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बक्सरः- थाना क्षेत्र के मौना-राजपुर मुख्य मार्ग पर जोगिया बाबा मंदिर के समीप लावारिस हालत में पड़ी गंभीर रूप से घायल महिला को पुलिस उठाकर नगर स्थित पीएचसी ले आई। अवचेतन अवस्था में लाई गई महिला के सिर और नाक से खून बह रहा था। इलाज के क्रम में महिला को थोड़ी देर में होश आया और इसी दौरान उसने अपने गांव का नाम बसडीहां बताया। बाद में छानबीन में महिला की पहचान उक्त गांव के अवधेश यादव की पत्नी के रूप में की गयी। सूचना पाकर परिजन पीएचसी पहुंचे और सड़क दुर्घटना की शिकार उक्त महिला को चिकित्सीय सलाह पर बेहतर इलाज के लिए जमुहार स्थित नारायण मेडिकल काॅलेज एंड हास्पिटल ले गये। वहीं थानाध्यक्ष सुभाष कुमार ने शंका व्यक्त की है कि उक्त महिला किसी अज्ञात वाहन के धक्के से घायल एवं बेहोश होकर सड़क पर गिर पड़ी और राहगीरों की सूचना पाकर अवसर पर पहुंची पुलिस थाने के वाहन से ही तत्काल उसे इलाज के लिए पीएचसी ले आई। फिलहाल महिला की हालत सही बताई जा रही है।
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बक्सरः- थाना क्षेत्र के मौना-राजपुर मुख्य मार्ग पर जोगिया बाबा मंदिर के समीप लावारिस हालत में पड़ी गंभीर रूप से घायल महिला को पुलिस उठाकर नगर स्थित पीएचसी ले आई। अवचेतन अवस्था में लाई गई महिला के सिर और नाक से खून बह रहा था। इलाज के क्रम में महिला को थोड़ी देर में होश आया और इसी दौरान उसने अपने गांव का नाम बसडीहां बताया। बाद में छानबीन में महिला की पहचान उक्त गांव के अवधेश यादव की पत्नी के रूप में की गयी। सूचना पाकर परिजन पीएचसी पहुंचे और सड़क दुर्घटना की शिकार उक्त महिला को चिकित्सीय सलाह पर बेहतर इलाज के लिए जमुहार स्थित नारायण मेडिकल काॅलेज एंड हास्पिटल ले गये। वहीं थानाध्यक्ष सुभाष कुमार ने शंका व्यक्त की है कि उक्त महिला किसी अज्ञात वाहन के धक्के से घायल एवं बेहोश होकर सड़क पर गिर पड़ी और राहगीरों की सूचना पाकर अवसर पर पहुंची पुलिस थाने के वाहन से ही तत्काल उसे इलाज के लिए पीएचसी ले आई। फिलहाल महिला की हालत सही बताई जा रही है।
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Bhojpuri Bold Films: भोजपुरी सिनेमा बहुत ही तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। भोजपुरी फिल्में हो, या फिर गाने दिनों दिन इसके दर्शकों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।
Bhojpuri Bold Films: भोजपुरी सिनेमा बहुत ही तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। भोजपुरी फिल्में हो, या फिर गाने दिनों दिन इसके दर्शकों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। भोजपुरी गाने लोगों के बीच जमकर धमाल मचा रहें हैं, यहीं नहीं सोशल मीडिया पर भी भोजपुरी गाने खूब ट्रेंड करते हैं और लोग धड़ल्ले से Reels भी बनाते हैं।
वैसे एक बात तो है कि भोजपुरी फिल्में हो या गाने दोनों में ही बोल्ड सीन्स होना आम बात है। भोजपुरी सिनेमा खासतौर पर अपनी बोल्डनेस के लिए भी जाना जाता है तो ऐसे में लगभग आपको सभी फिल्मों में बोल्ड और हॉट सीन देखने को मिल जायेंगे, लेकिन क्या आपको पता है। भोजपुरी की कई ऐसी फिल्में भी हैं, जिसने बोल्डनेस की सारी हदें पार कर दी है। फिल्म में बेहद बोल्ड सीन है जो यकीनन आपका पसीना छुड़ा देगी। आइए आपको ऐसी ही कुछ फिल्मों के नाम बताते हैं, जिसे आपको अकेले में देखना चाहिए।
निरहुआ की फिल्म "सिपाही"
भोजपुरी सिनेमा की बोल्ड फिल्मों की बात की जा रही हो और निरहुआ की फिल्म "सिपाही" की चर्चा न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। फिल्म "सिपाही" साल 2014 में रिलीज हुई थी, जिसे प्रेमांशु सिंह ने डायरेक्ट किया था। निरहुआ के अलावा फिल्म में आम्रपाली दुबे और मनोज टाइगर मुख्य किरदारों में थे। इस फिल्म में बोल्ड सीन की भरमार है, आम्रपाली और निहरुआ के बीच बेहद बोल्ड सीन्स दिखाए गए हैं, जिसने दर्शकों के पसीने छुड़ा दिए थे। आम्रपाली और निरहुआ की जोड़ी ने इस फिल्म को हिट बना दिया था। फिल्म "सिपाही" को आप जी5 पर फ्री में देख सकते हैं।
शिविका दीवान की "नथुनिया पर गोली मारे 2"
"नथुनिया पर गोली मारे 2" फिल्म साल 2018 में रिलीज हुई थी। शिविका दीवान इस फिल्म में लीड रोल में नजर आईं थीं, जिन्होंने सिर्फ एक या दो नहीं बल्कि फिल्म में भर-भर कर रोमांटिक सीन दिए थे। जब यह फिल्म रिलीज हुई थी एक्ट्रेस शिविका दीवान अपने बोल्ड सीन के चलते सुर्खियों में आ गईं थीं। वहीं इस फिल्म में भोजपुरी क्वीन मोनालिसा का एक आइटम नंबर भी था। फिल्म को अजय श्रीवास्तव ने डायरेक्ट किया था, जिसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी।
यश कुमार की "कसम पैदा करने वाले की"
अभिनेता यश कुमार और एक्ट्रेस निधि झा की फिल्म "कसम पैदा करने वाले की" गिनती भी भोजपुरी के बेहद बोल्ड पिक्चरों में की जाती हैं। हम तो यही सुझाव देंगे कि इस फिल्म को आप अकेले में ही देखें, क्योंकि इस फिल्म में इतने बोल्ड सीन हैं कि आप पानी-पानी हो जायेंगे। निधि और यश कुमार के बीच बेहद हॉट सीन फिल्माए गए हैं। ये फिल्म भी 2017 में रिलीज हुई थी, जिसे दर्शकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी। पराग पाटिल ने इस फिल्म को डायरेक्ट किया था।
खेसारी लाल यादव की "दिलवाला"
भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव की फिल्म "दिलवाला" भी बोल्ड फिल्मों की लिस्ट में आती है। ये फिल्म 2017 में रिलीज हुई थी, जिसे सतीश जैन ने डायरेक्ट किया था। खेसारी लाल यादव के साथ इस फिल्म में अक्षरा सिंह की जोड़ी बनी थी, जो हिट रही। दोनों के ऊपर बेहद रोमांटिक सीन फिल्माए गए हैं, न सिर्फ फिल्म बल्कि इसके गाने भी बोल्ड सीन से भरपूर हैं।
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Bhojpuri Bold Films: भोजपुरी सिनेमा बहुत ही तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। भोजपुरी फिल्में हो, या फिर गाने दिनों दिन इसके दर्शकों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। Bhojpuri Bold Films: भोजपुरी सिनेमा बहुत ही तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। भोजपुरी फिल्में हो, या फिर गाने दिनों दिन इसके दर्शकों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। भोजपुरी गाने लोगों के बीच जमकर धमाल मचा रहें हैं, यहीं नहीं सोशल मीडिया पर भी भोजपुरी गाने खूब ट्रेंड करते हैं और लोग धड़ल्ले से Reels भी बनाते हैं। वैसे एक बात तो है कि भोजपुरी फिल्में हो या गाने दोनों में ही बोल्ड सीन्स होना आम बात है। भोजपुरी सिनेमा खासतौर पर अपनी बोल्डनेस के लिए भी जाना जाता है तो ऐसे में लगभग आपको सभी फिल्मों में बोल्ड और हॉट सीन देखने को मिल जायेंगे, लेकिन क्या आपको पता है। भोजपुरी की कई ऐसी फिल्में भी हैं, जिसने बोल्डनेस की सारी हदें पार कर दी है। फिल्म में बेहद बोल्ड सीन है जो यकीनन आपका पसीना छुड़ा देगी। आइए आपको ऐसी ही कुछ फिल्मों के नाम बताते हैं, जिसे आपको अकेले में देखना चाहिए। निरहुआ की फिल्म "सिपाही" भोजपुरी सिनेमा की बोल्ड फिल्मों की बात की जा रही हो और निरहुआ की फिल्म "सिपाही" की चर्चा न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। फिल्म "सिपाही" साल दो हज़ार चौदह में रिलीज हुई थी, जिसे प्रेमांशु सिंह ने डायरेक्ट किया था। निरहुआ के अलावा फिल्म में आम्रपाली दुबे और मनोज टाइगर मुख्य किरदारों में थे। इस फिल्म में बोल्ड सीन की भरमार है, आम्रपाली और निहरुआ के बीच बेहद बोल्ड सीन्स दिखाए गए हैं, जिसने दर्शकों के पसीने छुड़ा दिए थे। आम्रपाली और निरहुआ की जोड़ी ने इस फिल्म को हिट बना दिया था। फिल्म "सिपाही" को आप जीपाँच पर फ्री में देख सकते हैं। शिविका दीवान की "नथुनिया पर गोली मारे दो" "नथुनिया पर गोली मारे दो" फिल्म साल दो हज़ार अट्ठारह में रिलीज हुई थी। शिविका दीवान इस फिल्म में लीड रोल में नजर आईं थीं, जिन्होंने सिर्फ एक या दो नहीं बल्कि फिल्म में भर-भर कर रोमांटिक सीन दिए थे। जब यह फिल्म रिलीज हुई थी एक्ट्रेस शिविका दीवान अपने बोल्ड सीन के चलते सुर्खियों में आ गईं थीं। वहीं इस फिल्म में भोजपुरी क्वीन मोनालिसा का एक आइटम नंबर भी था। फिल्म को अजय श्रीवास्तव ने डायरेक्ट किया था, जिसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी। यश कुमार की "कसम पैदा करने वाले की" अभिनेता यश कुमार और एक्ट्रेस निधि झा की फिल्म "कसम पैदा करने वाले की" गिनती भी भोजपुरी के बेहद बोल्ड पिक्चरों में की जाती हैं। हम तो यही सुझाव देंगे कि इस फिल्म को आप अकेले में ही देखें, क्योंकि इस फिल्म में इतने बोल्ड सीन हैं कि आप पानी-पानी हो जायेंगे। निधि और यश कुमार के बीच बेहद हॉट सीन फिल्माए गए हैं। ये फिल्म भी दो हज़ार सत्रह में रिलीज हुई थी, जिसे दर्शकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली थी। पराग पाटिल ने इस फिल्म को डायरेक्ट किया था। खेसारी लाल यादव की "दिलवाला" भोजपुरी सुपरस्टार खेसारी लाल यादव की फिल्म "दिलवाला" भी बोल्ड फिल्मों की लिस्ट में आती है। ये फिल्म दो हज़ार सत्रह में रिलीज हुई थी, जिसे सतीश जैन ने डायरेक्ट किया था। खेसारी लाल यादव के साथ इस फिल्म में अक्षरा सिंह की जोड़ी बनी थी, जो हिट रही। दोनों के ऊपर बेहद रोमांटिक सीन फिल्माए गए हैं, न सिर्फ फिल्म बल्कि इसके गाने भी बोल्ड सीन से भरपूर हैं।
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यवतमाल. यवतमाल शहर सहित आर्णी में एक ही दिन में चार लोगों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना शुक्रवार की सुबह में सामने आयी. इनमें एक युवती सहित तीन लोगों का समावेश है. युवती की आत्महत्या के प्रकरण में पुलिस सहित परिजनों ने संदेह जताया है.
शहर के चापनवाडी निवासी उदय बाबुराव काकडे (50) ने शुक्रवार की सुबह निलोणा बांध में कूदकर आत्महत्या कर ली. वह परिसर में किराणा दुकान चलाकर अपने परिवार की उपजीविका निभा रहा था. मृतक के भाई संजय काकडे की शिकायत पर अवधूतवाडी पुलिस ने मामला दर्ज किया है. बताया जा रहा है कि मृतक बीते दो महिने पहले अपनी पत्नी से अलग रह रहा था. तभी से वह चिंता में डूबा रहता था. 6 जुलाई की दोपहर उदय घर में किसी को कुछ ना बताते हुए दुपहिया से निकल गया.
शाम ढलने के बाद भी वह घर नहीं लौटने पर उसको ढूंढना शुरू किया गया. तभी मंगेश डहाले को निलोणा बांध के पास उसकी दुपहिया दिखाई दी. इसके बाद शुक्रवार की सुबह उदय का शव निलोणा बांध की दीवार के पास पडा पाया गया. यवतमाल ग्रामीण पुलिस ने पंचनामा कर आक्समिक मौत का मामला दर्ज किया है.
दारव्हा मार्ग पर स्थित एक दुपहिया शोरुम में कार्यरत प्रबंधक ने किन्ही खेत परिसर में शुक्रवार की सुबह पेड पर रस्सी बांधकर फांसी लेकर आत्महत्या कर ली.
मृतक का नाम दत्तनगर निवासी सुरेश गुलाबराव गावंडे (48 ) बताया गया है. शुक्रवार की सुबह कुछ लोगों को उसका शव पेड पर लटका हुआ दिखाई दिया. पुलिस ने घटनास्थल पहुंचकर पंचनामा किया. इस समय घटनास्थल पर जहर की बोतल भी पायी गई. इसके अलावा सुरेश ने मृत्युपूर्व जहर गटकते हुए परिवार के सदस्यों को फोन पर तीनों की परेशानियों से तंग आकर आत्महत्या करने की बात बतलायी और इसके बाद फांसी लेकर आत्महत्या कर ली. मृतक के पास पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है. जिसके आधार पर पुलिस जांच कर रही है. यवतमाल ग्रामीण पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया है.
आर्णी तहसील के बोरगांव निवासी 70 वर्षीय बुजुर्ग नुरसिंह चव्हाण ने 6 जुलाई की दोपहर में जहर पीकर आत्महत्या कर ली. आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया है. पवन चव्हाण की शिकायत पर आर्णी पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया है.
शहर से सटे मादनी बोरगांव जंगल में पेड पर फांसी लगी अवस्था में युवती का शव पाया गया. यह घटना शुक्रवार की सुबह सामने आयी. परिजनों ने युवती की आत्महत्या को लेकर संदेह जताया है.
मृतक युवती अमरावती जिले के चांदूररेलवे तहसील के येरडबाजार निवासी बतायी जा रही है. युवती तलेगांव दशासर में पढाई कर रही थीं. मृतक युवती का नाम आंचल सुधीर डेहणीकर बताया जा रहा है. 3 जुलाई को घर से कॉलेज जाने की बात कहकर वह निकली थी. इसके बाद देर शाम तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसे ढूंढना शुरू किया. लेकिन उसका कहीं पर भी पता नहीं चल पाया. जिसके बाद परिजनों ने चांदूररेलवे पुलिस थाने में युवती के लापता होने की शिकायत दर्ज करायी.
इसके बाद शुक्रवार 7 जुलाई की सुबह यवतमाल शहर से सटे मदनी बोरगांव जंगल परिसर में उसका शव पेड पर फांसी लगी अवस्था में दिखाई दिया. घटना के बाद ग्रामीण पुलिस ने घटनास्थल पहुंचकर पंचनामा कर शव पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल में भेज दिया. मृतक युवती के चेहरे व पैर पर मिट्टी लगी होने से परिजनों ने संदेह जताया है. मामले में यवतमाल ग्रामीण पुलिस ने आकस्मिक मौत का अपराध दर्ज कर जांच शुरू की है.
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यवतमाल. यवतमाल शहर सहित आर्णी में एक ही दिन में चार लोगों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना शुक्रवार की सुबह में सामने आयी. इनमें एक युवती सहित तीन लोगों का समावेश है. युवती की आत्महत्या के प्रकरण में पुलिस सहित परिजनों ने संदेह जताया है. शहर के चापनवाडी निवासी उदय बाबुराव काकडे ने शुक्रवार की सुबह निलोणा बांध में कूदकर आत्महत्या कर ली. वह परिसर में किराणा दुकान चलाकर अपने परिवार की उपजीविका निभा रहा था. मृतक के भाई संजय काकडे की शिकायत पर अवधूतवाडी पुलिस ने मामला दर्ज किया है. बताया जा रहा है कि मृतक बीते दो महिने पहले अपनी पत्नी से अलग रह रहा था. तभी से वह चिंता में डूबा रहता था. छः जुलाई की दोपहर उदय घर में किसी को कुछ ना बताते हुए दुपहिया से निकल गया. शाम ढलने के बाद भी वह घर नहीं लौटने पर उसको ढूंढना शुरू किया गया. तभी मंगेश डहाले को निलोणा बांध के पास उसकी दुपहिया दिखाई दी. इसके बाद शुक्रवार की सुबह उदय का शव निलोणा बांध की दीवार के पास पडा पाया गया. यवतमाल ग्रामीण पुलिस ने पंचनामा कर आक्समिक मौत का मामला दर्ज किया है. दारव्हा मार्ग पर स्थित एक दुपहिया शोरुम में कार्यरत प्रबंधक ने किन्ही खेत परिसर में शुक्रवार की सुबह पेड पर रस्सी बांधकर फांसी लेकर आत्महत्या कर ली. मृतक का नाम दत्तनगर निवासी सुरेश गुलाबराव गावंडे बताया गया है. शुक्रवार की सुबह कुछ लोगों को उसका शव पेड पर लटका हुआ दिखाई दिया. पुलिस ने घटनास्थल पहुंचकर पंचनामा किया. इस समय घटनास्थल पर जहर की बोतल भी पायी गई. इसके अलावा सुरेश ने मृत्युपूर्व जहर गटकते हुए परिवार के सदस्यों को फोन पर तीनों की परेशानियों से तंग आकर आत्महत्या करने की बात बतलायी और इसके बाद फांसी लेकर आत्महत्या कर ली. मृतक के पास पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है. जिसके आधार पर पुलिस जांच कर रही है. यवतमाल ग्रामीण पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया है. आर्णी तहसील के बोरगांव निवासी सत्तर वर्षीय बुजुर्ग नुरसिंह चव्हाण ने छः जुलाई की दोपहर में जहर पीकर आत्महत्या कर ली. आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया है. पवन चव्हाण की शिकायत पर आर्णी पुलिस ने आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया है. शहर से सटे मादनी बोरगांव जंगल में पेड पर फांसी लगी अवस्था में युवती का शव पाया गया. यह घटना शुक्रवार की सुबह सामने आयी. परिजनों ने युवती की आत्महत्या को लेकर संदेह जताया है. मृतक युवती अमरावती जिले के चांदूररेलवे तहसील के येरडबाजार निवासी बतायी जा रही है. युवती तलेगांव दशासर में पढाई कर रही थीं. मृतक युवती का नाम आंचल सुधीर डेहणीकर बताया जा रहा है. तीन जुलाई को घर से कॉलेज जाने की बात कहकर वह निकली थी. इसके बाद देर शाम तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने उसे ढूंढना शुरू किया. लेकिन उसका कहीं पर भी पता नहीं चल पाया. जिसके बाद परिजनों ने चांदूररेलवे पुलिस थाने में युवती के लापता होने की शिकायत दर्ज करायी. इसके बाद शुक्रवार सात जुलाई की सुबह यवतमाल शहर से सटे मदनी बोरगांव जंगल परिसर में उसका शव पेड पर फांसी लगी अवस्था में दिखाई दिया. घटना के बाद ग्रामीण पुलिस ने घटनास्थल पहुंचकर पंचनामा कर शव पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल में भेज दिया. मृतक युवती के चेहरे व पैर पर मिट्टी लगी होने से परिजनों ने संदेह जताया है. मामले में यवतमाल ग्रामीण पुलिस ने आकस्मिक मौत का अपराध दर्ज कर जांच शुरू की है.
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MS Dhoni Statement CSK vs RR IPL 2023 आईपीएल 2023 के रोमांचक मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स को राजस्थान रॉयल्स के हाथों 3 रनों से हार का मुंह देखना पड़ा। कप्तान एमएस धोनी ने हार के लिए बल्लेबाजों को जिम्मेदार ठहराया है।
नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। आईपीएल 2023 के 17वें मैच में चेन्नई सुपर किंग्स की टीम को राजस्थान रॉयल्स के हाथों हार का सामना करना पड़ा। सांसें रोक देने वाले मुकाबले में संजू सैमसन एंड कंपनी ने 3 रनों से जीत दर्ज की। सीएसके के कप्तान एमएस धोनी और रवींद्र जडेजा की जोड़ी आखिरी ओवर में 21 रन बनाने में नाकाम रही।
चेन्नई के बतौर कप्तान 200वें मैच में मिली हार के बाद माही टीम के बल्लेबाजों के प्रदर्शन से नाखुश नजर आए। धोनी ने बीच के ओवरों में स्ट्राइक ना रोटेट कर पाने को हार की एक बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि मिडिल ओवरों में हमको ज्यादा स्ट्राइक रोटेट करना चाहिए था, पिच में स्पिनर्स के लिए ज्यादा कुछ नहीं था, लेकिन उनके पास अनुभवी स्पिनर्स थे जिन्होंने आसानी से स्ट्राइक रोटेट नहीं करने दी। "
सीएसके के कप्तान ने आगे कहा, "यह उतना मुश्किल नहीं था और हार का ठीकरा बल्लेबाजों के सिर ही फोड़ा जाना चाहिए। यह अच्छा रहा कि हम टारगेट के नजदीक पहुंच गए, क्योंकि इससे नेट रनरेट पर टूर्नामेंट के आखिरी फेज में काफी फर्क पड़ता है। आप फील्ड को और बॉलर को देखते हैं कि वह क्या करने की कोशिश कर रहा है और उसके बाद आप सीधे खड़े होकर गेंदबाज द्वारा गलती करने का इंतजार करते हैं। मैं बॉलर के गलती करने का वेट करता हूं और यह कुछ ऐसा है जिसके चलते मुझे कामयाबी मिली है। आपको अपनी स्ट्रेंथ को बैक करना होता है और मेरी ताकत सामने की तरफ शॉट मारना है। "
धोनी अपने गेंदबाजों के प्रदर्शन से संतुष्ट नजर आए। उन्होंने कहा, "मैदान पर थोड़ी ओस थी और जब बॉल आउटफील्ड में जा रही थी, तो बल्लेबाजी करना आसान हो जा रहा था। ओवरऑल मैं अपने गेंदबाजों के प्रदर्शन से खुश हूं। मुझे नहीं पता था कि यह सीएसके के कप्तान के तौर पर मेरा 200वां मैच था और मेरी लिए माइलस्टोन ज्यादा मैटर नहीं करते हैं। "
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MS Dhoni Statement CSK vs RR IPL दो हज़ार तेईस आईपीएल दो हज़ार तेईस के रोमांचक मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स को राजस्थान रॉयल्स के हाथों तीन रनों से हार का मुंह देखना पड़ा। कप्तान एमएस धोनी ने हार के लिए बल्लेबाजों को जिम्मेदार ठहराया है। नई दिल्ली, स्पोर्ट्स डेस्क। आईपीएल दो हज़ार तेईस के सत्रहवें मैच में चेन्नई सुपर किंग्स की टीम को राजस्थान रॉयल्स के हाथों हार का सामना करना पड़ा। सांसें रोक देने वाले मुकाबले में संजू सैमसन एंड कंपनी ने तीन रनों से जीत दर्ज की। सीएसके के कप्तान एमएस धोनी और रवींद्र जडेजा की जोड़ी आखिरी ओवर में इक्कीस रन बनाने में नाकाम रही। चेन्नई के बतौर कप्तान दो सौवें मैच में मिली हार के बाद माही टीम के बल्लेबाजों के प्रदर्शन से नाखुश नजर आए। धोनी ने बीच के ओवरों में स्ट्राइक ना रोटेट कर पाने को हार की एक बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि मिडिल ओवरों में हमको ज्यादा स्ट्राइक रोटेट करना चाहिए था, पिच में स्पिनर्स के लिए ज्यादा कुछ नहीं था, लेकिन उनके पास अनुभवी स्पिनर्स थे जिन्होंने आसानी से स्ट्राइक रोटेट नहीं करने दी। " सीएसके के कप्तान ने आगे कहा, "यह उतना मुश्किल नहीं था और हार का ठीकरा बल्लेबाजों के सिर ही फोड़ा जाना चाहिए। यह अच्छा रहा कि हम टारगेट के नजदीक पहुंच गए, क्योंकि इससे नेट रनरेट पर टूर्नामेंट के आखिरी फेज में काफी फर्क पड़ता है। आप फील्ड को और बॉलर को देखते हैं कि वह क्या करने की कोशिश कर रहा है और उसके बाद आप सीधे खड़े होकर गेंदबाज द्वारा गलती करने का इंतजार करते हैं। मैं बॉलर के गलती करने का वेट करता हूं और यह कुछ ऐसा है जिसके चलते मुझे कामयाबी मिली है। आपको अपनी स्ट्रेंथ को बैक करना होता है और मेरी ताकत सामने की तरफ शॉट मारना है। " धोनी अपने गेंदबाजों के प्रदर्शन से संतुष्ट नजर आए। उन्होंने कहा, "मैदान पर थोड़ी ओस थी और जब बॉल आउटफील्ड में जा रही थी, तो बल्लेबाजी करना आसान हो जा रहा था। ओवरऑल मैं अपने गेंदबाजों के प्रदर्शन से खुश हूं। मुझे नहीं पता था कि यह सीएसके के कप्तान के तौर पर मेरा दो सौवां मैच था और मेरी लिए माइलस्टोन ज्यादा मैटर नहीं करते हैं। "
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नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के कोरिया स्थित बैैैैकुण्ठपुर केे एक ही परिवार के 5 लोगों के बहुचर्चित हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाए सोनू सरदार की सजा को दिल्ली हाईकोर्ट ने बदल कर आजीवन कारावास कर दिया है।
सोनू को जिला न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई थी। जिसके बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने और फिर सुप्रीमकोर्ट ने जिला न्यायालय के फैसले को यथावत रखा था। सोनू की सजा के खिलाफ राष्ट्रपति के पास दया याचिका लगाई गई थी जिसे राष्ट्रपति ने भी खारिज कर दिया था।
सोनू की सजा के खिलाफ उसके वकीलों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई, छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए याचिका का विरोध किया था। सरकार की तरफ से पैरवी करने वकील ने दलील दी थी कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इसकी सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट नहीं कर सकती। छत्तीसगढ़ सरकार की यह दलील हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए सोनू सरदार की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।
सोनू और उसके साथियों ने 26 नवंबर 2004 को कबाड़ व्यापारी शमीम अख्तर और परिवार के 5 सदस्यों को टुकड़े-टुकड़े कर दिए थे। आरोपी शाम के समय शमीम के घर पहुंचे। उन्हें मालूम था शमीम के पास दो लाख से ज्यादा कैश है। कबाड़ बेचने का झूठ बोलकर घर में घुसे और शमीम, उसकी पत्नी रुखसाना, बेटी रानो, बेटे याकूब और 5 महीने की नन्हीं बच्ची की हत्या कर दी। शमीम की छह साल की बेटी ने किसी तरह भागकर जान बचाई थी।
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नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के कोरिया स्थित बैैैैकुण्ठपुर केे एक ही परिवार के पाँच लोगों के बहुचर्चित हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाए सोनू सरदार की सजा को दिल्ली हाईकोर्ट ने बदल कर आजीवन कारावास कर दिया है। सोनू को जिला न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई थी। जिसके बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने और फिर सुप्रीमकोर्ट ने जिला न्यायालय के फैसले को यथावत रखा था। सोनू की सजा के खिलाफ राष्ट्रपति के पास दया याचिका लगाई गई थी जिसे राष्ट्रपति ने भी खारिज कर दिया था। सोनू की सजा के खिलाफ उसके वकीलों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई, छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए याचिका का विरोध किया था। सरकार की तरफ से पैरवी करने वकील ने दलील दी थी कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इसकी सुनवाई दिल्ली हाईकोर्ट नहीं कर सकती। छत्तीसगढ़ सरकार की यह दलील हाईकोर्ट ने खारिज करते हुए सोनू सरदार की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। सोनू और उसके साथियों ने छब्बीस नवंबर दो हज़ार चार को कबाड़ व्यापारी शमीम अख्तर और परिवार के पाँच सदस्यों को टुकड़े-टुकड़े कर दिए थे। आरोपी शाम के समय शमीम के घर पहुंचे। उन्हें मालूम था शमीम के पास दो लाख से ज्यादा कैश है। कबाड़ बेचने का झूठ बोलकर घर में घुसे और शमीम, उसकी पत्नी रुखसाना, बेटी रानो, बेटे याकूब और पाँच महीने की नन्हीं बच्ची की हत्या कर दी। शमीम की छह साल की बेटी ने किसी तरह भागकर जान बचाई थी।
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आर्यन खान ड्रग्स केस का तानाबाना किसे बदनाम करने के लिए बुना गया, उसकी परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। इंडिया टुडे ने केंद्रीय जांच एजेंसी एनसीबी के जांच अधिकारी से बातचीत करके तह में जाने की कोशिश की है।
आर्यन ख़ान को क्लीनचीट मिलने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या ड्रग्स मामले में उनको गिरफ़्तार करने वाली एनसीबी टीम व समीर वानखेड़े के ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी? जानिए गृह मंत्रालय व एनसीबी अधिकारी ने क्या कहा।
आर्यन ख़ान को क्लीनचिट मिलने के बाद अब एनसीपी और शिवसेना के नेता सवाल उठा रहे हैं कि क्या समीर वानखेड़े व एनसीबी के दूसरे अधिकारियों ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई होगी जिन्होंने ग़लत तरीक़े से आर्यन को गिरफ्तार किया था?
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आर्यन खान ड्रग्स केस का तानाबाना किसे बदनाम करने के लिए बुना गया, उसकी परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। इंडिया टुडे ने केंद्रीय जांच एजेंसी एनसीबी के जांच अधिकारी से बातचीत करके तह में जाने की कोशिश की है। आर्यन ख़ान को क्लीनचीट मिलने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या ड्रग्स मामले में उनको गिरफ़्तार करने वाली एनसीबी टीम व समीर वानखेड़े के ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी? जानिए गृह मंत्रालय व एनसीबी अधिकारी ने क्या कहा। आर्यन ख़ान को क्लीनचिट मिलने के बाद अब एनसीपी और शिवसेना के नेता सवाल उठा रहे हैं कि क्या समीर वानखेड़े व एनसीबी के दूसरे अधिकारियों ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई होगी जिन्होंने ग़लत तरीक़े से आर्यन को गिरफ्तार किया था?
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Vanantara Resort Case हत्या में मुख्य आरोपित पुलकित आर्या व सौरभ भास्कर नार्को टेस्ट के लिए तैयार हो गए हैं। तीसरे आरोपित अंकित गुप्ता ने जवाब देने के लिए 10 दिन का समय मांगा है। अगली सुनवाई की तिथि 22 दिसंबर को नियत की है।
जागरण संवाददाता, देहरादून : Vanantara Resort Case : ऋषिकेश के वनंतरा रिसार्ट एक महिला कर्मचारी की हत्या में मुख्य आरोपित पुलकित आर्या व सौरभ भास्कर नार्को टेस्ट के लिए तैयार हो गए हैं।
आरोपित पुलकित आर्या ने कुछ शर्तों के साथ टेस्ट करवाने के लिए हामी भरी है। वहीं, तीसरे आरोपित अंकित गुप्ता ने जवाब देने के लिए 10 दिन का समय मांगा है। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 22 दिसंबर को नियत की है, जिसमें नार्को व पालीग्राफ टेस्ट पर फैसला हो सकता है।
हत्या के मामले में गिरफ्तार रिसार्ट मालिक पुलकित आर्या, सौरभ भास्कर व अंकित गुप्ता का नार्को व पालीग्राफ टेस्ट करवाने के लिए एसआइटी की ओर से बीते शुक्रवार को कोटद्वार(पौड़ी गढ़वाल) के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम की कोर्ट में प्रार्थनापत्र दायर किया गया था।
सोमवार को अदालत ने प्रार्थनापत्र पर सुनवाई की। नार्को व पालीग्राफ टेस्ट के लिए विभिन्न जेलों में बंद तीनों आरोपितों से जवाब मांगा गया था। तीनों ने जेल से जवाब भेजे। इस दौरान केस के मुख्य आरोपित पुलकित आर्या और सौरभ भास्कर ने नार्को व पालीग्राफ टेस्ट के लिए हामी भरी है, जिसमें पुलकित ने टेस्ट करवाने के लिए कुछ शर्तें भी रखी हैं।
उसने कहा है कि टेस्ट के दौरान उसकी वीडियोग्राफी की जाए और साथ ही रिकार्डिंग भी करवाई जाए। तीसरे आरोपित अंकित ने जवाब देने के लिए 10 दिन का समय मांगा है। अदालत ने नार्को व पालीग्राफ टेस्ट को लेकर 22 दिसंबर को फैसला सुनाने को कहा है।
प्रकरण के बाद एसआइटी ने काफी साक्ष्य तो एकत्रित कर लिए हैं, लेकिन अब भी कई अनसुलझे सवाल हैं, जिनके जवाब एसआइटी को नहीं मिल पाए हैं। ऐसे में तीनों आरोपितों का नार्को व पालीग्राफ टेस्ट करवाया जा रहा है।
असल में आरोपितों से कई बार पूछताछ करने के बाद भी पुलिस अब तक यह पता नहीं लगा पाई है कि वनंतरा रिसार्ट में आने वाला वीआइपी कौन था। युवती ने अपने दोस्त के साथ वाट्सएप चैटिंग में वीआइपी का जिक्र किया था, जिसके लिए उस पर स्पेशल सर्विस के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
साथ ही युवती और मुख्य आरोपित पुलकित आर्या का मोबाइल भी बरामद नहीं हो पाया है। इसके अलावा भी कई प्रश्न हैं, जिनका उत्तर इस प्रकरण की जांच कर रही एसआइटी को नहीं मिल पाया है।
पालीग्राफ टेस्ट को लाई डिटेक्टर टेस्ट भी कहा जाता है। यह एक खास तकनीक है, जिसमें संबंधित शख्स से सवाल पूछे जाते हैं। जवाब देते समय व्यक्ति के शरीर के आंतरिक व्यवहार जैसे पल्स रेट, हार्ट बीट, ब्लड प्रेशर आदि के माध्यम से मशीनों के जरिये पता लगाया जाता है कि व्यक्ति सच बोल रहा है या झूठ।
अपराध के कई मामलों में आरोपित के झूठ बोलने या बार-बार बयान बदलने से जांच में अड़चन आने लगती है। ऐसे में सच्चाई का पता लगाने के लिए आरोपित का नार्को टेस्ट करवाया जाता है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि नार्को टेस्ट में सच उगलवाने की पूरी संभावना होती है। इसमें संबंधित को एक इंजेक्शन दिया जाता है, जिससे वह अर्द्ध चेतना की अवस्था में पहुंच जाता है। इसके बाद उससे सवाल किए जाते हैं।
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Vanantara Resort Case हत्या में मुख्य आरोपित पुलकित आर्या व सौरभ भास्कर नार्को टेस्ट के लिए तैयार हो गए हैं। तीसरे आरोपित अंकित गुप्ता ने जवाब देने के लिए दस दिन का समय मांगा है। अगली सुनवाई की तिथि बाईस दिसंबर को नियत की है। जागरण संवाददाता, देहरादून : Vanantara Resort Case : ऋषिकेश के वनंतरा रिसार्ट एक महिला कर्मचारी की हत्या में मुख्य आरोपित पुलकित आर्या व सौरभ भास्कर नार्को टेस्ट के लिए तैयार हो गए हैं। आरोपित पुलकित आर्या ने कुछ शर्तों के साथ टेस्ट करवाने के लिए हामी भरी है। वहीं, तीसरे आरोपित अंकित गुप्ता ने जवाब देने के लिए दस दिन का समय मांगा है। कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि बाईस दिसंबर को नियत की है, जिसमें नार्को व पालीग्राफ टेस्ट पर फैसला हो सकता है। हत्या के मामले में गिरफ्तार रिसार्ट मालिक पुलकित आर्या, सौरभ भास्कर व अंकित गुप्ता का नार्को व पालीग्राफ टेस्ट करवाने के लिए एसआइटी की ओर से बीते शुक्रवार को कोटद्वार के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम की कोर्ट में प्रार्थनापत्र दायर किया गया था। सोमवार को अदालत ने प्रार्थनापत्र पर सुनवाई की। नार्को व पालीग्राफ टेस्ट के लिए विभिन्न जेलों में बंद तीनों आरोपितों से जवाब मांगा गया था। तीनों ने जेल से जवाब भेजे। इस दौरान केस के मुख्य आरोपित पुलकित आर्या और सौरभ भास्कर ने नार्को व पालीग्राफ टेस्ट के लिए हामी भरी है, जिसमें पुलकित ने टेस्ट करवाने के लिए कुछ शर्तें भी रखी हैं। उसने कहा है कि टेस्ट के दौरान उसकी वीडियोग्राफी की जाए और साथ ही रिकार्डिंग भी करवाई जाए। तीसरे आरोपित अंकित ने जवाब देने के लिए दस दिन का समय मांगा है। अदालत ने नार्को व पालीग्राफ टेस्ट को लेकर बाईस दिसंबर को फैसला सुनाने को कहा है। प्रकरण के बाद एसआइटी ने काफी साक्ष्य तो एकत्रित कर लिए हैं, लेकिन अब भी कई अनसुलझे सवाल हैं, जिनके जवाब एसआइटी को नहीं मिल पाए हैं। ऐसे में तीनों आरोपितों का नार्को व पालीग्राफ टेस्ट करवाया जा रहा है। असल में आरोपितों से कई बार पूछताछ करने के बाद भी पुलिस अब तक यह पता नहीं लगा पाई है कि वनंतरा रिसार्ट में आने वाला वीआइपी कौन था। युवती ने अपने दोस्त के साथ वाट्सएप चैटिंग में वीआइपी का जिक्र किया था, जिसके लिए उस पर स्पेशल सर्विस के लिए दबाव बनाया जा रहा है। साथ ही युवती और मुख्य आरोपित पुलकित आर्या का मोबाइल भी बरामद नहीं हो पाया है। इसके अलावा भी कई प्रश्न हैं, जिनका उत्तर इस प्रकरण की जांच कर रही एसआइटी को नहीं मिल पाया है। पालीग्राफ टेस्ट को लाई डिटेक्टर टेस्ट भी कहा जाता है। यह एक खास तकनीक है, जिसमें संबंधित शख्स से सवाल पूछे जाते हैं। जवाब देते समय व्यक्ति के शरीर के आंतरिक व्यवहार जैसे पल्स रेट, हार्ट बीट, ब्लड प्रेशर आदि के माध्यम से मशीनों के जरिये पता लगाया जाता है कि व्यक्ति सच बोल रहा है या झूठ। अपराध के कई मामलों में आरोपित के झूठ बोलने या बार-बार बयान बदलने से जांच में अड़चन आने लगती है। ऐसे में सच्चाई का पता लगाने के लिए आरोपित का नार्को टेस्ट करवाया जाता है। जांच अधिकारियों का कहना है कि नार्को टेस्ट में सच उगलवाने की पूरी संभावना होती है। इसमें संबंधित को एक इंजेक्शन दिया जाता है, जिससे वह अर्द्ध चेतना की अवस्था में पहुंच जाता है। इसके बाद उससे सवाल किए जाते हैं।
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काबुलः अफगानिस्ताान में आतंकी संगठन तालिबान के शासन के अधीन गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए अमेरिका 14. 4 करोड़ डॉलर देगा. अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन (Antony Blinken) ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया है कि मदद, स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय और गैर-सरकारी मानवीय संगठनों को सीधे प्रदान की जाएगी, जिनमें शरणार्थियों से सम्बंधित संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त (UNHCR), संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNISEF), अंतरराष्ट्रीय आव्रजन संगठन (IOM) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) शामिल हैं.
ब्लिंकन ने आगे कहा कि, 'इस कोष के माध्यम से क्षेत्र के 1. 8 करोड़ से अधिक जरूरतमंद अफगानिस्तान के लोगों को सीधे मदद उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें पड़ोसी देशों में शरण लेने वाले अफगानिस्तान के शरणार्थी भी शामिल हैं. ' ब्लिंकन ने कहा कि इसके साथ ही, अफगानिस्तान में और इस क्षेत्र में अफगान शरणार्थियों के लिए कुल अमेरिकी मानवीय मदद 2021 में बढ़कर तक़रीबन 47. 4 करोड़ डॉलर हो गई, जो किसी भी राष्ट्र द्वारा दी गई सबसे अधिक आर्थिक सहायता है.
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काबुलः अफगानिस्ताान में आतंकी संगठन तालिबान के शासन के अधीन गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहे लोगों की मदद के लिए अमेरिका चौदह. चार करोड़ डॉलर देगा. अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने गुरुवार को जानकारी देते हुए बताया है कि मदद, स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय और गैर-सरकारी मानवीय संगठनों को सीधे प्रदान की जाएगी, जिनमें शरणार्थियों से सम्बंधित संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त , संयुक्त राष्ट्र बाल कोष , अंतरराष्ट्रीय आव्रजन संगठन और विश्व स्वास्थ्य संगठन शामिल हैं. ब्लिंकन ने आगे कहा कि, 'इस कोष के माध्यम से क्षेत्र के एक. आठ करोड़ से अधिक जरूरतमंद अफगानिस्तान के लोगों को सीधे मदद उपलब्ध कराई जाएगी, जिसमें पड़ोसी देशों में शरण लेने वाले अफगानिस्तान के शरणार्थी भी शामिल हैं. ' ब्लिंकन ने कहा कि इसके साथ ही, अफगानिस्तान में और इस क्षेत्र में अफगान शरणार्थियों के लिए कुल अमेरिकी मानवीय मदद दो हज़ार इक्कीस में बढ़कर तक़रीबन सैंतालीस. चार करोड़ डॉलर हो गई, जो किसी भी राष्ट्र द्वारा दी गई सबसे अधिक आर्थिक सहायता है.
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शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नरेंद्र मोदी जी ने एक दीर्घकालीन रणनीति बनाई ताकि किसानों की आय दोगुनी हो सके। इसीलिए 3 बिल आए। किसान अपनी उपज को कहीं भी बेच सकता है। कांग्रेस को क्या आपत्ति है।
भोपालः मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नेकांग्रेस पर हमला किया। सीएम ने कहा कि कांग्रेस के सपने में पीएम मोदी ही आते हैं। किसान मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा।
कांग्रेस के नेता बोलने के अलावा कुछ नहीं करते हैं। अपने पूर्ववर्ती कमलनाथ की नेतृत्व क्षमता पर निशाना साधते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 73 वर्षीय कांग्रेस नेता इस पद पर रहने के दौरान हमेशा धन की कमी की रट लगाते रहते थे।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नरेंद्र मोदी जी ने एक दीर्घकालीन रणनीति बनाई ताकि किसानों की आय दोगुनी हो सके। इसीलिए 3 बिल आए। किसान अपनी उपज को कहीं भी बेच सकता है। कांग्रेस को क्या आपत्ति है। घर पर ही सही दाम मिले और किसान अपनी फसल बेचता है, तो कांग्रेस को क्या आपत्ति है।
परन्तु झूठ बोलना और भ्रम फैलाना कांग्रेस की फितरत है, मोदी जी का नाम सुनकर तो सपने में भी चौंक जाते हैं और उठकर विरोध करने लगते हैं। ये केवल मोदी जी का विरोध नहीं किसानों का विरोध है और किसान इसे सहन नहीं करेगा। ये तीनों बिल किसान के हित में हैं।
उन्होंने कहा, "कमलनाथ जब राज्य के मुख्यमंत्री थे, तब विकास की मांग पर जन प्रतिनिधियों से हमेशा यही कहते थे कि (सरकारी खजाने में) पैसा नहीं है। लेकिन सूबे की मौजूदा भाजपा सरकार विकास कार्यों के लिए धन की कमी कभी नहीं आने देगी। " चौहान ने कहा कि पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार ने गरीब कल्याण की महत्वाकांक्षी "सम्बल" योजना को बंद कर दिया था जिसे मौजूदा भाजपा सरकार ने बहाल कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य सरकारी महकमों के खाली पदों पर जल्द भर्ती शुरू की जाएगी ताकि कोविड-19 के संकट के दौरान युवाओं को सरकारी रोजगार मिल सकें। उन्होंने इंदौर में महामारी की रोकथाम के लिए कई व्यापारी संगठनों द्वारा स्वैच्छिक तौर पर आंशिक लॉकडाउन के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि इस पहल से समूचे सूबे को सीख लेनी चाहिए।
गौरतलब है कि कारोबारी संगठनों ने खुद तय किया है कि वे सोमवार से शुक्रवार तक अपने प्रतिष्ठान शाम छह बजे बंद कर देंगे, जबकि शनिवार व रविवार को इन्हें पूरी तरह बंद रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा भी की कि शहर में झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाले हर परिवार को तीन वर्षों के भीतर पक्का घर मुहैया कराया जाएगा।
शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए उन्हें राज्य सरकार की ओर से प्रतिवर्ष दो किस्तों में दो-दो हज़ार रुपये कुल 4,000 रुपये की सम्मान राशि देने का निर्णय किया है। किसानों के लिये "मुख्यमंत्री सम्मान निधि" नामक यह योजना 25 सितंबर से जन संघ के सह-संस्थापक पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती से शुरू की जायेगी।
इससे प्रदेश के 70 लाख किसानों को फायदा होगा। इस योजना में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के पंजीकृत किसानों को ही शामिल किया जायेगा। प्रधानमंत्री-किसान योजना के तहत केन्द्र सरकार प्रति वर्ष छह हजार रुपये की राशि, तीन समान किश्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा कराती है।
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शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नरेंद्र मोदी जी ने एक दीर्घकालीन रणनीति बनाई ताकि किसानों की आय दोगुनी हो सके। इसीलिए तीन बिल आए। किसान अपनी उपज को कहीं भी बेच सकता है। कांग्रेस को क्या आपत्ति है। भोपालः मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नेकांग्रेस पर हमला किया। सीएम ने कहा कि कांग्रेस के सपने में पीएम मोदी ही आते हैं। किसान मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा। कांग्रेस के नेता बोलने के अलावा कुछ नहीं करते हैं। अपने पूर्ववर्ती कमलनाथ की नेतृत्व क्षमता पर निशाना साधते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि तिहत्तर वर्षीय कांग्रेस नेता इस पद पर रहने के दौरान हमेशा धन की कमी की रट लगाते रहते थे। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि नरेंद्र मोदी जी ने एक दीर्घकालीन रणनीति बनाई ताकि किसानों की आय दोगुनी हो सके। इसीलिए तीन बिल आए। किसान अपनी उपज को कहीं भी बेच सकता है। कांग्रेस को क्या आपत्ति है। घर पर ही सही दाम मिले और किसान अपनी फसल बेचता है, तो कांग्रेस को क्या आपत्ति है। परन्तु झूठ बोलना और भ्रम फैलाना कांग्रेस की फितरत है, मोदी जी का नाम सुनकर तो सपने में भी चौंक जाते हैं और उठकर विरोध करने लगते हैं। ये केवल मोदी जी का विरोध नहीं किसानों का विरोध है और किसान इसे सहन नहीं करेगा। ये तीनों बिल किसान के हित में हैं। उन्होंने कहा, "कमलनाथ जब राज्य के मुख्यमंत्री थे, तब विकास की मांग पर जन प्रतिनिधियों से हमेशा यही कहते थे कि पैसा नहीं है। लेकिन सूबे की मौजूदा भाजपा सरकार विकास कार्यों के लिए धन की कमी कभी नहीं आने देगी। " चौहान ने कहा कि पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार ने गरीब कल्याण की महत्वाकांक्षी "सम्बल" योजना को बंद कर दिया था जिसे मौजूदा भाजपा सरकार ने बहाल कर दिया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य सरकारी महकमों के खाली पदों पर जल्द भर्ती शुरू की जाएगी ताकि कोविड-उन्नीस के संकट के दौरान युवाओं को सरकारी रोजगार मिल सकें। उन्होंने इंदौर में महामारी की रोकथाम के लिए कई व्यापारी संगठनों द्वारा स्वैच्छिक तौर पर आंशिक लॉकडाउन के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि इस पहल से समूचे सूबे को सीख लेनी चाहिए। गौरतलब है कि कारोबारी संगठनों ने खुद तय किया है कि वे सोमवार से शुक्रवार तक अपने प्रतिष्ठान शाम छह बजे बंद कर देंगे, जबकि शनिवार व रविवार को इन्हें पूरी तरह बंद रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा भी की कि शहर में झुग्गी-झोंपड़ी में रहने वाले हर परिवार को तीन वर्षों के भीतर पक्का घर मुहैया कराया जाएगा। शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए उन्हें राज्य सरकार की ओर से प्रतिवर्ष दो किस्तों में दो-दो हज़ार रुपये कुल चार,शून्य रुपयापये की सम्मान राशि देने का निर्णय किया है। किसानों के लिये "मुख्यमंत्री सम्मान निधि" नामक यह योजना पच्चीस सितंबर से जन संघ के सह-संस्थापक पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जयंती से शुरू की जायेगी। इससे प्रदेश के सत्तर लाख किसानों को फायदा होगा। इस योजना में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के पंजीकृत किसानों को ही शामिल किया जायेगा। प्रधानमंत्री-किसान योजना के तहत केन्द्र सरकार प्रति वर्ष छह हजार रुपये की राशि, तीन समान किश्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा कराती है।
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नगरीय क्षेत्र के वार्ड नंबर 2 और शहर से सटी ग्राम पंचायत गोंगलई में स्थित शराब दुकान हटाने वहां के स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित रहवासियों ने विरोध प्रारंभ कर दिया है। मंगलवार को भटेरा चौकी स्थित शराब दुकान में वार्ड पार्षद योगराज कारो लिल्हारे सहित कांग्रेसी पार्षद और रहवासियों ने धरना देकर शीघ्र शराब दुकान हटाने मांग की है। वहीं ग्राम पंचायत गोंगलई के सरपंच उप सरपंच व पंचों एवं ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंच ग्राम से शीघ्र शराब दुकान हटाने की मांग की है। मध्यप्रदेश ढीमर मछुआ समाज संगठन द्वारा समस्त ग्राम पंचायतों की हर पंचायतों में रोजगार गारंटी 15 वें वित्त के आधार पर बनने वाले मिनी निषादराज भवन फीशयार्ड का ग्राम पंचायतों द्वारा मछुआ समिति से ५-५ हजार रूपये का अनुबंध करने का विरोध जताते हुये कलेक्ट्रेट पहुंच इस पर रोक लगाने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। नगर पालिका परिषद द्वारा पिछली परिषद की बैठक में स्थानीय बस स्टैंड में रात्रि में बस हाल्टिंग का सौ रूपये प्रति बस किराया वसूल करने का निर्णय लेते हुये परिषद में प्रस्ताव पारित किया गया था। नपा द्वारा 1 अप्रैल से इस शुल्क को लागू करने की बात कही गई थी। लेकिन अब बस एसोसिएशन द्वारा पुराना शुल्क 20 रूपये से एक रूपये भी अधिक देने को तैयार नहीं है। मंगलवार को बालाघाट बस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने नपाध्यक्ष भारती सुरजीत सिंह ठाकुर से मुलाकात कर बस हाल्टिंग का शुल्क सौ रूपये देने में असहमति जताई है। उन्होंने बस स्टैंड में विभिन्न प्रकार की सुविधाओं और सेवाएं बढ़ाए जाने की मांग की है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित बालाघाट मुख्यालय से कलेक्टर व बैंक प्रशासक डा. गिरीश कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में बैंक सीईओ आर. सी. पटले द्वारा ४ अप्रैल को वी. सी. के माध्यम से शाखा प्रबंधकों सुपरवाइजरों की बैठक ली गई। इस दौरान वीसी के माध्यम से पटले ने निर्देशित किया गया कि सभी खातो को १०० प्रतिशत आधार से लिंक किया जावे जिसकी समीक्षा कलेक्टर बालाघाट द्वारा की जावेगी। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कमलनाथ के निर्देश पर संगठन का विस्तार कर संगठन को मजबूत करने का कार्य सुचारू रूप से किया जा रहा है। इसी कड़ी में कांग्रेस के प्रदेश सहप्रभारी सी. पी मित्तल ने बालाघाट प्रवास के दौरान सर्किट हाऊस में पत्रकारो की । इस दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा अडानी मामले में अडानी और मोदी के रिश्ते के बारे में पूछे जाने पर केन्द्र सरकार द्वारा जवाब न देते हुये राहुल गांधी की आवाज को दबाने का कार्य करते हुये लोकसभा सदस्यता समाप्त करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि मोदी और अडानी के रिश्ते जनता के बीच आना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आव्हान पर वारासीवनी-खैरलांजी क्षेत्र के कांग्रेसियो ने नगर ने नहेरू चौक के समीप धरना प्रदर्शन कर कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी की सदस्यता रदद् करने का पुरजोर विरोध किया। काग्रेशियो ने केंद्र की मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि राहुल गांधी की सदस्यता रदद् करना निंदनीय है। पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष व लांजी विधायक हिना कावरे ने कहा कि कांग्रेस का हर कार्यकर्ता राहुल गाँधी के साथ है।
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नगरीय क्षेत्र के वार्ड नंबर दो और शहर से सटी ग्राम पंचायत गोंगलई में स्थित शराब दुकान हटाने वहां के स्थानीय जनप्रतिनिधियों सहित रहवासियों ने विरोध प्रारंभ कर दिया है। मंगलवार को भटेरा चौकी स्थित शराब दुकान में वार्ड पार्षद योगराज कारो लिल्हारे सहित कांग्रेसी पार्षद और रहवासियों ने धरना देकर शीघ्र शराब दुकान हटाने मांग की है। वहीं ग्राम पंचायत गोंगलई के सरपंच उप सरपंच व पंचों एवं ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंच ग्राम से शीघ्र शराब दुकान हटाने की मांग की है। मध्यप्रदेश ढीमर मछुआ समाज संगठन द्वारा समस्त ग्राम पंचायतों की हर पंचायतों में रोजगार गारंटी पंद्रह वें वित्त के आधार पर बनने वाले मिनी निषादराज भवन फीशयार्ड का ग्राम पंचायतों द्वारा मछुआ समिति से पाँच-पाँच हजार रूपये का अनुबंध करने का विरोध जताते हुये कलेक्ट्रेट पहुंच इस पर रोक लगाने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। नगर पालिका परिषद द्वारा पिछली परिषद की बैठक में स्थानीय बस स्टैंड में रात्रि में बस हाल्टिंग का सौ रूपये प्रति बस किराया वसूल करने का निर्णय लेते हुये परिषद में प्रस्ताव पारित किया गया था। नपा द्वारा एक अप्रैल से इस शुल्क को लागू करने की बात कही गई थी। लेकिन अब बस एसोसिएशन द्वारा पुराना शुल्क बीस रूपये से एक रूपये भी अधिक देने को तैयार नहीं है। मंगलवार को बालाघाट बस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने नपाध्यक्ष भारती सुरजीत सिंह ठाकुर से मुलाकात कर बस हाल्टिंग का शुल्क सौ रूपये देने में असहमति जताई है। उन्होंने बस स्टैंड में विभिन्न प्रकार की सुविधाओं और सेवाएं बढ़ाए जाने की मांग की है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित बालाघाट मुख्यालय से कलेक्टर व बैंक प्रशासक डा. गिरीश कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में बैंक सीईओ आर. सी. पटले द्वारा चार अप्रैल को वी. सी. के माध्यम से शाखा प्रबंधकों सुपरवाइजरों की बैठक ली गई। इस दौरान वीसी के माध्यम से पटले ने निर्देशित किया गया कि सभी खातो को एक सौ प्रतिशत आधार से लिंक किया जावे जिसकी समीक्षा कलेक्टर बालाघाट द्वारा की जावेगी। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कमलनाथ के निर्देश पर संगठन का विस्तार कर संगठन को मजबूत करने का कार्य सुचारू रूप से किया जा रहा है। इसी कड़ी में कांग्रेस के प्रदेश सहप्रभारी सी. पी मित्तल ने बालाघाट प्रवास के दौरान सर्किट हाऊस में पत्रकारो की । इस दौरान उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा अडानी मामले में अडानी और मोदी के रिश्ते के बारे में पूछे जाने पर केन्द्र सरकार द्वारा जवाब न देते हुये राहुल गांधी की आवाज को दबाने का कार्य करते हुये लोकसभा सदस्यता समाप्त करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि मोदी और अडानी के रिश्ते जनता के बीच आना चाहिए। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आव्हान पर वारासीवनी-खैरलांजी क्षेत्र के कांग्रेसियो ने नगर ने नहेरू चौक के समीप धरना प्रदर्शन कर कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी की सदस्यता रदद् करने का पुरजोर विरोध किया। काग्रेशियो ने केंद्र की मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि राहुल गांधी की सदस्यता रदद् करना निंदनीय है। पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष व लांजी विधायक हिना कावरे ने कहा कि कांग्रेस का हर कार्यकर्ता राहुल गाँधी के साथ है।
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नारनौल, 19 जुलाई। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जयप्रकाश दलाल ने कहा कि फसलों की सुगम खरीद, मुआवजा व अन्य योजनाओंं का सीधा लाभ देने के लिए सरकार ने मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल पर सभी किसानों को अपनी खेती योग्य जमीन का ब्यौरा दर्ज करवाना है। प्रदेश के लगभग 3. 19 लाख किसनों ने अभी तक अपना ब्यौरा दर्ज करवाया है। किसान आगामी 31 जुलाई तक पंजीकरण करवा सकते हैं। किसानों की आय सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार का यह एतिहासिक कदम है। श्री दलाल आज जिला लोक संपर्क एवं जन परिवेदना समिति की मासिक बैठक के बाद यह जानकारी दे रहे थे।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार चाहती है कि हर खेत की जानकारी सरकार के पास हो ताकि किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार योजनाओंं का लाभ दिया जा सके। उन्होंने कहा कि इस पोर्टल पर जिन किसानों ने अपनी जमीन खाली छोड़ी हुई है उन्हें भी अपने खाली खेत की जानकरी देनी है। किसानों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर ही किसानों को सुविधाएं दी जाएंगी।
प्रदेश मेंं फसल विविधिकरण योजना के संबंध मेंं कृषि मंत्री ने कहा कि अब तक विविधिकरण योजना के तहत बाजरे के स्थान पर दूसरी फसल लगाने के लिए प्रदेश के 26 हजार 265 किसानों ने पंजीकरण करवाया है। इस योजना के तहत एक लाख एकड़ का लक्ष्य रखा गया था जिसमें से अब तक 58 हजार एकड़ के लिए पंजीकरण हो चुका है। उन्होंने किसानों से आह्ïवान किया कि अभी भी मूंग की बिजाई का समय है। किसान मूंग की बिजाई करें। मूंग के बीज पर प्रदेश सरकार 90 फीसदी सब्सिडी दे रही है। इसके अलावा अगर जिस किसान ने पिछली बार बाजरे की बिजाई की थी वहां पर इस बार मूंग की खेती करता है तो उसे प्रति एकड़ 4 हजार रुपए सब्सिडी देगी। अकेले जिला महेंद्रगढ़ में अब तक उपलब्ध 700 क्विंटल मूंग के बीज में से 640 क्विंटल बीज किसान खरीद चुके हैं। अगर कहीं अधिक डिमांड है तो कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी डिमांड तुरंत भेज दें।
श्री दलाल ने कहा कि यह फसल लगभग 70 दिन में तैयार हो जाती है। किसान इसके बाद सरसोंं की बिजाई कर सकता है। एक एकड़ में किसान आराम से लगभग 20 हजार की मूंग का उत्पादन कर सकता है। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति भी बनी रहेगी।
इस मौके पर उपायुक्त अजय कुमार तथा नांगल चौधरी के विधायक डा. अभय सिंह यादव भी मौजूद थे।
नारनौल। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जयप्रकाश दलाल ने आज पंचायत भवन में जिला लोक संपर्क एवं जनपरिवेदना समिति की मासिक बैठक ली। इस बैठक में कुल पूर्व निर्धारित 14 मामले सुनवाई के लिए रखे गए जिनमें से अधिकतर का समाधान कर दिया गया। इसमेंं पांच मामले पिछली बैठक से लंबित थे।
बड़ का कुआं निवासी रामनिवास की शिकायत पर कार्यवाही करते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने नगर परिषद के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस जमीन को अपने कब्जे मेंं लें। अगर वक्फ बोर्ड खुद कब्जा लेने की कार्यवाही नहींं करता है तो नगर परिषद के अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे इसे अपने कब्जे में रखे। सरकार की भूमि पर अवैध कब्जे किसी भी सूरत मेंं नहींं हाने चाहिए।
गांव खेड़की निवासी की शिकायत पर उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगर वे बच्चोंं का सर्टिफिकेट जारी नहींं करता है तो उस स्कूल की मान्यता रद्द करने का नोटिस भेजें। बच्चों का सर्टिफिकेट तुरंत प्रभाव से दिलवाया जाए।
नांगल चौधरी के सतीश कुमार की शिकायत पर कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि कल ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ तालमेल करके सरकारी स्कूल की जमीन की पैमाइस करवाई जाए। वहींं नगर पालिका कनीना में अतिक्रमण हटवाने के संबंध में श्री दलाल ने निर्देश दिए कि इसमें जन प्रतिनिधियों की कमेटी बनाकर अगली बैठक तक अतिक्रमण पर रिपोर्ट दें। इस दौरान यह देखा जाए कि कहीं नगर पालिका अधिकारी चयनित के खिलाफ तो कार्यवाही नहींं कर रहे। ऐसे अभियान में सभी के साथ एक जैसी कार्यवाही होनी चाहिए।
जनपरिवेदना के अलावा भी उन्होंने शिकायतेंं सुनीं जिसमें उन्होंने एजीएल द्वारा बिछाई जा रही पाइप लाइन के संबंध मेंं निर्देश दिए कि अगर बिना मंजूरी के पाइप लाइन बिछाई जा रही है तो तुरंत एफआईआर दर्ज करें और जनस्वास्थ्य विभाग को जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई भी संंबंधित कंपनी से की जाए। सरकार द्वारा दी जा रही ढांचागत सुविधाओं को किसी भी सूरत में नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। एक सुविधा तैयार करने के लिए दूसरी सुविधाओं को नुकसान नहींं होना चाहिए।
इस बैठक में उपायुक्त अजय कुमार, नांगल चौधरी के विधायक अभय सिंह यादव, बीजेपी जिला प्रधान राकेश शर्मा, पूर्व चेयरमैन गोबिंद भारद्वाज व जेपी सैनी के अलावा अन्य सदस्य मौजूद थे।
फोटोः- नागरिकों के परिवाद सुनते कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जयप्रकाश दलाल।
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नारनौल, उन्नीस जुलाई। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जयप्रकाश दलाल ने कहा कि फसलों की सुगम खरीद, मुआवजा व अन्य योजनाओंं का सीधा लाभ देने के लिए सरकार ने मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल शुरू किया है। इस पोर्टल पर सभी किसानों को अपनी खेती योग्य जमीन का ब्यौरा दर्ज करवाना है। प्रदेश के लगभग तीन. उन्नीस लाख किसनों ने अभी तक अपना ब्यौरा दर्ज करवाया है। किसान आगामी इकतीस जुलाई तक पंजीकरण करवा सकते हैं। किसानों की आय सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार का यह एतिहासिक कदम है। श्री दलाल आज जिला लोक संपर्क एवं जन परिवेदना समिति की मासिक बैठक के बाद यह जानकारी दे रहे थे। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार चाहती है कि हर खेत की जानकारी सरकार के पास हो ताकि किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार योजनाओंं का लाभ दिया जा सके। उन्होंने कहा कि इस पोर्टल पर जिन किसानों ने अपनी जमीन खाली छोड़ी हुई है उन्हें भी अपने खाली खेत की जानकरी देनी है। किसानों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर ही किसानों को सुविधाएं दी जाएंगी। प्रदेश मेंं फसल विविधिकरण योजना के संबंध मेंं कृषि मंत्री ने कहा कि अब तक विविधिकरण योजना के तहत बाजरे के स्थान पर दूसरी फसल लगाने के लिए प्रदेश के छब्बीस हजार दो सौ पैंसठ किसानों ने पंजीकरण करवाया है। इस योजना के तहत एक लाख एकड़ का लक्ष्य रखा गया था जिसमें से अब तक अट्ठावन हजार एकड़ के लिए पंजीकरण हो चुका है। उन्होंने किसानों से आह्ïवान किया कि अभी भी मूंग की बिजाई का समय है। किसान मूंग की बिजाई करें। मूंग के बीज पर प्रदेश सरकार नब्बे फीसदी सब्सिडी दे रही है। इसके अलावा अगर जिस किसान ने पिछली बार बाजरे की बिजाई की थी वहां पर इस बार मूंग की खेती करता है तो उसे प्रति एकड़ चार हजार रुपए सब्सिडी देगी। अकेले जिला महेंद्रगढ़ में अब तक उपलब्ध सात सौ क्विंटल मूंग के बीज में से छः सौ चालीस क्विंटल बीज किसान खरीद चुके हैं। अगर कहीं अधिक डिमांड है तो कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी डिमांड तुरंत भेज दें। श्री दलाल ने कहा कि यह फसल लगभग सत्तर दिन में तैयार हो जाती है। किसान इसके बाद सरसोंं की बिजाई कर सकता है। एक एकड़ में किसान आराम से लगभग बीस हजार की मूंग का उत्पादन कर सकता है। इससे जमीन की उर्वरा शक्ति भी बनी रहेगी। इस मौके पर उपायुक्त अजय कुमार तथा नांगल चौधरी के विधायक डा. अभय सिंह यादव भी मौजूद थे। नारनौल। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जयप्रकाश दलाल ने आज पंचायत भवन में जिला लोक संपर्क एवं जनपरिवेदना समिति की मासिक बैठक ली। इस बैठक में कुल पूर्व निर्धारित चौदह मामले सुनवाई के लिए रखे गए जिनमें से अधिकतर का समाधान कर दिया गया। इसमेंं पांच मामले पिछली बैठक से लंबित थे। बड़ का कुआं निवासी रामनिवास की शिकायत पर कार्यवाही करते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने नगर परिषद के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस जमीन को अपने कब्जे मेंं लें। अगर वक्फ बोर्ड खुद कब्जा लेने की कार्यवाही नहींं करता है तो नगर परिषद के अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे इसे अपने कब्जे में रखे। सरकार की भूमि पर अवैध कब्जे किसी भी सूरत मेंं नहींं हाने चाहिए। गांव खेड़की निवासी की शिकायत पर उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगर वे बच्चोंं का सर्टिफिकेट जारी नहींं करता है तो उस स्कूल की मान्यता रद्द करने का नोटिस भेजें। बच्चों का सर्टिफिकेट तुरंत प्रभाव से दिलवाया जाए। नांगल चौधरी के सतीश कुमार की शिकायत पर कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि कल ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ तालमेल करके सरकारी स्कूल की जमीन की पैमाइस करवाई जाए। वहींं नगर पालिका कनीना में अतिक्रमण हटवाने के संबंध में श्री दलाल ने निर्देश दिए कि इसमें जन प्रतिनिधियों की कमेटी बनाकर अगली बैठक तक अतिक्रमण पर रिपोर्ट दें। इस दौरान यह देखा जाए कि कहीं नगर पालिका अधिकारी चयनित के खिलाफ तो कार्यवाही नहींं कर रहे। ऐसे अभियान में सभी के साथ एक जैसी कार्यवाही होनी चाहिए। जनपरिवेदना के अलावा भी उन्होंने शिकायतेंं सुनीं जिसमें उन्होंने एजीएल द्वारा बिछाई जा रही पाइप लाइन के संबंध मेंं निर्देश दिए कि अगर बिना मंजूरी के पाइप लाइन बिछाई जा रही है तो तुरंत एफआईआर दर्ज करें और जनस्वास्थ्य विभाग को जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई भी संंबंधित कंपनी से की जाए। सरकार द्वारा दी जा रही ढांचागत सुविधाओं को किसी भी सूरत में नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। एक सुविधा तैयार करने के लिए दूसरी सुविधाओं को नुकसान नहींं होना चाहिए। इस बैठक में उपायुक्त अजय कुमार, नांगल चौधरी के विधायक अभय सिंह यादव, बीजेपी जिला प्रधान राकेश शर्मा, पूर्व चेयरमैन गोबिंद भारद्वाज व जेपी सैनी के अलावा अन्य सदस्य मौजूद थे। फोटोः- नागरिकों के परिवाद सुनते कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जयप्रकाश दलाल।
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LUCKNOW: कैंट बोर्ड ने कैंट एरिया में बाइक चालक और पीछे बैठे व्यक्ति दोनों के लिए ही सुरक्षा के लिहाज से हेलमेट अनिवार्य कर दिया था। मगर स्थानीय लोगों ने पीछे बैठे व्यक्ति के लिए हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर शनिवार को जमकर विरोध प्रदर्शन किया। ऐसे में कैंट की मेन रोड पर कई घंटे तक यातायात बाधित रहा। जिसके बाद कैंड बोर्ड ने डबल हेलमेट की अनिवार्यता से सामयिक छूट दे दी।
राजधानी के कैंट इलाके में सेना ने दुपहिया वाहनों के चालक और सवारी दोनों के लिए सुरक्षा के लिहाज से हेलमेट लगाना अनिवार्य कर दिया था। यह आदेश एक जनवरी यानी शनिवार से ही लागू हुआ था। जिसके कारण लोगों ने शनिवार सुबह क्0 बजे से ही सड़क जाम कर हंगामा करना शुरू कर दिया। घंटों चले हंगामे के बाद कैंट बोर्ड के अध्यक्ष मेजर जनरल आरएस मालवे मौके पर पहुंचे और डबल हेलमेट की अनिवार्यता खत्म करने का ऐलान किया, जिसके बाद ही लोगों ने प्रदर्शन समाप्त किया।
कैंट बोर्ड के अध्यक्ष मेजर जनरल आरएस मालवे ने बताया कि केन्द्रीय सड़क परिवहन नियम के तहत और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर दो पहिया वाहन पर सहयात्री के लिए हेलमेट की अनिवार्यता को लखनऊ छावनी क्षेत्र में एक जनवरी ख्0क्म् से लागू किया गया था। जिसको लेकर जनता ने इस नियम में छूट का अनुरोध किया। फिलहाल इस नियम में आम जनता के लिए सामयिक छूट दी जा रही है।
उन्होंने आगे बताया कि लेकिन दोपहिया वाहनों की गति सीमा पर नियंत्रण रखा जाएगा और दो से अधिक सवारी बैठने की इजाजत नहीं दी जाएगी। साथ ही दोपरिया वाहन चालक के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य रहेगा। उन्होंने कहा कि भले ही यह आदेश जनहित में जानी किया गया लेकिन कुछ शरारती तत्व आम जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। आम जनता में सहयात्रियों की सुरक्षा के अहमियत देने की जागरूकता को जगाने के लिए सेना की मुहिम आगे भी जारी रहेगी ।
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LUCKNOW: कैंट बोर्ड ने कैंट एरिया में बाइक चालक और पीछे बैठे व्यक्ति दोनों के लिए ही सुरक्षा के लिहाज से हेलमेट अनिवार्य कर दिया था। मगर स्थानीय लोगों ने पीछे बैठे व्यक्ति के लिए हेलमेट की अनिवार्यता को लेकर शनिवार को जमकर विरोध प्रदर्शन किया। ऐसे में कैंट की मेन रोड पर कई घंटे तक यातायात बाधित रहा। जिसके बाद कैंड बोर्ड ने डबल हेलमेट की अनिवार्यता से सामयिक छूट दे दी। राजधानी के कैंट इलाके में सेना ने दुपहिया वाहनों के चालक और सवारी दोनों के लिए सुरक्षा के लिहाज से हेलमेट लगाना अनिवार्य कर दिया था। यह आदेश एक जनवरी यानी शनिवार से ही लागू हुआ था। जिसके कारण लोगों ने शनिवार सुबह क्शून्य बजे से ही सड़क जाम कर हंगामा करना शुरू कर दिया। घंटों चले हंगामे के बाद कैंट बोर्ड के अध्यक्ष मेजर जनरल आरएस मालवे मौके पर पहुंचे और डबल हेलमेट की अनिवार्यता खत्म करने का ऐलान किया, जिसके बाद ही लोगों ने प्रदर्शन समाप्त किया। कैंट बोर्ड के अध्यक्ष मेजर जनरल आरएस मालवे ने बताया कि केन्द्रीय सड़क परिवहन नियम के तहत और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर दो पहिया वाहन पर सहयात्री के लिए हेलमेट की अनिवार्यता को लखनऊ छावनी क्षेत्र में एक जनवरी ख्शून्यक्म् से लागू किया गया था। जिसको लेकर जनता ने इस नियम में छूट का अनुरोध किया। फिलहाल इस नियम में आम जनता के लिए सामयिक छूट दी जा रही है। उन्होंने आगे बताया कि लेकिन दोपहिया वाहनों की गति सीमा पर नियंत्रण रखा जाएगा और दो से अधिक सवारी बैठने की इजाजत नहीं दी जाएगी। साथ ही दोपरिया वाहन चालक के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य रहेगा। उन्होंने कहा कि भले ही यह आदेश जनहित में जानी किया गया लेकिन कुछ शरारती तत्व आम जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। आम जनता में सहयात्रियों की सुरक्षा के अहमियत देने की जागरूकता को जगाने के लिए सेना की मुहिम आगे भी जारी रहेगी ।
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मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है। इस बात की संभावना है कि प्रधानमंत्री अपने संदेश में कोरोना वैक्सीन की तैयारियों को लेकर देश कहां पहुंचा है, इसकी जानकारी दे सकते हैं।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आखिर देश को क्या बताने जा रहे हैं! आज शाम 6 बजे राष्ट्र के नाम उनके संदेश की सूचना को लेकर लोगों मंे उत्सुकता है।
प्रधानमंत्री ने खुद ट्वीट कर यह जानकारी दी। मोदी लोगों से इस प्रसारण से जुड़ने की अपील की है। पीएम मोदी का के इस संबोधन का प्रसारण दूरदर्शन और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म के माध्यम से किया जाएगा। मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है। इस बात की संभावना है कि प्रधानमंत्री अपने संदेश में कोरोना वैक्सीन की तैयारियों को लेकर देश कहां पहुंचा है, इसकी जानकारी दे सकते हैं। साथ ही लोगों से सतर्कता बरतने की अपील भी कर सकते हैं। यह भी माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री अपने इस संबोधन के दौरान लोगों से कोरोना को ध्यान में रखते हुए त्योहार मनाने की अपील भी कर सकते हैं।
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मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है। इस बात की संभावना है कि प्रधानमंत्री अपने संदेश में कोरोना वैक्सीन की तैयारियों को लेकर देश कहां पहुंचा है, इसकी जानकारी दे सकते हैं। नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आखिर देश को क्या बताने जा रहे हैं! आज शाम छः बजे राष्ट्र के नाम उनके संदेश की सूचना को लेकर लोगों मंे उत्सुकता है। प्रधानमंत्री ने खुद ट्वीट कर यह जानकारी दी। मोदी लोगों से इस प्रसारण से जुड़ने की अपील की है। पीएम मोदी का के इस संबोधन का प्रसारण दूरदर्शन और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म के माध्यम से किया जाएगा। मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है। इस बात की संभावना है कि प्रधानमंत्री अपने संदेश में कोरोना वैक्सीन की तैयारियों को लेकर देश कहां पहुंचा है, इसकी जानकारी दे सकते हैं। साथ ही लोगों से सतर्कता बरतने की अपील भी कर सकते हैं। यह भी माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री अपने इस संबोधन के दौरान लोगों से कोरोना को ध्यान में रखते हुए त्योहार मनाने की अपील भी कर सकते हैं।
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उत्तरकाशी जिले के 133 गांवों में पिछले तीन माह में जन्मे बच्चों में से कोई बेटी न होने संबंधी रिपोर्ट का सरकार परीक्षण कराएगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि यदि वास्तव में यही स्थिति है तो आंकड़ें चौकान्ने वाले हैं। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को कहा कि उत्तरकाशी के डीएम को हकीकत पता करने के निर्देश दिए हैं। यह हमारे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के लिए भी बहुत चिंताजनक है। इस बीच उन्होंने कहा कि कि 28 जुलाई को होने वाले हिमालयन कान्क्लेव में सभी हिमालयी राज्यों के प्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे। हिमालयी राज्य किस प्रकार न्यू इंडिया में योगदान दे सकते हैं, इस पर भी विमर्श होगा। कमोबेश सभी हिमालयी राज्यों की परिस्थितियां एक जैसी हैं। पर्यावरण को संरक्षित रखते हुए किस प्रकार पर्वतीय क्षेत्रों का विकास किया जा सकता है, इस पर मंथन किया जाएगा। उन्होंने कहा, कॉन्क्लेव के निष्कर्षों का ड्राफ्ट नीति आयोग को सौंपा जाएगा। सीएम ने कहा कि भाजपा सरकार में लगभग सभी कैबिनेट निर्णयों पर कार्रवाई हुई है। कैबिनेट के निर्णयों पर निर्धारित समय अवधि में अमल सुनिश्चित हो, इसलिए मुख्य सचिव को निर्णयों के क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग को कहा है।
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उत्तरकाशी जिले के एक सौ तैंतीस गांवों में पिछले तीन माह में जन्मे बच्चों में से कोई बेटी न होने संबंधी रिपोर्ट का सरकार परीक्षण कराएगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि यदि वास्तव में यही स्थिति है तो आंकड़ें चौकान्ने वाले हैं। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को कहा कि उत्तरकाशी के डीएम को हकीकत पता करने के निर्देश दिए हैं। यह हमारे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के लिए भी बहुत चिंताजनक है। इस बीच उन्होंने कहा कि कि अट्ठाईस जुलाई को होने वाले हिमालयन कान्क्लेव में सभी हिमालयी राज्यों के प्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे। हिमालयी राज्य किस प्रकार न्यू इंडिया में योगदान दे सकते हैं, इस पर भी विमर्श होगा। कमोबेश सभी हिमालयी राज्यों की परिस्थितियां एक जैसी हैं। पर्यावरण को संरक्षित रखते हुए किस प्रकार पर्वतीय क्षेत्रों का विकास किया जा सकता है, इस पर मंथन किया जाएगा। उन्होंने कहा, कॉन्क्लेव के निष्कर्षों का ड्राफ्ट नीति आयोग को सौंपा जाएगा। सीएम ने कहा कि भाजपा सरकार में लगभग सभी कैबिनेट निर्णयों पर कार्रवाई हुई है। कैबिनेट के निर्णयों पर निर्धारित समय अवधि में अमल सुनिश्चित हो, इसलिए मुख्य सचिव को निर्णयों के क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग को कहा है।
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पटना, प्रशांत किशोर ने आज अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कर दिया है कि वह फिलहाल कोई पॉलिटिकल पार्टी नहीं बनाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के 30 साल के शासन के बाद भी बिहार सबसे पिछड़ा राज्य है, अगर बिहार को आगे बढ़ाना है तो हम सबको साथ आना होगा बिहार को नई दशा और दिशा की जरुरत है। प्रशांत किशोर ने अपने विजन को प्रस्तुत करते हुए कहा कि जो कुछ भी मेरे पास आज है मैं उसे पूरी तरह से बिहार के लिए समर्पित कर रहा हूं।
बिहार के लोगों से ज्यादा मिलना उनकी बातों को समझना और उनकी समस्याओं पर अमल करना यह हमारा शुरू से प्रयास रहा है। मैं आने वाले तीन चार महीनों में जन सुराज की परिकल्पना के तहत बिहार के अधिक से अधिक लोगों से मिलकर इस मुहिम को एक नई ऊंचाई तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूं। और मुझे अगर इसके लिए राजनीतिक पार्टी बनाने की जरूरत पड़ेगी तो मैं ऐसा भी करने का प्रयास करूंगा।
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पटना, प्रशांत किशोर ने आज अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कर दिया है कि वह फिलहाल कोई पॉलिटिकल पार्टी नहीं बनाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के तीस साल के शासन के बाद भी बिहार सबसे पिछड़ा राज्य है, अगर बिहार को आगे बढ़ाना है तो हम सबको साथ आना होगा बिहार को नई दशा और दिशा की जरुरत है। प्रशांत किशोर ने अपने विजन को प्रस्तुत करते हुए कहा कि जो कुछ भी मेरे पास आज है मैं उसे पूरी तरह से बिहार के लिए समर्पित कर रहा हूं। बिहार के लोगों से ज्यादा मिलना उनकी बातों को समझना और उनकी समस्याओं पर अमल करना यह हमारा शुरू से प्रयास रहा है। मैं आने वाले तीन चार महीनों में जन सुराज की परिकल्पना के तहत बिहार के अधिक से अधिक लोगों से मिलकर इस मुहिम को एक नई ऊंचाई तक ले जाने का प्रयास कर रहा हूं। और मुझे अगर इसके लिए राजनीतिक पार्टी बनाने की जरूरत पड़ेगी तो मैं ऐसा भी करने का प्रयास करूंगा।
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महाराष्ट्र में औरंगाबाद और उस्मानाबाद का नाम बदले जाने के बाद एआईएमआईएम चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के सियासी तेवर बहुत ही तल्ख लग रहे हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में अपना आधार बढ़ाने की कोशिशों में जुटे ओवैसी ने अब वक्त पर मुसलमानों का साथ नहीं देने का आरोप लगाकर शिवसेना (उद्धव बाल ठाकरे) के सुप्रीमो उद्धव ठाकरे, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया है। उन्होंने मुस्लिम युवाओं से कहा है कि वह अपनी ताकत को समझें और सत्ता में अपना दबदबा कायम करने के लिए जुट जाएं।
ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी महाराष्ट्र की मुस्लिम राजनीति को लेकर पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के साथ-साथ उनके सहयोगी कांग्रेस पर भी जोरदार हमला बोला है। उन्होंने ठाकरे और पवार को निशाने पर लेते हुए दावा किया है कि जब भी उनके समुदाय को जरूरत पड़ी इन दोनों नेताओं ने उनका साथ नहीं दिया। उन्होंने शिवसेना (उद्धव बाल ठाकरे) के नेता उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि जब भी 'हमारे समुदाय के लोगों को प्रताड़ित होना पड़ा' तो वे चुप क्यों रहे।
'संकट के समय मुसलमानों को भूल जाते हैं'
उन्होंने ठाकरे की पार्टी की सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो शरद पवार पर भी तीखे हमले किए हैं। महाराष्ट्र के ठाणे में वे बोले कि एनसीपी अध्यक्ष पवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराना चाहते हैं और वे इसके लिए एआईएमआईएम का सपोर्ट मांगते हैं। उन्होंने पूछा,'लेकिन, संकट के समय में मुसलमानों को समर्थन देते समय वह भूल जाते हैं, उन्होंने कभी भी सामने आने की जहमत नहीं उठाई और हमें हमारे हाल पर छोड़ दिया। यह किस तरीकी की धर्मनिरपेक्षता है? '
सिर्फ उद्धव और शरद पवार ही नहीं, ओवैसी ने कांग्रेस को भी जमकर निशाना बनाया है। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कहा कि इसके नेताओं के पास भारत जोड़ो यात्रा का समय था, लेकिन मॉब लिंचिंग और बाकी घटनाों में मारे गए लोगों के परिवारों के पास दिलासा देने नहीं पहुंचे। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि एआईएमआईएम को मजबूत बनाएं और मुसलमानों और दलितों के अधिकारों के लिए लड़ें।
मुंबई के पास ठाणे जिले के मुंब्रा में अपनी पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान एक रैली को संबोधित करते हुए हैदराबाद के सांसद ने शनिवार को मुस्लिम युवाओं से कहा, 'अगर अजीत पवार, सुप्रिया सुले, शरद पवार, उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस नेता बन सकते हैं, तो आप क्यों नहीं बन सकते? ' वो बोले की एआईएमआईएम 65 साल पहले बनी थी, लेकिन बहुत कम लोग ही इसकी सभाओं में आते थे। लेकिन, अब हजारों में पहुंच रहे हैं। पार्टी चीफ ने कहा, 'हमारी संसद, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों में भी मौजूदगी है और यह प्रगति निरंतर जारी रहनी चाहिए और युवाओं को चुनाव के जरिए से प्रशासन में भी शामिल होने की कोशिश करनी चाहिए। '
इसे भी पढ़ें- Veer Savarkar: महात्मा गांधी ने कहा था, 'भारत को वीर सावरकर के त्याग और देशभक्ति का बहुत जल्दी फायदा मिलेगा'
'आप पैसे की ताकत से सबकुछ नहीं खरीद सकते हैं'
इसके साथ ही ओवैसी ने आने वाले चुनावों में उन लोगों के खिलाफ अपनी पार्टी की ओर से 'शेर' उम्मीदवारों को उतारने का ऐलान किया है, जो अपने गढ़ में पकड़ होने के दावे करते हैं। हैदराबाद के सांसद ने बिना किसी का नाम लिए कहा, 'आप पैसे की ताकत से सबकुछ नहीं खरीद सकते हैं, हमारे साथ अभी भी ऐसे लोग हैं, जो हमारे लिए वफादार हैं और उनके साथ मिलकर हम आपको हराएंगे। ' ओवैसी ने दावा किया कि उन्हें पैसे की ताकत से कोई नहीं खरीद सकता है। (इनपुट-पीटीआई)
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महाराष्ट्र में औरंगाबाद और उस्मानाबाद का नाम बदले जाने के बाद एआईएमआईएम चीफ और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी के सियासी तेवर बहुत ही तल्ख लग रहे हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में अपना आधार बढ़ाने की कोशिशों में जुटे ओवैसी ने अब वक्त पर मुसलमानों का साथ नहीं देने का आरोप लगाकर शिवसेना के सुप्रीमो उद्धव ठाकरे, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया है। उन्होंने मुस्लिम युवाओं से कहा है कि वह अपनी ताकत को समझें और सत्ता में अपना दबदबा कायम करने के लिए जुट जाएं। ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन के चीफ असदुद्दीन ओवैसी महाराष्ट्र की मुस्लिम राजनीति को लेकर पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के साथ-साथ उनके सहयोगी कांग्रेस पर भी जोरदार हमला बोला है। उन्होंने ठाकरे और पवार को निशाने पर लेते हुए दावा किया है कि जब भी उनके समुदाय को जरूरत पड़ी इन दोनों नेताओं ने उनका साथ नहीं दिया। उन्होंने शिवसेना के नेता उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि जब भी 'हमारे समुदाय के लोगों को प्रताड़ित होना पड़ा' तो वे चुप क्यों रहे। 'संकट के समय मुसलमानों को भूल जाते हैं' उन्होंने ठाकरे की पार्टी की सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सुप्रीमो शरद पवार पर भी तीखे हमले किए हैं। महाराष्ट्र के ठाणे में वे बोले कि एनसीपी अध्यक्ष पवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराना चाहते हैं और वे इसके लिए एआईएमआईएम का सपोर्ट मांगते हैं। उन्होंने पूछा,'लेकिन, संकट के समय में मुसलमानों को समर्थन देते समय वह भूल जाते हैं, उन्होंने कभी भी सामने आने की जहमत नहीं उठाई और हमें हमारे हाल पर छोड़ दिया। यह किस तरीकी की धर्मनिरपेक्षता है? ' सिर्फ उद्धव और शरद पवार ही नहीं, ओवैसी ने कांग्रेस को भी जमकर निशाना बनाया है। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बगैर कहा कि इसके नेताओं के पास भारत जोड़ो यात्रा का समय था, लेकिन मॉब लिंचिंग और बाकी घटनाों में मारे गए लोगों के परिवारों के पास दिलासा देने नहीं पहुंचे। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि एआईएमआईएम को मजबूत बनाएं और मुसलमानों और दलितों के अधिकारों के लिए लड़ें। मुंबई के पास ठाणे जिले के मुंब्रा में अपनी पार्टी के राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान एक रैली को संबोधित करते हुए हैदराबाद के सांसद ने शनिवार को मुस्लिम युवाओं से कहा, 'अगर अजीत पवार, सुप्रिया सुले, शरद पवार, उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस नेता बन सकते हैं, तो आप क्यों नहीं बन सकते? ' वो बोले की एआईएमआईएम पैंसठ साल पहले बनी थी, लेकिन बहुत कम लोग ही इसकी सभाओं में आते थे। लेकिन, अब हजारों में पहुंच रहे हैं। पार्टी चीफ ने कहा, 'हमारी संसद, राज्य विधानसभाओं और स्थानीय निकायों में भी मौजूदगी है और यह प्रगति निरंतर जारी रहनी चाहिए और युवाओं को चुनाव के जरिए से प्रशासन में भी शामिल होने की कोशिश करनी चाहिए। ' इसे भी पढ़ें- Veer Savarkar: महात्मा गांधी ने कहा था, 'भारत को वीर सावरकर के त्याग और देशभक्ति का बहुत जल्दी फायदा मिलेगा' 'आप पैसे की ताकत से सबकुछ नहीं खरीद सकते हैं' इसके साथ ही ओवैसी ने आने वाले चुनावों में उन लोगों के खिलाफ अपनी पार्टी की ओर से 'शेर' उम्मीदवारों को उतारने का ऐलान किया है, जो अपने गढ़ में पकड़ होने के दावे करते हैं। हैदराबाद के सांसद ने बिना किसी का नाम लिए कहा, 'आप पैसे की ताकत से सबकुछ नहीं खरीद सकते हैं, हमारे साथ अभी भी ऐसे लोग हैं, जो हमारे लिए वफादार हैं और उनके साथ मिलकर हम आपको हराएंगे। ' ओवैसी ने दावा किया कि उन्हें पैसे की ताकत से कोई नहीं खरीद सकता है।
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लीड्स, 09 जुलाई (वार्ता) इंग्लैंड ने हैरी ब्रूक (75) के अर्द्धशतक की बदौलत रोमांचक तीसरे एशेज़ टेस्ट में रविवार को ऑस्ट्रेलिया को तीन विकेट से हराकर शृंखला को जीवंत रखा।
ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड के सामने 251 रन का लक्ष्य रखा था, जिसे इंग्लैंड ने सात विकेट गंवाकर हासिल कर लिया। यह पांच मैचों की घरेलू एशेज़ शृंखला में इंग्लैंड की पहली जीत है और ऑस्ट्रेलियाई टीम अब सिर्फ 1-2 से आगे है।
इंग्लैंड की इस अत्यंत महत्वपूर्ण जीत में ब्रूक ने 93 गेंद पर नौ चौकों की मदद से 75 रन का योगदान दिया। इंग्लैंड ने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ब्रूक के रूप में अपना सातवां विकेट गंवाया, लेकिन क्रिस वोक्स (32 नाबाद) और मार्क वुड (16 नाबाद) ने 24 रन की बहुमूल्य साझेदारी कर मेज़बान टीम को जीत दिलाई।
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लीड्स, नौ जुलाई इंग्लैंड ने हैरी ब्रूक के अर्द्धशतक की बदौलत रोमांचक तीसरे एशेज़ टेस्ट में रविवार को ऑस्ट्रेलिया को तीन विकेट से हराकर शृंखला को जीवंत रखा। ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड के सामने दो सौ इक्यावन रन का लक्ष्य रखा था, जिसे इंग्लैंड ने सात विकेट गंवाकर हासिल कर लिया। यह पांच मैचों की घरेलू एशेज़ शृंखला में इंग्लैंड की पहली जीत है और ऑस्ट्रेलियाई टीम अब सिर्फ एक-दो से आगे है। इंग्लैंड की इस अत्यंत महत्वपूर्ण जीत में ब्रूक ने तिरानवे गेंद पर नौ चौकों की मदद से पचहत्तर रन का योगदान दिया। इंग्लैंड ने लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ब्रूक के रूप में अपना सातवां विकेट गंवाया, लेकिन क्रिस वोक्स और मार्क वुड ने चौबीस रन की बहुमूल्य साझेदारी कर मेज़बान टीम को जीत दिलाई।
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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की लगातार हो रही मुलाकातों और बातचीत पर लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के चिराग पासवान ने हमला बोला है। चिराग पासवान ने कहा कि दोनों के बीच हो रही मुलाकात पर पूछे गए सवाल में उन्होंने कहा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुर्सी बचाने के लिए इस तरह से लगातार मुलाकात कर रहे हैं। चिराग पासवान ने नीतीश कुमार पर दबाव की राजनीति करने और अवसर तलाशने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बंद कमरों में हो रही मुलाकात कुर्सी को बचाने को लेकर हो रही है। चिराग ने कहा कि आप मुख्यमंत्री हैं। आप जातिगत जनगणना कराएं। चिराग पासवान ने कहा कि नीतीश कुमार के घटक दल बीजेपी ने साफ कर दिया है कि वो जातिगत जनगणना नहीं कराएंगे।
लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के नेता चिराग पासवान ने कहा कि बंद कमरों में लगातार हो रही मुलाकातों का सीधा मतलब निकाला जा सकता है कि जेडीयू और आरजेडी के फॉर्मूले को दोबारा लागू करने का मन बना रहे हैं। इन नजदीकियों को क्या मतलब निकाला जाए? चिराग पासवान ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास समय है कि वो नेता प्रतिपक्ष के इफ्तार पार्टी में पैदल जाने का समय, एक एक घंटे बैठकर बात करने का समय है, लेकिन सिर मुडवाकर बैठे शिक्षकों के पास जाने का वक्त नहीं है। चिराग पासवान ने कहा कि भविष्य की राजनीति तय की जा रही है।
चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए तेजस्वी और लालू परिवार से नजदीकियों पर कहा कि ये मुलाकात भविष्य की राजनीति तय करने के लिए की जा रही है। उन्होंंने कहा, आपने पहले भी देखा 2015 में कि उन्होंने क्या किया, रातोंं रात तस्वीर बदल गई, किसी को कानों कान खबर नहीं हुई। चिराग पासवान ने कहा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए कुछ भी संभव है। चिराग ने कहा कि इतना वक्त निकाल के 19 लोगों के रोजगार की सोचते और जनता की समस्या का समाधान करते तो अच्छा होता।
चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीपीएससी परीक्षा के पेपर लीक पर नीतीश कुमार को आश्चर्य होता है, पुल हवा से गिर जाता है, सरकारी भवन में आग लग जाती है। उनको सभी में आश्चर्य होता है। चिराग ने कहा कि BPSC परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक से बिहार की छवि खराब हुई है। पूरे देश में बिहार का नाम खराब हुआ है और वो आश्चर्य व्यक्त करते हैं। चिराग पासवान ने कहा कि मुख्यमंत्री जी विश्वेश्वरैया भवन में आग लगी, वो देखने गए वो तो ये देखने गए थे कि सारे कागजात जल गए या नहीं।
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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की लगातार हो रही मुलाकातों और बातचीत पर लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के चिराग पासवान ने हमला बोला है। चिराग पासवान ने कहा कि दोनों के बीच हो रही मुलाकात पर पूछे गए सवाल में उन्होंने कहा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कुर्सी बचाने के लिए इस तरह से लगातार मुलाकात कर रहे हैं। चिराग पासवान ने नीतीश कुमार पर दबाव की राजनीति करने और अवसर तलाशने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बंद कमरों में हो रही मुलाकात कुर्सी को बचाने को लेकर हो रही है। चिराग ने कहा कि आप मुख्यमंत्री हैं। आप जातिगत जनगणना कराएं। चिराग पासवान ने कहा कि नीतीश कुमार के घटक दल बीजेपी ने साफ कर दिया है कि वो जातिगत जनगणना नहीं कराएंगे। लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के नेता चिराग पासवान ने कहा कि बंद कमरों में लगातार हो रही मुलाकातों का सीधा मतलब निकाला जा सकता है कि जेडीयू और आरजेडी के फॉर्मूले को दोबारा लागू करने का मन बना रहे हैं। इन नजदीकियों को क्या मतलब निकाला जाए? चिराग पासवान ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास समय है कि वो नेता प्रतिपक्ष के इफ्तार पार्टी में पैदल जाने का समय, एक एक घंटे बैठकर बात करने का समय है, लेकिन सिर मुडवाकर बैठे शिक्षकों के पास जाने का वक्त नहीं है। चिराग पासवान ने कहा कि भविष्य की राजनीति तय की जा रही है। चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए तेजस्वी और लालू परिवार से नजदीकियों पर कहा कि ये मुलाकात भविष्य की राजनीति तय करने के लिए की जा रही है। उन्होंंने कहा, आपने पहले भी देखा दो हज़ार पंद्रह में कि उन्होंने क्या किया, रातोंं रात तस्वीर बदल गई, किसी को कानों कान खबर नहीं हुई। चिराग पासवान ने कहा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए कुछ भी संभव है। चिराग ने कहा कि इतना वक्त निकाल के उन्नीस लोगों के रोजगार की सोचते और जनता की समस्या का समाधान करते तो अच्छा होता। चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि बीपीएससी परीक्षा के पेपर लीक पर नीतीश कुमार को आश्चर्य होता है, पुल हवा से गिर जाता है, सरकारी भवन में आग लग जाती है। उनको सभी में आश्चर्य होता है। चिराग ने कहा कि BPSC परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक से बिहार की छवि खराब हुई है। पूरे देश में बिहार का नाम खराब हुआ है और वो आश्चर्य व्यक्त करते हैं। चिराग पासवान ने कहा कि मुख्यमंत्री जी विश्वेश्वरैया भवन में आग लगी, वो देखने गए वो तो ये देखने गए थे कि सारे कागजात जल गए या नहीं।
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हमीरपुर - हमीरपुर मेडिकल कालेज के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर डा. आरती चौहान ने क्षेत्रीय अस्पताल में ज्वाइन कर लिया है। डा. आरती चौहान अब क्षेत्रीय अस्पताल के कमरा नंबर 404 में बैठ अपनी सेवाएं देंगी। इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने इस कमरे में रेनोवेशन का कार्य शुरू किया हुआ है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सावित्री कटवाल ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इसी माह के पहले सप्ताह में डा. आरती चौहान ने अस्पताल में अपनी ज्वाइनिंग दी है। असिस्टेंट प्रोफेसर डा. आरती गायनी विशेषज्ञ है। हमीरपुर के लिए राहत की बात यह है कि अब गायनी संबंधी बड़े आपरेशनों के लिए मरीजों को टांडा या शिमला के चक्कर नहीं काटने होंगे। जिला अस्पताल में भी सभी तरह की बड़ी सर्जरी हो पाएंगे। इसी फेहरिस्त में असिस्टेंट प्रो. डा. आरती ने ओटी में सर्जरी करना भी शुरू कर दी हैं। इससे विभिन्न तरह के रोगों से पीडि़त महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। डा. आरती गायनी विंग के स्पेशल केसों को ही देखरेख करेंगी। इसके अलावा मेडिकल कालेज के डेंटल विंग के लिए असिस्टेंट प्रो. डा. अनुप्रिया ने भी अस्पताल में ज्वाइन किया है। डा. सावित्री कटवाल ने बताया कि उनके लिए भी अस्पताल प्रशासन अलग से रूम तैयार कर रहा है। मौजूदा समय में डा. अनुप्रिया डेंटल विंग में बैठकर कर ही अपनी सेवाएं दे रही हैं। लिहाजा हमीरपुर मेडिकल कालेज के लिए भरे जाने वाले पदों में से दो ने अपनी ज्वाइनिंग दे दी है, जबकि कालेज के लिए बाकी रिक्त पदों का भरा जाना अभी शेष है। हमीरपुर मेडिकल कालेज को लेकर अस्पताल में तमाम तैयारियां भी तेज हो गई हैं। अस्पताल में एडिशनल अल्ट्रेशन के साथ रेनोवेशन का कार्य युद्धस्तर पर किया जारहा है। बर्न यूनिट व न्यू ब्लॉक बिल्डिंग सहित अस्पताल के अन्य हिस्सों में कंस्ट्रक्शन का कार्य चल रहा है। इसके अलावा क्षेत्रीय अस्पताल की बिल्डिंग के समीप मार्क किए गए 101 पेड़ों का कटान भी किया जा रहा है। इन पेड़ों के कटान के उपरांत उक्त स्थान पर नए भवनों का निर्माण किया जाना है, जहां मेडिकल कालेज की कक्षाएं आयोजित होंगी।
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हमीरपुर - हमीरपुर मेडिकल कालेज के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर डा. आरती चौहान ने क्षेत्रीय अस्पताल में ज्वाइन कर लिया है। डा. आरती चौहान अब क्षेत्रीय अस्पताल के कमरा नंबर चार सौ चार में बैठ अपनी सेवाएं देंगी। इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने इस कमरे में रेनोवेशन का कार्य शुरू किया हुआ है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. सावित्री कटवाल ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि इसी माह के पहले सप्ताह में डा. आरती चौहान ने अस्पताल में अपनी ज्वाइनिंग दी है। असिस्टेंट प्रोफेसर डा. आरती गायनी विशेषज्ञ है। हमीरपुर के लिए राहत की बात यह है कि अब गायनी संबंधी बड़े आपरेशनों के लिए मरीजों को टांडा या शिमला के चक्कर नहीं काटने होंगे। जिला अस्पताल में भी सभी तरह की बड़ी सर्जरी हो पाएंगे। इसी फेहरिस्त में असिस्टेंट प्रो. डा. आरती ने ओटी में सर्जरी करना भी शुरू कर दी हैं। इससे विभिन्न तरह के रोगों से पीडि़त महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। डा. आरती गायनी विंग के स्पेशल केसों को ही देखरेख करेंगी। इसके अलावा मेडिकल कालेज के डेंटल विंग के लिए असिस्टेंट प्रो. डा. अनुप्रिया ने भी अस्पताल में ज्वाइन किया है। डा. सावित्री कटवाल ने बताया कि उनके लिए भी अस्पताल प्रशासन अलग से रूम तैयार कर रहा है। मौजूदा समय में डा. अनुप्रिया डेंटल विंग में बैठकर कर ही अपनी सेवाएं दे रही हैं। लिहाजा हमीरपुर मेडिकल कालेज के लिए भरे जाने वाले पदों में से दो ने अपनी ज्वाइनिंग दे दी है, जबकि कालेज के लिए बाकी रिक्त पदों का भरा जाना अभी शेष है। हमीरपुर मेडिकल कालेज को लेकर अस्पताल में तमाम तैयारियां भी तेज हो गई हैं। अस्पताल में एडिशनल अल्ट्रेशन के साथ रेनोवेशन का कार्य युद्धस्तर पर किया जारहा है। बर्न यूनिट व न्यू ब्लॉक बिल्डिंग सहित अस्पताल के अन्य हिस्सों में कंस्ट्रक्शन का कार्य चल रहा है। इसके अलावा क्षेत्रीय अस्पताल की बिल्डिंग के समीप मार्क किए गए एक सौ एक पेड़ों का कटान भी किया जा रहा है। इन पेड़ों के कटान के उपरांत उक्त स्थान पर नए भवनों का निर्माण किया जाना है, जहां मेडिकल कालेज की कक्षाएं आयोजित होंगी।
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Libra Tula Arthik Rashifal Today 17 September 2022: आज आप दुविधा की स्थिति में खुद को असमंजस की स्थिति में पाएंगे। बैंक से जुड़े लेन-देन में बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है। आपकी संवाद और काम करने की क्षमता कारगर साबित होगी। जीवनसाथी के स्वास्थ्य को लेकर आप चिंतित रह सकते हैं। आज का दिन तुला राशि के लोगों के लिए लाभप्रद साबित होगा। पिता के सहयोग से धन लाभ हो सकता है। दिन की शुरुआत शानदार रहेगी। खाली समय का सदुपयोग करें। वाणी पर संयम बरतें।
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Libra Tula Arthik Rashifal Today सत्रह सितंबरtember दो हज़ार बाईस: आज आप दुविधा की स्थिति में खुद को असमंजस की स्थिति में पाएंगे। बैंक से जुड़े लेन-देन में बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है। आपकी संवाद और काम करने की क्षमता कारगर साबित होगी। जीवनसाथी के स्वास्थ्य को लेकर आप चिंतित रह सकते हैं। आज का दिन तुला राशि के लोगों के लिए लाभप्रद साबित होगा। पिता के सहयोग से धन लाभ हो सकता है। दिन की शुरुआत शानदार रहेगी। खाली समय का सदुपयोग करें। वाणी पर संयम बरतें।
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जैसा प्रबल विद्रोह किसी दलित जनता में भी नहीं होता। जगत् को जलाने के लिए उफनते ज्वालामुखी पर ढक्कन रखकर उसे दबा देने का प्रयत्न अभी नहीं हुआ था । ऐसा प्रयत्न हुआ भी होगा तो वह सफल नहीं हुआ था । ज्वालामुखी की ज्वाला से तो भोग देने पर ही छुटकारा था। रस-वृत्ति को उमंग को सन्तुष्ट करने पर हो उससे. छुटकारा मिलता है । यदि उसे सन्तुष्ट न किया जाय तो वह संस्कार को जला ढाले,. चारित्र्य को विगाढ़ दे और जीवन की आहुति कर उसे धधकता अंगार या बिल्कुल राख हो बना देती है। रस-वृत्ति का विरोध पुण्य नहीं है। जहाँ रस-वृत्ति को पूर्ण सन्तोष होता है, वहाँ महापुण्य प्रकट होता है । इस रस-वृत्ति को दवाने का जहाँ. प्रयत्न होता है, वहीं सैकड़ों पाप सताते रहते हैं ।
विजया ने ज्यों-ज्यों लालजी से सन्तुष्ट होने का प्रयत्न किया, त्यों त्यो उसको रस-वृत्ति अधिक तीव्र होती गई। उन और संस्कारों के बरावर न मिलने से पति-: पत्नी की रस-वृत्तियाँ एक नहीं हो सकतीं। एक होने के प्रयत्न में परस्पर टकराकर उनकी वृत्तियाँ आमने-सामने थककर बैठ जाती हैं। प्रेम की भूखी विजया को सततः प्रेमोपचार करने को लालजी में शक्ति न थी । और उसे भोगने की कोमलता भी उसमें नहीं थी । ज्यों-ज्यों वह जगदोश को भूलना चाहती, त्यों-त्यों वह उसकी स्मृति में अधिक स्पष्ट रूप में अंकित होता जाता । मानो लालजी का परिचय घटकर जगदोश को तरफ़ ममत्व और अपनापन बढ़ता जाता हो । लालजी पराया बन गया । पराया तो पहले हो से था, यह सत्य अधिक प्रवलता से हो प्रकट हुआ, कारण अपना पात्र बनाने लायक एक पुरुष उसे मिल गया था ।
अत्यन्त वेचैन विजया दो-तीन दिन से शाम को नियमित रूप से घूमने जाती थी । लालजी को कौंसिल के काम में दिलचस्पी हो गई थी। इसलिए वह उसीप्रवृत्ति में व्यस्त रहता था । प्रवृत्ति को भी आदत पड़ जाती है । मिलने की ज़रूरतः
• न होने पर भी उसे मनुष्यों से मिलते रहने की आदत पड़ गई थी । विजया अकेलो ही घूमने जाती थी। शहर के बाहर मोटर की गति बढ़वाकर उसकी तेज़ी अनुभव. करने में वह अपनी कुछ वेचैनी भूलने का प्रयत्न करतो थी । जगदोश को घर के के आगे से निकलते हुए विजया ने देखा। वह तैयार रखी हुई मोटर में जगदीश के पोछे गई, और उससे अपने साथ चलने को कहा। जगदीश यह चाहता ही था कि. वह शीघ्र भाग सके और उसने आमन्त्रण स्वीकार कर लिया। विजया की असन्तुष्ट
रस-वृत्ति ने रस - पात्र माने हुए व्यक्ति को अचानक अपनी बगल में ही देखा । आनन्द के उन्माद में यह रस-वृत्ति अमर्याद बनने लगी। रसिक और रस- पंडितों ने रसप्रदर्शन की मीमांसा करते हुए रस-शास्त्र रचा है । परकीया और सामान्या को वह भूला नहीं । इसमें मानवता प्रकट होती है । रस की शक्यता अनिर्धारित पात्रों में सम्भव है । रस और प्रेम का सच्चा रूप क्या होगा ?
नदी किनारे पहुँचने तक सूर्यास्त हो चुका था। जगदीश और विजया नीचे उतरे । इस समय दूसरे गोलार्ध को प्रकाश देने की तैयारी में सूर्य अपना तेज समेटकर क्षितिज के नीचे उतरने की तैयारी कर रहा था । पश्चिम- आकाश में आये हुए चादल सूर्य की रंगीन किरणों से रँगकर रंगीन वस्त्रों-जैसे मालूम होते थे । भेंट के लिए उत्सुक नदी का प्रशस्त पाट मानो बहुत दिनों में मिला हो, इस प्रकार पवन ज़ोर से उसके ऊपर मँडरा रहा था, और अति रसिक नायक का तूफ़ानी विलास मानो नदी को पसन्द हो, इस प्रकार वह अपनी लहरों को हवा के साथ अधिक आन्दोलित होने दे रही थी । किनारे के वृक्ष भो इस मस्त वातावरण का अनुमोदन करके, तेज़ी से बढ़ते हुए अन्धकार में, इससे भी अधिक तूफ़ान आवश्यक मानकर, आनन्द से हिल रहे थे।
पानी के पास पहुँचने के पहले कई टीले चढ़ने-उतरने पड़ते थे । एक टोला उतरते हुए जरा विजया का पैर फिसला । विजया ने फौरन पास चलते जगदीश का हाथ पकड़ लिया। उसने फिर हाथ नहीं छोड़ा । एक सो ज़मोन आने पर उसने अपने हाथ के ऊपर की वँगड़ी बताकर कहा - देखो जगदीश भाई, यह बँगड़ी कैसी है ? 'बहुत अच्छी है ।'
'यों विना देखे ही प्रशंसा न करो । तुम्हें यह पसन्द है ?'
'मैं ठीक कह रहा हूँ। मुझे बहुत पसन्द है ।'
'तुम यह बँगड़ी कोकिला बहिन को पहना दो न ? मैं यह तुम्हें भेंट करती हूँ ।' यह कहकर विजया हीरों की वँगड़ी निकालने लगी ।
'नहीं, नहीं, यह मुझसे न ली जायगी । उड़े वँगड़ी पहननी होगी तो मैं खुद खरीदकर ला दूँगा ।' जगदीश ने कहा ।
'पर देखो ।
कोकिला वहिन को वँगड़ी मैंने पहनी है तो मेरी वँगड़ो उन्हें पहकहकर विजया ने हाथ पर पहनी हुई दूसरी सादी वँगड़ी की
ही चाहिए ।'
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जैसा प्रबल विद्रोह किसी दलित जनता में भी नहीं होता। जगत् को जलाने के लिए उफनते ज्वालामुखी पर ढक्कन रखकर उसे दबा देने का प्रयत्न अभी नहीं हुआ था । ऐसा प्रयत्न हुआ भी होगा तो वह सफल नहीं हुआ था । ज्वालामुखी की ज्वाला से तो भोग देने पर ही छुटकारा था। रस-वृत्ति को उमंग को सन्तुष्ट करने पर हो उससे. छुटकारा मिलता है । यदि उसे सन्तुष्ट न किया जाय तो वह संस्कार को जला ढाले,. चारित्र्य को विगाढ़ दे और जीवन की आहुति कर उसे धधकता अंगार या बिल्कुल राख हो बना देती है। रस-वृत्ति का विरोध पुण्य नहीं है। जहाँ रस-वृत्ति को पूर्ण सन्तोष होता है, वहाँ महापुण्य प्रकट होता है । इस रस-वृत्ति को दवाने का जहाँ. प्रयत्न होता है, वहीं सैकड़ों पाप सताते रहते हैं । विजया ने ज्यों-ज्यों लालजी से सन्तुष्ट होने का प्रयत्न किया, त्यों त्यो उसको रस-वृत्ति अधिक तीव्र होती गई। उन और संस्कारों के बरावर न मिलने से पति-: पत्नी की रस-वृत्तियाँ एक नहीं हो सकतीं। एक होने के प्रयत्न में परस्पर टकराकर उनकी वृत्तियाँ आमने-सामने थककर बैठ जाती हैं। प्रेम की भूखी विजया को सततः प्रेमोपचार करने को लालजी में शक्ति न थी । और उसे भोगने की कोमलता भी उसमें नहीं थी । ज्यों-ज्यों वह जगदोश को भूलना चाहती, त्यों-त्यों वह उसकी स्मृति में अधिक स्पष्ट रूप में अंकित होता जाता । मानो लालजी का परिचय घटकर जगदोश को तरफ़ ममत्व और अपनापन बढ़ता जाता हो । लालजी पराया बन गया । पराया तो पहले हो से था, यह सत्य अधिक प्रवलता से हो प्रकट हुआ, कारण अपना पात्र बनाने लायक एक पुरुष उसे मिल गया था । अत्यन्त वेचैन विजया दो-तीन दिन से शाम को नियमित रूप से घूमने जाती थी । लालजी को कौंसिल के काम में दिलचस्पी हो गई थी। इसलिए वह उसीप्रवृत्ति में व्यस्त रहता था । प्रवृत्ति को भी आदत पड़ जाती है । मिलने की ज़रूरतः • न होने पर भी उसे मनुष्यों से मिलते रहने की आदत पड़ गई थी । विजया अकेलो ही घूमने जाती थी। शहर के बाहर मोटर की गति बढ़वाकर उसकी तेज़ी अनुभव. करने में वह अपनी कुछ वेचैनी भूलने का प्रयत्न करतो थी । जगदोश को घर के के आगे से निकलते हुए विजया ने देखा। वह तैयार रखी हुई मोटर में जगदीश के पोछे गई, और उससे अपने साथ चलने को कहा। जगदीश यह चाहता ही था कि. वह शीघ्र भाग सके और उसने आमन्त्रण स्वीकार कर लिया। विजया की असन्तुष्ट रस-वृत्ति ने रस - पात्र माने हुए व्यक्ति को अचानक अपनी बगल में ही देखा । आनन्द के उन्माद में यह रस-वृत्ति अमर्याद बनने लगी। रसिक और रस- पंडितों ने रसप्रदर्शन की मीमांसा करते हुए रस-शास्त्र रचा है । परकीया और सामान्या को वह भूला नहीं । इसमें मानवता प्रकट होती है । रस की शक्यता अनिर्धारित पात्रों में सम्भव है । रस और प्रेम का सच्चा रूप क्या होगा ? नदी किनारे पहुँचने तक सूर्यास्त हो चुका था। जगदीश और विजया नीचे उतरे । इस समय दूसरे गोलार्ध को प्रकाश देने की तैयारी में सूर्य अपना तेज समेटकर क्षितिज के नीचे उतरने की तैयारी कर रहा था । पश्चिम- आकाश में आये हुए चादल सूर्य की रंगीन किरणों से रँगकर रंगीन वस्त्रों-जैसे मालूम होते थे । भेंट के लिए उत्सुक नदी का प्रशस्त पाट मानो बहुत दिनों में मिला हो, इस प्रकार पवन ज़ोर से उसके ऊपर मँडरा रहा था, और अति रसिक नायक का तूफ़ानी विलास मानो नदी को पसन्द हो, इस प्रकार वह अपनी लहरों को हवा के साथ अधिक आन्दोलित होने दे रही थी । किनारे के वृक्ष भो इस मस्त वातावरण का अनुमोदन करके, तेज़ी से बढ़ते हुए अन्धकार में, इससे भी अधिक तूफ़ान आवश्यक मानकर, आनन्द से हिल रहे थे। पानी के पास पहुँचने के पहले कई टीले चढ़ने-उतरने पड़ते थे । एक टोला उतरते हुए जरा विजया का पैर फिसला । विजया ने फौरन पास चलते जगदीश का हाथ पकड़ लिया। उसने फिर हाथ नहीं छोड़ा । एक सो ज़मोन आने पर उसने अपने हाथ के ऊपर की वँगड़ी बताकर कहा - देखो जगदीश भाई, यह बँगड़ी कैसी है ? 'बहुत अच्छी है ।' 'यों विना देखे ही प्रशंसा न करो । तुम्हें यह पसन्द है ?' 'मैं ठीक कह रहा हूँ। मुझे बहुत पसन्द है ।' 'तुम यह बँगड़ी कोकिला बहिन को पहना दो न ? मैं यह तुम्हें भेंट करती हूँ ।' यह कहकर विजया हीरों की वँगड़ी निकालने लगी । 'नहीं, नहीं, यह मुझसे न ली जायगी । उड़े वँगड़ी पहननी होगी तो मैं खुद खरीदकर ला दूँगा ।' जगदीश ने कहा । 'पर देखो । कोकिला वहिन को वँगड़ी मैंने पहनी है तो मेरी वँगड़ो उन्हें पहकहकर विजया ने हाथ पर पहनी हुई दूसरी सादी वँगड़ी की ही चाहिए ।'
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रायपुर, (ब्यूरो छत्तीसगढ़)। राजधानी की पथम महिला महापौर डा0 श्रीमती किरणमयी नायक ने नगर पालिक निगम के स्वास्थ्य विभाग की ओर से समस्त राजधानीवासियें से जनहित में जनस्वास्थ्य सुरक्षा हेतु संत्रढामक रोगों की राजधानी निगम क्षेत्र के 70 वार्डो में कारगर रोकथाम करने सकिय व जागरूक रहकर अभियान में सहभागी बनने का नगरहित मेंसंकल्प लेने का आव्हान किया है। उन्होने कहा कि वायरस जनित रोंगों की कारगर रोकथाम हेतु मच्छरों से बचाव का उपाय करना सबसे महत्वपूर्ण हैं। महापौर डा0 श्रीमती नायक ने नागरिकों से मच्छरों से स्वयं का बचाव करने हेतु मच्छरदानी का उपयोग करने,जेट या मेट लगाने,अगरबत्ती जलाने,नीम की पत्तियों का धुंआ अथवा तेल जलाकर धुंवा करने, मच्छर रोधी दवाओं का लेप लगाने,संध्या केसमय पतिदिन खिडकी दरवाजे बंद करके या जाली लगाकर मच्छरों से बचाव का उपाय करने का जनस्वास्थ्य सुरक्षा हेतु उपाय करके संत्रढामक रोगों की कारगर रोकथाम में सत्रिढय व जागरूक सहयोग सकारात्मक सोच केसाथ देने का संकल्प लेने का भी आव्हान किया है। महापौर डा0 श्रीमती नायक ने निगम स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे राजधानी में मच्छरों को पनपने ही न देने के लिये विभिन्न उपाय करके सहज सहभागी जनहितकारी कार्य में बनने का पण लें । नागरिक अपने घरों के आस पास कहीं भी पानी काक जमाव न होने दें। अपने घरों की नालियों बगीचों की टंकिंयों को साप रखें एवं ढंक दें। नलों को रिसने न दें ताकि इससे इकटठे हुए पानी से मच्छर पनपने न पायें छत पर की टंकियों को साप करवाकर ढंक कर रखें कूलर सहित पानी केसभी बडे बरतनों को हर सप्ताह एकबार अनिवार्य रूप से साप करवायें। बरसात आने के पहले घरों के आस पास के गढढों को पाटने का पबंध करवायें ताकि इन गढढों में पानी का जमाव न होने पाये। बारिश या बेमौसम बारिश के दौरान पुराने टीन,टायर टूटे बरतनों आदि में पानी का जमाव न होने देना सुनिश्चित करवा लें । यदि आस पास के गढढों में पानी का जमाव दिखे तो उसमें मिटटी कातेल या जलें हुए इंधन का तेल का छिडकाव करवा दें । डीडीटी के छिडकाव में आगे आकर समाजहित में मच्छरों पर कारगर नियंत्रण पाने सत्रिढय सहभागी बनने का पण लें । लार्वाभक्षी गम्बूजियां मछलियां कुओं और तालाबों में डलवाने के जनहितकारी अभियान में जनस्वास्थ्य सुरक्षा हेतु राजधानी निगम क्षेत्र में सत्रिढय व जागरूक रहकर सहभागी बनने का पण लें।
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रायपुर, । राजधानी की पथम महिला महापौर डाशून्य श्रीमती किरणमयी नायक ने नगर पालिक निगम के स्वास्थ्य विभाग की ओर से समस्त राजधानीवासियें से जनहित में जनस्वास्थ्य सुरक्षा हेतु संत्रढामक रोगों की राजधानी निगम क्षेत्र के सत्तर वार्डो में कारगर रोकथाम करने सकिय व जागरूक रहकर अभियान में सहभागी बनने का नगरहित मेंसंकल्प लेने का आव्हान किया है। उन्होने कहा कि वायरस जनित रोंगों की कारगर रोकथाम हेतु मच्छरों से बचाव का उपाय करना सबसे महत्वपूर्ण हैं। महापौर डाशून्य श्रीमती नायक ने नागरिकों से मच्छरों से स्वयं का बचाव करने हेतु मच्छरदानी का उपयोग करने,जेट या मेट लगाने,अगरबत्ती जलाने,नीम की पत्तियों का धुंआ अथवा तेल जलाकर धुंवा करने, मच्छर रोधी दवाओं का लेप लगाने,संध्या केसमय पतिदिन खिडकी दरवाजे बंद करके या जाली लगाकर मच्छरों से बचाव का उपाय करने का जनस्वास्थ्य सुरक्षा हेतु उपाय करके संत्रढामक रोगों की कारगर रोकथाम में सत्रिढय व जागरूक सहयोग सकारात्मक सोच केसाथ देने का संकल्प लेने का भी आव्हान किया है। महापौर डाशून्य श्रीमती नायक ने निगम स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे राजधानी में मच्छरों को पनपने ही न देने के लिये विभिन्न उपाय करके सहज सहभागी जनहितकारी कार्य में बनने का पण लें । नागरिक अपने घरों के आस पास कहीं भी पानी काक जमाव न होने दें। अपने घरों की नालियों बगीचों की टंकिंयों को साप रखें एवं ढंक दें। नलों को रिसने न दें ताकि इससे इकटठे हुए पानी से मच्छर पनपने न पायें छत पर की टंकियों को साप करवाकर ढंक कर रखें कूलर सहित पानी केसभी बडे बरतनों को हर सप्ताह एकबार अनिवार्य रूप से साप करवायें। बरसात आने के पहले घरों के आस पास के गढढों को पाटने का पबंध करवायें ताकि इन गढढों में पानी का जमाव न होने पाये। बारिश या बेमौसम बारिश के दौरान पुराने टीन,टायर टूटे बरतनों आदि में पानी का जमाव न होने देना सुनिश्चित करवा लें । यदि आस पास के गढढों में पानी का जमाव दिखे तो उसमें मिटटी कातेल या जलें हुए इंधन का तेल का छिडकाव करवा दें । डीडीटी के छिडकाव में आगे आकर समाजहित में मच्छरों पर कारगर नियंत्रण पाने सत्रिढय सहभागी बनने का पण लें । लार्वाभक्षी गम्बूजियां मछलियां कुओं और तालाबों में डलवाने के जनहितकारी अभियान में जनस्वास्थ्य सुरक्षा हेतु राजधानी निगम क्षेत्र में सत्रिढय व जागरूक रहकर सहभागी बनने का पण लें।
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समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने आनंद स्वरूप उर्फ पप्पू यादव को समाजवादी पार्टी का जिलाध्यक्ष घोषित किया है। उन्होंने इस संबंध में गुरुवार को विज्ञप्ति जारी की है। इसके पूर्व सपा जिलाध्यक्ष पद का दायित्व एमएलसी महफूज खां के पास था। पप्पू यादव पिछले कई वर्षों से समाजवादी पार्टी में सेवा दे रहे हैं। उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए जिलाध्यक्ष का पद सौंपा गया है। वह मूल रूप से बेलसर ब्लॉक के डिडिसिया कला ग्राम पंचायत के निवासी हैं। उनकी नियुक्ति पर सपा के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने हर्ष व्यक्त किया है।
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समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल ने आनंद स्वरूप उर्फ पप्पू यादव को समाजवादी पार्टी का जिलाध्यक्ष घोषित किया है। उन्होंने इस संबंध में गुरुवार को विज्ञप्ति जारी की है। इसके पूर्व सपा जिलाध्यक्ष पद का दायित्व एमएलसी महफूज खां के पास था। पप्पू यादव पिछले कई वर्षों से समाजवादी पार्टी में सेवा दे रहे हैं। उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए जिलाध्यक्ष का पद सौंपा गया है। वह मूल रूप से बेलसर ब्लॉक के डिडिसिया कला ग्राम पंचायत के निवासी हैं। उनकी नियुक्ति पर सपा के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने हर्ष व्यक्त किया है।
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नई दिल्ली (एएनआई)। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि कैबिनेट ने एक महत्वकांक्षी परियोजना के लिए 76,000 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसके तहत भारत में सेमिकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने पर सरकार छह वर्षों के दौरान प्रोत्साहन राशि देगी। सरकार द्वारा जारी बयान के मुताबिक, इस परियोजना से विभिन्न सेक्टर लाभान्वित होंगे और वैश्विक स्तर पर उपयोगिता बढ़ेगी। इससे 2025 तक 5 ट्रिलियन डाॅलर जीडीपी का लक्ष हासिल करने में मदद मिलेगी।
केंद्रीय टेलीकाॅम एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस स्कीम के बारे में और जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इलेक्ट्राॅनिक्स के क्षेत्र में यह एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। इसके तहत देश में भी डिजाइन, फैब्रिकेशन, टेस्टिंग और पैकेजिंग का संपूर्ण इकोसिस्टम विकसित हो जाएगा। इसमें सरकार 76,000 करोड़ रुपये निवेश करेगी। पिछले सात वर्षों के दौरान देश में इलेक्ट्राॅनिक्स निर्माण 75 अरब डाॅलर का हो गया है। अगले छह वर्षों में उम्मीद है कि यह 300 अरब डाॅलर तक पहुंच जाएगा।
इसके अलावा केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कहा कि कैबिनेट ने यूपीआई और रूपे डेबिट कार्डों से डिजिटल ट्रांजेक्शन करने की एवज में 1,300 करोड़ रुपये की भरपाई के लिए भी मंजूरी दी है। मंत्री ने कहा कि रूपे डिबिट कार्ड और भीम यूपीआई से छोटे-छोटे डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है। इस पर केंद्र सरकार तकरीबन 1,300 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
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नई दिल्ली । केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि कैबिनेट ने एक महत्वकांक्षी परियोजना के लिए छिहत्तर,शून्य करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसके तहत भारत में सेमिकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने पर सरकार छह वर्षों के दौरान प्रोत्साहन राशि देगी। सरकार द्वारा जारी बयान के मुताबिक, इस परियोजना से विभिन्न सेक्टर लाभान्वित होंगे और वैश्विक स्तर पर उपयोगिता बढ़ेगी। इससे दो हज़ार पच्चीस तक पाँच ट्रिलियन डाॅलर जीडीपी का लक्ष हासिल करने में मदद मिलेगी। केंद्रीय टेलीकाॅम एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस स्कीम के बारे में और जानकारी देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इलेक्ट्राॅनिक्स के क्षेत्र में यह एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। इसके तहत देश में भी डिजाइन, फैब्रिकेशन, टेस्टिंग और पैकेजिंग का संपूर्ण इकोसिस्टम विकसित हो जाएगा। इसमें सरकार छिहत्तर,शून्य करोड़ रुपये निवेश करेगी। पिछले सात वर्षों के दौरान देश में इलेक्ट्राॅनिक्स निर्माण पचहत्तर अरब डाॅलर का हो गया है। अगले छह वर्षों में उम्मीद है कि यह तीन सौ अरब डाॅलर तक पहुंच जाएगा। इसके अलावा केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने कहा कि कैबिनेट ने यूपीआई और रूपे डेबिट कार्डों से डिजिटल ट्रांजेक्शन करने की एवज में एक,तीन सौ करोड़ रुपये की भरपाई के लिए भी मंजूरी दी है। मंत्री ने कहा कि रूपे डिबिट कार्ड और भीम यूपीआई से छोटे-छोटे डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है। इस पर केंद्र सरकार तकरीबन एक,तीन सौ करोड़ रुपये खर्च करेगी।
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नई दिल्ली॥ विशाखापत्तनम जिले के एजेंसी क्षेत्र में मदुगुला मंडल के गुदुतरु पंचायत के मलकापलेम गांव में मांस का सेवन करने से लगभग 70 ग्रामीणों बीमार हो गए। इनमें छह की हालात गंभीर बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि इन सभी ने रात में मृत जानवर के मांस का सेवन किया था। गंभीर रूप से बीमार लोगों को पडरु जिला अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है, जबकि कुछ लोगों का इलाज स्थानीय सरकारी अस्पताल में चल रहा है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार गांव में लोगों ने कल रात मरे जानवार का मांस पकाया कर पूरे गांव के लोगों ने दावत की थी। देर रात इन सभी को तेज़ बुखार, पेट में दर्द, उल्टी और बदन दर्द की शिकायत हुई। इसके बाद बीमार लोगों को स्थानीय अस्पताल पहुंचाया गया। लोगों ने बताया कि इन सभी ने मरी गाय का मांस का सेवन किया था। हालांकि गाय का मांस होने की अधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पडरू की विधायक भाग्य लक्ष्मी ने गुरुवार की सुबह अस्पताल का दौरा किया और मरीज़ों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। विधायक ने डॉक्टरों को पीड़ितों को बेहतर इलाज मुहैया कराने का निर्देश दिया है। इनमें कई गंभीर लोगों को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया है।
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नई दिल्ली॥ विशाखापत्तनम जिले के एजेंसी क्षेत्र में मदुगुला मंडल के गुदुतरु पंचायत के मलकापलेम गांव में मांस का सेवन करने से लगभग सत्तर ग्रामीणों बीमार हो गए। इनमें छह की हालात गंभीर बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि इन सभी ने रात में मृत जानवर के मांस का सेवन किया था। गंभीर रूप से बीमार लोगों को पडरु जिला अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है, जबकि कुछ लोगों का इलाज स्थानीय सरकारी अस्पताल में चल रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार गांव में लोगों ने कल रात मरे जानवार का मांस पकाया कर पूरे गांव के लोगों ने दावत की थी। देर रात इन सभी को तेज़ बुखार, पेट में दर्द, उल्टी और बदन दर्द की शिकायत हुई। इसके बाद बीमार लोगों को स्थानीय अस्पताल पहुंचाया गया। लोगों ने बताया कि इन सभी ने मरी गाय का मांस का सेवन किया था। हालांकि गाय का मांस होने की अधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पडरू की विधायक भाग्य लक्ष्मी ने गुरुवार की सुबह अस्पताल का दौरा किया और मरीज़ों के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली। विधायक ने डॉक्टरों को पीड़ितों को बेहतर इलाज मुहैया कराने का निर्देश दिया है। इनमें कई गंभीर लोगों को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया है।
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इस महिला को देखकर कोई कह नहीं सकता कि ये कभी अपना वजन कम कर सकती है। पर उसने किया। वो भी 362 किलो।
444 साल की इस महिला का नाम मायरा रोजेल्स है। वो 34 साल की है और अब से कुछ दिनों पहले तक उनके बदन का वो हाल था कि कोई भी देखकर डर जाए। सभी तस्वीरें मिरर से।
वजन के कारण हमेशा से बिस्तर में ही पड़े रहने वाली मायरा के ऊपर साल 2008 में उन्हीं के बहन के बेटे को मारने का आरोप था।
कहा गया कि मायरा ने अपने वजन तले उसे दबाकर मार डाला। हालांकि ऑटोप्सी की रिपोर्ट आते ही पता लगा लिया गया उसकी मौत सिर में लगी एक चोट के कारण हुआ था।
इस घटना ने काफी सुर्खियां बटोरीं और ये पता चल गया कि उस लड़के की मौत की असली वजह उसकी मां जेमी ही थी। जेमी को 15 साल की कैद हो गई।
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इस महिला को देखकर कोई कह नहीं सकता कि ये कभी अपना वजन कम कर सकती है। पर उसने किया। वो भी तीन सौ बासठ किलो। चार सौ चौंतालीस साल की इस महिला का नाम मायरा रोजेल्स है। वो चौंतीस साल की है और अब से कुछ दिनों पहले तक उनके बदन का वो हाल था कि कोई भी देखकर डर जाए। सभी तस्वीरें मिरर से। वजन के कारण हमेशा से बिस्तर में ही पड़े रहने वाली मायरा के ऊपर साल दो हज़ार आठ में उन्हीं के बहन के बेटे को मारने का आरोप था। कहा गया कि मायरा ने अपने वजन तले उसे दबाकर मार डाला। हालांकि ऑटोप्सी की रिपोर्ट आते ही पता लगा लिया गया उसकी मौत सिर में लगी एक चोट के कारण हुआ था। इस घटना ने काफी सुर्खियां बटोरीं और ये पता चल गया कि उस लड़के की मौत की असली वजह उसकी मां जेमी ही थी। जेमी को पंद्रह साल की कैद हो गई।
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मुंबई। संगीतकार जावेद अख्तर की ओर से दायर मानहानि केस में अभिनेत्री कंगना रणौत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मुंबई की मेट्रोपॉलिटन अदालत ने कंगना के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। कंगना के खिलाफ यह वारंट मानहानि मामले में कोर्ट में पेश न होने की वजह से जारी हुआ है। बता दें कि जावेद अख्तर ने कंगना रणौत पर टेलीविजन इंटरव्यू में कथित रूप से उनके खिलाफ मानहानि करने वाली और निराधार टिप्पणियां करने पर पिछले साल नवंबर में अंधेरी मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी।
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मुंबई। संगीतकार जावेद अख्तर की ओर से दायर मानहानि केस में अभिनेत्री कंगना रणौत की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मुंबई की मेट्रोपॉलिटन अदालत ने कंगना के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। कंगना के खिलाफ यह वारंट मानहानि मामले में कोर्ट में पेश न होने की वजह से जारी हुआ है। बता दें कि जावेद अख्तर ने कंगना रणौत पर टेलीविजन इंटरव्यू में कथित रूप से उनके खिलाफ मानहानि करने वाली और निराधार टिप्पणियां करने पर पिछले साल नवंबर में अंधेरी मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी।
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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मंगलवार को मैनहट्टन कोर्ट में पेश होने वाले हैं. इससे ठीक पहले उनका मगशॉट लिया जा सकता है. साल 2016 में पोर्न फिल्म स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स के साथ अपना अफेयर छिपाने के एवज में उन्हें गुप्त रूप से दी गई धनराशि के मामले में न्यूयॉर्क की मैनहट्टन कोर्ट में पेश होना है. अमेरिका में मगशॉट कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा ली गई एक तस्वीर है. जब किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है और उस पर मामला दर्ज किया जाता है तब एंजेसी मगशॉट लेती है.
आपराधिक आरोप का सामना करने वाले पहले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप (76) मंगलवार को दोपहर 2. 15 बजे ईएसटी (रात 11. 45 बजे आईएसटी) में न्यायाधीश जुआन मर्चेन के सामने पेश होंगे. अभी हाल ही में बीते गुरुवार को ग्रैंड ज्यूरी ने Hush Money Case में उनके ऊपर अभियोग लगाया था. ट्रंप ने इन आरोपों से इन्कार किया है और उन्होंने एक रिपब्लिकन के तौर पर घोषणा की है कि वह 2024 में अगले राष्ट्रपति चुनाव में भी हिस्सा लेंगे.
White House के पूर्व उप प्रेस सचिव और उनके अभियान के प्रवक्ता होगन गिडले ने इंटरव्यू में ट्रंप के मगशॉट को लेकर कहा, मैं इसे देखने से पहले ही कह सकता हूं कि रिकॉर्ड के लिए लिया जाने वाला ये मगशॉट निश्चित रूप से most manly, most masculine, most handsome mugshot होगा.
न्यू यॉर्क के कानून में चार साल पहले संशोधन किया गया था. इस संशोधन के मुताबिक, जब तक कि पुलिस यह तय नहीं करती है कि किसी की फोटो जारी करने के लिए कोई वैध कानूनी वजह है, तब तक फोटो को जारी करने पर रोक लगा दी है. ऐसे में ट्रंप का मगशॉट भी जारी नहीं किया जाएगा. अल्बानी टाइम्स यूनियन के अनुसार, न्यूयॉर्क के कानून में चार साल पहले संशोधन किया गया था, जब तक कि पुलिस यह निर्धारित नहीं करती कि किसी व्यक्ति की फोटो जारी करने के लिए वैध वजह है, तब तक के लिए ऐसी फोटो जारी करने पर रोक लगा दी जाती है. वही The Daily की रिपोर्ट के मुताबिक भी ट्रम्प की बुकिंग फोटो को तब तक सार्वजनिक नहीं किया जा सकता जब तक कि वह इसे जारी करने का फैसला नहीं करते हैं.
वहीं, इस मामले में कई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मगशॉट को एक राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. द यूनियन अखबार ने बताया कि हार्वर्ड लॉ स्कूल के पूर्व प्रोफेसर एलन डर्शोविट्ज़ ने पिछले हफ्ते कई इंटरव्यू में कहा था कि ट्रम्प को टी-शर्ट और पोस्टर पर अपनी बुकिंग (Mugshot) की तस्वीर लगानी चाहिए और उन्हें अपने 2024 के राष्ट्रपति अभियान के लिए इसके जरिए समर्थन लेना चाहिए.
ट्रम्प के मंगलवार को मैनहट्टन कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करने की उम्मीद है. कानून प्रक्रिया के तहत उनका मगशॉट लिया जा सकता है, जैसा कि इस तरह की सभी गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण में एक अनिवार्य प्रक्रिया रही है. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ट्रंप पर 30 मामलों में चार्ज लगाए जाने की उम्मीद है. वहीं दूसरी ओर ट्रंप के वकीलों ने सोमवार को न्यायाधीश जुआन मर्चेन से अदालत में कैमरों की अनुमति नहीं देने का आग्रह किया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कोर्ट रूम में कैमरे की अनुमति नहीं मिलेगी. न्यूयॉर्क राज्य के एक लंबे समय से चले आ रहे कानून को ध्यान में रखते हुए कुछ विश्वसनीय पत्रकारों को अंदर जरूर जाने दिया जाएगा.
रिपोर्ट में कहा गया है, "यह भी स्पष्ट नहीं है कि ट्रम्प को कोर्टहाउस पर्प वॉक करनी होगी या उन्हें किसी निजी प्रवेश द्वार से ले जाया जाएगा. कोर्ट में आरोप सुनाए जाने के बाद, ट्रम्प के फ्लोरिडा में अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में वापस जाने की उम्मीद है. उनके ऑफिस की ओर से बताया गया है कि वह देर रात प्रेस को संबोधित करेंगे. रिपोर्ट कहती है कि "ट्रम्प अपने अभियोग को एक बड़े प्रतीक में बदलना चाहते हैं, खुद को रूढ़िवादी अमेरिकियों से जोड़ना चाहते हैं जो अपने विचारों के लिए अलग-थलग महसूस करते हैं. "
वहीं गिडले के हवाले से कहा गया, "एक हथियारबंद सरकार ने अब सारी आशंकाएं और चिंताएं डोनाल्ड ट्रम्प पर जता दी हैं. उन्हें यह डर है कि ट्रंप इसके जरिए ऐसे मंच पर खड़े हो जाएंगे, जहां से वह मुखर तरीके से कह सकते हैं कि हम सभी उस सरकार के शिकार हैं जिसने हमें हमेशा अपना निशाना बनाया है. उनके मुताबिक, हम गलत रैलियों में जाते हैं, गलत ट्वीट करते हैं और गलत फिल्में देखते हैं.
क्या है मगशॉट ?
अमेरिका में हर अपराधी के मगशॉट लिए जाते हैं. ट्रंप के केस में अभी अटकलें है कि उनके फिंगर प्रिंट लिए जाएंगे और इसके बाद मग शॉट लिया जाएगा. मग शॉट में चेहरे की सामने से फोटो ली जाती है और एक फोटो साइड प्रोफाइल से ली जाती है. अगर ट्रंप के साथ ऐसा होता है तो अमेरिका के इतिहास में ये पहली बार होगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाला कोई व्यक्ति इस तरह की प्रक्रिया से गुजरेगा.
मैनहट्टन कोर्ट में मंगलवार को जब ट्रंप अरेन्मेंट प्रक्रिया (आरोप सुनाए जाने की प्रक्रिया) का सामना करेंगे, उस समय कोर्ट में ब्रॉडकास्ट मीडिया की मौजूदगी नहीं रहेगी.
न्यू यॉर्क सुप्रीम कोर्ट के जज जुआन मर्चेन ने इस बारे में फैसला सुनाते हुए कहा है कि समाचार आउटलेट्स को मंगलवार को मैनहट्टन की अदालत में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ऐतिहासिक अभियोग को प्रसारित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
आपराधिक आरोप का सामना करने वाले पहले पूर्व राष्ट्रपति 76 वर्षीय ट्रंप कड़ी सुरक्षा के बीच मंगलवार दोपहर 2. 15 बजे ईएसटी (रात 11. 45 बजे आईएसटी) जज मर्चेन के सामने पेश होंगे. बता दें कि फेडरल ग्रैंड ज्यूरी ने 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स को एक कथित मामले को गुप्त रखने के लिए 1. 30 लाख डॉलर की रकम देने के संबंध में गुरुवार को अभियोग लगाया था. इसी के बाद मंगलवार 4 अप्रैल को ट्रंप कोर्ट में पेश होने वाले हैं. इस दौरान न्यूयॉर्क सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मर्चन ने कार्यवाही प्रसारित करने की अनुमति के लिए कई मीडिया संगठनों के अनुरोध को खारिज कर दिया. हालांकि सुनवाई शुरू होने से पहले पांच स्टिल फोटोग्राफर्स को ट्रंप और कोर्टरूम की तस्वीरें लेने की इजाजत होगी. सीएनएन ने बताया कि ट्रम्प का आरोप एक सार्वजनिक कार्यवाही है, लेकिन समाचार कैमरों को आमतौर पर अदालत कक्ष के अंदर से ब्रॉडकास्टिंग की अनुमति नहीं है.
प्रसारण के अनुरोध को अस्वीकार करते हुए, जज मर्चेन ने इस कार्यवाही के ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए कड़े शब्दों में लिखा, यह अभियोग यादगार के तौर पर जाना जाएगा, ऐसे में इसे विवादित नहीं बनाया जा सकता है. यह एक ऐसा मामला है, जो इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ है. न तो पद पर रहते हुए और न ही किसी पूर्व राष्ट्रपति पर ऐसे अभियोग लगाए गए हैं, जिसके खिलाफ आपराधिक मामला चलाया जाए. उन्होंने लिखा कि इस अभियोग में ट्रंप का नाम जुड़ा होने और उनके संभावित अपमान ने मीडिया का ध्यान आकर्षित किया है. लोग सबसे सटीक जानकारी पाने के लिए आतुर हैं, लेकिन ऐसा कोई भी सुझाव देना कपटता होगी.
इससे पहले सोमवार को ट्रंप के वकीलों ने जज से कोर्ट रूम में कैमरों के लिए मीडिया के अनुरोध को खारिज करने का आग्रह किया था. अदालत कक्ष में कैमरे लगाने की कोशिश करने वाले मीडिया आउटलेट्स ने तर्क दिया था कि "इस कार्यवाही की गंभीरता और इसके परिणाम के व्यापक तौर पर सार्वजनिक पहुंच की जरूरत को कम में नहीं आंका जा सकता है.
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पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मंगलवार को मैनहट्टन कोर्ट में पेश होने वाले हैं. इससे ठीक पहले उनका मगशॉट लिया जा सकता है. साल दो हज़ार सोलह में पोर्न फिल्म स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स के साथ अपना अफेयर छिपाने के एवज में उन्हें गुप्त रूप से दी गई धनराशि के मामले में न्यूयॉर्क की मैनहट्टन कोर्ट में पेश होना है. अमेरिका में मगशॉट कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा ली गई एक तस्वीर है. जब किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है और उस पर मामला दर्ज किया जाता है तब एंजेसी मगशॉट लेती है. आपराधिक आरोप का सामना करने वाले पहले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को दोपहर दो. पंद्रह बजे ईएसटी में न्यायाधीश जुआन मर्चेन के सामने पेश होंगे. अभी हाल ही में बीते गुरुवार को ग्रैंड ज्यूरी ने Hush Money Case में उनके ऊपर अभियोग लगाया था. ट्रंप ने इन आरोपों से इन्कार किया है और उन्होंने एक रिपब्लिकन के तौर पर घोषणा की है कि वह दो हज़ार चौबीस में अगले राष्ट्रपति चुनाव में भी हिस्सा लेंगे. White House के पूर्व उप प्रेस सचिव और उनके अभियान के प्रवक्ता होगन गिडले ने इंटरव्यू में ट्रंप के मगशॉट को लेकर कहा, मैं इसे देखने से पहले ही कह सकता हूं कि रिकॉर्ड के लिए लिया जाने वाला ये मगशॉट निश्चित रूप से most manly, most masculine, most handsome mugshot होगा. न्यू यॉर्क के कानून में चार साल पहले संशोधन किया गया था. इस संशोधन के मुताबिक, जब तक कि पुलिस यह तय नहीं करती है कि किसी की फोटो जारी करने के लिए कोई वैध कानूनी वजह है, तब तक फोटो को जारी करने पर रोक लगा दी है. ऐसे में ट्रंप का मगशॉट भी जारी नहीं किया जाएगा. अल्बानी टाइम्स यूनियन के अनुसार, न्यूयॉर्क के कानून में चार साल पहले संशोधन किया गया था, जब तक कि पुलिस यह निर्धारित नहीं करती कि किसी व्यक्ति की फोटो जारी करने के लिए वैध वजह है, तब तक के लिए ऐसी फोटो जारी करने पर रोक लगा दी जाती है. वही The Daily की रिपोर्ट के मुताबिक भी ट्रम्प की बुकिंग फोटो को तब तक सार्वजनिक नहीं किया जा सकता जब तक कि वह इसे जारी करने का फैसला नहीं करते हैं. वहीं, इस मामले में कई राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मगशॉट को एक राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. द यूनियन अखबार ने बताया कि हार्वर्ड लॉ स्कूल के पूर्व प्रोफेसर एलन डर्शोविट्ज़ ने पिछले हफ्ते कई इंटरव्यू में कहा था कि ट्रम्प को टी-शर्ट और पोस्टर पर अपनी बुकिंग की तस्वीर लगानी चाहिए और उन्हें अपने दो हज़ार चौबीस के राष्ट्रपति अभियान के लिए इसके जरिए समर्थन लेना चाहिए. ट्रम्प के मंगलवार को मैनहट्टन कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करने की उम्मीद है. कानून प्रक्रिया के तहत उनका मगशॉट लिया जा सकता है, जैसा कि इस तरह की सभी गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण में एक अनिवार्य प्रक्रिया रही है. मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ट्रंप पर तीस मामलों में चार्ज लगाए जाने की उम्मीद है. वहीं दूसरी ओर ट्रंप के वकीलों ने सोमवार को न्यायाधीश जुआन मर्चेन से अदालत में कैमरों की अनुमति नहीं देने का आग्रह किया. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कोर्ट रूम में कैमरे की अनुमति नहीं मिलेगी. न्यूयॉर्क राज्य के एक लंबे समय से चले आ रहे कानून को ध्यान में रखते हुए कुछ विश्वसनीय पत्रकारों को अंदर जरूर जाने दिया जाएगा. रिपोर्ट में कहा गया है, "यह भी स्पष्ट नहीं है कि ट्रम्प को कोर्टहाउस पर्प वॉक करनी होगी या उन्हें किसी निजी प्रवेश द्वार से ले जाया जाएगा. कोर्ट में आरोप सुनाए जाने के बाद, ट्रम्प के फ्लोरिडा में अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में वापस जाने की उम्मीद है. उनके ऑफिस की ओर से बताया गया है कि वह देर रात प्रेस को संबोधित करेंगे. रिपोर्ट कहती है कि "ट्रम्प अपने अभियोग को एक बड़े प्रतीक में बदलना चाहते हैं, खुद को रूढ़िवादी अमेरिकियों से जोड़ना चाहते हैं जो अपने विचारों के लिए अलग-थलग महसूस करते हैं. " वहीं गिडले के हवाले से कहा गया, "एक हथियारबंद सरकार ने अब सारी आशंकाएं और चिंताएं डोनाल्ड ट्रम्प पर जता दी हैं. उन्हें यह डर है कि ट्रंप इसके जरिए ऐसे मंच पर खड़े हो जाएंगे, जहां से वह मुखर तरीके से कह सकते हैं कि हम सभी उस सरकार के शिकार हैं जिसने हमें हमेशा अपना निशाना बनाया है. उनके मुताबिक, हम गलत रैलियों में जाते हैं, गलत ट्वीट करते हैं और गलत फिल्में देखते हैं. क्या है मगशॉट ? अमेरिका में हर अपराधी के मगशॉट लिए जाते हैं. ट्रंप के केस में अभी अटकलें है कि उनके फिंगर प्रिंट लिए जाएंगे और इसके बाद मग शॉट लिया जाएगा. मग शॉट में चेहरे की सामने से फोटो ली जाती है और एक फोटो साइड प्रोफाइल से ली जाती है. अगर ट्रंप के साथ ऐसा होता है तो अमेरिका के इतिहास में ये पहली बार होगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ लेने वाला कोई व्यक्ति इस तरह की प्रक्रिया से गुजरेगा. मैनहट्टन कोर्ट में मंगलवार को जब ट्रंप अरेन्मेंट प्रक्रिया का सामना करेंगे, उस समय कोर्ट में ब्रॉडकास्ट मीडिया की मौजूदगी नहीं रहेगी. न्यू यॉर्क सुप्रीम कोर्ट के जज जुआन मर्चेन ने इस बारे में फैसला सुनाते हुए कहा है कि समाचार आउटलेट्स को मंगलवार को मैनहट्टन की अदालत में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ऐतिहासिक अभियोग को प्रसारित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. आपराधिक आरोप का सामना करने वाले पहले पूर्व राष्ट्रपति छिहत्तर वर्षीय ट्रंप कड़ी सुरक्षा के बीच मंगलवार दोपहर दो. पंद्रह बजे ईएसटी जज मर्चेन के सामने पेश होंगे. बता दें कि फेडरल ग्रैंड ज्यूरी ने दो हज़ार सोलह में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से पहले पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स को एक कथित मामले को गुप्त रखने के लिए एक. तीस लाख डॉलर की रकम देने के संबंध में गुरुवार को अभियोग लगाया था. इसी के बाद मंगलवार चार अप्रैल को ट्रंप कोर्ट में पेश होने वाले हैं. इस दौरान न्यूयॉर्क सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मर्चन ने कार्यवाही प्रसारित करने की अनुमति के लिए कई मीडिया संगठनों के अनुरोध को खारिज कर दिया. हालांकि सुनवाई शुरू होने से पहले पांच स्टिल फोटोग्राफर्स को ट्रंप और कोर्टरूम की तस्वीरें लेने की इजाजत होगी. सीएनएन ने बताया कि ट्रम्प का आरोप एक सार्वजनिक कार्यवाही है, लेकिन समाचार कैमरों को आमतौर पर अदालत कक्ष के अंदर से ब्रॉडकास्टिंग की अनुमति नहीं है. प्रसारण के अनुरोध को अस्वीकार करते हुए, जज मर्चेन ने इस कार्यवाही के ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए कड़े शब्दों में लिखा, यह अभियोग यादगार के तौर पर जाना जाएगा, ऐसे में इसे विवादित नहीं बनाया जा सकता है. यह एक ऐसा मामला है, जो इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ है. न तो पद पर रहते हुए और न ही किसी पूर्व राष्ट्रपति पर ऐसे अभियोग लगाए गए हैं, जिसके खिलाफ आपराधिक मामला चलाया जाए. उन्होंने लिखा कि इस अभियोग में ट्रंप का नाम जुड़ा होने और उनके संभावित अपमान ने मीडिया का ध्यान आकर्षित किया है. लोग सबसे सटीक जानकारी पाने के लिए आतुर हैं, लेकिन ऐसा कोई भी सुझाव देना कपटता होगी. इससे पहले सोमवार को ट्रंप के वकीलों ने जज से कोर्ट रूम में कैमरों के लिए मीडिया के अनुरोध को खारिज करने का आग्रह किया था. अदालत कक्ष में कैमरे लगाने की कोशिश करने वाले मीडिया आउटलेट्स ने तर्क दिया था कि "इस कार्यवाही की गंभीरता और इसके परिणाम के व्यापक तौर पर सार्वजनिक पहुंच की जरूरत को कम में नहीं आंका जा सकता है.
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अगर कोई गंभीर चोट लगती है तो इसके इलाज के दौरान टांके लगाए जाते हैं। घाव भरने के बाद ये टांके तो हटा दिए जाते हैं, लेकिन इनके जिद्दी निशान टस से मस नहीं होते हैं। टांकों के निशान देखने में बहुत ही अजीब लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें हटाने के सुरक्षित उपाय खोजते रहते हैं। अगर आप भी उन्हीं लोगों में से एक हैं तो आइए आज हम आपको इसके लिए कुछ असरदार घरेलू नुस्खे बताते हैं।
टांकों के निशान हटाने में एलोवेरा काफी मदद कर सकता है। लाभ के लिए एक कटोरी में एलोवेरा के पत्ते से जेल निकालें और इससे टांकों के निशानों पर हल्के हाथों से मसाज करें। 15 मिनट बाद त्वचा को गुनगुने पानी से धो लें। अच्छे नतीजों के लिए इस उपाय को दिन में एक या दो बार दोहराएं और जब तक निशान हल्के न लगने लगें, तब तक हर रोज एलोवेरा जेल प्रभावित हिस्से पर लगाएं।
नींबू का रस विटामिन-C से समृद्ध होता है जो टांके के निशान को हल्का करने में मदद कर सकता है। इसके लिए सबसे पहले एक कॉटन के पैड या रूई को नींबू के रस में डुबोएं और फिर इसे कुछ देर के लिए टांकों के निशानों पर लगाएं। इसके बाद नींबू के रस को गीले तौलिये से साफ करके त्वचा पर मॉइश्चराइजर लगा लें। इसे रोजाना दो या तीन बार तक उपयोग कर सकते हैं।
टांकों के निशानों को हटाने के लिए आलू के रस का इस्तेमाल करना भी कारगर साबित हो सकता है क्योंकि इसमें फाइटोकेमिकल्स होते हैं जो निशान को हल्का करने में मदद कर सकते हैं। लाभ के लिए एक कच्चे आलू को बारीक कद्दूकस करके उसे एक कटोरी में निचोड़ लें, फिर एक कॉटन पैड की मदद से इसको त्वचा की प्रभावित जगह पर लगाकर 10 मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद त्वचा को गीले तौलिये से साफ कर लें।
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अगर कोई गंभीर चोट लगती है तो इसके इलाज के दौरान टांके लगाए जाते हैं। घाव भरने के बाद ये टांके तो हटा दिए जाते हैं, लेकिन इनके जिद्दी निशान टस से मस नहीं होते हैं। टांकों के निशान देखने में बहुत ही अजीब लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें हटाने के सुरक्षित उपाय खोजते रहते हैं। अगर आप भी उन्हीं लोगों में से एक हैं तो आइए आज हम आपको इसके लिए कुछ असरदार घरेलू नुस्खे बताते हैं। टांकों के निशान हटाने में एलोवेरा काफी मदद कर सकता है। लाभ के लिए एक कटोरी में एलोवेरा के पत्ते से जेल निकालें और इससे टांकों के निशानों पर हल्के हाथों से मसाज करें। पंद्रह मिनट बाद त्वचा को गुनगुने पानी से धो लें। अच्छे नतीजों के लिए इस उपाय को दिन में एक या दो बार दोहराएं और जब तक निशान हल्के न लगने लगें, तब तक हर रोज एलोवेरा जेल प्रभावित हिस्से पर लगाएं। नींबू का रस विटामिन-C से समृद्ध होता है जो टांके के निशान को हल्का करने में मदद कर सकता है। इसके लिए सबसे पहले एक कॉटन के पैड या रूई को नींबू के रस में डुबोएं और फिर इसे कुछ देर के लिए टांकों के निशानों पर लगाएं। इसके बाद नींबू के रस को गीले तौलिये से साफ करके त्वचा पर मॉइश्चराइजर लगा लें। इसे रोजाना दो या तीन बार तक उपयोग कर सकते हैं। टांकों के निशानों को हटाने के लिए आलू के रस का इस्तेमाल करना भी कारगर साबित हो सकता है क्योंकि इसमें फाइटोकेमिकल्स होते हैं जो निशान को हल्का करने में मदद कर सकते हैं। लाभ के लिए एक कच्चे आलू को बारीक कद्दूकस करके उसे एक कटोरी में निचोड़ लें, फिर एक कॉटन पैड की मदद से इसको त्वचा की प्रभावित जगह पर लगाकर दस मिनट के लिए छोड़ दें। इसके बाद त्वचा को गीले तौलिये से साफ कर लें।
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इम्फालः आज राहुल गाँधी ने मणिपुर की राजधानी इम्फाल में एक चुनावी रैली को संबोधित किया और उत्तर प्रदेश की तरफ सपने दिखाए और मोदी पर जमकर हमला किया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मणिपुर में कांग्रेस की लगातार 15 वर्षों से सरकार है। इसके अलावा ढाई साल पहले लगातार 10 साल तक कांग्रेस की केंद्र में भी सरकार थी, मतलब कांग्रेस की केंद्र और राज्य दोनों में सरकार थी, अगर कांग्रेस चाहती तो मणिपुर को दुनिया का सबसे विकसित राज्य बना सकती थी लेकिन आज की रैली के राहुल गाँधी ने मणिपुर की जनता को वही अपने दिखाए जो उत्तर प्रदेश की जनता को दिखा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में राहुल गाँधी वादे करते हैं कि हम चाहते हैं कि आम पर मेड इन लखनऊ लिखा हो, जैकेट पर मेड इन कानपुर लिखा हो, हम सरकार में आने के बाद सभी युवाओं को घर घर जाकर पैसे बाटेंगे, उन्हें फैक्ट्रियां लगाने के लिए और लोगों को रोजगार देने के लिए कहेंगे, हम उनकी फैक्ट्रियों के बाहर एयरपोर्ट लगा देंगे, उनकी फैक्ट्रियों तक रेलवे लाइन बिछा देंगे, सभी खेतों के बाहर फ़ूड प्रोसेसिंग प्लांट लगा देंगे, किसानों के बच्चों को रोजगार देंगे, खेतों के बाहर आम-अचार-पापड़ बनायेंगे।
ये वादे तो राहुल गाँधी उत्तर प्रदेश में करते हैं, वहां पर उनकी सरकार नहीं है बल्कि उनकी साथी समाजवादी पार्टी की सरकार है, उत्तर प्रदेश में राहुल गाँधी वादे करें ये उनका हक बनता है लेकिन मणिपुर में 15 वर्षों तक सरकार चलाने के बाद भी वे सिर्फ वही अपने दिखा रहे हैं।
राहुल गाँधी ने कहा कि अगर आप मोबाइल के पीछे देखो तो मेड इन चाइना दिखायी देता है, मैं चाहता हूँ कि जब हमारे मुख्यमंत्री इबूबी अमेरिका जाएं और वहां पर साल खरीदें तो साल पर लिखा हो मेड इन मणिपुर। इस काम को करने के लिए जो हेंडीक्राफ्ट का काम करते हैं उन्हें सपोर्ट करना पड़ेगा, उनके लिए सड़कें बनानी पड़ेंगी। (सवाल यह है कि कांग्रेस ने 15 साल में सड़कें क्यों नहीं बनायी? )
राहुल गाँधी ने कहा कि यहाँ पर नीबू उगाया जाता है, नारंगी उगाते हो, पाइन एप्पल उगाते हो, मै चाहता हूँ कि एक दिन ऐसा दिन आये, कोई लंदन में अगर पाइन एप्पल जूस लिए और डब्बे पर देखे तो मेड इन मणिपुर लिखा हो। (सवाल यह है कि कांग्रेस ने यह काम पिछले 15 वर्ष में क्यों नहीं किया? )
राहुल गाँधी ने कहा कि हम चाहते हैं कि फ़ूड प्रोसेसिंग प्लांट में महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिले, किसानों को नीबू और पाइन एप्पल का सही दाम मिले और पूरे मणिपुर को फायदा मिले। (सवाल यह है कि कांग्रेस ने यह काम पिछले 15 वर्षों में क्यों नहीं किया)
इसके बाद राहुल गाँधी ने दूसरा सपना दिखाते हुए कहा कि यहाँ पर स्पोर्ट सबसे अधिक है, आपको स्पोर्ट करना सबसे अच्छा मालूम है, मैं चाहता हूँ कि मणिपुर के युवाओं को जीतने से पहले पहचान मिले, हम चुन चुन कर मणिपुर के युवाओं को ढूंढेंगे और युवाओं को सपोर्ट करेंगे। हम चाहते हैं कि ओलंपिक में मणिपुर को कम से कम 5 गोल्ड मैडल मिले। (सवाल यह है कि कांग्रेस ने यह काम पिछले 15 वर्षों में क्यों नहीं किया, जानकारी के लिए बता दें कि विश्व चैम्पियन महिला बॉक्सर मैरी कोम बीजेपी में इसीलिए शामिल हुई थीं क्योंकि कांग्रेस ने खेल और खिलाडियों को कभी सपोर्ट नहीं किया)
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इम्फालः आज राहुल गाँधी ने मणिपुर की राजधानी इम्फाल में एक चुनावी रैली को संबोधित किया और उत्तर प्रदेश की तरफ सपने दिखाए और मोदी पर जमकर हमला किया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मणिपुर में कांग्रेस की लगातार पंद्रह वर्षों से सरकार है। इसके अलावा ढाई साल पहले लगातार दस साल तक कांग्रेस की केंद्र में भी सरकार थी, मतलब कांग्रेस की केंद्र और राज्य दोनों में सरकार थी, अगर कांग्रेस चाहती तो मणिपुर को दुनिया का सबसे विकसित राज्य बना सकती थी लेकिन आज की रैली के राहुल गाँधी ने मणिपुर की जनता को वही अपने दिखाए जो उत्तर प्रदेश की जनता को दिखा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में राहुल गाँधी वादे करते हैं कि हम चाहते हैं कि आम पर मेड इन लखनऊ लिखा हो, जैकेट पर मेड इन कानपुर लिखा हो, हम सरकार में आने के बाद सभी युवाओं को घर घर जाकर पैसे बाटेंगे, उन्हें फैक्ट्रियां लगाने के लिए और लोगों को रोजगार देने के लिए कहेंगे, हम उनकी फैक्ट्रियों के बाहर एयरपोर्ट लगा देंगे, उनकी फैक्ट्रियों तक रेलवे लाइन बिछा देंगे, सभी खेतों के बाहर फ़ूड प्रोसेसिंग प्लांट लगा देंगे, किसानों के बच्चों को रोजगार देंगे, खेतों के बाहर आम-अचार-पापड़ बनायेंगे। ये वादे तो राहुल गाँधी उत्तर प्रदेश में करते हैं, वहां पर उनकी सरकार नहीं है बल्कि उनकी साथी समाजवादी पार्टी की सरकार है, उत्तर प्रदेश में राहुल गाँधी वादे करें ये उनका हक बनता है लेकिन मणिपुर में पंद्रह वर्षों तक सरकार चलाने के बाद भी वे सिर्फ वही अपने दिखा रहे हैं। राहुल गाँधी ने कहा कि अगर आप मोबाइल के पीछे देखो तो मेड इन चाइना दिखायी देता है, मैं चाहता हूँ कि जब हमारे मुख्यमंत्री इबूबी अमेरिका जाएं और वहां पर साल खरीदें तो साल पर लिखा हो मेड इन मणिपुर। इस काम को करने के लिए जो हेंडीक्राफ्ट का काम करते हैं उन्हें सपोर्ट करना पड़ेगा, उनके लिए सड़कें बनानी पड़ेंगी। राहुल गाँधी ने कहा कि यहाँ पर नीबू उगाया जाता है, नारंगी उगाते हो, पाइन एप्पल उगाते हो, मै चाहता हूँ कि एक दिन ऐसा दिन आये, कोई लंदन में अगर पाइन एप्पल जूस लिए और डब्बे पर देखे तो मेड इन मणिपुर लिखा हो। राहुल गाँधी ने कहा कि हम चाहते हैं कि फ़ूड प्रोसेसिंग प्लांट में महिलाओं और युवाओं को रोजगार मिले, किसानों को नीबू और पाइन एप्पल का सही दाम मिले और पूरे मणिपुर को फायदा मिले। इसके बाद राहुल गाँधी ने दूसरा सपना दिखाते हुए कहा कि यहाँ पर स्पोर्ट सबसे अधिक है, आपको स्पोर्ट करना सबसे अच्छा मालूम है, मैं चाहता हूँ कि मणिपुर के युवाओं को जीतने से पहले पहचान मिले, हम चुन चुन कर मणिपुर के युवाओं को ढूंढेंगे और युवाओं को सपोर्ट करेंगे। हम चाहते हैं कि ओलंपिक में मणिपुर को कम से कम पाँच गोल्ड मैडल मिले।
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मुंबई। सेंसर बोर्ड ने शुक्रवार को बम्बई उच्च न्यायालय को बताया कि 'उड़ता पंजाब' के जिन दृश्यों को फिल्म से निकालने का सुझाव दिया गया है, वे 'बहुत अश्लील' हैं। अदालत में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएससी) का पक्ष रख रहे अधिवक्ता अद्वैत सेठना ने उदाहरण देते हुए कहा कि फिल्म का संवाद 'जमीन बंजर तो औलाद कंजर' अपमानजनक है।इस पर न्यायमूर्ति एस.सी. धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति शालिनी फणसालकर जोशी ने कहा कि फिल्में ऐसी विषय सामग्रियों से नहीं चलती हैं और आज के दर्शक काफी परिपक्व हैं।सीबीएफसी के अधिवक्ता सेठना ने दलील दी कि 'कंजर' शब्द भरपूर उत्पादन करने वाले पंजाब राज्य की छवि धूमिल करता है। उन्होंने कहा कि फिल्म में एक कुत्ते का नाम 'जैकी चेन' है।न्यायमूर्तियों ने कहा कि इससे फिल्म का अनावश्यक प्रचार हो रहा है और लोगों को अपनी पसंद की चीज देखने की अनुमति होनी चाहिए, चाहे वह फिल्म हो या टेलीविजन।न्यायालय ने गुरुवार को कहा था कि 'उड़ता पंजाब' मादक पदार्थो के खिलाफ है और इसे 'पंजाब राज्य या इसके लोगों का अपमान करने की बात सोचकर नहीं बनाया गया है।'अनुराग कश्यप सह-निर्मित 'उड़ता पंजाब' में शाहिद कपूर, करीना कपूर, आलिया भट्ट व दिलजीत दोसांझ मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह पंजाब में व्याप्त नशे की समस्या पर आधारित है।
मुंबई। रणबीर कपूर के लिए आज गुरुवार का दिन बेहद खास है। एक्टर आज 28 सितंबर को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। इसके साथ ही उनकी टॉक ऑफ द टाउन फिल्म एनिमल का टीजर भी आज रिलीज होने वाला है। इस बीच उनकी पत्नी आलिया भट्ट ने एक्टर के लिए एक खूबसूरत पोस्ट लिखा।
एक्ट्रेस ने इसके साथ ही रणबीर कपूर के सीक्रेट सोशल मीडिया अकाउंट होने की बात भी कही है। अब उन्होंने ये गलती से बता दिया हो या फिर जानबूझकर, लेकिन एक्टर का राज उनके फैंस को बता दिया है।
आलिया भट्ट ने रणबीर कपूर को विश करने के लिए तस्वीरों की एक सीरीज शेयर की है। इनमें उनके क्वालिटी टाइम बिताने से लेकर उनकी शादी तक, कई अनदेखी फोटो शामिल है। आलिया भट्ट ने सबसे पहली फोटो रणबीर कपूर को किस करते हुए शेयर की है।
इसके बाद की तस्वीर में दोनों स्टेडियम में मैच देखते हुए नजर आ रहे हैं। एक फोटो में आलिया ने रणबीर का दूल्हा लुक शेयर किया है। वहीं, चौथी फोटो में दोनों के मेहंदी सेरेमनी की है, जिसमें रणबीर, आलिया को अपने हाथों में लगी मेहंदी दिखा रहे हैं।
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मुंबई। सेंसर बोर्ड ने शुक्रवार को बम्बई उच्च न्यायालय को बताया कि 'उड़ता पंजाब' के जिन दृश्यों को फिल्म से निकालने का सुझाव दिया गया है, वे 'बहुत अश्लील' हैं। अदालत में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड का पक्ष रख रहे अधिवक्ता अद्वैत सेठना ने उदाहरण देते हुए कहा कि फिल्म का संवाद 'जमीन बंजर तो औलाद कंजर' अपमानजनक है।इस पर न्यायमूर्ति एस.सी. धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति शालिनी फणसालकर जोशी ने कहा कि फिल्में ऐसी विषय सामग्रियों से नहीं चलती हैं और आज के दर्शक काफी परिपक्व हैं।सीबीएफसी के अधिवक्ता सेठना ने दलील दी कि 'कंजर' शब्द भरपूर उत्पादन करने वाले पंजाब राज्य की छवि धूमिल करता है। उन्होंने कहा कि फिल्म में एक कुत्ते का नाम 'जैकी चेन' है।न्यायमूर्तियों ने कहा कि इससे फिल्म का अनावश्यक प्रचार हो रहा है और लोगों को अपनी पसंद की चीज देखने की अनुमति होनी चाहिए, चाहे वह फिल्म हो या टेलीविजन।न्यायालय ने गुरुवार को कहा था कि 'उड़ता पंजाब' मादक पदार्थो के खिलाफ है और इसे 'पंजाब राज्य या इसके लोगों का अपमान करने की बात सोचकर नहीं बनाया गया है।'अनुराग कश्यप सह-निर्मित 'उड़ता पंजाब' में शाहिद कपूर, करीना कपूर, आलिया भट्ट व दिलजीत दोसांझ मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह पंजाब में व्याप्त नशे की समस्या पर आधारित है। मुंबई। रणबीर कपूर के लिए आज गुरुवार का दिन बेहद खास है। एक्टर आज अट्ठाईस सितंबर को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। इसके साथ ही उनकी टॉक ऑफ द टाउन फिल्म एनिमल का टीजर भी आज रिलीज होने वाला है। इस बीच उनकी पत्नी आलिया भट्ट ने एक्टर के लिए एक खूबसूरत पोस्ट लिखा। एक्ट्रेस ने इसके साथ ही रणबीर कपूर के सीक्रेट सोशल मीडिया अकाउंट होने की बात भी कही है। अब उन्होंने ये गलती से बता दिया हो या फिर जानबूझकर, लेकिन एक्टर का राज उनके फैंस को बता दिया है। आलिया भट्ट ने रणबीर कपूर को विश करने के लिए तस्वीरों की एक सीरीज शेयर की है। इनमें उनके क्वालिटी टाइम बिताने से लेकर उनकी शादी तक, कई अनदेखी फोटो शामिल है। आलिया भट्ट ने सबसे पहली फोटो रणबीर कपूर को किस करते हुए शेयर की है। इसके बाद की तस्वीर में दोनों स्टेडियम में मैच देखते हुए नजर आ रहे हैं। एक फोटो में आलिया ने रणबीर का दूल्हा लुक शेयर किया है। वहीं, चौथी फोटो में दोनों के मेहंदी सेरेमनी की है, जिसमें रणबीर, आलिया को अपने हाथों में लगी मेहंदी दिखा रहे हैं।
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कानपुर के बर्रा इलाके में मंगलवार को एक बुजुर्ग दंपति की उनके घर के अंदर धारदार हथियार से हत्या कर दी गई।
मृतकों की पहचान 52 वर्षीय मुन्ना लाल उत्तम और उनकी 55 वर्षीय पत्नी राजदेवी के रूप में हुई है। मुन्ना लाल एक फील्ड गन फैक्ट्री से सुपरवाइजर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
घटना के वक्त दंपति का बेटा अनूप उत्तम और बेटी कोमल घर में थे।
आपको बता दे कि जांच में जुटी कानपुर पुलिस ने 10 घंटे में हत्याकांड का खुलासा कर दिया। कानपुर पुलिस का दावा है कि बुजुर्ग दंपती की हत्या उनकी ही बेटी ने की है। वही ,इस वारदात को अंजाम देने के लिए उसने अपने प्रेमी की मदद ली। कानपुर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया कि दंपती प्रेमी से उसकी शादी का विरोध कर रहे थे।
साथ ही पिता के नाम करोड़ों की संपत्ति थी, जिसे बेटी और उसका प्रेमी इसे हथियाना चाहते थे, इसलिए बेटी ने माता-पिता की हत्या कर दी। पुलिस का कहना है कि बेटी ने वारदात को अंजाम देने के लिए सोमवार रात को अपने बुजुर्ग माता-पिता और भाई को जूस में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया था। सभी जब बेहोश हो गए तो उसने अपने प्रेमी को बुलाया फिर माता-पिता की गला रेत कर हत्या कर दी। वारदात के बाद जब प्रेमी चला गया तो उसने शोर मचाना शुरू किया। शोर सुनकर घर की दूसरी मंजिल पर सो रहा भाई आया तो उसने बताया कि तीन नकाबपोश लोगों ने मां-पिता की हत्या कर दी है।
वही इससे पहले ,अनूप ने दोहरे हत्याकांड के लिए अपने ससुराल वालों को जिम्मेदार ठहराया है। उसने पुलिस को बताया कि उसकी शादी 2017 में सोनिका से हुई थी, लेकिन शादी के कुछ महीनों बाद वह घर छोड़कर चली गई, तब से दोनों में आपस में बात नहीं हुई है। उनके तलाक का केस कोर्ट में चल रहा है।
अनूप ने आरोप लगाया कि उनके बड़े साले सुरेंद्र और छोटे बहनोई मयंक लगभग हर दिन उन्हें जान से मारने की धमकी देते थे।
अनूप के अनुसार, परिवार सोमवार की रात जल्दी सो गया था, लेकिन मंगलवार की तड़के उसकी बहन कोमल ने उसे जगाया और कहा कि उसके माता-पिता की हत्या कर दी गई है।
अनूप ने पुलिस को इसकी सूचना दी। रात 11 बजकर 54 मिनट पर संदिग्ध को घर में घुसते देखा गया। पड़ोस में लगे सीसीटीवी कैमरे में संदिग्ध तड़के करीब 2. 15 बजे मुंह पर सफेद कपड़ा बांधकर घर से निकलता नजर आया।
वह घर से निकलकर संकटमोचन मंदिर की ओर चल दिया।
कानपुर के पुलिस आयुक्त विजय सिंह मीणा ने कहा था कि जांच जारी है और दोषियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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कानपुर के बर्रा इलाके में मंगलवार को एक बुजुर्ग दंपति की उनके घर के अंदर धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। मृतकों की पहचान बावन वर्षीय मुन्ना लाल उत्तम और उनकी पचपन वर्षीय पत्नी राजदेवी के रूप में हुई है। मुन्ना लाल एक फील्ड गन फैक्ट्री से सुपरवाइजर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। घटना के वक्त दंपति का बेटा अनूप उत्तम और बेटी कोमल घर में थे। आपको बता दे कि जांच में जुटी कानपुर पुलिस ने दस घंटाटे में हत्याकांड का खुलासा कर दिया। कानपुर पुलिस का दावा है कि बुजुर्ग दंपती की हत्या उनकी ही बेटी ने की है। वही ,इस वारदात को अंजाम देने के लिए उसने अपने प्रेमी की मदद ली। कानपुर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया कि दंपती प्रेमी से उसकी शादी का विरोध कर रहे थे। साथ ही पिता के नाम करोड़ों की संपत्ति थी, जिसे बेटी और उसका प्रेमी इसे हथियाना चाहते थे, इसलिए बेटी ने माता-पिता की हत्या कर दी। पुलिस का कहना है कि बेटी ने वारदात को अंजाम देने के लिए सोमवार रात को अपने बुजुर्ग माता-पिता और भाई को जूस में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया था। सभी जब बेहोश हो गए तो उसने अपने प्रेमी को बुलाया फिर माता-पिता की गला रेत कर हत्या कर दी। वारदात के बाद जब प्रेमी चला गया तो उसने शोर मचाना शुरू किया। शोर सुनकर घर की दूसरी मंजिल पर सो रहा भाई आया तो उसने बताया कि तीन नकाबपोश लोगों ने मां-पिता की हत्या कर दी है। वही इससे पहले ,अनूप ने दोहरे हत्याकांड के लिए अपने ससुराल वालों को जिम्मेदार ठहराया है। उसने पुलिस को बताया कि उसकी शादी दो हज़ार सत्रह में सोनिका से हुई थी, लेकिन शादी के कुछ महीनों बाद वह घर छोड़कर चली गई, तब से दोनों में आपस में बात नहीं हुई है। उनके तलाक का केस कोर्ट में चल रहा है। अनूप ने आरोप लगाया कि उनके बड़े साले सुरेंद्र और छोटे बहनोई मयंक लगभग हर दिन उन्हें जान से मारने की धमकी देते थे। अनूप के अनुसार, परिवार सोमवार की रात जल्दी सो गया था, लेकिन मंगलवार की तड़के उसकी बहन कोमल ने उसे जगाया और कहा कि उसके माता-पिता की हत्या कर दी गई है। अनूप ने पुलिस को इसकी सूचना दी। रात ग्यारह बजकर चौवन मिनट पर संदिग्ध को घर में घुसते देखा गया। पड़ोस में लगे सीसीटीवी कैमरे में संदिग्ध तड़के करीब दो. पंद्रह बजे मुंह पर सफेद कपड़ा बांधकर घर से निकलता नजर आया। वह घर से निकलकर संकटमोचन मंदिर की ओर चल दिया। कानपुर के पुलिस आयुक्त विजय सिंह मीणा ने कहा था कि जांच जारी है और दोषियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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देहरादून। म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार को जिस किसी ने देखा उसके रोंगटे खड़े हो गए। इसी अत्याचार के तहत खफा मुस्लिम समाज के सैकड़ों लोगों ने बुधवार को कचहरी में जुलूस निकाला और बुधवार को बड़ी तादात में लोग मुस्लिम कॉलोनी स्थित दारूल इफ्ता बैनर के अन्तर्गत रीठामंडी से जुलूस की शक्ल में कचहरी पहुंचे । जोरदार प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर म्यांमार सरकार पर दबाव बनाने की याचना भी की और उन्होंने कहा केंद्र सरकार को इस मामले में कूटनीतिक कोशिश करना चाहिए।
यदि वहां की सरकार पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है तो म्यांमार से अपने ट्रम्स तोड़ देना चाहिए। शहर काजी मोहम्मद अहमद काजमी ने बताया कि पिछले छह सौ साल से म्यांमार में रहने वाले रोहिंग्या मुस्लिमों पर वहां की फौज कहर ढा रही। वहीं जुलूस के दरम्यान रेसकोर्स, हरिद्वार रोड, सहारनपुर रोड वाले हिस्से में कुछ देर ट्रॉफिक रुक गया। दोपहर करीब साढ़े 12 बजे तक चले प्रदर्शन के समय ही डीएम ने चुनिंदा प्रतिनिधियों को बुलाकर ज्ञापन लिया।
प्रदर्शन में दारूल कजा के काजी मुफ्ती सलीम, मुफ्ती उलेफा, मौलाना अलताफ, मौलाना अब्दुल कादिर, तौसीर अहमद, हाजी सली, कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष ताहिर अली, शादाब शम्स, सईद जमाल, मोहम्मद आजम, कारिफ वारसी, आरिफ कुरैशी, हाजी अलीम अहमद, हाजी दिलशाद, अजैबा कुरैशी, इकबाल अहमद, नईम अहमद, मोहम्मद फारूख, मोहम्मद रियाज, अब्दुल सत्तार, मोहम्मद दानिश, फुरकान, मोहम्मद ताहिर, आरिफ कुरैशी, हयात खान, दिलशाद कुरैशी, नासिर खान, इमरान,वाहिद खान सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे।
नायब सुन्नी शहर काजी सैयद अशरफ हुसैन कादरी ने बताया कि ऑल इंडिया जमात रजा और रजा एकेडमी के आह्वान पर दून की सुन्नी हन्फी बरेलवी मस्जिदों में अजान देकर पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब और उनके घरवालों पर अभद्र टिप्पणी करने का प्रतिरोध किया गया।
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देहरादून। म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचार को जिस किसी ने देखा उसके रोंगटे खड़े हो गए। इसी अत्याचार के तहत खफा मुस्लिम समाज के सैकड़ों लोगों ने बुधवार को कचहरी में जुलूस निकाला और बुधवार को बड़ी तादात में लोग मुस्लिम कॉलोनी स्थित दारूल इफ्ता बैनर के अन्तर्गत रीठामंडी से जुलूस की शक्ल में कचहरी पहुंचे । जोरदार प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर म्यांमार सरकार पर दबाव बनाने की याचना भी की और उन्होंने कहा केंद्र सरकार को इस मामले में कूटनीतिक कोशिश करना चाहिए। यदि वहां की सरकार पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है तो म्यांमार से अपने ट्रम्स तोड़ देना चाहिए। शहर काजी मोहम्मद अहमद काजमी ने बताया कि पिछले छह सौ साल से म्यांमार में रहने वाले रोहिंग्या मुस्लिमों पर वहां की फौज कहर ढा रही। वहीं जुलूस के दरम्यान रेसकोर्स, हरिद्वार रोड, सहारनपुर रोड वाले हिस्से में कुछ देर ट्रॉफिक रुक गया। दोपहर करीब साढ़े बारह बजे तक चले प्रदर्शन के समय ही डीएम ने चुनिंदा प्रतिनिधियों को बुलाकर ज्ञापन लिया। प्रदर्शन में दारूल कजा के काजी मुफ्ती सलीम, मुफ्ती उलेफा, मौलाना अलताफ, मौलाना अब्दुल कादिर, तौसीर अहमद, हाजी सली, कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष ताहिर अली, शादाब शम्स, सईद जमाल, मोहम्मद आजम, कारिफ वारसी, आरिफ कुरैशी, हाजी अलीम अहमद, हाजी दिलशाद, अजैबा कुरैशी, इकबाल अहमद, नईम अहमद, मोहम्मद फारूख, मोहम्मद रियाज, अब्दुल सत्तार, मोहम्मद दानिश, फुरकान, मोहम्मद ताहिर, आरिफ कुरैशी, हयात खान, दिलशाद कुरैशी, नासिर खान, इमरान,वाहिद खान सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे। नायब सुन्नी शहर काजी सैयद अशरफ हुसैन कादरी ने बताया कि ऑल इंडिया जमात रजा और रजा एकेडमी के आह्वान पर दून की सुन्नी हन्फी बरेलवी मस्जिदों में अजान देकर पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब और उनके घरवालों पर अभद्र टिप्पणी करने का प्रतिरोध किया गया।
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नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। गुजरात टाइटंस ने IPL 2022 के लिए 13 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में आधिकारिक तौर पर अपनी नई जर्सी का अनावरण कर दिया है। इस नीले रंग की जर्सी में एक विशिष्ट और आकर्षक डिजाइन है। गुजरात टाइटंस 26 मार्च से शुरू होने वाले आगामी आईपीएल 2022 का हिस्सा है। गुजरात टाइटंस की IPL 2022 में यह पहली उपस्थिति है। दरअसल इस सीज़न में टाइटन्स और लखनऊ सुपर जायंट्स को नई टीम के रूप में जोड़ा गया है, जिसके कारण इस बार IPL 2022 में10-टीम आमने सामने होगी।
गुजरात फ्रेंचाइजी ने स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या को अपना नया कप्तान नियुक्त किया है और विस्फोटक सलामी बल्लेबाज जेसन रॉय की अनुपस्थिति के कारण उनकी जगह अफगानिस्तान के विकेटकीपर-बल्लेबाज रहमानुल्ला गुरबाज को भी शामिल किया है। यह नई फ्रेंचाइजी की आईपीएल 2022 से दो हफ्ते से भी कम समय पहले की गयी बड़ी घोषणा है।
गुजरात टाइटंस ने कप्तान हार्दिक पांड्या को 15 करोड़ रुपये और अफगानिस्तान के राशिद खान को इतनी ही राशि के साथ ख़रीदा था। इसके अलावा शुभमन गिल (INR 8 करोड़), ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर-बल्लेबाज मैथ्यू वेड (INR 2. 40 करोड़), राहुल तेवतिया (INR 9 करोड़), दक्षिण अफ्रीका के मध्य-क्रम सनसनी डेविड मिलर (INR 3 करोड़), अनुभवी विकेटकीपर रिद्धिमान साहा (INR) 1. 90 करोड़), वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ (INR 2. 40 करोड़), न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज लॉकी फर्ग्यूसन (INR 10 करोड़), भारत के वरिष्ठ तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी (INR 6. 25 करोड़) में ख़रीदा है।
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नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। गुजरात टाइटंस ने IPL दो हज़ार बाईस के लिए तेरह मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में आधिकारिक तौर पर अपनी नई जर्सी का अनावरण कर दिया है। इस नीले रंग की जर्सी में एक विशिष्ट और आकर्षक डिजाइन है। गुजरात टाइटंस छब्बीस मार्च से शुरू होने वाले आगामी आईपीएल दो हज़ार बाईस का हिस्सा है। गुजरात टाइटंस की IPL दो हज़ार बाईस में यह पहली उपस्थिति है। दरअसल इस सीज़न में टाइटन्स और लखनऊ सुपर जायंट्स को नई टीम के रूप में जोड़ा गया है, जिसके कारण इस बार IPL दो हज़ार बाईस मेंदस-टीम आमने सामने होगी। गुजरात फ्रेंचाइजी ने स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या को अपना नया कप्तान नियुक्त किया है और विस्फोटक सलामी बल्लेबाज जेसन रॉय की अनुपस्थिति के कारण उनकी जगह अफगानिस्तान के विकेटकीपर-बल्लेबाज रहमानुल्ला गुरबाज को भी शामिल किया है। यह नई फ्रेंचाइजी की आईपीएल दो हज़ार बाईस से दो हफ्ते से भी कम समय पहले की गयी बड़ी घोषणा है। गुजरात टाइटंस ने कप्तान हार्दिक पांड्या को पंद्रह करोड़ रुपये और अफगानिस्तान के राशिद खान को इतनी ही राशि के साथ ख़रीदा था। इसके अलावा शुभमन गिल , ऑस्ट्रेलियाई विकेटकीपर-बल्लेबाज मैथ्यू वेड , राहुल तेवतिया , दक्षिण अफ्रीका के मध्य-क्रम सनसनी डेविड मिलर , अनुभवी विकेटकीपर रिद्धिमान साहा एक. नब्बे करोड़), वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ , न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज लॉकी फर्ग्यूसन , भारत के वरिष्ठ तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी में ख़रीदा है।
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भारत में अभी तक कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन के 2135 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 828 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं या अन्य स्थानों पर चले गए हैं। ये मामले 24 राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों में सामने आए हैं। वहीं देश में बुधवार को कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन से मौत का पहला मामला सामना आया है। राजस्थान के उदयपुर के एक व्यक्ति की पिछले सप्ताह मौत हो गई थी और उसमें ओमीक्रोन की पुष्टि हुई है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 की तीसरी लहर आ गई है। भारत में एक दिन में कोविड-19 के 58,097 नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,50,18,358 हो गई है। करीब 199 दिन बाद इतने अधिक दैनिक मामले सामने आए हैं।
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भारत में अभी तक कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन के दो हज़ार एक सौ पैंतीस मामले सामने आए हैं, जिनमें से आठ सौ अट्ठाईस लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं या अन्य स्थानों पर चले गए हैं। ये मामले चौबीस राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों में सामने आए हैं। वहीं देश में बुधवार को कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन से मौत का पहला मामला सामना आया है। राजस्थान के उदयपुर के एक व्यक्ति की पिछले सप्ताह मौत हो गई थी और उसमें ओमीक्रोन की पुष्टि हुई है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-उन्नीस की तीसरी लहर आ गई है। भारत में एक दिन में कोविड-उन्नीस के अट्ठावन,सत्तानवे नए मामले सामने आने के बाद देश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर तीन,पचास,अट्ठारह,तीन सौ अट्ठावन हो गई है। करीब एक सौ निन्यानवे दिन बाद इतने अधिक दैनिक मामले सामने आए हैं।
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रिश्तो में बेनतीजा बहस नुकसान पंहुचा सकती है. इसलिए कोशिश करे कि बहस न करे जिससे रिश्ते में दूरिया न आए. बहस के दौरान एक दूसरे को गलत ठहराना, आरोप लगाना सामान्य है, किन्तु इस बहस से कुछ हासिल नहीं होता है. हर किसी की सोच एक जैसी नहीं होती है, लड़ाई किसी समस्या का हल नहीं होती है.
इसके लिए जरूरी है कि बैठ कर बातचीत कर समस्या का हल निकाले, न कि बिना नतीजे कि बहस करे. कई बार किसी बात का बुरा लग जाता है उसे मन में रखा ही जाता है, जरूरी है कि उन भावनाओ को ठीक तरह से व्यक्त किया जाए. क्योकि ऐसी बातें मन ही मन में इंसान को कचोटती है और आगे जा कर यह भयंकर लड़ाई में तब्दील हो जाती है. भावनाओ को साथी के सामने रखे और बहस से बचे.
यदि आपका पार्टनर गुस्सैल स्वभाव का है, उसे समझदारी से हैंडल करना जरूरी है. प्यार से समझने पर निश्चित ही वह आपकी बात को मानेगा. कोशिश करे कि बात करते समय आपकी आवाज तेज न हो. इससे बात बिगड़ेगी ही. इसलिए धीमे आवाज में शांत हो कर बात करे.
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रिश्तो में बेनतीजा बहस नुकसान पंहुचा सकती है. इसलिए कोशिश करे कि बहस न करे जिससे रिश्ते में दूरिया न आए. बहस के दौरान एक दूसरे को गलत ठहराना, आरोप लगाना सामान्य है, किन्तु इस बहस से कुछ हासिल नहीं होता है. हर किसी की सोच एक जैसी नहीं होती है, लड़ाई किसी समस्या का हल नहीं होती है. इसके लिए जरूरी है कि बैठ कर बातचीत कर समस्या का हल निकाले, न कि बिना नतीजे कि बहस करे. कई बार किसी बात का बुरा लग जाता है उसे मन में रखा ही जाता है, जरूरी है कि उन भावनाओ को ठीक तरह से व्यक्त किया जाए. क्योकि ऐसी बातें मन ही मन में इंसान को कचोटती है और आगे जा कर यह भयंकर लड़ाई में तब्दील हो जाती है. भावनाओ को साथी के सामने रखे और बहस से बचे. यदि आपका पार्टनर गुस्सैल स्वभाव का है, उसे समझदारी से हैंडल करना जरूरी है. प्यार से समझने पर निश्चित ही वह आपकी बात को मानेगा. कोशिश करे कि बात करते समय आपकी आवाज तेज न हो. इससे बात बिगड़ेगी ही. इसलिए धीमे आवाज में शांत हो कर बात करे.
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गीतकार जावेद अख्तर ने एक्टर कंगना रनोट के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया था। आज कंगना मुंबई के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश होंगी।
जावेद अख्तर ने क्यों और कब दर्ज कराया था केस?
जावेद अख्तर ने नवंबर 2020 में शिकायत दर्ज करवाई थी। उन्होंने दावा किया था कि एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कंगना ने उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला बयान दिया था, इससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
सवाल- मानहानि का मतलब क्या होता है?
जवाब- अगर कोई इंसान आपकी इज्जत के साथ खिलवाड़ करता है। मसलन गलत स्टेटमेंट देना, गलत बातें छपवाना, बिना सहमति के कोई गलत कमेंट करना। इसे ही कानूनी भाषा में मानहानि कहते हैं। यानी आपके मान को ठेस पहुंचाना।
सवाल- मानहानि कितने तरह की होती हैं?
सिविल- इसमें पीड़ित पक्ष पैसे के लिए क्लेम कर सकता है। मानहानि का केस सिविल कोर्ट या हाईकोर्ट में दायर किया जा सकता है।
क्लेम करते वक्त बताया जाता है कि उस व्यक्ति की रेप्युटेशन क्या है और उसका कितना नुकसान हुआ है।
क्रिमिनल- इसमें CrPC की धारा- 200 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। सीधे थाने में केस दर्ज नहीं कराया जा सकता। इसमें ज्यादा से ज्यादा 2 साल की जेल की सजा हो सकती है।
सवाल- मानहानि को लेकर क्या कानून है?
जवाब- इंडियन पीनल कोड (IPC) की धारा 499 और 500 में किसी भी व्यक्ति की इज्जत और प्रतिष्ठा को सुरक्षा देने का नियम है। धारा 499 में इस बात का जिक्र है कि किन परिस्थितियों में मानहानि का दावा किया जा सकता है और धारा 500 में उसकी सजा के बारे में लिखा गया है।
सवाल- लोग क्लेम करते वक्त पैसे का कैलकुलेशन कैसे करते हैं?
जवाब- इसे कंगना और जावेद के उदाहरण से ही समझिए। मान लीजिए, जावेद अख्तर की एक दिन की कमाई 50 लाख रुपए है और जिस दिन से उनकी मान की हानि हुई है, उस दिन से उन्हें कितने का नुकसान हुआ है, वो इसे कैलकुलेट करेंगे। फिर कंगना के ऊपर उतने पैसे का क्लेम कर सकते हैं।
सवाल- अगर किसी व्यक्ति की कमाई एक महीने में 30 से 40 हजार है, लेकिन उसकी सोशल वैल्यू बहुत है, लाखों में फॉलोअर्स हैं और लोग उन्हें बहुत मानते हैं, तो क्या कमाई के साथ-साथ वो अपने सोशल वैल्यू को भी कैलकुलेट करके क्लेम कर सकते हैं हैं?
जवाब- जी हां, आप अपनी कमाई के नुकसान के साथ-साथ अपने सोशल वैल्यू को भी कैलकुलेट कर सकते हैं।
सवाल- आप सामने वाले के ऊपर जितने चाहे, उतने पैसे के लिए क्लेम कर सकते हैं?
जवाब- हां, आप जितने पैसे चाहे उतने पैसे के लिए क्लेम कर सकते हैं। जैसे- 1 करोड़, 2 करोड़, 3 करोड़ या इससे ज्यादा भी, लेकिन सामने वाला देने की स्थिति में है कि नहीं, यह कोर्ट तय करता है।
कोर्ट दोनों पक्षों की बातों और सबूतों को देखेगा। आरोपी की हैसियत उतनी है, जितने पैसे आपने उस पर क्लेम किए हैं, तो उसे उतना पैसा देना होगा, लेकिन सामने वाले की स्थिति उतने पैसे देने लायक नहीं है, तो कोर्ट तय करेगी कि उसे कितनी रकम देनी है।
सवाल- मानहानि के लिए कोर्ट में कितनी फीस जमा करनी होती है?
जवाब- कोर्ट की फीस ज्यादा से ज्यादा 1 लाख 50 हजार रुपए है। इतने पैसे जमा करने के बाद आप जितना चाहे उतने पैसे की मांग रख सकते हैं।
सवाल- किन बातों को मानहानि नहीं माना जाता है?
रामलला का कोई अपमान करे तो क्या मानहानि का केस होगा?
जी हां, उनके कुल या परिवार के लोग मानहानि का केस कर सकते हैं। हालांकि उन्हें लोग पूजते हैं, इसलिए उनकी संपत्ति या पैसे का कैलकुलेशन नहीं किया जा सकता है।
इस स्थिति में अगर रामलला को लेकर लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, तो कोई भी इंडिविजुअल इंसान IPC की धारा- 295 और 295 A के तहत केस दर्ज करवा सकता है।
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गीतकार जावेद अख्तर ने एक्टर कंगना रनोट के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया था। आज कंगना मुंबई के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश होंगी। जावेद अख्तर ने क्यों और कब दर्ज कराया था केस? जावेद अख्तर ने नवंबर दो हज़ार बीस में शिकायत दर्ज करवाई थी। उन्होंने दावा किया था कि एक टीवी इंटरव्यू के दौरान कंगना ने उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला बयान दिया था, इससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। सवाल- मानहानि का मतलब क्या होता है? जवाब- अगर कोई इंसान आपकी इज्जत के साथ खिलवाड़ करता है। मसलन गलत स्टेटमेंट देना, गलत बातें छपवाना, बिना सहमति के कोई गलत कमेंट करना। इसे ही कानूनी भाषा में मानहानि कहते हैं। यानी आपके मान को ठेस पहुंचाना। सवाल- मानहानि कितने तरह की होती हैं? सिविल- इसमें पीड़ित पक्ष पैसे के लिए क्लेम कर सकता है। मानहानि का केस सिविल कोर्ट या हाईकोर्ट में दायर किया जा सकता है। क्लेम करते वक्त बताया जाता है कि उस व्यक्ति की रेप्युटेशन क्या है और उसका कितना नुकसान हुआ है। क्रिमिनल- इसमें CrPC की धारा- दो सौ के तहत मजिस्ट्रेट के सामने शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। सीधे थाने में केस दर्ज नहीं कराया जा सकता। इसमें ज्यादा से ज्यादा दो साल की जेल की सजा हो सकती है। सवाल- मानहानि को लेकर क्या कानून है? जवाब- इंडियन पीनल कोड की धारा चार सौ निन्यानवे और पाँच सौ में किसी भी व्यक्ति की इज्जत और प्रतिष्ठा को सुरक्षा देने का नियम है। धारा चार सौ निन्यानवे में इस बात का जिक्र है कि किन परिस्थितियों में मानहानि का दावा किया जा सकता है और धारा पाँच सौ में उसकी सजा के बारे में लिखा गया है। सवाल- लोग क्लेम करते वक्त पैसे का कैलकुलेशन कैसे करते हैं? जवाब- इसे कंगना और जावेद के उदाहरण से ही समझिए। मान लीजिए, जावेद अख्तर की एक दिन की कमाई पचास लाख रुपए है और जिस दिन से उनकी मान की हानि हुई है, उस दिन से उन्हें कितने का नुकसान हुआ है, वो इसे कैलकुलेट करेंगे। फिर कंगना के ऊपर उतने पैसे का क्लेम कर सकते हैं। सवाल- अगर किसी व्यक्ति की कमाई एक महीने में तीस से चालीस हजार है, लेकिन उसकी सोशल वैल्यू बहुत है, लाखों में फॉलोअर्स हैं और लोग उन्हें बहुत मानते हैं, तो क्या कमाई के साथ-साथ वो अपने सोशल वैल्यू को भी कैलकुलेट करके क्लेम कर सकते हैं हैं? जवाब- जी हां, आप अपनी कमाई के नुकसान के साथ-साथ अपने सोशल वैल्यू को भी कैलकुलेट कर सकते हैं। सवाल- आप सामने वाले के ऊपर जितने चाहे, उतने पैसे के लिए क्लेम कर सकते हैं? जवाब- हां, आप जितने पैसे चाहे उतने पैसे के लिए क्लेम कर सकते हैं। जैसे- एक करोड़, दो करोड़, तीन करोड़ या इससे ज्यादा भी, लेकिन सामने वाला देने की स्थिति में है कि नहीं, यह कोर्ट तय करता है। कोर्ट दोनों पक्षों की बातों और सबूतों को देखेगा। आरोपी की हैसियत उतनी है, जितने पैसे आपने उस पर क्लेम किए हैं, तो उसे उतना पैसा देना होगा, लेकिन सामने वाले की स्थिति उतने पैसे देने लायक नहीं है, तो कोर्ट तय करेगी कि उसे कितनी रकम देनी है। सवाल- मानहानि के लिए कोर्ट में कितनी फीस जमा करनी होती है? जवाब- कोर्ट की फीस ज्यादा से ज्यादा एक लाख पचास हजार रुपए है। इतने पैसे जमा करने के बाद आप जितना चाहे उतने पैसे की मांग रख सकते हैं। सवाल- किन बातों को मानहानि नहीं माना जाता है? रामलला का कोई अपमान करे तो क्या मानहानि का केस होगा? जी हां, उनके कुल या परिवार के लोग मानहानि का केस कर सकते हैं। हालांकि उन्हें लोग पूजते हैं, इसलिए उनकी संपत्ति या पैसे का कैलकुलेशन नहीं किया जा सकता है। इस स्थिति में अगर रामलला को लेकर लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, तो कोई भी इंडिविजुअल इंसान IPC की धारा- दो सौ पचानवे और दो सौ पचानवे एम्पीयर के तहत केस दर्ज करवा सकता है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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अनाथ और सड़क पर रहने वाले जानवरों के सुरक्षा की बात करते हैं लेकिन उनकी स्थिति किसी से छुपी नहीं है। अक्सर सड़क पर घूमने वाले कुत्ते बीमारी (dog) या किसी वाहन की चपेट में आने से बेमौत मारे जाते हैं। हालांकि ऐसे जानवरों के लिए काम करने वाले कई सारे संगठन और एनजीओ (NGO) हैं लेकिन इस बार मुंबई पुलिस के एक जवान ने इस तरह की एक पहल है।
हालांकि अभी तक उत्तर मुंबई (North mumbai) के इलाके में जानवरों को आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं थी लेकिन अब एमएचबी पुलिस स्टेशन (MHB police station) के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर सुधीर कुंडालकर के प्रयासों से एक बाइक एम्बुलेंस का उद्घाटन किया गया। गौर करने वाली बात ये है कि यह बाइक एम्बुलेंस (bike ambulance) प्योर एनिमल लवर ग्रुप (animal lover group) के सदस्य भरत सत्रा ने खुद अपने पैसों से ख़रीदा और जानवरो के लिए फस्ट ऐड की व्यवस्था के साथ इसे पाल ग्रुप को सुपुर्द कर दिया। जिसके बाद अब उत्तर मुंबई के अंतर्गत आने वाले इलाकों में जानवरों को गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचाने की समस्या दूर हो गयी।
आपको बता दें कि इससे पहले भी एमएचबी पुलिस स्टेशन में कार्यरत हेड कॉन्स्टेबल विनायक वारघाड़े के प्रयासों से एम्बुलेंस की व्यवस्था की गयी जिसका उद्घाटन सुधीर कुंडालकर के हाथों किया गया। तो कुल मिलाकर इन दिनों मुंबई के एमएचबी पुलिस स्टेशन की चर्चा पूरे मुंबई शहर में हो रही है जिसका श्रेय जाता है एमएचबी पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर सुधीर कुंडालकर को।
इस बाइक एम्बुलेंस से बीमार या घायल जानवरों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचा कर उनका इलाज शुरू किया जा सकेगा।
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अनाथ और सड़क पर रहने वाले जानवरों के सुरक्षा की बात करते हैं लेकिन उनकी स्थिति किसी से छुपी नहीं है। अक्सर सड़क पर घूमने वाले कुत्ते बीमारी या किसी वाहन की चपेट में आने से बेमौत मारे जाते हैं। हालांकि ऐसे जानवरों के लिए काम करने वाले कई सारे संगठन और एनजीओ हैं लेकिन इस बार मुंबई पुलिस के एक जवान ने इस तरह की एक पहल है। हालांकि अभी तक उत्तर मुंबई के इलाके में जानवरों को आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं थी लेकिन अब एमएचबी पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर सुधीर कुंडालकर के प्रयासों से एक बाइक एम्बुलेंस का उद्घाटन किया गया। गौर करने वाली बात ये है कि यह बाइक एम्बुलेंस प्योर एनिमल लवर ग्रुप के सदस्य भरत सत्रा ने खुद अपने पैसों से ख़रीदा और जानवरो के लिए फस्ट ऐड की व्यवस्था के साथ इसे पाल ग्रुप को सुपुर्द कर दिया। जिसके बाद अब उत्तर मुंबई के अंतर्गत आने वाले इलाकों में जानवरों को गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंचाने की समस्या दूर हो गयी। आपको बता दें कि इससे पहले भी एमएचबी पुलिस स्टेशन में कार्यरत हेड कॉन्स्टेबल विनायक वारघाड़े के प्रयासों से एम्बुलेंस की व्यवस्था की गयी जिसका उद्घाटन सुधीर कुंडालकर के हाथों किया गया। तो कुल मिलाकर इन दिनों मुंबई के एमएचबी पुलिस स्टेशन की चर्चा पूरे मुंबई शहर में हो रही है जिसका श्रेय जाता है एमएचबी पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर सुधीर कुंडालकर को। इस बाइक एम्बुलेंस से बीमार या घायल जानवरों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचा कर उनका इलाज शुरू किया जा सकेगा।
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शिवपुरी। अभी अभी खबर आ रही है कि जिले के देहात थाना क्षेत्र के अंर्तगत बांकडे हनुमान मंदिर के सामने घसारई पुल पर एक ट्रक असंतुलित होकर खाई में गिर गया। जिससे ट्रक में सबार तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। और पांच मजदूर घायल हो गए। जिन्हे उपचार के लिए जिला चिकित्सालय लाया गया।
जानकारी के अनुसार कल्लू शिवहरे का भूसे का काम है और इसी काम के चलते कल्लू शिवहरे का ट्रक क्रमांक एम पी 33 एच 0239 शिवपुरी से झांसी की ओर भूसा भरने जा रहा था। तभी ट्र्रक ड्राइवर अतर सिंह ने तेजी और लापरवाही पूर्वक गाडी पर से संतुलन खो दिया और ट्रक को पास ही स्थित खाई में गिरा दिया जिससे ट्रक की बोनट पर बैठे अजय पुत्र पटटू आदिवासी उम्र 20 वर्ष निवासी पडोरा, विक्कू पुत्र गजनलाल आदिवासी उम्र 22 वर्ष और प्रताप पुत्र शांतिलाल आदिवासी उम्र 23 वर्ष निवासी कोटा की मौके पर ही र्ददनाक मौत हो गई।
वहीं ट्रक में सवार शेरा समेत पांच मजदूर घायल हो गए। पुलिस मौके पर पहुंची और घायलो को अस्पताल पहुंचाया जहां पर घायलों का उपचार किया जा रहा है वहीं मतृको को पीएम हाउस भेज दिया गया है।
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शिवपुरी। अभी अभी खबर आ रही है कि जिले के देहात थाना क्षेत्र के अंर्तगत बांकडे हनुमान मंदिर के सामने घसारई पुल पर एक ट्रक असंतुलित होकर खाई में गिर गया। जिससे ट्रक में सबार तीन मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। और पांच मजदूर घायल हो गए। जिन्हे उपचार के लिए जिला चिकित्सालय लाया गया। जानकारी के अनुसार कल्लू शिवहरे का भूसे का काम है और इसी काम के चलते कल्लू शिवहरे का ट्रक क्रमांक एम पी तैंतीस एच दो सौ उनतालीस शिवपुरी से झांसी की ओर भूसा भरने जा रहा था। तभी ट्र्रक ड्राइवर अतर सिंह ने तेजी और लापरवाही पूर्वक गाडी पर से संतुलन खो दिया और ट्रक को पास ही स्थित खाई में गिरा दिया जिससे ट्रक की बोनट पर बैठे अजय पुत्र पटटू आदिवासी उम्र बीस वर्ष निवासी पडोरा, विक्कू पुत्र गजनलाल आदिवासी उम्र बाईस वर्ष और प्रताप पुत्र शांतिलाल आदिवासी उम्र तेईस वर्ष निवासी कोटा की मौके पर ही र्ददनाक मौत हो गई। वहीं ट्रक में सवार शेरा समेत पांच मजदूर घायल हो गए। पुलिस मौके पर पहुंची और घायलो को अस्पताल पहुंचाया जहां पर घायलों का उपचार किया जा रहा है वहीं मतृको को पीएम हाउस भेज दिया गया है।
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केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि नकदी की स्थिति की समीक्षा तथा आने वाले समय में भरोसेमंद नकदी की जरूरत का आकलन करने के बाद यह फैसला किया गया है।
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह 20 जून को बांड खरीद के जरिये बैंकिंग प्रणाली में 12,500 करोड़ रुपये की पूंजी डालेगा। केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि नकदी की स्थिति की समीक्षा तथा आने वाले समय में भरोसेमंद नकदी की जरूरत का आकलन करने के बाद यह फैसला किया गया है।
खुले बाजार की गतिविधियों (ओएमओ) के तहत 20 जून 2019 को 125 अरब रुपये मूल्य (12,500 करोड़ रुपये) की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद की जाएगी। इससे पहले, दिन में आरबीआई ने बांड खरीद के जरिये बैंकों में 15,000 करोड़ रुपये की पूंजी डाली थी।
Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि नकदी की स्थिति की समीक्षा तथा आने वाले समय में भरोसेमंद नकदी की जरूरत का आकलन करने के बाद यह फैसला किया गया है। मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह बीस जून को बांड खरीद के जरिये बैंकिंग प्रणाली में बारह,पाँच सौ करोड़ रुपये की पूंजी डालेगा। केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि नकदी की स्थिति की समीक्षा तथा आने वाले समय में भरोसेमंद नकदी की जरूरत का आकलन करने के बाद यह फैसला किया गया है। खुले बाजार की गतिविधियों के तहत बीस जून दो हज़ार उन्नीस को एक सौ पच्चीस अरब रुपये मूल्य की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद की जाएगी। इससे पहले, दिन में आरबीआई ने बांड खरीद के जरिये बैंकों में पंद्रह,शून्य करोड़ रुपये की पूंजी डाली थी। Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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चेन्नई, फिल्मकार प्रवीण सत्तारु ने अपनी आगामी तेलुगू फिल्म 'पीएसवी गरुड़ा वेगा' में एक खास गाने के लिए अभिनेत्री सनी लियोनी को शामिल किया है। प्रवीण का कहना है कि इस गाने के लिए सनी ही उनकी पहली पसंद थीं। प्रवीण ने कहा, 'निर्माताओं से इस बारे में बात करने से पहले ही मेरे दिमाग में इस गाने के लिए सनी का ही नाम था।
यह गाना फिल्म में एक खास मौके पर आएगा। इसलिए, इसमें जाने-पहचाने चेहरे की जरूरत थी। हालांकि, तेलुगू फिल्म जगत में इस गीत के लिए हमारे पास कई विकल्प थे, लेकिन मेरा मानना है कि सनी की उपस्थिति दर्शकों को सिनेमाघरों तक लाने में मदद करेगी। ' प्रवीण ने इस बात को भी स्पष्ट किया है कि यह गाना कोई आइटम सॉन्ग नहीं है। फिल्मकार ने कहा, 'यह गाना कहानी का हिस्सा है।
कोई आइटम नम्बर नहीं है। फिल्म के दूसरे भाग का यह एकमात्र गाना है। सनी को एक अलग अवतार में देखा जाएगा। इस गाने की शूटिंग केरल में होगी। ' इस फिल्म में अभिनेता राजशेखर मुख्य भूमिका में हैं। वह इसमें पुलिस अधिकारी के किरदार में नजर आएंगे। राजशेखर के अलावा, इसमें पूजा कुमार, श्रद्धा दास और अदिथ अरुण भी मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म जल्द ही रिलीज होगी।
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चेन्नई, फिल्मकार प्रवीण सत्तारु ने अपनी आगामी तेलुगू फिल्म 'पीएसवी गरुड़ा वेगा' में एक खास गाने के लिए अभिनेत्री सनी लियोनी को शामिल किया है। प्रवीण का कहना है कि इस गाने के लिए सनी ही उनकी पहली पसंद थीं। प्रवीण ने कहा, 'निर्माताओं से इस बारे में बात करने से पहले ही मेरे दिमाग में इस गाने के लिए सनी का ही नाम था। यह गाना फिल्म में एक खास मौके पर आएगा। इसलिए, इसमें जाने-पहचाने चेहरे की जरूरत थी। हालांकि, तेलुगू फिल्म जगत में इस गीत के लिए हमारे पास कई विकल्प थे, लेकिन मेरा मानना है कि सनी की उपस्थिति दर्शकों को सिनेमाघरों तक लाने में मदद करेगी। ' प्रवीण ने इस बात को भी स्पष्ट किया है कि यह गाना कोई आइटम सॉन्ग नहीं है। फिल्मकार ने कहा, 'यह गाना कहानी का हिस्सा है। कोई आइटम नम्बर नहीं है। फिल्म के दूसरे भाग का यह एकमात्र गाना है। सनी को एक अलग अवतार में देखा जाएगा। इस गाने की शूटिंग केरल में होगी। ' इस फिल्म में अभिनेता राजशेखर मुख्य भूमिका में हैं। वह इसमें पुलिस अधिकारी के किरदार में नजर आएंगे। राजशेखर के अलावा, इसमें पूजा कुमार, श्रद्धा दास और अदिथ अरुण भी मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म जल्द ही रिलीज होगी।
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आत्मश्रेय होगा । और इसी से ही गुमदान की महत्ता ज्यादा है। दया ही मनुष्य का उद्धार करनेवाली है। और वही मुक्ति का द्वार है । तुलसीदास तो पुकार पुकार के कहते हैं कि
दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान । तुलसी दया न छडीए, जब लग घट में प्राख ।।
सभी तप, जप, यम, नियम, प्रत्याहार, प्राणायाम, धारणा, ध्यान, समाधि और योगादि जो यौगिक प्रवृत्तियाँ हैं वे सभी स्वदया के लिए ही हैं। अर्थात् की उन्नत स्थिति के वास्ते ही हैं । उस के पालन से आत्मा का कर्ममल नष्ट हो जाता है। और अन्त में आत्मा परमात्मा हो जाता है । जिसने स्वया अर्थात् अपने आत्मा को पहचाना है वही यथार्थ अहिंसा का पालन कर सकता है। और वही सधा मुमुक्षु है और वही विश्ववद्य या महात्मा होने लायक है। आत्मा प्रथम कर्मवन्धों से जकड़ जाता है मगर अहिंसा से वह स्वतंत्र हो सकता है आत्मा का ओजसू प्रगट होता है और उस की सामर्थ्य चढ़ती है। मायिक, पौद्गलिक, आसुरी और पाशविक वल ये सब अज्ञानता यानि हिंसा से पैदा होता है। अहिंमा जितनी मनल होती है उतनी ही आसुरी आदि वृत्तियाँ कमजोर होती है और आत्मिकसामध्ये वृद्धि पो पाता है । हिंसानल वह पशुबल है। अहिंसानल वह सात्विक बल है। रावण बलिष्ठ यानि धासुरी घलों का अधिष्ठाता था
मगर उस को श्रीराम जैसी महा व्यक्ति के आगे हारना पडा और समरांगण में अस्तित्व मिटाना पड़ा । इसलिए आसुरीवल चाहे कितना भी क्यो न हो मगर सात्विकवल के आगे वह ठहर नहीं सकता । मेघाच्छिन्न सूर्य जैसे मेघखण्डो से मुक्त होता है वैसे वैसे उस का तेज वृद्धि को पाता है उसी तरह आत्मा का असावल जितना बढता है उतना उस का सामर्थ्य वृद्धि को पाता है । अहिंसावादी हमेशां अपना का सामर्थ्य केवल से बढाता जाता है तब हिंसावादी धर्माचरण से पापकर्म को बढाता है और अज्ञानरूप से अशुभ कर्मों को पैदा कर के निस्तेज होता है । जो अहिंसक है, सत्यव्रत के पालक है वे दुःख और विपाद के बादल उमड आने पर कष्ट की वर्षा होने पर भी अपने व्रत से तिल भर भी पीछे नही हटते थे, वे चूपचाप दुःखो को सहते है और दूसरे के कल्याण की भावना करते रहते है ।
अहिंसा के उच्च तत्त्व की उन्नत स्थिति को प्राप्त करने के लिए - परमात्मदशा को पहुंचने के लिए है । अतः किसी स्वरूप से किसी विषय मे उस को यथास्थित पालन करने मे आवे तो अहिंसा के प्रमाण मे इच्छित लाभ को विना दिये नहीं रहते। गुड हमेशां मीठा होता है और जब कभी उस को चक्खो तब वह मठापन देता है । इसी तरह का कैसा भी पालन हितावह ही होता है । माता भारती के वीरपुत्र महात्मा गांधीजीने जो देश की आझादी के लिए
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आत्मश्रेय होगा । और इसी से ही गुमदान की महत्ता ज्यादा है। दया ही मनुष्य का उद्धार करनेवाली है। और वही मुक्ति का द्वार है । तुलसीदास तो पुकार पुकार के कहते हैं कि दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान । तुलसी दया न छडीए, जब लग घट में प्राख ।। सभी तप, जप, यम, नियम, प्रत्याहार, प्राणायाम, धारणा, ध्यान, समाधि और योगादि जो यौगिक प्रवृत्तियाँ हैं वे सभी स्वदया के लिए ही हैं। अर्थात् की उन्नत स्थिति के वास्ते ही हैं । उस के पालन से आत्मा का कर्ममल नष्ट हो जाता है। और अन्त में आत्मा परमात्मा हो जाता है । जिसने स्वया अर्थात् अपने आत्मा को पहचाना है वही यथार्थ अहिंसा का पालन कर सकता है। और वही सधा मुमुक्षु है और वही विश्ववद्य या महात्मा होने लायक है। आत्मा प्रथम कर्मवन्धों से जकड़ जाता है मगर अहिंसा से वह स्वतंत्र हो सकता है आत्मा का ओजसू प्रगट होता है और उस की सामर्थ्य चढ़ती है। मायिक, पौद्गलिक, आसुरी और पाशविक वल ये सब अज्ञानता यानि हिंसा से पैदा होता है। अहिंमा जितनी मनल होती है उतनी ही आसुरी आदि वृत्तियाँ कमजोर होती है और आत्मिकसामध्ये वृद्धि पो पाता है । हिंसानल वह पशुबल है। अहिंसानल वह सात्विक बल है। रावण बलिष्ठ यानि धासुरी घलों का अधिष्ठाता था मगर उस को श्रीराम जैसी महा व्यक्ति के आगे हारना पडा और समरांगण में अस्तित्व मिटाना पड़ा । इसलिए आसुरीवल चाहे कितना भी क्यो न हो मगर सात्विकवल के आगे वह ठहर नहीं सकता । मेघाच्छिन्न सूर्य जैसे मेघखण्डो से मुक्त होता है वैसे वैसे उस का तेज वृद्धि को पाता है उसी तरह आत्मा का असावल जितना बढता है उतना उस का सामर्थ्य वृद्धि को पाता है । अहिंसावादी हमेशां अपना का सामर्थ्य केवल से बढाता जाता है तब हिंसावादी धर्माचरण से पापकर्म को बढाता है और अज्ञानरूप से अशुभ कर्मों को पैदा कर के निस्तेज होता है । जो अहिंसक है, सत्यव्रत के पालक है वे दुःख और विपाद के बादल उमड आने पर कष्ट की वर्षा होने पर भी अपने व्रत से तिल भर भी पीछे नही हटते थे, वे चूपचाप दुःखो को सहते है और दूसरे के कल्याण की भावना करते रहते है । अहिंसा के उच्च तत्त्व की उन्नत स्थिति को प्राप्त करने के लिए - परमात्मदशा को पहुंचने के लिए है । अतः किसी स्वरूप से किसी विषय मे उस को यथास्थित पालन करने मे आवे तो अहिंसा के प्रमाण मे इच्छित लाभ को विना दिये नहीं रहते। गुड हमेशां मीठा होता है और जब कभी उस को चक्खो तब वह मठापन देता है । इसी तरह का कैसा भी पालन हितावह ही होता है । माता भारती के वीरपुत्र महात्मा गांधीजीने जो देश की आझादी के लिए
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- Kids Nutrition (2-15 Yrs)
Hemolite 231mg/1.5mg Tablet is a combination of nutritional supplements. इसे एनीमिया का इलाज करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
Hemolite 231mg/1.5mg Tablet can be taken with or without food. डॉक्टर द्वारा निर्धारित खुराक और अवधि अनुसार ही इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए. इस दवा का इस्तेमाल बताई गई डोज़ से अधिक नहीं किया जाना चाहिए.
यह आमतौर पर एक सुरक्षित दवा है जिसके बहुत कम साइड इफेक्ट होते हैं. अगर आप एलर्जीक रिएक्शन के कोई भी लक्षण देखते हैं जैसे कि सूजन, खुजली, सांस लेने में कठिनाई, हाइव्स आदि तो तुरंत अपने डॉक्टर से बात करें.
इस दवा को लेने से पहले, अगर आपको कोई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं है तो अपने डॉक्टर को बताएं. अगर आप कोई अन्य दवा ले रही हैं या स्तनपान कराती हैं या गर्भवती हैं तो डॉक्टर को बताएं.. इस दवा को लेने के बाद शराब का सेवन न करने की सलाह दी जाती है.
Hemolite 231mg/1.5mg Tablet can be taken with or without food. डॉक्टर द्वारा निर्धारित खुराक और अवधि अनुसार ही इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए. इस दवा का इस्तेमाल बताई गई डोज़ से अधिक नहीं किया जाना चाहिए.
यह आमतौर पर एक सुरक्षित दवा है जिसके बहुत कम साइड इफेक्ट होते हैं. अगर आप एलर्जीक रिएक्शन के कोई भी लक्षण देखते हैं जैसे कि सूजन, खुजली, सांस लेने में कठिनाई, हाइव्स आदि तो तुरंत अपने डॉक्टर से बात करें.
इस दवा को लेने से पहले, अगर आपको कोई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं है तो अपने डॉक्टर को बताएं. अगर आप कोई अन्य दवा ले रही हैं या स्तनपान कराती हैं या गर्भवती हैं तो डॉक्टर को बताएं.. इस दवा को लेने के बाद शराब का सेवन न करने की सलाह दी जाती है.
एनीमिया तब होता है जब आपके शरीर में पर्याप्त लाल रक्त कोशिकाएं(रेड ब्लड सेल्स) नहीं हैं या जब आपकी लाल रक्त कोशिकाएं ठीक से काम नहीं करती हैं. आपके शरीर में आयरन की कमीएनीमिया के सबसे आम कारणों में से एक है. Hemolite 231mg/1.5mg Tablet prevents and treat anemia by improving the level of iron in the body. This helps reduce symptoms such as tiredness, weakness, reduced concentration, pale or yellow skin, brittle nails, dry hair etc. Hemolite 231mg/1.5mg Tablet also reduces the risk of iron deficiency in pregnant and lactating women. Along with taking Hemolite 231mg/1.5mg Tablet, include iron rich foods like spinach, dates, organ meats like liver, iron fortified cereals etc.
इस दवा की खुराक और अनुपान की अवधि के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें. इसे साबुत निगल लें. इसे चबाएं, कुचलें या तोड़ें नहीं. Hemolite 231mg/1.5mg Tablet may be taken with or without food, but it is better to take it at a fixed time.
Hemolite 231mg/1.5mg Tablet is a combination of two medicines: Sodium Feredetate and Folic Acid. सोडियम फेरिडिटेट आपके शरीर में आयरन की भरपाई करता है. नई लाल रक्त कोशिकाओं और हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए आयरन महत्वपूर्ण है, एक ऐसा पदार्थ जो इन कोशिकाओं को ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता देता है. फोलिक एसिड विटामिन बी का एक रूप है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन ले जाता है.
Caution is advised when consuming alcohol with Hemolite 231mg/1.5mg Tablet. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें.
Information regarding the use of Hemolite 231mg/1.5mg Tablet during pregnancy is not available. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें.
Information regarding the use of Hemolite 231mg/1.5mg Tablet during breastfeeding is not available. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें.
It is not known whether Hemolite 231mg/1.5mg Tablet alters the ability to drive. यदि ऐसा कुछ भी मसहूस होता है तो गाड़ी ना चलाएं.
There is limited information available on the use of Hemolite 231mg/1.5mg Tablet in patients with kidney disease. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें.
There is limited information available on the use of Hemolite 231mg/1.5mg Tablet in patients with liver disease. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें.
If you miss a dose of Hemolite 231mg/1.5mg Tablet, take it as soon as possible. हालांकि, अगर अगली खुराक का समय हो गया है तो छूटी हुई खुराक को छोड़ दें और नियमित समय पर अगली खुराक लें. खुराक को डबल न करें.
यह जानकारी सिर्फ सूचना के उद्देश्य से है. कृपया कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें.
- Hemolite 231mg/1.5mg Tablet is given to treat anemia.
- अपने डॉक्टर को बताएं कि क्या आप कोई एंटीबायोटिक ले रहे हैं.
- आयरन सप्लीमेंट आपके मल का रंग गहरा कर सकता है. यह पूरी तरह से हानिरहित है.
- Hemolite 231mg/1.5mg Tablet might cause mild constipation, try to eat a well-balanced diet and drink several glasses of water each day.
Hemolite 231mg/1.5mg Tablet is used to regulate hemoglobin levels in the human body. यह आमतौर पर उन रोगियों को दिया जाता है जिनके पास आयरन की कमी होती है या आयरन की कमी होती है. हीमोग्लोबिन स्तर सामान्य होने तक डॉक्टर इस दवा का उपयोग करने का सुझाव दे सकता है. इस दवा के उपयोग को ठीक से समझने के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें.
Yes, Hemolite 231mg/1.5mg Tablet can be taken for iron deficiency anemia and iron deficiency. हालांकि, अन्य प्रकार के एनीमिया के लिए इसका उपयोग नहीं किया जाता है. Take Hemolite 231mg/1.5mg Tablet in the dose and duration advised by your doctor.
आप आयरन कंटेंट (जैसे लाल मांस, पोर्क, पोल्ट्री और सीफूड) से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकते हैं. अन्य खाद्य पदार्थ जिनमें समृद्ध आयरन कंटेंट होते हैं, में बीन्स, गहरे हरे पत्तेदार सब्जियां (जैसे पालक), मटर, सूखे फल (एप्रिकॉट), आयरन-फोर्टिफाइड अनाज, ब्रेड और पास्ता शामिल हैं. आप आयरन की कमी वाले एनीमिया के लिए फार्मेसी स्टोर पर उपलब्ध आयरन सप्लीमेंट (टैबलेट या कैप्सूल) का भी प्रयास कर सकते हैं. किसी भी सप्लीमेंट लेने से पहले हमेशा डॉक्टर से परामर्श करें.
Q. What can I take for iron deficiency anemia?
You can take iron supplement (ferrous fumarate/ferrous sulfate/ferrous gluconate) tablets to treat iron deficiency anemia. अगर आपको यकीन नहीं है, तो अपने डॉक्टर से परामर्श लें.
प्र. क्या मैं विटामिन सी/विटामिन डी/मल्टीविटामिन/फोलिक एसिड के साथ आयरन ले सकता/सकती हूं?
हां, आयरन और विटामिन सी/विटामिन डी/मल्टीविटामिन/फोलिक एसिड एक साथ लिया जा सकता है. विटामिन सी और आयरन को एक साथ लेने से शरीर को आयरन को सोखने में मदद मिलती है. However, it would be best to consult your doctor before using Hemolite 231mg/1.5mg Tablet with other medicines.
No, Hemolite 231mg/1.5mg Tablet may alter the absorption of zinc, if given together. Therefore, it is advisable not to take Hemolite 231mg/1.5mg Tablet with zinc.
Disclaimer:टाटा 1mg's का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उसके उपभोक्ताओं को एक्सपर्ट द्वारा जांच की गई, सटीक और भरोसेमंद जानकारी मिले. यहां उपलब्ध जानकारी को चिकित्सकीय परामर्श के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए. यहां दिए गए विवरण सिर्फ़ आपकी जानकारी के लिए हैं. यह संभव है कि इसमें स्वास्थ्य संबधी किसी विशेष समस्या, लैब टेस्ट, दवाओं और उनके सभी संभावित दुष्प्रभावों, पारस्परिक प्रभाव और उनसे जुड़ी सावधानियां एवं चेतावनियों के बारे में सारी जानकारी सम्मिलित ना हो। किसी भी दवा या बीमारी से जुड़े अपने सभी सवालों के लिए डॉक्टर से संपर्क करें. हमारा उद्देश्य डॉक्टर और मरीज के बीच के संबंध को मजबूत बनाना है, उसका विकल्प बनना नहीं.
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- Kids Nutrition Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet is a combination of nutritional supplements. इसे एनीमिया का इलाज करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet can be taken with or without food. डॉक्टर द्वारा निर्धारित खुराक और अवधि अनुसार ही इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए. इस दवा का इस्तेमाल बताई गई डोज़ से अधिक नहीं किया जाना चाहिए. यह आमतौर पर एक सुरक्षित दवा है जिसके बहुत कम साइड इफेक्ट होते हैं. अगर आप एलर्जीक रिएक्शन के कोई भी लक्षण देखते हैं जैसे कि सूजन, खुजली, सांस लेने में कठिनाई, हाइव्स आदि तो तुरंत अपने डॉक्टर से बात करें. इस दवा को लेने से पहले, अगर आपको कोई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं है तो अपने डॉक्टर को बताएं. अगर आप कोई अन्य दवा ले रही हैं या स्तनपान कराती हैं या गर्भवती हैं तो डॉक्टर को बताएं.. इस दवा को लेने के बाद शराब का सेवन न करने की सलाह दी जाती है. 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Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet prevents and treat anemia by improving the level of iron in the body. This helps reduce symptoms such as tiredness, weakness, reduced concentration, pale or yellow skin, brittle nails, dry hair etc. Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet also reduces the risk of iron deficiency in pregnant and lactating women. Along with taking Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet, include iron rich foods like spinach, dates, organ meats like liver, iron fortified cereals etc. इस दवा की खुराक और अनुपान की अवधि के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें. इसे साबुत निगल लें. इसे चबाएं, कुचलें या तोड़ें नहीं. Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet may be taken with or without food, but it is better to take it at a fixed time. Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet is a combination of two medicines: Sodium Feredetate and Folic Acid. सोडियम फेरिडिटेट आपके शरीर में आयरन की भरपाई करता है. नई लाल रक्त कोशिकाओं और हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए आयरन महत्वपूर्ण है, एक ऐसा पदार्थ जो इन कोशिकाओं को ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता देता है. फोलिक एसिड विटामिन बी का एक रूप है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन ले जाता है. Caution is advised when consuming alcohol with Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें. Information regarding the use of Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet during pregnancy is not available. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें. Information regarding the use of Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet during breastfeeding is not available. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें. It is not known whether Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet alters the ability to drive. यदि ऐसा कुछ भी मसहूस होता है तो गाड़ी ना चलाएं. There is limited information available on the use of Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet in patients with kidney disease. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें. There is limited information available on the use of Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet in patients with liver disease. कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें. If you miss a dose of Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet, take it as soon as possible. हालांकि, अगर अगली खुराक का समय हो गया है तो छूटी हुई खुराक को छोड़ दें और नियमित समय पर अगली खुराक लें. खुराक को डबल न करें. यह जानकारी सिर्फ सूचना के उद्देश्य से है. कृपया कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श लें. - Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet is given to treat anemia. - अपने डॉक्टर को बताएं कि क्या आप कोई एंटीबायोटिक ले रहे हैं. - आयरन सप्लीमेंट आपके मल का रंग गहरा कर सकता है. यह पूरी तरह से हानिरहित है. - Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet might cause mild constipation, try to eat a well-balanced diet and drink several glasses of water each day. Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet is used to regulate hemoglobin levels in the human body. यह आमतौर पर उन रोगियों को दिया जाता है जिनके पास आयरन की कमी होती है या आयरन की कमी होती है. हीमोग्लोबिन स्तर सामान्य होने तक डॉक्टर इस दवा का उपयोग करने का सुझाव दे सकता है. इस दवा के उपयोग को ठीक से समझने के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें. Yes, Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet can be taken for iron deficiency anemia and iron deficiency. हालांकि, अन्य प्रकार के एनीमिया के लिए इसका उपयोग नहीं किया जाता है. Take Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet in the dose and duration advised by your doctor. आप आयरन कंटेंट से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकते हैं. अन्य खाद्य पदार्थ जिनमें समृद्ध आयरन कंटेंट होते हैं, में बीन्स, गहरे हरे पत्तेदार सब्जियां , मटर, सूखे फल , आयरन-फोर्टिफाइड अनाज, ब्रेड और पास्ता शामिल हैं. आप आयरन की कमी वाले एनीमिया के लिए फार्मेसी स्टोर पर उपलब्ध आयरन सप्लीमेंट का भी प्रयास कर सकते हैं. किसी भी सप्लीमेंट लेने से पहले हमेशा डॉक्टर से परामर्श करें. Q. What can I take for iron deficiency anemia? You can take iron supplement tablets to treat iron deficiency anemia. अगर आपको यकीन नहीं है, तो अपने डॉक्टर से परामर्श लें. प्र. क्या मैं विटामिन सी/विटामिन डी/मल्टीविटामिन/फोलिक एसिड के साथ आयरन ले सकता/सकती हूं? हां, आयरन और विटामिन सी/विटामिन डी/मल्टीविटामिन/फोलिक एसिड एक साथ लिया जा सकता है. विटामिन सी और आयरन को एक साथ लेने से शरीर को आयरन को सोखने में मदद मिलती है. However, it would be best to consult your doctor before using Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet with other medicines. No, Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet may alter the absorption of zinc, if given together. Therefore, it is advisable not to take Hemolite दो सौ इकतीस मिलीग्राम/एक दशमलव पाँच मिलीग्राम Tablet with zinc. Disclaimer:टाटा एक मिलीग्राम's का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उसके उपभोक्ताओं को एक्सपर्ट द्वारा जांच की गई, सटीक और भरोसेमंद जानकारी मिले. यहां उपलब्ध जानकारी को चिकित्सकीय परामर्श के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए. यहां दिए गए विवरण सिर्फ़ आपकी जानकारी के लिए हैं. यह संभव है कि इसमें स्वास्थ्य संबधी किसी विशेष समस्या, लैब टेस्ट, दवाओं और उनके सभी संभावित दुष्प्रभावों, पारस्परिक प्रभाव और उनसे जुड़ी सावधानियां एवं चेतावनियों के बारे में सारी जानकारी सम्मिलित ना हो। किसी भी दवा या बीमारी से जुड़े अपने सभी सवालों के लिए डॉक्टर से संपर्क करें. हमारा उद्देश्य डॉक्टर और मरीज के बीच के संबंध को मजबूत बनाना है, उसका विकल्प बनना नहीं.
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उमेश पाल हत्याकांड और माफिया अतीक अहमद के साथ भाई अशरफ के कत्ल का लाइव शूटआउट वीडियो पूरे देश ने देखा। 24 फरवरी को उमेश पाल पर जिस तरह से गोलियां बरसाईं गईं ठीक उसी तरह अतीक और अशरफ पर भी गोलियों की बौछार हुई।
प्रयागराज, जागरण संवाददाता। लोगों ने हमेशा शूटआउट को सुना था, लेकिन देखा नहीं था। किंतु, 50 दिन के भीतर देश के लोगों ने दो बार लाइव शूटआउट देखा। सब कुछ वहीं। फर्क था तो सिर्फ स्थान का। पहली घटना की तरह ही इसमें भी यह तय था कि जिंदा नहीं छोड़ना है।
24 फरवरी की शाम करीब पांच बजे। सुलेमसराय के रहने वाले अधिवक्ता व विधायक राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल कचहरी से कार में सवार होकर अपने घर पहुंचते हैं। कार में उनके साथ चालक और दो सुरक्षाकर्मी रहते हैं। जैसे ही एक सुरक्षाकर्मी और उमेश पाल कार से उतरते हैं, अतीक अहमद का पुत्र असद अहमद समेत कई लोग गोली और बम से हमला बोल देते हैं।
दौड़ा-दौड़ाकर गोली और बम मारा जाता है। घर में घुसकर गोलियों की बौछार कर दी जाती है। घर के बाहर बनी गली से भागते हुए सुरक्षाकर्मी को पीछे से बम से उड़ा दिया जाता है। वहीं, कार में बैठे दूसरे सुरक्षाकर्मी को बाहर निकलने तक का मौका नहीं दिया जाता है। कार में ही गोली मारकर उसे छलनी कर दिया जाता है। सीसीटीवी से निकले फुटेज को जिले ही नहीं देश के लोगों ने देखा तो दहल गए। पहली बार शायद इस तरह का लाइव शूटआउट लोगों ने देखा था।
राजनीतिक गलियारे में भी इस लाइव शूटआउट ने खलबली मचा दिया था। इस घटना के ठीक 50वें दिन शनिवार रात देश के लोगों ने फिर शूटआउट का लाइव देखा। अंतर इतना था कि इस बार अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ ही इसका शिकार हो गए। अंदाज पहले ही शूटआउट की तरह ही था। अतीक और अशरफ को पुलिस जीप से उतारती है। काल्विन अस्पताल की तरफ बढ़ती है, उसी समय तीन युवक वहां पहुंचते हैं और अतीक के सिर में पिस्टल सटा देता है। जैसे ही ट्रिगर दबाता है, उसी समय बगल में खड़ा युवक अशरफ को गोली मार देता है।
इसके बाद तीसरा युवक भी फायरिंग करने लगता है। अतीक और अशरफ जमीन पर गिरते हैं तो उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो जाती है। सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी जब तक संभलते हैं, तब तक सब खत्म हो चुका होता है। सामने तीनों हमलावर हाथ उठाए नजर आते हैं। उनको पकड़कर पुलिस जीप में बैठाकर निकल जाती है। इसका एक-एक फुटेज लोगों ने देखा तो उनकी आखों से नींद गायब हो गई।
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उमेश पाल हत्याकांड और माफिया अतीक अहमद के साथ भाई अशरफ के कत्ल का लाइव शूटआउट वीडियो पूरे देश ने देखा। चौबीस फरवरी को उमेश पाल पर जिस तरह से गोलियां बरसाईं गईं ठीक उसी तरह अतीक और अशरफ पर भी गोलियों की बौछार हुई। प्रयागराज, जागरण संवाददाता। लोगों ने हमेशा शूटआउट को सुना था, लेकिन देखा नहीं था। किंतु, पचास दिन के भीतर देश के लोगों ने दो बार लाइव शूटआउट देखा। सब कुछ वहीं। फर्क था तो सिर्फ स्थान का। पहली घटना की तरह ही इसमें भी यह तय था कि जिंदा नहीं छोड़ना है। चौबीस फरवरी की शाम करीब पांच बजे। सुलेमसराय के रहने वाले अधिवक्ता व विधायक राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल कचहरी से कार में सवार होकर अपने घर पहुंचते हैं। कार में उनके साथ चालक और दो सुरक्षाकर्मी रहते हैं। जैसे ही एक सुरक्षाकर्मी और उमेश पाल कार से उतरते हैं, अतीक अहमद का पुत्र असद अहमद समेत कई लोग गोली और बम से हमला बोल देते हैं। दौड़ा-दौड़ाकर गोली और बम मारा जाता है। घर में घुसकर गोलियों की बौछार कर दी जाती है। घर के बाहर बनी गली से भागते हुए सुरक्षाकर्मी को पीछे से बम से उड़ा दिया जाता है। वहीं, कार में बैठे दूसरे सुरक्षाकर्मी को बाहर निकलने तक का मौका नहीं दिया जाता है। कार में ही गोली मारकर उसे छलनी कर दिया जाता है। सीसीटीवी से निकले फुटेज को जिले ही नहीं देश के लोगों ने देखा तो दहल गए। पहली बार शायद इस तरह का लाइव शूटआउट लोगों ने देखा था। राजनीतिक गलियारे में भी इस लाइव शूटआउट ने खलबली मचा दिया था। इस घटना के ठीक पचासवें दिन शनिवार रात देश के लोगों ने फिर शूटआउट का लाइव देखा। अंतर इतना था कि इस बार अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ ही इसका शिकार हो गए। अंदाज पहले ही शूटआउट की तरह ही था। अतीक और अशरफ को पुलिस जीप से उतारती है। काल्विन अस्पताल की तरफ बढ़ती है, उसी समय तीन युवक वहां पहुंचते हैं और अतीक के सिर में पिस्टल सटा देता है। जैसे ही ट्रिगर दबाता है, उसी समय बगल में खड़ा युवक अशरफ को गोली मार देता है। इसके बाद तीसरा युवक भी फायरिंग करने लगता है। अतीक और अशरफ जमीन पर गिरते हैं तो उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो जाती है। सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मी जब तक संभलते हैं, तब तक सब खत्म हो चुका होता है। सामने तीनों हमलावर हाथ उठाए नजर आते हैं। उनको पकड़कर पुलिस जीप में बैठाकर निकल जाती है। इसका एक-एक फुटेज लोगों ने देखा तो उनकी आखों से नींद गायब हो गई।
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हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बुधवार को कहा कि जननायक जनता पार्टी (जजपा) के पांचवें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में भिवानी में नौ दिसम्बर को ऐतिहासिक रैली आयोजित की जाएगी।
चौटाला ने उचाना विधानसभा क्षेत्र खटकड़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि रैली में राज्यभर से लाखों की संख्या कार्यकर्ता एवं आम लोग पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि इस रैली में जजपा द्वारा पूर्व में आयोजित सभी रैलियों की तुलना में भीड़ के हिसाब से नया रिकॉर्ड बनेगा।
उन्होंने लोगों को नौ दिसम्बर को भिवानी में आयोजित होने वाली रैली में भारी संख्या में पहुंचने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी पदाधिकारी खुद की गाड़ी में नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं एवं आमजन के साथ बस आदि में सवार होकर आएं। चौटाला ने कहा कि रैली में महिलाओं की संख्या पुरूषों के बराबर हो, इसके लिए सभी महिला पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता जोर-शोर से प्रचार में जुट जाएं।
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हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बुधवार को कहा कि जननायक जनता पार्टी के पांचवें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में भिवानी में नौ दिसम्बर को ऐतिहासिक रैली आयोजित की जाएगी। चौटाला ने उचाना विधानसभा क्षेत्र खटकड़ में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि रैली में राज्यभर से लाखों की संख्या कार्यकर्ता एवं आम लोग पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि इस रैली में जजपा द्वारा पूर्व में आयोजित सभी रैलियों की तुलना में भीड़ के हिसाब से नया रिकॉर्ड बनेगा। उन्होंने लोगों को नौ दिसम्बर को भिवानी में आयोजित होने वाली रैली में भारी संख्या में पहुंचने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी पदाधिकारी खुद की गाड़ी में नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं एवं आमजन के साथ बस आदि में सवार होकर आएं। चौटाला ने कहा कि रैली में महिलाओं की संख्या पुरूषों के बराबर हो, इसके लिए सभी महिला पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता जोर-शोर से प्रचार में जुट जाएं।
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लंबित मामलों का बोझ घटाने के लिए NGO ने संविधान के अनुच्छेद-224-A के तहत सभी हाईकोर्ट में अतिरिक्त जजों की नियुक्ति की अपील की है.
कोर्ट में लंबित मामलों को निपटाने के लिए 'एडहॉक जजों' (Ad Hoc Judge) की नियुक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 64 पैराग्राफ का फैसला लिखा है. इतना ही नहीं SC ने एडहॉक जजों की नियुक्ति को लेकर गाइडलाइंन भी जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने यह माना है कि यह प्रक्रिया जरूरी है. यह एक संवैधानिक प्रावधान है.
कोर्ट ने केंद्रीय कानून मंत्रालय और हाईकोर्ट (High Court) को एडहॉक जजों की नियुक्ति को लेकर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट चार महीने बाद इस मामले पर सुनवाई करेगा. गैर-सरकारी संगठन (NGO) लोक प्रहरी की ओर से दाखिल याचिका पर शीर्ष अदालत ने यह आदेश जारी किया है.
एनजीओ ने एडहॉक जजों की नियुक्ति की मांग को लेकर याचिका दायर की थी. लंबित मामलों का बोझ घटाने के लिए NGO ने संविधान के अनुच्छेद-224-A के तहत सभी हाईकोर्ट में अतिरिक्त जजों की नियुक्ति की अपील की है.
दरअसल, अनुच्छेद-224-A के मुताबिक, 'जरूरत के आधार पर किसी भी राज्य के हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से अदालत के किसी न्यायाधीश या किसी अन्य हाईकोर्ट के न्यायाधीश को उस राज्य के हाईकोर्ट में न्यायाधीश के तौर पर काम करने के लिए कह सकते हैं.
जस्टिस कौल ने कहा था कि वह चीफ जस्टिस की सलाह से सहमत हैं कि जब भी जजों की नियुक्ति होती है, तब ओछी शिकायतें की जाती है और इसे लेकर अदालत एडहॉक जजों की नियुक्ति की पूरी व्यवस्था को सवालिया घेरे में नहीं ला सकती. कोर्ट ने कहा था कि एडहॉक जज कमजोर निशाना नहीं हो सकते.
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में वरिष्ठ वकील विकास सिंह और कुछ अन्य वकीलों की उन दलीलों को भी खारिज कर दिया था, जिनमें कहा गया था कि कई पूर्व न्यायाधीश पद संभालने के लिए इच्छुक नहीं होंगे क्योंकि उनकी ज्यादा दिलचस्पी मध्यस्थता जैसे आकर्षक क्षेत्रों में हो सकती है.
कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान यह भी कहा था कि हमें लगता है कि यह फैसला पूर्व न्यायाधीशों पर ही छोड़ देना चाहिए. हम उन पर फैसला नहीं कर सकते. चीफ जस्टिस एडहॉक जजों के तौर पर नियुक्ति के पहले निश्चित तौर पर रिटायर्ड जजों के साथ चर्चा करेंगे.
अगर रिटायर हो चुके जजों को लगेगा कि उनके लिए कुछ और बेहतर अवसर हैं तो वे नियुक्ति के लिए मना भी कर सकते हैं. मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को लंबित मामलों का बोझ घटाने के लिए सभी हाईकोर्ट में एडहॉक जजों की नियुक्ति के लिए व्यवस्था तय करने की सलाह दी थी.
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लंबित मामलों का बोझ घटाने के लिए NGO ने संविधान के अनुच्छेद-दो सौ चौबीस-A के तहत सभी हाईकोर्ट में अतिरिक्त जजों की नियुक्ति की अपील की है. कोर्ट में लंबित मामलों को निपटाने के लिए 'एडहॉक जजों' की नियुक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चौंसठ पैराग्राफ का फैसला लिखा है. इतना ही नहीं SC ने एडहॉक जजों की नियुक्ति को लेकर गाइडलाइंन भी जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने यह माना है कि यह प्रक्रिया जरूरी है. यह एक संवैधानिक प्रावधान है. कोर्ट ने केंद्रीय कानून मंत्रालय और हाईकोर्ट को एडहॉक जजों की नियुक्ति को लेकर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट चार महीने बाद इस मामले पर सुनवाई करेगा. गैर-सरकारी संगठन लोक प्रहरी की ओर से दाखिल याचिका पर शीर्ष अदालत ने यह आदेश जारी किया है. एनजीओ ने एडहॉक जजों की नियुक्ति की मांग को लेकर याचिका दायर की थी. लंबित मामलों का बोझ घटाने के लिए NGO ने संविधान के अनुच्छेद-दो सौ चौबीस-A के तहत सभी हाईकोर्ट में अतिरिक्त जजों की नियुक्ति की अपील की है. दरअसल, अनुच्छेद-दो सौ चौबीस-A के मुताबिक, 'जरूरत के आधार पर किसी भी राज्य के हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से अदालत के किसी न्यायाधीश या किसी अन्य हाईकोर्ट के न्यायाधीश को उस राज्य के हाईकोर्ट में न्यायाधीश के तौर पर काम करने के लिए कह सकते हैं. जस्टिस कौल ने कहा था कि वह चीफ जस्टिस की सलाह से सहमत हैं कि जब भी जजों की नियुक्ति होती है, तब ओछी शिकायतें की जाती है और इसे लेकर अदालत एडहॉक जजों की नियुक्ति की पूरी व्यवस्था को सवालिया घेरे में नहीं ला सकती. कोर्ट ने कहा था कि एडहॉक जज कमजोर निशाना नहीं हो सकते. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में वरिष्ठ वकील विकास सिंह और कुछ अन्य वकीलों की उन दलीलों को भी खारिज कर दिया था, जिनमें कहा गया था कि कई पूर्व न्यायाधीश पद संभालने के लिए इच्छुक नहीं होंगे क्योंकि उनकी ज्यादा दिलचस्पी मध्यस्थता जैसे आकर्षक क्षेत्रों में हो सकती है. कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान यह भी कहा था कि हमें लगता है कि यह फैसला पूर्व न्यायाधीशों पर ही छोड़ देना चाहिए. हम उन पर फैसला नहीं कर सकते. चीफ जस्टिस एडहॉक जजों के तौर पर नियुक्ति के पहले निश्चित तौर पर रिटायर्ड जजों के साथ चर्चा करेंगे. अगर रिटायर हो चुके जजों को लगेगा कि उनके लिए कुछ और बेहतर अवसर हैं तो वे नियुक्ति के लिए मना भी कर सकते हैं. मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने आठ अप्रैल को लंबित मामलों का बोझ घटाने के लिए सभी हाईकोर्ट में एडहॉक जजों की नियुक्ति के लिए व्यवस्था तय करने की सलाह दी थी.
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(बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी) ( Image Source : PTI )
Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन (Chhavi Ranjan) को कुछ दिन पहले ईडी ने गिरफ्तार किया है. वहीं इस गिरफ्तारी के बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा हो गई है. गिरफ्तारी के बाद राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी, झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर लगातार हमला कर रही है. ऐसे में झारखंड के पूर्व बीजेपी मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी (Babulal Marandi) ने हेमंत सरकार पर एक बार फिर सवाल खड़ा किया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि, 'कुछ सिरफिरे लोग हमारे ट्वीट पर अक्सर यह सवाल उठाते हैं कि क्या झारखंड में सारे घपले-घोटाले तीन साल में ही हुए हैं? क्या इससे पहले अफ़सर-बिचौलिये नहीं लूट रहे थे? आदि-आदि. '
उन्होंने आगे कहा कि, 'मैं निःसंकोच स्वीकार करता हूं कि राज्य विभाजन के पहले भी और बाद में भी कुछ अधिकारियों-दलालों ने इस गरीब, पिछड़े राज्य में शासन करने के अनुभवों की कमजोरी का समय-समय पर फ़ायदा उठाया है, लेकिन पिछले तीन सालों में सत्ता संरक्षण एवं सांठगांठ में ये लूट का धंधा जितना परवान चढ़ गया है. ऐसा पहले कभी नहीं था. सवाल ये नहीं है कि तब क्या हुआ और अब क्या हो रहा है? पहले सरकार के संज्ञान में आता था, चोरी पकड़ी जाती थी तो कार्रवाई भी होती थी, लेकिन आज क्यों नहीं हो रहा है? अब लोग पकड़े गये हैं, पकड़े जा रहे हैं तो कार्रवाई तो होनी ही चाहिये न? '
बीजेपी नेता कहते हैं कि, 'खुद को ग़रीबों, आदिवासियों की हितैषी बता घड़ियाली आंसू बहाने एवं बात-बात में आदिवासी मुख्यमंत्री बताकर अपनी चोरी का बचाव करने वाली हेमंत सोरेन सरकार को बताना चाहिये कि पिछले एक सालों में केंद्रीय एजेंसियों की कारवाई में जो लोग पकड़े गये हैं, पकड़े जा रहे हैं, वो कौन लोग हैं? पंकज मिश्रा, पूजा सिंघल, प्रेम प्रकाश, बीरेन्द्र राम, छवि रंजन, शिवकुमार जैसे सत्ता पोषित पैसे के खिलाड़ी कौन हैं? गरीब आदिवासियों की सम्पदा लूटने और जो मर्ज़ी सो करने-कराने की ताक़त किसने और क्यों दी? '
बाबूलाल मरांडी ने आगे कहा कि, 'सवाल ये भी नहीं है कि कौन पकड़ रहा है और कौन लोग पकड़े जा रहे हैं, लेकिन जब घोटाला उजागर हो रहा है और लोग पकड़े जा रहे हैं तो राज्य सरकार का काम है ऐसे लोगों पर क़ानून के हिसाब कार्रवाई करना. लेकिन हेमंत सरकार ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने के बदले उन्हें बचाने के लिये रांची से दिल्ली तक ग़रीबों के टैक्स के पैसे से मंहगे वकीलों की सेवा दिलवा रही है. जिन लोगों पर जांच में मिले सबूतों के आधार पर मुक़दमा किया जाना चाहिये उनपर मुक़दमों की फ़ाईल को लटका घुमा कर जलेबी बना रही है. '
'यह भी सच है कि झारखंड को कुछ बेईमान अफ़सरों-दलालों ने जिस कदर और जितना लूटा है, पूरे देश में इसकी दूसरी मिसाल नहीं मिल सकती. लेकिन ऐसे लोगों पर कार्रवाई न करने का उदाहरण भी देश में कोई दूसरा नहीं हो सकता? वजह है राजनैतिक संलिप्तता और इच्छा शक्ति की कमी और इन सब चीजों का ख़ामियाज़ा बेचारी झारखंड की जनता भुगत रही है. '
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Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन को कुछ दिन पहले ईडी ने गिरफ्तार किया है. वहीं इस गिरफ्तारी के बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा हो गई है. गिरफ्तारी के बाद राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी बीजेपी, झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर लगातार हमला कर रही है. ऐसे में झारखंड के पूर्व बीजेपी मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर एक बार फिर सवाल खड़ा किया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि, 'कुछ सिरफिरे लोग हमारे ट्वीट पर अक्सर यह सवाल उठाते हैं कि क्या झारखंड में सारे घपले-घोटाले तीन साल में ही हुए हैं? क्या इससे पहले अफ़सर-बिचौलिये नहीं लूट रहे थे? आदि-आदि. ' उन्होंने आगे कहा कि, 'मैं निःसंकोच स्वीकार करता हूं कि राज्य विभाजन के पहले भी और बाद में भी कुछ अधिकारियों-दलालों ने इस गरीब, पिछड़े राज्य में शासन करने के अनुभवों की कमजोरी का समय-समय पर फ़ायदा उठाया है, लेकिन पिछले तीन सालों में सत्ता संरक्षण एवं सांठगांठ में ये लूट का धंधा जितना परवान चढ़ गया है. ऐसा पहले कभी नहीं था. सवाल ये नहीं है कि तब क्या हुआ और अब क्या हो रहा है? पहले सरकार के संज्ञान में आता था, चोरी पकड़ी जाती थी तो कार्रवाई भी होती थी, लेकिन आज क्यों नहीं हो रहा है? अब लोग पकड़े गये हैं, पकड़े जा रहे हैं तो कार्रवाई तो होनी ही चाहिये न? ' बीजेपी नेता कहते हैं कि, 'खुद को ग़रीबों, आदिवासियों की हितैषी बता घड़ियाली आंसू बहाने एवं बात-बात में आदिवासी मुख्यमंत्री बताकर अपनी चोरी का बचाव करने वाली हेमंत सोरेन सरकार को बताना चाहिये कि पिछले एक सालों में केंद्रीय एजेंसियों की कारवाई में जो लोग पकड़े गये हैं, पकड़े जा रहे हैं, वो कौन लोग हैं? पंकज मिश्रा, पूजा सिंघल, प्रेम प्रकाश, बीरेन्द्र राम, छवि रंजन, शिवकुमार जैसे सत्ता पोषित पैसे के खिलाड़ी कौन हैं? गरीब आदिवासियों की सम्पदा लूटने और जो मर्ज़ी सो करने-कराने की ताक़त किसने और क्यों दी? ' बाबूलाल मरांडी ने आगे कहा कि, 'सवाल ये भी नहीं है कि कौन पकड़ रहा है और कौन लोग पकड़े जा रहे हैं, लेकिन जब घोटाला उजागर हो रहा है और लोग पकड़े जा रहे हैं तो राज्य सरकार का काम है ऐसे लोगों पर क़ानून के हिसाब कार्रवाई करना. लेकिन हेमंत सरकार ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने के बदले उन्हें बचाने के लिये रांची से दिल्ली तक ग़रीबों के टैक्स के पैसे से मंहगे वकीलों की सेवा दिलवा रही है. जिन लोगों पर जांच में मिले सबूतों के आधार पर मुक़दमा किया जाना चाहिये उनपर मुक़दमों की फ़ाईल को लटका घुमा कर जलेबी बना रही है. ' 'यह भी सच है कि झारखंड को कुछ बेईमान अफ़सरों-दलालों ने जिस कदर और जितना लूटा है, पूरे देश में इसकी दूसरी मिसाल नहीं मिल सकती. लेकिन ऐसे लोगों पर कार्रवाई न करने का उदाहरण भी देश में कोई दूसरा नहीं हो सकता? वजह है राजनैतिक संलिप्तता और इच्छा शक्ति की कमी और इन सब चीजों का ख़ामियाज़ा बेचारी झारखंड की जनता भुगत रही है. '
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भाजपा ने पायलट से पूछा- भ्रष्टाचार के मुद्दों का क्या हुआ?
इस मसले पर खाद्य मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने कहा कि जब पार्टी आलाकमान मामले को अपने हाथ में लेता है तो सभी तरह के मतभेद खत्म हो जाते हैं। View More भाजपा ने पायलट से पूछा- भ्रष्टाचार के मुद्दों का क्या हुआ?
PM मोदी का मिशन मरुधरा, देव-दर्शन कर बजाएंगे चुनावी बिगुल, 29 सीटों पर सीधा असर!
पीएम मोदी 31 मई को केंद्र सरकार के 9 साल पूरे होने पर अजमेर के कायड़ विश्रामस्थली में एक जनसभा को संबोधित करेंगे. वहीं इससे पहले वह तीर्थ नगरी पुष्कर में ब्रह्मा मंदिर के दर्शन करेंगे. View More PM मोदी का मिशन मरुधरा, देव-दर्शन कर बजाएंगे चुनावी बिगुल, 29 सीटों पर सीधा असर!
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भाजपा ने पायलट से पूछा- भ्रष्टाचार के मुद्दों का क्या हुआ? इस मसले पर खाद्य मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने कहा कि जब पार्टी आलाकमान मामले को अपने हाथ में लेता है तो सभी तरह के मतभेद खत्म हो जाते हैं। View More भाजपा ने पायलट से पूछा- भ्रष्टाचार के मुद्दों का क्या हुआ? PM मोदी का मिशन मरुधरा, देव-दर्शन कर बजाएंगे चुनावी बिगुल, उनतीस सीटों पर सीधा असर! पीएम मोदी इकतीस मई को केंद्र सरकार के नौ साल पूरे होने पर अजमेर के कायड़ विश्रामस्थली में एक जनसभा को संबोधित करेंगे. वहीं इससे पहले वह तीर्थ नगरी पुष्कर में ब्रह्मा मंदिर के दर्शन करेंगे. View More PM मोदी का मिशन मरुधरा, देव-दर्शन कर बजाएंगे चुनावी बिगुल, उनतीस सीटों पर सीधा असर!
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देहरादून में महानगर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष लालचन्द शर्मा ने कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के घर पर दिल्ली पुलिस के पहुंचने की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि कहा कि भारतीय जनता पार्टी निम्न स्तर की राजनीति पर उतर आई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को जानबूझ कर प्रताड़ित कर रही है। इससे साफ है कि बीजेपी कांग्रेस के बढ़ते जनाधार से घबरा रही है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा भाजपा राहुल गांधी जी की भारत जोड़ो यात्रा की सफलता से इतना घबरा गई है कि अब साम, दाम, दण्ड भेद की नीति अपना रही है। उन्होंने कहा कि कभी ईडी, सीबीआई के नाम पर डराने का प्रयास कर रहे हैं, तो कभी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पर एन्टी नेशनिलस्ट जैसे अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज भाजपा सरकार के इशारे पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से साफ जाहिर होता है कि भाजपा राजनीति में किस हद तक गिर सकती है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
लालचंद शर्मा ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा को समाप्त हुए एक माह से अधिक का समय हो गया है और यात्रा के दौरान राहुल गांधी द्वारा उठाये गये महिला सुरक्षा तथा जनहित के मुद्दों पर जवाब देने की बजाय भाजपा सरकार उन्हें अब पुलिस के माध्यम से प्रताड़ित करने का षडयंत्र कर रही है। जो कि सर्वथा निन्दनीय है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की आवाज को ताकत व डंडे के बल पर नहीं रोका जा सकता है कांग्रेस नेता राहुल गांधी जी भाजपा की इस गीदड भभकी से डरने वाले नहीं है तथा कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता उनके साथ खड़ा है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
गौरतलब है कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के जम्मू कश्मीर में दिए गए बयान को लेकर दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी आज राहुल गांधी के घर पहुंचे हैं। राहुल गांधी के बयान को दिल्ली पुलिस ने संज्ञान में लिया था। कश्मीर में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल के बयान पर दिल्ली पुलिस उनसे बात करना चाहती है। 16 मार्च को दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी को नोटिस दिया था, लेकिन राहुल ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद दिल्ली पुलिस आज उनके घर पहुंची है। इस दौरान गेट के बाहर भी भारी पुलिस बल तैनात है। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
राहुल गांधी ने कश्मीर में कहा था कि उनसे कई महिलाओं ने यौन उत्पीड़न की शिकायत की है। आज भी महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न हो रहा है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि वह राहुल से उन महिलाओं की डिटेल्स जानना चाहती है, ताकि कानूनी कारवाई की जा सके। आज स्पेशल सीपी स्तर के अधिकारी के साथ आला अधिकारी राहुल गांधी से बातचीत करने की कोशिश करेंगे, ताकि पीड़ित महिलाओं की जानकारी मिल सके। (खबर जारी, अगले पैरे में देखिए)
गौरतलब है कि राहुल गांधी के लंदन में दिए गए बयान पर संसद में हंगामा मचा हुआ है। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि वे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को तब तक सदन में बोलने नहीं देंगे, जब तक कि वह लंदन में भारतीय लोकतंत्र पर की गई अपनी टिप्पणी के लिए माफी नहीं मांग लेते। बजट सत्र का पहला हफ्ता दोनों सदनों में विरोध और नारेबाजी के कारण नहीं चला। भाजपा राहुल गांधी से माफी की मांग कर रही है तो विपक्ष अडाणी समूह के खिलाफ अमेरिकी शॉर्टसेलर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) पर अड़ा हुआ है।
लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं।
भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
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देहरादून में महानगर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष लालचन्द शर्मा ने कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के घर पर दिल्ली पुलिस के पहुंचने की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि कहा कि भारतीय जनता पार्टी निम्न स्तर की राजनीति पर उतर आई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी को जानबूझ कर प्रताड़ित कर रही है। इससे साफ है कि बीजेपी कांग्रेस के बढ़ते जनाधार से घबरा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा भाजपा राहुल गांधी जी की भारत जोड़ो यात्रा की सफलता से इतना घबरा गई है कि अब साम, दाम, दण्ड भेद की नीति अपना रही है। उन्होंने कहा कि कभी ईडी, सीबीआई के नाम पर डराने का प्रयास कर रहे हैं, तो कभी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी पर एन्टी नेशनिलस्ट जैसे अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज भाजपा सरकार के इशारे पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से साफ जाहिर होता है कि भाजपा राजनीति में किस हद तक गिर सकती है। लालचंद शर्मा ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा को समाप्त हुए एक माह से अधिक का समय हो गया है और यात्रा के दौरान राहुल गांधी द्वारा उठाये गये महिला सुरक्षा तथा जनहित के मुद्दों पर जवाब देने की बजाय भाजपा सरकार उन्हें अब पुलिस के माध्यम से प्रताड़ित करने का षडयंत्र कर रही है। जो कि सर्वथा निन्दनीय है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की आवाज को ताकत व डंडे के बल पर नहीं रोका जा सकता है कांग्रेस नेता राहुल गांधी जी भाजपा की इस गीदड भभकी से डरने वाले नहीं है तथा कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता उनके साथ खड़ा है। गौरतलब है कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी के जम्मू कश्मीर में दिए गए बयान को लेकर दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी आज राहुल गांधी के घर पहुंचे हैं। राहुल गांधी के बयान को दिल्ली पुलिस ने संज्ञान में लिया था। कश्मीर में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल के बयान पर दिल्ली पुलिस उनसे बात करना चाहती है। सोलह मार्च को दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी को नोटिस दिया था, लेकिन राहुल ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद दिल्ली पुलिस आज उनके घर पहुंची है। इस दौरान गेट के बाहर भी भारी पुलिस बल तैनात है। राहुल गांधी ने कश्मीर में कहा था कि उनसे कई महिलाओं ने यौन उत्पीड़न की शिकायत की है। आज भी महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न हो रहा है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि वह राहुल से उन महिलाओं की डिटेल्स जानना चाहती है, ताकि कानूनी कारवाई की जा सके। आज स्पेशल सीपी स्तर के अधिकारी के साथ आला अधिकारी राहुल गांधी से बातचीत करने की कोशिश करेंगे, ताकि पीड़ित महिलाओं की जानकारी मिल सके। गौरतलब है कि राहुल गांधी के लंदन में दिए गए बयान पर संसद में हंगामा मचा हुआ है। भाजपा के सूत्रों का कहना है कि वे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को तब तक सदन में बोलने नहीं देंगे, जब तक कि वह लंदन में भारतीय लोकतंत्र पर की गई अपनी टिप्पणी के लिए माफी नहीं मांग लेते। बजट सत्र का पहला हफ्ता दोनों सदनों में विरोध और नारेबाजी के कारण नहीं चला। भाजपा राहुल गांधी से माफी की मांग कर रही है तो विपक्ष अडाणी समूह के खिलाफ अमेरिकी शॉर्टसेलर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति पर अड़ा हुआ है। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
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Citizenship Amendment Act: जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर पहले ही नागरिकता संशोधन कानून और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजनशिप का विरोध कर चुके हैं। सीएए के मुद्दे पर वो अपनी पार्टी के स्टैंड के खिलाफ रहे हैं। अब प्रशांत किशोर ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर सीएए और एनआरसी को रोकने के लिए दो उपाय बताए हैं। प्रशांत किशोर ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि - 'सीएए और एनआरसी की प्रक्रिया को रोकने के 2 प्रभावकारी तरीके हैं।
(1) अपना विरोध शांतिपूर्वक जारी रखें विभिन्न मंचों पर अपनी आवाज उठाते रहें।
(2) 16 भाजपा मुख्यमंत्री अपने राज्यों में एनआरसी को लागू ना होने दें।
लोकसभा चुनाव 2014 में भारतीय जनता पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले रणनीतिकार प्रशांत किशोर लम्बे अरसे से बीजेपी की सहयोगी जदयू के साथ हैं। प्रशांत को पार्टी में उपाध्यक्ष का पद मिला हुआ है। इससे पहले प्रशांत किशोर ने 11 दिसंबर को सीधे तौर पर नीतीश कुमार पर निशाना साधा था और लिखा था कि CAB को समर्थन देते समय जेडीयू नेतृत्व को साल 2015 की उस घड़ी को भी याद कर लेना चाहिए जब लोगों ने उनमें आस्था जताई थी और सत्ता सौंपी थी।
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Citizenship Amendment Act: जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर पहले ही नागरिकता संशोधन कानून और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजनशिप का विरोध कर चुके हैं। सीएए के मुद्दे पर वो अपनी पार्टी के स्टैंड के खिलाफ रहे हैं। अब प्रशांत किशोर ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर सीएए और एनआरसी को रोकने के लिए दो उपाय बताए हैं। प्रशांत किशोर ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि - 'सीएए और एनआरसी की प्रक्रिया को रोकने के दो प्रभावकारी तरीके हैं। अपना विरोध शांतिपूर्वक जारी रखें विभिन्न मंचों पर अपनी आवाज उठाते रहें। सोलह भाजपा मुख्यमंत्री अपने राज्यों में एनआरसी को लागू ना होने दें। लोकसभा चुनाव दो हज़ार चौदह में भारतीय जनता पार्टी को ऐतिहासिक जीत दिलाने में बड़ी भूमिका निभाने वाले रणनीतिकार प्रशांत किशोर लम्बे अरसे से बीजेपी की सहयोगी जदयू के साथ हैं। प्रशांत को पार्टी में उपाध्यक्ष का पद मिला हुआ है। इससे पहले प्रशांत किशोर ने ग्यारह दिसंबर को सीधे तौर पर नीतीश कुमार पर निशाना साधा था और लिखा था कि CAB को समर्थन देते समय जेडीयू नेतृत्व को साल दो हज़ार पंद्रह की उस घड़ी को भी याद कर लेना चाहिए जब लोगों ने उनमें आस्था जताई थी और सत्ता सौंपी थी।
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साथियों, मैं 2014 जून में सरकार बनने के तुरंत बाद श्रीहरिकोटा गया था, क्योंकि इसी विभाग का मैं मंत्री भी हूं तो मंत्री के नाते भी मुझे इस विभाग के काम को समझना था, तो detailed presentation सब scientists ने मेरे सामने किया था और उस समय मैंने एक विषय रखा था कि Space technology का उपयोग सामान्य मानवी के लिए कैसे हो सकता है? हमारे सारे departments उस दृष्टि से क्या कर सकते हैं? और उसी में से तय हुआ था कि किस department में क्या हो रहा है, उसका एक लेखा-जोखा ले लिया जाए और जिन राज्यों में इस दिशा में कुछ न कुछ initiative लिए गए हैं, उसकी भी जानकारी इकट्ठी की जाए। और मेरे मन में प्रारंभ से ही था कि ज्यादातर सरकार का स्वभाव साहस का नहीं होता है। नई चीज करना, नई चीज को adopt करना, वो बहुत समय लगता है और ज्यादातर innovation होते हैं या initiative होते हैं तो एकाध उत्साही अधिकारी के आधार पर होते हैं। व्यवस्था के तहत बदलाव, व्यवस्था के तहत new initiative हो। ये जब तक हम ढांचा खड़ा नहीं करते, हम बदलते हुए युग में अपने आप को irrelevant बना देते हैं और इस बात को हमने स्वीकार करना होगा कि इस generation में हम पर technology एक driving force है, technology का बहुत बड़ी मात्रा में impact है और technology बहुत बड़ी मात्रा में solution का कारण भी है और इसलिए हमारे लिए आवश्यक होता है कि हम इन चीजों को समझें और हमारी आवश्यकता के अनुसार, हम इसे उपयोग में लाएं।
आज पूरे विश्व में Space के क्षेत्र में भारत ने अपनी गौरवपूर्ण जगह बनाई है। हमारे scientists ने, हर हिंदुस्तानी गर्व कर सके, ऐसे achievement किए हैं लेकिन जब से भारत ने Space Science ने पैर रखा, तब से एक विवाद चलता रहा है और वो विवाद ये चला है कि भारत जैसे गरीब देशों ने इस चक्कर में पड़ना चाहिए क्या, अगर हम आज Space में नहीं जाएंगे तो क्या फर्क पड़ता है, हम satellite के पीछे रुपए खर्च नहीं करेंगे तो क्या फर्क पड़ेगा? ये सवाल आज भी उठाए जाते हैं। डॉ. विक्रम साराभाई ने इसके लिए शुरू में एक बात बहुत अच्छी तरह बताई थी। उन्होंने कहा था कि ये सवाल उठना बहुत स्वाभाविक है कि भारत जैसे गरीब देशों ने इस स्पर्धा में क्यों जाना चाहिए और उन्होंने कहा था कि हम स्पर्धा के लिए नहीं जा रहे हैं। लेकिन हमारे देश के सामान्य मानवी की आवश्यकता की पूर्ति के लिए, हमारे प्रयासों में हम कम नहीं रहने चाहिए, हमारे प्रयास कम नहीं पड़ने चाहिए। जितने भी तौर-तरीके हैं, जितने भी माध्यम है जितनी भी व्यवस्था है, जितने भी innovations है, ये सारे भारत के सामान्य मानवी जीवन के बदलाव में उपयोग आ सकते हैं क्या? और उसमें हमें पीछे नहीं रहना चाहिए? विक्रम साराभाई ने उस समय जो दर्शन किया था, आज हम देख रहे हैं कि हम space के माध्यम से, हमारे science के माध्यम से, हमारे ISRO के माध्यम से, जो कुछ भी achieve हुआ है, आज हम देश के विकास में कहीं न कहीं इसको जोड़ने का, कम-अधिक मात्रा में सफल प्रयास हुआ है।
जब मैं ये presentation देख रहा था, मुझे इतनी खुशी हो रही थी कि सब department अब इस बात से जुड़े हैं, कुछ department चल पड़े हैं, कुछ department दौड़ते हुए आगे बढ़ रहे हैं और कई department इन नई-नई चीजों को कैसे सोचे व्यवस्था को कैसा उपयोग किया जाए? मैं कुछ दिन पहले बनारस में जो Loko-shed है, वहां पर एक high power engine के लोकापर्ण के लिए गया था, तो अंदर जो उनकी सारी नई-नई व्यवस्थाएं थी, उनको देख रहा था तो मैं, मैंने उनको एक सवाल पूछा, मैंने कहा हवाई जहाज में हम देखते हैं तो एक monitor होता है pilot के सामने और उसे पता रहता है कि इतने minute के बाद cloud आएगा, cloud का ये की ये घनता होगी इसके कारण जहाज में जर्क आ सकता हो वो warning भी देता है अंदर passenger को। मैंने कहा, ये technology तो है, क्या हमारे engine में, जो engine driver है, उसको हम इस प्रकार का monitor system दे सकते हैं क्या? और satellite connectivity हो और जहां भी unmanned crossing होते हैं, उसको पहले से ही warning मिले monitor पर, special प्रकार का lighting हो और horn बजे और 2-4 किलोमीटर पहले से शुरू हो सकता है क्या? वहां ऐसे ही देखते-देखते मेरे मन में विचार आया था। मैंने वहां जो, engineer वगैरह थे, उनके सामने विषय रखा। फिर हमारे scientist मिले तो मैंने उनके सामने रखा कि भई देखिए जरा इस पर क्या कर सकते हैं और मुझे खुशी है। इन 3-4 महीनों के कालखंड में उन्होंने उस काम को तैयार कर दिया और मुझे बता रहे थे कि बस आने वाले निकट दिनों में हम इसको roll-out करेंगे। unmanned crossing की समस्या का समाधान के लिए कई रास्ते हो सकते हैं लेकिन क्या satellite भी unmanned crossing में सुरक्षा के लिए काम आ सकता है क्या? हमारे scientists को काम दिया गया और मैं देख रहा हूं 3-4 महीने के भीतर-भीतर वो result लेकर के आ गए।
मेरी department के मित्रों से गुजारिश है कि आप भी एक छोटा सा cell बनाइए अपने department में, जो ये सोचते रहे, जिसकी technology की nature हो कि इसका क्या-क्या उपयोग हो सकता है, कैसे उपयोग हो सकता है? अगर वो इस बात को समझ ले और वो फिर जरा discuss करे, नीचे ground reality क्या है, उसको देखें और फिर हम ISRO को कहें कि देखिए हमारे सामने ये puzzle है, हमें लगता है कि इसका कोई रास्ता खोजना चाहिए, ये-ये व्यवस्थाएं चाहिए। आप देखिए उनकी team लग जाएगी। Technology किस हद तक काम आ सकती है, data collection का काम आपका है, conversion का काम आपका है और किस प्रकार से उसके परिणाम लाए जा सकते हैं। कई नए initiative हम ले सकते हैं।
जब 2014, जून में मैं ISRO में गया था, श्री हरिकोटा में मैंने बात की थी, जैसा अभी किरण जी ने बताया कि 20 department में कम-अधिक मात्रा में काम हो रहा था। आज 60 departments में space technology के उपयोग पर pro active गतिविधि हो रही है। थोड़ा सा प्रयास हुआ, छोटी-छोटी meeting हुई department की, मैं मानता हूं शायद हिंदुस्तान में और सरकार के इतिहास में, ये पहली बड़ी घटना होगी कि केंद्र और राज्य के करीब 1600 अधिकारी पूरा दिनभर एक ही विषय पर brainstorming करते हो, workshop करते हो और जिसके पास जानकारी हो, दूसरे को दे रहा है, जिसके पास जिज्ञासा है, वो पूछ रहा है। शायद हिंदुस्तान के सरकार के इतिहास में इतनी बड़ी तादाद में एक ही विषय के solution के लिए ये पहले कार्यक्रम हुआ होगा। लेकिन ये एक दिन का workshop, ये एक दिन का workshop नहीं है इसके पूर्व पिछले 6-8 महीनों से लगातार हर department के साथ, हर राज्य के साथ, scientists के साथ मिलना, बातचीत करना, विषयों को पकड़ना, समस्याओं को ढूंढना, solution को ढूंढना ये लगातार चला है और उसी का परिणाम है कि आज हम एक विश्वास के साथ यहां इकट्ठा हुए हैं कि हम समस्याओं का समाधान खोज सकते हैं।
Technology का सर्वाधिक लाभ कम से कम खर्च में, हो सके उतनी सरलता से, गरीब से गरीब व्यक्ति को पहुंचे कैसे? यही हमारी सबसे बड़ी चुनौती है और आपने देखा होगा जैसे ये हरियाणा की एक घटना बताई गई कि उन्होंने उसका election का जो I-card है, उसको ही satellite technology का उपयोग करते हुए जोडकर के, उसके जमीन के document के साथ उसको, उन्होंने जोड़ दिया है। अब ये सब चीजें पड़ी थी, कहीं न कहीं पड़ी थी लेकिन किसी ने इसको दिमाग लगाया और जोड़ने का प्रयास किया तो एक नई व्यवस्था खड़ी हो गई।
हमारे सामने नया कुछ भी न करें। मान लो हम तय करें कि इस संबंध में नया कुछ नहीं होने वाला लेकिन कुछ उपलब्ध जानकारियां हैं, उपलब्ध technology है, उसी को हमारी आवश्यकता के अनुसार किस प्रकार से conversion किया जाए, इस पर भी हम mind apply करें तो हम बहुत बड़ी मात्रा में नए solution दे सकते हैं और easy delivery की व्यवस्था विकसित कर सकते हैं।
हमारी postal department, इतना बड़ा network है। उस network का उपयोग हम Satellite system के साथ जोड़कर के कहां-कहां कर सकते हैं? देश का सामान्य से सामान्य नागरिक और व्यवस्थाओं से जुड़ता हो या न जुड़ता हो, लेकिन वो post office से जरूर जुड़ता है। साल में एकाध बार तो उसका post office से संबंध आता ही-आता है। इसका मतलब यह है कि सरकार के पास एक ऐसी इकाई है, जो last bench तक सहजता से जुड़ी हुई है और post office एक ऐसी व्यवस्था है कि आज भी सामान्य मानवी को उस पर बड़ा भरोसा है। जिसको आदत होती है तो डाकिया कब आएगा वो देखता रहता है, डाकिया आया क्या, डाकिया गया क्या। भले महीने में एक बार डाक आती हो लेकिन बेटा बाहर तो डाकिया का इंतजार करती रहती है मां। ये जो विश्वास है, वो विश्वास के साथ इस technology का जुड़ना, नई-नई चीजों को जोड़ना, कितना बड़ा परिणाम दे सकता है।
जब मैं राज्य में काम कर रहा था तो ये किरण जी भी हमारे वहीं थे तो हमारी अच्छी दोस्ती थी तो मैं उनसे काफी कुछ जानता रहता था, क्या नया हो रहा है, क्या कर रहे हो, दुनिया को क्या देने वाले हो। उसमें से एक हमारा कार्यक्रम बना fishermen के लिए, fishermen को हम mobile के ऊपर जानकारी देते थे कि इतने longitude पर, latitude पर catch है और fish का एक स्वभाव रहता है कि जहां जमघट रहता है उसका तो करीब-करीब 24 घंटे वहीं रहती है और वो पहले fishing के लिए जाते थे तो घंटों तक वो boat लेके जाते थे, वो देखते रहते थे, वो जाल फेंकते रहते थे, फिर मिला, फिर आगे गए, घंटों तक उनको प्रक्रिया करनी पड़ती थी। ये व्यवस्था देने के बाद वो targeted जगह पर पहुंचता है, कम समय में पहुंचता है, डीजल-वीजल का खर्चा कम होता है और भरपूर मात्रा में cash मिलता है, fishing करके वापस आ जाता है, समय और शक्ति बच जाती है। technology वही थी, उसका उपयोग गरीब व्यक्ति के लिए कैसे होता है।
आज जैसे अभी बताया। मध्य प्रदेश ने आदिवासियों को, जमीन के पट्टे देने में इसका उपयोग किया। इससे भी एक कदम आगे हम काम कर सकते हैं। कई लोग, कई आदिवासी claim करते हैं कि भई यहां हम खेती करते थे, ये हमारी जमीन है, ये हमको मिलना चाहिए। गांव के लोग कहते हैं कि नहीं ये झूठ बोल रहा है, खेती नहीं करता था बेकार में जमीन हड़प करना चाह रहा है, उसका तो पैतृक जगह वो है, वहां करता था अब बच्चे बेकार में अलग हो गए हैं, सब झगड़े चलते रहते थे। लेकिन अब satellite से, पुरानी तस्वीरों को आधार पर उसको photographic system से, comparison से उसको बता सकते हैं कि यहां पर पहले forest था या खेती होती थी या कोई काम होता था, सारी चीजें निकालकर के हम उसको proof provide कर सकते हैं, एक आदिवासी hub को हम establish कर सकते हैं, just with the help of satellite. जिस scientist ने जिस समय satellite के लिए काम किया होगा तब उसे भी शायद पता नहीं होगा कि दूर-सुदूर जंगलों में बैठे हुए किसी आदिवासी के हक की लड़ाई, वो satellite के माध्यम से लड़ रहा है और उसको हक दिला रहा है, ये ताकत technology की है। जिस scientist ने उस काम को किया होगा, उसको जब पता चलेगा, अरे वाह मैने तो इस काम के लिए किया था, आदिवासी के हक के लिए मैं सफल हो गया, उसका जीवन धन्य हो जाता है। हमारा ये काम रहता है कि हम इन चीजों को कैसे उपयोग में लाएं। हम बहुत बड़ी मात्रा में लोगों का involvement करना चाहिए, क्या हर department, ideas के लिए young generation को invite कर सकते हैं कि भई हमारे सामने ये issue हैं, हमें technology के लिए, satellite या space system के लिए कैसे रास्ता निकालना चाहिए, आप student के सामने छोड़ दीजिए। आप देखिए वे exercise करेंगे, वो online आपके साथ जुड़ेंगे और नए-नए ideas देंगे। Department में एक cell बनाइए और young generation तो आजकल बड़ी techno-savvy होती है, उसमें से बनाइए, उसको कहिए कि देखे भाई आप जरा mind apply किजिए, आपको जरूर नए-नए ideas मिलेंगे और आपको इसका परिणाम भी मिलेगा।
हमारे देश में गरीब से गरीब व्यक्ति भी कुछ न कुछ दिमाग apply करने का स्वभाव रखता है। अगर भारत, innovative भारत इस पर अगर काम किया जाए, तो मैं नहीं मानता हूं कि हम कहीं पीछे नजर आएगें। हर प्रकार के, आपने देखा होगा कि कई अखबारों में पढ़ते हैं कि कोई किसान अपने खेत का पानी का पंप घर से ही operate करता है कैसे? Mobile Phone से operate करता है, उसने खुद ने technology develop की और mobile technology का उपयोग करता है और अपने घर से ही उसे पता चलेगा, बिजली आई है, तो अपने घर से ही वो पंप चालू कर देता है और पानी का काम शुरू हो जाता है, फिर उसके बाद वो खेत चला जाता है।
मुझे एक बार किसी ने बताया, कैसे दिमाग काम करता है सामान्य व्यक्ति का, वो व्यक्ति जिसने अपने घर में bio-gas का एक unit लगाया था, गांव के अंदर, किसान ने और अपने जो पशु थे उसका गोबर वगैरह डालता था, अपने घर में Kitchen में जो काम होता था वो गोबर डालता था और गैस पैदा करता था। अपने चूल्हे में requirement से भी ज्यादा गैस होने लगा। उसने बुद्धि का उपयोग कैसे किया, उसने tractor की tube में, अब tractor की tube कितनी बड़ी होती है, हमें अंदाजा है, वो गैस उसमें भर लेता था वो और scooter पर उसको उठाकर के, अब scooter पर कोई tractor की tube ले जाता है तो देखकर के डर लगता है कि क्या होगा, गैस tractor की tube में transport करके अपने खेत पर ले जाता था और अपने raw-wisdom से, उस गैस से वो अपना diesel engine को, जो उसने modify किया था, चलाता था और पानी निकालता था। अब देखिए कोई विज्ञान के तरीके, यानि सामान्य मानवी को भी ये मूलभूति सिद्धांत हो गए, वो उसमें से अपना रास्ता खोजता है और चीजों को apply करता है। हम किस प्रकार से इन चीजों पर सोचें नहीं तो ये सारा ज्ञान-विज्ञान भंडार बढ़ता ही चला जाएगा, लेकिन सामान्य मानवी की आवश्यकताओं के लिए हमारा विभाग क्या करता है।
आज हमारी education quality हमें ठीक करनी है, ये ठीक है, कोई कहेगा कि इतने गांवों में बिजली नहीं है तो कैसे करोगे? इतने गांवों में broadband connectivity नहीं है तो कैसे करोगे? इतने गोवों में optical fiber network नहीं है, तो कहां करोगे? जिसको ये सोचना है, वो ये सोचेगा लेकिन ये भी तो सोचो कि भई इतने गांवों में है, इतने शहरों में है। कम से कम वहां long distance education के द्वारा the best quality of the teachers और हिंदुस्तान के बड़े शहर में बैठकर के studio में वो बच्चों को पढ़ाएं, मैं समझता हूं कि उस teacher को भी quality education की तरफ, उसका भी training होगा और long distance education वो करेगा और दूर-सुदूर जंगलों में भी, हमारे गांवों में हम अच्छी शिक्षा को improve कर सकते हैं।
अभी मुझे किरण जी बता रहे थे, हमारे health secretary ने जो कहा कि उनको broadband capacity की कोई समस्या है, मैं उनको पूछ रहा थे कि as per health is concerned हमारे पास access capability है। अगर हम इसका उपयोग करने के लिए सोचें, हमारे सेना के जवान सीमा पर हैं, उनको इसका उपयोग कैसे हो, उनकी requirement के लिए हम इस technology को कैसे जोड़ें? हम सीमा की सुरक्षा का बहुत बड़ा काम, हम इस technology के माध्यम से कर सकते हैं।
कभी-कभार जैसे हम बहुत बड़ा एक कार्यक्रम लेकर के चले हैं, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, ये प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की सफलता का सबसे पहला कोई कदम है तो हमारे space technology का उपयोग है। हम बढिया सा contour तैयार कर सकते हैं, गांव का contour तैयार कर सकते हैं और उसके आधार पर तैयार कर सकते है कि पानी का प्रवाह किस तरफ है, पानी का quantum कितना हो सकता है, rain fall कितना हो सकता है और इसके आधार पर भविष्य की पूरी design हम technology के आधार पर हम बना सकते हैं। एक प्रकार से ये science Good Governance के लिए एक अहम role पैदा कर सकता है। पहले हम planning करते थे तो सामान्य अपने अनुभव के आधार पर करते थे। आज satellite के माध्यम से हम वो planning कर सकते हैं कि जिसके कारण हमारा खर्च भी बच सकता है, समय भी बच सकता है और आज road network बनाना है। आज आप देखिए दशरथ मांझी इतना बड़ा popular हो गया है, लेकिन कारण क्या था, सरकार ने road ऐसा बनाया कि एक गांव से दूसरे गांव जाना था तो पहाड़ के किनारे-किनारे जाता था और 50-60 किलोमीटर extra जाता था। दशरथ मांझी का raw-vision कहता था, जन्म से लाया होगा GIS system वो, उसको लगता था यहां सीधा चला जाउं तो दो किलोमीटर में पहुंच जाउंगा। और अपने हथोड़े से उसने वो रास्ता बना दिया। आज technology इतनी available है कि कोई दशरथ मांझी को अपनी जिन्दगी खपानी नहीं पड़ेगी। आप shortest way में अपना रास्ता खोज सकते हो, बना सकते हो।
हम इस technology का कैसे उपयोग करें? और उपयोग कर-करके हम इसे। देखिए हमारे यहां canal भी बनती है। ऐसे-ऐसे-ऐसे जब हेलीकॉप्टर या हवाई जहाज से जाते हैं तो बड़ी पीड़ा होती है कि ये canal भी इतने-इतने सांप की तरह क्यों जा रही है। तो एक तो बनाते समय देखा होगा कि चलो यहां से चले जाएं, या तो कोई decision making पर कोई pressure आया होगा कि यार इसका खेत बचाना है, जरा उधर ले जाओ तो सांप की तरह हम लेते चले गए लेकिन हमने अगर technology का प्रयोग करते, उस समय technology करने का अवसर मिला हो तो perfect alignment के साथ हम काम कर सकते थे।
हमारे जितने भी, अब देखिए encroachment का highways पर बड़े encroachment की चिंता होती है, satellite के द्वारा हम regular monitor कर सकते हैं कि हमारे highway पर encroachment हो रहा है, क्या हो रहा है, क्या गतिविधि हो रही है, हम आराम से कर सकते हैं, हम निकाल सकते हैं रास्ता।
हमारी wild life, हमारी wildlife क्यों गिनती करना का, पांच साल में एक बार करते हैं और wildlife की गिनती के लिए भी पचासों प्रकार के सवाल आते हैं, Camera लगते हैं, कोई उसके पैर का नाप ले लेता है, मैं मानता हूं हम satellite system से महीने भर observe करें तो हम चीजों को खोज सकते हैं कि इस प्रकार के जो हमारे wildlife हैं, इस प्रकार यहां रहता है, इनकी movement का ये area है, आप आराम से इन चीजों को गिन सकते हैं।
Technology का उपयोग इतनी सहजता से, सरलता से हो सकता है और मैं चाहता हूं कि हमारे सारे departments इस पर कैसे काम करें। हमारे पास बंजर भूमि बहुत बड़ी मात्रा में है। एक-एक इंच जमीन का सदुपयोग कैसे हो, इस पर हम कैसे काम कर सकते हैं।
हमारे जंगल कभी कट गए, इसकी खबर आती है। Red चंदन जहां, वहां कहते हैं कि कटाई बहुत होती है। क्या हमारा permanent high resolution वाले camera, regular हमें update नहीं दे सकते क्या कि भई Red चंदन वाला इलाका है, यहां कोई भी movement होगी तो हमें तुरंत पता चलेगा।
Mining..mining की विशेषता क्या होती है कि वो सारे system तो perfect होते हैं कागज पे, उसको mining का मिल जाता है contract मिल जाता है लेकिन जो उसको two square kilometer by two square kilometer area, मिला होगा, वो वहां शुरू नहीं करता है, उसके बगल में खुदाई करता है। अब कोई जाएगा तो उसको भी लगता है कि यार उसको तो contract मिला हुआ है, वो थोड़ा नापता है कि कितने फुट कहां है? लेकिन उसको अगर satellite system से watch किया जाए तो एक इंच इधर-उधर नहीं जा सकता, जो जगह उसको तय हुई है, वहीं पर ही mining कर सकता है और हम उसके vehicles को track कर सकते हैं कि दिन में कितने vehicle निकले, कितना गया और taxation system के साथ उसको जोड़ा जा सकता है, ये आराम से काम हो सकता है।
हमारे यहां road tax लेते हैं। कभी-कभार road tax में, हम technology का उपयोग करके, बहुत मात्रा में leakages बचा सकते हैं, just with the help of technology और हम बहुत व्यवस्थाओं को विकसित कर सकते हैं।
मेरा कहने का तात्पर्य ये है कि हमारे पास एक ऐसी व्यवस्था उपलब्ध है और एक लंबे अर्से तक हमारे scientists ने पुरुषार्थ करके इसको पाया है, हमारा दायित्व बनता है कि हम इसको सहज रूप से कैसे अपने यहां लागू करें और जो भी विभाग इसका आदि होगा, जिसको जरा स्वभाव होगा। आपने देखा होगा कि उसको लगता है कि इसने तो मेरे पूरे काम को बड़ा easy बना दिया है, बड़ा सरल कर दिया है. तो वो उसमें फिर involve होता चला जाएगा। जिसको ये पता नहीं कि भई इसका क्या है, अब दो साल के बाद retire होना है, तो मेरा क्या, छोड़ो यार, तुम कर लेना। जो ऊर्जा खो देते हैं जी, वो retire होने के बाद भी जिंदगी का मजा नहीं ले सकते हैं और इसलिए हम हर पल, हर पल भले ही हम senior most हैं, जिंदगी के आखिरी पड़ाव आता है, तो भी हम ऐसी कोई foot-print छौड़कर के जाएं ताकि हमारे बाद की नई पीढियों को सालों तक काम करने का अवसर मिले।
ये जो आज प्रयास किया उसमें मैने एक प्रकार से तीन पीढ़ी को इकट्ठा किया है। जो fresh अभी-अभी मसूरी से निकले हैं, वो नौजवान भी यहां बैठे हैं और जो सोचते होंगे कि भई 30 तारीख को retire होना है, अगली 30 तारीख को होना है, वो भी बैठे हैं, यानि एक प्रकार से तीन पीढ़ी यहां बैठी हैं, मैंने सबको इकट्ठा करने का प्रयास यही था कि junior लोगों को ज्यादा यहां बिठाए, उसका कारण ये है कि मैं चाहता हूं कि ये legacy आगे बढ़े, ऐसा न हो फिर नई team आए, उनको चिंता न हो कि क्या करें यार, पुराने वाले तो चले गए या पुरान वाले सोचें कि अब आखिर क्या करें कि अब एक बार चला लें।
हमारे लिए सबसे बड़ी आवश्यकता है, हर department एक-एक छोटा काम सोचें कि हम 2015 में, अभी भी हमारे पास तीन-चार महीने है। एक चीज identify करें। हमें लगता है कि सैटेलाइट सिस्टम से हम इसको उपयोग कर सकते हैं और फिर उसके लिए outsource करना पड़े, कुछ नौजवानों की मदद लेनी पड़े तो हम ले लेकिन कुछ करके दिखाएं। उसी प्रकार से, जैसा ये एक पूरे देश का workshop हुआ है। राज्यों से भी मेरा आग्रह है कि राज्य भी अपने राज्य की इसी प्रकार की दो-तीन पीढ़ियों को इकट्ठी करके एक पूरे दिन का brainstorming करें, भारत सरकार के कोई न कोई अधिकारी वहां जाएं और वे भी अपने लिए plan workout करें।
तीसरा मुझे आवश्यक लगता है कि ये सब होने के बाद भी decision making करने वालों को अगर हम sensitize नहीं करेंगे। उनको अगर परिचित नहीं करवाया कि ये चीजे क्या है। गांव का जो प्रधान है, वहां से ले करके MLA तक जितने भी elected लोग है, उनको कभी न कभी ऐसे institutions दिखाने का कार्यक्रम करना चाहिए। उनको बताना चाहिए कि देखिए भई आपके गांव की इतनी चीजों को satellite से हम organize कर सकते हैं। उसका विश्वास बढ़ जाएगा और वो इन चीजों को करेगा। एक बार हम और गांव के प्रधान को बुलाएंगे, तो वहां के पटवारी को भी आप जरूर बुलवाएंगे। तो एक गांव की पांच-सात प्रमुख लोगों की team होती है, जो सरकार को represent करती है, वे sensitize हो जाएगी। हमें इस चीज को नीचे तक percolate करना है। अगर हमें नीचे तक percolate करना है, तो मैं चाहूंगा कि इसके कारण हम कर सकते हैं। हम ये मानकर चले कि Good Governance के लिए, transparency के लिए, efficiency के लिए, accountability के लिए, real time delivery के लिए, real time monitoring के लिए technology हमारे पास सबसे ताकतवर माध्यम होता है। अगर हम Good Governance की बात करते हैं तो उसकी शुरूआत होती है perfect planning. perfect planning के अंदर आपको इतना बढ़िया database मिले, आपको maps मिले, आपको 3 D resolutions मिले, मैं नहीं मानता हूं कि planning में कोई कमी आ सकती है। अगर perfect planning है और proper road-map है implementation का और time frame में आपका goal set किए हैं, मैं मानता हूं कि हम जो चाहे वो परिणामों को technology के माध्यम से हमारा समय का span कम करते हुए, qualitative improvement करके हम परिणाम ला सकते हैं।
सरी समस्या आई कोसी नदी पर। नेपाल में कोसी का जो हिस्सा है, landslide हुआ, पानी का प्रवाह बंद हो गया। उधर पानी जमता गया। मानते हैं, कल्पना कर सकते हैं मिट्टी का Dam बन जाए और पानी भर जाए और जिस दिन खुलेगा तो क्या होगा। सबसे पहले NDRF की टीमों को यहां से बिहार भेजा और कोसी के रास्ते पर जितने गांव थे सारे के सारे गांव खाली करवाए। लोग गुस्सा भी कर रहे थे, भई पानी तो है नहीं बारिश तो हो नहीं रही, आप क्यों खाली करवा रहे हो? उनको बड़ी मुश्किल से समझाया, दबाव भी डाला, उनको हटाया और उधर की तरफ उस पानी के प्रवाह को चालू करने के लिए रास्ते खोजते रहे, किस प्रकार से क्या समस्या का समाधान किया जाए। सदनसीब से रास्ते निकले और धीरे-धीरे-धीरे पानी का बहाव शुरू हुआ और हम एक बहुत बड़े संकट से बच गए और ये भी तब संभव हुआ, satellite का regular imaginary monitoring हो रहा था उससे पता चला कि इतना बड़ा संकट आने वाला है।
पिछले दिनों आपने देखा होगा, Vizag में जो हुदहुद आया और हमारे विभाग के लोग, राठौड़ यहां बैठे हैं। इतना perfect information दिया उन्होंने कि cyclone कितना दूर है, कितनी intensity है, किस angle से जा रहा है और कब वो आकर के Vizag को परेशान करेगा। मैं मानता हूं इतना perfect information था और just with the help of satellite technology और उसका परिणाम हुआ कि इतना बड़ा हुदहुद Vizag में आया, कम से कम नुकसान हुआ। हम disaster management की दृष्टि से, early warning की दृष्टि से, preparedness की दृष्टि से मानव जाति के कल्याण का एक बहुत बड़ा काम कर सकते हैं और इसलिए हम इन विषयों में जितने हम sensitize होते हैं, हमारे सारे department उस दिशा में सोचने लगते हैं कि हां भाई हमारे यहां ये young team है, दो-चार लोगों को हम लगाएंगे।
मैं यह भी चाहता हूं कि ISRO भी जिस प्रकार से हमारे यहां अलग-अलग कार्यक्रम चलते हैं। हमारी space technology आखिर है क्या, हम students को तैयार करें, students को नीचे lecture देने के लिए भेजें, slideshow करें, एक अच्छी video बनाएं, लोगों को समझाएं कि भई क्या चीज है, कैसे काम आ सकती हैं, एक mass-education का कार्यक्रम ISRO ने initiate करना चाहिए, HRD ministry और बाकी ministry और state government इनकी मदद लेनी चाहिए, इनके लिए एक programming तैयार करना चाहिए और students, हमारे students को तैयार करना चाहिए, उनसे 1-2 week मांगने चाहिए कि भई आप 1 week, 2 week दीजिए, 10 स्कूल-कॉलेज में आपको जाना है, ये lecture देकर के आ जाइए, तो हमारी एक generation भी तैयार होगी इस चीजों से और जो सुनेंगे, उनको थोड़ा-थोड़ा परिचय होगा कि भई ये-ये चीजें हैं, ये करने वाला काम मुझे लगता है।
अभी 15 अगस्त को मैंने लालकिले पर से कहा था Start-up India-Stand up India, अभी जो बताया गया slide में करीब 3 हजार छोटे-मोटे private unit हैं जो हमारी इस गतिविधि के साथ जुड़े हुए हैं। मुझे लगता है कि, मैं कोई scientist तो नहीं हूं लेकिन इस क्षेत्र में विकास के लिए sky is the limit, हम इस प्रकार के हमारे जो scientific temper के जो नौजवान हैं, उनको Start-up के लिए प्रेरित कर सकते हैं क्या? हम उनको blue print दे सकते हैं क्या? कि भई ये 400 प्रकार के काम ऐसे हैं कि नौजवान आगे आए और वो कुछ उसमें innovation करे, कुछ manufacturing करे, कुछ चीजें बनाए, हमारे space science के लिए बहुत काम आने वाली हैं, या हमारे space science की utility के लिए नीचे काम आने वाली है या तो हम upgrade जाने के लिए करें या downgrade जाने के लिए करें लेकिन हम दोनों रास्ते पर कैसे काम करें हम इस पर सोच सकते हैं क्या? अगर हम इस व्यवस्था को विकसित कर सकते हैं तो Start-up India-Stand up India ये जो एक dream है उसमें innovation technology का भरपूर हम उपयोगक कर-करके और financial institution भी, वे भी इस दिशा में सोचें कि इस प्रकार से Start-up के लोग आते हैं जो science में कुछ न कुछ contribute करने वाले हैं तो उनके लिए विशेष व्यवस्था की जाए, ISRO के साथ मिलकर के की जाए, आप देखिए हमको एक बहुत बड़ा लाभ मिल सकता है।
हर एक department की चिंता था कि capacity building की, ये बात सही है कि हम स्वभाव से इन चीजों को स्वीकार करने के आदि न होने के कारण इस तरफ हमने ध्यान नहीं दिया है। हम जब recruitment करें, हमारे नए लोगों को तो recruitment करने पर इस प्रकार के विज्ञान से जुड़े हुए लोगों को ज्यादा लें, ताकि हमें capacity building के लिए सुविधा रहे। हमारे यहां पूछा जाए department में कि भई हमारे यहां department में कितने लोगों कि इस-इस चीज में रुचि है। तो फिर इनको 7 दिन, 10 दिन का एक course करवाया जा सकता है। अगर हम इस व्यवस्था का, human resource development अगर हो गया तो institutional capital building अपना आप आना शुरू हो जाएगा। सिर्फ financial resources से institutional capacity नहीं आती है, institutional capability का आधार structure नहीं होता है, building कैसा है, वो नहीं होता है, equipment कैसे होते हैं, वो नहीं होता है, financial arrangement कैसे हैं, वो नहीं होता है, उसका मूल आधार होता है, human resource कैसा है। अगर आपके पास उत्तम प्रकार का human resource होता है, तो आप में से कभी, मैं तो चाहता था कि यहां एक slide दिखानी चाहिए थी। भारत Space Science में गया और जिसका आज इतना बड़ा नाम होता है। पहला जो हमारा space का जो छोड़ने का था, उसकी पहली फोटो है तो साईकिल पर एक मजदूर उठाकर के ले जा रहा है। भारत का पहला जो space प्रयोग हुआ, वो एक गैराज के अंदर trial हुआ था। यानि उसकी गतिविधि गैराज में हुई थी और साईकिल पर उसका shifting होता था ले जाने का यानि वहां से अगर, इसका मतलब ये हुआ कि और व्यवस्थाओं की ताकत कम होती है, human resource की ताकत ज्यादा होती है, जिसने हमें आसमान की ऊंचाइयों को सैर करने के लिए ले गए, जबकि जमीन पर उसको साईकिल पर उठाकर ले जाया गया। ये दो चीजें हैं, ये जो चीजें हैं हमारे लिए इससे बड़ा कोई उदाहरण नहीं हो सकता है, इससे बड़ा कोई उदाहरण नहीं हो सकता है कि हमारे science में, हमारे भीतर की जो ताकत है, वो कितना बड़ा contribution कर सकती है, ये संभावनाएं हमारे पास पड़ी हुई हैं।
अच्छे planning के लिए, समय सीमा में implementation के लिए, हम इसका भरपूर उपयोग करें और मुझे विश्वास है कि आज पूरे दिनभर ये जो exercise हुई है, करीब 1600 अधिकारी और बहुत महत्वपूर्ण दायित्व संभालने वाले अधिकारियों के ये मंथन आने वाले दिनों में ऐसा न हो कि space technology in common man के बीच space रह जाए और इसलिए हमारा काम है common man और space technology के बीच में space नहीं रहना चाहिए। ये सपना पूरा करें, बहुत-बहुत शुभकामनाएं। धन्यवाद।
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साथियों, मैं दो हज़ार चौदह जून में सरकार बनने के तुरंत बाद श्रीहरिकोटा गया था, क्योंकि इसी विभाग का मैं मंत्री भी हूं तो मंत्री के नाते भी मुझे इस विभाग के काम को समझना था, तो detailed presentation सब scientists ने मेरे सामने किया था और उस समय मैंने एक विषय रखा था कि Space technology का उपयोग सामान्य मानवी के लिए कैसे हो सकता है? हमारे सारे departments उस दृष्टि से क्या कर सकते हैं? और उसी में से तय हुआ था कि किस department में क्या हो रहा है, उसका एक लेखा-जोखा ले लिया जाए और जिन राज्यों में इस दिशा में कुछ न कुछ initiative लिए गए हैं, उसकी भी जानकारी इकट्ठी की जाए। और मेरे मन में प्रारंभ से ही था कि ज्यादातर सरकार का स्वभाव साहस का नहीं होता है। नई चीज करना, नई चीज को adopt करना, वो बहुत समय लगता है और ज्यादातर innovation होते हैं या initiative होते हैं तो एकाध उत्साही अधिकारी के आधार पर होते हैं। व्यवस्था के तहत बदलाव, व्यवस्था के तहत new initiative हो। ये जब तक हम ढांचा खड़ा नहीं करते, हम बदलते हुए युग में अपने आप को irrelevant बना देते हैं और इस बात को हमने स्वीकार करना होगा कि इस generation में हम पर technology एक driving force है, technology का बहुत बड़ी मात्रा में impact है और technology बहुत बड़ी मात्रा में solution का कारण भी है और इसलिए हमारे लिए आवश्यक होता है कि हम इन चीजों को समझें और हमारी आवश्यकता के अनुसार, हम इसे उपयोग में लाएं। आज पूरे विश्व में Space के क्षेत्र में भारत ने अपनी गौरवपूर्ण जगह बनाई है। हमारे scientists ने, हर हिंदुस्तानी गर्व कर सके, ऐसे achievement किए हैं लेकिन जब से भारत ने Space Science ने पैर रखा, तब से एक विवाद चलता रहा है और वो विवाद ये चला है कि भारत जैसे गरीब देशों ने इस चक्कर में पड़ना चाहिए क्या, अगर हम आज Space में नहीं जाएंगे तो क्या फर्क पड़ता है, हम satellite के पीछे रुपए खर्च नहीं करेंगे तो क्या फर्क पड़ेगा? ये सवाल आज भी उठाए जाते हैं। डॉ. विक्रम साराभाई ने इसके लिए शुरू में एक बात बहुत अच्छी तरह बताई थी। उन्होंने कहा था कि ये सवाल उठना बहुत स्वाभाविक है कि भारत जैसे गरीब देशों ने इस स्पर्धा में क्यों जाना चाहिए और उन्होंने कहा था कि हम स्पर्धा के लिए नहीं जा रहे हैं। लेकिन हमारे देश के सामान्य मानवी की आवश्यकता की पूर्ति के लिए, हमारे प्रयासों में हम कम नहीं रहने चाहिए, हमारे प्रयास कम नहीं पड़ने चाहिए। जितने भी तौर-तरीके हैं, जितने भी माध्यम है जितनी भी व्यवस्था है, जितने भी innovations है, ये सारे भारत के सामान्य मानवी जीवन के बदलाव में उपयोग आ सकते हैं क्या? और उसमें हमें पीछे नहीं रहना चाहिए? विक्रम साराभाई ने उस समय जो दर्शन किया था, आज हम देख रहे हैं कि हम space के माध्यम से, हमारे science के माध्यम से, हमारे ISRO के माध्यम से, जो कुछ भी achieve हुआ है, आज हम देश के विकास में कहीं न कहीं इसको जोड़ने का, कम-अधिक मात्रा में सफल प्रयास हुआ है। जब मैं ये presentation देख रहा था, मुझे इतनी खुशी हो रही थी कि सब department अब इस बात से जुड़े हैं, कुछ department चल पड़े हैं, कुछ department दौड़ते हुए आगे बढ़ रहे हैं और कई department इन नई-नई चीजों को कैसे सोचे व्यवस्था को कैसा उपयोग किया जाए? मैं कुछ दिन पहले बनारस में जो Loko-shed है, वहां पर एक high power engine के लोकापर्ण के लिए गया था, तो अंदर जो उनकी सारी नई-नई व्यवस्थाएं थी, उनको देख रहा था तो मैं, मैंने उनको एक सवाल पूछा, मैंने कहा हवाई जहाज में हम देखते हैं तो एक monitor होता है pilot के सामने और उसे पता रहता है कि इतने minute के बाद cloud आएगा, cloud का ये की ये घनता होगी इसके कारण जहाज में जर्क आ सकता हो वो warning भी देता है अंदर passenger को। मैंने कहा, ये technology तो है, क्या हमारे engine में, जो engine driver है, उसको हम इस प्रकार का monitor system दे सकते हैं क्या? और satellite connectivity हो और जहां भी unmanned crossing होते हैं, उसको पहले से ही warning मिले monitor पर, special प्रकार का lighting हो और horn बजे और दो-चार किलोग्राममीटर पहले से शुरू हो सकता है क्या? वहां ऐसे ही देखते-देखते मेरे मन में विचार आया था। मैंने वहां जो, engineer वगैरह थे, उनके सामने विषय रखा। फिर हमारे scientist मिले तो मैंने उनके सामने रखा कि भई देखिए जरा इस पर क्या कर सकते हैं और मुझे खुशी है। इन तीन-चार महीनों के कालखंड में उन्होंने उस काम को तैयार कर दिया और मुझे बता रहे थे कि बस आने वाले निकट दिनों में हम इसको roll-out करेंगे। unmanned crossing की समस्या का समाधान के लिए कई रास्ते हो सकते हैं लेकिन क्या satellite भी unmanned crossing में सुरक्षा के लिए काम आ सकता है क्या? हमारे scientists को काम दिया गया और मैं देख रहा हूं तीन-चार महीने के भीतर-भीतर वो result लेकर के आ गए। मेरी department के मित्रों से गुजारिश है कि आप भी एक छोटा सा cell बनाइए अपने department में, जो ये सोचते रहे, जिसकी technology की nature हो कि इसका क्या-क्या उपयोग हो सकता है, कैसे उपयोग हो सकता है? अगर वो इस बात को समझ ले और वो फिर जरा discuss करे, नीचे ground reality क्या है, उसको देखें और फिर हम ISRO को कहें कि देखिए हमारे सामने ये puzzle है, हमें लगता है कि इसका कोई रास्ता खोजना चाहिए, ये-ये व्यवस्थाएं चाहिए। आप देखिए उनकी team लग जाएगी। Technology किस हद तक काम आ सकती है, data collection का काम आपका है, conversion का काम आपका है और किस प्रकार से उसके परिणाम लाए जा सकते हैं। कई नए initiative हम ले सकते हैं। जब दो हज़ार चौदह, जून में मैं ISRO में गया था, श्री हरिकोटा में मैंने बात की थी, जैसा अभी किरण जी ने बताया कि बीस department में कम-अधिक मात्रा में काम हो रहा था। आज साठ departments में space technology के उपयोग पर pro active गतिविधि हो रही है। थोड़ा सा प्रयास हुआ, छोटी-छोटी meeting हुई department की, मैं मानता हूं शायद हिंदुस्तान में और सरकार के इतिहास में, ये पहली बड़ी घटना होगी कि केंद्र और राज्य के करीब एक हज़ार छः सौ अधिकारी पूरा दिनभर एक ही विषय पर brainstorming करते हो, workshop करते हो और जिसके पास जानकारी हो, दूसरे को दे रहा है, जिसके पास जिज्ञासा है, वो पूछ रहा है। शायद हिंदुस्तान के सरकार के इतिहास में इतनी बड़ी तादाद में एक ही विषय के solution के लिए ये पहले कार्यक्रम हुआ होगा। लेकिन ये एक दिन का workshop, ये एक दिन का workshop नहीं है इसके पूर्व पिछले छः-आठ महीनों से लगातार हर department के साथ, हर राज्य के साथ, scientists के साथ मिलना, बातचीत करना, विषयों को पकड़ना, समस्याओं को ढूंढना, solution को ढूंढना ये लगातार चला है और उसी का परिणाम है कि आज हम एक विश्वास के साथ यहां इकट्ठा हुए हैं कि हम समस्याओं का समाधान खोज सकते हैं। Technology का सर्वाधिक लाभ कम से कम खर्च में, हो सके उतनी सरलता से, गरीब से गरीब व्यक्ति को पहुंचे कैसे? यही हमारी सबसे बड़ी चुनौती है और आपने देखा होगा जैसे ये हरियाणा की एक घटना बताई गई कि उन्होंने उसका election का जो I-card है, उसको ही satellite technology का उपयोग करते हुए जोडकर के, उसके जमीन के document के साथ उसको, उन्होंने जोड़ दिया है। अब ये सब चीजें पड़ी थी, कहीं न कहीं पड़ी थी लेकिन किसी ने इसको दिमाग लगाया और जोड़ने का प्रयास किया तो एक नई व्यवस्था खड़ी हो गई। हमारे सामने नया कुछ भी न करें। मान लो हम तय करें कि इस संबंध में नया कुछ नहीं होने वाला लेकिन कुछ उपलब्ध जानकारियां हैं, उपलब्ध technology है, उसी को हमारी आवश्यकता के अनुसार किस प्रकार से conversion किया जाए, इस पर भी हम mind apply करें तो हम बहुत बड़ी मात्रा में नए solution दे सकते हैं और easy delivery की व्यवस्था विकसित कर सकते हैं। हमारी postal department, इतना बड़ा network है। उस network का उपयोग हम Satellite system के साथ जोड़कर के कहां-कहां कर सकते हैं? देश का सामान्य से सामान्य नागरिक और व्यवस्थाओं से जुड़ता हो या न जुड़ता हो, लेकिन वो post office से जरूर जुड़ता है। साल में एकाध बार तो उसका post office से संबंध आता ही-आता है। इसका मतलब यह है कि सरकार के पास एक ऐसी इकाई है, जो last bench तक सहजता से जुड़ी हुई है और post office एक ऐसी व्यवस्था है कि आज भी सामान्य मानवी को उस पर बड़ा भरोसा है। जिसको आदत होती है तो डाकिया कब आएगा वो देखता रहता है, डाकिया आया क्या, डाकिया गया क्या। भले महीने में एक बार डाक आती हो लेकिन बेटा बाहर तो डाकिया का इंतजार करती रहती है मां। ये जो विश्वास है, वो विश्वास के साथ इस technology का जुड़ना, नई-नई चीजों को जोड़ना, कितना बड़ा परिणाम दे सकता है। जब मैं राज्य में काम कर रहा था तो ये किरण जी भी हमारे वहीं थे तो हमारी अच्छी दोस्ती थी तो मैं उनसे काफी कुछ जानता रहता था, क्या नया हो रहा है, क्या कर रहे हो, दुनिया को क्या देने वाले हो। उसमें से एक हमारा कार्यक्रम बना fishermen के लिए, fishermen को हम mobile के ऊपर जानकारी देते थे कि इतने longitude पर, latitude पर catch है और fish का एक स्वभाव रहता है कि जहां जमघट रहता है उसका तो करीब-करीब चौबीस घंटाटे वहीं रहती है और वो पहले fishing के लिए जाते थे तो घंटों तक वो boat लेके जाते थे, वो देखते रहते थे, वो जाल फेंकते रहते थे, फिर मिला, फिर आगे गए, घंटों तक उनको प्रक्रिया करनी पड़ती थी। ये व्यवस्था देने के बाद वो targeted जगह पर पहुंचता है, कम समय में पहुंचता है, डीजल-वीजल का खर्चा कम होता है और भरपूर मात्रा में cash मिलता है, fishing करके वापस आ जाता है, समय और शक्ति बच जाती है। technology वही थी, उसका उपयोग गरीब व्यक्ति के लिए कैसे होता है। आज जैसे अभी बताया। मध्य प्रदेश ने आदिवासियों को, जमीन के पट्टे देने में इसका उपयोग किया। इससे भी एक कदम आगे हम काम कर सकते हैं। कई लोग, कई आदिवासी claim करते हैं कि भई यहां हम खेती करते थे, ये हमारी जमीन है, ये हमको मिलना चाहिए। गांव के लोग कहते हैं कि नहीं ये झूठ बोल रहा है, खेती नहीं करता था बेकार में जमीन हड़प करना चाह रहा है, उसका तो पैतृक जगह वो है, वहां करता था अब बच्चे बेकार में अलग हो गए हैं, सब झगड़े चलते रहते थे। लेकिन अब satellite से, पुरानी तस्वीरों को आधार पर उसको photographic system से, comparison से उसको बता सकते हैं कि यहां पर पहले forest था या खेती होती थी या कोई काम होता था, सारी चीजें निकालकर के हम उसको proof provide कर सकते हैं, एक आदिवासी hub को हम establish कर सकते हैं, just with the help of satellite. जिस scientist ने जिस समय satellite के लिए काम किया होगा तब उसे भी शायद पता नहीं होगा कि दूर-सुदूर जंगलों में बैठे हुए किसी आदिवासी के हक की लड़ाई, वो satellite के माध्यम से लड़ रहा है और उसको हक दिला रहा है, ये ताकत technology की है। जिस scientist ने उस काम को किया होगा, उसको जब पता चलेगा, अरे वाह मैने तो इस काम के लिए किया था, आदिवासी के हक के लिए मैं सफल हो गया, उसका जीवन धन्य हो जाता है। हमारा ये काम रहता है कि हम इन चीजों को कैसे उपयोग में लाएं। हम बहुत बड़ी मात्रा में लोगों का involvement करना चाहिए, क्या हर department, ideas के लिए young generation को invite कर सकते हैं कि भई हमारे सामने ये issue हैं, हमें technology के लिए, satellite या space system के लिए कैसे रास्ता निकालना चाहिए, आप student के सामने छोड़ दीजिए। आप देखिए वे exercise करेंगे, वो online आपके साथ जुड़ेंगे और नए-नए ideas देंगे। Department में एक cell बनाइए और young generation तो आजकल बड़ी techno-savvy होती है, उसमें से बनाइए, उसको कहिए कि देखे भाई आप जरा mind apply किजिए, आपको जरूर नए-नए ideas मिलेंगे और आपको इसका परिणाम भी मिलेगा। हमारे देश में गरीब से गरीब व्यक्ति भी कुछ न कुछ दिमाग apply करने का स्वभाव रखता है। अगर भारत, innovative भारत इस पर अगर काम किया जाए, तो मैं नहीं मानता हूं कि हम कहीं पीछे नजर आएगें। हर प्रकार के, आपने देखा होगा कि कई अखबारों में पढ़ते हैं कि कोई किसान अपने खेत का पानी का पंप घर से ही operate करता है कैसे? Mobile Phone से operate करता है, उसने खुद ने technology develop की और mobile technology का उपयोग करता है और अपने घर से ही उसे पता चलेगा, बिजली आई है, तो अपने घर से ही वो पंप चालू कर देता है और पानी का काम शुरू हो जाता है, फिर उसके बाद वो खेत चला जाता है। मुझे एक बार किसी ने बताया, कैसे दिमाग काम करता है सामान्य व्यक्ति का, वो व्यक्ति जिसने अपने घर में bio-gas का एक unit लगाया था, गांव के अंदर, किसान ने और अपने जो पशु थे उसका गोबर वगैरह डालता था, अपने घर में Kitchen में जो काम होता था वो गोबर डालता था और गैस पैदा करता था। अपने चूल्हे में requirement से भी ज्यादा गैस होने लगा। उसने बुद्धि का उपयोग कैसे किया, उसने tractor की tube में, अब tractor की tube कितनी बड़ी होती है, हमें अंदाजा है, वो गैस उसमें भर लेता था वो और scooter पर उसको उठाकर के, अब scooter पर कोई tractor की tube ले जाता है तो देखकर के डर लगता है कि क्या होगा, गैस tractor की tube में transport करके अपने खेत पर ले जाता था और अपने raw-wisdom से, उस गैस से वो अपना diesel engine को, जो उसने modify किया था, चलाता था और पानी निकालता था। अब देखिए कोई विज्ञान के तरीके, यानि सामान्य मानवी को भी ये मूलभूति सिद्धांत हो गए, वो उसमें से अपना रास्ता खोजता है और चीजों को apply करता है। हम किस प्रकार से इन चीजों पर सोचें नहीं तो ये सारा ज्ञान-विज्ञान भंडार बढ़ता ही चला जाएगा, लेकिन सामान्य मानवी की आवश्यकताओं के लिए हमारा विभाग क्या करता है। आज हमारी education quality हमें ठीक करनी है, ये ठीक है, कोई कहेगा कि इतने गांवों में बिजली नहीं है तो कैसे करोगे? इतने गांवों में broadband connectivity नहीं है तो कैसे करोगे? इतने गोवों में optical fiber network नहीं है, तो कहां करोगे? जिसको ये सोचना है, वो ये सोचेगा लेकिन ये भी तो सोचो कि भई इतने गांवों में है, इतने शहरों में है। कम से कम वहां long distance education के द्वारा the best quality of the teachers और हिंदुस्तान के बड़े शहर में बैठकर के studio में वो बच्चों को पढ़ाएं, मैं समझता हूं कि उस teacher को भी quality education की तरफ, उसका भी training होगा और long distance education वो करेगा और दूर-सुदूर जंगलों में भी, हमारे गांवों में हम अच्छी शिक्षा को improve कर सकते हैं। अभी मुझे किरण जी बता रहे थे, हमारे health secretary ने जो कहा कि उनको broadband capacity की कोई समस्या है, मैं उनको पूछ रहा थे कि as per health is concerned हमारे पास access capability है। अगर हम इसका उपयोग करने के लिए सोचें, हमारे सेना के जवान सीमा पर हैं, उनको इसका उपयोग कैसे हो, उनकी requirement के लिए हम इस technology को कैसे जोड़ें? हम सीमा की सुरक्षा का बहुत बड़ा काम, हम इस technology के माध्यम से कर सकते हैं। कभी-कभार जैसे हम बहुत बड़ा एक कार्यक्रम लेकर के चले हैं, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, ये प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की सफलता का सबसे पहला कोई कदम है तो हमारे space technology का उपयोग है। हम बढिया सा contour तैयार कर सकते हैं, गांव का contour तैयार कर सकते हैं और उसके आधार पर तैयार कर सकते है कि पानी का प्रवाह किस तरफ है, पानी का quantum कितना हो सकता है, rain fall कितना हो सकता है और इसके आधार पर भविष्य की पूरी design हम technology के आधार पर हम बना सकते हैं। एक प्रकार से ये science Good Governance के लिए एक अहम role पैदा कर सकता है। पहले हम planning करते थे तो सामान्य अपने अनुभव के आधार पर करते थे। आज satellite के माध्यम से हम वो planning कर सकते हैं कि जिसके कारण हमारा खर्च भी बच सकता है, समय भी बच सकता है और आज road network बनाना है। आज आप देखिए दशरथ मांझी इतना बड़ा popular हो गया है, लेकिन कारण क्या था, सरकार ने road ऐसा बनाया कि एक गांव से दूसरे गांव जाना था तो पहाड़ के किनारे-किनारे जाता था और पचास-साठ किलोग्राममीटर extra जाता था। दशरथ मांझी का raw-vision कहता था, जन्म से लाया होगा GIS system वो, उसको लगता था यहां सीधा चला जाउं तो दो किलोमीटर में पहुंच जाउंगा। और अपने हथोड़े से उसने वो रास्ता बना दिया। आज technology इतनी available है कि कोई दशरथ मांझी को अपनी जिन्दगी खपानी नहीं पड़ेगी। आप shortest way में अपना रास्ता खोज सकते हो, बना सकते हो। हम इस technology का कैसे उपयोग करें? और उपयोग कर-करके हम इसे। देखिए हमारे यहां canal भी बनती है। ऐसे-ऐसे-ऐसे जब हेलीकॉप्टर या हवाई जहाज से जाते हैं तो बड़ी पीड़ा होती है कि ये canal भी इतने-इतने सांप की तरह क्यों जा रही है। तो एक तो बनाते समय देखा होगा कि चलो यहां से चले जाएं, या तो कोई decision making पर कोई pressure आया होगा कि यार इसका खेत बचाना है, जरा उधर ले जाओ तो सांप की तरह हम लेते चले गए लेकिन हमने अगर technology का प्रयोग करते, उस समय technology करने का अवसर मिला हो तो perfect alignment के साथ हम काम कर सकते थे। हमारे जितने भी, अब देखिए encroachment का highways पर बड़े encroachment की चिंता होती है, satellite के द्वारा हम regular monitor कर सकते हैं कि हमारे highway पर encroachment हो रहा है, क्या हो रहा है, क्या गतिविधि हो रही है, हम आराम से कर सकते हैं, हम निकाल सकते हैं रास्ता। हमारी wild life, हमारी wildlife क्यों गिनती करना का, पांच साल में एक बार करते हैं और wildlife की गिनती के लिए भी पचासों प्रकार के सवाल आते हैं, Camera लगते हैं, कोई उसके पैर का नाप ले लेता है, मैं मानता हूं हम satellite system से महीने भर observe करें तो हम चीजों को खोज सकते हैं कि इस प्रकार के जो हमारे wildlife हैं, इस प्रकार यहां रहता है, इनकी movement का ये area है, आप आराम से इन चीजों को गिन सकते हैं। Technology का उपयोग इतनी सहजता से, सरलता से हो सकता है और मैं चाहता हूं कि हमारे सारे departments इस पर कैसे काम करें। हमारे पास बंजर भूमि बहुत बड़ी मात्रा में है। एक-एक इंच जमीन का सदुपयोग कैसे हो, इस पर हम कैसे काम कर सकते हैं। हमारे जंगल कभी कट गए, इसकी खबर आती है। Red चंदन जहां, वहां कहते हैं कि कटाई बहुत होती है। क्या हमारा permanent high resolution वाले camera, regular हमें update नहीं दे सकते क्या कि भई Red चंदन वाला इलाका है, यहां कोई भी movement होगी तो हमें तुरंत पता चलेगा। Mining..mining की विशेषता क्या होती है कि वो सारे system तो perfect होते हैं कागज पे, उसको mining का मिल जाता है contract मिल जाता है लेकिन जो उसको two square kilometer by two square kilometer area, मिला होगा, वो वहां शुरू नहीं करता है, उसके बगल में खुदाई करता है। अब कोई जाएगा तो उसको भी लगता है कि यार उसको तो contract मिला हुआ है, वो थोड़ा नापता है कि कितने फुट कहां है? लेकिन उसको अगर satellite system से watch किया जाए तो एक इंच इधर-उधर नहीं जा सकता, जो जगह उसको तय हुई है, वहीं पर ही mining कर सकता है और हम उसके vehicles को track कर सकते हैं कि दिन में कितने vehicle निकले, कितना गया और taxation system के साथ उसको जोड़ा जा सकता है, ये आराम से काम हो सकता है। हमारे यहां road tax लेते हैं। कभी-कभार road tax में, हम technology का उपयोग करके, बहुत मात्रा में leakages बचा सकते हैं, just with the help of technology और हम बहुत व्यवस्थाओं को विकसित कर सकते हैं। मेरा कहने का तात्पर्य ये है कि हमारे पास एक ऐसी व्यवस्था उपलब्ध है और एक लंबे अर्से तक हमारे scientists ने पुरुषार्थ करके इसको पाया है, हमारा दायित्व बनता है कि हम इसको सहज रूप से कैसे अपने यहां लागू करें और जो भी विभाग इसका आदि होगा, जिसको जरा स्वभाव होगा। आपने देखा होगा कि उसको लगता है कि इसने तो मेरे पूरे काम को बड़ा easy बना दिया है, बड़ा सरल कर दिया है. तो वो उसमें फिर involve होता चला जाएगा। जिसको ये पता नहीं कि भई इसका क्या है, अब दो साल के बाद retire होना है, तो मेरा क्या, छोड़ो यार, तुम कर लेना। जो ऊर्जा खो देते हैं जी, वो retire होने के बाद भी जिंदगी का मजा नहीं ले सकते हैं और इसलिए हम हर पल, हर पल भले ही हम senior most हैं, जिंदगी के आखिरी पड़ाव आता है, तो भी हम ऐसी कोई foot-print छौड़कर के जाएं ताकि हमारे बाद की नई पीढियों को सालों तक काम करने का अवसर मिले। ये जो आज प्रयास किया उसमें मैने एक प्रकार से तीन पीढ़ी को इकट्ठा किया है। जो fresh अभी-अभी मसूरी से निकले हैं, वो नौजवान भी यहां बैठे हैं और जो सोचते होंगे कि भई तीस तारीख को retire होना है, अगली तीस तारीख को होना है, वो भी बैठे हैं, यानि एक प्रकार से तीन पीढ़ी यहां बैठी हैं, मैंने सबको इकट्ठा करने का प्रयास यही था कि junior लोगों को ज्यादा यहां बिठाए, उसका कारण ये है कि मैं चाहता हूं कि ये legacy आगे बढ़े, ऐसा न हो फिर नई team आए, उनको चिंता न हो कि क्या करें यार, पुराने वाले तो चले गए या पुरान वाले सोचें कि अब आखिर क्या करें कि अब एक बार चला लें। हमारे लिए सबसे बड़ी आवश्यकता है, हर department एक-एक छोटा काम सोचें कि हम दो हज़ार पंद्रह में, अभी भी हमारे पास तीन-चार महीने है। एक चीज identify करें। हमें लगता है कि सैटेलाइट सिस्टम से हम इसको उपयोग कर सकते हैं और फिर उसके लिए outsource करना पड़े, कुछ नौजवानों की मदद लेनी पड़े तो हम ले लेकिन कुछ करके दिखाएं। उसी प्रकार से, जैसा ये एक पूरे देश का workshop हुआ है। राज्यों से भी मेरा आग्रह है कि राज्य भी अपने राज्य की इसी प्रकार की दो-तीन पीढ़ियों को इकट्ठी करके एक पूरे दिन का brainstorming करें, भारत सरकार के कोई न कोई अधिकारी वहां जाएं और वे भी अपने लिए plan workout करें। तीसरा मुझे आवश्यक लगता है कि ये सब होने के बाद भी decision making करने वालों को अगर हम sensitize नहीं करेंगे। उनको अगर परिचित नहीं करवाया कि ये चीजे क्या है। गांव का जो प्रधान है, वहां से ले करके MLA तक जितने भी elected लोग है, उनको कभी न कभी ऐसे institutions दिखाने का कार्यक्रम करना चाहिए। उनको बताना चाहिए कि देखिए भई आपके गांव की इतनी चीजों को satellite से हम organize कर सकते हैं। उसका विश्वास बढ़ जाएगा और वो इन चीजों को करेगा। एक बार हम और गांव के प्रधान को बुलाएंगे, तो वहां के पटवारी को भी आप जरूर बुलवाएंगे। तो एक गांव की पांच-सात प्रमुख लोगों की team होती है, जो सरकार को represent करती है, वे sensitize हो जाएगी। हमें इस चीज को नीचे तक percolate करना है। अगर हमें नीचे तक percolate करना है, तो मैं चाहूंगा कि इसके कारण हम कर सकते हैं। हम ये मानकर चले कि Good Governance के लिए, transparency के लिए, efficiency के लिए, accountability के लिए, real time delivery के लिए, real time monitoring के लिए technology हमारे पास सबसे ताकतवर माध्यम होता है। अगर हम Good Governance की बात करते हैं तो उसकी शुरूआत होती है perfect planning. perfect planning के अंदर आपको इतना बढ़िया database मिले, आपको maps मिले, आपको तीन D resolutions मिले, मैं नहीं मानता हूं कि planning में कोई कमी आ सकती है। अगर perfect planning है और proper road-map है implementation का और time frame में आपका goal set किए हैं, मैं मानता हूं कि हम जो चाहे वो परिणामों को technology के माध्यम से हमारा समय का span कम करते हुए, qualitative improvement करके हम परिणाम ला सकते हैं। सरी समस्या आई कोसी नदी पर। नेपाल में कोसी का जो हिस्सा है, landslide हुआ, पानी का प्रवाह बंद हो गया। उधर पानी जमता गया। मानते हैं, कल्पना कर सकते हैं मिट्टी का Dam बन जाए और पानी भर जाए और जिस दिन खुलेगा तो क्या होगा। सबसे पहले NDRF की टीमों को यहां से बिहार भेजा और कोसी के रास्ते पर जितने गांव थे सारे के सारे गांव खाली करवाए। लोग गुस्सा भी कर रहे थे, भई पानी तो है नहीं बारिश तो हो नहीं रही, आप क्यों खाली करवा रहे हो? उनको बड़ी मुश्किल से समझाया, दबाव भी डाला, उनको हटाया और उधर की तरफ उस पानी के प्रवाह को चालू करने के लिए रास्ते खोजते रहे, किस प्रकार से क्या समस्या का समाधान किया जाए। सदनसीब से रास्ते निकले और धीरे-धीरे-धीरे पानी का बहाव शुरू हुआ और हम एक बहुत बड़े संकट से बच गए और ये भी तब संभव हुआ, satellite का regular imaginary monitoring हो रहा था उससे पता चला कि इतना बड़ा संकट आने वाला है। पिछले दिनों आपने देखा होगा, Vizag में जो हुदहुद आया और हमारे विभाग के लोग, राठौड़ यहां बैठे हैं। इतना perfect information दिया उन्होंने कि cyclone कितना दूर है, कितनी intensity है, किस angle से जा रहा है और कब वो आकर के Vizag को परेशान करेगा। मैं मानता हूं इतना perfect information था और just with the help of satellite technology और उसका परिणाम हुआ कि इतना बड़ा हुदहुद Vizag में आया, कम से कम नुकसान हुआ। हम disaster management की दृष्टि से, early warning की दृष्टि से, preparedness की दृष्टि से मानव जाति के कल्याण का एक बहुत बड़ा काम कर सकते हैं और इसलिए हम इन विषयों में जितने हम sensitize होते हैं, हमारे सारे department उस दिशा में सोचने लगते हैं कि हां भाई हमारे यहां ये young team है, दो-चार लोगों को हम लगाएंगे। मैं यह भी चाहता हूं कि ISRO भी जिस प्रकार से हमारे यहां अलग-अलग कार्यक्रम चलते हैं। हमारी space technology आखिर है क्या, हम students को तैयार करें, students को नीचे lecture देने के लिए भेजें, slideshow करें, एक अच्छी video बनाएं, लोगों को समझाएं कि भई क्या चीज है, कैसे काम आ सकती हैं, एक mass-education का कार्यक्रम ISRO ने initiate करना चाहिए, HRD ministry और बाकी ministry और state government इनकी मदद लेनी चाहिए, इनके लिए एक programming तैयार करना चाहिए और students, हमारे students को तैयार करना चाहिए, उनसे एक-दो week मांगने चाहिए कि भई आप एक week, दो week दीजिए, दस स्कूल-कॉलेज में आपको जाना है, ये lecture देकर के आ जाइए, तो हमारी एक generation भी तैयार होगी इस चीजों से और जो सुनेंगे, उनको थोड़ा-थोड़ा परिचय होगा कि भई ये-ये चीजें हैं, ये करने वाला काम मुझे लगता है। अभी पंद्रह अगस्त को मैंने लालकिले पर से कहा था Start-up India-Stand up India, अभी जो बताया गया slide में करीब तीन हजार छोटे-मोटे private unit हैं जो हमारी इस गतिविधि के साथ जुड़े हुए हैं। मुझे लगता है कि, मैं कोई scientist तो नहीं हूं लेकिन इस क्षेत्र में विकास के लिए sky is the limit, हम इस प्रकार के हमारे जो scientific temper के जो नौजवान हैं, उनको Start-up के लिए प्रेरित कर सकते हैं क्या? हम उनको blue print दे सकते हैं क्या? कि भई ये चार सौ प्रकार के काम ऐसे हैं कि नौजवान आगे आए और वो कुछ उसमें innovation करे, कुछ manufacturing करे, कुछ चीजें बनाए, हमारे space science के लिए बहुत काम आने वाली हैं, या हमारे space science की utility के लिए नीचे काम आने वाली है या तो हम upgrade जाने के लिए करें या downgrade जाने के लिए करें लेकिन हम दोनों रास्ते पर कैसे काम करें हम इस पर सोच सकते हैं क्या? अगर हम इस व्यवस्था को विकसित कर सकते हैं तो Start-up India-Stand up India ये जो एक dream है उसमें innovation technology का भरपूर हम उपयोगक कर-करके और financial institution भी, वे भी इस दिशा में सोचें कि इस प्रकार से Start-up के लोग आते हैं जो science में कुछ न कुछ contribute करने वाले हैं तो उनके लिए विशेष व्यवस्था की जाए, ISRO के साथ मिलकर के की जाए, आप देखिए हमको एक बहुत बड़ा लाभ मिल सकता है। हर एक department की चिंता था कि capacity building की, ये बात सही है कि हम स्वभाव से इन चीजों को स्वीकार करने के आदि न होने के कारण इस तरफ हमने ध्यान नहीं दिया है। हम जब recruitment करें, हमारे नए लोगों को तो recruitment करने पर इस प्रकार के विज्ञान से जुड़े हुए लोगों को ज्यादा लें, ताकि हमें capacity building के लिए सुविधा रहे। हमारे यहां पूछा जाए department में कि भई हमारे यहां department में कितने लोगों कि इस-इस चीज में रुचि है। तो फिर इनको सात दिन, दस दिन का एक course करवाया जा सकता है। अगर हम इस व्यवस्था का, human resource development अगर हो गया तो institutional capital building अपना आप आना शुरू हो जाएगा। सिर्फ financial resources से institutional capacity नहीं आती है, institutional capability का आधार structure नहीं होता है, building कैसा है, वो नहीं होता है, equipment कैसे होते हैं, वो नहीं होता है, financial arrangement कैसे हैं, वो नहीं होता है, उसका मूल आधार होता है, human resource कैसा है। अगर आपके पास उत्तम प्रकार का human resource होता है, तो आप में से कभी, मैं तो चाहता था कि यहां एक slide दिखानी चाहिए थी। भारत Space Science में गया और जिसका आज इतना बड़ा नाम होता है। पहला जो हमारा space का जो छोड़ने का था, उसकी पहली फोटो है तो साईकिल पर एक मजदूर उठाकर के ले जा रहा है। भारत का पहला जो space प्रयोग हुआ, वो एक गैराज के अंदर trial हुआ था। यानि उसकी गतिविधि गैराज में हुई थी और साईकिल पर उसका shifting होता था ले जाने का यानि वहां से अगर, इसका मतलब ये हुआ कि और व्यवस्थाओं की ताकत कम होती है, human resource की ताकत ज्यादा होती है, जिसने हमें आसमान की ऊंचाइयों को सैर करने के लिए ले गए, जबकि जमीन पर उसको साईकिल पर उठाकर ले जाया गया। ये दो चीजें हैं, ये जो चीजें हैं हमारे लिए इससे बड़ा कोई उदाहरण नहीं हो सकता है, इससे बड़ा कोई उदाहरण नहीं हो सकता है कि हमारे science में, हमारे भीतर की जो ताकत है, वो कितना बड़ा contribution कर सकती है, ये संभावनाएं हमारे पास पड़ी हुई हैं। अच्छे planning के लिए, समय सीमा में implementation के लिए, हम इसका भरपूर उपयोग करें और मुझे विश्वास है कि आज पूरे दिनभर ये जो exercise हुई है, करीब एक हज़ार छः सौ अधिकारी और बहुत महत्वपूर्ण दायित्व संभालने वाले अधिकारियों के ये मंथन आने वाले दिनों में ऐसा न हो कि space technology in common man के बीच space रह जाए और इसलिए हमारा काम है common man और space technology के बीच में space नहीं रहना चाहिए। ये सपना पूरा करें, बहुत-बहुत शुभकामनाएं। धन्यवाद।
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बिलासपुरः छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी को बड़ी राहत दी है। दरअसल, स्मार्ट सिटी कंपनी ने नए प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी करने और काम शुरू करने की अनुमति मांगी थी। कंपनी की तरफ से यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार का स्पष्ट आदेश है कि स्मार्ट सिटी का काम जून 2023 तक पूरा करना है। ऐसे में काम शुरू नहीं होने से रायपुर और बिलासपुर को मिली राशि लेप्स हो जाएगी। कोर्ट ने स्मार्ट सिटी कंपनी की मांग को स्वीकार कर लिया है।
हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस अरूप गोस्वामी और जस्टिस गौतम चौरडि? ा की डिवीजन बेंच ने पिछली सुनवाई के दौरान बिलासपुर और रायपुर स्मार्ट सिटी कंपनी के अधिवक्ता को यह निर्देश दिए थे कि, वह स्पष्ट रूप से यह बताएं कि कौन- कौन से ऐसे प्रोजेक्ट हैं या कार्य हैं जिनका वर्क आॅर्डर जारी किए जाने का स्टेज आ चुका है। दरअसल, कंपनी ने जनहित याचिका पर हाईकोर्ट के सामने यह आवेदन लगाया था कि कंपनी के बहुत सारे प्रोजेक्ट और कार्य टेंडर स्टेज पर है। लेकिन, कोर्ट से अनुमति नहीं मिलने के कारण न तो टेंडर जारी हो पा रहा है और न ही काम शुरू हो रहा है। कोर्ट के निर्देश पर सोमवार को स्मार्ट सिटी कंपनी के अधिवक्ता सुमेश बजाज ने नए प्रोजेक्ट की सूची प्रस्तुत कर बताया कि केंद्र सरकार का स्पष्ट आदेश है कि स्मार्ट सिटी का काम हर हाल में जून 2023 तक पूरा करना है। ऐसे में केंद्र सरकार से मिली राशि 31 मार्च के बाद लैप्स हो जाएगी। डिवीजन बेंच ने स्मार्ट सिटी की मांग को स्वीकार करते हुए नए प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी कर काम शुरू करने की अनुमति दे दी है।
मामले की सुनवाई के दौरान बताया गया कि नगर निगम क्षेत्र में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के सभी काम के लिए मेयर इन काउंसिल और सामान्य सभा की अनुमति से किया जा रहा है। कोर्ट को नगर निगम की तरफ से भी बताया गया कि सामान्य सभा की बैठक और एमआईसी के अनुमोदन के बाद ही स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का काम हो रहा है। सोमवार को सुनवाई के दौरान अधिवक्ता सुमेश बजाज, राज्य सरकार की ओर से हरप्रीत अहलूवालिया, केंद्र सरकार की ओर से रमाकांत मिश्रा के साथ ही मेयर इन काउंसिल और सामान्य सभा की ओर से अधिवक्ता गण अशोक वर्मा, हर्षवर्धन अग्रवाल और सुदीप अग्रवाल उपस्थित रहे।
अधिवक्ता विनय दुबे ने अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव और गुंजन तिवारी के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है। बिलासपुर और रायपुर नगर में कार्यरत स्मार्ट सिटी लिमिटेड कम्पनियों को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि इन्होंने निर्वाचित नगर निगमों के सभी अधिकारों और क्रियाकलाप का असंवैधानिक रूप से अधिग्रहण कर लिया है। जबकि ये सभी कम्पनियां विकास के वही कार्य कर रही हैं जो संविधान के तहत संचालित प्रजातांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित नगर निगमों के अधीन हैं।
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बिलासपुरः छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रायपुर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी को बड़ी राहत दी है। दरअसल, स्मार्ट सिटी कंपनी ने नए प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी करने और काम शुरू करने की अनुमति मांगी थी। कंपनी की तरफ से यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार का स्पष्ट आदेश है कि स्मार्ट सिटी का काम जून दो हज़ार तेईस तक पूरा करना है। ऐसे में काम शुरू नहीं होने से रायपुर और बिलासपुर को मिली राशि लेप्स हो जाएगी। कोर्ट ने स्मार्ट सिटी कंपनी की मांग को स्वीकार कर लिया है। हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस अरूप गोस्वामी और जस्टिस गौतम चौरडि? ा की डिवीजन बेंच ने पिछली सुनवाई के दौरान बिलासपुर और रायपुर स्मार्ट सिटी कंपनी के अधिवक्ता को यह निर्देश दिए थे कि, वह स्पष्ट रूप से यह बताएं कि कौन- कौन से ऐसे प्रोजेक्ट हैं या कार्य हैं जिनका वर्क आॅर्डर जारी किए जाने का स्टेज आ चुका है। दरअसल, कंपनी ने जनहित याचिका पर हाईकोर्ट के सामने यह आवेदन लगाया था कि कंपनी के बहुत सारे प्रोजेक्ट और कार्य टेंडर स्टेज पर है। लेकिन, कोर्ट से अनुमति नहीं मिलने के कारण न तो टेंडर जारी हो पा रहा है और न ही काम शुरू हो रहा है। कोर्ट के निर्देश पर सोमवार को स्मार्ट सिटी कंपनी के अधिवक्ता सुमेश बजाज ने नए प्रोजेक्ट की सूची प्रस्तुत कर बताया कि केंद्र सरकार का स्पष्ट आदेश है कि स्मार्ट सिटी का काम हर हाल में जून दो हज़ार तेईस तक पूरा करना है। ऐसे में केंद्र सरकार से मिली राशि इकतीस मार्च के बाद लैप्स हो जाएगी। डिवीजन बेंच ने स्मार्ट सिटी की मांग को स्वीकार करते हुए नए प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी कर काम शुरू करने की अनुमति दे दी है। मामले की सुनवाई के दौरान बताया गया कि नगर निगम क्षेत्र में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के सभी काम के लिए मेयर इन काउंसिल और सामान्य सभा की अनुमति से किया जा रहा है। कोर्ट को नगर निगम की तरफ से भी बताया गया कि सामान्य सभा की बैठक और एमआईसी के अनुमोदन के बाद ही स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का काम हो रहा है। सोमवार को सुनवाई के दौरान अधिवक्ता सुमेश बजाज, राज्य सरकार की ओर से हरप्रीत अहलूवालिया, केंद्र सरकार की ओर से रमाकांत मिश्रा के साथ ही मेयर इन काउंसिल और सामान्य सभा की ओर से अधिवक्ता गण अशोक वर्मा, हर्षवर्धन अग्रवाल और सुदीप अग्रवाल उपस्थित रहे। अधिवक्ता विनय दुबे ने अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव और गुंजन तिवारी के माध्यम से जनहित याचिका दायर की है। बिलासपुर और रायपुर नगर में कार्यरत स्मार्ट सिटी लिमिटेड कम्पनियों को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि इन्होंने निर्वाचित नगर निगमों के सभी अधिकारों और क्रियाकलाप का असंवैधानिक रूप से अधिग्रहण कर लिया है। जबकि ये सभी कम्पनियां विकास के वही कार्य कर रही हैं जो संविधान के तहत संचालित प्रजातांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित नगर निगमों के अधीन हैं।
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सैफ अली खान और करीना कपूर के नन्हे नवाब तैमूर इंटरनेट सेंसेशन बन चुके हैं, इस बात में कोई शक नहीं। अपनी क्यूटनेस से सबका दिल जीतने वाले तैमूर अली खान बालीवुड के फेवरिट स्टार किड्स में से एक हैं। तैमूर की फैन फॉलोइंग भी किसी सुपरस्टार से कम नहीं, तभी तो उनकी कोई भी नई तस्वीर आते ही सोशल मीडिया पर छा जाती है। क्या आपने कभी सोचा है कि इन तस्वीरों की कीमत क्या होती है। इन तस्वीरों के लिए फोटोग्रॉफर्स मीडिया से मोटी रकम वसूल करते हैं। इस बात की खुलासा खुद तैमूर के पापा सैफ ने किया है। हाल ही में 'कॉफी विद करण' में बेटी सारा संग पहुंचे सैफ ने अपने नन्हे तैमूर को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है। सैफ ने बताया कि तैमूर की एक तस्वीर की कीमत 1500 रुपए है, जो कि बालीवुड के किसी भी सुपरस्टार की तस्वीर के लिए मिलने वाली कीमत से ज्यादा है। सैफ ने यह भी बताया कि महंगी बिकने वाली तस्वीरों की लिस्ट में जहां एक तरफ उनके बेटे टॉप पर हैं, वहीं वह सबसे लास्ट में हैं। सैफ ने बताया कि उन्हें उनके ससुर रणधीर कपूर ने तैमूर के हाई रेट के बारे में जानकारी दी थी, जिसे सुनकर वह खुद भी हैरान रह गए थे।
जीवनसंगी की तलाश है? तो आज ही भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
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सैफ अली खान और करीना कपूर के नन्हे नवाब तैमूर इंटरनेट सेंसेशन बन चुके हैं, इस बात में कोई शक नहीं। अपनी क्यूटनेस से सबका दिल जीतने वाले तैमूर अली खान बालीवुड के फेवरिट स्टार किड्स में से एक हैं। तैमूर की फैन फॉलोइंग भी किसी सुपरस्टार से कम नहीं, तभी तो उनकी कोई भी नई तस्वीर आते ही सोशल मीडिया पर छा जाती है। क्या आपने कभी सोचा है कि इन तस्वीरों की कीमत क्या होती है। इन तस्वीरों के लिए फोटोग्रॉफर्स मीडिया से मोटी रकम वसूल करते हैं। इस बात की खुलासा खुद तैमूर के पापा सैफ ने किया है। हाल ही में 'कॉफी विद करण' में बेटी सारा संग पहुंचे सैफ ने अपने नन्हे तैमूर को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है। सैफ ने बताया कि तैमूर की एक तस्वीर की कीमत एक हज़ार पाँच सौ रुपयापए है, जो कि बालीवुड के किसी भी सुपरस्टार की तस्वीर के लिए मिलने वाली कीमत से ज्यादा है। सैफ ने यह भी बताया कि महंगी बिकने वाली तस्वीरों की लिस्ट में जहां एक तरफ उनके बेटे टॉप पर हैं, वहीं वह सबसे लास्ट में हैं। सैफ ने बताया कि उन्हें उनके ससुर रणधीर कपूर ने तैमूर के हाई रेट के बारे में जानकारी दी थी, जिसे सुनकर वह खुद भी हैरान रह गए थे। जीवनसंगी की तलाश है? तो आज ही भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें- निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!
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किशोर एवं युवा मन की कवितायें, क्षणिकायें, गजलें और रुबाईयाँ.
साथ ही, बँगला कवि सुकान्तो भट्टाचार्य की 7 कविताओं का हिन्दी अनुवाद और मिर्जा ग़ालिब के कुछ चुनिन्दा शेरों पर आधारित एक काल्पनिक कहानी.
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किशोर एवं युवा मन की कवितायें, क्षणिकायें, गजलें और रुबाईयाँ. साथ ही, बँगला कवि सुकान्तो भट्टाचार्य की सात कविताओं का हिन्दी अनुवाद और मिर्जा ग़ालिब के कुछ चुनिन्दा शेरों पर आधारित एक काल्पनिक कहानी. Currently there are no reviews available for this book. Be the first one to write a review for the book कारवाँ.
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हाफिज रहमत खान (1774-1774)
1720 में रूहेला सरदारों ने बरेली को अपनी राजधानी बनाई थी। इस रूहेला सरदार ने बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर सहित रूहेलखंड में 1779 से 1774 तक शासन किया।
1761 में हाफिज रहमत खान का काफी योगदान रहा था। उनकी बहादुरी से उनके पक्ष को जीत हासिल हुई थी।
1764 में मुगल सेना को हराकर आगरा किला पर कब्जा करने वाले सूरजमल ने ताजमहल के चांदी का दरवाजा लूट लिया। मुगलों ने हाफिज रहमत को कमांडर बनाकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी। वे बहादुरी से लड़े और इन्होंने सूरजमल को हरा दिया।
कहने को तो रुहेलखंड की ग्लोरियस हिस्ट्री स्वर्णाक्षरों में दर्ज की गई है। यहां के रुहेला सरदारों की बहादुरी के किस्से इसके स्वर्णिम इतिहास की कहानी कहते हैं। पर अब यह गोल्डन हेरिटेज धीरे-धीरे जमींदोज होती जा रही है। हो भी क्यों ना, जब टूरिज्म डिपार्टमेंट हमारी विरासत को हेरिटेज टूरिज्म का हिस्सा ही नहीं मानता है। वहीं, इस हेरिटेज को सहेजने में एएसआई भी लाचार ही नजर आता है। सिटी की बात करें तो रुहेला सरदार हाफिज रहमत खां के मकबरे को ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने अपने संरक्षण में ले तो लिया है पर इसे संजो नहीं पाई।
यूपी टूरिज्म डिपार्टमेंट पर स्टेट के टूरिज्म डेस्टिनेशंस में पहले तो बरेली को शामिल किया गया है, पर इस पेज में केवल अहिच्छत्र के जैन मंदिर का ही जिक्र किया गया है। ऐसे में, सवाल यह उठता है कि बरेली में अहिच्छत्र के इस जैन मंदिर के अलावा कोई ऐसा डेस्टिनेशन नहीं है, जो टूरिस्ट को अट्रैक्ट कर सके। रीजनल टूरिज्म ऑफीसर प्रीती श्रीवास्तव के मुताबिक वास्तव में हम इस टूरिस्ट डेस्टिनेशन में बरेली की बात नहीं कर रहे हैं। यह तो अहिच्छत्र का जिक्र है। आईटी डिपार्टमेंट की गलती से यह डेस्टिनेशन बरेली के नाम से बन गया है। इसके लिए लेटर लिखकर डेस्टिनेशन चेंज करने के लिए कहा जा चुका है। बरेली तो टूरिस्ट डेस्टिनेशन में शामिल ही नहीं है। आई नेक्स्ट की पड़ताल के बाद देर शाम साइट से बरेली को अहिच्छत्र से रिप्लेस कर दिया गया।
रीजनल टूरिज्म डिपार्टमेंट की मानें तो सेंट्रल लेवल पर सूफी श्राइन की 32 साइट क ो टूरिस्ट प्लेस के रूप में डेवलप करने के लिए सेलेक्ट किया गया है। इनमें बरेली से खानकाह-ए-नियाजिया और दरगाह-ए-आला हजरत को शामिल किया गया है। इसके लिए एडमिनिस्ट्रेशन से लैंड की डिमांड की गई है। यहां 50 बस की पार्किंग, कार पार्किंग, बाथिंग फैसिलिटी, टॉयलेट्स, कुकिंग प्लेस, ड्रिंकिंग वॉटर और जनरल यूटिलिटी की शॉप्स डेवलप की जाएंगी।
टूरिज्म डिपार्टमेंट जो भी दावा करे पर वास्तव में बरेली की विरासत किसी से कमजोर नहीं है। फिर चाहें वह गुप्तकाल की बात हो या अंग्रेजी शासन और रुहेला सरदारों की कहानी हो। हिस्टोरियन डॉ। जोगा सिंह होठी के मुताबिक सिटी में इतनी ऐतिहासिक विरासतें हैं, जिन्हें काउंट करना भी मुश्किल है। शहर को नाथ नगरी कहा जाता है, यहां पांच प्राचीन शिव मंदिर है। इनमें तपेश्वरनाथ, मढ़ीनाथ, अलखनाथ, त्रिवटीनाथ और धोपेश्वरनाथ मंदिर हैं। खानकाह-ए-नियाजिया, दरगाह-ए-आला हजरत, नौमहला मस्जिद, जामा मस्जिद भी हेरिटेज साइट्स हैं। इन प्लेसेज पर टूरिस्ट की आवाजाही भी वर्ष भर लगी रहती है।
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हाफिज रहमत खान एक हज़ार सात सौ बीस में रूहेला सरदारों ने बरेली को अपनी राजधानी बनाई थी। इस रूहेला सरदार ने बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर सहित रूहेलखंड में एक हज़ार सात सौ उन्यासी से एक हज़ार सात सौ चौहत्तर तक शासन किया। एक हज़ार सात सौ इकसठ में हाफिज रहमत खान का काफी योगदान रहा था। उनकी बहादुरी से उनके पक्ष को जीत हासिल हुई थी। एक हज़ार सात सौ चौंसठ में मुगल सेना को हराकर आगरा किला पर कब्जा करने वाले सूरजमल ने ताजमहल के चांदी का दरवाजा लूट लिया। मुगलों ने हाफिज रहमत को कमांडर बनाकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी। वे बहादुरी से लड़े और इन्होंने सूरजमल को हरा दिया। कहने को तो रुहेलखंड की ग्लोरियस हिस्ट्री स्वर्णाक्षरों में दर्ज की गई है। यहां के रुहेला सरदारों की बहादुरी के किस्से इसके स्वर्णिम इतिहास की कहानी कहते हैं। पर अब यह गोल्डन हेरिटेज धीरे-धीरे जमींदोज होती जा रही है। हो भी क्यों ना, जब टूरिज्म डिपार्टमेंट हमारी विरासत को हेरिटेज टूरिज्म का हिस्सा ही नहीं मानता है। वहीं, इस हेरिटेज को सहेजने में एएसआई भी लाचार ही नजर आता है। सिटी की बात करें तो रुहेला सरदार हाफिज रहमत खां के मकबरे को ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने अपने संरक्षण में ले तो लिया है पर इसे संजो नहीं पाई। यूपी टूरिज्म डिपार्टमेंट पर स्टेट के टूरिज्म डेस्टिनेशंस में पहले तो बरेली को शामिल किया गया है, पर इस पेज में केवल अहिच्छत्र के जैन मंदिर का ही जिक्र किया गया है। ऐसे में, सवाल यह उठता है कि बरेली में अहिच्छत्र के इस जैन मंदिर के अलावा कोई ऐसा डेस्टिनेशन नहीं है, जो टूरिस्ट को अट्रैक्ट कर सके। रीजनल टूरिज्म ऑफीसर प्रीती श्रीवास्तव के मुताबिक वास्तव में हम इस टूरिस्ट डेस्टिनेशन में बरेली की बात नहीं कर रहे हैं। यह तो अहिच्छत्र का जिक्र है। आईटी डिपार्टमेंट की गलती से यह डेस्टिनेशन बरेली के नाम से बन गया है। इसके लिए लेटर लिखकर डेस्टिनेशन चेंज करने के लिए कहा जा चुका है। बरेली तो टूरिस्ट डेस्टिनेशन में शामिल ही नहीं है। आई नेक्स्ट की पड़ताल के बाद देर शाम साइट से बरेली को अहिच्छत्र से रिप्लेस कर दिया गया। रीजनल टूरिज्म डिपार्टमेंट की मानें तो सेंट्रल लेवल पर सूफी श्राइन की बत्तीस साइट क ो टूरिस्ट प्लेस के रूप में डेवलप करने के लिए सेलेक्ट किया गया है। इनमें बरेली से खानकाह-ए-नियाजिया और दरगाह-ए-आला हजरत को शामिल किया गया है। इसके लिए एडमिनिस्ट्रेशन से लैंड की डिमांड की गई है। यहां पचास बस की पार्किंग, कार पार्किंग, बाथिंग फैसिलिटी, टॉयलेट्स, कुकिंग प्लेस, ड्रिंकिंग वॉटर और जनरल यूटिलिटी की शॉप्स डेवलप की जाएंगी। टूरिज्म डिपार्टमेंट जो भी दावा करे पर वास्तव में बरेली की विरासत किसी से कमजोर नहीं है। फिर चाहें वह गुप्तकाल की बात हो या अंग्रेजी शासन और रुहेला सरदारों की कहानी हो। हिस्टोरियन डॉ। जोगा सिंह होठी के मुताबिक सिटी में इतनी ऐतिहासिक विरासतें हैं, जिन्हें काउंट करना भी मुश्किल है। शहर को नाथ नगरी कहा जाता है, यहां पांच प्राचीन शिव मंदिर है। इनमें तपेश्वरनाथ, मढ़ीनाथ, अलखनाथ, त्रिवटीनाथ और धोपेश्वरनाथ मंदिर हैं। खानकाह-ए-नियाजिया, दरगाह-ए-आला हजरत, नौमहला मस्जिद, जामा मस्जिद भी हेरिटेज साइट्स हैं। इन प्लेसेज पर टूरिस्ट की आवाजाही भी वर्ष भर लगी रहती है।
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देश के पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने पाकिस्तानी पत्रकार के दावों को 'असत्य' करार देते हुए खारिज कर दिया था. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ताजा हमलों के मद्देनजर पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने शुक्रवार को दोहराया कि वह पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा को नहीं जानते और न ही उन्हें कभी किसी सम्मेलन में आमंत्रित किया था. मिर्जा ने दावा किया था कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के शासनकाल में उन्होंने पांच बार भारत का दौरा किया था और इस दौरान यहां जुटाई गई संवेदनशील सूचनाएं अपने देश की खुफिया एजेंसी आईएसआई को उपलब्ध कराई थीं.
मिर्जा ने कथित तौर पर टिप्पणी की थी कि वह अंसारी के निमंत्रण पर भारत आए थे और उनसे मुलाकात भी की थी. हालांकि, अंसारी ने उनके दावों को 'असत्य एवं निराधार' करार देते हुए उन्हें खारिज कर दिया था. भाजपा ने शुक्रवार को इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर हमले तेज कर दिए. पार्टी ने अंसारी और मिर्जा की एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें दोनों 2009 में आतंकवाद पर भारत में आयोजित एक सम्मेलन में कथित तौर पर मंच साझा करते हुए नजर आ रहे हैं.
अंसारी के कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा, "भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति अपने इस बयान पर कायम हैं कि वह पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा को नहीं जानते और न ही उन्हें कभी किसी सम्मेलन में आमंत्रित किया था. इसमें नुसरत मिर्जा द्वारा उल्लिखित 2010 के सम्मेलन से लेकर 2009 में आतंकवाद पर आयोजित सम्मेलन या कोई अन्य कार्यक्रम शामिल है. " अंसारी ने कुछ दिन पहले मिर्जा को आमंत्रित करने के भाजपा के दावे का खंडन करते हुए कहा था कि यह एक ज्ञात तथ्य है कि भारत के उपराष्ट्रपति द्वारा विदेशी हस्तियों को निमंत्रण सरकार के परामर्श पर भेजा जाता है, आमतौर पर विदेश मंत्रालय के माध्यम से.
पाकिस्तान में मिर्जा द्वारा दिए गए एक साक्षात्कार के वीडियो क्लिप पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें वह यह कहते नजर आ रहे है कि उन्होंने भारत में आतंकवाद पर आयोजित एक सम्मेलन में हिस्सा लिया था, जिसे अंसारी ने भी संबोधित किया था. मिर्जा ने यह भी दावा किया था कि उन्होंने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) को कई गोपनीय एवं खुफिया सूचनाएं उपलब्ध कराई थीं.
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देश के पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने पाकिस्तानी पत्रकार के दावों को 'असत्य' करार देते हुए खारिज कर दिया था. नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी के ताजा हमलों के मद्देनजर पूर्व उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने शुक्रवार को दोहराया कि वह पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा को नहीं जानते और न ही उन्हें कभी किसी सम्मेलन में आमंत्रित किया था. मिर्जा ने दावा किया था कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के शासनकाल में उन्होंने पांच बार भारत का दौरा किया था और इस दौरान यहां जुटाई गई संवेदनशील सूचनाएं अपने देश की खुफिया एजेंसी आईएसआई को उपलब्ध कराई थीं. मिर्जा ने कथित तौर पर टिप्पणी की थी कि वह अंसारी के निमंत्रण पर भारत आए थे और उनसे मुलाकात भी की थी. हालांकि, अंसारी ने उनके दावों को 'असत्य एवं निराधार' करार देते हुए उन्हें खारिज कर दिया था. भाजपा ने शुक्रवार को इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर हमले तेज कर दिए. पार्टी ने अंसारी और मिर्जा की एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें दोनों दो हज़ार नौ में आतंकवाद पर भारत में आयोजित एक सम्मेलन में कथित तौर पर मंच साझा करते हुए नजर आ रहे हैं. अंसारी के कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा, "भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति अपने इस बयान पर कायम हैं कि वह पाकिस्तानी पत्रकार नुसरत मिर्जा को नहीं जानते और न ही उन्हें कभी किसी सम्मेलन में आमंत्रित किया था. इसमें नुसरत मिर्जा द्वारा उल्लिखित दो हज़ार दस के सम्मेलन से लेकर दो हज़ार नौ में आतंकवाद पर आयोजित सम्मेलन या कोई अन्य कार्यक्रम शामिल है. " अंसारी ने कुछ दिन पहले मिर्जा को आमंत्रित करने के भाजपा के दावे का खंडन करते हुए कहा था कि यह एक ज्ञात तथ्य है कि भारत के उपराष्ट्रपति द्वारा विदेशी हस्तियों को निमंत्रण सरकार के परामर्श पर भेजा जाता है, आमतौर पर विदेश मंत्रालय के माध्यम से. पाकिस्तान में मिर्जा द्वारा दिए गए एक साक्षात्कार के वीडियो क्लिप पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे हैं, जिनमें वह यह कहते नजर आ रहे है कि उन्होंने भारत में आतंकवाद पर आयोजित एक सम्मेलन में हिस्सा लिया था, जिसे अंसारी ने भी संबोधित किया था. मिर्जा ने यह भी दावा किया था कि उन्होंने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस को कई गोपनीय एवं खुफिया सूचनाएं उपलब्ध कराई थीं. .
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का मुकुट न उतार लूँ, रुधिर के प्रवाह में घोड़े हाथी ( की सेना को ) न डुबा दूँ, यदि राजा भरतेश्वर को मार न डालूँ तो पिता ऋषभेश्वर की मुझे लाज है। ( हे दूत ), तुम भट भरतेश्वर के पास जाकर सूचना दे दो कि वह अपने श्रेष्ठ घोड़े, हाथी औौर रथ को शीघ्र ( युद्ध क्षेत्र में ) चलावें ।
आपण केले ।
११८ - दूत बोला- हे राजा ! सुनो न । उन दिनों की बात मत करो जिन दिनों वह ( भरतेश्वर ) गंगातीर पर खेला करता था । ( अब वह ऐसा चक्रवर्ती राजा बन गया है कि ) उसके दल के चलने के भार से शेषनाग का सिर और उसके फण का मणि सलसला उठता है । यदि तुम उसकी ज्ञा नहीं मानते तो भरतेश्वर तो दूर रहा; फल सूर्य उगते ही मल्ल समुदाय के द्वारा ही श्राप मैं ( सारा राज्य ) बलात् श्रधिकार में कर लूँगा ।
बेढ़िउँ - वेढ़ ( वेष्ट) = लपेट लेना, अपने अधिकार में कर लेना । ।
११६ - इस प्रकार कहकर दूत चल पड़ा । मंत्रीश्वर विचार करने लगा ( और बोला ) हे देव, दूत को प्रसन्न कीजिए । अन्य ६८ कुमारवर, जिन्होंने पृथक् पृथक् रूप से भरतेश्वर को प्रचारा, वे सब उसकी श्राज्ञा मान गए और बली भरतेश्वर के पास श्रा गए । हे अक्षय स्वामी, बांधवों के संघिबल का विमर्श न करो । ( वे ६८ बांध का साथ न देंगे । )
पाठांतर - ते णमन्निउ ( वे श्राज्ञा मान गए ) ।
१२० - [ दूत राजा भरतेश्वर के पास जाकर बाहुबलि का वृत्तांत सुना रहा है । ] वे ( बाहुबलि ) क्रुद्ध हुए, किलकिला उठे । ( मानो ) काल की दूसरी कालाग्नि प्रज्वलित हो उठी हो । महाचल के हाथ में करवाल ने पर उसका स्वरूप ऐसा हुआ मानो कंकोल वृक्ष कोरंबित हो उठा हो ।
काल ही कलकल करता हुआ मुकुटधारी ( बाहुबली ) से मिल गया । कलह के कारण विकराल कोप प्रज्वलित हो गया हो ।
पाठांतर - कंकोली किम रोषीश्रो ?
१२१ - गड़गड़ाहट से कोलाहल हुआ और गगनांगण गरन उठा । सुभट सामंत पूरी समाधानिका ( तैयारी ) के साथ चल पड़े । कवच से
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का मुकुट न उतार लूँ, रुधिर के प्रवाह में घोड़े हाथी न डुबा दूँ, यदि राजा भरतेश्वर को मार न डालूँ तो पिता ऋषभेश्वर की मुझे लाज है। , तुम भट भरतेश्वर के पास जाकर सूचना दे दो कि वह अपने श्रेष्ठ घोड़े, हाथी औौर रथ को शीघ्र चलावें । आपण केले । एक सौ अट्ठारह - दूत बोला- हे राजा ! सुनो न । उन दिनों की बात मत करो जिन दिनों वह गंगातीर पर खेला करता था । उसके दल के चलने के भार से शेषनाग का सिर और उसके फण का मणि सलसला उठता है । यदि तुम उसकी ज्ञा नहीं मानते तो भरतेश्वर तो दूर रहा; फल सूर्य उगते ही मल्ल समुदाय के द्वारा ही श्राप मैं बलात् श्रधिकार में कर लूँगा । बेढ़िउँ - वेढ़ = लपेट लेना, अपने अधिकार में कर लेना । । एक सौ सोलह - इस प्रकार कहकर दूत चल पड़ा । मंत्रीश्वर विचार करने लगा हे देव, दूत को प्रसन्न कीजिए । अन्य अड़सठ कुमारवर, जिन्होंने पृथक् पृथक् रूप से भरतेश्वर को प्रचारा, वे सब उसकी श्राज्ञा मान गए और बली भरतेश्वर के पास श्रा गए । हे अक्षय स्वामी, बांधवों के संघिबल का विमर्श न करो । पाठांतर - ते णमन्निउ । एक सौ बीस - [ दूत राजा भरतेश्वर के पास जाकर बाहुबलि का वृत्तांत सुना रहा है । ] वे क्रुद्ध हुए, किलकिला उठे । काल की दूसरी कालाग्नि प्रज्वलित हो उठी हो । महाचल के हाथ में करवाल ने पर उसका स्वरूप ऐसा हुआ मानो कंकोल वृक्ष कोरंबित हो उठा हो । काल ही कलकल करता हुआ मुकुटधारी से मिल गया । कलह के कारण विकराल कोप प्रज्वलित हो गया हो । पाठांतर - कंकोली किम रोषीश्रो ? एक सौ इक्कीस - गड़गड़ाहट से कोलाहल हुआ और गगनांगण गरन उठा । सुभट सामंत पूरी समाधानिका के साथ चल पड़े । कवच से
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श्री याँठिया रचित साहित्य : मुनि जिनविजयजी 19
बढ़कर इस काम के लिये कौन अधिक अधिकारी हो सकता है ? मेरा विचार अप्रैल के अन्त में उधर आप लोगों से मिलने को आने का है।
कार्य की व्यस्तता इतनी अधिक बढ़ गयी है कि जिससे मैं अपना इच्छित काम समय पर नहीं कर सकता। भवन की प्रवृत्ति इतनी विस्तृत और विविध कार्यवाही हो रही है कि जिसके काम से मुझे एक मिनट भी छुटकारा नहीं मिलता ओर उसमे मुझे मेरी सिधी ग्रथ माला का व्यवहार तो नियमित रखना ही पड़ता है। रोज कई ग्रंथो के प्रूफ तो आते ही रहते हैं। उनको देखते देखते ही दिन खत्म हो जाता है।
युद्ध के कारण बहुत कुछ कठिनाई उपस्थित हो रही है, नहीं तो अभी तक बहुत काम हो जाता।
कलकत्ते में श्री सिधीजी का स्वर्गवास हो गया। सब छोड़कर चले गये। क्या उनकी उदारता, क्या साहित्य प्रेम, क्या सज्जनता और कैसा उनका खजाना जिसके सामने सब जैन भिखारी गालूम देते हैं ऐसे पुरूष भी सब छोड़कर चले गये। हमे इससे बड़ा दुख और खेद हो रहा है। शुभ
सिंधी पार्क कलकत्ता १२४५
मैं ता० १८ से रवाना होकर यहाँ २० को आया था फिर ता० २३ को अजीगगज जाता हुआ वापस लौटा हूँ। अजीमगंज मे ता० २५ २६ २८ के दिन श्री व्हादुरसिह बाबू और उनकी माताजी के पुण्य स्मरणार्थ वर्सी और पूजा आदि का समारम्भ था। इसलिये जाना हुआ। प्राय इन लोगों ने एक लाख रूपया खर्च किया। मैं यहाँ पर अब नाहर लाइब्रेरी को लेने के लिये ही आया हूँ।
ता० २६ नवम्बर को यहाँ से उदयपुर (मेवाड) जाना पड़ा सो कल वापस आया हूँ। उदयपुर में महाराणा से मिलना था। आपको गालूम होगा कि कुछ राजपूत स्टेटस एक राजपूत यूनिवर्सिटी बनाना चाहते हैं। उसी के सिलसिले में मुझे और श्री कन्हैयालाल जी मुशी को वहाँ जाना पड़ा। यहाँ पर उदयपुर, डूंगरपुर, पन्ना के महाराजा से मिलना हुआ. यूनिवर्सिटी की स्कीम की चर्चा की गई। इसलिए मैं और श्री गुंशी जी दोनों यहाँ पर गये थे कल ही वापस आये है। इसी राज्य से मेरा बीकानेर जाना, जो मैंने स्वामी जी को ता० १५ दिसम्बर निश्चित लिखा था, बन्द रखना पड़ा। शरीर भी निकम्मा हो रहा है पर उसकी उपेक्षा करके चल रहा है यदि प्रताप यूनिवरिंटी की स्वीम कुछ अमल में लाने का अवसर आया तो उसके संगठन और संयोजन का बहुत बड़ा भार मुझे उठाना पड़ेगा। उसके प्रेसीडेंट या महाराजा वगैरह मुझे ही उस काम का संयोजक बनाना चाहते हैं। और ऐसा हुआ तो मुझे कुछ समय मेवाड उदयपुरचित्तौड जाकर आसन जमाना पड़ेगा।
मेरे दिल मे ओसवाल महाविद्यालय की कायम करने की कई कारणों से बड़ी आवश्यकता प्रतीत शे रही है, ये कारण प्रत्यक्ष ही में विशेष बताये जा सकते हैं। मैं अभी वित्तौड़ दो दिन ठहरा था. यहां ऊपर नीधे खूब पूमा
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श्री याँठिया रचित साहित्य : मुनि जिनविजयजी उन्नीस बढ़कर इस काम के लिये कौन अधिक अधिकारी हो सकता है ? मेरा विचार अप्रैल के अन्त में उधर आप लोगों से मिलने को आने का है। कार्य की व्यस्तता इतनी अधिक बढ़ गयी है कि जिससे मैं अपना इच्छित काम समय पर नहीं कर सकता। भवन की प्रवृत्ति इतनी विस्तृत और विविध कार्यवाही हो रही है कि जिसके काम से मुझे एक मिनट भी छुटकारा नहीं मिलता ओर उसमे मुझे मेरी सिधी ग्रथ माला का व्यवहार तो नियमित रखना ही पड़ता है। रोज कई ग्रंथो के प्रूफ तो आते ही रहते हैं। उनको देखते देखते ही दिन खत्म हो जाता है। युद्ध के कारण बहुत कुछ कठिनाई उपस्थित हो रही है, नहीं तो अभी तक बहुत काम हो जाता। कलकत्ते में श्री सिधीजी का स्वर्गवास हो गया। सब छोड़कर चले गये। क्या उनकी उदारता, क्या साहित्य प्रेम, क्या सज्जनता और कैसा उनका खजाना जिसके सामने सब जैन भिखारी गालूम देते हैं ऐसे पुरूष भी सब छोड़कर चले गये। हमे इससे बड़ा दुख और खेद हो रहा है। शुभ सिंधी पार्क कलकत्ता एक हज़ार दो सौ पैंतालीस मैं ताशून्य अट्ठारह से रवाना होकर यहाँ बीस को आया था फिर ताशून्य तेईस को अजीगगज जाता हुआ वापस लौटा हूँ। अजीमगंज मे ताशून्य पच्चीस छब्बीस अट्ठाईस के दिन श्री व्हादुरसिह बाबू और उनकी माताजी के पुण्य स्मरणार्थ वर्सी और पूजा आदि का समारम्भ था। इसलिये जाना हुआ। प्राय इन लोगों ने एक लाख रूपया खर्च किया। मैं यहाँ पर अब नाहर लाइब्रेरी को लेने के लिये ही आया हूँ। ताशून्य छब्बीस नवम्बर को यहाँ से उदयपुर जाना पड़ा सो कल वापस आया हूँ। उदयपुर में महाराणा से मिलना था। आपको गालूम होगा कि कुछ राजपूत स्टेटस एक राजपूत यूनिवर्सिटी बनाना चाहते हैं। उसी के सिलसिले में मुझे और श्री कन्हैयालाल जी मुशी को वहाँ जाना पड़ा। यहाँ पर उदयपुर, डूंगरपुर, पन्ना के महाराजा से मिलना हुआ. यूनिवर्सिटी की स्कीम की चर्चा की गई। इसलिए मैं और श्री गुंशी जी दोनों यहाँ पर गये थे कल ही वापस आये है। इसी राज्य से मेरा बीकानेर जाना, जो मैंने स्वामी जी को ताशून्य पंद्रह दिसम्बर निश्चित लिखा था, बन्द रखना पड़ा। शरीर भी निकम्मा हो रहा है पर उसकी उपेक्षा करके चल रहा है यदि प्रताप यूनिवरिंटी की स्वीम कुछ अमल में लाने का अवसर आया तो उसके संगठन और संयोजन का बहुत बड़ा भार मुझे उठाना पड़ेगा। उसके प्रेसीडेंट या महाराजा वगैरह मुझे ही उस काम का संयोजक बनाना चाहते हैं। और ऐसा हुआ तो मुझे कुछ समय मेवाड उदयपुरचित्तौड जाकर आसन जमाना पड़ेगा। मेरे दिल मे ओसवाल महाविद्यालय की कायम करने की कई कारणों से बड़ी आवश्यकता प्रतीत शे रही है, ये कारण प्रत्यक्ष ही में विशेष बताये जा सकते हैं। मैं अभी वित्तौड़ दो दिन ठहरा था. यहां ऊपर नीधे खूब पूमा
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कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने एमपी की तीन छात्राओं को हेलिकॉप्टर की सैर कराई। उज्जैन में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल ने उनसे वादा किया था। 10 दिन बाद छात्राओं को उन्होंने राजस्थान बुलाया। यहां हेलिकॉप्टर में आधे घंटे तक घुमाया। छात्राओं ने कहा- ये हमारे लिए सपने जैसा है।
भारत जोड़ो यात्रा गुरुवार को राजस्थान के बूंदी जिले में प्रवेश कर गई। कोटा में यात्रा पूरी होने के बाद राहुल बूंदी के गुडली में बनाए हेलिपेड पहुंचे। यहां तीनों छात्राओं को पहले ही बुलवा लिया गया था। 29 नवंबर को भारत जोड़ो यात्रा उज्जैन में थी। यहां राहुल गांधी ने महाकालेश्वर के दर्शन किए। साथ ही, सभा को भी संबोधित किया था। यहां यात्रा में बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर के साथ उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी शामिल हुए थे।
उज्जैन में यात्रा के दौरान राहुल गांधी और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बड़नगर के श्रीराम कॉन्वेंट हायर सेकंडरी स्कूल के बच्चों के साथ डांस किया था। इसके बाद राहुल ने करीब 30 मिनट तक बच्चों के साथ बात की थी। उन्होंने इसी स्कूल की 11वीं की स्टूडेंट्स अंतिमा पंवार और शीतल पाटीदार व 10वीं की स्टूडेंट गिरिजा पंवार से भी मुलाकात की थी। राहुल ने बच्चों से उनकी ड्रीम्स को लेकर भी बात की थी। छात्राओं ने पायलट बनने की इच्छा जताई थी। राहुल ने पूछा- आप कभी एयरोप्लेन में बैठी हो? इस पर बच्चों ने इनकार कर दिया था। इसे बाद राहुल ने तीनों से प्रॉमिस किया था कि आपको जल्द हवाई यात्रा कराऊंगा।
10 दिन बाद यानी गुरुवार को राहुल गांधी ने तीनों छात्राओं को राजस्थान के बूंदी बुलाया। अचानक राहुल का बुलावा पाकर लड़कियों के परिवारवालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। स्कूल के प्रिंसिपल मोहन सिंह पंवार तीनों छात्राओं को बूंदी लेकर पहुंचे। यहां गुडली में हेलिपैड पर राहुल गांधी ने तीनों को करीब 30 मिनट तक हेलिकॉप्टर की सैर करवाई। इस दौरान उन्होंने एयरोप्लेन की बारीकियों को भी बताया। उन्हाेंने छात्राओं को बताया कि प्लेन कैसे उड़ता है? कैसे लैंडिंग और टेक ऑफ करता है? प्लेन में क्या-क्या सावधानियां रखी जाती हैं? उड़ान भरते समय किन चीजों का ख्याल रखा जाता है? हेलिकॉप्टर की स्पीड, कितने देर में कितनी दूरी तय करता है?
तीनों छात्राएं हेलिकॉप्टर से उतरीं तो राहुल ने उन्हें चॉकलेट भी दी। साथ ही, राहुल और हेलिकॉप्टर के पायलट ने भी 10 मिनट तक छात्राओं को हेलिकॉप्टर की तकनीकी जानकारियां भी दीं। तीनों बेटियों के साथ राहुल ने फोटो खिंचवाए। इसके बाद राहुल गांधी सोनिया गांधी से मिलने के लिए सवाईमाधोपुर रवाना हो गए।
राहुल के साथ हवाई यात्रा करने वाली तीनों छात्राओं से दैनिक भास्कर ने बात की। छात्राओं ने बताया कि उज्जैन में जब यात्रा आने वाली थी तब हमें इसका आइडिया नहीं था। स्कूल के डायरेक्टर ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान प्रस्तुति देनी है। इसके बाद हमने प्रस्तुति दी। राहुल गांधी के साथ डांस भी किया। उनके साथ डांस करके बहुत अच्छा लगा। हेलिकॉप्टर का एक्सपीरियंस बताते हुए छात्राओं ने बताया कि यह हमारे लिए सपना पूरा होने जैसा है। उनका कहना था कि पहली बार हेलिकॉप्टर में बैठे और वह भी राहुल गांधी के साथ। यह क्षण हमारे लिए अकल्पनीय और अविस्मरणीय रहेगा। ये पल हमें हमेशा याद रहेंगे। हमने कभी सोचा भी नहीं था कि राहुल गांधी के साथ इस तरह यात्रा करने को मिलेगा।
छात्राओं ने कहा कि लगन और मेहनत से लक्ष्य की ओर बढ़ो, तो हवाई यात्रा का सपना जरूर पूरा होगा। हवाई यात्रा के दौरान राहुल ने हमसे कहा कि देश भर की यात्रा के दौरान वे बच्चों से मिले हैं। सभी बच्चों ने बड़े पदों पर जाने की इच्छा जताई है।
राहुल ने कहा- पढ़ लिखकर पसंद का करियर चुनिए प्रिंसिपल मोहन सिंह पंवार ने बताया कि राहुल गांधी ने बच्चों से कहा कि जो भी करें, वह मन से करें, जो ज्यादा पसंद हो, उसको दिल से करते हुए करियर बनाएं। छात्राओं ने बताया कि राहुल ने कहा कि परिवार या समाज के दबाव में आकर करियर नहीं चुनें, अपनी पसंद का करियर ही चुनें।
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कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने एमपी की तीन छात्राओं को हेलिकॉप्टर की सैर कराई। उज्जैन में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल ने उनसे वादा किया था। दस दिन बाद छात्राओं को उन्होंने राजस्थान बुलाया। यहां हेलिकॉप्टर में आधे घंटे तक घुमाया। छात्राओं ने कहा- ये हमारे लिए सपने जैसा है। भारत जोड़ो यात्रा गुरुवार को राजस्थान के बूंदी जिले में प्रवेश कर गई। कोटा में यात्रा पूरी होने के बाद राहुल बूंदी के गुडली में बनाए हेलिपेड पहुंचे। यहां तीनों छात्राओं को पहले ही बुलवा लिया गया था। उनतीस नवंबर को भारत जोड़ो यात्रा उज्जैन में थी। यहां राहुल गांधी ने महाकालेश्वर के दर्शन किए। साथ ही, सभा को भी संबोधित किया था। यहां यात्रा में बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर के साथ उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी शामिल हुए थे। उज्जैन में यात्रा के दौरान राहुल गांधी और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बड़नगर के श्रीराम कॉन्वेंट हायर सेकंडरी स्कूल के बच्चों के साथ डांस किया था। इसके बाद राहुल ने करीब तीस मिनट तक बच्चों के साथ बात की थी। उन्होंने इसी स्कूल की ग्यारहवीं की स्टूडेंट्स अंतिमा पंवार और शीतल पाटीदार व दसवीं की स्टूडेंट गिरिजा पंवार से भी मुलाकात की थी। राहुल ने बच्चों से उनकी ड्रीम्स को लेकर भी बात की थी। छात्राओं ने पायलट बनने की इच्छा जताई थी। राहुल ने पूछा- आप कभी एयरोप्लेन में बैठी हो? इस पर बच्चों ने इनकार कर दिया था। इसे बाद राहुल ने तीनों से प्रॉमिस किया था कि आपको जल्द हवाई यात्रा कराऊंगा। दस दिन बाद यानी गुरुवार को राहुल गांधी ने तीनों छात्राओं को राजस्थान के बूंदी बुलाया। अचानक राहुल का बुलावा पाकर लड़कियों के परिवारवालों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। स्कूल के प्रिंसिपल मोहन सिंह पंवार तीनों छात्राओं को बूंदी लेकर पहुंचे। यहां गुडली में हेलिपैड पर राहुल गांधी ने तीनों को करीब तीस मिनट तक हेलिकॉप्टर की सैर करवाई। इस दौरान उन्होंने एयरोप्लेन की बारीकियों को भी बताया। उन्हाेंने छात्राओं को बताया कि प्लेन कैसे उड़ता है? कैसे लैंडिंग और टेक ऑफ करता है? प्लेन में क्या-क्या सावधानियां रखी जाती हैं? उड़ान भरते समय किन चीजों का ख्याल रखा जाता है? हेलिकॉप्टर की स्पीड, कितने देर में कितनी दूरी तय करता है? तीनों छात्राएं हेलिकॉप्टर से उतरीं तो राहुल ने उन्हें चॉकलेट भी दी। साथ ही, राहुल और हेलिकॉप्टर के पायलट ने भी दस मिनट तक छात्राओं को हेलिकॉप्टर की तकनीकी जानकारियां भी दीं। तीनों बेटियों के साथ राहुल ने फोटो खिंचवाए। इसके बाद राहुल गांधी सोनिया गांधी से मिलने के लिए सवाईमाधोपुर रवाना हो गए। राहुल के साथ हवाई यात्रा करने वाली तीनों छात्राओं से दैनिक भास्कर ने बात की। छात्राओं ने बताया कि उज्जैन में जब यात्रा आने वाली थी तब हमें इसका आइडिया नहीं था। स्कूल के डायरेक्टर ने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान प्रस्तुति देनी है। इसके बाद हमने प्रस्तुति दी। राहुल गांधी के साथ डांस भी किया। उनके साथ डांस करके बहुत अच्छा लगा। हेलिकॉप्टर का एक्सपीरियंस बताते हुए छात्राओं ने बताया कि यह हमारे लिए सपना पूरा होने जैसा है। उनका कहना था कि पहली बार हेलिकॉप्टर में बैठे और वह भी राहुल गांधी के साथ। यह क्षण हमारे लिए अकल्पनीय और अविस्मरणीय रहेगा। ये पल हमें हमेशा याद रहेंगे। हमने कभी सोचा भी नहीं था कि राहुल गांधी के साथ इस तरह यात्रा करने को मिलेगा। छात्राओं ने कहा कि लगन और मेहनत से लक्ष्य की ओर बढ़ो, तो हवाई यात्रा का सपना जरूर पूरा होगा। हवाई यात्रा के दौरान राहुल ने हमसे कहा कि देश भर की यात्रा के दौरान वे बच्चों से मिले हैं। सभी बच्चों ने बड़े पदों पर जाने की इच्छा जताई है। राहुल ने कहा- पढ़ लिखकर पसंद का करियर चुनिए प्रिंसिपल मोहन सिंह पंवार ने बताया कि राहुल गांधी ने बच्चों से कहा कि जो भी करें, वह मन से करें, जो ज्यादा पसंद हो, उसको दिल से करते हुए करियर बनाएं। छात्राओं ने बताया कि राहुल ने कहा कि परिवार या समाज के दबाव में आकर करियर नहीं चुनें, अपनी पसंद का करियर ही चुनें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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पंजाब में अवैध बालू खनन के खिलाफ जारी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई छापेमारी के दौरान 10 करोड़ रुपए की नकदी जब्त की गई, जिसमें से आठ करोड़ रुपए चन्नी के भतीजे भूपिंदर सिंह उर्फ हनी से जुड़े परिसरों से जब्त किए गए.
पंजाब (Punjab) के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Former Chief Minister Captain Amarinder Singh) ने शनिवार को कहा कि अवैध रेत खनन (illegal sand mining) में शामिल होने से चरणजीत सिंह चन्नी का इनकार करना पूरी तरह झूठ है. कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली थी कि मुख्यमंत्री चन्नी और कांग्रेस के अन्य नेता तथा विधायकों की रेत माफिया में हिस्सेदारी है. पंजाब लोक कांग्रेस के अध्यक्ष ने कहा कि ऊपर से नीचे तक, वरिष्ठ मंत्रियों के स्तर तक, बहुत से लोग शामिल हैं. साथ ही कहा कि मैं जब मुख्यमंत्री था, तब मैंने सोनिया गांधी को बताया था. उन्होंने मुझसे पूछा कि मैं इस मामले में क्या कार्रवाई कर रहा हूं और मैंने उन्हें बताया कि मुझे ऊपर से शुरुआत करनी पड़ेगी.
पिछले साल मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले अमरिंदर सिंह ने कहा कि मैंने अपने पूरे कार्यकाल में एक ही गलती की, कि मैंने उस समय कोई कार्रवाई नहीं की क्योंकि सोनिया गांधी ने इसकी अनुमति नहीं दी थी और मैं कांग्रेस के प्रति वफादार था. उन्होंने कहा कि खनन माफिया में चन्नी के शामिल होने और 'मीटू' घटना में उनका नाम आने से उनकी पोल खुल गई है और लोग उन्हें पंजाब पर शासन करने के लायक नहीं मानते और नवजोत सिद्धू की मानसिक अस्थिरता ने उन्हें राज्य को चलाने में पूरी तरह नकारा साबित कर दिया है.
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आश्चर्य प्रकट करते हुए सवाल किया कि राहुल गांधी को इन लोगों में ऐसा क्या दिखा. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के लिए कांग्रेस द्वारा उन्हें अलग किया जाना समझ से परे था. वहीं गुरुवार को आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से उनके रिश्तेदार से जुड़े परिसरों पर ईडी के छापे में भारी मात्रा में नकद की बरामदगी के बारे में स्पष्टीकरण मांगा.
पंजाब में अवैध बालू खनन के खिलाफ जारी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई छापेमारी के दौरान 10 करोड़ रुपए की नकदी जब्त की गई, जिसमें से आठ करोड़ रुपए चन्नी के भतीजे भूपिंदर सिंह उर्फ हनी से जुड़े परिसरों से जब्त किए गए. सूत्रों ने बताया कि दो करोड़ रुपए की नकदी संदीप कुमार नाम के एक शख्स के ठिकाने से बरामद हुई है. अधिकारियों ने कहा कि नवांशहर पुलिस की 2018 की एफआईआर और राज्य में अवैध रेत खनन के कारोबार में कथित रूप से शामिल कुछ कंपनियों एवं व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस को मिली इसी प्रकार की अन्य शिकायतों का संज्ञान लेने के बाद ये कार्रवाई की गई.
(इनपुट- भाषा के साथ)
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पंजाब में अवैध बालू खनन के खिलाफ जारी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई छापेमारी के दौरान दस करोड़ रुपए की नकदी जब्त की गई, जिसमें से आठ करोड़ रुपए चन्नी के भतीजे भूपिंदर सिंह उर्फ हनी से जुड़े परिसरों से जब्त किए गए. पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शनिवार को कहा कि अवैध रेत खनन में शामिल होने से चरणजीत सिंह चन्नी का इनकार करना पूरी तरह झूठ है. कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली थी कि मुख्यमंत्री चन्नी और कांग्रेस के अन्य नेता तथा विधायकों की रेत माफिया में हिस्सेदारी है. पंजाब लोक कांग्रेस के अध्यक्ष ने कहा कि ऊपर से नीचे तक, वरिष्ठ मंत्रियों के स्तर तक, बहुत से लोग शामिल हैं. साथ ही कहा कि मैं जब मुख्यमंत्री था, तब मैंने सोनिया गांधी को बताया था. उन्होंने मुझसे पूछा कि मैं इस मामले में क्या कार्रवाई कर रहा हूं और मैंने उन्हें बताया कि मुझे ऊपर से शुरुआत करनी पड़ेगी. पिछले साल मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले अमरिंदर सिंह ने कहा कि मैंने अपने पूरे कार्यकाल में एक ही गलती की, कि मैंने उस समय कोई कार्रवाई नहीं की क्योंकि सोनिया गांधी ने इसकी अनुमति नहीं दी थी और मैं कांग्रेस के प्रति वफादार था. उन्होंने कहा कि खनन माफिया में चन्नी के शामिल होने और 'मीटू' घटना में उनका नाम आने से उनकी पोल खुल गई है और लोग उन्हें पंजाब पर शासन करने के लायक नहीं मानते और नवजोत सिद्धू की मानसिक अस्थिरता ने उन्हें राज्य को चलाने में पूरी तरह नकारा साबित कर दिया है. कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आश्चर्य प्रकट करते हुए सवाल किया कि राहुल गांधी को इन लोगों में ऐसा क्या दिखा. उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के लिए कांग्रेस द्वारा उन्हें अलग किया जाना समझ से परे था. वहीं गुरुवार को आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से उनके रिश्तेदार से जुड़े परिसरों पर ईडी के छापे में भारी मात्रा में नकद की बरामदगी के बारे में स्पष्टीकरण मांगा. पंजाब में अवैध बालू खनन के खिलाफ जारी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई छापेमारी के दौरान दस करोड़ रुपए की नकदी जब्त की गई, जिसमें से आठ करोड़ रुपए चन्नी के भतीजे भूपिंदर सिंह उर्फ हनी से जुड़े परिसरों से जब्त किए गए. सूत्रों ने बताया कि दो करोड़ रुपए की नकदी संदीप कुमार नाम के एक शख्स के ठिकाने से बरामद हुई है. अधिकारियों ने कहा कि नवांशहर पुलिस की दो हज़ार अट्ठारह की एफआईआर और राज्य में अवैध रेत खनन के कारोबार में कथित रूप से शामिल कुछ कंपनियों एवं व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस को मिली इसी प्रकार की अन्य शिकायतों का संज्ञान लेने के बाद ये कार्रवाई की गई.
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कवीर का रहस्यवाद
गरीब सेवक होय करि ऊतरे इस पृथ्वी के मांहि
जीव उधारन जगत गुरु बार बार बलि जांहि ॥३८०॥ गरीब काशी पुरी कस्त किया, उतरे अधर उधार । मोमन को मुजरा हुआ, जंगल मैं दीदार ॥ ३८१ ॥ गरीब कोटि किरण शशि भान सुधि, आसन अधर बिमान । परसत पूरण ब्रह्म कू, शीतल पिंडरु प्राण ।। ३८२ ।। गरीब गोद लिया मुख चूबि करि, हेम रूप कलकत । जगर मगर काया करै, दमकें पदम अनंत ।।३८३ ।। गरीब काशी उमटी गुल भया, मो मन का घर घेर । कोई कहै ब्रह्म विष्णु हैं, कोई कहै इन्द्र कुबेर १ ॥ ३८४ ॥ इस उद्धरण से यह जात होता है कि कबीर ने काशी में सीधे मुसलमान (मोमिन) ही कः दर्शन देकर उसके घर में जन्म ग्रहण किया । और मोमिन ने शिशु कबीर का मुंह चूम करें उसके अलौकिक रूप के दर्शन किये। इस अवतरण से भी कबीर की ब्राह्मण विधवा से उत्पन्न होने की किम्बदंती ग़लत हो जाती है । सद्गुरु गरीबदास जी साहिब की बारगी भी प्रामाणिक ग्रंथ माना जाना चाहिए क्योंकि वह सवत् १८६० की एक प्राचीन हस्त लिखित प्रति के आधार पर प्रकाशित किया गया है । २
इन दो गाला से कबीर का मुसलमान होना स्पष्ट है। इन्होंने
१ वही प्रथ, पृष्ठ १६६
२ - यह ग्रंथ साहिब हस्तलिखित विक्रम संवत् १८६० मिन्ती वैसाख मास का लिखा हुवा मेरे को मुकाम पिलाणा जिल्ला रोहतक में मिला हुआ जैसा का तैसा छापा है जिसको असल लिखा हुवा ग्रंथ साहिब देखना हो वह बड़ोदे में श्री जुम्मादादा व्यायाम शाला प्रो० माणेकराव के यहां कायम के लिये रखा गया है सो सब वहां से देख सकते हैंःश्रजरानंद गरीब दासी
- वाणी की प्रस्तावना
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कवीर का रहस्यवाद गरीब सेवक होय करि ऊतरे इस पृथ्वी के मांहि जीव उधारन जगत गुरु बार बार बलि जांहि ॥तीन सौ अस्सी॥ गरीब काशी पुरी कस्त किया, उतरे अधर उधार । मोमन को मुजरा हुआ, जंगल मैं दीदार ॥ तीन सौ इक्यासी ॥ गरीब कोटि किरण शशि भान सुधि, आसन अधर बिमान । परसत पूरण ब्रह्म कू, शीतल पिंडरु प्राण ।। तीन सौ बयासी ।। गरीब गोद लिया मुख चूबि करि, हेम रूप कलकत । जगर मगर काया करै, दमकें पदम अनंत ।।तीन सौ तिरासी ।। गरीब काशी उमटी गुल भया, मो मन का घर घेर । कोई कहै ब्रह्म विष्णु हैं, कोई कहै इन्द्र कुबेर एक ॥ तीन सौ चौरासी ॥ इस उद्धरण से यह जात होता है कि कबीर ने काशी में सीधे मुसलमान ही कः दर्शन देकर उसके घर में जन्म ग्रहण किया । और मोमिन ने शिशु कबीर का मुंह चूम करें उसके अलौकिक रूप के दर्शन किये। इस अवतरण से भी कबीर की ब्राह्मण विधवा से उत्पन्न होने की किम्बदंती ग़लत हो जाती है । सद्गुरु गरीबदास जी साहिब की बारगी भी प्रामाणिक ग्रंथ माना जाना चाहिए क्योंकि वह सवत् एक हज़ार आठ सौ साठ की एक प्राचीन हस्त लिखित प्रति के आधार पर प्रकाशित किया गया है । दो इन दो गाला से कबीर का मुसलमान होना स्पष्ट है। इन्होंने एक वही प्रथ, पृष्ठ एक सौ छयासठ दो - यह ग्रंथ साहिब हस्तलिखित विक्रम संवत् एक हज़ार आठ सौ साठ मिन्ती वैसाख मास का लिखा हुवा मेरे को मुकाम पिलाणा जिल्ला रोहतक में मिला हुआ जैसा का तैसा छापा है जिसको असल लिखा हुवा ग्रंथ साहिब देखना हो वह बड़ोदे में श्री जुम्मादादा व्यायाम शाला प्रोशून्य माणेकराव के यहां कायम के लिये रखा गया है सो सब वहां से देख सकते हैंःश्रजरानंद गरीब दासी - वाणी की प्रस्तावना
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बेंगलुरू : भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज ने सोमवार को एकदिवसीय क्रिकेट में 5000 रन पूरे कर लिए. इस मुकाम पर पहुंचने वाली वह भारत की पहली और विश्व की दूसरी बल्लेबाज हैं. मिताली ने सोमवार को एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में न्यूजीलैंड के साथ खेले गए चौथे एकदिवसीय मुकाबले में 81 रनों की नाबाद पारी खेली. उनके खाते में अब 5029 रन दर्ज हैं. मिताली ने 157 मैचों की 144 पारियों में 48. 82 के औसत से रन बनाए हैं. मिताली के खाते में पांच शतक और 37 अर्धशतक हैं. इंग्लैंड की सीएम एडवर्ड्स ने अब तक सबसे अधिक 5812 रन बनाए हैं.
एडवर्ड्स ने नौ शतक और 45 अर्धशतक लगाए हैं. आस्ट्रेलिया की बेलिंडा क्लार्क (4844) इस क्रम में तीसरे और आस्ट्रेलिया की ही केएल रोल्टन (4814) चौथे क्रम पर हैं. भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए मैच में न्यूजीलैंड से मिले 221 रनों के लक्ष्य को भारतीय टीम ने दो विकेट खोकर 34 गेंद शेष रहते आसानी से हासिल कर लिया. हरमनप्रीत कौर (नाबाद 32) ने छक्का लगाकर भारत को विजय तक पहुंचाया.
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बेंगलुरू : भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज ने सोमवार को एकदिवसीय क्रिकेट में पाँच हज़ार रन पूरे कर लिए. इस मुकाम पर पहुंचने वाली वह भारत की पहली और विश्व की दूसरी बल्लेबाज हैं. मिताली ने सोमवार को एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में न्यूजीलैंड के साथ खेले गए चौथे एकदिवसीय मुकाबले में इक्यासी रनों की नाबाद पारी खेली. उनके खाते में अब पाँच हज़ार उनतीस रन दर्ज हैं. मिताली ने एक सौ सत्तावन मैचों की एक सौ चौंतालीस पारियों में अड़तालीस. बयासी के औसत से रन बनाए हैं. मिताली के खाते में पांच शतक और सैंतीस अर्धशतक हैं. इंग्लैंड की सीएम एडवर्ड्स ने अब तक सबसे अधिक पाँच हज़ार आठ सौ बारह रन बनाए हैं. एडवर्ड्स ने नौ शतक और पैंतालीस अर्धशतक लगाए हैं. आस्ट्रेलिया की बेलिंडा क्लार्क इस क्रम में तीसरे और आस्ट्रेलिया की ही केएल रोल्टन चौथे क्रम पर हैं. भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए मैच में न्यूजीलैंड से मिले दो सौ इक्कीस रनों के लक्ष्य को भारतीय टीम ने दो विकेट खोकर चौंतीस गेंद शेष रहते आसानी से हासिल कर लिया. हरमनप्रीत कौर ने छक्का लगाकर भारत को विजय तक पहुंचाया.
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अब कैपिटल गेन की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को देनी ही होगी.
नई दिल्ली. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर एक आटोमेटेड ई-पोर्टल (E-Portal) लॉन्च किया है. इस ई-पोर्टल पर जाकर कोई भी व्यक्ति कर चोरी (Tax Evasion) या विदेश में अघोषित संपत्ति (Undisclosed Property) के साथ ही बेनामी संपत्ति से जुड़ी शिकायत ऑनलाइन कर सकता है. केंद्र सरकार ने कहा कि इस ई-पोर्टल पर मिलने वाली शिकायतों पर विभाग तत्काल कार्रवाई करेगा. वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) ने कहा कि कर चोरी को रोकने और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने की दिशा में ये अगला कदम है.
वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस नए पोर्टल के जरिये कर चोरी को रोकने में लोगों की भागीदारी (Citizens Participation) भी बढ़ेगी. इसके लिए लोगों को https://www. incometaxindiaefiling. gov. in/ पर जाकर File complaint of tax evasion/undisclosed foreign asset/ benami property में किसी एक पर क्लिक कर शिकायत दर्ज करानी होगी. ये सुविधा पैन या आधार कार्ड होल्डर्स के साथ ही उन लोगों को भी मिलेगी, जिनके पास ये दोनों नहीं हैं.
केंद्र ने कहा कि मोबाइल या ई-मेल पर मिले ओटीपी की मदद से वैरिफिकेान के बाद कोई भी व्यक्ति आयकर अधिनियम, 1961, ब्लेक मनी (अघोषित विदेशी संपत्ति व आय) इंपोजिशन ऑफ द इनकम टैक्स एक्ट 1961 और प्रिवेंशन ऑफ बेनामी ट्रांजैक्शन एक्ट के तहत अलग-अलग फॉर्म से शिकायत दर्ज करा सकता है. इन तीनों फॉर्म को खास इसी काम के लिए डिजाइन किया गया है ताकि शिकायतकर्ता को किसी तरह की दिक्कत ना हो. शिकायत दर्ज होने के बाद आयकर विभाग शिकायतकर्ता को एक यूनिक नंबर अलॉट करेगा. शिकायतकर्ता विभाग की वेबसाइट पर अपनी शिकायत का स्टेटस ऑनलाइन ही चेक कर सकता है.
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अब कैपिटल गेन की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को देनी ही होगी. नई दिल्ली. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर एक आटोमेटेड ई-पोर्टल लॉन्च किया है. इस ई-पोर्टल पर जाकर कोई भी व्यक्ति कर चोरी या विदेश में अघोषित संपत्ति के साथ ही बेनामी संपत्ति से जुड़ी शिकायत ऑनलाइन कर सकता है. केंद्र सरकार ने कहा कि इस ई-पोर्टल पर मिलने वाली शिकायतों पर विभाग तत्काल कार्रवाई करेगा. वित्त मंत्रालय ने कहा कि कर चोरी को रोकने और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देने की दिशा में ये अगला कदम है. वित्त मंत्रालय ने कहा कि इस नए पोर्टल के जरिये कर चोरी को रोकने में लोगों की भागीदारी भी बढ़ेगी. इसके लिए लोगों को https://www. incometaxindiaefiling. gov. in/ पर जाकर File complaint of tax evasion/undisclosed foreign asset/ benami property में किसी एक पर क्लिक कर शिकायत दर्ज करानी होगी. ये सुविधा पैन या आधार कार्ड होल्डर्स के साथ ही उन लोगों को भी मिलेगी, जिनके पास ये दोनों नहीं हैं. केंद्र ने कहा कि मोबाइल या ई-मेल पर मिले ओटीपी की मदद से वैरिफिकेान के बाद कोई भी व्यक्ति आयकर अधिनियम, एक हज़ार नौ सौ इकसठ, ब्लेक मनी इंपोजिशन ऑफ द इनकम टैक्स एक्ट एक हज़ार नौ सौ इकसठ और प्रिवेंशन ऑफ बेनामी ट्रांजैक्शन एक्ट के तहत अलग-अलग फॉर्म से शिकायत दर्ज करा सकता है. इन तीनों फॉर्म को खास इसी काम के लिए डिजाइन किया गया है ताकि शिकायतकर्ता को किसी तरह की दिक्कत ना हो. शिकायत दर्ज होने के बाद आयकर विभाग शिकायतकर्ता को एक यूनिक नंबर अलॉट करेगा. शिकायतकर्ता विभाग की वेबसाइट पर अपनी शिकायत का स्टेटस ऑनलाइन ही चेक कर सकता है. .
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कौशाम्बी सैनी कोतवाली से कुछ ही दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग में बाइक सवारों को कन्टेनर ने रौंद दिया है जिससे बाइक सवार दो सगे भाइयों की मौके पर दर्दनाक मौत हो गयी है हादसे के बाद मौके पर राहगीरों की भारी भीड़ लग गयी है सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंचकर शव की शिनाख्त करवाकर शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया है।
जानकारी के अनुसार कड़ा धाम कोतवाली के हब्बूनगर सिपाह निवासी ताराचंद्र तिवारी उम्र लगभग 70 वर्ष अपने छोटे भाई सुभाष चंद्र तिवारी उम्र लगभग 68 वर्ष पुत्रगण शिव दुलारे एक ही मोटरसाइकिल से कानपुर की ओर से सैनी की तरफ आ रहे थे राष्ट्रीय राजमार्ग सैनी में बन रहे ब्रिज वाया मार्ग- सैनी कोतवाली से चंद कदम की दूरी पर प्रयागराज की ओर से कानपुर की तरफ जा रहे कंटेनर ने बाइक सवार भाइयो को रौंद दिया जिससे मौके पर ही दोनों सगे भाइयों की दर्दनाक मौत हो गयी।
दुर्घटना देख मौके पर राहगीरों की भारी भीड़ लग गयी सूचना पर सैनी कोतवाल तेजबहादुर सिंह उपनिरीक्षक अजहर जमाल मय हमराहियों मौके पर पहुँचे हादसे की खबर परिजनों को देते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया है वहीं कन्टेनर चालक स्टार्ट गाड़ी को मौके पर छोड़कर फरार हो गया कोतवाली पुलिस कंटेनर को कब्जे में लेकर विधिक कार्रवाई में जुट गई है हादसे में दो सगे भाइयों की मौत के बाद रिश्तेदारों परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।
कौशाम्बी सैनी कोतवाली क्षेत्र के अझुवा कस्बे के रहने वाले पत्रकार अंजनी पांडेय गुरु जी और राहुल भट्ट पत्रकार निवासी गरई सिराथू शुक्रवार को बाइक से प्रयागराज गए थे दोनों पत्रकार बाइक से वापस शुक्रवार की शाम अझुवा लौट रहे थे जैसे ही बाइक सवार पत्रकार सैनी कोतवाली के कमासिन के पास पहुंचे अचानक सड़क पर नीलगाय आने से बाइक सवार उससे टकरा गए और सड़क पर गिर पड़े इस हादसे में अन्जनी पाण्डेय और राहुल भट्ट को चोटें आई हैं सूचना पर परिजनों एवम पत्रकार साथियों ने नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गम्भीर स्थिति को देखते हुए राहुल भट्ट को मंझनपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां राहुल का दाहिना हाथ मे गम्भीर फ्रैक्चर का इलाज चल रहा है और अन्जनी पाण्डेय को प्राथमिक चिकित्सा के बाद चिकित्सकों ने घर जाकर आराम करने की सलाह दी है।।
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कौशाम्बी सैनी कोतवाली से कुछ ही दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग में बाइक सवारों को कन्टेनर ने रौंद दिया है जिससे बाइक सवार दो सगे भाइयों की मौके पर दर्दनाक मौत हो गयी है हादसे के बाद मौके पर राहगीरों की भारी भीड़ लग गयी है सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंचकर शव की शिनाख्त करवाकर शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया है। जानकारी के अनुसार कड़ा धाम कोतवाली के हब्बूनगर सिपाह निवासी ताराचंद्र तिवारी उम्र लगभग सत्तर वर्ष अपने छोटे भाई सुभाष चंद्र तिवारी उम्र लगभग अड़सठ वर्ष पुत्रगण शिव दुलारे एक ही मोटरसाइकिल से कानपुर की ओर से सैनी की तरफ आ रहे थे राष्ट्रीय राजमार्ग सैनी में बन रहे ब्रिज वाया मार्ग- सैनी कोतवाली से चंद कदम की दूरी पर प्रयागराज की ओर से कानपुर की तरफ जा रहे कंटेनर ने बाइक सवार भाइयो को रौंद दिया जिससे मौके पर ही दोनों सगे भाइयों की दर्दनाक मौत हो गयी। दुर्घटना देख मौके पर राहगीरों की भारी भीड़ लग गयी सूचना पर सैनी कोतवाल तेजबहादुर सिंह उपनिरीक्षक अजहर जमाल मय हमराहियों मौके पर पहुँचे हादसे की खबर परिजनों को देते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया है वहीं कन्टेनर चालक स्टार्ट गाड़ी को मौके पर छोड़कर फरार हो गया कोतवाली पुलिस कंटेनर को कब्जे में लेकर विधिक कार्रवाई में जुट गई है हादसे में दो सगे भाइयों की मौत के बाद रिश्तेदारों परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। कौशाम्बी सैनी कोतवाली क्षेत्र के अझुवा कस्बे के रहने वाले पत्रकार अंजनी पांडेय गुरु जी और राहुल भट्ट पत्रकार निवासी गरई सिराथू शुक्रवार को बाइक से प्रयागराज गए थे दोनों पत्रकार बाइक से वापस शुक्रवार की शाम अझुवा लौट रहे थे जैसे ही बाइक सवार पत्रकार सैनी कोतवाली के कमासिन के पास पहुंचे अचानक सड़क पर नीलगाय आने से बाइक सवार उससे टकरा गए और सड़क पर गिर पड़े इस हादसे में अन्जनी पाण्डेय और राहुल भट्ट को चोटें आई हैं सूचना पर परिजनों एवम पत्रकार साथियों ने नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गम्भीर स्थिति को देखते हुए राहुल भट्ट को मंझनपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां राहुल का दाहिना हाथ मे गम्भीर फ्रैक्चर का इलाज चल रहा है और अन्जनी पाण्डेय को प्राथमिक चिकित्सा के बाद चिकित्सकों ने घर जाकर आराम करने की सलाह दी है।।
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भारतीय डिप्लोमेसी के संदर्भ में कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाएं तेजी से घटित हुईं हैं और कुछ होने वाली हैं, जिन पर हमें ध्यान देना चाहिए। डोनाल्ड ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन की पेरिस-संधि से अमेरिका के हटने की घोषणा करके वैश्विक राजनीति में तमाम लहरें पैदा कर दी हैं। भारत के नजरिए से अमेरिका के इस संधि से हटने के मुकाबले ज्यादा महत्वपूर्ण है ट्रंप का भारत को कोसना। यह बात अब प्रधान मंत्री की इसी महीने होने वाली अमेरिका यात्रा का एक बड़ा मुद्दा होगी।
नरेन्द्र मोदी इन दिनों विदेश यात्रा पर हैं। इस यात्रा में वे ऐसे देशों से मिल रहे हैं, जो आने वाले समय में वैश्विक नेतृत्व से अमेरिका के हटने के बाद उसकी जगह लेंगे। इनमें जर्मनी और फ्रांस मुख्य हैं। रूस और चीन काफी करीब आ चुके हैं। भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर का विरोध तो किया ही है चीन की 'वन बेल्ट, वन रोड' पहल का भी विरोध किया है। इस सिलसिले में हुए शिखर सम्मेलन का बहिष्कार करके भारत ने बर्र के छत्ते में हाथ भी डाल दिया है।
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भारतीय डिप्लोमेसी के संदर्भ में कुछ महत्त्वपूर्ण घटनाएं तेजी से घटित हुईं हैं और कुछ होने वाली हैं, जिन पर हमें ध्यान देना चाहिए। डोनाल्ड ट्रंप ने जलवायु परिवर्तन की पेरिस-संधि से अमेरिका के हटने की घोषणा करके वैश्विक राजनीति में तमाम लहरें पैदा कर दी हैं। भारत के नजरिए से अमेरिका के इस संधि से हटने के मुकाबले ज्यादा महत्वपूर्ण है ट्रंप का भारत को कोसना। यह बात अब प्रधान मंत्री की इसी महीने होने वाली अमेरिका यात्रा का एक बड़ा मुद्दा होगी। नरेन्द्र मोदी इन दिनों विदेश यात्रा पर हैं। इस यात्रा में वे ऐसे देशों से मिल रहे हैं, जो आने वाले समय में वैश्विक नेतृत्व से अमेरिका के हटने के बाद उसकी जगह लेंगे। इनमें जर्मनी और फ्रांस मुख्य हैं। रूस और चीन काफी करीब आ चुके हैं। भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर का विरोध तो किया ही है चीन की 'वन बेल्ट, वन रोड' पहल का भी विरोध किया है। इस सिलसिले में हुए शिखर सम्मेलन का बहिष्कार करके भारत ने बर्र के छत्ते में हाथ भी डाल दिया है।
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स्टार बल्लेबाज विराट कोहली उन भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हैं जो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लंदन में होने वाले विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) फाइनल के लिए मंगलवार को तड़के इंग्लैंड रवाना होंगे. कोहली के रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर के साथी मोहम्मद सिराज भी उसी उड़ान से लंदन पहुंचेंगे. इंग्लैंड रवाना होने वाले पहले बैच में स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और अक्षर पटेल तथा ऑलराउंडर शार्दुल ठाकुर के अलावा राहुल द्रविड़ की अगुवाई वाला सहयोगी स्टाफ भी शामिल है. डब्ल्यूटीसी फाइनल सात से 11 जून के बीच ओवल में खेला जाएगा.
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स्टार बल्लेबाज विराट कोहली उन भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हैं जो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लंदन में होने वाले विश्व टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के लिए मंगलवार को तड़के इंग्लैंड रवाना होंगे. कोहली के रॉयल चैलेंजर्स बेंगलोर के साथी मोहम्मद सिराज भी उसी उड़ान से लंदन पहुंचेंगे. इंग्लैंड रवाना होने वाले पहले बैच में स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और अक्षर पटेल तथा ऑलराउंडर शार्दुल ठाकुर के अलावा राहुल द्रविड़ की अगुवाई वाला सहयोगी स्टाफ भी शामिल है. डब्ल्यूटीसी फाइनल सात से ग्यारह जून के बीच ओवल में खेला जाएगा.
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हिंदुत्व की तुलना कट्टर इस्लामी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट और बोको हरम से करने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। बीजेपी ने इसे कांग्रेस की हिंदू विरोधी सोच और उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले तुष्टीकरण की राजनीति का प्रयास बताया है। महाराष्ट्र में कांग्रेस के सहयोगी दल शिवसेना ने भी इस किताब पर आपत्ति जताई है। वहीं कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने भी कहा कि , "हम एक राजनीतिक विचारधारा के रूप में हिंदुत्व से सहमत नहीं हो सकते हैं, लेकिन आईएसआईएस और जिहादी इस्लाम के साथ इसकी तुलना करना तथ्यात्मक रूप से गलत और अतिशयोक्ति है। "
आपको बता दें कि खर्शीद की पुस्तक 'सनराइज ओवर अयोध्या' का बुधवार को विमोचन हुआ जिसमें कांग्रेस के वरष्ठि नेता पी चिदम्बरम तथा दग्विजिय सिंह मौजूद थे। बीजेपी इस किताब को लेकर खुर्शीद और कांग्रेस पार्टी पर हमलावर है।
पुस्तक में हिंदुत्व की तुलना आतंकवादी संगठन आईएसआईएस और बोको हरम से किये जाने पर भाजपा ने खुर्शीद की कड़ी आलोचना की और कहा कि यह हिंदुत्व का अपमान है और इससे भारत की आस्था को ठेस पहुंचती हैं। भाजपा ने अपने आधिकारिक हैंडल पर इस बारे में ट्वीट करते हुए कहा कांग्रेस पार्टी एक मकड़ी की तरह हिंदुओं के खिलाफ नफरत का जाल बुन रही है और इस पार्टी की सरकारें आजादी के बाद 55 साल देश में रहीं लेकिन उसने केवल सांप्रदायिक राजनीति की है।
खुर्शीद ने यह किताब अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर लिखी है। खुर्शीद ने अपनी किताब में एक तरफ अयोध्या पर फैसले को सही ठहराते हुए इस मुद्दे से आगे बढ़ने की सलाह दी है तो दूसरी तरफ उन्होंने इसमें हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और बोको हरम जैसे आतंकी संगठनों से कर दी है। इस तुलना से विवाद इतना गहरा गया है कि किताब बुधवार देर शाम ही लॉन्च हुई और 24 घंटे से भी कम समय में खुर्शीद के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज हो गई है।
खुर्शीद ने क्या लिखा है किताब में?
किताब में सलमान खुर्शीद ने कहा है कि 'हिंदुत्व का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए होता है, चुनाव प्रचार के दौरान इसका ज्यादा जिक्र किया जाता है। ' किताब में उन्होंने कहा कि 'सनातन धर्म या क्लासिकल हिंदुइज्म को किनारे करके हिंदुत्व को आगे बढ़ाया जा रहा है। ' किताब में हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और बोको हरम जैसे आतंकी संगठनों से करते हुए सलमान खुर्शीद ने कहा कि हिंदुत्व साधु-सन्तों के सनातन और प्राचीन हिंदू धर्म को किनारे लगा रहा है, जो कि हर तरीके से आईएसआईएस और बोको हरम जैसे जिहादी इस्लामी संगठनों जैसा है।
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हिंदुत्व की तुलना कट्टर इस्लामी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट और बोको हरम से करने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। बीजेपी ने इसे कांग्रेस की हिंदू विरोधी सोच और उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले तुष्टीकरण की राजनीति का प्रयास बताया है। महाराष्ट्र में कांग्रेस के सहयोगी दल शिवसेना ने भी इस किताब पर आपत्ति जताई है। वहीं कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने भी कहा कि , "हम एक राजनीतिक विचारधारा के रूप में हिंदुत्व से सहमत नहीं हो सकते हैं, लेकिन आईएसआईएस और जिहादी इस्लाम के साथ इसकी तुलना करना तथ्यात्मक रूप से गलत और अतिशयोक्ति है। " आपको बता दें कि खर्शीद की पुस्तक 'सनराइज ओवर अयोध्या' का बुधवार को विमोचन हुआ जिसमें कांग्रेस के वरष्ठि नेता पी चिदम्बरम तथा दग्विजिय सिंह मौजूद थे। बीजेपी इस किताब को लेकर खुर्शीद और कांग्रेस पार्टी पर हमलावर है। पुस्तक में हिंदुत्व की तुलना आतंकवादी संगठन आईएसआईएस और बोको हरम से किये जाने पर भाजपा ने खुर्शीद की कड़ी आलोचना की और कहा कि यह हिंदुत्व का अपमान है और इससे भारत की आस्था को ठेस पहुंचती हैं। भाजपा ने अपने आधिकारिक हैंडल पर इस बारे में ट्वीट करते हुए कहा कांग्रेस पार्टी एक मकड़ी की तरह हिंदुओं के खिलाफ नफरत का जाल बुन रही है और इस पार्टी की सरकारें आजादी के बाद पचपन साल देश में रहीं लेकिन उसने केवल सांप्रदायिक राजनीति की है। खुर्शीद ने यह किताब अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर लिखी है। खुर्शीद ने अपनी किताब में एक तरफ अयोध्या पर फैसले को सही ठहराते हुए इस मुद्दे से आगे बढ़ने की सलाह दी है तो दूसरी तरफ उन्होंने इसमें हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और बोको हरम जैसे आतंकी संगठनों से कर दी है। इस तुलना से विवाद इतना गहरा गया है कि किताब बुधवार देर शाम ही लॉन्च हुई और चौबीस घंटाटे से भी कम समय में खुर्शीद के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज हो गई है। खुर्शीद ने क्या लिखा है किताब में? किताब में सलमान खुर्शीद ने कहा है कि 'हिंदुत्व का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए होता है, चुनाव प्रचार के दौरान इसका ज्यादा जिक्र किया जाता है। ' किताब में उन्होंने कहा कि 'सनातन धर्म या क्लासिकल हिंदुइज्म को किनारे करके हिंदुत्व को आगे बढ़ाया जा रहा है। ' किताब में हिंदुत्व की तुलना आईएसआईएस और बोको हरम जैसे आतंकी संगठनों से करते हुए सलमान खुर्शीद ने कहा कि हिंदुत्व साधु-सन्तों के सनातन और प्राचीन हिंदू धर्म को किनारे लगा रहा है, जो कि हर तरीके से आईएसआईएस और बोको हरम जैसे जिहादी इस्लामी संगठनों जैसा है।
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क्राइस्टचर्च। न्यूजीलैंड (New Zealand) के आगामी ऑस्ट्रेलिया (Australia) दौरे को न्यूजीलैंड (New Zealand) की क्वारंटीन आवश्यकताओं और सीमा नियंत्रण के कारण अगली सूचना तक स्थगित कर दिया गया है। न्यूजीलैंड क्रिकेट (एनजेडसी) ने बुधवार को इसकी पुष्टि की। यह दौरा 24 जनवरी से नौ फरवरी तक निर्धारित था।
न्यूजीलैंड क्रिकेट (New Zealand Cricket) ने एक बयान में कहा, "न्यूजीलैंड (New Zealand) की टीम क्वारंटीन आवश्यकताओं के मद्देनजर समय पर स्वदेश लौट सके, इसके लिए न्यूजीलैंड क्रिकेट (New Zealand Cricket) और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (Cricket Australia) के दौरे को लंबा करने के प्रस्ताव के बावजूद सरकार ने आज पुष्टि की कि, उसके पास इस अनुरोध को पूरा करने की क्षमता नहीं है। "
न्यूजीलैंड क्रिकेट (New Zealand Cricket) के मुख्य कार्यकारी डेविड व्हाइट ने इस बारे में कहा, "जैसा कि अब हम जानते हैं, कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन स्वरूप ने सरकार को रणनीति में बदलाव करने पर मजबूर किया है। परिणामस्वरूप आने वाले सभी यात्रियों को 10 दिन के अनिवार्य क्वारंटीन में रहना होगा। उम्मीद थी कि न्यूजीलैंड क्रिकेट (New Zealand Cricket) और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (Cricket Australia) का प्रस्ताव सरकार के लिए मददगार होगा, लेकिन हमें आज सूचना मिली कि सरकार इस पर भी पूरा भरोसा नहीं दे सकी। अब क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया (Cricket Australia) के साथ चर्चा जारी है कि स्थगित दौरा कब पूरा होगा। "
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
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क्राइस्टचर्च। न्यूजीलैंड के आगामी ऑस्ट्रेलिया दौरे को न्यूजीलैंड की क्वारंटीन आवश्यकताओं और सीमा नियंत्रण के कारण अगली सूचना तक स्थगित कर दिया गया है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने बुधवार को इसकी पुष्टि की। यह दौरा चौबीस जनवरी से नौ फरवरी तक निर्धारित था। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने एक बयान में कहा, "न्यूजीलैंड की टीम क्वारंटीन आवश्यकताओं के मद्देनजर समय पर स्वदेश लौट सके, इसके लिए न्यूजीलैंड क्रिकेट और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के दौरे को लंबा करने के प्रस्ताव के बावजूद सरकार ने आज पुष्टि की कि, उसके पास इस अनुरोध को पूरा करने की क्षमता नहीं है। " न्यूजीलैंड क्रिकेट के मुख्य कार्यकारी डेविड व्हाइट ने इस बारे में कहा, "जैसा कि अब हम जानते हैं, कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन स्वरूप ने सरकार को रणनीति में बदलाव करने पर मजबूर किया है। परिणामस्वरूप आने वाले सभी यात्रियों को दस दिन के अनिवार्य क्वारंटीन में रहना होगा। उम्मीद थी कि न्यूजीलैंड क्रिकेट और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का प्रस्ताव सरकार के लिए मददगार होगा, लेकिन हमें आज सूचना मिली कि सरकार इस पर भी पूरा भरोसा नहीं दे सकी। अब क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के साथ चर्चा जारी है कि स्थगित दौरा कब पूरा होगा। " ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे राज एक्सप्रेस यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। यूट्यूब पर @RajExpressHindi के नाम से सर्च कर, सब्स्क्राइब करें।
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सोनभद्र. यूपी के सोनभद्र (Sonbhadra)में वन विभाग ने एक दुकान में घुसे दुर्लभ जीव को पकड़ा है. जिसकी कीमत तस्करी के तौर पर 12 से 15 लाख रुपए बताई जा रही है. इस जीव की खाल पर गोली लगने का भी असर नहीं होता है. इस जीव का नाम इंडियन पैंगोलिन बताया जा रहा है.
बताते चलें कि पूरा मामला बभनी रेंज के घाघरा का है जहां इंडियन पैंगोलिन नाम का एक जीव पकड़ा गया है, जो एक दुकान में घुसकर छुप गया था. इस जीव की तस्करी की जाती है. जिसमें इसकी कीमत 12 से 15 लाख रुपए बताई जा रही है.
वही, इस जीव का एक और बड़ा कारनामा है कि इसकी खाल पर गोली भी लग जाए तो गोली का कोई असर नहीं होगा. वन विभाग ने इसे पकड़ लिया है. जिसके बाद इसे सुरक्षित जगह पर छोड़ा जाएगा.
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सोनभद्र. यूपी के सोनभद्र में वन विभाग ने एक दुकान में घुसे दुर्लभ जीव को पकड़ा है. जिसकी कीमत तस्करी के तौर पर बारह से पंद्रह लाख रुपए बताई जा रही है. इस जीव की खाल पर गोली लगने का भी असर नहीं होता है. इस जीव का नाम इंडियन पैंगोलिन बताया जा रहा है. बताते चलें कि पूरा मामला बभनी रेंज के घाघरा का है जहां इंडियन पैंगोलिन नाम का एक जीव पकड़ा गया है, जो एक दुकान में घुसकर छुप गया था. इस जीव की तस्करी की जाती है. जिसमें इसकी कीमत बारह से पंद्रह लाख रुपए बताई जा रही है. वही, इस जीव का एक और बड़ा कारनामा है कि इसकी खाल पर गोली भी लग जाए तो गोली का कोई असर नहीं होगा. वन विभाग ने इसे पकड़ लिया है. जिसके बाद इसे सुरक्षित जगह पर छोड़ा जाएगा.
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CRIME NEWS: जब भी कहीं कोई क्राइम होता है तो उसकी जानकारी पुलिस को दी जाती है. यहां तो पुलिस वालों ने ही कांड कर दिया. मामला कुछ ऐसा है कि, एक सराफा कारोबारी 50 किलो चांदी लेकर जा रहा था. तभी 2 पुलिस वालों ने खाकी का धौंस दिखाकर लूट की वारदात को अंजाम दिया. हालांकि, मामले की शिकायत के बाद दोनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. आरोपियों के पास ले लूट की चांदी बरामद कर ली गई है.
बता दें कि, ये पूरा मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात का है. यहां आगरा का सराफा कारोबारी मनीष सोनी 50 किलो चांदी लेकर फतेहपुर से आगरा जा रहे थे. उसी दौरान भोगनीपुर कोतवाल अजय पाल सिंह ने दरोगा चिंतन कौशिक और हेड कॉन्स्टेबल रामशंकर को उनके पीछे लगा दिया. दोनों ने औरैया बॉर्डर पर कारोबारी मनीष सोनी को रोक लिया और मनीष से 50 किलो चांदी लेकर मौके से फरार हो गए. सराफा कारोबारी ने अपने साथ लूट की घटना की जानकारी अगले दिन कानपुर और औरैया एसपी को दी.
वहीं मामला सामने आने के बाद औरैया एसपी ने इस मामले की जांच के लिए टीम गठित की. इस मामले में मिले इनपुट के आधार पर कानपुर देहात के भोगनीपुर कोतवाली में तैनात इंस्पेक्टर अजय पाल सिंह के सरकारी आवास पर देर रात SOG और पुलिस टीम ने छापेमारी की. इस दौरान मौके से टीम ने 50 किलो चांदी बरामद कर ली. पुलिस टीम ने लूट में शामिल भोगनीपुर कोतवाल अजय पाल सिंह और दरोगा चिंतन कौशिक को गिरफ्तार कर लिया. वहीं मौके से एक हेड कॉन्स्टेबल रामशंकर फरार हो गया, पुलिस उसकी गिरफ्तारी का प्रयास कर रही है.
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CRIME NEWS: जब भी कहीं कोई क्राइम होता है तो उसकी जानकारी पुलिस को दी जाती है. यहां तो पुलिस वालों ने ही कांड कर दिया. मामला कुछ ऐसा है कि, एक सराफा कारोबारी पचास किलो चांदी लेकर जा रहा था. तभी दो पुलिस वालों ने खाकी का धौंस दिखाकर लूट की वारदात को अंजाम दिया. हालांकि, मामले की शिकायत के बाद दोनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. आरोपियों के पास ले लूट की चांदी बरामद कर ली गई है. बता दें कि, ये पूरा मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात का है. यहां आगरा का सराफा कारोबारी मनीष सोनी पचास किलो चांदी लेकर फतेहपुर से आगरा जा रहे थे. उसी दौरान भोगनीपुर कोतवाल अजय पाल सिंह ने दरोगा चिंतन कौशिक और हेड कॉन्स्टेबल रामशंकर को उनके पीछे लगा दिया. दोनों ने औरैया बॉर्डर पर कारोबारी मनीष सोनी को रोक लिया और मनीष से पचास किलो चांदी लेकर मौके से फरार हो गए. सराफा कारोबारी ने अपने साथ लूट की घटना की जानकारी अगले दिन कानपुर और औरैया एसपी को दी. वहीं मामला सामने आने के बाद औरैया एसपी ने इस मामले की जांच के लिए टीम गठित की. इस मामले में मिले इनपुट के आधार पर कानपुर देहात के भोगनीपुर कोतवाली में तैनात इंस्पेक्टर अजय पाल सिंह के सरकारी आवास पर देर रात SOG और पुलिस टीम ने छापेमारी की. इस दौरान मौके से टीम ने पचास किलो चांदी बरामद कर ली. पुलिस टीम ने लूट में शामिल भोगनीपुर कोतवाल अजय पाल सिंह और दरोगा चिंतन कौशिक को गिरफ्तार कर लिया. वहीं मौके से एक हेड कॉन्स्टेबल रामशंकर फरार हो गया, पुलिस उसकी गिरफ्तारी का प्रयास कर रही है.
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- 36 min ago सोनाक्षी सिन्हा के साथ रोमांस करने से रणबीर कपूर ने कर दिया था इंकार? वजह है चौकाने वाली!
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गौरतलब है कि अभी सैफ और करीना दोनों ही होम प्रोडक्शन की फिल्म एजेंट विनोद की शूटिंग में व्यस्त हैं. करीना ने कहा है कि उनका सपना है कि वह करीना कपूर खान कहलाएं। उन्होंने कहा "मैं अपना करियर बना चुकी हूं और आगे भी इस पर काम कर रही हूं अब सैफू जब भी चाहेंगे मैं शादी कर लूंगी। "
हूं.
था।
हूं।
करीना मानती हैं कि प्रियंका उनकी दोस्त नहीं हैं एक तो उन्होंने प्रियंका के साथ कभी काम नहीं किया और न ही उन दोनों में कभी अधिक बातचीत हुई है।
Kareena Kapoor says yes i want to become Kareena Kapoor khan but till then I'd like to be Kareena Kapoor.
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और इसके अलावा सौंग बांध परियोजना के पुनर्वास एवं विस्थापन के प्रस्ताव पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा विभिन्न विभागों की सेवा नियमावली, विधानसभा के पटल पर रखे जाने वाले प्रत्यावेदनों पर चर्चा हो सकती है।
तो वही राज्य आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के मुद्दे पर उनके तेवर तल्ख हैं। राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मंच ने रविवार को शहीद स्मारक पर एक दिवसीय धरना दिया। इसमें क्षैतिज आरक्षण के लिए अधिनियम या नियमावली के पास नहीं होने की सूरत में आगामी रणनीति पर विचार किया गया।
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और इसके अलावा सौंग बांध परियोजना के पुनर्वास एवं विस्थापन के प्रस्ताव पर भी चर्चा हो सकती है। इसके अलावा विभिन्न विभागों की सेवा नियमावली, विधानसभा के पटल पर रखे जाने वाले प्रत्यावेदनों पर चर्चा हो सकती है। तो वही राज्य आंदोलनकारियों को दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के मुद्दे पर उनके तेवर तल्ख हैं। राज्य आंदोलनकारी संयुक्त मंच ने रविवार को शहीद स्मारक पर एक दिवसीय धरना दिया। इसमें क्षैतिज आरक्षण के लिए अधिनियम या नियमावली के पास नहीं होने की सूरत में आगामी रणनीति पर विचार किया गया। ।
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PATNA :अवैध हथियार बरामदगी मामले में आरोपी पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा की अग्रिम जमानत याचिका पर आज पटना हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। मंजू को आज जेल मिलता है या फिर उन्हें जेल जाना पड़ेगा इसका फैसला होने की उम्मीद जताई जा रही है। बेगूसराय कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद मंजू वर्मा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इससे पहले भी हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई हो चुकी है, लेकिन कोर्ट की ओर से कोई फैसला नहीं दिया गया था। आज एकबार फिर कोर्ट में इसकी सुनवाई होनी है।
गौरतलब हो कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह दुष्कर्म कांड की जांच कर रही सीबीआई द्वारा गत 17 अगस्त को की गयी छापेमारी के दौरान बेगूसराय जिला के चेरिया बरियारपुर थाना अंतर्गत अर्जुन टोला गांव स्थित मंजू वर्मा के पति के आवास से विभिन्न हथियारों के साथ 50 कारतूस बरामद किया गया था।
इस मामले को लेकर सीबीआई ने स्थानीय अदालत में पूर्व मंत्री मंजू वर्मा एवं उनके पति चन्देश्वर वर्मा के विरुद्ध चेरिया बरियारपुर थाना में कांड संख्या 143 दर्ज कराया था। फोन सीडीआर में मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के फोन पर मंजू वर्मा के पति के 17 बार बातचीत करने की बात सामने आने पर मंजू ने गत आठ अगस्त को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
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PATNA :अवैध हथियार बरामदगी मामले में आरोपी पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा की अग्रिम जमानत याचिका पर आज पटना हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। मंजू को आज जेल मिलता है या फिर उन्हें जेल जाना पड़ेगा इसका फैसला होने की उम्मीद जताई जा रही है। बेगूसराय कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद मंजू वर्मा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इससे पहले भी हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई हो चुकी है, लेकिन कोर्ट की ओर से कोई फैसला नहीं दिया गया था। आज एकबार फिर कोर्ट में इसकी सुनवाई होनी है। गौरतलब हो कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह दुष्कर्म कांड की जांच कर रही सीबीआई द्वारा गत सत्रह अगस्त को की गयी छापेमारी के दौरान बेगूसराय जिला के चेरिया बरियारपुर थाना अंतर्गत अर्जुन टोला गांव स्थित मंजू वर्मा के पति के आवास से विभिन्न हथियारों के साथ पचास कारतूस बरामद किया गया था। इस मामले को लेकर सीबीआई ने स्थानीय अदालत में पूर्व मंत्री मंजू वर्मा एवं उनके पति चन्देश्वर वर्मा के विरुद्ध चेरिया बरियारपुर थाना में कांड संख्या एक सौ तैंतालीस दर्ज कराया था। फोन सीडीआर में मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के फोन पर मंजू वर्मा के पति के सत्रह बार बातचीत करने की बात सामने आने पर मंजू ने गत आठ अगस्त को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
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PBKS vs LSG Preview आईपीएल 2023 का 38वां मुकाबला शुक्रवार को मोहली में खेला जाएगा। लखनऊ ने अपना पिछला मुकाबला गंवाया है तो वहीं पंजाब ने जीत के साथ वापसी की है। लखनऊ के खिलाफ कप्तान शिखर धवन टीम में वापसी कर सकते हैं।
विकास शर्मा,चंडीगढ़। मोहाली के आईएस बिंद्रा क्रिकेट स्टेडियम में शुक्रवार को पंजाब किंग्स बनाम लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच आईपीएल सीजन का 38वां मुकाबला खेला जाएगा। पंजाब किंग्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच आईपीएल में दो बार आमना-सामना हुआ है। दोनों टीमों ने एक-एक मुकाबला अपने नाम किया है। अंक तालिका में लखनऊ सुपर जायंट्स चौथे और पंजाब किंग्स छठे स्थान पर है।
मौजूदा सीजन की बात करें तो लखनऊ सुपर जायंट्स को उसी के घर में दो विकेट से हराने वाली किंग्स का पलड़ा भारी दिख रहा है। बावजूद इसके किंग्स के लिए परेशानी यह है कि टीम अपने घरेलू मैदान में जीत की लय को बरकरार नहीं रख पा रही है। मोहाली में खेले गए पिछले दो मुकाबलों में किंग्स को हार का सामना करना पड़ा है। हालांकि, मुंबई इंडियन को उसी के घर में हराकर वापस लौटी टीम अपने घरेलू मैदान पर जीत दर्ज कर अपना दबदबा कायम रखने की कोशिश करेगी। दूसरी तरफ लखनऊ सुपर जायंट्स अपनी हार का बदला लेने के लिए दम लगाएगी।
लगातार दो दिन अभ्यास सत्र में लंबे शाट्स लगाकर अपनी फिटनेस को परखने वाले पंजाब किंग्स के कप्तान शिखर धवन लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ वापसी कर सकते हैं। कंधे में चोट के कारण धवन पिछले तीन मैचों में नहीं खेले, लेकिन अब वह फिट दिख रहे हैं। दूसरी तरफ से मुंबई के खिलाफ 55 रन की शानदार पारी खेलकर प्लेयर्स ऑफ द मैच बने सैम करन टूर्नामेंट के साथ लय पकड़ रहे हैं।
पिछली सात पारियों में 142 के साथ 5 विकेट झटकने वाले सैम के साथ कप्तान धवन भी टीम का हिस्सा होंगे तो यकीनन लखनऊ के मुश्किलें बढ़ेगी। प्रभसिमरन, मैथ्यू शार्ट और लिविंगस्टन को भी जिम्मेदारी से खेलना होगा। टीम में अर्शदीप, एन एलिस और हरप्रीत जैसे गेंदबाजों की बदौलत किंग्स लखनऊ के खिलाफ मजबूत लग रही है।
मौजूदा सीजन के सात मैचों में दो अर्धशतक लगाकर 37. 42 की औसत से 262 रन बना चुके केएल राहुल को अभी भी अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का इंतजार है। गुजरात के खिलाफ 68 रन बनाकर भी वह टीम को जीत नहीं दिला पाए थे। बता दें, केएल राहुल लखनऊ जायंट्स से पहले पंजाब किंग्स से खेलते थे। राहुल ने पंजाब के लिए चार सत्रों में से प्रत्येक में 500 से अधिक रन बनाए हैं। यह अपने आप में एक रिकार्ड है। उन्होंने 50 से अधिक की औसत और 130 से अधिक की स्ट्राइक रेट से रन ठोके हैं।
वह वर्ष 2022 लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ जुड़े थे। इसलिए राहुल किंग्स की रणनीति और आईएस बिंद्रा स्टेडियम की पिच से अच्छी तरह से वाकिफ हैं। मोहाली में राहुल यकीनन अपने बल्ले से आलोचकों को जबाव देना चाहेंगे। किंग्स को हराने के लिए काईल मेयर्स, निकोलस पूरन,मार्कस स्टोइनिस और क्रुणाल पंड्या को अपना बेहतर खेल दिखाना होगा। गेंदबाजी में कप्तान को मार्क वुड की कमी खलेगी। रवि बिश्नोई और आवेश खान को अपना बेहतर प्रदर्शन करना होगा।
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PBKS vs LSG Preview आईपीएल दो हज़ार तेईस का अड़तीसवां मुकाबला शुक्रवार को मोहली में खेला जाएगा। लखनऊ ने अपना पिछला मुकाबला गंवाया है तो वहीं पंजाब ने जीत के साथ वापसी की है। लखनऊ के खिलाफ कप्तान शिखर धवन टीम में वापसी कर सकते हैं। विकास शर्मा,चंडीगढ़। मोहाली के आईएस बिंद्रा क्रिकेट स्टेडियम में शुक्रवार को पंजाब किंग्स बनाम लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच आईपीएल सीजन का अड़तीसवां मुकाबला खेला जाएगा। पंजाब किंग्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच आईपीएल में दो बार आमना-सामना हुआ है। दोनों टीमों ने एक-एक मुकाबला अपने नाम किया है। अंक तालिका में लखनऊ सुपर जायंट्स चौथे और पंजाब किंग्स छठे स्थान पर है। मौजूदा सीजन की बात करें तो लखनऊ सुपर जायंट्स को उसी के घर में दो विकेट से हराने वाली किंग्स का पलड़ा भारी दिख रहा है। बावजूद इसके किंग्स के लिए परेशानी यह है कि टीम अपने घरेलू मैदान में जीत की लय को बरकरार नहीं रख पा रही है। मोहाली में खेले गए पिछले दो मुकाबलों में किंग्स को हार का सामना करना पड़ा है। हालांकि, मुंबई इंडियन को उसी के घर में हराकर वापस लौटी टीम अपने घरेलू मैदान पर जीत दर्ज कर अपना दबदबा कायम रखने की कोशिश करेगी। दूसरी तरफ लखनऊ सुपर जायंट्स अपनी हार का बदला लेने के लिए दम लगाएगी। लगातार दो दिन अभ्यास सत्र में लंबे शाट्स लगाकर अपनी फिटनेस को परखने वाले पंजाब किंग्स के कप्तान शिखर धवन लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ वापसी कर सकते हैं। कंधे में चोट के कारण धवन पिछले तीन मैचों में नहीं खेले, लेकिन अब वह फिट दिख रहे हैं। दूसरी तरफ से मुंबई के खिलाफ पचपन रन की शानदार पारी खेलकर प्लेयर्स ऑफ द मैच बने सैम करन टूर्नामेंट के साथ लय पकड़ रहे हैं। पिछली सात पारियों में एक सौ बयालीस के साथ पाँच विकेट झटकने वाले सैम के साथ कप्तान धवन भी टीम का हिस्सा होंगे तो यकीनन लखनऊ के मुश्किलें बढ़ेगी। प्रभसिमरन, मैथ्यू शार्ट और लिविंगस्टन को भी जिम्मेदारी से खेलना होगा। टीम में अर्शदीप, एन एलिस और हरप्रीत जैसे गेंदबाजों की बदौलत किंग्स लखनऊ के खिलाफ मजबूत लग रही है। मौजूदा सीजन के सात मैचों में दो अर्धशतक लगाकर सैंतीस. बयालीस की औसत से दो सौ बासठ रन बना चुके केएल राहुल को अभी भी अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का इंतजार है। गुजरात के खिलाफ अड़सठ रन बनाकर भी वह टीम को जीत नहीं दिला पाए थे। बता दें, केएल राहुल लखनऊ जायंट्स से पहले पंजाब किंग्स से खेलते थे। राहुल ने पंजाब के लिए चार सत्रों में से प्रत्येक में पाँच सौ से अधिक रन बनाए हैं। यह अपने आप में एक रिकार्ड है। उन्होंने पचास से अधिक की औसत और एक सौ तीस से अधिक की स्ट्राइक रेट से रन ठोके हैं। वह वर्ष दो हज़ार बाईस लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ जुड़े थे। इसलिए राहुल किंग्स की रणनीति और आईएस बिंद्रा स्टेडियम की पिच से अच्छी तरह से वाकिफ हैं। मोहाली में राहुल यकीनन अपने बल्ले से आलोचकों को जबाव देना चाहेंगे। किंग्स को हराने के लिए काईल मेयर्स, निकोलस पूरन,मार्कस स्टोइनिस और क्रुणाल पंड्या को अपना बेहतर खेल दिखाना होगा। गेंदबाजी में कप्तान को मार्क वुड की कमी खलेगी। रवि बिश्नोई और आवेश खान को अपना बेहतर प्रदर्शन करना होगा।
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यदि आप एक गर्मी की शादी में भाग ले रहे हैं और एक ताजा और लंबे समय तक चलने वाला लुक सुनिश्चित करने के लिए दिन के मेकअप टिप्स की जरूरत है, तो यहां कुछ सुझाव दिए गए हैंः
- अच्छे आधार से शुरुआत करेंः
- क्लींजिंग, टोनिंग और मॉइस्चराइजिंग से अपनी त्वचा को तैयार करें। अपनी त्वचा को धूप से बचाने के लिए एसपीएफ युक्त हल्के, तेल रहित मॉइस्चराइज़र का प्रयोग करें।
- अपने मेकअप के लिए एक चिकना कैनवास बनाने के लिए प्राइमर लगाएं और इसे लंबे समय तक टिकने में मदद करें।
- लाइटवेट फाउंडेशन चुनेंः
- भारी महसूस किए बिना अपनी त्वचा की टोन को समान करने के लिए हल्के, लंबे समय तक रहने वाले फाउंडेशन या एसपीएफ युक्त टिंटेड मॉइस्चराइज़र का विकल्प चुनें।
- अगर आपकी त्वचा ऑयली है तो चमक कम करने के लिए मैट फिनिश वाले फाउंडेशन का इस्तेमाल करें।
- कंसीलर का इस्तेमाल करेंः
- किसी भी धब्बे, काले घेरे या लालिमा को छिपाने के लिए कंसीलर लगाएं। नेचुरल लुक के लिए हल्के, ब्लेंडेबल फॉर्मूले का इस्तेमाल करें।
- पाउडर के साथ सेट करेंः
- अपने फाउंडेशन को सेट करने और चमक कम करने के लिए अपने चेहरे पर ट्रांसलूसेंट पाउडर की एक हल्की परत लगाएं। टी-ज़ोन पर ध्यान दें, जहाँ तेलीयता अधिक प्रमुख होती है।
- आंखों का मेकअप सॉफ्ट और नेचुरल रखेंः
- आड़ू, गुलाबी, या कांस्य जैसे नरम, गर्मियों के रंगों में तटस्थ आईशैडो रंगों का चयन करें। दिन के समय हेवी या डार्क स्मोकी आई लुक से बचें।
- पसीने या नमी के कारण गलने या बहने से रोकने के लिए वाटरप्रूफ मस्कारा का इस्तेमाल करें।
- अपनी भौहें परिभाषित करेंः
- अपने प्राकृतिक बालों के रंग से मेल खाने वाली ब्रो पेंसिल या पाउडर का उपयोग करके अपनी भौंहों को संवारें और आकार दें। पॉलिश लुक के लिए किसी भी विरल क्षेत्र को भरें।
- रंग का स्पर्श जोड़ेंः
- अपने गालों पर एक स्वस्थ फ्लश जोड़ने के लिए एक नरम गुलाबी या आड़ू छाया में प्राकृतिक दिखने वाले ब्लश का विकल्प चुनें।
- सूक्ष्म चमक के लिए अपने चेहरे के ऊंचे बिंदुओं, जैसे चीकबोन्स, ब्रो बोन और कामदेव के धनुष पर हाइलाइटर का उपयोग करें।
- लंबे समय तक टिकने वाला लिप कलर चुनेंः
- एक शेड में लंबे समय तक पहनने वाले लिप कलर का चयन करें जो आपके आउटफिट को कॉम्प्लीमेंट करता हो। मैट या साटन फ़िनिश अधिक समय तक चलते हैं।
- स्मूद एप्लिकेशन सुनिश्चित करने के लिए लिप कलर लगाने से पहले अपने होठों को एक्सफोलिएट और मॉइस्चराइजिंग करके तैयार करें।
- अपना मेकअप सेट करेंः
- अपने पूरे चेहरे पर मेकअप सेटिंग स्प्रे छिड़क कर अपना मेकअप पूरा करें। यह आपके मेकअप को जगह पर रहने और गर्मी और उमस का सामना करने में मदद करेगा।
- टच-अप के लिए आवश्यक पैक करेंः
- पूरे दिन टच-अप के लिए ब्लॉटिंग पेपर, एक कॉम्पैक्ट पाउडर, लिपस्टिक, और एक छोटा ब्रश या स्पंज जैसी जरूरी चीजों के साथ एक छोटा मेकअप बैग साथ लाएं।
याद रखें, मेकअप चुनते और लगाते समय आपकी त्वचा के प्रकार की विशिष्ट आवश्यकताओं और किसी भी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर विचार करना आवश्यक है। मौसम की स्थिति को ध्यान में रखें और ऐसे उत्पाद चुनें जो पसीना प्रतिरोधी और लंबे समय तक चलने वाले हों ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आपका मेकअप पूरे दिन ताजा और सुंदर बना रहे।
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यदि आप एक गर्मी की शादी में भाग ले रहे हैं और एक ताजा और लंबे समय तक चलने वाला लुक सुनिश्चित करने के लिए दिन के मेकअप टिप्स की जरूरत है, तो यहां कुछ सुझाव दिए गए हैंः - अच्छे आधार से शुरुआत करेंः - क्लींजिंग, टोनिंग और मॉइस्चराइजिंग से अपनी त्वचा को तैयार करें। अपनी त्वचा को धूप से बचाने के लिए एसपीएफ युक्त हल्के, तेल रहित मॉइस्चराइज़र का प्रयोग करें। - अपने मेकअप के लिए एक चिकना कैनवास बनाने के लिए प्राइमर लगाएं और इसे लंबे समय तक टिकने में मदद करें। - लाइटवेट फाउंडेशन चुनेंः - भारी महसूस किए बिना अपनी त्वचा की टोन को समान करने के लिए हल्के, लंबे समय तक रहने वाले फाउंडेशन या एसपीएफ युक्त टिंटेड मॉइस्चराइज़र का विकल्प चुनें। - अगर आपकी त्वचा ऑयली है तो चमक कम करने के लिए मैट फिनिश वाले फाउंडेशन का इस्तेमाल करें। - कंसीलर का इस्तेमाल करेंः - किसी भी धब्बे, काले घेरे या लालिमा को छिपाने के लिए कंसीलर लगाएं। नेचुरल लुक के लिए हल्के, ब्लेंडेबल फॉर्मूले का इस्तेमाल करें। - पाउडर के साथ सेट करेंः - अपने फाउंडेशन को सेट करने और चमक कम करने के लिए अपने चेहरे पर ट्रांसलूसेंट पाउडर की एक हल्की परत लगाएं। टी-ज़ोन पर ध्यान दें, जहाँ तेलीयता अधिक प्रमुख होती है। - आंखों का मेकअप सॉफ्ट और नेचुरल रखेंः - आड़ू, गुलाबी, या कांस्य जैसे नरम, गर्मियों के रंगों में तटस्थ आईशैडो रंगों का चयन करें। दिन के समय हेवी या डार्क स्मोकी आई लुक से बचें। - पसीने या नमी के कारण गलने या बहने से रोकने के लिए वाटरप्रूफ मस्कारा का इस्तेमाल करें। - अपनी भौहें परिभाषित करेंः - अपने प्राकृतिक बालों के रंग से मेल खाने वाली ब्रो पेंसिल या पाउडर का उपयोग करके अपनी भौंहों को संवारें और आकार दें। पॉलिश लुक के लिए किसी भी विरल क्षेत्र को भरें। - रंग का स्पर्श जोड़ेंः - अपने गालों पर एक स्वस्थ फ्लश जोड़ने के लिए एक नरम गुलाबी या आड़ू छाया में प्राकृतिक दिखने वाले ब्लश का विकल्प चुनें। - सूक्ष्म चमक के लिए अपने चेहरे के ऊंचे बिंदुओं, जैसे चीकबोन्स, ब्रो बोन और कामदेव के धनुष पर हाइलाइटर का उपयोग करें। - लंबे समय तक टिकने वाला लिप कलर चुनेंः - एक शेड में लंबे समय तक पहनने वाले लिप कलर का चयन करें जो आपके आउटफिट को कॉम्प्लीमेंट करता हो। मैट या साटन फ़िनिश अधिक समय तक चलते हैं। - स्मूद एप्लिकेशन सुनिश्चित करने के लिए लिप कलर लगाने से पहले अपने होठों को एक्सफोलिएट और मॉइस्चराइजिंग करके तैयार करें। - अपना मेकअप सेट करेंः - अपने पूरे चेहरे पर मेकअप सेटिंग स्प्रे छिड़क कर अपना मेकअप पूरा करें। यह आपके मेकअप को जगह पर रहने और गर्मी और उमस का सामना करने में मदद करेगा। - टच-अप के लिए आवश्यक पैक करेंः - पूरे दिन टच-अप के लिए ब्लॉटिंग पेपर, एक कॉम्पैक्ट पाउडर, लिपस्टिक, और एक छोटा ब्रश या स्पंज जैसी जरूरी चीजों के साथ एक छोटा मेकअप बैग साथ लाएं। याद रखें, मेकअप चुनते और लगाते समय आपकी त्वचा के प्रकार की विशिष्ट आवश्यकताओं और किसी भी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर विचार करना आवश्यक है। मौसम की स्थिति को ध्यान में रखें और ऐसे उत्पाद चुनें जो पसीना प्रतिरोधी और लंबे समय तक चलने वाले हों ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आपका मेकअप पूरे दिन ताजा और सुंदर बना रहे।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
ए के बालन एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान केरल सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं । . Name This article can be a great amount of complex detail that may only interest a specific audience.
ए के बालन और पालक्काड जिला आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
ए के बालन 8 संबंध है और पालक्काड जिला 0 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (8 + 0)।
यह लेख ए के बालन और पालक्काड जिला के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। ए के बालन एक भारतीय राजनीतिज्ञ तथा वर्तमान केरल सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं । . Name This article can be a great amount of complex detail that may only interest a specific audience. ए के बालन और पालक्काड जिला आम में शून्य बातें हैं । ए के बालन आठ संबंध है और पालक्काड जिला शून्य है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख ए के बालन और पालक्काड जिला के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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(१०) सुभद्रा
(१२) कुन्ती
(१३) दमयन्ती
(१४) पुष्पचूला
(१५) प्रभावती (१६) पद्मावती
दशवैकालिक निर्यक्ति गा ० ७३-७४ अ० १ आवश्यक निर्यक्ति गा० १२८४ ज्ञाताधर्मकथात १६ वाँ अध्ययन
आवश्यक नियुक्ति गा० १२८४
आवश्यक निर्युक्ति गा० १३११की
भाष्य गाथा२०५-६
सतरहवां बोल संग्रह
८७७ -- विनय समाधि अध्ययन की १७ गाथाएं
दशवैकालिक सूत्र के नवें अध्ययन का नाम विनयसमाधि है । उस में चार उद्देशे हैं। पहले उद्देशे में १७ गाथाएं हैं। दूसरे में २४ । तीसरे में १५ और चौथे में ७ । पहले उद्देशे की १७ गाथाओं का भावार्थ नीचे लिखे अनुसार है(१) जो शिष्य अहंकार, क्रोध, छल तथा प्रमाद के कारण गुरु की सेवा में रहता हुआ भी विनयधर्म की शिक्षा नहीं लेता। अहंकार आदि दुर्गुण उसके ज्ञान आदि सद्गुणों को उसी प्रकार नष्ट कर देते हैं जिस प्रकार बॉस का फल स्वयं बॉस को नष्ट कर देता है ।
(२) जो दुर्बुद्धि शिष्य अपने गुरु को मन्दबुद्धि, अल्पवयस्क और अल्पज्ञ जान कर उनकी हीलना करता है, निन्दा करता है वह मिथ्यात्व को प्राप्त होता है तथा गुरु की वड़ी भारी अशातना करने वाला होता है ।
(३) बहुत से मुनि वयोवृद्ध होने पर भी स्वभाव से मन्दबुद्धि होते हैं। बहुत से छोटी उमर वाले भी बुद्धिमान् तथा शास्त्रों के ज्ञाता होते हैं । ज्ञान में न्यूनाधिक होने पर भी सदाचारी और सद्गुणी गुरुजनों का अपमान न करना चाहिए। उनका अपमान अग्नि के समान सभी गुणों को भस्म कर देता है ।
(४) यह छोटा है, कुछ नहीं कर सकता ऐसा समझ कर भी जो व्यक्ति सॉप को छेड़ता है उसे साँप काट खाता है और बहुत
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सुभद्रा कुन्ती दमयन्ती पुष्पचूला प्रभावती पद्मावती दशवैकालिक निर्यक्ति गा शून्य तिहत्तर-चौहत्तर अशून्य एक आवश्यक निर्यक्ति गाशून्य एक हज़ार दो सौ चौरासी ज्ञाताधर्मकथात सोलह वाँ अध्ययन आवश्यक नियुक्ति गाशून्य एक हज़ार दो सौ चौरासी आवश्यक निर्युक्ति गाशून्य एक हज़ार तीन सौ ग्यारहकी भाष्य गाथादो सौ पाँच-छः सतरहवां बोल संग्रह आठ सौ सतहत्तर -- विनय समाधि अध्ययन की सत्रह गाथाएं दशवैकालिक सूत्र के नवें अध्ययन का नाम विनयसमाधि है । उस में चार उद्देशे हैं। पहले उद्देशे में सत्रह गाथाएं हैं। दूसरे में चौबीस । तीसरे में पंद्रह और चौथे में सात । पहले उद्देशे की सत्रह गाथाओं का भावार्थ नीचे लिखे अनुसार है जो शिष्य अहंकार, क्रोध, छल तथा प्रमाद के कारण गुरु की सेवा में रहता हुआ भी विनयधर्म की शिक्षा नहीं लेता। अहंकार आदि दुर्गुण उसके ज्ञान आदि सद्गुणों को उसी प्रकार नष्ट कर देते हैं जिस प्रकार बॉस का फल स्वयं बॉस को नष्ट कर देता है । जो दुर्बुद्धि शिष्य अपने गुरु को मन्दबुद्धि, अल्पवयस्क और अल्पज्ञ जान कर उनकी हीलना करता है, निन्दा करता है वह मिथ्यात्व को प्राप्त होता है तथा गुरु की वड़ी भारी अशातना करने वाला होता है । बहुत से मुनि वयोवृद्ध होने पर भी स्वभाव से मन्दबुद्धि होते हैं। बहुत से छोटी उमर वाले भी बुद्धिमान् तथा शास्त्रों के ज्ञाता होते हैं । ज्ञान में न्यूनाधिक होने पर भी सदाचारी और सद्गुणी गुरुजनों का अपमान न करना चाहिए। उनका अपमान अग्नि के समान सभी गुणों को भस्म कर देता है । यह छोटा है, कुछ नहीं कर सकता ऐसा समझ कर भी जो व्यक्ति सॉप को छेड़ता है उसे साँप काट खाता है और बहुत
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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को देखते हुए एयर इंडिया ने ईरानी वायु क्षेत्र से होकर गुजरने वाली एअर इंडिया, एअर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानों के मार्गों का पुनर्निर्धारण करने का फैसला लिया है। एयर इंडिया के प्रवक्ता धनंजय कुमार ने कहा कि हमारे लिए यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा सबसे पहले हैं। ईरानी हवाई क्षेत्र के भीतर तनाव को देखते हुए एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानों के मार्गों को अस्थायी रूप से पुनर्निर्धारण किया जा रहा है।
इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने ट्रैवल एडवायजरी जारी की है। साथ ही इराक में रह रहे भारतीयों को भी अलर्ट रहने के लिए कहा है। भारत सरकार ने देश के सभी एयरलाइंस कंपनियों को ईरान के एयर स्पेस का उपयोग नहीं करने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अगले आदेश तक जरूरत पड़ने पर ही इराक के लिए यात्रा करें। साथ ही इराक में रह रहे भारतीयों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। साथ ही इराक में भी यात्रा करने से बचने की सलाह दी है।
मंत्रालय का कहना है कि बगदाद स्थित भारतीय दूतावास और एरबिल स्थित वाणिज्य दूतावास इराक में रह रहे भारतीय लोगों की मदद के लिए लगातार काम कर रही है। भारत के अलावा चीन ने भी अपने एयरलाइंस कंपनियों को इरान का एयर स्पेस का उपयोग करने से मना किया है। साथ ही सिंगापुर एयरलाइंस ने भी एडवायजरी जारी किया है। बता दें कि अमेरिका के साथ तल्खी के बीच ईरान में आज काफी उथल-पुथल देखने को मिल रहा है। आज यानी बुधवार की सुबह ईरान ने इराक स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया और करीब 1 दर्जन मिसाइलें दागीं।
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अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को देखते हुए एयर इंडिया ने ईरानी वायु क्षेत्र से होकर गुजरने वाली एअर इंडिया, एअर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानों के मार्गों का पुनर्निर्धारण करने का फैसला लिया है। एयर इंडिया के प्रवक्ता धनंजय कुमार ने कहा कि हमारे लिए यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा सबसे पहले हैं। ईरानी हवाई क्षेत्र के भीतर तनाव को देखते हुए एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस की उड़ानों के मार्गों को अस्थायी रूप से पुनर्निर्धारण किया जा रहा है। इससे पहले अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने ट्रैवल एडवायजरी जारी की है। साथ ही इराक में रह रहे भारतीयों को भी अलर्ट रहने के लिए कहा है। भारत सरकार ने देश के सभी एयरलाइंस कंपनियों को ईरान के एयर स्पेस का उपयोग नहीं करने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अगले आदेश तक जरूरत पड़ने पर ही इराक के लिए यात्रा करें। साथ ही इराक में रह रहे भारतीयों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है। साथ ही इराक में भी यात्रा करने से बचने की सलाह दी है। मंत्रालय का कहना है कि बगदाद स्थित भारतीय दूतावास और एरबिल स्थित वाणिज्य दूतावास इराक में रह रहे भारतीय लोगों की मदद के लिए लगातार काम कर रही है। भारत के अलावा चीन ने भी अपने एयरलाइंस कंपनियों को इरान का एयर स्पेस का उपयोग करने से मना किया है। साथ ही सिंगापुर एयरलाइंस ने भी एडवायजरी जारी किया है। बता दें कि अमेरिका के साथ तल्खी के बीच ईरान में आज काफी उथल-पुथल देखने को मिल रहा है। आज यानी बुधवार की सुबह ईरान ने इराक स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया और करीब एक दर्जन मिसाइलें दागीं।
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नई दिल्ली : देश के सबसे पुराने मामले अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्णय देने के बाद मुस्लिम पक्षकारों को मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन अयोध्या के धन्नीपुर में दिया गया। जहां 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ने मस्जिद की जमीन पर सांकेतिक शिलान्यास किया था। इससे पहले मस्जिद का नक्शा भी पास कराया गया, जिसके अनुसार मस्जिद का निर्माण होगा।
इसके साथ ही वहां भव्य मस्जिद के अलावास 200 बेड का सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का निर्माण भी किया जाएगा। साथ ही एक बड़ा म्यूजियम भी बनेगा और एक लाइब्रेरी भी स्थापित की जाएगी। यही नहीं एक इस्लामिक रिसर्च सेंटर भी बनाया जाएगा। इसके अलावा एक ऐसा कम्युनिटी किचन भी बनाया जाएगा, जिसके जरिए एक हजार लोगों को रोज फ्री खाना उपलब्ध कराया जा सके।
इन सभी खबरों के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक ऐसा याचिका दायर किया गया, जिसने लगभग सभी योजनाओं पर ग्रहण लगाने का काम किया। हालांकि यह ग्रहण कितने दिनों का है, इसका निर्णय कोर्ट के फैसला आने के बाद ही हो सकेगा। गौरतलब है कि अयोध्या के धन्नीपुर में मस्जिद के लिए आवंटित जमीन में से पांच एकड़ हिस्से पर दिल्ली की दो महिलाओं ने अपना दावा किया है। इसे लेकर उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक याचिका भी दाखिल की है।
आपको बता दें कि ये महिला रानी कपूर और रमा रानी हैं, जिन्होंने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को आवंटित जमीन को लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल की है। बता दें कि इस मामले में सुनवाई 8 फरवरी को हो सकती है।
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नई दिल्ली : देश के सबसे पुराने मामले अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्णय देने के बाद मुस्लिम पक्षकारों को मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन अयोध्या के धन्नीपुर में दिया गया। जहां छब्बीस जनवरी को गणतंत्र दिवस के मौके पर इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ने मस्जिद की जमीन पर सांकेतिक शिलान्यास किया था। इससे पहले मस्जिद का नक्शा भी पास कराया गया, जिसके अनुसार मस्जिद का निर्माण होगा। इसके साथ ही वहां भव्य मस्जिद के अलावास दो सौ बेड का सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का निर्माण भी किया जाएगा। साथ ही एक बड़ा म्यूजियम भी बनेगा और एक लाइब्रेरी भी स्थापित की जाएगी। यही नहीं एक इस्लामिक रिसर्च सेंटर भी बनाया जाएगा। इसके अलावा एक ऐसा कम्युनिटी किचन भी बनाया जाएगा, जिसके जरिए एक हजार लोगों को रोज फ्री खाना उपलब्ध कराया जा सके। इन सभी खबरों के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक ऐसा याचिका दायर किया गया, जिसने लगभग सभी योजनाओं पर ग्रहण लगाने का काम किया। हालांकि यह ग्रहण कितने दिनों का है, इसका निर्णय कोर्ट के फैसला आने के बाद ही हो सकेगा। गौरतलब है कि अयोध्या के धन्नीपुर में मस्जिद के लिए आवंटित जमीन में से पांच एकड़ हिस्से पर दिल्ली की दो महिलाओं ने अपना दावा किया है। इसे लेकर उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक याचिका भी दाखिल की है। आपको बता दें कि ये महिला रानी कपूर और रमा रानी हैं, जिन्होंने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को आवंटित जमीन को लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल की है। बता दें कि इस मामले में सुनवाई आठ फरवरी को हो सकती है।
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नई दिल्लीः केएल राहुल (KL Rahul) की कप्तानी वाली टीम इंडिया इस वक्त साउथ अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में भिड़ रही है. इस टेस्ट में नियमित कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) चोटिल होने की वजह से बाहर हैं. जिसके बाद हनुमा विहारी (Hanuman Vihari) को इस मैच में उनकी जगह मौका मिला. हालांकि अंपायर की एक बड़ी गलती के चलकते विहारी इस मौके को भुना नहीं पाए और उन्हें एक छोटी पारी के बाद वापस लौटना पड़ा.
दरअसल हनुमा विहारी (Hanuman Vihari) इस मैच में काफी अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे. सिर्फ 20 रनों की इस पारी में उन्होंने दिखा दिया था कि वो आज एक बड़ा स्कोर खड़ा कर सकते हैं. लेकिन कागिसो रबाडा ने 39वें ओवर की चौथी गेंद पर विहारी को वैन डर डूसेन के हाथों कैच आउट करवाया. डूसेन ने एक बेहतरीन कैच लपक कर विहारी को वापस भेजा. हालांकि रबाड़ा का पैर उस वक्त क्रीज पर था और उनके जूते का हिस्सा लाइन के अंदर नहीं नजर आ रहा था. यही वजह है कि टीम इंडिया के फैंस अंपायर के इस निर्णय से नाखुश नजर आए हैं.
नो गेंद पर आउट हुए विहारी?
कगिसो रबाड़ा की वो गेंद नो बॉल ही नजर आ रही थी जिसपर हनुमा विहारी (Hanuman Vihari) ने अपना विकेट खोया. हैरानी की बात ये है कि मैदानी अंपायर के अलावा थर्ड अंपायर ने भी रबाड़ा की इस गेंद को इग्नोर कर दिया. अब अंपायर को सोशल मीडिया पर टीम इंडिया के फैंस जमकर लताड़ रहे हैं. लोगों ने तरह-तरह के ट्वीट्स करके अंपायर को ट्रोल करना शुरू कर दिया है.
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच जोहानिसबर्ग टेस्ट (Johannesburg Test) के शुरू होने से पहले ही टीम इंडिया को तगड़ा झटका लगा है. विराट कोहली (Virat Kohli) ये टेस्ट नहीं खेल रहे हैं. उनकी जगह केएल राहुल (KL Rahul) टीम की कप्तानी कर रहे हैं. वो भारत की तरफ से टेस्ट कैप्टनसी करने वाले 34वें खिलाड़ी हैं. केएल राहुल ने बतौर कप्तान अपने पहले ही टेस्ट में टॉस भी जीता. इसके बाद उन्होंने बताया कि विराट कोहली को पीठ में दर्द है और इसी वजह से वो नहीं खेल रहे हैं.
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नई दिल्लीः केएल राहुल की कप्तानी वाली टीम इंडिया इस वक्त साउथ अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में भिड़ रही है. इस टेस्ट में नियमित कप्तान विराट कोहली चोटिल होने की वजह से बाहर हैं. जिसके बाद हनुमा विहारी को इस मैच में उनकी जगह मौका मिला. हालांकि अंपायर की एक बड़ी गलती के चलकते विहारी इस मौके को भुना नहीं पाए और उन्हें एक छोटी पारी के बाद वापस लौटना पड़ा. दरअसल हनुमा विहारी इस मैच में काफी अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे. सिर्फ बीस रनों की इस पारी में उन्होंने दिखा दिया था कि वो आज एक बड़ा स्कोर खड़ा कर सकते हैं. लेकिन कागिसो रबाडा ने उनतालीसवें ओवर की चौथी गेंद पर विहारी को वैन डर डूसेन के हाथों कैच आउट करवाया. डूसेन ने एक बेहतरीन कैच लपक कर विहारी को वापस भेजा. हालांकि रबाड़ा का पैर उस वक्त क्रीज पर था और उनके जूते का हिस्सा लाइन के अंदर नहीं नजर आ रहा था. यही वजह है कि टीम इंडिया के फैंस अंपायर के इस निर्णय से नाखुश नजर आए हैं. नो गेंद पर आउट हुए विहारी? कगिसो रबाड़ा की वो गेंद नो बॉल ही नजर आ रही थी जिसपर हनुमा विहारी ने अपना विकेट खोया. हैरानी की बात ये है कि मैदानी अंपायर के अलावा थर्ड अंपायर ने भी रबाड़ा की इस गेंद को इग्नोर कर दिया. अब अंपायर को सोशल मीडिया पर टीम इंडिया के फैंस जमकर लताड़ रहे हैं. लोगों ने तरह-तरह के ट्वीट्स करके अंपायर को ट्रोल करना शुरू कर दिया है. भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच जोहानिसबर्ग टेस्ट के शुरू होने से पहले ही टीम इंडिया को तगड़ा झटका लगा है. विराट कोहली ये टेस्ट नहीं खेल रहे हैं. उनकी जगह केएल राहुल टीम की कप्तानी कर रहे हैं. वो भारत की तरफ से टेस्ट कैप्टनसी करने वाले चौंतीसवें खिलाड़ी हैं. केएल राहुल ने बतौर कप्तान अपने पहले ही टेस्ट में टॉस भी जीता. इसके बाद उन्होंने बताया कि विराट कोहली को पीठ में दर्द है और इसी वजह से वो नहीं खेल रहे हैं.
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आज दोपहर उत्तरी बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले हिंदुओं के एक धार्मिक कार्यक्रम रूशमेला में एक के बाद एक कई धमाके हुए जिसमें 6 लोग घायल हो गए। स्थानीय पुलिस अधिकारी अब्दुल मजीद के मुताबिक घायलों में से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक इस घटना के बाद अबतक 5 संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मजीद के मुताबिक आयोजन से पहले मंदिर के पुजारी को धार्मिक आयोजन ना करने की धमकी भी दी गई थी। आपको बता दें कि इस इलाके में पिछले महीने इटली मूल के एक डॉक्टर और एक जापानी मूल के व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इन सभी घटनाओं की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने ली है। कहा जा रहा है कुल दस श्रद्धालु धमाकों में घायल हुए हैं।
दिनाजपुर में स्थित इस मंदिर में घायल हुए लोगों को अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया है वहीं घटना के ठीक बाद पुलिस ने तीन संदिग्धों को धमाके में शामिल होने की आशंका के चलते गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले उत्तरी बांग्लादेश के शिया मस्जिद में एक अज्ञात बंदूकधारी ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी थी, जिसमें 1 व्यक्ति की मौत हो गई थी। बांग्लादेश इस्लामिक फाउंडेशन के महानिदेशक शमीम मोहम्मद अफजल ने कहा था कि बांग्लादेश में शिया अल्पसंख्यक हैं और हमने बांग्लादेश के इतिहास में कभी इस तरह मस्जिद पर हमला नहीं देखा है। शमीम मोहम्मद ने ये भी कहा कि हमले की प्रकृति और समय आने वाले खतरे की ओर इशारा करता है।
बंगलादेश में बढ़ रहा है आतंकी संगठनों का दखलक्राइम ब्रांच के संयुक्त निदेशक मोनिरुल इस्लाम ने इस हमले के बारे में कहा कि उन्हें इस बात के भी संकेत मिले हैं कि अंतराष्ट्रीय आतंकी गुट बांग्लादेश के चरमपंथी संगठनों के साथ मेलजोल बढ़ा रहे हैं। तब भी आतंकी संगठन आईएस से जुड़े एक ट्विटर अकाउंट के जरिए बांग्लादेश की मस्जिद में हुए हमले की जिम्मेदारी ली गई थी। ट्विटर पर लिखा गया था कि अल्लाह के एक बंदे ने मशीनगन से मस्जिद में गोलियां चलाईं। इस्लामिक स्टेट की ओर से मंदिर के पुजारी को धार्मिक समारोह आयोजित ना करने की धमकी जारी की हुई थी।
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आज दोपहर उत्तरी बांग्लादेश के दिनाजपुर जिले हिंदुओं के एक धार्मिक कार्यक्रम रूशमेला में एक के बाद एक कई धमाके हुए जिसमें छः लोग घायल हो गए। स्थानीय पुलिस अधिकारी अब्दुल मजीद के मुताबिक घायलों में से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक इस घटना के बाद अबतक पाँच संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मजीद के मुताबिक आयोजन से पहले मंदिर के पुजारी को धार्मिक आयोजन ना करने की धमकी भी दी गई थी। आपको बता दें कि इस इलाके में पिछले महीने इटली मूल के एक डॉक्टर और एक जापानी मूल के व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इन सभी घटनाओं की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने ली है। कहा जा रहा है कुल दस श्रद्धालु धमाकों में घायल हुए हैं। दिनाजपुर में स्थित इस मंदिर में घायल हुए लोगों को अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया है वहीं घटना के ठीक बाद पुलिस ने तीन संदिग्धों को धमाके में शामिल होने की आशंका के चलते गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले उत्तरी बांग्लादेश के शिया मस्जिद में एक अज्ञात बंदूकधारी ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। बांग्लादेश इस्लामिक फाउंडेशन के महानिदेशक शमीम मोहम्मद अफजल ने कहा था कि बांग्लादेश में शिया अल्पसंख्यक हैं और हमने बांग्लादेश के इतिहास में कभी इस तरह मस्जिद पर हमला नहीं देखा है। शमीम मोहम्मद ने ये भी कहा कि हमले की प्रकृति और समय आने वाले खतरे की ओर इशारा करता है। बंगलादेश में बढ़ रहा है आतंकी संगठनों का दखलक्राइम ब्रांच के संयुक्त निदेशक मोनिरुल इस्लाम ने इस हमले के बारे में कहा कि उन्हें इस बात के भी संकेत मिले हैं कि अंतराष्ट्रीय आतंकी गुट बांग्लादेश के चरमपंथी संगठनों के साथ मेलजोल बढ़ा रहे हैं। तब भी आतंकी संगठन आईएस से जुड़े एक ट्विटर अकाउंट के जरिए बांग्लादेश की मस्जिद में हुए हमले की जिम्मेदारी ली गई थी। ट्विटर पर लिखा गया था कि अल्लाह के एक बंदे ने मशीनगन से मस्जिद में गोलियां चलाईं। इस्लामिक स्टेट की ओर से मंदिर के पुजारी को धार्मिक समारोह आयोजित ना करने की धमकी जारी की हुई थी।
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भारत में इन दिनों कुछ खिलाड़ी घरेलू महाराजा टी-20 लीग खेल रहे हैं। वहीं कुछ टीम इंडिया के साथ है। भारत की एक टीम जिम्बाब्वे दौरे पर पहुंच चुकी है, क्योंकि उन्हें मेजबान टीम के साथ 18 अगस्त से तीन वनडे मैचों की श्रृंखला खेलनी है। उसके बाद दूसरी टीम यूएई में एशिया कप खेलने के लिए जाएगी।
भारत में बहुत सारे ऐसे खिलाड़ी है जो भारतीय टीम में जगह मिलने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें इंडिया की तरफ से खेलने का मौका नहीं दिया जा रहा है। इन दिनों कुछ भारतीय खिलाड़ी इंग्लैंड में रॉयल लंदन वनडे कप खेल रहे हैं, जिसमे उनका प्रदर्शन बहुत बढ़िया देखने को मिला है।
इंग्लैंड में इन दिनों खेले जा रहे रॉयल लंदन वनडे कप का एक मैच वारविकशायर (Warwickshire) और ससेक्स (Sussex) के बीच खेला गया। उस मुकाबले में दोनों टीमों की तरफ से कई भारतीय क्रिकेटर खेल रहे थे, जिसमे से कुछ ने अपनी प्रदर्शन से सबका दिल जीता है। वारविकशायर और ससेक्स के बीच खेले गए मैच में चेतेश्वर पुजारा ने बल्ले से धमाल मचाया।
उस मैच में चेतेश्वर पुजारा वारविकशायर के लिए खेलते हुए चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने के लिए आए। उसके बाद उन्होंने 7 चौके और 2 गगनचुंबी छक्के की मदद से 107 रनों की अच्छी पारी खेली। उस इनिंग के दौरान पुजारा ने कुल 79 गेंदों का सामना किया था, लेकिन उन्होंने उनमे से अधिकतर गेंदे डॉट खेली थी। इस वजह से शतक जड़ने के लिए पुजारा ने मात्र 53 गेंदों का सहारा लिया।
चेतेश्वर पुजारा उस मुकाबले में 7 चौके और दो गगनचुंबी छक्के की मदद से सिर्फ 9 गेंदों में 40 रन बना दिए। उसके बाद उन्होंने 10 डबल, तीन ट्रिपल और 31 सिंगल दौड़कर पूरा किया। इस तरह पुजारा उस मैच में शतक तक पहुंचने के लिए मात्र 53 गेंदों का सामना किया था। इस वजह से पिछले कुछ दिनों से पुजारा लगातार चर्चा में बने हुए हैं, क्योंकि लोगों को लगता था कि पुजारा सिर्फ धीमी बल्लेबाजी कर सकते हैं, लेकिन अब उन्होंने साबित कर दिया है कि वो तेजी से बल्लेबाजी करना जानते हैं।
चेतेश्वर पुजारा भारत के लिए अभी भी टेस्ट क्रिकेट खेलते हैं, लेकिन वनडे क्रिकेट में उन्हें मौका नहीं मिलता है। भारत के लिए पुजारा सिर्फ 5 ओडीआई मैच खेल पाए हैं, उसके बाद उन्हें इस फॉर्मेट में खेलने का मौका मिलना पूरी तरह से बंद हो गया है। आईपीएल 2021 में चेतेश्वर पुजारा चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा थे, लेकिन उस दौरान सीएसके ने उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं दिया। उसके बाद आईपीएल 2022 से पहले उन्हें रिलीज कर दिया गया।
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भारत में इन दिनों कुछ खिलाड़ी घरेलू महाराजा टी-बीस लीटरग खेल रहे हैं। वहीं कुछ टीम इंडिया के साथ है। भारत की एक टीम जिम्बाब्वे दौरे पर पहुंच चुकी है, क्योंकि उन्हें मेजबान टीम के साथ अट्ठारह अगस्त से तीन वनडे मैचों की श्रृंखला खेलनी है। उसके बाद दूसरी टीम यूएई में एशिया कप खेलने के लिए जाएगी। भारत में बहुत सारे ऐसे खिलाड़ी है जो भारतीय टीम में जगह मिलने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें इंडिया की तरफ से खेलने का मौका नहीं दिया जा रहा है। इन दिनों कुछ भारतीय खिलाड़ी इंग्लैंड में रॉयल लंदन वनडे कप खेल रहे हैं, जिसमे उनका प्रदर्शन बहुत बढ़िया देखने को मिला है। इंग्लैंड में इन दिनों खेले जा रहे रॉयल लंदन वनडे कप का एक मैच वारविकशायर और ससेक्स के बीच खेला गया। उस मुकाबले में दोनों टीमों की तरफ से कई भारतीय क्रिकेटर खेल रहे थे, जिसमे से कुछ ने अपनी प्रदर्शन से सबका दिल जीता है। वारविकशायर और ससेक्स के बीच खेले गए मैच में चेतेश्वर पुजारा ने बल्ले से धमाल मचाया। उस मैच में चेतेश्वर पुजारा वारविकशायर के लिए खेलते हुए चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने के लिए आए। उसके बाद उन्होंने सात चौके और दो गगनचुंबी छक्के की मदद से एक सौ सात रनों की अच्छी पारी खेली। उस इनिंग के दौरान पुजारा ने कुल उन्यासी गेंदों का सामना किया था, लेकिन उन्होंने उनमे से अधिकतर गेंदे डॉट खेली थी। इस वजह से शतक जड़ने के लिए पुजारा ने मात्र तिरेपन गेंदों का सहारा लिया। चेतेश्वर पुजारा उस मुकाबले में सात चौके और दो गगनचुंबी छक्के की मदद से सिर्फ नौ गेंदों में चालीस रन बना दिए। उसके बाद उन्होंने दस डबल, तीन ट्रिपल और इकतीस सिंगल दौड़कर पूरा किया। इस तरह पुजारा उस मैच में शतक तक पहुंचने के लिए मात्र तिरेपन गेंदों का सामना किया था। इस वजह से पिछले कुछ दिनों से पुजारा लगातार चर्चा में बने हुए हैं, क्योंकि लोगों को लगता था कि पुजारा सिर्फ धीमी बल्लेबाजी कर सकते हैं, लेकिन अब उन्होंने साबित कर दिया है कि वो तेजी से बल्लेबाजी करना जानते हैं। चेतेश्वर पुजारा भारत के लिए अभी भी टेस्ट क्रिकेट खेलते हैं, लेकिन वनडे क्रिकेट में उन्हें मौका नहीं मिलता है। भारत के लिए पुजारा सिर्फ पाँच ओडीआई मैच खेल पाए हैं, उसके बाद उन्हें इस फॉर्मेट में खेलने का मौका मिलना पूरी तरह से बंद हो गया है। आईपीएल दो हज़ार इक्कीस में चेतेश्वर पुजारा चेन्नई सुपर किंग्स का हिस्सा थे, लेकिन उस दौरान सीएसके ने उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं दिया। उसके बाद आईपीएल दो हज़ार बाईस से पहले उन्हें रिलीज कर दिया गया।
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साजिद खान एक भारतीय फिल्म निर्माता टीवी होस्ट एक्टर हैं और कोरियोयग्राफर, फिल्म निर्देशक फराह खान के भाई भी हैं। साजिद खान ने अब तक छः फिल्मों का निर्माण किया हैं। जिनमे से दो तो बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह विफल हुई। साल 2022 में बिग बॉस 16 के घर में साजिद खान एंट्री ले चुके हैं।
साजिद खान का जन्म 23 नवम्बर 1971 मुंबई में हुआ था। साजिद के पिता का नाम कामरान खान है और उनकी माँ का नाम मेनका ईरानी है। इनकी एक बहन है-फराह खान जोकि कोरियोयग्राफर, फिल्म निर्देशक है। इनके ब्रदर इन लॉ शिरीष कुंदर हैं जोकि निर्माता,निर्देशक हैं। फराह और जोया अख्तर मौसेरे भाई-बहन हैं।
भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा ने शेयर किया न्यू ईयर पार्टी का शानदार वीडियो, एक्ट्रेस की अदाएं देख फैंस हुए घ�..
बच्चे को लेकर Dino Morea का बयान,- "मुझे नहीं चाहिए किराए की कोख, बच्चे चाहता हूं लेकिन बिना ..."
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साजिद खान एक भारतीय फिल्म निर्माता टीवी होस्ट एक्टर हैं और कोरियोयग्राफर, फिल्म निर्देशक फराह खान के भाई भी हैं। साजिद खान ने अब तक छः फिल्मों का निर्माण किया हैं। जिनमे से दो तो बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह विफल हुई। साल दो हज़ार बाईस में बिग बॉस सोलह के घर में साजिद खान एंट्री ले चुके हैं। साजिद खान का जन्म तेईस नवम्बर एक हज़ार नौ सौ इकहत्तर मुंबई में हुआ था। साजिद के पिता का नाम कामरान खान है और उनकी माँ का नाम मेनका ईरानी है। इनकी एक बहन है-फराह खान जोकि कोरियोयग्राफर, फिल्म निर्देशक है। इनके ब्रदर इन लॉ शिरीष कुंदर हैं जोकि निर्माता,निर्देशक हैं। फराह और जोया अख्तर मौसेरे भाई-बहन हैं। भोजपुरी एक्ट्रेस मोनालिसा ने शेयर किया न्यू ईयर पार्टी का शानदार वीडियो, एक्ट्रेस की अदाएं देख फैंस हुए घ�.. बच्चे को लेकर Dino Morea का बयान,- "मुझे नहीं चाहिए किराए की कोख, बच्चे चाहता हूं लेकिन बिना ..." Do you want to clear all the notifications from your inbox?
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थायस ने स्वाधीन, लेकिन निर्धन और मूर्तिपूजक मातापिता के घर जन्म लिया था। जब वह बहुत छोटीसी लड़की थी तो उसका बाप एक सराय का भटियारा था। उस सराय में परायः मल्लाह बहुत आते थे। बाल्यकाल की अशृंखल, किन्तु सजीव स्मृतियां उसके मन में अब भी संचित थीं। उसे अपने बाप की याद आती थी जो पैर पर पैर रखे अंगीठी के सामने बैठा रहता था। लम्बा, भारीभरकम, शान्त परकृति का मनुष्य था, उन फिर ऊनों की भांति जिनकी कीर्ति सड़क के नुक्कड़ों पर भाटों के मुख से नित्य अमर होती रहती थी। उसे अपनी दुर्बल माता की भी याद आती थी जो भूखी बिल्ली की भांति घर में चारों ओर चक्कर लगाती रहती थी। सारा घर उसके तीक्ष्ण कंठ स्वर में गूंजता और उसके उद्दीप्त नेत्रों की ज्योति से चमकता रहता था। पड़ोस वाले कहते थे, यह डायन है, रात को उल्लू बन जाती है और अपने परेमियों के पास उड़ जाती है। यह अफीमचियों की गप थी। थामस अपनी मां से भलीभांति परिचित थी और जानती थी कि वह जादूटोना नहीं करती। हां, उसे लोभ का रोग था और दिन की कमाई को रातभर गिनती रहती थी। असली पिता और लोभिनी माता थायस के लालनपालन की ओर विशेष ध्यान न देते थे। वह किसी जंगली पौधे के समान अपनी बा़ से ब़ती जाती थी। वह मतवाले मल्लाहों के कमरबन्द से एकएक करके पैसे निकालने में निपुण हो गयी। वह अपने अश्लील वाक्यों और बाजारी गीतों से उनका मनोरंजन करती थी, यद्यपि वह स्वयं इनका आशय न जानती थी। घर शराब की महक से भरा रहता था। जहांतहां शराब के चमड़े के पीपे रखे रहते थे और वह मल्लाहों की गोद में बैठती फिरती थी। तब मुंह में शराब का लसका लगाये वह पैसे लेकर घर से निकलती और एक बुयि से गुलगुले लेकर खाती। नित्यपरति एक ही अभिनय होता रहता था। मल्लाह अपनी जानजोखिम यात्राओं की कथा कहते, तब चौसर खेलते, देवताओं को गालियां देते और उन्मत्त होकर 'शराब, शराब, सबसे उत्तम शराब !' की रट लगाते। नित्यपरति रात को मल्लाहों के हुल्लड़ से बालिका की नींद उचट जाती थी। एकदूसरे को वे घोंघे फेंककर मारते जिससे मांस कट जाता था और भयंकर कोलाहल मचता था। कभी तलवारें भी निकल पड़ती थीं और रक्तपात हो जाता था।
थायस को यह याद करके बहुत दुःख होता था कि बाल्यावस्था में यदि किसी को मुझसे स्नेह था तो वह सरल, सहृदय अहमद था। अहमद इस घर का हब्शी गुलाम था, तवे से भी ज्यादा काला, लेकिन बड़ा सज्जन, बहुत नेक जैसे रात की मीठी नींद। वह बहुधा थामस को घुटनों पर बैठा लेता और पुराने जमाने के तहखानों की अद्भुत कहानियां सुनाता जो धनलोलुप राजेमहाराजे बनवाते थे और बनवाकर शिल्पियों और कारीगरों का वध कर डालते थे कि किसी को बता न दें। कभीकभी ऐसे चतुर चोरों की कहानियां सुनाता जिन्होंने राजाओं की कन्या से विवाह किया और मीनार बनवाये। बालिका थायस के लिए अहमद बाप भी था, मां भी था, दाई था और कुत्ता भी था। वह अहमद के पीछेपीछे फिरा करती; जहां वह जाता, परछाईं की तरह साथ लगी रहती। अहमद भी उस पर जान देता था। बहुत रात को अपने पुआल के गद्दे पर सोने के बदले बैठा हुआ वह उसके लिए कागज के गुब्बारे और नौकाएं बनाया करता।
अहमद के साथ उसके स्वामियों ने घोर निर्दयता का बर्ताव किया था। एक कान कटा हुआ था और देह पर कोड़ों के दागही-दाग थे। किन्तु उसके मुख पर नित्य सुखमय शान्ति खेला करती थी और कोई उससे न पूछता था कि इस आत्मा की शान्ति और हृदय के सन्टोष का स्त्रोत कहां था। वह बालक की तरह भोला था। काम करतेकरते थक जाता तो अपने भद्दे स्वर में धार्मिक भजन गाने लगता जिन्हें सुनकर बालिका कांप उठती और वही बातें स्वप्न में भी देखती।
'हमसे बात मेरी बेटी, तू कहां गयी थी और क्या देखा था ?'
'मैंने कफन और सफेद कपड़े देखे। स्वर्गदूत कबर पर बैठे हुए थे और मैंने परभु मसीह की ज्योति देखी।
थायस उससे पूछती-'दादा, तुम कबर में बैठै हुए दूतों का भजन क्यों गाते हो।'
अहमद जवाब देता-'मेरी आंखों की नन्ही पुतली, मैं स्वर्गदूतों के भजन इसलिए गाता हूं कि हमारे परभु मसीह स्वर्गलोक को उड़ गये हैं।'
अहमद ईसाई था। उसकी यथोचित रीति से दीक्षा हो चुकी थी और ईसाइयों के समाज में उसका नाम भी थियोडोर परसिद्ध था। वह रातों को छिपकर अपने सोने के समय में उनकी संगीतों में शामिल हुआ करता था।
उस समय ईसाई धर्म पर विपत्ति की घटाएं छाई हुई थीं। रूस के बादशाह की आज्ञा से ईसाइयों के गिरजे खोदकर फेंक दिये गये थे, पवित्र पुस्तकें जला डाली गयी थीं और पूजा की सामगिरयां लूट ली गयी थीं। ईसाइयों के सम्मानपद छीन लिये गये थे और चारों ओर उन्हें मौतही-मौत दिखाई देती थी। इस्कन्द्रिया में रहने वाले समस्त ईसाई समाज के लोग संकट में थे। जिसके विषय में ईसावलम्बी होने का जरा भी सन्देह होता, उसे तुरन्त कैद में डाल दिया जाता था। सारे देश में इन खबरों से हाहाकार मचा हुआ था कि स्याम, अरब, ईरान आदि स्थानों में ईसाई बिशपों और वरतधारिणी कुमारियों को कोड़े मारे गये हैं, सूली दी गयी हैं और जंगल के जानवरों के समान डाल दिया गया है। इस दारुण विपत्ति के समय जब ऐसा निश्चय हो रहा था कि ईसाइयों का नाम निशान भी न रहेगा; एन्थोनी ने अपने एकान्तवास से निकलकर मानो मुरझाये हुए धान में पानी डाल दिया। एन्थोनी मिस्त्रनिवासी ईसाइयों का नेता, विद्वान्, सिद्धपुरुष था, जिसके अलौकिक कृत्यों की खबरें दूरदूर तक फैली हुई थीं। वहआत्मज्ञानी और तपस्वी था। उसने समस्त देश में भरमण करके ईसाई सम्परदाय मात्र को श्रद्घा और धमोर्त्साह से प्लावित कर दिया। विधर्मियों से गुप्त रहकर वह एक समय में ईसाइयों की समस्त सभाओं में पहुंच जाता था, और सभी में उस शक्ति और विचारशीलता का संचार कर देता था जो उसके रोमरोम में व्याप्त थी। गुलामों के साथ असाधारण कठोरता का व्यवहार किया गया था। इससे भयभीत होकर कितने ही धर्मविमुख हो गये, और अधिकांश जंगल को भाग गये। वहां या तो वे साधु हो जायेंगे या डाके मारकर निवार्ह करेंगे। लेकिन अहमद पूर्ववत इन सभाओं में सम्मिलित होता, कैदियों से भेंट करता, आहत पुरुषों का क्रियाकर्म करता और निर्भय होकर ईसाई धर्म की घोषणा करता था। परतिभाशाली एन्थोनी अहमद की यह दृ़ता और निश्चलता देखकर इतना परसन्न हुआ कि चलते समय उसे छाती से लगा लिया और बड़े परेम से आशीवार्द दिया।
जब थायस सात वर्ष की हुई तो अहमद ने उसे ईश्वरचचार करनी शुरू की। उसकी कथा सत्य और असत्य का विचित्र मिश्रण लेकिन बाल्यहृदय के अनुकूल थी।
ईश्वर फिरऊन की भांति स्वर्ग में, अपने हरम के खेमों और अपने बाग के वृक्षों की छांह में रहता है। वह बहुत पराचीन काल से वहां रहता है, और दुनिया से भी पुराना है। उसके केवल एक ही बेटा है, जिसका नाम परभु ईसू है। वह स्वर्ग के दूतों से और रमणी युवतियों से भी सुन्दर है। ईश्वर उसे हृदय से प्यार करता है। उसने एक दिन परभु मसीह से कहा-'मेरे भवन और हरम, मेरे छुहारे के वृक्षों और मीठे पानी की नदियों को छोड़कर पृथ्वी पर जाओ और दीनदुःखी पराणियों का कल्याण करो ! वहां तुझे छोटे बालक की भांति रहना होगा। वहां दुःख हो तेरा भोजन होगा और तुझे इतना रोना होगा कि तुझे आंसुओं से नदियां बह निकलें, जिनमें दीनदुःखी जन नहाकर अपनी थकन को भूल जाएं। जाओ प्यारे पुत्र !'
परभु मसीह ने अपने पूज्य पिता की आज्ञा मान ली और आकर बेथलेहम नगर में अवतार लिया। वह खेतों और जंगलों में फिरते थे और अपने साथियों से कहते थे-मुबारक हैं वे लोग जो भूखे रहते हैं, क्योंकि मैं उन्हें अपने पिता की मेज पर खाना खिलाऊंगा। मुबारक हैं वे लोग जो प्यासे रहते हैं, क्योंकि वह स्वर्ग की निर्मल नदियों का जल पियेंगे और मुबारक हैं वे जो रोते हैं, क्योंकि मैं अपने दामन से उनके आंसू पोंछूंगा।
यही कारण है कि दीनहीन पराणी उन्हें प्यार करते हैं और उन पर विश्वास करते हैं। लेकिन धनी लोग उनसे डरते हैं कि कहीं यह गरीबों को उनसे ज्यादा धनी न बना दें। उस समय क्लियोपेट्रा और सीजर पृथ्वी पर सबसे बलवान थे। वे दोनों ही मसीह से जलते थे, इसीलिए पुजारियों और न्यायाधीशों को हुक्म दिया कि परभु मसीह को मार डालो। उनकी आज्ञा से लोगों ने एक सलीब खड़ी की और परभु को सूली पर च़ा दिया। किन्तु परभु मसीह ने कबर के द्वार को तोड़ डाला और फिर अपने पिता ईश्वर के पास चले गये।
उसी समय से परभु मसीह के भक्त स्वर्ग को जाते हैं। ईश्वर परेम से उनका स्वागत करता है और उनसे कहता है-'आओ, मैं तुम्हारा स्वागत करता हूं क्योंकि तुम मेरे बेटे को प्यार करते हो। हाथ धोकर मेज पर बैठ जाओ।' तब स्वर्ग अप्सराएं गाती हैं और जब तक मेहमान लोग भोजन करते हैं, नाच होता रहता है। उन्हें ईश्वर अपनी आंखों की ज्योति से अधिक प्यार करता है, क्योंकि वे उसके मेहमान होते हैं और उनके विश्राम के लिए अपने भवन के गलीचे और उनके स्वादन के लिए अपने बाग का अनार परदान करता है।
अहमद इस परकार थायस से ईश्वर चचार करता था। वह विस्मित होकर कहती थी-'मुझे ईश्वर के बाग के अनार मिलें तो खूब खाऊं।'
अहमद कहता था-'स्वर्ग के फल वही पराणी खा सकते हैं जो बपतिस्मा ले लेते हैं।'
तब थायस ने बपतिस्मा लेने की आकांक्षा परकट की। परभु मसीह में उसकी भक्ति देखकर अहमद ने उसे और भी धर्मकथाएं सुनानी शुरू कीं।
इस परकार एक वर्ष तक बीत गया। ईस्टर का शुभ सप्ताह आया और ईसाइयों ने धमोर्त्सव मनाने की तैयारी की। इसी सप्ताह में एक रात को थायस नींद से चौंकी तो देखा कि अहमद उसे गोद में उठा रहा है। उसकी आंखों में इस समय अद्भुत चमक थी। वह और दिनों की भांति फटे हुए पाजामे नहीं, बल्कि एक श्वेत लम्बा ीला चोगा पहने हुए था। उसके थायस को उसी चोगे में छिपा लिया और उसके कान में बोला-'आ, मेरी आंखों की पुतली, आ। और बपतिस्मा के पवित्र वस्त्र धारण कर।'
वह लड़की को छाती से लगाये हुए चला। थायस कुछ डरी, किन्तु उत्सुक भी थी। उसने सिर चोगे से बाहर निकाल लिया और अपने दोनों हाथ अहमद की मर्दन में डाल दिये। अहमद उसे लिये वेग से दौड़ा चला जाता था। वह एक तंग अंधेरी गली से होकर गुजरा; तब यहूदियों के मुहल्ले को पार किया, फिर एक कबिरस्तान के गिर्द में घूमते हुए एक खुले मैदान में पहुंचा जहां, ईसाई, धमार्हतों की लाशें सलीबों पर लटकी हुई थीं। थायस ने अपना सिर चोगे में छिपा लिया और फिर रास्ते भर उसे मुंह बाहर निकालने का साहस न हुआ। उसे शीघर ज्ञात हो गया कि हम लोग किसी तहखाने में चले जा रहे हैं। जब उसने फिर आंखें खोलीं तो अपने को एक तंग खोह में पाया। राल की मशालें जल रही थीं। खोह की दीवारों पर ईसाई सिद्ध महात्माओं के चित्र बने हुए थे जो मशालों के अस्थिर परकाश में चलतेफिरते, सजीव मालूम होते थे। उनके हाथों में खजूर की डालें थीं और उनके इर्दगिर्द मेमने, कबूतर, फाखते और अंगूर की बेलें चित्रित थीं। इन्हीं चित्रों में थायस ने ईसू को पहचाना, जिसके पैरों के पास फूलों का ेर लगा हुआ था।
खोह के मध्य में, एक पत्थर के जलकुण्ड के पास, एक वृद्ध पुरुष लाल रंग का ीला कुरता पहने खड़ा था। यद्यपि उसके वस्त्र बहुमूल्य थे, पर वह अत्यन्त दीन और सरल जान पड़ता था। उसका नाम बिशप जीवन था, जिसे बादशाह ने देश से निकाल दिया था। अब वह भेड़ का ऊन कातकर अपना निवार्ह करता था। उसके समीप दो लड़के खड़े थे। निकट ही एक बुयि हब्शिन एक छोटासा सफेद कपड़ा लिये खड़ी थी। अहमद ने थायस को जमीन पर बैठा दिया और बिशप के सामने घुटनों के बल बैठकर बोला-'पूज्य पिता, यही वह छोटी लड़की है जिसे मैं पराणों से भी अधिक चाहता हूं। मैं उसे आपकी सेवा में लाया हूं कि आप अपने वचनानुसार, यदि इच्छा हो तो, उसे बपतिस्मा परदान कीजिए।'
यह सुनकर बिशप ने हाथ फैलाया। उनकी उंगलियों के नाखून उखाड़ लिये गये थे क्योंकि आपत्ति के दिनों में वह राजाज्ञा की परवाह न करके अपने धर्म पर आऱु रहे थे। थायस डर गयी और अहमद की गोद में छिप गयी, किन्तु बिशप के इन स्नेहमय शब्दों ने उस आश्वस्त कर दिया-'पिरय पुत्री, डरो मत। अहमद तेरा धर्मपिता है जिसे हम लोग थियोडोरा कहते हैं, और यह वृद्घा स्त्री तेरी माता है जिसने अपने हाथों से तेरे लिए एक सफेद वस्त्र तैयार किया। इसका नाम नीतिदा है। यह इस जन्म में गुलाम है; पर स्वर्ग में यह परभु मसीह की परेयसी बनेगी।'
तब उसने थायस से पूछा-'थायस, क्या तू ईश्वर पर, जो हम सबों का परम पिता है, उसके इकलौते पुत्र परभु मसीह पर जिसने हमारी मुक्ति के लिए पराण अर्पण किये, और मसीह के शिष्यों पर विश्वास करती हैं ?'
हब्शी और हब्शिन ने एक स्वर से कहा-'हां।'
तब बिशप के आदेश से नीतिदा ने थायस के कपड़े उतारे। वह नग्न हो गयी। उसके गले में केवल एक यन्त्र था। विशप ने उसे तीन बार जलकुण्ड में गोता दिया, और तब नीतिदा ने देह का पानी पोंछकर अपना सफेद वस्त्र पहना दिया। इस परकार वह बालिका ईसा शरण में आयी जो कितनी परीक्षाओं और परलोभनों के बाद अमर जीवन पराप्त करने वाली थी।
जब यह संस्कार समाप्त हो गया और सब लोग खोह के बाहर निकले तो अहमद ने बिशप से कहा-'पूज्य पिता, हमें आज आनन्द मनाना चाहिए; क्योंकि हमने एक आत्मा को परभु मसीह के चरणों पर समर्पित किया। आज्ञा हो तो हम आपके शुभस्थान पर चलें और शेष रात्रि उत्सव मनाने में काटें।'
बिशप ने परसन्नता से इस परस्ताव को स्वीकार किया। लोग बिशप के घर आये। इसमें केवल एक कमरा था। दो चरखे रखे हुए थे और एक फटी हुई दरी बिछी थी। जब यह लोग अन्दर पहुंचे तो बिशप ने नीतिदा से कहा-'चूल्हा और तेल की बोतल लाओ। भोजन बनायें।'
यह कहकर उसने कुछ मछलियां निकालीं, उन्हें तेल में भूना, तब सबके-सब फर्श पर बैठकर भोजन करने लगे। बिशप ने अपनी यन्त्रणाओं का वृत्तान्त कहा और ईसाइयों की विजय पर विश्वास परकट किया। उसकी भाषा बहुत ही पेचदार, अलंकृत, उलझी हुई थी। तत्त्व कम, शब्दाडम्बर बहुत था। थायस मंत्रमुग्ध-सी बैठी सुनती रही।
भोजन समाप्त हो जाने का बिशप ने मेहमानों को थोड़ीसी शराब पिलाई। नशा च़ा तो वे बहकबहककर बातें करने लगे। एक क्षण के बाद अहमद और नीतिदा ने नाचना शुरू किया। यह परेतनृत्य था। दोनों हाथ हिलाहिलाकर कभी एकदूसरे की तरफ लपकते, कभी दूर हट जाते। जब सेवा होने में थोड़ी देर रह गयी तो अहमद ने थायस को फिर गोद में उठाया और घर चला आया।
अन्य बालकों की भांति थायस भी आमोदपिरय थी। दिनभर वह गलियों में बालकों के साथ नाचतीगाती रहती थी। रात को घर आती तब भी वह गीत गाया करती, जिनका सिरपैर कुछ न होता।
अब उसे अहमद जैसे शान्त, सीधेसीधे आदमी की अपेक्षा लड़केलड़कियों की संगति अधिक रुचिकर मालूम होती ! अहमद भी उसके साथ कम दिखाई देता। ईसाइयों पर अब बादशाह की क्रुर दृष्टि न थी, इसलिए वह अबाधरूप से धर्म संभाएं करने लगे थे। धर्मनिष्ठ अहमद इन सभाओं में सम्मिलित होने से कभी न चूकता। उसका धमोर्त्साह दिनोंदिन ब़ने लगा। कभीकभी वह बाजार में ईसाइयों को जमा करके उन्हें आने वाले सुखों की शुभ सूचना देता। उसकी सूरत देखते ही शहर के भिखारी, मजदूर, गुलाम, जिनका कोई आश्रय न था, जो रातों में सड़क पर सोते थे, एकत्र हो जाते और वह उनसे कहता-'गुलामों के मुक्त होने के बदन निकट हैं, न्याय जल्द आने वाला है, धन के मतवाले चैन की नींद न सो सकेंगे। ईश्वर के राज्य में गुलामों को ताजा शराब और स्वादिष्ट फल खाने को मिलेंगे, और धनी लोग कुत्ते की भांति दुबके हुए मेज के नीचे बैठे रहेंगे और उनका जूठन खायेंगे।'
यह शुभसन्देश शहर के कोनेकोने में गूंजने लगता और धनी स्वामियों को शंका होती कि कहीं उनके गुलाम उत्तेजित होकर बगावत न कर बैठें। थायस का पिता भी उससे जला करता था। वह कुत्सित भावों को गुप्त रखता।
एक दिन चांदी का एक नमकदान जो देवताओं के यज्ञ के लिए अलग रखा हुआ था, चोरी हो गया। अहमद ही अपराधी ठहराया गया। अवश्य अपने स्वामी को हानि पहुंचाने और देवताओं का अपमान करने के लिए उसने यह अधर्म किया है ! चोरी को साबित करने के लिए कोई परमाण न था और अहमद पुकारपुकारकर कहता था-मुझ पर व्यर्थ ही यह दोषारोपण किया जाता है। तिस पर भी वह अदालत में खड़ा किया गया। थायस के पिता ने कहा-'यह कभी मन लगाकर काम नहीं करता।' न्यायाधीश ने उसे पराणदण्ड का हुक्म दे दिया। जब अहमद अदालत से चलने लगा तो न्यायधीश ने कहा-'तुमने अपने हाथों से अच्छी तरह काम नहीं लिया इसलिए अब यह सलीब में ठोंक दिये जायेंगे !'
अहमद ने शान्तिपूर्वक फैसला सुना, दीनता से न्यायाधीश को परणाम किया और तब कारागार में बन्द कर दिया गया। उसके जीवन के केवल तीन दिन और थे और तीनों दिनों दिन यह कैदियों को उपदेश देता रहा। कहते हैं उसके उपदेशों का ऐसा असर पड़ा कि सारे कैदी और जेल के कर्मचारी मसीह की शरण में आ गये। यह उसके अविचल धमार्नुराग का फल था।
चौथे दिन वह उसी स्थान पर पहुंचाया गया जहां से दो साल पहले, थायस को गोद में लिये वह बड़े आनन्द से निकला था। जब उसके हाथ सलीब पर ठोंक दिये गये, तो उसने 'उफ' तक न किया, और एक भी अपशब्द उसके मुंह से न निकला ! अन्त में बोला-'मैं प्यासा हूं !
'वह स्वर्ग के दूत तुझे लेने को आ रहे हैं। उनका मुख कितना तेजस्वी है। वह अपने साथ फल और शराब लिये आते हैं। उनके परों से कैसी निर्मल, सुखद वायु चल रही है।'
और यह कहतेकहते उसका पराणान्त हो गया।
मरने पर भी उसका मुखमंडल आत्मोल्लास से उद्दीप्त हो रहा था। यहां तक कि वे सिपाही भी जो सलीब की रक्षा कर रहे थे, विस्मत हो गये। बिशप जीवन ने आकर शव का मृतकसंस्कार किया और ईसाई समुदाय ने महात्मा थियोडोर की कीर्ति को परमाज्ज्वल अक्षरों में अंकित किया।
वह छोटी ही उमर में बादशाह के युवकों के साथ क्रीड़ा करने लगी। संध्या समय वह बू़े आदमियों के पीछे लग जाती और उनसे कुछन-कुछ ले मरती थी। इस भांति जो कुछ मिलता उससे मिठाइयां और खिलौने मोल लेती। पर उसकी लोभिनी माता चाहती थी कि वह जो कुछ पाये वह मुझे दे। थायस इसे न मानती थी। इसलिए उसकी माता उसे मारापीटा करती थी। माता की मार से बचने के लिए वह बहुधा घर से भाग जाती और शहरपनाह की दीवार की दरारों में वन्य जन्तुओं के साथ छिपी रहती।
एक दिन उसकी माता ने इतनी निर्दयता से उसे पीटा कि वह घर से भागी और शहर के फाटक के पास चुपचाप पड़ी सिसक रही थी कि एक बुयि उसके सामने जाकर खड़ी हो गयी। वह थोड़ी देर तक मुग्धभाव से उसकी ओर ताकती रही और तब बोली-'ओ मेरी गुलाब, मेरी गुलाब, मेरी फूलसी बच्ची ! धन्य है तेरा पिता जिसने तुझे पैदा किया और धन्य है तेरी माता जिसने तुझे पाला।'
थायस चुपचाप बैठी जमीन की ओर देखती रही। उसकी आंखें लाल थीं, वह रो रही थी।
बुयि ने फिर कहा-'मेरी आंखों की पुतली, मुन्नी, क्या तेरी माता तुझजैसी देवकन्या को पालपोसकर आनन्द से फूल नहीं जाती, और तेरा पिता तुझे देखकर गौरव से उन्मत्त नहीं हो जाता ?'
थायस ने इस तरह भुनभुनाकर उत्तर दिया, मानो मन ही में कह रही है-मेरा बाप शराब से फूला हुआ पीपा है और माता रक्त चूसने वाली जोंक है।
बुयि ने दायेंबायें देखा कि कोई सुन तो नहीं रहा है, तब निस्संक होकर अत्यन्त मृदु कंठ से बोली-'अरे मेरी प्यारी आंखों की ज्योति, ओ मेरी खिली हुई गुलाब की कली, मेरे साथ चलो। क्यों इतना कष्ट सहती हो ? ऐसे मांबाप की झाड़ मारो। मेरे यहां तुम्हें नाचने और हंसने के सिवाय और कुछ न करना पड़ेगा। मैं तुम्हें शहद के रसगुल्ले खिलाऊंगी, और मेरा बेटा तुम्हें आंखों की पुतली बनाकर रखेगा। वह बड़ा सुन्दर सजीला जबान है, उसकी दा़ी पर अभी बाल भी नहीं निकले, गोरे रंग का कोमल स्वभाव का प्यारा लड़का है।'
थायस ने कहा-'मैं शौक से तुम्हें साथ चलूंगी।' और उठकर बुयि के पीछे शहर के बाहर चली गयी।
बुयि का नाम मीरा था। उसके पास कई लड़केलड़कियों की एक मंडली थी। उन्हें उसने नाचना, गाना, नकलें करना सिखाया था। इस मंडली को लेकर वह नगरनगर घूमती थी, और अमीरों के जलसों में उनका नाचगाना कराके अच्छा पुरस्कार लिया करती थी।
उसकी चतुर आंखों ने देख लिया कि यह कोई साधारण लड़की नहीं है। उसका उठान कहे देता था कि आगे चलकर वह अत्यन्त रूपवती रमणी होगी। उसने उसे कोड़े मारकर संगीत और पिंगल की शिक्षा दी। जब सितार के तालों के साथ उसके पैर न उठते तो वह उसकी कोमल पिंडलियों में चमड़े के तस्में से मारती। उसका पुत्र जो हिजड़ा था, थायस से द्वेष रखता था, जो उसे स्त्री मात्र से था। पर वह नाचने में, नकल करने में, मनोगत भावों को संकेत, सैन, आकृति द्वारा व्यक्त करने में, परेम की घातों के दर्शाने में, अत्यन्त कुशल था। हिजड़ों में यह गुण परायः ईश्वरदत्त होते हैं। उसने थायस को यह विद्या सिखाई, खुशी से नहीं, बल्कि इसलिए कि इस तरकीब से वह जी भरकर थायस को गालियां दे सकता था। जब उसने देखा कि थायस नाचनेगाने में निपुण होती जाती है और रसिक लोग उसके नृत्यगान से जितने मुग्ध होते हैं उतना मेरे नृत्यकौशल से नहीं होते तो उसकी छाती पर सांप काटने लगा। वह उसके गालों को नोच लेता, उसके हाथपैर में चुटकियां काटता। पर उसकी जलन से थायस को लेशमात्र भी दुःख न होता था। निर्दय व्यवहार का उसे अभ्यास हो गया था। अन्तियोकस उस समय बहुत आबाद शहर था। मीरा जब इस शहर में आयी तो उसने रईसों से थायस की खूब परशंसा की। थायस का रूपलावण्य देखकर लोगों ने बड़े चाव से उसे अपनी रागरंग की मजलिसों में निमन्त्रित किया, और उसके नृत्यगान पर मोहित हो गये। शनैःशनैः यही उसका नित्य का काम हो गया! नृत्यगान समाप्त होने पर वह परायः सेठसाहूकारों के साथ नदी के किनारे, घने कुञ्जों में विहार करती। उस समय तक उसे परेम के मूल्य का ज्ञान न था, जो कोई बुलाता उसके पास जाती, मानो कोई जौहरी का लड़का धनराशि को कौड़ियों की भांति लुटा रहा हो। उसका एकएक कटाक्ष हृदय को कितना उद्विग्न कर देता है, उसका एकएक कर स्पर्श कितना रोमांचकारी होता है, यह उसके अज्ञात यौवन को विदित न था।
थायस, यह मेरा परम सौभाग्य होता यदि तेरे अलकों में गुंथी हुई पुष्पमाला या तेरे कोमल शरीर का आभूषण, अथवा तेरे चरणों की पादुका मैं होता। यह मेरी परम लालसा है कि पादुका की भांति तेरे सुन्दर चरणों से कुचला जाता, मेरा परेमालिंगन तेरे सुकोमल शरीर का आभूषण और तेरी अलकराशि का पुष्प होता। सुन्दरी रमणी, मैं पराणों को हाथ में लिये तेरी भेंट करने को उत्सुक हो रहा हूं। मेरे साथ चल और हम दोनों परेम में मग्न होकर संसार को भूल जायें।'
जब तक वह बोलता रहा, थायस उसकी ओर विस्मित होकर ताकती रही। उसे ज्ञात हुआ कि उसका रूप मनोहर है। अकस्मात उसे अपने माथे पर ठंडा पसीना बहता हुआ जान पड़ा। वह हरी घास की भांति आर्द्र हो गयी। उसके सिर में चक्कर आने लगे, आंखों के सामने मेघघटासी उठती हुई जान पड़ी। युवक ने फिर वही परेमाकांक्षा परकट की, लेकिन थायस ने फिर इनकार किया। उसके आतुर नेत्र, उसकी परेमयाचना बस निष्फल हुई, और जब उसने अधीर होकर उसे अपनी गोद में ले लिया और बलात खींच ले जाना चाहा तो उसने निष्ठुरता से उसे हटा दिया। तब वह उसके सामने बैठकर रोने लगा। पर उसके हृदय में एक नवीन, अज्ञात और अलक्षित चैतन्यता उदित हो गयी थी। वह अब भी दुरागरह करती रही।
मेहमानों ने सुना तो बोले-'यह कैसी पगली है ? लोलस कुलीन, रूपवान, धनी है, और यह नाचने वाली युवती उसका अपमान करती हैं !'
लोलस का रात घर लौटा तो परेममद तो मतवाला हो रहा था। परातःकाल वह फिर थायस के घर आया, तो उसका मुख विवर्ण और आंखें लाल थीं। उसने थायस के द्वार पर फूलों की माला च़ाई। लेकिन थायस भयभीत और अशान्त थी, और लोलस से मुंह छिपाती रहती थी। फिर भी लोलस की स्मृति एक क्षण के लिए भी उसकी आंखों से न उतरती। उसे वेदना होती थी पर वह इसका कारण न जानती थी। उसे आश्चर्य होता था कि मैं इतनी खिन्न और अन्यमनस्क क्यों हो गयी हूं। यह अन्य सब परेमियों से दूर भागती थी। उनसे उसे घृणा होती थी। उसे दिन का परकाश अच्छा न लगता, सारे दिन अकेले बिछावन पर पड़ी, तकिये में मुंह छिपाये रोया करती। लोलस कई बार किसीन-किसी युक्ति से उसके पास पहुंचा, पर उसका परेमागरह, रोनाधोना, एक भी उसे न पिघला सका। उसके सामने वह ताक न सकती, केवल यही कहती-'नहीं, नहीं।'
लेकिन एक पक्ष के बाद उसकी जिद्द जाती रही। उसे ज्ञात हुआ कि मैं लोलस के परेमपाश में फंस गयी हूं। वह उसके घर गयी और उसके साथ रहने लगी। अब उनके आनन्द की सीमा न थी। दिन भर एकदूसरे से आंखें मिलाये बैठे परेमलाप किया करते। संध्या को नदी के नीरव निर्जन तट पर हाथमें-हाथ डाले टहलते। कभीकभी अरुणोदय के समय उठकर पहाड़ियों पर सम्बुल के फूल बटोरने चले जाते। उनकी थाली एक थी। प्याला एक था, मेज एक थी। लोलस उसके मुंह के अंगूर निकालकर अपने मुंह में खा जाता।
तब मीरा लोलस के पास आकर रोनेपीटने लगी कि मेरी थायस को छोड़ दो। वह मेरी बेटी है, मेरी आंखों की पुतली ! मैंने इसी उदर से उसे निकाल, इस गोद में उसका लालनपालन किया और अब तू उसे मेरी गोद से छीन लेना चाहता है।
लोलस ने उसे परचुर धन देकर विदा किया, लेकिन जब वह धनतृष्णा से लोलुप होकर फिर आयी तो लोलस ने उसे कैद करा दिया। न्यायाधिकारियों को ज्ञात हुआ कि वह कुटनी है, भोली लड़कियों को बहका ले जाना ही उसका उद्यम है तो उसे पराणदण्ड दे दिया और वह जंगली जानवरों के सामने फेंक दी गई।
लोलस अपनी अखंड, सम्पूर्ण कामना से थायस को प्यार करता था। उसकी परेम कल्पना ने विराट रूप धारण कर लिया था, जिससे उसकी किशोर चेतना सशंक हो जाती थी। थायस अन्तःकरण से कहती-'मैंने तुम्हारे सिवाय और किसी से परेम नहीं किया।'
लोलस जवाब देता-'तुम संसार में अद्वितीय हो।' दोनों पर छः महीने तक यह नशा सवार रहा। अन्त में टूट गया। थायस को ऐसा जान पड़ता कि मेरा हृदय शून्य और निर्जन है। वहां से कोई चीज गायब हो गयी है। लोलस उसकी दृष्टि में कुछ और मालूम होता था। वह सोचती-मुझमें सहसा यह अन्तर क्यों हो गया ? यह क्या बात है कि लोलस अब और मनुष्यों कासा हो गया है, अपनासा नहीं रहा ? मुझे क्या हो गया है ?
यह दशा उसे असह्य परतीत होने लगी। अखण्ड परेम के आस्वादन के बाद अब यह नीरस, शुष्क व्यापार उसकी तृष्णा को तृप्त न कर सका। वह अपने खोये हुए लोलस को किसी अन्य पराणी में खोजने की गुप्त इच्छा को हृदय में छिपाये हुए, लोलस के पास से चली गयी। उसने सोचा परेम रहने पर भी किसी पुरुष के साथ रहना। उस आदमी के साथ रहने से कहीं सुखकर है जिससे अब परेम नहीं रहा। वह फिर नगर के विषयभोगियों के साथ उन धमोर्त्सवों में जाने लगी जहां वस्त्रहीन युवतियां मन्दिरों में नृत्य किया करती थीं, या जहां वेश्याओं के गोलके-गोल नदी में तैरा करते थे। वह उस विलासपिरय और रंगीले नगर के रागरंग में दिल खोलकर भाग लेने लगी। वह नित्य रंगशालाओं में आती जहां चतुर गवैये और नर्तक देशदेशान्तरों से आकर अपने करतब दिखाते थे और उत्तेजना के भूखे दर्शकवृन्द वाहवाह की ध्वनि से आसमान सिर पर उठा लेते थे।
थायस गायकों, अभिनेताओं, विशेषतः उन स्त्रियों के चालाल को बड़े ध्यान से देखा करती थी जो दुःखान्त नाटकों में मनुष्य से परेम करने वाली देवियों या देवताओं से परेम करने वाली स्त्रियों का अभिनय करती थीं। शीघर ही उसे वह लटके मालूम हो गये, जिनके द्वारा वह पात्राएं दर्शकों का मन हर लेती थीं, और उसने सोचा, क्या मैं जो उन सबों से रूपवती हूं, ऐसा ही अभिनय करके दर्शकों को परसन्न नहीं कर सकती? वह रंगशाला व्यवस्थापक के पास गयी और उससे कहा कि मुझे भी इस नाट्यमंडली में सम्मिलित कर लीजिए। उसके सौन्दर्य ने उसकी पूर्वशिक्षा के साथ मिलकर उसकी सिफारिश की। व्यवस्थापक ने उसकी परार्थना स्वीकार कर ली। और वह पहली बार रंगमंच पर आयी।
पहले दर्शकों ने उसका बहुत आशाजनक स्वागत न किया। एक तो वह इस काम में अभ्यस्त न थी, दूसरे उसकी परशंसा के पुल बांधकर जनता को पहले ही से उत्सुक न बनाया गया था। लेकिन कुछ दिनों तक गौण चरित्रों का पार्ट खेलने के बाद उसके यौवन ने वह हाथपांव निकाले कि सारा नगर लोटपोट हो गया। रंगशाला में कहीं तिल रखने भर की जगह न बचती। नगर के बड़ेबड़े हाकिम, रईस, अमीर, लोकमत के परभाव से रंगशाला में आने पर मजबूर हुए। शहर के चौकीदार, पल्लेदार, मेहतर, घाट के मजदूर, दिनदिन भर उपवास करते थे कि अपनी जगह सुरक्षित करा लें। कविजन उसकी परशंसा में कवित्त कहते। लम्बी दायिों वाले विज्ञानशास्त्री व्यायामशालाओं में उसकी निन्दा और उपेक्षा करते। जब उसका तामझाम सड़क पर से निकलता तो ईसाई पादरी मुंह फेर लेते थे। उसके द्वार की चौखट पुष्पमालाओं से की रहती थी। अपने परेमियों से उसे इतना अतुल धन मिलता कि उसे गिनना मुश्किल था। तराजू पर तौल लिया जाता था। कृपण बू़ों की संगरह की हुई समस्त सम्पत्ति उसके ऊपर कौड़ियों की भांति लुटाई जाती थी। पर उसे गर्व न था। ऐंठ न थी। देवताओं की कृपादृष्टि और जनता की परशंसाध्वनि से उसके हृदय को गौरवयुक्त आनन्द होता था। सबकी प्यारी बनकर वह अपने को प्यार करने लगी थी।
कई वर्ष तक ऐन्टिओकवासियों के परेम और परशंसा का सुख उठाने के बाद उसके मन में परबल उत्कंठा हुई कि इस्कन्द्रिया चलूं और उस नगर में अपना ठाटबाट दिखाऊं, जहां बचपन में मैं नंगी और भूखी, दरिद्र और दुर्बल, सड़कों पर मारीमारी फिरती थी और गलियों की खाक छानती थी। इस्कन्द्रियां आंखें बिछाये उसकी राह देखता था। उसने बड़े हर्ष से उसका स्वागत किया और उस पर मोती बरसाये। वह क्रीड़ाभूमि में आती तो धूम मच जाती। परेमियों और विलासियों के मारे उसे सांस न मिलती, पर वह किसी को मुंह न लगाती। दूसरा, लोलस उसे जब न मिला तो उसने उसकी चिन्ता ही छोड़ दी। उस स्वर्गसुख की अब उसे आशा न थी।
उसके अन्य परेमियों में तत्त्वज्ञानी निसियास भी था जो विरक्त होने का दावा करने पर भी उसके परेम का इच्छुक था। वह धनवान था पर अन्य धनपतियों की भांति अभिमानी और मन्दबुद्धि न था। उसके स्वभाव में विनय और सौहार्द की आभा झलकती थी, किन्तु उसका मधुरहास्य और मृदुकल्पनाएं उसे रिझाने में सफल न होतीं। उसे निसियास से परेम न था, कभीकभी उसके सुभाषितों से उसे चि होती थी। उसके शंकावाद से उसका चित्त व्यगर हो जाता था, क्योंकि निसियास की श्रद्घा किसी पर न थी और थायस की श्रद्घा सभी पर थी। वह ईश्वर पर, भूतपरेतों पर जादूटोने पर, जन्त्रमन्त्र पर पूरा विश्वास करती थी। उसकी भक्ति परभु मसीह पर भी थी, स्याम वालों की पुनीता देवी पर भी उसे विश्वास था कि रात को जब अमुक परेत गलियों में निकलता है तो कुतियां भूंकती हैं। मारण, उच्चाटन, वशीकरण के विधानों पर और शक्ति पर उसे अटल विश्वास था। उसका चित्त अज्ञात न लिए उत्सुक रहता था। वह देवताओं की मनौतियां करती थी और सदैव शुभाशाओं में मग्न रहती थी भविष्य से यह शंका रहती थी, फिर भी उसे जानना चाहती थी। उसके यहां, ओझे, सयाने, तांत्रिक, मन्त्र जगाने वाले, हाथ देखने वाले जमा रहते थे। वह उनके हाथों नित्य धोखा खाती पर सतर्क न होती थी। वह मौत से डरती थी और उससे सतर्क रहती थी। सुखभोग के समय भी उसे भय होता था कि कोई निर्दय कठोर हाथ उसका गला दबाने के लिए ब़ा आता है और वह चिल्ला उठती थी।
निसियास कहता था-'पिरये, एक ही बात है, चाहे हम रुग्ण और जर्जर होकर महारात्रि की गोद में समा जायें, अथवा यहीं बैठे, आनन्दभोग करते, हंसतेखेलते, संसार से परस्थान कर जायें। जीवन का उद्देश्य सुखभोग है। आओ जीवन की बाहार लूटें। परेम से हमारा जीवन सफल हो जायेगा। इन्द्रियों द्वारा पराप्त ज्ञान ही यथार्थ ज्ञान है। इसके सिवाय सब मिथ्या के लिए अपने जीवन सुख में क्यों बाधा डालें ?'
थायस सरोष होकर उत्तर देती-'तुम जैसे मनुष्यों से भगवान बचाये, जिन्हें कोई आशा नहीं, कोई भय नहीं। मैं परकाश चाहती हूं, जिससे मेरा अन्तःकरण चमक उठे।'
जीवन के रहस्य को समझने के लिए उसे दर्शनगरन्थों को पॄना शुरू किया, पर वह उसकी समझ में न आये। ज्योंज्यों बाल्यावस्था उससे दूर होती जाती थी, त्योंत्यों उसकी याद उसे विकल करती थी। उसे रातों को भेष बदलकर उन सड़कों, गलियों, चौराहों पर घूमना बहुत पिरय मालूम होता जहां उसका बचपन इतने दुःख से कटा था। उसे अपने मातापिता के मरने का दुःख होता था, इस कारण और भी कि वह उन्हें प्यार न कर सकी थी।
जब किसी ईसाई पूजक से उसकी भेंट हो जाती तो उसे अपना बपतिस्मा याद आता और चित्त अशान्त हो जाता। एक रात को वह एक लम्बा लबादा ओ़े, सुन्दर केशों को एक काले टोप से छिपाये, शहर के बाहर विचर रही थी कि सहसा वह एक गिरजाघर के सामने पहुंच गयी। उसे याद आया, मैंने इसे पहले भी देखा है। कुछ लोग अन्दर गा रहे थे और दीवार की दरारों से उज्ज्वल परकाशरेखाएं बाहर झांक रही थीं। इसमें कोई नवीन बात न थी, क्योंकि इधर लगभग बीस वर्षों से ईसाईधर्म में को विघ्नबाधा न थी, ईसाई लोग निरापद रूप से अपने धमोर्त्सव करते थे। लेकिन इन भजनों में इतनी अनुरक्ति, करुण स्वर्गध्वनि थी, जो मर्मस्थल में चुटकियां लेती हुई जान पड़ती थीं। थायस अन्तःकरण के वशीभूत होकर इस तरह द्वार, खोलकर भीतर घुस गयी मानो किसी ने उसे बुलाया है। वहां उसे बाल, वृद्ध, नरनारियों का एक बड़ा समूह एक समाधि के सामने सिजदा करता हुआ दिखाई दिया। यह कबर केवल पत्थर की एक ताबूत थी, जिस पर अंगूर के गुच्छों और बेलों के आकार बने हुए थे। पर उस पर लोगों की असीम श्रद्घा थी। वह खजूर की टहनियों और गुलाब की पुष्पमालाओं से की हुई थी। चारों तरफ दीपक जल रहे थे और उसके मलिन परकाश में लोबान, ऊद आदि का धुआं स्वर्गदूतों के वस्त्रों की तहोंसा दीखता था, और दीवार के चित्र स्वर्ग के दृश्यों केसे। कई श्वेत वस्त्रधारी पादरी कबर के पैरों पर पेट के बल पड़े हुए थे। उनके भजन दुःख के आनन्द को परकट करते थे और अपने शोकोल्लास में दुःख और सुख, हर्ष और शोक का ऐसा समावेश कर रहे थे कि थायस को उनके सुनने से जीवन के सुख और मृत्यु के भय, एक साथ ही किसी जलस्त्रोत की भांति अपनी सचिन्तस्नायुओं में बहते हुए जान पड़े।
जब गाना बन्द हुआ तो भक्तजन उठे और एक कतार मंें कबर के पास जाकर उसे चूमा। यह सामान्य पराणी थे; जो मजूरी करके निवार्ह करते थे। क्या ही धीरेधीरे पग उठाते, आंखों में आंसू भरे, सिर झुकाये, वे आगे ब़ते और बारीबारी से कबर की परिक्रमा करते थे। स्त्रियों ने अपने बालकों को गोद में उठाकर कबर पर उनके होंठ रख दिये।
थायस ने विस्मित और चिन्तित होकर एक पादरी से पूछा-'पूज्य पिता, यह कैसा समारोह है ?'
पादरी ने उत्तर दिया-'क्या तुम्हें नहीं मालूम कि हम आज सन्त थियोडोर की जयन्ती मना रहे हैं ? उनका जीवन पवित्र था। उन्होंने अपने को धर्म की बलिवेदी पर च़ा दिया, और इसीलिए हम श्वेत वस्त्र पहनकर उनकी समाधि पर लाल गुलाब के फूल च़ाने आये हैं।'
यह सुनते ही थायस घुटनों के बल बैठ गयी और जोर से रो पड़ी। अहमद की अर्धविस्मृत स्मृतियां जागरत हो गयीं। उस दीन, दुखी, अभागे पराणी की कीर्ति कितनी उज्ज्वल है ! उसके नाम पर दीपक जलते हैं, गुलाब की लपटें आती हैं, हवन के सुगन्धित धुएं उठते हैं, मीठे स्वरों का नाद होता है और पवित्र आत्माएं मस्तक झुकाती हैं। थायस ने सोचा-अपने जीवन में वह पुष्यात्मा था, पर अब वह पूज्य और उपास्य हो गया हैं ! वह अन्य पराणियों की अपेक्षा क्यों इतना श्रद्घास्पद है ? वह कौनसी अज्ञात वस्तु है जो धन और भोग से भी बहुमूल्य है ?
वह आहिस्ता से उठी और उस सन्त की समाधि की ओर चली जिसने उसे गोद में खेलाया था। उसकी अपूर्व आंखों में भरे हुए अश्रुबिन्दु दीपक के आलोक में चमक रहे थे। तब वह सिर झुकाकर, दीनभाव से कबर के पास गयी और उस पर अपने अधरों से अपनी हार्दिक श्रद्घा अंकित कर दी-उन्हीं अधरों से जो अगणित तृष्णाओं का क्रीड़ाक्षेत्र थे !
जब वह घर आयी तो निसियास को बाल संवारे, वस्त्रों मंें सुगन्ध मले, कबा के बन्द खोले बैठे देखा। वह उसके इन्तजार में समय काटने के लिए एक नीतिगरंथ पॄ रहा था। उसे देखते ही वह बांहें खोले उसकी ब़ा और मृदुहास्य से बोला-'कहां गयी थीं, चंचला देवी ? तुम जानती हो तुम्हारे इन्तजार में बैठा हुआ, मैं इस नीतिगरंथ में क्या पॄ रहा था?' नीति के वाक्य और शुद्घाचरण के उपदेश ?' 'कदापि नहीं। गरंथ के पन्नों पर अक्षरों की जगह अगणित छोटीछोटी थायसें नृत्य कर रही थीं। उनमें से एक भी मेरी उंगली से बड़ी न थी, पर उनकी छवि अपार थी और सब एक ही थायस का परतिबिम्ब थीं। कोई तो रत्नजड़ित वस्त्र पहने अकड़ती हुई चलती थी, कोई श्वेत मेघसमूह के सदृश्य स्वच्छ आवरण धारण किये हुए थी; कोई ऐसी भी थीं जिनकी नग्नता हृदय में वासना का संचार करती थी। सबके पीछे दो, एक ही रंगरूप की थीं। इतनी अनुरूप कि उनमें भेद करना कठिन था। दोनों हाथमें-हाथ मिलाये हुए थीं, दोनों ही हंसती थीं। पहली कहती थी-मैं परेम हूं। दूसरी कहती थी-मैं नृत्य हूं।'
यह कहकर निसियास ने थायस को अपने करपाश में खींच लिया। थायस की आंखें झुकी हुई थीं। निसियास को यह ज्ञान न हो सका कि उनमें कितना रोष भरा हुआ है। वह इसी भांति सूक्तियों की वर्षा करता रहा, इस बात से बेखबर कि थायस का ध्यान ही इधर नहीं है। वह कह रहा था-'जब मेरी आंखों के सामने यह शब्द आये-अपनी आत्मशुद्धि के मार्ग में कोई बाधा मत आने दो, तो मैंने पॄा 'थायस के अधरस्पर्श अग्नि से दाहक और मधु से मधुर हैं।' इसी भांति एक पण्डित दूसरे पण्डितों के विचारों को उलटपलट देता है; और यह तुम्हारा ही दोष है। यह सर्वथा सत्य है कि जब तक हम वही हैं जो हैं, तब तक हम दूसरों के विचारों में अपने ही विचारों की झलक देखते रहेंगे।'
वह अब भी इधर मुखातिब न हुई। उसकी आत्मा अभी तक हब्शी की कबर के सामने झुकी हुई थी। सहसा उसे आह भरते देखकर उसने उसकी गर्दन का चुम्बन कर लिया और बोला-'पिरये, संसार में सुख नहीं है जब तक हम संसार को भूल न जायें। आओ, हम संसार से छल करें, छल करके उससे सुख लें-परेम में सबकुछ भूल जायें।'
लेकिन उसने उसे पीछे हटा दिया और व्यथित होकर बोली-'तुम परेम का मर्म नहीं जानते ! तुमने कभी किसी से परेम नहीं किया। मैं तुम्हें नहीं चाहती, जरा भी नहीं चाहती। यहां से चले जाओ, मुझे तुमसे घृणा होती है। अभी चले जाओ, मुझे तुम्हारी सूरत से नफरत है। मुझे उन सब पराणियों से घृणा है, धनी है, आनन्दभोगी हैं। जाओ, जाओ। दया और परेम उन्हीं में है जो अभागे हैं। जब मैं छोटी थी तो मेरे यहां एक हब्शी था जिसने सलीब पर जान दी। वह सज्जन था, वह जीवन के रहस्यों को जानता था। तुम उसके चरण धोने योग्य भी नहीं हो। चले जाओ। तुम्हारा स्त्रियों कासा शृंगार मुझे एक आंख नहीं भाता। फिर मुझे अपनी सूरत मत दिखाना।'
यह कहतेकहते वह फर्श पर मुंह के बल गिर पड़ी और सारी रात रोकर काटी। उसने संकल्प किया कि मैं सन्त थियोडोर की भांति और दरिद्र दशा में जीवन व्यतीत करुंगी।
दूसरे दिन वह फिर उन्हीं वासनाओं में लिप्त हो गयी जिनकी उसे चाट पड़ गयी थी। वह जानती थी कि उसकी रूपशोभा अभी पूरे तेज पर है, पर स्थायी नहीं इसीलिए इसके द्वारा जितना सुख और जितनी ख्याति पराप्त हो सकती थी उसे पराप्त करने के लिए वह अधीर हो उठी। थियेटर में वह पहले की अपेक्षा और देर तक बैठकर पुस्तकावलोकन किया करती। वह कवियों, मूर्तिकारों और चित्रकारों की कल्पनाओं को सजीव बना देती थी, विद्वानों और तत्त्वज्ञानियों को उसकी गति, अगंविन्यास और उस पराकृतिक माधुर्य की झलक नजर आती थी जो समस्त संसार में व्यापक है और उनके विचार में ऐसी अर्पूव शोभा स्वयं एक पवित्र वस्तु थी। दीन, दरिद्र, मूर्ख लोग उसे एक स्वगीर्य पदार्थ समझते थे। कोई किसी रूप में उसकी उपासना करता था, कोई किसी रूप में। कोई उसे भोग्य समझता था, कोई स्तुत्य और कोई पूज्य। किन्तु इस परेम, भक्ति और श्रद्घा की पात्रा होकर भी वह दुःखी थी, मृत्यु की शंका उसे अब और भी अधिक होने लगी। किसी वस्तु से उसे इस शंका से निवृत्ति न होती। उसका विशाल भवन और उपवन भी, जिनकी शोभा अकथनीय थी और जो समस्त नगर में जनश्रुति बने हुए थे, उसे आश्वस्त करने में असफल थे।
इस उपवन में ईरान और हिन्दुस्तान के वृक्ष थे, जिनके लाने और पालने में अपरिमित धन व्यय हुआ था। उनकी सिंचाई के लिए एक निर्मल जल धारा बहायी गयी थी। समीप ही एक झील बनी हुई थी। जिसमें एक कुशल कलाकार के हाथों सजाये हुए स्तम्भचिह्नों और कृत्रिम पहाड़ियों तक तट पर की सुन्दर मूर्तियों का परतिबिम्ब दिखाई देता था। उपवन के मध्य में 'परियों का कुंज' था। यह नाम इसलिए पड़ा था कि उस भवन के द्वार पर तीन पूरे कद की स्त्रियों की मूर्तियां खड़ी थीं। वह सशंक होकर पीछे ताक रही थीं कि कोई देखता न हो। मूर्तिकार ने उनकी चितवनों द्वारा मूर्तियों में जान डाल दी थी। भवन में जो परकाश आता था वह पानी की पतली चादरों से छनकर मद्धिम और रंगीन हो जाता था। दीवारों पर भांतिभांति की झालरें, मालाएं और चित्र लटके हुए थे। बीच में एक हाथीदांत की परम मनोहर मूर्ति थी जो निसियास ने भेंट की थी। एक तिपाई पर एक काले ष्पााण की बकरी की मूर्ति थी, जिसकी आंखें नीलम की बनी हुई थीं। उसके थनों को घेरे हुए छः चीनी के बच्चे खड़े थे, लेकिन बकरी अपने फटे हुए खुर उठाकर ऊपर की पहाड़ी पर उचक जाना चाहती थी। फर्श पर ईरानी कालीनें बिछी हुई थीं, मसनदों पर कैथे के बने हुए सुनहरे बेलबूटे थे। सोने के धूपदान से सुगन्धित धुएं उठ रहे थे, और बड़ेबड़े चीनी गमलों में फूलों से लदे हुए पौधे सजाये हुए थे। सिरे पर, ऊदी छाया में, एक बड़े हिन्दुस्तानी कछुए के सुनहरे नख चमक रहे थे जो पेट के बल उलट दिया गया था। यही थायस का शयनागार था। इसी कछुए के पेट पर लेटी हुई वह इस सुगन्ध और सजावट और सुषमा का आनन्द उठाती थी, मित्रों से बातचीत करती थी और या तो अभिनयकला का मनन करती थी, या बीते हुए दिनों का।
तीसरा पहर था। थायस परियों के कुंज में शयन कर रही थी। उसने आईने में अपने सौन्दर्य की अवनति के परथम चिह्न देखे थे, और उसे इस विचार से पीड़ा हो रही थी कि झुर्रियों और श्वेत बालों का आक्रमण होने वाला है उसने इस विचार से अपने को आश्वासन देने की विफल चेष्टा की कि मैं जड़ीबूटियों के हवन करके मंत्रों द्वारा अपने वर्ण की कोमलता को फिर से पराप्त कर लूंगी। उसके कानों में इन शब्दों की निर्दय ध्वनि आयी-'थायस, तू बुयि हो जायेगी !' भय से उसके माथे पर ठण्डाठण्डा पसीना आ गया। तब उसने पुनः अपने को संभालकर आईने में देखा और उसे ज्ञात हुआ कि मैं अब भी परम सुन्दरी और परेयसी बनने के योग्य हूं। उसने पुलकित मन से मुस्कराकर मन में कहा-आज भी इस्कन्द्रिया में काई ऐसी रमणी नहीं है जो अंगों की चपलता और लचक में मुझसे टक्कर ले सके। मेरी बांहों की शोभा अब भी हृदय को खींच सकती है, यथार्थ में यही परेम का पाश है !
वह इसी विचार में मग्न थी कि उसने एक अपरिचित मनुष्य को अपने सामने आते देखा। उसकी आंखों में ज्वाला थी, दा़ी ब़ी हुई थी और वस्त्र बहुमूल्य थे। उसके हाथ में आईना छूटकर गिर पड़ा और वह भय से चीख उठी।
पापनाशी स्तम्भित हो गया। उसका अपूर्व सौन्दर्य देखकर उसने शुद्ध अन्तःकरण से परार्थना की-भगवान मुझे ऐसी शक्ति दीजिए कि इस स्त्री का मुख मुझे लुब्ध न करे, वरन तेरे इस दास की परतिज्ञा को और भी दृ़ करे।
तब अपने को संभालकर वह बोला-'थायस, मैं एक दूर देश में रहता हूं, तेरे सौन्दर्य की परशंसा सुनकर तेरे पास आया हूं। मैंने सुना था तुमसे चतुर अभिनेत्री और तुमसे मुग्धकर स्त्री संसार में नहीं है। तुम्हारे परेमरहस्यों और तुम्हारे धन के विषय में जो कुछ कहा जाता है वह आश्चर्यजनक है, और उससे 'रोडोप' की कथा याद आती है, जिसकी कीर्ति को नील के मांझी नित्य गाया करते हैं। इसलिए मुझे भी तुम्हारे दर्शनों की अभिलाषा हुई और अब मैं देखता हूं कि परत्यक्ष सुनीसुनाई बातों से कहीं ब़कर है। जितना मशहूर है उससे तुम हजार गुना चतुर और मोहिनी हो। वास्तव में तुम्हारे सामने बिना मतवालों की भांति डगमगाये आना असम्भव है।'
यह शब्द कृत्रिम थे, किन्तु योगी ने पवित्र भक्ति से परभावित होकर सच्चे जोश से उनका उच्चारण किया। थायस ने परसन्न होकर इस विचित्र पराणी की ओर ताका जिससे वह पहले भयभीत हो गयी थी। उसके अभद्र और उद्दण्ड वेश ने उसे विस्मित कर दिया। उसे अब तक जितने मनुष्य मिले थे, यह उन सबों से निराला था। उसके मन में ऐसे अद्भुत पराणी के जीवनवृत्तान्त जानने की परबल उत्कंठा हुई। उसने उसका मजाक उड़ाते हुए कहा-'महाशय, आप परेमपरदर्शन में बड़े कुशल मालूम होते हैं। होशियार रहियेगा कि मेरी चितबनें आपके हृदय के पार न हो जायें। मेरे परेम के मैदान में जरा संभलकर कदम रखियेगा।'
पापनाशी बोला-'थामस, मुझे तुमसे अगाध परेम है। तुम मुझे जीवन और आत्मा से भी पिरय हो। तुम्हारे लिए मैंने अपना वन्यजीवन छोड़ा है, तुम्हारे लिए मेरे होंठों से, जिन्होंने मौनवरत धारण किया था, अपवित्र शब्द निकले हैं। तुम्हारे लिए मैंने वह देखा जो न देखना चाहिए था, वह सुना है जो मेरे लिए वर्जित था। तुम्हारे लिए मेरी आत्मा तड़प रही है, मेरा हृदय अधीर हो रहा है और जलस्त्रोत की भांति विचार की धाराएं परवाहित हो रही हैं। तुम्हारे लिए मैं अपने नंगे पैर सर्पों और बिच्छुओं पर रखते हुए भी नहीं हिचका हूं। अब तुम्हें मालूम हो गया होगा कि मुझे तुमसे कितना परेम है। लेकिन मेरा परेम उन मनुष्यों कासा नहीं है जो वासना की अग्नि से जलते हुए तुम्हारे पास जीवभक्षी व्याघरों की, और उन्मत्त सांड़ों की भांति दौड़े आते हैं। उनका वही परेम होता है जो सिंह को मृगशावक से। उनकी पाशविक कामलिप्सा तुम्हारी आत्मा को भी भस्मीभूत कर डालेगी। मेरा परेम पवित्र है, अनन्त है, स्थायी है। मैं तुमसे ईश्वर के नाम पर, सत्य के नाम पर परेम करता हूं। मेरा हृदय पतितोद्घार और ईश्वरीय दया के भाव से परिपूर्ण है। मैं तुम्हें फलों से की हुई शराब की मस्ती से और एक अल्परात्रि के सुखस्वप्न से कहीं उत्तम पदार्थों का वचन देने आया हूं। मैं तुम्हें महापरसाद और सुधारसपान का निमन्त्रण देने आया हूं। मैं तुम्हें उस आनन्द का सुखसंवाद सुनाने आया हूं जो नित्य, अमर, अखण्ड है। मृत्युलोक के पराणी यदि उसको देख लें तो आश्चर्य से भर जायें।'
थायस ने कुटिल हास्य करके उत्तर दिया-'मित्र, यदि वह ऐसा अद्भुत परेम है तो तुरन्त दिखा दो। एक क्षण भी विलम्ब न करो। लम्बीलम्बी वक्तृताओं से मेरे सौन्दर्य का अपमान होगा। मैं आनन्द का स्वाद उठाने के लिए रो रही हूं। किन्तु जो मेरे दिल की बात पूछो, तो मुझे इस कोरी परशंसा के सिवा और कुछ हाथ न आयेगा। वादे करना आसान है; उन्हें पूरा करना मुश्किल है। सभी मनष्यों में कोईन-कोई गुण विशेष होता है। ऐसा मालूम होता है कि तुम वाणी में निपुण हो। तुम एक अज्ञात परेम का वचन देते हो। मुझे यह व्यापार करते इतने दिन हो गये और उसका इतना अनुभव हो गया है कि अब उसमें किसी नवीनता की किसी रहस्य की आशा नहीं रही। इस विषय का ज्ञान परेमियों को दार्शनिकों से अधिक होता है।'
'थायस, दिल्लगी की बात नहीं है, मैं तुम्हारे लिए अछूता परेम लाया हूं।'
'मित्र, तुम बहुत देर में आये। मैं सभी परकार के परेमों का स्वाद ले चुकी हूं।'
'मैं जो परेम लाया हूं, वह उज्ज्वल है, श्रेय है! तुम्हें जिस परेम का अनुभव हुआ है वह निंद्य और त्याज्य है।'
थायस ने गर्व से गर्दन उठाकर कहा-'मित्र, तुम मुंहफट जान पड़ते हो। तुम्हें गृहस्वामिनी के परति मुख से ऐसे शब्द निकालने में जरा भी संकोच नहीं होता ? मेरी ओर आंख उठाकर देखो और तब बताओ कि मेरा स्वरूप निन्दित और पतित पराणियों ही कासा है। नहीं, मैं अपने कृत्यों पर लज्जित नहीं हूं। अन्य स्त्रियां भी, जिनका जीवन मेरे ही जैसा है, अपने को नीच और पतित नहीं समझतीं, यद्यपि, उनके पास न इतना धन है और न इतना रूप। सुख मेरे पैरों के नीचे आंखें बिछाये रहता है, इसे सारा जगत जानता है। मैं संसार के मुकुटधारियों को पैर की धूलि समझती हूं। उन सबों ने इन्हीं पैरों पर शीश नवाये हैं। आंखें उठाओ। मेरे पैरों की ओर देखो। लाखों पराणी उनका चुम्बन करने के लिए अपने पराण भेंट कर देंगे। मेरा डीलडौल बहुत बड़ा नहीं है, मेरे लिए पृथ्वी पर बहुत स्थान की जरूरत नहीं। जो लोग मुझे देवमन्दिर के शिखर पर से देखते हैं, उन्हें मैं बालू के कण के समान दीखती हूं, पर इस कण ने मनुष्यों में जितनी ईष्यार्, जितना द्वेष, जितनी निराशा, जितनी अभिलाषा और जितने पापों का संचार किया है उनके बोझ से अटल पर्वत भी दब जायेगा। जब मेरी कीर्ति समस्त संसार में परसारित हो रही है तो तुम्हारी लज्जा और निद्रा की बात करना पागलपन नहीं तो और क्या है ?'
पापनाशी ने अविचलित भाव से उत्तर दिया-'सुन्दरी, यह तुम्हारी भूल है। मनुष्य जिस बात की सराहना करते हैं वह ईश्वर की दृष्टि में पाप है। हमने इतने भिन्नभिन्न देशों में जन्म लिया है कि यदि हमारी भाषा और विचार अनुरूप न हों तो कोई आश्चर्य की बात नहीं। लेकिन मैं ईश्वर को साक्षी देकर कहता हूं कि मैं तुम्हारे पास से जाना नहीं चाहता। कौन मेरे मुख में ऐसे आग्नेय शब्दों को परेरित करेगा जो तुम्हें मोम की भांति पिघला दें कि मेरी उंगलियां तुम्हें अपनी इच्छा के अनुसार रूप दे सकें ? ओ नारीरत्न ! यह कौनसी शक्ति है जो तुम्हें मेरे हाथों में सौंप देगी कि मेरे अन्तःकरण में निहित सद्परेरणा तुम्हारा पुनसरंस्कार करके तुम्हें ऐसा नया और परिष्कृत सौन्दर्य परदान करे कि तुम आनन्द से विह्वल हो पुकार उठो, मेरा फिर से नया संस्कार हुआ ? कौन मेरे हृदय में उस सुधास्त्रोत को परवाहित करेगा कि तुम उसमें नहाकर फिर अपनी मौलिक पवित्रता लाभ कर सको ? कौन मुझे मर्दन की निर्मल धारा में परिवर्तित कर देगा जिसकी लहरों का स्पर्श तुम्हें अनन्त सौन्दर्य से विभूषित कर दे ?'
थायस का क्रोध शान्त हो गया। उसने सोचा-यह पुरुष अनन्त जीवन के रहस्यों में परिचित है, और जो कुछ वह कह सकता है उसमें ऋषिवाक्यों कीसी परतिभा है। यह अवश्य कोई कीमियागर है और ऐसे गुप्तमन्त्र जानता है जो जीर्णावस्था का निवारण कर सकते हैं। उसने अपनी देह को उसकी इच्छाओं को समर्पित करने का निश्चय कर लिया। वह एक सशंक पक्षी की भांति कई कदम पीछे हट गयी और अपने पलंग पट्टी पर बैठकर उसकी परतीक्षा करने लगी। उसकी आंखें झुकी हुई थीं और लम्बी पलकों की मलिन छाया कपालों पर पड़ रही थी। ऐसा जान पड़ता था कि कोई बालक नदी के किनारे बैठा हुआ किसी विचार में मग्न है।
किन्तु पापनाशी केवल उसकी ओर टकटकी लगाये ताकता रहा, अपनी जगह से जौ भर भी न हिला। उसके घुटने थरथरा रहे थे और मालूम होता था कि वे उसे संभाल न सकेंगे। उसका तालू सूख गया था, कानों में तीवर भनभनाहट की आवाज आने लगी। अकस्मात उसकी आंखों के सामने अन्धकार छा गया, मानो समस्त भवन मेघाच्छादित हो गया है। उसे ऐसा भाषित हुआ कि परभु मसीह ने इस स्त्री को छिपाने के निमित्त उसकी आंखों पर परदा डाल दिया है। इस गुप्त करावलम्ब से आश्वस्त और सशक्त होकर उसने ऐसे गम्भीर भाव से कहा जो किसी वृद्ध तपस्वी के यथायोग्य था-क्या तुम समझती हो कि तुम्हारा यह आत्महनन ईश्वर की निगाहों से छिपा हुआ है ?'
उसने सिर हिलाकर कहा-'ईश्वर ? ईश्वर से कौन कहता है कि सदैव परियों के कुंज पर आंखें जमाये रखे ? यदि हमारे काम उसे नहीं भाते तो वह यहां से चला क्यों नहीं जाता ? लेकिन हमारे कर्म उसे बुरे लगते ही क्यों हैं ? उसी ने हमारी सृष्टि की है। जैसा उसने बनाया है वैसे ही हम हैं। जैसी वृत्तियां उसने हमें दी हैं उसी के अनुसार हम आचरण करते हैं ! फिर उसे हमसे रुष्ट होने का, अथवा विस्मित होने का क्या अधिकार है ? उसकी तरफ से लोग बहुतसी मनग़न्त बातें किया करते हैं और उसको ऐसेऐसे विचारों का श्रेय देते हैं जो उसके मन में कभी न थे। तुमको उसके मन की बातें जानने का दावा है। तुमको उसके चरित्र का यथार्थ ज्ञान है। तुम कौन हो कि उसके वकील बनकर मुझे ऐसीऐसी आशाएं दिलाते हो ?'
पापनाशी ने मंगनी के बहुमूल्य वस्त्र उतारकर नीचे का मोटा कुरता दिखाते हुए कहा-'मैं धमार्श्रम का योगी हूं। मेरा नाम पापनाशी है। मैं उसी पवित्र तपोभूमि से आ रहा हूं। ईश्वर की आज्ञा से मैं एकान्तसेवन करता हूं। मैंने संसार से और संसार के पराणियों से मुंह मोड़ लिया था। इस पापमय संसार में निर्लिप्त रहना ही मेरा उद्दिष्ट मार्ग है। लेकिन तेरी मूर्ति मेरी शान्तिकुटीर में आकर मेरे सम्मुख खड़ी हुई और मैंने देखा कि तू पाप और वासना में लिप्त है, मृत्यु तुझे अपना गरास बनाने को खड़ी है। मेरी दया जागृत हो गयी और तेरा उद्घार करने के लिए आ उपस्थित हुआ हूं। मैं तुझे पुकारकर कहता हूं-थायस, उठ, अब समय नहीं है।'
योगी के यह शब्द सुनकर थायस भय से थरथर कांपने लगी। उसका मुख श्रीहीन हो गया, वह केश छिटकाये, दोनों हाथ जोड़े रोती और विलाप करती हुई उसके पैरों पर गिर पड़ी और बोली-'महात्मा जी, ईश्वर के लिए मुझ पर दया कीजिए। आप यहां क्यों आये हैं ? आपकी क्या इच्छा है ? मेरा सर्वनाश न कीजिए। मैं जानता हूं कि तपोभूमि के ऋषिगण हम जैसी स्त्रियों से घृणा करते हैं, जिनका जन्म ही दूसरों को परसन्न रखने के लिए होता है। मुझे भय हो रहा है कि आप मुझसे घृणा करते हैं और मेरा सर्वनाश करने पर उद्यत हैं। कृपया यहां से सिधारिए। मैं आपकी शक्ति और सिद्धि के सामने सिर झुकाती हूं। लेकिन आपका मुझ पर कोप करना उचित नहीं है, क्योंकि मैं अन्य मनुष्यों की भांति आप लोगों की भिक्षावृत्ति और संयम की निन्दा नहीं करती। आप भी मेरे भोगविलास को पाप न समझिए। मैं रूपवती हूं और अभिनय करने में चतुर हूं। मेरा काबू न अपनी दशा पर है, और न अपनी परकृति पर। मैं जिस काम के योग्य बनायी गयी हूं वही करती हूं। मनुष्यों की मुग्ध करने ही के निमित्त मेरी सृष्टि हुई है। आप भी तो अभी कह रहे थे कि मैं तुम्हें प्यार करता हूं। अपनी सिद्धियों से मेरा अनुपकार न कीजिए। ऐसा मन्त्र न चलाइए कि मेरा सौन्दर्य नष्ट हो जाय, या मैं पत्थर तथा नमक की मूर्ति बन जाऊं। मुझे भयभीत न कीजिए। मेरे तो पहले ही से पराण सूखे हुए हैं। मुझे मौत का मुंह न दिखाइए, मुझे मौत से बहुत डर लगता है।'
पापनाशी ने उसे उठने का इशारा किया और बोला-'बच्चा, डर मत। तेरे परति अपमान या घृणा का शब्द भी मेरे मुंह से न निकलेगा। मैं उस महान पुरुष की ओर से आया हूं, जो पापियों को गले लगाता था, वेश्याओं के घर भोजन करता था, हत्यारों से परेम करता था, पतितों को सान्त्वना देता था। मैं स्वयं पापमुक्त नहीं हूं कि दूसरों पर पत्थर फेंकूं। मैंने कितनी ही बार उस विभूति का दुरुपयोग किया है जो ईश्वर ने मुझे परदान की है। क्रोध ने मुझे यहां आने पर उत्साहित नहीं किया। मैं दया के वशीभूत होकर आया हूं। मैं निष्कपट भाव से परेम के शब्दों में तुझे आश्वासन दे सकता हूं, क्योंकि मेरा पवित्र धर्मस्नेह ही मुझे यहां लाया है। मेरे हृदय में वात्सल्य की अग्नि परज्वलित हो रही है और यदि तेरी आंखें जो विषय के स्थूल, अपवित्र दृश्यों के वशीभूत हो रही हैं, वस्तुओं को उनके आध्यात्मिक रूप में देखतीं तो तुझे विदित होता कि मैं उस जलती हुई झाड़ी का एक पल्लव हूं जो ईश्वर ने अपने परेम का परिचय देने के लिए मूसा को पर्वत पर दिखाई थी-जो समस्त संसार में व्याप्त है, और जो वस्तुओं को भस्म कर देने के बदले, जिस वस्तु में परवेश करती है उसे सदा के लिए निर्मल और सुगन्धमय बना देती है।'
थायस ने आश्वस्त होकर कहा-'महात्मा जी, अब मुझे आप पर विश्वास हो गया है। मुझे आपसे किसी अनिष्ट या अमंगल की आशंका नहीं है। मैंने धमार्श्रम के तपस्वियों की बहुत चचार सुनी है। ऐण्तोनी और पॉल के विषय में बड़ी अद्भुत कथाएं सुनने में आयी हैं। आपके नाम से भी मैं अपरिचित नहीं हूं और मैंने लोगों को कहते सुना है कि यद्यपि आपकी उमर अभी कम है, आप धर्मनिष्ठा में उन तपस्वियों से भी श्रेष्ठ हैं जिन्होंने अपना समस्त जीवन ईश्वर आराधना में व्यतीत किया। यद्यपि मेरा अपसे परिचय न था, किन्तु आपको देखते ही मैं समझ गयी कि आप कोई साधारण पुरुष नहीं हैं। बताइये, आप मुझे वह वस्तु परदान कर सकते हैं जो सारे संसार के सिद्ध और साधु, ओझे और सयाने, कापालिक और वैतालिक नहीं कर सके ? आपके पास मौत की दवा है ? आप मुझे अमर जीवन दे सकते हैं ? यही सांसारिक इच्छाओं का सप्तम स्वर्ग है।'
पापनाशी ने उत्तर दिया-'कामिनी, अमर जीवन लाभ करना परत्येक पराणी की इच्छा के अधीन है। विषयवासनाओं को त्याग दे, जो तेरी आत्मा का सर्वनाश कर रहे हैं। उस शरीर को पिशाचों के पंजे से छुड़ा ले जिसे ईश्वर ने अपने मुंह के पानी से साना और अपने श्वास से जिलाया, अन्यथा परेत और पिशाच उसे बड़ी क्रुरता से जलायेंगे। नित्य के विलास से तेरे जीवन का स्त्रोत क्षीण हो गया है। आ, और एकान्त के पवित्र सागर में उसे फिर परवाहित कर दे। आ, और मरुभूमि में छिपे हुए सोतों का जल सेवन कर जिनका उफान स्वर्ग तक पहुंचता है। ओ चिन्ताओं में डूबी हुई आत्मा ! आ, अपनी इच्छित वस्तु को पराप्त कर ! जो आनन्द की भूखी स्त्री ! आ, और सच्चे आनन्द का आस्वादन कर। दरिद्रता का, विराग का, त्याग कर, ईश्वर के चरणों में आत्मसमर्पण कर ! आ, ओ स्त्री, जो आज परभु मसीह की द्रोहिणी है, लेकिन कल उसको परेयसी होगी। आ, उसका दर्शन कर, उसे देखते ही तू पुकार उठेगी-मुझे परेमधन मिल गया !'
थामस भविष्यचिन्तन में खोयी हुई थी। बोली-'महात्मा, अगर मैं जीवन के सुखों को त्याग दूं और कठिन तपस्या करुं तो क्या यह सत्य है कि मैं फिर जन्म लूंगी और मेरे सौन्दर्य को आंच न आयेगी ?'
पापनाशी ने कहा-'थायस, मैं तेरे लिए अनन्तजीवन का सन्देश लाया हूं। विश्वास कर, मैं जो कुछ कहता हूं, सर्वथा सत्य है।'
थायस-'मुझे उसकी सत्यता पर विश्वास क्योंकर आये ?'
पापनाशी-'दाऊद और अन्य नबी उसकी साक्षी देंगे, तुझे अलौकिक दृश्य दिखाई देंगे, वह इसका समर्थन करेंगे।'
थायस-'योगी जी, आपकी बातों से मुझे बहुत संष्तोा हो रहा है, क्योंकि वास्तव में मुझे इस संसार में सुख नहीं मिला। मैं किसी रानी से कम नहीं हूं, किन्तु फिर भी मेरी दुराशाओं और चिन्ताओं का अन्त नहीं है। मैं जीने से उकता गयी हूं। अन्य स्त्रियां मुझ पर ईष्यार करती हैं, पर मैं कभीकभी उस दुःख की मारी, पोपली बुयि पर ईष्यार करती हूं जो शहर के फाटक की छांह में बैठी तलाशे बेचा करती है। कितनी ही बार मेरे मन में आया है कि गरीब ही सुखी, सज्जन और सच्चे होते हैं, और दीन, हीन, निष्परभ रहने में चित्त को बड़ी शान्ति मिलती है। आपने मेरी आत्मा में एक तूफानसा पैदा कर दिया है और जो नीचे दबी पड़ी थी उसे ऊपर कर दिया है। हां ! मैं किसका विश्वास करुं ? मेरे जीवन का क्या अन्त होगा-जीवन ही क्या है ?'
पापनाशी ने उसे उठने का इशारा किया और बोला-'बच्चा, डर मत। तेरे परति अपमान या घृणा का शब्द भी मेरे मुंह से न निकलेगा। मैं उस महान पुरुष की ओर से आया हूं, जो पापियों को गले लगाता था, वेश्याओं के घर भोजन करता था, हत्यारों से परेम करता था, पतितों को सान्त्वना देता था। मैं स्वयं पापमुक्त नहीं हूं कि दूसरों पर पत्थर फेंकूं। मैंने कितनी ही बार उस विभूति का दुरुपयोग किया है जो ईश्वर ने मुझे परदान की है। क्रोध ने मुझे यहां आने पर उत्साहित नहीं किया। मैं दया के वशीभूत होकर आया हूं। मैं निष्कपट भाव से परेम के शब्दों में तुझे आश्वासन दे सकता हूं, क्योंकि मेरा पवित्र धर्मस्नेह ही मुझे यहां लाया है। मेरे हृदय में वात्सल्य की अग्नि परज्वलित हो रही है और यदि तेरी आंखें जो विषय के स्थूल, अपवित्र दृश्यों के वशीभूत हो रही हैं, वस्तुओं को उनके आध्यात्मिक रूप में देखतीं तो तुझे विदित होता कि मैं उस जलती हुई झाड़ी का एक पल्लव हूं जो ईश्वर ने अपने परेम का परिचय देने के लिए मूसा को पर्वत पर दिखाई थी-जो समस्त संसार में व्याप्त है, और जो वस्तुओं को भस्म कर देने के बदले, जिस वस्तु में परवेश करती है उसे सदा के लिए निर्मल और सुगन्धमय बना देती है।'
थायस ने आश्वस्त होकर कहा-'महात्मा जी, अब मुझे आप पर विश्वास हो गया है। मुझे आपसे किसी अनिष्ट या अमंगल की आशंका नहीं है। मैंने धमार्श्रम के तपस्वियों की बहुत चचार सुनी है। ऐण्तोनी और पॉल के विषय में बड़ी अद्भुत कथाएं सुनने में आयी हैं। आपके नाम से भी मैं अपरिचित नहीं हूं और मैंने लोगों को कहते सुना है कि यद्यपि आपकी उमर अभी कम है, आप धर्मनिष्ठा में उन तपस्वियों से भी श्रेष्ठ हैं जिन्होंने अपना समस्त जीवन ईश्वर आराधना में व्यतीत किया। यद्यपि मेरा अपसे परिचय न था, किन्तु आपको देखते ही मैं समझ गयी कि आप कोई साधारण पुरुष नहीं हैं। बताइये, आप मुझे वह वस्तु परदान कर सकते हैं जो सारे संसार के सिद्ध और साधु, ओझे और सयाने, कापालिक और वैतालिक नहीं कर सके ? आपके पास मौत की दवा है ? आप मुझे अमर जीवन दे सकते हैं ? यही सांसारिक इच्छाओं का सप्तम स्वर्ग है।'
पापनाशी ने उत्तर दिया-'कामिनी, अमर जीवन लाभ करना परत्येक पराणी की इच्छा के अधीन है। विषयवासनाओं को त्याग दे, जो तेरी आत्मा का सर्वनाश कर रहे हैं। उस शरीर को पिशाचों के पंजे से छुड़ा ले जिसे ईश्वर ने अपने मुंह के पानी से साना और अपने श्वास से जिलाया, अन्यथा परेत और पिशाच उसे बड़ी क्रुरता से जलायेंगे। नित्य के विलास से तेरे जीवन का स्त्रोत क्षीण हो गया है। आ, और एकान्त के पवित्र सागर में उसे फिर परवाहित कर दे। आ, और मरुभूमि में छिपे हुए सोतों का जल सेवन कर जिनका उफान स्वर्ग तक पहुंचता है। ओ चिन्ताओं में डूबी हुई आत्मा ! आ, अपनी इच्छित वस्तु को पराप्त कर ! जो आनन्द की भूखी स्त्री ! आ, और सच्चे आनन्द का आस्वादन कर। दरिद्रता का, विराग का, त्याग कर, ईश्वर के चरणों में आत्मसमर्पण कर ! आ, ओ स्त्री, जो आज परभु मसीह की द्रोहिणी है, लेकिन कल उसको परेयसी होगी। आ, उसका दर्शन कर, उसे देखते ही तू पुकार उठेगी-मुझे परेमधन मिल गया !'
थामस भविष्यचिन्तन में खोयी हुई थी। बोली-'महात्मा, अगर मैं जीवन के सुखों को त्याग दूं और कठिन तपस्या करुं तो क्या यह सत्य है कि मैं फिर जन्म लूंगी और मेरे सौन्दर्य को आंच न आयेगी ?'
पापनाशी ने कहा-'थायस, मैं तेरे लिए अनन्तजीवन का सन्देश लाया हूं। विश्वास कर, मैं जो कुछ कहता हूं, सर्वथा सत्य है।'
थायस-'मुझे उसकी सत्यता पर विश्वास क्योंकर आये ?'
पापनाशी-'दाऊद और अन्य नबी उसकी साक्षी देंगे, तुझे अलौकिक दृश्य दिखाई देंगे, वह इसका समर्थन करेंगे।'
थायस-'योगी जी, आपकी बातों से मुझे बहुत संष्तोा हो रहा है, क्योंकि वास्तव में मुझे इस संसार में सुख नहीं मिला। मैं किसी रानी से कम नहीं हूं, किन्तु फिर भी मेरी दुराशाओं और चिन्ताओं का अन्त नहीं है। मैं जीने से उकता गयी हूं। अन्य स्त्रियां मुझ पर ईष्यार करती हैं, पर मैं कभीकभी उस दुःख की मारी, पोपली बुयि पर ईष्यार करती हूं जो शहर के फाटक की छांह में बैठी तलाशे बेचा करती है। कितनी ही बार मेरे मन में आया है कि गरीब ही सुखी, सज्जन और सच्चे होते हैं, और दीन, हीन, निष्परभ रहने में चित्त को बड़ी शान्ति मिलती है। आपने मेरी आत्मा में एक तूफानसा पैदा कर दिया है और जो नीचे दबी पड़ी थी उसे ऊपर कर दिया है। हां ! मैं किसका विश्वास करुं ? मेरे जीवन का क्या अन्त होगा-जीवन ही क्या है ?'
वह यह बातें कर रही थी कि पापनाशी के मुख पर तेज छा गया, सारा मुखमंडल आदि ज्योति से चमक उठा, उसके मुंह से यह परतिभाशाली वाक्य निकले-'कामिनी, सुन, मैंने जब इस घर में कदम रखा तो मैं अकेला न था। मेरे साथ कोई और भी था और वह अब भी मेरे बगल में खड़ा है। तू अभी उसे नहीं देख सकती, क्योंकि तेरी आंखों में इतनी शक्ति नहीं है। लेकिन शीघर ही स्वगीर्य परतिभा से तू उसे आलोकित देखेगी और तेरे मुंह से आपही-आप निकल पड़ेगा-यही मेरा आराध्य देव है। तूने अभी उसकी आलौकिक शक्ति देखी ! अगर उसने मेरी आंखों के सामने अपने दयालु हाथ न फैला दिये होते तो अब तक मैं तेरे साथ पापाचरण कर चुका होता; क्योंकि स्वतः मैं अत्यन्त दुर्बल और पापी हूं। लेकिन उसने हम दोनों की रक्षा की। वह जितना ही शक्तिशाली है उतना ही दयालु है और उसका नाम है मुक्तिदाता। दाऊद और अन्य नबियों ने उसके आने की खबर दी थी, चरवाहों और ज्योतिषियों ने हिंडोले में उसके सामने शीश झुकाया था। फरीसियों ने उसे सलीब पर च़ाया, फिर वह उठकर स्वर्ग को चला गया। तुझे मृत्यु से इतना सशंक देखकर वह स्वयं तेरे घर आया है कि तुझे मृत्यु से बचा ले। परभु मसीह ! क्या इस समय तुम यहां उपस्थित नहीं हो, उसी रूप में जो तुमने गैलिली के निवासियों को दिखाया था। कितना विचित्र समय था बैतुलहम के बालक तारागण को हाथ में लेकर खेलते थे जो उस समय धरती के निकट ही स्थित थे। परभु मसीह, क्या यह सत्य नहीं है कि तुम इस समय यहां उपस्थित हो और मैं तुम्हारी पवित्र देह को परत्यक्ष देख रहा हूं ? क्या तेरी दयालु कोमल मुखारबिन्द यहां नहीं है ? और क्या वह आंसू जो तेरे गालों पर बह रहे हैं, परत्यक्ष आंसू नहीं हैं ? हां, ईश्वरीय न्याय का कर्त्ता उन मोतियों के लिए हाथ रोपे खड़ा है और उन्हीं मोतियों से थायस की आत्मा की मुक्ति होगी। परभु मसीह, क्या तू बोलने के लिए होंठ नहीं खोले हुए है ? बोल, मैं सुन रहा हूं ! और थायस, सुलक्षण थायस सुन, परभु मसीह तुझसे क्या कह रहे हैं-ऐ मेरी भटकी हुई मेषसुन्दरी, मैं बहुत दिनों से तेरी खोज में हूं। अन्त में मैं तुझे पा गया। अब फिर मेरे पास से न भागना। आ, मैं तेरा हाथ पकड़ लूं और अपने कन्धों पर बिठाकर स्वर्ग के बाड़े में ले चलूं। आ मेरी थायस, मेरी पिरयतमा, आ ! और मेरे साथ रो।'
यह कहतेकहते पापनाशी भक्ति से विह्वल होकर जमीन पर घुटनों के बल बैठ गया। उसकी आंखों से आत्मोल्लास की ज्योतिरेखाएं निकलने लगीं। और थायस को उसके चेहरे पर जीतेजागते मसीह का स्वरूप दिखाई दिया।
वह करुण क्रंदन करती हुई बोली-'ओ मेरी बीती हुई बाल्यावस्था, ओ मेरे दयालु पिता अहमद ! ओ सन्त थियोडोर, मैं क्यों न तेरी गोद में उसी समय मर गयी जब तू अरुणोदय के समय मुझे अपनी चादर में लपेटे लिये आता था और मेरे शरीर से वपतिस्मा के पवित्र जल की बूंदें टपक रही थीं।'
पापनाशी यह सुनकर चौंक पड़ा मानो कोई अलौकिक घटना हो गयी है और दोनों हाथ फैलाये हुए थायस की ओर यह कहते हुए ब़ा-'भगवान्, तेरी महिमा अपार है। क्या तू बपतिस्मा के जल से प्लावित हो चुकी है ? हे परमपिता, भक्तवत्सल परभु, ओ बुद्धि के अगाध सागर ! अब मुझे मालूम हुआ कि वह कौनसी शक्ति थी जो मुझे तेरे पास खींचकर लायी। अब मुझे ज्ञात हुआ कि वह कौनसा रहस्य था जिसने तुझे मेरी दृष्टि में इतना सुन्दर, इतना चित्ताकर्षक बना दिया था। अब मुझे मालूम हुआ कि मैं तेरे परेमपाश में क्यों इस भांति जकड़ गया था कि अपना शान्तिवास छोड़ने पर विवश हुआ। इसी बपतिस्माजल की महिमा थी जिसने मुझे ईश्वर के द्वार को छुड़ाकर मुझे खोजने के लिए इस विषाक्त वायु से भरे हुए संसार में आने पर बाध्य किया जहां मायामोह में फंसे हुए लोग अपना कलुषित जीवन व्यतीत करते हैं। उस पवित्र जल की एक बूंद-केवल एक ही बूंद मेरे मुख पर छिड़क दी गयी है जिसमें तूने स्नान किया था। आ, मेरी प्यारी बहिन, आ, और अपने भाई के गले लग जा जिसका हृदय तेरा अभिवादन करने के लिए तड़प रहा है।'
यह कहकर पापनाशी ने बारांगना के सुन्दर ललाट को अपने होंठों से स्पर्श किया।
इसके बाद वह चुप हो गया कि ईश्वर स्वयं मधुर, सांत्वनापरद शब्दों में थायस को अपनी दयालुता का विश्वास दिलाये। और 'परियों के रमणीक कुंज' में थायस की सिसकियों के सिवा, जो जलधारा की कलकल ध्वनि से मिल गयी थीं, और कुछ न सुनाई दिया।
वह इसी भांति देर तक रोती रही। अश्रुपरवाह को रोकने का परयत्न उसने न किया। यहां तक कि उसके हब्शी गुलाम सुन्दर वस्त्र; फूलों के हार और भांतिभांति के इत्र लिये आ पहुंचे।
उसने मुस्कराने की चेष्टा करके कहा-'अरे रोने का समय बिल्कुल नहीं रहा। आंसुओं से आंखें लाल हो जाती हैं, और उनमें चित्त को विकल करने वाला पुष्प विकास नहीं रहता, चेहरे का रंग फीका पड़ जाता है, वर्ण की कोमलता नष्ट हो जाती है। मुझे आज कई रसिक मित्रों के साथ भोजन करना है। मैं चाहती हूं कि मेरी मुखचन्द्र सोलहों कला से चमके, क्योंकि वहां कई ऐसी स्त्रियां आयेंगी जो मेरे मुख पर चिन्ता या ग्लानि के चिह्न को तुरन्त भांप जायेंगी और मन में परसन्न होंगी कि अब इनका सौन्दर्य थोड़े ही दिनों का और मेहमान है, नायिका अब परौ़ा हुआ चाहती है। ये गुलाम मेरा शृंगार करने आये हैं। पूज्य पिता आप कृपया दूसरे कमरे में जा बैठिए और इन दोनों को अपना काम करने दीजिए। यह अपने काम में बड़े परवीण और कुशल हैं। मैं उन्हें यथेष्ट पुरस्कार देती हूं। वह जो सोने की अंगूठियां पहने हैं और जिनके मोती केसे दांत चमक रहे हैं, उसे मैंने परधानमन्त्री की पत्नी से लिया है।'
पापनाशी की पहले तो यह इच्छा हुई कि थायस को इस भोज में सम्मिलित होने से यथाशक्ति रोके। पर पुनः विचार किया तो विदित हुआ कि यह उतावली का समय नहीं है। वर्षों का जमा हुआ मनोमालिन्य एक रगड़ से नहीं दूर हो सकता। रोग का मूलनाश शनैःशनैः, क्रमक्रम से ही होगा। इसलिए उसने धमोर्त्साह के बदले बुद्धिमत्ता से काम लेने का निश्चय किया और पूछा-वाह किनकिन मनुष्यों से भेंट होगी ?
उसने उत्तर दिया-'पहले तो वयोवृद्ध कोटा से भेंट होगी जो यहां के जलसेना के सेनापति हैं। उन्हीं ने यह दावत दी है। निसियास और अन्य दार्शनिक भी आयेंगे जिन्हें किसी विषय की मीमांसा करने ही में सबसे अधिक आनन्द पराप्त होता है। इनके अतिरिक्त कविसमाजभूषण कलिक्रान्त, और देवमन्दिर के अध्यक्ष भी आयेंगे। कई युवक होंगे जिनको घोड़े निकालने ही में परम आनन्द आता है और कई स्त्रियां मिलेंगी जिनके विषय में इसके सिवाय और कुछ नहीं कहा जा सकता कि वे युवतियां हैं।'
पापनाशी ने ऐसी उत्सुकता से जाने की सम्मति दी मानो उसे आकाशवाणी हुई है। बोला-'तो अवश्य जाओ थायस, अवश्य जाओ। मैं तुम्हें सहर्ष आज्ञा देता हूं। लेकिन मैं तेरा साथ न छोडूंगा। मैं भी इस दावत में तुम्हारे साथ चलूंगा। इतना जानता हूं कि कहां बोलना और कहां चुप रहना चाहिए। मेरे साथ रहने से तुम्हें कोई असुविधा अथवा झेंप न होगी।'
दोनों गुलाम अभी उसको आभूषण पहना ही रहे थे कि थायस खिलखिलाकर हंस पड़ी और बोली-'वह धमार्श्रम के एक तपस्वी को मेरे परेमियों में देखकर कहेंगे ?'
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थायस ने स्वाधीन, लेकिन निर्धन और मूर्तिपूजक मातापिता के घर जन्म लिया था। जब वह बहुत छोटीसी लड़की थी तो उसका बाप एक सराय का भटियारा था। उस सराय में परायः मल्लाह बहुत आते थे। बाल्यकाल की अशृंखल, किन्तु सजीव स्मृतियां उसके मन में अब भी संचित थीं। उसे अपने बाप की याद आती थी जो पैर पर पैर रखे अंगीठी के सामने बैठा रहता था। लम्बा, भारीभरकम, शान्त परकृति का मनुष्य था, उन फिर ऊनों की भांति जिनकी कीर्ति सड़क के नुक्कड़ों पर भाटों के मुख से नित्य अमर होती रहती थी। उसे अपनी दुर्बल माता की भी याद आती थी जो भूखी बिल्ली की भांति घर में चारों ओर चक्कर लगाती रहती थी। सारा घर उसके तीक्ष्ण कंठ स्वर में गूंजता और उसके उद्दीप्त नेत्रों की ज्योति से चमकता रहता था। पड़ोस वाले कहते थे, यह डायन है, रात को उल्लू बन जाती है और अपने परेमियों के पास उड़ जाती है। यह अफीमचियों की गप थी। थामस अपनी मां से भलीभांति परिचित थी और जानती थी कि वह जादूटोना नहीं करती। हां, उसे लोभ का रोग था और दिन की कमाई को रातभर गिनती रहती थी। असली पिता और लोभिनी माता थायस के लालनपालन की ओर विशेष ध्यान न देते थे। वह किसी जंगली पौधे के समान अपनी बा़ से ब़ती जाती थी। वह मतवाले मल्लाहों के कमरबन्द से एकएक करके पैसे निकालने में निपुण हो गयी। वह अपने अश्लील वाक्यों और बाजारी गीतों से उनका मनोरंजन करती थी, यद्यपि वह स्वयं इनका आशय न जानती थी। घर शराब की महक से भरा रहता था। जहांतहां शराब के चमड़े के पीपे रखे रहते थे और वह मल्लाहों की गोद में बैठती फिरती थी। तब मुंह में शराब का लसका लगाये वह पैसे लेकर घर से निकलती और एक बुयि से गुलगुले लेकर खाती। नित्यपरति एक ही अभिनय होता रहता था। मल्लाह अपनी जानजोखिम यात्राओं की कथा कहते, तब चौसर खेलते, देवताओं को गालियां देते और उन्मत्त होकर 'शराब, शराब, सबसे उत्तम शराब !' की रट लगाते। नित्यपरति रात को मल्लाहों के हुल्लड़ से बालिका की नींद उचट जाती थी। एकदूसरे को वे घोंघे फेंककर मारते जिससे मांस कट जाता था और भयंकर कोलाहल मचता था। कभी तलवारें भी निकल पड़ती थीं और रक्तपात हो जाता था। थायस को यह याद करके बहुत दुःख होता था कि बाल्यावस्था में यदि किसी को मुझसे स्नेह था तो वह सरल, सहृदय अहमद था। अहमद इस घर का हब्शी गुलाम था, तवे से भी ज्यादा काला, लेकिन बड़ा सज्जन, बहुत नेक जैसे रात की मीठी नींद। वह बहुधा थामस को घुटनों पर बैठा लेता और पुराने जमाने के तहखानों की अद्भुत कहानियां सुनाता जो धनलोलुप राजेमहाराजे बनवाते थे और बनवाकर शिल्पियों और कारीगरों का वध कर डालते थे कि किसी को बता न दें। कभीकभी ऐसे चतुर चोरों की कहानियां सुनाता जिन्होंने राजाओं की कन्या से विवाह किया और मीनार बनवाये। बालिका थायस के लिए अहमद बाप भी था, मां भी था, दाई था और कुत्ता भी था। वह अहमद के पीछेपीछे फिरा करती; जहां वह जाता, परछाईं की तरह साथ लगी रहती। अहमद भी उस पर जान देता था। बहुत रात को अपने पुआल के गद्दे पर सोने के बदले बैठा हुआ वह उसके लिए कागज के गुब्बारे और नौकाएं बनाया करता। अहमद के साथ उसके स्वामियों ने घोर निर्दयता का बर्ताव किया था। एक कान कटा हुआ था और देह पर कोड़ों के दागही-दाग थे। किन्तु उसके मुख पर नित्य सुखमय शान्ति खेला करती थी और कोई उससे न पूछता था कि इस आत्मा की शान्ति और हृदय के सन्टोष का स्त्रोत कहां था। वह बालक की तरह भोला था। काम करतेकरते थक जाता तो अपने भद्दे स्वर में धार्मिक भजन गाने लगता जिन्हें सुनकर बालिका कांप उठती और वही बातें स्वप्न में भी देखती। 'हमसे बात मेरी बेटी, तू कहां गयी थी और क्या देखा था ?' 'मैंने कफन और सफेद कपड़े देखे। स्वर्गदूत कबर पर बैठे हुए थे और मैंने परभु मसीह की ज्योति देखी। थायस उससे पूछती-'दादा, तुम कबर में बैठै हुए दूतों का भजन क्यों गाते हो।' अहमद जवाब देता-'मेरी आंखों की नन्ही पुतली, मैं स्वर्गदूतों के भजन इसलिए गाता हूं कि हमारे परभु मसीह स्वर्गलोक को उड़ गये हैं।' अहमद ईसाई था। उसकी यथोचित रीति से दीक्षा हो चुकी थी और ईसाइयों के समाज में उसका नाम भी थियोडोर परसिद्ध था। वह रातों को छिपकर अपने सोने के समय में उनकी संगीतों में शामिल हुआ करता था। उस समय ईसाई धर्म पर विपत्ति की घटाएं छाई हुई थीं। रूस के बादशाह की आज्ञा से ईसाइयों के गिरजे खोदकर फेंक दिये गये थे, पवित्र पुस्तकें जला डाली गयी थीं और पूजा की सामगिरयां लूट ली गयी थीं। ईसाइयों के सम्मानपद छीन लिये गये थे और चारों ओर उन्हें मौतही-मौत दिखाई देती थी। इस्कन्द्रिया में रहने वाले समस्त ईसाई समाज के लोग संकट में थे। जिसके विषय में ईसावलम्बी होने का जरा भी सन्देह होता, उसे तुरन्त कैद में डाल दिया जाता था। सारे देश में इन खबरों से हाहाकार मचा हुआ था कि स्याम, अरब, ईरान आदि स्थानों में ईसाई बिशपों और वरतधारिणी कुमारियों को कोड़े मारे गये हैं, सूली दी गयी हैं और जंगल के जानवरों के समान डाल दिया गया है। इस दारुण विपत्ति के समय जब ऐसा निश्चय हो रहा था कि ईसाइयों का नाम निशान भी न रहेगा; एन्थोनी ने अपने एकान्तवास से निकलकर मानो मुरझाये हुए धान में पानी डाल दिया। एन्थोनी मिस्त्रनिवासी ईसाइयों का नेता, विद्वान्, सिद्धपुरुष था, जिसके अलौकिक कृत्यों की खबरें दूरदूर तक फैली हुई थीं। वहआत्मज्ञानी और तपस्वी था। उसने समस्त देश में भरमण करके ईसाई सम्परदाय मात्र को श्रद्घा और धमोर्त्साह से प्लावित कर दिया। विधर्मियों से गुप्त रहकर वह एक समय में ईसाइयों की समस्त सभाओं में पहुंच जाता था, और सभी में उस शक्ति और विचारशीलता का संचार कर देता था जो उसके रोमरोम में व्याप्त थी। गुलामों के साथ असाधारण कठोरता का व्यवहार किया गया था। इससे भयभीत होकर कितने ही धर्मविमुख हो गये, और अधिकांश जंगल को भाग गये। वहां या तो वे साधु हो जायेंगे या डाके मारकर निवार्ह करेंगे। लेकिन अहमद पूर्ववत इन सभाओं में सम्मिलित होता, कैदियों से भेंट करता, आहत पुरुषों का क्रियाकर्म करता और निर्भय होकर ईसाई धर्म की घोषणा करता था। परतिभाशाली एन्थोनी अहमद की यह दृ़ता और निश्चलता देखकर इतना परसन्न हुआ कि चलते समय उसे छाती से लगा लिया और बड़े परेम से आशीवार्द दिया। जब थायस सात वर्ष की हुई तो अहमद ने उसे ईश्वरचचार करनी शुरू की। उसकी कथा सत्य और असत्य का विचित्र मिश्रण लेकिन बाल्यहृदय के अनुकूल थी। ईश्वर फिरऊन की भांति स्वर्ग में, अपने हरम के खेमों और अपने बाग के वृक्षों की छांह में रहता है। वह बहुत पराचीन काल से वहां रहता है, और दुनिया से भी पुराना है। उसके केवल एक ही बेटा है, जिसका नाम परभु ईसू है। वह स्वर्ग के दूतों से और रमणी युवतियों से भी सुन्दर है। ईश्वर उसे हृदय से प्यार करता है। उसने एक दिन परभु मसीह से कहा-'मेरे भवन और हरम, मेरे छुहारे के वृक्षों और मीठे पानी की नदियों को छोड़कर पृथ्वी पर जाओ और दीनदुःखी पराणियों का कल्याण करो ! वहां तुझे छोटे बालक की भांति रहना होगा। वहां दुःख हो तेरा भोजन होगा और तुझे इतना रोना होगा कि तुझे आंसुओं से नदियां बह निकलें, जिनमें दीनदुःखी जन नहाकर अपनी थकन को भूल जाएं। जाओ प्यारे पुत्र !' परभु मसीह ने अपने पूज्य पिता की आज्ञा मान ली और आकर बेथलेहम नगर में अवतार लिया। वह खेतों और जंगलों में फिरते थे और अपने साथियों से कहते थे-मुबारक हैं वे लोग जो भूखे रहते हैं, क्योंकि मैं उन्हें अपने पिता की मेज पर खाना खिलाऊंगा। मुबारक हैं वे लोग जो प्यासे रहते हैं, क्योंकि वह स्वर्ग की निर्मल नदियों का जल पियेंगे और मुबारक हैं वे जो रोते हैं, क्योंकि मैं अपने दामन से उनके आंसू पोंछूंगा। यही कारण है कि दीनहीन पराणी उन्हें प्यार करते हैं और उन पर विश्वास करते हैं। लेकिन धनी लोग उनसे डरते हैं कि कहीं यह गरीबों को उनसे ज्यादा धनी न बना दें। उस समय क्लियोपेट्रा और सीजर पृथ्वी पर सबसे बलवान थे। वे दोनों ही मसीह से जलते थे, इसीलिए पुजारियों और न्यायाधीशों को हुक्म दिया कि परभु मसीह को मार डालो। उनकी आज्ञा से लोगों ने एक सलीब खड़ी की और परभु को सूली पर च़ा दिया। किन्तु परभु मसीह ने कबर के द्वार को तोड़ डाला और फिर अपने पिता ईश्वर के पास चले गये। उसी समय से परभु मसीह के भक्त स्वर्ग को जाते हैं। ईश्वर परेम से उनका स्वागत करता है और उनसे कहता है-'आओ, मैं तुम्हारा स्वागत करता हूं क्योंकि तुम मेरे बेटे को प्यार करते हो। हाथ धोकर मेज पर बैठ जाओ।' तब स्वर्ग अप्सराएं गाती हैं और जब तक मेहमान लोग भोजन करते हैं, नाच होता रहता है। उन्हें ईश्वर अपनी आंखों की ज्योति से अधिक प्यार करता है, क्योंकि वे उसके मेहमान होते हैं और उनके विश्राम के लिए अपने भवन के गलीचे और उनके स्वादन के लिए अपने बाग का अनार परदान करता है। अहमद इस परकार थायस से ईश्वर चचार करता था। वह विस्मित होकर कहती थी-'मुझे ईश्वर के बाग के अनार मिलें तो खूब खाऊं।' अहमद कहता था-'स्वर्ग के फल वही पराणी खा सकते हैं जो बपतिस्मा ले लेते हैं।' तब थायस ने बपतिस्मा लेने की आकांक्षा परकट की। परभु मसीह में उसकी भक्ति देखकर अहमद ने उसे और भी धर्मकथाएं सुनानी शुरू कीं। इस परकार एक वर्ष तक बीत गया। ईस्टर का शुभ सप्ताह आया और ईसाइयों ने धमोर्त्सव मनाने की तैयारी की। इसी सप्ताह में एक रात को थायस नींद से चौंकी तो देखा कि अहमद उसे गोद में उठा रहा है। उसकी आंखों में इस समय अद्भुत चमक थी। वह और दिनों की भांति फटे हुए पाजामे नहीं, बल्कि एक श्वेत लम्बा ीला चोगा पहने हुए था। उसके थायस को उसी चोगे में छिपा लिया और उसके कान में बोला-'आ, मेरी आंखों की पुतली, आ। और बपतिस्मा के पवित्र वस्त्र धारण कर।' वह लड़की को छाती से लगाये हुए चला। थायस कुछ डरी, किन्तु उत्सुक भी थी। उसने सिर चोगे से बाहर निकाल लिया और अपने दोनों हाथ अहमद की मर्दन में डाल दिये। अहमद उसे लिये वेग से दौड़ा चला जाता था। वह एक तंग अंधेरी गली से होकर गुजरा; तब यहूदियों के मुहल्ले को पार किया, फिर एक कबिरस्तान के गिर्द में घूमते हुए एक खुले मैदान में पहुंचा जहां, ईसाई, धमार्हतों की लाशें सलीबों पर लटकी हुई थीं। थायस ने अपना सिर चोगे में छिपा लिया और फिर रास्ते भर उसे मुंह बाहर निकालने का साहस न हुआ। उसे शीघर ज्ञात हो गया कि हम लोग किसी तहखाने में चले जा रहे हैं। जब उसने फिर आंखें खोलीं तो अपने को एक तंग खोह में पाया। राल की मशालें जल रही थीं। खोह की दीवारों पर ईसाई सिद्ध महात्माओं के चित्र बने हुए थे जो मशालों के अस्थिर परकाश में चलतेफिरते, सजीव मालूम होते थे। उनके हाथों में खजूर की डालें थीं और उनके इर्दगिर्द मेमने, कबूतर, फाखते और अंगूर की बेलें चित्रित थीं। इन्हीं चित्रों में थायस ने ईसू को पहचाना, जिसके पैरों के पास फूलों का ेर लगा हुआ था। खोह के मध्य में, एक पत्थर के जलकुण्ड के पास, एक वृद्ध पुरुष लाल रंग का ीला कुरता पहने खड़ा था। यद्यपि उसके वस्त्र बहुमूल्य थे, पर वह अत्यन्त दीन और सरल जान पड़ता था। उसका नाम बिशप जीवन था, जिसे बादशाह ने देश से निकाल दिया था। अब वह भेड़ का ऊन कातकर अपना निवार्ह करता था। उसके समीप दो लड़के खड़े थे। निकट ही एक बुयि हब्शिन एक छोटासा सफेद कपड़ा लिये खड़ी थी। अहमद ने थायस को जमीन पर बैठा दिया और बिशप के सामने घुटनों के बल बैठकर बोला-'पूज्य पिता, यही वह छोटी लड़की है जिसे मैं पराणों से भी अधिक चाहता हूं। मैं उसे आपकी सेवा में लाया हूं कि आप अपने वचनानुसार, यदि इच्छा हो तो, उसे बपतिस्मा परदान कीजिए।' यह सुनकर बिशप ने हाथ फैलाया। उनकी उंगलियों के नाखून उखाड़ लिये गये थे क्योंकि आपत्ति के दिनों में वह राजाज्ञा की परवाह न करके अपने धर्म पर आऱु रहे थे। थायस डर गयी और अहमद की गोद में छिप गयी, किन्तु बिशप के इन स्नेहमय शब्दों ने उस आश्वस्त कर दिया-'पिरय पुत्री, डरो मत। अहमद तेरा धर्मपिता है जिसे हम लोग थियोडोरा कहते हैं, और यह वृद्घा स्त्री तेरी माता है जिसने अपने हाथों से तेरे लिए एक सफेद वस्त्र तैयार किया। इसका नाम नीतिदा है। यह इस जन्म में गुलाम है; पर स्वर्ग में यह परभु मसीह की परेयसी बनेगी।' तब उसने थायस से पूछा-'थायस, क्या तू ईश्वर पर, जो हम सबों का परम पिता है, उसके इकलौते पुत्र परभु मसीह पर जिसने हमारी मुक्ति के लिए पराण अर्पण किये, और मसीह के शिष्यों पर विश्वास करती हैं ?' हब्शी और हब्शिन ने एक स्वर से कहा-'हां।' तब बिशप के आदेश से नीतिदा ने थायस के कपड़े उतारे। वह नग्न हो गयी। उसके गले में केवल एक यन्त्र था। विशप ने उसे तीन बार जलकुण्ड में गोता दिया, और तब नीतिदा ने देह का पानी पोंछकर अपना सफेद वस्त्र पहना दिया। इस परकार वह बालिका ईसा शरण में आयी जो कितनी परीक्षाओं और परलोभनों के बाद अमर जीवन पराप्त करने वाली थी। जब यह संस्कार समाप्त हो गया और सब लोग खोह के बाहर निकले तो अहमद ने बिशप से कहा-'पूज्य पिता, हमें आज आनन्द मनाना चाहिए; क्योंकि हमने एक आत्मा को परभु मसीह के चरणों पर समर्पित किया। आज्ञा हो तो हम आपके शुभस्थान पर चलें और शेष रात्रि उत्सव मनाने में काटें।' बिशप ने परसन्नता से इस परस्ताव को स्वीकार किया। लोग बिशप के घर आये। इसमें केवल एक कमरा था। दो चरखे रखे हुए थे और एक फटी हुई दरी बिछी थी। जब यह लोग अन्दर पहुंचे तो बिशप ने नीतिदा से कहा-'चूल्हा और तेल की बोतल लाओ। भोजन बनायें।' यह कहकर उसने कुछ मछलियां निकालीं, उन्हें तेल में भूना, तब सबके-सब फर्श पर बैठकर भोजन करने लगे। बिशप ने अपनी यन्त्रणाओं का वृत्तान्त कहा और ईसाइयों की विजय पर विश्वास परकट किया। उसकी भाषा बहुत ही पेचदार, अलंकृत, उलझी हुई थी। तत्त्व कम, शब्दाडम्बर बहुत था। थायस मंत्रमुग्ध-सी बैठी सुनती रही। भोजन समाप्त हो जाने का बिशप ने मेहमानों को थोड़ीसी शराब पिलाई। नशा च़ा तो वे बहकबहककर बातें करने लगे। एक क्षण के बाद अहमद और नीतिदा ने नाचना शुरू किया। यह परेतनृत्य था। दोनों हाथ हिलाहिलाकर कभी एकदूसरे की तरफ लपकते, कभी दूर हट जाते। जब सेवा होने में थोड़ी देर रह गयी तो अहमद ने थायस को फिर गोद में उठाया और घर चला आया। अन्य बालकों की भांति थायस भी आमोदपिरय थी। दिनभर वह गलियों में बालकों के साथ नाचतीगाती रहती थी। रात को घर आती तब भी वह गीत गाया करती, जिनका सिरपैर कुछ न होता। अब उसे अहमद जैसे शान्त, सीधेसीधे आदमी की अपेक्षा लड़केलड़कियों की संगति अधिक रुचिकर मालूम होती ! अहमद भी उसके साथ कम दिखाई देता। ईसाइयों पर अब बादशाह की क्रुर दृष्टि न थी, इसलिए वह अबाधरूप से धर्म संभाएं करने लगे थे। धर्मनिष्ठ अहमद इन सभाओं में सम्मिलित होने से कभी न चूकता। उसका धमोर्त्साह दिनोंदिन ब़ने लगा। कभीकभी वह बाजार में ईसाइयों को जमा करके उन्हें आने वाले सुखों की शुभ सूचना देता। उसकी सूरत देखते ही शहर के भिखारी, मजदूर, गुलाम, जिनका कोई आश्रय न था, जो रातों में सड़क पर सोते थे, एकत्र हो जाते और वह उनसे कहता-'गुलामों के मुक्त होने के बदन निकट हैं, न्याय जल्द आने वाला है, धन के मतवाले चैन की नींद न सो सकेंगे। ईश्वर के राज्य में गुलामों को ताजा शराब और स्वादिष्ट फल खाने को मिलेंगे, और धनी लोग कुत्ते की भांति दुबके हुए मेज के नीचे बैठे रहेंगे और उनका जूठन खायेंगे।' यह शुभसन्देश शहर के कोनेकोने में गूंजने लगता और धनी स्वामियों को शंका होती कि कहीं उनके गुलाम उत्तेजित होकर बगावत न कर बैठें। थायस का पिता भी उससे जला करता था। वह कुत्सित भावों को गुप्त रखता। एक दिन चांदी का एक नमकदान जो देवताओं के यज्ञ के लिए अलग रखा हुआ था, चोरी हो गया। अहमद ही अपराधी ठहराया गया। अवश्य अपने स्वामी को हानि पहुंचाने और देवताओं का अपमान करने के लिए उसने यह अधर्म किया है ! चोरी को साबित करने के लिए कोई परमाण न था और अहमद पुकारपुकारकर कहता था-मुझ पर व्यर्थ ही यह दोषारोपण किया जाता है। तिस पर भी वह अदालत में खड़ा किया गया। थायस के पिता ने कहा-'यह कभी मन लगाकर काम नहीं करता।' न्यायाधीश ने उसे पराणदण्ड का हुक्म दे दिया। जब अहमद अदालत से चलने लगा तो न्यायधीश ने कहा-'तुमने अपने हाथों से अच्छी तरह काम नहीं लिया इसलिए अब यह सलीब में ठोंक दिये जायेंगे !' अहमद ने शान्तिपूर्वक फैसला सुना, दीनता से न्यायाधीश को परणाम किया और तब कारागार में बन्द कर दिया गया। उसके जीवन के केवल तीन दिन और थे और तीनों दिनों दिन यह कैदियों को उपदेश देता रहा। कहते हैं उसके उपदेशों का ऐसा असर पड़ा कि सारे कैदी और जेल के कर्मचारी मसीह की शरण में आ गये। यह उसके अविचल धमार्नुराग का फल था। चौथे दिन वह उसी स्थान पर पहुंचाया गया जहां से दो साल पहले, थायस को गोद में लिये वह बड़े आनन्द से निकला था। जब उसके हाथ सलीब पर ठोंक दिये गये, तो उसने 'उफ' तक न किया, और एक भी अपशब्द उसके मुंह से न निकला ! अन्त में बोला-'मैं प्यासा हूं ! 'वह स्वर्ग के दूत तुझे लेने को आ रहे हैं। उनका मुख कितना तेजस्वी है। वह अपने साथ फल और शराब लिये आते हैं। उनके परों से कैसी निर्मल, सुखद वायु चल रही है।' और यह कहतेकहते उसका पराणान्त हो गया। मरने पर भी उसका मुखमंडल आत्मोल्लास से उद्दीप्त हो रहा था। यहां तक कि वे सिपाही भी जो सलीब की रक्षा कर रहे थे, विस्मत हो गये। बिशप जीवन ने आकर शव का मृतकसंस्कार किया और ईसाई समुदाय ने महात्मा थियोडोर की कीर्ति को परमाज्ज्वल अक्षरों में अंकित किया। वह छोटी ही उमर में बादशाह के युवकों के साथ क्रीड़ा करने लगी। संध्या समय वह बू़े आदमियों के पीछे लग जाती और उनसे कुछन-कुछ ले मरती थी। इस भांति जो कुछ मिलता उससे मिठाइयां और खिलौने मोल लेती। पर उसकी लोभिनी माता चाहती थी कि वह जो कुछ पाये वह मुझे दे। थायस इसे न मानती थी। इसलिए उसकी माता उसे मारापीटा करती थी। माता की मार से बचने के लिए वह बहुधा घर से भाग जाती और शहरपनाह की दीवार की दरारों में वन्य जन्तुओं के साथ छिपी रहती। एक दिन उसकी माता ने इतनी निर्दयता से उसे पीटा कि वह घर से भागी और शहर के फाटक के पास चुपचाप पड़ी सिसक रही थी कि एक बुयि उसके सामने जाकर खड़ी हो गयी। वह थोड़ी देर तक मुग्धभाव से उसकी ओर ताकती रही और तब बोली-'ओ मेरी गुलाब, मेरी गुलाब, मेरी फूलसी बच्ची ! धन्य है तेरा पिता जिसने तुझे पैदा किया और धन्य है तेरी माता जिसने तुझे पाला।' थायस चुपचाप बैठी जमीन की ओर देखती रही। उसकी आंखें लाल थीं, वह रो रही थी। बुयि ने फिर कहा-'मेरी आंखों की पुतली, मुन्नी, क्या तेरी माता तुझजैसी देवकन्या को पालपोसकर आनन्द से फूल नहीं जाती, और तेरा पिता तुझे देखकर गौरव से उन्मत्त नहीं हो जाता ?' थायस ने इस तरह भुनभुनाकर उत्तर दिया, मानो मन ही में कह रही है-मेरा बाप शराब से फूला हुआ पीपा है और माता रक्त चूसने वाली जोंक है। बुयि ने दायेंबायें देखा कि कोई सुन तो नहीं रहा है, तब निस्संक होकर अत्यन्त मृदु कंठ से बोली-'अरे मेरी प्यारी आंखों की ज्योति, ओ मेरी खिली हुई गुलाब की कली, मेरे साथ चलो। क्यों इतना कष्ट सहती हो ? ऐसे मांबाप की झाड़ मारो। मेरे यहां तुम्हें नाचने और हंसने के सिवाय और कुछ न करना पड़ेगा। मैं तुम्हें शहद के रसगुल्ले खिलाऊंगी, और मेरा बेटा तुम्हें आंखों की पुतली बनाकर रखेगा। वह बड़ा सुन्दर सजीला जबान है, उसकी दा़ी पर अभी बाल भी नहीं निकले, गोरे रंग का कोमल स्वभाव का प्यारा लड़का है।' थायस ने कहा-'मैं शौक से तुम्हें साथ चलूंगी।' और उठकर बुयि के पीछे शहर के बाहर चली गयी। बुयि का नाम मीरा था। उसके पास कई लड़केलड़कियों की एक मंडली थी। उन्हें उसने नाचना, गाना, नकलें करना सिखाया था। इस मंडली को लेकर वह नगरनगर घूमती थी, और अमीरों के जलसों में उनका नाचगाना कराके अच्छा पुरस्कार लिया करती थी। उसकी चतुर आंखों ने देख लिया कि यह कोई साधारण लड़की नहीं है। उसका उठान कहे देता था कि आगे चलकर वह अत्यन्त रूपवती रमणी होगी। उसने उसे कोड़े मारकर संगीत और पिंगल की शिक्षा दी। जब सितार के तालों के साथ उसके पैर न उठते तो वह उसकी कोमल पिंडलियों में चमड़े के तस्में से मारती। उसका पुत्र जो हिजड़ा था, थायस से द्वेष रखता था, जो उसे स्त्री मात्र से था। पर वह नाचने में, नकल करने में, मनोगत भावों को संकेत, सैन, आकृति द्वारा व्यक्त करने में, परेम की घातों के दर्शाने में, अत्यन्त कुशल था। हिजड़ों में यह गुण परायः ईश्वरदत्त होते हैं। उसने थायस को यह विद्या सिखाई, खुशी से नहीं, बल्कि इसलिए कि इस तरकीब से वह जी भरकर थायस को गालियां दे सकता था। जब उसने देखा कि थायस नाचनेगाने में निपुण होती जाती है और रसिक लोग उसके नृत्यगान से जितने मुग्ध होते हैं उतना मेरे नृत्यकौशल से नहीं होते तो उसकी छाती पर सांप काटने लगा। वह उसके गालों को नोच लेता, उसके हाथपैर में चुटकियां काटता। पर उसकी जलन से थायस को लेशमात्र भी दुःख न होता था। निर्दय व्यवहार का उसे अभ्यास हो गया था। अन्तियोकस उस समय बहुत आबाद शहर था। मीरा जब इस शहर में आयी तो उसने रईसों से थायस की खूब परशंसा की। थायस का रूपलावण्य देखकर लोगों ने बड़े चाव से उसे अपनी रागरंग की मजलिसों में निमन्त्रित किया, और उसके नृत्यगान पर मोहित हो गये। शनैःशनैः यही उसका नित्य का काम हो गया! नृत्यगान समाप्त होने पर वह परायः सेठसाहूकारों के साथ नदी के किनारे, घने कुञ्जों में विहार करती। उस समय तक उसे परेम के मूल्य का ज्ञान न था, जो कोई बुलाता उसके पास जाती, मानो कोई जौहरी का लड़का धनराशि को कौड़ियों की भांति लुटा रहा हो। उसका एकएक कटाक्ष हृदय को कितना उद्विग्न कर देता है, उसका एकएक कर स्पर्श कितना रोमांचकारी होता है, यह उसके अज्ञात यौवन को विदित न था। थायस, यह मेरा परम सौभाग्य होता यदि तेरे अलकों में गुंथी हुई पुष्पमाला या तेरे कोमल शरीर का आभूषण, अथवा तेरे चरणों की पादुका मैं होता। यह मेरी परम लालसा है कि पादुका की भांति तेरे सुन्दर चरणों से कुचला जाता, मेरा परेमालिंगन तेरे सुकोमल शरीर का आभूषण और तेरी अलकराशि का पुष्प होता। सुन्दरी रमणी, मैं पराणों को हाथ में लिये तेरी भेंट करने को उत्सुक हो रहा हूं। मेरे साथ चल और हम दोनों परेम में मग्न होकर संसार को भूल जायें।' जब तक वह बोलता रहा, थायस उसकी ओर विस्मित होकर ताकती रही। उसे ज्ञात हुआ कि उसका रूप मनोहर है। अकस्मात उसे अपने माथे पर ठंडा पसीना बहता हुआ जान पड़ा। वह हरी घास की भांति आर्द्र हो गयी। उसके सिर में चक्कर आने लगे, आंखों के सामने मेघघटासी उठती हुई जान पड़ी। युवक ने फिर वही परेमाकांक्षा परकट की, लेकिन थायस ने फिर इनकार किया। उसके आतुर नेत्र, उसकी परेमयाचना बस निष्फल हुई, और जब उसने अधीर होकर उसे अपनी गोद में ले लिया और बलात खींच ले जाना चाहा तो उसने निष्ठुरता से उसे हटा दिया। तब वह उसके सामने बैठकर रोने लगा। पर उसके हृदय में एक नवीन, अज्ञात और अलक्षित चैतन्यता उदित हो गयी थी। वह अब भी दुरागरह करती रही। मेहमानों ने सुना तो बोले-'यह कैसी पगली है ? लोलस कुलीन, रूपवान, धनी है, और यह नाचने वाली युवती उसका अपमान करती हैं !' लोलस का रात घर लौटा तो परेममद तो मतवाला हो रहा था। परातःकाल वह फिर थायस के घर आया, तो उसका मुख विवर्ण और आंखें लाल थीं। उसने थायस के द्वार पर फूलों की माला च़ाई। लेकिन थायस भयभीत और अशान्त थी, और लोलस से मुंह छिपाती रहती थी। फिर भी लोलस की स्मृति एक क्षण के लिए भी उसकी आंखों से न उतरती। उसे वेदना होती थी पर वह इसका कारण न जानती थी। उसे आश्चर्य होता था कि मैं इतनी खिन्न और अन्यमनस्क क्यों हो गयी हूं। यह अन्य सब परेमियों से दूर भागती थी। उनसे उसे घृणा होती थी। उसे दिन का परकाश अच्छा न लगता, सारे दिन अकेले बिछावन पर पड़ी, तकिये में मुंह छिपाये रोया करती। लोलस कई बार किसीन-किसी युक्ति से उसके पास पहुंचा, पर उसका परेमागरह, रोनाधोना, एक भी उसे न पिघला सका। उसके सामने वह ताक न सकती, केवल यही कहती-'नहीं, नहीं।' लेकिन एक पक्ष के बाद उसकी जिद्द जाती रही। उसे ज्ञात हुआ कि मैं लोलस के परेमपाश में फंस गयी हूं। वह उसके घर गयी और उसके साथ रहने लगी। अब उनके आनन्द की सीमा न थी। दिन भर एकदूसरे से आंखें मिलाये बैठे परेमलाप किया करते। संध्या को नदी के नीरव निर्जन तट पर हाथमें-हाथ डाले टहलते। कभीकभी अरुणोदय के समय उठकर पहाड़ियों पर सम्बुल के फूल बटोरने चले जाते। उनकी थाली एक थी। प्याला एक था, मेज एक थी। लोलस उसके मुंह के अंगूर निकालकर अपने मुंह में खा जाता। तब मीरा लोलस के पास आकर रोनेपीटने लगी कि मेरी थायस को छोड़ दो। वह मेरी बेटी है, मेरी आंखों की पुतली ! मैंने इसी उदर से उसे निकाल, इस गोद में उसका लालनपालन किया और अब तू उसे मेरी गोद से छीन लेना चाहता है। लोलस ने उसे परचुर धन देकर विदा किया, लेकिन जब वह धनतृष्णा से लोलुप होकर फिर आयी तो लोलस ने उसे कैद करा दिया। न्यायाधिकारियों को ज्ञात हुआ कि वह कुटनी है, भोली लड़कियों को बहका ले जाना ही उसका उद्यम है तो उसे पराणदण्ड दे दिया और वह जंगली जानवरों के सामने फेंक दी गई। लोलस अपनी अखंड, सम्पूर्ण कामना से थायस को प्यार करता था। उसकी परेम कल्पना ने विराट रूप धारण कर लिया था, जिससे उसकी किशोर चेतना सशंक हो जाती थी। थायस अन्तःकरण से कहती-'मैंने तुम्हारे सिवाय और किसी से परेम नहीं किया।' लोलस जवाब देता-'तुम संसार में अद्वितीय हो।' दोनों पर छः महीने तक यह नशा सवार रहा। अन्त में टूट गया। थायस को ऐसा जान पड़ता कि मेरा हृदय शून्य और निर्जन है। वहां से कोई चीज गायब हो गयी है। लोलस उसकी दृष्टि में कुछ और मालूम होता था। वह सोचती-मुझमें सहसा यह अन्तर क्यों हो गया ? यह क्या बात है कि लोलस अब और मनुष्यों कासा हो गया है, अपनासा नहीं रहा ? मुझे क्या हो गया है ? यह दशा उसे असह्य परतीत होने लगी। अखण्ड परेम के आस्वादन के बाद अब यह नीरस, शुष्क व्यापार उसकी तृष्णा को तृप्त न कर सका। वह अपने खोये हुए लोलस को किसी अन्य पराणी में खोजने की गुप्त इच्छा को हृदय में छिपाये हुए, लोलस के पास से चली गयी। उसने सोचा परेम रहने पर भी किसी पुरुष के साथ रहना। उस आदमी के साथ रहने से कहीं सुखकर है जिससे अब परेम नहीं रहा। वह फिर नगर के विषयभोगियों के साथ उन धमोर्त्सवों में जाने लगी जहां वस्त्रहीन युवतियां मन्दिरों में नृत्य किया करती थीं, या जहां वेश्याओं के गोलके-गोल नदी में तैरा करते थे। वह उस विलासपिरय और रंगीले नगर के रागरंग में दिल खोलकर भाग लेने लगी। वह नित्य रंगशालाओं में आती जहां चतुर गवैये और नर्तक देशदेशान्तरों से आकर अपने करतब दिखाते थे और उत्तेजना के भूखे दर्शकवृन्द वाहवाह की ध्वनि से आसमान सिर पर उठा लेते थे। थायस गायकों, अभिनेताओं, विशेषतः उन स्त्रियों के चालाल को बड़े ध्यान से देखा करती थी जो दुःखान्त नाटकों में मनुष्य से परेम करने वाली देवियों या देवताओं से परेम करने वाली स्त्रियों का अभिनय करती थीं। शीघर ही उसे वह लटके मालूम हो गये, जिनके द्वारा वह पात्राएं दर्शकों का मन हर लेती थीं, और उसने सोचा, क्या मैं जो उन सबों से रूपवती हूं, ऐसा ही अभिनय करके दर्शकों को परसन्न नहीं कर सकती? वह रंगशाला व्यवस्थापक के पास गयी और उससे कहा कि मुझे भी इस नाट्यमंडली में सम्मिलित कर लीजिए। उसके सौन्दर्य ने उसकी पूर्वशिक्षा के साथ मिलकर उसकी सिफारिश की। व्यवस्थापक ने उसकी परार्थना स्वीकार कर ली। और वह पहली बार रंगमंच पर आयी। पहले दर्शकों ने उसका बहुत आशाजनक स्वागत न किया। एक तो वह इस काम में अभ्यस्त न थी, दूसरे उसकी परशंसा के पुल बांधकर जनता को पहले ही से उत्सुक न बनाया गया था। लेकिन कुछ दिनों तक गौण चरित्रों का पार्ट खेलने के बाद उसके यौवन ने वह हाथपांव निकाले कि सारा नगर लोटपोट हो गया। रंगशाला में कहीं तिल रखने भर की जगह न बचती। नगर के बड़ेबड़े हाकिम, रईस, अमीर, लोकमत के परभाव से रंगशाला में आने पर मजबूर हुए। शहर के चौकीदार, पल्लेदार, मेहतर, घाट के मजदूर, दिनदिन भर उपवास करते थे कि अपनी जगह सुरक्षित करा लें। कविजन उसकी परशंसा में कवित्त कहते। लम्बी दायिों वाले विज्ञानशास्त्री व्यायामशालाओं में उसकी निन्दा और उपेक्षा करते। जब उसका तामझाम सड़क पर से निकलता तो ईसाई पादरी मुंह फेर लेते थे। उसके द्वार की चौखट पुष्पमालाओं से की रहती थी। अपने परेमियों से उसे इतना अतुल धन मिलता कि उसे गिनना मुश्किल था। तराजू पर तौल लिया जाता था। कृपण बू़ों की संगरह की हुई समस्त सम्पत्ति उसके ऊपर कौड़ियों की भांति लुटाई जाती थी। पर उसे गर्व न था। ऐंठ न थी। देवताओं की कृपादृष्टि और जनता की परशंसाध्वनि से उसके हृदय को गौरवयुक्त आनन्द होता था। सबकी प्यारी बनकर वह अपने को प्यार करने लगी थी। कई वर्ष तक ऐन्टिओकवासियों के परेम और परशंसा का सुख उठाने के बाद उसके मन में परबल उत्कंठा हुई कि इस्कन्द्रिया चलूं और उस नगर में अपना ठाटबाट दिखाऊं, जहां बचपन में मैं नंगी और भूखी, दरिद्र और दुर्बल, सड़कों पर मारीमारी फिरती थी और गलियों की खाक छानती थी। इस्कन्द्रियां आंखें बिछाये उसकी राह देखता था। उसने बड़े हर्ष से उसका स्वागत किया और उस पर मोती बरसाये। वह क्रीड़ाभूमि में आती तो धूम मच जाती। परेमियों और विलासियों के मारे उसे सांस न मिलती, पर वह किसी को मुंह न लगाती। दूसरा, लोलस उसे जब न मिला तो उसने उसकी चिन्ता ही छोड़ दी। उस स्वर्गसुख की अब उसे आशा न थी। उसके अन्य परेमियों में तत्त्वज्ञानी निसियास भी था जो विरक्त होने का दावा करने पर भी उसके परेम का इच्छुक था। वह धनवान था पर अन्य धनपतियों की भांति अभिमानी और मन्दबुद्धि न था। उसके स्वभाव में विनय और सौहार्द की आभा झलकती थी, किन्तु उसका मधुरहास्य और मृदुकल्पनाएं उसे रिझाने में सफल न होतीं। उसे निसियास से परेम न था, कभीकभी उसके सुभाषितों से उसे चि होती थी। उसके शंकावाद से उसका चित्त व्यगर हो जाता था, क्योंकि निसियास की श्रद्घा किसी पर न थी और थायस की श्रद्घा सभी पर थी। वह ईश्वर पर, भूतपरेतों पर जादूटोने पर, जन्त्रमन्त्र पर पूरा विश्वास करती थी। उसकी भक्ति परभु मसीह पर भी थी, स्याम वालों की पुनीता देवी पर भी उसे विश्वास था कि रात को जब अमुक परेत गलियों में निकलता है तो कुतियां भूंकती हैं। मारण, उच्चाटन, वशीकरण के विधानों पर और शक्ति पर उसे अटल विश्वास था। उसका चित्त अज्ञात न लिए उत्सुक रहता था। वह देवताओं की मनौतियां करती थी और सदैव शुभाशाओं में मग्न रहती थी भविष्य से यह शंका रहती थी, फिर भी उसे जानना चाहती थी। उसके यहां, ओझे, सयाने, तांत्रिक, मन्त्र जगाने वाले, हाथ देखने वाले जमा रहते थे। वह उनके हाथों नित्य धोखा खाती पर सतर्क न होती थी। वह मौत से डरती थी और उससे सतर्क रहती थी। सुखभोग के समय भी उसे भय होता था कि कोई निर्दय कठोर हाथ उसका गला दबाने के लिए ब़ा आता है और वह चिल्ला उठती थी। निसियास कहता था-'पिरये, एक ही बात है, चाहे हम रुग्ण और जर्जर होकर महारात्रि की गोद में समा जायें, अथवा यहीं बैठे, आनन्दभोग करते, हंसतेखेलते, संसार से परस्थान कर जायें। जीवन का उद्देश्य सुखभोग है। आओ जीवन की बाहार लूटें। परेम से हमारा जीवन सफल हो जायेगा। इन्द्रियों द्वारा पराप्त ज्ञान ही यथार्थ ज्ञान है। इसके सिवाय सब मिथ्या के लिए अपने जीवन सुख में क्यों बाधा डालें ?' थायस सरोष होकर उत्तर देती-'तुम जैसे मनुष्यों से भगवान बचाये, जिन्हें कोई आशा नहीं, कोई भय नहीं। मैं परकाश चाहती हूं, जिससे मेरा अन्तःकरण चमक उठे।' जीवन के रहस्य को समझने के लिए उसे दर्शनगरन्थों को पॄना शुरू किया, पर वह उसकी समझ में न आये। ज्योंज्यों बाल्यावस्था उससे दूर होती जाती थी, त्योंत्यों उसकी याद उसे विकल करती थी। उसे रातों को भेष बदलकर उन सड़कों, गलियों, चौराहों पर घूमना बहुत पिरय मालूम होता जहां उसका बचपन इतने दुःख से कटा था। उसे अपने मातापिता के मरने का दुःख होता था, इस कारण और भी कि वह उन्हें प्यार न कर सकी थी। जब किसी ईसाई पूजक से उसकी भेंट हो जाती तो उसे अपना बपतिस्मा याद आता और चित्त अशान्त हो जाता। एक रात को वह एक लम्बा लबादा ओ़े, सुन्दर केशों को एक काले टोप से छिपाये, शहर के बाहर विचर रही थी कि सहसा वह एक गिरजाघर के सामने पहुंच गयी। उसे याद आया, मैंने इसे पहले भी देखा है। कुछ लोग अन्दर गा रहे थे और दीवार की दरारों से उज्ज्वल परकाशरेखाएं बाहर झांक रही थीं। इसमें कोई नवीन बात न थी, क्योंकि इधर लगभग बीस वर्षों से ईसाईधर्म में को विघ्नबाधा न थी, ईसाई लोग निरापद रूप से अपने धमोर्त्सव करते थे। लेकिन इन भजनों में इतनी अनुरक्ति, करुण स्वर्गध्वनि थी, जो मर्मस्थल में चुटकियां लेती हुई जान पड़ती थीं। थायस अन्तःकरण के वशीभूत होकर इस तरह द्वार, खोलकर भीतर घुस गयी मानो किसी ने उसे बुलाया है। वहां उसे बाल, वृद्ध, नरनारियों का एक बड़ा समूह एक समाधि के सामने सिजदा करता हुआ दिखाई दिया। यह कबर केवल पत्थर की एक ताबूत थी, जिस पर अंगूर के गुच्छों और बेलों के आकार बने हुए थे। पर उस पर लोगों की असीम श्रद्घा थी। वह खजूर की टहनियों और गुलाब की पुष्पमालाओं से की हुई थी। चारों तरफ दीपक जल रहे थे और उसके मलिन परकाश में लोबान, ऊद आदि का धुआं स्वर्गदूतों के वस्त्रों की तहोंसा दीखता था, और दीवार के चित्र स्वर्ग के दृश्यों केसे। कई श्वेत वस्त्रधारी पादरी कबर के पैरों पर पेट के बल पड़े हुए थे। उनके भजन दुःख के आनन्द को परकट करते थे और अपने शोकोल्लास में दुःख और सुख, हर्ष और शोक का ऐसा समावेश कर रहे थे कि थायस को उनके सुनने से जीवन के सुख और मृत्यु के भय, एक साथ ही किसी जलस्त्रोत की भांति अपनी सचिन्तस्नायुओं में बहते हुए जान पड़े। जब गाना बन्द हुआ तो भक्तजन उठे और एक कतार मंें कबर के पास जाकर उसे चूमा। यह सामान्य पराणी थे; जो मजूरी करके निवार्ह करते थे। क्या ही धीरेधीरे पग उठाते, आंखों में आंसू भरे, सिर झुकाये, वे आगे ब़ते और बारीबारी से कबर की परिक्रमा करते थे। स्त्रियों ने अपने बालकों को गोद में उठाकर कबर पर उनके होंठ रख दिये। थायस ने विस्मित और चिन्तित होकर एक पादरी से पूछा-'पूज्य पिता, यह कैसा समारोह है ?' पादरी ने उत्तर दिया-'क्या तुम्हें नहीं मालूम कि हम आज सन्त थियोडोर की जयन्ती मना रहे हैं ? उनका जीवन पवित्र था। उन्होंने अपने को धर्म की बलिवेदी पर च़ा दिया, और इसीलिए हम श्वेत वस्त्र पहनकर उनकी समाधि पर लाल गुलाब के फूल च़ाने आये हैं।' यह सुनते ही थायस घुटनों के बल बैठ गयी और जोर से रो पड़ी। अहमद की अर्धविस्मृत स्मृतियां जागरत हो गयीं। उस दीन, दुखी, अभागे पराणी की कीर्ति कितनी उज्ज्वल है ! उसके नाम पर दीपक जलते हैं, गुलाब की लपटें आती हैं, हवन के सुगन्धित धुएं उठते हैं, मीठे स्वरों का नाद होता है और पवित्र आत्माएं मस्तक झुकाती हैं। थायस ने सोचा-अपने जीवन में वह पुष्यात्मा था, पर अब वह पूज्य और उपास्य हो गया हैं ! वह अन्य पराणियों की अपेक्षा क्यों इतना श्रद्घास्पद है ? वह कौनसी अज्ञात वस्तु है जो धन और भोग से भी बहुमूल्य है ? वह आहिस्ता से उठी और उस सन्त की समाधि की ओर चली जिसने उसे गोद में खेलाया था। उसकी अपूर्व आंखों में भरे हुए अश्रुबिन्दु दीपक के आलोक में चमक रहे थे। तब वह सिर झुकाकर, दीनभाव से कबर के पास गयी और उस पर अपने अधरों से अपनी हार्दिक श्रद्घा अंकित कर दी-उन्हीं अधरों से जो अगणित तृष्णाओं का क्रीड़ाक्षेत्र थे ! जब वह घर आयी तो निसियास को बाल संवारे, वस्त्रों मंें सुगन्ध मले, कबा के बन्द खोले बैठे देखा। वह उसके इन्तजार में समय काटने के लिए एक नीतिगरंथ पॄ रहा था। उसे देखते ही वह बांहें खोले उसकी ब़ा और मृदुहास्य से बोला-'कहां गयी थीं, चंचला देवी ? तुम जानती हो तुम्हारे इन्तजार में बैठा हुआ, मैं इस नीतिगरंथ में क्या पॄ रहा था?' नीति के वाक्य और शुद्घाचरण के उपदेश ?' 'कदापि नहीं। गरंथ के पन्नों पर अक्षरों की जगह अगणित छोटीछोटी थायसें नृत्य कर रही थीं। उनमें से एक भी मेरी उंगली से बड़ी न थी, पर उनकी छवि अपार थी और सब एक ही थायस का परतिबिम्ब थीं। कोई तो रत्नजड़ित वस्त्र पहने अकड़ती हुई चलती थी, कोई श्वेत मेघसमूह के सदृश्य स्वच्छ आवरण धारण किये हुए थी; कोई ऐसी भी थीं जिनकी नग्नता हृदय में वासना का संचार करती थी। सबके पीछे दो, एक ही रंगरूप की थीं। इतनी अनुरूप कि उनमें भेद करना कठिन था। दोनों हाथमें-हाथ मिलाये हुए थीं, दोनों ही हंसती थीं। पहली कहती थी-मैं परेम हूं। दूसरी कहती थी-मैं नृत्य हूं।' यह कहकर निसियास ने थायस को अपने करपाश में खींच लिया। थायस की आंखें झुकी हुई थीं। निसियास को यह ज्ञान न हो सका कि उनमें कितना रोष भरा हुआ है। वह इसी भांति सूक्तियों की वर्षा करता रहा, इस बात से बेखबर कि थायस का ध्यान ही इधर नहीं है। वह कह रहा था-'जब मेरी आंखों के सामने यह शब्द आये-अपनी आत्मशुद्धि के मार्ग में कोई बाधा मत आने दो, तो मैंने पॄा 'थायस के अधरस्पर्श अग्नि से दाहक और मधु से मधुर हैं।' इसी भांति एक पण्डित दूसरे पण्डितों के विचारों को उलटपलट देता है; और यह तुम्हारा ही दोष है। यह सर्वथा सत्य है कि जब तक हम वही हैं जो हैं, तब तक हम दूसरों के विचारों में अपने ही विचारों की झलक देखते रहेंगे।' वह अब भी इधर मुखातिब न हुई। उसकी आत्मा अभी तक हब्शी की कबर के सामने झुकी हुई थी। सहसा उसे आह भरते देखकर उसने उसकी गर्दन का चुम्बन कर लिया और बोला-'पिरये, संसार में सुख नहीं है जब तक हम संसार को भूल न जायें। आओ, हम संसार से छल करें, छल करके उससे सुख लें-परेम में सबकुछ भूल जायें।' लेकिन उसने उसे पीछे हटा दिया और व्यथित होकर बोली-'तुम परेम का मर्म नहीं जानते ! तुमने कभी किसी से परेम नहीं किया। मैं तुम्हें नहीं चाहती, जरा भी नहीं चाहती। यहां से चले जाओ, मुझे तुमसे घृणा होती है। अभी चले जाओ, मुझे तुम्हारी सूरत से नफरत है। मुझे उन सब पराणियों से घृणा है, धनी है, आनन्दभोगी हैं। जाओ, जाओ। दया और परेम उन्हीं में है जो अभागे हैं। जब मैं छोटी थी तो मेरे यहां एक हब्शी था जिसने सलीब पर जान दी। वह सज्जन था, वह जीवन के रहस्यों को जानता था। तुम उसके चरण धोने योग्य भी नहीं हो। चले जाओ। तुम्हारा स्त्रियों कासा शृंगार मुझे एक आंख नहीं भाता। फिर मुझे अपनी सूरत मत दिखाना।' यह कहतेकहते वह फर्श पर मुंह के बल गिर पड़ी और सारी रात रोकर काटी। उसने संकल्प किया कि मैं सन्त थियोडोर की भांति और दरिद्र दशा में जीवन व्यतीत करुंगी। दूसरे दिन वह फिर उन्हीं वासनाओं में लिप्त हो गयी जिनकी उसे चाट पड़ गयी थी। वह जानती थी कि उसकी रूपशोभा अभी पूरे तेज पर है, पर स्थायी नहीं इसीलिए इसके द्वारा जितना सुख और जितनी ख्याति पराप्त हो सकती थी उसे पराप्त करने के लिए वह अधीर हो उठी। थियेटर में वह पहले की अपेक्षा और देर तक बैठकर पुस्तकावलोकन किया करती। वह कवियों, मूर्तिकारों और चित्रकारों की कल्पनाओं को सजीव बना देती थी, विद्वानों और तत्त्वज्ञानियों को उसकी गति, अगंविन्यास और उस पराकृतिक माधुर्य की झलक नजर आती थी जो समस्त संसार में व्यापक है और उनके विचार में ऐसी अर्पूव शोभा स्वयं एक पवित्र वस्तु थी। दीन, दरिद्र, मूर्ख लोग उसे एक स्वगीर्य पदार्थ समझते थे। कोई किसी रूप में उसकी उपासना करता था, कोई किसी रूप में। कोई उसे भोग्य समझता था, कोई स्तुत्य और कोई पूज्य। किन्तु इस परेम, भक्ति और श्रद्घा की पात्रा होकर भी वह दुःखी थी, मृत्यु की शंका उसे अब और भी अधिक होने लगी। किसी वस्तु से उसे इस शंका से निवृत्ति न होती। उसका विशाल भवन और उपवन भी, जिनकी शोभा अकथनीय थी और जो समस्त नगर में जनश्रुति बने हुए थे, उसे आश्वस्त करने में असफल थे। इस उपवन में ईरान और हिन्दुस्तान के वृक्ष थे, जिनके लाने और पालने में अपरिमित धन व्यय हुआ था। उनकी सिंचाई के लिए एक निर्मल जल धारा बहायी गयी थी। समीप ही एक झील बनी हुई थी। जिसमें एक कुशल कलाकार के हाथों सजाये हुए स्तम्भचिह्नों और कृत्रिम पहाड़ियों तक तट पर की सुन्दर मूर्तियों का परतिबिम्ब दिखाई देता था। उपवन के मध्य में 'परियों का कुंज' था। यह नाम इसलिए पड़ा था कि उस भवन के द्वार पर तीन पूरे कद की स्त्रियों की मूर्तियां खड़ी थीं। वह सशंक होकर पीछे ताक रही थीं कि कोई देखता न हो। मूर्तिकार ने उनकी चितवनों द्वारा मूर्तियों में जान डाल दी थी। भवन में जो परकाश आता था वह पानी की पतली चादरों से छनकर मद्धिम और रंगीन हो जाता था। दीवारों पर भांतिभांति की झालरें, मालाएं और चित्र लटके हुए थे। बीच में एक हाथीदांत की परम मनोहर मूर्ति थी जो निसियास ने भेंट की थी। एक तिपाई पर एक काले ष्पााण की बकरी की मूर्ति थी, जिसकी आंखें नीलम की बनी हुई थीं। उसके थनों को घेरे हुए छः चीनी के बच्चे खड़े थे, लेकिन बकरी अपने फटे हुए खुर उठाकर ऊपर की पहाड़ी पर उचक जाना चाहती थी। फर्श पर ईरानी कालीनें बिछी हुई थीं, मसनदों पर कैथे के बने हुए सुनहरे बेलबूटे थे। सोने के धूपदान से सुगन्धित धुएं उठ रहे थे, और बड़ेबड़े चीनी गमलों में फूलों से लदे हुए पौधे सजाये हुए थे। सिरे पर, ऊदी छाया में, एक बड़े हिन्दुस्तानी कछुए के सुनहरे नख चमक रहे थे जो पेट के बल उलट दिया गया था। यही थायस का शयनागार था। इसी कछुए के पेट पर लेटी हुई वह इस सुगन्ध और सजावट और सुषमा का आनन्द उठाती थी, मित्रों से बातचीत करती थी और या तो अभिनयकला का मनन करती थी, या बीते हुए दिनों का। तीसरा पहर था। थायस परियों के कुंज में शयन कर रही थी। उसने आईने में अपने सौन्दर्य की अवनति के परथम चिह्न देखे थे, और उसे इस विचार से पीड़ा हो रही थी कि झुर्रियों और श्वेत बालों का आक्रमण होने वाला है उसने इस विचार से अपने को आश्वासन देने की विफल चेष्टा की कि मैं जड़ीबूटियों के हवन करके मंत्रों द्वारा अपने वर्ण की कोमलता को फिर से पराप्त कर लूंगी। उसके कानों में इन शब्दों की निर्दय ध्वनि आयी-'थायस, तू बुयि हो जायेगी !' भय से उसके माथे पर ठण्डाठण्डा पसीना आ गया। तब उसने पुनः अपने को संभालकर आईने में देखा और उसे ज्ञात हुआ कि मैं अब भी परम सुन्दरी और परेयसी बनने के योग्य हूं। उसने पुलकित मन से मुस्कराकर मन में कहा-आज भी इस्कन्द्रिया में काई ऐसी रमणी नहीं है जो अंगों की चपलता और लचक में मुझसे टक्कर ले सके। मेरी बांहों की शोभा अब भी हृदय को खींच सकती है, यथार्थ में यही परेम का पाश है ! वह इसी विचार में मग्न थी कि उसने एक अपरिचित मनुष्य को अपने सामने आते देखा। उसकी आंखों में ज्वाला थी, दा़ी ब़ी हुई थी और वस्त्र बहुमूल्य थे। उसके हाथ में आईना छूटकर गिर पड़ा और वह भय से चीख उठी। पापनाशी स्तम्भित हो गया। उसका अपूर्व सौन्दर्य देखकर उसने शुद्ध अन्तःकरण से परार्थना की-भगवान मुझे ऐसी शक्ति दीजिए कि इस स्त्री का मुख मुझे लुब्ध न करे, वरन तेरे इस दास की परतिज्ञा को और भी दृ़ करे। तब अपने को संभालकर वह बोला-'थायस, मैं एक दूर देश में रहता हूं, तेरे सौन्दर्य की परशंसा सुनकर तेरे पास आया हूं। मैंने सुना था तुमसे चतुर अभिनेत्री और तुमसे मुग्धकर स्त्री संसार में नहीं है। तुम्हारे परेमरहस्यों और तुम्हारे धन के विषय में जो कुछ कहा जाता है वह आश्चर्यजनक है, और उससे 'रोडोप' की कथा याद आती है, जिसकी कीर्ति को नील के मांझी नित्य गाया करते हैं। इसलिए मुझे भी तुम्हारे दर्शनों की अभिलाषा हुई और अब मैं देखता हूं कि परत्यक्ष सुनीसुनाई बातों से कहीं ब़कर है। जितना मशहूर है उससे तुम हजार गुना चतुर और मोहिनी हो। वास्तव में तुम्हारे सामने बिना मतवालों की भांति डगमगाये आना असम्भव है।' यह शब्द कृत्रिम थे, किन्तु योगी ने पवित्र भक्ति से परभावित होकर सच्चे जोश से उनका उच्चारण किया। थायस ने परसन्न होकर इस विचित्र पराणी की ओर ताका जिससे वह पहले भयभीत हो गयी थी। उसके अभद्र और उद्दण्ड वेश ने उसे विस्मित कर दिया। उसे अब तक जितने मनुष्य मिले थे, यह उन सबों से निराला था। उसके मन में ऐसे अद्भुत पराणी के जीवनवृत्तान्त जानने की परबल उत्कंठा हुई। उसने उसका मजाक उड़ाते हुए कहा-'महाशय, आप परेमपरदर्शन में बड़े कुशल मालूम होते हैं। होशियार रहियेगा कि मेरी चितबनें आपके हृदय के पार न हो जायें। मेरे परेम के मैदान में जरा संभलकर कदम रखियेगा।' पापनाशी बोला-'थामस, मुझे तुमसे अगाध परेम है। तुम मुझे जीवन और आत्मा से भी पिरय हो। तुम्हारे लिए मैंने अपना वन्यजीवन छोड़ा है, तुम्हारे लिए मेरे होंठों से, जिन्होंने मौनवरत धारण किया था, अपवित्र शब्द निकले हैं। तुम्हारे लिए मैंने वह देखा जो न देखना चाहिए था, वह सुना है जो मेरे लिए वर्जित था। तुम्हारे लिए मेरी आत्मा तड़प रही है, मेरा हृदय अधीर हो रहा है और जलस्त्रोत की भांति विचार की धाराएं परवाहित हो रही हैं। तुम्हारे लिए मैं अपने नंगे पैर सर्पों और बिच्छुओं पर रखते हुए भी नहीं हिचका हूं। अब तुम्हें मालूम हो गया होगा कि मुझे तुमसे कितना परेम है। लेकिन मेरा परेम उन मनुष्यों कासा नहीं है जो वासना की अग्नि से जलते हुए तुम्हारे पास जीवभक्षी व्याघरों की, और उन्मत्त सांड़ों की भांति दौड़े आते हैं। उनका वही परेम होता है जो सिंह को मृगशावक से। उनकी पाशविक कामलिप्सा तुम्हारी आत्मा को भी भस्मीभूत कर डालेगी। मेरा परेम पवित्र है, अनन्त है, स्थायी है। मैं तुमसे ईश्वर के नाम पर, सत्य के नाम पर परेम करता हूं। मेरा हृदय पतितोद्घार और ईश्वरीय दया के भाव से परिपूर्ण है। मैं तुम्हें फलों से की हुई शराब की मस्ती से और एक अल्परात्रि के सुखस्वप्न से कहीं उत्तम पदार्थों का वचन देने आया हूं। मैं तुम्हें महापरसाद और सुधारसपान का निमन्त्रण देने आया हूं। मैं तुम्हें उस आनन्द का सुखसंवाद सुनाने आया हूं जो नित्य, अमर, अखण्ड है। मृत्युलोक के पराणी यदि उसको देख लें तो आश्चर्य से भर जायें।' थायस ने कुटिल हास्य करके उत्तर दिया-'मित्र, यदि वह ऐसा अद्भुत परेम है तो तुरन्त दिखा दो। एक क्षण भी विलम्ब न करो। लम्बीलम्बी वक्तृताओं से मेरे सौन्दर्य का अपमान होगा। मैं आनन्द का स्वाद उठाने के लिए रो रही हूं। किन्तु जो मेरे दिल की बात पूछो, तो मुझे इस कोरी परशंसा के सिवा और कुछ हाथ न आयेगा। वादे करना आसान है; उन्हें पूरा करना मुश्किल है। सभी मनष्यों में कोईन-कोई गुण विशेष होता है। ऐसा मालूम होता है कि तुम वाणी में निपुण हो। तुम एक अज्ञात परेम का वचन देते हो। मुझे यह व्यापार करते इतने दिन हो गये और उसका इतना अनुभव हो गया है कि अब उसमें किसी नवीनता की किसी रहस्य की आशा नहीं रही। इस विषय का ज्ञान परेमियों को दार्शनिकों से अधिक होता है।' 'थायस, दिल्लगी की बात नहीं है, मैं तुम्हारे लिए अछूता परेम लाया हूं।' 'मित्र, तुम बहुत देर में आये। मैं सभी परकार के परेमों का स्वाद ले चुकी हूं।' 'मैं जो परेम लाया हूं, वह उज्ज्वल है, श्रेय है! तुम्हें जिस परेम का अनुभव हुआ है वह निंद्य और त्याज्य है।' थायस ने गर्व से गर्दन उठाकर कहा-'मित्र, तुम मुंहफट जान पड़ते हो। तुम्हें गृहस्वामिनी के परति मुख से ऐसे शब्द निकालने में जरा भी संकोच नहीं होता ? मेरी ओर आंख उठाकर देखो और तब बताओ कि मेरा स्वरूप निन्दित और पतित पराणियों ही कासा है। नहीं, मैं अपने कृत्यों पर लज्जित नहीं हूं। अन्य स्त्रियां भी, जिनका जीवन मेरे ही जैसा है, अपने को नीच और पतित नहीं समझतीं, यद्यपि, उनके पास न इतना धन है और न इतना रूप। सुख मेरे पैरों के नीचे आंखें बिछाये रहता है, इसे सारा जगत जानता है। मैं संसार के मुकुटधारियों को पैर की धूलि समझती हूं। उन सबों ने इन्हीं पैरों पर शीश नवाये हैं। आंखें उठाओ। मेरे पैरों की ओर देखो। लाखों पराणी उनका चुम्बन करने के लिए अपने पराण भेंट कर देंगे। मेरा डीलडौल बहुत बड़ा नहीं है, मेरे लिए पृथ्वी पर बहुत स्थान की जरूरत नहीं। जो लोग मुझे देवमन्दिर के शिखर पर से देखते हैं, उन्हें मैं बालू के कण के समान दीखती हूं, पर इस कण ने मनुष्यों में जितनी ईष्यार्, जितना द्वेष, जितनी निराशा, जितनी अभिलाषा और जितने पापों का संचार किया है उनके बोझ से अटल पर्वत भी दब जायेगा। जब मेरी कीर्ति समस्त संसार में परसारित हो रही है तो तुम्हारी लज्जा और निद्रा की बात करना पागलपन नहीं तो और क्या है ?' पापनाशी ने अविचलित भाव से उत्तर दिया-'सुन्दरी, यह तुम्हारी भूल है। मनुष्य जिस बात की सराहना करते हैं वह ईश्वर की दृष्टि में पाप है। हमने इतने भिन्नभिन्न देशों में जन्म लिया है कि यदि हमारी भाषा और विचार अनुरूप न हों तो कोई आश्चर्य की बात नहीं। लेकिन मैं ईश्वर को साक्षी देकर कहता हूं कि मैं तुम्हारे पास से जाना नहीं चाहता। कौन मेरे मुख में ऐसे आग्नेय शब्दों को परेरित करेगा जो तुम्हें मोम की भांति पिघला दें कि मेरी उंगलियां तुम्हें अपनी इच्छा के अनुसार रूप दे सकें ? ओ नारीरत्न ! यह कौनसी शक्ति है जो तुम्हें मेरे हाथों में सौंप देगी कि मेरे अन्तःकरण में निहित सद्परेरणा तुम्हारा पुनसरंस्कार करके तुम्हें ऐसा नया और परिष्कृत सौन्दर्य परदान करे कि तुम आनन्द से विह्वल हो पुकार उठो, मेरा फिर से नया संस्कार हुआ ? कौन मेरे हृदय में उस सुधास्त्रोत को परवाहित करेगा कि तुम उसमें नहाकर फिर अपनी मौलिक पवित्रता लाभ कर सको ? कौन मुझे मर्दन की निर्मल धारा में परिवर्तित कर देगा जिसकी लहरों का स्पर्श तुम्हें अनन्त सौन्दर्य से विभूषित कर दे ?' थायस का क्रोध शान्त हो गया। उसने सोचा-यह पुरुष अनन्त जीवन के रहस्यों में परिचित है, और जो कुछ वह कह सकता है उसमें ऋषिवाक्यों कीसी परतिभा है। यह अवश्य कोई कीमियागर है और ऐसे गुप्तमन्त्र जानता है जो जीर्णावस्था का निवारण कर सकते हैं। उसने अपनी देह को उसकी इच्छाओं को समर्पित करने का निश्चय कर लिया। वह एक सशंक पक्षी की भांति कई कदम पीछे हट गयी और अपने पलंग पट्टी पर बैठकर उसकी परतीक्षा करने लगी। उसकी आंखें झुकी हुई थीं और लम्बी पलकों की मलिन छाया कपालों पर पड़ रही थी। ऐसा जान पड़ता था कि कोई बालक नदी के किनारे बैठा हुआ किसी विचार में मग्न है। किन्तु पापनाशी केवल उसकी ओर टकटकी लगाये ताकता रहा, अपनी जगह से जौ भर भी न हिला। उसके घुटने थरथरा रहे थे और मालूम होता था कि वे उसे संभाल न सकेंगे। उसका तालू सूख गया था, कानों में तीवर भनभनाहट की आवाज आने लगी। अकस्मात उसकी आंखों के सामने अन्धकार छा गया, मानो समस्त भवन मेघाच्छादित हो गया है। उसे ऐसा भाषित हुआ कि परभु मसीह ने इस स्त्री को छिपाने के निमित्त उसकी आंखों पर परदा डाल दिया है। इस गुप्त करावलम्ब से आश्वस्त और सशक्त होकर उसने ऐसे गम्भीर भाव से कहा जो किसी वृद्ध तपस्वी के यथायोग्य था-क्या तुम समझती हो कि तुम्हारा यह आत्महनन ईश्वर की निगाहों से छिपा हुआ है ?' उसने सिर हिलाकर कहा-'ईश्वर ? ईश्वर से कौन कहता है कि सदैव परियों के कुंज पर आंखें जमाये रखे ? यदि हमारे काम उसे नहीं भाते तो वह यहां से चला क्यों नहीं जाता ? लेकिन हमारे कर्म उसे बुरे लगते ही क्यों हैं ? उसी ने हमारी सृष्टि की है। जैसा उसने बनाया है वैसे ही हम हैं। जैसी वृत्तियां उसने हमें दी हैं उसी के अनुसार हम आचरण करते हैं ! फिर उसे हमसे रुष्ट होने का, अथवा विस्मित होने का क्या अधिकार है ? उसकी तरफ से लोग बहुतसी मनग़न्त बातें किया करते हैं और उसको ऐसेऐसे विचारों का श्रेय देते हैं जो उसके मन में कभी न थे। तुमको उसके मन की बातें जानने का दावा है। तुमको उसके चरित्र का यथार्थ ज्ञान है। तुम कौन हो कि उसके वकील बनकर मुझे ऐसीऐसी आशाएं दिलाते हो ?' पापनाशी ने मंगनी के बहुमूल्य वस्त्र उतारकर नीचे का मोटा कुरता दिखाते हुए कहा-'मैं धमार्श्रम का योगी हूं। मेरा नाम पापनाशी है। मैं उसी पवित्र तपोभूमि से आ रहा हूं। ईश्वर की आज्ञा से मैं एकान्तसेवन करता हूं। मैंने संसार से और संसार के पराणियों से मुंह मोड़ लिया था। इस पापमय संसार में निर्लिप्त रहना ही मेरा उद्दिष्ट मार्ग है। लेकिन तेरी मूर्ति मेरी शान्तिकुटीर में आकर मेरे सम्मुख खड़ी हुई और मैंने देखा कि तू पाप और वासना में लिप्त है, मृत्यु तुझे अपना गरास बनाने को खड़ी है। मेरी दया जागृत हो गयी और तेरा उद्घार करने के लिए आ उपस्थित हुआ हूं। मैं तुझे पुकारकर कहता हूं-थायस, उठ, अब समय नहीं है।' योगी के यह शब्द सुनकर थायस भय से थरथर कांपने लगी। उसका मुख श्रीहीन हो गया, वह केश छिटकाये, दोनों हाथ जोड़े रोती और विलाप करती हुई उसके पैरों पर गिर पड़ी और बोली-'महात्मा जी, ईश्वर के लिए मुझ पर दया कीजिए। आप यहां क्यों आये हैं ? आपकी क्या इच्छा है ? मेरा सर्वनाश न कीजिए। मैं जानता हूं कि तपोभूमि के ऋषिगण हम जैसी स्त्रियों से घृणा करते हैं, जिनका जन्म ही दूसरों को परसन्न रखने के लिए होता है। मुझे भय हो रहा है कि आप मुझसे घृणा करते हैं और मेरा सर्वनाश करने पर उद्यत हैं। कृपया यहां से सिधारिए। मैं आपकी शक्ति और सिद्धि के सामने सिर झुकाती हूं। लेकिन आपका मुझ पर कोप करना उचित नहीं है, क्योंकि मैं अन्य मनुष्यों की भांति आप लोगों की भिक्षावृत्ति और संयम की निन्दा नहीं करती। आप भी मेरे भोगविलास को पाप न समझिए। मैं रूपवती हूं और अभिनय करने में चतुर हूं। मेरा काबू न अपनी दशा पर है, और न अपनी परकृति पर। मैं जिस काम के योग्य बनायी गयी हूं वही करती हूं। मनुष्यों की मुग्ध करने ही के निमित्त मेरी सृष्टि हुई है। आप भी तो अभी कह रहे थे कि मैं तुम्हें प्यार करता हूं। अपनी सिद्धियों से मेरा अनुपकार न कीजिए। ऐसा मन्त्र न चलाइए कि मेरा सौन्दर्य नष्ट हो जाय, या मैं पत्थर तथा नमक की मूर्ति बन जाऊं। मुझे भयभीत न कीजिए। मेरे तो पहले ही से पराण सूखे हुए हैं। मुझे मौत का मुंह न दिखाइए, मुझे मौत से बहुत डर लगता है।' पापनाशी ने उसे उठने का इशारा किया और बोला-'बच्चा, डर मत। तेरे परति अपमान या घृणा का शब्द भी मेरे मुंह से न निकलेगा। मैं उस महान पुरुष की ओर से आया हूं, जो पापियों को गले लगाता था, वेश्याओं के घर भोजन करता था, हत्यारों से परेम करता था, पतितों को सान्त्वना देता था। मैं स्वयं पापमुक्त नहीं हूं कि दूसरों पर पत्थर फेंकूं। मैंने कितनी ही बार उस विभूति का दुरुपयोग किया है जो ईश्वर ने मुझे परदान की है। क्रोध ने मुझे यहां आने पर उत्साहित नहीं किया। मैं दया के वशीभूत होकर आया हूं। मैं निष्कपट भाव से परेम के शब्दों में तुझे आश्वासन दे सकता हूं, क्योंकि मेरा पवित्र धर्मस्नेह ही मुझे यहां लाया है। मेरे हृदय में वात्सल्य की अग्नि परज्वलित हो रही है और यदि तेरी आंखें जो विषय के स्थूल, अपवित्र दृश्यों के वशीभूत हो रही हैं, वस्तुओं को उनके आध्यात्मिक रूप में देखतीं तो तुझे विदित होता कि मैं उस जलती हुई झाड़ी का एक पल्लव हूं जो ईश्वर ने अपने परेम का परिचय देने के लिए मूसा को पर्वत पर दिखाई थी-जो समस्त संसार में व्याप्त है, और जो वस्तुओं को भस्म कर देने के बदले, जिस वस्तु में परवेश करती है उसे सदा के लिए निर्मल और सुगन्धमय बना देती है।' थायस ने आश्वस्त होकर कहा-'महात्मा जी, अब मुझे आप पर विश्वास हो गया है। मुझे आपसे किसी अनिष्ट या अमंगल की आशंका नहीं है। मैंने धमार्श्रम के तपस्वियों की बहुत चचार सुनी है। ऐण्तोनी और पॉल के विषय में बड़ी अद्भुत कथाएं सुनने में आयी हैं। आपके नाम से भी मैं अपरिचित नहीं हूं और मैंने लोगों को कहते सुना है कि यद्यपि आपकी उमर अभी कम है, आप धर्मनिष्ठा में उन तपस्वियों से भी श्रेष्ठ हैं जिन्होंने अपना समस्त जीवन ईश्वर आराधना में व्यतीत किया। यद्यपि मेरा अपसे परिचय न था, किन्तु आपको देखते ही मैं समझ गयी कि आप कोई साधारण पुरुष नहीं हैं। बताइये, आप मुझे वह वस्तु परदान कर सकते हैं जो सारे संसार के सिद्ध और साधु, ओझे और सयाने, कापालिक और वैतालिक नहीं कर सके ? आपके पास मौत की दवा है ? आप मुझे अमर जीवन दे सकते हैं ? यही सांसारिक इच्छाओं का सप्तम स्वर्ग है।' पापनाशी ने उत्तर दिया-'कामिनी, अमर जीवन लाभ करना परत्येक पराणी की इच्छा के अधीन है। विषयवासनाओं को त्याग दे, जो तेरी आत्मा का सर्वनाश कर रहे हैं। उस शरीर को पिशाचों के पंजे से छुड़ा ले जिसे ईश्वर ने अपने मुंह के पानी से साना और अपने श्वास से जिलाया, अन्यथा परेत और पिशाच उसे बड़ी क्रुरता से जलायेंगे। नित्य के विलास से तेरे जीवन का स्त्रोत क्षीण हो गया है। आ, और एकान्त के पवित्र सागर में उसे फिर परवाहित कर दे। आ, और मरुभूमि में छिपे हुए सोतों का जल सेवन कर जिनका उफान स्वर्ग तक पहुंचता है। ओ चिन्ताओं में डूबी हुई आत्मा ! आ, अपनी इच्छित वस्तु को पराप्त कर ! जो आनन्द की भूखी स्त्री ! आ, और सच्चे आनन्द का आस्वादन कर। दरिद्रता का, विराग का, त्याग कर, ईश्वर के चरणों में आत्मसमर्पण कर ! आ, ओ स्त्री, जो आज परभु मसीह की द्रोहिणी है, लेकिन कल उसको परेयसी होगी। आ, उसका दर्शन कर, उसे देखते ही तू पुकार उठेगी-मुझे परेमधन मिल गया !' थामस भविष्यचिन्तन में खोयी हुई थी। बोली-'महात्मा, अगर मैं जीवन के सुखों को त्याग दूं और कठिन तपस्या करुं तो क्या यह सत्य है कि मैं फिर जन्म लूंगी और मेरे सौन्दर्य को आंच न आयेगी ?' पापनाशी ने कहा-'थायस, मैं तेरे लिए अनन्तजीवन का सन्देश लाया हूं। विश्वास कर, मैं जो कुछ कहता हूं, सर्वथा सत्य है।' थायस-'मुझे उसकी सत्यता पर विश्वास क्योंकर आये ?' पापनाशी-'दाऊद और अन्य नबी उसकी साक्षी देंगे, तुझे अलौकिक दृश्य दिखाई देंगे, वह इसका समर्थन करेंगे।' थायस-'योगी जी, आपकी बातों से मुझे बहुत संष्तोा हो रहा है, क्योंकि वास्तव में मुझे इस संसार में सुख नहीं मिला। मैं किसी रानी से कम नहीं हूं, किन्तु फिर भी मेरी दुराशाओं और चिन्ताओं का अन्त नहीं है। मैं जीने से उकता गयी हूं। अन्य स्त्रियां मुझ पर ईष्यार करती हैं, पर मैं कभीकभी उस दुःख की मारी, पोपली बुयि पर ईष्यार करती हूं जो शहर के फाटक की छांह में बैठी तलाशे बेचा करती है। कितनी ही बार मेरे मन में आया है कि गरीब ही सुखी, सज्जन और सच्चे होते हैं, और दीन, हीन, निष्परभ रहने में चित्त को बड़ी शान्ति मिलती है। आपने मेरी आत्मा में एक तूफानसा पैदा कर दिया है और जो नीचे दबी पड़ी थी उसे ऊपर कर दिया है। हां ! मैं किसका विश्वास करुं ? मेरे जीवन का क्या अन्त होगा-जीवन ही क्या है ?' पापनाशी ने उसे उठने का इशारा किया और बोला-'बच्चा, डर मत। तेरे परति अपमान या घृणा का शब्द भी मेरे मुंह से न निकलेगा। मैं उस महान पुरुष की ओर से आया हूं, जो पापियों को गले लगाता था, वेश्याओं के घर भोजन करता था, हत्यारों से परेम करता था, पतितों को सान्त्वना देता था। मैं स्वयं पापमुक्त नहीं हूं कि दूसरों पर पत्थर फेंकूं। मैंने कितनी ही बार उस विभूति का दुरुपयोग किया है जो ईश्वर ने मुझे परदान की है। क्रोध ने मुझे यहां आने पर उत्साहित नहीं किया। मैं दया के वशीभूत होकर आया हूं। मैं निष्कपट भाव से परेम के शब्दों में तुझे आश्वासन दे सकता हूं, क्योंकि मेरा पवित्र धर्मस्नेह ही मुझे यहां लाया है। मेरे हृदय में वात्सल्य की अग्नि परज्वलित हो रही है और यदि तेरी आंखें जो विषय के स्थूल, अपवित्र दृश्यों के वशीभूत हो रही हैं, वस्तुओं को उनके आध्यात्मिक रूप में देखतीं तो तुझे विदित होता कि मैं उस जलती हुई झाड़ी का एक पल्लव हूं जो ईश्वर ने अपने परेम का परिचय देने के लिए मूसा को पर्वत पर दिखाई थी-जो समस्त संसार में व्याप्त है, और जो वस्तुओं को भस्म कर देने के बदले, जिस वस्तु में परवेश करती है उसे सदा के लिए निर्मल और सुगन्धमय बना देती है।' थायस ने आश्वस्त होकर कहा-'महात्मा जी, अब मुझे आप पर विश्वास हो गया है। मुझे आपसे किसी अनिष्ट या अमंगल की आशंका नहीं है। मैंने धमार्श्रम के तपस्वियों की बहुत चचार सुनी है। ऐण्तोनी और पॉल के विषय में बड़ी अद्भुत कथाएं सुनने में आयी हैं। आपके नाम से भी मैं अपरिचित नहीं हूं और मैंने लोगों को कहते सुना है कि यद्यपि आपकी उमर अभी कम है, आप धर्मनिष्ठा में उन तपस्वियों से भी श्रेष्ठ हैं जिन्होंने अपना समस्त जीवन ईश्वर आराधना में व्यतीत किया। यद्यपि मेरा अपसे परिचय न था, किन्तु आपको देखते ही मैं समझ गयी कि आप कोई साधारण पुरुष नहीं हैं। बताइये, आप मुझे वह वस्तु परदान कर सकते हैं जो सारे संसार के सिद्ध और साधु, ओझे और सयाने, कापालिक और वैतालिक नहीं कर सके ? आपके पास मौत की दवा है ? आप मुझे अमर जीवन दे सकते हैं ? यही सांसारिक इच्छाओं का सप्तम स्वर्ग है।' पापनाशी ने उत्तर दिया-'कामिनी, अमर जीवन लाभ करना परत्येक पराणी की इच्छा के अधीन है। विषयवासनाओं को त्याग दे, जो तेरी आत्मा का सर्वनाश कर रहे हैं। उस शरीर को पिशाचों के पंजे से छुड़ा ले जिसे ईश्वर ने अपने मुंह के पानी से साना और अपने श्वास से जिलाया, अन्यथा परेत और पिशाच उसे बड़ी क्रुरता से जलायेंगे। नित्य के विलास से तेरे जीवन का स्त्रोत क्षीण हो गया है। आ, और एकान्त के पवित्र सागर में उसे फिर परवाहित कर दे। आ, और मरुभूमि में छिपे हुए सोतों का जल सेवन कर जिनका उफान स्वर्ग तक पहुंचता है। ओ चिन्ताओं में डूबी हुई आत्मा ! आ, अपनी इच्छित वस्तु को पराप्त कर ! जो आनन्द की भूखी स्त्री ! आ, और सच्चे आनन्द का आस्वादन कर। दरिद्रता का, विराग का, त्याग कर, ईश्वर के चरणों में आत्मसमर्पण कर ! आ, ओ स्त्री, जो आज परभु मसीह की द्रोहिणी है, लेकिन कल उसको परेयसी होगी। आ, उसका दर्शन कर, उसे देखते ही तू पुकार उठेगी-मुझे परेमधन मिल गया !' थामस भविष्यचिन्तन में खोयी हुई थी। बोली-'महात्मा, अगर मैं जीवन के सुखों को त्याग दूं और कठिन तपस्या करुं तो क्या यह सत्य है कि मैं फिर जन्म लूंगी और मेरे सौन्दर्य को आंच न आयेगी ?' पापनाशी ने कहा-'थायस, मैं तेरे लिए अनन्तजीवन का सन्देश लाया हूं। विश्वास कर, मैं जो कुछ कहता हूं, सर्वथा सत्य है।' थायस-'मुझे उसकी सत्यता पर विश्वास क्योंकर आये ?' पापनाशी-'दाऊद और अन्य नबी उसकी साक्षी देंगे, तुझे अलौकिक दृश्य दिखाई देंगे, वह इसका समर्थन करेंगे।' थायस-'योगी जी, आपकी बातों से मुझे बहुत संष्तोा हो रहा है, क्योंकि वास्तव में मुझे इस संसार में सुख नहीं मिला। मैं किसी रानी से कम नहीं हूं, किन्तु फिर भी मेरी दुराशाओं और चिन्ताओं का अन्त नहीं है। मैं जीने से उकता गयी हूं। अन्य स्त्रियां मुझ पर ईष्यार करती हैं, पर मैं कभीकभी उस दुःख की मारी, पोपली बुयि पर ईष्यार करती हूं जो शहर के फाटक की छांह में बैठी तलाशे बेचा करती है। कितनी ही बार मेरे मन में आया है कि गरीब ही सुखी, सज्जन और सच्चे होते हैं, और दीन, हीन, निष्परभ रहने में चित्त को बड़ी शान्ति मिलती है। आपने मेरी आत्मा में एक तूफानसा पैदा कर दिया है और जो नीचे दबी पड़ी थी उसे ऊपर कर दिया है। हां ! मैं किसका विश्वास करुं ? मेरे जीवन का क्या अन्त होगा-जीवन ही क्या है ?' वह यह बातें कर रही थी कि पापनाशी के मुख पर तेज छा गया, सारा मुखमंडल आदि ज्योति से चमक उठा, उसके मुंह से यह परतिभाशाली वाक्य निकले-'कामिनी, सुन, मैंने जब इस घर में कदम रखा तो मैं अकेला न था। मेरे साथ कोई और भी था और वह अब भी मेरे बगल में खड़ा है। तू अभी उसे नहीं देख सकती, क्योंकि तेरी आंखों में इतनी शक्ति नहीं है। लेकिन शीघर ही स्वगीर्य परतिभा से तू उसे आलोकित देखेगी और तेरे मुंह से आपही-आप निकल पड़ेगा-यही मेरा आराध्य देव है। तूने अभी उसकी आलौकिक शक्ति देखी ! अगर उसने मेरी आंखों के सामने अपने दयालु हाथ न फैला दिये होते तो अब तक मैं तेरे साथ पापाचरण कर चुका होता; क्योंकि स्वतः मैं अत्यन्त दुर्बल और पापी हूं। लेकिन उसने हम दोनों की रक्षा की। वह जितना ही शक्तिशाली है उतना ही दयालु है और उसका नाम है मुक्तिदाता। दाऊद और अन्य नबियों ने उसके आने की खबर दी थी, चरवाहों और ज्योतिषियों ने हिंडोले में उसके सामने शीश झुकाया था। फरीसियों ने उसे सलीब पर च़ाया, फिर वह उठकर स्वर्ग को चला गया। तुझे मृत्यु से इतना सशंक देखकर वह स्वयं तेरे घर आया है कि तुझे मृत्यु से बचा ले। परभु मसीह ! क्या इस समय तुम यहां उपस्थित नहीं हो, उसी रूप में जो तुमने गैलिली के निवासियों को दिखाया था। कितना विचित्र समय था बैतुलहम के बालक तारागण को हाथ में लेकर खेलते थे जो उस समय धरती के निकट ही स्थित थे। परभु मसीह, क्या यह सत्य नहीं है कि तुम इस समय यहां उपस्थित हो और मैं तुम्हारी पवित्र देह को परत्यक्ष देख रहा हूं ? क्या तेरी दयालु कोमल मुखारबिन्द यहां नहीं है ? और क्या वह आंसू जो तेरे गालों पर बह रहे हैं, परत्यक्ष आंसू नहीं हैं ? हां, ईश्वरीय न्याय का कर्त्ता उन मोतियों के लिए हाथ रोपे खड़ा है और उन्हीं मोतियों से थायस की आत्मा की मुक्ति होगी। परभु मसीह, क्या तू बोलने के लिए होंठ नहीं खोले हुए है ? बोल, मैं सुन रहा हूं ! और थायस, सुलक्षण थायस सुन, परभु मसीह तुझसे क्या कह रहे हैं-ऐ मेरी भटकी हुई मेषसुन्दरी, मैं बहुत दिनों से तेरी खोज में हूं। अन्त में मैं तुझे पा गया। अब फिर मेरे पास से न भागना। आ, मैं तेरा हाथ पकड़ लूं और अपने कन्धों पर बिठाकर स्वर्ग के बाड़े में ले चलूं। आ मेरी थायस, मेरी पिरयतमा, आ ! और मेरे साथ रो।' यह कहतेकहते पापनाशी भक्ति से विह्वल होकर जमीन पर घुटनों के बल बैठ गया। उसकी आंखों से आत्मोल्लास की ज्योतिरेखाएं निकलने लगीं। और थायस को उसके चेहरे पर जीतेजागते मसीह का स्वरूप दिखाई दिया। वह करुण क्रंदन करती हुई बोली-'ओ मेरी बीती हुई बाल्यावस्था, ओ मेरे दयालु पिता अहमद ! ओ सन्त थियोडोर, मैं क्यों न तेरी गोद में उसी समय मर गयी जब तू अरुणोदय के समय मुझे अपनी चादर में लपेटे लिये आता था और मेरे शरीर से वपतिस्मा के पवित्र जल की बूंदें टपक रही थीं।' पापनाशी यह सुनकर चौंक पड़ा मानो कोई अलौकिक घटना हो गयी है और दोनों हाथ फैलाये हुए थायस की ओर यह कहते हुए ब़ा-'भगवान्, तेरी महिमा अपार है। क्या तू बपतिस्मा के जल से प्लावित हो चुकी है ? हे परमपिता, भक्तवत्सल परभु, ओ बुद्धि के अगाध सागर ! अब मुझे मालूम हुआ कि वह कौनसी शक्ति थी जो मुझे तेरे पास खींचकर लायी। अब मुझे ज्ञात हुआ कि वह कौनसा रहस्य था जिसने तुझे मेरी दृष्टि में इतना सुन्दर, इतना चित्ताकर्षक बना दिया था। अब मुझे मालूम हुआ कि मैं तेरे परेमपाश में क्यों इस भांति जकड़ गया था कि अपना शान्तिवास छोड़ने पर विवश हुआ। इसी बपतिस्माजल की महिमा थी जिसने मुझे ईश्वर के द्वार को छुड़ाकर मुझे खोजने के लिए इस विषाक्त वायु से भरे हुए संसार में आने पर बाध्य किया जहां मायामोह में फंसे हुए लोग अपना कलुषित जीवन व्यतीत करते हैं। उस पवित्र जल की एक बूंद-केवल एक ही बूंद मेरे मुख पर छिड़क दी गयी है जिसमें तूने स्नान किया था। आ, मेरी प्यारी बहिन, आ, और अपने भाई के गले लग जा जिसका हृदय तेरा अभिवादन करने के लिए तड़प रहा है।' यह कहकर पापनाशी ने बारांगना के सुन्दर ललाट को अपने होंठों से स्पर्श किया। इसके बाद वह चुप हो गया कि ईश्वर स्वयं मधुर, सांत्वनापरद शब्दों में थायस को अपनी दयालुता का विश्वास दिलाये। और 'परियों के रमणीक कुंज' में थायस की सिसकियों के सिवा, जो जलधारा की कलकल ध्वनि से मिल गयी थीं, और कुछ न सुनाई दिया। वह इसी भांति देर तक रोती रही। अश्रुपरवाह को रोकने का परयत्न उसने न किया। यहां तक कि उसके हब्शी गुलाम सुन्दर वस्त्र; फूलों के हार और भांतिभांति के इत्र लिये आ पहुंचे। उसने मुस्कराने की चेष्टा करके कहा-'अरे रोने का समय बिल्कुल नहीं रहा। आंसुओं से आंखें लाल हो जाती हैं, और उनमें चित्त को विकल करने वाला पुष्प विकास नहीं रहता, चेहरे का रंग फीका पड़ जाता है, वर्ण की कोमलता नष्ट हो जाती है। मुझे आज कई रसिक मित्रों के साथ भोजन करना है। मैं चाहती हूं कि मेरी मुखचन्द्र सोलहों कला से चमके, क्योंकि वहां कई ऐसी स्त्रियां आयेंगी जो मेरे मुख पर चिन्ता या ग्लानि के चिह्न को तुरन्त भांप जायेंगी और मन में परसन्न होंगी कि अब इनका सौन्दर्य थोड़े ही दिनों का और मेहमान है, नायिका अब परौ़ा हुआ चाहती है। ये गुलाम मेरा शृंगार करने आये हैं। पूज्य पिता आप कृपया दूसरे कमरे में जा बैठिए और इन दोनों को अपना काम करने दीजिए। यह अपने काम में बड़े परवीण और कुशल हैं। मैं उन्हें यथेष्ट पुरस्कार देती हूं। वह जो सोने की अंगूठियां पहने हैं और जिनके मोती केसे दांत चमक रहे हैं, उसे मैंने परधानमन्त्री की पत्नी से लिया है।' पापनाशी की पहले तो यह इच्छा हुई कि थायस को इस भोज में सम्मिलित होने से यथाशक्ति रोके। पर पुनः विचार किया तो विदित हुआ कि यह उतावली का समय नहीं है। वर्षों का जमा हुआ मनोमालिन्य एक रगड़ से नहीं दूर हो सकता। रोग का मूलनाश शनैःशनैः, क्रमक्रम से ही होगा। इसलिए उसने धमोर्त्साह के बदले बुद्धिमत्ता से काम लेने का निश्चय किया और पूछा-वाह किनकिन मनुष्यों से भेंट होगी ? उसने उत्तर दिया-'पहले तो वयोवृद्ध कोटा से भेंट होगी जो यहां के जलसेना के सेनापति हैं। उन्हीं ने यह दावत दी है। निसियास और अन्य दार्शनिक भी आयेंगे जिन्हें किसी विषय की मीमांसा करने ही में सबसे अधिक आनन्द पराप्त होता है। इनके अतिरिक्त कविसमाजभूषण कलिक्रान्त, और देवमन्दिर के अध्यक्ष भी आयेंगे। कई युवक होंगे जिनको घोड़े निकालने ही में परम आनन्द आता है और कई स्त्रियां मिलेंगी जिनके विषय में इसके सिवाय और कुछ नहीं कहा जा सकता कि वे युवतियां हैं।' पापनाशी ने ऐसी उत्सुकता से जाने की सम्मति दी मानो उसे आकाशवाणी हुई है। बोला-'तो अवश्य जाओ थायस, अवश्य जाओ। मैं तुम्हें सहर्ष आज्ञा देता हूं। लेकिन मैं तेरा साथ न छोडूंगा। मैं भी इस दावत में तुम्हारे साथ चलूंगा। इतना जानता हूं कि कहां बोलना और कहां चुप रहना चाहिए। मेरे साथ रहने से तुम्हें कोई असुविधा अथवा झेंप न होगी।' दोनों गुलाम अभी उसको आभूषण पहना ही रहे थे कि थायस खिलखिलाकर हंस पड़ी और बोली-'वह धमार्श्रम के एक तपस्वी को मेरे परेमियों में देखकर कहेंगे ?'
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मांट्रियल, पीटीआइ।
कनाडा के मांट्रियल शहर में बुधवार को करीब दो सप्ताह चलने वाला जैव विविधता पर सम्मेलन (सीओपी 15) शुरू हुआ। सम्मेलन में भारत सहित 196 देशों के करीब 20 हजार प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। प्रतिभागियों में मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, पर्यावरण विशेषज्ञ और संगठनों के पदाधिकारी शामिल हैं। सम्मेलन में प्रकृति को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए कार्य योजना बनाने पर विचार होगा। इस कार्ययोजना को 2030 तक पूरा करने के लिए समझौता होगा।
नवंबर में मिस्त्र में हुए अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन के बाद पर्यावरण सुधार के लिए संयुक्त राष्ट्र के यह दूसरा बड़ा प्रयास है। 19 दिसंबर तक चलने वाले इस सम्मेलन में वायुमंडल में रहने वाले सभी जीवधारियों के संरक्षण की रूपरेखा बनाई जाएगी जिससे प्रकृति का क्षरण रुके। सम्मेलन में 2030 तक 30 प्रतिशत भूमि और समुद्री पर्यावरण को संरक्षित करने पर विचार होगा। सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि प्रकृति खतरे में है। इस पर लगातार हमले हो रहे हैं। विश्व में इस समय जो कुछ हो रहा है, अच्छा नहीं हो रहा है।
ट्रूडो ने कहा कि कनाडा प्रकृति में सुधार और जैव विविधता के विकास में हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। उनका देश प्रकृति के 30 प्रतिशत हिस्से को संरक्षित करने के प्रस्ताव का समर्थन करता है। कनाडा ने पर्यावरण सुधार के प्रयासों के लिए विकासशील देशों को 30 करोड़ डालर की सहायता का भी एलान किया है। ट्रूडो जिस समय बोल रहे थे उस समय पर्यावरण सुधार के पक्षधर संगठन गाना गाकर और ड्रम बजाकर उनके भाषण को बाधित करने का प्रयास कर रहे थे। इन संगठनों का मानना है कि दुनिया के संपन्न देशों ने पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है और अब वे केवल सुधार की बातें कर रहे हैं, वास्तव में कुछ नहीं कर रहे। विदित हो कि कनाडा उद्योग संपन्न देशों के संगठन जी 7 का सदस्य देश है।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कहा, अगर हालात काबू नहीं किए गए तो मानव के विलुप्त होने का खतरा पैदा हो जाएगा। पर्यावरण में सुधार के लिए अब और समय गंवाने की गुंजाइश नहीं है। पर्यावरण में तेजी से हो रहे बदलाव के कारण दस लाख से ज्यादा कीड़े-मकोड़े और पशु-पक्षी विलुप्त हो गए हैं या फिर विलुप्तीकरण के कगार पर पहुंच चुके हैं। जीवधारियों का इतनी तेज गति से विलुप्तीकरण बीते एक करोड़ सालों में नहीं देखा गया। इतना ही नहीं करीब 40 प्रतिशत भूमि की प्रकृति भी खराब हुई है। संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले आयोजित सम्मेलन दो सप्ताह चलेगा और इसमें पर्यावरण, पेड़-पौधों और जीवधारियों पर चर्चा होगी।
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मांट्रियल, पीटीआइ। कनाडा के मांट्रियल शहर में बुधवार को करीब दो सप्ताह चलने वाला जैव विविधता पर सम्मेलन शुरू हुआ। सम्मेलन में भारत सहित एक सौ छियानवे देशों के करीब बीस हजार प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। प्रतिभागियों में मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, पर्यावरण विशेषज्ञ और संगठनों के पदाधिकारी शामिल हैं। सम्मेलन में प्रकृति को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए कार्य योजना बनाने पर विचार होगा। इस कार्ययोजना को दो हज़ार तीस तक पूरा करने के लिए समझौता होगा। नवंबर में मिस्त्र में हुए अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन के बाद पर्यावरण सुधार के लिए संयुक्त राष्ट्र के यह दूसरा बड़ा प्रयास है। उन्नीस दिसंबर तक चलने वाले इस सम्मेलन में वायुमंडल में रहने वाले सभी जीवधारियों के संरक्षण की रूपरेखा बनाई जाएगी जिससे प्रकृति का क्षरण रुके। सम्मेलन में दो हज़ार तीस तक तीस प्रतिशत भूमि और समुद्री पर्यावरण को संरक्षित करने पर विचार होगा। सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा कि प्रकृति खतरे में है। इस पर लगातार हमले हो रहे हैं। विश्व में इस समय जो कुछ हो रहा है, अच्छा नहीं हो रहा है। ट्रूडो ने कहा कि कनाडा प्रकृति में सुधार और जैव विविधता के विकास में हर संभव सहयोग देने के लिए तैयार है। उनका देश प्रकृति के तीस प्रतिशत हिस्से को संरक्षित करने के प्रस्ताव का समर्थन करता है। कनाडा ने पर्यावरण सुधार के प्रयासों के लिए विकासशील देशों को तीस करोड़ डालर की सहायता का भी एलान किया है। ट्रूडो जिस समय बोल रहे थे उस समय पर्यावरण सुधार के पक्षधर संगठन गाना गाकर और ड्रम बजाकर उनके भाषण को बाधित करने का प्रयास कर रहे थे। इन संगठनों का मानना है कि दुनिया के संपन्न देशों ने पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है और अब वे केवल सुधार की बातें कर रहे हैं, वास्तव में कुछ नहीं कर रहे। विदित हो कि कनाडा उद्योग संपन्न देशों के संगठन जी सात का सदस्य देश है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कहा, अगर हालात काबू नहीं किए गए तो मानव के विलुप्त होने का खतरा पैदा हो जाएगा। पर्यावरण में सुधार के लिए अब और समय गंवाने की गुंजाइश नहीं है। पर्यावरण में तेजी से हो रहे बदलाव के कारण दस लाख से ज्यादा कीड़े-मकोड़े और पशु-पक्षी विलुप्त हो गए हैं या फिर विलुप्तीकरण के कगार पर पहुंच चुके हैं। जीवधारियों का इतनी तेज गति से विलुप्तीकरण बीते एक करोड़ सालों में नहीं देखा गया। इतना ही नहीं करीब चालीस प्रतिशत भूमि की प्रकृति भी खराब हुई है। संयुक्त राष्ट्र के बैनर तले आयोजित सम्मेलन दो सप्ताह चलेगा और इसमें पर्यावरण, पेड़-पौधों और जीवधारियों पर चर्चा होगी।
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बकरी, बेल, पागल, शत्रु, भयंकर रोगी, विषदेनेवाला, अग्नि लगाने वाला, लड़ाई करनेवाला, नास्तिक दंभी, वेश्यागामी आदि का मण्डप में प्रवेश न हो- ऐसा मण्डपाच्छादन करे। मण्डप की हर समय रक्षा होनी चाहिये। रात को आदमी मण्डप के चारों तरफ घूमता रहे जिससे चोर आदि द्वारा मण्डप की सामग्री तथा मूर्ति की चोरी का भय न हो ।
आचार्य कुण्ड निर्णय---
नवग्रहके नो कुण्ड पक्ष में सूर्य के प्रधान हो जाने से आचार्यकुण्ड मध्य का ही होता है। इन कुण्डों की योनिका स्थान विभक्त । द्विमुख में मध्य गत दो कुण्डों में दक्षिणवाला कुण्ड आचार्य कुण्ड होता है। इनकी योनि पूर्वं होती है । शतमुख में विशेष वचन से नैऋत्यकोण का ही कुण्ड आचार्य कुण्ड होता है। इन कुण्डोंकी योनि पूर्व ही होती है। दश मुखर्भे नैऋत्यकोण का ही कुण्ड आचार्य कुण्ड होता है। इनकी योनि पूर्वमें होती है। विष्णु, रूद्र आदिकी प्रतिष्ठा मात्र में नौ कण्डी पक्ष में ईशान कोण और पूर्वादशाके मध्य वाला कुण्ड आचार्य कुण्ड होता है । पञ्चकुण्डी पक्ष में तो ईशानकोण का ही आचार्य कुण्ड होता है। राम बाजपेयी ने पञ्चकुण्डी पक्ष में भी ईशान और पूर्वदिशा का कुण्ड आचार्यकण्ड माना है, पर उसमें कोई मूल नहीं मिलता है। ये कुण्ड-चतुरस्र यानि, अर्धचंद्र, त्रिकोण, वृत आदि भेदसे ही बनते हैं या सब वृत चतुरत्र, या पद्म बन सकते हैं। यदि सब एक प्रकार के बने तो भी 'कुण्डत्रयो दक्षिण योनिः' यह वचन वहाँ भी लगेगा। ऐसा मालूम होता है । प्रतिष्ठा में जहाँ एक कुण्ड का विधान वहाँ ईशान, पूर्व, पश्चिम, उत्तर आदि का कुण्ड आचार्य कुण्ड होता है। प्रतिष्ठा में यदि चारकुण्ड पक्ष को स्वीकार करेंगे तो संभवतः पूर्वदिशा का कुण्ड आचार्य कुण्ड होता है । प्रतिष्ठा में सातकुण्ड पक्षको ग्रहण करने पर अचार्यकुण्ड पूर्वदिशाका हो निर्विवाद होगा ।
त्रयोदशात्र कुण्डानि परितः कारयेद् वुधः । उक्तलक्षणयुंक्तानि प्रधानं
बुण्ड निर्माण में आवश्यक बातें
त्वग्निकोण के अत्र मण्डपे वेद्या परितः दिक्षुद्वे विदिक्षु चैकेकम् प्रधानं च त्रयोदश कुण्डानि । आदो पूर्वादि चतुदिक्षु एकैकंकुण्डमकोण चैकं प्रधान कुण्डम् पञ्चकुण्डेभ्यो बहिः परितः- अष्टदिक्षु एकैकंकुण्डम् एवं त्रयो दश कुंडानि मनु - अग्निकोणे एकस्य कुंडस्य विद्यमानत्वात् कथंमत्र प्रधानकुंड कार्यमाह -- अग्निकोणगात् कुंडात् हस्त मात्र मनरतः व्यवस्थाने अग्निकोण एव साक्षात् मुख्यं प्रधानकुंड कारयेत् । [ तंत्रसार ]
जहाँ हवन प्रधान होगा वहीं पंचकुंडी और पंचकुंडीपक्ष में मध्यका ही कुंड आचार्य शास्त्रीय मतसे होता है। क्योंकि मत्स्यपुराण शारदा तिलक आदि आचार्यकुंड मध्ये स्यात् गौरीपतिमहेन्द्रयोः' इत्यादि पद्य दीक्षा और प्रतिष्ठा आदि को लेकर ही लिखा है। यह बात वहाँ के प्रकरण को देखने से निर्णीत हो जाती है ।
कुण्ड विषयक विचारकुण्ड को परिमाण से हीन बनाने पर व्याधि होती है। कुण्ड की नाप से अधिक बनानेपर शत्रु बढ़ते हैं। कुण्ड निर्माण करनेपर पत्थर निकले तो अपमृत्यु होती है। विधानमालामत' से अनेक प्रकार का भय, धन तथा आयुकी हानि होती है। कुण्ड बनानेपर हड़ड़ो, केश और अंगार निकले तो धन का नाश होता है। अंगारों के टुकड़े निकलने पर रोग तथा पाषाण के टुकड़ों को देखने पर सौख्य होता है। 'विधानमाला' । छशव निकले तो कुल का नाश होता है। कुण्ड के बनाते समय राख निकले तो भय उत्पन्न होता है। कुण्ड के निर्माण समय में तुष निकले तो दरिद्री होता है। कुण्ड में नाप से अधिक खात होने पर धननाश होता है। कुण्ड के टेढ़ापन होने से दुःख होता हैं। कुण्ड के न्यून या अधिक होने से यजमान का स्वयं नाश होता है। कुण्डा दक के अधिक या न्यून होने पर यज्ञाचार्य का मरण होता है। कुण्ड के नापमें कमी रखने पर दरिद्रता होती है। विशेषज्ञों द्वारा कुण्ड न बनाने पर कुण्ड और मण्डपादि निष्फल होता है। कुण्ड आयु, कलन्त्र पुत्र और सुख देनेवाला कहा गया है, कुण्ड को खोदते समय सर्प, वृश्चिक देखने में रोग, मृत्यु तथा भय प्राप्त होता
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बकरी, बेल, पागल, शत्रु, भयंकर रोगी, विषदेनेवाला, अग्नि लगाने वाला, लड़ाई करनेवाला, नास्तिक दंभी, वेश्यागामी आदि का मण्डप में प्रवेश न हो- ऐसा मण्डपाच्छादन करे। मण्डप की हर समय रक्षा होनी चाहिये। रात को आदमी मण्डप के चारों तरफ घूमता रहे जिससे चोर आदि द्वारा मण्डप की सामग्री तथा मूर्ति की चोरी का भय न हो । आचार्य कुण्ड निर्णय--- नवग्रहके नो कुण्ड पक्ष में सूर्य के प्रधान हो जाने से आचार्यकुण्ड मध्य का ही होता है। इन कुण्डों की योनिका स्थान विभक्त । द्विमुख में मध्य गत दो कुण्डों में दक्षिणवाला कुण्ड आचार्य कुण्ड होता है। इनकी योनि पूर्वं होती है । शतमुख में विशेष वचन से नैऋत्यकोण का ही कुण्ड आचार्य कुण्ड होता है। इन कुण्डोंकी योनि पूर्व ही होती है। दश मुखर्भे नैऋत्यकोण का ही कुण्ड आचार्य कुण्ड होता है। इनकी योनि पूर्वमें होती है। विष्णु, रूद्र आदिकी प्रतिष्ठा मात्र में नौ कण्डी पक्ष में ईशान कोण और पूर्वादशाके मध्य वाला कुण्ड आचार्य कुण्ड होता है । पञ्चकुण्डी पक्ष में तो ईशानकोण का ही आचार्य कुण्ड होता है। राम बाजपेयी ने पञ्चकुण्डी पक्ष में भी ईशान और पूर्वदिशा का कुण्ड आचार्यकण्ड माना है, पर उसमें कोई मूल नहीं मिलता है। ये कुण्ड-चतुरस्र यानि, अर्धचंद्र, त्रिकोण, वृत आदि भेदसे ही बनते हैं या सब वृत चतुरत्र, या पद्म बन सकते हैं। यदि सब एक प्रकार के बने तो भी 'कुण्डत्रयो दक्षिण योनिः' यह वचन वहाँ भी लगेगा। ऐसा मालूम होता है । प्रतिष्ठा में जहाँ एक कुण्ड का विधान वहाँ ईशान, पूर्व, पश्चिम, उत्तर आदि का कुण्ड आचार्य कुण्ड होता है। प्रतिष्ठा में यदि चारकुण्ड पक्ष को स्वीकार करेंगे तो संभवतः पूर्वदिशा का कुण्ड आचार्य कुण्ड होता है । प्रतिष्ठा में सातकुण्ड पक्षको ग्रहण करने पर अचार्यकुण्ड पूर्वदिशाका हो निर्विवाद होगा । त्रयोदशात्र कुण्डानि परितः कारयेद् वुधः । उक्तलक्षणयुंक्तानि प्रधानं बुण्ड निर्माण में आवश्यक बातें त्वग्निकोण के अत्र मण्डपे वेद्या परितः दिक्षुद्वे विदिक्षु चैकेकम् प्रधानं च त्रयोदश कुण्डानि । आदो पूर्वादि चतुदिक्षु एकैकंकुण्डमकोण चैकं प्रधान कुण्डम् पञ्चकुण्डेभ्यो बहिः परितः- अष्टदिक्षु एकैकंकुण्डम् एवं त्रयो दश कुंडानि मनु - अग्निकोणे एकस्य कुंडस्य विद्यमानत्वात् कथंमत्र प्रधानकुंड कार्यमाह -- अग्निकोणगात् कुंडात् हस्त मात्र मनरतः व्यवस्थाने अग्निकोण एव साक्षात् मुख्यं प्रधानकुंड कारयेत् । [ तंत्रसार ] जहाँ हवन प्रधान होगा वहीं पंचकुंडी और पंचकुंडीपक्ष में मध्यका ही कुंड आचार्य शास्त्रीय मतसे होता है। क्योंकि मत्स्यपुराण शारदा तिलक आदि आचार्यकुंड मध्ये स्यात् गौरीपतिमहेन्द्रयोः' इत्यादि पद्य दीक्षा और प्रतिष्ठा आदि को लेकर ही लिखा है। यह बात वहाँ के प्रकरण को देखने से निर्णीत हो जाती है । कुण्ड विषयक विचारकुण्ड को परिमाण से हीन बनाने पर व्याधि होती है। कुण्ड की नाप से अधिक बनानेपर शत्रु बढ़ते हैं। कुण्ड निर्माण करनेपर पत्थर निकले तो अपमृत्यु होती है। विधानमालामत' से अनेक प्रकार का भय, धन तथा आयुकी हानि होती है। कुण्ड बनानेपर हड़ड़ो, केश और अंगार निकले तो धन का नाश होता है। अंगारों के टुकड़े निकलने पर रोग तथा पाषाण के टुकड़ों को देखने पर सौख्य होता है। 'विधानमाला' । छशव निकले तो कुल का नाश होता है। कुण्ड के बनाते समय राख निकले तो भय उत्पन्न होता है। कुण्ड के निर्माण समय में तुष निकले तो दरिद्री होता है। कुण्ड में नाप से अधिक खात होने पर धननाश होता है। कुण्ड के टेढ़ापन होने से दुःख होता हैं। कुण्ड के न्यून या अधिक होने से यजमान का स्वयं नाश होता है। कुण्डा दक के अधिक या न्यून होने पर यज्ञाचार्य का मरण होता है। कुण्ड के नापमें कमी रखने पर दरिद्रता होती है। विशेषज्ञों द्वारा कुण्ड न बनाने पर कुण्ड और मण्डपादि निष्फल होता है। कुण्ड आयु, कलन्त्र पुत्र और सुख देनेवाला कहा गया है, कुण्ड को खोदते समय सर्प, वृश्चिक देखने में रोग, मृत्यु तथा भय प्राप्त होता
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आंदोलन से परेशान बीजेपी किसानों को लुभाने में जुटी!
राम मंदिर निर्माण के लिए बन रहे ट्रस्ट में ये 4 अखाड़े होंगे शामिल !
चुनावी रैलियों पर वरुण गाँधी ने उठाए सवाल, क्या बगावती तेवर करेंगे भाजपा का नुकसान ?
Artificial Intelligence: शिक्षा में AI का उपयोग और भविष्य का एक्सपोजर. .
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मुसीबत में फंसी अक्षय कुमार की दो धमाकेदार सीक्वल फिल्में- नहीं होगी रिलीज!
निर्माता फिरोज़ नाडियाडवाला ने इरोज़ इंटरनेश्नल पर आरोप लगाते हुए पब्लिक नोटिस जारी किया है कि इरोज के पास वेलकम बैक, हेरा फेरी 2 और आवारा पागल दीवाना 2 की कोई राइट्स नहीं है। कुछ ही दिनों पहले इन फिल्मों की खबरें तेज़ हुई थी। फिरोज नाडियावाला ने साफी तौर पर लिखा है कि इरोज़ ने वेलकम बैक की राइट्स की अनाधिकारिक तौर पर बेची है। खैर, इस नोटिस के बाद साफ है कि अक्षय कुमार की हेरा फेरी 3 और आवारा पागल दीवाना सीक्वल फिलहाल फ्लोर पर नहीं आएगी।
हेरा फेरी 3 की बात करें तो फिल्म के सामने कई तरह की मुश्किलें सामने आ रही हैं। पहले फिल्म के स्टारकास्ट को लेकर कंफ्यूजन रहा। कभी अभिषेक बच्चन तो कभी अक्षय कुमार का नाम जोड़ा जा रहा है, जबकि निर्माता की ओर से आधिकारिक तौर पर अभी तक किसी तरह की घोषणा नहीं की गई है।
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले डाइरेक्ट इंद्र कुमार ने ट्विटर पर जानकारी दी थी कि हेरा फेरी 3 का निर्देशन वो करेंगे और फिल्म में अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और परेश रावल ही होंगे। लेकिन लगता है कि अभी फिल्म फाइनल नहीं है।
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Don't Miss! मुसीबत में फंसी अक्षय कुमार की दो धमाकेदार सीक्वल फिल्में- नहीं होगी रिलीज! निर्माता फिरोज़ नाडियाडवाला ने इरोज़ इंटरनेश्नल पर आरोप लगाते हुए पब्लिक नोटिस जारी किया है कि इरोज के पास वेलकम बैक, हेरा फेरी दो और आवारा पागल दीवाना दो की कोई राइट्स नहीं है। कुछ ही दिनों पहले इन फिल्मों की खबरें तेज़ हुई थी। फिरोज नाडियावाला ने साफी तौर पर लिखा है कि इरोज़ ने वेलकम बैक की राइट्स की अनाधिकारिक तौर पर बेची है। खैर, इस नोटिस के बाद साफ है कि अक्षय कुमार की हेरा फेरी तीन और आवारा पागल दीवाना सीक्वल फिलहाल फ्लोर पर नहीं आएगी। हेरा फेरी तीन की बात करें तो फिल्म के सामने कई तरह की मुश्किलें सामने आ रही हैं। पहले फिल्म के स्टारकास्ट को लेकर कंफ्यूजन रहा। कभी अभिषेक बच्चन तो कभी अक्षय कुमार का नाम जोड़ा जा रहा है, जबकि निर्माता की ओर से आधिकारिक तौर पर अभी तक किसी तरह की घोषणा नहीं की गई है। गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले डाइरेक्ट इंद्र कुमार ने ट्विटर पर जानकारी दी थी कि हेरा फेरी तीन का निर्देशन वो करेंगे और फिल्म में अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और परेश रावल ही होंगे। लेकिन लगता है कि अभी फिल्म फाइनल नहीं है।
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अटल निर्मल नगर पुरस्कार की कुल धनराशि एक करोड़ से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये की जाएगी। स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्य के नौ नगर निकायों को अटल निर्मल नगर पुरस्कार प्रदान करते हुए यह घोषणा की।
राज्य ब्यूरो, देहरादूनः उत्तराखंड में शहरी क्षेत्रों को स्वच्छ व सुंदर बनाने और इसके लिए नगर निकायों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इस कड़ी में 'अटल निर्मल नगर पुरस्कार' की कुल धनराशि एक करोड़ से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये की जाएगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्य सेवक सदन में आयोजित समारोह में स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्य के नौ नगर निकायों को अटल निर्मल नगर पुरस्कार प्रदान करते हुए यह घोषणा की। राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत पांच नगर निकायों को स्वच्छ गौरव सम्मान भी इस अवसर पर प्रदान किए गए।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अटल निर्मल नगर पुरस्कार में छावनी परिषदों को भी शामिल किया जाएगा। इसके लिए छावनी परिषद के जो प्रविधान होंगे, उसी के अनुसार कदम उठाए जाएंगे। अभी तक इस पुरस्कार के लिए तीन-तीन नगर निगम, नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों का चयन किया जाता है। प्रथम, द्वितीय व तृतीय रहने वाली इन पंचायतों को कुल एक करोड़ की धनराशि पुरस्कारस्वरूप दी जाती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि जिस तरह प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थियों को आवास बनने पर घरेलू सामान के लिए पांच-पांच हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है, उसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के लाभार्थियों को भी यह राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यात्राकाल के दौरान केदारनाथ, बदरीनाथ व गंगोत्री में पर्यावरण मित्र की जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मियों का ध्यान भी सरकार रख रही है।
यात्राकाल में इन्हें भोजन व गरम वर्दी के लिए अतिरिक्त मानदेय दिया जाएगा। उन्होंने नगर निकायों के केंद्रीयत सेवा के कर्मचारियों को पेशन देयकों के भुगतान के मामले में भी बड़ी राहत दी है। उन्होंने घोषणा की कि इसके लिए राज्य वित्त आयोग से एक प्रतिशत धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। अभी तक पेंशन के भुगतान के लिए पेंशनरों को निकायों के चक्कर काटने को विवश होना पड़ता था।
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अटल निर्मल नगर पुरस्कार की कुल धनराशि एक करोड़ से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये की जाएगी। स्वच्छ सर्वेक्षण-दो हज़ार बाईस में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्य के नौ नगर निकायों को अटल निर्मल नगर पुरस्कार प्रदान करते हुए यह घोषणा की। राज्य ब्यूरो, देहरादूनः उत्तराखंड में शहरी क्षेत्रों को स्वच्छ व सुंदर बनाने और इसके लिए नगर निकायों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इस कड़ी में 'अटल निर्मल नगर पुरस्कार' की कुल धनराशि एक करोड़ से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये की जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्य सेवक सदन में आयोजित समारोह में स्वच्छ सर्वेक्षण-दो हज़ार बाईस में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्य के नौ नगर निकायों को अटल निर्मल नगर पुरस्कार प्रदान करते हुए यह घोषणा की। राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत पांच नगर निकायों को स्वच्छ गौरव सम्मान भी इस अवसर पर प्रदान किए गए। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अटल निर्मल नगर पुरस्कार में छावनी परिषदों को भी शामिल किया जाएगा। इसके लिए छावनी परिषद के जो प्रविधान होंगे, उसी के अनुसार कदम उठाए जाएंगे। अभी तक इस पुरस्कार के लिए तीन-तीन नगर निगम, नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतों का चयन किया जाता है। प्रथम, द्वितीय व तृतीय रहने वाली इन पंचायतों को कुल एक करोड़ की धनराशि पुरस्कारस्वरूप दी जाती है। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि जिस तरह प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लाभार्थियों को आवास बनने पर घरेलू सामान के लिए पांच-पांच हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है, उसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के लाभार्थियों को भी यह राशि दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यात्राकाल के दौरान केदारनाथ, बदरीनाथ व गंगोत्री में पर्यावरण मित्र की जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मियों का ध्यान भी सरकार रख रही है। यात्राकाल में इन्हें भोजन व गरम वर्दी के लिए अतिरिक्त मानदेय दिया जाएगा। उन्होंने नगर निकायों के केंद्रीयत सेवा के कर्मचारियों को पेशन देयकों के भुगतान के मामले में भी बड़ी राहत दी है। उन्होंने घोषणा की कि इसके लिए राज्य वित्त आयोग से एक प्रतिशत धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। अभी तक पेंशन के भुगतान के लिए पेंशनरों को निकायों के चक्कर काटने को विवश होना पड़ता था।
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Narottam mishra on TS singh deo: भोपाल। छ्त्तीसगढ़ की राजनीति में इस समय बवाल मचा हुआ है। टी एस सिंहदेव प्रदेश के पहले डिप्टी सीएम बनाए गए है। चुनाव के पहले डिप्टी सीएम बनाने के मामले में राजनीतिक बयानवाजियां तेज हो गईं है। तो वहीं मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा से टीएस सिंहदेव के उपमुख्यमंत्री बनने के सवाल पर बोले कि ये पार्टी का अंदरूनी मामला है। उनका मुख्यमंत्री बनना अच्छी बात है।
Narottam mishra on TS singh deo: इसके अलावा मंत्री मिश्रा ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि तुअर दाल और अरहर दाल को एक बताने वाले राहुल गांधी पश्चात संस्कृति में पले बढ़े हैं। राहुल गांधी विदेशी मानसिकता वाले हैं। वे छुट्टियां भी विदेश में ही मनाते है।
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Narottam mishra on TS singh deo: भोपाल। छ्त्तीसगढ़ की राजनीति में इस समय बवाल मचा हुआ है। टी एस सिंहदेव प्रदेश के पहले डिप्टी सीएम बनाए गए है। चुनाव के पहले डिप्टी सीएम बनाने के मामले में राजनीतिक बयानवाजियां तेज हो गईं है। तो वहीं मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा से टीएस सिंहदेव के उपमुख्यमंत्री बनने के सवाल पर बोले कि ये पार्टी का अंदरूनी मामला है। उनका मुख्यमंत्री बनना अच्छी बात है। Narottam mishra on TS singh deo: इसके अलावा मंत्री मिश्रा ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि तुअर दाल और अरहर दाल को एक बताने वाले राहुल गांधी पश्चात संस्कृति में पले बढ़े हैं। राहुल गांधी विदेशी मानसिकता वाले हैं। वे छुट्टियां भी विदेश में ही मनाते है।
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पांवटा साहिब के वार्ड नंबर सात की वाल्मीकि बस्ती में कुछ युवकों द्वारा एक युवक को घेरकर मारपीट करने का मामला पेश आया है। महिला की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार शारदा देवी पत्नी मदन कुमार निवासी वार्ड नंबर सात वाल्मीकि बस्ती पांवटा साहिब ने पुलिस में शिकायत की है कि 17 जून को अपनी ड्यूटी से पांच बजे शाम घर वापस आई। कुछ समय बाद शारदा देवी ने अपनी भतीजी संजना को छत पर पानी की टंकी में पानी देखने के लिए भेजा तो संजना एकदम सीढिय़ों से भागी-भागी वापस आई और बताया कि गौरव गोशाला के अंदर बैठा है, जिसके सिर से खून निकल रहा है।
इसके बाद शारदा देवी व गौरव की माता काकी गोशाला में गई और गौरव को पानी पिलाया और इसने गौरव से चोट लगने का कारण पूछा तो उसने बताया कि उसके साथ तीन युवकों ने उसके साथ झगड़ा किया तथा मारपीट की। इसके बाद इसका बेटा नीरज गौरव को इलाज के लिए पांवटा साहिब अस्पताल लेकर आए। यहां पर डाक्टर ने उसे प्राथमिक उपचार के बाद नाहन रैफर कर दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उधर, मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी पांवटा वीर बहादुर ने बताया कि महिला की शिकायत पर मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
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पांवटा साहिब के वार्ड नंबर सात की वाल्मीकि बस्ती में कुछ युवकों द्वारा एक युवक को घेरकर मारपीट करने का मामला पेश आया है। महिला की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार शारदा देवी पत्नी मदन कुमार निवासी वार्ड नंबर सात वाल्मीकि बस्ती पांवटा साहिब ने पुलिस में शिकायत की है कि सत्रह जून को अपनी ड्यूटी से पांच बजे शाम घर वापस आई। कुछ समय बाद शारदा देवी ने अपनी भतीजी संजना को छत पर पानी की टंकी में पानी देखने के लिए भेजा तो संजना एकदम सीढिय़ों से भागी-भागी वापस आई और बताया कि गौरव गोशाला के अंदर बैठा है, जिसके सिर से खून निकल रहा है। इसके बाद शारदा देवी व गौरव की माता काकी गोशाला में गई और गौरव को पानी पिलाया और इसने गौरव से चोट लगने का कारण पूछा तो उसने बताया कि उसके साथ तीन युवकों ने उसके साथ झगड़ा किया तथा मारपीट की। इसके बाद इसका बेटा नीरज गौरव को इलाज के लिए पांवटा साहिब अस्पताल लेकर आए। यहां पर डाक्टर ने उसे प्राथमिक उपचार के बाद नाहन रैफर कर दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उधर, मामले की पुष्टि करते हुए डीएसपी पांवटा वीर बहादुर ने बताया कि महिला की शिकायत पर मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
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स्थित हैं। वे प्रसिद्ध आठ मूर्तियाँ ये लोकमें पुत्र-पौत्र आदिको प्रसन्न देखकर हैं- शर्व, भव, रुद्र, उम्र, भीम, पशुपति, ईशान और महादेव शिवजीके इन शर्व आदि अष्टपूर्तियोद्वारा पृथ्वी, जल, अग्नि वायु, आकाश, क्षेत्रज्ञ, सूर्य और चन्द्रमा अधिष्ठित हैं। शास्त्रका ऐसा निश्चय है कि कल्याणकर्ता महेश्वरका विश्वम्भरात्मक रूप ही चराचर विश्वको धारण किये हुए है। परमात्मा शिवका सलिलात्मक रूप जो समस्त जगत्को जीवन प्रदान करनेवाला है. भव' नामसे कहा जाता है। जो जगत्के बाहर भीतर वर्तमान है और स्वयं ही प्रिय सनत्कुमारजी ! अब तुम विश्वका भरण-पोषण करता तथा स्पन्दित शिवजीके अनुपम अर्धनारीनररूपका वर्णन होता है, उग्ररूपधारी प्रभुके उस रूपको सुनो महाप्राज्ञ वह रूप ब्रह्माकी सत्पुरुष 'उम्र कहते हैं। महादेवका जो कामनाओंको पूर्ण करनेवाला है। (सृष्टिके सबको अवकाश देनेवाला सर्वव्यापी आदिमें) जब सृष्टिकर्ता ब्रह्माद्वारा स्त्री हुई आकाशात्मक रूप है, उसे 'भीम' कहते हैं। सारी प्रजाएँ विस्तारको नहीं प्राप्त हुई, तब यह भूतवृन्दका भेदक है। जो रूप समस्त ब्रह्मा उस दुःखसे दुःखी हो चिन्ताकुल हो आत्माओंका अधिष्ठान, सम्पूर्ण क्षेत्रों में गये। उसी समय यो आकाशवाणी हुईनिवास करनेवाला और जीवोंके भव- ब्रह्मन् ! अब मैथुनी सृष्टिकी रचना करो।' पाशका छेदक है, उसे 'पशुपति'का रूप उस व्योमवाणीको सुनकर ब्रह्माने मैथुनी समझना चाहिये। महेश्वरका सम्पूर्ण सृष्टि उत्पन्न करनेका विचार किया; परंतु जगत्को प्रकाशित करनेवाला जो सूर्य इससे पहले नारियोंका कुल ईशानसे प्रकट नामक रूप है, उसे 'ईशान' कहते हैं। वह ही नहीं हुआ था, इसलिये पद्मयोनि ब्रह्मा लोकमें भ्रमण करता है। अमृतमयी मैथुनी सृष्टि रचनेमें समर्थ न हो सके। तब वे रश्मियोंवाला जो चन्द्रमा सम्पूर्ण विश्वको यो विचार कर कि शम्भुकी कृपाके बिना आह्लादित करता है, शिवका वह रूप मैथुनी प्रजा उत्पन्न नहीं हो सकती, तप 'महादेव' नामसे पुकारा जाता है। 'आत्मा' करनेको उद्यत हुए। उस समय ब्रह्मा परमात्मा शिवका आठवाँ रूप है। यह मूर्ति पराशक्ति शिवासहित परमेश्वर शिवका अन्य मूर्तियोंकी व्यापिका है। इसलिये सारा प्रेमपूर्वक हृदयमें ध्यान करके घोर तप करने विश्व शिवमय है। जिस प्रकार वृक्षके लगे। तदनन्तर तपोऽनुष्ठानमें लगे हुए मूलको सींचनेसे उसकी शाखाएँ पुष्पित हो ब्रह्माके उस तीव्र तपसे थोड़े ही समयमें जाती हैं, उसी तरह शिवका पूजन करनेसे शिवजी प्रसन्न हो गये। तब से कष्टहारी शिवस्वरूप विश्व परिपुष्ट होता है। जैसे इस शंकर पूर्णसचिदानन्दकी कामदा मूर्तिमें
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स्थित हैं। वे प्रसिद्ध आठ मूर्तियाँ ये लोकमें पुत्र-पौत्र आदिको प्रसन्न देखकर हैं- शर्व, भव, रुद्र, उम्र, भीम, पशुपति, ईशान और महादेव शिवजीके इन शर्व आदि अष्टपूर्तियोद्वारा पृथ्वी, जल, अग्नि वायु, आकाश, क्षेत्रज्ञ, सूर्य और चन्द्रमा अधिष्ठित हैं। शास्त्रका ऐसा निश्चय है कि कल्याणकर्ता महेश्वरका विश्वम्भरात्मक रूप ही चराचर विश्वको धारण किये हुए है। परमात्मा शिवका सलिलात्मक रूप जो समस्त जगत्को जीवन प्रदान करनेवाला है. भव' नामसे कहा जाता है। जो जगत्के बाहर भीतर वर्तमान है और स्वयं ही प्रिय सनत्कुमारजी ! अब तुम विश्वका भरण-पोषण करता तथा स्पन्दित शिवजीके अनुपम अर्धनारीनररूपका वर्णन होता है, उग्ररूपधारी प्रभुके उस रूपको सुनो महाप्राज्ञ वह रूप ब्रह्माकी सत्पुरुष 'उम्र कहते हैं। महादेवका जो कामनाओंको पूर्ण करनेवाला है। जब सृष्टिकर्ता ब्रह्माद्वारा स्त्री हुई आकाशात्मक रूप है, उसे 'भीम' कहते हैं। सारी प्रजाएँ विस्तारको नहीं प्राप्त हुई, तब यह भूतवृन्दका भेदक है। जो रूप समस्त ब्रह्मा उस दुःखसे दुःखी हो चिन्ताकुल हो आत्माओंका अधिष्ठान, सम्पूर्ण क्षेत्रों में गये। उसी समय यो आकाशवाणी हुईनिवास करनेवाला और जीवोंके भव- ब्रह्मन् ! अब मैथुनी सृष्टिकी रचना करो।' पाशका छेदक है, उसे 'पशुपति'का रूप उस व्योमवाणीको सुनकर ब्रह्माने मैथुनी समझना चाहिये। महेश्वरका सम्पूर्ण सृष्टि उत्पन्न करनेका विचार किया; परंतु जगत्को प्रकाशित करनेवाला जो सूर्य इससे पहले नारियोंका कुल ईशानसे प्रकट नामक रूप है, उसे 'ईशान' कहते हैं। वह ही नहीं हुआ था, इसलिये पद्मयोनि ब्रह्मा लोकमें भ्रमण करता है। अमृतमयी मैथुनी सृष्टि रचनेमें समर्थ न हो सके। तब वे रश्मियोंवाला जो चन्द्रमा सम्पूर्ण विश्वको यो विचार कर कि शम्भुकी कृपाके बिना आह्लादित करता है, शिवका वह रूप मैथुनी प्रजा उत्पन्न नहीं हो सकती, तप 'महादेव' नामसे पुकारा जाता है। 'आत्मा' करनेको उद्यत हुए। उस समय ब्रह्मा परमात्मा शिवका आठवाँ रूप है। यह मूर्ति पराशक्ति शिवासहित परमेश्वर शिवका अन्य मूर्तियोंकी व्यापिका है। इसलिये सारा प्रेमपूर्वक हृदयमें ध्यान करके घोर तप करने विश्व शिवमय है। जिस प्रकार वृक्षके लगे। तदनन्तर तपोऽनुष्ठानमें लगे हुए मूलको सींचनेसे उसकी शाखाएँ पुष्पित हो ब्रह्माके उस तीव्र तपसे थोड़े ही समयमें जाती हैं, उसी तरह शिवका पूजन करनेसे शिवजी प्रसन्न हो गये। तब से कष्टहारी शिवस्वरूप विश्व परिपुष्ट होता है। जैसे इस शंकर पूर्णसचिदानन्दकी कामदा मूर्तिमें
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बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान इन दिनों अपनी आगामी फिल्म 'रेस 3' की शूटिंग में व्यस्त है. इसी बीच उनकी आगामी फिल्म 'दबंग 3' को लेकर भी चर्चा हो रही है. हाल ही में खबर आई है कि, इस फिल्म में सलमान के साथ दो हीरोइन होंगी. एक हीरोइन के तौर पर नाम आगे आया है अभिनेत्री ऐमी जैक्सन का वही दूसरी अभिनेत्री शाहरुख खान की फिल्म 'फैन' में नजर आईं वलूचा डिसूजा होंगी.
वलूचा डिसूजा ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी. इसके बाद वह अभिनय की दुनिया में आई. वलूचा डिसूजा के तीन बच्चे है उन्होंने सुपर मॉडल मार्क रॉबिन्सन से शादी की थी लेकिन कुछ कारणों की वजह से उनका रिश्ता ज्यादा दिन टिक नहीं पाया और वे एक दूसरे से अलग हो गए. वलूचा डिसूजा एक बार फिर सलमान खान के साथ नजर आने के लिए जमकर चर्चा में है.
हालांकि पहले इस फिल्म में अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा के नाम को लेकर चर्चा चल रही थी लेकिन उनके नाम को लेकर कुछ क्लियर नहीं हो पा रहा है. बता दे कि, बीते दिनों एक इंटरव्यू में अभिनेता और फिल्म निर्माता अरबाज़ खान ने ये कहा था कि, सोनाक्षी सिन्हा को रिप्लेस नहीं किया जाएगा. अब देखना ये है कि, सल्लू मिंया 'दबंग 3' में किस एक्ट्रेस के साथ रोमांस फरमाएंगे. फिलहाल तो वह अपनी फिल्म रेस 3 की शूटिंग में व्यस्त है.
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बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान इन दिनों अपनी आगामी फिल्म 'रेस तीन' की शूटिंग में व्यस्त है. इसी बीच उनकी आगामी फिल्म 'दबंग तीन' को लेकर भी चर्चा हो रही है. हाल ही में खबर आई है कि, इस फिल्म में सलमान के साथ दो हीरोइन होंगी. एक हीरोइन के तौर पर नाम आगे आया है अभिनेत्री ऐमी जैक्सन का वही दूसरी अभिनेत्री शाहरुख खान की फिल्म 'फैन' में नजर आईं वलूचा डिसूजा होंगी. वलूचा डिसूजा ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी. इसके बाद वह अभिनय की दुनिया में आई. वलूचा डिसूजा के तीन बच्चे है उन्होंने सुपर मॉडल मार्क रॉबिन्सन से शादी की थी लेकिन कुछ कारणों की वजह से उनका रिश्ता ज्यादा दिन टिक नहीं पाया और वे एक दूसरे से अलग हो गए. वलूचा डिसूजा एक बार फिर सलमान खान के साथ नजर आने के लिए जमकर चर्चा में है. हालांकि पहले इस फिल्म में अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा के नाम को लेकर चर्चा चल रही थी लेकिन उनके नाम को लेकर कुछ क्लियर नहीं हो पा रहा है. बता दे कि, बीते दिनों एक इंटरव्यू में अभिनेता और फिल्म निर्माता अरबाज़ खान ने ये कहा था कि, सोनाक्षी सिन्हा को रिप्लेस नहीं किया जाएगा. अब देखना ये है कि, सल्लू मिंया 'दबंग तीन' में किस एक्ट्रेस के साथ रोमांस फरमाएंगे. फिलहाल तो वह अपनी फिल्म रेस तीन की शूटिंग में व्यस्त है.
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आईएमएम ने एक मंच का आयोजन किया जहां कहारनमारास में भूकंप के स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभावों पर चर्चा की गई। यह कहते हुए कि भूकंप लोगों और उनके मनोविज्ञान को गहराई से प्रभावित करते हैं, स्वास्थ्य विभाग के आईएमएम प्रमुख डॉ। Önder Yüksel Eryiğit ने कहा, "हम यहां से प्राप्त होने वाले परिणामों के साथ अपेक्षित इस्तांबुल भूकंप में आने वाली नकारात्मक स्थितियों से कैसे निपट सकते हैं, इस पर एक रोड मैप तैयार करेंगे।"
इस्तांबुल मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका (IMM) ने "भूकंप फोरम के स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभावों का मूल्यांकन" का आयोजन किया, जिसमें कहारनमारास में मानव मानसिक स्वास्थ्य पर भूकंप के प्रभाव और प्रक्रिया में क्या किया जा सकता है, इसके समाधान पर चर्चा की गई। IMM स्वास्थ्य विभाग के सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के समन्वय के साथ, येनिबोस्ना डॉ। एनवर ऑरेन कल्चरल सेंटर में आयोजित मंच; स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. Önder Yüksel Eryiğit, स्वास्थ्य और स्वच्छता शाखा प्रबंधक, Uzm। डॉ। एम. हकन यिलमज़तुर्क, İBB कल्चरल एक्टिविटीज़ ब्रांच मैनेजर Gül Ayşe Eken, İBB यूनिट के कर्मचारी, शिक्षाविद जो अपने क्षेत्रों के विशेषज्ञ हैं और NGO के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
फोरम का उद्घाटन भाषण देते हुए IMM स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख डॉ. ओंडर युकसेल एरीगिट ने कहाः
"मेरे विनाशकारी भूकंपों का हमारे नागरिकों पर कई मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा है। फोरम में, हम विशेषज्ञ शिक्षाविदों और क्षेत्र में काम करने वाले नामों के साथ मिलकर भूकंप के नकारात्मक प्रभावों का मूल्यांकन करेंगे। भूकंप के बाद स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं, प्रवास आंदोलनों, शिक्षा अध्ययन, हिंसा का मुकाबला करने, मीडिया के प्रभावी उपयोग, न्यायिक प्रक्रियाओं और भूकंप में कानूनी सहायता, सांस्कृतिक अध्ययन जैसे विषयों पर हमारे सम्मानित प्रोफेसरों से हम आपको सुझाव प्राप्त करेंगे। , और भूकंप में नशीली दवाओं का संकट हमारे लिए बहुत मूल्यवान है। हम यहां से प्राप्त होने वाले परिणामों के साथ अपेक्षित इस्तांबुल भूकंप में आने वाली नकारात्मक परिस्थितियों से कैसे निपट सकते हैं, इस पर एक रोड मैप तैयार करेंगे।
हमने IMM कम्युनिटी मेंटल हेल्थ साइंस बोर्ड की स्थापना की है ताकि IMM के भीतर क्लिनिकल मनोवैज्ञानिकों और टर्किश साइकियाट्रिक एसोसिएशन और टर्किश साइकोलॉजिस्ट एसोसिएशन के स्वयंसेवकों दोनों के साथ काम का समन्वय किया जा सके, ताकि भूकंप से प्रभावित पीड़ित मनोवैज्ञानिक के साथ सामना कर सकें। आघात वे अनुभव करते हैं और जितनी जल्दी हो सके अपने मानसिक स्वास्थ्य को पुनः प्राप्त करते हैं। इस संदर्भ में, हमने भूकंप से प्रभावित अपने नागरिकों को "साइकोसोशल सपोर्ट लाइन" के माध्यम से मनोवैज्ञानिक परामर्श दिया, जिसे हमने लॉन्च किया था।
टर्किश साइकियाट्रिक एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. डॉ। Ejder Akgün Yıldırım द्वारा संचालित सत्रों में, भूकंप में स्वास्थ्य अध्ययन, भूकंप में सामाजिक कार्य, भूकंप के दौरान प्रवास और अप्रवासी, भूकंप के दौरान शिक्षा, भूकंप के दौरान हिंसा का मुकाबला, भूकंप के दौरान मीडिया का प्रभावी उपयोग, न्यायिक प्रक्रियाएँ और भूकंप में कानूनी सहायता, भूकंप में सांस्कृतिक अध्ययन, भूकंप में दवा संकट जैसे विषयों पर चर्चा की गई। शिक्षाविद जो अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं, ने भूकंप क्षेत्र में अपने अध्ययन के आधार पर उदाहरणों के साथ संभावित इस्तांबुल भूकंप में लापता बिंदुओं का मूल्यांकन किया और इन बिंदुओं पर सुझाव दिए।
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आईएमएम ने एक मंच का आयोजन किया जहां कहारनमारास में भूकंप के स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभावों पर चर्चा की गई। यह कहते हुए कि भूकंप लोगों और उनके मनोविज्ञान को गहराई से प्रभावित करते हैं, स्वास्थ्य विभाग के आईएमएम प्रमुख डॉ। Önder Yüksel Eryiğit ने कहा, "हम यहां से प्राप्त होने वाले परिणामों के साथ अपेक्षित इस्तांबुल भूकंप में आने वाली नकारात्मक स्थितियों से कैसे निपट सकते हैं, इस पर एक रोड मैप तैयार करेंगे।" इस्तांबुल मेट्रोपॉलिटन नगर पालिका ने "भूकंप फोरम के स्वास्थ्य और सामाजिक प्रभावों का मूल्यांकन" का आयोजन किया, जिसमें कहारनमारास में मानव मानसिक स्वास्थ्य पर भूकंप के प्रभाव और प्रक्रिया में क्या किया जा सकता है, इसके समाधान पर चर्चा की गई। IMM स्वास्थ्य विभाग के सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के समन्वय के साथ, येनिबोस्ना डॉ। एनवर ऑरेन कल्चरल सेंटर में आयोजित मंच; स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. Önder Yüksel Eryiğit, स्वास्थ्य और स्वच्छता शाखा प्रबंधक, Uzm। डॉ। एम. हकन यिलमज़तुर्क, İBB कल्चरल एक्टिविटीज़ ब्रांच मैनेजर Gül Ayşe Eken, İBB यूनिट के कर्मचारी, शिक्षाविद जो अपने क्षेत्रों के विशेषज्ञ हैं और NGO के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। फोरम का उद्घाटन भाषण देते हुए IMM स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख डॉ. ओंडर युकसेल एरीगिट ने कहाः "मेरे विनाशकारी भूकंपों का हमारे नागरिकों पर कई मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ा है। फोरम में, हम विशेषज्ञ शिक्षाविदों और क्षेत्र में काम करने वाले नामों के साथ मिलकर भूकंप के नकारात्मक प्रभावों का मूल्यांकन करेंगे। भूकंप के बाद स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं, प्रवास आंदोलनों, शिक्षा अध्ययन, हिंसा का मुकाबला करने, मीडिया के प्रभावी उपयोग, न्यायिक प्रक्रियाओं और भूकंप में कानूनी सहायता, सांस्कृतिक अध्ययन जैसे विषयों पर हमारे सम्मानित प्रोफेसरों से हम आपको सुझाव प्राप्त करेंगे। , और भूकंप में नशीली दवाओं का संकट हमारे लिए बहुत मूल्यवान है। हम यहां से प्राप्त होने वाले परिणामों के साथ अपेक्षित इस्तांबुल भूकंप में आने वाली नकारात्मक परिस्थितियों से कैसे निपट सकते हैं, इस पर एक रोड मैप तैयार करेंगे। हमने IMM कम्युनिटी मेंटल हेल्थ साइंस बोर्ड की स्थापना की है ताकि IMM के भीतर क्लिनिकल मनोवैज्ञानिकों और टर्किश साइकियाट्रिक एसोसिएशन और टर्किश साइकोलॉजिस्ट एसोसिएशन के स्वयंसेवकों दोनों के साथ काम का समन्वय किया जा सके, ताकि भूकंप से प्रभावित पीड़ित मनोवैज्ञानिक के साथ सामना कर सकें। आघात वे अनुभव करते हैं और जितनी जल्दी हो सके अपने मानसिक स्वास्थ्य को पुनः प्राप्त करते हैं। इस संदर्भ में, हमने भूकंप से प्रभावित अपने नागरिकों को "साइकोसोशल सपोर्ट लाइन" के माध्यम से मनोवैज्ञानिक परामर्श दिया, जिसे हमने लॉन्च किया था। टर्किश साइकियाट्रिक एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. डॉ। Ejder Akgün Yıldırım द्वारा संचालित सत्रों में, भूकंप में स्वास्थ्य अध्ययन, भूकंप में सामाजिक कार्य, भूकंप के दौरान प्रवास और अप्रवासी, भूकंप के दौरान शिक्षा, भूकंप के दौरान हिंसा का मुकाबला, भूकंप के दौरान मीडिया का प्रभावी उपयोग, न्यायिक प्रक्रियाएँ और भूकंप में कानूनी सहायता, भूकंप में सांस्कृतिक अध्ययन, भूकंप में दवा संकट जैसे विषयों पर चर्चा की गई। शिक्षाविद जो अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं, ने भूकंप क्षेत्र में अपने अध्ययन के आधार पर उदाहरणों के साथ संभावित इस्तांबुल भूकंप में लापता बिंदुओं का मूल्यांकन किया और इन बिंदुओं पर सुझाव दिए।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
गाल्ल के समुद्र के किनारे किलेबन्दी जिस पर घास उग आयी है। गाल्ल (सिंहलः ගාල්ල; तमिलः காலி; अंग्रेजीः Galle) श्रीलंका के दक्षिण-पश्चिमी समुद्रतट पर अवस्थित एक नगर तथा पत्तन है। अपनी उत्कृष्ट स्थिति के कारण यह उन्नतिशील नगर है। श्रीलंका के नगरों में इसका पाँचवाँ स्थान है। इसके समीप बगानी कृषिक्षेत्र है, अतः यहाँ के पत्तन से नारियल का तेल, जटाएँ, रेशे और उससे बनी रस्सियाँ, रबर, तथा चाय का निर्यात होता है। यद्यपि यह नगर प्राचीन प्रतीत होता है, तथापि १२६७ ई. से पहले इसका कोई ऐतिहासिक उल्लेख नहीं मिलता। १४वीं सदी के मध्य में अरब यात्री इब्नबतूता ने इसका उल्लेख 'काली' (Kali) नाम से किया है। वस्तुतः इसका समुन्नितकाल पुर्तगालियों के आगमन के पश्चात् प्रारंभ होता है। यह डचों द्वारा स्थापित बंदरगाह है। पोताश्रय (harbour) के किनारे प्राकृतिक हैं किंतु प्रवेशद्वार खुला तथा खतरनाक चट्टानों से युक्त है। यहाँ डचों ने एक किला भी बनवाया था। यह १९वीं सदी के पूर्वार्ध तक श्रीलंका का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पत्तन रहा। स्वेज नहर (१८६९ ई.) बनने तथा कोलंबों के विशाल कृत्रिम बंदरगाह के निर्माण के बाद इसका महत्व घट गया। यह उत्तर में कोलंबों से तथा दक्षिण-दक्षिण-पूर्व में मतारा से रेल तथा राजमार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। यह गाल्ल जनपद का प्रधान प्रशासनिक नगर भी है। इसे 'प्वांट डी गाल' (Point de Gall) भी कहते हैं। श्रेणीःश्रीलंका. नारियल के पेड़ नारियल (Cocos nucifera, कोकोस् नूकीफ़ेरा) एक बहुवर्षी एवं एकबीजपत्री पौधा है। इसका तना लम्बा तथा शाखा रहित होता है। मुख्य तने के ऊपरी सिरे पर लम्बी पत्तियों का मुकुट होता है। ये वृक्ष समुद्र के किनारे या नमकीन जगह पर पाये जाते हैं। इसके फल हिन्दुओं के धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त होता है। बांग्ला में इसे नारिकेल कहते हैं। नारियल के वृक्ष भारत में प्रमुख रूप से केरल, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में खूब उगते हैं। महाराष्ट्र में मुंबई तथा तटीय क्षेत्रों व गोआ में भी इसकी उपज होती है। नारियल एक बेहद उपयोगी फल है। नारियल देर से पचने वाला, मूत्राशय शोधक, ग्राही, पुष्टिकारक, बलवर्धक, रक्तविकार नाशक, दाहशामक तथा वात-पित्त नाशक है। .
गाल्ल और नारियल आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
गाल्ल 10 संबंध है और नारियल 12 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (10 + 12)।
यह लेख गाल्ल और नारियल के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। गाल्ल के समुद्र के किनारे किलेबन्दी जिस पर घास उग आयी है। गाल्ल श्रीलंका के दक्षिण-पश्चिमी समुद्रतट पर अवस्थित एक नगर तथा पत्तन है। अपनी उत्कृष्ट स्थिति के कारण यह उन्नतिशील नगर है। श्रीलंका के नगरों में इसका पाँचवाँ स्थान है। इसके समीप बगानी कृषिक्षेत्र है, अतः यहाँ के पत्तन से नारियल का तेल, जटाएँ, रेशे और उससे बनी रस्सियाँ, रबर, तथा चाय का निर्यात होता है। यद्यपि यह नगर प्राचीन प्रतीत होता है, तथापि एक हज़ार दो सौ सरसठ ई. से पहले इसका कोई ऐतिहासिक उल्लेख नहीं मिलता। चौदहवीं सदी के मध्य में अरब यात्री इब्नबतूता ने इसका उल्लेख 'काली' नाम से किया है। वस्तुतः इसका समुन्नितकाल पुर्तगालियों के आगमन के पश्चात् प्रारंभ होता है। यह डचों द्वारा स्थापित बंदरगाह है। पोताश्रय के किनारे प्राकृतिक हैं किंतु प्रवेशद्वार खुला तथा खतरनाक चट्टानों से युक्त है। यहाँ डचों ने एक किला भी बनवाया था। यह उन्नीसवीं सदी के पूर्वार्ध तक श्रीलंका का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पत्तन रहा। स्वेज नहर बनने तथा कोलंबों के विशाल कृत्रिम बंदरगाह के निर्माण के बाद इसका महत्व घट गया। यह उत्तर में कोलंबों से तथा दक्षिण-दक्षिण-पूर्व में मतारा से रेल तथा राजमार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है। यह गाल्ल जनपद का प्रधान प्रशासनिक नगर भी है। इसे 'प्वांट डी गाल' भी कहते हैं। श्रेणीःश्रीलंका. नारियल के पेड़ नारियल एक बहुवर्षी एवं एकबीजपत्री पौधा है। इसका तना लम्बा तथा शाखा रहित होता है। मुख्य तने के ऊपरी सिरे पर लम्बी पत्तियों का मुकुट होता है। ये वृक्ष समुद्र के किनारे या नमकीन जगह पर पाये जाते हैं। इसके फल हिन्दुओं के धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त होता है। बांग्ला में इसे नारिकेल कहते हैं। नारियल के वृक्ष भारत में प्रमुख रूप से केरल, पश्चिम बंगाल और उड़ीसा में खूब उगते हैं। महाराष्ट्र में मुंबई तथा तटीय क्षेत्रों व गोआ में भी इसकी उपज होती है। नारियल एक बेहद उपयोगी फल है। नारियल देर से पचने वाला, मूत्राशय शोधक, ग्राही, पुष्टिकारक, बलवर्धक, रक्तविकार नाशक, दाहशामक तथा वात-पित्त नाशक है। . गाल्ल और नारियल आम में शून्य बातें हैं । गाल्ल दस संबंध है और नारियल बारह है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख गाल्ल और नारियल के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा बोर्ड धर्मशाला के तहत बहुतकनीकी प्रवेश परीक्षा तथा लेटरल एंट्री एंट्रेस टेस्ट के आवेदन पत्र में अपने दसवीं व जमा दो कक्षा के अंक परिणाम घोषित न होने के कारण दर्ज नहीं किए थे, वह अब अपने अंक बोर्ड की बेवसाइट पर जाकर दर्ज करवा सकते हैं। बहुतकनीकी प्रवेश परीक्षा के अभ्यर्थियों के लिए अपने दसवीं के अंक दर्ज करवाने की तिथि 28 जुलाई है। वहीं लेटरल एंट्री एंट्रेस टेस्ट के अभ्यर्थियों के लिए अपने जमा दो के अंक दर्ज करवाने की अंतिम तिथि भी 28 जुलाई यानी कि आज गुरुवार की है। उधर, तकनीकी शिक्षा बोर्ड धर्मशाला सचिव आरके शर्मा ने बताया कि बहुतकनीकी प्रवेश परीक्षा तथा लेटरल एंट्री एंट्रेस टेस्ट के संबंध में होने वाली प्रथम राउंंड की काउंसिलिंग के लिए सीटों की एलोटमेंट क्रमशः दो तथा पांच अगस्त को की जाएगी। जिन अभ्यर्थियों का चयन उक्त परीक्षाओं की प्रथम राउंड की काउंसिलिंग में होगा, वह अभ्यर्थी तकनीकी शिक्षा बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध चैक लिस्ट में दर्शाए गए दस्तावेजों सहित आबंटित संस्थानों में क्रमशः छह अगस्त (पैट) तथा दस अगस्त (लीट) रिपोर्ट करेंगे।
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हिमाचल प्रदेश तकनीकी शिक्षा बोर्ड धर्मशाला के तहत बहुतकनीकी प्रवेश परीक्षा तथा लेटरल एंट्री एंट्रेस टेस्ट के आवेदन पत्र में अपने दसवीं व जमा दो कक्षा के अंक परिणाम घोषित न होने के कारण दर्ज नहीं किए थे, वह अब अपने अंक बोर्ड की बेवसाइट पर जाकर दर्ज करवा सकते हैं। बहुतकनीकी प्रवेश परीक्षा के अभ्यर्थियों के लिए अपने दसवीं के अंक दर्ज करवाने की तिथि अट्ठाईस जुलाई है। वहीं लेटरल एंट्री एंट्रेस टेस्ट के अभ्यर्थियों के लिए अपने जमा दो के अंक दर्ज करवाने की अंतिम तिथि भी अट्ठाईस जुलाई यानी कि आज गुरुवार की है। उधर, तकनीकी शिक्षा बोर्ड धर्मशाला सचिव आरके शर्मा ने बताया कि बहुतकनीकी प्रवेश परीक्षा तथा लेटरल एंट्री एंट्रेस टेस्ट के संबंध में होने वाली प्रथम राउंंड की काउंसिलिंग के लिए सीटों की एलोटमेंट क्रमशः दो तथा पांच अगस्त को की जाएगी। जिन अभ्यर्थियों का चयन उक्त परीक्षाओं की प्रथम राउंड की काउंसिलिंग में होगा, वह अभ्यर्थी तकनीकी शिक्षा बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध चैक लिस्ट में दर्शाए गए दस्तावेजों सहित आबंटित संस्थानों में क्रमशः छह अगस्त तथा दस अगस्त रिपोर्ट करेंगे।
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तमिलनाडु में साहित्यकारों और कलाकारों की एक वैचारिक सभा में डीएमके के युवा नेता उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म के उन्मूलन वाले बयान के बाद भाजपा और संघ का पूरा गिरोह अपने सारे कपड़े फाड़कर देश भर में बबाल मचाने में भिड़ा है। उनके ब्रह्मा जी को छोड़कर कुनबे में जितने भी देव, दानव, गण, भक्तगण, गणवेशधारी और हिंदुत्व पुंगव, बन्धु और भगिनियां हैं, वे पूरा गोला बारूद लेकर इसे धर्मोन्माद में बदलने और राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुटे हुए हैं।
'सनातन उन्मूलन सम्मेलन' में भाग लेते हुए पहले उदयनिधि स्टालिन ने 'भारतीय मुक्ति संग्राम में आरएसएस का योगदान' शीर्षक से व्यंग्य चित्रों वाली एक पुस्तक का विमोचन किया था; भक्तगण इसके बारे में एक भी शब्द नहीं बोल रहे, वे इसके बाद दिए गए भाषण में उन्होंने सनातन धर्म को लेकर जो टिप्पणियां की थीं उन्हें लेकर भनभनाये हुए हैं।
उदयनिधि स्टालिन ने अपने संबोधन में सम्मेलन के शीर्षक को बहुत अच्छा बताया और इसके लिए बधाई देते हुए कहा कि 'सनातन विरोधी सम्मेलन' के बजाय 'सनातन उन्मूलन सम्मेलन' रखा जाना इसलिए ठीक है क्योंकि हमें कुछ चीज़ों को ख़त्म करना होगा। सिर्फ उनका विरोध करने से काम नहीं चल सकता। जैसे मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना वायरस इत्यादि का विरोध करना काफी नहीं होता, उन्हें खत्म करना होता है ठीक उसी तरह सनातन धर्म भी ऐसा ही है जिसका हमें विरोध नहीं करना है बल्कि इसका उन्मूलन करना है।
जिस सनातन को लेकर इतना हल्ला मचाया जा रहा है वह सनातन क्या है? इस पर आने से पहले यह जानना दिलचस्प होगा कि पिछले कुछ महीनों- अधिकतम एक साल- से आरएसएस और उसके कुनबे की भाषा में अचानक सनातन के इतनी प्रमुखता हासिल करने के पीछे मकसद क्या है? संघ और उसकी सभी भुजाएं अब तक हिन्दू और हिंदुत्व की बातें करती रही हैं। हिन्दू धर्म वालों की एकता बनाकर, हिंदुत्व पर आधारित हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का दावा करती रही हैं।
गोलवलकर की 1939 में लिखी किताब 'हम और हमारी राष्ट्रीयता', जिसे आरएसएस ने अभी तक आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया, फिलहाल उससे अपनी असंबद्धता ही जाहिर की है, उसमें हिन्दू राष्ट्र में रहने की 5 योग्यतायें गिनाते समय एक धर्म- सनातन धर्म- का उल्लेख छोड़कर अभी तक संघ के प्रचार साहित्य में भी सनातन का उस तरह जिक्र नहीं मिलता जिस तरह हाल के कुछ महीनों में शुरू हुआ है। हर जगह हिन्दू पहचान, हिन्दू धर्म, हिंदुत्व और उस पर आधारित हिन्दू राष्ट्र की बात मिलती है। हिंदुत्व भी वह वाला जिसे उन सावरकर ने परिभाषित किया था जो खुद किसी धर्म में विश्वास नहीं करते थे और घोषित रूप से स्वयं को नास्तिक बताते थे।
संघी गिरोह द्वारा अचानक से हिन्दू धर्म और हिंदुत्व को कब और क्यों गंगा में सिरा दिया गया और बंद अंधेरी गुफा में पड़े सनातन की प्राण प्रतिष्ठा कर दी गयी? यह अचानक नहीं हुआ। इसकी भी एक क्रोनोलोजी है। मुख्य वजह यह है कि हिंदुत्ववादी साम्प्रदायिकता के उभार के बाद से देशभर में चले विमर्श में हिंदुत्व के वर्णाश्रम, जाति श्रेणी क्रम के अमानवीय आधार, लोकतंत्र और समता के निषेध के आपराधिक रूप जनता के सामने आये हैं- नतीजे में इसकी अमानुषिकता उजागर हुयी है।
इनके कथित सामाजिक समरसता के अभियानों के बावजूद दलितों, आदिवासियों, अन्य पिछड़े समुदायों और महिलाओं के एक बड़े हिस्से में हिंदुत्व के असली चेहरे की भयावहता सामने आयी है- उनकी इसके प्रति अरुचि बढ़ी है, अविश्वास बढ़ते बढ़ते तिरस्कार भाव तक पहुंचने लगा है। इसी के साथ, इसी बीच, हिन्दू शब्द के उद्गम को लेकर आई जानकारियों ने भी इस गिरोह को असुविधा में डाला है। लिहाजा बहुत ही सोचे समझे तरीके से पिछले कुछ महीनों से इस कुनबे ने हिन्दू, हिंदुत्व की केंचुली उतारना और सनातन की खाल ओढ़ कर नया बाना धारण करना शुरू कर दिया है।
हालांकि जिस सनातन की ये दुहाई दे रहे हैं वह सनातन क्या और कितना सनातन है, यह बात भी कोई दबी छिपी नहीं है। सनातन एक आधुनिक पहचान है जो विविधताओं से भरी हिन्दू परम्परा के प्रभुत्वशाली ब्राह्मण धर्म में कुरीतियों के विरुद्ध हुए धार्मिक सुधार आंदोलनों के मुकाबले घनघोर पुरातनपंथी रूढ़ीवाद की पहचान के रूप में सामने आयी।
बंगाल के नवजागरण सहित ब्रह्म समाज आन्दोलन, दक्षिण के जाति और वर्णाश्रम विरोधी मैदानी और वैचारिक संघर्षों, महाराष्ट्र के सामाजिक सुधारकों की मुहिमों और खासकर उत्तर भारत में मूर्तिपूजा, अंधविश्वास और एक हद तक जाति विरोधी आन्दोलन आर्य समाज के बरक्स असमानता, ऊंचनीच और भेदभाव का धुर पक्षधर पुराणपंथ सनातन के नाम पर गिरोहबंद हुआ।
18वीं और 19वीं सदी में सनातनियों का सबसे बड़ा युद्ध जिस आर्य समाज के साथ हुआ था उस आर्य समाज का तो नारा ही वेदों की ओर वापस लौटने का था, इसलिए सनातन धर्म का वैदिक धर्म के साथ कोई रिश्ता होने का सवाल ही नहीं उठता। यूं भी चारों वेदों में कहीं सनातन नहीं है, 14 ब्राम्हण ग्रंथों, 7 अरण्यकों, 108 उपनिषदों- जिनमें से ज्यादातर एक दूसरे के खिलाफ भी राय देते हैं- में इसका कोई महात्म्य नहीं समझाया गया है। एक भागवत को छोड़कर, जो तुलनात्मक रूप से आधुनिक है, 18 पुराणों में भी सनातन का कहीं जिक्र नहीं मिलता।
श्री कृष्ण- जिनके उपदेश वाले ग्रंथ गीता को संघ-भाजपा भारत का राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करता रहा है- उन्होंने तो धर्म की जो परिभाषा दी है वह सनातन को अधर्म करार देती है। वे कहते हैं कि "जो समय के साथ नहीं बदलता, जो अपरिवर्तित और सनातन रहता है वह धर्म नहीं अधर्म है।" प्रश्न यह था कि जब द्रौपदी का चीरहरण किया गया तब द्यूत सभा में मौजूद सभी ज्ञानियों के चुप रहने पर कृष्ण ने अपनी आपत्ति दर्ज की और इसे अधर्म बताया।
भीष्म और विदुर ने अपनी-अपनी प्रतिज्ञाओं के पालन का धर्म निबाहने का हवाला देते हुए खुद कृष्ण को कठघरे में खडा किया और कहा कि उन्होंने शस्त्र न उठाने का वचन तोड़कर खुद अधर्म किया है। इसके जवाब में कृष्ण धर्म को परिभाषित करते हुए कहते हैं कि "जिस धर्म का पालन करने की बात आप कर रहे है वह धर्म नहीं है। धर्म किसी वचन से बंधा नहीं होता, वह लगातार बदलता है, जो समय के साथ नहीं बदलता वह अधर्म है।" उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ युद्ध जैसा छेड़े आरएसएस और भाजपा यदि सनातन की सनातनता पर सचमुच में गंभीर हैं तो उन्हें पहले कृष्ण के खिलाफ मोर्चा खोलना चाहिये।
रही सनातन के शाब्दिक अर्थ के हिसाब से अनादिकाल से चले आने की बात है तो पाली भाषा में लिखे ग्रंथों में उन बुद्ध और उनके बौद्ध धर्म को भी सनातन कहा गया है जिन गौतम बुद्ध का खुद का यह कहना था कि "दुनिया में कुछ भी स्थिर नहीं है। कुछ भी शाश्वत नहीं है। कुछ भी सनातन नहीं है। व्यक्ति और समाज के लिये परिवर्तन ही जीवन का नियम है। वेदों को प्रमाण मानने से इनकार करने वाले, ईश्वर के अस्तित्व को भी न मानने वाले पृथ्वी के इस हिस्से के पहले नास्तिक धर्म में भी "है भी, नहीं भी है" का संशयवाद है- हालांकि इसके बाद भी जैन धर्मावलंबियों का दावा है कि वह भी अनादिकाल से अस्तित्वमान है।
ठीक यही वजह है कि सनातन धर्म में सनातन क्या है, यह बात कोई सनातनी भी न खुद समझ पाया है ना हीं किसी को समझा पाया है। ताजा विवाद के बाद अचानक धर्मवेत्ता बन गए राजनाथ सिंह का राजस्थान में दिया गया भाषण इसी गफलत का एक और नमूना है। वे सनातन की ठीक उलटी परिभाषा देते हुए वह सब बातें बखानने लगते हैं, सनातन जिनके पूरी तरह खिलाफ है।
उन्होंने दावा किया कि "जो जड़ में हैं वही चेतन में है, जो पिंड में है वही ब्रह्माण्ड में है, जो छोटे में है वही बड़े में है, जो मेरे में है वही तेरे में है।" अरक्षनीय का रक्षण करते करते वे यहां तक बोल गए कि "जो जात-पात और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता, न जिसका आदि है न अंत है वही सनातन धर्म है।" जाहिर सी बात है कि वे बता कम रहे थे छुपा ज्यादा रहे थे।
यह कुनबा जिस सनातन धर्म की बात कर रहा है वह वर्णाश्रम पर आधारित, जाति प्रथा और उसके आधार पर ऊंच-नीच यहां तक कि छुआछूत तक में यकीन करने, महिलाओं को शूद्रातिशूद्र मानने को धर्मसम्मत बताने वाली व्याधि है जिसका सही नाम ब्राह्मण धर्म है। वही ब्राह्मण धर्म जिसके खिलाफ पिछले ढाई तीन हजार वर्षों में भारत में दार्शनिक और धार्मिक विद्रोह होते रहे; जिससे लड़ते-लड़ते जैन, बौद्ध, लोकायत धारा, सिख, शैव, भांति-भांति के वैष्णव जैसे अनेक धर्म और उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम में अनेकानेक पंथ विकसित हुए।
यह वह सांघातिक बीमारी है जिसने इस देश को करीब डेढ़ हजार वर्ष तक घुप्प अंधेरे में डालकर रखा- मनुस्मृति के आधार पर हाथ और दिमाग को एक दूसरे से काटकर भारत के विज्ञान, साहित्य, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास को अवरुद्ध करके रख दिया, सडांध पैदा कर दी। यह वही जकड़न है जिससे निजात पाने के लिए कबीर से लेकर रैदास, गुरु घासीदास से होते हुए राजा राममोहन राय, ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ने अपने तरीकों से जद्दोजहद की। जोतिबा फुले से पेरियार होते हुए अम्बेडकर तक ने निर्णायक चोटें की।
ई एम एस नम्बूदिरिपाद और ए के गोपालन से होते हुए वाम आन्दोलन ने इसे सुधार से आगे बढाया और सामाजिक बदलाव की लड़ाई से जोड़ा। इन्हीं संघर्षों का असर था, जिसने भारत के संविधान के रूप में मूर्त आकार ग्रहण किया। जिसने भारत को मध्ययुगीन यातना गृह से बाहर निकाल एक सभ्य समाज बनाने की पृष्ठभूमि तैयार की। यही बाद में 70 के दशक में देश की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व में गुणात्मक परिवर्तन के रूप में दिखा।
इस तरह यह जहां एक ओर कुख्यात हो गए हिंदुत्व की नई पैकेजिंग है वहीं दूसरी ओर इन ढाई-तीन हजार वर्षों के वैचारिक संघर्षों की उपलब्धियों का नकार भी है। संविधान और उसमें दी गयी समता, समानता, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता का धिक्कार भी है। यह बर्बर असलियत को छिपाने का कपट है। राजनाथ सिंह के दावे को सावरकर की 1923 की पुस्तक हिंदुत्व, जिसे संघ-भाजपा अपना ध्येय मानती है, में लिखे के आधार पर जांच कर देखना चाहिए।
बकौल सावरकर "वर्ण व्यवस्था हमारी राष्ट्रीयता की लगभग मुख्य पहचान बन गयी है। यह भी कि "जिस देश में चातुर्वर्ण नहीं है, वह म्लेच्छ देश है। आर्यावर्त नहीं है।" और आगे बढ़कर सावरकर इसे और स्पष्ट करते हैं कि "ब्राह्मणों का शासन, हिन्दू राष्ट्र का आदर्श होगा।" वे यह भी कहते हैं कि "सन 1818 में यहां देश के आखिरी और सबसे गौरवशाली हिन्दू साम्राज्य (पेशवाशाही) की कब्र बनी।" ध्यान रहे यह वही पेशवाशाही है जिसे हिन्दू पदपादशाही के रूप में फिर से कायम कर आरएसएस एक राष्ट्र बनाना चाहता है और इसी को वह हिन्दू राष्ट्र बताता है।
भारत के इतिहास में कलंक के रूप में जानी जाने वाली यह पेशवाशाही क्या थी, इसे जोतिबा फुले की 'गुलामगीरी' या भीमा कोरेगांव की संक्षेपिका पढ़ कर जाना जा सकता है। यही बात संघ के एकमात्र गुरु जी गोलवलकर ने कही थी कि "ईरान, मिस्र, यूरोप तथा चीन के सभी राष्ट्रों को मुसलमानों ने जीत कर अपने में मिला लिया, क्योंकि उनके यहां वर्ण व्यवस्था नहीं थी। सिंध, बलूचिस्तान, कश्मीर तथा उत्तर-पश्चिम के सीमान्त प्रदेश और पूर्वी बंगाल में लोग मुसलमान हो गए क्योंकि इन क्षेत्रों में बौद्ध धर्म ने वर्ण व्यवस्था को कमजोर बना दिया था।" इनका सनातन धर्म की बहाली का दावा वर्णाश्रम की बहाली के सिवा कुछ नहीं है।
इस मामले में भी इस कुनबे की हिटलर के साथ आश्चर्यजनक समानता है; हिटलर जो खुद नास्तिक था, 18 वर्ष का होने के बाद कभी मास या प्रेयर में नहीं गया, उसने भी अपने कर्मों को जायज ठहराने के लिए न केवल "सकारात्मक ईसाई धर्म" के नाम पर एक नया धर्म और उसका नया चर्च बनाने की कोशिश की थी, ईसा मसीह को भी एक आर्य सेनानी के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी बल्कि इतिहास के कूड़ेदान से निकालकर अपना एक अलग देवता भी प्रतिष्ठित कर दिया था।
उनकी ताजा भड़भड़ाहट की वजह यह है कि हिंदुत्व और हिन्दू की जगह सनातन का जाप कर उसी पुराने और त्याज्य पर नया मुलम्मा चढ़ाने की इस कोशिश को लोग समझने लगे हैं। भट्टी सुलगने के पहले ही समता, सामाजिक सुधार, लोकतंत्र और संविधान की हिमायती ताकतें उसे बुझाने के लिए खुद जाग चुकी हैं औरों को भी जगा रही हैं। तमिलनाडु के साहित्यकारों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों की वह सभा इसी जागरण अभियान का हिस्सा थी। कहने की आवश्यकता नहीं कि संघ और भाजपा जितना शोर मचाएंगे उतना ही इसके खिलाफ प्रतिरोध भी तेज से तेजतर होगा।
(बादल सरोज, लोकजतन के सम्पादक और अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव हैं।)
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तमिलनाडु में साहित्यकारों और कलाकारों की एक वैचारिक सभा में डीएमके के युवा नेता उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म के उन्मूलन वाले बयान के बाद भाजपा और संघ का पूरा गिरोह अपने सारे कपड़े फाड़कर देश भर में बबाल मचाने में भिड़ा है। उनके ब्रह्मा जी को छोड़कर कुनबे में जितने भी देव, दानव, गण, भक्तगण, गणवेशधारी और हिंदुत्व पुंगव, बन्धु और भगिनियां हैं, वे पूरा गोला बारूद लेकर इसे धर्मोन्माद में बदलने और राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुटे हुए हैं। 'सनातन उन्मूलन सम्मेलन' में भाग लेते हुए पहले उदयनिधि स्टालिन ने 'भारतीय मुक्ति संग्राम में आरएसएस का योगदान' शीर्षक से व्यंग्य चित्रों वाली एक पुस्तक का विमोचन किया था; भक्तगण इसके बारे में एक भी शब्द नहीं बोल रहे, वे इसके बाद दिए गए भाषण में उन्होंने सनातन धर्म को लेकर जो टिप्पणियां की थीं उन्हें लेकर भनभनाये हुए हैं। उदयनिधि स्टालिन ने अपने संबोधन में सम्मेलन के शीर्षक को बहुत अच्छा बताया और इसके लिए बधाई देते हुए कहा कि 'सनातन विरोधी सम्मेलन' के बजाय 'सनातन उन्मूलन सम्मेलन' रखा जाना इसलिए ठीक है क्योंकि हमें कुछ चीज़ों को ख़त्म करना होगा। सिर्फ उनका विरोध करने से काम नहीं चल सकता। जैसे मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना वायरस इत्यादि का विरोध करना काफी नहीं होता, उन्हें खत्म करना होता है ठीक उसी तरह सनातन धर्म भी ऐसा ही है जिसका हमें विरोध नहीं करना है बल्कि इसका उन्मूलन करना है। जिस सनातन को लेकर इतना हल्ला मचाया जा रहा है वह सनातन क्या है? इस पर आने से पहले यह जानना दिलचस्प होगा कि पिछले कुछ महीनों- अधिकतम एक साल- से आरएसएस और उसके कुनबे की भाषा में अचानक सनातन के इतनी प्रमुखता हासिल करने के पीछे मकसद क्या है? संघ और उसकी सभी भुजाएं अब तक हिन्दू और हिंदुत्व की बातें करती रही हैं। हिन्दू धर्म वालों की एकता बनाकर, हिंदुत्व पर आधारित हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का दावा करती रही हैं। गोलवलकर की एक हज़ार नौ सौ उनतालीस में लिखी किताब 'हम और हमारी राष्ट्रीयता', जिसे आरएसएस ने अभी तक आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया, फिलहाल उससे अपनी असंबद्धता ही जाहिर की है, उसमें हिन्दू राष्ट्र में रहने की पाँच योग्यतायें गिनाते समय एक धर्म- सनातन धर्म- का उल्लेख छोड़कर अभी तक संघ के प्रचार साहित्य में भी सनातन का उस तरह जिक्र नहीं मिलता जिस तरह हाल के कुछ महीनों में शुरू हुआ है। हर जगह हिन्दू पहचान, हिन्दू धर्म, हिंदुत्व और उस पर आधारित हिन्दू राष्ट्र की बात मिलती है। हिंदुत्व भी वह वाला जिसे उन सावरकर ने परिभाषित किया था जो खुद किसी धर्म में विश्वास नहीं करते थे और घोषित रूप से स्वयं को नास्तिक बताते थे। संघी गिरोह द्वारा अचानक से हिन्दू धर्म और हिंदुत्व को कब और क्यों गंगा में सिरा दिया गया और बंद अंधेरी गुफा में पड़े सनातन की प्राण प्रतिष्ठा कर दी गयी? यह अचानक नहीं हुआ। इसकी भी एक क्रोनोलोजी है। मुख्य वजह यह है कि हिंदुत्ववादी साम्प्रदायिकता के उभार के बाद से देशभर में चले विमर्श में हिंदुत्व के वर्णाश्रम, जाति श्रेणी क्रम के अमानवीय आधार, लोकतंत्र और समता के निषेध के आपराधिक रूप जनता के सामने आये हैं- नतीजे में इसकी अमानुषिकता उजागर हुयी है। इनके कथित सामाजिक समरसता के अभियानों के बावजूद दलितों, आदिवासियों, अन्य पिछड़े समुदायों और महिलाओं के एक बड़े हिस्से में हिंदुत्व के असली चेहरे की भयावहता सामने आयी है- उनकी इसके प्रति अरुचि बढ़ी है, अविश्वास बढ़ते बढ़ते तिरस्कार भाव तक पहुंचने लगा है। इसी के साथ, इसी बीच, हिन्दू शब्द के उद्गम को लेकर आई जानकारियों ने भी इस गिरोह को असुविधा में डाला है। लिहाजा बहुत ही सोचे समझे तरीके से पिछले कुछ महीनों से इस कुनबे ने हिन्दू, हिंदुत्व की केंचुली उतारना और सनातन की खाल ओढ़ कर नया बाना धारण करना शुरू कर दिया है। हालांकि जिस सनातन की ये दुहाई दे रहे हैं वह सनातन क्या और कितना सनातन है, यह बात भी कोई दबी छिपी नहीं है। सनातन एक आधुनिक पहचान है जो विविधताओं से भरी हिन्दू परम्परा के प्रभुत्वशाली ब्राह्मण धर्म में कुरीतियों के विरुद्ध हुए धार्मिक सुधार आंदोलनों के मुकाबले घनघोर पुरातनपंथी रूढ़ीवाद की पहचान के रूप में सामने आयी। बंगाल के नवजागरण सहित ब्रह्म समाज आन्दोलन, दक्षिण के जाति और वर्णाश्रम विरोधी मैदानी और वैचारिक संघर्षों, महाराष्ट्र के सामाजिक सुधारकों की मुहिमों और खासकर उत्तर भारत में मूर्तिपूजा, अंधविश्वास और एक हद तक जाति विरोधी आन्दोलन आर्य समाज के बरक्स असमानता, ऊंचनीच और भेदभाव का धुर पक्षधर पुराणपंथ सनातन के नाम पर गिरोहबंद हुआ। अट्ठारहवीं और उन्नीसवीं सदी में सनातनियों का सबसे बड़ा युद्ध जिस आर्य समाज के साथ हुआ था उस आर्य समाज का तो नारा ही वेदों की ओर वापस लौटने का था, इसलिए सनातन धर्म का वैदिक धर्म के साथ कोई रिश्ता होने का सवाल ही नहीं उठता। यूं भी चारों वेदों में कहीं सनातन नहीं है, चौदह ब्राम्हण ग्रंथों, सात अरण्यकों, एक सौ आठ उपनिषदों- जिनमें से ज्यादातर एक दूसरे के खिलाफ भी राय देते हैं- में इसका कोई महात्म्य नहीं समझाया गया है। एक भागवत को छोड़कर, जो तुलनात्मक रूप से आधुनिक है, अट्ठारह पुराणों में भी सनातन का कहीं जिक्र नहीं मिलता। श्री कृष्ण- जिनके उपदेश वाले ग्रंथ गीता को संघ-भाजपा भारत का राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित करता रहा है- उन्होंने तो धर्म की जो परिभाषा दी है वह सनातन को अधर्म करार देती है। वे कहते हैं कि "जो समय के साथ नहीं बदलता, जो अपरिवर्तित और सनातन रहता है वह धर्म नहीं अधर्म है।" प्रश्न यह था कि जब द्रौपदी का चीरहरण किया गया तब द्यूत सभा में मौजूद सभी ज्ञानियों के चुप रहने पर कृष्ण ने अपनी आपत्ति दर्ज की और इसे अधर्म बताया। भीष्म और विदुर ने अपनी-अपनी प्रतिज्ञाओं के पालन का धर्म निबाहने का हवाला देते हुए खुद कृष्ण को कठघरे में खडा किया और कहा कि उन्होंने शस्त्र न उठाने का वचन तोड़कर खुद अधर्म किया है। इसके जवाब में कृष्ण धर्म को परिभाषित करते हुए कहते हैं कि "जिस धर्म का पालन करने की बात आप कर रहे है वह धर्म नहीं है। धर्म किसी वचन से बंधा नहीं होता, वह लगातार बदलता है, जो समय के साथ नहीं बदलता वह अधर्म है।" उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ युद्ध जैसा छेड़े आरएसएस और भाजपा यदि सनातन की सनातनता पर सचमुच में गंभीर हैं तो उन्हें पहले कृष्ण के खिलाफ मोर्चा खोलना चाहिये। रही सनातन के शाब्दिक अर्थ के हिसाब से अनादिकाल से चले आने की बात है तो पाली भाषा में लिखे ग्रंथों में उन बुद्ध और उनके बौद्ध धर्म को भी सनातन कहा गया है जिन गौतम बुद्ध का खुद का यह कहना था कि "दुनिया में कुछ भी स्थिर नहीं है। कुछ भी शाश्वत नहीं है। कुछ भी सनातन नहीं है। व्यक्ति और समाज के लिये परिवर्तन ही जीवन का नियम है। वेदों को प्रमाण मानने से इनकार करने वाले, ईश्वर के अस्तित्व को भी न मानने वाले पृथ्वी के इस हिस्से के पहले नास्तिक धर्म में भी "है भी, नहीं भी है" का संशयवाद है- हालांकि इसके बाद भी जैन धर्मावलंबियों का दावा है कि वह भी अनादिकाल से अस्तित्वमान है। ठीक यही वजह है कि सनातन धर्म में सनातन क्या है, यह बात कोई सनातनी भी न खुद समझ पाया है ना हीं किसी को समझा पाया है। ताजा विवाद के बाद अचानक धर्मवेत्ता बन गए राजनाथ सिंह का राजस्थान में दिया गया भाषण इसी गफलत का एक और नमूना है। वे सनातन की ठीक उलटी परिभाषा देते हुए वह सब बातें बखानने लगते हैं, सनातन जिनके पूरी तरह खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि "जो जड़ में हैं वही चेतन में है, जो पिंड में है वही ब्रह्माण्ड में है, जो छोटे में है वही बड़े में है, जो मेरे में है वही तेरे में है।" अरक्षनीय का रक्षण करते करते वे यहां तक बोल गए कि "जो जात-पात और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करता, न जिसका आदि है न अंत है वही सनातन धर्म है।" जाहिर सी बात है कि वे बता कम रहे थे छुपा ज्यादा रहे थे। यह कुनबा जिस सनातन धर्म की बात कर रहा है वह वर्णाश्रम पर आधारित, जाति प्रथा और उसके आधार पर ऊंच-नीच यहां तक कि छुआछूत तक में यकीन करने, महिलाओं को शूद्रातिशूद्र मानने को धर्मसम्मत बताने वाली व्याधि है जिसका सही नाम ब्राह्मण धर्म है। वही ब्राह्मण धर्म जिसके खिलाफ पिछले ढाई तीन हजार वर्षों में भारत में दार्शनिक और धार्मिक विद्रोह होते रहे; जिससे लड़ते-लड़ते जैन, बौद्ध, लोकायत धारा, सिख, शैव, भांति-भांति के वैष्णव जैसे अनेक धर्म और उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम में अनेकानेक पंथ विकसित हुए। यह वह सांघातिक बीमारी है जिसने इस देश को करीब डेढ़ हजार वर्ष तक घुप्प अंधेरे में डालकर रखा- मनुस्मृति के आधार पर हाथ और दिमाग को एक दूसरे से काटकर भारत के विज्ञान, साहित्य, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास को अवरुद्ध करके रख दिया, सडांध पैदा कर दी। यह वही जकड़न है जिससे निजात पाने के लिए कबीर से लेकर रैदास, गुरु घासीदास से होते हुए राजा राममोहन राय, ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ने अपने तरीकों से जद्दोजहद की। जोतिबा फुले से पेरियार होते हुए अम्बेडकर तक ने निर्णायक चोटें की। ई एम एस नम्बूदिरिपाद और ए के गोपालन से होते हुए वाम आन्दोलन ने इसे सुधार से आगे बढाया और सामाजिक बदलाव की लड़ाई से जोड़ा। इन्हीं संघर्षों का असर था, जिसने भारत के संविधान के रूप में मूर्त आकार ग्रहण किया। जिसने भारत को मध्ययुगीन यातना गृह से बाहर निकाल एक सभ्य समाज बनाने की पृष्ठभूमि तैयार की। यही बाद में सत्तर के दशक में देश की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व में गुणात्मक परिवर्तन के रूप में दिखा। इस तरह यह जहां एक ओर कुख्यात हो गए हिंदुत्व की नई पैकेजिंग है वहीं दूसरी ओर इन ढाई-तीन हजार वर्षों के वैचारिक संघर्षों की उपलब्धियों का नकार भी है। संविधान और उसमें दी गयी समता, समानता, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता का धिक्कार भी है। यह बर्बर असलियत को छिपाने का कपट है। राजनाथ सिंह के दावे को सावरकर की एक हज़ार नौ सौ तेईस की पुस्तक हिंदुत्व, जिसे संघ-भाजपा अपना ध्येय मानती है, में लिखे के आधार पर जांच कर देखना चाहिए। बकौल सावरकर "वर्ण व्यवस्था हमारी राष्ट्रीयता की लगभग मुख्य पहचान बन गयी है। यह भी कि "जिस देश में चातुर्वर्ण नहीं है, वह म्लेच्छ देश है। आर्यावर्त नहीं है।" और आगे बढ़कर सावरकर इसे और स्पष्ट करते हैं कि "ब्राह्मणों का शासन, हिन्दू राष्ट्र का आदर्श होगा।" वे यह भी कहते हैं कि "सन एक हज़ार आठ सौ अट्ठारह में यहां देश के आखिरी और सबसे गौरवशाली हिन्दू साम्राज्य की कब्र बनी।" ध्यान रहे यह वही पेशवाशाही है जिसे हिन्दू पदपादशाही के रूप में फिर से कायम कर आरएसएस एक राष्ट्र बनाना चाहता है और इसी को वह हिन्दू राष्ट्र बताता है। भारत के इतिहास में कलंक के रूप में जानी जाने वाली यह पेशवाशाही क्या थी, इसे जोतिबा फुले की 'गुलामगीरी' या भीमा कोरेगांव की संक्षेपिका पढ़ कर जाना जा सकता है। यही बात संघ के एकमात्र गुरु जी गोलवलकर ने कही थी कि "ईरान, मिस्र, यूरोप तथा चीन के सभी राष्ट्रों को मुसलमानों ने जीत कर अपने में मिला लिया, क्योंकि उनके यहां वर्ण व्यवस्था नहीं थी। सिंध, बलूचिस्तान, कश्मीर तथा उत्तर-पश्चिम के सीमान्त प्रदेश और पूर्वी बंगाल में लोग मुसलमान हो गए क्योंकि इन क्षेत्रों में बौद्ध धर्म ने वर्ण व्यवस्था को कमजोर बना दिया था।" इनका सनातन धर्म की बहाली का दावा वर्णाश्रम की बहाली के सिवा कुछ नहीं है। इस मामले में भी इस कुनबे की हिटलर के साथ आश्चर्यजनक समानता है; हिटलर जो खुद नास्तिक था, अट्ठारह वर्ष का होने के बाद कभी मास या प्रेयर में नहीं गया, उसने भी अपने कर्मों को जायज ठहराने के लिए न केवल "सकारात्मक ईसाई धर्म" के नाम पर एक नया धर्म और उसका नया चर्च बनाने की कोशिश की थी, ईसा मसीह को भी एक आर्य सेनानी के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी ताकत लगा दी थी बल्कि इतिहास के कूड़ेदान से निकालकर अपना एक अलग देवता भी प्रतिष्ठित कर दिया था। उनकी ताजा भड़भड़ाहट की वजह यह है कि हिंदुत्व और हिन्दू की जगह सनातन का जाप कर उसी पुराने और त्याज्य पर नया मुलम्मा चढ़ाने की इस कोशिश को लोग समझने लगे हैं। भट्टी सुलगने के पहले ही समता, सामाजिक सुधार, लोकतंत्र और संविधान की हिमायती ताकतें उसे बुझाने के लिए खुद जाग चुकी हैं औरों को भी जगा रही हैं। तमिलनाडु के साहित्यकारों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों की वह सभा इसी जागरण अभियान का हिस्सा थी। कहने की आवश्यकता नहीं कि संघ और भाजपा जितना शोर मचाएंगे उतना ही इसके खिलाफ प्रतिरोध भी तेज से तेजतर होगा।
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हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल स्पीति में हिमस्खलन की चपेट में आने से सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के दो लोगों की मौत हो गई और एक लापता है। राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी टीमों ने दोनों शवों को बरामद कर लिया है, जबकि लापता युवक की तलाश जारी है।
मृतक मजदूरों की पहचान 19 वर्षीय राम बुद्ध निवासी नेपाल और राकेश निवासी चम्बा के रूप में हुई है। वहीं, लापता व्यक्ति की पहचान नेपाल निवासी छेरिंग लामा (27) के रूप में हुई है। हादसा जिला मुख्यालय केलांग से 35 किलोमीटर दूर शिकुंला दर्रे के पास हुआ है।
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एक प्रवक्ता के मुताबिक, रविवार शाम 4 बजे के करीब लाहौल उपमण्डल में दारचा-शिंकुला सड़क पर छीका गांव के पास यह हिमखण्ड गिरा। उस दौरान सीमा सड़क संगठन के मजदूर सड़क से बर्फ हटा रहे थे। अचानक हिमस्खलन की चपेट में आने से घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। तीन मजदूरों के साथ बर्फ हटाने वाला स्नो कटर और मशीनरी भी हिमस्खलन की जद में आ गई।
लाहौल स्पीति के उपायुक्त सुमित खिमटा ने बताया कि देर शाम सीमा सड़क संगठन ने हिमखण्ड गिरने की सूचना दी थी। घटना में बीआरओ के तीन दिहाड़ी मजदूर स्नो कटर और डोजर मशीनरी सहित हिमस्खलन की चपेट में आ गए। दो शवों को बरामद कर क्षेत्रीय अस्पताल केलांग लाया जा रहा है। लापता युवक की तलाश की जा रही है।
गौरतलब है कि बीते दिनों लाहौल-स्पीति में भारी हिमपात हुआ था। इस वजह से कई सडकें अवरुद्ध हो गई थीं। सड़कों से बर्फ हटाने का कार्य चल रहा है। जिला में 131 सड़कें अभी भी अवरुद्ध हैं। लाहौल स्पीति में पिछले चार-पांच दिनों से मौसम साफ चल रहा है और तेज धूप खिलने से बर्फ पिघल रही है और हिमखण्डों के टूटने की आशंका बनी हुई है।
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हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला लाहौल स्पीति में हिमस्खलन की चपेट में आने से सीमा सड़क संगठन के दो लोगों की मौत हो गई और एक लापता है। राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी टीमों ने दोनों शवों को बरामद कर लिया है, जबकि लापता युवक की तलाश जारी है। मृतक मजदूरों की पहचान उन्नीस वर्षीय राम बुद्ध निवासी नेपाल और राकेश निवासी चम्बा के रूप में हुई है। वहीं, लापता व्यक्ति की पहचान नेपाल निवासी छेरिंग लामा के रूप में हुई है। हादसा जिला मुख्यालय केलांग से पैंतीस किलोग्राममीटर दूर शिकुंला दर्रे के पास हुआ है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एक प्रवक्ता के मुताबिक, रविवार शाम चार बजे के करीब लाहौल उपमण्डल में दारचा-शिंकुला सड़क पर छीका गांव के पास यह हिमखण्ड गिरा। उस दौरान सीमा सड़क संगठन के मजदूर सड़क से बर्फ हटा रहे थे। अचानक हिमस्खलन की चपेट में आने से घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। तीन मजदूरों के साथ बर्फ हटाने वाला स्नो कटर और मशीनरी भी हिमस्खलन की जद में आ गई। लाहौल स्पीति के उपायुक्त सुमित खिमटा ने बताया कि देर शाम सीमा सड़क संगठन ने हिमखण्ड गिरने की सूचना दी थी। घटना में बीआरओ के तीन दिहाड़ी मजदूर स्नो कटर और डोजर मशीनरी सहित हिमस्खलन की चपेट में आ गए। दो शवों को बरामद कर क्षेत्रीय अस्पताल केलांग लाया जा रहा है। लापता युवक की तलाश की जा रही है। गौरतलब है कि बीते दिनों लाहौल-स्पीति में भारी हिमपात हुआ था। इस वजह से कई सडकें अवरुद्ध हो गई थीं। सड़कों से बर्फ हटाने का कार्य चल रहा है। जिला में एक सौ इकतीस सड़कें अभी भी अवरुद्ध हैं। लाहौल स्पीति में पिछले चार-पांच दिनों से मौसम साफ चल रहा है और तेज धूप खिलने से बर्फ पिघल रही है और हिमखण्डों के टूटने की आशंका बनी हुई है।
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