधी के इस बयान पर भाजपा की प्रतिक्रिया आई है. राहुल गाँधी के बयान पर भाजपा सांसद की प्रतिक्रिया आई है. राहुल गाँधी के बयान पर भाजपा सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौर ने बड़ा हमला बोला है. राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि, राहुल गांधी के नाना जी सो रहे थे और सोते-सोते उन्होंने भारत की सैंतीस हज़ार स्क्वायर किमी क्षेत्र गंवा दी थी. तब तो राहुल गांधी को लगा कि चीन से दोस्ती करनी चाहिए और अब दोस्ती इतनी गहरी है कि चीन क्या करने वाला है ये उन्हें पता है. राहुल गांधी ने कहा है कि हमारे जवान पिट रहे हैं उन्हें एक बार ऐसे कहने से पहले सोचना चाहिए कि जब हमारे जवानों को इस बारे में पता चलेगा तो उन्हें कैसा लगेगा. राहुल ने कहा- चीन के मसले को सरकार लगातार इग्नोर करती आ रही है सरकार को मामले की गंभीरता समझ नहीं आ रही, लेकिन ना तो इस मसले को इग्नोर किया जा सकता है, ना ही इसे छिपाया जा सकता है. चीन का ऑपरेशन चल रहा है और वो भारत पर हमला करने की तैयारी में है, लेकिन हिंदुस्तान की सरकार सोई हुई है. जो कोई भी इन बातों को समझता है वो उनके हथियार साफ़ तौर पर देख सकता है. चीन युद्ध की तैयारी कर रहा है, लेकिन हिंदुस्तान की सरकार इवेंट बेस्ड काम करती है. सरकार को समझना चाहिए इंटरनेशनल मसले पर इवेंट नहीं, शक्ति काम करती है. मैंने तीन-चार बार बोला है कि सरकार को इसपर एक्शन लेना चाहिए. सिर्फ विदेश मंत्री के बयान आते रहते हैं, इन मुद्दों पर विदेश मंत्री को भी अपनी सोच अच्छी करनी चाहिए. तवांग तो सिर्फ बहाना है, चीन का मकसद इन पांच क्षेत्रों पर कब्जा जमाना है... जानिए क्या है ड्रैगन की पाँच फिंगर पॉलिसी?
प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एम वाय अस्पताल के मॉडल ब्लड बैंक में जोरदार धमाका हो गया। इस धमाके में 6 लोग घायल हो गए, जिनमें से 4 लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई तो वहीं दो लोग घायल होने के बाद डॉक्टर की निगरानी में है। अस्पताल में ब्लास्ट होते ही अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जिसके बाद घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रबंधन से जुड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे, और घटनास्थल का जायजा लिया। घटना करीब शाम 4 बजे हुई, जहां अस्पताल की पहली मंजिल पर स्थित मॉडल ब्लड बैंक में ब्लास्ट हो गया। जानकारी के मुताबिक घटना अस्पताल की पहली मंजिल पर बने मॉडल ब्लड बैंक में शाम लगभग 4 बजे के आसपास हुई, जहां यह धमाका प्लेटलेट एजिटेटर के कंप्रेसर में हुआ। यह प्लेटलेट एजिटेटर कई साल पुराना बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि, मेंटेनेंस कंपनी के 2 कर्मचारी कंप्रेसर में कूलिंग गैस भर रहे थे तभी अचानक यह ब्लास्ट हो गया। प्लेटलेट एजिटेटर ब्लड बैंक के अंदर रखा रहता है, जहां चुनिंदा कर्मचारियों को ही एंट्री मिलती है। वहीं हादसे के बाद फॉल सीलिंग जमीन पर आ गिरी, जिससे ब्लड बैंक में रखे इक्यूपमेंट को नुकसान पहुंचा है। उधर, अस्पताल के मॉडल ब्लड बैंक में हुए धमाके के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जहां जिसे भी इस घटना की जानकारी लगी, वह तुरंत मॉडल ब्लड बैंक में पहुंच गया। वहीं घायलों को निकाल कर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटनाक्रम के बाद एमवाय अस्पताल प्रबंधन से जुड़े अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे, जहां उन्होंने पूरे घटनाक्रम का जायजा लिया। वहीं इस घटनाक्रम में घायल हुए लोगों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 4 लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई तो वहीं 2 लोगों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। उधर, अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर पीएस ठाकुर ने बताया कि, घटना में 2 लोग घायल हुए हैं, उनकी हालत फिलहाल ठीक है। अस्पताल प्रबंधन की मानें तो ब्लड बैंक चालू रहेगा, इसे बंद करने की नौबत नहीं आएगी। वहीं अब इस घटनाक्रम में हुए नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है, जहां इस घटनाक्रम से भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। बीजेपी विधायक के 100 करोड़ रुपये के दावे पर केटीआर ने पूछा, केंद्रीय एजेंसियां कहां हैं?
प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एम वाय अस्पताल के मॉडल ब्लड बैंक में जोरदार धमाका हो गया। इस धमाके में छः लोग घायल हो गए, जिनमें से चार लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई तो वहीं दो लोग घायल होने के बाद डॉक्टर की निगरानी में है। अस्पताल में ब्लास्ट होते ही अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जिसके बाद घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रबंधन से जुड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे, और घटनास्थल का जायजा लिया। घटना करीब शाम चार बजे हुई, जहां अस्पताल की पहली मंजिल पर स्थित मॉडल ब्लड बैंक में ब्लास्ट हो गया। जानकारी के मुताबिक घटना अस्पताल की पहली मंजिल पर बने मॉडल ब्लड बैंक में शाम लगभग चार बजे के आसपास हुई, जहां यह धमाका प्लेटलेट एजिटेटर के कंप्रेसर में हुआ। यह प्लेटलेट एजिटेटर कई साल पुराना बताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि, मेंटेनेंस कंपनी के दो कर्मचारी कंप्रेसर में कूलिंग गैस भर रहे थे तभी अचानक यह ब्लास्ट हो गया। प्लेटलेट एजिटेटर ब्लड बैंक के अंदर रखा रहता है, जहां चुनिंदा कर्मचारियों को ही एंट्री मिलती है। वहीं हादसे के बाद फॉल सीलिंग जमीन पर आ गिरी, जिससे ब्लड बैंक में रखे इक्यूपमेंट को नुकसान पहुंचा है। उधर, अस्पताल के मॉडल ब्लड बैंक में हुए धमाके के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जहां जिसे भी इस घटना की जानकारी लगी, वह तुरंत मॉडल ब्लड बैंक में पहुंच गया। वहीं घायलों को निकाल कर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटनाक्रम के बाद एमवाय अस्पताल प्रबंधन से जुड़े अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे, जहां उन्होंने पूरे घटनाक्रम का जायजा लिया। वहीं इस घटनाक्रम में घायल हुए लोगों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चार लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई तो वहीं दो लोगों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। उधर, अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर पीएस ठाकुर ने बताया कि, घटना में दो लोग घायल हुए हैं, उनकी हालत फिलहाल ठीक है। अस्पताल प्रबंधन की मानें तो ब्लड बैंक चालू रहेगा, इसे बंद करने की नौबत नहीं आएगी। वहीं अब इस घटनाक्रम में हुए नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है, जहां इस घटनाक्रम से भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। बीजेपी विधायक के एक सौ करोड़ रुपये के दावे पर केटीआर ने पूछा, केंद्रीय एजेंसियां कहां हैं?
'स्काईमेट वेदर' में मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने कहा कि दक्षिणी दिल्ली, फरीदाबाद, पलवल, आगरा, मथुरा, होडल और नारनौल में धूल भरी आंधी के साथ हल्की बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार, कुरुक्षेत्र, करनाल (हरियाणा) गंगोह, शामली, मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) के आसपास के इलाकों में 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज के साथ छीटें पड़ने का अनुमान है। Changed weather patterns : वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान अनुसंधान प्रणाली (सफर) के अनुसार, दिल्ली में सुबह नौ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 182 दर्ज किया गया जो 'मध्यम' श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि शून्य से 50 के बीच एक्यूआई 'अच्छा', 51 से 100 के बीच 'संतोषजनक', 101 से 200 के बीच 'मध्यम', 201 से 300 के बीच 'खराब', 301 से 400 के बीच 'बहुत खराब' और 401 से 500 के बीच एक्यूआई 'गंभीर' माना जाता है।
'स्काईमेट वेदर' में मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने कहा कि दक्षिणी दिल्ली, फरीदाबाद, पलवल, आगरा, मथुरा, होडल और नारनौल में धूल भरी आंधी के साथ हल्की बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार, कुरुक्षेत्र, करनाल गंगोह, शामली, मुजफ्फरनगर के आसपास के इलाकों में तीस-चालीस किलोग्राममीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज के साथ छीटें पड़ने का अनुमान है। Changed weather patterns : वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान अनुसंधान प्रणाली के अनुसार, दिल्ली में सुबह नौ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक एक सौ बयासी दर्ज किया गया जो 'मध्यम' श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि शून्य से पचास के बीच एक्यूआई 'अच्छा', इक्यावन से एक सौ के बीच 'संतोषजनक', एक सौ एक से दो सौ के बीच 'मध्यम', दो सौ एक से तीन सौ के बीच 'खराब', तीन सौ एक से चार सौ के बीच 'बहुत खराब' और चार सौ एक से पाँच सौ के बीच एक्यूआई 'गंभीर' माना जाता है।
सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने आज सोमवार को नोटबंदी (demonetisation) पर अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार की नोटबंदी को चुनौती देने वाली सभी 58 याचिकाओं को खारिज कर दिया है। शीर्ष कोर्ट ने केंद्र सरकार के 2016 में 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों को बंद करने के फैसले को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि नोटबंदी से पहले केंद्र और आरबीआई के बीच सलाह-मशविरा हुआ था। कोर्ट का कहना है कि हम मानते हैं कि नोटबंदी आनुपातिकता के सिद्धांत से प्रभावित नहीं हुई थी। जस्टिस अब्दुल नजीर की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने 7 दिसंबर को सरकार और याचिकाकर्ताओं की पांच दिन की बहस सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। जस्टिस नजीर अपने रिटायरमेंट से दो दिन पहले नोटबंदी पर फैसला सुनाया है। फैसला सुनाने वाली बेंच में जस्टिस अब्दुल नजीर, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस ए. एस. बोपन्ना, जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यन, और जस्टिस बी. वी. नागरत्ना शामिल हैं। इससे पहले कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखते हुए केंद्र और आरबीआई से नोटबंदी से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड कोर्ट में पेश करने को कहा था। टीम इंडिया (Team India) को साल 2022 में चोटों (injuries) से जूझना पड़ा और उसके कई खिलाड़ी (player) इसका शिकार बने. जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah), रोहित शर्मा (Rohit Sharma) और रवींद्र जडेजा (Ravindra Jadeja) जैसे स्टार प्लेयर्स चोटिल खिलाड़ियों की लिस्ट में शामिल रहे. बुमराह और जडेजा की कमी तो टीम इंडिया को काफी खली और उसका प्रदर्शन निराशाजनक रहा था. अब भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) ने खिलाड़ियों की इंजरी से निपटने के लिए एक बड़ा फैसला लिया. अब खिलाड़ियों के सेलेक्शन का आधार यो-यो टेस्ट के अलावा डेक्सा (DEXA) भी होगा. अगर डेक्सा स्कैन में कोई समस्या आती है तो खिलाड़ियों का सेलेक्शन नहीं किया जाएगा. यानी कि अब भारतीय टीम में चयन के लिए यो-यो टेस्ट के साथ-साथ इस नए टेस्ट में भी खिलाड़ियों को सफलता प्राप्त करनी होगी. मैक्सिको (mexico) के सीमावर्ती शहर जुआरेज शहर (juarez city) में एक जेल (Jail) में कुछ हमलावरों ने गोलियां चला दीं। इस हमले में 14 लोगों की मौत (Death) हो गई, वहीं एक अधिकारी ने बताया कि जेल हमले में मरने वालों में 10 सुरक्षाकर्मी और चार कैदी थे, जबकि 13 अन्य घायल हुए और कम से कम 24 भाग निकले। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका कि हमला किसने किया। पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि प्रारंभिक जांच में पाया गया कि हमलावर स्थानीय समयानुसार सुबह करीब सात बजे बख्तरबंद वाहनों में जेल पहुंचे और गोलियां चलाईं। शहर के एक अलग हिस्से में, बाद में दिन में दो और ड्राइवरों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि सशस्त्र हमले में उनकी मौत हुई है। राज्य अभियोजक ने यह नहीं बताया कि क्या तीनों घटनाएं संबंधित थीं। अधिकारियों के मुताबिक, यह घटना उस वक्त हुई, जब जेल में बंद कैदियों के अपने परिवारों से मिलने का समय था। इसी दौरान सुबह लगभग 7 बजे कुछ बंदूकधारी एक गाड़ी से जेल में घुस आए और सुरक्षा अधिकारियों को गोली मार दी। इस डर के माहौल में 24 कैदी जेल से भाग निकले। सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के गोरखनाथ मंदिर में होने के दौरान रविवार दोपहर 12. 30 बजे मंदिर परिसर में आतंकी घुसने की सूचना से हड़कंप मच गया। पुलिस कंट्रोल रूम नंबर 112 पर कॉल आते ही डीएम कृष्णा करुणेश, एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर फोर्स के साथ गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर जांच पड़ताल करने लगे। उधर, एसओजी, सर्विलांस टीम नंबर के आधार पर जांच पड़ताल में जुट गई। देर शाम एसओजी ने आरोपी को गिरफ्तार कर कैंट पुलिस को सौंप दिया। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी सिरफिरा है और पुलिस को परेशान करने के लिए सूचना दी थी। पकड़े गए आरोपी की पहचान बिहार के वैशाली निवासी कुर्बान अली के रूप में हुई है। वह गोरखनाथ इलाके के इंड्रस्ट्रियल एरिया में किराए के मकान में रहकर बेकरी की दुकान पर काम करता है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण (increasing infection of corona) को देखते हुए उत्तरप्रदेश में टीकाकारण कार्य में तेजी लाने का काम किया जा रहा है. कोविड प्रबंधन के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने गठित उच्चस्तरीय टीम 09 के साथ सोमवार को प्रदेश की स्थिति की समीक्षा की. बैठक के दौरान सीएम ने जानकारी दी कि यूपी सरकार (UP Government) ने केंद्र सरकार से कोविड वैक्सीन की 10 लाख डोज मांगी है. समीक्षा बैठक के दौरान प्रदेश में कोरोना की स्थिति को लेकर चर्चा की गयी. इस बैठक के बाद सीएम योगी आदियानाथ ने कहा कि विभिन्न देशों में बढ़ते कोविड-19 के संक्रमण (Corona Cases In UP) के बीच उत्तर प्रदेश की स्थिति सामान्य है. दिसंबर माह में 09 लाख 06 हजार से अधिक टेस्ट किए गए, जिसमें 103 केस की पुष्टि हुई. इस अवधि में प्रदेश की पॉजिटिविटी दर 0. 01% दर्ज की गई. वर्तमान में प्रदेश में कुल 49 एक्टिव केस हैं. विगत 24 घंटों में 42 हजार से अधिक टेस्ट किए गए. यह समय सतर्क और सावधान रहने का है. विमुद्रीकरण (Demonetisation) को लेकर जारी एक मामले में सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय पीठ ने आज 4:1 के अनुपात में नोटबंदी के पक्ष में फैसला दिया. कोर्ट ने कहा कि केंद्र द्वारा नोटबंदी करना बिलकुल वाजिब था. आज इस ऐतिहासिक फैसले के मौक पर देखते हैं कि आखिर किन कारणों से नोटबंदी की गई थी. सरकार का कहना था कि देश में बड़ी मात्रा में काला धन (black money) छुपा है. साथ ये काला धन मुख्यतः 500 और 1000 रुपये के नोटों के रूप में रखा गया है. नोटबंदी से ये सारा धन बेकार हो जाएगा, वरना सरकार की नजर में आ जाएगा. इसके अलावा एक और बड़ी समस्या देश में जाली नोटों की थी. इसकी वजह से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा था. नोटबंदी से जाली नोटों की समस्या पर लगाम लगाने की मंशा थी. ब्लैक मनी और जाली नोटों से देश में अशांति फैलाने वाले तत्वों को फंडिंग की जा रही थी. कश्मीर में मिलिटेंसी से लेकर छत्तीसगढ़ में माओवाद तक को इससे समर्थन दिया जा रहा था. नकली नोटों के कारण बैंकों के लिए परेशानी खड़ी हो गई थी. आए दिन एटीएम से नकली नोट निकलने की शिकायतें आ रही थी और एटीएम बंद तक करने की नौबत आ रही थी. इन जाली नोटों और काले धन के कारण एक समानांतर अर्थव्यवस्ता का संचालन हो रहा था जिसकी वजह से बैंकों को बड़ा नुकसान हो रहा था. नोटबंदी से इस पर भी रोक लगाने में मदद मिली. पाकिस्तानी हिंदुओं (Pakistani Hindus) की एक ख्वाहिश पूरी करने में नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi government) बड़ी मदद करने जा रही है. पाकिस्तान में कई हिंदुओं की अंतिम ख्वाहिश थी कि मरने के बाद उनकी अस्थियों को पवित्र गंगा नदी में विसर्जित किया जाए. लेकिन उनके परिवार के लोगों के लिए अस्थियां लेकर पाकिस्तान से भारत आना आसान नहीं है. ऐसे में अब नरेंद्र मोदी सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसके जरिए वे सभी परिवार अपने लोगों की अस्थियों की लेकर उत्तराखंड के हरिद्वार आ सकेंगे और अस्थियों को धार्मिक क्रियाओं के अनुसार पवित्र गंगा में विसर्जित कर सकेंगे. नरेंद्र मोदी सरकार की स्पॉन्सरशिप पॉलिसी में संशोधन के बाद ऐसा पहली बार होगा, जब 426 पाकिस्तानी हिंदुओं की अस्थियों को उनके परिवार के लोगों के द्वारा हरिद्वार में गंगा नदी में विसर्जित किया जाएगा. वर्तमान में ये अस्थियां कराची के कुछ मंदिरों और श्मशान घाटों और अन्य जगहों पर रखी हुई हैं. पंजाब के चंडीगढ़ (Chandigarh) में बम होने की खबर सामने आई. पुलिस बम (लाइव शैल) होने की सूचना जिस इलाके से मिली है वह पंजाब के सीएम हाउस (CM House) से कुछ ही दूरी पर है. पुलिस ने तुरंत ही बम स्क्वाड (bomb squad) को इस बात की सूचना दी है. फिलहाल मौके पर पुलिस और बम स्क्वाड (police and bomb squad) पहुंच गए हैं. मामले की जांच की जा रही है. इस वीवीआईपी इलाके (VVIP area) में बम की खबर से पूरे प्रशासन में खलबली मच गई है. यह बम एक आतंकी हमले की साजिश के तहत यहां होने के शक है. हालांकि यह साजिश नाकाम हो गई है. जानकारी के मुताबिक शहर के कांसल और मोहाली के नया गांव की सीमा पर यह बम मिला है. इसे सबसे पहले एक ट्यूबवैल चालक ने देखा था जिसके बाद उसने पुलिस को इसकी सूचना दी. पुलिस ने तुरंत बम स्क्वाड को सूचना दी और दोनों ही टीमें मौके पर पहुंच गई. बताया जा रहा है कि जहां यह बम मिला है वहां पर सीएम हाउस के अलावा पंजाब और हरियाणा सचिवालय (Punjab and Haryana Secretariat) और विधानसभा परिसर (विधानसभा परिसर) भी हैं. इस बम की लोकेशन से सीएम हाऊस के लिए बनाया गया वीवीआईपी हैलिपेड भी है. दिल्ली (Delhi) में रविवार को हुए कंझावला (Kanjhawala) मामले ने पुरे देश को अंदर तक झकझोर दिया है. जिस तरह से एक गाड़ी ने लड़की को कई किलोमीटर तक सड़क पर घसीटा, हर कोई स्तब्ध रह गया है. अब इस मामले में गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) ने दिल्ली पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इस केस की एक विस्तृत रिपोर्ट (detailed report) उन्हें तुरंत सौंपे. बता दें कि दिल्ली के कंझावला में रविवार तड़के एक युवती का नग्न अवस्था में शव मिला था. बॉडी के कई हिस्से क्षत-विक्षत हो गए थे. पुलिस का दावा है कि कार सवार 5 युवकों ने एक युवती को टक्कर मारी, फिर सड़क पर 10 से 12 किमी तक घसीटा, जिससे उसकी मौत हो गई. दिल्ली पुलिस ने शव मिलने के बाद जांच की तो घटनास्थल से थोड़ी दूरी पर पुलिस को एक स्कूटी भी पड़ी मिली, जो दुर्घटनाग्रस्त थी. स्कूटी के नंबर के आधार पर युवती के बारे में पता किया गया. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के एक चर्च में धर्मांतरण (conversion to church) को लेकर हिंसा हुई। नारायणपुर में आदिवासी समाज (tribal society) में गुस्सा है और वो सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों (protesters) ने सोमवार को मौके पर पहुंचे नारायणपुर के एसपी सदानंद कुमार (SP Sadanand Kumar) पर हमला कर दिया। इस हमले में उनके सिर पर गंभीर चोट आई। बताया जा रहा कि आदिवासी समाज को धर्मांतरण की जानकारी मिली थी। जिसे लेकर समाज के लोग भड़क गए। आरोप है कि इस दौरान धर्म विशेष के लोगों ने उनके साथ मारपीट की। इसमें कई लोग घायल हो गए। विरोध बढ़ गया और भीड़ ने एक चर्च में तोड़फोड़ करने की कोशिश की। भीड़ को शांत करने की कोशिश करने वाले नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक सदानंद कुमार घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। Share:
सुप्रीम कोर्ट ने आज सोमवार को नोटबंदी पर अपना फैसला सुनाया है। कोर्ट ने केंद्र की मोदी सरकार की नोटबंदी को चुनौती देने वाली सभी अट्ठावन याचिकाओं को खारिज कर दिया है। शीर्ष कोर्ट ने केंद्र सरकार के दो हज़ार सोलह में पाँच सौ रुपयापये और एक हज़ार रुपयापये के नोटों को बंद करने के फैसले को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि नोटबंदी से पहले केंद्र और आरबीआई के बीच सलाह-मशविरा हुआ था। कोर्ट का कहना है कि हम मानते हैं कि नोटबंदी आनुपातिकता के सिद्धांत से प्रभावित नहीं हुई थी। जस्टिस अब्दुल नजीर की अध्यक्षता वाली पाँच जजों की संवैधानिक बेंच ने सात दिसंबर को सरकार और याचिकाकर्ताओं की पांच दिन की बहस सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। जस्टिस नजीर अपने रिटायरमेंट से दो दिन पहले नोटबंदी पर फैसला सुनाया है। फैसला सुनाने वाली बेंच में जस्टिस अब्दुल नजीर, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस ए. एस. बोपन्ना, जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यन, और जस्टिस बी. वी. नागरत्ना शामिल हैं। इससे पहले कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखते हुए केंद्र और आरबीआई से नोटबंदी से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड कोर्ट में पेश करने को कहा था। टीम इंडिया को साल दो हज़ार बाईस में चोटों से जूझना पड़ा और उसके कई खिलाड़ी इसका शिकार बने. जसप्रीत बुमराह , रोहित शर्मा और रवींद्र जडेजा जैसे स्टार प्लेयर्स चोटिल खिलाड़ियों की लिस्ट में शामिल रहे. बुमराह और जडेजा की कमी तो टीम इंडिया को काफी खली और उसका प्रदर्शन निराशाजनक रहा था. अब भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड ने खिलाड़ियों की इंजरी से निपटने के लिए एक बड़ा फैसला लिया. अब खिलाड़ियों के सेलेक्शन का आधार यो-यो टेस्ट के अलावा डेक्सा भी होगा. अगर डेक्सा स्कैन में कोई समस्या आती है तो खिलाड़ियों का सेलेक्शन नहीं किया जाएगा. यानी कि अब भारतीय टीम में चयन के लिए यो-यो टेस्ट के साथ-साथ इस नए टेस्ट में भी खिलाड़ियों को सफलता प्राप्त करनी होगी. मैक्सिको के सीमावर्ती शहर जुआरेज शहर में एक जेल में कुछ हमलावरों ने गोलियां चला दीं। इस हमले में चौदह लोगों की मौत हो गई, वहीं एक अधिकारी ने बताया कि जेल हमले में मरने वालों में दस सुरक्षाकर्मी और चार कैदी थे, जबकि तेरह अन्य घायल हुए और कम से कम चौबीस भाग निकले। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका कि हमला किसने किया। पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि प्रारंभिक जांच में पाया गया कि हमलावर स्थानीय समयानुसार सुबह करीब सात बजे बख्तरबंद वाहनों में जेल पहुंचे और गोलियां चलाईं। शहर के एक अलग हिस्से में, बाद में दिन में दो और ड्राइवरों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि सशस्त्र हमले में उनकी मौत हुई है। राज्य अभियोजक ने यह नहीं बताया कि क्या तीनों घटनाएं संबंधित थीं। अधिकारियों के मुताबिक, यह घटना उस वक्त हुई, जब जेल में बंद कैदियों के अपने परिवारों से मिलने का समय था। इसी दौरान सुबह लगभग सात बजे कुछ बंदूकधारी एक गाड़ी से जेल में घुस आए और सुरक्षा अधिकारियों को गोली मार दी। इस डर के माहौल में चौबीस कैदी जेल से भाग निकले। सीएम योगी आदित्यनाथ के गोरखनाथ मंदिर में होने के दौरान रविवार दोपहर बारह. तीस बजे मंदिर परिसर में आतंकी घुसने की सूचना से हड़कंप मच गया। पुलिस कंट्रोल रूम नंबर एक सौ बारह पर कॉल आते ही डीएम कृष्णा करुणेश, एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर फोर्स के साथ गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर जांच पड़ताल करने लगे। उधर, एसओजी, सर्विलांस टीम नंबर के आधार पर जांच पड़ताल में जुट गई। देर शाम एसओजी ने आरोपी को गिरफ्तार कर कैंट पुलिस को सौंप दिया। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी सिरफिरा है और पुलिस को परेशान करने के लिए सूचना दी थी। पकड़े गए आरोपी की पहचान बिहार के वैशाली निवासी कुर्बान अली के रूप में हुई है। वह गोरखनाथ इलाके के इंड्रस्ट्रियल एरिया में किराए के मकान में रहकर बेकरी की दुकान पर काम करता है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए उत्तरप्रदेश में टीकाकारण कार्य में तेजी लाने का काम किया जा रहा है. कोविड प्रबंधन के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गठित उच्चस्तरीय टीम नौ के साथ सोमवार को प्रदेश की स्थिति की समीक्षा की. बैठक के दौरान सीएम ने जानकारी दी कि यूपी सरकार ने केंद्र सरकार से कोविड वैक्सीन की दस लाख डोज मांगी है. समीक्षा बैठक के दौरान प्रदेश में कोरोना की स्थिति को लेकर चर्चा की गयी. इस बैठक के बाद सीएम योगी आदियानाथ ने कहा कि विभिन्न देशों में बढ़ते कोविड-उन्नीस के संक्रमण के बीच उत्तर प्रदेश की स्थिति सामान्य है. दिसंबर माह में नौ लाख छः हजार से अधिक टेस्ट किए गए, जिसमें एक सौ तीन केस की पुष्टि हुई. इस अवधि में प्रदेश की पॉजिटिविटी दर शून्य. एक% दर्ज की गई. वर्तमान में प्रदेश में कुल उनचास एक्टिव केस हैं. विगत चौबीस घंटाटों में बयालीस हजार से अधिक टेस्ट किए गए. यह समय सतर्क और सावधान रहने का है. विमुद्रीकरण को लेकर जारी एक मामले में सुप्रीम कोर्ट की पाँच सदस्यीय पीठ ने आज चार:एक के अनुपात में नोटबंदी के पक्ष में फैसला दिया. कोर्ट ने कहा कि केंद्र द्वारा नोटबंदी करना बिलकुल वाजिब था. आज इस ऐतिहासिक फैसले के मौक पर देखते हैं कि आखिर किन कारणों से नोटबंदी की गई थी. सरकार का कहना था कि देश में बड़ी मात्रा में काला धन छुपा है. साथ ये काला धन मुख्यतः पाँच सौ और एक हज़ार रुपयापये के नोटों के रूप में रखा गया है. नोटबंदी से ये सारा धन बेकार हो जाएगा, वरना सरकार की नजर में आ जाएगा. इसके अलावा एक और बड़ी समस्या देश में जाली नोटों की थी. इसकी वजह से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा था. नोटबंदी से जाली नोटों की समस्या पर लगाम लगाने की मंशा थी. ब्लैक मनी और जाली नोटों से देश में अशांति फैलाने वाले तत्वों को फंडिंग की जा रही थी. कश्मीर में मिलिटेंसी से लेकर छत्तीसगढ़ में माओवाद तक को इससे समर्थन दिया जा रहा था. नकली नोटों के कारण बैंकों के लिए परेशानी खड़ी हो गई थी. आए दिन एटीएम से नकली नोट निकलने की शिकायतें आ रही थी और एटीएम बंद तक करने की नौबत आ रही थी. इन जाली नोटों और काले धन के कारण एक समानांतर अर्थव्यवस्ता का संचालन हो रहा था जिसकी वजह से बैंकों को बड़ा नुकसान हो रहा था. नोटबंदी से इस पर भी रोक लगाने में मदद मिली. पाकिस्तानी हिंदुओं की एक ख्वाहिश पूरी करने में नरेंद्र मोदी सरकार बड़ी मदद करने जा रही है. पाकिस्तान में कई हिंदुओं की अंतिम ख्वाहिश थी कि मरने के बाद उनकी अस्थियों को पवित्र गंगा नदी में विसर्जित किया जाए. लेकिन उनके परिवार के लोगों के लिए अस्थियां लेकर पाकिस्तान से भारत आना आसान नहीं है. ऐसे में अब नरेंद्र मोदी सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसके जरिए वे सभी परिवार अपने लोगों की अस्थियों की लेकर उत्तराखंड के हरिद्वार आ सकेंगे और अस्थियों को धार्मिक क्रियाओं के अनुसार पवित्र गंगा में विसर्जित कर सकेंगे. नरेंद्र मोदी सरकार की स्पॉन्सरशिप पॉलिसी में संशोधन के बाद ऐसा पहली बार होगा, जब चार सौ छब्बीस पाकिस्तानी हिंदुओं की अस्थियों को उनके परिवार के लोगों के द्वारा हरिद्वार में गंगा नदी में विसर्जित किया जाएगा. वर्तमान में ये अस्थियां कराची के कुछ मंदिरों और श्मशान घाटों और अन्य जगहों पर रखी हुई हैं. पंजाब के चंडीगढ़ में बम होने की खबर सामने आई. पुलिस बम होने की सूचना जिस इलाके से मिली है वह पंजाब के सीएम हाउस से कुछ ही दूरी पर है. पुलिस ने तुरंत ही बम स्क्वाड को इस बात की सूचना दी है. फिलहाल मौके पर पुलिस और बम स्क्वाड पहुंच गए हैं. मामले की जांच की जा रही है. इस वीवीआईपी इलाके में बम की खबर से पूरे प्रशासन में खलबली मच गई है. यह बम एक आतंकी हमले की साजिश के तहत यहां होने के शक है. हालांकि यह साजिश नाकाम हो गई है. जानकारी के मुताबिक शहर के कांसल और मोहाली के नया गांव की सीमा पर यह बम मिला है. इसे सबसे पहले एक ट्यूबवैल चालक ने देखा था जिसके बाद उसने पुलिस को इसकी सूचना दी. पुलिस ने तुरंत बम स्क्वाड को सूचना दी और दोनों ही टीमें मौके पर पहुंच गई. बताया जा रहा है कि जहां यह बम मिला है वहां पर सीएम हाउस के अलावा पंजाब और हरियाणा सचिवालय और विधानसभा परिसर भी हैं. इस बम की लोकेशन से सीएम हाऊस के लिए बनाया गया वीवीआईपी हैलिपेड भी है. दिल्ली में रविवार को हुए कंझावला मामले ने पुरे देश को अंदर तक झकझोर दिया है. जिस तरह से एक गाड़ी ने लड़की को कई किलोमीटर तक सड़क पर घसीटा, हर कोई स्तब्ध रह गया है. अब इस मामले में गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इस केस की एक विस्तृत रिपोर्ट उन्हें तुरंत सौंपे. बता दें कि दिल्ली के कंझावला में रविवार तड़के एक युवती का नग्न अवस्था में शव मिला था. बॉडी के कई हिस्से क्षत-विक्षत हो गए थे. पुलिस का दावा है कि कार सवार पाँच युवकों ने एक युवती को टक्कर मारी, फिर सड़क पर दस से बारह किमी तक घसीटा, जिससे उसकी मौत हो गई. दिल्ली पुलिस ने शव मिलने के बाद जांच की तो घटनास्थल से थोड़ी दूरी पर पुलिस को एक स्कूटी भी पड़ी मिली, जो दुर्घटनाग्रस्त थी. स्कूटी के नंबर के आधार पर युवती के बारे में पता किया गया. छत्तीसगढ़ के एक चर्च में धर्मांतरण को लेकर हिंसा हुई। नारायणपुर में आदिवासी समाज में गुस्सा है और वो सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को मौके पर पहुंचे नारायणपुर के एसपी सदानंद कुमार पर हमला कर दिया। इस हमले में उनके सिर पर गंभीर चोट आई। बताया जा रहा कि आदिवासी समाज को धर्मांतरण की जानकारी मिली थी। जिसे लेकर समाज के लोग भड़क गए। आरोप है कि इस दौरान धर्म विशेष के लोगों ने उनके साथ मारपीट की। इसमें कई लोग घायल हो गए। विरोध बढ़ गया और भीड़ ने एक चर्च में तोड़फोड़ करने की कोशिश की। भीड़ को शांत करने की कोशिश करने वाले नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक सदानंद कुमार घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। Share:
भुवनेश्वर. राज्य में कोरोना के कारण दो मरीजों की मौत हो गयी है, जबकि 245 नये मामले सामने आये हैं. नये मामलों के सामने आने के बाद राज्य में कुल मामलों की संख्या बढ़कर 6859 हो गई है. राज्य के सूचना व जनसंपर्क विभाग द्वारा ट्वीट कर यह जानकारी दी गयी है. राज्य में कोरोना के कारण और दो लोगों की मौत के साथ ही मौतों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है. राज्य के स्वास्थ व परिवार कल्याण विभाग के अनुसार, ये दोनों मौतें गंजाम जिले में हुई हैं तथा उनकी आयु 48 व 52 साल की थी. आज पहचान किये गये संक्रमितों में से 214 लोग संगरोध केन्द्रों से हैं, जबकि शेष 31 स्थानीय लोग हैं. आज पहचान किये गये संक्रमित कुल 19 जिलों के हैं. इसके साथ ही पश्चिम बंगाल से अंफान की ड्यूटी कर लौटने वाले एनडीआरएफ व ओड्राफ के दो जवान भी कोरोना संक्रमित पाये गये हैं. गंजाम जिले में सर्वाधिक 96 मामले सामने आये हैं. जाजपुर जिले में 40 मामले सामने आये हैं. इसी तरह खुर्दा जिले से 28 नये मामलों की पहचान की गई है. बालेश्वर जिले से दो, बरगढ़ जिले से 10, भद्रक जिले से दो, कटक जिले से सात तथा ढेंकानाल जिले से तीन मरीज कोरोना संक्रमित पाये गये हैं. इसी तरह गजपति जिले से सात, जगतसिंहपुर जिले से नौ, झारसुगुड़ा जिले से एक, केन्द्रापड़ा जिले से आठ तथा केन्दुझर जिले से सात नये संक्रमितों की पहचान की गई है. मयूरभंज जिले से पांच, नवरंगपुर जिले से सात, नयागढ़ जिले से तीन, सोनपुर जिले से एक व सुंदरगढ़ जिले से छह कोरोना संक्रमितों की पहचान की गई है. राज्य में गत 24 घंटों में 4619 नमूनों का परीक्षण किया गया है. अब तक राज्य में 260428 नमूनों का परीक्षण किया जा चुका है. राज्य के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग द्वारा यह जानकारी दी गई है.
भुवनेश्वर. राज्य में कोरोना के कारण दो मरीजों की मौत हो गयी है, जबकि दो सौ पैंतालीस नये मामले सामने आये हैं. नये मामलों के सामने आने के बाद राज्य में कुल मामलों की संख्या बढ़कर छः हज़ार आठ सौ उनसठ हो गई है. राज्य के सूचना व जनसंपर्क विभाग द्वारा ट्वीट कर यह जानकारी दी गयी है. राज्य में कोरोना के कारण और दो लोगों की मौत के साथ ही मौतों की संख्या बढ़कर तेईस हो गई है. राज्य के स्वास्थ व परिवार कल्याण विभाग के अनुसार, ये दोनों मौतें गंजाम जिले में हुई हैं तथा उनकी आयु अड़तालीस व बावन साल की थी. आज पहचान किये गये संक्रमितों में से दो सौ चौदह लोग संगरोध केन्द्रों से हैं, जबकि शेष इकतीस स्थानीय लोग हैं. आज पहचान किये गये संक्रमित कुल उन्नीस जिलों के हैं. इसके साथ ही पश्चिम बंगाल से अंफान की ड्यूटी कर लौटने वाले एनडीआरएफ व ओड्राफ के दो जवान भी कोरोना संक्रमित पाये गये हैं. गंजाम जिले में सर्वाधिक छियानवे मामले सामने आये हैं. जाजपुर जिले में चालीस मामले सामने आये हैं. इसी तरह खुर्दा जिले से अट्ठाईस नये मामलों की पहचान की गई है. बालेश्वर जिले से दो, बरगढ़ जिले से दस, भद्रक जिले से दो, कटक जिले से सात तथा ढेंकानाल जिले से तीन मरीज कोरोना संक्रमित पाये गये हैं. इसी तरह गजपति जिले से सात, जगतसिंहपुर जिले से नौ, झारसुगुड़ा जिले से एक, केन्द्रापड़ा जिले से आठ तथा केन्दुझर जिले से सात नये संक्रमितों की पहचान की गई है. मयूरभंज जिले से पांच, नवरंगपुर जिले से सात, नयागढ़ जिले से तीन, सोनपुर जिले से एक व सुंदरगढ़ जिले से छह कोरोना संक्रमितों की पहचान की गई है. राज्य में गत चौबीस घंटाटों में चार हज़ार छः सौ उन्नीस नमूनों का परीक्षण किया गया है. अब तक राज्य में दो लाख साठ हज़ार चार सौ अट्ठाईस नमूनों का परीक्षण किया जा चुका है. राज्य के स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग द्वारा यह जानकारी दी गई है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के नए नवेले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को बधाई पत्र भेजा है। उन्होंने इसमें इस बात पर जोर दिया है कि भारत उनके देश के साथ रचनात्मक संबंध चाहता है। हालांकि, सरकार के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे को संबोधित नहीं करता, तब तक संबंधों में कोई नाटकीय बदलाव की उम्मीद नहीं है। एक सरकारी अंदरूनी सूत्र ने कहा कि पाकिस्तान के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए भारत इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया पर सतर्क रहा। नई दिल्ली यह भी जानती है कि शरीफ की संबंधों में सुधार करने की क्षमता सीमित है, क्योंकि अगले साल की शुरुआत में वहां चुनाव हो सकते हैं। शरीफ भारत के लिए शांति प्रस्ताव बनाकर इमरान खान को जमीन नहीं देना चाहेंगे। 2018 में भी इमरान खान के पीएम चुने जाने के बाद पीएम मोदी ने बधाई पत्र लिखा था। हालांकि, इमरान की सरकार ने कभी भी सीमा पार आतंकवाद को संबोधित नहीं किया। इसके अलावा उन्होंने मोदी और भाजपा पर व्यक्तिगत हमले किए। ऐसा कर उन्होंने संबंधों में सुधार की संभावना को कम कर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के नए नवेले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को बधाई पत्र भेजा है। उन्होंने इसमें इस बात पर जोर दिया है कि भारत उनके देश के साथ रचनात्मक संबंध चाहता है। हालांकि, सरकार के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे को संबोधित नहीं करता, तब तक संबंधों में कोई नाटकीय बदलाव की उम्मीद नहीं है। एक सरकारी अंदरूनी सूत्र ने कहा कि पाकिस्तान के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए भारत इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया पर सतर्क रहा। नई दिल्ली यह भी जानती है कि शरीफ की संबंधों में सुधार करने की क्षमता सीमित है, क्योंकि अगले साल की शुरुआत में वहां चुनाव हो सकते हैं। शरीफ भारत के लिए शांति प्रस्ताव बनाकर इमरान खान को जमीन नहीं देना चाहेंगे। दो हज़ार अट्ठारह में भी इमरान खान के पीएम चुने जाने के बाद पीएम मोदी ने बधाई पत्र लिखा था। हालांकि, इमरान की सरकार ने कभी भी सीमा पार आतंकवाद को संबोधित नहीं किया। इसके अलावा उन्होंने मोदी और भाजपा पर व्यक्तिगत हमले किए। ऐसा कर उन्होंने संबंधों में सुधार की संभावना को कम कर दिया।
कश्मीर के दूर-दराज क्षेत्रों के 40 बच्चों ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह से भेंट की। इनमें 20 लड़कियां भी थीं। श्री राजनाथ सिंह ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अनेकता में एकता का देश है। उन्होंने बच्चों को सलाह दी कि वे देश की सुंदरता और विविधता को साझा करें ताकि देश एकीकृत रूप से आगे बढ़े और प्रतिदिन मजबूत बने। उन्होंने देश की समृद्ध सांस्कृति विरासत एवं विविधता को देखने के लिए कश्मीर क्षेत्र के बच्चों के लिए भारत दर्शन भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की प्रशंसा की। बच्चों ने विभिन्न ऐतिहासिक स्थानों की यात्रा के बारे में अपने अनुभवों को साझा किया और आयोजन के लिए सीमा सुरक्षा बल को धन्यवाद दिया। गृह मंत्री ने बच्चों से वापसी के बाद मित्रों तथा परिजनों के साथ अनुभव और प्यार साझा करने की सलाह दी। इस अवसर पर सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक श्री डी. के. पाठक ने कहा कि भारत दर्शन भ्रमण की अवधारणा वर्ष 2000 में शुरू की गई थी और इसका आयोजन जम्मू-कश्मीर के बच्चों के लिए प्रत्येक वर्ष किया जाता है। अब तक बीएसएफ प्रायोजित भारत दर्शन भ्रमण में जम्मू-कश्मीर के 1499 बच्चे शामिल हुए हैं। इस भ्रमण कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं देश के सामाजिक परिवेश से परिचित कराना तथा देश की औद्योगिक, तकनीकी तथा विज्ञान के क्षेत्रों में प्रगति के बारे में बताना और उनमें देश के लिए गौरव भाव करना है। भ्रमण के दौरान बच्चों ने देश के विभिन्न भागों में ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक महत्व के स्थानों को देखा। भारत दर्शन भ्रमण से बच्चों को देश की विविधता देखने का अवसर मिलता है। इस भ्रमण से बच्चों को विभिन्न संस्कृतियों, क्षेत्रों तथा भाषाओं के लोगों के साथ मिलने-जुलने और संवाद का मौका मिलता है।
कश्मीर के दूर-दराज क्षेत्रों के चालीस बच्चों ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह से भेंट की। इनमें बीस लड़कियां भी थीं। श्री राजनाथ सिंह ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अनेकता में एकता का देश है। उन्होंने बच्चों को सलाह दी कि वे देश की सुंदरता और विविधता को साझा करें ताकि देश एकीकृत रूप से आगे बढ़े और प्रतिदिन मजबूत बने। उन्होंने देश की समृद्ध सांस्कृति विरासत एवं विविधता को देखने के लिए कश्मीर क्षेत्र के बच्चों के लिए भारत दर्शन भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए सीमा सुरक्षा बल की प्रशंसा की। बच्चों ने विभिन्न ऐतिहासिक स्थानों की यात्रा के बारे में अपने अनुभवों को साझा किया और आयोजन के लिए सीमा सुरक्षा बल को धन्यवाद दिया। गृह मंत्री ने बच्चों से वापसी के बाद मित्रों तथा परिजनों के साथ अनुभव और प्यार साझा करने की सलाह दी। इस अवसर पर सीमा सुरक्षा बल के महानिदेशक श्री डी. के. पाठक ने कहा कि भारत दर्शन भ्रमण की अवधारणा वर्ष दो हज़ार में शुरू की गई थी और इसका आयोजन जम्मू-कश्मीर के बच्चों के लिए प्रत्येक वर्ष किया जाता है। अब तक बीएसएफ प्रायोजित भारत दर्शन भ्रमण में जम्मू-कश्मीर के एक हज़ार चार सौ निन्यानवे बच्चे शामिल हुए हैं। इस भ्रमण कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं देश के सामाजिक परिवेश से परिचित कराना तथा देश की औद्योगिक, तकनीकी तथा विज्ञान के क्षेत्रों में प्रगति के बारे में बताना और उनमें देश के लिए गौरव भाव करना है। भ्रमण के दौरान बच्चों ने देश के विभिन्न भागों में ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक महत्व के स्थानों को देखा। भारत दर्शन भ्रमण से बच्चों को देश की विविधता देखने का अवसर मिलता है। इस भ्रमण से बच्चों को विभिन्न संस्कृतियों, क्षेत्रों तथा भाषाओं के लोगों के साथ मिलने-जुलने और संवाद का मौका मिलता है।
ओङ्कारेणान्तरितं ये जपन्ति गोविन्दस्य पञ्च पदं मनुम् । दर्शयेदात्मरूपं तस्मान्मुमुक्षुरभ्यसेन्नित्यशान्त्यै ।। 'जो लोग सर्वदा यत्नपूर्वक श्रीविष्णुके इस परमपदकी आराधना करते हैं और विषयवासनासे प्रीति नहीं रखते, उनके पुरुषार्थके कारण श्रीविष्णुभगवान् गोपवेषमें उन लोगोंके निकट अपना स्वरूप प्रकाश करते हैं । जो कोई ओंकारयुक्त श्रीगोविन्दके पञ्चपदी मन्त्रका जप करते हैं, उनको श्रीगोविन्द अपना रूप दिखलाते हैं, अतएव मुमुक्षुको शान्ति प्राप्त करनेके निमित्त गोविन्द मन्त्रका बार-बार जप करना चाहिये ।' श्रीभगवान् के आकारमें और मनुष्यके आकारमें यह भेद है कि मनुष्यके आकार मूल प्रकृतिके विकारोंके ( शरीर पञ्चमहाभूतके और अन्तःकरण मलिन सत्त्वगुणके ) बने हुए हैं और कर्माधीन हैं किन्तु ईश्वरका आकार उनकी शक्ति, दैवी प्रकृति ( जो विशुद्ध विद्यारूपिणी है ) का बना हुआ है और उनकी इच्छाके अधीन है । जिस उपास्य देवपर जिसकी रुचि हो उसको उसी देवकी भक्ति करनी चाहिये, अन्तिम परिणाम सत्रका एक ही है, क्योंकि यथार्थमें भिन्न-भिन्न उपास्यदेव ( जैसे विष्णु, शिव, शक्ति, सूर्य, * * उपास्यसूर्य इस प्रकाशसूर्यके अन्तरमें हैं जिनकी यह दृश्यमान मूर्ति केवल आवरण है । आदित्यहृदयमें लिखा है'ध्येयः सदा संवितृमण्डलमध्यवर्ती नारायणः सरसिजासनसन्निविष्टः । गणपति आदि ) एक ही परम पुरुपके नाना रूप हैं, अतएव सत्र एक ही हैं, भिन्न-भिन्न नहीं है, जैसा पहले भी कहा जा चुका है। उपासकका सम्बन्ध श्रीउपास्यदेवके साथ कृत्रिम नहीं है किन्तु स्वयंसिद्ध, स्वाभाविक और अनादि है । प्रत्येक जीवको उपास्यदेवमेंसे एक-न-एकसे सनातन सम्बन्ध रहता है जो उस जीवका आवश्यक रक्षण और निरीक्षण करते हैं, यद्यपि अज्ञानवश वह उनको न जानता और न मानता हो । यथार्य दीक्षा वही है जब कि परम गुरुदेव शिष्यको उसके इष्टदेवके साथ प्रकटरूपमें सम्बन्ध करवा देते हैं । ध्यानके निमित्त हृदयमें सांगोपांग मूर्ति श्रीइष्टदेवताको ऐसी बनानी अत्यन्तावश्यक है जो अधिक कालतक ज्यों-की-यों बनी रहे जिसका होना बिना किसी आदर्शके सहाराके कठिन है अतएव व्यानके समय हृदय में सांगोपांग मूर्ति बनाने में सहायता पाने के लिये इष्टदेवताका एक सुन्दर चित्ताकर्षक चित्र सामने रखना चाहिये और उसी चित्रकी-सी मूर्ति हृदयमें वनानी चाहिये और उस हृदयस्थ मूर्तिपर मनको बाँधना चाहिये । अभ्यासके प्रारम्भमें ऐसी मूर्ति पूर्णरूपसे बनाने में और उसको ज्यों-की-त्यों बनाये रखने में बहुत कठिनाई जान पड़ेगी, सर्वाग एकाएक बनना और वैसे ही वना रहना कठिन होगा । जैसे कभी पग नहीं दीख पड़ेगा, यदि पग बनाया जायगा, तो बाहु नहीं दीख पड़ेगा इत्यादि, इत्यादि । किन्तु इस कठिनाईको दूर करनेमें 'सूर्यमण्डलके भीतर रहनेवाला कमलासनस नारायणका सदा ध्यान करना चाहिये ।' चित्रको देख लेने से बड़ी सहायता मिलेगी और कुछ कालके अभ्यासके बाद यह कठिनाई जाती रहेगी। पहले यह कार्य सुन्दर प्रतिमाद्वारा लिया जाता था किन्तु चित्र प्रतिमासे अधिक सुन्दर और मनोहर होनेके कारण और सुगमतासे प्राप्य और रखने और अन्यत्र ले जानेमें सुलभ होनेके कारण अब चित्रका व्यवहार करना उचित है और किया जाता है । ध्यानकी प्रथम अवस्था यथार्थ में चित्राङ्कित करना अथवा मूर्तिको हृदयमें चित्रित करना है । जैसा चित्रकार अथवा शिल्पी चित्र बनानेका कार्य सावधानीसे मनको एकाग्र करके करता है उसी प्रकार ध्यान में मूर्तिको, चित्रकी सहायतासे, हृदय-पटमें अंकित करना पड़ता है । क्रम यह है कि पहले हृदयमें श्रीउपास्यदेवके चरणकमलको बनावे, फिर जंघा, फिर कटि, उदर, वक्षःस्थल, मुख आदि क्रमशः बनावे और सर्वांग वन जानेपर तीव्र धारणाके बलसे उस मूर्तिको स्थिर रखे । और उसीपर मन संलग्न करे और साथ-साथ मानसिक जप भी हृदयक्षेत्रमें ही होता रहे । श्रीमद्भागवत पुराणमें लिखा हैएकैकशोऽङ्गानि धियानुभावयेत् पादादि यावद्धसितं गदाभृतः । जितं जितं स्थानमपोह्य धारयेत् परं परं शुद्धयति धीर्यथा यथा ॥ ( २ । २ । १३ ) 'तदनन्तर उन श्रीभगवान्के चरणकमलसे लेकर हास्ययुक्त मुखपर्यन्त प्रत्येक अङ्गका बुद्धिसे ध्यान करे, चरण आदि जो-जो अङ्ग विना यतके ध्यानमें आ जाय उन-उनको त्यागकर आगेआगेके जंघा, जानु आदि अङ्गोंका ध्यान करे, अपनी बुद्धि जिस प्रकार भगवत्स्वरूपमें स्थित रहे उसी रीतिसे करे ।' जिस रूप और भावमें श्रीउपास्यदेवके ध्यान करनेकी रुचि हो उसी रूप और भावमें ध्यान करना चाहिये । क्योंकि वे सर्वत्र हैं । यथाभिमत ध्यानका उल्लेख पहले भी हो चुका है। श्रीभगवान् जिस रूप और भावद्वारा साधकके चित्तको आकर्षण करें उसीमें शुद्ध निष्कामभावसे उसके अभ्यन्तरमें श्रीभगवान्को जान ध्यान करना चाहिये जो स्वाभाविक होनेके कारण शीघ्र फलीभूत होगा । श्रीमद्भागवत पुराण, स्क० ११ अ० २७ का वचन है --- अर्चादिपु यदा यत्र श्रद्धा मां तत्र चार्चयेत् । सर्वभूतेप्वात्मनि च सर्वात्माहमवस्थितः ॥ ४८ ॥ जब और जहाँसे उपासककी श्रद्धा हो तत्र और उसीमें मेरी उपासना- ध्यान करे । क्योंकि मैं सम्पूर्ण प्राणियों में और अपने स्वरूप सर्वात्मभावसे विराजमान हूँ । प्रथम अवस्थामें चित्तको श्रीउपास्यदेवके सांगोपांग (अर्थात् सत्र अवयवयुक्त) मूर्तिपर सन्निवेशित करे और उसमें संलग्न करे और ध्यानद्वारा देखता रहे । किन्तु जब यह ध्यान दृढ़ हो जाय तो एक-एक अङ्गके ध्यान में क्रमशः नीचेके असे प्रवृत्त हो । इसमें प्रथम चरणका ध्यान है । इसी कारण इस साधनाका नाम चरणसेवा है। श्रीमद्भागवत पुराणका वचन हैस्थितं व्रजन्तमासीनं शयानं वा गुहाशयम् । प्रेक्षणीयेहितं ध्यायेच्छुद्धभावेन चेतसा ।। तस्मिन् लब्धपदं चित्तं सर्वावयवसंस्थितम् । विलक्ष्यैकत्र संयुज्यादङ्गे भगवतो मुनिः सञ्चिन्तयेद्भगवतश्चरणारविन्द वज्राङ्कुशध्वजसरोरुहलाञ्छनाढ्यम् । उत्तुङ्गरक्तविलसन्नखचक्रवालज्योत्स्नाभिराहतमहद्धृयान्धकारम् । तीर्थेन मूर्त्यधिकृतेन शिवः शिवोऽभूत् । ध्यातुर्मनःशमलशैलनिसृष्टवज्रं ध्यायेश्चिरं भगवतश्चरणारविन्दम् ।। 'अपनेको जैसा प्रिय हो वैसे, खड़े हुए, चलते हुए, सिंहासनपर बैठे हुए, शेषशय्यापर शयन करते हुए, अनेकों प्रकारकी देखने योग्य लीलाएँ करते हुए और हृदयगुहामें विराजमान श्रीइष्टदेवका शुद्ध भक्तियुक्त अन्तःकरणसे ध्यान करे । तदनन्तर उन श्रीभगवान्के खरूपपर चित्त स्थिर होनेपर तथा उनके सकल अवयव एक साथ चित्तमें चित्रित होने लगे तब वह ध्यान करने - वाला योगी, अपने मनको श्रीभगवान्के एक-एक अवयवमें लगावे । प्रथम तो उत्तमतासे श्रीभगवान्के चरणकमलका ध्यान करे, जो चरणकमल वज्र, अङ्कुश, ध्वजा और कमलके चिह्नोंसे युक्त है तथा जो ऊँचे, रक्तवर्ण और शोभायमान नखोंकी पाँतिकी किरणोंसे, ध्यान करनेवाले सत्पुरुषोंके हृदयके अज्ञानरूप अन्धकारका नाश करता है । जिसके धोनेसे उत्पन्न हुई भागीरथीके जलको जो संसारको तारनेवाला है, मस्तकपर धरकर श्रीशङ्करभगवान् शिवरूप हुए हैं और जो चरणकमल, ध्यान करनेवाले पुरुषोंके मानसिक पापरूप पर्वतपर वज्रके समान छूटता है उस श्रीभगवान्के चरणकमलका चिरकाल पर्यन्त ध्यान करे ।' श्रीमद्भागवत पुराणमें यों आदेश हैनियच्छेद्विपयेभ्योऽक्षान्मनसा बुद्धिसारथिः । मनः कर्मभिराक्षिप्तं शुभार्थे धारयेद्धिया ।। तत्रैकावयवं ध्यायेदव्युच्छिन्नेन चेतसा । मनो निर्विषयं युङ्क्त्वा ततः किञ्चन न स्मरेत् । पदं तत्परमं विष्णोर्मनो यत्र प्रसीदति ॥ (२।१।१८ १९ ) 'निश्चयात्मक बुद्धिको सहायतासे मनके द्वारा इन्द्रियोंको विषयोंसे हटाकर अन्तर्मुख करे, कर्मवासनासे विषयों में दौड़नेवाले मनको निश्रयात्मक बुद्धिसे भगवत् खरूपमें लगावे । तदनन्तर ध्यानगत मूर्तिके प्रत्येक अङ्गका ध्यान करे, ऐसे विषयवासनारहित अपने मनको श्रीभगवान्के स्वरूप - चिन्तनमें लगाकर अन्य किसी वस्तुका भी स्मरण न करे; जहाँ मन प्रसन्न होता है वही विष्णुभगवान्का उत्तम स्थान है ।' हृदयके चिदाकाशमें जो चिन्मय कमल है उसमें इष्टदेवको विराजमान जान ध्यान करना चाहिये । साधारण लोगोंमें उस कमलका नाल ऊपर है और दल नीचे किन्तु व्यान करते समय चिन्तन करना चाहिये कि कमलका दल ऊपर है नाल नीचे, ऐसे अष्टदल कमलमें इष्टदेव हैं। श्रीमद्भागवत पुराण, स्कं० ११ अ० १४ में इस कमलका उल्लेख यों है - हृत्पुण्डरीकमन्तस्थमूर्ध्वनालमधोमुखम् ध्यात्वोर्ध्वमुखमुन्निद्रमपत्रं सकर्णिकम् ॥ ३६॥ श्रीभगवान्की प्रतिमा अथवा चित्रका पूजन भी इसी अवस्थाके अन्तर्गत है । विग्रहमूर्ति अथवा चित्रपटको दीर्घकालतक श्रद्धा और प्रेमसे पूजा करनेसे उसमें ऐसी शक्ति आ जाती है कि उसके दर्शनसे ही पूजा करनेवालेके मनकी अवस्था बदल जाती है और श्रीउपास्यदेवका हृदय में स्फुरण होता है और उनके निमित्त प्रेम उत्पन्न होनेपर चित्त स्वभावतः श्रीउपास्यदेवमें संलग्न और लीन हो जाता है। स्वयं श्रीउपास्यदेवके निमित्त शारीरिक सेवा करनेकी अभिलाषा जो उपासकमें रहती है जो प्रारम्भिक अवस्था में खाभाविक और आवश्यक है उसकी पूर्ति मूर्तिपूजाद्वारा होती है । श्रीउपास्यदेव भक्तके अधीनमें ऐसे रहते हैं कि जिस-जिस प्रकारसे उपासक उनकी पूजा करना चाहता है, उसी उसी प्रकार से वह उसको स्वीकार करते हैं। किन्तु मूर्तिपूजाका मुख्य आधिदैविक तात्पर्य साक्षात् सेवा अथवा ध्यानद्वारा भगवान्की सेवा करना है । जिसकी सिद्धिमें सुन्दर मनोहर चित्ताकर्षक मूर्ति अथवा चित्र परमावश्यक है, बल्कि यों कहना चाहिये कि बिना इनके आश्रयके ध्यानकी सिद्धि होना बहुत ही कठिन है । चित्तका स्वभाव है कि सुन्दर और मनोहरपर आसक्त हो और यथार्थ में श्री उपास्यदेवकी मूर्ति ही परम सुन्दर और मनोहर उपासकके निमित्त है । अतएव श्रीउपास्यदेवकी विग्रह मूर्ति अथवा चित्र सब प्रकारसे परम सुन्दर और चित्ताकर्षक लब्ध की जाय और सुन्दर स्थानमें आदरसे रहे और पूजित हो जिसके होनेसे और जिसकी सहायतासे ध्यानमें सुगमता होगी । अनेक साघक वाह्य पूजा न कर केवल मानसिक पूजा करते हैं और उनको उसीसे लाभ भी होता है। भक्तिमार्गमें विग्रहमूर्तिकी पूजा-सेवासे अनेक सहायता मिलती है और संसारका भी उपकार होता है, क्योंकि साधारण लोगोंके चित्तमें श्रीभगवान्का भाव प्रायः केवल विग्रहमूर्तिहीके देखनेसे होता है और विग्रहकी सेवा-पूजासे उनमें भक्तिभावका सञ्चार होता है। प्रतिमा और उनकी पूजाका स्थान भी, यदि भक्ति-भावसे सेवा हो तो, तेजपुञ्जका केन्द्र ( खजाना ) हो जाता है जहाँसे उक्त तेज सर्वत्र फैलता है और संसारका उपकार करता है । जहाँ भक्तिभावसे प्रतिमाकी पूजा होती हैं, उस तेजपूरित प्रतिमाके भक्तिभावसे दर्शन करनेसे जो तात्कालिक चित्तमें शान्ति प्राप्त होती है वह प्रत्यक्ष ही है । प्रतिमाकी पूजाके निमित्त जो सुगन्ध द्रव्यादि व्यवहार होते, शङ्ख आदि बजाये जाते, धूप-दीप दिये जाते, स्तुति- पाठ-भजन किये जाते, उन सत्रले आधिदैविक उपकारके सिवा संसारका आधिभौतिक उपकार भी होता है । प्रतिमापूजा सत्र साधकोंके लिये अत्यन्तावश्यक नहीं है, क्योंकि किसी-किसीको मानसिक पूजाद्वारा भी उद्देश्यसाधन हो जाता है । मूर्तिपूजा मुख्य करके साधकके लिये प्रेमके उपजानेमें सहायता देनेके निमित्त हैं जिसमें उत्कृष्ट सहायता उसके द्वारा मिलती हैं । किन्तु यदि प्रेम और अनुरागके सञ्चार करनेका उद्देश्य न रखकर ऐसी पूजा केवल राजसिक भावसे की जाय तो वह भक्तिमार्गक साधकको विशेष उपकारी नहीं है । सेवासाधनमें उन्नति करनेपर साधक ऐसी अवस्था में प्राप्त होता है जब कि उसको यथार्थ अदृश्य श्रीसद्गुरुके अस्तित्व में तनिक भी सन्देह नहीं रहता और किसी सत्पुरुषके सत्संगसे श्रीसद्गुरुका ज्ञान उसको प्राप्त हो जाता है । श्रीउपास्यदेवकी कृपासे साधक श्रीसद्गुरुको जानता है और उनके प्रति उसके चित्तमें प्रेम उत्पन्न होता है । वह तब श्रीसद्गुरुका आश्रय लेता है और उनको अपना सद्गुरु करके वरण करता है और जानता है कि बिना श्रीसद्गुरुकी कृपाके श्रीउपास्य देवकी प्राप्ति उसको हो नहीं सकती है । वह दोनों ( श्रीसद्गुरु और श्रीउपास्यदेव ) में अभेद समझता है और दोनों की सेवामें सदा प्रवृत्त होता है । ध्यानके प्रथम भागमें वह श्रीसद्गुरुका ध्यान करता है और जबतक किसी प्रकार श्रीसद्गुरुके रूपका ज्ञान उसको नहीं होता ( जो उपयुक्त समयपर अवश्य होता है ) तबतक वह श्रीसद्गुरुके केवल चरणका ध्यान हृदयमें करता है । वह अपने हृदय में श्रीसद्गुरुके चरणकमलको अङ्कितकर उसीमें चित्तको संलग्नकर प्रेमसे उसी चरणकमलका ध्यान करता है । श्रीसद्गुरुके ध्यानके बाद श्रीउपास्यदेवका ध्यान किया जाता है । चूँकि श्रीसद्गुरु श्री उपास्य देवके साथ साधकको युक्त कर देते हैं, अतएव साधककी दृष्टि में श्रीसद्गुरुका स्थान ऊँचा है और इसी कारण उनकी पूजा और ध्यान पहले किये जाते हैं, पश्चात् श्रीउपास्य देवकी । जब श्रीउपास्यदेव कृपाकर श्रीसद्गुरुके रूपको साधकके हृदयमें अथवा पाढ़सेवा अथवा ध्यान अन्य प्रकार दृष्टिगोचर करा देते हैं तबसे साधक श्रीसद्गुरुके उसी रूपका ध्यान करता है । भक्तिमार्गके ध्यानके लक्ष्य केवल श्रीसद्गुरु और श्रीउपास्य देव हैं, अन्य कोई नहीं और यह ध्यान हृदयका कार्य है, केवल बुद्धिका कार्य नहीं । स्मरणादि निःस्वार्थ सेवाद्वारा हृदयके शुद्ध होनेसे जब प्रेमका अङ्कुर हृदयमें जागृत होता है तभी यथार्थ ध्यानको प्राप्ति सम्भव है जो हृदयमें बिना अनुराग और स्नेहके उत्पन्न हुए हो नहीं सकता । इस अवस्थाका ध्यान स्मरणकी अवस्थाके ध्यानसे अवश्य उच्च है और इसमें हार्दिक प्रेमले ध्यान में प्रवृत्त होना मुख्य है । यह वही अवस्था है जब कि साधकमें श्री उपास्यदेवके प्रति ऐसा प्रगाढ़ प्रेम उत्पन्न होता है कि वह उनसे पृथक् रहना नहीं चाहता, किन्तु अत्यन्त समीप होना चाहता है ताकि वह श्रीभगवान्के तेजःपुलको कणमात्रको भी प्रथम अपने हृदय में धारण करे, फिर वहाँसे बाह्य जगत्में फैलाकर संसारका उपकाररूप भगवत् - सेवा कर सके । भक्तिमार्गका ध्यान ही प्राण है और यही श्रीउपास्यदेवकी प्राप्ति करानेवाला है । ध्यान ध्येय वस्तुके लगातार स्मरण - चिन्तनको कहते हैं जिसका प्रवाह तेलकी अखण्ड धाराके समान (जब कि एक पात्रसे दूसरे पात्र में डाला जाता है) अपरिच्छिन्न होना चाहिये । ध्यानके समय श्रीउपास्यदेवके मन्त्रका जप करना परम आवश्यक है । मूर्तिका ध्यान मनके विक्षेप ( चञ्चलता ) को नाश करेगा और मन्त्र जप मनको लय होनेसे अर्थात् निद्रितावस्था में जानेसे रोकेगा । व्यानकालमें मन जब कभी ध्येयको छोड़कर अथवा अन्य प्रकारसे दूसरी ओर जाय, जो अभ्यासके प्रारम्भमें अवश्य होगा, तो मनको ध्येयसे अन्य किसी ओर जाने न देना चाहिये और मनमें आयी हुई भावनासे शीघ्र मनको हटाकर मन्त्र और देवतापर एकाग्रभावसे लगाना चाहिये, और सतत ऐसी सावधानी रखनी चाहिये कि मन उस कालमें मन्त्र और देवतासे हटके अन्य किसी वस्तु अथवा विषयपर न चला जाय अर्थात् कोई अन्य भावना मनमें न आ जाय । श्रीमद्भागवत पुराण स्क० ११, अ० १४ में कथन है-- सुकुमारमभिध्यायेत्सर्वाङ्गेषु मनो दधत् । इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यो मनसाकृष्य तन्मनः । बुद्धया सारथिना धीर प्रणयेन्मयि सर्वतः ॥ तत्सर्वव्यापकं चित्तमाकृप्यैकत्र धारयेत् । नान्यानि चिन्तयेद्भूयः सुस्मितं भावयेन्मुखम् ॥ ( ४२-४३ ) 'मेरे सम्पूर्ण अङ्गोंमें मनको स्थिर करते हुए मेरी सुकुमार मूर्तिका ध्यान करे । मनके द्वारा इन्द्रियोंको उनके विषयोंसे खींचकर, उस मनको धीर पुरुष बुद्धिरूपी सारथिकी सहायतासे सर्वथा केवल मुझमें ही लगा दे । सत्र ओर फैले हुए चित्तको खींचकर एक स्थानमें स्थिर करे और फिर कुछ और चिन्तन न करता हुआ मेरे मधुर मुसकानयुक्त मुखका ही ध्यान करे ।' विना मनके निग्रहके ध्यानकी सिद्धि हो नहीं सकती है । वैराग्य और अभ्याससे मनिग्रह होता है । वैराग्य, आत्मा और अनात्माके ज्ञानद्वारा, अनात्मामें आसक्ति छोड़ने से प्राप्त होता है । है यह ज्ञान-वैराग्य भी भगवत्कृपासे भक्तिकी साधनासे प्राप्त होता है । अतएव मन-निग्रह मुख्य है । श्रीमद्भागवत पुराण स्क० ११ में लिखा है कि मनका निग्रह परम योग है और दान, स्वधर्म, यम, नियम, वेदाध्ययन, शुभ व्रत तथा अन्य उत्तमोत्तम कर्मोका फल मननिग्रह ही है और उसीसे समाधि मिलती है। जैसा किएप चै परमो योगो मनसः संग्रहः स्मृतः । दानं स्वधर्मो सर्वे मनो नियमो यमञ्च श्रुतानि कर्माणि च सतानि । निग्रह लक्षणान्ताः परो हि योगो मनसः समाधिः ॥ यह मन-निग्रह मनके प्रवाहको एकदम रोकनेसे कठिन है किन्तु उपयुक्त भाव-भक्तिसे श्रीभगवान्में, उनकी असीम अकारण कृपा और जीवात्माके मूल कारण और परम सुहृढ़ होनेके ज्ञानके कारण, मनको सन्निवेशित और अर्पित करनेसे मनका निग्रह सहज है । मनके प्रवाहको श्रीभगवान्की ओर कर उन्होंमें संन्यस्त करना ही मुख्य ध्यान है और यही परम भगवत्सेवा हैं। जिसमें मन-बुद्धिका अर्पण मुख्य है । इस प्रकार सदा मनको एकाग्र ही रखनेका यत्न करना और किसी दूसरी ओर नहीं जाने देना, यदि जाय तो वहाँ से हटाकर फिर पूर्ववत् एकाग्र ही रखना, एकहीमें लगाये रखना, अर्थात् किसी अन्य भावनाको मनमें नहीं आने देना, आवे तो उसे स्थान नहीं देकर शीघ्र बाहर कर देना, ऐसा बार-बार करते रहनेको अभ्यास कहते हैं । ऐसा ही अभ्यास अनेक कालतक करनेसे मनको एकाग्र रखनेकी शक्ति प्राप्त होती है । महाभारतमें कहा हैसमाहितं क्षणं किञ्चिद्धयानवर्त्मनि तिष्ठति । पुनर्वायुपथं भ्रान्तं मनो धावति वायुवत् ।। अनिर्वेदो गतक्लेशो गततन्द्रो ह्यमत्सरी । समादध्यात् पुनश्चेतो ध्यानेन ध्यानयोगवित् ॥ ( शान्तिपर्व अध्याय १९५ । १३-१४ ) 'जब मन समाहित होता है तो किञ्चित् कालके लिये ध्यानमार्गमें स्थित रहता है; किन्तु जब कि वह फिर वायुमार्गमें विक्षेप - के कारण जाता है तब वायुसमान द्रुतगामी हो जाता है । ध्यानयोगकी साधनाओंको जाननेवाले पुरुषको उस ( विक्षेप ) से हतोत्साह न होकर कुछ कष्ट न मान आलस्य और द्वेषको त्यागकर अपने मनको ध्यानावस्थित करना चाहिये ।' । जब साधकको प्रेम और अभ्यासद्वारा मनके एकाग्र रखनेकी शक्ति प्राप्त हो * ऐसा नहीं कि सर्वदा एक ही वस्तुपर चित्तको रखना चाहिये किन्तु जब कोई भावना करना अथवा कोई कर्म करना तो उस समय उसी भावना अथवा कर्ममें चित्तको एकाग्र किये रहना चाहिये, अन्य ओर जाने नहीं देना चाहिये । प्रत्येक व्यावहारिक और पारमार्थिक कर्मको एकाग्रभावसे ही करना चाहिये । + इस वाक्यसे यह सिद्ध होता है कि जो साधक कुछ समयतक चित्तके एकाग्र होनेमें कृतकार्य न होनेपर भी यदि अभ्यासमें शिथिलता न कर उसमें प्रवृत्त ही रहेगा तो कभी-न-कभी अवश्य कृतकार्य होगा । जाय जिसके कारण श्री उपास्यदेव में मन ऐसा संलग्न हो जाय कि उनको छोड़कर और किसी वस्तुका ज्ञान नहीं रहे, बल्कि अपनेको भी भूल जाय, केवल एक ध्येयहीका ज्ञान रह जाय, ज्ञाता, ज्ञान, ज्ञेय तीनों एक हो जायँ, तत्र समझना चाहिये कि वह ध्यानकी पराकाष्ठाको पहुँचा है और तत्र ही ध्येयकी प्राप्ति होती है। लिखा हैध्येये सक्तं मनो यस्य ध्येयमेवानुपश्यति । नान्यं पदार्थ जानाति ध्यानमेतत्प्रकीर्त्तितम् ॥ ( गरुडपुराण) 'जिसका मन ध्येयमें ऐसा संलग्न हो कि केवल ध्येयहीको देखे और सिवा उसके किसी अन्य पदार्थकी भावना उस समय चित्तमें न आवे और न जान पड़े तो ऐसी अवस्थाको ध्यान कहते हैं ।' यथार्थ ध्यान वही है जिसमें हृदय प्रेमसे पूर्ण होकर स्वभावतः श्रीउपास्यकी ओर प्रवृत्त होने और लगातार उन्होंमें अविच्छिन्नभावसे लगा रहे । इस प्रकार मनको एकाग्र रखनेका अभ्यास ध्यानकाळके सिवा अन्य कर्मोंके करते समयमें भी करना चाहिये अर्थात् जो काम किया जाय उसीमें भलीभाँति मनको एकाग्र रख किया जाय, जैसा कि नोटमें कहा गया है । ध्यानमें ऐसी शक्ति है कि अन्ततोगत्वा व्याताको ध्येयसे युक्त कर देती है। लिखा हैध्यायन्ति पुरुपं दिव्यमच्युतञ्च स्मरन्ति ये । लभन्ते तेऽच्युतस्थानं श्रुतिरेपा पुरातनी ॥ ( पद्मपुराणान्तर्गत वैशाखमाहात्म्य) यत्र यत्र मनो देही धारयेत् सकलं घिया । स्नेहाद् द्वेषाद्भयाद्वापि याति तत्तत्स्वरूपताम् ॥ कीटः पेशस्कृतं ध्यायन् कुड्यां तेन प्रवेशितः । याति तत्साम्यतां राजन् पूर्वरूपमसन्त्यजन् ॥ ( श्रीमद्भा० ११ । ९ । २२ २३ ) 'जो व्यक्ति दिव्यपुरुष श्रीभगवान्का ध्यान और स्मरण करते हैं वे श्रीभगवान्के स्थानको प्राप्त करते हैं यह प्राचीन श्रुति है । देही जिस-जिसपर स्नेहसे, द्वेषसे अथवा भयसे जिस किसीमें भी सम्पूर्णरूपसे अपना मन लगा देता है अन्तमें वह तद्रूप हो जाता है । हे राजन् ! इसका दृष्टान्त यह है कि भ्रमरके द्वारा दीवार आदिमें छिद्र करके उसमें बन्द किया हुआ एक प्रकारका कीड़ा भयसे उस भ्रमरका ध्यान करता हुआ पहले रूपको छोड़कर उसीके समान रूपको प्राप्त होता है ।' यह प्रसिद्ध है कि श्रीभगवान्का साक्षात् मिलन ध्यानद्वारा ही होता है । अष्टाङ्गयोगमें भी ध्यानका फल समाधि ( साक्षात् प्राप्ति ) है । गीताके भी अन्तिम अठारह अध्यायको अन्तिम साधनामें भी, जिससे पराभक्ति और ब्रह्मकी साक्षात् प्राप्ति कथित है ध्यान-योग ही मुख्य है ( १८ । ५२ ) और भी उसमें साथ-साथ सद्गुणोंका अनुष्ठान और दुर्गुणोंका त्याग कथित है। उपनिषदोंमें भी ब्रह्मप्राप्तिका साक्षात् साधन ध्यान ही कहा गया है। जैसा किस्वदेहमरणि कृत्वा प्रणवञ्चोत्तरारणिम् । ध्याननिर्मथनाभ्यासाद्देवं पश्येन्निगूढवत् ।।
ओङ्कारेणान्तरितं ये जपन्ति गोविन्दस्य पञ्च पदं मनुम् । दर्शयेदात्मरूपं तस्मान्मुमुक्षुरभ्यसेन्नित्यशान्त्यै ।। 'जो लोग सर्वदा यत्नपूर्वक श्रीविष्णुके इस परमपदकी आराधना करते हैं और विषयवासनासे प्रीति नहीं रखते, उनके पुरुषार्थके कारण श्रीविष्णुभगवान् गोपवेषमें उन लोगोंके निकट अपना स्वरूप प्रकाश करते हैं । जो कोई ओंकारयुक्त श्रीगोविन्दके पञ्चपदी मन्त्रका जप करते हैं, उनको श्रीगोविन्द अपना रूप दिखलाते हैं, अतएव मुमुक्षुको शान्ति प्राप्त करनेके निमित्त गोविन्द मन्त्रका बार-बार जप करना चाहिये ।' श्रीभगवान् के आकारमें और मनुष्यके आकारमें यह भेद है कि मनुष्यके आकार मूल प्रकृतिके विकारोंके बने हुए हैं और कर्माधीन हैं किन्तु ईश्वरका आकार उनकी शक्ति, दैवी प्रकृति का बना हुआ है और उनकी इच्छाके अधीन है । जिस उपास्य देवपर जिसकी रुचि हो उसको उसी देवकी भक्ति करनी चाहिये, अन्तिम परिणाम सत्रका एक ही है, क्योंकि यथार्थमें भिन्न-भिन्न उपास्यदेव एक ही परम पुरुपके नाना रूप हैं, अतएव सत्र एक ही हैं, भिन्न-भिन्न नहीं है, जैसा पहले भी कहा जा चुका है। उपासकका सम्बन्ध श्रीउपास्यदेवके साथ कृत्रिम नहीं है किन्तु स्वयंसिद्ध, स्वाभाविक और अनादि है । प्रत्येक जीवको उपास्यदेवमेंसे एक-न-एकसे सनातन सम्बन्ध रहता है जो उस जीवका आवश्यक रक्षण और निरीक्षण करते हैं, यद्यपि अज्ञानवश वह उनको न जानता और न मानता हो । यथार्य दीक्षा वही है जब कि परम गुरुदेव शिष्यको उसके इष्टदेवके साथ प्रकटरूपमें सम्बन्ध करवा देते हैं । ध्यानके निमित्त हृदयमें सांगोपांग मूर्ति श्रीइष्टदेवताको ऐसी बनानी अत्यन्तावश्यक है जो अधिक कालतक ज्यों-की-यों बनी रहे जिसका होना बिना किसी आदर्शके सहाराके कठिन है अतएव व्यानके समय हृदय में सांगोपांग मूर्ति बनाने में सहायता पाने के लिये इष्टदेवताका एक सुन्दर चित्ताकर्षक चित्र सामने रखना चाहिये और उसी चित्रकी-सी मूर्ति हृदयमें वनानी चाहिये और उस हृदयस्थ मूर्तिपर मनको बाँधना चाहिये । अभ्यासके प्रारम्भमें ऐसी मूर्ति पूर्णरूपसे बनाने में और उसको ज्यों-की-त्यों बनाये रखने में बहुत कठिनाई जान पड़ेगी, सर्वाग एकाएक बनना और वैसे ही वना रहना कठिन होगा । जैसे कभी पग नहीं दीख पड़ेगा, यदि पग बनाया जायगा, तो बाहु नहीं दीख पड़ेगा इत्यादि, इत्यादि । किन्तु इस कठिनाईको दूर करनेमें 'सूर्यमण्डलके भीतर रहनेवाला कमलासनस नारायणका सदा ध्यान करना चाहिये ।' चित्रको देख लेने से बड़ी सहायता मिलेगी और कुछ कालके अभ्यासके बाद यह कठिनाई जाती रहेगी। पहले यह कार्य सुन्दर प्रतिमाद्वारा लिया जाता था किन्तु चित्र प्रतिमासे अधिक सुन्दर और मनोहर होनेके कारण और सुगमतासे प्राप्य और रखने और अन्यत्र ले जानेमें सुलभ होनेके कारण अब चित्रका व्यवहार करना उचित है और किया जाता है । ध्यानकी प्रथम अवस्था यथार्थ में चित्राङ्कित करना अथवा मूर्तिको हृदयमें चित्रित करना है । जैसा चित्रकार अथवा शिल्पी चित्र बनानेका कार्य सावधानीसे मनको एकाग्र करके करता है उसी प्रकार ध्यान में मूर्तिको, चित्रकी सहायतासे, हृदय-पटमें अंकित करना पड़ता है । क्रम यह है कि पहले हृदयमें श्रीउपास्यदेवके चरणकमलको बनावे, फिर जंघा, फिर कटि, उदर, वक्षःस्थल, मुख आदि क्रमशः बनावे और सर्वांग वन जानेपर तीव्र धारणाके बलसे उस मूर्तिको स्थिर रखे । और उसीपर मन संलग्न करे और साथ-साथ मानसिक जप भी हृदयक्षेत्रमें ही होता रहे । श्रीमद्भागवत पुराणमें लिखा हैएकैकशोऽङ्गानि धियानुभावयेत् पादादि यावद्धसितं गदाभृतः । जितं जितं स्थानमपोह्य धारयेत् परं परं शुद्धयति धीर्यथा यथा ॥ 'तदनन्तर उन श्रीभगवान्के चरणकमलसे लेकर हास्ययुक्त मुखपर्यन्त प्रत्येक अङ्गका बुद्धिसे ध्यान करे, चरण आदि जो-जो अङ्ग विना यतके ध्यानमें आ जाय उन-उनको त्यागकर आगेआगेके जंघा, जानु आदि अङ्गोंका ध्यान करे, अपनी बुद्धि जिस प्रकार भगवत्स्वरूपमें स्थित रहे उसी रीतिसे करे ।' जिस रूप और भावमें श्रीउपास्यदेवके ध्यान करनेकी रुचि हो उसी रूप और भावमें ध्यान करना चाहिये । क्योंकि वे सर्वत्र हैं । यथाभिमत ध्यानका उल्लेख पहले भी हो चुका है। श्रीभगवान् जिस रूप और भावद्वारा साधकके चित्तको आकर्षण करें उसीमें शुद्ध निष्कामभावसे उसके अभ्यन्तरमें श्रीभगवान्को जान ध्यान करना चाहिये जो स्वाभाविक होनेके कारण शीघ्र फलीभूत होगा । श्रीमद्भागवत पुराण, स्कशून्य ग्यारह अशून्य सत्ताईस का वचन है --- अर्चादिपु यदा यत्र श्रद्धा मां तत्र चार्चयेत् । सर्वभूतेप्वात्मनि च सर्वात्माहमवस्थितः ॥ अड़तालीस ॥ जब और जहाँसे उपासककी श्रद्धा हो तत्र और उसीमें मेरी उपासना- ध्यान करे । क्योंकि मैं सम्पूर्ण प्राणियों में और अपने स्वरूप सर्वात्मभावसे विराजमान हूँ । प्रथम अवस्थामें चित्तको श्रीउपास्यदेवके सांगोपांग मूर्तिपर सन्निवेशित करे और उसमें संलग्न करे और ध्यानद्वारा देखता रहे । किन्तु जब यह ध्यान दृढ़ हो जाय तो एक-एक अङ्गके ध्यान में क्रमशः नीचेके असे प्रवृत्त हो । इसमें प्रथम चरणका ध्यान है । इसी कारण इस साधनाका नाम चरणसेवा है। श्रीमद्भागवत पुराणका वचन हैस्थितं व्रजन्तमासीनं शयानं वा गुहाशयम् । प्रेक्षणीयेहितं ध्यायेच्छुद्धभावेन चेतसा ।। तस्मिन् लब्धपदं चित्तं सर्वावयवसंस्थितम् । विलक्ष्यैकत्र संयुज्यादङ्गे भगवतो मुनिः सञ्चिन्तयेद्भगवतश्चरणारविन्द वज्राङ्कुशध्वजसरोरुहलाञ्छनाढ्यम् । उत्तुङ्गरक्तविलसन्नखचक्रवालज्योत्स्नाभिराहतमहद्धृयान्धकारम् । तीर्थेन मूर्त्यधिकृतेन शिवः शिवोऽभूत् । ध्यातुर्मनःशमलशैलनिसृष्टवज्रं ध्यायेश्चिरं भगवतश्चरणारविन्दम् ।। 'अपनेको जैसा प्रिय हो वैसे, खड़े हुए, चलते हुए, सिंहासनपर बैठे हुए, शेषशय्यापर शयन करते हुए, अनेकों प्रकारकी देखने योग्य लीलाएँ करते हुए और हृदयगुहामें विराजमान श्रीइष्टदेवका शुद्ध भक्तियुक्त अन्तःकरणसे ध्यान करे । तदनन्तर उन श्रीभगवान्के खरूपपर चित्त स्थिर होनेपर तथा उनके सकल अवयव एक साथ चित्तमें चित्रित होने लगे तब वह ध्यान करने - वाला योगी, अपने मनको श्रीभगवान्के एक-एक अवयवमें लगावे । प्रथम तो उत्तमतासे श्रीभगवान्के चरणकमलका ध्यान करे, जो चरणकमल वज्र, अङ्कुश, ध्वजा और कमलके चिह्नोंसे युक्त है तथा जो ऊँचे, रक्तवर्ण और शोभायमान नखोंकी पाँतिकी किरणोंसे, ध्यान करनेवाले सत्पुरुषोंके हृदयके अज्ञानरूप अन्धकारका नाश करता है । जिसके धोनेसे उत्पन्न हुई भागीरथीके जलको जो संसारको तारनेवाला है, मस्तकपर धरकर श्रीशङ्करभगवान् शिवरूप हुए हैं और जो चरणकमल, ध्यान करनेवाले पुरुषोंके मानसिक पापरूप पर्वतपर वज्रके समान छूटता है उस श्रीभगवान्के चरणकमलका चिरकाल पर्यन्त ध्यान करे ।' श्रीमद्भागवत पुराणमें यों आदेश हैनियच्छेद्विपयेभ्योऽक्षान्मनसा बुद्धिसारथिः । मनः कर्मभिराक्षिप्तं शुभार्थे धारयेद्धिया ।। तत्रैकावयवं ध्यायेदव्युच्छिन्नेन चेतसा । मनो निर्विषयं युङ्क्त्वा ततः किञ्चन न स्मरेत् । पदं तत्परमं विष्णोर्मनो यत्र प्रसीदति ॥ 'निश्चयात्मक बुद्धिको सहायतासे मनके द्वारा इन्द्रियोंको विषयोंसे हटाकर अन्तर्मुख करे, कर्मवासनासे विषयों में दौड़नेवाले मनको निश्रयात्मक बुद्धिसे भगवत् खरूपमें लगावे । तदनन्तर ध्यानगत मूर्तिके प्रत्येक अङ्गका ध्यान करे, ऐसे विषयवासनारहित अपने मनको श्रीभगवान्के स्वरूप - चिन्तनमें लगाकर अन्य किसी वस्तुका भी स्मरण न करे; जहाँ मन प्रसन्न होता है वही विष्णुभगवान्का उत्तम स्थान है ।' हृदयके चिदाकाशमें जो चिन्मय कमल है उसमें इष्टदेवको विराजमान जान ध्यान करना चाहिये । साधारण लोगोंमें उस कमलका नाल ऊपर है और दल नीचे किन्तु व्यान करते समय चिन्तन करना चाहिये कि कमलका दल ऊपर है नाल नीचे, ऐसे अष्टदल कमलमें इष्टदेव हैं। श्रीमद्भागवत पुराण, स्कंशून्य ग्यारह अशून्य चौदह में इस कमलका उल्लेख यों है - हृत्पुण्डरीकमन्तस्थमूर्ध्वनालमधोमुखम् ध्यात्वोर्ध्वमुखमुन्निद्रमपत्रं सकर्णिकम् ॥ छत्तीस॥ श्रीभगवान्की प्रतिमा अथवा चित्रका पूजन भी इसी अवस्थाके अन्तर्गत है । विग्रहमूर्ति अथवा चित्रपटको दीर्घकालतक श्रद्धा और प्रेमसे पूजा करनेसे उसमें ऐसी शक्ति आ जाती है कि उसके दर्शनसे ही पूजा करनेवालेके मनकी अवस्था बदल जाती है और श्रीउपास्यदेवका हृदय में स्फुरण होता है और उनके निमित्त प्रेम उत्पन्न होनेपर चित्त स्वभावतः श्रीउपास्यदेवमें संलग्न और लीन हो जाता है। स्वयं श्रीउपास्यदेवके निमित्त शारीरिक सेवा करनेकी अभिलाषा जो उपासकमें रहती है जो प्रारम्भिक अवस्था में खाभाविक और आवश्यक है उसकी पूर्ति मूर्तिपूजाद्वारा होती है । श्रीउपास्यदेव भक्तके अधीनमें ऐसे रहते हैं कि जिस-जिस प्रकारसे उपासक उनकी पूजा करना चाहता है, उसी उसी प्रकार से वह उसको स्वीकार करते हैं। किन्तु मूर्तिपूजाका मुख्य आधिदैविक तात्पर्य साक्षात् सेवा अथवा ध्यानद्वारा भगवान्की सेवा करना है । जिसकी सिद्धिमें सुन्दर मनोहर चित्ताकर्षक मूर्ति अथवा चित्र परमावश्यक है, बल्कि यों कहना चाहिये कि बिना इनके आश्रयके ध्यानकी सिद्धि होना बहुत ही कठिन है । चित्तका स्वभाव है कि सुन्दर और मनोहरपर आसक्त हो और यथार्थ में श्री उपास्यदेवकी मूर्ति ही परम सुन्दर और मनोहर उपासकके निमित्त है । अतएव श्रीउपास्यदेवकी विग्रह मूर्ति अथवा चित्र सब प्रकारसे परम सुन्दर और चित्ताकर्षक लब्ध की जाय और सुन्दर स्थानमें आदरसे रहे और पूजित हो जिसके होनेसे और जिसकी सहायतासे ध्यानमें सुगमता होगी । अनेक साघक वाह्य पूजा न कर केवल मानसिक पूजा करते हैं और उनको उसीसे लाभ भी होता है। भक्तिमार्गमें विग्रहमूर्तिकी पूजा-सेवासे अनेक सहायता मिलती है और संसारका भी उपकार होता है, क्योंकि साधारण लोगोंके चित्तमें श्रीभगवान्का भाव प्रायः केवल विग्रहमूर्तिहीके देखनेसे होता है और विग्रहकी सेवा-पूजासे उनमें भक्तिभावका सञ्चार होता है। प्रतिमा और उनकी पूजाका स्थान भी, यदि भक्ति-भावसे सेवा हो तो, तेजपुञ्जका केन्द्र हो जाता है जहाँसे उक्त तेज सर्वत्र फैलता है और संसारका उपकार करता है । जहाँ भक्तिभावसे प्रतिमाकी पूजा होती हैं, उस तेजपूरित प्रतिमाके भक्तिभावसे दर्शन करनेसे जो तात्कालिक चित्तमें शान्ति प्राप्त होती है वह प्रत्यक्ष ही है । प्रतिमाकी पूजाके निमित्त जो सुगन्ध द्रव्यादि व्यवहार होते, शङ्ख आदि बजाये जाते, धूप-दीप दिये जाते, स्तुति- पाठ-भजन किये जाते, उन सत्रले आधिदैविक उपकारके सिवा संसारका आधिभौतिक उपकार भी होता है । प्रतिमापूजा सत्र साधकोंके लिये अत्यन्तावश्यक नहीं है, क्योंकि किसी-किसीको मानसिक पूजाद्वारा भी उद्देश्यसाधन हो जाता है । मूर्तिपूजा मुख्य करके साधकके लिये प्रेमके उपजानेमें सहायता देनेके निमित्त हैं जिसमें उत्कृष्ट सहायता उसके द्वारा मिलती हैं । किन्तु यदि प्रेम और अनुरागके सञ्चार करनेका उद्देश्य न रखकर ऐसी पूजा केवल राजसिक भावसे की जाय तो वह भक्तिमार्गक साधकको विशेष उपकारी नहीं है । सेवासाधनमें उन्नति करनेपर साधक ऐसी अवस्था में प्राप्त होता है जब कि उसको यथार्थ अदृश्य श्रीसद्गुरुके अस्तित्व में तनिक भी सन्देह नहीं रहता और किसी सत्पुरुषके सत्संगसे श्रीसद्गुरुका ज्ञान उसको प्राप्त हो जाता है । श्रीउपास्यदेवकी कृपासे साधक श्रीसद्गुरुको जानता है और उनके प्रति उसके चित्तमें प्रेम उत्पन्न होता है । वह तब श्रीसद्गुरुका आश्रय लेता है और उनको अपना सद्गुरु करके वरण करता है और जानता है कि बिना श्रीसद्गुरुकी कृपाके श्रीउपास्य देवकी प्राप्ति उसको हो नहीं सकती है । वह दोनों में अभेद समझता है और दोनों की सेवामें सदा प्रवृत्त होता है । ध्यानके प्रथम भागमें वह श्रीसद्गुरुका ध्यान करता है और जबतक किसी प्रकार श्रीसद्गुरुके रूपका ज्ञान उसको नहीं होता तबतक वह श्रीसद्गुरुके केवल चरणका ध्यान हृदयमें करता है । वह अपने हृदय में श्रीसद्गुरुके चरणकमलको अङ्कितकर उसीमें चित्तको संलग्नकर प्रेमसे उसी चरणकमलका ध्यान करता है । श्रीसद्गुरुके ध्यानके बाद श्रीउपास्यदेवका ध्यान किया जाता है । चूँकि श्रीसद्गुरु श्री उपास्य देवके साथ साधकको युक्त कर देते हैं, अतएव साधककी दृष्टि में श्रीसद्गुरुका स्थान ऊँचा है और इसी कारण उनकी पूजा और ध्यान पहले किये जाते हैं, पश्चात् श्रीउपास्य देवकी । जब श्रीउपास्यदेव कृपाकर श्रीसद्गुरुके रूपको साधकके हृदयमें अथवा पाढ़सेवा अथवा ध्यान अन्य प्रकार दृष्टिगोचर करा देते हैं तबसे साधक श्रीसद्गुरुके उसी रूपका ध्यान करता है । भक्तिमार्गके ध्यानके लक्ष्य केवल श्रीसद्गुरु और श्रीउपास्य देव हैं, अन्य कोई नहीं और यह ध्यान हृदयका कार्य है, केवल बुद्धिका कार्य नहीं । स्मरणादि निःस्वार्थ सेवाद्वारा हृदयके शुद्ध होनेसे जब प्रेमका अङ्कुर हृदयमें जागृत होता है तभी यथार्थ ध्यानको प्राप्ति सम्भव है जो हृदयमें बिना अनुराग और स्नेहके उत्पन्न हुए हो नहीं सकता । इस अवस्थाका ध्यान स्मरणकी अवस्थाके ध्यानसे अवश्य उच्च है और इसमें हार्दिक प्रेमले ध्यान में प्रवृत्त होना मुख्य है । यह वही अवस्था है जब कि साधकमें श्री उपास्यदेवके प्रति ऐसा प्रगाढ़ प्रेम उत्पन्न होता है कि वह उनसे पृथक् रहना नहीं चाहता, किन्तु अत्यन्त समीप होना चाहता है ताकि वह श्रीभगवान्के तेजःपुलको कणमात्रको भी प्रथम अपने हृदय में धारण करे, फिर वहाँसे बाह्य जगत्में फैलाकर संसारका उपकाररूप भगवत् - सेवा कर सके । भक्तिमार्गका ध्यान ही प्राण है और यही श्रीउपास्यदेवकी प्राप्ति करानेवाला है । ध्यान ध्येय वस्तुके लगातार स्मरण - चिन्तनको कहते हैं जिसका प्रवाह तेलकी अखण्ड धाराके समान अपरिच्छिन्न होना चाहिये । ध्यानके समय श्रीउपास्यदेवके मन्त्रका जप करना परम आवश्यक है । मूर्तिका ध्यान मनके विक्षेप को नाश करेगा और मन्त्र जप मनको लय होनेसे अर्थात् निद्रितावस्था में जानेसे रोकेगा । व्यानकालमें मन जब कभी ध्येयको छोड़कर अथवा अन्य प्रकारसे दूसरी ओर जाय, जो अभ्यासके प्रारम्भमें अवश्य होगा, तो मनको ध्येयसे अन्य किसी ओर जाने न देना चाहिये और मनमें आयी हुई भावनासे शीघ्र मनको हटाकर मन्त्र और देवतापर एकाग्रभावसे लगाना चाहिये, और सतत ऐसी सावधानी रखनी चाहिये कि मन उस कालमें मन्त्र और देवतासे हटके अन्य किसी वस्तु अथवा विषयपर न चला जाय अर्थात् कोई अन्य भावना मनमें न आ जाय । श्रीमद्भागवत पुराण स्कशून्य ग्यारह, अशून्य चौदह में कथन है-- सुकुमारमभिध्यायेत्सर्वाङ्गेषु मनो दधत् । इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यो मनसाकृष्य तन्मनः । बुद्धया सारथिना धीर प्रणयेन्मयि सर्वतः ॥ तत्सर्वव्यापकं चित्तमाकृप्यैकत्र धारयेत् । नान्यानि चिन्तयेद्भूयः सुस्मितं भावयेन्मुखम् ॥ 'मेरे सम्पूर्ण अङ्गोंमें मनको स्थिर करते हुए मेरी सुकुमार मूर्तिका ध्यान करे । मनके द्वारा इन्द्रियोंको उनके विषयोंसे खींचकर, उस मनको धीर पुरुष बुद्धिरूपी सारथिकी सहायतासे सर्वथा केवल मुझमें ही लगा दे । सत्र ओर फैले हुए चित्तको खींचकर एक स्थानमें स्थिर करे और फिर कुछ और चिन्तन न करता हुआ मेरे मधुर मुसकानयुक्त मुखका ही ध्यान करे ।' विना मनके निग्रहके ध्यानकी सिद्धि हो नहीं सकती है । वैराग्य और अभ्याससे मनिग्रह होता है । वैराग्य, आत्मा और अनात्माके ज्ञानद्वारा, अनात्मामें आसक्ति छोड़ने से प्राप्त होता है । है यह ज्ञान-वैराग्य भी भगवत्कृपासे भक्तिकी साधनासे प्राप्त होता है । अतएव मन-निग्रह मुख्य है । श्रीमद्भागवत पुराण स्कशून्य ग्यारह में लिखा है कि मनका निग्रह परम योग है और दान, स्वधर्म, यम, नियम, वेदाध्ययन, शुभ व्रत तथा अन्य उत्तमोत्तम कर्मोका फल मननिग्रह ही है और उसीसे समाधि मिलती है। जैसा किएप चै परमो योगो मनसः संग्रहः स्मृतः । दानं स्वधर्मो सर्वे मनो नियमो यमञ्च श्रुतानि कर्माणि च सतानि । निग्रह लक्षणान्ताः परो हि योगो मनसः समाधिः ॥ यह मन-निग्रह मनके प्रवाहको एकदम रोकनेसे कठिन है किन्तु उपयुक्त भाव-भक्तिसे श्रीभगवान्में, उनकी असीम अकारण कृपा और जीवात्माके मूल कारण और परम सुहृढ़ होनेके ज्ञानके कारण, मनको सन्निवेशित और अर्पित करनेसे मनका निग्रह सहज है । मनके प्रवाहको श्रीभगवान्की ओर कर उन्होंमें संन्यस्त करना ही मुख्य ध्यान है और यही परम भगवत्सेवा हैं। जिसमें मन-बुद्धिका अर्पण मुख्य है । इस प्रकार सदा मनको एकाग्र ही रखनेका यत्न करना और किसी दूसरी ओर नहीं जाने देना, यदि जाय तो वहाँ से हटाकर फिर पूर्ववत् एकाग्र ही रखना, एकहीमें लगाये रखना, अर्थात् किसी अन्य भावनाको मनमें नहीं आने देना, आवे तो उसे स्थान नहीं देकर शीघ्र बाहर कर देना, ऐसा बार-बार करते रहनेको अभ्यास कहते हैं । ऐसा ही अभ्यास अनेक कालतक करनेसे मनको एकाग्र रखनेकी शक्ति प्राप्त होती है । महाभारतमें कहा हैसमाहितं क्षणं किञ्चिद्धयानवर्त्मनि तिष्ठति । पुनर्वायुपथं भ्रान्तं मनो धावति वायुवत् ।। अनिर्वेदो गतक्लेशो गततन्द्रो ह्यमत्सरी । समादध्यात् पुनश्चेतो ध्यानेन ध्यानयोगवित् ॥ 'जब मन समाहित होता है तो किञ्चित् कालके लिये ध्यानमार्गमें स्थित रहता है; किन्तु जब कि वह फिर वायुमार्गमें विक्षेप - के कारण जाता है तब वायुसमान द्रुतगामी हो जाता है । ध्यानयोगकी साधनाओंको जाननेवाले पुरुषको उस से हतोत्साह न होकर कुछ कष्ट न मान आलस्य और द्वेषको त्यागकर अपने मनको ध्यानावस्थित करना चाहिये ।' । जब साधकको प्रेम और अभ्यासद्वारा मनके एकाग्र रखनेकी शक्ति प्राप्त हो * ऐसा नहीं कि सर्वदा एक ही वस्तुपर चित्तको रखना चाहिये किन्तु जब कोई भावना करना अथवा कोई कर्म करना तो उस समय उसी भावना अथवा कर्ममें चित्तको एकाग्र किये रहना चाहिये, अन्य ओर जाने नहीं देना चाहिये । प्रत्येक व्यावहारिक और पारमार्थिक कर्मको एकाग्रभावसे ही करना चाहिये । + इस वाक्यसे यह सिद्ध होता है कि जो साधक कुछ समयतक चित्तके एकाग्र होनेमें कृतकार्य न होनेपर भी यदि अभ्यासमें शिथिलता न कर उसमें प्रवृत्त ही रहेगा तो कभी-न-कभी अवश्य कृतकार्य होगा । जाय जिसके कारण श्री उपास्यदेव में मन ऐसा संलग्न हो जाय कि उनको छोड़कर और किसी वस्तुका ज्ञान नहीं रहे, बल्कि अपनेको भी भूल जाय, केवल एक ध्येयहीका ज्ञान रह जाय, ज्ञाता, ज्ञान, ज्ञेय तीनों एक हो जायँ, तत्र समझना चाहिये कि वह ध्यानकी पराकाष्ठाको पहुँचा है और तत्र ही ध्येयकी प्राप्ति होती है। लिखा हैध्येये सक्तं मनो यस्य ध्येयमेवानुपश्यति । नान्यं पदार्थ जानाति ध्यानमेतत्प्रकीर्त्तितम् ॥ 'जिसका मन ध्येयमें ऐसा संलग्न हो कि केवल ध्येयहीको देखे और सिवा उसके किसी अन्य पदार्थकी भावना उस समय चित्तमें न आवे और न जान पड़े तो ऐसी अवस्थाको ध्यान कहते हैं ।' यथार्थ ध्यान वही है जिसमें हृदय प्रेमसे पूर्ण होकर स्वभावतः श्रीउपास्यकी ओर प्रवृत्त होने और लगातार उन्होंमें अविच्छिन्नभावसे लगा रहे । इस प्रकार मनको एकाग्र रखनेका अभ्यास ध्यानकाळके सिवा अन्य कर्मोंके करते समयमें भी करना चाहिये अर्थात् जो काम किया जाय उसीमें भलीभाँति मनको एकाग्र रख किया जाय, जैसा कि नोटमें कहा गया है । ध्यानमें ऐसी शक्ति है कि अन्ततोगत्वा व्याताको ध्येयसे युक्त कर देती है। लिखा हैध्यायन्ति पुरुपं दिव्यमच्युतञ्च स्मरन्ति ये । लभन्ते तेऽच्युतस्थानं श्रुतिरेपा पुरातनी ॥ यत्र यत्र मनो देही धारयेत् सकलं घिया । स्नेहाद् द्वेषाद्भयाद्वापि याति तत्तत्स्वरूपताम् ॥ कीटः पेशस्कृतं ध्यायन् कुड्यां तेन प्रवेशितः । याति तत्साम्यतां राजन् पूर्वरूपमसन्त्यजन् ॥ 'जो व्यक्ति दिव्यपुरुष श्रीभगवान्का ध्यान और स्मरण करते हैं वे श्रीभगवान्के स्थानको प्राप्त करते हैं यह प्राचीन श्रुति है । देही जिस-जिसपर स्नेहसे, द्वेषसे अथवा भयसे जिस किसीमें भी सम्पूर्णरूपसे अपना मन लगा देता है अन्तमें वह तद्रूप हो जाता है । हे राजन् ! इसका दृष्टान्त यह है कि भ्रमरके द्वारा दीवार आदिमें छिद्र करके उसमें बन्द किया हुआ एक प्रकारका कीड़ा भयसे उस भ्रमरका ध्यान करता हुआ पहले रूपको छोड़कर उसीके समान रूपको प्राप्त होता है ।' यह प्रसिद्ध है कि श्रीभगवान्का साक्षात् मिलन ध्यानद्वारा ही होता है । अष्टाङ्गयोगमें भी ध्यानका फल समाधि है । गीताके भी अन्तिम अठारह अध्यायको अन्तिम साधनामें भी, जिससे पराभक्ति और ब्रह्मकी साक्षात् प्राप्ति कथित है ध्यान-योग ही मुख्य है और भी उसमें साथ-साथ सद्गुणोंका अनुष्ठान और दुर्गुणोंका त्याग कथित है। उपनिषदोंमें भी ब्रह्मप्राप्तिका साक्षात् साधन ध्यान ही कहा गया है। जैसा किस्वदेहमरणि कृत्वा प्रणवञ्चोत्तरारणिम् । ध्याननिर्मथनाभ्यासाद्देवं पश्येन्निगूढवत् ।।
जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को कहा कि उनका प्रशासन सुनिश्चित करेगा कि केंद्र शासित प्रदेश में रह रहे पश्चिम पाकिस्तान के शरणार्थियों को जमीन का मालिकाना हक मिले। नेशनल डेस्कः जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को कहा कि उनका प्रशासन सुनिश्चित करेगा कि केंद्र शासित प्रदेश में रह रहे पश्चिम पाकिस्तान के शरणार्थियों को जमीन का मालिकाना हक मिले। सिन्हा ने कहा कि इन शरणार्थियों को अनुच्छेद 370 और 35ए ने राजनीतिक अधिकारों व अन्य फायदों से वंचित किया तथा उनकी समृद्धि बाधित की। सिन्हा ने कहा, "पश्चिम पाकिस्तानी शरणार्थियों को जमीन का मालिकाना हक केंद्र के निर्देशों पर केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा। " उन्होंने यहां आर एस पुरा स्थित चकरोरी में पश्चिम पाकिस्तानी शरणार्थियों के लिए एक विशेष शिविर का उद्घाटन करने के बाद कहा, "सरकार समुदाय के सपनों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। "
जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को कहा कि उनका प्रशासन सुनिश्चित करेगा कि केंद्र शासित प्रदेश में रह रहे पश्चिम पाकिस्तान के शरणार्थियों को जमीन का मालिकाना हक मिले। नेशनल डेस्कः जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को कहा कि उनका प्रशासन सुनिश्चित करेगा कि केंद्र शासित प्रदेश में रह रहे पश्चिम पाकिस्तान के शरणार्थियों को जमीन का मालिकाना हक मिले। सिन्हा ने कहा कि इन शरणार्थियों को अनुच्छेद तीन सौ सत्तर और पैंतीसए ने राजनीतिक अधिकारों व अन्य फायदों से वंचित किया तथा उनकी समृद्धि बाधित की। सिन्हा ने कहा, "पश्चिम पाकिस्तानी शरणार्थियों को जमीन का मालिकाना हक केंद्र के निर्देशों पर केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा। " उन्होंने यहां आर एस पुरा स्थित चकरोरी में पश्चिम पाकिस्तानी शरणार्थियों के लिए एक विशेष शिविर का उद्घाटन करने के बाद कहा, "सरकार समुदाय के सपनों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। "
मैं एक व्यवसाय शुरू करना चाहता हूंः यहां संसाधन हैं जिन्हें आप शुरू करना चाहते हैंमैं एक व्यवसाय शुरू करना चाहता हूं, आप कहते हैं। अच्छी खबर यह है कि कोई भी व्यवसाय शुरू कर सकता है। बुरी खबर यह है कि एक ऐसा व्यवसाय शुरू करना जो सफल होता है और बढ़ता जा रहा है, इतना आसान नहीं है। सत्ता में रहने वाले व्यवसाय को शुरू करने के लिए आवश्यक पांच संसाधन हैं। व्यवसाय ज्ञान निश्चित रूप से एक है, लेकिन अन्य चार समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। स्टार्टअप उद्यम को एक सफल व्यवसाय में बदलने के लिए, आपको यह करना होगाः सफल उद्यमी वे लोग हैं जो अपने व्यावसायिक उद्यमों के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। आपको अपने दिल और आत्मा को जो कुछ भी कर रहे हैं, उसे वास्तव में अपने उत्पाद या सेवा में विश्वास करने के लिए तैयार रहना होगा, और दूसरों को अपने उत्पाद या सेवा में विश्वास करने के लिए लंबे समय तक काम करने के लिए तैयार रहना होगा। जब आप एक व्यवसाय शुरू करते हैं, तो आपको छुट्टियों, और यहां तक कि वेतन जैसी आवश्यकताएं, बिना किसी अंतहीन खिंचाव की तरह लगने के लिए तैयार रहना होगा। और आपको सुरक्षा नेट के बिना यह सब करना है कि वेतनभोगी कर्मचारियों का उपयोग लाभ और पेंशन योजनाओं के लिए किया जाता है । वास्तव में, आपको एक कर्मचारी की तुलना में एक उद्यमी के रूप में एक पूरी तरह से अलग मानसिकता होनी चाहिए । लेकिन सिर्फ प्रतिबद्धता बनाने में सक्षम होने से स्वचालित रूप से व्यावसायिक सफलता नहीं होती है । लोग खुद को सभी प्रकार की चीजों के लिए प्रतिबद्ध करते हैं; कारण, शौक, अन्य लोग। यदि आप कहां जा रहे हैं कि आप कहां जाना चाहते हैं और एक व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो आपको भी "टाइप डी" व्यक्ति होना चाहिए; कोई व्यक्ति जो मजबूत अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ ड्राइव के साथ इच्छा रखता है। आपको न केवल व्यवसाय के विचार हैं , बल्कि उन्हें निष्पादित करने में सक्षम होना चाहिए। सफल व्यवसाय लोग दृढ़ हैं; बाधाएं काम करने के लिए अस्थायी बाधाएं हैं। वे उत्तर के लिए "नहीं" ले सकते हैं, लेकिन केवल तब तक जब तक वे उन्हें किसी अन्य कोण से प्रश्न को रेफ्रेम करने के लिए लेते हैं और फिर से पूछते हैं। और आपको अनुशासन और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता है क्योंकि ये गुण सफल व्यवसायिक लोगों को उनके व्यावसायिक विचारों का पालन करने का धीरज देते हैं, और आर्थिक माहौल के तूफान और शांतता का मौसम करते हैं। सोचें कि आपके पास व्यवसाय में सफल होने के लिए आवश्यक व्यक्तिगत संसाधन हैं? इस उद्यमशील आत्म-आकलन का प्रयास करें और एक लघु व्यवसाय शुरू करने के बारे में सोचें? कई लोगों ने अपने व्यवसाय को शुरू करने की कोशिश किए बिना व्यवसाय के ज्ञान को हासिल करने के लिए परेशान किए बिना अपने व्यवसाय शुरू करने की कोशिश की है - और उनके व्यवसाय विफल हो गए हैं । व्यवसाय शुरू करने के लिए, आपको व्यवसाय के कई अलग-अलग पहलुओं के बारे में जानकार होना चाहिए और कई अलग-अलग कौशल हैं . . . या कम से कम उन लोगों को ढूंढने और किराए पर लेने के लिए शोध किया है जिनके पास आपकी कमी है। यदि आप अपनी खुद की किताबें रखने के लिए लेखांकन के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं रखते हैं, उदाहरण के लिए, आपको एक बुककीपर और / या एकाउंटेंट किराए पर लेने की आवश्यकता होगी। यदि आपका व्यवसाय इंटरनेट आधारित है, तो आप अपनी वेबसाइट को डिज़ाइन करने और बैक एंड को संभालने के लिए कंपनी को किराए पर लेना बुद्धिमान होंगे, जब तक कि आप व्यक्तिगत रूप से वेबसाइट विकास में विशेषज्ञ न हों। जब आप अपनी व्यावसायिक योजना बना रहे हैं, तो आपके पहले कदमों में से एक को आपके कौशल और विशेषज्ञता का स्पष्ट मूल्यांकन होना चाहिए। व्यवसाय के कौन से पहलू आप योग्य हैं या संभालने के इच्छुक हैं और कौन से पहलुओं को आपके हिस्से पर या तो सीखने या बाहरी मदद में कॉल करने की आवश्यकता होगी? लोगों का प्रबंधन केवल एक कौशल सेट है जिसे आपको सफल होने वाला व्यवसाय शुरू करने की आवश्यकता होगी। आपको बिक्री और विपणन के बारे में जानकार होने की भी आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, मान लें कि आपने एक बेहतर मूसटैप विकसित किया है। आपके प्रतियोगियों कौन हैं ? वे किस तरह के मूसट्रैप्स की पेशकश कर रहे हैं और उनकी कीमत कैसी है? क्या आपके मूसटैप बेहतर बनाता है? क्या वहां एक बेहतर मूसट्रैप की आवश्यकता भी है? "वहां से बाहर" कहां है? क्या आपके पास ग्राहकों की पहचान करने और संपर्क करने के लिए आवश्यक कौशल हैं? क्या आप मूसट्रैप्स बेचने में अच्छे हैं? क्या आप एक व्यवहार्य विपणन योजना और प्रचार सामग्री विकसित कर सकते हैं? और व्यापार संचालन के बारे में क्या? क्या आपके पास इन्वेंट्री प्रबंधित करने और ऑर्डर भरने के लिए व्यवसाय ज्ञान है? जहां आप अपने सभी mousetraps स्टोर करने जा रहे हैं और आप उन्हें अपने ग्राहकों के लिए कैसे जा रहे हैं? क्या आपको उन सप्लायरों को मिला है जिन्हें आप चाहते हैं और उनके साथ संबंध विकसित किए हैं? क्या आपने ग्राहक सहायता नीति स्थापित की है? व्यवसाय शुरू करने से पहले व्यवसाय ज्ञान महत्वपूर्ण है। अगर आपके पास वास्तव में सफल व्यवसाय चलाने का ज्ञान नहीं है और आपकी सफलता के लिए अनुसंधान और योजना के लिए परेशान न हों तो दुनिया में सभी ड्राइव और दृढ़ संकल्प आपकी मदद नहीं करेंगे। जब तक कि आपके पास व्यक्तिगत रूप से गहरे जेब नहीं होते हैं, जैसे कि विरासत में धन, यह पता लगाना कि आप अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए पैसा कहां प्राप्त कर रहे हैं और पहले से ही वित्त पोषण प्राप्त करना आपके व्यवसाय की योजना बनाने के सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक होगा। पर्याप्त व्यवसाय शुरू करना पैसा शुरू करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आपका व्यवसाय तुरंत पैसे कमाने जा रहा है, और निश्चित रूप से कोई गारंटी नहीं है कि आपका नया व्यवसाय आपके और आपके परिवार के लिए पर्याप्त धन लाएगा। ( जब आप व्यवसाय शुरू कर रहे हों तो पैसा कमाने के लिए ये वित्तीय रणनीतियां मदद कर सकती हैं। ) आप स्टार्ट-अप पूंजी के बिना व्यवसाय शुरू नहीं कर सकते हैं, व्यवसाय के लिए अपने दरवाजे खोलने के लिए आपको जितनी धनराशि की आवश्यकता है, और उन्हें तब तक खुला रखें जब तक कि पर्याप्त राजस्व पर निर्भर न हो। आपको व्यवसाय शुरू करने के लिए ऑपरेटिंग कैपिटल की भी आवश्यकता होगी, व्यवसाय को जारी रखने के लिए कितनी धनराशि होती है। ऑपरेटिंग पूंजी में वेतन , मजदूरी, किराया, खर्च, आपूर्ति, उपयोगिताओं, विज्ञापन , मूल्यह्रास और ब्याज भुगतान जैसे खर्च शामिल हैं। छोटे व्यवसाय सलाहकार सलाह देते हैं कि स्टार्ट-अप व्यय में कम से कम छह महीने की ऑपरेटिंग पूंजी शामिल हो। यदि आपके पास अपने गहरे जेब नहीं हैं, तो आपको व्यवसाय शुरू करने के लिए आपको कहां से पैसे मिलते हैं? निजी संपत्ति , जैसे कि बचत, ( आरआरएसपी , पेंशन फंड, पृथक्करण भत्ता सहित), संपत्ति, क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत संपत्ति को रिमोटेज करना , व्यवसायों का सबसे आम प्रारंभिक स्रोत छोटे व्यवसायों के लिए धन शुरू करना है । ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि नए व्यवसाय शुरू करने वाले लोगों के पास कोई विकल्प नहीं है; यदि आपके पास अधिक संपार्श्विक या स्थापित क्रेडिट इतिहास नहीं है , तो एक छोटा व्यवसाय ऋण प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है। (सफल लघु व्यवसाय ऋण आवेदन करने की संभावनाओं को बढ़ाने के तरीके को जानने के लिए, लघु व्यवसाय ऋण कैसे प्राप्त करें देखें। ) घर से दाएंः एक सफल गृह-आधारित व्यवसाय कैसे शुरू करें , बारबरा मोवाट और टेड जेम्स ने कहा कि परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों से उधार लिया गया धन घर-आधारित व्यवसायों के लिए पचास प्रतिशत से अधिक ऋण बनाता है। वे हमेशा लिखित में ऋण के बारे में समझौते करके गलतफहमी और बुरी भावनाओं से बचने की सलाह देते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी ऋण उचित सुरक्षा, किसी भी नियम या शर्तों और भुगतान अनुसूची के साथ स्थापित किए जाएं। जब भी आप पैसे उधार लेते हैं, तो यह सलाह देने के लिए अच्छी सलाह है। सफल होने वाले व्यवसाय को शुरू करने के लिए आवश्यक संसाधनों का अंतिम भाग एक अच्छा समर्थन प्रणाली है। जब आप व्यावसायिक सहायता के बारे में सोच रहे हों, तो पहले घर के सामने देखें। यह कोई संयोग नहीं है कि सबसे सफल छोटे व्यवसाय ऑपरेटर विवाहित हैं। जबकि हम "इसे अकेले जाने" और "अपना खुद का शो चलाने" के बारे में बात करना पसंद करते हैं, तो आप अन्य लोगों के समर्थन के बिना एक सफल लघु व्यवसाय शुरू नहीं कर सकते हैं। और आपके विचारों या समस्याओं को सुनने के लिए एक सहायक पति / पत्नी से बेहतर कौन है, और आपको प्रोत्साहित करने वाले प्रोत्साहन या सलाह प्रदान करते हैं? उद्यमिता मेंः कनाडाई लोगों के लिए एक प्रोफाइल , विलियम ई। जेनिंग्स बताते हैं कि सफल उद्यमी के पास आमतौर पर एक असाधारण सहायक पति / पत्नी होता है। उन्होंने आगे कहा कि ये असाधारण पति या पत्नी केवल व्यापार और व्यापार के लिए विशिष्ट समर्थन प्रदान नहीं करते हैं, जैसे व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक पूंजी प्रदान करने में मदद करना, या बिना लागत के भुगतान के लिए कंपनी में काम करना। व्यवसाय के बाहर काम करके वित्तीय रूप से योगदान करने वाले पति भी एक आम लघु व्यवसाय परिदृश्य हैं। एक सहायक पति / पत्नी होना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है यदि आप घर-आधारित व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। "हकीकत में, आप घर का व्यवसाय शुरू नहीं करते हैं , आपका पूरा घर करता है" ( घर से सही; एक सफल गृह-आधारित बिजनेस शुरू करना )। आप घर के आधार पर व्यवसाय शुरू नहीं कर सकते हैं, इस पर विचार किए बिना कि आपके परिवार के सदस्य इस विचार के बारे में क्या सोचते हैं, आपके परिवार के सदस्यों में कौन सी भूमिकाएं आपके व्यवसाय में खेल सकती हैं, और आपका व्यवसाय आपके घर के जीवन को कैसे प्रभावित करेगा। आपके परिवार के सक्रिय समर्थन के बिना, आपका घर व्यवसाय विफल हो जाएगा। इन मुद्दों को पहले से बात करें और पता लगाएं कि व्यवसाय शुरू करने से पहले आपके परिवार का कितना सहायक है। अन्य व्यवसायिक लोग व्यवसाय समर्थन का एक और मूल्यवान स्रोत हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस प्रकार का व्यवसाय शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं, कोई वहां गया है और ऐसा किया है। अन्य व्यावसायिक लोगों से बात करते हुए जिन्होंने पहले से ही एक सफल व्यवसाय स्थापित किया है, वे नुकसान से बचने के लिए एक लंबा सफर तय कर सकते हैं और क्या काम करता है और क्या नहीं करता है। मैंने हमेशा पाया है कि अन्य व्यवसायी लोग दूसरों के साथ अपना ज्ञान साझा करने के इच्छुक हैं; यदि आप किसी से स्थानीय रूप से बात करने के लिए नहीं ढूंढ पाते हैं, तो ऑनलाइन व्यवसाय समुदायों का एक सतत नेटवर्क है जहां आप अपनी आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, और कभी-कभी अच्छी सलाह भी ले सकते हैं। तुम तैयार हो? सफल पांच या घरेलू व्यवसाय शुरू करने के लिए इन सभी पांच संसाधनों की आवश्यकताएं हैं। और व्यवसाय शुरू करने से पहले इन सभी पांच संसाधनों को जगह में होना चाहिए। क्या आप एक "टाइप डी" व्यक्ति हैं जो सफल व्यवसाय शुरू करने और चलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं? क्या आपने यह पता लगाया है कि व्यवसाय को आपके द्वारा आवश्यक धनराशि शुरू करने और अपने वित्त पोषण को सुरक्षित करने के लिए कहां प्राप्त किया जाए? क्या आपके पास व्यवसायिक ज्ञान और समर्थन प्रणाली है जो आपको सफल होने के लिए क्या करने की ज़रूरत है? फिर इसके लिए जाओ! आप छोटे व्यवसाय की सफलता के रास्ते पर पहले से ही अच्छे हैं!
मैं एक व्यवसाय शुरू करना चाहता हूंः यहां संसाधन हैं जिन्हें आप शुरू करना चाहते हैंमैं एक व्यवसाय शुरू करना चाहता हूं, आप कहते हैं। अच्छी खबर यह है कि कोई भी व्यवसाय शुरू कर सकता है। बुरी खबर यह है कि एक ऐसा व्यवसाय शुरू करना जो सफल होता है और बढ़ता जा रहा है, इतना आसान नहीं है। सत्ता में रहने वाले व्यवसाय को शुरू करने के लिए आवश्यक पांच संसाधन हैं। व्यवसाय ज्ञान निश्चित रूप से एक है, लेकिन अन्य चार समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। स्टार्टअप उद्यम को एक सफल व्यवसाय में बदलने के लिए, आपको यह करना होगाः सफल उद्यमी वे लोग हैं जो अपने व्यावसायिक उद्यमों के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। आपको अपने दिल और आत्मा को जो कुछ भी कर रहे हैं, उसे वास्तव में अपने उत्पाद या सेवा में विश्वास करने के लिए तैयार रहना होगा, और दूसरों को अपने उत्पाद या सेवा में विश्वास करने के लिए लंबे समय तक काम करने के लिए तैयार रहना होगा। जब आप एक व्यवसाय शुरू करते हैं, तो आपको छुट्टियों, और यहां तक कि वेतन जैसी आवश्यकताएं, बिना किसी अंतहीन खिंचाव की तरह लगने के लिए तैयार रहना होगा। और आपको सुरक्षा नेट के बिना यह सब करना है कि वेतनभोगी कर्मचारियों का उपयोग लाभ और पेंशन योजनाओं के लिए किया जाता है । वास्तव में, आपको एक कर्मचारी की तुलना में एक उद्यमी के रूप में एक पूरी तरह से अलग मानसिकता होनी चाहिए । लेकिन सिर्फ प्रतिबद्धता बनाने में सक्षम होने से स्वचालित रूप से व्यावसायिक सफलता नहीं होती है । लोग खुद को सभी प्रकार की चीजों के लिए प्रतिबद्ध करते हैं; कारण, शौक, अन्य लोग। यदि आप कहां जा रहे हैं कि आप कहां जाना चाहते हैं और एक व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो आपको भी "टाइप डी" व्यक्ति होना चाहिए; कोई व्यक्ति जो मजबूत अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ ड्राइव के साथ इच्छा रखता है। आपको न केवल व्यवसाय के विचार हैं , बल्कि उन्हें निष्पादित करने में सक्षम होना चाहिए। सफल व्यवसाय लोग दृढ़ हैं; बाधाएं काम करने के लिए अस्थायी बाधाएं हैं। वे उत्तर के लिए "नहीं" ले सकते हैं, लेकिन केवल तब तक जब तक वे उन्हें किसी अन्य कोण से प्रश्न को रेफ्रेम करने के लिए लेते हैं और फिर से पूछते हैं। और आपको अनुशासन और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता है क्योंकि ये गुण सफल व्यवसायिक लोगों को उनके व्यावसायिक विचारों का पालन करने का धीरज देते हैं, और आर्थिक माहौल के तूफान और शांतता का मौसम करते हैं। सोचें कि आपके पास व्यवसाय में सफल होने के लिए आवश्यक व्यक्तिगत संसाधन हैं? इस उद्यमशील आत्म-आकलन का प्रयास करें और एक लघु व्यवसाय शुरू करने के बारे में सोचें? कई लोगों ने अपने व्यवसाय को शुरू करने की कोशिश किए बिना व्यवसाय के ज्ञान को हासिल करने के लिए परेशान किए बिना अपने व्यवसाय शुरू करने की कोशिश की है - और उनके व्यवसाय विफल हो गए हैं । व्यवसाय शुरू करने के लिए, आपको व्यवसाय के कई अलग-अलग पहलुओं के बारे में जानकार होना चाहिए और कई अलग-अलग कौशल हैं . . . या कम से कम उन लोगों को ढूंढने और किराए पर लेने के लिए शोध किया है जिनके पास आपकी कमी है। यदि आप अपनी खुद की किताबें रखने के लिए लेखांकन के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं रखते हैं, उदाहरण के लिए, आपको एक बुककीपर और / या एकाउंटेंट किराए पर लेने की आवश्यकता होगी। यदि आपका व्यवसाय इंटरनेट आधारित है, तो आप अपनी वेबसाइट को डिज़ाइन करने और बैक एंड को संभालने के लिए कंपनी को किराए पर लेना बुद्धिमान होंगे, जब तक कि आप व्यक्तिगत रूप से वेबसाइट विकास में विशेषज्ञ न हों। जब आप अपनी व्यावसायिक योजना बना रहे हैं, तो आपके पहले कदमों में से एक को आपके कौशल और विशेषज्ञता का स्पष्ट मूल्यांकन होना चाहिए। व्यवसाय के कौन से पहलू आप योग्य हैं या संभालने के इच्छुक हैं और कौन से पहलुओं को आपके हिस्से पर या तो सीखने या बाहरी मदद में कॉल करने की आवश्यकता होगी? लोगों का प्रबंधन केवल एक कौशल सेट है जिसे आपको सफल होने वाला व्यवसाय शुरू करने की आवश्यकता होगी। आपको बिक्री और विपणन के बारे में जानकार होने की भी आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, मान लें कि आपने एक बेहतर मूसटैप विकसित किया है। आपके प्रतियोगियों कौन हैं ? वे किस तरह के मूसट्रैप्स की पेशकश कर रहे हैं और उनकी कीमत कैसी है? क्या आपके मूसटैप बेहतर बनाता है? क्या वहां एक बेहतर मूसट्रैप की आवश्यकता भी है? "वहां से बाहर" कहां है? क्या आपके पास ग्राहकों की पहचान करने और संपर्क करने के लिए आवश्यक कौशल हैं? क्या आप मूसट्रैप्स बेचने में अच्छे हैं? क्या आप एक व्यवहार्य विपणन योजना और प्रचार सामग्री विकसित कर सकते हैं? और व्यापार संचालन के बारे में क्या? क्या आपके पास इन्वेंट्री प्रबंधित करने और ऑर्डर भरने के लिए व्यवसाय ज्ञान है? जहां आप अपने सभी mousetraps स्टोर करने जा रहे हैं और आप उन्हें अपने ग्राहकों के लिए कैसे जा रहे हैं? क्या आपको उन सप्लायरों को मिला है जिन्हें आप चाहते हैं और उनके साथ संबंध विकसित किए हैं? क्या आपने ग्राहक सहायता नीति स्थापित की है? व्यवसाय शुरू करने से पहले व्यवसाय ज्ञान महत्वपूर्ण है। अगर आपके पास वास्तव में सफल व्यवसाय चलाने का ज्ञान नहीं है और आपकी सफलता के लिए अनुसंधान और योजना के लिए परेशान न हों तो दुनिया में सभी ड्राइव और दृढ़ संकल्प आपकी मदद नहीं करेंगे। जब तक कि आपके पास व्यक्तिगत रूप से गहरे जेब नहीं होते हैं, जैसे कि विरासत में धन, यह पता लगाना कि आप अपना खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए पैसा कहां प्राप्त कर रहे हैं और पहले से ही वित्त पोषण प्राप्त करना आपके व्यवसाय की योजना बनाने के सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक होगा। पर्याप्त व्यवसाय शुरू करना पैसा शुरू करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आपका व्यवसाय तुरंत पैसे कमाने जा रहा है, और निश्चित रूप से कोई गारंटी नहीं है कि आपका नया व्यवसाय आपके और आपके परिवार के लिए पर्याप्त धन लाएगा। आप स्टार्ट-अप पूंजी के बिना व्यवसाय शुरू नहीं कर सकते हैं, व्यवसाय के लिए अपने दरवाजे खोलने के लिए आपको जितनी धनराशि की आवश्यकता है, और उन्हें तब तक खुला रखें जब तक कि पर्याप्त राजस्व पर निर्भर न हो। आपको व्यवसाय शुरू करने के लिए ऑपरेटिंग कैपिटल की भी आवश्यकता होगी, व्यवसाय को जारी रखने के लिए कितनी धनराशि होती है। ऑपरेटिंग पूंजी में वेतन , मजदूरी, किराया, खर्च, आपूर्ति, उपयोगिताओं, विज्ञापन , मूल्यह्रास और ब्याज भुगतान जैसे खर्च शामिल हैं। छोटे व्यवसाय सलाहकार सलाह देते हैं कि स्टार्ट-अप व्यय में कम से कम छह महीने की ऑपरेटिंग पूंजी शामिल हो। यदि आपके पास अपने गहरे जेब नहीं हैं, तो आपको व्यवसाय शुरू करने के लिए आपको कहां से पैसे मिलते हैं? निजी संपत्ति , जैसे कि बचत, , संपत्ति, क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत संपत्ति को रिमोटेज करना , व्यवसायों का सबसे आम प्रारंभिक स्रोत छोटे व्यवसायों के लिए धन शुरू करना है । ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि नए व्यवसाय शुरू करने वाले लोगों के पास कोई विकल्प नहीं है; यदि आपके पास अधिक संपार्श्विक या स्थापित क्रेडिट इतिहास नहीं है , तो एक छोटा व्यवसाय ऋण प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है। घर से दाएंः एक सफल गृह-आधारित व्यवसाय कैसे शुरू करें , बारबरा मोवाट और टेड जेम्स ने कहा कि परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों से उधार लिया गया धन घर-आधारित व्यवसायों के लिए पचास प्रतिशत से अधिक ऋण बनाता है। वे हमेशा लिखित में ऋण के बारे में समझौते करके गलतफहमी और बुरी भावनाओं से बचने की सलाह देते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी ऋण उचित सुरक्षा, किसी भी नियम या शर्तों और भुगतान अनुसूची के साथ स्थापित किए जाएं। जब भी आप पैसे उधार लेते हैं, तो यह सलाह देने के लिए अच्छी सलाह है। सफल होने वाले व्यवसाय को शुरू करने के लिए आवश्यक संसाधनों का अंतिम भाग एक अच्छा समर्थन प्रणाली है। जब आप व्यावसायिक सहायता के बारे में सोच रहे हों, तो पहले घर के सामने देखें। यह कोई संयोग नहीं है कि सबसे सफल छोटे व्यवसाय ऑपरेटर विवाहित हैं। जबकि हम "इसे अकेले जाने" और "अपना खुद का शो चलाने" के बारे में बात करना पसंद करते हैं, तो आप अन्य लोगों के समर्थन के बिना एक सफल लघु व्यवसाय शुरू नहीं कर सकते हैं। और आपके विचारों या समस्याओं को सुनने के लिए एक सहायक पति / पत्नी से बेहतर कौन है, और आपको प्रोत्साहित करने वाले प्रोत्साहन या सलाह प्रदान करते हैं? उद्यमिता मेंः कनाडाई लोगों के लिए एक प्रोफाइल , विलियम ई। जेनिंग्स बताते हैं कि सफल उद्यमी के पास आमतौर पर एक असाधारण सहायक पति / पत्नी होता है। उन्होंने आगे कहा कि ये असाधारण पति या पत्नी केवल व्यापार और व्यापार के लिए विशिष्ट समर्थन प्रदान नहीं करते हैं, जैसे व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक पूंजी प्रदान करने में मदद करना, या बिना लागत के भुगतान के लिए कंपनी में काम करना। व्यवसाय के बाहर काम करके वित्तीय रूप से योगदान करने वाले पति भी एक आम लघु व्यवसाय परिदृश्य हैं। एक सहायक पति / पत्नी होना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है यदि आप घर-आधारित व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं। "हकीकत में, आप घर का व्यवसाय शुरू नहीं करते हैं , आपका पूरा घर करता है" । आप घर के आधार पर व्यवसाय शुरू नहीं कर सकते हैं, इस पर विचार किए बिना कि आपके परिवार के सदस्य इस विचार के बारे में क्या सोचते हैं, आपके परिवार के सदस्यों में कौन सी भूमिकाएं आपके व्यवसाय में खेल सकती हैं, और आपका व्यवसाय आपके घर के जीवन को कैसे प्रभावित करेगा। आपके परिवार के सक्रिय समर्थन के बिना, आपका घर व्यवसाय विफल हो जाएगा। इन मुद्दों को पहले से बात करें और पता लगाएं कि व्यवसाय शुरू करने से पहले आपके परिवार का कितना सहायक है। अन्य व्यवसायिक लोग व्यवसाय समर्थन का एक और मूल्यवान स्रोत हैं। कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस प्रकार का व्यवसाय शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं, कोई वहां गया है और ऐसा किया है। अन्य व्यावसायिक लोगों से बात करते हुए जिन्होंने पहले से ही एक सफल व्यवसाय स्थापित किया है, वे नुकसान से बचने के लिए एक लंबा सफर तय कर सकते हैं और क्या काम करता है और क्या नहीं करता है। मैंने हमेशा पाया है कि अन्य व्यवसायी लोग दूसरों के साथ अपना ज्ञान साझा करने के इच्छुक हैं; यदि आप किसी से स्थानीय रूप से बात करने के लिए नहीं ढूंढ पाते हैं, तो ऑनलाइन व्यवसाय समुदायों का एक सतत नेटवर्क है जहां आप अपनी आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, और कभी-कभी अच्छी सलाह भी ले सकते हैं। तुम तैयार हो? सफल पांच या घरेलू व्यवसाय शुरू करने के लिए इन सभी पांच संसाधनों की आवश्यकताएं हैं। और व्यवसाय शुरू करने से पहले इन सभी पांच संसाधनों को जगह में होना चाहिए। क्या आप एक "टाइप डी" व्यक्ति हैं जो सफल व्यवसाय शुरू करने और चलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं? क्या आपने यह पता लगाया है कि व्यवसाय को आपके द्वारा आवश्यक धनराशि शुरू करने और अपने वित्त पोषण को सुरक्षित करने के लिए कहां प्राप्त किया जाए? क्या आपके पास व्यवसायिक ज्ञान और समर्थन प्रणाली है जो आपको सफल होने के लिए क्या करने की ज़रूरत है? फिर इसके लिए जाओ! आप छोटे व्यवसाय की सफलता के रास्ते पर पहले से ही अच्छे हैं!
फिल्म की कहानी में एक किरदार दानिश (धनुष) नामक एक व्यक्ित की है. जो एक कस्बे में रहता है. वह किसी भी कीमत पर फिल्म जगत का एक बड़ा सुपरस्टार बनना चाहता है, लेकिन न उसके पास कोई संसाधन है और न कोई बड़ा सोर्स है, सबसे बड़ी बात तो यह है कि उसके पास अवाज नहीं होती है. बावजूद इसके वह मुंबई आता है और यहां पर उसकी मुलाकात फिल्म की एडी अक्षरा (अक्षरा हासन) से होती है. ऐसे में वह अक्षरा और एक दूसरे किरदार अमिताभ सिन्हा (अमिताभ बच्चन) की आवाज की मदद से बहुत जल्द एक बड़ा सुपरस्टार बन जाता है, लेकिन फिर वहीं चीजे सामने आ जाती है. दोनों के बीच जल्द ही अहम और क्रेडिट लेने का टकराव शुरू हो जाता है. दोनों के अंदर ये चीजें घर कर जाती हैं. फिल्म ने कुछ लेवल तक अच्छा काम किया है. आर. बाल्की ने फिल्म को बोझिल नहीं होने दिया है. सबसे खास बात तो यह है कि उन्होंने एक बड़ी ही नार्मल स्टोरी को उठाया और उसे तरास कर एक फिल्म के रूप में पेश किया. उन्होंने फिल्म में परिस्थितियों का ताना-बाना बेहद रोचक और तार्किक बुना है. जिससे कि फिल्म को बड़ा क्रेडिट मिलता है. इसके अलावा फिल्म के गाने भी उसकी स्टोरी को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं. शमिताभ फिल्म का निर्देशन बेजोड़ है. सबसे खास बात तो यह है कि निदेशक आर. बाल्की ने फिल्म को कहीं से भी बोझिल नहीं होने दिया है. उन्होंने फिल्म में बॉलीवुड की एक सच्ची कहानी को उभारा है. कि कैसे इस इंडस्ट्री में लोग आते हैं और अपना करियर बनाने के लिए स्ट्रगल करते हैं. ढाई घंटे की इस जब बीच में कुछ स्ट्रेच्ड आते हैं. ऐसे में फिल्म में कई सीन ऐसे हैं जो पटरी से उतरती फिल्म में जान डालने का काम करते हैं. जिससे फिल्म में अंत तक कॉमेडी, सीरियस, भावुकता के सींस का प्रेजंटेशन हो चुका होता है. इसके अलावा शमिताभ में किरदारों की असुरक्षा, अविश्वास और अहम की गुत्थमगुत्थी बारीकी से देखने को मिलती है. एक बात तो साफ है कि लाइफ के कुछ खास सीक्वेंस देखने के लिए इस फिल्म को जरूर देखें. जिसमें यह दिखाया गया है कि लोग अलग अलग जरूर हो सकते हैं, लेकिन उन्हें आपस में मिलाकर उनके टैलेंट को एक दिशा दी जा सकती है. टैलेंट से भरा धनुष कड़ी मेहनत से अपनी प्रतिभा को बाहर निकालता है तो किस तरह से वह एक सक्सेज मैन बन जाता है. सफलता उसके कदम चूमती है. इसके अलावा वहीं अमिताभ बच्चन कुछ भी न होते हुए एक अच्छी और मोहक आवाज रखते हैं. जिससे अपनी मेहनत और आवाज के बल पर अपने कैरियर को बुलंदियों तक पहुंचाते हैं. जिससे यह साफ है कि फिल्म में इनकी भूमिका ठीक ठाक हैं. वहीं अक्षरा हासन इस फिल्म से अपना डेब्यू कर रही हैं. उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर यानी एडी की भूमिका अच्छे से निभायी है, लेकिन उन्हें अपनी अदाकारी पर अभी और काम करना होगा. एक एक्ट्रेस के रूप में उन्हें अभी खुद को और भी तरासने की जरूरत है.
फिल्म की कहानी में एक किरदार दानिश नामक एक व्यक्ित की है. जो एक कस्बे में रहता है. वह किसी भी कीमत पर फिल्म जगत का एक बड़ा सुपरस्टार बनना चाहता है, लेकिन न उसके पास कोई संसाधन है और न कोई बड़ा सोर्स है, सबसे बड़ी बात तो यह है कि उसके पास अवाज नहीं होती है. बावजूद इसके वह मुंबई आता है और यहां पर उसकी मुलाकात फिल्म की एडी अक्षरा से होती है. ऐसे में वह अक्षरा और एक दूसरे किरदार अमिताभ सिन्हा की आवाज की मदद से बहुत जल्द एक बड़ा सुपरस्टार बन जाता है, लेकिन फिर वहीं चीजे सामने आ जाती है. दोनों के बीच जल्द ही अहम और क्रेडिट लेने का टकराव शुरू हो जाता है. दोनों के अंदर ये चीजें घर कर जाती हैं. फिल्म ने कुछ लेवल तक अच्छा काम किया है. आर. बाल्की ने फिल्म को बोझिल नहीं होने दिया है. सबसे खास बात तो यह है कि उन्होंने एक बड़ी ही नार्मल स्टोरी को उठाया और उसे तरास कर एक फिल्म के रूप में पेश किया. उन्होंने फिल्म में परिस्थितियों का ताना-बाना बेहद रोचक और तार्किक बुना है. जिससे कि फिल्म को बड़ा क्रेडिट मिलता है. इसके अलावा फिल्म के गाने भी उसकी स्टोरी को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं. शमिताभ फिल्म का निर्देशन बेजोड़ है. सबसे खास बात तो यह है कि निदेशक आर. बाल्की ने फिल्म को कहीं से भी बोझिल नहीं होने दिया है. उन्होंने फिल्म में बॉलीवुड की एक सच्ची कहानी को उभारा है. कि कैसे इस इंडस्ट्री में लोग आते हैं और अपना करियर बनाने के लिए स्ट्रगल करते हैं. ढाई घंटे की इस जब बीच में कुछ स्ट्रेच्ड आते हैं. ऐसे में फिल्म में कई सीन ऐसे हैं जो पटरी से उतरती फिल्म में जान डालने का काम करते हैं. जिससे फिल्म में अंत तक कॉमेडी, सीरियस, भावुकता के सींस का प्रेजंटेशन हो चुका होता है. इसके अलावा शमिताभ में किरदारों की असुरक्षा, अविश्वास और अहम की गुत्थमगुत्थी बारीकी से देखने को मिलती है. एक बात तो साफ है कि लाइफ के कुछ खास सीक्वेंस देखने के लिए इस फिल्म को जरूर देखें. जिसमें यह दिखाया गया है कि लोग अलग अलग जरूर हो सकते हैं, लेकिन उन्हें आपस में मिलाकर उनके टैलेंट को एक दिशा दी जा सकती है. टैलेंट से भरा धनुष कड़ी मेहनत से अपनी प्रतिभा को बाहर निकालता है तो किस तरह से वह एक सक्सेज मैन बन जाता है. सफलता उसके कदम चूमती है. इसके अलावा वहीं अमिताभ बच्चन कुछ भी न होते हुए एक अच्छी और मोहक आवाज रखते हैं. जिससे अपनी मेहनत और आवाज के बल पर अपने कैरियर को बुलंदियों तक पहुंचाते हैं. जिससे यह साफ है कि फिल्म में इनकी भूमिका ठीक ठाक हैं. वहीं अक्षरा हासन इस फिल्म से अपना डेब्यू कर रही हैं. उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर यानी एडी की भूमिका अच्छे से निभायी है, लेकिन उन्हें अपनी अदाकारी पर अभी और काम करना होगा. एक एक्ट्रेस के रूप में उन्हें अभी खुद को और भी तरासने की जरूरत है.
नई दिल्ली (एजेंसी). माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर को लेकर बड़ी खबर आई है. ट्विटर पर अब राजनीतिक विज्ञापन नजर नहीं आएंगे. ट्विटर के सीईओ जैक डॉर्सी ने ट्वीट कर इस बात का ऐलान किया है. ट्विटर का कहना है कि कुछ लोग ट्विटर का इस्तेमाल गलत जानकारी फैलाने के लिए करते हैं जिसकी वजह से बैन लगाना जरूरी हो गया है. ट्विटर के सीईओ जैक डॉर्सी ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है, "हमने ट्विटर पर सभी तरह के राजनीतिक विज्ञापनों पर बैन लगा दिया है. हमारा मानना है कि राजनीतिक संदेश अर्जित किए जाने चाहिए, खरीदे नहीं. " जैक डॉर्सी के इस ट्वीट के बाद दुनिया भर के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई. अमेरिका में होने वाले चुनावों से पहले ट्विटर के इस बैन के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कैम्पेन मैनेजर ने कहा कि ये ट्रम्प और कन्जरवेटिव्स को रोकने का प्रयास है. ट्विटर पर राजनीतिक विज्ञापनों के बैन लगने के बाद अब फेसबुक पर भी दबाव बढ़ जाएगा. फेसबुक ने कुछ दिन पहले ही इस तरह का कोई भी बैन लगाने से मना कर दिया था.
नई दिल्ली . माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर को लेकर बड़ी खबर आई है. ट्विटर पर अब राजनीतिक विज्ञापन नजर नहीं आएंगे. ट्विटर के सीईओ जैक डॉर्सी ने ट्वीट कर इस बात का ऐलान किया है. ट्विटर का कहना है कि कुछ लोग ट्विटर का इस्तेमाल गलत जानकारी फैलाने के लिए करते हैं जिसकी वजह से बैन लगाना जरूरी हो गया है. ट्विटर के सीईओ जैक डॉर्सी ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया है, "हमने ट्विटर पर सभी तरह के राजनीतिक विज्ञापनों पर बैन लगा दिया है. हमारा मानना है कि राजनीतिक संदेश अर्जित किए जाने चाहिए, खरीदे नहीं. " जैक डॉर्सी के इस ट्वीट के बाद दुनिया भर के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई. अमेरिका में होने वाले चुनावों से पहले ट्विटर के इस बैन के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कैम्पेन मैनेजर ने कहा कि ये ट्रम्प और कन्जरवेटिव्स को रोकने का प्रयास है. ट्विटर पर राजनीतिक विज्ञापनों के बैन लगने के बाद अब फेसबुक पर भी दबाव बढ़ जाएगा. फेसबुक ने कुछ दिन पहले ही इस तरह का कोई भी बैन लगाने से मना कर दिया था.
सहस्र नर नारी भावाल पूद्ध भूख की ज्वाला से जल गए, अगणित होनहार भययुवक अन्नविद्दीन हो काल के कवल हो गए। इस दशा में नगर निवासियों की नेपोलियन ने इतनी अधिक सहायता तथा सेवा की कि वह प्रत्येक प्राणी की आंखों फ्रा तारा हो गया । सत्य है, अत्याचारी के अत्याचार से पीड़ित लोग अपना मस्तक उसके पैरों पर घर देते हैं, खुशामदी धनिकों के आगे और निर्बल घलवान के आगे स्वार्थवश सिर झुका देता है, पशुवल से धनावटी प्रतिष्ठा मनुष्य पा सकता है परंतु मनुष्य हृदय का जितना काम है उसके लिये स्नेह चाहिए, करुणा और दया चाहिए तथा हार्दिक प्रेम चाहिए । ईश्वर ने नेपोलियन को जहाँ बली और चतुर बनाया था वहाँ उसको मनुष्यों के हृदयों पर विजय पाने के भी साधन प्रदान किए थे । इन्हीं सद्गुणों के कारण आज नेपोलियन फ्रांस के हर एक छोटे बड़े का स्नेह-पात्र, प्रतिष्ठा-भाजन, उपास्य देव बन गया । विवाह से कई दिन पहले नेपोलियन इटली देशस्थ फरांसीसी सैन्यों का प्रधान सेनापति नियुक्त हो चुका था, भूतपूर्व सेनापति पृथक् किया जा चुका था । नेपोलियन को इस बड़े दायित्वपूर्ण पद पर नियुक्त करने के समय डाइरेक्टरों ने कहा - " तुम बालक हो, इतनी बड़ी जिम्मेदारी के 'उठाने योग्य अभी तुम्हारी अवस्था नहीं है, तुम कैसे बूढ़े सेनापतियों पर शासन करोगे ? " नेपोलियन ने सरल भाव से उत्तर दिया-" में बारह महीने में ही धूढ़ा हो जाऊँगा, अथवा मेरा शरीर पात हो जायगा ।" पुनः एक डाइरेक्टर ने कहा - " हम तुम्हें प्रधान सेनापति ही बनाते हैं, किंतु सैन्य के लिये धन की सहायता हम से कुछ न हो सकेगी। राज-कोप खाली है और उन लोगों के कुव्यवहार की सीमा नहीं है, ये सब बातें सोच लो ।" नेपोलियन बोला-" अच्छा यों ही सही, इन सब बातों का भी में ही दायी रहा, आप चिंता न करें । " अब पाठक थोड़े से शब्दों में यह जान लें कि इस युद्ध का कारण क्या था, क्यों इटली की ओर सेना पड़ी थी, जिसके शासन के लिये फ्रांस से नेपोलियन को जाना पड़ा । हम कुछ पहले कह चुके हैं कि फ्रांस का आभ्यंतरिक विद्रोह देख तथा उसे निर्बल जान कुछ तो अन्य युरोपीय राज्यों ने यह सोचा था कि ऐसे समय मे जो कुछ फ्रांस से हम लोग छीन सकेंछीन ले, फिर ऐसा अवसर मिले या न मिले । दूसरी बात यह थी कि फ्रांस के प्रजातंत्र की धूम युरोप में फैल गई थी, राजाओं के आसन डोल गए थे, वे यह समझते थे कि जो कहीं इस प्रजातंत्र की लहर सारे युरोप में फैली तो हमारा ठिकाना न लगेगा, हम दूसरों के पसीने की गाढ़ी कमाई से भोग विलास में निरत न रह सकेंगे। स्थानांतर में युरोपीय प्रजा ईश्वर से प्रार्थना करती थी कि मांस का प्रजातंत्र कृतकार्य्यता के मुकुट से मंडित मस्तक हो और ईश्वर हमारी सुने, हमारा भी दुख दूर हो । आयरलैंड के मृतक शरीर से भी स्वतंत्रता की ध्वनि उठ खड़ी हुई थी। इसी लिये समस्त युरोपीय राज्यों ने फ्रांस की भंजातंत्र शासन प्रणाली को, जो युनाइटेड स्टेट अमेरिका के ढंग पर बनी थी, मिट्टी में मिलाने का बीड़ा उठाया था। इस काम में आस्ट्रिया, जो इटली पर घोर अत्याचार कर रहा था, प्रधान बना । इसके साथ इंगलैंड, सार्टिनिया, पोप, सभी सम्मिलित थे एक शब्द में, सारा युरोप एक ओर और नेपोलियन के आधिपत्य में फरासीसी सैन्य दूसरी ओर। सच तो यह है कि जो कहीं बीच में अटलांटिक महासागर का व्यवधान न होता तो यह कृपित युरोपीय राजमंडल नेपोलियन की भाँति वीर वाशिंगटन को भी पकड़ कर किसी सेंटहेलना में बंदी करने के लिये वश रहते, कोई भी उपाय उठा न रखता ! इस दशा में भूसी प्यासी, कई मास से बिना वेतन पाए, दुसरी, कर्तव्य भूली हुई, विदेशस्थ फरासीसी सेना के प्रधानाधिपत्य पर युवक नेपोलियन भेजा गया। लेकिन किसी कवि ने सच कहा है कि-' रागी बागी रतन पारसी नायक और नियाय । इन पांचों के गुरु सही पर उपजें अंग सुभाय ।' नेपोलियन जात नेता था कृत नहीं, इसमें आधिपत्य की शक्ति ईश्वरप्रदत्त थी । नेपोलियन 'नाइस' में पहुँचा । यहाँ ३० सहस्र फरासीसी सैन्य क्षुधातुर, हतोत्साह असंतुष्ट पड़ी थी, इसीफो ले कर वीर नेपोलियन को समस्त युरोप की सम्मिलित शक्ति के सामने मोरचे पर खड़ा होना था। पहले तो चूड़े सेनाधिप, विना मूछ दाढ़ी के बालक को प्रधान सेना परि• चालक देख कर आश्चर्य्यान्वित हो कहने लगे कि क्या इसी के अधीन काम करके हम विजयी होंगे? परंतु मेसानो, अगारो आदि इसकी प्रतिभा को जानते थे उन्होंने कहा" इसे छोटा न समझो, 'मंत्र परम लघु जामु वम वसहि देव गंधर्व । "वैजवंत लघु गनिए ना भाई ।" नेपोलियन ने जाते ही सेना में एक घोषणापत्र वितरण कराया । वह यह था"योद्धागण ! तुम लोग क्षुधार्त और वस्त्रहीन हो, शासनमंडल अनेक प्रकार से तुम्हारा ऋणी है और उसके हाथ में इसका बदला देने का कोई भी उपाय नहीं है। निस्संदेह इस पहाड़ी धरती में, इस अगम्य स्थान पर तुम्हारा साहस, तुम्हारी सहिष्णुता अनुकरणीय आदर्श है। लेकिन तुम्हारी वीरता का कोई प्रमाण नहीं मिलता। मैं तुम्हारा अधिप हो कर आया हूं और तुमको संपन्न उर्वरा धरती पर ले चलूंगा, अनेक धन धान्य संपन्न स्थान तुम्हारे करतल गत होंगे, और तुमको अन्न, वस्त्र, धन, ऐश्वर्य, सुयश किसी बात की कमी न रहेगी। अब योद्धाओ । यह बताओ कि तुम मे इस प्रकार से यश और ऐश्वर्य अपने हाथों प्राप्त करने का साहस है या नहीं ! है तो उठ सड़े हो, सब कुछ तुम्हारे हाथ तले है।" इस घोषणा के पढ़ने से सैन्यगण की छाती दूनी हो गई, उनकी नस नस उत्साह से भर उठी, उनकी भुजाएँ फड़कने लगीं । नेपोलियन ने पहले इटली में पैर धरना निश्चय किया, क्योंकि सार्डेिनिया और आस्ट्रिया मे भेद डालना बहुत आव श्यक था। इसमें कृत्कार्य्य हो कर उसने सोचा कि आस्ट्रिया की सेना को ऐसा दबाना कि आस्ट्रिया को इनकी सहायता के लिये राईन नदी पर तटस्थ सेना को बुलाना ही पड़े। तीसरे उसने पोप की शक्ति और क्षमता का नाश करना अनिवार्य्य जाना, क्योंकि यह बायॉन वंशजों के हाथ में फ्रांस का सिंहासन देने के लिये सिर तोड़ चेष्टा कर रहा था । पोप प्रजा का और शत्रु था, इसने फ्रांस के दूत को मरवा डाला था, यद्यपि दूत अवध्य होते हैं। यह सब काम कठिन और सेना केवल ३० हजार, सो भी क्षुधा से क्षीण तन, निर्जीव; रण माममी भी पूरी नहीं; पर नहीं, नेपोलियन के आगे कटिन या असंभव तो कुछ था ही नहीं। घोषणापत्र पढ़ने के उपरांत नेपोलियन ने कूच की आज्ञा दे दी। कुद्ध भुजंगिनी की तरह नेपोलियन की विशाल धतुरंगिणी युद्धाभिलापिणी हो चल पड़ी । नेपोलियन रात दिन घोड़े की पीठ पर बैठे विना विश्राम आगे बढ़ने लगा। यह सेना के प्रत्येक जन के मुख दुःख को अपनी आंखों से देसवा, संवेदना प्रकाश करता, दुःस दूर करने की चेष्टा करता हुआ आस्ट्रिया की सेना की ओर चला। सेनापति बेटीर ने आस्ट्रिया की सेना को तीन भागों में विभक्त किया था। इसमें से बोचवाली १० हजार मढेना नामक छोटे से ग्राम में थी । ११ अप्रैल की अँधेरी रात में हवा सनसना रही थी, वर्षा कहती थी कि आजही प्रलय करके छोडूंगी, पंकीभूत मार्ग दुर्गम हो रहा था। विपक्षी सेना निश्चित, मुँह बंद किए आठ हाथ की रजाई में लंनी ताने पड़ी थी । नेपोलियन मेना लिये मारो मार धावा कर रहा था। नदी पहाड़ों को चुपके से बिना सटका खुटका किए पैरों ही पार करके प्रभात होते होते मडेना के सामने के पहाड़ पर नेपोलियन ससैन्य पहुँच गया। इसने पर्वत पर से अनुसंधान ले लिया, परंतु शत्रु दल के कान में जू तफ रेंगने का अवसर न दिया। यकी हुई सेना को विश्राम का भी अवसर न दे कर नेपोलियन आस्ट्रिया और सार्डिनिया के सम्मिलित वल दल के ऊपर बिजली की तरह गिर पड़ा। आगे पीछे दहिने बाएँ चारों ओर से युगपत् आक्रमण से विदलित शत्रु दल भाग उठा । तीन हजार शत्रु दल एकदम खेत रहा और कुछ घायल पड़े रहे, शेष भाग गए। यहाँ बहुत सी रण सामग्री तथा रसद नेपोलियन के हाथ लगी। यही मडेना का युद्ध है जिसकी बावत नेपोलियन ने कहा था कि मैंने वंशगौरव मडेना के युद्ध में प्राप्त किया है। पाठकों को याद होगा कि आस्ट्रिया नरेश ने अपनी पुत्री का विवाह नेपोलियन से करना चाहा था और इसके उच्च वंशज होने न होने का प्रश्न उठा था। पराजित आस्ट्रियन सेना 'डिगो' की ओर भागी, और वहाँ नई सेना से सम्मिलित हो कर विजयी नेपोलियन की सेना के हाथ से मिलन की रक्षा करने के लिये उद्यत हुई, और साहिनिया की सेना मेलिसमों की ओर भागी और राजधानी टूरिन की रक्षा में तत्पर हुई । इस तरह एक उद्देश्य नेपोलियन का सिद्ध हो गया, जैसा ऊपर कहा गया है । इस जीत के पीछे सेना को उसने कुछ विश्राम दिया; लेकिन नेपोलियन स्वयम् शत्रु दल पर फिर आक्रमण करने की आयोजना करने में लगा रहा और उसने कुछ विश्राम न लिया । १३ वीं व १४ वीं अप्रैल को घोर युद्ध होने पर आस्ट्रिया वा सार्डिनिया की सम्मिलित सेना घंटे घंटे पर नई कुमक पाती रही और पर्वत के ऊपर से नेपोलियन की सेना पर पत्थर की चट्टानें लुढ़काने लगी । नेपोलियन सेना में फिर फिर कर सिपाहियों 'को प्रोत्साहित करता हुआ आगे बढ़ता रहा। अंततः उसने डिगो मे शत्रु दल को हटाया । यहाँ भी बहुत सी रण और खाद्य सामग्री नेपोलियन के हाथ लगी। वहाँ ३००० आस्ट्रियन सेना नेपोलियन के बंधन में आ गई मिटेसिमों में मार्टिनिया फी १५०० सेना को भी नेपोलियन ने थंदी किया। इस तरह शत्रु दल में बिजली की भाँति द्रुव बेग से नेपोलियन का आक्रमण असा हो गया और हाहाकार मच गई। भूसी निर्धन किंतु विजयी सेना लूट आरंभ कर देती पर नेपोलियन इस यात का विरोधी था, विशेषतः यह इटलीवालों की सहानुभूति प्राप्त करना चाहता था, इस लिये उसने अपने कठोर शासन द्वारा लूट की प्रथा बंद कर दी। जो रसद सामग्री उसे शत्रु दल की हाथ लगती इस से ही उसने अपनी सेना की परितृप्ति की । अतः नेपोलियन जेमोला पर्वत पर हो कर इटली का सौंदर्म्य देखता हुआ ससैन्य तूरिन पर आक्रमण करने के लिये चला । १८ वी अप्रैल को इसने देखा कि ८ हजार शत्रु दुल शिविर बनाए पड़ा हुआ है । नेपोलियन इन पर याज की तरह टूटा । सारे दिन तुमुल युद्ध हुआ । रात को प्रातः काल की प्रतीक्षा करते हुए फरासीसी बंदूकें सिरहाने घर कर सोए, किंतु उपःकाल में ही देखा गया कि साहिनिया की सेना ने भाग कर समीपवर्ती कारसग्लिया नदी के उस पार जा डेरा डाला है। यहाँ और नई सेना आ कर इनमें मिल गई थी और पीछे की ओर आस्ट्रिया का बड़ा भारी दल इकट्ठा हो रहा था। इस कठिन अवस्था में कर्तव्य कार्य के विचार के लिये रात को समर सभा बैठी और निश्चय हुआ कि नदी का सेतु अच्छी तरह अरुणोदय होने के पहले तोड़ दिया जाय । बस प्रभात होने के कुछ पहले ही फरासीसी सेना पुल पर आ पड़ी और आतंकित सार्डिनीय सेना भाग खड़ी हुई । नेपोलियन को ऐसी कापुरुपता की आशा न थी, प्रत्युत इसी पुल के द्वारा आ कर शत्रु सेना से आक्रमित होने की उसे पूरी आशंका थी । अब क्याथा, सानंद फरासीसी सेना पुल के पार हो गई। आगे आगे सार्डिनिया की सेना भागी जाती थी पीछे पीछे नेपोलियन उसे खदेड़ता जाता था । शत्रु सेना मांटोवी पहाड़ पर जा कर निवेशित हुई और संध्या होते ही फरासीसी सेना भी वहाँ जा पहुँची। यहाँ अच्छा युद्ध हुआ, अंत में विजय नेपोलियन की हुई। आठ वृहन्नलिका ग्यारह झंडे और दो सहस्र शत्रु-दल के योद्धा नेपोलियन के हाथ आए, और एक सहस्र खेत रहे। लेकिन अब भी नेपोलियन के हाथ से उन्हें छुटकारा मिलता नहीं दीसा । शत्रुदल भाग भाग कर छिपता था नेपोलियन खोज खोज कर उन्हें मारता था । केरास्को से विजय लाभ करती हुई फरासीसी सेना तूरिन से दस कोस पर आ पड़ी, राजधानी में हलचल मच गई। प्रजातंत्र के पक्षपाती लोग नेपोलियन के स्वागत करने को उत्कंठित हो उठे, वे फ्रांस की जय मनाने लगे । सार यह कि सार्डिनिया नरेश काँप उठा और उसने हाथ बाँध कर क्षमा माँगी । नेपोलियन ने अपने सहयोगियों के मत का तीव्र प्रतिवाद करके सार्डिनिया से संधि कर ली। इस संधि में यही शर्त लिखी गई कि 'अब सार्डिनिया, आस्ट्रिया वा अंग्रेजों से मैत्री न रखेगा। इस संधि के विधानानुसार नेपोलियन को तीन दुर्ग समस्त रण मामग्री तथा. खाद्य द्रव्य सहित सार्टिनिया ने प्रदान किए। जीते हुए स्थान फरासीसियों के ही पास रहे और फरामीसी सेना को आस्ट्रिया के साथ लड़ने के लिये मार्ग दिया गया इस विजय के उपरांत नेपोलियन ने समस्त सेना को एकत्र फरके एक सारगर्भित वक्तृता दी, जिसका तत्त्व यह है - "हे सैन्यगण ! तुम्हारी धीरता से २१ झंडे, ६४ तोपें और कई दुर्ग हमारे हाथ आए हैं। तुम्हारे पास अन्न वस्त्र न या उसकी अब कमी नहीं है। तुमने १० सहय वीरों को रणभूमि शायी किया और १५ सहस्र तुम्हारे कारागार में हैं । तुम फ्रांस प्रजातंत्र के विश्वासपात्र वीर हो । एक बात करना कि लूट कर के अपना और अपने देश का नाम कलंकित न करना । जिसे तुझ जीतो वह तुम्हें दस्यु लुटेरा न जान कर अपना उद्धारक मानता हुआ तुम से प्रेम करे यही तुम्हारा धम्मे है। जो तुम में लुटेरे हैं उन्हें प्राण दंड मिलेगा। उन लुटेरों के कारण तुम सबका उज्ज्वल यश कलुपित न होने पावेगा। अभी काम बहुत सा है। जब तक कार्य असंपूर्ण रहेगा तुम्हें चैन नहीं। इटलीवासियो, देगे हम तुम्हें टूटने मारने नहीं आए, जिन स्त्रत्वापहारियों से तुम पीड़ित हो, चे ही हमारे शत्रु है। तुम प्रजातंत्र फांस पर विश्वास करो।" इसके अनंतर नेपोलियन ने जीती हुई ध्वजाएँ, संधि पत्र और सारा समाचार अपने विश्वस्त चाकर मुराट के हाथों पेरिस भेजा । अन्य सेनापति चाहते थे कि राजा को पदच्युत करके सार्डिनिया में प्रजातंत्र स्थापित
सहस्र नर नारी भावाल पूद्ध भूख की ज्वाला से जल गए, अगणित होनहार भययुवक अन्नविद्दीन हो काल के कवल हो गए। इस दशा में नगर निवासियों की नेपोलियन ने इतनी अधिक सहायता तथा सेवा की कि वह प्रत्येक प्राणी की आंखों फ्रा तारा हो गया । सत्य है, अत्याचारी के अत्याचार से पीड़ित लोग अपना मस्तक उसके पैरों पर घर देते हैं, खुशामदी धनिकों के आगे और निर्बल घलवान के आगे स्वार्थवश सिर झुका देता है, पशुवल से धनावटी प्रतिष्ठा मनुष्य पा सकता है परंतु मनुष्य हृदय का जितना काम है उसके लिये स्नेह चाहिए, करुणा और दया चाहिए तथा हार्दिक प्रेम चाहिए । ईश्वर ने नेपोलियन को जहाँ बली और चतुर बनाया था वहाँ उसको मनुष्यों के हृदयों पर विजय पाने के भी साधन प्रदान किए थे । इन्हीं सद्गुणों के कारण आज नेपोलियन फ्रांस के हर एक छोटे बड़े का स्नेह-पात्र, प्रतिष्ठा-भाजन, उपास्य देव बन गया । विवाह से कई दिन पहले नेपोलियन इटली देशस्थ फरांसीसी सैन्यों का प्रधान सेनापति नियुक्त हो चुका था, भूतपूर्व सेनापति पृथक् किया जा चुका था । नेपोलियन को इस बड़े दायित्वपूर्ण पद पर नियुक्त करने के समय डाइरेक्टरों ने कहा - " तुम बालक हो, इतनी बड़ी जिम्मेदारी के 'उठाने योग्य अभी तुम्हारी अवस्था नहीं है, तुम कैसे बूढ़े सेनापतियों पर शासन करोगे ? " नेपोलियन ने सरल भाव से उत्तर दिया-" में बारह महीने में ही धूढ़ा हो जाऊँगा, अथवा मेरा शरीर पात हो जायगा ।" पुनः एक डाइरेक्टर ने कहा - " हम तुम्हें प्रधान सेनापति ही बनाते हैं, किंतु सैन्य के लिये धन की सहायता हम से कुछ न हो सकेगी। राज-कोप खाली है और उन लोगों के कुव्यवहार की सीमा नहीं है, ये सब बातें सोच लो ।" नेपोलियन बोला-" अच्छा यों ही सही, इन सब बातों का भी में ही दायी रहा, आप चिंता न करें । " अब पाठक थोड़े से शब्दों में यह जान लें कि इस युद्ध का कारण क्या था, क्यों इटली की ओर सेना पड़ी थी, जिसके शासन के लिये फ्रांस से नेपोलियन को जाना पड़ा । हम कुछ पहले कह चुके हैं कि फ्रांस का आभ्यंतरिक विद्रोह देख तथा उसे निर्बल जान कुछ तो अन्य युरोपीय राज्यों ने यह सोचा था कि ऐसे समय मे जो कुछ फ्रांस से हम लोग छीन सकेंछीन ले, फिर ऐसा अवसर मिले या न मिले । दूसरी बात यह थी कि फ्रांस के प्रजातंत्र की धूम युरोप में फैल गई थी, राजाओं के आसन डोल गए थे, वे यह समझते थे कि जो कहीं इस प्रजातंत्र की लहर सारे युरोप में फैली तो हमारा ठिकाना न लगेगा, हम दूसरों के पसीने की गाढ़ी कमाई से भोग विलास में निरत न रह सकेंगे। स्थानांतर में युरोपीय प्रजा ईश्वर से प्रार्थना करती थी कि मांस का प्रजातंत्र कृतकार्य्यता के मुकुट से मंडित मस्तक हो और ईश्वर हमारी सुने, हमारा भी दुख दूर हो । आयरलैंड के मृतक शरीर से भी स्वतंत्रता की ध्वनि उठ खड़ी हुई थी। इसी लिये समस्त युरोपीय राज्यों ने फ्रांस की भंजातंत्र शासन प्रणाली को, जो युनाइटेड स्टेट अमेरिका के ढंग पर बनी थी, मिट्टी में मिलाने का बीड़ा उठाया था। इस काम में आस्ट्रिया, जो इटली पर घोर अत्याचार कर रहा था, प्रधान बना । इसके साथ इंगलैंड, सार्टिनिया, पोप, सभी सम्मिलित थे एक शब्द में, सारा युरोप एक ओर और नेपोलियन के आधिपत्य में फरासीसी सैन्य दूसरी ओर। सच तो यह है कि जो कहीं बीच में अटलांटिक महासागर का व्यवधान न होता तो यह कृपित युरोपीय राजमंडल नेपोलियन की भाँति वीर वाशिंगटन को भी पकड़ कर किसी सेंटहेलना में बंदी करने के लिये वश रहते, कोई भी उपाय उठा न रखता ! इस दशा में भूसी प्यासी, कई मास से बिना वेतन पाए, दुसरी, कर्तव्य भूली हुई, विदेशस्थ फरासीसी सेना के प्रधानाधिपत्य पर युवक नेपोलियन भेजा गया। लेकिन किसी कवि ने सच कहा है कि-' रागी बागी रतन पारसी नायक और नियाय । इन पांचों के गुरु सही पर उपजें अंग सुभाय ।' नेपोलियन जात नेता था कृत नहीं, इसमें आधिपत्य की शक्ति ईश्वरप्रदत्त थी । नेपोलियन 'नाइस' में पहुँचा । यहाँ तीस सहस्र फरासीसी सैन्य क्षुधातुर, हतोत्साह असंतुष्ट पड़ी थी, इसीफो ले कर वीर नेपोलियन को समस्त युरोप की सम्मिलित शक्ति के सामने मोरचे पर खड़ा होना था। पहले तो चूड़े सेनाधिप, विना मूछ दाढ़ी के बालक को प्रधान सेना परि• चालक देख कर आश्चर्य्यान्वित हो कहने लगे कि क्या इसी के अधीन काम करके हम विजयी होंगे? परंतु मेसानो, अगारो आदि इसकी प्रतिभा को जानते थे उन्होंने कहा" इसे छोटा न समझो, 'मंत्र परम लघु जामु वम वसहि देव गंधर्व । "वैजवंत लघु गनिए ना भाई ।" नेपोलियन ने जाते ही सेना में एक घोषणापत्र वितरण कराया । वह यह था"योद्धागण ! तुम लोग क्षुधार्त और वस्त्रहीन हो, शासनमंडल अनेक प्रकार से तुम्हारा ऋणी है और उसके हाथ में इसका बदला देने का कोई भी उपाय नहीं है। निस्संदेह इस पहाड़ी धरती में, इस अगम्य स्थान पर तुम्हारा साहस, तुम्हारी सहिष्णुता अनुकरणीय आदर्श है। लेकिन तुम्हारी वीरता का कोई प्रमाण नहीं मिलता। मैं तुम्हारा अधिप हो कर आया हूं और तुमको संपन्न उर्वरा धरती पर ले चलूंगा, अनेक धन धान्य संपन्न स्थान तुम्हारे करतल गत होंगे, और तुमको अन्न, वस्त्र, धन, ऐश्वर्य, सुयश किसी बात की कमी न रहेगी। अब योद्धाओ । यह बताओ कि तुम मे इस प्रकार से यश और ऐश्वर्य अपने हाथों प्राप्त करने का साहस है या नहीं ! है तो उठ सड़े हो, सब कुछ तुम्हारे हाथ तले है।" इस घोषणा के पढ़ने से सैन्यगण की छाती दूनी हो गई, उनकी नस नस उत्साह से भर उठी, उनकी भुजाएँ फड़कने लगीं । नेपोलियन ने पहले इटली में पैर धरना निश्चय किया, क्योंकि सार्डेिनिया और आस्ट्रिया मे भेद डालना बहुत आव श्यक था। इसमें कृत्कार्य्य हो कर उसने सोचा कि आस्ट्रिया की सेना को ऐसा दबाना कि आस्ट्रिया को इनकी सहायता के लिये राईन नदी पर तटस्थ सेना को बुलाना ही पड़े। तीसरे उसने पोप की शक्ति और क्षमता का नाश करना अनिवार्य्य जाना, क्योंकि यह बायॉन वंशजों के हाथ में फ्रांस का सिंहासन देने के लिये सिर तोड़ चेष्टा कर रहा था । पोप प्रजा का और शत्रु था, इसने फ्रांस के दूत को मरवा डाला था, यद्यपि दूत अवध्य होते हैं। यह सब काम कठिन और सेना केवल तीस हजार, सो भी क्षुधा से क्षीण तन, निर्जीव; रण माममी भी पूरी नहीं; पर नहीं, नेपोलियन के आगे कटिन या असंभव तो कुछ था ही नहीं। घोषणापत्र पढ़ने के उपरांत नेपोलियन ने कूच की आज्ञा दे दी। कुद्ध भुजंगिनी की तरह नेपोलियन की विशाल धतुरंगिणी युद्धाभिलापिणी हो चल पड़ी । नेपोलियन रात दिन घोड़े की पीठ पर बैठे विना विश्राम आगे बढ़ने लगा। यह सेना के प्रत्येक जन के मुख दुःख को अपनी आंखों से देसवा, संवेदना प्रकाश करता, दुःस दूर करने की चेष्टा करता हुआ आस्ट्रिया की सेना की ओर चला। सेनापति बेटीर ने आस्ट्रिया की सेना को तीन भागों में विभक्त किया था। इसमें से बोचवाली दस हजार मढेना नामक छोटे से ग्राम में थी । ग्यारह अप्रैल की अँधेरी रात में हवा सनसना रही थी, वर्षा कहती थी कि आजही प्रलय करके छोडूंगी, पंकीभूत मार्ग दुर्गम हो रहा था। विपक्षी सेना निश्चित, मुँह बंद किए आठ हाथ की रजाई में लंनी ताने पड़ी थी । नेपोलियन मेना लिये मारो मार धावा कर रहा था। नदी पहाड़ों को चुपके से बिना सटका खुटका किए पैरों ही पार करके प्रभात होते होते मडेना के सामने के पहाड़ पर नेपोलियन ससैन्य पहुँच गया। इसने पर्वत पर से अनुसंधान ले लिया, परंतु शत्रु दल के कान में जू तफ रेंगने का अवसर न दिया। यकी हुई सेना को विश्राम का भी अवसर न दे कर नेपोलियन आस्ट्रिया और सार्डिनिया के सम्मिलित वल दल के ऊपर बिजली की तरह गिर पड़ा। आगे पीछे दहिने बाएँ चारों ओर से युगपत् आक्रमण से विदलित शत्रु दल भाग उठा । तीन हजार शत्रु दल एकदम खेत रहा और कुछ घायल पड़े रहे, शेष भाग गए। यहाँ बहुत सी रण सामग्री तथा रसद नेपोलियन के हाथ लगी। यही मडेना का युद्ध है जिसकी बावत नेपोलियन ने कहा था कि मैंने वंशगौरव मडेना के युद्ध में प्राप्त किया है। पाठकों को याद होगा कि आस्ट्रिया नरेश ने अपनी पुत्री का विवाह नेपोलियन से करना चाहा था और इसके उच्च वंशज होने न होने का प्रश्न उठा था। पराजित आस्ट्रियन सेना 'डिगो' की ओर भागी, और वहाँ नई सेना से सम्मिलित हो कर विजयी नेपोलियन की सेना के हाथ से मिलन की रक्षा करने के लिये उद्यत हुई, और साहिनिया की सेना मेलिसमों की ओर भागी और राजधानी टूरिन की रक्षा में तत्पर हुई । इस तरह एक उद्देश्य नेपोलियन का सिद्ध हो गया, जैसा ऊपर कहा गया है । इस जीत के पीछे सेना को उसने कुछ विश्राम दिया; लेकिन नेपोलियन स्वयम् शत्रु दल पर फिर आक्रमण करने की आयोजना करने में लगा रहा और उसने कुछ विश्राम न लिया । तेरह वीं व चौदह वीं अप्रैल को घोर युद्ध होने पर आस्ट्रिया वा सार्डिनिया की सम्मिलित सेना घंटे घंटे पर नई कुमक पाती रही और पर्वत के ऊपर से नेपोलियन की सेना पर पत्थर की चट्टानें लुढ़काने लगी । नेपोलियन सेना में फिर फिर कर सिपाहियों 'को प्रोत्साहित करता हुआ आगे बढ़ता रहा। अंततः उसने डिगो मे शत्रु दल को हटाया । यहाँ भी बहुत सी रण और खाद्य सामग्री नेपोलियन के हाथ लगी। वहाँ तीन हज़ार आस्ट्रियन सेना नेपोलियन के बंधन में आ गई मिटेसिमों में मार्टिनिया फी एक हज़ार पाँच सौ सेना को भी नेपोलियन ने थंदी किया। इस तरह शत्रु दल में बिजली की भाँति द्रुव बेग से नेपोलियन का आक्रमण असा हो गया और हाहाकार मच गई। भूसी निर्धन किंतु विजयी सेना लूट आरंभ कर देती पर नेपोलियन इस यात का विरोधी था, विशेषतः यह इटलीवालों की सहानुभूति प्राप्त करना चाहता था, इस लिये उसने अपने कठोर शासन द्वारा लूट की प्रथा बंद कर दी। जो रसद सामग्री उसे शत्रु दल की हाथ लगती इस से ही उसने अपनी सेना की परितृप्ति की । अतः नेपोलियन जेमोला पर्वत पर हो कर इटली का सौंदर्म्य देखता हुआ ससैन्य तूरिन पर आक्रमण करने के लिये चला । अट्ठारह वी अप्रैल को इसने देखा कि आठ हजार शत्रु दुल शिविर बनाए पड़ा हुआ है । नेपोलियन इन पर याज की तरह टूटा । सारे दिन तुमुल युद्ध हुआ । रात को प्रातः काल की प्रतीक्षा करते हुए फरासीसी बंदूकें सिरहाने घर कर सोए, किंतु उपःकाल में ही देखा गया कि साहिनिया की सेना ने भाग कर समीपवर्ती कारसग्लिया नदी के उस पार जा डेरा डाला है। यहाँ और नई सेना आ कर इनमें मिल गई थी और पीछे की ओर आस्ट्रिया का बड़ा भारी दल इकट्ठा हो रहा था। इस कठिन अवस्था में कर्तव्य कार्य के विचार के लिये रात को समर सभा बैठी और निश्चय हुआ कि नदी का सेतु अच्छी तरह अरुणोदय होने के पहले तोड़ दिया जाय । बस प्रभात होने के कुछ पहले ही फरासीसी सेना पुल पर आ पड़ी और आतंकित सार्डिनीय सेना भाग खड़ी हुई । नेपोलियन को ऐसी कापुरुपता की आशा न थी, प्रत्युत इसी पुल के द्वारा आ कर शत्रु सेना से आक्रमित होने की उसे पूरी आशंका थी । अब क्याथा, सानंद फरासीसी सेना पुल के पार हो गई। आगे आगे सार्डिनिया की सेना भागी जाती थी पीछे पीछे नेपोलियन उसे खदेड़ता जाता था । शत्रु सेना मांटोवी पहाड़ पर जा कर निवेशित हुई और संध्या होते ही फरासीसी सेना भी वहाँ जा पहुँची। यहाँ अच्छा युद्ध हुआ, अंत में विजय नेपोलियन की हुई। आठ वृहन्नलिका ग्यारह झंडे और दो सहस्र शत्रु-दल के योद्धा नेपोलियन के हाथ आए, और एक सहस्र खेत रहे। लेकिन अब भी नेपोलियन के हाथ से उन्हें छुटकारा मिलता नहीं दीसा । शत्रुदल भाग भाग कर छिपता था नेपोलियन खोज खोज कर उन्हें मारता था । केरास्को से विजय लाभ करती हुई फरासीसी सेना तूरिन से दस कोस पर आ पड़ी, राजधानी में हलचल मच गई। प्रजातंत्र के पक्षपाती लोग नेपोलियन के स्वागत करने को उत्कंठित हो उठे, वे फ्रांस की जय मनाने लगे । सार यह कि सार्डिनिया नरेश काँप उठा और उसने हाथ बाँध कर क्षमा माँगी । नेपोलियन ने अपने सहयोगियों के मत का तीव्र प्रतिवाद करके सार्डिनिया से संधि कर ली। इस संधि में यही शर्त लिखी गई कि 'अब सार्डिनिया, आस्ट्रिया वा अंग्रेजों से मैत्री न रखेगा। इस संधि के विधानानुसार नेपोलियन को तीन दुर्ग समस्त रण मामग्री तथा. खाद्य द्रव्य सहित सार्टिनिया ने प्रदान किए। जीते हुए स्थान फरासीसियों के ही पास रहे और फरामीसी सेना को आस्ट्रिया के साथ लड़ने के लिये मार्ग दिया गया इस विजय के उपरांत नेपोलियन ने समस्त सेना को एकत्र फरके एक सारगर्भित वक्तृता दी, जिसका तत्त्व यह है - "हे सैन्यगण ! तुम्हारी धीरता से इक्कीस झंडे, चौंसठ तोपें और कई दुर्ग हमारे हाथ आए हैं। तुम्हारे पास अन्न वस्त्र न या उसकी अब कमी नहीं है। तुमने दस सहय वीरों को रणभूमि शायी किया और पंद्रह सहस्र तुम्हारे कारागार में हैं । तुम फ्रांस प्रजातंत्र के विश्वासपात्र वीर हो । एक बात करना कि लूट कर के अपना और अपने देश का नाम कलंकित न करना । जिसे तुझ जीतो वह तुम्हें दस्यु लुटेरा न जान कर अपना उद्धारक मानता हुआ तुम से प्रेम करे यही तुम्हारा धम्मे है। जो तुम में लुटेरे हैं उन्हें प्राण दंड मिलेगा। उन लुटेरों के कारण तुम सबका उज्ज्वल यश कलुपित न होने पावेगा। अभी काम बहुत सा है। जब तक कार्य असंपूर्ण रहेगा तुम्हें चैन नहीं। इटलीवासियो, देगे हम तुम्हें टूटने मारने नहीं आए, जिन स्त्रत्वापहारियों से तुम पीड़ित हो, चे ही हमारे शत्रु है। तुम प्रजातंत्र फांस पर विश्वास करो।" इसके अनंतर नेपोलियन ने जीती हुई ध्वजाएँ, संधि पत्र और सारा समाचार अपने विश्वस्त चाकर मुराट के हाथों पेरिस भेजा । अन्य सेनापति चाहते थे कि राजा को पदच्युत करके सार्डिनिया में प्रजातंत्र स्थापित
दिल्ली में तीन दिनों से हो रही हिंसा को लेकर शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता वारिस पठान को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि वारिस पठान के बयान के कारण ही लोग उग्र हो गए हैं. रिजवी ने दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध पर तंज कसते हुए कहा कि यह हिंसा वहां बैठी दादी और नानियों की जिहालत का नतीजा है. लोगों से सीधे तौर पर संबोधन करते हुए वसीम रिजवी ने कहा कि सभी से हाथ जोड़कर अपील है कि कांग्रेस के जहर का प्याला लोग न पिएं. कांग्रेस के जाल में फंसकर हुकूमत के खिलाफ माहौल मत बनाओ. हुकूमत, देश और नागरिकता संशोधन कानून हमारा है. आपस में लड़कर मरने वाले को कोई शहीद नहीं कहता है. सच्ची कहानी पर आधारित है तापसी की फिल्म 'थप्पड़' आपकी जानकारी के लिए बता दे कि शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी लगातार अपने बयानों को लेकर चर्चाओं में बने रहते हैं. नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शनों पर लगातार वह सख्त बयानबाजी करते रहे हैं. उन्होंने हाल ही में एक बयान में कहा कि अगर ऐसे ही हालात रहे तो इस्लामिक दाढ़ी और बगैर मूंछ के डरावने चेहरे हिंदुस्तान की गंगा-जमुनी तहजीब को तार-तार कर देंगे. उन्होंने कहा कि शाहीन बाग जैसे हजारों धरने हो जाएं. लेकिन नागरिकता संशोधन कानून पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा था कि शाहीन बाग का धरना हक मांगने कि लड़ाई नहीं है, बल्कि हिंदुओं का हक छीनने की जिद है.
दिल्ली में तीन दिनों से हो रही हिंसा को लेकर शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के नेता वारिस पठान को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि वारिस पठान के बयान के कारण ही लोग उग्र हो गए हैं. रिजवी ने दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध पर तंज कसते हुए कहा कि यह हिंसा वहां बैठी दादी और नानियों की जिहालत का नतीजा है. लोगों से सीधे तौर पर संबोधन करते हुए वसीम रिजवी ने कहा कि सभी से हाथ जोड़कर अपील है कि कांग्रेस के जहर का प्याला लोग न पिएं. कांग्रेस के जाल में फंसकर हुकूमत के खिलाफ माहौल मत बनाओ. हुकूमत, देश और नागरिकता संशोधन कानून हमारा है. आपस में लड़कर मरने वाले को कोई शहीद नहीं कहता है. सच्ची कहानी पर आधारित है तापसी की फिल्म 'थप्पड़' आपकी जानकारी के लिए बता दे कि शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी लगातार अपने बयानों को लेकर चर्चाओं में बने रहते हैं. नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शनों पर लगातार वह सख्त बयानबाजी करते रहे हैं. उन्होंने हाल ही में एक बयान में कहा कि अगर ऐसे ही हालात रहे तो इस्लामिक दाढ़ी और बगैर मूंछ के डरावने चेहरे हिंदुस्तान की गंगा-जमुनी तहजीब को तार-तार कर देंगे. उन्होंने कहा कि शाहीन बाग जैसे हजारों धरने हो जाएं. लेकिन नागरिकता संशोधन कानून पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा था कि शाहीन बाग का धरना हक मांगने कि लड़ाई नहीं है, बल्कि हिंदुओं का हक छीनने की जिद है.
न्यूज़ अरोमा रामगढ़ः जिले में अपराध समीक्षा बैठक के बाद बुधवार की शाम रामगढ़ और रजरप्पा थाना क्षेत्र में कोयला तस्करों के खिलाफ सघन छापेमारी अभियान चलाया गया। इस अभियान में दोनों थाना क्षेत्रों में लगभग 40 टन अवैध कोयला जप्त किया गया है। साथ ही रजरप्पा थाना क्षेत्र में अवैध कोयला लदा ट्रैक्टर भी पुलिस ने पकड़ा है। इस पूरे मामले की पुष्टि करते हुए एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि अवैध कोयला तस्करों के द्वारा ईट भट्ठा पर कोयला गिराया जा रहा था। जिसकी सूचना पुलिस को पहले से ही मिल रही थी। पुलिस की अचानक हुई कार्रवाई के बाद कोयला तस्करों में हड़कंप मचा हुआ है। रामगढ़ थाना क्षेत्र के सरैया और सुगिया गांव में पड़ने वाले आधा दर्जन ईंट भट्ठों पर भी छापेमारी हुई है। रामगढ़ और रजरप्पा थाना क्षेत्र की सीमा पर स्थित इन गांवों में कोयला तस्कर अक्सर पुलिस को चकमा देकर अवैध कारोबार करते हैं। दोनों थाना की टीम ने संयुक्त रुप से कार्रवाई की है। तभी यह सफलता हासिल हुई है। एसपी ने बताया कि ईट भट्ठा मालिकों और कोयला तस्करों के खिलाफ दोनों थाना में प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।
न्यूज़ अरोमा रामगढ़ः जिले में अपराध समीक्षा बैठक के बाद बुधवार की शाम रामगढ़ और रजरप्पा थाना क्षेत्र में कोयला तस्करों के खिलाफ सघन छापेमारी अभियान चलाया गया। इस अभियान में दोनों थाना क्षेत्रों में लगभग चालीस टन अवैध कोयला जप्त किया गया है। साथ ही रजरप्पा थाना क्षेत्र में अवैध कोयला लदा ट्रैक्टर भी पुलिस ने पकड़ा है। इस पूरे मामले की पुष्टि करते हुए एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि अवैध कोयला तस्करों के द्वारा ईट भट्ठा पर कोयला गिराया जा रहा था। जिसकी सूचना पुलिस को पहले से ही मिल रही थी। पुलिस की अचानक हुई कार्रवाई के बाद कोयला तस्करों में हड़कंप मचा हुआ है। रामगढ़ थाना क्षेत्र के सरैया और सुगिया गांव में पड़ने वाले आधा दर्जन ईंट भट्ठों पर भी छापेमारी हुई है। रामगढ़ और रजरप्पा थाना क्षेत्र की सीमा पर स्थित इन गांवों में कोयला तस्कर अक्सर पुलिस को चकमा देकर अवैध कारोबार करते हैं। दोनों थाना की टीम ने संयुक्त रुप से कार्रवाई की है। तभी यह सफलता हासिल हुई है। एसपी ने बताया कि ईट भट्ठा मालिकों और कोयला तस्करों के खिलाफ दोनों थाना में प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है।
MP Election 2018: इस मामले में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के प्रत्याशियों ने कंजूसी दिखाई है। इंदौर। प्रदेश में जारी चुनावी घमासान में किस्मत आजमा रहे कुछ धन्नासेठों ने भले ही चुनाव आयोग को दिए घोषणा पत्र में अपनी संपत्ति करोड़ों में बताई हो, लेकिन चुनाव प्रचार के खर्च में ये काफी कंजूसी दिखा रहे हैं। नियमों के मुताबिक चुनाव में हर प्रत्याशी 28 लाख तक खर्च कर सकता है लेकिन चुनाव प्रचार में खत्म होने में कुछ ही दिन बाकी हैं और प्रत्याशियों ने चुनाव पर खर्च काफी कम बताया है। एक बानगी देखिए, इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्र. -1 से कांग्रेस प्रत्याशी संजय शुक्ला ने 139. 92 करोड़ रु. की संपत्ति की घोषणा की है, जबकि 22 नवंबर तक केवल 95 हजार 571 रुपए ही खर्च किए हैं। यही नहीं, रतलाम से भाजपा प्रत्याशी चेतन्य काश्यप ने 197 करोड़ की संपत्ति घोषित की है व चुनावी खर्च 8. 50 लाख बताया है। चुनावी खर्च - 4 लाख 3 हजार 19 रुपए (18 नवंबर तक) चुनावी खर्च - 86 हजार 409 रुपए (16 नवंबर तक) कटनी जिले के विजयराघवगढ़ सीट से भाजपा प्रत्याशी और राज्य मंत्री संजय पाठक ने बताया है कि उनके पास 141. 62 करोड़ रुपए (बैंक खातों में नकद जमा, शेयर, बीमा आदि) हैं। करीब 84. 45 करोड़ रुपए अचल संपत्ति है। पाठक ने अब तक केवल 5. 66 लाख रुपए खर्च किए हैं। ग्वालियर-चंबल अंचल में सर्वाधिक 58 करोड़ की संपत्ति पिछोर से कांग्रेस के केपी सिंह ने घोषित की है। उन्होंने अब तक चुनाव में 4. 34 लाख रुपए ही खर्च किए हैं। मुरैना में बसपा प्रत्याशी बलवीर सिंह दंडोतिया ने 42 करोड़ की संपत्ति घोषित की है और 10,76,682 खर्च बताया है। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार खर्च के लिए प्रत्याशी को नामांकन भरने से एक दिन पहले किसी बैंक में अलग खाता खोलना अनिवार्य होता है। -बैंक खाते की संख्या का उल्लेख नामांकन पत्र में करना जरूरी है। चुनाव संबंधी सभी खर्च इसी खाते से किए जाने का प्रावधान है। -चुनावी खर्च के लिए 20 हजार रुपए तक नकद दिए जा सकते हैं। -प्रत्याशी को हर चुनावी खर्च का लेखा-जोखा रखना है और तय अवधि में चुनाव के व्यय लेखा प्रेक्षक के कार्यालय में पेश करना है।
MP Election दो हज़ार अट्ठारह: इस मामले में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के प्रत्याशियों ने कंजूसी दिखाई है। इंदौर। प्रदेश में जारी चुनावी घमासान में किस्मत आजमा रहे कुछ धन्नासेठों ने भले ही चुनाव आयोग को दिए घोषणा पत्र में अपनी संपत्ति करोड़ों में बताई हो, लेकिन चुनाव प्रचार के खर्च में ये काफी कंजूसी दिखा रहे हैं। नियमों के मुताबिक चुनाव में हर प्रत्याशी अट्ठाईस लाख तक खर्च कर सकता है लेकिन चुनाव प्रचार में खत्म होने में कुछ ही दिन बाकी हैं और प्रत्याशियों ने चुनाव पर खर्च काफी कम बताया है। एक बानगी देखिए, इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्र. -एक से कांग्रेस प्रत्याशी संजय शुक्ला ने एक सौ उनतालीस. बानवे करोड़ रु. की संपत्ति की घोषणा की है, जबकि बाईस नवंबर तक केवल पचानवे हजार पाँच सौ इकहत्तर रुपयापए ही खर्च किए हैं। यही नहीं, रतलाम से भाजपा प्रत्याशी चेतन्य काश्यप ने एक सौ सत्तानवे करोड़ की संपत्ति घोषित की है व चुनावी खर्च आठ. पचास लाख बताया है। चुनावी खर्च - चार लाख तीन हजार उन्नीस रुपयापए चुनावी खर्च - छियासी हजार चार सौ नौ रुपयापए कटनी जिले के विजयराघवगढ़ सीट से भाजपा प्रत्याशी और राज्य मंत्री संजय पाठक ने बताया है कि उनके पास एक सौ इकतालीस. बासठ करोड़ रुपए हैं। करीब चौरासी. पैंतालीस करोड़ रुपए अचल संपत्ति है। पाठक ने अब तक केवल पाँच. छयासठ लाख रुपए खर्च किए हैं। ग्वालियर-चंबल अंचल में सर्वाधिक अट्ठावन करोड़ की संपत्ति पिछोर से कांग्रेस के केपी सिंह ने घोषित की है। उन्होंने अब तक चुनाव में चार. चौंतीस लाख रुपए ही खर्च किए हैं। मुरैना में बसपा प्रत्याशी बलवीर सिंह दंडोतिया ने बयालीस करोड़ की संपत्ति घोषित की है और दस,छिहत्तर,छः सौ बयासी खर्च बताया है। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार खर्च के लिए प्रत्याशी को नामांकन भरने से एक दिन पहले किसी बैंक में अलग खाता खोलना अनिवार्य होता है। -बैंक खाते की संख्या का उल्लेख नामांकन पत्र में करना जरूरी है। चुनाव संबंधी सभी खर्च इसी खाते से किए जाने का प्रावधान है। -चुनावी खर्च के लिए बीस हजार रुपए तक नकद दिए जा सकते हैं। -प्रत्याशी को हर चुनावी खर्च का लेखा-जोखा रखना है और तय अवधि में चुनाव के व्यय लेखा प्रेक्षक के कार्यालय में पेश करना है।
संभावना और भी अधिक है। फिर चूँकि, मुहावरों का उनकी भाषा से काफी घनिष्ठ सम्बन्ध है, इसलिए स्मिथ का इतने विश्वास के साथ यह कहना कि मुहावरों में प्रयुक्त शब्द प्रायः प्रत्येक शब्दभेद की तरह प्रयुक्त हो सकते हैं, सर्वथा उचित और ठीक ही है। मुहावरों में, जैसा आगे चलकर विस्तारपूर्वक बतायेंगे, व्याकरण के और भी कितने ही नियमों का व्यतिक्रम पाया जाता है। किन्तु, जबकि भाषा के साधारण प्रयोगों में इस प्रकार का कोई भी व्यतिक्रम दोष माना जाता है, मुहावरों में वही दोष उनकी विशेषता बन जाता है । अँगरेजी-मुहावरों के उदाहरण लेकर स्मिथ ने इस सम्बन्ध में जो कुछ कहा है, हिन्दी-मुहावरों पर भी विना किसी उलट-फेर या न्यूनाधिक्य के वह बात उतनी ही लागू होती है। अतएव हम यहाँ अपने उदाहरणों से पुष्ट करते हुए स्मिथ का मत देते हैं। वह कहता है - " ऐसे मुहावरों के साथ ही कि जिनमें व्याकरण के नियमों की खुले आम उपेक्षा की गई है, हमारी मुहावरेदार भाषा में बहुत से ऐसे प्रयोग भी मिलते हैं, जिनमें नियमों का ( भाषा, व्याकरण अथवा तर्क सम्बन्धी ) बहुत ही सूक्ष्म विरोध हुआ है। हमारे अधिकांश मुहावरे जन-साधारण की उस लोकप्रिय भाषा से आते हैं, जिसमें आज भी व्याकरण सम्बन्धी वही स्वतन्त्रता सुरक्षित है, जो हमारी भाषा के प्राचीन इतिहास की एक विशेषता थी। इस प्रकार एलिजबेथ कालीन अंगरेजी की तरह मुहावरों में शब्दों का प्रायः कोई भी एक भेद किसी दूसरे भेद के स्थान में प्रयुक्त हो सकता है और उसका काम कर सकता है। संज्ञा और विशेषणों को क्रिया - रूप में बदलकर प्रयोग करना तो हमारी भाषा के लिए एक साधारण बात है, बहुत से मुहावरों में क्रियाविशेषण और उपसर्ग संज्ञा की तरह प्रयुक्त होते हैं । ( 'क्यों और कैसे में न पड़ना', 'अगर-मगर करना', 'नीच-ऊँच देखना' । 'अति' संस्कृत का उपसर्ग है, किन्तु, 'अति सर्वत्र वर्जयेत्' में संज्ञा की तरह प्रयुक्त हुआ है; 'दुर' भी उपसर्ग है, किन्तु दुर दुर करना' मुहावरे में संज्ञा की तरह प्रयुक्त हुआ है । ) उपसर्ग किया-रूप हो जाते हैं ( हिन्दी में इस प्रकार के प्रयोग हमें नहीं मिले, अँगरेजो में अवश्य 'to out with', 'to up and' इत्यादि प्रयोग मिलते हैं, और क्रियाएँ संज्ञाओं की तरह प्रयुक्त होती हैं ( 'खाना-पीना होना', 'आना-जाना बन्द होना', 'रोने रोना )। कभी अकर्मक क्रया का सकर्मक रूप में प्रयोग होता है, जैसे उचकना अकर्मक क्रिया है, किन्तु 'किसी का माल उचक लेना आदि प्रयोगों में सकर्मक की तरह इसका प्रयोग होता है और कत्तू वाच्य का कर्मवाच्य - जैसा अर्थ होता है । 'देशावर लदना' इसी प्रकार का प्रयोग है, किन्तु वास्तव में इस प्रकार की स्वतन्त्रताओं की कोई सीमा निर्धारित करना कठिन है। 'But me no buts' मुहावरों के इस प्रयोग -स्वातन्त्र्य का एक विलक्षण उदाहरण है। कामताप्रसाद गुरु अपने हिन्दी व्याकरण में संज्ञा के स्थान में आनेवाले शब्दों की मीमांसा करते हुए लिखते हैं - 'सर्वनाम का उपयोग संज्ञा के स्थान में होता है', 'विशेषण कभी-कभी संज्ञा के स्थान में आता है', 'कोई-कोई क्रियाविशेषण संज्ञाओं के समान उपयोग में आते हैं, 'कभी-कभी विस्मयादिबोधक शब्द संज्ञा के समान प्रयुक्त होता है', 'कोई भी शब्द वा अक्षर केवल उसी शब्द वा अक्षर के अर्थ में संज्ञा के समान उपयोग में आ सकता है। गुरुजी ने भाषा के साधारण प्रयोगों की छानबीन कर ही इतनी विशेषताएँ अथवा अपवाद एकत्रित किये हैं, कहीं मुहावरों के क्षेत्र में जा निकलते, तो पग-पग पर दायें-बायें, नीचे-ऊपर, आगे-पीछे सब जगह इसी प्रकार के प्रयोग लहराते हुए देखकर हम समझते हैं कि एक बार तो अवश्य हो वे इस भ्रम में पड़ जाते कि मुहावरों को व्याकरण का अपवाद कहें अथवा व्याकरण को मुहावरों का अपवाद । उदाहरण के लिए इस प्रकार के कुछ मुहावरे आगे देते हैं
संभावना और भी अधिक है। फिर चूँकि, मुहावरों का उनकी भाषा से काफी घनिष्ठ सम्बन्ध है, इसलिए स्मिथ का इतने विश्वास के साथ यह कहना कि मुहावरों में प्रयुक्त शब्द प्रायः प्रत्येक शब्दभेद की तरह प्रयुक्त हो सकते हैं, सर्वथा उचित और ठीक ही है। मुहावरों में, जैसा आगे चलकर विस्तारपूर्वक बतायेंगे, व्याकरण के और भी कितने ही नियमों का व्यतिक्रम पाया जाता है। किन्तु, जबकि भाषा के साधारण प्रयोगों में इस प्रकार का कोई भी व्यतिक्रम दोष माना जाता है, मुहावरों में वही दोष उनकी विशेषता बन जाता है । अँगरेजी-मुहावरों के उदाहरण लेकर स्मिथ ने इस सम्बन्ध में जो कुछ कहा है, हिन्दी-मुहावरों पर भी विना किसी उलट-फेर या न्यूनाधिक्य के वह बात उतनी ही लागू होती है। अतएव हम यहाँ अपने उदाहरणों से पुष्ट करते हुए स्मिथ का मत देते हैं। वह कहता है - " ऐसे मुहावरों के साथ ही कि जिनमें व्याकरण के नियमों की खुले आम उपेक्षा की गई है, हमारी मुहावरेदार भाषा में बहुत से ऐसे प्रयोग भी मिलते हैं, जिनमें नियमों का बहुत ही सूक्ष्म विरोध हुआ है। हमारे अधिकांश मुहावरे जन-साधारण की उस लोकप्रिय भाषा से आते हैं, जिसमें आज भी व्याकरण सम्बन्धी वही स्वतन्त्रता सुरक्षित है, जो हमारी भाषा के प्राचीन इतिहास की एक विशेषता थी। इस प्रकार एलिजबेथ कालीन अंगरेजी की तरह मुहावरों में शब्दों का प्रायः कोई भी एक भेद किसी दूसरे भेद के स्थान में प्रयुक्त हो सकता है और उसका काम कर सकता है। संज्ञा और विशेषणों को क्रिया - रूप में बदलकर प्रयोग करना तो हमारी भाषा के लिए एक साधारण बात है, बहुत से मुहावरों में क्रियाविशेषण और उपसर्ग संज्ञा की तरह प्रयुक्त होते हैं । उपसर्ग किया-रूप हो जाते हैं । कभी अकर्मक क्रया का सकर्मक रूप में प्रयोग होता है, जैसे उचकना अकर्मक क्रिया है, किन्तु 'किसी का माल उचक लेना आदि प्रयोगों में सकर्मक की तरह इसका प्रयोग होता है और कत्तू वाच्य का कर्मवाच्य - जैसा अर्थ होता है । 'देशावर लदना' इसी प्रकार का प्रयोग है, किन्तु वास्तव में इस प्रकार की स्वतन्त्रताओं की कोई सीमा निर्धारित करना कठिन है। 'But me no buts' मुहावरों के इस प्रयोग -स्वातन्त्र्य का एक विलक्षण उदाहरण है। कामताप्रसाद गुरु अपने हिन्दी व्याकरण में संज्ञा के स्थान में आनेवाले शब्दों की मीमांसा करते हुए लिखते हैं - 'सर्वनाम का उपयोग संज्ञा के स्थान में होता है', 'विशेषण कभी-कभी संज्ञा के स्थान में आता है', 'कोई-कोई क्रियाविशेषण संज्ञाओं के समान उपयोग में आते हैं, 'कभी-कभी विस्मयादिबोधक शब्द संज्ञा के समान प्रयुक्त होता है', 'कोई भी शब्द वा अक्षर केवल उसी शब्द वा अक्षर के अर्थ में संज्ञा के समान उपयोग में आ सकता है। गुरुजी ने भाषा के साधारण प्रयोगों की छानबीन कर ही इतनी विशेषताएँ अथवा अपवाद एकत्रित किये हैं, कहीं मुहावरों के क्षेत्र में जा निकलते, तो पग-पग पर दायें-बायें, नीचे-ऊपर, आगे-पीछे सब जगह इसी प्रकार के प्रयोग लहराते हुए देखकर हम समझते हैं कि एक बार तो अवश्य हो वे इस भ्रम में पड़ जाते कि मुहावरों को व्याकरण का अपवाद कहें अथवा व्याकरण को मुहावरों का अपवाद । उदाहरण के लिए इस प्रकार के कुछ मुहावरे आगे देते हैं
गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का पटना में हुआ निधन.... देहरादून : यदि मनमाना किराया मांगे ऑटो वाले तो परेशान न हों तुरंत डायल करें 112.... . UK : उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी का दौर जारी....
गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का पटना में हुआ निधन.... देहरादून : यदि मनमाना किराया मांगे ऑटो वाले तो परेशान न हों तुरंत डायल करें एक सौ बारह.... . UK : उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी का दौर जारी....
वॉशिंगटन - जनवरी के आखिर में उत्तरी इराक में लड़ रहे इस्लामिक स्टेट के दो आतंकवादी नदी के कगार पर खड़े होकर अपने हाथ आए एक नए हथियार का प्रदर्शन करते दिखे। इन आतंकियों के हाथ में एक छोटा सा ड्रोन था। यह ड्रोन करीब छह फुट चौड़ा था और इसके साथ एक छोटा बम भी बंधा हुआ था। दोनों आतंकियों ने इस ड्रोन को लांच कर एक दूसरे ड्रोन से उसकी वीडियो बनाई। दोनों ड्रोंस एक जैसे थे। यह ड्रोन फिर मोसुल के उस हिस्से पर से गुजरा, जिस पर इराकी गठबंधन सेना का कब्जा है। वहां इराकी सेना के एक आउटपोस्ट के ऊपर से गुजरते ड्रोन ने बम नीचे गिरा दिया। इस बम के धमाके से इराकी सेना में भगदड़ मच गई। अगले ही पल एक सैनिक जमीन पर गिरा नजर आया। उस सैनिक की या तो मौत हो चुकी थी, या वह घायल हो गया था। यह इस तरह की अकेली घटना नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों में आईएस की ओर से ऐसे कई ड्रोन हमले किए गए हैं। दो साल पहले आईएस ने निगरानी रखने के मकसद से पहले-पहल ड्रोंस की खरीदारी की थी। अब वह इस तकनीक का इस्तेमाल अपने दुश्मनों को मारने में भी कर रहा है। इस खतरे के मद्देनजर अमरीकी और इराकी कमांडर्स ने मोर्चे पर तैनात अपने सैनिकों के लिए चेतावनी जारी की है। अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि इस नए डिवेलप्मेंट से आम नागरिकों के लिए एक गंभीर जोखिम पैदा हो रहा है।
वॉशिंगटन - जनवरी के आखिर में उत्तरी इराक में लड़ रहे इस्लामिक स्टेट के दो आतंकवादी नदी के कगार पर खड़े होकर अपने हाथ आए एक नए हथियार का प्रदर्शन करते दिखे। इन आतंकियों के हाथ में एक छोटा सा ड्रोन था। यह ड्रोन करीब छह फुट चौड़ा था और इसके साथ एक छोटा बम भी बंधा हुआ था। दोनों आतंकियों ने इस ड्रोन को लांच कर एक दूसरे ड्रोन से उसकी वीडियो बनाई। दोनों ड्रोंस एक जैसे थे। यह ड्रोन फिर मोसुल के उस हिस्से पर से गुजरा, जिस पर इराकी गठबंधन सेना का कब्जा है। वहां इराकी सेना के एक आउटपोस्ट के ऊपर से गुजरते ड्रोन ने बम नीचे गिरा दिया। इस बम के धमाके से इराकी सेना में भगदड़ मच गई। अगले ही पल एक सैनिक जमीन पर गिरा नजर आया। उस सैनिक की या तो मौत हो चुकी थी, या वह घायल हो गया था। यह इस तरह की अकेली घटना नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों में आईएस की ओर से ऐसे कई ड्रोन हमले किए गए हैं। दो साल पहले आईएस ने निगरानी रखने के मकसद से पहले-पहल ड्रोंस की खरीदारी की थी। अब वह इस तकनीक का इस्तेमाल अपने दुश्मनों को मारने में भी कर रहा है। इस खतरे के मद्देनजर अमरीकी और इराकी कमांडर्स ने मोर्चे पर तैनात अपने सैनिकों के लिए चेतावनी जारी की है। अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि इस नए डिवेलप्मेंट से आम नागरिकों के लिए एक गंभीर जोखिम पैदा हो रहा है।
भोपाल(राज्य ब्यूरो)। ये भारतीय जनता पार्टी है। सुमित्रा बाल्मिक जी ने सपने में नहीं सोचा था, कभी टिकट मिलेगा राज्यसभा का, मांगने की तो बात ही अलग है। यह बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कही। चौहान मंगलवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में मीडिया के साथ बातचीत कर रहे थे। चौहान ने कहा उनके द्वारा नामांकन पत्र भरना बहुत सरल इसलिए था कि उनके पास कुछ है ही नहीं। मैंने कल रात को कलेक्टर को कहा की जरा देखो और उनको भेजना, ठीक से पहुंच जाएं। वो बाल्मिक समाज से आती हैं। ये भाजपा केवल बड़े नेताओं की पार्टी नहीं है कि बड़े-बड़े चेहरे केवल उन्हीं को टिकट दिए जाएंगे। एक तरफ कविता पाटीदार, जमीन से जुड़ी दिन और रात काम करने वाली हमारी बेटी जो पार्टी के महामंत्री हैं। उनको टिकट दिया और एक तरफ सुमित्रा बाल्मिक जैसे अंत्योदय परिवार से आने वाली बहन को टिकट दिया है। ये नेता हैं और भारतीय जनता पार्टी ऐसे कार्यकर्ताओं को भी नेता बनाती है हमें गर्व है। आप राजनीति का एजेंडा देख लीजिए, बदल गया है। उन्होंने कहा कि परिवारवाद, अब कांग्रेस को कहना पड़ रहा है एक परिवार में एक ही टिकट देंग। ये चमत्कार कौन कर सकता था। भारतीय राजनीति के एजेंडे को, विकाश और सुशासन से जोड़ा है तो, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने जोड़ा है। हमने ग्रामीण आवास के क्षेत्र में 24 लाख मकान बना कर पूरे कर दिए, छह लाख मकान में काम चल रहा है। पहले जो सूची थी, वह 30 लाख की थी हम 30 लाख मकान बना कर कंप्लीट कर देंगे। सीएम के अनुसार अकेले मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में 83 लाख 78 हजार किसानों के खाते में, 13 हजार 400 करोड़ रुपए डाले जा चुके हैं। प्रधानमंत्री उज्जवला गैस रसोई योजना के अंतर्गत, 89 लाख 84 हजार बहनों को गैस कनेक्शन मिल चुके हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जिसमें मध्य प्रदेश प्रथम है 28 लाख 99 हजार गर्भवती बहनों को, 1261 करोड़ रुपये की राशि मिली है।
भोपाल। ये भारतीय जनता पार्टी है। सुमित्रा बाल्मिक जी ने सपने में नहीं सोचा था, कभी टिकट मिलेगा राज्यसभा का, मांगने की तो बात ही अलग है। यह बात मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कही। चौहान मंगलवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में मीडिया के साथ बातचीत कर रहे थे। चौहान ने कहा उनके द्वारा नामांकन पत्र भरना बहुत सरल इसलिए था कि उनके पास कुछ है ही नहीं। मैंने कल रात को कलेक्टर को कहा की जरा देखो और उनको भेजना, ठीक से पहुंच जाएं। वो बाल्मिक समाज से आती हैं। ये भाजपा केवल बड़े नेताओं की पार्टी नहीं है कि बड़े-बड़े चेहरे केवल उन्हीं को टिकट दिए जाएंगे। एक तरफ कविता पाटीदार, जमीन से जुड़ी दिन और रात काम करने वाली हमारी बेटी जो पार्टी के महामंत्री हैं। उनको टिकट दिया और एक तरफ सुमित्रा बाल्मिक जैसे अंत्योदय परिवार से आने वाली बहन को टिकट दिया है। ये नेता हैं और भारतीय जनता पार्टी ऐसे कार्यकर्ताओं को भी नेता बनाती है हमें गर्व है। आप राजनीति का एजेंडा देख लीजिए, बदल गया है। उन्होंने कहा कि परिवारवाद, अब कांग्रेस को कहना पड़ रहा है एक परिवार में एक ही टिकट देंग। ये चमत्कार कौन कर सकता था। भारतीय राजनीति के एजेंडे को, विकाश और सुशासन से जोड़ा है तो, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने जोड़ा है। हमने ग्रामीण आवास के क्षेत्र में चौबीस लाख मकान बना कर पूरे कर दिए, छह लाख मकान में काम चल रहा है। पहले जो सूची थी, वह तीस लाख की थी हम तीस लाख मकान बना कर कंप्लीट कर देंगे। सीएम के अनुसार अकेले मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में तिरासी लाख अठहत्तर हजार किसानों के खाते में, तेरह हजार चार सौ करोड़ रुपए डाले जा चुके हैं। प्रधानमंत्री उज्जवला गैस रसोई योजना के अंतर्गत, नवासी लाख चौरासी हजार बहनों को गैस कनेक्शन मिल चुके हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जिसमें मध्य प्रदेश प्रथम है अट्ठाईस लाख निन्यानवे हजार गर्भवती बहनों को, एक हज़ार दो सौ इकसठ करोड़ रुपये की राशि मिली है।
Jamshedpur : अखिल भारतीय तैलिक साहू महासभा की ओर से बुधवार को एमजीएम गोलचक्कर पर भामाशाह की 422वीं पुण्यतिथि को गौरव दिवस के रूप में मनाया गया. इस अवसर पर भामाशाह की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनको नमन किया साथ ही जरूरतमंद 51 लोगों के बीच कंबल का वितरण किया गया. मौके पर जिलाध्यक्ष राकेश साहू ने कहा कि आने वाले समय में जल्द ही इस गोलचक्कर पर भामाशाह की प्रतिमा लगाई जाएगी. उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान महाराणा प्रताप का सारा धन खत्म हो गया तो भामाशाह ने उस समय अपना पूरा खजाना खोल दिया था. इसलिए उन्हें दानवीर भामाशाह कहा जाता है. इस कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से चंदिका प्रसाद, रंजीत कुमार साव, सह सचिव पिंटू साव, पप्पू साहू, विदेशी साव, युवा अध्यक्ष आदित्य धनराज साह, महिला अध्यक्ष पूजा साहू, राकेश कुमार, सत्यनारायण प्रसाद, जितेंद्र साहू, गौतम साहू, सूरज प्रसाद आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा.
Jamshedpur : अखिल भारतीय तैलिक साहू महासभा की ओर से बुधवार को एमजीएम गोलचक्कर पर भामाशाह की चार सौ बाईसवीं पुण्यतिथि को गौरव दिवस के रूप में मनाया गया. इस अवसर पर भामाशाह की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं श्रद्धा सुमन अर्पित कर उनको नमन किया साथ ही जरूरतमंद इक्यावन लोगों के बीच कंबल का वितरण किया गया. मौके पर जिलाध्यक्ष राकेश साहू ने कहा कि आने वाले समय में जल्द ही इस गोलचक्कर पर भामाशाह की प्रतिमा लगाई जाएगी. उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान महाराणा प्रताप का सारा धन खत्म हो गया तो भामाशाह ने उस समय अपना पूरा खजाना खोल दिया था. इसलिए उन्हें दानवीर भामाशाह कहा जाता है. इस कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से चंदिका प्रसाद, रंजीत कुमार साव, सह सचिव पिंटू साव, पप्पू साहू, विदेशी साव, युवा अध्यक्ष आदित्य धनराज साह, महिला अध्यक्ष पूजा साहू, राकेश कुमार, सत्यनारायण प्रसाद, जितेंद्र साहू, गौतम साहू, सूरज प्रसाद आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा.
बिहारी की विरहिनी यदि ध्रुव प्रदेश में चली जाय तो क्या हो, यह ध्यान ही "बिहारी की विरहिती" नामक निबंध लिखा गया था । भूपण पर एक बार बड़ा प्रहार हुआ था और प्रस्ताव हुआ था कि इसे साहित्यरत्न के पाठ्यक्रम से हटा दिया जाय, तभी राष्ट्रीय महाकवि भूपण लिखा गया था। घनानन्द रीक्ति मुक्त कवि था, रीतिकाल के इस दृष्टिकोण को अपनाते हुए भी एक व्याख्यान माला मे मैने प्रतिपादित किया था कि कवि अपने युग से अछूता नहीं रहता है। प्रसादजी के नाटकों की नारियों का अध्ययन करते हुए "कामायनी की नारी" ने जन्म लिया था । नाटक पर शोध करते हुए कुछ तथ्य सामने आये थे जिनका कुछ प्रतिबिंव नाटक घाट में है । एकांकी में का जन्म (१८८४) ब्रजभाषा नाटक युग, नाटक में अनुकरण, भारत दुर्दशा नाट्य रासक नहीं है, प्रसाद का नाट्य विधान पश्चिमी शैली का है - - ऐसे कुछ प्रश्न इस नाटक घाट में मुखरित है । बी० ए० एवं एम० ए० के छात्रों को समझने और समझने के अवसरों पर कुछ कहना पड़ा है । फलतः ऐसे निबंध भी जन्मे, जैसे हिन्दी का नाटक साहित्य, उपन्यास साहित्य, एकांकी का विकास, निबंध का विकास, दो झांसी की रानी, मृगनयनी, प्रेमाश्रम की समस्या इत्यादि । तुलसी का जीवन घोर दुःखान्त नाटक' इस पर विचार करते हुए "निराश हृदय का उद्गार-गोदान' अवतरित हो गया था। शोध छात्रों के कारण कुछ पुस्तकें पढ़ी गई और फलतः कुछ निबंध लिखे गए जैसे कि ऐतिहासिक उपन्यास, चन्द्रगुप्त नाटक की परम्परा इत्यादि । यह है कहानी इन निबन्धों के जन्म की। वैसे इनमें से कई हिन्दी की मासिक पत्रिकाओं (अनुशीलन, समालोचक, अजंता, अवन्तिका, साहित्य संदेश, माधुरी, सरस्वती, वासंती, सरस्वती संवाद इत्यादि ) में प्रकाश और चर्चा भी पा चुके है । जो जिससे पाया है, उसे उन्हें लौटाने में संकोच कैसा ? कविता घाट [ कबीर, जायसी, सूर, तुलसी, केशव, बिहारी, सेनापति, भूषण, घनानन्द, हरिग्रोध, प्रसाद पन्त ] कबीर - कबीर पर सिद्धों मर नाथों का प्रभाव [ शैली का प्रभाव विचारों का प्रभाव ] कबीर और जायसी - कबीर और जायसी का रहस्यवाद [ व्याख्या. प्रेम परक रह व्यवाद, प्रकृति परक, योग परकपरक ] जायसी - जायसी का विरह वर्गात [ ऊहात्मक, सम्वेदनात्मक, दश दशाएँ ] ४. सूर - सूर की सरसता [ बाह्य सरसता, प्रांतरिक सरसता ] ५. सूर-सूर का बाल चित्रण [ वाल प्रकृति, मनोविज्ञान ] ६. तुलसी- तुलसी का जीव विज्ञान [ पक्षी जगत, पशु जगत, लघुकीट ] तुलसी- तुलसीदास की मौलिकता 5. तुलसी- तुलसी की कला या कविता लसी पा तुलसी की कला [ शब्द योजना, शब्द चित्र, शब्द शृङ्गार, अर्थध्वनन, शब्द शक्ति ] ६. केशव - केशवदास की रामचन्द्रिका [ संवाद, वर्णन, अलंकार, व्यंजना ] १०. बिहारी - सतसईकार बिहारी और मतिराम [ विषय, भाव, क्षेत्र, शृङ्गार क्षेत्र, उपमान ] बिहारी-बिहारी की विरहिनी १२. सेनापति - सेनापति का प्रकृति चित्रण [ उद्दीपन रूप, आलम्बन रूप, अलंकार रूप, दृष्टिकोण, सम्मतियाँ ] १३. भूबा - राष्ट्रीय महाकवि भूषण[राष्ट्रीयता युग प्रधान- चापलूसहिन्दी राष्ट्रीयता, वीर रस ] घनानन्दघनानन्द और रीति कालीन प्रवृत्तियाँ [ शृङ्गार प्रवृत्ति, कला प्रवृत्ति ]
बिहारी की विरहिनी यदि ध्रुव प्रदेश में चली जाय तो क्या हो, यह ध्यान ही "बिहारी की विरहिती" नामक निबंध लिखा गया था । भूपण पर एक बार बड़ा प्रहार हुआ था और प्रस्ताव हुआ था कि इसे साहित्यरत्न के पाठ्यक्रम से हटा दिया जाय, तभी राष्ट्रीय महाकवि भूपण लिखा गया था। घनानन्द रीक्ति मुक्त कवि था, रीतिकाल के इस दृष्टिकोण को अपनाते हुए भी एक व्याख्यान माला मे मैने प्रतिपादित किया था कि कवि अपने युग से अछूता नहीं रहता है। प्रसादजी के नाटकों की नारियों का अध्ययन करते हुए "कामायनी की नारी" ने जन्म लिया था । नाटक पर शोध करते हुए कुछ तथ्य सामने आये थे जिनका कुछ प्रतिबिंव नाटक घाट में है । एकांकी में का जन्म ब्रजभाषा नाटक युग, नाटक में अनुकरण, भारत दुर्दशा नाट्य रासक नहीं है, प्रसाद का नाट्य विधान पश्चिमी शैली का है - - ऐसे कुछ प्रश्न इस नाटक घाट में मुखरित है । बीशून्य एशून्य एवं एमशून्य एशून्य के छात्रों को समझने और समझने के अवसरों पर कुछ कहना पड़ा है । फलतः ऐसे निबंध भी जन्मे, जैसे हिन्दी का नाटक साहित्य, उपन्यास साहित्य, एकांकी का विकास, निबंध का विकास, दो झांसी की रानी, मृगनयनी, प्रेमाश्रम की समस्या इत्यादि । तुलसी का जीवन घोर दुःखान्त नाटक' इस पर विचार करते हुए "निराश हृदय का उद्गार-गोदान' अवतरित हो गया था। शोध छात्रों के कारण कुछ पुस्तकें पढ़ी गई और फलतः कुछ निबंध लिखे गए जैसे कि ऐतिहासिक उपन्यास, चन्द्रगुप्त नाटक की परम्परा इत्यादि । यह है कहानी इन निबन्धों के जन्म की। वैसे इनमें से कई हिन्दी की मासिक पत्रिकाओं में प्रकाश और चर्चा भी पा चुके है । जो जिससे पाया है, उसे उन्हें लौटाने में संकोच कैसा ? कविता घाट [ कबीर, जायसी, सूर, तुलसी, केशव, बिहारी, सेनापति, भूषण, घनानन्द, हरिग्रोध, प्रसाद पन्त ] कबीर - कबीर पर सिद्धों मर नाथों का प्रभाव [ शैली का प्रभाव विचारों का प्रभाव ] कबीर और जायसी - कबीर और जायसी का रहस्यवाद [ व्याख्या. प्रेम परक रह व्यवाद, प्रकृति परक, योग परकपरक ] जायसी - जायसी का विरह वर्गात [ ऊहात्मक, सम्वेदनात्मक, दश दशाएँ ] चार. सूर - सूर की सरसता [ बाह्य सरसता, प्रांतरिक सरसता ] पाँच. सूर-सूर का बाल चित्रण [ वाल प्रकृति, मनोविज्ञान ] छः. तुलसी- तुलसी का जीव विज्ञान [ पक्षी जगत, पशु जगत, लघुकीट ] तुलसी- तुलसीदास की मौलिकता पाँच. तुलसी- तुलसी की कला या कविता लसी पा तुलसी की कला [ शब्द योजना, शब्द चित्र, शब्द शृङ्गार, अर्थध्वनन, शब्द शक्ति ] छः. केशव - केशवदास की रामचन्द्रिका [ संवाद, वर्णन, अलंकार, व्यंजना ] दस. बिहारी - सतसईकार बिहारी और मतिराम [ विषय, भाव, क्षेत्र, शृङ्गार क्षेत्र, उपमान ] बिहारी-बिहारी की विरहिनी बारह. सेनापति - सेनापति का प्रकृति चित्रण [ उद्दीपन रूप, आलम्बन रूप, अलंकार रूप, दृष्टिकोण, सम्मतियाँ ] तेरह. भूबा - राष्ट्रीय महाकवि भूषण[राष्ट्रीयता युग प्रधान- चापलूसहिन्दी राष्ट्रीयता, वीर रस ] घनानन्दघनानन्द और रीति कालीन प्रवृत्तियाँ [ शृङ्गार प्रवृत्ति, कला प्रवृत्ति ]
एलोवेरा का जूस सभी बिमारियों का रामबाण इलाज होता है, क्योंकि इसे एक रुप से औषधि के रुप में जाना जाता है। गुणों से भरपूर एलोवेरा ना केवल सेवन करने से फायदा देता है बल्कि स्किन पर लगाने से और शरीर में मौजूद दागों पर लगाने से भी फायदा होता है। ये सेहत और सुंदरता दोनों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। यदि बात करें Aloe Vera For Hair की तो, बालों को टूटने से बचाता है। आयुर्वेद में Food को बहुत अधिक महत्व दिया गया है। जितना पौष्टिक आहार उतना पौष्टिक संसार माना जाता है। एलोवेरा को संजीवनी बूटी भी कहा जाता है। इस Aloe Vera Juice Benefits को स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी माना जाता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और कई अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इसके सेवन से आप कई रोगों से बच सकते हैं। यह स्वास्थ्य के साथ स्किन और बालों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। तो चलिए जानते हैं, एलोवेरा जूस के क्या फायदे हैं। अब Benefits Of Aloe Vera Juice की बात हो रही है, तो इसके काफी प्रोडक्ट भी अलग-अलग आपको मार्केट में मिलते है। ऐसे में हम आपके लिए 5 अलग-अलग क्वालिटी के साथ क्वांटिटी भी Juice Price में लेकर आएं है, जो आपके लिए और स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगी। एलोवेरा जूस में लैक्सेटिव पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। यह Glowing Skin के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। कब्ज, एसिडिटी आदि की समस्या से राहत दिलाने में कारगार होता है। अगर आपको पाचन से जुड़ी समस्या हो, तो Aloe Vera Juice का सेवन मददगार साबित हो सकता है। यह बढ़िया ब्रांड का जूस आपके लिए उत्तम है। त्वचा के लिए एलोवेरा जूस काफी फायदेमंद होता है। यह हमारे शरीर में शुद्ध रुप से Skin Care करने में मदद करता है। एलोवेरा जूस के रोजाना सेवन से त्वचा पर रंगत आती है। यह त्वचा को एक प्राकृतिक और स्वस्थ चमक प्रदान करने में मदद करता है और त्वचा की एलर्जी को नियंत्रित रखता है। आप भी Aloe Vera Juice Price के बारे में ज्यादा जानना चाहते हैं, तो आर्टिक्ल के अंत तक बने रहे, क्योंकि इनकी कीमत प्रोडक्ट के अनुसार बदलती रहती है। एलोवेरा शरीर में जमे हुए फैट को तेजी से बर्न करता है। अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो एलोवेरा जूस का सेवन कर सकते हैं। यह Patanjali Aloe Vera Juice एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है, जो वजन कम करने में मददगार हैं। यह Aloe vera juice Price आप कम कीमत पर खरीद सकते हैं, साथ ही एलोवेरा में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। यह फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में कारगर है। यह Health Juice आपके बालों और त्वचा दोनों के लिए उत्तम है, क्योंकि यह आवंला और एलोवेरा दोनों का कोम्बो मिल रहा है। अपने स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए आप Benefits Of Aloe Vera Juice का सेवन हर दिन कर सकते हैं। जीवा Aloe Vera For Hair के लिए एक उपयुक्त जूस है। साथ ही स्वस्थ त्वचा प्रदान करने में मदद करता है क्योंकि यह विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है और पाचन में भी मदद करता है, जिससे त्वचा का स्वास्थ्य बेहतर होता है।
एलोवेरा का जूस सभी बिमारियों का रामबाण इलाज होता है, क्योंकि इसे एक रुप से औषधि के रुप में जाना जाता है। गुणों से भरपूर एलोवेरा ना केवल सेवन करने से फायदा देता है बल्कि स्किन पर लगाने से और शरीर में मौजूद दागों पर लगाने से भी फायदा होता है। ये सेहत और सुंदरता दोनों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। यदि बात करें Aloe Vera For Hair की तो, बालों को टूटने से बचाता है। आयुर्वेद में Food को बहुत अधिक महत्व दिया गया है। जितना पौष्टिक आहार उतना पौष्टिक संसार माना जाता है। एलोवेरा को संजीवनी बूटी भी कहा जाता है। इस Aloe Vera Juice Benefits को स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी माना जाता है। इसमें आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और कई अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं। इसके सेवन से आप कई रोगों से बच सकते हैं। यह स्वास्थ्य के साथ स्किन और बालों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है। तो चलिए जानते हैं, एलोवेरा जूस के क्या फायदे हैं। अब Benefits Of Aloe Vera Juice की बात हो रही है, तो इसके काफी प्रोडक्ट भी अलग-अलग आपको मार्केट में मिलते है। ऐसे में हम आपके लिए पाँच अलग-अलग क्वालिटी के साथ क्वांटिटी भी Juice Price में लेकर आएं है, जो आपके लिए और स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगी। एलोवेरा जूस में लैक्सेटिव पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। यह Glowing Skin के लिए भी काफी फायदेमंद होता है। कब्ज, एसिडिटी आदि की समस्या से राहत दिलाने में कारगार होता है। अगर आपको पाचन से जुड़ी समस्या हो, तो Aloe Vera Juice का सेवन मददगार साबित हो सकता है। यह बढ़िया ब्रांड का जूस आपके लिए उत्तम है। त्वचा के लिए एलोवेरा जूस काफी फायदेमंद होता है। यह हमारे शरीर में शुद्ध रुप से Skin Care करने में मदद करता है। एलोवेरा जूस के रोजाना सेवन से त्वचा पर रंगत आती है। यह त्वचा को एक प्राकृतिक और स्वस्थ चमक प्रदान करने में मदद करता है और त्वचा की एलर्जी को नियंत्रित रखता है। आप भी Aloe Vera Juice Price के बारे में ज्यादा जानना चाहते हैं, तो आर्टिक्ल के अंत तक बने रहे, क्योंकि इनकी कीमत प्रोडक्ट के अनुसार बदलती रहती है। एलोवेरा शरीर में जमे हुए फैट को तेजी से बर्न करता है। अगर आप वजन कम करना चाहते हैं, तो एलोवेरा जूस का सेवन कर सकते हैं। यह Patanjali Aloe Vera Juice एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों से भरपूर होता है, जो वजन कम करने में मददगार हैं। यह Aloe vera juice Price आप कम कीमत पर खरीद सकते हैं, साथ ही एलोवेरा में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। यह फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में कारगर है। यह Health Juice आपके बालों और त्वचा दोनों के लिए उत्तम है, क्योंकि यह आवंला और एलोवेरा दोनों का कोम्बो मिल रहा है। अपने स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए आप Benefits Of Aloe Vera Juice का सेवन हर दिन कर सकते हैं। जीवा Aloe Vera For Hair के लिए एक उपयुक्त जूस है। साथ ही स्वस्थ त्वचा प्रदान करने में मदद करता है क्योंकि यह विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है और पाचन में भी मदद करता है, जिससे त्वचा का स्वास्थ्य बेहतर होता है।
मुंबई : बॉलीवुड (Bollywood) एक्ट्रेस (Actress) रानी मुखर्जी (Rani Mukerji) अपनी अपकमिंग फिल्म 'मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे' (Mrs. Chatterjee Vs Norway) से स्क्रीन पर कमबैक करने जा रही हैं। जिसका ट्रेलर भी रिलीज हो चुका हैं। इस फिल्म में एक्ट्रेस मां की भूमिका में नजर आएंगी। जो नॉर्वे में रहने वाली एक बंगाली महिला हैं। वो नॉर्वे में अपने पति और दो बच्चों के साथ रहती है। जिसका झलक फिल्म के ट्रेलर में देखने को मिल रहा है। एक्ट्रेस अपने बच्चों शुभ और शुचि से बहुत प्यार करती हैं। ट्रेलर में एक्ट्रेस अपने बच्चों की कस्टडी के लिए स्ट्रगल करती नजर आ रही हैं। जो बाल सुरक्षा सेवा के अनुसार उनसे उनके बच्चों को ले लिया गया है। रानी मुखर्जी अपने बच्चों के लिए कोर्ट के चक्कर काटती दिखाई दे रही हैं। फिल्म का ट्रेलर जी स्टूडियोज के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है। 2 मिनट 47 सेकंड का ये ट्रेलर काफी इंट्रेस्टिंग है। आशिमा छिब्बर द्वारा निर्देशित फिल्म 'मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे' एक सच्ची घटना पर आधारित है। जिसमें रानी मुखर्जी के आलवा अनिर्बान भट्टाचार्य, जिम सर्भ और नीना गुप्ता भी अहम भूमिका में नजर आएंगी। ये फिल्म पहले 3 मार्च, 2023 को रिलीज होने वाली थी, लेकिन बाद में फिल्म के रिलीज डेट में बदलाव करते हुए इसे 21 मार्च, 2023 कर दिया गया। अब ये फिल्म रानी मुखर्जी के जन्मदिन के मौके पर 21 मार्च, 2023 को रिलीज होगी।
मुंबई : बॉलीवुड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी अपनी अपकमिंग फिल्म 'मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे' से स्क्रीन पर कमबैक करने जा रही हैं। जिसका ट्रेलर भी रिलीज हो चुका हैं। इस फिल्म में एक्ट्रेस मां की भूमिका में नजर आएंगी। जो नॉर्वे में रहने वाली एक बंगाली महिला हैं। वो नॉर्वे में अपने पति और दो बच्चों के साथ रहती है। जिसका झलक फिल्म के ट्रेलर में देखने को मिल रहा है। एक्ट्रेस अपने बच्चों शुभ और शुचि से बहुत प्यार करती हैं। ट्रेलर में एक्ट्रेस अपने बच्चों की कस्टडी के लिए स्ट्रगल करती नजर आ रही हैं। जो बाल सुरक्षा सेवा के अनुसार उनसे उनके बच्चों को ले लिया गया है। रानी मुखर्जी अपने बच्चों के लिए कोर्ट के चक्कर काटती दिखाई दे रही हैं। फिल्म का ट्रेलर जी स्टूडियोज के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है। दो मिनट सैंतालीस सेकंड का ये ट्रेलर काफी इंट्रेस्टिंग है। आशिमा छिब्बर द्वारा निर्देशित फिल्म 'मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे' एक सच्ची घटना पर आधारित है। जिसमें रानी मुखर्जी के आलवा अनिर्बान भट्टाचार्य, जिम सर्भ और नीना गुप्ता भी अहम भूमिका में नजर आएंगी। ये फिल्म पहले तीन मार्च, दो हज़ार तेईस को रिलीज होने वाली थी, लेकिन बाद में फिल्म के रिलीज डेट में बदलाव करते हुए इसे इक्कीस मार्च, दो हज़ार तेईस कर दिया गया। अब ये फिल्म रानी मुखर्जी के जन्मदिन के मौके पर इक्कीस मार्च, दो हज़ार तेईस को रिलीज होगी।
Posted On: केन्द्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री परशोत्तम रूपाला की अध्यक्षता में आज वर्चुअल मोड के माध्यम से सभी राज्यों के पशुपालन/पशु चिकित्सा मंत्रियों के साथ राष्ट्रीय स्तर की एक बैठक आयोजित की गई। सभी राज्यों के पशुपालन/पशु चिकित्सा मंत्रियों के साथ राष्ट्रीय स्तर की यह बैठक पांच साल से अधिक के अंतराल के बाद बुलाई गई थी। केन्द्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ने सभी राज्यों के पशुपालन/पशु चिकित्सा मंत्रियों को विशेष पशुधन क्षेत्र पैकेज, जिसे हाल ही में भारत सरकार द्वारा अगले पांच वर्षों के लिए 9800 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ कुल 54,618 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने के उद्देश से घोषित किया गया है,के बारे में बताया। इस बैठक में मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्यमंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान तथा मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। केन्द्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री परशोत्तम रूपाला ने सभी राज्यों के पशुपालन/पशु चिकित्सा मंत्रियों को मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी के संबंध में भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत लाए गए विभिन्न बदलावों, उनके निहितार्थों और विभाग की संशोधित एवं पुनर्गठित योजनाओं के कार्यान्वयन में राज्यों की भूमिका के बारे में अवगत कराया। उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन में सभी राज्य/ केन्द्र-शासित प्रदेश प्रमुख हितधारक हैं। केन्द्र और विभिन्न राज्यों के बीच एक स्वस्थ संवाद से सहयोग बढ़ेगा और योजना के लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से सहकारी संघवाद को मजबूती मिलेगी। केन्द्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल के हाल के फैसले के अनुसार, राष्ट्रीय पशुधन मिशन और राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) नाम की योजनाओं में अब ब्रीडर फार्म उद्यमियों और चारा उद्यमियों से संबंधित एक घटक है। आरजीएम के तहत उच्च आनुवांशिक योग्यता वाली बछिया के उत्पादन और आपूर्ति के लिए नस्ल गुणन फार्मों के लिए उद्यमियों को सीधे 50 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी। राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) ग्रामीण उद्यमिता के निर्माण में मदद करेगा और साथ हीहब स्पोक मॉडल के माध्यम से 50 प्रतिशत सब्सिडी देकर बेरोजगार आत्मनिर्भर भारत का मार्ग प्रशस्त करते हुए युवाओं और पशुपालकों के लिए मवेशी, डेयरी, मुर्गी पालन, भेड़ पालन, बकरी पालन, सुअर पालन, पशुओं के भोजन और चारा के क्षेत्र में आजीविका के बेहतर अवसर पैदा करने में मदद करेगा। मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्यमंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियानने पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण पर जोर दिया। उन्होंने पशु चिकित्सा से संबंधित ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर देने की बात की। इस बैठक में दोबारा से संगठित किए गए राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) से जुड़ी प्रस्तुतियां भी दी गईं। इन प्रस्तुतियों में पशुधन और मुर्गी पालन से जुड़े रोगों के खिलाफ रोगनिरोधी टीकाकरण के जरिए पशुओं के स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को कम करने,पशु चिकित्सा सेवाओं की क्षमता का निर्माण करने, रोगों की निगरानी करने और पशु चिकित्सा से संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य सेदूध की खरीद और दूध एवं दूध से बने उत्पादों के प्रसंस्करण, विपणन और उनकी गुणवत्ता के साथ-साथ पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण पर जोर दिया गया। सभी राज्यों के पशुपालन/पशु चिकित्सा मंत्रियों को पशुपालन में संलग्न 10 करोड़ किसानों के घर तक पशु स्वास्थ्य सेवाएं देने के उद्देश्य से देशभर में स्थापित किए गए चलंत पशु चिकित्सालयों की सेवाओं का लाभ उठाने की भी सलाह दी गई। इस बैठक के दौरान, केन्द्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) से संबद्ध एक पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इस पोर्टल को भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सीडबी) द्वारा पशुपालन और डेयरी विभाग के सहयोग से इस योजना के कार्यान्वयन के क्रम में इसके प्रभाव और इसकी पारदर्शिता को बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह ऑनलाइन पोर्टल इस योजना के तहत जरूरतों के अनुरूप राज्य कार्यान्वयन एजेंसी (एसआईए), ऋणदाताओं और मंत्रालय के बीच एक अनुकूलित कार्यप्रवाह को संभव बनाएगा। केन्द्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ने "बुनियादी पशुपालन सांख्यिकी- 2020" रिपोर्ट भी जारी की। इस रिपोर्ट में दूध, अंडे, मांस और ऊन जैसे पशुधन से जुड़े प्रमुख उत्पादों के उत्पादन का अनुमान देने वाले सारणीबद्ध आंकड़े शामिल हैं। इस बैठक के दौरान सभी राज्यों के पशुपालन/पशु चिकित्सा मंत्रियों को पशुधन से जुड़े किसानों की सफलता की कहानियां भी दिखाई गईं।
Posted On: केन्द्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री परशोत्तम रूपाला की अध्यक्षता में आज वर्चुअल मोड के माध्यम से सभी राज्यों के पशुपालन/पशु चिकित्सा मंत्रियों के साथ राष्ट्रीय स्तर की एक बैठक आयोजित की गई। सभी राज्यों के पशुपालन/पशु चिकित्सा मंत्रियों के साथ राष्ट्रीय स्तर की यह बैठक पांच साल से अधिक के अंतराल के बाद बुलाई गई थी। केन्द्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ने सभी राज्यों के पशुपालन/पशु चिकित्सा मंत्रियों को विशेष पशुधन क्षेत्र पैकेज, जिसे हाल ही में भारत सरकार द्वारा अगले पांच वर्षों के लिए नौ हज़ार आठ सौ करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ कुल चौवन,छः सौ अट्ठारह करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने के उद्देश से घोषित किया गया है,के बारे में बताया। इस बैठक में मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्यमंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियान तथा मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। केन्द्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री परशोत्तम रूपाला ने सभी राज्यों के पशुपालन/पशु चिकित्सा मंत्रियों को मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी के संबंध में भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत लाए गए विभिन्न बदलावों, उनके निहितार्थों और विभाग की संशोधित एवं पुनर्गठित योजनाओं के कार्यान्वयन में राज्यों की भूमिका के बारे में अवगत कराया। उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि विभिन्न योजनाओं के कार्यान्वयन में सभी राज्य/ केन्द्र-शासित प्रदेश प्रमुख हितधारक हैं। केन्द्र और विभिन्न राज्यों के बीच एक स्वस्थ संवाद से सहयोग बढ़ेगा और योजना के लक्ष्यों को प्राप्त करने के उद्देश्य से सहकारी संघवाद को मजबूती मिलेगी। केन्द्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल के हाल के फैसले के अनुसार, राष्ट्रीय पशुधन मिशन और राष्ट्रीय गोकुल मिशन नाम की योजनाओं में अब ब्रीडर फार्म उद्यमियों और चारा उद्यमियों से संबंधित एक घटक है। आरजीएम के तहत उच्च आनुवांशिक योग्यता वाली बछिया के उत्पादन और आपूर्ति के लिए नस्ल गुणन फार्मों के लिए उद्यमियों को सीधे पचास प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी। राष्ट्रीय पशुधन मिशन ग्रामीण उद्यमिता के निर्माण में मदद करेगा और साथ हीहब स्पोक मॉडल के माध्यम से पचास प्रतिशत सब्सिडी देकर बेरोजगार आत्मनिर्भर भारत का मार्ग प्रशस्त करते हुए युवाओं और पशुपालकों के लिए मवेशी, डेयरी, मुर्गी पालन, भेड़ पालन, बकरी पालन, सुअर पालन, पशुओं के भोजन और चारा के क्षेत्र में आजीविका के बेहतर अवसर पैदा करने में मदद करेगा। मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्यमंत्री डॉ. संजीव कुमार बालियानने पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण पर जोर दिया। उन्होंने पशु चिकित्सा से संबंधित ढांचे को मजबूत करने पर भी जोर देने की बात की। इस बैठक में दोबारा से संगठित किए गए राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम से जुड़ी प्रस्तुतियां भी दी गईं। इन प्रस्तुतियों में पशुधन और मुर्गी पालन से जुड़े रोगों के खिलाफ रोगनिरोधी टीकाकरण के जरिए पशुओं के स्वास्थ्य संबंधी जोखिम को कम करने,पशु चिकित्सा सेवाओं की क्षमता का निर्माण करने, रोगों की निगरानी करने और पशु चिकित्सा से संबंधित बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य सेदूध की खरीद और दूध एवं दूध से बने उत्पादों के प्रसंस्करण, विपणन और उनकी गुणवत्ता के साथ-साथ पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण पर जोर दिया गया। सभी राज्यों के पशुपालन/पशु चिकित्सा मंत्रियों को पशुपालन में संलग्न दस करोड़ किसानों के घर तक पशु स्वास्थ्य सेवाएं देने के उद्देश्य से देशभर में स्थापित किए गए चलंत पशु चिकित्सालयों की सेवाओं का लाभ उठाने की भी सलाह दी गई। इस बैठक के दौरान, केन्द्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन से संबद्ध एक पोर्टल का भी शुभारंभ किया। इस पोर्टल को भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक द्वारा पशुपालन और डेयरी विभाग के सहयोग से इस योजना के कार्यान्वयन के क्रम में इसके प्रभाव और इसकी पारदर्शिता को बढ़ाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह ऑनलाइन पोर्टल इस योजना के तहत जरूरतों के अनुरूप राज्य कार्यान्वयन एजेंसी , ऋणदाताओं और मंत्रालय के बीच एक अनुकूलित कार्यप्रवाह को संभव बनाएगा। केन्द्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री ने "बुनियादी पशुपालन सांख्यिकी- दो हज़ार बीस" रिपोर्ट भी जारी की। इस रिपोर्ट में दूध, अंडे, मांस और ऊन जैसे पशुधन से जुड़े प्रमुख उत्पादों के उत्पादन का अनुमान देने वाले सारणीबद्ध आंकड़े शामिल हैं। इस बैठक के दौरान सभी राज्यों के पशुपालन/पशु चिकित्सा मंत्रियों को पशुधन से जुड़े किसानों की सफलता की कहानियां भी दिखाई गईं।
स्थान पर सब से अधिक घमासान हो रहा होता था वहीं पिल पड़ते थे, और उधर कुवर साहिब और अमलोपागस के फरसे मशीन की तरह लगातार उठ और गिर रहे थे और प्रत्येक वार पर कोई न कोई मसाई मर कर या सख्त जख्मी हो कर गिर पड़ता था । मगर मैं ने देखा कि कड़े परिश्रम के कारण कुंवर साहिब की ताकृत जवाब देती जा रहीं थी । उनको कई जख्म भी लग चुके थे और उन से खून बह रहा था । उनका दम फूल गया था और सांस तक रुक रुक कर आ रही थीं। उनकी कनपटी और माथे को नसें नीली नीली डोरियों की तरह उभर आई थीं। फ़ौलाद जैसा अमलोपागस भी सुस्त होता जा रहा था । मैने देखा कि वह अपने 'कठफोड़वा' ढंग को छोड़ कर इन्कूसीकास के चौड़े धारदार फल को काम में लाने लग गया था और वैज्ञानिक रीति से शिर या माथे पर गोल गोल छेद बनाने के बजाय अवसर मिलते हीं शत्रुओं को काट काट कर फेक रहा था । मै स्वयं भीड़ भड़क्के में नहीं घुसा था, लेकिन जिस प्रकार फुटबाल के खेल में फुल बैक खेलने वाला खिलाड़ीं भीड़ में न घुस कर भी अपने साथियों को मदद पहुचाता और विपक्षियों को रोकता रहता है उसी प्रकार मैं भी भीड़ से बाहर मंडला रहा था और मौका मिलते ही किसी न किसी मसाई को अपनी गोली का निशाना बना देता था । भीड़ में घुस कर लड़ने के स्थान पर मेरा इस तरह मार धाड़ करना अधिक लाभदायक सिद्ध हो रहा था । उस दिन मै ने ६० कारतूस छोड़े थे और जहाँ तक मुझे याद है कि मेरी कोई भी गोली खुता नहीं हुई। परन्तु हमारे भरसक प्रयत्न करने पर भी धीरे धीरे हमारा पल्ला फिर हल्का पड़ने लगा । अब हम कोई १५-१६ आदमी ठीक बचे हुए थे और मसाई कोई ५० से अधिक ही थे । यदि उन के होश हवास ठीक, होते और वह सब मिल कर एक साथ हम पर हल्ला बोल देते तो कुछ ही क्षणों में हमारा सफाया कर सकते थे। लेकिन बस यही तो उन्होंने किया नहीं । वह अभी तक पूरे तौर से अपने होश हवास में नहीं आये थे और बहुत से तो सोते से एकाएकी उठ कर बिना हथियार लिये ही भाग छूटे थे । लेकिन इतनी दिक्कतें होने पर भी कुछ मसाई बड़ी हिम्मत बहादुरी और जी दारी से जीवन का मोह छोड़ कर लड़ रहे थे और उन की यह जी दारों ही हमारा टाट उलट देने के लिए काफी थी । कोढ़ खाज, उसी समय फ़ादर की रायफिल भी खाली हो गई और एक हृष्ट पुष्ट बड़े डील डौल के मसाई ने अपनी चौड़ी तलवार ले कर उन पर आक्रमण कर दिया । फ़ादर ने अपनी रायफिल एक ओर फेक दी और अपनी कमर पेटी से लटके बड़े शिकारी चाकू को खोल कर हाथ में ले लिया ( उनका रिवाल्वर मार काट में कहीं गिर पड़ा था) और वह दोनों जीवन की आस छोड़ कर एक दूसरे से लिपट गये । पलक झपकते ही वह एक दूसरे से भिड़ गये और एक दूसरे की बाहों में जकड़े फ़ादर और वह मसाई दूर तक लुढ़कते चले गए। इस के बाद ही कुछ देर तक मै भी अपनी जान बचाने के चक्कर में ऐसा फंसा रहा कि उनकी ओर ध्यान न दे सका और इस कारण कुछ देर तक मुझे यह भी मालूम न हो सका कि फादर पर कैसी बीती और उन के द्वंद युद्ध का क्या परिणाम हुआ । लड़ाई की स्थिति अब भी डांवाडोल थी और जिस प्रकार भंवर में फंसा मनुष्य उस के बाहर नहीं निकल सकता उसी तरह हमारे आदमी भी मसाइयों के बवण्डर में फंस कर गाजर मूली की तरह काटे जा रहे थे और हमारा पल्ला तेजी से हल्का पड़ता जा रहा था। उसी समय सौभाग्य से एक आश्चर्यजनक घटना हुई। अकस्मात ही या जान बूझ कर भीड़ को चीर कर बाहर निकल आया और कुछ दूर लोपागस हट कर एक अकेले इल्मोरन से जूझ गया । वह उस इल्मोरन से लड़ ही रहा था कि एक दूसरे मसाई ने दौड़ कर उस की पीठ पर पूरी ताक़त से अपने वर से वार किया। कड़ी फ़ौलाद की फिल्लम पर लगने के कारण बरछा उस के शरीर में न घुस सका और टकरा कर दूर जा के गिरा । क्षण भर तो बरछा मारने वाला हक्का बक्का भौंचक्का सा मुंह वाये ताकता रहा, लोहे के मिल्लम जैसी वस्तुओं को इस जाति के मनुष्यों ने कभी नहीं देखा था। इस कारण वह उस को जानते भी नहीं थे, और तब वह अपनी पूरी ताकत से चिल्ला उठा, "भूत", "प्रेत", "जादूगर", "जादूगर" । भूत प्रेत का ख्याल आते ही उस की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई और डर के मारे अपनी ढाल को जमीन पर फेक कर वह तो सिर पर पांव रख कर भाग निकला। एक गोली से मैं ने उस की जीवन लीला समाप्त कर दी । इधर अमलोपागस ने अपने इन्क्रूसीकास से उस मसाई का भंडारा खोल दिया था, और तव अन्य मसाइयों में भय तथा आतंक फैल गया । "जादूगर", "जादूगर" कह कर सभी चिल्लाने लगे और भेड़ बकरियों की तरह सिर पर पांव रख कर अन्धाधुध इधर से उधर भागने लगे । वह पूरी तौर से मतिभृष्ट हो गये थे और उन का साहस जवाब दे चुका था । उन में से बहुत से तो अपनी ढाले बरछे तक फेक कर भाग खड़े हुए । इस भयानक ड्रामे का अन्तिम दृश्य और हुआ । इस नर-संहार में जी खोल कर खून बहाया गया था, ऐसा घमासान हुआ था कि लाशों के ढेर चुन गए थे, महा नरमेध यज्ञ हुआ था जिस में हम ने न कोई दया दिखाई थी और न शत्रुओं से किसी प्रकार की आशा ही रखी थी । इस नरमेध यज्ञ की पूर्णहुति भी वड़े विचित्र ढंग से हुई । मैं यह आशा कर ही रहा था कि मसाइयों के भाग जाने से अब युद्ध समाप्त हो गया था कि एकाएकी मुरदों के ढेर में छुपा एक स्वस्थ इल्मोरन झपट कर निकला और मृतक तथा घायलों को कुचलता रौंदता तीर की तरह सीधा मेरी तरफ लपका। मगर मैं ने देखा कि वह अकेला नहीं था क्योंकि उसे देखते ही अमलोपागस अपने बाजुओं को चिड़ियों के डैनों की तरह फैलाये उसके पीछे दौड़ा ज़रा पास आने पर मै ने उस मसाई को पहिचान लिया, यह वहीं रात वाला हरकारा था । यह देख कर कि उस का पीछा करने वाला उस के पास आता जा रहा था और करीब था कि उसे पकड़ ले वह रुका और बर को संभाल कर उल्टा अमलोपागस पर टूट पड़ा। अमलोपागस भी पैंतरा बदल कर कन्नी काट गया । "आहा तू है," उस ने इल्मोरन को चिढ़ाते हुए कहा, "तुझ ही से तो मैं ने रात को बातें कीं थीं। लिगोनानी, हरकारा, छोकरियों को चुराने वाला चोर, छोटी छोकरियों को मार कर बहादुरी की डींग मारने वाला डींगिया, तूने ही तो कहा था कि तू आमने सामने की लड़ाई में अमस्लोपागस से लड़ेगा, अमलोपागस से जिस का गोत्र मैक्यूलिसिनी है, जो अमाजूलू क़ौम से है । देख तेरी प्रार्थना मान ली गई है । तुझे याद है कि मैं ने तेरी बोटी बोटी काट कर फेंक देने की कसम खाई थीं, याद है तुझे गुस्ताख़ कुत्ते । देख मैं तेरी बोटी बोटी फेंकता हूँ।" अपने होठ चबा डाले लम्बर को उठा कर जूलू पर हमला कर दिया । पास पर अमलोपागस पैंतरा काट कर एक तरफ हो गया और अपने दोनों हाथों से इन्कूसीकास को सिर से ऊपर उठा कर उस के धार वाले फल से मसाई के कन्धे पर पीछे की तरफ़ से इतना ज़बरदस्त चार किया कि फरसे ने गरदन की हड्डी और पसलियों को काटते हुए उसे कमर तक चीर दिया और वह दो टुकड़े हो कर धूल में लोटने लगा । "हूँ, " अपने शत्र के शव को ध्यान से देखते हुए अमस्लोपागस ने कहा, "वायदा पूरा कर दिया है मै ने अपना । कैसा सच्च वार था।"
स्थान पर सब से अधिक घमासान हो रहा होता था वहीं पिल पड़ते थे, और उधर कुवर साहिब और अमलोपागस के फरसे मशीन की तरह लगातार उठ और गिर रहे थे और प्रत्येक वार पर कोई न कोई मसाई मर कर या सख्त जख्मी हो कर गिर पड़ता था । मगर मैं ने देखा कि कड़े परिश्रम के कारण कुंवर साहिब की ताकृत जवाब देती जा रहीं थी । उनको कई जख्म भी लग चुके थे और उन से खून बह रहा था । उनका दम फूल गया था और सांस तक रुक रुक कर आ रही थीं। उनकी कनपटी और माथे को नसें नीली नीली डोरियों की तरह उभर आई थीं। फ़ौलाद जैसा अमलोपागस भी सुस्त होता जा रहा था । मैने देखा कि वह अपने 'कठफोड़वा' ढंग को छोड़ कर इन्कूसीकास के चौड़े धारदार फल को काम में लाने लग गया था और वैज्ञानिक रीति से शिर या माथे पर गोल गोल छेद बनाने के बजाय अवसर मिलते हीं शत्रुओं को काट काट कर फेक रहा था । मै स्वयं भीड़ भड़क्के में नहीं घुसा था, लेकिन जिस प्रकार फुटबाल के खेल में फुल बैक खेलने वाला खिलाड़ीं भीड़ में न घुस कर भी अपने साथियों को मदद पहुचाता और विपक्षियों को रोकता रहता है उसी प्रकार मैं भी भीड़ से बाहर मंडला रहा था और मौका मिलते ही किसी न किसी मसाई को अपनी गोली का निशाना बना देता था । भीड़ में घुस कर लड़ने के स्थान पर मेरा इस तरह मार धाड़ करना अधिक लाभदायक सिद्ध हो रहा था । उस दिन मै ने साठ कारतूस छोड़े थे और जहाँ तक मुझे याद है कि मेरी कोई भी गोली खुता नहीं हुई। परन्तु हमारे भरसक प्रयत्न करने पर भी धीरे धीरे हमारा पल्ला फिर हल्का पड़ने लगा । अब हम कोई पंद्रह-सोलह आदमी ठीक बचे हुए थे और मसाई कोई पचास से अधिक ही थे । यदि उन के होश हवास ठीक, होते और वह सब मिल कर एक साथ हम पर हल्ला बोल देते तो कुछ ही क्षणों में हमारा सफाया कर सकते थे। लेकिन बस यही तो उन्होंने किया नहीं । वह अभी तक पूरे तौर से अपने होश हवास में नहीं आये थे और बहुत से तो सोते से एकाएकी उठ कर बिना हथियार लिये ही भाग छूटे थे । लेकिन इतनी दिक्कतें होने पर भी कुछ मसाई बड़ी हिम्मत बहादुरी और जी दारी से जीवन का मोह छोड़ कर लड़ रहे थे और उन की यह जी दारों ही हमारा टाट उलट देने के लिए काफी थी । कोढ़ खाज, उसी समय फ़ादर की रायफिल भी खाली हो गई और एक हृष्ट पुष्ट बड़े डील डौल के मसाई ने अपनी चौड़ी तलवार ले कर उन पर आक्रमण कर दिया । फ़ादर ने अपनी रायफिल एक ओर फेक दी और अपनी कमर पेटी से लटके बड़े शिकारी चाकू को खोल कर हाथ में ले लिया और वह दोनों जीवन की आस छोड़ कर एक दूसरे से लिपट गये । पलक झपकते ही वह एक दूसरे से भिड़ गये और एक दूसरे की बाहों में जकड़े फ़ादर और वह मसाई दूर तक लुढ़कते चले गए। इस के बाद ही कुछ देर तक मै भी अपनी जान बचाने के चक्कर में ऐसा फंसा रहा कि उनकी ओर ध्यान न दे सका और इस कारण कुछ देर तक मुझे यह भी मालूम न हो सका कि फादर पर कैसी बीती और उन के द्वंद युद्ध का क्या परिणाम हुआ । लड़ाई की स्थिति अब भी डांवाडोल थी और जिस प्रकार भंवर में फंसा मनुष्य उस के बाहर नहीं निकल सकता उसी तरह हमारे आदमी भी मसाइयों के बवण्डर में फंस कर गाजर मूली की तरह काटे जा रहे थे और हमारा पल्ला तेजी से हल्का पड़ता जा रहा था। उसी समय सौभाग्य से एक आश्चर्यजनक घटना हुई। अकस्मात ही या जान बूझ कर भीड़ को चीर कर बाहर निकल आया और कुछ दूर लोपागस हट कर एक अकेले इल्मोरन से जूझ गया । वह उस इल्मोरन से लड़ ही रहा था कि एक दूसरे मसाई ने दौड़ कर उस की पीठ पर पूरी ताक़त से अपने वर से वार किया। कड़ी फ़ौलाद की फिल्लम पर लगने के कारण बरछा उस के शरीर में न घुस सका और टकरा कर दूर जा के गिरा । क्षण भर तो बरछा मारने वाला हक्का बक्का भौंचक्का सा मुंह वाये ताकता रहा, लोहे के मिल्लम जैसी वस्तुओं को इस जाति के मनुष्यों ने कभी नहीं देखा था। इस कारण वह उस को जानते भी नहीं थे, और तब वह अपनी पूरी ताकत से चिल्ला उठा, "भूत", "प्रेत", "जादूगर", "जादूगर" । भूत प्रेत का ख्याल आते ही उस की सिट्टी पिट्टी गुम हो गई और डर के मारे अपनी ढाल को जमीन पर फेक कर वह तो सिर पर पांव रख कर भाग निकला। एक गोली से मैं ने उस की जीवन लीला समाप्त कर दी । इधर अमलोपागस ने अपने इन्क्रूसीकास से उस मसाई का भंडारा खोल दिया था, और तव अन्य मसाइयों में भय तथा आतंक फैल गया । "जादूगर", "जादूगर" कह कर सभी चिल्लाने लगे और भेड़ बकरियों की तरह सिर पर पांव रख कर अन्धाधुध इधर से उधर भागने लगे । वह पूरी तौर से मतिभृष्ट हो गये थे और उन का साहस जवाब दे चुका था । उन में से बहुत से तो अपनी ढाले बरछे तक फेक कर भाग खड़े हुए । इस भयानक ड्रामे का अन्तिम दृश्य और हुआ । इस नर-संहार में जी खोल कर खून बहाया गया था, ऐसा घमासान हुआ था कि लाशों के ढेर चुन गए थे, महा नरमेध यज्ञ हुआ था जिस में हम ने न कोई दया दिखाई थी और न शत्रुओं से किसी प्रकार की आशा ही रखी थी । इस नरमेध यज्ञ की पूर्णहुति भी वड़े विचित्र ढंग से हुई । मैं यह आशा कर ही रहा था कि मसाइयों के भाग जाने से अब युद्ध समाप्त हो गया था कि एकाएकी मुरदों के ढेर में छुपा एक स्वस्थ इल्मोरन झपट कर निकला और मृतक तथा घायलों को कुचलता रौंदता तीर की तरह सीधा मेरी तरफ लपका। मगर मैं ने देखा कि वह अकेला नहीं था क्योंकि उसे देखते ही अमलोपागस अपने बाजुओं को चिड़ियों के डैनों की तरह फैलाये उसके पीछे दौड़ा ज़रा पास आने पर मै ने उस मसाई को पहिचान लिया, यह वहीं रात वाला हरकारा था । यह देख कर कि उस का पीछा करने वाला उस के पास आता जा रहा था और करीब था कि उसे पकड़ ले वह रुका और बर को संभाल कर उल्टा अमलोपागस पर टूट पड़ा। अमलोपागस भी पैंतरा बदल कर कन्नी काट गया । "आहा तू है," उस ने इल्मोरन को चिढ़ाते हुए कहा, "तुझ ही से तो मैं ने रात को बातें कीं थीं। लिगोनानी, हरकारा, छोकरियों को चुराने वाला चोर, छोटी छोकरियों को मार कर बहादुरी की डींग मारने वाला डींगिया, तूने ही तो कहा था कि तू आमने सामने की लड़ाई में अमस्लोपागस से लड़ेगा, अमलोपागस से जिस का गोत्र मैक्यूलिसिनी है, जो अमाजूलू क़ौम से है । देख तेरी प्रार्थना मान ली गई है । तुझे याद है कि मैं ने तेरी बोटी बोटी काट कर फेंक देने की कसम खाई थीं, याद है तुझे गुस्ताख़ कुत्ते । देख मैं तेरी बोटी बोटी फेंकता हूँ।" अपने होठ चबा डाले लम्बर को उठा कर जूलू पर हमला कर दिया । पास पर अमलोपागस पैंतरा काट कर एक तरफ हो गया और अपने दोनों हाथों से इन्कूसीकास को सिर से ऊपर उठा कर उस के धार वाले फल से मसाई के कन्धे पर पीछे की तरफ़ से इतना ज़बरदस्त चार किया कि फरसे ने गरदन की हड्डी और पसलियों को काटते हुए उसे कमर तक चीर दिया और वह दो टुकड़े हो कर धूल में लोटने लगा । "हूँ, " अपने शत्र के शव को ध्यान से देखते हुए अमस्लोपागस ने कहा, "वायदा पूरा कर दिया है मै ने अपना । कैसा सच्च वार था।"