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देश में कोरोना वायरस महामारी तेजी से बढ़ रही है. महाराष्ट्र से सबसे ज्यादा केस सामने आए हैं. अकोला में 2 दिनों के लिए कंप्लीट लॉकडाउन लगा दिया गया है. इस दौरान सिर्फ मेडिकल शॉप और इमरजेंसी सेवाओं से जुड़ी चीजें ही खुली होंगी बाकी सब कुछ बंद रहेगा. जलगांव जिले में आज से रविवार (14 मार्च) तक जनता कर्फ्यू लागू हो गया है. वहीं पुणे के लोगों को राहत मिली है.
पुणे में फिलहाल कंप्लीट लॉकडाउन नहीं लगेगा. लेकिन नाइट कर्फ्यू अब भी जारी रहेंगे. कड़े प्रतिबंध जारी रहेंगे. होटल और मॉल केवल 10 बजे तक खुले रहेंगे. स्कूल कॉलेज 31 मार्च तक बंद रहेंगे. शादियों में 50 से अधिक लोग शामिल नहीं होंगे. इससे पहले व्यापारियों ने पुणे के संरक्षक मंत्री और उपमुख्यमंत्री अजित पवार से आग्रह किया था कि लॉकडाउन नहीं लगाए जाएं इससे किसी तरह पटरी पार आ रहे उद्योग-धंधे चौपट हो जाएंगे.
अजित पवार ने अधिकारियों के साथ बैठक की और यह निर्णय किया कि फिलहाल कंप्लीट लॉकडाउन नहीं किया जाएगा. इस बैठक में विभागीय आयुक्त, जिलाधिकारी और पालिका आयुक्त उपस्थित थे. इस बैठक से पहले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटील भी अजित पवार से मिले और पुणे और पुणे से सटे पिंपरी-चिंचवड इलाके में कोरोना के बढ़ते संकट को लेकर चर्चा की. फिलहाल पुणे में 62 कंटेनमेंट जोन हैं. गुरुवार को पुणे में 1 हजार 504 नए केस सामने आए. इससे पहले बुधवार को 1 हजार 352 नए कोरोना केस सामने आए थे वहीं मंगलवार को भी कोरोना संक्रमितों की संख्या 1 हजार से पार रही थी. मंगलवार पुणे में 1 हजार 86 कोरोना केस सामने आए थे.
इस बीच मुंबई की मेयर किशोरी पेडणेकर ने मुंबई में बढ़ते कोरोना के संकट को देखते हुए मुंबई में आंशिक लॉकडाउन और लोकल को रोकने का संकेत दिया है.
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देश में कोरोना वायरस महामारी तेजी से बढ़ रही है. महाराष्ट्र से सबसे ज्यादा केस सामने आए हैं. अकोला में दो दिनों के लिए कंप्लीट लॉकडाउन लगा दिया गया है. इस दौरान सिर्फ मेडिकल शॉप और इमरजेंसी सेवाओं से जुड़ी चीजें ही खुली होंगी बाकी सब कुछ बंद रहेगा. जलगांव जिले में आज से रविवार तक जनता कर्फ्यू लागू हो गया है. वहीं पुणे के लोगों को राहत मिली है. पुणे में फिलहाल कंप्लीट लॉकडाउन नहीं लगेगा. लेकिन नाइट कर्फ्यू अब भी जारी रहेंगे. कड़े प्रतिबंध जारी रहेंगे. होटल और मॉल केवल दस बजे तक खुले रहेंगे. स्कूल कॉलेज इकतीस मार्च तक बंद रहेंगे. शादियों में पचास से अधिक लोग शामिल नहीं होंगे. इससे पहले व्यापारियों ने पुणे के संरक्षक मंत्री और उपमुख्यमंत्री अजित पवार से आग्रह किया था कि लॉकडाउन नहीं लगाए जाएं इससे किसी तरह पटरी पार आ रहे उद्योग-धंधे चौपट हो जाएंगे. अजित पवार ने अधिकारियों के साथ बैठक की और यह निर्णय किया कि फिलहाल कंप्लीट लॉकडाउन नहीं किया जाएगा. इस बैठक में विभागीय आयुक्त, जिलाधिकारी और पालिका आयुक्त उपस्थित थे. इस बैठक से पहले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष चंद्रकांत पाटील भी अजित पवार से मिले और पुणे और पुणे से सटे पिंपरी-चिंचवड इलाके में कोरोना के बढ़ते संकट को लेकर चर्चा की. फिलहाल पुणे में बासठ कंटेनमेंट जोन हैं. गुरुवार को पुणे में एक हजार पाँच सौ चार नए केस सामने आए. इससे पहले बुधवार को एक हजार तीन सौ बावन नए कोरोना केस सामने आए थे वहीं मंगलवार को भी कोरोना संक्रमितों की संख्या एक हजार से पार रही थी. मंगलवार पुणे में एक हजार छियासी कोरोना केस सामने आए थे. इस बीच मुंबई की मेयर किशोरी पेडणेकर ने मुंबई में बढ़ते कोरोना के संकट को देखते हुए मुंबई में आंशिक लॉकडाउन और लोकल को रोकने का संकेत दिया है.
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रायपुर. छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित हो रहे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव तीन दिनों का होगा। राजधानी रायपुर के र्साइंस कॉलेज मैदान में 27, 28 और 29 दिसम्बर को होगा। बुधवार को इस आयोजन के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति गठित की गई है। समिति में गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रवीन्द्र चौबे, आदिमजाति एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री उमेश पटेल, छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव समेत अन्य संबंधित अधिकारी होंगे।
राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में प्रतियोगिता भी होगी। इनमें चार विषयों पर कार्यक्रम होंगे। पहला विवाह या मांगलिक अवसर पर होने वाले नृत्य, दूसरा कृषि आधारित जैसे फसल कटने के समय आयोजित होने वाले नृत्य, तीसरा देश के विभिन्न राज्यों में पारंपरिक त्यौहारों, विशेष अवसरों पर होने वाले नृत्य और चौथे विषय को खुली प्रतियोगिता के रूप में रखा गया है। इसमें एक राज्य से 4 ग्रुप शामिल होंगे। हर ग्रुप में 15 कलाकारों की टीम होगी।
इस फेस्टिवल में प्रदर्शनी, हस्तशिल्प, कुटीर उद्योग, बस्तर एवं सरगुजा के कला प्रदर्शनी, हर्बल उत्पाद, नरवा, गरवा, घुरूवा, बारी की थीम पर प्रदर्शनी, छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की प्रदर्शनी एवं विक्रय केन्द्रों के स्टाल लगाये जाएंगे। हाथकरघा वस्त्रों और कृषि आधारित विभिन्न उत्पादों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के अलावा देश के दूसरे राज्यों से 2500 कलाकार शामिल होंगे।
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रायपुर. छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित हो रहे राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव तीन दिनों का होगा। राजधानी रायपुर के र्साइंस कॉलेज मैदान में सत्ताईस, अट्ठाईस और उनतीस दिसम्बर को होगा। बुधवार को इस आयोजन के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति गठित की गई है। समिति में गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रवीन्द्र चौबे, आदिमजाति एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री उमेश पटेल, छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव समेत अन्य संबंधित अधिकारी होंगे। राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव में प्रतियोगिता भी होगी। इनमें चार विषयों पर कार्यक्रम होंगे। पहला विवाह या मांगलिक अवसर पर होने वाले नृत्य, दूसरा कृषि आधारित जैसे फसल कटने के समय आयोजित होने वाले नृत्य, तीसरा देश के विभिन्न राज्यों में पारंपरिक त्यौहारों, विशेष अवसरों पर होने वाले नृत्य और चौथे विषय को खुली प्रतियोगिता के रूप में रखा गया है। इसमें एक राज्य से चार ग्रुप शामिल होंगे। हर ग्रुप में पंद्रह कलाकारों की टीम होगी। इस फेस्टिवल में प्रदर्शनी, हस्तशिल्प, कुटीर उद्योग, बस्तर एवं सरगुजा के कला प्रदर्शनी, हर्बल उत्पाद, नरवा, गरवा, घुरूवा, बारी की थीम पर प्रदर्शनी, छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की प्रदर्शनी एवं विक्रय केन्द्रों के स्टाल लगाये जाएंगे। हाथकरघा वस्त्रों और कृषि आधारित विभिन्न उत्पादों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के अलावा देश के दूसरे राज्यों से दो हज़ार पाँच सौ कलाकार शामिल होंगे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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( मेरे ) अधिक रक्त पी लेने पर भी ( इस ) धीरता के समुद्र को कोई ग्लानि ( मलिनता ) नहीं । माँस के काटने से उत्पन्न हुई पीड़ा को धारण करते हुए भी ( इसका ) मुख हर्ष से प्रसन्न है । (इसका ) जो अङ्ग ( अभी तक) नष्ट नहीं हुआ वहां यह रोमाञ्च स्पष्ट दिखाई दे रहा है। (और) मुझ
पर भी इसकी दृष्टि ऐसे पड़ रही है मानों किसी उपकारी व्यक्ति पर पड़ रही हो । अतः इसकी इस धैर्य-वृत्ति से मु उत्सुकता ही पैदा हुई है । और इसे नहीं खाऊंगा । ( हट जाता है)
नायक - (गरुड़ को मांस के काटने से विमुख हुआ देखकर ) - मेरी नाड़ियों के मुखों से अभी रक्त वह रहा है। अभी तक मेरे शरीर में मांस है । तुम्हारी तृप्ति भी मैं नहीं देख रहा । तो हे गरुड़ ! तुम ( मेरे शरीर को) खाने से क्यों हट गए हो ? गरुड़ · ~ (मन ही मन ) - श्राश्चर्य है ! आश्चर्य है !! क्या इस दशा में भी, इस प्रकार तेजस्वी चचन बोल रहा है !!! (प्रकट ) हे महात्मन्1. मलिनता; थकावट, कमज़ोरी । 2. प्रसन्न; आनन्दित, शान्त ।
3. चू रहा है; बह रहा है 1
मिया चञ्च्या हृदयात्तव शोणितम् । पुनस्त्वा हृदयमेव नः ॥ १७ ॥ तत्कस्त्वमिति श्रोतुमिच्छामि ।
नायकः एवं क्षुदुपततो न श्रवणयोग्यस्त्वम् । कुरुष्व तावन्मम मांसशोणितेन तृप्तिम् ।
शङ्खचूडः- (सहसोपसृत्य ) तार्य ! न खलु न खलु साहसमनुष्ठेयम् । नायं नागः । परित्यजैनम् । मां भक्षय । तोऽस्म वासुकिना ।
[इत्युरो ददाति]
नायकः- (शङ्खचूडं दृष्ट्वा सविषादमात्मगतम् ) कष्टं ! विफलीकृतो मे मनोरथः शङ्खचूडेनागच्छता ।
गरुड़ः - ( उभौ निरूप्य) द्वयोरपि भवतोवँध्यचिह्नम् । कः खलु नाग इति नावगच्छामि ।
शङ्खचूडः- अस्थान एव भ्रान्तिः ।
श्लोक न० : १७, अन्वयः -
मया चळच्चा तव हृदयात् शोणितम् (एव) श्रावर्जितम् । त्वया पुनः अनेन धैर्येण नः हृदयमेव (श्रावर्जितम्) ।
मैं ने तो अपनी चोंच से आपके हृदय से रक्त ही निकाला है ; पर तो इस धैर्य से हमारा हृदय ही हर लिया है ( वश में कर लिया है) । अतः मैं यह सुनना चाहता हूँ कि आप कौन
जायक इस प्रकार भूख से पीड़ित तुम (भी) सुनने योग्य नहीं हो । तः (पहिले) मेरे मांस तथा रक्त से अपनी तृप्ति कर लो । शङ्खचूड - (सहसा पास जा कर) हे गरुड़ ! मत करो, ऐसा साहस मत करो। यह नाग नहीं है। इसे छोड़ दो। मुझे खायो । मै ही वासुकि के द्वारा तुम्हारे भोजन के लिए भेजा गया हूँ । [ यह कहकर अपनी छाती भेंट करता है ]
( शङ्खचूड़ को देखकर, दुःख के साथ, मन ही मन ) - हाय, शङ्खचूड ने कर मेरे मनोरथ को निष्फल कर दिया !
गरुड - ( दोनों को देखकर ) तुम दोनों के चध्यचिह्न है । तो कौन ( वस्तुतः ) नाग है यह मैं नहीं समझ सका ।
शङ्खचूड - श्राप का भ्रम उचित नहीं । ( क्योंकि - )
1. निकालना; वश में करना; हरना ।
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अधिक रक्त पी लेने पर भी धीरता के समुद्र को कोई ग्लानि नहीं । माँस के काटने से उत्पन्न हुई पीड़ा को धारण करते हुए भी मुख हर्ष से प्रसन्न है । जो अङ्ग नष्ट नहीं हुआ वहां यह रोमाञ्च स्पष्ट दिखाई दे रहा है। मुझ पर भी इसकी दृष्टि ऐसे पड़ रही है मानों किसी उपकारी व्यक्ति पर पड़ रही हो । अतः इसकी इस धैर्य-वृत्ति से मु उत्सुकता ही पैदा हुई है । और इसे नहीं खाऊंगा । नायक - - मेरी नाड़ियों के मुखों से अभी रक्त वह रहा है। अभी तक मेरे शरीर में मांस है । तुम्हारी तृप्ति भी मैं नहीं देख रहा । तो हे गरुड़ ! तुम खाने से क्यों हट गए हो ? गरुड़ · ~ - श्राश्चर्य है ! आश्चर्य है !! क्या इस दशा में भी, इस प्रकार तेजस्वी चचन बोल रहा है !!! हे महात्मन्एक. मलिनता; थकावट, कमज़ोरी । दो. प्रसन्न; आनन्दित, शान्त । तीन. चू रहा है; बह रहा है एक मिया चञ्च्या हृदयात्तव शोणितम् । पुनस्त्वा हृदयमेव नः ॥ सत्रह ॥ तत्कस्त्वमिति श्रोतुमिच्छामि । नायकः एवं क्षुदुपततो न श्रवणयोग्यस्त्वम् । कुरुष्व तावन्मम मांसशोणितेन तृप्तिम् । शङ्खचूडः- तार्य ! न खलु न खलु साहसमनुष्ठेयम् । नायं नागः । परित्यजैनम् । मां भक्षय । तोऽस्म वासुकिना । [इत्युरो ददाति] नायकः- कष्टं ! विफलीकृतो मे मनोरथः शङ्खचूडेनागच्छता । गरुड़ः - द्वयोरपि भवतोवँध्यचिह्नम् । कः खलु नाग इति नावगच्छामि । शङ्खचूडः- अस्थान एव भ्रान्तिः । श्लोक नशून्य : सत्रह, अन्वयः - मया चळच्चा तव हृदयात् शोणितम् श्रावर्जितम् । त्वया पुनः अनेन धैर्येण नः हृदयमेव । मैं ने तो अपनी चोंच से आपके हृदय से रक्त ही निकाला है ; पर तो इस धैर्य से हमारा हृदय ही हर लिया है । अतः मैं यह सुनना चाहता हूँ कि आप कौन जायक इस प्रकार भूख से पीड़ित तुम सुनने योग्य नहीं हो । तः मेरे मांस तथा रक्त से अपनी तृप्ति कर लो । शङ्खचूड - हे गरुड़ ! मत करो, ऐसा साहस मत करो। यह नाग नहीं है। इसे छोड़ दो। मुझे खायो । मै ही वासुकि के द्वारा तुम्हारे भोजन के लिए भेजा गया हूँ । [ यह कहकर अपनी छाती भेंट करता है ] - हाय, शङ्खचूड ने कर मेरे मनोरथ को निष्फल कर दिया ! गरुड - तुम दोनों के चध्यचिह्न है । तो कौन नाग है यह मैं नहीं समझ सका । शङ्खचूड - श्राप का भ्रम उचित नहीं । एक. निकालना; वश में करना; हरना ।
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सिनेमाजगत के सीनियर एक्टर अनुपम खेर के सेन्स ऑफ ह्यूमर के सभी दीवाने हैं। फिल्म हो या फिर सोशल मीडिया अनुपम कई बार ऐसी बातें कह देते हैं जिसे पढ़ने के बाद लोगों की अपने आप ही हंसी छूट जाती है। इस बार भी अनुपम खेर ने कुछ ऐसा किया है जिसे जो भी पढ़ रहा है वो अपनी हंसी को रोक नहीं पा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि अभिनेता का ये पोस्ट गंजेपन को लेकर है।
इस मजाकिया पोस्ट को अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर दिलचस्प अंदाज में पोस्ट किया है। इस पोस्ट के साथ अनुपम खेर ने अपनी एक तस्वीर शेयर की है इसके साथ ही जबरदस्त कैप्शन भी लिखा है जो लोगों को खूब पसंद आ रहा है। इस कैप्शन के साथ अभिनेता ने ये बताया कि जिसके सिर पर बाल नहीं होते हैं वो सबसे ज्यादा सुकून में रहता है। अनुपम ने इस पोस्ट के साथ दो कैप्शन लिखे हैं। पहले कैप्शन में लिखा- 'ये उन सभी लोगों के लिए जो गंजे हैं। क्या आपको नहीं लगता कि मेरी इस बात में प्वाइंट है। क्यों मेरे गंजे दोस्तों! ! मैंने सही कहा ना। '
इसके अलावा अनुपम खेर ने अपनी तस्वीर के साथ कैप्शन में लिखा- 'दुनिया में सबसे संतुष्ट गंजा आदमी होता है. . . क्योंकि उसकी कोई मांग नहीं होती. . और ना ही कोई उसका बाल बांका कर सकता है। '
अभिनेता के इस पोस्ट को यूजर्स खूब पसंद कर रहे हैं और लगातर कमेंट करके अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। राहमनाऋषि नाम के यूजर ने कमेंट में लिखा- 'वाह क्या मोटिवेट किया है सर आप ने। ' वहीं दूसरे यूजर ने लिखा- 'जबरदस्त प्वाइंट है सर। ' इसके अलावा निखिल रस्तोगी नाम के यूजर ने लिखा- 'क्या खूब कही। '
इससे पहले अनुपम खेर ने अपने करीबी दोस्त केतन मेहता के साथ एक तस्वीर शेयर की थी। इस तस्वीर को शेयर करते हुए अनुपम खेर ने कैप्शन में लिखा- 'मैं अपनी किताब 'योर बेस्ट डे इज टुडे' को अपने दोस्त केतन देसाई को देते हुए बहुत खुश हूं। उन्होंने मेरी फिल्म अल्ला रक्खा डायरेक्ट की थी। ये मेरे फेवरेट फिल्ममेकर मनमोहन देसाई के बेटे हैं। '
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सिनेमाजगत के सीनियर एक्टर अनुपम खेर के सेन्स ऑफ ह्यूमर के सभी दीवाने हैं। फिल्म हो या फिर सोशल मीडिया अनुपम कई बार ऐसी बातें कह देते हैं जिसे पढ़ने के बाद लोगों की अपने आप ही हंसी छूट जाती है। इस बार भी अनुपम खेर ने कुछ ऐसा किया है जिसे जो भी पढ़ रहा है वो अपनी हंसी को रोक नहीं पा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि अभिनेता का ये पोस्ट गंजेपन को लेकर है। इस मजाकिया पोस्ट को अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर दिलचस्प अंदाज में पोस्ट किया है। इस पोस्ट के साथ अनुपम खेर ने अपनी एक तस्वीर शेयर की है इसके साथ ही जबरदस्त कैप्शन भी लिखा है जो लोगों को खूब पसंद आ रहा है। इस कैप्शन के साथ अभिनेता ने ये बताया कि जिसके सिर पर बाल नहीं होते हैं वो सबसे ज्यादा सुकून में रहता है। अनुपम ने इस पोस्ट के साथ दो कैप्शन लिखे हैं। पहले कैप्शन में लिखा- 'ये उन सभी लोगों के लिए जो गंजे हैं। क्या आपको नहीं लगता कि मेरी इस बात में प्वाइंट है। क्यों मेरे गंजे दोस्तों! ! मैंने सही कहा ना। ' इसके अलावा अनुपम खेर ने अपनी तस्वीर के साथ कैप्शन में लिखा- 'दुनिया में सबसे संतुष्ट गंजा आदमी होता है. . . क्योंकि उसकी कोई मांग नहीं होती. . और ना ही कोई उसका बाल बांका कर सकता है। ' अभिनेता के इस पोस्ट को यूजर्स खूब पसंद कर रहे हैं और लगातर कमेंट करके अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं। राहमनाऋषि नाम के यूजर ने कमेंट में लिखा- 'वाह क्या मोटिवेट किया है सर आप ने। ' वहीं दूसरे यूजर ने लिखा- 'जबरदस्त प्वाइंट है सर। ' इसके अलावा निखिल रस्तोगी नाम के यूजर ने लिखा- 'क्या खूब कही। ' इससे पहले अनुपम खेर ने अपने करीबी दोस्त केतन मेहता के साथ एक तस्वीर शेयर की थी। इस तस्वीर को शेयर करते हुए अनुपम खेर ने कैप्शन में लिखा- 'मैं अपनी किताब 'योर बेस्ट डे इज टुडे' को अपने दोस्त केतन देसाई को देते हुए बहुत खुश हूं। उन्होंने मेरी फिल्म अल्ला रक्खा डायरेक्ट की थी। ये मेरे फेवरेट फिल्ममेकर मनमोहन देसाई के बेटे हैं। '
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केरल हाईकोर्ट ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के उस आदेश को बरकरार रखा है, जो उन्होंने केरल तकनीकी विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति के रूप में सीजा थोमस की नियुक्ति को लेकर दिया था।
केरल हाईकोर्ट ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के उस आदेश को बरकरार रखा है, जो उन्होंने केरल तकनीकी विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति के रूप में सीजा थॉमस की नियुक्ति को लेकर दिया था। सीजा थॉमस तकनीकी शिक्षा निदेशालय के वरिष्ठ संयुक्त निदेशक हैं।
हाईकोर्ट ने मंगलवार को सीजा थॉमस को एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति के रूप में जारी रखने की अनुमति दी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जल्द से जल्द एक चयन समति का गठन करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने जल्द ही नए कुलपति को नियुक्त करने का निर्देश दिया।
केरल सरकार के द्वारा सीजा थॉमस की नियुक्ति पर रोक लगाने की मां की गई थी। न्यायमूर्ति देवन रामचंद्र ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि कुलपति के रूप में राज्यपाल यूजीसी के नियमों के आधार पर नियुक्तियां कर सकते हैं।
हाईकोर्ट ने कहा, विश्वविद्यालय, कुलाधिपति और यूजीसी से आग्रह है कि वे अपने-अपने नाम दें और एक चयन समिति का गठन करें। यदि संभव हो तो तीन से चार महीने के भीतर कुलपति की नियुक्ति करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्यपाल ने थॉमस को नियुक्त करने से पहले सभी संभावित विकल्पों पर विचार किया था।
इससे पहले हाईकोर्ट ने केटीयू के प्रभारी कुलपति की नियुक्ति पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा, कुलपति के नाम की सिफारिश करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। कोर्ट ने राज्यपाल के इस तर्क को भी स्वीकार किया कि यूजीसी के नियमों के अनुसार अस्थायी नियुक्तियां की जा सकती हैं।
कोर्ट ने कहा, इस तरह के मुकदमे छात्रों और शिक्षाविदों के मनोबल को प्रभावित करते हैं। इसने कहा, हम अपने विश्वविद्यालयों की छवि को धूमिल करने की अनुमति नहीं दे सकते।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।
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केरल हाईकोर्ट ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के उस आदेश को बरकरार रखा है, जो उन्होंने केरल तकनीकी विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति के रूप में सीजा थोमस की नियुक्ति को लेकर दिया था। केरल हाईकोर्ट ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के उस आदेश को बरकरार रखा है, जो उन्होंने केरल तकनीकी विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति के रूप में सीजा थॉमस की नियुक्ति को लेकर दिया था। सीजा थॉमस तकनीकी शिक्षा निदेशालय के वरिष्ठ संयुक्त निदेशक हैं। हाईकोर्ट ने मंगलवार को सीजा थॉमस को एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति के रूप में जारी रखने की अनुमति दी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जल्द से जल्द एक चयन समति का गठन करने का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने जल्द ही नए कुलपति को नियुक्त करने का निर्देश दिया। केरल सरकार के द्वारा सीजा थॉमस की नियुक्ति पर रोक लगाने की मां की गई थी। न्यायमूर्ति देवन रामचंद्र ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि कुलपति के रूप में राज्यपाल यूजीसी के नियमों के आधार पर नियुक्तियां कर सकते हैं। हाईकोर्ट ने कहा, विश्वविद्यालय, कुलाधिपति और यूजीसी से आग्रह है कि वे अपने-अपने नाम दें और एक चयन समिति का गठन करें। यदि संभव हो तो तीन से चार महीने के भीतर कुलपति की नियुक्ति करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्यपाल ने थॉमस को नियुक्त करने से पहले सभी संभावित विकल्पों पर विचार किया था। इससे पहले हाईकोर्ट ने केटीयू के प्रभारी कुलपति की नियुक्ति पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा, कुलपति के नाम की सिफारिश करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। कोर्ट ने राज्यपाल के इस तर्क को भी स्वीकार किया कि यूजीसी के नियमों के अनुसार अस्थायी नियुक्तियां की जा सकती हैं। कोर्ट ने कहा, इस तरह के मुकदमे छात्रों और शिक्षाविदों के मनोबल को प्रभावित करते हैं। इसने कहा, हम अपने विश्वविद्यालयों की छवि को धूमिल करने की अनुमति नहीं दे सकते। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
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टीवी के हॉट कपल प्रिंस नरुला और युविका चौधरी कुछ ही घंटों में आज एक दूसरे के साथ शादी के पवित्र बंधन में बंध जाएंगे। युविका और प्रिंस की शादी की तमाम रस्में जैसे की मेंहदी और रिंग सेरेमनी बीते दिनों ही पूरी हुई है। इस दौरान की कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल भी हुई है। अपनी मेंहदी और रिंग सेरेमनी के दौरान दोनों ने परिवार और दोस्तों की मौदूजगी में जमकर मस्ती की और कल रात हुए संगीत सेरेमनी में तो इन कपल ने महफिल ही लूट ली।
बता दें कि बीती रात ही मुबंई में युविका और प्रिंस की संगीत सेरेमनी का आयोजन किया गया था और इस सेरेमनी के दौरान टीवी जगत की तमाम हस्तियों ने चार चांद लगाए। जहां युविका और प्रिंस ने अपने दोस्तों और परिवार के साथ बॉलवुड के कई गानों पर धमाकेदार परफॉर्मेंस दी वहीं मौका लगते है ही दोनों ढोल नगाड़े बजाते हुए भी नजर आए।
इनके संगीत सेरेमनी की कई तस्वीरें और वीडियोज हमारे हाथ लग चुके है, जिसे देखने के बाद आप इस कपल की खुशी का अंदाजा आसानी से लगा सकते है। साथ ही इस जोड़े को देख कर साफ कहा जा सकता है कि, यह शादी तो केवल एक औपचारिक रस्म है, प्रिंस और युविका तो पहले ही एक दूसरे के हो चुके हैं।
बता दें कि प्रिंस और युविका की दोस्ती बिग बॉस 9 के घर में हुई थी, जिसके बाद इन दोनों का प्यार परवान चढा और अब ये जोड़ा शादी कर रहा है। फिलहाल तो हमें इंतजार है युविका और प्रिंस की शादी की पहली तस्वीर की। वैसे आपको इनके संगीत सेरेमनी की तस्वीरें और वीडियो कैसे लगे? कमेंटबॉक्स में जरुर बताइएगा।
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टीवी के हॉट कपल प्रिंस नरुला और युविका चौधरी कुछ ही घंटों में आज एक दूसरे के साथ शादी के पवित्र बंधन में बंध जाएंगे। युविका और प्रिंस की शादी की तमाम रस्में जैसे की मेंहदी और रिंग सेरेमनी बीते दिनों ही पूरी हुई है। इस दौरान की कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल भी हुई है। अपनी मेंहदी और रिंग सेरेमनी के दौरान दोनों ने परिवार और दोस्तों की मौदूजगी में जमकर मस्ती की और कल रात हुए संगीत सेरेमनी में तो इन कपल ने महफिल ही लूट ली। बता दें कि बीती रात ही मुबंई में युविका और प्रिंस की संगीत सेरेमनी का आयोजन किया गया था और इस सेरेमनी के दौरान टीवी जगत की तमाम हस्तियों ने चार चांद लगाए। जहां युविका और प्रिंस ने अपने दोस्तों और परिवार के साथ बॉलवुड के कई गानों पर धमाकेदार परफॉर्मेंस दी वहीं मौका लगते है ही दोनों ढोल नगाड़े बजाते हुए भी नजर आए। इनके संगीत सेरेमनी की कई तस्वीरें और वीडियोज हमारे हाथ लग चुके है, जिसे देखने के बाद आप इस कपल की खुशी का अंदाजा आसानी से लगा सकते है। साथ ही इस जोड़े को देख कर साफ कहा जा सकता है कि, यह शादी तो केवल एक औपचारिक रस्म है, प्रिंस और युविका तो पहले ही एक दूसरे के हो चुके हैं। बता दें कि प्रिंस और युविका की दोस्ती बिग बॉस नौ के घर में हुई थी, जिसके बाद इन दोनों का प्यार परवान चढा और अब ये जोड़ा शादी कर रहा है। फिलहाल तो हमें इंतजार है युविका और प्रिंस की शादी की पहली तस्वीर की। वैसे आपको इनके संगीत सेरेमनी की तस्वीरें और वीडियो कैसे लगे? कमेंटबॉक्स में जरुर बताइएगा। बॉलीवुड, हॉलीवुड, साउथ, भोजपुरी और टीवी जगत की ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें...बॉलीवुड लाइफ हिन्दी के फेसबुक पेज, ट्विटर पेज, ताजा गॉसिप के लिए हमें Facebook Messenger पर फॉलो करें।
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तत्र तयोर्द्वयो कर्मचेतना कर्मफलचेतनयोर्मध्ये पूर्वम् तावन्निश्चयप्रतिक्रमण - निश्चयप्रत्याख्यान - निश्चयालोचना स्वरूप यत्पूर्वम् व्याख्यात तत्र स्थित्वा शुद्धज्ञानचेतनावलेन कर्मचेतनासन्यासभावना नाटयति । कर्मचेतनात्यागभावना कर्मवधविनाशार्थम् करोतीत्यर्थ ।
तद्यथा-यदहमकार्पम् यदहमचीकर यदह कुर्वन्तमप्यन्य प्राणिन समन्वज्ञासिषम् । केन ? मनसा वाचा कायेन नन्मिथ्या मे दुष्कृतमिति षड्सयोगेनैकभग । यदहमकार्पम् यदहमचीकर यदहकुर्वन्तमप्यन्य प्राणिन समन्वज्ञासिपम् । केन ? मनसा वाचा तन्मिथ्या मे दुष्कृतमिति पचसयोगेन, एकैकापनयने भगत्रय भवति । सयोगेनेत्याद्यक्षसचारेणैकोनपचाशद्भङ्गा भवतीति टीकाभिप्राय । अथवा त एव सुखोपायेन कथ्यते । कथ ? इति चेत्, कृत कारितमनुमतमिति प्रत्येक भगत्रय भवति । कृतकारितद्वय कृतानुमतद्वय कारितानुमतद्वयमिति द्विसयोगेन च भगत्रय जातम् । कृतकारितानुमतत्रयमिति त्रिसयोगेनैको भग इति सप्तभगी। तथैव च मनसा वाचा कायेनेति प्रत्येक भगत्रय भवति । मनोवचनद्वय मन कायद्वय वचनकायद्वयमिति द्विसयोगेन भगत्रय जातम् । मनोवचनकायत्रयमिति च त्रिसयोगेनैको भग इयमपि सप्तभगी । कृत मनसा सह, कृत वाचा सह, कृत कायेन सह, कृत मनोवचनद्वयेन सह, कृत मन कायद्वयेन सह, कृत वचनकायद्वयेन सह, कृत मनोवचनकायत्रयेण सहेति कृते निरुद्धे विवक्षिते सप्तभगी जाता यथा। तथा कारितेऽपि, तथा अनुमतेऽपि, तथा कृतकारितद्वयेऽपि, तथा कृतानुमतद्वयेऽपि, तथा कारितानुमत द्वयेऽपि, तथा कृतकारितानुमतत्रये चेति प्रत्येकमनेन क्रमेण सप्तभगी योजनीया । एव - एकोनपचाशद्भगा भवतीति
प्रतिक्रमणकल्प समाप्त ।
उदय में आये हुए कर्मफल को अनुभव करनेवाला याने शुद्धात्मानुभव न करनेवाला जो जीव मनोज्ञ - अमनोज्ञ इद्रियों के विपय को निमित्तमात्र करके सुखी अथवा दुखी होता है, वह जीव फिर भी उन आठ प्रकार के कर्मों को बाधता है।
शका वे कर्म कैसे हैं ?
समाधान - वे कर्म दुख का बीज कारण हैं।
इस प्रकार तीसरी गाथा से कर्मफल चेतना का व्याख्यान किया है । शका कर्मफल चेतना का क्या अर्थ है ?
समाधान - ग्वस्थभाव से रहित (शुद्धात्मानुभव से रहित ) अज्ञानभाव से अज्ञानचेतना से यथा संभव व्यक्ताव्यक्त स्वभाव से इच्छापूर्वक किये जानेवाले इष्टानिष्ट विकल्परूप से हर्षविषादमय सुख-दुख का अनुभव करनेवाली जो अज्ञानचेतना है, वह बध का कारणवाली कर्मफलचेतना कहलाती है।
यह कर्मचेतना और कर्मफलचेतना दोनों भी वध का कारण होने से त्याज्य है। यहाँ कर्मचेतना और कर्मफलचेतना इन दोनों में पहले तो निश्चयप्रतिक्रमण, निश्चयप्रत्याख्यान, निश्चय आलोचना इनका जो स्वरूप पूर्व में था उसमें रहकर शुद्धज्ञानचेतना के बल से कर्मचेतना के सन्यास की भावना को नचाते है करने 1 अर्थात् कर्म के वध का नाश करने के लिये कर्मचेतना के त्याग की भावना को करने में
इदानीं प्रत्याख्यानकल्प कथ्यते तथाति- यदर करिष्यामि, यदल कार्ययष्यागि, यदह कर्वन्तमयन्य प्राणिन समनुज्ञास्यामि । केन ? मनसा वाचा कायेन तन्मिथ्या मे हुन्छूनमिति पूर्ववत पटसको भग । यथा यदह करिष्यामि यदह कारिष्यामि यदह कुर्वन्तमप्यन्य प्राणिन समानुपारिग के ? मनसा वाचा चेति तन्मिथ्या मे दुष्कृतमिति पूर्ववदेर्ककापनयनेन पचसयोगेन भगत्रय भवति । एवं पूर्वोतक्रमेण गोपचाशदूभगा ज्ञातव्या इति
प्रत्याख्यानकल्प समाप्त ।
जैसे मन से, वचन से, और काय से मैंने जो पहले (मृतफाल में) किया, मैंने पहले किसी से करवाया, करते हुये को अच्छा माना, वह सब मेरा दुष्कृत्य मिथ्या हो जाय, इस प्रकार यह छहों के सयोगरूप पहला भग हुआ । मन से और वचन से जो मैंने किया, किसी से करवाया, और किसी करते हुए को अच्छा माना, वह सब मेरा दुष्कृत्य मिथ्या होओ, इस प्रकार यह पाँच सयोग का एक भग हुआ।
एक-एक को कम करने से तीन भग पाँच सयोगी होंगे। इस प्रकार गयोग करने पर अक्ष संचार के द्वारा ४९ भग हो जाते हैं, यही टीकाकार के कहने का अभिप्राय है। (जैसा कि श्री अमृतचद्राचार्यजी ने आत्मख्याति टीका में बताया है ।) अथवा वे भग ही सरल रूप से बनाये जा है। कैसे ? तो-कृत, काग्नि और अनुमोदन इस प्रकार प्रत्येक तीन-तीन भग हुए, फिर कुन कारित ये दोनों, कुन अनुमोदन ये दोनों, कारित अनुमोदन ये दोनों, इस प्रकार दो-दो के सयोग से तीन भग हो गये और कृत कारित अनुमोदन इन तीनों के सयोग से एक भग हुआ । इस प्रकार सब मिलकर एक सप्तभगी हुई ।
उसी प्रकार मन से, वचन से, काय से प्रत्येक को लेकर तीन भग हुए। फिर मन और वचन ये दो, मन और काय ये दो, वचन व काय ये दो, इस प्रकार दो के सयोग से तीन भग हुए। मन, वचन और काय इन तीनों के सयोग से एक भग हुआ । इस प्रकार यह दूसरी सप्तभगी हुई।
मन के साथ करना, वचन के साथ करना, और काय के साथ करना, मन और वचन दोनों के साथ करना, मन और काय दोनों के साथ करना, वचन और काय दोनों के साथ करना, और मन वचन काय इन तीनों के साथ करना इस प्रकार कृत के निरुद्ध विवक्षित में तीसरी सप्तभगी हुई ।
जिस प्रकार कृत की सप्तभगी वतलाई उसी प्रकार कारित पर भी, अनुमोदना पर भी, तथा कृत कारित इन दोनों पर भी, कृत अनुमोदना इन दोनों पर भी, कारित अनुमोदना इन दोनों पर भी, तथा कृत कारित और अनुमोदना इन तीनों पर भी, ऐसे प्रत्येक की इस क्रम से सप्तभगी लगा लेना चाहिये, इस प्रकार ये सव ७ सप्तभगी मिलकर ४९ भग होते हैं । यह प्रतिक्रमण कल्प समाप्त हुआ।
अव, प्रत्याख्यान कल्प का वर्णन करते हैं - मन से, वचन से, काय से जो मैं ( भविष्य काल में) करूँगा, जो मैं कराऊगा, करते हुए किसी अन्य को अच्छा मानूँगा, मेरे ये दुष्कृत्य मिथ्या हो जायें। यह छहों के सयोगरूप पहले के अनुसार एक पहला भग हुआ । इसी प्रकार मन से और वचन से मैं करूंगा, मैं कराऊँगा ओर करते हुए किसी अन्य को मैं अच्छा मानूँगा, मेरे ये दुष्कृत्य मिथ्या होवें । यह पचसयोगी भग भी पहले कहे अनुसार एक-एक को कम कर देने पर तीन प्रकार का होता है। इसी प्रकार कहे अनुसार इसको कर लेने से ४९ भग हो जाते हैं ऐसा जानना चाहिए। यह प्रत्याख्यान कल्प समाप्त हुआ।
इदानीमालोचनाकल्प कथ्यते । तद्यथा- यदह करोमि यदह कारयामि यदह कुर्वन्तमप्यन्य प्राणिन समनुजानामि । केन ? मनसा वाचा कायेनेति तन्मिथ्या मे दुष्कृतमिति पूर्ववत् षट्सयोगेनैकभग । तथा यदहं करोमि यदह कारयामि यदह कुर्वन्तमप्यन्य प्राणिन समनुजानामि । केन ? मनसा वाचेति तन्मिथ्या मे दुष्कृतमितिएकैकापनयनेन पचसयोगेन भगत्रय भवति । एव पूर्वोक्तप्रकारेण एकोनपचाद्भगा ज्ञातव्या । इत्यालोचनाकल्प समाप्त । कल्प पर्वपरिच्छेदोऽधिकारोऽध्याय प्रकरणमित्याद्येकार्था ज्ञातव्या । एव निश्चयप्रतिक्रमण - निश्चय प्रत्याख्यान - निश्चयालोचनाप्रकारेण शुद्धज्ञानचेतनाभावनारूपेण गाथाद्वयव्याख्यानेन कर्मचेतनासन्यासभावना समाप्ता ।
इदानीं शुद्धज्ञानचेतनाभावनाबलेन कर्मफलचेतनासन्यासभावना नाटयति करोतीत्यर्थ । तद्यथा- नाह मतिज्ञानावरणीय कर्मफल भुजे । तर्हि कि करोमि ? शुद्धचैतन्य स्वभावमात्मानमेव सचेतये । सम्यगनुभवे इत्यर्थ । नाह श्रुतज्ञानावरणीय कर्मफल भुजे । तर्हि कि करोमि ? शुद्धचैतन्य स्वाभावमात्मानमेव सचेतये । नाहमवधिज्ञानावरणीय कर्मफल भुजे । तर्हि कि करोमि ? शुद्ध चैतन्य स्वभावमात्मानमेव सचेतये । नाह मन पर्ययज्ञानावरणीयकर्मफल भुजे । तर्हि कि करोमि ? शुद्धचैतन्यस्वाभावमात्मानमेव सचेतये। नाह केवलज्ञानावरणीयकर्मफल भुजे । तर्हि कि करोमि ? शुद्धचैतन्यस्वभावमात्मानमेव सचेतये । इति पचप्रकारज्ञानावरणीयरूपेण कर्मफलचेतनासन्यासभावना व्याख्याता ।
अब, आलोचना कल्प का वर्णन करते हैं - वर्तमान काल में मन से, वचन से, काय से जो मैं करता हॅ, कराता हूँ, करते हुए किसी अन्य को अच्छा मानता हूँ, मेरे ये दुष्कृत्य मिथ्या हो जायें। यह पहले के समान छहों के सयोगरूप पहला भग हुआ । इसी प्रकार मन से ओर वचन से जो मैं करता हूँ, मैं कराता हूँ, और करते हुए किसी अन्य जीव को मैं अच्छा मानता हूँ, मेरे ये दुष्कृत्य मिथ्या हो जायें। इस प्रकार पूर्वोक्त क्रम से एक-एक को कम करने पर पाँच सयोगी तीन भग होते हैं। इस प्रकार पहले कहे अनुसार ४९ भग होते हैं, ऐसा जानना चाहिये। यह आलोचना कल्प समाप्त हुआ । कला, पर्व, अधिकार, अध्याय, परिच्छेद, प्रकरण इत्यादि सब एकार्थ नाम हैं, ऐसा जानना चाहिये ।
इस प्रकार निश्चयप्रतिक्रमण निश्चयप्रत्याख्यान निश्चय आलोचना वाली शुद्धज्ञानचेतना भावना से दो गाथाओं में कर्मचेतना के सन्यास की भावना समाप्त हुई ।
अव, शुद्धज्ञानचेतना की भावना के बल से कर्मफलचेतना के सन्यास (-त्याग ) की भावना को नचाते हैं - करते हैं, जैसे कि - मतिज्ञानावरण कर्म के फल को मैं नहीं भोगता हूँ। तो फिर क्या करता हूँ ? मैं तो स्वशुद्ध चैतन्यस्वभावमय आत्मा का ही सम्यक् अनुभव करता हूँ। श्रुतज्ञानावरण कर्म के फल को मैं नहीं भोगता हूँ। तो फिर क्या करता हूँ ? मैं तो स्वशुद्ध चैतन्यस्वभावमय आत्मा का ही सम्यक् अनुभव करता हूँ। अवधिज्ञानावरण कर्म के फल को मैं नहीं भोगता हूँ। तो फिर क्या करता हूँ ? में तो स्वशुद्ध चैतन्य ग्वभावमय जात्मा का ही सम्यक् अनुभव करता हूँ । मन पर्ययज्ञानावरण कर्म के फल को मैं नहीं भोगता हूँ। तो फिर क्या मैं तो स्वशुद्धचेतन्यस्वभावमय आत्मा का ही सम्यक् अनुभव करता हूँ । केवलज्ञानावरण कर्म के फल को में नहीं भोगता हूँ। तो फिर क्या करता हूँ ? मैं तो स्व शुन्द्रचैतन्य स्वभावमय आत्मा का ही सम्यक् अनुभव करता हूँ । इस प्रकार पाँच प्रकार के ज्ञानावरण कर्म के रूप से कर्मफल सन्यास की भावना की जाती है, इस का कथन हुआ ।
नाह चक्षुर्दर्शनावरणीय फल भुजे । तर्हि कि करोमि ? शुद्धचेतन्य स्वभावमात्मानमेव सचेतये । एव टीकाकथितक्रमेण३७८
पण णव दु अट्ठवीसा चउ तिय णउदीय दुष्णि पचेव चावण्णहीण वियसय पयडिविणासेण होति ते सिद्धा }}
इमा गाथामाश्रित्य अष्टचत्वारिंशदधिकशतप्रमितोत्तर प्रकृतीना कर्मफलसन्यासमावना नाटयित्वा, कर्तव्येत्यर्थ । किच, जगत्त्रयकालत्रयसवधि मनोवचनकाय-कृतकाग्तिानुमत- यातिप्रजानाभ-दृष्टश्रुतानृमृतभोगातभारूप निदानवधादि समस्तपद्रव्यालवनोत्पन्न शुभाशुभसकल्पविकल्पगणनेन शून्येन चिदानन्दकग्वभावशुद्धात्मतत्त्वसम्यकूश्रन्द्रानज्ञानानुचरणरूपाभेटरत्नत्रयात्मक निर्विकल्पसमाधिसजातवीतगगमा जपरमानदस्पसुरसग्साग्वादपरमसमरसीभावानुभवसालवनेन भरितावस्थेन केवलज्ञानाद्यनतचतुष्टयव्यक्तिरुपम्य साभादुपारेयभृतन्य कार्यसमाग्योत्पादकेन निश्चयकारणसमयसापेण शुद्धज्ञानचेतनाभावनावष्टभेन कृत्वा कर्मचेतनासन्यामभावना कर्मफलचेननासन्यासमारना च मोक्षार्थिना पुरुषेण कर्तव्येति भावार्थ । एव गाथाद्वय कर्मचेतनामन्यामभावनामुख्यचेन, गार्थका कर्मकलचेतनासन्यासभावनामुख्यत्वेनेति दशमस्थले गाथात्रय गतम् ।।४०९, ४१०, ४११ ।।
चक्षुदर्शनावरण कर्म के फल को में नहीं भोगता हूँ। तो फिर क्या करता हूँ ? मै तो स्वशुद्ध चैतन्य स्वभावमय आत्मा का ही सम्यक् अनुभव करता हूँ। इस प्रकार आत्मख्याति टीका में बताये हुए क्रम के अनुसार "पण णव दु इत्यादि," अर्थात् ५ ज्ञानावरण कर्म की, ९ दर्शनावरण की वेदनीय की, २८ मोहनीय की, ४ आयु की, ९३ नाम की, २ गोत्र की, और५ अंतराय की इस प्रकार सब ५२ कम २०० अर्थात् १४८ कर्म प्रकृतियाँ हुई। इन सब प्रकृतियों का नाशकर सिद्ध होते है। इस गाथा का आशय लेकर १४८ सख्या वाली उत्तर कर्म की प्रकृतियों के फल के त्याग की भावना करने योग्य है।
इस का विशेष स्पष्टीकरण यह है कि, तीनलोक और तीनकाल से सवध रखनेवाले जो मन, वचन, काय तथा कृत, कारित और अनुमोदना तथा ख्याति, पूजा, लाभ तथा देखे, सुने और अनुभव किये हुए भोगों की अकाक्षारूप निदानवधादि सब परद्रव्य के आलवन से उत्पन्न होनेवाले शुभ-अशुभ सकल्प - विक्ल्परहित अर्थात् के चिदानद-एक-स्वभाव-शुन्द्रात्मतत्त्व के सम्यक् श्रद्धानज्ञानानुचरण अभेदरत्नत्रयात्मक निर्विकल्प समाधि से उत्पन्न होनेवाले वीतराग-सहज-परमानदमय सुखरस के आस्वादवाले परमसमरसीभाव के अनुभव के अवलवन से भरितअवस्थावाले, केवलज्ञानादि अनंतचतुष्टय के व्यक्तिरूप साक्षात् उपादेयभृत कार्यसमयसार को उत्पन्न करने वाले, निश्चयकारणसमयसार वाले शुद्धज्ञानचेतना की भावना का अवलवन करके कर्मचेतना की सन्यास भावना और कर्मफलचेतना की सन्यास भावना मुमुक्षु पुरुष द्वारा की जानी चाहिये, यह भावार्थ है।
इस प्रकार दो गाथाओं में कर्मचेतना के सन्यास की भावना की मुख्यता से कथन है और एक गाथा में कर्मफलचेतना के सन्यास की भावना की मुख्यता से कथन है, इस तरह दशमस्थल में तीन गाथायें पूर्ण हुई।।
अथेदानीं व्यावहारिक जीवादिनवपदार्थेभ्यो भिन्नमपि
गद्यपद्यादिविचित्र -
रचनारचितशास्त्रै शब्दादिपचेंद्रियविषयप्रभृतिपरद्रव्यैश्च शून्यमपि रागादि विकल्पोपाधिरहित सदानन्दैकलक्षण सुखामृतरसास्वादेन भरितावस्थ परमात्मतत्त्व प्रकाशयति
सत्य णाण ण हवदि जम्हा सत्य ण याणदे किचि । (३९०) तम्हा अण्ण णाण अण्णं सत्य जिणा विति ।। ४१२ ॥
सदो णाण ण हवदि जम्हा सद्दो ण याणदे किचि । (३९१ ) तम्हा अण्ण णाण अण्ण सद्द जिणा विति ।। ४१३ ।। रूव णाण ण हवदि जम्हा रूव ण याणदे किचि । (३९२) तम्हा अण्ण णाण अण्ण रूव जिणा विति ।। ४१४ ।। वण्णो णाण ण हवदि जह्या वण्णो ण याणदे किचि । ( ३९३ ) तह्मा अण्ण णाण अण्ण वण्ण जिणा विति ।। ४१५ ।।
अव यहाँ जो व्यावहारिक जीवादि नवपदार्थों से भिन्न है तो भी टकोत्कीर्ण ज्ञायक एक पारमार्थिक पदार्थ नामवाला है, तथा गद्यपद्यादि विचित्र रचना रचित शास्त्रों से और शब्दादि पचेंद्रिय विषय प्रभृति परद्रव्यों से शून्य है तो भी रागादिविकल्पों की उपाधि से रहित सदानद एक लक्षण सुखामृत रसास्वाद से भरित अवस्थावाला परमात्म तत्त्व है; उस परमात्म तत्त्व को प्रगट करते हैं
गाथार्थ - ( सत्य ) शास्त्र (णाण ) ज्ञान (ण हवदि ) नहीं है ( जम्हा) क्योंकि ( सत्य किचि ण याणदे) शास्त्र कुछ नहीं जानता है याने शास्त्र जड है ( तम्हा) इसलिये ( णाण अण्ण) ज्ञान अन्य है ( सत्य अण्ण) शास्त्र अन्य है, ऐसा (जिणा विति) जिनेन्द्र भगवान कहते हैं।
(सदो) शब्द (णाण ण हवदि ) ज्ञान नहीं है ( जम्हा) क्योंकि (सदो किचि ण याणदे) शब्द कुछ नहीं जानता है याने जड है (तम्हा) इसलिये ( णाण अण्ण) ज्ञान अन्य है, (सद अण्ण) शब्द अन्य है ऐसा (जिणा विति) जिनेन्द्र भगवान कहते हैं ।
(रूव) रूप (णाण ण हवदि) ज्ञान नहीं है (जम्हा) क्योंकि (रूव किचि ण याणदे) रूप कुछ नहीं जानता है (तभ्हा) इसलिये (णाण अण्ण) ज्ञान अन्य है (रूव अण्ण) रूप अन्य है ऐसा (जिणा विति) जिनेन्द्र भगवान कहते है ।
(वण्णो णाण ण हवदि) वर्ण ज्ञान नहीं है ( जम्हा) क्योंकि (वण्णो किचि ण याणदे) वर्ण कुछ जानता नही है (तम्हा) इसलिये (णाण अण्ण) ज्ञान अन्य है (वण्ण अण्ण) वर्ण अन्य है ऐसा (जिणा विति) जिनेन्द्र देव कहते हैं ।
गधो णाण ण हवदि जम्हा गधो ण याणदे किचि । (३९४) तम्हा अण्ण णाण अण्ण गध जिणा विति ।। ४१६ ।।
ण रसो दु हवदि णाण जम्हा दु रसो ण याणदे किचि । (३९५) तम्हा अण्ण णाण रस य अण्ण जिणा विति ।। ४१७।। फासो ण हवदि णाण जम्हा फासो ण याणदे किचि । ( ३९६ ) तम्हा अण्ण णाण अण्ण फास जिणा विति ।। ४१८ ।। कम्म णाण ण हवदि जम्हा कम्म ण याणदे किचि । (३९७) तम्हा अण्ण णाण अण्ण कम्म जिणा विति ।। ४१९ ।। धम्मो णाण ण हवदि जम्हा धम्मो ण याणदे किचि । (३९८) तम्हा अण्ण णाण अण्ण धम्म जिणा विति ।। ४२० ।। णाणमधम्मो ण हवदि जम्हाऽधम्मो ण याणदे किचि । ( ३९९ ) तम्हा अण्ण णाण अण्णमधम्म जिणा विति ।। ४२१ ।।
(गधो) गध (णाण ण इवदि) ज्ञान नहीं है ( जम्हा) क्योंकि (गधो किचि ण याण ) गध कुछ नहीं जानता है ( तम्हा) इसलिये (णाण अण्ण) ज्ञान अन्य है (गध अण्ण) गघ अन्य है, ऐसा (जिणा विंति) जिनेन्द्रदेव कहते हैं । (रसो दु णाण ण हवदि) रस तो ज्ञान नहीं है ( तम्हा) क्योंकि (रसो दु किचि ण याणदे) रस तो कुछ नहीं जानता है (तम्हा) इसलिये ( णाण अण्ण य ) ज्ञान अन्य है ओर ( रस अण्ण) रस अन्य है, ऐसा (जिणा विति) जिनेन्द्रदेव कहते हैं 1
(फासो) स्पर्श (णाण ण हवदि ) ज्ञान नहीं है ( जम्हा) क्योंकि (फासो किचि ण याणदे) स्पर्श कुछ नहीं जानता है (तम्हा) इसलिये ( णाण अण्ण) ज्ञान अन्य है (फास अण्ण) स्पर्श अन्य है ऐसा (जिणा विति) जिनेन्द्रदेव कहते हैं ।
( कम्म) कम ( णाण ण हवदि ) ज्ञान नहीं है ( जम्हा ) क्योंकि (कम्म किचि ण याणदे) कर्म कुछ नहीं जानता है (तम्हा) इसलिये ( णाण अण्ण) ज्ञान अन्य है (कम्म अण्ण) कर्म अन्य है ऐसा (जिणा विति)
जिनेन्द्रदेव कहते हैं ।
( धम्मो ) धर्मास्तिकाय ( णाण ण हवदि ) ज्ञान नहीं है ( जम्हा) क्योंकि (धम्मो किचि ण याणदे) धर्मद्रव्य कुछ नहीं जानता है ( तम्हा) इसलिये ( णाण अण्ण) ज्ञान अन्य है (धम्म अण्ण) धर्मद्रव्य अन्य है ऐसा (जिणा विति) जिनेन्द्रदेव कहते हैं ।
(अधम्मो) अधर्मद्रव्य (णाण ण हवदि ) ज्ञान नहीं है ( जम्हा) क्योंकि (अधम्मो किचि ण याणदे) अधर्मद्रव्य कुछ नहीं जानता है ( तम्हा ) इसलिये ( णाण अण्ण ) ज्ञान अन्य है (अधम्म अण्ण) अधर्मद्रव्य अन्य है ऐसा (जिणा विति) जिनेन्द्रदेव कहते हैं ।
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तत्र तयोर्द्वयो कर्मचेतना कर्मफलचेतनयोर्मध्ये पूर्वम् तावन्निश्चयप्रतिक्रमण - निश्चयप्रत्याख्यान - निश्चयालोचना स्वरूप यत्पूर्वम् व्याख्यात तत्र स्थित्वा शुद्धज्ञानचेतनावलेन कर्मचेतनासन्यासभावना नाटयति । कर्मचेतनात्यागभावना कर्मवधविनाशार्थम् करोतीत्यर्थ । तद्यथा-यदहमकार्पम् यदहमचीकर यदह कुर्वन्तमप्यन्य प्राणिन समन्वज्ञासिषम् । केन ? मनसा वाचा कायेन नन्मिथ्या मे दुष्कृतमिति षड्सयोगेनैकभग । यदहमकार्पम् यदहमचीकर यदहकुर्वन्तमप्यन्य प्राणिन समन्वज्ञासिपम् । केन ? मनसा वाचा तन्मिथ्या मे दुष्कृतमिति पचसयोगेन, एकैकापनयने भगत्रय भवति । सयोगेनेत्याद्यक्षसचारेणैकोनपचाशद्भङ्गा भवतीति टीकाभिप्राय । अथवा त एव सुखोपायेन कथ्यते । कथ ? इति चेत्, कृत कारितमनुमतमिति प्रत्येक भगत्रय भवति । कृतकारितद्वय कृतानुमतद्वय कारितानुमतद्वयमिति द्विसयोगेन च भगत्रय जातम् । कृतकारितानुमतत्रयमिति त्रिसयोगेनैको भग इति सप्तभगी। तथैव च मनसा वाचा कायेनेति प्रत्येक भगत्रय भवति । मनोवचनद्वय मन कायद्वय वचनकायद्वयमिति द्विसयोगेन भगत्रय जातम् । मनोवचनकायत्रयमिति च त्रिसयोगेनैको भग इयमपि सप्तभगी । कृत मनसा सह, कृत वाचा सह, कृत कायेन सह, कृत मनोवचनद्वयेन सह, कृत मन कायद्वयेन सह, कृत वचनकायद्वयेन सह, कृत मनोवचनकायत्रयेण सहेति कृते निरुद्धे विवक्षिते सप्तभगी जाता यथा। तथा कारितेऽपि, तथा अनुमतेऽपि, तथा कृतकारितद्वयेऽपि, तथा कृतानुमतद्वयेऽपि, तथा कारितानुमत द्वयेऽपि, तथा कृतकारितानुमतत्रये चेति प्रत्येकमनेन क्रमेण सप्तभगी योजनीया । एव - एकोनपचाशद्भगा भवतीति प्रतिक्रमणकल्प समाप्त । उदय में आये हुए कर्मफल को अनुभव करनेवाला याने शुद्धात्मानुभव न करनेवाला जो जीव मनोज्ञ - अमनोज्ञ इद्रियों के विपय को निमित्तमात्र करके सुखी अथवा दुखी होता है, वह जीव फिर भी उन आठ प्रकार के कर्मों को बाधता है। शका वे कर्म कैसे हैं ? समाधान - वे कर्म दुख का बीज कारण हैं। इस प्रकार तीसरी गाथा से कर्मफल चेतना का व्याख्यान किया है । शका कर्मफल चेतना का क्या अर्थ है ? समाधान - ग्वस्थभाव से रहित अज्ञानभाव से अज्ञानचेतना से यथा संभव व्यक्ताव्यक्त स्वभाव से इच्छापूर्वक किये जानेवाले इष्टानिष्ट विकल्परूप से हर्षविषादमय सुख-दुख का अनुभव करनेवाली जो अज्ञानचेतना है, वह बध का कारणवाली कर्मफलचेतना कहलाती है। यह कर्मचेतना और कर्मफलचेतना दोनों भी वध का कारण होने से त्याज्य है। यहाँ कर्मचेतना और कर्मफलचेतना इन दोनों में पहले तो निश्चयप्रतिक्रमण, निश्चयप्रत्याख्यान, निश्चय आलोचना इनका जो स्वरूप पूर्व में था उसमें रहकर शुद्धज्ञानचेतना के बल से कर्मचेतना के सन्यास की भावना को नचाते है करने एक अर्थात् कर्म के वध का नाश करने के लिये कर्मचेतना के त्याग की भावना को करने में इदानीं प्रत्याख्यानकल्प कथ्यते तथाति- यदर करिष्यामि, यदल कार्ययष्यागि, यदह कर्वन्तमयन्य प्राणिन समनुज्ञास्यामि । केन ? मनसा वाचा कायेन तन्मिथ्या मे हुन्छूनमिति पूर्ववत पटसको भग । यथा यदह करिष्यामि यदह कारिष्यामि यदह कुर्वन्तमप्यन्य प्राणिन समानुपारिग के ? मनसा वाचा चेति तन्मिथ्या मे दुष्कृतमिति पूर्ववदेर्ककापनयनेन पचसयोगेन भगत्रय भवति । एवं पूर्वोतक्रमेण गोपचाशदूभगा ज्ञातव्या इति प्रत्याख्यानकल्प समाप्त । जैसे मन से, वचन से, और काय से मैंने जो पहले किया, मैंने पहले किसी से करवाया, करते हुये को अच्छा माना, वह सब मेरा दुष्कृत्य मिथ्या हो जाय, इस प्रकार यह छहों के सयोगरूप पहला भग हुआ । मन से और वचन से जो मैंने किया, किसी से करवाया, और किसी करते हुए को अच्छा माना, वह सब मेरा दुष्कृत्य मिथ्या होओ, इस प्रकार यह पाँच सयोग का एक भग हुआ। एक-एक को कम करने से तीन भग पाँच सयोगी होंगे। इस प्रकार गयोग करने पर अक्ष संचार के द्वारा उनचास भग हो जाते हैं, यही टीकाकार के कहने का अभिप्राय है। अथवा वे भग ही सरल रूप से बनाये जा है। कैसे ? तो-कृत, काग्नि और अनुमोदन इस प्रकार प्रत्येक तीन-तीन भग हुए, फिर कुन कारित ये दोनों, कुन अनुमोदन ये दोनों, कारित अनुमोदन ये दोनों, इस प्रकार दो-दो के सयोग से तीन भग हो गये और कृत कारित अनुमोदन इन तीनों के सयोग से एक भग हुआ । इस प्रकार सब मिलकर एक सप्तभगी हुई । उसी प्रकार मन से, वचन से, काय से प्रत्येक को लेकर तीन भग हुए। फिर मन और वचन ये दो, मन और काय ये दो, वचन व काय ये दो, इस प्रकार दो के सयोग से तीन भग हुए। मन, वचन और काय इन तीनों के सयोग से एक भग हुआ । इस प्रकार यह दूसरी सप्तभगी हुई। मन के साथ करना, वचन के साथ करना, और काय के साथ करना, मन और वचन दोनों के साथ करना, मन और काय दोनों के साथ करना, वचन और काय दोनों के साथ करना, और मन वचन काय इन तीनों के साथ करना इस प्रकार कृत के निरुद्ध विवक्षित में तीसरी सप्तभगी हुई । जिस प्रकार कृत की सप्तभगी वतलाई उसी प्रकार कारित पर भी, अनुमोदना पर भी, तथा कृत कारित इन दोनों पर भी, कृत अनुमोदना इन दोनों पर भी, कारित अनुमोदना इन दोनों पर भी, तथा कृत कारित और अनुमोदना इन तीनों पर भी, ऐसे प्रत्येक की इस क्रम से सप्तभगी लगा लेना चाहिये, इस प्रकार ये सव सात सप्तभगी मिलकर उनचास भग होते हैं । यह प्रतिक्रमण कल्प समाप्त हुआ। अव, प्रत्याख्यान कल्प का वर्णन करते हैं - मन से, वचन से, काय से जो मैं करूँगा, जो मैं कराऊगा, करते हुए किसी अन्य को अच्छा मानूँगा, मेरे ये दुष्कृत्य मिथ्या हो जायें। यह छहों के सयोगरूप पहले के अनुसार एक पहला भग हुआ । इसी प्रकार मन से और वचन से मैं करूंगा, मैं कराऊँगा ओर करते हुए किसी अन्य को मैं अच्छा मानूँगा, मेरे ये दुष्कृत्य मिथ्या होवें । यह पचसयोगी भग भी पहले कहे अनुसार एक-एक को कम कर देने पर तीन प्रकार का होता है। इसी प्रकार कहे अनुसार इसको कर लेने से उनचास भग हो जाते हैं ऐसा जानना चाहिए। यह प्रत्याख्यान कल्प समाप्त हुआ। इदानीमालोचनाकल्प कथ्यते । तद्यथा- यदह करोमि यदह कारयामि यदह कुर्वन्तमप्यन्य प्राणिन समनुजानामि । केन ? मनसा वाचा कायेनेति तन्मिथ्या मे दुष्कृतमिति पूर्ववत् षट्सयोगेनैकभग । तथा यदहं करोमि यदह कारयामि यदह कुर्वन्तमप्यन्य प्राणिन समनुजानामि । केन ? मनसा वाचेति तन्मिथ्या मे दुष्कृतमितिएकैकापनयनेन पचसयोगेन भगत्रय भवति । एव पूर्वोक्तप्रकारेण एकोनपचाद्भगा ज्ञातव्या । इत्यालोचनाकल्प समाप्त । कल्प पर्वपरिच्छेदोऽधिकारोऽध्याय प्रकरणमित्याद्येकार्था ज्ञातव्या । एव निश्चयप्रतिक्रमण - निश्चय प्रत्याख्यान - निश्चयालोचनाप्रकारेण शुद्धज्ञानचेतनाभावनारूपेण गाथाद्वयव्याख्यानेन कर्मचेतनासन्यासभावना समाप्ता । इदानीं शुद्धज्ञानचेतनाभावनाबलेन कर्मफलचेतनासन्यासभावना नाटयति करोतीत्यर्थ । तद्यथा- नाह मतिज्ञानावरणीय कर्मफल भुजे । तर्हि कि करोमि ? शुद्धचैतन्य स्वभावमात्मानमेव सचेतये । सम्यगनुभवे इत्यर्थ । नाह श्रुतज्ञानावरणीय कर्मफल भुजे । तर्हि कि करोमि ? शुद्धचैतन्य स्वाभावमात्मानमेव सचेतये । नाहमवधिज्ञानावरणीय कर्मफल भुजे । तर्हि कि करोमि ? शुद्ध चैतन्य स्वभावमात्मानमेव सचेतये । नाह मन पर्ययज्ञानावरणीयकर्मफल भुजे । तर्हि कि करोमि ? शुद्धचैतन्यस्वाभावमात्मानमेव सचेतये। नाह केवलज्ञानावरणीयकर्मफल भुजे । तर्हि कि करोमि ? शुद्धचैतन्यस्वभावमात्मानमेव सचेतये । इति पचप्रकारज्ञानावरणीयरूपेण कर्मफलचेतनासन्यासभावना व्याख्याता । अब, आलोचना कल्प का वर्णन करते हैं - वर्तमान काल में मन से, वचन से, काय से जो मैं करता हॅ, कराता हूँ, करते हुए किसी अन्य को अच्छा मानता हूँ, मेरे ये दुष्कृत्य मिथ्या हो जायें। यह पहले के समान छहों के सयोगरूप पहला भग हुआ । इसी प्रकार मन से ओर वचन से जो मैं करता हूँ, मैं कराता हूँ, और करते हुए किसी अन्य जीव को मैं अच्छा मानता हूँ, मेरे ये दुष्कृत्य मिथ्या हो जायें। इस प्रकार पूर्वोक्त क्रम से एक-एक को कम करने पर पाँच सयोगी तीन भग होते हैं। इस प्रकार पहले कहे अनुसार उनचास भग होते हैं, ऐसा जानना चाहिये। यह आलोचना कल्प समाप्त हुआ । कला, पर्व, अधिकार, अध्याय, परिच्छेद, प्रकरण इत्यादि सब एकार्थ नाम हैं, ऐसा जानना चाहिये । इस प्रकार निश्चयप्रतिक्रमण निश्चयप्रत्याख्यान निश्चय आलोचना वाली शुद्धज्ञानचेतना भावना से दो गाथाओं में कर्मचेतना के सन्यास की भावना समाप्त हुई । अव, शुद्धज्ञानचेतना की भावना के बल से कर्मफलचेतना के सन्यास की भावना को नचाते हैं - करते हैं, जैसे कि - मतिज्ञानावरण कर्म के फल को मैं नहीं भोगता हूँ। तो फिर क्या करता हूँ ? मैं तो स्वशुद्ध चैतन्यस्वभावमय आत्मा का ही सम्यक् अनुभव करता हूँ। श्रुतज्ञानावरण कर्म के फल को मैं नहीं भोगता हूँ। तो फिर क्या करता हूँ ? मैं तो स्वशुद्ध चैतन्यस्वभावमय आत्मा का ही सम्यक् अनुभव करता हूँ। अवधिज्ञानावरण कर्म के फल को मैं नहीं भोगता हूँ। तो फिर क्या करता हूँ ? में तो स्वशुद्ध चैतन्य ग्वभावमय जात्मा का ही सम्यक् अनुभव करता हूँ । मन पर्ययज्ञानावरण कर्म के फल को मैं नहीं भोगता हूँ। तो फिर क्या मैं तो स्वशुद्धचेतन्यस्वभावमय आत्मा का ही सम्यक् अनुभव करता हूँ । केवलज्ञानावरण कर्म के फल को में नहीं भोगता हूँ। तो फिर क्या करता हूँ ? मैं तो स्व शुन्द्रचैतन्य स्वभावमय आत्मा का ही सम्यक् अनुभव करता हूँ । इस प्रकार पाँच प्रकार के ज्ञानावरण कर्म के रूप से कर्मफल सन्यास की भावना की जाती है, इस का कथन हुआ । नाह चक्षुर्दर्शनावरणीय फल भुजे । तर्हि कि करोमि ? शुद्धचेतन्य स्वभावमात्मानमेव सचेतये । एव टीकाकथितक्रमेणतीन सौ अठहत्तर पण णव दु अट्ठवीसा चउ तिय णउदीय दुष्णि पचेव चावण्णहीण वियसय पयडिविणासेण होति ते सिद्धा }} इमा गाथामाश्रित्य अष्टचत्वारिंशदधिकशतप्रमितोत्तर प्रकृतीना कर्मफलसन्यासमावना नाटयित्वा, कर्तव्येत्यर्थ । किच, जगत्त्रयकालत्रयसवधि मनोवचनकाय-कृतकाग्तिानुमत- यातिप्रजानाभ-दृष्टश्रुतानृमृतभोगातभारूप निदानवधादि समस्तपद्रव्यालवनोत्पन्न शुभाशुभसकल्पविकल्पगणनेन शून्येन चिदानन्दकग्वभावशुद्धात्मतत्त्वसम्यकूश्रन्द्रानज्ञानानुचरणरूपाभेटरत्नत्रयात्मक निर्विकल्पसमाधिसजातवीतगगमा जपरमानदस्पसुरसग्साग्वादपरमसमरसीभावानुभवसालवनेन भरितावस्थेन केवलज्ञानाद्यनतचतुष्टयव्यक्तिरुपम्य साभादुपारेयभृतन्य कार्यसमाग्योत्पादकेन निश्चयकारणसमयसापेण शुद्धज्ञानचेतनाभावनावष्टभेन कृत्वा कर्मचेतनासन्यामभावना कर्मफलचेननासन्यासमारना च मोक्षार्थिना पुरुषेण कर्तव्येति भावार्थ । एव गाथाद्वय कर्मचेतनामन्यामभावनामुख्यचेन, गार्थका कर्मकलचेतनासन्यासभावनामुख्यत्वेनेति दशमस्थले गाथात्रय गतम् ।।चार सौ नौ, चार सौ दस, चार सौ ग्यारह ।। चक्षुदर्शनावरण कर्म के फल को में नहीं भोगता हूँ। तो फिर क्या करता हूँ ? मै तो स्वशुद्ध चैतन्य स्वभावमय आत्मा का ही सम्यक् अनुभव करता हूँ। इस प्रकार आत्मख्याति टीका में बताये हुए क्रम के अनुसार "पण णव दु इत्यादि," अर्थात् पाँच ज्ञानावरण कर्म की, नौ दर्शनावरण की वेदनीय की, अट्ठाईस मोहनीय की, चार आयु की, तिरानवे नाम की, दो गोत्र की, औरपाँच अंतराय की इस प्रकार सब बावन कम दो सौ अर्थात् एक सौ अड़तालीस कर्म प्रकृतियाँ हुई। इन सब प्रकृतियों का नाशकर सिद्ध होते है। इस गाथा का आशय लेकर एक सौ अड़तालीस सख्या वाली उत्तर कर्म की प्रकृतियों के फल के त्याग की भावना करने योग्य है। इस का विशेष स्पष्टीकरण यह है कि, तीनलोक और तीनकाल से सवध रखनेवाले जो मन, वचन, काय तथा कृत, कारित और अनुमोदना तथा ख्याति, पूजा, लाभ तथा देखे, सुने और अनुभव किये हुए भोगों की अकाक्षारूप निदानवधादि सब परद्रव्य के आलवन से उत्पन्न होनेवाले शुभ-अशुभ सकल्प - विक्ल्परहित अर्थात् के चिदानद-एक-स्वभाव-शुन्द्रात्मतत्त्व के सम्यक् श्रद्धानज्ञानानुचरण अभेदरत्नत्रयात्मक निर्विकल्प समाधि से उत्पन्न होनेवाले वीतराग-सहज-परमानदमय सुखरस के आस्वादवाले परमसमरसीभाव के अनुभव के अवलवन से भरितअवस्थावाले, केवलज्ञानादि अनंतचतुष्टय के व्यक्तिरूप साक्षात् उपादेयभृत कार्यसमयसार को उत्पन्न करने वाले, निश्चयकारणसमयसार वाले शुद्धज्ञानचेतना की भावना का अवलवन करके कर्मचेतना की सन्यास भावना और कर्मफलचेतना की सन्यास भावना मुमुक्षु पुरुष द्वारा की जानी चाहिये, यह भावार्थ है। इस प्रकार दो गाथाओं में कर्मचेतना के सन्यास की भावना की मुख्यता से कथन है और एक गाथा में कर्मफलचेतना के सन्यास की भावना की मुख्यता से कथन है, इस तरह दशमस्थल में तीन गाथायें पूर्ण हुई।। अथेदानीं व्यावहारिक जीवादिनवपदार्थेभ्यो भिन्नमपि गद्यपद्यादिविचित्र - रचनारचितशास्त्रै शब्दादिपचेंद्रियविषयप्रभृतिपरद्रव्यैश्च शून्यमपि रागादि विकल्पोपाधिरहित सदानन्दैकलक्षण सुखामृतरसास्वादेन भरितावस्थ परमात्मतत्त्व प्रकाशयति सत्य णाण ण हवदि जम्हा सत्य ण याणदे किचि । तम्हा अण्ण णाण अण्णं सत्य जिणा विति ।। चार सौ बारह ॥ सदो णाण ण हवदि जम्हा सद्दो ण याणदे किचि । तम्हा अण्ण णाण अण्ण सद्द जिणा विति ।। चार सौ तेरह ।। रूव णाण ण हवदि जम्हा रूव ण याणदे किचि । तम्हा अण्ण णाण अण्ण रूव जिणा विति ।। चार सौ चौदह ।। वण्णो णाण ण हवदि जह्या वण्णो ण याणदे किचि । तह्मा अण्ण णाण अण्ण वण्ण जिणा विति ।। चार सौ पंद्रह ।। अव यहाँ जो व्यावहारिक जीवादि नवपदार्थों से भिन्न है तो भी टकोत्कीर्ण ज्ञायक एक पारमार्थिक पदार्थ नामवाला है, तथा गद्यपद्यादि विचित्र रचना रचित शास्त्रों से और शब्दादि पचेंद्रिय विषय प्रभृति परद्रव्यों से शून्य है तो भी रागादिविकल्पों की उपाधि से रहित सदानद एक लक्षण सुखामृत रसास्वाद से भरित अवस्थावाला परमात्म तत्त्व है; उस परमात्म तत्त्व को प्रगट करते हैं गाथार्थ - शास्त्र ज्ञान नहीं है क्योंकि शास्त्र कुछ नहीं जानता है याने शास्त्र जड है इसलिये ज्ञान अन्य है शास्त्र अन्य है, ऐसा जिनेन्द्र भगवान कहते हैं। शब्द ज्ञान नहीं है क्योंकि शब्द कुछ नहीं जानता है याने जड है इसलिये ज्ञान अन्य है, शब्द अन्य है ऐसा जिनेन्द्र भगवान कहते हैं । रूप ज्ञान नहीं है क्योंकि रूप कुछ नहीं जानता है इसलिये ज्ञान अन्य है रूप अन्य है ऐसा जिनेन्द्र भगवान कहते है । वर्ण ज्ञान नहीं है क्योंकि वर्ण कुछ जानता नही है इसलिये ज्ञान अन्य है वर्ण अन्य है ऐसा जिनेन्द्र देव कहते हैं । गधो णाण ण हवदि जम्हा गधो ण याणदे किचि । तम्हा अण्ण णाण अण्ण गध जिणा विति ।। चार सौ सोलह ।। ण रसो दु हवदि णाण जम्हा दु रसो ण याणदे किचि । तम्हा अण्ण णाण रस य अण्ण जिणा विति ।। चार सौ सत्रह।। फासो ण हवदि णाण जम्हा फासो ण याणदे किचि । तम्हा अण्ण णाण अण्ण फास जिणा विति ।। चार सौ अट्ठारह ।। कम्म णाण ण हवदि जम्हा कम्म ण याणदे किचि । तम्हा अण्ण णाण अण्ण कम्म जिणा विति ।। चार सौ उन्नीस ।। धम्मो णाण ण हवदि जम्हा धम्मो ण याणदे किचि । तम्हा अण्ण णाण अण्ण धम्म जिणा विति ।। चार सौ बीस ।। णाणमधम्मो ण हवदि जम्हाऽधम्मो ण याणदे किचि । तम्हा अण्ण णाण अण्णमधम्म जिणा विति ।। चार सौ इक्कीस ।। गध ज्ञान नहीं है क्योंकि गध कुछ नहीं जानता है इसलिये ज्ञान अन्य है गघ अन्य है, ऐसा जिनेन्द्रदेव कहते हैं । रस तो ज्ञान नहीं है क्योंकि रस तो कुछ नहीं जानता है इसलिये ज्ञान अन्य है ओर रस अन्य है, ऐसा जिनेन्द्रदेव कहते हैं एक स्पर्श ज्ञान नहीं है क्योंकि स्पर्श कुछ नहीं जानता है इसलिये ज्ञान अन्य है स्पर्श अन्य है ऐसा जिनेन्द्रदेव कहते हैं । कम ज्ञान नहीं है क्योंकि कर्म कुछ नहीं जानता है इसलिये ज्ञान अन्य है कर्म अन्य है ऐसा जिनेन्द्रदेव कहते हैं । धर्मास्तिकाय ज्ञान नहीं है क्योंकि धर्मद्रव्य कुछ नहीं जानता है इसलिये ज्ञान अन्य है धर्मद्रव्य अन्य है ऐसा जिनेन्द्रदेव कहते हैं । अधर्मद्रव्य ज्ञान नहीं है क्योंकि अधर्मद्रव्य कुछ नहीं जानता है इसलिये ज्ञान अन्य है अधर्मद्रव्य अन्य है ऐसा जिनेन्द्रदेव कहते हैं ।
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ब्रिटेन में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी ने पूरे यूरोप की चिंता बढ़ा दी है। इस बार खास चिंता का पहलू यह है कि ब्रिटेन में आई नई लहर के दौरान अस्पताल में भर्ती हो रहे मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। ब्रिटेन में संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी का कारण वैक्सीन के असर का घटना बताया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ये बातें साबित हो गईं, तो फिर यह पूरे यूरोप और दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा।
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ब्रिटेन में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी ने पूरे यूरोप की चिंता बढ़ा दी है। इस बार खास चिंता का पहलू यह है कि ब्रिटेन में आई नई लहर के दौरान अस्पताल में भर्ती हो रहे मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। ब्रिटेन में संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी का कारण वैक्सीन के असर का घटना बताया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ये बातें साबित हो गईं, तो फिर यह पूरे यूरोप और दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा। Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
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१७८ । कुमारवालचरितम्
(पाहुडाइँ) उपहारों को; (उन्नामिज भुमयाए) कुछ (आँखों की) भौंओं को उन्नत करके; (इशारा करके) ( चण्डारे) भण्डार में; (पेण्डविरो) रखने वाला (राजा कुमारपाल सभा मंडप में बैठा ) ।
वोक्कन्त-महामन्चो निवो अवुक्कन्त-पणइ-मण्डलिओ । विष्णत्ति-दिन्न-कण्णो अहिट्टिओ कणय-मण्डविअं ।।२६।।
शब्दार्थ - (वोक्कन्त महामच्चो) (जिसकी सेवा में बड़े-बड़े मंत्रीगण (कुछ) निवेदन कर रहे हैं; (ऐसा राजा) (अवुक्कन्त पण इ-मंडलिओ) जिसकी सेवा में प्रेमी मांडलिक राजागण (कुछ) निवेदन कर रहे हैं ( ऐसा राजा); (विष्णत्ति-दिन- कण्णो) ( मंत्री और राजाओं की) विज्ञप्ति के प्रति निवेदन के प्रति दिया है कान-जिसने (ऐसा ) (निवो) राजा कुमारपाल ; ( कणय-मंडविअं) स्वर्णनिर्मित मंडप पर; (अहिट्ठिओ) बैठा ।
टिप्पण- दाविअ । दंसिअ दक्खविअ ।
दरिसिए । "हशेर्दाव-दंसदक्खवा; (३२)
उग्गिअ । उग्घाडिअ । "उद्धटेरुग्गः " ( ३३ ) ॥
ससिह । "स्पृहः सिहः" (३४)
संभाविओ । आसङि घओ । "संभावेरासङ्घः (३५) ॥ उल्लालिअ । उत्थङिघअ । गुलुगुञ्छ्अि उप्पेलिअ । उन्नामिअ । उन्न मेरुत्थङ घोल्लाल-गुलुगुञ्छोप्पेलाः (३६) ।।
पेण्डविरो। पठविआई। पट्ठाविआई । "प्रस्थापेः पट्ठव-पेण्डवौ" (३७) वोकन्त । अनुक्कत । विष्णत्ति । " विज्ञपेर्वोक्काबुक्की" (३८) पणमिर-पणइ-पणामिअ-दिट्ठी सो तत्थ अल्लिविअ-हरिसो । अणचच्चुप्पिअ - हिअओ अप्पिअ निव खोहमासीणो ।।२७।। शब्दार्थ - (पणमिर- पणइ) प्रणाम करने वाले प्रेमियों के प्रति; (पणा. मिअ-दिट्ठी) प्रदान की है दृष्टि को - जिसने ऐसा कुमारपाल ; ( नमस्कार करने वालों को राजा ने देखा - यह तात्पर्य है); (तत्थ) वहाँ पर; अल्लिविअ हरिसो) (अपना दर्शन देने से) प्रदान किया है हर्ष (सभी सभाजनों के लिए जिसने ऐसा; कुमारपाल); (अणचचबुप्पिअ-हिअओ) (जिसने गम्भीर होने के कारण से ) अपने हृदय की बात को ( बाहिर) प्रकट नहीं की है; ऐसा सो वह कुमारपाल; (अप्पिअ-निव- खोहम्) जिसने राजाओं के चित्त में क्षोभ उत्पन्न किया है; ऐसा ( अर्थात् राजाओं के चित्त में यह दुविधा थी कि राजा कुमारपाल हम पर प्रसन्न है अथवा नहीं ? हमें
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एक सौ अठहत्तर । कुमारवालचरितम् उपहारों को; कुछ भौंओं को उन्नत करके; भण्डार में; रखने वाला । वोक्कन्त-महामन्चो निवो अवुक्कन्त-पणइ-मण्डलिओ । विष्णत्ति-दिन्न-कण्णो अहिट्टिओ कणय-मण्डविअं ।।छब्बीस।। शब्दार्थ - निवेदन कर रहे हैं; जिसकी सेवा में प्रेमी मांडलिक राजागण निवेदन कर रहे हैं ; विज्ञप्ति के प्रति निवेदन के प्रति दिया है कान-जिसने राजा कुमारपाल ; स्वर्णनिर्मित मंडप पर; बैठा । टिप्पण- दाविअ । दंसिअ दक्खविअ । दरिसिए । "हशेर्दाव-दंसदक्खवा; उग्गिअ । उग्घाडिअ । "उद्धटेरुग्गः " ॥ ससिह । "स्पृहः सिहः" संभाविओ । आसङि घओ । "संभावेरासङ्घः ॥ उल्लालिअ । उत्थङिघअ । गुलुगुञ्छ्अि उप्पेलिअ । उन्नामिअ । उन्न मेरुत्थङ घोल्लाल-गुलुगुञ्छोप्पेलाः ।। पेण्डविरो। पठविआई। पट्ठाविआई । "प्रस्थापेः पट्ठव-पेण्डवौ" वोकन्त । अनुक्कत । विष्णत्ति । " विज्ञपेर्वोक्काबुक्की" पणमिर-पणइ-पणामिअ-दिट्ठी सो तत्थ अल्लिविअ-हरिसो । अणचच्चुप्पिअ - हिअओ अप्पिअ निव खोहमासीणो ।।सत्ताईस।। शब्दार्थ - प्रणाम करने वाले प्रेमियों के प्रति; प्रदान की है दृष्टि को - जिसने ऐसा कुमारपाल ; ; वहाँ पर; अल्लिविअ हरिसो) प्रदान किया है हर्ष ; अपने हृदय की बात को प्रकट नहीं की है; ऐसा सो वह कुमारपाल; जिसने राजाओं के चित्त में क्षोभ उत्पन्न किया है; ऐसा ( अर्थात् राजाओं के चित्त में यह दुविधा थी कि राजा कुमारपाल हम पर प्रसन्न है अथवा नहीं ? हमें
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जुम्मे की नमाज पढ़कर बाहर आने पर युवक से मारपीट करने का मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में राजीनामा करने की धमकी देना और नहीं करने पर तलवार से गर्दन काटने की धमकी देने का मामला दर्ज कर लिया।
मामले की जांच कर रहे एएसआई लक्ष्मण सिंह ने बताया कि वार्ड 13 निवासी तारीफ खान ने रिपोर्ट दी कि शुक्रवार दिन में जुम्मे की नमाज पढ़कर आ रहा था। तभी वार्ड का इस्पाक और आथुना मोहल्ला निवासी मोनू गांधी एक राय होकर आए और मेरे साथ मारपीट करने लगे। तभी इस्पाक अपने घर जाकर तलवार लेकर आया। मेरे गले पर तलवार रखकर कहने लगा कि मेरे खिलाफ दर्ज मामले में राजीनामा कर ले। वरना इस तलवार से तेरी गर्दन काट दूंगा और तेरे परिवार को जान से मार दूंगा। शोर शराबा सुनकर मौहल्ले के लोग आ गए। तभी दोनों जने भाग गए और जाते समय इस्पाक व मोनू गांधी कहने लगा कि अगले जुम्मे तक एक लाख रुपए लाकर दे वरना तुझे व तेरे परिवार को जान से मार देंगे। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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जुम्मे की नमाज पढ़कर बाहर आने पर युवक से मारपीट करने का मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में राजीनामा करने की धमकी देना और नहीं करने पर तलवार से गर्दन काटने की धमकी देने का मामला दर्ज कर लिया। मामले की जांच कर रहे एएसआई लक्ष्मण सिंह ने बताया कि वार्ड तेरह निवासी तारीफ खान ने रिपोर्ट दी कि शुक्रवार दिन में जुम्मे की नमाज पढ़कर आ रहा था। तभी वार्ड का इस्पाक और आथुना मोहल्ला निवासी मोनू गांधी एक राय होकर आए और मेरे साथ मारपीट करने लगे। तभी इस्पाक अपने घर जाकर तलवार लेकर आया। मेरे गले पर तलवार रखकर कहने लगा कि मेरे खिलाफ दर्ज मामले में राजीनामा कर ले। वरना इस तलवार से तेरी गर्दन काट दूंगा और तेरे परिवार को जान से मार दूंगा। शोर शराबा सुनकर मौहल्ले के लोग आ गए। तभी दोनों जने भाग गए और जाते समय इस्पाक व मोनू गांधी कहने लगा कि अगले जुम्मे तक एक लाख रुपए लाकर दे वरना तुझे व तेरे परिवार को जान से मार देंगे। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक बार फिर देश को 'मन की बात' कार्यक्रम के माध्यम से संबोधित कर रहे हैं। हर महीने के आखिरी रविवार को डीडी चैनलों और आकाशवाणी पर प्रसारित होने वाले मन की बात कार्यक्रम का ये 91वां एपिसोड है। इसी बीच पीएम मोदी ने कहा कि, इस बार 'मन की बात' हमारे लिए बहुत खास कार्यक्रम है। इसका कारण ये है कि, इस बार का स्वतंत्रता दिवस पर भारत अपनी आज़ादी के 75 वर्ष पूरे करने जा रहा है। हम सभी बहुत अद्भुत और ऐतिहासिक पल के गवाह बनने जा रहे हैं। हम सब को ईश्वर ने ये बहुत बड़ा सौभाग्य दिया है।
वहीं, पीएम मोदी ने शहीद उद्यम सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि, आज के ही दिन हम सभी देशवासी, शहीद उद्यम सिंह जी की शहादत को नमन करते हैं। मैं ऐसे अन्य सभी महान क्रांतिकारियों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
पीएम मोदी ने मन की बात में आगे कहा कि मुझे ये देखकर काफी खुशी मिलती है कि आज़ादी का अमृत महोत्सव एक जन आंदोलन का रूप ले रहा है। देश के सभी इलाकों में समाज के हर वर्ग के लोग इससे जुड़े हुए अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। इसी दिशा में जुलाई महीने में एक बहुत ही रोचक प्रयास किया गया है, जिसका नाम है आज़ादी की रेलगाड़ी और रेलवे स्टेशन। इसका टारगेट है कि लोग आज़ादी की लड़ाई में भारतीय रेल की भूमिका को जानें। पीएम मोदी ने कहा कि, झारखंड के गोमो जंक्शन को अब आधिकारिक रूप से नेताजी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन गोमो के नाम से जाना जाता है। देशभर के 24 राज्यों में फैले ऐसे 75 रेलवे स्टेशनों की पहचान की गई है। इन 75 स्टेशनों को बहुत ही खूबसूरती से सजाया जा रहा है।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के अमृत महोत्सव को मध्यनजर रखते हुए कहा कि, 13 अगस्त से 15 अगस्त तक देश में एक विशेष अभियान 'हर घर तिरंगा' का आयोजन किया जा रहा है। आप सभी देश वासियो से आग्रह करता हूं कि इस अभियान का हिस्सा बनकर 13 से 15 अगस्त तक आप अपने घर पर तिरंगा जरूर फहराएं।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक बार फिर देश को 'मन की बात' कार्यक्रम के माध्यम से संबोधित कर रहे हैं। हर महीने के आखिरी रविवार को डीडी चैनलों और आकाशवाणी पर प्रसारित होने वाले मन की बात कार्यक्रम का ये इक्यानवेवां एपिसोड है। इसी बीच पीएम मोदी ने कहा कि, इस बार 'मन की बात' हमारे लिए बहुत खास कार्यक्रम है। इसका कारण ये है कि, इस बार का स्वतंत्रता दिवस पर भारत अपनी आज़ादी के पचहत्तर वर्ष पूरे करने जा रहा है। हम सभी बहुत अद्भुत और ऐतिहासिक पल के गवाह बनने जा रहे हैं। हम सब को ईश्वर ने ये बहुत बड़ा सौभाग्य दिया है। वहीं, पीएम मोदी ने शहीद उद्यम सिंह को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि, आज के ही दिन हम सभी देशवासी, शहीद उद्यम सिंह जी की शहादत को नमन करते हैं। मैं ऐसे अन्य सभी महान क्रांतिकारियों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। पीएम मोदी ने मन की बात में आगे कहा कि मुझे ये देखकर काफी खुशी मिलती है कि आज़ादी का अमृत महोत्सव एक जन आंदोलन का रूप ले रहा है। देश के सभी इलाकों में समाज के हर वर्ग के लोग इससे जुड़े हुए अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। इसी दिशा में जुलाई महीने में एक बहुत ही रोचक प्रयास किया गया है, जिसका नाम है आज़ादी की रेलगाड़ी और रेलवे स्टेशन। इसका टारगेट है कि लोग आज़ादी की लड़ाई में भारतीय रेल की भूमिका को जानें। पीएम मोदी ने कहा कि, झारखंड के गोमो जंक्शन को अब आधिकारिक रूप से नेताजी सुभाष चंद्र बोस जंक्शन गोमो के नाम से जाना जाता है। देशभर के चौबीस राज्यों में फैले ऐसे पचहत्तर रेलवे स्टेशनों की पहचान की गई है। इन पचहत्तर स्टेशनों को बहुत ही खूबसूरती से सजाया जा रहा है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के अमृत महोत्सव को मध्यनजर रखते हुए कहा कि, तेरह अगस्त से पंद्रह अगस्त तक देश में एक विशेष अभियान 'हर घर तिरंगा' का आयोजन किया जा रहा है। आप सभी देश वासियो से आग्रह करता हूं कि इस अभियान का हिस्सा बनकर तेरह से पंद्रह अगस्त तक आप अपने घर पर तिरंगा जरूर फहराएं।
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बिहार की लंबी सीमा नेपाल से सटी हुई है। खासकर सीमांचल के किशनगंज और पूर्वी चंपारण का ज्यादा हिस्सा नेपाल से सटा हुआ है। नेपाल में आम चुनाव है। जिसे लेकर बिहार-नेपाल की सीमा 72 घंटे तक सील रहेगी। भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई है। बैठक में शराबबंदी, क्राइम कंट्रोल और तस्करी रोकने को लेकर रणनीति बनी।
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बिहार की लंबी सीमा नेपाल से सटी हुई है। खासकर सीमांचल के किशनगंज और पूर्वी चंपारण का ज्यादा हिस्सा नेपाल से सटा हुआ है। नेपाल में आम चुनाव है। जिसे लेकर बिहार-नेपाल की सीमा बहत्तर घंटाटे तक सील रहेगी। भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई है। बैठक में शराबबंदी, क्राइम कंट्रोल और तस्करी रोकने को लेकर रणनीति बनी।
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यहां कुम्भलगढ़ को पर्वत श्रेणी के नीची हो जाने से दर्रा बन गया है। दोनों सेनाओं के बीच की दूरी अब सिर्फ बारह मील रह गयी थी ।
मोलेला गांव पहुंचने और ठहरने के बाद भी मानसिंह को यह पता नहीं लग पाया था कि प्रताप की सेना इतने पास है। इस कारण यहां एक घटना होते-होते रह गयी जो मेवाड़ को शायद जीत दिला देती, परन्तु प्रताप की कीर्ति कम कर सकती थी ।
खमनोर से दक्षिण पहाड़ी प्रदेश से जांच-पड़ताल करने के लिए, शिकार का बहाना करके, मानसिंह मेवाड़ के सैन्य शिविर के बहुत पास जा पहुंचा। उस समय उसके साथ एक हजार से अधिक घुड़सवार नहीं होगे । गुप्तचरों ने आकर प्रताप को उसकी खबर दी । "उस वक्त कितने ही सरदारो ने अर्ज की कि कुंवर मानसिंह पर हमला करें, लेकिन झाला वीदा ने कहा कि इस तरह दगा करना बहादुरो का काम नहीं है। महाराणा ने भी वीदा के कहने को पसन्द किया। दूसरे रोज कुंवर मानसिंह को महाराणा प्रतापसिंह के ( इतने नजदीक ) आने की खबर मिली।"" इस तरह मान सिंह, और प्रताप का, सम्मान बच गया। हां, झाला सरदार वीदा को अपने परामर्श का मूल्य अपने जीवन से देना पड़ा । परन्तु अपने इस परामर्श और बाद में युद्ध मे अत्यन्त असाधारण त्याग और वीरता का प्रदर्शन करके उसने मेवाड़ के इतिहास में अपना स्थान सुरक्षित कर लिया, मानवीय गुण कहां तक एक व्यक्ति को उठा सकते है, इसका वह उदाहरण बन गया है । हल्दीघाटी का युद्ध
मानसिंह और प्रतापसिंह के बीच हुआ यह युद्ध 'हल्दीघाटी युद्ध' के नाम से प्रसिद्ध है, परन्तु यह युद्ध हल्दीघाटी के भीतर नहीं हुआ था, और उस समय के भुगल इतिहासकारो ने इसका उल्लेख इस नाम से किया भी नहीं है । मेवाड़ के इतिहास से संबंधित जो प्राचीन ग्रन्थ उपलब्ध हैं उनमें भी इस युद्ध को 'हल्दीघाटी का युद्ध' नहीं कहा गया है ।
राजस्थानी का एक दोहा बहुत प्रचलित है, जिसकी प्रथम पंक्ति है गोगूंदा रै घाट पर, मचियो घाण मथाण
अर्थात् जिस स्थान पर प्रतापसिंह और मानसिंह की सेनाओं के बीच 'भयंकर युद्ध' हुआ था वह 'गोगूंदा के घाट' के नाम से प्रसिद्ध था ।
उदयपुर से 40 मील उत्तर की ओर बने राजसमुद्र सरोवर के तट पर श्री रणछोड़ भट्ट की लिखी 'राजप्रशस्ति' 25 काले पत्थरों पर खुदी लगी हुई है। इसमें लिखा है कि 'खमणोर गांव में प्रताप और मानसिंह के बीच भीषण युद्ध हुआ। इसी कवि के लिखे 'श्रमरकाव्य' में कहा गया है, 'खमणोर के बीच इतना रक्तपात हुआ कि वनास नदी का पानी लाल हो गया ।
1 'वीर विनोद', दूसरा भाग, पृष्ठ 151
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यहां कुम्भलगढ़ को पर्वत श्रेणी के नीची हो जाने से दर्रा बन गया है। दोनों सेनाओं के बीच की दूरी अब सिर्फ बारह मील रह गयी थी । मोलेला गांव पहुंचने और ठहरने के बाद भी मानसिंह को यह पता नहीं लग पाया था कि प्रताप की सेना इतने पास है। इस कारण यहां एक घटना होते-होते रह गयी जो मेवाड़ को शायद जीत दिला देती, परन्तु प्रताप की कीर्ति कम कर सकती थी । खमनोर से दक्षिण पहाड़ी प्रदेश से जांच-पड़ताल करने के लिए, शिकार का बहाना करके, मानसिंह मेवाड़ के सैन्य शिविर के बहुत पास जा पहुंचा। उस समय उसके साथ एक हजार से अधिक घुड़सवार नहीं होगे । गुप्तचरों ने आकर प्रताप को उसकी खबर दी । "उस वक्त कितने ही सरदारो ने अर्ज की कि कुंवर मानसिंह पर हमला करें, लेकिन झाला वीदा ने कहा कि इस तरह दगा करना बहादुरो का काम नहीं है। महाराणा ने भी वीदा के कहने को पसन्द किया। दूसरे रोज कुंवर मानसिंह को महाराणा प्रतापसिंह के आने की खबर मिली।"" इस तरह मान सिंह, और प्रताप का, सम्मान बच गया। हां, झाला सरदार वीदा को अपने परामर्श का मूल्य अपने जीवन से देना पड़ा । परन्तु अपने इस परामर्श और बाद में युद्ध मे अत्यन्त असाधारण त्याग और वीरता का प्रदर्शन करके उसने मेवाड़ के इतिहास में अपना स्थान सुरक्षित कर लिया, मानवीय गुण कहां तक एक व्यक्ति को उठा सकते है, इसका वह उदाहरण बन गया है । हल्दीघाटी का युद्ध मानसिंह और प्रतापसिंह के बीच हुआ यह युद्ध 'हल्दीघाटी युद्ध' के नाम से प्रसिद्ध है, परन्तु यह युद्ध हल्दीघाटी के भीतर नहीं हुआ था, और उस समय के भुगल इतिहासकारो ने इसका उल्लेख इस नाम से किया भी नहीं है । मेवाड़ के इतिहास से संबंधित जो प्राचीन ग्रन्थ उपलब्ध हैं उनमें भी इस युद्ध को 'हल्दीघाटी का युद्ध' नहीं कहा गया है । राजस्थानी का एक दोहा बहुत प्रचलित है, जिसकी प्रथम पंक्ति है गोगूंदा रै घाट पर, मचियो घाण मथाण अर्थात् जिस स्थान पर प्रतापसिंह और मानसिंह की सेनाओं के बीच 'भयंकर युद्ध' हुआ था वह 'गोगूंदा के घाट' के नाम से प्रसिद्ध था । उदयपुर से चालीस मील उत्तर की ओर बने राजसमुद्र सरोवर के तट पर श्री रणछोड़ भट्ट की लिखी 'राजप्रशस्ति' पच्चीस काले पत्थरों पर खुदी लगी हुई है। इसमें लिखा है कि 'खमणोर गांव में प्रताप और मानसिंह के बीच भीषण युद्ध हुआ। इसी कवि के लिखे 'श्रमरकाव्य' में कहा गया है, 'खमणोर के बीच इतना रक्तपात हुआ कि वनास नदी का पानी लाल हो गया । एक 'वीर विनोद', दूसरा भाग, पृष्ठ एक सौ इक्यावन
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गढ़वा : उपायुक्त गढ़वा राजेश कुमार पाठक के कार्यालय प्रकोष्ठ में मंगलवार को जनता दरबार का आयोजन किया। इसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को उपायुक्त के समक्ष रखते हुए समाधान की गुहार लगाई।
सर्वप्रथम जनता दरबार में ग्राम-ओबरा, पोस्ट- अन्नराज, थाना- नवाडीह निवासी कैमुद्दीन अंसारी ने उपायुक्त को अपनी समस्या से अवगत कराते हुए कहा कि मैं आग से जलकर पूरी तरह से जख्मी हो गया हूं। मैं गरीब परिवार से हूं तथा अपने इलाज के लिए मेरे पास पैसे नहीं है। उन्होंने उपायुक्त से इलाज हेतु सरकारी कोष से सहायता राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। जिस पर उपायुक्त ने पत्र को कल्याण विभाग को अग्रसारित करते हुए नियमावली के अनुरूप तत्काल प्रभाव से उन्हें इलाज हेतु सहायता राशि उपलब्ध कराने का निर्देश जिला कल्याण पदाधिकारी को दिया।
जनता दरबार में अगले फरियादी ग्राम- डूमरो निवासी संजय कुमार मेहता ने उपायुक्त को अपनी समस्या बताते हुए कहा कि मैं संजय कुमार मेहता व मेरे भाई मनोज मेहता हम दोनों का घर एनएच- 75 गढ़वा बाईपास में जा रहा है। जिसकी मापी पूर्व में की गई थी, लेकिन इस भवन का मुआवजा भुगतान पत्र अभी तक हमें प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में उन्होंने उपायुक्त से पुनः मापी कराकर भवन का मुआवजा भुगतान कराने का अनुरोध किया। जनता दरबार में अगले फरियादी कालिन प्राथमिक बुनकर सहयोग समिति के संचालक, करिमन प्रजापति ने उपायुक्त से बुनकर सहयोग समिति में कार्यरत कारीगरों के भोजन व्यवस्था को लेकर आग्रह करते हुए कहा कि कालिन प्राथमिक बुनकर सहयोग समिति लिमिटेड, रक्सी, धुरकी में स्थापित है। यहां पर सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक कर्मियों को कार्य करना पड़ता है। इसी बीच दोपहर के खाने के लिए बुनकरों को अपने घर से खाना मंगवाना पड़ता है, जिससे कार्य में बाधा उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान हेतु पूरे समिति के सदस्यों का आग्रह है कि गरीब कार्यरत कारीगरों के एक समय के भोजन की व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री दाल- भात योजना को स्वीकृति दी जाए साथ ही उन्होंने अपने कार्यस्थल पर उपायुक्त के आगमन का भी आग्रह किया।
जनता दरबार में इसके अलावा भूमि विवाद से संबंधित मामले, प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास उपलब्ध कराने, दिव्यांग महिला के ऑपरेशन में सहायता उपलब्ध कराने,अतिथि शिक्षकों का लंबित पारिश्रमिक भुगतान करने समेत अन्य से जुड़े कुल 26 आवेदन आये जिन्हें उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को अग्रसरित करते हुए जल्द से जल्द उसका निष्पादन करने का निर्देश दिया।
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गढ़वा : उपायुक्त गढ़वा राजेश कुमार पाठक के कार्यालय प्रकोष्ठ में मंगलवार को जनता दरबार का आयोजन किया। इसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को उपायुक्त के समक्ष रखते हुए समाधान की गुहार लगाई। सर्वप्रथम जनता दरबार में ग्राम-ओबरा, पोस्ट- अन्नराज, थाना- नवाडीह निवासी कैमुद्दीन अंसारी ने उपायुक्त को अपनी समस्या से अवगत कराते हुए कहा कि मैं आग से जलकर पूरी तरह से जख्मी हो गया हूं। मैं गरीब परिवार से हूं तथा अपने इलाज के लिए मेरे पास पैसे नहीं है। उन्होंने उपायुक्त से इलाज हेतु सरकारी कोष से सहायता राशि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। जिस पर उपायुक्त ने पत्र को कल्याण विभाग को अग्रसारित करते हुए नियमावली के अनुरूप तत्काल प्रभाव से उन्हें इलाज हेतु सहायता राशि उपलब्ध कराने का निर्देश जिला कल्याण पदाधिकारी को दिया। जनता दरबार में अगले फरियादी ग्राम- डूमरो निवासी संजय कुमार मेहता ने उपायुक्त को अपनी समस्या बताते हुए कहा कि मैं संजय कुमार मेहता व मेरे भाई मनोज मेहता हम दोनों का घर एनएच- पचहत्तर गढ़वा बाईपास में जा रहा है। जिसकी मापी पूर्व में की गई थी, लेकिन इस भवन का मुआवजा भुगतान पत्र अभी तक हमें प्राप्त नहीं हुआ है। ऐसे में उन्होंने उपायुक्त से पुनः मापी कराकर भवन का मुआवजा भुगतान कराने का अनुरोध किया। जनता दरबार में अगले फरियादी कालिन प्राथमिक बुनकर सहयोग समिति के संचालक, करिमन प्रजापति ने उपायुक्त से बुनकर सहयोग समिति में कार्यरत कारीगरों के भोजन व्यवस्था को लेकर आग्रह करते हुए कहा कि कालिन प्राथमिक बुनकर सहयोग समिति लिमिटेड, रक्सी, धुरकी में स्थापित है। यहां पर सुबह छः बजे से लेकर शाम छः बजे तक कर्मियों को कार्य करना पड़ता है। इसी बीच दोपहर के खाने के लिए बुनकरों को अपने घर से खाना मंगवाना पड़ता है, जिससे कार्य में बाधा उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान हेतु पूरे समिति के सदस्यों का आग्रह है कि गरीब कार्यरत कारीगरों के एक समय के भोजन की व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री दाल- भात योजना को स्वीकृति दी जाए साथ ही उन्होंने अपने कार्यस्थल पर उपायुक्त के आगमन का भी आग्रह किया। जनता दरबार में इसके अलावा भूमि विवाद से संबंधित मामले, प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास उपलब्ध कराने, दिव्यांग महिला के ऑपरेशन में सहायता उपलब्ध कराने,अतिथि शिक्षकों का लंबित पारिश्रमिक भुगतान करने समेत अन्य से जुड़े कुल छब्बीस आवेदन आये जिन्हें उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को अग्रसरित करते हुए जल्द से जल्द उसका निष्पादन करने का निर्देश दिया।
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यौन शोषण के मामले में दोषी डेरा प्रमुख राम रहीम को सजा सुनाने के लिए सीबीआई कोर्ट के जज रोहतक आएंगे। बताया जा रहा है कि इस मामले में फैसला सुनाने वाले जज जगदीप सिंह हेलिकॉप्टर के जरिए रोहतक जाएंगे, जहां राम रहीम को सजा सुनाई जाएगी। सुनारिया जेल के अधीक्षक सुनील सांगवान ने बताया कि सोमवार को राम रहीम को सजा सुनाने के लिए जज रोहतक आएंगे, इसके लिए जेल प्रशासन की तरफ से तैयारियां की जा रही हैं।
बताया जा रहा है कि सुनारिया जेल में ही एक कमरे को कोर्ट रूम के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। हरियाणा और पंजाब हाई कोर्ट ने पुलिस को इस मामले में सभी इंतजाम करने को कहा है। हरियाणा के डीजीपी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस मामले में तमाम तैयारियां की जा रही हैं। इससे पहले हरियाणा पुलिस ने कहा था कि राम रहीम की पंचकूला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में पेशी नहीं होगी। इसके बाद माना जा रहा था कि डेरा प्रमुख को विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सजा सुनाई जा सकती है। हरियाणा डीजीपी ने कहा था कि सजा का ऐलान या तो विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया जाएगा या फिर रोहतक जेल में ही कोर्ट बैठेगा।
साध्वी यौन शोषण मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद डेरा प्रमुख राम रहीम को पंचकूला से एयरलिफ्ट किया गया और हेलिकॉप्टर से पुलिस प्रशिक्षण केंद्र सुनारिया के अंदर अस्थाई हेलिपैड पर उतारा गया। उनके वहां पहुंचने से पहले ही सीआईएसएफ की कंपनी तैनात कर दी गई थी। सीआईएसएफ ने पीटीसी सुनारिया से 3 किलोमीटर के एरिया को सील कर दिया गया। सुरक्षा को लेकर भारी इंतजाम किया गया। संत राम रहीम के सुनारिया पहुंचने पर इंतजाम इतने कड़े किए गए है कि वहां पर परिंदा भी पर नहीं मार सकता।
पुलिस अधीक्षक रोहतक पंकज नैन ने रोहतक में जारी बयान में बताया कि रोहतक में सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए है। प्रशासन द्वारा जिला में जान व माल की सुरक्षा हेतु धारा 144 लगाई गई है। यदि रोहतक में रहने वाले डेरा सच्चा सौदा के समर्थक किसी प्रकार का धरना या जलूस निकालकर किसी प्रकार की अराजकता फैलाने का प्रयास करेंगे तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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यौन शोषण के मामले में दोषी डेरा प्रमुख राम रहीम को सजा सुनाने के लिए सीबीआई कोर्ट के जज रोहतक आएंगे। बताया जा रहा है कि इस मामले में फैसला सुनाने वाले जज जगदीप सिंह हेलिकॉप्टर के जरिए रोहतक जाएंगे, जहां राम रहीम को सजा सुनाई जाएगी। सुनारिया जेल के अधीक्षक सुनील सांगवान ने बताया कि सोमवार को राम रहीम को सजा सुनाने के लिए जज रोहतक आएंगे, इसके लिए जेल प्रशासन की तरफ से तैयारियां की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि सुनारिया जेल में ही एक कमरे को कोर्ट रूम के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा। हरियाणा और पंजाब हाई कोर्ट ने पुलिस को इस मामले में सभी इंतजाम करने को कहा है। हरियाणा के डीजीपी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस मामले में तमाम तैयारियां की जा रही हैं। इससे पहले हरियाणा पुलिस ने कहा था कि राम रहीम की पंचकूला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में पेशी नहीं होगी। इसके बाद माना जा रहा था कि डेरा प्रमुख को विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सजा सुनाई जा सकती है। हरियाणा डीजीपी ने कहा था कि सजा का ऐलान या तो विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए किया जाएगा या फिर रोहतक जेल में ही कोर्ट बैठेगा। साध्वी यौन शोषण मामले में दोषी करार दिए जाने के बाद डेरा प्रमुख राम रहीम को पंचकूला से एयरलिफ्ट किया गया और हेलिकॉप्टर से पुलिस प्रशिक्षण केंद्र सुनारिया के अंदर अस्थाई हेलिपैड पर उतारा गया। उनके वहां पहुंचने से पहले ही सीआईएसएफ की कंपनी तैनात कर दी गई थी। सीआईएसएफ ने पीटीसी सुनारिया से तीन किलोग्राममीटर के एरिया को सील कर दिया गया। सुरक्षा को लेकर भारी इंतजाम किया गया। संत राम रहीम के सुनारिया पहुंचने पर इंतजाम इतने कड़े किए गए है कि वहां पर परिंदा भी पर नहीं मार सकता। पुलिस अधीक्षक रोहतक पंकज नैन ने रोहतक में जारी बयान में बताया कि रोहतक में सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए है। प्रशासन द्वारा जिला में जान व माल की सुरक्षा हेतु धारा एक सौ चौंतालीस लगाई गई है। यदि रोहतक में रहने वाले डेरा सच्चा सौदा के समर्थक किसी प्रकार का धरना या जलूस निकालकर किसी प्रकार की अराजकता फैलाने का प्रयास करेंगे तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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बर्मिंघम, 7 अगस्तः भारतीय मुक्केबाज निकहत जरीन ने राष्ट्रमंडल खेल 2022 में रविवार को भारत को 17वां स्वर्ण पदक दिलाया। निकहत ने महिला लाइट फ्लाईवेट (50 किग्रा) वर्ग के एकतरफा फाइनल मुकाबले में उत्तरी आयरलैंड की कार्ली एमसी नौल को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह भारत का दिन का चौथा और बर्मिंघम में कुल मिलाकर 17वां स्वर्ण पदक है। भारत पदक तालिका में न्यूजीलैंड को पीछे छोड़ते हुए चौथे स्थान पर पहुंच गया है। निकहत ने इससे पहले सेमीफाइनल में इंग्लैंड की स्टबले अलफिया सवानाह को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से पराजित किया। जरीन से पहले आज भारतीय मुक्केबाज नीतू घंघास और अमित पंघाल ने भारत के लिए स्वर्ण पदक जीते। नीतू ने महिलाओं के मिनीममवेट कैटेगरी (45-48 किग्रा) में स्वर्ण पदक जीता।
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बर्मिंघम, सात अगस्तः भारतीय मुक्केबाज निकहत जरीन ने राष्ट्रमंडल खेल दो हज़ार बाईस में रविवार को भारत को सत्रहवां स्वर्ण पदक दिलाया। निकहत ने महिला लाइट फ्लाईवेट वर्ग के एकतरफा फाइनल मुकाबले में उत्तरी आयरलैंड की कार्ली एमसी नौल को पाँच-शून्य से हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह भारत का दिन का चौथा और बर्मिंघम में कुल मिलाकर सत्रहवां स्वर्ण पदक है। भारत पदक तालिका में न्यूजीलैंड को पीछे छोड़ते हुए चौथे स्थान पर पहुंच गया है। निकहत ने इससे पहले सेमीफाइनल में इंग्लैंड की स्टबले अलफिया सवानाह को पाँच-शून्य के सर्वसम्मत फैसले से पराजित किया। जरीन से पहले आज भारतीय मुक्केबाज नीतू घंघास और अमित पंघाल ने भारत के लिए स्वर्ण पदक जीते। नीतू ने महिलाओं के मिनीममवेट कैटेगरी में स्वर्ण पदक जीता।
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आर्डन प्रोग्रेसिव स्कूल, लामाचौड़ के क्लास 11वीं के छात्र रक्षित डालाकोटी का अंडर 16 उत्तराखंड क्रिकेट टीम में सेलेक्शन हुआ है। उनका उत्तराखंड की अंडर 16 क्रिकेट टीम में सेलेक्शन होना स्वयं उनके, उनके परिवार व पूरे विद्यालय परिवार के साथ ही नैनीताल जनपद के लिए भी अत्यधिक गर्व का विषय है।
आपको बता दें कि रक्षित डालाकोटी आज 28 नवम्बर 2022 को सवेरे बी. सी. सी. आई द्वारा आयोजित विजय मर्चेंट ट्राफी में उत्तराखंड की ओर से प्रतिभाग करने चले गए हैं। डालाकोटी की इस उपलब्धि पर विद्यालय के मुख्य ट्रस्टी एवं प्रधानाचार्या ने रक्षित को बधाई दी एवं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
Corruption game in UP cooperative : फर्जी डिग्री धारी सुभाष चन्द्र पांडेय का सच उजागर पर क्यों रूक रही कार्रवाई?
Corruption game in UP cooperative : फर्जी डिग्री धारी सुभाष चन्द्र पांडेय का सच उजागर पर क्यों रूक रही कार्रवाई?
Natwarlal Ias Officer मणि प्रसाद मिश्रा ने सचिव बनने के लिये जन्मतिथि में की हेरा-फेरी!
अजब UP गजब UPSIDC: एक साथ दो-दो डिग्री कोर्स करने वालों और प्लाटों के फर्जी आवंटन करने वालों को मिलता है अवार्ड!
अजब UP गजब UPSIDC: एक साथ दो-दो डिग्री कोर्स करने वालों और प्लाटों के फर्जी आवंटन करने वालों को मिलता है अवार्ड!
शासन के फर्जी आदेश पर UPSIDC में नौकरी हासिल करने वाले इस भ्रष्ट मैनेजर पर कब होगी कार्रवाई!
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आर्डन प्रोग्रेसिव स्कूल, लामाचौड़ के क्लास ग्यारहवीं के छात्र रक्षित डालाकोटी का अंडर सोलह उत्तराखंड क्रिकेट टीम में सेलेक्शन हुआ है। उनका उत्तराखंड की अंडर सोलह क्रिकेट टीम में सेलेक्शन होना स्वयं उनके, उनके परिवार व पूरे विद्यालय परिवार के साथ ही नैनीताल जनपद के लिए भी अत्यधिक गर्व का विषय है। आपको बता दें कि रक्षित डालाकोटी आज अट्ठाईस नवम्बर दो हज़ार बाईस को सवेरे बी. सी. सी. आई द्वारा आयोजित विजय मर्चेंट ट्राफी में उत्तराखंड की ओर से प्रतिभाग करने चले गए हैं। डालाकोटी की इस उपलब्धि पर विद्यालय के मुख्य ट्रस्टी एवं प्रधानाचार्या ने रक्षित को बधाई दी एवं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। Corruption game in UP cooperative : फर्जी डिग्री धारी सुभाष चन्द्र पांडेय का सच उजागर पर क्यों रूक रही कार्रवाई? Corruption game in UP cooperative : फर्जी डिग्री धारी सुभाष चन्द्र पांडेय का सच उजागर पर क्यों रूक रही कार्रवाई? Natwarlal Ias Officer मणि प्रसाद मिश्रा ने सचिव बनने के लिये जन्मतिथि में की हेरा-फेरी! अजब UP गजब UPSIDC: एक साथ दो-दो डिग्री कोर्स करने वालों और प्लाटों के फर्जी आवंटन करने वालों को मिलता है अवार्ड! अजब UP गजब UPSIDC: एक साथ दो-दो डिग्री कोर्स करने वालों और प्लाटों के फर्जी आवंटन करने वालों को मिलता है अवार्ड! शासन के फर्जी आदेश पर UPSIDC में नौकरी हासिल करने वाले इस भ्रष्ट मैनेजर पर कब होगी कार्रवाई!
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उपमंडल नूरपुर के तहत पड़ती चक्की खड्ड में अवैध खनन लगातार जारी है, जिससे चक्की खड्ड का सीना छलनी हो रहा है, जबकि पुलिस-प्रशासन व खनन विभाग अवैध खनन पर कड़ी कार्रवाई किए जाने का तर्क देता है परंतु इसके बावजूद अवैध खनन लगातार जारी है और इतने दावों के बावजूद खनन बंद क्यों हुआ यह लोगों में यक्ष प्रश्न बना हुआ है। पुलिस-प्रशासन व खनन विभाग समय-समय पर चक्की खड्ड में अवैध खनन पर कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात करता है, परंतु प्रतिबंधों के बावजूद अवैध खनन पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती, यह लोगों के सामने यक्ष प्रश्न बना हुआ है। यह अवैध खनन किसकी शह पर हो रहा है और खनन माफिया को क्यों पुलिस-प्रशासन, सबंधित विभाग व सरकार का डर नहीं है, यह बात भी लोगों की समझ से परे है और प्रभावित लोग इस अवैध खनन की मार से पीडि़त है।
चक्की खड्ड में खनन माफिया नियमों को ताक पर रख कर अवैध खनन कर रहा है, जबकि इस माफिया पर कड़ी कार्रवाई तो दूर नाममात्र की कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे खनन माफिया के हौसले बुलंद है। सूत्रों के मुताबिक चक्की खड्ड में खन्नी उपरली व अन्य जगहों पर खनन माफिया जेसीबी मशीनों की मदद से क्रशर मैटीरियल टिप्परों द्वारा ढो रहा है और कई जगहों पर भारी मात्रा में क्रशर मैटीरियल एकत्रित किया हुआ है। प्रशासन व खनन विभाग को इसकी जांच करनी चाहिए कि जिनका यह क्रशर मैटीरियल है उनकी खनन लीज कहा है और यह इतनी बड़ी मात्रा में क्रशर कहां से आया। अगर जांच में गड़बड़ी हो, तो इसे सीज कर इसकी ऑक्शन करनी चाहिए। चक्की खड्ड से क्रशर मैटीरियल पंजाब के क्रशरों को भी उपलब्ध करवाया जाता है, ताकि यहां का क्रशर पंजाब में भी सप्लाई किया जा सके, अन्यथा वहां सप्लाई करने मुशिकल हो सकती है। बहरहाल चक्की खड्ड में अवैध खनन के खेल में यहां सरकारी खनिज संपदा लूट रही है और सरकारी खजाने के राजस्व को चुना लग रहा है। साथ ही खनन माफिया पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही यह लोगों में यक्ष प्रश्न बना हुआ है। (एचडीएम)
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उपमंडल नूरपुर के तहत पड़ती चक्की खड्ड में अवैध खनन लगातार जारी है, जिससे चक्की खड्ड का सीना छलनी हो रहा है, जबकि पुलिस-प्रशासन व खनन विभाग अवैध खनन पर कड़ी कार्रवाई किए जाने का तर्क देता है परंतु इसके बावजूद अवैध खनन लगातार जारी है और इतने दावों के बावजूद खनन बंद क्यों हुआ यह लोगों में यक्ष प्रश्न बना हुआ है। पुलिस-प्रशासन व खनन विभाग समय-समय पर चक्की खड्ड में अवैध खनन पर कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात करता है, परंतु प्रतिबंधों के बावजूद अवैध खनन पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती, यह लोगों के सामने यक्ष प्रश्न बना हुआ है। यह अवैध खनन किसकी शह पर हो रहा है और खनन माफिया को क्यों पुलिस-प्रशासन, सबंधित विभाग व सरकार का डर नहीं है, यह बात भी लोगों की समझ से परे है और प्रभावित लोग इस अवैध खनन की मार से पीडि़त है। चक्की खड्ड में खनन माफिया नियमों को ताक पर रख कर अवैध खनन कर रहा है, जबकि इस माफिया पर कड़ी कार्रवाई तो दूर नाममात्र की कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे खनन माफिया के हौसले बुलंद है। सूत्रों के मुताबिक चक्की खड्ड में खन्नी उपरली व अन्य जगहों पर खनन माफिया जेसीबी मशीनों की मदद से क्रशर मैटीरियल टिप्परों द्वारा ढो रहा है और कई जगहों पर भारी मात्रा में क्रशर मैटीरियल एकत्रित किया हुआ है। प्रशासन व खनन विभाग को इसकी जांच करनी चाहिए कि जिनका यह क्रशर मैटीरियल है उनकी खनन लीज कहा है और यह इतनी बड़ी मात्रा में क्रशर कहां से आया। अगर जांच में गड़बड़ी हो, तो इसे सीज कर इसकी ऑक्शन करनी चाहिए। चक्की खड्ड से क्रशर मैटीरियल पंजाब के क्रशरों को भी उपलब्ध करवाया जाता है, ताकि यहां का क्रशर पंजाब में भी सप्लाई किया जा सके, अन्यथा वहां सप्लाई करने मुशिकल हो सकती है। बहरहाल चक्की खड्ड में अवैध खनन के खेल में यहां सरकारी खनिज संपदा लूट रही है और सरकारी खजाने के राजस्व को चुना लग रहा है। साथ ही खनन माफिया पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही यह लोगों में यक्ष प्रश्न बना हुआ है।
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है, तो सूक्ष्मदृष्टि से देश और काल के किञ्चित् किञ्चित् परिवर्तन के साथ ही धर्म का आदर्श और आचरण भी बदलना ही चाहिये। ऐसी अवस्था में शास्त्र द्वारा धर्म का निर्णय किस प्रकार हो सकता है ? कारण, शास्त्र में प्रत्येक उपदेश साधारण भाव से ही दिया जाता है, प्रत्येक व्यक्ति के प्रतिमुहूर्त्त के धर्म के देशगत और अवस्थागत पार्थक्य की ओर दृष्टि रखकर शास्त्र के द्वारा कदापि निर्णय नहीं हो सकता, यदि यही सत्य है तो क्या शास्त्र को मिथ्या कहा जाय ?
वक्ता - शास्त्र मिथ्या क्यों होने लगा ? हाँ, तुम लोग जिसे शास्त्र कहते हो, वह यथार्थ शास्त्र नहीं है - वह यथार्थ शास्त्र का केवल बाह्य परिच्छिन्न प्रकाश है । जब तक ज्ञानचक्षु नहीं खुल जाते, प्रकृति के अन्दर प्रविष्ट नहीं हुआ जाता - सारांश यह कि जब तक वेद या शब्द - ब्रह्म का साक्षात्कार नहीं हो जाता, तब तक शास्त्रवाणी को कैसे समझा जा सकता है ? अनन्त चिदाकाश से जिस बोधरूप वाणी का उद्गम होता है, वही शास्त्र है । ऐसी वाणी किसी शरीरधारी दिव्यमूर्ति की वाणी हो सकती है; अशरीरी की आकाश-वाणी हो सकती है, हृदय से उठी हुई भाववाणी हो सकती है; अथवा गुरु-स्थान से निकली हुई आशा स्वरूप ज्ञानरूमा दिव्यवाणी हो सकती है। कोई भी वाणी हो वह मूलतः एक प्रज्ञास्वरूपा वाणी ही है, दूसरी नहीं । जिज्ञासु - शास्त्रतत्व के सम्बन्ध में इस समय मैं कुछ भी नहीं पृछता । केवल एक बात जानना चाहता हूँ। आपने जिस को नित्य शास्त्र कहा है, उसमें और हमारे प्रचलित शास्त्र में क्या कोई भेद है ? यदि है तो वह कैसा है ?
वक्ता - संक्षेप में तुम्हारी इस बात का उत्तर मैं तुम्हें पहले ही दे चुका 1 फिर भी, तुम्हारे इस विशेष प्रश्न के उत्तर में यह कहा जा सकता है कि दोनों में भेद और नहीं भी है। शास्त्र ही धर्म का प्रकाशक है । धर्म के नित्य रूप का ज्ञान तो नित्य शास्त्र से ही हो सकता है। हमारे प्रचलित शास्त्र से हम केवल व्यावहारिक धर्म का रूप जान सकते हैं । धर्म का सार्वभौम तत्त्व जानने के लिये बुद्धि-गुहा में प्रवेश करना पड़ता है। वह ग्रन्थ-पाठ से जानने का विषय नहीं है। प्रत्येक मनुष्य के लिये देश और अवस्था गत अधिकारमूलक धर्म का निर्देश व्यावहारिक शास्त्र में नहीं मिल सकता ।
जिज्ञासु - तो क्या आप का यह अभिप्राय है कि कर्त्तव्याकर्त्तव्य के यथार्थ निर्णय के लिये ग्रन्थ-पाठ यथेष्ट नहीं है ?
वक्ता - अधिकार और अवस्था के भेद के अनुसार कौन-सा कर्म उचित है और कौन-सा अनुचित, इसका निर्णय केवल साधारण उपदेशों की आलोचना से नहीं किया जा सकता, जब तक अन्तःकरण जाग्रत् नहीं होता, जब तक हृदय में गुरु शक्ति की जागृति नहीं होती, तब तक कर्तव्य का निर्णय अभ्रान्त हो ही नहीं सकता । वेदरूपी नित्य गुरु के हृदय में जाग्रत् हुये विना कर्म-पथ पर अग्रसर होना सम्भव नहीं है ।
"सत हि सन्देहपदेषु वस्तुषु प्रमाणमन्तःकरणप्रवृत्तयः ।"
यह बात बिलकुल सत्य है। इसका तात्पर्य यह है कि जो संत हैं, साधु है, शुद्धचित्त हैं और मोहनिद्रा से जाग कर जिन्होंने सत्य वस्तु की ओर देखना आरम्भ कर दिया है, उनको ग्रन्थ पढ़ कर अथवा किसी से उपदेश सुन कर सन्दिग्ध विषय का सन्देह दूर करना नहीं पड़ता, उनका ज्ञानोज्ज्वल चित्त ही संशय का उच्छेद कर उनके हृदय में विश्वास का बीज बो देता है। शुद्धचित्त पुरुष की स्वाभाविक प्रवृत्ति कभी अनुचित अथवा निषिद्ध विषय की ओर हो ही नहीं सकती । इसी से समझ लेना चाहिये कि साधारण जीव के लिये धर्म के गूढ़ तत्त्व को जान लेना कितनी दूर की बात है। दूसरे को धर्म का उपदेश करना तो दूर रहा, स्वयं ही कर्म-पथ पर चलने के लिये धर्म के जितने प्रत्यक्ष ज्ञान की आवश्यकता है, उतना ही सहज में नहीं मिल सकता । सारांश यह कि वाह्य शास्त्रीय ज्ञान यथार्थ शास्त्र ज्ञान नहीं है ।
जिज्ञासु - आपने जो कुछ कहा, इससे यह समझ में आता है कि विषय अत्यन्त कठिन होने पर भी इसे जानना ही चाहिये, क्योंकि धर्म का तत्त्व जाने बिना भनुष्य के पशुत्व का नाश होने का दूसरा कोई मार्ग ही नहीं है। एकमात्र धर्म ने हो मनुष्य को दूसरे पशुओं से अलग कर के मनुष्यपद के योग्य बनाया है। धर्म की उन्नति से व्यक्तिगत और जातिगत रूप में मनुष्य की उन्नति होती है और धर्म का लोप होने पर मनुष्य क्रमशः पुनः पाशवरूप में उतर आता है ।
वक्ता - वत्स, वास्तव में ही धर्म की उन्नति और विशुद्धि से मनुष्य की सब प्रकार की उन्नति होती है । "धर्मः सर्वेषां भूतानां मधु" - धर्मरूप कल्पवृक्ष का आश्रय ले लेने पर मनुष्य की कोई इच्छा अपूर्ण नहीं रह सकती। मनुष्य सत्र विषयों में परमानन्द प्राप्त कर कृतार्थ हो सकता है ।
जिज्ञासु - ये सब बातें तो हुई। अब प्रस्तावित विषय में करके मुझे कृतार्थ करें ।
मेरे सन्देह को दूर
वक्ता- वत्स, में कहता हूँ, तुम चित्त लगाकर सुनो । आलोचना के लिये धर्म-तत्त्व को दो भागों में बाँट लेने से सुविधा होगी। धर्म का एक नित्य और अविनश्वर रूप है, जिसका कुछ कुछ आभास मैं तुम्हें पहले बातों-ही-चातों में करा चुका हूँ। उसके सम्बन्ध में आगे आलोचना करूँगा । परन्तु धर्म का एक रूप और है, जो व्यावहारिक होने के कारण अनित्य होने पर भी स्वाभाविक है । चिरस्थायी न होनेपर भी प्रथमतः इसकी आवश्यकता है। यह अनित्य प्राकृतिक धर्म प्रवृत्ति और निवृत्तिभेद से दो प्रकार का है। अवश्य ही यहाँ मैं पुरुषकार-मूलक कृत्रिम धर्म की बात नहीं कह रहा हूँ ।
जिज्ञासु - आपने जो प्रवृत्ति को धर्म का एक अंग बतलाया, यह बात ठीक समझ में नहीं आयी। क्योंकि प्रवृत्ति तो वासनामलिन जीव के लिये स्वाभाविक है। यदि इसको धर्म के अन्तर्गत माना जाय तो फिर अधर्म का क्या लक्षण किया जायगा ? मैं तो समझता हूँ कि प्रवृत्ति का निरोध किये बिना धर्म-जीवन की सूचना ही नहीं हो सकती। फिर आप निवृत्तिधर्म के अतिरिक्त एक नित्य धर्म और बतलाते हैं, यह बात भी ठीक समझ में नहीं आयी । निवृत्ति के फलस्वरूप जीव अनन्त काल
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है, तो सूक्ष्मदृष्टि से देश और काल के किञ्चित् किञ्चित् परिवर्तन के साथ ही धर्म का आदर्श और आचरण भी बदलना ही चाहिये। ऐसी अवस्था में शास्त्र द्वारा धर्म का निर्णय किस प्रकार हो सकता है ? कारण, शास्त्र में प्रत्येक उपदेश साधारण भाव से ही दिया जाता है, प्रत्येक व्यक्ति के प्रतिमुहूर्त्त के धर्म के देशगत और अवस्थागत पार्थक्य की ओर दृष्टि रखकर शास्त्र के द्वारा कदापि निर्णय नहीं हो सकता, यदि यही सत्य है तो क्या शास्त्र को मिथ्या कहा जाय ? वक्ता - शास्त्र मिथ्या क्यों होने लगा ? हाँ, तुम लोग जिसे शास्त्र कहते हो, वह यथार्थ शास्त्र नहीं है - वह यथार्थ शास्त्र का केवल बाह्य परिच्छिन्न प्रकाश है । जब तक ज्ञानचक्षु नहीं खुल जाते, प्रकृति के अन्दर प्रविष्ट नहीं हुआ जाता - सारांश यह कि जब तक वेद या शब्द - ब्रह्म का साक्षात्कार नहीं हो जाता, तब तक शास्त्रवाणी को कैसे समझा जा सकता है ? अनन्त चिदाकाश से जिस बोधरूप वाणी का उद्गम होता है, वही शास्त्र है । ऐसी वाणी किसी शरीरधारी दिव्यमूर्ति की वाणी हो सकती है; अशरीरी की आकाश-वाणी हो सकती है, हृदय से उठी हुई भाववाणी हो सकती है; अथवा गुरु-स्थान से निकली हुई आशा स्वरूप ज्ञानरूमा दिव्यवाणी हो सकती है। कोई भी वाणी हो वह मूलतः एक प्रज्ञास्वरूपा वाणी ही है, दूसरी नहीं । जिज्ञासु - शास्त्रतत्व के सम्बन्ध में इस समय मैं कुछ भी नहीं पृछता । केवल एक बात जानना चाहता हूँ। आपने जिस को नित्य शास्त्र कहा है, उसमें और हमारे प्रचलित शास्त्र में क्या कोई भेद है ? यदि है तो वह कैसा है ? वक्ता - संक्षेप में तुम्हारी इस बात का उत्तर मैं तुम्हें पहले ही दे चुका एक फिर भी, तुम्हारे इस विशेष प्रश्न के उत्तर में यह कहा जा सकता है कि दोनों में भेद और नहीं भी है। शास्त्र ही धर्म का प्रकाशक है । धर्म के नित्य रूप का ज्ञान तो नित्य शास्त्र से ही हो सकता है। हमारे प्रचलित शास्त्र से हम केवल व्यावहारिक धर्म का रूप जान सकते हैं । धर्म का सार्वभौम तत्त्व जानने के लिये बुद्धि-गुहा में प्रवेश करना पड़ता है। वह ग्रन्थ-पाठ से जानने का विषय नहीं है। प्रत्येक मनुष्य के लिये देश और अवस्था गत अधिकारमूलक धर्म का निर्देश व्यावहारिक शास्त्र में नहीं मिल सकता । जिज्ञासु - तो क्या आप का यह अभिप्राय है कि कर्त्तव्याकर्त्तव्य के यथार्थ निर्णय के लिये ग्रन्थ-पाठ यथेष्ट नहीं है ? वक्ता - अधिकार और अवस्था के भेद के अनुसार कौन-सा कर्म उचित है और कौन-सा अनुचित, इसका निर्णय केवल साधारण उपदेशों की आलोचना से नहीं किया जा सकता, जब तक अन्तःकरण जाग्रत् नहीं होता, जब तक हृदय में गुरु शक्ति की जागृति नहीं होती, तब तक कर्तव्य का निर्णय अभ्रान्त हो ही नहीं सकता । वेदरूपी नित्य गुरु के हृदय में जाग्रत् हुये विना कर्म-पथ पर अग्रसर होना सम्भव नहीं है । "सत हि सन्देहपदेषु वस्तुषु प्रमाणमन्तःकरणप्रवृत्तयः ।" यह बात बिलकुल सत्य है। इसका तात्पर्य यह है कि जो संत हैं, साधु है, शुद्धचित्त हैं और मोहनिद्रा से जाग कर जिन्होंने सत्य वस्तु की ओर देखना आरम्भ कर दिया है, उनको ग्रन्थ पढ़ कर अथवा किसी से उपदेश सुन कर सन्दिग्ध विषय का सन्देह दूर करना नहीं पड़ता, उनका ज्ञानोज्ज्वल चित्त ही संशय का उच्छेद कर उनके हृदय में विश्वास का बीज बो देता है। शुद्धचित्त पुरुष की स्वाभाविक प्रवृत्ति कभी अनुचित अथवा निषिद्ध विषय की ओर हो ही नहीं सकती । इसी से समझ लेना चाहिये कि साधारण जीव के लिये धर्म के गूढ़ तत्त्व को जान लेना कितनी दूर की बात है। दूसरे को धर्म का उपदेश करना तो दूर रहा, स्वयं ही कर्म-पथ पर चलने के लिये धर्म के जितने प्रत्यक्ष ज्ञान की आवश्यकता है, उतना ही सहज में नहीं मिल सकता । सारांश यह कि वाह्य शास्त्रीय ज्ञान यथार्थ शास्त्र ज्ञान नहीं है । जिज्ञासु - आपने जो कुछ कहा, इससे यह समझ में आता है कि विषय अत्यन्त कठिन होने पर भी इसे जानना ही चाहिये, क्योंकि धर्म का तत्त्व जाने बिना भनुष्य के पशुत्व का नाश होने का दूसरा कोई मार्ग ही नहीं है। एकमात्र धर्म ने हो मनुष्य को दूसरे पशुओं से अलग कर के मनुष्यपद के योग्य बनाया है। धर्म की उन्नति से व्यक्तिगत और जातिगत रूप में मनुष्य की उन्नति होती है और धर्म का लोप होने पर मनुष्य क्रमशः पुनः पाशवरूप में उतर आता है । वक्ता - वत्स, वास्तव में ही धर्म की उन्नति और विशुद्धि से मनुष्य की सब प्रकार की उन्नति होती है । "धर्मः सर्वेषां भूतानां मधु" - धर्मरूप कल्पवृक्ष का आश्रय ले लेने पर मनुष्य की कोई इच्छा अपूर्ण नहीं रह सकती। मनुष्य सत्र विषयों में परमानन्द प्राप्त कर कृतार्थ हो सकता है । जिज्ञासु - ये सब बातें तो हुई। अब प्रस्तावित विषय में करके मुझे कृतार्थ करें । मेरे सन्देह को दूर वक्ता- वत्स, में कहता हूँ, तुम चित्त लगाकर सुनो । आलोचना के लिये धर्म-तत्त्व को दो भागों में बाँट लेने से सुविधा होगी। धर्म का एक नित्य और अविनश्वर रूप है, जिसका कुछ कुछ आभास मैं तुम्हें पहले बातों-ही-चातों में करा चुका हूँ। उसके सम्बन्ध में आगे आलोचना करूँगा । परन्तु धर्म का एक रूप और है, जो व्यावहारिक होने के कारण अनित्य होने पर भी स्वाभाविक है । चिरस्थायी न होनेपर भी प्रथमतः इसकी आवश्यकता है। यह अनित्य प्राकृतिक धर्म प्रवृत्ति और निवृत्तिभेद से दो प्रकार का है। अवश्य ही यहाँ मैं पुरुषकार-मूलक कृत्रिम धर्म की बात नहीं कह रहा हूँ । जिज्ञासु - आपने जो प्रवृत्ति को धर्म का एक अंग बतलाया, यह बात ठीक समझ में नहीं आयी। क्योंकि प्रवृत्ति तो वासनामलिन जीव के लिये स्वाभाविक है। यदि इसको धर्म के अन्तर्गत माना जाय तो फिर अधर्म का क्या लक्षण किया जायगा ? मैं तो समझता हूँ कि प्रवृत्ति का निरोध किये बिना धर्म-जीवन की सूचना ही नहीं हो सकती। फिर आप निवृत्तिधर्म के अतिरिक्त एक नित्य धर्म और बतलाते हैं, यह बात भी ठीक समझ में नहीं आयी । निवृत्ति के फलस्वरूप जीव अनन्त काल
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महासमुंद। कवर्धा मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद के आह्ववान पर मंगलवार को सर्व हिंदू समाज के बैनर तले पटवारी कार्यालय परिसर में धरना दिया। धरना बाद मौके पर ही राज्यपाल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सीएम भूपेश बघेल के नाम प्रभारी एसडीएम शशिकांत कुर्रे को ज्ञापन सौंपा।
विहिप पदाधिकारियों ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि कवर्धा में हुई पूरी घटना की न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए। भगवा ध्वज का अपमान करने वालों और जय श्रीराम के जयघोष के बाद दुर्गेश देवांगन के साथ मारपीट करने वालों को पहचान कर दंडित किया जाना चाहिए।
विहिप पदाधिकारियों ने कहा कि कवर्धा घटना में जिन लोगों पर मामले दर्ज किए गए हैं, उसे निश्शर्त वापस लिए जाएं। कवर्धा में लाठीचार्ज हुआ और हजारों लोगों को सरेराह पीटा गया, इस कारण कवर्धा के एसपी, कलेक्टर, थानेदार, नायब तहसीलदार को तत्काल निलंबित कर लाठीचार्ज की जांच कराई जाए।
छत्तीसगढ़ प्रांत में अवैध रूप से रहने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें बाहर किया जाए। धरने में विहिप, बजरंग दल से जिला कार्यकारी अध्यक्ष हर्षवर्धन चंद्राकर, जिला उपाध्यक्ष पंकज चंद्राकर तथा सर्व हिंदू समाज के पदाधिकारी शामिल रहे।
सभा में एसआर बंजारे, कमलेश ध्रुव, राजू यादव, पवन पटेल, गुरुबचन सिंघ, धरम साहू, महेश चंद्राकर, देवेंद्र दुबे, कोमल आचार्य, आलेख आश्रम से योगत्यानंद, सौरभ अग्रवाल, रूपकुमारी चौधरी, तिलक साव, भूपेंद्र राठौड़, ऐश्वर्य पुरोहित मंचस्थ थे।
सभा को सांसद चुन्नीलाल साहू, अमित अग्रवाल, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, राकेश चंद्राकर, भामिनि पोखन चंद्राकर, रामचंद्र अग्रवाल, डा विमल चोपड़ा ने संबोधित किया। संचालन चंद्रशेखर साहू, अखिलेश लुनिया ने किया। आभार पंकज चंद्राकर ने जताया।
सभा को लेकर पुलिस विभाग मुस्तैद रहा। सादी वर्दी के अलावा खाकी में भी जवान तैनात थे। आसपास की दुकानों को हटा दी गई थी। कई थानों के टीआइ मौके पर मौजूद रहे।
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महासमुंद। कवर्धा मामले को लेकर विश्व हिंदू परिषद के आह्ववान पर मंगलवार को सर्व हिंदू समाज के बैनर तले पटवारी कार्यालय परिसर में धरना दिया। धरना बाद मौके पर ही राज्यपाल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सीएम भूपेश बघेल के नाम प्रभारी एसडीएम शशिकांत कुर्रे को ज्ञापन सौंपा। विहिप पदाधिकारियों ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि कवर्धा में हुई पूरी घटना की न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए। भगवा ध्वज का अपमान करने वालों और जय श्रीराम के जयघोष के बाद दुर्गेश देवांगन के साथ मारपीट करने वालों को पहचान कर दंडित किया जाना चाहिए। विहिप पदाधिकारियों ने कहा कि कवर्धा घटना में जिन लोगों पर मामले दर्ज किए गए हैं, उसे निश्शर्त वापस लिए जाएं। कवर्धा में लाठीचार्ज हुआ और हजारों लोगों को सरेराह पीटा गया, इस कारण कवर्धा के एसपी, कलेक्टर, थानेदार, नायब तहसीलदार को तत्काल निलंबित कर लाठीचार्ज की जांच कराई जाए। छत्तीसगढ़ प्रांत में अवैध रूप से रहने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें बाहर किया जाए। धरने में विहिप, बजरंग दल से जिला कार्यकारी अध्यक्ष हर्षवर्धन चंद्राकर, जिला उपाध्यक्ष पंकज चंद्राकर तथा सर्व हिंदू समाज के पदाधिकारी शामिल रहे। सभा में एसआर बंजारे, कमलेश ध्रुव, राजू यादव, पवन पटेल, गुरुबचन सिंघ, धरम साहू, महेश चंद्राकर, देवेंद्र दुबे, कोमल आचार्य, आलेख आश्रम से योगत्यानंद, सौरभ अग्रवाल, रूपकुमारी चौधरी, तिलक साव, भूपेंद्र राठौड़, ऐश्वर्य पुरोहित मंचस्थ थे। सभा को सांसद चुन्नीलाल साहू, अमित अग्रवाल, सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, राकेश चंद्राकर, भामिनि पोखन चंद्राकर, रामचंद्र अग्रवाल, डा विमल चोपड़ा ने संबोधित किया। संचालन चंद्रशेखर साहू, अखिलेश लुनिया ने किया। आभार पंकज चंद्राकर ने जताया। सभा को लेकर पुलिस विभाग मुस्तैद रहा। सादी वर्दी के अलावा खाकी में भी जवान तैनात थे। आसपास की दुकानों को हटा दी गई थी। कई थानों के टीआइ मौके पर मौजूद रहे।
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कला के पहले क्षण का निदर्शन करते हुए मुक्तिबोध का वाक्यांश है- 'जीवन का उत्कट तीव्र अनुभव-क्षण। ' आगे चल कर वे इसकी व्याख्या करते हुए कहते हैं- 'हां, यह ठीक है कि उसमें अनुभव-तत्त्व ही प्रधान है, किंतु, उसमें भी दर्शकत्व का कुछ-न-कुछ अंश जरूर रहता है। लेकिन भोक्तृत्व तिरोहित नहीं हो जाता। ' इसके बाद मुक्तिबोध जो बुनियादी और सबसे महत्त्वपूर्ण बात कहते हैं वह उन्हीं के शब्दों में- 'कलाकार का वास्तविक अनुभव और अनुभव की संवेदनाओं द्वारा प्रेरित फैंटेसी इन दोनों के बीच कल्पना का एक रोल होता है। वह रोल- वह भूमिका एक सृजनशील भूमिका है। वही कल्पना उसे वास्तविक अनुभव की व्यक्तिबद्ध पीड़ाओं से हटा कर, उस अनुभव को ही दृश्यवत करके, उसी अनुभव को नए रूप में उपस्थित कर देती है। किंतु, यह अनुभव दृश्यवत होते ही मूल अनुभव से पृथक होकर भिन्न हो जाता है। ' 'जीवन का उत्कट तीव्र अनुभव-क्षण' साथ ही उससे जन्म लेने वाली संवेदनाओं द्वारा प्रेरित फैंटेसी के बीच जो सबसे बड़ा रोल होता है वह कल्पना का होता है। मुक्तिबोध का ही कथन मानें तो सृजनशीलता का दारोमदार उसी कल्पना पर होता है। इसका मतलब यही है कि कल्पना एक संयोजिका शक्ति है। अगर वह न हो तो सारा शीराजा बिखर जाएगा।
यह कल्पना क्या है? भारतीय काव्य-शास्त्र की पदावली में कल्पना शब्द तो मिलता नहीं। प्रतिभा संबंधी आधुनिक विवेचनों में कुछेक शोधकर्ताओं ने जरूर प्रतिभा शक्ति को सर्जक की कल्पना शक्ति कहा है। आचार्य शुक्ल ने तो अपनी आचार्य-भाषा में बगैर कोई लाग-लपेट लगाए कह दिया कि भावना या कल्पना एक ही बात है। इसलिए काव्य-वृहत्तर अर्थ में साहित्य एक भावयोग है। भावना, उपासना, ध्यान आदि शब्दों की याद दिलाते हुए वे फिर समझाने पर उतर आते हैं- जिस प्रकार भक्ति के लिए उपासना या ध्यान की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार और भावों के प्रवर्तन के लिए भी भावना या कल्पना अपेक्षित होती है। जिनकी भावना या कल्पना शिथिल या अशक्त होती है, किसी कविता या सरस उक्ति को पढ़-सुन कर उनके हृदय में मार्मिकता होते हुए भी वैसी अनुभूति नहीं होती। बात यह है कि उनके अंतःकरण में चटपट वह 'सजीव और स्पष्ट मूर्तिविधान' नहीं होता, जो भावों को परिचालित कर देता है। इसका मतलब यही कि कल्पना की एक और शक्ति भावों का परिचालन भी है। निष्कर्ष रूप में संयोजन और परिचालन। इस संयोजन व्यापार की व्याख्या करते हुए मुक्तिबोध कहते हैं- 'वही कल्पना उसे वास्तविक अनुभव की व्यक्तिबद्ध पीड़ाओं से हटा कर, उस अनुभव ही को दृश्यवत करके, उसी अनुभव को नए रूप में उपस्थित कर देती है। किंतु यह अनुभव दृश्यवत होते ही मूल अनुभव से पृथक होकर भिन्न हो जाता है। इस दृश्यवत उपस्थित और विस्तृत अनुभव या फैंटेसी में, (जो कला का दूसरा क्षण है) अनुभविता अर्थात फैंटेसी का जनक-दर्शक, जीवन के नए-नए अर्थ ढूंढ़ने लगता है, अनुभव-प्रसूत फैंटेसी में जीवन के अर्थ खोजने और उसमें आनंद लेने की इस प्रक्रिया में ही जो प्रसन्न भावना पैदा होती है, वही एस्थेटिक एक्सपीरिएंस का मर्म है। ' आगे की बातों में उनके कहने का सार यह है कि यह सारा जिम्मा कल्पना अपने कंधों पर स्वाभाविक ढंग से उठा लेती है। तभी तो पाठक को नए-नए अर्थ-महत्त्व और अर्थ-संकेत प्राप्त होते जाते हैं। यही उसकी कलानुभूति है।
प्रसंगवश, यहां यह विचारणीय है कि मुक्तिबोध काव्य-प्रक्रिया के अपने विवेचन-व्यापार में जिन पारिभाषिक पदों का व्यवहार कर रहे हैं वे क्या सर्वथा मौलिक हैं अथवा पश्चिम की काव्यशास्त्रीय पदावली से लिए गए हैं? प्रश्न यह भी है कि क्या भारतीय काव्यशास्त्र में इन बातों को व्यक्त करने के लिए शब्दों का अभाव है? तब भी जिसे वे 'ऐस्थेटिक एक्सपीरिएंस' कह उसे 'आनंद लेने की प्रक्रिया' कह रहे हैं, वह क्या वही नहीं है जो रस-व्याख्याकार भट्टनायक भोक्तृत्व व्यापार या अभिनवगुप्त साधारणीकरण व्यापार कह रहे हैं और जो आनंद-व्यापार ही है? कल्पना तत्त्व को तो शुक्ल जी भावना-व्यापार कह ही रहे हैं। भारतीय काव्य-शास्त्र की आचार्य परंपरा के लेखक डॉ. राधावल्लभ त्रिपाठी भी क्या इसी को भावकत्व व्यापार नहीं कह रहे? तब मुक्तिबोध को इनसे परे जाकर पारिभाषिक पदों की जरूरत क्यों महसूस हुई? जो भी हो, व्याख्याएं तो उनकी अपनी हैं और वे हम रचनाकारों की मदद भी करती हैं। इससे भी कहीं अधिक वे खुद कवि मुक्तिबोध के काव्य-व्यापार को समझने में हमारी मदद करती हैं। यह परखने में भी कि अति प्रचलित फैशनग्रस्त कविताओं वाले कवियों की भारी भीड़ और आवाजाही से हिंदी कविता का कितना उपकार हो रहा है? क्या वे सचमुच जीवन के तीव्र उत्कट क्षण की अनुभूतियों की उपज हैं? क्या उन्हें उस संयोजिका कल्पना शक्ति का सहारा मिल पाया है जिससे रचना सामूहिक सौंदर्य-व्यापार की परिणति तक पहुंच पाई है?
इधर कई बार 'स्त्री की आवाज' और 'अति प्रतिष्ठित कवियों का पाठ' जैसे आयोजनों में बहैसियत श्रोता के रूप में शामिल होकर बार-बार इसी निराशापूर्ण मनोदशा में जाना पड़ा कि समकालीन काव्य-पाठ के आयोजनों में कितने भोथरे और निष्प्राण काव्य-बोध और मर्मज्ञता की जरूरत है। कैसी निरीह सामाजिकता की जैसे कि जरूरत न होने पर भी सामाजिक मजबूरी के चलते किसी की शव-यात्रा में जाना पड़े। इन दिनों केवल नेता होना नहीं, कवि होना भी काफी आसान हो गया है। पर नेता का कारोबार तो कुछेक दिनों के लिए चल भी जाता है, कवि का तो बिल्कुल नहीं चलता। मैं ऐसे अनेक कवियों को जानता हूं, जो कविता को भी एक व्यापार बनाए जगह-जगह घूम रहे हैं। कभी-कभी ऐसा भी लगता है कि बच्चन, बलवीर सिंह 'रंग' और नीरज को तो जनता बुलाती और सुनती रहती थी, पर साहित्यिक संस्थाएं अब जिन कवियों/ कवयित्रियों को बुला कर, सुप्रतिष्ठित आसन पर केवल बिठाती ही नहीं, खूब आवभगत भी करती हैं, वे क्या उस सहृदय समाज के योग्य हैं, जिसका काव्य-बोध अत्यंत प्रखर और ग्रहणशील हैं? कहीं वे अपने इन आयोजनों के मार्फत ऐसे कवियों और कविताओं के प्रति वितृष्णा का माहौल तो नहीं पैदा करना चाहतीं और चाहती हैं कि कविता को लेकर एक सामाजिक अरुचि पैदा हो जाए? निश्चय ही उनकी ऐसी मंशा तो कदापि न होगी। तब क्या वे ऐसे सच्चे और खरे कवियों को आमंत्रित क्यों नहीं कर पातीं, जिनसे हिंदी कविता की सचमुच पहचान और रक्षा हो सके। इतना ही क्यों, वह विदग्ध और सहृदय समाज भी जिंदा रह पाने की सुविधा पा सके, जो उसका स्वाभाविक हक है। प्रश्न यह भी कि कविता क्या कोरा विचार-व्यापार है? या प्रथमतः एक बेहद जरूरी सांस्कृतिक-व्यापार जो लोक-जीवन में हमारे सामाजिक संवेदनों की रक्षा ही नहीं, पोषण भी करता है। कविता और साहित्य की जरूरत इसीलिए बराबर बनी रहती है। फिर भी, इस तरह तो नहीं।
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कला के पहले क्षण का निदर्शन करते हुए मुक्तिबोध का वाक्यांश है- 'जीवन का उत्कट तीव्र अनुभव-क्षण। ' आगे चल कर वे इसकी व्याख्या करते हुए कहते हैं- 'हां, यह ठीक है कि उसमें अनुभव-तत्त्व ही प्रधान है, किंतु, उसमें भी दर्शकत्व का कुछ-न-कुछ अंश जरूर रहता है। लेकिन भोक्तृत्व तिरोहित नहीं हो जाता। ' इसके बाद मुक्तिबोध जो बुनियादी और सबसे महत्त्वपूर्ण बात कहते हैं वह उन्हीं के शब्दों में- 'कलाकार का वास्तविक अनुभव और अनुभव की संवेदनाओं द्वारा प्रेरित फैंटेसी इन दोनों के बीच कल्पना का एक रोल होता है। वह रोल- वह भूमिका एक सृजनशील भूमिका है। वही कल्पना उसे वास्तविक अनुभव की व्यक्तिबद्ध पीड़ाओं से हटा कर, उस अनुभव को ही दृश्यवत करके, उसी अनुभव को नए रूप में उपस्थित कर देती है। किंतु, यह अनुभव दृश्यवत होते ही मूल अनुभव से पृथक होकर भिन्न हो जाता है। ' 'जीवन का उत्कट तीव्र अनुभव-क्षण' साथ ही उससे जन्म लेने वाली संवेदनाओं द्वारा प्रेरित फैंटेसी के बीच जो सबसे बड़ा रोल होता है वह कल्पना का होता है। मुक्तिबोध का ही कथन मानें तो सृजनशीलता का दारोमदार उसी कल्पना पर होता है। इसका मतलब यही है कि कल्पना एक संयोजिका शक्ति है। अगर वह न हो तो सारा शीराजा बिखर जाएगा। यह कल्पना क्या है? भारतीय काव्य-शास्त्र की पदावली में कल्पना शब्द तो मिलता नहीं। प्रतिभा संबंधी आधुनिक विवेचनों में कुछेक शोधकर्ताओं ने जरूर प्रतिभा शक्ति को सर्जक की कल्पना शक्ति कहा है। आचार्य शुक्ल ने तो अपनी आचार्य-भाषा में बगैर कोई लाग-लपेट लगाए कह दिया कि भावना या कल्पना एक ही बात है। इसलिए काव्य-वृहत्तर अर्थ में साहित्य एक भावयोग है। भावना, उपासना, ध्यान आदि शब्दों की याद दिलाते हुए वे फिर समझाने पर उतर आते हैं- जिस प्रकार भक्ति के लिए उपासना या ध्यान की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार और भावों के प्रवर्तन के लिए भी भावना या कल्पना अपेक्षित होती है। जिनकी भावना या कल्पना शिथिल या अशक्त होती है, किसी कविता या सरस उक्ति को पढ़-सुन कर उनके हृदय में मार्मिकता होते हुए भी वैसी अनुभूति नहीं होती। बात यह है कि उनके अंतःकरण में चटपट वह 'सजीव और स्पष्ट मूर्तिविधान' नहीं होता, जो भावों को परिचालित कर देता है। इसका मतलब यही कि कल्पना की एक और शक्ति भावों का परिचालन भी है। निष्कर्ष रूप में संयोजन और परिचालन। इस संयोजन व्यापार की व्याख्या करते हुए मुक्तिबोध कहते हैं- 'वही कल्पना उसे वास्तविक अनुभव की व्यक्तिबद्ध पीड़ाओं से हटा कर, उस अनुभव ही को दृश्यवत करके, उसी अनुभव को नए रूप में उपस्थित कर देती है। किंतु यह अनुभव दृश्यवत होते ही मूल अनुभव से पृथक होकर भिन्न हो जाता है। इस दृश्यवत उपस्थित और विस्तृत अनुभव या फैंटेसी में, अनुभविता अर्थात फैंटेसी का जनक-दर्शक, जीवन के नए-नए अर्थ ढूंढ़ने लगता है, अनुभव-प्रसूत फैंटेसी में जीवन के अर्थ खोजने और उसमें आनंद लेने की इस प्रक्रिया में ही जो प्रसन्न भावना पैदा होती है, वही एस्थेटिक एक्सपीरिएंस का मर्म है। ' आगे की बातों में उनके कहने का सार यह है कि यह सारा जिम्मा कल्पना अपने कंधों पर स्वाभाविक ढंग से उठा लेती है। तभी तो पाठक को नए-नए अर्थ-महत्त्व और अर्थ-संकेत प्राप्त होते जाते हैं। यही उसकी कलानुभूति है। प्रसंगवश, यहां यह विचारणीय है कि मुक्तिबोध काव्य-प्रक्रिया के अपने विवेचन-व्यापार में जिन पारिभाषिक पदों का व्यवहार कर रहे हैं वे क्या सर्वथा मौलिक हैं अथवा पश्चिम की काव्यशास्त्रीय पदावली से लिए गए हैं? प्रश्न यह भी है कि क्या भारतीय काव्यशास्त्र में इन बातों को व्यक्त करने के लिए शब्दों का अभाव है? तब भी जिसे वे 'ऐस्थेटिक एक्सपीरिएंस' कह उसे 'आनंद लेने की प्रक्रिया' कह रहे हैं, वह क्या वही नहीं है जो रस-व्याख्याकार भट्टनायक भोक्तृत्व व्यापार या अभिनवगुप्त साधारणीकरण व्यापार कह रहे हैं और जो आनंद-व्यापार ही है? कल्पना तत्त्व को तो शुक्ल जी भावना-व्यापार कह ही रहे हैं। भारतीय काव्य-शास्त्र की आचार्य परंपरा के लेखक डॉ. राधावल्लभ त्रिपाठी भी क्या इसी को भावकत्व व्यापार नहीं कह रहे? तब मुक्तिबोध को इनसे परे जाकर पारिभाषिक पदों की जरूरत क्यों महसूस हुई? जो भी हो, व्याख्याएं तो उनकी अपनी हैं और वे हम रचनाकारों की मदद भी करती हैं। इससे भी कहीं अधिक वे खुद कवि मुक्तिबोध के काव्य-व्यापार को समझने में हमारी मदद करती हैं। यह परखने में भी कि अति प्रचलित फैशनग्रस्त कविताओं वाले कवियों की भारी भीड़ और आवाजाही से हिंदी कविता का कितना उपकार हो रहा है? क्या वे सचमुच जीवन के तीव्र उत्कट क्षण की अनुभूतियों की उपज हैं? क्या उन्हें उस संयोजिका कल्पना शक्ति का सहारा मिल पाया है जिससे रचना सामूहिक सौंदर्य-व्यापार की परिणति तक पहुंच पाई है? इधर कई बार 'स्त्री की आवाज' और 'अति प्रतिष्ठित कवियों का पाठ' जैसे आयोजनों में बहैसियत श्रोता के रूप में शामिल होकर बार-बार इसी निराशापूर्ण मनोदशा में जाना पड़ा कि समकालीन काव्य-पाठ के आयोजनों में कितने भोथरे और निष्प्राण काव्य-बोध और मर्मज्ञता की जरूरत है। कैसी निरीह सामाजिकता की जैसे कि जरूरत न होने पर भी सामाजिक मजबूरी के चलते किसी की शव-यात्रा में जाना पड़े। इन दिनों केवल नेता होना नहीं, कवि होना भी काफी आसान हो गया है। पर नेता का कारोबार तो कुछेक दिनों के लिए चल भी जाता है, कवि का तो बिल्कुल नहीं चलता। मैं ऐसे अनेक कवियों को जानता हूं, जो कविता को भी एक व्यापार बनाए जगह-जगह घूम रहे हैं। कभी-कभी ऐसा भी लगता है कि बच्चन, बलवीर सिंह 'रंग' और नीरज को तो जनता बुलाती और सुनती रहती थी, पर साहित्यिक संस्थाएं अब जिन कवियों/ कवयित्रियों को बुला कर, सुप्रतिष्ठित आसन पर केवल बिठाती ही नहीं, खूब आवभगत भी करती हैं, वे क्या उस सहृदय समाज के योग्य हैं, जिसका काव्य-बोध अत्यंत प्रखर और ग्रहणशील हैं? कहीं वे अपने इन आयोजनों के मार्फत ऐसे कवियों और कविताओं के प्रति वितृष्णा का माहौल तो नहीं पैदा करना चाहतीं और चाहती हैं कि कविता को लेकर एक सामाजिक अरुचि पैदा हो जाए? निश्चय ही उनकी ऐसी मंशा तो कदापि न होगी। तब क्या वे ऐसे सच्चे और खरे कवियों को आमंत्रित क्यों नहीं कर पातीं, जिनसे हिंदी कविता की सचमुच पहचान और रक्षा हो सके। इतना ही क्यों, वह विदग्ध और सहृदय समाज भी जिंदा रह पाने की सुविधा पा सके, जो उसका स्वाभाविक हक है। प्रश्न यह भी कि कविता क्या कोरा विचार-व्यापार है? या प्रथमतः एक बेहद जरूरी सांस्कृतिक-व्यापार जो लोक-जीवन में हमारे सामाजिक संवेदनों की रक्षा ही नहीं, पोषण भी करता है। कविता और साहित्य की जरूरत इसीलिए बराबर बनी रहती है। फिर भी, इस तरह तो नहीं।
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देश में कोयले को तरल पेट्रोलियम बनाने की 6 से 8 अरब डॉलर की प्रतिष्ठित परियोजना की दौड़ में रिलायंस इंडस्ट्रीज पिछड़ गई है।
दक्षिण अफ्रीका के सासोल के साथ टाटा समूह के संयुक्त उद्यम और जिंदल स्टील ऐंड पावर ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) और गेल को पीछे छोड़ते हुए शार्टलिस्ट की गई कंपनियों की सूची में नाम दर्ज करा लिया है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि 22 कंपनियों के आवेदनों की जांच के बाद अंतर-मंत्रालय समूह टाटा और सासोल के संयुक्त उद्यम- स्टै्रटेजिक एनर्जी टेक्नोलॉजी सिस्टम्स लिमिटेड और जेएसपीएल को कोल टू लिक्विड (सीटीएल) की पायलट परियोजना देने की सिफारिश की है।
उल्लेखनीय है कि भारत में भारी मात्रा में कोयला पाया जाता है, इसलिए आयातित तेल पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए सीटीएल परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा था। इस परियोजना से कोयला भंडार के तरलीकरण से रोजाना 80,000 बैरल कच्चा तेल का उत्पादन किया जा सकेगा।
अंतर मंत्रालय समूह ने उड़ीसा में स्थापित की जाने वाली इस परियोजना के लिए जिन 22 कंपनियों के आवेदन की जांच की थी, उसमें आरआईएल, अनिल अंबानी समूह की रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, सेल, गेल, इंडियन आयल, जीएमआर इन्फ्रास्ट्रक्चर और वेदांता शामिल हैं।
अधिकारी ने कहा कि आरआईएल के प्रस्ताव को इसलिए स्वीकार नहीं किया गया, क्यो कि इसने प्रत्यक्ष तरलीकरण की प्रक्रिया की पेशकश की थी जिसे स्वीकार नहीं किया गया।
गेल और जीएमआर ने दस्तावेजों के साथ किसी प्रौद्योगिकी प्रदाता के साथ समझौतों की प्रति नहीं जमा कराई थी, जो आवश्यक थी।
उन्होंने कहा कि दोनों कंपनियो ने हालांकि प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के पत्र की प्रति आईएमजी को तब सौंपी थी, जबकि उसने रिपोर्ट तैयार कर ली थी। इधर, सेल ने अपना आवेदन वापस ले लिया जबकि वेदांता ने कोई अतिरिक्त सूचना नहीं दी।
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देश में कोयले को तरल पेट्रोलियम बनाने की छः से आठ अरब डॉलर की प्रतिष्ठित परियोजना की दौड़ में रिलायंस इंडस्ट्रीज पिछड़ गई है। दक्षिण अफ्रीका के सासोल के साथ टाटा समूह के संयुक्त उद्यम और जिंदल स्टील ऐंड पावर ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और गेल को पीछे छोड़ते हुए शार्टलिस्ट की गई कंपनियों की सूची में नाम दर्ज करा लिया है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि बाईस कंपनियों के आवेदनों की जांच के बाद अंतर-मंत्रालय समूह टाटा और सासोल के संयुक्त उद्यम- स्टै्रटेजिक एनर्जी टेक्नोलॉजी सिस्टम्स लिमिटेड और जेएसपीएल को कोल टू लिक्विड की पायलट परियोजना देने की सिफारिश की है। उल्लेखनीय है कि भारत में भारी मात्रा में कोयला पाया जाता है, इसलिए आयातित तेल पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए सीटीएल परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा था। इस परियोजना से कोयला भंडार के तरलीकरण से रोजाना अस्सी,शून्य बैरल कच्चा तेल का उत्पादन किया जा सकेगा। अंतर मंत्रालय समूह ने उड़ीसा में स्थापित की जाने वाली इस परियोजना के लिए जिन बाईस कंपनियों के आवेदन की जांच की थी, उसमें आरआईएल, अनिल अंबानी समूह की रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, सेल, गेल, इंडियन आयल, जीएमआर इन्फ्रास्ट्रक्चर और वेदांता शामिल हैं। अधिकारी ने कहा कि आरआईएल के प्रस्ताव को इसलिए स्वीकार नहीं किया गया, क्यो कि इसने प्रत्यक्ष तरलीकरण की प्रक्रिया की पेशकश की थी जिसे स्वीकार नहीं किया गया। गेल और जीएमआर ने दस्तावेजों के साथ किसी प्रौद्योगिकी प्रदाता के साथ समझौतों की प्रति नहीं जमा कराई थी, जो आवश्यक थी। उन्होंने कहा कि दोनों कंपनियो ने हालांकि प्रौद्योगिकी प्रदाताओं के पत्र की प्रति आईएमजी को तब सौंपी थी, जबकि उसने रिपोर्ट तैयार कर ली थी। इधर, सेल ने अपना आवेदन वापस ले लिया जबकि वेदांता ने कोई अतिरिक्त सूचना नहीं दी।
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PATNA : दो सीटों पर होनेवाले उप चुनावों में राजद के स्टार प्रचारकों की लिस्ट से नाम कटने पर लालू के बड़े लाल तेज प्रताप निराशा हैं। उन्होंने अपनी यह निराशा ट्विटर पर शायराना अंदाज में जाहिर की है, साथ ही रोते हुए इमोजी भी जोड़ा है। बता दें कि पिछले दिनों तेज प्रताप को पार्टी से निकाले जाने की बात भी सामने आ चुकी है। हालांकि इस पर अधिकारिक बयान नहीं दिया गया है।
स्टार प्रचारकों में तेज प्रताप के साथ राबड़ी देवी और मीसा भारती का नाम भी हटा दिया गया है। जिसको लेकर तेज प्रताप ने ट्विटर पर लिखा है कि "ऐ अँधेरे देख ले मुँह तेरा काला हो गया माँ ने आँखें खोल दीं घर में उजाला हो गया... मेरा नाम रहता ना रहता मां और दीदी का नाम रहना चाहिए था... इस गलती के लिए बिहार की महिलाएं कभी माफ नहीं करेगीं, दशहरा में हम मां की ही अराधना करतें हैं ना जी..." साफ जाहिर है कि जिस प्रकार राबड़ी देवी और मीसा भारती को तेजस्वी की नेतृत्ववाली राजद ने स्टार प्रचारकों की लिस्ट से बाहर किया है, वह बात तेज प्रताप को पसंद नहीं आई है।
तेज प्रताप ने मुनव्वर राणा की शायरी की दो पंक्तियों से ना जाने कितनों पर वार कर गई। साथ ही उन्होंने ये भी बता दिया कि उनके घर में सब कुछ ठीक नहीं है। स्टार प्रचारकों में नाम ना होने से आहत तेज प्रताप ने 24 घंटे के बाद सोशल मीडिया पर अपना रिएक्शन दिया है। इस पोस्ट के साथ उन्होंने रोता हुआ इमोजी भी डाला है।
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PATNA : दो सीटों पर होनेवाले उप चुनावों में राजद के स्टार प्रचारकों की लिस्ट से नाम कटने पर लालू के बड़े लाल तेज प्रताप निराशा हैं। उन्होंने अपनी यह निराशा ट्विटर पर शायराना अंदाज में जाहिर की है, साथ ही रोते हुए इमोजी भी जोड़ा है। बता दें कि पिछले दिनों तेज प्रताप को पार्टी से निकाले जाने की बात भी सामने आ चुकी है। हालांकि इस पर अधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। स्टार प्रचारकों में तेज प्रताप के साथ राबड़ी देवी और मीसा भारती का नाम भी हटा दिया गया है। जिसको लेकर तेज प्रताप ने ट्विटर पर लिखा है कि "ऐ अँधेरे देख ले मुँह तेरा काला हो गया माँ ने आँखें खोल दीं घर में उजाला हो गया... मेरा नाम रहता ना रहता मां और दीदी का नाम रहना चाहिए था... इस गलती के लिए बिहार की महिलाएं कभी माफ नहीं करेगीं, दशहरा में हम मां की ही अराधना करतें हैं ना जी..." साफ जाहिर है कि जिस प्रकार राबड़ी देवी और मीसा भारती को तेजस्वी की नेतृत्ववाली राजद ने स्टार प्रचारकों की लिस्ट से बाहर किया है, वह बात तेज प्रताप को पसंद नहीं आई है। तेज प्रताप ने मुनव्वर राणा की शायरी की दो पंक्तियों से ना जाने कितनों पर वार कर गई। साथ ही उन्होंने ये भी बता दिया कि उनके घर में सब कुछ ठीक नहीं है। स्टार प्रचारकों में नाम ना होने से आहत तेज प्रताप ने चौबीस घंटाटे के बाद सोशल मीडिया पर अपना रिएक्शन दिया है। इस पोस्ट के साथ उन्होंने रोता हुआ इमोजी भी डाला है।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
जेरोम ब्रूनर (Jerome Seymour Bruner; 1 अक्टूबर, 1915 - 5 जून, 2016) अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे जिन्होने मानव के संज्ञानात्मक मनोविज्ञान तथा संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धान्त (cognitive learning theory) पर उल्लेखनीय योगदान दिया। वे न्यू यॉर्क के यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ ला में वरिष्ट अनुसन्धान फेलो थे। उन्होने १९३७ में ड्यूक विश्वविद्यालय से बीए किया और १९४१ में हारवर्ड विश्वविद्यालय से पी एच डी की। . सिंगापुर सिटी सेन्टर का लघु प्रारूप (मॉडल) युद्ध के दृष्य का प्रारूप - आस्ट्रेलियायी युद्ध स्मारक, कैन्बरा किसी वस्तु या प्रक्रम के वास्तविक आकार से बड़ा या छोटा आकार की प्रतिकृति उस वस्तु या प्रक्रम की भौतिक प्रतिरूप या भौतिक मॉडल (physical model) कहलाती है। जिस वस्तु का (भौतिक) मॉडल बनाया जाता है उसका वास्तविक आकार बहुत ही छोटा (जैसे-परमाणु) या बहुत बड़ा (जैसे- सौर तंत्र) हो सकता है; अथवा वास्तविक आकार के बजाय उसका लघु आकार का मॉडल बनाकर परीक्षण करना कम खर्चीला हो सकता है। पहले भौतिक मॉडल का निर्माण बहुत प्रचलित था किन्तु वर्तमान समय में कम्प्यूटर और सिमुलेशन सॉफ्टवेयर की सहायता से गणितीय मॉडल बनाकर सिमुलेशन करना अधिक सस्ता, सरल, सुरक्षित एवं सुविधाजनक हो गया है। भौतिक मॉडल का उपयोग किसी जटिल वस्तु, तन्त्र या प्रक्रिया के देखने (visualization) के लिये भी किया जाता है/था किन्तु आजकल कम्प्यूटर ग्राफिक्स की सहायता से भांति-भांति से और अलग-अलग कोणों से किसी वस्तु के चित्र को देखा और समझा जा सकता है। .
जेरोम ब्रूनर और भौतिक मॉडल आम में 0 बातें हैं (यूनियनपीडिया में)।
जेरोम ब्रूनर 8 संबंध है और भौतिक मॉडल 1 है। वे आम 0 में है, समानता सूचकांक 0.00% है = 0 / (8 + 1)।
यह लेख जेरोम ब्रूनर और भौतिक मॉडल के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। जेरोम ब्रूनर अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे जिन्होने मानव के संज्ञानात्मक मनोविज्ञान तथा संज्ञानात्मक अधिगम सिद्धान्त पर उल्लेखनीय योगदान दिया। वे न्यू यॉर्क के यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ ला में वरिष्ट अनुसन्धान फेलो थे। उन्होने एक हज़ार नौ सौ सैंतीस में ड्यूक विश्वविद्यालय से बीए किया और एक हज़ार नौ सौ इकतालीस में हारवर्ड विश्वविद्यालय से पी एच डी की। . सिंगापुर सिटी सेन्टर का लघु प्रारूप युद्ध के दृष्य का प्रारूप - आस्ट्रेलियायी युद्ध स्मारक, कैन्बरा किसी वस्तु या प्रक्रम के वास्तविक आकार से बड़ा या छोटा आकार की प्रतिकृति उस वस्तु या प्रक्रम की भौतिक प्रतिरूप या भौतिक मॉडल कहलाती है। जिस वस्तु का मॉडल बनाया जाता है उसका वास्तविक आकार बहुत ही छोटा या बहुत बड़ा हो सकता है; अथवा वास्तविक आकार के बजाय उसका लघु आकार का मॉडल बनाकर परीक्षण करना कम खर्चीला हो सकता है। पहले भौतिक मॉडल का निर्माण बहुत प्रचलित था किन्तु वर्तमान समय में कम्प्यूटर और सिमुलेशन सॉफ्टवेयर की सहायता से गणितीय मॉडल बनाकर सिमुलेशन करना अधिक सस्ता, सरल, सुरक्षित एवं सुविधाजनक हो गया है। भौतिक मॉडल का उपयोग किसी जटिल वस्तु, तन्त्र या प्रक्रिया के देखने के लिये भी किया जाता है/था किन्तु आजकल कम्प्यूटर ग्राफिक्स की सहायता से भांति-भांति से और अलग-अलग कोणों से किसी वस्तु के चित्र को देखा और समझा जा सकता है। . जेरोम ब्रूनर और भौतिक मॉडल आम में शून्य बातें हैं । जेरोम ब्रूनर आठ संबंध है और भौतिक मॉडल एक है। वे आम शून्य में है, समानता सूचकांक शून्य.शून्य% है = शून्य / । यह लेख जेरोम ब्रूनर और भौतिक मॉडल के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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नई दिल्ली, आगामी राष्ट्रपति चुनाव के लिए बुधवार को पहले दिन 11 उम्मीदवारों ने नामांकन किया. इनमें से एक उम्मीदवार का पर्चा उचित दस्तावेज़ न होने के चलते खारिज कर दिया दया. नामांकन करने वालों में लालू प्रसाद यादव नामक शख्स भी शामिल है. 18 जूलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के लिए बुधवार को अधिसूचना जारी की गई, इसी के साथ देश में राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है. देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के चुनाव के लिए उम्मीदवार 29 जून तक अपना नामांकन पर्चा दाखिल कर सकते हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, संसदीय सूत्रों ने कहा कि बिहार के सारण से लालू प्रसाद यादव नाम का एक व्यक्ति भी नामांकन दाखिल करने वालों में शामिल है. वहीं, एक उम्मीदवार का नामांकन इसलिए खारिज कर दिया गया क्योंकि उस व्यक्ति ने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के लिए वर्तमान मतदाता सूची में अपना नाम दिखाने वाले पेपर की प्रमाणित प्रति संलग्न नहीं की थी, जिससे यह साबित होता है कि उम्मीदवार एक मतदाता के रूप में पंजीकृत है, इसलिए उसका नामांकन खारिज कर दिया गे.
बुधवार को नामांकन दाखिल करने वाले उम्मीदवार दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से थे, बता दें कि देश के नए राष्ट्रपति का चुनाव 18 जुलाई को होना है, जिसमें 4,809 वोट डाले जाएंगे. और 21 जुलाई को मतों की गिनती की जाएगी, 29 जून तक नामांकन करने की तारीख रहेगी. 30 जून तक इनकी स्क्रूटनी होगी और उम्मीदवार 2 जुलाई तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे.
बता दें, राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनज़र बुधवार को ममता बनर्जी ने विपक्ष की बैठक बुलाई थी, इस बैठक में 17 राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए थे.
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नई दिल्ली, आगामी राष्ट्रपति चुनाव के लिए बुधवार को पहले दिन ग्यारह उम्मीदवारों ने नामांकन किया. इनमें से एक उम्मीदवार का पर्चा उचित दस्तावेज़ न होने के चलते खारिज कर दिया दया. नामांकन करने वालों में लालू प्रसाद यादव नामक शख्स भी शामिल है. अट्ठारह जूलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के लिए बुधवार को अधिसूचना जारी की गई, इसी के साथ देश में राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है. देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के चुनाव के लिए उम्मीदवार उनतीस जून तक अपना नामांकन पर्चा दाखिल कर सकते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, संसदीय सूत्रों ने कहा कि बिहार के सारण से लालू प्रसाद यादव नाम का एक व्यक्ति भी नामांकन दाखिल करने वालों में शामिल है. वहीं, एक उम्मीदवार का नामांकन इसलिए खारिज कर दिया गया क्योंकि उस व्यक्ति ने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के लिए वर्तमान मतदाता सूची में अपना नाम दिखाने वाले पेपर की प्रमाणित प्रति संलग्न नहीं की थी, जिससे यह साबित होता है कि उम्मीदवार एक मतदाता के रूप में पंजीकृत है, इसलिए उसका नामांकन खारिज कर दिया गे. बुधवार को नामांकन दाखिल करने वाले उम्मीदवार दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश से थे, बता दें कि देश के नए राष्ट्रपति का चुनाव अट्ठारह जुलाई को होना है, जिसमें चार,आठ सौ नौ वोट डाले जाएंगे. और इक्कीस जुलाई को मतों की गिनती की जाएगी, उनतीस जून तक नामांकन करने की तारीख रहेगी. तीस जून तक इनकी स्क्रूटनी होगी और उम्मीदवार दो जुलाई तक अपना नामांकन वापस ले सकेंगे. बता दें, राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनज़र बुधवार को ममता बनर्जी ने विपक्ष की बैठक बुलाई थी, इस बैठक में सत्रह राजनीतिक दलों के नेता शामिल हुए थे.
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मुख्य सचिव श्री सुनील कुजूर ने आज यहां मंत्रालय में विधानसभा की कार्रवाईयों त्वरित क्रियान्वयन तथा सत्र पूर्व तैयारियों के संबंध में जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा का सत्र आगामी 12 जुलाई से 19 जुलाई तक आयोजित होगा।
इस दौरान पंचायत एवं विकास विभाग, गृह विभाग, वित्त विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और नगरीय प्रशासन विभाग के सात विधेयकों को संशोधन के लिए प्रस्तुत किए जायेंगे। मुख्य सचिव ने इस संबंध में सभी प्रक्रिया समय पूर्व पूर्ण करने के निर्देश दिए है।
बता दें कि विधानसभा सत्र के दौरान शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों के अवकाश पर (अपरिहार्य स्थिति को छोड़कर) रोक लगा दी गयी है। उन्होंने प्रत्येक विभागों विधानसभा प्रकोष्ठ का गठन करने और नोडल अधिकारियों की तैनाती के निर्देश दिए है।
सत्र के दौरान होने वाले चर्चा के संभावित विषयों की समस्त जानकारियां संकलित करने के निर्देश दिए गए है। मुख्य सचिव ने विधानसभा सत्र की कार्रवाई के दौरान विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित होने कहा है।
विधानसभा सत्र के दौरान कानून एवं शांति व्यवस्था बनाएं रखने के निर्देश दिए गए है। बैठक में अपर मुख्य सचिव के. डी. पी. राव, सी. के. खेतान, आर. पी. मण्डल, प्रमुख सचिव रविशंकर शर्मा, मनोज कुमार पिंगवा, गौरव द्विवेदी, सचिव सर्वश्री सुबोध सिंह, परदेशी सिद्धार्थ कोमल, निहारिका बारिक, शहला निगार, सुरेन्द्र जायसवाल, डी. डी. सिंह, डाॅ. कमलप्रीत सिंह, हेमंत पहारे, श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, अविनाश चम्पावत, रीता शांडिल्य, विशेष सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल, श्री अन्बलगन पी. , पुलिस विभाग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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मुख्य सचिव श्री सुनील कुजूर ने आज यहां मंत्रालय में विधानसभा की कार्रवाईयों त्वरित क्रियान्वयन तथा सत्र पूर्व तैयारियों के संबंध में जानकारी ली। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ विधानसभा का सत्र आगामी बारह जुलाई से उन्नीस जुलाई तक आयोजित होगा। इस दौरान पंचायत एवं विकास विभाग, गृह विभाग, वित्त विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और नगरीय प्रशासन विभाग के सात विधेयकों को संशोधन के लिए प्रस्तुत किए जायेंगे। मुख्य सचिव ने इस संबंध में सभी प्रक्रिया समय पूर्व पूर्ण करने के निर्देश दिए है। बता दें कि विधानसभा सत्र के दौरान शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों के अवकाश पर रोक लगा दी गयी है। उन्होंने प्रत्येक विभागों विधानसभा प्रकोष्ठ का गठन करने और नोडल अधिकारियों की तैनाती के निर्देश दिए है। सत्र के दौरान होने वाले चर्चा के संभावित विषयों की समस्त जानकारियां संकलित करने के निर्देश दिए गए है। मुख्य सचिव ने विधानसभा सत्र की कार्रवाई के दौरान विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित होने कहा है। विधानसभा सत्र के दौरान कानून एवं शांति व्यवस्था बनाएं रखने के निर्देश दिए गए है। बैठक में अपर मुख्य सचिव के. डी. पी. राव, सी. के. खेतान, आर. पी. मण्डल, प्रमुख सचिव रविशंकर शर्मा, मनोज कुमार पिंगवा, गौरव द्विवेदी, सचिव सर्वश्री सुबोध सिंह, परदेशी सिद्धार्थ कोमल, निहारिका बारिक, शहला निगार, सुरेन्द्र जायसवाल, डी. डी. सिंह, डाॅ. कमलप्रीत सिंह, हेमंत पहारे, श्रीमती रीना बाबा साहेब कंगाले, अविनाश चम्पावत, रीता शांडिल्य, विशेष सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल, श्री अन्बलगन पी. , पुलिस विभाग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अशोक जुनेजा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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रेनाल्ड ने शीघ्रता से कहा - "ओह, इस बात का मुझे बड़ा खेद है कि मैं उन्हें तकलीफ़ पहुंचाई ! मैं उनके स्वास्थ्य की मंगल कामना करता हूँ ।" - इतना कह कर वह कमरे से बाहर चला
गया ।
थामस अपने निवासस्थान पर लौट गया। टपकाम्बे ने सलाह दी कि आज रात को हमें ब्रिस्टल में ही रहना चाहिए, परन्तु थामस ने निश्चयात्मक स्वर में कहा कि हम लोग अभी भी लौट चलेंगे । थामस का विचार था कि आज हम लोग फ़ारसपार्क पहुंच जायें ताकि कल रेनाल्ड के हिण्टौक पहुंचने से पूर्व ही हम वहाँ पहुंच सकें । अतः शाम के पांच बजे वे फ़ाल्सपार्क के लिए वापिस लौट चले । यात्रा बिल्कुल नौरस रही। तेज हवा चल रही थी । ऋतु में कोई आकर्षण नहीं था। दोनों चुपचाप चले जा रहे थे । टपकाम्बे इस सम्पूर्ण घटना पर विचार कर रहा था । पिछले पांच सालों में उस के मालिक में कितना परिवर्तन आगया है । वह कितना बीमार और उदास स्वभाव का बन गया है। ऐसी के विवाह से लेकर अब तक की सम्पूर्ण घटनायें एक एक कर के उस के सामने आ रही थीं।
सायंकाल का अन्धकार क्रमशः घना होने लगा। सहसा टपकाम्बे को प्रतीत हुआ कि उस के मालिक को घोड़े की पीठ पर बड़ा कष्ट अनुभव हो रहा है। वह अपना घोड़ा बढ़ा कर उस के समानान्तर ले आया। टपकाम्बे ने पूछा- "हज़ूर क्या बहुत तकलीफ़ अनुभव हो रही है ?"
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रेनाल्ड ने शीघ्रता से कहा - "ओह, इस बात का मुझे बड़ा खेद है कि मैं उन्हें तकलीफ़ पहुंचाई ! मैं उनके स्वास्थ्य की मंगल कामना करता हूँ ।" - इतना कह कर वह कमरे से बाहर चला गया । थामस अपने निवासस्थान पर लौट गया। टपकाम्बे ने सलाह दी कि आज रात को हमें ब्रिस्टल में ही रहना चाहिए, परन्तु थामस ने निश्चयात्मक स्वर में कहा कि हम लोग अभी भी लौट चलेंगे । थामस का विचार था कि आज हम लोग फ़ारसपार्क पहुंच जायें ताकि कल रेनाल्ड के हिण्टौक पहुंचने से पूर्व ही हम वहाँ पहुंच सकें । अतः शाम के पांच बजे वे फ़ाल्सपार्क के लिए वापिस लौट चले । यात्रा बिल्कुल नौरस रही। तेज हवा चल रही थी । ऋतु में कोई आकर्षण नहीं था। दोनों चुपचाप चले जा रहे थे । टपकाम्बे इस सम्पूर्ण घटना पर विचार कर रहा था । पिछले पांच सालों में उस के मालिक में कितना परिवर्तन आगया है । वह कितना बीमार और उदास स्वभाव का बन गया है। ऐसी के विवाह से लेकर अब तक की सम्पूर्ण घटनायें एक एक कर के उस के सामने आ रही थीं। सायंकाल का अन्धकार क्रमशः घना होने लगा। सहसा टपकाम्बे को प्रतीत हुआ कि उस के मालिक को घोड़े की पीठ पर बड़ा कष्ट अनुभव हो रहा है। वह अपना घोड़ा बढ़ा कर उस के समानान्तर ले आया। टपकाम्बे ने पूछा- "हज़ूर क्या बहुत तकलीफ़ अनुभव हो रही है ?"
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Jamshedpur (Ashok kumar) : मुसाबनी पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि महिलायें ही शराब की बिक्री कर रही है. इसके बाद पुलिस टीम का गठन कर अवैध शराब के साथ महिला को गिरफ्तार किया गया. यह छापेमारी राजीव चौक सुरदा में महिला के आवास पर की गयी. विजय लामा के घर पर हुई छापेमारी में 79 बोतल शराब बरामद किया गया. साथ ही महिला को भी धर-दबोचा गया.
सूचना पर मुसाबनी पुलिस ने पड़ोस के एक महिला के आवास पर भी छापेमारी की. इस दौरान महिला पहले से ही फरार हो चुकी थी, लेकिन वहां से पुलिस ने 63 पीस बीयर का बोतल बरामद किया. जब्त सामानों में 750 एमएल की 63 बोतल, 759 एमएल की किंग गोल्ड शराब की 56 बोतल, 180 एमएल मैकडोवेल्स की 16 बोतल और किंगफीसर बीयर की 7 बोतल बरामद की गयी. छापेमारी टीम में मुसाबनी थाना प्रभारी राजा दिलावर, एसआइ अंकित कुमार, एएसआइ मोहिब हुसैन, आरक्षी मोनिका टोप्पो आदि शामिल थे.
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Jamshedpur : मुसाबनी पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि महिलायें ही शराब की बिक्री कर रही है. इसके बाद पुलिस टीम का गठन कर अवैध शराब के साथ महिला को गिरफ्तार किया गया. यह छापेमारी राजीव चौक सुरदा में महिला के आवास पर की गयी. विजय लामा के घर पर हुई छापेमारी में उन्यासी बोतल शराब बरामद किया गया. साथ ही महिला को भी धर-दबोचा गया. सूचना पर मुसाबनी पुलिस ने पड़ोस के एक महिला के आवास पर भी छापेमारी की. इस दौरान महिला पहले से ही फरार हो चुकी थी, लेकिन वहां से पुलिस ने तिरेसठ पीस बीयर का बोतल बरामद किया. जब्त सामानों में सात सौ पचास एमएल की तिरेसठ बोतल, सात सौ उनसठ एमएल की किंग गोल्ड शराब की छप्पन बोतल, एक सौ अस्सी एमएल मैकडोवेल्स की सोलह बोतल और किंगफीसर बीयर की सात बोतल बरामद की गयी. छापेमारी टीम में मुसाबनी थाना प्रभारी राजा दिलावर, एसआइ अंकित कुमार, एएसआइ मोहिब हुसैन, आरक्षी मोनिका टोप्पो आदि शामिल थे.
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दीपिका पादुकोण को बिना ऑडिशन के ही मिल गई थी पहली फिल्म, क्या पिता के नाम का मिला था फायदा?
दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) ने अपने अब तक के करियर में एक से एक नायाब फिल्मों में काम किया है. एक्ट्रेस को खूबसूरती के साथ साथ शानदार एक्टिंग के लिए जाना जाता है.
बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone)करोड़ों दिलों पर राज करती हैं. दीपिका ने फिल्म ओम शांति ओम से अपने करियर की शुरुआत की थी. दीपिका की ये पहली ही फिल्म पर्दे पर सुपरहिट हुई थी. फिल्म में वह शाहरुख खान के साथ नजर आई थीं.आपको बता दें कि दीपिका को अपनी पहली फिल्म पाने के लिए न तो कोई ऑडिशन देना पड़ा और न ही किसी स्क्रीन टेस्ट से गुजरना पड़ा था.
दीपिका पादुकोण ने अपने अब तक के करियर में एक से एक नायाब फिल्मों में काम किया है. एक्ट्रेस को खूबसूरती के साथ साथ शानदार एक्टिंग के लिए जाना जाता है. ओम शांति ओम के लिए बिना ऑडिशन के ही फराह और शाहरुख (Shahrukh Khan) उन्हें फिल्म की हीरोइन मान बैठे थे.
एबीपी न्यूज की खबर के अनुसार पहली ही फिल्म से फैंस को दीवाना करने वाली दीपिका पादुकोण ने एक इंटरव्यू में अपनी फिल्मी जर्नी से जुड़ी कई सारी बातें शेयर की थीं. खबर के अनुसार दीपिका ने अपने अपनी पहली फिल्म पर कुछ खुलासे किए. एक्ट्रेस ने बताया है कि वह फिल्मी दुनिया से पूरी तरह से अंजान थीं. उनको कैमरा फेस हो या फिर डायलॉग डिलिवरी, उन्हें कई ऐसी बातें फिल्म से जुड़ी नहीं पता थीं.
लेकिन एक्ट्रेस के अनुसार डायरेक्टर फराह खान भी उन पर भरोसा था और उन पर जरा भी डाउट नहीं था कि वे फिल्म में काम नहीं कर पाएंगी. दीपिका ने बताया कि न्यूकमर होने के बावजूद फिल्म के लिए उनका न तो ऑडिशन लिया गया और न ही स्क्रीन टेस्ट. दीपिका ने बताया कि फिल्म में उनकी शाहरुख ने भी काफी मदद की थी.
आपको बता दें कि दीपिका पादुकोण भले फिल्मों के लिए नई हों लेकिन वह एक प्रसिद्ध परिवार से आती हैं. दीपिका का पिता प्रकाश पादुकोण इंडियन बैडमिंटन के एक बड़े प्लेयर रहे हैं. ऐसे में दीपिका को हो सकते है पिता के नाम का भी फायदा मिला हो हालांकि हम इस पर मुहर नहीं नहीं लगा रहे हैं.
दीपिका पादुकोण को फैंस ने आखिरी बार मेघना गुलजार की फिल्म धपाक में देखा था. फिल्म में दीपिका के अपोजिट विक्रांस मैसी नजर आए थे. फिल्म भले पर्दे पर ना चली हो लेकिन दीपिका की एक्टिंग को फिल्म में फैंस ने काफी पसंद किया था. फिलहाल दीपिका जल्द ही पति रणवीर सिंह के साथ शादी के बाद पहली बार फिल्म 83 में नजर आने वाली हैं. इस फिल्म का फैंस को काफी इंतजार है.
यह भी पढ़ें- जाह्नवी कपूर का बिकिनी लुक हुआ वायरल, जानिए क्यों फैंस के सामने एक्ट्रेस ने पेश की सफाई?
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दीपिका पादुकोण को बिना ऑडिशन के ही मिल गई थी पहली फिल्म, क्या पिता के नाम का मिला था फायदा? दीपिका पादुकोण ने अपने अब तक के करियर में एक से एक नायाब फिल्मों में काम किया है. एक्ट्रेस को खूबसूरती के साथ साथ शानदार एक्टिंग के लिए जाना जाता है. बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण करोड़ों दिलों पर राज करती हैं. दीपिका ने फिल्म ओम शांति ओम से अपने करियर की शुरुआत की थी. दीपिका की ये पहली ही फिल्म पर्दे पर सुपरहिट हुई थी. फिल्म में वह शाहरुख खान के साथ नजर आई थीं.आपको बता दें कि दीपिका को अपनी पहली फिल्म पाने के लिए न तो कोई ऑडिशन देना पड़ा और न ही किसी स्क्रीन टेस्ट से गुजरना पड़ा था. दीपिका पादुकोण ने अपने अब तक के करियर में एक से एक नायाब फिल्मों में काम किया है. एक्ट्रेस को खूबसूरती के साथ साथ शानदार एक्टिंग के लिए जाना जाता है. ओम शांति ओम के लिए बिना ऑडिशन के ही फराह और शाहरुख उन्हें फिल्म की हीरोइन मान बैठे थे. एबीपी न्यूज की खबर के अनुसार पहली ही फिल्म से फैंस को दीवाना करने वाली दीपिका पादुकोण ने एक इंटरव्यू में अपनी फिल्मी जर्नी से जुड़ी कई सारी बातें शेयर की थीं. खबर के अनुसार दीपिका ने अपने अपनी पहली फिल्म पर कुछ खुलासे किए. एक्ट्रेस ने बताया है कि वह फिल्मी दुनिया से पूरी तरह से अंजान थीं. उनको कैमरा फेस हो या फिर डायलॉग डिलिवरी, उन्हें कई ऐसी बातें फिल्म से जुड़ी नहीं पता थीं. लेकिन एक्ट्रेस के अनुसार डायरेक्टर फराह खान भी उन पर भरोसा था और उन पर जरा भी डाउट नहीं था कि वे फिल्म में काम नहीं कर पाएंगी. दीपिका ने बताया कि न्यूकमर होने के बावजूद फिल्म के लिए उनका न तो ऑडिशन लिया गया और न ही स्क्रीन टेस्ट. दीपिका ने बताया कि फिल्म में उनकी शाहरुख ने भी काफी मदद की थी. आपको बता दें कि दीपिका पादुकोण भले फिल्मों के लिए नई हों लेकिन वह एक प्रसिद्ध परिवार से आती हैं. दीपिका का पिता प्रकाश पादुकोण इंडियन बैडमिंटन के एक बड़े प्लेयर रहे हैं. ऐसे में दीपिका को हो सकते है पिता के नाम का भी फायदा मिला हो हालांकि हम इस पर मुहर नहीं नहीं लगा रहे हैं. दीपिका पादुकोण को फैंस ने आखिरी बार मेघना गुलजार की फिल्म धपाक में देखा था. फिल्म में दीपिका के अपोजिट विक्रांस मैसी नजर आए थे. फिल्म भले पर्दे पर ना चली हो लेकिन दीपिका की एक्टिंग को फिल्म में फैंस ने काफी पसंद किया था. फिलहाल दीपिका जल्द ही पति रणवीर सिंह के साथ शादी के बाद पहली बार फिल्म तिरासी में नजर आने वाली हैं. इस फिल्म का फैंस को काफी इंतजार है. यह भी पढ़ें- जाह्नवी कपूर का बिकिनी लुक हुआ वायरल, जानिए क्यों फैंस के सामने एक्ट्रेस ने पेश की सफाई?
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सऊदी अरबः क्या गाड़ी चलाना आतंकवाद है?
गाड़ी चलाने के लिए सउदी अरब की दो महिलाओं पर आतंकवाद निरोधी अदालत में मुकदमा चलेगा. इस बारे में सामाजिक कार्यकर्ताओँ ने जानकारी दी है.
25 साल की लुजैन अल हथलौल और 33 साल की मायसा अल अमौदी करीब एक महीने से क़ैद में हैं. देश में महिला ड्राइवरों पर रोक है और इन दोनों ने इसे ना मान कर गाड़ी चलाई.
गुरुवार को देश के पूर्वी इलाक़े अल अहसा की एक अदालत ने यह आदेश दिया कि इन महिलाओं पर रियाद की उस अदालत में मुकदमा चलाया जाए जो आतंकवादी मामलों को देखती है.
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बताया है कि दोनों महिलाएं इस आदेश के खिलाफ अपील करेंगी.
सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक इन महिलाओं के मुकदमे को सोशल मीडिया में प्रतिक्रिया जताने पर दूसरी अदालत में भेजा गया है ना कि गाड़ी चलाने के लिए.
सऊदी अरब दुनिया में अकेला देश है जहां महिलाओं के गाड़ी चलाने पर पाबंदी है.
तकनीकी रूप से महिलाओं का गाड़ी चलाना गैरकानूनी नहीं है लेकिन यहां ड्राइविंग लाइसेंस केवल पुरुषों को ही दिए जाते हैं. गाड़ी चलाने वाली महिलाओं पर ज़ुर्माना लगता है और पुलिस उन्हें गिरफ़्तार कर लेती है.
सऊदी अरब की महिलाएं इस रोक को हटाने के लिए कई अभियान चला रही हैं. सोशल मीडिया पर भी खूब बहस हो रही है.
समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक लुजैन अल हथलौल को 1 दिसंबर को गाड़ी चलाकर देश की सीमा में दाखिल होते वक्त गिरफ़्तार किया गया. पेशे से पत्रकार अलमाउदी को तब गिरफ़्तार किया गया जब वो हथलौल के समर्थन में गाड़ी चलाते हुए सीमा पर जा पहुंची.
दोनों महिलाओं को ट्विटर पर बड़ी संख्या में लोग फॉलो करते हैं. हथलौल ने ट्विटर पर लोगों को बताया कि उन्हें सऊदी सीमा पर देश में घुसने के लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ा रहा है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं. )
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सऊदी अरबः क्या गाड़ी चलाना आतंकवाद है? गाड़ी चलाने के लिए सउदी अरब की दो महिलाओं पर आतंकवाद निरोधी अदालत में मुकदमा चलेगा. इस बारे में सामाजिक कार्यकर्ताओँ ने जानकारी दी है. पच्चीस साल की लुजैन अल हथलौल और तैंतीस साल की मायसा अल अमौदी करीब एक महीने से क़ैद में हैं. देश में महिला ड्राइवरों पर रोक है और इन दोनों ने इसे ना मान कर गाड़ी चलाई. गुरुवार को देश के पूर्वी इलाक़े अल अहसा की एक अदालत ने यह आदेश दिया कि इन महिलाओं पर रियाद की उस अदालत में मुकदमा चलाया जाए जो आतंकवादी मामलों को देखती है. सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बताया है कि दोनों महिलाएं इस आदेश के खिलाफ अपील करेंगी. सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक इन महिलाओं के मुकदमे को सोशल मीडिया में प्रतिक्रिया जताने पर दूसरी अदालत में भेजा गया है ना कि गाड़ी चलाने के लिए. सऊदी अरब दुनिया में अकेला देश है जहां महिलाओं के गाड़ी चलाने पर पाबंदी है. तकनीकी रूप से महिलाओं का गाड़ी चलाना गैरकानूनी नहीं है लेकिन यहां ड्राइविंग लाइसेंस केवल पुरुषों को ही दिए जाते हैं. गाड़ी चलाने वाली महिलाओं पर ज़ुर्माना लगता है और पुलिस उन्हें गिरफ़्तार कर लेती है. सऊदी अरब की महिलाएं इस रोक को हटाने के लिए कई अभियान चला रही हैं. सोशल मीडिया पर भी खूब बहस हो रही है. समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक लुजैन अल हथलौल को एक दिसंबर को गाड़ी चलाकर देश की सीमा में दाखिल होते वक्त गिरफ़्तार किया गया. पेशे से पत्रकार अलमाउदी को तब गिरफ़्तार किया गया जब वो हथलौल के समर्थन में गाड़ी चलाते हुए सीमा पर जा पहुंची. दोनों महिलाओं को ट्विटर पर बड़ी संख्या में लोग फॉलो करते हैं. हथलौल ने ट्विटर पर लोगों को बताया कि उन्हें सऊदी सीमा पर देश में घुसने के लिए लंबा इंतज़ार करना पड़ा रहा है.
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दी उसोस ने अमेरिकन अल्फा को हराया अमेरिकन अल्फा 2 हफ्तों बाद फिर से रिंग में लौटी. गैबल अभी भी चोटिल थे, लेकिन फिर भी वे मैच खेलने आए. ये मैच अच्छा रहा. उसोस ने गैबल को जहां चोट लगी हैं, वहीं पर लक्ष्य किया.
गैबल के चोटिल होने की वजह से जॉरडन अकेले पड़े और ये मैच दी उसोस ने जीता. अब नो मर्सी में उसोस का मुकाबला टैग टीम चैम्पियन्स रायनो और हिथ स्लेटर से होगा.
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दी उसोस ने अमेरिकन अल्फा को हराया अमेरिकन अल्फा दो हफ्तों बाद फिर से रिंग में लौटी. गैबल अभी भी चोटिल थे, लेकिन फिर भी वे मैच खेलने आए. ये मैच अच्छा रहा. उसोस ने गैबल को जहां चोट लगी हैं, वहीं पर लक्ष्य किया. गैबल के चोटिल होने की वजह से जॉरडन अकेले पड़े और ये मैच दी उसोस ने जीता. अब नो मर्सी में उसोस का मुकाबला टैग टीम चैम्पियन्स रायनो और हिथ स्लेटर से होगा.
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पटना, 2 जनवरी (आईएएनएस)। बिहार की राजधानी पटना सहित राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में मंगलवार सुबह चल रही ठंडी हवाओं के कारण पूरा क्षेत्र कड़ाके की ठंड की चपेट में हैं। इस बीच कोहरे और गलन के कारण लोग परेशान हैं। पटना का मंगलवार को न्यूनतम तापमान 7.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में कहा है कि अगले दो-चार दिनों में राज्य के मौसम में कोई खास परिवर्तन की संभावना नहीं है। इस दौरान सुबह घना कोहरा रहेगा, दोपहर बाद धूप निकलेगी। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी।
पटना स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, मंगलवार को भागलपुर का न्यूनतम तापमान 7.3 डिग्री, गया का 8.8 डिग्री और पूर्णिया का 9.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
पटना एवं इसके आसपास के क्षेत्रों में सोमवार को अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से पांच डिग्री कम है। मंगलवार को भी अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के करीब रहने के आसार हैं।
नई दिल्ली। राष्ट्रपित द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को महिला आरक्षण बिल को मंजूरी दे दी। राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद अब यह कानून में बदल गया है। केंद्र सरकार ने इस संबंध में शुक्रवार को अधिसूचना जारी की।
बता दें कि महिला आरक्षण बिल संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था। इसे संसद के विशेष सत्र के दौरान पारित कराया गया था। इससे लोकसभा और राज्यों के विधानसभा में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण मिलेगा।
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पटना, दो जनवरी । बिहार की राजधानी पटना सहित राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में मंगलवार सुबह चल रही ठंडी हवाओं के कारण पूरा क्षेत्र कड़ाके की ठंड की चपेट में हैं। इस बीच कोहरे और गलन के कारण लोग परेशान हैं। पटना का मंगलवार को न्यूनतम तापमान सात दशमलव एक डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में कहा है कि अगले दो-चार दिनों में राज्य के मौसम में कोई खास परिवर्तन की संभावना नहीं है। इस दौरान सुबह घना कोहरा रहेगा, दोपहर बाद धूप निकलेगी। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। पटना स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, मंगलवार को भागलपुर का न्यूनतम तापमान सात.तीन डिग्री, गया का आठ.आठ डिग्री और पूर्णिया का नौ दशमलव नौ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पटना एवं इसके आसपास के क्षेत्रों में सोमवार को अधिकतम तापमान सत्रह डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से पांच डिग्री कम है। मंगलवार को भी अधिकतम तापमान अट्ठारह डिग्री सेल्सियस के करीब रहने के आसार हैं। नई दिल्ली। राष्ट्रपित द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को महिला आरक्षण बिल को मंजूरी दे दी। राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद अब यह कानून में बदल गया है। केंद्र सरकार ने इस संबंध में शुक्रवार को अधिसूचना जारी की। बता दें कि महिला आरक्षण बिल संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था। इसे संसद के विशेष सत्र के दौरान पारित कराया गया था। इससे लोकसभा और राज्यों के विधानसभा में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण मिलेगा।
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Khatron Ke Khiladi Season 11 : बिजली के झटके से ऐसे हिले अभिनव शुक्ला, चिल्ला-चिल्लाकर रोहित शेट्टी को कहा- 'सर मेरे बच्चे...'
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YRKKH: फहमान खान या शहीर शेख? कौन करेगा हर्षद चोपड़ा को रिप्लेस?
पटना में लालू-नीतीश की मुलाकात, जानिए क्या हुई बात?
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Khatron Ke Khiladi Season ग्यारह : बिजली के झटके से ऐसे हिले अभिनव शुक्ला, चिल्ला-चिल्लाकर रोहित शेट्टी को कहा- 'सर मेरे बच्चे...' बाज जैसी नजर वाले ही ढूंढ पाएंगे संख्या नौ, आपको दिखा क्या? YRKKH: फहमान खान या शहीर शेख? कौन करेगा हर्षद चोपड़ा को रिप्लेस? पटना में लालू-नीतीश की मुलाकात, जानिए क्या हुई बात?
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मुंबई में बढ़ते हुए कोरोना संक्रमण को देखते हुए सवाल उठने लगा है कि क्या इस महानगर में एक बार फिर लॉकडाउन लगाया जा सकता है। मेयर किशोरी पेडनेकर ने इस संभावना से इनकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि यह शहर के लोगों पर निर्भर करता है।
क्या देश में कोरोना संक्रमण अब ख़त्म होने की ओर है? संक्रमण के जितने मामले आ रहे हैं उससे ऐसा सवाल उठना लाजिमी है। पिछले 24 घंटे में कोरोना के क़रीब 11 नए मामले आए हैं। दिल्ली में तो 24 घंटे में एक भी मौत नहीं हुई है।
भारत में जिन वैक्सीन को दुनिया में सबसे सस्ती वैक्सीनों में से एक बताया जा रहा है उनकी क़ीमतों पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया और भारत बायोटेक की वैक्सीन की ज़्यादा क़ीमतें वसूली जा रही हैं।
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मुंबई में बढ़ते हुए कोरोना संक्रमण को देखते हुए सवाल उठने लगा है कि क्या इस महानगर में एक बार फिर लॉकडाउन लगाया जा सकता है। मेयर किशोरी पेडनेकर ने इस संभावना से इनकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि यह शहर के लोगों पर निर्भर करता है। क्या देश में कोरोना संक्रमण अब ख़त्म होने की ओर है? संक्रमण के जितने मामले आ रहे हैं उससे ऐसा सवाल उठना लाजिमी है। पिछले चौबीस घंटाटे में कोरोना के क़रीब ग्यारह नए मामले आए हैं। दिल्ली में तो चौबीस घंटाटे में एक भी मौत नहीं हुई है। भारत में जिन वैक्सीन को दुनिया में सबसे सस्ती वैक्सीनों में से एक बताया जा रहा है उनकी क़ीमतों पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया और भारत बायोटेक की वैक्सीन की ज़्यादा क़ीमतें वसूली जा रही हैं।
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झारखंड । । इंडिया और न्यूजीलैंड के बीच जारी पांच एकदिवसीय मैचों की श्रृंखला के पहले मुकाबले के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI ने भारतीय टीम के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। दरअसल, भारतीय टीम के मौजूदा कप्तान विराट कोहली को BCCI ने शुरुआती तीन एकदिवसीय मैचों के बाद स्वदेश लौटने का निर्देश दिया है।
BCCI के अनुसार, कप्तान कोहली को आराम दिया गया है ताकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली आगामी वनडे श्रृंखला तथा आगामी कई अहम मुकाबलों के लिए विराट कोहली खुद को रिफ्रेश कर सकें।
विराट कोहली की भारतीय टीम से बाहर होने के बाद भारतीय टीम मैनेजमेंट में टीम की कमान भारतीय टीम के उप कप्तान रोहित शर्मा के हाथों में सौंपी है। वनडे श्रृंखला के साथ-साथ रोहित शर्मा टी20 श्रृंखला में भी भारतीय टीम की कप्तानी करते नजर आएंगे। हालांकि अगर पिछले कुछ समय से देखा जाए तो भारतीय T20 टीम की कप्तानी अक्सर रोहित शर्मा के हाथों में ही रही है।
इसकी सबसे बड़ी वजह यह नहीं है कि विराट कोहली को उस समय आराम दिया गया था बल्कि BCCI भी रोहित शर्मा पर एक बड़ा दांव खेलना चाहती है। आज से कुछ हफ्ते पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा दिए गए एक बयान पर नजर डालें तो उन्होंने कहा कि वह आज से कुछ समय पहले रोहित शर्मा को भारतीय T20 टीम की कमान सौंपना चाहते थे।
उनका मानना था कि अगर रोहित शर्मा भारतीय T20 टीम की कमान संभालेंगे तो भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली पर सिर्फ भारतीय टेस्ट टीम तथा वनडे टीम की जिम्मेदारी रहेगी, जिससे कि उनका मानसिक प्रेशर थोड़ा कम होगा। लेकिन BCCI के अन्य सदस्यों ने इस पर सहमति नहीं जताते हुए कहा कि एक निश्चित समय अंतराल पर कोहली और रोहित शर्मा दोनों को भारतीय टीम की कमान संभालने का मौका दिया जाएगा, जिससे कि विराट कोहली को भी आराम करने का मौका मिलेगा।
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झारखंड । । इंडिया और न्यूजीलैंड के बीच जारी पांच एकदिवसीय मैचों की श्रृंखला के पहले मुकाबले के बाद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI ने भारतीय टीम के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। दरअसल, भारतीय टीम के मौजूदा कप्तान विराट कोहली को BCCI ने शुरुआती तीन एकदिवसीय मैचों के बाद स्वदेश लौटने का निर्देश दिया है। BCCI के अनुसार, कप्तान कोहली को आराम दिया गया है ताकि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली आगामी वनडे श्रृंखला तथा आगामी कई अहम मुकाबलों के लिए विराट कोहली खुद को रिफ्रेश कर सकें। विराट कोहली की भारतीय टीम से बाहर होने के बाद भारतीय टीम मैनेजमेंट में टीम की कमान भारतीय टीम के उप कप्तान रोहित शर्मा के हाथों में सौंपी है। वनडे श्रृंखला के साथ-साथ रोहित शर्मा टीबीस श्रृंखला में भी भारतीय टीम की कप्तानी करते नजर आएंगे। हालांकि अगर पिछले कुछ समय से देखा जाए तो भारतीय Tबीस टीम की कप्तानी अक्सर रोहित शर्मा के हाथों में ही रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह नहीं है कि विराट कोहली को उस समय आराम दिया गया था बल्कि BCCI भी रोहित शर्मा पर एक बड़ा दांव खेलना चाहती है। आज से कुछ हफ्ते पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष द्वारा दिए गए एक बयान पर नजर डालें तो उन्होंने कहा कि वह आज से कुछ समय पहले रोहित शर्मा को भारतीय Tबीस टीम की कमान सौंपना चाहते थे। उनका मानना था कि अगर रोहित शर्मा भारतीय Tबीस टीम की कमान संभालेंगे तो भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली पर सिर्फ भारतीय टेस्ट टीम तथा वनडे टीम की जिम्मेदारी रहेगी, जिससे कि उनका मानसिक प्रेशर थोड़ा कम होगा। लेकिन BCCI के अन्य सदस्यों ने इस पर सहमति नहीं जताते हुए कहा कि एक निश्चित समय अंतराल पर कोहली और रोहित शर्मा दोनों को भारतीय टीम की कमान संभालने का मौका दिया जाएगा, जिससे कि विराट कोहली को भी आराम करने का मौका मिलेगा।
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परित्याग - जो इसका मतलब है?
बीमा क्षेत्र शर्तों, जिनमें से कई आम लोगों के लिए स्पष्ट नहीं हैं की एक किस्म कार्यरत हैं। वे लेन-देन की सुविधा के लिए आवश्यक हैं। परित्याग बीमा क्या है? इस शब्द का विदेश में संपत्ति के संबंध में प्रयोग किया जाता है। यह मोटर बीमा के क्षेत्र में आम है। अब वह सक्रिय रूप से रूस के क्षेत्र में प्रयोग किया जाता है।
परित्याग - एक अवधारणा बीमा कंपनी के पक्ष में संपत्ति के संभावित विफलता का संकेत है। यह अनुबंध में तय हो गई है, तो लाभार्थी में एक वस्तु के लिए उनके अधिकारों को माफ करने का अधिकार है,। यह बीमा कंपनी से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।
परम्परागत मामले परित्याग संपत्ति की प्राप्ति, जिसके बाद स्वामित्व अधिकार बीमा कंपनी है, जो पूरा मुआवजा का भुगतान करती है के लिए स्थानांतरित कर रहे हैं। जब नुकसान होता है, इसके स्वामित्व की सही बीमा कंपनी को स्थानांतरित कर रहे हैं। परित्याग - यह एक पूर्ण, अनुल्लंघनीय आदर्श है, इसलिए, सही कुछ निश्चित परिस्थितियों में से इनकार किया जाना चाहिए नहीं कर रहा है हो सकता है,।
पहली नज़र में यह है कि परित्याग लग सकता है - एक सरल नियम है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। हालांकि यह समझौता और पार्टियों के बीच सहयोग की शर्तों लिख, वहां अक्सर नियमों, विनियमों की वैधता और मुआवजा भुगतान की राशि को लेकर विवाद कर रहे हैं।
अक्सर संघर्ष अदालत में हल कर रहे हैं। मामलों के बहुमत लाभार्थी या बीमित जीतता है। इस वजह से, कंपनियों के विशेषज्ञों परित्याग के क्षेत्र में न्यायिक व्यवहार में रुचि।
यह क्या है - सही है या कर्तव्य?
कई आश्चर्य परित्याग - यह सही है या कर्तव्य है? यह सही है, जो लाभार्थी है। और बीमा कंपनी का परित्याग करने के लिए, कर्तव्य माना के रूप में यह बीमित संपत्ति लेने के लिए है। इस विनियमन पत्र जो निवास के लिए बीमा कंपनी की जगह पर बीमा के लिए भेजा जाता है के द्वारा किया जाता है।
इस स्थिति में, वहाँ अनुबंध का कोई विषय के लिए लेन-देन के दलों के समझौते द्वारा विनियमित किया जाएगा जो अनुसार है। यह समझौता जब दस्तावेजों और संपत्ति के संचरण का मार्ग से संबंधित तकनीकी मुद्दों का सामना करना पड़ प्रवेश किया गया है।
यह लाभार्थी जारी करना चाहिए। यह बाद में नहीं क्षण से किया जाता है, जब वह प्राप्त बीमा मुआवजा। समुद्री बीमा एक बीमा मामले की परिभाषा से 6 महीने के लिए वैध होगा।
वक्तव्य वापस लेने के लिए के रूप में यह बिना शर्त है की अनुमति नहीं दी। के तहत अनुबंध, और कानून जाना चाहिए, के लिए लाभार्थी, जिसने पाया संपत्ति बीमा कंपनी चाहिए वापसी राशि का मुआवजा। केवल संपत्ति को नुकसान घटाया।
इस अवधारणा को न केवल कार बीमा भी शामिल है। परित्याग घटना है कि परिवहन के रचनात्मक नुकसान का पता चला था में आवश्यक हो। यह तब होता है जब अपने वर्तमान बाजार मूल्य के 30% से अधिक मरम्मत की कीमत। इन मामलों में, एक बहुत ही जटिल गणनाओं में कुछ कारणों के लिए कार के मालिक के लिए लागू किया नहीं कर सकते।
परित्याग रूस बीमा कंपनियों के लिए लाभहीन, Casco नीति का प्रसार है, खासकर जब। इसे और अधिक एक छोटे से मुआवजा, जिसके माध्यम से वसूली मशीन है कि कानूनी अज्ञानता परिवहन मालिकों के कारण काम नहीं करता है के द्वारा कवर किया जा सकता है भुगतान करने के लिए सुविधाजनक है। इसलिए, यदि रचनात्मक नुकसान कार मिल गया है, आप एक पेशेवर की सेवाओं का उपयोग करना चाहिए।
सेवाएं "Rosgosstrakh"
इस कंपनी के वाहन बीमा जारी करने के लिए प्रदान करता है। परिवहन लोकप्रिय हल के मालिकों के बीच। फर्म की सेवाओं का उपयोग करने के लिए, यह बीमा नियमों का अध्ययन करने के लिए आवश्यक है। "Rosgosstrakh" का प्रस्ताव दर्ज करें तीन प्रकार के अनुबंधः
- पूर्णः भुगतान मशीन के बीमित मूल्य के बराबर हो जाएगा। और क्षति पूरा भुगतान किया जाता है।
- आंशिक आनुपातिकः राशि बीमित मूल्य से कम है। मुआवजा लागत राशि के अनुपात में है।
- आंशिक आय से अधिकः भुगतान underinsurance के अधीन है।
बीमा विनियम "Rosgosstrakh" निम्नलिखित स्थापित करता हैः
- प्रीमियम के भुगतान, यहां तक कि ऐसे मामलों में जहां बीमित दोषी दिखाई दिया है।
- यदि एक से अधिक 2 आसन्न वाहन भागों का सामना करना पड़ा नहीं।
- चोरी या मुआवजा योगदान के प्रतिशत के रूप परिशोधन के आधार पर दी गई करने के लिए क्षति के मामले में।
- जानवरों या पक्षियों की वजह से हुई बात के नुकसान के लिए भुगतान न करें।
ग्राहक पूरा मुआवजा प्राप्त करने का अधिकार है। उदाहरण के लिए, एक बीमा कंपनी एक दुर्घटना वाहनों में क्षतिग्रस्त पैदा करता है। में अभ्यास, का राशि का मुआवजा किया जा सकता है छोटे। लेकिन आम तौर पर, मशीनों के मालिकों, इस के लिए सहमत हैं क्योंकि वे अपने स्वयं पर बिक्री करना चाहते नहीं है।
जब संपत्ति वसूली बेकार है परित्याग आवश्यक है, या यह निवेश का एक बहुत लेता है। संपत्ति के उपयोग का अधिकार बीमा कंपनी को हस्तांतरित कर रहा है। परित्याग 2 तरीकों से किया जाता हैः
- अनुबंध सहयोग की दृष्टि से बाहर मंत्र।
- यह जो संपत्ति के हस्तांतरण पर चर्चा की जाएगी एक अतिरिक्त दस्तावेज़ जारी किया।
बाद स्थिति एक चेतावनी प्रवेश कर सकते हैं। कंपनी ग्राहक अनुबंध है, जो तीसरे पक्ष को वाहनों के हस्तांतरण के अनुबंध, उदाहरण के लिए, एक बचत की दुकान पर अमल करने प्रदान करता है। इस तरह के सौदों को नहीं बनाते हैं, क्योंकि के बाद ग्राहक प्रॉपर्टी स्थानांतरित करने का अधिकार है परित्याग पर गायब हो जाता है। इसलिए, यह मुआवजा नहीं किया जाएगा। यदि अनुबंध में कहा गया है बीमा परित्याग, ग्राहक के लाभ है।
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परित्याग - जो इसका मतलब है? बीमा क्षेत्र शर्तों, जिनमें से कई आम लोगों के लिए स्पष्ट नहीं हैं की एक किस्म कार्यरत हैं। वे लेन-देन की सुविधा के लिए आवश्यक हैं। परित्याग बीमा क्या है? इस शब्द का विदेश में संपत्ति के संबंध में प्रयोग किया जाता है। यह मोटर बीमा के क्षेत्र में आम है। अब वह सक्रिय रूप से रूस के क्षेत्र में प्रयोग किया जाता है। परित्याग - एक अवधारणा बीमा कंपनी के पक्ष में संपत्ति के संभावित विफलता का संकेत है। यह अनुबंध में तय हो गई है, तो लाभार्थी में एक वस्तु के लिए उनके अधिकारों को माफ करने का अधिकार है,। यह बीमा कंपनी से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए आवश्यक है। परम्परागत मामले परित्याग संपत्ति की प्राप्ति, जिसके बाद स्वामित्व अधिकार बीमा कंपनी है, जो पूरा मुआवजा का भुगतान करती है के लिए स्थानांतरित कर रहे हैं। जब नुकसान होता है, इसके स्वामित्व की सही बीमा कंपनी को स्थानांतरित कर रहे हैं। परित्याग - यह एक पूर्ण, अनुल्लंघनीय आदर्श है, इसलिए, सही कुछ निश्चित परिस्थितियों में से इनकार किया जाना चाहिए नहीं कर रहा है हो सकता है,। पहली नज़र में यह है कि परित्याग लग सकता है - एक सरल नियम है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। हालांकि यह समझौता और पार्टियों के बीच सहयोग की शर्तों लिख, वहां अक्सर नियमों, विनियमों की वैधता और मुआवजा भुगतान की राशि को लेकर विवाद कर रहे हैं। अक्सर संघर्ष अदालत में हल कर रहे हैं। मामलों के बहुमत लाभार्थी या बीमित जीतता है। इस वजह से, कंपनियों के विशेषज्ञों परित्याग के क्षेत्र में न्यायिक व्यवहार में रुचि। यह क्या है - सही है या कर्तव्य? कई आश्चर्य परित्याग - यह सही है या कर्तव्य है? यह सही है, जो लाभार्थी है। और बीमा कंपनी का परित्याग करने के लिए, कर्तव्य माना के रूप में यह बीमित संपत्ति लेने के लिए है। इस विनियमन पत्र जो निवास के लिए बीमा कंपनी की जगह पर बीमा के लिए भेजा जाता है के द्वारा किया जाता है। इस स्थिति में, वहाँ अनुबंध का कोई विषय के लिए लेन-देन के दलों के समझौते द्वारा विनियमित किया जाएगा जो अनुसार है। यह समझौता जब दस्तावेजों और संपत्ति के संचरण का मार्ग से संबंधित तकनीकी मुद्दों का सामना करना पड़ प्रवेश किया गया है। यह लाभार्थी जारी करना चाहिए। यह बाद में नहीं क्षण से किया जाता है, जब वह प्राप्त बीमा मुआवजा। समुद्री बीमा एक बीमा मामले की परिभाषा से छः महीने के लिए वैध होगा। वक्तव्य वापस लेने के लिए के रूप में यह बिना शर्त है की अनुमति नहीं दी। के तहत अनुबंध, और कानून जाना चाहिए, के लिए लाभार्थी, जिसने पाया संपत्ति बीमा कंपनी चाहिए वापसी राशि का मुआवजा। केवल संपत्ति को नुकसान घटाया। इस अवधारणा को न केवल कार बीमा भी शामिल है। परित्याग घटना है कि परिवहन के रचनात्मक नुकसान का पता चला था में आवश्यक हो। यह तब होता है जब अपने वर्तमान बाजार मूल्य के तीस% से अधिक मरम्मत की कीमत। इन मामलों में, एक बहुत ही जटिल गणनाओं में कुछ कारणों के लिए कार के मालिक के लिए लागू किया नहीं कर सकते। परित्याग रूस बीमा कंपनियों के लिए लाभहीन, Casco नीति का प्रसार है, खासकर जब। इसे और अधिक एक छोटे से मुआवजा, जिसके माध्यम से वसूली मशीन है कि कानूनी अज्ञानता परिवहन मालिकों के कारण काम नहीं करता है के द्वारा कवर किया जा सकता है भुगतान करने के लिए सुविधाजनक है। इसलिए, यदि रचनात्मक नुकसान कार मिल गया है, आप एक पेशेवर की सेवाओं का उपयोग करना चाहिए। सेवाएं "Rosgosstrakh" इस कंपनी के वाहन बीमा जारी करने के लिए प्रदान करता है। परिवहन लोकप्रिय हल के मालिकों के बीच। फर्म की सेवाओं का उपयोग करने के लिए, यह बीमा नियमों का अध्ययन करने के लिए आवश्यक है। "Rosgosstrakh" का प्रस्ताव दर्ज करें तीन प्रकार के अनुबंधः - पूर्णः भुगतान मशीन के बीमित मूल्य के बराबर हो जाएगा। और क्षति पूरा भुगतान किया जाता है। - आंशिक आनुपातिकः राशि बीमित मूल्य से कम है। मुआवजा लागत राशि के अनुपात में है। - आंशिक आय से अधिकः भुगतान underinsurance के अधीन है। बीमा विनियम "Rosgosstrakh" निम्नलिखित स्थापित करता हैः - प्रीमियम के भुगतान, यहां तक कि ऐसे मामलों में जहां बीमित दोषी दिखाई दिया है। - यदि एक से अधिक दो आसन्न वाहन भागों का सामना करना पड़ा नहीं। - चोरी या मुआवजा योगदान के प्रतिशत के रूप परिशोधन के आधार पर दी गई करने के लिए क्षति के मामले में। - जानवरों या पक्षियों की वजह से हुई बात के नुकसान के लिए भुगतान न करें। ग्राहक पूरा मुआवजा प्राप्त करने का अधिकार है। उदाहरण के लिए, एक बीमा कंपनी एक दुर्घटना वाहनों में क्षतिग्रस्त पैदा करता है। में अभ्यास, का राशि का मुआवजा किया जा सकता है छोटे। लेकिन आम तौर पर, मशीनों के मालिकों, इस के लिए सहमत हैं क्योंकि वे अपने स्वयं पर बिक्री करना चाहते नहीं है। जब संपत्ति वसूली बेकार है परित्याग आवश्यक है, या यह निवेश का एक बहुत लेता है। संपत्ति के उपयोग का अधिकार बीमा कंपनी को हस्तांतरित कर रहा है। परित्याग दो तरीकों से किया जाता हैः - अनुबंध सहयोग की दृष्टि से बाहर मंत्र। - यह जो संपत्ति के हस्तांतरण पर चर्चा की जाएगी एक अतिरिक्त दस्तावेज़ जारी किया। बाद स्थिति एक चेतावनी प्रवेश कर सकते हैं। कंपनी ग्राहक अनुबंध है, जो तीसरे पक्ष को वाहनों के हस्तांतरण के अनुबंध, उदाहरण के लिए, एक बचत की दुकान पर अमल करने प्रदान करता है। इस तरह के सौदों को नहीं बनाते हैं, क्योंकि के बाद ग्राहक प्रॉपर्टी स्थानांतरित करने का अधिकार है परित्याग पर गायब हो जाता है। इसलिए, यह मुआवजा नहीं किया जाएगा। यदि अनुबंध में कहा गया है बीमा परित्याग, ग्राहक के लाभ है।
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Virgo Kanya Arthik Rashifal Today 8 june 2022: स्वास्थ्य सुधर गया। प्रेम और संतान की स्थिति पहले से ही बेहतर थी। आय में आशातीत बढ़ोत्तरी हो रही है। शुभ समाचार की प्राप्ति हो रही है। सुखद दिन का निर्माण हो रहा है। शनिदेव की अराधना करते रहें। आज आपको हर काम को फोकस करके पूरा करना चाहिए। संभव है कि आज आपको कोई ज्यादा महत्वपूर्ण और जरूरी काम सौंप दिया हो, लेकिन आपको बिना किसी शंका और विचार के अपने कर्तव्य पर व्यस्त रहना चाहिए। आज आप सफलता से कर काम को पूरा कर लेंगे और आय के नए स्रोत भी आपको प्राप्त होंगे।
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Virgo Kanya Arthik Rashifal Today आठ june दो हज़ार बाईस: स्वास्थ्य सुधर गया। प्रेम और संतान की स्थिति पहले से ही बेहतर थी। आय में आशातीत बढ़ोत्तरी हो रही है। शुभ समाचार की प्राप्ति हो रही है। सुखद दिन का निर्माण हो रहा है। शनिदेव की अराधना करते रहें। आज आपको हर काम को फोकस करके पूरा करना चाहिए। संभव है कि आज आपको कोई ज्यादा महत्वपूर्ण और जरूरी काम सौंप दिया हो, लेकिन आपको बिना किसी शंका और विचार के अपने कर्तव्य पर व्यस्त रहना चाहिए। आज आप सफलता से कर काम को पूरा कर लेंगे और आय के नए स्रोत भी आपको प्राप्त होंगे।
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भारतीय कार बाजार में भले ही छोटी कारों और एसयूवी को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता हो लेकिन कॉम्पैक्ट सेडान और सेडान कारों के चाहने वाले भी कम नहीं हैं। वजह है इनका खूबसूरत अंदाज, अच्छे फीचर्स, बेहतरीन कंफर्ट और राइड। अगर आप की भी दिलचस्पी भी कॉम्पैक्ट सेडान या सेडान कारों में है तो यहां हम लाए हैं 8 लाख रुपये से कम कीमत में आने वाली टॉप-5 कॉम्पैक्ट सेडान और सेडान कारें।
फॉक्सवेगन एमियोः एमियो के साथ फॉक्सवेगन ने कॉम्पैक्ट सेडान सेगमेंट में नई एंट्री की है। एमियो को पोलो हैचबैक के प्लेटफार्म पर तैयार किया गया है। इसका फ्रंट एकदम पोलो जैसा है। इसमें एडवांस टेक्नोलॉजी, शानदार फीचर्स और अच्छी राइड क्वालिटी मिलेगी। कीमत के मामले में यह पोलो से भी बेहतर है। फॉक्सवेगन ने एमियो की शुरुआती कीमत 5. 24 लाख रुपये रखी गई है। फिलहाल यह सिर्फ पेट्रोल वर्जन में उपलब्ध है। अक्टूबर तक इसका डीजल इंजन उतारा जाएगा।
फोर्ड फीगो एस्पायरः दूसरे नंबर पर है फोर्ड फीगो एस्पायर। इसे 'सेडान ऑफ द ईयर 2015' अवॉर्ड भी मिला हुआ है। इसमें सेफ्टी और कंफर्ट फीचर्स की लंबी लिस्ट मौजूद है। पेट्रोल इंजन के साथ डबल क्लच ऑटोमैटिक गियरबॉक्स, दमदार डीजल इंजन समेत कई एडवांस फीचर्स मिलेंगे। कंपनी ने कार की शुरुआती कीमत 5. 21 लाख रुपये रखी है।
मारुति सुजुकी सियाजः मारुति सुजुकी की इस फुल साइज सेडान ने भी काफी सफलता हासिल की है। इसमें डीजल इंजन के साथ हाइब्रिड तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। पांच पैसेंजर आसानी से बैठ सकते हैं। एडवांस फीचर्स के तौर पर टचस्क्रीन इंटरटेनमेंट सिस्टम, जीपीएस नेविगेशन, रिवर्स पार्किंग कैमरा और लैदर सीटें दी गई हैं। कार को स्टाइलिश बनाने के लिए ग्रिल पर क्रोम का इस्तेमाल और प्रोजेक्टर हैडलैंप्स दिए गए हैं। सियाज की शुरुआती कीमत 7. 53 लाख रखी गई है। कार के फीचर्स और डिजाइन की बदौलत इसे वैल्यू फॉर मनी प्रोडक्ट कहा जा सकता है।
हुंडई वरनाः हुंडई ने पिछले साल ही वरना का अपडेट वर्जन पेश किया। पहले की तुलना में इसे काफी बेहतर बनाया गया है। सुरक्षा के लिए इसमें 6-एयरबैग दिए गए हैं। इसके पेट्रोल और डीजल वर्जन में कई इंजन ऑप्शन दिए गए हैं। कार की शुरुआती कीमत 7. 87 लाख रुपये रखी गई है।
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भारतीय कार बाजार में भले ही छोटी कारों और एसयूवी को सबसे ज्यादा पसंद किया जाता हो लेकिन कॉम्पैक्ट सेडान और सेडान कारों के चाहने वाले भी कम नहीं हैं। वजह है इनका खूबसूरत अंदाज, अच्छे फीचर्स, बेहतरीन कंफर्ट और राइड। अगर आप की भी दिलचस्पी भी कॉम्पैक्ट सेडान या सेडान कारों में है तो यहां हम लाए हैं आठ लाख रुपये से कम कीमत में आने वाली टॉप-पाँच कॉम्पैक्ट सेडान और सेडान कारें। फॉक्सवेगन एमियोः एमियो के साथ फॉक्सवेगन ने कॉम्पैक्ट सेडान सेगमेंट में नई एंट्री की है। एमियो को पोलो हैचबैक के प्लेटफार्म पर तैयार किया गया है। इसका फ्रंट एकदम पोलो जैसा है। इसमें एडवांस टेक्नोलॉजी, शानदार फीचर्स और अच्छी राइड क्वालिटी मिलेगी। कीमत के मामले में यह पोलो से भी बेहतर है। फॉक्सवेगन ने एमियो की शुरुआती कीमत पाँच. चौबीस लाख रुपये रखी गई है। फिलहाल यह सिर्फ पेट्रोल वर्जन में उपलब्ध है। अक्टूबर तक इसका डीजल इंजन उतारा जाएगा। फोर्ड फीगो एस्पायरः दूसरे नंबर पर है फोर्ड फीगो एस्पायर। इसे 'सेडान ऑफ द ईयर दो हज़ार पंद्रह' अवॉर्ड भी मिला हुआ है। इसमें सेफ्टी और कंफर्ट फीचर्स की लंबी लिस्ट मौजूद है। पेट्रोल इंजन के साथ डबल क्लच ऑटोमैटिक गियरबॉक्स, दमदार डीजल इंजन समेत कई एडवांस फीचर्स मिलेंगे। कंपनी ने कार की शुरुआती कीमत पाँच. इक्कीस लाख रुपये रखी है। मारुति सुजुकी सियाजः मारुति सुजुकी की इस फुल साइज सेडान ने भी काफी सफलता हासिल की है। इसमें डीजल इंजन के साथ हाइब्रिड तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। पांच पैसेंजर आसानी से बैठ सकते हैं। एडवांस फीचर्स के तौर पर टचस्क्रीन इंटरटेनमेंट सिस्टम, जीपीएस नेविगेशन, रिवर्स पार्किंग कैमरा और लैदर सीटें दी गई हैं। कार को स्टाइलिश बनाने के लिए ग्रिल पर क्रोम का इस्तेमाल और प्रोजेक्टर हैडलैंप्स दिए गए हैं। सियाज की शुरुआती कीमत सात. तिरेपन लाख रखी गई है। कार के फीचर्स और डिजाइन की बदौलत इसे वैल्यू फॉर मनी प्रोडक्ट कहा जा सकता है। हुंडई वरनाः हुंडई ने पिछले साल ही वरना का अपडेट वर्जन पेश किया। पहले की तुलना में इसे काफी बेहतर बनाया गया है। सुरक्षा के लिए इसमें छः-एयरबैग दिए गए हैं। इसके पेट्रोल और डीजल वर्जन में कई इंजन ऑप्शन दिए गए हैं। कार की शुरुआती कीमत सात. सत्तासी लाख रुपये रखी गई है।
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एक हाथ से पकड़े हुए है। कितना प्रसन्न है। शायद कोई गीत गा रहा है। इस, मशक से पानी उड़ेला ही चाहता है। नूरे को वकील से प्रेम है। कैसी विद्वत्ता है। उनके मुख् पर, काला चुग्रा, नीचे सफेद अचकन, अचकन के सामने की जेब में घड़ी की सुनहरी ब्रजोर, एक हाथ में कानून का पोथा लिये हुए। मालूम होता है, अभी किसी अदालत से जिरह या बहस किये चले आ रहे हैं। यह सब दो-दो पैसे के खिलौने हैं हामिद के पास घुल तीन पैसे है । इतने मँहगे खिलौने वह कैसे ले ? खिलौना कहीं हाथ से छूट पड़े, तो चूर-चूर हो जाय। जरा पानी पड़े तो सारा रग धुल जाय । ऐसे खिलौने लेकर वह क्या करेगा, किस काम के !
कहता है - मेरा भिश्ती रोज़ पानी दे जायगा ; साँझ-सवेरे । महमुद - और मेरा सिपाही घर का पहरा देगा। कोई चोर आयेगा, तो फौरन बन्दूक फेर कर देगा ।
नूरे - और मेरा वकील खूब मुकदमा लड़ेगा । सम्मी - और मेरी धोबिन रोज कपड़े धोयेगी ।
हामिद खिलौनों की निन्दा करता है - मिट्टी ही के तो हैं, गिरें तो चकनाचूर - हो जाय; लेकिन ललचाई हुई आँखों से खिलौनों को देख रहा है। और चाहता है कि जरा देर के लिए उन्हें हाथ में ले सकता । उसके हाथ अनायास ही लपकते हैं S लेकिन लड़के इतने त्यागी नहीं होते, विशेषकर जब अभी नया शौक है। हामिद लळवता रह जाता है।
खिलौने के बाद मिठाइयाँ आती हैं। किसी ने रेउदियाँ ली है, किसी ने गुलाब जामुन, किसी ने सोइन हलवा । मन से खा रहे हैं। हामिद उनकी बिरादरी से पृथकू है । अभागे के पास तीन पैसे हैं। क्यों नहीं कुछ लेकर खाता ? ललचाई आँखों से सबकी ओर देखता है ।
मोहसिन कहता है- हामिद, यह रेलड़ी ले जा, कितनी खुशबूदार है !
हामिद को सन्देह हुआ, यह केवल क्रूर विनोद है, मोहसिन इतना उदार नहीं है, लेकिन यह जानकर भी वह उसके पास जाता है। मोहसिन दोने से एक रेउड़ो निकालकर हामिद की और बढ़ाता है। हामिद हाथ फैलाता है । मोहसिन रेउड़ी अपने मुँह में रख लेता है । महमूद, नूरे और सम्मी खूब तालियाँ बजा बजाकर हँसवे हैं । हामिद खिसिया जाता है।
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एक हाथ से पकड़े हुए है। कितना प्रसन्न है। शायद कोई गीत गा रहा है। इस, मशक से पानी उड़ेला ही चाहता है। नूरे को वकील से प्रेम है। कैसी विद्वत्ता है। उनके मुख् पर, काला चुग्रा, नीचे सफेद अचकन, अचकन के सामने की जेब में घड़ी की सुनहरी ब्रजोर, एक हाथ में कानून का पोथा लिये हुए। मालूम होता है, अभी किसी अदालत से जिरह या बहस किये चले आ रहे हैं। यह सब दो-दो पैसे के खिलौने हैं हामिद के पास घुल तीन पैसे है । इतने मँहगे खिलौने वह कैसे ले ? खिलौना कहीं हाथ से छूट पड़े, तो चूर-चूर हो जाय। जरा पानी पड़े तो सारा रग धुल जाय । ऐसे खिलौने लेकर वह क्या करेगा, किस काम के ! कहता है - मेरा भिश्ती रोज़ पानी दे जायगा ; साँझ-सवेरे । महमुद - और मेरा सिपाही घर का पहरा देगा। कोई चोर आयेगा, तो फौरन बन्दूक फेर कर देगा । नूरे - और मेरा वकील खूब मुकदमा लड़ेगा । सम्मी - और मेरी धोबिन रोज कपड़े धोयेगी । हामिद खिलौनों की निन्दा करता है - मिट्टी ही के तो हैं, गिरें तो चकनाचूर - हो जाय; लेकिन ललचाई हुई आँखों से खिलौनों को देख रहा है। और चाहता है कि जरा देर के लिए उन्हें हाथ में ले सकता । उसके हाथ अनायास ही लपकते हैं S लेकिन लड़के इतने त्यागी नहीं होते, विशेषकर जब अभी नया शौक है। हामिद लळवता रह जाता है। खिलौने के बाद मिठाइयाँ आती हैं। किसी ने रेउदियाँ ली है, किसी ने गुलाब जामुन, किसी ने सोइन हलवा । मन से खा रहे हैं। हामिद उनकी बिरादरी से पृथकू है । अभागे के पास तीन पैसे हैं। क्यों नहीं कुछ लेकर खाता ? ललचाई आँखों से सबकी ओर देखता है । मोहसिन कहता है- हामिद, यह रेलड़ी ले जा, कितनी खुशबूदार है ! हामिद को सन्देह हुआ, यह केवल क्रूर विनोद है, मोहसिन इतना उदार नहीं है, लेकिन यह जानकर भी वह उसके पास जाता है। मोहसिन दोने से एक रेउड़ो निकालकर हामिद की और बढ़ाता है। हामिद हाथ फैलाता है । मोहसिन रेउड़ी अपने मुँह में रख लेता है । महमूद, नूरे और सम्मी खूब तालियाँ बजा बजाकर हँसवे हैं । हामिद खिसिया जाता है।
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टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेट संजय मांजरेकर ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जारी सिडनी टेस्ट मैच के दूसरे दिन रविंद्र जडेजा के डायरेक्ट थ्रो की जमकर तारीफ की है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चार टेस्ट मैचों की बॉर्डर-गावस्कर सीरीज का तीसरा टेस्ट मैच सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में खेला जा रहा है। मैच के दूसरे दिन रविंद्र जडेजा ने गेंदबाजी और फील्डिंग दोनों में कमाल किया। जडेजा ने गेंदबाजी के दौरान चार विकेट लिए, जबकि अपनी चुस्त फील्डिंग से स्टीव स्मिथ को पवेलियन का रास्ता दिखाया। जडेजा के डायरेक्ट थ्रो पर स्मिथ 131 रन बनाकर आउट हुए और इसके साथ ही ऑस्ट्रेलियाई पारी 338 रनों पर सिमट गई।
मांजरेकर ने जडेजा की इस थ्रो की तारीफ करते हुए ट्विटर पर लिखा, 'नामुमकिन जैसा लग रहा था, जो सिर्फ फील्डर जडेजा ही मुमकिन कर सकते थे। थ्रो में सिर्फ एक्युरेसी ही नहीं थी बल्कि सटीक स्पीड भी थी, जो इस रनआउट का अहम कारण था। अद्भुत। ' मांजरेकर जब भी जडेजा को लेकर कोई टिप्पणी करते हैं, उस पर फैन्स उनको जमकर ट्रोल करते हैं। मांजरेकर ने एक बार जडेजा को 'टुकड़ों में खेलने वाला खिलाड़ी' कहा था, जिसका जवाब जड्डू ने उन्हें ट्विटर के जरिए दिया था।
मैच की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया। ऑस्ट्रेलिया का स्कोर एक समय 2 विकेट पर 206 रन था, लेकिन मार्नस लाबूशेन को आउट कर जडेजा ने मैच में भारत की वापसी कराई। जड्डू ने चार विकेट झटके और स्मिथ को रनआउट किया। ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 338 रनों पर सिमटी, स्मिथ ऑस्ट्रेलिया की ओर से बेस्ट स्कोरर रहे। मार्नस लाबूशेन ने 91 और विल पुकोवस्की ने 62 रनों की पारी खेली।
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टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेट संजय मांजरेकर ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जारी सिडनी टेस्ट मैच के दूसरे दिन रविंद्र जडेजा के डायरेक्ट थ्रो की जमकर तारीफ की है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच चार टेस्ट मैचों की बॉर्डर-गावस्कर सीरीज का तीसरा टेस्ट मैच सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में खेला जा रहा है। मैच के दूसरे दिन रविंद्र जडेजा ने गेंदबाजी और फील्डिंग दोनों में कमाल किया। जडेजा ने गेंदबाजी के दौरान चार विकेट लिए, जबकि अपनी चुस्त फील्डिंग से स्टीव स्मिथ को पवेलियन का रास्ता दिखाया। जडेजा के डायरेक्ट थ्रो पर स्मिथ एक सौ इकतीस रन बनाकर आउट हुए और इसके साथ ही ऑस्ट्रेलियाई पारी तीन सौ अड़तीस रनों पर सिमट गई। मांजरेकर ने जडेजा की इस थ्रो की तारीफ करते हुए ट्विटर पर लिखा, 'नामुमकिन जैसा लग रहा था, जो सिर्फ फील्डर जडेजा ही मुमकिन कर सकते थे। थ्रो में सिर्फ एक्युरेसी ही नहीं थी बल्कि सटीक स्पीड भी थी, जो इस रनआउट का अहम कारण था। अद्भुत। ' मांजरेकर जब भी जडेजा को लेकर कोई टिप्पणी करते हैं, उस पर फैन्स उनको जमकर ट्रोल करते हैं। मांजरेकर ने एक बार जडेजा को 'टुकड़ों में खेलने वाला खिलाड़ी' कहा था, जिसका जवाब जड्डू ने उन्हें ट्विटर के जरिए दिया था। मैच की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया। ऑस्ट्रेलिया का स्कोर एक समय दो विकेट पर दो सौ छः रन था, लेकिन मार्नस लाबूशेन को आउट कर जडेजा ने मैच में भारत की वापसी कराई। जड्डू ने चार विकेट झटके और स्मिथ को रनआउट किया। ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी तीन सौ अड़तीस रनों पर सिमटी, स्मिथ ऑस्ट्रेलिया की ओर से बेस्ट स्कोरर रहे। मार्नस लाबूशेन ने इक्यानवे और विल पुकोवस्की ने बासठ रनों की पारी खेली।
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आजकल इस भागदौड़ के समय में लोग देर से सोने व देर से उठने के आदि हो गए हैं। हिंदू धर्म के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके भगवान की पूजा करने से व्यक्ति पर भगवान की कृपा बनी रहती है।
नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क। Astro Tips: रात को कई लोग गहरी नींद में सोते हैं तो वहीं कुछ लोगों की आंख रात में कई बार खुलती है। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनकी एक निश्चित समय पर ही आंख खुलती है। ऐसे में अगर आपकी आंख तीन बजे या उसके आस-पास खुलती है तो इसका क्या मतलब है। कहा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति की नींद 3 से 5 के बीच खुलती है तो इसका अर्थ है कि कोई दैवीय शक्ति आपको संदेश देना चाहती है।
हिंदू धर्म में सुबह 3 बजे से 4:30 बजे के बीच का समय देवताओं का समय माना जाता है। इसे ब्रह्म मुहूर्त भी कहते हैं। यह भी माना जाता है कि इसी समय में माता सरस्वती हमारी जिह्वा पर विराजमान होती हैं। और इस समय जो भी मांगा जाता है, माता सरस्वती उसे पूरा करती हैं।
यदि आपकी नींद 3 बजे अचानक खुलती है। तो इसका मतलब सृष्टि व दिव्य शक्ति चाहती है कि आप उठे और अपने इष्टदेव की आराधना करें। आप परमात्मा का जाप करें क्योंकि काफी शक्तियां आपका इंतजार कर रही हैं, जो आपको मिल सकती है। वहीं अगर आपकी नींद सुबह 3 से 5 के बीच खुलती है तो इसका मतलब कोई अनजान शक्ति आपसे संपर्क करने कोशिश कर रही है। जो आपके जीवन के प्रति जागरूक है।
ब्रह्म मुहूर्त रात्रि के अंतिम प्रहर का तीसरा भाग है। धर्म शास्त्रों में निद्रा का त्याग करने का यह सर्वोत्तम समय है। ब्रह्म मुहूर्त का समय सुबह करीब 4 बजे से लेकर 5 बजकर 30 मिनट तक होता है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में उठकर विधि-विधान से जीवन व्यतीत करते हैं उन पर सदैव दैवीय कृपा बरसती है। ब्रह्म मुहूर्त के समय पूरा वातावरण शांत और निर्मल होता है। इस काल में देवी-देवता विचरण कर रहे होते हैं। सत्त्वगुणों की प्रधानता होती है। प्रमुख मंदिरों के कपाट भी ब्रह्म मुहूर्त में ही खुल जाते हैं और ब्रह्म मुहूर्त में ही भगवान की पूजा-अर्चना करने का विधान है।
डिसक्लेमरः 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी। '
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आजकल इस भागदौड़ के समय में लोग देर से सोने व देर से उठने के आदि हो गए हैं। हिंदू धर्म के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके भगवान की पूजा करने से व्यक्ति पर भगवान की कृपा बनी रहती है। नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क। Astro Tips: रात को कई लोग गहरी नींद में सोते हैं तो वहीं कुछ लोगों की आंख रात में कई बार खुलती है। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनकी एक निश्चित समय पर ही आंख खुलती है। ऐसे में अगर आपकी आंख तीन बजे या उसके आस-पास खुलती है तो इसका क्या मतलब है। कहा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति की नींद तीन से पाँच के बीच खुलती है तो इसका अर्थ है कि कोई दैवीय शक्ति आपको संदेश देना चाहती है। हिंदू धर्म में सुबह तीन बजे से चार:तीस बजे के बीच का समय देवताओं का समय माना जाता है। इसे ब्रह्म मुहूर्त भी कहते हैं। यह भी माना जाता है कि इसी समय में माता सरस्वती हमारी जिह्वा पर विराजमान होती हैं। और इस समय जो भी मांगा जाता है, माता सरस्वती उसे पूरा करती हैं। यदि आपकी नींद तीन बजे अचानक खुलती है। तो इसका मतलब सृष्टि व दिव्य शक्ति चाहती है कि आप उठे और अपने इष्टदेव की आराधना करें। आप परमात्मा का जाप करें क्योंकि काफी शक्तियां आपका इंतजार कर रही हैं, जो आपको मिल सकती है। वहीं अगर आपकी नींद सुबह तीन से पाँच के बीच खुलती है तो इसका मतलब कोई अनजान शक्ति आपसे संपर्क करने कोशिश कर रही है। जो आपके जीवन के प्रति जागरूक है। ब्रह्म मुहूर्त रात्रि के अंतिम प्रहर का तीसरा भाग है। धर्म शास्त्रों में निद्रा का त्याग करने का यह सर्वोत्तम समय है। ब्रह्म मुहूर्त का समय सुबह करीब चार बजे से लेकर पाँच बजकर तीस मिनट तक होता है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में उठकर विधि-विधान से जीवन व्यतीत करते हैं उन पर सदैव दैवीय कृपा बरसती है। ब्रह्म मुहूर्त के समय पूरा वातावरण शांत और निर्मल होता है। इस काल में देवी-देवता विचरण कर रहे होते हैं। सत्त्वगुणों की प्रधानता होती है। प्रमुख मंदिरों के कपाट भी ब्रह्म मुहूर्त में ही खुल जाते हैं और ब्रह्म मुहूर्त में ही भगवान की पूजा-अर्चना करने का विधान है। डिसक्लेमरः 'इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी। '
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कोच्चिः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 24 और 25 अप्रैल को केरल के दो दिवसीय दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और खतरे की आशंका पर एडीजीपी टी के विनोदकुमार की रिपोर्ट से केरल में विवाद खड़ा हो गया है और भाजपा नेताओं ने सरकार की ओर से सुरक्षा में चूक का आरोप लगाया है. .
रिपोर्ट में कहा गया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर हालिया प्रतिबंध, जिसका केरल में मजबूत कैडर बेस है, प्रधानमंत्री के लिए एक गंभीर खतरा है।
"पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और वेलफेयर पार्टी जैसे अन्य मुस्लिम कट्टरपंथी संगठनों से खतरे पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए, और उनकी सभी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखनी होगी। केरल में सक्रिय सीपीआई माओवादी भी अन्य राज्य सरकारों के साथ समन्वय में केंद्र सरकार के सुरक्षा बलों द्वारा उनके खिलाफ चलाए गए सफल अभियानों के मद्देनजर आने वाले प्रधान मंत्री के लिए गंभीर सुरक्षा खतरा पैदा कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई माओवादी कैडरों का सफाया हो गया है।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि प्रवासी मजदूरों की उपस्थिति, विशेष रूप से माओवादी या उग्रवाद प्रभावित राज्यों और उत्तर पूर्वी राज्यों से भी प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए खतरा है। यह भी कहा गया है कि माओवादी कैडर अतिथि मजदूरों की आड़ में केरल चले गए हैं।
पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझिकोड ग्रामीण, वायनाड और कन्नूर माओवादी प्रभावित हैं। वायनाड और अन्य माओवाद प्रभावित जिलों से माओवादियों के देखे जाने की सूचना मिली है और हाल के दिनों में ऐसी घटनाओं की आवृत्ति में वृद्धि देखी गई है।
सुरक्षा व्यवस्था करते समय माओवादियों की ओर से आने वाले प्रधान मंत्री के खिलाफ प्रतिशोध की संभावना को ध्यान में रखा जा सकता है।
विचार किया जाना चाहिए, "रिपोर्ट कहती है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि महिलाओं सहित कुछ कट्टरपंथी केरल के युवा खाड़ी क्षेत्र में इस्लामिक स्टेट और जबात नुसरा जैसे विभिन्न जिहादी समूहों में शामिल हो गए हैं और एनआईए द्वारा कन्नूर के कनकमला में संदिग्ध मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी को भी गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।
"राज्य में सीपीएम और बीजेपी-आरएसएस कार्यकर्ताओं के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, केंद्र सरकार के खिलाफ छात्र संगठनों के बीच सामान्य अशांति, इस्लामिक स्टेट (आईएस) तत्वों के साथ केरलवासियों के लिंक, आदि को गंभीरता से देखा जाना चाहिए," यह कहा।
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कोच्चिः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चौबीस और पच्चीस अप्रैल को केरल के दो दिवसीय दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और खतरे की आशंका पर एडीजीपी टी के विनोदकुमार की रिपोर्ट से केरल में विवाद खड़ा हो गया है और भाजपा नेताओं ने सरकार की ओर से सुरक्षा में चूक का आरोप लगाया है. . रिपोर्ट में कहा गया है कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पर हालिया प्रतिबंध, जिसका केरल में मजबूत कैडर बेस है, प्रधानमंत्री के लिए एक गंभीर खतरा है। "पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और वेलफेयर पार्टी जैसे अन्य मुस्लिम कट्टरपंथी संगठनों से खतरे पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए, और उनकी सभी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखनी होगी। केरल में सक्रिय सीपीआई माओवादी भी अन्य राज्य सरकारों के साथ समन्वय में केंद्र सरकार के सुरक्षा बलों द्वारा उनके खिलाफ चलाए गए सफल अभियानों के मद्देनजर आने वाले प्रधान मंत्री के लिए गंभीर सुरक्षा खतरा पैदा कर रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप कई माओवादी कैडरों का सफाया हो गया है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि प्रवासी मजदूरों की उपस्थिति, विशेष रूप से माओवादी या उग्रवाद प्रभावित राज्यों और उत्तर पूर्वी राज्यों से भी प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए खतरा है। यह भी कहा गया है कि माओवादी कैडर अतिथि मजदूरों की आड़ में केरल चले गए हैं। पलक्कड़, मलप्पुरम, कोझिकोड ग्रामीण, वायनाड और कन्नूर माओवादी प्रभावित हैं। वायनाड और अन्य माओवाद प्रभावित जिलों से माओवादियों के देखे जाने की सूचना मिली है और हाल के दिनों में ऐसी घटनाओं की आवृत्ति में वृद्धि देखी गई है। सुरक्षा व्यवस्था करते समय माओवादियों की ओर से आने वाले प्रधान मंत्री के खिलाफ प्रतिशोध की संभावना को ध्यान में रखा जा सकता है। विचार किया जाना चाहिए, "रिपोर्ट कहती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि महिलाओं सहित कुछ कट्टरपंथी केरल के युवा खाड़ी क्षेत्र में इस्लामिक स्टेट और जबात नुसरा जैसे विभिन्न जिहादी समूहों में शामिल हो गए हैं और एनआईए द्वारा कन्नूर के कनकमला में संदिग्ध मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी को भी गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। "राज्य में सीपीएम और बीजेपी-आरएसएस कार्यकर्ताओं के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, केंद्र सरकार के खिलाफ छात्र संगठनों के बीच सामान्य अशांति, इस्लामिक स्टेट तत्वों के साथ केरलवासियों के लिंक, आदि को गंभीरता से देखा जाना चाहिए," यह कहा।
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दीपावली के उपलक्ष्य पर अभिनेता अक्षय कुमार की फिल्म 'लक्ष्मी बॉम्ब' 9 नवंबर को प्रदर्शित होनेवाली है । फिल्म के नाम से माता लक्ष्मी का अपमान होने के कारण तथा फिल्म के पात्रों के माध्यम से 'लव जिहाद' को बढावा देने के कारण हिन्दू समाज ने इसका कडा विरोध किया । इस विरोध के उपरांत फिल्म का नाम केवल 'लक्ष्मी बॉम्ब' से 'लक्ष्मी' इस प्रकार किया गया है । परंतु लव जिहाद को बढावा देनेवाले दृश्य तथा माता लक्ष्मी का अपमान करनेवाले संभावित दृश्य फिल्म से हटाए नहीं गए है ।
इसलिए आज ट्विटर पर इस फिल्म पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग करनेवाला एक हॅशटॅग ट्रेंड हुआ । #Ban_Laxmmi_Movie इस हॅशटॅग के साथ धर्मप्रेमियों ने अपना विरोध दर्ज किया । यह ट्रेंड तिसरे स्थान पर था । साथ ही इस ट्रेंड में ४० हजार से अधिक ट्विट्स हुए ।
ट्रेंड में एक ने कहा, इस फिल्म द्वारा माता लक्ष्मी के नाम का मजाक उडाया गया है, यह एक निंदात्मक एवं जानबूझकर बदनाम करने बॉलीवूड का षड्यंत्र है । हमें इसके विरोध में आवाज उठाकर धर्म पर हो रहे आक्रमण को रोकना होगा ।
अन्य एक ने कहा, दीपावली पर 'लक्ष्मी' के नाम से चलचित्र बनानेवाले क्या कभी ईद के निमित्त अल्लाह अथवा पैगंबर; क्रिसमस पर जीजस अथवा ईसामसीह के नाम से विनोदी चलचित्र बनाने का साहस करेंगे ? क्या फिल्म सेंसर बोर्ड इस नाम को मान्यता देगा ?
और एक यूजर ने कहा, यह फिल्म तमिल के 'कांचना' फिल्म का संस्करण है । उसमें अभिनेता का नाम राघव और अभिनेत्री का नाम प्रिया था । लेकिन यहां अभिनेता आसिफ और अभिनेत्री प्रिया इस प्रकार दिखाकर एक प्रकार से लव जिहाद को ही बढावा दिया है । ऐसे फिल्म पर प्रतिबन्ध लगना चाहिए !
The movie is remake of South Tamil movie Kanchana, in that movie both characters were Hindus.
In Tamil Version "Kanchana"
It's not coincident, it's an deliberate act to spread "LOVE JIHAD"
Promoting #lovejihaad is a Bollywood agenda.
All films screened in the last 10 years have been promoting Love Jihad.
Akshay Kumar's #Lakshmii film is a part of this agenda.
Filmmakers Shabina Khan releases a movie in d name of Goddess #Laxmmi on d occasion of #Diwali!
Do they dare to make a such a film like Fatima/Ayesha Bomb on occasion of Eid?
Does sensor board is in sleep?
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दीपावली के उपलक्ष्य पर अभिनेता अक्षय कुमार की फिल्म 'लक्ष्मी बॉम्ब' नौ नवंबर को प्रदर्शित होनेवाली है । फिल्म के नाम से माता लक्ष्मी का अपमान होने के कारण तथा फिल्म के पात्रों के माध्यम से 'लव जिहाद' को बढावा देने के कारण हिन्दू समाज ने इसका कडा विरोध किया । इस विरोध के उपरांत फिल्म का नाम केवल 'लक्ष्मी बॉम्ब' से 'लक्ष्मी' इस प्रकार किया गया है । परंतु लव जिहाद को बढावा देनेवाले दृश्य तथा माता लक्ष्मी का अपमान करनेवाले संभावित दृश्य फिल्म से हटाए नहीं गए है । इसलिए आज ट्विटर पर इस फिल्म पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग करनेवाला एक हॅशटॅग ट्रेंड हुआ । #Ban_Laxmmi_Movie इस हॅशटॅग के साथ धर्मप्रेमियों ने अपना विरोध दर्ज किया । यह ट्रेंड तिसरे स्थान पर था । साथ ही इस ट्रेंड में चालीस हजार से अधिक ट्विट्स हुए । ट्रेंड में एक ने कहा, इस फिल्म द्वारा माता लक्ष्मी के नाम का मजाक उडाया गया है, यह एक निंदात्मक एवं जानबूझकर बदनाम करने बॉलीवूड का षड्यंत्र है । हमें इसके विरोध में आवाज उठाकर धर्म पर हो रहे आक्रमण को रोकना होगा । अन्य एक ने कहा, दीपावली पर 'लक्ष्मी' के नाम से चलचित्र बनानेवाले क्या कभी ईद के निमित्त अल्लाह अथवा पैगंबर; क्रिसमस पर जीजस अथवा ईसामसीह के नाम से विनोदी चलचित्र बनाने का साहस करेंगे ? क्या फिल्म सेंसर बोर्ड इस नाम को मान्यता देगा ? और एक यूजर ने कहा, यह फिल्म तमिल के 'कांचना' फिल्म का संस्करण है । उसमें अभिनेता का नाम राघव और अभिनेत्री का नाम प्रिया था । लेकिन यहां अभिनेता आसिफ और अभिनेत्री प्रिया इस प्रकार दिखाकर एक प्रकार से लव जिहाद को ही बढावा दिया है । ऐसे फिल्म पर प्रतिबन्ध लगना चाहिए ! The movie is remake of South Tamil movie Kanchana, in that movie both characters were Hindus. In Tamil Version "Kanchana" It's not coincident, it's an deliberate act to spread "LOVE JIHAD" Promoting #lovejihaad is a Bollywood agenda. All films screened in the last दस years have been promoting Love Jihad. Akshay Kumar's #Lakshmii film is a part of this agenda. Filmmakers Shabina Khan releases a movie in d name of Goddess #Laxmmi on d occasion of #Diwali! Do they dare to make a such a film like Fatima/Ayesha Bomb on occasion of Eid? Does sensor board is in sleep?
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नेशनल डिफेंस एकेडमी व नेवल एकेडमी परीक्षा का रिजल्ट घोषिट, देखें पूरी लिस्ट, किसने मारी बाजी?
नेशनल डिफेंस एकेडमी व नेवल एकेडमी परीक्षा का मंगलवार को रिजल्ट घोषित हो गया है। उत्तराखंड के दून निवासी रिपुंजय नैथानी ने मेरिट लिस्ट में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश का नाम रोशन किया है।
रिपुंजय वर्तमान में आरआइएमसी के छात्र हैं। आरआइएमसी के दो और कैडेट टॉप चार में हैं। वहीं संस्थान के 18 कैडेटों ने सफलता पाई है। रिपुंजय के मेरिट लिस्ट में टॉप आने पर उनके माता-पिता ने खुशी जाहिर की। उन्होंने इसका पूरा श्रेय रिपुंजय की मेहनत और आरआइएमसी को दिया है।
यूपीएससी की ओर से एनडीए व एनए की परीक्षा 21 अप्रैल 2019 को आयोजित की गई थी। मंगलवार को परीक्षा का रिजल्ट घोषित किया गया। परीक्षा में 450 छात्रों ने सफलता हासिल की है। मूल रूप से उत्तराखंड के पौडी गढ़वाल निवासी व वर्तमान में दून के बसंत विहार निवासी रिपुंजय नेगी ने परीक्षा में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
रिपुंजय नेगी के पिता राजेश नैथानी वर्तमान में सेना में कर्नल के पद पर है, और असम में तैनात हैं। जबकि माता पूजा नैथानी हिल फाउंडेशन स्कूल इंदिरा नगर में प्रिंसिपल के पद पर तैनात है। रिपुंजय ने मैरिट में टॉप स्थान प्राप्त करने का श्रेय आरआइएमसी और उनके माता-पिता को दिया है।
उन्होंने कहा कि पहले ही प्रयास में उन्होंने एनडीए में टॉप किया है। बताया कि बचपन से ही उनकी इच्छा आर्मी ज्वाइन करने की थी। वर्ष 2013 में उन्होंने आरआईएमसी की परीक्षा पास कर वहां एडमिशन लिया था। वह वर्तमान में कैडेट कैप्टन हैं। राइडिंग, स्वीमिंग, डिवेट, बॉक्सिंग, रीडिंग उनकी प्रमुख हॉबी है। कहा कि सेना में जाकर वह एक अच्छा अफसर बन देश, प्रदेश और माता-पिता का नाम रोशन करेगा।
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नेशनल डिफेंस एकेडमी व नेवल एकेडमी परीक्षा का रिजल्ट घोषिट, देखें पूरी लिस्ट, किसने मारी बाजी? नेशनल डिफेंस एकेडमी व नेवल एकेडमी परीक्षा का मंगलवार को रिजल्ट घोषित हो गया है। उत्तराखंड के दून निवासी रिपुंजय नैथानी ने मेरिट लिस्ट में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। रिपुंजय वर्तमान में आरआइएमसी के छात्र हैं। आरआइएमसी के दो और कैडेट टॉप चार में हैं। वहीं संस्थान के अट्ठारह कैडेटों ने सफलता पाई है। रिपुंजय के मेरिट लिस्ट में टॉप आने पर उनके माता-पिता ने खुशी जाहिर की। उन्होंने इसका पूरा श्रेय रिपुंजय की मेहनत और आरआइएमसी को दिया है। यूपीएससी की ओर से एनडीए व एनए की परीक्षा इक्कीस अप्रैल दो हज़ार उन्नीस को आयोजित की गई थी। मंगलवार को परीक्षा का रिजल्ट घोषित किया गया। परीक्षा में चार सौ पचास छात्रों ने सफलता हासिल की है। मूल रूप से उत्तराखंड के पौडी गढ़वाल निवासी व वर्तमान में दून के बसंत विहार निवासी रिपुंजय नेगी ने परीक्षा में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। रिपुंजय नेगी के पिता राजेश नैथानी वर्तमान में सेना में कर्नल के पद पर है, और असम में तैनात हैं। जबकि माता पूजा नैथानी हिल फाउंडेशन स्कूल इंदिरा नगर में प्रिंसिपल के पद पर तैनात है। रिपुंजय ने मैरिट में टॉप स्थान प्राप्त करने का श्रेय आरआइएमसी और उनके माता-पिता को दिया है। उन्होंने कहा कि पहले ही प्रयास में उन्होंने एनडीए में टॉप किया है। बताया कि बचपन से ही उनकी इच्छा आर्मी ज्वाइन करने की थी। वर्ष दो हज़ार तेरह में उन्होंने आरआईएमसी की परीक्षा पास कर वहां एडमिशन लिया था। वह वर्तमान में कैडेट कैप्टन हैं। राइडिंग, स्वीमिंग, डिवेट, बॉक्सिंग, रीडिंग उनकी प्रमुख हॉबी है। कहा कि सेना में जाकर वह एक अच्छा अफसर बन देश, प्रदेश और माता-पिता का नाम रोशन करेगा।
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8 मार्च को पूरी दुनिया एक ओर जहां महिला दिवस पर महिलाओं के शान में कशीदे पढ़ रही थीी वहीं दूसरी तरफ एक मां ने जन्म के तुरंत बाद नवजात बेटी को सड़क के किनारे फेंक दिया क्यों?
इस मां का कुसूर इतना ता कि उसने तीसरी बार बेटी को जन्म दिया . घटना पटना के निकट परसा बाजार थाना के कुरथौल गांव की है.लोग सडक के किनारे नवजात के रोने की आवाज पर जमा हुए तो पूरा मामला प्रकाश में आया। पुलिस ने नवजात बच्ची को उठा कर चाइलड लाइन में दे दिया है.
यह घटना एक मां की बेबसी की मिसाल है जो बयान करती है कि आज जब एक तरफ बेटियां दुनिय में अपना मुकाम बना रही हैं वहीं दूसरी तरफ हमारे समाज का एक वर्ग ऐसे भी है जो बेटी को बोझ समझता है.
और उसी का नतीजा है कि एक मां को अपनी ममता की कुर्बानी दे कर अपने जिगर के टुकरे को खुद से अलग करने को मजबूर होना पड़ा है.
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आठ मार्च को पूरी दुनिया एक ओर जहां महिला दिवस पर महिलाओं के शान में कशीदे पढ़ रही थीी वहीं दूसरी तरफ एक मां ने जन्म के तुरंत बाद नवजात बेटी को सड़क के किनारे फेंक दिया क्यों? इस मां का कुसूर इतना ता कि उसने तीसरी बार बेटी को जन्म दिया . घटना पटना के निकट परसा बाजार थाना के कुरथौल गांव की है.लोग सडक के किनारे नवजात के रोने की आवाज पर जमा हुए तो पूरा मामला प्रकाश में आया। पुलिस ने नवजात बच्ची को उठा कर चाइलड लाइन में दे दिया है. यह घटना एक मां की बेबसी की मिसाल है जो बयान करती है कि आज जब एक तरफ बेटियां दुनिय में अपना मुकाम बना रही हैं वहीं दूसरी तरफ हमारे समाज का एक वर्ग ऐसे भी है जो बेटी को बोझ समझता है. और उसी का नतीजा है कि एक मां को अपनी ममता की कुर्बानी दे कर अपने जिगर के टुकरे को खुद से अलग करने को मजबूर होना पड़ा है.
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औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने आज शुक्रवार को उत्तर प्रदेश बोर्ड इंटरमीडिएट की परीक्षा में अनेक बाधाओं और अभावों के बाद भी जनपद में टॉप करने वाली प्रयागराज के फूलपुर की छात्रा सुबासना और हंडिया की मेधावी छात्रा नंदिनी और उनके अभिभावकों को उनके घर जाकर सम्मानित किया. मंत्री नंदी ने सीबीएसई बोर्ड इंटरमीडिएट में जनपद में द्वितीय जगह प्राप्त करने वाले कटघर निवासी विद्यार्थी आर्यन सिंह और आईसीएसई बोर्ड हाईस्कूल में जनपद में प्रथम जगह प्राप्त करने वाले सिविल लाइंस निवासी विद्यार्थी सार्थक सिंह को भी मोमेंटो और शॉल देकर सम्मानित किया.
मंत्री नंदी ने मेधावी विद्यार्थियों का हौसला बढ़ाते हुए बोला कि वे प्रतिभा का बहुत सम्मान करते हैं, इसीलिए पिछले करीब 15 सालों से प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित करते चले आ रहे हैं. मंत्री नंदी ने बोला कि महत्वपूर्ण ये नहीं कि हमें विरासत में क्या मिला है, महत्वपूर्ण ये है कि हम विरासत में क्या छोड़ जाते हैं. जिस रास्ते पर चलने का प्रण किया है, उसी पर चलें, कामयाबी आपके कदम चूमेगी. सब आपके पीछे खड़े होंगे. आने वाला वक्त, आपका इन्तजार कर रहा है. समाज में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को हमेशा सम्मान मिलता है.
टॉपर छात्रा का हौसला बढ़ाते मंत्री नंदी.
मंत्री उत्तर प्रदेश बोर्ड इंटरमीडिएट की परीक्षा में जनपद प्रयागराज में प्रथम जगह प्राप्त कर जनपद का गौरव बढ़ाने वाली छात्रा कुमारी सुबासना के जलालपुर, फूलपुर स्थित आवास पर पहुंचे. छात्रा के साथ ही परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. भावुक छात्रा को संभालते हुए मंत्री ने हर संभव सहायता का भरोसा जताया. एक छोटे से परिवार से होने के बाद भी कामयाबी हासिल करने वाली छात्रा ने बताया कि वह आईएएस बनना चाहती हैं. इसी क्रम में उसकी तैयारी चल रही है. नंदी ने इस जरूरी उपलब्धि के लिए छात्रा के पिता कांस्टेबल राम सुंदर के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों को भी शुभकामनाएं प्रेषित की.
द्वितीय जगह प्राप्त कर जनपद का गौरव बढ़ाने वाली छात्रा कुमारी नंदिनी के धनुपुर, हंडिया स्थित आवास पर जाकर उन्हें सम्मानित किया. उज्जवल भविष्य की कामना की. छात्रा के पिता बुधराम के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों को भी इसके लिए शुभकामना दी.
सीबीएसई बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में जनपद में द्वितीय जगह प्राप्त कर प्रयागराज का गौरव बढ़ाने वाले शंकरगढ़ की कोठी कटघर निवासी विद्यार्थी आर्यन केसरवानी के घर जाकर उन्हें सम्मानित किया. छात्रा के पिता डाक्टर अजय केसरवानी को शुभकामना दी. आईसीएसई बोर्ड की 10वीं की परीक्षा में प्रथम जगह प्राप्त कर प्रयागराज का गौरव बढ़ाने वाले प्रयागकुंज सिविल लाइंस निवासी विद्यार्थी सार्थक सिंह के घर जाकर उन्हें सम्मानित किया. सार्थक के पिता आशुतोष सिंह को बेटे को अच्छी शिक्षा देने के लिए शुभकामना दी.
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औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने आज शुक्रवार को उत्तर प्रदेश बोर्ड इंटरमीडिएट की परीक्षा में अनेक बाधाओं और अभावों के बाद भी जनपद में टॉप करने वाली प्रयागराज के फूलपुर की छात्रा सुबासना और हंडिया की मेधावी छात्रा नंदिनी और उनके अभिभावकों को उनके घर जाकर सम्मानित किया. मंत्री नंदी ने सीबीएसई बोर्ड इंटरमीडिएट में जनपद में द्वितीय जगह प्राप्त करने वाले कटघर निवासी विद्यार्थी आर्यन सिंह और आईसीएसई बोर्ड हाईस्कूल में जनपद में प्रथम जगह प्राप्त करने वाले सिविल लाइंस निवासी विद्यार्थी सार्थक सिंह को भी मोमेंटो और शॉल देकर सम्मानित किया. मंत्री नंदी ने मेधावी विद्यार्थियों का हौसला बढ़ाते हुए बोला कि वे प्रतिभा का बहुत सम्मान करते हैं, इसीलिए पिछले करीब पंद्रह सालों से प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित करते चले आ रहे हैं. मंत्री नंदी ने बोला कि महत्वपूर्ण ये नहीं कि हमें विरासत में क्या मिला है, महत्वपूर्ण ये है कि हम विरासत में क्या छोड़ जाते हैं. जिस रास्ते पर चलने का प्रण किया है, उसी पर चलें, कामयाबी आपके कदम चूमेगी. सब आपके पीछे खड़े होंगे. आने वाला वक्त, आपका इन्तजार कर रहा है. समाज में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को हमेशा सम्मान मिलता है. टॉपर छात्रा का हौसला बढ़ाते मंत्री नंदी. मंत्री उत्तर प्रदेश बोर्ड इंटरमीडिएट की परीक्षा में जनपद प्रयागराज में प्रथम जगह प्राप्त कर जनपद का गौरव बढ़ाने वाली छात्रा कुमारी सुबासना के जलालपुर, फूलपुर स्थित आवास पर पहुंचे. छात्रा के साथ ही परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. भावुक छात्रा को संभालते हुए मंत्री ने हर संभव सहायता का भरोसा जताया. एक छोटे से परिवार से होने के बाद भी कामयाबी हासिल करने वाली छात्रा ने बताया कि वह आईएएस बनना चाहती हैं. इसी क्रम में उसकी तैयारी चल रही है. नंदी ने इस जरूरी उपलब्धि के लिए छात्रा के पिता कांस्टेबल राम सुंदर के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों को भी शुभकामनाएं प्रेषित की. द्वितीय जगह प्राप्त कर जनपद का गौरव बढ़ाने वाली छात्रा कुमारी नंदिनी के धनुपुर, हंडिया स्थित आवास पर जाकर उन्हें सम्मानित किया. उज्जवल भविष्य की कामना की. छात्रा के पिता बुधराम के साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों को भी इसके लिए शुभकामना दी. सीबीएसई बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा में जनपद में द्वितीय जगह प्राप्त कर प्रयागराज का गौरव बढ़ाने वाले शंकरगढ़ की कोठी कटघर निवासी विद्यार्थी आर्यन केसरवानी के घर जाकर उन्हें सम्मानित किया. छात्रा के पिता डाक्टर अजय केसरवानी को शुभकामना दी. आईसीएसई बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में प्रथम जगह प्राप्त कर प्रयागराज का गौरव बढ़ाने वाले प्रयागकुंज सिविल लाइंस निवासी विद्यार्थी सार्थक सिंह के घर जाकर उन्हें सम्मानित किया. सार्थक के पिता आशुतोष सिंह को बेटे को अच्छी शिक्षा देने के लिए शुभकामना दी.
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नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार 'बच्चन पांडे', 'बच्चन पांडे' और 'बेलबॉटम' के बाद अब फैंस को एक और तोहफा देने के लिए तैयार हैं। एक्टर की अपकमिंग मेगा बजट फिल्म 'पृथ्वीराज' का ट्रेलर रिलीज हो चुका है। ट्रेलर रिलीज के साथ ही छा गया है। फैंस एक्टर को पृथ्वीराज के लिबास में देखकर खुश और उत्साहित हैं। सुबह से ही इस फिल्म का नाम ट्वीटर पर ट्रेंड कर रहा है। इसी से लोगों में इस फिल्म को लेकर होने वाली उत्सुकता का अंदाजा लगाया जा सकता है। फैंस अब बेसब्री से अक्षय की इस फिल्म के रिलीज होने का इंतजार कर रहे हैं। फिल्म के ट्रेलर रिलीज के दौरान अक्षय कुमार भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि पृथ्वी राज चौहान जो पूरे देश के महाराजा थे। उनका रोल प्ले करना मेरे लिए गर्व की बात है।
ट्रेलर लॉन्च के दौरान अक्षय कुमार अपनी मां को याद कर भी भावुक हुए। उन्होंने अपनी मां को याद करते हुए कहा कि काश! आज मेरी मां मुझे पृथ्वीराज बने हुए देख पाती। ये बात करते हुए एक्टर की आंखों में आंसू थे। बता दें कि एक्टर की मां का निधन 8 सितंबर 2021 को हो गया था। कुछ दिन तक उन्हें आईसीयू में भर्ती रखा गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सकता। मां के निधन के बाद एक्टर ने कल मदर्स -डे के मौके पर एक इमोशनल पोस्ट भी लिखा है जिसमें उन्होंने खुद को अपनी मां के बिना अधूरा बताया था।
ट्रेलर लॉन्च के मौके पर एक्टर से सवाल किया गया किया गया कि क्या वो पीएम मोदी को अपनी फिल्म दिखाएंगे। इस सवाल का जवाब देते हुए एक्टर ने कहा कि मैं कौन होता हूं उन्हें फिल्म दिखाने वाला...अगर उन्हें फिल्म देखनी होगी तो खुद देख लेंगे। इस फिल्म की कहानी यानी पृथ्वीराज चौहान के बारे में लोगों को बहुत कम ही जानकारी है। ये एक एजुकेशन फिल्म जिसे हर बच्चे और देश के हर नागरिक को देखना चाहिए।
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नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार 'बच्चन पांडे', 'बच्चन पांडे' और 'बेलबॉटम' के बाद अब फैंस को एक और तोहफा देने के लिए तैयार हैं। एक्टर की अपकमिंग मेगा बजट फिल्म 'पृथ्वीराज' का ट्रेलर रिलीज हो चुका है। ट्रेलर रिलीज के साथ ही छा गया है। फैंस एक्टर को पृथ्वीराज के लिबास में देखकर खुश और उत्साहित हैं। सुबह से ही इस फिल्म का नाम ट्वीटर पर ट्रेंड कर रहा है। इसी से लोगों में इस फिल्म को लेकर होने वाली उत्सुकता का अंदाजा लगाया जा सकता है। फैंस अब बेसब्री से अक्षय की इस फिल्म के रिलीज होने का इंतजार कर रहे हैं। फिल्म के ट्रेलर रिलीज के दौरान अक्षय कुमार भावुक नजर आए। उन्होंने बताया कि पृथ्वी राज चौहान जो पूरे देश के महाराजा थे। उनका रोल प्ले करना मेरे लिए गर्व की बात है। ट्रेलर लॉन्च के दौरान अक्षय कुमार अपनी मां को याद कर भी भावुक हुए। उन्होंने अपनी मां को याद करते हुए कहा कि काश! आज मेरी मां मुझे पृथ्वीराज बने हुए देख पाती। ये बात करते हुए एक्टर की आंखों में आंसू थे। बता दें कि एक्टर की मां का निधन आठ सितंबर दो हज़ार इक्कीस को हो गया था। कुछ दिन तक उन्हें आईसीयू में भर्ती रखा गया लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सकता। मां के निधन के बाद एक्टर ने कल मदर्स -डे के मौके पर एक इमोशनल पोस्ट भी लिखा है जिसमें उन्होंने खुद को अपनी मां के बिना अधूरा बताया था। ट्रेलर लॉन्च के मौके पर एक्टर से सवाल किया गया किया गया कि क्या वो पीएम मोदी को अपनी फिल्म दिखाएंगे। इस सवाल का जवाब देते हुए एक्टर ने कहा कि मैं कौन होता हूं उन्हें फिल्म दिखाने वाला...अगर उन्हें फिल्म देखनी होगी तो खुद देख लेंगे। इस फिल्म की कहानी यानी पृथ्वीराज चौहान के बारे में लोगों को बहुत कम ही जानकारी है। ये एक एजुकेशन फिल्म जिसे हर बच्चे और देश के हर नागरिक को देखना चाहिए।
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समय आने पर कमला की भाँति बा० सोहनलाल, भदनमोहन का विवाह भी एक योग्य और गुगावती कन्या से कर उससे भी निश्चिन्त हो गये थे, परन्तु शोक कि मदनमोहन की माता पतोहू का सुख न देख सकीं, विवाह पर ही कुछ दिनों के लिये पतोहू का मुख देख कर वे इस संसार से चल बसी थीं ।
कोतवाल के चले जाने के पीछे वा० सोहनलाल मदनमोहन से बोले - "तुम्हें यह क्या सूझी है ? तुम अपने को क्या मुझसे भी अधिक बुद्धिमान समझते हो ? मैं तुमसे स्पष्ट कहे देता हूँ-धोखा खगे। समय पड़ने पर कोई काम न आवेगा । इस समय जो तुम्हें फुसला २ कर ले जाते हैं और जिनके कहने में आकर तुम यह कार्य कर रहे हो, समय पड़ने पर वेही कोस भागेंगे । इस लिये मैं तुमसे कहता हूँ इसे छोड़ो, इन व्यर्थकी बातों में क्या लोगे ? इस समय स्वदेश सेवा करना भानो अपने ऊपर विपत्ति लेना है। मैं सदैव समझाता रहा हूँ, अब भी समझाता हूँ, कि इन कामोंमें हाथ न डालो, सब छोड़ कर घर बैठो। वृद्धावस्थामें मेरा जन्म कंलकित करनेके कार्य भत करो और यदि तुम्हारी यही इच्छा है, तो जबतक मैं जावित हूँ, तब तक तो मेरे ऊपर दया करो, और जब मैं मरजाऊँ तब चाहो सो करना मै देखने नही आऊँगा, परन्तु इस समय तुम इस कामको छोड़ कर सीधे २ अपना कार्य्य जो करो ।
मदनमोहनने नम्रता पूर्वक कहा- मुझे लोग बलात्कार खींच ले गये और वहाँ मंत्री बना दिया, उस समय मैं क्या करता ? 'मना करना' सबकी दृष्टि में कायर बनना था, नपुंसकर्ताका परिचय देना था। फिर मेरी समझमें भी इसमें कोई भयकी
बात नही, देश भर इस बातमें सहमत है। इस समय देशकी
जैसी दशा है, उसे आप भी जानते हैं; ऐसे समय प्रत्येक भारतवासीका यही लक्ष्य है, कि किसी प्रकार स्वराज्य प्राप्त हो । फिर भी हमारा तात्पर्य्य 'स्वराज' से सर्वथा स्वतंत्र होना"नहीं है, वरन् इंगलैण्डाधिपतिके आधीन रहते हुए निज जन्म स्वत्वोंका उपभोग करना है। मेरी समझमें इस प्रकारके प्रचार में और इस आन्दोलनमें कोई दोष नहीं, कोई हानि नहीं और कोई द्रोह नहीं ।
सोहनलाल - इन वातोंसे क्या मतलव ? है कि त्यागपत्र लिखकर "मंत्री" पदसे तुरन्त मदन० - यह तो अवमुझसे नहीं होगा । सोहन० -तुम पिताका पुत्र पर कुछ अधिकार मानते हो या नहीं ?
मदन० - मानता हूँ, और यही कारणा था, कि अब तक इन कार्यों से दूर रहा हूँ, परन्तु अब देशमें जागृति फैल रही है, अब अकर्मण्यताका समय नहीं है, चहुँ ओर परिवर्तन दिखाई देता है, मनुष्य अपने अधिकारों और त्वको पहिचान रहे है । अब पूर्वमें भी स्वतंत्रताकी सूर्यलालिमा देख पड़ती है, भारत-सन्तान व भक्तिभावसे अपने शरीर पुष्पहृदयके सूर्यको अपना तन, मन, धन सब कुछ देनेके लिये तयार हैं, अब रात्रि नही रही, दिनकान है, अब जागृति और उन्नतिका समय है; हम किसीसे द्वेष नहीं करते, किसीके साथ द्रोह नहीं करते, अब हम भी उन्नति-पथ पर अग्रसर होना चाहते है, बस यही बात है। इसमें भय की कोई बात नहीं, डरनेका कोई कारगा नहीं । माता प्रकृतिका भी यही उपदेश है सबके स्वत्व समान हैं, निर्भय होकर अपना काम करना चाहिये, तभी कल्याणा है, कहा भी है :
बच्चो ! न डर किसी का करना कभी न रुकना । लातों कुचल भगाना बाधा प्रसन्न रहना ।। दुःख भी मिले जो कर्त्तव्य से न हटना । पुत्रो ! स्वदेश के लिये विपता से नाहिं डरना ।। जब स्वदेशसेवामे यह तन लगे तुम्हारा - माता की कोख मानो तबही पवित्र धारा ।
अव कहिये इसमें डरकी क्या बात है ? उत्तमकार्योमें भयभीत होना अपनी असमर्थता प्रकट करना है । फिर इसी क्या भय है ? हमारी इच्छा साम्राज्य की छत्र कायामें रहनेकी है, वह भी इस लिये, कि समयपर सब प्रकार से हम उसकी सहायता कर सकें और उसकी सेवा करनेमे समर्थ हो सकें । अव तटस्थ वैठे रहना देशवासियोंके साथ अन्य और साम्राज्यका अहित करना है। हम साम्राज्यकी सबसे अच्छी सेवा और देशका भला तभी कर सक्ते हैं, जब हमारे वास्तविक अधिकार हमें प्राप्त हों और हम उनका पूरापूरा उपभोग करते हों। ब्रिटिश साम्राज्य के अन्तर्गत रहकर देशोन्नति करनेहीमे हमारा सबका भला और कल्याण है । जिस मातृभूमिने हमको जन्म दिया, जिसकी गोद में बैठ कर हम इतने बड़े हुए और जिसके अन्न, जल, वायु आदि हमारा उदर पोषगा होता है, यदि उसकी सेवा और उन्नति न की जाय, तो उसके साथ कृतघ्नता करना होगा। देशसेवाकी महिमा बड़ी पार और अलौकिक है। वही लौकिक और पारिलौकिक धमाका केन्द्र और स्वर्गकी दायिनी है । जो जाति; जो माता पिता और जिस देशके निवासी अपने बालकोको
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समय आने पर कमला की भाँति बाशून्य सोहनलाल, भदनमोहन का विवाह भी एक योग्य और गुगावती कन्या से कर उससे भी निश्चिन्त हो गये थे, परन्तु शोक कि मदनमोहन की माता पतोहू का सुख न देख सकीं, विवाह पर ही कुछ दिनों के लिये पतोहू का मुख देख कर वे इस संसार से चल बसी थीं । कोतवाल के चले जाने के पीछे वाशून्य सोहनलाल मदनमोहन से बोले - "तुम्हें यह क्या सूझी है ? तुम अपने को क्या मुझसे भी अधिक बुद्धिमान समझते हो ? मैं तुमसे स्पष्ट कहे देता हूँ-धोखा खगे। समय पड़ने पर कोई काम न आवेगा । इस समय जो तुम्हें फुसला दो कर ले जाते हैं और जिनके कहने में आकर तुम यह कार्य कर रहे हो, समय पड़ने पर वेही कोस भागेंगे । इस लिये मैं तुमसे कहता हूँ इसे छोड़ो, इन व्यर्थकी बातों में क्या लोगे ? इस समय स्वदेश सेवा करना भानो अपने ऊपर विपत्ति लेना है। मैं सदैव समझाता रहा हूँ, अब भी समझाता हूँ, कि इन कामोंमें हाथ न डालो, सब छोड़ कर घर बैठो। वृद्धावस्थामें मेरा जन्म कंलकित करनेके कार्य भत करो और यदि तुम्हारी यही इच्छा है, तो जबतक मैं जावित हूँ, तब तक तो मेरे ऊपर दया करो, और जब मैं मरजाऊँ तब चाहो सो करना मै देखने नही आऊँगा, परन्तु इस समय तुम इस कामको छोड़ कर सीधे दो अपना कार्य्य जो करो । मदनमोहनने नम्रता पूर्वक कहा- मुझे लोग बलात्कार खींच ले गये और वहाँ मंत्री बना दिया, उस समय मैं क्या करता ? 'मना करना' सबकी दृष्टि में कायर बनना था, नपुंसकर्ताका परिचय देना था। फिर मेरी समझमें भी इसमें कोई भयकी बात नही, देश भर इस बातमें सहमत है। इस समय देशकी जैसी दशा है, उसे आप भी जानते हैं; ऐसे समय प्रत्येक भारतवासीका यही लक्ष्य है, कि किसी प्रकार स्वराज्य प्राप्त हो । फिर भी हमारा तात्पर्य्य 'स्वराज' से सर्वथा स्वतंत्र होना"नहीं है, वरन् इंगलैण्डाधिपतिके आधीन रहते हुए निज जन्म स्वत्वोंका उपभोग करना है। मेरी समझमें इस प्रकारके प्रचार में और इस आन्दोलनमें कोई दोष नहीं, कोई हानि नहीं और कोई द्रोह नहीं । सोहनलाल - इन वातोंसे क्या मतलव ? है कि त्यागपत्र लिखकर "मंत्री" पदसे तुरन्त मदनशून्य - यह तो अवमुझसे नहीं होगा । सोहनशून्य -तुम पिताका पुत्र पर कुछ अधिकार मानते हो या नहीं ? मदनशून्य - मानता हूँ, और यही कारणा था, कि अब तक इन कार्यों से दूर रहा हूँ, परन्तु अब देशमें जागृति फैल रही है, अब अकर्मण्यताका समय नहीं है, चहुँ ओर परिवर्तन दिखाई देता है, मनुष्य अपने अधिकारों और त्वको पहिचान रहे है । अब पूर्वमें भी स्वतंत्रताकी सूर्यलालिमा देख पड़ती है, भारत-सन्तान व भक्तिभावसे अपने शरीर पुष्पहृदयके सूर्यको अपना तन, मन, धन सब कुछ देनेके लिये तयार हैं, अब रात्रि नही रही, दिनकान है, अब जागृति और उन्नतिका समय है; हम किसीसे द्वेष नहीं करते, किसीके साथ द्रोह नहीं करते, अब हम भी उन्नति-पथ पर अग्रसर होना चाहते है, बस यही बात है। इसमें भय की कोई बात नहीं, डरनेका कोई कारगा नहीं । माता प्रकृतिका भी यही उपदेश है सबके स्वत्व समान हैं, निर्भय होकर अपना काम करना चाहिये, तभी कल्याणा है, कहा भी है : बच्चो ! न डर किसी का करना कभी न रुकना । लातों कुचल भगाना बाधा प्रसन्न रहना ।। दुःख भी मिले जो कर्त्तव्य से न हटना । पुत्रो ! स्वदेश के लिये विपता से नाहिं डरना ।। जब स्वदेशसेवामे यह तन लगे तुम्हारा - माता की कोख मानो तबही पवित्र धारा । अव कहिये इसमें डरकी क्या बात है ? उत्तमकार्योमें भयभीत होना अपनी असमर्थता प्रकट करना है । फिर इसी क्या भय है ? हमारी इच्छा साम्राज्य की छत्र कायामें रहनेकी है, वह भी इस लिये, कि समयपर सब प्रकार से हम उसकी सहायता कर सकें और उसकी सेवा करनेमे समर्थ हो सकें । अव तटस्थ वैठे रहना देशवासियोंके साथ अन्य और साम्राज्यका अहित करना है। हम साम्राज्यकी सबसे अच्छी सेवा और देशका भला तभी कर सक्ते हैं, जब हमारे वास्तविक अधिकार हमें प्राप्त हों और हम उनका पूरापूरा उपभोग करते हों। ब्रिटिश साम्राज्य के अन्तर्गत रहकर देशोन्नति करनेहीमे हमारा सबका भला और कल्याण है । जिस मातृभूमिने हमको जन्म दिया, जिसकी गोद में बैठ कर हम इतने बड़े हुए और जिसके अन्न, जल, वायु आदि हमारा उदर पोषगा होता है, यदि उसकी सेवा और उन्नति न की जाय, तो उसके साथ कृतघ्नता करना होगा। देशसेवाकी महिमा बड़ी पार और अलौकिक है। वही लौकिक और पारिलौकिक धमाका केन्द्र और स्वर्गकी दायिनी है । जो जाति; जो माता पिता और जिस देशके निवासी अपने बालकोको
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इस गांव में बच्चों से लेकर बूढ़ों तक. . . सभी हैं 'ब्रिज' के धुरंधर!
वैसे तो आम तौर पर कोई भी मां-बाप अपने बच्चों को ताश खेलने से रोकता है. मगर इस गांव में ऐसा नहीं है. यहां मां-बाप खुद अपने बच्चों को ताश खेलने के लिये कहते हैं.
'ब्रिज' एक ऐसा ताश के पत्तों का खेल जिसे आम तौर पर अमीर लोग ही खेल पाते हैं. मगर मध्य प्रदेश के खरगौन जिले के एक छोटे से गांव रायबिड़पुरा में 'ब्रिज' के उस्ताद बसते हैं. इस गांव की प्रतिभा को देख बिल गेट्स भी इसे 1000 डॉलर दे चुके हैं.
आबादी, महज़ 5000. . . . मगर 500 से ज्यादा उस्ताद. जी हां. . . मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में रायबिड़पुरा नाम के गांव में ब्रिज खेलने वालों के नाम का डंका बजता है. वैस तो ब्रिज कोई आसान खेल नही है. इसे खेलने के लिये शतरंज से भी ज्यादा दिमाग की ज़रुरत होती है. मगर इस छोटे से गांव में किसानों से लेकर छोटी-छोटी लड़कियां तक ब्रिज खेलने में महारत हासिल कर चुकी हैं.
अब आपके मन में सवाल उठता होगा कि ब्रिज जैसा ताश के पत्तों का खेल इस छोटे से गांव में कैसे आ गया? तो आपको बता दें कि इसे 1962 में इस गांव के अस्पताल में काम करने आए डॉ. मोहम्मद खान लेकर आए थे. उन्होंने ही यहां के लोगों को इस खेल को खेलना सिखाया. अब इस गांव में ब्रिज का असर इतना है कि गांव वालों ने 'ब्रिज क्लब' ही खोल दिया है.
गांव वालो का कहना है, 'हम सभी इस खेल को खेलते हैं और हम देश के कई राज्यों में इस खेल को खेल चुके हैं. साथ ही कई पुरस्कार भी जीत चुके हैं. '
यह भी पढ़ें- एक गांव की महिलाओं ने लंबे बालों से बुन डाला एक रिकॉर्ड!
इस गांव में ब्रिज खेलने वालों में शिक्षक भी शामिल हैं. और उनका तो मानना है कि ब्रिज खेलने के लिये शतरंज से भी ज्यादा दिमाग की आवश्यकता होती है. वे तो इसे गणित से भी ज्यादा अच्छा मानते हैं. शिक्षकों के हिसाब से तो शासन को ब्रिज को पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए. कुछ शिक्षक तो स्कूल में अपने बच्चों को भी ब्रिज सिखाते हैं. जिससे कि उनका दिमाम और तेज़ी से काम कर सके.
वैसे तो आम तौर पर कोई भी मां-बाप अपने बच्चों को ताश खेलने से रोकता है. मगर इस गांव में ऐसा नहीं है. यहां मां-बाप खुद अपने बच्चों को ताश खेलने के लिये कहते हैं. यहां तक कि 14-15 साल की लड़कियां भी निकल पड़ती हैं ब्रिज खेलने. ब्रिज यहां केवल शौक ही नहीं बल्कि इन्होंने इस खेल में इतनी महारत हासिल कर ली है कि इन लड़कियों का चयन वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिये हो गया. इन्हें इसके लिए इस्तांबुल जाना था.
मगर अफसोस सही समय पर पासपोर्ट न बन पाने के कारण ये बच्चे उस वर्ल्ड चैंपियनशिप का हिस्सा नहीं बन पाए. इस गांव की पहचान ही अब ब्रिज गांव से होने लगी है. भले ही हमारी सरकार ने इस गांव के लोगों की मदद नहीं की हो. मगर अमेरिका से माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के मालिक बिल गेट्स इस गांव को 1000 डॉलर देकर मदद कर चुके हैं.
यहां पर ऐसे कई लोग हैं जो अपने बच्चों का करियर ही ब्रिज में बनवाना चाहते हैं.
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इस गांव में बच्चों से लेकर बूढ़ों तक. . . सभी हैं 'ब्रिज' के धुरंधर! वैसे तो आम तौर पर कोई भी मां-बाप अपने बच्चों को ताश खेलने से रोकता है. मगर इस गांव में ऐसा नहीं है. यहां मां-बाप खुद अपने बच्चों को ताश खेलने के लिये कहते हैं. 'ब्रिज' एक ऐसा ताश के पत्तों का खेल जिसे आम तौर पर अमीर लोग ही खेल पाते हैं. मगर मध्य प्रदेश के खरगौन जिले के एक छोटे से गांव रायबिड़पुरा में 'ब्रिज' के उस्ताद बसते हैं. इस गांव की प्रतिभा को देख बिल गेट्स भी इसे एक हज़ार डॉलर दे चुके हैं. आबादी, महज़ पाँच हज़ार. . . . मगर पाँच सौ से ज्यादा उस्ताद. जी हां. . . मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में रायबिड़पुरा नाम के गांव में ब्रिज खेलने वालों के नाम का डंका बजता है. वैस तो ब्रिज कोई आसान खेल नही है. इसे खेलने के लिये शतरंज से भी ज्यादा दिमाग की ज़रुरत होती है. मगर इस छोटे से गांव में किसानों से लेकर छोटी-छोटी लड़कियां तक ब्रिज खेलने में महारत हासिल कर चुकी हैं. अब आपके मन में सवाल उठता होगा कि ब्रिज जैसा ताश के पत्तों का खेल इस छोटे से गांव में कैसे आ गया? तो आपको बता दें कि इसे एक हज़ार नौ सौ बासठ में इस गांव के अस्पताल में काम करने आए डॉ. मोहम्मद खान लेकर आए थे. उन्होंने ही यहां के लोगों को इस खेल को खेलना सिखाया. अब इस गांव में ब्रिज का असर इतना है कि गांव वालों ने 'ब्रिज क्लब' ही खोल दिया है. गांव वालो का कहना है, 'हम सभी इस खेल को खेलते हैं और हम देश के कई राज्यों में इस खेल को खेल चुके हैं. साथ ही कई पुरस्कार भी जीत चुके हैं. ' यह भी पढ़ें- एक गांव की महिलाओं ने लंबे बालों से बुन डाला एक रिकॉर्ड! इस गांव में ब्रिज खेलने वालों में शिक्षक भी शामिल हैं. और उनका तो मानना है कि ब्रिज खेलने के लिये शतरंज से भी ज्यादा दिमाग की आवश्यकता होती है. वे तो इसे गणित से भी ज्यादा अच्छा मानते हैं. शिक्षकों के हिसाब से तो शासन को ब्रिज को पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए. कुछ शिक्षक तो स्कूल में अपने बच्चों को भी ब्रिज सिखाते हैं. जिससे कि उनका दिमाम और तेज़ी से काम कर सके. वैसे तो आम तौर पर कोई भी मां-बाप अपने बच्चों को ताश खेलने से रोकता है. मगर इस गांव में ऐसा नहीं है. यहां मां-बाप खुद अपने बच्चों को ताश खेलने के लिये कहते हैं. यहां तक कि चौदह-पंद्रह साल की लड़कियां भी निकल पड़ती हैं ब्रिज खेलने. ब्रिज यहां केवल शौक ही नहीं बल्कि इन्होंने इस खेल में इतनी महारत हासिल कर ली है कि इन लड़कियों का चयन वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिये हो गया. इन्हें इसके लिए इस्तांबुल जाना था. मगर अफसोस सही समय पर पासपोर्ट न बन पाने के कारण ये बच्चे उस वर्ल्ड चैंपियनशिप का हिस्सा नहीं बन पाए. इस गांव की पहचान ही अब ब्रिज गांव से होने लगी है. भले ही हमारी सरकार ने इस गांव के लोगों की मदद नहीं की हो. मगर अमेरिका से माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के मालिक बिल गेट्स इस गांव को एक हज़ार डॉलर देकर मदद कर चुके हैं. यहां पर ऐसे कई लोग हैं जो अपने बच्चों का करियर ही ब्रिज में बनवाना चाहते हैं.
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तेलंगाना सरकार ने सोमवार से शुरू होने जारी रही सेकंडरी स्कूल सर्टिफिकेट (SSC or class 10) की परीक्षाओं को स्थगित करने का फैसला किया है। सरकार ने यह फैसला शनिवार को लिया।
राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने शनिवार देर शाम को यह फैसला लिया। सरकार का यह फैसला उस वक्त सामने आया जब तेलंगाना एसएससी की परीक्षाओं को लेकर दाखिल की गई एक पीआईएल पर राज्य के हाईकोर्ट ने सुनवाई की।
राज्य की शिक्षामंत्री सबिता इंद्रा रेड्डी ने इस मामले में कहा कि मुख्यमंत्री ने इस संबंध में रविवार को एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। इस मीटिंग में हाईकोर्ट के फैसले पर चर्चा की जाएगी और आगे कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि पूरे में राज्य में कोरोना महामारी के संकट को देखते हुए फैसला किया जाएगा किया आगे किस प्रकार की और क्या रणनीति बनाई जाए।
तेलंगाना सरकार ने 10वीं कक्षा के पहली और दूसरी भाषा के पेपर (तेलगू और हिन्दी) की परीक्षा लॉकडाउन से पहले 23 मार्च को कराई थी। इसके बाद लॉकडाउन 1. 0 का ऐलान हो गया जिससे कि अन्य सभी परीक्षाओं को स्थगित करना पड़ा था। इससे पहले दिन में सरकार ने सोमवार से 10वीं की परीक्षाएं (ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन इलाके को छोड़कर) कराने के दिशा निर्देश जारी किए थे।
आपको बता दें कि ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन इलाके में राज्य के सबसे ज्यादा कोरोना मरीज सामने आ रहे हैं। इसी इलाके को देखते हुए हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की गई थी कि परीक्षाओं पर रोक लगाई जाए।
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने पूरे राज्य में परीक्षा कराने की बात कही थी जिससे लोगों में कन्फ्यूजन पैदा हो गई थी, लेकिन हकीकत यह है कि परीक्षाएं पूरे राज्य में आयोजित नहीं कराई जानी थीं।
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तेलंगाना सरकार ने सोमवार से शुरू होने जारी रही सेकंडरी स्कूल सर्टिफिकेट की परीक्षाओं को स्थगित करने का फैसला किया है। सरकार ने यह फैसला शनिवार को लिया। राज्य के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने शनिवार देर शाम को यह फैसला लिया। सरकार का यह फैसला उस वक्त सामने आया जब तेलंगाना एसएससी की परीक्षाओं को लेकर दाखिल की गई एक पीआईएल पर राज्य के हाईकोर्ट ने सुनवाई की। राज्य की शिक्षामंत्री सबिता इंद्रा रेड्डी ने इस मामले में कहा कि मुख्यमंत्री ने इस संबंध में रविवार को एक हाई लेवल मीटिंग बुलाई है। इस मीटिंग में हाईकोर्ट के फैसले पर चर्चा की जाएगी और आगे कार्रवाई तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि पूरे में राज्य में कोरोना महामारी के संकट को देखते हुए फैसला किया जाएगा किया आगे किस प्रकार की और क्या रणनीति बनाई जाए। तेलंगाना सरकार ने दसवीं कक्षा के पहली और दूसरी भाषा के पेपर की परीक्षा लॉकडाउन से पहले तेईस मार्च को कराई थी। इसके बाद लॉकडाउन एक. शून्य का ऐलान हो गया जिससे कि अन्य सभी परीक्षाओं को स्थगित करना पड़ा था। इससे पहले दिन में सरकार ने सोमवार से दसवीं की परीक्षाएं कराने के दिशा निर्देश जारी किए थे। आपको बता दें कि ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन इलाके में राज्य के सबसे ज्यादा कोरोना मरीज सामने आ रहे हैं। इसी इलाके को देखते हुए हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की गई थी कि परीक्षाओं पर रोक लगाई जाए। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने पूरे राज्य में परीक्षा कराने की बात कही थी जिससे लोगों में कन्फ्यूजन पैदा हो गई थी, लेकिन हकीकत यह है कि परीक्षाएं पूरे राज्य में आयोजित नहीं कराई जानी थीं।
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शस्त्र सीमा बल-एसएसबी जल्द ही कॉन्स्टेबल पदों की 399 रिक्तियों की भरने के लिए अधिसूचना जारी करेगा। ये भर्ती प्रक्रिया स्पोर्सट कोटा के तहत की जाएगी। जारी होने वाली आधिसूचना के माध्यम से आवेदन की तिथि के साथ अन्य संबंधित जानकारी दी जाएगी। आवेदन प्रक्रिया की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी। एक बार आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद जो भी उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं वह ssbrectt. gov. in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। जारी होने वाल अधिसूचना भी दी गई इस वेबसाइट पर की जाएगी। इसलिए इच्छुक छात्रों को सलाह है कि वह आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी नजर बनाए रखें।
- शस्त्र सीमा बल में कॉन्स्टेबल के पद पर कार्य करने के लिए उम्मीदवार का कक्षा 10वीं पास होना अनिवार्य है और साथ ही उनके पास स्पोट्स क्वालिफिकेशन होनी चाहिए।
- इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार की उम्र 18 वर्ष से 23 वर्ष की होनी चाहिए।
- आरक्षिक श्रेणी (एससी, एसटी, ओबीसी, पीडब्लूडी और पीएच) वाले उम्मीदवारों को आयु सीमा छूट दी जाएगी।
- एजुकेशन क्वालिफिकेशन और योग्यता आदि की जानकारी जारी होने वाली अधिसूचना में विस्तिृत तौर से दी जाएगी। इसके लिए उम्मीदवारों को थोठा इंतजार करना पड़ेगा।
7वें सीपीसी के अनुसार 3 पेय लेवल के अंडर पदों के लिए चयनित उम्मीदवार को 21,700 रुपये से 69,100 रुपये तक का वेतन दिया जाएगा। इसे साथ अन्य अलाउंस भी दिए जाएंगे।
एसएसबी जीडी कॉन्स्टेबल पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को आवेदन भरने के बाद आवेदन शुल्क का भुगतान करना है। आवेदन शुल्क गैरवापसी शुल्क होगा।
जनरल, ओबीसी, ईडब्लूएस श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए एसएसबी जीडी कॉन्सटेबर पदों के लिए किए जाने वाले आवेदन फॉर्म का शुल्क 100/- रुपये तय किया गया है। वहीं एससी, एसटी, पीडब्लूडी, ईएसएम और महिलाओं के लिए फॉर्म निशुल्क है।
जैसे ही एसएसबी जीडी कॉन्स्टेबल पदों की भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत करेगा उम्मीदवार उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते है। पदों की भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों अधिसूचना को लेकर आधिकारिक वेबसाइट पर ध्यान बनाए रखे ताकि जरूरी किसी भी प्रकार की जानकारी उनसे छूट न जाए।
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शस्त्र सीमा बल-एसएसबी जल्द ही कॉन्स्टेबल पदों की तीन सौ निन्यानवे रिक्तियों की भरने के लिए अधिसूचना जारी करेगा। ये भर्ती प्रक्रिया स्पोर्सट कोटा के तहत की जाएगी। जारी होने वाली आधिसूचना के माध्यम से आवेदन की तिथि के साथ अन्य संबंधित जानकारी दी जाएगी। आवेदन प्रक्रिया की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी। एक बार आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद जो भी उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन करना चाहते हैं वह ssbrectt. gov. in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। जारी होने वाल अधिसूचना भी दी गई इस वेबसाइट पर की जाएगी। इसलिए इच्छुक छात्रों को सलाह है कि वह आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी नजर बनाए रखें। - शस्त्र सीमा बल में कॉन्स्टेबल के पद पर कार्य करने के लिए उम्मीदवार का कक्षा दसवीं पास होना अनिवार्य है और साथ ही उनके पास स्पोट्स क्वालिफिकेशन होनी चाहिए। - इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवार की उम्र अट्ठारह वर्ष से तेईस वर्ष की होनी चाहिए। - आरक्षिक श्रेणी वाले उम्मीदवारों को आयु सीमा छूट दी जाएगी। - एजुकेशन क्वालिफिकेशन और योग्यता आदि की जानकारी जारी होने वाली अधिसूचना में विस्तिृत तौर से दी जाएगी। इसके लिए उम्मीदवारों को थोठा इंतजार करना पड़ेगा। सातवें सीपीसी के अनुसार तीन पेय लेवल के अंडर पदों के लिए चयनित उम्मीदवार को इक्कीस,सात सौ रुपयापये से उनहत्तर,एक सौ रुपयापये तक का वेतन दिया जाएगा। इसे साथ अन्य अलाउंस भी दिए जाएंगे। एसएसबी जीडी कॉन्स्टेबल पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को आवेदन भरने के बाद आवेदन शुल्क का भुगतान करना है। आवेदन शुल्क गैरवापसी शुल्क होगा। जनरल, ओबीसी, ईडब्लूएस श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए एसएसबी जीडी कॉन्सटेबर पदों के लिए किए जाने वाले आवेदन फॉर्म का शुल्क एक सौ/- रुपये तय किया गया है। वहीं एससी, एसटी, पीडब्लूडी, ईएसएम और महिलाओं के लिए फॉर्म निशुल्क है। जैसे ही एसएसबी जीडी कॉन्स्टेबल पदों की भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत करेगा उम्मीदवार उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते है। पदों की भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों अधिसूचना को लेकर आधिकारिक वेबसाइट पर ध्यान बनाए रखे ताकि जरूरी किसी भी प्रकार की जानकारी उनसे छूट न जाए।
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जगदलपुर, (ब्यूरो छत्तीसगढ़)। बस्तर संभाग का नक्सली पभावित बीजापुर जिला के ग्रामीण अब धीरे-धीरे नक्सली दहशत से मुक्प होकर जिला पशासन का सहयोग देकर क्षेत्र में विकास में जुटेंगे, वहीं नक्सलियों में आपस में टकराव की स्थिति भी उत्पन्न हो गई है। बीजापुर जिले में गत एक माह से केन्दीय सुरक्षा बल , स्पेषल टास्क, पोर्स, छत्तीसगढ़ आर्म्ट पोर्स तथा जिला पुलिस बल मिलकर इलाकें की घ्sाराबंदी करके कई संघम सदस्य, नक्सली डिप्टी कमाडर को गिरपतार किया। और पूछताछ के दौरान नक्सलियों को सहयोग करने वालों का पुलिस ने एक सूचि भी तैयार की और लगातार नक्सलियों पर दबाव बनाये हुये है। दूसरी ओर केन्दीय सुरक्षा बल के जवान गांव में षिविर लगाकर ग्रामीणों और छात्र- छात्राओं को आवष्यकता अनुसार सामग्री भी दी जा रही है, जिससे ग्रामीणों का विश्वास पुलिस पर बढ़ा है। अब नक्सली ग्रामीणों को बैठक में बुला रहे हैं पर ग्रामीण नक्सली बैठक में जाने से कतराने लगे है। ग्रामीणों का कहना ह wअब हम किसी भी कीमत पर नक्सली बैठक में नहीं जाएगेंऔर ना ही नक्सलियों के लिए कोई काम करेगें। एwसी स्थिति में नक्सलियों को जो ग्रामीणों से सूचनाएं मिलती थी और बैनर ,पोस्टर लगाते थे अब बंद हो गया। हाल ही में नक्सलियों के चंगुल से छुटी दो नाबालिक लड़कियो ंने पुलिस के सामने नक्सली बर्ताव और बलात्कार किये जाने की बात कतायी। इस घटना से महिलाओं में छात्र- छात्राओं के बीच नक्सलियों के पति घृण की भावना पनपने लगी है। जिला पषासन ने दोनों लड़कियों को पोटा केबिन स्कूल में भर्ती किया गया है वहीं केन्द शासन ने पांच- पांच लाख रूपए इन दोनो छात्राओं को पदान किया। पुलिस के गोपनीय सूत्रों के अनुसार नक्सलियों के राषि गबन के मामले में आंध्र पदेष में एक कमाण्डर को जन अदालत में पेष किया गया था,जंहा उसे गबन का आरोपी बताकर उसके साथ दूर व्यवहार किया, इससे क्षुब्ध होकर उक्प कमाण्डर ने आत्म हत्या कर ली। गोपनीय सूत्रों के अनुसार बस्तर के जंगलों में नक्सलियों के बीच पैसो को लेकर एक मन मुटाव और तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। जंगल में नकसली आपस में एक दूसरे पर बंदूक तान दिये थे। इस मामले को नक्सलियों की सेन्टरल कमेटी ने गंभीरता से लेते हुये आपस में सलाह - मषवरा कराया। इन परिस्थितियों को देखते हुये ग्रामीण अब न नक्सलियों की बैठक में जा रहे हैं ओर ना ही उन्हैं सहयोग कर रहे हैं।
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जगदलपुर, । बस्तर संभाग का नक्सली पभावित बीजापुर जिला के ग्रामीण अब धीरे-धीरे नक्सली दहशत से मुक्प होकर जिला पशासन का सहयोग देकर क्षेत्र में विकास में जुटेंगे, वहीं नक्सलियों में आपस में टकराव की स्थिति भी उत्पन्न हो गई है। बीजापुर जिले में गत एक माह से केन्दीय सुरक्षा बल , स्पेषल टास्क, पोर्स, छत्तीसगढ़ आर्म्ट पोर्स तथा जिला पुलिस बल मिलकर इलाकें की घ्sाराबंदी करके कई संघम सदस्य, नक्सली डिप्टी कमाडर को गिरपतार किया। और पूछताछ के दौरान नक्सलियों को सहयोग करने वालों का पुलिस ने एक सूचि भी तैयार की और लगातार नक्सलियों पर दबाव बनाये हुये है। दूसरी ओर केन्दीय सुरक्षा बल के जवान गांव में षिविर लगाकर ग्रामीणों और छात्र- छात्राओं को आवष्यकता अनुसार सामग्री भी दी जा रही है, जिससे ग्रामीणों का विश्वास पुलिस पर बढ़ा है। अब नक्सली ग्रामीणों को बैठक में बुला रहे हैं पर ग्रामीण नक्सली बैठक में जाने से कतराने लगे है। ग्रामीणों का कहना ह wअब हम किसी भी कीमत पर नक्सली बैठक में नहीं जाएगेंऔर ना ही नक्सलियों के लिए कोई काम करेगें। एwसी स्थिति में नक्सलियों को जो ग्रामीणों से सूचनाएं मिलती थी और बैनर ,पोस्टर लगाते थे अब बंद हो गया। हाल ही में नक्सलियों के चंगुल से छुटी दो नाबालिक लड़कियो ंने पुलिस के सामने नक्सली बर्ताव और बलात्कार किये जाने की बात कतायी। इस घटना से महिलाओं में छात्र- छात्राओं के बीच नक्सलियों के पति घृण की भावना पनपने लगी है। जिला पषासन ने दोनों लड़कियों को पोटा केबिन स्कूल में भर्ती किया गया है वहीं केन्द शासन ने पांच- पांच लाख रूपए इन दोनो छात्राओं को पदान किया। पुलिस के गोपनीय सूत्रों के अनुसार नक्सलियों के राषि गबन के मामले में आंध्र पदेष में एक कमाण्डर को जन अदालत में पेष किया गया था,जंहा उसे गबन का आरोपी बताकर उसके साथ दूर व्यवहार किया, इससे क्षुब्ध होकर उक्प कमाण्डर ने आत्म हत्या कर ली। गोपनीय सूत्रों के अनुसार बस्तर के जंगलों में नक्सलियों के बीच पैसो को लेकर एक मन मुटाव और तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। जंगल में नकसली आपस में एक दूसरे पर बंदूक तान दिये थे। इस मामले को नक्सलियों की सेन्टरल कमेटी ने गंभीरता से लेते हुये आपस में सलाह - मषवरा कराया। इन परिस्थितियों को देखते हुये ग्रामीण अब न नक्सलियों की बैठक में जा रहे हैं ओर ना ही उन्हैं सहयोग कर रहे हैं।
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भारतीय टीम इस समय बांग्लादेश के विरूद्ध पहला टेस्ट मैच खेल रही है। इस मैच के पहले दिन भारतीय बल्लेबाजों ने कमाल का खेल दिखाया। चेतेश्वर पुजारा ने 90 रनों की पारी खेली। वहीं, ऋषभ पंत ने 46 रन बनाए। अपनी इस छोटी पारी की वजह से पंत मैच में दो बड़े रिकॉर्ड बना दिए और कई कद्दावर क्रिकेटर्स को पीछे छोड़ दिया। आइए जानते हैं, इसके बारे में।
बांग्लादेश के विरूद्ध पहले टेस्ट मैच में ऋषभ पंत बहुत बढ़िया लय में नजर आए। वह अच्छे टच में दिख रहे थे। उन्होंने मैच में 45 गेंदों में 46 रन बनाए, जिसमें 6 चौके और 2 लंबे छक्के शामिल थे। लेकिन केवल 4 रनों से वह अपने अर्धशतक से चूक गए। मैच में दो छक्के लगाते ही उन्होंने अपने नाम एक बड़ा रिकॉर्ड दर्ज कर लिया। पंत टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 50 छक्के लगाने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं। उन्होंने 54 पारियों में ये कारनामा किया है। जबकि रोहित शर्मा ने 51 पारियों में ये उपलब्धि हासिल की थी। धोनी को टेस्ट क्रिकेट में 50 लगाने के लिए 92 पारियां खेलनी पड़ी थीं।
ऋषभ पंत ने बांग्लादेश के विरूद्ध 46 रन बनाते ही इंटरनेशनल क्रिकेट में अपने 4000 रन पूरे कर लिए हैं। पंत ने टेस्ट क्रिकेट में हिंदुस्तान के लिए 32 टेस्ट मैचों की 54 पारियों में 43. 38 की औसत से 2169 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से पांच शतक निकले हैं। वहीं, 30 वनडे मैचों में 865 रन बनाए हैं और 66 टी20 मैचों में 987 रन जड़े हैं। वह विस्फोटक बैटिंग के लिए फेमस हैं।
पहले दिन भारतीय बल्लेबाजों ने कमाल का खेल दिखाया। चेतेश्वर पुजारा ने 90 रनों की पारी खेली। वहीं, श्रेयस अय्यर 82 रन बनाकर नॉट आउट हैं। इन दोनों ही वजह से ही पहले दिन हिंदुस्तान ने 6 विकेट खोकर 278 रन बनाए। वहीं, पंत ने 46 रनों का सहयोग दिया। सुपर स्टार बल्लेबाज विराट कोहली 1 रन बनाकर आउट हुए।
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भारतीय टीम इस समय बांग्लादेश के विरूद्ध पहला टेस्ट मैच खेल रही है। इस मैच के पहले दिन भारतीय बल्लेबाजों ने कमाल का खेल दिखाया। चेतेश्वर पुजारा ने नब्बे रनों की पारी खेली। वहीं, ऋषभ पंत ने छियालीस रन बनाए। अपनी इस छोटी पारी की वजह से पंत मैच में दो बड़े रिकॉर्ड बना दिए और कई कद्दावर क्रिकेटर्स को पीछे छोड़ दिया। आइए जानते हैं, इसके बारे में। बांग्लादेश के विरूद्ध पहले टेस्ट मैच में ऋषभ पंत बहुत बढ़िया लय में नजर आए। वह अच्छे टच में दिख रहे थे। उन्होंने मैच में पैंतालीस गेंदों में छियालीस रन बनाए, जिसमें छः चौके और दो लंबे छक्के शामिल थे। लेकिन केवल चार रनों से वह अपने अर्धशतक से चूक गए। मैच में दो छक्के लगाते ही उन्होंने अपने नाम एक बड़ा रिकॉर्ड दर्ज कर लिया। पंत टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज पचास छक्के लगाने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं। उन्होंने चौवन पारियों में ये कारनामा किया है। जबकि रोहित शर्मा ने इक्यावन पारियों में ये उपलब्धि हासिल की थी। धोनी को टेस्ट क्रिकेट में पचास लगाने के लिए बानवे पारियां खेलनी पड़ी थीं। ऋषभ पंत ने बांग्लादेश के विरूद्ध छियालीस रन बनाते ही इंटरनेशनल क्रिकेट में अपने चार हज़ार रन पूरे कर लिए हैं। पंत ने टेस्ट क्रिकेट में हिंदुस्तान के लिए बत्तीस टेस्ट मैचों की चौवन पारियों में तैंतालीस. अड़तीस की औसत से दो हज़ार एक सौ उनहत्तर रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से पांच शतक निकले हैं। वहीं, तीस वनडे मैचों में आठ सौ पैंसठ रन बनाए हैं और छयासठ टीबीस मैचों में नौ सौ सत्तासी रन जड़े हैं। वह विस्फोटक बैटिंग के लिए फेमस हैं। पहले दिन भारतीय बल्लेबाजों ने कमाल का खेल दिखाया। चेतेश्वर पुजारा ने नब्बे रनों की पारी खेली। वहीं, श्रेयस अय्यर बयासी रन बनाकर नॉट आउट हैं। इन दोनों ही वजह से ही पहले दिन हिंदुस्तान ने छः विकेट खोकर दो सौ अठहत्तर रन बनाए। वहीं, पंत ने छियालीस रनों का सहयोग दिया। सुपर स्टार बल्लेबाज विराट कोहली एक रन बनाकर आउट हुए।
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चंडीगढ़, 13 मार्च (आईएएनएस)। पंजाब के अमृतसर के पास अटारी में कोरोनावायरस के कारण संयुक्त जांच चौकी (जेसीपी) पर पाकिस्तान से लोगों और माल की आवाजाही को शुक्रवार को एहतियात के तौर पर अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है। एक कस्टम अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि पाकिस्तान के रास्ते होकर आने वाली अफगानिस्तान की वस्तुओं को भी इस अटारी-वाघा जेसीपी के जरिए भारत में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी।
ऐसी जानकारी मिली है कि भारतीय श्रद्धालुओं द्वारा करतारपुर साहिब गलियारे से होकर डेरा बाबा नानक से पाकिस्तान के नरोवाल जिले के शकरगढ़ तहसील में करतारपुर साहिब गुरुद्वारा जाने की यात्रा भी जल्द ही स्थगित किए जाने की आशंका है।
4. 1 किलोमीटर लंबा गलियारा गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक नगर को करतारपुर साहिब गुरुद्वारे से जोड़ता है।
पुलवामा हमले के बाद भारत द्वारा माल पर 200 प्रतिशत व्यापार शुल्क लगाने के बाद अटारी-वाघा सीमा पर पाकिस्तान के साथ व्यापार पहले ही कम हो गया है।
इससे पहले, सीमा सुरक्षा बल ने शाम को जेसीपी पर होने वाले र्रिटीट कार्यक्रम को रद्द कर दिया था।
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चंडीगढ़, तेरह मार्च । पंजाब के अमृतसर के पास अटारी में कोरोनावायरस के कारण संयुक्त जांच चौकी पर पाकिस्तान से लोगों और माल की आवाजाही को शुक्रवार को एहतियात के तौर पर अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है। एक कस्टम अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि पाकिस्तान के रास्ते होकर आने वाली अफगानिस्तान की वस्तुओं को भी इस अटारी-वाघा जेसीपी के जरिए भारत में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। ऐसी जानकारी मिली है कि भारतीय श्रद्धालुओं द्वारा करतारपुर साहिब गलियारे से होकर डेरा बाबा नानक से पाकिस्तान के नरोवाल जिले के शकरगढ़ तहसील में करतारपुर साहिब गुरुद्वारा जाने की यात्रा भी जल्द ही स्थगित किए जाने की आशंका है। चार. एक किलोग्राममीटर लंबा गलियारा गुरदासपुर जिले के डेरा बाबा नानक नगर को करतारपुर साहिब गुरुद्वारे से जोड़ता है। पुलवामा हमले के बाद भारत द्वारा माल पर दो सौ प्रतिशत व्यापार शुल्क लगाने के बाद अटारी-वाघा सीमा पर पाकिस्तान के साथ व्यापार पहले ही कम हो गया है। इससे पहले, सीमा सुरक्षा बल ने शाम को जेसीपी पर होने वाले र्रिटीट कार्यक्रम को रद्द कर दिया था।
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की बातें कर वह घर की ओर चल दिया। राह में सोचता रहा यह साहित्यिक-समाज भी रंग-बिरंगा है - कोई कलाधर है और कोई रसिक, फिर कोई नीलम और कोई किंकर । और इसी समाज में शेखर बाबू भी तो
हैं । साहित्यिक तपस्वी, साहित्यिक दधीचि । कलम की कमाई पर जीना चाहते हैं; मगर अधर्म से बचकर - राम से डर कर ।
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की बातें कर वह घर की ओर चल दिया। राह में सोचता रहा यह साहित्यिक-समाज भी रंग-बिरंगा है - कोई कलाधर है और कोई रसिक, फिर कोई नीलम और कोई किंकर । और इसी समाज में शेखर बाबू भी तो हैं । साहित्यिक तपस्वी, साहित्यिक दधीचि । कलम की कमाई पर जीना चाहते हैं; मगर अधर्म से बचकर - राम से डर कर ।
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सितंबर 1812 में, स्टिंगेल और एसेन की कमान के तहत रूसी सैनिकों ने रीगा की दिशा में प्रशिया कोर को हराने की कोशिश की। आक्रामक विफल रहा, हमारे सैनिक रीगा लौट आए।
8 (20) जुलाई 1812 प्रशिया के सैनिक (एकाऊ की लड़ाई) मितवा पर कब्जा कर लिया। 22 जुलाई को नेपोलियन के निर्देश पर कौरलैंड के लिए एक विभाग बनाया गया था। कब्जे के दौरान, क्षेत्र पूरी तरह से तबाह हो गया था, सेना के लिए रोटी, घोड़े, कपड़ा, चर्मपत्र कोट निकाल लिए गए थे, और 15 मिलियन का मौद्रिक योगदान लगाया गया था। ग्रेट आर्मी के विभिन्न प्रमुखों, रेगिस्तानों द्वारा कौरलैंड को भी लूट लिया गया था।
16 जुलाई (28 जुलाई), 1812 को प्रशिया कोर के कमांडर ने रीगा के आत्मसमर्पण की मांग की। जनरल एसेन ने मना कर दिया। नदी के किनारे प्रशिया के सैनिक तैनात थे। मीसा, उन्नत पदों को डीवीना के बाईं ओर धकेलती है। ग्रामीणों की टुकड़ियों को दाहिने किनारे पर भेजा गया। रीगा से, उनके खिलाफ टुकड़ियाँ निकलीं, जो स्थानीय शिकारियों के साथ थीं (जैसा कि तब स्वयंसेवकों को बुलाया जाता था)। एसेन ने दुश्मन के खिलाफ छँटाई करने की हिम्मत नहीं की। यह इस तथ्य से उचित था कि उनकी वाहिनी में मुख्य रूप से अनुभवहीन, आरक्षित और आरक्षित बटालियन और स्क्वाड्रन शामिल थे। इसने पीटर्सबर्ग को परेशान कर दिया।
20 जुलाई (1 अगस्त) को स्वेबॉर्ग से रीगा के लिए 67 गनबोट आए। वे कई बार नदी के ऊपर श्लोक और उससे ऊपर गए, प्रशिया के साथ झड़प करते हुए, लेकिन बहुत अधिक परिणाम के बिना। नतीजतन, जुलाई का अंत और पूरा अगस्त निष्क्रियता में बीत गया। रीगा के सैन्य गवर्नर ने गंभीर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं की, रीगा में उन्होंने विट्गेन्स्टाइन कोर की आशा की, जो सफलतापूर्वक औडिनोट और सेंट-साइर की वाहिनी के साथ लड़े। मार्शल मैकडोनाल्ड के पास एक बड़े शहर की पूर्ण घेराबंदी शुरू करने के लिए पर्याप्त ताकत नहीं थी।
नेपोलियन का सफलतापूर्वक विरोध करने के लिए स्वीडिश प्रश्न को हल करना आवश्यक था। फ्रांस के पक्ष में स्वीडन का प्रदर्शन उत्तर-पश्चिमी रणनीतिक दिशा में रूस की स्थिति को तेजी से खराब कर सकता है। 1807वीं शताब्दी की शुरुआत में रूसी-स्वीडिश संबंध जटिल थे। एक ओर, स्वेड्स ने 1808 वीं शताब्दी की हार और क्षेत्रीय नुकसान को याद किया। बदला लेने की पार्टी थी। दूसरी ओर, रूस और स्वीडन, सहयोगी के रूप में, फ्रांस के साथ लड़े। 1809 में, फ्रांस के साथ तिलसिट शांति के समापन के बाद, रूस ने स्वीडन के साथ एक सफल युद्ध शुरू किया, जो इंग्लैंड के पक्ष में रहा। XNUMX-XNUMX के युद्ध में स्वीडन की हार हुई और फिनलैंड को रूसी साम्राज्य में मिला लिया गया।
हार की पृष्ठभूमि के खिलाफ, स्वीडिश राजा गुस्तावस एडॉल्फ वी को उखाड़ फेंका गया था, और स्वीडिश रिक्स्डैग ने मार्शल बर्नडॉट को सिंहासन के उत्तराधिकारी के रूप में चुना था। स्वीडन ने इंग्लैंड के साथ गठबंधन छोड़ दिया और डेनिश नॉर्वे पर दावा करना शुरू कर दिया। रूस ने इस मामले में समर्थन का वादा किया था।
एक नए रूसी-फ्रांसीसी युद्ध के दृष्टिकोण के साथ, स्वीडन रूस के पक्ष में झुक गया। स्वीडन को इंग्लैंड की महाद्वीपीय नाकाबंदी से बहुत नुकसान हुआ, अंग्रेज इसके मुख्य व्यापारिक भागीदार (जैसे रूस) थे। जवाब में, नेपोलियन ने जर्मनी में स्वीडिश पोमेरानिया पर कब्जा करने का आदेश दिया। इससे स्वीडन और रूस और भी करीब आ गए। 5 अप्रैल को, पीटर्सबर्ग संघ संधि पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके अनुसार स्टॉकहोम ने फिनलैंड को रूस के रूप में मान्यता दी, और रूसी-तुर्की वार्ता में मध्यस्थता करने का वादा किया। बदले में, सेंट पीटर्सबर्ग ने नॉर्वे में शामिल होने में स्वीडन का समर्थन करने का वादा किया। दोनों शक्तियों ने फ्रांस के खिलाफ निर्देशित सैन्य गठबंधन में प्रवेश किया। उन्होंने जर्मनी (पोमेरेनियन प्रोजेक्ट) में संयुक्त लैंडिंग की योजना भी विकसित की।
रूसी सेना के कमांडर-इन-चीफ के रूप में कुतुज़ोव की नियुक्ति के बाद - 8 अगस्त (20), 1812 को, रूसी संप्रभु अलेक्जेंडर I स्वीडन के क्राउन प्रिंस से मिलने के लिए अबो गए। 12 अगस्त को सम्राट अबो में थे, 15 तारीख को क्राउन प्रिंस कार्ल-जोहान (बर्नडॉट) पहुंचे। बर्नडॉट ने रूस की मदद के लिए 30वीं कोर लगाने की पेशकश की। फिनलैंड के बदले। सिकंदर ने इस तरह के सौदे से इनकार कर दिया। फ्रांस के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में संभावित संयुक्त लैंडिंग के विचार पर भी चर्चा हुई।
18 अगस्त (30) को अबो की संधि संपन्न हुई। स्टॉकहोम ने अंततः फ़िनलैंड और ऑलैंड द्वीप समूह को छोड़ दिया। रूस ने इसे दक्षिणी स्वीडन में तैनात करने के लिए 35-मजबूत सहायक कोर लगाने का वादा किया, जबकि स्वीडिश सेना डेनमार्क के साथ युद्ध में व्यस्त थी। सिकंदर ज़ीलैंड के डेनिश द्वीप को स्वीडन में मिलाने के लिए सहमत हो गया। बर्नाडोट ने डची ऑफ वारसॉ के हिस्से को रूसी साम्राज्य में शामिल करने पर सहमति व्यक्त की। पीटर्सबर्ग ने स्वीडन को 1,5 मिलियन रूबल का ऋण प्रदान किया। दोनों पक्षों ने इंग्लैंड को गठबंधन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया।
इस प्रकार, स्वीडन के डर के बिना, रूस को उत्तर-पश्चिम में एक स्वतंत्र हाथ मिला, जो फिनलैंड पर कब्जा करने के लिए नेपोलियन के आक्रमण का लाभ उठा सकता था। बदले में, पीटर्सबर्ग ने नए स्वीडिश बर्नाडोट राजवंश के अधिकारों को मजबूत किया।
डेनमार्क के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई स्थगित कर दी गई (लंदन के साथ सहमत होना और स्वीडिश और रूसी सैनिकों को तैयार करना आवश्यक था, नेपोलियन के साथ युद्ध जारी रहा), इसलिए रूस को स्वीडन का समर्थन करने के लिए सैनिकों का उपयोग करने का अवसर मिला। रीगा के गैरीसन को मजबूत करने के लिए फ़िनिश गवर्नर-जनरल फ़ैडी फेडोरोविच शेटिंगेल की कमान के तहत फ़िनिश कोर भेजने का निर्णय लिया गया। जनरल लड़ रहा थाः उसने 1807 में फ्रांसीसी के साथ लड़ाई लड़ी, घायल हो गया, दो बार स्वेड्स के साथ लड़ा।
फ़िनिश कोर 1810 की शरद ऋतु में फ़िनलैंड में तैनात सैनिकों से बनाया गया था। 1812 के वसंत और गर्मियों में, उन्हें आंशिक रूप से बाल्टिक सागर के तट पर पोमेरानिया में, स्वेड्स के साथ, नियोजित लैंडिंग के लिए अलैंड द्वीप समूह में स्थानांतरित कर दिया गया था। कोर में शामिल हैंः 6 वीं और 21 वीं इन्फैंट्री डिवीजन, फिनिश ड्रैगून रेजिमेंट और डॉन कोसैक लोशिलिन रेजिमेंट। कुल मिलाकर, जुलाई 1812 के अंत तक - 21 हजार सैनिक। 18 अगस्त (30) को, रीगा के पास हेलसिंगफोर्स, अलंड्स और अबो से एक कोर भेजने का आदेश दिया गया ताकि वहां की चौकी को मजबूत किया जा सके। सिकंदर प्रथम ने रीगा के गवर्नर-जनरल को रीगा और मितवा से दुश्मन को पीछे धकेलने का निर्देश दिया।
उथले पानी के कारण रीगा तक पहुंचना नामुमकिन होने के कारण वाहिनी 28 अगस्त को रेवेल में उतरी। खराब मौसम ने जहाजों के हिस्से को क्षतिग्रस्त कर दिया, कुछ स्वेबॉर्ग लौट आए, दूसरों के प्रस्थान में देरी हुई। फ़िनिश गवर्नर-जनरल ने प्रतीक्षा नहीं की और उपलब्ध बलों के साथ निकल पड़े - 10 हजार लोग। 8 सितंबर (20) को मोहरा रीगा में था। 10 सितंबर (22) को, स्टिंगेल की वाहिनी ने रीगा से संपर्क किया।
रीगा की दिशा में एक खामोशी थी। मैकडॉनल्ड्स के कोर ने रीगा को सक्रिय कदम उठाए बिना देखा, क्योंकि उसके पास एक सफल घेराबंदी और हमले के लिए पर्याप्त बल और साधन नहीं थे। इसके अलावा, प्रशिया नेपोलियन के नाम पर लड़ने में धीमे थे और पहले कभी हमला नहीं किया। ग्रेवर्ट की जगह लेने वाले प्रशिया के जनरल लुडविग योर्क ने रूसियों को नाराज नहीं करने की कोशिश की।
मितवा में प्रशिया के सैनिक तैनात थे। मई में वापस, डेंजिग से घेराबंदी तोपखाने (130 बंदूकें) भेजी गईं, जो अगस्त की शुरुआत में तिलसिट पहुंचे और अगस्त के अंत में बौस्का के पास रुएंटल में लाए गए। लेकिन मार्शल के पास घेराबंदी शुरू करने का समय नहीं था, क्योंकि नेपोलियन का आदेश प्रतीक्षा करने के लिए आया था। उस समय फ्रांसीसी सम्राट मास्को जा रहे थे और उनका मानना था कि सिकंदर के साथ जल्द ही शांति पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसलिए, रीगा की घेराबंदी नहीं की जा सकी।
दूसरी ओर, एसेन ने निर्णायक छंटनी के लिए खुद को बहुत कमजोर माना। केवल कभी-कभी हमारे गश्ती दल ने दुश्मन को परेशान किया। काउंट स्टिंगेल के फिनिश कॉर्प्स के आने से हमारे पक्ष में शक्ति का संतुलन बदलने वाला था। फ़िनिश वाहिनी को रीगा में भेजकर, अलेक्जेंडर I ने शहर से घेराबंदी को उठाने का कार्य निर्धारित किया। लेकिन सेंट पीटर्सबर्ग में पहुंचने के बाद, सिकंदर ने काउंट स्टिंगेल को एक अधिक महत्वाकांक्षी कार्य निर्धारित कियाः रीगा और फ़िनलैंड की दो वाहिनी, जिनकी संख्या 35-40 हजार संगीन और घुड़सवार सेना होनी चाहिए, न केवल रीगा में दुश्मन को हराने के लिए थे, वरन उसे नेमन से निकालकर विल्ना को भी जाना। यहाँ नेमन पर प्रशिया को देखने के लिए और अन्य सेनाओं के बेरेज़िना में आने की प्रतीक्षा करने के लिए।
हालांकि, एसेन और स्टिंगेल इस तरह के कार्य को पूरा नहीं कर सके। सबसे पहले, जनरलों के पास सुवोरोव का निर्माण नहीं था। दूसरे, जनरलों ने लक्ष्यों की प्रधानता और प्राथमिकता के बारे में बहस करना शुरू कर दिया। तीसरा, नियोजित से कम सैनिक थे। यह माना जाता था कि रीगा 20 हजार सैनिकों को रख सकती है, और काउंट स्टिंगेल - 15 हजार। एस्सेन ने किले की रक्षा के लिए 5 हजार छोड़े और जनरल लेविज को 10 हजार देने में सक्षम थे। तूफान के कारण फिनिश कोर को सड़क पर 5 हजार का नुकसान हुआ नतीजतन, वे 21 हजार से अधिक लोगों पर हमला नहीं कर सके। अर्थात् शत्रु पर कोई श्रेष्ठता नहीं थी।
सैन्य परिषद में, एसेन, स्टिंगेल और लेविज़ ने यॉर्क के 16-मजबूत प्रशियाई कोर पर हमला करने का फैसला किया, जो मितवा-ओले क्षेत्र में तैनात था। 14 सितंबर (26), 1812 को, आक्रामक शुरू हुआ। दाईं ओर, तटीय फ़्लैक ने काम किया छोटी नावों का बेड़ा रियर एडमिरल मोलर, उसे जनरल ब्रिसमैन की 2-मजबूत टुकड़ी द्वारा समर्थित किया गया था, जिसे मितावा क्षेत्र में प्रशिया की तर्ज पर जाना था। कर्नल रोसेन की 1-मजबूत टुकड़ी ने ओलाई के खिलाफ कार्रवाई की। फ़िनिश कोर की मुख्य सेनाएँ और रीगा की चौकी - 19 तोपों के साथ 23 हज़ार से अधिक, बौस्का रोड के साथ मार्च किया।
स्टिंगेल के सैनिकों ने प्रशिया की अग्रिम टुकड़ियों को उलट दिया। दुश्मन की प्रगति के बारे में जानने के बाद, जनरल यॉर्क ने रूएंथल में घेराबंदी पार्क को कवर करते हुए एकाऊ में एक कोर इकट्ठा करना शुरू कर दिया। 15 सितंबर (27) को दोपहर के आसपास, स्टिंगेल की वाहिनी ने एकाऊ में यॉर्क के सैनिकों पर हमला किया। एक छोटी सी झड़प के बाद, प्रशियाई एकाऊ नदी के उस पार वापस चले गए और वहाँ कसकर पकड़ लिया। रूसियों ने दुश्मन को पछाड़ना शुरू कर दिया, और प्रशिया के सैनिकों ने आ नदी के पार पीछे हट गए, बॉस्क और रुएन्थल के बीच खड़े होकर, उनकी घेराबंदी तोपखाने की रक्षा की।
काउंट स्टिंगेल ने एकाऊ पर कब्जा कर लिया, मोहरा बौस्का में था। दुर्भाग्य से, रूसी कमांडरों ने आक्रामक को जल्दी से विकसित करने के लिए अच्छी शुरुआत का उपयोग नहीं किया। उस क्षण का उपयोग करें जब संख्यात्मक श्रेष्ठता हमारे पक्ष में थी। ब्रिसमैन और रोसेन की टुकड़ियों के साथ संयुक्त अभियान के लिए 3 सैनिकों को मितावा भेजकर स्टिंगेल ने खुद को कमजोर कर लिया। इस बीच, दुश्मन, इसके विपरीत, बलों को केंद्रित करता है। यॉर्क ने अस्थायी रूप से मितवा को आत्मसमर्पण करने का फैसला किया और वहां क्लीस्ट गैरीसन को उसका पालन करने का आदेश दिया। नतीजतन, प्रशिया कोर फिनिश कोर की तुलना में मजबूत हो गया। घेराबंदी पार्क को बचाने के लिए, प्रशिया ने मेज़ोटेन में एक जवाबी हमला करने का फैसला किया।
मेसोटेन में दुश्मन की गतिविधियों के बारे में जानने के बाद, स्टिंगेल ने बौस्का रोड को छोड़ दिया और दाईं ओर मुड़ गया, वह भी मेसोटेन की ओर। रात में, मोहरा ने दुश्मन के बाएं हिस्से को मारने के लिए आ नदी को पार किया। अंधेरे में और नदी पार करते समय, हमारे सैनिकों ने आदेश खो दिया, इसने क्लेस्ट के प्रशिया को हमले का सामना करने की अनुमति दी। यॉर्क से सुदृढीकरण प्राप्त करने के बाद, क्लेस्ट ने खुद पर हमला किया। हमारा मोहरा पीछे हट गया।
स्टिंगेल, ऐसी परिस्थितियों में जब यह स्पष्ट हो गया कि दुश्मन को ताकत में फायदा था, खासकर घुड़सवार सेना और घोड़े के तोपखाने में, आक्रामक जारी रखने की हिम्मत नहीं हुई और सेना को रीगा में वापस ले लिया।
यॉर्क ने तुरंत रूसी कमान की गलतियों का फायदा उठाया, 18 सितंबर (30) को भोर में जवाबी कार्रवाई की और हमारे रियरगार्ड पर हमला किया। जबकि रियर गार्ड ने प्रशिया को वापस पकड़ लिया, स्टिंगेल की कोर ओलाई में पीछे हट गई, जहां वह ब्रिसमैन और रोसेन की टुकड़ियों के साथ जुड़ गया। मितवा, जिस पर हमारे सैनिकों ने दो दिनों तक कब्जा किया था, को फिर से छोड़ दिया गया। शहर में, दवीना पर एक पुल के निर्माण के लिए तैयार सामग्री को नष्ट कर दिया गया, 4 बंदूकें और विभिन्न आपूर्ति पर कब्जा कर लिया गया। इस असफल अभियान में रूसी नुकसान - लगभग 2,5 हजार लोग, प्रशिया - 1 हजार।
20 सितंबर (1 अक्टूबर), 1812 को, रूसी सैनिक रीगा लौट आए। असफलता ने शहरवासियों पर बहुत प्रभाव डाला। उसी समय आया खबर है दुश्मन द्वारा मास्को पर कब्जा करने के बारे में।
रीगा में बैठना नहीं चाहते, स्टिंगेल ने विट्गेन्स्टाइन की पहली कोर को पोलोत्स्क दिशा में मदद करने के लिए फिनिश कोर को स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी। नतीजतन, 1 सितंबर (23 अक्टूबर) को, स्टिंगेल की 4 वीं वाहिनी रीगा से निकली। रीगा और डुनामुंडे में, पूर्व गैरीसन बने रहे - 10 हजार सैनिक। 17 अक्टूबर (17) को, जनरल फिलिप पॉलुची ने रीगा सैन्य गवर्नर और एक अलग कोर के कमांडर के रूप में जनरल एसेन की जगह ली।
मैकडोनाल्ड, रीगा के पास रूसी सैनिकों की उन्नति के बारे में जानने के बाद, डनबर्ग में एक रेजिमेंट छोड़कर, यॉर्क की मदद करने के लिए अपनी सेना को स्थानांतरित कर दिया। यह देखते हुए कि अब कोई खतरा नहीं था, उसने फ्रांसीसी डिवीजन को डनबर्ग लौटा दिया। नतीजतन, ग्रैंडजीन का फ्रांसीसी डिवीजन पूरे अभियान में निष्क्रिय था, इसका उपयोग रीगा या पोलोत्स्क दिशा में नहीं किया गया था। घेराबंदी पार्क को वापस भेज दिया गया, अंत में रीगा की घेराबंदी की योजनाओं को छोड़ दिया गया।
1812 की देर से शरद ऋतु तक, दोनों पक्ष फिर से निष्क्रिय थे। सेंट-साइर ने मैकडॉनल्ड्स को विट्गेन्स्टाइन के खिलाफ आक्रमण शुरू करने के लिए 12 सैनिकों को पोलोत्स्क भेजने की पेशकश की। मैकडोनाल्ड ने उत्तर दिया कि वह 4-5 हजार से अधिक सैनिकों को आवंटित नहीं कर सकता, क्योंकि उसे एक बड़े क्षेत्र की रक्षा करनी थी, और यदि यह कमजोर हो गया, तो रीगा कोर द्वारा एक नया हमला संभव था। सेंट-साइर ने उत्तर दिया कि रूसियों पर हमले के लिए 5 हजार पर्याप्त नहीं थे।
मैकडोनाल्ड रूस से पीछे हटने वाला अंतिम व्यक्ति था। 5 दिसंबर (17), 1812 तक, उनके सैनिक अपने पिछले पदों पर खड़े रहे। उन्हें नेपोलियन के मुख्यालय से कोई निर्देश नहीं मिला, जो रूस से अपनी उड़ान के दौरान ग्रैंड आर्मी में शासन करने वाले सामान्य भ्रम के कारण था। मैकडोनाल्ड ने फ्रांसीसी सेना की हार और पीछे हटने के बारे में विल्ना और मितवा तक पहुंचने वाली सभी अफवाहों को खारिज करते हुए आदेश की प्रतीक्षा की। केवल 6 दिसंबर (18) को मूरत ने 10 वीं वाहिनी को वापस लेने का आदेश दिया। 7 दिसंबर को, मैकडॉनल्ड्स ने वाहिनी को तिलसिट की ओर वापस ले जाने का आदेश दिया। 8 दिसंबर (20) को, प्रशिया ने मितवा छोड़ दिया।
कमांडर-इन-चीफ कुतुज़ोव ने मैकडॉनल्ड्स को रोकने के लिए विट्गेन्स्टाइन की वाहिनी को रूसियों (अब रसीनाई) के पास जाने का आदेश दिया। सबसे आगे एडजुटेंट जनरल कुतुज़ोव और मेजर जनरल डिबिच की टुकड़ियाँ थीं। प्रशिया के लिए, पॉलुची की सेना ने रीगा को भी छोड़ दिया। मुख्य रूसी सेना धीरे-धीरे आगे बढ़ी, इसलिए वे मैकडोनाल्ड को हराने में विफल रहे। फ्रांसीसी मार्शल ने उस खतरे पर संदेह किया जिसने उसे धमकी दी, मार्च को तेज कर दिया, और 15 दिसंबर (27) को कुतुज़ोव के पूर्व मोहरा, जो पहले से ही तिलसिट में था, व्लास्तोव की टुकड़ी को हराया। कुतुज़ोव ने दुश्मन की पूरी वाहिनी को रोकना संभव नहीं मानते हुए, दुश्मन के लिए तिलसिट का रास्ता साफ कर दिया। मैकडॉनल्ड टिलसिट में रुक गया, यॉर्क के पीछे के स्तंभों की प्रतीक्षा कर रहा था।
इस बीच, मेमेल पर मार्च करते हुए डिबिच टुकड़ी ने प्रशिया सैनिकों के लिए सड़क काट दी। केवल 1 रूसी थे और प्रशिया (400-14 हजार) उन्हें उलट सकते थे। हालांकि, प्रशिया के जनरलों क्लेस्ट और योर्क रूसियों से लड़ना नहीं चाहते थे। यॉर्क ने अपने जोखिम और जोखिम पर 16 दिसंबर (18) को रूसियों के साथ टॉरोजेन कन्वेंशन का समापन किया, जिसके अनुसार उनकी वाहिनी "तटस्थता" का पालन करने लगी। यह समझौता रूस के पक्ष में प्रशिया के संक्रमण और फ्रांसीसी विरोधी गठबंधन की शुरुआत थी।
मैकडॉनल्ड्स के साथ टिलसिट में मौजूद प्रशियाई सैनिकों को रूसियों के साथ यॉर्क के समझौते की खबर मिली, उन्होंने फ्रांसीसी छोड़ दिया और अपने कोर में शामिल होने के लिए चले गए। मैकडोनाल्ड के पास लगभग 5 हजार सैनिक बचे थे, और 19 दिसंबर को वह जल्दबाजी में तिलसिट से कोनिग्सबर्ग के लिए पीछे हट गया। पूर्वी प्रशिया के शहर और वारसॉ के डची, एक के बाद एक, रूसी सैनिकों द्वारा कब्जा कर लिया गया था। नेपोलियन की सेना के अवशेष विस्तुला भाग गए।
- लेखकः
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सितंबर एक हज़ार आठ सौ बारह में, स्टिंगेल और एसेन की कमान के तहत रूसी सैनिकों ने रीगा की दिशा में प्रशिया कोर को हराने की कोशिश की। आक्रामक विफल रहा, हमारे सैनिक रीगा लौट आए। आठ जुलाई एक हज़ार आठ सौ बारह प्रशिया के सैनिक मितवा पर कब्जा कर लिया। बाईस जुलाई को नेपोलियन के निर्देश पर कौरलैंड के लिए एक विभाग बनाया गया था। कब्जे के दौरान, क्षेत्र पूरी तरह से तबाह हो गया था, सेना के लिए रोटी, घोड़े, कपड़ा, चर्मपत्र कोट निकाल लिए गए थे, और पंद्रह मिलियन का मौद्रिक योगदान लगाया गया था। ग्रेट आर्मी के विभिन्न प्रमुखों, रेगिस्तानों द्वारा कौरलैंड को भी लूट लिया गया था। सोलह जुलाई , एक हज़ार आठ सौ बारह को प्रशिया कोर के कमांडर ने रीगा के आत्मसमर्पण की मांग की। जनरल एसेन ने मना कर दिया। नदी के किनारे प्रशिया के सैनिक तैनात थे। मीसा, उन्नत पदों को डीवीना के बाईं ओर धकेलती है। ग्रामीणों की टुकड़ियों को दाहिने किनारे पर भेजा गया। रीगा से, उनके खिलाफ टुकड़ियाँ निकलीं, जो स्थानीय शिकारियों के साथ थीं । एसेन ने दुश्मन के खिलाफ छँटाई करने की हिम्मत नहीं की। यह इस तथ्य से उचित था कि उनकी वाहिनी में मुख्य रूप से अनुभवहीन, आरक्षित और आरक्षित बटालियन और स्क्वाड्रन शामिल थे। इसने पीटर्सबर्ग को परेशान कर दिया। बीस जुलाई को स्वेबॉर्ग से रीगा के लिए सरसठ गनबोट आए। वे कई बार नदी के ऊपर श्लोक और उससे ऊपर गए, प्रशिया के साथ झड़प करते हुए, लेकिन बहुत अधिक परिणाम के बिना। नतीजतन, जुलाई का अंत और पूरा अगस्त निष्क्रियता में बीत गया। रीगा के सैन्य गवर्नर ने गंभीर कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं की, रीगा में उन्होंने विट्गेन्स्टाइन कोर की आशा की, जो सफलतापूर्वक औडिनोट और सेंट-साइर की वाहिनी के साथ लड़े। मार्शल मैकडोनाल्ड के पास एक बड़े शहर की पूर्ण घेराबंदी शुरू करने के लिए पर्याप्त ताकत नहीं थी। नेपोलियन का सफलतापूर्वक विरोध करने के लिए स्वीडिश प्रश्न को हल करना आवश्यक था। फ्रांस के पक्ष में स्वीडन का प्रदर्शन उत्तर-पश्चिमी रणनीतिक दिशा में रूस की स्थिति को तेजी से खराब कर सकता है। एक हज़ार आठ सौ सातवीं शताब्दी की शुरुआत में रूसी-स्वीडिश संबंध जटिल थे। एक ओर, स्वेड्स ने एक हज़ार आठ सौ आठ वीं शताब्दी की हार और क्षेत्रीय नुकसान को याद किया। बदला लेने की पार्टी थी। दूसरी ओर, रूस और स्वीडन, सहयोगी के रूप में, फ्रांस के साथ लड़े। एक हज़ार आठ सौ नौ में, फ्रांस के साथ तिलसिट शांति के समापन के बाद, रूस ने स्वीडन के साथ एक सफल युद्ध शुरू किया, जो इंग्लैंड के पक्ष में रहा। XNUMX-XNUMX के युद्ध में स्वीडन की हार हुई और फिनलैंड को रूसी साम्राज्य में मिला लिया गया। हार की पृष्ठभूमि के खिलाफ, स्वीडिश राजा गुस्तावस एडॉल्फ वी को उखाड़ फेंका गया था, और स्वीडिश रिक्स्डैग ने मार्शल बर्नडॉट को सिंहासन के उत्तराधिकारी के रूप में चुना था। स्वीडन ने इंग्लैंड के साथ गठबंधन छोड़ दिया और डेनिश नॉर्वे पर दावा करना शुरू कर दिया। रूस ने इस मामले में समर्थन का वादा किया था। एक नए रूसी-फ्रांसीसी युद्ध के दृष्टिकोण के साथ, स्वीडन रूस के पक्ष में झुक गया। स्वीडन को इंग्लैंड की महाद्वीपीय नाकाबंदी से बहुत नुकसान हुआ, अंग्रेज इसके मुख्य व्यापारिक भागीदार थे। जवाब में, नेपोलियन ने जर्मनी में स्वीडिश पोमेरानिया पर कब्जा करने का आदेश दिया। इससे स्वीडन और रूस और भी करीब आ गए। पाँच अप्रैल को, पीटर्सबर्ग संघ संधि पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके अनुसार स्टॉकहोम ने फिनलैंड को रूस के रूप में मान्यता दी, और रूसी-तुर्की वार्ता में मध्यस्थता करने का वादा किया। बदले में, सेंट पीटर्सबर्ग ने नॉर्वे में शामिल होने में स्वीडन का समर्थन करने का वादा किया। दोनों शक्तियों ने फ्रांस के खिलाफ निर्देशित सैन्य गठबंधन में प्रवेश किया। उन्होंने जर्मनी में संयुक्त लैंडिंग की योजना भी विकसित की। रूसी सेना के कमांडर-इन-चीफ के रूप में कुतुज़ोव की नियुक्ति के बाद - आठ अगस्त , एक हज़ार आठ सौ बारह को, रूसी संप्रभु अलेक्जेंडर I स्वीडन के क्राउन प्रिंस से मिलने के लिए अबो गए। बारह अगस्त को सम्राट अबो में थे, पंद्रह तारीख को क्राउन प्रिंस कार्ल-जोहान पहुंचे। बर्नडॉट ने रूस की मदद के लिए तीसवीं कोर लगाने की पेशकश की। फिनलैंड के बदले। सिकंदर ने इस तरह के सौदे से इनकार कर दिया। फ्रांस के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में संभावित संयुक्त लैंडिंग के विचार पर भी चर्चा हुई। अट्ठारह अगस्त को अबो की संधि संपन्न हुई। स्टॉकहोम ने अंततः फ़िनलैंड और ऑलैंड द्वीप समूह को छोड़ दिया। रूस ने इसे दक्षिणी स्वीडन में तैनात करने के लिए पैंतीस-मजबूत सहायक कोर लगाने का वादा किया, जबकि स्वीडिश सेना डेनमार्क के साथ युद्ध में व्यस्त थी। सिकंदर ज़ीलैंड के डेनिश द्वीप को स्वीडन में मिलाने के लिए सहमत हो गया। बर्नाडोट ने डची ऑफ वारसॉ के हिस्से को रूसी साम्राज्य में शामिल करने पर सहमति व्यक्त की। पीटर्सबर्ग ने स्वीडन को एक,पाँच मिलियन रूबल का ऋण प्रदान किया। दोनों पक्षों ने इंग्लैंड को गठबंधन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। इस प्रकार, स्वीडन के डर के बिना, रूस को उत्तर-पश्चिम में एक स्वतंत्र हाथ मिला, जो फिनलैंड पर कब्जा करने के लिए नेपोलियन के आक्रमण का लाभ उठा सकता था। बदले में, पीटर्सबर्ग ने नए स्वीडिश बर्नाडोट राजवंश के अधिकारों को मजबूत किया। डेनमार्क के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई स्थगित कर दी गई , इसलिए रूस को स्वीडन का समर्थन करने के लिए सैनिकों का उपयोग करने का अवसर मिला। रीगा के गैरीसन को मजबूत करने के लिए फ़िनिश गवर्नर-जनरल फ़ैडी फेडोरोविच शेटिंगेल की कमान के तहत फ़िनिश कोर भेजने का निर्णय लिया गया। जनरल लड़ रहा थाः उसने एक हज़ार आठ सौ सात में फ्रांसीसी के साथ लड़ाई लड़ी, घायल हो गया, दो बार स्वेड्स के साथ लड़ा। फ़िनिश कोर एक हज़ार आठ सौ दस की शरद ऋतु में फ़िनलैंड में तैनात सैनिकों से बनाया गया था। एक हज़ार आठ सौ बारह के वसंत और गर्मियों में, उन्हें आंशिक रूप से बाल्टिक सागर के तट पर पोमेरानिया में, स्वेड्स के साथ, नियोजित लैंडिंग के लिए अलैंड द्वीप समूह में स्थानांतरित कर दिया गया था। कोर में शामिल हैंः छः वीं और इक्कीस वीं इन्फैंट्री डिवीजन, फिनिश ड्रैगून रेजिमेंट और डॉन कोसैक लोशिलिन रेजिमेंट। कुल मिलाकर, जुलाई एक हज़ार आठ सौ बारह के अंत तक - इक्कीस हजार सैनिक। अट्ठारह अगस्त को, रीगा के पास हेलसिंगफोर्स, अलंड्स और अबो से एक कोर भेजने का आदेश दिया गया ताकि वहां की चौकी को मजबूत किया जा सके। सिकंदर प्रथम ने रीगा के गवर्नर-जनरल को रीगा और मितवा से दुश्मन को पीछे धकेलने का निर्देश दिया। उथले पानी के कारण रीगा तक पहुंचना नामुमकिन होने के कारण वाहिनी अट्ठाईस अगस्त को रेवेल में उतरी। खराब मौसम ने जहाजों के हिस्से को क्षतिग्रस्त कर दिया, कुछ स्वेबॉर्ग लौट आए, दूसरों के प्रस्थान में देरी हुई। फ़िनिश गवर्नर-जनरल ने प्रतीक्षा नहीं की और उपलब्ध बलों के साथ निकल पड़े - दस हजार लोग। आठ सितंबर को मोहरा रीगा में था। दस सितंबर को, स्टिंगेल की वाहिनी ने रीगा से संपर्क किया। रीगा की दिशा में एक खामोशी थी। मैकडॉनल्ड्स के कोर ने रीगा को सक्रिय कदम उठाए बिना देखा, क्योंकि उसके पास एक सफल घेराबंदी और हमले के लिए पर्याप्त बल और साधन नहीं थे। इसके अलावा, प्रशिया नेपोलियन के नाम पर लड़ने में धीमे थे और पहले कभी हमला नहीं किया। ग्रेवर्ट की जगह लेने वाले प्रशिया के जनरल लुडविग योर्क ने रूसियों को नाराज नहीं करने की कोशिश की। मितवा में प्रशिया के सैनिक तैनात थे। मई में वापस, डेंजिग से घेराबंदी तोपखाने भेजी गईं, जो अगस्त की शुरुआत में तिलसिट पहुंचे और अगस्त के अंत में बौस्का के पास रुएंटल में लाए गए। लेकिन मार्शल के पास घेराबंदी शुरू करने का समय नहीं था, क्योंकि नेपोलियन का आदेश प्रतीक्षा करने के लिए आया था। उस समय फ्रांसीसी सम्राट मास्को जा रहे थे और उनका मानना था कि सिकंदर के साथ जल्द ही शांति पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसलिए, रीगा की घेराबंदी नहीं की जा सकी। दूसरी ओर, एसेन ने निर्णायक छंटनी के लिए खुद को बहुत कमजोर माना। केवल कभी-कभी हमारे गश्ती दल ने दुश्मन को परेशान किया। काउंट स्टिंगेल के फिनिश कॉर्प्स के आने से हमारे पक्ष में शक्ति का संतुलन बदलने वाला था। फ़िनिश वाहिनी को रीगा में भेजकर, अलेक्जेंडर I ने शहर से घेराबंदी को उठाने का कार्य निर्धारित किया। लेकिन सेंट पीटर्सबर्ग में पहुंचने के बाद, सिकंदर ने काउंट स्टिंगेल को एक अधिक महत्वाकांक्षी कार्य निर्धारित कियाः रीगा और फ़िनलैंड की दो वाहिनी, जिनकी संख्या पैंतीस-चालीस हजार संगीन और घुड़सवार सेना होनी चाहिए, न केवल रीगा में दुश्मन को हराने के लिए थे, वरन उसे नेमन से निकालकर विल्ना को भी जाना। यहाँ नेमन पर प्रशिया को देखने के लिए और अन्य सेनाओं के बेरेज़िना में आने की प्रतीक्षा करने के लिए। हालांकि, एसेन और स्टिंगेल इस तरह के कार्य को पूरा नहीं कर सके। सबसे पहले, जनरलों के पास सुवोरोव का निर्माण नहीं था। दूसरे, जनरलों ने लक्ष्यों की प्रधानता और प्राथमिकता के बारे में बहस करना शुरू कर दिया। तीसरा, नियोजित से कम सैनिक थे। यह माना जाता था कि रीगा बीस हजार सैनिकों को रख सकती है, और काउंट स्टिंगेल - पंद्रह हजार। एस्सेन ने किले की रक्षा के लिए पाँच हजार छोड़े और जनरल लेविज को दस हजार देने में सक्षम थे। तूफान के कारण फिनिश कोर को सड़क पर पाँच हजार का नुकसान हुआ नतीजतन, वे इक्कीस हजार से अधिक लोगों पर हमला नहीं कर सके। अर्थात् शत्रु पर कोई श्रेष्ठता नहीं थी। सैन्य परिषद में, एसेन, स्टिंगेल और लेविज़ ने यॉर्क के सोलह-मजबूत प्रशियाई कोर पर हमला करने का फैसला किया, जो मितवा-ओले क्षेत्र में तैनात था। चौदह सितंबर , एक हज़ार आठ सौ बारह को, आक्रामक शुरू हुआ। दाईं ओर, तटीय फ़्लैक ने काम किया छोटी नावों का बेड़ा रियर एडमिरल मोलर, उसे जनरल ब्रिसमैन की दो-मजबूत टुकड़ी द्वारा समर्थित किया गया था, जिसे मितावा क्षेत्र में प्रशिया की तर्ज पर जाना था। कर्नल रोसेन की एक-मजबूत टुकड़ी ने ओलाई के खिलाफ कार्रवाई की। फ़िनिश कोर की मुख्य सेनाएँ और रीगा की चौकी - उन्नीस तोपों के साथ तेईस हज़ार से अधिक, बौस्का रोड के साथ मार्च किया। स्टिंगेल के सैनिकों ने प्रशिया की अग्रिम टुकड़ियों को उलट दिया। दुश्मन की प्रगति के बारे में जानने के बाद, जनरल यॉर्क ने रूएंथल में घेराबंदी पार्क को कवर करते हुए एकाऊ में एक कोर इकट्ठा करना शुरू कर दिया। पंद्रह सितंबर को दोपहर के आसपास, स्टिंगेल की वाहिनी ने एकाऊ में यॉर्क के सैनिकों पर हमला किया। एक छोटी सी झड़प के बाद, प्रशियाई एकाऊ नदी के उस पार वापस चले गए और वहाँ कसकर पकड़ लिया। रूसियों ने दुश्मन को पछाड़ना शुरू कर दिया, और प्रशिया के सैनिकों ने आ नदी के पार पीछे हट गए, बॉस्क और रुएन्थल के बीच खड़े होकर, उनकी घेराबंदी तोपखाने की रक्षा की। काउंट स्टिंगेल ने एकाऊ पर कब्जा कर लिया, मोहरा बौस्का में था। दुर्भाग्य से, रूसी कमांडरों ने आक्रामक को जल्दी से विकसित करने के लिए अच्छी शुरुआत का उपयोग नहीं किया। उस क्षण का उपयोग करें जब संख्यात्मक श्रेष्ठता हमारे पक्ष में थी। ब्रिसमैन और रोसेन की टुकड़ियों के साथ संयुक्त अभियान के लिए तीन सैनिकों को मितावा भेजकर स्टिंगेल ने खुद को कमजोर कर लिया। इस बीच, दुश्मन, इसके विपरीत, बलों को केंद्रित करता है। यॉर्क ने अस्थायी रूप से मितवा को आत्मसमर्पण करने का फैसला किया और वहां क्लीस्ट गैरीसन को उसका पालन करने का आदेश दिया। नतीजतन, प्रशिया कोर फिनिश कोर की तुलना में मजबूत हो गया। घेराबंदी पार्क को बचाने के लिए, प्रशिया ने मेज़ोटेन में एक जवाबी हमला करने का फैसला किया। मेसोटेन में दुश्मन की गतिविधियों के बारे में जानने के बाद, स्टिंगेल ने बौस्का रोड को छोड़ दिया और दाईं ओर मुड़ गया, वह भी मेसोटेन की ओर। रात में, मोहरा ने दुश्मन के बाएं हिस्से को मारने के लिए आ नदी को पार किया। अंधेरे में और नदी पार करते समय, हमारे सैनिकों ने आदेश खो दिया, इसने क्लेस्ट के प्रशिया को हमले का सामना करने की अनुमति दी। यॉर्क से सुदृढीकरण प्राप्त करने के बाद, क्लेस्ट ने खुद पर हमला किया। हमारा मोहरा पीछे हट गया। स्टिंगेल, ऐसी परिस्थितियों में जब यह स्पष्ट हो गया कि दुश्मन को ताकत में फायदा था, खासकर घुड़सवार सेना और घोड़े के तोपखाने में, आक्रामक जारी रखने की हिम्मत नहीं हुई और सेना को रीगा में वापस ले लिया। यॉर्क ने तुरंत रूसी कमान की गलतियों का फायदा उठाया, अट्ठारह सितंबर को भोर में जवाबी कार्रवाई की और हमारे रियरगार्ड पर हमला किया। जबकि रियर गार्ड ने प्रशिया को वापस पकड़ लिया, स्टिंगेल की कोर ओलाई में पीछे हट गई, जहां वह ब्रिसमैन और रोसेन की टुकड़ियों के साथ जुड़ गया। मितवा, जिस पर हमारे सैनिकों ने दो दिनों तक कब्जा किया था, को फिर से छोड़ दिया गया। शहर में, दवीना पर एक पुल के निर्माण के लिए तैयार सामग्री को नष्ट कर दिया गया, चार बंदूकें और विभिन्न आपूर्ति पर कब्जा कर लिया गया। इस असफल अभियान में रूसी नुकसान - लगभग दो,पाँच हजार लोग, प्रशिया - एक हजार। बीस सितंबर , एक हज़ार आठ सौ बारह को, रूसी सैनिक रीगा लौट आए। असफलता ने शहरवासियों पर बहुत प्रभाव डाला। उसी समय आया खबर है दुश्मन द्वारा मास्को पर कब्जा करने के बारे में। रीगा में बैठना नहीं चाहते, स्टिंगेल ने विट्गेन्स्टाइन की पहली कोर को पोलोत्स्क दिशा में मदद करने के लिए फिनिश कोर को स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी। नतीजतन, एक सितंबर को, स्टिंगेल की चार वीं वाहिनी रीगा से निकली। रीगा और डुनामुंडे में, पूर्व गैरीसन बने रहे - दस हजार सैनिक। सत्रह अक्टूबर को, जनरल फिलिप पॉलुची ने रीगा सैन्य गवर्नर और एक अलग कोर के कमांडर के रूप में जनरल एसेन की जगह ली। मैकडोनाल्ड, रीगा के पास रूसी सैनिकों की उन्नति के बारे में जानने के बाद, डनबर्ग में एक रेजिमेंट छोड़कर, यॉर्क की मदद करने के लिए अपनी सेना को स्थानांतरित कर दिया। यह देखते हुए कि अब कोई खतरा नहीं था, उसने फ्रांसीसी डिवीजन को डनबर्ग लौटा दिया। नतीजतन, ग्रैंडजीन का फ्रांसीसी डिवीजन पूरे अभियान में निष्क्रिय था, इसका उपयोग रीगा या पोलोत्स्क दिशा में नहीं किया गया था। घेराबंदी पार्क को वापस भेज दिया गया, अंत में रीगा की घेराबंदी की योजनाओं को छोड़ दिया गया। एक हज़ार आठ सौ बारह की देर से शरद ऋतु तक, दोनों पक्ष फिर से निष्क्रिय थे। सेंट-साइर ने मैकडॉनल्ड्स को विट्गेन्स्टाइन के खिलाफ आक्रमण शुरू करने के लिए बारह सैनिकों को पोलोत्स्क भेजने की पेशकश की। मैकडोनाल्ड ने उत्तर दिया कि वह चार-पाँच हजार से अधिक सैनिकों को आवंटित नहीं कर सकता, क्योंकि उसे एक बड़े क्षेत्र की रक्षा करनी थी, और यदि यह कमजोर हो गया, तो रीगा कोर द्वारा एक नया हमला संभव था। सेंट-साइर ने उत्तर दिया कि रूसियों पर हमले के लिए पाँच हजार पर्याप्त नहीं थे। मैकडोनाल्ड रूस से पीछे हटने वाला अंतिम व्यक्ति था। पाँच दिसंबर , एक हज़ार आठ सौ बारह तक, उनके सैनिक अपने पिछले पदों पर खड़े रहे। उन्हें नेपोलियन के मुख्यालय से कोई निर्देश नहीं मिला, जो रूस से अपनी उड़ान के दौरान ग्रैंड आर्मी में शासन करने वाले सामान्य भ्रम के कारण था। मैकडोनाल्ड ने फ्रांसीसी सेना की हार और पीछे हटने के बारे में विल्ना और मितवा तक पहुंचने वाली सभी अफवाहों को खारिज करते हुए आदेश की प्रतीक्षा की। केवल छः दिसंबर को मूरत ने दस वीं वाहिनी को वापस लेने का आदेश दिया। सात दिसंबर को, मैकडॉनल्ड्स ने वाहिनी को तिलसिट की ओर वापस ले जाने का आदेश दिया। आठ दिसंबर को, प्रशिया ने मितवा छोड़ दिया। कमांडर-इन-चीफ कुतुज़ोव ने मैकडॉनल्ड्स को रोकने के लिए विट्गेन्स्टाइन की वाहिनी को रूसियों के पास जाने का आदेश दिया। सबसे आगे एडजुटेंट जनरल कुतुज़ोव और मेजर जनरल डिबिच की टुकड़ियाँ थीं। प्रशिया के लिए, पॉलुची की सेना ने रीगा को भी छोड़ दिया। मुख्य रूसी सेना धीरे-धीरे आगे बढ़ी, इसलिए वे मैकडोनाल्ड को हराने में विफल रहे। फ्रांसीसी मार्शल ने उस खतरे पर संदेह किया जिसने उसे धमकी दी, मार्च को तेज कर दिया, और पंद्रह दिसंबर को कुतुज़ोव के पूर्व मोहरा, जो पहले से ही तिलसिट में था, व्लास्तोव की टुकड़ी को हराया। कुतुज़ोव ने दुश्मन की पूरी वाहिनी को रोकना संभव नहीं मानते हुए, दुश्मन के लिए तिलसिट का रास्ता साफ कर दिया। मैकडॉनल्ड टिलसिट में रुक गया, यॉर्क के पीछे के स्तंभों की प्रतीक्षा कर रहा था। इस बीच, मेमेल पर मार्च करते हुए डिबिच टुकड़ी ने प्रशिया सैनिकों के लिए सड़क काट दी। केवल एक रूसी थे और प्रशिया उन्हें उलट सकते थे। हालांकि, प्रशिया के जनरलों क्लेस्ट और योर्क रूसियों से लड़ना नहीं चाहते थे। यॉर्क ने अपने जोखिम और जोखिम पर सोलह दिसंबर को रूसियों के साथ टॉरोजेन कन्वेंशन का समापन किया, जिसके अनुसार उनकी वाहिनी "तटस्थता" का पालन करने लगी। यह समझौता रूस के पक्ष में प्रशिया के संक्रमण और फ्रांसीसी विरोधी गठबंधन की शुरुआत थी। मैकडॉनल्ड्स के साथ टिलसिट में मौजूद प्रशियाई सैनिकों को रूसियों के साथ यॉर्क के समझौते की खबर मिली, उन्होंने फ्रांसीसी छोड़ दिया और अपने कोर में शामिल होने के लिए चले गए। मैकडोनाल्ड के पास लगभग पाँच हजार सैनिक बचे थे, और उन्नीस दिसंबर को वह जल्दबाजी में तिलसिट से कोनिग्सबर्ग के लिए पीछे हट गया। पूर्वी प्रशिया के शहर और वारसॉ के डची, एक के बाद एक, रूसी सैनिकों द्वारा कब्जा कर लिया गया था। नेपोलियन की सेना के अवशेष विस्तुला भाग गए। - लेखकः
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देशभर के अलग-अलग राज्यों में आज से पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी हुई है. हालांकि ऐसा लगातार 29 दिनों बाद हुआ है जब देश में पेट्रोल और डीजल के दाम में बदलाव हुए हो.
नए साल में पहली बार पेट्रोल के दाम में बढ़ोतरी हुई है और देशभर के अलग-अलग राज्यों की बात की जाए तो पेट्रोल के दाम में 24 से 26 पैसे और डीजल के दाम में 24 से 27 पैसे तक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है.
बता दें कि देश में पिछली बार ईंधन के दाम में 8 दिसंबर को बदलाव हुआ था और उसके बाद आज नए साल के पहले प्राइस चेंज में पेट्रोल 26 पैसे और डीजल 25 पैसे महंगे हुए हैं.
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देशभर के अलग-अलग राज्यों में आज से पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी हुई है. हालांकि ऐसा लगातार उनतीस दिनों बाद हुआ है जब देश में पेट्रोल और डीजल के दाम में बदलाव हुए हो. नए साल में पहली बार पेट्रोल के दाम में बढ़ोतरी हुई है और देशभर के अलग-अलग राज्यों की बात की जाए तो पेट्रोल के दाम में चौबीस से छब्बीस पैसे और डीजल के दाम में चौबीस से सत्ताईस पैसे तक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. बता दें कि देश में पिछली बार ईंधन के दाम में आठ दिसंबर को बदलाव हुआ था और उसके बाद आज नए साल के पहले प्राइस चेंज में पेट्रोल छब्बीस पैसे और डीजल पच्चीस पैसे महंगे हुए हैं.
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- क्या आप फिजूलखर्च करते हैं?
क्या आप फिजूलखर्च करते हैं? क्या आप अपने भविष्य के लिए पैसे की बचत नहीं करते? अगर इसका जवाब हां है तो आपको अभी से सचेत हो जाने की जरूरत है। क्योंकि आने वाले दिनों में पूरे विश्व में आर्थिक मंदी के संकेत मिल रहे हैं। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा जारी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट कह रही है। IMF रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले वित्त वर्ष में वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर 2. 7 फीसदी रहने का अनुमान है। अमेरिका से लेकर विश्व के सभी देशों की विकास दर कम रहने की संभावना है।
वहीं भारत की विकास दर 6. 8% रहने की संभावना IMF ने जताई है। IMF की इस रिपोर्ट के बाद पूरी दुनिया के लोग आशंकित है। सबको अपने भविष्य की चिंता सता रही है। रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से चल रहे युद्ध और कोरोना महामारी ने पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। आपको बता दें आज के समय में पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था एक दूसरे पर निर्भर है। विश्व के किसी भी कोने में हो रही हलचल से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है।
क्या होती है आर्थिक मंदी?
जब किसी देश की जीडीपी लगातार दो तिमाही से अधिक समय तक गिरती रहे, तब उस स्थिति को अर्थशास्त्र में मंदी कहा जाता है। आसान शब्दों में कहें तो जब बाजार में उत्पादन बहुत ज्यादा हो, लेकिन मांग बहुत कम तब वह स्थिति मंदी का रूप ले लेती है और अगर कमोबेश वैसी ही स्थिति पूरी दुनिया में आ जाए तब उसे वैश्विक मंदी कहा जाता है।
आर्थिक मंदी सीधे-सीधे लोगों को प्रभावित करती है। उस दौरान लोगों के अंदर नौकरी जाने का डर बना रहता है। कंपनियों और फैक्ट्रियों के मंदी की चपेट में आ जाने के बाद रोजगार के नये अवसर खत्म हो जाते हैं। मंहगाई में बेतहाशा वृद्धि हो जाती है और हाथ में पैसे न होने के कारण लोगों की क्रय शक्ति कम हो जाती है।
दुनिया में आर्थिक मंदी तो कई बार आई, लेकिन 1929 की आर्थिक मंदी जिसे हम ग्रेट डिप्रेशन के नाम से जानते हैं उस तरह की मंदी कभी नहीं आई। 1929 के उस मंदी को अबतक की सबसे बड़ी आर्थिक मंदी माना जाता है। आपको बता दें, उस समय पूरे वैश्विक अर्थव्यवस्था में भयावह स्थिति थी। उस समय फैक्ट्रियों में उत्पादन ज्यादा हो रहा था, लेकिन मांग न के बराबर थी। अमेरिका का शेयर बाजार धाराशायी हो गया था। अमेरिका ने आयात शुल्क बढ़ा दिए जिसके बाद पूरा विश्व व्यपार बुरी तरह प्रभावित हुआ था। यूरोपीय देश पूरी तरह से अमेरिकी कर्ज के बोझ तले दबे हुए थे। मात्र 3 साल के अंदर एक लाख से अधिक कंपनियां बंद हो गई और 1933 आते-आते 4 हजार से अधिक बैंकों पर ताला लग गया था। ये कहना गलत नहीं होगा कि उस महामंदी ने कई देशों में अराजकता की स्थिति में धकेल दिया था और उसी का नतीजा था कि यूरोप समेत कई देशों में भयंकर पलायन शुरू हो गया था।
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- क्या आप फिजूलखर्च करते हैं? क्या आप फिजूलखर्च करते हैं? क्या आप अपने भविष्य के लिए पैसे की बचत नहीं करते? अगर इसका जवाब हां है तो आपको अभी से सचेत हो जाने की जरूरत है। क्योंकि आने वाले दिनों में पूरे विश्व में आर्थिक मंदी के संकेत मिल रहे हैं। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा जारी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट कह रही है। IMF रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले वित्त वर्ष में वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर दो. सात फीसदी रहने का अनुमान है। अमेरिका से लेकर विश्व के सभी देशों की विकास दर कम रहने की संभावना है। वहीं भारत की विकास दर छः. आठ% रहने की संभावना IMF ने जताई है। IMF की इस रिपोर्ट के बाद पूरी दुनिया के लोग आशंकित है। सबको अपने भविष्य की चिंता सता रही है। रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से चल रहे युद्ध और कोरोना महामारी ने पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। आपको बता दें आज के समय में पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था एक दूसरे पर निर्भर है। विश्व के किसी भी कोने में हो रही हलचल से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है। क्या होती है आर्थिक मंदी? जब किसी देश की जीडीपी लगातार दो तिमाही से अधिक समय तक गिरती रहे, तब उस स्थिति को अर्थशास्त्र में मंदी कहा जाता है। आसान शब्दों में कहें तो जब बाजार में उत्पादन बहुत ज्यादा हो, लेकिन मांग बहुत कम तब वह स्थिति मंदी का रूप ले लेती है और अगर कमोबेश वैसी ही स्थिति पूरी दुनिया में आ जाए तब उसे वैश्विक मंदी कहा जाता है। आर्थिक मंदी सीधे-सीधे लोगों को प्रभावित करती है। उस दौरान लोगों के अंदर नौकरी जाने का डर बना रहता है। कंपनियों और फैक्ट्रियों के मंदी की चपेट में आ जाने के बाद रोजगार के नये अवसर खत्म हो जाते हैं। मंहगाई में बेतहाशा वृद्धि हो जाती है और हाथ में पैसे न होने के कारण लोगों की क्रय शक्ति कम हो जाती है। दुनिया में आर्थिक मंदी तो कई बार आई, लेकिन एक हज़ार नौ सौ उनतीस की आर्थिक मंदी जिसे हम ग्रेट डिप्रेशन के नाम से जानते हैं उस तरह की मंदी कभी नहीं आई। एक हज़ार नौ सौ उनतीस के उस मंदी को अबतक की सबसे बड़ी आर्थिक मंदी माना जाता है। आपको बता दें, उस समय पूरे वैश्विक अर्थव्यवस्था में भयावह स्थिति थी। उस समय फैक्ट्रियों में उत्पादन ज्यादा हो रहा था, लेकिन मांग न के बराबर थी। अमेरिका का शेयर बाजार धाराशायी हो गया था। अमेरिका ने आयात शुल्क बढ़ा दिए जिसके बाद पूरा विश्व व्यपार बुरी तरह प्रभावित हुआ था। यूरोपीय देश पूरी तरह से अमेरिकी कर्ज के बोझ तले दबे हुए थे। मात्र तीन साल के अंदर एक लाख से अधिक कंपनियां बंद हो गई और एक हज़ार नौ सौ तैंतीस आते-आते चार हजार से अधिक बैंकों पर ताला लग गया था। ये कहना गलत नहीं होगा कि उस महामंदी ने कई देशों में अराजकता की स्थिति में धकेल दिया था और उसी का नतीजा था कि यूरोप समेत कई देशों में भयंकर पलायन शुरू हो गया था।
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Disclaimer : NBT के पत्रकारों ने इस आर्टिकल को नहीं लिखा है। आर्टिकल लिखे जाने तक ये प्रोडक्ट्स Amazon पर उपलब्ध हैं।
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जीवों की बातें भी कुछ नहीं है । ईश्वर हो एकमात्र सत्य है । कोई-कोई समझते हैं कि दुःख-ई ( Pains ) चरित्रोन्नति (अर्थात् चित्त शुद्धि) के लिए ऐसे ही आवश्यक हैं, जैसे कि अग्नि स्वर्ण की शुद्धि के लिए । प्रयास के बिना प्रकृति आगे बढ़ने नहीं देती । शायद आज पर्यन्त वरावर ऐसा ही होता है । परन्तु क्या यह भी कोई युक्ति ( कारण ) है कि इसी प्रकार सदा ऐसा ही होता रहे । यह सत्य है कि कोई भी रसायन (chemical) नवजात अवस्था (Nascent state ) में से गुजरे बिना कार्य नहीं कर सकता । वो अपने तत्त्व में परिघटित (through seduction into the substance ) होने से ही उगता द्रव दशा ( melting point ) में प्रवेश कर चुकने पर ही धातुओं को पीटपाट कर जोड़ा जा सकता है। बाहरी दिखावट और भावों से युक्त मनुष्य प्रत्यक्ष आशाओं और उज्ज्वल भविष्य ( प्रत्याशा, prospects ) से उत्तेजित होकर व्यक्तिगत रूपों में अपना विश्वास जमाता हुआ आगे बढ़ता है, किन्तु तुरन्त ही वह अपने सिर पर कड़ी चोट या माये पर भारी मुक्का ( घुसा ) खाता है । चोट उसके चित्त को पिचला कर उसे पूर्व आरम्भिक अवस्था पर पहुँचा देती है, और इस प्रकार जीवन की शर्त पूरी हो जाने पर सफलता उसके चरण चूमने आ जाती है। चाहे रिपोर्ट (पुस्तकों में वर्णन ) कुछ हो क्यों न हों, यदि देवी विधान वास्तव में देवी विधान है, तो ईश्वरादर्श को किसी प्रकार भूले विना या 'जीवन में मृत्यु' के माग से च्युत हुए बिना हजरत ईसा को कदापि कष्ट उठाना नहीं पड़ सकता था । हाँ, पीड़ा भरे अत्याचार ने उसे तुरन्त सावधान कर दिया, और प्रत्यक्ष शूली पर चढ़ने से पहले कुछ घंटों तक कालावच्छिन्न स्वरूप ( Timeless All ) में अहंभाव के विलीन (self-crucifiction ) रहने ने उसे सदा के लिए
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जीवों की बातें भी कुछ नहीं है । ईश्वर हो एकमात्र सत्य है । कोई-कोई समझते हैं कि दुःख-ई चरित्रोन्नति के लिए ऐसे ही आवश्यक हैं, जैसे कि अग्नि स्वर्ण की शुद्धि के लिए । प्रयास के बिना प्रकृति आगे बढ़ने नहीं देती । शायद आज पर्यन्त वरावर ऐसा ही होता है । परन्तु क्या यह भी कोई युक्ति है कि इसी प्रकार सदा ऐसा ही होता रहे । यह सत्य है कि कोई भी रसायन नवजात अवस्था में से गुजरे बिना कार्य नहीं कर सकता । वो अपने तत्त्व में परिघटित होने से ही उगता द्रव दशा में प्रवेश कर चुकने पर ही धातुओं को पीटपाट कर जोड़ा जा सकता है। बाहरी दिखावट और भावों से युक्त मनुष्य प्रत्यक्ष आशाओं और उज्ज्वल भविष्य से उत्तेजित होकर व्यक्तिगत रूपों में अपना विश्वास जमाता हुआ आगे बढ़ता है, किन्तु तुरन्त ही वह अपने सिर पर कड़ी चोट या माये पर भारी मुक्का खाता है । चोट उसके चित्त को पिचला कर उसे पूर्व आरम्भिक अवस्था पर पहुँचा देती है, और इस प्रकार जीवन की शर्त पूरी हो जाने पर सफलता उसके चरण चूमने आ जाती है। चाहे रिपोर्ट कुछ हो क्यों न हों, यदि देवी विधान वास्तव में देवी विधान है, तो ईश्वरादर्श को किसी प्रकार भूले विना या 'जीवन में मृत्यु' के माग से च्युत हुए बिना हजरत ईसा को कदापि कष्ट उठाना नहीं पड़ सकता था । हाँ, पीड़ा भरे अत्याचार ने उसे तुरन्त सावधान कर दिया, और प्रत्यक्ष शूली पर चढ़ने से पहले कुछ घंटों तक कालावच्छिन्न स्वरूप में अहंभाव के विलीन रहने ने उसे सदा के लिए
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शिमला - हिमाचल के तीन पुलिस अफसर भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में शामिल किए गए हैं। करीब दो माह पहले इन अधिकारियों के लिए डीपीसी करवाई गई थी। वहीं शुक्रवार को इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से अधिसूचना जारी की गई है। हिमाचल पुलिस सेवा के तीन अधिकारियों की भारतीय पुलिस सेवा में इंडक्शन करवाई गई है। जिन अधिकारियों को आईपीएस में शामिल किया गया है, वे 1999 बैच के एचपीएस अधिकारी थे। इनमें वरिष्ठता में पहले स्थान पर खुशहाल शर्मा हैं, जो कि वर्तमान में एसपी कानून व्यवस्था, पुलिस मुख्यालय में तैनात हैं। दूसरे स्थान पर संजीव कुमार गांधी हैं, जो कि इस वक्त ऊना जिला में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। तीसरे स्थान पर वरिष्ठता के लिहाज से रमेश छाजटा हैं, जो कि वर्तमान में राज्य के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में एसपी के पद पर तैनात हैं। इस तरह एक ही बैच के तीन पुलिस अफसर आईपीएस अधिकारी बनाए गए हैं। करीब दो माह पहले शिमला के राज्य सचिवालय में इसके लिए डीपीसी करवाई गई थी। इसके बाद केंद्रीय लोक सेवा आयोग के माध्यम से इनकी इंडक्शन की प्रक्रिया पूरी की गई। वहीं अब इन अधिकारियों को आईपीएस बनाने के बारे में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। अधिसूचना के अनुसार तीनों अधिकारी एक साल तक प्रोबेशन पीरियड पर रहेंगे। वहीं इनको इसके लिए जरूरी इंडक्शन ट्रेनिंग भी पूरी करनी होगी। हिमाचल की बात करें, तो वर्तमान में पुलिस विभाग में आईपीएस अधिकारियों के कुल 94 पद मंजूर हैं। इनमें से 71 पद भरे हुए हैं, जबकि 23 पद खाली चल रहे हैं। केंद्र सरकार के नियमानुसार आईपीएस के कुल पदों में से 33. 3 फीसदी पदों पर राज्य पुलिस अधिकारियों को पदोन्नति कर आईपीएस बनाया जाता है। इस तरह विभाग में आईपीएस के 94 स्वीकृत पदों में से 31 पद राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के हिस्से में हैं, बाकी 63 पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से आईपीएस अधिकारियों की तैनाती की जाती है। राज्य सर्विस कोटे के अभी तीन पद खाली पड़े हुए थे, जो कि नई इंडक्शन से भरे गए हैं। आईपीएस में इंडक्शन होने की अधिसूचना जारी होने पर अधिकारियों व कर्मचारियों ने तीनों अधिकारियों को बधाइयां दीं।
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शिमला - हिमाचल के तीन पुलिस अफसर भारतीय पुलिस सेवा में शामिल किए गए हैं। करीब दो माह पहले इन अधिकारियों के लिए डीपीसी करवाई गई थी। वहीं शुक्रवार को इस बारे में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से अधिसूचना जारी की गई है। हिमाचल पुलिस सेवा के तीन अधिकारियों की भारतीय पुलिस सेवा में इंडक्शन करवाई गई है। जिन अधिकारियों को आईपीएस में शामिल किया गया है, वे एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे बैच के एचपीएस अधिकारी थे। इनमें वरिष्ठता में पहले स्थान पर खुशहाल शर्मा हैं, जो कि वर्तमान में एसपी कानून व्यवस्था, पुलिस मुख्यालय में तैनात हैं। दूसरे स्थान पर संजीव कुमार गांधी हैं, जो कि इस वक्त ऊना जिला में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। तीसरे स्थान पर वरिष्ठता के लिहाज से रमेश छाजटा हैं, जो कि वर्तमान में राज्य के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में एसपी के पद पर तैनात हैं। इस तरह एक ही बैच के तीन पुलिस अफसर आईपीएस अधिकारी बनाए गए हैं। करीब दो माह पहले शिमला के राज्य सचिवालय में इसके लिए डीपीसी करवाई गई थी। इसके बाद केंद्रीय लोक सेवा आयोग के माध्यम से इनकी इंडक्शन की प्रक्रिया पूरी की गई। वहीं अब इन अधिकारियों को आईपीएस बनाने के बारे में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। अधिसूचना के अनुसार तीनों अधिकारी एक साल तक प्रोबेशन पीरियड पर रहेंगे। वहीं इनको इसके लिए जरूरी इंडक्शन ट्रेनिंग भी पूरी करनी होगी। हिमाचल की बात करें, तो वर्तमान में पुलिस विभाग में आईपीएस अधिकारियों के कुल चौरानवे पद मंजूर हैं। इनमें से इकहत्तर पद भरे हुए हैं, जबकि तेईस पद खाली चल रहे हैं। केंद्र सरकार के नियमानुसार आईपीएस के कुल पदों में से तैंतीस. तीन फीसदी पदों पर राज्य पुलिस अधिकारियों को पदोन्नति कर आईपीएस बनाया जाता है। इस तरह विभाग में आईपीएस के चौरानवे स्वीकृत पदों में से इकतीस पद राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के हिस्से में हैं, बाकी तिरेसठ पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से आईपीएस अधिकारियों की तैनाती की जाती है। राज्य सर्विस कोटे के अभी तीन पद खाली पड़े हुए थे, जो कि नई इंडक्शन से भरे गए हैं। आईपीएस में इंडक्शन होने की अधिसूचना जारी होने पर अधिकारियों व कर्मचारियों ने तीनों अधिकारियों को बधाइयां दीं। विवाह प्रस्ताव की तलाश कर रहे हैं ? भारत मैट्रीमोनी में निःशुल्क रजिस्टर करें !
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1 यक़ीनन रब का बाज़ू छोटा नहीं कि वह बचा न सके, उसका कान बहरा नहीं कि सुन न सके। 2 हक़ीक़त में तुम्हारे बुरे कामों ने तुम्हें उससे अलग कर दिया, तुम्हारे गुनाहों ने उसका चेहरा तुमसे छुपाए रखा, इसलिए वह तुम्हारी नहीं सुनता। 3 क्योंकि तुम्हारे हाथ ख़ूनआलूदा, तुम्हारी उँगलियाँ गुनाह से नापाक हैं। तुम्हारे होंट झूट बोलते और तुम्हारी ज़बान शरीर बातें फुसफुसाती है। 4 अदालत में कोई मुंसिफ़ाना मुक़दमा नहीं चलाता, कोई सच्चे दलायल पेश नहीं करता। लोग सच्चाई से ख़ाली बातों पर एतबार करके झूट बोलते हैं, वह बदकारी से हामिला होकर बेदीनी को जन्म देते हैं। 5-6 वह ज़हरीले साँपों के अंडों पर बैठ जाते हैं ताकि बच्चे निकलें। जो उनके अंडे खाए वह मर जाता है, और अगर उनके अंडे दबाए तो ज़हरीला साँप निकल आता है। यह लोग मकड़ी के जाले तान लेते हैं, ऐसा कपड़ा जो पहनने के लिए बेकार है। अपने हाथों के बनाए हुए इस कपड़े से वह अपने आपको ढाँप नहीं सकते। उनके आमाल बुरे ही हैं, उनके हाथ तशद्दुद ही करते हैं। 7 जहाँ भी ग़लत काम करने का मौक़ा मिले वहाँ उनके पाँव भागकर पहुँच जाते हैं। वह बेक़ुसूर को क़त्ल करने के लिए तैयार रहते हैं। उनके ख़यालात शरीर ही हैं, अपने पीछे वह तबाहीओ-बरबादी छोड़ जाते हैं। 8 न वह सलामती की राह जानते हैं, न उनके रास्तों में इनसाफ़ पाया जाता है। क्योंकि उन्होंने उन्हें टेढ़ा-मेढ़ा बना रखा है, और जो भी उन पर चले वह सलामती को नहीं जानता।
9 इसी लिए इनसाफ़ हमसे दूर है, रास्ती हम तक पहुँचती नहीं। हम रौशनी के इंतज़ार में रहते हैं, लेकिन अफ़सोस, अंधेरा ही अंधेरा नज़र आता है। हम आबो-ताब की उम्मीद रखते हैं, लेकिन अफ़सोस, जहाँ भी चलते हैं वहाँ घनी तारीकी छाई रहती है। 10 हम अंधों की तरह दीवार को हाथ से छू छूकर रास्ता मालूम करते हैं, आँखों से महरूम लोगों की तरह टटोल टटोलकर आगे बढ़ते हैं। दोपहर के वक़्त भी हम ठोकर खा खाकर यों फिरते हैं जैसे धुँधलका हो। गो हम तनआवर लोगों के दरमियान रहते हैं, लेकिन ख़ुद मुरदों की मानिंद हैं। 11 हम सब निढाल हालत में रीछों की तरह ग़ुर्राते, कबूतरों की मानिंद ग़ूँ ग़ूँ करते हैं। हम इनसाफ़ के इंतज़ार में रहते हैं, लेकिन बेसूद। हम नजात की उम्मीद रखते हैं, लेकिन वह हमसे दूर ही रहती है।
12 क्योंकि हमारे मुतअद्दिद जरायम तेरे सामने हैं, और हमारे गुनाह हमारे ख़िलाफ़ गवाही देते हैं। हमें मुतवातिर अपने जरायम का एहसास है, हम अपने गुनाहों से ख़ूब वाक़िफ़ हैं। 13 हम मानते हैं कि रब से बेवफ़ा रहे बल्कि उसका इनकार भी किया है। हमने अपना मुँह अपने ख़ुदा से फेरकर ज़ुल्म और धोके की बातें फैलाई हैं। हमारे दिलों में झूट का बीज बढ़ते बढ़ते मुँह में से निकला। 14 नतीजे में इनसाफ़ पीछे हट गया, और रास्ती दूर खड़ी रहती है। सच्चाई चौक में ठोकर खाकर गिर गई है, और दियानतदारी दाख़िल ही नहीं हो सकती। 15 चुनाँचे सच्चाई कहीं भी पाई नहीं जाती, और ग़लत काम से गुरेज़ करनेवाले को लूटा जाता है।
यह सब कुछ रब को नज़र आया, और वह नाख़ुश था कि इनसाफ़ नहीं है। 16 उसने देखा कि कोई नहीं है, वह हैरान हुआ कि मुदाख़लत करनेवाला कोई नहीं है। तब उसके ज़ोरावर बाज़ू ने उस की मदद की, और उस की रास्ती ने उसको सहारा दिया। 17 रास्ती के ज़िरा-बकतर से मुलब्बस होकर उसने सर पर नजात का ख़ोद रखा, इंतक़ाम का लिबास पहनकर उसने ग़ैरत की चादर ओढ़ ली। 18 हर एक को वह उसका मुनासिब मुआवज़ा देगा। वह मुख़ालिफ़ों पर अपना ग़ज़ब नाज़िल करेगा और दुश्मनों से बदला लेगा बल्कि जज़ीरों को भी उनकी हरकतों का अज्र देगा। 19 तब इनसान मग़रिब में रब के नाम का ख़ौफ़ मानेंगे और मशरिक़ में उसे जलाल देंगे। क्योंकि वह रब की फूँक से चलाए हुए ज़ोरदार सैलाब की तरह उन पर टूट पड़ेगा।
21 रब फ़रमाता है, "जहाँ तक मेरा ताल्लुक़ है, उनके साथ मेरा यह अहद है : मेरा रूह जो तुझ पर ठहरा हुआ है और मेरे अलफ़ाज़ जो मैंने तेरे मुँह में डाले हैं वह अब से अबद तक न तेरे मुँह से, न तेरी औलाद के मुँह से और न तेरी औलाद की औलाद से हटेंगे।" यह रब का फ़रमान है।
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एक यक़ीनन रब का बाज़ू छोटा नहीं कि वह बचा न सके, उसका कान बहरा नहीं कि सुन न सके। दो हक़ीक़त में तुम्हारे बुरे कामों ने तुम्हें उससे अलग कर दिया, तुम्हारे गुनाहों ने उसका चेहरा तुमसे छुपाए रखा, इसलिए वह तुम्हारी नहीं सुनता। तीन क्योंकि तुम्हारे हाथ ख़ूनआलूदा, तुम्हारी उँगलियाँ गुनाह से नापाक हैं। तुम्हारे होंट झूट बोलते और तुम्हारी ज़बान शरीर बातें फुसफुसाती है। चार अदालत में कोई मुंसिफ़ाना मुक़दमा नहीं चलाता, कोई सच्चे दलायल पेश नहीं करता। लोग सच्चाई से ख़ाली बातों पर एतबार करके झूट बोलते हैं, वह बदकारी से हामिला होकर बेदीनी को जन्म देते हैं। पाँच-छः वह ज़हरीले साँपों के अंडों पर बैठ जाते हैं ताकि बच्चे निकलें। जो उनके अंडे खाए वह मर जाता है, और अगर उनके अंडे दबाए तो ज़हरीला साँप निकल आता है। यह लोग मकड़ी के जाले तान लेते हैं, ऐसा कपड़ा जो पहनने के लिए बेकार है। अपने हाथों के बनाए हुए इस कपड़े से वह अपने आपको ढाँप नहीं सकते। उनके आमाल बुरे ही हैं, उनके हाथ तशद्दुद ही करते हैं। सात जहाँ भी ग़लत काम करने का मौक़ा मिले वहाँ उनके पाँव भागकर पहुँच जाते हैं। वह बेक़ुसूर को क़त्ल करने के लिए तैयार रहते हैं। उनके ख़यालात शरीर ही हैं, अपने पीछे वह तबाहीओ-बरबादी छोड़ जाते हैं। आठ न वह सलामती की राह जानते हैं, न उनके रास्तों में इनसाफ़ पाया जाता है। क्योंकि उन्होंने उन्हें टेढ़ा-मेढ़ा बना रखा है, और जो भी उन पर चले वह सलामती को नहीं जानता। नौ इसी लिए इनसाफ़ हमसे दूर है, रास्ती हम तक पहुँचती नहीं। हम रौशनी के इंतज़ार में रहते हैं, लेकिन अफ़सोस, अंधेरा ही अंधेरा नज़र आता है। हम आबो-ताब की उम्मीद रखते हैं, लेकिन अफ़सोस, जहाँ भी चलते हैं वहाँ घनी तारीकी छाई रहती है। दस हम अंधों की तरह दीवार को हाथ से छू छूकर रास्ता मालूम करते हैं, आँखों से महरूम लोगों की तरह टटोल टटोलकर आगे बढ़ते हैं। दोपहर के वक़्त भी हम ठोकर खा खाकर यों फिरते हैं जैसे धुँधलका हो। गो हम तनआवर लोगों के दरमियान रहते हैं, लेकिन ख़ुद मुरदों की मानिंद हैं। ग्यारह हम सब निढाल हालत में रीछों की तरह ग़ुर्राते, कबूतरों की मानिंद ग़ूँ ग़ूँ करते हैं। हम इनसाफ़ के इंतज़ार में रहते हैं, लेकिन बेसूद। हम नजात की उम्मीद रखते हैं, लेकिन वह हमसे दूर ही रहती है। बारह क्योंकि हमारे मुतअद्दिद जरायम तेरे सामने हैं, और हमारे गुनाह हमारे ख़िलाफ़ गवाही देते हैं। हमें मुतवातिर अपने जरायम का एहसास है, हम अपने गुनाहों से ख़ूब वाक़िफ़ हैं। तेरह हम मानते हैं कि रब से बेवफ़ा रहे बल्कि उसका इनकार भी किया है। हमने अपना मुँह अपने ख़ुदा से फेरकर ज़ुल्म और धोके की बातें फैलाई हैं। हमारे दिलों में झूट का बीज बढ़ते बढ़ते मुँह में से निकला। चौदह नतीजे में इनसाफ़ पीछे हट गया, और रास्ती दूर खड़ी रहती है। सच्चाई चौक में ठोकर खाकर गिर गई है, और दियानतदारी दाख़िल ही नहीं हो सकती। पंद्रह चुनाँचे सच्चाई कहीं भी पाई नहीं जाती, और ग़लत काम से गुरेज़ करनेवाले को लूटा जाता है। यह सब कुछ रब को नज़र आया, और वह नाख़ुश था कि इनसाफ़ नहीं है। सोलह उसने देखा कि कोई नहीं है, वह हैरान हुआ कि मुदाख़लत करनेवाला कोई नहीं है। तब उसके ज़ोरावर बाज़ू ने उस की मदद की, और उस की रास्ती ने उसको सहारा दिया। सत्रह रास्ती के ज़िरा-बकतर से मुलब्बस होकर उसने सर पर नजात का ख़ोद रखा, इंतक़ाम का लिबास पहनकर उसने ग़ैरत की चादर ओढ़ ली। अट्ठारह हर एक को वह उसका मुनासिब मुआवज़ा देगा। वह मुख़ालिफ़ों पर अपना ग़ज़ब नाज़िल करेगा और दुश्मनों से बदला लेगा बल्कि जज़ीरों को भी उनकी हरकतों का अज्र देगा। उन्नीस तब इनसान मग़रिब में रब के नाम का ख़ौफ़ मानेंगे और मशरिक़ में उसे जलाल देंगे। क्योंकि वह रब की फूँक से चलाए हुए ज़ोरदार सैलाब की तरह उन पर टूट पड़ेगा। इक्कीस रब फ़रमाता है, "जहाँ तक मेरा ताल्लुक़ है, उनके साथ मेरा यह अहद है : मेरा रूह जो तुझ पर ठहरा हुआ है और मेरे अलफ़ाज़ जो मैंने तेरे मुँह में डाले हैं वह अब से अबद तक न तेरे मुँह से, न तेरी औलाद के मुँह से और न तेरी औलाद की औलाद से हटेंगे।" यह रब का फ़रमान है।
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झारखंड में बीजेपी युवा मोर्चा (Jharkhand BJP Yuva Morcha leader) के पलामू जिला कोषाध्यक्ष सुमित कुमार श्रीवास्तव (Sumit Kumar Srivastava) की हत्या के बाद झारखंड बीजेपी ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है.
झारखंड में बीजेपी युवा मोर्चा (Jharkhand BJP Yuva Morcha leader) के पलामू जिला कोषाध्यक्ष सुमित कुमार श्रीवास्तव (Sumit Kumar Srivastava) की गोली मारकर हत्या कर दी गई है. सुमित की कनपटी के नीचे तेज धारदार नुकीला हथियार से गोदकर हत्या की गयी है. शव एनएच-98 मेदिनीनगर-औरंगाबाद मुख्य पथ पर हरिहरगंज थाना क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के समीप पहाड़ी मंदिर जाने वाले मोड़ पर उनकी कार से बरामद किया गया. पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए MMCH भेज दिया है. इस हत्याकांड के विरोध में रविवार को हरिहरगंज बाजार बंद रखा गया है.
घटना के बाद से बीजेपी कार्यकर्ताओं में जहां आक्रोश है, वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. इलाके में दहशत का माहौल है. पुलिस मामले की छानबीन में जुट गयी है. जानकारी के मुताबिक सुमित कुमार कल (13 नवंबर) रात साढ़े 10 बजे अपने दोस्त से मिलने की बात कह कर घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने जब उसकी खोज शुरू की तो एनएच-98 के पास उसका शव बरामद हुआ.
पार्टी के युवा मोर्चा के पलामू जिला कोषाध्यक्ष सुमित श्रीवास्तव की हत्या की जितनी भी निंदा की जाए कम है.
झारखण्ड में अपराधियों का तांडव चरम पर है और राज्य सरकार सिर्फ अवैध वसूली में लगी है.
झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने ट्वीट किया, "पार्टी के युवा मोर्चा के पलामू जिला कोषाध्यक्ष सुमित श्रीवास्तव की हत्या की जितनी भी निंदा की जाए कम है. झारखण्ड में अपराधियों का तांडव चरम पर है और राज्य सरकार सिर्फ अवैध वसूली में लगी है. राज्य सरकार अविलंब अपराधियों को गिरफ़्तार करे अन्यथा आक्रोशित आंदोलन के लिए तैयार रहे." वहीं इस घटना के बाद भारी संख्या में स्थानीय बीजेपी नेता एमएमसीएच पहुंचे और पूरी घटना की जानकारी ली. बीजेपी जिलाअध्यक्ष विजय आनंद ने सुमित की हत्या के लिए गिरती कानून व्यवस्था को जिम्मेवार ठहराया और चेतावनी दी कि जल्द ही इस मामले में हत्यारे की गिरफ्तारी नहीं होती है तो बीजेपी बड़ा आंदोलन करेगी. उन्होंने सुमित कुमार को बीजेपी का सच्चा सिपाही बताया और प्रशासन से जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की.
ग्रामीणों के मुताबिक सुमित की हत्या कर उसके शव को कार में रखा गया. ड्राइवर की सीट के बगल में उसके शव को इस तरह रखा गया था कि खून का रिसाव न हो. मॉर्निंग वॉक कर लोट रहे लोगों की माने तो उनके जाते वक्त घटनास्थल पर कोई कार खड़ी नहीं थी लेकिन लौटते वक्त कार और उसमे एक लाश मिला है. इससे जाहिर होता है कि सुमित की हत्या के बाद कार को यहां पार्क कर अपराधी फरार हो गए हैं. पलामू एसपी चंदन कुमार सिन्हा के मुताबिक कल देर शाम वो अपने दोस्तों के फोन करने पर ही घर से बाहर निकला था, हरिहरगंज बाजार में कुछ युवकों की आपस में लड़ाई हुई थी. इसी लड़ाई में शामिल एक दोस्त से सुमित की फोन पर बात हुई थी. पुलिस के अनुसार हत्या के बाद सुमित का दोस्त शक के दायरे में है और जांच की जा रही है. एसपी ने बताया कि जल्द ही जांच पूरा कर हत्यारे को गिरफ्तार किया जाएगा.
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झारखंड में बीजेपी युवा मोर्चा के पलामू जिला कोषाध्यक्ष सुमित कुमार श्रीवास्तव की हत्या के बाद झारखंड बीजेपी ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है. झारखंड में बीजेपी युवा मोर्चा के पलामू जिला कोषाध्यक्ष सुमित कुमार श्रीवास्तव की गोली मारकर हत्या कर दी गई है. सुमित की कनपटी के नीचे तेज धारदार नुकीला हथियार से गोदकर हत्या की गयी है. शव एनएच-अट्ठानवे मेदिनीनगर-औरंगाबाद मुख्य पथ पर हरिहरगंज थाना क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के समीप पहाड़ी मंदिर जाने वाले मोड़ पर उनकी कार से बरामद किया गया. पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए MMCH भेज दिया है. इस हत्याकांड के विरोध में रविवार को हरिहरगंज बाजार बंद रखा गया है. घटना के बाद से बीजेपी कार्यकर्ताओं में जहां आक्रोश है, वहीं परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. इलाके में दहशत का माहौल है. पुलिस मामले की छानबीन में जुट गयी है. जानकारी के मुताबिक सुमित कुमार कल रात साढ़े दस बजे अपने दोस्त से मिलने की बात कह कर घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने जब उसकी खोज शुरू की तो एनएच-अट्ठानवे के पास उसका शव बरामद हुआ. पार्टी के युवा मोर्चा के पलामू जिला कोषाध्यक्ष सुमित श्रीवास्तव की हत्या की जितनी भी निंदा की जाए कम है. झारखण्ड में अपराधियों का तांडव चरम पर है और राज्य सरकार सिर्फ अवैध वसूली में लगी है. झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने ट्वीट किया, "पार्टी के युवा मोर्चा के पलामू जिला कोषाध्यक्ष सुमित श्रीवास्तव की हत्या की जितनी भी निंदा की जाए कम है. झारखण्ड में अपराधियों का तांडव चरम पर है और राज्य सरकार सिर्फ अवैध वसूली में लगी है. राज्य सरकार अविलंब अपराधियों को गिरफ़्तार करे अन्यथा आक्रोशित आंदोलन के लिए तैयार रहे." वहीं इस घटना के बाद भारी संख्या में स्थानीय बीजेपी नेता एमएमसीएच पहुंचे और पूरी घटना की जानकारी ली. बीजेपी जिलाअध्यक्ष विजय आनंद ने सुमित की हत्या के लिए गिरती कानून व्यवस्था को जिम्मेवार ठहराया और चेतावनी दी कि जल्द ही इस मामले में हत्यारे की गिरफ्तारी नहीं होती है तो बीजेपी बड़ा आंदोलन करेगी. उन्होंने सुमित कुमार को बीजेपी का सच्चा सिपाही बताया और प्रशासन से जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग की. ग्रामीणों के मुताबिक सुमित की हत्या कर उसके शव को कार में रखा गया. ड्राइवर की सीट के बगल में उसके शव को इस तरह रखा गया था कि खून का रिसाव न हो. मॉर्निंग वॉक कर लोट रहे लोगों की माने तो उनके जाते वक्त घटनास्थल पर कोई कार खड़ी नहीं थी लेकिन लौटते वक्त कार और उसमे एक लाश मिला है. इससे जाहिर होता है कि सुमित की हत्या के बाद कार को यहां पार्क कर अपराधी फरार हो गए हैं. पलामू एसपी चंदन कुमार सिन्हा के मुताबिक कल देर शाम वो अपने दोस्तों के फोन करने पर ही घर से बाहर निकला था, हरिहरगंज बाजार में कुछ युवकों की आपस में लड़ाई हुई थी. इसी लड़ाई में शामिल एक दोस्त से सुमित की फोन पर बात हुई थी. पुलिस के अनुसार हत्या के बाद सुमित का दोस्त शक के दायरे में है और जांच की जा रही है. एसपी ने बताया कि जल्द ही जांच पूरा कर हत्यारे को गिरफ्तार किया जाएगा.
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देश में इन दिनों हिजाब मामले को लेकर राजनीति काफी गर्म है। इस मामले को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी अपनी राय रखी और कहा कि ऐसे मामले को लेकर दोनों समाज के लोगों को आपस में बैठकर समझा लेना चाहिए, बेवजह की तूल नहीं देनी चाहिए ।
सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि शुरुआत करने वालों को पता नहीं कि इसका हश्र क्या होगा? सीएम ने कहा कि ये बाते वहीं बैठकर दो समुदाय के लोगों को हल कर लेना था, जो आज राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की समस्या बन गई है । मुझे बेहद दुःख होता है भारत जैसे देश में, जिसमें दुनिया भर के तमाम धर्म के लोग जो सताए हुए हैं उनको आश्रय मिला है हिदुस्तान में । आज हम अपने लोगों के साथ किस प्रकार का व्यवहार कर रहें हैं ।
सीएम ने कहा कि कट्टरता चाहे इधर का हो या उधर का हो, दोनों ही हमारे लिए नुकसान दायक है । इससे समाज का ही नुकसान होना है । सीएम ने कहा कि मैं फिर से कहना चाहता हूँ जिन्होंने इसकी शुरुआत की है उनको अंजाम का पता नहीं है । ये बेहद संवेदनशील मामला है । पारिवारिक, सामाजिक मामला है इसको बैठकर हल करना चाहिए ।
सीएम ने कहा कि हर चीज में आप न्यायालय जाएंगे, इसको राजनीतिक मुद्दा बनाएंगे , तो हमारा देश कहा जा रहा है । हम किस दिशा में जा रहे हैं । क्या इसी प्रकार से लड़ाइयां लड़ते रहेंगे । क्या वो बच्चे, बच्चे हमारे है वो हमारा भविष्य हैं लेकिन वो हमारे प्रतिनिधित्व नहीं करते लेकिन जो प्रतिनिधित्व करने वाले हैं उनकी जिम्मेदारी है कि ऐसे मामलों को हमको आपस में बैठकर सुलझा लेना चाहिए ।
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देश में इन दिनों हिजाब मामले को लेकर राजनीति काफी गर्म है। इस मामले को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी अपनी राय रखी और कहा कि ऐसे मामले को लेकर दोनों समाज के लोगों को आपस में बैठकर समझा लेना चाहिए, बेवजह की तूल नहीं देनी चाहिए । सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि शुरुआत करने वालों को पता नहीं कि इसका हश्र क्या होगा? सीएम ने कहा कि ये बाते वहीं बैठकर दो समुदाय के लोगों को हल कर लेना था, जो आज राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की समस्या बन गई है । मुझे बेहद दुःख होता है भारत जैसे देश में, जिसमें दुनिया भर के तमाम धर्म के लोग जो सताए हुए हैं उनको आश्रय मिला है हिदुस्तान में । आज हम अपने लोगों के साथ किस प्रकार का व्यवहार कर रहें हैं । सीएम ने कहा कि कट्टरता चाहे इधर का हो या उधर का हो, दोनों ही हमारे लिए नुकसान दायक है । इससे समाज का ही नुकसान होना है । सीएम ने कहा कि मैं फिर से कहना चाहता हूँ जिन्होंने इसकी शुरुआत की है उनको अंजाम का पता नहीं है । ये बेहद संवेदनशील मामला है । पारिवारिक, सामाजिक मामला है इसको बैठकर हल करना चाहिए । सीएम ने कहा कि हर चीज में आप न्यायालय जाएंगे, इसको राजनीतिक मुद्दा बनाएंगे , तो हमारा देश कहा जा रहा है । हम किस दिशा में जा रहे हैं । क्या इसी प्रकार से लड़ाइयां लड़ते रहेंगे । क्या वो बच्चे, बच्चे हमारे है वो हमारा भविष्य हैं लेकिन वो हमारे प्रतिनिधित्व नहीं करते लेकिन जो प्रतिनिधित्व करने वाले हैं उनकी जिम्मेदारी है कि ऐसे मामलों को हमको आपस में बैठकर सुलझा लेना चाहिए ।
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एक तरफ जहां एडिलेड टेस्ट मैच में एक शतक और एक अर्धशतक जमाकर भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई तो वहीं अब पर्थ टेस्ट मैच में भी अपनी बल्लेबाजी से भारतीय पारी को मुश्किल हालात से बाहर निकाल रहे हैं।
जो इस टेस्ट सीरीज में किसी भी बल्लेबाज के द्वारा सबसे ज्यादा गेंद खेलने का रिकॉर्ड दर्ज है। एडिलेड टेस्ट मैच में पुजारा ने दोनों पारियों को मिलाकर कुल 450 गेंद खेले थे तो वहीं अबतक पर्थ में 92 गेंद खेल चुके हैं। यानि 542 गेंद पुजारा ने अबतक ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस टेस्ट सीरीज में खुल चुके हैं।
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एक तरफ जहां एडिलेड टेस्ट मैच में एक शतक और एक अर्धशतक जमाकर भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई तो वहीं अब पर्थ टेस्ट मैच में भी अपनी बल्लेबाजी से भारतीय पारी को मुश्किल हालात से बाहर निकाल रहे हैं। जो इस टेस्ट सीरीज में किसी भी बल्लेबाज के द्वारा सबसे ज्यादा गेंद खेलने का रिकॉर्ड दर्ज है। एडिलेड टेस्ट मैच में पुजारा ने दोनों पारियों को मिलाकर कुल चार सौ पचास गेंद खेले थे तो वहीं अबतक पर्थ में बानवे गेंद खेल चुके हैं। यानि पाँच सौ बयालीस गेंद पुजारा ने अबतक ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस टेस्ट सीरीज में खुल चुके हैं।
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हर इंसान को अपने-अपने बालों से प्यार होता है, लेकिन क्या आपने कभी ऐसा सुना है कि कोई अपने लंबे बालों को हमेशा अपने साथ रखने उसका स्वेटर और हैट बुने। है न अजीब, लेकिन चीन में ऐसा ही हुआ है।
यहां के चोगिंग इलाके में रहने वाली 60 साल की एक सेवानिवृत शिक्षिका शियांग रेनशियान को अपने लंबे बालों से कुछ इस कदर प्यार था, कि उन्होंने 11 साल की कड़ी मेहनत के बाद अपने बालों का स्वेटर और हैट बुन डाला है।
आपको बता दे कि चीन में रहने वाली शियांग को अपने बाल बहुत पसंद हैं। वह इसे सुरक्षित रखने के लिए पिछले 11 साल से कंघी करने के दौरान या शैंपू करने के दौरान झड़ने वाले बालों को जमा कर रही थीं।
इस दौरान वह जमा हुए बालों से स्वेटर की बुनाई भी कर रही थीं। शियांग ने बालों से बनाए इस स्वेटर को अपने लिए रखा है, जबकि हैट अपने पति को भेंट कर दिया है।
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हर इंसान को अपने-अपने बालों से प्यार होता है, लेकिन क्या आपने कभी ऐसा सुना है कि कोई अपने लंबे बालों को हमेशा अपने साथ रखने उसका स्वेटर और हैट बुने। है न अजीब, लेकिन चीन में ऐसा ही हुआ है। यहां के चोगिंग इलाके में रहने वाली साठ साल की एक सेवानिवृत शिक्षिका शियांग रेनशियान को अपने लंबे बालों से कुछ इस कदर प्यार था, कि उन्होंने ग्यारह साल की कड़ी मेहनत के बाद अपने बालों का स्वेटर और हैट बुन डाला है। आपको बता दे कि चीन में रहने वाली शियांग को अपने बाल बहुत पसंद हैं। वह इसे सुरक्षित रखने के लिए पिछले ग्यारह साल से कंघी करने के दौरान या शैंपू करने के दौरान झड़ने वाले बालों को जमा कर रही थीं। इस दौरान वह जमा हुए बालों से स्वेटर की बुनाई भी कर रही थीं। शियांग ने बालों से बनाए इस स्वेटर को अपने लिए रखा है, जबकि हैट अपने पति को भेंट कर दिया है।
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गुरमीत सिंह (लेफ्टिनेंट जनरल)
गुरमीत सिंह (लेफ्टिनेंट जनरल)
।पीएचडी (स्मार्ट पावर फॉर नेशनल सिक्योरिटी डायनेमिक्स)
।लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह सेना से 2016 में सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने सेना में करीब 40 वर्ष की सेवा दी है।
लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (अंग्रेज़ीः Lieutenant General Gurmit Singh) भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल हैं। वह उत्तराखंड के राज्यपाल बनाये गये हैं। गुरमीत सिंह सेना में उच्च पदों पर रहे हैं। इस दौरान वह चीन से जुड़े सामरिक मामलों को भी देख चुके हैं। राज्य के आठवें राज्यपाल के तौर पर सैन्य बहुल और सीमांत राज्य में उनकी नियुक्ति को केंद्र की खास रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। गुरमीत सिंह राज्य में सिक्ख समुदाय से ताल्लुक रखने वाले दूसरे राज्यपाल हैं। उत्तराखंड के पहले राज्यपाल सरदार सुरजीत सिंह बरनाला थे।
लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह सेना से 2016 में सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने सेना में करीब 40 वर्ष की सेवा दी। इस दौरान उन्होंने चार बार 'राष्ट्रपति पुरस्कार' और दो 'चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमंडेशन अवॉर्ड' प्राप्त किए। लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह सेना डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ रहे हैं।
अपने शपथ ग्रहण समारोह के बाद मीडिया से बात करते हुए राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा था कि, वीरों की भूमि उत्तराखंड में मुझे राज्यपाल के पद पर काम करने का मौका मिला है। उत्तराखंड के विकास के लिए सबको साथ मिलकर काम करना होगा। इसके साथ ही उत्तराखंड में पर्यटन के तौर पर भी अपार संभावनाएं हैं, जिसके लिए राज्य सरकार बेहतर तरीके से काम कर रही है।
वहीं उन्होंने देव भूमि के शहीदों को नमन करते हुए कहा कि 'उत्तराखंड की बच्चियों को भी फौज में जाने का मौका मिल सके, इस पर काम किया जाएगा।' उन्होंने उत्तराखंड के चारों धामों का जिक्र करते हुए कहा कि 'यह वीरों की भूमि होने के साथ-साथ देवों की भूमि भी है, मैं सभी को नमन करता हूं।'
- ↑ लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह बने उत्तराखंड के आठवें राज्यपाल (हिंदी) abplive.com। अभिगमन तिथिः 11 जून, 2022।
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गुरमीत सिंह गुरमीत सिंह ।पीएचडी ।लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह सेना से दो हज़ार सोलह में सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने सेना में करीब चालीस वर्ष की सेवा दी है। लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल हैं। वह उत्तराखंड के राज्यपाल बनाये गये हैं। गुरमीत सिंह सेना में उच्च पदों पर रहे हैं। इस दौरान वह चीन से जुड़े सामरिक मामलों को भी देख चुके हैं। राज्य के आठवें राज्यपाल के तौर पर सैन्य बहुल और सीमांत राज्य में उनकी नियुक्ति को केंद्र की खास रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। गुरमीत सिंह राज्य में सिक्ख समुदाय से ताल्लुक रखने वाले दूसरे राज्यपाल हैं। उत्तराखंड के पहले राज्यपाल सरदार सुरजीत सिंह बरनाला थे। लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह सेना से दो हज़ार सोलह में सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने सेना में करीब चालीस वर्ष की सेवा दी। इस दौरान उन्होंने चार बार 'राष्ट्रपति पुरस्कार' और दो 'चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ कमंडेशन अवॉर्ड' प्राप्त किए। लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह सेना डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ रहे हैं। अपने शपथ ग्रहण समारोह के बाद मीडिया से बात करते हुए राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा था कि, वीरों की भूमि उत्तराखंड में मुझे राज्यपाल के पद पर काम करने का मौका मिला है। उत्तराखंड के विकास के लिए सबको साथ मिलकर काम करना होगा। इसके साथ ही उत्तराखंड में पर्यटन के तौर पर भी अपार संभावनाएं हैं, जिसके लिए राज्य सरकार बेहतर तरीके से काम कर रही है। वहीं उन्होंने देव भूमि के शहीदों को नमन करते हुए कहा कि 'उत्तराखंड की बच्चियों को भी फौज में जाने का मौका मिल सके, इस पर काम किया जाएगा।' उन्होंने उत्तराखंड के चारों धामों का जिक्र करते हुए कहा कि 'यह वीरों की भूमि होने के साथ-साथ देवों की भूमि भी है, मैं सभी को नमन करता हूं।' - ↑ लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह बने उत्तराखंड के आठवें राज्यपाल abplive.com। अभिगमन तिथिः ग्यारह जून, दो हज़ार बाईस।
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भारतीय अर्थव्यवस्था साल 2019 के आखिरी तीन महीनों में पिछले 6 सालों से भी अधिक की सबसे धीमी गति से बढ़ी है. विश्लेषकों ने अनुमान जताया है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) के ग्लोबर स्तर पर प्रकोप के चलते एशिया की इस तीसरी बड़ी इकोनॉमी में आगे भी और सुस्ती रह सकती है.
CMIE के डाटा के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर पिछले महीने के 5. 97 फीसदी के मुकाबले फरवरी में बढ़कर 7. 37 फीसदी हो गई है. वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह पिछली दर 9. 70 के मुकाबले गिरकर 8. 65 पर आ गई है.
दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस फैलने का असर फरवरी माह के दौरान भारत में विनिर्माण गतिविधियों (India's Manufacturing Sector Activity) पर देखा गया. इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में कुछ नरमी देखी गई. सोमवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण में यह कहा गया है. आईएचएस मार्किट इंडिया (IHS Markit India) के विनिर्माण क्षेत्र के पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) फरवरी 2020 में 54. 5 पर रहा. यह आंकड़ा जनवरी के 55. 3 अंक के मुकाबले नीचे है. जनवरी में यह पिछले 8 साल में सबसे ऊंचा था. यह लगातार 31वां महीना है जब भारत में विनिर्माण क्षेत्र का पीएमआई 50 अंक के स्तर से ऊपर बना हुआ है.
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भारतीय अर्थव्यवस्था साल दो हज़ार उन्नीस के आखिरी तीन महीनों में पिछले छः सालों से भी अधिक की सबसे धीमी गति से बढ़ी है. विश्लेषकों ने अनुमान जताया है कि कोरोना वायरस के ग्लोबर स्तर पर प्रकोप के चलते एशिया की इस तीसरी बड़ी इकोनॉमी में आगे भी और सुस्ती रह सकती है. CMIE के डाटा के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर पिछले महीने के पाँच. सत्तानवे फीसदी के मुकाबले फरवरी में बढ़कर सात. सैंतीस फीसदी हो गई है. वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह पिछली दर नौ. सत्तर के मुकाबले गिरकर आठ. पैंसठ पर आ गई है. दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस फैलने का असर फरवरी माह के दौरान भारत में विनिर्माण गतिविधियों पर देखा गया. इस दौरान विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में कुछ नरमी देखी गई. सोमवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण में यह कहा गया है. आईएचएस मार्किट इंडिया के विनिर्माण क्षेत्र के पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स फरवरी दो हज़ार बीस में चौवन. पाँच पर रहा. यह आंकड़ा जनवरी के पचपन. तीन अंक के मुकाबले नीचे है. जनवरी में यह पिछले आठ साल में सबसे ऊंचा था. यह लगातार इकतीसवां महीना है जब भारत में विनिर्माण क्षेत्र का पीएमआई पचास अंक के स्तर से ऊपर बना हुआ है. .
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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समाजवादी पार्टी के संरक्षक उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर समाजवादी छात्र सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा यादव ने आज अखिलेश यादव की सरकार में एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए बने शीरोज हैंगआउट कैफे पर नेता जी के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर एसिड अटैक सर्वाइवर्स को सम्मानित किया। नेहा यादव ने नेता जी को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा भारत में मुलायम सिंह यादव का योगदान अनुकरणीय और प्रेरणादायक है। नेता जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिये।
नेहा यादव ने सभी एसिड अटैक पीडिताओं के साथ केक काटने के बाद उनसे चर्चा भी की। उनके साथ सपा सरकार में शुरु किये गए शीरोज से अब तक हुए परिवर्तन पर चर्चा करते हुए वादा किया वह हर साल नेता जी का जन्मदिन इसी तरह मनाएंगे। इस अवसर पर छात्र सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री नेहा यादव के साथ महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष जूही सिंह, सैय्यद जरीन, मार्कण्डेय यादव, आयुष प्रियदर्शी, आशीष कमला, आदित्य कुमार, प्रदीप शर्मा, रूबी खान, फिजा, ज्योति, कांची सिंह, आदि मौजूद रहे।
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समाजवादी पार्टी के संरक्षक उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व रक्षा मंत्री मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर समाजवादी छात्र सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा यादव ने आज अखिलेश यादव की सरकार में एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए बने शीरोज हैंगआउट कैफे पर नेता जी के जन्मदिन की पूर्व संध्या पर एसिड अटैक सर्वाइवर्स को सम्मानित किया। नेहा यादव ने नेता जी को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा भारत में मुलायम सिंह यादव का योगदान अनुकरणीय और प्रेरणादायक है। नेता जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिये। नेहा यादव ने सभी एसिड अटैक पीडिताओं के साथ केक काटने के बाद उनसे चर्चा भी की। उनके साथ सपा सरकार में शुरु किये गए शीरोज से अब तक हुए परिवर्तन पर चर्चा करते हुए वादा किया वह हर साल नेता जी का जन्मदिन इसी तरह मनाएंगे। इस अवसर पर छात्र सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री नेहा यादव के साथ महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष जूही सिंह, सैय्यद जरीन, मार्कण्डेय यादव, आयुष प्रियदर्शी, आशीष कमला, आदित्य कुमार, प्रदीप शर्मा, रूबी खान, फिजा, ज्योति, कांची सिंह, आदि मौजूद रहे। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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IPL 2021: इंडियन प्रीमियर लीग 2021 में प्लेऑफ की जंग तय कर दी गई है। शुक्रवार को हुए मैच में मुंबई इंडियंस ने हैदराबाद के खिलाफ मैच जीता लेकिन इसके बाद भी वह प्लेऑफ में अपनी जगह पक्की कर पाने में सफल नहीं हो पाई है।
नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग 2021 में प्लेऑफ की जंग तय कर दी गई है। शुक्रवार को हुए मैच में मुंबई इंडियंस ने हैदराबाद के खिलाफ मैच जीता लेकिन इसके बाद भी वह प्लेऑफ में अपनी जगह पक्की कर पाने में सफल नहीं हो पाई है। जिसके बाद मुंबई का लगातार तीसरी बार आईपीएल जीत हासिल करने का सपना अधूरा रह गया है। अब दिल्ली, चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता की टीम खिताब जीतने के लिए लड़ेंगी।
मुंबई इंडियंस को प्लेऑफ के लिए हैदराबाद को 66 रनों के अंदर ऑलआउट करना था, जिसके बाद ही उसे क्वालिफाई किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। पहले मुंबई ने बल्लेबाजी करते हुए बड़ा स्कोर कयाम करते हुए 235 रन बनाए। लेकिन वह उस चमत्कारिक आंकड़े को हासिल नहीं कर पाई, जिसकी वजह से वो प्लेऑफ में जगह बनामे में सफल हो पाती। शुक्रवार के मैच में ईशान किशन ने सिर्फ 16 बॉल में फिफ्टी जड़ी और कुल 32 बॉल में 84 रन ही बना पाए। वहीं ईशान के अलावा सूर्यकुमार यादव ने भी अपना जलवा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और 40 बॉल में 82 रन बनाए। आखिर में मुंबई ने हैदराबाद को कुल 42 रनों से हरा दिया, लेकिन इसके बाद भी प्लेऑफ का सपना पूरा नहीं हो पाया।
मुंबई इंडियंस आईपीएल की ऐसी इकलौती टीम है, जिसने अभी तक पांच बार खिताब जीता है। इसकी खास बात यह है कि साल 2013 के बाद से मुंबई की टीम ने हर वो आईपीएल जीता है, जो विषम नंबर वाले साल में हुए हैं, लेकिन इस साल यह मिथक भी टूट गया। मुंबई ने अभी तक 2013, 2015, 2017, 2019 और 2020 का आईपीएल खिताब अपने नाम किया है। जिनमें सिर्फ पिछले साल आई ट्रॉफी विषम नंबर के साल में नहीं थी।
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IPL दो हज़ार इक्कीस: इंडियन प्रीमियर लीग दो हज़ार इक्कीस में प्लेऑफ की जंग तय कर दी गई है। शुक्रवार को हुए मैच में मुंबई इंडियंस ने हैदराबाद के खिलाफ मैच जीता लेकिन इसके बाद भी वह प्लेऑफ में अपनी जगह पक्की कर पाने में सफल नहीं हो पाई है। नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग दो हज़ार इक्कीस में प्लेऑफ की जंग तय कर दी गई है। शुक्रवार को हुए मैच में मुंबई इंडियंस ने हैदराबाद के खिलाफ मैच जीता लेकिन इसके बाद भी वह प्लेऑफ में अपनी जगह पक्की कर पाने में सफल नहीं हो पाई है। जिसके बाद मुंबई का लगातार तीसरी बार आईपीएल जीत हासिल करने का सपना अधूरा रह गया है। अब दिल्ली, चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता की टीम खिताब जीतने के लिए लड़ेंगी। मुंबई इंडियंस को प्लेऑफ के लिए हैदराबाद को छयासठ रनों के अंदर ऑलआउट करना था, जिसके बाद ही उसे क्वालिफाई किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। पहले मुंबई ने बल्लेबाजी करते हुए बड़ा स्कोर कयाम करते हुए दो सौ पैंतीस रन बनाए। लेकिन वह उस चमत्कारिक आंकड़े को हासिल नहीं कर पाई, जिसकी वजह से वो प्लेऑफ में जगह बनामे में सफल हो पाती। शुक्रवार के मैच में ईशान किशन ने सिर्फ सोलह बॉल में फिफ्टी जड़ी और कुल बत्तीस बॉल में चौरासी रन ही बना पाए। वहीं ईशान के अलावा सूर्यकुमार यादव ने भी अपना जलवा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और चालीस बॉल में बयासी रन बनाए। आखिर में मुंबई ने हैदराबाद को कुल बयालीस रनों से हरा दिया, लेकिन इसके बाद भी प्लेऑफ का सपना पूरा नहीं हो पाया। मुंबई इंडियंस आईपीएल की ऐसी इकलौती टीम है, जिसने अभी तक पांच बार खिताब जीता है। इसकी खास बात यह है कि साल दो हज़ार तेरह के बाद से मुंबई की टीम ने हर वो आईपीएल जीता है, जो विषम नंबर वाले साल में हुए हैं, लेकिन इस साल यह मिथक भी टूट गया। मुंबई ने अभी तक दो हज़ार तेरह, दो हज़ार पंद्रह, दो हज़ार सत्रह, दो हज़ार उन्नीस और दो हज़ार बीस का आईपीएल खिताब अपने नाम किया है। जिनमें सिर्फ पिछले साल आई ट्रॉफी विषम नंबर के साल में नहीं थी।
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- #AssamKamakhya Dham: मां कामाख्य मंदिर के 3 दिन बाद खुले कपाट, जानिए कैसे पड़ा अंबुवासी मेले का नाम?
Assam Meghalaya Border Dispute: असम और मेघालय के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए चल रही बातचीत के दौरान आज यानी मंगलवार को फायरिंग की घटना सामने आई है। हुई फायरिंग में 6 लोगों की मौत हो गई। यह फायरिंग मेघालय के वेस्ट जयंतिया हिल्स के मुक्रोह गांव में हुई है। मोकाइयाव के विधायक नुजोरकी सुनगोह ने बताया कि घटना के दौरान चार लोगों की मौत हो गई है और कुछ अन्य घायल हो गए हैं।
हालांकि स्थानीय विधायक नुजोरकी सुनगोह ने घटना स्थल का दौरा किया। उन्होंने गोलीबारी में मृतकों की संख्या की पुष्टि नहीं की है। खासी स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) की मुकरोह यूनिट ने कहा कि इस घटना में कई लोगों को चोटें आई हैं। छात्रों के मुताबिक फायरिंग की घटना तड़के तीन बजे के करीब की है।
फायरिंग की घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि दो गुटों के बीच मारपीट हो रही है। एक समूह में राइफलों से लैस पुलिसकर्मी भी हैं और भीड़ के साथ आगे बढ़ रहे हैं। मेघालय के एक स्थानीय व्यक्ति को चिल्लाते हुए सुना जा सकता है कि पुलिस ने अपनी राइफलें निकाल ली हैं। कुछ ही सेकेंड में फायरिंग शुरू हो गई जिससे लोग जान बचाकर भागने लगे।
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- #AssamKamakhya Dham: मां कामाख्य मंदिर के तीन दिन बाद खुले कपाट, जानिए कैसे पड़ा अंबुवासी मेले का नाम? Assam Meghalaya Border Dispute: असम और मेघालय के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए चल रही बातचीत के दौरान आज यानी मंगलवार को फायरिंग की घटना सामने आई है। हुई फायरिंग में छः लोगों की मौत हो गई। यह फायरिंग मेघालय के वेस्ट जयंतिया हिल्स के मुक्रोह गांव में हुई है। मोकाइयाव के विधायक नुजोरकी सुनगोह ने बताया कि घटना के दौरान चार लोगों की मौत हो गई है और कुछ अन्य घायल हो गए हैं। हालांकि स्थानीय विधायक नुजोरकी सुनगोह ने घटना स्थल का दौरा किया। उन्होंने गोलीबारी में मृतकों की संख्या की पुष्टि नहीं की है। खासी स्टूडेंट्स यूनियन की मुकरोह यूनिट ने कहा कि इस घटना में कई लोगों को चोटें आई हैं। छात्रों के मुताबिक फायरिंग की घटना तड़के तीन बजे के करीब की है। फायरिंग की घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि दो गुटों के बीच मारपीट हो रही है। एक समूह में राइफलों से लैस पुलिसकर्मी भी हैं और भीड़ के साथ आगे बढ़ रहे हैं। मेघालय के एक स्थानीय व्यक्ति को चिल्लाते हुए सुना जा सकता है कि पुलिस ने अपनी राइफलें निकाल ली हैं। कुछ ही सेकेंड में फायरिंग शुरू हो गई जिससे लोग जान बचाकर भागने लगे।
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वीर अर्जुन संवाददाता देहरादून। मुख्यमंत्री डॉ. रमेष पोखरियाल निषंक ने षनिवार को राजपुर रोड स्थित एक होटल के सभागार में उत्तराखण्ड अंतरिक्ष उपयोग केन्द द्वारा आयोजित `उत्तराखण्ड सेटकॉम नेटवर्क विजन एण्ड मिषन' विशय पर आयोजित राश्ट्रीय संगोश्"ाr का उद्घाटन किया। उन्होंने सेटलाइट आंकड़ों पर आधारित पदेष का भू-उपयोग और भू-आच्छादित मानचित्र भी जारी किया। मुख्यमंत्री डॉ. निषंक ने कहा कि अंतरिक्ष पौद्योगिकी के पयोग से राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों सहित सभी षिक्षण संस्थानों को गुणवत्तायुक्त षिक्षा एवं पषिक्षण पदान किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में एडूसेट कार्पाम पहले से ही पारम्भ हो चुका है। सेटकॉम नेटवर्क से जुड़ने पर पदेष के विद्यार्थियों, विषेश रूप से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को नवीनतम ज्ञान-विज्ञान की जानकारी पाप्त होगी। उन्होंने कहा कि नई पौद्योगिकी का लाभ षिक्षा के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रांs में भी पाप्त होगा। पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर सामुदायिक सहभागिता से उपग्रह तकनीकी का पयोग करते हुए पषिक्षण एवं क्षमता संवर्द्धन (ट्रेनिंग और कैपिसिटी बिल्डिंग) का कार्य किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष पौद्योगिकी का आपदा पबन्धन में अधिकतम लाभकारी उपयोग किए जाने की सभी सम्भावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में पाकृतिक आपदा की सम्भावनाओं को देखते हुए यदि पौद्योगिकी इनका कुछ पूर्वानुमान लगा सके तो समय रहते बहुत से लोगों के जीवन का बचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने सेटकॉम नेटवर्क की सहायता से टेलीमेडिसिन और ई-गवर्नेंस के उपयोग को बढ़ाने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य तेजी से विकास के कई मानकों में देष के अग्रणी राज्यों में षुमार हो रहा है। राज्य सरकार पर्यावरण एवं विकास के मध्य समन्वय स्थापित कर आगे बढ़ना चाहती है और आधुनिक पौद्योगिकी इस दिषा में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी। विषिश्ट अतिथि और जवाहर लाल नेहरू विष्वविद्यालय के पख्यात षिक्षाविद् पो. पुश्पेष पंत ने कहा कि अंतरिक्ष पौरद्योगिकी में उत्तराखण्ड द्वारा की जा रही पहल अन्य राज्यों के लिए भी पेरणा का स्रोत बनेगी। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाओं की सहायता से ज्ञान आधारित समाज की स्थापना होती है। पभारी सचिव विज्ञान एवं पौद्योगिकी अरूण ढौढियाल ने कहा कि षीघ्र ही अंतरिक्ष पौद्योगिकी को अन्य जनोपयोगी योजनाओं से भी जोड़ा जायेगा। दून विष्वविद्यालय के कुलपति पो. गिरिजेष पंत ने कहा कि उनका विष्वविद्यालय ऐसी योजनाओं में सािढय भागीदारी निभायेगा। मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. राजेष नैथानी ने कहा कि अंतरिक्ष पौद्योगिकी का पदेष के समग्र विकास हेतु पयोग किया जायेगा।
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वीर अर्जुन संवाददाता देहरादून। मुख्यमंत्री डॉ. रमेष पोखरियाल निषंक ने षनिवार को राजपुर रोड स्थित एक होटल के सभागार में उत्तराखण्ड अंतरिक्ष उपयोग केन्द द्वारा आयोजित `उत्तराखण्ड सेटकॉम नेटवर्क विजन एण्ड मिषन' विशय पर आयोजित राश्ट्रीय संगोश्"ाr का उद्घाटन किया। उन्होंने सेटलाइट आंकड़ों पर आधारित पदेष का भू-उपयोग और भू-आच्छादित मानचित्र भी जारी किया। मुख्यमंत्री डॉ. निषंक ने कहा कि अंतरिक्ष पौद्योगिकी के पयोग से राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों सहित सभी षिक्षण संस्थानों को गुणवत्तायुक्त षिक्षा एवं पषिक्षण पदान किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में एडूसेट कार्पाम पहले से ही पारम्भ हो चुका है। सेटकॉम नेटवर्क से जुड़ने पर पदेष के विद्यार्थियों, विषेश रूप से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को नवीनतम ज्ञान-विज्ञान की जानकारी पाप्त होगी। उन्होंने कहा कि नई पौद्योगिकी का लाभ षिक्षा के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रांs में भी पाप्त होगा। पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर सामुदायिक सहभागिता से उपग्रह तकनीकी का पयोग करते हुए पषिक्षण एवं क्षमता संवर्द्धन का कार्य किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरिक्ष पौद्योगिकी का आपदा पबन्धन में अधिकतम लाभकारी उपयोग किए जाने की सभी सम्भावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में पाकृतिक आपदा की सम्भावनाओं को देखते हुए यदि पौद्योगिकी इनका कुछ पूर्वानुमान लगा सके तो समय रहते बहुत से लोगों के जीवन का बचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने सेटकॉम नेटवर्क की सहायता से टेलीमेडिसिन और ई-गवर्नेंस के उपयोग को बढ़ाने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य तेजी से विकास के कई मानकों में देष के अग्रणी राज्यों में षुमार हो रहा है। राज्य सरकार पर्यावरण एवं विकास के मध्य समन्वय स्थापित कर आगे बढ़ना चाहती है और आधुनिक पौद्योगिकी इस दिषा में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी। विषिश्ट अतिथि और जवाहर लाल नेहरू विष्वविद्यालय के पख्यात षिक्षाविद् पो. पुश्पेष पंत ने कहा कि अंतरिक्ष पौरद्योगिकी में उत्तराखण्ड द्वारा की जा रही पहल अन्य राज्यों के लिए भी पेरणा का स्रोत बनेगी। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाओं की सहायता से ज्ञान आधारित समाज की स्थापना होती है। पभारी सचिव विज्ञान एवं पौद्योगिकी अरूण ढौढियाल ने कहा कि षीघ्र ही अंतरिक्ष पौद्योगिकी को अन्य जनोपयोगी योजनाओं से भी जोड़ा जायेगा। दून विष्वविद्यालय के कुलपति पो. गिरिजेष पंत ने कहा कि उनका विष्वविद्यालय ऐसी योजनाओं में सािढय भागीदारी निभायेगा। मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. राजेष नैथानी ने कहा कि अंतरिक्ष पौद्योगिकी का पदेष के समग्र विकास हेतु पयोग किया जायेगा।
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अमरीका में पेंसिलवेनिया प्रांत के एक स्कूल में हुई गोलीबारी में चार बच्चे मारे गए हैं और आठ घायल हैं.
एक कमरे वाला यह स्कूल आमिश धार्मिक समुदाय का है. आपातकालीन सेवाएँ मौक़े पर पहुँच गई हैं और घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
पेंसिलवेनिया प्रांतीय पुलिस के एक प्रवक्ता जैक लुईस ने बताया कि एक बंदूकधारी स्कूल में घुसा और उसने कुछ बच्चों को वहाँ से जाने और कुछ को वहीं रहने को कहा.
इसके बाद उसने वहाँ मौजूद बच्चों को बाँध कर उन पर अँधाधुँध गोलीबारी की. बाद में उस व्यक्ति ने ख़ुद को भी गोली मार ली.
पुलिस के मुताबिक हमलावर की पहचान 32 वर्षीय ट्रक चालक चार्ल्स कार्ल रॉबर्ट्स के रुप में की है.
पिछले एक हफ़्ते में अमरीकी स्कूलों में गोलीबारी की यह तीसरी घटना है.
इस स्कूल में 14 साल तक के बच्चे पढ़ते हैं और माना जा रहा है कि स्कूल में 20-30 बच्चे पढ़ते थे. पुलिस ने पूरे इलाक़े को घेर लिया है.
आमिश समुदाय के लोग 'एनाबैप्टिस्ट' ईसाई होते हैं जो आधुनिक दुनिया से बिल्कुल अलग रहते हैं.
इस धार्मिक समुदाय के लोग कार और टेलीफ़ोन जैसे आधुनिक सामानों का इस्तेमाल भी नहीं करते हैं.
हाल के दिनों में अमरीकी स्कूलों में हिंसा की घटनाओं की संख्या बढ़ गई है.
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अमरीका में पेंसिलवेनिया प्रांत के एक स्कूल में हुई गोलीबारी में चार बच्चे मारे गए हैं और आठ घायल हैं. एक कमरे वाला यह स्कूल आमिश धार्मिक समुदाय का है. आपातकालीन सेवाएँ मौक़े पर पहुँच गई हैं और घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पेंसिलवेनिया प्रांतीय पुलिस के एक प्रवक्ता जैक लुईस ने बताया कि एक बंदूकधारी स्कूल में घुसा और उसने कुछ बच्चों को वहाँ से जाने और कुछ को वहीं रहने को कहा. इसके बाद उसने वहाँ मौजूद बच्चों को बाँध कर उन पर अँधाधुँध गोलीबारी की. बाद में उस व्यक्ति ने ख़ुद को भी गोली मार ली. पुलिस के मुताबिक हमलावर की पहचान बत्तीस वर्षीय ट्रक चालक चार्ल्स कार्ल रॉबर्ट्स के रुप में की है. पिछले एक हफ़्ते में अमरीकी स्कूलों में गोलीबारी की यह तीसरी घटना है. इस स्कूल में चौदह साल तक के बच्चे पढ़ते हैं और माना जा रहा है कि स्कूल में बीस-तीस बच्चे पढ़ते थे. पुलिस ने पूरे इलाक़े को घेर लिया है. आमिश समुदाय के लोग 'एनाबैप्टिस्ट' ईसाई होते हैं जो आधुनिक दुनिया से बिल्कुल अलग रहते हैं. इस धार्मिक समुदाय के लोग कार और टेलीफ़ोन जैसे आधुनिक सामानों का इस्तेमाल भी नहीं करते हैं. हाल के दिनों में अमरीकी स्कूलों में हिंसा की घटनाओं की संख्या बढ़ गई है.
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हूँ। मुझे उनसे हर्ष या शोक नहीं होता। स्फटिक रत्न के समान निर्मल असंख्य प्रदेशों में समय समय पर सब कुछ भास होता है। प्रदेश स्थिर और एक रूप हैं - यह सब विचारना पार्थिवी धारणा है। ग्ने धारणा के लिए नाभि मे सोलह पंखुड़ियो वाले कमल की कल्पना करना और कमल की कणिका मे 'अ' यंत्र स्थापित करना चाहिए । कमल की प्रत्येक पखुडी मे क्रमशः आ इ ई उ ऊ ऋ ॠ लृ ऌ ए ऐ ओ औ १६ स्वरों को स्थापित करके उस कमल मे एकाग्र चित्त में लीन हो जाना चाहिए । यहाँ तक कि कमल के सिवा और किसी वस्तु का स्मरण तक न रहे। फिर हृदय में आठ पँखुड़ियों वाले कमल की कल्पना करके प्रत्येक पॅखुड़ी मे क्रमशः ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय, वेदनीय, मोहनीय, आयुष्य, नाम, गोत्र और अन्तराय, इन आठ कर्मों का एक-एक पॅखुडी में स्थापन करना चाहिए । इस कमल का मुख इस प्रकार नीचे रखना चाहिए कि जिससे उक्त सोलह पखुडियो वाले कमल पर यह कमल अधोमुख होकर भूलता रहे । फिर सोलह पॅखुड़ियों वाले कमल में स्थापित 'अहं' के 'ई' वाले रेफ विन्दु से धूम्रशिखा निकलने की कल्पना करके धीरे-धीरे उसमे से अग्निकरण और बाद में ज्वालाओं के निकलने की कल्पना करनी चाहिए । इन ज्वालाओं से हृदयान्तगत अष्टकर्मा की पखुड़ियों वाला कर्म-कमल जल रहा है और महामंत्र 'अहं' के ध्यान से उत्पन्न हुई अग्नि के द्वारा श्रष्ट कर्मों की पंखुड़ियो वाला कमल जल कर भस्म हो रहा है - यह भावना करनी चाहिए । फिर, शरीर के बाहर त्रिकोण के रूप मे जलता हुआ अग्नि का समूह मनमे लाना चाहिए और उस अग्नि-समूह तथा शरीर में महामंत्र के ध्यान से उत्पन्न हुई अग्निज्वालाश्रो से देह और अष्ट कर्मों का कमल, दोनो जलकर भस्म हो रहे
है - यह कल्पना करके शान्त हो जाना चाहिए । यही वारणा का स्वरूप है। तीसरी वायवी धारणा का ध्यान इस प्रकार करना चाहिए - तीनों भुवनों के विस्तार को पूर्ण करने वाली प्रचंड वायु है, आग्नेयी धार से शरीर और कर्म की जो भस्म हो गई है, उसको यह वायु उड़ा देती है, और फिर वायु शान्त हो जाती है। वारुणी धारणा का ध्यान इस प्रकार करना चाहिए - अमृत के समान वर्षा करने वाली मेघमाला से पूर्ण आकाश, आकाश से होने वाली जल-वृष्टि, वायु से उड़ गई देह तथा कर्म की भस्म - राख को शान्त कर देती और वो डालती है, अन्त में वरुणमडल शान्त हो जाता है - यह् चाकणी धारणा है । अन्तिम तत्त्वभू धारणा यह है - मेरी आत्मा, नातो धातुओं से रहित पूर्णचन्द्रकान्त के समान निर्मल, सर्वज्ञ के समान हं, सिहासन पर बैठे, सव कर्मों का नाश करने वाले, शरीर के अन्तरस्थ निराकार आत्मा का स्मरण कर रहा हूँ। यह तत्त्वभू धारणा है जो समस्त कर्मों का नाश करती है, आत्मा को परमात्मस्वरूप ब्रह्मस्वरूप चनाती हैं। यह पॉच धारणाएँ भी वैदिक मतानुसार योग के पाँच तत्त्वों की वारणाओं की तरह आत्मा को 'अहं ब्रह्मास्मि' का माक्षात्कार कराती है ।
पिण्डस्थ ध्यान करने वाला अपने को औदारिक, वैकिय, हारिक, तैजस और कारण आदि पांचा प्रकार के शरीरो से पृथक् समझता है और इस से देहादि अह्नों के कार्यों में आत्मा अहं तथा ममत्व के परिणाम से नहीं बँधता । वह योग्य पदार्थों की इच्छाओं में भी नहीं बँधता और न अनेक जीवो को दु ख देने के लिये प्रेरित होता है। कर्म के योग से वस्त्र के समान शरीर तो मिलते हैं और छूटते हैं तथापि वह इस से जरा भी हर्पित या शोकान्त्रित नहीं होता । पिंडन्थ ध्यान वाला योगी
प्रारब्ध कर्मों के योग से अनेक कार्य करता हुआ भी आत्मा के स्वरूप में ध्यान रखता है। शरीरस्थ शरीर से भिन्न है, ऐसा निश्चयात्मकज्ञान होने पर, वाह्य सयोगों में रहते हुए भी बह उन में फँसते नहीं है । आत्म प्रदेश में लगा हुआ मन निर्विकल्प हो जाता है और आत्मा की शक्तियाँ विकिसित होने लगती हैं । वचनसिद्धि और सकल्पसिद्धि सरल हो जाती है । जो लोग आत्मा के असंख्यात प्रदेशो का ध्यान करते है परन्तु जगत् का उपकार करने की प्रशस्त इच्छा रखते हैं, वे तीर्थकरादि पढ़ को प्राप्त कर लेते हैं और जो उपकार करने की इच्छा को भी त्याग कर पिंडस्थ ध्यान करते है, वे मूककेवली होकर सिद्ध अवस्था को प्राप्त करते हैं। शरीर के किसी भी भाग में आत्मा के प्रदेशो का ध्यान हो सकता है। नाभिचक्र मे ध्यान करने से कायव्यूह का ज्ञान होता है, यानी शरीर की नाड़ियों और उनके कार्यों का ज्ञान होता है और मन में संकल्प विकल्पो का विलय भी हो जाता है । कंठकूप में ध्यान करने से क्षुधा तृषा का शमन होता और वाणी भलीभाँति प्रकट होने लगती है । कूर्म नाड़ी में ध्यान करने से स्थिरता बढ़ती और चचलता नष्ट होती है । ब्रह्मरन्ध्र मे ध्यान करने से सिद्ध पुरुषों के दर्शन होते हैं, पापो का नाश होता और धर्म श्रद्धा बढ़ती है । हृदय में ध्यान करने से हृदय-शुद्धि होती है, ज्ञान का भास होता जाता है सत्य की प्रतीति होती और दूसरे के हृदय को पढ़ा जा सकता है। मनोवर्गरणा में ध्यान करने से, मनोवर्गरणा के साथ लेश्या के सम्बन्ध का ज्ञान होता
। और इसमें विशेषसयम करने से मन पर्यवज्ञान प्रकट होता है। इसी प्रकार कान, नाक, आँख, जीभ और स्पर्शेन्द्रिय में ध्यान करने से, उन उन इन्द्रियों की शक्तियों का विकास होता है । कायबल, वारणीबल और मनोवल में ध्यान करने से,
उनके बल बढ़ते हैं । मस्तक मे ध्यान करने से मस्तिष्क के ज्ञान तन्तुओ की पुष्टि होती है और तर्कशक्ति अधिकाधिक विकसित होती है इस प्रकार स्त्र पिड यानी अपने शरीर के किसी भी अंग मे पिडस्थ ध्यान किया जा सकता है, और उससे शारीरिक तथा आध्यात्मिक लाभ होते हैं। परन्तु ब्रह्मरन्ध्र मे आत्म प्रदेशों का ध्यान करना ही सर्वश्रेष्ठ है । जिस समय ब्रह्मरन्ध्र मंत् के असंख्य प्रदेशो का ध्यान किया जाता है उस समय श्वासोच्छ्वास की गति मन्द पड़ जाती है। आत्मा के असंख्य प्रदेशो मे तन्मयता आ जाने से श्वासोच्छ्वास की गति बिल्कुल धीमी हो जाती और आनन्द ही आनन्द भास होने लगता है, आत्मा की अनन्त शक्तियों का अनुभव होता है, सब जीवो पर समतारूपी अमृत मेघवृष्टि होने लगती है, उस समय ऐसा मालूम होने लगता है कि सर्वदा उसी में रहा जाय, तो बड़ा अच्छा यह अवस्था क्षयोपशम भाव मे देर नहीं रह पाती, तो भी पुन. पिडस्थ ध्यान करके यह अवस्था प्राप्त करने के लिए ध्यानी लोग प्रयत्न करते हैं और फिर वही आनन्द प्राप्त कर लेते हैं । अन्य छाझस्थिक कार्यों मे लगकर, वे उपाधि की विकल्प अवस्था का अनुभव करते है, पर उसमे उन्हे आनन्द नही मिलता, इसलिए किसी भी प्रकार फिर ध्यान में प्रविष्ट होते हैं । इस सहज सुख की अवस्था का अनुभव होने पर, बाह्य सुध की सब प्रकार की अभिलाषाएँ दूर हो जाती हैं ।
( २ ) पदस्थ ध्येय मे अनेक प्रकार से ध्यान किया जाता है, उनमें से कुछ प्रकार ग्रन्थकार ने यहाँ प्रकट किये हैं । चित्त को स्थिर करके अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु इन पाँच पढ़ो का ध्यान करना 'पदस्थ ध्येय का ध्यान' कहा जाता है। दूसरा प्रकार यह है कि नाभि प्रदेश मे सोलह पँखु -
ड़ियो के कमल की कल्पना करके उसमे 'अ' से 'अ' तक सोलह स्वरो को स्थापित कर क्रमश. उनका ध्यान करना । तीसरा प्रकार यह है कि हृदय-कमल मे चौवीस पॅखुड़ियो वाले कमल की कल्पना करक 'क' से 'म' तक के अक्षर क्रमशः चौबीमो पॅखुड़ियो मे स्थापित करना और 'म' को कमल की कणिका में स्थापित करके प्रत्येक पढ़ का क्रमश ध्यान करना चाहिए । चौथा प्रकार यह है कि मुख मे आठ पँखुड़ियो वाले कमल की कल्पना करके उसमें 'य' से 'ह' तक के अक्षर स्थापित करना और उसका ध्यान करना चाहिए । इसी प्रकार 'ॐ' कार का, 'आई' मंत्र का, ॐ ह्री श्री अईं नम.' आदि मंत्र तथा अन्य मंत्रों का भी ध्यान किया जा सकता है। इस प्रकार
और पदो का ध्यान करता हुआ योगी चित्त की चंचलता का शमन कर देता ओर श्रुतज्ञान का परिणामी हो जाता है । पदस्थ ध्यान का सावक, निमित्त ज्ञान को भी प्राप्त कर सकता हैं, तो भी सच्चा योगी पदस्थ ध्येय के आल से किये हुए ध्यान के द्वारा, आत्मा को निर्मल करने वाले शुक्ल ध्यान मे ही गति करने के लिए उद्योगशील रहता है ।
( ३ ) समवसरण मे बैठे तीर्थकर भगवान् का स्वरूप 'रूपस्थ ध्येय' है और उसमे ध्यान करना, ध्यान का तीसरा प्रकार है । भगवान् की शान्त अवस्था का चित्त में अव धारण करना, उनके मस्तक मे से प्रकट होने वाली तेज धाराओ को चित्त प्रदेश मे झेलना, उनके अनन्त गुणो का स्मरण करना और वैसे ही गुण हमारी आत्मा मे प्रच्छन्न रूप से विद्यमान
इनको प्रकट करने का ध्यान करना इसी प्रकार का ध्यान है । आठ कर्म रूपी हैं और मेरी आत्मा अनादिकाल से उनसे सम्बद्ध रही है। रूप में स्थित मेरी आत्मा वास्तव में रूप से अलग है, सिद्ध के समान अनन्त गुणमय है - आदि भावना
करना, रूपस्थ ध्येय का ध्यान है। इस ध्यान में ऐसे विचार करना चाहिए कि मेरी आत्मा गुणों से पचपरमेष्ठिरूप है और इन गुणो को प्रकट करना मेरा प्रयत्न है; तथा ज्ञान, दर्शन और चारित्र्य गुणों से मेरी आत्मा दीप्तिमान् है, द मे ही परमात्म-अवस्था स्थित है, परन्तु ध्यान के बिना वह प्रकट नहीं होती, इसलिए रूपस्थ ध्येय मे ध्यान करने की योजना है। इससे संकल्प-विकल्पवाली चित्तावस्था का निरोध होता है, मोह की तरंगे आप ही आप शान्त हो जाती हैं, अनेक शक्तियाँ प्रकट होती हैं और मन की निर्मलता सहज ही साध्य हो जाती है ।
( ४ ) रूप सेती - काररहित, ज्ञानानन्द-स्वरूप, निरंजन सिद्ध परमात्मा का प्राश्रय ग्रहण करके उनके साथ, शक्ति की अपेक्षा सिद्ध के समान सत्ता वाली अपनी आत्मा का, चित्त में एकत्व धारण करना रूपातीत ध्येय का ध्यान समझना चाहिए । पिडस्थ, पदस्थ ओर रूपस्थ ध्येय का अवलम्वन करके मुमुक्षु योगी को रूपातीत ध्येय पर पहुँचना और स्थूल से सूक्ष्म आत्मा तक पहुॅचते हुए आत्मा के गुरण पर्यायों की शुद्धता का चितन करना चाहिए । आत्मा का उपयोग एक ही जगह रखना और मन को बाहर न जाने देना चाहिए। ऐसा करने से रूपातीत ध्येय मे प्रवेश होगा और अहर्निश उसका अभ्यास करने से रूपातीत ध्येय में ध्यान स्थिर हो जायगा । रूपातीत ध्यान के जिज्ञासु को द्रव्यानुयोग तथा अध्यात्म शास्त्रों का ज्ञान भली भाँति प्राप्त करना चाहिए, कारण कि इसके बिना जड़ चेतन की भिन्नता का ध्यान भली भाँति चित्त में नही रहता । चारो ध्यानो मे रूपातीत ध्यान सर्वोपरि है। इस ध्यान का करने वाला योगी, कर्म रूपी ईंधन को जलाकर भस्म कर देता है और वह अपनी शक्ति को प्रकट करने में समर्थ वन
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हूँ। मुझे उनसे हर्ष या शोक नहीं होता। स्फटिक रत्न के समान निर्मल असंख्य प्रदेशों में समय समय पर सब कुछ भास होता है। प्रदेश स्थिर और एक रूप हैं - यह सब विचारना पार्थिवी धारणा है। ग्ने धारणा के लिए नाभि मे सोलह पंखुड़ियो वाले कमल की कल्पना करना और कमल की कणिका मे 'अ' यंत्र स्थापित करना चाहिए । कमल की प्रत्येक पखुडी मे क्रमशः आ इ ई उ ऊ ऋ ॠ लृ ऌ ए ऐ ओ औ सोलह स्वरों को स्थापित करके उस कमल मे एकाग्र चित्त में लीन हो जाना चाहिए । यहाँ तक कि कमल के सिवा और किसी वस्तु का स्मरण तक न रहे। फिर हृदय में आठ पँखुड़ियों वाले कमल की कल्पना करके प्रत्येक पॅखुड़ी मे क्रमशः ज्ञानावरणीय, दर्शनावरणीय, वेदनीय, मोहनीय, आयुष्य, नाम, गोत्र और अन्तराय, इन आठ कर्मों का एक-एक पॅखुडी में स्थापन करना चाहिए । इस कमल का मुख इस प्रकार नीचे रखना चाहिए कि जिससे उक्त सोलह पखुडियो वाले कमल पर यह कमल अधोमुख होकर भूलता रहे । फिर सोलह पॅखुड़ियों वाले कमल में स्थापित 'अहं' के 'ई' वाले रेफ विन्दु से धूम्रशिखा निकलने की कल्पना करके धीरे-धीरे उसमे से अग्निकरण और बाद में ज्वालाओं के निकलने की कल्पना करनी चाहिए । इन ज्वालाओं से हृदयान्तगत अष्टकर्मा की पखुड़ियों वाला कर्म-कमल जल रहा है और महामंत्र 'अहं' के ध्यान से उत्पन्न हुई अग्नि के द्वारा श्रष्ट कर्मों की पंखुड़ियो वाला कमल जल कर भस्म हो रहा है - यह भावना करनी चाहिए । फिर, शरीर के बाहर त्रिकोण के रूप मे जलता हुआ अग्नि का समूह मनमे लाना चाहिए और उस अग्नि-समूह तथा शरीर में महामंत्र के ध्यान से उत्पन्न हुई अग्निज्वालाश्रो से देह और अष्ट कर्मों का कमल, दोनो जलकर भस्म हो रहे है - यह कल्पना करके शान्त हो जाना चाहिए । यही वारणा का स्वरूप है। तीसरी वायवी धारणा का ध्यान इस प्रकार करना चाहिए - तीनों भुवनों के विस्तार को पूर्ण करने वाली प्रचंड वायु है, आग्नेयी धार से शरीर और कर्म की जो भस्म हो गई है, उसको यह वायु उड़ा देती है, और फिर वायु शान्त हो जाती है। वारुणी धारणा का ध्यान इस प्रकार करना चाहिए - अमृत के समान वर्षा करने वाली मेघमाला से पूर्ण आकाश, आकाश से होने वाली जल-वृष्टि, वायु से उड़ गई देह तथा कर्म की भस्म - राख को शान्त कर देती और वो डालती है, अन्त में वरुणमडल शान्त हो जाता है - यह् चाकणी धारणा है । अन्तिम तत्त्वभू धारणा यह है - मेरी आत्मा, नातो धातुओं से रहित पूर्णचन्द्रकान्त के समान निर्मल, सर्वज्ञ के समान हं, सिहासन पर बैठे, सव कर्मों का नाश करने वाले, शरीर के अन्तरस्थ निराकार आत्मा का स्मरण कर रहा हूँ। यह तत्त्वभू धारणा है जो समस्त कर्मों का नाश करती है, आत्मा को परमात्मस्वरूप ब्रह्मस्वरूप चनाती हैं। यह पॉच धारणाएँ भी वैदिक मतानुसार योग के पाँच तत्त्वों की वारणाओं की तरह आत्मा को 'अहं ब्रह्मास्मि' का माक्षात्कार कराती है । पिण्डस्थ ध्यान करने वाला अपने को औदारिक, वैकिय, हारिक, तैजस और कारण आदि पांचा प्रकार के शरीरो से पृथक् समझता है और इस से देहादि अह्नों के कार्यों में आत्मा अहं तथा ममत्व के परिणाम से नहीं बँधता । वह योग्य पदार्थों की इच्छाओं में भी नहीं बँधता और न अनेक जीवो को दु ख देने के लिये प्रेरित होता है। कर्म के योग से वस्त्र के समान शरीर तो मिलते हैं और छूटते हैं तथापि वह इस से जरा भी हर्पित या शोकान्त्रित नहीं होता । पिंडन्थ ध्यान वाला योगी प्रारब्ध कर्मों के योग से अनेक कार्य करता हुआ भी आत्मा के स्वरूप में ध्यान रखता है। शरीरस्थ शरीर से भिन्न है, ऐसा निश्चयात्मकज्ञान होने पर, वाह्य सयोगों में रहते हुए भी बह उन में फँसते नहीं है । आत्म प्रदेश में लगा हुआ मन निर्विकल्प हो जाता है और आत्मा की शक्तियाँ विकिसित होने लगती हैं । वचनसिद्धि और सकल्पसिद्धि सरल हो जाती है । जो लोग आत्मा के असंख्यात प्रदेशो का ध्यान करते है परन्तु जगत् का उपकार करने की प्रशस्त इच्छा रखते हैं, वे तीर्थकरादि पढ़ को प्राप्त कर लेते हैं और जो उपकार करने की इच्छा को भी त्याग कर पिंडस्थ ध्यान करते है, वे मूककेवली होकर सिद्ध अवस्था को प्राप्त करते हैं। शरीर के किसी भी भाग में आत्मा के प्रदेशो का ध्यान हो सकता है। नाभिचक्र मे ध्यान करने से कायव्यूह का ज्ञान होता है, यानी शरीर की नाड़ियों और उनके कार्यों का ज्ञान होता है और मन में संकल्प विकल्पो का विलय भी हो जाता है । कंठकूप में ध्यान करने से क्षुधा तृषा का शमन होता और वाणी भलीभाँति प्रकट होने लगती है । कूर्म नाड़ी में ध्यान करने से स्थिरता बढ़ती और चचलता नष्ट होती है । ब्रह्मरन्ध्र मे ध्यान करने से सिद्ध पुरुषों के दर्शन होते हैं, पापो का नाश होता और धर्म श्रद्धा बढ़ती है । हृदय में ध्यान करने से हृदय-शुद्धि होती है, ज्ञान का भास होता जाता है सत्य की प्रतीति होती और दूसरे के हृदय को पढ़ा जा सकता है। मनोवर्गरणा में ध्यान करने से, मनोवर्गरणा के साथ लेश्या के सम्बन्ध का ज्ञान होता । और इसमें विशेषसयम करने से मन पर्यवज्ञान प्रकट होता है। इसी प्रकार कान, नाक, आँख, जीभ और स्पर्शेन्द्रिय में ध्यान करने से, उन उन इन्द्रियों की शक्तियों का विकास होता है । कायबल, वारणीबल और मनोवल में ध्यान करने से, उनके बल बढ़ते हैं । मस्तक मे ध्यान करने से मस्तिष्क के ज्ञान तन्तुओ की पुष्टि होती है और तर्कशक्ति अधिकाधिक विकसित होती है इस प्रकार स्त्र पिड यानी अपने शरीर के किसी भी अंग मे पिडस्थ ध्यान किया जा सकता है, और उससे शारीरिक तथा आध्यात्मिक लाभ होते हैं। परन्तु ब्रह्मरन्ध्र मे आत्म प्रदेशों का ध्यान करना ही सर्वश्रेष्ठ है । जिस समय ब्रह्मरन्ध्र मंत् के असंख्य प्रदेशो का ध्यान किया जाता है उस समय श्वासोच्छ्वास की गति मन्द पड़ जाती है। आत्मा के असंख्य प्रदेशो मे तन्मयता आ जाने से श्वासोच्छ्वास की गति बिल्कुल धीमी हो जाती और आनन्द ही आनन्द भास होने लगता है, आत्मा की अनन्त शक्तियों का अनुभव होता है, सब जीवो पर समतारूपी अमृत मेघवृष्टि होने लगती है, उस समय ऐसा मालूम होने लगता है कि सर्वदा उसी में रहा जाय, तो बड़ा अच्छा यह अवस्था क्षयोपशम भाव मे देर नहीं रह पाती, तो भी पुन. पिडस्थ ध्यान करके यह अवस्था प्राप्त करने के लिए ध्यानी लोग प्रयत्न करते हैं और फिर वही आनन्द प्राप्त कर लेते हैं । अन्य छाझस्थिक कार्यों मे लगकर, वे उपाधि की विकल्प अवस्था का अनुभव करते है, पर उसमे उन्हे आनन्द नही मिलता, इसलिए किसी भी प्रकार फिर ध्यान में प्रविष्ट होते हैं । इस सहज सुख की अवस्था का अनुभव होने पर, बाह्य सुध की सब प्रकार की अभिलाषाएँ दूर हो जाती हैं । पदस्थ ध्येय मे अनेक प्रकार से ध्यान किया जाता है, उनमें से कुछ प्रकार ग्रन्थकार ने यहाँ प्रकट किये हैं । चित्त को स्थिर करके अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु इन पाँच पढ़ो का ध्यान करना 'पदस्थ ध्येय का ध्यान' कहा जाता है। दूसरा प्रकार यह है कि नाभि प्रदेश मे सोलह पँखु - ड़ियो के कमल की कल्पना करके उसमे 'अ' से 'अ' तक सोलह स्वरो को स्थापित कर क्रमश. उनका ध्यान करना । तीसरा प्रकार यह है कि हृदय-कमल मे चौवीस पॅखुड़ियो वाले कमल की कल्पना करक 'क' से 'म' तक के अक्षर क्रमशः चौबीमो पॅखुड़ियो मे स्थापित करना और 'म' को कमल की कणिका में स्थापित करके प्रत्येक पढ़ का क्रमश ध्यान करना चाहिए । चौथा प्रकार यह है कि मुख मे आठ पँखुड़ियो वाले कमल की कल्पना करके उसमें 'य' से 'ह' तक के अक्षर स्थापित करना और उसका ध्यान करना चाहिए । इसी प्रकार 'ॐ' कार का, 'आई' मंत्र का, ॐ ह्री श्री अईं नम.' आदि मंत्र तथा अन्य मंत्रों का भी ध्यान किया जा सकता है। इस प्रकार और पदो का ध्यान करता हुआ योगी चित्त की चंचलता का शमन कर देता ओर श्रुतज्ञान का परिणामी हो जाता है । पदस्थ ध्यान का सावक, निमित्त ज्ञान को भी प्राप्त कर सकता हैं, तो भी सच्चा योगी पदस्थ ध्येय के आल से किये हुए ध्यान के द्वारा, आत्मा को निर्मल करने वाले शुक्ल ध्यान मे ही गति करने के लिए उद्योगशील रहता है । समवसरण मे बैठे तीर्थकर भगवान् का स्वरूप 'रूपस्थ ध्येय' है और उसमे ध्यान करना, ध्यान का तीसरा प्रकार है । भगवान् की शान्त अवस्था का चित्त में अव धारण करना, उनके मस्तक मे से प्रकट होने वाली तेज धाराओ को चित्त प्रदेश मे झेलना, उनके अनन्त गुणो का स्मरण करना और वैसे ही गुण हमारी आत्मा मे प्रच्छन्न रूप से विद्यमान इनको प्रकट करने का ध्यान करना इसी प्रकार का ध्यान है । आठ कर्म रूपी हैं और मेरी आत्मा अनादिकाल से उनसे सम्बद्ध रही है। रूप में स्थित मेरी आत्मा वास्तव में रूप से अलग है, सिद्ध के समान अनन्त गुणमय है - आदि भावना करना, रूपस्थ ध्येय का ध्यान है। इस ध्यान में ऐसे विचार करना चाहिए कि मेरी आत्मा गुणों से पचपरमेष्ठिरूप है और इन गुणो को प्रकट करना मेरा प्रयत्न है; तथा ज्ञान, दर्शन और चारित्र्य गुणों से मेरी आत्मा दीप्तिमान् है, द मे ही परमात्म-अवस्था स्थित है, परन्तु ध्यान के बिना वह प्रकट नहीं होती, इसलिए रूपस्थ ध्येय मे ध्यान करने की योजना है। इससे संकल्प-विकल्पवाली चित्तावस्था का निरोध होता है, मोह की तरंगे आप ही आप शान्त हो जाती हैं, अनेक शक्तियाँ प्रकट होती हैं और मन की निर्मलता सहज ही साध्य हो जाती है । रूप सेती - काररहित, ज्ञानानन्द-स्वरूप, निरंजन सिद्ध परमात्मा का प्राश्रय ग्रहण करके उनके साथ, शक्ति की अपेक्षा सिद्ध के समान सत्ता वाली अपनी आत्मा का, चित्त में एकत्व धारण करना रूपातीत ध्येय का ध्यान समझना चाहिए । पिडस्थ, पदस्थ ओर रूपस्थ ध्येय का अवलम्वन करके मुमुक्षु योगी को रूपातीत ध्येय पर पहुँचना और स्थूल से सूक्ष्म आत्मा तक पहुॅचते हुए आत्मा के गुरण पर्यायों की शुद्धता का चितन करना चाहिए । आत्मा का उपयोग एक ही जगह रखना और मन को बाहर न जाने देना चाहिए। ऐसा करने से रूपातीत ध्येय मे प्रवेश होगा और अहर्निश उसका अभ्यास करने से रूपातीत ध्येय में ध्यान स्थिर हो जायगा । रूपातीत ध्यान के जिज्ञासु को द्रव्यानुयोग तथा अध्यात्म शास्त्रों का ज्ञान भली भाँति प्राप्त करना चाहिए, कारण कि इसके बिना जड़ चेतन की भिन्नता का ध्यान भली भाँति चित्त में नही रहता । चारो ध्यानो मे रूपातीत ध्यान सर्वोपरि है। इस ध्यान का करने वाला योगी, कर्म रूपी ईंधन को जलाकर भस्म कर देता है और वह अपनी शक्ति को प्रकट करने में समर्थ वन
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जालंधर। पंजाब के जालंधर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां ट्यूशन से लौट रहे एक 15 साल के बच्चे पर पिटबुल कुत्ते ने अचानक हमला कर दिया। कुत्ते ने बच्चे के पैर को अपने जबड़े में दबा लिया। इस दौरान आसपास के लोगों ने कुत्ते पर बाल्टी, पत्थर और डंडा समेत सबकुछ मारा लेकिन उसने बच्चे के पैर को नहीं छोड़ा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर अब तेजी से वायरल हो रहा है।
बताया जा रहा है कि बच्चे ने काफी मुश्किल के बीच करीब 15 मिनट बाद कुत्ते के जबड़े से अपने पैर को छुड़ाया। घटना मंगलवार शाम की बताई जा रही है। जब लक्षद्वीप उप्पल नामक ये बच्चा सीईकिल पर अपने ट्यूशन से वापस लौट रहा था। तभी उसके साथ ये घटना हुई। वहां लगे सीसीटीवी में ये पूरी घटना कैद हो गई है। वीडियो में दिख रहा है कि बच्चा डर के कारण काफी चिल्ला रहा है लेकिन फिर भी कुत्ता उसके पैर को नहीं छोड़ता।
वीडियो में देखा जा सकता है कि आसपास मौजूद लोग बच्चे को बचाने की पूरी कोशिश करते हैं। कोई कुत्ते पर पत्थर फेंकता है, कोई बाल्टी फेंककर मारता है तो कोई उसे डंडे से मारता है। लेकिन इतनी कोशिश के बावजूद भी कुत्ता बच्चे का पैर नहीं छोड़ता है। इस बीच बच्चे की मां भी वीडियो में दिखाई दे रही है। जो इस खतरनाक जानवर से अपने बेटे को बचाने की पूरी कोशिश कर रही है।
जानकारी के मुताबिक बच्चे का पैर बुरी तरह घायल हो गया है। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। बच्चे के माता-पिता ने इस घटना की सूचना पुलिस को दे दी है।
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जालंधर। पंजाब के जालंधर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां ट्यूशन से लौट रहे एक पंद्रह साल के बच्चे पर पिटबुल कुत्ते ने अचानक हमला कर दिया। कुत्ते ने बच्चे के पैर को अपने जबड़े में दबा लिया। इस दौरान आसपास के लोगों ने कुत्ते पर बाल्टी, पत्थर और डंडा समेत सबकुछ मारा लेकिन उसने बच्चे के पैर को नहीं छोड़ा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर अब तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि बच्चे ने काफी मुश्किल के बीच करीब पंद्रह मिनट बाद कुत्ते के जबड़े से अपने पैर को छुड़ाया। घटना मंगलवार शाम की बताई जा रही है। जब लक्षद्वीप उप्पल नामक ये बच्चा सीईकिल पर अपने ट्यूशन से वापस लौट रहा था। तभी उसके साथ ये घटना हुई। वहां लगे सीसीटीवी में ये पूरी घटना कैद हो गई है। वीडियो में दिख रहा है कि बच्चा डर के कारण काफी चिल्ला रहा है लेकिन फिर भी कुत्ता उसके पैर को नहीं छोड़ता। वीडियो में देखा जा सकता है कि आसपास मौजूद लोग बच्चे को बचाने की पूरी कोशिश करते हैं। कोई कुत्ते पर पत्थर फेंकता है, कोई बाल्टी फेंककर मारता है तो कोई उसे डंडे से मारता है। लेकिन इतनी कोशिश के बावजूद भी कुत्ता बच्चे का पैर नहीं छोड़ता है। इस बीच बच्चे की मां भी वीडियो में दिखाई दे रही है। जो इस खतरनाक जानवर से अपने बेटे को बचाने की पूरी कोशिश कर रही है। जानकारी के मुताबिक बच्चे का पैर बुरी तरह घायल हो गया है। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। बच्चे के माता-पिता ने इस घटना की सूचना पुलिस को दे दी है।
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जबलपुर यश भारत ।हनुमानताल के बहोराबाग में पुरानी बुराई को लेकर दो बदमाशों ने मिलकर एक युवक पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। घटना में युवक को गंभीर चोटें आई हैं और बदमाश चाकू लहराते हुए वहां से भाग निकले। घायल की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं।
पुलिस ने बताया कि बहोराबाग में रहने वाले 24 वर्षीय मो. आसिफ ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि बीती रात वह अपने घर के पास खड़ा था। उसी दौरान वहां आबिद और जाहुल पहुंचे और पुरानी किसी बात को लेकर उसे गालियां देने लगे। आसिफ ने जब उन्हें अभद्रता करने से रोका तो पहले तो दोनों ने उसे हाथ-घूसों से पीटा। मो. आसिफ खुद को बचाने के लिए वहां से भागा, लेकिन जाहुल और आबिद भी चाकू लेकर उसके पीछे दौड़े और पकड़कर चाकू से हमला कर लहुलुहान कर दिया। तभी वहां से गुजर रहे मोहल्ले के कुछ लोगों ने बीच-बचाव कर आसिफ को बदमाशों के चंगुल से छुड़ाते हुए उपचार हेतु अस्पताल पहुंचाया।
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जबलपुर यश भारत ।हनुमानताल के बहोराबाग में पुरानी बुराई को लेकर दो बदमाशों ने मिलकर एक युवक पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। घटना में युवक को गंभीर चोटें आई हैं और बदमाश चाकू लहराते हुए वहां से भाग निकले। घायल की शिकायत पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए हैं। पुलिस ने बताया कि बहोराबाग में रहने वाले चौबीस वर्षीय मो. आसिफ ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि बीती रात वह अपने घर के पास खड़ा था। उसी दौरान वहां आबिद और जाहुल पहुंचे और पुरानी किसी बात को लेकर उसे गालियां देने लगे। आसिफ ने जब उन्हें अभद्रता करने से रोका तो पहले तो दोनों ने उसे हाथ-घूसों से पीटा। मो. आसिफ खुद को बचाने के लिए वहां से भागा, लेकिन जाहुल और आबिद भी चाकू लेकर उसके पीछे दौड़े और पकड़कर चाकू से हमला कर लहुलुहान कर दिया। तभी वहां से गुजर रहे मोहल्ले के कुछ लोगों ने बीच-बचाव कर आसिफ को बदमाशों के चंगुल से छुड़ाते हुए उपचार हेतु अस्पताल पहुंचाया।
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले कामरान ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि उसने एक करोड़ रु के लालच में सीएम योगी को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। हालांकि उसने ये नहीं बताया कि पैसे का ऑफर उसे किस शख्स ने दिया था।
25 वर्षीय आरोपित कामरान से पूछताछ कर रही उत्तर प्रदेश पुलिस की एसटीएफ के सामने कामरान ने अपने जुर्म को कबूल कर लिया। उसने एसटीएफ को बताया कि उसे एक करोड़ रु का ऑफर दिया गया था इसलिए उसने ऐसा किया। साथ ही उसने आगे कहा कि उसका ऐसा करने का कोई इरादा नहीं था।
जानकारी के मुताबिक मुंबई में रहने वाला आरोपित कामरान पहले एक सिक्योरिटी गॉर्ड का काम करता था, लेकिन 2017 में टीबी का ऑपरेशन होने के बाद उसने नौकरी छोड़ दी और वह फिलहाल कुछ नहीं कर रहा है। टैक्सी ड्राइवर पिता का पहले ही निधन हो चुका है।
पाँचवी पास कामरान नशे का आदी है। महाराष्ट्र एटीएस ने मुंबई के चूनाभट्टी इलाके के निवासी कामरान खान को एटीएस की कालाचौकी इकाई ने गिरफ्तार किया था।
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले कामरान ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि उसने एक करोड़ रु के लालच में सीएम योगी को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। हालांकि उसने ये नहीं बताया कि पैसे का ऑफर उसे किस शख्स ने दिया था। पच्चीस वर्षीय आरोपित कामरान से पूछताछ कर रही उत्तर प्रदेश पुलिस की एसटीएफ के सामने कामरान ने अपने जुर्म को कबूल कर लिया। उसने एसटीएफ को बताया कि उसे एक करोड़ रु का ऑफर दिया गया था इसलिए उसने ऐसा किया। साथ ही उसने आगे कहा कि उसका ऐसा करने का कोई इरादा नहीं था। जानकारी के मुताबिक मुंबई में रहने वाला आरोपित कामरान पहले एक सिक्योरिटी गॉर्ड का काम करता था, लेकिन दो हज़ार सत्रह में टीबी का ऑपरेशन होने के बाद उसने नौकरी छोड़ दी और वह फिलहाल कुछ नहीं कर रहा है। टैक्सी ड्राइवर पिता का पहले ही निधन हो चुका है। पाँचवी पास कामरान नशे का आदी है। महाराष्ट्र एटीएस ने मुंबई के चूनाभट्टी इलाके के निवासी कामरान खान को एटीएस की कालाचौकी इकाई ने गिरफ्तार किया था।
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ट्विटर पर लगाया बड़ा इल्जाम भाजपा पर अखिलेश ने! जानिए पूरी कहानी।
इसके साथ एक वीडियो भी डाला जिसके माध्यम से साफ पता लग रहा है, कि किस प्रकार अभिनेताओं ने पुराने कार्य की सफलता की तायल छुपा कर अपने नाम की तायल लगा दी। जिस से साफ साफ यह भी पता लगा की किस प्रकार पुराने विकास कार्यो पर भाजपा के नेता अपने नाम की तायल लगा कर जनता को चकमा दे रहे है।
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ट्विटर पर लगाया बड़ा इल्जाम भाजपा पर अखिलेश ने! जानिए पूरी कहानी। इसके साथ एक वीडियो भी डाला जिसके माध्यम से साफ पता लग रहा है, कि किस प्रकार अभिनेताओं ने पुराने कार्य की सफलता की तायल छुपा कर अपने नाम की तायल लगा दी। जिस से साफ साफ यह भी पता लगा की किस प्रकार पुराने विकास कार्यो पर भाजपा के नेता अपने नाम की तायल लगा कर जनता को चकमा दे रहे है।
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मैसेजिंग एप व्हाट्सएप अपनी यूजर्स को एक नयी सर्विस देने की तैयारी कर रहा है। इस नयी सर्विस के तहत पैसे भेजना मेसेज भेजने जितना आसान हो जायेगा।
व्हाट्सएप पिछले एक साल से करीब दस लाख उपयोगकर्ताओं के साथ अपनी भुगतान सेवाओं का परीक्षण कर रही है। भारत में व्हाट्सएप इस्तेमाल करने वालों की संख्या करीब 40 करोड़ है।
व्हाट्सएप के वैश्विक मामलों के प्रमुख विल कैथकार्ट ने कहा है कि कंपनी इस साल भारत में अपनी भुगतान सेवाओं की शुरुआत कर सकती है।
कैथकार्ट ने कहा कि कंपनी चाहती है कि उसके मंच से रुपये भेजना संदेश भेजने जितना ही आसान हो।
उन्होंने कहा कि अगर उनकी कंपनी ऐसा करने में कामयाब रहती है, तो इससे वित्तीय समावेश को गति देने में मदद मिल सकती है।
व्हाट्सएप देश में भुगतान सेवा की शुरुआत करती है तो उसकी प्रतिस्पर्धा पेटीएम, फोन पे और गूगल पे जैसी कंपनियों से होगी।
फेसबुक की स्वामित्व वाली कंपनी अन्य बाजारों में भी अपनी भुगतान सेवा शुरू करने की संभावनाएं तलाश रही है। दुनियाभर में करीब डेढ़ अरब लोग व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं।
(अन्य खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें। आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं। )
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मैसेजिंग एप व्हाट्सएप अपनी यूजर्स को एक नयी सर्विस देने की तैयारी कर रहा है। इस नयी सर्विस के तहत पैसे भेजना मेसेज भेजने जितना आसान हो जायेगा। व्हाट्सएप पिछले एक साल से करीब दस लाख उपयोगकर्ताओं के साथ अपनी भुगतान सेवाओं का परीक्षण कर रही है। भारत में व्हाट्सएप इस्तेमाल करने वालों की संख्या करीब चालीस करोड़ है। व्हाट्सएप के वैश्विक मामलों के प्रमुख विल कैथकार्ट ने कहा है कि कंपनी इस साल भारत में अपनी भुगतान सेवाओं की शुरुआत कर सकती है। कैथकार्ट ने कहा कि कंपनी चाहती है कि उसके मंच से रुपये भेजना संदेश भेजने जितना ही आसान हो। उन्होंने कहा कि अगर उनकी कंपनी ऐसा करने में कामयाब रहती है, तो इससे वित्तीय समावेश को गति देने में मदद मिल सकती है। व्हाट्सएप देश में भुगतान सेवा की शुरुआत करती है तो उसकी प्रतिस्पर्धा पेटीएम, फोन पे और गूगल पे जैसी कंपनियों से होगी। फेसबुक की स्वामित्व वाली कंपनी अन्य बाजारों में भी अपनी भुगतान सेवा शुरू करने की संभावनाएं तलाश रही है। दुनियाभर में करीब डेढ़ अरब लोग व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं।
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मवानाः मवाना-परीक्षितगढ़ रोड स्थित ततीना गांव के पास बिना अनुमति के अवैध मिट्टी खनन करने वाले माफियाओं पर शिकंजा कसते हुए एक जेसीबी मशीन समेत मिट्टी से भरे चार ट्रैक्टर-ट्रॉली को कब्जे में लेकर सीजकर चार आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए संबंधित धारा में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों की सख्ती के बाद खनन करने वाले माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि हाइवे पर चल रहे सड़क चौड़ीकरण का निर्माण की एवज में खनन माफिया चोरी छिपे अवैध रूप से गांव क्षेत्र में जेसीबी मशीन रात दिन धरती का सीना छलनी करने में जुटे हुए हैं। एसडीएम अखिलेश यादव ने कहा कि तहसील क्षेत्र में अवैध खनन को किसी कीमत पर होने नहीं दिया जाएगा।
स्पेक्टर अतुल कुमार ने थाने का चार्ज लेने के बाद नगर एवं देहात क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध खनन को बंद कराने के लिए अभियान चलाते हुए खनन माफियाओं पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मवाना-मेरठ रोड स्थित साधन पुलिया के पास चल रहे कोर्ट बिल्डिंग कार्य में प्रयोग की जा रही मिट्टी डालने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले डंपर संचालक आसपास बन रही कालोनी में अवैध खनन कर मिट्टी डाल व्यारे के न्यारे कर रहे हैं तो वहीं कुछ माफिया देहात क्षेत्र में चोरी छिपे अवैध रूप से जेसीबी मशीन से दिन रात खनन कर धरती का सीना छलनी करने में जुटे हुए हैं। एसडीएम अखिलेश यादव के निर्देश पर पुलिस ने अवैध खनन कर मिट्टी भर रहे माफियाओं पर शिकंजा कसते हुए एक जेसीबी मशीन समेत चार ट्रैक्टर-ट्रॉली को कब्जे में लेकर थाने में खडा कर दिया है।
पुलिस ने एसडीएम अखिलेश यादव के निर्देश पर बिना अनुमति के अवैध मिट्टी खनन करने वाले माफिया मुजफ्फरनगर जिले के गांव भलवा निवासी साहिब पुत्र इरशाद, आबाद पुत्र शहजाद, उवैश पुत्र इंतजार, शौकत पुत्र इशाक एवं फैजान पुत्र अफजाल से मिट्टी खनन की अनुमति मांगी, लेकिन खनन माफियाओं पर कोई अनुमति नहीं मिलने के साथ जेसीबी मशीन समेत चार ट्रैक्टर-ट्रॉली को कब्जे में लेकर सील करने के साथ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया है।
एसडीएम अखिलेश यादव ने कहा कि किसी कीमत पर तहसील क्षेत्र में अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि डंपर एवं ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालक एनएचएआई से लेकर कोर्ट के निर्माण में प्रयोग होने वाले डंपर से मिट्टी लादकर कालोनाइजर से सांठगांठ प्लाट एवं कालोनियों में खनन कर मिट्टी को धड़ल्ले से डालने में जुटे हुए हैं। एसडीएम अखिलेश यादव के निर्देश पर पुलिस ने खनन माफिया पर शिकंजा कसता देख खनन माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।
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मवानाः मवाना-परीक्षितगढ़ रोड स्थित ततीना गांव के पास बिना अनुमति के अवैध मिट्टी खनन करने वाले माफियाओं पर शिकंजा कसते हुए एक जेसीबी मशीन समेत मिट्टी से भरे चार ट्रैक्टर-ट्रॉली को कब्जे में लेकर सीजकर चार आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए संबंधित धारा में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों की सख्ती के बाद खनन करने वाले माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि हाइवे पर चल रहे सड़क चौड़ीकरण का निर्माण की एवज में खनन माफिया चोरी छिपे अवैध रूप से गांव क्षेत्र में जेसीबी मशीन रात दिन धरती का सीना छलनी करने में जुटे हुए हैं। एसडीएम अखिलेश यादव ने कहा कि तहसील क्षेत्र में अवैध खनन को किसी कीमत पर होने नहीं दिया जाएगा। स्पेक्टर अतुल कुमार ने थाने का चार्ज लेने के बाद नगर एवं देहात क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध खनन को बंद कराने के लिए अभियान चलाते हुए खनन माफियाओं पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मवाना-मेरठ रोड स्थित साधन पुलिया के पास चल रहे कोर्ट बिल्डिंग कार्य में प्रयोग की जा रही मिट्टी डालने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाले डंपर संचालक आसपास बन रही कालोनी में अवैध खनन कर मिट्टी डाल व्यारे के न्यारे कर रहे हैं तो वहीं कुछ माफिया देहात क्षेत्र में चोरी छिपे अवैध रूप से जेसीबी मशीन से दिन रात खनन कर धरती का सीना छलनी करने में जुटे हुए हैं। एसडीएम अखिलेश यादव के निर्देश पर पुलिस ने अवैध खनन कर मिट्टी भर रहे माफियाओं पर शिकंजा कसते हुए एक जेसीबी मशीन समेत चार ट्रैक्टर-ट्रॉली को कब्जे में लेकर थाने में खडा कर दिया है। पुलिस ने एसडीएम अखिलेश यादव के निर्देश पर बिना अनुमति के अवैध मिट्टी खनन करने वाले माफिया मुजफ्फरनगर जिले के गांव भलवा निवासी साहिब पुत्र इरशाद, आबाद पुत्र शहजाद, उवैश पुत्र इंतजार, शौकत पुत्र इशाक एवं फैजान पुत्र अफजाल से मिट्टी खनन की अनुमति मांगी, लेकिन खनन माफियाओं पर कोई अनुमति नहीं मिलने के साथ जेसीबी मशीन समेत चार ट्रैक्टर-ट्रॉली को कब्जे में लेकर सील करने के साथ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया है। एसडीएम अखिलेश यादव ने कहा कि किसी कीमत पर तहसील क्षेत्र में अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि डंपर एवं ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालक एनएचएआई से लेकर कोर्ट के निर्माण में प्रयोग होने वाले डंपर से मिट्टी लादकर कालोनाइजर से सांठगांठ प्लाट एवं कालोनियों में खनन कर मिट्टी को धड़ल्ले से डालने में जुटे हुए हैं। एसडीएम अखिलेश यादव के निर्देश पर पुलिस ने खनन माफिया पर शिकंजा कसता देख खनन माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है।
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Ranchi : विधि व्यवस्था दुरुस्त रखने को लेकर जमशेदपुर के गदड़ा में नया थाना का सृजन होगा. प्रमंडलीय आयुक्त कोल्हान द्वारा बीते 9 फरवरी को पुलिस मुख्यालय से इसकी अनुशंसा की गई थी, जिसका पुलिस मुख्यालय स्तर पर समीक्षा की जा रही है.
जमशेदपुर जिला के परसुडीह थाना क्षेत्र की आबादी और क्षेत्रफल ज्यादा होने के कारण वहां कानून व्यवस्था बनाए रखने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिले के गदड़ा में नया थाना बनाने की अनुशंसा पुलिस मुख्यालय से की गयी है. हालांकि यह प्रस्ताव सरकार के समक्ष विचाराधीन नहीं है.
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Ranchi : विधि व्यवस्था दुरुस्त रखने को लेकर जमशेदपुर के गदड़ा में नया थाना का सृजन होगा. प्रमंडलीय आयुक्त कोल्हान द्वारा बीते नौ फरवरी को पुलिस मुख्यालय से इसकी अनुशंसा की गई थी, जिसका पुलिस मुख्यालय स्तर पर समीक्षा की जा रही है. जमशेदपुर जिला के परसुडीह थाना क्षेत्र की आबादी और क्षेत्रफल ज्यादा होने के कारण वहां कानून व्यवस्था बनाए रखने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिले के गदड़ा में नया थाना बनाने की अनुशंसा पुलिस मुख्यालय से की गयी है. हालांकि यह प्रस्ताव सरकार के समक्ष विचाराधीन नहीं है.
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'अलङ्कार शेखर' नामक अलङ्कारशास्त्रीय महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ के रचयिता केशवमिश्र १६ वीं शती के काव्याशास्त्रियों में विशेषतया उल्लेखनीय हैं उन्होंने अलङ्कार सूत्रकार भगवान शौद्धोदनि द्वारा रचित अलङ्कार सूत्रों को अपने ग्रन्थ में मूल रूप से संगृहीत कर उन पर वृत्ति (व्याख्या) लिखी है। 'अलङ्कार शेखर' के तीन भाग है- कारिका ( सूत्रवृत्ति और उदाहरण) अलंङ्कार शास्त्र की सूत्र रूप में रचना करने वाले दो ही विद्वान प्रसिद्ध हैं, एक वामन व दूसरे शौद्धोदनि । ग्रन्थ की शैली देखने से प्रतीत होता है कि बारहवीं शती के अनन्तर ही इन सूत्रों का निर्माण हुआ है। यह शौद्धोदनि नाम अन्य किसी अलंङ्कार ग्रन्थ में उपलब्ध नहीं होता; अतः यह सन्देह होता है कि शौद्धोदनि वास्तविक नाम है, अथवा किसी बौद्ध मतानुयायी का उपनाम, जिसने अलंकार सूत्र का निर्माण किया व अपने इष्ट के अनुकूल शौद्धोदनि नाम स्वतः धारण कर लिया। भगवान बुद्ध शुद्धोदन के पुत्र थे ही - शुद्धोदनस्य अपत्यं पुमान्! शौद्धोदनिः । केशव मिश्र ने अलंङ्कार शेखर में काव्य लक्षण के उपक्रम में स्वयं लिखा है- : अलङ्कार विद्या सूत्रकारों भगवान् शौद्धोदनिः परम कारूणिकः स्वशास्त्रे प्रवर्तयिष्यन् प्रथमं काव्यस्वरूपमाह' ।
केशव मिश्र
इसमें भगवान व परमकारूणिकः- ये दो विशेषण भगवान बुद्ध की ओर ही निर्देश करते हैं, । परन्तु किसी पुष्ट प्रमाण के अभाव से भगवान बुद्ध को अलंङ्कार सूत्रों का रचयिता मान लेना उचित नहीं । इस ग्रन्थ में महिमभट्ट, राजशेखर, बाग्भट, गोवर्धन, भोजराज, मम्मट श्रीपाद आदि आचार्यो के मतों का नामोल्लेख है। इसमें श्रीपाद नामक विद्वान का उल्लेख अनेक बार हुआ है, परन्तु श्रीपाद का कोई भी ग्रन्थ उपलब्ध नहीं है सम्भवतः यह शौद्धोदनि का ही विशेषण है। उपसंहार में भी केशव मिश्र ने 'अलङ्कार विद्या सूत्रकार शब्द का प्रयोग किया है१.
केशवमिश्र में 'अलङ्कार शेखर' की रचना शौद्धिदनि की कारिकाओं के आधार पर की थी, इसलिये इन कारिकाओं की रचना 'अलङ्कारशेखर' की रचना से बहुत पहले हो जो गयी होगी, यह अनुमान किया जा सकता है। शौद्धोदनि ने काव्य का लक्षण रस के
श्रुतमेषाऽन्यथाकारमक्षराणि कियन्त्यपि । काव्यालङ्कारविद्यायां शौद्धोदनिरसूत्रयत् ।।
इस ग्रन्थ का प्रकाशन काव्यमाला सीरिज नं. ५० के अन्तर्गत बम्बई से हुआ। बाद में यह काशी संस्कृत सीरिज वाराणसी से भी प्रकाशित हुआ
अलङ्कार शेखर पृष्ठ- २।
आधार पर दिया है और 'व्यक्ति विवेक' के लेखक महिमभट्ट (१०२०-१०५० ई.) का इन्होंने उल्लेख किया है । इसके अतिरिक्त इनके विवेचन पर 'वाग्भटालङ्कार' का प्रभाव भी परिलक्षित होता है । इस कारण इन कारिकाओं की रचना १२ वीं शताब्दी के उत्तरार्थ से पहले नहीं हुई होगी।
केशवमिश्र ने 'अलङ्कार शेखर' की रचना राजा धर्मचन्द्र के पुत्र राजा माणिक्यचन्द्र की प्रेरणा से की थी -
काव्यालङ्कारपारङ्गममतिरखिलक्ष्माभृतां चक्रवर्ती । सर्वेषामस्तु काव्ये मतिरतिनुिपणेत्याशये सन्निवेश्य वेदान्तन्यायविद्यापरिचय चतुरं केशवं सन्नियुज्य श्रीमन्माणिक्यचन्द्रः क्षितिपतितिलकोग्रन्थमेनंविधत्ते ।
उपसंहार में भी इससे सम्बन्धित वर्णन है। इन्होंने अपने प्रेरक माणिक्यचन्द्र की वंशावलि भी प्रस्तुत की है। उसमें काबुल के राजा को जीतने वाले रामचन्द्र उनके पुत्र धर्मचन्द्र व उनके पुत्र माणिक्यचन्द्र का वर्णन है।
कनिंघम के अनुसार धर्मचन्द्र का पुत्र माणिक्यचन्द्र कांगड़ा के राज्यसिंहासन पर १५६३ ई से १५७३ तक आसीन था । केशव द्वारा प्रदर्शित वंश वृक्ष में इसी माणिक्यचन्द्र के साथ अनुकूलता है । अतः इस ग्रन्थ की रचना का काल भी यही है, यह निश्चित किया जा सकता है। इस आधार पर केशव मिश्र का रचनाकार १६ वी शती का उत्तरार्ध माना जा सकता है ।
केशव मिश्र न्याय व वेदान्त के प्रौढ़ विद्वान् थे। इनके द्वारा उद्धृतश्लोक इसका प्रमाण है- 'वेदान्तन्याय विद्या परिचयचतुरं केशवं सन्नियुज्य' । इन्होंने 'अलङ्कारशेखर' ग्रन्थ का निर्माण करनेसे पूर्व सात ग्रन्थों का निर्माण कर लिया था -
ग्रन्थाः काव्यकृतां हिताय विहिता ये सप्तपूर्वं मया ते तर्कार्णवसंप्लवव्यसनिभिः शक्याः परं वेदितुम । इत्यालोच्य हृदा मदालसवधूपादारविन्दक्कणन्मञ्जीरध्वनि मञ्जुलोऽयमथुना प्रस्तूयते प्रक्रमः ।।
इससे ज्ञात होता है कि ये उत्कृष्ट पाण्डित्य से समन्वित, उत्कृष्ट लेखकीय मेधा से सम्पन्न आचार्य थे, परन्तु इन सात ग्रन्थों के विषय में अधिक ज्ञात नहीं होता ।
प्रथम रत्ने प्रथम मरीचि ।
२. तत्रैव, प्रतावनात्मक प्रथम - १ - ७ श्लोक
३. तत्रैव, द्वितीय श्लोक
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'अलङ्कार शेखर' नामक अलङ्कारशास्त्रीय महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ के रचयिता केशवमिश्र सोलह वीं शती के काव्याशास्त्रियों में विशेषतया उल्लेखनीय हैं उन्होंने अलङ्कार सूत्रकार भगवान शौद्धोदनि द्वारा रचित अलङ्कार सूत्रों को अपने ग्रन्थ में मूल रूप से संगृहीत कर उन पर वृत्ति लिखी है। 'अलङ्कार शेखर' के तीन भाग है- कारिका अलंङ्कार शास्त्र की सूत्र रूप में रचना करने वाले दो ही विद्वान प्रसिद्ध हैं, एक वामन व दूसरे शौद्धोदनि । ग्रन्थ की शैली देखने से प्रतीत होता है कि बारहवीं शती के अनन्तर ही इन सूत्रों का निर्माण हुआ है। यह शौद्धोदनि नाम अन्य किसी अलंङ्कार ग्रन्थ में उपलब्ध नहीं होता; अतः यह सन्देह होता है कि शौद्धोदनि वास्तविक नाम है, अथवा किसी बौद्ध मतानुयायी का उपनाम, जिसने अलंकार सूत्र का निर्माण किया व अपने इष्ट के अनुकूल शौद्धोदनि नाम स्वतः धारण कर लिया। भगवान बुद्ध शुद्धोदन के पुत्र थे ही - शुद्धोदनस्य अपत्यं पुमान्! शौद्धोदनिः । केशव मिश्र ने अलंङ्कार शेखर में काव्य लक्षण के उपक्रम में स्वयं लिखा है- : अलङ्कार विद्या सूत्रकारों भगवान् शौद्धोदनिः परम कारूणिकः स्वशास्त्रे प्रवर्तयिष्यन् प्रथमं काव्यस्वरूपमाह' । केशव मिश्र इसमें भगवान व परमकारूणिकः- ये दो विशेषण भगवान बुद्ध की ओर ही निर्देश करते हैं, । परन्तु किसी पुष्ट प्रमाण के अभाव से भगवान बुद्ध को अलंङ्कार सूत्रों का रचयिता मान लेना उचित नहीं । इस ग्रन्थ में महिमभट्ट, राजशेखर, बाग्भट, गोवर्धन, भोजराज, मम्मट श्रीपाद आदि आचार्यो के मतों का नामोल्लेख है। इसमें श्रीपाद नामक विद्वान का उल्लेख अनेक बार हुआ है, परन्तु श्रीपाद का कोई भी ग्रन्थ उपलब्ध नहीं है सम्भवतः यह शौद्धोदनि का ही विशेषण है। उपसंहार में भी केशव मिश्र ने 'अलङ्कार विद्या सूत्रकार शब्द का प्रयोग किया हैएक. केशवमिश्र में 'अलङ्कार शेखर' की रचना शौद्धिदनि की कारिकाओं के आधार पर की थी, इसलिये इन कारिकाओं की रचना 'अलङ्कारशेखर' की रचना से बहुत पहले हो जो गयी होगी, यह अनुमान किया जा सकता है। शौद्धोदनि ने काव्य का लक्षण रस के श्रुतमेषाऽन्यथाकारमक्षराणि कियन्त्यपि । काव्यालङ्कारविद्यायां शौद्धोदनिरसूत्रयत् ।। इस ग्रन्थ का प्रकाशन काव्यमाला सीरिज नं. पचास के अन्तर्गत बम्बई से हुआ। बाद में यह काशी संस्कृत सीरिज वाराणसी से भी प्रकाशित हुआ अलङ्कार शेखर पृष्ठ- दो। आधार पर दिया है और 'व्यक्ति विवेक' के लेखक महिमभट्ट का इन्होंने उल्लेख किया है । इसके अतिरिक्त इनके विवेचन पर 'वाग्भटालङ्कार' का प्रभाव भी परिलक्षित होता है । इस कारण इन कारिकाओं की रचना बारह वीं शताब्दी के उत्तरार्थ से पहले नहीं हुई होगी। केशवमिश्र ने 'अलङ्कार शेखर' की रचना राजा धर्मचन्द्र के पुत्र राजा माणिक्यचन्द्र की प्रेरणा से की थी - काव्यालङ्कारपारङ्गममतिरखिलक्ष्माभृतां चक्रवर्ती । सर्वेषामस्तु काव्ये मतिरतिनुिपणेत्याशये सन्निवेश्य वेदान्तन्यायविद्यापरिचय चतुरं केशवं सन्नियुज्य श्रीमन्माणिक्यचन्द्रः क्षितिपतितिलकोग्रन्थमेनंविधत्ते । उपसंहार में भी इससे सम्बन्धित वर्णन है। इन्होंने अपने प्रेरक माणिक्यचन्द्र की वंशावलि भी प्रस्तुत की है। उसमें काबुल के राजा को जीतने वाले रामचन्द्र उनके पुत्र धर्मचन्द्र व उनके पुत्र माणिक्यचन्द्र का वर्णन है। कनिंघम के अनुसार धर्मचन्द्र का पुत्र माणिक्यचन्द्र कांगड़ा के राज्यसिंहासन पर एक हज़ार पाँच सौ तिरेसठ ई से एक हज़ार पाँच सौ तिहत्तर तक आसीन था । केशव द्वारा प्रदर्शित वंश वृक्ष में इसी माणिक्यचन्द्र के साथ अनुकूलता है । अतः इस ग्रन्थ की रचना का काल भी यही है, यह निश्चित किया जा सकता है। इस आधार पर केशव मिश्र का रचनाकार सोलह वी शती का उत्तरार्ध माना जा सकता है । केशव मिश्र न्याय व वेदान्त के प्रौढ़ विद्वान् थे। इनके द्वारा उद्धृतश्लोक इसका प्रमाण है- 'वेदान्तन्याय विद्या परिचयचतुरं केशवं सन्नियुज्य' । इन्होंने 'अलङ्कारशेखर' ग्रन्थ का निर्माण करनेसे पूर्व सात ग्रन्थों का निर्माण कर लिया था - ग्रन्थाः काव्यकृतां हिताय विहिता ये सप्तपूर्वं मया ते तर्कार्णवसंप्लवव्यसनिभिः शक्याः परं वेदितुम । इत्यालोच्य हृदा मदालसवधूपादारविन्दक्कणन्मञ्जीरध्वनि मञ्जुलोऽयमथुना प्रस्तूयते प्रक्रमः ।। इससे ज्ञात होता है कि ये उत्कृष्ट पाण्डित्य से समन्वित, उत्कृष्ट लेखकीय मेधा से सम्पन्न आचार्य थे, परन्तु इन सात ग्रन्थों के विषय में अधिक ज्ञात नहीं होता । प्रथम रत्ने प्रथम मरीचि । दो. तत्रैव, प्रतावनात्मक प्रथम - एक - सात श्लोक तीन. तत्रैव, द्वितीय श्लोक
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हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला ने कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि अब नारों से काम नहीं चलेगा मेहनत करनी पड़ेगी। उन्होंने शुक्रवार को सिरसा में जिला स्तर के कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इनेलो का कार्यकर्ता बेहद कर्मठ है। आपने आज से भी ज्यादा विपरीत सियासी परिस्थितियों में काम किया है। आज के हालातों से उबरना आपके लिए ज्यादा टेढ़ी खीर नहीं है।
बता दें कि शिक्षक भर्ती घोटाले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में सजा काट रहे ओम प्रकाश चौटाला 14 दिनों की फरलो पर बाहर आए हैं तथा उन्होंने लोकसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद प्रदेशभर में जिला मुख्यालयों पर कार्यकर्ता सम्मेलन कर पार्टी कार्यकर्ताओं में दम भरने की मुहिम आज सिरसा से छेड़ी है।
न्यूज एजेंसी वार्ता के अनुसार, चौटाला ने कहा कि हरियाणा विधानसभा के चुनाव अक्टूबर माह में प्रस्तावित हैं जिनसे पहले मैं आपके बीच आ जाऊंगा। उन्होंने बताया कि आगामी आठ अगस्त को जेबीटी भर्ती घोटाला मामले में उनकी अदालत में पेशी है, जिसमें निर्णय उनके पक्ष में आने की उम्मीद है।
इस सम्मेलन को वरिष्ठ इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला, पूर्व मंत्री भागीराम, विधायक मक्खन लाल सिंगला, पूर्व सांसद चरणजीत सिंह, पूर्व विधायक सीता राम व रानियां के विधायक रामचंद्र कम्बोज ने भी संबोधित किया। इस दौरान कार्यकर्ता लम्बे समय के बाद चौटाला को अपने बीच पाकर गदगद थे।
चौटाला ने कहा कि आप जितनी ज्यादा मेहनत करोगे उतने ही बेहतर परिणाम आएंगे। यदि संगठन मजबूत होगा तो सत्ता आपके कदम चूमेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे पार्टी से नाराज होकर चले गए लोगों को पुचकार कर लाने की कोशिश करें ,वहीं दूसरे दलों के अच्छे लोगों को भी इनेलो में शामिल करें।
उन्होंने कड़े शब्दों में यह भी कहा कि सत्ता की मौज लूटने वाले लोगोंं को पार्टी में कभी शामिल नहीं किया जाएगा। आप लोगों ने दूसरे दलों की सत्ता देख ली है, इससे पहले इनेलो की सरकार भी आपने देखी, इनेलो शासन में जितने जनहित में अच्छे काम किए गए आज भी उनका मुकाबला नहीं है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आपकी सरकार निश्चित तौर पर बनेगी, मेहनत फल देगी यह आपको वायदा कर रहा हूं। अबकी बार सरकार बनने पर चौधरी देवीलाल के सपनों को साकार करेंगे, कोई व्यक्तिगत काम नहीं करेंगे। इनेलो शासन में हरियाणा देश का पहला विकसित राज्य बनेगा। आमजन के लिए रोजी, रोटी, कपड़ा, मकान का प्रबंध सरकारी स्तर पर करेंगे।
पूर्व मुख्यमंंत्री ने हरियाणा में भाजपा सरकार द्वारा खोली गई सीएम विंडो पर चुटकी लेते हुए उसे नकारा करार दिया और मात्र कागजी बताया। चौटाला ने कहा कि इनेलो शासन के समय सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के तहत सरकार स्वयं गांव की दहलीज पर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जाकर आमजन की सुनवाई कर मौके पर ही उसका निराकरण करती थी।
चौटाला ने विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि वे हर विधानसभा में उम्मीदवारी के लिए अच्छे कार्यकर्ताओं के नाम दें बशर्ते वे गरीब हों उनको जिताने के लिए मैं स्वयं कार्यकर्ताओं से धन जुटाने का काम करते हुए उम्मीदवार को विजयश्री दिलवाने का काम करूंगा।
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हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं इंडियन नेशनल लोकदल के सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला ने कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि अब नारों से काम नहीं चलेगा मेहनत करनी पड़ेगी। उन्होंने शुक्रवार को सिरसा में जिला स्तर के कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इनेलो का कार्यकर्ता बेहद कर्मठ है। आपने आज से भी ज्यादा विपरीत सियासी परिस्थितियों में काम किया है। आज के हालातों से उबरना आपके लिए ज्यादा टेढ़ी खीर नहीं है। बता दें कि शिक्षक भर्ती घोटाले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में सजा काट रहे ओम प्रकाश चौटाला चौदह दिनों की फरलो पर बाहर आए हैं तथा उन्होंने लोकसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद प्रदेशभर में जिला मुख्यालयों पर कार्यकर्ता सम्मेलन कर पार्टी कार्यकर्ताओं में दम भरने की मुहिम आज सिरसा से छेड़ी है। न्यूज एजेंसी वार्ता के अनुसार, चौटाला ने कहा कि हरियाणा विधानसभा के चुनाव अक्टूबर माह में प्रस्तावित हैं जिनसे पहले मैं आपके बीच आ जाऊंगा। उन्होंने बताया कि आगामी आठ अगस्त को जेबीटी भर्ती घोटाला मामले में उनकी अदालत में पेशी है, जिसमें निर्णय उनके पक्ष में आने की उम्मीद है। इस सम्मेलन को वरिष्ठ इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला, पूर्व मंत्री भागीराम, विधायक मक्खन लाल सिंगला, पूर्व सांसद चरणजीत सिंह, पूर्व विधायक सीता राम व रानियां के विधायक रामचंद्र कम्बोज ने भी संबोधित किया। इस दौरान कार्यकर्ता लम्बे समय के बाद चौटाला को अपने बीच पाकर गदगद थे। चौटाला ने कहा कि आप जितनी ज्यादा मेहनत करोगे उतने ही बेहतर परिणाम आएंगे। यदि संगठन मजबूत होगा तो सत्ता आपके कदम चूमेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि वे पार्टी से नाराज होकर चले गए लोगों को पुचकार कर लाने की कोशिश करें ,वहीं दूसरे दलों के अच्छे लोगों को भी इनेलो में शामिल करें। उन्होंने कड़े शब्दों में यह भी कहा कि सत्ता की मौज लूटने वाले लोगोंं को पार्टी में कभी शामिल नहीं किया जाएगा। आप लोगों ने दूसरे दलों की सत्ता देख ली है, इससे पहले इनेलो की सरकार भी आपने देखी, इनेलो शासन में जितने जनहित में अच्छे काम किए गए आज भी उनका मुकाबला नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आपकी सरकार निश्चित तौर पर बनेगी, मेहनत फल देगी यह आपको वायदा कर रहा हूं। अबकी बार सरकार बनने पर चौधरी देवीलाल के सपनों को साकार करेंगे, कोई व्यक्तिगत काम नहीं करेंगे। इनेलो शासन में हरियाणा देश का पहला विकसित राज्य बनेगा। आमजन के लिए रोजी, रोटी, कपड़ा, मकान का प्रबंध सरकारी स्तर पर करेंगे। पूर्व मुख्यमंंत्री ने हरियाणा में भाजपा सरकार द्वारा खोली गई सीएम विंडो पर चुटकी लेते हुए उसे नकारा करार दिया और मात्र कागजी बताया। चौटाला ने कहा कि इनेलो शासन के समय सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के तहत सरकार स्वयं गांव की दहलीज पर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जाकर आमजन की सुनवाई कर मौके पर ही उसका निराकरण करती थी। चौटाला ने विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि वे हर विधानसभा में उम्मीदवारी के लिए अच्छे कार्यकर्ताओं के नाम दें बशर्ते वे गरीब हों उनको जिताने के लिए मैं स्वयं कार्यकर्ताओं से धन जुटाने का काम करते हुए उम्मीदवार को विजयश्री दिलवाने का काम करूंगा।
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इंडियन वुमन हॉकी टीम की पूर्व कप्तान एल्वेरा ब्रिटो का मंगलवार को यहां बढ़ती आयु से जुड़ी समस्याओं की वजह से देहांत हो गया है। वह 81 साल की थी। तीन लोकप्रिय ब्रिटो बहनों (रीता और मेइ दो अन्य बहनें) में सबसे बड़ी एल्वेरा का 1960 से 1967 तक घरेलू प्रतियोगिताओं में दबदबा देखने के लिए मिला और उनकी मौजूदगी वाली कर्नाटक की टीम ने इस बीच 7 राष्ट्रीय खिताब भी जाट गए थे। एल्वेरा ने आस्ट्रेलिया, श्रीलंका और जापान के विरुद्ध इंडिया का प्रतिनिधित्व भी किया।
अल्वेरा 1965 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित होने वाली सिर्फ दूसरी वुमन हॉकी खिलाड़ी बन गई थी । उनसे पहले एने लुम्सडेन (1961) को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है। एल्वेरा ने भी अपनी बहनों की तरह विवाह नहीं किया। हॉकी इंडिया ने एल्वेरा के निधन पर शोक व्यक्त किया है।
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष ज्ञानेंद्रो निंगोमबम ने बयान में बोला है- एल्वेरा ब्रिटो के निधन के बारे में जानकर दुख को झेलना पड़ा है। वह अपने वक़्त की खिलाडिय़ों से आगे थी और महिला हॉकी में उन्होंने इतना कुछ प्राप्त किया तथा राज्य में प्रशासक के रूप में खेल की सेवा करना जारी रखा। उन्होंने बोला है कि हॉकी इंडिया और पूरे हॉकी समुदाय की ओर से हम उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं।
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इंडियन वुमन हॉकी टीम की पूर्व कप्तान एल्वेरा ब्रिटो का मंगलवार को यहां बढ़ती आयु से जुड़ी समस्याओं की वजह से देहांत हो गया है। वह इक्यासी साल की थी। तीन लोकप्रिय ब्रिटो बहनों में सबसे बड़ी एल्वेरा का एक हज़ार नौ सौ साठ से एक हज़ार नौ सौ सरसठ तक घरेलू प्रतियोगिताओं में दबदबा देखने के लिए मिला और उनकी मौजूदगी वाली कर्नाटक की टीम ने इस बीच सात राष्ट्रीय खिताब भी जाट गए थे। एल्वेरा ने आस्ट्रेलिया, श्रीलंका और जापान के विरुद्ध इंडिया का प्रतिनिधित्व भी किया। अल्वेरा एक हज़ार नौ सौ पैंसठ में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित होने वाली सिर्फ दूसरी वुमन हॉकी खिलाड़ी बन गई थी । उनसे पहले एने लुम्सडेन को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है। एल्वेरा ने भी अपनी बहनों की तरह विवाह नहीं किया। हॉकी इंडिया ने एल्वेरा के निधन पर शोक व्यक्त किया है। हॉकी इंडिया के अध्यक्ष ज्ञानेंद्रो निंगोमबम ने बयान में बोला है- एल्वेरा ब्रिटो के निधन के बारे में जानकर दुख को झेलना पड़ा है। वह अपने वक़्त की खिलाडिय़ों से आगे थी और महिला हॉकी में उन्होंने इतना कुछ प्राप्त किया तथा राज्य में प्रशासक के रूप में खेल की सेवा करना जारी रखा। उन्होंने बोला है कि हॉकी इंडिया और पूरे हॉकी समुदाय की ओर से हम उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं।
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राज्य-भक्त ( १ )
संध्या का समय था। लखनऊ के वादशाह नासिरुद्दीन अपने मुसाहूवों और दरवारियों के साथ बाग़ की सैर कर रहे थे। उनके सिर पर रत्नजटित मुकुट को जगह अंगरेज़ी टोपी थी । वस्त्र भी अंगरेजी ही थे । मुसाहवों में पाँच अंगरेज़ थे । उनमें से एक के कंधे पर सिर रखकर बादशाह चल रहे थे । तीन-चार हिंदुस्थानी भी थे । उनमें एक राजा बख्तावरसिंह थे । वहु बादशाही सेना के अध्यक्ष थे। उन्हें सब लोग 'जेनरल' कहा करते थे । वह अधेड़ आदमी थे। शरीर खूब गठा हुआ था। लखनवी पहनावा उन पर बहुत सजता था । मुख से विचारशीलता झलक रही थी। दूसरे महाशय का नाम रोशनुद्दीला था। यह राज्य के प्रधान मंत्री थे। बड़ी-बड़ी मूछें और नाटा ोल था, जिसे ऊंचा करने के लिये वह तनकर चलते थे । नेत्रों से गर्व टपक था। शेष लोगों में एक कोतवाल था, और दो बादशाह के रक्षक यद्यपि अभी १९वीं शताब्दी का प्रारंभ ही था, पर वादशाह ने अँगरेज़ी रहनसहन अख्तियार कर ली थी । भोजन भी प्रायः अंगरेज़ी ही करते थे । बॅगरजो पर उनका असीम विश्वास था । वह सदैव उनका पक्ष लिया करते । मजाल न थी कि कोई बड़े से बड़ा राजा या राज-कर्मचारी किसी अंगरेज से बरावरी करने का साहस कर सके ।
अगर किसी में यह हिम्मत थी, तो वह राजा बख्तावरसिंह थे । उनसे कंपनी का बढ़ता हुआ अधिकार न देखा जाता था; कंपनी की उस सेना की संख्या, जिसे उसने अवध के राज्य की रक्षा के लिये लखनऊ में नियुक्त किया, था, दिन-दिन बढ़ती जाती थी। उसी प्रमाण से सेना का व्यय भी बढ़ रहा था । राज दरवार उसे चुका न सकने के कारण कंपनी का ऋणी होता जाता था। वादशाही सेना की दशा होन-से-होनतर होती जाती थी । उसमें न संगठन था, न वल । वरसों तक सिपाहियों का वेतन न मिलता । शस्त्र सभी
पुराने ढंग के वरदी फटी हुई, कवायद का नाम नहीं । कोई उनका पूछनेवाला न था। अगर राजा बख्तावरसिंह वेतन वृद्धिया नए शस्त्रों के संबंध में कोई प्रयत्न करते, तो कपनी का रेजीडेंट उसका घोर विरोध और राज्य पर विद्रोहात्मक शक्ति संचार का दोपारोप करता। उधर से डॉट पड़ती, तो वादगाह अपना गुस्मा राजा साहब पर उतारते । वादशाह के सभी अँगरेज मुसाहब राजा साहब से शकित रहते, और उनको जड़ सोदने का प्रयास करते थे। पर वह राज्य का सेवक एक ओर से अवहेलना और दूसरी ओर से घोर विरोध सहते हुए अपने कर्तव्य का पालन करता जाता था। मज़ा यह कि सेना भी उनसे सतुष्ट न थो । सेना मे अधिकाम लखनऊ के शोहदे और गुडे भरे हुए थे । राजा साहब जब उन्हें हटाकर अच्छे-अच्छे जवान भरती करने की चेष्टा करते, तो सारी सेना में हाहाकार मच जाता। लोगों को शंका होती कि यह राजपूतों को सेना बनाकर कही राज्य हो पर तो हाय नहीं बढ़ाना चाहते ? इसलिये मुसलमान भी उनसे बदगुमान रहते थे । राजा साहब के मन में बार-बार प्रेरणा होती कि इस पद को त्याग चले जायँ, पर यह भय उन्हें रोकता था कि मेरे हटते ही अंगरेज़ो की बन आवेगी, और बादशाह उनके हाथों में कठपुतली बन जायेंगे, रही-सही सेना के साथ अवधराज्य का अस्तित्व भी मिट जायगा । अतएव इतनी कठिनाइयों के होते हुए भो, चारों ओर वर-विरोध से घिरे होने पर भी, वह अपने पद से हटने का निश्चय न कर सकते थे। सबसे कठिन समस्या यह थी कि रोशनुद्दीला भी राजा साहब से खार खाता था । उसे सदैव शका रहती थी कि यह मराठी से मंत्री करके अवध-राज्य को मिटाना चाहते हैं । इसलिये वह भी राजा साहब के प्रत्येक कार्य में बाधा डालता रहता । उसे अब भी आशा थी कि अवध का मुसलमानी राज्य अगर जीवित रह सकता है, तो अंगरेज़ी के संरक्षण में, अन्यथा वह अवश्य हिंदुओं की बढ़ती हुई शक्ति का ग्रास बन जायगा ।
वास्तव में वख्तावरसिंह की दशा अत्यत करुण थी । वह अपनी चतुराई से जिह्वा की भांति दांतों के बीच में पड़े हुए अपना काम किए जाते थे । थों तो वह स्वभाव से अक्खड़ थे, पर अपना काम निकालने के लिये मधुरता और मृदुलता, शील और विनय का आवाहन भी करते रहते थे। इससे उनके
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राज्य-भक्त संध्या का समय था। लखनऊ के वादशाह नासिरुद्दीन अपने मुसाहूवों और दरवारियों के साथ बाग़ की सैर कर रहे थे। उनके सिर पर रत्नजटित मुकुट को जगह अंगरेज़ी टोपी थी । वस्त्र भी अंगरेजी ही थे । मुसाहवों में पाँच अंगरेज़ थे । उनमें से एक के कंधे पर सिर रखकर बादशाह चल रहे थे । तीन-चार हिंदुस्थानी भी थे । उनमें एक राजा बख्तावरसिंह थे । वहु बादशाही सेना के अध्यक्ष थे। उन्हें सब लोग 'जेनरल' कहा करते थे । वह अधेड़ आदमी थे। शरीर खूब गठा हुआ था। लखनवी पहनावा उन पर बहुत सजता था । मुख से विचारशीलता झलक रही थी। दूसरे महाशय का नाम रोशनुद्दीला था। यह राज्य के प्रधान मंत्री थे। बड़ी-बड़ी मूछें और नाटा ोल था, जिसे ऊंचा करने के लिये वह तनकर चलते थे । नेत्रों से गर्व टपक था। शेष लोगों में एक कोतवाल था, और दो बादशाह के रक्षक यद्यपि अभी उन्नीसवीं शताब्दी का प्रारंभ ही था, पर वादशाह ने अँगरेज़ी रहनसहन अख्तियार कर ली थी । भोजन भी प्रायः अंगरेज़ी ही करते थे । बॅगरजो पर उनका असीम विश्वास था । वह सदैव उनका पक्ष लिया करते । मजाल न थी कि कोई बड़े से बड़ा राजा या राज-कर्मचारी किसी अंगरेज से बरावरी करने का साहस कर सके । अगर किसी में यह हिम्मत थी, तो वह राजा बख्तावरसिंह थे । उनसे कंपनी का बढ़ता हुआ अधिकार न देखा जाता था; कंपनी की उस सेना की संख्या, जिसे उसने अवध के राज्य की रक्षा के लिये लखनऊ में नियुक्त किया, था, दिन-दिन बढ़ती जाती थी। उसी प्रमाण से सेना का व्यय भी बढ़ रहा था । राज दरवार उसे चुका न सकने के कारण कंपनी का ऋणी होता जाता था। वादशाही सेना की दशा होन-से-होनतर होती जाती थी । उसमें न संगठन था, न वल । वरसों तक सिपाहियों का वेतन न मिलता । शस्त्र सभी पुराने ढंग के वरदी फटी हुई, कवायद का नाम नहीं । कोई उनका पूछनेवाला न था। अगर राजा बख्तावरसिंह वेतन वृद्धिया नए शस्त्रों के संबंध में कोई प्रयत्न करते, तो कपनी का रेजीडेंट उसका घोर विरोध और राज्य पर विद्रोहात्मक शक्ति संचार का दोपारोप करता। उधर से डॉट पड़ती, तो वादगाह अपना गुस्मा राजा साहब पर उतारते । वादशाह के सभी अँगरेज मुसाहब राजा साहब से शकित रहते, और उनको जड़ सोदने का प्रयास करते थे। पर वह राज्य का सेवक एक ओर से अवहेलना और दूसरी ओर से घोर विरोध सहते हुए अपने कर्तव्य का पालन करता जाता था। मज़ा यह कि सेना भी उनसे सतुष्ट न थो । सेना मे अधिकाम लखनऊ के शोहदे और गुडे भरे हुए थे । राजा साहब जब उन्हें हटाकर अच्छे-अच्छे जवान भरती करने की चेष्टा करते, तो सारी सेना में हाहाकार मच जाता। लोगों को शंका होती कि यह राजपूतों को सेना बनाकर कही राज्य हो पर तो हाय नहीं बढ़ाना चाहते ? इसलिये मुसलमान भी उनसे बदगुमान रहते थे । राजा साहब के मन में बार-बार प्रेरणा होती कि इस पद को त्याग चले जायँ, पर यह भय उन्हें रोकता था कि मेरे हटते ही अंगरेज़ो की बन आवेगी, और बादशाह उनके हाथों में कठपुतली बन जायेंगे, रही-सही सेना के साथ अवधराज्य का अस्तित्व भी मिट जायगा । अतएव इतनी कठिनाइयों के होते हुए भो, चारों ओर वर-विरोध से घिरे होने पर भी, वह अपने पद से हटने का निश्चय न कर सकते थे। सबसे कठिन समस्या यह थी कि रोशनुद्दीला भी राजा साहब से खार खाता था । उसे सदैव शका रहती थी कि यह मराठी से मंत्री करके अवध-राज्य को मिटाना चाहते हैं । इसलिये वह भी राजा साहब के प्रत्येक कार्य में बाधा डालता रहता । उसे अब भी आशा थी कि अवध का मुसलमानी राज्य अगर जीवित रह सकता है, तो अंगरेज़ी के संरक्षण में, अन्यथा वह अवश्य हिंदुओं की बढ़ती हुई शक्ति का ग्रास बन जायगा । वास्तव में वख्तावरसिंह की दशा अत्यत करुण थी । वह अपनी चतुराई से जिह्वा की भांति दांतों के बीच में पड़े हुए अपना काम किए जाते थे । थों तो वह स्वभाव से अक्खड़ थे, पर अपना काम निकालने के लिये मधुरता और मृदुलता, शील और विनय का आवाहन भी करते रहते थे। इससे उनके
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Jamshedpur (Dharmendra Kumar) : झारखंड शिक्षा परियोजना, पूर्वी सिंहभूम की ओर से सोमवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय अंतर विद्यालय प्रतियोगिता का आयोजन कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, पोटका में किया गया. इस प्रतियोगिता में नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय गोलमुरी एवं लखाईडीह के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया. प्रतियोगिता का उद्घाटन सोमबारी सबर ने किया. प्रतियोगिता में 13 इवेंट कराये गये. इसमें विजेताओं को पुरस्कृत किया गया.
क्विज प्रतियोगिता में कुंडिया सामद (एनएससीबीएवी, लखाईडीह) एवं करण किस्कु (एनएससीबीएवी गोलमुरी), निबंध लेखन प्रतियोगिता में पुदु हेम्ब्रम (एनएससीबीएवी गोलमुरी) एवं शिबू मुंडा (एनएससीबीएवी लखाईडीह), चित्रकला प्रतियोगिता में सागेन हेम्ब्रम (एनएससीबीएवी लखाईडीह) एवं बबलू सोरेन (एनएससीबीएवी गोलमुरी) ने पुरस्कार जीते. रंगोली प्रतियोगिता में हरि सबर, चेतन पूर्ति एवं नारायण मुर्मू (एनएससीबीएवी लखाईडीह) एवं रेशमा कुमारी, निशाद हांसदा एवं सुगीता सोरेन (एनएससीबीएवी गोलमुरी), 100 मीटर दौड़ में अमित हेम्ब्रम (एनएससीबीएवी लखाईडीह) एवं गनी पूर्ति (एनएससीबीएवी गोलमुरी), 200 मीटर दौड़ में आशिष मुर्मू (एनएससीबीएभी लखाईडीह) एवं जयंत सरदार (एनएससीबीएभी गोलमुरी) ने पुरस्कार जीते.
नृत्य प्रतियोगिता में एनएससीबीएवी लखाईडीह एवं एनएससीबीएवी गोलमुरी, बैंड प्रतियोगिता एनएससीबीएवी लखाईडीह, 100 मीटर दौड़ बालिका मे सांझली माझी (केजीबीभी पोटका) एवं सोनाली हांसदा (एनएससीबीएवी गोलमुरी) ने पुरस्कार जीते. 200 मीटर दौड़ बालिका के लिए संजू मुर्मू (केजीबीवी पोटका) एवं सिनगो मार्डी (एनएससीबीएवी गोलमुरी), तीन पैर दौड़ में बारमनी सरदार-भारती माझी (केजीबीभी पोटका) एवं मिरनमाई जोजो (एनएससीबीएभी गोलमुरी) एवं चॉकलेट रेस में सेफाली सरदार (केजीबीवी पोटका) एवं सेफाली हेम्ब्रम (एनएससीबीएवी गोलमुरी) को क्रमशः प्रथम एवं द्वितीय स्थान मिला. इस अवसर पर बीइइओ विनय कुमार दुबे, पोटका थाना प्रभारी रविंद्र मुंडा, एपीओ बिंदु झा, बीपीओ बी नंदी एवं जयश्री बोयपाई, सोनु महतो, वार्डेन रूमा हालदार, ज्योति सागर, ललिता कुमारी आदि उपस्थित थे.
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Jamshedpur : झारखंड शिक्षा परियोजना, पूर्वी सिंहभूम की ओर से सोमवार को नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय अंतर विद्यालय प्रतियोगिता का आयोजन कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, पोटका में किया गया. इस प्रतियोगिता में नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय गोलमुरी एवं लखाईडीह के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया. प्रतियोगिता का उद्घाटन सोमबारी सबर ने किया. प्रतियोगिता में तेरह इवेंट कराये गये. इसमें विजेताओं को पुरस्कृत किया गया. क्विज प्रतियोगिता में कुंडिया सामद एवं करण किस्कु , निबंध लेखन प्रतियोगिता में पुदु हेम्ब्रम एवं शिबू मुंडा , चित्रकला प्रतियोगिता में सागेन हेम्ब्रम एवं बबलू सोरेन ने पुरस्कार जीते. रंगोली प्रतियोगिता में हरि सबर, चेतन पूर्ति एवं नारायण मुर्मू एवं रेशमा कुमारी, निशाद हांसदा एवं सुगीता सोरेन , एक सौ मीटर दौड़ में अमित हेम्ब्रम एवं गनी पूर्ति , दो सौ मीटर दौड़ में आशिष मुर्मू एवं जयंत सरदार ने पुरस्कार जीते. नृत्य प्रतियोगिता में एनएससीबीएवी लखाईडीह एवं एनएससीबीएवी गोलमुरी, बैंड प्रतियोगिता एनएससीबीएवी लखाईडीह, एक सौ मीटर दौड़ बालिका मे सांझली माझी एवं सोनाली हांसदा ने पुरस्कार जीते. दो सौ मीटर दौड़ बालिका के लिए संजू मुर्मू एवं सिनगो मार्डी , तीन पैर दौड़ में बारमनी सरदार-भारती माझी एवं मिरनमाई जोजो एवं चॉकलेट रेस में सेफाली सरदार एवं सेफाली हेम्ब्रम को क्रमशः प्रथम एवं द्वितीय स्थान मिला. इस अवसर पर बीइइओ विनय कुमार दुबे, पोटका थाना प्रभारी रविंद्र मुंडा, एपीओ बिंदु झा, बीपीओ बी नंदी एवं जयश्री बोयपाई, सोनु महतो, वार्डेन रूमा हालदार, ज्योति सागर, ललिता कुमारी आदि उपस्थित थे.
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रजनीश जैन एटा। एटा-अवागढ़ के बीच बसुंधरा के निकट 9 जनवरी की रात हीरो डीलर दिनेश अग्रवाल के अपहरण की योजना शातिर शीलेन्द्र उर्फ लुक्का ने बनाई थी। इस षडयंत्र के मास्टरमाइंड लुक्का को अवागढ़ पुलिस ने मंगलवार की रात गिरफ्तार कर लिया। बीती 9 जनवरी की रात हीरो डीलर दिनेश अग्रवाल अपनी बोलेरो गाडी से अवागढ़ जा रहे थे, तभी बसुंधरा के निकट बाइकों पर सवार 10 बदमाशों ने अपहरण के उद्देश्य से गाडी रोकने का फ्रयास किया था। चालक ने जब गाडी नहीं रोकी तो बदमाशों ने फायरिंग कर दी। जिससे एक गोली दिनेश अग्रवाल के पैर में लगी थी। अपहरण में सफल न होने पर बदमाश भाग निकले। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए तभी से जाल बिछाए हुए थी। इस घटना के दो आरोपी सतेन्द्र और शीलेन्द्र निवासी नगला सेवा पुलिस की पकड में पहले ही आ चुके थे। इसके बाद थानाध्यक्ष अवागढ़ देवेन्द्र शंकर पांडेय और फोर्स ने गिरोह के सरगना शीलेन्द्र उर्फ लुक्का पुत्र बलवीर सिंह निवासी गूदरगंज को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना में शीलेन्द्र नाम के दो आरोपी पकडे जा चुके हैं। नगला सेवा के शीलेन्द्र को पहले ही पकड लिया था। जबकि गूदरगंज निवासी शीलेन्द्र को मंगलवार की रात पकडा गया है। पुलिस ने लुक्का की निशानदेही पर वारदात में फ्रयुक्त तमंचा भी बरामद कर लिया। आरोपी शीलेन्द्र ने 9 जनवरी को एक बाइक खरीदी थी, जिसकी कीमत से कम रुपए डीलर को दिए थे। शेष पैसे बाद में देने को कहा था। जिसे डीलर ने नहीं माना। इस बात को लेकर विवाद हुआ। शीलेन्द्र ने नगला सेवा और गूदरगंज गांवों के 10 साथियों को एटा बुला लिया और उन्हें एटा-आगरा मार्ग पर लगा दिया। शीलेन्द्र घटना वाले दिन मोबाइल पर दिनेश की लोकेशन बताता रहा। दिनेश अग्रवाल बोलेरो लेकर अवागढ़ की ओर चले तो शीलेन्द्र ने भी पीछा शुरू कर दिया और वारदात को अंजाम दे डाला। हीरो डीलर का लोकेशन देने वाले शातिर बदमाश शीलेन्द्र से एक चूक हुई थी, जिसकी वजह से बदमाशों की योजना ढेर हो गई। हुआ ये कि डीलर दिनेश अग्रवाल ने अपनी फर्म से चलने के बाद एटा में रोडवेज वर्कशॉप पर कुछ देर के लिए अपनी गाडी रोक दी थी। शीलेन्द्र बाइक से पीछा कर रहा था जो यह नहीं भांप सका कि बोलेरो रुक गई है और उसने अपने साथियों को बताया कि बोलेरो उसकी आंखों से ओझल हो गई है, मगर आगरा की और दौड रही है। शीलेन्द्र के साथी गाडी की तलाश में भटक गए और एक जगह एकत्रित नहीं हो पाए। यही कारण था कि जब गाडी पर फायरिंग की गई तो मात्र बाइक सवार तीन बदमाश ही शामिल रहे। क्षेत्राधिकारी जलेसर विजय कपिल ने बताया कि हीरो डीलर के अपहरण का फ्रयास करने वाले गिरोह के सरगना शीलेन्द्र उर्फ लुक्का पर कासगंज, हाथरस, मलावन, कोतवाली नगर, निधौलीकलां आदि थाना क्षेत्रों में लूट, हत्या, डकैती के डेढ़ दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। इस गिरोह में जितेन्द्र उपेन्द्र, चमनू, पुष्पेन्द्र, बच्चन, दिनेश आदि बदमाश भी शामिल थे।
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रजनीश जैन एटा। एटा-अवागढ़ के बीच बसुंधरा के निकट नौ जनवरी की रात हीरो डीलर दिनेश अग्रवाल के अपहरण की योजना शातिर शीलेन्द्र उर्फ लुक्का ने बनाई थी। इस षडयंत्र के मास्टरमाइंड लुक्का को अवागढ़ पुलिस ने मंगलवार की रात गिरफ्तार कर लिया। बीती नौ जनवरी की रात हीरो डीलर दिनेश अग्रवाल अपनी बोलेरो गाडी से अवागढ़ जा रहे थे, तभी बसुंधरा के निकट बाइकों पर सवार दस बदमाशों ने अपहरण के उद्देश्य से गाडी रोकने का फ्रयास किया था। चालक ने जब गाडी नहीं रोकी तो बदमाशों ने फायरिंग कर दी। जिससे एक गोली दिनेश अग्रवाल के पैर में लगी थी। अपहरण में सफल न होने पर बदमाश भाग निकले। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए तभी से जाल बिछाए हुए थी। इस घटना के दो आरोपी सतेन्द्र और शीलेन्द्र निवासी नगला सेवा पुलिस की पकड में पहले ही आ चुके थे। इसके बाद थानाध्यक्ष अवागढ़ देवेन्द्र शंकर पांडेय और फोर्स ने गिरोह के सरगना शीलेन्द्र उर्फ लुक्का पुत्र बलवीर सिंह निवासी गूदरगंज को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना में शीलेन्द्र नाम के दो आरोपी पकडे जा चुके हैं। नगला सेवा के शीलेन्द्र को पहले ही पकड लिया था। जबकि गूदरगंज निवासी शीलेन्द्र को मंगलवार की रात पकडा गया है। पुलिस ने लुक्का की निशानदेही पर वारदात में फ्रयुक्त तमंचा भी बरामद कर लिया। आरोपी शीलेन्द्र ने नौ जनवरी को एक बाइक खरीदी थी, जिसकी कीमत से कम रुपए डीलर को दिए थे। शेष पैसे बाद में देने को कहा था। जिसे डीलर ने नहीं माना। इस बात को लेकर विवाद हुआ। शीलेन्द्र ने नगला सेवा और गूदरगंज गांवों के दस साथियों को एटा बुला लिया और उन्हें एटा-आगरा मार्ग पर लगा दिया। शीलेन्द्र घटना वाले दिन मोबाइल पर दिनेश की लोकेशन बताता रहा। दिनेश अग्रवाल बोलेरो लेकर अवागढ़ की ओर चले तो शीलेन्द्र ने भी पीछा शुरू कर दिया और वारदात को अंजाम दे डाला। हीरो डीलर का लोकेशन देने वाले शातिर बदमाश शीलेन्द्र से एक चूक हुई थी, जिसकी वजह से बदमाशों की योजना ढेर हो गई। हुआ ये कि डीलर दिनेश अग्रवाल ने अपनी फर्म से चलने के बाद एटा में रोडवेज वर्कशॉप पर कुछ देर के लिए अपनी गाडी रोक दी थी। शीलेन्द्र बाइक से पीछा कर रहा था जो यह नहीं भांप सका कि बोलेरो रुक गई है और उसने अपने साथियों को बताया कि बोलेरो उसकी आंखों से ओझल हो गई है, मगर आगरा की और दौड रही है। शीलेन्द्र के साथी गाडी की तलाश में भटक गए और एक जगह एकत्रित नहीं हो पाए। यही कारण था कि जब गाडी पर फायरिंग की गई तो मात्र बाइक सवार तीन बदमाश ही शामिल रहे। क्षेत्राधिकारी जलेसर विजय कपिल ने बताया कि हीरो डीलर के अपहरण का फ्रयास करने वाले गिरोह के सरगना शीलेन्द्र उर्फ लुक्का पर कासगंज, हाथरस, मलावन, कोतवाली नगर, निधौलीकलां आदि थाना क्षेत्रों में लूट, हत्या, डकैती के डेढ़ दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। इस गिरोह में जितेन्द्र उपेन्द्र, चमनू, पुष्पेन्द्र, बच्चन, दिनेश आदि बदमाश भी शामिल थे।
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उत्सवमें सम्मिलित हुई थीं । महाराजने उन समस्त । प्रकट होकर मुझे प्रत्यक्ष दर्शन न दें। समागत अतिथियोंके लिये ठहरनेके स्थान, शय्या, यों कहकर राजाओंमें श्रेष्ठ इन्द्रद्युम्नने बहुत सा
भाँति-भाँतिके भोज्य पदार्थ, महीन चावल, ईखका सुवर्ण, करोड़ोंके आभूषण, लाखों हाथी-घोड़े, रस और गोरस आदि प्रदान किये । उस महायज्ञमें जो भी श्रेष्ठ ब्राह्मण पधारे, उन सबको राजाने स्वागतपूर्वक ग्रहण किया। महातेजस्वी नरेशने दम्भ छोड़कर स्वयं ही सब ब्राह्मणोंका सब तरहसे स्वागत-सत्कार किया। तत्पश्चात् शिल्पियोंने अपनी शिल्प-रचनाका कार्य पूरा करके राजाको यज्ञमण्डप तैयार हो जानेकी सूचना दी। यह सुनकर मन्त्रियोंसहित राजा बहुत प्रसन्न हुए। उनके शरीरमें रोमाञ्च हो आया। यज्ञमण्डप तैयार हो जानेपर महाराजने ब्राह्मण भोजनका कार्य आरम्भ कराया। प्रतिदिन जब एक लाख ब्राह्मण भोजन कर लेते, तब बारंबार मेघगर्जनाके समान गम्भीर स्वरमें दुन्दुभिकी ध्वनि होने लगती थी। इस प्रकार राजाके यज्ञकी वृद्धि होने लगी। उसमें अन्नका इतना दान किया गया, जिसकी कहीं
उपमा नहीं थी। लोगोंने देखा वहाँ दूध, दही और अरबों बैल तथा सुवर्णमय सींगोंवाली दुधारू घीकी नदियाँ बह रही हैं । भिन्न-भिन्न जनपदोंके गौएँ, जिनके साथ काँसेके दुग्धपात्र थे, वेदवेत्ता साथ समूचे जम्बूद्वीपके लोग वहाँ जुटे थे। वहाँ ब्राह्मणोंको दान किये। इसके सिवा बहुमूल्य वस्त्र, कितने ही सहस्र पुरुष बहुत से पात्र लेकर । हरिणके बालोंसे बने हुए बिछौने, मूँगा, मणि तथा इधर-उधरसे एकत्र हुए थे। राजाके अनुगामी हीरा, पुखराज, माणिक और मोती आदि भाँतिपुरुष ब्राह्मणोंको तरह-तरहके अनुपान और राजाओंके । भाँतिके रत्न भी दिये । उस अश्वमेध यज्ञमें याचकों उपभोगमें आनेवाले भोज्य पदार्थ परोसते थे । और ब्राह्मणोंको भाँति-भाँतिके भक्ष्य-भोज्य पदार्थ यज्ञमें आये हुए वेदवेत्ता ब्राह्मणों तथा राजाओंका प्रदान किये गये । मीठे पूर्व तथा स्वादिष्ट अन्न महाराजने पूर्ण स्वागत-सत्कार किया। इसके बाद सब जीवोंकी तृप्तिके लिये बारंबार दिये जाते थे। उन्होंने राजकुमारोंसे कहा। वहाँ दिये गये तथा दिये जानेवाले धनका कभी राजा बोले - राजपुत्रो ! अब समस्त शुभ अन्त नहीं होता था। इस प्रकार उस महायज्ञको लक्षणोंसे युक्त श्रेष्ठ अश्व ले आओ और उसे देखकर देवता, दैत्य, चारण, गन्धर्व, अप्सरा, समूची पृथ्वीपर घुमाओ । विद्वान् और धर्मात्मा । सिद्ध, ऋषि और प्रजापति - सब के सब बड़े ब्राह्मण यहाँ होम करें और यह यज्ञ उस समयतक विस्मयमें पड़ गये । उस श्रेष्ठ यज्ञकी सफलता चालू रहे, जबतक कि भगवान् इसके समीप । देख पुरोहित, मन्त्री तथा राजा - सबको बड़ी
* राजा इन्द्रद्युम्नके द्वारा भगवान् श्रीविष्णुकी स्तुति
प्रसन्नता हुई। वहाँ कोई भी मनुष्य मलिन, दीन । दंशन, ग्रहपीड़ा अथवा विषका कष्ट नहीं हुआ। अथवा भूखा नहीं रहा। उस यज्ञमें किसी प्रकारका । इस प्रकार राजाने अश्वमेध-यज्ञ तथा पुरुषोत्तमप्रासादउपद्रव, ग्लानि, आधि, व्याधि, अकाल मृत्यु, निर्माणका कार्य विधिपूर्वक पूर्ण किया ।
राजा इन्द्रद्युम्नके द्वारा भगवान् श्रीविष्णुकी स्तुति
ब्रह्माजी कहते हैं - अश्वमेध यज्ञके अनुष्ठान । मृत्युरूपी संसार - सागरसे मेरा उद्धार कीजिये । और प्रासाद-निर्माणका कार्य पूर्ण हो जानेपर राजा पुरुषोत्तम ! आपका स्वरूप निर्मल आकाशके इन्द्रद्युम्नके मनमें दिन-रात प्रतिमाके लिये चिन्ता । समान है। आपको नमस्कार है। सबको अपनी रहने लगी । वे सोचने लगे- कौन-सा उपाय करूँ, ओर खींचनेवाले संकर्षण! आपको प्रणाम है। जिससे सृष्टि, पालन और संहार करनेवाले लोकपावन धरणीधर ! आप मेरी रक्षा कीजिये । हेमगर्भ भगवान् पुरुषोत्तमका मुझे दर्शन हो । इसी चिन्तामें । (शालग्रामशिला) की - सी आभावाले प्रभो! आपको निमग्न रहनेके कारण उन्हें न रातमें नींद आती न नमस्कार है। मकरध्वज ! आपको प्रणाम है। दिनमें। वे न तो भाँति-भाँतिके भोग भोगते और रतिकान्त ! आपको नमस्कार है। शम्बरासुरका न स्नान एवं शृङ्गार ही करते थे । वाद्य, सुगन्ध, संहार करनेवाले प्रद्युम्न ! आप मेरी रक्षा कीजिये । संगीत, अङ्गराग, इन्द्रनील, महानील, पद्मराग, भगवन् ! आपका श्रीअङ्ग अञ्जनके समान श्याम सोना, चाँदी, हीरा, स्फटिक आदि मणियाँ, राग, है । भक्तवत्सल ! आपको नमस्कार है। अनिरुद्ध ! अर्थ, काम, वन्य पदार्थ अथवा दिव्य वस्तुओंसे आपको प्रणाम है । आप मेरी रक्षा करें और भी उनके मनको संतोष नहीं होता था । पत्थर, वरदायक बनें । सम्पूर्ण देवताओंके निवासस्थान ! मिट्टी और लकड़ीमेंसे इस पृथ्वीपर सर्वोत्तम वस्तु आपको नमस्कार है। देवप्रिय ! आपको प्रणाम कौन है ? किससे भगवान् विष्णुकी प्रतिमाका है । नारायण ! आपको नमस्कार है। आप मुझ निर्माण ठीक हो सकता है ? इस प्रकारकी चिन्तामें शरणागतकी रक्षा कीजिये । बलवानों में श्रेष्ठ बलराम ! पड़े-पड़े उन्होंने पाञ्चरात्रकी विधिसे भगवान् आपको प्रणाम है । लाङ्गलायुध ! आपको नमस्कार पुरुषोत्तमका पूजन किया और अन्तमें इस प्रकार है । चतुर्मुख ! जगद्धाम ! प्रपितामह ! मेरी रक्षा स्तवन आरम्भ कियाकीजिये । नील मेघके समान आभावाले घनश्याम ! 'वासुदेव! आपको नमस्कार है। आप मोक्षके आपको नमस्कार है । देवपूजित परमेश्वर! आपको कारण हैं। आपको मेरा नमस्कार है । सम्पूर्ण प्रणाम है। सर्वव्यापी जगन्नाथ! मैं भवसागरमें लोकोंके स्वामी परमेश्वर ! आप इस जन्म- डूबा हुआ हूँ, मेरा उद्धार कीजिये । *
'वासुदेव नमस्तेऽस्तु नमस्ते निर्मलाम्बरसंकाश
नमस्ते हेमगर्भाय
नमस्तेऽञ्जनसंकाश नमस्ते
नमस्ते विबुधावास नमस्ते नमस्ते बलिनां श्रेष्ठ नमस्ते नमस्ते नीलमेघाभ नमस्ते
मोक्षकारण । त्राहि मां सर्वलोकेश जन्मसंसारसागरात् ॥ पुरुषोत्तम । संकर्षण नमस्तेऽस्तु त्राहि मां धरणीधर ॥ मकरध्वज । रतिकान्त नमस्तेऽस्तु त्राहि मां शम्बरान्तक ।। भक्तवत्सल। अनिरुद्ध नमस्तेऽस्तु त्राहि मां वरदो भव ॥ विबुधप्रिय । नारायण नमस्तेऽस्तु त्राहि मां शरणागतम् ॥ लाङ्गलायुध । चतुर्मुख जगद्धाम त्राहि मां प्रपितामह ॥ त्रिदशाचित । त्राहि विष्णो जगन्नाथ मग्नं मां भवसागरे ।
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उत्सवमें सम्मिलित हुई थीं । महाराजने उन समस्त । प्रकट होकर मुझे प्रत्यक्ष दर्शन न दें। समागत अतिथियोंके लिये ठहरनेके स्थान, शय्या, यों कहकर राजाओंमें श्रेष्ठ इन्द्रद्युम्नने बहुत सा भाँति-भाँतिके भोज्य पदार्थ, महीन चावल, ईखका सुवर्ण, करोड़ोंके आभूषण, लाखों हाथी-घोड़े, रस और गोरस आदि प्रदान किये । उस महायज्ञमें जो भी श्रेष्ठ ब्राह्मण पधारे, उन सबको राजाने स्वागतपूर्वक ग्रहण किया। महातेजस्वी नरेशने दम्भ छोड़कर स्वयं ही सब ब्राह्मणोंका सब तरहसे स्वागत-सत्कार किया। तत्पश्चात् शिल्पियोंने अपनी शिल्प-रचनाका कार्य पूरा करके राजाको यज्ञमण्डप तैयार हो जानेकी सूचना दी। यह सुनकर मन्त्रियोंसहित राजा बहुत प्रसन्न हुए। उनके शरीरमें रोमाञ्च हो आया। यज्ञमण्डप तैयार हो जानेपर महाराजने ब्राह्मण भोजनका कार्य आरम्भ कराया। प्रतिदिन जब एक लाख ब्राह्मण भोजन कर लेते, तब बारंबार मेघगर्जनाके समान गम्भीर स्वरमें दुन्दुभिकी ध्वनि होने लगती थी। इस प्रकार राजाके यज्ञकी वृद्धि होने लगी। उसमें अन्नका इतना दान किया गया, जिसकी कहीं उपमा नहीं थी। लोगोंने देखा वहाँ दूध, दही और अरबों बैल तथा सुवर्णमय सींगोंवाली दुधारू घीकी नदियाँ बह रही हैं । भिन्न-भिन्न जनपदोंके गौएँ, जिनके साथ काँसेके दुग्धपात्र थे, वेदवेत्ता साथ समूचे जम्बूद्वीपके लोग वहाँ जुटे थे। वहाँ ब्राह्मणोंको दान किये। इसके सिवा बहुमूल्य वस्त्र, कितने ही सहस्र पुरुष बहुत से पात्र लेकर । हरिणके बालोंसे बने हुए बिछौने, मूँगा, मणि तथा इधर-उधरसे एकत्र हुए थे। राजाके अनुगामी हीरा, पुखराज, माणिक और मोती आदि भाँतिपुरुष ब्राह्मणोंको तरह-तरहके अनुपान और राजाओंके । भाँतिके रत्न भी दिये । उस अश्वमेध यज्ञमें याचकों उपभोगमें आनेवाले भोज्य पदार्थ परोसते थे । और ब्राह्मणोंको भाँति-भाँतिके भक्ष्य-भोज्य पदार्थ यज्ञमें आये हुए वेदवेत्ता ब्राह्मणों तथा राजाओंका प्रदान किये गये । मीठे पूर्व तथा स्वादिष्ट अन्न महाराजने पूर्ण स्वागत-सत्कार किया। इसके बाद सब जीवोंकी तृप्तिके लिये बारंबार दिये जाते थे। उन्होंने राजकुमारोंसे कहा। वहाँ दिये गये तथा दिये जानेवाले धनका कभी राजा बोले - राजपुत्रो ! अब समस्त शुभ अन्त नहीं होता था। इस प्रकार उस महायज्ञको लक्षणोंसे युक्त श्रेष्ठ अश्व ले आओ और उसे देखकर देवता, दैत्य, चारण, गन्धर्व, अप्सरा, समूची पृथ्वीपर घुमाओ । विद्वान् और धर्मात्मा । सिद्ध, ऋषि और प्रजापति - सब के सब बड़े ब्राह्मण यहाँ होम करें और यह यज्ञ उस समयतक विस्मयमें पड़ गये । उस श्रेष्ठ यज्ञकी सफलता चालू रहे, जबतक कि भगवान् इसके समीप । देख पुरोहित, मन्त्री तथा राजा - सबको बड़ी * राजा इन्द्रद्युम्नके द्वारा भगवान् श्रीविष्णुकी स्तुति प्रसन्नता हुई। वहाँ कोई भी मनुष्य मलिन, दीन । दंशन, ग्रहपीड़ा अथवा विषका कष्ट नहीं हुआ। अथवा भूखा नहीं रहा। उस यज्ञमें किसी प्रकारका । इस प्रकार राजाने अश्वमेध-यज्ञ तथा पुरुषोत्तमप्रासादउपद्रव, ग्लानि, आधि, व्याधि, अकाल मृत्यु, निर्माणका कार्य विधिपूर्वक पूर्ण किया । राजा इन्द्रद्युम्नके द्वारा भगवान् श्रीविष्णुकी स्तुति ब्रह्माजी कहते हैं - अश्वमेध यज्ञके अनुष्ठान । मृत्युरूपी संसार - सागरसे मेरा उद्धार कीजिये । और प्रासाद-निर्माणका कार्य पूर्ण हो जानेपर राजा पुरुषोत्तम ! आपका स्वरूप निर्मल आकाशके इन्द्रद्युम्नके मनमें दिन-रात प्रतिमाके लिये चिन्ता । समान है। आपको नमस्कार है। सबको अपनी रहने लगी । वे सोचने लगे- कौन-सा उपाय करूँ, ओर खींचनेवाले संकर्षण! आपको प्रणाम है। जिससे सृष्टि, पालन और संहार करनेवाले लोकपावन धरणीधर ! आप मेरी रक्षा कीजिये । हेमगर्भ भगवान् पुरुषोत्तमका मुझे दर्शन हो । इसी चिन्तामें । की - सी आभावाले प्रभो! आपको निमग्न रहनेके कारण उन्हें न रातमें नींद आती न नमस्कार है। मकरध्वज ! आपको प्रणाम है। दिनमें। वे न तो भाँति-भाँतिके भोग भोगते और रतिकान्त ! आपको नमस्कार है। शम्बरासुरका न स्नान एवं शृङ्गार ही करते थे । वाद्य, सुगन्ध, संहार करनेवाले प्रद्युम्न ! आप मेरी रक्षा कीजिये । संगीत, अङ्गराग, इन्द्रनील, महानील, पद्मराग, भगवन् ! आपका श्रीअङ्ग अञ्जनके समान श्याम सोना, चाँदी, हीरा, स्फटिक आदि मणियाँ, राग, है । भक्तवत्सल ! आपको नमस्कार है। अनिरुद्ध ! अर्थ, काम, वन्य पदार्थ अथवा दिव्य वस्तुओंसे आपको प्रणाम है । आप मेरी रक्षा करें और भी उनके मनको संतोष नहीं होता था । पत्थर, वरदायक बनें । सम्पूर्ण देवताओंके निवासस्थान ! मिट्टी और लकड़ीमेंसे इस पृथ्वीपर सर्वोत्तम वस्तु आपको नमस्कार है। देवप्रिय ! आपको प्रणाम कौन है ? किससे भगवान् विष्णुकी प्रतिमाका है । नारायण ! आपको नमस्कार है। आप मुझ निर्माण ठीक हो सकता है ? इस प्रकारकी चिन्तामें शरणागतकी रक्षा कीजिये । बलवानों में श्रेष्ठ बलराम ! पड़े-पड़े उन्होंने पाञ्चरात्रकी विधिसे भगवान् आपको प्रणाम है । लाङ्गलायुध ! आपको नमस्कार पुरुषोत्तमका पूजन किया और अन्तमें इस प्रकार है । चतुर्मुख ! जगद्धाम ! प्रपितामह ! मेरी रक्षा स्तवन आरम्भ कियाकीजिये । नील मेघके समान आभावाले घनश्याम ! 'वासुदेव! आपको नमस्कार है। आप मोक्षके आपको नमस्कार है । देवपूजित परमेश्वर! आपको कारण हैं। आपको मेरा नमस्कार है । सम्पूर्ण प्रणाम है। सर्वव्यापी जगन्नाथ! मैं भवसागरमें लोकोंके स्वामी परमेश्वर ! आप इस जन्म- डूबा हुआ हूँ, मेरा उद्धार कीजिये । * 'वासुदेव नमस्तेऽस्तु नमस्ते निर्मलाम्बरसंकाश नमस्ते हेमगर्भाय नमस्तेऽञ्जनसंकाश नमस्ते नमस्ते विबुधावास नमस्ते नमस्ते बलिनां श्रेष्ठ नमस्ते नमस्ते नीलमेघाभ नमस्ते मोक्षकारण । त्राहि मां सर्वलोकेश जन्मसंसारसागरात् ॥ पुरुषोत्तम । संकर्षण नमस्तेऽस्तु त्राहि मां धरणीधर ॥ मकरध्वज । रतिकान्त नमस्तेऽस्तु त्राहि मां शम्बरान्तक ।। भक्तवत्सल। अनिरुद्ध नमस्तेऽस्तु त्राहि मां वरदो भव ॥ विबुधप्रिय । नारायण नमस्तेऽस्तु त्राहि मां शरणागतम् ॥ लाङ्गलायुध । चतुर्मुख जगद्धाम त्राहि मां प्रपितामह ॥ त्रिदशाचित । त्राहि विष्णो जगन्नाथ मग्नं मां भवसागरे ।
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इंदिरा वार्ड
आजाद वार्ड
महाराणा प्रताप वार्ड
दक्षिण - नंदी विश्वकर्मा के मकान से बजरंग मढ़िया, विष्णु चौधरी के मकान से रामेश्वर बड़कुल का मकान, सोसायटी बी. एल. ए. हाउस तक.
पश्चिम - पुखराज कौरव के मकान से कॉच मंदिर होते हुये विमलेश कौरव के मकान को लेते हुये पूरन पराशर से गनेश विश्वकर्मा के मकान, रेल्वे फाटक तक परिसीमित.
उत्तर - सोसायटी प्लांट एवं उसके आसपास के मकान लेते हुये, डॉ. महाजन के बंगला से कृषि उपज मंडी होते हुये, प्रभु छीपा श्री हनुमान मंदिर
पूर्व - श्री हनुमान मंदिर के दाहिनी ओर के मकानों को लेते हुये चंद्रशेखर कालोनी, त्रिवेणी कालोनी एवं राजेश डेरी उत्सव भवन को लेते हुये भगवानदास कौरव की दुकान तक.
दक्षिण - भगवानदास कौरव से नीखरा दालमिल के आगे इसी लाइन में दाहिनी ओर के मकानों को शामिल करते हुये, गुप्ता इंजीनियर के मकान से विश्नोई के खेत होते हुये जितेन्द्र पटैल के मकान तक.
पश्चिम - बायपास रोड पर जितेन्द्र पटैल के मकान से सोयाबीन प्लांट तक.
उत्तर - श्री पाराशर जी की नर्सरी से दशोदा कालोनी लेते हुये, धनराज चौधरी के
मकान तक.
पूर्व -
धनीराम चौधरी के मकान के सामने से दाहिनी तरफ के मकानों को लेते हुये गुप्ता जी के कृषि फार्म तक परिसीमित.
दक्षिण - गुप्ता कृषि फार्म से कठल किराना तक.
पश्चिम - कठल किराना से प्रतिभा कालोनी, इंदिरा कालोनी, दुर्गा मंदिर लेते हुये मेन रोड पर झुग्गी झोपड़ी लेते हुए, बुधौलिया वकील साहब के मकान
उत्तर - सुरेन्द्र ढिमोले के मकान के बाजू से पूरी आई. टी. आई. कालोनी लेते हुये, अशोक नौरिया तक एवं जमाड़ा रोड (पलोटन गंज तिराहा) से प्रारंभ होकर आगे जनपद भवन तहसील कार्यालय को शामिल करते हुये उसी लाइन के दाहिनी तरफ के मकानों को शामिल करते हुये नगरपालिका नलकूप तक परिसीमित.
पूर्व - नगरपालिका नलकूप से स्टेशन स्कूल लेते हुये कान्हरगांव रेल्वे के फाटक
दक्षिण - कान्हरगांव रेल्वे फाटक से होकर स्त्रोतों को घेरते हुये, जमाड़ा रोड पर अमर शांति टाउनशिप देवेन्द्र पटैल से गोल्डन सिटी तक.
पश्चिम-गोल्डन सिटी से बायपास रोड से देवेन्द्र पटैल के घर के बाजू से दाहिनी
तरफ के समस्त मकानों को लेते हुये सरस्वती शिशु मंदिर से मदन रैकवार से जमाड़ा रोड तिराहा तक परिसीमित.
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इंदिरा वार्ड आजाद वार्ड महाराणा प्रताप वार्ड दक्षिण - नंदी विश्वकर्मा के मकान से बजरंग मढ़िया, विष्णु चौधरी के मकान से रामेश्वर बड़कुल का मकान, सोसायटी बी. एल. ए. हाउस तक. पश्चिम - पुखराज कौरव के मकान से कॉच मंदिर होते हुये विमलेश कौरव के मकान को लेते हुये पूरन पराशर से गनेश विश्वकर्मा के मकान, रेल्वे फाटक तक परिसीमित. उत्तर - सोसायटी प्लांट एवं उसके आसपास के मकान लेते हुये, डॉ. महाजन के बंगला से कृषि उपज मंडी होते हुये, प्रभु छीपा श्री हनुमान मंदिर पूर्व - श्री हनुमान मंदिर के दाहिनी ओर के मकानों को लेते हुये चंद्रशेखर कालोनी, त्रिवेणी कालोनी एवं राजेश डेरी उत्सव भवन को लेते हुये भगवानदास कौरव की दुकान तक. दक्षिण - भगवानदास कौरव से नीखरा दालमिल के आगे इसी लाइन में दाहिनी ओर के मकानों को शामिल करते हुये, गुप्ता इंजीनियर के मकान से विश्नोई के खेत होते हुये जितेन्द्र पटैल के मकान तक. पश्चिम - बायपास रोड पर जितेन्द्र पटैल के मकान से सोयाबीन प्लांट तक. उत्तर - श्री पाराशर जी की नर्सरी से दशोदा कालोनी लेते हुये, धनराज चौधरी के मकान तक. पूर्व - धनीराम चौधरी के मकान के सामने से दाहिनी तरफ के मकानों को लेते हुये गुप्ता जी के कृषि फार्म तक परिसीमित. दक्षिण - गुप्ता कृषि फार्म से कठल किराना तक. पश्चिम - कठल किराना से प्रतिभा कालोनी, इंदिरा कालोनी, दुर्गा मंदिर लेते हुये मेन रोड पर झुग्गी झोपड़ी लेते हुए, बुधौलिया वकील साहब के मकान उत्तर - सुरेन्द्र ढिमोले के मकान के बाजू से पूरी आई. टी. आई. कालोनी लेते हुये, अशोक नौरिया तक एवं जमाड़ा रोड से प्रारंभ होकर आगे जनपद भवन तहसील कार्यालय को शामिल करते हुये उसी लाइन के दाहिनी तरफ के मकानों को शामिल करते हुये नगरपालिका नलकूप तक परिसीमित. पूर्व - नगरपालिका नलकूप से स्टेशन स्कूल लेते हुये कान्हरगांव रेल्वे के फाटक दक्षिण - कान्हरगांव रेल्वे फाटक से होकर स्त्रोतों को घेरते हुये, जमाड़ा रोड पर अमर शांति टाउनशिप देवेन्द्र पटैल से गोल्डन सिटी तक. पश्चिम-गोल्डन सिटी से बायपास रोड से देवेन्द्र पटैल के घर के बाजू से दाहिनी तरफ के समस्त मकानों को लेते हुये सरस्वती शिशु मंदिर से मदन रैकवार से जमाड़ा रोड तिराहा तक परिसीमित.
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पंकज जब अजय के घर जा रहा था तो उसने गली में घुसते समय नज़ीर को देखा था। तब उसे कोई शक नहीं हुआ था। उसे लगा था कि वह भी उसकी तरह किसी से मिलने आया होगा। पर जब वह अजय के घर से लौट रहा था तो एकबार फिर उसकी नज़र नज़ीर पर पड़ी। वह उसके पीछे पीछे चल रहा था। अब उसे दाल में कुछ काला मालूम पड़ा। वह चाय की दुकान में घुस गया। वह सोच रहा था कि क्या करे ? वह पक्के तौर पर यह नहीं कह पा रहा था कि नज़ीर उसके पीछे है। उसे लग रहा था कि कहीं वह कुछ अधिक तो नहीं सोच रहा है। हो सकता है यह आदमी किसी काम से अजय की गली में गया हो। वहाँ से लौटते हुए बाजार तो बीच में पड़ता ही है। तभी उसने नज़ीर को कांस्टेबल मनोज से बात करते देखा। एकबार फिर उसे शक हुआ। वह चांस नहीं लेना चाहता था। उसने इधर उधर देखा तो चाय की दुकान में एक और दरवाज़ा था। जहाँ से दूसरी तरफ निकला जा सकता था। वह फौरन वहाँ से निकल कर वापस अजय के घर गया। उसने अजय को अपना शक बताते हुए कहा,
"वैसे कुछ स्पष्ट तो नहीं है पर हमें सावधान रहना चाहिए। हम किसी और को इसके बारे में नहीं बताएंगे। अगर वह आदमी मेरा पीछा कर रहा था तो उसने तुम्हारा घर देख लिया है। इसलिए तुम मेरे साथ चलो।"
अजय उसकी बात मान गया। पर रास्ते में ही दोनों पकड़े गए।
अजय और पंकज को रानीगंज पुलिस स्टेशन ले जाकर उनसे पूछताछ की गई। दोनों ने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें पुलिस बिना कारण परेशान कर रही है। उन्हें बिना किसी जुर्म के हिरासत में लिया गया है। पुलिस के पास भी यही एक मौका था। वह उन दोनों को अधिक देर हिरासत में नहीं रख सकती थी। उनका कहना सही था। पुलिस ने उन्हें कोई अपराध करते हुए नहीं पकड़ा था। ना उनके पास कोई प्रत्यक्ष सबूत था। सब इंस्पेक्टर आकाश दुबे को अपनी बाकी टीम के साथ रानीगंज पहुँचने में शाम हो चुकी थी। सब इंस्पेक्टर आकाश दुबे जानता था कि आसानी से इन लोगों से सच नहीं निकलवा जा सकता है। सख्ती करनी होगी। पर अभी उसके लिए वक्त नहीं था। उसने कहा,
"ये दोनों कुछ बताने को तैयार नहीं हैं। लेकिन इनका संबंध बलि देने वाले ग्रुप से है। इनके हिरासत में होने की बात बाहर ना निकले। इन्हें तब तक अंदर रखो जब तक सच सामने ना आ जाए। हम अपने हिसाब से काम करेंगे।"
पुलिस के पास सिर्फ वाट्सअप का वह मैसेज था जो उन्हें भेजा गया था। जिसके आधार पर आगे बढ़ सकते थे। पर उसमें भी कुछ स्पष्ट नहीं था। उस मैसेज में लिखा था,
'आज रात मिलते हैं। रिंग रोड पर आगे चलकर पुराने मंदिर पर तुम्हारा साथी तुम्हें मिल जाएगा।'
मैसेज पढ़कर सब इंस्पेक्टर आकाश दुबे ने अपनी टीम से कहा,
"इसी मैसेज के सहारे आगे बढ़ते हैं। रिंग रोड पर कोई पुराना मंदिर है। वहाँ कोई मिलने वाला है। वह इन लोगों को कहीं ले जाएगा। वह जगह उस मंदिर के आसपास ही होगी।"
वह रुका। उसने नज़ीर और कांस्टेबल मनोज से कहा,
"तुम लोग उस मंदिर के आसपास किसी ऐसी इमारत को खोजो जो एकांत में हो। वही जगह है जहाँ इन्हें बुलाया गया है। ऐसी जगह मिलते ही खबर दो। पर सावधान रहना। थोड़ी सी भी चूक मुश्किल खड़ी करेगी।"
कांस्टेबल मनोज और नज़ीर फौरन अपने काम के लिए निकल गए।
कोठरी में कैद एसपी गुरुनूर कौर के ज़ेहन में शैतानी मुखौटे के पीछे से झांकती उस शैतान की आँखें घूम रही थीं। कोठरी से निकलने से पहले उसने कहा था कि तुम्हारी वर्दी मेरे काम आई। तबसे वह यही सोच रही थी कि उसके यह कहने का मतलब क्या था। जब भी उसका मन घबराता था तो मूल मंतर का पाठ कर वह खुद को हिम्मत देती थी। अभी कुछ समय पहले ही उसने पाठ किया था। उसके भीतर एक नई ऊर्जा का संचार हुआ था। वह सोच रही थी कि उसे मरना तो है ही। पर वह इस तरह निष्क्रिय होकर नहीं बैठेगी। अपनी जान देगी तो लड़ते हुए।
वह सोच रही थी कि उस दिन उसे ना जाने क्या हो गया था। वह शैतान उसके सामने था। उसके हाथ पैर भी खुले हुए थे। पर डर ने उसे कायर बना दिया था। वह चाहती तो उस समय उसका मुखौटा खींच कर उसे बेनकाब कर सकती थी। लेकिन वह एक पुतले की तरह खड़ी रही। आज उसने तय कर लिया था कि अपनी कोशिश ज़रूर करेगी।
कांस्टेबल मनोज मोटरसाइकिल चला रहा था। नज़ीर उसके पीछे बैठा था। रिंग रोड पर चलते हुए दोनों दाएं बाएं पुराना मंदिर देख रहे थे। दोनों काफी आगे निकल आए थे। तभी नज़ीर ने देखा कि दूर दाईं तरफ एक पेड़ के नीचे छोटी सी मठिया है। उसने कांस्टेबल मनोज का ध्यान उस तरफ दिलाया। कांस्टेबल मनोज मोटरसाइकिल उस मठिया के पास ले गया। मोटरसाइकिल खड़ी करके दोनों उतर गए। कांस्टेबल मनोज ने कहा,
"लगता तो यही है। मंदिर पुराना है। इसकी हालत देखकर लगता है कि कोई यहाँ पूजा नहीं करता है।"
नज़ीर ने भी अपनी सहमति जताई। उसने इधर उधर देखकर कहा,
"जिस जगह की हमें तलाश है वह दाएं या बाएं किसी भी तरफ हो सकती है। हम दोनों को अलग अलग देखना होगा।"
कांस्टेबल मनोज ने कहा,
"तुम मंदिर के आगे बढ़ कर देखो। मैं दूसरी तरफ जाकर देखता हूँ।"
कांस्टेबल मनोज ने मोटरसाइकिल को झाड़ियों के पीछे खड़ा कर दिया। दोनों अपनी अपनी दिशा में चल दिए।
एसपी गुरुनूर कौर दृढ़ इरादे के साथ बैठी थी। जानती थी कि उसे अकेले ना जाने कितने लोगों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन वह अपने अंदर डर को नहीं आने दे रही थी। उसे किसी के आने की आहट सुनाई पड़ रही थी। उसने अपने आप को तैयार कर लिया था। कोठरी का दरवाज़ा खुला। मुखौटा पहने हुए उस शैतान ने अंदर प्रवेश किया। उसे देखकर शैतानी हंसी हंसकर बोला,
"अब तक सारा दम निकल चुका होगा। अगर अभी भी इस इंतज़ार में हो कि तुम्हारे लोग तुम्हें बचाने आएंगे तो भूल जाओ। उनके लिए तुम मर चुकी हो। तुम्हारी वर्दी में एक लाश उन्हें मिली थी। अब वो लोग तुम्हें नहीं ढूढ़ेंगे।"
एसपी गुरुनूर कौर ने गुस्से से उसकी तरफ देखा। वह शैतान ज़ोर ज़ोर से हंस रहा था। उसने गुरु गोविंद सिंह को याद करते हुए मन ही मन दोहराया,
'चिड़ियाँ नाल मैं बाज लड़ावाँ गिदरां नुं मैं शेर बनावाँ सवा लाख से एक लड़ावाँ ताँ गोविंद सिंह नाम धरावाँ'
उसके अंदर एक शक्ति का संचार हुआ। पूरी ताकत बटोर कर उसने उस शैतान को लात मारी। वह लड़खड़ा कर गिर गया। एसपी गुरुनूर कौर शेरनी की तरह उसकी छाती पर चढ़कर बैठ गई। उसने उसका मुखौटा खींचकर उतार दिया। उसका चेहरा देखकर एसपी गुरुनूर कौर के मुंह से निकला,
सिवन अपनी असलियत सामने आने से बौखलाया हुआ था। उसका साथी कोठरी के अंदर आ गया था। जांबूर का चेहरा और नाम जानकर वह भौचक खड़ा था। एसपी गुरुनूर कौर ने फुर्ती से उठकर उस पर वार किया और कोठरी से बाहर भाग गई। सिवन ज़ोर से चिल्लाया,
"खड़े क्या हो पकड़ो इसे।"
उसका साथी भी तेज़ी से एसपी गुरुनूर कौर की तरफ लपका। कोठरी से निकल कर एसपी गुरुनूर कौर बाहर की तरफ भाग रही थी तभी अचानक रंजन सिंह उसके सामने आकर खड़ा हो गया। उसे देखकर एसपी गुरुनूर कौर को आश्चर्य हुआ। उसने कहा,
"सब इंस्पेक्टर रंजन सिंह....."
रंजन सिंह ने हंसते हुए कहा,
"जी मैडम..... मैं सब इंस्पेक्टर रंजन सिंह हूँ। पर आप इस तरह उछल कूद बेकार मचा रही हैं। कोई फायदा नहीं है। आप बचकर नहीं निकल पाएंगी।"
यह कहकर उसने एसपी गुरुनूर कौर को पकड़ने की कोशिश की। एसपी गुरुनूर कौर ने उस पर भी वार किया। लेकिन उसने खुद को बचा लिया। एसपी गुरुनूर कौर को बालों से पकड़ कर बोला,
"बेवजह दम दिखाने का कोई मतलब नहीं है। आप जीते जी यहाँ से नहीं जा सकती।"
उसी समय सिवन भी वहाँ आ गया। उसने एसपी गुरुनूर कौर को मीटिंग वाले कमरे में ले जाने को कहा।
अंधेरा हो गया था। नज़ीर एक मकान के सामने खड़ा था। यह मकान एकांत में था। इसके आसपास और कोई मकान नहीं था। मकान के चारों ओर ऊंची ऊंची चारदीवारी थी। मकान किसी किले की तरह लग रहा था। नज़ीर को यकीन हो गया कि यह वह जगह हो सकती है जिसकी तलाश में वह आया था। वह मकान के चारों तरफ घूमकर अंदर क्या हो सकता है अंदाज़ लगाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन कुछ पता नहीं चल पा रहा था। उसने सोचा कि वह कांस्टेबल मनोज को फोन करके बुला ले। वह फोन कर रहा था कि तभी किसी ने उसके सर पर वार किया। वह ज़मीन पर गिर पड़ा।
कांस्टेबल मनोज के फोन पर नज़ीर की कॉल आई लेकिन जब उसने फोन उठाया तो कॉल कट गई। उसने पलट कर फोन मिलाया तो फोन नहीं लगा। वह परेशान हो गया। उसे समझते देर नहीं लगी कि कुछ गड़बड़ है। उसने सबसे पहले सब इंस्पेक्टर आकाश दुबे को इसकी सूचना दी। उन्हें उस पुराने मंदिर के पास आने को कहा। वह खुद उसी जगह पर रुककर इंतज़ार करने लगा।
सब इंस्पेक्टर आकाश दुबे प्रतीक्षा कर रहा था कि उसे कोई अच्छी खबर सुनने के मिले। कांस्टेबल मनोज ने जब उसे सारी बात बताई तो बिना कोई देरी किए वह अपनी टीम के साथ चल दिया।
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पंकज जब अजय के घर जा रहा था तो उसने गली में घुसते समय नज़ीर को देखा था। तब उसे कोई शक नहीं हुआ था। उसे लगा था कि वह भी उसकी तरह किसी से मिलने आया होगा। पर जब वह अजय के घर से लौट रहा था तो एकबार फिर उसकी नज़र नज़ीर पर पड़ी। वह उसके पीछे पीछे चल रहा था। अब उसे दाल में कुछ काला मालूम पड़ा। वह चाय की दुकान में घुस गया। वह सोच रहा था कि क्या करे ? वह पक्के तौर पर यह नहीं कह पा रहा था कि नज़ीर उसके पीछे है। उसे लग रहा था कि कहीं वह कुछ अधिक तो नहीं सोच रहा है। हो सकता है यह आदमी किसी काम से अजय की गली में गया हो। वहाँ से लौटते हुए बाजार तो बीच में पड़ता ही है। तभी उसने नज़ीर को कांस्टेबल मनोज से बात करते देखा। एकबार फिर उसे शक हुआ। वह चांस नहीं लेना चाहता था। उसने इधर उधर देखा तो चाय की दुकान में एक और दरवाज़ा था। जहाँ से दूसरी तरफ निकला जा सकता था। वह फौरन वहाँ से निकल कर वापस अजय के घर गया। उसने अजय को अपना शक बताते हुए कहा, "वैसे कुछ स्पष्ट तो नहीं है पर हमें सावधान रहना चाहिए। हम किसी और को इसके बारे में नहीं बताएंगे। अगर वह आदमी मेरा पीछा कर रहा था तो उसने तुम्हारा घर देख लिया है। इसलिए तुम मेरे साथ चलो।" अजय उसकी बात मान गया। पर रास्ते में ही दोनों पकड़े गए। अजय और पंकज को रानीगंज पुलिस स्टेशन ले जाकर उनसे पूछताछ की गई। दोनों ने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें पुलिस बिना कारण परेशान कर रही है। उन्हें बिना किसी जुर्म के हिरासत में लिया गया है। पुलिस के पास भी यही एक मौका था। वह उन दोनों को अधिक देर हिरासत में नहीं रख सकती थी। उनका कहना सही था। पुलिस ने उन्हें कोई अपराध करते हुए नहीं पकड़ा था। ना उनके पास कोई प्रत्यक्ष सबूत था। सब इंस्पेक्टर आकाश दुबे को अपनी बाकी टीम के साथ रानीगंज पहुँचने में शाम हो चुकी थी। सब इंस्पेक्टर आकाश दुबे जानता था कि आसानी से इन लोगों से सच नहीं निकलवा जा सकता है। सख्ती करनी होगी। पर अभी उसके लिए वक्त नहीं था। उसने कहा, "ये दोनों कुछ बताने को तैयार नहीं हैं। लेकिन इनका संबंध बलि देने वाले ग्रुप से है। इनके हिरासत में होने की बात बाहर ना निकले। इन्हें तब तक अंदर रखो जब तक सच सामने ना आ जाए। हम अपने हिसाब से काम करेंगे।" पुलिस के पास सिर्फ वाट्सअप का वह मैसेज था जो उन्हें भेजा गया था। जिसके आधार पर आगे बढ़ सकते थे। पर उसमें भी कुछ स्पष्ट नहीं था। उस मैसेज में लिखा था, 'आज रात मिलते हैं। रिंग रोड पर आगे चलकर पुराने मंदिर पर तुम्हारा साथी तुम्हें मिल जाएगा।' मैसेज पढ़कर सब इंस्पेक्टर आकाश दुबे ने अपनी टीम से कहा, "इसी मैसेज के सहारे आगे बढ़ते हैं। रिंग रोड पर कोई पुराना मंदिर है। वहाँ कोई मिलने वाला है। वह इन लोगों को कहीं ले जाएगा। वह जगह उस मंदिर के आसपास ही होगी।" वह रुका। उसने नज़ीर और कांस्टेबल मनोज से कहा, "तुम लोग उस मंदिर के आसपास किसी ऐसी इमारत को खोजो जो एकांत में हो। वही जगह है जहाँ इन्हें बुलाया गया है। ऐसी जगह मिलते ही खबर दो। पर सावधान रहना। थोड़ी सी भी चूक मुश्किल खड़ी करेगी।" कांस्टेबल मनोज और नज़ीर फौरन अपने काम के लिए निकल गए। कोठरी में कैद एसपी गुरुनूर कौर के ज़ेहन में शैतानी मुखौटे के पीछे से झांकती उस शैतान की आँखें घूम रही थीं। कोठरी से निकलने से पहले उसने कहा था कि तुम्हारी वर्दी मेरे काम आई। तबसे वह यही सोच रही थी कि उसके यह कहने का मतलब क्या था। जब भी उसका मन घबराता था तो मूल मंतर का पाठ कर वह खुद को हिम्मत देती थी। अभी कुछ समय पहले ही उसने पाठ किया था। उसके भीतर एक नई ऊर्जा का संचार हुआ था। वह सोच रही थी कि उसे मरना तो है ही। पर वह इस तरह निष्क्रिय होकर नहीं बैठेगी। अपनी जान देगी तो लड़ते हुए। वह सोच रही थी कि उस दिन उसे ना जाने क्या हो गया था। वह शैतान उसके सामने था। उसके हाथ पैर भी खुले हुए थे। पर डर ने उसे कायर बना दिया था। वह चाहती तो उस समय उसका मुखौटा खींच कर उसे बेनकाब कर सकती थी। लेकिन वह एक पुतले की तरह खड़ी रही। आज उसने तय कर लिया था कि अपनी कोशिश ज़रूर करेगी। कांस्टेबल मनोज मोटरसाइकिल चला रहा था। नज़ीर उसके पीछे बैठा था। रिंग रोड पर चलते हुए दोनों दाएं बाएं पुराना मंदिर देख रहे थे। दोनों काफी आगे निकल आए थे। तभी नज़ीर ने देखा कि दूर दाईं तरफ एक पेड़ के नीचे छोटी सी मठिया है। उसने कांस्टेबल मनोज का ध्यान उस तरफ दिलाया। कांस्टेबल मनोज मोटरसाइकिल उस मठिया के पास ले गया। मोटरसाइकिल खड़ी करके दोनों उतर गए। कांस्टेबल मनोज ने कहा, "लगता तो यही है। मंदिर पुराना है। इसकी हालत देखकर लगता है कि कोई यहाँ पूजा नहीं करता है।" नज़ीर ने भी अपनी सहमति जताई। उसने इधर उधर देखकर कहा, "जिस जगह की हमें तलाश है वह दाएं या बाएं किसी भी तरफ हो सकती है। हम दोनों को अलग अलग देखना होगा।" कांस्टेबल मनोज ने कहा, "तुम मंदिर के आगे बढ़ कर देखो। मैं दूसरी तरफ जाकर देखता हूँ।" कांस्टेबल मनोज ने मोटरसाइकिल को झाड़ियों के पीछे खड़ा कर दिया। दोनों अपनी अपनी दिशा में चल दिए। एसपी गुरुनूर कौर दृढ़ इरादे के साथ बैठी थी। जानती थी कि उसे अकेले ना जाने कितने लोगों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन वह अपने अंदर डर को नहीं आने दे रही थी। उसे किसी के आने की आहट सुनाई पड़ रही थी। उसने अपने आप को तैयार कर लिया था। कोठरी का दरवाज़ा खुला। मुखौटा पहने हुए उस शैतान ने अंदर प्रवेश किया। उसे देखकर शैतानी हंसी हंसकर बोला, "अब तक सारा दम निकल चुका होगा। अगर अभी भी इस इंतज़ार में हो कि तुम्हारे लोग तुम्हें बचाने आएंगे तो भूल जाओ। उनके लिए तुम मर चुकी हो। तुम्हारी वर्दी में एक लाश उन्हें मिली थी। अब वो लोग तुम्हें नहीं ढूढ़ेंगे।" एसपी गुरुनूर कौर ने गुस्से से उसकी तरफ देखा। वह शैतान ज़ोर ज़ोर से हंस रहा था। उसने गुरु गोविंद सिंह को याद करते हुए मन ही मन दोहराया, 'चिड़ियाँ नाल मैं बाज लड़ावाँ गिदरां नुं मैं शेर बनावाँ सवा लाख से एक लड़ावाँ ताँ गोविंद सिंह नाम धरावाँ' उसके अंदर एक शक्ति का संचार हुआ। पूरी ताकत बटोर कर उसने उस शैतान को लात मारी। वह लड़खड़ा कर गिर गया। एसपी गुरुनूर कौर शेरनी की तरह उसकी छाती पर चढ़कर बैठ गई। उसने उसका मुखौटा खींचकर उतार दिया। उसका चेहरा देखकर एसपी गुरुनूर कौर के मुंह से निकला, सिवन अपनी असलियत सामने आने से बौखलाया हुआ था। उसका साथी कोठरी के अंदर आ गया था। जांबूर का चेहरा और नाम जानकर वह भौचक खड़ा था। एसपी गुरुनूर कौर ने फुर्ती से उठकर उस पर वार किया और कोठरी से बाहर भाग गई। सिवन ज़ोर से चिल्लाया, "खड़े क्या हो पकड़ो इसे।" उसका साथी भी तेज़ी से एसपी गुरुनूर कौर की तरफ लपका। कोठरी से निकल कर एसपी गुरुनूर कौर बाहर की तरफ भाग रही थी तभी अचानक रंजन सिंह उसके सामने आकर खड़ा हो गया। उसे देखकर एसपी गुरुनूर कौर को आश्चर्य हुआ। उसने कहा, "सब इंस्पेक्टर रंजन सिंह....." रंजन सिंह ने हंसते हुए कहा, "जी मैडम..... मैं सब इंस्पेक्टर रंजन सिंह हूँ। पर आप इस तरह उछल कूद बेकार मचा रही हैं। कोई फायदा नहीं है। आप बचकर नहीं निकल पाएंगी।" यह कहकर उसने एसपी गुरुनूर कौर को पकड़ने की कोशिश की। एसपी गुरुनूर कौर ने उस पर भी वार किया। लेकिन उसने खुद को बचा लिया। एसपी गुरुनूर कौर को बालों से पकड़ कर बोला, "बेवजह दम दिखाने का कोई मतलब नहीं है। आप जीते जी यहाँ से नहीं जा सकती।" उसी समय सिवन भी वहाँ आ गया। उसने एसपी गुरुनूर कौर को मीटिंग वाले कमरे में ले जाने को कहा। अंधेरा हो गया था। नज़ीर एक मकान के सामने खड़ा था। यह मकान एकांत में था। इसके आसपास और कोई मकान नहीं था। मकान के चारों ओर ऊंची ऊंची चारदीवारी थी। मकान किसी किले की तरह लग रहा था। नज़ीर को यकीन हो गया कि यह वह जगह हो सकती है जिसकी तलाश में वह आया था। वह मकान के चारों तरफ घूमकर अंदर क्या हो सकता है अंदाज़ लगाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन कुछ पता नहीं चल पा रहा था। उसने सोचा कि वह कांस्टेबल मनोज को फोन करके बुला ले। वह फोन कर रहा था कि तभी किसी ने उसके सर पर वार किया। वह ज़मीन पर गिर पड़ा। कांस्टेबल मनोज के फोन पर नज़ीर की कॉल आई लेकिन जब उसने फोन उठाया तो कॉल कट गई। उसने पलट कर फोन मिलाया तो फोन नहीं लगा। वह परेशान हो गया। उसे समझते देर नहीं लगी कि कुछ गड़बड़ है। उसने सबसे पहले सब इंस्पेक्टर आकाश दुबे को इसकी सूचना दी। उन्हें उस पुराने मंदिर के पास आने को कहा। वह खुद उसी जगह पर रुककर इंतज़ार करने लगा। सब इंस्पेक्टर आकाश दुबे प्रतीक्षा कर रहा था कि उसे कोई अच्छी खबर सुनने के मिले। कांस्टेबल मनोज ने जब उसे सारी बात बताई तो बिना कोई देरी किए वह अपनी टीम के साथ चल दिया।
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चीज़ें जो गोरा बना सकती है - क्या आपका रंग भी थोड़ा दबा है?
ऐसे में आपको अपनी सहेलियों के साथ चलने में इन्सल्ट फील होता है?
या फिर कोई भी लड़का आपकी काली त्वचा के कारन आपको देखता तक नहीं?
कारण चाहे जो भी हो निराश होने का, लेकिन अब वक़्त है बदलने का.
जी हाँ अपनाइए ये चीज़ें जो गोरा बना सकती है - ख़ास टिप्स और पाइए तुरंत गोरा निखार.
अगर आपके चेहरे पर दाग-धब्बे हैं और उससे निजात पाने के लिए आपने महँगी सी महँगी क्रीम लगा डाली, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, तो अब अपनाइए हमारी टिप्स. जी हाँ, यकीन नहीं होता तो ख़ुद कर के देखिए. रोजाना एक निम्बू को बीच से काटकर उसे अपने चेहरे पर रगड़ें. ३० मिनट तक ऐसे ही रहने दें. ३० मिनट के बाद पानी से चेहरा धो लें. आपका चेहरा ग्लो करेगा.
जी हाँ शहद कई तरह से हमारे लिए फायदेमंद होता है, लेकिन क्या आप्जनती हैं कि ये आपकी दल स्किन में भी निखार ला सकता है, जी हाँ. बस हर दिन १ टेबलस्पून शहद लें और उसे अच्छी तरह से चेहरे पर लगाएं. करीब १५ मिनट के बाद हलके गुनगुने पानी से चेहरा धो लें. इससे चेहरे निखार के साथ ही फ्रेश लुक भी मिलेगा.
संतरे के छिलके को धुप में सुखाकर पीस लें. अब इसे एक डब्बे में भरकर रख दें. हफ्ते में दो या ३ दिन अक चम्मच पाउडर में थोडा-सा दही या दूध मिलाकर चेहरे पर लगाएं. ३० मिनट के बाद चेहरा धो लें. चेहरा ग्लो करेगा.
इंस्टेंट गोरापन पाने का ये बेहतर तरीका है. बस एक केला लीजिए और इसे अच्छे से मैश कीजिए. अब इसमें थोडा सा दूध मिलाकर चेहरे पर लगाइए और फिर १५ मिनट के बाद पानी से धो लीजिए. चेहरे में नै चमक आ जाएगी. इसके साथ ही धीरे-धीरे रंगत निखरने लगेगी.
जितना हो सके दही का सेवन बढ़ा दीजिए. अगर आपको दही पसंद नहीं है, तो उसे अच्छी तरह से फेंट कर चेहरे पर लगाइए. कुछ मिनट के बाद चेहरा धो लीजिए. चेहरे में चमक आ जाएगी.
सेहत बनाने के साथ ही गाजर आपकी सुंदर को भी निखारता है. सबसे पहले गाजर को पतला पीस लें. अब इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं. सूखने के बाद ठन्डे पानी से चेहरा धोएं.
रात में सोने से पहले चेहरे पर टोनर लगाना न भूलिए. ऐसा रोजाना करते रहने से चेहरे में कसाव आता है और चेहरा चमक उठता है.
ये है वो चीज़ें जो गोरा बना सकती है - सोच क्या रही हैं मैडम, जल्दी अपनाइए ये टिप्स और तुरंत पाइए गोरापन.
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चीज़ें जो गोरा बना सकती है - क्या आपका रंग भी थोड़ा दबा है? ऐसे में आपको अपनी सहेलियों के साथ चलने में इन्सल्ट फील होता है? या फिर कोई भी लड़का आपकी काली त्वचा के कारन आपको देखता तक नहीं? कारण चाहे जो भी हो निराश होने का, लेकिन अब वक़्त है बदलने का. जी हाँ अपनाइए ये चीज़ें जो गोरा बना सकती है - ख़ास टिप्स और पाइए तुरंत गोरा निखार. अगर आपके चेहरे पर दाग-धब्बे हैं और उससे निजात पाने के लिए आपने महँगी सी महँगी क्रीम लगा डाली, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, तो अब अपनाइए हमारी टिप्स. जी हाँ, यकीन नहीं होता तो ख़ुद कर के देखिए. रोजाना एक निम्बू को बीच से काटकर उसे अपने चेहरे पर रगड़ें. तीस मिनट तक ऐसे ही रहने दें. तीस मिनट के बाद पानी से चेहरा धो लें. आपका चेहरा ग्लो करेगा. जी हाँ शहद कई तरह से हमारे लिए फायदेमंद होता है, लेकिन क्या आप्जनती हैं कि ये आपकी दल स्किन में भी निखार ला सकता है, जी हाँ. बस हर दिन एक टेबलस्पून शहद लें और उसे अच्छी तरह से चेहरे पर लगाएं. करीब पंद्रह मिनट के बाद हलके गुनगुने पानी से चेहरा धो लें. इससे चेहरे निखार के साथ ही फ्रेश लुक भी मिलेगा. संतरे के छिलके को धुप में सुखाकर पीस लें. अब इसे एक डब्बे में भरकर रख दें. हफ्ते में दो या तीन दिन अक चम्मच पाउडर में थोडा-सा दही या दूध मिलाकर चेहरे पर लगाएं. तीस मिनट के बाद चेहरा धो लें. चेहरा ग्लो करेगा. इंस्टेंट गोरापन पाने का ये बेहतर तरीका है. बस एक केला लीजिए और इसे अच्छे से मैश कीजिए. अब इसमें थोडा सा दूध मिलाकर चेहरे पर लगाइए और फिर पंद्रह मिनट के बाद पानी से धो लीजिए. चेहरे में नै चमक आ जाएगी. इसके साथ ही धीरे-धीरे रंगत निखरने लगेगी. जितना हो सके दही का सेवन बढ़ा दीजिए. अगर आपको दही पसंद नहीं है, तो उसे अच्छी तरह से फेंट कर चेहरे पर लगाइए. कुछ मिनट के बाद चेहरा धो लीजिए. चेहरे में चमक आ जाएगी. सेहत बनाने के साथ ही गाजर आपकी सुंदर को भी निखारता है. सबसे पहले गाजर को पतला पीस लें. अब इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं. सूखने के बाद ठन्डे पानी से चेहरा धोएं. रात में सोने से पहले चेहरे पर टोनर लगाना न भूलिए. ऐसा रोजाना करते रहने से चेहरे में कसाव आता है और चेहरा चमक उठता है. ये है वो चीज़ें जो गोरा बना सकती है - सोच क्या रही हैं मैडम, जल्दी अपनाइए ये टिप्स और तुरंत पाइए गोरापन.
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आवाज़ों का दबना सबसे दुखद नहीं होता,
शासन और बंदूक की तानाशाही भी सबसे दुखद नहीं होती।
सत्ता का खेल भी सबसे दुखद नहीं होता।
सबसे दुखद होता है उम्मीदों का टूटना,
सबसे दुखद होता है साथ अपनों का छूटना।
सबसे दुखद होता है सबकुछ हाथ में होते हुए भी हाथ- पे- हाथ रखकर बैठना,
सबसे दुखद होता है जुबान होते हुए भी बेजुबान बने रहना,
ताकतवर होते हुए तटस्थ रहना।
सबसे दुखद होता है इच्छाओं का दबना,
हौसलों का यूं ही हलाल होते रहना,
इससे दुखद भी भला कोई दुखद बात है क्या ?
सबसे दुखद होता है अपने को आप ही लूटना !
भरोसे पर से भरोसा का टूटना।
चूंकि सरकारें अक्सर ही बेसरकार आवाजों को दबाने का,
असंतोष की चिंगारी को बुझाने का हरदम प्रयत्न में रहती है,
मगर इनकी आवाज़ कहाँ, कब और कैसे दबने वाली ?
जनमत की ताकत है इनकी हथेली पे ,
भले ही इनके बेबसी के दुखड़े को जनसभाओं में राग अलापते हैं !
मगर सबसे दुखद यह है कि आज तक ये क्यों हाशिये पे हैं ?
क्यों मुट्ठीभर लोगों की इक्कीस दिन में पैसा डबल हो रहा है?
कहा जाता है की लोकतंत्र में प्रजा ही राजा होते हैं,
कुछ देर के लिए सिद्धांतवादी बन मान भी लिया मैंने।
मगर सबसे दुखद यह है कि क्या यह शासन- प्रशासन की व्यवहार में झलकता है?
आखिर में सबसे दुखद है रटी- रटायी बातें मानना।
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आवाज़ों का दबना सबसे दुखद नहीं होता, शासन और बंदूक की तानाशाही भी सबसे दुखद नहीं होती। सत्ता का खेल भी सबसे दुखद नहीं होता। सबसे दुखद होता है उम्मीदों का टूटना, सबसे दुखद होता है साथ अपनों का छूटना। सबसे दुखद होता है सबकुछ हाथ में होते हुए भी हाथ- पे- हाथ रखकर बैठना, सबसे दुखद होता है जुबान होते हुए भी बेजुबान बने रहना, ताकतवर होते हुए तटस्थ रहना। सबसे दुखद होता है इच्छाओं का दबना, हौसलों का यूं ही हलाल होते रहना, इससे दुखद भी भला कोई दुखद बात है क्या ? सबसे दुखद होता है अपने को आप ही लूटना ! भरोसे पर से भरोसा का टूटना। चूंकि सरकारें अक्सर ही बेसरकार आवाजों को दबाने का, असंतोष की चिंगारी को बुझाने का हरदम प्रयत्न में रहती है, मगर इनकी आवाज़ कहाँ, कब और कैसे दबने वाली ? जनमत की ताकत है इनकी हथेली पे , भले ही इनके बेबसी के दुखड़े को जनसभाओं में राग अलापते हैं ! मगर सबसे दुखद यह है कि आज तक ये क्यों हाशिये पे हैं ? क्यों मुट्ठीभर लोगों की इक्कीस दिन में पैसा डबल हो रहा है? कहा जाता है की लोकतंत्र में प्रजा ही राजा होते हैं, कुछ देर के लिए सिद्धांतवादी बन मान भी लिया मैंने। मगर सबसे दुखद यह है कि क्या यह शासन- प्रशासन की व्यवहार में झलकता है? आखिर में सबसे दुखद है रटी- रटायी बातें मानना।
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मिस्र का प्राचीन साहित्य
मिस्र का प्राचीन साहित्य हमे दो साधनों से उपलब्ध हुआ है। एक तो उन अभिलेखों के जरिए जो प्राचीन इमारतों की दीवालों पर अन्य भग्नावशेषों पर खुदे है, दूसरे उन लेखों के जरिए जो 'पेपिरस' नामक कागज पर लिखी पुस्तकों में सुरक्षित है। इसमे सन्देह नहीं कि अभिलेखों का विषय वस्तुतः साहित्य नहीं कहा जा सकता। अधिकतर तो वे राजनीति और धर्म सम्बन्धी हैं जो साहित्य के क्षेत्र में स्थान नहीं पा सकते । यह तो उन अभिलेखों की साधारण स्थिति है। परन्तु उनमें कुछ ऐसे भी हैं जिनका रूप साहित्यिक है ।
इस प्रकार के अभिलेखों में सबसे महत्त्वपूर्ण एक कविता है जिसमें रामेसेज महान् की कीर्तिकथा गाई गई है, विशेष कर उस कठिन युद्ध तथा विजय की कीर्तिकथा जो उस महान् नृपति ने खत्तियों के विरुद्ध अर्जित की थी। अन्य अभिलेख अधिकतर शुद्ध ऐतिहासिक महत्त्व के हैं और उनमें विविध राजकुलों की सूची दी हुई है । अभाग्यवश इन आनुक्रमिक सूचियों में से एक भी सम्पूर्ण नहीं है। यही वात पेपिरस पर लिखे अधिकतर ऐतिहासिक वृन्तों के सम्बन्ध में भी कही जा सकती है । यह महत्व की बात है कि इन तिथिपरक तालिकाओं का मेल मानेथो की तालिका से प्रायः बैठ जाता है। परन्तु मानेथों की वह तालिका भी केवल जोजेफ्स् और दूसरों के उद्धरणों में ही उपलब्ध हो सकी है। मूल तो उसका सर्वथा नष्ट हो चुका है। फिर भी इन दोनों की तुलना कर प्रोफेसर पेत्री ने यह सिद्ध कर दिया है कि मानेथों का ग्रन्थ कैसा सच्चा इतिहास रहा होगा और उसका अभाव वर्तमान इतिहास के लिए कितना क्लेशजनक है ।
जिन पेपिरस के 'रोलों' पर इतिहास के साहित्यिक अवशेष अभिलिखित हैं वे रोल निःसन्देह वास्तविक ग्रन्थ हैं। पत्रों पर लिखित ग्रन्थों की शैली अपेक्षाकृत आधुनिक है। प्राचीन काल में विशेष कर पश्चिमी देशों में लपेटे हुए रोल के रूप मे ही पुस्तकों का निर्माण हुआ। वैसे तो मोम की पट्टिकाओं पर भी विषयों का उल्लेख हुआ है, परन्तु उनको सही-सही पुस्तक कह सकना कठिन है। कम-से-कम लम्बे-चौडे क्रमिक ग्रन्थों के रूप में बाजारों में बिकने के लिए और घरों में प्रयुक्त होने के लिए उनका निर्माण नहीं हुआ था । यह सम्भव है कि ग्रन्थकारों ने अपनी आरम्भिक कृतियों का अम्वास उनपर कुछ अंश में किया हो मध्य युग तक इस रोल का उप
योग होता रहा है पिछले काल में प्रीस और रोम में पुस्तक लिखने का आधार कपडा
रहा है। परन्तु प्राचीन मिस्र में जब तब ही उसका प्रयोग हुआ है। साधारणतः पुस्तकें वहाँ पेपिरस पर ही लिखी जाती रही ।
पेपिरस का कागज पेपिरस नामक पौधे की खुखड़ी या छिल्के-टुकड़ों को एक के ऊपर एक सटाकर बनता था। पेपिरस कागज की ये चादरें चौड़ाई में छः से चौदह इंच तक और लंबाई में कई फुट तक की होती थी । लेख नरकट की कलम से कागज की लम्बाई में खड़े स्तम्भों के रूप में लिखे जाते थे। ये स्तम विविध चौड़ाइयों के होते थे, परन्तु उनका आकार लेखक तथा पाठक की सुविधा पर अवलखित होता था । मिल में मिली प्राचीन लेखक की एक मूर्ति से जान पड़ता है कि लेखक काम करते समय पलथी मार कर बैठता था । पेपिरस अत्यन्त आशुनश्य पदार्थ होने के कारण मिस्र की शुष्क जलवायु में ही सुरक्षित रह सकता है। उसी साधारण जलवायु के प्रताप से हमें मिल के तृतीय सहस्राब्दी ई० पू० तक के अभिलेख उपलब्ध हो सके है । ऐतिहासिक दृष्टि से सबसे अधिक महत्व के वे लेख हैं, जो ट्यूरिन संग्रहालय में सुरक्षित हैं। परन्तु उनसे भी प्राचीन पेपिरस वे हैं, जिन्हें उनके अन्वेषक प्रित्से दावेन के नाम पर मिस्से पेपिरस कहते हैं । ये सम्यक् आचरण और युक्त आजीव के ऊपर लिखे अनेक निबन्ध हैं। अपने विषय की महत्ता के अतिरिक्त इनका महत्व इसमे भी है कि यही प्राचीनतम मिस्त्री लेखन के नमूने हैं। चित्र लेखन से त्वरा-लेखन के लिए जिस प्राचीन लिपि का प्रादुर्भाव हुआ उसी में ये अभिलिखित हैं। फ्रेंच भाषा तत्वविद् दि रूगे का यह दृढ़ विश्वास था कि इसी लिपि से फ़िनीशिया की वर्णमाला निकली और अन्य विद्वानों ने भी इस निष्कर्ष को तब अंगीकार कर लिया था, यद्यपि आज वह सिद्धान्त कुछ कमजोर पड़ चला है । मिस्रियों के चिकित्सा और गणित विषयक अन्य निबन्ध भी प्रभूत संख्या में सुरक्षित हैं।
पेपिरस के रोलों में एक और प्रकार का साहित्य भी बहुमात्रा में उपलब्ध है। यह धार्मिक साहित्य है, वस्तुतः श्राद्ध सम्बन्धी और 'मृतक की पुस्तक' कह लाता है । यह वास्तव में प्राचीन मिस्त्रियों की धर्मपुस्तक है, जिसकी समूची अथवा स्खण्डित अनेक प्रतियाँ मिली हैं। इनमें कइयों में विषय को अंकित करने के लिए चित्र भी बने है । साधारणतः चित्रित ग्रन्थ का प्रचलन अपेक्षाकृत आधुनिक माना जाता है, परन्तु इन मिस्री अभिलेखों से प्रमाणित है कि मिस्र के प्राचीन निवासी ईसा से दो हज़ार वर्षों से भी पूर्व इस कला का उपयोग करते थे ।
शुद्ध साहित्यिक दृष्टि से पेपिरस पर लिखे और अनेक पाठों में सुरक्षित कुछ कहानियाँ और कविताएँ हैं। कहानियाँ और उपन्यास अधिकतर परियों की कथाओं के तौर पर हैं, यद्यपि उनमें वास्तविकता का सर्वथा अभाव भी नहीं है। कविताएँ अधिक तर प्रणय सम्बन्धी और गेय हैं। काल के परिमाण से इतनी दूर और विदेशी भाषा के कलात्मक सौन्दर्य तथा साहित्यिक सुरुचि की वाणियों को हृदयंगम करना निश्चय कठिन है, परन्तु मित्र तत्वविदों का कहना है कि ये कविताएँ तब के मिस्र में अत्यन्त लोकप्रिय थीं कुछ कहानिया और कविताएँ तो निश्चय ऐसी है कि वर्तमान
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मिस्र का प्राचीन साहित्य मिस्र का प्राचीन साहित्य हमे दो साधनों से उपलब्ध हुआ है। एक तो उन अभिलेखों के जरिए जो प्राचीन इमारतों की दीवालों पर अन्य भग्नावशेषों पर खुदे है, दूसरे उन लेखों के जरिए जो 'पेपिरस' नामक कागज पर लिखी पुस्तकों में सुरक्षित है। इसमे सन्देह नहीं कि अभिलेखों का विषय वस्तुतः साहित्य नहीं कहा जा सकता। अधिकतर तो वे राजनीति और धर्म सम्बन्धी हैं जो साहित्य के क्षेत्र में स्थान नहीं पा सकते । यह तो उन अभिलेखों की साधारण स्थिति है। परन्तु उनमें कुछ ऐसे भी हैं जिनका रूप साहित्यिक है । इस प्रकार के अभिलेखों में सबसे महत्त्वपूर्ण एक कविता है जिसमें रामेसेज महान् की कीर्तिकथा गाई गई है, विशेष कर उस कठिन युद्ध तथा विजय की कीर्तिकथा जो उस महान् नृपति ने खत्तियों के विरुद्ध अर्जित की थी। अन्य अभिलेख अधिकतर शुद्ध ऐतिहासिक महत्त्व के हैं और उनमें विविध राजकुलों की सूची दी हुई है । अभाग्यवश इन आनुक्रमिक सूचियों में से एक भी सम्पूर्ण नहीं है। यही वात पेपिरस पर लिखे अधिकतर ऐतिहासिक वृन्तों के सम्बन्ध में भी कही जा सकती है । यह महत्व की बात है कि इन तिथिपरक तालिकाओं का मेल मानेथो की तालिका से प्रायः बैठ जाता है। परन्तु मानेथों की वह तालिका भी केवल जोजेफ्स् और दूसरों के उद्धरणों में ही उपलब्ध हो सकी है। मूल तो उसका सर्वथा नष्ट हो चुका है। फिर भी इन दोनों की तुलना कर प्रोफेसर पेत्री ने यह सिद्ध कर दिया है कि मानेथों का ग्रन्थ कैसा सच्चा इतिहास रहा होगा और उसका अभाव वर्तमान इतिहास के लिए कितना क्लेशजनक है । जिन पेपिरस के 'रोलों' पर इतिहास के साहित्यिक अवशेष अभिलिखित हैं वे रोल निःसन्देह वास्तविक ग्रन्थ हैं। पत्रों पर लिखित ग्रन्थों की शैली अपेक्षाकृत आधुनिक है। प्राचीन काल में विशेष कर पश्चिमी देशों में लपेटे हुए रोल के रूप मे ही पुस्तकों का निर्माण हुआ। वैसे तो मोम की पट्टिकाओं पर भी विषयों का उल्लेख हुआ है, परन्तु उनको सही-सही पुस्तक कह सकना कठिन है। कम-से-कम लम्बे-चौडे क्रमिक ग्रन्थों के रूप में बाजारों में बिकने के लिए और घरों में प्रयुक्त होने के लिए उनका निर्माण नहीं हुआ था । यह सम्भव है कि ग्रन्थकारों ने अपनी आरम्भिक कृतियों का अम्वास उनपर कुछ अंश में किया हो मध्य युग तक इस रोल का उप योग होता रहा है पिछले काल में प्रीस और रोम में पुस्तक लिखने का आधार कपडा रहा है। परन्तु प्राचीन मिस्र में जब तब ही उसका प्रयोग हुआ है। साधारणतः पुस्तकें वहाँ पेपिरस पर ही लिखी जाती रही । पेपिरस का कागज पेपिरस नामक पौधे की खुखड़ी या छिल्के-टुकड़ों को एक के ऊपर एक सटाकर बनता था। पेपिरस कागज की ये चादरें चौड़ाई में छः से चौदह इंच तक और लंबाई में कई फुट तक की होती थी । लेख नरकट की कलम से कागज की लम्बाई में खड़े स्तम्भों के रूप में लिखे जाते थे। ये स्तम विविध चौड़ाइयों के होते थे, परन्तु उनका आकार लेखक तथा पाठक की सुविधा पर अवलखित होता था । मिल में मिली प्राचीन लेखक की एक मूर्ति से जान पड़ता है कि लेखक काम करते समय पलथी मार कर बैठता था । पेपिरस अत्यन्त आशुनश्य पदार्थ होने के कारण मिस्र की शुष्क जलवायु में ही सुरक्षित रह सकता है। उसी साधारण जलवायु के प्रताप से हमें मिल के तृतीय सहस्राब्दी ईशून्य पूशून्य तक के अभिलेख उपलब्ध हो सके है । ऐतिहासिक दृष्टि से सबसे अधिक महत्व के वे लेख हैं, जो ट्यूरिन संग्रहालय में सुरक्षित हैं। परन्तु उनसे भी प्राचीन पेपिरस वे हैं, जिन्हें उनके अन्वेषक प्रित्से दावेन के नाम पर मिस्से पेपिरस कहते हैं । ये सम्यक् आचरण और युक्त आजीव के ऊपर लिखे अनेक निबन्ध हैं। अपने विषय की महत्ता के अतिरिक्त इनका महत्व इसमे भी है कि यही प्राचीनतम मिस्त्री लेखन के नमूने हैं। चित्र लेखन से त्वरा-लेखन के लिए जिस प्राचीन लिपि का प्रादुर्भाव हुआ उसी में ये अभिलिखित हैं। फ्रेंच भाषा तत्वविद् दि रूगे का यह दृढ़ विश्वास था कि इसी लिपि से फ़िनीशिया की वर्णमाला निकली और अन्य विद्वानों ने भी इस निष्कर्ष को तब अंगीकार कर लिया था, यद्यपि आज वह सिद्धान्त कुछ कमजोर पड़ चला है । मिस्रियों के चिकित्सा और गणित विषयक अन्य निबन्ध भी प्रभूत संख्या में सुरक्षित हैं। पेपिरस के रोलों में एक और प्रकार का साहित्य भी बहुमात्रा में उपलब्ध है। यह धार्मिक साहित्य है, वस्तुतः श्राद्ध सम्बन्धी और 'मृतक की पुस्तक' कह लाता है । यह वास्तव में प्राचीन मिस्त्रियों की धर्मपुस्तक है, जिसकी समूची अथवा स्खण्डित अनेक प्रतियाँ मिली हैं। इनमें कइयों में विषय को अंकित करने के लिए चित्र भी बने है । साधारणतः चित्रित ग्रन्थ का प्रचलन अपेक्षाकृत आधुनिक माना जाता है, परन्तु इन मिस्री अभिलेखों से प्रमाणित है कि मिस्र के प्राचीन निवासी ईसा से दो हज़ार वर्षों से भी पूर्व इस कला का उपयोग करते थे । शुद्ध साहित्यिक दृष्टि से पेपिरस पर लिखे और अनेक पाठों में सुरक्षित कुछ कहानियाँ और कविताएँ हैं। कहानियाँ और उपन्यास अधिकतर परियों की कथाओं के तौर पर हैं, यद्यपि उनमें वास्तविकता का सर्वथा अभाव भी नहीं है। कविताएँ अधिक तर प्रणय सम्बन्धी और गेय हैं। काल के परिमाण से इतनी दूर और विदेशी भाषा के कलात्मक सौन्दर्य तथा साहित्यिक सुरुचि की वाणियों को हृदयंगम करना निश्चय कठिन है, परन्तु मित्र तत्वविदों का कहना है कि ये कविताएँ तब के मिस्र में अत्यन्त लोकप्रिय थीं कुछ कहानिया और कविताएँ तो निश्चय ऐसी है कि वर्तमान
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अपने मतदाताओं की समस्याओं को अपनी ही पार्टी की सरकार तक पहुंचाने के लिए प्रदेश के दो भाजपा विधायकों को सड़क पर उतरना पड़ा है. ये हैं पूर्व मंत्री और विधायक अनूप मिश्र और हाटपीपल्या से विधायक दीपक जोशी.
ग्वालियर नगर निगम पर भाजपा का कब्जा है. स्वास्थ्य मंत्री रह चुके अनूप मिश्र यहां से विधायक हैं. वे अपने समर्थकों के साथ 13 फरवरी को नगर निगम के दफ्तर पहुंच गए. निगम अधिकारियों पर उन्होंने जनता की समस्याओं की ओर ध्यान न देने का आरोप लगाया और सभी अधिकारियों को जमकर खरीखोटी सुनाई. मिश्र ने कहा कि अधिकारी शहर को सुंदर बनाने के नाम पर तोड़-फोड़ कर जनता को परेशान करने के तरीके ढूंढ़ते रहते हैं. इसके बाद उन्होंने नगर निगम मुख्यालय के सामने ही जन चौपाल भी लगाई और नागरिकों से अपनी समस्याएं और शिकायतें बताने के लिए कहा.
भाजपा शासित निगम के खिलाफ पार्टी के ही विधायक के उतर आने से खलबली मच गई. भाजपा के लिए स्थिति उस वक्त और भी परेशानी भरी हो गई जब पार्टी के ही 20 पार्षदों सहित निगम सभापति बृजेंद्र सिंह जादौन ने भी मिश्र का साथ दिया. यही नहीं, उनके समर्थन में कई कांग्रेसी नेता भी उतर आए.
मिश्र ने आरोप लगाया कि सड़कें चौड़ी करने के लिए अतिक्रमण साल भर पहले हटा दिए गए थे लेकिन चौड़ीकरण का काम अब तक नहीं हुआ. मामले को बढ़ता देख प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा को मैदान में आना पड़ा. मिश्र को मनाने के लिए झा उनके घर गए. उन्होंने मामले को संभालते हुए और पार्टी में एका दिखाने की कोशिश करते हुए कहा कि मिश्र ने अपने क्षेत्र की जन समस्याओं को उठाया है इसमें कुछ भी गलत नहीं है.
मिश्र के इन तेवर को प्रदेश स्तर पर अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाने का तरीका भी माना जा सकता है. दरअसल डेढ़ साल पहले मिश्र के परिजनों का नाम एक हत्याकांड में आया था, जिसके चलते उन्हें मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था. हालांकि बाद में यह मामला ठंडा पड़ गया और मिश्र को मंत्री पद फिर से हासिल होने की उम्मीद बंधी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. जन चौपाल के बहाने जब मिश्र का संदेश सरकार और संगठन तक पहुंच गया तो थोड़ा नरम पड़ते हुए उन्होंने कहा कि उनका यह कदम सरकार के खिलाफ नहीं है बल्कि नगर निगम के अधिकारियों के रवैये के खिलाफ है.
ग्वालियर में मिश्र के तेवर ठंडे पड़े ही थे कि भाजपा के दिग्गज नेता कैलाश जोशी के बेटे और विधायक दीपक जोशी भी अपनी आवाज को सरकार तक पहुंचाने के लिए सड़क पर उतर आए. देवास जिले के हाटपीपल्या से विधायक दीपक ने अपने क्षेत्र से गुजर रहे गिट्टी भरे डंपरों को बीच राह में ही रोक दिया और आरोप लगाया कि विधायक निधि से जो सड़क उन्होंने बनवाई थी वह एक कंपनी के गिट्टी से भरे इन डंपरों के कारण टूट रही है. इस क्षेत्र में 6 लेन वाली सड़क के निर्माण का काम चल रहा है. सड़क निर्माण की वजह से यहां डंपरों की आवाजाही बहुत बढ़ गई है.
जोशी का आरोप है कि डंपरों में मनमाने तरीके से निर्धारित सीमा से ज्यादा माल लदा होता है जिससे सड़कों को नुकसान पहुंचता है. इन डंपरों के कारण लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर पाते हैं. जोशी कहते हैं, "इस बाबत प्रशासन से कई बार अनुरोध करने के बावजूद इसका हल निकालने की अब तक कोई कोशिश नहीं हुई. इसी वजह से सड़क पर आकर अपना विरोध जताना पड़ा है. " जोशी ने चेतावनी दी है कि 18 फरवरी तक उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो उनका अगला कदम क्षेत्र के हाइवे को जाम करना होगा.
जोशी के कड़े तेवरों को देख निर्माण कंपनी ने बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की है. गायत्री कंस्ट्रक्शंस ने उन्हें भरोसा दिया है कि सड़क को जो भी नुकसान पहुंचा है, उसे कंपनी खुद ही ठीक करवाएगी. उम्मीद कर सकते हैं कि विधायकों के इन तेवरों से जनता को थोड़ा-बहुत फायदा तो मिल ही जाएगा.
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अपने मतदाताओं की समस्याओं को अपनी ही पार्टी की सरकार तक पहुंचाने के लिए प्रदेश के दो भाजपा विधायकों को सड़क पर उतरना पड़ा है. ये हैं पूर्व मंत्री और विधायक अनूप मिश्र और हाटपीपल्या से विधायक दीपक जोशी. ग्वालियर नगर निगम पर भाजपा का कब्जा है. स्वास्थ्य मंत्री रह चुके अनूप मिश्र यहां से विधायक हैं. वे अपने समर्थकों के साथ तेरह फरवरी को नगर निगम के दफ्तर पहुंच गए. निगम अधिकारियों पर उन्होंने जनता की समस्याओं की ओर ध्यान न देने का आरोप लगाया और सभी अधिकारियों को जमकर खरीखोटी सुनाई. मिश्र ने कहा कि अधिकारी शहर को सुंदर बनाने के नाम पर तोड़-फोड़ कर जनता को परेशान करने के तरीके ढूंढ़ते रहते हैं. इसके बाद उन्होंने नगर निगम मुख्यालय के सामने ही जन चौपाल भी लगाई और नागरिकों से अपनी समस्याएं और शिकायतें बताने के लिए कहा. भाजपा शासित निगम के खिलाफ पार्टी के ही विधायक के उतर आने से खलबली मच गई. भाजपा के लिए स्थिति उस वक्त और भी परेशानी भरी हो गई जब पार्टी के ही बीस पार्षदों सहित निगम सभापति बृजेंद्र सिंह जादौन ने भी मिश्र का साथ दिया. यही नहीं, उनके समर्थन में कई कांग्रेसी नेता भी उतर आए. मिश्र ने आरोप लगाया कि सड़कें चौड़ी करने के लिए अतिक्रमण साल भर पहले हटा दिए गए थे लेकिन चौड़ीकरण का काम अब तक नहीं हुआ. मामले को बढ़ता देख प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा को मैदान में आना पड़ा. मिश्र को मनाने के लिए झा उनके घर गए. उन्होंने मामले को संभालते हुए और पार्टी में एका दिखाने की कोशिश करते हुए कहा कि मिश्र ने अपने क्षेत्र की जन समस्याओं को उठाया है इसमें कुछ भी गलत नहीं है. मिश्र के इन तेवर को प्रदेश स्तर पर अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाने का तरीका भी माना जा सकता है. दरअसल डेढ़ साल पहले मिश्र के परिजनों का नाम एक हत्याकांड में आया था, जिसके चलते उन्हें मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा था. हालांकि बाद में यह मामला ठंडा पड़ गया और मिश्र को मंत्री पद फिर से हासिल होने की उम्मीद बंधी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. जन चौपाल के बहाने जब मिश्र का संदेश सरकार और संगठन तक पहुंच गया तो थोड़ा नरम पड़ते हुए उन्होंने कहा कि उनका यह कदम सरकार के खिलाफ नहीं है बल्कि नगर निगम के अधिकारियों के रवैये के खिलाफ है. ग्वालियर में मिश्र के तेवर ठंडे पड़े ही थे कि भाजपा के दिग्गज नेता कैलाश जोशी के बेटे और विधायक दीपक जोशी भी अपनी आवाज को सरकार तक पहुंचाने के लिए सड़क पर उतर आए. देवास जिले के हाटपीपल्या से विधायक दीपक ने अपने क्षेत्र से गुजर रहे गिट्टी भरे डंपरों को बीच राह में ही रोक दिया और आरोप लगाया कि विधायक निधि से जो सड़क उन्होंने बनवाई थी वह एक कंपनी के गिट्टी से भरे इन डंपरों के कारण टूट रही है. इस क्षेत्र में छः लेन वाली सड़क के निर्माण का काम चल रहा है. सड़क निर्माण की वजह से यहां डंपरों की आवाजाही बहुत बढ़ गई है. जोशी का आरोप है कि डंपरों में मनमाने तरीके से निर्धारित सीमा से ज्यादा माल लदा होता है जिससे सड़कों को नुकसान पहुंचता है. इन डंपरों के कारण लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर पाते हैं. जोशी कहते हैं, "इस बाबत प्रशासन से कई बार अनुरोध करने के बावजूद इसका हल निकालने की अब तक कोई कोशिश नहीं हुई. इसी वजह से सड़क पर आकर अपना विरोध जताना पड़ा है. " जोशी ने चेतावनी दी है कि अट्ठारह फरवरी तक उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो उनका अगला कदम क्षेत्र के हाइवे को जाम करना होगा. जोशी के कड़े तेवरों को देख निर्माण कंपनी ने बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की है. गायत्री कंस्ट्रक्शंस ने उन्हें भरोसा दिया है कि सड़क को जो भी नुकसान पहुंचा है, उसे कंपनी खुद ही ठीक करवाएगी. उम्मीद कर सकते हैं कि विधायकों के इन तेवरों से जनता को थोड़ा-बहुत फायदा तो मिल ही जाएगा.
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रूस की सैन्य कार्रवाई के बाद यूक्रेन में तेजी से बिगड़ते हालात के बीच कीव स्थित भारतीय दूतावास ने नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें यूक्रेन में रह रहे भारतीयों से कहा गया है कि वे जहां भी हों घर में रहें, शांत व सुरक्षित रहें। मौजूदा स्थिति अत्यधिक अनिश्चित है।
भारतीय दूतावास ने कहा है कि कीव के पश्चिमी हिस्सों से यात्रा करने वालों सहित कीव की यात्रा करने वाले सभी लोगों को अस्थायी रूप से अपने-अपने शहरों में लौटने की सलाह दी जाती है। दूतावास ने कहा है कि किसी भी अपडेट के लिए आगे की एडवाइजरी जारी की जाएगी। यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास लगातार यूक्रेन में रह रहे भारतीयों से यूक्रेन छोड़कर भारत लौटने की अपील कर रहा था। यूक्रेन के तेजी से बदलते हालात को देखते हुए दूतावास ने अब तक कई एडवाइजरी जारी की है।
यूक्रेन के राजदूत ने कहा यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे तनाव में भारत अहम भूमिका अदा कर सकता है। उन्होंने पीएम मोदी से अपील करते हुए कहा कि वो तुरंत यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से इस बारे में बात करें। मोदी जी इस समय बहुत बड़े नेता हैं, हम उनसे मदद की अपील करते हैं, दुनिया में तनाव को भारत ही कम कर सकता है।
रूस के हमले के बाद यूक्रेन के हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया गया है। कीव में स्थित भारतीय दूतावासा ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। दूतावासा ने बताया कि यूक्रेन पर हमले के बाद हवाई क्षेत्र को बंद करने के मद्देनजर विशेष फ्लाइटों को रद्द कर दिया गया है। भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। दूतावास की वेबसाइट, सोशल मीडिया पोस्ट और नीचे दिए गए नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।
रायटर्स के अनुसार यूक्रेन के रक्षा मंत्री ओलेक्सी रेजनिकोव ने कहा कि जो कोई भी हथियार उठाने के लिए तैयार और सक्षम हो, वह टेरिटोरियल डिफेंस फोर्स के रैंक में शामिल हो सकता है।
भारत में यूक्रेन के राजदूत डा इगोर पोलिखा ने रूस के हमले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया है। यह जबरदस्त आक्रामकता का मामला है, जो सुबह 5 बजे शुरू हुआ। यूक्रेन अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा और इस युद्ध को जीतेगा।
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रूस की सैन्य कार्रवाई के बाद यूक्रेन में तेजी से बिगड़ते हालात के बीच कीव स्थित भारतीय दूतावास ने नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें यूक्रेन में रह रहे भारतीयों से कहा गया है कि वे जहां भी हों घर में रहें, शांत व सुरक्षित रहें। मौजूदा स्थिति अत्यधिक अनिश्चित है। भारतीय दूतावास ने कहा है कि कीव के पश्चिमी हिस्सों से यात्रा करने वालों सहित कीव की यात्रा करने वाले सभी लोगों को अस्थायी रूप से अपने-अपने शहरों में लौटने की सलाह दी जाती है। दूतावास ने कहा है कि किसी भी अपडेट के लिए आगे की एडवाइजरी जारी की जाएगी। यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास लगातार यूक्रेन में रह रहे भारतीयों से यूक्रेन छोड़कर भारत लौटने की अपील कर रहा था। यूक्रेन के तेजी से बदलते हालात को देखते हुए दूतावास ने अब तक कई एडवाइजरी जारी की है। यूक्रेन के राजदूत ने कहा यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे तनाव में भारत अहम भूमिका अदा कर सकता है। उन्होंने पीएम मोदी से अपील करते हुए कहा कि वो तुरंत यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से इस बारे में बात करें। मोदी जी इस समय बहुत बड़े नेता हैं, हम उनसे मदद की अपील करते हैं, दुनिया में तनाव को भारत ही कम कर सकता है। रूस के हमले के बाद यूक्रेन के हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया गया है। कीव में स्थित भारतीय दूतावासा ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। दूतावासा ने बताया कि यूक्रेन पर हमले के बाद हवाई क्षेत्र को बंद करने के मद्देनजर विशेष फ्लाइटों को रद्द कर दिया गया है। भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। दूतावास की वेबसाइट, सोशल मीडिया पोस्ट और नीचे दिए गए नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं। रायटर्स के अनुसार यूक्रेन के रक्षा मंत्री ओलेक्सी रेजनिकोव ने कहा कि जो कोई भी हथियार उठाने के लिए तैयार और सक्षम हो, वह टेरिटोरियल डिफेंस फोर्स के रैंक में शामिल हो सकता है। भारत में यूक्रेन के राजदूत डा इगोर पोलिखा ने रूस के हमले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया है। यह जबरदस्त आक्रामकता का मामला है, जो सुबह पाँच बजे शुरू हुआ। यूक्रेन अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा और इस युद्ध को जीतेगा।
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पाकिस्तान के लाहौर में एक सूफी दरगाह के बाहर बम धमाका होने की खबर है। बताया जा रहा है कि इस हमले में 5 सुरक्षाकर्मियों समेत 9 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, 24 से ज्यादा के घायल होने की जानकारी मिली है।
उधर, बेंगलुरु में इंडियन एयर फोर्स (IAF) का विमान AN-32 रनवे नंबर 27 पर ओवररन हो गया। फिलहाल इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। वहीं, एहतियात के तौर पर रनवे नंबर 27 को दिनभर के लिए बंद कर दिया गया है। एयर फोर्स के अधिकारियों ने बताया कि यह विमान बेंगलुरु के पास येलहांका एयर फोर्स जा रहा था।
Lok Sabha Election 2019: चुनावी रैली के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर पीएम मोदी की 'भ्रष्टाचारी नंबर-1' वाली टिप्पणी को चुनाव आयोग ने आचार संहिता का उल्लंघन नहीं माना है। EC ने इस मामले में पीएम मोदी को क्लीन चिट दे दी है। जांच के बाद पोल समिति ने कहा कि इस मामले में किसी भी शाब्दिक उल्लंघन की जानकारी नहीं मिली है।
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पाकिस्तान के लाहौर में एक सूफी दरगाह के बाहर बम धमाका होने की खबर है। बताया जा रहा है कि इस हमले में पाँच सुरक्षाकर्मियों समेत नौ लोगों की मौत हो गई है। वहीं, चौबीस से ज्यादा के घायल होने की जानकारी मिली है। उधर, बेंगलुरु में इंडियन एयर फोर्स का विमान AN-बत्तीस रनवे नंबर सत्ताईस पर ओवररन हो गया। फिलहाल इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। वहीं, एहतियात के तौर पर रनवे नंबर सत्ताईस को दिनभर के लिए बंद कर दिया गया है। एयर फोर्स के अधिकारियों ने बताया कि यह विमान बेंगलुरु के पास येलहांका एयर फोर्स जा रहा था। Lok Sabha Election दो हज़ार उन्नीस: चुनावी रैली के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर पीएम मोदी की 'भ्रष्टाचारी नंबर-एक' वाली टिप्पणी को चुनाव आयोग ने आचार संहिता का उल्लंघन नहीं माना है। EC ने इस मामले में पीएम मोदी को क्लीन चिट दे दी है। जांच के बाद पोल समिति ने कहा कि इस मामले में किसी भी शाब्दिक उल्लंघन की जानकारी नहीं मिली है।
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नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना वायरस (Coronavirus) जैसी खतरनाक बीमारी से जूझ रहे दिल्ली (Delhi) के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) की तबियत खराब है और अगले कुछ दिन में उनकी संक्रमण को लेकर फिर जांच की जाएगी।
उनके ऑफिस से मिल रही जानकारी के मुताबिक, मनीष सिसोदिया को एलएनजेपी अस्पताल से मैक्स अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है। वहीं आज शाम को ही बताया गया था कि उन्हें डेंगू भी निकला है और उनका प्लेटलेट्स काउंट भी काफी कम है। बता दें कि बुधवार को बुखार और लो ऑक्सिजन लेवल की शिकायत के बाद उन्हें दिल्ली के सरकारी एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि कोरोना संक्रमित होने के बाद सिसोसिया घर पर ही आइसोलेशन में थे। इसके बाद उन्हें बुधवार को बुखार और लो ऑक्सिजन लेवल की शिकायत के बाद एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा, 'वह कल से आईसीयू में हैं, लेकिन उनकी हालत स्थिर है। मंत्री को ऑक्सीजन की मदद दी जा रही है और उनके स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। '
एलएनजेपी, कोविड-19 के मरीजों के लिए एक निर्दिष्ट अस्पताल है। डॉक्टर ने कहा, 'कुछ दिनों में उनकी आरटी-पीसीआर जांच कराई जाएगी। ' यह पूछे जाने पर कि क्या सिसोदिया को कोई अन्य रोग भी हैं, डॉक्टर ने कहा, 'उन्हें हाइपरटेंशन है। ' आम आदमी पार्टी के 48 वर्षीय नेता को बुखार और ऑक्सीजन के स्तर में कमी बाद बुधवार को शाम चार बजे अस्पताल में भर्ती किया गया था।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को कहा, 'उन्हें एहतियात के तौर पर भर्ती किया गया था क्योंकि उनके शरीर का तापमान उच्च बना हुआ था और उनमें ऑक्सीजन का स्तर थोड़ा कम हो गया था। ' बता दें कि डिप्टी सीएम 14 सितंबर को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे और घर पर ही आइसोलेशन में थे। इस बात की जानकारी उन्होंने ट्वीट कर दी थी।
सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा थी, 'हल्का बुखार होने के बाद आज कोरोना टेस्ट कराया था जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मैंने स्वयं को एकांतवास में रख लिया है। उन्होंने आगे कहा, 'फिलहाल बुखार या अन्य कोई परेशानी नहीं है मैं पूरी तरह ठीक हूं। आप सब की दुआओं से जल्द ही पूर्ण स्वस्थ होकर काम पर लौटूंगा। '
Corona पर 3 चौंकाने वाले शोध, इस ब्लड ग्रुप वालों को होता है संक्रमण का सबसे कम खतरा, पढ़े रिपोर्ट. .
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नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कोरोना वायरस जैसी खतरनाक बीमारी से जूझ रहे दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की तबियत खराब है और अगले कुछ दिन में उनकी संक्रमण को लेकर फिर जांच की जाएगी। उनके ऑफिस से मिल रही जानकारी के मुताबिक, मनीष सिसोदिया को एलएनजेपी अस्पताल से मैक्स अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है। वहीं आज शाम को ही बताया गया था कि उन्हें डेंगू भी निकला है और उनका प्लेटलेट्स काउंट भी काफी कम है। बता दें कि बुधवार को बुखार और लो ऑक्सिजन लेवल की शिकायत के बाद उन्हें दिल्ली के सरकारी एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि कोरोना संक्रमित होने के बाद सिसोसिया घर पर ही आइसोलेशन में थे। इसके बाद उन्हें बुधवार को बुखार और लो ऑक्सिजन लेवल की शिकायत के बाद एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा, 'वह कल से आईसीयू में हैं, लेकिन उनकी हालत स्थिर है। मंत्री को ऑक्सीजन की मदद दी जा रही है और उनके स्वास्थ्य पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ' एलएनजेपी, कोविड-उन्नीस के मरीजों के लिए एक निर्दिष्ट अस्पताल है। डॉक्टर ने कहा, 'कुछ दिनों में उनकी आरटी-पीसीआर जांच कराई जाएगी। ' यह पूछे जाने पर कि क्या सिसोदिया को कोई अन्य रोग भी हैं, डॉक्टर ने कहा, 'उन्हें हाइपरटेंशन है। ' आम आदमी पार्टी के अड़तालीस वर्षीय नेता को बुखार और ऑक्सीजन के स्तर में कमी बाद बुधवार को शाम चार बजे अस्पताल में भर्ती किया गया था। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को कहा, 'उन्हें एहतियात के तौर पर भर्ती किया गया था क्योंकि उनके शरीर का तापमान उच्च बना हुआ था और उनमें ऑक्सीजन का स्तर थोड़ा कम हो गया था। ' बता दें कि डिप्टी सीएम चौदह सितंबर को कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे और घर पर ही आइसोलेशन में थे। इस बात की जानकारी उन्होंने ट्वीट कर दी थी। सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा थी, 'हल्का बुखार होने के बाद आज कोरोना टेस्ट कराया था जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मैंने स्वयं को एकांतवास में रख लिया है। उन्होंने आगे कहा, 'फिलहाल बुखार या अन्य कोई परेशानी नहीं है मैं पूरी तरह ठीक हूं। आप सब की दुआओं से जल्द ही पूर्ण स्वस्थ होकर काम पर लौटूंगा। ' Corona पर तीन चौंकाने वाले शोध, इस ब्लड ग्रुप वालों को होता है संक्रमण का सबसे कम खतरा, पढ़े रिपोर्ट. . Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें। हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
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बिजनौर जिले में इन दिनों ने कहर बरपा रखा है। इसी साल गुलदार के हमले से 8 लोगों की जान चुकी है, जबकि डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। लोग गुलदार के आतंक से इतने परेशान हैं कि अब वह खेती करने जंगल जाने से भी कतरा रहे हैं और समूह में इकठ्ठा होकर लाठी-डंडे हाथ में लेकर खेती करने को मजबूर हैं।
वन विभाग गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाकर गुलदार को पकड़ने के लाख दावे कर रहा हो लेकिन गुलदार अभी तक वन विभाग के पकड़ से कोसों दूर है। अफजलगढ़़, रेहड़ ,नगीना ,धामपुर सहित पूरे जिले में अलग-अलग जगह पिछले काफी दिनों से गुलदार का आतंक देखने को मिल रहा है।
साल 2023 में अब तक 7 महीने के अंदर गुलदार के हमले से 8 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। अफ़ज़लगढ के ब्लाक क्षेत्र में तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी आदमखोर गुलदार वन विभाग की टीम की पकड़ से दूर है। गुलदार को पकड़ना तो दूर सर्च टीम अभी तक गुलदार का मूवमेंट भी ट्रेस नहीं कर पायी। गुलदार के न पकड़े जाने व लगातार हो रहे हमलों से क्षेत्रीय जनता में मन में डर बना हुआ है।
नगीना वन रेंज के अन्तर्गत पिछले दो माह के भीतर गुलदार पांच इंसानों को अपना निवाला बना चुका हैं। गुलदार को पकड़ने के लिये एवं मानव वन्यजीव संघर्ष को न्यून करने के लिये पांच टीमें गठित की गयी थी। टीमों द्वारा गुलदार प्रभावित क्षेत्र में ट्रेप कैमरा व पिंजरे लगवायें थें व गुलदार की लोकेशन ट्रेस करने के लिए ड्रोन कैमरा का सहारा लिया गया था। लेकिन तीन सप्ताह बाद भी सर्च टीम को कोई सफलता न मिलने से क्षेत्र में गुलदार का आतंक बरकार हैं।
क्षेत्र के रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब जंगल में अकेले जाते हुए भी डर लग रहा है। साथ ही उनकी खेती बर्बाद होने के कगार पर है। वह अब इकट्ठा होकर समूह बनाकर हाथ में डंडे लेकर खेतों में खेती करने जा रहे हैं और वन विभाग से जल्द गुलदार को पकड़े जाने की मांग कर रहे हैं।
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बिजनौर जिले में इन दिनों ने कहर बरपा रखा है। इसी साल गुलदार के हमले से आठ लोगों की जान चुकी है, जबकि डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। लोग गुलदार के आतंक से इतने परेशान हैं कि अब वह खेती करने जंगल जाने से भी कतरा रहे हैं और समूह में इकठ्ठा होकर लाठी-डंडे हाथ में लेकर खेती करने को मजबूर हैं। वन विभाग गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाकर गुलदार को पकड़ने के लाख दावे कर रहा हो लेकिन गुलदार अभी तक वन विभाग के पकड़ से कोसों दूर है। अफजलगढ़़, रेहड़ ,नगीना ,धामपुर सहित पूरे जिले में अलग-अलग जगह पिछले काफी दिनों से गुलदार का आतंक देखने को मिल रहा है। साल दो हज़ार तेईस में अब तक सात महीने के अंदर गुलदार के हमले से आठ लोगों की मौत हो चुकी है जबकि डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। अफ़ज़लगढ के ब्लाक क्षेत्र में तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी आदमखोर गुलदार वन विभाग की टीम की पकड़ से दूर है। गुलदार को पकड़ना तो दूर सर्च टीम अभी तक गुलदार का मूवमेंट भी ट्रेस नहीं कर पायी। गुलदार के न पकड़े जाने व लगातार हो रहे हमलों से क्षेत्रीय जनता में मन में डर बना हुआ है। नगीना वन रेंज के अन्तर्गत पिछले दो माह के भीतर गुलदार पांच इंसानों को अपना निवाला बना चुका हैं। गुलदार को पकड़ने के लिये एवं मानव वन्यजीव संघर्ष को न्यून करने के लिये पांच टीमें गठित की गयी थी। टीमों द्वारा गुलदार प्रभावित क्षेत्र में ट्रेप कैमरा व पिंजरे लगवायें थें व गुलदार की लोकेशन ट्रेस करने के लिए ड्रोन कैमरा का सहारा लिया गया था। लेकिन तीन सप्ताह बाद भी सर्च टीम को कोई सफलता न मिलने से क्षेत्र में गुलदार का आतंक बरकार हैं। क्षेत्र के रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब जंगल में अकेले जाते हुए भी डर लग रहा है। साथ ही उनकी खेती बर्बाद होने के कगार पर है। वह अब इकट्ठा होकर समूह बनाकर हाथ में डंडे लेकर खेतों में खेती करने जा रहे हैं और वन विभाग से जल्द गुलदार को पकड़े जाने की मांग कर रहे हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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कनाडा में खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों की तरफ से एक के बाद एक्शन लिए जा रहे हैं। पहले कनाडा की तरफ से भारत के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की गई तो भारत ने भी पलटवार करते हुए कनाडा जाने वाले भारतीय यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
खबर में आगे पढ़ेंः
भारत ने वर्तमान हालात को देखते हुए फिलहाल अपने यात्रियों को कनाडा की यात्रा करने से बचने की सलाह दी है। वहीं अगर भारतीय नागरिक कनाडा की यात्रा कर रहे हैं तो कुछ सावधानी बरतने को कहा है। एडवाइजरी में भारतीय राजनयिकों सहित व्यक्तियों को खतरे का हवाला दिया गया है साथ ही कनाडा जाने वाले छात्रों और भारतीय नागरिकों को उच्चायोग में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा है।
भारतीय विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी में कहा गया है कि हाल ही में कनाडा की कुछ क्षेत्रों में भारतीय राजनियकों और भारतीय वर्गों को निशाना बनाया गया है। इसलिए भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे कनाडा के उन क्षेत्रों और संभावित स्थानों करने से बचें जहां ऐसी घटनाएं देखी गई है।
बता दें कि कनाडा ने भारत में रह रहे अपने लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में भारत की कई जगहों को सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक बताया है। कनाडा ने कहा, "अप्रत्याशित सुरक्षा स्थिति के कारण केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर की यात्रा से बचें। आतंकवाद, उग्रवाद, नागरिक अशांति और अपहरण का खतरा है। इस सलाह में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की यात्रा या उसके भीतर यात्रा शामिल नहीं है।" लद्दाख के लिए एडवाइजरी में कोई अपडेट जारी नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि लद्दाख में यात्रा कर सकते हैं।
भारत में कनाडा के उच्चायुक्त कैमरून मैके को विदेश मंत्रालय ने तलब कर वरिष्ठ कनाडाई राजनयिक को निष्कासित कर दिया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह कदम हमारे आंतरिक मामलों में कनाडाई राजनयिकों के हस्तक्षेप और भारत विरोधी गतिविधियों में उनकी संलिप्तता को लेकर भारत की बढ़ती चिंता को दर्शाता है। राजनयिक को अगले पांच दिन में भारत से जाने का निर्देश दिया गया है।
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कनाडा में खालिस्तानी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों की तरफ से एक के बाद एक्शन लिए जा रहे हैं। पहले कनाडा की तरफ से भारत के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की गई तो भारत ने भी पलटवार करते हुए कनाडा जाने वाले भारतीय यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की है। खबर में आगे पढ़ेंः भारत ने वर्तमान हालात को देखते हुए फिलहाल अपने यात्रियों को कनाडा की यात्रा करने से बचने की सलाह दी है। वहीं अगर भारतीय नागरिक कनाडा की यात्रा कर रहे हैं तो कुछ सावधानी बरतने को कहा है। एडवाइजरी में भारतीय राजनयिकों सहित व्यक्तियों को खतरे का हवाला दिया गया है साथ ही कनाडा जाने वाले छात्रों और भारतीय नागरिकों को उच्चायोग में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए कहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी में कहा गया है कि हाल ही में कनाडा की कुछ क्षेत्रों में भारतीय राजनियकों और भारतीय वर्गों को निशाना बनाया गया है। इसलिए भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे कनाडा के उन क्षेत्रों और संभावित स्थानों करने से बचें जहां ऐसी घटनाएं देखी गई है। बता दें कि कनाडा ने भारत में रह रहे अपने लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में भारत की कई जगहों को सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक बताया है। कनाडा ने कहा, "अप्रत्याशित सुरक्षा स्थिति के कारण केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर की यात्रा से बचें। आतंकवाद, उग्रवाद, नागरिक अशांति और अपहरण का खतरा है। इस सलाह में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की यात्रा या उसके भीतर यात्रा शामिल नहीं है।" लद्दाख के लिए एडवाइजरी में कोई अपडेट जारी नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि लद्दाख में यात्रा कर सकते हैं। भारत में कनाडा के उच्चायुक्त कैमरून मैके को विदेश मंत्रालय ने तलब कर वरिष्ठ कनाडाई राजनयिक को निष्कासित कर दिया। विदेश मंत्रालय ने बताया कि यह कदम हमारे आंतरिक मामलों में कनाडाई राजनयिकों के हस्तक्षेप और भारत विरोधी गतिविधियों में उनकी संलिप्तता को लेकर भारत की बढ़ती चिंता को दर्शाता है। राजनयिक को अगले पांच दिन में भारत से जाने का निर्देश दिया गया है।
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