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MCD Election 2022: दिल्ली नगर निगम चुनाव 2022 की तारीखों का आजा ऐलान कर दिया गया है। तय की गई तारीखों के मुताबिक 4 दिसंबर 2022 को मतदान होगा और इसके बाद 7 दिसंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे। दिल्ली में इस बार सरकार ने निगमों का एकीकरण कर दिया है। हालांकि, निगम और जनता सशक्त हो और उनको ज्यादा लाभ मिले इसके लिए एमसीडी एकीकरण एक्ट में प्रावधान नहीं दिया गया है। बता दें कि दिल्ली नगर निगम की 250 सीटों में से अनुसूचित जाति (SC) के लिए 42 सीटें आरक्षित की गई हैं। वहीं, महिलाओं के लिए भी 50 फीसदी सीटें आरक्षित रहेंगी। इन सीटों को भी चिन्हित कर लिया गया है।
दिल्ली में 1 जनवरी 2022 तक करीब 1. 48 करोड़ मतदाता थे। गृह मंत्रालय ने बीते मंगलवार को एमसीडी के परिसीमन के बाद नोटिफिकेशन जारी किया था। जिसके बाद एमसीडी चुनाव को लेकर रास्ता साफ हो गया था। गृह मंत्रालय द्वारा जारी 800 पन्नों के नोटिफिकेशन में कहा गया था कि दिल्ली में नगर निगम वार्डों की संख्या अब 250 होगी। नगर पालिका के एकीकरण से पहले 70 विधानसभा क्षेत्रों में 272 वार्ड हुआ करते थे।
MCD Election 2022: क्या निगमों का होगा एकीकरण?
दिल्ली में इस बार सरकार ने निगमों का एकीकरण कर दिया है। इसके अलावा एक्ट में निगम के दिवालिया होने की वजह, पार्षदों और मेयर को पावरफुल बनने या मिलने वाले नए अधिकारों का कोई जिक्र नहीं है।
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MCD Election दो हज़ार बाईस: दिल्ली नगर निगम चुनाव दो हज़ार बाईस की तारीखों का आजा ऐलान कर दिया गया है। तय की गई तारीखों के मुताबिक चार दिसंबर दो हज़ार बाईस को मतदान होगा और इसके बाद सात दिसंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे। दिल्ली में इस बार सरकार ने निगमों का एकीकरण कर दिया है। हालांकि, निगम और जनता सशक्त हो और उनको ज्यादा लाभ मिले इसके लिए एमसीडी एकीकरण एक्ट में प्रावधान नहीं दिया गया है। बता दें कि दिल्ली नगर निगम की दो सौ पचास सीटों में से अनुसूचित जाति के लिए बयालीस सीटें आरक्षित की गई हैं। वहीं, महिलाओं के लिए भी पचास फीसदी सीटें आरक्षित रहेंगी। इन सीटों को भी चिन्हित कर लिया गया है। दिल्ली में एक जनवरी दो हज़ार बाईस तक करीब एक. अड़तालीस करोड़ मतदाता थे। गृह मंत्रालय ने बीते मंगलवार को एमसीडी के परिसीमन के बाद नोटिफिकेशन जारी किया था। जिसके बाद एमसीडी चुनाव को लेकर रास्ता साफ हो गया था। गृह मंत्रालय द्वारा जारी आठ सौ पन्नों के नोटिफिकेशन में कहा गया था कि दिल्ली में नगर निगम वार्डों की संख्या अब दो सौ पचास होगी। नगर पालिका के एकीकरण से पहले सत्तर विधानसभा क्षेत्रों में दो सौ बहत्तर वार्ड हुआ करते थे। MCD Election दो हज़ार बाईस: क्या निगमों का होगा एकीकरण? दिल्ली में इस बार सरकार ने निगमों का एकीकरण कर दिया है। इसके अलावा एक्ट में निगम के दिवालिया होने की वजह, पार्षदों और मेयर को पावरफुल बनने या मिलने वाले नए अधिकारों का कोई जिक्र नहीं है।
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ALLAHABAD: माघ मेले में देश की अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों की झलक तो दिखती है। ऐसे में लोक कलाओं के संगम की अनुभूति शहर के लोगों के लिए अलग अनुभव देना वाला होगा। गुरुवार से परेड रोड पर उत्तर मध्य सांस्कृतिक केन्द्र के शिविर में लोक कलाओं के ऐसे ही अनूठे संगम का आगाज होगा। एनसीजेडसीसी की ओर से आयोजित चलो मन गंगा यमुना तीर कार्यक्रम की श्रृंखला के अन्तर्गत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दो चरणों में आयोजित होगी। पहला चरण दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक होगा। जबकि दूसरा चरण शाम साढ़े पांच बजे से रात्रि आठ बजे तक आयोजित किया जाएगा। चार फरवरी से हो रही शुरूआत के मुख्य अतिथि कमिश्नर राजन शुक्ल होंगे।
एनसीजेडसीसी की ओर से आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम चलो मन गंगा यमुना तीर का आयोजन 11 दिनों तक किया जाएगा। इस दौरान शहर के लोगों को मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखण्ड, हरियाणा समेत अन्य विभिन्न प्रदेशों की लोक कलाओं की शानदार झलक देखने का मौका मिलेगा। एनसीजेडसीसी के डायरेक्टर गौरव कृष्ण बंसल ने बताया कि विभिन्न प्रदेशों की लोक कलाओं के साथ ही उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के गांवों में बसने वाली लोक कलाओं की प्रस्तुति भी होगी। इसमें मिर्जापुर की फेमस कजरी से लेकर मथुरा के कलाकारों द्वारा ब्रज के लोकनृत्य, ब्रज की लीला दर्शकों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र रहेगी।
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ALLAHABAD: माघ मेले में देश की अलग-अलग संस्कृतियों के लोगों की झलक तो दिखती है। ऐसे में लोक कलाओं के संगम की अनुभूति शहर के लोगों के लिए अलग अनुभव देना वाला होगा। गुरुवार से परेड रोड पर उत्तर मध्य सांस्कृतिक केन्द्र के शिविर में लोक कलाओं के ऐसे ही अनूठे संगम का आगाज होगा। एनसीजेडसीसी की ओर से आयोजित चलो मन गंगा यमुना तीर कार्यक्रम की श्रृंखला के अन्तर्गत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दो चरणों में आयोजित होगी। पहला चरण दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक होगा। जबकि दूसरा चरण शाम साढ़े पांच बजे से रात्रि आठ बजे तक आयोजित किया जाएगा। चार फरवरी से हो रही शुरूआत के मुख्य अतिथि कमिश्नर राजन शुक्ल होंगे। एनसीजेडसीसी की ओर से आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम चलो मन गंगा यमुना तीर का आयोजन ग्यारह दिनों तक किया जाएगा। इस दौरान शहर के लोगों को मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखण्ड, हरियाणा समेत अन्य विभिन्न प्रदेशों की लोक कलाओं की शानदार झलक देखने का मौका मिलेगा। एनसीजेडसीसी के डायरेक्टर गौरव कृष्ण बंसल ने बताया कि विभिन्न प्रदेशों की लोक कलाओं के साथ ही उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के गांवों में बसने वाली लोक कलाओं की प्रस्तुति भी होगी। इसमें मिर्जापुर की फेमस कजरी से लेकर मथुरा के कलाकारों द्वारा ब्रज के लोकनृत्य, ब्रज की लीला दर्शकों के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र रहेगी।
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नई दिल्ली : आज बुधवार को फ्रांस से खरीदे जा रहे 36 अत्याधुनिक राफेल विमानों में से पांच विमान भारत पहुंच रहे हैं। बता दे कि हरियाणा के अंबाला में 5 राफेल विमानों का पहला जत्था पहुंचेगा। पांच विमान करीब 7,000 किमी की दूरी तय करके आज बुधवार को भारत में पहुंच रहे हैं। जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया अंबाला एयरबेस पर विमानों की अगवानी करेंगे।
- राफेल की अधिकतम रफ्तार 2200 से 2500 तक किमी प्रतिघंटा है इसकी रेंज 3700 किलोमीटर है।
- इसमें 1. 30 mm की एक गन लगी होती है जो एक बार में 125 राउंड गोलियां निकाल सकती है।
- इसमें थाले आरबीई-2 रडार और थाले स्पेक्ट्रा वारफेयर सिस्टम लगा होता है। साथ ही इसमें ऑप्ट्रॉनिक सेक्योर फ्रंटल इंफ्रा-रेड सर्च और ट्रैक सिस्टम भी लगा है।
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नई दिल्ली : आज बुधवार को फ्रांस से खरीदे जा रहे छत्तीस अत्याधुनिक राफेल विमानों में से पांच विमान भारत पहुंच रहे हैं। बता दे कि हरियाणा के अंबाला में पाँच राफेल विमानों का पहला जत्था पहुंचेगा। पांच विमान करीब सात,शून्य किमी की दूरी तय करके आज बुधवार को भारत में पहुंच रहे हैं। जहां वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया अंबाला एयरबेस पर विमानों की अगवानी करेंगे। - राफेल की अधिकतम रफ्तार दो हज़ार दो सौ से दो हज़ार पाँच सौ तक किमी प्रतिघंटा है इसकी रेंज तीन हज़ार सात सौ किलोग्राममीटर है। - इसमें एक. तीस मिलीमीटर की एक गन लगी होती है जो एक बार में एक सौ पच्चीस राउंड गोलियां निकाल सकती है। - इसमें थाले आरबीई-दो रडार और थाले स्पेक्ट्रा वारफेयर सिस्टम लगा होता है। साथ ही इसमें ऑप्ट्रॉनिक सेक्योर फ्रंटल इंफ्रा-रेड सर्च और ट्रैक सिस्टम भी लगा है।
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डोमचांचः डोमचांच स्थित जी. एस. पब्लिक स्कूल डोमचांच प्रांगण में बुधवार को CCA एक्टिविटी के अंतर्गत कराये गए विभिन्न तरह के खेल-कूद प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता, ड्रॉइंग उन्होंने सम्मानित सभी बच्चों के लिए एक से बढ़कर एक विचार प्रस्तुत किया।
में भाग लिए सभी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर मोमेंटो व प्रसस्ति पत्र दिया गया।
सम्मान समारोह के कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के अध्यक्ष प्रदीप सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में सभी बच्चों को ढेरों शुभकामनाएं एवं आशीर्वचन देते हुए जीवन मे सफल होने के साथ विद्यालय एवं अपने माता-पिता के नाम रोशन करने की बात कही।
समारोह में उपस्थित विद्यालय के निदेशक नितेश कुमार ने उत्कृष्ट सभी बच्चों को अपने आशीर्वचन दिए व प्रसस्ति पत्र वितरित किया एवं अपने संबोधन में पढ़ाई के साथ-साथ अलग-अलग प्रतिभा व कला को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। मौके पर उपस्थित विद्यालय की प्राचार्या प्रतिमा कुमारी ने भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हुए सबो को शुभकामनाएं दी एवं खेल कूद के महत्व को बताते हुए अपने विचार प्रस्तुत किये।
कार्यक्रम के मंच संचालन में विद्यालय के कोऑर्डिनेटर सोनी चंदन के द्वारा की गयी।
वर्ग नवम व दशम के छात्रों के लिए फुटबॉल एवं कब्बडी प्रतियोगिता का आयोजन विद्यालय के शिक्षक सह खेल-कूद प्रशिक्षक ललित मेहता के द्वारा उनके मार्ग दर्शन में किया गया। उत्कृष्ट सभी बच्चों को विद्यालय में उपस्थित सभी शिक्षक-शिक्षकीओं के द्वारा प्रसस्ति पत्र वितरित कर बच्चों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी शिक्षक-शिक्षकीओं में अकॉउंटेन्ट गुलाब चंद सहा, आशीष कुमार, शिवपूजन मोदी, जितेंद्र कुमार,मो. इलियास, राजीव मिश्रा, शुभम कुमार, निरंजन कुमार, सुनील शर्मा, दिगंबर पांडे, रामलखन पासवान, मो. नवाज, अनुज सिंहा, रवि कांत रवि, सुशीला कुमारी,नेहा भरतपुरिया, आरूषी कुमारी, काजल कुमारी, अनिता कुमारी,नेहा पंडित, काजल साह, रूबी कुमारी, गुड़िया कुमारी, स्नेहलता सिन्हा, मंजू सिंह, शमा परवीन, लक्ष्मी कुमारी, सुनीता बारा, नैना कुमारी, अर्चना कुमारी, नेहा रजक, ममता सिन्हा, अंजलि रजक, प्रीति प्रिया, मेहनाज परवीन, सभी शामिल हुए।
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डोमचांचः डोमचांच स्थित जी. एस. पब्लिक स्कूल डोमचांच प्रांगण में बुधवार को CCA एक्टिविटी के अंतर्गत कराये गए विभिन्न तरह के खेल-कूद प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता, ड्रॉइंग उन्होंने सम्मानित सभी बच्चों के लिए एक से बढ़कर एक विचार प्रस्तुत किया। में भाग लिए सभी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर मोमेंटो व प्रसस्ति पत्र दिया गया। सम्मान समारोह के कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के अध्यक्ष प्रदीप सिंह द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में सभी बच्चों को ढेरों शुभकामनाएं एवं आशीर्वचन देते हुए जीवन मे सफल होने के साथ विद्यालय एवं अपने माता-पिता के नाम रोशन करने की बात कही। समारोह में उपस्थित विद्यालय के निदेशक नितेश कुमार ने उत्कृष्ट सभी बच्चों को अपने आशीर्वचन दिए व प्रसस्ति पत्र वितरित किया एवं अपने संबोधन में पढ़ाई के साथ-साथ अलग-अलग प्रतिभा व कला को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। मौके पर उपस्थित विद्यालय की प्राचार्या प्रतिमा कुमारी ने भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हुए सबो को शुभकामनाएं दी एवं खेल कूद के महत्व को बताते हुए अपने विचार प्रस्तुत किये। कार्यक्रम के मंच संचालन में विद्यालय के कोऑर्डिनेटर सोनी चंदन के द्वारा की गयी। वर्ग नवम व दशम के छात्रों के लिए फुटबॉल एवं कब्बडी प्रतियोगिता का आयोजन विद्यालय के शिक्षक सह खेल-कूद प्रशिक्षक ललित मेहता के द्वारा उनके मार्ग दर्शन में किया गया। उत्कृष्ट सभी बच्चों को विद्यालय में उपस्थित सभी शिक्षक-शिक्षकीओं के द्वारा प्रसस्ति पत्र वितरित कर बच्चों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी शिक्षक-शिक्षकीओं में अकॉउंटेन्ट गुलाब चंद सहा, आशीष कुमार, शिवपूजन मोदी, जितेंद्र कुमार,मो. इलियास, राजीव मिश्रा, शुभम कुमार, निरंजन कुमार, सुनील शर्मा, दिगंबर पांडे, रामलखन पासवान, मो. नवाज, अनुज सिंहा, रवि कांत रवि, सुशीला कुमारी,नेहा भरतपुरिया, आरूषी कुमारी, काजल कुमारी, अनिता कुमारी,नेहा पंडित, काजल साह, रूबी कुमारी, गुड़िया कुमारी, स्नेहलता सिन्हा, मंजू सिंह, शमा परवीन, लक्ष्मी कुमारी, सुनीता बारा, नैना कुमारी, अर्चना कुमारी, नेहा रजक, ममता सिन्हा, अंजलि रजक, प्रीति प्रिया, मेहनाज परवीन, सभी शामिल हुए।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज जार्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की और दोनों पक्षों ने रक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, सीमा शुल्क के क्षेत्र में आपसी सहयोग समेत एक दर्जन समझौतों पर हस्ताक्षर किये।
दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता से पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि दोनों देश पारंपरिक करीबी और सौहार्दपूर्ण संबंधों को गति प्रदान कर रहे है। भारत और जार्डन ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये जिसमें प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, सैन्य अध्ययन, साइबर सुरक्षा, सैन्य चिकित्सा सेवा, शांति रक्षा जैसे कुछ चिन्हित क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया जायेगा। दोनों देशों ने स्वास्थ्य एवं औषधि के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिये भी एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया। इसका मकसद स्वास्थ्स, चिकित्सा विज्ञान, चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में समानता और आपसी लाभ के आधार पर सहयोग बढ़ाना है। इसमें सार्वभौम स्वास्थ्य कवरेज, सेवा एवं आईटी क्षेत्र में स्वास्थ्य, स्वास्थ्य शोध, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सांख्यिकी, उपचार, फार्मा एवं चिकित्सा उपकरण के संबंध में नियमन, टीबी जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है। समझौते के तहत भारत, जार्डन में अगली पीढी का उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करेगा जिसके माध्यम से अगले पांच वर्षों में 3000 आईटी पेशेवरों को प्रशिक्षित किया जायेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जार्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने राक फास्फेट और उर्वरक एवं एनपीके की दीर्घावधि आपूर्ति के बारे में एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये।
दोनों देशों ने सीमा शुल्क से जुड़े अपराधों को रोकने तथा सीमा शुल्क, कर, फीस एवं अन्य शुल्क के बारे में सटीक सूचनाओं के आदान प्रदान के बारे में भी समझौता किया।
भारत और जार्डन ने आगरा और पेट्रा के बीच अनुकूलता संबंधी एक समझौता भी किया जिसका मकसद दोनों क्षेत्रों की नगर पालिकाओं के बीच पर्यटन, संस्कृति, खेल और आर्थिक क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों की पहचान करने और इन्हें बढ़ावा देने में सहयोग करना है।
भारतीय जन संचार संस्थान और जार्डन मीडिया इंस्टीट्यूट के बीच भी सहयोग को बढ़ावा देने के बारे में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये गए। इसके तहत दोनों संस्थान आकादमिक और वैज्ञानिक गतिविधियों का संयुक्त रूप से आयोजन करेंगे और कर्मचारियों, छात्रों एवं सामग्रियों का आदान प्रदान करेंगे।
दोनों देशों ने राजनयिक एवं आधिकारिक पासपोर्ट धारकों को वीजा छूट देने तथा सांस्कृतिक आदान प्रदान कार्यक्रम के संबंध में भी समझौता किया।
सांस्कृतिक आदान प्रदान समझौते के तहत साल 2018 से 2022 के बीच भारत और जार्डन संगीत, नृत्य, थियेटर, प्रदर्शनी, सम्मेलनों, संग्रहालयों, शोध, पुरातत्व के क्षेत्र में आपसी आदान प्रदान को बढ़ावा देंगे।
भारत और जार्डन ने मानव शक्ति के क्षेत्र में सहयोग को लेकर एक समझौता किया। यूनिवर्सिटी आफ जार्डन और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद ःआईसीसीआरः ने भी एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया जिसका मकसद विश्वविद्यालय में हिन्दी पी" की स्थापना करना है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज जार्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की और दोनों पक्षों ने रक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, सीमा शुल्क के क्षेत्र में आपसी सहयोग समेत एक दर्जन समझौतों पर हस्ताक्षर किये। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय वार्ता से पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि दोनों देश पारंपरिक करीबी और सौहार्दपूर्ण संबंधों को गति प्रदान कर रहे है। भारत और जार्डन ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये जिसमें प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, सैन्य अध्ययन, साइबर सुरक्षा, सैन्य चिकित्सा सेवा, शांति रक्षा जैसे कुछ चिन्हित क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया जायेगा। दोनों देशों ने स्वास्थ्य एवं औषधि के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिये भी एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया। इसका मकसद स्वास्थ्स, चिकित्सा विज्ञान, चिकित्सा शिक्षा और शोध के क्षेत्र में समानता और आपसी लाभ के आधार पर सहयोग बढ़ाना है। इसमें सार्वभौम स्वास्थ्य कवरेज, सेवा एवं आईटी क्षेत्र में स्वास्थ्य, स्वास्थ्य शोध, राष्ट्रीय स्वास्थ्य सांख्यिकी, उपचार, फार्मा एवं चिकित्सा उपकरण के संबंध में नियमन, टीबी जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है। समझौते के तहत भारत, जार्डन में अगली पीढी का उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करेगा जिसके माध्यम से अगले पांच वर्षों में तीन हज़ार आईटी पेशेवरों को प्रशिक्षित किया जायेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जार्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने राक फास्फेट और उर्वरक एवं एनपीके की दीर्घावधि आपूर्ति के बारे में एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये। दोनों देशों ने सीमा शुल्क से जुड़े अपराधों को रोकने तथा सीमा शुल्क, कर, फीस एवं अन्य शुल्क के बारे में सटीक सूचनाओं के आदान प्रदान के बारे में भी समझौता किया। भारत और जार्डन ने आगरा और पेट्रा के बीच अनुकूलता संबंधी एक समझौता भी किया जिसका मकसद दोनों क्षेत्रों की नगर पालिकाओं के बीच पर्यटन, संस्कृति, खेल और आर्थिक क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों की पहचान करने और इन्हें बढ़ावा देने में सहयोग करना है। भारतीय जन संचार संस्थान और जार्डन मीडिया इंस्टीट्यूट के बीच भी सहयोग को बढ़ावा देने के बारे में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये गए। इसके तहत दोनों संस्थान आकादमिक और वैज्ञानिक गतिविधियों का संयुक्त रूप से आयोजन करेंगे और कर्मचारियों, छात्रों एवं सामग्रियों का आदान प्रदान करेंगे। दोनों देशों ने राजनयिक एवं आधिकारिक पासपोर्ट धारकों को वीजा छूट देने तथा सांस्कृतिक आदान प्रदान कार्यक्रम के संबंध में भी समझौता किया। सांस्कृतिक आदान प्रदान समझौते के तहत साल दो हज़ार अट्ठारह से दो हज़ार बाईस के बीच भारत और जार्डन संगीत, नृत्य, थियेटर, प्रदर्शनी, सम्मेलनों, संग्रहालयों, शोध, पुरातत्व के क्षेत्र में आपसी आदान प्रदान को बढ़ावा देंगे। भारत और जार्डन ने मानव शक्ति के क्षेत्र में सहयोग को लेकर एक समझौता किया। यूनिवर्सिटी आफ जार्डन और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद ःआईसीसीआरः ने भी एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किया जिसका मकसद विश्वविद्यालय में हिन्दी पी" की स्थापना करना है।
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KANPUR: सिटी में बीते कई दिनों से जलसंकट बना हुआ है। अब लोअर गंगा कैनाल से 5 करोड़ लीटर वाटर सप्लाई बंद हो गई। इससे 3 लाख लोगों के सामने जलसंकट खड़ा हो गया है। वाटर सप्लाई बंद होने से 3 दर्जन से ज्यादा मोहल्लों में लो प्रेशर से पानी पहुंच पा रहा है। इससे दूसरी मंजिलों में रहने वाले लोगों को पानी नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा मोतीझील में भी पानी का लेवल काफी कम हो गया है। इससे मछलियों के मरने की आशंका बनी हुई है। पंप खराब होने के कारण लोअर गंगा कैनाल से झील में भी पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
पनकी से आने वाली लोअर गंगा कैनाल की एक लाइन बेनाझाबर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पहुंच गई है। जबकि एक लाइन कारगिल पार्क स्थित मोतीझील में गई है। कैनाल से रोजाना इसमें पानी आता है। इससे झील के पानी का लेवल मेंटेन रहता है। कई दिनों से पानी न आने से एक तरफ की झील सूखने लगी है। इससे मछलियों के मरने का खतरा मंडराने लगा है। नगर निगम के उद्यान अधिकारी डॉ। वीके सिंह ने बताया कि अगर पानी नहीं आता है तो सबमर्सिबल पंप के माध्यम से पानी झील में पहुंचाया जाएगा।
दर्शनपुरवा, पीरोड, प्रेमनगर, चमनगंज, गांधीनगर, जवाहर नगर, नेहरू नगर, परमट, सूटरगंज, ग्वालटोली समेत दर्जनों मोहल्लों में लो प्रेशर से वाटर सप्लाई हो रही है।
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KANPUR: सिटी में बीते कई दिनों से जलसंकट बना हुआ है। अब लोअर गंगा कैनाल से पाँच करोड़ लीटर वाटर सप्लाई बंद हो गई। इससे तीन लाख लोगों के सामने जलसंकट खड़ा हो गया है। वाटर सप्लाई बंद होने से तीन दर्जन से ज्यादा मोहल्लों में लो प्रेशर से पानी पहुंच पा रहा है। इससे दूसरी मंजिलों में रहने वाले लोगों को पानी नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा मोतीझील में भी पानी का लेवल काफी कम हो गया है। इससे मछलियों के मरने की आशंका बनी हुई है। पंप खराब होने के कारण लोअर गंगा कैनाल से झील में भी पानी नहीं पहुंच पा रहा है। पनकी से आने वाली लोअर गंगा कैनाल की एक लाइन बेनाझाबर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पहुंच गई है। जबकि एक लाइन कारगिल पार्क स्थित मोतीझील में गई है। कैनाल से रोजाना इसमें पानी आता है। इससे झील के पानी का लेवल मेंटेन रहता है। कई दिनों से पानी न आने से एक तरफ की झील सूखने लगी है। इससे मछलियों के मरने का खतरा मंडराने लगा है। नगर निगम के उद्यान अधिकारी डॉ। वीके सिंह ने बताया कि अगर पानी नहीं आता है तो सबमर्सिबल पंप के माध्यम से पानी झील में पहुंचाया जाएगा। दर्शनपुरवा, पीरोड, प्रेमनगर, चमनगंज, गांधीनगर, जवाहर नगर, नेहरू नगर, परमट, सूटरगंज, ग्वालटोली समेत दर्जनों मोहल्लों में लो प्रेशर से वाटर सप्लाई हो रही है।
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HARIDWAR: महाशिवरात्रि पर्व पर सातों संन्यासी अखाड़ों के हजारों साधु-संत जब हरकी पैड़ी पर गंगा में डुबकी लगाने पहुंचे तो ब्रह्मकुंड में अवधूती आनंद बरसने लगा। 'हर-हर महादेव' व 'बम-बम भोले' के जयघोष से चारों दिशाएं गुंजायमान हो उठीं और पंचाक्षरी मंत्र की मधुर धुन से वातावरण महकने लगा। हरकी पैड़ी स्थित ब्रह्मकुंड से लेकर दक्ष नगर कनखल तक सभी गंगा घाट इंद्रधनुषी आभा में आलोकित हो उठे। शाही वैभव के साथ संन्यासी अखाड़ों का क्रमानुसार हरकी पैड़ी पहुंचना और साधु-महात्मा व नागा संन्यासियों का ब्रह्मकुंड में गंगा की लहरों से एकसार होना आध्यात्मिक अनुभूति करा रहा था। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार देर शाम तक सातों संन्यासी अखाडों के साधु-संतों समेत 30 लाख से अधिक श्रद्धालु गंगा घाटों पर आस्था की डुबकी लगा चुके थे। संतों और श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की गई।
तय क्रम के अनुसार सबसे पहले श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के छत्र तले अग्नि, आह्वान और किन्नर अखाड़े ने आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि की अगुआई में पूरी शान-ओ-शौकत के साथ महाशिवरात्रि स्नान किया। इसके बाद श्रीपंचायती निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि की अगुआई में निरंजनी और आनंद अखाड़े के साधु-संन्यासियों ने ब्रह्मकुंड में आस्था की डुबकी लगाई। आखिर में महानिर्वाणी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद की अगुआई में महानिर्वाणी व अटल अखाड़े के साधु-संत व नागा संन्यासी पूरे राजसी वैभव के साथ स्नान के लिए पहुंचे। इस दौरान ऐसा दृश्य साकार हो रहा था, जिसे कोई भी श्रद्धालु शायद ही कभी बिसराना चाहेगा। प्रशासन की ओर से सुबह सात से शाम पांच बजे तक हरकी पैड़ी ब्रह्मकुंड और उसके ठीक सामने स्थित मालवीय घाट को अखाड़ों के लिए आरक्षित कर दिया था। इससे पहले और बाद का समय आम श्रद्धालुओं को स्नान के लिए दिया गया। यही वजह है कि मध्यरात्रि के बाद से ही आम श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने लगे थे। इस अवधि में श्रद्धालुओं ने गंगा पूजन के साथ काले तिल का दान भी किया। इस दौरान ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो हम अलग ही दुनिया में विचरण कर रहे हैं, जहां शिव के सिवा कुछ भी नहीं है। वैराग्य भाव में गंगा घाटों की ओर बढ़ते कदमों की रवानी हृदय को आनंदित कर रही थी। रात दो बजे के बाद से हरकी पैड़ी पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी थी। भोर की बेला तो वहां आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हरकी पैड़ी स्थित ब्रह्मकुंड से लेकर दक्ष नगरी कनखल तक शायद ही कोई घाट ऐसा रहा होगा, जहां आस्था हिलोरें न ले रही हो। श्रद्धालु घाट पर पहुंचते ही आस्था की डुबकी लगा रहे थे और फिर साथ में गंगाजल लेकर गंतव्य की ओर निकले।
- प्रशासनिक के अनुसार देर शाम तक सातों संन्यासी अखाडों के साधु-संतों समेत 30 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा घाटों पर लगाई डुबकी।
HARIDWAR: शाही स्नान की तर्ज पर हो रहे महाशिवरात्रि स्नान के मौके पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने हरकी पैड़ी पर गंगा पूजन कर प्रदेशवासियों की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि दिव्य, भव्य और सुरक्षित कुंभ के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। कुंभ में श्रद्धालुओं के आने-जाने पर किसी भी तरह की कोई रोक नहीं है। न ही श्रद्धालुओं के साथ किसी भी प्रकार की सख्ती की जाएगी। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए हरिद्वार आएं। इससे पहले उन्होंने स्नान के लिए जा रहे श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा भी की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने संतों से भी मुलाकात की। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने हरकी पैड़ी पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य और हरिद्वार जिले की सीमा पर श्रद्धालुओं के साथ किसी तरह की सख्ती करने के लिए अधिकारियों को मना किया गया है। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि स्नान पर जो भी कमी सामने आई है, उसे दूर करते हुए अप्रैल के शाही स्नान दिव्य व भव्य कराए जाएंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से कोविड गाइड लाइन का पालन करने का आह्वान किया। इससे पहले हरकी पैड़ी पर संतों ने उनका स्वागत किया।
HARIDWAR: महाशिवरात्रि स्नान के लिए आए श्रद्धालुओं को मीलों का सफर पैदल तय करना पड़ा। दरअसल, भीड़ को देखते हुए रोडवेज बसें, प्राइवेट वाहन शहरी के बाहरी क्षेत्रों में ही रोक दिए गए। कुछ दूरी तक ऑटो, विक्रम, ई-रिक्शा चले। मगर, 10 से 15 किमी। तक श्रद्धालुओं को सिर पर सामान और बच्चों का हाथ पकड़कर पैदल ही चलना पड़ा।
HARIDWAR: महाशिवरात्रि स्नान पर्व पर उत्तराखंड पुलिस के बैंड ने भजनों, लोक गीत व देशभक्ति गीतों की शानदार धुनों से साधु-संतों का स्वागत किया। हरकी पैड़ी पर दिन भर पुलिस बैंड की सुर लहरी गूंजती रही। प्लाटून कमांडर देवेंद्र सिंह असवाल के नेतृत्व में उत्तराखंड पुलिस बैंड का 18 सदस्यीय दल महाशिवरात्रि स्नान पर्व पर सुबह से हरकी पैड़ी पर मुस्तैद रहा। ट्रम्पेट, क्लारनेट, कोर्नेट, सेक्सोफोन, मराकस, बेस ड्रम, ड्रम व साइड ड्रम आदि से पुलिस बैंड के कलाकारों ने गंगा तेरा पानी अमृत, गंगा मैया में जब तक ये पानी रहे, मानो तो मैं गंगा मां हूं जैसे भजनों के अलावा उत्तराखंड के लोकगीत और देशभक्ति गीतों की बेहतरीन प्रस्तुतियां देकर गंगा स्नान को आने वाले साधु-संतों व श्रद्धालुओं का संगीतमय स्वागत किया।
HARIDWAR: महाशिवरात्रि स्नान पर्व पर धर्मध्वजा की स्टील की छड़ी विद्युत लाइन से टकराने पर करंट लगने से एक साधु की मौत हो गई। हादसा जूना अखाड़ा छावनी से संतों के स्नान के लिए हरकी पैड़ी जाने के दौरान हुआ। अग्नि अखाड़ा का साधु मूलरूप से केरल का निवासी था। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है। पुलिस के मुताबिक जूना अखाड़ा से गुरुवार सुबह जूना अखाड़ा, अग्नि, आह्वान और किन्नर अखाड़े के साधु-संत स्नान के लिए हरकी पैड़ी के लिए रवाना हुए। अग्नि अखाड़े का एक साधु हाथ में ध्वजा उठाकर चल रहा था। ध्वजा स्टील के पाइप पर लगी थी। अचानक पाइप ऊपर से गुजर रही बिजली की लाइन में टकरा गया और साधु करंट से बुरी तरह झुलस गया। आनन फानन में उसे पास जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने साधु की पहचान तृश्शूर केरल निवासी नितिन दास के रूप में की।
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HARIDWAR: महाशिवरात्रि पर्व पर सातों संन्यासी अखाड़ों के हजारों साधु-संत जब हरकी पैड़ी पर गंगा में डुबकी लगाने पहुंचे तो ब्रह्मकुंड में अवधूती आनंद बरसने लगा। 'हर-हर महादेव' व 'बम-बम भोले' के जयघोष से चारों दिशाएं गुंजायमान हो उठीं और पंचाक्षरी मंत्र की मधुर धुन से वातावरण महकने लगा। हरकी पैड़ी स्थित ब्रह्मकुंड से लेकर दक्ष नगर कनखल तक सभी गंगा घाट इंद्रधनुषी आभा में आलोकित हो उठे। शाही वैभव के साथ संन्यासी अखाड़ों का क्रमानुसार हरकी पैड़ी पहुंचना और साधु-महात्मा व नागा संन्यासियों का ब्रह्मकुंड में गंगा की लहरों से एकसार होना आध्यात्मिक अनुभूति करा रहा था। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार देर शाम तक सातों संन्यासी अखाडों के साधु-संतों समेत तीस लाख से अधिक श्रद्धालु गंगा घाटों पर आस्था की डुबकी लगा चुके थे। संतों और श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा भी की गई। तय क्रम के अनुसार सबसे पहले श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के छत्र तले अग्नि, आह्वान और किन्नर अखाड़े ने आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि की अगुआई में पूरी शान-ओ-शौकत के साथ महाशिवरात्रि स्नान किया। इसके बाद श्रीपंचायती निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि की अगुआई में निरंजनी और आनंद अखाड़े के साधु-संन्यासियों ने ब्रह्मकुंड में आस्था की डुबकी लगाई। आखिर में महानिर्वाणी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद की अगुआई में महानिर्वाणी व अटल अखाड़े के साधु-संत व नागा संन्यासी पूरे राजसी वैभव के साथ स्नान के लिए पहुंचे। इस दौरान ऐसा दृश्य साकार हो रहा था, जिसे कोई भी श्रद्धालु शायद ही कभी बिसराना चाहेगा। प्रशासन की ओर से सुबह सात से शाम पांच बजे तक हरकी पैड़ी ब्रह्मकुंड और उसके ठीक सामने स्थित मालवीय घाट को अखाड़ों के लिए आरक्षित कर दिया था। इससे पहले और बाद का समय आम श्रद्धालुओं को स्नान के लिए दिया गया। यही वजह है कि मध्यरात्रि के बाद से ही आम श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने लगे थे। इस अवधि में श्रद्धालुओं ने गंगा पूजन के साथ काले तिल का दान भी किया। इस दौरान ऐसा प्रतीत हो रहा था, मानो हम अलग ही दुनिया में विचरण कर रहे हैं, जहां शिव के सिवा कुछ भी नहीं है। वैराग्य भाव में गंगा घाटों की ओर बढ़ते कदमों की रवानी हृदय को आनंदित कर रही थी। रात दो बजे के बाद से हरकी पैड़ी पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी थी। भोर की बेला तो वहां आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। हरकी पैड़ी स्थित ब्रह्मकुंड से लेकर दक्ष नगरी कनखल तक शायद ही कोई घाट ऐसा रहा होगा, जहां आस्था हिलोरें न ले रही हो। श्रद्धालु घाट पर पहुंचते ही आस्था की डुबकी लगा रहे थे और फिर साथ में गंगाजल लेकर गंतव्य की ओर निकले। - प्रशासनिक के अनुसार देर शाम तक सातों संन्यासी अखाडों के साधु-संतों समेत तीस लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा घाटों पर लगाई डुबकी। HARIDWAR: शाही स्नान की तर्ज पर हो रहे महाशिवरात्रि स्नान के मौके पर मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने हरकी पैड़ी पर गंगा पूजन कर प्रदेशवासियों की खुशहाली और सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि दिव्य, भव्य और सुरक्षित कुंभ के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। कुंभ में श्रद्धालुओं के आने-जाने पर किसी भी तरह की कोई रोक नहीं है। न ही श्रद्धालुओं के साथ किसी भी प्रकार की सख्ती की जाएगी। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु कोविड गाइड लाइन का पालन करते हुए हरिद्वार आएं। इससे पहले उन्होंने स्नान के लिए जा रहे श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा भी की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने संतों से भी मुलाकात की। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने हरकी पैड़ी पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य और हरिद्वार जिले की सीमा पर श्रद्धालुओं के साथ किसी तरह की सख्ती करने के लिए अधिकारियों को मना किया गया है। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि स्नान पर जो भी कमी सामने आई है, उसे दूर करते हुए अप्रैल के शाही स्नान दिव्य व भव्य कराए जाएंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से कोविड गाइड लाइन का पालन करने का आह्वान किया। इससे पहले हरकी पैड़ी पर संतों ने उनका स्वागत किया। HARIDWAR: महाशिवरात्रि स्नान के लिए आए श्रद्धालुओं को मीलों का सफर पैदल तय करना पड़ा। दरअसल, भीड़ को देखते हुए रोडवेज बसें, प्राइवेट वाहन शहरी के बाहरी क्षेत्रों में ही रोक दिए गए। कुछ दूरी तक ऑटो, विक्रम, ई-रिक्शा चले। मगर, दस से पंद्रह किमी। तक श्रद्धालुओं को सिर पर सामान और बच्चों का हाथ पकड़कर पैदल ही चलना पड़ा। HARIDWAR: महाशिवरात्रि स्नान पर्व पर उत्तराखंड पुलिस के बैंड ने भजनों, लोक गीत व देशभक्ति गीतों की शानदार धुनों से साधु-संतों का स्वागत किया। हरकी पैड़ी पर दिन भर पुलिस बैंड की सुर लहरी गूंजती रही। प्लाटून कमांडर देवेंद्र सिंह असवाल के नेतृत्व में उत्तराखंड पुलिस बैंड का अट्ठारह सदस्यीय दल महाशिवरात्रि स्नान पर्व पर सुबह से हरकी पैड़ी पर मुस्तैद रहा। ट्रम्पेट, क्लारनेट, कोर्नेट, सेक्सोफोन, मराकस, बेस ड्रम, ड्रम व साइड ड्रम आदि से पुलिस बैंड के कलाकारों ने गंगा तेरा पानी अमृत, गंगा मैया में जब तक ये पानी रहे, मानो तो मैं गंगा मां हूं जैसे भजनों के अलावा उत्तराखंड के लोकगीत और देशभक्ति गीतों की बेहतरीन प्रस्तुतियां देकर गंगा स्नान को आने वाले साधु-संतों व श्रद्धालुओं का संगीतमय स्वागत किया। HARIDWAR: महाशिवरात्रि स्नान पर्व पर धर्मध्वजा की स्टील की छड़ी विद्युत लाइन से टकराने पर करंट लगने से एक साधु की मौत हो गई। हादसा जूना अखाड़ा छावनी से संतों के स्नान के लिए हरकी पैड़ी जाने के दौरान हुआ। अग्नि अखाड़ा का साधु मूलरूप से केरल का निवासी था। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है। पुलिस के मुताबिक जूना अखाड़ा से गुरुवार सुबह जूना अखाड़ा, अग्नि, आह्वान और किन्नर अखाड़े के साधु-संत स्नान के लिए हरकी पैड़ी के लिए रवाना हुए। अग्नि अखाड़े का एक साधु हाथ में ध्वजा उठाकर चल रहा था। ध्वजा स्टील के पाइप पर लगी थी। अचानक पाइप ऊपर से गुजर रही बिजली की लाइन में टकरा गया और साधु करंट से बुरी तरह झुलस गया। आनन फानन में उसे पास जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने साधु की पहचान तृश्शूर केरल निवासी नितिन दास के रूप में की।
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विश्वासमत प्रस्ताव पर मतदान के दौरान अगर देवेंद्र फडणवीस की सरकार गिरती है, तो कहीं राज्यपाल विधानसभा को ही बर्खास्त न कर दें, इस आशंका को टालने के लिए शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के नेता सोमवार को राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा ठोक आए हैं। अपने दावे को मजबूत करने के लिए तीनों पार्टियों के गठबंधन महा विकास आघाडी ने अपने 162 विधायकों के समर्थन का पत्र भी जोड़ा है, ताकि बाद में कोई अड़चन न हो।
राजभवन को विधायकों की जो लिस्ट सौंपी गई है, उसमें शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा के 54 में से केवल 51 विधायकों के ही हस्ताक्षर हैं। इस बारे में राकांपा विधायक दल के नेता जयंत पाटील ने कहा कि पत्र रात में ही तैयार हो गया था, इसलिए दो विधायकों के हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं। लिस्ट में शिवसेना और निर्दलियों सहित 63 विधायक, कांग्रेस के 44 और समाजवादी पार्टी सहित अन्य छोटे दलों के विधायकों के भी हस्ताक्षर हैं।
राज्यपाल को दिए पत्र में तीनों दलों ने लिखा है कि विश्वास मत प्रस्ताव के दौरान फडणवीस बहुमत साबित करने में असफल साबित होंगे। इसके बाद सरकार गठन के शिवसेना के दावे पर विचार करना चाहिए। हमने पत्र के साथ शिवसेना के दावे का समर्थन कर रहे राकांपा और कांग्रेस के विधायकों के नाम की सूची जोड़ी है। साथ ही कई छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की सूची भी है, जिन्होंने हमें समर्थन दिया है। इसलिए सरकार गठन के लिए हमें तत्काल बुलाया जाना चाहिए।
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विश्वासमत प्रस्ताव पर मतदान के दौरान अगर देवेंद्र फडणवीस की सरकार गिरती है, तो कहीं राज्यपाल विधानसभा को ही बर्खास्त न कर दें, इस आशंका को टालने के लिए शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के नेता सोमवार को राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा ठोक आए हैं। अपने दावे को मजबूत करने के लिए तीनों पार्टियों के गठबंधन महा विकास आघाडी ने अपने एक सौ बासठ विधायकों के समर्थन का पत्र भी जोड़ा है, ताकि बाद में कोई अड़चन न हो। राजभवन को विधायकों की जो लिस्ट सौंपी गई है, उसमें शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा के चौवन में से केवल इक्यावन विधायकों के ही हस्ताक्षर हैं। इस बारे में राकांपा विधायक दल के नेता जयंत पाटील ने कहा कि पत्र रात में ही तैयार हो गया था, इसलिए दो विधायकों के हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं। लिस्ट में शिवसेना और निर्दलियों सहित तिरेसठ विधायक, कांग्रेस के चौंतालीस और समाजवादी पार्टी सहित अन्य छोटे दलों के विधायकों के भी हस्ताक्षर हैं। राज्यपाल को दिए पत्र में तीनों दलों ने लिखा है कि विश्वास मत प्रस्ताव के दौरान फडणवीस बहुमत साबित करने में असफल साबित होंगे। इसके बाद सरकार गठन के शिवसेना के दावे पर विचार करना चाहिए। हमने पत्र के साथ शिवसेना के दावे का समर्थन कर रहे राकांपा और कांग्रेस के विधायकों के नाम की सूची जोड़ी है। साथ ही कई छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की सूची भी है, जिन्होंने हमें समर्थन दिया है। इसलिए सरकार गठन के लिए हमें तत्काल बुलाया जाना चाहिए।
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सलमान खान ने माना-पापा बनने की प्लानिंग करने में की देरी, अब कैसे पूरी होगी ख्वाहिश?
हर उम्र की अपनी जरूरत होती है, शायद यही वजह है कि 57 साल के सलमान खान के भीतर अब घर-परिवार बसाने की इच्छा जाग उठी है. सलमान का कहना है करण जोहर की तरह उन्हें भी काफी पहले इसके बारे में सोचना चाहिए था.
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान (Salman Khan) की फिल्म 'चोरी चोरी चुपके चुपके' बहुतों को याद होगी, साल 2001 की उस फिल्म की कहानी में सलमान खान सरोगेसी (Surrogecy)से पिता बनते हैं लेकिन 22 साल बाद सलमान खान अब रियल लाइफ़ में सरोगेसी के जरिए पिता बनना चाहते हैं. जाहिर है इसका तकनीक और कानूनी तरीका अलग हो सकता है लेकिन सलमान खान ने इरादा जता दिया है कि उन्हें बच्चों का बड़ा शौक है.
सलमान खान ने कहा कि उन्हें बच्चों से बहुत प्यार है. उनकी उम्र 57 साल की हो गई है. अब घरवाले शादी करने के लिए कह रहे हैं ऐसे में उन्हें बच्चे की जरूरत महसूस हो रही है. हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या वो इसके लिए शादी करेंगे तो उन्होंने कहा कि वो सरोगेसी के जरिए पिता बनना चाहते हैं लेकिन सरोगेसी लॉ 2022 के प्रावधानों को देखए हुए ये कितना आसान है?
सलमान खान के सरोगेसी से पिता बनने की राह में भले ही मुश्किलें हों लेकिन उनसे पहले कई फिल्म स्टार्स सरोगेसी के जरिए माता-या पिता बन चुके हैं. उनमें जितेंद्र के बेटे-बेटी तुषार कपूर और एकता कपूर हैं. उनके अलावा फिल्म निर्देशक करण जोहर भी सरोगेसी के जरिए पिता बन चुके हैं.
यहां तक कि शाहरुख खान भी सरोगेसी के जरिए ही अपने तीसरे बच्चे के पिता बने हैं. लेकिन इन सभी स्टार्स ने सरोगेसी माध्यम तब अपनाया था जब आज की तरह कड़े नियम नहीं बने थे. जाहिर है सलमान खान इस मोर्चे पर इनसे पीछे रह गए.
भारत में सरोगेसी क्या है नया कानून?
भारत में साल 2022 में सरोगेसी के पहले के प्रावधानों में संशोधन कर दिया गया और बकायदा नया कानून बनाया गया. नये कानून के मुताबिक कई सख्त नियम बनाए गए. कानून के मुताबिक जरूरतमंद दंपत्ति को किराए की कोख लेने के लिए कोर्ट का रुख करना अनिवार्य है. और उन्हें कई केंद्रों से प्रमाण पत्र हासिल करना होगा.
नए कानून के तहत जो दंपति सरोगेसी के माध्यम से बच्चा पैदा करना चाहते हैं उन्हें एक सरकारी मेडिकल बोर्ड से भी संपर्क करना जरूरी है, जिसमें प्रसूति विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और अन्य विशेषज्ञ शामिल होंगे.
महिला और पुरुष की उम्र 25 से 50 साल के बीच होनी चाहिए. उनके पास पहले से अपने या गोद लिया कोई बच्चा नहीं होना चाहिए. उनके पास रेडियोलॉजिकल रिपोर्ट भी होनी चाहिए. उस रिपोर्ट में उन्हें कारण दर्शाना होना कि आखिर उन्हें क्यों सरोगेसी की जरूरत पड़ रही है.
इसके अलावा दंपति के पास भ्रूण स्थानांतरण की तारीख से अगले 36 महीनों के लिए सरोगेट मां की डॉक्टरी देखभाल की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक बीमा पॉलिसी होनी चाहिए. जब मेडिकल बोर्ड दंपति के सबमिशन को मान्यता दे देता है, तो उन्हें एक प्रमाणपत्र जारी किया जाता है.
इसके बाद प्रमाणपत्र को आगे के लिए आदेश के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में जमा करना होता है. यह आदेश सरोगेसी से पैदा हुए बच्चे के जन्म के प्रमाण के रूप में काम करता है. इसके बाद ही नगर पालिका में बच्चे का जन्म पंजीकरण हो सकेगा.
सरोगेट बनने की पात्रता क्या है?
नये कानून के मुताबिक सरोगेट की भी उम्र तय है. उसकी उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए. उसे साबित करना होगा कि वह पहली बार सरोगेट बन रही है और मानसिक रूप से फिट है. इस संबंध में प्रमाण पत्र पेश करना होगा.
दंपति और सरोगेट के प्रमाण पत्र बनाने के बाद भ्रूण स्थानांतरण के लिए वे असिस्टेंट रिपरोडक्टिव टेक्नोलोजी (assisted reproductive technology) केंद्र से संपर्क कर सकते हैं. कानूनन सरोगेट माता और दंपति को अपने आधार कार्ड को लिंक करना होगा. यह कदाचार को रोकने के लिए है.
सरकार ने क्यों बदला सरोेगेसी का कानून?
वैसे देखें तो सरोगेसी को परोपकारी माना जाता है. सरोगेट बच्चे की चाह रखने वाले दंपत्ति के प्रति सहानुभूति जताते हुए बच्चे को जन्म देती हैं. लेकिन आगे चलकर सरोगेसी का व्यवसायिकरण होने लगा. भारत के सांस्कृतिक परिवेश को यह व्यवसायीकरण काफी नुकसान पहुंचाने वाला साबित हुआ.
सरोगेसी के नाम पर बड़े पैमाने पर मुनाफाखोरी और रैकेट चलाने के भी मामले सामने आते थे. कई बार धोखाधड़ी और शोषण का भी खुलासा होता था. इस पर रोक लगाने के लिए सरकार काफी पहले से ही प्लान कर रही थी. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने 2005 में सरोगेसी के गाइड लाइन बनाई थी.
दरअसल कानूनन मानव भ्रूण को कोई भी न तो बेच सकता है और न ही खरीद सकता है. इसी तरह कोई भी सरोगेट की सेवाओं को बेच या खरीद नहीं सकता है. ना ही सरोगेट, उसके आश्रितों या उसके प्रतिनिधि को कोई भुगतान, पुरस्कार, लाभ, शुल्क या अन्य प्रलोभन की पेशकश की जानी चाहिए.
नये कानून में विदेशों में भ्रूण के निर्यात पर भी प्रतिबंध है. प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा और 10 साल तक की जेल हो सकती है.
यदि भारत का कोई जोड़ा देश के बाहर सरोगेट की सेवा लेता तो उससे पैदा होने वाले बच्चे को भारतीय नागरिकता नहीं दी जाएगी.
बच्चे की उम्र 18 साल के होने पर उन्हें यह जानने का अधिकार होगा कि वे सरोगेसी से पैदा हुए हैं. वे सरोगेट मां की पहचान का पता लगाने के लिए अपने अधिकार का प्रयोग भी कर सकते हैं.
क्या सलमान खान बन सकेंगे सरोगेसी से पिता?
नये नियमों को देखते हुए ऐसा मुश्किल लगता है. खुद सलमान खान ने भी माना है उन्हें नया कानून इजाजत नहीं दे रहा है. सबसे बड़ी बाधा उम्र है. क्योंकि सलमान खान की उम्र 57 साल की हो चुकी है और नये नियम के मुताबिक सरोगेसी से बच्चा चाहने वाले दंपत्ति की उम्र 25 से 50 साल है. दूसरी बात कि सलमान सिंगल हैं जबकि संतान पैदा करने में अक्षम दंपति सरोगेसी का सहारा ले सकते हैं.
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सलमान खान ने माना-पापा बनने की प्लानिंग करने में की देरी, अब कैसे पूरी होगी ख्वाहिश? हर उम्र की अपनी जरूरत होती है, शायद यही वजह है कि सत्तावन साल के सलमान खान के भीतर अब घर-परिवार बसाने की इच्छा जाग उठी है. सलमान का कहना है करण जोहर की तरह उन्हें भी काफी पहले इसके बारे में सोचना चाहिए था. बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की फिल्म 'चोरी चोरी चुपके चुपके' बहुतों को याद होगी, साल दो हज़ार एक की उस फिल्म की कहानी में सलमान खान सरोगेसी से पिता बनते हैं लेकिन बाईस साल बाद सलमान खान अब रियल लाइफ़ में सरोगेसी के जरिए पिता बनना चाहते हैं. जाहिर है इसका तकनीक और कानूनी तरीका अलग हो सकता है लेकिन सलमान खान ने इरादा जता दिया है कि उन्हें बच्चों का बड़ा शौक है. सलमान खान ने कहा कि उन्हें बच्चों से बहुत प्यार है. उनकी उम्र सत्तावन साल की हो गई है. अब घरवाले शादी करने के लिए कह रहे हैं ऐसे में उन्हें बच्चे की जरूरत महसूस हो रही है. हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या वो इसके लिए शादी करेंगे तो उन्होंने कहा कि वो सरोगेसी के जरिए पिता बनना चाहते हैं लेकिन सरोगेसी लॉ दो हज़ार बाईस के प्रावधानों को देखए हुए ये कितना आसान है? सलमान खान के सरोगेसी से पिता बनने की राह में भले ही मुश्किलें हों लेकिन उनसे पहले कई फिल्म स्टार्स सरोगेसी के जरिए माता-या पिता बन चुके हैं. उनमें जितेंद्र के बेटे-बेटी तुषार कपूर और एकता कपूर हैं. उनके अलावा फिल्म निर्देशक करण जोहर भी सरोगेसी के जरिए पिता बन चुके हैं. यहां तक कि शाहरुख खान भी सरोगेसी के जरिए ही अपने तीसरे बच्चे के पिता बने हैं. लेकिन इन सभी स्टार्स ने सरोगेसी माध्यम तब अपनाया था जब आज की तरह कड़े नियम नहीं बने थे. जाहिर है सलमान खान इस मोर्चे पर इनसे पीछे रह गए. भारत में सरोगेसी क्या है नया कानून? भारत में साल दो हज़ार बाईस में सरोगेसी के पहले के प्रावधानों में संशोधन कर दिया गया और बकायदा नया कानून बनाया गया. नये कानून के मुताबिक कई सख्त नियम बनाए गए. कानून के मुताबिक जरूरतमंद दंपत्ति को किराए की कोख लेने के लिए कोर्ट का रुख करना अनिवार्य है. और उन्हें कई केंद्रों से प्रमाण पत्र हासिल करना होगा. नए कानून के तहत जो दंपति सरोगेसी के माध्यम से बच्चा पैदा करना चाहते हैं उन्हें एक सरकारी मेडिकल बोर्ड से भी संपर्क करना जरूरी है, जिसमें प्रसूति विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ और अन्य विशेषज्ञ शामिल होंगे. महिला और पुरुष की उम्र पच्चीस से पचास साल के बीच होनी चाहिए. उनके पास पहले से अपने या गोद लिया कोई बच्चा नहीं होना चाहिए. उनके पास रेडियोलॉजिकल रिपोर्ट भी होनी चाहिए. उस रिपोर्ट में उन्हें कारण दर्शाना होना कि आखिर उन्हें क्यों सरोगेसी की जरूरत पड़ रही है. इसके अलावा दंपति के पास भ्रूण स्थानांतरण की तारीख से अगले छत्तीस महीनों के लिए सरोगेट मां की डॉक्टरी देखभाल की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक बीमा पॉलिसी होनी चाहिए. जब मेडिकल बोर्ड दंपति के सबमिशन को मान्यता दे देता है, तो उन्हें एक प्रमाणपत्र जारी किया जाता है. इसके बाद प्रमाणपत्र को आगे के लिए आदेश के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में जमा करना होता है. यह आदेश सरोगेसी से पैदा हुए बच्चे के जन्म के प्रमाण के रूप में काम करता है. इसके बाद ही नगर पालिका में बच्चे का जन्म पंजीकरण हो सकेगा. सरोगेट बनने की पात्रता क्या है? नये कानून के मुताबिक सरोगेट की भी उम्र तय है. उसकी उम्र पच्चीस से पैंतीस वर्ष के बीच होनी चाहिए. उसे साबित करना होगा कि वह पहली बार सरोगेट बन रही है और मानसिक रूप से फिट है. इस संबंध में प्रमाण पत्र पेश करना होगा. दंपति और सरोगेट के प्रमाण पत्र बनाने के बाद भ्रूण स्थानांतरण के लिए वे असिस्टेंट रिपरोडक्टिव टेक्नोलोजी केंद्र से संपर्क कर सकते हैं. कानूनन सरोगेट माता और दंपति को अपने आधार कार्ड को लिंक करना होगा. यह कदाचार को रोकने के लिए है. सरकार ने क्यों बदला सरोेगेसी का कानून? वैसे देखें तो सरोगेसी को परोपकारी माना जाता है. सरोगेट बच्चे की चाह रखने वाले दंपत्ति के प्रति सहानुभूति जताते हुए बच्चे को जन्म देती हैं. लेकिन आगे चलकर सरोगेसी का व्यवसायिकरण होने लगा. भारत के सांस्कृतिक परिवेश को यह व्यवसायीकरण काफी नुकसान पहुंचाने वाला साबित हुआ. सरोगेसी के नाम पर बड़े पैमाने पर मुनाफाखोरी और रैकेट चलाने के भी मामले सामने आते थे. कई बार धोखाधड़ी और शोषण का भी खुलासा होता था. इस पर रोक लगाने के लिए सरकार काफी पहले से ही प्लान कर रही थी. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने दो हज़ार पाँच में सरोगेसी के गाइड लाइन बनाई थी. दरअसल कानूनन मानव भ्रूण को कोई भी न तो बेच सकता है और न ही खरीद सकता है. इसी तरह कोई भी सरोगेट की सेवाओं को बेच या खरीद नहीं सकता है. ना ही सरोगेट, उसके आश्रितों या उसके प्रतिनिधि को कोई भुगतान, पुरस्कार, लाभ, शुल्क या अन्य प्रलोभन की पेशकश की जानी चाहिए. नये कानून में विदेशों में भ्रूण के निर्यात पर भी प्रतिबंध है. प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा और दस साल तक की जेल हो सकती है. यदि भारत का कोई जोड़ा देश के बाहर सरोगेट की सेवा लेता तो उससे पैदा होने वाले बच्चे को भारतीय नागरिकता नहीं दी जाएगी. बच्चे की उम्र अट्ठारह साल के होने पर उन्हें यह जानने का अधिकार होगा कि वे सरोगेसी से पैदा हुए हैं. वे सरोगेट मां की पहचान का पता लगाने के लिए अपने अधिकार का प्रयोग भी कर सकते हैं. क्या सलमान खान बन सकेंगे सरोगेसी से पिता? नये नियमों को देखते हुए ऐसा मुश्किल लगता है. खुद सलमान खान ने भी माना है उन्हें नया कानून इजाजत नहीं दे रहा है. सबसे बड़ी बाधा उम्र है. क्योंकि सलमान खान की उम्र सत्तावन साल की हो चुकी है और नये नियम के मुताबिक सरोगेसी से बच्चा चाहने वाले दंपत्ति की उम्र पच्चीस से पचास साल है. दूसरी बात कि सलमान सिंगल हैं जबकि संतान पैदा करने में अक्षम दंपति सरोगेसी का सहारा ले सकते हैं. यह भी पढ़ें : देश में कितने फीसदी लोग हैं बांझपन के शिकार?
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पिपलियामंडी। ग्राम डूंगलावदा में युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जानकारी के अनुसार हंसराज पाटीदार के यहां मजदूर 25 वर्षीय राहुल पुत्र भैरुलाल पाटीदार ने शुक्रवार देर शाम बाड़े के पास बने कमरे का दरवाजा लगाकर आत्महत्या कर ली। शाम को बाड़े में पशुओं की देखभाल करने गए परिवार को मजदूर नहीं दिखा। दरवाजा खटखटाया, जो भीतर से बंद था। सूचना पर पुलिस मौके पहुंची, दरवाजा तोड़ा तो मजदूर फंदे पर लटका था। जिसे नीचे उतरवाया। सुबह शव पीएम के बाद स्वंजनों को सौंप दिया। टीआइ नरेंद्र यादव ने बताया कि आत्महत्या के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए। उल्लेखनीय है कि एक दिन पूर्व गांव मुंडकोषा में भी युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
पिपलियामंडी। सड़क से नीचे उतरे बाइक सवार वृद्ध की पत्थर से सिर टकराने से मौत हो गई। पुलिस ने मामला जांच में लिया हैं। जानकारी के अनुसार मंदसौर निवासी 70 वर्षीय जगदीश जाट मंदसौर जा रहे थे, इसी दौरान महू-नीमच राजमार्ग पर बोतलगंज के निकट बाइक सड़क से नीचे उतरकर स्लिप हो गई। खाई में नीचे गिरने पर पत्थर से सिर टकराने पर अंदरुनी चोट लगने के बाद वृद्ध की मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामला जांच में लिया हैं।
पिपलियामंडी। खेत पर नहीं जाने की धमकी देकर मारपीट करने के मामले में प्रकरण दर्ज हुआ हैं। झारड़ा चौकी पर 40 वर्षीय वरदीचंद पुत्र भंवरलाल धनगर ने शिकायत दर्ज कराई कि काका के लड़के गोपाल पुत्र नानूराम धनगर ने रास्ता रोककर बोला कि खेत पर नहीं जाया कर कहकर गाली-गलौज करने लगा। इसके बाद मारपीट भी की। लकड़ी से सिर में मारने से खून बहने लगा। पुलिस ने आरोपित गोपाल के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया हैं।
मंदसौर। नाहरगढ़ थाने के ग्राम जग्गााखेड़ी व कचनारा में शराब के नशे में पति ने पत्नी को पीट दिया। जग्गाखेड़ी निवासी 45 वर्षीय नंदूबाई सूर्यवंशी ने नाहरगढ़ थाने पर शिकायत दर्ज कराई है कि शराब के नशे में पति रमेश सूर्यवंशी ने गाली-गलौज कर मारपीट की। साथ ही जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने आरोपित पति के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। इसी प्रकार कचनारा निवासी सीमा बागरी ने शिकायत दर्ज कराई कि पति अंतरसिंह मुझे कभी भी पीहर वालों से मोबाइल पर बात नहीं करने देता था। बीती रात्रि में शराब पीकर गाली-गलौज की, मारपीट की व जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने आरोपित पति के खिलाफ विभिन्ना धाराओं में मामला दर्ज किया है।
मंदसौर। जिले में पुलिस ने शराब की तस्करी करते हुए चार आरोपितों को पकड़ा है। बूढ़ा चौकी पुलिस ने ग्राम मंशाखेड़ी में घर के पीछे चार प्लास्टिक केन में 58 लीटर हाथ भट्टी शराब रखने के मामले में 42 मोहनलाल बंजारा को पकड़ा हैं। नारायणगढ़ पुलिस ने गांव तुरकिया में प्लास्टिक केन में 5 लीटर हाथभट्टी कच्ची शराब ले जाते चौथखेड़ी निवासी 33 वर्षीय रामलाल गायरी को पकड़ा। नाहरगढ़ पुलिस ने बेखेड़ा फंटे पर 10 लीटर हाथभट्टी कच्ची शराब के साथ शककरखेड़ी निवासी 35 वर्षीय भैरुलाल बांछड़ा को पकड़ा हैं। झारड़ा चौकी पुलिस ने बंड पिपलिया फंटे पर थैली में 17 क्वार्टर प्लेन शराब के साथ पिपलियामंडी निवासी 21 वर्षीय लखन बरगुंडा को पकड़ा हैं। सभी आरोपितों के खिलाफ संबंधित पुलिस ने आबकारी एक्ट में मामला दर्ज किया हैं।
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पिपलियामंडी। ग्राम डूंगलावदा में युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जानकारी के अनुसार हंसराज पाटीदार के यहां मजदूर पच्चीस वर्षीय राहुल पुत्र भैरुलाल पाटीदार ने शुक्रवार देर शाम बाड़े के पास बने कमरे का दरवाजा लगाकर आत्महत्या कर ली। शाम को बाड़े में पशुओं की देखभाल करने गए परिवार को मजदूर नहीं दिखा। दरवाजा खटखटाया, जो भीतर से बंद था। सूचना पर पुलिस मौके पहुंची, दरवाजा तोड़ा तो मजदूर फंदे पर लटका था। जिसे नीचे उतरवाया। सुबह शव पीएम के बाद स्वंजनों को सौंप दिया। टीआइ नरेंद्र यादव ने बताया कि आत्महत्या के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए। उल्लेखनीय है कि एक दिन पूर्व गांव मुंडकोषा में भी युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पिपलियामंडी। सड़क से नीचे उतरे बाइक सवार वृद्ध की पत्थर से सिर टकराने से मौत हो गई। पुलिस ने मामला जांच में लिया हैं। जानकारी के अनुसार मंदसौर निवासी सत्तर वर्षीय जगदीश जाट मंदसौर जा रहे थे, इसी दौरान महू-नीमच राजमार्ग पर बोतलगंज के निकट बाइक सड़क से नीचे उतरकर स्लिप हो गई। खाई में नीचे गिरने पर पत्थर से सिर टकराने पर अंदरुनी चोट लगने के बाद वृद्ध की मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामला जांच में लिया हैं। पिपलियामंडी। खेत पर नहीं जाने की धमकी देकर मारपीट करने के मामले में प्रकरण दर्ज हुआ हैं। झारड़ा चौकी पर चालीस वर्षीय वरदीचंद पुत्र भंवरलाल धनगर ने शिकायत दर्ज कराई कि काका के लड़के गोपाल पुत्र नानूराम धनगर ने रास्ता रोककर बोला कि खेत पर नहीं जाया कर कहकर गाली-गलौज करने लगा। इसके बाद मारपीट भी की। लकड़ी से सिर में मारने से खून बहने लगा। पुलिस ने आरोपित गोपाल के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया हैं। मंदसौर। नाहरगढ़ थाने के ग्राम जग्गााखेड़ी व कचनारा में शराब के नशे में पति ने पत्नी को पीट दिया। जग्गाखेड़ी निवासी पैंतालीस वर्षीय नंदूबाई सूर्यवंशी ने नाहरगढ़ थाने पर शिकायत दर्ज कराई है कि शराब के नशे में पति रमेश सूर्यवंशी ने गाली-गलौज कर मारपीट की। साथ ही जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने आरोपित पति के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। इसी प्रकार कचनारा निवासी सीमा बागरी ने शिकायत दर्ज कराई कि पति अंतरसिंह मुझे कभी भी पीहर वालों से मोबाइल पर बात नहीं करने देता था। बीती रात्रि में शराब पीकर गाली-गलौज की, मारपीट की व जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने आरोपित पति के खिलाफ विभिन्ना धाराओं में मामला दर्ज किया है। मंदसौर। जिले में पुलिस ने शराब की तस्करी करते हुए चार आरोपितों को पकड़ा है। बूढ़ा चौकी पुलिस ने ग्राम मंशाखेड़ी में घर के पीछे चार प्लास्टिक केन में अट्ठावन लीटरटर हाथ भट्टी शराब रखने के मामले में बयालीस मोहनलाल बंजारा को पकड़ा हैं। नारायणगढ़ पुलिस ने गांव तुरकिया में प्लास्टिक केन में पाँच लीटरटर हाथभट्टी कच्ची शराब ले जाते चौथखेड़ी निवासी तैंतीस वर्षीय रामलाल गायरी को पकड़ा। नाहरगढ़ पुलिस ने बेखेड़ा फंटे पर दस लीटरटर हाथभट्टी कच्ची शराब के साथ शककरखेड़ी निवासी पैंतीस वर्षीय भैरुलाल बांछड़ा को पकड़ा हैं। झारड़ा चौकी पुलिस ने बंड पिपलिया फंटे पर थैली में सत्रह क्वार्टर प्लेन शराब के साथ पिपलियामंडी निवासी इक्कीस वर्षीय लखन बरगुंडा को पकड़ा हैं। सभी आरोपितों के खिलाफ संबंधित पुलिस ने आबकारी एक्ट में मामला दर्ज किया हैं।
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मेरा जन्म अति धनिक परीवार में तो नहीं लेकिन हां धनिक तो कह ही सकते ऐसे परीवार में हुआ । मेरे पिता सुन्दरलाला ओझा सरकारी नौकरी में थे और माँ निर्मला एक गृहिणी । मेरी माता महादेव की परम भक्त थी इसलिए बचपन से शिव के प्रति अदम्य आकर्षण था । मै बचपन से न तो दुबला न ही मोटा , एकदम बीच में था पूरी तरह एथलीट जैसा शरीर । मै स्कूल में रनिंग चैम्पियन था हमेशा पहले नंबर पर आता था लेकिन पिताजी पुराने ख़यालात वाले थे उन्होंने मुझसे कह दिया के सिर्फ पढाई पर ध्यान दो खेलकूद सिर्फ शौक के लिए ठीक है । मै भी पिताजी से बहुत डरता था इसलिए पढाई में ध्यान दिया वैसे भी मुझे मानव मन के रहस्यों की तरफ ज्यादा आकर्षण था इसलिए मैंने सायकोलोजी में यहाँ बैचलर की डिग्री ली और मास्टर्स की डिग्री अमरीका से ली । वह से वापस आकर मैंने राजकोट में प्रेक्टिस शुरू की हिप्नोटिज़म में मै मास्टर था कैसी भी व्यक्ति हो मै आसानी से हिप्नोटाइज़ कर देता । फिर मेरे जीवन में शोभा आई वो सोशिअल वर्कर थी इस वजह से एक दो बार मिलना हुआ , और हमदोनो में प्यार के अंकुर फूटे , उसके पिता चंदूलाल मेरे पिताजी के मित्र थे इसलिए हमारी लव मेरेज अरेंज हो गई । कुछ साल बाद एक बेटा हुआ , एक दम शांति से जी रहा था मै । बहुत साधारण दिनचर्या थी मेरी सुबह उठकर क्लिनिक और शाम को घर पे या घूमने मेरी इनकम भी अच्छी थी । धीरे धीरे मुझे सरकारी काम मिलने लगे थे , काम था गुनहगार को हिप्नोटाइज़ करके उससे जुर्म कुबुलवाना वैसे यह कुबुलातनामा अदालत में तो मान्य नहीं था लेकिन फिर कहानी सुनकर सबूत खोजना बहुत आसान था जिसमे इंस्पेक्टर मन्सुरी की मास्टरी थी यह आईडिया भी उनका था । इंस्पेक्टर मन्सुरी एक चुस्त , चालाक और ईमानदार व्यक्ति था डिपार्टमेंट में उसकी ईमानदारी की कसमें खाई जाती थी कोई कोई तो कह देता था की एक बार हीरोइन के गाल में दाग़ मिल जायेगा लेकिन मन्सुरी की वर्दी पर नहीं इसी वजह से की शहर में ज्यादा समय टिक नहीं पाता था । लेकिन पता नहीं इस बार राजकोट में काफी लम्बी इनिंग खेल रहे थे ।
एक बार एक ऐसा केस आया जिससे मेरी और इंस्पेक्टर दोनों की जिंदगी बदल गई । उस वक़्त में काफी बच्चो के अपहरण हो रहे थे और न कोई सबूत मिलता था नहीं सुराग जिससे किसी दिशा में आगे बढ़ा जा सके पर एक दिन एक अपहृत बच्चा वापस आया और रैकेट का भांडा फुट गया । उस बच्चे के कहे अनुसार जब रेड की गई तो वह से चार बच्चे मिले वो रैकेट चलनेवाला गृहमंत्री का बेटा था पर उसको अरेस्ट नहीं कर पाए मन्सुरी साहब क्योकि पूरी जिम्मेदारी फार्महाउस के मैनेजर ने ले ली थी , जो की विश्वास के काबिल नहीं था । चार बच्चे मिले थे लेकिन बाकि १६० बच्चो का कुछ अतापता नहीं था इसलिए मन्सुरी साहब ने रिस्क लिया और मंत्रीजी के बेटे को किडनैप करके मेरी क्लिनिक में ले आये और मुझे कहा की इसे हिप्नोटाइज़ करके पता करो बाकि बच्चे कहा है । लेकिन जब उसने पूरी कहानी बताई तब हमने अपना सर पकड़ लिया वो अलग अलग गैंग से किडनैपिंग करवाता और मीडिएटर के जरिये फार्म पर लता और एक टेम्पो में पडोसी राज्य में भेज देते जहा किसी साधु असीमानंद का आश्रम था वह उनका इस्तेमाल तांत्रिकविधि के लिए होता था ।
इंस्पेक्टर मन्सुरी ने आश्रम पर रेड की तो आश्रम की पीछे बहुत सारी हड्डियों के ढांचे मिले जो की बच्चो के थे लेकिन बाबा की पहुंच बहुत ऊपर तक थी इसलिए उसने इस बात को दबा दिया और इंस्पेक्टर मन्सुरी को नक्सलवादीओ को मदद करने का आरोप लगाकर सस्पेंड कर दिया । मै जब उनसे मिलाने गया तो उन्होंने कहा की सस्पेंड हो गया उसका मुझे कोई दुःख नहीं है लेकिन उन मनुष्य रूपी जानवरो को सजा नहीं दिला पाया इसकी तकलीफ है ।
फिर कुछ दिन बाद एक लड़की को असिस्टेंट के तौर पर रखा नाम था प्रीति मेरे एक सीनियर की चिट्ठी लेकर आई थी । अपने काम में काफी होशियार थी ,बला की खूबसूरत थी और बाते तो ऐसे करती थी जैसे मुँह में से शब्दों की जगह शहद टपक रहा हो । मेरी पत्नी वैसे कभी किसी की तारीफ नहीं करती थी लेकिन वो प्रीति से काफी खुश थी उसने उसका दिल भी जीत लिया था । एक दिन दोपहर टिफिन खा रहा था तब वो सामने ही बैठी थी और मेरी नजर बचाकर उसने कोई मेडिसिन या केमिकल खाने में मिला दिया जिससे मै उत्तेजित हो गया और उसने भी मुझे बहकाया जिससे मै न करनेवाली गलती कर बैठा । शाम को जब नींद से जागा तब पुलिस आ चुकी थी और प्रीति ने मुझ पर बलात्कार का आरोप लगाया था । मैंने पुलिस को बताने की कोशिश की की मेरे खाने कुछ मिला दिया था लेकिन उनके कान में जु तक न यही रेंगी । मेडिकल रिपोर्ट पॉज़िटिव आये और मुझे गुनहगार मानकर सात साल की सजा दी गई । एक सफल मनोचिकित्सक अब एक कैदी नंबर बन चूका था मैंने शोभा को बताने की कोशिश की की यह एक षड़यंत्र है लेकिन वो भी मुझे गुनहगार मानती थी वो डिप्रेशन में आ गई उसमे उसने मेरे बेटे को मारकर खुद भी सुसाइड कर ली । समय की कैसी विडम्बना की एक मनोचिकित्सक की पत्नी ने डिप्रेशन में आकर आत्महत्या कर ली ।
नटु जब उठा तो उसकी आँख में आँसू थे देवांशी की आँखे भी नम थी । शाम हो गई थी देवांशी ने जाते जाते पूछा की क्या मै आपके लिए कुछ कर सकती हु तो नटु ने कहा की एक काम जरूर कर सकती हो मै यहाँ नटु बनकर आया हु नटु बनकर रहने दो मेरी हकीकत किसीको भी मत बताओ । देवांशी ने सर हिलाया और चली गई ।
नटु के मन का भर हल्का हो चूका था कितने साल बाद किसीसे इतनी बाते की थी इस कहानी में वो रोनक पटेल का नाम गोल कर चूका था जिसने मदद की उसके बेटे को बदनाम क्यों करता । उसके अंदर की गाँठ अब खुल रही थी । उसने सोचा की अब शांति से जीऊंगा लेकिन उसे कहा मालूम था की नियति ने उसके लिए कुछ और सोचकर रखा है ।वो कमरा उसका इंतजार कर रहा था ।
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मेरा जन्म अति धनिक परीवार में तो नहीं लेकिन हां धनिक तो कह ही सकते ऐसे परीवार में हुआ । मेरे पिता सुन्दरलाला ओझा सरकारी नौकरी में थे और माँ निर्मला एक गृहिणी । मेरी माता महादेव की परम भक्त थी इसलिए बचपन से शिव के प्रति अदम्य आकर्षण था । मै बचपन से न तो दुबला न ही मोटा , एकदम बीच में था पूरी तरह एथलीट जैसा शरीर । मै स्कूल में रनिंग चैम्पियन था हमेशा पहले नंबर पर आता था लेकिन पिताजी पुराने ख़यालात वाले थे उन्होंने मुझसे कह दिया के सिर्फ पढाई पर ध्यान दो खेलकूद सिर्फ शौक के लिए ठीक है । मै भी पिताजी से बहुत डरता था इसलिए पढाई में ध्यान दिया वैसे भी मुझे मानव मन के रहस्यों की तरफ ज्यादा आकर्षण था इसलिए मैंने सायकोलोजी में यहाँ बैचलर की डिग्री ली और मास्टर्स की डिग्री अमरीका से ली । वह से वापस आकर मैंने राजकोट में प्रेक्टिस शुरू की हिप्नोटिज़म में मै मास्टर था कैसी भी व्यक्ति हो मै आसानी से हिप्नोटाइज़ कर देता । फिर मेरे जीवन में शोभा आई वो सोशिअल वर्कर थी इस वजह से एक दो बार मिलना हुआ , और हमदोनो में प्यार के अंकुर फूटे , उसके पिता चंदूलाल मेरे पिताजी के मित्र थे इसलिए हमारी लव मेरेज अरेंज हो गई । कुछ साल बाद एक बेटा हुआ , एक दम शांति से जी रहा था मै । बहुत साधारण दिनचर्या थी मेरी सुबह उठकर क्लिनिक और शाम को घर पे या घूमने मेरी इनकम भी अच्छी थी । धीरे धीरे मुझे सरकारी काम मिलने लगे थे , काम था गुनहगार को हिप्नोटाइज़ करके उससे जुर्म कुबुलवाना वैसे यह कुबुलातनामा अदालत में तो मान्य नहीं था लेकिन फिर कहानी सुनकर सबूत खोजना बहुत आसान था जिसमे इंस्पेक्टर मन्सुरी की मास्टरी थी यह आईडिया भी उनका था । इंस्पेक्टर मन्सुरी एक चुस्त , चालाक और ईमानदार व्यक्ति था डिपार्टमेंट में उसकी ईमानदारी की कसमें खाई जाती थी कोई कोई तो कह देता था की एक बार हीरोइन के गाल में दाग़ मिल जायेगा लेकिन मन्सुरी की वर्दी पर नहीं इसी वजह से की शहर में ज्यादा समय टिक नहीं पाता था । लेकिन पता नहीं इस बार राजकोट में काफी लम्बी इनिंग खेल रहे थे । एक बार एक ऐसा केस आया जिससे मेरी और इंस्पेक्टर दोनों की जिंदगी बदल गई । उस वक़्त में काफी बच्चो के अपहरण हो रहे थे और न कोई सबूत मिलता था नहीं सुराग जिससे किसी दिशा में आगे बढ़ा जा सके पर एक दिन एक अपहृत बच्चा वापस आया और रैकेट का भांडा फुट गया । उस बच्चे के कहे अनुसार जब रेड की गई तो वह से चार बच्चे मिले वो रैकेट चलनेवाला गृहमंत्री का बेटा था पर उसको अरेस्ट नहीं कर पाए मन्सुरी साहब क्योकि पूरी जिम्मेदारी फार्महाउस के मैनेजर ने ले ली थी , जो की विश्वास के काबिल नहीं था । चार बच्चे मिले थे लेकिन बाकि एक सौ साठ बच्चो का कुछ अतापता नहीं था इसलिए मन्सुरी साहब ने रिस्क लिया और मंत्रीजी के बेटे को किडनैप करके मेरी क्लिनिक में ले आये और मुझे कहा की इसे हिप्नोटाइज़ करके पता करो बाकि बच्चे कहा है । लेकिन जब उसने पूरी कहानी बताई तब हमने अपना सर पकड़ लिया वो अलग अलग गैंग से किडनैपिंग करवाता और मीडिएटर के जरिये फार्म पर लता और एक टेम्पो में पडोसी राज्य में भेज देते जहा किसी साधु असीमानंद का आश्रम था वह उनका इस्तेमाल तांत्रिकविधि के लिए होता था । इंस्पेक्टर मन्सुरी ने आश्रम पर रेड की तो आश्रम की पीछे बहुत सारी हड्डियों के ढांचे मिले जो की बच्चो के थे लेकिन बाबा की पहुंच बहुत ऊपर तक थी इसलिए उसने इस बात को दबा दिया और इंस्पेक्टर मन्सुरी को नक्सलवादीओ को मदद करने का आरोप लगाकर सस्पेंड कर दिया । मै जब उनसे मिलाने गया तो उन्होंने कहा की सस्पेंड हो गया उसका मुझे कोई दुःख नहीं है लेकिन उन मनुष्य रूपी जानवरो को सजा नहीं दिला पाया इसकी तकलीफ है । फिर कुछ दिन बाद एक लड़की को असिस्टेंट के तौर पर रखा नाम था प्रीति मेरे एक सीनियर की चिट्ठी लेकर आई थी । अपने काम में काफी होशियार थी ,बला की खूबसूरत थी और बाते तो ऐसे करती थी जैसे मुँह में से शब्दों की जगह शहद टपक रहा हो । मेरी पत्नी वैसे कभी किसी की तारीफ नहीं करती थी लेकिन वो प्रीति से काफी खुश थी उसने उसका दिल भी जीत लिया था । एक दिन दोपहर टिफिन खा रहा था तब वो सामने ही बैठी थी और मेरी नजर बचाकर उसने कोई मेडिसिन या केमिकल खाने में मिला दिया जिससे मै उत्तेजित हो गया और उसने भी मुझे बहकाया जिससे मै न करनेवाली गलती कर बैठा । शाम को जब नींद से जागा तब पुलिस आ चुकी थी और प्रीति ने मुझ पर बलात्कार का आरोप लगाया था । मैंने पुलिस को बताने की कोशिश की की मेरे खाने कुछ मिला दिया था लेकिन उनके कान में जु तक न यही रेंगी । मेडिकल रिपोर्ट पॉज़िटिव आये और मुझे गुनहगार मानकर सात साल की सजा दी गई । एक सफल मनोचिकित्सक अब एक कैदी नंबर बन चूका था मैंने शोभा को बताने की कोशिश की की यह एक षड़यंत्र है लेकिन वो भी मुझे गुनहगार मानती थी वो डिप्रेशन में आ गई उसमे उसने मेरे बेटे को मारकर खुद भी सुसाइड कर ली । समय की कैसी विडम्बना की एक मनोचिकित्सक की पत्नी ने डिप्रेशन में आकर आत्महत्या कर ली । नटु जब उठा तो उसकी आँख में आँसू थे देवांशी की आँखे भी नम थी । शाम हो गई थी देवांशी ने जाते जाते पूछा की क्या मै आपके लिए कुछ कर सकती हु तो नटु ने कहा की एक काम जरूर कर सकती हो मै यहाँ नटु बनकर आया हु नटु बनकर रहने दो मेरी हकीकत किसीको भी मत बताओ । देवांशी ने सर हिलाया और चली गई । नटु के मन का भर हल्का हो चूका था कितने साल बाद किसीसे इतनी बाते की थी इस कहानी में वो रोनक पटेल का नाम गोल कर चूका था जिसने मदद की उसके बेटे को बदनाम क्यों करता । उसके अंदर की गाँठ अब खुल रही थी । उसने सोचा की अब शांति से जीऊंगा लेकिन उसे कहा मालूम था की नियति ने उसके लिए कुछ और सोचकर रखा है ।वो कमरा उसका इंतजार कर रहा था ।
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शहर में आंधी-पानी से बदहाल बिजली सप्लाई गुरुवार की देर रात सुचारू हो गई। हालांकि गांधी मैदान के आसपास के लोगों को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनकी बिजली सप्लाई सुचारू होने में 33 घंटे का समय लग गया। बुधवार की रात करीब 12 बजे आंधी-पानी से पूरे जिले में बिजली व्यवस्था चरमरा गई। देखते ही देखते सभी फीडर ब्रेकडाउन हो गए। जानकारी मिलते ही विद्युत कार्यपालक अभियंता चंदन कुमार सिन्हा व शिवम कुमार सप्लाई चालू कराने में जुट गए। काफी खोजबीन करने के बाद पता चला कि ग्रिड से न्यू पीएसएस आने वाला 33 केवी केबल ब्लास्ट कर गया है। बिजलीकर्मियों के अथक प्रयास से गुरुवार की रात 10 बजे 33 हजार का केबल बदलकर सप्लाई चालू की गई। इस दौरान महादेवा, नई बस्ती, मालवीयनगर, रामदेव नगर, जेपी चौक, शास्त्रीनगर, विद्युरतीहाता, मखदुम सराय, स्टेशन रोड, आंदर ढाला, लक्ष्मीपुर, हनुमंतनगर, रामनगर, छपिया समेत कई मोहल्ले अंधकार में डूब गए। जिले के दोनों कार्यपालक अभियंता समेत शहरी एसएसडी अभय मौर्य व जेई शशिभूषण कुमार देर रात तक पावर सब स्टेशन में डटे रहे। वहीं शहर के मोति स्कूल के पास नाला निर्माण के दौरान भी बिजली बाधित रही। आसपास के ट्रांसफार्मर का जंफर खोलकर बाकि मोहल्ले में बिजली सप्लाई की गई। हालांकि शुक्रवार की सुबह बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई।
आंधी-पानी से बिजली सप्लाई बाधित होने से लोगों को पानी के लिए भारी परेशानी झेलनी पड़ी। एक साथ सभी फीडरों के ब्रेकडाउन से पानी का सप्लाई देने वाले ने भी जवाब दे दिया। वहीं लोगों के घरों का इनवर्टर भी पांच से छह घंटे बाद बंद हो गया। आरओ पर निर्भर रहने वालों को चापाकल से पानी भरकर काम चलाना पड़ा। घरों में आइसोलेट हो रहे कोविड पॉजिटिव लोगों को भी भारी परेशानी हुई। वहीं बच्चों को पढ़ाई भी बाधित रही।
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शहर में आंधी-पानी से बदहाल बिजली सप्लाई गुरुवार की देर रात सुचारू हो गई। हालांकि गांधी मैदान के आसपास के लोगों को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनकी बिजली सप्लाई सुचारू होने में तैंतीस घंटाटे का समय लग गया। बुधवार की रात करीब बारह बजे आंधी-पानी से पूरे जिले में बिजली व्यवस्था चरमरा गई। देखते ही देखते सभी फीडर ब्रेकडाउन हो गए। जानकारी मिलते ही विद्युत कार्यपालक अभियंता चंदन कुमार सिन्हा व शिवम कुमार सप्लाई चालू कराने में जुट गए। काफी खोजबीन करने के बाद पता चला कि ग्रिड से न्यू पीएसएस आने वाला तैंतीस केवी केबल ब्लास्ट कर गया है। बिजलीकर्मियों के अथक प्रयास से गुरुवार की रात दस बजे तैंतीस हजार का केबल बदलकर सप्लाई चालू की गई। इस दौरान महादेवा, नई बस्ती, मालवीयनगर, रामदेव नगर, जेपी चौक, शास्त्रीनगर, विद्युरतीहाता, मखदुम सराय, स्टेशन रोड, आंदर ढाला, लक्ष्मीपुर, हनुमंतनगर, रामनगर, छपिया समेत कई मोहल्ले अंधकार में डूब गए। जिले के दोनों कार्यपालक अभियंता समेत शहरी एसएसडी अभय मौर्य व जेई शशिभूषण कुमार देर रात तक पावर सब स्टेशन में डटे रहे। वहीं शहर के मोति स्कूल के पास नाला निर्माण के दौरान भी बिजली बाधित रही। आसपास के ट्रांसफार्मर का जंफर खोलकर बाकि मोहल्ले में बिजली सप्लाई की गई। हालांकि शुक्रवार की सुबह बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई। आंधी-पानी से बिजली सप्लाई बाधित होने से लोगों को पानी के लिए भारी परेशानी झेलनी पड़ी। एक साथ सभी फीडरों के ब्रेकडाउन से पानी का सप्लाई देने वाले ने भी जवाब दे दिया। वहीं लोगों के घरों का इनवर्टर भी पांच से छह घंटे बाद बंद हो गया। आरओ पर निर्भर रहने वालों को चापाकल से पानी भरकर काम चलाना पड़ा। घरों में आइसोलेट हो रहे कोविड पॉजिटिव लोगों को भी भारी परेशानी हुई। वहीं बच्चों को पढ़ाई भी बाधित रही।
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मुंबई, 19 सितंबर (आईएएनएस)। अभिनेता वरुण मित्रा ने बताया कि निर्माता मुकेश और महेश भट्ट ने कैसे उन्हें अपनी आगामी रोमांटिक फिल्म 'जलेबी' में शामिल करने का फैसला लिया जिसमें रिया चक्रवर्ती और दीगंगना सूर्यवंशी भी हैं। वरुण ने एक बयान में कहा, मुझे मुकेशजी और भट्ट साहब (महेश भट्ट) से पहली मुलाकात याद है।
उन्होंने मेरी वर्ष 2015 की फिल्म 'काश' का ट्रेलर देखा था जिसका टोक्यो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रीमियर हुआ था और उन्होंने मेरा अमेजन किंडल का विज्ञापन भी देखा जिसके बाद उन्होंने मुझे फिल्म में शामिल कर लिया।
भट्ट ब्रदर्स के साथ काम को लेकर उत्साहित वरुण ने कहा, बड़े बैनर से अधिक मेरे लिए भट्ट भाइयों ने यह अनुभव यादगार बना दिया। मैं भट्ट साहब के साथ बिताए समय को संजो रहा हूं।
'जलेबी- द एवरलास्टिंग टेस्ट ऑफ लव' 12 अक्टबूर को रिलीज होगी। यह महेश भट्ट के सहयोग से विशेष फिल्म्स द्वारा प्रस्तुत और मुकेश भट्ट द्वारा निर्मित की जा रही है।
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मुंबई, उन्नीस सितंबर । अभिनेता वरुण मित्रा ने बताया कि निर्माता मुकेश और महेश भट्ट ने कैसे उन्हें अपनी आगामी रोमांटिक फिल्म 'जलेबी' में शामिल करने का फैसला लिया जिसमें रिया चक्रवर्ती और दीगंगना सूर्यवंशी भी हैं। वरुण ने एक बयान में कहा, मुझे मुकेशजी और भट्ट साहब से पहली मुलाकात याद है। उन्होंने मेरी वर्ष दो हज़ार पंद्रह की फिल्म 'काश' का ट्रेलर देखा था जिसका टोक्यो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रीमियर हुआ था और उन्होंने मेरा अमेजन किंडल का विज्ञापन भी देखा जिसके बाद उन्होंने मुझे फिल्म में शामिल कर लिया। भट्ट ब्रदर्स के साथ काम को लेकर उत्साहित वरुण ने कहा, बड़े बैनर से अधिक मेरे लिए भट्ट भाइयों ने यह अनुभव यादगार बना दिया। मैं भट्ट साहब के साथ बिताए समय को संजो रहा हूं। 'जलेबी- द एवरलास्टिंग टेस्ट ऑफ लव' बारह अक्टबूर को रिलीज होगी। यह महेश भट्ट के सहयोग से विशेष फिल्म्स द्वारा प्रस्तुत और मुकेश भट्ट द्वारा निर्मित की जा रही है।
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बरेली : डिस्ट्रिक्ट में बरेलियंस को सेफ्टी देने का दावा करने वाली हाईटेक पुलिस को शातिर चोर लगातार चैलेंज दे रहे हैं। पिछले तीन साल में पुलिस ने चोर और ऑटोलिफ्टर पर 4982 मामले 29 थानों में दर्ज किए है। मगर पुलिस कई मामलों का खुलासा नहीं कर पाई है। थर्सडे को टीचर के बंद घर में हुई चोरी का खुलासा पुलिस नहीं कर पाई थी कि चोरों एक ही रात सीमेंट व्यापारी के अलावा एक घर में हाथ साफ कर लाखों का समान पार कर दिया। हालांकि पुलिस मामला दर्ज कर पड़ोसियों से पूछताछ करने में जुटी है।
शहर के शास्त्री नगर निवासी उदित पाराशरी की इज्जतनगर में ग्रेटर आकाश मोड़ पर सीमेंट स्टोर और कैफे है। थर्सडे रात चोरों ने दुकान का शटर काट कर 12 हजार कैश व अन्य सामान चोरी कर लिया। फ्राइडे को वह दुकान खोलने पहुंचे तो चोरी होने का पता लगा।
दूसरी वारदात फतेहगंज पश्चिमी के खिरका गांव की है। सत्यम गंगवार बरेली में परिवार के साथ रहते हैं, डेली वह गांव जाते हैं, लेकिन दो दिन से किसी वजह से वह गांव नहीं जा सके। फ्राइडे को वह गांव पहुंचे तो मकान के ताले टूटे पड़े थे। अलमारी में रखे जेवर और 35 हजार रुपए भी गायब थे। पीडि़तों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
वहीं वेडनसडे रात सुभाषनगर के बदायूं रोड निवासी नवीन कुमार शर्मा के घर हुई दस लाख की चोरी का पुलिस अब तक खुलासा नहीं कर सकी है।
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बरेली : डिस्ट्रिक्ट में बरेलियंस को सेफ्टी देने का दावा करने वाली हाईटेक पुलिस को शातिर चोर लगातार चैलेंज दे रहे हैं। पिछले तीन साल में पुलिस ने चोर और ऑटोलिफ्टर पर चार हज़ार नौ सौ बयासी मामले उनतीस थानों में दर्ज किए है। मगर पुलिस कई मामलों का खुलासा नहीं कर पाई है। थर्सडे को टीचर के बंद घर में हुई चोरी का खुलासा पुलिस नहीं कर पाई थी कि चोरों एक ही रात सीमेंट व्यापारी के अलावा एक घर में हाथ साफ कर लाखों का समान पार कर दिया। हालांकि पुलिस मामला दर्ज कर पड़ोसियों से पूछताछ करने में जुटी है। शहर के शास्त्री नगर निवासी उदित पाराशरी की इज्जतनगर में ग्रेटर आकाश मोड़ पर सीमेंट स्टोर और कैफे है। थर्सडे रात चोरों ने दुकान का शटर काट कर बारह हजार कैश व अन्य सामान चोरी कर लिया। फ्राइडे को वह दुकान खोलने पहुंचे तो चोरी होने का पता लगा। दूसरी वारदात फतेहगंज पश्चिमी के खिरका गांव की है। सत्यम गंगवार बरेली में परिवार के साथ रहते हैं, डेली वह गांव जाते हैं, लेकिन दो दिन से किसी वजह से वह गांव नहीं जा सके। फ्राइडे को वह गांव पहुंचे तो मकान के ताले टूटे पड़े थे। अलमारी में रखे जेवर और पैंतीस हजार रुपए भी गायब थे। पीडि़तों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं वेडनसडे रात सुभाषनगर के बदायूं रोड निवासी नवीन कुमार शर्मा के घर हुई दस लाख की चोरी का पुलिस अब तक खुलासा नहीं कर सकी है।
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SAHJANWA: सहजनवां थाना क्षेत्र के कुलावल खुर्द के पास स्कूल से घर लौट रहे 13 वर्षीय छात्र को पुलिस जीप ने रौंद डाला। घटना शनिवार की शाम में हुई। रविवार को सुबह इलाज के दौरान छात्र ने दम तोड़ दिया। पीडि़त परिवार ने हरपुर एसओ और पुलिस जीप के खिलाफ तहरीर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने केस तो दर्ज कर लिया लेकिन अपने एसओ को बचा ले गई। थाने में सरकारी गाड़ी व अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। घटना के बाद से ही पूरा महकमा एसओ को बचाने में जुटा है।
सहजनवां थाना क्षेत्र के कुआवल खुर्द निवासी बाबूलाल विश्वकर्मा का पुत्र राजन विश्वकर्मा (13) पास के स्कूल में 8वीं का छात्र था। शनिवार की शाम 4 बजे वह स्कूल से घर लौट रहा था। अभी गांव के पास पहुंचा ही था कि भीटी-हरपुर मार्ग पर पुलिस जीप ने टक्कर मार दी। जीप हरपुर बुदहट थाने की थी जो थाने से भीटी की तरफ जा रही थी। जीप में बैठे हरपुर बुदहट थाने के एसओ ने गंभीर रूप से घायल छात्र को स्थानीय अस्पताल भिजवाया। वहां से डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
शनिवार को भरे चौराहे पर 4 बजे हुई घटना को पुलिस ने दबा दिया। मामले की किसी को खबर नहीं हुई। परिजन भी छात्र के इलाज में लग गए। सभी मेडिकल कॉलेज में छात्र के साथ ही थे। शनिवार को सुबह 9 बजे छात्र की मौत हो गई। इसके बाद से मेडिकल कॉलेज कैम्पस में परिजनों की चीख-पुकार मच गई। अपने लाडले को खोने के बाद परिजनों ने अपना आपा भी खो दिया और पुलिस का भय भूल गए। परिजनों ने सहजनवां थाने में हरपुर एसओ और पुलिस जीप के खिलाफ तहरीर दी।
छात्र की मौत के बाद परिजनों के साथ ही क्षेत्र में पुलिस के खिलाफ लोगों में गुस्सा भर गया था। इधर, पुलिस जीप से मौत की चर्चा हर तरफ होने लगी। पुलिस को लगा कि अब यदि केस दर्ज न किया गया तो मामला बढ़ सकता है। पुलिस ने चतुराई से केस दर्ज कर इसकी सूचना परिजनों को दे दी ताकि मामला शांत हो जाए। छात्र के पिता ने हरपुर एसओ और जीप से छात्र के रौंदे जाने की तहरीर दी लेकिन पुलिस ने 'सरकारी वाहन' और अज्ञात पर केस दर्ज कर लिया। तहरीर के केस में बदलने के क्रम में एसओ का नाम गायब कर दिया गया।
तहरीर में आरोपित एसओ हरपुर श्यामबिहारी का कहना है कि वे क्षेत्र में जा रहे थे। उसी बीच रास्ते में मैजिक गाड़ी ने छात्र को ठोकर मार दिया। सामने हुई घटना के बाद तुरंत ही छात्र को अपनी गाड़ी में लादकर सहजनवां सीएचसी पहुंचाया। वहां इलाज के बाद डॉक्टर ने रेफर कर दिया। यह टक्कर मेरे वाहन से नहीं बल्कि मैजिक से हुई लेकिन कुछ लोगों के दबाव में पीडि़त झूठा आरोप लगा रहे हैं।
हरपुर एसओ की मानें तो जिस वक्त हादसा हुआ, उसी समय उनकी जीप घटनास्थल पर पहुंची। एक मैजिक ने टक्कर मारी और उसका चालक भाग गया। वह मैजिक थाने में खड़ी है जो किसी मनोज कुमार की है। मनोज कुमार का पता पूछने पर एसओ का कहना है कि उन्हें बस इतनी ही जानकारी है। सवाल उठता है कि जब एसओ के सामने ही टक्कर किसी मैजिक ने मारी तो केस सरकारी वाहन पर क्यों दर्ज किया? ऐसे कई सवाल हैं जो एसओ के बयान को खारिज करते हैं। वहीं सहजनवां पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में हैं। वरीय अधिकारी भी एसओ का बचाव करते ही नजर आ रहे हैं।
इन सवालों का जवाब क्या?
- पुलिस के सामना हुआ हादसा तो क्यों नहीं पकड़ा गया टक्कर मारने वाला चालक?
- टक्कर शनिवार को हुई थी। 24 घंटे बाद भी पुलिस को मैजिक मालिक का सिर्फ नाम पता था।
- मैजिक पर कोई व्यक्ति नहीं पकड़ा गया तो मालिक का नाम गाड़ी से मिले कागजात से ही पता चला होगा। लेकिन कागजात पर तो पता भी होना चाहिए था?
- एसओ के सामने मैजिक ने टक्कर मारी तो सरकारी वाहन के खिलाफ केस क्यों?
- पुलिस के साथ टक्कर मैजिक चालक ने मारी, मैजिक मालिक का नाम भी पता है तो अज्ञात पर केस दर्ज क्यों किया?
- पुलिस के सामने हुए हादसे में पीडि़त का बयान लेकर केस उसी दिन दर्ज क्यों नहीं किया गया?
पीडि़त की तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। जांच की जा रही है।
तहरीर के आधार पर सहजनवां थाने में केस दर्ज कर लिया गया है। विवेचना में जो तथ्य सामने आएंगे, उस आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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SAHJANWA: सहजनवां थाना क्षेत्र के कुलावल खुर्द के पास स्कूल से घर लौट रहे तेरह वर्षीय छात्र को पुलिस जीप ने रौंद डाला। घटना शनिवार की शाम में हुई। रविवार को सुबह इलाज के दौरान छात्र ने दम तोड़ दिया। पीडि़त परिवार ने हरपुर एसओ और पुलिस जीप के खिलाफ तहरीर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने केस तो दर्ज कर लिया लेकिन अपने एसओ को बचा ले गई। थाने में सरकारी गाड़ी व अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। घटना के बाद से ही पूरा महकमा एसओ को बचाने में जुटा है। सहजनवां थाना क्षेत्र के कुआवल खुर्द निवासी बाबूलाल विश्वकर्मा का पुत्र राजन विश्वकर्मा पास के स्कूल में आठवीं का छात्र था। शनिवार की शाम चार बजे वह स्कूल से घर लौट रहा था। अभी गांव के पास पहुंचा ही था कि भीटी-हरपुर मार्ग पर पुलिस जीप ने टक्कर मार दी। जीप हरपुर बुदहट थाने की थी जो थाने से भीटी की तरफ जा रही थी। जीप में बैठे हरपुर बुदहट थाने के एसओ ने गंभीर रूप से घायल छात्र को स्थानीय अस्पताल भिजवाया। वहां से डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। शनिवार को भरे चौराहे पर चार बजे हुई घटना को पुलिस ने दबा दिया। मामले की किसी को खबर नहीं हुई। परिजन भी छात्र के इलाज में लग गए। सभी मेडिकल कॉलेज में छात्र के साथ ही थे। शनिवार को सुबह नौ बजे छात्र की मौत हो गई। इसके बाद से मेडिकल कॉलेज कैम्पस में परिजनों की चीख-पुकार मच गई। अपने लाडले को खोने के बाद परिजनों ने अपना आपा भी खो दिया और पुलिस का भय भूल गए। परिजनों ने सहजनवां थाने में हरपुर एसओ और पुलिस जीप के खिलाफ तहरीर दी। छात्र की मौत के बाद परिजनों के साथ ही क्षेत्र में पुलिस के खिलाफ लोगों में गुस्सा भर गया था। इधर, पुलिस जीप से मौत की चर्चा हर तरफ होने लगी। पुलिस को लगा कि अब यदि केस दर्ज न किया गया तो मामला बढ़ सकता है। पुलिस ने चतुराई से केस दर्ज कर इसकी सूचना परिजनों को दे दी ताकि मामला शांत हो जाए। छात्र के पिता ने हरपुर एसओ और जीप से छात्र के रौंदे जाने की तहरीर दी लेकिन पुलिस ने 'सरकारी वाहन' और अज्ञात पर केस दर्ज कर लिया। तहरीर के केस में बदलने के क्रम में एसओ का नाम गायब कर दिया गया। तहरीर में आरोपित एसओ हरपुर श्यामबिहारी का कहना है कि वे क्षेत्र में जा रहे थे। उसी बीच रास्ते में मैजिक गाड़ी ने छात्र को ठोकर मार दिया। सामने हुई घटना के बाद तुरंत ही छात्र को अपनी गाड़ी में लादकर सहजनवां सीएचसी पहुंचाया। वहां इलाज के बाद डॉक्टर ने रेफर कर दिया। यह टक्कर मेरे वाहन से नहीं बल्कि मैजिक से हुई लेकिन कुछ लोगों के दबाव में पीडि़त झूठा आरोप लगा रहे हैं। हरपुर एसओ की मानें तो जिस वक्त हादसा हुआ, उसी समय उनकी जीप घटनास्थल पर पहुंची। एक मैजिक ने टक्कर मारी और उसका चालक भाग गया। वह मैजिक थाने में खड़ी है जो किसी मनोज कुमार की है। मनोज कुमार का पता पूछने पर एसओ का कहना है कि उन्हें बस इतनी ही जानकारी है। सवाल उठता है कि जब एसओ के सामने ही टक्कर किसी मैजिक ने मारी तो केस सरकारी वाहन पर क्यों दर्ज किया? ऐसे कई सवाल हैं जो एसओ के बयान को खारिज करते हैं। वहीं सहजनवां पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में हैं। वरीय अधिकारी भी एसओ का बचाव करते ही नजर आ रहे हैं। इन सवालों का जवाब क्या? - पुलिस के सामना हुआ हादसा तो क्यों नहीं पकड़ा गया टक्कर मारने वाला चालक? - टक्कर शनिवार को हुई थी। चौबीस घंटाटे बाद भी पुलिस को मैजिक मालिक का सिर्फ नाम पता था। - मैजिक पर कोई व्यक्ति नहीं पकड़ा गया तो मालिक का नाम गाड़ी से मिले कागजात से ही पता चला होगा। लेकिन कागजात पर तो पता भी होना चाहिए था? - एसओ के सामने मैजिक ने टक्कर मारी तो सरकारी वाहन के खिलाफ केस क्यों? - पुलिस के साथ टक्कर मैजिक चालक ने मारी, मैजिक मालिक का नाम भी पता है तो अज्ञात पर केस दर्ज क्यों किया? - पुलिस के सामने हुए हादसे में पीडि़त का बयान लेकर केस उसी दिन दर्ज क्यों नहीं किया गया? पीडि़त की तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। जांच की जा रही है। तहरीर के आधार पर सहजनवां थाने में केस दर्ज कर लिया गया है। विवेचना में जो तथ्य सामने आएंगे, उस आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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नई दिल्ली, 16 सितंबर : भारत और विदेशों में विदेश मंत्रालय के राजनयिक पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा पंजाब में एक नया बीएमडब्ल्यू विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के दावों से परेशान हैं, जिसे बाद प्रमुख ऑटो दिग्गज बीएमडब्ल्यू ने खारिज कर दिया. मंत्रालय के एक सूत्र के अनुसार, राजनयिकों ने इसे विश्वसनीयता के सवाल के रूप में देखा और कहा कि इस तरह के लंबे दावों से बचा जाना चाहिए, क्योंकि इससे देश और सरकार की विश्वसनीयता को भी चोट पहुंचती है. सूत्र ने कहा कि इससे राजनयिकों को शर्मिदगी उठानी पड़ी है.
हालांकि, एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए बीएमडब्ल्यू ग्रुप ने बुधवार को इस तरह की योजना से इनकार किया. "बीएमडब्ल्यू समूह चेन्नई में अपने विनिर्माण संयंत्र, पुणे में एक पुर्जे गोदाम, गुड़गांव-एनसीआर में एक प्रशिक्षण केंद्र और देश के प्रमुख महानगरों में एक अच्छी तरह से विकसित डीलर नेटवर्क के साथ अपने भारतीय परिचालन के लिए प्रतिबद्ध है. बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया के पास पंजाब में अतिरिक्त विनिर्माण परिचालन स्थापित करने की कोई योजना नहीं है. "
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नई दिल्ली, सोलह सितंबर : भारत और विदेशों में विदेश मंत्रालय के राजनयिक पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा पंजाब में एक नया बीएमडब्ल्यू विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने के दावों से परेशान हैं, जिसे बाद प्रमुख ऑटो दिग्गज बीएमडब्ल्यू ने खारिज कर दिया. मंत्रालय के एक सूत्र के अनुसार, राजनयिकों ने इसे विश्वसनीयता के सवाल के रूप में देखा और कहा कि इस तरह के लंबे दावों से बचा जाना चाहिए, क्योंकि इससे देश और सरकार की विश्वसनीयता को भी चोट पहुंचती है. सूत्र ने कहा कि इससे राजनयिकों को शर्मिदगी उठानी पड़ी है. हालांकि, एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए बीएमडब्ल्यू ग्रुप ने बुधवार को इस तरह की योजना से इनकार किया. "बीएमडब्ल्यू समूह चेन्नई में अपने विनिर्माण संयंत्र, पुणे में एक पुर्जे गोदाम, गुड़गांव-एनसीआर में एक प्रशिक्षण केंद्र और देश के प्रमुख महानगरों में एक अच्छी तरह से विकसित डीलर नेटवर्क के साथ अपने भारतीय परिचालन के लिए प्रतिबद्ध है. बीएमडब्ल्यू ग्रुप इंडिया के पास पंजाब में अतिरिक्त विनिर्माण परिचालन स्थापित करने की कोई योजना नहीं है. "
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साहिबगंज। यूपीएससी, जेपीएससी, एसएससी, मेडिकल व इंजीनियरिंग करने के सपने संजोए जिले के युवाओं को अब प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। जिला प्रशासन ने इसके लिए पहल शुरू कर दी है। खासकर पीटीजी समुदाय के युवाओं को ध्यान में रखकर योजना को तैयार किया गया है। वैसे जिला प्रशासन के स्तर से संचालित होने वाले इसे कोचिंग में एसटी, एससी, बीपीएल, ओबीसी व जेनरल विद्यार्थियों को भी प्राथमिकता के आधार पर तैयारी कराया जाएगा। डीसी रामनिवास यादव ने यहां के युवाओं की प्रतिभा को देखते हुए नीति आयोग से यहां चांद भैरव मार्गदर्शन कोचिंग सेंटर खोलने का प्रस्ताव भेजा है। इसके लिए 1. 3 करोड़ रुपए का योजना प्रस्ताव तैयार किया गया है। कोचिंग सेंटर का नाम नव्या होगा। नव्या का शाब्दिक अर्थ प्रशंसा के योग्य होता है। नव्या कोचिंग के लिए जिला मुख्यालय में तत्काल एक सरकारी भवन को चिह्नित किया गया है। नव्या कोचिंग सेंटर में दो साल में करीब 2500 विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कराने का लक्ष्य है। हालांकि यह संख्या घट बढ़ भी सकती है। इस कोचिंग में देश के नामचीन संस्थाओं के एक्सपर्ट व अनुभवी शिक्षकों की देखरेख में शिक्षण कार्य संचालित होगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने शुरूआती तैयारी पूरी कर ली है। नीति आयोग से योजना की स्वीकृति मिलते ही शिक्षकों की नियुक्ति के साथ आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
चांद भैरव मार्गदर्शक कोचिंग सेंटर (नव्या) में दो तरह से प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कराई जाएगी। यहां कक्षा का ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों प्रकार से होगा। विद्यार्थी जिस स्तर से अपना निबंधन कराएंगे, उन्हे उसी स्तर पर शिक्षण कार्य कराया जाएगा। निबंधन के लिए एक न्यूनतम शुल्क होगा। यहां स्टडी मटेरियल के लिए भी न्यूनतम शुल्क होगा। ऑनलाइन क्लास के लिए बच्चों को निबंधन के बाद एक आइडी मिलेगा। आइडी के आधार पर बेवसाइट सब-क्राइव करना होगा। इसके माध्यम से बच्चों को पूरी जानकारी मिल सकेगी। यदि किसी बच्चें को विशेष जानकारी चाहिए या कोई परेशानी हो तो उनके लिए सप्ताह में एक दिन ऑनलाइन संबंधित विषय के एक्सपर्ट से बात करने का मौका मिलेगा।
कोचिंग में पढ़ने वाले बच्चों के लिए हर दिन सात बेच बनाया गया है। एक बेच में अधिकतम 50 विद्यार्थी होंगे। कोचिंग में नामांकन के लिए विद्यार्थियों को ऑफलाइन प्रतियोगिता परीक्षा से गुजरना होगा। ऐसा नहीं है कि निबंधन कराने मात्र से ही संबंधित विद्यार्थी का नामांकन हो जाएगा।
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साहिबगंज। यूपीएससी, जेपीएससी, एसएससी, मेडिकल व इंजीनियरिंग करने के सपने संजोए जिले के युवाओं को अब प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। जिला प्रशासन ने इसके लिए पहल शुरू कर दी है। खासकर पीटीजी समुदाय के युवाओं को ध्यान में रखकर योजना को तैयार किया गया है। वैसे जिला प्रशासन के स्तर से संचालित होने वाले इसे कोचिंग में एसटी, एससी, बीपीएल, ओबीसी व जेनरल विद्यार्थियों को भी प्राथमिकता के आधार पर तैयारी कराया जाएगा। डीसी रामनिवास यादव ने यहां के युवाओं की प्रतिभा को देखते हुए नीति आयोग से यहां चांद भैरव मार्गदर्शन कोचिंग सेंटर खोलने का प्रस्ताव भेजा है। इसके लिए एक. तीन करोड़ रुपए का योजना प्रस्ताव तैयार किया गया है। कोचिंग सेंटर का नाम नव्या होगा। नव्या का शाब्दिक अर्थ प्रशंसा के योग्य होता है। नव्या कोचिंग के लिए जिला मुख्यालय में तत्काल एक सरकारी भवन को चिह्नित किया गया है। नव्या कोचिंग सेंटर में दो साल में करीब दो हज़ार पाँच सौ विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कराने का लक्ष्य है। हालांकि यह संख्या घट बढ़ भी सकती है। इस कोचिंग में देश के नामचीन संस्थाओं के एक्सपर्ट व अनुभवी शिक्षकों की देखरेख में शिक्षण कार्य संचालित होगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने शुरूआती तैयारी पूरी कर ली है। नीति आयोग से योजना की स्वीकृति मिलते ही शिक्षकों की नियुक्ति के साथ आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। चांद भैरव मार्गदर्शक कोचिंग सेंटर में दो तरह से प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कराई जाएगी। यहां कक्षा का ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों प्रकार से होगा। विद्यार्थी जिस स्तर से अपना निबंधन कराएंगे, उन्हे उसी स्तर पर शिक्षण कार्य कराया जाएगा। निबंधन के लिए एक न्यूनतम शुल्क होगा। यहां स्टडी मटेरियल के लिए भी न्यूनतम शुल्क होगा। ऑनलाइन क्लास के लिए बच्चों को निबंधन के बाद एक आइडी मिलेगा। आइडी के आधार पर बेवसाइट सब-क्राइव करना होगा। इसके माध्यम से बच्चों को पूरी जानकारी मिल सकेगी। यदि किसी बच्चें को विशेष जानकारी चाहिए या कोई परेशानी हो तो उनके लिए सप्ताह में एक दिन ऑनलाइन संबंधित विषय के एक्सपर्ट से बात करने का मौका मिलेगा। कोचिंग में पढ़ने वाले बच्चों के लिए हर दिन सात बेच बनाया गया है। एक बेच में अधिकतम पचास विद्यार्थी होंगे। कोचिंग में नामांकन के लिए विद्यार्थियों को ऑफलाइन प्रतियोगिता परीक्षा से गुजरना होगा। ऐसा नहीं है कि निबंधन कराने मात्र से ही संबंधित विद्यार्थी का नामांकन हो जाएगा।
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रंगों के त्योहार होली (Holi 2023) की धूम पूरे देश में देखने के लिए मिलने लगी है। हर तरफ होली को लेकर लोगों में बहुत उत्साह दिखाई दे रहा है। होली का पर्व भाईचारे का त्योहार है, इसमें लोग आपसी वैर भुलकर एक-दूसरे को प्यार से रंग लगाते हैं। लेकिन होली का यह त्योहार बॉलीवुड गानों के बिना कभी पूरी नहीं होती। मूवी इंडस्ट्री में इस त्योहार को लेकर कई सुपरहिट गाने भी बनाएं जा चुके है, इसमें होली की रौनक देखने के लिए मिली। यही वजह है कि होली की पार्टियों में लोग बॉलीवुड गानों पर जमकर डांस करते हैं। ऐसे में यदि आप होली के अवसर पर बॉलीवुड गानों की अपनी प्ले लिस्ट तैयार करना चाहते हैं तो उसमें इन गानों को शामिल भी कर सकते है।
बलम पिचकारी (Balam Pichkari): 'बलम पिचकारी' वर्ष 2013 में आई मूवी 'ये जवानी है दीवानी' का है। इस गाने में रणवीर और दीपिका की जोड़ी को बहुत पसंद किया गया था और यही वजह है कि आज भी यह सॉन्ग होली की पार्टियों में सबसे अधिक बजाया जाता है।
होरी खेले रघुवीरा (Holi Khele Raghuveera): मूवी 'बागबान' का यह गाना 'होरी खेले रघुवीरा' होली पार्टियों में लोगों को थिरकने पर मजबूर कर डालता है। इस गाने में अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी की जबरदस्त केमेस्ट्री ने फैंस का दिल भी जीतती हुई नजर आई।
लहू मुंह लग गया (Lahu Muh Lag Gaya): अगर आप होली के अवसर पर अपने पार्टनर के साथ किसी रोमांटिक और सेंसुअस गाने पर परफॉर्म करना चाहते हैं 'लहू मुंह लग गया' गाना आपके लिए बेस्ट ऑप्शन है। यह गाना मूवी 'गोलियों की रासलीला राम-लीला' का है।
डू मी ए फेवर लेट्स प्ले होली (Do Me A Favour Lets Play Holi): साल 2005 में रिलीज हुई मूवी 'वक्त' के इस गाने में अक्षय कुमार और प्रियंका चोपड़ा के रोमांटिक अंदाज से दर्शकों का दिल जीत लिया था। आज भी होली के मौके पर इस गाने को खूब बजाया जा रहा है।
अंग से अंग लगाना (Ang Se Ang Lagana): मूवी 'डर' का यह गाना 'अंग से अंग लगाना' होली का बेस्ट सॉन्ग है। आप इस गाने पर आज भी लोगों के पैर थिरकने के लिए मजबूर हो जाते है। आप 'अंग से अंग लगाना' गाने को अपनी प्ले लिस्ट में शामिल भी कर पाएंगे।
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रंगों के त्योहार होली की धूम पूरे देश में देखने के लिए मिलने लगी है। हर तरफ होली को लेकर लोगों में बहुत उत्साह दिखाई दे रहा है। होली का पर्व भाईचारे का त्योहार है, इसमें लोग आपसी वैर भुलकर एक-दूसरे को प्यार से रंग लगाते हैं। लेकिन होली का यह त्योहार बॉलीवुड गानों के बिना कभी पूरी नहीं होती। मूवी इंडस्ट्री में इस त्योहार को लेकर कई सुपरहिट गाने भी बनाएं जा चुके है, इसमें होली की रौनक देखने के लिए मिली। यही वजह है कि होली की पार्टियों में लोग बॉलीवुड गानों पर जमकर डांस करते हैं। ऐसे में यदि आप होली के अवसर पर बॉलीवुड गानों की अपनी प्ले लिस्ट तैयार करना चाहते हैं तो उसमें इन गानों को शामिल भी कर सकते है। बलम पिचकारी : 'बलम पिचकारी' वर्ष दो हज़ार तेरह में आई मूवी 'ये जवानी है दीवानी' का है। इस गाने में रणवीर और दीपिका की जोड़ी को बहुत पसंद किया गया था और यही वजह है कि आज भी यह सॉन्ग होली की पार्टियों में सबसे अधिक बजाया जाता है। होरी खेले रघुवीरा : मूवी 'बागबान' का यह गाना 'होरी खेले रघुवीरा' होली पार्टियों में लोगों को थिरकने पर मजबूर कर डालता है। इस गाने में अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी की जबरदस्त केमेस्ट्री ने फैंस का दिल भी जीतती हुई नजर आई। लहू मुंह लग गया : अगर आप होली के अवसर पर अपने पार्टनर के साथ किसी रोमांटिक और सेंसुअस गाने पर परफॉर्म करना चाहते हैं 'लहू मुंह लग गया' गाना आपके लिए बेस्ट ऑप्शन है। यह गाना मूवी 'गोलियों की रासलीला राम-लीला' का है। डू मी ए फेवर लेट्स प्ले होली : साल दो हज़ार पाँच में रिलीज हुई मूवी 'वक्त' के इस गाने में अक्षय कुमार और प्रियंका चोपड़ा के रोमांटिक अंदाज से दर्शकों का दिल जीत लिया था। आज भी होली के मौके पर इस गाने को खूब बजाया जा रहा है। अंग से अंग लगाना : मूवी 'डर' का यह गाना 'अंग से अंग लगाना' होली का बेस्ट सॉन्ग है। आप इस गाने पर आज भी लोगों के पैर थिरकने के लिए मजबूर हो जाते है। आप 'अंग से अंग लगाना' गाने को अपनी प्ले लिस्ट में शामिल भी कर पाएंगे।
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1. 'जय जवान, जय किसान' का नारा किसने दिया ?
2. संविधान सभा का स्थाई अध्यक्ष कौन था ?
3. संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे ?
4. विश्व 'रेडक्रास दिवस किस तारीख को मनाया जाता है?
5. 'सूर्योदय का देश के नाम से कौनसा देश प्रसिद्ध है?
6. अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस किस तिथि को मनाया जाता है?
7. क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत में सबसे छोटा राज्य कौन-सा है?
8. ओणम किस राज्य का प्रसिद्ध त्योहार है ?
9. दिल्ली भारत की राजधानी कब बनी ?
10. सबसे चमकीला ग्रह कौनसा है ?
11. भारत का राष्ट्रीय पशु कौनसा है ?
12. भारत का राष्ट्रीय पक्षी कौनसा है ?
13. भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव कौनसा है ?
14. भारत का राष्ट्रीय फल कौनसा है ?
15. भारत का राष्ट्रीय फूल कौनसा है ?
16. भारत का राष्ट्रीय पेड़ कौनसा है ?
17. भारत का राष्ट्रीय खेल कौनसा है ?
18. भारत के राष्ट्रीय झंडे की लम्बाई और चौड़ाई में अनुपात कितना होता है ?
19. भारत का राष्ट्रगान किसने लिखा ?
20. भारत का राष्ट्रगीत कौनसा है ?
इंकलाब जिंदाबाद' का नारा किसने दिया ?
भारत का पहला गवर्नर जनरल कौन था?
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एक. 'जय जवान, जय किसान' का नारा किसने दिया ? दो. संविधान सभा का स्थाई अध्यक्ष कौन था ? तीन. संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष कौन थे ? चार. विश्व 'रेडक्रास दिवस किस तारीख को मनाया जाता है? पाँच. 'सूर्योदय का देश के नाम से कौनसा देश प्रसिद्ध है? छः. अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस किस तिथि को मनाया जाता है? सात. क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत में सबसे छोटा राज्य कौन-सा है? आठ. ओणम किस राज्य का प्रसिद्ध त्योहार है ? नौ. दिल्ली भारत की राजधानी कब बनी ? दस. सबसे चमकीला ग्रह कौनसा है ? ग्यारह. भारत का राष्ट्रीय पशु कौनसा है ? बारह. भारत का राष्ट्रीय पक्षी कौनसा है ? तेरह. भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव कौनसा है ? चौदह. भारत का राष्ट्रीय फल कौनसा है ? पंद्रह. भारत का राष्ट्रीय फूल कौनसा है ? सोलह. भारत का राष्ट्रीय पेड़ कौनसा है ? सत्रह. भारत का राष्ट्रीय खेल कौनसा है ? अट्ठारह. भारत के राष्ट्रीय झंडे की लम्बाई और चौड़ाई में अनुपात कितना होता है ? उन्नीस. भारत का राष्ट्रगान किसने लिखा ? बीस. भारत का राष्ट्रगीत कौनसा है ? इंकलाब जिंदाबाद' का नारा किसने दिया ? भारत का पहला गवर्नर जनरल कौन था?
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काशी शिव जी की नगरी है। कार्तिक पूर्णिमा के दीपोत्सव में देवता भी सहभागी होते है। इसीलिए यह देव दीपावली के रूप में प्रतिष्ठित है। योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से अयोध्या में त्रेता युग के दीपोत्सव की झलक दिखाई दी थी,उसी प्रकार देव दीपावली भी दिव्य और भव्य बन गई। गंगा जी के किनारे अनेक घाट अद्भुत प्रकाश से दैदीप्यमान हो उठे। सब तरफ शम्भू शम्भू नमामि शम्भू का उद्घोष होने लगा।
देव दीपावली का यह दृश्य विलक्षण था। नरेंद्र मोदी ने प्रथम दीप प्रज्ज्वलित कर आयोजन का शुभारम्भ किया। इसके साथ ही काशी के आदिकेशव से अस्सी तक सभी घाट क्षण भर में ही असंख्य दीयों की रोशनी से जगमगा उठे।
प्रधानमंत्री जी कार्तिक पूर्णिमा एवं देव दीपावली और गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व की बधाई दी। हर हर महादेव के उद्घोष से संबोधन प्रारम्भ किया। कहा कि सौ साल पहले माता अन्नपूर्णा की चोरी हुई मूर्ति वापस आ रही है। हमारे देवी देवताओं की प्राचीन मूर्तियां हमारी विरासत हैं। काशी की विरासत अब लौट रही है।
माँ अन्नपूर्णा की कृपा से किसानों को बिचैलियों व उनका शोषण करने वालों से मुक्ति मिल रही है। रेहड़ी पटरी वालों को भी बैंक सहायता प्रदान कर रहे हैं। देश लोकल के लिए वोकल भी हो रहा है। वोकल फॉर लोकल जीवन का हिस्सा बनना चाहिए। सुधारों की सार्थकता सामने आने लगती है,तो विरोध शान्त हो जाता है। गंगा जी काशी विश्वनाथ मन्दिर धाम के निकट आ गई है। काशी का गौरव पुनर्जीवित हो रहा है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नेतृत्व में एक भारत, श्रेष्ठ भारत का निर्माण हो रहा है। अयोध्या में पांच शताब्दी का सपना साकार हुआ। काशी के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को बनाए रखते हुए इसे वैश्विक मंच पर स्थापित किया है।
छह वर्षों में मां गंगा को निर्मल एवं अविरल बनाया गया है। अब गंगा जल से आचमन किया जा सकता है। प्रधानमंत्री के प्रयासों से काशी विश्वनाथ व मां गंगा को जोड़ने का कार्य श्री काशी विश्वनाथ मन्दिर धाम के माध्यम से हजारों साल बाद हो रहा है। प्रयागराज कुम्भ दो सौ देशों के राजदूतों को आमंत्रित कर दुनिया के वैश्विक मंच पर कुम्भ को स्थापित किया गया।
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काशी शिव जी की नगरी है। कार्तिक पूर्णिमा के दीपोत्सव में देवता भी सहभागी होते है। इसीलिए यह देव दीपावली के रूप में प्रतिष्ठित है। योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से अयोध्या में त्रेता युग के दीपोत्सव की झलक दिखाई दी थी,उसी प्रकार देव दीपावली भी दिव्य और भव्य बन गई। गंगा जी के किनारे अनेक घाट अद्भुत प्रकाश से दैदीप्यमान हो उठे। सब तरफ शम्भू शम्भू नमामि शम्भू का उद्घोष होने लगा। देव दीपावली का यह दृश्य विलक्षण था। नरेंद्र मोदी ने प्रथम दीप प्रज्ज्वलित कर आयोजन का शुभारम्भ किया। इसके साथ ही काशी के आदिकेशव से अस्सी तक सभी घाट क्षण भर में ही असंख्य दीयों की रोशनी से जगमगा उठे। प्रधानमंत्री जी कार्तिक पूर्णिमा एवं देव दीपावली और गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व की बधाई दी। हर हर महादेव के उद्घोष से संबोधन प्रारम्भ किया। कहा कि सौ साल पहले माता अन्नपूर्णा की चोरी हुई मूर्ति वापस आ रही है। हमारे देवी देवताओं की प्राचीन मूर्तियां हमारी विरासत हैं। काशी की विरासत अब लौट रही है। माँ अन्नपूर्णा की कृपा से किसानों को बिचैलियों व उनका शोषण करने वालों से मुक्ति मिल रही है। रेहड़ी पटरी वालों को भी बैंक सहायता प्रदान कर रहे हैं। देश लोकल के लिए वोकल भी हो रहा है। वोकल फॉर लोकल जीवन का हिस्सा बनना चाहिए। सुधारों की सार्थकता सामने आने लगती है,तो विरोध शान्त हो जाता है। गंगा जी काशी विश्वनाथ मन्दिर धाम के निकट आ गई है। काशी का गौरव पुनर्जीवित हो रहा है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री ने नेतृत्व में एक भारत, श्रेष्ठ भारत का निर्माण हो रहा है। अयोध्या में पांच शताब्दी का सपना साकार हुआ। काशी के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को बनाए रखते हुए इसे वैश्विक मंच पर स्थापित किया है। छह वर्षों में मां गंगा को निर्मल एवं अविरल बनाया गया है। अब गंगा जल से आचमन किया जा सकता है। प्रधानमंत्री के प्रयासों से काशी विश्वनाथ व मां गंगा को जोड़ने का कार्य श्री काशी विश्वनाथ मन्दिर धाम के माध्यम से हजारों साल बाद हो रहा है। प्रयागराज कुम्भ दो सौ देशों के राजदूतों को आमंत्रित कर दुनिया के वैश्विक मंच पर कुम्भ को स्थापित किया गया।
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अमृतसर रूरल पुलिस के अंतर्गत गांव इनायतपुरा में सुबह दो समुदायों में झगड़ा हो गया। झगड़े के दौरान फायरिंग भी हुई। इसमें दो लोगों को गोली लगने से मौत हो गई है और तीन घायलों को गुरु नानक देव अस्पताल में दाखिल करवाया गया। पुलिस ने दो आरोपियों गांव इनायतपुरा निवासी भिल्ला और जिंदा के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।
पूरा घटनाक्रम सोमवार को छोटे एक्सीडेंट के साथ शुरू हुआ। गांव इनायतपुरा में आरोपियों के ट्रैक्टर और गुर्जर समुदाय के रेहड़े के बीच टक्कर हो गई। इसके बाद दो गुटों में झगड़ा शुरू हो गया। इसे लोगों ने शांत करवा दिया। मंगलवार सुबह गुर्जर समुदाय की भैंसें आरोपियों के खेतों में घुस गईं। इसके बाद दोनों समुदायों के बीच फिर से कहासुनी हुई। झगड़ा इतना अधिक बढ़ गया कि आरोपी भिल्ला और जिंदा ने फायरिंग कर दी। फायरिंग के दौरान गुर्जर समुदाय के दो सुरमूदीप और अली को गोलियां लग गईं।
घटना के बाद घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। सुरमूदीप की मौके पर मौत हो गई और अली को अस्पताल ले जाया गया और इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। तीन घायलों का इलाज गुरु नानक देव अस्पताल में चल रहा है।
SSP रूरल दीपक हिलोरी ने बताया कि दो गुटों में झगड़े के दौरान फायरिंग हुई। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। गोलियां चलाने वालों की पहचान कर ली गई है और जल्द आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया जाएगा। SHO मजीठा हर्षनदीप सिंह ने बताया कि गुर्जर समुदाय के दो व्यक्तियों की मौत हुई है। मौके पर मौजूद लोगों के बयान लिए जा रहे हैं। युवकों की पहचान भिल्ला व जिंदा के रूप में कर ली गई है। बयान दर्ज करने के प्रोसेस के बाद सभी के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।
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अमृतसर रूरल पुलिस के अंतर्गत गांव इनायतपुरा में सुबह दो समुदायों में झगड़ा हो गया। झगड़े के दौरान फायरिंग भी हुई। इसमें दो लोगों को गोली लगने से मौत हो गई है और तीन घायलों को गुरु नानक देव अस्पताल में दाखिल करवाया गया। पुलिस ने दो आरोपियों गांव इनायतपुरा निवासी भिल्ला और जिंदा के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। पूरा घटनाक्रम सोमवार को छोटे एक्सीडेंट के साथ शुरू हुआ। गांव इनायतपुरा में आरोपियों के ट्रैक्टर और गुर्जर समुदाय के रेहड़े के बीच टक्कर हो गई। इसके बाद दो गुटों में झगड़ा शुरू हो गया। इसे लोगों ने शांत करवा दिया। मंगलवार सुबह गुर्जर समुदाय की भैंसें आरोपियों के खेतों में घुस गईं। इसके बाद दोनों समुदायों के बीच फिर से कहासुनी हुई। झगड़ा इतना अधिक बढ़ गया कि आरोपी भिल्ला और जिंदा ने फायरिंग कर दी। फायरिंग के दौरान गुर्जर समुदाय के दो सुरमूदीप और अली को गोलियां लग गईं। घटना के बाद घायलों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। सुरमूदीप की मौके पर मौत हो गई और अली को अस्पताल ले जाया गया और इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। तीन घायलों का इलाज गुरु नानक देव अस्पताल में चल रहा है। SSP रूरल दीपक हिलोरी ने बताया कि दो गुटों में झगड़े के दौरान फायरिंग हुई। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। गोलियां चलाने वालों की पहचान कर ली गई है और जल्द आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया जाएगा। SHO मजीठा हर्षनदीप सिंह ने बताया कि गुर्जर समुदाय के दो व्यक्तियों की मौत हुई है। मौके पर मौजूद लोगों के बयान लिए जा रहे हैं। युवकों की पहचान भिल्ला व जिंदा के रूप में कर ली गई है। बयान दर्ज करने के प्रोसेस के बाद सभी के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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अंटार्टिका महाद्वीप पर पिछले 3 महीनों में 30 हजार से ज्यादा भूकंप आ चुके हैं। इसका खुलासा चिली की यूनिवर्सिटी के भूगर्भ वैज्ञानिकों ने किया है। यूनिवर्सिटी के नेशनल सीस्मोलॉजिकल सेंटर में स्टडी कर रहे वैज्ञानिकों के मुताबिक, अंटार्कटिका महाद्वीप के ब्रैन्सफील्ड स्ट्रेट में आए भूकंप की तीव्रता 6 थी।
ब्रैन्सफील्ड स्ट्रेट अंटार्कटिक महाद्वीप और दक्षिणी शेटलैंड आइलैंड्स के बीच मौजूद है. इस खाड़ी की चौड़ाई लगभग 96 किलोमीटर है। ब्रैन्सफील्ड स्ट्रेट के पास कई माइक्रोप्लेट्स और बड़ी टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में मिलती हैं। इनमें टकराव और घर्षण के कारण ही पिछले तीन महीने में अंटार्कटिका में भूकंप आ रहे हैं।
ब्रैन्सफील्ड स्ट्रेट हर साल 15 सेंटीमीटर यानी 6 इंच तक बड़ा हो जाता है। इस वजह से ब्रैन्सफील्ड स्ट्रेट के नीचे की माइक्रोप्लेट्स और टेक्टोनिक प्लेट्स में काफी ज्यादा घर्षण होता है और भूकंप आते हैं।
चिली की यूनिवर्सिटी के नेशनल सीस्मोलॉजिकल सेंटर के डायरेक्टर सर्जियो बैरिनटोस के मुताबिक, अंटार्कटिका महाद्वीप की ब्रैन्सफील्ड स्ट्रेट पहले से लगभग 20 गुना तक बड़ी हो चुकी है। इस वजह से अंटार्कटिका और शेटलैंड आइलैंड्स के बीच तेजी से दूरी बढ़ रही है. ।
ग्लोबल वार्मिंग की वजह से अंटार्कटिका महाद्वीप का ये इलाका तेजी से गर्म इलाके के रूप में बदल रहा है। इसलिए वैज्ञानिकों की नजर इस जगह पर लगातार बनी हुई है। यहां की बर्फ और ग्लेशियर ग्लोबल वार्मिंग के कारण पिघलकर रहे हैं।
एल्गी यानी काई तब पैदा होती है जब उस जगह का तापमान 0 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होता है। अंटार्कटिका की इस घटना पर नजर रखने के लिए यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने पिछले 2 साल में यहां की कई तस्वीरें ली हैं। जिनमें दिख रहा है कि अंटर्कटिका के इस हिस्से में काई पनप गई है। अंटार्कटिका महाद्वीप पर 1679 अलग-अलग जगहों पर वैज्ञानिकों को हरे रंग की बर्फ के सबूत मिले हैं। ऐसे में वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग भी अंटार्किटिका पर बार-बार आ रहे भूकंपों का कारण हो सकता है।
अंटार्टिका महाद्वीप पर पिछले 3 महीनों में 30 हजार से ज्यादा भूकंप आ चुके हैं। इसका खुलासा चिली की यूनिवर्सिटी के भूगर्भ वैज्ञानिकों ने किया है। यूनिवर्सिटी के नेशनल सीस्मोलॉजिकल सेंटर में स्टडी कर रहे वैज्ञानिकों के मुताबिक, अंटार्कटिका महाद्वीप के ब्रैन्सफील्ड स्ट्रेट में आए भूकंप की तीव्रता 6 थी।
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अंटार्टिका महाद्वीप पर पिछले तीन महीनों में तीस हजार से ज्यादा भूकंप आ चुके हैं। इसका खुलासा चिली की यूनिवर्सिटी के भूगर्भ वैज्ञानिकों ने किया है। यूनिवर्सिटी के नेशनल सीस्मोलॉजिकल सेंटर में स्टडी कर रहे वैज्ञानिकों के मुताबिक, अंटार्कटिका महाद्वीप के ब्रैन्सफील्ड स्ट्रेट में आए भूकंप की तीव्रता छः थी। ब्रैन्सफील्ड स्ट्रेट अंटार्कटिक महाद्वीप और दक्षिणी शेटलैंड आइलैंड्स के बीच मौजूद है. इस खाड़ी की चौड़ाई लगभग छियानवे किलोग्राममीटर है। ब्रैन्सफील्ड स्ट्रेट के पास कई माइक्रोप्लेट्स और बड़ी टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में मिलती हैं। इनमें टकराव और घर्षण के कारण ही पिछले तीन महीने में अंटार्कटिका में भूकंप आ रहे हैं। ब्रैन्सफील्ड स्ट्रेट हर साल पंद्रह सेंटीमीटर यानी छः इंच तक बड़ा हो जाता है। इस वजह से ब्रैन्सफील्ड स्ट्रेट के नीचे की माइक्रोप्लेट्स और टेक्टोनिक प्लेट्स में काफी ज्यादा घर्षण होता है और भूकंप आते हैं। चिली की यूनिवर्सिटी के नेशनल सीस्मोलॉजिकल सेंटर के डायरेक्टर सर्जियो बैरिनटोस के मुताबिक, अंटार्कटिका महाद्वीप की ब्रैन्सफील्ड स्ट्रेट पहले से लगभग बीस गुना तक बड़ी हो चुकी है। इस वजह से अंटार्कटिका और शेटलैंड आइलैंड्स के बीच तेजी से दूरी बढ़ रही है. । ग्लोबल वार्मिंग की वजह से अंटार्कटिका महाद्वीप का ये इलाका तेजी से गर्म इलाके के रूप में बदल रहा है। इसलिए वैज्ञानिकों की नजर इस जगह पर लगातार बनी हुई है। यहां की बर्फ और ग्लेशियर ग्लोबल वार्मिंग के कारण पिघलकर रहे हैं। एल्गी यानी काई तब पैदा होती है जब उस जगह का तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होता है। अंटार्कटिका की इस घटना पर नजर रखने के लिए यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने पिछले दो साल में यहां की कई तस्वीरें ली हैं। जिनमें दिख रहा है कि अंटर्कटिका के इस हिस्से में काई पनप गई है। अंटार्कटिका महाद्वीप पर एक हज़ार छः सौ उन्यासी अलग-अलग जगहों पर वैज्ञानिकों को हरे रंग की बर्फ के सबूत मिले हैं। ऐसे में वैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग भी अंटार्किटिका पर बार-बार आ रहे भूकंपों का कारण हो सकता है। अंटार्टिका महाद्वीप पर पिछले तीन महीनों में तीस हजार से ज्यादा भूकंप आ चुके हैं। इसका खुलासा चिली की यूनिवर्सिटी के भूगर्भ वैज्ञानिकों ने किया है। यूनिवर्सिटी के नेशनल सीस्मोलॉजिकल सेंटर में स्टडी कर रहे वैज्ञानिकों के मुताबिक, अंटार्कटिका महाद्वीप के ब्रैन्सफील्ड स्ट्रेट में आए भूकंप की तीव्रता छः थी।
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बस्तर। अवैध गांजा के तस्करी पर बस्तर पुलिस ने आज बड़ी कार्यवाही की है. जानकारी के मुताबिक पुलिस को मुखबिर के जरिए लगातार सूचना मिल रही थी, कि इस रास्ते से गांजा की तस्करी की जा रही है. जिस पर पुलिस ने टीम गठित कर नाकेबंदी किया।
नाकेबंदी के दौरान वाहनों की जांच पड़ताल की गई. चेकिंग के दौरान पुलिस ने छत्तीसगढ-उडीसा सीमा पर कार से 60 किलो अवैध गांजा बरामद किया है. जिसकी अनुमानित कीमत 3 लाख बताई जा रही है. साथ ही 2 तस्करों को गिरफ्तार किया है. दोनों से पूछताछ जारी है. बता दें कि सीएम भूपेश बघेल के निर्देश के बाद पुलिस लगातार अवैध तस्करों के खिलाफ कर रही है.
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बस्तर। अवैध गांजा के तस्करी पर बस्तर पुलिस ने आज बड़ी कार्यवाही की है. जानकारी के मुताबिक पुलिस को मुखबिर के जरिए लगातार सूचना मिल रही थी, कि इस रास्ते से गांजा की तस्करी की जा रही है. जिस पर पुलिस ने टीम गठित कर नाकेबंदी किया। नाकेबंदी के दौरान वाहनों की जांच पड़ताल की गई. चेकिंग के दौरान पुलिस ने छत्तीसगढ-उडीसा सीमा पर कार से साठ किलो अवैध गांजा बरामद किया है. जिसकी अनुमानित कीमत तीन लाख बताई जा रही है. साथ ही दो तस्करों को गिरफ्तार किया है. दोनों से पूछताछ जारी है. बता दें कि सीएम भूपेश बघेल के निर्देश के बाद पुलिस लगातार अवैध तस्करों के खिलाफ कर रही है.
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हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नालागढ़ में ITC डोन बॉस्को टैक सोसाइटी की ओर से 18 मार्च को निशुल्क रोजगार मेला लगाया जा रहा है। सोसायटी सेंटर के हेड लालचंद ठाकुर ने बताया कि संस्था की ओर से निशुल्क रोजगार मेला लगाया जा रहा है, जो 18 मार्च को यूको बैंक के नजदीक होटल हैरिसन में लगाया जाएगा।
लाल चंद ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि रोजगार मेले में कई बड़ी-बड़ी कंपनियां पहुंचेंगी, जिसमें माइक्रोटर्नर्स, फ्रेसिनियस कॉबी, पी एंड जी, इनोवा कैप्टैब, एडमेड फार्मा, मैकलोएड फार्मा, सन फार्मास्यूटिकल, सोडेक्सो इंडिया सर्विस प्राइवेट, इंदौरमा, समर्थ लाइफ साइंस, स्टील बर्ड, समेत कई कंपनियां शामिला हैं।
उन्होंने कहा कि रोजगार मेले में 200 से ज्यादा पद भरे जाएंगे। इन पदों के लिए पद अनुसार आवश्यक शैक्षणिक योग्यता 8वीं,10वीं, 12वीं, बी फार्मा, डी फार्मा, ITI है। इच्छुक उम्मीदवारों को अपने दस्तावेज लेकर सुबह करीब 10 बजे आना होगा।
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हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नालागढ़ में ITC डोन बॉस्को टैक सोसाइटी की ओर से अट्ठारह मार्च को निशुल्क रोजगार मेला लगाया जा रहा है। सोसायटी सेंटर के हेड लालचंद ठाकुर ने बताया कि संस्था की ओर से निशुल्क रोजगार मेला लगाया जा रहा है, जो अट्ठारह मार्च को यूको बैंक के नजदीक होटल हैरिसन में लगाया जाएगा। लाल चंद ठाकुर ने जानकारी देते हुए बताया कि रोजगार मेले में कई बड़ी-बड़ी कंपनियां पहुंचेंगी, जिसमें माइक्रोटर्नर्स, फ्रेसिनियस कॉबी, पी एंड जी, इनोवा कैप्टैब, एडमेड फार्मा, मैकलोएड फार्मा, सन फार्मास्यूटिकल, सोडेक्सो इंडिया सर्विस प्राइवेट, इंदौरमा, समर्थ लाइफ साइंस, स्टील बर्ड, समेत कई कंपनियां शामिला हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार मेले में दो सौ से ज्यादा पद भरे जाएंगे। इन पदों के लिए पद अनुसार आवश्यक शैक्षणिक योग्यता आठवीं,दसवीं, बारहवीं, बी फार्मा, डी फार्मा, ITI है। इच्छुक उम्मीदवारों को अपने दस्तावेज लेकर सुबह करीब दस बजे आना होगा। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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राम रमापति जय जय जय,
वन वन भटके वह,
मर्यादा की सीख सिखाने,
त्याग भावना हमें सिखाने ,
यहीं पे पूरे करने काम,
आए मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम।
अयोध्या में आए श्री राम,
नहीं वहां पर अब कोई वाम,
सब वहां हर्षित हैं इस पल,
दशरथ के मन में है हलचल,
आए फिर भरत शत्रुघ्न भी,
लक्ष्मण ने भी आँखें खोली,
तीन रानियां सखियों जैसी,
साथ साथ ममता में डोली,
मानव का उत्थान है करना,
इसीलिए आए श्री राम ।
अयोध्या में उत्सव का शोर,
शंखनाद है चारों ओर,
शांताकारम राम के दर्शन,
करने आए सभी चहु और,
यह हो सकता है कि रावण,
भी आया हो दर्शन करने,
यह भी सच है सभी देवता,
सोच रहे अब कष्ट मिटेंगे,
यद्यपि यह मेरा विचार है,
कि रावण भी विष्णु भक्त था,
किंतु नहीं यह वर्णन कहीं भी,
कि रावण आया अयोध्या कभी भी,
सभी यहां सुख सागर में है,
आज यहां आए हैं राम।
यह है श्री राघव की माया,
कि यह कोई समझ न पाया,
एक मास का एक दिवस था,
हर कोई मोह में विवश था,
यहां रवि भी रुका हुआ है,
यहां कवि भी झुका हुआ है,
यहां सभी नतमस्तक होंगे,
यह है अयोध्या नगरी शुभ धाम,
यहां पे जग के पालक राम।
यदि यह हमने ना समझा,
यदि यह हमने ना जाना,
कि यह परम सत्य ही था,
की रमापति ही सियापति था,
प्रत्यक्ष को प्रमाण नहीं है ,
स्वयं सिखाएंगे श्री राम।
वहां चले अब जहां सरस्वती,
गुरु ने शास्त्रों की शिक्षा दी,
गुरु आश्रम में ऐसे रहते,
सेवा भाव से कार्य हैं करते,
आए जब राम गुरुकुल में ,
पुनः ज्ञान अर्जित करने ,
वहां सभी सुख में डूबे,
चारों भाई थे चार अजूबे,
यह प्रभु की ही अद्भुत लीला,
वेदों के ज्ञाता हैं राम।
गुरु आश्रम से आ साकेत,
विश्वामित्र का पा आदेश,
सबको करने अभय प्रदान,
लखन को ले चलें कृपानिधान,
चले ताड़का वन की ओर,
दुष्ट राक्षसी रहती जिस छोर,
बाण एक ताड़का को मारा,
मारीच सुबाहु को संघारा,
मारीच को दिया क्यों जीवनदान,
यह भेद जाने बस कृपा निधान,
चले हैं हरने मही की त्रास ,
इसीलिए आए श्रीराम।
चले वहां अब जहां महालक्ष्मी,
जनक सुता रमा कल्याणी,
वहीं होगा अब मिलन हरि से,
जहां जनक राज्य हैं करते,
चले संग मुनिवर लक्ष्मण के,
गंगा तट पर पूजन करके ,
वहीं एक निर्जीव आश्रम में,
तारा अहिल्या को चरण रज से ,
गंगा जिनकी उत्पत्ति है ,
वो हैं पतित पावन श्री राम।
समय ने ऐसा खेल रचाया,
समय ने ऐसा मेल बनाया,
वहीं पे पहुंचे कृपानिधान,
जहां पे थी खुद गुण की खान,
वही पहुंची अब जनक सुता,
उपवन में राघव को देखा ,
अद्भुत सौंदर्य और अतुल पराक्रम का,
है यह अति पुरातन रिश्ता,
तीनों लोकों में दोनों की,
कोई कर सकता ना समता,
गई मांगने उनसे रघुवर,
जिसने तप से शिव को जीता,
जनकपुरी में शुभ समय है आया,
जनक राज ने प्रण सुनाया,
सब का अभिनंदन करके,
सीता को सखियों संग बुलाया,
किंतु शिव के महा धनुष को,
कोई राजा हिला न पाया,
विश्वामित्र ने देखा अवसर,
तब उन्होंने राम को पठाया,
राम ने जाना शुभ समय है आया,
सभी बड़ों को शीश नवाया,
धनुष के दो टुकड़े कर डाले,
हमें मिले फिर सीताराम।
केकई ने षड्यंत्र रचाया,
नियति ने फिर खेल रचाया,
राजतिलक का समय जब आया,
माता का फिर मन भरमाया,
दशरथ से मांगे वर दो,
भरत को राज्य , वन राम को दो,
माता की आज्ञा सिर धरके,
पिता वचनों की गरिमा रखने,
साथ सिया और लक्ष्मण को ले,
चले गए फिर वन को राम।
वन में उनको मिले सभी ,
ऋषि तपस्वी और ज्ञानी,
वन में था ज्ञान अथाह,
वन में था आनंद समस्त,
वन में थे राक्षस कई ,
वन को कलुषित करते सभी ,
रावण के यह बंधु सभी,
करते थे दुष्कर्म कई ,
लिया राम ने फिर प्रण एक ,
निश्चर हीन धरा को यह,
रक्षा इस धरती की करने ,
आए दोनों लक्ष्मण राम।
वन में जा पहुंचा अभिमानी,
मारीच उसका मामा अति ज्ञानी ,
अभिमानी के हाथों उसकी,
मृत्यु हो जाती निष्फल ,
चुना मृत्यु का मार्ग सफल,
बन सुंदर एक मृग सुनहरी,
चला भरमाने मायापति राम।
सीता को पाकर अकेली,
छद्मवेश साधू का धर के,
ले गया वह सीता को हर के,
यहां वहां सीता ने पुकारा,
हार गया जटायु बेचारा,
वन वन भटके दोनों भाई ,
पर सीता की सुध ना पाई,
यह सब तो है प्रभु का खेल,
दीन बने खुद दीनानाथ राम।
मिलना था अब हनुमान से,
बुद्धि ज्ञान और बलवान से,
वन में उनको भक्त मिला,
वानर एक अनूप मिला,
रुद्र अवतार राम के साथी,
वानर राज सुग्रीव के मंत्री,
वानर जाति का किया कल्याण,
सब के रक्षक हैं श्रीराम।
वानर राज ने किया संकल्प,
माता की खोज हो तुरंत ,
चारों दिशाओं में जाओ ,
सीता मां की सुध लाओ ,
चले पवनसुत दक्षिण की ओर,
मन में राम नाम की डोर,
विघ्न हरण करते हनुमान ,
उनके मन में हैं श्रीराम।
चले वहां अब जहां थी लंका,
वहां पर अद्भुत दृश्य यह देखा,
एक महल में शंख और तुलसी,
देख उठी यह मन में शंका,
वर्णन कर आने का कारण,
विभीषण से जाना सब भेदन,
सीता मां से चले फिर मिलने,
राम प्रभु के कष्ट मिटाने,
माता को दी मुद्रिका निशानी,
प्रभु की सुनाकर अमर कहानी,
यह तब जाना सीता माॅ ने,
रामदूत आया संकट हरने,
चले लांघ समुद्र महाकाय ,
सीता मां की सुध ले आए,
रावण की लंका नगरी को,
अग्नि को समर्पित कर आए,
रावण का अहंकार जलाकर,
बोले क्षमा करेंगे राम।
हनुमत पहुंचे राम के पास,
सीता मां का हाल सुनाकर,
बोले ना टूटे मां की आस ,
दक्षिण तट पर पहुंच के बोले,
अब जाना है सागर पार,
राम नाम की महिमा गहरी,
वो करते हैं भव से पार,
राम नाम लिखकर जो पत्थर,
सागर में तर जाते हैं,
उसी राम के आगे देखो,
शिव भी शीश झुकाते हैं,
करके पूजा महादेव की,
लिंग पे जल चढ़ाते हैं,
राम भी उनकी सेवा करते,
जो रामेश्वरम कहलाते हैं,
सेतु बांध समुद्र के ऊपर,
लंका ध्वस्त करेंगे राम।
रावण एक महा अभिमानी,
विभीषण की एक न मानी,
मंदोदरी उसकी महारानी,
उसकी कोई बात न मानी,
सीता ने उसको समझाया,
क्यों मरने की तूने ठानी,
विभीषण को दे देश निकाला,
लंका का विनाश लिख डाला,
चले विभीषण राम के पास,
मिटाने कई जन्मों की त्रास,
लंकेश्वर कहकर पुकारा,
शरणागत के रक्षक राम।
शांताकारम राम ने सोचा,
जो विनाश युद्ध से होता,
सृजन में लगते लाखों कल्प,
राम ने चाहा अंगद अब जाए,
रावण को यह कहकर आए,
माता को आदर् से लेकर,
राम प्रभु की शरण में जाए,
अंगद ने जा राजमहल में,
पर उस अभिमानी रावण की,
राज्य सभा को समझ ना आया,
तब राम नाम लेकर अंगद ने,
वहीं पर अपना पैर जमाया,
राम ने उस अभिमानी रावण को,
राम नाम का खेल दिखाया,
हिला ना पाए कोई उसको,
जिसके तन मन में हो राम।
अब निश्चित है युद्ध का होना,
रावण के अपनों का खोना,
सब ने अपने प्राण गवाएं,
रावण अब इस बात को समझा,
कि संकट में प्राण फसाए,
युद्ध भूमि में किसको भेजें,
जाकर कुंभकरण को जगाएं,
राम लखन के सन्मुख भेजें,
वानर सेना को मरवायें,
कुंभकरण ना समझ सका की,
नारायण को कैसे हराऐं,
यह था कुंभकरण का भाग्य,
मुक्ति के दाता हैं श्री राम।
वानर सेना में उत्साह का शोर,
राक्षस सेना चिंतित सब ओर,
युद्ध हुआ हर दिन घनघोर,
पर बचा न कोई रावण की ओर,
एक से एक महा भट्ट आते,
आकर अपने प्राण गवाते,
मेघनाथ रावण की आस,
लक्ष्मण लक्ष्य लंका के सुत का,
गड़ शक्ति पराक्रम बल कौशल का,
यह क्या विधि ने खेल रचाया,
लक्ष्मण को युद्ध में हराया,
शक्ति मेघनाथ ने छोड़ी,
राम लखन की जोड़ी तोड़ी,
मेघनाथ के शंखनाद का कैसे उत्तर देंगे राम।
अब वानर सेना है भयभीत,
वानर दल की टूटी पीठ,
लक्ष्मण राम प्रभु की प्रीत,
लूट के ले गया इंद्रजीत,
वानर दल श्री राम को चाहे,
उनकी चिंता देखी न जाए,
अब उनको संजीवनी बचाए,
तब हनुमंत सामने आए,
वानर सब उनको समझाएं,
की सूर्य उदय से पहले ले आएं,
वरना लक्ष्मण को जीवित ना पाएं,
शांत समुद्र में जैसे तूफान,
ऐसे विचलित हैं श्री राम।
चले पवनसुत उत्तर की ओर,
लक्ष्मण के प्राणों की टूटे ना डोर,
संग ले राम नाम की आस,
हनुमत पहुंचे पर्वत के पास,
लक्ष्मण के प्राणों को लेकर,
हनुमत पहुंचे जहां थे राम।
यह तो है राम नाम की चाहत,
जो लक्ष्मण हो सके न आहत,
फिर गरज कर लक्ष्मण ने कहा,
तेरी मृत्यु अब निश्चित है अहा,
कहां है वह पाखंडी राक्षस,
युद्ध के सभी नियमों का भक्षक,
यहां पर तो रघुकुल का चिन्ह है,
कि अब मेघनाद का मस्तक,
उसके धड़ से कब होता भिन्न है,
लक्ष्मण ने अब प्रण है ठाना,
विजयी हो कर आऊंगा राम।
युद्ध वहां है जहां है माता,
इंद्रजीत को समझ न आता,
जो सत्य का साथ है देता,
वहीं पे लक्ष्मण ने ललकारा,
युद्ध करने को उसे पुकारा,
सभी शास्त्र विफल कर डाले,
मेघनाद ने देखे तारे,
यह समझा रावण का सुत अब,
यह कैसे पितु को समझाए,
राक्षस जाति को कैसे बचाए,
सुबह का सूरज यह लेकर आया,
अब युद्ध करेंगे रावण राम।
वहां से शंखनाद यह बोला,
रावण का सिंहासन डोला,
यह अब अंतिम युद्ध है करना,
वानर सेना करें यह गणना,
यह है अब राम की इच्छा,
रावण को वानर दें शिक्षा,
युद्ध हुआ वह बहुत भयंकर,
देख रहे ब्रह्मा और शंकर,
यह अब युद्ध में निर्णय होगा,
की अंत में विजयी कौन बनेगा,
यहां पर सब हैं आस लगाए,
कि जल्दी सीता अब आए,
राम मारेंगे अब रावण को,
सीता मां के दर्शन हो सबको,
चलेंगे तीखे तीर रघुवर के,
काटने को शीश रावण के,
जों जों शीश दशानन के कटते,
वर के कारण वापस आ जाते,
तब रघुवर विस्मय में आए,
अब तो कोई उपाय बताए,
तब विभीषण सामने आए,
अमृत का रहस्य बतालाए,
अग्निबाण नाभि में मारो,
दशानन को ब्रह्मास्त्र से संघारो,
यही वो पल है जिसके कारण,
धरती पर आए श्री राम।
यह तो सब ने देखा उस क्षण,
कि रावण का हो रहा है मर्दन,
यह तो बस रघुवर में जाना,
कि रावण था बड़ा सयाना,
बिना राम के मुक्ति पाना,
असंभव था उसने यह जाना,
शुभम अथवा सत्यम का मिलना,
नहीं था संभव बिना सियाराम।
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राम रमापति जय जय जय, वन वन भटके वह, मर्यादा की सीख सिखाने, त्याग भावना हमें सिखाने , यहीं पे पूरे करने काम, आए मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम। अयोध्या में आए श्री राम, नहीं वहां पर अब कोई वाम, सब वहां हर्षित हैं इस पल, दशरथ के मन में है हलचल, आए फिर भरत शत्रुघ्न भी, लक्ष्मण ने भी आँखें खोली, तीन रानियां सखियों जैसी, साथ साथ ममता में डोली, मानव का उत्थान है करना, इसीलिए आए श्री राम । अयोध्या में उत्सव का शोर, शंखनाद है चारों ओर, शांताकारम राम के दर्शन, करने आए सभी चहु और, यह हो सकता है कि रावण, भी आया हो दर्शन करने, यह भी सच है सभी देवता, सोच रहे अब कष्ट मिटेंगे, यद्यपि यह मेरा विचार है, कि रावण भी विष्णु भक्त था, किंतु नहीं यह वर्णन कहीं भी, कि रावण आया अयोध्या कभी भी, सभी यहां सुख सागर में है, आज यहां आए हैं राम। यह है श्री राघव की माया, कि यह कोई समझ न पाया, एक मास का एक दिवस था, हर कोई मोह में विवश था, यहां रवि भी रुका हुआ है, यहां कवि भी झुका हुआ है, यहां सभी नतमस्तक होंगे, यह है अयोध्या नगरी शुभ धाम, यहां पे जग के पालक राम। यदि यह हमने ना समझा, यदि यह हमने ना जाना, कि यह परम सत्य ही था, की रमापति ही सियापति था, प्रत्यक्ष को प्रमाण नहीं है , स्वयं सिखाएंगे श्री राम। वहां चले अब जहां सरस्वती, गुरु ने शास्त्रों की शिक्षा दी, गुरु आश्रम में ऐसे रहते, सेवा भाव से कार्य हैं करते, आए जब राम गुरुकुल में , पुनः ज्ञान अर्जित करने , वहां सभी सुख में डूबे, चारों भाई थे चार अजूबे, यह प्रभु की ही अद्भुत लीला, वेदों के ज्ञाता हैं राम। गुरु आश्रम से आ साकेत, विश्वामित्र का पा आदेश, सबको करने अभय प्रदान, लखन को ले चलें कृपानिधान, चले ताड़का वन की ओर, दुष्ट राक्षसी रहती जिस छोर, बाण एक ताड़का को मारा, मारीच सुबाहु को संघारा, मारीच को दिया क्यों जीवनदान, यह भेद जाने बस कृपा निधान, चले हैं हरने मही की त्रास , इसीलिए आए श्रीराम। चले वहां अब जहां महालक्ष्मी, जनक सुता रमा कल्याणी, वहीं होगा अब मिलन हरि से, जहां जनक राज्य हैं करते, चले संग मुनिवर लक्ष्मण के, गंगा तट पर पूजन करके , वहीं एक निर्जीव आश्रम में, तारा अहिल्या को चरण रज से , गंगा जिनकी उत्पत्ति है , वो हैं पतित पावन श्री राम। समय ने ऐसा खेल रचाया, समय ने ऐसा मेल बनाया, वहीं पे पहुंचे कृपानिधान, जहां पे थी खुद गुण की खान, वही पहुंची अब जनक सुता, उपवन में राघव को देखा , अद्भुत सौंदर्य और अतुल पराक्रम का, है यह अति पुरातन रिश्ता, तीनों लोकों में दोनों की, कोई कर सकता ना समता, गई मांगने उनसे रघुवर, जिसने तप से शिव को जीता, जनकपुरी में शुभ समय है आया, जनक राज ने प्रण सुनाया, सब का अभिनंदन करके, सीता को सखियों संग बुलाया, किंतु शिव के महा धनुष को, कोई राजा हिला न पाया, विश्वामित्र ने देखा अवसर, तब उन्होंने राम को पठाया, राम ने जाना शुभ समय है आया, सभी बड़ों को शीश नवाया, धनुष के दो टुकड़े कर डाले, हमें मिले फिर सीताराम। केकई ने षड्यंत्र रचाया, नियति ने फिर खेल रचाया, राजतिलक का समय जब आया, माता का फिर मन भरमाया, दशरथ से मांगे वर दो, भरत को राज्य , वन राम को दो, माता की आज्ञा सिर धरके, पिता वचनों की गरिमा रखने, साथ सिया और लक्ष्मण को ले, चले गए फिर वन को राम। वन में उनको मिले सभी , ऋषि तपस्वी और ज्ञानी, वन में था ज्ञान अथाह, वन में था आनंद समस्त, वन में थे राक्षस कई , वन को कलुषित करते सभी , रावण के यह बंधु सभी, करते थे दुष्कर्म कई , लिया राम ने फिर प्रण एक , निश्चर हीन धरा को यह, रक्षा इस धरती की करने , आए दोनों लक्ष्मण राम। वन में जा पहुंचा अभिमानी, मारीच उसका मामा अति ज्ञानी , अभिमानी के हाथों उसकी, मृत्यु हो जाती निष्फल , चुना मृत्यु का मार्ग सफल, बन सुंदर एक मृग सुनहरी, चला भरमाने मायापति राम। सीता को पाकर अकेली, छद्मवेश साधू का धर के, ले गया वह सीता को हर के, यहां वहां सीता ने पुकारा, हार गया जटायु बेचारा, वन वन भटके दोनों भाई , पर सीता की सुध ना पाई, यह सब तो है प्रभु का खेल, दीन बने खुद दीनानाथ राम। मिलना था अब हनुमान से, बुद्धि ज्ञान और बलवान से, वन में उनको भक्त मिला, वानर एक अनूप मिला, रुद्र अवतार राम के साथी, वानर राज सुग्रीव के मंत्री, वानर जाति का किया कल्याण, सब के रक्षक हैं श्रीराम। वानर राज ने किया संकल्प, माता की खोज हो तुरंत , चारों दिशाओं में जाओ , सीता मां की सुध लाओ , चले पवनसुत दक्षिण की ओर, मन में राम नाम की डोर, विघ्न हरण करते हनुमान , उनके मन में हैं श्रीराम। चले वहां अब जहां थी लंका, वहां पर अद्भुत दृश्य यह देखा, एक महल में शंख और तुलसी, देख उठी यह मन में शंका, वर्णन कर आने का कारण, विभीषण से जाना सब भेदन, सीता मां से चले फिर मिलने, राम प्रभु के कष्ट मिटाने, माता को दी मुद्रिका निशानी, प्रभु की सुनाकर अमर कहानी, यह तब जाना सीता माॅ ने, रामदूत आया संकट हरने, चले लांघ समुद्र महाकाय , सीता मां की सुध ले आए, रावण की लंका नगरी को, अग्नि को समर्पित कर आए, रावण का अहंकार जलाकर, बोले क्षमा करेंगे राम। हनुमत पहुंचे राम के पास, सीता मां का हाल सुनाकर, बोले ना टूटे मां की आस , दक्षिण तट पर पहुंच के बोले, अब जाना है सागर पार, राम नाम की महिमा गहरी, वो करते हैं भव से पार, राम नाम लिखकर जो पत्थर, सागर में तर जाते हैं, उसी राम के आगे देखो, शिव भी शीश झुकाते हैं, करके पूजा महादेव की, लिंग पे जल चढ़ाते हैं, राम भी उनकी सेवा करते, जो रामेश्वरम कहलाते हैं, सेतु बांध समुद्र के ऊपर, लंका ध्वस्त करेंगे राम। रावण एक महा अभिमानी, विभीषण की एक न मानी, मंदोदरी उसकी महारानी, उसकी कोई बात न मानी, सीता ने उसको समझाया, क्यों मरने की तूने ठानी, विभीषण को दे देश निकाला, लंका का विनाश लिख डाला, चले विभीषण राम के पास, मिटाने कई जन्मों की त्रास, लंकेश्वर कहकर पुकारा, शरणागत के रक्षक राम। शांताकारम राम ने सोचा, जो विनाश युद्ध से होता, सृजन में लगते लाखों कल्प, राम ने चाहा अंगद अब जाए, रावण को यह कहकर आए, माता को आदर् से लेकर, राम प्रभु की शरण में जाए, अंगद ने जा राजमहल में, पर उस अभिमानी रावण की, राज्य सभा को समझ ना आया, तब राम नाम लेकर अंगद ने, वहीं पर अपना पैर जमाया, राम ने उस अभिमानी रावण को, राम नाम का खेल दिखाया, हिला ना पाए कोई उसको, जिसके तन मन में हो राम। अब निश्चित है युद्ध का होना, रावण के अपनों का खोना, सब ने अपने प्राण गवाएं, रावण अब इस बात को समझा, कि संकट में प्राण फसाए, युद्ध भूमि में किसको भेजें, जाकर कुंभकरण को जगाएं, राम लखन के सन्मुख भेजें, वानर सेना को मरवायें, कुंभकरण ना समझ सका की, नारायण को कैसे हराऐं, यह था कुंभकरण का भाग्य, मुक्ति के दाता हैं श्री राम। वानर सेना में उत्साह का शोर, राक्षस सेना चिंतित सब ओर, युद्ध हुआ हर दिन घनघोर, पर बचा न कोई रावण की ओर, एक से एक महा भट्ट आते, आकर अपने प्राण गवाते, मेघनाथ रावण की आस, लक्ष्मण लक्ष्य लंका के सुत का, गड़ शक्ति पराक्रम बल कौशल का, यह क्या विधि ने खेल रचाया, लक्ष्मण को युद्ध में हराया, शक्ति मेघनाथ ने छोड़ी, राम लखन की जोड़ी तोड़ी, मेघनाथ के शंखनाद का कैसे उत्तर देंगे राम। अब वानर सेना है भयभीत, वानर दल की टूटी पीठ, लक्ष्मण राम प्रभु की प्रीत, लूट के ले गया इंद्रजीत, वानर दल श्री राम को चाहे, उनकी चिंता देखी न जाए, अब उनको संजीवनी बचाए, तब हनुमंत सामने आए, वानर सब उनको समझाएं, की सूर्य उदय से पहले ले आएं, वरना लक्ष्मण को जीवित ना पाएं, शांत समुद्र में जैसे तूफान, ऐसे विचलित हैं श्री राम। चले पवनसुत उत्तर की ओर, लक्ष्मण के प्राणों की टूटे ना डोर, संग ले राम नाम की आस, हनुमत पहुंचे पर्वत के पास, लक्ष्मण के प्राणों को लेकर, हनुमत पहुंचे जहां थे राम। यह तो है राम नाम की चाहत, जो लक्ष्मण हो सके न आहत, फिर गरज कर लक्ष्मण ने कहा, तेरी मृत्यु अब निश्चित है अहा, कहां है वह पाखंडी राक्षस, युद्ध के सभी नियमों का भक्षक, यहां पर तो रघुकुल का चिन्ह है, कि अब मेघनाद का मस्तक, उसके धड़ से कब होता भिन्न है, लक्ष्मण ने अब प्रण है ठाना, विजयी हो कर आऊंगा राम। युद्ध वहां है जहां है माता, इंद्रजीत को समझ न आता, जो सत्य का साथ है देता, वहीं पे लक्ष्मण ने ललकारा, युद्ध करने को उसे पुकारा, सभी शास्त्र विफल कर डाले, मेघनाद ने देखे तारे, यह समझा रावण का सुत अब, यह कैसे पितु को समझाए, राक्षस जाति को कैसे बचाए, सुबह का सूरज यह लेकर आया, अब युद्ध करेंगे रावण राम। वहां से शंखनाद यह बोला, रावण का सिंहासन डोला, यह अब अंतिम युद्ध है करना, वानर सेना करें यह गणना, यह है अब राम की इच्छा, रावण को वानर दें शिक्षा, युद्ध हुआ वह बहुत भयंकर, देख रहे ब्रह्मा और शंकर, यह अब युद्ध में निर्णय होगा, की अंत में विजयी कौन बनेगा, यहां पर सब हैं आस लगाए, कि जल्दी सीता अब आए, राम मारेंगे अब रावण को, सीता मां के दर्शन हो सबको, चलेंगे तीखे तीर रघुवर के, काटने को शीश रावण के, जों जों शीश दशानन के कटते, वर के कारण वापस आ जाते, तब रघुवर विस्मय में आए, अब तो कोई उपाय बताए, तब विभीषण सामने आए, अमृत का रहस्य बतालाए, अग्निबाण नाभि में मारो, दशानन को ब्रह्मास्त्र से संघारो, यही वो पल है जिसके कारण, धरती पर आए श्री राम। यह तो सब ने देखा उस क्षण, कि रावण का हो रहा है मर्दन, यह तो बस रघुवर में जाना, कि रावण था बड़ा सयाना, बिना राम के मुक्ति पाना, असंभव था उसने यह जाना, शुभम अथवा सत्यम का मिलना, नहीं था संभव बिना सियाराम।
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कोरोना के कहर से अमेरिका बेहाल है और अब ख़बर आ रही है कि अमेरिकी पॉप सिंगर मैडोना के शरीर में कोरोना एंटीबॉडीज़ मौजूद हैं। खुद सिंगर ने इस बात का खुलासा इंस्टाग्राम के ज़रिए किया है।
इस ख़बर के सामने आने के बाद अब ज्यादा से ज्यादा लोग ये जानने के लिए उत्सुक हैं कि ये एंटीबॉडीज़ हैं क्या? सेंटर फोर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन (सीडीसी), यूएस की माने तो एंटीबॉडी टेस्ट्स का इस्तेमाल यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि कोई व्यक्ति कोविड-19 के संपर्क में है या नहीं। हालांकि ये इम्युनिटी के तौर पर काम करता है या नहीं इसकी कोई पुख्ता रिपोर्ट नहीं है।
ये अमेरिकन पॉप सिंगर सोशल मीडिया पर भी खूब एक्टिव रहती हैं और लगातार कोरोनावायरस को लेकर अपनी तस्वीरें भी शेयर करती रहती हैं। हाल ही में इन्होने एक कोलाज शेयर किया था और कैप्शन में लिखा था कि क्रिएटिव लोग क्वारंटाइन में कभी भी बोर नहीं होते। इस समय का फायदा उठाइए।
यूएसए में कोरोनावायरस से हाहाकार मचा हुआ है। यहां पर 1 लाख 13 हज़ार के करीब लोग कोरोनावायरस से पॉजीटिव पाए गए हैं जिनमें से 65 हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं पूरी दुनिया की बात करें तो स्पेन में 25,100, इटली में 28, 236, यूके में 27,510, जर्मनी में 6,735, फ्रांस में 24, 594, रूस में 1,222, टर्की में 3,258, ईरान में 6,091 लोगों की मौत कोरोनावायरस से हो चुकी है।और पढ़ेंः अमेरिका में लॉकडाऊन के दौरान आमिर खान की 3 Idiots का बजा डंका, हॉलीवुड फिल्मों को पछाड़ा..
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कोरोना के कहर से अमेरिका बेहाल है और अब ख़बर आ रही है कि अमेरिकी पॉप सिंगर मैडोना के शरीर में कोरोना एंटीबॉडीज़ मौजूद हैं। खुद सिंगर ने इस बात का खुलासा इंस्टाग्राम के ज़रिए किया है। इस ख़बर के सामने आने के बाद अब ज्यादा से ज्यादा लोग ये जानने के लिए उत्सुक हैं कि ये एंटीबॉडीज़ हैं क्या? सेंटर फोर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेन्शन , यूएस की माने तो एंटीबॉडी टेस्ट्स का इस्तेमाल यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि कोई व्यक्ति कोविड-उन्नीस के संपर्क में है या नहीं। हालांकि ये इम्युनिटी के तौर पर काम करता है या नहीं इसकी कोई पुख्ता रिपोर्ट नहीं है। ये अमेरिकन पॉप सिंगर सोशल मीडिया पर भी खूब एक्टिव रहती हैं और लगातार कोरोनावायरस को लेकर अपनी तस्वीरें भी शेयर करती रहती हैं। हाल ही में इन्होने एक कोलाज शेयर किया था और कैप्शन में लिखा था कि क्रिएटिव लोग क्वारंटाइन में कभी भी बोर नहीं होते। इस समय का फायदा उठाइए। यूएसए में कोरोनावायरस से हाहाकार मचा हुआ है। यहां पर एक लाख तेरह हज़ार के करीब लोग कोरोनावायरस से पॉजीटिव पाए गए हैं जिनमें से पैंसठ हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं पूरी दुनिया की बात करें तो स्पेन में पच्चीस,एक सौ, इटली में अट्ठाईस, दो सौ छत्तीस, यूके में सत्ताईस,पाँच सौ दस, जर्मनी में छः,सात सौ पैंतीस, फ्रांस में चौबीस, पाँच सौ चौरानवे, रूस में एक,दो सौ बाईस, टर्की में तीन,दो सौ अट्ठावन, ईरान में छः,इक्यानवे लोगों की मौत कोरोनावायरस से हो चुकी है।और पढ़ेंः अमेरिका में लॉकडाऊन के दौरान आमिर खान की तीन Idiots का बजा डंका, हॉलीवुड फिल्मों को पछाड़ा..
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क्योंकि वह तो करीब-करीब मेरी भी और आप सबकी पूरी तौरसे मातृभाषा है। इसलिए उसमें में जो कुछ कहूंगा यह आप सही सही समझ सकते हैं । यह ( डा० सुशीला नैयर) मेरे भाषणको अंग्रेजीमें कर तो लेती है, क्योंकि वह खासा अंग्रेजी जानती है, फिर भी उसमें कमी रह जाती है । इसलिए आज मैंने थोड़ा समय निकालकर अंग्रेजीमें लिख रखा है। यहां में उसीको ध्यान में रखते हुए बात कहूंगा। परंतु अखबारों वही छपेगा जो मैंने लिख रखा है।
तो शुरूमें मैं उस खतकी बात बता देना चाहता हूं, जिसमें मुझे प्रार्थना चालू रखनेके बारे में कोसा गया है और लिखा है कि झूठा है, ठीक तरहसे जवाब भी नहीं देता । ऐसा जो लिखते हैं वे बालक हैं । उम्र में भले ही सयाने हो गए हों, पर बुद्धिमें बालक ही रहे हैं ।
उनको मेरी यह बात चुभती है कि मैं यही क्यों कहता हूं कि 'मरो', 'मरो' । ऐसा क्यों नहीं कहता कि पहले 'मारो- काटो और फिर मरो' । वे चाहते हैं कि मैं तलवारका बदला तलवार और आगका बदला आग से लेनेको कहूं । लेकिन मैं अपने सारे जीवनके विरुद्ध नहीं जा सकता और मानव-कानूनकी जगह पाशविक कानूनकी हिमायत करनेका अपराधी नहीं बन सकता । जब कोई मुझे मारने आवेगा तब मैं यह कहते कहते मरूंगा कि ईश्वर तेरा भला करे । इसके बदले उनका आग्रह है कि मैं पहले मारनेको कहूं और बादमें मरना पड़े तो मरनेको कहूं । अगर मैं ऐसा कहनेको तैयार नहीं हूं तो वे मुझे कहते हैं कि 'तुम अपनी बहादुरी अपनी जेबमें रखो !' और यहांसे जंगलमें भाग जाओ । पर वे ऐसा क्यों कहते हैं ? इसलिए कि मुसलमान सबको मारते हैं । तो क्या इसी बात पर हिंदू भी मारनेको उतारू हो जाएं और फिर दोनों दीवाने बन जायं ? क्या मुसलमान बिगड़ जायं तो हम भी बिगड़ें ? कहा जाता है कि सब मुसलमान खराब हैं, गंदे (दिलके ) हैं । और यह भी बताते हैं कि सब हिंदू फरिश्ते हैं। लेकिन मैं इस बातको नहीं मान सकता ।
एक मुसलमान महिलाका खत मेरे पास आया है। उसमें लिखा है कि जब आप अबिल्ला' की ईश्वरकी स्तुति करते हैं तो उसे 'आज
उर्दू नज्ममें क्यों नहीं करते ? मेरा उत्तर यह है कि जब मैं नज्म पढ़ने लगूंगा तब उसपर खफा होकर मुसलमान पूछेंगे कि अरबीका तरजुमा करनेवाले तुम कौन होते हो ? और वे पीटने श्रायंगे तब मैं क्या कहूंगा ?
सही बात यह है कि जो चीज जिस भाषामें कही गई और जिस पर तप किया गया उसी भाषामें उसका माधुर्य होता है । बिशपोंने अंग्रेजी - बाइबिलकी भाषाको बहुत परिश्रमसे मधुर बनाया है और लेटिनसे भी अंग्रेजीमें वह किस तरह मीठी हो गई है। अंग्रेजी सीखना चाहनेवालेको बाइबिल तो सीखनी ही चाहिए । मैं अंग्रेजी भाषाका द्वेषी नहीं, उसका प्रशंसक हूं । पर गलत जगह जाकर वह गंदी हो जाती है । सो मैं 'ओज अबिल्ला' की भाषाका माधुर्य छोड़नेको तैयार नहीं; क्योंकि हमारे पास ऐसे कवि नहीं हैं जो वैसी ही मधुरतासे उसका ग्रनवाद कर सकें ।
आज मैं अहिंसाके शाश्वत नियमकी बात नहीं कहूंगा । हालां कि उसपर मेरा दृढ़ विश्वास है । यदि सारा हिंदुस्तान उसे सोच-समझकर अपना ले तो वह बेशक सारी दुनियाका नेता बन जायगा । यहां तो मैं केवल यह कहना चाहता हूं कि कोई आदमी विवेकके अलावा और किसी चीजके आगे न झुके ।
लेकिन आजकल तो हमने विवेक बिलकुल ही भुला दिया है । विवेक तभी कायम रह सकता है जब हममें बहादुरी हो । आज जो चल रहा है वह बहादुरी नहीं है । इन्सानियत भी नहीं है । हम बिलकुल जानवर - जैसे बन गये हैं। हमारे अखबार रोज-रोज हमें सुनाते हैं कि यहां हिंदु बरबादी कर डाली और वहां मुसलमानोंने क्या हिंदू और क्या मुसलमान, दोनों ही बुरा काम करते हैं । यह मैं माननेको तैयार हूं कि मुसलमान ज्यादा बरबादी कर रहे हैं; पर जब दोनों ही बुराई करते हैं तब किसने ज्यादा बुराई की और किसने कम, यह जानना बेकार है। दोनों गलतीपर हैं ।
खबर आई है कि हमारे नजदीक ही गुड़गांवमें कई गांव जल गए हैं । किसने किसके मकान जलाए हैं, इसका पता चलानेकी कोशिश में मैं हूं; पर सही पता लगना कठिन है। लोग कहेंगे कि जब इतने करीबमें
यह सब हो रहा है तब यहां बैठा मैं लंबी-चौड़ी बातें कैसे सुना रहा हूं ? जब आप लोग यहां आ गए हैं और हमारी बदकिस्मतीसे गुड़गांवमें यह हो रहा है तब अपने मनकी बात मैं आपसे कहूंगा ही। और मेरा यही कहना है कि हमारे चारों ओर अंगार जलते रहें तो भी हमें तो शांत ही रहना है और चित्त स्थिर रखते हुए हमें भी इस अंगारमें जलना है। हम क्यों दहशतके मारे यह कहते फिरें कि दूसरी जूनको यह होनेवाला है, वह होनेवाला है ? जो बहादुर होंगे उनके लिए उस दिन कुछ भी होनेवाला नहीं है । यह यकीन रखिए । सबको एक बार मरना ही है । कोई अमर तो पैदा हुआ नहीं है । तो फिर हम यही निश्चय क्यों न कर लें कि हम बहादुरीसे मरेंगे और मरते दमतक अपनी ओरसे बुराई नहीं करेंगे ? जान-बूझकर किसीको मारेंगे नहीं । एक बार मनमें ऐसा निश्चय कर लेंगे तब आप स्थिरचित्त रहेंगे और किसीकी ओर नहीं ताकेंगे । जो डरा-धमकाकर पाकिस्तान लेना चाहेंगे उनसे कह देंगे कि इस तरह रत्तीभर भी पाकिस्तान मिलनेवाला नहीं है। आप इन्साफपर रहेंगे, हमारी बुद्धिको समझा देंगे, दुनियाको समझा देंगे तो आप पूरा का पूरा हिंदुस्तान ले जा सकते हैं । जबर्दस्तीसे तो हम पाकिस्तान कभी नहीं देंगे ।
और अंग्रेजोंसे क्या कहूं ! अगर वे मिशन-योजनासे हटते हैं तो वे दगाबाज हैं । हम दगाबाज न बनेंगे और न बनने देंगे। हमारा और उनका संबंध १६ मईकी घोषणासे है । उसीके आधारपर विधानपरिषद् बनी है। उसके मुताबिक हम चलेंगे। इसके अलावा हम कुछ नहीं जानते । दूसरा कुछ तभी हो सकता है जब हम खामोश हो जायं, लड़ाई-दंगा न रहे और हम शांत होकर बैठें । पर हम दबेंगे नहीं ।
इन चार दिनोंमें इतना पाठ आप सीख लें तो सब कुछ मिलनेवाला है । भले ही वे सारे हथियार जो बटोरे हैं जमा लें । जब हम इतनी बड़ी सल्तनतके मुकाबले में डट गए और उनके इतने सारे हथियारोंसे नहीं डरे, उसके झंडेके सामने सिर नहीं झुकाया तो अब हम क्यों लड़खड़ाएं ? जब कि आजादी मिलने ही वाली है, हम यह सोचनेकी गलती न करें कि अगर हम न झुके -- चाहे यह भुकना पाशविक शक्तिके आगे ही क्यों
न हो तो आजादी हमारे हाथोंसे निकल जायगी । अगर हम ऐसा सोचेंगे तो हमारा नाश निश्चित है ।
मैं लंदन से आनेवाले तारोंमें विश्वास नहीं करता । मैं यह आशा नहीं छोड़ंगा कि ब्रिटेन गत वर्षके १६ मईके केबिनट मिशनके वक्तव्यकी इबारत और भावनासे बाल-बराबर भी नहीं हटेगा, जबतक कि भारतकी पार्टियां अपने आप कोई फर्क करनेको रजामंद न हो जाएं । इस कामके लिए दोनोंको एक जगह मिलना होगा और मानने लायक हल निकालना पड़ेगा ।
यहांके अंग्रेज अफसरोंके लिए कहा जाता है कि वे बदमाश हैं । इन दंगों में उनका हाथ है, वे ही हमें लड़ाते हैं। लेकिन जबतक यह गंभीर आरोप ठीक-ठीक साबित नहीं हो जाता तबतक हमें उनपर इल्जाम नहीं लगाना चाहिए । मैं तो कहूंगा कि अगर हम लड़ना नहीं चाहते तो लड़ाई कैसे होगी ? मैं अगर यहां बैठी हुई अपनी लड़कीसे लड़ना न चाहूं तो मुझे कौन लड़ा सकता है ?
और माउंटबेटन साहबका काम आसान नहीं है । वे बड़े सेनापति हैं, बहादुर हैं; पर अपनी उस बहादुरीको वे यहां नहीं बता सकते । यहांपर वे अपनी सेना लेकर नहीं आए हैं। यहां वे फौजी वर्दीमें नहीं आए हैं, सिविलियन बनकर आए हैं और उनका कहना है कि मैं अंग्रेजोंसे हिंदुस्तान छुड़वा देनेके लिए आया हूं । अब हमें देखना है कि वे किस तरह जाते हैं । माउंटबेटन साहबको अपने गवर्नर जनरलके पदको शोभित करना है । उन्हें अपनी सारी चतुराई और सच्ची राजनीतिज्ञता बतानी है। अगर वे जरा भी चूक जायंगे, जरा भी सुस्ती कर जायंगे तो ठीक न होगा । इसलिए हम और आप सब मिलकर प्रार्थना करें कि भगवान उनको सन्मति दे और इतनी बात वे जान लें कि सोलह मईकी बातसे बालभर भी फरक जबर्दस्तीसे वे नहीं कर सकते । अगर करते हैं तो वह दगा होगा और दगा किसीका सगा नहीं होता। दगेका अंत भलाईमें कभी या नहीं सकता।
आप लंदनकी ओर न देखें, न वाइसरायकी ओर देखें । इसका मतलब यह नहीं कि इंग्लैंड में जितने अंग्रेज हैं, सब-के-सब बुरे हैं । उनमें बहुत से भले भी हैं। माउंटबेटन साहब भी भले हैं । पर वे सब
घरमें भले हैं । जब यहां आकर दखल देते हैं तो वे बुरे बन जाते हैं। अब वह पुरानी बात नहीं रही कि जब अंग्रेजोंकी हिफाजतका वादा जरूरी समझा जाता था। सिविल सर्विसमें जो अंग्रेज लोग हैं उन्हें अब अपने यहां नौकर रखने के लिए हम मजबूर नहीं हैं । अगर सिविलयन रहना चाहें तो रहें और अंग्रेज व्यापारी भी रहना चाहें तो वे भी रहें; लेकिन उनको बचाने के लिए यहां एक भी अंग्रेज सिपाही नहीं रह सकेगा । हिंदुस्तानियोंकी खिदमत और उनकी मुहब्बतके जरिए ही वे रह सकते हैं। अगर कोई पागलपनमें उन्हें नुकसान पहुंचाएं तो उसकी जिम्मेदारी हमपर नहीं होगी । अंग्रेजोंके हिंदुस्तान से पूरी तरहसे चले जाने में कुछ देर लग सकती है। उन्होंने इसके लिए १९४८ के जूनकी ३० तारीख़ कायम की है । उस दिनको आजसे पूरे बारह महीने बाकी रहे हैं । अगर वे इससे पहले जा सकें तो उन्हें जाना है । लेकिन उसके बाद तो वे एक दिन भी नहीं टिक सकते । यह तो प्रामिसरी नोट की - सी बात है। अगर प्रामिसरी नोटमें इतवारके दिन रुपया देनेका वचन दिया है तो उसे सोमवारपर नहीं टाला जा सकता । इसी तरह अंग्रेज भी ३० जूनके बाद यहां नहीं रह सकते । अंग्रेज-प्रजाने उन्हें जो आदेश दिया है उसका उन्हें पालन करना है । आखिर वाइसराय उसी अंग्रेज-प्रजाके नौकर हैं । इस दूसरी या तीसरी जुनको वह हमें बतायंगे कि वह क्या करना चाहते हैं और किस तरह यहांसे जायंगे । यह उनका कर्तव्य है और उसे पूरा करना उनका काम है। हमको अपना धर्म खुद देखना है ।
फिर मैं सोचता हूं, मैं कौन हूं ? मैं किसका नुमाइंदा हूं ? बरसों
बीते, मैं कांग्रेस से बाहर निकल आया हूं । चवन्नीका मेम्बर भी नहीं हूं । पर कांग्रेसका खादिम हूं। मैंने उसकी बरसोंतक सेवा की है और कर रहा हूं । इसी तरह मैं मुस्लिम लीगका भी खादिम हूं और राजका भी खादिम हूं । सबका खादिम हूं, पर नुमाइंदा किसीका नहीं हूं । हां, एकका मैं नुमाइंदा जरूर हूं । मैं कायदे आजमका नुमाइंदा हूं; क्योंकि उनके साथ मैंने शांति-पलपर दस्तखत किए हैं। हम दोनोंने मिलकर कहा है कि हिंसासे कोई राजनैतिक बात हम नहीं ले सकते । यह बहुत बड़ी बात है । उस अपीलपर दूसरे लोगोंकी सही भी लेनेकी बात थी, लेकिन जिन्ना साहबने कहा कि मुझे तो अकेले गांधीजीकी ही सही चाहिए । इस तरह मैं जिन्ना साह्बका नुमाइंदा बन गया । उनके अलावा मैं किसीका नुमाइंदा नहीं हूं ।
लेकिन मैंने अपीलपर हिंदूकी हैसियतसे दस्तखत नहीं किए, किंतु हिंदू मैं जन्मसे अवश्य हूं, कोई मुझे हिंदू मिटा नहीं सकता । मैं मुसलमान भी हूं, क्योंकि मैं अच्छा हिंदू हूं और इसी तरह पारसी और ईसाई भी हूं । सब धर्मोकी जड़ में एक ही ईश्वरका नाम है । सबके धर्मशास्त्र एक-सी बात कहते हैं ।
मैंने कुरान देखा है और जैसा कि उस बहनने लिखा था, मैं नहीं मानता कि कुरानमें काफिरोंको कत्ल करनेकी बात लिखी है । मैंने बादशाह खान और अब्दुस्समदखां साहबसे, जिन्होंने आज बढ़िया तरीके से आत पढ़ी है, पूछा तो वे भी नहीं कहते कि कुरानमें गैरमुस्लिमको कत्ल करनेके लिए लिखा है । विहारके मुसलमानों में से किसीने नहीं कहा कि क्योंकि अविश्वासी हैं, इसलिए हम आपको कल करेंगे और नोग्राखालीके मौलवियोंने भी ऐसा नहीं कहा; बल्कि उन्होंने राम धुनको ढोलकके साथ होने दिया । कुरानमें जो लिखा है उसका मतलब इतना ही है कि खुदा काफिरसे पूछेगा। खुदा तो सबसे पूछेगा । मुसलमान से भी पूछेगा । वह लफ्जको नहीं पूछेगा, कामोंको पूछेगा। बाकी जो गंदा देखना चाहें, हर जगह गंदा देख सकते हैं । ऐसी कोई चीज नहीं जिसमें श्रच्छा व बुरा न मिला हो । हमारी मनुस्मृतिमें भी लिखा है कि अछूतोंके कानमें सीसा डालो । पर मैं कहूंगा कि हिंदू धर्मशास्त्रोंकी यह
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क्योंकि वह तो करीब-करीब मेरी भी और आप सबकी पूरी तौरसे मातृभाषा है। इसलिए उसमें में जो कुछ कहूंगा यह आप सही सही समझ सकते हैं । यह मेरे भाषणको अंग्रेजीमें कर तो लेती है, क्योंकि वह खासा अंग्रेजी जानती है, फिर भी उसमें कमी रह जाती है । इसलिए आज मैंने थोड़ा समय निकालकर अंग्रेजीमें लिख रखा है। यहां में उसीको ध्यान में रखते हुए बात कहूंगा। परंतु अखबारों वही छपेगा जो मैंने लिख रखा है। तो शुरूमें मैं उस खतकी बात बता देना चाहता हूं, जिसमें मुझे प्रार्थना चालू रखनेके बारे में कोसा गया है और लिखा है कि झूठा है, ठीक तरहसे जवाब भी नहीं देता । ऐसा जो लिखते हैं वे बालक हैं । उम्र में भले ही सयाने हो गए हों, पर बुद्धिमें बालक ही रहे हैं । उनको मेरी यह बात चुभती है कि मैं यही क्यों कहता हूं कि 'मरो', 'मरो' । ऐसा क्यों नहीं कहता कि पहले 'मारो- काटो और फिर मरो' । वे चाहते हैं कि मैं तलवारका बदला तलवार और आगका बदला आग से लेनेको कहूं । लेकिन मैं अपने सारे जीवनके विरुद्ध नहीं जा सकता और मानव-कानूनकी जगह पाशविक कानूनकी हिमायत करनेका अपराधी नहीं बन सकता । जब कोई मुझे मारने आवेगा तब मैं यह कहते कहते मरूंगा कि ईश्वर तेरा भला करे । इसके बदले उनका आग्रह है कि मैं पहले मारनेको कहूं और बादमें मरना पड़े तो मरनेको कहूं । अगर मैं ऐसा कहनेको तैयार नहीं हूं तो वे मुझे कहते हैं कि 'तुम अपनी बहादुरी अपनी जेबमें रखो !' और यहांसे जंगलमें भाग जाओ । पर वे ऐसा क्यों कहते हैं ? इसलिए कि मुसलमान सबको मारते हैं । तो क्या इसी बात पर हिंदू भी मारनेको उतारू हो जाएं और फिर दोनों दीवाने बन जायं ? क्या मुसलमान बिगड़ जायं तो हम भी बिगड़ें ? कहा जाता है कि सब मुसलमान खराब हैं, गंदे हैं । और यह भी बताते हैं कि सब हिंदू फरिश्ते हैं। लेकिन मैं इस बातको नहीं मान सकता । एक मुसलमान महिलाका खत मेरे पास आया है। उसमें लिखा है कि जब आप अबिल्ला' की ईश्वरकी स्तुति करते हैं तो उसे 'आज उर्दू नज्ममें क्यों नहीं करते ? मेरा उत्तर यह है कि जब मैं नज्म पढ़ने लगूंगा तब उसपर खफा होकर मुसलमान पूछेंगे कि अरबीका तरजुमा करनेवाले तुम कौन होते हो ? और वे पीटने श्रायंगे तब मैं क्या कहूंगा ? सही बात यह है कि जो चीज जिस भाषामें कही गई और जिस पर तप किया गया उसी भाषामें उसका माधुर्य होता है । बिशपोंने अंग्रेजी - बाइबिलकी भाषाको बहुत परिश्रमसे मधुर बनाया है और लेटिनसे भी अंग्रेजीमें वह किस तरह मीठी हो गई है। अंग्रेजी सीखना चाहनेवालेको बाइबिल तो सीखनी ही चाहिए । मैं अंग्रेजी भाषाका द्वेषी नहीं, उसका प्रशंसक हूं । पर गलत जगह जाकर वह गंदी हो जाती है । सो मैं 'ओज अबिल्ला' की भाषाका माधुर्य छोड़नेको तैयार नहीं; क्योंकि हमारे पास ऐसे कवि नहीं हैं जो वैसी ही मधुरतासे उसका ग्रनवाद कर सकें । आज मैं अहिंसाके शाश्वत नियमकी बात नहीं कहूंगा । हालां कि उसपर मेरा दृढ़ विश्वास है । यदि सारा हिंदुस्तान उसे सोच-समझकर अपना ले तो वह बेशक सारी दुनियाका नेता बन जायगा । यहां तो मैं केवल यह कहना चाहता हूं कि कोई आदमी विवेकके अलावा और किसी चीजके आगे न झुके । लेकिन आजकल तो हमने विवेक बिलकुल ही भुला दिया है । विवेक तभी कायम रह सकता है जब हममें बहादुरी हो । आज जो चल रहा है वह बहादुरी नहीं है । इन्सानियत भी नहीं है । हम बिलकुल जानवर - जैसे बन गये हैं। हमारे अखबार रोज-रोज हमें सुनाते हैं कि यहां हिंदु बरबादी कर डाली और वहां मुसलमानोंने क्या हिंदू और क्या मुसलमान, दोनों ही बुरा काम करते हैं । यह मैं माननेको तैयार हूं कि मुसलमान ज्यादा बरबादी कर रहे हैं; पर जब दोनों ही बुराई करते हैं तब किसने ज्यादा बुराई की और किसने कम, यह जानना बेकार है। दोनों गलतीपर हैं । खबर आई है कि हमारे नजदीक ही गुड़गांवमें कई गांव जल गए हैं । किसने किसके मकान जलाए हैं, इसका पता चलानेकी कोशिश में मैं हूं; पर सही पता लगना कठिन है। लोग कहेंगे कि जब इतने करीबमें यह सब हो रहा है तब यहां बैठा मैं लंबी-चौड़ी बातें कैसे सुना रहा हूं ? जब आप लोग यहां आ गए हैं और हमारी बदकिस्मतीसे गुड़गांवमें यह हो रहा है तब अपने मनकी बात मैं आपसे कहूंगा ही। और मेरा यही कहना है कि हमारे चारों ओर अंगार जलते रहें तो भी हमें तो शांत ही रहना है और चित्त स्थिर रखते हुए हमें भी इस अंगारमें जलना है। हम क्यों दहशतके मारे यह कहते फिरें कि दूसरी जूनको यह होनेवाला है, वह होनेवाला है ? जो बहादुर होंगे उनके लिए उस दिन कुछ भी होनेवाला नहीं है । यह यकीन रखिए । सबको एक बार मरना ही है । कोई अमर तो पैदा हुआ नहीं है । तो फिर हम यही निश्चय क्यों न कर लें कि हम बहादुरीसे मरेंगे और मरते दमतक अपनी ओरसे बुराई नहीं करेंगे ? जान-बूझकर किसीको मारेंगे नहीं । एक बार मनमें ऐसा निश्चय कर लेंगे तब आप स्थिरचित्त रहेंगे और किसीकी ओर नहीं ताकेंगे । जो डरा-धमकाकर पाकिस्तान लेना चाहेंगे उनसे कह देंगे कि इस तरह रत्तीभर भी पाकिस्तान मिलनेवाला नहीं है। आप इन्साफपर रहेंगे, हमारी बुद्धिको समझा देंगे, दुनियाको समझा देंगे तो आप पूरा का पूरा हिंदुस्तान ले जा सकते हैं । जबर्दस्तीसे तो हम पाकिस्तान कभी नहीं देंगे । और अंग्रेजोंसे क्या कहूं ! अगर वे मिशन-योजनासे हटते हैं तो वे दगाबाज हैं । हम दगाबाज न बनेंगे और न बनने देंगे। हमारा और उनका संबंध सोलह मईकी घोषणासे है । उसीके आधारपर विधानपरिषद् बनी है। उसके मुताबिक हम चलेंगे। इसके अलावा हम कुछ नहीं जानते । दूसरा कुछ तभी हो सकता है जब हम खामोश हो जायं, लड़ाई-दंगा न रहे और हम शांत होकर बैठें । पर हम दबेंगे नहीं । इन चार दिनोंमें इतना पाठ आप सीख लें तो सब कुछ मिलनेवाला है । भले ही वे सारे हथियार जो बटोरे हैं जमा लें । जब हम इतनी बड़ी सल्तनतके मुकाबले में डट गए और उनके इतने सारे हथियारोंसे नहीं डरे, उसके झंडेके सामने सिर नहीं झुकाया तो अब हम क्यों लड़खड़ाएं ? जब कि आजादी मिलने ही वाली है, हम यह सोचनेकी गलती न करें कि अगर हम न झुके -- चाहे यह भुकना पाशविक शक्तिके आगे ही क्यों न हो तो आजादी हमारे हाथोंसे निकल जायगी । अगर हम ऐसा सोचेंगे तो हमारा नाश निश्चित है । मैं लंदन से आनेवाले तारोंमें विश्वास नहीं करता । मैं यह आशा नहीं छोड़ंगा कि ब्रिटेन गत वर्षके सोलह मईके केबिनट मिशनके वक्तव्यकी इबारत और भावनासे बाल-बराबर भी नहीं हटेगा, जबतक कि भारतकी पार्टियां अपने आप कोई फर्क करनेको रजामंद न हो जाएं । इस कामके लिए दोनोंको एक जगह मिलना होगा और मानने लायक हल निकालना पड़ेगा । यहांके अंग्रेज अफसरोंके लिए कहा जाता है कि वे बदमाश हैं । इन दंगों में उनका हाथ है, वे ही हमें लड़ाते हैं। लेकिन जबतक यह गंभीर आरोप ठीक-ठीक साबित नहीं हो जाता तबतक हमें उनपर इल्जाम नहीं लगाना चाहिए । मैं तो कहूंगा कि अगर हम लड़ना नहीं चाहते तो लड़ाई कैसे होगी ? मैं अगर यहां बैठी हुई अपनी लड़कीसे लड़ना न चाहूं तो मुझे कौन लड़ा सकता है ? और माउंटबेटन साहबका काम आसान नहीं है । वे बड़े सेनापति हैं, बहादुर हैं; पर अपनी उस बहादुरीको वे यहां नहीं बता सकते । यहांपर वे अपनी सेना लेकर नहीं आए हैं। यहां वे फौजी वर्दीमें नहीं आए हैं, सिविलियन बनकर आए हैं और उनका कहना है कि मैं अंग्रेजोंसे हिंदुस्तान छुड़वा देनेके लिए आया हूं । अब हमें देखना है कि वे किस तरह जाते हैं । माउंटबेटन साहबको अपने गवर्नर जनरलके पदको शोभित करना है । उन्हें अपनी सारी चतुराई और सच्ची राजनीतिज्ञता बतानी है। अगर वे जरा भी चूक जायंगे, जरा भी सुस्ती कर जायंगे तो ठीक न होगा । इसलिए हम और आप सब मिलकर प्रार्थना करें कि भगवान उनको सन्मति दे और इतनी बात वे जान लें कि सोलह मईकी बातसे बालभर भी फरक जबर्दस्तीसे वे नहीं कर सकते । अगर करते हैं तो वह दगा होगा और दगा किसीका सगा नहीं होता। दगेका अंत भलाईमें कभी या नहीं सकता। आप लंदनकी ओर न देखें, न वाइसरायकी ओर देखें । इसका मतलब यह नहीं कि इंग्लैंड में जितने अंग्रेज हैं, सब-के-सब बुरे हैं । उनमें बहुत से भले भी हैं। माउंटबेटन साहब भी भले हैं । पर वे सब घरमें भले हैं । जब यहां आकर दखल देते हैं तो वे बुरे बन जाते हैं। अब वह पुरानी बात नहीं रही कि जब अंग्रेजोंकी हिफाजतका वादा जरूरी समझा जाता था। सिविल सर्विसमें जो अंग्रेज लोग हैं उन्हें अब अपने यहां नौकर रखने के लिए हम मजबूर नहीं हैं । अगर सिविलयन रहना चाहें तो रहें और अंग्रेज व्यापारी भी रहना चाहें तो वे भी रहें; लेकिन उनको बचाने के लिए यहां एक भी अंग्रेज सिपाही नहीं रह सकेगा । हिंदुस्तानियोंकी खिदमत और उनकी मुहब्बतके जरिए ही वे रह सकते हैं। अगर कोई पागलपनमें उन्हें नुकसान पहुंचाएं तो उसकी जिम्मेदारी हमपर नहीं होगी । अंग्रेजोंके हिंदुस्तान से पूरी तरहसे चले जाने में कुछ देर लग सकती है। उन्होंने इसके लिए एक हज़ार नौ सौ अड़तालीस के जूनकी तीस तारीख़ कायम की है । उस दिनको आजसे पूरे बारह महीने बाकी रहे हैं । अगर वे इससे पहले जा सकें तो उन्हें जाना है । लेकिन उसके बाद तो वे एक दिन भी नहीं टिक सकते । यह तो प्रामिसरी नोट की - सी बात है। अगर प्रामिसरी नोटमें इतवारके दिन रुपया देनेका वचन दिया है तो उसे सोमवारपर नहीं टाला जा सकता । इसी तरह अंग्रेज भी तीस जूनके बाद यहां नहीं रह सकते । अंग्रेज-प्रजाने उन्हें जो आदेश दिया है उसका उन्हें पालन करना है । आखिर वाइसराय उसी अंग्रेज-प्रजाके नौकर हैं । इस दूसरी या तीसरी जुनको वह हमें बतायंगे कि वह क्या करना चाहते हैं और किस तरह यहांसे जायंगे । यह उनका कर्तव्य है और उसे पूरा करना उनका काम है। हमको अपना धर्म खुद देखना है । फिर मैं सोचता हूं, मैं कौन हूं ? मैं किसका नुमाइंदा हूं ? बरसों बीते, मैं कांग्रेस से बाहर निकल आया हूं । चवन्नीका मेम्बर भी नहीं हूं । पर कांग्रेसका खादिम हूं। मैंने उसकी बरसोंतक सेवा की है और कर रहा हूं । इसी तरह मैं मुस्लिम लीगका भी खादिम हूं और राजका भी खादिम हूं । सबका खादिम हूं, पर नुमाइंदा किसीका नहीं हूं । हां, एकका मैं नुमाइंदा जरूर हूं । मैं कायदे आजमका नुमाइंदा हूं; क्योंकि उनके साथ मैंने शांति-पलपर दस्तखत किए हैं। हम दोनोंने मिलकर कहा है कि हिंसासे कोई राजनैतिक बात हम नहीं ले सकते । यह बहुत बड़ी बात है । उस अपीलपर दूसरे लोगोंकी सही भी लेनेकी बात थी, लेकिन जिन्ना साहबने कहा कि मुझे तो अकेले गांधीजीकी ही सही चाहिए । इस तरह मैं जिन्ना साह्बका नुमाइंदा बन गया । उनके अलावा मैं किसीका नुमाइंदा नहीं हूं । लेकिन मैंने अपीलपर हिंदूकी हैसियतसे दस्तखत नहीं किए, किंतु हिंदू मैं जन्मसे अवश्य हूं, कोई मुझे हिंदू मिटा नहीं सकता । मैं मुसलमान भी हूं, क्योंकि मैं अच्छा हिंदू हूं और इसी तरह पारसी और ईसाई भी हूं । सब धर्मोकी जड़ में एक ही ईश्वरका नाम है । सबके धर्मशास्त्र एक-सी बात कहते हैं । मैंने कुरान देखा है और जैसा कि उस बहनने लिखा था, मैं नहीं मानता कि कुरानमें काफिरोंको कत्ल करनेकी बात लिखी है । मैंने बादशाह खान और अब्दुस्समदखां साहबसे, जिन्होंने आज बढ़िया तरीके से आत पढ़ी है, पूछा तो वे भी नहीं कहते कि कुरानमें गैरमुस्लिमको कत्ल करनेके लिए लिखा है । विहारके मुसलमानों में से किसीने नहीं कहा कि क्योंकि अविश्वासी हैं, इसलिए हम आपको कल करेंगे और नोग्राखालीके मौलवियोंने भी ऐसा नहीं कहा; बल्कि उन्होंने राम धुनको ढोलकके साथ होने दिया । कुरानमें जो लिखा है उसका मतलब इतना ही है कि खुदा काफिरसे पूछेगा। खुदा तो सबसे पूछेगा । मुसलमान से भी पूछेगा । वह लफ्जको नहीं पूछेगा, कामोंको पूछेगा। बाकी जो गंदा देखना चाहें, हर जगह गंदा देख सकते हैं । ऐसी कोई चीज नहीं जिसमें श्रच्छा व बुरा न मिला हो । हमारी मनुस्मृतिमें भी लिखा है कि अछूतोंके कानमें सीसा डालो । पर मैं कहूंगा कि हिंदू धर्मशास्त्रोंकी यह
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उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जेल में हुए गैंगवार में शूटर अंशु की गोली से मारे गए गैंगेस्टर मुकीम काला के परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। शनिवार को बेटे का शव लेने पहुची मुकीम की माँ ने कहा कि जेल में बाहर से एक चम्मच नही जा सकता तो पिस्टल कैसे पहुंचा।
जेल में हुए गैंगवार में मारे गए मुकीम और वारदात के बाद पुलिस की गोली से ढेर हुए अंशु दीक्षित के शवों का शनिवार को चित्रकूट में पोस्टमार्टम करवाया गया। दोपहर करीब 1 बजे मुकीम के मामा शुकका और माँ मीना उसका शव लेने शामली से चित्रकूट पहुँचे। मीना ने कहा कि पुलिस ने पूरी योजना बनाकर मुकीम की हत्या करवाई। वह करीब छह साल से जेल में था। उसे मारने के लिए ही चित्रकूट जेल लाया गया। मामा शुकका ने कहा कि वह इसकी जांच करवाने के लिए कोर्ट जाएंगे।
मुकीम की माँ मीना ने बताया कि उनका परिवार इस घटना से बेखबर था। परिवार के लोग ईद की खुशियां मना रहे थे। वह ईद की नमाज अदा कर रही थी तभी एक पुलिस वाले का फोन आया। उसने जेल में मुकीम के मौत की खबर दी। थोड़ी देर बाद पता चला कि उसकी हत्या कर दी गयी है।
क्या था मामला?
चित्रकूट जेल में शुक्रवार (14 मई) को कैदियों के बीच गोली चल गई। इसमें वेस्ट UP के गैंगस्टर अंशु दीक्षित ने मुख्तार अंसारी के खास गुर्गे मेराज और बदमाश मुकीम काला की गोली मारकर हत्या कर दी। मेराज बनारस जेल से भेजा गया था, जबकि मुकीम काला सहारनपुर जेल से लाया गया था। पुलिस ने अंशु दीक्षित को सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन वह फायरिंग करता रहा। बाद में पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अंशु भी मारा गया।
CM योगी आदित्यनाथ ने शूटआउट के मामले में DG जेल से 6 घंटे में रिपोर्ट तलब की। कमिश्नर डीके सिंह, DIG के सत्यनारायण और ADG जेल संजीव त्रिपाठी मामले की जांच की है। वहीं, देर शाम चित्रकूट के जेल अधीक्षक एसपी त्रिपाठी, जेलर महेंद्र पाल समेत पांच कर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया था।
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उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जेल में हुए गैंगवार में शूटर अंशु की गोली से मारे गए गैंगेस्टर मुकीम काला के परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। शनिवार को बेटे का शव लेने पहुची मुकीम की माँ ने कहा कि जेल में बाहर से एक चम्मच नही जा सकता तो पिस्टल कैसे पहुंचा। जेल में हुए गैंगवार में मारे गए मुकीम और वारदात के बाद पुलिस की गोली से ढेर हुए अंशु दीक्षित के शवों का शनिवार को चित्रकूट में पोस्टमार्टम करवाया गया। दोपहर करीब एक बजे मुकीम के मामा शुकका और माँ मीना उसका शव लेने शामली से चित्रकूट पहुँचे। मीना ने कहा कि पुलिस ने पूरी योजना बनाकर मुकीम की हत्या करवाई। वह करीब छह साल से जेल में था। उसे मारने के लिए ही चित्रकूट जेल लाया गया। मामा शुकका ने कहा कि वह इसकी जांच करवाने के लिए कोर्ट जाएंगे। मुकीम की माँ मीना ने बताया कि उनका परिवार इस घटना से बेखबर था। परिवार के लोग ईद की खुशियां मना रहे थे। वह ईद की नमाज अदा कर रही थी तभी एक पुलिस वाले का फोन आया। उसने जेल में मुकीम के मौत की खबर दी। थोड़ी देर बाद पता चला कि उसकी हत्या कर दी गयी है। क्या था मामला? चित्रकूट जेल में शुक्रवार को कैदियों के बीच गोली चल गई। इसमें वेस्ट UP के गैंगस्टर अंशु दीक्षित ने मुख्तार अंसारी के खास गुर्गे मेराज और बदमाश मुकीम काला की गोली मारकर हत्या कर दी। मेराज बनारस जेल से भेजा गया था, जबकि मुकीम काला सहारनपुर जेल से लाया गया था। पुलिस ने अंशु दीक्षित को सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन वह फायरिंग करता रहा। बाद में पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अंशु भी मारा गया। CM योगी आदित्यनाथ ने शूटआउट के मामले में DG जेल से छः घंटाटे में रिपोर्ट तलब की। कमिश्नर डीके सिंह, DIG के सत्यनारायण और ADG जेल संजीव त्रिपाठी मामले की जांच की है। वहीं, देर शाम चित्रकूट के जेल अधीक्षक एसपी त्रिपाठी, जेलर महेंद्र पाल समेत पांच कर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया था। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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(हरियाणा बेरोजगारी दर में सबसे आगे)
Unemployment In Haryana : सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) द्वारा 7 जनवरी 2022 को जारी आकंड़ों के अनुसार भारत की बेरोजगारी दर 7.7 प्रतिशत पहुंच गई। शहरों में बेरोजगारी दर 9.0 प्रतिशत तो ग्रामीण इलाकों में 7.0 प्रतिशत रही है। राज्यों की बात करें तो हरियाणा में बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा 34.1 प्रतिशत रही है। वहीं दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर राजस्थान में 27.1 प्रतिशत रही है। इसके बाद झारखंड (17.03 प्रतिशत) और चौथे नंबर पर बिहार (16.0 प्रतिशत) है।
यह आंकड़े सामने आने के बाद जहां हरियाणा (Haryana) में विपक्ष बेरोजगारी के मुद्दे पर हमलावार हो गया है वहीं मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) इन आंकड़ों को खारिज कर रहे हैं और इनको निराधार बता रहे हैं।
हरियाणा निवास में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम खट्टर ने कहा कि विपक्ष के लोग अविश्वसनीय मैग्जीन के आंकड़ों को लेकर सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं। प्रदेश में बेरोजगारी दर 6.1 प्रतिशत है। खट्टर ने कहा कि सीएमआई के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए एडवोकेट जनरल से कानूनी राय ली जाएगी।
यह आंकड़ा सरकार का नहीं बल्कि खुद उन युवाओं द्वारा दिया गया है जिन्होंने खुद को बेरोजगार बताया है। परिवार पहचान पहचान पत्र का डेटा मीडिया के सामने रखते हुए खट्टर ने कहा कि तीन वर्षों से पीपीपी पर रजिस्ट्रेशन हो रहा है। अभी तक राज्य के 98 प्रतिशत के करीब परिवार पीपीपी पर रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। प्रदेश के 65 लाख 78 हजार 311 परिवारों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। इस हिसाब से 2 करोड़ 97 लाख 99 हजार लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। इनमें से 18 से 58 आयु वर्ग के लोगों की संख्या 1 करोड़ 72 लाख 96 हजार है। इनमें से 10 लाख 59 हजार 530 ने खुद को बेरोजगार बताया है। इस हिसाब से इस वर्ग का यह कुल 6.1 प्रतिशत बनता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 18 से 58 आयु वर्ग के लोगों को ही बेरोजगारी के दायरे में मानती है। इससे अधिक उम्र के लोग खुद कुछ करना चाहें तो कर सकते हैं। सरकार के स्तर पर इस वर्ग के लोगों को रोजगार की कैटगरी में नहीं माना जाता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 18 से 58 आयु वर्ग के लोगों को ही बेरोजगारी के दायरे में मानती है। इससे अधिक उम्र के लोग खुद कुछ करना चाहें तो कर सकते हैं। सरकार के स्तर पर इस वर्ग के लोगों को रोजगार की कैटगरी में नहीं माना जाता।
(जनता की पत्रकारिता करते हुए जनज्वार लगातार निष्पक्ष और निर्भीक रह सका है तो इसका सारा श्रेय जनज्वार के पाठकों और दर्शकों को ही जाता है। हम उन मुद्दों की पड़ताल करते हैं जिनसे मुख्यधारा का मीडिया अक्सर मुँह चुराता दिखाई देता है। हम उन कहानियों को पाठक के सामने ले कर आते हैं जिन्हें खोजने और प्रस्तुत करने में समय लगाना पड़ता है, संसाधन जुटाने पड़ते हैं और साहस दिखाना पड़ता है क्योंकि तथ्यों से अपने पाठकों और व्यापक समाज को रु-ब-रु कराने के लिए हम कटिबद्ध हैं।
हमारे द्वारा उद्घाटित रिपोर्ट्स और कहानियाँ अक्सर बदलाव का सबब बनती रही है। साथ ही सरकार और सरकारी अधिकारियों को मजबूर करती रही हैं कि वे नागरिकों को उन सभी चीजों और सेवाओं को मुहैया करवाएं जिनकी उन्हें दरकार है। लाजिमी है कि इस तरह की जन-पत्रकारिता को जारी रखने के लिए हमें लगातार आपके मूल्यवान समर्थन और सहयोग की आवश्यकता है।
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Unemployment In Haryana : सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी द्वारा सात जनवरी दो हज़ार बाईस को जारी आकंड़ों के अनुसार भारत की बेरोजगारी दर सात.सात प्रतिशत पहुंच गई। शहरों में बेरोजगारी दर नौ.शून्य प्रतिशत तो ग्रामीण इलाकों में सात.शून्य प्रतिशत रही है। राज्यों की बात करें तो हरियाणा में बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा चौंतीस.एक प्रतिशत रही है। वहीं दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर राजस्थान में सत्ताईस.एक प्रतिशत रही है। इसके बाद झारखंड और चौथे नंबर पर बिहार है। यह आंकड़े सामने आने के बाद जहां हरियाणा में विपक्ष बेरोजगारी के मुद्दे पर हमलावार हो गया है वहीं मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर इन आंकड़ों को खारिज कर रहे हैं और इनको निराधार बता रहे हैं। हरियाणा निवास में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम खट्टर ने कहा कि विपक्ष के लोग अविश्वसनीय मैग्जीन के आंकड़ों को लेकर सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं। प्रदेश में बेरोजगारी दर छः.एक प्रतिशत है। खट्टर ने कहा कि सीएमआई के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए एडवोकेट जनरल से कानूनी राय ली जाएगी। यह आंकड़ा सरकार का नहीं बल्कि खुद उन युवाओं द्वारा दिया गया है जिन्होंने खुद को बेरोजगार बताया है। परिवार पहचान पहचान पत्र का डेटा मीडिया के सामने रखते हुए खट्टर ने कहा कि तीन वर्षों से पीपीपी पर रजिस्ट्रेशन हो रहा है। अभी तक राज्य के अट्ठानवे प्रतिशत के करीब परिवार पीपीपी पर रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। प्रदेश के पैंसठ लाख अठहत्तर हजार तीन सौ ग्यारह परिवारों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। इस हिसाब से दो करोड़ सत्तानवे लाख निन्यानवे हजार लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। इनमें से अट्ठारह से अट्ठावन आयु वर्ग के लोगों की संख्या एक करोड़ बहत्तर लाख छियानवे हजार है। इनमें से दस लाख उनसठ हजार पाँच सौ तीस ने खुद को बेरोजगार बताया है। इस हिसाब से इस वर्ग का यह कुल छः.एक प्रतिशत बनता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अट्ठारह से अट्ठावन आयु वर्ग के लोगों को ही बेरोजगारी के दायरे में मानती है। इससे अधिक उम्र के लोग खुद कुछ करना चाहें तो कर सकते हैं। सरकार के स्तर पर इस वर्ग के लोगों को रोजगार की कैटगरी में नहीं माना जाता। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अट्ठारह से अट्ठावन आयु वर्ग के लोगों को ही बेरोजगारी के दायरे में मानती है। इससे अधिक उम्र के लोग खुद कुछ करना चाहें तो कर सकते हैं। सरकार के स्तर पर इस वर्ग के लोगों को रोजगार की कैटगरी में नहीं माना जाता।
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रचनात्मक आधार पर मनुष्य, ज्ञान-विज्ञान और तकनीकी विधियों का प्रयोग करके अपने विवेक, सच्चाई, सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों और सहयोगी प्रयासों के सहारे इस सहज विकास की प्रक्रिया को मानवीय सन्दर्भ में ज्यादा प्रभावकारी बना सकता है। विकास की इस प्रक्रिया में कुछ शक्तियाँ- जो एक दूसरे से सम्बन्धित होती है - कारण और कार्य की प्रकृति के रुप में क्रियाशील होती हैं। इन शक्तियों के सन्दर्भ में आर० पी० मिश्र' ने प्रकाश डालते हुए लिखा है कि विकास की प्रक्रिया संकेन्द्रण और प्रकीर्णन, दो विपरीत स्वभाव वाली सहगामी स्थानिक प्रवृत्तियों द्वारा निर्देशित होती है। संकेन्द्रण की प्रवृत्ति केन्द्राभिमुखी शक्तियों का परिणाम होती है तो प्रकीर्णन की प्रवृत्ति केन्द्रापसारी शक्तियों का । संकेन्द्रण की प्रवृत्ति में मानवीय क्रियाओं में एक जगह केन्द्रीभूत् होने की प्रवृत्ति पायी जाती है जबकि प्रकीर्णन की प्रवृत्ति में क्रियाओं में एक जगह केन्द्रीभूत न होकर सम्पूर्ण क्षेत्र में विकेन्द्रित होने की प्रवृत्ति होती है। व्यवहार में दोनों प्रक्रियाएँ अलग-अलग न क्रियाशील होकर एक साथ ही कार्य करती है। किसी समय विशेष में स्थान विशेष पर मानव क्रियाओं का स्थानिक प्रबन्धन इन दोनों ही क्रियाओं की सापेक्षिक शक्ति में तीव्रता का प्रतिफल होता है। जिस क्षेत्र में केन्द्राभिमुखी शक्तियाँ प्रबल होती हैं वहाँ पर क्रियाओं का केन्द्रित संकेन्द्रण होता है जिससे क्षेत्र में अपेक्षया कुछ बड़े नगरीय केन्द्रों का उद्भव होता है जो अविकसित क्षेत्र के लिए विकास केन्द्र का कार्य सम्पादित करते हैं। साथ ही जब केन्द्रापसारी शक्तियाँ अपेक्षया प्रबल होती हैं तो क्रियाओं का संकेन्द्रण सम्पूर्ण क्षेत्र में छोटे और मध्यम नगरीय केन्द्रों के रूप में होता है और इनके माध्यम से क्षेत्र का विकास संभव हो पाता है।
इस प्रकार सम्पूर्ण क्षेत्र का विकास दोनों ही प्रक्रियाओं के माध्यम से संभव होता है किन्तु विकास के लिए उपयुक्त प्रक्रिया के सन्दर्भ में विद्वानों में बड़ा ही मतभेद है। हर्शमैन"जैसे विद्वानों ने किसी पिछड़ी अर्थव्यवस्था के विकास के लिए केन्द्रित संकेन्द्रण की प्रक्रिया को उचित करार दिया है। वस्तुतः प्रक्रिया का युक्तिसंगत होना क्षेत्र के विकास के स्तर पर निर्भर करता है । यदि अर्थव्यवस्था नितान्त पिछड़ी है तो सर्वप्रथम एक सीमा तक केन्द्रित संकेन्द्रण की प्रक्रिया उपयुक्त है, उसके बाद विकेन्द्रित संकेन्द्रण की प्रक्रिया को उपयुक्त कहा जा सकता है। 1.4 विकास के निर्धारक तत्व
प्राकृतिक पर्यावरण, प्रौद्योगिकी और संस्थाएँ आर्थिक विकास के तीन आधारभूत् प्राचल है जिनके द्वारा विकास की दिशा तथा स्तर निर्धारित होता है। परन्तु विकास की बृहत् संकल्पना के परिप्रेक्ष्य में विकास के स्तर को निर्धारित करने वाले सूचकों के सम्बन्ध में पर्याप्त मतभेद रहा है। ये सूचक व्यक्ति, समाज, समय तथा स्थान के सन्दर्भ में भिन्न-भिन्न हो सकते हैं । विकास - स्तर के निर्धारण में एडेलमैन तथा मौरिश ने राजनीतिक एवं सामाजिक विषयों से सम्बन्धित 41 सूचकों का प्रयोग किया है। सम्प्रति, विकास का मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत
और सामाजिक कल्याण में वृद्धि करना है। इस वृद्धि को जीवन की आवश्यक वस्तुओं के प्रयोग, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा प्रतिव्यक्ति आय के स्तर द्वारा ज्ञात किया जा सकता है। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखकर हैगन ने समाज एवं व्यक्ति के कल्याण से सम्बन्धित स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, रोजगार, संचार, वस्तुओं का उपभोग तथा प्रतिव्यक्ति राष्ट्रीय उत्पाद आदि 11 सूचकों का प्रयोग विकास के स्तर को निर्धारित करने में किया है। संयुक्त राष्ट्र के सामाजिक विकास शोध संस्थान (UNRISD) ने 16 सूचकों को विकास के स्तर निर्धारण में उचित बताया है। बेरी - ने 1960 में आर्थिक विकास के विश्लेषण में परिवहन, ऊर्जा का प्रयोग, कृषि-उत्पाद, संचार, व्यापार, जनसंख्या तथा सकल राष्ट्रीय उत्पाद को प्रमुख सूचकों के रूप में प्रयुक्त किया है। प्रायः सभी विद्वानों ने अपने-अपने विश्लेषण में भिन्न-भिन्न सूचकों का प्रयोग किया है किन्तु सकल राष्ट्रीय उत्पाद, शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार, परिवहन, संचार, जनसंख्या की संरचना तथा नगरीकरण आदि सूचकों को प्रायः सभी ने स्थान दिया है। अतः सामान्य रुप से उक्त प्रमुख कारक किसी भी स्थान, समय एवं समाज के विकास के स्तर को निर्धारित करने के लिए उपयुक्त कहे जा सकते है।
1.5 विकास सम्बन्धी सिद्धान्त
विभिन्न अर्थशास्त्रियों, समाजशास्त्रियों तथा समाजविज्ञानियों द्वारा विकास से सम्बन्धित अनेक सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया गया है किन्तु यहाँ उनमें से भौगोलिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कतिपय सिद्धान्तों की संक्षिप्त रुपरेखा प्रस्तुत की गयी है।
मिरडल का 'क्युमुलेटिव काजेशन मॉडल'
मिरडल महोदय" ने 1956 में विकास सम्बन्धी अपना 'क्युमुलेटिव काजेशन मॉडल' प्रस्तुत किया (चित्र 1.1) जिसके माध्यम से उन्होंने यह बताने का प्रयास किया है कि प्रादेशिक विभेदशीलता आर्थिक विकास का स्वाभाविक प्रतिफल होती है क्योंकि एक प्रदेश विना दूसरे को हानि पहुँचाये कभी भी विकास नहीं कर सकता है। इनके मॉडल से स्पष्ट है कि आर्थिक विकास मुख्यतः उन्हीं स्थानों पर केन्द्रित होता है जहाँ कच्चा माल एवं शक्ति के साधनों की उपलब्धि आसानी से होती है।
उनका मत है कि किसी स्थान पर एक बार विकास की प्रक्रिया आरम्भ हो जाने पर कार्यों के संचयी प्रभाव, केन्द्राभिमुखी शक्ति एवं गुणक प्रभाव के कारण सतत् बढ़ती जाती है । फलतः बढ़ती हुई औद्योगिक इकाइयाँ द्वितीयक किस्म की औद्योगिक अवस्थापना को जन्म देती हैं तथा केन्द्रीय प्रदेश का निर्माण होने लगता है। सामाजिक इकाइयाँ इस प्रक्रिया को प्रोत्साहन प्रदान करती है जिससे स्वयं-पोषी आर्थिक वृद्धि होने लगती है
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रचनात्मक आधार पर मनुष्य, ज्ञान-विज्ञान और तकनीकी विधियों का प्रयोग करके अपने विवेक, सच्चाई, सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों और सहयोगी प्रयासों के सहारे इस सहज विकास की प्रक्रिया को मानवीय सन्दर्भ में ज्यादा प्रभावकारी बना सकता है। विकास की इस प्रक्रिया में कुछ शक्तियाँ- जो एक दूसरे से सम्बन्धित होती है - कारण और कार्य की प्रकृति के रुप में क्रियाशील होती हैं। इन शक्तियों के सन्दर्भ में आरशून्य पीशून्य मिश्र' ने प्रकाश डालते हुए लिखा है कि विकास की प्रक्रिया संकेन्द्रण और प्रकीर्णन, दो विपरीत स्वभाव वाली सहगामी स्थानिक प्रवृत्तियों द्वारा निर्देशित होती है। संकेन्द्रण की प्रवृत्ति केन्द्राभिमुखी शक्तियों का परिणाम होती है तो प्रकीर्णन की प्रवृत्ति केन्द्रापसारी शक्तियों का । संकेन्द्रण की प्रवृत्ति में मानवीय क्रियाओं में एक जगह केन्द्रीभूत् होने की प्रवृत्ति पायी जाती है जबकि प्रकीर्णन की प्रवृत्ति में क्रियाओं में एक जगह केन्द्रीभूत न होकर सम्पूर्ण क्षेत्र में विकेन्द्रित होने की प्रवृत्ति होती है। व्यवहार में दोनों प्रक्रियाएँ अलग-अलग न क्रियाशील होकर एक साथ ही कार्य करती है। किसी समय विशेष में स्थान विशेष पर मानव क्रियाओं का स्थानिक प्रबन्धन इन दोनों ही क्रियाओं की सापेक्षिक शक्ति में तीव्रता का प्रतिफल होता है। जिस क्षेत्र में केन्द्राभिमुखी शक्तियाँ प्रबल होती हैं वहाँ पर क्रियाओं का केन्द्रित संकेन्द्रण होता है जिससे क्षेत्र में अपेक्षया कुछ बड़े नगरीय केन्द्रों का उद्भव होता है जो अविकसित क्षेत्र के लिए विकास केन्द्र का कार्य सम्पादित करते हैं। साथ ही जब केन्द्रापसारी शक्तियाँ अपेक्षया प्रबल होती हैं तो क्रियाओं का संकेन्द्रण सम्पूर्ण क्षेत्र में छोटे और मध्यम नगरीय केन्द्रों के रूप में होता है और इनके माध्यम से क्षेत्र का विकास संभव हो पाता है। इस प्रकार सम्पूर्ण क्षेत्र का विकास दोनों ही प्रक्रियाओं के माध्यम से संभव होता है किन्तु विकास के लिए उपयुक्त प्रक्रिया के सन्दर्भ में विद्वानों में बड़ा ही मतभेद है। हर्शमैन"जैसे विद्वानों ने किसी पिछड़ी अर्थव्यवस्था के विकास के लिए केन्द्रित संकेन्द्रण की प्रक्रिया को उचित करार दिया है। वस्तुतः प्रक्रिया का युक्तिसंगत होना क्षेत्र के विकास के स्तर पर निर्भर करता है । यदि अर्थव्यवस्था नितान्त पिछड़ी है तो सर्वप्रथम एक सीमा तक केन्द्रित संकेन्द्रण की प्रक्रिया उपयुक्त है, उसके बाद विकेन्द्रित संकेन्द्रण की प्रक्रिया को उपयुक्त कहा जा सकता है। एक.चार विकास के निर्धारक तत्व प्राकृतिक पर्यावरण, प्रौद्योगिकी और संस्थाएँ आर्थिक विकास के तीन आधारभूत् प्राचल है जिनके द्वारा विकास की दिशा तथा स्तर निर्धारित होता है। परन्तु विकास की बृहत् संकल्पना के परिप्रेक्ष्य में विकास के स्तर को निर्धारित करने वाले सूचकों के सम्बन्ध में पर्याप्त मतभेद रहा है। ये सूचक व्यक्ति, समाज, समय तथा स्थान के सन्दर्भ में भिन्न-भिन्न हो सकते हैं । विकास - स्तर के निर्धारण में एडेलमैन तथा मौरिश ने राजनीतिक एवं सामाजिक विषयों से सम्बन्धित इकतालीस सूचकों का प्रयोग किया है। सम्प्रति, विकास का मुख्य उद्देश्य व्यक्तिगत और सामाजिक कल्याण में वृद्धि करना है। इस वृद्धि को जीवन की आवश्यक वस्तुओं के प्रयोग, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा प्रतिव्यक्ति आय के स्तर द्वारा ज्ञात किया जा सकता है। इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखकर हैगन ने समाज एवं व्यक्ति के कल्याण से सम्बन्धित स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, रोजगार, संचार, वस्तुओं का उपभोग तथा प्रतिव्यक्ति राष्ट्रीय उत्पाद आदि ग्यारह सूचकों का प्रयोग विकास के स्तर को निर्धारित करने में किया है। संयुक्त राष्ट्र के सामाजिक विकास शोध संस्थान ने सोलह सूचकों को विकास के स्तर निर्धारण में उचित बताया है। बेरी - ने एक हज़ार नौ सौ साठ में आर्थिक विकास के विश्लेषण में परिवहन, ऊर्जा का प्रयोग, कृषि-उत्पाद, संचार, व्यापार, जनसंख्या तथा सकल राष्ट्रीय उत्पाद को प्रमुख सूचकों के रूप में प्रयुक्त किया है। प्रायः सभी विद्वानों ने अपने-अपने विश्लेषण में भिन्न-भिन्न सूचकों का प्रयोग किया है किन्तु सकल राष्ट्रीय उत्पाद, शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार, परिवहन, संचार, जनसंख्या की संरचना तथा नगरीकरण आदि सूचकों को प्रायः सभी ने स्थान दिया है। अतः सामान्य रुप से उक्त प्रमुख कारक किसी भी स्थान, समय एवं समाज के विकास के स्तर को निर्धारित करने के लिए उपयुक्त कहे जा सकते है। एक.पाँच विकास सम्बन्धी सिद्धान्त विभिन्न अर्थशास्त्रियों, समाजशास्त्रियों तथा समाजविज्ञानियों द्वारा विकास से सम्बन्धित अनेक सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया गया है किन्तु यहाँ उनमें से भौगोलिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कतिपय सिद्धान्तों की संक्षिप्त रुपरेखा प्रस्तुत की गयी है। मिरडल का 'क्युमुलेटिव काजेशन मॉडल' मिरडल महोदय" ने एक हज़ार नौ सौ छप्पन में विकास सम्बन्धी अपना 'क्युमुलेटिव काजेशन मॉडल' प्रस्तुत किया जिसके माध्यम से उन्होंने यह बताने का प्रयास किया है कि प्रादेशिक विभेदशीलता आर्थिक विकास का स्वाभाविक प्रतिफल होती है क्योंकि एक प्रदेश विना दूसरे को हानि पहुँचाये कभी भी विकास नहीं कर सकता है। इनके मॉडल से स्पष्ट है कि आर्थिक विकास मुख्यतः उन्हीं स्थानों पर केन्द्रित होता है जहाँ कच्चा माल एवं शक्ति के साधनों की उपलब्धि आसानी से होती है। उनका मत है कि किसी स्थान पर एक बार विकास की प्रक्रिया आरम्भ हो जाने पर कार्यों के संचयी प्रभाव, केन्द्राभिमुखी शक्ति एवं गुणक प्रभाव के कारण सतत् बढ़ती जाती है । फलतः बढ़ती हुई औद्योगिक इकाइयाँ द्वितीयक किस्म की औद्योगिक अवस्थापना को जन्म देती हैं तथा केन्द्रीय प्रदेश का निर्माण होने लगता है। सामाजिक इकाइयाँ इस प्रक्रिया को प्रोत्साहन प्रदान करती है जिससे स्वयं-पोषी आर्थिक वृद्धि होने लगती है
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Sushant Singh Rajput Death Case: जेल में रिया चक्रवर्ती पूरी रात सो नहीं पा रही हैं. पिछले तीन दिनों से जेल में रह रहीं रिया रातभर सेल के अंदर बेचैन रहती हैं और सेल में घूमती रहती हैं. सुबह 6 बजे रोल कॉल पर उन्हें सेल से बाहर आने की इजाजत मिलती है और बाद में वह फिर सेल के अंदर चली जाती हैं.
मुंबई. नसीबी की टीम ने बीते मंगलवार को बॉलीवुड एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) को गिरफ्तार (Arrest) कर लिया है. वहीं रिया चक्रवर्ती 14 दिन की न्यायिक हिरासत मिली है. एक रात उन्होंने एनसीबी की जेल में काटी है. आज उन्हें मुंबई की भायखला जेल में शिफ्ट किया जाएगा. रिया की गिरफ्तारी को लेकर कई बॉलीवुड (Bollywood) सेलेब्रिटीज ने भी सोशल मीडिया (Social Media) के जरिए रिएक्ट किया है. वहीं इस बीच फिल्म इंडस्ट्री के एक प्रोड्यूसर (Producer) निखिल द्विवेदी (Nikhil Dwivedi) ने भी रिया को लेकर एक ट्वीट किया है. इस पोस्ट में उन्होंने रिया के बारे में लिखते हुए ना सिर्फ उनके साथ हुए घटनाक्रम को गलत ठहराया है, बल्कि रिया को बड़ा ऑफर भी दे डाला है.
रिया चक्रवर्ती को लेकर निखिल द्विवेदी ने ट्वीट किया है. इस ट्वीट में उन्होंने लिखा- रिया मैं तुम्हें जाना नहीं हूं. मैं नहीं जानता कि तुम किस तरह की इंसान हो. ये भी हो सकता है कि तुम उतनी ही बुरी हो जितना बनाया जा रहा है. या तुम ऐसी नहीं हो. मैं इतना जरूर जानता हूं कि तुम्हारे साथ जो हुआ वो सही नहीं है, कानूनी तौर पर गलत है और कोई सभ्य देश इस तरह बर्ताव नहीं करता है. जब ये सब खत्म हो जाएगा तब मैं तुम्हारे साथ काम करना चाहता हूं. इस ट्वीट के जरिए निखिल ने रिया के साथ एक प्रोजेक्ट का ऐलान कर डाला है. इस ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा हो रही है.
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Sushant Singh Rajput Death Case: जेल में रिया चक्रवर्ती पूरी रात सो नहीं पा रही हैं. पिछले तीन दिनों से जेल में रह रहीं रिया रातभर सेल के अंदर बेचैन रहती हैं और सेल में घूमती रहती हैं. सुबह छः बजे रोल कॉल पर उन्हें सेल से बाहर आने की इजाजत मिलती है और बाद में वह फिर सेल के अंदर चली जाती हैं. मुंबई. नसीबी की टीम ने बीते मंगलवार को बॉलीवुड एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं रिया चक्रवर्ती चौदह दिन की न्यायिक हिरासत मिली है. एक रात उन्होंने एनसीबी की जेल में काटी है. आज उन्हें मुंबई की भायखला जेल में शिफ्ट किया जाएगा. रिया की गिरफ्तारी को लेकर कई बॉलीवुड सेलेब्रिटीज ने भी सोशल मीडिया के जरिए रिएक्ट किया है. वहीं इस बीच फिल्म इंडस्ट्री के एक प्रोड्यूसर निखिल द्विवेदी ने भी रिया को लेकर एक ट्वीट किया है. इस पोस्ट में उन्होंने रिया के बारे में लिखते हुए ना सिर्फ उनके साथ हुए घटनाक्रम को गलत ठहराया है, बल्कि रिया को बड़ा ऑफर भी दे डाला है. रिया चक्रवर्ती को लेकर निखिल द्विवेदी ने ट्वीट किया है. इस ट्वीट में उन्होंने लिखा- रिया मैं तुम्हें जाना नहीं हूं. मैं नहीं जानता कि तुम किस तरह की इंसान हो. ये भी हो सकता है कि तुम उतनी ही बुरी हो जितना बनाया जा रहा है. या तुम ऐसी नहीं हो. मैं इतना जरूर जानता हूं कि तुम्हारे साथ जो हुआ वो सही नहीं है, कानूनी तौर पर गलत है और कोई सभ्य देश इस तरह बर्ताव नहीं करता है. जब ये सब खत्म हो जाएगा तब मैं तुम्हारे साथ काम करना चाहता हूं. इस ट्वीट के जरिए निखिल ने रिया के साथ एक प्रोजेक्ट का ऐलान कर डाला है. इस ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा हो रही है. .
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इंदौर के रावजी बाजार थाने में कल आरक्षक के जन्मदिवस पर क्षेत्र की महिलाए अचानक थाने पहुंची यहां महिलाओं की भीड़ देख सब चौंक गए थे। लेकिन हाथों में हार-फूल लिए महिला आरक्षक का स्वागत करने पहुंची थी।
रावजी बाजार थाने के आरक्षक धर्मेंद्र पाठक का कल जन्मदिवस था उनके जन्मदिवस के दिन को क्षेत्रीय महिलाओं ने खास दिन में तब तब्दील कर दिया जब महिलाए हाथों में केक,मिठाई-फूल लिए थाने पहुंची थी। पाठक की कार्यशैली से क्षेत्र की महिलाए प्रभावित है। उनके द्वारा बड़े मामलों में अफसरों के साथ मिलकर की गई कई कार्यवाही काबिले तारीफ साबित हुई है। इसके लिए उन्हें कई बार नगद पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चूका है।
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इंदौर के रावजी बाजार थाने में कल आरक्षक के जन्मदिवस पर क्षेत्र की महिलाए अचानक थाने पहुंची यहां महिलाओं की भीड़ देख सब चौंक गए थे। लेकिन हाथों में हार-फूल लिए महिला आरक्षक का स्वागत करने पहुंची थी। रावजी बाजार थाने के आरक्षक धर्मेंद्र पाठक का कल जन्मदिवस था उनके जन्मदिवस के दिन को क्षेत्रीय महिलाओं ने खास दिन में तब तब्दील कर दिया जब महिलाए हाथों में केक,मिठाई-फूल लिए थाने पहुंची थी। पाठक की कार्यशैली से क्षेत्र की महिलाए प्रभावित है। उनके द्वारा बड़े मामलों में अफसरों के साथ मिलकर की गई कई कार्यवाही काबिले तारीफ साबित हुई है। इसके लिए उन्हें कई बार नगद पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चूका है।
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दूरदर्शन टेलीविजन नेटवर्क की तीन महिला कर्मचारियों ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि उनका अनुबंध बढ़ाने का झांसा देकर उनके साथ यह सब किया गया।
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दूरदर्शन टेलीविजन नेटवर्क की तीन महिला कर्मचारियों ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। उन्होंने शुक्रवार को कहा कि उनका अनुबंध बढ़ाने का झांसा देकर उनके साथ यह सब किया गया। Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
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मुंबईः बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन ने अभिनेत्री सारा अली खान को हाल ही में साझा की गई अभिनेत्री के ग्रेजुएशन वाले दिन की तस्वीर पर एक कमेंट के साथ मजेदार तरीके से ट्रोल किया है। सारा ने हाल ही में चार साल पहले कोलंबिया विश्वविद्यालय से अपने ग्रेजुएशन की कई तस्वीरें इंस्टाग्राम पर साझा की थीं।
तस्वीर पर अभिनेता ने कमेंट किया है, "अब तक तुमने जितनी तस्वीरें साझा की हैं, उनमें सर्वश्रेष्ठ। " उनके कमेंट पर 10,584 लाइक्स मिले हैं।
वरुण ने इंस्टाग्राम पर खुद की एक मोनोक्रोम तस्वीर भी साझा की। तस्वीर में वह कैमरे की तरफ देखते नजर आ रहे हैं। उन्होंने सफेद टी-शर्ट और जैकेट पहन रखा है।
सारा और वरुण जल्द ही 'कुली नं. 1' में नजर आएंगे। इसके अलावा सारा 'अतरंगी रे' में दिखाई देंगी, जिसमें अक्षय कुमार और साउथ स्टार धनुष लीड रोल में हैं।
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मुंबईः बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन ने अभिनेत्री सारा अली खान को हाल ही में साझा की गई अभिनेत्री के ग्रेजुएशन वाले दिन की तस्वीर पर एक कमेंट के साथ मजेदार तरीके से ट्रोल किया है। सारा ने हाल ही में चार साल पहले कोलंबिया विश्वविद्यालय से अपने ग्रेजुएशन की कई तस्वीरें इंस्टाग्राम पर साझा की थीं। तस्वीर पर अभिनेता ने कमेंट किया है, "अब तक तुमने जितनी तस्वीरें साझा की हैं, उनमें सर्वश्रेष्ठ। " उनके कमेंट पर दस,पाँच सौ चौरासी लाइक्स मिले हैं। वरुण ने इंस्टाग्राम पर खुद की एक मोनोक्रोम तस्वीर भी साझा की। तस्वीर में वह कैमरे की तरफ देखते नजर आ रहे हैं। उन्होंने सफेद टी-शर्ट और जैकेट पहन रखा है। सारा और वरुण जल्द ही 'कुली नं. एक' में नजर आएंगे। इसके अलावा सारा 'अतरंगी रे' में दिखाई देंगी, जिसमें अक्षय कुमार और साउथ स्टार धनुष लीड रोल में हैं।
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अल्कोहलिया ( Alcoholia) को शनिवार को मुंबई में एक भव्य कार्यक्रम में लॉन्च किया गया, जिसमें ऋतिक रोशन, राधिका आप्टे, रोहित सराफ और फिल्म निर्माता जोड़ी गायत्री और पुष्कर ने पार्टीसिपेट किया था।
एंटरटेनमेंट डेस्क, Hrithik Roshan, actor of Vikram Vedha, dances in the bar : ऋतिक रोशन और सैफ अली खान ( Hrithik Roshan and Saif Ali Khan) की फिल्म विक्रम वेधा के मेकर्स ने आज Alcoholia गाना रिलीज किया है। दो मिनट से अधिक लंबे वीडियो में ऋतिक रोशन और रोहित सराफ को एक बार में डांस करते हुए दिखाया गया है। ऋतिक रोशन को रफ एंड टफ लुक में देखा जा सकता है। विशाल और शेखर ने इसका म्यूजिक तैयार किया है, अल्कोहलिया मनोज मुतंशिर द्वारा लिखा गया है।
ये सांग "the dancing number of the year" के रूप में पेश किया गया है, इस गाने को स्निग्धजीत भौमिक और अनन्या चक्रवर्ती ( Snigdhajit Bhowmik and Ananya Chakraborty ) ने अपनी आवाजें दी हैं। गाने में नशे में धुत नजर आने वाले ऋतिक अपने डांसिंग स्किल्स से सबको प्रभावित करते दिएक रहे हैं।
अल्कोहलिया ( Alcoholia) को शनिवार को मुंबई में एक भव्य कार्यक्रम में लॉन्च किया गया, जिसमें ऋतिक रोशन, राधिका आप्टे, रोहित सराफ ( Hrithik Roshan, Radhika Apte, Rohit Saraf) और फिल्म निर्माता जोड़ी गायत्री और पुष्कर ( Gayathri and Pushkar ) ने पार्टीसिपेट किया था।
गायत्री और पुष्कर द्वारा निर्देशित विक्रम वेधा 30 सितंबर को बड़े पर्दे पर आने के लिए पूरी तरह तैयार है। फिल्म में ऋतिक रोशन, सैफ अली खान, राधिका आप्टे और रोहित सराफ ( Hrithik Roshan, Saif Ali Khan, Radhika Apte and Rohit Saraf) मुख्य भूमिकाओं में हैं। विक्रम वेधा इसी नाम और निर्देशकों के साथ 2017 की तमिल फिल्म का आधिकारिक हिंदी रीमेक है। फिल्म में आर माधवन और विजय सेतुपति ( R Madhavan and Vijay Sethupathi )मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म में ऋतिक एक गैंगस्टर वेधा की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि सैफ अली खान एक पुलिस वाले विक्रम की भूमिका निभा रहे हैं।
वर्क फ्रंट की बात करें तो, ऋतिक रोशन को आखिरी बार 2019 की ब्लॉकबस्टर फिल्म वॉर में देखा गया था, जिसमें टाइगर श्रॉफ भी थे। विक्रम वेधा के अलावा, दीपिका पादुकोण के साथ फाइटर में दिखाई देंगे। इस बीच, सैफ अली खान प्रभास के साथ फिल्म आदिपुरुष में दिखाई देंगे, जिसमें कृति सनोन भी मुख्य भूमिका में हैं।
कौन हैं पाकिस्तान की यह खूबसूरत लड़की, जो शाहरुख़ खान के बेटे आर्यन के प्यार में हुई पागल?
कौन हैं पाकिस्तान की यह खूबसूरत लड़की, जो शाहरुख़ खान के बेटे आर्यन के प्यार में हुई पागल?
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अल्कोहलिया को शनिवार को मुंबई में एक भव्य कार्यक्रम में लॉन्च किया गया, जिसमें ऋतिक रोशन, राधिका आप्टे, रोहित सराफ और फिल्म निर्माता जोड़ी गायत्री और पुष्कर ने पार्टीसिपेट किया था। एंटरटेनमेंट डेस्क, Hrithik Roshan, actor of Vikram Vedha, dances in the bar : ऋतिक रोशन और सैफ अली खान की फिल्म विक्रम वेधा के मेकर्स ने आज Alcoholia गाना रिलीज किया है। दो मिनट से अधिक लंबे वीडियो में ऋतिक रोशन और रोहित सराफ को एक बार में डांस करते हुए दिखाया गया है। ऋतिक रोशन को रफ एंड टफ लुक में देखा जा सकता है। विशाल और शेखर ने इसका म्यूजिक तैयार किया है, अल्कोहलिया मनोज मुतंशिर द्वारा लिखा गया है। ये सांग "the dancing number of the year" के रूप में पेश किया गया है, इस गाने को स्निग्धजीत भौमिक और अनन्या चक्रवर्ती ने अपनी आवाजें दी हैं। गाने में नशे में धुत नजर आने वाले ऋतिक अपने डांसिंग स्किल्स से सबको प्रभावित करते दिएक रहे हैं। अल्कोहलिया को शनिवार को मुंबई में एक भव्य कार्यक्रम में लॉन्च किया गया, जिसमें ऋतिक रोशन, राधिका आप्टे, रोहित सराफ और फिल्म निर्माता जोड़ी गायत्री और पुष्कर ने पार्टीसिपेट किया था। गायत्री और पुष्कर द्वारा निर्देशित विक्रम वेधा तीस सितंबर को बड़े पर्दे पर आने के लिए पूरी तरह तैयार है। फिल्म में ऋतिक रोशन, सैफ अली खान, राधिका आप्टे और रोहित सराफ मुख्य भूमिकाओं में हैं। विक्रम वेधा इसी नाम और निर्देशकों के साथ दो हज़ार सत्रह की तमिल फिल्म का आधिकारिक हिंदी रीमेक है। फिल्म में आर माधवन और विजय सेतुपति मुख्य भूमिका में हैं। फिल्म में ऋतिक एक गैंगस्टर वेधा की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि सैफ अली खान एक पुलिस वाले विक्रम की भूमिका निभा रहे हैं। वर्क फ्रंट की बात करें तो, ऋतिक रोशन को आखिरी बार दो हज़ार उन्नीस की ब्लॉकबस्टर फिल्म वॉर में देखा गया था, जिसमें टाइगर श्रॉफ भी थे। विक्रम वेधा के अलावा, दीपिका पादुकोण के साथ फाइटर में दिखाई देंगे। इस बीच, सैफ अली खान प्रभास के साथ फिल्म आदिपुरुष में दिखाई देंगे, जिसमें कृति सनोन भी मुख्य भूमिका में हैं। कौन हैं पाकिस्तान की यह खूबसूरत लड़की, जो शाहरुख़ खान के बेटे आर्यन के प्यार में हुई पागल? कौन हैं पाकिस्तान की यह खूबसूरत लड़की, जो शाहरुख़ खान के बेटे आर्यन के प्यार में हुई पागल?
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BJP Leader Nupur Sharma Latest Update दिल्ली की भारतीय जनता पार्टी के धाकड़ नेता नूपुर शर्मा इन दिनों खूब चर्चा में है। नूपुर शर्मा की एक कथित टिप्पणी के खिलाफ मुंबई पुलिस में मामला भी दर्ज हो गया है।
नई दिल्ली, जागरण डिजिटल डेस्क। BJP Leader Nupur Sharma Latest Update: चंद दिन पहले तक सिर्फ दिल्ली की स्थानीय नेता के तौर जानी जाने वाली भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता अब पूरे देश के साथ-साथ पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी चर्चा में हैं। दरअसल, शुक्रवार से ही भाजपा नेता नूपुर शर्मा और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
इस बाबत नूपर शर्मा खुद को मिल रहे धमकी भरे संदेशों को लेकर दिल्ली पुलिस को ट्विटर के जरिये जानकारी दे चुकी हैं। नूपुर शर्मा का आरोप है कि उन्हें इस्लामिक कट्टरपंथियों से धमकियां मिली हैं। उनके मुताबिक, दुष्कर्म करने और जान से मारने की धमकी इंटरनेट मीडिया पर दी जा रही हैं।
आरोप है कि नूपुर शर्मा कथित तौर पर पैगंबर की बेअदमी की है। वहीं, शिकायत मिलने पर भाजपा नेता नूपुर शर्मा के खिलाफ मुंबई पुलिस ने आइपीसी की धारा 153ए, 295ए और 505 (2) के तहत मामला दर्ज किया है। इसके तहत उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है। मुंबई पुलिस ने नूपुर शर्मा के खिलाफ यह मामला एक मुस्लिम सामाजिक संस्था रजा एकेडमी की शिकायत पर दर्ज किया है।
एक टेलीविजन डिबेट के दौरान पैगंबर मुहम्मद पर विवादित बयान दिया था, जिसके बाद उनके विरुद्ध यह कार्रवाई की गई है। बता दें कि शनिवार को दिनभर नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी को लेकर चलाया गया हैशटैग टाप ट्रेंड में था। अब पड़ोसी देश पाकिस्तान में यह शनिवार के साथ-साथ रविवार को भी ट्रेंड में बना हुआ है, जो हैश टैग NupurSharmaarrest है। रविवार दोपहर बाद भी पाकिस्तान में भी #ArrestNupurSharma हैशटैंग के साथ लोग ट्वीट कर रहे हैं।
इस पूरे मामले में नूपुर शर्मा का सफाई में यह कहना है कि अपने आपको फैक्ट चेकर कहने वाले मोहम्मद ज़ुबैर नाम के शख्स ने मेरे एक टीवी डिबेट्स के मनमाने तरीक़े से एडिट किए गए वीडियो डाल कर मेरे विरुद्ध इस तरह का नकारात्मक माहौल बनाया। इसे बाद से लगातार मुझे और मेरे परिजनों को जान से मारने और दुष्कर्म करने की धमकियां मिल रही हैं।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी की नेता नूपुर शर्मान ने धमकी भरे स्क्रीन शाट लेकर ट्वीट किया है। इसमें उन्होंने लिखा है- 'दिल्ली पुलिस, दिल्ली पुलिस आयुक्त- मुझे और मेरे परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. . . कुछ तस्वीरें संलग्न कर रही हूं। कृपया संज्ञान लें। ' ट्वीट के जवाब में दिल्ली पुलिस ने कहा- पूरे विषय को आवश्यक कार्रवाई के लिए संबद्ध अधिकारियों के पास भेज दिया गया है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने ट्वीट कर नूपुर शर्मा का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। ऐसे कट्टरपंथियों को काबू में करना होगा और उन्हें कानून की ताकत का एहसास होना चाहिए। हिम्मत करें कि आप उसे डराने-धमकाने के बारे में भी सोचें, नहीं तो हम यह सुनिश्चित करेंगे कि आप अपनी पूरी जिंदगी जेल में बिताएं। @CPDelhi कृपया उचित कार्रवाई करें।
यहां पर बता दें कि दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 में अरविंद केजरीवाल के ताल ठोकर अचानक लाइमलाइट में आईं नूपुर शर्मा भाजपा की धाकड़ प्रवक्ता भी हैं। वह लगातार टेलीविजन समाचार चैनलों पर लगातार भाजपा का पक्ष विभिन्न विषय़ों पर रखनी रही हैं।
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BJP Leader Nupur Sharma Latest Update दिल्ली की भारतीय जनता पार्टी के धाकड़ नेता नूपुर शर्मा इन दिनों खूब चर्चा में है। नूपुर शर्मा की एक कथित टिप्पणी के खिलाफ मुंबई पुलिस में मामला भी दर्ज हो गया है। नई दिल्ली, जागरण डिजिटल डेस्क। BJP Leader Nupur Sharma Latest Update: चंद दिन पहले तक सिर्फ दिल्ली की स्थानीय नेता के तौर जानी जाने वाली भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता अब पूरे देश के साथ-साथ पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी चर्चा में हैं। दरअसल, शुक्रवार से ही भाजपा नेता नूपुर शर्मा और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। इस बाबत नूपर शर्मा खुद को मिल रहे धमकी भरे संदेशों को लेकर दिल्ली पुलिस को ट्विटर के जरिये जानकारी दे चुकी हैं। नूपुर शर्मा का आरोप है कि उन्हें इस्लामिक कट्टरपंथियों से धमकियां मिली हैं। उनके मुताबिक, दुष्कर्म करने और जान से मारने की धमकी इंटरनेट मीडिया पर दी जा रही हैं। आरोप है कि नूपुर शर्मा कथित तौर पर पैगंबर की बेअदमी की है। वहीं, शिकायत मिलने पर भाजपा नेता नूपुर शर्मा के खिलाफ मुंबई पुलिस ने आइपीसी की धारा एक सौ तिरेपनए, दो सौ पचानवेए और पाँच सौ पाँच के तहत मामला दर्ज किया है। इसके तहत उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है। मुंबई पुलिस ने नूपुर शर्मा के खिलाफ यह मामला एक मुस्लिम सामाजिक संस्था रजा एकेडमी की शिकायत पर दर्ज किया है। एक टेलीविजन डिबेट के दौरान पैगंबर मुहम्मद पर विवादित बयान दिया था, जिसके बाद उनके विरुद्ध यह कार्रवाई की गई है। बता दें कि शनिवार को दिनभर नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी को लेकर चलाया गया हैशटैग टाप ट्रेंड में था। अब पड़ोसी देश पाकिस्तान में यह शनिवार के साथ-साथ रविवार को भी ट्रेंड में बना हुआ है, जो हैश टैग NupurSharmaarrest है। रविवार दोपहर बाद भी पाकिस्तान में भी #ArrestNupurSharma हैशटैंग के साथ लोग ट्वीट कर रहे हैं। इस पूरे मामले में नूपुर शर्मा का सफाई में यह कहना है कि अपने आपको फैक्ट चेकर कहने वाले मोहम्मद ज़ुबैर नाम के शख्स ने मेरे एक टीवी डिबेट्स के मनमाने तरीक़े से एडिट किए गए वीडियो डाल कर मेरे विरुद्ध इस तरह का नकारात्मक माहौल बनाया। इसे बाद से लगातार मुझे और मेरे परिजनों को जान से मारने और दुष्कर्म करने की धमकियां मिल रही हैं। वहीं, भारतीय जनता पार्टी की नेता नूपुर शर्मान ने धमकी भरे स्क्रीन शाट लेकर ट्वीट किया है। इसमें उन्होंने लिखा है- 'दिल्ली पुलिस, दिल्ली पुलिस आयुक्त- मुझे और मेरे परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. . . कुछ तस्वीरें संलग्न कर रही हूं। कृपया संज्ञान लें। ' ट्वीट के जवाब में दिल्ली पुलिस ने कहा- पूरे विषय को आवश्यक कार्रवाई के लिए संबद्ध अधिकारियों के पास भेज दिया गया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने ट्वीट कर नूपुर शर्मा का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। ऐसे कट्टरपंथियों को काबू में करना होगा और उन्हें कानून की ताकत का एहसास होना चाहिए। हिम्मत करें कि आप उसे डराने-धमकाने के बारे में भी सोचें, नहीं तो हम यह सुनिश्चित करेंगे कि आप अपनी पूरी जिंदगी जेल में बिताएं। @CPDelhi कृपया उचित कार्रवाई करें। यहां पर बता दें कि दिल्ली विधानसभा चुनाव दो हज़ार पंद्रह में अरविंद केजरीवाल के ताल ठोकर अचानक लाइमलाइट में आईं नूपुर शर्मा भाजपा की धाकड़ प्रवक्ता भी हैं। वह लगातार टेलीविजन समाचार चैनलों पर लगातार भाजपा का पक्ष विभिन्न विषय़ों पर रखनी रही हैं।
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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उपहार के रूप में 600 किलोग्राम आम भेजे हैं।
नेशनल डेस्कः बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उपहार के रूप में 600 किलोग्राम आम भेजे हैं। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। बांग्लादेश उप उच्चायोग के एक अधिकारी ने यहां कहा, "राजनयिक प्रयासों के तहत बनर्जी को 'हिमसागर' और 'लंगड़ा' किस्मों के आम भेजे गए हैं।
पिछले साल भी हमने आम भेजे थे। " हसीना ने पूर्वोत्तर के सभी मुख्यमंत्रियों को भी आम भेजे हैं। पिछले साल उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम के मुख्यमंत्रियों को उपहार के रूप में आम भेजे थे।
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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उपहार के रूप में छः सौ किलोग्रामग्राम आम भेजे हैं। नेशनल डेस्कः बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उपहार के रूप में छः सौ किलोग्रामग्राम आम भेजे हैं। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। बांग्लादेश उप उच्चायोग के एक अधिकारी ने यहां कहा, "राजनयिक प्रयासों के तहत बनर्जी को 'हिमसागर' और 'लंगड़ा' किस्मों के आम भेजे गए हैं। पिछले साल भी हमने आम भेजे थे। " हसीना ने पूर्वोत्तर के सभी मुख्यमंत्रियों को भी आम भेजे हैं। पिछले साल उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और असम के मुख्यमंत्रियों को उपहार के रूप में आम भेजे थे।
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रांची। चारा घोटाले के चौथे मामले में आज हुई सुनवाई में विशेष सीबीआई अदालत द्वारा लालू प्रसाद यादव को दोषी करार दिया गया है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को बरी कर दिया गया है।
लालू यादव फिलहाल झारखंड की रांची सेंट्रल जेल में पहले से ही तीन मामलों की सजा काट रहे हैं। अब से पहले लालू को चारा घोटाले के तीन मामलों में उन्हें सजा हो चुकी है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को आज चारा घोटाले के चौथे मामले में दोषी करार दिया गया है।
दुमका कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े इस मामले में रांची की विशेष सीबीआई अदालत में आज सुनवाई की जानी थी। यानी अब तक चारा घोटाले के 6 में से 4 केसों में लालू यादव को दोषी करार दिया जा चुका है।
चारा घोटाले के चौथे मामले में भी लालू को दोषी करार दिए जाने के बाद आरजेडी के वरिष्ठ रघुवंश प्रसाद सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा, 'अजब है नरेंद्र मोदी और नीतीश का मेल, अजब है खेल, दोबारा से हो गया जगन्नाथ मिश्रा रिहा और लालू यादव को जेल। एक आदमी को जेल, एक आदमी को बेल, ये है नरेंद्र मोदी का खेल।' इससे पहले भी रघुवंश प्रसाद सिंह लालू को हुई तीसरी सजा पर कह चुके हैं कि लालू को मिली सजा राजनीतिक है, न कि आपराधिक।
गौरतलब है कि आज जिस मामले में लालू यादव को सजा सुनाई गई है वह दुमका कोषागार से लगभग 3.76 करोड़ रुपये की अवैध निकासी से जुड़ा हुआ है। इस मामले में सीबीआई ने 1996 में एफआईआर दर्ज की थी। राशि की निकासी 1995 से 1996 के बीच हुई थी। मामले की जांच के बाद सीबीआई ने 11 अप्रैल 1996 को रिपोर्ट दर्ज की थी।
इसे पहले फरवरी के अंतिम हफ्ते में चारा घोटाले के पहले मामले देवघर ट्रेजरी से अवैध निकासी पर लालू की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में दायर एक याचिका को खारिज कर दिया गया था। इस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने आरजेडी सुप्रीमो को साढ़े तीन साल की जेल और 5 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस सजा के बाद लालू के पास हाईकोर्ट से जमानत लेने का विकल्प था, जिसके आधार पर लालू ने झारखंड हाई कोर्ट में अर्जी दायर की थी।
चारा घोटाले के तीसरे मामले में लालू प्रसाद और जगन्नाथ मिश्रा दोनों को चारा घोटाले से जुड़े चाईबासा कोषागार गबन मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल जेल की सजा सुनाई थी। इस मामले में कोर्ट ने लालू यादव पर 10 लाख और जगन्नाथ मिश्रा पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
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रांची। चारा घोटाले के चौथे मामले में आज हुई सुनवाई में विशेष सीबीआई अदालत द्वारा लालू प्रसाद यादव को दोषी करार दिया गया है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा को बरी कर दिया गया है। लालू यादव फिलहाल झारखंड की रांची सेंट्रल जेल में पहले से ही तीन मामलों की सजा काट रहे हैं। अब से पहले लालू को चारा घोटाले के तीन मामलों में उन्हें सजा हो चुकी है। राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को आज चारा घोटाले के चौथे मामले में दोषी करार दिया गया है। दुमका कोषागार से अवैध निकासी से जुड़े इस मामले में रांची की विशेष सीबीआई अदालत में आज सुनवाई की जानी थी। यानी अब तक चारा घोटाले के छः में से चार केसों में लालू यादव को दोषी करार दिया जा चुका है। चारा घोटाले के चौथे मामले में भी लालू को दोषी करार दिए जाने के बाद आरजेडी के वरिष्ठ रघुवंश प्रसाद सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा, 'अजब है नरेंद्र मोदी और नीतीश का मेल, अजब है खेल, दोबारा से हो गया जगन्नाथ मिश्रा रिहा और लालू यादव को जेल। एक आदमी को जेल, एक आदमी को बेल, ये है नरेंद्र मोदी का खेल।' इससे पहले भी रघुवंश प्रसाद सिंह लालू को हुई तीसरी सजा पर कह चुके हैं कि लालू को मिली सजा राजनीतिक है, न कि आपराधिक। गौरतलब है कि आज जिस मामले में लालू यादव को सजा सुनाई गई है वह दुमका कोषागार से लगभग तीन.छिहत्तर करोड़ रुपये की अवैध निकासी से जुड़ा हुआ है। इस मामले में सीबीआई ने एक हज़ार नौ सौ छियानवे में एफआईआर दर्ज की थी। राशि की निकासी एक हज़ार नौ सौ पचानवे से एक हज़ार नौ सौ छियानवे के बीच हुई थी। मामले की जांच के बाद सीबीआई ने ग्यारह अप्रैल एक हज़ार नौ सौ छियानवे को रिपोर्ट दर्ज की थी। इसे पहले फरवरी के अंतिम हफ्ते में चारा घोटाले के पहले मामले देवघर ट्रेजरी से अवैध निकासी पर लालू की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में दायर एक याचिका को खारिज कर दिया गया था। इस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने आरजेडी सुप्रीमो को साढ़े तीन साल की जेल और पाँच लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस सजा के बाद लालू के पास हाईकोर्ट से जमानत लेने का विकल्प था, जिसके आधार पर लालू ने झारखंड हाई कोर्ट में अर्जी दायर की थी। चारा घोटाले के तीसरे मामले में लालू प्रसाद और जगन्नाथ मिश्रा दोनों को चारा घोटाले से जुड़े चाईबासा कोषागार गबन मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने दोषी करार देते हुए पांच-पांच साल जेल की सजा सुनाई थी। इस मामले में कोर्ट ने लालू यादव पर दस लाख और जगन्नाथ मिश्रा पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
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ईंट भट्ठे की जांच करती एसडीएम नेहा मिश्रा।
केराकत जौनपुर। उपजिलाधिकारी नेहा मिश्रा ने मंगलवार को क्षेत्र के गगन मार्का ईंट भट्टा देवकली पर श्रम विभाग, जीएसटी विभाग, खनन विभाग व जिला पंचायत विभाग के अधिकारियों के साथ आकस्मिक छापेमारी कर जांच किया। उपजिलाधिकारी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उस समय हतप्रभ हो गये, जब जांच में किसी भी विभाग से उक्त भट्ठा पंजीकृत नहीं पाया गया। एसडीएम सुश्री मिश्रा ने बताया कि जांच से पूर्व संग्रह अमीन द्वारा ईंट भट्टा मालिक को अवगत करा दिया गया था कि वह भट्ठे पर उपस्थित रहेंगे। परन्तु मौके पर भट्ठा मालिक अनुपस्थित पाए गए। उनके मोबाइल नंबर पर कई बार सम्पर्क करने का भी प्रयास किया गया। परन्तु उनका मोबाइल स्विच आफ पाया गया। मौके पर दो ट्रैक्टर व ट्राली को कोतवाली केराकत को सुपुर्द कर दिया गया। भट्ठे पर मौजूद मुंशी को निर्देशित किया गया कि जिलाधिकारी के अग्रिम आदेश तक भट्ठे पर कोई भी कार्य निकासी, पथाई, फुंकाई, खरीद, बिक्री का कार्य नहीं किया जायेगा।
सुश्री मिश्रा ने बताया कि मौके पर एक लाख कच्ची ईंट को नष्ट करा दिया गया तथा अग्रिम आदेश तक भट्ठे को सीज कर दिया गया है। इसी प्रकार खुज्जी में आरके ईंट भट्ठा द्वारा एक लाख चौरासी हजार का विनियमन शुल्क,एक लाख जीएसटी चेक दिया गया तथा 16 हजार जिला पंचायत शुल्क भी मौके पर जमा कराया गया। इसी प्रकार बाबा एंड आशीष ईंट भट्ठा खुज्झी द्वारा एक लाख चौवन हजार विनियमन शुल्क का चेक दिया गया। राज ईंट उद्दोग देवकली को चेक किया गया जहां सब कुछ सही पाया गया।
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ईंट भट्ठे की जांच करती एसडीएम नेहा मिश्रा। केराकत जौनपुर। उपजिलाधिकारी नेहा मिश्रा ने मंगलवार को क्षेत्र के गगन मार्का ईंट भट्टा देवकली पर श्रम विभाग, जीएसटी विभाग, खनन विभाग व जिला पंचायत विभाग के अधिकारियों के साथ आकस्मिक छापेमारी कर जांच किया। उपजिलाधिकारी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी उस समय हतप्रभ हो गये, जब जांच में किसी भी विभाग से उक्त भट्ठा पंजीकृत नहीं पाया गया। एसडीएम सुश्री मिश्रा ने बताया कि जांच से पूर्व संग्रह अमीन द्वारा ईंट भट्टा मालिक को अवगत करा दिया गया था कि वह भट्ठे पर उपस्थित रहेंगे। परन्तु मौके पर भट्ठा मालिक अनुपस्थित पाए गए। उनके मोबाइल नंबर पर कई बार सम्पर्क करने का भी प्रयास किया गया। परन्तु उनका मोबाइल स्विच आफ पाया गया। मौके पर दो ट्रैक्टर व ट्राली को कोतवाली केराकत को सुपुर्द कर दिया गया। भट्ठे पर मौजूद मुंशी को निर्देशित किया गया कि जिलाधिकारी के अग्रिम आदेश तक भट्ठे पर कोई भी कार्य निकासी, पथाई, फुंकाई, खरीद, बिक्री का कार्य नहीं किया जायेगा। सुश्री मिश्रा ने बताया कि मौके पर एक लाख कच्ची ईंट को नष्ट करा दिया गया तथा अग्रिम आदेश तक भट्ठे को सीज कर दिया गया है। इसी प्रकार खुज्जी में आरके ईंट भट्ठा द्वारा एक लाख चौरासी हजार का विनियमन शुल्क,एक लाख जीएसटी चेक दिया गया तथा सोलह हजार जिला पंचायत शुल्क भी मौके पर जमा कराया गया। इसी प्रकार बाबा एंड आशीष ईंट भट्ठा खुज्झी द्वारा एक लाख चौवन हजार विनियमन शुल्क का चेक दिया गया। राज ईंट उद्दोग देवकली को चेक किया गया जहां सब कुछ सही पाया गया।
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ग्राम पंचायत ऊखली के तहत आने वाले गौटा गांव में प्रयास संस्था द्वारा अयोजित ब्यूटी एंड वेलनेस प्रशिक्षण शिविर के समापन पर महिलाओं को सर्टिफिकेट वितरित किए गए। पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कार्यक्रम में पहुंचकर महिलाओं को प्रमाण पत्र दिए। उनका गौटा में पहुंचने पर लोगों ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। कार्यक्रम के सफल संचालन की भूमिका ग्राम पंचायत ऊखली के उपप्रधान सुशील ठाकुर ने निभाई। इस अवसर पर पंचायत के काफी अधिक संख्या में लोग मौजूद रहे। लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री का आयोजन स्थल पर पहुंचने पर फूल मालाओं से स्वागत किया।
पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि हुनर से शिखर की ओर महिलाओं को रोजगार एवं स्वावलंबन बनाने की पहल जो केंद्रीय सूचना प्रसारण एवं खेल मंत्री ने चलाई है, उसका नारी शक्ति पूरा फायदा ले रही है। उन्होंने महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह आगे बढ़े, रोजगार कमाए और अपनी आजीविका बढ़ाएं तथा सुंदर और स्वस्थ रहकर परिवार का पालन पोषण करें। उन्होंने कहा कि यही सोच केंद्रीय सूचना प्रसारण एवं खेल मंत्री अनुराग ठाकुर की है। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण शिविर में दर्जनों युवतियां महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। उसी के मध्य नजर उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है। एक सांसद का दायित्व सांसद निधि को अपने लोकसभा क्षेत्र में विकास के रूप में लगाना है। सांसद निधि को लोकसभा क्षेत्र की सभी पंचायतों में लगाया जा रहा है। किस पंचायत में कितना पैसा लगा है इसकी सूचना कोई भी व्यक्ति आरटीआई के माध्यम से प्राप्त कर सकता है लेकिन लोगों को आरटीआई डालने के बाद जानकारी मिले इससे पहले जिस पंचायत में विकास कार्य पर पैसा खर्च हुआ है वहां के लोग पार्टी कार्यकर्ता उस काम का बखान लोगों के बीच करें। इस अवसर पर काफी संख्या में पूर्व फौजी, क्षेत्र के ग्रामीण तथा भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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ग्राम पंचायत ऊखली के तहत आने वाले गौटा गांव में प्रयास संस्था द्वारा अयोजित ब्यूटी एंड वेलनेस प्रशिक्षण शिविर के समापन पर महिलाओं को सर्टिफिकेट वितरित किए गए। पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कार्यक्रम में पहुंचकर महिलाओं को प्रमाण पत्र दिए। उनका गौटा में पहुंचने पर लोगों ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। कार्यक्रम के सफल संचालन की भूमिका ग्राम पंचायत ऊखली के उपप्रधान सुशील ठाकुर ने निभाई। इस अवसर पर पंचायत के काफी अधिक संख्या में लोग मौजूद रहे। लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री का आयोजन स्थल पर पहुंचने पर फूल मालाओं से स्वागत किया। पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि हुनर से शिखर की ओर महिलाओं को रोजगार एवं स्वावलंबन बनाने की पहल जो केंद्रीय सूचना प्रसारण एवं खेल मंत्री ने चलाई है, उसका नारी शक्ति पूरा फायदा ले रही है। उन्होंने महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह आगे बढ़े, रोजगार कमाए और अपनी आजीविका बढ़ाएं तथा सुंदर और स्वस्थ रहकर परिवार का पालन पोषण करें। उन्होंने कहा कि यही सोच केंद्रीय सूचना प्रसारण एवं खेल मंत्री अनुराग ठाकुर की है। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण शिविर में दर्जनों युवतियां महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। उसी के मध्य नजर उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया है। एक सांसद का दायित्व सांसद निधि को अपने लोकसभा क्षेत्र में विकास के रूप में लगाना है। सांसद निधि को लोकसभा क्षेत्र की सभी पंचायतों में लगाया जा रहा है। किस पंचायत में कितना पैसा लगा है इसकी सूचना कोई भी व्यक्ति आरटीआई के माध्यम से प्राप्त कर सकता है लेकिन लोगों को आरटीआई डालने के बाद जानकारी मिले इससे पहले जिस पंचायत में विकास कार्य पर पैसा खर्च हुआ है वहां के लोग पार्टी कार्यकर्ता उस काम का बखान लोगों के बीच करें। इस अवसर पर काफी संख्या में पूर्व फौजी, क्षेत्र के ग्रामीण तथा भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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बीएमसी को मुंबई के अलग अलग इलाको में आवारा बिल्लियों (Stray Cats) की शिकायतें मिल रही हैं। ये शिकायतें दिन ब दिन बढ़ती दिख रही हैं। इस संबंध में मदद के लिए अब सामाजिक संगठनों और निजी संगठनों से आवारा बिल्लियों के टीकाकरण (Vaccination) में मदद के लिए आगे आने की अपील की गई है।
चालू वर्ष में बीएमसी ने प्रति बिल्ली नसबंदी के लिए 2,000 रुपये रखे है। बीएमसी ने इन आवारा बिल्लियों के टीकाकरण के लिए एक करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। बीएमसी का कहना है की कुत्तों की संख्या कम होने पर बिल्लियों की संख्या बढ़ जाती है।
बीएमसी ने 2019 में आवारा बिल्लियों की नसबंदी शुरू की थी। यह काम डिफेंस ऑफ एनिमल्स को दिया गया था, जो एक एनजीओ है जो देवनार में आश्रय और पराल में बॉम्बे वेटरनरी कॉलेज में कार्यक्रम चलाता है। लेकिन बीएमसी अब इस काम में और एजेंसियों को शामिल करने की मांग कर रही है।2019 से अब तक केवल 5,700 बिल्लियों की नसबंदी की गई है।
इस कार्य में बीएमसी के साथ साथ संस्थाओ को भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सबसे पहले नगर पालिका या संबंधित संस्था को ऐसे लोगों को ढूंढना होगा जो बिल्लियों को पकड़कर नसबंदी की जगह पर लाएंगे। इसके बाद नसबंदी के बाद इन्हें रखने के लिए बड़े पिंजड़े खरीदने पड़ते हैं।
टीकाकरण के बाद कम से कम पांच दिनों तक बिल्लियों को निगरानी में रखना चाहिए। इसके अलावा, कभी-कभी, लोग अपने घरों के पास नसबंदी केंद्र स्थापित करने का विरोध करते हैं।
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बीएमसी को मुंबई के अलग अलग इलाको में आवारा बिल्लियों की शिकायतें मिल रही हैं। ये शिकायतें दिन ब दिन बढ़ती दिख रही हैं। इस संबंध में मदद के लिए अब सामाजिक संगठनों और निजी संगठनों से आवारा बिल्लियों के टीकाकरण में मदद के लिए आगे आने की अपील की गई है। चालू वर्ष में बीएमसी ने प्रति बिल्ली नसबंदी के लिए दो,शून्य रुपयापये रखे है। बीएमसी ने इन आवारा बिल्लियों के टीकाकरण के लिए एक करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। बीएमसी का कहना है की कुत्तों की संख्या कम होने पर बिल्लियों की संख्या बढ़ जाती है। बीएमसी ने दो हज़ार उन्नीस में आवारा बिल्लियों की नसबंदी शुरू की थी। यह काम डिफेंस ऑफ एनिमल्स को दिया गया था, जो एक एनजीओ है जो देवनार में आश्रय और पराल में बॉम्बे वेटरनरी कॉलेज में कार्यक्रम चलाता है। लेकिन बीएमसी अब इस काम में और एजेंसियों को शामिल करने की मांग कर रही है।दो हज़ार उन्नीस से अब तक केवल पाँच,सात सौ बिल्लियों की नसबंदी की गई है। इस कार्य में बीएमसी के साथ साथ संस्थाओ को भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सबसे पहले नगर पालिका या संबंधित संस्था को ऐसे लोगों को ढूंढना होगा जो बिल्लियों को पकड़कर नसबंदी की जगह पर लाएंगे। इसके बाद नसबंदी के बाद इन्हें रखने के लिए बड़े पिंजड़े खरीदने पड़ते हैं। टीकाकरण के बाद कम से कम पांच दिनों तक बिल्लियों को निगरानी में रखना चाहिए। इसके अलावा, कभी-कभी, लोग अपने घरों के पास नसबंदी केंद्र स्थापित करने का विरोध करते हैं।
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कोविड मुक्त महिला विश्व कप के आयोजन की उम्मीद के बीच किसी भी तरह के हालात से निपटने को तैयार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के सीईओ ज्यौफ अलार्डिस ने सोमवार को कहा कि संचालन परिषद टूर्नामेंट के सुचारू आयोजन के लिए काफी हद तक इस पर निर्भर है कि खिलाड़ी समझदारी दिखाएं। महिला एकदिवसीय विश्व कप चार मार्च से शुरू होगा और न्यूजीलैंड के छह स्थलों पर खेला जाएगा। पहला मुकाबला मेजबान न्यूजीलैंड और वेस्टइंडीज के बीच होगा। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता से पहले ऑनलाइन बातचीत के दौरान अलार्डिस ने कहा, मुझे लगता है कि योजना यह होगी कि टूर्नामेंट के दौरान नियंत्रित माहौल बनाया जाए और अधिक संख्या में परीक्षण किए जाएं।
ऐसा नहीं है कि रोजाना परीक्षण किए जाएंगे। उन्होंने कहा, यह खिलाडिय़ों के जिम्मेदारी लेने पर निर्भर करता है। हम खिलाडिय़ों और टीम से कह रहे हैं कि वे समझदारी दिखाएं, ऐसी जगहों से दूर रहे, जहां से संक्रमण फैलने की संभावना है। संक्रमण फैलने की स्थिति में भी मुकाबलों का आयोजन प्रत्येक टीम में नौ खिलाडिय़ों के साथ भी किया जा सकता है, लेकिन अलार्डिस ने उम्मीद जताई कि हालात इतने खराब नहीं होंगे। अलार्डिस ने कहा, पिछले कुछ महीनों में ओमिक्रॉन प्रारूप के फैलने के बाद हमें ऐसा करना पड़ा।
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कोविड मुक्त महिला विश्व कप के आयोजन की उम्मीद के बीच किसी भी तरह के हालात से निपटने को तैयार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के सीईओ ज्यौफ अलार्डिस ने सोमवार को कहा कि संचालन परिषद टूर्नामेंट के सुचारू आयोजन के लिए काफी हद तक इस पर निर्भर है कि खिलाड़ी समझदारी दिखाएं। महिला एकदिवसीय विश्व कप चार मार्च से शुरू होगा और न्यूजीलैंड के छह स्थलों पर खेला जाएगा। पहला मुकाबला मेजबान न्यूजीलैंड और वेस्टइंडीज के बीच होगा। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता से पहले ऑनलाइन बातचीत के दौरान अलार्डिस ने कहा, मुझे लगता है कि योजना यह होगी कि टूर्नामेंट के दौरान नियंत्रित माहौल बनाया जाए और अधिक संख्या में परीक्षण किए जाएं। ऐसा नहीं है कि रोजाना परीक्षण किए जाएंगे। उन्होंने कहा, यह खिलाडिय़ों के जिम्मेदारी लेने पर निर्भर करता है। हम खिलाडिय़ों और टीम से कह रहे हैं कि वे समझदारी दिखाएं, ऐसी जगहों से दूर रहे, जहां से संक्रमण फैलने की संभावना है। संक्रमण फैलने की स्थिति में भी मुकाबलों का आयोजन प्रत्येक टीम में नौ खिलाडिय़ों के साथ भी किया जा सकता है, लेकिन अलार्डिस ने उम्मीद जताई कि हालात इतने खराब नहीं होंगे। अलार्डिस ने कहा, पिछले कुछ महीनों में ओमिक्रॉन प्रारूप के फैलने के बाद हमें ऐसा करना पड़ा।
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बद्रीनाथ (एजेंसी) :
उत्तराखंड में बदरीनाथ धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रविवार सुबह 6.15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। भगवान विष्णु को समर्पित बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को देखने के लिए देश और विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। इस अवसर पर मंदिर के मुख्य पुजारी ईश्वरी प्रसाद नंबूदिरी ने धार्मिक अनुष्ठान किया, जबकि वेदपाठियों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया।
कपाट खुलने के अवसर पर मंदिर और उसके परिसर को गेंदे के फूलों से सजाया गया था। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा पूरी तरह से शुरू हो गई है, क्योंकि इसके चारों मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। इससे पहले, तीन मई को अक्षय तृतीया के अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर के कपाट खोले गए थे, जबकि छह मई को केदारनाथ मंदिर के कपाट खुले थे। कोविड-19 महामारी के कारण पिछले दो वर्षों से चारधाम यात्रा बुरी तरह से प्रभावित रही थी, जिससे मंदिरों को कई महीनों तक श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोला जा सका था। बदरीनाथ में पूजा-अर्चना करने के लिए शनिवार देर रात से ही श्रद्धालु कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करने लगे थे।
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बद्रीनाथ : उत्तराखंड में बदरीनाथ धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रविवार सुबह छः.पंद्रह बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। भगवान विष्णु को समर्पित बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को देखने के लिए देश और विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। इस अवसर पर मंदिर के मुख्य पुजारी ईश्वरी प्रसाद नंबूदिरी ने धार्मिक अनुष्ठान किया, जबकि वेदपाठियों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया। कपाट खुलने के अवसर पर मंदिर और उसके परिसर को गेंदे के फूलों से सजाया गया था। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा पूरी तरह से शुरू हो गई है, क्योंकि इसके चारों मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। इससे पहले, तीन मई को अक्षय तृतीया के अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर के कपाट खोले गए थे, जबकि छह मई को केदारनाथ मंदिर के कपाट खुले थे। कोविड-उन्नीस महामारी के कारण पिछले दो वर्षों से चारधाम यात्रा बुरी तरह से प्रभावित रही थी, जिससे मंदिरों को कई महीनों तक श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोला जा सका था। बदरीनाथ में पूजा-अर्चना करने के लिए शनिवार देर रात से ही श्रद्धालु कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करने लगे थे।
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मे उसकी निवृत्ति ही मानी गई है । १ ईश्वर गन्तव्य है और जीव गन्ता; २ जिस प्रकार सर्वगतवन्हिविद्युदादिरूप से मेघादि मे उपलब्ध होती है, उसी प्रकार सर्वव्यापी भगवान् अपनी साधारण शक्ति एव महत्ता से उपासकों की भावनाओ को पूर्ण करने के लिए दृग्गोचर भी हो जाता है - भावना - प्रकर्ष से वह भक्तो के लिये दृश्यमान भी हो जाता है । ३ अतः यह सिद्ध हो गया कि श्री रामाख्यपरब्रह्मसर्वनियन्ता, सर्व स्वामी, एव सर्वशेषी है, उनसे भिन्न पदार्थ उनके शेषत्व को ही उपपन्न होते है ।' 'अन्तर्यामी' परमात्मा ही है, जीव नहीं । ५ 'भूतयोनि' परमात्मा ही हैं, अन्य नही । 'वैश्वानर' परमात्मा ही है, अन्य नही । 'पुरुषोत्तम' श्रीराम ही हैं, अन्य नही । 'भ्वाद्यायतन' परमात्मा ही है, जीव नहीं । 'भूमा' परमात्मा ही है, प्राणादि विशिष्ट जीवात्मा नही । 'अक्षर' परमात्मा ही है, प्रकृति नही । 'पुरुष' परमात्मा ही है, जीव नही । 'दहराकाश' परमात्मा ही है, जीव नही । मुक्त जीव भी दहराकाश नही, क्योकि परमात्मा के ज्ञान एवं उनकी उपासना से ही जीव को उनका साधर्म्य प्राप्त होता है, जीव सभी अवस्थानो मे परमात्मा के ही अधीन है। 'गुष्ठमात्र पुरुष परमात्मा ही है; प्रपन्न जनो के मनोरथ को पूर्ण करने के लिए परब्रह्म स्वेच्छया चतुर्व्यूह रूप से जगत् की रक्षा करता है, अतः सकर्पणादि रूपो मे उसका होता ही है । ६
जीवो द्वारा जागरिताद्यवस्थाओ मे किए गए दोष 'अन्तर्यामी' होने पर भी ब्रह्म को सम्भव नहीं होते ।
त्रिरत्नी मे " भगवदाचार्य ने ईश्वर तत्व का कुछ और विस्तार से विवेचन किया है। उनके मत से ईश्वर के ५ रूप हैं - पर, व्यूह, विभव, अन्तर्यामी और । द्विभुज भगवान् श्रीराम जी पर है, वासुदेव-कर्षणप्रद्युम्न और अनिरुद्ध उनके व्यूह रूप हैं, वासुदेव मे ज्ञान-बल- ऐश्वर्य - वीर्य-शक्ति आदि छह गुण रहते है, सकर्षण मे ज्ञान और बल, प्रद्युम्न मे ऐश्वर्य और वीर्य तथा अनिरुद्ध मे शक्ति और तेजादि गुण रहते है ।
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मे उसकी निवृत्ति ही मानी गई है । एक ईश्वर गन्तव्य है और जीव गन्ता; दो जिस प्रकार सर्वगतवन्हिविद्युदादिरूप से मेघादि मे उपलब्ध होती है, उसी प्रकार सर्वव्यापी भगवान् अपनी साधारण शक्ति एव महत्ता से उपासकों की भावनाओ को पूर्ण करने के लिए दृग्गोचर भी हो जाता है - भावना - प्रकर्ष से वह भक्तो के लिये दृश्यमान भी हो जाता है । तीन अतः यह सिद्ध हो गया कि श्री रामाख्यपरब्रह्मसर्वनियन्ता, सर्व स्वामी, एव सर्वशेषी है, उनसे भिन्न पदार्थ उनके शेषत्व को ही उपपन्न होते है ।' 'अन्तर्यामी' परमात्मा ही है, जीव नहीं । पाँच 'भूतयोनि' परमात्मा ही हैं, अन्य नही । 'वैश्वानर' परमात्मा ही है, अन्य नही । 'पुरुषोत्तम' श्रीराम ही हैं, अन्य नही । 'भ्वाद्यायतन' परमात्मा ही है, जीव नहीं । 'भूमा' परमात्मा ही है, प्राणादि विशिष्ट जीवात्मा नही । 'अक्षर' परमात्मा ही है, प्रकृति नही । 'पुरुष' परमात्मा ही है, जीव नही । 'दहराकाश' परमात्मा ही है, जीव नही । मुक्त जीव भी दहराकाश नही, क्योकि परमात्मा के ज्ञान एवं उनकी उपासना से ही जीव को उनका साधर्म्य प्राप्त होता है, जीव सभी अवस्थानो मे परमात्मा के ही अधीन है। 'गुष्ठमात्र पुरुष परमात्मा ही है; प्रपन्न जनो के मनोरथ को पूर्ण करने के लिए परब्रह्म स्वेच्छया चतुर्व्यूह रूप से जगत् की रक्षा करता है, अतः सकर्पणादि रूपो मे उसका होता ही है । छः जीवो द्वारा जागरिताद्यवस्थाओ मे किए गए दोष 'अन्तर्यामी' होने पर भी ब्रह्म को सम्भव नहीं होते । त्रिरत्नी मे " भगवदाचार्य ने ईश्वर तत्व का कुछ और विस्तार से विवेचन किया है। उनके मत से ईश्वर के पाँच रूप हैं - पर, व्यूह, विभव, अन्तर्यामी और । द्विभुज भगवान् श्रीराम जी पर है, वासुदेव-कर्षणप्रद्युम्न और अनिरुद्ध उनके व्यूह रूप हैं, वासुदेव मे ज्ञान-बल- ऐश्वर्य - वीर्य-शक्ति आदि छह गुण रहते है, सकर्षण मे ज्ञान और बल, प्रद्युम्न मे ऐश्वर्य और वीर्य तथा अनिरुद्ध मे शक्ति और तेजादि गुण रहते है ।
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यह एक युवती का रूप धारण करने लगती है । भद्राचलम् से राजमहेन्द्री तक हम इसे एक दुलहिन के रूप रूप में देख सकते हैं। राजमहेन्द्री के समीप यह दो मील से तो कम चौड़ी न होगी। राजमहेन्द्री से पांच मील पर धक्लेश्वर है जहाँ गोदावरी का पाट चार मील हो जाता है, भले ही पाट का तीन चौथाई भाग तीन टापुत्रों से घिरा हुआ है। ऐसे टापू तो इधर बहुत हैं- -कुछ परम्पराओं के समान स्थायी, कुछ नित-नित के स्वप्नों के समान बनने बिगड़ने के अभ्यस्त । प्रत्येक टापू लंका कहलाता है। स्थायी टापुओं पर खेती भी खूब होती है। कहते हैं कि गोदावरी को गोतम ऋषि शिव की जटाओं से निकाल कर लाये थे और प्राचीन काल में यह सात धाराओं में बंट कर सागर में गिरती थी । आज भी परम्पराओं द्वारा अभिनन्दित तट पर स्थित वे सातों स्थल सात की स्मृति दिलाते
भले ही गोदावरी अलग ही दो स्थानों पर सागर में प्रवेश करती है। उन सातों स्थलों पर आज भी अनेक लोग सन्तान प्राप्ति की कामना से स्नान करने जाते हैं। इस सप्त-सागर यात्रा कहते हैं। इसके अतिरिक्त हर तेरहवें वर्ष राजमहेन्द्री और गोदावरी के तट पर स्थित दूसरे नगरों में पुष्करम् उत्सव मनाया जाता है, जब शत-शत स्त्री-पुरुष गोदावरी स्नान के लिए उमड़ पड़ते हैं ।
एक जनश्रुति यह भी है कि प्राचीन काल में सात ऋषियों ने अपनी असीम शक्ति द्वारा गोदावरी को सात धाराओं में बढ़ने के लिए बाध्य किया था । अब उन ऋषियों को यह श्रेय कोई देना भी चाहे तो कैसे दें। अब तो गोदावरी की केवल दो ही धाराएँ रह गई हैं और वे भी पहले स्थलों से
हट कर ।
धवलेश्वर तक तो गोदावरी का पूर्व रूप ही नज़र आता है। फिर यहाँ से गोमती गोदावरी या पूर्वी गोदावरी अंजारम, यागाम और निल्लापल्ली को छूती हुई 'प्वाइंट गोदावरी' के स्थान पर सागर में प्रवेश करती है ; और
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यह एक युवती का रूप धारण करने लगती है । भद्राचलम् से राजमहेन्द्री तक हम इसे एक दुलहिन के रूप रूप में देख सकते हैं। राजमहेन्द्री के समीप यह दो मील से तो कम चौड़ी न होगी। राजमहेन्द्री से पांच मील पर धक्लेश्वर है जहाँ गोदावरी का पाट चार मील हो जाता है, भले ही पाट का तीन चौथाई भाग तीन टापुत्रों से घिरा हुआ है। ऐसे टापू तो इधर बहुत हैं- -कुछ परम्पराओं के समान स्थायी, कुछ नित-नित के स्वप्नों के समान बनने बिगड़ने के अभ्यस्त । प्रत्येक टापू लंका कहलाता है। स्थायी टापुओं पर खेती भी खूब होती है। कहते हैं कि गोदावरी को गोतम ऋषि शिव की जटाओं से निकाल कर लाये थे और प्राचीन काल में यह सात धाराओं में बंट कर सागर में गिरती थी । आज भी परम्पराओं द्वारा अभिनन्दित तट पर स्थित वे सातों स्थल सात की स्मृति दिलाते भले ही गोदावरी अलग ही दो स्थानों पर सागर में प्रवेश करती है। उन सातों स्थलों पर आज भी अनेक लोग सन्तान प्राप्ति की कामना से स्नान करने जाते हैं। इस सप्त-सागर यात्रा कहते हैं। इसके अतिरिक्त हर तेरहवें वर्ष राजमहेन्द्री और गोदावरी के तट पर स्थित दूसरे नगरों में पुष्करम् उत्सव मनाया जाता है, जब शत-शत स्त्री-पुरुष गोदावरी स्नान के लिए उमड़ पड़ते हैं । एक जनश्रुति यह भी है कि प्राचीन काल में सात ऋषियों ने अपनी असीम शक्ति द्वारा गोदावरी को सात धाराओं में बढ़ने के लिए बाध्य किया था । अब उन ऋषियों को यह श्रेय कोई देना भी चाहे तो कैसे दें। अब तो गोदावरी की केवल दो ही धाराएँ रह गई हैं और वे भी पहले स्थलों से हट कर । धवलेश्वर तक तो गोदावरी का पूर्व रूप ही नज़र आता है। फिर यहाँ से गोमती गोदावरी या पूर्वी गोदावरी अंजारम, यागाम और निल्लापल्ली को छूती हुई 'प्वाइंट गोदावरी' के स्थान पर सागर में प्रवेश करती है ; और
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जो कठिन अत्यन्त है और भदश्य है अन्य को, जो नहीं देख! कोई तुमको दिखाया रूप को ।।
हे पाण्डुनन्दन रूप यह इस लोक में दुर्लभ है अति, न वेद अध्ययन से तथा तप और कोई दान अति । कोई क्रिया से भी नहीं कोई मुझे देखे जगत, तेरे सिवा सम्भव नहीं कि रूप देखे कोई जगत ।।
दर्शन कर व्यथित होवो नहीं,
मेरे भयंकर रूप
हे धनंजय मूढता प्रकटो नहीं । हे प्रीतिवाला पुरुष पुनि उस रूप का दर्शन करो, अर्जुन पुनः दर्शन करो ॥ मेरे चतुर्भुज रूपका
संजय उवाचऐसो कहि अर्जुन को नृप, पूर्व रूप दिखाया । सौम्य रूप से अभय करि धीरज दियो बंधाय ।।
विलख तुम्हारा सौम्य रूप इस मानव तन में है माधव । भव मैं निर्भय शान्त हुआ औौ ठिकाने मन माधव ।।
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जो कठिन अत्यन्त है और भदश्य है अन्य को, जो नहीं देख! कोई तुमको दिखाया रूप को ।। हे पाण्डुनन्दन रूप यह इस लोक में दुर्लभ है अति, न वेद अध्ययन से तथा तप और कोई दान अति । कोई क्रिया से भी नहीं कोई मुझे देखे जगत, तेरे सिवा सम्भव नहीं कि रूप देखे कोई जगत ।। दर्शन कर व्यथित होवो नहीं, मेरे भयंकर रूप हे धनंजय मूढता प्रकटो नहीं । हे प्रीतिवाला पुरुष पुनि उस रूप का दर्शन करो, अर्जुन पुनः दर्शन करो ॥ मेरे चतुर्भुज रूपका संजय उवाचऐसो कहि अर्जुन को नृप, पूर्व रूप दिखाया । सौम्य रूप से अभय करि धीरज दियो बंधाय ।। विलख तुम्हारा सौम्य रूप इस मानव तन में है माधव । भव मैं निर्भय शान्त हुआ औौ ठिकाने मन माधव ।।
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शाहजहांपुर. दुष्कर्म के बयान दर्ज कराने के बाद भी चिन्मयानंद की गिरफ्तारी न होने से छात्रा आहत है। उसने जल्द गिरफ्तारी न होने पर आत्मदाह की चेतावनी दी है। वहीं, छात्रा को लेकर उसके पिता प्रयागराज रवाना हो गए हैं। जहां वह अपने वकीलों को SIT की अब तक की कार्रवाई के बारे में बताएंगे। साथ ही हाईकोर्ट में आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चा करेंगे।
16 सितंबर को छात्रा ने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम की कोर्ट में 164 के बयान दर्ज कराए थे। उसके बाद से किसी भी समय चिन्मयानंद की गिरफ्तारी के संभावनाएं बन रही थीं, लेकिन दो दिन बाद भी SIT की ओर से कोई कार्रवाई न होते देख छात्रा व उसके परिवार का धैर्य टूटने लगा है।
मीडिया से बातचीत में छात्रा ने कहा कि अगर चिन्मयानंद गिरफ्तार न हुए तो वह आत्मदाह कर लेगी। उसका कहना है कि SIT कार्रवाई करने में लापरवाही बरत रही है।
छात्रा अपने पिता व भाई के साथ कड़ी सुरक्षा में प्रयागराज रवाना हो गई है। छात्रा के पिता ने बताया कि वह वहां पर अपने वकीलों से मिलेंगे। उनको अब तक की SIT की जांच के बारे में बताएंगे। उसके बाद तय करेंगे कि आगे क्या करना है। छात्रा के पिता ने बताया कि उन लोगों को इस मामले में क्या चल रहा है कोई कुछ नहीं बता रहा। SIT के अधिकारी भी कोई सही जवाब नहीं दे रहे हैं।
जब मेरी बेटी के बयान हो चुके हैं तो चिन्मयानंद को गिरफ्तार करने में देरी क्यों हो रही है। आत्मदाह को लेकर बेटी ने बयान दिया है, लेकिन इस पर अब हम और कुछ ज्यादा नहीं कहना चाहते।
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शाहजहांपुर. दुष्कर्म के बयान दर्ज कराने के बाद भी चिन्मयानंद की गिरफ्तारी न होने से छात्रा आहत है। उसने जल्द गिरफ्तारी न होने पर आत्मदाह की चेतावनी दी है। वहीं, छात्रा को लेकर उसके पिता प्रयागराज रवाना हो गए हैं। जहां वह अपने वकीलों को SIT की अब तक की कार्रवाई के बारे में बताएंगे। साथ ही हाईकोर्ट में आगे की कार्रवाई को लेकर चर्चा करेंगे। सोलह सितंबर को छात्रा ने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट प्रथम की कोर्ट में एक सौ चौंसठ के बयान दर्ज कराए थे। उसके बाद से किसी भी समय चिन्मयानंद की गिरफ्तारी के संभावनाएं बन रही थीं, लेकिन दो दिन बाद भी SIT की ओर से कोई कार्रवाई न होते देख छात्रा व उसके परिवार का धैर्य टूटने लगा है। मीडिया से बातचीत में छात्रा ने कहा कि अगर चिन्मयानंद गिरफ्तार न हुए तो वह आत्मदाह कर लेगी। उसका कहना है कि SIT कार्रवाई करने में लापरवाही बरत रही है। छात्रा अपने पिता व भाई के साथ कड़ी सुरक्षा में प्रयागराज रवाना हो गई है। छात्रा के पिता ने बताया कि वह वहां पर अपने वकीलों से मिलेंगे। उनको अब तक की SIT की जांच के बारे में बताएंगे। उसके बाद तय करेंगे कि आगे क्या करना है। छात्रा के पिता ने बताया कि उन लोगों को इस मामले में क्या चल रहा है कोई कुछ नहीं बता रहा। SIT के अधिकारी भी कोई सही जवाब नहीं दे रहे हैं। जब मेरी बेटी के बयान हो चुके हैं तो चिन्मयानंद को गिरफ्तार करने में देरी क्यों हो रही है। आत्मदाह को लेकर बेटी ने बयान दिया है, लेकिन इस पर अब हम और कुछ ज्यादा नहीं कहना चाहते।
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उज्जैन। बीती रात आगर रोड स्थित दाल मिल चौराहा के पास कपास खली कारखाने में भीषण आग लग गई उसमें 65 लाख का नुकसान हुआ है और ढाई घंटे से अधिक का समय आग बुझाने में लगा। आगर रोड इंदिरा नगर चौराहे के सामने दाल मिल के पास कपास्या खली बनाने की फैक्ट्री में रात्रि 1 बजे आग लगी। शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी थी। जब वहाँ के कर्मचारी ने धुआं उठता देखा तो फायर ब्रिगेड को सूचना दी। प्रदीप इंटरप्राइजेज की कपास्या खली बनाने की फैक्ट्री है, यहाँ रात्रि में कर्मचारी भी रहता है। कर्मचारी की सूचना के बाद फायर ब्रिगेड की टीम वहाँ पहुँची। आग लगे को एक घंटा हो चुका था इसलिए पूरी फैक्ट्री में धुआं घिर चुका था, इसको देखते हुए फायर ब्रिगेड के प्रभारी फायर ऑफिसर पी. सी. यादव ने वहाँ जैसी भी भेजी।
फायर ब्रिगेड के कर्मचारी उमेश सिंह बेस एवं टीम ने पहले फैक्ट्री की दीवार तोड़ी और धुएं को बाहर किया। इसके बाद आग बुझाने का काम किया। आग इतनी भीषण थी कि 12 वाटर लारी पानी आग बुझाने में लगा और ढाई से तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। बताया जा रहा है कि इस आग में फैक्ट्री मालिक को करीब 60 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। कल से जैसे ही गर्मी का मौसम शुरू हुआ है, वैसे ही 24 घंटे में 4 स्थानों पर आग लग चुकी है। इनमें निनोरा, रातडिय़ा एवं एक अन्य स्थान तथा बीती रात में दाल मिल चौराहे में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी। अब गर्मी का मौसम जैसे-जैसे बढ़ेगा आगजनी की घटनाएं भी बढ़ेगी। लाखों रुपए का नुकसान इस बड़ी आगजनी में हुआ है तथा काफी सामान जल गया। Share:
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उज्जैन। बीती रात आगर रोड स्थित दाल मिल चौराहा के पास कपास खली कारखाने में भीषण आग लग गई उसमें पैंसठ लाख का नुकसान हुआ है और ढाई घंटे से अधिक का समय आग बुझाने में लगा। आगर रोड इंदिरा नगर चौराहे के सामने दाल मिल के पास कपास्या खली बनाने की फैक्ट्री में रात्रि एक बजे आग लगी। शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी थी। जब वहाँ के कर्मचारी ने धुआं उठता देखा तो फायर ब्रिगेड को सूचना दी। प्रदीप इंटरप्राइजेज की कपास्या खली बनाने की फैक्ट्री है, यहाँ रात्रि में कर्मचारी भी रहता है। कर्मचारी की सूचना के बाद फायर ब्रिगेड की टीम वहाँ पहुँची। आग लगे को एक घंटा हो चुका था इसलिए पूरी फैक्ट्री में धुआं घिर चुका था, इसको देखते हुए फायर ब्रिगेड के प्रभारी फायर ऑफिसर पी. सी. यादव ने वहाँ जैसी भी भेजी। फायर ब्रिगेड के कर्मचारी उमेश सिंह बेस एवं टीम ने पहले फैक्ट्री की दीवार तोड़ी और धुएं को बाहर किया। इसके बाद आग बुझाने का काम किया। आग इतनी भीषण थी कि बारह वाटर लारी पानी आग बुझाने में लगा और ढाई से तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। बताया जा रहा है कि इस आग में फैक्ट्री मालिक को करीब साठ लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। कल से जैसे ही गर्मी का मौसम शुरू हुआ है, वैसे ही चौबीस घंटाटे में चार स्थानों पर आग लग चुकी है। इनमें निनोरा, रातडिय़ा एवं एक अन्य स्थान तथा बीती रात में दाल मिल चौराहे में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी। अब गर्मी का मौसम जैसे-जैसे बढ़ेगा आगजनी की घटनाएं भी बढ़ेगी। लाखों रुपए का नुकसान इस बड़ी आगजनी में हुआ है तथा काफी सामान जल गया। Share:
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नई दिल्ली/टीम डिजिटल। छत्तीसगढ़ में अब शराब की होम डिलीवरी होगी। ये खुशखबरी खुद राज्य सरकार ने शराब प्रेमियों की बढ़ती डिमांड को देख कर दी है। अब शराब मोबाइल एप और वेबसाइट के जरिए घर मंगाई जा सकेगी।
बताया जा रहा है कि इस बारे में छत्तीसगढ़ सरकार ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए राज्य की शराब दुकानों को संचालित करने के निर्देश दिए है। राज्य की सभी शराब की दुकानें छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन द्वारा संचालित की जाती हैं।
दूसरे राज्यों से सबक लेने हुए राज्य में अब शराब डिलीवरी बॉय के द्वारा घर-घर आर्डर पर भिजवाई जाएगी। फिलहाल ये सुविधा राज्य के ग्रीन जोन में शुरू की गई है।
बताया जा रहा है कि इस बारे में वेबसाइट पर जा कर और गूगल प्ले से एप डाउनलोड कर फ़ोन से बुकिंग दी जा सकती है। लेकिन इसके लिए ग्राहक को अपना पहले पंजीकरण करवाना होगा। इसके लिए ग्राहक को ऑनलाइन अपने फ़ोन नंबर, आधार नंबर और पूरा पता देना होगा। इसके बाद ओटीपी से नंबर कंफ़र्म किया जायेगा। इसके बाद ग्राहक को अपने आस-पास के ठेके से शराब बुक करनी होगी।
यहां ये भी सुविधा दी गई है कि एप और वेबसाइट पर एक लिस्ट है जिसमें ग्राहक के आस-पास की सभी दुकानें और उनका शराब ब्रांड की लिस्ट के उनके मूल्य के साथ मिलेगी। जहां से ग्राहक अपनी जरुरत के हिसाब से बुकिंग करा सकता है।
बता दें, 3 मई से देश के कई राज्यों में शराब की बिक्री शुरू की गई थी लेकिन लोगों ने सारे नियम ताक पर रख दिए और कोरोना के डर से बेखौंफ़ लोगों ने शराब लेने के लिए लंबी लाइनें लगा दी। जिसके बाद पुलिस को ठेके बंद करवाने पड़े। इस तरह की लापरवाही न हो इसको देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने ऑनलाइन शराब की बुकिंग का तरीका निकाला है।
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नई दिल्ली/टीम डिजिटल। छत्तीसगढ़ में अब शराब की होम डिलीवरी होगी। ये खुशखबरी खुद राज्य सरकार ने शराब प्रेमियों की बढ़ती डिमांड को देख कर दी है। अब शराब मोबाइल एप और वेबसाइट के जरिए घर मंगाई जा सकेगी। बताया जा रहा है कि इस बारे में छत्तीसगढ़ सरकार ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए राज्य की शराब दुकानों को संचालित करने के निर्देश दिए है। राज्य की सभी शराब की दुकानें छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन द्वारा संचालित की जाती हैं। दूसरे राज्यों से सबक लेने हुए राज्य में अब शराब डिलीवरी बॉय के द्वारा घर-घर आर्डर पर भिजवाई जाएगी। फिलहाल ये सुविधा राज्य के ग्रीन जोन में शुरू की गई है। बताया जा रहा है कि इस बारे में वेबसाइट पर जा कर और गूगल प्ले से एप डाउनलोड कर फ़ोन से बुकिंग दी जा सकती है। लेकिन इसके लिए ग्राहक को अपना पहले पंजीकरण करवाना होगा। इसके लिए ग्राहक को ऑनलाइन अपने फ़ोन नंबर, आधार नंबर और पूरा पता देना होगा। इसके बाद ओटीपी से नंबर कंफ़र्म किया जायेगा। इसके बाद ग्राहक को अपने आस-पास के ठेके से शराब बुक करनी होगी। यहां ये भी सुविधा दी गई है कि एप और वेबसाइट पर एक लिस्ट है जिसमें ग्राहक के आस-पास की सभी दुकानें और उनका शराब ब्रांड की लिस्ट के उनके मूल्य के साथ मिलेगी। जहां से ग्राहक अपनी जरुरत के हिसाब से बुकिंग करा सकता है। बता दें, तीन मई से देश के कई राज्यों में शराब की बिक्री शुरू की गई थी लेकिन लोगों ने सारे नियम ताक पर रख दिए और कोरोना के डर से बेखौंफ़ लोगों ने शराब लेने के लिए लंबी लाइनें लगा दी। जिसके बाद पुलिस को ठेके बंद करवाने पड़े। इस तरह की लापरवाही न हो इसको देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने ऑनलाइन शराब की बुकिंग का तरीका निकाला है।
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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पंजाब कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी की मुखालफत करने वालों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इस कड़ी में पहली गाज प्रदेश यूथ कांग्रेस के पूर्व महासचिव सुखविंदर डैनी पर गिरी है।
प्रदेश कांग्रेस अनुशासनात्मक कमेटी ने डैनी की प्राथमिक सदस्यता सस्पेंड कर दी है। साथ ही उन्हें नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उन्हें पार्टी से निकाल दिया जाए। कमेटी के चेयरमैन जीके चतरथ ने इसकी पुष्टि की है।
डैनी पिछले लोकसभा चुनाव में फरीदकोट से उम्मीदवार थे। इस बार भी उन्होंने टिकट मांगा था, पर पार्टी ने जोगिंदर सिंह पंजगराईं को उम्मीदवार बनाया।
रोष में डैनी ने आजाद नामांकन कर दिया। उसकेबाद पार्टी उम्मीदवार पंजगराईं और प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ बयान दिया। हालांकि बाद में उन्होंने नामांकन वापस ले लिया था।
जीके चतरथ ने बताया कि उस समय भी डैनी को नोटिस दिया गया था कि वह जवाब दें कि उन्होंने ऐसा पार्टी विरोधी कदम क्यों उठाया। लेकिन डैनी का जवाब था कि वह 16 मई तक कुछ नहीं बोलेंगे।
इसे संतोषजनक जवाब नहीं माना गया। इसके बाद शुक्रवार को अनुशासनात्मक कमेटी की मीटिंग में उनकी सदस्यता सस्पेंड करने का फैसला किया गया।
चतरथ ने कहा कि कमेटी की अगली मीटिंग दस दिनों बाद होगी। इस दौरान सभी लोक सभा हलकों से फीडबैक लिया जाएगा कि कहां-कहां किन नेताओं ने पार्टी उम्मीदवारों की मुखालफत की। अगली मीटिंग में उस पर कार्रवाई का फैसला लिया जाएगा। मीटिंग में गुरकंवल कौर, जसवंत सिंह व भाग सिंह भी मौजूद थे।
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पंजाब कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी की मुखालफत करने वालों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इस कड़ी में पहली गाज प्रदेश यूथ कांग्रेस के पूर्व महासचिव सुखविंदर डैनी पर गिरी है। प्रदेश कांग्रेस अनुशासनात्मक कमेटी ने डैनी की प्राथमिक सदस्यता सस्पेंड कर दी है। साथ ही उन्हें नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उन्हें पार्टी से निकाल दिया जाए। कमेटी के चेयरमैन जीके चतरथ ने इसकी पुष्टि की है। डैनी पिछले लोकसभा चुनाव में फरीदकोट से उम्मीदवार थे। इस बार भी उन्होंने टिकट मांगा था, पर पार्टी ने जोगिंदर सिंह पंजगराईं को उम्मीदवार बनाया। रोष में डैनी ने आजाद नामांकन कर दिया। उसकेबाद पार्टी उम्मीदवार पंजगराईं और प्रदेश कांग्रेस प्रधान प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ बयान दिया। हालांकि बाद में उन्होंने नामांकन वापस ले लिया था। जीके चतरथ ने बताया कि उस समय भी डैनी को नोटिस दिया गया था कि वह जवाब दें कि उन्होंने ऐसा पार्टी विरोधी कदम क्यों उठाया। लेकिन डैनी का जवाब था कि वह सोलह मई तक कुछ नहीं बोलेंगे। इसे संतोषजनक जवाब नहीं माना गया। इसके बाद शुक्रवार को अनुशासनात्मक कमेटी की मीटिंग में उनकी सदस्यता सस्पेंड करने का फैसला किया गया। चतरथ ने कहा कि कमेटी की अगली मीटिंग दस दिनों बाद होगी। इस दौरान सभी लोक सभा हलकों से फीडबैक लिया जाएगा कि कहां-कहां किन नेताओं ने पार्टी उम्मीदवारों की मुखालफत की। अगली मीटिंग में उस पर कार्रवाई का फैसला लिया जाएगा। मीटिंग में गुरकंवल कौर, जसवंत सिंह व भाग सिंह भी मौजूद थे।
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प्रयागराज में उमेशपाल की हत्या की साजिश बरेली सेंट्रल जेल में रची गई। प्रयागराज में अतीक अहमद और इसका भाई अशरफ भी मारे जा चुके हैं। लेकिन, बरेली जेल प्रकरण में पुलिस ने जेल में बंद 8 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें जेल के दोनों सिपाही शिव हरि अवस्थी और मनोज गोड़ भी शामिल हैं। वहीं अशरफ का साला सद्दाम फरार है, जिस पर एक लाख का इनाम घोषित है। जबकि पूर्व विधायक अशरफ मारा जा चुका है।
24 फरवरी को प्रयागराज में उमेश पाल की हत्या गोलियां और बम बरसाकर कर दी। हत्या की साजिश यूपी के बाहुबली पूर्व सांसद अतीक और इसके भाई अशरफ पर लगी। अतीक गुजरात की साबरमती जेल में बंद था, जबकि अशरफ बरेली की सेंट्रल जेल में बंद था। हत्या में अतीक का बेटा असद भी शामिल रहा। हत्या से 13 दिन पहले यानी 11 फरवरी को बरेली जेल में 9 लोग असद की आईडी पर अशरफ से मिले थे, जिनमें शूटर भी शामिल थे।
बरेली जेल से वॉट्सऐप कॉल की गई, प्रयागराज में पकड़े गए आरोपी के मोबाइल नंबर से इसकी पुष्टि हुई। जिसके बाद 27 फरवरी को बरेली जेल में डीएम शिवाकांत द्विवेदी और डीआईजी अखिलेश चौरसिया ने छापा मारा, पता चला कि अशरफ से अवैध तरह से मुलाकात हुई। 6 मार्च को बरेली के बिथरी चैनपुर थाने में अशरफ, जेल अधिकारी, जेल कर्मचारी, सिपाही, सद्दाम ओर अन्य पर केस दर्ज हुआ।
बाहुबली अतीक अहमद निवासी चकिया मोहल्ला धूमनगंज प्रयागराज 1 जनवरी 2019 को देवरिया जेल से बरेली सेंट्रल जेल में प्रशासनिक आधार पर लाया गया। 19 अप्रैल 2019 को फिर प्रशासनिक आधार पर नैनी जेल इलाहाबाद भेज दिया गया था। उमेशपाल अपहरण केस में अतीक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
अतीक का भाई खालिद असीम उर्फ अशरफ 11 जुलाई 2020 को नैनी जेल प्रयागराज से बरेली सेंट्रल जेल लाया गया था। अतीक के जाने के बाद अशरफ ढाई साल से इस जेल में बंद रहा था। 14 साल पहले राजू पाल हत्याकांड में अतीक और अशरफ मुख्य आरोपी थे, लेकिन दोनों मारे जा चुके हैं।
अशरफ का साला सद्दाम अपने साथी लल्लागद्दी और अन्य साथियों को लेकर बरेली जेल में अशरफ से लगातार मुलाकात करता रहा। 11 फरवरी को बरेली जेल में अतीक के बेटे असद समेत 9 लोग बरेली जेल में अशरफ से मिले, जिनमें शूटर विजय उर्फ उस्मान चौधरी, गुड्डू मुस्लिम और गुलाम भी शामिल था। बरेली जेल में अशरफ से शूटरों ने मुलाकात की। उसके 13 दिन बाद 24 फरवरी को प्रयागराज में पुलिस सुरक्षा में उमेश पाल की हत्या कर दी।
एसआईटी ने सीआरपीसी की धारा 173 (6) के तहत चार्जशीट दाखिल की है। जेल के सिपाही शिवहरि अवस्थी और मनोज गौड़, कैंटीन के सामान के सप्लायर ऑटो ड्राइवर दयाराम उर्फ नन्हें, राशिद अली, फुरकान नवी खान, प्रापर्टी डीलर फरहद उर्फ गुड्डू, मोहम्मद रजा उर्फ लल्ला गद्दी, आरिफ के खिलाफ चार्जशीट लगाई गई है। नामजद आरोपियों में अशरफ मारा जा चुका है, जबकि सद्दाम फरार है।
एसएसपी प्रभाकर चौधरी का कहना है कि जेल प्रकरण में 8 लोगों पर चार्जशीट दाखिल की गई है। यह सभी आरोपी जेल में बंद है। फरार सद्दाम की तलाश में पुलिस टीमें काम कर रही हैं। पूरे साक्ष्य के आधार पर आरोपियों पर चार्जशीट लगाई गई है।
This website follows the DNPA Code of Ethics.
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प्रयागराज में उमेशपाल की हत्या की साजिश बरेली सेंट्रल जेल में रची गई। प्रयागराज में अतीक अहमद और इसका भाई अशरफ भी मारे जा चुके हैं। लेकिन, बरेली जेल प्रकरण में पुलिस ने जेल में बंद आठ लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें जेल के दोनों सिपाही शिव हरि अवस्थी और मनोज गोड़ भी शामिल हैं। वहीं अशरफ का साला सद्दाम फरार है, जिस पर एक लाख का इनाम घोषित है। जबकि पूर्व विधायक अशरफ मारा जा चुका है। चौबीस फरवरी को प्रयागराज में उमेश पाल की हत्या गोलियां और बम बरसाकर कर दी। हत्या की साजिश यूपी के बाहुबली पूर्व सांसद अतीक और इसके भाई अशरफ पर लगी। अतीक गुजरात की साबरमती जेल में बंद था, जबकि अशरफ बरेली की सेंट्रल जेल में बंद था। हत्या में अतीक का बेटा असद भी शामिल रहा। हत्या से तेरह दिन पहले यानी ग्यारह फरवरी को बरेली जेल में नौ लोग असद की आईडी पर अशरफ से मिले थे, जिनमें शूटर भी शामिल थे। बरेली जेल से वॉट्सऐप कॉल की गई, प्रयागराज में पकड़े गए आरोपी के मोबाइल नंबर से इसकी पुष्टि हुई। जिसके बाद सत्ताईस फरवरी को बरेली जेल में डीएम शिवाकांत द्विवेदी और डीआईजी अखिलेश चौरसिया ने छापा मारा, पता चला कि अशरफ से अवैध तरह से मुलाकात हुई। छः मार्च को बरेली के बिथरी चैनपुर थाने में अशरफ, जेल अधिकारी, जेल कर्मचारी, सिपाही, सद्दाम ओर अन्य पर केस दर्ज हुआ। बाहुबली अतीक अहमद निवासी चकिया मोहल्ला धूमनगंज प्रयागराज एक जनवरी दो हज़ार उन्नीस को देवरिया जेल से बरेली सेंट्रल जेल में प्रशासनिक आधार पर लाया गया। उन्नीस अप्रैल दो हज़ार उन्नीस को फिर प्रशासनिक आधार पर नैनी जेल इलाहाबाद भेज दिया गया था। उमेशपाल अपहरण केस में अतीक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। अतीक का भाई खालिद असीम उर्फ अशरफ ग्यारह जुलाई दो हज़ार बीस को नैनी जेल प्रयागराज से बरेली सेंट्रल जेल लाया गया था। अतीक के जाने के बाद अशरफ ढाई साल से इस जेल में बंद रहा था। चौदह साल पहले राजू पाल हत्याकांड में अतीक और अशरफ मुख्य आरोपी थे, लेकिन दोनों मारे जा चुके हैं। अशरफ का साला सद्दाम अपने साथी लल्लागद्दी और अन्य साथियों को लेकर बरेली जेल में अशरफ से लगातार मुलाकात करता रहा। ग्यारह फरवरी को बरेली जेल में अतीक के बेटे असद समेत नौ लोग बरेली जेल में अशरफ से मिले, जिनमें शूटर विजय उर्फ उस्मान चौधरी, गुड्डू मुस्लिम और गुलाम भी शामिल था। बरेली जेल में अशरफ से शूटरों ने मुलाकात की। उसके तेरह दिन बाद चौबीस फरवरी को प्रयागराज में पुलिस सुरक्षा में उमेश पाल की हत्या कर दी। एसआईटी ने सीआरपीसी की धारा एक सौ तिहत्तर के तहत चार्जशीट दाखिल की है। जेल के सिपाही शिवहरि अवस्थी और मनोज गौड़, कैंटीन के सामान के सप्लायर ऑटो ड्राइवर दयाराम उर्फ नन्हें, राशिद अली, फुरकान नवी खान, प्रापर्टी डीलर फरहद उर्फ गुड्डू, मोहम्मद रजा उर्फ लल्ला गद्दी, आरिफ के खिलाफ चार्जशीट लगाई गई है। नामजद आरोपियों में अशरफ मारा जा चुका है, जबकि सद्दाम फरार है। एसएसपी प्रभाकर चौधरी का कहना है कि जेल प्रकरण में आठ लोगों पर चार्जशीट दाखिल की गई है। यह सभी आरोपी जेल में बंद है। फरार सद्दाम की तलाश में पुलिस टीमें काम कर रही हैं। पूरे साक्ष्य के आधार पर आरोपियों पर चार्जशीट लगाई गई है। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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कुमारिल मट्टाचार्य 16
पवित्र है। मैं अपना काम कर चुका हूँ। आप अपने उद्देश्य की पूर्ति के निमित्त मेरे प्रधान शिष्य मण्डन मिश्रकी सहायता, लीजिये। यदि उसे आप शास्त्रार्थ द्वारा पराजित कर अपने वश कर लेंगे, तो वह आपको बड़ी सहायता देगा और आपके भाव्यपर वार्त्तिक लिखेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जय तक मेरा शरीर भस्म न हो जाय तब तक आप मेरे साम ने खड़े रहे। मुझे आपसे बड़ी प्रीति है, क्योंकि आपने वेदोंके उद्धारका झण्डा उठाया है।
इतना कहकर भट्टाचार्य मौन हो गये। तुषाग्नि जोरोंके साथ धधक उठी और देखते ही देखते पुण्यात्मा फुमारिल भस्म हो गये । उनके विछोहसे शङ्कपचार्य घड़े दुःखी हुए। कर्मकाण्डपर कुमारिलको बड़ी श्रद्धा थी। उस श्रद्धाफे वशीभूत हो कर ही उन्होंने अपने आपको जला डाला था। उनके यदि शंकरावाने इसी लिये कम वादका घड़ी तिव्रतासे खण्डन किया।
कुमारिल अपने समयके एक अद्वितीय विद्वान थे। उन्हें वैदिक और बौद्ध धम्मके सिद्धान्त तथा दर्शन शास्त्रोंका यथेष्ट ज्ञान था । वेदोंको सच्चाई पर उन्हें पूरा पूरा विश्वास था । मीमांसा शास्त्रके सावरभाध्य तथा आश्वलायनके गृह्य सूत्र. पर उन्होंने वार्त्तिक रचे थे ( न्युनताको पूर्ण करना, त्रुटिफो दिखाना और भयोग्य की भयोग्यता सिद्ध करना चार्त्तिक है ) इस के अतिरिक्त उन्होंने रूपक और अलंकारिक कथाओंको विद्व
भारतके महापुरुष कतारक
ताके साथ स्पष्ट किया था। उन्हें हुए प्रायः ११०० वर्ष व्यतीत हो चुके हैं। उन्होंने जिस परिश्रम ओर योग्यता के साथ वेइ धर्मका पुनः प्रचार किया घह सराहनीय है। घेदों को शिक्षा रसातलको पहुंच चुकी थी। ये न हुए होते तो भाज हमारी धार्मिक परिस्थिति अत्यन्त शोचनीय होती। जिस बौद्ध धर्मने • समूचे भारत और प्रायः एशिया भर में प्रचार पा लिया था, उसे -इस प्रकार उछिन्न करना सामान्य काम न था। महाचाने -यह सफलता पूर्वक कर दिखाया अतः उनका नाम अमर है और अनन्तकाल तक अमर रहेगा।
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कुमारिल मट्टाचार्य सोलह पवित्र है। मैं अपना काम कर चुका हूँ। आप अपने उद्देश्य की पूर्ति के निमित्त मेरे प्रधान शिष्य मण्डन मिश्रकी सहायता, लीजिये। यदि उसे आप शास्त्रार्थ द्वारा पराजित कर अपने वश कर लेंगे, तो वह आपको बड़ी सहायता देगा और आपके भाव्यपर वार्त्तिक लिखेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जय तक मेरा शरीर भस्म न हो जाय तब तक आप मेरे साम ने खड़े रहे। मुझे आपसे बड़ी प्रीति है, क्योंकि आपने वेदोंके उद्धारका झण्डा उठाया है। इतना कहकर भट्टाचार्य मौन हो गये। तुषाग्नि जोरोंके साथ धधक उठी और देखते ही देखते पुण्यात्मा फुमारिल भस्म हो गये । उनके विछोहसे शङ्कपचार्य घड़े दुःखी हुए। कर्मकाण्डपर कुमारिलको बड़ी श्रद्धा थी। उस श्रद्धाफे वशीभूत हो कर ही उन्होंने अपने आपको जला डाला था। उनके यदि शंकरावाने इसी लिये कम वादका घड़ी तिव्रतासे खण्डन किया। कुमारिल अपने समयके एक अद्वितीय विद्वान थे। उन्हें वैदिक और बौद्ध धम्मके सिद्धान्त तथा दर्शन शास्त्रोंका यथेष्ट ज्ञान था । वेदोंको सच्चाई पर उन्हें पूरा पूरा विश्वास था । मीमांसा शास्त्रके सावरभाध्य तथा आश्वलायनके गृह्य सूत्र. पर उन्होंने वार्त्तिक रचे थे इस के अतिरिक्त उन्होंने रूपक और अलंकारिक कथाओंको विद्व भारतके महापुरुष कतारक ताके साथ स्पष्ट किया था। उन्हें हुए प्रायः एक हज़ार एक सौ वर्ष व्यतीत हो चुके हैं। उन्होंने जिस परिश्रम ओर योग्यता के साथ वेइ धर्मका पुनः प्रचार किया घह सराहनीय है। घेदों को शिक्षा रसातलको पहुंच चुकी थी। ये न हुए होते तो भाज हमारी धार्मिक परिस्थिति अत्यन्त शोचनीय होती। जिस बौद्ध धर्मने • समूचे भारत और प्रायः एशिया भर में प्रचार पा लिया था, उसे -इस प्रकार उछिन्न करना सामान्य काम न था। महाचाने -यह सफलता पूर्वक कर दिखाया अतः उनका नाम अमर है और अनन्तकाल तक अमर रहेगा।
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टीना ने शिमला से ये तस्वीरें शेयर की हैं. इनमें वे सफेद चादर लपेटे टॉपलेस नजर आ रही हैं.
उतरन फेम टीवी एक्ट्रेस टीना दत्ता टीवी की संस्कारी बहू से ग्लैमरस डॉल में अपना जलवा बिखेर चुकी हैं. छोटे पर्दे पर जिस टीना को दर्शकों ने सलवार सूट और साड़ी में देखा था, अब वे काफी बदल चुकी हैं. उन्होंने अपने संस्कारी इमेज को बोल्ड लुक दे दिया है. वे आए दिन बोल्डनेस का परिचय देते अपनी फोटोज शेयर करती रहती हैं. उनकी लेटेस्ट फोटो भी खूब वायरल हो रही है.
टीना ने शिमला से ये तस्वीरें शेयर की हैं. इनमें वे सफेद चादर लपेटे टॉपलेस नजर आ रही हैं. पहाड़ों के पीछे सूजर को ताकते हुए टीना ने एक सादे तस्वीर को भी ग्लैमर का टच दे दिया है. उन्होंने सिलसिलेवार अपनी कई तस्वीरें साझा की हैं. इस गैलरी के अंत में टीना स्पोर्ट्स ब्रा में भी नजर आईं. स्पोर्ट्स ब्रा और सन ग्लासेज लगाए टीना ने अपना साइड पोज दिया है.
टॉपलेस फोटो से एक दिन पहले टीना ने अपने मैगजीन कवर के फोटोशूट की तस्वीर साझा की थी. इसमें वे बटनलेस चेक लॉन्ग जैकेट और ब्लैक टाइट्स में नजर आईं. हील्स और ब्राउड ग्लासेज लगाए टीना इस फोटो में बेहद बोल्ड लगीं.
टीना पहले भी टॉपलेस फोटोज से सनसनी मचा चुकी हैं. फोटोज में टीना मल्टीकलर बॉटम स्विमवियर और शेड्स में नजर आईं. ओपन हेयर, मिनिमल मेकअप में टॉपलेस फोटोशूट के लिए पोज देती टीना दत्ता पूरे कॉन्फिडेंस में दिखीं.
टीवी पर भोली भाली इच्छा का रोल प्ले कर चुकीं टीना का यह अवतार लोगों के लिए अब नया नहीं है. पर फिर भी टीना हर बार अपने स्टाइलिश लुक्स से फैंस को इंप्रेस करने में कामयाब रहती हैं.
इसमें उनके काम को काफी सराहा गया था. उतरन के अलावा टीना दत्ता डायन, कर्मफल दाता शनि, कोई आने को है शोज में काम कर चुकी हैं. वे बिग बॉस के पिछले सीजन में बतौर गेस्ट नजर आईं थीं.
टीना सोशल मीडिया पर बेहद एक्टिव रहती हैं. वे अपने पिता के साथ रील्स भी बनाती हैं. दोनों के वीडियो काफी मजेदार होते हैं.
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टीना ने शिमला से ये तस्वीरें शेयर की हैं. इनमें वे सफेद चादर लपेटे टॉपलेस नजर आ रही हैं. उतरन फेम टीवी एक्ट्रेस टीना दत्ता टीवी की संस्कारी बहू से ग्लैमरस डॉल में अपना जलवा बिखेर चुकी हैं. छोटे पर्दे पर जिस टीना को दर्शकों ने सलवार सूट और साड़ी में देखा था, अब वे काफी बदल चुकी हैं. उन्होंने अपने संस्कारी इमेज को बोल्ड लुक दे दिया है. वे आए दिन बोल्डनेस का परिचय देते अपनी फोटोज शेयर करती रहती हैं. उनकी लेटेस्ट फोटो भी खूब वायरल हो रही है. टीना ने शिमला से ये तस्वीरें शेयर की हैं. इनमें वे सफेद चादर लपेटे टॉपलेस नजर आ रही हैं. पहाड़ों के पीछे सूजर को ताकते हुए टीना ने एक सादे तस्वीर को भी ग्लैमर का टच दे दिया है. उन्होंने सिलसिलेवार अपनी कई तस्वीरें साझा की हैं. इस गैलरी के अंत में टीना स्पोर्ट्स ब्रा में भी नजर आईं. स्पोर्ट्स ब्रा और सन ग्लासेज लगाए टीना ने अपना साइड पोज दिया है. टॉपलेस फोटो से एक दिन पहले टीना ने अपने मैगजीन कवर के फोटोशूट की तस्वीर साझा की थी. इसमें वे बटनलेस चेक लॉन्ग जैकेट और ब्लैक टाइट्स में नजर आईं. हील्स और ब्राउड ग्लासेज लगाए टीना इस फोटो में बेहद बोल्ड लगीं. टीना पहले भी टॉपलेस फोटोज से सनसनी मचा चुकी हैं. फोटोज में टीना मल्टीकलर बॉटम स्विमवियर और शेड्स में नजर आईं. ओपन हेयर, मिनिमल मेकअप में टॉपलेस फोटोशूट के लिए पोज देती टीना दत्ता पूरे कॉन्फिडेंस में दिखीं. टीवी पर भोली भाली इच्छा का रोल प्ले कर चुकीं टीना का यह अवतार लोगों के लिए अब नया नहीं है. पर फिर भी टीना हर बार अपने स्टाइलिश लुक्स से फैंस को इंप्रेस करने में कामयाब रहती हैं. इसमें उनके काम को काफी सराहा गया था. उतरन के अलावा टीना दत्ता डायन, कर्मफल दाता शनि, कोई आने को है शोज में काम कर चुकी हैं. वे बिग बॉस के पिछले सीजन में बतौर गेस्ट नजर आईं थीं. टीना सोशल मीडिया पर बेहद एक्टिव रहती हैं. वे अपने पिता के साथ रील्स भी बनाती हैं. दोनों के वीडियो काफी मजेदार होते हैं.
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फिल्म 'आदिपुरुष' को देखने के बाद दर्शको ने फिल्म की निंदा की, अब एक्टर मुकेश खन्ना (Mukesh Khanna ) जो 80 के दशक में महाभारत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं. प्रभास और कृति सनोन अभिनीत 'आदिपुरुष' को देखने के बाद, उन्होंने इसे गड़बड़ करने के लिए ओम राउत पर जमकर निशाना साधा और दावा किया कि वह जो बना रहे हैं वह रामायण का अपमान है. शक्तिमान स्टार ने खुले तौर पर फिल्म की आलोचना की और इसे रामायण के प्रति अपमानजनक बताया.
कथित तौर पर, मुकेश खन्ना ने अपने YouTube व्लॉग पर आदिपुरुष को आड़े हाथों लिया, जहां उन्होंने लिखा, "रामायण के लिए आदिपुरुष से बड़ा कोई अपमान नहीं है. ओम राउत को लगता है कि रामायण का कोई ज्ञान नहीं है, और उसके ऊपर, हमारे पास महान बुद्धजीवी लेखक हैं . मनोज मुंतशिर शुक्ला, जिन्होंने हमारी रामायण को कलयुग बना दिया . उनके बेतुके डायलॉग और नींद लाने वाली पटकथा ने एक ऐसी फिल्म बनाई है, जो नींद की गोलियां भी लहूलुहान कर सकती है. इस फिल्म का अब तक लिखी गई किसी भी रामायण से कोई संबंध नहीं है."
मुकेश खन्ना ने यह भी कहा कि उन्होंने रामायण के साथ जो किया उसे इतिहास कभी माफ नहीं करेगा और भूल जाएगाः "फिल्म देखने के बाद यह स्पष्ट है कि राउत हॉलीवुड फिल्म निर्माण से प्रभावित हैं, और उसी से प्रेरित होकर उन्होंने इस रामायण में उपद्रव भर दिया है. यदि आप चाहते तो सिनेमाई स्वतंत्रता ले लो, तुम एक काल्पनिक फिल्म बना सकते थे. लेकिन तुमने देवताओं की छवियों के साथ खेला, और इसलिए, आदिपुरुष रामायण के साथ एक ' भयानक मजाक ' (एक खतरनाक मजाक) है.
आदिपुरुष ने दुनिया भर में 240 करोड़ से अधिक की कमाई की है, और अभिनेता फिल्म के लिए भारी प्रतिक्रिया के बीच इस जीत का जश्न मना रहे हैं . फिल्म में जानकी की भूमिका निभाने वाली कृति सनोन अपने किरदार के लिए सकारात्मक समीक्षा साझा कर रही हैं और खुश हैं कि दर्शकों ने उनके काम को पसंद किया. प्रभास और सैफ अली खान को फिल्म में राघव और रावण के रूप में अपने लुक के लिए भारी आलोचना का सामना करना पड़ा .
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फिल्म 'आदिपुरुष' को देखने के बाद दर्शको ने फिल्म की निंदा की, अब एक्टर मुकेश खन्ना जो अस्सी के दशक में महाभारत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं. प्रभास और कृति सनोन अभिनीत 'आदिपुरुष' को देखने के बाद, उन्होंने इसे गड़बड़ करने के लिए ओम राउत पर जमकर निशाना साधा और दावा किया कि वह जो बना रहे हैं वह रामायण का अपमान है. शक्तिमान स्टार ने खुले तौर पर फिल्म की आलोचना की और इसे रामायण के प्रति अपमानजनक बताया. कथित तौर पर, मुकेश खन्ना ने अपने YouTube व्लॉग पर आदिपुरुष को आड़े हाथों लिया, जहां उन्होंने लिखा, "रामायण के लिए आदिपुरुष से बड़ा कोई अपमान नहीं है. ओम राउत को लगता है कि रामायण का कोई ज्ञान नहीं है, और उसके ऊपर, हमारे पास महान बुद्धजीवी लेखक हैं . मनोज मुंतशिर शुक्ला, जिन्होंने हमारी रामायण को कलयुग बना दिया . उनके बेतुके डायलॉग और नींद लाने वाली पटकथा ने एक ऐसी फिल्म बनाई है, जो नींद की गोलियां भी लहूलुहान कर सकती है. इस फिल्म का अब तक लिखी गई किसी भी रामायण से कोई संबंध नहीं है." मुकेश खन्ना ने यह भी कहा कि उन्होंने रामायण के साथ जो किया उसे इतिहास कभी माफ नहीं करेगा और भूल जाएगाः "फिल्म देखने के बाद यह स्पष्ट है कि राउत हॉलीवुड फिल्म निर्माण से प्रभावित हैं, और उसी से प्रेरित होकर उन्होंने इस रामायण में उपद्रव भर दिया है. यदि आप चाहते तो सिनेमाई स्वतंत्रता ले लो, तुम एक काल्पनिक फिल्म बना सकते थे. लेकिन तुमने देवताओं की छवियों के साथ खेला, और इसलिए, आदिपुरुष रामायण के साथ एक ' भयानक मजाक ' है. आदिपुरुष ने दुनिया भर में दो सौ चालीस करोड़ से अधिक की कमाई की है, और अभिनेता फिल्म के लिए भारी प्रतिक्रिया के बीच इस जीत का जश्न मना रहे हैं . फिल्म में जानकी की भूमिका निभाने वाली कृति सनोन अपने किरदार के लिए सकारात्मक समीक्षा साझा कर रही हैं और खुश हैं कि दर्शकों ने उनके काम को पसंद किया. प्रभास और सैफ अली खान को फिल्म में राघव और रावण के रूप में अपने लुक के लिए भारी आलोचना का सामना करना पड़ा .
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आप सभी जानते ही हैं कि बीते कल होली थी. ऐसे में होली का जश्न पूरे देश में बड़ी धूमधाम से मनाया गया और छोटे पर्दे के सितारों ने भी जमकर एन्जॉय किया. जी हाँ, टीवी सेलेब्स ने होली पार्टी आयोजित की. जहां एक्ट्रेस हिना खान ने अपने बॉयफ्रेंड रॉकी जायसवाल के साथ मिलकर होली मनाई तो वहीं कसौटी की पूरी टीम ने एक साथ पार्टी एन्जॉय की वहीं दूसरे टीवी सेलेब्स ने भी अपने-अपने करीबियों के साथ होली एन्जॉय की. ऐसे में इस समय जमकर हिना खान और रॉकी जायसवाल की तस्वीरें वायरल हो रहीं हैं जो आप देख सकते हैं.
हिना इस तस्वीर में रॉकी संग एन्जॉय कर रहीं हैं और रॉकी उन्हें किस कर रहे हैं. रॉकी ने यह तस्वीर शेयर कर लिखा है What a Holi ! ! When a family of friends mix with each other just like the colours in Holi, everyone distinct and everyone beautiful and everyone together. Happy Holi All! Life is indeed a festival of colours ! @realhinakhan @s. roy12345 @roy. 37853 @neelamsingh. ritz @nirja. jaiswal @ikhanaamir @sonamshah1804 @heenaalad इसमें वह हिना और अपने परिवार संग दिखाई दे रहे हैं. रॉकी और हिना की होली की तस्वीरें जमकर वायरल हो रहीं हैं और सभी को पसंद आ रहीं हैं दोनों ने जमकर होली का जश्न मनाया है जो इन तस्वीरों में साफ़ दिखाई दे रहा है.
हिना इन दिनों कोमोलिका के किरदार में कसौटी ज़िंदगी की 2 में नजर आ रहीं हैं जहाँ से वह जल्द ही अलविदा कहकर फिल्मों में नजर आने वाली हैं.
Video: होली खेलते-खेलते बेकाबू हो गईं राखी सावंत, करने लगी गंदा काम!
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आप सभी जानते ही हैं कि बीते कल होली थी. ऐसे में होली का जश्न पूरे देश में बड़ी धूमधाम से मनाया गया और छोटे पर्दे के सितारों ने भी जमकर एन्जॉय किया. जी हाँ, टीवी सेलेब्स ने होली पार्टी आयोजित की. जहां एक्ट्रेस हिना खान ने अपने बॉयफ्रेंड रॉकी जायसवाल के साथ मिलकर होली मनाई तो वहीं कसौटी की पूरी टीम ने एक साथ पार्टी एन्जॉय की वहीं दूसरे टीवी सेलेब्स ने भी अपने-अपने करीबियों के साथ होली एन्जॉय की. ऐसे में इस समय जमकर हिना खान और रॉकी जायसवाल की तस्वीरें वायरल हो रहीं हैं जो आप देख सकते हैं. हिना इस तस्वीर में रॉकी संग एन्जॉय कर रहीं हैं और रॉकी उन्हें किस कर रहे हैं. रॉकी ने यह तस्वीर शेयर कर लिखा है What a Holi ! ! When a family of friends mix with each other just like the colours in Holi, everyone distinct and everyone beautiful and everyone together. Happy Holi All! Life is indeed a festival of colours ! @realhinakhan @s. royबारह हज़ार तीन सौ पैंतालीस @roy. सैंतीस हज़ार आठ सौ तिरेपन @neelamsingh. ritz @nirja. jaiswal @ikhanaamir @sonamshahएक हज़ार आठ सौ चार @heenaalad इसमें वह हिना और अपने परिवार संग दिखाई दे रहे हैं. रॉकी और हिना की होली की तस्वीरें जमकर वायरल हो रहीं हैं और सभी को पसंद आ रहीं हैं दोनों ने जमकर होली का जश्न मनाया है जो इन तस्वीरों में साफ़ दिखाई दे रहा है. हिना इन दिनों कोमोलिका के किरदार में कसौटी ज़िंदगी की दो में नजर आ रहीं हैं जहाँ से वह जल्द ही अलविदा कहकर फिल्मों में नजर आने वाली हैं. Video: होली खेलते-खेलते बेकाबू हो गईं राखी सावंत, करने लगी गंदा काम!
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समर्थन के लिए सभी का धन्यवाद! मैं दुनिया भर में घरेलू क्रिकेट खेलने के लिए उत्सुक हूं। कृपया वरिष्ठ महिला वेस्टइंडीज टीम से मेरी औपचारिक रिटायरमेंट को स्वीकार करें। मैंने यह घोषणा बहुत चिंतन के बाद की है। क्योंकि क्रिकेट हमेशा से मेरा जुनून रहा है। हालांकि, जब आग जलती है, तो किसी को तो जलना ही पड़ता है।
मेरे क्रिकेट करियर के दौरान कई बाधाएं आई हैं जिन्हें मुझे दूर करना पड़ा है। हालांकि, वर्तमान माहौल और टीम का माहौल मेरे जुनून को बढ़ाने और फिर से शुरू करने की मेरी क्षमता को काम कर रहा है। मैं उन अवसरों की सराहना करती हूं जो मुझे प्रदान किए गए हैं और मैंने समय के साथ मेरे निर्णय पर विचार किया है।
डिएंड्रा डॉटिन (Deandra Dottin) ने कहा कि वेस्टइंडीज के लिए खेलना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने आगे कहा कि अपने 14 साल के खेल के दौरान, मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण लिया है और एक खिलाड़ी के रूप में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से विकसित हुआ है।
यह इस विकास का संयोजन है जिसने मुझे यह सोचने में मदद की है कि मेरे लिए वास्तव में क्या महत्वपूर्ण है। बहुत दुख के साथ, लेकिन अफसोस के बिना, मुझे एहसास हुआ कि मैं अब टीम संस्कृति और टीम के माहौल का पालन करने में सक्षम नहीं हूं। क्योंकि इसने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की मेरी क्षमता को कम कर दिया है। मैं संगठन और टीम को भविष्य में शुभकामनाएं देती हूं।
डिएंड्रा डॉटिन (Deandra Dottin) ने 260 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैचों में वेस्टइंडीज का प्रतिनिधित्व किया है। उसने 143 मैचों में 30. 54 की औसत से 3 शतकों के साथ 3,727 एकदिवसीय रन बनाए हैं। जबकि उसने 124 टी-20 मुकाबलों में 26. 28 की औसत से 2 शतकों के साथ 2,681 रन बनाए हैं।
इसी के साथ डिएंड्रा डॉटिन (Deandra Dottin) ने 133 अंतरराष्ट्रीय विकेट भी लिए हैं। डॉटिन वनडे और टी-20 में वेस्टइंडीज महिला टीम के लिए दूसरे सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी के रूप में रिटायर हुई हैं। इसी के साथ डॉटिन टी-20 प्रारूप में अग्रणी विकेट लेने वालों की सूची में चौथे स्थान पर हैं।
दाएं हाथ की इस महिला खिलाड़ी ने वनडे और टी-20 दोनों में वेस्टइंडीज के लिए दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी के रूप में संन्यास लिया है। हालांकि वह राष्ट्रमंडल खेलों 2022 में बारबाडोस का प्रतिनिधित्व करना जारी रखेगी। जहां वे बुधवार को करो या मरो के मैच में भारत से भिड़ेंगी।
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समर्थन के लिए सभी का धन्यवाद! मैं दुनिया भर में घरेलू क्रिकेट खेलने के लिए उत्सुक हूं। कृपया वरिष्ठ महिला वेस्टइंडीज टीम से मेरी औपचारिक रिटायरमेंट को स्वीकार करें। मैंने यह घोषणा बहुत चिंतन के बाद की है। क्योंकि क्रिकेट हमेशा से मेरा जुनून रहा है। हालांकि, जब आग जलती है, तो किसी को तो जलना ही पड़ता है। मेरे क्रिकेट करियर के दौरान कई बाधाएं आई हैं जिन्हें मुझे दूर करना पड़ा है। हालांकि, वर्तमान माहौल और टीम का माहौल मेरे जुनून को बढ़ाने और फिर से शुरू करने की मेरी क्षमता को काम कर रहा है। मैं उन अवसरों की सराहना करती हूं जो मुझे प्रदान किए गए हैं और मैंने समय के साथ मेरे निर्णय पर विचार किया है। डिएंड्रा डॉटिन ने कहा कि वेस्टइंडीज के लिए खेलना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने आगे कहा कि अपने चौदह साल के खेल के दौरान, मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षण लिया है और एक खिलाड़ी के रूप में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से विकसित हुआ है। यह इस विकास का संयोजन है जिसने मुझे यह सोचने में मदद की है कि मेरे लिए वास्तव में क्या महत्वपूर्ण है। बहुत दुख के साथ, लेकिन अफसोस के बिना, मुझे एहसास हुआ कि मैं अब टीम संस्कृति और टीम के माहौल का पालन करने में सक्षम नहीं हूं। क्योंकि इसने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की मेरी क्षमता को कम कर दिया है। मैं संगठन और टीम को भविष्य में शुभकामनाएं देती हूं। डिएंड्रा डॉटिन ने दो सौ साठ से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैचों में वेस्टइंडीज का प्रतिनिधित्व किया है। उसने एक सौ तैंतालीस मैचों में तीस. चौवन की औसत से तीन शतकों के साथ तीन,सात सौ सत्ताईस एकदिवसीय रन बनाए हैं। जबकि उसने एक सौ चौबीस टी-बीस मुकाबलों में छब्बीस. अट्ठाईस की औसत से दो शतकों के साथ दो,छः सौ इक्यासी रन बनाए हैं। इसी के साथ डिएंड्रा डॉटिन ने एक सौ तैंतीस अंतरराष्ट्रीय विकेट भी लिए हैं। डॉटिन वनडे और टी-बीस में वेस्टइंडीज महिला टीम के लिए दूसरे सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी के रूप में रिटायर हुई हैं। इसी के साथ डॉटिन टी-बीस प्रारूप में अग्रणी विकेट लेने वालों की सूची में चौथे स्थान पर हैं। दाएं हाथ की इस महिला खिलाड़ी ने वनडे और टी-बीस दोनों में वेस्टइंडीज के लिए दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी के रूप में संन्यास लिया है। हालांकि वह राष्ट्रमंडल खेलों दो हज़ार बाईस में बारबाडोस का प्रतिनिधित्व करना जारी रखेगी। जहां वे बुधवार को करो या मरो के मैच में भारत से भिड़ेंगी। हमें Google News पर फॉलो करे- क्लिक करे !
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वजह से हुआ करती है । सूखा चारा खिलाना और कम पानी पिलाने की वजह से भी हो सकती है ।
पहचान - जानवर को पेशाब न होना, उसका बेचैन होकर उठनाबैठना और बार-बार पेशाब करने की कोशिश करना इस बीमारी के लक्षण हैं।
इलाज -
३ माशा
सब चीजें घोट-पीसकर ठण्डे पानी में घोलकर पिला दें और नीचे लिखी दवाओं में से कोई-सी उसके मूतने के स्थान पर लगा दें ।
(१) नीम के पत्ते उबालकर नमक मिलाकर मूतने के स्थान पर लगाइए ।
(२) बंधे वाले जानवर के मूतने की जगह एक साबित लाल मिर्च रख दें । जब पेशाब करने लगे तो निकाल लें ।
( ३ ) इसी प्रकार शोरे के गाढ़े घोल में बत्ती भिगोकर मूतने की जगह चढ़ा दें ।
(४) यदि संभव हो तो मूतने की जगह एक या दो खांड के बताशे चढ़ाने से भी पेशाब हो जाता है ।
( ५ ) बेरी के पत्ते चबाकर मूतने की जगह रखने से भी पेशाब हो जाता है।
खान-पान - पेशाब में खून आने के विषय में बताये अनुसार । अन्य हिदायतें-- अगर उपरोक्त दवा देने से फायदा न हो तो सरकारी पशु-डाक्टर को बुलाकर दिखाना चाहिए ।
(१७) पेशाब का टपकते रहना
यह बीमारी भी मसाने, गुर्दे इत्यादि की कमजोरी व पथरी आदि की वजह से होती है ।
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वजह से हुआ करती है । सूखा चारा खिलाना और कम पानी पिलाने की वजह से भी हो सकती है । पहचान - जानवर को पेशाब न होना, उसका बेचैन होकर उठनाबैठना और बार-बार पेशाब करने की कोशिश करना इस बीमारी के लक्षण हैं। इलाज - तीन माशा सब चीजें घोट-पीसकर ठण्डे पानी में घोलकर पिला दें और नीचे लिखी दवाओं में से कोई-सी उसके मूतने के स्थान पर लगा दें । नीम के पत्ते उबालकर नमक मिलाकर मूतने के स्थान पर लगाइए । बंधे वाले जानवर के मूतने की जगह एक साबित लाल मिर्च रख दें । जब पेशाब करने लगे तो निकाल लें । इसी प्रकार शोरे के गाढ़े घोल में बत्ती भिगोकर मूतने की जगह चढ़ा दें । यदि संभव हो तो मूतने की जगह एक या दो खांड के बताशे चढ़ाने से भी पेशाब हो जाता है । बेरी के पत्ते चबाकर मूतने की जगह रखने से भी पेशाब हो जाता है। खान-पान - पेशाब में खून आने के विषय में बताये अनुसार । अन्य हिदायतें-- अगर उपरोक्त दवा देने से फायदा न हो तो सरकारी पशु-डाक्टर को बुलाकर दिखाना चाहिए । पेशाब का टपकते रहना यह बीमारी भी मसाने, गुर्दे इत्यादि की कमजोरी व पथरी आदि की वजह से होती है ।
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नाहन, 22 जून . पांवटा साहिब वार्ड नंबर 10 में स्मैक का कारोबार कर रहे सगे बहन भाई को Police ने गिरफ्तार किया है इनके पास से 9. 87 ग्राम स्मैक बरामद की गई है. डीएसपी मानवेंद्र ठाकुर के नेतृत्व में Police ने नशा तस्करों को गिरफ्तार किया है .
बता दें कि लगातार सामने आ रहा है कि वार्ड नंबर 10 में विशेष तौर पर महिलाएं स्मैक का धंधा कर रही हैं जिसके बाद पावटा Police द्वारा एक बड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई.
डीएसपी मानवेंद्र ठाकुर ने बताया कि आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है जिनको Friday को कोर्ट में पेश किया जाएगा तथा पता लगाया जाएगा कि आरोपी यह नशे की थी कहां से लाए थे.
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नाहन, बाईस जून . पांवटा साहिब वार्ड नंबर दस में स्मैक का कारोबार कर रहे सगे बहन भाई को Police ने गिरफ्तार किया है इनके पास से नौ. सत्तासी ग्राम स्मैक बरामद की गई है. डीएसपी मानवेंद्र ठाकुर के नेतृत्व में Police ने नशा तस्करों को गिरफ्तार किया है . बता दें कि लगातार सामने आ रहा है कि वार्ड नंबर दस में विशेष तौर पर महिलाएं स्मैक का धंधा कर रही हैं जिसके बाद पावटा Police द्वारा एक बड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई. डीएसपी मानवेंद्र ठाकुर ने बताया कि आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है जिनको Friday को कोर्ट में पेश किया जाएगा तथा पता लगाया जाएगा कि आरोपी यह नशे की थी कहां से लाए थे.
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4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है।
विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है।
किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है।
- ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है।
- सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
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चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
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47 सालों बाद चुपके चुपके रीमेक कंफर्म, राजकुमार राव - विकी कौशल होंगे धर्मेंद्र - अमिताभ बच्चन?
प्रोड्यूसर और टीसीरीज़ फिल्म्स के मालिक भूषण कुमार ने हाल ही में एक इंटरव्यू में चुपके चुपके रीमेक कंफर्म किया है। गौरतलब है कि इस फिल्म की चर्चा काफी सालों से है और अब भूषण कुमार ने खुद कंफर्म किया है कि इस फिल्म पर काम चल रहा है। हालांकि, इससे ज़्यादा उन्होंने कोई जानकारी बाहर नहीं आने दी है।
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राजकुमार राव होंगे धर्मेंद्र?
इस फिल्म की चर्चा पिछले दो सालों से हो रही है और जब से इस फिल्म की रिपोर्ट्स बाहर आई हैं तब से फिल्म की कास्ट के बारे में भी चर्चा हुई है। राजकुमार राव ने कुछ इंटरव्यू में ये कंफर्म किया था कि फिल्म में वो धर्मेंद्र की भूमिका निभाएंगे जबकि उनका अमिताभ बच्चन ढूंढा जा रहा है। हालांकि, भूषण कुमार ने फिल्म की स्टारकास्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।
जहां राजकुमार राव का नाम फिल्म में धर्मेंद्र के किरदार से जोड़ा गया था वहीं माना जा रहा था कि फिल्म में अमिताभ बच्चन के किरदार के लिए विकी कौशल को अप्रोच किया गया था। अब विकी ने फिल्म को हां बोला है या फिर वो इस फिल्म को हां बोलेंगे या नहीं, इसके लिए तो फिलहाल थोड़ा इंतज़ार और करना होगा।
चुपके चुपके ऋषिकेश मुखर्जी की उन चुनिंदा फिल्मों में से हैं जिसे देखकर न आप कभी बोर होंगे। न ही कभी हंसना कम करेंगे। इसके अलावा ये फिल्म सिचुएशनल कॉमेडी का बेहतरीन नमूना थी जहां कोई कॉमेडी करता नहीं था पर प्यारे, सुलेखा, वसुधा, जीजाजी के साथ जो कुछ जीवन में घट रहा था, वही कॉमेडी हो जाता था। आइये याद करते हैं इस फिल्म से जुड़े कुछ बेहद मज़ेदार सीन। फिल्म को टीसीरीज़ के साथ लव रंजन प्रोड्यूस कर रहे हैं और वो इसे खुद ही लिखना चाहते हैं।
गौरतलब है कि बॉलीवुड में रीमेक फिल्मों का इतिहास काफी अच्छा नहीं रहा है। बॉलीवुड में पहले भी हिंदी फिल्मों के रीमेक बन चुके हैं। और इनका स्कोर हमेशा 50 प्रतिशत रहा है। यानि कि फिल्म के हिट और फ्लॉप होने का चांस बराबर का रहता है। जहां बोल बच्चन अमोल पालेकर की गोलमाल का हिट रीमेक थी वहीं अजय देवगन की हिम्मतवाला और सूरज पंचोली की हीरो, इन्हीं नाम की फिल्मों का फ्लॉप रीमेक थीं।
गौरतलब है कि रीमेक करना इतना आसान भी नहीं है। बॉलीवुड में कई रीमेक फिल्में अनाउंस तो हुई लेकिन बन नहीं पाईं। वहीं कई फिल्मों के रीमेक पर काम शुरू हुआ लेकिन वो कभी अनाउंस नहीं हो पाईं। इनमें ऐश्वर्या राय के साथ रात और दिन रीमेक, आयुष्मान खुराना के साथ छोटी सी बात रीमेक, दीपिका पादुकोण के साथ वो कौन थी रीमेक, श्रद्धा कपूर के साथ चालबाज़ रीमेक शामिल हैं।
ऋषिकेश मुखर्जी की मशहूर फिल्म चुपके चुपके 11 अप्रैल 1975 को रिलीज़ हुई थी और फिल्म की रिलीज़ को 47 साल पूरे हो चुके हैं। फिल्म की शूटिंग जहां हुई थी वो इस समय अमिताभ बच्चन का बंगला है जलसा। अमिताभ बच्चन ने ये घर खरीद कर इसे वापस बनवाया था। उस समय ये प्रोड्यूसर रमेश सिप्पी का बंगला था। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की कॉमिक टाईमिंग की तारीफ की जाती है और कॉमिक टाईमिंग में लव रंजन को महारत हासिल है।
भूषण कुमार ने बताया है कि फिलहाल लव रंजन अपनी रणबीर कपूर - श्रद्धा कपूर फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं और उस फिल्म के पूरा होते ही वो चुपके चुपके रीमेक पर काम करना शुरू कर देंगे। बस थोड़ा इंतज़ार और।
बिन ब्रा बीच रोड में कार खड़ी करके ऐसी हरकत करने लगी भोजपुरी हसीना, लोग मांग रहे हैं लोकेशन!
बॉलीवुड पर राज करती थी ये हसीना, बहन ने भी एक्टिंग में बनाया करियर, इमरान हाशमी से है खास कनेक्शन, पहचाना?
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Don't Miss! सैंतालीस सालों बाद चुपके चुपके रीमेक कंफर्म, राजकुमार राव - विकी कौशल होंगे धर्मेंद्र - अमिताभ बच्चन? प्रोड्यूसर और टीसीरीज़ फिल्म्स के मालिक भूषण कुमार ने हाल ही में एक इंटरव्यू में चुपके चुपके रीमेक कंफर्म किया है। गौरतलब है कि इस फिल्म की चर्चा काफी सालों से है और अब भूषण कुमार ने खुद कंफर्म किया है कि इस फिल्म पर काम चल रहा है। हालांकि, इससे ज़्यादा उन्होंने कोई जानकारी बाहर नहीं आने दी है। है। है। था। है। बच्चन, धर्मेंद्र, बच्चन, थे। है। राजकुमार राव होंगे धर्मेंद्र? इस फिल्म की चर्चा पिछले दो सालों से हो रही है और जब से इस फिल्म की रिपोर्ट्स बाहर आई हैं तब से फिल्म की कास्ट के बारे में भी चर्चा हुई है। राजकुमार राव ने कुछ इंटरव्यू में ये कंफर्म किया था कि फिल्म में वो धर्मेंद्र की भूमिका निभाएंगे जबकि उनका अमिताभ बच्चन ढूंढा जा रहा है। हालांकि, भूषण कुमार ने फिल्म की स्टारकास्ट के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। जहां राजकुमार राव का नाम फिल्म में धर्मेंद्र के किरदार से जोड़ा गया था वहीं माना जा रहा था कि फिल्म में अमिताभ बच्चन के किरदार के लिए विकी कौशल को अप्रोच किया गया था। अब विकी ने फिल्म को हां बोला है या फिर वो इस फिल्म को हां बोलेंगे या नहीं, इसके लिए तो फिलहाल थोड़ा इंतज़ार और करना होगा। चुपके चुपके ऋषिकेश मुखर्जी की उन चुनिंदा फिल्मों में से हैं जिसे देखकर न आप कभी बोर होंगे। न ही कभी हंसना कम करेंगे। इसके अलावा ये फिल्म सिचुएशनल कॉमेडी का बेहतरीन नमूना थी जहां कोई कॉमेडी करता नहीं था पर प्यारे, सुलेखा, वसुधा, जीजाजी के साथ जो कुछ जीवन में घट रहा था, वही कॉमेडी हो जाता था। आइये याद करते हैं इस फिल्म से जुड़े कुछ बेहद मज़ेदार सीन। फिल्म को टीसीरीज़ के साथ लव रंजन प्रोड्यूस कर रहे हैं और वो इसे खुद ही लिखना चाहते हैं। गौरतलब है कि बॉलीवुड में रीमेक फिल्मों का इतिहास काफी अच्छा नहीं रहा है। बॉलीवुड में पहले भी हिंदी फिल्मों के रीमेक बन चुके हैं। और इनका स्कोर हमेशा पचास प्रतिशत रहा है। यानि कि फिल्म के हिट और फ्लॉप होने का चांस बराबर का रहता है। जहां बोल बच्चन अमोल पालेकर की गोलमाल का हिट रीमेक थी वहीं अजय देवगन की हिम्मतवाला और सूरज पंचोली की हीरो, इन्हीं नाम की फिल्मों का फ्लॉप रीमेक थीं। गौरतलब है कि रीमेक करना इतना आसान भी नहीं है। बॉलीवुड में कई रीमेक फिल्में अनाउंस तो हुई लेकिन बन नहीं पाईं। वहीं कई फिल्मों के रीमेक पर काम शुरू हुआ लेकिन वो कभी अनाउंस नहीं हो पाईं। इनमें ऐश्वर्या राय के साथ रात और दिन रीमेक, आयुष्मान खुराना के साथ छोटी सी बात रीमेक, दीपिका पादुकोण के साथ वो कौन थी रीमेक, श्रद्धा कपूर के साथ चालबाज़ रीमेक शामिल हैं। ऋषिकेश मुखर्जी की मशहूर फिल्म चुपके चुपके ग्यारह अप्रैल एक हज़ार नौ सौ पचहत्तर को रिलीज़ हुई थी और फिल्म की रिलीज़ को सैंतालीस साल पूरे हो चुके हैं। फिल्म की शूटिंग जहां हुई थी वो इस समय अमिताभ बच्चन का बंगला है जलसा। अमिताभ बच्चन ने ये घर खरीद कर इसे वापस बनवाया था। उस समय ये प्रोड्यूसर रमेश सिप्पी का बंगला था। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की कॉमिक टाईमिंग की तारीफ की जाती है और कॉमिक टाईमिंग में लव रंजन को महारत हासिल है। भूषण कुमार ने बताया है कि फिलहाल लव रंजन अपनी रणबीर कपूर - श्रद्धा कपूर फिल्म की शूटिंग में व्यस्त हैं और उस फिल्म के पूरा होते ही वो चुपके चुपके रीमेक पर काम करना शुरू कर देंगे। बस थोड़ा इंतज़ार और। बिन ब्रा बीच रोड में कार खड़ी करके ऐसी हरकत करने लगी भोजपुरी हसीना, लोग मांग रहे हैं लोकेशन! बॉलीवुड पर राज करती थी ये हसीना, बहन ने भी एक्टिंग में बनाया करियर, इमरान हाशमी से है खास कनेक्शन, पहचाना?
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टेलर स्विफ्ट, एक अमेरिकी गायिका, गीतकार और अभिनेत्री हैं जिन्होंने अपनी संगीत करियर में अद्भुत सफलता हासिल की है। टेलर का जन्म 13 दिसंबर 1989 को पेन्सिल्वेनिया, अमेरिका में हुआ था। वह अपनी रचनात्मकता और संगीत के जरिए दुनिया में अपनी पहचान बनाने में सक्षम रही हैं। इस लेख में हम टेलर स्विफ्ट के जीवन, करियर और उनकी सफलता के बारे में विस्तार से जानेंगे।
टेलर ने अपनी संगीत करियर की शुरुआत 14 साल की उम्र में की। उन्होंने स्कूल में गीत गाने का कोर्स किया और अपनी पहली गिटार खरीदी। उन्होंने खुद से गिटार बजाना सीखा और अपने लिए गीत लिखना शुरू किया। उन्होंने इंटरनेट पर अपने गीत डालना शुरू किया और बाद में उन्होंने नैशनल साक्स और म्यूजिक टीवी जैसे टीवी शो में अपने गाने गाए। टेलर को उनके संगीत में अपने उच्च-स्कूल में रचे गानों से शुरुआत करनी पड़ी। उन्होंने अपनी पहली संगीत एल्बम 'टेलर स्विफ्ट' को 2006 में जारी किया जिसमें उन्होंने अपनी खुद की रचनात्मकता को उजागर किया। उनकी दूसरी एल्बम 'फियर' ने उन्हें व्यापक सम्मान और संगीत उद्योग में अधिक सफलता दिलाई। उन्होंने अपनी तीसरी एल्बम 'स्पीक नाउ' को 2010 में जारी किया जो उन्हें ग्रैमी अवार्ड के लिए नामांकित किया गया।
टेलर सोशल मीडिया में भी अपनी जगह बनाई हुई है। उन्हें इंस्टाग्राम पर लगभग 164 मिलियन फॉलोअर हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर जोड़ी बनाई हुई है और उनके प्रशंसकों को अपने नए गीतों और वीडियो के साथ नवीनतम अपडेट प्रदान करती हैं।
इन गानों ने संगीत उद्योग में अपनी जगह बनाई है और उन्हें लोगों की यादों में सदियों तक जीवित रखेंगे।
टेलर के साथ विवादः टेलर ने कई बार संगीत उद्योग के अंदर विवादों का सामना किया है। उन्होंने अपने पूर्व प्रबंधक के साथ विवाद किया जिससे संगीत उद्योग में बहुत सारे चर्चे हुए। उन्होंने अपने बैक-टू-बैक एल्बम "Folklore" और "Evermore" के माध्यम से अपने नए गानों से फैंस को उल्लासित किया है।
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टेलर स्विफ्ट, एक अमेरिकी गायिका, गीतकार और अभिनेत्री हैं जिन्होंने अपनी संगीत करियर में अद्भुत सफलता हासिल की है। टेलर का जन्म तेरह दिसंबर एक हज़ार नौ सौ नवासी को पेन्सिल्वेनिया, अमेरिका में हुआ था। वह अपनी रचनात्मकता और संगीत के जरिए दुनिया में अपनी पहचान बनाने में सक्षम रही हैं। इस लेख में हम टेलर स्विफ्ट के जीवन, करियर और उनकी सफलता के बारे में विस्तार से जानेंगे। टेलर ने अपनी संगीत करियर की शुरुआत चौदह साल की उम्र में की। उन्होंने स्कूल में गीत गाने का कोर्स किया और अपनी पहली गिटार खरीदी। उन्होंने खुद से गिटार बजाना सीखा और अपने लिए गीत लिखना शुरू किया। उन्होंने इंटरनेट पर अपने गीत डालना शुरू किया और बाद में उन्होंने नैशनल साक्स और म्यूजिक टीवी जैसे टीवी शो में अपने गाने गाए। टेलर को उनके संगीत में अपने उच्च-स्कूल में रचे गानों से शुरुआत करनी पड़ी। उन्होंने अपनी पहली संगीत एल्बम 'टेलर स्विफ्ट' को दो हज़ार छः में जारी किया जिसमें उन्होंने अपनी खुद की रचनात्मकता को उजागर किया। उनकी दूसरी एल्बम 'फियर' ने उन्हें व्यापक सम्मान और संगीत उद्योग में अधिक सफलता दिलाई। उन्होंने अपनी तीसरी एल्बम 'स्पीक नाउ' को दो हज़ार दस में जारी किया जो उन्हें ग्रैमी अवार्ड के लिए नामांकित किया गया। टेलर सोशल मीडिया में भी अपनी जगह बनाई हुई है। उन्हें इंस्टाग्राम पर लगभग एक सौ चौंसठ मिलियन फॉलोअर हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर जोड़ी बनाई हुई है और उनके प्रशंसकों को अपने नए गीतों और वीडियो के साथ नवीनतम अपडेट प्रदान करती हैं। इन गानों ने संगीत उद्योग में अपनी जगह बनाई है और उन्हें लोगों की यादों में सदियों तक जीवित रखेंगे। टेलर के साथ विवादः टेलर ने कई बार संगीत उद्योग के अंदर विवादों का सामना किया है। उन्होंने अपने पूर्व प्रबंधक के साथ विवाद किया जिससे संगीत उद्योग में बहुत सारे चर्चे हुए। उन्होंने अपने बैक-टू-बैक एल्बम "Folklore" और "Evermore" के माध्यम से अपने नए गानों से फैंस को उल्लासित किया है।
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अगर आप अपने बच्चे का नाम हेलाइ रखने की सोच रहें हैं तो पहले उसका मतलब जान लेना जरूरी है। आपको बता दें कि हेलाइ का मतलब कौन, परमेश्वर की तरह है आरोही ऊपर चढ़ाई होता है। हेलाइ नाम का खास महत्व है क्योंकि इसका मतलब कौन, परमेश्वर की तरह है आरोही ऊपर चढ़ाई है जिसे काफी अच्छा माना जाता है। शास्त्रों में हेलाइ नाम को काफी अच्छा माना गया है और इसका मतलब यानी कौन, परमेश्वर की तरह है आरोही ऊपर चढ़ाई भी लोगों को बहुत पसंद आता है। वेदों में भी ये बात कही गई कि शिशु को हेलाइ देने से पहले माता-पिता को इसकी पूरी जानकारी लेनी चाहिए। हेलाइ नाम के अर्थ यानी कौन, परमेश्वर की तरह है आरोही ऊपर चढ़ाई का असर आप इनके स्वभाव में साफ़ देख सकते हैं। आगे हेलाइ नाम की राशि व लकी नंबर अथवा हेलाइ नाम के कौन, परमेश्वर की तरह है आरोही ऊपर चढ़ाई अर्थ के बारे में विस्तार से बताया गया है।
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अगर आप अपने बच्चे का नाम हेलाइ रखने की सोच रहें हैं तो पहले उसका मतलब जान लेना जरूरी है। आपको बता दें कि हेलाइ का मतलब कौन, परमेश्वर की तरह है आरोही ऊपर चढ़ाई होता है। हेलाइ नाम का खास महत्व है क्योंकि इसका मतलब कौन, परमेश्वर की तरह है आरोही ऊपर चढ़ाई है जिसे काफी अच्छा माना जाता है। शास्त्रों में हेलाइ नाम को काफी अच्छा माना गया है और इसका मतलब यानी कौन, परमेश्वर की तरह है आरोही ऊपर चढ़ाई भी लोगों को बहुत पसंद आता है। वेदों में भी ये बात कही गई कि शिशु को हेलाइ देने से पहले माता-पिता को इसकी पूरी जानकारी लेनी चाहिए। हेलाइ नाम के अर्थ यानी कौन, परमेश्वर की तरह है आरोही ऊपर चढ़ाई का असर आप इनके स्वभाव में साफ़ देख सकते हैं। आगे हेलाइ नाम की राशि व लकी नंबर अथवा हेलाइ नाम के कौन, परमेश्वर की तरह है आरोही ऊपर चढ़ाई अर्थ के बारे में विस्तार से बताया गया है।
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- 7 hrs ago राम चरण की सुपरहिट फिल्म 'आरआरआर' का जल्द आएगा सीक्वल, परंतु राजामौली नहीं होगे डायरेक्टर!
- 8 hrs ago Shahrukh Khan की 'जवान' प्रीव्यू पर सलमान खान का शानदार रिएक्शन, बोले, "पठान जवान बन गया, वाह. . "
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Raid की जोड़ी का कमबैक, अजय देवगन की साल 2021 की बड़ी एक्शन क्राइम वेब सीरीज फाइनल !
तानाजी के बाद अजय देवगन के फैंस उनकी आगामी फिल्म भुज द प्राइड ऑफ इंडिया के रिलीज होने का इंतजार कर रहे हैं। ये फिल्म ओटीटी पर रिलीज होगी। बताया जा रहा है कि अक्टूबर में इसकी रिलीज तय की जा सकती है। लेकिन इसी के साथ अजय देवगन के कई आगामी प्रोजेक्ट हैं जो कि इसी साल फाइनल किए जा रहे हैं।
हालांकि इनकी रिलीज आने वाले साल में होगी। लेकिन कई ऐसी स्क्रिप्ट है जिसे अजय देवगन इन दिनों लॅाक कर रहे हैं। इसी में से एक हैं उनकी वेब सीरीज। जी हां, अजय देवगन बतौर लीड एक्टर जल्द एक बड़ी वेब सीरीज का हिस्सा बनने जा रहे हैं।
वेब सीरीज इन दिनों कई बड़े कलाकार की पहली पसंद बनी हुई है। वेब का मार्केट कोरोना काल में पहले से अधिक उभर कर सामने आया है। फिर भला अजय देवगन इससे कैसे पीछे हटते।
जब शादीशुदा धर्मेंद्र ने तनुजा के साथ कर दी ऐसी हरकत, भड़कीं एक्ट्रेस, सेट पर ही जड़ दिया तमाचा, कहा- बेशर्म. .
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बता दें कि इस गाने के जरिए पहली बार अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor) और रकुल प्रीत (Rakul Preet Singh) ने साथ काम किया है. हो सकता है कि आगे भी दोनों को बड़े पर्दे पर देखना का मौका मिले.
अर्जुन कपूर (Arjun Kapoor) और रकुल प्रीत सिंह (Rakul Preet Singh) का बहुप्रतिक्षित गाना 'दिल है दीवाना' (Dil Hai Deewana) रिलीज हो चुका है. टी-सीरीज ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस गाने का वीडियो रिलीज किया है. यह गाना मुंबई में शूट हुआ. इस गाने में आप अर्जुन और रकुल प्रीत का सुपर कूल लुक देख सकते हैं. यह एक पैपी सॉन्ग है. इस गाने को दर्शन रावल (Darshan Raval) और जारा ने अपनी आवाज दी है. वहीं, गाने का म्यूजिक तनिष्क बागची ने दिया है, जबकि इसे लिखा शब्बीर अहमद ने है.
गाने की शुरुआत होती है अनिल कपूर के सिग्नेचर स्टेप वाले म्यूजिक धिना धिन से. हालांकि गाने में अनिल कपूर नहीं हैं. गाने में एक कर्मचारी और मालकिन की लव स्टोरी को दिखाया गया है. रकुल प्रीत ने इस गाने में जबरदस्त डांस करके दिखाया है. वहीं अर्जुन कपूर काफी हैंडसम लग रहे हैं. अर्जुन कपूर और रकुल प्रीत की केमिस्ट्री इस गाने में दर्शकों को खूब भा रही है. आपको बता दें कि इस गाने के जरिए पहली बार अर्जुन कपूर और रकुल प्रीत ने साथ काम किया है. हो सकता है कि आगे भी दोनों को बड़े पर्दे पर देखना का मौका मिले.
अर्जुन कपूर पिछले सात सालों से दर्शन रावल के साथ काम करना चाह रहे थे और अब उनका यह सपना पूरा हो चुका है. दर्शन ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शॉर्ट क्लिप्स शेयर की थीं. इनमें एक क्लिप साल 2014 में आए सिंगिंग रियलिटी शो इंडियाज रॉ स्टार की थी, जिसमें दर्शन ने कंटेस्टेंट के तौर पर भाग लिया था. इस क्लिप में आप दर्शन को गाना गाते देख सकते हैं और अर्जुन कपूर दर्शन की आवाज सुनकर कहते हैं- ये आवाज मुझे दे दे यार तू.
दूसरी क्लिप में दर्शन ने अर्जुन कपूर पर फिल्माया गया गाना 'दिल है दीवाना' की एक झलक दिखाई. इसे शेयर करते हुए दर्शन रावल ने अर्जुन कपूर को टैग किया और कैप्शन में लिखा- अर्जुन भाई लो हो गई आपकी आवाज. दर्शन के इस पोस्ट पर अर्जुन ने भी तुरंत जवाब दिया. एक्टर ने लिखा- इस आवाज पर मेरा हक है.
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बता दें कि इस गाने के जरिए पहली बार अर्जुन कपूर और रकुल प्रीत ने साथ काम किया है. हो सकता है कि आगे भी दोनों को बड़े पर्दे पर देखना का मौका मिले. अर्जुन कपूर और रकुल प्रीत सिंह का बहुप्रतिक्षित गाना 'दिल है दीवाना' रिलीज हो चुका है. टी-सीरीज ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस गाने का वीडियो रिलीज किया है. यह गाना मुंबई में शूट हुआ. इस गाने में आप अर्जुन और रकुल प्रीत का सुपर कूल लुक देख सकते हैं. यह एक पैपी सॉन्ग है. इस गाने को दर्शन रावल और जारा ने अपनी आवाज दी है. वहीं, गाने का म्यूजिक तनिष्क बागची ने दिया है, जबकि इसे लिखा शब्बीर अहमद ने है. गाने की शुरुआत होती है अनिल कपूर के सिग्नेचर स्टेप वाले म्यूजिक धिना धिन से. हालांकि गाने में अनिल कपूर नहीं हैं. गाने में एक कर्मचारी और मालकिन की लव स्टोरी को दिखाया गया है. रकुल प्रीत ने इस गाने में जबरदस्त डांस करके दिखाया है. वहीं अर्जुन कपूर काफी हैंडसम लग रहे हैं. अर्जुन कपूर और रकुल प्रीत की केमिस्ट्री इस गाने में दर्शकों को खूब भा रही है. आपको बता दें कि इस गाने के जरिए पहली बार अर्जुन कपूर और रकुल प्रीत ने साथ काम किया है. हो सकता है कि आगे भी दोनों को बड़े पर्दे पर देखना का मौका मिले. अर्जुन कपूर पिछले सात सालों से दर्शन रावल के साथ काम करना चाह रहे थे और अब उनका यह सपना पूरा हो चुका है. दर्शन ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शॉर्ट क्लिप्स शेयर की थीं. इनमें एक क्लिप साल दो हज़ार चौदह में आए सिंगिंग रियलिटी शो इंडियाज रॉ स्टार की थी, जिसमें दर्शन ने कंटेस्टेंट के तौर पर भाग लिया था. इस क्लिप में आप दर्शन को गाना गाते देख सकते हैं और अर्जुन कपूर दर्शन की आवाज सुनकर कहते हैं- ये आवाज मुझे दे दे यार तू. दूसरी क्लिप में दर्शन ने अर्जुन कपूर पर फिल्माया गया गाना 'दिल है दीवाना' की एक झलक दिखाई. इसे शेयर करते हुए दर्शन रावल ने अर्जुन कपूर को टैग किया और कैप्शन में लिखा- अर्जुन भाई लो हो गई आपकी आवाज. दर्शन के इस पोस्ट पर अर्जुन ने भी तुरंत जवाब दिया. एक्टर ने लिखा- इस आवाज पर मेरा हक है. A post shared by #RabbaMeharKari Darshan Raval
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कैटरीना कैफ बॉलीवुड की उन एक्ट्रेसेस मे से एक है जिनको लोग बहुत ज्यादा प्यार करते है और उनकी फैन फॉलोविंग काफी है। ऐसे में कैटरीना के बारे में ये जानना बेहद जरूरी है कि इस मकाम तक पहुंचने के लिए उन्होने काफी मेहनत की है और पसीना बहाया है।
कैटरीना के बारे में ये कहा जाता है कि वो काफी हार्डवर्किंग और अपने काम को पर्फेक्टली करती है। इन दिनो कैटरीना कैफ का एक वीडियो वायरल हो रही है जिसमे कैटरीना कैफ अपने लाइफ का कोई इवेंट बताती नजर आ रही है।
चलिए आपको ज्यादा सस्पेंस में ना डालते हुए बताते है कि एक्ट्रेस रानी मुखर्जी इन दिनो अपनी फिल्म हिचकी का प्रमोशन जोर शोर से कर रही है फिल्म को लेकर वो किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाह रही है। बता दें कि इसी प्रमोशन के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए वो कैटरीना कैफ के पास जा पहुंची।
कैटरीना कैफ से बात करते हुए रानी ने पूछा कि आपके लाइफ की सबसे बड़ी हिचकी कौन सी थी जो आप लाइफ में कभी भी नहीं भूल सकती है। इसके बारे में कैटरीना ने कहा कि एक बार वो तेलगू फिल्म की शूटिंग कर रही थी जिसमे उनके एक्टर वेंकटेस थे और फिल्म के किसी गाने की शूटिंग चल रही थी।
कैटरीना ने बताया कि उस गाने को राजू सुंदरम कोरियोग्राफ कर रहे थे और उनको मेरे साथ प्रॉबलम हो रही थी और स्टेप सही से नहीं हो पा रहे थे। उसी समय वहां सलमान खान पहुंच गए और अचानक उन्होने कोरियोग्राफर से पूछ लिया कि कैटरीना की डांसिंग कैसी है।
कोरियोग्राफर का जवाब सुनकर मेरे चेहरे का रंग उड़ गया क्योंकि उन्होने सलमान से कहा कि सर ये डांस में एकदम जीरो है। कैटरीना बताती है कि वो मेरे लाइफ की सबसे बड़ी हिचकी थी और उन्होने डांस को अपनी हिचकी समझकर मेहनत करना शुरु कर दिया।
हालांकि कैटरीना बताती है कि मैं जीरो नहीं थी और बाद में कैट के गाने बहुत ज्यादा फेमस हुए। चिकनी चमेली, शीला की जवानी, काला चश्मा और स्वैग से स्वागत में कैटरीना की परफॉर्मेंस जानदार थी और पूरे देश को कैटरीना ने इस गाने पर नचाया।
कैटरीना ने बताया कि जब 2008 में रेस आई तब बॉस्को सीजर ने गाने में डांस करने की उनको काफी हिम्मत दी थी। रानी मुखर्जी हाल ही में अपनी फिल्म की प्रमोशन के लिए शाहरुख खान से भी मिली थी और उनसे भी यही सवाल पूछा था। फिल्म हिचकी 23 मार्च को पूरे देश में रिलीज कर दी जाएगी।
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Don't Miss! कैटरीना कैफ बॉलीवुड की उन एक्ट्रेसेस मे से एक है जिनको लोग बहुत ज्यादा प्यार करते है और उनकी फैन फॉलोविंग काफी है। ऐसे में कैटरीना के बारे में ये जानना बेहद जरूरी है कि इस मकाम तक पहुंचने के लिए उन्होने काफी मेहनत की है और पसीना बहाया है। कैटरीना के बारे में ये कहा जाता है कि वो काफी हार्डवर्किंग और अपने काम को पर्फेक्टली करती है। इन दिनो कैटरीना कैफ का एक वीडियो वायरल हो रही है जिसमे कैटरीना कैफ अपने लाइफ का कोई इवेंट बताती नजर आ रही है। चलिए आपको ज्यादा सस्पेंस में ना डालते हुए बताते है कि एक्ट्रेस रानी मुखर्जी इन दिनो अपनी फिल्म हिचकी का प्रमोशन जोर शोर से कर रही है फिल्म को लेकर वो किसी भी तरह का रिस्क नहीं लेना चाह रही है। बता दें कि इसी प्रमोशन के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए वो कैटरीना कैफ के पास जा पहुंची। कैटरीना कैफ से बात करते हुए रानी ने पूछा कि आपके लाइफ की सबसे बड़ी हिचकी कौन सी थी जो आप लाइफ में कभी भी नहीं भूल सकती है। इसके बारे में कैटरीना ने कहा कि एक बार वो तेलगू फिल्म की शूटिंग कर रही थी जिसमे उनके एक्टर वेंकटेस थे और फिल्म के किसी गाने की शूटिंग चल रही थी। कैटरीना ने बताया कि उस गाने को राजू सुंदरम कोरियोग्राफ कर रहे थे और उनको मेरे साथ प्रॉबलम हो रही थी और स्टेप सही से नहीं हो पा रहे थे। उसी समय वहां सलमान खान पहुंच गए और अचानक उन्होने कोरियोग्राफर से पूछ लिया कि कैटरीना की डांसिंग कैसी है। कोरियोग्राफर का जवाब सुनकर मेरे चेहरे का रंग उड़ गया क्योंकि उन्होने सलमान से कहा कि सर ये डांस में एकदम जीरो है। कैटरीना बताती है कि वो मेरे लाइफ की सबसे बड़ी हिचकी थी और उन्होने डांस को अपनी हिचकी समझकर मेहनत करना शुरु कर दिया। हालांकि कैटरीना बताती है कि मैं जीरो नहीं थी और बाद में कैट के गाने बहुत ज्यादा फेमस हुए। चिकनी चमेली, शीला की जवानी, काला चश्मा और स्वैग से स्वागत में कैटरीना की परफॉर्मेंस जानदार थी और पूरे देश को कैटरीना ने इस गाने पर नचाया। कैटरीना ने बताया कि जब दो हज़ार आठ में रेस आई तब बॉस्को सीजर ने गाने में डांस करने की उनको काफी हिम्मत दी थी। रानी मुखर्जी हाल ही में अपनी फिल्म की प्रमोशन के लिए शाहरुख खान से भी मिली थी और उनसे भी यही सवाल पूछा था। फिल्म हिचकी तेईस मार्च को पूरे देश में रिलीज कर दी जाएगी।
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भोपाल/पुणे। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह मुश्किल में पड़ सकते हैं। चुनाव से ठीक 8 दिन पहले दिग्विजय सिंह का नाम एक बार फिर माओवादियों के साथ संबंधों को लेकर आया है। पुणे पुलिस के मुताबिक माओवादी समर्थक नेताओं के मोबाइल नंबरों की जांच के दौरान एक नंबर मिला है, जिस पर कई बार बातें हुई है, वो नंबर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का निकला है।
भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच कर रही पुणे पुलिस मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से पूछताछ कर सकती है। पुणे पुलिस के डीसीपी सुहास बावचे के मुताबिक पुलिस को कुछ ऐसे तथ्य मिले हैं जिससे उनके नक्सलियों के साथ संबंध हो सकते हैं। बावचे ने कहा कि जरूरत पड़ी तो दिग्विजय को जांच में जुड़ने के के लिए समन भी भेज सकते हैं।
एक अंग्रेजी समाचार पत्र के मुताबिक पुणे की पुलिस ने जून में माओवादी विचारक रोना विल्सन को नक्सली नेता मिलिंद टेलम्बडे ने खत लिखा था, जिसमें कहा गया था कि कई कांग्रेसी नेता हमारी मदद को तैयार हैं। इसकी जांच में पुलिस ने जब गिरफ्तार माओवादी समर्थक नेता प्रकार ऊर्फ ऋतुपन गोस्वामी और सुरेंद्र गाडलिंग के मोबाइल नंबरों की जांच की तो एक नंबर पर उनकी कई बार बात होना पाया गया। यह नंबर किसी और का नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का निकला। इसका खुलासा होते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। डीसीपी के मुताबिक यह बेहद संवेदनशील और हाईप्रोफाइल मामला है।
संबित पात्रा ने लगाए थे आरोप इससे पहले भाजपा नेता संबित पात्रा ने आरोप लगाया था कि दिग्विजय सिंह के संबंध नक्सलियों के साथ हैं। दिग्वजय सिंह ने बीजेपी के इस आरोप पर तत्काल कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यदि बीजेपी मुझ पर नक्सली होने के आरोप लगा रही है तो सरकार मुझे गिरफ्तार क्यों नहीं करती है। दिग्विजय ने कहा कि उन्हें पहले भी देशद्रोही कहा जा चुका है, इसलिए सरकार उन्हें गिरफ्तार करके बताए।
दिग्विजय सिंह ने नक्सली कनेक्शन पर कहा कि उनके जिस फोन नंबर का जिक्र नक्सलियों के साथ आया है, वो चार साल से बंद है। आरएसएस और भाजपा मुझसे डरती है। दम है तो सरकार मुझे गिरफ्तार करके दिखाए।
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भोपाल/पुणे। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह मुश्किल में पड़ सकते हैं। चुनाव से ठीक आठ दिन पहले दिग्विजय सिंह का नाम एक बार फिर माओवादियों के साथ संबंधों को लेकर आया है। पुणे पुलिस के मुताबिक माओवादी समर्थक नेताओं के मोबाइल नंबरों की जांच के दौरान एक नंबर मिला है, जिस पर कई बार बातें हुई है, वो नंबर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का निकला है। भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच कर रही पुणे पुलिस मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से पूछताछ कर सकती है। पुणे पुलिस के डीसीपी सुहास बावचे के मुताबिक पुलिस को कुछ ऐसे तथ्य मिले हैं जिससे उनके नक्सलियों के साथ संबंध हो सकते हैं। बावचे ने कहा कि जरूरत पड़ी तो दिग्विजय को जांच में जुड़ने के के लिए समन भी भेज सकते हैं। एक अंग्रेजी समाचार पत्र के मुताबिक पुणे की पुलिस ने जून में माओवादी विचारक रोना विल्सन को नक्सली नेता मिलिंद टेलम्बडे ने खत लिखा था, जिसमें कहा गया था कि कई कांग्रेसी नेता हमारी मदद को तैयार हैं। इसकी जांच में पुलिस ने जब गिरफ्तार माओवादी समर्थक नेता प्रकार ऊर्फ ऋतुपन गोस्वामी और सुरेंद्र गाडलिंग के मोबाइल नंबरों की जांच की तो एक नंबर पर उनकी कई बार बात होना पाया गया। यह नंबर किसी और का नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का निकला। इसका खुलासा होते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है। डीसीपी के मुताबिक यह बेहद संवेदनशील और हाईप्रोफाइल मामला है। संबित पात्रा ने लगाए थे आरोप इससे पहले भाजपा नेता संबित पात्रा ने आरोप लगाया था कि दिग्विजय सिंह के संबंध नक्सलियों के साथ हैं। दिग्वजय सिंह ने बीजेपी के इस आरोप पर तत्काल कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यदि बीजेपी मुझ पर नक्सली होने के आरोप लगा रही है तो सरकार मुझे गिरफ्तार क्यों नहीं करती है। दिग्विजय ने कहा कि उन्हें पहले भी देशद्रोही कहा जा चुका है, इसलिए सरकार उन्हें गिरफ्तार करके बताए। दिग्विजय सिंह ने नक्सली कनेक्शन पर कहा कि उनके जिस फोन नंबर का जिक्र नक्सलियों के साथ आया है, वो चार साल से बंद है। आरएसएस और भाजपा मुझसे डरती है। दम है तो सरकार मुझे गिरफ्तार करके दिखाए।
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क्लब ने कहा कि सांतोस के स्टेडियम में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। मात्र 14 वर्ष की आयु में सांतोस क्लब से अपने फुटबॉल करियर की शुरुआत करने वाले कॉटिन्हो को निमोनिया के चलते जनवरी में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कॉटिन्हो ने क्लब के लिए 368 गोल किए थे। उन्होंने ब्राजील की राष्ट्रीय टीम के साथ 15 मैच खेले थे।
मोहित शर्मा ने CSK के खिलाफ दिल दहलाने वाले आखिरी ओवर पर किया खुलासाः "मैं सो नहीं पाया"
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क्लब ने कहा कि सांतोस के स्टेडियम में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। मात्र चौदह वर्ष की आयु में सांतोस क्लब से अपने फुटबॉल करियर की शुरुआत करने वाले कॉटिन्हो को निमोनिया के चलते जनवरी में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कॉटिन्हो ने क्लब के लिए तीन सौ अड़सठ गोल किए थे। उन्होंने ब्राजील की राष्ट्रीय टीम के साथ पंद्रह मैच खेले थे। मोहित शर्मा ने CSK के खिलाफ दिल दहलाने वाले आखिरी ओवर पर किया खुलासाः "मैं सो नहीं पाया"
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गाबाः ऑस्ट्रेलिया ने जोश हेजलवुड की अगुवाई में टीम इंडिया को एक समय 186/6 के स्कोर पर पहुंचाकर बैकफुट पर धकेल दिया था। मगर डेब्यू करने वाले वॉशिंगटन सुंदर और ऑलराउंडर शार्दुल ठाकुर ने 123 रन की शतकीय साझेदारी करके टीम इंडिया की जोरदार वापसी कराई। ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी 369 रन के जवाब में भारत की पहली पारी 336 रन पर सिमटी। इस तरह मेजबान टीम को पहली पारी के आधार पर 33 रन की बढ़त मिली।
टीम इंडिया के फैंस के लिए एक आंकड़ा ऐसा निकलकर सामने आया है, जिससे उन्हें खुशी जरूर होगी। दरअसल, ऑस्ट्रेलिया ने दो बार टेस्ट में पहली पारी के आधार पर भारत के खिलाफ 33 रन की बढ़त बनाई और दोनों ही मौकों पर उसे शिकस्त झेलनी पड़ी है। आखिरी बार ऐसा 2003 एडिलेड टेस्ट के दौरान हुआ था जब राहुल द्रविड़ ने 233 रन की उम्दा पारी खेली थी और उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया था। भारत ने तब ऑस्ट्रेलिया को 4 विकेट से मात दी थी। इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करके पहली पारी में 556 रन का विशाल स्कोर बनाया था। रिकी पोंटिंग ने 242 रन की उम्दा पारी खेली थी। टीम इंडिया ने जोरदार जवाब देते हुए 523 रन बनाए थे।
इस तरह ऑस्ट्रेलिया को पहली पारी के आधार पर 33 रन की बढ़त मिली थी। द्रविड़ के दोहरे शतक के अलावा वीवीएस लक्ष्मण ने 148 रन बनाए थे और दो सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों ने 303 रन की साझेदारी करके टीम इंडिया की मैच में वापसी कराई थी। इसके बाद दूसरी पारी में अजित अगरकर ने 41 रन देकर 6 विकेट झटके और ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी 196 रन पर ढेर हो गई। भारत ने 6 विकेट गंवाकर 233 रन का लक्ष्य हासिल करके मुकाबला अपने नाम किया। राहुल द्रविड़ ने नाबाद 72 रन बनाए थे।
इसके अलावा भारत के 1979 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी के आधार पर 33 रन की बढ़त हासिल की थी। यह 6 मैचों की सीरीज का तीसरा टेस्ट था जो अक्टूबर 1979 को खेला जा रहा था। टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी की और पहली पारी में 271 रन पर ऑलआउट हुई। कप्तान सुनील गावस्कर ने 76 रन की पारी खेली थी। जवाब में ग्राहन येलोप (89) की पारी की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 304 रन बनाए। इस तरह मेजबान टीम ने पहली पारी के आधार पर 33 रन की बढ़त बनाई।
टीम इंडिया ने दूसरी पारी में चेतन चौहान (84) की उम्दा पारी की बदौलत 311 रन बनाए। टीम इंडिया ने इस तरह ऑस्ट्रेलिया के सामने 278 रन का लक्ष्य रखा। कपिल देव ने गेंदबाजी से तांडव मचाया और ऑस्ट्रेलिया को दूसरी पारी में केवल 125 रन पर ढेर कर दिया। भारत ने यह मुकाबला 153 रन से अपने नाम किया। अब ऑस्ट्रेलिया ने मौजूदा ब्रिस्बेन टेस्ट में भारत के खिलाफ पहली पारी के आधार पर 33 रन की बढ़त हासिल की है। क्या टीम इंडिया भाग्यशाली रहकर गाबा में ऑस्ट्रेलिया का घमंड तोड़ने में कामयाब होगी? यह समय ही बताएगा। गाबा पर ऑस्ट्रेलिया ने पिछले 32 सालों से कोई टेस्ट मैच नहीं गंवाया है।
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गाबाः ऑस्ट्रेलिया ने जोश हेजलवुड की अगुवाई में टीम इंडिया को एक समय एक सौ छियासी/छः के स्कोर पर पहुंचाकर बैकफुट पर धकेल दिया था। मगर डेब्यू करने वाले वॉशिंगटन सुंदर और ऑलराउंडर शार्दुल ठाकुर ने एक सौ तेईस रन की शतकीय साझेदारी करके टीम इंडिया की जोरदार वापसी कराई। ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी तीन सौ उनहत्तर रन के जवाब में भारत की पहली पारी तीन सौ छत्तीस रन पर सिमटी। इस तरह मेजबान टीम को पहली पारी के आधार पर तैंतीस रन की बढ़त मिली। टीम इंडिया के फैंस के लिए एक आंकड़ा ऐसा निकलकर सामने आया है, जिससे उन्हें खुशी जरूर होगी। दरअसल, ऑस्ट्रेलिया ने दो बार टेस्ट में पहली पारी के आधार पर भारत के खिलाफ तैंतीस रन की बढ़त बनाई और दोनों ही मौकों पर उसे शिकस्त झेलनी पड़ी है। आखिरी बार ऐसा दो हज़ार तीन एडिलेड टेस्ट के दौरान हुआ था जब राहुल द्रविड़ ने दो सौ तैंतीस रन की उम्दा पारी खेली थी और उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया था। भारत ने तब ऑस्ट्रेलिया को चार विकेट से मात दी थी। इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करके पहली पारी में पाँच सौ छप्पन रन का विशाल स्कोर बनाया था। रिकी पोंटिंग ने दो सौ बयालीस रन की उम्दा पारी खेली थी। टीम इंडिया ने जोरदार जवाब देते हुए पाँच सौ तेईस रन बनाए थे। इस तरह ऑस्ट्रेलिया को पहली पारी के आधार पर तैंतीस रन की बढ़त मिली थी। द्रविड़ के दोहरे शतक के अलावा वीवीएस लक्ष्मण ने एक सौ अड़तालीस रन बनाए थे और दो सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों ने तीन सौ तीन रन की साझेदारी करके टीम इंडिया की मैच में वापसी कराई थी। इसके बाद दूसरी पारी में अजित अगरकर ने इकतालीस रन देकर छः विकेट झटके और ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी एक सौ छियानवे रन पर ढेर हो गई। भारत ने छः विकेट गंवाकर दो सौ तैंतीस रन का लक्ष्य हासिल करके मुकाबला अपने नाम किया। राहुल द्रविड़ ने नाबाद बहत्तर रन बनाए थे। इसके अलावा भारत के एक हज़ार नौ सौ उन्यासी में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी के आधार पर तैंतीस रन की बढ़त हासिल की थी। यह छः मैचों की सीरीज का तीसरा टेस्ट था जो अक्टूबर एक हज़ार नौ सौ उन्यासी को खेला जा रहा था। टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी की और पहली पारी में दो सौ इकहत्तर रन पर ऑलआउट हुई। कप्तान सुनील गावस्कर ने छिहत्तर रन की पारी खेली थी। जवाब में ग्राहन येलोप की पारी की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में तीन सौ चार रन बनाए। इस तरह मेजबान टीम ने पहली पारी के आधार पर तैंतीस रन की बढ़त बनाई। टीम इंडिया ने दूसरी पारी में चेतन चौहान की उम्दा पारी की बदौलत तीन सौ ग्यारह रन बनाए। टीम इंडिया ने इस तरह ऑस्ट्रेलिया के सामने दो सौ अठहत्तर रन का लक्ष्य रखा। कपिल देव ने गेंदबाजी से तांडव मचाया और ऑस्ट्रेलिया को दूसरी पारी में केवल एक सौ पच्चीस रन पर ढेर कर दिया। भारत ने यह मुकाबला एक सौ तिरेपन रन से अपने नाम किया। अब ऑस्ट्रेलिया ने मौजूदा ब्रिस्बेन टेस्ट में भारत के खिलाफ पहली पारी के आधार पर तैंतीस रन की बढ़त हासिल की है। क्या टीम इंडिया भाग्यशाली रहकर गाबा में ऑस्ट्रेलिया का घमंड तोड़ने में कामयाब होगी? यह समय ही बताएगा। गाबा पर ऑस्ट्रेलिया ने पिछले बत्तीस सालों से कोई टेस्ट मैच नहीं गंवाया है।
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तो यहूदी हो गया यूँहीं अगर कहा खुदा जानता है कि मैंने ऐसा नहीं किया है और यह बात उस ने झूट कही है तो अइन अल्फ़ाज़ से भी कसम हो जाती है हल्फ़ करता हूँ, कसम खाता हूँ, मैं शहादत खुदा गवाह है, खुदा को गवाह कर के कहता हूँ, मुझ पर क़सम है, ला-इलाह इल्लल्लाह मैं यह काम न करूँगा, अगर यह काम करे या किया हो तो यहूदी है या नसरानी या काफिर या काफिरोंका शरीक, मरते वक़्त ईमान नसीब न हो। बे ईमान मरे काफ़िर हो कर मरे और यह अल्फ़ाज़ बहुत सख़्त हैं कि अगर झूटी कसम खाई या कसम तोड़ दी तो बाज़ सूरत में काफिर होजायेगा जो शख़्स इस किस्म की झुटी कसम खाये उस की निस्बत हदीस में फ़रमाया वह वैसा ही है जैसा उस ने कहा यानी यहूदी होने की कसम खाई कसर उलमा के नज़दीक काफिर है मसअला :- यह अल्फ़ाज़े क़सम नहीं अगर्चे उनके बोलने से गुनाहगार होगा जब कि अपनी बात में झूटा है अगर ऐसा करूँ तो मुझ पर अल्लाह का ग़ज़ब हो। उस की लअनत हो, उस का अज़ाब हो, खुदा का कहर टूटे मुझ पर आसमान फट पड़े, मुझे ज़मीन निगल जाये, मुझ पर खुदा की मार हो, खुदा की फटकार हो, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की शफाअत न मिले मुझे खुदा का दीदार न नसीब हो, मरते वक़्त कलिमा न नसीब हो ।
मसअलाः- जो शख़्स किसी चीज़ को अपने ऊपर हराम करे मसलन कहे कि फुलाँ चीज़ मुझ पर हराम है तो उस के कह देने से वह शय हराम नहीं होगी कि अल्लाह ने जिस चीज़ को हलाल किया उसे कौन हराम कर सकेगा मगर उस के बरतने से कफ़्फ़ारा लाज़िम आयेगा यानी यह भी कसम है । (तबईन)
मसअला :- तुझ से बात करना हराम है यह यमीन है बात करेगा तो कफ़्फ़ारा लज़िम होगा (आलमगीरी) मसअला :- अगर उस को खाऊँ तो सुअर खाऊँ या मुर्दार खाऊँ यह कसम नहीं यानी कफ़्फ़ारा लाज़िम न होगा । (म्बसूत)
मसअला :- गैर खुदा की कसम कसम नहीं मसलन तुम्हारी कसम अपनी क़सम, तुम्हारी जान की क़सम, अपनी जान की क़सम, तुम्हारे सर की कसम, अपने सर की कसम, आँखों की कसम, जवानी की क़सम, माँ बाप की कसम, औलाद की क़सम, मज़हब की कसम, दीन की कसम, इल्म की क़सम, कअबा की कसम, अर्शे इलाही की कसम, रसूलुल्लाह की कसम ।
मसअला :- खुदा और रसूल की कसम यह काम न करूँगा, यह कसम नहीं अगर कहा मैंने कसम खाई है कि यह काम न करूँगा और वाकेअ में कसम खाई है तो कसम है और झूट कहा तो कसम नहीं झूट बोलने का गुनाह हुआ और अगर कहा खुदा की क़सम कि इस से बड़ कर कोई क़सम नहीं या उस के नाम से बुजुर्ग कोई नाम नहीं या उस से बड़ कर कोई नहीं मैं उस काम को न करूँगा तो यह क़सम होगई और दरमियान का लफ़्ज़ फाज़िल करार न दिया जायेगा । (आलमगीरी) मसअला :- अगर यह काम करूँ तो खुदा से मुझे जितनी उमीद हों सब से ना उमीद हूँ यह क़सम है और तोड़ने पर कफ़्फ़ारा लाज़िम । (आलमगीरी)
मसअला :अगर यह काम करूँ तो काफ़िरों से बद तर हो जाऊँ तो कसम है और अगर कहा कि यह काम करे तो काफ़िर को उस पर शरफ हो तो कसम नही । (आलमगीरी)
मसअला ::- अगर किसी काम की चन्द कसमें खाई और उस के ख़िलाफ किया तो जितनी कसमें हैं उतने ही कफ़्फ़ारे लाज़िम होंगे मसलन कहा कि वल्लाह बिल्लाह मैं यह नहीं करूँगा या कहा खुदा की कसम, परवरदिगार की क़सम, तो यह दो कसमें हैं। किसी काम की निस्बत कसम खाई
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तो यहूदी हो गया यूँहीं अगर कहा खुदा जानता है कि मैंने ऐसा नहीं किया है और यह बात उस ने झूट कही है तो अइन अल्फ़ाज़ से भी कसम हो जाती है हल्फ़ करता हूँ, कसम खाता हूँ, मैं शहादत खुदा गवाह है, खुदा को गवाह कर के कहता हूँ, मुझ पर क़सम है, ला-इलाह इल्लल्लाह मैं यह काम न करूँगा, अगर यह काम करे या किया हो तो यहूदी है या नसरानी या काफिर या काफिरोंका शरीक, मरते वक़्त ईमान नसीब न हो। बे ईमान मरे काफ़िर हो कर मरे और यह अल्फ़ाज़ बहुत सख़्त हैं कि अगर झूटी कसम खाई या कसम तोड़ दी तो बाज़ सूरत में काफिर होजायेगा जो शख़्स इस किस्म की झुटी कसम खाये उस की निस्बत हदीस में फ़रमाया वह वैसा ही है जैसा उस ने कहा यानी यहूदी होने की कसम खाई कसर उलमा के नज़दीक काफिर है मसअला :- यह अल्फ़ाज़े क़सम नहीं अगर्चे उनके बोलने से गुनाहगार होगा जब कि अपनी बात में झूटा है अगर ऐसा करूँ तो मुझ पर अल्लाह का ग़ज़ब हो। उस की लअनत हो, उस का अज़ाब हो, खुदा का कहर टूटे मुझ पर आसमान फट पड़े, मुझे ज़मीन निगल जाये, मुझ पर खुदा की मार हो, खुदा की फटकार हो, रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम की शफाअत न मिले मुझे खुदा का दीदार न नसीब हो, मरते वक़्त कलिमा न नसीब हो । मसअलाः- जो शख़्स किसी चीज़ को अपने ऊपर हराम करे मसलन कहे कि फुलाँ चीज़ मुझ पर हराम है तो उस के कह देने से वह शय हराम नहीं होगी कि अल्लाह ने जिस चीज़ को हलाल किया उसे कौन हराम कर सकेगा मगर उस के बरतने से कफ़्फ़ारा लाज़िम आयेगा यानी यह भी कसम है । मसअला :- तुझ से बात करना हराम है यह यमीन है बात करेगा तो कफ़्फ़ारा लज़िम होगा मसअला :- अगर उस को खाऊँ तो सुअर खाऊँ या मुर्दार खाऊँ यह कसम नहीं यानी कफ़्फ़ारा लाज़िम न होगा । मसअला :- गैर खुदा की कसम कसम नहीं मसलन तुम्हारी कसम अपनी क़सम, तुम्हारी जान की क़सम, अपनी जान की क़सम, तुम्हारे सर की कसम, अपने सर की कसम, आँखों की कसम, जवानी की क़सम, माँ बाप की कसम, औलाद की क़सम, मज़हब की कसम, दीन की कसम, इल्म की क़सम, कअबा की कसम, अर्शे इलाही की कसम, रसूलुल्लाह की कसम । मसअला :- खुदा और रसूल की कसम यह काम न करूँगा, यह कसम नहीं अगर कहा मैंने कसम खाई है कि यह काम न करूँगा और वाकेअ में कसम खाई है तो कसम है और झूट कहा तो कसम नहीं झूट बोलने का गुनाह हुआ और अगर कहा खुदा की क़सम कि इस से बड़ कर कोई क़सम नहीं या उस के नाम से बुजुर्ग कोई नाम नहीं या उस से बड़ कर कोई नहीं मैं उस काम को न करूँगा तो यह क़सम होगई और दरमियान का लफ़्ज़ फाज़िल करार न दिया जायेगा । मसअला :- अगर यह काम करूँ तो खुदा से मुझे जितनी उमीद हों सब से ना उमीद हूँ यह क़सम है और तोड़ने पर कफ़्फ़ारा लाज़िम । मसअला :अगर यह काम करूँ तो काफ़िरों से बद तर हो जाऊँ तो कसम है और अगर कहा कि यह काम करे तो काफ़िर को उस पर शरफ हो तो कसम नही । मसअला ::- अगर किसी काम की चन्द कसमें खाई और उस के ख़िलाफ किया तो जितनी कसमें हैं उतने ही कफ़्फ़ारे लाज़िम होंगे मसलन कहा कि वल्लाह बिल्लाह मैं यह नहीं करूँगा या कहा खुदा की कसम, परवरदिगार की क़सम, तो यह दो कसमें हैं। किसी काम की निस्बत कसम खाई
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उत्तर प्रदेश के बाद अब उत्तराखंड की पुलिस ने भी अवैध बूचड़खानों के खिलाप अभियान शुरू कर दिया है। शनिवार (8 अप्रैल) सुबह 4 बजे जब देहरादून शहर नींद के आगोश में था तो पुलिस ने यहां के अवैध बूचड़खानों में छापा मारा। और कई गोवंश को काटे जाने से बचाया। अंग्रेजी वेबसाइट द हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक पुलिस को शहर के कई मुस्लिम बहुत इलाके में जानवरों को काटे जानें की शिकायतें मिल रही थी, पुलिस ने शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए शनिवार को कई अवैध कसाईघरों में छापा मारा। पुलिस जब यहां सुबह सुबह पहुंची तो यहां का नज़ारा बेहद हैरान करने वाला था। यहां अवैध बूचड़खाना चलाने वाले लोग अवैध रूप से जानवर काट रहे थे, इन जानवरों का खून खुले रुप से नाली में डाला जा रहा था। यही नहीं यहां जानवरों को काटने के बाद पैदा होने वाले अवशिष्ट पदार्थों के भी उचित निपटान की व्यवस्था नहीं थी।
पुलिस की इस छापेमारी टीम में नगर निगम, जिला प्रशासन, और फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट के अधिकारी शामिल थे। पुलिस ने सबसे पहले मुस्लिम बहुल इलाके में स्थित इनामुल्लाह बिल्डिंग में छापा मारा, हिन्दुस्तान टाइम्स के सूत्रों के मुताबिक यहां कई गोवंश को बहुंत ही अस्वास्थ्यकर हालात में काटा जा रहा था। इन जानवरों को काटने से निकलने वाला खून सार्वजनिक नलियों में बह रहा था जो कि पर्यावरण के नियमों का सरासर उल्लंघन है। फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट के अधिकारी अनोज कुमार थपलियाल ने बताया कि अंदर हालत बेहद खराब हैं।
पुलिस ने इसके बाद कर्गी चौक और चुखुवाला में अवैध कत्लखानों में छापा मारा। यहां भी हालत ऐसे ही थे।
पुलिस ने इस मामले में 7 लोगों को नोटिस भेजा है। इन लोगों को तीन दिनों के अंदर फूड सेफ्टी को जवाब सौंपने को कहा गया है। पुलिस ने इनके खिलाफ अवैध तरीके से गोवंश को काटने और पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया है। सूत्रों के मुताबिक देहरादून जिले में लगभग 50 कसाईखाने अवैध रुप से चल रहे हैं। देहरादून के एसपी अजय सिंह ने कहा कि, अवैध बूचडखानों के खिलाफ पुलिस ने अभी अभियान शुरू ही किया है। आने वाले दिनों में भी ऐसे छापेमारी जारी रहेंगे।
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उत्तर प्रदेश के बाद अब उत्तराखंड की पुलिस ने भी अवैध बूचड़खानों के खिलाप अभियान शुरू कर दिया है। शनिवार सुबह चार बजे जब देहरादून शहर नींद के आगोश में था तो पुलिस ने यहां के अवैध बूचड़खानों में छापा मारा। और कई गोवंश को काटे जाने से बचाया। अंग्रेजी वेबसाइट द हिन्दुस्तान टाइम्स के मुताबिक पुलिस को शहर के कई मुस्लिम बहुत इलाके में जानवरों को काटे जानें की शिकायतें मिल रही थी, पुलिस ने शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए शनिवार को कई अवैध कसाईघरों में छापा मारा। पुलिस जब यहां सुबह सुबह पहुंची तो यहां का नज़ारा बेहद हैरान करने वाला था। यहां अवैध बूचड़खाना चलाने वाले लोग अवैध रूप से जानवर काट रहे थे, इन जानवरों का खून खुले रुप से नाली में डाला जा रहा था। यही नहीं यहां जानवरों को काटने के बाद पैदा होने वाले अवशिष्ट पदार्थों के भी उचित निपटान की व्यवस्था नहीं थी। पुलिस की इस छापेमारी टीम में नगर निगम, जिला प्रशासन, और फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट के अधिकारी शामिल थे। पुलिस ने सबसे पहले मुस्लिम बहुल इलाके में स्थित इनामुल्लाह बिल्डिंग में छापा मारा, हिन्दुस्तान टाइम्स के सूत्रों के मुताबिक यहां कई गोवंश को बहुंत ही अस्वास्थ्यकर हालात में काटा जा रहा था। इन जानवरों को काटने से निकलने वाला खून सार्वजनिक नलियों में बह रहा था जो कि पर्यावरण के नियमों का सरासर उल्लंघन है। फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट के अधिकारी अनोज कुमार थपलियाल ने बताया कि अंदर हालत बेहद खराब हैं। पुलिस ने इसके बाद कर्गी चौक और चुखुवाला में अवैध कत्लखानों में छापा मारा। यहां भी हालत ऐसे ही थे। पुलिस ने इस मामले में सात लोगों को नोटिस भेजा है। इन लोगों को तीन दिनों के अंदर फूड सेफ्टी को जवाब सौंपने को कहा गया है। पुलिस ने इनके खिलाफ अवैध तरीके से गोवंश को काटने और पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया है। सूत्रों के मुताबिक देहरादून जिले में लगभग पचास कसाईखाने अवैध रुप से चल रहे हैं। देहरादून के एसपी अजय सिंह ने कहा कि, अवैध बूचडखानों के खिलाफ पुलिस ने अभी अभियान शुरू ही किया है। आने वाले दिनों में भी ऐसे छापेमारी जारी रहेंगे।
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Brahmastra Trailer Release: जबरदस्त VFX से तैयार ये फिल्म हॉलीवुड को देगी टक्कर।
साउथ सिनेमा पड रहा बॉलीवुड पर भारी,रॉ का ट्रेलर दे रहा RRR को टक्कर।
जयेशभाई जोरदार का ट्रेलर रिलीज, समाजिक कुरीतियों पर होगा कटाक्ष।
Runway 34 के दोनों ट्रेलर रिलीज़,सच्ची घटना पर आधारित है फिल्म।
भूल भुलैया 2 का ट्रेलर रिलीज़,15 साल बाद स्क्रीन पर लौटेगी मंजुलिका।
The Kashmir Files के प्रीमियर पर रो पड़े दर्शक,थिएटर में आज रिलीज़ होगी फिल्म।
Shabaash Mithu Trailer Out: तापसी पन्नू के किरदार ने जीता दिल, भावुक हुए लोग।
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Brahmastra Trailer Release: जबरदस्त VFX से तैयार ये फिल्म हॉलीवुड को देगी टक्कर। साउथ सिनेमा पड रहा बॉलीवुड पर भारी,रॉ का ट्रेलर दे रहा RRR को टक्कर। जयेशभाई जोरदार का ट्रेलर रिलीज, समाजिक कुरीतियों पर होगा कटाक्ष। Runway चौंतीस के दोनों ट्रेलर रिलीज़,सच्ची घटना पर आधारित है फिल्म। भूल भुलैया दो का ट्रेलर रिलीज़,पंद्रह साल बाद स्क्रीन पर लौटेगी मंजुलिका। The Kashmir Files के प्रीमियर पर रो पड़े दर्शक,थिएटर में आज रिलीज़ होगी फिल्म। Shabaash Mithu Trailer Out: तापसी पन्नू के किरदार ने जीता दिल, भावुक हुए लोग।
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बस्तर। जगदलपुर में कोरोना वैक्सीन की नई खेप पहुंचने के बाद रविवार को टीकाकरण में तेजी देखी गई. जगदलपुर शहर में टीकाकरण के लिए 6 टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं. हर दिन प्रत्येक टीकाकरण केंद्र में औसतन 100 से 150 लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है.
बता दें कि शनिवार देर शाम रायपुर से 7700 टीका जगदलपुर पहुंचे, हालांकि जिस मात्रा में टीके राजधानी से यहां पहुंचे हैं. इस हिसाब से यह स्टॉक भी 3 से 4 दिन में समाप्त हो जाएगा. वहीं टीकाकरण के लिए स्थानीय प्रशासन ने सीजी टीका एप का उपयोग शुरू कर दिया है.
इसके पहले बीपीएल-एपीएल और अंत्योदय के लिए निर्धारित आरक्षण के आधार पर टीका लगाया जा रहा था. अब सीजी टीका एप में टीकाकरण केंद्र का चयन कर खुद पंजीकृत कर सकते हैं. टीका लगवाया जा सकेगा. पूर्व में निर्धारित आरक्षण को खत्म कर दिया गया है.
वहीं कई हितग्राही टीका एप में पंजीयन कराने हेल्प डेस्क भी केंद्र भी पहुंच रहें हैं. केंद्रों में भीड़ का सामना करना पड़ रहा है. शहर में एप के माध्यम से सिर्फ एक ही केंद्र दिख रहा है, जिससे हितग्राहियों में नाराजगी भी देखने को मिली है. इस संबंध में महापौर का कहना है कि कुछ तकनीकी कारणों से एप में थोड़ी समस्या आ रही है. बहुत जल्द ही इस समस्या को सुधारा जाएगा.
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बस्तर। जगदलपुर में कोरोना वैक्सीन की नई खेप पहुंचने के बाद रविवार को टीकाकरण में तेजी देखी गई. जगदलपुर शहर में टीकाकरण के लिए छः टीकाकरण केंद्र बनाए गए हैं. हर दिन प्रत्येक टीकाकरण केंद्र में औसतन एक सौ से एक सौ पचास लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है. बता दें कि शनिवार देर शाम रायपुर से सात हज़ार सात सौ टीका जगदलपुर पहुंचे, हालांकि जिस मात्रा में टीके राजधानी से यहां पहुंचे हैं. इस हिसाब से यह स्टॉक भी तीन से चार दिन में समाप्त हो जाएगा. वहीं टीकाकरण के लिए स्थानीय प्रशासन ने सीजी टीका एप का उपयोग शुरू कर दिया है. इसके पहले बीपीएल-एपीएल और अंत्योदय के लिए निर्धारित आरक्षण के आधार पर टीका लगाया जा रहा था. अब सीजी टीका एप में टीकाकरण केंद्र का चयन कर खुद पंजीकृत कर सकते हैं. टीका लगवाया जा सकेगा. पूर्व में निर्धारित आरक्षण को खत्म कर दिया गया है. वहीं कई हितग्राही टीका एप में पंजीयन कराने हेल्प डेस्क भी केंद्र भी पहुंच रहें हैं. केंद्रों में भीड़ का सामना करना पड़ रहा है. शहर में एप के माध्यम से सिर्फ एक ही केंद्र दिख रहा है, जिससे हितग्राहियों में नाराजगी भी देखने को मिली है. इस संबंध में महापौर का कहना है कि कुछ तकनीकी कारणों से एप में थोड़ी समस्या आ रही है. बहुत जल्द ही इस समस्या को सुधारा जाएगा.
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1- बहुत baar रात में कुछ हैवी खा लेने से खाना पचने में दिक्कत होती है, जिससे पेट में एसिडिटी और जलन की समस्या होने लगती है. जिसकेकारण कभी कभी नींद आने में भी दिक्कत होने लगती है. ऐसे में एक गिलास गुनगुने पानी 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच सेब के सिरके को मिलाकर पीएं. इस बात का ध्यान रखें की इसे हमेशा सोने से आधा घंटा पहले पीना चाहिए. इससे खाना आसानी से पच जाएगा.
2- नियमित रूप से रात को सोने से पहले 1 गिलास हल्के गर्म पानी में 2 चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पीने से बॉडी की एक्सट्रा कैलोरी बर्न होने लगती है और मोटापा कम होता है.
3- जिन लोगो को शुगर की समस्या है उनके लिए भी सेब के सिरके का सेवन बहुत फ़ायदेमदं होता है. रोज़ाना सेब के सिरके को गर्म पानी के साथ मिलाकर पीने से बॉडी में शुगर का लेवल हमेशा कण्ट्रोल में रहता है का सेवन करना चाहिए. रोजाना रात को सोने से पहले 2 चम्मच सिरका पीने से फायदा होता है.
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एक- बहुत baar रात में कुछ हैवी खा लेने से खाना पचने में दिक्कत होती है, जिससे पेट में एसिडिटी और जलन की समस्या होने लगती है. जिसकेकारण कभी कभी नींद आने में भी दिक्कत होने लगती है. ऐसे में एक गिलास गुनगुने पानी एक चम्मच शहद और एक चम्मच सेब के सिरके को मिलाकर पीएं. इस बात का ध्यान रखें की इसे हमेशा सोने से आधा घंटा पहले पीना चाहिए. इससे खाना आसानी से पच जाएगा. दो- नियमित रूप से रात को सोने से पहले एक गिलास हल्के गर्म पानी में दो चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पीने से बॉडी की एक्सट्रा कैलोरी बर्न होने लगती है और मोटापा कम होता है. तीन- जिन लोगो को शुगर की समस्या है उनके लिए भी सेब के सिरके का सेवन बहुत फ़ायदेमदं होता है. रोज़ाना सेब के सिरके को गर्म पानी के साथ मिलाकर पीने से बॉडी में शुगर का लेवल हमेशा कण्ट्रोल में रहता है का सेवन करना चाहिए. रोजाना रात को सोने से पहले दो चम्मच सिरका पीने से फायदा होता है.
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फिल्म बारूद साल 1998 में रिलीज़ हुई एक बॉलीवुड एक्शन मसाला फिल्म है, जिसका निर्देशन प्रमोद चक्रवर्ती ने किया है। इस फिल्म में अक्षय कुमार और रवीना टंडन लीड रोल में दिखाई दिये है। अमरीश पूरी, मोहन जोशी, राखी और मोहनीश बहल, फिल्म में सहायक भूमिका में नज़र आये है।
Jawan- 50 करोड़ की ओपनिंग के साथ Shahrukh Khan? इस एक्टर ने की तगड़ी भविष्यवाणी!
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फिल्म बारूद साल एक हज़ार नौ सौ अट्ठानवे में रिलीज़ हुई एक बॉलीवुड एक्शन मसाला फिल्म है, जिसका निर्देशन प्रमोद चक्रवर्ती ने किया है। इस फिल्म में अक्षय कुमार और रवीना टंडन लीड रोल में दिखाई दिये है। अमरीश पूरी, मोहन जोशी, राखी और मोहनीश बहल, फिल्म में सहायक भूमिका में नज़र आये है। Jawan- पचास करोड़ की ओपनिंग के साथ Shahrukh Khan? इस एक्टर ने की तगड़ी भविष्यवाणी!
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(आदित्य राय)
छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में जो दिग्गज लगातार प्रचार के लिए पहुंच रहे हैं, उनमें एक नाम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी है. पिछले 15 दिन में योगी आदित्यनाथ 20 से अधिक चुनावी सभाएं छत्तीसगढ़ में कर चुके हैं. अयोध्या की विवादित जमीन पर राम मंदिर निर्माण को लेकर योगी आदित्यनाथ लगातार कांग्रेस पर हमलावार हैं. चुनाव प्रचार में योगी बार-बार एक लाइन दोहराते सुने जा सकते हैं कि, 'जो कांग्रेस राम की नहीं, वह हमारे किसी काम की नहीं'.
छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रचार के लिए यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ से न्यूज 18 ने खास बातचीत की. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भाजपा विकास और सुशासन के मुद्दे पर चुनाव मैदान में है. केंद्र और राज्य सरकारों ने बेहतर काम किया है. अपने काम के दम पर भाजपा चुनाव मैदान में हैं. योगी ने कहा कि विकास और सुशासन ही रामराज्य का आधार है. भाजपा ने यह किया है और इसी आधार पर जनता के सामने है.
(ये भी पढ़ेंः योगी आदित्यनाथ ने इशारों में कहा- 'इटली से आए हैं धर्म के सौदागर')
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संवैधानिक मर्यादाओं में रहकर के जनभावनाओं का आदर करने के पक्ष में हैं. हम भारत की संवैधानिक मर्यादाओं को ध्यान में रखकर इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाएंगे. योगी ने कहा कि जनभावनाएं यह कहती हैं कि इस मामले की जल्द ही सुनवाई हो. देश में शांति और सौहार्द के हित में भी यही है. देश की न्यायपालिका स्वतंत्र है. इस मामले में कब फैसला करना है, यह न्यायपालिका तय करेगी?
यूपी में समुदाय विशेष के लोगों की असुरक्षा पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कौन रहना चाहता है और कौन छोड़ना चाहता है. ये उनका अपना विषय है. अयोध्या क्या पूरे उत्तर प्रदेश में हर व्यक्ति सुरक्षित है. कोई राजनीतिक उद्देश्य से इन मुद्दों को अपना बनाना चाहता है तो ये उसका विषय है. उत्तर प्रदेश में सबकी सुरक्षा की गारंटी है. योगी ने कहा कि राहुल गांधी के पास दूसरा कोई मुद्दा नहीं है. अनावश्यक रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने, विकास के मुद्दे से देश का ध्यान भटकाने की यह शरारत पूर्ण चेष्टा है.
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस ने देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया है. देश की एयरफोर्स बार-बार कह रही कि एयरफोर्स की ताकत के लिए 5वीं पीढ़ी का युद्धक विमान चाहिए. राफेल इसका महत्वपूर्ण पार्ट है. अगर भाजपा ने इसे आगे बढ़ाया है तो राजनीति करने की बजाय तथ्यों को समझने की आवश्यकता है. देश को कौन से युद्धक विमान चाहिए. ये रक्षा विशेषज्ञ तय करेंगे, राहुल गांधी या कोई और नहीं.
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चुनाव हर 5 साल में होंगे. चुनाव अपनी जगह होंगे, लेकिन कुंभ दुनिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजन है. यूनिस्को ने कुंभ को पहली बार बहुमूल्य सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी है. हमें अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर पर गौरव की अनुभूति करनी चाहिए और यह हमारा गौरव है. कुम्भ 2019 के प्रारंभ में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में है इसकी भव्य तैयारी की जा रही है.
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छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में जो दिग्गज लगातार प्रचार के लिए पहुंच रहे हैं, उनमें एक नाम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी है. पिछले पंद्रह दिन में योगी आदित्यनाथ बीस से अधिक चुनावी सभाएं छत्तीसगढ़ में कर चुके हैं. अयोध्या की विवादित जमीन पर राम मंदिर निर्माण को लेकर योगी आदित्यनाथ लगातार कांग्रेस पर हमलावार हैं. चुनाव प्रचार में योगी बार-बार एक लाइन दोहराते सुने जा सकते हैं कि, 'जो कांग्रेस राम की नहीं, वह हमारे किसी काम की नहीं'. छत्तीसगढ़ में चुनाव प्रचार के लिए यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ से न्यूज अट्ठारह ने खास बातचीत की. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भाजपा विकास और सुशासन के मुद्दे पर चुनाव मैदान में है. केंद्र और राज्य सरकारों ने बेहतर काम किया है. अपने काम के दम पर भाजपा चुनाव मैदान में हैं. योगी ने कहा कि विकास और सुशासन ही रामराज्य का आधार है. भाजपा ने यह किया है और इसी आधार पर जनता के सामने है. अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संवैधानिक मर्यादाओं में रहकर के जनभावनाओं का आदर करने के पक्ष में हैं. हम भारत की संवैधानिक मर्यादाओं को ध्यान में रखकर इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाएंगे. योगी ने कहा कि जनभावनाएं यह कहती हैं कि इस मामले की जल्द ही सुनवाई हो. देश में शांति और सौहार्द के हित में भी यही है. देश की न्यायपालिका स्वतंत्र है. इस मामले में कब फैसला करना है, यह न्यायपालिका तय करेगी? यूपी में समुदाय विशेष के लोगों की असुरक्षा पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कौन रहना चाहता है और कौन छोड़ना चाहता है. ये उनका अपना विषय है. अयोध्या क्या पूरे उत्तर प्रदेश में हर व्यक्ति सुरक्षित है. कोई राजनीतिक उद्देश्य से इन मुद्दों को अपना बनाना चाहता है तो ये उसका विषय है. उत्तर प्रदेश में सबकी सुरक्षा की गारंटी है. योगी ने कहा कि राहुल गांधी के पास दूसरा कोई मुद्दा नहीं है. अनावश्यक रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने, विकास के मुद्दे से देश का ध्यान भटकाने की यह शरारत पूर्ण चेष्टा है. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस ने देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया है. देश की एयरफोर्स बार-बार कह रही कि एयरफोर्स की ताकत के लिए पाँचवीं पीढ़ी का युद्धक विमान चाहिए. राफेल इसका महत्वपूर्ण पार्ट है. अगर भाजपा ने इसे आगे बढ़ाया है तो राजनीति करने की बजाय तथ्यों को समझने की आवश्यकता है. देश को कौन से युद्धक विमान चाहिए. ये रक्षा विशेषज्ञ तय करेंगे, राहुल गांधी या कोई और नहीं. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चुनाव हर पाँच साल में होंगे. चुनाव अपनी जगह होंगे, लेकिन कुंभ दुनिया का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयोजन है. यूनिस्को ने कुंभ को पहली बार बहुमूल्य सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी है. हमें अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर पर गौरव की अनुभूति करनी चाहिए और यह हमारा गौरव है. कुम्भ दो हज़ार उन्नीस के प्रारंभ में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में है इसकी भव्य तैयारी की जा रही है. .
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किसानों के विरोध प्रदर्शन के चलते नोएडा और गाजियाबाद की तरफ से दिल्ली आने वाली ट्रैफिक के लिए चिल्ला और गाजीपुर बॉर्डर को बंद कर दिया गया है। लोगों को दिल्ली आने के लिए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई।
दिल्ली आने के लिए लोग आनंद विहार और डीएनडी जैसे रास्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके चलते नए साल में पार्टी मनाने वालों के साथ अन्य लोगों को भी परेशानी हो रही है। हरियाणा-दिल्ली के बीच सिंघु पर किसान डटे हुए हैं। इस वजह से सिंघु बॉर्डर पर यातायात पूरी तरह से बंद है।
कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के आंदोलन से खासकर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्रों में आपूर्ति व्यवस्था बाधित होने से दिसंबर तिमाही में 70,000 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होगा। उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स ने ये जानकारी दी है।
नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज किसान आंदोलन का 37वां दिन है। किसान संगठनों ने साफ कह दिया है कि जब तक नए कानूनों को वापस नहीं लिया जाता, वे अपने आंदोलन को जारी रखेंगे।
30 दिसंबर को सरकार और किसानों के बीच हुई बैठक में किसानों से बिजली संशोधन विधेयक 2020 और पराली जलाने से संबंधित कानूनों पर ही सहमति बन सकी।
जिन मुद्दों पर कुछ बात बनी उसमें मुख्य बात ये थी कि सरकार बिजली की कीमत और पराली जलाने को लेकर जुर्माने की कार्रवाई के मुद्दों पर किसानों की शंका दूर करेगी। हालांकि विरोध की प्रमुख वजह न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कोई ठोस फैसला नहीं हो सका।
कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसान डटे हुए हैं। किसानों के आंदोलन का आज 37वां दिन है। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के सुखविंदर सिंह सभरा ने कहा कि तीनों कृषि कानून रद्द होने चाहिए, अगर 4 जनवरी को इसका कोई हल नहीं निकला तो आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज होगा।
कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े किसान आज शुक्रवार को केंद्र सरकार के साथ होने वाली बैठक को लेकर अहम बैठक करने वाले हैं। सिंघु बॉर्डर पर दोपहर 2 बजे किसानों की बैठक होगी।
इस बैठक में सरकार से अगले दौर की बातचीत और आंदोलन को लेकर रणनीति पर चर्चा होगी। इसके बाद शाम पांच बजे किसान संगठनों के नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। कृषि कानूनों को लेकर सरकार और किसानों के बीच अगले दौर की बातचीत 4 जनवरी को होनी है।
इस बातचीत के लिए किसानों की अगली रणनीति क्या होगी, इसी को लेकर आज किसान संगठनों की एक बैठक होने जा रही है। इस बैठक में सभी प्रमुख किसान संगठन शामिल होंगे।
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किसानों के विरोध प्रदर्शन के चलते नोएडा और गाजियाबाद की तरफ से दिल्ली आने वाली ट्रैफिक के लिए चिल्ला और गाजीपुर बॉर्डर को बंद कर दिया गया है। लोगों को दिल्ली आने के लिए वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। दिल्ली आने के लिए लोग आनंद विहार और डीएनडी जैसे रास्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके चलते नए साल में पार्टी मनाने वालों के साथ अन्य लोगों को भी परेशानी हो रही है। हरियाणा-दिल्ली के बीच सिंघु पर किसान डटे हुए हैं। इस वजह से सिंघु बॉर्डर पर यातायात पूरी तरह से बंद है। कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के आंदोलन से खासकर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्रों में आपूर्ति व्यवस्था बाधित होने से दिसंबर तिमाही में सत्तर,शून्य करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होगा। उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स ने ये जानकारी दी है। नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा है। आज किसान आंदोलन का सैंतीसवां दिन है। किसान संगठनों ने साफ कह दिया है कि जब तक नए कानूनों को वापस नहीं लिया जाता, वे अपने आंदोलन को जारी रखेंगे। तीस दिसंबर को सरकार और किसानों के बीच हुई बैठक में किसानों से बिजली संशोधन विधेयक दो हज़ार बीस और पराली जलाने से संबंधित कानूनों पर ही सहमति बन सकी। जिन मुद्दों पर कुछ बात बनी उसमें मुख्य बात ये थी कि सरकार बिजली की कीमत और पराली जलाने को लेकर जुर्माने की कार्रवाई के मुद्दों पर किसानों की शंका दूर करेगी। हालांकि विरोध की प्रमुख वजह न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कोई ठोस फैसला नहीं हो सका। कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसान डटे हुए हैं। किसानों के आंदोलन का आज सैंतीसवां दिन है। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के सुखविंदर सिंह सभरा ने कहा कि तीनों कृषि कानून रद्द होने चाहिए, अगर चार जनवरी को इसका कोई हल नहीं निकला तो आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज होगा। कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े किसान आज शुक्रवार को केंद्र सरकार के साथ होने वाली बैठक को लेकर अहम बैठक करने वाले हैं। सिंघु बॉर्डर पर दोपहर दो बजे किसानों की बैठक होगी। इस बैठक में सरकार से अगले दौर की बातचीत और आंदोलन को लेकर रणनीति पर चर्चा होगी। इसके बाद शाम पांच बजे किसान संगठनों के नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। कृषि कानूनों को लेकर सरकार और किसानों के बीच अगले दौर की बातचीत चार जनवरी को होनी है। इस बातचीत के लिए किसानों की अगली रणनीति क्या होगी, इसी को लेकर आज किसान संगठनों की एक बैठक होने जा रही है। इस बैठक में सभी प्रमुख किसान संगठन शामिल होंगे।
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मीडिया में ये खबर आई थी कि सीआईएसएफ के एएसआई सोमनाथ मोहंती पर प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगा है। और उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है।
मुंबईः सीआईएसएफ (CISF) ने उन खबरों का खंडन किया है जिसमें कहा गया था कि बॉलिवुड अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) को मुंबई एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के लिए रोकने वाले सीआईएसएफ के एएसआई सोमनाथ मोहंती (CISF ASI Somnath Mohanty) को सजा दी गई है।
दरअसल सीआईएसएफ ने उन खबरों का गलत बताया है जिसमें कहा गया था कि एएसआई सोमनाथ मोहंती पर प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगा है। और उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है। इस खबरों को सीआईएसएफ ने झूठ बताते हुए कहा है कि अधिकारी को कोई सजा नहीं दी गई है बल्कि उन्हें सम्मान मिला है।
'सीआईएसएफ' CISF ने ऑफिशियल ट्विट्टर हैंडल से ट्वीट किया। जिसमें लिखा है - 'इस ट्वीट का कॉन्टेंट सही नहीं है और निराधार है। सच तो ये है कि संबंधित अफसर को उनकी ड्यूटी के प्रति प्रोफेशनलिजम को देखते हुए इनाम दिया गया है। '
बता दें, हाल ही में सलमान खान को एयरपोर्ट के प्रवेश द्वार पर सीआईएसएफ अधिकारी सोमनाथ सुरक्षा जांच के लिए रोकते नजर आए थे। सलमान खान अपनी आगामी फिल्म टाइगर 3 की शूटिंग के लिए रूस रवाना हो रहे थे। इस दौरान वहां पैपराजी ने सलमान को घेर लिया था। वहीं सलमान खान अपने सुरक्षागार्ड के साथ भीतर जाने लगते हैं जिसपर CISF के एएसआई सोमनाथ उन्हें सुरक्षा जांच कराने के लिए रोक लेते हैं।
बात करें सलमान की तो वे फिलहाल टाइगर 3 की शूटिंग के लिए रूस में हैं। वहां से सलमान खान के फिल्म का लुक भी सामने आया था। फिल्म में सलमान खान के साथ कैटरीना कैफ भी नजर आने वाली हैं। इसके अलावा इसमें इमरान हाशमी भी खलनायक के रूप में दिखेंगे।
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मीडिया में ये खबर आई थी कि सीआईएसएफ के एएसआई सोमनाथ मोहंती पर प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगा है। और उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है। मुंबईः सीआईएसएफ ने उन खबरों का खंडन किया है जिसमें कहा गया था कि बॉलिवुड अभिनेता सलमान खान को मुंबई एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के लिए रोकने वाले सीआईएसएफ के एएसआई सोमनाथ मोहंती को सजा दी गई है। दरअसल सीआईएसएफ ने उन खबरों का गलत बताया है जिसमें कहा गया था कि एएसआई सोमनाथ मोहंती पर प्रोटोकॉल तोड़ने का आरोप लगा है। और उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है। इस खबरों को सीआईएसएफ ने झूठ बताते हुए कहा है कि अधिकारी को कोई सजा नहीं दी गई है बल्कि उन्हें सम्मान मिला है। 'सीआईएसएफ' CISF ने ऑफिशियल ट्विट्टर हैंडल से ट्वीट किया। जिसमें लिखा है - 'इस ट्वीट का कॉन्टेंट सही नहीं है और निराधार है। सच तो ये है कि संबंधित अफसर को उनकी ड्यूटी के प्रति प्रोफेशनलिजम को देखते हुए इनाम दिया गया है। ' बता दें, हाल ही में सलमान खान को एयरपोर्ट के प्रवेश द्वार पर सीआईएसएफ अधिकारी सोमनाथ सुरक्षा जांच के लिए रोकते नजर आए थे। सलमान खान अपनी आगामी फिल्म टाइगर तीन की शूटिंग के लिए रूस रवाना हो रहे थे। इस दौरान वहां पैपराजी ने सलमान को घेर लिया था। वहीं सलमान खान अपने सुरक्षागार्ड के साथ भीतर जाने लगते हैं जिसपर CISF के एएसआई सोमनाथ उन्हें सुरक्षा जांच कराने के लिए रोक लेते हैं। बात करें सलमान की तो वे फिलहाल टाइगर तीन की शूटिंग के लिए रूस में हैं। वहां से सलमान खान के फिल्म का लुक भी सामने आया था। फिल्म में सलमान खान के साथ कैटरीना कैफ भी नजर आने वाली हैं। इसके अलावा इसमें इमरान हाशमी भी खलनायक के रूप में दिखेंगे।
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बाड़मेर। विद्यालय स्तर पर वार्षिक खेल दिवस समारोह काआयोजन किया गया। विद्यालय प्राचार्या डॉ. सरोज डबास ने आगन्तुक अतिथियों का स्वागत सत्कार करते हुए विद्यार्थियों को खेल-प्रतिभा निखारने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में दीपिका तिवारी, सीनियर डायरेक्टर बोगरा परिवार कल्याण संगठन जालीपा छावनी बाड़मेर ने विद्यार्थियों को कहा कि खेल जीवन का अभिन्न अंग है जिससे मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। इस दौरान विद्यालय के शारीरिक शिक्षक तेजाराम मीना ने विद्यालय का वार्षिक खेल प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि खो-खो -14 में विद्यालय की टीम ने राष्ट्रीय स्तर परभाग लिया, एथेलेटिक्स मेंओमप्रकाश ने रजतव पवन कुमार ने ताम्र पदक जीतकर विद्यालय का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। प्रियंका ने खो-खो , विक्रम सिंह ने खो-खो, छोटू सिंह ने कबड्डी तथा प्रमोद ने फूटबाल में राष्ट्रीय स्तर पर भाग लेकर विद्यालय का नाम रोशन किया । इस अवसर पर विद्यालय स्तर पर सदनवार विभिन्न खेल-कूद प्रतियोगिताओं के साथ साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। इस दौरान सेना चिकित्सालय जालीपा छावनी की एक टीम विद्यार्थियों के प्राथमिक उपचार हेतु उपस्थित रह कर अपना योगदान दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विद्यालय के सभी शिक्षक खेल मैदान में रहकर विद्यार्थियों का हौसला अफजाई करते नजर आए ।
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बाड़मेर। विद्यालय स्तर पर वार्षिक खेल दिवस समारोह काआयोजन किया गया। विद्यालय प्राचार्या डॉ. सरोज डबास ने आगन्तुक अतिथियों का स्वागत सत्कार करते हुए विद्यार्थियों को खेल-प्रतिभा निखारने के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में दीपिका तिवारी, सीनियर डायरेक्टर बोगरा परिवार कल्याण संगठन जालीपा छावनी बाड़मेर ने विद्यार्थियों को कहा कि खेल जीवन का अभिन्न अंग है जिससे मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। इस दौरान विद्यालय के शारीरिक शिक्षक तेजाराम मीना ने विद्यालय का वार्षिक खेल प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि खो-खो -चौदह में विद्यालय की टीम ने राष्ट्रीय स्तर परभाग लिया, एथेलेटिक्स मेंओमप्रकाश ने रजतव पवन कुमार ने ताम्र पदक जीतकर विद्यालय का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। प्रियंका ने खो-खो , विक्रम सिंह ने खो-खो, छोटू सिंह ने कबड्डी तथा प्रमोद ने फूटबाल में राष्ट्रीय स्तर पर भाग लेकर विद्यालय का नाम रोशन किया । इस अवसर पर विद्यालय स्तर पर सदनवार विभिन्न खेल-कूद प्रतियोगिताओं के साथ साथ विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। इस दौरान सेना चिकित्सालय जालीपा छावनी की एक टीम विद्यार्थियों के प्राथमिक उपचार हेतु उपस्थित रह कर अपना योगदान दिया। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए विद्यालय के सभी शिक्षक खेल मैदान में रहकर विद्यार्थियों का हौसला अफजाई करते नजर आए । यह भी पढ़े :खासखबर EXCLUSIVE:यूपी चुनाव में किसकी क्या है चाल? यह भी पढ़े :मुलायम के लिए इतने अहम् क्यों हैं अमर सिंह?
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राजिम। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में फर्जीवाड़ा के मामले में पुलिस ने तीन महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया है। दरअसल, यह तीनों महिलाएं गांव में घूम-घूमकर कर फर्जी श्रम कार्ड बनाने और पीएम आवास दिलाने का दावा कर ग्रामीणों से 500 से 1000 रुपए ऐंठ लेती थीं। शिकायत के बाद पुलिस हरकत में आई और तीनों को रंगे हाथों पकड़ लिया।
मिली जानकारी के अनुसार, राजिम के एक गांव कौंदकेरा में तीन महिलाएं लोगों से पैसे ऐंठ रही थी। दरअसल, ये तीनों अपने आप को केंद्र सरकार का कर्मचारी बताकर फर्जी श्रम कार्ड बनाने का काम कर रही थी। कार्ड बनाने के नाम पर ग्रामीणों से 500 से 1000 रूपए लेती थीं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि, ये महिलाएं पीएम आवास दिलवाने के नाम पर लोगों से फार्म भरवा रही थीं।
जब ग्रामीणों ने इसकी शिकायत तहसीलदार और श्रम विभाग से की तो वे पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद उन्होंने तीनों महिलाओं को रंगे हाथों पकड़ लिया। अनुमान लगाया जा रहा है कि, इलाके में सिर्फ पकड़ी गई तीन महिलाएं ही फर्जीवाड़े में शामिल नहीं है, बल्कि पूरा एक गिरोह इस काम में लगा हो सकता है।
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राजिम। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में फर्जीवाड़ा के मामले में पुलिस ने तीन महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया है। दरअसल, यह तीनों महिलाएं गांव में घूम-घूमकर कर फर्जी श्रम कार्ड बनाने और पीएम आवास दिलाने का दावा कर ग्रामीणों से पाँच सौ से एक हज़ार रुपयापए ऐंठ लेती थीं। शिकायत के बाद पुलिस हरकत में आई और तीनों को रंगे हाथों पकड़ लिया। मिली जानकारी के अनुसार, राजिम के एक गांव कौंदकेरा में तीन महिलाएं लोगों से पैसे ऐंठ रही थी। दरअसल, ये तीनों अपने आप को केंद्र सरकार का कर्मचारी बताकर फर्जी श्रम कार्ड बनाने का काम कर रही थी। कार्ड बनाने के नाम पर ग्रामीणों से पाँच सौ से एक हज़ार रूपए लेती थीं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि, ये महिलाएं पीएम आवास दिलवाने के नाम पर लोगों से फार्म भरवा रही थीं। जब ग्रामीणों ने इसकी शिकायत तहसीलदार और श्रम विभाग से की तो वे पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद उन्होंने तीनों महिलाओं को रंगे हाथों पकड़ लिया। अनुमान लगाया जा रहा है कि, इलाके में सिर्फ पकड़ी गई तीन महिलाएं ही फर्जीवाड़े में शामिल नहीं है, बल्कि पूरा एक गिरोह इस काम में लगा हो सकता है।
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चर्चा जारी थी।
तभी राजा साहब ने कहा - क्या ये सब समस्याएं इंसानों में नहीं आतीं? वो भी तो अलग अलग रंग, आकार और हैसियत के होते हैं? वो इन समस्याओं का हल कैसे करते हैं। कुछ उनसे पता लगाया जाए।लोमड़ी ने कहा - लेकिन इंसानों के पास जाना तो खतरनाक है। वो हमें देखते ही या तो पकड़ कर कैद कर लेते हैं या फिर हमें मार देते हैं।
तभी मिट्ठू पोपट बोला - हां, याद आया। हमारा खरगोश तो जादूगर है, ये यहीं बैठे बैठे इंसानों से हमारी बात करा सकता है। उनके पास जाने का जोखिम लेने की क्या जरूरत है! क्यों खरगोश भाई?
इस पर राजा साहब और रानी साहिबा दोनों चौंक कर बोले - वाह! ये तो बड़ी अच्छी बात है, हमें तो पता ही नहीं था कि हमारे दरबार में इतने टैलेंटेड लोग भी हैं।
मिट्ठू पोपट ने बताया कि खरगोश ने एक बार अपने जादू से स्कूल से भागे दो बच्चों से मेरी बात कराई थी। दोनों बहुत ही बुद्धिमान थे। एक लड़का था और एक लड़की।
खरगोश अपनी इतनी तारीफ़ सुन कर कुछ शरमा गया। बोला - वो बच्चे तो अपना होमवर्क न करके लाने के कारण टीचर के डर से स्कूल से भाग आए थे। वो जंगल में चले आए थे इसी से मेरी उनसे कुछ दोस्ती हो गई थी।
रानी साहिबा बोलीं - वाह, ये तो अच्छी बात है। तो तुम उन्हीं बच्चों से पूछो कि हम अपनी समस्या को कैसे हल करें। वो जरूर कुछ बताएंगे। बुद्धिमान भी हैं और इंसान भी। हैं न?
- जी बिलकुल। मैं अपने जादू टोने से उन्हें यहां बुला लूंगा। उनकी फ़ोटो यहां हमारी दीवार पर दिखाई देगी। पर वो हमें सुन सकेंगे। वो जो कुछ बोलेंगे वो हम सब भी सुन सकेंगे।
- एक्सीलेंट! राजा साहब ने कहा।
ये नज़ारा आश्चर्यजनक था। सब रोमांचित थे।
मांद महल के कॉन्फ्रेंस हॉल में राजा साहब, रानी साहिबा, एडवाइजर मिट्ठू पोपट, लोमड़ी,खरगोश, न्यायमूर्ति शार्क, तीनों सेना प्रमुख हाथी, घोड़ा, मगरमच्छ, प्रिंसिपल हिप्पो सर, बिज़नस टायकून राइनो सर आदि गणमान्य लोग एक ओर बैठे थे और दूसरी तरफ बड़ी सी दीवार पर लगे परदे पर दो इंसान बच्चे मुस्करा रहे थे।
राजा साहब उनसे जो पूछते वो संजीदगी से उसका जवाब देते। कभी लड़की बोलती तो कभी लड़का।
राजा साहब : बच्चो, हमने बहुत कोशिश की, कि जंगल में भी आप इंसानों की तरह दुनिया बसे, विकास हो, जिंदगी बेहतर बने। कुदरत की शुरूआत से ही हम लोग भी आपके साथ हैं, पर आप मानव कहां से कहां पहुंच गए, जबकि हम अभी तक वहीं के वहीं हैं। इसका कारण हम आपसे जानना चाहते हैं।
लड़की : जी, नमस्ते महाराजा साहब! आपकी चिंता जायज़ है। पर इसका कारण सिर्फ़ इतना सा है कि प्रकृति ने आप लोगों को जो शारीरिक शक्ति, बल या ताकत दी आप उसी के सहारे चले। जबकि हम इंसानों ने अपने शरीर की ताक़त से ज्यादा अपने मानसिक बल और बुद्धि पर भरोसा किया। हम जीवन को सफ़ल बनाने के लिए जुटे रहे और सफ़ल भी हुए।
रानी साहिबा : लेकिन बेटा, कुछ प्राणियों को तो आप भी खा जाते हैं!
लड़का : मैम आपकी बात सही है, पर हम भोजन के लिए और भी बहुत सारी चीज़ें अन्न, फ़ल, सब्जियां, दलहन, मसाले, जड़ी बूटियां आदि खोजते रहे और धीरे धीरे अपने भोजन में उन्हें शामिल करते गए।
रानी साहिबा : घास पत्ते आदि तो हमारे भी कुछ प्राणी खाते हैं!
लड़का : जी, ऐसे प्राणी निडर होकर हमारे पास भी चले आते हैं, हम उन्हें पालते हैं और कई अच्छी बातें उन्हें सिखाते हैं। जैसे गाय, भैंस, घोड़ा, बकरी, कुत्ते आदि। किंतु पशुओं का वध करके अपना पेट भरने वाले हिंसक प्राणियों से तो हम भी डरते हैं। हम उन्हें भगा देते हैं, कैद कर लेते हैं या फिर उन्हें मजबूर होकर मारना पड़ जाता है। हम उन्हें कुछ नहीं सिखा पाते।
मिट्ठू पोपट : पर हम आपकी तरह बोलना सीखने की कोशिश भी तो करते हैं। पर हमारे प्राणियों के आकार बहुत अलग अलग भी हैं न। अब आप व्हेल और तितली को ही देखिए। यहां जिराफ़ और टिड्डा एक साथ रहते हैं। तो उनमें कैसे निभाव हो?
लड़का : होगा। ज़रूर होगा। लेकिन तब होगा जब आप रंग, आकार या डीलडौल पर नहीं, बल्कि उन प्राणियों की बुद्धि पर भरोसा करेंगे। छोटे लोग भी समझदार हो सकते हैं। हमारे यहां देखिए, महिलाएं पुरुषों से कद काठी में छोटी होते हुए भी समझदारी, धैर्य, अनुशासन, प्रेम आदि में उनसे मीलों आगे होती हैं। इसीलिए अच्छी तरह पूरा परिवार चलाती हैं।
हिप्पो सर : ये बात तो बहुत ही अच्छी है। हम अपने स्कूल में बच्चों को सिखाएंगे।
लड़की : सही बात है, पर हमने भी आप लोगों से कई अच्छी बातें सीखीं हैं। हम भी देखते हैं कि चूज़े हमेशा मुर्गी के साथ ही घूमते हैं, कभी मुर्गा उन्हें लेकर नहीं घूमता। बालक की भूख का ख्याल हमेशा मां ही करती है चाहे गाय हो, या चिड़िया। और भी बहुत सी अच्छी बातें हैं आप में!
रानी साहिबा : वाह! अदभुत!
लड़का : आपके जो लोग हमारे साथ रहे जैसे घोड़ा, बैल, कुत्ता, तोता आदि वो तो प्रशिक्षण लेकर बहुत कुछ सीख गए। आपके कुछ प्राणी तो बेहद सुंदर घौंसले बनाते हैं। इस तरह जीवन को बेहतर बनाने के प्रयास से तो एक दिन धरती के सभी प्राणी उन्नति कर सकेंगे! हम आपको यकीन दिलाते हैं।
तभी बाहर कुछ हलचल सुनाई दी। एडवाइजर मिट्ठू पोपट ने सबको बताया कि बाहर लंच की व्यवस्था हो चुकी है अतः अब सभा बर्खास्त होती है। परदे से दोनों बच्चे मुस्कुराते हुए ओझल हो रहे थे।
राजा साहब ने खरगोश से कहा - चलिए जादूगर जी, सूप ठंडा हो रहा होगा!
तभी सारे लोग राजा साहब और रानी साहिबा के साथ सेल्फी लेने के लिए उनके इर्द- गिर्द इकट्ठे होने लगे।
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चर्चा जारी थी। तभी राजा साहब ने कहा - क्या ये सब समस्याएं इंसानों में नहीं आतीं? वो भी तो अलग अलग रंग, आकार और हैसियत के होते हैं? वो इन समस्याओं का हल कैसे करते हैं। कुछ उनसे पता लगाया जाए।लोमड़ी ने कहा - लेकिन इंसानों के पास जाना तो खतरनाक है। वो हमें देखते ही या तो पकड़ कर कैद कर लेते हैं या फिर हमें मार देते हैं। तभी मिट्ठू पोपट बोला - हां, याद आया। हमारा खरगोश तो जादूगर है, ये यहीं बैठे बैठे इंसानों से हमारी बात करा सकता है। उनके पास जाने का जोखिम लेने की क्या जरूरत है! क्यों खरगोश भाई? इस पर राजा साहब और रानी साहिबा दोनों चौंक कर बोले - वाह! ये तो बड़ी अच्छी बात है, हमें तो पता ही नहीं था कि हमारे दरबार में इतने टैलेंटेड लोग भी हैं। मिट्ठू पोपट ने बताया कि खरगोश ने एक बार अपने जादू से स्कूल से भागे दो बच्चों से मेरी बात कराई थी। दोनों बहुत ही बुद्धिमान थे। एक लड़का था और एक लड़की। खरगोश अपनी इतनी तारीफ़ सुन कर कुछ शरमा गया। बोला - वो बच्चे तो अपना होमवर्क न करके लाने के कारण टीचर के डर से स्कूल से भाग आए थे। वो जंगल में चले आए थे इसी से मेरी उनसे कुछ दोस्ती हो गई थी। रानी साहिबा बोलीं - वाह, ये तो अच्छी बात है। तो तुम उन्हीं बच्चों से पूछो कि हम अपनी समस्या को कैसे हल करें। वो जरूर कुछ बताएंगे। बुद्धिमान भी हैं और इंसान भी। हैं न? - जी बिलकुल। मैं अपने जादू टोने से उन्हें यहां बुला लूंगा। उनकी फ़ोटो यहां हमारी दीवार पर दिखाई देगी। पर वो हमें सुन सकेंगे। वो जो कुछ बोलेंगे वो हम सब भी सुन सकेंगे। - एक्सीलेंट! राजा साहब ने कहा। ये नज़ारा आश्चर्यजनक था। सब रोमांचित थे। मांद महल के कॉन्फ्रेंस हॉल में राजा साहब, रानी साहिबा, एडवाइजर मिट्ठू पोपट, लोमड़ी,खरगोश, न्यायमूर्ति शार्क, तीनों सेना प्रमुख हाथी, घोड़ा, मगरमच्छ, प्रिंसिपल हिप्पो सर, बिज़नस टायकून राइनो सर आदि गणमान्य लोग एक ओर बैठे थे और दूसरी तरफ बड़ी सी दीवार पर लगे परदे पर दो इंसान बच्चे मुस्करा रहे थे। राजा साहब उनसे जो पूछते वो संजीदगी से उसका जवाब देते। कभी लड़की बोलती तो कभी लड़का। राजा साहब : बच्चो, हमने बहुत कोशिश की, कि जंगल में भी आप इंसानों की तरह दुनिया बसे, विकास हो, जिंदगी बेहतर बने। कुदरत की शुरूआत से ही हम लोग भी आपके साथ हैं, पर आप मानव कहां से कहां पहुंच गए, जबकि हम अभी तक वहीं के वहीं हैं। इसका कारण हम आपसे जानना चाहते हैं। लड़की : जी, नमस्ते महाराजा साहब! आपकी चिंता जायज़ है। पर इसका कारण सिर्फ़ इतना सा है कि प्रकृति ने आप लोगों को जो शारीरिक शक्ति, बल या ताकत दी आप उसी के सहारे चले। जबकि हम इंसानों ने अपने शरीर की ताक़त से ज्यादा अपने मानसिक बल और बुद्धि पर भरोसा किया। हम जीवन को सफ़ल बनाने के लिए जुटे रहे और सफ़ल भी हुए। रानी साहिबा : लेकिन बेटा, कुछ प्राणियों को तो आप भी खा जाते हैं! लड़का : मैम आपकी बात सही है, पर हम भोजन के लिए और भी बहुत सारी चीज़ें अन्न, फ़ल, सब्जियां, दलहन, मसाले, जड़ी बूटियां आदि खोजते रहे और धीरे धीरे अपने भोजन में उन्हें शामिल करते गए। रानी साहिबा : घास पत्ते आदि तो हमारे भी कुछ प्राणी खाते हैं! लड़का : जी, ऐसे प्राणी निडर होकर हमारे पास भी चले आते हैं, हम उन्हें पालते हैं और कई अच्छी बातें उन्हें सिखाते हैं। जैसे गाय, भैंस, घोड़ा, बकरी, कुत्ते आदि। किंतु पशुओं का वध करके अपना पेट भरने वाले हिंसक प्राणियों से तो हम भी डरते हैं। हम उन्हें भगा देते हैं, कैद कर लेते हैं या फिर उन्हें मजबूर होकर मारना पड़ जाता है। हम उन्हें कुछ नहीं सिखा पाते। मिट्ठू पोपट : पर हम आपकी तरह बोलना सीखने की कोशिश भी तो करते हैं। पर हमारे प्राणियों के आकार बहुत अलग अलग भी हैं न। अब आप व्हेल और तितली को ही देखिए। यहां जिराफ़ और टिड्डा एक साथ रहते हैं। तो उनमें कैसे निभाव हो? लड़का : होगा। ज़रूर होगा। लेकिन तब होगा जब आप रंग, आकार या डीलडौल पर नहीं, बल्कि उन प्राणियों की बुद्धि पर भरोसा करेंगे। छोटे लोग भी समझदार हो सकते हैं। हमारे यहां देखिए, महिलाएं पुरुषों से कद काठी में छोटी होते हुए भी समझदारी, धैर्य, अनुशासन, प्रेम आदि में उनसे मीलों आगे होती हैं। इसीलिए अच्छी तरह पूरा परिवार चलाती हैं। हिप्पो सर : ये बात तो बहुत ही अच्छी है। हम अपने स्कूल में बच्चों को सिखाएंगे। लड़की : सही बात है, पर हमने भी आप लोगों से कई अच्छी बातें सीखीं हैं। हम भी देखते हैं कि चूज़े हमेशा मुर्गी के साथ ही घूमते हैं, कभी मुर्गा उन्हें लेकर नहीं घूमता। बालक की भूख का ख्याल हमेशा मां ही करती है चाहे गाय हो, या चिड़िया। और भी बहुत सी अच्छी बातें हैं आप में! रानी साहिबा : वाह! अदभुत! लड़का : आपके जो लोग हमारे साथ रहे जैसे घोड़ा, बैल, कुत्ता, तोता आदि वो तो प्रशिक्षण लेकर बहुत कुछ सीख गए। आपके कुछ प्राणी तो बेहद सुंदर घौंसले बनाते हैं। इस तरह जीवन को बेहतर बनाने के प्रयास से तो एक दिन धरती के सभी प्राणी उन्नति कर सकेंगे! हम आपको यकीन दिलाते हैं। तभी बाहर कुछ हलचल सुनाई दी। एडवाइजर मिट्ठू पोपट ने सबको बताया कि बाहर लंच की व्यवस्था हो चुकी है अतः अब सभा बर्खास्त होती है। परदे से दोनों बच्चे मुस्कुराते हुए ओझल हो रहे थे। राजा साहब ने खरगोश से कहा - चलिए जादूगर जी, सूप ठंडा हो रहा होगा! तभी सारे लोग राजा साहब और रानी साहिबा के साथ सेल्फी लेने के लिए उनके इर्द- गिर्द इकट्ठे होने लगे।
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दैववश जो मिल जाता है, उसी में सन्तुष्ट रहता है। कभी कुछ नहीं मिलता, तब भी बहुत दिनों तक पड़ा रहता हूँ। मैं कभी थोड़ा खाता हूँ, कभी बहुत अधिक, कभी सुस्वादु कभी स्वादहीन, कभी अनेक गुणों से युक्त, कभी एकदम गुणहीन, कभी श्रद्धापूर्वक लाया और कभी निरादरपूर्वक मिला अन्न ही खा लेता हूँ। विभिन्न स्वभाव वाले मनुष्यों में किसी की निन्दा और स्तुति नहीं करता। मैं कभी नहा धो, शरीर में चन्दन लगा, सुन्दर वस्त्र तथा माला आदि पहन रथ, हाथी तथा घोड़े पर चलता और कभी पिशाच की तरह दिगम्बर विचरण करता हूँ। 100 मैं सदैव प्राणियों की मंगल कामना करता हूँ । १०१
उन मुनीश्वर के मुख से परमहंसों का धर्म १०२ सुनकर दैत्यपति प्रहलाद ने उनकी पूजा की। श्रीमद्भागवत के एकादशस्कन्ध के सातवें आठवें और नौवें अध्याय में जो अवधूतचर्या का विशद प्रतिपादन हुआ है, वह यति धर्म का सार है। पूरे भागवत में इतना सुन्दर उपदेश अत्यन्त दुर्लभ है। संन्यासधर्म को जानने के इच्छुक लोगों को यह अवश्य पढ़ना चाहिए। यहाँ अवधूत ने पृथ्वी, वायु, आकाश, जल, अग्नि, चन्द्रमा, सूर्य, कपोत, अजगर, समुद्र पतंग, मधुमक्षिका, हाथी, शहद ले जाने वाला, हरिण, मीन, पिंगला, वेश्या, कुररपक्षी, बालक, कुमारी, बाण बनाने वाला, सर्प, मकड़ी और भृंग कीट को गुरु बनाया गया है । १०३
जैनग्रन्थ मूलाचार में आचार्य को भूमि, चन्द्र और समुद्र के सदृश बतलाया है । १०४ भावगत में कहा हैभूतों से प्रेरित कोई प्राणी यदि किसी तरह कष्ट पहुँचाए तो भी विद्वान् अपने मार्ग से विचलित न हो, यह मैंने पृथ्वी से सीखा था। १०५ अलक्ष्यगति काल के प्रभाव से घटने, बढ़ने वाली चन्द्रमा की कलाओं के सदृश जन्म से मृत्यु पर्यन्त सारी अवस्थायें शरीर की होती हैं, आत्मा की नहीं। अग्नि की शिखा जैसे निरन्तर क्षण क्षण में उत्पन्न तथा विलीन होती रहती है। किन्तु उसमें कोई भेद प्रतीत नहीं होता, वैसे ही जल प्रवाह के समान वेगवान् काल के द्वारा भूतों की उत्पत्ति तथा नाश क्षण क्षण में होते ही रहते हैं, किन्तु अज्ञानवश वे दिखलायी नहीं पड़ते हैं; यह मैंने चन्द्रमा से सीखा है। १०६ मुनि को निस्तरंग, समुद्र के समान शान्त, गम्भीर, अगम्य, अभेद्य, अनन्तपार और क्षोभरहित होकर रहना चाहिए। जैसे नदियों के कारण समुद्र नहीं बढ़ता और न गर्मी में घटता ही है, उसी प्रकार नारायण परायण योगी को भी पदार्थों को मिलने से प्रसन्न और न मिलने से उदास नहीं होना चाहिए । १०७ मूलाचार की आचारवृत्ति में आचार्य को क्षमा गुण में पृथ्वी, सौम्य गुण में चन्द्रमा और निर्मलता में समुद्र के समान बतलाया है। १०८५ चरित्र भक्ति में आचार्य
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दैववश जो मिल जाता है, उसी में सन्तुष्ट रहता है। कभी कुछ नहीं मिलता, तब भी बहुत दिनों तक पड़ा रहता हूँ। मैं कभी थोड़ा खाता हूँ, कभी बहुत अधिक, कभी सुस्वादु कभी स्वादहीन, कभी अनेक गुणों से युक्त, कभी एकदम गुणहीन, कभी श्रद्धापूर्वक लाया और कभी निरादरपूर्वक मिला अन्न ही खा लेता हूँ। विभिन्न स्वभाव वाले मनुष्यों में किसी की निन्दा और स्तुति नहीं करता। मैं कभी नहा धो, शरीर में चन्दन लगा, सुन्दर वस्त्र तथा माला आदि पहन रथ, हाथी तथा घोड़े पर चलता और कभी पिशाच की तरह दिगम्बर विचरण करता हूँ। एक सौ मैं सदैव प्राणियों की मंगल कामना करता हूँ । एक सौ एक उन मुनीश्वर के मुख से परमहंसों का धर्म एक सौ दो सुनकर दैत्यपति प्रहलाद ने उनकी पूजा की। श्रीमद्भागवत के एकादशस्कन्ध के सातवें आठवें और नौवें अध्याय में जो अवधूतचर्या का विशद प्रतिपादन हुआ है, वह यति धर्म का सार है। पूरे भागवत में इतना सुन्दर उपदेश अत्यन्त दुर्लभ है। संन्यासधर्म को जानने के इच्छुक लोगों को यह अवश्य पढ़ना चाहिए। यहाँ अवधूत ने पृथ्वी, वायु, आकाश, जल, अग्नि, चन्द्रमा, सूर्य, कपोत, अजगर, समुद्र पतंग, मधुमक्षिका, हाथी, शहद ले जाने वाला, हरिण, मीन, पिंगला, वेश्या, कुररपक्षी, बालक, कुमारी, बाण बनाने वाला, सर्प, मकड़ी और भृंग कीट को गुरु बनाया गया है । एक सौ तीन जैनग्रन्थ मूलाचार में आचार्य को भूमि, चन्द्र और समुद्र के सदृश बतलाया है । एक सौ चार भावगत में कहा हैभूतों से प्रेरित कोई प्राणी यदि किसी तरह कष्ट पहुँचाए तो भी विद्वान् अपने मार्ग से विचलित न हो, यह मैंने पृथ्वी से सीखा था। एक सौ पाँच अलक्ष्यगति काल के प्रभाव से घटने, बढ़ने वाली चन्द्रमा की कलाओं के सदृश जन्म से मृत्यु पर्यन्त सारी अवस्थायें शरीर की होती हैं, आत्मा की नहीं। अग्नि की शिखा जैसे निरन्तर क्षण क्षण में उत्पन्न तथा विलीन होती रहती है। किन्तु उसमें कोई भेद प्रतीत नहीं होता, वैसे ही जल प्रवाह के समान वेगवान् काल के द्वारा भूतों की उत्पत्ति तथा नाश क्षण क्षण में होते ही रहते हैं, किन्तु अज्ञानवश वे दिखलायी नहीं पड़ते हैं; यह मैंने चन्द्रमा से सीखा है। एक सौ छः मुनि को निस्तरंग, समुद्र के समान शान्त, गम्भीर, अगम्य, अभेद्य, अनन्तपार और क्षोभरहित होकर रहना चाहिए। जैसे नदियों के कारण समुद्र नहीं बढ़ता और न गर्मी में घटता ही है, उसी प्रकार नारायण परायण योगी को भी पदार्थों को मिलने से प्रसन्न और न मिलने से उदास नहीं होना चाहिए । एक सौ सात मूलाचार की आचारवृत्ति में आचार्य को क्षमा गुण में पृथ्वी, सौम्य गुण में चन्द्रमा और निर्मलता में समुद्र के समान बतलाया है। एक हज़ार पचासी चरित्र भक्ति में आचार्य
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बॉलीवुड में आये कुछ वक़्त पहले ही राजकुमार राव के पास दो साल पहले तक फीस भरने के लिए भी नहीं थे पैसे, 18 रुपये में किया था गुजारा '। राजकुमार राव का आज जन्मदिन है। उनका जन्म 31 अगस्त 1984 को गुड़गांव के अहीरवाल में हुआ था।राजकुमार राव अपनी किस्मत आजमाने मुंबई आ गए। राजकुमार को इंडस्ट्री में ज्यादा वक़्त आये नहीं हुआ लेकिन उन्होंने अपनी पहचान कम टाइम में ही बॉलीवुड के लोगो के सामने बना ली।राजकुमार ने अलीगढ़', 'बरेली की बर्फी', 'स्त्री' और 'न्यूटन' जैसी एक से एक हिट फिल्में दी और दर्शकों का प्यार बटोरा। राजकुमार ने अपना हर एक किरदार बड़े ही मन लगाकर निभाया है। शाहिद में उन्होंने वकील शाहिद का किरदार इस कदर निभाया कि उनको राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 'शादी मे जरूर आना' में उन्होंने एक लवर का एक्ट किया ,जिसमे उनका हनूर निखर कर आया तो दूसरी तरफ ' न्यूटन' में वो चुनाव अधिकारी बने तो बरेली की बर्फी में प्रीतम विद्रोही। राजकुमार का हर किरदार सुपरहिट रहा है और एक दूसरे से जुड़ा रहा। यही कारण है कि आज लोग उनको और उनकी सारी फिल्मो को बहुत प्यार दे रहे है यही वजह है कि आज उनका एक अलग दर्शक वर्ग है और इसमें वो सुपरहिट हैं। Rajkumar Rao को बॉलीवुड में पहली फिल्म 'रण', 'लव सेक्स और धोखा' और 'रागिनी एमएमएस' जैसे मिली लेकिन खुद की पहचान उन्हें 'काई पो छे' से मिली। करियर के शुरुआत में जब उन्हें सफलता नहीं मिली, तो उन्होंने अपनी मां के कहने पर अपने नाम की स्पेलिंग बदल दी और Rajkumar Rao की जगह Rajkummar Rao लिखने लगे। लेकिन रियल नाम उनका राजकुमार यादव है। आप सभी ये बात अच्छे से जानते है की बॉलीवुड में सफलता इतनी आसानी से नहीं मिलती। राजकुमार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ उन्होंने वो वक्त भी देखा जब उनके पास पैसे नहीं होते थे। एक इंटरव्यू में राजकुमार ने कहा था मैं अपने हिस्से से सात हजार रुपये देता था जो मेरे लिए बहुत ज्यादा था। हर महीने 15-20 हजार रुपये की जरूरत होती थी। एक बार मेरे खाते में सिर्फ 18 रुपये थे और मेरे दोस्त के पास 23 रुपये।वो नहीं जानते थे कि अच्छा दिखने के लिए क्या पहनना होता है। इन सब बातों की परवाह किए बिना राजकुमार चेहरे पर गुलाब जल लगा लेते थे और सोचते थे कि इससे वो अच्छे दिखने लगेंगे।
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बॉलीवुड में आये कुछ वक़्त पहले ही राजकुमार राव के पास दो साल पहले तक फीस भरने के लिए भी नहीं थे पैसे, अट्ठारह रुपयापये में किया था गुजारा '। राजकुमार राव का आज जन्मदिन है। उनका जन्म इकतीस अगस्त एक हज़ार नौ सौ चौरासी को गुड़गांव के अहीरवाल में हुआ था।राजकुमार राव अपनी किस्मत आजमाने मुंबई आ गए। राजकुमार को इंडस्ट्री में ज्यादा वक़्त आये नहीं हुआ लेकिन उन्होंने अपनी पहचान कम टाइम में ही बॉलीवुड के लोगो के सामने बना ली।राजकुमार ने अलीगढ़', 'बरेली की बर्फी', 'स्त्री' और 'न्यूटन' जैसी एक से एक हिट फिल्में दी और दर्शकों का प्यार बटोरा। राजकुमार ने अपना हर एक किरदार बड़े ही मन लगाकर निभाया है। शाहिद में उन्होंने वकील शाहिद का किरदार इस कदर निभाया कि उनको राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 'शादी मे जरूर आना' में उन्होंने एक लवर का एक्ट किया ,जिसमे उनका हनूर निखर कर आया तो दूसरी तरफ ' न्यूटन' में वो चुनाव अधिकारी बने तो बरेली की बर्फी में प्रीतम विद्रोही। राजकुमार का हर किरदार सुपरहिट रहा है और एक दूसरे से जुड़ा रहा। यही कारण है कि आज लोग उनको और उनकी सारी फिल्मो को बहुत प्यार दे रहे है यही वजह है कि आज उनका एक अलग दर्शक वर्ग है और इसमें वो सुपरहिट हैं। Rajkumar Rao को बॉलीवुड में पहली फिल्म 'रण', 'लव सेक्स और धोखा' और 'रागिनी एमएमएस' जैसे मिली लेकिन खुद की पहचान उन्हें 'काई पो छे' से मिली। करियर के शुरुआत में जब उन्हें सफलता नहीं मिली, तो उन्होंने अपनी मां के कहने पर अपने नाम की स्पेलिंग बदल दी और Rajkumar Rao की जगह Rajkummar Rao लिखने लगे। लेकिन रियल नाम उनका राजकुमार यादव है। आप सभी ये बात अच्छे से जानते है की बॉलीवुड में सफलता इतनी आसानी से नहीं मिलती। राजकुमार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ उन्होंने वो वक्त भी देखा जब उनके पास पैसे नहीं होते थे। एक इंटरव्यू में राजकुमार ने कहा था मैं अपने हिस्से से सात हजार रुपये देता था जो मेरे लिए बहुत ज्यादा था। हर महीने पंद्रह-बीस हजार रुपये की जरूरत होती थी। एक बार मेरे खाते में सिर्फ अट्ठारह रुपयापये थे और मेरे दोस्त के पास तेईस रुपयापये।वो नहीं जानते थे कि अच्छा दिखने के लिए क्या पहनना होता है। इन सब बातों की परवाह किए बिना राजकुमार चेहरे पर गुलाब जल लगा लेते थे और सोचते थे कि इससे वो अच्छे दिखने लगेंगे।
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भारत के बाहर कृषि कानूनों के खिलाफ जो प्रदर्शन (Farmers Protest) हो रहे हैं उनमें खालिस्तान समर्थकों का कितना हाथ है इसकी जांच अब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) करेगी.
भारत के बाहर कृषि कानूनों के खिलाफ जो प्रदर्शन (Farmers Protest) हो रहे हैं उनमें खालिस्तान समर्थकों का कितना हाथ है इसकी जांच अब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) करेगी. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, एनआईए ने एक केस रजिस्टर किया है इसमें यह जांच की जाएगी कि यूके, यूएस, कनाडा, जर्मनी समेत अन्य देशों में भारतीय दूतावास के बाहर जो प्रदर्शन हुए उसमें खालिस्तानी आतंकी ग्रुप की फंडिंग का कितना हाथ है.
खबर के मुताबिक, यह केस पिछले हफ्ते रजिस्टर किया गया है. आरोप है कि भारत में मौजूद खालिस्तानी समर्थकों को भी एनजीओ के जरिए फंडिंग मिल रही है. भारत में किसान पिछले 27 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, एजेंसी ने यूएस के गुरपतवंत सिंह पन्नुन, यूके में मौजूद परमजीत सिंह पम्मा और कनाडा निवासी हरदीप सिंह निज्जर को आरोपी बनाया है. कहा गया है कि ये लोग सिख फॉर जस्टिस (SFJ) नाम की संस्था के जरिए भारत सरकार के खिलाफ प्रदर्शन को पैसा जुटा रहे हैं. यह बात एनआईए की एफआईआर में लिखी है. एनआईए ने FIR में तीनों के पते तक मेंशन किए हुए हैं.
FIR में लिखा गया है कि भारत में मौजूद खालिस्तानी समर्थकों को भी एनजीओ के जरिए बड़ी रकम मिली है. आगे यह भी आरोप है कि SFJ नेतृत्व का प्लान है कि हिंसा करके सरकारी और प्राइवेट प्रोपर्टी को नुकसान पहुंचाया जाए.
कहा जा रहा है कि इस FIR से एएआईए विदेश में SFJ की गतिविधियों पर नजर रख पाएगा. जरूरत पड़ने पर एनआईए की टीम विदेश में इन ठिकानों पर जाकर भी फंडिंग की जांच कर सकती है. बता दें कि SFJ को भारत सरकार की तरफ से गृह मंत्रालय ने पहले ही बैन किया हुआ है. FIR में जिन तीनों का नाम है उनकी भारत में मौजूद प्रोपर्टी पहले ही जब्त है. तीनों पर पिछले महीने भी एक दूसरे केस में चार्जशीट दाखिल की गई थी.
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भारत के बाहर कृषि कानूनों के खिलाफ जो प्रदर्शन हो रहे हैं उनमें खालिस्तान समर्थकों का कितना हाथ है इसकी जांच अब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी करेगी. भारत के बाहर कृषि कानूनों के खिलाफ जो प्रदर्शन हो रहे हैं उनमें खालिस्तान समर्थकों का कितना हाथ है इसकी जांच अब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी करेगी. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, एनआईए ने एक केस रजिस्टर किया है इसमें यह जांच की जाएगी कि यूके, यूएस, कनाडा, जर्मनी समेत अन्य देशों में भारतीय दूतावास के बाहर जो प्रदर्शन हुए उसमें खालिस्तानी आतंकी ग्रुप की फंडिंग का कितना हाथ है. खबर के मुताबिक, यह केस पिछले हफ्ते रजिस्टर किया गया है. आरोप है कि भारत में मौजूद खालिस्तानी समर्थकों को भी एनजीओ के जरिए फंडिंग मिल रही है. भारत में किसान पिछले सत्ताईस दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, एजेंसी ने यूएस के गुरपतवंत सिंह पन्नुन, यूके में मौजूद परमजीत सिंह पम्मा और कनाडा निवासी हरदीप सिंह निज्जर को आरोपी बनाया है. कहा गया है कि ये लोग सिख फॉर जस्टिस नाम की संस्था के जरिए भारत सरकार के खिलाफ प्रदर्शन को पैसा जुटा रहे हैं. यह बात एनआईए की एफआईआर में लिखी है. एनआईए ने FIR में तीनों के पते तक मेंशन किए हुए हैं. FIR में लिखा गया है कि भारत में मौजूद खालिस्तानी समर्थकों को भी एनजीओ के जरिए बड़ी रकम मिली है. आगे यह भी आरोप है कि SFJ नेतृत्व का प्लान है कि हिंसा करके सरकारी और प्राइवेट प्रोपर्टी को नुकसान पहुंचाया जाए. कहा जा रहा है कि इस FIR से एएआईए विदेश में SFJ की गतिविधियों पर नजर रख पाएगा. जरूरत पड़ने पर एनआईए की टीम विदेश में इन ठिकानों पर जाकर भी फंडिंग की जांच कर सकती है. बता दें कि SFJ को भारत सरकार की तरफ से गृह मंत्रालय ने पहले ही बैन किया हुआ है. FIR में जिन तीनों का नाम है उनकी भारत में मौजूद प्रोपर्टी पहले ही जब्त है. तीनों पर पिछले महीने भी एक दूसरे केस में चार्जशीट दाखिल की गई थी.
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चंडीगढ़, 28 फरवरीः
आज यहाँ सामाजिक सुरक्षा और महिला और बाल विकास मंत्री रजिया सुल्ताना द्वारा विभाग की कल्याण स्कीमों की समीक्षा करते बताया गया कि प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना अधीन लाभपात्रियों को 4.7 करोड़ रुपए की अदायगी की जा चुकी है।
इस उच्च स्तरीय समीक्षा मीटिंग की अध्यक्षता करते हुये श्रीमती सुल्ताना ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार द्वारा चलाईं जा रही विभिन्न स्कीमों का अधिक से अधिक प्रचार करके जरूरतमंद लोगों तक पहुँचाया जाये। उन्होंने विशेष के तौर पर कहा कि गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष तौर पर बनायी गई प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना को सुचारू ढंग के साथ लागू करना यकीनी बनाया जाये जिससे ज़रूरतमंदों को वित्तीय सहायता सही समय पर मिल सके।
मंत्री ने बताया कि विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओंं को उनका पहला बच्चा होने पर तीन किश्तों में क्रमवार 1000, 2000 और 2000 (कुल 5000 रुपए) अदा किये जा रहे हैं और इस वित्तीय सहायता की प्राप्ति के लिए कोई आय सीमा का मापदंड भी नहीं निश्चित किया गया। स्कीम अधीन 28 दिसंबर, 2017 से 28 फरवरी, 2018 तक कुल 64767 लाभपात्री रजिस्टर हो चुके हैं, जिनमें से 30,605 लाभपात्रियोंं को उनके बैंक खातों के द्वारा कुल 4,07,14,000 रुपए अदा किये जा चुके हैं।
सामाजिक सुरक्षा मंत्री ने बताया हमारे लिए गौरव वाली बात है कि तरन तारन जि़ले को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ स्कीम को सुचारू ढंग के साथ लागू करने के लिए देश के 10 जिलों में जगह मिली है। जैसे तरन तारन जि़लो में विभाग ने लोगों को जागरूक करके लडक़ा -लडक़ी के जन्म दर में सुधार किया है, वह पूरे राज्य के लिए मिसाल है।
श्रीमती सुल्ताना ने निर्देश दिए कि यूनिक डिसेबिलटी आई.डी. कार्ड प्रोजैक्ट के अंतर्गत राज्य के हर गाँव को जल्द कवर करके अपाहिज ज़रूरतमंदों को रजिस्टर्ड किया जाये जिससे उनको समय से अपंगता सर्टीफिकेट जारी किये जा सके और सरकार की तरफ से मिलने वाली वित्तीय और अन्य सहायता का लाभपात्री लाभ उठा सके।
इसी दौरान विशेष मुख्य सचिव श्री के.बी.एस. सिद्धू ने बताया कि आंगनवाड़ी सेवाओं स्कीम पंजाब राज्य में 27,314 आंगनवाड़ी केन्द्रों के द्वारा चलाई जा रही है, जिनमें राशन मुहैया करवाने सम्बन्धित 33 करोड़ रुपए की राशि निकाली जा चुकी है और जल्दी ही आंगनवाड़ी केन्द्रों में राशन पहुँचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राइट्स आफ पर्सनज़ विद्द डिसएबिलटी एक्ट -2016 एक्ट के अंतर्गत नियम तैयार कर लिए गए हैं। विभाग अपंग व्यक्तियों को सरकारी इमारतों में अड़चन रहित माहौल प्रदान करने के लिए कार्यवाही कर रहा है।
इस मौके पर कविता सिंह डायरैक्टर, सामाजिक सुरक्षा और महिला और बाल विकास ने बताया कि विभाग द्वारा गूँगे और बहरे बच्चों और विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों के लिए राज्य में विशेष स्कूल स्थापित करने के लिए विशेष प्रोग्राम विचार अधीन है। उन्होंने बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में पहली क्लास से ग्रेजुएशन तक अपंग व्यक्तियों को पढ़ाई के लिए वज़ीफ़ा मुहैया करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आई.सी.पी.एस स्कीम अधीन बच्चों की संभाल के लिए विभिन्न वर्गों के विभाग द्वारा 19 होम चलाए जा रहे हैं, जिनमें रह रहे 560 बच्चों को जे.जे. एक्ट के अंतर्गत बुनियादी सुविधाएं दीं जा रही हैं।
मीटिंग में आंगनवाड़ी केन्द्रों के रिकार्ड को अॅानलाइन करना, अपंग व्यक्तियों के लिए छात्रवृति, करैच्च स्कीम और सप्लीमैंटरी पौष्टिक भोजन प्रोग्राम आदि स्कीमों की कारगुज़ारी की समीक्षा भी की गई।
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चंडीगढ़, अट्ठाईस फरवरीः आज यहाँ सामाजिक सुरक्षा और महिला और बाल विकास मंत्री रजिया सुल्ताना द्वारा विभाग की कल्याण स्कीमों की समीक्षा करते बताया गया कि प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना अधीन लाभपात्रियों को चार.सात करोड़ रुपए की अदायगी की जा चुकी है। इस उच्च स्तरीय समीक्षा मीटिंग की अध्यक्षता करते हुये श्रीमती सुल्ताना ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरकार द्वारा चलाईं जा रही विभिन्न स्कीमों का अधिक से अधिक प्रचार करके जरूरतमंद लोगों तक पहुँचाया जाये। उन्होंने विशेष के तौर पर कहा कि गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष तौर पर बनायी गई प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना को सुचारू ढंग के साथ लागू करना यकीनी बनाया जाये जिससे ज़रूरतमंदों को वित्तीय सहायता सही समय पर मिल सके। मंत्री ने बताया कि विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओंं को उनका पहला बच्चा होने पर तीन किश्तों में क्रमवार एक हज़ार, दो हज़ार और दो हज़ार अदा किये जा रहे हैं और इस वित्तीय सहायता की प्राप्ति के लिए कोई आय सीमा का मापदंड भी नहीं निश्चित किया गया। स्कीम अधीन अट्ठाईस दिसंबर, दो हज़ार सत्रह से अट्ठाईस फरवरी, दो हज़ार अट्ठारह तक कुल चौंसठ हज़ार सात सौ सरसठ लाभपात्री रजिस्टर हो चुके हैं, जिनमें से तीस,छः सौ पाँच लाभपात्रियोंं को उनके बैंक खातों के द्वारा कुल चार,सात,चौदह,शून्य रुपयापए अदा किये जा चुके हैं। सामाजिक सुरक्षा मंत्री ने बताया हमारे लिए गौरव वाली बात है कि तरन तारन जि़ले को बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ स्कीम को सुचारू ढंग के साथ लागू करने के लिए देश के दस जिलों में जगह मिली है। जैसे तरन तारन जि़लो में विभाग ने लोगों को जागरूक करके लडक़ा -लडक़ी के जन्म दर में सुधार किया है, वह पूरे राज्य के लिए मिसाल है। श्रीमती सुल्ताना ने निर्देश दिए कि यूनिक डिसेबिलटी आई.डी. कार्ड प्रोजैक्ट के अंतर्गत राज्य के हर गाँव को जल्द कवर करके अपाहिज ज़रूरतमंदों को रजिस्टर्ड किया जाये जिससे उनको समय से अपंगता सर्टीफिकेट जारी किये जा सके और सरकार की तरफ से मिलने वाली वित्तीय और अन्य सहायता का लाभपात्री लाभ उठा सके। इसी दौरान विशेष मुख्य सचिव श्री के.बी.एस. सिद्धू ने बताया कि आंगनवाड़ी सेवाओं स्कीम पंजाब राज्य में सत्ताईस,तीन सौ चौदह आंगनवाड़ी केन्द्रों के द्वारा चलाई जा रही है, जिनमें राशन मुहैया करवाने सम्बन्धित तैंतीस करोड़ रुपए की राशि निकाली जा चुकी है और जल्दी ही आंगनवाड़ी केन्द्रों में राशन पहुँचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राइट्स आफ पर्सनज़ विद्द डिसएबिलटी एक्ट -दो हज़ार सोलह एक्ट के अंतर्गत नियम तैयार कर लिए गए हैं। विभाग अपंग व्यक्तियों को सरकारी इमारतों में अड़चन रहित माहौल प्रदान करने के लिए कार्यवाही कर रहा है। इस मौके पर कविता सिंह डायरैक्टर, सामाजिक सुरक्षा और महिला और बाल विकास ने बताया कि विभाग द्वारा गूँगे और बहरे बच्चों और विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों के लिए राज्य में विशेष स्कूल स्थापित करने के लिए विशेष प्रोग्राम विचार अधीन है। उन्होंने बताया कि शिक्षा के क्षेत्र में पहली क्लास से ग्रेजुएशन तक अपंग व्यक्तियों को पढ़ाई के लिए वज़ीफ़ा मुहैया करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आई.सी.पी.एस स्कीम अधीन बच्चों की संभाल के लिए विभिन्न वर्गों के विभाग द्वारा उन्नीस होम चलाए जा रहे हैं, जिनमें रह रहे पाँच सौ साठ बच्चों को जे.जे. एक्ट के अंतर्गत बुनियादी सुविधाएं दीं जा रही हैं। मीटिंग में आंगनवाड़ी केन्द्रों के रिकार्ड को अॅानलाइन करना, अपंग व्यक्तियों के लिए छात्रवृति, करैच्च स्कीम और सप्लीमैंटरी पौष्टिक भोजन प्रोग्राम आदि स्कीमों की कारगुज़ारी की समीक्षा भी की गई।
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कोरिया, सुरेश मिनोचा। सविप्रा उपाध्यक्ष, विधायक गुलाब कमरो ने ग्राम पंचायत चनवारीडाँड़ में 75 लाख 23 हजार की लागत से बनने वाले बहुप्रतीक्षित हाई स्कूल भवन का भूमिपूजन किया। विदित हो कि बिना भवन के 2013 में मिडिल स्कूल से हाई स्कूल में उन्नयन हुआ था। हाई स्कूल मिडिल स्कूल के अतिरिक्त कक्ष में संचालित हो रहा था। आज विधायक ने भवन का भूमिपूजन कर क्षेत्र में एक सौगात और दी वही विधायक व अथितियों के द्वारा छात्राओं को सायकल वितरण किया गया।
इस अवसर पर जिला पंचायत सभापति उषा सिंह, जनपद अध्यक्ष डॉ विनय शंकर सिंह, उपाध्यक्ष राजेश साहू, नपाउपाध्यक्ष कृष्णमुरारी तिवारी, जनपद सदस्य कविता दीवान, सरपंच गौरी सिंह, बीईओ गिरीश कुरचानिया, एसडीओ वीपी पटेल, जिला महामंत्री रामनरेश पटेल, चंद्रकांत चावड़ा सहित शाला स्टाफ व ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
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कोरिया, सुरेश मिनोचा। सविप्रा उपाध्यक्ष, विधायक गुलाब कमरो ने ग्राम पंचायत चनवारीडाँड़ में पचहत्तर लाख तेईस हजार की लागत से बनने वाले बहुप्रतीक्षित हाई स्कूल भवन का भूमिपूजन किया। विदित हो कि बिना भवन के दो हज़ार तेरह में मिडिल स्कूल से हाई स्कूल में उन्नयन हुआ था। हाई स्कूल मिडिल स्कूल के अतिरिक्त कक्ष में संचालित हो रहा था। आज विधायक ने भवन का भूमिपूजन कर क्षेत्र में एक सौगात और दी वही विधायक व अथितियों के द्वारा छात्राओं को सायकल वितरण किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत सभापति उषा सिंह, जनपद अध्यक्ष डॉ विनय शंकर सिंह, उपाध्यक्ष राजेश साहू, नपाउपाध्यक्ष कृष्णमुरारी तिवारी, जनपद सदस्य कविता दीवान, सरपंच गौरी सिंह, बीईओ गिरीश कुरचानिया, एसडीओ वीपी पटेल, जिला महामंत्री रामनरेश पटेल, चंद्रकांत चावड़ा सहित शाला स्टाफ व ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
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जैसा कि हम सभी जानते हैं कि अस्थमा रोग एक ऐसी स्वास्थ्य स्थिति है, जो आम तौर पर एलर्जी से संबधित है और ये एलर्जी वातावरण में मौजूद धूल-कण, धुएं जैसी प्रदूषक के कण हमारे सांस लेने के साथ ही श्वास नली में पहुंच जाते हैं, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। ये स्थिति धीरे-धीरे अस्थमा का रूप ले लेती है। डॉ. अनिमेष आर्य, सीनियर कंसलटेंट, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट बताते हैं कि अस्थमा के मरीजों सांस की नली में सूजन आ जाती है, जिसके कारण उनकी सांस की नली सिकुड़ जाती है और उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। आइए जानते हैं कितने प्रकार का होता है अस्थमा और इससे कैसे बचा जा सकता है।
अगर आप या किसी भी व्यक्ति को धूल-मिट्टी के संम्पर्क में आने पर तुरंत ही सांस लेने में किसी प्रकार की दिक्कत महसूस होने लगती है तो निश्चित ही आप एलर्जिक अस्थमा के शिकार हो सकते हैं।
ये स्थिति तब पैदा होती है जब आप बहुत अधिक तनाव में होते हैं और आपको अचानक सर्दी लगने लगें या खांसी-जुकाम हो जाता है। इस स्थिति को नॉनएलर्जिक अस्थमा भी कहा जाता है।
आपने गौर किया होगा कि बहुत से लोगों को अधिक एक्सरसाइज और शारीरिक गतिविधि के कारण भी अस्थमा की परेशानी हो जाती है, जिसे एक्सरसाइज इनड्यूस अस्थमा भी कहते हैं।
इस स्थिति में अस्थमा के अटैक अचानक काम के दौरान पड़ता है। अगर आप नियमित रूप से एक ही तरह के काम करते हैं तो अक्सर आपको इस दौरान अटैक पड़नेलगते है, जिसे ऑक्यूपेशनल अस्थमा कहा जाता है।
ये स्थिति सिर्फ और सिर्फ बच्चों में ही देखी जाती है। इस स्थिति से पीड़ित बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता है, इस प्रकार के अस्थमा से अपने आप ही बाहर आने लगता है। यह स्थिति गंभीर नहीं होती और उचित समय पर इलाज से बच्चे को बड़ी आसानी से बचाया जा सकता है।
डॉ. अनिमेष आर्य बताते हैं कि एक वयस्क के अस्थमा की चपेट में आने पर या फिर नॉन-एलर्जिक अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति को मोटापे का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। वहीं छोटे बच्चों में डर और तनाव उन्हें अस्थमा का शिकार बना देता है। दरअसल तनाव के कारण हार्मोन में गड़बड़ी हो जाती है, जिसके कारण मनुष्य के फेफड़े व श्वास तंत्र की नाड़ियां सिकुड़ने लगती हैं और उन्हें सांस लेने में परेशानी होती है।
डॉ. अनिमेष आर्य के मुताबिक, गर्भावस्था के दौरान अस्थमा अटैक गर्भवती महिला के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है, इसलिए जरूरी है कि वह प्रेगनेंसी के शुरू में ही अस्थमा की जांच कराएं। सही समय पर इलाज न मिलने से महिला और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है। एक अध्ययन के मुताबिक, 10 प्रतिशत अस्थमा पीड़ित महिलाओं को गर्भवती होने में सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक समय लगता है।
दरअसल गर्भावस्था में महिलाओं का ब्लड प्रेशर हाई होने के कारण यूरिन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे भ्रूण को ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। इस स्थिति में महिलाओं को अपनी अस्थमा के दवाएं लेती रहनी चाहिए। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को धूल, मिट्टी, धुंआ और दुर्गध आदि एलर्जी वाली चीजो से दूर रहना चाहिए।
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जैसा कि हम सभी जानते हैं कि अस्थमा रोग एक ऐसी स्वास्थ्य स्थिति है, जो आम तौर पर एलर्जी से संबधित है और ये एलर्जी वातावरण में मौजूद धूल-कण, धुएं जैसी प्रदूषक के कण हमारे सांस लेने के साथ ही श्वास नली में पहुंच जाते हैं, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। ये स्थिति धीरे-धीरे अस्थमा का रूप ले लेती है। डॉ. अनिमेष आर्य, सीनियर कंसलटेंट, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट बताते हैं कि अस्थमा के मरीजों सांस की नली में सूजन आ जाती है, जिसके कारण उनकी सांस की नली सिकुड़ जाती है और उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। आइए जानते हैं कितने प्रकार का होता है अस्थमा और इससे कैसे बचा जा सकता है। अगर आप या किसी भी व्यक्ति को धूल-मिट्टी के संम्पर्क में आने पर तुरंत ही सांस लेने में किसी प्रकार की दिक्कत महसूस होने लगती है तो निश्चित ही आप एलर्जिक अस्थमा के शिकार हो सकते हैं। ये स्थिति तब पैदा होती है जब आप बहुत अधिक तनाव में होते हैं और आपको अचानक सर्दी लगने लगें या खांसी-जुकाम हो जाता है। इस स्थिति को नॉनएलर्जिक अस्थमा भी कहा जाता है। आपने गौर किया होगा कि बहुत से लोगों को अधिक एक्सरसाइज और शारीरिक गतिविधि के कारण भी अस्थमा की परेशानी हो जाती है, जिसे एक्सरसाइज इनड्यूस अस्थमा भी कहते हैं। इस स्थिति में अस्थमा के अटैक अचानक काम के दौरान पड़ता है। अगर आप नियमित रूप से एक ही तरह के काम करते हैं तो अक्सर आपको इस दौरान अटैक पड़नेलगते है, जिसे ऑक्यूपेशनल अस्थमा कहा जाता है। ये स्थिति सिर्फ और सिर्फ बच्चों में ही देखी जाती है। इस स्थिति से पीड़ित बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता है, इस प्रकार के अस्थमा से अपने आप ही बाहर आने लगता है। यह स्थिति गंभीर नहीं होती और उचित समय पर इलाज से बच्चे को बड़ी आसानी से बचाया जा सकता है। डॉ. अनिमेष आर्य बताते हैं कि एक वयस्क के अस्थमा की चपेट में आने पर या फिर नॉन-एलर्जिक अस्थमा से पीड़ित व्यक्ति को मोटापे का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। वहीं छोटे बच्चों में डर और तनाव उन्हें अस्थमा का शिकार बना देता है। दरअसल तनाव के कारण हार्मोन में गड़बड़ी हो जाती है, जिसके कारण मनुष्य के फेफड़े व श्वास तंत्र की नाड़ियां सिकुड़ने लगती हैं और उन्हें सांस लेने में परेशानी होती है। डॉ. अनिमेष आर्य के मुताबिक, गर्भावस्था के दौरान अस्थमा अटैक गर्भवती महिला के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है, इसलिए जरूरी है कि वह प्रेगनेंसी के शुरू में ही अस्थमा की जांच कराएं। सही समय पर इलाज न मिलने से महिला और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है। एक अध्ययन के मुताबिक, दस प्रतिशत अस्थमा पीड़ित महिलाओं को गर्भवती होने में सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक समय लगता है। दरअसल गर्भावस्था में महिलाओं का ब्लड प्रेशर हाई होने के कारण यूरिन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे भ्रूण को ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। इस स्थिति में महिलाओं को अपनी अस्थमा के दवाएं लेती रहनी चाहिए। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को धूल, मिट्टी, धुंआ और दुर्गध आदि एलर्जी वाली चीजो से दूर रहना चाहिए। Total Wellness is now just a click away.
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17 जुलाई, 1 9 87 को शिकागो, इलिनोइस में पैदा हुए, जेरेमह फेलटन, जिसे प्रोफेसरिकोनिली के रूप में जाना जाता है, केवल जेरेमह के रूप में जाना जाता था, सीईओ रसेल सिमन्स के लिए बैठक और प्रदर्शन के बाद उसी दिन फरवरी 200 9 में डेफ जाम रिकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर किए गए थे। उन्होंने तत्काल सफलता हासिल की, दो डबल प्लैटिनम, एक प्लैटिनम और दो स्वर्ण एकल दो एल्बमों से कमाई। 200 9 में बिलबोर्ड टॉप आर एंड बी / हिप-हॉप एल्बम चार्ट पर उनकी स्वयं-शीर्षक वाली पहली सीडी हिट नंबर एक थी। उनकी दूसरी सीडी, 2010 में ऑल अबाउट यू , आठ नंबर पर पहुंच गई।
जेरेमह को दो बिलबोर्ड संगीत पुरस्कार नामांकन प्राप्त हुए हैं, और उन्हें एक अमेरिकी संगीत पुरस्कार और एक एनएएसीपी छवि पुरस्कार के लिए भी नामित किया गया है। उन्होंने क्रिस ब्राउन, निकी मिनज , आर केली , लिल वेन , टीआई , लुडैक्रिस, 50 सेंट, जे कोल, फ्लो रिडा , वेले, रिक रॉस, डिजी, मीक मिल और बिग सीन सहित कई कलाकारों के साथ सहयोग किया है।
यहां "जेरेमह के शीर्ष दस सबसे महान हिट्स" की एक सूची दी गई है ।
200 9 - "जन्मदिन सेक्स"
जेरेमिह ने 200 9 में अपने प्लैटिनम पदार्पण एकल, "जन्मदिन सेक्स" के साथ अपना रिकॉर्डिंग करियर लॉन्च किया। अपने स्वयं के शीर्षक वाले पहले एल्बम से, गीत बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट के शीर्ष पर पहुंच गया और हॉट 100 पर नंबर चार पर पहुंच गया। यह गीत फ्रेंच में भी दर्ज किया गया था।
2014 - वाईजी को बताएं "एम मत कहो"
जेरेमह द्वारा "डॉट नॉट टेल" एएम की विशेषता है कि वाईजी को 2015 में बेस्ट आर एंड बी गीत के लिए बिलबोर्ड म्यूजिक अवॉर्ड के लिए नामित किया गया था। यह गीत बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट पर नंबर दो पर पहुंच गया, हॉट 100 पर नंबर छह, और डबल प्लैटिनम प्रमाणित किया गया। "मत कहो" एम "अपनी तीसरी सीडी, लेट नाइट्स से पहला एकल था ।
2010- 50 सेंट की विशेषता वाले "डाउन ऑन मी"
जर्मिह द्वारा "डाउन ऑन मी" ने 50 प्रतिशत की विशेषता वाले 2012 में बेस्ट आर एंड बी गीत के लिए बिलबोर्ड म्यूजिक अवॉर्ड के लिए मनोनीत किया था। यह उनके दूसरे एल्बम, ऑल अबाउट यू का दूसरा एकल था , और डबल प्लैटिनम प्रमाणित किया गया था।
जेरेबह को मैकबैक म्यूजिक ग्रुप के सेल्फ मेड वॉल्यूम से वेले के गीत "द वे" पर रिक रॉस के साथ दिखाया गया था । 2011 में 1 सीडी। गीत बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट पर नंबर चार पर पहुंच गया।
जेरेमीह को नेटली ला रोज के 2015 के पहले एकल, "किसीबॉडी" पर दिखाया गया था, जो बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट पर नंबर पांच पर और हॉट 100 पर नंबर दस पर पहुंच गया था।
जेरेहह को क्रिस ब्राउन, अगस्त एल्सीना और फ्यूचर "डी होल्ड यू डाउन" पर डीजे खालद के आठवें स्टूडियो एल्बम आई चेंज ए लोट से दिखाया गया था। ट्रैक 2014 में बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट पर नंबर दस पर पहुंच गया।
जेरेमह को मेक मिल के पहले एकल "अमेन" पर अपने पहले एकल एल्बम, ड्रीम्स एंड नाइटमेरेस से ड्रैक के साथ दिखाया गया था। गीत बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट पर नंबर पांच पर पहुंच गया।
2011 में, जेरेमिह को अपने पहले एकल एल्बम, अप्रत्याशित आगमन से डिजी के "डू इट लाइक यू" पर दिखाया गया था । यह गीत बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट पर ग्यारह नंबर पर पहुंच गया।
200 9 - "इमा स्टार (हर जगह हम हैं)"
जेरेमह का दूसरा एकल, "इम्मा स्टार (हर जगह जहां हम हैं)" को प्रमाणित किया गया था। यह 200 9 में बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट पर नंबर 23 पर पहुंच गया।
2015 - जे। कोल की विशेषता "विमान"
2015 में, जेरेलीह द्वारा जेरेलीह द्वारा "प्लेन" की विशेषता बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट पर नंबर 17 पर पहुंच गई । "प्लेन" उनकी तीसरी सीडी, लेट नाइट्स से दूसरी एकल थी ।
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सत्रह जुलाई, एक नौ सत्तासी को शिकागो, इलिनोइस में पैदा हुए, जेरेमह फेलटन, जिसे प्रोफेसरिकोनिली के रूप में जाना जाता है, केवल जेरेमह के रूप में जाना जाता था, सीईओ रसेल सिमन्स के लिए बैठक और प्रदर्शन के बाद उसी दिन फरवरी दो सौ नौ में डेफ जाम रिकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर किए गए थे। उन्होंने तत्काल सफलता हासिल की, दो डबल प्लैटिनम, एक प्लैटिनम और दो स्वर्ण एकल दो एल्बमों से कमाई। दो सौ नौ में बिलबोर्ड टॉप आर एंड बी / हिप-हॉप एल्बम चार्ट पर उनकी स्वयं-शीर्षक वाली पहली सीडी हिट नंबर एक थी। उनकी दूसरी सीडी, दो हज़ार दस में ऑल अबाउट यू , आठ नंबर पर पहुंच गई। जेरेमह को दो बिलबोर्ड संगीत पुरस्कार नामांकन प्राप्त हुए हैं, और उन्हें एक अमेरिकी संगीत पुरस्कार और एक एनएएसीपी छवि पुरस्कार के लिए भी नामित किया गया है। उन्होंने क्रिस ब्राउन, निकी मिनज , आर केली , लिल वेन , टीआई , लुडैक्रिस, पचास सेंट, जे कोल, फ्लो रिडा , वेले, रिक रॉस, डिजी, मीक मिल और बिग सीन सहित कई कलाकारों के साथ सहयोग किया है। यहां "जेरेमह के शीर्ष दस सबसे महान हिट्स" की एक सूची दी गई है । दो सौ नौ - "जन्मदिन सेक्स" जेरेमिह ने दो सौ नौ में अपने प्लैटिनम पदार्पण एकल, "जन्मदिन सेक्स" के साथ अपना रिकॉर्डिंग करियर लॉन्च किया। अपने स्वयं के शीर्षक वाले पहले एल्बम से, गीत बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट के शीर्ष पर पहुंच गया और हॉट एक सौ पर नंबर चार पर पहुंच गया। यह गीत फ्रेंच में भी दर्ज किया गया था। दो हज़ार चौदह - वाईजी को बताएं "एम मत कहो" जेरेमह द्वारा "डॉट नॉट टेल" एएम की विशेषता है कि वाईजी को दो हज़ार पंद्रह में बेस्ट आर एंड बी गीत के लिए बिलबोर्ड म्यूजिक अवॉर्ड के लिए नामित किया गया था। यह गीत बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट पर नंबर दो पर पहुंच गया, हॉट एक सौ पर नंबर छह, और डबल प्लैटिनम प्रमाणित किया गया। "मत कहो" एम "अपनी तीसरी सीडी, लेट नाइट्स से पहला एकल था । दो हज़ार दस- पचास सेंट की विशेषता वाले "डाउन ऑन मी" जर्मिह द्वारा "डाउन ऑन मी" ने पचास प्रतिशत की विशेषता वाले दो हज़ार बारह में बेस्ट आर एंड बी गीत के लिए बिलबोर्ड म्यूजिक अवॉर्ड के लिए मनोनीत किया था। यह उनके दूसरे एल्बम, ऑल अबाउट यू का दूसरा एकल था , और डबल प्लैटिनम प्रमाणित किया गया था। जेरेबह को मैकबैक म्यूजिक ग्रुप के सेल्फ मेड वॉल्यूम से वेले के गीत "द वे" पर रिक रॉस के साथ दिखाया गया था । दो हज़ार ग्यारह में एक सीडी। गीत बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट पर नंबर चार पर पहुंच गया। जेरेमीह को नेटली ला रोज के दो हज़ार पंद्रह के पहले एकल, "किसीबॉडी" पर दिखाया गया था, जो बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट पर नंबर पांच पर और हॉट एक सौ पर नंबर दस पर पहुंच गया था। जेरेहह को क्रिस ब्राउन, अगस्त एल्सीना और फ्यूचर "डी होल्ड यू डाउन" पर डीजे खालद के आठवें स्टूडियो एल्बम आई चेंज ए लोट से दिखाया गया था। ट्रैक दो हज़ार चौदह में बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट पर नंबर दस पर पहुंच गया। जेरेमह को मेक मिल के पहले एकल "अमेन" पर अपने पहले एकल एल्बम, ड्रीम्स एंड नाइटमेरेस से ड्रैक के साथ दिखाया गया था। गीत बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट पर नंबर पांच पर पहुंच गया। दो हज़ार ग्यारह में, जेरेमिह को अपने पहले एकल एल्बम, अप्रत्याशित आगमन से डिजी के "डू इट लाइक यू" पर दिखाया गया था । यह गीत बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट पर ग्यारह नंबर पर पहुंच गया। दो सौ नौ - "इमा स्टार " जेरेमह का दूसरा एकल, "इम्मा स्टार " को प्रमाणित किया गया था। यह दो सौ नौ में बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट पर नंबर तेईस पर पहुंच गया। दो हज़ार पंद्रह - जे। कोल की विशेषता "विमान" दो हज़ार पंद्रह में, जेरेलीह द्वारा जेरेलीह द्वारा "प्लेन" की विशेषता बिलबोर्ड आर एंड बी चार्ट पर नंबर सत्रह पर पहुंच गई । "प्लेन" उनकी तीसरी सीडी, लेट नाइट्स से दूसरी एकल थी ।
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सोएंगे तेरी गोद में एक दिन मरके, हम दम भी जो तोड़ेंगे तेरा दम भर के. . . हमने तो नमाजें भी पढ़ी हैं अक्सर, गंगा तेरे पानी से वजू करके. . . । यह पंक्तियां लिखने वाले नजीर बनारसी की काशी में रविवार की शाम एक बार फिर गंगा-जमुनी तहजीब का आदर्श रूप देखने को मिला। दरअसल, मैदागिन से बुलनाला, चौक होते हुए दशाश्वमेध घाट तक राम बारात शोभा यात्रा जा रही थी। शोभायात्रा का स्वागत करने के लिए रोजेदार चौक थाने के सामने एकत्र हो गए। चिलचिलाती धूप में खुद भूखे-प्यासे रहकर रोजेदारों ने राम भक्तों पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसा कर उन्हें पानी पिलाया। इसके साथ ही मुस्लिम बंधुओं ने हिंदू भाइयों के गले मिलकर नवरात्रि और रामनवमी की शुभकामनाएं दीं।
रोजेदारों के जत्थे की अगुवाई कर रहे शेख मोहम्मद आसिफ ने कहा कि हमारे राम भक्त भाई चिलचिलाती धूप में शोभा यात्रा में जा रहे थे। इसी वजह से हमने उन पर पुष्प वर्षा कर उन्हें पानी पिलाया। ऐसा हम सब हर साल रामनवमी और महाशिवरात्रि पर करते रहते हैं। काशी गंगा-जमुनी तहजीब की परिचायक है और असली हिंदुस्तान यही है।
हिंदुस्तान ही एकमात्र ऐसा देश है जहां सभी जाति और धर्मों के लोगों को बगैर भेदभाव के समान अवसर मिलता है। हम सभी साथ में होली-दिवाली और ईद मनाते हैं। हम हर साल यही संदेश देने का प्रयास करते हैं कि हम हिंदू-मुसलमान एक हैं और हिंदुस्तान जैसा महान देश कोई नहीं है।
भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर मंत्री श्रीपति मिश्र ने कहा कि यह नजारा पूरे हिंदुस्तान और खासतौर से ओवैसी जैसे नेताओं को जरूर देखना चाहिए। भीषण गर्मी में खुद भूखे-प्यासे रहकर मुस्लिम भाइयों ने राम भक्तों को पानी पिलाया, यही हिंदुस्तान की असली तस्वीर है। देश और दुनिया के लोगों को देखना और समझना चाहिए कि काशी में हिंदू और मुसलमान कैसे एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सुख-दुख में साथ खड़े रहते हैं। यह उन लोगों के लिए भी करारा जवाब है जो धर्म-जाति की राजनीति करते हैं।
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सोएंगे तेरी गोद में एक दिन मरके, हम दम भी जो तोड़ेंगे तेरा दम भर के. . . हमने तो नमाजें भी पढ़ी हैं अक्सर, गंगा तेरे पानी से वजू करके. . . । यह पंक्तियां लिखने वाले नजीर बनारसी की काशी में रविवार की शाम एक बार फिर गंगा-जमुनी तहजीब का आदर्श रूप देखने को मिला। दरअसल, मैदागिन से बुलनाला, चौक होते हुए दशाश्वमेध घाट तक राम बारात शोभा यात्रा जा रही थी। शोभायात्रा का स्वागत करने के लिए रोजेदार चौक थाने के सामने एकत्र हो गए। चिलचिलाती धूप में खुद भूखे-प्यासे रहकर रोजेदारों ने राम भक्तों पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसा कर उन्हें पानी पिलाया। इसके साथ ही मुस्लिम बंधुओं ने हिंदू भाइयों के गले मिलकर नवरात्रि और रामनवमी की शुभकामनाएं दीं। रोजेदारों के जत्थे की अगुवाई कर रहे शेख मोहम्मद आसिफ ने कहा कि हमारे राम भक्त भाई चिलचिलाती धूप में शोभा यात्रा में जा रहे थे। इसी वजह से हमने उन पर पुष्प वर्षा कर उन्हें पानी पिलाया। ऐसा हम सब हर साल रामनवमी और महाशिवरात्रि पर करते रहते हैं। काशी गंगा-जमुनी तहजीब की परिचायक है और असली हिंदुस्तान यही है। हिंदुस्तान ही एकमात्र ऐसा देश है जहां सभी जाति और धर्मों के लोगों को बगैर भेदभाव के समान अवसर मिलता है। हम सभी साथ में होली-दिवाली और ईद मनाते हैं। हम हर साल यही संदेश देने का प्रयास करते हैं कि हम हिंदू-मुसलमान एक हैं और हिंदुस्तान जैसा महान देश कोई नहीं है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के महानगर मंत्री श्रीपति मिश्र ने कहा कि यह नजारा पूरे हिंदुस्तान और खासतौर से ओवैसी जैसे नेताओं को जरूर देखना चाहिए। भीषण गर्मी में खुद भूखे-प्यासे रहकर मुस्लिम भाइयों ने राम भक्तों को पानी पिलाया, यही हिंदुस्तान की असली तस्वीर है। देश और दुनिया के लोगों को देखना और समझना चाहिए कि काशी में हिंदू और मुसलमान कैसे एक-दूसरे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सुख-दुख में साथ खड़े रहते हैं। यह उन लोगों के लिए भी करारा जवाब है जो धर्म-जाति की राजनीति करते हैं। This website follows the DNPA Code of Ethics.
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।पंक्ति 3:
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'सागर के इस पार से, उस पार से' की रूपरेखा कानपुर स्थित अमर उजाला अखबार में संपादक और कवि वीरेन डंगवाल के ऑफिस में उपजी थी। मैं उनसे जब पहली बार मिला तो यह जानकर अच्छा लगा कि वे मुझे नाम से जानते हैं और उन्होंने मेरी कहानियाँ पढ़ी हैं।
पहली मुलाकात में ही उन्होंने आग्रह के साथ कहा कि आप हमारे लिए भी लिखिए। मैंने उन्हें बताया कि अखबारों में मैं केवल 'दैनिक जागरण' के लिए ही लिखता हूँ। हालाँकि कभी 'आज' में लगभग दो साल तक नियमित काम भी किया। यह सही है कि मैंने ऐसी कोई कसम नहीं खाई थी कि मैं केवल जागरण मे ही लिखूँगा। एक अच्छे सम्पादक की विशेषता ही यही है कि वह लेखक से रचना प्राप्त कर ले। इस मामले में मुझे डॉ. जयनारायण, प्रभाकर श्रोत्रिय जी और दैनिक जागरण के श्री राजेन्द्र दुबे बहुत सजग और सफल संपादक नज़र आते हैं। श्री दुबे तो इतना दबाव बढ़ा देता हैं कि रचना दिए बिना राहत नहीं मिलती। उन्होंने मुझसे सचमुच एक ऐसा काम करवा लिया कि अगर उनका दबाव न होता तो शायद मैं उसे न करता। यह उनका आदेशमूलक सस्नेह आग्रह ही है कि मैं उन्हें एक के बाद एक ऐसी कहानियाँ दे रहा हूँ जिसमें केन्द्रीय पात्र यूँ तो बच्चा है मगर समाज और वातावरण भी उसी प्रमुखता से उभरा है।
श्री डंगवाल को फिलहाल तो मैंने उस दौरान लिखे कुछ व्यंग्य लेख दिए और फिर अगर कई मुलाकातों में यह यह हुआ कि खाड़ी में रहनेवाले एशियाई मूल के लोगों के बारे में धारावाहिक स्तम्भ की शुरुआत करूँ। बात तो हो गई थी और मेरे पास लिखने के लिए भरपूर सामग्री भी थी मगर मेरी दिक्कत यह थी कि छुट्टियों से वापस आने के बाद डंगवालजी से संपर्क मुझे ही करना होता था। वह भी फोन पर। कभी बात हो पाती और कभी नहीं। उन्होंने मेरे कई लेख छापे मगर न तो उनकी सूचना दी और न ही अपने कार्यालय में किसी को यह ज़िम्मेदारी कि प्रकाशित रचनाओं की कटिंग मुझे भेजे। इस मामले में बहुत से संपादक संवेदना शून्य हैं। मुझे 'अमर उजाला' में प्रकाशित अपने लेखों के बारे में हमेशा दूसरों से पता चला। 'अमर उजाला' में प्रकाशित किसी भी रचना को मैंने नहीं देखा है। एक कविता कवि मान बहादुर सिंह पर भी प्रकाशित हुई थी। उसकी पाण्डुलिपि भी मेरे पास नहीं है। जब अगली बार अपनी छु्टियों में कानपुर गया तो पता चला कि वीरेन डंगवाल बरेली चले गए।
वे बरेली से ही आए भी थे। मुहावरा भी तो हैं उल्टे बाँस बरेली को। 'अमर उजाला' के दफ्तर में भी कई बार गया लेकिन मुझे अपनी प्रकाशित रचनाओं की कटिंग नहीं मिली। पैसा या पारिश्रमिक तो ख़ैर मिलना ही नहीं था। मुझे 'पेमेण्ट' करने से पहले सम्पादक यह सोच लेते हैं कि जो लेखक खाड़ी के देश में रह रहा है उसे क्यों पैसा देना। पत्रिका या अखबार तक वे इसलिए नहीं भेजते कि डाक खर्च बहुत आता है। यह हाल तथा कथित बड़ी पत्रिकाओं का है। हिन्दी की दशा दयनीय नहीं है। उसे दयनीय बनाने वाले बड़े सम्पादक हैं। पूँजीपतियों को खुश करने की उनकी कोशिश में हिन्दी का लेखक भले ही सपरिवार मिट जाए इसकी चिन्ता उन्हें नहीं है जो बड़े प्रतिष्ठानों में काम करते हुए स्वयं तो मोटी-मोटी सभी सुविधाओं का लाभ उठाते हैं मगर जिनके लिखने के बल पर अडीशन निकलता है वे अगर मर भी जाएँ तो क्या फर्क पड़ता है ? दूसरे मरने वाले फिर मिल जाएँगे। इस मामले में लघु पत्रिकाएँ निकालने वाले फिर भी अपनी सीमाओं में ईमानदारी बरत रहे हैं। लेकिन ईमानदारी बरतने वालों की संख्या बहुत कम है। बहरहाल, जो भी हुआ वह इस कृति का निमित्त तो हुआ ही। वीरेन डंगवाल को मैं पढ़ता हूँ। वे भी मुझे पढ़ते होंगे। क्योंकि छपता तो मैं भी हूँ। उनका आभारी हूँ कि यह कृति आकार ले सकी।
इस प्रोजेक्ट पर काम करने के बारे में जब मैंने गम्भीरता से सोचा तो मुझे लगा कि एक ऐसी दुनिया जिससे मैं पूरी तरह अपरिचित था और मेरी तरह ही बहुत से लोग अनजान हैं, साथ ही जिस दुनिया के बारे में बड़ी अजीब धारणाएँ फैली हैं, क्यों न उसे ही अपने लिखने की विषय वस्तु बनाया जाए अबूधाबी में पहुँचने पर पहले दिन ही एक मलयालम फिल्म 'अकरे' देखने का मौका मिला था। इससे पूर्व केवल एक मलयालम फिल्म सन् 76-77 में देखी थी जो 'मन का आँगन' शीर्षक से हिन्दी में डब की गई थी। वह फिल्म एक नई थीम 'पुरुष नपुंसकता' को लेकर बनी थी मगर प्रचारित और विज्ञापित कुछ इस प्रकार हुई थी कि 'सेक्सी' फिल्म का दर्ज़ा पा गई थी। युवक-युवतियों में फिल्म को लेकर बहुत क्रेज था। मैंने भी वह फिल्म देखी थी, फिल्म पसन्द आई थी। एक ऐसे विषय पर फिल्म थी जिसकी चर्चा कोने-अतरे में भी काम करने में लोग हिचकते थे। आज भी हिचकते हैं।
'मन का आँगन' के बाद तो कुछ समय के लिए मलयालम फिल्मों की हिन्दी डबिंग का सिलसिला चल निकला और उत्तर भारत में यह मान लिया गया कि दक्षिण भारत की औरते केवल ब्लाउज और पेटीकोट में ही रहती हैं और साउथ की फिल्में ब्लू फिल्मों से ज्यादा सेक्सी हैं। लेकिन यह सब कुछ बहुत दिन नहीं चला। खैर बात 'अकरे' की हो रही है तो इस शीर्षक का अर्थ है कि उस पार की घास ज़्यादा हरी दिखती है। जबर दस्त फिल्म थी। इस फिल्म ने चमक-दमक वाले संसार से मेरा मोह भंग पहले दिन ही कर दिया, मगर ! भाग्य प्रारब्ध कुछ तो होता होगा कि उन्नीस वर्ष यहाँ निकल गए। जब इस विषय पर लिखना शुरू किया तो सबसे उपयुक्त शीर्षक 'अकरे' ही लगा। इसके कुछ भाग लखनऊ से प्रकाशित होने वाले 'जनसत्ता' ने छापे और कुछ वहीं से प्रकाशित होने वाली पत्रिका 'शब्दसत्ता' ने। यह सब सुशील सिद्धार्थ ने किया। इसकी कुछ किश्तें प्रकाशित हो चुकी थीं। जब मैं अपनी अगली छुट्टियों में लखनऊ गया तो 'जनसत्ता' कार्यालय में प्रतिभा कटियार ने कहा कि आपका स्तम्भ 'अकरे' बहुत प्यारा है।
जनसत्ता में इसके कुछ ही अंश प्रकाशित हो सकते थे कि सुशील सिद्धार्थ वहाँ से निकल गए और इसका प्रकाशन स्थगित हो गय। प्रकाशन क्या, इसे लिखना ही स्थगित हो गया। धारावाहिकों के साथ ऐसा प्रायः होता है कि अगर लिखवाने वाला अपनी सीट से गया तो उसके प्रोजेक्ट भी गायब हो जाते हैं। दूसरों को उसमें कुछ गंध आती है। जब 'अकरे' का मामला स्थगित हो गया तो वह सीरीज ही टूट गई और उस पर सोचना भी। कई साल बाद अचानक इण्टरनेट पर प्रकाशित बहुचर्चित पत्रिका की सम्पादिका श्रीमती पूर्णिमा वर्मन से टेलीफोन पर परिचय हुआ और उन्होंने जिए हुए को एक नए एंगल से देखने का सुझाव दिया। उसी का फल है 'सागर के पार से, उस पार से'।
यह मेरी आत्मकथा नहीं है। मुझ जैसों की कथा है। वैसे भी आत्मकथा में 'आत्म' जैसा कुछ नहीं होता। उसमें भी दूसरे ही शामिल होते हैं। और अगर इसे आत्मकथा ही माना जाए तो यह बताना मेरा दायित्व हो जाता है कि यह उसका दूसरा भाग है। यह भी क्या बात हुई कि अगर आत्मकथा लिखी जाए तो उसकी शुरुआत मध्य से हो। मैं शब्दों का सहारा लेकर अपने लिए दया का कोई माहौल बनाना नहीं चाहता। बीस साल से गल्फ़ में हूँ। एयर कंडीशंड कमरे में रहता हूँ। नई निसान कार का ओनर हूँ। अच्छे से अच्छे काग़ज़ पर बहुत मँहगे पेन से लिखता हूँ। कुरियर सर्विस से रचना भेजता हूँ। हमेशा अपनी ओत से फोने करके दोस्तो-दुश्मनों की खैरियत लेता रहता हूँ। जहाँ तक सम्भव हुआ है, सबकी मदद की है। मुझे जानने वाला एक व्यक्ति भी ऊपर मेरे बयानों से असहमति नहीं जता सकता यह संस्कार मैंने अपने निर्माताओं से पाया है। कृतज्ञताज्ञापन बहुत छोटा शब्द है लेकिन ऐसा न करना बहुत बड़ी कृतघ्नता होगी। मुझे मेरे परिवेश ने बनाया है। सबसे पहले मैं अपने बाबूजी को याद करूँगा।
वे मेरे सच्चे दुश्मन थे। पिता से बड़ा कोई ईमानदार दुश्मन नहीं होता। माँ का कर्ज तो कभी चुकता ही नहीं। हकीकत है कि दुनिया में मुझे माँ जैसी कोई दूसरी औरत कहीं दिखी ही नहीं। मेरे शिक्षक जो गोविन्द से भी बड़े हैं उन्होंने हमेशा मेरा मार्गदर्शन किया है। मेरे दोनों छोटे भाई और छोटी बहनें। इनके बारे में क्या कहूँ ? कि घर में सबसे बड़ा होकर भी मैं इन सबसे डरता हूं। डरता हूँ, क्योंकि मैं ऐबी हूँ और मेरे भाई-बहन उनसभी ऐबों से दूर जिनके मैं करीब हूँ। असल में मैं इन सबसे नहीं डरता। इनकी मोहब्बतों से डरता हूँ। जब मैं अवकाश में भारत पहुँचता हूँ तो मिलते ही ममता कहती है कि भइया रात को पीकर मत आना। मत आना का मतलब न आने से नहीं है। उसे डर लगता है कि मैं कहीं पीकर ड्रॉइव करते हुए दुर्घटना का शिकार न हो जाऊँ। भाई कहता है कि कहीं किसी स्टेज से कुछ बोलोगे नहीं। उसे मालूम है कि मेरे विचार बहुत उल्टे-सीधे हैं। सबसे छोटी अनीता कुछ नहीं कहती लेकिन उसके कुछ न करने में ही बहुत कुछ कहा हुआ रहता है। उसे मैं समझता हूँ। इतना प्यार ठीक नहीं। मगर इतना प्यार मुझे मिला है।
बहुत प्यार पाया है। बहुत प्यार खोया है। शहर का कर्ज़ तो मैं उसी तरह नहीं उतार सकता जैसे माँ का, जैसे गाँव का। मेरा शहर मेरी बुनियाद के न दिखने वाले महत्त्वपूर्ण पायों में से एक है। इसी शहर में मैंने प्रेम को महसूसा। इसी प्रेम ने मेरी जिन्दगी बदल दी। सहज प्रेम ने मेरा सर्वस्व बदल दिया। मेरी निर्मित में सर्वश्री राव और श्यामनंदन वर्मा का स्थान महत्वपूर्ण है। निस्संदेह श्रीमती वर्मा यानी कि भाभीजी का खामोश योगदान भूल पाना असम्भव है। कैसे भूल सकता हूँ कि डॉ. रमेश शर्मा और डॉ. राम जन्म राम खर्मा के सुझाव जो लेखन के रास्तों का पता दे सके। और अन्त में अपनी पत्नी और बेटों के उस धैर्य के प्रति हृदय से विनम्र हूँ जिनके अनिर्वचनीय सहयोग ने मुझे रचनात्मक होने दिया।
गाँव, घर और अपनों को भुला पाना बहुत कठिन ही नहीं असम्भव होता है। सब याद आते हैं। असल में रचनाकारों के जीने के यही सहारे हैं। इनके बिना जीवन की भारी साँसें ले पाना आसान नहीं है। मैं बचकर लेखन नहीं करना चाहता। लिखकर जीना चाहता हूँ। मरना तो एक दिन सबको है। लेकिन समय से पहले की मौत मुझे स्वीकार नहीं।
मैं आपकी प्रतिक्रिया का आभारी रहूँगा। शायद वही मेरा उत्साह बढ़ाए कि मैं इसका अगला भाग शीघ्र ही आपको सौंप सकूँ।
सिक्किम की नौकरी मैंने एक झटके में छोड़ दी थी। बिना आगा-पीछा सोचे। इससे पहले भी मैंने ऐसा कई बार किया था। कई नौकरियाँ तो मेरे हिसाबसे बहुत छोटी भी थीं। पर, दो-तीन नौकरियाँ तो सचमुच न केवल ठीक-ठाक बल्कि बहुत ठीक थीं। लेकिन तब बात और थी। मैं अविवाहित था और ऐसे खतरे उठा सकता था। मगर एक बच्चे का बाप अचानक ऐसा निर्णय लेना यह नियात अव्यावहारिक थी। खैर - जो मुझे करना था वह कर चुका था और मैं अब यह भी कह सकता हूँ कि एक बच्चे का या कई बच्चे का बाप होना व्यक्ति के चरित्र को नहीं बदल सकता। निर्णय लेने के क्षण कुछ ही होते हैं।
इस्तीफा देने के बाद ही मेरे निकटतम मित्र जान सके थे कि मैंने नौकरी छोड़ दी। वे सब भी सकते की हालत में थे। ऐसा होना स्वाभाविक भी था क्योंकि बीस मिनट पहले मैंने उन सबके साथ स्कूल के अटेंण्डेंस रजिस्टर पर इनकमिंग कॉलम में हस्ताक्षर किए थे तो इस्तीफा देने की बात तक मन में नहीं थी।
ज़ाहिर है कि जो कुछ हुआ वह तत्कालीन प्रधानाचार्य की बदतमीजी को न सह पाने की प्रतिक्रिया में हुआ था। मैंने उनकी मेज़ से ही क़ाग़ज लेकर उन्हीं के सामने इस्तीफा लिखा और उनके मुँह पर दे मारा था जबकि उन्हें इसकी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने मुझे टार्चर करने के लिए एक नुस्खे को आजमाना चाहा था जो उनके ही गले पड़ गया। मैंने अपना इस्तीफा देते हुए उनसे कहा - "अब मैं आपके अधीन काम नहीं करूँगा।" और उनके चेम्बर से बाहर निकल आया और अपने फ्लैट पर जाने के लिए चल पड़ा। उन दिनों मैं स्कूल के ही अलॉट किए फ्लैट में रहता था जो तिब्बत रोड पर था मैं अपनी गति से स्कूल गेट की ओर चला जा रहा था और वह घबराएँ हुए मेरे पीछे थे कि इस तरह बिना एक महीने की नोटिस दिए मैं नौकरी नहीं छोड़ सकता। उनकी पीछा करती आवाज़ का मुझ पर कोई असर नहीं था।
अगर आपके पास पूर्ण रचना है तो कृपया gadyakosh@gmail.com पर भेजें।
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।पंक्ति तीन: ।पंक्ति तीन: 'सागर के इस पार से, उस पार से' की रूपरेखा कानपुर स्थित अमर उजाला अखबार में संपादक और कवि वीरेन डंगवाल के ऑफिस में उपजी थी। मैं उनसे जब पहली बार मिला तो यह जानकर अच्छा लगा कि वे मुझे नाम से जानते हैं और उन्होंने मेरी कहानियाँ पढ़ी हैं। पहली मुलाकात में ही उन्होंने आग्रह के साथ कहा कि आप हमारे लिए भी लिखिए। मैंने उन्हें बताया कि अखबारों में मैं केवल 'दैनिक जागरण' के लिए ही लिखता हूँ। हालाँकि कभी 'आज' में लगभग दो साल तक नियमित काम भी किया। यह सही है कि मैंने ऐसी कोई कसम नहीं खाई थी कि मैं केवल जागरण मे ही लिखूँगा। एक अच्छे सम्पादक की विशेषता ही यही है कि वह लेखक से रचना प्राप्त कर ले। इस मामले में मुझे डॉ. जयनारायण, प्रभाकर श्रोत्रिय जी और दैनिक जागरण के श्री राजेन्द्र दुबे बहुत सजग और सफल संपादक नज़र आते हैं। श्री दुबे तो इतना दबाव बढ़ा देता हैं कि रचना दिए बिना राहत नहीं मिलती। उन्होंने मुझसे सचमुच एक ऐसा काम करवा लिया कि अगर उनका दबाव न होता तो शायद मैं उसे न करता। यह उनका आदेशमूलक सस्नेह आग्रह ही है कि मैं उन्हें एक के बाद एक ऐसी कहानियाँ दे रहा हूँ जिसमें केन्द्रीय पात्र यूँ तो बच्चा है मगर समाज और वातावरण भी उसी प्रमुखता से उभरा है। श्री डंगवाल को फिलहाल तो मैंने उस दौरान लिखे कुछ व्यंग्य लेख दिए और फिर अगर कई मुलाकातों में यह यह हुआ कि खाड़ी में रहनेवाले एशियाई मूल के लोगों के बारे में धारावाहिक स्तम्भ की शुरुआत करूँ। बात तो हो गई थी और मेरे पास लिखने के लिए भरपूर सामग्री भी थी मगर मेरी दिक्कत यह थी कि छुट्टियों से वापस आने के बाद डंगवालजी से संपर्क मुझे ही करना होता था। वह भी फोन पर। कभी बात हो पाती और कभी नहीं। उन्होंने मेरे कई लेख छापे मगर न तो उनकी सूचना दी और न ही अपने कार्यालय में किसी को यह ज़िम्मेदारी कि प्रकाशित रचनाओं की कटिंग मुझे भेजे। इस मामले में बहुत से संपादक संवेदना शून्य हैं। मुझे 'अमर उजाला' में प्रकाशित अपने लेखों के बारे में हमेशा दूसरों से पता चला। 'अमर उजाला' में प्रकाशित किसी भी रचना को मैंने नहीं देखा है। एक कविता कवि मान बहादुर सिंह पर भी प्रकाशित हुई थी। उसकी पाण्डुलिपि भी मेरे पास नहीं है। जब अगली बार अपनी छु्टियों में कानपुर गया तो पता चला कि वीरेन डंगवाल बरेली चले गए। वे बरेली से ही आए भी थे। मुहावरा भी तो हैं उल्टे बाँस बरेली को। 'अमर उजाला' के दफ्तर में भी कई बार गया लेकिन मुझे अपनी प्रकाशित रचनाओं की कटिंग नहीं मिली। पैसा या पारिश्रमिक तो ख़ैर मिलना ही नहीं था। मुझे 'पेमेण्ट' करने से पहले सम्पादक यह सोच लेते हैं कि जो लेखक खाड़ी के देश में रह रहा है उसे क्यों पैसा देना। पत्रिका या अखबार तक वे इसलिए नहीं भेजते कि डाक खर्च बहुत आता है। यह हाल तथा कथित बड़ी पत्रिकाओं का है। हिन्दी की दशा दयनीय नहीं है। उसे दयनीय बनाने वाले बड़े सम्पादक हैं। पूँजीपतियों को खुश करने की उनकी कोशिश में हिन्दी का लेखक भले ही सपरिवार मिट जाए इसकी चिन्ता उन्हें नहीं है जो बड़े प्रतिष्ठानों में काम करते हुए स्वयं तो मोटी-मोटी सभी सुविधाओं का लाभ उठाते हैं मगर जिनके लिखने के बल पर अडीशन निकलता है वे अगर मर भी जाएँ तो क्या फर्क पड़ता है ? दूसरे मरने वाले फिर मिल जाएँगे। इस मामले में लघु पत्रिकाएँ निकालने वाले फिर भी अपनी सीमाओं में ईमानदारी बरत रहे हैं। लेकिन ईमानदारी बरतने वालों की संख्या बहुत कम है। बहरहाल, जो भी हुआ वह इस कृति का निमित्त तो हुआ ही। वीरेन डंगवाल को मैं पढ़ता हूँ। वे भी मुझे पढ़ते होंगे। क्योंकि छपता तो मैं भी हूँ। उनका आभारी हूँ कि यह कृति आकार ले सकी। इस प्रोजेक्ट पर काम करने के बारे में जब मैंने गम्भीरता से सोचा तो मुझे लगा कि एक ऐसी दुनिया जिससे मैं पूरी तरह अपरिचित था और मेरी तरह ही बहुत से लोग अनजान हैं, साथ ही जिस दुनिया के बारे में बड़ी अजीब धारणाएँ फैली हैं, क्यों न उसे ही अपने लिखने की विषय वस्तु बनाया जाए अबूधाबी में पहुँचने पर पहले दिन ही एक मलयालम फिल्म 'अकरे' देखने का मौका मिला था। इससे पूर्व केवल एक मलयालम फिल्म सन् छिहत्तर-सतहत्तर में देखी थी जो 'मन का आँगन' शीर्षक से हिन्दी में डब की गई थी। वह फिल्म एक नई थीम 'पुरुष नपुंसकता' को लेकर बनी थी मगर प्रचारित और विज्ञापित कुछ इस प्रकार हुई थी कि 'सेक्सी' फिल्म का दर्ज़ा पा गई थी। युवक-युवतियों में फिल्म को लेकर बहुत क्रेज था। मैंने भी वह फिल्म देखी थी, फिल्म पसन्द आई थी। एक ऐसे विषय पर फिल्म थी जिसकी चर्चा कोने-अतरे में भी काम करने में लोग हिचकते थे। आज भी हिचकते हैं। 'मन का आँगन' के बाद तो कुछ समय के लिए मलयालम फिल्मों की हिन्दी डबिंग का सिलसिला चल निकला और उत्तर भारत में यह मान लिया गया कि दक्षिण भारत की औरते केवल ब्लाउज और पेटीकोट में ही रहती हैं और साउथ की फिल्में ब्लू फिल्मों से ज्यादा सेक्सी हैं। लेकिन यह सब कुछ बहुत दिन नहीं चला। खैर बात 'अकरे' की हो रही है तो इस शीर्षक का अर्थ है कि उस पार की घास ज़्यादा हरी दिखती है। जबर दस्त फिल्म थी। इस फिल्म ने चमक-दमक वाले संसार से मेरा मोह भंग पहले दिन ही कर दिया, मगर ! भाग्य प्रारब्ध कुछ तो होता होगा कि उन्नीस वर्ष यहाँ निकल गए। जब इस विषय पर लिखना शुरू किया तो सबसे उपयुक्त शीर्षक 'अकरे' ही लगा। इसके कुछ भाग लखनऊ से प्रकाशित होने वाले 'जनसत्ता' ने छापे और कुछ वहीं से प्रकाशित होने वाली पत्रिका 'शब्दसत्ता' ने। यह सब सुशील सिद्धार्थ ने किया। इसकी कुछ किश्तें प्रकाशित हो चुकी थीं। जब मैं अपनी अगली छुट्टियों में लखनऊ गया तो 'जनसत्ता' कार्यालय में प्रतिभा कटियार ने कहा कि आपका स्तम्भ 'अकरे' बहुत प्यारा है। जनसत्ता में इसके कुछ ही अंश प्रकाशित हो सकते थे कि सुशील सिद्धार्थ वहाँ से निकल गए और इसका प्रकाशन स्थगित हो गय। प्रकाशन क्या, इसे लिखना ही स्थगित हो गया। धारावाहिकों के साथ ऐसा प्रायः होता है कि अगर लिखवाने वाला अपनी सीट से गया तो उसके प्रोजेक्ट भी गायब हो जाते हैं। दूसरों को उसमें कुछ गंध आती है। जब 'अकरे' का मामला स्थगित हो गया तो वह सीरीज ही टूट गई और उस पर सोचना भी। कई साल बाद अचानक इण्टरनेट पर प्रकाशित बहुचर्चित पत्रिका की सम्पादिका श्रीमती पूर्णिमा वर्मन से टेलीफोन पर परिचय हुआ और उन्होंने जिए हुए को एक नए एंगल से देखने का सुझाव दिया। उसी का फल है 'सागर के पार से, उस पार से'। यह मेरी आत्मकथा नहीं है। मुझ जैसों की कथा है। वैसे भी आत्मकथा में 'आत्म' जैसा कुछ नहीं होता। उसमें भी दूसरे ही शामिल होते हैं। और अगर इसे आत्मकथा ही माना जाए तो यह बताना मेरा दायित्व हो जाता है कि यह उसका दूसरा भाग है। यह भी क्या बात हुई कि अगर आत्मकथा लिखी जाए तो उसकी शुरुआत मध्य से हो। मैं शब्दों का सहारा लेकर अपने लिए दया का कोई माहौल बनाना नहीं चाहता। बीस साल से गल्फ़ में हूँ। एयर कंडीशंड कमरे में रहता हूँ। नई निसान कार का ओनर हूँ। अच्छे से अच्छे काग़ज़ पर बहुत मँहगे पेन से लिखता हूँ। कुरियर सर्विस से रचना भेजता हूँ। हमेशा अपनी ओत से फोने करके दोस्तो-दुश्मनों की खैरियत लेता रहता हूँ। जहाँ तक सम्भव हुआ है, सबकी मदद की है। मुझे जानने वाला एक व्यक्ति भी ऊपर मेरे बयानों से असहमति नहीं जता सकता यह संस्कार मैंने अपने निर्माताओं से पाया है। कृतज्ञताज्ञापन बहुत छोटा शब्द है लेकिन ऐसा न करना बहुत बड़ी कृतघ्नता होगी। मुझे मेरे परिवेश ने बनाया है। सबसे पहले मैं अपने बाबूजी को याद करूँगा। वे मेरे सच्चे दुश्मन थे। पिता से बड़ा कोई ईमानदार दुश्मन नहीं होता। माँ का कर्ज तो कभी चुकता ही नहीं। हकीकत है कि दुनिया में मुझे माँ जैसी कोई दूसरी औरत कहीं दिखी ही नहीं। मेरे शिक्षक जो गोविन्द से भी बड़े हैं उन्होंने हमेशा मेरा मार्गदर्शन किया है। मेरे दोनों छोटे भाई और छोटी बहनें। इनके बारे में क्या कहूँ ? कि घर में सबसे बड़ा होकर भी मैं इन सबसे डरता हूं। डरता हूँ, क्योंकि मैं ऐबी हूँ और मेरे भाई-बहन उनसभी ऐबों से दूर जिनके मैं करीब हूँ। असल में मैं इन सबसे नहीं डरता। इनकी मोहब्बतों से डरता हूँ। जब मैं अवकाश में भारत पहुँचता हूँ तो मिलते ही ममता कहती है कि भइया रात को पीकर मत आना। मत आना का मतलब न आने से नहीं है। उसे डर लगता है कि मैं कहीं पीकर ड्रॉइव करते हुए दुर्घटना का शिकार न हो जाऊँ। भाई कहता है कि कहीं किसी स्टेज से कुछ बोलोगे नहीं। उसे मालूम है कि मेरे विचार बहुत उल्टे-सीधे हैं। सबसे छोटी अनीता कुछ नहीं कहती लेकिन उसके कुछ न करने में ही बहुत कुछ कहा हुआ रहता है। उसे मैं समझता हूँ। इतना प्यार ठीक नहीं। मगर इतना प्यार मुझे मिला है। बहुत प्यार पाया है। बहुत प्यार खोया है। शहर का कर्ज़ तो मैं उसी तरह नहीं उतार सकता जैसे माँ का, जैसे गाँव का। मेरा शहर मेरी बुनियाद के न दिखने वाले महत्त्वपूर्ण पायों में से एक है। इसी शहर में मैंने प्रेम को महसूसा। इसी प्रेम ने मेरी जिन्दगी बदल दी। सहज प्रेम ने मेरा सर्वस्व बदल दिया। मेरी निर्मित में सर्वश्री राव और श्यामनंदन वर्मा का स्थान महत्वपूर्ण है। निस्संदेह श्रीमती वर्मा यानी कि भाभीजी का खामोश योगदान भूल पाना असम्भव है। कैसे भूल सकता हूँ कि डॉ. रमेश शर्मा और डॉ. राम जन्म राम खर्मा के सुझाव जो लेखन के रास्तों का पता दे सके। और अन्त में अपनी पत्नी और बेटों के उस धैर्य के प्रति हृदय से विनम्र हूँ जिनके अनिर्वचनीय सहयोग ने मुझे रचनात्मक होने दिया। गाँव, घर और अपनों को भुला पाना बहुत कठिन ही नहीं असम्भव होता है। सब याद आते हैं। असल में रचनाकारों के जीने के यही सहारे हैं। इनके बिना जीवन की भारी साँसें ले पाना आसान नहीं है। मैं बचकर लेखन नहीं करना चाहता। लिखकर जीना चाहता हूँ। मरना तो एक दिन सबको है। लेकिन समय से पहले की मौत मुझे स्वीकार नहीं। मैं आपकी प्रतिक्रिया का आभारी रहूँगा। शायद वही मेरा उत्साह बढ़ाए कि मैं इसका अगला भाग शीघ्र ही आपको सौंप सकूँ। सिक्किम की नौकरी मैंने एक झटके में छोड़ दी थी। बिना आगा-पीछा सोचे। इससे पहले भी मैंने ऐसा कई बार किया था। कई नौकरियाँ तो मेरे हिसाबसे बहुत छोटी भी थीं। पर, दो-तीन नौकरियाँ तो सचमुच न केवल ठीक-ठाक बल्कि बहुत ठीक थीं। लेकिन तब बात और थी। मैं अविवाहित था और ऐसे खतरे उठा सकता था। मगर एक बच्चे का बाप अचानक ऐसा निर्णय लेना यह नियात अव्यावहारिक थी। खैर - जो मुझे करना था वह कर चुका था और मैं अब यह भी कह सकता हूँ कि एक बच्चे का या कई बच्चे का बाप होना व्यक्ति के चरित्र को नहीं बदल सकता। निर्णय लेने के क्षण कुछ ही होते हैं। इस्तीफा देने के बाद ही मेरे निकटतम मित्र जान सके थे कि मैंने नौकरी छोड़ दी। वे सब भी सकते की हालत में थे। ऐसा होना स्वाभाविक भी था क्योंकि बीस मिनट पहले मैंने उन सबके साथ स्कूल के अटेंण्डेंस रजिस्टर पर इनकमिंग कॉलम में हस्ताक्षर किए थे तो इस्तीफा देने की बात तक मन में नहीं थी। ज़ाहिर है कि जो कुछ हुआ वह तत्कालीन प्रधानाचार्य की बदतमीजी को न सह पाने की प्रतिक्रिया में हुआ था। मैंने उनकी मेज़ से ही क़ाग़ज लेकर उन्हीं के सामने इस्तीफा लिखा और उनके मुँह पर दे मारा था जबकि उन्हें इसकी उम्मीद नहीं थी। उन्होंने मुझे टार्चर करने के लिए एक नुस्खे को आजमाना चाहा था जो उनके ही गले पड़ गया। मैंने अपना इस्तीफा देते हुए उनसे कहा - "अब मैं आपके अधीन काम नहीं करूँगा।" और उनके चेम्बर से बाहर निकल आया और अपने फ्लैट पर जाने के लिए चल पड़ा। उन दिनों मैं स्कूल के ही अलॉट किए फ्लैट में रहता था जो तिब्बत रोड पर था मैं अपनी गति से स्कूल गेट की ओर चला जा रहा था और वह घबराएँ हुए मेरे पीछे थे कि इस तरह बिना एक महीने की नोटिस दिए मैं नौकरी नहीं छोड़ सकता। उनकी पीछा करती आवाज़ का मुझ पर कोई असर नहीं था। अगर आपके पास पूर्ण रचना है तो कृपया gadyakosh@gmail.com पर भेजें।
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क्राइम वेब सीरीज 'मिर्जापुर 2' लोगों के जहन में छाई रही। इस क्राइम सीरीज़-2 में महिलाओं का जोरम-जोर ज्यादा दिखा है। ऐसे में मिर्जापुर की पहली सीरीज की अपेक्षा मिर्जापुर -2 में पुरूष अभिनेताओं का दबदबा महिलाओं से कुछ कम रहा।
नई दिल्ली। बीते दिनों अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई क्राइम वेब सीरीज 'मिर्जापुर 2' लोगों के जहन में छाई रही। इस क्राइम सीरीज़-2 में महिलाओं का जोरम-जोर ज्यादा दिखा है। ऐसे में मिर्जापुर की पहली सीरीज की अपेक्षा मिर्जापुर -2 में पुरूष अभिनेताओं का दबदबा महिलाओं से कुछ कम रहा। क्योंकि सीरीज के पहले पार्ट में महिलाओं को डरा सहमा हुआ दिखाया गया था, लेकिन दूसरे पार्ट में 'मिर्जापुर 2' में महिलाओं ने अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों पर अपने तरीकों से आवाज़ उठाते हुए दिखाया गया है। ऐसे में चाहें वो गोलू गुप्ता हों या फिर कालीन भइया की पत्नी बीना ही क्यों न हों और या उनकी नौकरानी राधा।
इस सीजन आई 'मिर्जापुर 2' में महिला किरदारों को काफी ज्यादा पसंद किया गया है। अब वैसे तो 'मिर्जापुर 2' की लगभग हर एक्ट्रेस को आप पहचानते होंगे, आज हम आपको उस एक्ट्रेस के बारे में बताते हैं जिनके बारे में आप शायद ही जानते होंगे।
जीं क्या आपने 'मिर्जापुर' में कालीन भइया की नौकरानी राधा पर गौर फरमाया है? हां उसी नौकरानी की बात कर रहे है, जो पूरी सीरीज़ में डरकर रहती है। वहीं नौकरानी जिसका मुन्ना त्रिपाठी और सत्यानंद त्रिपाठी शोषण करते हैं और अंत में वो इस शोषण का बदला लेती है।
ऐसे में इस सीरीज़ में डरी सहमी दुबकी सी रहने वाली राधा जिसका असल जिंदगी में नाम प्रशंसा शर्मा वो अपने किरदार से बिल्कुल विपरीत है। प्रशंसा असल जिंदगी में काफी बोल्ड हैं। इनका इंस्टाग्राम एकाउंट देखेंगें तो उनकी बोल्डनेस देखकर एक बात तो पक्की है, कि कुछ हो चाहे न हो, लेकिन इनके देखकर आपकी आंखे खुली की खुली जरूर रहने वाली हैं।
झारखंड की रहने वाली प्रशंसा शर्मा ने देहरादून के वेलहम गार्ड स्कूल से पढ़ाई की है। फिर इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से दर्शनशास्त्र से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया है। इसके बाद प्रशंसा मुंबई आ गईं और यहां उन्होंने प्राग फिल्म स्कूल और ड्रामा स्कूल इन मुंबई में पढ़ाई की। अब प्रशंसा मुंबई में ही रह रही हैं। प्रशंसा को पहचान 'मिर्जापुर' से ही मिली है।
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क्राइम वेब सीरीज 'मिर्जापुर दो' लोगों के जहन में छाई रही। इस क्राइम सीरीज़-दो में महिलाओं का जोरम-जोर ज्यादा दिखा है। ऐसे में मिर्जापुर की पहली सीरीज की अपेक्षा मिर्जापुर -दो में पुरूष अभिनेताओं का दबदबा महिलाओं से कुछ कम रहा। नई दिल्ली। बीते दिनों अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई क्राइम वेब सीरीज 'मिर्जापुर दो' लोगों के जहन में छाई रही। इस क्राइम सीरीज़-दो में महिलाओं का जोरम-जोर ज्यादा दिखा है। ऐसे में मिर्जापुर की पहली सीरीज की अपेक्षा मिर्जापुर -दो में पुरूष अभिनेताओं का दबदबा महिलाओं से कुछ कम रहा। क्योंकि सीरीज के पहले पार्ट में महिलाओं को डरा सहमा हुआ दिखाया गया था, लेकिन दूसरे पार्ट में 'मिर्जापुर दो' में महिलाओं ने अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों पर अपने तरीकों से आवाज़ उठाते हुए दिखाया गया है। ऐसे में चाहें वो गोलू गुप्ता हों या फिर कालीन भइया की पत्नी बीना ही क्यों न हों और या उनकी नौकरानी राधा। इस सीजन आई 'मिर्जापुर दो' में महिला किरदारों को काफी ज्यादा पसंद किया गया है। अब वैसे तो 'मिर्जापुर दो' की लगभग हर एक्ट्रेस को आप पहचानते होंगे, आज हम आपको उस एक्ट्रेस के बारे में बताते हैं जिनके बारे में आप शायद ही जानते होंगे। जीं क्या आपने 'मिर्जापुर' में कालीन भइया की नौकरानी राधा पर गौर फरमाया है? हां उसी नौकरानी की बात कर रहे है, जो पूरी सीरीज़ में डरकर रहती है। वहीं नौकरानी जिसका मुन्ना त्रिपाठी और सत्यानंद त्रिपाठी शोषण करते हैं और अंत में वो इस शोषण का बदला लेती है। ऐसे में इस सीरीज़ में डरी सहमी दुबकी सी रहने वाली राधा जिसका असल जिंदगी में नाम प्रशंसा शर्मा वो अपने किरदार से बिल्कुल विपरीत है। प्रशंसा असल जिंदगी में काफी बोल्ड हैं। इनका इंस्टाग्राम एकाउंट देखेंगें तो उनकी बोल्डनेस देखकर एक बात तो पक्की है, कि कुछ हो चाहे न हो, लेकिन इनके देखकर आपकी आंखे खुली की खुली जरूर रहने वाली हैं। झारखंड की रहने वाली प्रशंसा शर्मा ने देहरादून के वेलहम गार्ड स्कूल से पढ़ाई की है। फिर इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से दर्शनशास्त्र से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया है। इसके बाद प्रशंसा मुंबई आ गईं और यहां उन्होंने प्राग फिल्म स्कूल और ड्रामा स्कूल इन मुंबई में पढ़ाई की। अब प्रशंसा मुंबई में ही रह रही हैं। प्रशंसा को पहचान 'मिर्जापुर' से ही मिली है।
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ।
फिलिप बर्न-जोन्स द्वारा पिशाच, 1897 पिशाच कल्पित प्राणी है जो जीवित प्राणियों के जीवन-सार खाकर जीवित रहते हैं आमतौर पर उनका खून पीकर. कोरोनरी धमनियों के साथ मानव हृदय. हृदय या हिया या दिल एक पेशीय (muscular) अंग है, जो सभी कशेरुकी (vertebrate) जीवों में आवृत ताल बद्ध संकुचन के द्वारा रक्त का प्रवाह शरीर के सभी भागो तक पहुचाता है। कशेरुकियों का ह्रदय हृद पेशी (cardiac muscle) से बना होता है, जो एक अनैच्छिक पेशी (involuntary muscle) ऊतक है, जो केवल ह्रदय अंग में ही पाया जाता है। औसतन मानव ह्रदय एक मिनट में ७२ बार धड़कता है, जो (लगभग ६६वर्ष) एक जीवन काल में २.५ बिलियन बार धड़कता है। इसका भार औसतन महिलाओं में २५० से ३०० ग्राम और पुरुषों में ३०० से ३५० ग्राम होता है। .
पिशाच और हृदय आम में एक बात है (यूनियनपीडिया में): यकृत।
यकृत की स्थिति (4) यकृत या जिगर या कलेजा (Liver) शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है, जो पित्त (Bile) का निर्माण करती है। पित्त, यकृती वाहिनी उपतंत्र (Hepatic duct system) तथा पित्तवाहिनी (Bile duct) द्वारा ग्रहणी (Duodenum), तथा पित्ताशय (Gall bladder) में चला जाता है। पाचन क्षेत्र में अवशोषित आंत्ररस के उपापचय (metabolism) का यह मुख्य स्थान है। .
पिशाच 79 संबंध है और हृदय 31 है। वे आम 1 में है, समानता सूचकांक 0.91% है = 1 / (79 + 31)।
यह लेख पिशाच और हृदय के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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शॉर्टकटः मतभेद, समानता, समानता गुणांक, संदर्भ। फिलिप बर्न-जोन्स द्वारा पिशाच, एक हज़ार आठ सौ सत्तानवे पिशाच कल्पित प्राणी है जो जीवित प्राणियों के जीवन-सार खाकर जीवित रहते हैं आमतौर पर उनका खून पीकर. कोरोनरी धमनियों के साथ मानव हृदय. हृदय या हिया या दिल एक पेशीय अंग है, जो सभी कशेरुकी जीवों में आवृत ताल बद्ध संकुचन के द्वारा रक्त का प्रवाह शरीर के सभी भागो तक पहुचाता है। कशेरुकियों का ह्रदय हृद पेशी से बना होता है, जो एक अनैच्छिक पेशी ऊतक है, जो केवल ह्रदय अंग में ही पाया जाता है। औसतन मानव ह्रदय एक मिनट में बहत्तर बार धड़कता है, जो एक जीवन काल में दो.पाँच बिलियन बार धड़कता है। इसका भार औसतन महिलाओं में दो सौ पचास से तीन सौ ग्राम और पुरुषों में तीन सौ से तीन सौ पचास ग्राम होता है। . पिशाच और हृदय आम में एक बात है : यकृत। यकृत की स्थिति यकृत या जिगर या कलेजा शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है, जो पित्त का निर्माण करती है। पित्त, यकृती वाहिनी उपतंत्र तथा पित्तवाहिनी द्वारा ग्रहणी , तथा पित्ताशय में चला जाता है। पाचन क्षेत्र में अवशोषित आंत्ररस के उपापचय का यह मुख्य स्थान है। . पिशाच उन्यासी संबंध है और हृदय इकतीस है। वे आम एक में है, समानता सूचकांक शून्य.इक्यानवे% है = एक / । यह लेख पिशाच और हृदय के बीच संबंध को दर्शाता है। जानकारी निकाला गया था, जिसमें से एक लेख का उपयोग करने के लिए, कृपया देखेंः
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योग से रासायनिक वैभव स्पष्ट हो चुकी है । रासायनिक वैभव का नियति प्राण सूत्र - प्राण कोषा और प्राण कोषा से रचित रचनाएँ जैसे प्राणावस्था (वनस्पति संसार) जीवावस्था तथा मानव शरीर ही है । मानव ही सभी प्रकार की शरीर रचनाओ का अध्ययन करने में निष्णात होना चाहता है । यह मानव की सहज प्रवृति है । मानव शोध, अनुसंधान, प्रयोग पूर्वक परम्परा में प्रमाणों को समाहित करने का इच्छुक होना पाया गया है । इस क्रम में अभी तक किये गये वैज्ञानिक तथ्यों मे सार उपलब्धि जो मानव के हाथ लगी है वह दूरदर्शन, दूर-श्रवण,दूर-गमन है । इन सबका सकारात्मक भाग समाज गति के लिए उपयोग करना मानव परम्परा की गरिमा है । मानव इन अद्भूत उपलब्धियों को नकारात्मक पक्ष में जो उपयोग प्रयोग किया है वह सामरिक तंत्र ही है । सामरिकता के जितने भी यंत्र-उपकरण बने सब मानव की बर्बादी का द्योतक है । यही आजादी का रास्ता अभी तक हुआ नहीं है । परिपूर्ण होने के लिए सहअस्तित्व ज्ञान विज्ञान, विवेक परम आवश्यक है । इन सबका विधिवत अध्ययन करने के लिए मध्यस्थ दर्शन सहअस्तित्व वाद प्रस्तुत हुआ है । इस नजरिया से परस्परता में संवाद सुलभ होने के लिए यह व्यवहारात्मक जनवाद प्रस्तुत हुआ है ।
संवाद मानव परम्परा में एक सहज कार्य है । इसमें कहीं न
कहीं सर्वशुभ की कामना समायी रहती है । सर्व शुभ घटनाएँ घटित होने के उपरांत मानव परम्परा स्वयं शुभ परम्परा के रूप में प्रमाणित होने की सम्भावना बनी ही है । मानव में चाहत भी बनी है । चाहत और सम्भावना का संयोग योग बिन्दु में ही शुभ परम्परा का उद्गम है । इसका प्रमाण रूप चेतना विकास मूल्य शिक्षा - संस्कार में मानव की पहचान, मानव की पहचान का मतलब मानवीय शिक्षा, मानवीय व्यवस्था, मानवीय संविधान और मानवीयता पूर्ण आचरण को बोधगम्य कराना ही है । इस क्रम में मूल सूत्र "त्व सहित व्यवस्था एवं समग्र व्यवस्था में भागीदारी" ही है । मानवत्व अपने में जागृति के रूप में सुस्पष्ट है। जागृति अपने में समझदारी का स्वरूप होना स्पष्ट हो चुकी है । समझदारी अपने आप में सहअस्तित्व रूपी अस्तित्व होना स्पष्ट हुआ । इसी क्रम में अर्थात जागृति क्रम मे मानव परम्परा का वैभव, मानवत्व सहित महिमा, परिवार में प्रमाणित होना समग्र व्यवस्था में भागीदारी का प्रमाण, विश्व परिवार व्यवस्था तक सोपानीय क्रम मे प्रमाणित होना है । इसी विधि से मानव संबंध और प्राकृतिक संबंध संतुलन होना पाया
जाता है । नियति विरोधी, प्रकृति विरोधी, मानव विरोधी गति विधियो से मुक्ति पाने का उपाय भी यही है । हर मानव विरोधो से मुक्ति पाना चाहता ही है । इसी तथ्यवश इसकी संभावना सुस्पष्ट
सभी को भागीदार होने की आशा अपेक्षा और कर्तव्य है । इसी आशय को सार्थक संवाद में, अवगाहन में लाने का यह प्रयास है ।
अखंडता और सार्वभौमता के वर्चस्व का धारक वाहक केवल मानव ही है। ऐसी अखंडता और सार्वभौमता की पहचान के पूर्व जानने मानने के अर्थ को स्पष्ट कर लें । मानव में ही जानने, मानने, पहचानने, निर्वाह करने की क्रियाकलाप परम्परा में स्पष्ट हो जाती है या प्रमाणित हो जाती है । जाने बिना मानना रूढ़िवादिता के रूप में स्पष्ट है । जानते हुए नहीं मानना एक अन्तर्विरोध अथवा का स्वरूप होना पाया गया है । इसलिए यह समझ में आता है जानना, मानना मानव-परम्परा में, से, के लिए एक अनिवार्य क्रिया है । जानना मानना ही प्रमाण का आधार बनता है । प्रमाण क्रियान्वयन होने की स्थिति में पहचानना, निर्वाह करना भी होता है । प्रमाण किसके साथ प्रस्तुत होना है इस का पहचान होना आवश्यक है । इस विधि से सर्वमानव मानव के साथ ही जानने मानने का प्रमाण प्रस्तुत करता है । यह प्रमाण समाधान, समृद्धि, अभय, सहअस्तित्व ही होता है जिसके फलस्वरुप में सुख, शान्ति,
सन्तोष, आनन्द होना पाया जाता है । अनुभव धारक ही वाहकता का स्रोत है। अनुभवमूलक विधि से ही अखंडता और सार्वभौमता का प्रमाण होना पाया जाता है । इसकी स्वीकृति अनुभव के पहले
से ही मानव में सर्वेक्षित हुई है । इसे प्रत्येक व्यक्ति कर भी सकते है । हर निश्चयन निरीक्षण, परीक्षण, सर्वेक्षण की सहज प्रक्रिया से ध्रुवीकृत होता है और निश्चित होता है । यह निश्चित बात है कि निश्चयता में ही मानव जीना चाहता है । अनिश्चयता मानव को स्वीकृत नहीं है । भ्रम की स्थिति में भी निश्चयता की अपेक्षा मानव में, से, के लिए निहित रहती ही है । निश्चयपूर्वक ही मानव धरती पर चल पाता है । हवा पर चलता है और पानी पर चलता है । इसी प्रकार अन्य गतियों मे भी निश्चयता की अपेक्षा बनी हुई है । निश्चयो के साथ ही जानने मानने का प्रयोजन प्रमाणित होता है । धरती पर चलने के पहले से ही धरती की स्थिरता धरती पर निहित मानव को ज्ञात रहती है । प्रयोग से सुदृढ़ होती जाती है । इसी प्रकार हवा पर, जल पर चलने के तरीकों को मानव अपना चुका है । हवा पर चलने के लिए हवा की सांद्रता को बढ़ाने और सांद्रता की अपेक्षा में यान गति को अधिक बनाए रखने के उपायों को मानव अपना चुका है । इन उपायो के साथ साथ मानव वायुयान तंत्र को सर्वसुलभ कर चुका है । प्रमाणित कर चुका है ।
इसी प्रकार जल सान्द्रता की अपेक्षा में जलयान गतियों की स्थिति को बनाए रखने के उपायों को मानव अपना चुका है । जल सान्द्रता पर तैरने का तरीका, वस्तु और आकार प्रकार विधियो मे पारंगत हो
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योग से रासायनिक वैभव स्पष्ट हो चुकी है । रासायनिक वैभव का नियति प्राण सूत्र - प्राण कोषा और प्राण कोषा से रचित रचनाएँ जैसे प्राणावस्था जीवावस्था तथा मानव शरीर ही है । मानव ही सभी प्रकार की शरीर रचनाओ का अध्ययन करने में निष्णात होना चाहता है । यह मानव की सहज प्रवृति है । मानव शोध, अनुसंधान, प्रयोग पूर्वक परम्परा में प्रमाणों को समाहित करने का इच्छुक होना पाया गया है । इस क्रम में अभी तक किये गये वैज्ञानिक तथ्यों मे सार उपलब्धि जो मानव के हाथ लगी है वह दूरदर्शन, दूर-श्रवण,दूर-गमन है । इन सबका सकारात्मक भाग समाज गति के लिए उपयोग करना मानव परम्परा की गरिमा है । मानव इन अद्भूत उपलब्धियों को नकारात्मक पक्ष में जो उपयोग प्रयोग किया है वह सामरिक तंत्र ही है । सामरिकता के जितने भी यंत्र-उपकरण बने सब मानव की बर्बादी का द्योतक है । यही आजादी का रास्ता अभी तक हुआ नहीं है । परिपूर्ण होने के लिए सहअस्तित्व ज्ञान विज्ञान, विवेक परम आवश्यक है । इन सबका विधिवत अध्ययन करने के लिए मध्यस्थ दर्शन सहअस्तित्व वाद प्रस्तुत हुआ है । इस नजरिया से परस्परता में संवाद सुलभ होने के लिए यह व्यवहारात्मक जनवाद प्रस्तुत हुआ है । संवाद मानव परम्परा में एक सहज कार्य है । इसमें कहीं न कहीं सर्वशुभ की कामना समायी रहती है । सर्व शुभ घटनाएँ घटित होने के उपरांत मानव परम्परा स्वयं शुभ परम्परा के रूप में प्रमाणित होने की सम्भावना बनी ही है । मानव में चाहत भी बनी है । चाहत और सम्भावना का संयोग योग बिन्दु में ही शुभ परम्परा का उद्गम है । इसका प्रमाण रूप चेतना विकास मूल्य शिक्षा - संस्कार में मानव की पहचान, मानव की पहचान का मतलब मानवीय शिक्षा, मानवीय व्यवस्था, मानवीय संविधान और मानवीयता पूर्ण आचरण को बोधगम्य कराना ही है । इस क्रम में मूल सूत्र "त्व सहित व्यवस्था एवं समग्र व्यवस्था में भागीदारी" ही है । मानवत्व अपने में जागृति के रूप में सुस्पष्ट है। जागृति अपने में समझदारी का स्वरूप होना स्पष्ट हो चुकी है । समझदारी अपने आप में सहअस्तित्व रूपी अस्तित्व होना स्पष्ट हुआ । इसी क्रम में अर्थात जागृति क्रम मे मानव परम्परा का वैभव, मानवत्व सहित महिमा, परिवार में प्रमाणित होना समग्र व्यवस्था में भागीदारी का प्रमाण, विश्व परिवार व्यवस्था तक सोपानीय क्रम मे प्रमाणित होना है । इसी विधि से मानव संबंध और प्राकृतिक संबंध संतुलन होना पाया जाता है । नियति विरोधी, प्रकृति विरोधी, मानव विरोधी गति विधियो से मुक्ति पाने का उपाय भी यही है । हर मानव विरोधो से मुक्ति पाना चाहता ही है । इसी तथ्यवश इसकी संभावना सुस्पष्ट सभी को भागीदार होने की आशा अपेक्षा और कर्तव्य है । इसी आशय को सार्थक संवाद में, अवगाहन में लाने का यह प्रयास है । अखंडता और सार्वभौमता के वर्चस्व का धारक वाहक केवल मानव ही है। ऐसी अखंडता और सार्वभौमता की पहचान के पूर्व जानने मानने के अर्थ को स्पष्ट कर लें । मानव में ही जानने, मानने, पहचानने, निर्वाह करने की क्रियाकलाप परम्परा में स्पष्ट हो जाती है या प्रमाणित हो जाती है । जाने बिना मानना रूढ़िवादिता के रूप में स्पष्ट है । जानते हुए नहीं मानना एक अन्तर्विरोध अथवा का स्वरूप होना पाया गया है । इसलिए यह समझ में आता है जानना, मानना मानव-परम्परा में, से, के लिए एक अनिवार्य क्रिया है । जानना मानना ही प्रमाण का आधार बनता है । प्रमाण क्रियान्वयन होने की स्थिति में पहचानना, निर्वाह करना भी होता है । प्रमाण किसके साथ प्रस्तुत होना है इस का पहचान होना आवश्यक है । इस विधि से सर्वमानव मानव के साथ ही जानने मानने का प्रमाण प्रस्तुत करता है । यह प्रमाण समाधान, समृद्धि, अभय, सहअस्तित्व ही होता है जिसके फलस्वरुप में सुख, शान्ति, सन्तोष, आनन्द होना पाया जाता है । अनुभव धारक ही वाहकता का स्रोत है। अनुभवमूलक विधि से ही अखंडता और सार्वभौमता का प्रमाण होना पाया जाता है । इसकी स्वीकृति अनुभव के पहले से ही मानव में सर्वेक्षित हुई है । इसे प्रत्येक व्यक्ति कर भी सकते है । हर निश्चयन निरीक्षण, परीक्षण, सर्वेक्षण की सहज प्रक्रिया से ध्रुवीकृत होता है और निश्चित होता है । यह निश्चित बात है कि निश्चयता में ही मानव जीना चाहता है । अनिश्चयता मानव को स्वीकृत नहीं है । भ्रम की स्थिति में भी निश्चयता की अपेक्षा मानव में, से, के लिए निहित रहती ही है । निश्चयपूर्वक ही मानव धरती पर चल पाता है । हवा पर चलता है और पानी पर चलता है । इसी प्रकार अन्य गतियों मे भी निश्चयता की अपेक्षा बनी हुई है । निश्चयो के साथ ही जानने मानने का प्रयोजन प्रमाणित होता है । धरती पर चलने के पहले से ही धरती की स्थिरता धरती पर निहित मानव को ज्ञात रहती है । प्रयोग से सुदृढ़ होती जाती है । इसी प्रकार हवा पर, जल पर चलने के तरीकों को मानव अपना चुका है । हवा पर चलने के लिए हवा की सांद्रता को बढ़ाने और सांद्रता की अपेक्षा में यान गति को अधिक बनाए रखने के उपायों को मानव अपना चुका है । इन उपायो के साथ साथ मानव वायुयान तंत्र को सर्वसुलभ कर चुका है । प्रमाणित कर चुका है । इसी प्रकार जल सान्द्रता की अपेक्षा में जलयान गतियों की स्थिति को बनाए रखने के उपायों को मानव अपना चुका है । जल सान्द्रता पर तैरने का तरीका, वस्तु और आकार प्रकार विधियो मे पारंगत हो
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इन दिनों लखनऊ में राज्यमंत्री विजय मिश्रा का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। जिसमें वो एक पुलिसवाले पर भड़कते दिख रहें हैं। ये पूरा मामला तब शुरू हुआ जब मंत्री जी को पुलिसवाले ने नो पार्किंग जोन पर गाड़ी पार्क करने से मना किया। इस पर मंत्री जी भड़क गए। इतना ही नहीं उन्होंने एसएसपी मंजिल सैनी से फोन पर बात की। मंत्री जी की इस दादागिरी के बावजूद अखिरकार पुलिस को ही माफी मांगनी पड़ी।
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इन दिनों लखनऊ में राज्यमंत्री विजय मिश्रा का एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है। जिसमें वो एक पुलिसवाले पर भड़कते दिख रहें हैं। ये पूरा मामला तब शुरू हुआ जब मंत्री जी को पुलिसवाले ने नो पार्किंग जोन पर गाड़ी पार्क करने से मना किया। इस पर मंत्री जी भड़क गए। इतना ही नहीं उन्होंने एसएसपी मंजिल सैनी से फोन पर बात की। मंत्री जी की इस दादागिरी के बावजूद अखिरकार पुलिस को ही माफी मांगनी पड़ी।
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नेपीता (म्यामां), एक फरवरी (एपी) म्यामां की सेना ने घोषणा की है कि वह सोमवार को घोषित एक साल के आपातकाल के बाद देश में नए सिरे से चुनाव कराएगी। म्यामां की सेना ने सोमवार को तख्तापलट के बाद देश की शीर्ष नेता आंग सान सू ची को कथित रूप से हिरासत में ले लिया है।
सेना के नियंत्रण वाले 'मयावाडी टीवी' पर यह घोषणा की गई। इससे पहले सैन्य नियंत्रण वाले इस टीवी चैनल पर कहा गया था कि राष्ट्रीय स्थिरता बाधित है इसलिये सभी सरकारी कामकाज सेना प्रमुख जनरल मिन आंग लाइंग को स्थानांतरित किये जाते हैं। यह कदम 2008 के संविधान के प्रावधान के तहत उठाया गया जिसे सैन्य शासन के दौरान जारी किया गया था।
घोषणा में कहा गया है कि एक बार चुनाव होने के बाद सेना जीतने वाले को सत्ता की बागडोर सौंप देगी।
सू ची की नेशनल लीग ऑफ डेमोक्रेसी पार्टी ने पिछले साल नवंबर में हुए आम चुनाव में शानदार जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में सेना के समर्थन वाली यूनियन सॉलिडेरटी एंड डेवलपमेंट पार्टी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी।
सेना ने कहा, "उसे यह कार्रवाई करनी पड़ी क्योंकि सू ची की सरकार बड़े पैमाने पर चुनावों में धांधली के उसके आरोपों का निराकरण करने में नाकाम रही।
Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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नेपीता , एक फरवरी म्यामां की सेना ने घोषणा की है कि वह सोमवार को घोषित एक साल के आपातकाल के बाद देश में नए सिरे से चुनाव कराएगी। म्यामां की सेना ने सोमवार को तख्तापलट के बाद देश की शीर्ष नेता आंग सान सू ची को कथित रूप से हिरासत में ले लिया है। सेना के नियंत्रण वाले 'मयावाडी टीवी' पर यह घोषणा की गई। इससे पहले सैन्य नियंत्रण वाले इस टीवी चैनल पर कहा गया था कि राष्ट्रीय स्थिरता बाधित है इसलिये सभी सरकारी कामकाज सेना प्रमुख जनरल मिन आंग लाइंग को स्थानांतरित किये जाते हैं। यह कदम दो हज़ार आठ के संविधान के प्रावधान के तहत उठाया गया जिसे सैन्य शासन के दौरान जारी किया गया था। घोषणा में कहा गया है कि एक बार चुनाव होने के बाद सेना जीतने वाले को सत्ता की बागडोर सौंप देगी। सू ची की नेशनल लीग ऑफ डेमोक्रेसी पार्टी ने पिछले साल नवंबर में हुए आम चुनाव में शानदार जीत दर्ज की थी। उस चुनाव में सेना के समर्थन वाली यूनियन सॉलिडेरटी एंड डेवलपमेंट पार्टी को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। सेना ने कहा, "उसे यह कार्रवाई करनी पड़ी क्योंकि सू ची की सरकार बड़े पैमाने पर चुनावों में धांधली के उसके आरोपों का निराकरण करने में नाकाम रही। Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।
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कानपुर (फीचर डेस्क)। रिपोर्ट के मुताबिक फरहान और शिबानी ने इस साल के एंड तक शादी करने कर डिसीजन लिया है। खबरों के मुताबिक दोनों ने शादी की तैयारियां शुरू कर दी हैं और दोनों फरहान की फिल्म तूफान के रिलीज होने के बाद शादी करेंगे। फिलहाल अब तक इस खबर पर फरहान या फिर शिबानी की तरफ से किसी तरह का कोई बयान नहीं आया है।
रिपोर्ट की मानें तो ऐसा भी हो सकता है कि दोनों साल के बीच में शादी करके फैन्स को सरप्राइज भी दे सकते हैं। हालांकि, कपल की शादी की डेट अभी फाइनल नहीं हुई है, लेकिन दोनों की शादी की तैयारियां शुरू होने की खबरें हैं। वर्क फ्रंट की बात करें तो फरहान जल्द ही राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म तूफान में दिखेंगे। इस फिल्म में फरहान एक बॉक्सर का रोल निभाएंगे। फरहान की ये फिल्म 2 अक्टूबर को रिलीज होगी।
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कानपुर । रिपोर्ट के मुताबिक फरहान और शिबानी ने इस साल के एंड तक शादी करने कर डिसीजन लिया है। खबरों के मुताबिक दोनों ने शादी की तैयारियां शुरू कर दी हैं और दोनों फरहान की फिल्म तूफान के रिलीज होने के बाद शादी करेंगे। फिलहाल अब तक इस खबर पर फरहान या फिर शिबानी की तरफ से किसी तरह का कोई बयान नहीं आया है। रिपोर्ट की मानें तो ऐसा भी हो सकता है कि दोनों साल के बीच में शादी करके फैन्स को सरप्राइज भी दे सकते हैं। हालांकि, कपल की शादी की डेट अभी फाइनल नहीं हुई है, लेकिन दोनों की शादी की तैयारियां शुरू होने की खबरें हैं। वर्क फ्रंट की बात करें तो फरहान जल्द ही राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म तूफान में दिखेंगे। इस फिल्म में फरहान एक बॉक्सर का रोल निभाएंगे। फरहान की ये फिल्म दो अक्टूबर को रिलीज होगी।
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दुनिया में पैसा कमाने के दो ही तरीके होते हैं या तो इंसान बिजनेस करता है या फिर नौकरी करें, लेकिन क्या आप जानते हैं दुनिया में एक ऐसा शख्स भी है जो सिर्फ नींद लेकर लाखों रुपए कमा लेता है.
दुनिया में शायद ही कोई ऐसा शख्स होगा, जो पैसा कमाना चाहता हो. यहां हर शख्स का सपना होता है कि उसके पास भी ढेर सारा (How To Earn Money) पैसा हो जिससे वह अपने सारे शौक पूरे कर सके. इसके लिए इंसान वह अपने दफ्तर में खूब मेहनत भी करता है. इस दौरान इंसान अपने भूख-प्यास और नींद सबको कंट्रोल करके बड़ी ही शिद्दत से अपना काम करता है, लेकिन क्या हो अगर आप भी सोते-सोते पैसा कमाना शुरू कर दे तो. जी हां, बिल्कुल सही पढ़ा आपने, आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो सोते-सोते लाखों रूपए कमा लेता है.
सोशल मीडिया के आ जाने से जिंदगी लोगों की जिंदगी बड़ी आसान हो चुकी है, लेकिन क्या आप जानते हैं इसी सोशल मीडिया के जरिए आज के जरिए आज लोग खूब पैसा भी कमा रहे हैं. जैसे आज-कल लोग यूट्यूब पर वीडियो (YouTube Video) अपलोड करके काफी कमाई कर रहे हैं. अगर कोई वीडियो ट्रेंड करने लग जाए (Viral Video), तब तो मजे ही हो जाते हैं. हाल के दिनों में एक ऐसे ही शख्स की चर्चा की हो रही है जो सोते-सोते लाखों रुपए यूट्यूब के जरिए कमा रहा है.
हम बात कर रहे हैं यूट्यूब (YouTube Video) पर सुपर मेनस्ट्रीम (Super Mainstream) नाम के चैनल के बारे में, यहां एक शख्स अपने बिस्तर के पास माइक्रोफोन, कैमरा, लाइटिंग और मॉनिटर लगाकर रखता है और उसे लाइव कर देता है. जिसे देखने के लिए हजारों दर्शक लाइवस्ट्रीम में शामिल होते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी इस शख्स की लोग ना सिर्फ वीडियो देखते हैं बल्कि उसे पैसे भी डोनेट करते हैं. जिससे उसकी लाखों की कमाई सोते-सोते ही हो जाती है.
यह यूट्यूबर सिर्फ 21 साल का है और हफ्ते में छह घंटे गहरी नींद में सोने के बदले में वह £2,000 (2 लाख रुपये) से भी ज्यादा कमा लेता है. इस दौरान लाइव वीडियो रिकॉर्ड होता रहता है, फिर वह उसे अपने चैनल पर अपलोड कर देता है. लोग उसका वीडियो देखते हैं और उसे इसके रुपये मिल जाते हैं. इस अजब-गजब नौकरी (Weird Job) के बारे में जानकर आपका दिल भी ऐसा कुछ करने के लिए मचलने लगेगा.
यह भी पढ़ेंः PHOTOS: 3 फीट की ये मॉडल अपने लिए ढूंढ रही है ब्वॉयफ्रेंड, नहीं मिल रहा सच्चा प्यार!
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दुनिया में पैसा कमाने के दो ही तरीके होते हैं या तो इंसान बिजनेस करता है या फिर नौकरी करें, लेकिन क्या आप जानते हैं दुनिया में एक ऐसा शख्स भी है जो सिर्फ नींद लेकर लाखों रुपए कमा लेता है. दुनिया में शायद ही कोई ऐसा शख्स होगा, जो पैसा कमाना चाहता हो. यहां हर शख्स का सपना होता है कि उसके पास भी ढेर सारा पैसा हो जिससे वह अपने सारे शौक पूरे कर सके. इसके लिए इंसान वह अपने दफ्तर में खूब मेहनत भी करता है. इस दौरान इंसान अपने भूख-प्यास और नींद सबको कंट्रोल करके बड़ी ही शिद्दत से अपना काम करता है, लेकिन क्या हो अगर आप भी सोते-सोते पैसा कमाना शुरू कर दे तो. जी हां, बिल्कुल सही पढ़ा आपने, आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो सोते-सोते लाखों रूपए कमा लेता है. सोशल मीडिया के आ जाने से जिंदगी लोगों की जिंदगी बड़ी आसान हो चुकी है, लेकिन क्या आप जानते हैं इसी सोशल मीडिया के जरिए आज के जरिए आज लोग खूब पैसा भी कमा रहे हैं. जैसे आज-कल लोग यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करके काफी कमाई कर रहे हैं. अगर कोई वीडियो ट्रेंड करने लग जाए , तब तो मजे ही हो जाते हैं. हाल के दिनों में एक ऐसे ही शख्स की चर्चा की हो रही है जो सोते-सोते लाखों रुपए यूट्यूब के जरिए कमा रहा है. हम बात कर रहे हैं यूट्यूब पर सुपर मेनस्ट्रीम नाम के चैनल के बारे में, यहां एक शख्स अपने बिस्तर के पास माइक्रोफोन, कैमरा, लाइटिंग और मॉनिटर लगाकर रखता है और उसे लाइव कर देता है. जिसे देखने के लिए हजारों दर्शक लाइवस्ट्रीम में शामिल होते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी इस शख्स की लोग ना सिर्फ वीडियो देखते हैं बल्कि उसे पैसे भी डोनेट करते हैं. जिससे उसकी लाखों की कमाई सोते-सोते ही हो जाती है. यह यूट्यूबर सिर्फ इक्कीस साल का है और हफ्ते में छह घंटे गहरी नींद में सोने के बदले में वह दो पाउंड,शून्य से भी ज्यादा कमा लेता है. इस दौरान लाइव वीडियो रिकॉर्ड होता रहता है, फिर वह उसे अपने चैनल पर अपलोड कर देता है. लोग उसका वीडियो देखते हैं और उसे इसके रुपये मिल जाते हैं. इस अजब-गजब नौकरी के बारे में जानकर आपका दिल भी ऐसा कुछ करने के लिए मचलने लगेगा. यह भी पढ़ेंः PHOTOS: तीन फीट की ये मॉडल अपने लिए ढूंढ रही है ब्वॉयफ्रेंड, नहीं मिल रहा सच्चा प्यार!
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सोशल मीडिया पर पिछले कई दिनों से करीना कपूर के दूसरे बेटे जिसका नाम 'जहांगीर' (Jehangir) रखा गया है, इसपर पिछले कई दिनों से तगड़ी लड़ाई चल रही है. ऐसे में अब स्वरा भास्कर (Swara Bhasker) ने इस ट्रोलर्स को अपने अदांज में जवाब दिया है.
बॉलीवुड की खूबसूरत एक्ट्रेस करीना कपूर खान (Kareena Kapoor Khan) और सैफ अली खान (Saif Ali Khan) के बेटे का नाम जहांगीर (Jehangir) रखा गया है. इस नाम को लेकर अब सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है. जहां इस नाम के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स इस जोड़ी को ट्रोल करते हुए इनकी आलोचना कर रहे हैं. जहां यूजर्स का कहना है कि करीना ने अपने बड़े बेटे का नाम तैमूर रखा है, जिसके बाद अब उन्होंने अपने दूसरे बेटे का नाम जहांगीर किस वजह से रखा है. ऐसे में अब इस पूरे मामले को देखते हुए करीना कपूर खान की पुरानी दोस्त और कोस्टार मशहूर एक्ट्रेस स्वरा भास्कर (Swara Bhasker) ने इसपर अपनी बेबाक राय रखी है.
स्वरा भास्कर ने करीना के छोटे बेटे के नाम को लेकर एक खास ट्वीट किया है. इस ट्वीट में एक्ट्रेस ने यूजर्स को अपने काम से काम रखने की सलाह दी है. यहां तक कि उन्होंने अपने इस ट्वीट में इन सभी ट्रोलर्स को गधा बुलाया है. एक्ट्रेस लिखती हैं "किसी दम्पति ने अपने बच्चों के नाम रखे हैं, और वो दम्पति आप नहीं हैं - पर आपको इसपर राय है कि नाम क्या हैं और क्यों हैं और आपके दिमाग में ये एक मुद्दा है; जिस से आपकी भावनाएं आहत हैं.... तो आप इस दुनिया के सबसे बड़े गधों में एक हैं!" इस ट्वीट के अंत में एक्ट्रेस ने करीना के बेटे का नाम जहांगीर लिखा है. सोशल मीडिया पर एक्ट्रेस का ट्वीट तेजी से वायरल हो रहा है. जहां कई यूजर्स ने एक्ट्रेस को अपने जवाब भी दिए हैं.
कुछ यूजर्स ने यहां स्वरा को ही ट्रोल करते हुए कहा है कि "मीट तैमूर, जहांगीर और आने वाले औरंगजेब की आया" एक अन्य यूजर ने एक्ट्रेस के लिए लिखा "अपने वक्त में आप यह बात क्यों भूल जाती हैं, जो मामला आपके फायदे का होता है उसमें कूद पड़ती हैं और जहां आप का फायदा नहीं निकलता है मुंह बंद करके घर में बैठ जाती हैं." कई यूजर्स का आरोप है कि एक्ट्रेस महज अपनी पब्लिकसिटी के लिए ऐसे मुद्दों पर अपने बयान देती हैं. जहां उन्हें खबरों में रहने का मौका मिलता रहे.
? मीट तैमूर, जहांगीर और आने वाले औरंगजेब की आया।?
आपको बता दें, करीना और स्वरा हमें अपनी फिल्म वीरे दी वेडिंग (Veere Di Wedding) में साथ नजर आईं थीं. जहां इस फिल्म के प्रोमोशन के दौरान इन दोनों की दोस्ती बहुत गहरी हो गई थी. आपको बता दें, स्वरा हमें 2018 के बाद से हमें किसी भी बड़ी फिल्म में नजर नहीं आई हैं. इन दिनों वो दिल्ली में अपने पूरे परिवार के साथ रह रही हैं. वहीं करीना कपूर खान हमें बहुत जल्द हमें अपनी अगली फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' में आमिर खान के साथ मुख्य भूमिका निभाते हुए नजर आएंगी. देखना होगा लॉकडाउन के बाद रिलीज हो रही है इस फिल्म को दर्शक कितना पसंद करते हैं.
यह भी पढ़ें :- वामिका गब्बी के इस तलवारबाजी हुनर को देखकर फैंस हुए दीवाने, क्या कुछ बड़ा करने की है तैयारी?
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सोशल मीडिया पर पिछले कई दिनों से करीना कपूर के दूसरे बेटे जिसका नाम 'जहांगीर' रखा गया है, इसपर पिछले कई दिनों से तगड़ी लड़ाई चल रही है. ऐसे में अब स्वरा भास्कर ने इस ट्रोलर्स को अपने अदांज में जवाब दिया है. बॉलीवुड की खूबसूरत एक्ट्रेस करीना कपूर खान और सैफ अली खान के बेटे का नाम जहांगीर रखा गया है. इस नाम को लेकर अब सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है. जहां इस नाम के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स इस जोड़ी को ट्रोल करते हुए इनकी आलोचना कर रहे हैं. जहां यूजर्स का कहना है कि करीना ने अपने बड़े बेटे का नाम तैमूर रखा है, जिसके बाद अब उन्होंने अपने दूसरे बेटे का नाम जहांगीर किस वजह से रखा है. ऐसे में अब इस पूरे मामले को देखते हुए करीना कपूर खान की पुरानी दोस्त और कोस्टार मशहूर एक्ट्रेस स्वरा भास्कर ने इसपर अपनी बेबाक राय रखी है. स्वरा भास्कर ने करीना के छोटे बेटे के नाम को लेकर एक खास ट्वीट किया है. इस ट्वीट में एक्ट्रेस ने यूजर्स को अपने काम से काम रखने की सलाह दी है. यहां तक कि उन्होंने अपने इस ट्वीट में इन सभी ट्रोलर्स को गधा बुलाया है. एक्ट्रेस लिखती हैं "किसी दम्पति ने अपने बच्चों के नाम रखे हैं, और वो दम्पति आप नहीं हैं - पर आपको इसपर राय है कि नाम क्या हैं और क्यों हैं और आपके दिमाग में ये एक मुद्दा है; जिस से आपकी भावनाएं आहत हैं.... तो आप इस दुनिया के सबसे बड़े गधों में एक हैं!" इस ट्वीट के अंत में एक्ट्रेस ने करीना के बेटे का नाम जहांगीर लिखा है. सोशल मीडिया पर एक्ट्रेस का ट्वीट तेजी से वायरल हो रहा है. जहां कई यूजर्स ने एक्ट्रेस को अपने जवाब भी दिए हैं. कुछ यूजर्स ने यहां स्वरा को ही ट्रोल करते हुए कहा है कि "मीट तैमूर, जहांगीर और आने वाले औरंगजेब की आया" एक अन्य यूजर ने एक्ट्रेस के लिए लिखा "अपने वक्त में आप यह बात क्यों भूल जाती हैं, जो मामला आपके फायदे का होता है उसमें कूद पड़ती हैं और जहां आप का फायदा नहीं निकलता है मुंह बंद करके घर में बैठ जाती हैं." कई यूजर्स का आरोप है कि एक्ट्रेस महज अपनी पब्लिकसिटी के लिए ऐसे मुद्दों पर अपने बयान देती हैं. जहां उन्हें खबरों में रहने का मौका मिलता रहे. ? मीट तैमूर, जहांगीर और आने वाले औरंगजेब की आया।? आपको बता दें, करीना और स्वरा हमें अपनी फिल्म वीरे दी वेडिंग में साथ नजर आईं थीं. जहां इस फिल्म के प्रोमोशन के दौरान इन दोनों की दोस्ती बहुत गहरी हो गई थी. आपको बता दें, स्वरा हमें दो हज़ार अट्ठारह के बाद से हमें किसी भी बड़ी फिल्म में नजर नहीं आई हैं. इन दिनों वो दिल्ली में अपने पूरे परिवार के साथ रह रही हैं. वहीं करीना कपूर खान हमें बहुत जल्द हमें अपनी अगली फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' में आमिर खान के साथ मुख्य भूमिका निभाते हुए नजर आएंगी. देखना होगा लॉकडाउन के बाद रिलीज हो रही है इस फिल्म को दर्शक कितना पसंद करते हैं. यह भी पढ़ें :- वामिका गब्बी के इस तलवारबाजी हुनर को देखकर फैंस हुए दीवाने, क्या कुछ बड़ा करने की है तैयारी?
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Jamshedpur: एक्सएलआरआइ में '5वें सोशल इंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव' का आयोजन किया गया. एक्सएलआरआइ के सोशल इनिशिएटिव ग्रुप फॉर मैनेजरियल असिस्टेंस (सिग्मा) की ओर से आयोजित इस कॉन्क्लेव में आधुनिक भारत में ग्रामीण स्वास्थ्य की देखभाल पर चर्चा की गयी. इस वर्ष के कॉन्क्लेव का विषय था, 'आधुनिक भारत में ग्रामीण स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करना'. इस दौरान ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने, चुनौतियों और उनके समाधान से जुड़े विचारों का आदान-प्रदान किया गया. कॉन्क्लेव में अपने प्रयास से समाज में परिवर्तन लाने वाले कुल छह पैनलिस्टों को आमंत्रित किया गया था.
कॉन्क्लेव का उद्घाटन महाराष्ट्र की एक गैर-लाभकारी संस्था सोसाइटी फॉर एजुकेशन, एक्शन एंड रिसर्च इन कम्युनिटी हेल्थ (सर्च) के संयुक्त निदेशक डॉ आनंद बंग ने किया. उन्होंने अपने भाषण में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा के व्यापक पहलुओं को शामिल किया. उन्होंने देश के भावी इंटरप्रेन्योर को सफलता का मंत्र देते कहा कि 'जहां समस्याएं हैं वहां जाएं और उन्हें हल करने के लिए काम करें'. अगर किसी की समस्या का समाधान आपके किसी उद्यम से हो जाता है तो फिर उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता. इस दौरान उन्होंने कई उदाहरण भी प्रस्तुत किये. डॉ. बंग ने महाराष्ट्र के ग्रामीण समुदायों में उनके द्वारा किये जाने प्रयासों की जानकारी साझा की और ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यक्रमों और कार्यान्वयन में अंतर को पाटने के लिए एक प्रभावी समाधान खोजने की आवश्यकता पर बल दिया.
पहले पैनल के लिए वक्ताओं में आईक्योर के संस्थापक और सीईओ सुजय संतरा, अरविंद आई केयर सिस्टम के निदेशक सह संस्थापक सदस्य तुलसीराज रविला व एवरी इन्फैंट मैटर्स की संस्थापक डॉ. राधिका बत्रा मौजूद थे. इस पैनल डिस्कशन के दौरान यह बात निकल कर सामने आयी कि जब ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की बात आती है तो स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीणों तक पहुंचाना बड़ी समस्या थी. लेकिन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से इसे आसान किया जा सकता है. पैनल ने निष्कर्ष निकाला कि सच्चा परिवर्तन केवल युवा शिक्षित पीढ़ियों द्वारा लाया जा सकता है, जो अपने गृहनगर और गांवों के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं. यह एक सतत प्रक्रिया है जिसमें समय लगेगा, लेकिन दृढ़ता से अगर कार्य किया जाये तो रंग लायेगी. उन्होंने कहा कि दृढ़ता सफलता की कुंजी है.
दूसरा पैनल का विषय पोषण सुरक्षित भारत निर्माण में होने वाली चुनौतियां विषय पर था. पैनल के वक्ता के रूप में चेतना की संस्थापक-निदेशक इंदु कपूर, अरमान की संस्थापक डॉ चेतना अपर्णा हेगड़े और आकार इनोवेशन के संस्थापक जयदीप मंडल मौजूद थे. डॉ. अपर्णा ने देश के पोषण प्रोफाइल को मजबूत करने से जुड़ी बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ-साथ प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के महत्व पर चर्चा की. उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 2. 6 मिलियन महिलाओं को वॉयस कॉल के माध्यम से रोग को दूर करने से जुड़ी जानकारियां प्रदान की. वहीं इंदु कपूर ने कहा कि पोषण केवल खाने तक ही सीमित नहीं है बल्कि पोषण का ताल्लुक मानसिक पोषण से भी है. उन्होंने कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए समुदायों को सशक्त बनाने के साथ-साथ जागरूकता फैलाने के महत्व पर बल दिया. अंत में बताया गया कि में कुपोषण एक जटिल समस्या है, जिसके निवारण के लिए सरकारी विभागों और निजी स्तूर पर कार्य करने वाली संस्थानों को भी एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता है.
वहीं मंडल ने कहा कि कई बार जागरूकता की कमी के कारण भी ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां उत्पन्न होती हैं. अक्सर लोगों को धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं से गुमराह किया जाता है जो एक जागरूक स्वास्थ्य देखभाल मानसिकता तक पहुंचने में बाधा के रूप में कार्य करते हैं. उन्होंने मुख्य रूप से ग्रामीण महिलाओं की दुर्दशा और मासिक धर्म स्वच्छता के मामले में जागरूकता की कमी पर अपनी बातों को प्रस्तुत किया.
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Jamshedpur: एक्सएलआरआइ में 'पाँचवें सोशल इंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव' का आयोजन किया गया. एक्सएलआरआइ के सोशल इनिशिएटिव ग्रुप फॉर मैनेजरियल असिस्टेंस की ओर से आयोजित इस कॉन्क्लेव में आधुनिक भारत में ग्रामीण स्वास्थ्य की देखभाल पर चर्चा की गयी. इस वर्ष के कॉन्क्लेव का विषय था, 'आधुनिक भारत में ग्रामीण स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करना'. इस दौरान ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने, चुनौतियों और उनके समाधान से जुड़े विचारों का आदान-प्रदान किया गया. कॉन्क्लेव में अपने प्रयास से समाज में परिवर्तन लाने वाले कुल छह पैनलिस्टों को आमंत्रित किया गया था. कॉन्क्लेव का उद्घाटन महाराष्ट्र की एक गैर-लाभकारी संस्था सोसाइटी फॉर एजुकेशन, एक्शन एंड रिसर्च इन कम्युनिटी हेल्थ के संयुक्त निदेशक डॉ आनंद बंग ने किया. उन्होंने अपने भाषण में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा के व्यापक पहलुओं को शामिल किया. उन्होंने देश के भावी इंटरप्रेन्योर को सफलता का मंत्र देते कहा कि 'जहां समस्याएं हैं वहां जाएं और उन्हें हल करने के लिए काम करें'. अगर किसी की समस्या का समाधान आपके किसी उद्यम से हो जाता है तो फिर उसे सफल होने से कोई नहीं रोक सकता. इस दौरान उन्होंने कई उदाहरण भी प्रस्तुत किये. डॉ. बंग ने महाराष्ट्र के ग्रामीण समुदायों में उनके द्वारा किये जाने प्रयासों की जानकारी साझा की और ग्रामीण स्वास्थ्य कार्यक्रमों और कार्यान्वयन में अंतर को पाटने के लिए एक प्रभावी समाधान खोजने की आवश्यकता पर बल दिया. पहले पैनल के लिए वक्ताओं में आईक्योर के संस्थापक और सीईओ सुजय संतरा, अरविंद आई केयर सिस्टम के निदेशक सह संस्थापक सदस्य तुलसीराज रविला व एवरी इन्फैंट मैटर्स की संस्थापक डॉ. राधिका बत्रा मौजूद थे. इस पैनल डिस्कशन के दौरान यह बात निकल कर सामने आयी कि जब ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की बात आती है तो स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीणों तक पहुंचाना बड़ी समस्या थी. लेकिन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से इसे आसान किया जा सकता है. पैनल ने निष्कर्ष निकाला कि सच्चा परिवर्तन केवल युवा शिक्षित पीढ़ियों द्वारा लाया जा सकता है, जो अपने गृहनगर और गांवों के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं. यह एक सतत प्रक्रिया है जिसमें समय लगेगा, लेकिन दृढ़ता से अगर कार्य किया जाये तो रंग लायेगी. उन्होंने कहा कि दृढ़ता सफलता की कुंजी है. दूसरा पैनल का विषय पोषण सुरक्षित भारत निर्माण में होने वाली चुनौतियां विषय पर था. पैनल के वक्ता के रूप में चेतना की संस्थापक-निदेशक इंदु कपूर, अरमान की संस्थापक डॉ चेतना अपर्णा हेगड़े और आकार इनोवेशन के संस्थापक जयदीप मंडल मौजूद थे. डॉ. अपर्णा ने देश के पोषण प्रोफाइल को मजबूत करने से जुड़ी बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ-साथ प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के महत्व पर चर्चा की. उन्होंने बताया कि अब तक लगभग दो. छः मिलियन महिलाओं को वॉयस कॉल के माध्यम से रोग को दूर करने से जुड़ी जानकारियां प्रदान की. वहीं इंदु कपूर ने कहा कि पोषण केवल खाने तक ही सीमित नहीं है बल्कि पोषण का ताल्लुक मानसिक पोषण से भी है. उन्होंने कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए समुदायों को सशक्त बनाने के साथ-साथ जागरूकता फैलाने के महत्व पर बल दिया. अंत में बताया गया कि में कुपोषण एक जटिल समस्या है, जिसके निवारण के लिए सरकारी विभागों और निजी स्तूर पर कार्य करने वाली संस्थानों को भी एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता है. वहीं मंडल ने कहा कि कई बार जागरूकता की कमी के कारण भी ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां उत्पन्न होती हैं. अक्सर लोगों को धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं से गुमराह किया जाता है जो एक जागरूक स्वास्थ्य देखभाल मानसिकता तक पहुंचने में बाधा के रूप में कार्य करते हैं. उन्होंने मुख्य रूप से ग्रामीण महिलाओं की दुर्दशा और मासिक धर्म स्वच्छता के मामले में जागरूकता की कमी पर अपनी बातों को प्रस्तुत किया.
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पिछले दिनों लगातार दो रेलहादसों ने देश के झकझोर कर रख दिया। अब मोदी सरकार कुछ ऐसा करने जा रही है जिससे रेल मंत्रालय का कायापलट हो सके। खबरों के मुताबिक मोदी सरकार रेल मंत्रालय को खत्म करने की सोच रही है। जैसे इस सरकार ने आम बजट में रेल बजट को मिलाकर एक कर दिया ऐसा ही कुछ मंत्रालय के साथ करने की सोच रही है।
खबरें ये आ रही हैं कि सुरेश प्रभु के इस्तेफे के बाद नितिन गडकरी को रेल मंत्रालय का जिम्मा सौंपा जा सकता है। मोदी सरकार में फिलहाल ऐसे कई मंत्री हैं, जिनके पास एक से अधिक मंत्रालय है। लेकिन एक बार फिर ऐसा कुछ होने वाला है जो सोच से परे हो।
आपको बता दें कि पीएम मोदी 3 सितंबर को चीन यात्रा पर जा रहे हैं। ऐसे में इससे पहले ही मोदी अपने कैबिनेट में फेरबदल करने वाले हैं। रेल में हो रहे लगातार हादसे के बाद रेल मंत्री से मंत्रालय वापस लिया जा सकता है। साथ ही बड़ा फैसला ये हो सकता है कि रेल मंत्रालय नितिन गडकरी को दे दिया जाए। इसके साथ मोदी ये भी ऐलान कर सकते हैं कि रेलमंत्रालय को पूर्ण रूप से खत्म कर के इसे परिवहन मंत्रालय में मिला दिया जाए।
कौन बनेगा रक्षामंत्री?
आपको ये भी बता दें कि रक्षा मंत्रालय का पद बहुत दिनों से खाली है तो ऐसे में मोदी किसी वरिष्ठ नेता को रक्षा मंत्रालय की जिम्मा सौंप सकते हैं। रक्षा मंत्री का बनना अभी इसलिए भी जरूरी है कि भारत-चीन सीमा पर कुछ भी ठीक नहीं है। दोनों देश के बीच तनाव कम होने के बदल बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसे में देश में रक्षा मंत्री को होना जरूरी है।
दूसरी तरफ दक्षिण से भी कुछ नेता आ सके हैं, क्योंकि वहां कि राजनीति में जबरदस्त उथल-पुथल मचा हुआ है और #AIDMK का #NDA में शामिल होने के बाद कुछ विभाग का जिम्मा इनके नेताओं को भी सौंपा जाए। कई मंत्रियों के पास एक से अधिक मंत्रालय अभी हैं तो ये समझा जा रहा है कि कई नए लोगों का कैबिनेट में स्वागत हो सकता है।
मोदी सरकार अपना ये कैबिनेट 2019 की चुनाव को देखकर भी बदल रही है। हाल ही में मोदी ने बीजेपी शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री को बुला कर मीटिंग की थी। ऐसे में किसी मुख्यमंत्री को केंद्र में बुला लिया जाए तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी। वहीं दूसरी तरफ तमिलनाडु और बिहार में राज्यपाल का भी पद खाली है। इससे ये भी लग रहा है कि भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता को यह जिम्मा सौंपा जा सकता है। वहीं अगर रेल मंत्रालय की बात करें तो बहुत हद तक लग रहा है कि मोदी इस बार दो मंत्रालय को जोड़ दें।
वहीं बिहार में सियासी भूचाल मचा है, लेकिन इसी बीच ये भी खबर आ रही है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 24 दिल्ली आ रहे हैं। ऐसे में ये भी कयास लगाया जा रहा है कि #JDU के दो नेता को कैबिनिट में भी शामिल किया जा सकता है। साथ ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और #RSS के नेता मंत्रियों को चुनने का काम कर सकते हैं।
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पिछले दिनों लगातार दो रेलहादसों ने देश के झकझोर कर रख दिया। अब मोदी सरकार कुछ ऐसा करने जा रही है जिससे रेल मंत्रालय का कायापलट हो सके। खबरों के मुताबिक मोदी सरकार रेल मंत्रालय को खत्म करने की सोच रही है। जैसे इस सरकार ने आम बजट में रेल बजट को मिलाकर एक कर दिया ऐसा ही कुछ मंत्रालय के साथ करने की सोच रही है। खबरें ये आ रही हैं कि सुरेश प्रभु के इस्तेफे के बाद नितिन गडकरी को रेल मंत्रालय का जिम्मा सौंपा जा सकता है। मोदी सरकार में फिलहाल ऐसे कई मंत्री हैं, जिनके पास एक से अधिक मंत्रालय है। लेकिन एक बार फिर ऐसा कुछ होने वाला है जो सोच से परे हो। आपको बता दें कि पीएम मोदी तीन सितंबर को चीन यात्रा पर जा रहे हैं। ऐसे में इससे पहले ही मोदी अपने कैबिनेट में फेरबदल करने वाले हैं। रेल में हो रहे लगातार हादसे के बाद रेल मंत्री से मंत्रालय वापस लिया जा सकता है। साथ ही बड़ा फैसला ये हो सकता है कि रेल मंत्रालय नितिन गडकरी को दे दिया जाए। इसके साथ मोदी ये भी ऐलान कर सकते हैं कि रेलमंत्रालय को पूर्ण रूप से खत्म कर के इसे परिवहन मंत्रालय में मिला दिया जाए। कौन बनेगा रक्षामंत्री? आपको ये भी बता दें कि रक्षा मंत्रालय का पद बहुत दिनों से खाली है तो ऐसे में मोदी किसी वरिष्ठ नेता को रक्षा मंत्रालय की जिम्मा सौंप सकते हैं। रक्षा मंत्री का बनना अभी इसलिए भी जरूरी है कि भारत-चीन सीमा पर कुछ भी ठीक नहीं है। दोनों देश के बीच तनाव कम होने के बदल बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसे में देश में रक्षा मंत्री को होना जरूरी है। दूसरी तरफ दक्षिण से भी कुछ नेता आ सके हैं, क्योंकि वहां कि राजनीति में जबरदस्त उथल-पुथल मचा हुआ है और #AIDMK का #NDA में शामिल होने के बाद कुछ विभाग का जिम्मा इनके नेताओं को भी सौंपा जाए। कई मंत्रियों के पास एक से अधिक मंत्रालय अभी हैं तो ये समझा जा रहा है कि कई नए लोगों का कैबिनेट में स्वागत हो सकता है। मोदी सरकार अपना ये कैबिनेट दो हज़ार उन्नीस की चुनाव को देखकर भी बदल रही है। हाल ही में मोदी ने बीजेपी शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री को बुला कर मीटिंग की थी। ऐसे में किसी मुख्यमंत्री को केंद्र में बुला लिया जाए तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी। वहीं दूसरी तरफ तमिलनाडु और बिहार में राज्यपाल का भी पद खाली है। इससे ये भी लग रहा है कि भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता को यह जिम्मा सौंपा जा सकता है। वहीं अगर रेल मंत्रालय की बात करें तो बहुत हद तक लग रहा है कि मोदी इस बार दो मंत्रालय को जोड़ दें। वहीं बिहार में सियासी भूचाल मचा है, लेकिन इसी बीच ये भी खबर आ रही है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चौबीस दिल्ली आ रहे हैं। ऐसे में ये भी कयास लगाया जा रहा है कि #JDU के दो नेता को कैबिनिट में भी शामिल किया जा सकता है। साथ ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और #RSS के नेता मंत्रियों को चुनने का काम कर सकते हैं।
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