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भोरे। एक संवाददाता । स्थानीय थाने की पुलिस ने 45 पाउच देसी शराब के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार कर लिया। जबकि उसका एक साथी भागने में सफल हो गया। पकड़ाए युवक की बाइक पर रखे बोरे से 45 पाउच देशी शराब बरामद किया गया। पुलिस ने तस्कर की बाइक भी जब्त कर ली है। मामले में पुलिस ने उत्पाद अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर तस्कर को जेल भेज दिया।
भोरे। एक संवाददाता । स्थानीय थाने की पुलिस ने पैंतालीस पाउच देसी शराब के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार कर लिया। जबकि उसका एक साथी भागने में सफल हो गया। पकड़ाए युवक की बाइक पर रखे बोरे से पैंतालीस पाउच देशी शराब बरामद किया गया। पुलिस ने तस्कर की बाइक भी जब्त कर ली है। मामले में पुलिस ने उत्पाद अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर तस्कर को जेल भेज दिया।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
ALKAR मोर्टार सिस्टम के निर्यात के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसे ASELSAN द्वारा घरेलू संसाधनों के साथ विकसित किया गया था। विकास भूमि प्रणाली संगोष्ठी में साझा किया गया था, जो इस वर्ष पांचवीं बार आयोजित किया गया था। इस संदर्भ में निर्यात किए गए देश के नाम का खुलासा नहीं किया गया। यह कहा गया था कि निर्यात गतिविधियों को न्यूरोल और बीएमसी के साथ मिलकर चलाया जाता है। इसके अलावा, यह कहा गया था कि लैंड फोर्सेज कमांड को ALKAR मोर्टार सिस्टम के निश्चित संस्करण की डिलीवरी के लिए काम जारी है। 2021 में, TTZA (टैक्टिकल व्हील्ड आर्मर्ड व्हीकल) मोर्टार वाहन में एकीकृत 1 ALKAR 120 मिमी मोर्टार वेपन सिस्टम की स्वीकृति निरीक्षण गतिविधियाँ पूरी और वितरित की गईं। ALKAR 120 मिमी मोर्टार वेपन सिस्टम, मूल रूप से ASELSAN द्वारा डिज़ाइन किया गया; यह स्वचालित बैरल स्टीयरिंग सिस्टम, स्वचालित गोला बारूद लोडिंग सिस्टम, रिकॉइल मैकेनिज्म और फायर कंट्रोल सिस्टम से लैस बुर्ज पर एकीकृत एक आधुनिक हथियार प्रणाली है।
ALKAR मोर्टार सिस्टम के निर्यात के लिए एक अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसे ASELSAN द्वारा घरेलू संसाधनों के साथ विकसित किया गया था। विकास भूमि प्रणाली संगोष्ठी में साझा किया गया था, जो इस वर्ष पांचवीं बार आयोजित किया गया था। इस संदर्भ में निर्यात किए गए देश के नाम का खुलासा नहीं किया गया। यह कहा गया था कि निर्यात गतिविधियों को न्यूरोल और बीएमसी के साथ मिलकर चलाया जाता है। इसके अलावा, यह कहा गया था कि लैंड फोर्सेज कमांड को ALKAR मोर्टार सिस्टम के निश्चित संस्करण की डिलीवरी के लिए काम जारी है। दो हज़ार इक्कीस में, TTZA मोर्टार वाहन में एकीकृत एक ALKAR एक सौ बीस मिमी मोर्टार वेपन सिस्टम की स्वीकृति निरीक्षण गतिविधियाँ पूरी और वितरित की गईं। ALKAR एक सौ बीस मिमी मोर्टार वेपन सिस्टम, मूल रूप से ASELSAN द्वारा डिज़ाइन किया गया; यह स्वचालित बैरल स्टीयरिंग सिस्टम, स्वचालित गोला बारूद लोडिंग सिस्टम, रिकॉइल मैकेनिज्म और फायर कंट्रोल सिस्टम से लैस बुर्ज पर एकीकृत एक आधुनिक हथियार प्रणाली है।
Gurugram News: दिल्ली के ग्रेटर कैलाश एरिया में रहने वाले युवक को एक अजनबी के साथ शराब पीना भारी पड़ गया। फ्राईडे नाइट में युवक को नशे की हालत में मेट्रो से घर लौटना पड़ा। उसके साथ जो हुआ। इसके बाद में उसे अगले दिन पता चला। युवक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
Gurugram News: दिल्ली के ग्रेटर कैलाश एरिया में रहने वाले युवक को एक अजनबी के साथ शराब पीना भारी पड़ गया। फ्राईडे नाइट में युवक को नशे की हालत में मेट्रो से घर लौटना पड़ा। उसके साथ जो हुआ। इसके बाद में उसे अगले दिन पता चला। युवक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आजाद के बीच हुई मुलाकात के बाद जिले में सियासी हलचल तेज हो गई। चंद्रशेखर ने बताया कि गठबंधन को लेकर काफी देर तक चर्चा हुई। लेकिन अभी सीटों के बंटवारे पर निर्णय होना बाकी है। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद जनपद के भी राजनीतिक क्षेत्र में हलचल है। गठबंधन को लेकर चंद्रशेखर ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अपनी बात मीडिया के समक्ष रखी है। चंद्रशेखर आजाद ने बताया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ मुलाकात हुई है। विधान सभा चुनाव को लेकर गठबंधन पर लंबी चर्चा चली। पार्टी ने गठबंधन करके ही चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। अभी सीटों का बंटवारा फाइनल नहीं हुआ है। जैसे ही सीटें तय होंगी तो वह खुद सामने आकर गठबंधन का खुलासा करेंगे। चंद्रशेखर ने बताया कि पार्टी सरकार में दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और गरीब व मजलूमों की हिस्सेदारी चाहती है। इसीलिए गठबंधन के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भारतीय जनता पार्टी से कनेक्शन जोड़कर छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। मगर यदि भारतीय जनता पार्टी उन्हें मुख्यमंत्री भी बनाए तो वह भारतीय जनता पार्टी में नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार परीक्षाओं को कराने में विफल साबित हो रही है। शिक्षक पात्रता परीक्षा में पेपर लीक होना इसका उदाहरण है, जिसकी वजह से प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों को ठेस पहुंची है। उन्होंने 69 हजार शिक्षकों की भर्ती के मामले में भी सरकार पर बेरोजगार युवाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आजाद के बीच हुई मुलाकात के बाद जिले में सियासी हलचल तेज हो गई। चंद्रशेखर ने बताया कि गठबंधन को लेकर काफी देर तक चर्चा हुई। लेकिन अभी सीटों के बंटवारे पर निर्णय होना बाकी है। आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद जनपद के भी राजनीतिक क्षेत्र में हलचल है। गठबंधन को लेकर चंद्रशेखर ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अपनी बात मीडिया के समक्ष रखी है। चंद्रशेखर आजाद ने बताया कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ मुलाकात हुई है। विधान सभा चुनाव को लेकर गठबंधन पर लंबी चर्चा चली। पार्टी ने गठबंधन करके ही चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। अभी सीटों का बंटवारा फाइनल नहीं हुआ है। जैसे ही सीटें तय होंगी तो वह खुद सामने आकर गठबंधन का खुलासा करेंगे। चंद्रशेखर ने बताया कि पार्टी सरकार में दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और गरीब व मजलूमों की हिस्सेदारी चाहती है। इसीलिए गठबंधन के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भारतीय जनता पार्टी से कनेक्शन जोड़कर छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। मगर यदि भारतीय जनता पार्टी उन्हें मुख्यमंत्री भी बनाए तो वह भारतीय जनता पार्टी में नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार परीक्षाओं को कराने में विफल साबित हो रही है। शिक्षक पात्रता परीक्षा में पेपर लीक होना इसका उदाहरण है, जिसकी वजह से प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों को ठेस पहुंची है। उन्होंने उनहत्तर हजार शिक्षकों की भर्ती के मामले में भी सरकार पर बेरोजगार युवाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया। हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें। Read the latest and breaking Hindi news on amarujala. com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala. com to get all the latest Hindi news updates as they happen.
रायपुर (एजेंसी). अब छत्तीसगढ़ में बिना राज्य सरकार की अनुमति लिए सीबीआई राज्य में प्रवेश नहीं कर सकेगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र से आग्रह किया है कि वह केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को राज्य में जांच के लिए अब कोई नया प्रकरण नहीं लेने के निर्देश जारी करे। गौरतलब है कि सीबीआई केंद्र सरकार की जांच एजेंसी है। इसकी स्थापना दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टेब्लिशमेंट एक्ट,1946 के तहत की गई है। राज्यों ने एक विशेष अनुबंध के तहत सीबीआई को अपने अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई करने की अनुमति दी हुई है। डीएसपीई एक्ट,1946 के सेक्शन-6 के तहत सीबीआई को दूसरे राज्य में कार्रवाई करने के लिए राज्य की लिखित अनुमति होती है। छत्तीसगढ़ सरकार ने यह सहमति वापस ले ली है। छत्तीसगढ़ गृह विभाग के लिखे पत्र में केंद्र सरकार को सूचित किया गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2001 में इस बारे में केंद्र को दी गई सहमति वापस ले ली है, जिसके तहत केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सीबीआई को छत्तीसगढ़ में प्रकरणों की जांच के लिए अधिकृत करने की अधिसूचना जारी की गई थी। बता दें कि ऐसा ही निर्णय आंध्रप्रदेश और पश्चिम बंगाल सरकार पहले ही ले चुके हैं। अब बिना राज्य सरकार की अनुमति के सीबीआई राज्य में जांच नहीं कर पाएगी।
रायपुर . अब छत्तीसगढ़ में बिना राज्य सरकार की अनुमति लिए सीबीआई राज्य में प्रवेश नहीं कर सकेगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने केंद्र से आग्रह किया है कि वह केन्द्रीय जांच ब्यूरो को राज्य में जांच के लिए अब कोई नया प्रकरण नहीं लेने के निर्देश जारी करे। गौरतलब है कि सीबीआई केंद्र सरकार की जांच एजेंसी है। इसकी स्थापना दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टेब्लिशमेंट एक्ट,एक हज़ार नौ सौ छियालीस के तहत की गई है। राज्यों ने एक विशेष अनुबंध के तहत सीबीआई को अपने अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई करने की अनुमति दी हुई है। डीएसपीई एक्ट,एक हज़ार नौ सौ छियालीस के सेक्शन-छः के तहत सीबीआई को दूसरे राज्य में कार्रवाई करने के लिए राज्य की लिखित अनुमति होती है। छत्तीसगढ़ सरकार ने यह सहमति वापस ले ली है। छत्तीसगढ़ गृह विभाग के लिखे पत्र में केंद्र सरकार को सूचित किया गया है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष दो हज़ार एक में इस बारे में केंद्र को दी गई सहमति वापस ले ली है, जिसके तहत केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सीबीआई को छत्तीसगढ़ में प्रकरणों की जांच के लिए अधिकृत करने की अधिसूचना जारी की गई थी। बता दें कि ऐसा ही निर्णय आंध्रप्रदेश और पश्चिम बंगाल सरकार पहले ही ले चुके हैं। अब बिना राज्य सरकार की अनुमति के सीबीआई राज्य में जांच नहीं कर पाएगी।
नई दिल्ली। 2017 विधान सभा चुनाव के दौरान भाजपा ने उत्तर प्रदेश के लिए नारा दिया था कि गुण्डाराज ना भ्रष्ट्राचार अबकी बार भाजपा सरकार , चुनाव हुआ जनता ने समाजवादी सरकार को नकार दिया जनमत ही नहीं अपार बहुमत दिया। भाजपा ने योगी आदित्यनाथ के तौर पर उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया। प्रदेश में पूर्ववर्ती सरकार में जनता के धन का दुर्पयोग करने के मामले को लेकर और प्रदेश में व्याप्त अपराध को खत्म कराना योगी की प्रमुख जिम्मेदारी थी। सत्ता आते ही योगी ने अपने सम्बोधन में साफ कहा था कि सूबे में माफियाराज और गुण्डाराज नहीं चलेगा। लेकिन तीन महीने की सरकार के कार्यकाल में अपराधिय़ों ने सरकार के साथ जनता की नाक में दम कर दिया है। सरकार भले ही चुस्त कानून व्यवस्था करने के वादे करे दावे करे लेकिन वर्तमान समय में तीन महीने सरकार के निकल गये हैं। लेकिन अभी तक कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार के हालात अभी भी काबू में नहीं हैं। सूबे की योगी सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर लाख दावे और वादे करे। लेकिन जमीनी हकीकत है कि अभी तक वह सारे वादे और दावों से खोखले साबित हो रहे हैं। बीते 14 अप्रैल से सूबे का सहारनपुर सुलग रहा है। आग अब जाकर ठंड़ी होती दिख रही है। लेकिन इस दौरान मथुरा, आगरा, सीतापुर और इलाहाबाद में सरेआम अपराधियों का कहर देखने को मिला है। बात इतने पर ना रूकी जेवर, बुलंदशहर,रामपुर और सूबे की राजधानी लखनऊ के दामन पर बलात्कार का बदनुमा दाग भी लगा है। इसके साथ ही पूरे सूबे में कानून-व्यवस्था को लेकर जमकर माखौल उड़ाया गया है। पूर्ववर्ती सरकार को कामों को लेकर चुनाव के दौरान भाजपा ने जमकर किसानों से लेकर आम जनता का विरोधी करार दिया था। चुनाव के पहले योजनाओं का भंडार लगाने की बात कही थी। लेकिन सत्ता आते ही सारे वारे रफ्फू हो ंगये। सरकार तो सरकार अधिकारी थी साहब बन गये। सरकार ने 60 दिनों में सूबे की सड़को को सही करने का काम दिया था। 100 दिन बीत गये सड़क वहीं है। बस बदली केवल सरकार है। जब योगी सत्ता में आये तो विभागों की जांच शुरू हुई। उस वक्त लगा की काम की रफ्तार तेज होगी लेकिन सौ दिन चले ढाई कोस ही रफ्तार रही । सरकार सुचिता की बात करती है। लेकिन सत्ता के मद मे चूर विधायक से लेकर मंत्री तक के कई कारनामे आये दिन योगी सरकार की साख पर बट्टा लगा देते हैं। वाकिए की शुरूआत सीएम योगी के गृह जनपद गोरखपुर से होती है। जहां विधायक जी का एक महिला पुलिस अधिकारी को हिदायत देने का अंदाज साफ बता रहा था, कि विधायक जी पर सत्ता का नशा जमकर बोल रहा है। फिर महिला कल्याण मंत्री स्वाती सिंह का बीयर बार के उद्घाटन समारोह में जाकर फीता काटना। इसके बाद इन्ही का प्रसाद में सौ रूपये बटना। हांलाकि मंत्री जी ने इस पर अपनी सफाई दे दी है। लेकिन सरकार क्या करे। विकास के कार्यों से जुड़ी योजनाएं लागू होने में देरी की वजह योगी सरकार का प्रशासनिक ढांचा है। जिन अधिकारियों के दम पर योगी सूबे की तस्वीर बदलने निकले हैं। वे अधिकारी अभी तक अपने विभाग में इसी समस्या में उलझे हैं। मंत्री की सुने की सीएम की अगर सीएम की तो किसी क्योंकि एक सूबे में दो डिप्टी सीएम है एक सीएम योजनाओं को लेकर एक दो वैसे भी सरकार के पास फूटी कौड़ी बची नहीं है। फिर किसानों के कर्ज के लिए धन आवंटन की बात कह योगी सरकार ने योजनाओं को और पीछे कर दिया है। अधिकारियों के पास योजनाओं का कोई कार्यक्रम मौजूद नहीं है। योगी सरकार के तीन महीने के कार्यकाल पर अगर नजर डालें तो परिणाम ंशून्य ही मिल रहा है। 19 मार्च को सूबे के मुख्यमंत्री के तौर पर योगी आदित्यनाथ ने शपथ ली थी। भाजपा ने चुनाव में बड़े वादे किए थे। जनता ने भाजपा को अपार जनादेश देकर कुर्सी सौपी थी। लेकिन 3 महीने की योगी सरकार में जनता को किसी तरह की कोई राहत अभी तक जमीनी हकीकत पर उतरती नहीं दिखी है।
नई दिल्ली। दो हज़ार सत्रह विधान सभा चुनाव के दौरान भाजपा ने उत्तर प्रदेश के लिए नारा दिया था कि गुण्डाराज ना भ्रष्ट्राचार अबकी बार भाजपा सरकार , चुनाव हुआ जनता ने समाजवादी सरकार को नकार दिया जनमत ही नहीं अपार बहुमत दिया। भाजपा ने योगी आदित्यनाथ के तौर पर उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया। प्रदेश में पूर्ववर्ती सरकार में जनता के धन का दुर्पयोग करने के मामले को लेकर और प्रदेश में व्याप्त अपराध को खत्म कराना योगी की प्रमुख जिम्मेदारी थी। सत्ता आते ही योगी ने अपने सम्बोधन में साफ कहा था कि सूबे में माफियाराज और गुण्डाराज नहीं चलेगा। लेकिन तीन महीने की सरकार के कार्यकाल में अपराधिय़ों ने सरकार के साथ जनता की नाक में दम कर दिया है। सरकार भले ही चुस्त कानून व्यवस्था करने के वादे करे दावे करे लेकिन वर्तमान समय में तीन महीने सरकार के निकल गये हैं। लेकिन अभी तक कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार के हालात अभी भी काबू में नहीं हैं। सूबे की योगी सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर लाख दावे और वादे करे। लेकिन जमीनी हकीकत है कि अभी तक वह सारे वादे और दावों से खोखले साबित हो रहे हैं। बीते चौदह अप्रैल से सूबे का सहारनपुर सुलग रहा है। आग अब जाकर ठंड़ी होती दिख रही है। लेकिन इस दौरान मथुरा, आगरा, सीतापुर और इलाहाबाद में सरेआम अपराधियों का कहर देखने को मिला है। बात इतने पर ना रूकी जेवर, बुलंदशहर,रामपुर और सूबे की राजधानी लखनऊ के दामन पर बलात्कार का बदनुमा दाग भी लगा है। इसके साथ ही पूरे सूबे में कानून-व्यवस्था को लेकर जमकर माखौल उड़ाया गया है। पूर्ववर्ती सरकार को कामों को लेकर चुनाव के दौरान भाजपा ने जमकर किसानों से लेकर आम जनता का विरोधी करार दिया था। चुनाव के पहले योजनाओं का भंडार लगाने की बात कही थी। लेकिन सत्ता आते ही सारे वारे रफ्फू हो ंगये। सरकार तो सरकार अधिकारी थी साहब बन गये। सरकार ने साठ दिनों में सूबे की सड़को को सही करने का काम दिया था। एक सौ दिन बीत गये सड़क वहीं है। बस बदली केवल सरकार है। जब योगी सत्ता में आये तो विभागों की जांच शुरू हुई। उस वक्त लगा की काम की रफ्तार तेज होगी लेकिन सौ दिन चले ढाई कोस ही रफ्तार रही । सरकार सुचिता की बात करती है। लेकिन सत्ता के मद मे चूर विधायक से लेकर मंत्री तक के कई कारनामे आये दिन योगी सरकार की साख पर बट्टा लगा देते हैं। वाकिए की शुरूआत सीएम योगी के गृह जनपद गोरखपुर से होती है। जहां विधायक जी का एक महिला पुलिस अधिकारी को हिदायत देने का अंदाज साफ बता रहा था, कि विधायक जी पर सत्ता का नशा जमकर बोल रहा है। फिर महिला कल्याण मंत्री स्वाती सिंह का बीयर बार के उद्घाटन समारोह में जाकर फीता काटना। इसके बाद इन्ही का प्रसाद में सौ रूपये बटना। हांलाकि मंत्री जी ने इस पर अपनी सफाई दे दी है। लेकिन सरकार क्या करे। विकास के कार्यों से जुड़ी योजनाएं लागू होने में देरी की वजह योगी सरकार का प्रशासनिक ढांचा है। जिन अधिकारियों के दम पर योगी सूबे की तस्वीर बदलने निकले हैं। वे अधिकारी अभी तक अपने विभाग में इसी समस्या में उलझे हैं। मंत्री की सुने की सीएम की अगर सीएम की तो किसी क्योंकि एक सूबे में दो डिप्टी सीएम है एक सीएम योजनाओं को लेकर एक दो वैसे भी सरकार के पास फूटी कौड़ी बची नहीं है। फिर किसानों के कर्ज के लिए धन आवंटन की बात कह योगी सरकार ने योजनाओं को और पीछे कर दिया है। अधिकारियों के पास योजनाओं का कोई कार्यक्रम मौजूद नहीं है। योगी सरकार के तीन महीने के कार्यकाल पर अगर नजर डालें तो परिणाम ंशून्य ही मिल रहा है। उन्नीस मार्च को सूबे के मुख्यमंत्री के तौर पर योगी आदित्यनाथ ने शपथ ली थी। भाजपा ने चुनाव में बड़े वादे किए थे। जनता ने भाजपा को अपार जनादेश देकर कुर्सी सौपी थी। लेकिन तीन महीने की योगी सरकार में जनता को किसी तरह की कोई राहत अभी तक जमीनी हकीकत पर उतरती नहीं दिखी है।
सागर की रहली विधानसभा सीट ऐसी जगह है जहां से पिछले 35 साल से बीजेपी के गोपाल भाग्रव जीतते आ रहे हैं. वो अविजित तो बने ही हुए हैं, ख़ास बात ये है कि वो खुद सवर्ण समाज से हैं लेकिन उन्हें ओबीसी मतदाता जिताते हैं. प्रत्याशी गोपाल भार्गव रहली से सात बार से विधायक हैं. बीते 35साल से इस सीट पर उनका दबदबा है. रहली क्षेत्र में कुर्मी पटेल वोटर्स 35हजार से ज़्यादा हैं और ब्राह्मण मतदाता सिर्फ 10 हज़ार हैं. यानि बात साफ है कि भार्गव की जीत में कुर्मी मतदाताओं की मुख्य भूमिका है. पटेलों का गढ़ होने के बाद भी ब्राह्मण प्रत्याशी कांग्रेस पर भारी साबित हो रहा है. गोपाल भार्गव को टक्कर देने के लिए विरोधी यहां से पटेल प्रत्याशी उतारता है लेकिन भार्गव का दबदबा ख़त्म नहीं होता. पटेल समाज के भरत चौधरी, विष्णु पटेल, जीवन पटेल, 2008 में फिर से जीवन पटेल और पलटू राम को हार झेलनी पड़ी थी. रहली विधान सभा क्षेत्र में भले ही पटेल समुदाय के 35 हजार वोटर्स हैं, लेकिन समाज में गुटबाज़ी के कारण कुर्मी-पटेल उम्मीदवार जीत से दूर रहते हैं. पटेल समाज के प्रत्याशी सिर्फ चुनाव के समय सक्रिय होते हैं इसलिए वो जनता का भरोसा नहीं जीत पाते हैं. रहली में कुल 2 लाख 20 हजार337 मतदाता हैं. इनमें से पुरुष मतदाता-एक लाख 16 हजार 720 और महिता मतदाता 1 लाख 3 हजार 615 हैं. थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या 02 है. इस बार कांग्रेस से ज्योति पटेल दावेदारी ठोक रही हैं. पिछले चुनाव में गोपाल भार्गव के विरोध में खड़े होने वाले कांग्रेस प्रत्याशी जीवन पटेल खुद ज्योति पटेल के विरोध में हैं. जीवन पटेल कमलेश साहू का समर्थन कर रहे हैं. ज़ाहिर है वोट फिर बटेंगे. 2013 के चुनाव में गोपाल भार्गव को 101899 वोट और कांग्रेस के बृजबिहारी पटैरिया को 50134 मिले थे. बीएसपी तीसरे नंबर पर थी. कृष्णकुमार पांडे सिर्फ 1728 वोट हासिल कर पाए थे. इतने लंबे समय से गोपाल भार्गव यहां का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं बावजूद इसके रहली का विकास नहीं हुआ. यहां एक भी उद्योग नहीं है. पानी की बेहद किल्लत है और रोज़गार की तलाश में पलायन बड़ी समस्या है. इन मुद्दों को कांग्रेस भुना सकती है. लेकिन कमज़ोर रणनीति और गुटबाज़ी उसे हरा देती है. .
सागर की रहली विधानसभा सीट ऐसी जगह है जहां से पिछले पैंतीस साल से बीजेपी के गोपाल भाग्रव जीतते आ रहे हैं. वो अविजित तो बने ही हुए हैं, ख़ास बात ये है कि वो खुद सवर्ण समाज से हैं लेकिन उन्हें ओबीसी मतदाता जिताते हैं. प्रत्याशी गोपाल भार्गव रहली से सात बार से विधायक हैं. बीते पैंतीससाल से इस सीट पर उनका दबदबा है. रहली क्षेत्र में कुर्मी पटेल वोटर्स पैंतीसहजार से ज़्यादा हैं और ब्राह्मण मतदाता सिर्फ दस हज़ार हैं. यानि बात साफ है कि भार्गव की जीत में कुर्मी मतदाताओं की मुख्य भूमिका है. पटेलों का गढ़ होने के बाद भी ब्राह्मण प्रत्याशी कांग्रेस पर भारी साबित हो रहा है. गोपाल भार्गव को टक्कर देने के लिए विरोधी यहां से पटेल प्रत्याशी उतारता है लेकिन भार्गव का दबदबा ख़त्म नहीं होता. पटेल समाज के भरत चौधरी, विष्णु पटेल, जीवन पटेल, दो हज़ार आठ में फिर से जीवन पटेल और पलटू राम को हार झेलनी पड़ी थी. रहली विधान सभा क्षेत्र में भले ही पटेल समुदाय के पैंतीस हजार वोटर्स हैं, लेकिन समाज में गुटबाज़ी के कारण कुर्मी-पटेल उम्मीदवार जीत से दूर रहते हैं. पटेल समाज के प्रत्याशी सिर्फ चुनाव के समय सक्रिय होते हैं इसलिए वो जनता का भरोसा नहीं जीत पाते हैं. रहली में कुल दो लाख बीस हजारतीन सौ सैंतीस मतदाता हैं. इनमें से पुरुष मतदाता-एक लाख सोलह हजार सात सौ बीस और महिता मतदाता एक लाख तीन हजार छः सौ पंद्रह हैं. थर्ड जेंडर मतदाताओं की संख्या दो है. इस बार कांग्रेस से ज्योति पटेल दावेदारी ठोक रही हैं. पिछले चुनाव में गोपाल भार्गव के विरोध में खड़े होने वाले कांग्रेस प्रत्याशी जीवन पटेल खुद ज्योति पटेल के विरोध में हैं. जीवन पटेल कमलेश साहू का समर्थन कर रहे हैं. ज़ाहिर है वोट फिर बटेंगे. दो हज़ार तेरह के चुनाव में गोपाल भार्गव को एक लाख एक हज़ार आठ सौ निन्यानवे वोट और कांग्रेस के बृजबिहारी पटैरिया को पचास हज़ार एक सौ चौंतीस मिले थे. बीएसपी तीसरे नंबर पर थी. कृष्णकुमार पांडे सिर्फ एक हज़ार सात सौ अट्ठाईस वोट हासिल कर पाए थे. इतने लंबे समय से गोपाल भार्गव यहां का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं बावजूद इसके रहली का विकास नहीं हुआ. यहां एक भी उद्योग नहीं है. पानी की बेहद किल्लत है और रोज़गार की तलाश में पलायन बड़ी समस्या है. इन मुद्दों को कांग्रेस भुना सकती है. लेकिन कमज़ोर रणनीति और गुटबाज़ी उसे हरा देती है. .
एक बार फिर से नई मैगी करोड़ों लोगों का पेट महज दो मिनट में भरने के लिए तैयार है. लिहाजा इस बात की गारंटी दी जानी चाहिए कि पुरानी मैगी की गंदगी नई मैगी के नीचे नहीं दबी है. भारत में नेस्ले की बहुचर्चित ब्रांड मैगी का पुनर्जन्म हो चुका है. दीपावली के शुभ मौके पर जहां एक तरफ पटाखों की गूंज के साथ देश में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा था वहीं ऑनलाइन रीटेलर स्नैपडील पर नई मैगी की रिकॉर्ड सेल के साथ वापसी हो रही थी. जी हां, महज 5 मिनट में नई मैगी के 60,000 पैकेट बिक गए. अब बच्चे हो या बड़े, दीपावली पर खुशी दोगुनी हो गई क्योंकि सभी का 'दो मिनट' का यह साथी उनकी भूख मिटाने के लिए तैयार है. मई में 'दो मिनट' के इस साथी को खाने के लिए असुरक्षित पाया गया और 5 जून को इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. इस आरोप के बाद नेस्ले ने बाजार में बिकने के लिए रखी 350 करोड़ रुपये लागत की 30 टन मैगी को नष्ट कर दिया था. ब्रांड मैगी को इससे भी बड़ा झटका लगा क्योंकि पिछले तीन दशकों में मैगी ने देश के 80 फीसदी नूडल बाजार पर कब्जा कर रखा था. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि देश के फूड प्रोडक्ट्स की जांच एजेंसियों ने मुंबई हाईकोर्ट में दावा किया कि मैगी में खतरे के स्तर से ज्यादा लेड की मात्रा पाई गई है. इसके साथ ही स्वाद को बेहतर करने के लिए इसमे मोनोसोडियम ग्लूटामेट की मात्रा भी पाई गई जबकि इसके पैकेट पर इस केमिकल का कोई जिक्र नहीं था. ये दोनों केमिकल दुनियाभर में इंसानों की मौत के लिए बड़े स्तर पर जिम्मेदार रही हैं. लगभग डेढ़ लाख लोग हर साल इन केमिकल्स के प्रदूषण से मारे जा रहे हैं. लिहाजा, मैगी पर आरोप संगीन था. लेकिन सितंबर आते-आते देश ही नहीं दुनियाभर से जांच की रिपोर्ट मैगी को इन आरोपों से बरी करती गई. लोगों की एक बार फिर उम्मीद जगने लगी कि मैगी वापस आएगी. हुआ भी ऐसा. सितंबर में मुंबई की अदालत ने भी मैगी को सुरक्षित पाया. इसके बाद कंपनी ने नई मैगी को लांच करने के लिए दीपावली के शुभ अवसर को चुना. अब नवंबर में नई मैगी तो लांच हो गई. लेकिन आरोप लगाने वाले अदालत के फैसले के बाद चुप हैं. ब्रांड को दोबारा बाजार में जगह दिलाने के लिए मैगी भी चुप है. लेकिन क्या मेगी के फैन्स को भी चुप रहना चाहिए? देश की अदालत, जांच एजेंसियों और स्वास्थ विभागों को पिछले 6 महीनें में मैगी के खिलाफ हुई जांच से लेकर उसे ग्रीन सिग्नल दिए जाने तक का पूरा ब्यौरा (व्हाइट पेपर) सरल भाषा में उपभोक्ताओं के सामने रखना चाहिए. आखिर मैगी में लेड और मोनोसोडियम ग्लूटामेट की मात्रा शुरुआती परीक्षण में खतरे के स्तर के ऊपर कैसे पाया गया? अगर शुरुआती परीक्षण के तरीके में कोई में कोई वैज्ञानिक त्रुटि थी तो जांच एजेंसियों ने इसे सुधारने के लिए क्या किया? स्वास्थ विभाग ने पिछली जांच पर प्रतिबंध लगाना जरूरी समझा तो क्या अब वह पूरी तरह आश्वस्त है कि नई मैगी पर आरोप नहीं लगेगा? अगर पिछले छह महीने का पूरा प्रकरण किसी गलती का नतीजा था तो वह गलती किसकी थी, किसी फूड इंस्पेक्टर की, किसी विरोधी कंपनी की, मैन्यूफैक्चरिंग में इस्तेमाल हो रहे पानी की या कुछ और? इन सवालों के जबाव दो बातों के लिए जानना जरूरी है. पहला, एक बार फिर से मैगी करोड़ों लोगों का पेट महज दो मिनट में भरने के लिए तैयार है. लिहाजा, अब इसमें खतरा न होने की गारंटी मिलनी चाहिए. दूसरा, अगर किसी मल्टीनैशनल कॉरपोरेट के ब्रांड के साथ कोई साजिश हुई तो क्या वह खामियाजा नहीं मांगेगा. आखिर इस सवाल पर नेस्ले क्यों चुप है?
एक बार फिर से नई मैगी करोड़ों लोगों का पेट महज दो मिनट में भरने के लिए तैयार है. लिहाजा इस बात की गारंटी दी जानी चाहिए कि पुरानी मैगी की गंदगी नई मैगी के नीचे नहीं दबी है. भारत में नेस्ले की बहुचर्चित ब्रांड मैगी का पुनर्जन्म हो चुका है. दीपावली के शुभ मौके पर जहां एक तरफ पटाखों की गूंज के साथ देश में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा था वहीं ऑनलाइन रीटेलर स्नैपडील पर नई मैगी की रिकॉर्ड सेल के साथ वापसी हो रही थी. जी हां, महज पाँच मिनट में नई मैगी के साठ,शून्य पैकेट बिक गए. अब बच्चे हो या बड़े, दीपावली पर खुशी दोगुनी हो गई क्योंकि सभी का 'दो मिनट' का यह साथी उनकी भूख मिटाने के लिए तैयार है. मई में 'दो मिनट' के इस साथी को खाने के लिए असुरक्षित पाया गया और पाँच जून को इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. इस आरोप के बाद नेस्ले ने बाजार में बिकने के लिए रखी तीन सौ पचास करोड़ रुपये लागत की तीस टन मैगी को नष्ट कर दिया था. ब्रांड मैगी को इससे भी बड़ा झटका लगा क्योंकि पिछले तीन दशकों में मैगी ने देश के अस्सी फीसदी नूडल बाजार पर कब्जा कर रखा था. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि देश के फूड प्रोडक्ट्स की जांच एजेंसियों ने मुंबई हाईकोर्ट में दावा किया कि मैगी में खतरे के स्तर से ज्यादा लेड की मात्रा पाई गई है. इसके साथ ही स्वाद को बेहतर करने के लिए इसमे मोनोसोडियम ग्लूटामेट की मात्रा भी पाई गई जबकि इसके पैकेट पर इस केमिकल का कोई जिक्र नहीं था. ये दोनों केमिकल दुनियाभर में इंसानों की मौत के लिए बड़े स्तर पर जिम्मेदार रही हैं. लगभग डेढ़ लाख लोग हर साल इन केमिकल्स के प्रदूषण से मारे जा रहे हैं. लिहाजा, मैगी पर आरोप संगीन था. लेकिन सितंबर आते-आते देश ही नहीं दुनियाभर से जांच की रिपोर्ट मैगी को इन आरोपों से बरी करती गई. लोगों की एक बार फिर उम्मीद जगने लगी कि मैगी वापस आएगी. हुआ भी ऐसा. सितंबर में मुंबई की अदालत ने भी मैगी को सुरक्षित पाया. इसके बाद कंपनी ने नई मैगी को लांच करने के लिए दीपावली के शुभ अवसर को चुना. अब नवंबर में नई मैगी तो लांच हो गई. लेकिन आरोप लगाने वाले अदालत के फैसले के बाद चुप हैं. ब्रांड को दोबारा बाजार में जगह दिलाने के लिए मैगी भी चुप है. लेकिन क्या मेगी के फैन्स को भी चुप रहना चाहिए? देश की अदालत, जांच एजेंसियों और स्वास्थ विभागों को पिछले छः महीनें में मैगी के खिलाफ हुई जांच से लेकर उसे ग्रीन सिग्नल दिए जाने तक का पूरा ब्यौरा सरल भाषा में उपभोक्ताओं के सामने रखना चाहिए. आखिर मैगी में लेड और मोनोसोडियम ग्लूटामेट की मात्रा शुरुआती परीक्षण में खतरे के स्तर के ऊपर कैसे पाया गया? अगर शुरुआती परीक्षण के तरीके में कोई में कोई वैज्ञानिक त्रुटि थी तो जांच एजेंसियों ने इसे सुधारने के लिए क्या किया? स्वास्थ विभाग ने पिछली जांच पर प्रतिबंध लगाना जरूरी समझा तो क्या अब वह पूरी तरह आश्वस्त है कि नई मैगी पर आरोप नहीं लगेगा? अगर पिछले छह महीने का पूरा प्रकरण किसी गलती का नतीजा था तो वह गलती किसकी थी, किसी फूड इंस्पेक्टर की, किसी विरोधी कंपनी की, मैन्यूफैक्चरिंग में इस्तेमाल हो रहे पानी की या कुछ और? इन सवालों के जबाव दो बातों के लिए जानना जरूरी है. पहला, एक बार फिर से मैगी करोड़ों लोगों का पेट महज दो मिनट में भरने के लिए तैयार है. लिहाजा, अब इसमें खतरा न होने की गारंटी मिलनी चाहिए. दूसरा, अगर किसी मल्टीनैशनल कॉरपोरेट के ब्रांड के साथ कोई साजिश हुई तो क्या वह खामियाजा नहीं मांगेगा. आखिर इस सवाल पर नेस्ले क्यों चुप है?
पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में आज भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक जारी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को दिल्ली आ रहे हैं। इस दौरे के दौरान योगी के कई कार्यक्रम हैं। देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आज 73वीं जयंती है। इस मौके पर पूरे गांधी परिवार ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुजफ्फरनगर में हुए ट्रेन एक्सीडेंट के बाद लोगों में गुस्सा व्याप्त है। लोग सरकार और रेल मंत्री सुरेश प्रभु से सवाल पूछ रहे हैं। पुरी से हरिद्वार जा रही उत्कल-कलिंग एक्सप्रेस की लगभग 7 बोगियां पटरी से उतर गई। इस हादसे में 23 लोगों की मौत हो गई जबकि 115 लोग घायल हुए हैं।
पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में आज भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक जारी है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को दिल्ली आ रहे हैं। इस दौरे के दौरान योगी के कई कार्यक्रम हैं। देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आज तिहत्तरवीं जयंती है। इस मौके पर पूरे गांधी परिवार ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मुजफ्फरनगर में हुए ट्रेन एक्सीडेंट के बाद लोगों में गुस्सा व्याप्त है। लोग सरकार और रेल मंत्री सुरेश प्रभु से सवाल पूछ रहे हैं। पुरी से हरिद्वार जा रही उत्कल-कलिंग एक्सप्रेस की लगभग सात बोगियां पटरी से उतर गई। इस हादसे में तेईस लोगों की मौत हो गई जबकि एक सौ पंद्रह लोग घायल हुए हैं।
4 की उप-धारा 1 में निर्धारित 17 मदों (नियमावली) को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा 22 सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन (513.49 KB)
चार की उप-धारा एक में निर्धारित सत्रह मदों को प्रकाशित करना होगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में निम्नलिखित विभाग शामिल हैंः स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय चिकित्सा और जन स्वास्थ्य मामलों को देखता है जिसमें औषध नियंत्रण और खाद्य में मिलावट की रोकथाम शामिल है जिसका उद्देश्य आर्थिक विकास, सामाजिक विकास और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकताओं के अनुरूप जनसंख्या स्थिरीकरण करना है। विभाग में विभिन्न स्तरों पर कार्य का संचालन, कार्य संचालन नियमों और समय-समय पर जारी अन्य सरकारी आदेशों / अनुदेशों के अनुसार किया जाता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की कार्यालय पद्धति निर्देशिका, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नियमों / विनियमों / अनुदेशों आदि का अनुपालन करता है। किसी व्यवस्था की विशिष्टियां, जो उसकी नीति की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विद्यमान हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में एक केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद है जिसमें राज्य सरकारों / केन्द्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्री, सांसद, स्वास्थ्य संगठनों और सार्वजनिक निकायों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-सरकारी अधिकारी और कुछ प्रख्यात व्यक्ति शामिल हैं। यह केन्द्र और राज्यों के लिए नीति की व्यापक रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए अपने सभी पहलुओं में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के क्षेत्र में शीर्ष नीति निर्माण निकाय है। - ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों के, जिनमें दो या अधिक व्यक्ति हैं, जिनका उसके भाग के रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है और इस बारे में कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितियों और अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण में अध्यक्ष के अलावा बाईस सदस्य हैं। एफएसएसएआई के कार्यवृत्त को समय-समय पर वेबसाइट अर्थात् Fssai.gov.in पर अपलोड किया जाता है। - सूचना का अधिकार अधिनियम दो हज़ार पाँच के तहत नोडल अधिकारी का नामांकन
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हैरान कर देनी वाली घटना हुई है. यहां पर कुत्ते के भौंकने को लेकर दो परिवारों में झगड़ा हो गया. बात मारपटी तक जा पहुंची और इसी झड़प में 50 साल की महिला की हत्या कर दी गई. वहीं, मृतक महिला के परिवार के पांच लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं. घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. कुल तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है. फिलहाल एक आरोपी फरार बताया जा रहा है. बलिया के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्गा प्रसाद तिवारी ने बताया कि बैरिया थाना क्षेत्र के एक गांव में कुत्ते के भौंकने को दो परिवारों के बीच विवाद हो गया था. इस विवाद में 50 साल की लाल मुनि की हत्या कर दी गई. उनके परिवार के पांच लोगों को गंभीर घायल किया गया है. पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि पीड़ित परिवार आवारा कुत्तों को खाना खिलाता था. मंगलवार की रात जब लाल मुनि आरोपी परिवार के घर के पास से गुजर रही थी, तो कुत्ते ने उन पर भौंकना शुरू कर दिया. जब मुनि ने इसकी शिकायत उन लोगों से की, तो वे भड़क गए. इसके बाद मुनि के परिवार और आरोपी के परिवार के लोग एक-दूसरे को गालियां बकने लगे. दोनों पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि उनके बीच मारपीट होने लगी. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्गा प्रसाद तिवारी ने आगे बताया कि लाल मुनि और उनके परिवार पर आरोपी पक्ष के लोगों ने लाठी-डंडे से हमला कर दिया. इस दौरान लाल मुनि और उनके परिवार के पांच सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए. परिवार के लोग गंभीर अवस्था में लाल मुनि को लेकर अस्पताल ले गए. वहां इलाज के दौरान लाल मुनि की मौत हो गई. उसके परिवार के अन्य घायल लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्गा प्रसाद तिवारी के मुताबिक, मृतक लाल मुनि के बेटे की शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए शिव सागर बिंद और उनके बेटे अजीत को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं, एक आरोपी फरार है. उसकी तलाश की जा रही है.
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हैरान कर देनी वाली घटना हुई है. यहां पर कुत्ते के भौंकने को लेकर दो परिवारों में झगड़ा हो गया. बात मारपटी तक जा पहुंची और इसी झड़प में पचास साल की महिला की हत्या कर दी गई. वहीं, मृतक महिला के परिवार के पांच लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं. घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. कुल तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है. फिलहाल एक आरोपी फरार बताया जा रहा है. बलिया के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्गा प्रसाद तिवारी ने बताया कि बैरिया थाना क्षेत्र के एक गांव में कुत्ते के भौंकने को दो परिवारों के बीच विवाद हो गया था. इस विवाद में पचास साल की लाल मुनि की हत्या कर दी गई. उनके परिवार के पांच लोगों को गंभीर घायल किया गया है. पुलिस की पूछताछ में सामने आया है कि पीड़ित परिवार आवारा कुत्तों को खाना खिलाता था. मंगलवार की रात जब लाल मुनि आरोपी परिवार के घर के पास से गुजर रही थी, तो कुत्ते ने उन पर भौंकना शुरू कर दिया. जब मुनि ने इसकी शिकायत उन लोगों से की, तो वे भड़क गए. इसके बाद मुनि के परिवार और आरोपी के परिवार के लोग एक-दूसरे को गालियां बकने लगे. दोनों पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि उनके बीच मारपीट होने लगी. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्गा प्रसाद तिवारी ने आगे बताया कि लाल मुनि और उनके परिवार पर आरोपी पक्ष के लोगों ने लाठी-डंडे से हमला कर दिया. इस दौरान लाल मुनि और उनके परिवार के पांच सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए. परिवार के लोग गंभीर अवस्था में लाल मुनि को लेकर अस्पताल ले गए. वहां इलाज के दौरान लाल मुनि की मौत हो गई. उसके परिवार के अन्य घायल लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दुर्गा प्रसाद तिवारी के मुताबिक, मृतक लाल मुनि के बेटे की शिकायत पर तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए शिव सागर बिंद और उनके बेटे अजीत को गिरफ्तार कर लिया है. वहीं, एक आरोपी फरार है. उसकी तलाश की जा रही है.
छपरा न्यूज़ः इंटरमीडिएट की परीक्षा के दूसरे दिन सुबह नौ बजे ही परीक्षार्थी कुछ केंद्रों के बाहर नकल करते दिखे। पूछताछ करने पर पता चला कि प्रश्नपत्र लीक हो गया है। जिसे प्रशासन ने फर्जी करार दिया है। परीक्षार्थियों ने जिस प्रश्नपत्र को हल कर लिया था, वह सही था या गलत, इसका कोई प्रमाण नहीं मिला है। इसकी न तो उच्च स्तर पर जांच हुई और न ही पकड़ा गया। यह नजारा शहर से दूर तपेश्वर सिंह कॉलेज के कैंपस के बाहर का है। जहां परीक्षा कक्ष में जाने से पहले परीक्षार्थी कथित वायरल प्रश्न पत्र को हल कर नकल कर रहे थे. नकल कराने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ जिला प्रशासन सख्त था। दूसरे दिन प्रथम पाली की परीक्षा में कुल 14 परीक्षार्थियों को विभिन्न परीक्षा केंद्रों से नकल करते पकड़े जाने पर परीक्षा से निष्कासित कर दिया गया. पहली पाली में ही सभी का निष्कासन जिला मुख्यालय स्थित परीक्षा केंद्रों से कर दिया गया। जिसमें आरएन सिंह इवनिंग कॉलेज छपरा से 5, सीक्रेट हार्ट मिशन स्कूल से 4, एएनडी स्कूल से 2, इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, सीपीएस, भागवत विद्यापीठ, राजेंद्र कॉलेजिएट व होली फैमिली स्कूल से 1-1 परीक्षार्थियों को नकल के आरोप में निष्कासित कर दिया गया. गुरुवार को पहली बैठक में कुल 40 हजार 346 परीक्षार्थी शामिल हुए, जबकि पहली बैठक में 497 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे. दूसरी पाली की परीक्षा में 19 हजार 554 परीक्षार्थी शामिल हुए। इंटरमीडिएट परीक्षा में 100 वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में से अभ्यर्थी को केवल 50 प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। यदि आप 50 से अधिक प्रश्नों का प्रयास करते हैं, तो केवल पहले 50 प्रश्नों के उत्तरों का मूल्यांकन किया जाएगा। 2 अंक वाले प्रश्न में भी आपको दिए गए निर्देशों के अनुसार उत्तर देना है। यदि कोई छात्र निर्धारित संख्या से अधिक प्रश्नों का उत्तर देता है, तो भी मूल्यांकन शुरू से ही गिना जाएगा। इसको लेकर बीएसईबी पहले ही निर्देश जारी कर चुका है।
छपरा न्यूज़ः इंटरमीडिएट की परीक्षा के दूसरे दिन सुबह नौ बजे ही परीक्षार्थी कुछ केंद्रों के बाहर नकल करते दिखे। पूछताछ करने पर पता चला कि प्रश्नपत्र लीक हो गया है। जिसे प्रशासन ने फर्जी करार दिया है। परीक्षार्थियों ने जिस प्रश्नपत्र को हल कर लिया था, वह सही था या गलत, इसका कोई प्रमाण नहीं मिला है। इसकी न तो उच्च स्तर पर जांच हुई और न ही पकड़ा गया। यह नजारा शहर से दूर तपेश्वर सिंह कॉलेज के कैंपस के बाहर का है। जहां परीक्षा कक्ष में जाने से पहले परीक्षार्थी कथित वायरल प्रश्न पत्र को हल कर नकल कर रहे थे. नकल कराने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ जिला प्रशासन सख्त था। दूसरे दिन प्रथम पाली की परीक्षा में कुल चौदह परीक्षार्थियों को विभिन्न परीक्षा केंद्रों से नकल करते पकड़े जाने पर परीक्षा से निष्कासित कर दिया गया. पहली पाली में ही सभी का निष्कासन जिला मुख्यालय स्थित परीक्षा केंद्रों से कर दिया गया। जिसमें आरएन सिंह इवनिंग कॉलेज छपरा से पाँच, सीक्रेट हार्ट मिशन स्कूल से चार, एएनडी स्कूल से दो, इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, सीपीएस, भागवत विद्यापीठ, राजेंद्र कॉलेजिएट व होली फैमिली स्कूल से एक-एक परीक्षार्थियों को नकल के आरोप में निष्कासित कर दिया गया. गुरुवार को पहली बैठक में कुल चालीस हजार तीन सौ छियालीस परीक्षार्थी शामिल हुए, जबकि पहली बैठक में चार सौ सत्तानवे परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे. दूसरी पाली की परीक्षा में उन्नीस हजार पाँच सौ चौवन परीक्षार्थी शामिल हुए। इंटरमीडिएट परीक्षा में एक सौ वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में से अभ्यर्थी को केवल पचास प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं। यदि आप पचास से अधिक प्रश्नों का प्रयास करते हैं, तो केवल पहले पचास प्रश्नों के उत्तरों का मूल्यांकन किया जाएगा। दो अंक वाले प्रश्न में भी आपको दिए गए निर्देशों के अनुसार उत्तर देना है। यदि कोई छात्र निर्धारित संख्या से अधिक प्रश्नों का उत्तर देता है, तो भी मूल्यांकन शुरू से ही गिना जाएगा। इसको लेकर बीएसईबी पहले ही निर्देश जारी कर चुका है।
Farmers Transformer Subsidy In Hindi, Farmers Transformer Subsidy Scheme In Hindi: अगर आप किसान हैं और आपके खेत में बिजली विभाग ने खम्मा गाड़ रखा है या फिर डीपी लगा रखी है तो आपको नियमानुसार कुछ पैसे दिए जाने चाहिए। जानकारी के अनुसार इसके लिए बिजली विभाग (Farmers Transformer Subsidy Kya Hai) में कुछ नियम निर्धारित हैं। लेकिन किसानों को इसकी जानकारी न होने की वजह से लाभ नहीं मिल रहा है। आइए बिजली विभाग के कुछ नियमों के बारे में जानकारी प्राप्त करें। जानकारी के अनुसार अगर आप के खेत में खंभा लगा हुआ है तो किसानों को विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 57 के तहत अधिकार दिए गए हैं। इस अधिनियम के तहत किसानों के खेत में अगर खम्भा लगा हुआ है तो फिर उसके लिए कंपनी को कुछ राशि देनी होती है। ऐसा नियम में निर्धारित किया गया है। लेकिन इसके लिए सबसे बड़ी बात यह है कि आवेदन के समय आपसे कंपनी कुछ सर्त निर्धारित करती है। अगर आपने एनओसी दे रखा है तो कई वह सुविधा आपको प्राप्त नहीं होंगे। किसान के द्वारा कनेक्शन के लिए आवेदन किया गया है तो यहां कनेक्शन के साथ को 30 दिन के भीतर प्राप्त हो जाना चाहिए। अगर कंपनी आवेदन के 30 दिन के भीतर कनेक्शन नहीं दे रही है तो प्रति सप्ताह 100 रुपए मुआवजा देना होगा। कहा गया है कि अगर ट्रांसफार्मर में गड़बड़ी आने पर बिजली कंपनी 48 घंटे के अंदर सुधार नहीं करती है तो 50 रुपए देने होंगे।
Farmers Transformer Subsidy In Hindi, Farmers Transformer Subsidy Scheme In Hindi: अगर आप किसान हैं और आपके खेत में बिजली विभाग ने खम्मा गाड़ रखा है या फिर डीपी लगा रखी है तो आपको नियमानुसार कुछ पैसे दिए जाने चाहिए। जानकारी के अनुसार इसके लिए बिजली विभाग में कुछ नियम निर्धारित हैं। लेकिन किसानों को इसकी जानकारी न होने की वजह से लाभ नहीं मिल रहा है। आइए बिजली विभाग के कुछ नियमों के बारे में जानकारी प्राप्त करें। जानकारी के अनुसार अगर आप के खेत में खंभा लगा हुआ है तो किसानों को विद्युत अधिनियम दो हज़ार तीन की धारा सत्तावन के तहत अधिकार दिए गए हैं। इस अधिनियम के तहत किसानों के खेत में अगर खम्भा लगा हुआ है तो फिर उसके लिए कंपनी को कुछ राशि देनी होती है। ऐसा नियम में निर्धारित किया गया है। लेकिन इसके लिए सबसे बड़ी बात यह है कि आवेदन के समय आपसे कंपनी कुछ सर्त निर्धारित करती है। अगर आपने एनओसी दे रखा है तो कई वह सुविधा आपको प्राप्त नहीं होंगे। किसान के द्वारा कनेक्शन के लिए आवेदन किया गया है तो यहां कनेक्शन के साथ को तीस दिन के भीतर प्राप्त हो जाना चाहिए। अगर कंपनी आवेदन के तीस दिन के भीतर कनेक्शन नहीं दे रही है तो प्रति सप्ताह एक सौ रुपयापए मुआवजा देना होगा। कहा गया है कि अगर ट्रांसफार्मर में गड़बड़ी आने पर बिजली कंपनी अड़तालीस घंटाटे के अंदर सुधार नहीं करती है तो पचास रुपयापए देने होंगे।
अब लोगों का रुझान इलेक्ट्रिक गाड़ियों की तरफ बढ़ रहा है ताकि पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से छुटकारा पाया जा सके। इसी मांग को देखते हुए अब ओकाया ग्रुप ने Electric Two Wheeler सेगमेंट में कदम रखा है। नई दिल्ली। देश में महंगाई की मार से जूझ रहे आम आदमी की परेशानियां अभी खत्म होने वाली नहीं हैं। खासकर पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) की आसमान छूती कीमतों की बात करें तो ईंधन तेल के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर बने हुए हैं। तेल कंपनियों द्वारा आज की बढ़ोतरी के साथ ही दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ने सेंचुरी लगा दी है। ऐसे में अब लोगों का रुझान इलेक्ट्रिक गाड़ियों की तरफ बढ़ रहा है ताकि पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से छुटकारा पाया जा सके। इसी मांग को देखते हुए अब ओकाया ग्रुप ने Electric Two Wheeler सेगमेंट में कदम रखा है। Okaya Power Group के इलेक्ट्रिक वाहन डिवीजन, ओकाया ईवी ने 'इलेक्ट्रिक 2 व्हीलर्स' की एक श्रृंखला का अनावरण किया है। इसके अलावा, इसने दिल्ली और जयपुर में Experience Center शुरू किए हैं। कंपनी के 'इलेक्ट्रिक 2व्हीलर्स' चार वेरिएंट में दोनों 'वीआरएलए लीड एसिड बैटरी' और 'लिथियम आयरन फॉस्फेट' (LFP) बैटरी में उपलब्ध हैं। ओकाया पावर ग्रुप के प्रबंध निदेशक अनिल गुप्ता ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक टू व्हीलर्स की डिमांड आने वाले समय में और भी ज्यादा बढ़ने वाली है। इसी को देखते हुए कंपनी ने वाहन मार्किट में आने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, इन 'Electric Two Wheelers' की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए, हमारा लक्ष्य पूरे देश में शोरूम के साथ-साथ वितरण और सेवा केंद्र खोलना है। कंपनी ने इन अत्याधुनिक 'इलेक्ट्रिक टू व्हीलर' की निर्बाध आपूर्ति के लिए हरियाणा में एक और संयंत्र शुरू करने की अपनी योजना के साथ Himachal Pradesh के बद्दी में पहले ही एक विनिर्माण संयंत्र स्थापित कर लिया है। इसके अलावा 2023 से 2025 तक नीमराना में 34 एकड़ में फैले तीन और विनिर्माण संयंत्रों को लॉन्च करने की घोषणा की है।
अब लोगों का रुझान इलेक्ट्रिक गाड़ियों की तरफ बढ़ रहा है ताकि पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से छुटकारा पाया जा सके। इसी मांग को देखते हुए अब ओकाया ग्रुप ने Electric Two Wheeler सेगमेंट में कदम रखा है। नई दिल्ली। देश में महंगाई की मार से जूझ रहे आम आदमी की परेशानियां अभी खत्म होने वाली नहीं हैं। खासकर पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों की बात करें तो ईंधन तेल के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर बने हुए हैं। तेल कंपनियों द्वारा आज की बढ़ोतरी के साथ ही दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ने सेंचुरी लगा दी है। ऐसे में अब लोगों का रुझान इलेक्ट्रिक गाड़ियों की तरफ बढ़ रहा है ताकि पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से छुटकारा पाया जा सके। इसी मांग को देखते हुए अब ओकाया ग्रुप ने Electric Two Wheeler सेगमेंट में कदम रखा है। Okaya Power Group के इलेक्ट्रिक वाहन डिवीजन, ओकाया ईवी ने 'इलेक्ट्रिक दो व्हीलर्स' की एक श्रृंखला का अनावरण किया है। इसके अलावा, इसने दिल्ली और जयपुर में Experience Center शुरू किए हैं। कंपनी के 'इलेक्ट्रिक दोव्हीलर्स' चार वेरिएंट में दोनों 'वीआरएलए लीड एसिड बैटरी' और 'लिथियम आयरन फॉस्फेट' बैटरी में उपलब्ध हैं। ओकाया पावर ग्रुप के प्रबंध निदेशक अनिल गुप्ता ने कहा कि भारत में इलेक्ट्रिक टू व्हीलर्स की डिमांड आने वाले समय में और भी ज्यादा बढ़ने वाली है। इसी को देखते हुए कंपनी ने वाहन मार्किट में आने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, इन 'Electric Two Wheelers' की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए, हमारा लक्ष्य पूरे देश में शोरूम के साथ-साथ वितरण और सेवा केंद्र खोलना है। कंपनी ने इन अत्याधुनिक 'इलेक्ट्रिक टू व्हीलर' की निर्बाध आपूर्ति के लिए हरियाणा में एक और संयंत्र शुरू करने की अपनी योजना के साथ Himachal Pradesh के बद्दी में पहले ही एक विनिर्माण संयंत्र स्थापित कर लिया है। इसके अलावा दो हज़ार तेईस से दो हज़ार पच्चीस तक नीमराना में चौंतीस एकड़ में फैले तीन और विनिर्माण संयंत्रों को लॉन्च करने की घोषणा की है।
सबकुछ ठीकठाक रहा तो दो-तीनों बाद से जिले में ऑक्सीजन के अभाव में किसी की जान नहीं जायेगी। इसपर अंकुश लगने के पूरे आसार नजर आने लगे हैं। जिले में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए बुधवार को मशीनें जिला अस्पताल पहुंच गई। प्रधानमंत्री राहत कोष से दिल्ली से आई मशीनों को अस्पताल में रखवा दिया गया। अस्पताल प्रशासन को मशीन संचालित करने के लिए इंजीनियर का इंतजार है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले 48 घंटे बाद जिले में 'संजीवनी की भरमार हो जाएगी। अस्पताल में भर्ती प्रत्येक मरीज को पर्याप्त ऑक्सीजन के साथ ही विभिन्न अस्पतालों में भी इसे भेजने की व्यवस्था हो जाएगी। कोरोना के पहले दौर के समय ही अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की योजना शुरू हो गयी थी। करीब छह करोड़ लागत की इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए शासन ने ढाई करोड़ का बजट भी आवंटित कर दिये थे। इस धन से अस्पताल प्रशासन ने हर बेड पर ऑक्सीजन के पाइप बिछाने के साथ ही प्लांट लगाने के लिए भवन आदि का निर्माण करा लिया गया था, लेकिन बाद में बजट के अभाव में ऑक्सीजन प्लांट का काम अधर गया था। इसबीच पुनः कोरोना महामारी के पैर पसारने के साथ ही जिले में ऑक्सीजन का संकट गहरा गया और बढ़ते ऑक्सीजन संकट के बीच प्लांट की मांग भी जोर पकड़ने लगी। इस मुद्दे को लेकर एक ओर राजनीति होने लगी, वहीं दूसरी ओर ऑक्सीजन के अभाव में मरीज मरने लगे। इस मुद्दे को आपके अपने अखबार 'हिन्दुस्तान ने घंटी बजाओ अभियान के तहत प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर छपने के बाद आखिरकार शासन का ध्यान आकृष्ट हुआ और आखिरकार बुधवार को ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए पीएसए यूनिट (प्रेशर स्विंग ऐडजोरमेंट यूनिट) जिला अस्पताल में पहुंच गई। पीएसए यूनिट के आने से लोगों में ऑक्सीजन को लेकर आशा की किरण दिखाई दी है।
सबकुछ ठीकठाक रहा तो दो-तीनों बाद से जिले में ऑक्सीजन के अभाव में किसी की जान नहीं जायेगी। इसपर अंकुश लगने के पूरे आसार नजर आने लगे हैं। जिले में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए बुधवार को मशीनें जिला अस्पताल पहुंच गई। प्रधानमंत्री राहत कोष से दिल्ली से आई मशीनों को अस्पताल में रखवा दिया गया। अस्पताल प्रशासन को मशीन संचालित करने के लिए इंजीनियर का इंतजार है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले अड़तालीस घंटाटे बाद जिले में 'संजीवनी की भरमार हो जाएगी। अस्पताल में भर्ती प्रत्येक मरीज को पर्याप्त ऑक्सीजन के साथ ही विभिन्न अस्पतालों में भी इसे भेजने की व्यवस्था हो जाएगी। कोरोना के पहले दौर के समय ही अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की योजना शुरू हो गयी थी। करीब छह करोड़ लागत की इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए शासन ने ढाई करोड़ का बजट भी आवंटित कर दिये थे। इस धन से अस्पताल प्रशासन ने हर बेड पर ऑक्सीजन के पाइप बिछाने के साथ ही प्लांट लगाने के लिए भवन आदि का निर्माण करा लिया गया था, लेकिन बाद में बजट के अभाव में ऑक्सीजन प्लांट का काम अधर गया था। इसबीच पुनः कोरोना महामारी के पैर पसारने के साथ ही जिले में ऑक्सीजन का संकट गहरा गया और बढ़ते ऑक्सीजन संकट के बीच प्लांट की मांग भी जोर पकड़ने लगी। इस मुद्दे को लेकर एक ओर राजनीति होने लगी, वहीं दूसरी ओर ऑक्सीजन के अभाव में मरीज मरने लगे। इस मुद्दे को आपके अपने अखबार 'हिन्दुस्तान ने घंटी बजाओ अभियान के तहत प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर छपने के बाद आखिरकार शासन का ध्यान आकृष्ट हुआ और आखिरकार बुधवार को ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए पीएसए यूनिट जिला अस्पताल में पहुंच गई। पीएसए यूनिट के आने से लोगों में ऑक्सीजन को लेकर आशा की किरण दिखाई दी है।
पटना/लखनऊ। । जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने अपनी ही पार्टी नेताओं पर एक बहुत बड़ी कार्रवाई करते हुए अपने 21 बड़े नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की वजह से पार्टी से बार का रास्ता दिखाया। प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पार्टी के नेता अर्जुन राय, रमई राम समेत 21 नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया। आप को बता दें कि रमई राम, शरद यादव की सभी जनसभाओं में उनके साथ थे और पार्टी के खिलाफ जाकर बयान दिया था। इससे पहले जनता दल यूनाइटेज (जदयू) ने नोटिस जारी कर कहा था कि जो भी हमारी पार्टी के नेता या कार्यकर्ता शरद यादव के साथ जाएंगे उनपर कड़ी-कठोर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में 21 बड़े नेताओं और पार्टी के कार्यकर्ताओं की सदस्यता समाप्त कर दी है।
पटना/लखनऊ। । जनता दल यूनाइटेड ने अपनी ही पार्टी नेताओं पर एक बहुत बड़ी कार्रवाई करते हुए अपने इक्कीस बड़े नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की वजह से पार्टी से बार का रास्ता दिखाया। प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पार्टी के नेता अर्जुन राय, रमई राम समेत इक्कीस नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया। आप को बता दें कि रमई राम, शरद यादव की सभी जनसभाओं में उनके साथ थे और पार्टी के खिलाफ जाकर बयान दिया था। इससे पहले जनता दल यूनाइटेज ने नोटिस जारी कर कहा था कि जो भी हमारी पार्टी के नेता या कार्यकर्ता शरद यादव के साथ जाएंगे उनपर कड़ी-कठोर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में इक्कीस बड़े नेताओं और पार्टी के कार्यकर्ताओं की सदस्यता समाप्त कर दी है।
इस आर्टिकल में हम Garena Free Fire Max (गरेना फ्री फायर मैक्स) में रिनेम कार्ड कैसे खरीद सकते हैं। खिलाड़ियों को नीचे दी गई डिटेल्स को ध्यान पूर्वक फॉलो करें। Garena Free Fire Max (गरेना फ्री फायर मैक्स) दुनिया का सबसे फेमस बैटल रॉयल गेम है। इस गेम को करोड़ों खिलाड़ियों के द्वारा एंड्रॉइड और iOS डिवाइस पर खेला जाता है। गेम के अंदर पहचान बनाने के लिए खिलाड़ियों को स्टाइलिश और अनोखे निकनेम बनाना पड़ता है। हालांकि, ऐसे निकनेम प्राप्त करना आसान नहीं होता है। गेमर्स इंटरनेट पर मौजूद वेबसाइट का उपयोग करके स्टाइलिश और अनोखे निकनेम प्राप्त कर सकते हैं। इन नेम्स को सेट करने के लिए खिलाड़ियों को रिनेम कार्ड की जरूरत पड़ती है। नीचे दी गई डिटेल्स को ध्यान पूर्वक फॉलो करें। Also Read:- Free Fire Max में New Reward Added इवेंट से मुफ्त आइटम प्राप्त करें? Free Fire Max में रिनेम कार्ड कैसे खरीदें? गरेना फ्री फायर मैक्स के लिजेंड्री और रेयर आइटम का भंडार है। जैसे पेट्स, गन स्किन, इमोट्स, ऑउटफिट और बडंल आदि। इन सभी इनाम को खरीदने के लिए खिलाड़ियों को डायमंड्स करेंसी का उपयोग करना पड़ता है। हालांकि, गेमर्स निकनेम बदलने के लिए रिनेम कार्ड का उपयोग करते हैं। रिनेम कार्ड को खरीदने के लिए खिलाड़ियों को डायमंड्स खर्च करना पड़ता है। इसके आलावा ये कार्ड खिलाड़ियों को गेम के स्टोर सेक्शन से मिलता है। नए खिलाड़ियों को रिनेम कार्ड को खरीदने में परेशानी होती है। इसलिए, नीचे दी गई डिटेल्स को ध्यान पूर्वक फॉलो करें। #1 - अपने गेमिंग डिवाइस में Garena Free Fire Max को ओपन करें। #2 - लॉबी स्क्रीन खुलने के बाद खिलाड़ियों को लेफ्ट साइड Store बटन पर क्लिक करना पड़ेगा। #3 - उसके बाद राइट साइड में खिलाड़ियों को वाउचर में जाकर रिनेम कार्ड बटन पर क्लिक करना पड़ेगा। #4 - उसके बाद खिलाड़ियों को Purchase बटन पर क्लिक करना पड़ेगा।
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में प्राय बाघा उपस्थित की गई है, (ix) दीर्घकालीन विदेशी शासन ने अयंव्यवस्था को अपगु बना दिया था, जिसे सुधारने में समय का लगना स्वाभाविक है; (x) शिक्षा के अभाव मे देशवासियों में महत्वाकाक्षा की भावना नहीं पाई जाती, वरन् वे भाग्यवादी अधिक बन गए हैं, जिससे विकास सम्बन्यो उत्साह का अभाव पाया जाता है । राष्ट्रीय आय में वृद्धि करने के सुझाव (Suggestions for increasing National Income of India) भारत की राष्ट्रीय एवं प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करने के लिए मुख्य सुझाव निम्नलिखित हैं 1 उत्पादन में वृद्धि भारतवर्ष में राष्ट्रीय आय में वृद्धि करने के लिए सभो दिशाओ मे प्रयत्न किए जाने चाहिए । कृषि कुटीर एव लघु-उद्योग, खान, व्यापार, परिवहन आदि सभी को उन्नत करके उत्पादन में वृद्धि की जानी चाहिए । 2 बचत व विनियोग की दर में वृद्धि भारतवर्ष में बचतच विनियोग दोनों की दरें कम है। देश के निवासियों को कष्ट उठा कर भी बचन व विनियोग की दरों में वृद्धि करने की चेष्टा करनी चाहिए । 3 जनसध्या की वृद्धि पर नियन्त्रण परिवार नियोजन सम्बन्धी कार्यक्रमो को लोकप्रिय बना कर जनसंख्या की वृद्धि को रावना चाहिए, ताकि राष्ट्रीय एवं प्रति व्यक्ति आय सम्बन्धी लक्ष्यों को प्राप्ति में कठिनाई न हो । 4 धन का वितरण की असमानता में कमी करना देशवासियो मे राष्ट्रीय चेतना पैदा करने के लिए तथा देश के सभी क्षेत्रो मे उत्पादन बढ़ाने के लिए उनमे उत्माद् नभी पैदा किया जा सकता है जबकि बढ़ने हर उत्पादन में उन्हें यथोचित हिस्सा मिले । क्त देश में व्याप्न आर्थिक विषमता को कम करने के प्रयास करने चाहिए । 5 सतुलित आर्थिक विकास के लिए प्रयत्न दश के सतुलित आर्थिक विकास के लिए, एक तो, देश में औद्योगीकरण की गति को तेज करके अर्थ-व्यवस्था की कृषि पर निर्धनता कम की जानी चाहिए तथा दूसरे विकास की प्रक्रिया देश के सभी भागों में समान रूप से गतिशील होनी चाहिए। निछडे हुए क्षेत्रों को भी निर सित किया जाना चाहिए । 6 सामाजिक सुविधाओं में वृद्धि देश के नागरिकों को शिक्षा, चिकित्सा रोजगार सम्बन्धी सुविधायें दिलाई जानी चाहिए, ताकि उनका स्वास्थ्य ठीक रहे । उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि हो सके तथा वे अरमका उचित उपयोग करक देश के उत्पादन में वृद्धि कर सकें।
में प्राय बाघा उपस्थित की गई है, दीर्घकालीन विदेशी शासन ने अयंव्यवस्था को अपगु बना दिया था, जिसे सुधारने में समय का लगना स्वाभाविक है; शिक्षा के अभाव मे देशवासियों में महत्वाकाक्षा की भावना नहीं पाई जाती, वरन् वे भाग्यवादी अधिक बन गए हैं, जिससे विकास सम्बन्यो उत्साह का अभाव पाया जाता है । राष्ट्रीय आय में वृद्धि करने के सुझाव भारत की राष्ट्रीय एवं प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि करने के लिए मुख्य सुझाव निम्नलिखित हैं एक उत्पादन में वृद्धि भारतवर्ष में राष्ट्रीय आय में वृद्धि करने के लिए सभो दिशाओ मे प्रयत्न किए जाने चाहिए । कृषि कुटीर एव लघु-उद्योग, खान, व्यापार, परिवहन आदि सभी को उन्नत करके उत्पादन में वृद्धि की जानी चाहिए । दो बचत व विनियोग की दर में वृद्धि भारतवर्ष में बचतच विनियोग दोनों की दरें कम है। देश के निवासियों को कष्ट उठा कर भी बचन व विनियोग की दरों में वृद्धि करने की चेष्टा करनी चाहिए । तीन जनसध्या की वृद्धि पर नियन्त्रण परिवार नियोजन सम्बन्धी कार्यक्रमो को लोकप्रिय बना कर जनसंख्या की वृद्धि को रावना चाहिए, ताकि राष्ट्रीय एवं प्रति व्यक्ति आय सम्बन्धी लक्ष्यों को प्राप्ति में कठिनाई न हो । चार धन का वितरण की असमानता में कमी करना देशवासियो मे राष्ट्रीय चेतना पैदा करने के लिए तथा देश के सभी क्षेत्रो मे उत्पादन बढ़ाने के लिए उनमे उत्माद् नभी पैदा किया जा सकता है जबकि बढ़ने हर उत्पादन में उन्हें यथोचित हिस्सा मिले । क्त देश में व्याप्न आर्थिक विषमता को कम करने के प्रयास करने चाहिए । पाँच सतुलित आर्थिक विकास के लिए प्रयत्न दश के सतुलित आर्थिक विकास के लिए, एक तो, देश में औद्योगीकरण की गति को तेज करके अर्थ-व्यवस्था की कृषि पर निर्धनता कम की जानी चाहिए तथा दूसरे विकास की प्रक्रिया देश के सभी भागों में समान रूप से गतिशील होनी चाहिए। निछडे हुए क्षेत्रों को भी निर सित किया जाना चाहिए । छः सामाजिक सुविधाओं में वृद्धि देश के नागरिकों को शिक्षा, चिकित्सा रोजगार सम्बन्धी सुविधायें दिलाई जानी चाहिए, ताकि उनका स्वास्थ्य ठीक रहे । उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि हो सके तथा वे अरमका उचित उपयोग करक देश के उत्पादन में वृद्धि कर सकें।
डिजिटल सेविंग अकाउंट (Digital Savings Account) केवल एक साल के लिए वैध होता है. SSY Vs KVP Vs PPF Vs SCSS: किसान विकास पत्र में निवेश की गई राशि 124 महीने (10 साल 4 महीने) में दोगुनी हो जाती है. Smallcase: SEBI-रजिस्टर्ड प्रोफेशनल्स तैयार और मैनेज करते हैं. स्मॉलकेस के जरिए डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो खरीदने का मौका मिलता है. मॉर्निंग स्टार के इंडिया रिपोर्ट में पता चलता है कि मार्च 2020 से मई 2021 में हर 10 में 8 बार पैसिव फंड का रिटर्न एक्टिव फंड से बेहतर रहा है. आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल अप्रैल में 87,000 एक्टिव मामलों में से 90% हाई-राइज बिल्डिंग से थे, जबकि झुग्गी बस्तियों में सिर्फ 10% मामले थे. फ्रेश इश्यू से होने वाली कमाई का इस्तेमाल कैपिटल एक्सपेंडिचर की जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा. MSME: कोरोना महामारी के कारण देश के सभी उद्योग प्रभावित हुए है, विशेष रूप से एमएसएमई सेक्टर को एक बड़ा झटका लगा है.
डिजिटल सेविंग अकाउंट केवल एक साल के लिए वैध होता है. SSY Vs KVP Vs PPF Vs SCSS: किसान विकास पत्र में निवेश की गई राशि एक सौ चौबीस महीने में दोगुनी हो जाती है. Smallcase: SEBI-रजिस्टर्ड प्रोफेशनल्स तैयार और मैनेज करते हैं. स्मॉलकेस के जरिए डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो खरीदने का मौका मिलता है. मॉर्निंग स्टार के इंडिया रिपोर्ट में पता चलता है कि मार्च दो हज़ार बीस से मई दो हज़ार इक्कीस में हर दस में आठ बार पैसिव फंड का रिटर्न एक्टिव फंड से बेहतर रहा है. आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल अप्रैल में सत्तासी,शून्य एक्टिव मामलों में से नब्बे% हाई-राइज बिल्डिंग से थे, जबकि झुग्गी बस्तियों में सिर्फ दस% मामले थे. फ्रेश इश्यू से होने वाली कमाई का इस्तेमाल कैपिटल एक्सपेंडिचर की जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा. MSME: कोरोना महामारी के कारण देश के सभी उद्योग प्रभावित हुए है, विशेष रूप से एमएसएमई सेक्टर को एक बड़ा झटका लगा है.
आम लोगों की मुश्किलों को कम करने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को ट्रांसपोर्ट विभाग को 15 जून तक ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) और वाहनों के रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट (आरसी) का कोई केस लंबित न रखने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को यहां अपने दफ्तर में परिवहन विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए लोगों को ये सेवाएं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध करवाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से जारी ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी मिलने में लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। भगवंत मान ने अधिकारियों से ंस्पष्ट तौर पर यह सुनिश्चित करने को कहा कि तकनीकी कारणों से आरसी पैंडिंग लाइसैंस के बैकलॉग को 15 जून तक निपटाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस के संबंध में स्मार्ट कार्ड की छपाई का लंबित कार्य लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि आठ अप्रैल को केवल 29,934 ड्राइविंग लाइसेंसों की छपाई हुई थी, जो 29 मई को बढक़र 308,061 कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने बताया लाइसेंस की प्रिंटिंग का बैकलॉग आठ अप्रैल को 177, 012 से कमकर 29 मई तक 1943 कर दिया गया है । इसी तरह मुख्यमंत्री ने कहा कि आठ अप्रैल को आरसी की कोई प्रिटिंग नहीं हुई थी, लेकिन 29 मई को 347272, 29 मई को रिकार्ड प्रिटिंग की गई थी। उन्होंने कहा कि 29 मई तक आरण्सीण्के स्मार्ट कार्ड की छपाई का बैकलॉग 56251 था जोकि आठ अप्रैल को 226825 था। भगवंत मान ने कहा कि भविष्य में छपाई और लंबित मामलों की समस्या से बचने के लिए कंपनी को यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य किया जाए कि अगले तीन महीनों के लिए आवश्यक स्मार्ट कार्डों का स्टॉक उनके पास उपलब्ध रहेगा।
आम लोगों की मुश्किलों को कम करने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार को ट्रांसपोर्ट विभाग को पंद्रह जून तक ड्राइविंग लाइसेंस और वाहनों के रजिस्ट्रेशन सर्टीफिकेट का कोई केस लंबित न रखने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को यहां अपने दफ्तर में परिवहन विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए लोगों को ये सेवाएं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध करवाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से जारी ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी मिलने में लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। भगवंत मान ने अधिकारियों से ंस्पष्ट तौर पर यह सुनिश्चित करने को कहा कि तकनीकी कारणों से आरसी पैंडिंग लाइसैंस के बैकलॉग को पंद्रह जून तक निपटाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस के संबंध में स्मार्ट कार्ड की छपाई का लंबित कार्य लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि आठ अप्रैल को केवल उनतीस,नौ सौ चौंतीस ड्राइविंग लाइसेंसों की छपाई हुई थी, जो उनतीस मई को बढक़र तीन सौ आठ,इकसठ कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने बताया लाइसेंस की प्रिंटिंग का बैकलॉग आठ अप्रैल को एक सौ सतहत्तर, बारह से कमकर उनतीस मई तक एक हज़ार नौ सौ तैंतालीस कर दिया गया है । इसी तरह मुख्यमंत्री ने कहा कि आठ अप्रैल को आरसी की कोई प्रिटिंग नहीं हुई थी, लेकिन उनतीस मई को तीन लाख सैंतालीस हज़ार दो सौ बहत्तर, उनतीस मई को रिकार्ड प्रिटिंग की गई थी। उन्होंने कहा कि उनतीस मई तक आरण्सीण्के स्मार्ट कार्ड की छपाई का बैकलॉग छप्पन हज़ार दो सौ इक्यावन था जोकि आठ अप्रैल को दो लाख छब्बीस हज़ार आठ सौ पच्चीस था। भगवंत मान ने कहा कि भविष्य में छपाई और लंबित मामलों की समस्या से बचने के लिए कंपनी को यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य किया जाए कि अगले तीन महीनों के लिए आवश्यक स्मार्ट कार्डों का स्टॉक उनके पास उपलब्ध रहेगा।
चेन्नई, 16 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु में विधायकों को अयोग्य ठहराने के मामले में एक नया मोड़ आया है। अखिल भारतीय अन्ना द्रमुक मुनेत्र कड़गम (अन्ना-द्रमुक) के एक बागी विधायक ने शनिवार को कहा कि वह मद्रास उच्च न्यायालय से विधानसभा अध्यक्ष द्वारा खुद को अयोग्य ठहराए जाने को चुनौती देने की याचिका वापस लेगा। इस विधायक को अन्ना द्रमुक से दरकिनार किए गए टी. टी. वी. दिनाकरण का करीबी माना जाता है। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अयोग्य ठहराये गए 18 विधायकों में से एक थंगातमिलसेल्वन ने मीडिया से कहा कि उसने न्यायपालिका से न्याय मिलने की आस खो दी है और इसलिए उसने अपनी याचिका को वापस लेने का निर्णय लिया है। थंगातमिलसेल्वन के निर्णय पर, दिनाकरण ने समूह में किसी भी तरह की अनबन की रपट को खारिज कर दिया और कहा कि सभी विधायक संगठित हैं और कानूनी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा प्रतिकूल निर्णय आने पर वह सर्वोच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं। गुरुवार को मद्रास उच्च न्यायालय ने इस मामले में खंडित आदेश दिया था। मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी ने विधायकों के अयोग्य ठहराने के निर्णय को बरकरा रखा था, जबकि पीठ के एक अन्य न्यायाधीश एम. सुंदर ने विधानसभा अध्यक्ष के उलट निर्णय दिया था। दिनाकरण ने कहा, थंगातमिलसेल्वन अपनी याचिका वापस लेने के लिए उत्सुक है और वह उपचुनाव लड़ना चाहता है, क्योंकि वह इसे जीतने को लेकर निश्चिंत है। उन्होंने कहा, मैंने भी उसे 'ठीक है' कहा। वह हमसे गुस्सा नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि हमारे समूह में किसी भी तरह की फूट है। हम सभी संगठित हैं।
चेन्नई, सोलह जून । तमिलनाडु में विधायकों को अयोग्य ठहराने के मामले में एक नया मोड़ आया है। अखिल भारतीय अन्ना द्रमुक मुनेत्र कड़गम के एक बागी विधायक ने शनिवार को कहा कि वह मद्रास उच्च न्यायालय से विधानसभा अध्यक्ष द्वारा खुद को अयोग्य ठहराए जाने को चुनौती देने की याचिका वापस लेगा। इस विधायक को अन्ना द्रमुक से दरकिनार किए गए टी. टी. वी. दिनाकरण का करीबी माना जाता है। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अयोग्य ठहराये गए अट्ठारह विधायकों में से एक थंगातमिलसेल्वन ने मीडिया से कहा कि उसने न्यायपालिका से न्याय मिलने की आस खो दी है और इसलिए उसने अपनी याचिका को वापस लेने का निर्णय लिया है। थंगातमिलसेल्वन के निर्णय पर, दिनाकरण ने समूह में किसी भी तरह की अनबन की रपट को खारिज कर दिया और कहा कि सभी विधायक संगठित हैं और कानूनी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा प्रतिकूल निर्णय आने पर वह सर्वोच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं। गुरुवार को मद्रास उच्च न्यायालय ने इस मामले में खंडित आदेश दिया था। मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी ने विधायकों के अयोग्य ठहराने के निर्णय को बरकरा रखा था, जबकि पीठ के एक अन्य न्यायाधीश एम. सुंदर ने विधानसभा अध्यक्ष के उलट निर्णय दिया था। दिनाकरण ने कहा, थंगातमिलसेल्वन अपनी याचिका वापस लेने के लिए उत्सुक है और वह उपचुनाव लड़ना चाहता है, क्योंकि वह इसे जीतने को लेकर निश्चिंत है। उन्होंने कहा, मैंने भी उसे 'ठीक है' कहा। वह हमसे गुस्सा नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि हमारे समूह में किसी भी तरह की फूट है। हम सभी संगठित हैं।
तमिलनाडु के राज्यपाल श्री बनवारी लाल पुरोहित 12 मार्च, 2020 को शाम में चेन्नई के कलाईवनार आरंगम में आयोजित होने वाले 'दिव्य कला शक्ति - अक्षमताओं में क्षमताओं का प्रदर्शन" कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। यह अब तक का सबसे पहला एवं बेजोड़ क्षेत्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। तमिलनाडु सरकार के समाज कल्याण एवं पोषण दोपहर भोजन कार्यक्रम मंत्री डॉ. वी. सरोजा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी श्री पुरोहित के साथ उपस्थित रहेंगे। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सहयोग से राष्ट्रीय बहुविध दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन में दिव्यांगजनों, दिव्यांगजनों के माता-पिता, शिक्षकों, अभिभावकों और गैर-सरकारी संगठनों आदि सहित लगभग 1000 व्यक्ति आमंत्रित हैं। यह कार्यक्रम आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और लक्षद्वीप और पुदुचेरी के सभी पाँच दक्षिणी ज़ोनों के बच्चों और युवाओं को एक साथ लाता है। लगभग अपनी छिपी हुई प्रतिभाओं को प्रदर्शित करने के लिए दृष्टिबाधित, श्रवण बाधित, लोकोमोटर डिसएबिलिटीज, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, बौद्धिक विकलांगता, बहुविध दिव्यांगजन श्रेणी के 98 बच्चों और युवाओं ने एक महीने तक अभ्यास किया है। ये कलाकार शास्त्रीय, लोक और आधुनिक शैली में नृत्य, संगीत, वाद्य की प्रस्तुति करेंगे। इस आयोजन में पहली बार योग और कलाबाजी भी शामिल है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में महिला प्रतिभागी हिस्सा ले रही हैं। दिव्य कला शक्ति नामक सांस्कृतिक कार्यक्रम मंचन कला, संगीत, नृत्य, कलाबाजी आदि क्षेत्र में दिव्यांगजनों की क्षमताओं को दर्शाने के लिए एक व्यापक एवं अद्वितीय मंच प्रदान करता है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने लोकतंत्र के सभी चार स्तंभों के बीच व्यापक जागरूकता कायम करने के उद्देश्य से राष्ट्रपति भवन एवं नई दिल्ली स्थित संसद पुस्कालय भवन में क्रमशः 18 अप्रैल और 23 जुलाई, 2019 को दो राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किये थे। इन कार्यक्रमों में दिव्यांग बच्चों और युवाओं में अंतर्निहित प्रतिभा को देखने के लिए राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, सभी केन्द्रीय मंत्री तथा सभी सांसद उपस्थित थे। अपने प्रेरक भाषण में राष्ट्रपति ने यह इच्छा व्यक्त की थी कि इस सांस्कृतिक कार्यक्रम को देश के सभी हिस्सों में दिखाया जाए। इसलिए राष्ट्रपति के इन प्रेरक शब्दों के अनुसरण में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग इसे सभी क्षेत्रों में दिखाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि दिव्यांगजनों के प्रति समाज की सोच में बदलाव लाने में मदद मिल सके।
तमिलनाडु के राज्यपाल श्री बनवारी लाल पुरोहित बारह मार्च, दो हज़ार बीस को शाम में चेन्नई के कलाईवनार आरंगम में आयोजित होने वाले 'दिव्य कला शक्ति - अक्षमताओं में क्षमताओं का प्रदर्शन" कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। यह अब तक का सबसे पहला एवं बेजोड़ क्षेत्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। तमिलनाडु सरकार के समाज कल्याण एवं पोषण दोपहर भोजन कार्यक्रम मंत्री डॉ. वी. सरोजा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी श्री पुरोहित के साथ उपस्थित रहेंगे। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सहयोग से राष्ट्रीय बहुविध दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन में दिव्यांगजनों, दिव्यांगजनों के माता-पिता, शिक्षकों, अभिभावकों और गैर-सरकारी संगठनों आदि सहित लगभग एक हज़ार व्यक्ति आमंत्रित हैं। यह कार्यक्रम आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और लक्षद्वीप और पुदुचेरी के सभी पाँच दक्षिणी ज़ोनों के बच्चों और युवाओं को एक साथ लाता है। लगभग अपनी छिपी हुई प्रतिभाओं को प्रदर्शित करने के लिए दृष्टिबाधित, श्रवण बाधित, लोकोमोटर डिसएबिलिटीज, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, बौद्धिक विकलांगता, बहुविध दिव्यांगजन श्रेणी के अट्ठानवे बच्चों और युवाओं ने एक महीने तक अभ्यास किया है। ये कलाकार शास्त्रीय, लोक और आधुनिक शैली में नृत्य, संगीत, वाद्य की प्रस्तुति करेंगे। इस आयोजन में पहली बार योग और कलाबाजी भी शामिल है। इस आयोजन में बड़ी संख्या में महिला प्रतिभागी हिस्सा ले रही हैं। दिव्य कला शक्ति नामक सांस्कृतिक कार्यक्रम मंचन कला, संगीत, नृत्य, कलाबाजी आदि क्षेत्र में दिव्यांगजनों की क्षमताओं को दर्शाने के लिए एक व्यापक एवं अद्वितीय मंच प्रदान करता है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने लोकतंत्र के सभी चार स्तंभों के बीच व्यापक जागरूकता कायम करने के उद्देश्य से राष्ट्रपति भवन एवं नई दिल्ली स्थित संसद पुस्कालय भवन में क्रमशः अट्ठारह अप्रैल और तेईस जुलाई, दो हज़ार उन्नीस को दो राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किये थे। इन कार्यक्रमों में दिव्यांग बच्चों और युवाओं में अंतर्निहित प्रतिभा को देखने के लिए राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, सभी केन्द्रीय मंत्री तथा सभी सांसद उपस्थित थे। अपने प्रेरक भाषण में राष्ट्रपति ने यह इच्छा व्यक्त की थी कि इस सांस्कृतिक कार्यक्रम को देश के सभी हिस्सों में दिखाया जाए। इसलिए राष्ट्रपति के इन प्रेरक शब्दों के अनुसरण में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग इसे सभी क्षेत्रों में दिखाने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि दिव्यांगजनों के प्रति समाज की सोच में बदलाव लाने में मदद मिल सके।
लोकसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद आज बीजेपी संसदीय दल की बैठक हुई. बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने बताया कि आने वाले 20 मई को संसदीय बोर्ड की एक और बैठक होगी जिसमें संसदीय दल का नेता चुना जाएगा. वहीं, मोदी सरकार के शपथ ग्रहण की तारीख तय नहीं की गई है. इसे लेकर मीडिया में जो कयास लगाए जा रहे हैं वो गलत हैं. राजनाथ सिंह ने जानकारी दी कि 20 मई को बीजेपी संसदीय दल का नेता चुनने के बाद एनडीए की भी बैठक होगी. इसके बाद ही अगली सरकार का खाका साफ हो सकेगा. गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया. गठबंधन के खाते में कुल 336 सीटें गईं. बीजेपी को खुद ही बहुमत हासिल हुआ. राजनाथ सिंह ने बैठक के बाद कहा, 'आज की बैठक में बीजेपी संसदीय दल ने नरेंद्र मोदी का स्वागत किया. उन्होंने जिस परिश्रम और विजन के साथ काम किया, वह सराहनीय है.' राजनाथ सिंह ने आगे कहा, 'हम बीजेपी के सभी कार्यकर्ताओं को इस जीत के लिए बधाई देना चाहते हैं. सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों का भी आभार व्यक्त करते हैं. मैं देशवासियों का भी आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने हमपर भरोसा दिखाया. बीजेपी एक मात्र ऐसी पार्टी है जो कांग्रेस से बड़ा कद हासिल करने में कामयाब हुई. इसका श्रेय भारतवासियों को जाता है. आपने जातीय और भूगोलीय अवधारणाएं ध्वस्त कर दीं. बीजेपी कन्याकुमारी से कश्मीर तक जीती. बीजेपी संसदीय बोर्ड इस जनादेश का स्वागत करता है. देश की आजादी के बाद यह पहला मौका है जब किसी गैर-कांग्रेसी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला है.' इस बैठक में कुछ अहम फैसले भी लिए गए. राजनाथ सिंह ने बताया कि 20 मई को दोपहर 12 बजे पार्टी के संसदीय दल की बैठक होगी जिसमें मोदी जी को संसदीय दल के नेता के तौर पर चुना जाएगा. उसके बाद एनडीए के सभी साथियों को भी बैठक के लिए आमंत्रित किया जाएगा. अभी तक शपथ ग्रहण की तारीख के बारे में कोई भी फैसला नहीं किया गया है. अगली बैठक में ही कुछ तय होगा. प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा. ऐसे में बीजेपी विधान मंडल दल को अपना अगला मुखिया भी चुनना है. पार्टी ने थावर चंद गहलोत को गुजरात का स्पेशल ऑबजर्वर नियुक्त किया है वहीं राज्य प्रभारी ओम माथुर भी उनको सहयोग देंगे. नरेंद्र मोदी ने कहा, मैं देश वासियों को प्रणाम करता हूं. जनादेश के लिए धन्यवाद देता हूं. मीडिया ने भी मतदाता जागृति के काम में अहम रोल निभाया. लोकतंत्र का यह महापर्व उत्साह के साथ संपन्न हुआ. आपको बहुत- बहुत धन्यवाद. मीडिया के कई भाई-बंधु मुझसे मिलना चाहते थे. समय की कमी की वजह से मैं सबसे मिल नहीं पाया. इसके लिए माफ कीजिएगा. आगे हम फिर मिलते रहेंगे.
लोकसभा चुनाव में शानदार जीत के बाद आज बीजेपी संसदीय दल की बैठक हुई. बैठक के बाद पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने बताया कि आने वाले बीस मई को संसदीय बोर्ड की एक और बैठक होगी जिसमें संसदीय दल का नेता चुना जाएगा. वहीं, मोदी सरकार के शपथ ग्रहण की तारीख तय नहीं की गई है. इसे लेकर मीडिया में जो कयास लगाए जा रहे हैं वो गलत हैं. राजनाथ सिंह ने जानकारी दी कि बीस मई को बीजेपी संसदीय दल का नेता चुनने के बाद एनडीए की भी बैठक होगी. इसके बाद ही अगली सरकार का खाका साफ हो सकेगा. गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया. गठबंधन के खाते में कुल तीन सौ छत्तीस सीटें गईं. बीजेपी को खुद ही बहुमत हासिल हुआ. राजनाथ सिंह ने बैठक के बाद कहा, 'आज की बैठक में बीजेपी संसदीय दल ने नरेंद्र मोदी का स्वागत किया. उन्होंने जिस परिश्रम और विजन के साथ काम किया, वह सराहनीय है.' राजनाथ सिंह ने आगे कहा, 'हम बीजेपी के सभी कार्यकर्ताओं को इस जीत के लिए बधाई देना चाहते हैं. सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों का भी आभार व्यक्त करते हैं. मैं देशवासियों का भी आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने हमपर भरोसा दिखाया. बीजेपी एक मात्र ऐसी पार्टी है जो कांग्रेस से बड़ा कद हासिल करने में कामयाब हुई. इसका श्रेय भारतवासियों को जाता है. आपने जातीय और भूगोलीय अवधारणाएं ध्वस्त कर दीं. बीजेपी कन्याकुमारी से कश्मीर तक जीती. बीजेपी संसदीय बोर्ड इस जनादेश का स्वागत करता है. देश की आजादी के बाद यह पहला मौका है जब किसी गैर-कांग्रेसी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला है.' इस बैठक में कुछ अहम फैसले भी लिए गए. राजनाथ सिंह ने बताया कि बीस मई को दोपहर बारह बजे पार्टी के संसदीय दल की बैठक होगी जिसमें मोदी जी को संसदीय दल के नेता के तौर पर चुना जाएगा. उसके बाद एनडीए के सभी साथियों को भी बैठक के लिए आमंत्रित किया जाएगा. अभी तक शपथ ग्रहण की तारीख के बारे में कोई भी फैसला नहीं किया गया है. अगली बैठक में ही कुछ तय होगा. प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना होगा. ऐसे में बीजेपी विधान मंडल दल को अपना अगला मुखिया भी चुनना है. पार्टी ने थावर चंद गहलोत को गुजरात का स्पेशल ऑबजर्वर नियुक्त किया है वहीं राज्य प्रभारी ओम माथुर भी उनको सहयोग देंगे. नरेंद्र मोदी ने कहा, मैं देश वासियों को प्रणाम करता हूं. जनादेश के लिए धन्यवाद देता हूं. मीडिया ने भी मतदाता जागृति के काम में अहम रोल निभाया. लोकतंत्र का यह महापर्व उत्साह के साथ संपन्न हुआ. आपको बहुत- बहुत धन्यवाद. मीडिया के कई भाई-बंधु मुझसे मिलना चाहते थे. समय की कमी की वजह से मैं सबसे मिल नहीं पाया. इसके लिए माफ कीजिएगा. आगे हम फिर मिलते रहेंगे.
Praveen Nettaru Murder Case भाजपा कार्यकर्ता प्रवीण नेट्टारू की हत्या मामले में पुलिस ने अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अभी भी तीन आरोपी फरार हैं जिनकी तलाश में पुलिस की टीम जुटी हुई है। इसमें मुख्य आरोपी भी शामिल है। मंगलुरु (कर्नाटक), एजेंसी। Praveen Nettaru Murder Case: कर्नाटक की मंगलुरु पुलिस ने बुधवार को कहा कि उन्होंने भाजपा युवा नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या के मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीन आरोपी अभी भी फरार हैं। इसमें मुख्य आरोपी भी शामिल है। मंगलुरु के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) आलोक कुमार ने कहा कि पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) फरार तीन आरोपियों के लिए वारंट जारी करेगी। उन्होंने कहा, 'हम पहले ही प्रवीण नेट्टारू हत्याकांड में 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुके हैं। तीन और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जाना बाकी है। ' पुलिस ने बुधवार को बेल्लारे में एनआइए के साथ विभिन्न जिलों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस बैठक से पहले कुमार ने कहा, 'हम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। एनआइए भी हमारे साथ है। हम (कर्नाटक पुलिस और एनआइए) अदालत के माध्यम से फरार आरोपियों को वारंट जारी करेंगे और उनकी संपत्ति को जब्त करेगी। ' कुमार ने कहा कि पुलिस को तीन मुख्य आरोपियों के परिवार, पता और अन्य विवरणों के बारे में पता है लेकिन किसी ने उन्हें परेशान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए सबूत भी जुटा रहे हैं कि इस मामले में पीएफआई शामिल है या नहीं। 'हम पीएफआइ के खिलाफ सबूत इकट्ठा कर रहे हैं' कुमार ने कहा, 'हम सुनिश्चित करेंगे कि पीएफआई इस मामले में शामिल है या नहीं। हम बिना किसी सबूत के सीधे तौर पर कुछ नहीं कह सकते। हम सबूत इकट्ठा कर रहे हैं। ' कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने घटना पर बयान देते हुए कहा कि इसमें चरमपंथी पापुलर फ्रंट आफ इंडिया (PFI) और इसकी राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) की संलिप्तता का संदेह है। 19 जुलाई की देर शाम दक्षिण कन्नड़ के बेल्लारे में एक बाइक पर अज्ञात लोगों ने भाजपा के युवा कार्यकर्ता प्रवीण नेट्टारू पर घातक हथियारों से हमला कर दिया। जब भाजपा युवा मोर्चा के नेता की हत्या हुई, वह अपने घर की ओर जा रहे थे। हत्या के बाद दक्षिण कन्नड़ जिले के कई हिस्सों में तनाव व्याप्त है। हत्या को लेकर जिले के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी हुए।
Praveen Nettaru Murder Case भाजपा कार्यकर्ता प्रवीण नेट्टारू की हत्या मामले में पुलिस ने अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अभी भी तीन आरोपी फरार हैं जिनकी तलाश में पुलिस की टीम जुटी हुई है। इसमें मुख्य आरोपी भी शामिल है। मंगलुरु , एजेंसी। Praveen Nettaru Murder Case: कर्नाटक की मंगलुरु पुलिस ने बुधवार को कहा कि उन्होंने भाजपा युवा नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या के मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीन आरोपी अभी भी फरार हैं। इसमें मुख्य आरोपी भी शामिल है। मंगलुरु के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आलोक कुमार ने कहा कि पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी फरार तीन आरोपियों के लिए वारंट जारी करेगी। उन्होंने कहा, 'हम पहले ही प्रवीण नेट्टारू हत्याकांड में सात आरोपियों को गिरफ्तार कर चुके हैं। तीन और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जाना बाकी है। ' पुलिस ने बुधवार को बेल्लारे में एनआइए के साथ विभिन्न जिलों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इस बैठक से पहले कुमार ने कहा, 'हम प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। एनआइए भी हमारे साथ है। हम अदालत के माध्यम से फरार आरोपियों को वारंट जारी करेंगे और उनकी संपत्ति को जब्त करेगी। ' कुमार ने कहा कि पुलिस को तीन मुख्य आरोपियों के परिवार, पता और अन्य विवरणों के बारे में पता है लेकिन किसी ने उन्हें परेशान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे यह सुनिश्चित करने के लिए सबूत भी जुटा रहे हैं कि इस मामले में पीएफआई शामिल है या नहीं। 'हम पीएफआइ के खिलाफ सबूत इकट्ठा कर रहे हैं' कुमार ने कहा, 'हम सुनिश्चित करेंगे कि पीएफआई इस मामले में शामिल है या नहीं। हम बिना किसी सबूत के सीधे तौर पर कुछ नहीं कह सकते। हम सबूत इकट्ठा कर रहे हैं। ' कर्नाटक के गृह मंत्री अरागा ज्ञानेंद्र ने घटना पर बयान देते हुए कहा कि इसमें चरमपंथी पापुलर फ्रंट आफ इंडिया और इसकी राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया की संलिप्तता का संदेह है। उन्नीस जुलाई की देर शाम दक्षिण कन्नड़ के बेल्लारे में एक बाइक पर अज्ञात लोगों ने भाजपा के युवा कार्यकर्ता प्रवीण नेट्टारू पर घातक हथियारों से हमला कर दिया। जब भाजपा युवा मोर्चा के नेता की हत्या हुई, वह अपने घर की ओर जा रहे थे। हत्या के बाद दक्षिण कन्नड़ जिले के कई हिस्सों में तनाव व्याप्त है। हत्या को लेकर जिले के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी हुए।
नई दिल्ली। जरा सोचिए जब हम किसी सार्वजनिक मंच पर कोई प्रस्तुति दे रहे हों और अचानक से हम गिर पड़ें, तो यह नजारा देख वहां बैठे लोगों की हंसी छूट ही जाती है। हाल ही में ऐसा वाकया एक अभिनेत्री के साथ देखने को मिला है। जब वह मंच पर अपने एक्स बॉयफ्रेंड के साथ स्टेज पर डांस कर रही थीं, और उसी दौरान वह अचानक से स्टेज पर गिर पड़ीं। ये जोड़ी है अनुज सचदेवा और उर्वशी ढोलकिया की। दरअसल उर्वशी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपने अपकमिंग परफॉर्मेंस का एक प्रोमो वीडियो शेयर किया है। जिसमें वह अनुज के साथ शाहरुख खान के गाने जनम-जनम पर डांस करते हुए दिख रही हैं। दोनों के डांस मूव्स बेहद शानदार हैं लेकिन अचानक इस कपल से एक गलती हो जाती है और उर्वशी ढोलकिया स्टेज पर गिर जाती हैं। डांस के दौरान अनुज और उर्वशी एक लीफ्ट को ठीक से नहीं कर पाते और उर्वशी का हाथ स्लिप हो जाता है। जिसके बाद वह स्टेज पर ही गिर जाती हैं। यह वाकया सेलीब्रिटी डांस रिएलिटी शो नच बलिए के सीजन 9 का है। जिसके लिए कंटेस्टेंट काफी जोर शोर से पसीना बहा रहे हैं लेकिन इससे पहले ही उर्वशी अपने इस वीडियो को लेकर चर्चा में आ गई हैं। हालांकि इस वाकये के दौरान यह कपल इतना शानदार कॉन्फिडेंस दिखाता है, जिसकी जितनी तारीफ की जाए वह कम ही होगी। उर्वशी-अनुज ने इतनी बड़ी मिस्टेक होने के बावजूद अपने परफॉर्मेंस को जारी रखा। जिसे देख जज ने भी उनकी तारीफ की।
नई दिल्ली। जरा सोचिए जब हम किसी सार्वजनिक मंच पर कोई प्रस्तुति दे रहे हों और अचानक से हम गिर पड़ें, तो यह नजारा देख वहां बैठे लोगों की हंसी छूट ही जाती है। हाल ही में ऐसा वाकया एक अभिनेत्री के साथ देखने को मिला है। जब वह मंच पर अपने एक्स बॉयफ्रेंड के साथ स्टेज पर डांस कर रही थीं, और उसी दौरान वह अचानक से स्टेज पर गिर पड़ीं। ये जोड़ी है अनुज सचदेवा और उर्वशी ढोलकिया की। दरअसल उर्वशी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपने अपकमिंग परफॉर्मेंस का एक प्रोमो वीडियो शेयर किया है। जिसमें वह अनुज के साथ शाहरुख खान के गाने जनम-जनम पर डांस करते हुए दिख रही हैं। दोनों के डांस मूव्स बेहद शानदार हैं लेकिन अचानक इस कपल से एक गलती हो जाती है और उर्वशी ढोलकिया स्टेज पर गिर जाती हैं। डांस के दौरान अनुज और उर्वशी एक लीफ्ट को ठीक से नहीं कर पाते और उर्वशी का हाथ स्लिप हो जाता है। जिसके बाद वह स्टेज पर ही गिर जाती हैं। यह वाकया सेलीब्रिटी डांस रिएलिटी शो नच बलिए के सीजन नौ का है। जिसके लिए कंटेस्टेंट काफी जोर शोर से पसीना बहा रहे हैं लेकिन इससे पहले ही उर्वशी अपने इस वीडियो को लेकर चर्चा में आ गई हैं। हालांकि इस वाकये के दौरान यह कपल इतना शानदार कॉन्फिडेंस दिखाता है, जिसकी जितनी तारीफ की जाए वह कम ही होगी। उर्वशी-अनुज ने इतनी बड़ी मिस्टेक होने के बावजूद अपने परफॉर्मेंस को जारी रखा। जिसे देख जज ने भी उनकी तारीफ की।
हरियाणा के करनाल में एक युवक ने पत्नी से तंग आकर फांसी का फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। युवक ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है। जिसमें उसने अपनी पत्नी को अपनी चिता से दूर रहने की बात लिखी है, ऐसी जानकारी थाना सिटी इंचार्ज ने दी, घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस व एफएसएल की टीम ने मौका मुआयना कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में भिजवा दिया। पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी हे। वहीं इस घटना से परिवार में मातम पसर गया है। मृतक युवक कमलदीप के पिता सुरेंद्र सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी बहू प्रीति घर से सोने-चांदी के जेवरात व अन्य सामान बैगों में भरकर अपने मायके चली गई। कमलदीप प्रीति से काफी परेशान था। वह हर वक्त उससे झगड़ा करती रहती थी। बहू प्रीति के कारण ही उनके बेटे कमलदीप ने अपनी जान दी है। मृतक के पिता ने बताया कि डेढ़ साल पहले कमलदीप ने प्रीति के साथ लव मेरीज की थी। प्रीति कमलदीप को परेशान करती रहती थी। प्रीति के पिता भी कमलदीप को तंग करते थे। पत्नी से तंग आकर कमलदीप सिंह ने फांसी का फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। वो लड़की जिससे कभी कमलदीप ने प्यार किया था और फिर उसे अपना जीवन साथी बनाया, कमलदीप ने सुसाइड नोट में लिखा है कि उसकी पत्नी को उसकी चिता के पास भी ना आने दिया जाए।
हरियाणा के करनाल में एक युवक ने पत्नी से तंग आकर फांसी का फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। युवक ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है। जिसमें उसने अपनी पत्नी को अपनी चिता से दूर रहने की बात लिखी है, ऐसी जानकारी थाना सिटी इंचार्ज ने दी, घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस व एफएसएल की टीम ने मौका मुआयना कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज में भिजवा दिया। पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी हे। वहीं इस घटना से परिवार में मातम पसर गया है। मृतक युवक कमलदीप के पिता सुरेंद्र सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी बहू प्रीति घर से सोने-चांदी के जेवरात व अन्य सामान बैगों में भरकर अपने मायके चली गई। कमलदीप प्रीति से काफी परेशान था। वह हर वक्त उससे झगड़ा करती रहती थी। बहू प्रीति के कारण ही उनके बेटे कमलदीप ने अपनी जान दी है। मृतक के पिता ने बताया कि डेढ़ साल पहले कमलदीप ने प्रीति के साथ लव मेरीज की थी। प्रीति कमलदीप को परेशान करती रहती थी। प्रीति के पिता भी कमलदीप को तंग करते थे। पत्नी से तंग आकर कमलदीप सिंह ने फांसी का फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। वो लड़की जिससे कभी कमलदीप ने प्यार किया था और फिर उसे अपना जीवन साथी बनाया, कमलदीप ने सुसाइड नोट में लिखा है कि उसकी पत्नी को उसकी चिता के पास भी ना आने दिया जाए।
PRAYAGRAJ: एसएससी यानी स्टाफ सलेक्शन कमीशन की ओर से सेलेक्शन पोस्ट फेज-8 की परीक्षा का शुक्रवार यानी छह नवम्बर से शुरू होगी। देश के विभिन्न शहरों में बनाए गए सेंटर्स पर छह, नौ व 10 नवंबर को परीक्षा होगी। भर्ती परीक्षा आनलाइन मोड में तीन लेवल पर आयोजित होगी। इसमें मैट्रिकुलेशन, हायर सेकेंड्री और ग्रेजुएशन शामिल है। एसएससी के मध्य क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले राज्यों यूपी और बिहार में से सिर्फ यूपी में परीक्षा का आयोजन होगा, जबकि बिहार में चल रहे विधान सभा चुनाव के कारण परीक्षा 14 दिसंबर से होगी। एसएससी सेलेक्शन पोस्ट की परीक्षा तीन पालियों में होगी। प्रथम पाली की परीक्षा सुबह 10 से 11, द्वितीय पाली की दोपहर एक से दो और तीसरी पाली की परीक्षा शाम चार से पांच बजे तक आयोजित होगी। परीक्षा के लिए मध्य क्षेत्र में कुल 78050 आवेदन हुए हैं। इसमें मैट्रिकुलेशन में 22708, हायर सेकेंड्री में 31323 और ग्रेजुएशन स्तर में 24019 अभ्यर्थी हैं। एसएससी मध्य क्षेत्र के निदेशक राहुल सचान ने बताया कि मैट्रिक स्तर की परीक्षा छह नवंबर को प्रथम व द्वितीय पाली और 10 नवंबर को प्रथम पाली में होगी। हायर सेकेंड्री स्तर की परीक्षा छह नवंबर को तृतीय पाली, नौ नवंबर को प्रथम पाली और 10 नवंबर को द्वितीय पाली में होगी। वहीं, हायर सेकेंड्री स्तर की परीक्षा नौ नवंबर को दूसरे व तीसरी पाली में होगी। 10 नवंबर को तीसरी पाली में परीक्षा होगी। एसएससी सेलेक्शन पोस्ट फेज-8 की परीक्षा के लिए यूपी में 33 सेंटर्स बनाए गए है। इसमें आगरा में छह, बरेली में एक, कानपुर में आठ, लखनऊ में 10, मेरठ में दो व प्रयागराज के छह सेंटर्स पर परीक्षा का आयोजन होगा।
PRAYAGRAJ: एसएससी यानी स्टाफ सलेक्शन कमीशन की ओर से सेलेक्शन पोस्ट फेज-आठ की परीक्षा का शुक्रवार यानी छह नवम्बर से शुरू होगी। देश के विभिन्न शहरों में बनाए गए सेंटर्स पर छह, नौ व दस नवंबर को परीक्षा होगी। भर्ती परीक्षा आनलाइन मोड में तीन लेवल पर आयोजित होगी। इसमें मैट्रिकुलेशन, हायर सेकेंड्री और ग्रेजुएशन शामिल है। एसएससी के मध्य क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले राज्यों यूपी और बिहार में से सिर्फ यूपी में परीक्षा का आयोजन होगा, जबकि बिहार में चल रहे विधान सभा चुनाव के कारण परीक्षा चौदह दिसंबर से होगी। एसएससी सेलेक्शन पोस्ट की परीक्षा तीन पालियों में होगी। प्रथम पाली की परीक्षा सुबह दस से ग्यारह, द्वितीय पाली की दोपहर एक से दो और तीसरी पाली की परीक्षा शाम चार से पांच बजे तक आयोजित होगी। परीक्षा के लिए मध्य क्षेत्र में कुल अठहत्तर हज़ार पचास आवेदन हुए हैं। इसमें मैट्रिकुलेशन में बाईस हज़ार सात सौ आठ, हायर सेकेंड्री में इकतीस हज़ार तीन सौ तेईस और ग्रेजुएशन स्तर में चौबीस हज़ार उन्नीस अभ्यर्थी हैं। एसएससी मध्य क्षेत्र के निदेशक राहुल सचान ने बताया कि मैट्रिक स्तर की परीक्षा छह नवंबर को प्रथम व द्वितीय पाली और दस नवंबर को प्रथम पाली में होगी। हायर सेकेंड्री स्तर की परीक्षा छह नवंबर को तृतीय पाली, नौ नवंबर को प्रथम पाली और दस नवंबर को द्वितीय पाली में होगी। वहीं, हायर सेकेंड्री स्तर की परीक्षा नौ नवंबर को दूसरे व तीसरी पाली में होगी। दस नवंबर को तीसरी पाली में परीक्षा होगी। एसएससी सेलेक्शन पोस्ट फेज-आठ की परीक्षा के लिए यूपी में तैंतीस सेंटर्स बनाए गए है। इसमें आगरा में छह, बरेली में एक, कानपुर में आठ, लखनऊ में दस, मेरठ में दो व प्रयागराज के छह सेंटर्स पर परीक्षा का आयोजन होगा।
वीर अर्जुन संवाददाता देहरादून। कांग्रेस की पदेश सरकार के लिए लालबत्तियें का आवंटन मुसीबत का सबब बन चुकी हैं। लालबत्तियों के लालच में फंसे कांग्रेसी नेताओं के बीच इन दिनें भारी खींचतान मची हुई हैं। हालांकि यह मुद्दा कोई नयी बात नहीं है लेकिन सत्ता में भागीदारी के लिए लालाहित कांग्रेसी नेताओं के बीच गुटबाजी और अधिक तेज हो रही है। कांग्रेस ने अपने पूर्व कार्यकाल में संग"न और कार्यकर्ताआंs को भी सत्ता में भागीदार बनाने के लिए थोक के भाव लालबत्तियां बांटी थी। इन लालबत्तियों के जारिए राजनीति और समाज में रूतबा हासिल करने वाले कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता इसका मोह नहीं छोड़ पा रहे है हालांकि अभी मुख्यमंत्री द्वारा जिन लोगों को लालबत्तियों से नवाजा गया है। उनकी संख्या बहुत कम है लेकिन सत्ता में भागीदारी पाने और मंत्रियों जैसी सुख-सुविधाओं के लालच में फंसे कांग्रेसी नेता लगातार उन पर दबाव बनाये हुए है कि वह जल्दी से जल्दी संग"न से जुड़े कार्यकर्ताओं को सत्ता के सुख में शामिल करें। एनडी तिवारी के कार्यकाल में सौ से ऊपर लालबत्तियां देकर लोगों को राज्यमंत्री बनाया गया। लालबत्तियों की गाड़ियों में घूमने वाले यह कार्यकर्ता मंत्रियों की तरह अन्य तमाम वेतन भत्ते और सुविधाएं भी भोगते है। जिन पर जनता की कमाई का मोटा पैसा खर्च किया जाता है। कांग्रेस के इस चलन का 2007 के चुनाव में भाजपा ने न सिर्फ इसका विरोध किया था बल्कि इसे अपना चुनावी मुद्दा भी बनाया था। लेकिन चुनाव जीतने के बाद सूबे की सत्ता पर काबिज हुई भाजपा भी इस पर ंपरा अनुगामी बनकर रह गयी। भाजपा ने भी अपने कार्यकर्ताओं को लालबत्तियां देने में कोई परहेज नहीं किया। फर्क सिर्फ इतना था कि कांग्रेस के कार्यकाल में लालबत्तीधारियों को राज्यमंत्री कहा जाता था और भाजपा ने इन लालबत्ती धारियों को दायित्वधारी का नाम दिया। लालबत्तियां वास्तव में सूबे की राजनीति में एक परंपरा बनकर रह गयी हैं। अब यह पंरपरा वर्तमान सरकार के लिए भी बड़ा सिरदर्द बनी हुई हैं पहले विधायकों को लालबत्ती दी जायें या फिर संग"न के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को, पर तो विवाद बना ही हुआ है साथ ही साथ कांग्रेस में जितने गुट है वह तमाम गुट अपने-अपने समर्थकों को अधिक से अधिक संख्या में लालबत्तियां दिये जाने के लिए मुख्यमंत्री पर दबाव बना रहे है। मुख्यमंत्री द्वारा अभी भले ही कुछ ही लोगों को लालबत्तियां दी गयी है लेकिन निकट भविष्य में कुछ और लोगों को इन लालबत्तियां दिया जाना तय हैं। भले ही मुख्यमंत्री यह कह रहे हो कि हाईकमान का निर्देश है कि कम से कम लोगों को यह लालबत्तियां दी जायें लेकिन गुटीय और संग"न संतुलन बनाये रखनेके लिए इनकी संख्या को सीमित रखा जाना बहुत मुश्किल है। यहीं कारण है कि अब तक लालबत्ती बंटवारे के लिए कई बार लिस्ट बनायी और कैंसिल की जा चुकी है। इन लालबत्तियों पर जहां अनावश्यक धन खर्च का मुद्दा हमेशा चर्चा में रहा है वहीं इन लालबत्तीधारियों से राज्य के विकास में कोई सहयोग न होने की बात भी कही जाती रही हैं।
वीर अर्जुन संवाददाता देहरादून। कांग्रेस की पदेश सरकार के लिए लालबत्तियें का आवंटन मुसीबत का सबब बन चुकी हैं। लालबत्तियों के लालच में फंसे कांग्रेसी नेताओं के बीच इन दिनें भारी खींचतान मची हुई हैं। हालांकि यह मुद्दा कोई नयी बात नहीं है लेकिन सत्ता में भागीदारी के लिए लालाहित कांग्रेसी नेताओं के बीच गुटबाजी और अधिक तेज हो रही है। कांग्रेस ने अपने पूर्व कार्यकाल में संग"न और कार्यकर्ताआंs को भी सत्ता में भागीदार बनाने के लिए थोक के भाव लालबत्तियां बांटी थी। इन लालबत्तियों के जारिए राजनीति और समाज में रूतबा हासिल करने वाले कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता इसका मोह नहीं छोड़ पा रहे है हालांकि अभी मुख्यमंत्री द्वारा जिन लोगों को लालबत्तियों से नवाजा गया है। उनकी संख्या बहुत कम है लेकिन सत्ता में भागीदारी पाने और मंत्रियों जैसी सुख-सुविधाओं के लालच में फंसे कांग्रेसी नेता लगातार उन पर दबाव बनाये हुए है कि वह जल्दी से जल्दी संग"न से जुड़े कार्यकर्ताओं को सत्ता के सुख में शामिल करें। एनडी तिवारी के कार्यकाल में सौ से ऊपर लालबत्तियां देकर लोगों को राज्यमंत्री बनाया गया। लालबत्तियों की गाड़ियों में घूमने वाले यह कार्यकर्ता मंत्रियों की तरह अन्य तमाम वेतन भत्ते और सुविधाएं भी भोगते है। जिन पर जनता की कमाई का मोटा पैसा खर्च किया जाता है। कांग्रेस के इस चलन का दो हज़ार सात के चुनाव में भाजपा ने न सिर्फ इसका विरोध किया था बल्कि इसे अपना चुनावी मुद्दा भी बनाया था। लेकिन चुनाव जीतने के बाद सूबे की सत्ता पर काबिज हुई भाजपा भी इस पर ंपरा अनुगामी बनकर रह गयी। भाजपा ने भी अपने कार्यकर्ताओं को लालबत्तियां देने में कोई परहेज नहीं किया। फर्क सिर्फ इतना था कि कांग्रेस के कार्यकाल में लालबत्तीधारियों को राज्यमंत्री कहा जाता था और भाजपा ने इन लालबत्ती धारियों को दायित्वधारी का नाम दिया। लालबत्तियां वास्तव में सूबे की राजनीति में एक परंपरा बनकर रह गयी हैं। अब यह पंरपरा वर्तमान सरकार के लिए भी बड़ा सिरदर्द बनी हुई हैं पहले विधायकों को लालबत्ती दी जायें या फिर संग"न के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को, पर तो विवाद बना ही हुआ है साथ ही साथ कांग्रेस में जितने गुट है वह तमाम गुट अपने-अपने समर्थकों को अधिक से अधिक संख्या में लालबत्तियां दिये जाने के लिए मुख्यमंत्री पर दबाव बना रहे है। मुख्यमंत्री द्वारा अभी भले ही कुछ ही लोगों को लालबत्तियां दी गयी है लेकिन निकट भविष्य में कुछ और लोगों को इन लालबत्तियां दिया जाना तय हैं। भले ही मुख्यमंत्री यह कह रहे हो कि हाईकमान का निर्देश है कि कम से कम लोगों को यह लालबत्तियां दी जायें लेकिन गुटीय और संग"न संतुलन बनाये रखनेके लिए इनकी संख्या को सीमित रखा जाना बहुत मुश्किल है। यहीं कारण है कि अब तक लालबत्ती बंटवारे के लिए कई बार लिस्ट बनायी और कैंसिल की जा चुकी है। इन लालबत्तियों पर जहां अनावश्यक धन खर्च का मुद्दा हमेशा चर्चा में रहा है वहीं इन लालबत्तीधारियों से राज्य के विकास में कोई सहयोग न होने की बात भी कही जाती रही हैं।
उत्तराखंड में नए भू कानून को लेकर गठित कमेटी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपी सिफारिश रिपोर्ट. देहरादूनः उत्तराखंड में नए भू कानून को लेकर चर्चा तेज है. नए भू-कानून को लेकर गठित कमेटी ने सरकार को सिफारिश सौंप दी है. नए भू कानून का मुख्य उद्देश्य धर्म के नाम पर अवैध कब्जों को रोकना है. बताया गया कि अगर भू कानून की सिफारिशें जस की तस लागू हुईं, तो उत्तराखंड में धर्म की आड़ में कोई अवैध कब्जा और निर्माण नहीं हो सकेगा. भू कानून कमेटी का तर्क है कि इस सिफारिश के पीछे की वजह देवभूमि की पहचान बरकरार रखना है. उत्तराखंड में आने वाला भू कानून, कितना सख्त होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा. पर कहा जा रहा कि अगर कमेटी की एक एक सिफारिश जस की तस लागू हुई, तो धर्म के नाम पर जमीनों पर अवैध कब्जे का काम बंद हो सकता है. भू कानून कमेटी ने इसको लेकर रिपोर्ट में सिफारिश की है कि मस्जिद और मजार के नाम पर जो अवैध अतिक्रमण की बातें हो रही हैं, उसे देखते हुए जमीन लेने के लिए पहले डीएम और फिर शासन से परमिशन ली जाए. कमेटी के सदस्य अजेंद्र अजय का कहना है उत्तराखंड की संस्कृति और विरासत को देखते हुए ये सिफारिश की गई है. देवभूमि में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी सख्त रुख की बात कर चुके हैं. मुख्यमंत्री, राज्य की सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान बरकरार रखने को लेकर सख्ती दिखा चुके हैं. उन्होंने कहा कि देवभूमि की विरासत के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा. पूरे मामले को लेकर पूर्व सीएम निशंक का कहना है कि सरकार कानून पर जो भी फैसला लेगी, सोच समझकर लेगी. निशंक का कहना है कि सैद्धांतिक बात ये है कि उत्तराखंड की 70 प्रतिशत जमीन पर जंगल हैं, और बाकी में आबादी. ऐसे में जरूरत के हिसाब से जमीन कम है. गौरतलब है कि उत्तराखंड की पहचान मठ मंदिरों वाले धार्मिक राज्य की है. यहां हरिद्वार से लेकर बद्रीनाथ तक दुनिया के करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र हैं. ऐसे में धार्मिक स्थलों के नाम पर अवैध अतिक्रमण रोकने की बात, भू कानून कमेटी की रिपोर्ट में कही गई है. ताकि राज्य की सांस्कृतिक पहचान बरकरार रह सके. . PHOTOS: पहले प्यार से गुलाम संग जबरन शादी तक. . . पाक वाली सीमा की पूरी कुंडली, जिसने सचिन के लिए की सारी हदें पार!
उत्तराखंड में नए भू कानून को लेकर गठित कमेटी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपी सिफारिश रिपोर्ट. देहरादूनः उत्तराखंड में नए भू कानून को लेकर चर्चा तेज है. नए भू-कानून को लेकर गठित कमेटी ने सरकार को सिफारिश सौंप दी है. नए भू कानून का मुख्य उद्देश्य धर्म के नाम पर अवैध कब्जों को रोकना है. बताया गया कि अगर भू कानून की सिफारिशें जस की तस लागू हुईं, तो उत्तराखंड में धर्म की आड़ में कोई अवैध कब्जा और निर्माण नहीं हो सकेगा. भू कानून कमेटी का तर्क है कि इस सिफारिश के पीछे की वजह देवभूमि की पहचान बरकरार रखना है. उत्तराखंड में आने वाला भू कानून, कितना सख्त होगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा. पर कहा जा रहा कि अगर कमेटी की एक एक सिफारिश जस की तस लागू हुई, तो धर्म के नाम पर जमीनों पर अवैध कब्जे का काम बंद हो सकता है. भू कानून कमेटी ने इसको लेकर रिपोर्ट में सिफारिश की है कि मस्जिद और मजार के नाम पर जो अवैध अतिक्रमण की बातें हो रही हैं, उसे देखते हुए जमीन लेने के लिए पहले डीएम और फिर शासन से परमिशन ली जाए. कमेटी के सदस्य अजेंद्र अजय का कहना है उत्तराखंड की संस्कृति और विरासत को देखते हुए ये सिफारिश की गई है. देवभूमि में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी सख्त रुख की बात कर चुके हैं. मुख्यमंत्री, राज्य की सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान बरकरार रखने को लेकर सख्ती दिखा चुके हैं. उन्होंने कहा कि देवभूमि की विरासत के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा. पूरे मामले को लेकर पूर्व सीएम निशंक का कहना है कि सरकार कानून पर जो भी फैसला लेगी, सोच समझकर लेगी. निशंक का कहना है कि सैद्धांतिक बात ये है कि उत्तराखंड की सत्तर प्रतिशत जमीन पर जंगल हैं, और बाकी में आबादी. ऐसे में जरूरत के हिसाब से जमीन कम है. गौरतलब है कि उत्तराखंड की पहचान मठ मंदिरों वाले धार्मिक राज्य की है. यहां हरिद्वार से लेकर बद्रीनाथ तक दुनिया के करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र हैं. ऐसे में धार्मिक स्थलों के नाम पर अवैध अतिक्रमण रोकने की बात, भू कानून कमेटी की रिपोर्ट में कही गई है. ताकि राज्य की सांस्कृतिक पहचान बरकरार रह सके. . PHOTOS: पहले प्यार से गुलाम संग जबरन शादी तक. . . पाक वाली सीमा की पूरी कुंडली, जिसने सचिन के लिए की सारी हदें पार!
दूसरी लहर के कारण उड़ानों की संख्या में काफी कमी आने के कारण दिल्ली एयरपोर्ट ने मई में टर्मिनल-2 को अस्थाई रूप से बंद कर दिया था. इसके बाद सभी उड़ानें टर्मिनल-3 से ही संचालित हो रही थीं. कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर की स्थिति नियंत्रित होने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर घरेलू यात्रियों की आवाजाही बढ़ने लगी है. दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने गुरुवार को बताया कि मध्य मई की तुलना में जून के अंत में एयरपोर्ट पर घरेलू यात्रियों की संख्या में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है. DIAL ने एक बयान में कहा कि इस साल जून में उड़ान भरने वालों में 48 फीसदी परिवार या दोस्तों से मिलने के लिए, 25 फीसदी ने छुट्टी मनाने और 19 फीसदी बिजनेस ट्रेवलर ने यात्रा की. वहीं जून 2019 में, 44 फीसदी यात्रियों ने छुट्टी मनाने के लिए फ्लाइट से यात्रा की थी, जबकि दोस्त और परिवार से मिलने के लिए यात्रा करने वालों की संख्या 41 फीसदी थी. कोरोना वायरस की दूसरी लहर के कारण भारत का एविएशन सेक्टर बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. अप्रैल तक सभी उड़ानें पूरी क्षमता के साथ चालू थीं. फिलहाल एयरलाइंस को 50 फीसदी क्षमता के साथ ही उड़ान भरने की अनुमति है. दूसरी लहर के कारण उड़ानों की संख्या में काफी कमी आने के कारण दिल्ली एयरपोर्ट ने मई में टर्मिनल-2 को अस्थाई रूप से बंद कर दिया था. इसके बाद सभी उड़ानें टर्मिनल-3 से ही संचालित हो रही थीं. मई के दूसरे हफ्ते में DIAL ने बताया था कि महामारी से पहले तक यहां से प्रतिदिन 1,500 उड़ानें संचालित होती थीं. फरवरी महीने में दिल्ली एयरपोर्ट पर प्रतिदिन यात्रियों की औसत संख्या करीब 1.15 लाख थी, जो दूसरी लहर में घटकर प्रतिदिन करीब 30,000 से भी कम हो गई थी. देश से नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी 31 जुलाई तक निलंबित हैं. संक्रमण फैलने के बाद पिछले साल 23 मार्च 2020 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलने वाली अनुसूचित उड़ाने निलंबित हैं. लेकिन मई 2020 के बाद से 'वंदे भारत मिशन' के तहत विशेष अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का परिचालन किया जा रहा है. इसके अलावा पिछले साल जुलाई से चुनिंदा देशों के बीच द्विपक्षीय "एयर बबल" व्यवस्था के तहत कुछ विमानों का परिचालन जारी है.
दूसरी लहर के कारण उड़ानों की संख्या में काफी कमी आने के कारण दिल्ली एयरपोर्ट ने मई में टर्मिनल-दो को अस्थाई रूप से बंद कर दिया था. इसके बाद सभी उड़ानें टर्मिनल-तीन से ही संचालित हो रही थीं. कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर की स्थिति नियंत्रित होने के बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर घरेलू यात्रियों की आवाजाही बढ़ने लगी है. दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने गुरुवार को बताया कि मध्य मई की तुलना में जून के अंत में एयरपोर्ट पर घरेलू यात्रियों की संख्या में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है. DIAL ने एक बयान में कहा कि इस साल जून में उड़ान भरने वालों में अड़तालीस फीसदी परिवार या दोस्तों से मिलने के लिए, पच्चीस फीसदी ने छुट्टी मनाने और उन्नीस फीसदी बिजनेस ट्रेवलर ने यात्रा की. वहीं जून दो हज़ार उन्नीस में, चौंतालीस फीसदी यात्रियों ने छुट्टी मनाने के लिए फ्लाइट से यात्रा की थी, जबकि दोस्त और परिवार से मिलने के लिए यात्रा करने वालों की संख्या इकतालीस फीसदी थी. कोरोना वायरस की दूसरी लहर के कारण भारत का एविएशन सेक्टर बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. अप्रैल तक सभी उड़ानें पूरी क्षमता के साथ चालू थीं. फिलहाल एयरलाइंस को पचास फीसदी क्षमता के साथ ही उड़ान भरने की अनुमति है. दूसरी लहर के कारण उड़ानों की संख्या में काफी कमी आने के कारण दिल्ली एयरपोर्ट ने मई में टर्मिनल-दो को अस्थाई रूप से बंद कर दिया था. इसके बाद सभी उड़ानें टर्मिनल-तीन से ही संचालित हो रही थीं. मई के दूसरे हफ्ते में DIAL ने बताया था कि महामारी से पहले तक यहां से प्रतिदिन एक,पाँच सौ उड़ानें संचालित होती थीं. फरवरी महीने में दिल्ली एयरपोर्ट पर प्रतिदिन यात्रियों की औसत संख्या करीब एक.पंद्रह लाख थी, जो दूसरी लहर में घटकर प्रतिदिन करीब तीस,शून्य से भी कम हो गई थी. देश से नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी इकतीस जुलाई तक निलंबित हैं. संक्रमण फैलने के बाद पिछले साल तेईस मार्च दो हज़ार बीस से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलने वाली अनुसूचित उड़ाने निलंबित हैं. लेकिन मई दो हज़ार बीस के बाद से 'वंदे भारत मिशन' के तहत विशेष अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का परिचालन किया जा रहा है. इसके अलावा पिछले साल जुलाई से चुनिंदा देशों के बीच द्विपक्षीय "एयर बबल" व्यवस्था के तहत कुछ विमानों का परिचालन जारी है.
जागरण संवाददाता, बलिया : शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार फैलाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के मुश्किल दिन शुरू हो गए हैं। उन पर नकेल कसने के लिए शासन ने सरकारी सेवकों को अपनी चल और अचल संपत्ति का ब्यौरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। आनाकानी करने वाले अधिकारियों पर खुली सतर्कता जांच बैठाने के भी निर्देश दिए गए हैं। माध्यमिक शिक्षा और बेसिक शिक्षा विभाग आदेश के अनुपालन में जुटा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के कार्यालय में 17 सरकारी सेवक हैं, इनमें लिपिक 13 हैं। बेसिक शिक्षा विभाग कार्यालय से जुड़े करीब 38 सरकारी सेवकों में 19 लिपिक संवर्ग के कर्मचारी हैं। बीएसए शिव नारायण सिंह ने बताया कि महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने आदेश दिए हैं कि बेसिक शिक्षा विभाग के सभी सरकारी सेवकों, जिनमें सभी अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं, उन्हें अपनी सभी चल और अचल संपत्ति का विवरण शासन को देना है। इसलिए वह उसका विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करेंगे और उसकी एक प्रति शासन को भेजेंगे। इसे 20 जुलाई तक अनिवार्य रूप से शासन को भेजना है। एक ही पलट पर लंबे समय से जमे लिपिकों व लेखा विभाग के कर्मियों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। उनका तबादला किया जाएगा। इसके निर्देश अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने दिए हैं। उन्होंने कहा है कि उप्र सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली में सरकारी सेवकों को प्रथम नियुक्ति और हर पांच साल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा नियुक्ति प्राधिकारी को उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। स्थानांतरण नीति के आधार पर सभी कार्यालयों में सालों से तैनात उन लिपिकों के पटल बदलने के निर्देश दिए हैं, जो 31 मार्च तक तीन साल से अधिक समय से एक ही पटल पर काम कर रहे हों। यह तबादला भी 10 जुलाई तक करने हैं। शासन से पत्र आया है। सभी सरकारी सेवकों को सूचित कर दिया गया है। सभी को ऑनलाइन प्रपत्र भरना हैं। लंबे समय से एक ही पटल पर जमे बाबुओं के पटल बदलने के भी निर्देश हैं।
जागरण संवाददाता, बलिया : शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार फैलाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के मुश्किल दिन शुरू हो गए हैं। उन पर नकेल कसने के लिए शासन ने सरकारी सेवकों को अपनी चल और अचल संपत्ति का ब्यौरा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। आनाकानी करने वाले अधिकारियों पर खुली सतर्कता जांच बैठाने के भी निर्देश दिए गए हैं। माध्यमिक शिक्षा और बेसिक शिक्षा विभाग आदेश के अनुपालन में जुटा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के कार्यालय में सत्रह सरकारी सेवक हैं, इनमें लिपिक तेरह हैं। बेसिक शिक्षा विभाग कार्यालय से जुड़े करीब अड़तीस सरकारी सेवकों में उन्नीस लिपिक संवर्ग के कर्मचारी हैं। बीएसए शिव नारायण सिंह ने बताया कि महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने आदेश दिए हैं कि बेसिक शिक्षा विभाग के सभी सरकारी सेवकों, जिनमें सभी अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं, उन्हें अपनी सभी चल और अचल संपत्ति का विवरण शासन को देना है। इसलिए वह उसका विवरण मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करेंगे और उसकी एक प्रति शासन को भेजेंगे। इसे बीस जुलाई तक अनिवार्य रूप से शासन को भेजना है। एक ही पलट पर लंबे समय से जमे लिपिकों व लेखा विभाग के कर्मियों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। उनका तबादला किया जाएगा। इसके निर्देश अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने दिए हैं। उन्होंने कहा है कि उप्र सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली में सरकारी सेवकों को प्रथम नियुक्ति और हर पांच साल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा नियुक्ति प्राधिकारी को उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। स्थानांतरण नीति के आधार पर सभी कार्यालयों में सालों से तैनात उन लिपिकों के पटल बदलने के निर्देश दिए हैं, जो इकतीस मार्च तक तीन साल से अधिक समय से एक ही पटल पर काम कर रहे हों। यह तबादला भी दस जुलाई तक करने हैं। शासन से पत्र आया है। सभी सरकारी सेवकों को सूचित कर दिया गया है। सभी को ऑनलाइन प्रपत्र भरना हैं। लंबे समय से एक ही पटल पर जमे बाबुओं के पटल बदलने के भी निर्देश हैं।
मुंबई। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी के लोकप्रिय मॉडल मारुति WagonR ने नया इतिहास रचा है। मारुति की Alto और Maruti 800 के बाद WagonR ऐसी तीसरी कार बन गई है जिसकी बिक्री 20 लाख को पार कर गई है। कंपनी ने WagonR को 1999 में लॉन्च किया था और इसको 10 लाख का आंकड़ा छूने में 12 साल लग गए थे, लेकिन 10 लाख से लेकर 20 लाख का आंकड़ा छूने में WagonR को सिर्फ 6 साल लगे हैं। मारुति की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक पिछले 10 सालों से देश में WagonR उसके टॉप 5 सेलिंग मॉडल्स में बनी हुई है। मारुति ने WagonR को 1999 में लॉन्च किया था और 2004 में इसकी बिक्री का आंकड़ा 1 लाख तक पहुंचा था। इसके बाद 2008 में 5 लाख, 2011 में 10 लाख, 2014 में 15 लाख और अब 2017 में 20 लाख की बिक्री का आंकड़ा पार हुआ है। WagonR की इस सफलता पर मारुति के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक आर एस कल्सी ने बताया कि देश में स्माल कार सेग्मेंट में भारी प्रतिसपर्धा के बावजूद कार खरीदारों के लिए WagonR पहली पसंद बना हुआ है। मारुति की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक WagonR खरीदने वाले करीब 45 फीसदी ग्राहक ऐसे हैं जिन्होंने पहली कार के तौर पर इसे खरीदा है, करीब 20 फीसदी ग्राहक ऐसे हैं जिन्होंने दोबारा इस मॉडल को खरीदना पसंद किया है। मारुति के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, मुंबई, पुणे, बैंग्लुरू और अहमदाबाद जैसे शहरों में कार की सबसे ज्यादा बिक्री हुई है। मारुति के सबसे लोकप्रिय मॉडल Alto और Maruti 800 के बाद WagonR 20 लाख की बिक्री को पार करने वाली तीसरी कार बनी है।
मुंबई। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी के लोकप्रिय मॉडल मारुति WagonR ने नया इतिहास रचा है। मारुति की Alto और Maruti आठ सौ के बाद WagonR ऐसी तीसरी कार बन गई है जिसकी बिक्री बीस लाख को पार कर गई है। कंपनी ने WagonR को एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में लॉन्च किया था और इसको दस लाख का आंकड़ा छूने में बारह साल लग गए थे, लेकिन दस लाख से लेकर बीस लाख का आंकड़ा छूने में WagonR को सिर्फ छः साल लगे हैं। मारुति की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक पिछले दस सालों से देश में WagonR उसके टॉप पाँच सेलिंग मॉडल्स में बनी हुई है। मारुति ने WagonR को एक हज़ार नौ सौ निन्यानवे में लॉन्च किया था और दो हज़ार चार में इसकी बिक्री का आंकड़ा एक लाख तक पहुंचा था। इसके बाद दो हज़ार आठ में पाँच लाख, दो हज़ार ग्यारह में दस लाख, दो हज़ार चौदह में पंद्रह लाख और अब दो हज़ार सत्रह में बीस लाख की बिक्री का आंकड़ा पार हुआ है। WagonR की इस सफलता पर मारुति के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक आर एस कल्सी ने बताया कि देश में स्माल कार सेग्मेंट में भारी प्रतिसपर्धा के बावजूद कार खरीदारों के लिए WagonR पहली पसंद बना हुआ है। मारुति की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक WagonR खरीदने वाले करीब पैंतालीस फीसदी ग्राहक ऐसे हैं जिन्होंने पहली कार के तौर पर इसे खरीदा है, करीब बीस फीसदी ग्राहक ऐसे हैं जिन्होंने दोबारा इस मॉडल को खरीदना पसंद किया है। मारुति के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली, मुंबई, पुणे, बैंग्लुरू और अहमदाबाद जैसे शहरों में कार की सबसे ज्यादा बिक्री हुई है। मारुति के सबसे लोकप्रिय मॉडल Alto और Maruti आठ सौ के बाद WagonR बीस लाख की बिक्री को पार करने वाली तीसरी कार बनी है।
गढ़वाः केसरवानी वैश्य सभा के तत्वाधान में अमृत महोत्सव गोत्राचार्य परम पूज्य महर्षि ऋषि कश्यप मुनि की जयंती मनाई गयी। इस अवसर पर शोभा यात्रा नगर भ्रमण कर स्थानीय बिगन देवी स्मृति भवन के प्रांगण में गोत्राचार्य महर्षि कश्यप मुनि की के तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित कर तथा तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित किया गया । जिसमें नगर परिषद अध्यक्ष पिंकी केशरी , केसरवानी वैश्य सभा के अध्यक्ष सह प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुमार केशरी,केसरवानी महिला सभा के अध्यक्ष मीरा केशरी, केसरवानी वैश्य तरुण सभा के अध्यक्ष शुभम केशरी , विवाह परिचय समिति के संयोजक प्रदीप कुमार केशरी ने सामुहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर एवम गणेश वंदना ॐ गन गन पतै नमो नमःका भजन गाकर कार्यक्रम का शुरुआत की गई । अखिल भारतीय केसरवानी वैश्य महासभा के झारखंड जनगणना प्रमुख प्रदीप केशरी ने ब्रह्मा नारायण विष्णु नारायण ने भजन प्रस्तुत किया , मोहित कुमार केशरी , चंदन कुमार केशरी अजय केशरी,मनोज केशरी आदि लोगों ने भी एक से बढ़ कर एक भजन प्रस्तुत किया । इस अवसर पर उपस्थित सभा के संस्थापक विन्देश्वरी प्रसाद केशरी ,केसरवानी वैश्य सभा के उपाध्यक्ष रवि कुमार केशरी , रविन्द्र कुमार केशरी , महा मंत्री राजेश कुमार केशरी , मंत्री नंदन केशरी,अमित कुमार केशरी , मोनू केशरी , भंडार मंत्री उमेश प्रसाद केशरी,तरुण सभा के उपाध्यक्ष नमन केशरी, आकाश केशरी,महामंत्री शिवम केशरी, ऋषभ केशरी, उतम केशरी,प्रीतम केशरी,कुशल केशरी,मनीष केशरी,श्रेष्ठ केशरी,आंशित केशरी,प्रियांसु केशरी,राहुल केशरी,किशन केशरी,राज केशरी, गणेश प्रसाद केशरी , नानहू केशरी,रामजी केशरी,मनोज केशरी,बबलू केशरी, मनोज कुमार केशरी , ललिता देवी , शाकुन्तला देवी , इंदु केशरी , गीता देवी , मंजू केशरी , शुभम केशरी , शिवम केशरी , राम जी केशरी , अमित केशरी , अनुसुइया केशरी , गुड़िया केशरी , अजय कुमार केशरी , रामु केशरी , दीपक कुमार केशरी , आरती केशरी , मालती देवी , आस्था केशरी , मुकेश कुमार केशरी ,विजय कुमार केशरी , अनूप कुमार केशरी , राजेश सर्राफ , अनिल कुमार केशरी , महाबीर प्रसाद केशरी आदि लोगों ने कार्यक्रम में प्रमुख रूप से भाग लिया व अन्य लोग उपस्थित थे।
गढ़वाः केसरवानी वैश्य सभा के तत्वाधान में अमृत महोत्सव गोत्राचार्य परम पूज्य महर्षि ऋषि कश्यप मुनि की जयंती मनाई गयी। इस अवसर पर शोभा यात्रा नगर भ्रमण कर स्थानीय बिगन देवी स्मृति भवन के प्रांगण में गोत्राचार्य महर्षि कश्यप मुनि की के तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित कर तथा तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित किया गया । जिसमें नगर परिषद अध्यक्ष पिंकी केशरी , केसरवानी वैश्य सभा के अध्यक्ष सह प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुमार केशरी,केसरवानी महिला सभा के अध्यक्ष मीरा केशरी, केसरवानी वैश्य तरुण सभा के अध्यक्ष शुभम केशरी , विवाह परिचय समिति के संयोजक प्रदीप कुमार केशरी ने सामुहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर एवम गणेश वंदना ॐ गन गन पतै नमो नमःका भजन गाकर कार्यक्रम का शुरुआत की गई । अखिल भारतीय केसरवानी वैश्य महासभा के झारखंड जनगणना प्रमुख प्रदीप केशरी ने ब्रह्मा नारायण विष्णु नारायण ने भजन प्रस्तुत किया , मोहित कुमार केशरी , चंदन कुमार केशरी अजय केशरी,मनोज केशरी आदि लोगों ने भी एक से बढ़ कर एक भजन प्रस्तुत किया । इस अवसर पर उपस्थित सभा के संस्थापक विन्देश्वरी प्रसाद केशरी ,केसरवानी वैश्य सभा के उपाध्यक्ष रवि कुमार केशरी , रविन्द्र कुमार केशरी , महा मंत्री राजेश कुमार केशरी , मंत्री नंदन केशरी,अमित कुमार केशरी , मोनू केशरी , भंडार मंत्री उमेश प्रसाद केशरी,तरुण सभा के उपाध्यक्ष नमन केशरी, आकाश केशरी,महामंत्री शिवम केशरी, ऋषभ केशरी, उतम केशरी,प्रीतम केशरी,कुशल केशरी,मनीष केशरी,श्रेष्ठ केशरी,आंशित केशरी,प्रियांसु केशरी,राहुल केशरी,किशन केशरी,राज केशरी, गणेश प्रसाद केशरी , नानहू केशरी,रामजी केशरी,मनोज केशरी,बबलू केशरी, मनोज कुमार केशरी , ललिता देवी , शाकुन्तला देवी , इंदु केशरी , गीता देवी , मंजू केशरी , शुभम केशरी , शिवम केशरी , राम जी केशरी , अमित केशरी , अनुसुइया केशरी , गुड़िया केशरी , अजय कुमार केशरी , रामु केशरी , दीपक कुमार केशरी , आरती केशरी , मालती देवी , आस्था केशरी , मुकेश कुमार केशरी ,विजय कुमार केशरी , अनूप कुमार केशरी , राजेश सर्राफ , अनिल कुमार केशरी , महाबीर प्रसाद केशरी आदि लोगों ने कार्यक्रम में प्रमुख रूप से भाग लिया व अन्य लोग उपस्थित थे।
दिल्ली में नीतीश कुमार की राहुल गांधी संग मुलाकात की जो पहली तस्वीर आई उसमें बिहार के सीएम मुस्कुराते नजर आ रहे हैं। राहुल गांधी के भी चेहरे पर स्माइल साफ झलक रही थी। ऐसे में ये माना जा सकता है कि नीतीश कुमार जिस प्लान के तहत दिल्ली दौरे पर आए हैं वो सफल रहा। दरअसल, नीतीश को राष्ट्रीय पटल पर आने के लिए कांग्रेस और दूसरे दलों की जरूरत है और कांग्रेस को बिहार में नीतीश कुमार की। ऐसे में दोनों दिग्गज नेताओं की बॉडी लेंग्वेज से लग रहा की उनकी मुलाकात पॉजिटिव रही है। वहीं नीतीश-राहुल गांधी की सामने आई इस तस्वीर पर बीजेपी नेतृत्व की भी नजर जरूर होगी। जिस तरह से दोनों नेताओं में गर्मजोशी नजर आ रही वो बीजेपी आलाकमान को थोड़ी परेशान जरूर कर रही होगी। इसकी वजह भी है कि क्योंकि कुछ समय पहले तक नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू एनडीए के साथ थी। अब वो महागठबंधन के साथ चले गए हैं। एक अहम सहयोगी का इस तरह से विरोधी खेमे में जाना पार्टी की रणनीति को प्रभावित तो जरूर करेगा। कांग्रेस के साथ नीतीश की नजदीकी आगामी चुनाव में कितना प्रभाव डालेगी ये तो आने वाले समय में पता चलेगा। फिलहाल दोनों नेताओं की ये मुस्कुराती तस्वीर बीजेपी नेतृत्व को चुभ जरूर रही होगी। वहीं राहुल गांधी से मुलाकात के ठीक पहले दिल्ली में नीतीश कुमार ने पीएम पद की दावेदारी को लेकर फिर अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मेरी प्रधानमंत्री बनने की कोई इच्छा नहीं है। मैं बस यही चाहता हूं का विपक्ष एक साथ आए और बीजेपी के खिलाफ लड़े। इसी के साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आगे का प्लान का खुलासा कर दिया। उन्होंने आगे कहा कि अगर विपक्ष एक साथ आएगा तो अच्छा होगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार शाम करीब 5 बजे पटना से दिल्ली पहुंचे। वहीं दिल्ली रवाना होने से पहले नीतीश कुमार ने पटना में राबड़ी आवास पहुंचकर आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव से भी मुलाकात की। लालू यादव के साथ क्या बातचीत हुई इस सवाल के जवाब में सीएम ने कहा, हमारी और इनकी बातचीत क्या, हम तो एक ही विचारधारा के लोग हैं। सारी बातों पर हम सब एकमत हैं। इसी के बाद नीतीश कुमार विपक्षी दलों को एकजुट करने की कवायद में तीन दिन के दौरे पर दिल्ली पहुंचे। कुल मिलाकर नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जेडीयू ने आगामी 2024 लोकसभा चुनाव तैयारी तेज कर दी है।
दिल्ली में नीतीश कुमार की राहुल गांधी संग मुलाकात की जो पहली तस्वीर आई उसमें बिहार के सीएम मुस्कुराते नजर आ रहे हैं। राहुल गांधी के भी चेहरे पर स्माइल साफ झलक रही थी। ऐसे में ये माना जा सकता है कि नीतीश कुमार जिस प्लान के तहत दिल्ली दौरे पर आए हैं वो सफल रहा। दरअसल, नीतीश को राष्ट्रीय पटल पर आने के लिए कांग्रेस और दूसरे दलों की जरूरत है और कांग्रेस को बिहार में नीतीश कुमार की। ऐसे में दोनों दिग्गज नेताओं की बॉडी लेंग्वेज से लग रहा की उनकी मुलाकात पॉजिटिव रही है। वहीं नीतीश-राहुल गांधी की सामने आई इस तस्वीर पर बीजेपी नेतृत्व की भी नजर जरूर होगी। जिस तरह से दोनों नेताओं में गर्मजोशी नजर आ रही वो बीजेपी आलाकमान को थोड़ी परेशान जरूर कर रही होगी। इसकी वजह भी है कि क्योंकि कुछ समय पहले तक नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू एनडीए के साथ थी। अब वो महागठबंधन के साथ चले गए हैं। एक अहम सहयोगी का इस तरह से विरोधी खेमे में जाना पार्टी की रणनीति को प्रभावित तो जरूर करेगा। कांग्रेस के साथ नीतीश की नजदीकी आगामी चुनाव में कितना प्रभाव डालेगी ये तो आने वाले समय में पता चलेगा। फिलहाल दोनों नेताओं की ये मुस्कुराती तस्वीर बीजेपी नेतृत्व को चुभ जरूर रही होगी। वहीं राहुल गांधी से मुलाकात के ठीक पहले दिल्ली में नीतीश कुमार ने पीएम पद की दावेदारी को लेकर फिर अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मेरी प्रधानमंत्री बनने की कोई इच्छा नहीं है। मैं बस यही चाहता हूं का विपक्ष एक साथ आए और बीजेपी के खिलाफ लड़े। इसी के साथ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आगे का प्लान का खुलासा कर दिया। उन्होंने आगे कहा कि अगर विपक्ष एक साथ आएगा तो अच्छा होगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार शाम करीब पाँच बजे पटना से दिल्ली पहुंचे। वहीं दिल्ली रवाना होने से पहले नीतीश कुमार ने पटना में राबड़ी आवास पहुंचकर आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव से भी मुलाकात की। लालू यादव के साथ क्या बातचीत हुई इस सवाल के जवाब में सीएम ने कहा, हमारी और इनकी बातचीत क्या, हम तो एक ही विचारधारा के लोग हैं। सारी बातों पर हम सब एकमत हैं। इसी के बाद नीतीश कुमार विपक्षी दलों को एकजुट करने की कवायद में तीन दिन के दौरे पर दिल्ली पहुंचे। कुल मिलाकर नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जेडीयू ने आगामी दो हज़ार चौबीस लोकसभा चुनाव तैयारी तेज कर दी है।
Gwalior Court News: बलबीर सिंह, ग्वालियर नईदुनिया। फूड सेफ्टी विभाग ने डेयरी संचालक पर किया था एक लाख का जुर्माना। जिसके खिलाफ व्यापारी ने काेर्ट में अपील दायर की थी। सभी पक्षाें काे सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने कहा कि जुर्माना राशि 30 हजार रुपये करना उचित प्रतित हाेता है। खाद्य विभाग ने 23 जुलाई 2019 को थाटीपुर में भाटिया डेयरी पर कार्रवाई की थी। यहां से सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। डेयरी पर दूध, दही सहित अन्य सामान विक्रय हेतु रखा था। खाद्य विभाग ने अलग-अलग सामग्री के सैंपल लिए। उन सैंपलों की जांच रिपाेर्ट में खाद्य सामग्री मानक स्तर के अनुरूप नहीं पाई गई। इसके बाद विभाग ने सुनील भाटिया पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। भाटिया ने जुर्माने की राशि को जिला न्यायालय में चुनौती दी। उनकी ओर से तर्क दिया गया कि खाद्य विभाग ने नियमों का पालन नहीं किया। उनकी खाद्य सामग्री मानव उपयोग के लिए खतरनाक नहीं है। अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं दिया। खाद्य विभाग की ओर से अपील का विरोध किया गया और उसे खारिज करने की मांग की गई। कोर्ट ने तथ्यों के परीक्षण के बाद पाया कि खाद्य विभाग ने जुर्माना करने में गलती है। इसलिए इसे घटाकर 30 हजार रुपये किया जाता है। इससे दूध कारोबारी को बड़ी राहत मिल गई है। ज्ञात हो कि खाद्य विभाग की टीम ने त्याेहारों को देखते हुए शहर में बड़ी संख्या में कार्रवाई की है। सैंपल की जांच रिपोर्ट आने के बाद जुर्माने लगाए जा रहे हैं। लाेग जुर्माने की राशि को हाई कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं।
Gwalior Court News: बलबीर सिंह, ग्वालियर नईदुनिया। फूड सेफ्टी विभाग ने डेयरी संचालक पर किया था एक लाख का जुर्माना। जिसके खिलाफ व्यापारी ने काेर्ट में अपील दायर की थी। सभी पक्षाें काे सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने कहा कि जुर्माना राशि तीस हजार रुपये करना उचित प्रतित हाेता है। खाद्य विभाग ने तेईस जुलाई दो हज़ार उन्नीस को थाटीपुर में भाटिया डेयरी पर कार्रवाई की थी। यहां से सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। डेयरी पर दूध, दही सहित अन्य सामान विक्रय हेतु रखा था। खाद्य विभाग ने अलग-अलग सामग्री के सैंपल लिए। उन सैंपलों की जांच रिपाेर्ट में खाद्य सामग्री मानक स्तर के अनुरूप नहीं पाई गई। इसके बाद विभाग ने सुनील भाटिया पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। भाटिया ने जुर्माने की राशि को जिला न्यायालय में चुनौती दी। उनकी ओर से तर्क दिया गया कि खाद्य विभाग ने नियमों का पालन नहीं किया। उनकी खाद्य सामग्री मानव उपयोग के लिए खतरनाक नहीं है। अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं दिया। खाद्य विभाग की ओर से अपील का विरोध किया गया और उसे खारिज करने की मांग की गई। कोर्ट ने तथ्यों के परीक्षण के बाद पाया कि खाद्य विभाग ने जुर्माना करने में गलती है। इसलिए इसे घटाकर तीस हजार रुपये किया जाता है। इससे दूध कारोबारी को बड़ी राहत मिल गई है। ज्ञात हो कि खाद्य विभाग की टीम ने त्याेहारों को देखते हुए शहर में बड़ी संख्या में कार्रवाई की है। सैंपल की जांच रिपोर्ट आने के बाद जुर्माने लगाए जा रहे हैं। लाेग जुर्माने की राशि को हाई कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं।
बांदा जेल में कैद मुख्तार अंसारी की आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कोर्ट में जज के सामने पेशी हुई। पेशी के दौरान मुख्तार गिडगिड़ाते दिखा। आजमगढ़ः उत्तर प्रदेश का बाहुबली विधायक और माफिया (Mafia) मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) पंजाब से यूपी की बांदा जेल में शिफ्ट होने के बाद डरा सहमा है। गुरूवार को मुख्तार पेशी के दौरान जज के सामने गिडगिड़ाने लगा। मुख्तार के इस बर्ताव को देख हर कोई दंग रह गया। दरअसल, बांदा जेल में कैद मुख्तार अंसारी की आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कोर्ट में जज के सामने पेशी हो रही थी। करीब 20 मिनट तक हुई सुनवाई के दौरान मुख्तार रोने लगा। मुख्तार ने गिड़गिड़ाते हुए जज के सामने खुद को निर्दोष बताया और योगी सरकार पर द्वेष की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया। विवेचक पक्ष को भी कोर्ट ने सुना। विवेचक पक्ष ने मुख्तार से पूछताछ की मांग की है। ऐसे में माना जा रहा है कि आजमगढ़ पुलिस जल्द ही मुख्तार अंसारी से पूछताछ के लिए बांदा जेल जा सकती है। फ़िलहाल सुनवाई के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि नियत की है। बता दें कि गैंगेस्टर कोर्ट ने मुख्तार को गुरूवार को पेश होने का निर्देश दिया था लेकिन कोरोना वायरस के कारण मुख्तार कोर्ट में पेश नहीं हो सका हालांकि वीडियो कांफ्रेसिंग के जरीए कार्ट में उसके केस की सुनवाई हुई। गौरतलब है कि साल 2014 में आजमगढ़ के तरवां थाना क्षेत्र के ऐराखुर्द गांव में सड़क निर्माण के दौरान वर्चस्व की लड़ाई में बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के गुर्गों ने अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें एक मजदूर की मौत हो गयी थी और एक अन्य मजदूर घायल हो गया था। मामले में मुख्तार और उसके साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और इसी केस में मुख्तार और उसके 10 सहयोगियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।
बांदा जेल में कैद मुख्तार अंसारी की आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कोर्ट में जज के सामने पेशी हुई। पेशी के दौरान मुख्तार गिडगिड़ाते दिखा। आजमगढ़ः उत्तर प्रदेश का बाहुबली विधायक और माफिया मुख्तार अंसारी पंजाब से यूपी की बांदा जेल में शिफ्ट होने के बाद डरा सहमा है। गुरूवार को मुख्तार पेशी के दौरान जज के सामने गिडगिड़ाने लगा। मुख्तार के इस बर्ताव को देख हर कोई दंग रह गया। दरअसल, बांदा जेल में कैद मुख्तार अंसारी की आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कोर्ट में जज के सामने पेशी हो रही थी। करीब बीस मिनट तक हुई सुनवाई के दौरान मुख्तार रोने लगा। मुख्तार ने गिड़गिड़ाते हुए जज के सामने खुद को निर्दोष बताया और योगी सरकार पर द्वेष की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया। विवेचक पक्ष को भी कोर्ट ने सुना। विवेचक पक्ष ने मुख्तार से पूछताछ की मांग की है। ऐसे में माना जा रहा है कि आजमगढ़ पुलिस जल्द ही मुख्तार अंसारी से पूछताछ के लिए बांदा जेल जा सकती है। फ़िलहाल सुनवाई के बाद कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि नियत की है। बता दें कि गैंगेस्टर कोर्ट ने मुख्तार को गुरूवार को पेश होने का निर्देश दिया था लेकिन कोरोना वायरस के कारण मुख्तार कोर्ट में पेश नहीं हो सका हालांकि वीडियो कांफ्रेसिंग के जरीए कार्ट में उसके केस की सुनवाई हुई। गौरतलब है कि साल दो हज़ार चौदह में आजमगढ़ के तरवां थाना क्षेत्र के ऐराखुर्द गांव में सड़क निर्माण के दौरान वर्चस्व की लड़ाई में बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के गुर्गों ने अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें एक मजदूर की मौत हो गयी थी और एक अन्य मजदूर घायल हो गया था। मामले में मुख्तार और उसके साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ और इसी केस में मुख्तार और उसके दस सहयोगियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।
भारतीय क्रिकेट टीम के लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल श्रीलंका के खिलाफ टी-20 मुकाबला खेल IPL की तैयारियों में जुट गए हैं। इस सिलसिले में गुरुवार को युजवेंद्र जयपुर पहुंचे। यहां वह 3 से 4 दिन का क्वारैंटाइन पीरियड खत्म कर राजस्थान रॉयल्स के प्रैक्टिस सेशन में शामिल होंगे। इस दौरान चहल ने राजस्थान रॉयल्स की पिंक टी-शर्ट पहन सोशल मीडिया पर पोस्ट की। जिसमें लिखा था 'जब वी मेट'। वहीं, इससे पहले चहल ने फ्लाइट में बैठकर सोशल मीडिया के जरिए जयपुर आने की जानकारी साझा की थी। IPL ऑक्शन के दौरान राजस्थान रॉयल्स ने युजवेंद्र चहल को 6. 5 करोड़ रुपए में खरीदा था। राजस्थान रॉयल्स के प्रैक्टिस सेशन में शामिल होने से पहले उन्हें 3-5 दिनों के लिए क्वारैंटीन में रहना होगा। वहीं, चहल के साथ राजस्थान रॉयल्स के कप्तान संजू सैमसन समेत टीम के अन्य खिलाड़ियों के भी प्रैक्टिस सेशन में शामिल होने के लिए जयपुर आने की उम्मीद है। दरअसल, युजवेंद्र चहल ने साल 2011 में मुंबई इंडियंस फ्रैंचाइजी के साथ अपने IPL सफर की शुरुआत की थी। इस दौरान उन्हें पहचान नहीं मिल पाई। इसके बाद युजवेंद्र चहल साल 2014 से विराट कोहली की कप्तानी वाली RCB में खेलने लगे। अब IPL 2022 में चहल अपनी तीसरी फ्रैंचाइजी राजस्थान के लिए खेलेंगे। चहल ने अपने IPL करियर में 114 मैचों में 139 विकेट लिए हैं। इस दौरान उनका बेस्ट प्रदर्शन 25 रन देकर 4 विकेट झटकना है।
भारतीय क्रिकेट टीम के लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल श्रीलंका के खिलाफ टी-बीस मुकाबला खेल IPL की तैयारियों में जुट गए हैं। इस सिलसिले में गुरुवार को युजवेंद्र जयपुर पहुंचे। यहां वह तीन से चार दिन का क्वारैंटाइन पीरियड खत्म कर राजस्थान रॉयल्स के प्रैक्टिस सेशन में शामिल होंगे। इस दौरान चहल ने राजस्थान रॉयल्स की पिंक टी-शर्ट पहन सोशल मीडिया पर पोस्ट की। जिसमें लिखा था 'जब वी मेट'। वहीं, इससे पहले चहल ने फ्लाइट में बैठकर सोशल मीडिया के जरिए जयपुर आने की जानकारी साझा की थी। IPL ऑक्शन के दौरान राजस्थान रॉयल्स ने युजवेंद्र चहल को छः. पाँच करोड़ रुपए में खरीदा था। राजस्थान रॉयल्स के प्रैक्टिस सेशन में शामिल होने से पहले उन्हें तीन-पाँच दिनों के लिए क्वारैंटीन में रहना होगा। वहीं, चहल के साथ राजस्थान रॉयल्स के कप्तान संजू सैमसन समेत टीम के अन्य खिलाड़ियों के भी प्रैक्टिस सेशन में शामिल होने के लिए जयपुर आने की उम्मीद है। दरअसल, युजवेंद्र चहल ने साल दो हज़ार ग्यारह में मुंबई इंडियंस फ्रैंचाइजी के साथ अपने IPL सफर की शुरुआत की थी। इस दौरान उन्हें पहचान नहीं मिल पाई। इसके बाद युजवेंद्र चहल साल दो हज़ार चौदह से विराट कोहली की कप्तानी वाली RCB में खेलने लगे। अब IPL दो हज़ार बाईस में चहल अपनी तीसरी फ्रैंचाइजी राजस्थान के लिए खेलेंगे। चहल ने अपने IPL करियर में एक सौ चौदह मैचों में एक सौ उनतालीस विकेट लिए हैं। इस दौरान उनका बेस्ट प्रदर्शन पच्चीस रन देकर चार विकेट झटकना है।
सफेद बालों को दोबारा natural कलर में लाना है तो आजमाए यह घरेलू नुस्खा - COCONUT OIL AND LEMON MIXTURE: IT TURNS GRAY HAIR BACK TO ITS NATURAL COLOR. पटाखे से जला हुआ अंग हो जायेगा एक दिन में सही अगर तुरंत कर लेंगे ये काम. अमरुद की पत्तियां बालो का झड़ना कम कर उन्हें तेजी से बढने में मदद कर सकती है !! मस्सों को हमेसा के लिए जड़ से ख़त्म कर देगे ये आयुर्वेदिक उपचार !!
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मुंबई पुलिस ने समाजसेवा शाखा की मदद से सोमवार देर रात छापेमारी कर एक सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया. पुलिस ने मौके से दो मॉडल्स को एजेंटों के चंगुल से छुड़ाया है. मामले में एक एजेंट को गिरफ्तार किया गया है. उससे पूछताछ की जा रही है. समाजसेवा शाखा के अधिकारीयों को जानकारी मिली कि गोरेगांव में देह व्यापार के लिए मॉडल्स जाने वाली हैं. इसके बाद पुलिस ने जाल बिछाया और ओबेरॉय माल के नीचे एक कार से दोनों मॉडल्स को बरामद किया. इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट (पीटा) और देह व्यापार के विभिन्न धाराओं के तहत पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच-पड़ताल कर रही है.
मुंबई पुलिस ने समाजसेवा शाखा की मदद से सोमवार देर रात छापेमारी कर एक सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ किया. पुलिस ने मौके से दो मॉडल्स को एजेंटों के चंगुल से छुड़ाया है. मामले में एक एजेंट को गिरफ्तार किया गया है. उससे पूछताछ की जा रही है. समाजसेवा शाखा के अधिकारीयों को जानकारी मिली कि गोरेगांव में देह व्यापार के लिए मॉडल्स जाने वाली हैं. इसके बाद पुलिस ने जाल बिछाया और ओबेरॉय माल के नीचे एक कार से दोनों मॉडल्स को बरामद किया. इम्मोरल ट्रैफिक प्रिवेंशन एक्ट और देह व्यापार के विभिन्न धाराओं के तहत पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच-पड़ताल कर रही है.
आपका स्वागत है! बेहतर अनुभव के लिये कृपया लॉग इन करें या रजिस्टर करें। पुरानी वेबसाइट में किया गया रजिस्ट्रेशन नई वेबसाइट में मान्य नहीं होगा। नई वेबसाइट का इस्तेमाल करने के लिये नए एवं पुराने अभ्यर्थियो को दोबारा रजिस्ट्रेशन करना होगा। यदि आपने अभी तक अपना अकाउंट नहीं बनाया है, तो कृपया यहाँ रजिस्टर करें।
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मोबाइल फोन और कंप्यूटर में गेम के बढ़ते बाजार में स्टार इंडिया भी अपने गेम शो का तड़का लगा रहा है। शाहरुख खान के रियलिटी क्विज शो 'क्या आप पांचवीं पास से तेज हैं' के लिए समूह पहले ही क्विज किताबों और आइसक्रीम से बाजार को गर्म कर चुका है, लेकिन अब समूह गेमर्स के लिए मोबाइल, पीसी और डीटीएच-आईपीटीवी गेम्स लेकर आया है। स्टार इंडिया ने क्विज शो को गेम में तब्दील करने के लिए इंडियागेम्स को अपने साथ जोड़ा है। मोबाइल गेम के लिए उपभोक्ता रिलायंस, टाटा के अलावा जीपीआरएस फोन का इस्तेमाल कर सकते हैं। रिलायंस और टाटा के लिए यह गेम 7 रुपये प्रति खेल में उपलब्ध होगा, जबकि जीपीआरएस फोन उपभोक्ता इस गेम को 99 रुपये में पा सकते हैं। मोबाइल के अलावा कंप्यूटर पर उपभोक्ता इसे 200 रुपये प्रति महीने की सब्सक्रिप्शन पर जिसमें अन्य गेम भी शामिल हैं, खरीद सकते हैं या फिर वे 200 रुपये में गेम की डीवीडी ले सकते हैं। आखिर एक रियलिटी शो के चलते कितने लोग मोबाइल गेम या पीसी गेम को पसंद करेंगे, इस बारे में स्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सीनियर वाइस प्रेजिडेंट (लाइसेंसिंग एवं मार्केटिंग) नानेट डीसूजा का कहना है, 'पांचवीं पास.... मोबाइल या फिर पीसी गेम में भी आपको असली जैसा मजा आएगा। उन्होंने बताया कि कंपनी ने गेम के विकास और उसकी मार्केटिंग में लगभग 1 करोड़ रुपये खर्च किए है, जिसमें स्टार इंडिया को दी जाने वाली रॉयल्टी शामिल नहीं है। गौरतलब है कि इससे पहले भी कंपनी स्टार इंडिया के रियलिटी क्विज शो 'कौन बनेगा करोड़पति' के लिए मोबाइल गेम बना चुकी है। सिर्फ मोबाइल गेम से ही कंपनी ने 100 रुपये प्रति माह के लिए 50 से 70 हजार सब्सक्रिप्शन दिए। मोबाइल फोन के 750 से 1000 करोड़ रुपये के भारतीय बाजार में लगभग 55 फीसदी हिस्सेदारी के साथ इंडियागेम भारत में पांचवी पास के अलावा जुलाई में बैट मैन गेम और दुनिया भर में फिल्म 'जर्नी टू दी सेंटर ऑफ दी अर्थ' की 3डी गेम फिल्म के साथ ही लॉन्च करने वाली है। माइक्रोसॉफ्ट के गेमिंग कंसोल एक्सबॉक्स 360 के लिए कंपनी बायोशॉक अक्तूबर में लॉन्च करने वाली है। उद्योग सूत्रों के अनुसार स्टार इंडिया को पांचवीं पास.... की मर्केंडाइजिंग से ही लगभग 8 से 10 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल होने की उम्मीद है, लेकिन इस बारे में नानेट डीसूजा ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। पांचवी पास का दूसरा सीजन दर्शकों को इस साल की आखिरी तिमाही में देखने को मिलेगा।
मोबाइल फोन और कंप्यूटर में गेम के बढ़ते बाजार में स्टार इंडिया भी अपने गेम शो का तड़का लगा रहा है। शाहरुख खान के रियलिटी क्विज शो 'क्या आप पांचवीं पास से तेज हैं' के लिए समूह पहले ही क्विज किताबों और आइसक्रीम से बाजार को गर्म कर चुका है, लेकिन अब समूह गेमर्स के लिए मोबाइल, पीसी और डीटीएच-आईपीटीवी गेम्स लेकर आया है। स्टार इंडिया ने क्विज शो को गेम में तब्दील करने के लिए इंडियागेम्स को अपने साथ जोड़ा है। मोबाइल गेम के लिए उपभोक्ता रिलायंस, टाटा के अलावा जीपीआरएस फोन का इस्तेमाल कर सकते हैं। रिलायंस और टाटा के लिए यह गेम सात रुपयापये प्रति खेल में उपलब्ध होगा, जबकि जीपीआरएस फोन उपभोक्ता इस गेम को निन्यानवे रुपयापये में पा सकते हैं। मोबाइल के अलावा कंप्यूटर पर उपभोक्ता इसे दो सौ रुपयापये प्रति महीने की सब्सक्रिप्शन पर जिसमें अन्य गेम भी शामिल हैं, खरीद सकते हैं या फिर वे दो सौ रुपयापये में गेम की डीवीडी ले सकते हैं। आखिर एक रियलिटी शो के चलते कितने लोग मोबाइल गेम या पीसी गेम को पसंद करेंगे, इस बारे में स्टार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सीनियर वाइस प्रेजिडेंट नानेट डीसूजा का कहना है, 'पांचवीं पास.... मोबाइल या फिर पीसी गेम में भी आपको असली जैसा मजा आएगा। उन्होंने बताया कि कंपनी ने गेम के विकास और उसकी मार्केटिंग में लगभग एक करोड़ रुपये खर्च किए है, जिसमें स्टार इंडिया को दी जाने वाली रॉयल्टी शामिल नहीं है। गौरतलब है कि इससे पहले भी कंपनी स्टार इंडिया के रियलिटी क्विज शो 'कौन बनेगा करोड़पति' के लिए मोबाइल गेम बना चुकी है। सिर्फ मोबाइल गेम से ही कंपनी ने एक सौ रुपयापये प्रति माह के लिए पचास से सत्तर हजार सब्सक्रिप्शन दिए। मोबाइल फोन के सात सौ पचास से एक हज़ार करोड़ रुपये के भारतीय बाजार में लगभग पचपन फीसदी हिस्सेदारी के साथ इंडियागेम भारत में पांचवी पास के अलावा जुलाई में बैट मैन गेम और दुनिया भर में फिल्म 'जर्नी टू दी सेंटर ऑफ दी अर्थ' की तीनडी गेम फिल्म के साथ ही लॉन्च करने वाली है। माइक्रोसॉफ्ट के गेमिंग कंसोल एक्सबॉक्स तीन सौ साठ के लिए कंपनी बायोशॉक अक्तूबर में लॉन्च करने वाली है। उद्योग सूत्रों के अनुसार स्टार इंडिया को पांचवीं पास.... की मर्केंडाइजिंग से ही लगभग आठ से दस करोड़ रुपये का राजस्व हासिल होने की उम्मीद है, लेकिन इस बारे में नानेट डीसूजा ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। पांचवी पास का दूसरा सीजन दर्शकों को इस साल की आखिरी तिमाही में देखने को मिलेगा।
ईंट बजा रहे हैं। गौरतलब है कि 23 साल बाद इस फिल्म का सीक्वल गदर-2 के नाम से 11 अगस्त को प्रदर्शित होने जा रहा है। इस फिल्म का बज बनाने के लिए निर्माताओं ने पहले से ही यह तय कर लिया था कि मूल फिल्म का एक बार फिर से गदर-2 से पहले सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया जाएगा। इसी रणनीति के तहत अब गदर का नया ट्रेलर जारी किया गया है, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। जहां नए टच में पुरानी फिल्म 9 जून को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। वहीं गदर 2, 11 अगस्त को बॉक्स ऑफिस पर तूफान मचाएगी। सनी देओल और अमीषा पटेल स्टारर गदर एक प्रेम कथा को एक बार फिर से फैंस का भरपूर प्यार मिल रहा है। इस ट्रेलर को यूट्यूब पर अब तक 2. 5 मिलियन व्यूज मिल चुके हैं। बता दें कि साल 2001 में रिलीज हुई फिल्म गदर एक प्रेम कथा को अब 9 जून को 4k और डोल्बी एटम्स के साथ रिलीज किया जाएगा। ऐसे में इस फिल्म को देखने का दर्शकों का एक्सपीरियंस बेहतरीन होने वालाहै। गौरतलब है कि सनी देओल, अमीषा पटेल और अमरीश पुरी स्टारर फिल्म गदरः एक प्रेम कथा केवल 18. 5 करोड़ रुपये में बनकर तैयार हुई थी। वहीं साल 2001 में रिलीज हुई इस फिल्म का लाइफटाइम कलेक्शन 76. 44 करोड़ रुपये था तो वहीं फिल्म ने वर्ल्डवाइड स्तर पर 111. 73 करोड़ रुपये की शानदार कमाई की थी। सनी देओल स्टारर इस फिल्म ने कमाई के सभी रिकॉर्ड्स तोड़ दिए थे। गदर एक प्रेम कथा को देखने के लिए सिनेमाघरों में लंबी लाइनें लगती थीं। ऐसे में अब फैंस को बड़ी ही बेसब्री से गदर 2 का इंतजार है।
ईंट बजा रहे हैं। गौरतलब है कि तेईस साल बाद इस फिल्म का सीक्वल गदर-दो के नाम से ग्यारह अगस्त को प्रदर्शित होने जा रहा है। इस फिल्म का बज बनाने के लिए निर्माताओं ने पहले से ही यह तय कर लिया था कि मूल फिल्म का एक बार फिर से गदर-दो से पहले सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया जाएगा। इसी रणनीति के तहत अब गदर का नया ट्रेलर जारी किया गया है, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। जहां नए टच में पुरानी फिल्म नौ जून को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। वहीं गदर दो, ग्यारह अगस्त को बॉक्स ऑफिस पर तूफान मचाएगी। सनी देओल और अमीषा पटेल स्टारर गदर एक प्रेम कथा को एक बार फिर से फैंस का भरपूर प्यार मिल रहा है। इस ट्रेलर को यूट्यूब पर अब तक दो. पाँच मिलियन व्यूज मिल चुके हैं। बता दें कि साल दो हज़ार एक में रिलीज हुई फिल्म गदर एक प्रेम कथा को अब नौ जून को चारk और डोल्बी एटम्स के साथ रिलीज किया जाएगा। ऐसे में इस फिल्म को देखने का दर्शकों का एक्सपीरियंस बेहतरीन होने वालाहै। गौरतलब है कि सनी देओल, अमीषा पटेल और अमरीश पुरी स्टारर फिल्म गदरः एक प्रेम कथा केवल अट्ठारह. पाँच करोड़ रुपये में बनकर तैयार हुई थी। वहीं साल दो हज़ार एक में रिलीज हुई इस फिल्म का लाइफटाइम कलेक्शन छिहत्तर. चौंतालीस करोड़ रुपये था तो वहीं फिल्म ने वर्ल्डवाइड स्तर पर एक सौ ग्यारह. तिहत्तर करोड़ रुपये की शानदार कमाई की थी। सनी देओल स्टारर इस फिल्म ने कमाई के सभी रिकॉर्ड्स तोड़ दिए थे। गदर एक प्रेम कथा को देखने के लिए सिनेमाघरों में लंबी लाइनें लगती थीं। ऐसे में अब फैंस को बड़ी ही बेसब्री से गदर दो का इंतजार है।
शिमला : प्रदेश राजधानी शिमला में मंगलवार शाम को चार नए कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इनके साथ ही आज प्रदेश में कोरोना के कुल 11 मामले सामने आ चुके हैं। इसके पूर्व मंडी में सुबह और शाम को मिलाकर सात मामले आए थे। शिमला में जो मामले आए हैं उनमें से एक छोटा शिमला, एक टुटू व दो ठियोग क्षेत्र के बताए जा रहे हैं। ठियोग के दोनों लोग सेब व्यापारी है और यहां सेव खरीदने के लिए थे तथा दोनों ही क्वांरटाइन थे, परंतु दोनों की ही रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वहीं टुटू में जो महिला पॉजिटिव मिली है वह पूर्व में आए एक संक्रमित की मां बताई जा रही है। छोटा शिमला का व्यक्ति सचिवालय में कार्यरत बताया जा रहा है। सभी के संबंध में विस्तृत जानकारी खबर लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो पाई थी। Coronavirus News: चार नए कोरोना पॉजिटिव शिमला में शाम को मिले Reviewed by Himachal Fast News on 29 July Rating:
शिमला : प्रदेश राजधानी शिमला में मंगलवार शाम को चार नए कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। इनके साथ ही आज प्रदेश में कोरोना के कुल ग्यारह मामले सामने आ चुके हैं। इसके पूर्व मंडी में सुबह और शाम को मिलाकर सात मामले आए थे। शिमला में जो मामले आए हैं उनमें से एक छोटा शिमला, एक टुटू व दो ठियोग क्षेत्र के बताए जा रहे हैं। ठियोग के दोनों लोग सेब व्यापारी है और यहां सेव खरीदने के लिए थे तथा दोनों ही क्वांरटाइन थे, परंतु दोनों की ही रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वहीं टुटू में जो महिला पॉजिटिव मिली है वह पूर्व में आए एक संक्रमित की मां बताई जा रही है। छोटा शिमला का व्यक्ति सचिवालय में कार्यरत बताया जा रहा है। सभी के संबंध में विस्तृत जानकारी खबर लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो पाई थी। Coronavirus News: चार नए कोरोना पॉजिटिव शिमला में शाम को मिले Reviewed by Himachal Fast News on उनतीस जुलाईy Rating:
योगाभ्यास । दिगम्बर जैमः । भारतवर्ष में योगाभ्यासका अर्थ एक सम्मान प्रद शब्दोंमें लिया जाता है । जिसे लोग योगी समझलेते हैं उसकी ओर स्वयं श्रद्धा उत्पन्न हो जाती है यहातक कि उसे भूत, भविष्यत, वर्तमानका ज्ञाता भी समझने लगजाते हैं, उसकी सेवा करते हैं, जिससे नानातरह की सिद्धिया प्राप्त होसकें और इनका योगचलसे प्राप्त होना असंभव भी नहीं । वर्तमान समय में ऐसे विशिष्ट योगी या तो देखनेमें नहीं आते और हों भी तो कचित् विरले, किंतु आजकल जिसको कुछ आसन लगाते हुए या श्वास निरोधको करते हुए देखते हैं उसको ही लोग पहुंचा हुआ साधु समझ बैठते हैं । ले० - श्री० पं० रवींद्रनाथ जैन न्यायतीर्थ-रोहतक । जब कि ससारमें यह विषय इतना अच्छा समझा जाता है तब क्या जैन शास्त्र इसे हेय समते हैं ? यदि नहीं तो इसके प्रतिपादन करनेवाले शास्त्र जैन सप्रदायमें क्यो नहीं मिलते ? क्यों लोगोंकोइसके लिये औरोंके शास्त्रोंको टटोलना पड़ता है। इसका उत्तर यही है कि लोगोंने हठयोगको ही योग समझ रक्खा है और हठयोगको ही योग समझना जैन सिद्धात अथवा अन्य सिद्धातसे विरुद्ध है। यदि योगका व्यापक अर्थ लिया जावे तो अवश्य जैन सिद्धांतों में जगह पर योगका वर्णन मिलेगा। यह बात अवश्य होसकती है कि जैन सिद्धातमें योगकी जगह ध्यान अथवा समाधि शब्द व्यवहृत किया गया हो। हा, हठयोगका भी विशेष रूपसे किन्हीं २ शास्त्रों में वर्णन किया है, पर हठयोग आत्मकल्याण है। कभी२ साधककी अपेक्षा बाधक होजाता है। अतएव पा तो हठयोगका वर्णन ही नहीं है, अथवा है तो बहुत थोड़ा, किसी २ झायार्णव आदि शास्त्रों में कुछ विशेष वर्णन बताया भी है पर इसे वहींपर अश्रेयस्कर भी अंत में बता दिया गया है। पर जनताका झुकाव शरीरको लाभप्रद होते हुये भी आत्माके लिये किन्हीं अंशोंमें मनेयस्कर हठयोगकी ओर ही होरहा है। अत उसे जैनागममें योगाभ्यास नहीं मिलता है और उसके लिये विधर्मियोंके शास्त्र टटोलने पड़ते है । योग शब्द का अर्थ श्री राजवार्तिकजीमें " युजेः समाधिवचनस्य ध्यानं समाधिः योग इत्यर्थः " समाधि अर्थ सूचक युज धातुका योग ध्यान समाधि यह अर्थ बताया है। अन्य अजैन भी युज धातु संगति करण अर्थ में है। उसका अर्थ जिससे आत्मा परमात्माका मेल होसके बताया है, जो जैन सिद्धांतकी समाधि सदृश ही है। हां समाधिमें मात्मा स्वय अपनेको शुद्धानुभवन करता है और संगतिमे एक मानेहुये परब्रह्म में आत्मलय होता है। अंतर केवल इतना ही है। योगके अन्य शास्त्रोंमें १ ज्ञानयोग (ज्ञान विकाससे आत्मा वैराग्य एवं विवेकमें अपने अस्तित्वको भूल जाती है, वह अपने अस्तित्व के कण कण में परमात्मरूप देखने लगता है उस समय मुक्तिमें अप्रकट सम्मेलन होने लगता है ), २ हठयोग ( वायु और अगोंपर अधिकारकर परमात्म स्वरूप की ओर झुकता है ), ३ राजयोग ( मन एकाग्र कर परमात्माके दिव्य स्वरूपका वारवार चितवन करते हुये आत्माका समाधिस्थ हो परमात्मामें लीन हो जाना है)।
योगाभ्यास । दिगम्बर जैमः । भारतवर्ष में योगाभ्यासका अर्थ एक सम्मान प्रद शब्दोंमें लिया जाता है । जिसे लोग योगी समझलेते हैं उसकी ओर स्वयं श्रद्धा उत्पन्न हो जाती है यहातक कि उसे भूत, भविष्यत, वर्तमानका ज्ञाता भी समझने लगजाते हैं, उसकी सेवा करते हैं, जिससे नानातरह की सिद्धिया प्राप्त होसकें और इनका योगचलसे प्राप्त होना असंभव भी नहीं । वर्तमान समय में ऐसे विशिष्ट योगी या तो देखनेमें नहीं आते और हों भी तो कचित् विरले, किंतु आजकल जिसको कुछ आसन लगाते हुए या श्वास निरोधको करते हुए देखते हैं उसको ही लोग पहुंचा हुआ साधु समझ बैठते हैं । लेशून्य - श्रीशून्य पंशून्य रवींद्रनाथ जैन न्यायतीर्थ-रोहतक । जब कि ससारमें यह विषय इतना अच्छा समझा जाता है तब क्या जैन शास्त्र इसे हेय समते हैं ? यदि नहीं तो इसके प्रतिपादन करनेवाले शास्त्र जैन सप्रदायमें क्यो नहीं मिलते ? क्यों लोगोंकोइसके लिये औरोंके शास्त्रोंको टटोलना पड़ता है। इसका उत्तर यही है कि लोगोंने हठयोगको ही योग समझ रक्खा है और हठयोगको ही योग समझना जैन सिद्धात अथवा अन्य सिद्धातसे विरुद्ध है। यदि योगका व्यापक अर्थ लिया जावे तो अवश्य जैन सिद्धांतों में जगह पर योगका वर्णन मिलेगा। यह बात अवश्य होसकती है कि जैन सिद्धातमें योगकी जगह ध्यान अथवा समाधि शब्द व्यवहृत किया गया हो। हा, हठयोगका भी विशेष रूपसे किन्हीं दो शास्त्रों में वर्णन किया है, पर हठयोग आत्मकल्याण है। कभीदो साधककी अपेक्षा बाधक होजाता है। अतएव पा तो हठयोगका वर्णन ही नहीं है, अथवा है तो बहुत थोड़ा, किसी दो झायार्णव आदि शास्त्रों में कुछ विशेष वर्णन बताया भी है पर इसे वहींपर अश्रेयस्कर भी अंत में बता दिया गया है। पर जनताका झुकाव शरीरको लाभप्रद होते हुये भी आत्माके लिये किन्हीं अंशोंमें मनेयस्कर हठयोगकी ओर ही होरहा है। अत उसे जैनागममें योगाभ्यास नहीं मिलता है और उसके लिये विधर्मियोंके शास्त्र टटोलने पड़ते है । योग शब्द का अर्थ श्री राजवार्तिकजीमें " युजेः समाधिवचनस्य ध्यानं समाधिः योग इत्यर्थः " समाधि अर्थ सूचक युज धातुका योग ध्यान समाधि यह अर्थ बताया है। अन्य अजैन भी युज धातु संगति करण अर्थ में है। उसका अर्थ जिससे आत्मा परमात्माका मेल होसके बताया है, जो जैन सिद्धांतकी समाधि सदृश ही है। हां समाधिमें मात्मा स्वय अपनेको शुद्धानुभवन करता है और संगतिमे एक मानेहुये परब्रह्म में आत्मलय होता है। अंतर केवल इतना ही है। योगके अन्य शास्त्रोंमें एक ज्ञानयोग , दो हठयोग , तीन राजयोग ।
अगर इस तरह से बनाओगे चटपटी चिकन पास्ता मैकरोनी तो बड़े हो या बच्चे सभी मांग-मांग कर खाएंगे। मैं आपको मैकरोनी और पास्ता दोनों को एक साथ बनाना बताऊंगी। इसमें हम चीज़ भी डालेगे जिसको वजह से ये और बढ़िया लगेगा। नए तरीके से बना पास्ता और इनका कॉम्बिनेशन आपको बहुत पसंद आएंगा। चिकन पास्ता मैकरोनी बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में पास्ता और मैकरोनी को बॉईल करने के लिए पानी डालकर इसमें थोड़ा सा नमक डाल ले। उसके बाद पानी में बॉईल आने के बाद इसमें मैकरोनी और पास्ता दोनों को डालकर सॉफ्ट होने तक बॉईल कर ले। जब पास्ता और मैकरोनी दोनों सॉफ्ट हो जाएं, तब इनको पानी से निकालकर स्टेनर में रख ले। फिर मैकरोनी और पास्ते के ऊपर ठंडा पानी डाल ले। जिससे ये चिपके नही। उसके बाद एक पैन में ऑइल डालकर गर्म होने के लिए रख दे। जब ऑइल गर्म हो जाएं, तब इसमें सबसे पहले लहुसन डालकर इसको हल्का सा सुनहर कर ले। अब इसमें प्याज़ डालकर प्याज़ को लाइट पिंक होने तक फ्राई कर ले। फिर श्रेड किया हुआ चिकन डालकर इसको तेज़ आंच पर 2 से 3 मिनट स्टिर करते हुए फ्राई कर ले। उसके बाद मशरूम, लाल शिमला मिर्च, पीली शिमला मिर्च, हरी शिमला मिर्च और हरी मिर्च सबको डालकर 2 से 3 मिनट फ्राई कर ले। फिर टमाटर और नमक डालकर टमाटर को भी थोड़ा सा सॉफ्ट होने तक पका ले। अब इसमें टोमेटो सॉस और ग्रीन चिली सॉस डालकर दोनों को अच्छे से मिक्स कर ले। फिर इसमें दो से तीन टेबलस्पून पानी डालकर सॉस को 30 सेकंड पकने दे। फिर कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर और काली मिर्च पाउडर दोनो को डालकर अच्छे से मिक्स कर ले। फिर बॉईल किया हुआ पास्ता और मैकरोनी डालकर अच्छे से मिक्स कर दे। अब इसमें बटर डालकर इसको भी मिक्स करते हुए बटर को मेल्ट होने दे। आंच को धीमा रखे। फिर इसमें ग्रेट की हुए मोज़रेला चीज़ डालकर मिक्स कर ले और हरा धनिया डालकर मिलाने के बाद गैस को बंद कर दे। आपका चिकन पास्ता मैकरोनी बनकर रेडी हैं। फिर इसको सर्विंग प्लेट में निकालकर सर्व करे। - अगर आप ये बच्चो के लिए बना रहे हैं तो मिर्च थोड़ी कम डाले। - मैकरोनी और पास्ता दोनों को आप अलग-अलग भी बॉईल कर सकते हैं।
अगर इस तरह से बनाओगे चटपटी चिकन पास्ता मैकरोनी तो बड़े हो या बच्चे सभी मांग-मांग कर खाएंगे। मैं आपको मैकरोनी और पास्ता दोनों को एक साथ बनाना बताऊंगी। इसमें हम चीज़ भी डालेगे जिसको वजह से ये और बढ़िया लगेगा। नए तरीके से बना पास्ता और इनका कॉम्बिनेशन आपको बहुत पसंद आएंगा। चिकन पास्ता मैकरोनी बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में पास्ता और मैकरोनी को बॉईल करने के लिए पानी डालकर इसमें थोड़ा सा नमक डाल ले। उसके बाद पानी में बॉईल आने के बाद इसमें मैकरोनी और पास्ता दोनों को डालकर सॉफ्ट होने तक बॉईल कर ले। जब पास्ता और मैकरोनी दोनों सॉफ्ट हो जाएं, तब इनको पानी से निकालकर स्टेनर में रख ले। फिर मैकरोनी और पास्ते के ऊपर ठंडा पानी डाल ले। जिससे ये चिपके नही। उसके बाद एक पैन में ऑइल डालकर गर्म होने के लिए रख दे। जब ऑइल गर्म हो जाएं, तब इसमें सबसे पहले लहुसन डालकर इसको हल्का सा सुनहर कर ले। अब इसमें प्याज़ डालकर प्याज़ को लाइट पिंक होने तक फ्राई कर ले। फिर श्रेड किया हुआ चिकन डालकर इसको तेज़ आंच पर दो से तीन मिनट स्टिर करते हुए फ्राई कर ले। उसके बाद मशरूम, लाल शिमला मिर्च, पीली शिमला मिर्च, हरी शिमला मिर्च और हरी मिर्च सबको डालकर दो से तीन मिनट फ्राई कर ले। फिर टमाटर और नमक डालकर टमाटर को भी थोड़ा सा सॉफ्ट होने तक पका ले। अब इसमें टोमेटो सॉस और ग्रीन चिली सॉस डालकर दोनों को अच्छे से मिक्स कर ले। फिर इसमें दो से तीन टेबलस्पून पानी डालकर सॉस को तीस सेकंड पकने दे। फिर कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर और काली मिर्च पाउडर दोनो को डालकर अच्छे से मिक्स कर ले। फिर बॉईल किया हुआ पास्ता और मैकरोनी डालकर अच्छे से मिक्स कर दे। अब इसमें बटर डालकर इसको भी मिक्स करते हुए बटर को मेल्ट होने दे। आंच को धीमा रखे। फिर इसमें ग्रेट की हुए मोज़रेला चीज़ डालकर मिक्स कर ले और हरा धनिया डालकर मिलाने के बाद गैस को बंद कर दे। आपका चिकन पास्ता मैकरोनी बनकर रेडी हैं। फिर इसको सर्विंग प्लेट में निकालकर सर्व करे। - अगर आप ये बच्चो के लिए बना रहे हैं तो मिर्च थोड़ी कम डाले। - मैकरोनी और पास्ता दोनों को आप अलग-अलग भी बॉईल कर सकते हैं।
विधानसभा चुनाव के एलान के साथ ही वोट मांगने का दौर शुरू गया है। मिनरल वाटर का इस्तेमाल करने वाले राजनेताओ के सामने चंबल के मतदाताओं की ओर से साफ पानी का मुददा उठा करके नई मुसीबत खड़ी कर दी है। ऐसा लगता है कि चंबल मे पीने का साफ पानी का मुददा अगर प्रभावी हो गया तो दलों के समीकरण गड़बड़ा सकते हैं। पांच नदियों के संगम स्थल वाले इटावा जिले मे अभी कोई अहम चुनावी मुददा राजनैतिक दलों के पास नहीं है लेकिन चंबल घाटी में नदियों के किनारे रहने वाली एक बड़ी आबादी पीने के साफ पानी को लेकर राजनैतिक दलों के प्रत्याशियों को घेरने का पूरी तरह से मना बना चुकी है क्योंकि आजादी के बाद से अभी तक बीहड़ी गांव मे पीने के साफ पानी के नाम पर लोगों को यमुना, चंबल, क्वारी, सिंधु और पहुज नदियों का ही पानी पीना पड़ रहा है। पीने के साफ पानी का यह ऐसा मुददा हो सकता है जिससे हर राजनैतिक दलो का समीकरण गड़बड़ा सकता है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जिले इटावा मे भरथना सुरक्षित और इटावा सदर सीट के प्रत्याशी चंबल इलाके मे वोट मांगने के लिए तो जा रहे हैं लेकिन कोई भी चंबल के किनारे जिंदगी बसर करने वालों के लिए साफ पानी मुहैया कराने का कोई भरोसा नहीं दे पा रहा है। समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार कुलदीप गुप्ता संटू ने नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष की हैसियत ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के कुछेक इलाकों में वाटर कूलर लगवा कर लोगों की सहानुभूति लेनी शुरू कर दी है। ऐसा माना जा रहा है कि कुलदीप गुप्ता के लगवाए वाटर कूलर को लेकर लोगों मे तरह-तरह की राय है। उनके समर्थक वाटर कूलर को बहुत ही बेहतर बता रहे हैं तो विरोधी लोगों को प्रभावित करने की प्रकिया का हिस्सा। पीने के साफ पानी की समस्या से इटावा जिले की इटावा सदर और भरथना विधानसभा क्षेत्रों की काफी आबादी जूझ रही है। वैसे तो हर गांव में पीने के पानी के लिए सरकारी हैंडपंपों को लगाया जा चुका है लेकिन दिक्कत बरकरार है। इस वजह से चंबल, यमुना, क्वारी, सिंधु और पहुज नदियों के किनारे रहने वाले इन्हीं नदियों का पानी पीने के पानी के तौर करते आ रहे हैं। नदियों के पानी पीने से कई किस्म की यहां के वाशिंदो को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। करीब 10 साल से चंबल घाटी के विकास के लिए करोड़ों रुपए के पैकेज की मांग करके सुर्खियों में आए लोक समिति के अध्यक्ष सुल्तान सिंह का कहना है कि वैसे तो चंबल मे कई अहम समस्याएं हैं लेकिन सरकार अपने वादे के अनुसार उसे पीने का साफ पानी मुहैया नहीं करा पाती है तो इसे उसकी नाकामी ही माना जाएगा। ऐसे में अगर लोग चुनाव में दलों के प्रत्याशियों के सामने साफ पानी की दरकार कीमांग रखते हैं तो कोई गलत नहीं है क्योंकि हर आदमी को साफ पानी मांगने का हक है। डा. भीमराव अंबेडकर राजकीय संयुक्त चिकित्सालय के पूर्व वरिष्ठ चिकित्सक डा केएस भदौरिया का कहना है कि अगर किसी भी इंसान को साफ पानी पीने के लिए शुरुआती दिनों से न दिया जाए तो जाहिर है सामान्य इंसान की तरह से उसकी शारीरिक बनावट नहीं हो सकती।
विधानसभा चुनाव के एलान के साथ ही वोट मांगने का दौर शुरू गया है। मिनरल वाटर का इस्तेमाल करने वाले राजनेताओ के सामने चंबल के मतदाताओं की ओर से साफ पानी का मुददा उठा करके नई मुसीबत खड़ी कर दी है। ऐसा लगता है कि चंबल मे पीने का साफ पानी का मुददा अगर प्रभावी हो गया तो दलों के समीकरण गड़बड़ा सकते हैं। पांच नदियों के संगम स्थल वाले इटावा जिले मे अभी कोई अहम चुनावी मुददा राजनैतिक दलों के पास नहीं है लेकिन चंबल घाटी में नदियों के किनारे रहने वाली एक बड़ी आबादी पीने के साफ पानी को लेकर राजनैतिक दलों के प्रत्याशियों को घेरने का पूरी तरह से मना बना चुकी है क्योंकि आजादी के बाद से अभी तक बीहड़ी गांव मे पीने के साफ पानी के नाम पर लोगों को यमुना, चंबल, क्वारी, सिंधु और पहुज नदियों का ही पानी पीना पड़ रहा है। पीने के साफ पानी का यह ऐसा मुददा हो सकता है जिससे हर राजनैतिक दलो का समीकरण गड़बड़ा सकता है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जिले इटावा मे भरथना सुरक्षित और इटावा सदर सीट के प्रत्याशी चंबल इलाके मे वोट मांगने के लिए तो जा रहे हैं लेकिन कोई भी चंबल के किनारे जिंदगी बसर करने वालों के लिए साफ पानी मुहैया कराने का कोई भरोसा नहीं दे पा रहा है। समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार कुलदीप गुप्ता संटू ने नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष की हैसियत ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के कुछेक इलाकों में वाटर कूलर लगवा कर लोगों की सहानुभूति लेनी शुरू कर दी है। ऐसा माना जा रहा है कि कुलदीप गुप्ता के लगवाए वाटर कूलर को लेकर लोगों मे तरह-तरह की राय है। उनके समर्थक वाटर कूलर को बहुत ही बेहतर बता रहे हैं तो विरोधी लोगों को प्रभावित करने की प्रकिया का हिस्सा। पीने के साफ पानी की समस्या से इटावा जिले की इटावा सदर और भरथना विधानसभा क्षेत्रों की काफी आबादी जूझ रही है। वैसे तो हर गांव में पीने के पानी के लिए सरकारी हैंडपंपों को लगाया जा चुका है लेकिन दिक्कत बरकरार है। इस वजह से चंबल, यमुना, क्वारी, सिंधु और पहुज नदियों के किनारे रहने वाले इन्हीं नदियों का पानी पीने के पानी के तौर करते आ रहे हैं। नदियों के पानी पीने से कई किस्म की यहां के वाशिंदो को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। करीब दस साल से चंबल घाटी के विकास के लिए करोड़ों रुपए के पैकेज की मांग करके सुर्खियों में आए लोक समिति के अध्यक्ष सुल्तान सिंह का कहना है कि वैसे तो चंबल मे कई अहम समस्याएं हैं लेकिन सरकार अपने वादे के अनुसार उसे पीने का साफ पानी मुहैया नहीं करा पाती है तो इसे उसकी नाकामी ही माना जाएगा। ऐसे में अगर लोग चुनाव में दलों के प्रत्याशियों के सामने साफ पानी की दरकार कीमांग रखते हैं तो कोई गलत नहीं है क्योंकि हर आदमी को साफ पानी मांगने का हक है। डा. भीमराव अंबेडकर राजकीय संयुक्त चिकित्सालय के पूर्व वरिष्ठ चिकित्सक डा केएस भदौरिया का कहना है कि अगर किसी भी इंसान को साफ पानी पीने के लिए शुरुआती दिनों से न दिया जाए तो जाहिर है सामान्य इंसान की तरह से उसकी शारीरिक बनावट नहीं हो सकती।
पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम (Disability pension in Mizoram) राज्य में विकलांगता पेंशन योजना के तहते लाभार्थियों हर महीने केवल 100 रुपए देता है। राज्य में पंजीकृत 200 लाभार्थी हैं। ये जानकारी राज्यसभा में सरकार ने दी है। वहीं महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश (Disability pension in MP) जैसे बड़े राज्यों में भी हालात बेहतर नहीं हैं, जहां भी पेंशन के रूप में 300 रुपए दिए जाते हैं। बता दें कि महाराष्ट्र में 12. 12 लाख औ मध्यप्रदेश में 4. 79 लाख से अधिक लाभार्थी हैं। छत्तीसगढ़, ओडिशा और मेघालय (Disability pension in Meghalaya) जैसे राज्यों में राज्य पेंशन की राशि 200 रुपए है। पश्चिम बंगाल (Disability pension in WB) जैसा बड़ा राज्य 66,491 लाभार्थियों को 700 रुपये देता है। उत्तर प्रदेश (Disability pension in in UP) के 11. 17 लाख लाभार्थियों को हर महीने 1000 रुपए दिए जाते हैं। तेलंगाना में 5. 69 लाख से अधिक लाभार्थी हैं, जिन्हें सर्वाधिक 3016 रुपए की पेंशन दी जाती है। इसके बाद आंध्र प्रदेश (6. 59 लाख लाभार्थी) है जो 3,000 रुपये प्रदान करता है। पुडुचेरी के केंद्र शासित प्रदेश (20,952 लाभार्थी) में पेंशन 2,000 रुपए से लेकर अधिकतम 3,800 रुपये तक है। बता दें कि यह डेटा यह डेटा ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) की ओर से राज्यसभा में राज्य पेंशन योजनाओं के माध्यम से संबंधित लाभार्थियों और उन्हें हर महीने मिलने वाली राशि पर पूछे गए एक सवाल के जवाब पेश किया गया। 2,000 रुपए या उससे अधिक की मासिक पेंशन देने वाले राज्यों में हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली और अंडमान निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं। देश भर के लाभार्थियों को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना (Indira Gandhi National Disability Pension Scheme) के तहत दी जाने वाली मासिक पेंशन भी केवल 300 रुपए है। राज्य पेंशन डेटा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विकलांगों के अधिकारों के लिए बने राष्ट्रीय मंच (एनपीआरडी) के महासचिव मुरलीधरन ने कहा कि केंद्रीय सहायता एक दशक से अधिक समय से स्थिर है और 300 रुपए में तत्काल संशोधन की आवश्यकता है।
पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम राज्य में विकलांगता पेंशन योजना के तहते लाभार्थियों हर महीने केवल एक सौ रुपयापए देता है। राज्य में पंजीकृत दो सौ लाभार्थी हैं। ये जानकारी राज्यसभा में सरकार ने दी है। वहीं महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश जैसे बड़े राज्यों में भी हालात बेहतर नहीं हैं, जहां भी पेंशन के रूप में तीन सौ रुपयापए दिए जाते हैं। बता दें कि महाराष्ट्र में बारह. बारह लाख औ मध्यप्रदेश में चार. उन्यासी लाख से अधिक लाभार्थी हैं। छत्तीसगढ़, ओडिशा और मेघालय जैसे राज्यों में राज्य पेंशन की राशि दो सौ रुपयापए है। पश्चिम बंगाल जैसा बड़ा राज्य छयासठ,चार सौ इक्यानवे लाभार्थियों को सात सौ रुपयापये देता है। उत्तर प्रदेश के ग्यारह. सत्रह लाख लाभार्थियों को हर महीने एक हज़ार रुपयापए दिए जाते हैं। तेलंगाना में पाँच. उनहत्तर लाख से अधिक लाभार्थी हैं, जिन्हें सर्वाधिक तीन हज़ार सोलह रुपयापए की पेंशन दी जाती है। इसके बाद आंध्र प्रदेश है जो तीन,शून्य रुपयापये प्रदान करता है। पुडुचेरी के केंद्र शासित प्रदेश में पेंशन दो,शून्य रुपयापए से लेकर अधिकतम तीन,आठ सौ रुपयापये तक है। बता दें कि यह डेटा यह डेटा ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से राज्यसभा में राज्य पेंशन योजनाओं के माध्यम से संबंधित लाभार्थियों और उन्हें हर महीने मिलने वाली राशि पर पूछे गए एक सवाल के जवाब पेश किया गया। दो,शून्य रुपयापए या उससे अधिक की मासिक पेंशन देने वाले राज्यों में हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली और अंडमान निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं। देश भर के लाभार्थियों को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना के तहत दी जाने वाली मासिक पेंशन भी केवल तीन सौ रुपयापए है। राज्य पेंशन डेटा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विकलांगों के अधिकारों के लिए बने राष्ट्रीय मंच के महासचिव मुरलीधरन ने कहा कि केंद्रीय सहायता एक दशक से अधिक समय से स्थिर है और तीन सौ रुपयापए में तत्काल संशोधन की आवश्यकता है।
पखांजुर, बिप्लब् कुण्डू । छत्तीसगढ़ में पिछले दो हफ्तों से कोरोना के लगातार मामसे सामने आए हैं। जिससे भयावह स्थिति निर्मित हो गई है। इसे देखेत हुए कांकेर के युवा नेता पंकज साहा ने क्षेत्रवासियो को संदेश देते हुए कहा कि कोरोना को लेकर सरकार सचेत है और क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर हर मुमकिन कोशिश की जा रही है, जिससे क्षेत्रवासियों में सुरक्षा बनी रहे। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील है कि कोरोना जैसी बीमारी को सभी क्षेत्रवासी गंभीरता से ले और सोशल डिस्टेंस का पालन करे। मास्क और सेनेटाइजर का प्रयोग करें। साबुन से बार बार हाथ धोए, बिना किसी जरूरी काम यात्रा या बाहर न घूमे, सभी प्रवशी मजदूर और अन्य राज्य से आए लोग जो क्वारंटाइन सेंटरों में है। शासन प्रशासन के बनाए नियमों का पालन करे। उन्होंने कहा कि इस मुहिम में हम सभी को साथ मिलकर कोरोना से लड़ना है और कोरोना को हराना है।
पखांजुर, बिप्लब् कुण्डू । छत्तीसगढ़ में पिछले दो हफ्तों से कोरोना के लगातार मामसे सामने आए हैं। जिससे भयावह स्थिति निर्मित हो गई है। इसे देखेत हुए कांकेर के युवा नेता पंकज साहा ने क्षेत्रवासियो को संदेश देते हुए कहा कि कोरोना को लेकर सरकार सचेत है और क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर हर मुमकिन कोशिश की जा रही है, जिससे क्षेत्रवासियों में सुरक्षा बनी रहे। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील है कि कोरोना जैसी बीमारी को सभी क्षेत्रवासी गंभीरता से ले और सोशल डिस्टेंस का पालन करे। मास्क और सेनेटाइजर का प्रयोग करें। साबुन से बार बार हाथ धोए, बिना किसी जरूरी काम यात्रा या बाहर न घूमे, सभी प्रवशी मजदूर और अन्य राज्य से आए लोग जो क्वारंटाइन सेंटरों में है। शासन प्रशासन के बनाए नियमों का पालन करे। उन्होंने कहा कि इस मुहिम में हम सभी को साथ मिलकर कोरोना से लड़ना है और कोरोना को हराना है।
*अस्वीकरणः इस पृष्ठ में प्रदर्शित तस्वीरें उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत की जाती हैं और माना जाता है कि वे सार्वजनिक डोमेन से ली गयी हैं। इन तस्वीरों का कॉपीराइट उनके मूल प्रकाशक / फोटोग्राफर का है। यदि आपको लगता है कि ये फोटोज़ आपकी हैं या आपको लगता है कि आपके कॉपीराइट का उल्लंघन किया गया है, तो कृपया ([email protected]) पर हमें बतायें। हम तुरंत उन तस्वीरों को हटा देंगे।
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गुजरात के मुंद्रा पोर्ट के बाद अब भरूच जिले से भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद किया गया है. मुंबई ऐंटी नारकोटिक्स सेल की वर्ली यूनिट ने मंगलवार को भरूच जिले के अंकलेश्वर इलाके की एक फैक्ट्री में छापा मारा. इस छापेमारी में 513 किलो एमडी ड्रग्स बरामद किया गया है. एक अनुमान के मुताबिक, इतने ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 1,026 करोड़ रुपये है. ड्रग्स के अलावा कुल सात लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है. इससे पहले, मई महीने में गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से 500 करोड़ के ड्रग्स बरामद किए थे. इसके अलावा, जून में भी कच्छ के जखौ में बीएसएफ और पुलिस ने भारी मात्रा में हेरोइन बरामद की थी. बीते साल भी मुंद्रा बंदरगाह से 3,000 किलो ड्रग्स की खेप पकड़ी गई थी. जिसकी कीमत 21,000 करोड़ रुपये आँकी गई थी. आपको बता दें कि मुंद्रा बंदरगाह का मालिकाना हक इस समय अडाणी ग्रुप के पास है. पिछले दो सालों में मुंद्रा बंदरगाह से कई बार ड्रग्स की खेप बरामद हो चुकी है. यही वजह है कि गुजरात में विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने ड्रग्स के मुद्दे पर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं और मंत्रियों पर भी नशे के कारोबार में लिप्त होने के आरोप लगाए हैं. इसी महीने मुंबई नारकोटिक्स सेल ने मुंबई के नालासोपारा इलाके में एक दवा बनाने वाली कंपनी पर छापा मारा था. एक कंपनी से 703 किलोग्राम MD बरामद की गई थी और पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था. इतने एमडी की कीमत लगभग 1,400 करोड़ रुपये आंकी गई थी.
गुजरात के मुंद्रा पोर्ट के बाद अब भरूच जिले से भारी मात्रा में ड्रग्स बरामद किया गया है. मुंबई ऐंटी नारकोटिक्स सेल की वर्ली यूनिट ने मंगलवार को भरूच जिले के अंकलेश्वर इलाके की एक फैक्ट्री में छापा मारा. इस छापेमारी में पाँच सौ तेरह किलो एमडी ड्रग्स बरामद किया गया है. एक अनुमान के मुताबिक, इतने ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग एक,छब्बीस करोड़ रुपये है. ड्रग्स के अलावा कुल सात लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है. इससे पहले, मई महीने में गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह से पाँच सौ करोड़ के ड्रग्स बरामद किए थे. इसके अलावा, जून में भी कच्छ के जखौ में बीएसएफ और पुलिस ने भारी मात्रा में हेरोइन बरामद की थी. बीते साल भी मुंद्रा बंदरगाह से तीन,शून्य किलो ड्रग्स की खेप पकड़ी गई थी. जिसकी कीमत इक्कीस,शून्य करोड़ रुपये आँकी गई थी. आपको बता दें कि मुंद्रा बंदरगाह का मालिकाना हक इस समय अडाणी ग्रुप के पास है. पिछले दो सालों में मुंद्रा बंदरगाह से कई बार ड्रग्स की खेप बरामद हो चुकी है. यही वजह है कि गुजरात में विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने ड्रग्स के मुद्दे पर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और मंत्रियों पर भी नशे के कारोबार में लिप्त होने के आरोप लगाए हैं. इसी महीने मुंबई नारकोटिक्स सेल ने मुंबई के नालासोपारा इलाके में एक दवा बनाने वाली कंपनी पर छापा मारा था. एक कंपनी से सात सौ तीन किलोग्रामग्राम MD बरामद की गई थी और पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था. इतने एमडी की कीमत लगभग एक,चार सौ करोड़ रुपये आंकी गई थी.
GORAKHPUR: शहर में कई सड़कों को चौड़ीकरण के नाम पर खोद दिया गया है। लेकिन उसके बाद उनके निर्माण की रफ्तार इतनी स्लो है कि पब्लिक आजिज आ चुकी है। आते-जाते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और लोग पूछने लगे हैं, साहब, ये सड़क कब बनेगी? उधर जिम्मेदारों का आलम यह है कि एक विभाग से दूसरे विभाग के ऊपर जिम्मेदारी डालकर अपना गला छुड़ा ले रहे हैं। इस चक्कर में पब्लिक कभी जाम में फंसती है तो कभी हादसे का शिकार होती है। वहीं बन रही सड़क से उड़ने वाली धूल उसे सांस का रोगी तो बना ही रही है। महत्वः शहर के पूर्वी एरिया के लोगों को स्टेशन जाना होता है तो यूनीवर्सिटी के पीछे पेट्रोल पंप के सामने वाले रास्ते से निकलते हैं। यह रास्ता शहर के पूर्वी एरिया को जाम से निजात दिलाता है। बड़ी संख्या में रेलवे कर्मी इस रास्ते से आते-जाते हैं। वर्तमान हालतः नवंबर 2016 में काम शुरू हुआ था। तब वहां मौजूद ढाबा के पास नाला बनाने का कार्य शुरू हुआ। छह माह में आधा ही नाला बन पाया है। जनवरी में इसके डिवाइडर का काम भी शुरू हो गया है। लेकिन अभी तक केवल 500 मीटर तक ही डिवाइडर बना है। मुश्किलः डिवाइडर बनने का काम चलने के कारण महाराणा प्रताप की मूर्ति से पूरब की तरफ का आधा रास्ता बंद कर दिया जा रहा है। इससे लोगों को खासी मुश्किल हो रही है। महत्वः लखनऊ या बनारस से आने वाले और सोनौली की तरफ जाने वालों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण रास्ता है। बेतियाहाता, कचहरी जाने के साथ ही साथ महानगर के पूर्वी एरिया में जाने वाले इसी रास्ते से जाते हैं। वर्तमान हालतः इस रास्ते की खोदाई पिछले दो साल से लगातार हो रही है। एक साल पहले जीडीए ने अंडरग्राउंड तार बिछाने के लिए खोदा था। दो से तीन माह बीते थे कि पीडब्ल्यूडी ने खोदना शुरू कर दिया है। फिलहाल यह शहर का सबसे खतरनाकरोड बन गया है। कॉलिंग, वर्जन और हेल्थ पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को पेज वन पर ही लें। महत्वः इंजीनियरिंग कॉलेज, सिंघाडि़या, कूड़ाघाट, रानीडीहा, सुवा बाजार सहित कई प्रमुख मोहल्ले टच करती है। शहर के आर-पार जाने वाली एकमात्र रोड। शहर के डिफरेंट एरियाज तक पहुंचाती है। कब से रुकी हैः दिसंबर 2015 में तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव गोरखपुर आए तो सर्किट हाउस से लेकर चौरीचौरा तक सड़क का चोर लेन करने की स्वीकृत दी। मई में इसका कार्य भी लगभग शुरू हो गया और अगस्त में रोड के किनारे पेड़ों को काटने का कार्य शुरू हो गया। वर्तमान हालतः शहर के दायरे में आने वाले दो किमी रोड की खोदाई कर छोड़ दिया गया है। पूरे रास्ते के पेड़ काट दिए गए हैं। महत्वः गोरखपुर में एक बड़ी आबादी बिहार की रहती है जो डेली निजी साधन या सवारी गाड़ी से आते-जाते रहते हैं। नंदा नगर, झरना टोला, सिंघाडिया के रेल लाइन के किनारे की आबादी के साथ एयर फोर्स और जीआरडी के जवानों का आवागमन होता है। कब से रुकी हैः मई 2016 में स्वीकृत हुई और कार्य शुरू हो गया। वर्तमान हालतः कूड़ाघाट से नंदानगर क्रॉसिंग के बीच करीब दो किमी की दूरी में अक्टूबर 2016 में खोदकर छोड़ दिया गया है। उसके बाद से आज तक इस रोड पर कोई कार्य नहीं हुआ है। कुछ दिन पहले जब सीएम योगी आदित्यनाथ इस रोड से आने वाले थे तो पेड़ काटने का कार्य शुरू किया गया, लेकिन निर्माण नहीं शुरू हुआ।
GORAKHPUR: शहर में कई सड़कों को चौड़ीकरण के नाम पर खोद दिया गया है। लेकिन उसके बाद उनके निर्माण की रफ्तार इतनी स्लो है कि पब्लिक आजिज आ चुकी है। आते-जाते लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और लोग पूछने लगे हैं, साहब, ये सड़क कब बनेगी? उधर जिम्मेदारों का आलम यह है कि एक विभाग से दूसरे विभाग के ऊपर जिम्मेदारी डालकर अपना गला छुड़ा ले रहे हैं। इस चक्कर में पब्लिक कभी जाम में फंसती है तो कभी हादसे का शिकार होती है। वहीं बन रही सड़क से उड़ने वाली धूल उसे सांस का रोगी तो बना ही रही है। महत्वः शहर के पूर्वी एरिया के लोगों को स्टेशन जाना होता है तो यूनीवर्सिटी के पीछे पेट्रोल पंप के सामने वाले रास्ते से निकलते हैं। यह रास्ता शहर के पूर्वी एरिया को जाम से निजात दिलाता है। बड़ी संख्या में रेलवे कर्मी इस रास्ते से आते-जाते हैं। वर्तमान हालतः नवंबर दो हज़ार सोलह में काम शुरू हुआ था। तब वहां मौजूद ढाबा के पास नाला बनाने का कार्य शुरू हुआ। छह माह में आधा ही नाला बन पाया है। जनवरी में इसके डिवाइडर का काम भी शुरू हो गया है। लेकिन अभी तक केवल पाँच सौ मीटर तक ही डिवाइडर बना है। मुश्किलः डिवाइडर बनने का काम चलने के कारण महाराणा प्रताप की मूर्ति से पूरब की तरफ का आधा रास्ता बंद कर दिया जा रहा है। इससे लोगों को खासी मुश्किल हो रही है। महत्वः लखनऊ या बनारस से आने वाले और सोनौली की तरफ जाने वालों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण रास्ता है। बेतियाहाता, कचहरी जाने के साथ ही साथ महानगर के पूर्वी एरिया में जाने वाले इसी रास्ते से जाते हैं। वर्तमान हालतः इस रास्ते की खोदाई पिछले दो साल से लगातार हो रही है। एक साल पहले जीडीए ने अंडरग्राउंड तार बिछाने के लिए खोदा था। दो से तीन माह बीते थे कि पीडब्ल्यूडी ने खोदना शुरू कर दिया है। फिलहाल यह शहर का सबसे खतरनाकरोड बन गया है। कॉलिंग, वर्जन और हेल्थ पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को पेज वन पर ही लें। महत्वः इंजीनियरिंग कॉलेज, सिंघाडि़या, कूड़ाघाट, रानीडीहा, सुवा बाजार सहित कई प्रमुख मोहल्ले टच करती है। शहर के आर-पार जाने वाली एकमात्र रोड। शहर के डिफरेंट एरियाज तक पहुंचाती है। कब से रुकी हैः दिसंबर दो हज़ार पंद्रह में तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव गोरखपुर आए तो सर्किट हाउस से लेकर चौरीचौरा तक सड़क का चोर लेन करने की स्वीकृत दी। मई में इसका कार्य भी लगभग शुरू हो गया और अगस्त में रोड के किनारे पेड़ों को काटने का कार्य शुरू हो गया। वर्तमान हालतः शहर के दायरे में आने वाले दो किमी रोड की खोदाई कर छोड़ दिया गया है। पूरे रास्ते के पेड़ काट दिए गए हैं। महत्वः गोरखपुर में एक बड़ी आबादी बिहार की रहती है जो डेली निजी साधन या सवारी गाड़ी से आते-जाते रहते हैं। नंदा नगर, झरना टोला, सिंघाडिया के रेल लाइन के किनारे की आबादी के साथ एयर फोर्स और जीआरडी के जवानों का आवागमन होता है। कब से रुकी हैः मई दो हज़ार सोलह में स्वीकृत हुई और कार्य शुरू हो गया। वर्तमान हालतः कूड़ाघाट से नंदानगर क्रॉसिंग के बीच करीब दो किमी की दूरी में अक्टूबर दो हज़ार सोलह में खोदकर छोड़ दिया गया है। उसके बाद से आज तक इस रोड पर कोई कार्य नहीं हुआ है। कुछ दिन पहले जब सीएम योगी आदित्यनाथ इस रोड से आने वाले थे तो पेड़ काटने का कार्य शुरू किया गया, लेकिन निर्माण नहीं शुरू हुआ।
नई दिल्ली ः इस्लामाबाद, (भाषा)। एक महीने पूर्व थिम्पू में विश्वास की कमीको दूर करने के लिए दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच बनी सहमति के बाद भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की पहली बै"क 24 जून को होने जा रही है। विदेश सचिव स्तरीय इस वार्ता से विदेश मंत्री एस एम कृष्णा तथा उनके पाकिस्तानी समकक्ष शाह महमूद कुरैशी के बीच होने वाली आगामी वार्ता की दिशा तथा एजेंडा भी तय होगा। अगले सप्ताह इस्लामाबाद में पाकिस्तानी विदेश सचिव सलमान बशीर के साथ मुलाकात के लिए विदेश सचिव निरूपमा राव पाकिस्तान की यात्रा पर जाएंगी। विदेश मंत्रालय की आज जारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गयी है। अपने इस्लामाबाद प्रवास के दौरान राव कुरैशी से भी मिलेंगी। उधर, इस्लामाबाद में विदेश विभाग द्वारा जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा गया है कि राव द्विपक्षीय वार्ता के लिए बशीर के निमंत्रण पर पाकिस्तान की यात्रा पर आएंगी जो 24 जून को होनी तय है। वहां के राजनयिक सूत्रों ने पहले प्रेट्र को बताया था कि राव , बशीर के साथ अपनी निर्धारित वार्ता से एक दिन पूर्व इस्लामाबाद पहुंचेंगी। वरिष्" पाकिस्तानी अधिकारियों ने दोनों विदेश सचिवों की वार्ता के दौरान उ"ाए जाने वाले मुद्दों का व्यापक वर्गीकरण किया है जिनमें कश्मीर मुद्दा, कैदियों और मछुआरों की रिहाई जैसा मानवीय मसला, आतंकवाद और व्यापार तथा वाणिज्य भी शामिल है। भारत लगातार यह कह रहा है कि ये वार्ताएं भविष्य में व्यापक वार्ता के लिए विश्वास की कमी को दूर करने का सही माहौल बनाने के मकसद से हो रही हैं।
नई दिल्ली ः इस्लामाबाद, । एक महीने पूर्व थिम्पू में विश्वास की कमीको दूर करने के लिए दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच बनी सहमति के बाद भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की पहली बै"क चौबीस जून को होने जा रही है। विदेश सचिव स्तरीय इस वार्ता से विदेश मंत्री एस एम कृष्णा तथा उनके पाकिस्तानी समकक्ष शाह महमूद कुरैशी के बीच होने वाली आगामी वार्ता की दिशा तथा एजेंडा भी तय होगा। अगले सप्ताह इस्लामाबाद में पाकिस्तानी विदेश सचिव सलमान बशीर के साथ मुलाकात के लिए विदेश सचिव निरूपमा राव पाकिस्तान की यात्रा पर जाएंगी। विदेश मंत्रालय की आज जारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गयी है। अपने इस्लामाबाद प्रवास के दौरान राव कुरैशी से भी मिलेंगी। उधर, इस्लामाबाद में विदेश विभाग द्वारा जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा गया है कि राव द्विपक्षीय वार्ता के लिए बशीर के निमंत्रण पर पाकिस्तान की यात्रा पर आएंगी जो चौबीस जून को होनी तय है। वहां के राजनयिक सूत्रों ने पहले प्रेट्र को बताया था कि राव , बशीर के साथ अपनी निर्धारित वार्ता से एक दिन पूर्व इस्लामाबाद पहुंचेंगी। वरिष्" पाकिस्तानी अधिकारियों ने दोनों विदेश सचिवों की वार्ता के दौरान उ"ाए जाने वाले मुद्दों का व्यापक वर्गीकरण किया है जिनमें कश्मीर मुद्दा, कैदियों और मछुआरों की रिहाई जैसा मानवीय मसला, आतंकवाद और व्यापार तथा वाणिज्य भी शामिल है। भारत लगातार यह कह रहा है कि ये वार्ताएं भविष्य में व्यापक वार्ता के लिए विश्वास की कमी को दूर करने का सही माहौल बनाने के मकसद से हो रही हैं।
Ranji Trophy Final: रणजी ट्रॉफी के फाइनल में मध्य प्रदेश की टीम ने मुंबई को हरा कर ट्रॉफी में कब्जा कर लिया है। मुंबई की तरफ से दूसरी पारी के बाद मध्य प्रदेश की टीम के सामने जीत के लिए 108 रनों का लक्ष्य सामने था। इस लक्ष्य को मध्य प्रदेश की टीम ने 4 विकेट गंवाकर हासिल किया और एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की। Ranji Trophy Final: इस मैच में मुंबई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 347 रन बनाए। मुंबई को इस स्कोर तक पहुंचाने में सरफराज खान का बहुत बड़ा योगदान रहा। Ranji Trophy final 2022: द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई के बल्लेबाज सरफराज खान ने गुरुवार को बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में रणजी ट्रॉफी फाइनल के दूसरे दिन मध्य प्रदेश के खिलाफ शानदार शतक जड़ने के बाद दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूेसवाला को श्रद्धांजलि दी।
Ranji Trophy Final: रणजी ट्रॉफी के फाइनल में मध्य प्रदेश की टीम ने मुंबई को हरा कर ट्रॉफी में कब्जा कर लिया है। मुंबई की तरफ से दूसरी पारी के बाद मध्य प्रदेश की टीम के सामने जीत के लिए एक सौ आठ रनों का लक्ष्य सामने था। इस लक्ष्य को मध्य प्रदेश की टीम ने चार विकेट गंवाकर हासिल किया और एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की। Ranji Trophy Final: इस मैच में मुंबई ने पहले बल्लेबाजी करते हुए तीन सौ सैंतालीस रन बनाए। मुंबई को इस स्कोर तक पहुंचाने में सरफराज खान का बहुत बड़ा योगदान रहा। Ranji Trophy final दो हज़ार बाईस: द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई के बल्लेबाज सरफराज खान ने गुरुवार को बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में रणजी ट्रॉफी फाइनल के दूसरे दिन मध्य प्रदेश के खिलाफ शानदार शतक जड़ने के बाद दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूेसवाला को श्रद्धांजलि दी।
मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin खरीदने वाले लगभग तीन चौथाई लोगों को नुकसान उठाना पड़ा है। यह जानकारी बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के इकोनॉमिस्ट्स की ओर से पिछले सात वर्षों में लगभग 95 देशों के क्रिप्टोकरेंसी इनवेस्टर्स के डेटा की स्टडी से मिली है। गया है कि बिटकॉइन में इनवेस्टमेंट करने वाले लगभग तीन चौथाई लोगों को नुकसान होने का अनुमान है। इस अवधि में बिटकॉइन का प्राइस लगभग 250 डॉलर से बढ़कर पिछले वर्ष नवंबर में लगभग 69,000 डॉलर के उच्च स्तर पर पहुंचा था। ऐप्स के जरिए क्रिप्टोकरेंसीज खरीदने और बेचने वाले लोगों की संख्या इस अवधि में 1. 19 लाख से बढ़कर लगभग 3. 25 करोड़ पर पहुंच गई। स्टडी करने वाले रिसर्चर्स ने लिखा है, "हमारे एनालिसिस से पता चलता है कि बिटकॉइन के प्राइस में बढ़ोतरी इसके रिटेल इनवेस्टर्स की संख्या बढ़ने से जुड़ी है। " स्टडी में कहा गया है कि प्राइसेज के बढ़ने पर रिटेल इनवेस्टर्स की ओर से बिटकॉइन में खरीदारी की जा रही थी, जबकि इसके व्हेल्स जैसे बड़े होल्डर्स बिकवाली कर प्रॉफिट कमा रहे थे। इसके अलावा स्टडी में पाया गया है कि क्रिप्टोकरेंसी में इनवेस्ट करने वालों में लगभग 40 प्रतिशत 35 वर्ष से कम आयु के पुरुष थे। इस सेगमेंट को अधिक रिस्क लेने वाला माना जाता है। में काफी तेजी आई थी। इसके बाद से स्लोडाउन और कुछ अन्य कारणों से इसका प्राइस एक-तिहाई से अधिक टूट चुका है। इससे इनवेस्टर्स के साथ ही क्रिप्टो सेगमेंट से जुड़ी फर्मों को बड़ा नुकसान हुआ है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिटकॉइन में काफी बिकवाली हुई है। इन्फ्लेशन के भी लगभग पीक पर पहुंचने के संकेत हैं। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व सहित अन्य देशों के सेंट्रल बैंकों की ओर से मॉनेटरी पॉलिसी में कुछ छूट दी जा सकती है। यह क्रिप्टो मार्केट में तेजी का अगला बड़ा कारण हो सकता है। कुछ देशों में रेगुलेटर्स ने भी क्रिप्टोकरेंसीज को लेकर इनवेस्टर्स को चेतावनी दी है। इससे भी मार्केट पर प्रेशर बढ़ा है। कुछ क्रिप्टो फर्मों के डिफॉल्ट करने से इस मार्केट को लेकर आशंकाएं भी बढ़ी हैं। क्रिप्टो सेगमेंट के लिए बहुत से देश कड़े कानून बनाने पर भी काम कर रहे हैं। लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स 360 एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।
मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज से सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin खरीदने वाले लगभग तीन चौथाई लोगों को नुकसान उठाना पड़ा है। यह जानकारी बैंक ऑफ इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के इकोनॉमिस्ट्स की ओर से पिछले सात वर्षों में लगभग पचानवे देशों के क्रिप्टोकरेंसी इनवेस्टर्स के डेटा की स्टडी से मिली है। गया है कि बिटकॉइन में इनवेस्टमेंट करने वाले लगभग तीन चौथाई लोगों को नुकसान होने का अनुमान है। इस अवधि में बिटकॉइन का प्राइस लगभग दो सौ पचास डॉलर से बढ़कर पिछले वर्ष नवंबर में लगभग उनहत्तर,शून्य डॉलर के उच्च स्तर पर पहुंचा था। ऐप्स के जरिए क्रिप्टोकरेंसीज खरीदने और बेचने वाले लोगों की संख्या इस अवधि में एक. उन्नीस लाख से बढ़कर लगभग तीन. पच्चीस करोड़ पर पहुंच गई। स्टडी करने वाले रिसर्चर्स ने लिखा है, "हमारे एनालिसिस से पता चलता है कि बिटकॉइन के प्राइस में बढ़ोतरी इसके रिटेल इनवेस्टर्स की संख्या बढ़ने से जुड़ी है। " स्टडी में कहा गया है कि प्राइसेज के बढ़ने पर रिटेल इनवेस्टर्स की ओर से बिटकॉइन में खरीदारी की जा रही थी, जबकि इसके व्हेल्स जैसे बड़े होल्डर्स बिकवाली कर प्रॉफिट कमा रहे थे। इसके अलावा स्टडी में पाया गया है कि क्रिप्टोकरेंसी में इनवेस्ट करने वालों में लगभग चालीस प्रतिशत पैंतीस वर्ष से कम आयु के पुरुष थे। इस सेगमेंट को अधिक रिस्क लेने वाला माना जाता है। में काफी तेजी आई थी। इसके बाद से स्लोडाउन और कुछ अन्य कारणों से इसका प्राइस एक-तिहाई से अधिक टूट चुका है। इससे इनवेस्टर्स के साथ ही क्रिप्टो सेगमेंट से जुड़ी फर्मों को बड़ा नुकसान हुआ है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बिटकॉइन में काफी बिकवाली हुई है। इन्फ्लेशन के भी लगभग पीक पर पहुंचने के संकेत हैं। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व सहित अन्य देशों के सेंट्रल बैंकों की ओर से मॉनेटरी पॉलिसी में कुछ छूट दी जा सकती है। यह क्रिप्टो मार्केट में तेजी का अगला बड़ा कारण हो सकता है। कुछ देशों में रेगुलेटर्स ने भी क्रिप्टोकरेंसीज को लेकर इनवेस्टर्स को चेतावनी दी है। इससे भी मार्केट पर प्रेशर बढ़ा है। कुछ क्रिप्टो फर्मों के डिफॉल्ट करने से इस मार्केट को लेकर आशंकाएं भी बढ़ी हैं। क्रिप्टो सेगमेंट के लिए बहुत से देश कड़े कानून बनाने पर भी काम कर रहे हैं। लेटेस्ट टेक न्यूज़, स्मार्टफोन रिव्यू और लोकप्रिय मोबाइल पर मिलने वाले एक्सक्लूसिव ऑफर के लिए गैजेट्स तीन सौ साठ एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करें और हमें गूगल समाचार पर फॉलो करें।
जिसमें सुवर्ण की मात्रा कम ताँवा अधिक होता है ) आदि कार्य देखे जाते हैं। प्रतीति भेद और शब्द भेद से, वस्तु में भिनता मानी जाती है । यह, शुक्तिका रजत का सा भ्रम नहीं है, क्यों कि इसमें उत्पत्ति और विनाश की मध्यवर्त्ती देश और काल संबधी कोई बाधा नहीं है और न इसमें कोई दूसरी उपलब्धि (प्रतीति ) की बाधिका युक्ति ही दीखती है । पूर्व अननुभूत स्वस्तिक की उपलब्धि के समय जो सुवर्ण संबंधी प्रत्यभिज्ञा ( यह वही सुवर्ण है, ऐसी प्रतीति) होती है, वह भी विरुद्ध नहीं है, क्योंकि स्वस्तिक के आश्रयभूत, सुवर्ण की झलक रहती है। वेदवाक्यों से जगत को मिथ्या सिद्ध करने वाली बात का तो हम, पहिले ही निराकरण कर चुके हैं, तथा जो प्रत्यक्षविरोधी आदि तर्कों का निराकरण करना था, उन उन सबका भी पहिले बहुत अच्छे ढंग से कर चुके हैं । यच्चोक्तम्- एकेनात्मना सर्वाणि शरीराण्यात्मवंति, इति, तदसत्, एकस्यैव सर्वशरीरप्रयुक्तसुखदुःख प्रतिसंधान प्रसंगात् सौभरि प्रभृतिषु हि प्रात्मन एकत्वेना नेकशरीरप्रयुक्त सुखादिप्रतिसंधानमेकस्य दृश्यते न चाहमर्थस्य ज्ञातृत्वात्तद् भेदात् प्रतिसंधानाभावो नात्मभेदादितिवक्तं शक्यम्, आत्माज्ञातैव, स चाहमर्थ एव, अंतः करणभूतस्त्वहंकारो जडत्वात्करणत्वाच्च शरीरेन्द्रियादिवन्न ज्ञातेत्युपपादित्वात् । अथशरी रत्वजऽत्कार्यत्वकल्पितत्वैः सर्वंशरोराणां एकस्याविद्याकल्पितत्त्वमुक्तम्, तदपि सर्वंशरोराणामविद्याकल्पितत्वस्यैवाभावादयुक्तम् । तद्भावंश्चाबाधितस्य सत्यत्रोपपादनात् । यच्च चेदनादन्यस्य जडत्वदर्शनात् सर्वचेतनानामनन्यत्वमुक्तम् तदपि सुखदुःख व्यवस्थया भेदोपपादनादेव निरस्तम् । जो यह कहा कि एक ही आत्मा से सारे शरीर आत्मवान कहलाते हैं, यह भी असंगत बात है, ऐसा होने से तो, एक ही आत्मा, सभी शरीरों के सुख दुःख आदि को भोगने वाला सिद्ध होता है। सौभरि आदि ऋषियों के जो एक आत्मा के अनेक शरीर थे उनमें भोग भिन्न भी एक ही प्रकार का था, भिन्न नहीं था । अहं पदार्थ ही बास्तविक ज्ञाता है, प्रतिदेह में बहु भिन्न है, इसलिए प्रतिदेह की अनुभूति भिन्न भिन्न होती है । वह आत्मा के भेद से तो होती नहीं; इत्यादि भी नहीं कह सकते क्योंकि आत्मा ही ज्ञाता है, ज्ञातृत्व स्वरूप वह आत्मा ही "अह" है, दोनों भिन्न नहीं हैं, पर अंतःकारण रूप अहंकार जड़ एवं ज्ञान का साधन होने से शरीर और इन्द्रियों की तरह ज्ञाता नहीं हो सकता, ऐसा प्रथम ही कह चुके हैं । शरीरत्व, जडत्व, कार्यत्व कल्पितत्व होने से सारे शरीर अविद्या कल्पित हैं; यह कथन भी असंगत है, सारे शरीर अविद्या कल्पित हैं, इसको प्रमाणित नहीं किया जा सकता, अवाधित पदार्थ की सत्यता सिद्ध हो जाने से ही यह बात अप्रामाणिक हो जाती है । तथा चेतन से जड भिन्न है, इसलिए सब चेतन एक है, "यह बात भी सुख दुःख भोग की भेद व्यवस्था से जो भेदवाद सिद्ध किया गया, उसी से निराकृत हो चुकी । यत्तु-मयैवात्मवंति मदविद्या कल्पितान्यहमेव सर्वंचेतन जातमित्यमहमथंस्यैक्यमुपपादितम् तदज्ञातस्वसिद्धान्तस्य भ्रांतिजल्पितम्, अहं त्वमाद्यर्थविलक्षणं चिन्मात्रं हि प्रात्मात्वन्मते । कि च निर्विशेष चिन्मात्रातिरेकि सर्व मिथ्येति वदतो मोक्षार्थं श्रवणादि प्रयत्नो निष्फलः, अविद्याकार्यत्वात् शुक्तिकारजतादिषु रजताद्य पानादि प्रयत्नवत् । मोक्षार्थ प्रयत्नोग्यर्थः कल्पिताचार्यायत्तज्ञानकार्यत्वात् शुकप्रह्लादवामदेवादि प्रयत्नवत् । तत्त्वमस्यादिवाक्यजन्यज्ञानम् नं बन्धनिवर्तकम्, मविद्याकल्पितवाक्यजन्यत्वात्, स्वयंमविद्यात्मकत्वात्, भविद्याकल्पितज्ञात्राश्रयत्वात् कल्पिताचार्यायत्तश्रवणजम्यस्वादवा स्वाप्नबंधनिवर्त्तनवाक्यजन्यज्ञानवत् । किं च निर्विशेषचिन्मात्रं ब्रह्म मिथ्या, श्रविद्याकार्यज्ञानगम्यत्वात् श्रविद्याकल्पितज्ञा त्राश्रयज्ञानगम्यत्वात्, अविद्यात्मकज्ञानगम्यत्वाद् वा, यदेवंतत्तथा यथा स्वाप्नगंधर्वनगरादिः । न च निर्विशेष चिन्मात्रं ब्रह्म स्वयं प्रकाशते, येन न प्रमाणान्तरमपेक्षते । यत्त्वात्मसाक्षिकं स्वयं प्रकाशज्ञानं दृश्यते, तत्तु ज्ञेयविशेषसिद्धिरूपं ज्ञातृगतमेव दृश्यत इति पूर्वमेवोक्तम् । यानि च तस्य निर्विशेषत्व साधकानि यौक्तिकानि ज्ञानान्युपन्यस्तानि तानि चानन्तरोक्त रविद्याकार्यत्वादिभिरनुमानैर्निरस्तानि । न च निर्विशेषस्य चिन्मात्रस्याज्ञानसाक्षित्वमहंकारादि जगद् भ्रमश्चोपपद्यते, साक्षित्वभ्रमादयोऽपि हिज्ञातृविशेषगतादृष्टाः नं ज्ञप्तिमात्रगताः, न च तस्य प्रकाशत्वं स्वायत्त प्रकाशता वा सिध्यति, प्रकाशो हि कस्यचित्पुरुषस्य कंचनार्थविशेषं प्रति सिद्धरूपोदृश्यते तत एव हि तस्य स्वयम्प्रकाशतोपाद्यते भवद्भिरपि । न चातादृशस्य निर्विशेषस्यप्रकाशता संभवति यः पुनः स्वगोष्ठीष्वपरमार्थांदपि परमार्थकार्यं दृश्यत इत्युद्घोषः, सोऽपितानि कार्याणि सर्वाण्यबाधित कल्पातिव्यावहारिकसत्यानि, वस्तुतस्त्वविद्यात्मकान्येवेति स्वाभ्युपगमादेव निरस्तः । अस्माभिरपि सर्वत्र परमार्थादेव कारणात्सर्वकार्योत्पत्तिमुपपादयभिः पूर्वमेव निरस्तः । ये सारे शरीर मेरे से ही प्रात्मवान हैं, मेरी ही अविद्या से कल्पित हैं, मैं ही समस्त चेतन हूँ, इत्यादि जो, अहंभाव के अद्वैत भाव का प्रतिपादन किया गया है, वह अपने सिद्धान्त को न जानते से, भ्रांतिमूलक है तुम्हारे मत में तो, आत्मा, मैं और तू इत्यादि से विलक्षण, केवल चैतन्य स्वरूप है । जो यह कहते हो कि- निविशेष चैतन्य के अतिरिक्त सव कुछ मिथ्या है, तब तो मोक्ष के लिए किए जाने वाले, श्रवरण - मनन आदि सारे प्रयास व्यर्थ हैं, क्योंकि ये भी तो अविद्या कल्पित ही हैं । शुक्ति का रजत में जैसे रजत आदि मिथ्या को जानने का प्रयास विफल है, वैसे ही उक्त प्रयास भी विफल ही होगा । इससे तो यह भी धारणा बनती है कि मोक्ष के लिए किया जाने वाला प्रयत्न भी व्यर्थ है, क्योंकिवह अविद्या कल्पित आचार्य के अधीन ज्ञान से साध्य होता है । जैसे किशुक प्रह्लाद वामदेव आदि के प्रयास [परंतु बात सर्वथा भिन्न है, इन तीनों का मोक्ष शास्त्र प्रसिद्ध है। इस प्रकार तो "तत्वमसि" आदि वाक्यजन्य ज्ञान भी बंधनों को काटने वाला नहीं हो सकता, क्योंकि अविद्या कल्पित वाक्यजन्य है, तथा स्वयं अविद्यात्मक, विद्या कल्पित ज्ञाता के आश्रित, कल्पित आचार्य से आयत्त होने से कल्पित श्रवण जन्य है, जैसे कि स्वप्न में सुना गया ज्ञानात्मक वाक्य । और फिर इस मत से तो निर्विशेष चिन्मात्र ब्रह्म भी मिथ्या हो जायेगा, क्योंकि वह भी तो स्वयं, अविद्या जन्य ज्ञान का विषय ही तो है । जो कि अविद्या कल्पित ज्ञाता के आश्रित ज्ञान से जाना जाता है, तथा वह ज्ञान भी तो अविद्या कल्पित ही है । यह सब तो वैसा ही है जैसा कि स्वप्न में दृष्ट गन्धर्व नगर आदि । यह नहीं कह सकते कि- निविशेष चिन्मात्र ब्रह्म स्वयं प्रकाशवान है, इस लिए उसे प्रमाणान्तरों की अपेक्षा नहीं होती स्वयं प्रकाश ज्ञान आत्मसाक्षिक होता है, वह तो ज्ञेय विशेष (ब्रह्म) सिद्धिरूप ज्ञाता के अधीन देखा जाता हैं, यह हम पहिले ही बतला चुके हैं तथा उस ब्रह्म की निविशेषता की साधिका ज्ञानमूलक जिन युक्तियों को प्रस्तुत किया था, उन सबका, अविद्या कार्यत्व आदि घटित अनुमानों से निराकरण भी कर चुके हैं । निविशेष चिन्मात्र ब्रह्म के संबंध में, अज्ञान साक्षित्व और अहंकार आदि जगद्भ्रम का अरोप भी नहीं किया जा सकता, क्योंकि साक्षित्व भ्रमादि तो किसी किसी ज्ञाता विशेष में ही होते हैं । वह ज्ञानगत नहीं होते, और न उस ज्ञान का प्रकाश ही होता है, न उसमें स्वतः प्रकाश की क्षमता ही हो सकती है । प्रकाश का अर्थ होता है, किसी व्यक्ति विशेष में, किसी वस्तु की अभिव्यक्ति होना । ऐसा स्वयं प्रकाश का भाव, आपके द्वारा ही बतलाया गया है । जो ऐसे लक्षण से घटित न हो सके उस निविशेष की ज्ञान प्रकाशता संभव नहीं है। असत् पदार्थ से ही सत् पदार्थ उत्पन्न होते हैं, ऐसा जो आपका अपनी गोंष्ठी में उद्घोष है वह, आप ही के "सारे उत्पन्न होने वाले पदार्थ, एक रूप से अबाध व्यावहारिक सत्य हैं, वस्तुतः तो वे सब अविद्यात्मक ही हैं" इत्यादि मत से, समाप्त हो जाता है । परमार्थ कारण से ही, सर्वत्र सब कार्यों की उत्पत्ति होती है, ऐसा हमारा घोष भी, पहिले ही कट चुका है । न च त्वयंषामनुमानानां श्रुतिविरोधो वक्त शक्यते, श्रुतेरपि विद्याकार्यत्वेन विद्यात्मकत्वेन चोक्त दृष्टान्तेभ्यो विशेषाभावात् । यन्तु ब्रह्मणोऽपारमार्थिकज्ञानगम्यत्वेऽपि पश्चात्तनबाघः दर्शनाद ब्रह्म सत्यमेव इति तदसत्, दुष्टकारणजन्य ज्ञानगम्यत्वे निश्चिते सति पश्चात्तनबाधा दर्शनस्याकिचित्करत्वात् यथा शून्यमेवतस्त्वमिति वाक्यजन्यज्ञानस्य पश्चात्तनबाधादर्शनेऽपि दोषमूलत्वनिश्चयादेव तदर्थस्यासत्यत्वम् तुम हमारे किये गए उक्त अनुमानों को श्रुतिविरुद्ध नहीं कह सकते क्यों कि तुम्हारे ही प्रतिपादन से यह लक्षित हो चुका है कि श्रुति भी अविद्या का कार्य है अतएव अविद्यात्मक है, इसलिए गत दृष्टातों से कोई विशेष बात श्र तियों में कही गई हो ऐसा समझ में नहीं आता [अर्थात् मिथ्या दृष्टान्तों की तरह, श्रुति भी मिथ्या दृष्टान्त रूपही हैं] ब्रह्म अपारमार्थिक ज्ञान से गम्य होते हुए भी, ज्ञानोत्तर काल में उसमें किसी प्रकार की वाधा नहीं देखी जाती, इसलिए ब्रह्म तो सत्य ही है, यह कहना भी बेकार ही होगा क्योंकि ब्रह्म ज्ञान गम्य है तथा वह ज्ञान दोषावह कारणों से जन्य है ऐसा जब तर्क से निश्चित हो चुका तब उसमें, बाद में बाधा भले ही न पड़ने उससे कुछ होता नहीं [अर्थात् अविद्याजन्य ज्ञान से ही ज़ब ब्रह्म की प्रतीति होती है तो यही कौन कम बाधा है ? ] जैसे कि - "शून्य हो एकमात्र तत्त्व है" इत्यादि से जो प्रतीति होती है भले ही उसमें बाधा न पड़ो, पर है तो दोषमूलक हो, वैसे ही उक्त मत की असत्यता भी निश्चित होती है । कि य "नेह नानाऽस्तिकिचन" विज्ञानमानन्दं ब्रह्म" इति विज्ञा-मात्रातिरिक्तस्य कृत्स्नस्य वस्तुजातस्य निषेधकत्वेन सर्वस्मात् परत्वात् पश्चात्तन बाधा दर्शनमुच्यते, शून्यमेव तत्त्वमिति तस्याप्यभावं वदतः तस्मात्परत्वेन पश्चात्तनबाधो दृश्यते । सर्वशून्यत्वातिरेकिनिषेधासंभवात्तस्यैव पश्चात्तनबाधादर्शनम्, दोषमूलत्वं तु प्रत्यक्षादीनां वेदांत जन्मतः सर्वशून्यज्ञानस्याप्यविशिष्टम् । अतः सर्वं विज्ञानजातं पारमार्थिकज्ञातृगतं, स्वयं च परमार्थंभूतमर्थविशेष सिद्धिरूपम्, तत्र किचनज्ञानं दोषमूलम्, दोषश्च परमार्थः, किचिच्च निर्दोषं पारमार्थिक सामग्रीजन्यमिति यावन्नाभ्युयेयते, न तावत्सत्यमिथ्यार्थव्यवस्था लोकव्यवहारश्च सेत्स्यति । लोकव्यवहारोऽपि पारमार्थिको भ्रांतिरूपश्च, पारमार्थिकज्ञातृगतार्थ विशेष सिद्धिरूपप्रकाशपूर्वकः, निर्विशेष सन्मात्रस्य तु पारमार्थिकस्यापारमार्थिकस्य च प्रतिभासादेर्हेतुत्वांसंभवात् लोकव्यवहारो न संभवति । यच्च-तैर्निरधिष्ठानभ्रमासंभवात् सर्वाध्यासाधिष्ठानस्य सन्मालस्य पारमार्थिकत्वमुक्तम्, तदपि दोष दोषाश्रयत्वज्ञातृत्वज्ञानानामपारमायॅऽपि भ्रमोपपत्तिवदधिष्ठानापारमार्थ्येऽपि प्रमोपत्तोर्निरस्तम् । अष्ठानापारमाये॑ऽपि न क्वचिद् भ्रमोदृष्ट इति सन्मालस्य पारमार्थिकत्वमवश्याश्रयणीयमिति मन्यसे । हन्त तर्हि दोष दोषाश्रयत्वज्ञातृत्व ज्ञानानामपारमार्थ्येऽपि न क्वचिद् भ्रमोदृष्ट इति, दर्शननानुगुण्येन तेषामपि पारमार्थ्यमवश्याश्रयणीयमिति न कंचिद् न कंचिद् विशेषोऽन्यत्र तत्संरंभात् । " इस जगत और ब्रह्म में कोई भेद नहीं है "ब्रह्म विज्ञान और आनंद स्वरूप है " इत्यादि में विज्ञान से अतिरिक्त समस्त पदार्थों के निषेध तथा इन वाक्यों के परवर्ती होने से; ब्रह्म संबंधी बाधा की संभावना नहीं रह जाती परंतु "शून्य ही तत्त्व है "इस, उक्त वाक्य के भी परवर्ती वाक्य से, जो कि उसके भी प्रभाव को द्योतन कर रहा है, बाधा उपस्थित ही रहती है । सर्व शून्य से और अधिक निषेध की बात तो हो नहीं सकती, इसलिए इस परवर्ती शून्यवाद बोधक वाक्य का बोध तो हो नहीं सकता । प्रत्यक्ष आदि प्रमाणों की तरह, वेदांत का यह सर्व शून्यवाद भी दोषमूलक है । इसलिए जब तक, समस्त विज्ञान की सत्योपलव्धि, एवं वस्तु विशेष अभिव्यंजक विज्ञान की सत्यता, तथा किसी किसी ज्ञान की निर्दोषता, सत्य सृष्टिकरणता, आदि नहीं स्वीकारी जावेगी तब तक सत्य मिथ्या विभाग और लोकव्यवहार भी सिद्ध नहीं हो सकता । क्योकि पारमार्थिक और भ्रमात्मक दोंनो प्रकार के लोकव्यवहार, परमार्थ के ज्ञाता के लिए तो पहिले से ही,, वस्तुविशेष के प्रकाशक प्रकाश सहित अपेक्षित रहते हैं केवल निर्विशेष सत् स्वरूप कभी पारमार्थिक या अपारमार्थिक भाव में, प्रतीति का हेतु नहीं हो सकता। इसलिए उससे लोकव्यवहार भी संपन्न नहीं हो सकता । तथा- किसी एक आश्रय के विना भ्रम होता ही महीं, ऐसा मानकर जो समस्त अभ्यासों के अधिष्ठान शुद्ध सत् पदार्थ ब्रह्म की पारमार्थिकता बतलाई, वह भी दोष, दोष के आश्रय, ज्ञान और ज्ञातृत्व आदि के अपारमार्थिक होते हुए जैसे भ्रमोत्पादन हो जाता है, वैसे ही अधिष्ठान की अपारमार्थिकता होते हुए भी भ्रम उत्पन्न हो सकता हैं, इस संभावित बात से कट जाती है। यदि कहो कि जब अधिष्ठान की अपारमार्थिकता में भ्रम नहीं दीखता, तब तो शुद्ध सत्सदार्थ की पारमार्थिकता अवश्य ही माननी पड़ेगी। ठीक है, तब तो, दोष दोषाश्रया ज्ञातत्व और ज्ञान आदि की अपारमार्थिकता में भी जब कहीं भ्रम नहीं दीखता, तब लोकव्यवहार का अनुसरण करते हुए, इन सब की पारमार्थिकता भी अवश्य स्वीकारनी पड़ेगी। इस विषय में केवल वाक्याडम्वर के अतिरिक्त कोई विशेष बात नहीं है । यत्त भेदपक्षेऽव्यतीतकल्पानामानन्त्यात् सर्वेषामात्मनां मुक्तत्वेन बद्धासंभवात् बद्धमुक्त व्यवस्था न संभवति, तदात्मानंत्येन परिहृतम्। यत्त्वात्मनां भिन्नत्वे माषसर्षपघटपटादिवत्संख्या वत्त्वमवर्जनीयम् इति, तत्र घटादीनामप्यनंतत्वात् दृष्टांतः साध्यविकलः स्यात् । दशघटाः संख्यावत्त्व दृश्यत इतिचेत् - सत्यम्, तत्त, सहस्रभाषाः, इति न घटादिस्वरूपगतम्, अपितु देशकालाधुपाधिमद् घटादिगतम्, तादृशं तु संख्यावत्वमात्मनामभ्युपगच्छामः । न च तावता सर्वमुक्ति प्रसंगः आत्मस्वरूपानन्त्यात् । यत्त त्मनां भिन्नत्वे घटादिवज्जडत्वानात्मत्वक्षयित्व प्रसंगः, इति तदयुक्तम्, एकजातीयानां भेदस्य तज्जातीयानांजात्यन्तरत्वानापादकत्वात् । न हि घटानांभेदः, तेषां पटत्वमापादयति । यत्तु भिन्नत्वे वस्तुतः परिच्छदाछेशकालाभ्यामपि परिच्छेदोब्रह्मणः प्रसज्यत इत्यनंतत्त्वब्रह्माणो न सिध्यतीति, तदयुक्तम, वस्तुतः परिच्छिन्ना नामपिदेश कालपच्छेिदस्य न्यूनाधिकभ / वेनानियमदर्शनात् । देशकालसंबंधेयत्तायाः प्रमाणांतराप्त निरणयत्वेन ब्रह्मणः सर्वदेशकालसंबंधस्यापि प्रमाणान्तरादापतप्ये विरोधाभावात् । वस्तुतः परिच्छेदमात्रादपि सर्वप्रकार परिच्छेदरहितत्वाभावादानंत्यासिद्धरिति चेत्, तद्भवतोऽप्यविद्या विलक्षणत्व ब्रह्मणोऽभ्युपयतः समानम् । अतः सतोऽविद्या विलक्षणत्वाभ्युपगमाद् ब्रह्मणोऽपि भिन्नत्वेन भेदप्रयुक्ता दोषाः सर्वे तवापि प्रसज्येरन् । यद्यविद्याविलक्षणत्व नाभ्युपेयते, तर्हांद्यात्मकमेव ब्रह्मस्यात् । "सत्यं - ज्ञानमनंतंब्रह्म" इति लक्षणवाक्यमपि तत एवापार्थंकं स्यात् । भेदतत्त्वानभ्युपगमे हि स्वपक्ष परपक्ष साधनदूषणादिविवेकाभावाद सर्वमसमंजसं स्यात् श्रानंत्यप्रसिद्धिश्च देशकालपरिच्छेदरहितत्व मात्रेण, ने वस्तुतोऽपि परिच्छेद रहितत्त्वेम, तथा विधस्य शशविषाणायमानस्यानुपलब्धेः । भेदवादिनस्तु सर्वंचिदचिद् वस्तुशरीरत्वेन । ब्रह्मणः सर्वप्रकारत्वात् स्वतः परतोऽपि परिच्छेदो न विद्यते । तदेवोपादयद्भ्योऽवगम्यते । प्रारम्भ गशव्दप्रदिर्येषां वाक्यानाम्, तान्याकारणाद्भिन्नस्य कार्यस्य सत्यत्वाद् ब्रह्मकायं कृत्स्नं जगद् ब्रह्मरणोऽन्यदेव । यह कहा कि - अतीत कल्पों की अनन्तता होने से सभी आत्माओं के मुक्त हो जाने से, भेदवाद में भी बद्ध मुक्त व्यवस्था नहीं बनती, इस कथन का निराकरण जीवों की अनन्तता के आधार पर किया जा चुका है । जो यह कहो कि - आत्माओं की भिन्नता मानने से, उर्द, सरसों, घट पट आदि की तरह, संख्यावत्त्व अर्थात् सान्तत्त्व होगा, सो यह दृष्टांत ही गलत है, घट आदि तो स्वतः ही अनंत हैं । यदि कहो कि - दस घट, हजार भाव आदि गणना तो की जाती है, ठीक है की जाती है, पर यह गणना, घट आदि के रूप की नहीं है, यह तो देशकाल आदि से विशिष्ट घट की है । ऐसी ही संख्या आत्मा की भी है [ अर्थात् किसी स्थान किसी समय कुछ प्रात्मायें विभिन्न आकारों में उपस्थित हो तो हम उनकी गणना भले ही कर लें, पर हैं तो वह अनंत ही] इसलिए एक साथ सबकी मुक्ति का प्रश्न ही नहीं उठता, क्योंकि आत्मायें अनंत हैं । जो यह कहा कि - आत्माओं को भिन्न-भिन्न मानने से उनमें जडता, अनात्मता, विनाश आदि दोष हो सकते हैं, यह बात भी युक्ति संगत नहीं है, क्योंकि - एक जातीय पदार्थ का भेद, कभी उस जातीय पदार्थ से भिन्न जातीयता नहीं बतला सकता, जैसे कि -- घंटों के पारस्परिक भेद में, पटत्व का भान नहीं होता । यह कहना कि भेद मानने से आत्माओं का वस्तुगत परिच्छेद हो जायगा, जिसके फलस्वरूप ब्रह्म का देश काल परिच्छेद (ससीमभाव) संभावित होगा, जिससे ब्रह्म की अनंतता सिद्ध न होगी । यह भी असंगत बात है, परिच्छिन्न पदार्थों का भी, देश कालात्मक परिच्छेद का न्यूनाधिक भाव देखा जाता है। देशकाल संबंधी जो परिच्छेद होता है, उसे प्रमान्तरों के सहारे ही, निरूपण किया जा सकता है, इसलिए ब्रह्म का, देशकाल आदि का जो संबंध है, वह भी प्रमाणान्तरों से ही सिद्ध हो सकता है । इसलिए इसमें कोई विरूद्ध भाव नहीं है । यदि कहें कि आत्मा का रूप, वस्तु से परिच्छिन्न होते हुए भी, तथा उससे भिन्न सभी प्रकार के परिच्छेद का अभाव होते हुए भी, ब्रह्म की अनंतता सिद्ध नहीं होती। ठीक है, ब्रह्म को जब तुम, अविद्या से पृथक् तत्त्व मानते हो, तब भी तो यही दोष उपस्थित होता है । सत् स्वरूप ब्रह्म को, अविद्या से विलक्षण मानने परब्रह्म जब अविद्या से पृथक् हो जाता है तब भेद संबंधी जितने भी दोष तुम प्रस्तुत करते हो वे समी, संभावित हो सकते हैं । यदि अविद्यात्मक भिन्नता नहीं मानते, तो भी ब्रह्म तो अविद्यात्मक ही रहता है, जिससे "ब्रह्म सत्य ज्ञान अनंतस्वरूप है" यह वाक्य घटित नही होता । यदि तात्त्विक भेद ही मानते हो तो तुम्हारे पास अपने पक्ष के पुष्टि और दूसरे के पक्ष के दूषणों को विश्लेषण करने का कोई उपाय ही नहीं रह जायेगा । अतः सब कुछ असामंजस्य पूर्ण हो जायेगा। देशकाल परिच्छेद के न होने मात्र से ही "अनंतता" सिद्ध हो जायेगी तथा वस्तुगत परिच्छेद की अपेक्षा न होगी, ऐसा खरगोश की सींग का सा अनहोना, परिच्छेद तो कहीं भी दृटिगत नहीं होता । भेदवादियों के मत से जब, सभी जड़चेतन ब्रह्म का शरीर है, तब सारे पदार्थ, विशेषित ब्रह्म से, स्वतः या परतः किसी भी रूप में परिच्छिन्न होकर नहीं रह सकते । इससे ज्ञात होता है कि -- कारण से भिन्न कार्य के सत्य होने से, ब्रह्म का कार्य, सारा जगत निश्चित ही पृथक् है । सिद्धांतः- इति प्राप्ते प्रचक्ष्महे- तदन्यत्वभारम्भणशब्दादिभ्यः तस्माद् परम् कारणाद ब्रह्मरणः अनन्यत्वं जगतः, आरम्भरणशब्दादिम्यः तदुपरम्भरणशब्दादीनि । आरम्भरण शब्द आदिर्येषां वाक्यानां तान्यारम्भरण शब्दादीनि "वाचारम्भरणं विकारो नामधेयं मृत्तिकेत्येव सत्यम् ।" "सदेव साम्येदमग्र प्रासीत् एकमेवाद्वितीयं तदैक्षत् बहुस्यां प्रजायेयेति तत्तेजोऽसृजत्" अनेन जीवेनाऽत्मनाऽनुप्रविश्य" सन्मूलाः सोम्येमाःसर्वाः प्रजाः सदायतनाः सद्प्रतिष्ठा : "ऐतदात्भ्यमिदं सर्वंतत्सत्यं स आत्मा तत्त्वमसि श्वेतकेतोः" इत्येतानि प्रकरणा -न्तरस्थानि अप्येवंजातीयकानि अत्राभि प्रेतानि । एतानि हि वाक्यानि चिदचिदात्मकस्य जगतः परस्मादब्रह्मणोऽनन्यत्वमुत्पादयंति । उक्त संशय पर सूत्रकार " तदन्यत्वमारम्भरण शब्दादिभ्यः" सूत्र प्रस्तुत करते हैं । अर्थात्-ब्रह्म के साथ जगत के अभेद के प्रतिपादक "आरम्भरण' आदि शब्दों के प्रयोग से ज्ञात होता है कि - - परमकारण ब्रह्म से, यह जगत अभिन्न है । जिन वाक्यों में उक्त शब्दों का प्रयोग है वे इस प्रकार है - "विकारमात्र वाक्यारब्ध नाममात्र है, मृत्तिका ही सत्य पदार्थ है"सृष्ठि के पूर्व यह सारा जगत् सत्स्वरूप था, तब परमात्मा ने एक से अनेक होने की कामना करके तेज की सृष्टि की - "उसने इस जीवात्मा के अन्तःकरण में प्रवेश करके" - हे सौम्य ! ये सारे पदार्थ मूल से ही सत्, सत् में ही स्थित तथा सत् में ही विलीन हैं- "यह सब आत्मस्वरूप हैं, वही एकमात्र सत्य आत्मा है, श्वेतकेतु ! तुम वही हो" इत्यादि भिन्नभिन्न प्रकरणस्थ वाक्यों की एकता बतलाने के लिए ही सूत्र में आदि शब्द का प्रयोग किया गया है अर्थात् ये सारे वाक्य एक ही तत्त्व के बोधक हैं । ये सारे ही वाक्य चिदचिदात्मक जगत की, परब्रह्म से अनन्य ता बतलाते हैं । तथा हि - " स्तव्धोऽस्युत तमादेशमप्राक्ष्यो येनाश्रुतंश्रुतं भवत्य मतं मतमविज्ञातं विज्ञातम् ।" इति कृत्नस्यजगतो ब्रह्मैककारणत्वं, कारणकार्यस्यानन्यत्वं च हृदि निधाय कारणभूत ब्रह्म विज्ञानेन कार्यभूतस्य सर्वस्य विज्ञाने प्रतिज्ञाते सति कृत्स्नस्य ब्रह्मैककारणनानजानता शिष्येण "कथं न्य भगवः स आदेशः" इत्यनुज्ञानेन अन्यज्ञातता संभवं चोदितो जगतो ब्रह्मककारणतामुपदेक्ष्यन लौकिक प्रती( ७०५ ) तिसिद्धं कारणात् कायस्यानन्यत्वं तावत् "यथा सौम्येकेन मृतपडेन सर्वं मृण्मयं विज्ञातं स्यात्" इति दर्शयति । यथैकमृत्पिडाव्धानां घटशरावादीनां तस्मादनतिरिक्त द्रब्यतया तज्ज्ञानेन ज्ञाततेत्यर्थः । इसी प्रकार "वत्स ! तुम गर्व करते हो, तुमने इस विषय की कभी गुरु से जिज्ञासा की है ? जिसे जानकर, अश्रु त विषय श्रुत, अचिन्त्य वि षय चिन्त्य एवं अविज्ञात विषय भी ज्ञात हो जाता है "इत्यादि श्रुत से, संपूर्ण जगत की ब्रह्मक कारणता, कारण से कार्य की अभिन्नता समझाते हुए, गुरू ने, कारणस्वरुप ब्रह्म के ज्ञान से कार्य भूत जगत का ज्ञान होता है, इस तथ्य को बतलाया । एकमात्र ब्रह्म ही जगत का कारण है इस तथ्य को न जानने वाले शिष्य द्वारा पुनः "उस रूप का उपदेश भगवन् ! किस प्रकार का होगा ? " जिज्ञासा करने पर "हे सौम्य ! एक मिट्टी के ढेले से जैसे मिट्टी की निर्मित सभी वस्तुओं का ज्ञान हो जाता है उसी प्रकार" इत्यादि उत्तरसे गुरु ने एक विषय के ज्ञान के बिना अन्य विषयों का ज्ञान होना असंभव है, ऐसी लोक व्यवहारानुगत प्रतीति सिद्ध कारण कार्य की अभिन्नता बतलाई । इसका तात्पर्य है कि - एक मिट्टी के पिण्ड से समुत्पन्न घट प्याले आदि उस मृत पिण्ड से अभिन्न माने जाते हैं । उस मिट्टी के ढेले की जानकारी से ही उक्त धारणा बनती है । श्रत्र कारणाद वादेन कारणात् कार्यस्य द्रब्यान्तरत्वमाशंक्य लोक प्रतीत्यैव कारणात् कार्यस्यानन्यतामुपपादयति "वाचारम्भरणं विकारो नामधेय मृत्तिकेत्येवसत्यम्" इति । आरभ्यते श्रालभ्यते स्पृश्यते इत्यारम्भणं " कृत्यल्युटोबहुलम्" इति कर्मणिल्युट् । वाचावाक्पूर्वकेण व्यवहारेण हेतुनेत्यर्थः । "घटेनोदकमाहर" इत्यादि वाक्यपूर्वको हि उदकाहरणादिव्यवहारः तस्य व्यवहारस्य सिद्धये तेनैव मृद्रव्येण पृथुबुध्नोदरत्वादिलक्षणोविकारः संस्थान विशेषः, तत्प्रयुक्त च घटइत्यादिनामधेयम्, स्पृश्यते- उदकाहरणादिव्यवहारविशेषसिद्धयर्थं मृद्रव्यमेव संस्थानांतरनामधेयांतरभागववति । अतोघटाद्यपि मृत्तिके, त्येव सत्यम्, मृत्तिकाद्रव्यमित्येव सत्यम् प्रमाणेनोपलभ्यत इत्यर्थः न तु द्रव्यान्तरत्वेन । अतस्तस्यैवमृद्हिरण्यादे द्रव्यस्य संस्थानांतरभाषत्व मात्रेण बुद्धिशब्दान्तरादय उपपद्यन्ते यथैकस्यैव देवदत्तस्यावस्था भेदैः "बालोयुवास्थविरः" इति बुद्धिशब्दान्तरादयः कार्यविशेषाश्च दृश्यते । इस विषय में कणाद मत में, कारण से कार्य भिन्न द्रव्य है ऐसी आशंका पूर्वक लोक प्रतीति के अनुसार ही कारण कार्य की अद्वैत प्रतीति होती है, इत्यादि प्रतिपादन किया गया है। "घट आदि विकार - कहने मात्र को भिन्न हैं, मिट्टी ही सत्य है" इत्यादि वाक्य में आरंभण शब्द का अर्थ है, आरंभ करने योग्य, आलंबन करने योग्य । " कृत्यल्युटो बहुलम्" इस पाणिनीय सूत्र से यहाँ कर्म में ल्युट प्रत्यय हुआ है "वाचा" का अर्थ है, वाक्यपूर्वक व्यवहार के अनुसार "घट से जल लाओ" इत्यादि शब्दोच्चारण द्वारा हो, जल लाना आदि व्यवहार पूरा होता है उस ब्यव -हार के संपादन के लिए, मिट्टी के स्थूल गोलाकार, मिट्टी के विशिष्ट आकृति वाले "घट" नाम का स्पर्श करता है, अर्थात् जल आहरण रूप विशेष व्यवहार संपादन के उद्देश्य से, मिट्टी की अन्य प्रकार की आकृति का "घट" नाम पड़ा । वस्तुतः घट और मिट्टी एक ही हैं, मिट्टी ही उसका सत्य रूप है, अर्थात घट आदि पात्र मिट्टी होने से सत्य हैं। जैसे कि-देवदत्त नामक व्यक्ति अवस्था विशेष के अनुसार "बालक-युवा-वृद्ध" कहलाना है, ये भेद बुद्धि और शब्द व्यवहार के ही हैं, वास्तविक नहीं हैं वैसे ही एक ही मिट्टी के बनी विभित्र आँकृतियाँ घट प्याला आदि नामों से समझी और पुकारी जाती हैं । यदुक्त सत्यामेव मृदि "घटो नष्ट : " इति व्यवहारात् कारणाद् अन्यत्कार्यमिति, तदुत्पत्ति विनाशादीनां कारणभूतस्यैव द्रव्यस्यावस्थाविशेषत्वाभ्युपगमादेव परिहृतम् । तत्तदवस्थस्यैकस्यैव द्रव्यस्य ते ते शब्दास्तानि तानि च कार्यारणीति युक्तम् । द्रव्यस्य तत्तदवस्थत्वं कारकव्यापारायत्तमिति तस्यार्थवत्त्वम् अभिब्यक्तयनुवंधीनि चोद्यानि-
जिसमें सुवर्ण की मात्रा कम ताँवा अधिक होता है ) आदि कार्य देखे जाते हैं। प्रतीति भेद और शब्द भेद से, वस्तु में भिनता मानी जाती है । यह, शुक्तिका रजत का सा भ्रम नहीं है, क्यों कि इसमें उत्पत्ति और विनाश की मध्यवर्त्ती देश और काल संबधी कोई बाधा नहीं है और न इसमें कोई दूसरी उपलब्धि की बाधिका युक्ति ही दीखती है । पूर्व अननुभूत स्वस्तिक की उपलब्धि के समय जो सुवर्ण संबंधी प्रत्यभिज्ञा होती है, वह भी विरुद्ध नहीं है, क्योंकि स्वस्तिक के आश्रयभूत, सुवर्ण की झलक रहती है। वेदवाक्यों से जगत को मिथ्या सिद्ध करने वाली बात का तो हम, पहिले ही निराकरण कर चुके हैं, तथा जो प्रत्यक्षविरोधी आदि तर्कों का निराकरण करना था, उन उन सबका भी पहिले बहुत अच्छे ढंग से कर चुके हैं । यच्चोक्तम्- एकेनात्मना सर्वाणि शरीराण्यात्मवंति, इति, तदसत्, एकस्यैव सर्वशरीरप्रयुक्तसुखदुःख प्रतिसंधान प्रसंगात् सौभरि प्रभृतिषु हि प्रात्मन एकत्वेना नेकशरीरप्रयुक्त सुखादिप्रतिसंधानमेकस्य दृश्यते न चाहमर्थस्य ज्ञातृत्वात्तद् भेदात् प्रतिसंधानाभावो नात्मभेदादितिवक्तं शक्यम्, आत्माज्ञातैव, स चाहमर्थ एव, अंतः करणभूतस्त्वहंकारो जडत्वात्करणत्वाच्च शरीरेन्द्रियादिवन्न ज्ञातेत्युपपादित्वात् । अथशरी रत्वजऽत्कार्यत्वकल्पितत्वैः सर्वंशरोराणां एकस्याविद्याकल्पितत्त्वमुक्तम्, तदपि सर्वंशरोराणामविद्याकल्पितत्वस्यैवाभावादयुक्तम् । तद्भावंश्चाबाधितस्य सत्यत्रोपपादनात् । यच्च चेदनादन्यस्य जडत्वदर्शनात् सर्वचेतनानामनन्यत्वमुक्तम् तदपि सुखदुःख व्यवस्थया भेदोपपादनादेव निरस्तम् । जो यह कहा कि एक ही आत्मा से सारे शरीर आत्मवान कहलाते हैं, यह भी असंगत बात है, ऐसा होने से तो, एक ही आत्मा, सभी शरीरों के सुख दुःख आदि को भोगने वाला सिद्ध होता है। सौभरि आदि ऋषियों के जो एक आत्मा के अनेक शरीर थे उनमें भोग भिन्न भी एक ही प्रकार का था, भिन्न नहीं था । अहं पदार्थ ही बास्तविक ज्ञाता है, प्रतिदेह में बहु भिन्न है, इसलिए प्रतिदेह की अनुभूति भिन्न भिन्न होती है । वह आत्मा के भेद से तो होती नहीं; इत्यादि भी नहीं कह सकते क्योंकि आत्मा ही ज्ञाता है, ज्ञातृत्व स्वरूप वह आत्मा ही "अह" है, दोनों भिन्न नहीं हैं, पर अंतःकारण रूप अहंकार जड़ एवं ज्ञान का साधन होने से शरीर और इन्द्रियों की तरह ज्ञाता नहीं हो सकता, ऐसा प्रथम ही कह चुके हैं । शरीरत्व, जडत्व, कार्यत्व कल्पितत्व होने से सारे शरीर अविद्या कल्पित हैं; यह कथन भी असंगत है, सारे शरीर अविद्या कल्पित हैं, इसको प्रमाणित नहीं किया जा सकता, अवाधित पदार्थ की सत्यता सिद्ध हो जाने से ही यह बात अप्रामाणिक हो जाती है । तथा चेतन से जड भिन्न है, इसलिए सब चेतन एक है, "यह बात भी सुख दुःख भोग की भेद व्यवस्था से जो भेदवाद सिद्ध किया गया, उसी से निराकृत हो चुकी । यत्तु-मयैवात्मवंति मदविद्या कल्पितान्यहमेव सर्वंचेतन जातमित्यमहमथंस्यैक्यमुपपादितम् तदज्ञातस्वसिद्धान्तस्य भ्रांतिजल्पितम्, अहं त्वमाद्यर्थविलक्षणं चिन्मात्रं हि प्रात्मात्वन्मते । कि च निर्विशेष चिन्मात्रातिरेकि सर्व मिथ्येति वदतो मोक्षार्थं श्रवणादि प्रयत्नो निष्फलः, अविद्याकार्यत्वात् शुक्तिकारजतादिषु रजताद्य पानादि प्रयत्नवत् । मोक्षार्थ प्रयत्नोग्यर्थः कल्पिताचार्यायत्तज्ञानकार्यत्वात् शुकप्रह्लादवामदेवादि प्रयत्नवत् । तत्त्वमस्यादिवाक्यजन्यज्ञानम् नं बन्धनिवर्तकम्, मविद्याकल्पितवाक्यजन्यत्वात्, स्वयंमविद्यात्मकत्वात्, भविद्याकल्पितज्ञात्राश्रयत्वात् कल्पिताचार्यायत्तश्रवणजम्यस्वादवा स्वाप्नबंधनिवर्त्तनवाक्यजन्यज्ञानवत् । किं च निर्विशेषचिन्मात्रं ब्रह्म मिथ्या, श्रविद्याकार्यज्ञानगम्यत्वात् श्रविद्याकल्पितज्ञा त्राश्रयज्ञानगम्यत्वात्, अविद्यात्मकज्ञानगम्यत्वाद् वा, यदेवंतत्तथा यथा स्वाप्नगंधर्वनगरादिः । न च निर्विशेष चिन्मात्रं ब्रह्म स्वयं प्रकाशते, येन न प्रमाणान्तरमपेक्षते । यत्त्वात्मसाक्षिकं स्वयं प्रकाशज्ञानं दृश्यते, तत्तु ज्ञेयविशेषसिद्धिरूपं ज्ञातृगतमेव दृश्यत इति पूर्वमेवोक्तम् । यानि च तस्य निर्विशेषत्व साधकानि यौक्तिकानि ज्ञानान्युपन्यस्तानि तानि चानन्तरोक्त रविद्याकार्यत्वादिभिरनुमानैर्निरस्तानि । न च निर्विशेषस्य चिन्मात्रस्याज्ञानसाक्षित्वमहंकारादि जगद् भ्रमश्चोपपद्यते, साक्षित्वभ्रमादयोऽपि हिज्ञातृविशेषगतादृष्टाः नं ज्ञप्तिमात्रगताः, न च तस्य प्रकाशत्वं स्वायत्त प्रकाशता वा सिध्यति, प्रकाशो हि कस्यचित्पुरुषस्य कंचनार्थविशेषं प्रति सिद्धरूपोदृश्यते तत एव हि तस्य स्वयम्प्रकाशतोपाद्यते भवद्भिरपि । न चातादृशस्य निर्विशेषस्यप्रकाशता संभवति यः पुनः स्वगोष्ठीष्वपरमार्थांदपि परमार्थकार्यं दृश्यत इत्युद्घोषः, सोऽपितानि कार्याणि सर्वाण्यबाधित कल्पातिव्यावहारिकसत्यानि, वस्तुतस्त्वविद्यात्मकान्येवेति स्वाभ्युपगमादेव निरस्तः । अस्माभिरपि सर्वत्र परमार्थादेव कारणात्सर्वकार्योत्पत्तिमुपपादयभिः पूर्वमेव निरस्तः । ये सारे शरीर मेरे से ही प्रात्मवान हैं, मेरी ही अविद्या से कल्पित हैं, मैं ही समस्त चेतन हूँ, इत्यादि जो, अहंभाव के अद्वैत भाव का प्रतिपादन किया गया है, वह अपने सिद्धान्त को न जानते से, भ्रांतिमूलक है तुम्हारे मत में तो, आत्मा, मैं और तू इत्यादि से विलक्षण, केवल चैतन्य स्वरूप है । जो यह कहते हो कि- निविशेष चैतन्य के अतिरिक्त सव कुछ मिथ्या है, तब तो मोक्ष के लिए किए जाने वाले, श्रवरण - मनन आदि सारे प्रयास व्यर्थ हैं, क्योंकि ये भी तो अविद्या कल्पित ही हैं । शुक्ति का रजत में जैसे रजत आदि मिथ्या को जानने का प्रयास विफल है, वैसे ही उक्त प्रयास भी विफल ही होगा । इससे तो यह भी धारणा बनती है कि मोक्ष के लिए किया जाने वाला प्रयत्न भी व्यर्थ है, क्योंकिवह अविद्या कल्पित आचार्य के अधीन ज्ञान से साध्य होता है । जैसे किशुक प्रह्लाद वामदेव आदि के प्रयास [परंतु बात सर्वथा भिन्न है, इन तीनों का मोक्ष शास्त्र प्रसिद्ध है। इस प्रकार तो "तत्वमसि" आदि वाक्यजन्य ज्ञान भी बंधनों को काटने वाला नहीं हो सकता, क्योंकि अविद्या कल्पित वाक्यजन्य है, तथा स्वयं अविद्यात्मक, विद्या कल्पित ज्ञाता के आश्रित, कल्पित आचार्य से आयत्त होने से कल्पित श्रवण जन्य है, जैसे कि स्वप्न में सुना गया ज्ञानात्मक वाक्य । और फिर इस मत से तो निर्विशेष चिन्मात्र ब्रह्म भी मिथ्या हो जायेगा, क्योंकि वह भी तो स्वयं, अविद्या जन्य ज्ञान का विषय ही तो है । जो कि अविद्या कल्पित ज्ञाता के आश्रित ज्ञान से जाना जाता है, तथा वह ज्ञान भी तो अविद्या कल्पित ही है । यह सब तो वैसा ही है जैसा कि स्वप्न में दृष्ट गन्धर्व नगर आदि । यह नहीं कह सकते कि- निविशेष चिन्मात्र ब्रह्म स्वयं प्रकाशवान है, इस लिए उसे प्रमाणान्तरों की अपेक्षा नहीं होती स्वयं प्रकाश ज्ञान आत्मसाक्षिक होता है, वह तो ज्ञेय विशेष सिद्धिरूप ज्ञाता के अधीन देखा जाता हैं, यह हम पहिले ही बतला चुके हैं तथा उस ब्रह्म की निविशेषता की साधिका ज्ञानमूलक जिन युक्तियों को प्रस्तुत किया था, उन सबका, अविद्या कार्यत्व आदि घटित अनुमानों से निराकरण भी कर चुके हैं । निविशेष चिन्मात्र ब्रह्म के संबंध में, अज्ञान साक्षित्व और अहंकार आदि जगद्भ्रम का अरोप भी नहीं किया जा सकता, क्योंकि साक्षित्व भ्रमादि तो किसी किसी ज्ञाता विशेष में ही होते हैं । वह ज्ञानगत नहीं होते, और न उस ज्ञान का प्रकाश ही होता है, न उसमें स्वतः प्रकाश की क्षमता ही हो सकती है । प्रकाश का अर्थ होता है, किसी व्यक्ति विशेष में, किसी वस्तु की अभिव्यक्ति होना । ऐसा स्वयं प्रकाश का भाव, आपके द्वारा ही बतलाया गया है । जो ऐसे लक्षण से घटित न हो सके उस निविशेष की ज्ञान प्रकाशता संभव नहीं है। असत् पदार्थ से ही सत् पदार्थ उत्पन्न होते हैं, ऐसा जो आपका अपनी गोंष्ठी में उद्घोष है वह, आप ही के "सारे उत्पन्न होने वाले पदार्थ, एक रूप से अबाध व्यावहारिक सत्य हैं, वस्तुतः तो वे सब अविद्यात्मक ही हैं" इत्यादि मत से, समाप्त हो जाता है । परमार्थ कारण से ही, सर्वत्र सब कार्यों की उत्पत्ति होती है, ऐसा हमारा घोष भी, पहिले ही कट चुका है । न च त्वयंषामनुमानानां श्रुतिविरोधो वक्त शक्यते, श्रुतेरपि विद्याकार्यत्वेन विद्यात्मकत्वेन चोक्त दृष्टान्तेभ्यो विशेषाभावात् । यन्तु ब्रह्मणोऽपारमार्थिकज्ञानगम्यत्वेऽपि पश्चात्तनबाघः दर्शनाद ब्रह्म सत्यमेव इति तदसत्, दुष्टकारणजन्य ज्ञानगम्यत्वे निश्चिते सति पश्चात्तनबाधा दर्शनस्याकिचित्करत्वात् यथा शून्यमेवतस्त्वमिति वाक्यजन्यज्ञानस्य पश्चात्तनबाधादर्शनेऽपि दोषमूलत्वनिश्चयादेव तदर्थस्यासत्यत्वम् तुम हमारे किये गए उक्त अनुमानों को श्रुतिविरुद्ध नहीं कह सकते क्यों कि तुम्हारे ही प्रतिपादन से यह लक्षित हो चुका है कि श्रुति भी अविद्या का कार्य है अतएव अविद्यात्मक है, इसलिए गत दृष्टातों से कोई विशेष बात श्र तियों में कही गई हो ऐसा समझ में नहीं आता [अर्थात् मिथ्या दृष्टान्तों की तरह, श्रुति भी मिथ्या दृष्टान्त रूपही हैं] ब्रह्म अपारमार्थिक ज्ञान से गम्य होते हुए भी, ज्ञानोत्तर काल में उसमें किसी प्रकार की वाधा नहीं देखी जाती, इसलिए ब्रह्म तो सत्य ही है, यह कहना भी बेकार ही होगा क्योंकि ब्रह्म ज्ञान गम्य है तथा वह ज्ञान दोषावह कारणों से जन्य है ऐसा जब तर्क से निश्चित हो चुका तब उसमें, बाद में बाधा भले ही न पड़ने उससे कुछ होता नहीं [अर्थात् अविद्याजन्य ज्ञान से ही ज़ब ब्रह्म की प्रतीति होती है तो यही कौन कम बाधा है ? ] जैसे कि - "शून्य हो एकमात्र तत्त्व है" इत्यादि से जो प्रतीति होती है भले ही उसमें बाधा न पड़ो, पर है तो दोषमूलक हो, वैसे ही उक्त मत की असत्यता भी निश्चित होती है । कि य "नेह नानाऽस्तिकिचन" विज्ञानमानन्दं ब्रह्म" इति विज्ञा-मात्रातिरिक्तस्य कृत्स्नस्य वस्तुजातस्य निषेधकत्वेन सर्वस्मात् परत्वात् पश्चात्तन बाधा दर्शनमुच्यते, शून्यमेव तत्त्वमिति तस्याप्यभावं वदतः तस्मात्परत्वेन पश्चात्तनबाधो दृश्यते । सर्वशून्यत्वातिरेकिनिषेधासंभवात्तस्यैव पश्चात्तनबाधादर्शनम्, दोषमूलत्वं तु प्रत्यक्षादीनां वेदांत जन्मतः सर्वशून्यज्ञानस्याप्यविशिष्टम् । अतः सर्वं विज्ञानजातं पारमार्थिकज्ञातृगतं, स्वयं च परमार्थंभूतमर्थविशेष सिद्धिरूपम्, तत्र किचनज्ञानं दोषमूलम्, दोषश्च परमार्थः, किचिच्च निर्दोषं पारमार्थिक सामग्रीजन्यमिति यावन्नाभ्युयेयते, न तावत्सत्यमिथ्यार्थव्यवस्था लोकव्यवहारश्च सेत्स्यति । लोकव्यवहारोऽपि पारमार्थिको भ्रांतिरूपश्च, पारमार्थिकज्ञातृगतार्थ विशेष सिद्धिरूपप्रकाशपूर्वकः, निर्विशेष सन्मात्रस्य तु पारमार्थिकस्यापारमार्थिकस्य च प्रतिभासादेर्हेतुत्वांसंभवात् लोकव्यवहारो न संभवति । यच्च-तैर्निरधिष्ठानभ्रमासंभवात् सर्वाध्यासाधिष्ठानस्य सन्मालस्य पारमार्थिकत्वमुक्तम्, तदपि दोष दोषाश्रयत्वज्ञातृत्वज्ञानानामपारमायॅऽपि भ्रमोपपत्तिवदधिष्ठानापारमार्थ्येऽपि प्रमोपत्तोर्निरस्तम् । अष्ठानापारमाये॑ऽपि न क्वचिद् भ्रमोदृष्ट इति सन्मालस्य पारमार्थिकत्वमवश्याश्रयणीयमिति मन्यसे । हन्त तर्हि दोष दोषाश्रयत्वज्ञातृत्व ज्ञानानामपारमार्थ्येऽपि न क्वचिद् भ्रमोदृष्ट इति, दर्शननानुगुण्येन तेषामपि पारमार्थ्यमवश्याश्रयणीयमिति न कंचिद् न कंचिद् विशेषोऽन्यत्र तत्संरंभात् । " इस जगत और ब्रह्म में कोई भेद नहीं है "ब्रह्म विज्ञान और आनंद स्वरूप है " इत्यादि में विज्ञान से अतिरिक्त समस्त पदार्थों के निषेध तथा इन वाक्यों के परवर्ती होने से; ब्रह्म संबंधी बाधा की संभावना नहीं रह जाती परंतु "शून्य ही तत्त्व है "इस, उक्त वाक्य के भी परवर्ती वाक्य से, जो कि उसके भी प्रभाव को द्योतन कर रहा है, बाधा उपस्थित ही रहती है । सर्व शून्य से और अधिक निषेध की बात तो हो नहीं सकती, इसलिए इस परवर्ती शून्यवाद बोधक वाक्य का बोध तो हो नहीं सकता । प्रत्यक्ष आदि प्रमाणों की तरह, वेदांत का यह सर्व शून्यवाद भी दोषमूलक है । इसलिए जब तक, समस्त विज्ञान की सत्योपलव्धि, एवं वस्तु विशेष अभिव्यंजक विज्ञान की सत्यता, तथा किसी किसी ज्ञान की निर्दोषता, सत्य सृष्टिकरणता, आदि नहीं स्वीकारी जावेगी तब तक सत्य मिथ्या विभाग और लोकव्यवहार भी सिद्ध नहीं हो सकता । क्योकि पारमार्थिक और भ्रमात्मक दोंनो प्रकार के लोकव्यवहार, परमार्थ के ज्ञाता के लिए तो पहिले से ही,, वस्तुविशेष के प्रकाशक प्रकाश सहित अपेक्षित रहते हैं केवल निर्विशेष सत् स्वरूप कभी पारमार्थिक या अपारमार्थिक भाव में, प्रतीति का हेतु नहीं हो सकता। इसलिए उससे लोकव्यवहार भी संपन्न नहीं हो सकता । तथा- किसी एक आश्रय के विना भ्रम होता ही महीं, ऐसा मानकर जो समस्त अभ्यासों के अधिष्ठान शुद्ध सत् पदार्थ ब्रह्म की पारमार्थिकता बतलाई, वह भी दोष, दोष के आश्रय, ज्ञान और ज्ञातृत्व आदि के अपारमार्थिक होते हुए जैसे भ्रमोत्पादन हो जाता है, वैसे ही अधिष्ठान की अपारमार्थिकता होते हुए भी भ्रम उत्पन्न हो सकता हैं, इस संभावित बात से कट जाती है। यदि कहो कि जब अधिष्ठान की अपारमार्थिकता में भ्रम नहीं दीखता, तब तो शुद्ध सत्सदार्थ की पारमार्थिकता अवश्य ही माननी पड़ेगी। ठीक है, तब तो, दोष दोषाश्रया ज्ञातत्व और ज्ञान आदि की अपारमार्थिकता में भी जब कहीं भ्रम नहीं दीखता, तब लोकव्यवहार का अनुसरण करते हुए, इन सब की पारमार्थिकता भी अवश्य स्वीकारनी पड़ेगी। इस विषय में केवल वाक्याडम्वर के अतिरिक्त कोई विशेष बात नहीं है । यत्त भेदपक्षेऽव्यतीतकल्पानामानन्त्यात् सर्वेषामात्मनां मुक्तत्वेन बद्धासंभवात् बद्धमुक्त व्यवस्था न संभवति, तदात्मानंत्येन परिहृतम्। यत्त्वात्मनां भिन्नत्वे माषसर्षपघटपटादिवत्संख्या वत्त्वमवर्जनीयम् इति, तत्र घटादीनामप्यनंतत्वात् दृष्टांतः साध्यविकलः स्यात् । दशघटाः संख्यावत्त्व दृश्यत इतिचेत् - सत्यम्, तत्त, सहस्रभाषाः, इति न घटादिस्वरूपगतम्, अपितु देशकालाधुपाधिमद् घटादिगतम्, तादृशं तु संख्यावत्वमात्मनामभ्युपगच्छामः । न च तावता सर्वमुक्ति प्रसंगः आत्मस्वरूपानन्त्यात् । यत्त त्मनां भिन्नत्वे घटादिवज्जडत्वानात्मत्वक्षयित्व प्रसंगः, इति तदयुक्तम्, एकजातीयानां भेदस्य तज्जातीयानांजात्यन्तरत्वानापादकत्वात् । न हि घटानांभेदः, तेषां पटत्वमापादयति । यत्तु भिन्नत्वे वस्तुतः परिच्छदाछेशकालाभ्यामपि परिच्छेदोब्रह्मणः प्रसज्यत इत्यनंतत्त्वब्रह्माणो न सिध्यतीति, तदयुक्तम, वस्तुतः परिच्छिन्ना नामपिदेश कालपच्छेिदस्य न्यूनाधिकभ / वेनानियमदर्शनात् । देशकालसंबंधेयत्तायाः प्रमाणांतराप्त निरणयत्वेन ब्रह्मणः सर्वदेशकालसंबंधस्यापि प्रमाणान्तरादापतप्ये विरोधाभावात् । वस्तुतः परिच्छेदमात्रादपि सर्वप्रकार परिच्छेदरहितत्वाभावादानंत्यासिद्धरिति चेत्, तद्भवतोऽप्यविद्या विलक्षणत्व ब्रह्मणोऽभ्युपयतः समानम् । अतः सतोऽविद्या विलक्षणत्वाभ्युपगमाद् ब्रह्मणोऽपि भिन्नत्वेन भेदप्रयुक्ता दोषाः सर्वे तवापि प्रसज्येरन् । यद्यविद्याविलक्षणत्व नाभ्युपेयते, तर्हांद्यात्मकमेव ब्रह्मस्यात् । "सत्यं - ज्ञानमनंतंब्रह्म" इति लक्षणवाक्यमपि तत एवापार्थंकं स्यात् । भेदतत्त्वानभ्युपगमे हि स्वपक्ष परपक्ष साधनदूषणादिविवेकाभावाद सर्वमसमंजसं स्यात् श्रानंत्यप्रसिद्धिश्च देशकालपरिच्छेदरहितत्व मात्रेण, ने वस्तुतोऽपि परिच्छेद रहितत्त्वेम, तथा विधस्य शशविषाणायमानस्यानुपलब्धेः । भेदवादिनस्तु सर्वंचिदचिद् वस्तुशरीरत्वेन । ब्रह्मणः सर्वप्रकारत्वात् स्वतः परतोऽपि परिच्छेदो न विद्यते । तदेवोपादयद्भ्योऽवगम्यते । प्रारम्भ गशव्दप्रदिर्येषां वाक्यानाम्, तान्याकारणाद्भिन्नस्य कार्यस्य सत्यत्वाद् ब्रह्मकायं कृत्स्नं जगद् ब्रह्मरणोऽन्यदेव । यह कहा कि - अतीत कल्पों की अनन्तता होने से सभी आत्माओं के मुक्त हो जाने से, भेदवाद में भी बद्ध मुक्त व्यवस्था नहीं बनती, इस कथन का निराकरण जीवों की अनन्तता के आधार पर किया जा चुका है । जो यह कहो कि - आत्माओं की भिन्नता मानने से, उर्द, सरसों, घट पट आदि की तरह, संख्यावत्त्व अर्थात् सान्तत्त्व होगा, सो यह दृष्टांत ही गलत है, घट आदि तो स्वतः ही अनंत हैं । यदि कहो कि - दस घट, हजार भाव आदि गणना तो की जाती है, ठीक है की जाती है, पर यह गणना, घट आदि के रूप की नहीं है, यह तो देशकाल आदि से विशिष्ट घट की है । ऐसी ही संख्या आत्मा की भी है [ अर्थात् किसी स्थान किसी समय कुछ प्रात्मायें विभिन्न आकारों में उपस्थित हो तो हम उनकी गणना भले ही कर लें, पर हैं तो वह अनंत ही] इसलिए एक साथ सबकी मुक्ति का प्रश्न ही नहीं उठता, क्योंकि आत्मायें अनंत हैं । जो यह कहा कि - आत्माओं को भिन्न-भिन्न मानने से उनमें जडता, अनात्मता, विनाश आदि दोष हो सकते हैं, यह बात भी युक्ति संगत नहीं है, क्योंकि - एक जातीय पदार्थ का भेद, कभी उस जातीय पदार्थ से भिन्न जातीयता नहीं बतला सकता, जैसे कि -- घंटों के पारस्परिक भेद में, पटत्व का भान नहीं होता । यह कहना कि भेद मानने से आत्माओं का वस्तुगत परिच्छेद हो जायगा, जिसके फलस्वरूप ब्रह्म का देश काल परिच्छेद संभावित होगा, जिससे ब्रह्म की अनंतता सिद्ध न होगी । यह भी असंगत बात है, परिच्छिन्न पदार्थों का भी, देश कालात्मक परिच्छेद का न्यूनाधिक भाव देखा जाता है। देशकाल संबंधी जो परिच्छेद होता है, उसे प्रमान्तरों के सहारे ही, निरूपण किया जा सकता है, इसलिए ब्रह्म का, देशकाल आदि का जो संबंध है, वह भी प्रमाणान्तरों से ही सिद्ध हो सकता है । इसलिए इसमें कोई विरूद्ध भाव नहीं है । यदि कहें कि आत्मा का रूप, वस्तु से परिच्छिन्न होते हुए भी, तथा उससे भिन्न सभी प्रकार के परिच्छेद का अभाव होते हुए भी, ब्रह्म की अनंतता सिद्ध नहीं होती। ठीक है, ब्रह्म को जब तुम, अविद्या से पृथक् तत्त्व मानते हो, तब भी तो यही दोष उपस्थित होता है । सत् स्वरूप ब्रह्म को, अविद्या से विलक्षण मानने परब्रह्म जब अविद्या से पृथक् हो जाता है तब भेद संबंधी जितने भी दोष तुम प्रस्तुत करते हो वे समी, संभावित हो सकते हैं । यदि अविद्यात्मक भिन्नता नहीं मानते, तो भी ब्रह्म तो अविद्यात्मक ही रहता है, जिससे "ब्रह्म सत्य ज्ञान अनंतस्वरूप है" यह वाक्य घटित नही होता । यदि तात्त्विक भेद ही मानते हो तो तुम्हारे पास अपने पक्ष के पुष्टि और दूसरे के पक्ष के दूषणों को विश्लेषण करने का कोई उपाय ही नहीं रह जायेगा । अतः सब कुछ असामंजस्य पूर्ण हो जायेगा। देशकाल परिच्छेद के न होने मात्र से ही "अनंतता" सिद्ध हो जायेगी तथा वस्तुगत परिच्छेद की अपेक्षा न होगी, ऐसा खरगोश की सींग का सा अनहोना, परिच्छेद तो कहीं भी दृटिगत नहीं होता । भेदवादियों के मत से जब, सभी जड़चेतन ब्रह्म का शरीर है, तब सारे पदार्थ, विशेषित ब्रह्म से, स्वतः या परतः किसी भी रूप में परिच्छिन्न होकर नहीं रह सकते । इससे ज्ञात होता है कि -- कारण से भिन्न कार्य के सत्य होने से, ब्रह्म का कार्य, सारा जगत निश्चित ही पृथक् है । सिद्धांतः- इति प्राप्ते प्रचक्ष्महे- तदन्यत्वभारम्भणशब्दादिभ्यः तस्माद् परम् कारणाद ब्रह्मरणः अनन्यत्वं जगतः, आरम्भरणशब्दादिम्यः तदुपरम्भरणशब्दादीनि । आरम्भरण शब्द आदिर्येषां वाक्यानां तान्यारम्भरण शब्दादीनि "वाचारम्भरणं विकारो नामधेयं मृत्तिकेत्येव सत्यम् ।" "सदेव साम्येदमग्र प्रासीत् एकमेवाद्वितीयं तदैक्षत् बहुस्यां प्रजायेयेति तत्तेजोऽसृजत्" अनेन जीवेनाऽत्मनाऽनुप्रविश्य" सन्मूलाः सोम्येमाःसर्वाः प्रजाः सदायतनाः सद्प्रतिष्ठा : "ऐतदात्भ्यमिदं सर्वंतत्सत्यं स आत्मा तत्त्वमसि श्वेतकेतोः" इत्येतानि प्रकरणा -न्तरस्थानि अप्येवंजातीयकानि अत्राभि प्रेतानि । एतानि हि वाक्यानि चिदचिदात्मकस्य जगतः परस्मादब्रह्मणोऽनन्यत्वमुत्पादयंति । उक्त संशय पर सूत्रकार " तदन्यत्वमारम्भरण शब्दादिभ्यः" सूत्र प्रस्तुत करते हैं । अर्थात्-ब्रह्म के साथ जगत के अभेद के प्रतिपादक "आरम्भरण' आदि शब्दों के प्रयोग से ज्ञात होता है कि - - परमकारण ब्रह्म से, यह जगत अभिन्न है । जिन वाक्यों में उक्त शब्दों का प्रयोग है वे इस प्रकार है - "विकारमात्र वाक्यारब्ध नाममात्र है, मृत्तिका ही सत्य पदार्थ है"सृष्ठि के पूर्व यह सारा जगत् सत्स्वरूप था, तब परमात्मा ने एक से अनेक होने की कामना करके तेज की सृष्टि की - "उसने इस जीवात्मा के अन्तःकरण में प्रवेश करके" - हे सौम्य ! ये सारे पदार्थ मूल से ही सत्, सत् में ही स्थित तथा सत् में ही विलीन हैं- "यह सब आत्मस्वरूप हैं, वही एकमात्र सत्य आत्मा है, श्वेतकेतु ! तुम वही हो" इत्यादि भिन्नभिन्न प्रकरणस्थ वाक्यों की एकता बतलाने के लिए ही सूत्र में आदि शब्द का प्रयोग किया गया है अर्थात् ये सारे वाक्य एक ही तत्त्व के बोधक हैं । ये सारे ही वाक्य चिदचिदात्मक जगत की, परब्रह्म से अनन्य ता बतलाते हैं । तथा हि - " स्तव्धोऽस्युत तमादेशमप्राक्ष्यो येनाश्रुतंश्रुतं भवत्य मतं मतमविज्ञातं विज्ञातम् ।" इति कृत्नस्यजगतो ब्रह्मैककारणत्वं, कारणकार्यस्यानन्यत्वं च हृदि निधाय कारणभूत ब्रह्म विज्ञानेन कार्यभूतस्य सर्वस्य विज्ञाने प्रतिज्ञाते सति कृत्स्नस्य ब्रह्मैककारणनानजानता शिष्येण "कथं न्य भगवः स आदेशः" इत्यनुज्ञानेन अन्यज्ञातता संभवं चोदितो जगतो ब्रह्मककारणतामुपदेक्ष्यन लौकिक प्रती तिसिद्धं कारणात् कायस्यानन्यत्वं तावत् "यथा सौम्येकेन मृतपडेन सर्वं मृण्मयं विज्ञातं स्यात्" इति दर्शयति । यथैकमृत्पिडाव्धानां घटशरावादीनां तस्मादनतिरिक्त द्रब्यतया तज्ज्ञानेन ज्ञाततेत्यर्थः । इसी प्रकार "वत्स ! तुम गर्व करते हो, तुमने इस विषय की कभी गुरु से जिज्ञासा की है ? जिसे जानकर, अश्रु त विषय श्रुत, अचिन्त्य वि षय चिन्त्य एवं अविज्ञात विषय भी ज्ञात हो जाता है "इत्यादि श्रुत से, संपूर्ण जगत की ब्रह्मक कारणता, कारण से कार्य की अभिन्नता समझाते हुए, गुरू ने, कारणस्वरुप ब्रह्म के ज्ञान से कार्य भूत जगत का ज्ञान होता है, इस तथ्य को बतलाया । एकमात्र ब्रह्म ही जगत का कारण है इस तथ्य को न जानने वाले शिष्य द्वारा पुनः "उस रूप का उपदेश भगवन् ! किस प्रकार का होगा ? " जिज्ञासा करने पर "हे सौम्य ! एक मिट्टी के ढेले से जैसे मिट्टी की निर्मित सभी वस्तुओं का ज्ञान हो जाता है उसी प्रकार" इत्यादि उत्तरसे गुरु ने एक विषय के ज्ञान के बिना अन्य विषयों का ज्ञान होना असंभव है, ऐसी लोक व्यवहारानुगत प्रतीति सिद्ध कारण कार्य की अभिन्नता बतलाई । इसका तात्पर्य है कि - एक मिट्टी के पिण्ड से समुत्पन्न घट प्याले आदि उस मृत पिण्ड से अभिन्न माने जाते हैं । उस मिट्टी के ढेले की जानकारी से ही उक्त धारणा बनती है । श्रत्र कारणाद वादेन कारणात् कार्यस्य द्रब्यान्तरत्वमाशंक्य लोक प्रतीत्यैव कारणात् कार्यस्यानन्यतामुपपादयति "वाचारम्भरणं विकारो नामधेय मृत्तिकेत्येवसत्यम्" इति । आरभ्यते श्रालभ्यते स्पृश्यते इत्यारम्भणं " कृत्यल्युटोबहुलम्" इति कर्मणिल्युट् । वाचावाक्पूर्वकेण व्यवहारेण हेतुनेत्यर्थः । "घटेनोदकमाहर" इत्यादि वाक्यपूर्वको हि उदकाहरणादिव्यवहारः तस्य व्यवहारस्य सिद्धये तेनैव मृद्रव्येण पृथुबुध्नोदरत्वादिलक्षणोविकारः संस्थान विशेषः, तत्प्रयुक्त च घटइत्यादिनामधेयम्, स्पृश्यते- उदकाहरणादिव्यवहारविशेषसिद्धयर्थं मृद्रव्यमेव संस्थानांतरनामधेयांतरभागववति । अतोघटाद्यपि मृत्तिके, त्येव सत्यम्, मृत्तिकाद्रव्यमित्येव सत्यम् प्रमाणेनोपलभ्यत इत्यर्थः न तु द्रव्यान्तरत्वेन । अतस्तस्यैवमृद्हिरण्यादे द्रव्यस्य संस्थानांतरभाषत्व मात्रेण बुद्धिशब्दान्तरादय उपपद्यन्ते यथैकस्यैव देवदत्तस्यावस्था भेदैः "बालोयुवास्थविरः" इति बुद्धिशब्दान्तरादयः कार्यविशेषाश्च दृश्यते । इस विषय में कणाद मत में, कारण से कार्य भिन्न द्रव्य है ऐसी आशंका पूर्वक लोक प्रतीति के अनुसार ही कारण कार्य की अद्वैत प्रतीति होती है, इत्यादि प्रतिपादन किया गया है। "घट आदि विकार - कहने मात्र को भिन्न हैं, मिट्टी ही सत्य है" इत्यादि वाक्य में आरंभण शब्द का अर्थ है, आरंभ करने योग्य, आलंबन करने योग्य । " कृत्यल्युटो बहुलम्" इस पाणिनीय सूत्र से यहाँ कर्म में ल्युट प्रत्यय हुआ है "वाचा" का अर्थ है, वाक्यपूर्वक व्यवहार के अनुसार "घट से जल लाओ" इत्यादि शब्दोच्चारण द्वारा हो, जल लाना आदि व्यवहार पूरा होता है उस ब्यव -हार के संपादन के लिए, मिट्टी के स्थूल गोलाकार, मिट्टी के विशिष्ट आकृति वाले "घट" नाम का स्पर्श करता है, अर्थात् जल आहरण रूप विशेष व्यवहार संपादन के उद्देश्य से, मिट्टी की अन्य प्रकार की आकृति का "घट" नाम पड़ा । वस्तुतः घट और मिट्टी एक ही हैं, मिट्टी ही उसका सत्य रूप है, अर्थात घट आदि पात्र मिट्टी होने से सत्य हैं। जैसे कि-देवदत्त नामक व्यक्ति अवस्था विशेष के अनुसार "बालक-युवा-वृद्ध" कहलाना है, ये भेद बुद्धि और शब्द व्यवहार के ही हैं, वास्तविक नहीं हैं वैसे ही एक ही मिट्टी के बनी विभित्र आँकृतियाँ घट प्याला आदि नामों से समझी और पुकारी जाती हैं । यदुक्त सत्यामेव मृदि "घटो नष्ट : " इति व्यवहारात् कारणाद् अन्यत्कार्यमिति, तदुत्पत्ति विनाशादीनां कारणभूतस्यैव द्रव्यस्यावस्थाविशेषत्वाभ्युपगमादेव परिहृतम् । तत्तदवस्थस्यैकस्यैव द्रव्यस्य ते ते शब्दास्तानि तानि च कार्यारणीति युक्तम् । द्रव्यस्य तत्तदवस्थत्वं कारकव्यापारायत्तमिति तस्यार्थवत्त्वम् अभिब्यक्तयनुवंधीनि चोद्यानि-
नासाउ। फ्लोरिडा के फोर्ट लाउडरडेल जा रहा एक हेलीकॉप्टर बृहस्पतिवार को बहामा के ग्रैंड केय द्वीप में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसके कारण उसमें सवार सभी सात अमेरिकियों की मौत हो गई। बहामा की पुलिस ने यह जानकारी दी। रॉयल बहामा पुलिस बल ने एक बयान में बताया कि हेलीकॉप्टर द्वीप से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद लापता हो गया था। अधिकारियों और स्थानीय निवासियों को बाद में द्वीप तट से दो मील दूर दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर मिला। पुलिस ने बताया कि मृतकों में चार महिलाएं और तीन पुरुष हैं।
नासाउ। फ्लोरिडा के फोर्ट लाउडरडेल जा रहा एक हेलीकॉप्टर बृहस्पतिवार को बहामा के ग्रैंड केय द्वीप में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसके कारण उसमें सवार सभी सात अमेरिकियों की मौत हो गई। बहामा की पुलिस ने यह जानकारी दी। रॉयल बहामा पुलिस बल ने एक बयान में बताया कि हेलीकॉप्टर द्वीप से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद लापता हो गया था। अधिकारियों और स्थानीय निवासियों को बाद में द्वीप तट से दो मील दूर दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर मिला। पुलिस ने बताया कि मृतकों में चार महिलाएं और तीन पुरुष हैं।
बांदा जिला के बड़ोखर खुर्द ब्लाक के बांधा पुरवा मा एक किसान रामदास का दिल का दौरा पड़े से वहिके मउत होइगे है। परिवार वालेन के अनुसार मउत के वजा आठ लाख रुपिया का कर्जा रहै। बैंक कर्ज के उगाही के खातिर लगातार रामदास के ऊपर दबिस बनावत रहै। बांदा जिला मा कर्ज से डूबे किसानन के मउत का मामला आय दिन सउहें आवत है। कत्तौ दिल का दौरा तौ कत्तौ आत्महत्या का। यहिनतान के घटना बांधा पुरवा मा भे है। किसान रामदास के 22 अप्रैल का हार्टअटैक से मउत होइगे है। लगभग पांच साल से किसानी मा कुछौ नहीं होत रहै, कत्तौ सूखा तौ कत्तौ ओलावृष्टि के मार खात रहै, तौ वहिका कर्ज के चिंता सतावत रहै। दुई लाख ट्रैक्टर का लोन अउर छह लाख किसानी के खातिर कर्ज लीन गा रहा है। किसानी मा कुछ न होय के कारन कर्ज नहीं भर पावत रहै। यहै से चिंता सतावत रहै अउर पन्द्रह दिन पहिले नोटिस आई रहै। मृतिका का भतीजा बुद्धिमदास बताइस कि बैंक के कर्ज का बोझा बहुते रहै। दुई लाख ट्रैक्टर का लोन अउर छह लाख किसानी का कर्जा रहै। बैंक के कर्मचारी दबाव बनावत रहै, तौ चिंता के कारन हार्टअटैक आवा अउर मउत होइगे है। बेटा रामबाबू बताइस कि जमीन पन्द्रह बीघहा है। बैंक वाले दबाव बनावत रहै कि कर्ज भरौ नहीं तौ गाय, भैंइस, ट्रैक्टर, अउर जमीन सब तहसील के द्वारा ले जायेंगे। पत्नी शीला का कहब है कि सदमा से मउत भे है। लेखपाल बालकृष्ण का कहब है कि उनका मैं सूखा राहत वाला बाईस सौ रुपिया देवाय हौं अउर जउन सरकारी योजना के बीमा के अनुसार मिलत है। मैं तहसीलदार साहब के पास अप्लिकेशन मा लिख के भेज दीने हौं कि वहिके मउत होइगे है अउर वहिके परिवार वाले आर्थिक स्थिति मा है।
बांदा जिला के बड़ोखर खुर्द ब्लाक के बांधा पुरवा मा एक किसान रामदास का दिल का दौरा पड़े से वहिके मउत होइगे है। परिवार वालेन के अनुसार मउत के वजा आठ लाख रुपिया का कर्जा रहै। बैंक कर्ज के उगाही के खातिर लगातार रामदास के ऊपर दबिस बनावत रहै। बांदा जिला मा कर्ज से डूबे किसानन के मउत का मामला आय दिन सउहें आवत है। कत्तौ दिल का दौरा तौ कत्तौ आत्महत्या का। यहिनतान के घटना बांधा पुरवा मा भे है। किसान रामदास के बाईस अप्रैल का हार्टअटैक से मउत होइगे है। लगभग पांच साल से किसानी मा कुछौ नहीं होत रहै, कत्तौ सूखा तौ कत्तौ ओलावृष्टि के मार खात रहै, तौ वहिका कर्ज के चिंता सतावत रहै। दुई लाख ट्रैक्टर का लोन अउर छह लाख किसानी के खातिर कर्ज लीन गा रहा है। किसानी मा कुछ न होय के कारन कर्ज नहीं भर पावत रहै। यहै से चिंता सतावत रहै अउर पन्द्रह दिन पहिले नोटिस आई रहै। मृतिका का भतीजा बुद्धिमदास बताइस कि बैंक के कर्ज का बोझा बहुते रहै। दुई लाख ट्रैक्टर का लोन अउर छह लाख किसानी का कर्जा रहै। बैंक के कर्मचारी दबाव बनावत रहै, तौ चिंता के कारन हार्टअटैक आवा अउर मउत होइगे है। बेटा रामबाबू बताइस कि जमीन पन्द्रह बीघहा है। बैंक वाले दबाव बनावत रहै कि कर्ज भरौ नहीं तौ गाय, भैंइस, ट्रैक्टर, अउर जमीन सब तहसील के द्वारा ले जायेंगे। पत्नी शीला का कहब है कि सदमा से मउत भे है। लेखपाल बालकृष्ण का कहब है कि उनका मैं सूखा राहत वाला बाईस सौ रुपिया देवाय हौं अउर जउन सरकारी योजना के बीमा के अनुसार मिलत है। मैं तहसीलदार साहब के पास अप्लिकेशन मा लिख के भेज दीने हौं कि वहिके मउत होइगे है अउर वहिके परिवार वाले आर्थिक स्थिति मा है।
- फ़िल्टर करें : प्रश्न : उत्तर : उत्तर की रूपरेखाः - उत्तर की शुरुआत भारत में खाद्य सुरक्षा की आवश्यकता के साथ करें। - चर्चा करें कि क्यों खाद्य सुरक्षा के लक्ष्य को हासिल करने के लिये किसानों की सुरक्षा आवश्यक है। - खाद्य सुरक्षा हासिल करने के मार्ग में आने वाली चुनौतियों को लिखें। - अंत में किसानों की स्थिति में सुधार के लिये अपने सुझाव दें। खाद्य सुरक्षा एक दीर्घकालिक क्षमता है जिसके आधार पर कुल आबादी को समय पर विश्वसनीय तथा पर्याप्त पोषण युक्त भोजन की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। चूँकि अब भारत की जनसंख्या 130 करोड़ के लगभग पहुँच चुकी है तो उचित मूल्य पर नियमित खाद्य आपूर्ति अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है। इस समस्या के निदान के लिये अक्तूबर, 2007 में गेहूँ, चावल तथा दाल का उत्पादन बढ़ाने के लिये राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अभियान के नाम से केंद्र प्रोयाजित योजना चलाई गई। 12वीं पंचवर्षीय योजना में वाणिज्यिक फसलों तथा मोटे अनाजों को शामिल किया गया। 2018 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लाया गया। परंतु भारत में खाद्य सुरक्षा तभी हासिल की जा सकती है, जब हमारे अन्नदाता किसान सुरक्षित हों। आज किसान कर्ज़ तले दबा हुआ है, कृषि की लागत बढ़ गई तथा मूल्यों में स्थिरता नहीं रही है, कृषि बीमा का प्रसार भी सीमित है। खाद्य सुरक्षा हासिल करने में चुनौतियाँः - अन्य मुख्य खाद्यान्न उत्पादक राष्ट्रों की तुलना में खाद्यान्न की निम्न उत्पादकता। - भंडारण की बुनियादी सुविधा के अभाव में खाद्यान्न दूषित एवं नष्ट हो जाते हैं। - घटिया सड़कें तथा अक्षम परिवहन प्रणाली भारी देरी पैदा कर सकते हैं। - एक सुविकसित कृषि बैंकिग क्षेत्र का अभाव, जो कि किसानों को कमीशन एजेंट्स से ऋण लेने पर मजबूर करता है। - नई तकनीकों, प्रौद्योगिकियों तथा कृषि उत्पाद संबंधी शिक्षा तथा प्रशिक्षण का अभाव। - फैक्ट्रियों, गोदामों तथा आवासों के निर्माण के लिये उर्वर कृषिभूमि का स्थानांतरण किया जा रहा है। - जमीन की उत्पादकता में भी ह्रास हो रहा है, उर्वरक, पीड़कनाशी तथा कीटनाशी, जिन्होंने कभी चमत्कारी परिणाम दिया था, अब जमीन की उर्वरता में कमी के लिये दोषी ठहराए जा रहे हैं। मौजूदा महंगी, अक्षम और भ्रष्टाचार से ग्रस्त संस्थागत व्यवस्था में तत्काल बदलाव की आवश्यकता है जो अपेक्षित गुणवत्ता वाले अनाज का सस्ता वितरण एवं स्वलक्ष्यीकरण सुनिश्चित कर सके। कीमतों में व्यापक उतार-चढ़ाव से बचने के लिये और छोटे किसानों को संकट के समय बेचने से रोकने के लिये वायदा बाज़ार को प्रोत्साहित किया जा सकता है। सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग के ज़रिये बेहतर संचार प्रणालियाँ किसानों को उनके उत्पाद के बेहतर दाम दिलाने में मददगार हो सकती हैं। बीमा प्रीमियम का बड़ा हिस्सा सरकार द्वारा अदा करके फसल बीमा को बढ़ावा दिया जा सकता है, ताकि किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित किया जा सके।
- फ़िल्टर करें : प्रश्न : उत्तर : उत्तर की रूपरेखाः - उत्तर की शुरुआत भारत में खाद्य सुरक्षा की आवश्यकता के साथ करें। - चर्चा करें कि क्यों खाद्य सुरक्षा के लक्ष्य को हासिल करने के लिये किसानों की सुरक्षा आवश्यक है। - खाद्य सुरक्षा हासिल करने के मार्ग में आने वाली चुनौतियों को लिखें। - अंत में किसानों की स्थिति में सुधार के लिये अपने सुझाव दें। खाद्य सुरक्षा एक दीर्घकालिक क्षमता है जिसके आधार पर कुल आबादी को समय पर विश्वसनीय तथा पर्याप्त पोषण युक्त भोजन की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। चूँकि अब भारत की जनसंख्या एक सौ तीस करोड़ के लगभग पहुँच चुकी है तो उचित मूल्य पर नियमित खाद्य आपूर्ति अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई है। इस समस्या के निदान के लिये अक्तूबर, दो हज़ार सात में गेहूँ, चावल तथा दाल का उत्पादन बढ़ाने के लिये राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अभियान के नाम से केंद्र प्रोयाजित योजना चलाई गई। बारहवीं पंचवर्षीय योजना में वाणिज्यिक फसलों तथा मोटे अनाजों को शामिल किया गया। दो हज़ार अट्ठारह में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लाया गया। परंतु भारत में खाद्य सुरक्षा तभी हासिल की जा सकती है, जब हमारे अन्नदाता किसान सुरक्षित हों। आज किसान कर्ज़ तले दबा हुआ है, कृषि की लागत बढ़ गई तथा मूल्यों में स्थिरता नहीं रही है, कृषि बीमा का प्रसार भी सीमित है। खाद्य सुरक्षा हासिल करने में चुनौतियाँः - अन्य मुख्य खाद्यान्न उत्पादक राष्ट्रों की तुलना में खाद्यान्न की निम्न उत्पादकता। - भंडारण की बुनियादी सुविधा के अभाव में खाद्यान्न दूषित एवं नष्ट हो जाते हैं। - घटिया सड़कें तथा अक्षम परिवहन प्रणाली भारी देरी पैदा कर सकते हैं। - एक सुविकसित कृषि बैंकिग क्षेत्र का अभाव, जो कि किसानों को कमीशन एजेंट्स से ऋण लेने पर मजबूर करता है। - नई तकनीकों, प्रौद्योगिकियों तथा कृषि उत्पाद संबंधी शिक्षा तथा प्रशिक्षण का अभाव। - फैक्ट्रियों, गोदामों तथा आवासों के निर्माण के लिये उर्वर कृषिभूमि का स्थानांतरण किया जा रहा है। - जमीन की उत्पादकता में भी ह्रास हो रहा है, उर्वरक, पीड़कनाशी तथा कीटनाशी, जिन्होंने कभी चमत्कारी परिणाम दिया था, अब जमीन की उर्वरता में कमी के लिये दोषी ठहराए जा रहे हैं। मौजूदा महंगी, अक्षम और भ्रष्टाचार से ग्रस्त संस्थागत व्यवस्था में तत्काल बदलाव की आवश्यकता है जो अपेक्षित गुणवत्ता वाले अनाज का सस्ता वितरण एवं स्वलक्ष्यीकरण सुनिश्चित कर सके। कीमतों में व्यापक उतार-चढ़ाव से बचने के लिये और छोटे किसानों को संकट के समय बेचने से रोकने के लिये वायदा बाज़ार को प्रोत्साहित किया जा सकता है। सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग के ज़रिये बेहतर संचार प्रणालियाँ किसानों को उनके उत्पाद के बेहतर दाम दिलाने में मददगार हो सकती हैं। बीमा प्रीमियम का बड़ा हिस्सा सरकार द्वारा अदा करके फसल बीमा को बढ़ावा दिया जा सकता है, ताकि किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित किया जा सके।
माह को समर्पित ब्लॉक अमरजीतपुरा की ब्लॉक स्तरीय नामचर्चा शनिवार को बड़े ही धूमधाम से आयोजित की गई। सुमिरन कर कुल मालिक के चरणों में अरदास की गई। नामचर्चा में उपस्थित साध-संगत। अमरजीतपुरा की साध-संगत द्वारा दरबार के खेत खलिहान इत्यादि जगहों पर निः स्वार्थ भावना से श्रमदान किया। इन्सां सहित बड़ी तादाद में ब्लॉक की साध सँगत उपस्थित रही।
माह को समर्पित ब्लॉक अमरजीतपुरा की ब्लॉक स्तरीय नामचर्चा शनिवार को बड़े ही धूमधाम से आयोजित की गई। सुमिरन कर कुल मालिक के चरणों में अरदास की गई। नामचर्चा में उपस्थित साध-संगत। अमरजीतपुरा की साध-संगत द्वारा दरबार के खेत खलिहान इत्यादि जगहों पर निः स्वार्थ भावना से श्रमदान किया। इन्सां सहित बड़ी तादाद में ब्लॉक की साध सँगत उपस्थित रही।
Microbe in Permafrost: मंगल ग्रह पर कई ऐसी जगहें हैं जो पृथ्वी से मेल खाती है। कनाडा का हाई आर्कटिक क्षेत्र भी उन्हीं जगहों में से एक है। यहां का वातावरण भी बहुत सख्त है। शोधकर्ताओं को यहां पर माइक्रोब्स मिले हैं। इनमें से कई माइक्रोब ऐसे हैं जिन्हें जीने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत नहीं होती है।
Microbe in Permafrost: मंगल ग्रह पर कई ऐसी जगहें हैं जो पृथ्वी से मेल खाती है। कनाडा का हाई आर्कटिक क्षेत्र भी उन्हीं जगहों में से एक है। यहां का वातावरण भी बहुत सख्त है। शोधकर्ताओं को यहां पर माइक्रोब्स मिले हैं। इनमें से कई माइक्रोब ऐसे हैं जिन्हें जीने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत नहीं होती है।
भोपालः इंडियन कोरोना कहने की वजह से भारतीय जनता पार्टी के निशाने पर आने के बाद एक बार फिर से मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ बीजेपी के निशाने पर आ गए हैं। शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि भारत महान नहीं, बल्कि बदनाम देश है। दरअसल, शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भारत महान नहीं, भारत बदनाम है। सभी देशों ने रोक लगाई है कि भारत के लोग नहीं आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे किसी ने न्यूयॉर्क से फोन किया था कि यहां जो भारतीय टैक्सी चलाते हैं, उनकी टैक्सी में कोई बैठने को तैयार नहीं है। ऐसा बदनाम किया है आपने (मोदी) देश को। उन्होंने कहा कि मोदी जी कहते थे हमने कोरोना से लड़ाई जीत ली। कहते थे हम विश्व फार्मेसी हैं। लेकिन आज कह रहे हैं कि ग्लोबल टेंडर निकालो। वैक्सीन लाओ। बता दें कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कमलनाथ कोरोना संक्रमण के लिए केंद्र की बीजेपी सरकार पर हमला कर रहे थे, तो वहीं सोशल डिस्टेंशिंग की धज्जियां उड़ाते उनके आस-पास काफी लोग मौजूद थे, जिन्होंने मास्क नहीं लगाया था। खुद कमलनाथ ने भी मास्क नहीं लगाया था। बता दें कि बीते शुक्रवार (21 मई) को एक अन्य प्रेस कॉन्फ्रेंस में कमलनाथ ने कहा था कि दुनिया में हमारे देश ने इंडियन कोरोना के नाम से पहचान बनाई है। कोरोना की शुरूआत भले चीन से हुई हो लेकिन अब ये भारतीय वेरिएंट कोरोना है। 21 मई को दिए इस बयान को लेकर मप्र पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दारा 188 और 54 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। बीते रविवार को भोपाल में बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने केस दर्ज कराने के लिए पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा था, जिसके बाद कमलनाथ पर केस दर्ज किया गया।
भोपालः इंडियन कोरोना कहने की वजह से भारतीय जनता पार्टी के निशाने पर आने के बाद एक बार फिर से मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ बीजेपी के निशाने पर आ गए हैं। शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि भारत महान नहीं, बल्कि बदनाम देश है। दरअसल, शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भारत महान नहीं, भारत बदनाम है। सभी देशों ने रोक लगाई है कि भारत के लोग नहीं आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे किसी ने न्यूयॉर्क से फोन किया था कि यहां जो भारतीय टैक्सी चलाते हैं, उनकी टैक्सी में कोई बैठने को तैयार नहीं है। ऐसा बदनाम किया है आपने देश को। उन्होंने कहा कि मोदी जी कहते थे हमने कोरोना से लड़ाई जीत ली। कहते थे हम विश्व फार्मेसी हैं। लेकिन आज कह रहे हैं कि ग्लोबल टेंडर निकालो। वैक्सीन लाओ। बता दें कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कमलनाथ कोरोना संक्रमण के लिए केंद्र की बीजेपी सरकार पर हमला कर रहे थे, तो वहीं सोशल डिस्टेंशिंग की धज्जियां उड़ाते उनके आस-पास काफी लोग मौजूद थे, जिन्होंने मास्क नहीं लगाया था। खुद कमलनाथ ने भी मास्क नहीं लगाया था। बता दें कि बीते शुक्रवार को एक अन्य प्रेस कॉन्फ्रेंस में कमलनाथ ने कहा था कि दुनिया में हमारे देश ने इंडियन कोरोना के नाम से पहचान बनाई है। कोरोना की शुरूआत भले चीन से हुई हो लेकिन अब ये भारतीय वेरिएंट कोरोना है। इक्कीस मई को दिए इस बयान को लेकर मप्र पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दारा एक सौ अठासी और चौवन के तहत मामला दर्ज कर लिया है। बीते रविवार को भोपाल में बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने केस दर्ज कराने के लिए पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा था, जिसके बाद कमलनाथ पर केस दर्ज किया गया।
लगा, वह बहुत देरसे अकर्मण्य हो रहा है। एक दृढ कर्तृत्वके सकल्पसे उठ कर अकारण उसने कुछ काम करने का उपक्रम किया । उसे याद आया कि वह मिल लायब्रेरी का इनर्चाज भी तो है । पास की मेज पर पडे इडस्ट्रियल-टेक्सटाइल मेग्जीनोको झाडा, उलट-पलट कर देखा - बहुत सी फेक्टियो, मशीनों और कल-पुजाकी तस्वीरें है । वही मशीनों का जिक्र ? मनुष्यताके सर्वनाशका वृहद वैज्ञानिक आयोजन, यह मशीन ! नहीं-नहीं, असह्य है उसे, जगतके वक्ष पर हो रही यह दानव-लीला । और तब उसका कर्तृत्व एक ऐसी रुद्र सहारेच्छासे भर उठा मानो वह, मॉ पृथ्वीकी छाती की दूध की धारा खूनमे बदलती इस मशीन राक्षसीको चीरकर दो टुकडे कर देगा। । और फिर बहा देगा वही माँ की छातीकी उदार, नग्न, अबाध, निसर्ग दूधकी धारा, जिसे उसके बालक बिना किसी बाधाके, सामान रुपते और विश्वस्त भावसे पियेंगे, पोषण पायेगे। मॉके दूधपर सिक्के-मुहर ट्रेडमार्क 2 सील चपडी ? उसपर अधिकार, मॉनोपली, कन्ट्राक्ट 2 वह डिब्बों में बन्द करके बाजार मे बेचा जायगा ? जिसके पास पैसे हों वह खरीदे - और उसकी दूसरी सन्ताने मुखो मरेगी उफ, वह एक मिनिट भी यह सब बर्दाश्त न कर सकेगा। और इस विज्ञान तथा मशीनोंने मानव जाति के प्राणोको कितना सस्ता बना दिया, जीवनका मूल्य कितना घटा दिया । हमारे मस्तकपर आकाशमें, हमारे प्राणोंकी पल-पलकी माँस-हवामे मौत मण्डरा रही है। मनुष्यता सॉस नहीं ले सकेगी। उसे बेखटके जीने न दिया जायगा। नदियों और तालाबोंके पानीसे सावधान ! उसमे जहर घुला हुआ है। मॉ पृथ्वीकी पर विश्वास आश्वासनसे सोनेवाले मानव-शिशुओ, क्यो बेख़बर सोये हो ! माँकी छातीमें मौत छिपी बैठी है, तुम बोम्बार्ड कर दिये जाओगे । आकाश और पृथ्वी, सृष्टिके चिर-कालके रक्षक, प्रलयके पहले ही उसके भक्षक हो गये । उनके बीच जीवन पल-पल अरक्षित है, खतरेमें है । एक मनुष्य दूसरेकी जानका गाहक बना हुआ है। हम अविश्वास, सन्देह और खतरेकी जिन्दगी जीते हैं। सत्ता, पूँजी, युद्ध-हिंसा-प्रतिहिंसा, खून, श्राग, हिसाके ज्वालामुखियोंके विस्फोट' कौन है इन सबके लिए जिम्मेवार ? कौन ले आया है यह महानाश ? और तब उसकी आत्मामेसे मानों प्रतिध्वनि हुई - "मशीन, विज्ञान, मानवमस्तिष्क • हाँ, मानव मस्तिष्क । जड़ और चेतनके सघर्ष में चेतन पर जड़की विजय !" हौं, वह विध्वस चाहता है - विध्वंस, फिर नवनिर्माण । और उसी आवेगमे उसने दो-तीन मशीनोकी तस्वीरोंवाले मेग्जीन चीर डाले और फेक दिये सामने टेबलपर । बाहर एक मोटर बर्स्ट हो गयी, भड़ाम् ! नीलमणिका खून एकदम गिरकर ठडा हो गया । बर्फीली ठडी ऑखोसे उसने देखा - उसके सामने मशीन राक्षसीके दो टुकडे नहीं, कागजकी मेग्जीनोके टुकड़े फटे पडे थे, और वे मशीनें माँ पृथ्वीकी छातीकी दूधकी वाराओको खून में बदलती हुई अविराम धड-धड़ाती हुई चल रही थी। क्या वह उत्तेजना मात्र थी - नशा था ? क्या वह सब गलत था ? नहीं नहीं वह उसकी आत्मामे शत-शत ज्वालाओंगे जाज्वल्यमान है, उसकी चिन्तन-धारा परमे लिखा दिखायी दे रहा है । उस स्वप्नसे वह इतना बेचैन हो गया, कि वह मानो अब बैठ न सकेगा, रुक न सकेगा । सृष्टिका केन्द्र जैसे उसे खींच रहा है । उसे किसी दुर्भाय काले पर्वतसे जाकर टकरा जाना होगा । इस स्वप्न के उस गर्भदेशको वह पाना चाहता है - जहाँ उसने यह आकार पाया है। और भीतरके सन्नाटेकी सारी ध्वनियोके साथ वह अपने अन्दर डूबता चला और जहाँ आकर वे ध्वनियाँ विसर्जित हुई वहाँ उसने देखा - सूखे हुए खूनका दाग उस नग्न छातीपर, - और चुनौती भरी आँखें, कि बचकर जाओगे कहाँ ? नीलमणि अप्रकट रूपसे मन ही मन चीख उठा - ओह, असह्य, घृणित नारकीय । और तब मानों जमनाके उन सृष्टि की आग पिये हुए काले दानोंवाले ओठोंने हिलकर जवाब दिया - "हूँ - नैतिकता और पवित्रता ! नैतिकता और पवित्रता के उज्ज्वल कपडे पहने हुए जीवनको प्यार करनेवाले फूलकुमार, नग्न जीवनको तुम सहन भी नहीं कर सकते ? ये कथित नैतिकता और चरित्र, सबलोंके द्वारा अबलोसे बलात् ली गयी पाशविकताके एकान्ताधिकारकी मॉनोपली है ! मानों अज्ञानियो और निर्बलोंपर निरकुश रूपसे जुल्म करने, और बिना दस्तन्दाजीके अपना स्वार्थ-साधन करनेके लिए ही, धर्मके नामपर
लगा, वह बहुत देरसे अकर्मण्य हो रहा है। एक दृढ कर्तृत्वके सकल्पसे उठ कर अकारण उसने कुछ काम करने का उपक्रम किया । उसे याद आया कि वह मिल लायब्रेरी का इनर्चाज भी तो है । पास की मेज पर पडे इडस्ट्रियल-टेक्सटाइल मेग्जीनोको झाडा, उलट-पलट कर देखा - बहुत सी फेक्टियो, मशीनों और कल-पुजाकी तस्वीरें है । वही मशीनों का जिक्र ? मनुष्यताके सर्वनाशका वृहद वैज्ञानिक आयोजन, यह मशीन ! नहीं-नहीं, असह्य है उसे, जगतके वक्ष पर हो रही यह दानव-लीला । और तब उसका कर्तृत्व एक ऐसी रुद्र सहारेच्छासे भर उठा मानो वह, मॉ पृथ्वीकी छाती की दूध की धारा खूनमे बदलती इस मशीन राक्षसीको चीरकर दो टुकडे कर देगा। । और फिर बहा देगा वही माँ की छातीकी उदार, नग्न, अबाध, निसर्ग दूधकी धारा, जिसे उसके बालक बिना किसी बाधाके, सामान रुपते और विश्वस्त भावसे पियेंगे, पोषण पायेगे। मॉके दूधपर सिक्के-मुहर ट्रेडमार्क दो सील चपडी ? उसपर अधिकार, मॉनोपली, कन्ट्राक्ट दो वह डिब्बों में बन्द करके बाजार मे बेचा जायगा ? जिसके पास पैसे हों वह खरीदे - और उसकी दूसरी सन्ताने मुखो मरेगी उफ, वह एक मिनिट भी यह सब बर्दाश्त न कर सकेगा। और इस विज्ञान तथा मशीनोंने मानव जाति के प्राणोको कितना सस्ता बना दिया, जीवनका मूल्य कितना घटा दिया । हमारे मस्तकपर आकाशमें, हमारे प्राणोंकी पल-पलकी माँस-हवामे मौत मण्डरा रही है। मनुष्यता सॉस नहीं ले सकेगी। उसे बेखटके जीने न दिया जायगा। नदियों और तालाबोंके पानीसे सावधान ! उसमे जहर घुला हुआ है। मॉ पृथ्वीकी पर विश्वास आश्वासनसे सोनेवाले मानव-शिशुओ, क्यो बेख़बर सोये हो ! माँकी छातीमें मौत छिपी बैठी है, तुम बोम्बार्ड कर दिये जाओगे । आकाश और पृथ्वी, सृष्टिके चिर-कालके रक्षक, प्रलयके पहले ही उसके भक्षक हो गये । उनके बीच जीवन पल-पल अरक्षित है, खतरेमें है । एक मनुष्य दूसरेकी जानका गाहक बना हुआ है। हम अविश्वास, सन्देह और खतरेकी जिन्दगी जीते हैं। सत्ता, पूँजी, युद्ध-हिंसा-प्रतिहिंसा, खून, श्राग, हिसाके ज्वालामुखियोंके विस्फोट' कौन है इन सबके लिए जिम्मेवार ? कौन ले आया है यह महानाश ? और तब उसकी आत्मामेसे मानों प्रतिध्वनि हुई - "मशीन, विज्ञान, मानवमस्तिष्क • हाँ, मानव मस्तिष्क । जड़ और चेतनके सघर्ष में चेतन पर जड़की विजय !" हौं, वह विध्वस चाहता है - विध्वंस, फिर नवनिर्माण । और उसी आवेगमे उसने दो-तीन मशीनोकी तस्वीरोंवाले मेग्जीन चीर डाले और फेक दिये सामने टेबलपर । बाहर एक मोटर बर्स्ट हो गयी, भड़ाम् ! नीलमणिका खून एकदम गिरकर ठडा हो गया । बर्फीली ठडी ऑखोसे उसने देखा - उसके सामने मशीन राक्षसीके दो टुकडे नहीं, कागजकी मेग्जीनोके टुकड़े फटे पडे थे, और वे मशीनें माँ पृथ्वीकी छातीकी दूधकी वाराओको खून में बदलती हुई अविराम धड-धड़ाती हुई चल रही थी। क्या वह उत्तेजना मात्र थी - नशा था ? क्या वह सब गलत था ? नहीं नहीं वह उसकी आत्मामे शत-शत ज्वालाओंगे जाज्वल्यमान है, उसकी चिन्तन-धारा परमे लिखा दिखायी दे रहा है । उस स्वप्नसे वह इतना बेचैन हो गया, कि वह मानो अब बैठ न सकेगा, रुक न सकेगा । सृष्टिका केन्द्र जैसे उसे खींच रहा है । उसे किसी दुर्भाय काले पर्वतसे जाकर टकरा जाना होगा । इस स्वप्न के उस गर्भदेशको वह पाना चाहता है - जहाँ उसने यह आकार पाया है। और भीतरके सन्नाटेकी सारी ध्वनियोके साथ वह अपने अन्दर डूबता चला और जहाँ आकर वे ध्वनियाँ विसर्जित हुई वहाँ उसने देखा - सूखे हुए खूनका दाग उस नग्न छातीपर, - और चुनौती भरी आँखें, कि बचकर जाओगे कहाँ ? नीलमणि अप्रकट रूपसे मन ही मन चीख उठा - ओह, असह्य, घृणित नारकीय । और तब मानों जमनाके उन सृष्टि की आग पिये हुए काले दानोंवाले ओठोंने हिलकर जवाब दिया - "हूँ - नैतिकता और पवित्रता ! नैतिकता और पवित्रता के उज्ज्वल कपडे पहने हुए जीवनको प्यार करनेवाले फूलकुमार, नग्न जीवनको तुम सहन भी नहीं कर सकते ? ये कथित नैतिकता और चरित्र, सबलोंके द्वारा अबलोसे बलात् ली गयी पाशविकताके एकान्ताधिकारकी मॉनोपली है ! मानों अज्ञानियो और निर्बलोंपर निरकुश रूपसे जुल्म करने, और बिना दस्तन्दाजीके अपना स्वार्थ-साधन करनेके लिए ही, धर्मके नामपर
अयोध्या, 1 नवंबर (एजेंसी) उत्तर प्रदेश की सरकार 'दीपोत्सव' पर यहां 12 लाख दीये जलाएगी, जिसमें से 9 लाख दीये सरयू नदी के तट पर जलाए जाएंगे। पिछले वर्ष 'दीपोत्सव' पर 6 लाख से अधिक दीये जलाए गए थे, जो एक विश्व रिकॉर्ड था। सरकार के बयान के अनुसार, सोमवार से शुरू हो कर पांच दिनों तक चलने वाले समारोह के दौरान रामलीलाओं का मंचन, थ्री डी होलोग्राफिक प्रदर्शन, लेजर शो और आतिशबाजी भी होगी। इस बयान में बताया गया है कि नदी के तट पर नौ लाख दीये जलाए जाएंगे और शेष तीन लाख दीये शहर के अन्य हिस्सों में तीन नवंबर को शाम छह से साढ़े छह बजे के बीच जलाए जाएंगे। रामलीला का मंचन करने के लिए श्रीलंका से एक सांस्कृतिक समूह को बुलाया गया है, जबकि एक नवंबर से पांच नवंबर तक कई साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन होगा। नेपाल के जनकपुर से आई टीम सोमवार को रामलीला का मंचन करेगी, जबकि जम्मू-कश्मीर, गुजरात, असम, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल से आई टीमें पांच दिनों तक चलने वाले समारोह के दौरान इसका मंचन करेंगी। जिलाधिकारी नितीश कुमार ने कहा कि तीन नवंबर को 'दीपोत्सव' के दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदी बेन पटेल अयोध्या के राम कथा पार्क में 'पुष्पक विमान' (हेलीकॉप्टर) से भगवान राम, लक्ष्मण और सीता का सांकेतिक रूप से स्वागत करेंगे। मुख्यमंत्री 'सरयू आरती' भी करेंगे। दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने 2 फरवरी, 1881 को लाहौर (अब पाकिस्तान) से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है। 'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में 15 अगस्त, 1978 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास (प्रेसीडेंट), न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
अयोध्या, एक नवंबर उत्तर प्रदेश की सरकार 'दीपोत्सव' पर यहां बारह लाख दीये जलाएगी, जिसमें से नौ लाख दीये सरयू नदी के तट पर जलाए जाएंगे। पिछले वर्ष 'दीपोत्सव' पर छः लाख से अधिक दीये जलाए गए थे, जो एक विश्व रिकॉर्ड था। सरकार के बयान के अनुसार, सोमवार से शुरू हो कर पांच दिनों तक चलने वाले समारोह के दौरान रामलीलाओं का मंचन, थ्री डी होलोग्राफिक प्रदर्शन, लेजर शो और आतिशबाजी भी होगी। इस बयान में बताया गया है कि नदी के तट पर नौ लाख दीये जलाए जाएंगे और शेष तीन लाख दीये शहर के अन्य हिस्सों में तीन नवंबर को शाम छह से साढ़े छह बजे के बीच जलाए जाएंगे। रामलीला का मंचन करने के लिए श्रीलंका से एक सांस्कृतिक समूह को बुलाया गया है, जबकि एक नवंबर से पांच नवंबर तक कई साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन होगा। नेपाल के जनकपुर से आई टीम सोमवार को रामलीला का मंचन करेगी, जबकि जम्मू-कश्मीर, गुजरात, असम, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल से आई टीमें पांच दिनों तक चलने वाले समारोह के दौरान इसका मंचन करेंगी। जिलाधिकारी नितीश कुमार ने कहा कि तीन नवंबर को 'दीपोत्सव' के दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदी बेन पटेल अयोध्या के राम कथा पार्क में 'पुष्पक विमान' से भगवान राम, लक्ष्मण और सीता का सांकेतिक रूप से स्वागत करेंगे। मुख्यमंत्री 'सरयू आरती' भी करेंगे। दूरदृष्टा, जनचेतना के अग्रदूत, वैचारिक स्वतंत्रता के पुरोधा एवं समाजसेवी सरदार दयालसिंह मजीठिया ने दो फरवरी, एक हज़ार आठ सौ इक्यासी को लाहौर से 'द ट्रिब्यून' का प्रकाशन शुरू किया। विभाजन के बाद लाहौर से शिमला व अंबाला होते हुए यह समाचार पत्र अब चंडीगढ़ से प्रकाशित हो रहा है। 'द ट्रिब्यून' के सहयोगी प्रकाशनों के रूप में पंद्रह अगस्त, एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दैनिक ट्रिब्यून व पंजाबी ट्रिब्यून की शुरुआत हुई। द ट्रिब्यून प्रकाशन समूह का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। हमें दूरदर्शी ट्रस्टियों डॉ. तुलसीदास , न्यायमूर्ति डी. के. महाजन, लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. ज्ञानी, एच. आर. भाटिया, डॉ. एम. एस. रंधावा तथा तत्कालीन प्रधान संपादक प्रेम भाटिया का भावपूर्ण स्मरण करना जरूरी लगता है, जिनके प्रयासों से दैनिक ट्रिब्यून अस्तित्व में आया।
समाहरणालय स्थित सभा कक्ष में उपायुक्त श्री अबु इमरान की अध्यक्षता में समाज कल्याण की योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, सावित्री बाई फुले किशोरी समृद्धि योजना,आंगनबाड़ी केन्द्र, ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस, पोषण ट्रैकर डैसबोर्ड रिपोर्ट, जीरो से 05 वर्ष तक के बच्चों के आधार पंजीकरण समेत अन्य की क्रमवार समीक्षा की। समीक्षा के क्रम में पाया गया कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में हंटरगज, इटखोरी व टंडवा परियोजना का लक्ष्य के विरुद्ध उपलब्धि शून्य है। इस संदर्भ उपायुक्त ने सख्त निर्देश दिया कि अविलंब लक्ष्य को पूर्ण करें। अन्यथा विभागीय कार्रवाई हेतु विभाग को प्रेषित की जाएगी। उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत जिले को 271 कन्याओं को लाभांवित करने का लक्ष्य मिला है। तीन महीने के बाद भी अब तक 22 कन्याओं को ही लाभांवित किया गया है। इनमें चतरा ग्रामीण परियोजना में 11 ,प्रतापपुर परियोजना में 7 और सिमरिया परियोजना में 4 शामिल है। इन परियोजनाओं को क्रमशः 48, 39 और 48 कन्या को लाभांवित करने का लक्ष्य था। जबकि हंटरगंज, इटखोरी और टंडवा परियोजना को क्रमशः 46, 48 और 42 कन्या को लाभांवित करने का लक्ष्य मिला था। इसके विरुद्ध इन परियोजनाओं की उपलब्धि शून्य रही। बैठक में जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सूरज मूनी कुमारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी सिमरिया रीना साहू, बाल संरक्षण पदाधिकारी अरुण प्रसाद, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष धनंजय तिवारी, प्रखंड के सभी आहार विशेषज्ञ समेत अन्य संबंधित उपस्थित थे। बैठक में मामला सामने आया कि कान्हाचट्टी प्रखंड के बकचुंबा क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्र में एक सेविका आंगनवाड़ी केंद्र को अपना मकान समझ कर निवास कर रही है। उपायुक्त ने नाराजगी जताई और संबंधित महिला सुपरवाइजर आशा पासवान को सख्त निर्देश दिया कि जल्द से जल्द सेविका को वहां से खाली कराएं और सुचारू रूप से आंगनवाड़ी केंद्र का संचालन कराएं। उन्होंने कहा जिले में किराए पर चल रहे आंगनवाड़ी केंद्र का किराया भुगतान माह अगस्त से किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जाएगा। साथ ही कहा कि बने आंगनवाड़ी केंद्र भवन में किराए पर चल रहे आंगनवाड़ी केंद्र को शिफ्ट करें। 14 अगस्त को लाभुकों के खाते में जाएगी राशि डीसी ने सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी बाल परियोजना पदाधिकारी को लक्ष्य के विरुद्ध निर्धारित तिथि 26 जुलाई तक अंतिम रूप से लाभुकों को लाभान्वित करने हेतु भौतिक सत्यापन करते हुए आवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही जिला समाज कल्याण पदाधिकारी को निर्देश दिया गया कि प्राप्त आवेदनों का स्वीकृति कराते हुए सभी लाभुकों के खाते में 14 अगस्त को एक साथ भुगतान करें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
समाहरणालय स्थित सभा कक्ष में उपायुक्त श्री अबु इमरान की अध्यक्षता में समाज कल्याण की योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, सावित्री बाई फुले किशोरी समृद्धि योजना,आंगनबाड़ी केन्द्र, ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस, पोषण ट्रैकर डैसबोर्ड रिपोर्ट, जीरो से पाँच वर्ष तक के बच्चों के आधार पंजीकरण समेत अन्य की क्रमवार समीक्षा की। समीक्षा के क्रम में पाया गया कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में हंटरगज, इटखोरी व टंडवा परियोजना का लक्ष्य के विरुद्ध उपलब्धि शून्य है। इस संदर्भ उपायुक्त ने सख्त निर्देश दिया कि अविलंब लक्ष्य को पूर्ण करें। अन्यथा विभागीय कार्रवाई हेतु विभाग को प्रेषित की जाएगी। उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष दो हज़ार तेईस-चौबीस में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत जिले को दो सौ इकहत्तर कन्याओं को लाभांवित करने का लक्ष्य मिला है। तीन महीने के बाद भी अब तक बाईस कन्याओं को ही लाभांवित किया गया है। इनमें चतरा ग्रामीण परियोजना में ग्यारह ,प्रतापपुर परियोजना में सात और सिमरिया परियोजना में चार शामिल है। इन परियोजनाओं को क्रमशः अड़तालीस, उनतालीस और अड़तालीस कन्या को लाभांवित करने का लक्ष्य था। जबकि हंटरगंज, इटखोरी और टंडवा परियोजना को क्रमशः छियालीस, अड़तालीस और बयालीस कन्या को लाभांवित करने का लक्ष्य मिला था। इसके विरुद्ध इन परियोजनाओं की उपलब्धि शून्य रही। बैठक में जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सूरज मूनी कुमारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी सिमरिया रीना साहू, बाल संरक्षण पदाधिकारी अरुण प्रसाद, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष धनंजय तिवारी, प्रखंड के सभी आहार विशेषज्ञ समेत अन्य संबंधित उपस्थित थे। बैठक में मामला सामने आया कि कान्हाचट्टी प्रखंड के बकचुंबा क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्र में एक सेविका आंगनवाड़ी केंद्र को अपना मकान समझ कर निवास कर रही है। उपायुक्त ने नाराजगी जताई और संबंधित महिला सुपरवाइजर आशा पासवान को सख्त निर्देश दिया कि जल्द से जल्द सेविका को वहां से खाली कराएं और सुचारू रूप से आंगनवाड़ी केंद्र का संचालन कराएं। उन्होंने कहा जिले में किराए पर चल रहे आंगनवाड़ी केंद्र का किराया भुगतान माह अगस्त से किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जाएगा। साथ ही कहा कि बने आंगनवाड़ी केंद्र भवन में किराए पर चल रहे आंगनवाड़ी केंद्र को शिफ्ट करें। चौदह अगस्त को लाभुकों के खाते में जाएगी राशि डीसी ने सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी बाल परियोजना पदाधिकारी को लक्ष्य के विरुद्ध निर्धारित तिथि छब्बीस जुलाई तक अंतिम रूप से लाभुकों को लाभान्वित करने हेतु भौतिक सत्यापन करते हुए आवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही जिला समाज कल्याण पदाधिकारी को निर्देश दिया गया कि प्राप्त आवेदनों का स्वीकृति कराते हुए सभी लाभुकों के खाते में चौदह अगस्त को एक साथ भुगतान करें। This website follows the DNPA Code of Ethics.
Asia Cup 2022: भारतीय क्रिकेट बोर्ड के चयनकर्ताओं के द्वारा 8 अगस्त की रात को आगामी एशिया कप 2022 को लेकर 15 सदस्यीय दल का ऐलान किया गया है। रोहित शर्मा की अगुवाई में टीम इंडिया इस साल एशिया के महादंगल में उतरने वाली है। घोषित दस्ते में कई चौंकाने वाले नामों को भी जगह दी गई है। वहीं कुछ खिलाड़ी ऐसे भी रहे हैं जिनको चयन के दायरे में नहीं देख कर फैंस ने अपनी नाराजगी सामाजिक माध्यम से साझा की है। जहां पर भारतीय स्पिन गेंदबाज कुलदीप यादव (Kuldeep Yadav) को लेकर खूब चर्चा हो रही है। कुलदीप यादव (Kuldeep Yadav) मौजूदा समय में भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी स्पिन गेंदबाजों की गिनती में आते हैं। साल 2022 में उन्होंने अपनी खोई हुई लय प्राप्त करते हुए दमदार वापसी की है। इसका सबसे पहला मुजायरा उन्होंने आईपीएल 2022 से दे दिया था। इसके बाद उन्हें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 सीरीज में चुना गया था, लेकिन चोटिल होने के चलते वे सीरीज का हिस्सा नहीं बन पाए थे। वेस्टइंडीज के खिलाफ हाल ही में सम्पन्न हुई टी20 सीरीज के आखिरी मैच में कुलदीप यादव को खेलने का मौका मिला था। जहां इस गेंदबाज ने एक बार फिर अपनी फिरकी के जाल में कैरिबियाई बल्लेबाजों को फंसाते हुए महज 4 ओवर में 12 रन देकर 3 विकेट झटक लिए थे। ऐसे में उनके इस शानदार प्रदर्शन के बाद भी कुलदीप को Asia Cup 2022 के 15 सदस्यीय दल में नहीं देखकर भारतीय फैंस ने बीसीसीआई पर अपना गुस्सा निकालना शुरू कर दिया है। KULDEEP YADAV, SANJU SAMSON, MD SHAMI , PRASIDDH KRISHNA, Kuldeep Yadav could have been in place of R Ashwin. Recently he gave such a good performance against West Indies . And Deepak Chahar could have been in place of Avesh Khan.
Asia Cup दो हज़ार बाईस: भारतीय क्रिकेट बोर्ड के चयनकर्ताओं के द्वारा आठ अगस्त की रात को आगामी एशिया कप दो हज़ार बाईस को लेकर पंद्रह सदस्यीय दल का ऐलान किया गया है। रोहित शर्मा की अगुवाई में टीम इंडिया इस साल एशिया के महादंगल में उतरने वाली है। घोषित दस्ते में कई चौंकाने वाले नामों को भी जगह दी गई है। वहीं कुछ खिलाड़ी ऐसे भी रहे हैं जिनको चयन के दायरे में नहीं देख कर फैंस ने अपनी नाराजगी सामाजिक माध्यम से साझा की है। जहां पर भारतीय स्पिन गेंदबाज कुलदीप यादव को लेकर खूब चर्चा हो रही है। कुलदीप यादव मौजूदा समय में भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी स्पिन गेंदबाजों की गिनती में आते हैं। साल दो हज़ार बाईस में उन्होंने अपनी खोई हुई लय प्राप्त करते हुए दमदार वापसी की है। इसका सबसे पहला मुजायरा उन्होंने आईपीएल दो हज़ार बाईस से दे दिया था। इसके बाद उन्हें दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टीबीस सीरीज में चुना गया था, लेकिन चोटिल होने के चलते वे सीरीज का हिस्सा नहीं बन पाए थे। वेस्टइंडीज के खिलाफ हाल ही में सम्पन्न हुई टीबीस सीरीज के आखिरी मैच में कुलदीप यादव को खेलने का मौका मिला था। जहां इस गेंदबाज ने एक बार फिर अपनी फिरकी के जाल में कैरिबियाई बल्लेबाजों को फंसाते हुए महज चार ओवर में बारह रन देकर तीन विकेट झटक लिए थे। ऐसे में उनके इस शानदार प्रदर्शन के बाद भी कुलदीप को Asia Cup दो हज़ार बाईस के पंद्रह सदस्यीय दल में नहीं देखकर भारतीय फैंस ने बीसीसीआई पर अपना गुस्सा निकालना शुरू कर दिया है। KULDEEP YADAV, SANJU SAMSON, MD SHAMI , PRASIDDH KRISHNA, Kuldeep Yadav could have been in place of R Ashwin. Recently he gave such a good performance against West Indies . And Deepak Chahar could have been in place of Avesh Khan.
अभिषेक मनु सिंघवी के ट्वीट पर एक चैनल से बात करते हुए योग गुरु रामदेव ने कहा कि ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान. रामदेव ने कहा कि अल्लाह, भगवान, खुदा सब एक ही है, ऐसे में ॐ बोलने में दिक्कत क्या है. लेकिन, हम किसी को खुदा बोलने से मना नहीं कर रहे हैं. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 जून यानी सातवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर कहा कि आज जब पूरा विश्व कोरोना महामारी का मुकाबला कर रहा है तो योग उम्मीद की एक किरण बना हुआ है. पीएम ने कहा कि 2 वर्ष से दुनियाभर के देशों में और भारत में भले ही बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित न हुआ हो लेकिन योग दिवस के प्रति उत्साह जरा भी कम नहीं हुआ है.
अभिषेक मनु सिंघवी के ट्वीट पर एक चैनल से बात करते हुए योग गुरु रामदेव ने कहा कि ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान. रामदेव ने कहा कि अल्लाह, भगवान, खुदा सब एक ही है, ऐसे में ॐ बोलने में दिक्कत क्या है. लेकिन, हम किसी को खुदा बोलने से मना नहीं कर रहे हैं. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इक्कीस जून यानी सातवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर कहा कि आज जब पूरा विश्व कोरोना महामारी का मुकाबला कर रहा है तो योग उम्मीद की एक किरण बना हुआ है. पीएम ने कहा कि दो वर्ष से दुनियाभर के देशों में और भारत में भले ही बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित न हुआ हो लेकिन योग दिवस के प्रति उत्साह जरा भी कम नहीं हुआ है.
एयर इंडिया की नीलामी में बोली लगाने की समयसीमा को दूसरी बार बढ़ाया गया है। देश के बैंकों ने तकनीकी तौर पर 50 बड़े विलफुल डिफाल्टर्स के 68,607 करोड़ रुपए के कर्ज की बड़ी राशि को को बट्टा खाते में डाल दिया है। कोका-कोला इंडिया का उद्देश्य दुनिया को तरोताजा करना और एक सकारात्मक बदलाव लाना है। जिंदल ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि अर्थव्यवस्था मंदी में न फंसे इसके लिए हमें बहुत अधिक उपाय करने होंगे। अर्थव्यवस्था में सुस्ती भी इस देश के लिए एक चुनौती है। एजेंसी ने सरकारी समर्थन में जबर्दस्त वृद्धि करने की सलाह दी है। शापूरजी पालोनजी ग्रुप का मुख्यालय मुंबई में है और इसका कारोबार 70 से अधिक देशों में फैला हुआ है इसका वैश्विक टर्नओवर 5 अरब डॉलर से अधिक का है। आरबीआई ने कहा कि वह सतर्क है और कोविड-19 के आर्थिक प्रभाव को कम करने और वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
एयर इंडिया की नीलामी में बोली लगाने की समयसीमा को दूसरी बार बढ़ाया गया है। देश के बैंकों ने तकनीकी तौर पर पचास बड़े विलफुल डिफाल्टर्स के अड़सठ,छः सौ सात करोड़ रुपए के कर्ज की बड़ी राशि को को बट्टा खाते में डाल दिया है। कोका-कोला इंडिया का उद्देश्य दुनिया को तरोताजा करना और एक सकारात्मक बदलाव लाना है। जिंदल ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि अर्थव्यवस्था मंदी में न फंसे इसके लिए हमें बहुत अधिक उपाय करने होंगे। अर्थव्यवस्था में सुस्ती भी इस देश के लिए एक चुनौती है। एजेंसी ने सरकारी समर्थन में जबर्दस्त वृद्धि करने की सलाह दी है। शापूरजी पालोनजी ग्रुप का मुख्यालय मुंबई में है और इसका कारोबार सत्तर से अधिक देशों में फैला हुआ है इसका वैश्विक टर्नओवर पाँच अरब डॉलर से अधिक का है। आरबीआई ने कहा कि वह सतर्क है और कोविड-उन्नीस के आर्थिक प्रभाव को कम करने और वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
खजाने में तीन करोड़ से अधिक रकम थी और कम्पनी को मालगुजारी देने के बाद भी उनको १४-१५ लाख की वचत थी । कुछ लेखको का कहना है कि ओसान सिंह को कैद से छुडाकर और उन्हें चेत सिंह से जागीर दिलवाना हेस्टिग्म का अन्याय था। लेकिन समर्थक पक्ष का कहना कि हेन्टिग्न को इस तरह का हुक्म जारी करने का पूरा अविकार था क्योंकि पट्टा कबूलियत में यह नाफ्फ़-साफ लिन्ना था कि चेत सिंह अपनी रियाया पर जुल्म न करेंगे। अगर हेस्टिम की निगाहों में उन्होने औमान सिंह पर जुल्म किया तो इसका प्रतिकार करने का उन्हें पूर्ण . अधिकार था । हेन्टिग्स के समर्थक यह मानते है कि जब त्रेत मिह ने उनके पाँव पर अपनी पगडी रत्र दो तो उसे ठुकराना अनुचित था तथा राजा को उनके मकान में कंद करने की बात थी। लेकिन इन बातो का भी वे इस बुनियाद पर समर्थन करते हैं कि चेतसिंह ने कम्पनी के साथ बेईमानी बरती थी और अगर इन बेईमानी के फलस्वरूप हेस्टिग्म ने उनके साथ कडाई का व्यवहार किया तो कोई अनुचित नहीं था । हेस्टिग्म के समयंक यह मानते हैं कि चेत सिंह वाले मामले में सव दोप चेत सिंह और ओमान सिंह का था, हेस्टिंग्न इनमें निर्दोष थे। इस घटना को जड वे ओमान सिंह का मुगिदाबाद जाना मानते हैं । औसान सिंह के मुशिदाबाद जाते ही चेतसिंह को यह डर पैदा हुआ कि बौसान सिंह, जिन पर वारेन हेस्टिग्म की कृपा थो, कहीं राजा की उनसे चुगली न करें । उस समय गवर्नर जेनरल की काउंसिल में भी वैमनस्य चल रहा था और इस बात को नभावना थी कि अगर हेस्टिग्म अपने पद से हटे तो क्लेवरिंग गवर्नरजनरल होंगे। इस भविष्य को नोचकर ही चेत सिंह ने शभूनाथ को बनारनं ने क्लेवरिंग के पान भेजा । लेकिन जैसे ही हेन्टिग्स को ओसान सिंह ने यह खबर मिली वे राजा पर निहायत नाराज हुए और उसी दिन से हेस्टिंग्स का चेत सिंह के प्रति अविश्वान चढने लगा । इन अविश्वास को तूल देने वालो की कमी न थी । हेस्टिग्न और मार्कहम के नाय ओमान सिंह और दोनों मौलवी थे और चेत सिंह के माथ बहुत से बदमाश और खुशामदी । चेत सिंह और हेन्टिग्स का पारस्परिक अविश्वास वढता ही गया और उसी के फलस्वरूप राजा को बनारस छोड़ कर भाग जाना पड़ा । अगर ध्यानपूर्वक देन्वा जाय तो चेत सिंह वाले मामले में हेस्टिग्स की मरामर जवर्दन्ती यी । इनमें शक नहीं कि चेत सिंह को गद्दी पर बैठाने का बहुत कुछ श्रेय हेन्टिग्स को था पर इनके माने तो यह नहीं हो सकते कि गद्दी पर बैठाने के बाद क़बूलियत पट्टे को तान्न पर रखकर हेन्टिग्न चेत सिंह के साथ मनमाना व्यवहार करें । चेतसिंह कोई बहादुर आदमी नहीं थे । वात वान पर वे गवर्नर जनरल को खुशामद करने को तैयार ये फिर भी हेन्टिग्स ने उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया । यहाँ तक कि रेजिडेंट के मुंह लगे भी उनकी बेइज्जती करने में नहीं चूकते थे। लेकिन १८वी सदी में बुजदिल होना पाप था और उसी का दह चेत सिंह को भोगना पडा । वनारस की
खजाने में तीन करोड़ से अधिक रकम थी और कम्पनी को मालगुजारी देने के बाद भी उनको चौदह-पंद्रह लाख की वचत थी । कुछ लेखको का कहना है कि ओसान सिंह को कैद से छुडाकर और उन्हें चेत सिंह से जागीर दिलवाना हेस्टिग्म का अन्याय था। लेकिन समर्थक पक्ष का कहना कि हेन्टिग्न को इस तरह का हुक्म जारी करने का पूरा अविकार था क्योंकि पट्टा कबूलियत में यह नाफ्फ़-साफ लिन्ना था कि चेत सिंह अपनी रियाया पर जुल्म न करेंगे। अगर हेस्टिम की निगाहों में उन्होने औमान सिंह पर जुल्म किया तो इसका प्रतिकार करने का उन्हें पूर्ण . अधिकार था । हेन्टिग्स के समर्थक यह मानते है कि जब त्रेत मिह ने उनके पाँव पर अपनी पगडी रत्र दो तो उसे ठुकराना अनुचित था तथा राजा को उनके मकान में कंद करने की बात थी। लेकिन इन बातो का भी वे इस बुनियाद पर समर्थन करते हैं कि चेतसिंह ने कम्पनी के साथ बेईमानी बरती थी और अगर इन बेईमानी के फलस्वरूप हेस्टिग्म ने उनके साथ कडाई का व्यवहार किया तो कोई अनुचित नहीं था । हेस्टिग्म के समयंक यह मानते हैं कि चेत सिंह वाले मामले में सव दोप चेत सिंह और ओमान सिंह का था, हेस्टिंग्न इनमें निर्दोष थे। इस घटना को जड वे ओमान सिंह का मुगिदाबाद जाना मानते हैं । औसान सिंह के मुशिदाबाद जाते ही चेतसिंह को यह डर पैदा हुआ कि बौसान सिंह, जिन पर वारेन हेस्टिग्म की कृपा थो, कहीं राजा की उनसे चुगली न करें । उस समय गवर्नर जेनरल की काउंसिल में भी वैमनस्य चल रहा था और इस बात को नभावना थी कि अगर हेस्टिग्म अपने पद से हटे तो क्लेवरिंग गवर्नरजनरल होंगे। इस भविष्य को नोचकर ही चेत सिंह ने शभूनाथ को बनारनं ने क्लेवरिंग के पान भेजा । लेकिन जैसे ही हेन्टिग्स को ओसान सिंह ने यह खबर मिली वे राजा पर निहायत नाराज हुए और उसी दिन से हेस्टिंग्स का चेत सिंह के प्रति अविश्वान चढने लगा । इन अविश्वास को तूल देने वालो की कमी न थी । हेस्टिग्न और मार्कहम के नाय ओमान सिंह और दोनों मौलवी थे और चेत सिंह के माथ बहुत से बदमाश और खुशामदी । चेत सिंह और हेन्टिग्स का पारस्परिक अविश्वास वढता ही गया और उसी के फलस्वरूप राजा को बनारस छोड़ कर भाग जाना पड़ा । अगर ध्यानपूर्वक देन्वा जाय तो चेत सिंह वाले मामले में हेस्टिग्स की मरामर जवर्दन्ती यी । इनमें शक नहीं कि चेत सिंह को गद्दी पर बैठाने का बहुत कुछ श्रेय हेन्टिग्स को था पर इनके माने तो यह नहीं हो सकते कि गद्दी पर बैठाने के बाद क़बूलियत पट्टे को तान्न पर रखकर हेन्टिग्न चेत सिंह के साथ मनमाना व्यवहार करें । चेतसिंह कोई बहादुर आदमी नहीं थे । वात वान पर वे गवर्नर जनरल को खुशामद करने को तैयार ये फिर भी हेन्टिग्स ने उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया । यहाँ तक कि रेजिडेंट के मुंह लगे भी उनकी बेइज्जती करने में नहीं चूकते थे। लेकिन अट्ठारहवी सदी में बुजदिल होना पाप था और उसी का दह चेत सिंह को भोगना पडा । वनारस की
यह पूरी तरीके से मोबाइल से ब्लूटूथ के माध्यम से कनेक्ट होती है। इस लिपस्टिक गन की खास बात यह है कि लिपस्टिक के अंदर ही एक गन है। इसमें एक ही बटन है। जिससे फायर भी होगा और 112 को कॉल भी चला जाएगा। वाराणसी (उत्तर प्रदेश) । युवा वैज्ञानिक श्याम चौरसिया ने महिलाओं ओर युवतियों के लिए लिपस्टिक गन तैयार की है, जो युवतियों और महिलाओं की खूबसूरती बढ़ाने के साथ ही छेड़खानी करने वाले मनचलों को सबक भी सिखाएगी। इतना ही नहीं इससे 112 नंबर को कॉल भी कर सकते हैं। लिपस्टिक गन चार्जेबल डिवाइस है। यह पूरी तरीके से मोबाइल से ब्लूटूथ के माध्यम से कनेक्ट होती है। इस लिपस्टिक गन की खास बात यह है कि लिपस्टिक के अंदर ही एक गन है। इसमें एक ही बटन है। जिससे फायर भी होगा और 112 को कॉल भी चला जाएगा। श्याम चौरसिया ने बताया कि इस लिपस्टिक को बनाने में करीब एक महीने लगा। इसे बनाने में करीब से 600 रुपए करीब लागत आई है। इस लिपस्टिक से आवाज भी निकलेगी। दावा है कि इसकी आवाज काफी दूर आवाज सुनी जा सकती है। इस लिपस्टिक गन को बनाने वाले श्याम चौरसिया का कहना है कि उन्होंने वूमेन सेफ्टी के लिए लिपस्टिक गन तैयार की है। अगर लड़कियां किसी प्रॉब्लम में हैं तो उन्हें सिर्फ एक बटन दबाना है और 112 को समय रहते कॉल जाएगा। पुलिस तत्काल उन्हें सुरक्षा दे सकेगी।
यह पूरी तरीके से मोबाइल से ब्लूटूथ के माध्यम से कनेक्ट होती है। इस लिपस्टिक गन की खास बात यह है कि लिपस्टिक के अंदर ही एक गन है। इसमें एक ही बटन है। जिससे फायर भी होगा और एक सौ बारह को कॉल भी चला जाएगा। वाराणसी । युवा वैज्ञानिक श्याम चौरसिया ने महिलाओं ओर युवतियों के लिए लिपस्टिक गन तैयार की है, जो युवतियों और महिलाओं की खूबसूरती बढ़ाने के साथ ही छेड़खानी करने वाले मनचलों को सबक भी सिखाएगी। इतना ही नहीं इससे एक सौ बारह नंबर को कॉल भी कर सकते हैं। लिपस्टिक गन चार्जेबल डिवाइस है। यह पूरी तरीके से मोबाइल से ब्लूटूथ के माध्यम से कनेक्ट होती है। इस लिपस्टिक गन की खास बात यह है कि लिपस्टिक के अंदर ही एक गन है। इसमें एक ही बटन है। जिससे फायर भी होगा और एक सौ बारह को कॉल भी चला जाएगा। श्याम चौरसिया ने बताया कि इस लिपस्टिक को बनाने में करीब एक महीने लगा। इसे बनाने में करीब से छः सौ रुपयापए करीब लागत आई है। इस लिपस्टिक से आवाज भी निकलेगी। दावा है कि इसकी आवाज काफी दूर आवाज सुनी जा सकती है। इस लिपस्टिक गन को बनाने वाले श्याम चौरसिया का कहना है कि उन्होंने वूमेन सेफ्टी के लिए लिपस्टिक गन तैयार की है। अगर लड़कियां किसी प्रॉब्लम में हैं तो उन्हें सिर्फ एक बटन दबाना है और एक सौ बारह को समय रहते कॉल जाएगा। पुलिस तत्काल उन्हें सुरक्षा दे सकेगी।
के खींवसरा गोत्रीय थे। बारह वर्ष तक तो उन्हें दीक्षा अंगीकार करने की इजाजत ही नहीं मिली। मगर उनके देदीप्यमान एवं प्रभावशाली रूप की महत्ता उनके दिव्य गुणों के कारण थी । वह महान गुरणवान् थे । एक बार श्री देवीलालजी महाराज दृष्टि जमाकर उन्हें देखने लगे तो पूज्य श्री ने कहा - मुझे क्या देख रहे हो ? श्री देवीलालजी म० बोले- मैं यह देख रहा हूँ कि सुधर्मा स्वामी की कैसी चमक-दमक थी ? गच्छ का स्वामी भी हो और शोभनीक भी हो तो उसका दूसरों पर अपूर्व प्रभाव पड़ता है। उसे देख कर और उसकी वाणी सुन कर मिथ्यात्वी भी सम्यग्दृष्टि बन जाते हैं । अनाथी मुनि वन में तपस्या कर रहे थे । अचानक राजा श्रेणिक की दृष्टि उन पर पड़ गई । मुनि के शरीर से अद्भुत दीप्ति निकल रही थी। उनका आकार तथा रूप बड़ा ही मनोहर था। वर्णन आता है कि राजा श्रेणिक स्वयं अत्यन्त सुन्दर रूप का धनी था। मगर जब श्रेणिक ने अनाथी मुनि को देखा तो वह भी उस असाधारण रूप राशि को देख कर विस्मित रह गया ! सहसा उसके मुख निकल पड़ाः होवो अहो रूपं, अहो अज्जरस सोमया । हो खंती महो मुत्ती, भोगे असंगया ॥ अर्थात् आर्य का वर्ण अद्भुत है; रूप अद्भुत है, सौम्य भाष अद्भुत है । आर्य की जमा, निस्पृहता और अनासक्ति धन्य है ।
के खींवसरा गोत्रीय थे। बारह वर्ष तक तो उन्हें दीक्षा अंगीकार करने की इजाजत ही नहीं मिली। मगर उनके देदीप्यमान एवं प्रभावशाली रूप की महत्ता उनके दिव्य गुणों के कारण थी । वह महान गुरणवान् थे । एक बार श्री देवीलालजी महाराज दृष्टि जमाकर उन्हें देखने लगे तो पूज्य श्री ने कहा - मुझे क्या देख रहे हो ? श्री देवीलालजी मशून्य बोले- मैं यह देख रहा हूँ कि सुधर्मा स्वामी की कैसी चमक-दमक थी ? गच्छ का स्वामी भी हो और शोभनीक भी हो तो उसका दूसरों पर अपूर्व प्रभाव पड़ता है। उसे देख कर और उसकी वाणी सुन कर मिथ्यात्वी भी सम्यग्दृष्टि बन जाते हैं । अनाथी मुनि वन में तपस्या कर रहे थे । अचानक राजा श्रेणिक की दृष्टि उन पर पड़ गई । मुनि के शरीर से अद्भुत दीप्ति निकल रही थी। उनका आकार तथा रूप बड़ा ही मनोहर था। वर्णन आता है कि राजा श्रेणिक स्वयं अत्यन्त सुन्दर रूप का धनी था। मगर जब श्रेणिक ने अनाथी मुनि को देखा तो वह भी उस असाधारण रूप राशि को देख कर विस्मित रह गया ! सहसा उसके मुख निकल पड़ाः होवो अहो रूपं, अहो अज्जरस सोमया । हो खंती महो मुत्ती, भोगे असंगया ॥ अर्थात् आर्य का वर्ण अद्भुत है; रूप अद्भुत है, सौम्य भाष अद्भुत है । आर्य की जमा, निस्पृहता और अनासक्ति धन्य है ।
(current) एआईएफएफ की वेबसाइट हुई हैक, कुलभूषण जाधव के बारे में लिखा 'होगी फांसी' ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन वेबसाइट किसी हैकर ने हैक कर ली। इसके बाद उस हैकर ने वेबसाइट पर लिखा कि कुलभूषण जाधव को फांसी दी जाएगी। Desh Ki Bahas : हिजाब के हिसाब में और कितना हंगामा? Desh Ki Bahas : हिजाब विवाद या कट्टर जिहाद? Desh Ki Bahas : 'कश्मीर के सच' से सेक्युलर खेमा परेशान?
एआईएफएफ की वेबसाइट हुई हैक, कुलभूषण जाधव के बारे में लिखा 'होगी फांसी' ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन वेबसाइट किसी हैकर ने हैक कर ली। इसके बाद उस हैकर ने वेबसाइट पर लिखा कि कुलभूषण जाधव को फांसी दी जाएगी। Desh Ki Bahas : हिजाब के हिसाब में और कितना हंगामा? Desh Ki Bahas : हिजाब विवाद या कट्टर जिहाद? Desh Ki Bahas : 'कश्मीर के सच' से सेक्युलर खेमा परेशान?
महंगाई पर काबू पाने के लिए आरबीआई ने अपनी प्रमुख ब्याज दर में मई में 0. 40 प्रतिशत और जून में 0. 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की। 8 साल में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) के उच्च स्तर पर पहुंच जाने के बाद अप्रैल 2022 में थोक महंगाई (Wholesale Inflation) ने भी कई सालों के रिकॉर्ड को धराशाई कर दिया। थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति लगातार दूसरे माह बढ़कर फरवरी में 4. 17 प्रतिशत पर पहुंच गई। खाने-पीने और ईंधन, बिजली के दाम बढ़ने से मुद्रास्फीति बढ़ी है।
महंगाई पर काबू पाने के लिए आरबीआई ने अपनी प्रमुख ब्याज दर में मई में शून्य. चालीस प्रतिशत और जून में शून्य. पचास प्रतिशत की बढ़ोतरी की। आठ साल में खुदरा महंगाई के उच्च स्तर पर पहुंच जाने के बाद अप्रैल दो हज़ार बाईस में थोक महंगाई ने भी कई सालों के रिकॉर्ड को धराशाई कर दिया। थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति लगातार दूसरे माह बढ़कर फरवरी में चार. सत्रह प्रतिशत पर पहुंच गई। खाने-पीने और ईंधन, बिजली के दाम बढ़ने से मुद्रास्फीति बढ़ी है।
बिहार में नगर निकाय चुनाव की मतगणना है। आरा नगर निगम, गड़हनी नगर पंचायत और कोईलवर नगर पंचायत के लिए भी काउंटिंग है। आरा शहर के मेयर और उपमहापौर का भी फैसला होना है। लोगों में सबसे ज्यादा इंट्रेस्ट इस बात को लेकर है कि मेयर और उपमेयर का चुनाव कौन जीतता है?
बिहार में नगर निकाय चुनाव की मतगणना है। आरा नगर निगम, गड़हनी नगर पंचायत और कोईलवर नगर पंचायत के लिए भी काउंटिंग है। आरा शहर के मेयर और उपमहापौर का भी फैसला होना है। लोगों में सबसे ज्यादा इंट्रेस्ट इस बात को लेकर है कि मेयर और उपमेयर का चुनाव कौन जीतता है?
लंबे समय से प्रेम प्रसंग चलने क बाद भी जब लड़के के परिवार वालों ने शादी के लिए मना कर दिया तो गुस्साए प्रेमी जोड़े ने घर छोड़ दिया. उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में घर से फरार हुए प्रेमी ने थाने के गेट पर पहुंचकर माला डालकर शादी रचा ली. सेहरामऊ इलाके के गांव की रहने वाली युवती को भगवंतापुर गांव के युवक से प्यार हो गया. बताया जा रहा है कि युवक रिश्ते में लड़की के जीजा का भाई था जो भगवंतापुर गांव में रहता था. जीजा के भाई से युवती का लम्बे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था और जब घरवालों को इसकी जानकारी हुई तो पहले तो दोनों पक्षों के परिजन शादी के लिए तैयार हो गए. लेकिन अचानक ही दो दिन बाद युवक के परिजनों ने शादी से मना कर दिया. युवक का युवती के साथ लंबे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था लेकिन युवक के परिवार वालों ने जब शादी के लिए मना कर दिया तो गुस्साए प्रेमी जोड़े ने घर छोड़ दिया और दोनो रफूचक्कर हो गए उधर परिजनों के समझाने के बाद प्रेमी जोड़े घर लौट तो आये पर घर लौटते ही प्रेमिका थाने जा धमकी और शादी के लिए दरोगा से अड़ गई. जिसके बाद दोनों प्रेमी जोड़ो ने थाने के गेट पर ही शादी रचा ली. दोनों प्रेमी जोड़े जब थाने के गेट पर एक दूसरे को माला डालकर शादी रचा रहे थे उसी वक्त थाने के रोड से निकल रहे राहगीर भी दोनो को देखकर रुक गए और देखते ही देखते राहगीरों की भारी भीड़ लग गई. थाने के आसपास आने जाने वालों के लिए यह अजूबे ढ़ंग की शादी थी. थाने के पास से गुजरने वाले लोगों ने शादी को देखा और खूब विडियो बनाए. फिलहाल थाने के गेट पर शादी का करने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. थाने के गेट के बाहर हुई शादी के गवाह आने जाने वाले राहगीर तो जरूर बने पर पुलिस को कानों कान कुछ पता नही चला. पुलिस के मुताबिक प्रेमी युगल ने थाने के बाहर कब शादी कर ली इसकी जानकारी पुलिस को नही है. वहीं शादी के बाद युवक और युवती के परिजन थाने आये और आपसी सहमति बनाया.
लंबे समय से प्रेम प्रसंग चलने क बाद भी जब लड़के के परिवार वालों ने शादी के लिए मना कर दिया तो गुस्साए प्रेमी जोड़े ने घर छोड़ दिया. उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में घर से फरार हुए प्रेमी ने थाने के गेट पर पहुंचकर माला डालकर शादी रचा ली. सेहरामऊ इलाके के गांव की रहने वाली युवती को भगवंतापुर गांव के युवक से प्यार हो गया. बताया जा रहा है कि युवक रिश्ते में लड़की के जीजा का भाई था जो भगवंतापुर गांव में रहता था. जीजा के भाई से युवती का लम्बे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था और जब घरवालों को इसकी जानकारी हुई तो पहले तो दोनों पक्षों के परिजन शादी के लिए तैयार हो गए. लेकिन अचानक ही दो दिन बाद युवक के परिजनों ने शादी से मना कर दिया. युवक का युवती के साथ लंबे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था लेकिन युवक के परिवार वालों ने जब शादी के लिए मना कर दिया तो गुस्साए प्रेमी जोड़े ने घर छोड़ दिया और दोनो रफूचक्कर हो गए उधर परिजनों के समझाने के बाद प्रेमी जोड़े घर लौट तो आये पर घर लौटते ही प्रेमिका थाने जा धमकी और शादी के लिए दरोगा से अड़ गई. जिसके बाद दोनों प्रेमी जोड़ो ने थाने के गेट पर ही शादी रचा ली. दोनों प्रेमी जोड़े जब थाने के गेट पर एक दूसरे को माला डालकर शादी रचा रहे थे उसी वक्त थाने के रोड से निकल रहे राहगीर भी दोनो को देखकर रुक गए और देखते ही देखते राहगीरों की भारी भीड़ लग गई. थाने के आसपास आने जाने वालों के लिए यह अजूबे ढ़ंग की शादी थी. थाने के पास से गुजरने वाले लोगों ने शादी को देखा और खूब विडियो बनाए. फिलहाल थाने के गेट पर शादी का करने का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. थाने के गेट के बाहर हुई शादी के गवाह आने जाने वाले राहगीर तो जरूर बने पर पुलिस को कानों कान कुछ पता नही चला. पुलिस के मुताबिक प्रेमी युगल ने थाने के बाहर कब शादी कर ली इसकी जानकारी पुलिस को नही है. वहीं शादी के बाद युवक और युवती के परिजन थाने आये और आपसी सहमति बनाया.
लखनऊ(Uttar Pradesh ). कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए पूरा देश इस समय लॉकडाउन पर है। उत्तर प्रदेश में भी लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग के लिए जागरूक किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की बैठकें भी सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखते हुए की जा रही है। वहीं आम लोग भी कोरोना से चल रही इस जंग में पूरी सतर्कता बरतते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रख रहे हैं। लॉकडाउन में वैसे भी लोग बाहर नहीं निकल रहे हैं लेकिन जरूरी सामानों की खरीददारी के समय लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रख रहे हैं।
लखनऊ. कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए पूरा देश इस समय लॉकडाउन पर है। उत्तर प्रदेश में भी लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग के लिए जागरूक किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की बैठकें भी सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखते हुए की जा रही है। वहीं आम लोग भी कोरोना से चल रही इस जंग में पूरी सतर्कता बरतते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रख रहे हैं। लॉकडाउन में वैसे भी लोग बाहर नहीं निकल रहे हैं लेकिन जरूरी सामानों की खरीददारी के समय लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रख रहे हैं।
राजस्थान विधानसभा चुनाव में 101 सीट से कांग्रेस ने अपनी शानदार जीत दर्ज की हैं। इस जीत के बाद अब मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर चुनौती सामने आ गयी हैं। राज्य में दो कद्दावर नेता अशोक गहलोत और सचिन पायलट मुख्यमंत्री बनने की रेस में हैं। आपको बता दें, दोनों ही नेता के समर्थक अपने चहेते नेता को सीएम की कुर्सी पर बैठे देखने चाहते हैं। एक समर्थक ने सचिन पायलट के लिए खून से एक चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की अपील की है। कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत ने कहा कि 'आज शाम को तय हो जाएगा कि राजस्थान का मुख्यमंत्री कौन बनेगा। ' उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पर्यवेक्षक अविनाश पांडे और केसी वेणुगोपाल जयपुर आ चुके हैं और लगातार विधायकों से मिल रहे हैं।
राजस्थान विधानसभा चुनाव में एक सौ एक सीट से कांग्रेस ने अपनी शानदार जीत दर्ज की हैं। इस जीत के बाद अब मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर चुनौती सामने आ गयी हैं। राज्य में दो कद्दावर नेता अशोक गहलोत और सचिन पायलट मुख्यमंत्री बनने की रेस में हैं। आपको बता दें, दोनों ही नेता के समर्थक अपने चहेते नेता को सीएम की कुर्सी पर बैठे देखने चाहते हैं। एक समर्थक ने सचिन पायलट के लिए खून से एक चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की अपील की है। कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत ने कहा कि 'आज शाम को तय हो जाएगा कि राजस्थान का मुख्यमंत्री कौन बनेगा। ' उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पर्यवेक्षक अविनाश पांडे और केसी वेणुगोपाल जयपुर आ चुके हैं और लगातार विधायकों से मिल रहे हैं।
मुंबई, 25 अप्रैल (हि. स. )। मुंबई इंडियंस (Mumbai Indians) के खिलाफ मिली 36 रनों की जीत के बाद, लखनऊ सुपर जायंट्स (Lucknow Super Giants) के कोच एंडी बिकेल (Coach Andy Bickell) ने कप्तान केएल राहुल (KL Rahul) की जमकर तारीफ (Praise) की है। राहुल ने मुंबई के खिलाफ रविवार को यहां वानखेड़े स्टेडियम में नाबाद 103 रनों की पारी खेली। मैच के बाद राहुल ने कहा, "केएल शानदार थे। उन्होंने बेहतरीन बल्लेबाजी की व फ्रंट फुट से अच्छा खेला और गेंद पर अच्छी तरह से प्रहार किया। उन्होंने मैदान के हर तरफ शॉट खेला। " राहुल के वन-मैन शो ने उनकी टीम को सीजन की पांचवीं जीत और अंक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंचा दिया। केएल राहुल की 103 रनों की पारी और कुणाल पांड्या की तीन विकेट की बदौलत लखनऊ सुपर जायंट्स ने मुंबई इंडियंस को 36 रनों से हराया। यह रोहित शर्मा की अगुवाई में मुंबई की सीजन की लगातार आठवीं हार थी।
मुंबई, पच्चीस अप्रैल । मुंबई इंडियंस के खिलाफ मिली छत्तीस रनों की जीत के बाद, लखनऊ सुपर जायंट्स के कोच एंडी बिकेल ने कप्तान केएल राहुल की जमकर तारीफ की है। राहुल ने मुंबई के खिलाफ रविवार को यहां वानखेड़े स्टेडियम में नाबाद एक सौ तीन रनों की पारी खेली। मैच के बाद राहुल ने कहा, "केएल शानदार थे। उन्होंने बेहतरीन बल्लेबाजी की व फ्रंट फुट से अच्छा खेला और गेंद पर अच्छी तरह से प्रहार किया। उन्होंने मैदान के हर तरफ शॉट खेला। " राहुल के वन-मैन शो ने उनकी टीम को सीजन की पांचवीं जीत और अंक तालिका में चौथे स्थान पर पहुंचा दिया। केएल राहुल की एक सौ तीन रनों की पारी और कुणाल पांड्या की तीन विकेट की बदौलत लखनऊ सुपर जायंट्स ने मुंबई इंडियंस को छत्तीस रनों से हराया। यह रोहित शर्मा की अगुवाई में मुंबई की सीजन की लगातार आठवीं हार थी।
• ७८- सम्यक्त्वपरागम ( १ ) ऐसी स्थिति मे भगवान् विसी को जबदस्ती कैसे समझा सकते थे ? भगवान् अभग अहिंसा का परिपालन करेंत थ । 'किसी का दिल दुमाना भी हिसा है, इसीलिए भगवान किसी पर जोर-जबर्दस्ती नहीं की। उन्होंने समुच्चय रूपम सभी को कल्याणकारी उपदेश दिया है। जिन्होंने भगवात् वा उपदेश माना उन्होंने अपना क्ल्याण-साधन कर लिया । जिन्होने ऐसा नहीं किया, 'वे अपने कल्याण से वंचित रह गये । कई एक चीजें श्रेष्ठ तो होतो हैं, परन्तु दूसरो को कष्ट न पहुँचाने के विचार से बलात् नही दी जा सकती। भग वान् की यह वाणो धन्याणकारिणी होने पर भी किसी पो जबदस्ती नही समझाई जा सकती अतएव भगवान् ने समु च्चय रूप में हो उपदेश दिया है । सुधर्मास्वामी ने जम्बूस्वामी से कहा- 'मैंने भगवान् महावीर में इस प्रकार सुना है । किन्तु इस पर प्रश्न यह उपस्थित होता है कि भगवान् महावीर कौन-से ? इसका समाधान करने के लिए 'श्रमण विशेषण लगाया, मगर भ्रमण भी अनेक प्रकार के होते है अतएव अन्य का व्यवच्छेद करने के लिए सुधर्मास्वामी ने 'कामवेण' विशेषण लगाया है। अर्थात् काश्यपगोत्राले घमण भगवान् महावीर से मैंने सुना है । भगवान् के पूवजो में कोई कव्यप नामक व्यक्ति प्रधान । हुआ होगा और सभवत इसी कारण उन्हें काश्यप गोत्रीय कहा गया है । सुघर्मास्वामी इस प्रकार सम्यक्त्वपराक्रम नामक अध्ययन के प्रस्पर श्रमण भगवान महावीर का परिचय दने के बाद इस अध्ययन का माहात्मय बतलाते हुए आगे कहते हैं - 'इह खलु सम्मत्तपरिषकमे नाम अध्ययन का आरम्भ-७६० भगवया महावीरेण कासवेण पवेइय, ज सम्म सद्दहित्ता, पत्तइत्ता, रोयइत्ता, फासित्ता, तोरित्ता, कित्तइत्ता, सोहइत्ता, श्राराहित्ता आणा अणुपालइत्ता बहवें जीवा सिज्झति बुज्झन्ति, सुचचन्ति, परिनिव्वायन्ति, सव्वदुक्खाणमन्त करेन्ति ।' हे जम्बू काश्यपगोनीय श्रमण भगवान् महावीर ने 'सम्यक्त्वपराक्रम' नामक जो अध्ययन प्ररूपण किया है, वह. इतना महत्वपूर्ण है कि इस पर सम्यक् श्रद्धा करके, प्रतोति करो, रुचि करके, इसका स्पर्श करके, पार करके कीर्ति करके, सशुद्धि करके, आराधना करके और आज्ञापूर्वक अनुपालन करके अनेक जीव सिद्ध बुद्ध और मुक्त होकर, निर्वाण प्राप्त करते हैं और सब दुखो का अन्त करते हैं । सुधर्मास्वामी ने इस प्रकार कहकर सिद्ध, बुद्ध और मुक्त होने को महामार्ग इस सूत्रपाठ मे प्रदर्शित किया है । इस सूत्रपाठ म जगन् के जीवो को धम का बोध देने ' की जो शैली स्वीकार की गई है वह कितनी सरल, अथ - ' युक्त और प्रभावशालिनी है। इसका ठीक म्हम्य वही समझ सकता है जो सूनपारगामी हो । ऊपरी दृष्टि से देखने वाले को इस सूनशैली में पुनरुक्ति दिखाई देती है, पर इस पुत, रुक्ति मे क्या उद्देश्य छिपा हुआ है और पुनरुक्त प्रतीत होने वाले शब्दों में कितनी सार्थकता एव अथगभीरता है, इस विषय का गहरा विचार किया जाये तो मन की शका का समाधान हो जायेगा, अनेक अपूर्व बाते जानने को मिलेंगी। और सूनरचना-शैली पर अधिक आदरभाव उत्पन्न होगा। मगर आज सुनरचना के सम्बन्ध मे गहरे उतर कर नही वरन् ऊपरी दृष्टि से ही विचार किया जाता है । अगर
• अठहत्तर- सम्यक्त्वपरागम ऐसी स्थिति मे भगवान् विसी को जबदस्ती कैसे समझा सकते थे ? भगवान् अभग अहिंसा का परिपालन करेंत थ । 'किसी का दिल दुमाना भी हिसा है, इसीलिए भगवान किसी पर जोर-जबर्दस्ती नहीं की। उन्होंने समुच्चय रूपम सभी को कल्याणकारी उपदेश दिया है। जिन्होंने भगवात् वा उपदेश माना उन्होंने अपना क्ल्याण-साधन कर लिया । जिन्होने ऐसा नहीं किया, 'वे अपने कल्याण से वंचित रह गये । कई एक चीजें श्रेष्ठ तो होतो हैं, परन्तु दूसरो को कष्ट न पहुँचाने के विचार से बलात् नही दी जा सकती। भग वान् की यह वाणो धन्याणकारिणी होने पर भी किसी पो जबदस्ती नही समझाई जा सकती अतएव भगवान् ने समु च्चय रूप में हो उपदेश दिया है । सुधर्मास्वामी ने जम्बूस्वामी से कहा- 'मैंने भगवान् महावीर में इस प्रकार सुना है । किन्तु इस पर प्रश्न यह उपस्थित होता है कि भगवान् महावीर कौन-से ? इसका समाधान करने के लिए 'श्रमण विशेषण लगाया, मगर भ्रमण भी अनेक प्रकार के होते है अतएव अन्य का व्यवच्छेद करने के लिए सुधर्मास्वामी ने 'कामवेण' विशेषण लगाया है। अर्थात् काश्यपगोत्राले घमण भगवान् महावीर से मैंने सुना है । भगवान् के पूवजो में कोई कव्यप नामक व्यक्ति प्रधान । हुआ होगा और सभवत इसी कारण उन्हें काश्यप गोत्रीय कहा गया है । सुघर्मास्वामी इस प्रकार सम्यक्त्वपराक्रम नामक अध्ययन के प्रस्पर श्रमण भगवान महावीर का परिचय दने के बाद इस अध्ययन का माहात्मय बतलाते हुए आगे कहते हैं - 'इह खलु सम्मत्तपरिषकमे नाम अध्ययन का आरम्भ-सात सौ साठ भगवया महावीरेण कासवेण पवेइय, ज सम्म सद्दहित्ता, पत्तइत्ता, रोयइत्ता, फासित्ता, तोरित्ता, कित्तइत्ता, सोहइत्ता, श्राराहित्ता आणा अणुपालइत्ता बहवें जीवा सिज्झति बुज्झन्ति, सुचचन्ति, परिनिव्वायन्ति, सव्वदुक्खाणमन्त करेन्ति ।' हे जम्बू काश्यपगोनीय श्रमण भगवान् महावीर ने 'सम्यक्त्वपराक्रम' नामक जो अध्ययन प्ररूपण किया है, वह. इतना महत्वपूर्ण है कि इस पर सम्यक् श्रद्धा करके, प्रतोति करो, रुचि करके, इसका स्पर्श करके, पार करके कीर्ति करके, सशुद्धि करके, आराधना करके और आज्ञापूर्वक अनुपालन करके अनेक जीव सिद्ध बुद्ध और मुक्त होकर, निर्वाण प्राप्त करते हैं और सब दुखो का अन्त करते हैं । सुधर्मास्वामी ने इस प्रकार कहकर सिद्ध, बुद्ध और मुक्त होने को महामार्ग इस सूत्रपाठ मे प्रदर्शित किया है । इस सूत्रपाठ म जगन् के जीवो को धम का बोध देने ' की जो शैली स्वीकार की गई है वह कितनी सरल, अथ - ' युक्त और प्रभावशालिनी है। इसका ठीक म्हम्य वही समझ सकता है जो सूनपारगामी हो । ऊपरी दृष्टि से देखने वाले को इस सूनशैली में पुनरुक्ति दिखाई देती है, पर इस पुत, रुक्ति मे क्या उद्देश्य छिपा हुआ है और पुनरुक्त प्रतीत होने वाले शब्दों में कितनी सार्थकता एव अथगभीरता है, इस विषय का गहरा विचार किया जाये तो मन की शका का समाधान हो जायेगा, अनेक अपूर्व बाते जानने को मिलेंगी। और सूनरचना-शैली पर अधिक आदरभाव उत्पन्न होगा। मगर आज सुनरचना के सम्बन्ध मे गहरे उतर कर नही वरन् ऊपरी दृष्टि से ही विचार किया जाता है । अगर
अगर आप घर में ज्यादती की शिकार हो रही हैं तो घरेलू हिंसा कानून के तहत संरक्षण पा सकती हैं, जानिए कैसे। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)के ताजा आंकड़ों के अनुसार लॉकडाउन में घरेलू हिंसा के मामलों में 2. 5 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इससे इनकार किया है, लेकिन आंकड़ें बताते हैं कि महिलाएं ज्यादती की शिकार हो रही हैं। मार्च 25 से लेकर 31 मई के बीच राष्ट्रीय महिला आयोग को घरेलू हिंसा की 1477 शिकायतें व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर ( (917217735372 ) पर मिलीं। यह हेल्पलाइन ऐसी ही महिलाओं को मदद मुहैया कराने के लिए स्थापित की गई थी, जो ईमेल या पोस्ट के जरिए शिकायत नहीं कर सकतीं। लॉकडाउन के समय में जितनी शिकायतें दर्ज की गईं, वे पिछले साल के मार्च से मई तक के महीने की तुलना में 1. 5 फीसदी ज्यादा हैं, इसी अवधि में पिछले साल 607 शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में पिछले कुछ समय में घरेलू हिंसा के मामलों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है। घरेलू हिंसा में सिर्फ महिलाएं ही नहीं, बल्कि बच्चे और बुजुर्ग भी ज्यादती के शिकार होते हैं। अपराजिता चंद्रा बताती हैं, लॉकडाउन के दौरान सेलेब्रिटीज ने एक नई पहल की थी और घरेलू हिंसा के खिलाफ अभियान छेड़ा था। इस अभियान में माधुरी दीक्षित, करण जौहर, विद्या बालन, अनुष्का शर्मा और विराट कोहली जैसे सेलेब्रिटीज भी शामिल थे। इस सेलेब्स ने घरेलू हिंसा पर लॉकडाउन को लेकर एक वीडियो जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि अगर महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हो रही हैं तो वे आवाज उठाएं। 1. शारीरिक हिंसा-इसके तहत महिला के साथ मारपीट, जोर-जबरदस्ती या चोट पहुंचाने जैसी चीजें आती हैं। 2. यौन हिंसा-इसके तहत रेप और मैरिटल रेप दोनों ही आते हैं। मैरिटल रेप को समाज और कानून दोनों ही स्वीकार नहीं करते हैं, जबकि हर साल इस तरह के ढेरों मामले सामने आते हैं। 3. Verbal Abuse-इसे मेंटल हैरसमेंट या मानसिक शोषण भी कहा जाता है। इसमें गलत तरीके से बोलना, भावनात्मक रूप से चोट पहुंचाने जैसी चीजें शामिल हैं। इस तरह का शोषण सिर्फ पुरुष ही नहीं, बल्कि घर-परिवार के बड़े सदस्य भी करते हैं, इनमें बुजुर्ग महिलाएं भी शामिल हो सकती हैं। अक्सर इस तरह के मामलों में परिवार के कई सदस्य जैसे कि ननद, देवर, भाभी, सास, ससुर आदि अब्यूसर के साथ नामित होते हैं। परिवार के जो लोग इसका परोक्ष रूप से समर्थन करते हैं, वे भी इसके दोषी होते हैं। 4. Economic Abuse- अगर पति पत्नी को फाइनेंशियली सपोर्ट नहीं करता या उसके जरूरी खर्च के लिए उसे पैसे नहीं देता तो इस तरह के मामले Economic Abuse के तहत आते हैं। अगर घर के सामान को बिना पत्नी की सहमति के हटाया जा रहा है या उसे दैनिक जरूरतों के लिए राशन मुहैया नहीं हो रहा तो ये चीजें भी Economic Abuse के तहत आती हैं। साथ में रहते हुए अगर पति घर के खर्चों के लिए पैसे नहीं देता है तो यह चीज भी आर्थिक शोषण के तहत आती है। ज्यादातर मामलों में Economic Abuse को बड़ा मामला नहीं बनाया जाता, लेकिन यह एक गंभीर मसला है। इसे कानून भी गंभीरता से लेता है। अपराजिता चंद्रा बताती हैं, 'घरेलू हिंसा कानून महिलाओं के साथ-साथ 18 साल की उम्र तक के बच्चों को भी संरक्षण देता है। इस कानून के तहत सहायता पाने के लिए लोकल पुलिस स्टेशन जाने की जरूरत होती है। वहां घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया जा सकता है। पुलिस अफसर पहले मामले की पड़ताल करता है। अगर उसे लगता है कि इसका कानूनी मामला बनता है तो वह इसकी एफआईआर दर्ज करता है। पुलिस वाले पहले एफआईआर दर्ज नहीं करते हैं। पहले वे शिकायत दर्ज करते हैं। ज्यादातर मामलों में महिलाएं सिर्फ शिकायत दर्ज करा देती हैं, जिससे गंभीर मामलों में उचित कार्रवाई नहीं हो पाती। एफआईआर के बाद मामला अदालत में जाता है। इसके बाद अदालत इसका संज्ञान लेती है। बहुत से मामले में महिलाएं सीधे अदालत में जाकर संरक्षण की फरियाद करते हैं। अदालत ऐसे मामलों में संरक्षण दिए जाने के लिए कह सकती है या फिर पीड़ित को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दे सकती है। ' महिलाएं घरेलू हिंसा का मामला कहीं से भी दर्ज करा सकती हैं। अगर वे पति की ज्यादती की शिकार होने के बाद पिता के पास आकर रहने लगीं हैं तो वहां से भी मामला दर्ज करा सकती हैं। अगर महिलाएं आर्थिक रूप से पति पर आश्रित हैं तो वे अदालत में मेंटेनेंस दिए जाने के लिए भी निवेदन कर सकती हैं। इसके लिए अदालत अंतरिम आदेश में मेंटेनेंस दिए जाने का आदेश दे सकती है। आजकल ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट की तरफ से काउंसलर की नियुक्ति की जाती है। काउंसलर दोनों पक्षों की बात सुनता है और अगर मामला बातचीत से सुलझ सकता हो तो वह दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने का प्रयास करता है। कई बार मेंटेनेंस या दूसरे मामलों पर काउंसलर के स्तर पर ही मामले में सहमति बन जाती है और आगे की अदालती प्रक्रिया की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन अगर काउंसलर अपनी रिपोर्ट में कहता है कि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है तो कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। ज्यादातर मामलों में महिलाएं पुलिस ऑफिसर या मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होती हैं। एक्ट के तहत सर्विस प्रोवाइडर और प्रोटेक्शन ऑफिसर से भी मदद मांगी जा सकती है, लेकिन ज्यादातर इनकी उपलब्धता नहीं होती और ना ही इसके बारे में लोगों को जानकारी होती है। जिन मामलों में महिलाएं स्वयं जाकर शिकायत दर्ज नहीं करा सकतीं, वहां महिलाएं सर्विस प्रोवाइडर या प्रोटेक्शन ऑफिसर से मदद मांग सकती हैं। बहुत सी संस्थाएं मांग कर रही हैं कि इस तरह के लोगों को नियुक्त किया जाए, जो महिलाओं को मदद कर सकें। एक्ट के तहत घरेलू हिंसा के मामले में कार्रवाई 50 दिन में पूरी हो जानी चाहिए। लेकिन वास्तविक हालात में दोषी व्यक्ति को अदालत में लाते-लाते ही दो महीने लग जाते हैं। जब अदालत पीड़ित महिला का पक्ष सुन लेती है तो वह अब्यूजर को नोटिस इशु करती है और उसे कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए कहती है। कोर्ट दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद अपना फैसला सुनाती है। अदालत ऐसे मामलों में पीड़िता को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दे सकती है, अगर महिला ने मेंटेंनेंस के लिए निवेदन किया है तो उस बारे में फैसला लेती है। घरेलू हिंसा में दोष साबित होने पर अब्यूजर पर जुर्माना लगाया जा सकता है। बच्चों की कस्टडी किसके पास रहेगी, इस बारे में भी अदालत फैसला दे सकती है। इस कानून के तहत अब्यूजर को सीधे तौर पर जेल नहीं होती है, बल्कि अदालत अलग-अलग तरह के ऑर्डर पास कर पीड़िता को संरक्षण देता है। अगर अब्यूजर अदालत के आदेश का पालन नहीं करता तो उस स्थिति में उसे 1 साल की सजा हो सकती है। घरेलू हिंसा को तभी रोका जा सकता है, जब वुमन सेफ्टी को लेकर जागरूकता बढ़े और महिलाएं अपने साथ किसी तरह की हिंसा या मारपीट होने पर मदद पाने के लिए अपील करें। इसीलिए महिलाओं को मुश्किल से मुश्किल स्थितियों में भी सोच सकारात्मक बनाए रखनी चाहिए और बेहतर जीवन पाने के लिए अपने प्रयास जारी रखने चाहिए। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे जरूर शेयर करें। महिलाओं से जुड़े अन्य मुद्दों पर जानकारी पाने के लिए विजिट करती रहें हरजिंदगी। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
अगर आप घर में ज्यादती की शिकार हो रही हैं तो घरेलू हिंसा कानून के तहत संरक्षण पा सकती हैं, जानिए कैसे। राष्ट्रीय महिला आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार लॉकडाउन में घरेलू हिंसा के मामलों में दो. पाँच फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। हालांकि केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने इससे इनकार किया है, लेकिन आंकड़ें बताते हैं कि महिलाएं ज्यादती की शिकार हो रही हैं। मार्च पच्चीस से लेकर इकतीस मई के बीच राष्ट्रीय महिला आयोग को घरेलू हिंसा की एक हज़ार चार सौ सतहत्तर शिकायतें व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर पर मिलीं। यह हेल्पलाइन ऐसी ही महिलाओं को मदद मुहैया कराने के लिए स्थापित की गई थी, जो ईमेल या पोस्ट के जरिए शिकायत नहीं कर सकतीं। लॉकडाउन के समय में जितनी शिकायतें दर्ज की गईं, वे पिछले साल के मार्च से मई तक के महीने की तुलना में एक. पाँच फीसदी ज्यादा हैं, इसी अवधि में पिछले साल छः सौ सात शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में पिछले कुछ समय में घरेलू हिंसा के मामलों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है। घरेलू हिंसा में सिर्फ महिलाएं ही नहीं, बल्कि बच्चे और बुजुर्ग भी ज्यादती के शिकार होते हैं। अपराजिता चंद्रा बताती हैं, लॉकडाउन के दौरान सेलेब्रिटीज ने एक नई पहल की थी और घरेलू हिंसा के खिलाफ अभियान छेड़ा था। इस अभियान में माधुरी दीक्षित, करण जौहर, विद्या बालन, अनुष्का शर्मा और विराट कोहली जैसे सेलेब्रिटीज भी शामिल थे। इस सेलेब्स ने घरेलू हिंसा पर लॉकडाउन को लेकर एक वीडियो जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि अगर महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हो रही हैं तो वे आवाज उठाएं। एक. शारीरिक हिंसा-इसके तहत महिला के साथ मारपीट, जोर-जबरदस्ती या चोट पहुंचाने जैसी चीजें आती हैं। दो. यौन हिंसा-इसके तहत रेप और मैरिटल रेप दोनों ही आते हैं। मैरिटल रेप को समाज और कानून दोनों ही स्वीकार नहीं करते हैं, जबकि हर साल इस तरह के ढेरों मामले सामने आते हैं। तीन. Verbal Abuse-इसे मेंटल हैरसमेंट या मानसिक शोषण भी कहा जाता है। इसमें गलत तरीके से बोलना, भावनात्मक रूप से चोट पहुंचाने जैसी चीजें शामिल हैं। इस तरह का शोषण सिर्फ पुरुष ही नहीं, बल्कि घर-परिवार के बड़े सदस्य भी करते हैं, इनमें बुजुर्ग महिलाएं भी शामिल हो सकती हैं। अक्सर इस तरह के मामलों में परिवार के कई सदस्य जैसे कि ननद, देवर, भाभी, सास, ससुर आदि अब्यूसर के साथ नामित होते हैं। परिवार के जो लोग इसका परोक्ष रूप से समर्थन करते हैं, वे भी इसके दोषी होते हैं। चार. Economic Abuse- अगर पति पत्नी को फाइनेंशियली सपोर्ट नहीं करता या उसके जरूरी खर्च के लिए उसे पैसे नहीं देता तो इस तरह के मामले Economic Abuse के तहत आते हैं। अगर घर के सामान को बिना पत्नी की सहमति के हटाया जा रहा है या उसे दैनिक जरूरतों के लिए राशन मुहैया नहीं हो रहा तो ये चीजें भी Economic Abuse के तहत आती हैं। साथ में रहते हुए अगर पति घर के खर्चों के लिए पैसे नहीं देता है तो यह चीज भी आर्थिक शोषण के तहत आती है। ज्यादातर मामलों में Economic Abuse को बड़ा मामला नहीं बनाया जाता, लेकिन यह एक गंभीर मसला है। इसे कानून भी गंभीरता से लेता है। अपराजिता चंद्रा बताती हैं, 'घरेलू हिंसा कानून महिलाओं के साथ-साथ अट्ठारह साल की उम्र तक के बच्चों को भी संरक्षण देता है। इस कानून के तहत सहायता पाने के लिए लोकल पुलिस स्टेशन जाने की जरूरत होती है। वहां घरेलू हिंसा का मामला दर्ज कराया जा सकता है। पुलिस अफसर पहले मामले की पड़ताल करता है। अगर उसे लगता है कि इसका कानूनी मामला बनता है तो वह इसकी एफआईआर दर्ज करता है। पुलिस वाले पहले एफआईआर दर्ज नहीं करते हैं। पहले वे शिकायत दर्ज करते हैं। ज्यादातर मामलों में महिलाएं सिर्फ शिकायत दर्ज करा देती हैं, जिससे गंभीर मामलों में उचित कार्रवाई नहीं हो पाती। एफआईआर के बाद मामला अदालत में जाता है। इसके बाद अदालत इसका संज्ञान लेती है। बहुत से मामले में महिलाएं सीधे अदालत में जाकर संरक्षण की फरियाद करते हैं। अदालत ऐसे मामलों में संरक्षण दिए जाने के लिए कह सकती है या फिर पीड़ित को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दे सकती है। ' महिलाएं घरेलू हिंसा का मामला कहीं से भी दर्ज करा सकती हैं। अगर वे पति की ज्यादती की शिकार होने के बाद पिता के पास आकर रहने लगीं हैं तो वहां से भी मामला दर्ज करा सकती हैं। अगर महिलाएं आर्थिक रूप से पति पर आश्रित हैं तो वे अदालत में मेंटेनेंस दिए जाने के लिए भी निवेदन कर सकती हैं। इसके लिए अदालत अंतरिम आदेश में मेंटेनेंस दिए जाने का आदेश दे सकती है। आजकल ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट की तरफ से काउंसलर की नियुक्ति की जाती है। काउंसलर दोनों पक्षों की बात सुनता है और अगर मामला बातचीत से सुलझ सकता हो तो वह दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने का प्रयास करता है। कई बार मेंटेनेंस या दूसरे मामलों पर काउंसलर के स्तर पर ही मामले में सहमति बन जाती है और आगे की अदालती प्रक्रिया की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन अगर काउंसलर अपनी रिपोर्ट में कहता है कि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है तो कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। ज्यादातर मामलों में महिलाएं पुलिस ऑफिसर या मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होती हैं। एक्ट के तहत सर्विस प्रोवाइडर और प्रोटेक्शन ऑफिसर से भी मदद मांगी जा सकती है, लेकिन ज्यादातर इनकी उपलब्धता नहीं होती और ना ही इसके बारे में लोगों को जानकारी होती है। जिन मामलों में महिलाएं स्वयं जाकर शिकायत दर्ज नहीं करा सकतीं, वहां महिलाएं सर्विस प्रोवाइडर या प्रोटेक्शन ऑफिसर से मदद मांग सकती हैं। बहुत सी संस्थाएं मांग कर रही हैं कि इस तरह के लोगों को नियुक्त किया जाए, जो महिलाओं को मदद कर सकें। एक्ट के तहत घरेलू हिंसा के मामले में कार्रवाई पचास दिन में पूरी हो जानी चाहिए। लेकिन वास्तविक हालात में दोषी व्यक्ति को अदालत में लाते-लाते ही दो महीने लग जाते हैं। जब अदालत पीड़ित महिला का पक्ष सुन लेती है तो वह अब्यूजर को नोटिस इशु करती है और उसे कोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए कहती है। कोर्ट दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद अपना फैसला सुनाती है। अदालत ऐसे मामलों में पीड़िता को सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश दे सकती है, अगर महिला ने मेंटेंनेंस के लिए निवेदन किया है तो उस बारे में फैसला लेती है। घरेलू हिंसा में दोष साबित होने पर अब्यूजर पर जुर्माना लगाया जा सकता है। बच्चों की कस्टडी किसके पास रहेगी, इस बारे में भी अदालत फैसला दे सकती है। इस कानून के तहत अब्यूजर को सीधे तौर पर जेल नहीं होती है, बल्कि अदालत अलग-अलग तरह के ऑर्डर पास कर पीड़िता को संरक्षण देता है। अगर अब्यूजर अदालत के आदेश का पालन नहीं करता तो उस स्थिति में उसे एक साल की सजा हो सकती है। घरेलू हिंसा को तभी रोका जा सकता है, जब वुमन सेफ्टी को लेकर जागरूकता बढ़े और महिलाएं अपने साथ किसी तरह की हिंसा या मारपीट होने पर मदद पाने के लिए अपील करें। इसीलिए महिलाओं को मुश्किल से मुश्किल स्थितियों में भी सोच सकारात्मक बनाए रखनी चाहिए और बेहतर जीवन पाने के लिए अपने प्रयास जारी रखने चाहिए। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी तो इसे जरूर शेयर करें। महिलाओं से जुड़े अन्य मुद्दों पर जानकारी पाने के लिए विजिट करती रहें हरजिंदगी। आपकी स्किन और शरीर आपकी ही तरह अलग है। आप तक अपने आर्टिकल्स और सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से सही, सुरक्षित और विशेषज्ञ द्वारा वेरिफाइड जानकारी लाना हमारा प्रयास है, लेकिन फिर भी किसी भी होम रेमेडी, हैक या फिटनेस टिप को ट्राई करने से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें। किसी भी प्रतिक्रिया या शिकायत के लिए, compliant_gro@jagrannewmedia. com पर हमसे संपर्क करें।
Poco F1 में 6. 18 इंच का डिस्प्ले है, जो 2. 5डी कर्व्ड गोरिल्ला ग्लास प्रोटेक्शन के साथ आता है. शियोमी जल्द ही भारत में अपना नया फोन Poco F2 लॉन्च कर सकती है. पोको इंडिया के जनरल मैनेजर सी. मनमोहन ने सोमवार को ट्वीट कर ये जानकारी दी. मनमोहन ने अपने ट्वीट में कहा, 'पोको इंडिया भारतीय स्मार्टफोन बाजार में पोको का नया मॉडल लाने की तैयारी कर रहा है. लेकिन मेरे पास आप लोगों के लिए एक सरप्राइज़ है, क्या आप इसका अंदाजा लगा सकते हैं? ' But, that's not all. .
Poco Fएक में छः. अट्ठारह इंच का डिस्प्ले है, जो दो. पाँचडी कर्व्ड गोरिल्ला ग्लास प्रोटेक्शन के साथ आता है. शियोमी जल्द ही भारत में अपना नया फोन Poco Fदो लॉन्च कर सकती है. पोको इंडिया के जनरल मैनेजर सी. मनमोहन ने सोमवार को ट्वीट कर ये जानकारी दी. मनमोहन ने अपने ट्वीट में कहा, 'पोको इंडिया भारतीय स्मार्टफोन बाजार में पोको का नया मॉडल लाने की तैयारी कर रहा है. लेकिन मेरे पास आप लोगों के लिए एक सरप्राइज़ है, क्या आप इसका अंदाजा लगा सकते हैं? ' But, that's not all. .
फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन चिम्स एविएशन एकेडमी (सीएए) ने कैडेट पायलट प्रोग्राम के लिए देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के साथ एक समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो इस साल मार्च से शुरू होगा। शनिवार को जारी अपने बयान में झंकार एविएशन अकादमी ने उद्धृत किया, सीएए ने कैडेट पायलट कार्यक्रम के लिए इंडिगो के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और कार्यक्रम का पहला बैच मार्च से शुरू होगा। इन कैडेटों को मध्य प्रदेश के धना में सीएए के बेस पर इंडिगो द्वारा निर्धारित पेशेवर मानकों के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रदान किया गया प्रशिक्षण पूरी तरह से एकीकृत है, जहां कैडेट सीपीएल (वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस) और टाइप रेटिंग के लिए प्रशिक्षित करते हैं; उन्हें कॉकपिट तैयार कर रही है जब जूनियर पहले अधिकारियों के रूप में इंडिगो में शामिल किया। विज्ञप्ति में कहा गया है, 'हालांकि, लॉकडाउन से संबंधित विमानन उद्योग में अनिश्चितता के कारण पिछले साल इस कार्यक्रम पर रोक लगानी पड़ी थी। लॉकडाउन से पहले इंडिगो और चिम्स एविएशन एकेडमी ने संयुक्त रूप से एयरलाइन के कैडेट पायलट कार्यक्रम के तहत भविष्य के जूनियर फर्स्ट अधिकारियों के रूप में ' एबी-इनिटियो ' पायलटों को प्रशिक्षित करने का फैसला किया था। झंकार विमानन अकादमी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वाई एन शर्मा ने कहा कि अकादमी का चयन इंडिगो द्वारा एयरलाइन पायलट बनने के अपने कैरियर के उद्देश्य को पूरा करने के लिए इच्छुक कैडेटों के लिए इस पूर्ण घर में विकसित 'ट्रेन इन इंडिया' कैडेट पायलट कार्यक्रम शुरू करने के लिए किया गया है।
फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन चिम्स एविएशन एकेडमी ने कैडेट पायलट प्रोग्राम के लिए देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो इस साल मार्च से शुरू होगा। शनिवार को जारी अपने बयान में झंकार एविएशन अकादमी ने उद्धृत किया, सीएए ने कैडेट पायलट कार्यक्रम के लिए इंडिगो के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और कार्यक्रम का पहला बैच मार्च से शुरू होगा। इन कैडेटों को मध्य प्रदेश के धना में सीएए के बेस पर इंडिगो द्वारा निर्धारित पेशेवर मानकों के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रदान किया गया प्रशिक्षण पूरी तरह से एकीकृत है, जहां कैडेट सीपीएल और टाइप रेटिंग के लिए प्रशिक्षित करते हैं; उन्हें कॉकपिट तैयार कर रही है जब जूनियर पहले अधिकारियों के रूप में इंडिगो में शामिल किया। विज्ञप्ति में कहा गया है, 'हालांकि, लॉकडाउन से संबंधित विमानन उद्योग में अनिश्चितता के कारण पिछले साल इस कार्यक्रम पर रोक लगानी पड़ी थी। लॉकडाउन से पहले इंडिगो और चिम्स एविएशन एकेडमी ने संयुक्त रूप से एयरलाइन के कैडेट पायलट कार्यक्रम के तहत भविष्य के जूनियर फर्स्ट अधिकारियों के रूप में ' एबी-इनिटियो ' पायलटों को प्रशिक्षित करने का फैसला किया था। झंकार विमानन अकादमी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वाई एन शर्मा ने कहा कि अकादमी का चयन इंडिगो द्वारा एयरलाइन पायलट बनने के अपने कैरियर के उद्देश्य को पूरा करने के लिए इच्छुक कैडेटों के लिए इस पूर्ण घर में विकसित 'ट्रेन इन इंडिया' कैडेट पायलट कार्यक्रम शुरू करने के लिए किया गया है।
उसे अस्पताल में रहना होगा । उसके बाद स्विट्जरलैंड चली जायगी - या तो लेजिन मे या डावो किसी जगह । बहुत करके अगाथा भी उसके साथ जायगी, पर वहां रहेगी नहीं । डाक्टरों की राय उसे वहां चार या पांच महीने तक रखने की है । उसके बाद इस दुनिया का या हम लोगों का भी क्या होगा, कुछ कहा नहीं जा सकता ।" लेकिन युद्ध के कारण स्विट्ज़रलैंड मे चार या पांच महीने की यह अवधि बराबर बढ़ती गई । अब उसका आक्सफोर्ड लौटना ठीक नही था, क्योंकि इग्लैंड के नगरों पर जर्मन बमबारी बहुत तेज और उग्र हो गई थी । १९४१ के आरम्भ मे इन्दिरा ने घर लौटने का फैसला किया, क्योकि भारत का स्वतन्त्रता संग्राम फिर सक्रिय होने जा रहा था । वाइसराय ने भारतीय जनता से परामर्श करना उचित न समझा और न जनता को स्वतन्त्रता तथा लोकतत्र के अधि कार ही दिये और भारत की ओर से युद्ध की घोषणा कर दी, तो कांग्रेस ने इसके विरोध में व्यक्तिगत सत्याग्रह शुरू कर दिया । कांग्रेस कार्यसमिति ने वक्तव्य दिया कि गुलामी में रहते हुए भारत इग्लैंड के समर्थन मे लड़े जानेवाले युद्ध मे भाग नही ले सकता । गांधीजी ने दूसरे सत्याग्रही के रूप मे ( विनोबा भावे के बाद ) जवाहर को चुना । उन्हे, सरकार को यह सूचना देने के बाद कि वह एक सार्वजनिक सभा मे जनता को युद्ध - प्रयत्नो मे किसी भी तरह का सहयोग न देने के लिए कहेगे, ७ नवम्बर, १९४० को सत्याग्रह करना था । लेकिन सरकार ने हमेशा की तरह उन्हें इस बार भी पहले ही गिरफ्तार कर लिया । ३१ अक्तूबर को, जब वह गांधीजी से मिलकर
उसे अस्पताल में रहना होगा । उसके बाद स्विट्जरलैंड चली जायगी - या तो लेजिन मे या डावो किसी जगह । बहुत करके अगाथा भी उसके साथ जायगी, पर वहां रहेगी नहीं । डाक्टरों की राय उसे वहां चार या पांच महीने तक रखने की है । उसके बाद इस दुनिया का या हम लोगों का भी क्या होगा, कुछ कहा नहीं जा सकता ।" लेकिन युद्ध के कारण स्विट्ज़रलैंड मे चार या पांच महीने की यह अवधि बराबर बढ़ती गई । अब उसका आक्सफोर्ड लौटना ठीक नही था, क्योंकि इग्लैंड के नगरों पर जर्मन बमबारी बहुत तेज और उग्र हो गई थी । एक हज़ार नौ सौ इकतालीस के आरम्भ मे इन्दिरा ने घर लौटने का फैसला किया, क्योकि भारत का स्वतन्त्रता संग्राम फिर सक्रिय होने जा रहा था । वाइसराय ने भारतीय जनता से परामर्श करना उचित न समझा और न जनता को स्वतन्त्रता तथा लोकतत्र के अधि कार ही दिये और भारत की ओर से युद्ध की घोषणा कर दी, तो कांग्रेस ने इसके विरोध में व्यक्तिगत सत्याग्रह शुरू कर दिया । कांग्रेस कार्यसमिति ने वक्तव्य दिया कि गुलामी में रहते हुए भारत इग्लैंड के समर्थन मे लड़े जानेवाले युद्ध मे भाग नही ले सकता । गांधीजी ने दूसरे सत्याग्रही के रूप मे जवाहर को चुना । उन्हे, सरकार को यह सूचना देने के बाद कि वह एक सार्वजनिक सभा मे जनता को युद्ध - प्रयत्नो मे किसी भी तरह का सहयोग न देने के लिए कहेगे, सात नवम्बर, एक हज़ार नौ सौ चालीस को सत्याग्रह करना था । लेकिन सरकार ने हमेशा की तरह उन्हें इस बार भी पहले ही गिरफ्तार कर लिया । इकतीस अक्तूबर को, जब वह गांधीजी से मिलकर
हल्द्वानी । । प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के अंतर्गत अमेरिका की Walmart India उत्तराखंड में पहली बार रिटेल स्टोर खोलेगी। इसके लिए प्रदेश सरकार ने वॉलमार्ट को देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी में स्टोर खोलने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। रिटेल स्टोर के लिए हरिद्वार व हल्द्वानी में जमीन का चयन किया है। देहरादून शहर के लगभग 4 एकड़ भूमि देखी जा रही है। तीनों रिटेल स्टोर में 180 करोड़ का निवेश किया जाएगा। इसमें प्रत्येक स्टोर में 60 करोड़ के निवेश से 2,000 स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। बीते कल को Walmart India के आनंद विजय झा ने सचिवालय में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और प्रमुख सचिव उद्योग मनीषा पंवार से मुलाकात कर उत्तराखंड में 3 रिटेल स्टोर पर निवेश और रोजगार की सूचना दी। देहरादून, हल्द्वानी और हरिद्वार में रिटेल स्टोर खुलने से छोटे-छोटे दुकानदार वॉलमार्ट से माल खरीदने की सुविधा मिलेगी। Walmart India एफडीआई के अंतर्गत उत्तराखंड में रिटेल स्टोर में निवेश करेगी। इससे जहां स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं, उत्तराखंड के उत्पादों को ग्लोबल मार्केट उपलब्ध होगा। रिटेल स्टोर में 80 फीसदी स्थानीय लोगों को ही रोजगार दिया जाएगा।
हल्द्वानी । । प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के अंतर्गत अमेरिका की Walmart India उत्तराखंड में पहली बार रिटेल स्टोर खोलेगी। इसके लिए प्रदेश सरकार ने वॉलमार्ट को देहरादून, हरिद्वार, हल्द्वानी में स्टोर खोलने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। रिटेल स्टोर के लिए हरिद्वार व हल्द्वानी में जमीन का चयन किया है। देहरादून शहर के लगभग चार एकड़ भूमि देखी जा रही है। तीनों रिटेल स्टोर में एक सौ अस्सी करोड़ का निवेश किया जाएगा। इसमें प्रत्येक स्टोर में साठ करोड़ के निवेश से दो,शून्य स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। बीते कल को Walmart India के आनंद विजय झा ने सचिवालय में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और प्रमुख सचिव उद्योग मनीषा पंवार से मुलाकात कर उत्तराखंड में तीन रिटेल स्टोर पर निवेश और रोजगार की सूचना दी। देहरादून, हल्द्वानी और हरिद्वार में रिटेल स्टोर खुलने से छोटे-छोटे दुकानदार वॉलमार्ट से माल खरीदने की सुविधा मिलेगी। Walmart India एफडीआई के अंतर्गत उत्तराखंड में रिटेल स्टोर में निवेश करेगी। इससे जहां स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं, उत्तराखंड के उत्पादों को ग्लोबल मार्केट उपलब्ध होगा। रिटेल स्टोर में अस्सी फीसदी स्थानीय लोगों को ही रोजगार दिया जाएगा।
Battlegrounds Mobile India गेम के डेवेल्पर्स ने लॉन्च होने के बारे में कुछ खुलासा किया है। इसी के साथ ये बैटल रॉयल गेम कुछ प्रोफेशनल खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध भी है। भारतीय प्लेयर्स ये न्यूज जानकर काफी उत्साहित है, और कुछ दिनों में ही एंड्रॉइड खिलाड़ी Battlegrounds Mobile India को डाउनलोड कर सकते हैं। खैर, इस आर्टिकल में हम Battlegrounds Mobile India लॉन्च इवेंट के मिशन्स और इनामों की आधिकारिक जानकारी प्ले स्टोर पर सामने आई बताने वाले हैं। ये भी पढ़ेंः- Free Fire vs PUBG Mobile Lite: दोनों गेम्स में क्या अंतर है? Battlegrounds Mobile India गेम के अंदर काफी खास इनाम और मिशन्स लेकर आया है। इस नए इवेंट में खिलाड़ियों को हमेशा के लिए पर्पल कलर का ऑउटफिट प्राप्त होने वाला है। इन मिशन्स को पूरा करने पर प्लेयर्स को अनोखी गन स्किन्स और ऑउटफिट प्राप्त होगेंः Battlegrounds Mobile India गेम को जब खिलाड़ियों के द्वारा एक्सेस किया जाएगा तो खिलाड़ियों को एक क्रेट विपन प्राप्त होगा। गूगल प्ले स्टोर पर आने वाले समय में जब Battlegrounds Mobile India को ज्यादा खिलाड़ियों के द्वारा डाउनलोड किया जाएगा, तब नीचे मौजूद इनाम प्राप्त होंगेः PUBG Mobile के प्रोफेशनल प्लेयर Dynamo ने अर्ली एक्सेस किया है, उन्होंने Battlegrounds Mobile India को डाउनलोड करके कुछ फीचर्स दर्शकों के सामने बताए है। अर्ली एक्सेस का टाइटल देखते ही Dynamo Gaming चैनल पर 200K में वाचिंग चल रही है। नोटः अर्ली एक्सेस करने के बाद, खिलाड़ियों को उम्मीद है की Battlegrounds Mobile India एंड्रॉइड और iOS प्लेटफॉर्म पर जल्द ही देखने को मिल सकता है।
Battlegrounds Mobile India गेम के डेवेल्पर्स ने लॉन्च होने के बारे में कुछ खुलासा किया है। इसी के साथ ये बैटल रॉयल गेम कुछ प्रोफेशनल खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध भी है। भारतीय प्लेयर्स ये न्यूज जानकर काफी उत्साहित है, और कुछ दिनों में ही एंड्रॉइड खिलाड़ी Battlegrounds Mobile India को डाउनलोड कर सकते हैं। खैर, इस आर्टिकल में हम Battlegrounds Mobile India लॉन्च इवेंट के मिशन्स और इनामों की आधिकारिक जानकारी प्ले स्टोर पर सामने आई बताने वाले हैं। ये भी पढ़ेंः- Free Fire vs PUBG Mobile Lite: दोनों गेम्स में क्या अंतर है? Battlegrounds Mobile India गेम के अंदर काफी खास इनाम और मिशन्स लेकर आया है। इस नए इवेंट में खिलाड़ियों को हमेशा के लिए पर्पल कलर का ऑउटफिट प्राप्त होने वाला है। इन मिशन्स को पूरा करने पर प्लेयर्स को अनोखी गन स्किन्स और ऑउटफिट प्राप्त होगेंः Battlegrounds Mobile India गेम को जब खिलाड़ियों के द्वारा एक्सेस किया जाएगा तो खिलाड़ियों को एक क्रेट विपन प्राप्त होगा। गूगल प्ले स्टोर पर आने वाले समय में जब Battlegrounds Mobile India को ज्यादा खिलाड़ियों के द्वारा डाउनलोड किया जाएगा, तब नीचे मौजूद इनाम प्राप्त होंगेः PUBG Mobile के प्रोफेशनल प्लेयर Dynamo ने अर्ली एक्सेस किया है, उन्होंने Battlegrounds Mobile India को डाउनलोड करके कुछ फीचर्स दर्शकों के सामने बताए है। अर्ली एक्सेस का टाइटल देखते ही Dynamo Gaming चैनल पर दो सौ केल्विन में वाचिंग चल रही है। नोटः अर्ली एक्सेस करने के बाद, खिलाड़ियों को उम्मीद है की Battlegrounds Mobile India एंड्रॉइड और iOS प्लेटफॉर्म पर जल्द ही देखने को मिल सकता है।
नारनौल, 14 जून। जिला में जुलाई के पहले सप्ताह में शुरू होने वाले पौधारोपण कार्यक्रम के संबंध मेंं उपायुक्त अजय कुमार ने आज लघु सचिवालय मेंं अधिकारियों की बैठक ली। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि जिला में अब तक का यह सबसे बड़ा अभियान होगा जिसमें 11 लाख पौधे लगाए जाएंगे। ऐसे में केवल पौधे लगवाने का ही लक्ष्य नहींं बल्कि उनके पालने तक की जिम्मेदारी तय की जाए ताकि जिला मेंं वन क्षेत्र में और बढ़ोतरी हो। डीसी ने कहा कि इस बार कई स्तर पर एक साथ काम होगा। जल शक्ति अभियान के तहत वन विभाग 3. 46 लाख पौधे उपलब्ध करवाएगा। स्कूलों में पौधागिरी के लिए 55 हजार पौधे दिए जाएंगे। वहींं पंचायतों की खाली जमीन व अन्य स्थान पर वन विभाग खुद 3. 15 लाख पौधे लगाएगा। वहीं आमजन को मुफ्त में बांटने व बेचने के लिए 2. 23 हजार पौधे होंगे जिसमें एक लाख पौधे तुलसी, गिलोय व ग्वार पाठा के होंगे। इसी प्रकार 1. 61 लाख पौधे किसानों के खेतों मेंं बाग लगवाने के लिए होंगे। उपायुक्त ने कहा कि इस बार जिला के 136 गांवों पर विशेष फोकस किया जाएगा तथा वहां की खाली पड़ी जमीन मेंं 100 फीसदी पौधा लगाने का लक्ष्य रखा गया। यहां पर कहीं भी खाली जमीन नहींं बचेगी। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि इस बार अधिक से अधिक पौधे लगाए जाएं। डीसी ने डीडीपीओ को निर्देश दिए कि वे पंचायती जमीन की पहले ही पहचान करवाकर मनरेगा के तहत गड्ïढे तैयार करवाएं ताकि जुलाई के पहले सप्ताह मेंं ही अभियान की जोरोंं से शुरूआत हो सके। शिक्षा विभाग के अधिकारियोंं को निर्देश दिए कि वे बच्चोंं को पौधे देते समय उन्हें समझाएं कि प्रत्येक पौधे को बड़ा होने तक संभालना है। हर पौधे के साथ बच्चोंं का लगाव होना चाहिए। इस बैठक में डीएफओ रोहताश, डीडीपीओ ओमप्रकाश, जिला शिक्षा अधिकारी सुनील दत्त, जिला मौलिक अधिकारी विजेंद्र श्योराण के अलावा अन्य अधिकारी मौजूद थे। नारनौल, 14 जून। जिला में जुलाई के पहले सप्ताह में शुरू होने वाले पौधारोपण कार्यक्रम के संबंध मेंं उपायुक्त अजय कुमार ने आज लघु सचिवालय मेंं अधिकारियों की बैठक ली। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि जिला में अब तक का यह सबसे बड़ा अभियान होगा जिसमें 11 लाख पौधे लगाए जाएंगे। ऐसे में केवल पौधे लगवाने का ही लक्ष्य नहींं बल्कि उनके पालने तक की जिम्मेदारी तय की जाए ताकि जिला मेंं वन क्षेत्र में और बढ़ोतरी हो।
नारनौल, चौदह जून। जिला में जुलाई के पहले सप्ताह में शुरू होने वाले पौधारोपण कार्यक्रम के संबंध मेंं उपायुक्त अजय कुमार ने आज लघु सचिवालय मेंं अधिकारियों की बैठक ली। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि जिला में अब तक का यह सबसे बड़ा अभियान होगा जिसमें ग्यारह लाख पौधे लगाए जाएंगे। ऐसे में केवल पौधे लगवाने का ही लक्ष्य नहींं बल्कि उनके पालने तक की जिम्मेदारी तय की जाए ताकि जिला मेंं वन क्षेत्र में और बढ़ोतरी हो। डीसी ने कहा कि इस बार कई स्तर पर एक साथ काम होगा। जल शक्ति अभियान के तहत वन विभाग तीन. छियालीस लाख पौधे उपलब्ध करवाएगा। स्कूलों में पौधागिरी के लिए पचपन हजार पौधे दिए जाएंगे। वहींं पंचायतों की खाली जमीन व अन्य स्थान पर वन विभाग खुद तीन. पंद्रह लाख पौधे लगाएगा। वहीं आमजन को मुफ्त में बांटने व बेचने के लिए दो. तेईस हजार पौधे होंगे जिसमें एक लाख पौधे तुलसी, गिलोय व ग्वार पाठा के होंगे। इसी प्रकार एक. इकसठ लाख पौधे किसानों के खेतों मेंं बाग लगवाने के लिए होंगे। उपायुक्त ने कहा कि इस बार जिला के एक सौ छत्तीस गांवों पर विशेष फोकस किया जाएगा तथा वहां की खाली पड़ी जमीन मेंं एक सौ फीसदी पौधा लगाने का लक्ष्य रखा गया। यहां पर कहीं भी खाली जमीन नहींं बचेगी। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि इस बार अधिक से अधिक पौधे लगाए जाएं। डीसी ने डीडीपीओ को निर्देश दिए कि वे पंचायती जमीन की पहले ही पहचान करवाकर मनरेगा के तहत गड्ïढे तैयार करवाएं ताकि जुलाई के पहले सप्ताह मेंं ही अभियान की जोरोंं से शुरूआत हो सके। शिक्षा विभाग के अधिकारियोंं को निर्देश दिए कि वे बच्चोंं को पौधे देते समय उन्हें समझाएं कि प्रत्येक पौधे को बड़ा होने तक संभालना है। हर पौधे के साथ बच्चोंं का लगाव होना चाहिए। इस बैठक में डीएफओ रोहताश, डीडीपीओ ओमप्रकाश, जिला शिक्षा अधिकारी सुनील दत्त, जिला मौलिक अधिकारी विजेंद्र श्योराण के अलावा अन्य अधिकारी मौजूद थे। नारनौल, चौदह जून। जिला में जुलाई के पहले सप्ताह में शुरू होने वाले पौधारोपण कार्यक्रम के संबंध मेंं उपायुक्त अजय कुमार ने आज लघु सचिवालय मेंं अधिकारियों की बैठक ली। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि जिला में अब तक का यह सबसे बड़ा अभियान होगा जिसमें ग्यारह लाख पौधे लगाए जाएंगे। ऐसे में केवल पौधे लगवाने का ही लक्ष्य नहींं बल्कि उनके पालने तक की जिम्मेदारी तय की जाए ताकि जिला मेंं वन क्षेत्र में और बढ़ोतरी हो।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नेताओं और कार्यकर्ताओं का दल बदलने का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में रविवार को सपा-कांग्रेस और बसपा के सैकड़ों कार्यकर्ता राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) में शामिल हो गए। रालोद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मूसद अहमद की उपस्थिति में सभी को सदस्यता ग्रहण करायी गई। मीडिया प्रभारी अनिल दुबे ने बताया कि सदस्यता ग्रहण करने वालों में समाजवादी युवजन सभा के नेता प्रमोद सिंह यादव, कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव श्त्रोहन लाल रावत, बसपा के सुरेन्द्र चौबे ने प्रदेश मुख्यालय में आयोजित समारोह में रालोद की सदस्यता ग्रहण की। इसके साथ ही लखनऊ से सपा और उन्नाव से कांग्रेस के कार्यकर्ता भी पार्टी में शामिल हुए हैं। इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष डा. सुरेश यादव, मध्य उप्र के अध्यक्ष आदित्य विक्रम सिंह, युवा रालोद के प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र सिंह पटेल आदि मौजूद थे।
लखनऊ, उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नेताओं और कार्यकर्ताओं का दल बदलने का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में रविवार को सपा-कांग्रेस और बसपा के सैकड़ों कार्यकर्ता राष्ट्रीय लोकदल में शामिल हो गए। रालोद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मूसद अहमद की उपस्थिति में सभी को सदस्यता ग्रहण करायी गई। मीडिया प्रभारी अनिल दुबे ने बताया कि सदस्यता ग्रहण करने वालों में समाजवादी युवजन सभा के नेता प्रमोद सिंह यादव, कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव श्त्रोहन लाल रावत, बसपा के सुरेन्द्र चौबे ने प्रदेश मुख्यालय में आयोजित समारोह में रालोद की सदस्यता ग्रहण की। इसके साथ ही लखनऊ से सपा और उन्नाव से कांग्रेस के कार्यकर्ता भी पार्टी में शामिल हुए हैं। इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष डा. सुरेश यादव, मध्य उप्र के अध्यक्ष आदित्य विक्रम सिंह, युवा रालोद के प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र सिंह पटेल आदि मौजूद थे।
पांड्या के पिता को यकीन है कि इस बढ़ती पॉपुलेरिटी की वजह से हार्दिक का ध्यान खेल से नहीं भटकेगा। उन्होंने कहा, "वह मानसिक तौर पर काफी मजबूत है और फीमेल फैंस से अचानक मिली इस पॉपुलेरिटी से उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उसने हाल ही में चौथी बार तीन लगातार छक्के लगाए हैं। हम उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब वह एक ओवर में छह छक्के लगाएगा। वो दिन ज्यादा दूर नहीं है।" टीम इंडिया में रॉकस्टार और फैंस के बीच कुंग फू पांड्या नाम से मशहूर हार्दिक इस समय अपने करियर के शुरुआती दौर में ही हैं और उन्हें फैंस से इतना ज्यादा प्यार मिल रहा है। भारत के लिए तीनों फॉर्मेट में डेब्यू कर चुके पांड्या टीम के मैच जिताऊ खिलाड़ियों में से एक हैं। This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful. Strictly Necessary Cookie should be enabled at all times so that we can save your preferences for cookie settings. If you disable this cookie, we will not be able to save your preferences. This means that every time you visit this website you will need to enable or disable cookies again.
पांड्या के पिता को यकीन है कि इस बढ़ती पॉपुलेरिटी की वजह से हार्दिक का ध्यान खेल से नहीं भटकेगा। उन्होंने कहा, "वह मानसिक तौर पर काफी मजबूत है और फीमेल फैंस से अचानक मिली इस पॉपुलेरिटी से उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उसने हाल ही में चौथी बार तीन लगातार छक्के लगाए हैं। हम उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब वह एक ओवर में छह छक्के लगाएगा। वो दिन ज्यादा दूर नहीं है।" टीम इंडिया में रॉकस्टार और फैंस के बीच कुंग फू पांड्या नाम से मशहूर हार्दिक इस समय अपने करियर के शुरुआती दौर में ही हैं और उन्हें फैंस से इतना ज्यादा प्यार मिल रहा है। भारत के लिए तीनों फॉर्मेट में डेब्यू कर चुके पांड्या टीम के मैच जिताऊ खिलाड़ियों में से एक हैं। This website uses cookies so that we can provide you with the best user experience possible. Cookie information is stored in your browser and performs functions such as recognising you when you return to our website and helping our team to understand which sections of the website you find most interesting and useful. Strictly Necessary Cookie should be enabled at all times so that we can save your preferences for cookie settings. If you disable this cookie, we will not be able to save your preferences. This means that every time you visit this website you will need to enable or disable cookies again.
IND Vs ENG T20 वर्ल्ड कप 2022 सेमीफाइनल मैचः इंग्लैंड और भारत में से जो भी आज का मुकाबला जीतेगा, वह फाइनल में पाकिस्तान का सामना करेगा. टी20 वर्ल्ड कप 2022 अपने आखिरी पड़ाव की ओर है. लगभग एक महीने तक क्रिकेट लवर्स का मनोरंजन करने वाले इस टूर्नामेंट का फाइनल 13 तारीख को मेलबर्न में होगा. न्यूजीलैंड को 7 विकेट से हराकर पाकिस्तान पहले ही फाइनल के लिए क्वालीफाई कर चुका है. वहीं, 10 नवंबर यानी आज एडिलेड में इंग्लैंड और भारत के बीच दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला चल रहा है. इस बीच ट्विटर पर हैशटैग #INDvsENG टॉप ट्रेंड कर रहा है. फैन्स टीम इंडिया से अपील कर रहे हैं कि फिरंगियों की धज्जियां उड़ा दो. भारत और इंग्लैंड के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है, क्योंकि ये दोनों ही टीमें काफी मजबूत मानी जा रही हैं. दोनों की नजर फाइनल के टिकट पर है. फाइनल मुकाबला मेलबर्न में खेला जाएगा, जिसमें पाकिस्तान पहले ही अपनी जगह पक्की कर चुका है. बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच 2007 में पहले टी20 वर्ल्ड कप का फाइनल खेला गया था, जिसे भारत ने जीता था. टीम इंडिया के फैन्स को पूरी उम्मीद है कि रोहित शर्मा के धुरंधर फिरंगियों को आज के मैच में धूल चटा देंगे. इस बीच, ट्विटर पर मीम्स की बौछार हो गई है. लोग अपने-अपने अंदाज में टीम इंडिया की हौसलाअफजाई कर रहे हैं.
IND Vs ENG Tबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार बाईस सेमीफाइनल मैचः इंग्लैंड और भारत में से जो भी आज का मुकाबला जीतेगा, वह फाइनल में पाकिस्तान का सामना करेगा. टीबीस वर्ल्ड कप दो हज़ार बाईस अपने आखिरी पड़ाव की ओर है. लगभग एक महीने तक क्रिकेट लवर्स का मनोरंजन करने वाले इस टूर्नामेंट का फाइनल तेरह तारीख को मेलबर्न में होगा. न्यूजीलैंड को सात विकेट से हराकर पाकिस्तान पहले ही फाइनल के लिए क्वालीफाई कर चुका है. वहीं, दस नवंबर यानी आज एडिलेड में इंग्लैंड और भारत के बीच दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला चल रहा है. इस बीच ट्विटर पर हैशटैग #INDvsENG टॉप ट्रेंड कर रहा है. फैन्स टीम इंडिया से अपील कर रहे हैं कि फिरंगियों की धज्जियां उड़ा दो. भारत और इंग्लैंड के बीच मुकाबला बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है, क्योंकि ये दोनों ही टीमें काफी मजबूत मानी जा रही हैं. दोनों की नजर फाइनल के टिकट पर है. फाइनल मुकाबला मेलबर्न में खेला जाएगा, जिसमें पाकिस्तान पहले ही अपनी जगह पक्की कर चुका है. बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच दो हज़ार सात में पहले टीबीस वर्ल्ड कप का फाइनल खेला गया था, जिसे भारत ने जीता था. टीम इंडिया के फैन्स को पूरी उम्मीद है कि रोहित शर्मा के धुरंधर फिरंगियों को आज के मैच में धूल चटा देंगे. इस बीच, ट्विटर पर मीम्स की बौछार हो गई है. लोग अपने-अपने अंदाज में टीम इंडिया की हौसलाअफजाई कर रहे हैं.
दीपिका कक्कड़ और शोएब इब्राहिम अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रहे हैं. कपल ने रविवार को इंस्टाग्राम पर पोस्ट के जरिए प्रेग्नेंसी की घोषणा की. कपल ने इंस्टाग्राम पर संयुक्त पोस्ट साझा किए और खुलासा किया कि यह "उनके जीवन का सबसे खूबसूरत चरण है. " शोएब द्वारा साझा किए गए पोस्ट में कपल कैमरे की ओर अपनी पीठ किए दिख रहा है, जिसमें दोनों ने व्हाइट ड्रेस और मैचिंग कैप पहना है. दीपिका की टोपी पर लिखा है, "मॉम-टू-बी", जबकि शोएब की कैप पर लिखा है, "डैड-टू-बी. " पोस्ट को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, "आभार, खुशी, उत्साह और साथ ही घबराहट से भरे दिलों के साथ इस खबर को आप सभी के साथ साझा कर रहा हूं. हमारी जिंदगी का ये सबसे खूबसूरत चरण है. Yessss हम अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रहे हैं ! ! जल्द ही पितृत्व को गले लगाने जा रहे हैं. - ननद सबा का रिसेप्शन लुक खराब करने पर दीपिका कक्कड़ पर भड़के सोशल मीडिया यूजर्स, बोले- 'शर्म आनी चाहिए ! आपने. . . ' पोस्ट साझा करने के तुरंत बाद उनके इंडस्ट्री के फ्रेंड्स ने उन्हें शुभ कामनाएं देनी शुरू कर दी. गौहर खान ने लिखा, "अल्लाह आप दोनों को इस नई यात्रा पर आशीर्वाद दे. आमीन. " ससुराल सिमर का की को एक्टर अविका गोर ने लिखा, "हे भगवान! ! ! ! ! " चारु असोपा ने लिखा, "बधाई हो. "दीपिका कक्कड़ द्वारा साझा की गई एक अन्य पोस्ट में उन्हें जूतों की एक प्यारी जोड़ी के साथ कैमरे के लिए पोज देते हुए देखा जा सकता है. इसे उन्होंने कैप्शन दिया है, "हर पल अच्छा रहेगा, जब आपके कदम हमारे साथ जुड़ेंगे. Yessss हम अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रहे हैं ! ! अपने बच्चे के लिए आपकी दुआओं और प्यार की जरूरत है. बता दें कि दीपिका कक्कड़ और शोएब इब्राहिम को उनके लोकप्रिय शो ससुराल सिमर का के सेट पर प्यार हो गया था. कई सालों तक डेट करने के बाद उन्होंने 2018 में शादी कर ली थी.
दीपिका कक्कड़ और शोएब इब्राहिम अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रहे हैं. कपल ने रविवार को इंस्टाग्राम पर पोस्ट के जरिए प्रेग्नेंसी की घोषणा की. कपल ने इंस्टाग्राम पर संयुक्त पोस्ट साझा किए और खुलासा किया कि यह "उनके जीवन का सबसे खूबसूरत चरण है. " शोएब द्वारा साझा किए गए पोस्ट में कपल कैमरे की ओर अपनी पीठ किए दिख रहा है, जिसमें दोनों ने व्हाइट ड्रेस और मैचिंग कैप पहना है. दीपिका की टोपी पर लिखा है, "मॉम-टू-बी", जबकि शोएब की कैप पर लिखा है, "डैड-टू-बी. " पोस्ट को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, "आभार, खुशी, उत्साह और साथ ही घबराहट से भरे दिलों के साथ इस खबर को आप सभी के साथ साझा कर रहा हूं. हमारी जिंदगी का ये सबसे खूबसूरत चरण है. Yessss हम अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रहे हैं ! ! जल्द ही पितृत्व को गले लगाने जा रहे हैं. - ननद सबा का रिसेप्शन लुक खराब करने पर दीपिका कक्कड़ पर भड़के सोशल मीडिया यूजर्स, बोले- 'शर्म आनी चाहिए ! आपने. . . ' पोस्ट साझा करने के तुरंत बाद उनके इंडस्ट्री के फ्रेंड्स ने उन्हें शुभ कामनाएं देनी शुरू कर दी. गौहर खान ने लिखा, "अल्लाह आप दोनों को इस नई यात्रा पर आशीर्वाद दे. आमीन. " ससुराल सिमर का की को एक्टर अविका गोर ने लिखा, "हे भगवान! ! ! ! ! " चारु असोपा ने लिखा, "बधाई हो. "दीपिका कक्कड़ द्वारा साझा की गई एक अन्य पोस्ट में उन्हें जूतों की एक प्यारी जोड़ी के साथ कैमरे के लिए पोज देते हुए देखा जा सकता है. इसे उन्होंने कैप्शन दिया है, "हर पल अच्छा रहेगा, जब आपके कदम हमारे साथ जुड़ेंगे. Yessss हम अपने पहले बच्चे की उम्मीद कर रहे हैं ! ! अपने बच्चे के लिए आपकी दुआओं और प्यार की जरूरत है. बता दें कि दीपिका कक्कड़ और शोएब इब्राहिम को उनके लोकप्रिय शो ससुराल सिमर का के सेट पर प्यार हो गया था. कई सालों तक डेट करने के बाद उन्होंने दो हज़ार अट्ठारह में शादी कर ली थी.
उत्तर प्रदेश से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। रायबरेली जिले के बछरावां क्षेत्र में एक ट्रक तथा कार की आपस में टक्कर हो गई जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई तथा दो लोगों के घायल होंने की ख़बर है। पुलिस के मुताबिक गौतम गंभीर के पिता दीपक गंभीर ने बताया कि उनकी टोयोटा फॉरच्यूनर कार गुरुवार को दोपहर करीब साढ़े तीन बजे घर के बाहर पार्क की गई थी। शुक्रवार सुबह यह वहां नहीं थी। घटना के बाद गुस्साई भीड़ ने एक कार सवार को पीट-पीटकर मार डाला। वहीं, पिटाई से दूसरे की हालत नाजुक बनी हुई है। आक्रोशित लोगों ने कार को भी पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया।
उत्तर प्रदेश से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। रायबरेली जिले के बछरावां क्षेत्र में एक ट्रक तथा कार की आपस में टक्कर हो गई जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई तथा दो लोगों के घायल होंने की ख़बर है। पुलिस के मुताबिक गौतम गंभीर के पिता दीपक गंभीर ने बताया कि उनकी टोयोटा फॉरच्यूनर कार गुरुवार को दोपहर करीब साढ़े तीन बजे घर के बाहर पार्क की गई थी। शुक्रवार सुबह यह वहां नहीं थी। घटना के बाद गुस्साई भीड़ ने एक कार सवार को पीट-पीटकर मार डाला। वहीं, पिटाई से दूसरे की हालत नाजुक बनी हुई है। आक्रोशित लोगों ने कार को भी पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया।
Quick links: रिपब्लिक डायलॉग में स्त्री शक्ति ब्रेकिंग बैरियर के टॉपिक पर तीनों सेनाओं की महिला अधिकारियों ने अपने अनुभव शेयर किए। रिपब्लिक डायलॉग के मंच पर बोलते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल अनिला खत्री ने कहा कि सेनाओं में सभी अधिकारियों को एक जैसे टास्क दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि वहां महिलाओं के लिए कोई खास ट्रीटमेंट नहीं दिया जाता है। इस दौरान मंच पर नेवी की ले कमांडर तुषिना ठाकुर और एयर फोर्स से विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने भी अपने अनुभव शेयर किए। स्त्री ब्रेकिंग बैरियर के टॉपिक पर बात करते हुए नेवी की ले कमांडर तुषिना ठाकुर, आर्मी से ले कर्नल अनिला खत्री और एयर फोर्स से विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने अपनी सैन्य जर्नी के बारे में बात की। तीनों अधिकारियों ने अपने सिलेक्शन से लेकर सेना में अपनी ट्रेनिंग और कमीशनिंग के बाद के अनुभव शेयर किए। विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने अपनी जर्नी के बारे में बात करते हुए बताया कि उन्होंने भारतीय वायु सेना ज्वाइन करने का फैसला तब लिया, जब वो क्लास 6 में थीं। विंग कमांडर सिंह ने कहा कि यह एक रोलर कोस्टर यात्रा है, विशेष रूप से हेलीकॉप्टर उड़ाना और एक अविश्वसनीय अनुभव था। विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने कहा कि पायलट मेरे नाम को भी सूट करता है। मेरे क्लासटीचर ने कहा था व्योमिका एक दिन आसमान को फतह करेगी। उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर पायलट के तौर पर हमारी लाइफ काफी टफ होती है। कभी हम सी लेवल पर उड़ान भरते हैं, तो कभी 18 हजार फीट पर उड़ान भरते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में ये काफी अलग अनुभव था। विंग कमांडर सिंह ने कहा कि स्कूल टाइम में पायलट बनने का सपना देखा था। इसमें काफी समय तक महिला पायलटों के लिए कोई एंट्री नहीं थी। जब मैंने ग्रेजुएशन कर लिया, तो एक दिन देखा कि अब वायु सेना में महिला पायलट शामिल हो सकती हैं। इसके बाद मेरे पंखों को नई उड़ान मिल गई। फिर मैंने UPSC CDS का एग्जाम दिया, SSB के लिए गई और आज यहां हूं। इसके साथ ही लेफ्टिनेंट कमांडर तुषिना ठाकुर ने कहा कि मेरे परिवार मैं सबसे पहली थी, जिसने सेना को करियर के रूप में चुना। उन्होंने कहा कि मेरे बेस्ट फ्रेंड के भाई से प्रभावित होकर मैंने नेवी चुना। ले कमांडर ठाकुर ने कहा कि सिविल बैकग्राउंड से नेवी लाइफ का ट्रांजिशन टफ था, लेकिन उसे पूरा करना चैलेंज भी था। जिसे मैंने एंजॉय किया। लेफ्टिनेंट कर्नल अनिला खत्री ने कहा कि मुझे यूनिफॉर्म का शौक था। मेरे परिवार ने मेरा सपोर्ट किया, इसके कारण मैं सेना का हिस्सा बन पाई। ले कर्नल खत्री ने कहा कि 17 साल से हर दिन यूनिफॉर्म पहनना मेरे लिए अलग एक्सपीरिएंस था। तीनों महिला अधिकारियों ने कहा कि एकेडमी में ज्वाइन होने के बाद पहले कुछ दिन फिजिकल ट्रेनिंग के हिसाब से टफ थे। लेकिन हमने इसे एंजॉय किया। विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने कहा कि मेरे लिए ट्रेनिंग काफी एंजॉयफुल रहा। विंग कमांडर सिंह ने कहा कि उन्होंने ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में गोल्ड मेडल जीता था। वहीं ले कमांडर तुषिना ठाकुर ने कहा कि एकेडमी में शामिल होने के बाद, मुझे एहसास हुआ कि मैं एक लीडर हूं, जो मुझे एक अलग लेवल की संतुष्टि देता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण चीज है आत्मविश्वास। इसके साथ ही ले. कर्नल अनिला खत्री ने कहा कि सेना में कोई महिला पुरुष के लिए कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं होती है। सेना में सभी को एक जैसा टास्क दिया जाता है। यह भी पढ़ेंः रिपब्लिक डायलॉग समिट में बोलीं डॉ. किरण बेदी- 'महिलाओं का काम पुरुषों को सुधारना नहीं होता'
Quick links: रिपब्लिक डायलॉग में स्त्री शक्ति ब्रेकिंग बैरियर के टॉपिक पर तीनों सेनाओं की महिला अधिकारियों ने अपने अनुभव शेयर किए। रिपब्लिक डायलॉग के मंच पर बोलते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल अनिला खत्री ने कहा कि सेनाओं में सभी अधिकारियों को एक जैसे टास्क दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि वहां महिलाओं के लिए कोई खास ट्रीटमेंट नहीं दिया जाता है। इस दौरान मंच पर नेवी की ले कमांडर तुषिना ठाकुर और एयर फोर्स से विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने भी अपने अनुभव शेयर किए। स्त्री ब्रेकिंग बैरियर के टॉपिक पर बात करते हुए नेवी की ले कमांडर तुषिना ठाकुर, आर्मी से ले कर्नल अनिला खत्री और एयर फोर्स से विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने अपनी सैन्य जर्नी के बारे में बात की। तीनों अधिकारियों ने अपने सिलेक्शन से लेकर सेना में अपनी ट्रेनिंग और कमीशनिंग के बाद के अनुभव शेयर किए। विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने अपनी जर्नी के बारे में बात करते हुए बताया कि उन्होंने भारतीय वायु सेना ज्वाइन करने का फैसला तब लिया, जब वो क्लास छः में थीं। विंग कमांडर सिंह ने कहा कि यह एक रोलर कोस्टर यात्रा है, विशेष रूप से हेलीकॉप्टर उड़ाना और एक अविश्वसनीय अनुभव था। विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने कहा कि पायलट मेरे नाम को भी सूट करता है। मेरे क्लासटीचर ने कहा था व्योमिका एक दिन आसमान को फतह करेगी। उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर पायलट के तौर पर हमारी लाइफ काफी टफ होती है। कभी हम सी लेवल पर उड़ान भरते हैं, तो कभी अट्ठारह हजार फीट पर उड़ान भरते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे में ये काफी अलग अनुभव था। विंग कमांडर सिंह ने कहा कि स्कूल टाइम में पायलट बनने का सपना देखा था। इसमें काफी समय तक महिला पायलटों के लिए कोई एंट्री नहीं थी। जब मैंने ग्रेजुएशन कर लिया, तो एक दिन देखा कि अब वायु सेना में महिला पायलट शामिल हो सकती हैं। इसके बाद मेरे पंखों को नई उड़ान मिल गई। फिर मैंने UPSC CDS का एग्जाम दिया, SSB के लिए गई और आज यहां हूं। इसके साथ ही लेफ्टिनेंट कमांडर तुषिना ठाकुर ने कहा कि मेरे परिवार मैं सबसे पहली थी, जिसने सेना को करियर के रूप में चुना। उन्होंने कहा कि मेरे बेस्ट फ्रेंड के भाई से प्रभावित होकर मैंने नेवी चुना। ले कमांडर ठाकुर ने कहा कि सिविल बैकग्राउंड से नेवी लाइफ का ट्रांजिशन टफ था, लेकिन उसे पूरा करना चैलेंज भी था। जिसे मैंने एंजॉय किया। लेफ्टिनेंट कर्नल अनिला खत्री ने कहा कि मुझे यूनिफॉर्म का शौक था। मेरे परिवार ने मेरा सपोर्ट किया, इसके कारण मैं सेना का हिस्सा बन पाई। ले कर्नल खत्री ने कहा कि सत्रह साल से हर दिन यूनिफॉर्म पहनना मेरे लिए अलग एक्सपीरिएंस था। तीनों महिला अधिकारियों ने कहा कि एकेडमी में ज्वाइन होने के बाद पहले कुछ दिन फिजिकल ट्रेनिंग के हिसाब से टफ थे। लेकिन हमने इसे एंजॉय किया। विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने कहा कि मेरे लिए ट्रेनिंग काफी एंजॉयफुल रहा। विंग कमांडर सिंह ने कहा कि उन्होंने ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में गोल्ड मेडल जीता था। वहीं ले कमांडर तुषिना ठाकुर ने कहा कि एकेडमी में शामिल होने के बाद, मुझे एहसास हुआ कि मैं एक लीडर हूं, जो मुझे एक अलग लेवल की संतुष्टि देता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण चीज है आत्मविश्वास। इसके साथ ही ले. कर्नल अनिला खत्री ने कहा कि सेना में कोई महिला पुरुष के लिए कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं होती है। सेना में सभी को एक जैसा टास्क दिया जाता है। यह भी पढ़ेंः रिपब्लिक डायलॉग समिट में बोलीं डॉ. किरण बेदी- 'महिलाओं का काम पुरुषों को सुधारना नहीं होता'
कुछ लोग इस दर्द को दूर करने के लिए डॉक्टर का सहारा लेते हैं लेकिन आप चाहें तो इसका इलाज बिना वजह घर पर ही कर सकते हैं। इसके लिए हमने बेंगलुरु के जीवोत्तम आयुर्वेद केंद्र के वैद्य डॉ. शरद कुलकर्णी M. S (Ayu), (Ph. D. ) से बातचीत की है। उन्होंने पैरों को कुछ ही मिनटों में दर्द दूर करने के देसी नुस्खे के बारे में जानकारी दी है। (फोटो साभारः istock by getty images) अरंडी का तेल (castor oil) पैरों के दर्द को दूर करने के लिए अरंडी का तेल रामबाण इलाज है। अंग्रेजी में इसे कैस्टर ऑइल कहा जाता है जो तमाम तरह के औषधीय गुणों से भरपूर होता है। तमाम लोग सेहतमंद रहने के लिए अक्सर घरेलू उपायों का सहारा लेते हैं और इन्हीं में से एक है- अरंडी का तेल। अगर आपको पैरों में दर्द है तो आप अरंडी के पत्तों और इसके तेल का प्रयोग कर सकते हैं। तेल मिलता है तो आप तेल से मालिश करें और इसकी उपलब्धता नहीं है तो इसका पेड़ आसानी से मिल जाता है जिसके पत्तों को कढ़ाई में फ्राई करें और इसमें थोड़ा नमक एड करें। इसके बाद हल्का ठंडा करें और फिर इस पेस्ट को दर्द वाली जगह पर रखकर कपड़े या पट्टी से बांध लें। इससे कुछ ही मिनटों में दर्द में आराम मिलता है। एक्सपर्ट ने दी घर में 6 इंडोर प्लांट लगाने की सलाह, मिलेगी 24 घंटे ऑक्सीजन और दूर होंगी ये समस्याएं! हल्दी (Turmeric with coconut oil past) हल्दी को सब्जियों और दूध में मिलाकर पीना तो आम बात है लेकिन इसका प्रयोग पैरों के दर्द को दूर करने में भी किया जाता है। हल्दी को गरम नारियल तेल में मिलाएं और फिर इस पेस्ट को दर्द वाली जगह लगाकर कपड़े से बांध लें। चूंकि हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरिया और एंटीफंगल तत्व होते हैं जो शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं। निर्गुण्डी औषधि (Nirgundi Oil) आयुर्वेद में निर्गुंडी (nirgundi plant benefits) का प्रयोग कई दवाइयों में किया जाता है। इस पौधे के पत्तों का लेप लगाने से भी दर्द दूर हो जाता है। यह बैक्टीरिया और कीड़ों को नष्ट कर सकता है। इस औषधि का प्रयोग साइटिका का दर्द दूर करने में भी किया जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि साइटिका एक नस होती है तो कुल्हे से लेकर पैर के पिछले हिस्से से होते हुए एडी तक जाती है। जब इसमें दर्द उठता है तो शरीर के पूरे हिस्से में चुभन होती है। ऐसे दर्द को मिटाने के लिए आप निर्गुंडी का प्रयोग कर सकते हैं। इसका पेस्ट किसी भी सूजन को कम करने, घाव भरने आदि में भी किया जाता है। पैरों के दर्द को दूर करने के लिए सबसे पहले आप निर्गुण्डी के पत्तों को गरम सरसों तेल में भिगोएं, इसमें थो़ड़ा नमक मिलाएं। इसके बाद थोड़ा सा ठंडा होने दें और फिर कपड़े में रखकर बांध लें। रासना पौधे के पत्ते को तोड़ लें और फिर सरसों या फिर अरंडी का तेल में मिलाकर पेस्ट लगाकर बांधने से भी पैरों के दर्द को दूर करने में राहत मिलती है। करेले के पत्ते (Bitter gourd leaves) पैरों की जलन व दर्द दूर करने में करेले का प्रयोग भी कर सकते हैं। इसके लिए आपको सबसे पहले करेले की पत्तियों को पीसकर पेस्ट बनाना है और फिर दर्द वाली जगह पर लगाएं। जब भी आपको दर्द हो आप इस पेस्ट को लगाकर राहत पा सकते हैं। आमतौर पर गुग्गुल का प्रयोग हवन सामग्री में करते हैं। लेकिन इसका प्रयोग औषधि के तौर पर भी किया जाता है। पैरों के दर्द को दूर करने के लिए सबसे पहले शुद्ध गुग्गुल को आग में पिघला देना है। इसके बाद ये गम जैसा हो जाएगा और फिर हल्का गरम रहने पर इसमें कपूर मिलाकर दर्द वाली जगह वाली लगाएं। इसके बाद वहां कपड़े से बांध लें। डॉ. शरद कुलकर्णा के अनुसार, आप चाहें तो सामान्य दर्द को नमक के पानी के जरिए भी दूर कर सकते हैं। इसके लिए आपको एक बड़ा भगोना गरम पानी करना है और उसमें नमक मिलाना है। इसके बाद इस पानी से दर्द वाली जगह की सिकाई करें। आप चाहें तो पैरों का पानी में भी डाल सकते हैं।
कुछ लोग इस दर्द को दूर करने के लिए डॉक्टर का सहारा लेते हैं लेकिन आप चाहें तो इसका इलाज बिना वजह घर पर ही कर सकते हैं। इसके लिए हमने बेंगलुरु के जीवोत्तम आयुर्वेद केंद्र के वैद्य डॉ. शरद कुलकर्णी M. S , से बातचीत की है। उन्होंने पैरों को कुछ ही मिनटों में दर्द दूर करने के देसी नुस्खे के बारे में जानकारी दी है। अरंडी का तेल पैरों के दर्द को दूर करने के लिए अरंडी का तेल रामबाण इलाज है। अंग्रेजी में इसे कैस्टर ऑइल कहा जाता है जो तमाम तरह के औषधीय गुणों से भरपूर होता है। तमाम लोग सेहतमंद रहने के लिए अक्सर घरेलू उपायों का सहारा लेते हैं और इन्हीं में से एक है- अरंडी का तेल। अगर आपको पैरों में दर्द है तो आप अरंडी के पत्तों और इसके तेल का प्रयोग कर सकते हैं। तेल मिलता है तो आप तेल से मालिश करें और इसकी उपलब्धता नहीं है तो इसका पेड़ आसानी से मिल जाता है जिसके पत्तों को कढ़ाई में फ्राई करें और इसमें थोड़ा नमक एड करें। इसके बाद हल्का ठंडा करें और फिर इस पेस्ट को दर्द वाली जगह पर रखकर कपड़े या पट्टी से बांध लें। इससे कुछ ही मिनटों में दर्द में आराम मिलता है। एक्सपर्ट ने दी घर में छः इंडोर प्लांट लगाने की सलाह, मिलेगी चौबीस घंटाटे ऑक्सीजन और दूर होंगी ये समस्याएं! हल्दी हल्दी को सब्जियों और दूध में मिलाकर पीना तो आम बात है लेकिन इसका प्रयोग पैरों के दर्द को दूर करने में भी किया जाता है। हल्दी को गरम नारियल तेल में मिलाएं और फिर इस पेस्ट को दर्द वाली जगह लगाकर कपड़े से बांध लें। चूंकि हल्दी में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरिया और एंटीफंगल तत्व होते हैं जो शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करते हैं। निर्गुण्डी औषधि आयुर्वेद में निर्गुंडी का प्रयोग कई दवाइयों में किया जाता है। इस पौधे के पत्तों का लेप लगाने से भी दर्द दूर हो जाता है। यह बैक्टीरिया और कीड़ों को नष्ट कर सकता है। इस औषधि का प्रयोग साइटिका का दर्द दूर करने में भी किया जाता है। जानकारी के लिए बता दें कि साइटिका एक नस होती है तो कुल्हे से लेकर पैर के पिछले हिस्से से होते हुए एडी तक जाती है। जब इसमें दर्द उठता है तो शरीर के पूरे हिस्से में चुभन होती है। ऐसे दर्द को मिटाने के लिए आप निर्गुंडी का प्रयोग कर सकते हैं। इसका पेस्ट किसी भी सूजन को कम करने, घाव भरने आदि में भी किया जाता है। पैरों के दर्द को दूर करने के लिए सबसे पहले आप निर्गुण्डी के पत्तों को गरम सरसों तेल में भिगोएं, इसमें थो़ड़ा नमक मिलाएं। इसके बाद थोड़ा सा ठंडा होने दें और फिर कपड़े में रखकर बांध लें। रासना पौधे के पत्ते को तोड़ लें और फिर सरसों या फिर अरंडी का तेल में मिलाकर पेस्ट लगाकर बांधने से भी पैरों के दर्द को दूर करने में राहत मिलती है। करेले के पत्ते पैरों की जलन व दर्द दूर करने में करेले का प्रयोग भी कर सकते हैं। इसके लिए आपको सबसे पहले करेले की पत्तियों को पीसकर पेस्ट बनाना है और फिर दर्द वाली जगह पर लगाएं। जब भी आपको दर्द हो आप इस पेस्ट को लगाकर राहत पा सकते हैं। आमतौर पर गुग्गुल का प्रयोग हवन सामग्री में करते हैं। लेकिन इसका प्रयोग औषधि के तौर पर भी किया जाता है। पैरों के दर्द को दूर करने के लिए सबसे पहले शुद्ध गुग्गुल को आग में पिघला देना है। इसके बाद ये गम जैसा हो जाएगा और फिर हल्का गरम रहने पर इसमें कपूर मिलाकर दर्द वाली जगह वाली लगाएं। इसके बाद वहां कपड़े से बांध लें। डॉ. शरद कुलकर्णा के अनुसार, आप चाहें तो सामान्य दर्द को नमक के पानी के जरिए भी दूर कर सकते हैं। इसके लिए आपको एक बड़ा भगोना गरम पानी करना है और उसमें नमक मिलाना है। इसके बाद इस पानी से दर्द वाली जगह की सिकाई करें। आप चाहें तो पैरों का पानी में भी डाल सकते हैं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र के पांचवें दिन शुक्रवार को सोंढूर जलाशय के नहर निर्माण के लिए जमीन की क्षतिपूर्ति का मामला उठा. कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने जबाव कहा कि क्षतिपूर्ति का भुगतान वन विभाग को किया जा चुका है. सिहावा विधायक लक्ष्मी ध्रुव के सवाल पर जवाब देते हुए कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा योजना सन् 1978 की है. विभाग अगर जानकारी दे रहा है, तो विभाग का धन्यवाद दिजिए, क्योंकि इतने पुराने डाक्यूमेंट नहीं मिलते. कृषि मंत्री चौबे ने कहा कि जहां गांव वाले जमीन में क्षतिपूर्ति की मांग कर रहे हैं, वो जमीन ही गांव वालों की नहीं है. वो वन भूमि है और क्षतिपूर्ति का भुगतान वन विभाग को किया जा चुका है.
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र के पांचवें दिन शुक्रवार को सोंढूर जलाशय के नहर निर्माण के लिए जमीन की क्षतिपूर्ति का मामला उठा. कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने जबाव कहा कि क्षतिपूर्ति का भुगतान वन विभाग को किया जा चुका है. सिहावा विधायक लक्ष्मी ध्रुव के सवाल पर जवाब देते हुए कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा योजना सन् एक हज़ार नौ सौ अठहत्तर की है. विभाग अगर जानकारी दे रहा है, तो विभाग का धन्यवाद दिजिए, क्योंकि इतने पुराने डाक्यूमेंट नहीं मिलते. कृषि मंत्री चौबे ने कहा कि जहां गांव वाले जमीन में क्षतिपूर्ति की मांग कर रहे हैं, वो जमीन ही गांव वालों की नहीं है. वो वन भूमि है और क्षतिपूर्ति का भुगतान वन विभाग को किया जा चुका है.
सूरः जारियात (51) महफ़ूज़ है उसमें दर्ज) है, (ज़मीन पर उसका यकीनी इल्म किसी मस्लेहत के सबब नाज़िल नहीं * किया गया । चुनोँचे 'और वही बारिश बरसाता है' में भी नहीं बतलाया गया, और देखा भी जाता है कि यकीनी निर्धारण किसी को नहीं मालूम, लेकिन जब बावजूद निर्धारित वक्त का इल्म न होने के रिज़्क का वजूद यकीनी है फिर कियामत की इस तारीख़ के मुतैयन न होने से कियामत का कायम न होना कैसे लाज़िम आ गया, और ऐसे दलील लेने की तरफ इशारा करने के लिये "मा तू-अदू-न" के साथ 'रिज़्कुकुम' बढ़ा दिया। आगे इसी बात को आगे बढ़ाते हुए फरमाते हैं कि जब न होने की कोई दलील नहीं और होने की दलील है) तो क़सम है आसमान और ज़मीन के परवर्दिगार की कि वह (बदले का दिन) बरहक (और ऐसा यकीनी) है जैसे कि तुम बातें कर रहे हो (कभी इसमें शक नहीं होता, इसी तरह उसको यकीनी समझो ) । • सूरः ज़ारियात में भी इससे पहली सूरत सूरः कॉफ की तरह ज्यादातर मज़ामीन आखिरत व कियामत और उसमें मुर्दों के ज़िन्दा होने, हिसाब-किताब और सवाब व अज़ाब से संबन्धित हैं। पहली चन्द आयतों में अल्लाह तआला ने चन्द चीज़ों की कुसम खाकर फरमाया है कि कियामत के मुताल्लिक जिन चीज़ों का वायदा किया गया है वह सच्चा वायदा है, जिन चीज़ों की कसम खाई है वो चार हैंः الأريت ذرواء الحملت وقراء الجريت يسرا، المقسّمت أمرا. एक मरफ़ज़ हदीस में जिसको इमाम इब्ने कसीर ने ज़ईफ (कमज़ोर ) कहा है, और हज़रत ) फारूके आज़म और हज़रत अली मुर्तज़ा रज़ियल्लाहु अन्हुमा से मौकूफन इन चारों चीज़ों के मायने और महूम यह बतलाया गया है कि 'ज़ारियात' से मुराद वो हवायें हैं जिनके साथ गुबार होता है, और "हामिलाते विक्रन्" के लफ्ज़ी मायने बोझ उठाने वाले के हैं, इससे मुराद बादल हैं जो पानी का बोझ उठाये होते हैं, और "जारियाति युस्टन्" से भुराद कश्तियाँ हैं जो पानी में आसानी के साथ चलती हैं, और 'मुकस्सिमाति अम्ररन्' से मुराद वे फ़रिश्ते हैं जो अल्लाह तआला की तरफ से आम मख्लूकात में रिज़्क और बारिश का पानी और तकलीफ़ व राहत की मुख़्तलिफ किस्में तक़दीरे इलाही के मुताबिक तकसीम करते हैं, तफसीर इब्ने कसीर, तफसीरे कुर्तुबी और तफ़सीर दुर्रे मन्सूर में ये मरफ़अ और मौकूफ रिवायतें बयान हुई हैं। والسماء ذات الحبيه إنكم لفي قول مختلفه "हुबुक" हबीका की जमा ( बहुवचन) है, कपड़े की बनावट में जो धारियाँ हो जाती हैं उनको हुबुक कहा जाता है, वो चूँकि रास्ते और सड़क के जैसी होती हैं इसलिये रास्तों को भी हुबुक कह दिया जाता है। बहुत से हज़राते मुफस्सिरीन ने इस जगह यही मायने मुराद लिये हैं कि कसम है आसमान की जो रास्तों वाला है, रास्तों से वो रास्ते भी मुराद हो सकते हैं जिनसे फरिश्ते आते जाते हैं, और इससे मुराद सितारों और सय्यारों (ग्रहों) के रास्ते और उनके मदार
सूरः जारियात महफ़ूज़ है उसमें दर्ज) है, तो क़सम है आसमान और ज़मीन के परवर्दिगार की कि वह बरहक है जैसे कि तुम बातें कर रहे हो । • सूरः ज़ारियात में भी इससे पहली सूरत सूरः कॉफ की तरह ज्यादातर मज़ामीन आखिरत व कियामत और उसमें मुर्दों के ज़िन्दा होने, हिसाब-किताब और सवाब व अज़ाब से संबन्धित हैं। पहली चन्द आयतों में अल्लाह तआला ने चन्द चीज़ों की कुसम खाकर फरमाया है कि कियामत के मुताल्लिक जिन चीज़ों का वायदा किया गया है वह सच्चा वायदा है, जिन चीज़ों की कसम खाई है वो चार हैंः الأريت ذرواء الحملت وقراء الجريت يسرا، المقسّمت أمرا. एक मरफ़ज़ हदीस में जिसको इमाम इब्ने कसीर ने ज़ईफ कहा है, और हज़रत ) फारूके आज़म और हज़रत अली मुर्तज़ा रज़ियल्लाहु अन्हुमा से मौकूफन इन चारों चीज़ों के मायने और महूम यह बतलाया गया है कि 'ज़ारियात' से मुराद वो हवायें हैं जिनके साथ गुबार होता है, और "हामिलाते विक्रन्" के लफ्ज़ी मायने बोझ उठाने वाले के हैं, इससे मुराद बादल हैं जो पानी का बोझ उठाये होते हैं, और "जारियाति युस्टन्" से भुराद कश्तियाँ हैं जो पानी में आसानी के साथ चलती हैं, और 'मुकस्सिमाति अम्ररन्' से मुराद वे फ़रिश्ते हैं जो अल्लाह तआला की तरफ से आम मख्लूकात में रिज़्क और बारिश का पानी और तकलीफ़ व राहत की मुख़्तलिफ किस्में तक़दीरे इलाही के मुताबिक तकसीम करते हैं, तफसीर इब्ने कसीर, तफसीरे कुर्तुबी और तफ़सीर दुर्रे मन्सूर में ये मरफ़अ और मौकूफ रिवायतें बयान हुई हैं। والسماء ذات الحبيه إنكم لفي قول مختلفه "हुबुक" हबीका की जमा है, कपड़े की बनावट में जो धारियाँ हो जाती हैं उनको हुबुक कहा जाता है, वो चूँकि रास्ते और सड़क के जैसी होती हैं इसलिये रास्तों को भी हुबुक कह दिया जाता है। बहुत से हज़राते मुफस्सिरीन ने इस जगह यही मायने मुराद लिये हैं कि कसम है आसमान की जो रास्तों वाला है, रास्तों से वो रास्ते भी मुराद हो सकते हैं जिनसे फरिश्ते आते जाते हैं, और इससे मुराद सितारों और सय्यारों के रास्ते और उनके मदार
'होता रहे सत्य, उससे मुझे भय नहीं, गंगा के जल में मैलाकर मिल जाय तो उससे क्या गंगा अपवित्र हो जाती है ?' मैं हँसकर बोला - तब अच्छी ही बात कहता हूँ, मिली है पद्मा में । दूसरे दिन खाड़चट्टी और धूनारघाट के छोटे पहाड़ी शहर को पार कर जिस समय दाड़िमडाली आ पहुँचे उस समय साँझ हो गई थी । धूनारघाट से मिली है रामगंगा नदी, और मिले हैं छोटे-छोटे प्रान्तर । कहीं-कहीं मैदानों में खेती हो रही है । प्रायः लहराता हुआ मैदानी रास्ता है। में कई गाँव हैं। गाँव समृद्धिशाली हैं। करीब नौ बजे के समय साढ़े चार मील और चलकर इतने दिनों के बाद हम गढ़वाल जिले के अन्तिम हिस्से मेहलचौरी में आ पहुँचे । खयाल था कि मेहलचौरी कुछ देखने-दाखने लायक होगा, किन्तु वह इतना साधारण होगाइस बात को स्वप्न में भी नहीं सोचा था । यहीं टिहरी राज्य की अन्तिम सीमा है । वे समस्त गढ़वाली कुली जो एक दिन हरिद्वार से बोझा ले जाने के लिए नियुक्त किये गये थे, यहाँ से विदा ले लेंगे। इसके बाद ब्रिटिश सीमा है और बिना पासपोर्ट के ब्रिटिश सीमा में प्रवेश करने की उनको आज्ञा नहीं है। हम सभी एक देश के मनुष्य हैं, सभी भारतवासी हैं, फिर भी एक सामान्य राज्यगत् कारण से हम आपस में विच्छिन्न हैं। मेहलचौरी अत्यन्त मैली और अस्वास्थ्यकर जगह है। पास ही में रामगंगा नदी है और नदी के ऊपर एक पुल है । करीब ग्यारह बजे के समय चौधरी महाशय का दल धूमधाम के साथ आ पहुँचा। उनके साथ दसेक कांडीवाले थे। रानी घोड़े की पीठ पर आई। दूर से एक-दूसरे को देखने पर ऐसे जिससे और लक्ष्य न कर सकें । उसके बाद विश्राम और भोजनादि की व्यवस्था हुई । यहाँ गोपालदा की मंडली में ब्राह्मणी के साथ किसी एक कारण से मेरी कहा-सुनी हो गई ; धीरे-धीरे तिल का ताड़ हो गया । चारू की माने चुपचाप कहा - ब्राह्मण देवता, उस बूढ़ी के साथ झगड़ा करना भी तुम्हारा अपमान है, तुम चुप हो जाओ । हँसकर मैने कहा - चारू की मा, झगड़ा तो करता नहीं धमकी दे रहा हूँ। चारू की मा ठहाका मारकर हँस पड़ी और बोली- अच्छा, झगड़ा नहीं, धमकी है ? तब तो दो-एक बातें और सुना दो, मैं भी खुश हूँगी । १२९ :: हम सभी चुपचाप हँसने लगे, बूढ़ी ब्राह्मणी रो उठी । स्नान करने का समय हो गया, तौलिया लेकर रामगंगा चला आया। पत्थर तोड़ कर नीचे उतरना होता है । थोड़ी-थोड़ी वृष्टि हो रही है । स्नान करके सावधानी से देखते-भालते रानी उस समय नदी से वापस चली जा रही थीं। एक जगह खड़ी होकर बोलींइतनी कहासुनी कर सकते हैं ! देखती हूँ कि आप पूरे भलेमानस नहीं हैं। सुनिये, इस बार उन लोगों के दल को छोड़ दीजिये, चलिये हमारे साथ, एक साथ इधर-उधर फिरेंगे। और हाँ, आप यहाँ से एक घोड़ा कीजिए, समझ गये, दोनो जने घोड़े पर होंगे तो ठीक होगा । 'किन्तु -' आँखें फाड़कर वह बोलीं- मेरी बात वाध्य नहीं होगी-कहकर हँसती हुई जल्दी-जल्दी उठकर चल दी । अमरसिंह चला गया है, आज कांडीवालों ने भी विदा ले ली । विदाई का दृश्य करुणाजनक था । तुलसी, कालीचरण, तोताराम सभी ने प्रेमपूर्वक विदा माँगी; गढ़वालियों की यह एक विस्मयकर सरलता है । चौधरी महाशय के कांडीवाले तो जोर-जोर से रो रहे थे। रानी उन सबके लिए माता के समान जो है ; उसके समान इतनी दयावती, स्नेहमयी देवी उन्हें जीवन में कहाँ मिल सकती है। रानी के दान से उनकी झोलियाँ भर गईं। कपड़े, चादर, पुराने कम्बल, बर्तन और नकद इनाम ; मजूरी से ईनाम ज्यादा हो गया । उम्र में जो सबसे छोटा कुली था, वह कुछ नहीं चाहता था, केवल एक अबोध शिशु की तरह रानी के आँचल में मुख छिपाकर, सिसक सिसक कर रोने लगा । पराया जिस समय अपना होता है वह उस समय आत्मीय से भी होता है। ऐसा दृश्य जीवन में कभी नहीं देखा था। रानी की आँखें भी सजल हो आईं। राजकुमारी और श्रमिकों के बीच में कोई नहीं रहा । दुःख में, दुर्योग में, पथ-पथ में, इन दीर्घ चालीस दिनों में उन्होंने जाना, वह मा उनकी अपनी मा नहीं है, संसार के अपार जन-अरण्य में उनकी मा अदृश्य हो जायगी । यहाँ मुझे भी सबसे विदा लेनी पड़ी। बूढ़ी ब्राह्मणी के साथ विवाद के बाद गोपालदा की मंडली को आज यहीं से त्याग देना पड़ा। सोचा, यदि सम्भव हुआ तो स्वदेश जाकर फिर मिलूँगा। काफी दिनों तक गोपालदा के साथ रहा हूँ, ऋषीकेश की वही बातचीत, आज उनसे बिछुड़ना बहुत अखर रहा था । खैर, ठीक तीन बजे स्वामीजी और गोपालदा
'होता रहे सत्य, उससे मुझे भय नहीं, गंगा के जल में मैलाकर मिल जाय तो उससे क्या गंगा अपवित्र हो जाती है ?' मैं हँसकर बोला - तब अच्छी ही बात कहता हूँ, मिली है पद्मा में । दूसरे दिन खाड़चट्टी और धूनारघाट के छोटे पहाड़ी शहर को पार कर जिस समय दाड़िमडाली आ पहुँचे उस समय साँझ हो गई थी । धूनारघाट से मिली है रामगंगा नदी, और मिले हैं छोटे-छोटे प्रान्तर । कहीं-कहीं मैदानों में खेती हो रही है । प्रायः लहराता हुआ मैदानी रास्ता है। में कई गाँव हैं। गाँव समृद्धिशाली हैं। करीब नौ बजे के समय साढ़े चार मील और चलकर इतने दिनों के बाद हम गढ़वाल जिले के अन्तिम हिस्से मेहलचौरी में आ पहुँचे । खयाल था कि मेहलचौरी कुछ देखने-दाखने लायक होगा, किन्तु वह इतना साधारण होगाइस बात को स्वप्न में भी नहीं सोचा था । यहीं टिहरी राज्य की अन्तिम सीमा है । वे समस्त गढ़वाली कुली जो एक दिन हरिद्वार से बोझा ले जाने के लिए नियुक्त किये गये थे, यहाँ से विदा ले लेंगे। इसके बाद ब्रिटिश सीमा है और बिना पासपोर्ट के ब्रिटिश सीमा में प्रवेश करने की उनको आज्ञा नहीं है। हम सभी एक देश के मनुष्य हैं, सभी भारतवासी हैं, फिर भी एक सामान्य राज्यगत् कारण से हम आपस में विच्छिन्न हैं। मेहलचौरी अत्यन्त मैली और अस्वास्थ्यकर जगह है। पास ही में रामगंगा नदी है और नदी के ऊपर एक पुल है । करीब ग्यारह बजे के समय चौधरी महाशय का दल धूमधाम के साथ आ पहुँचा। उनके साथ दसेक कांडीवाले थे। रानी घोड़े की पीठ पर आई। दूर से एक-दूसरे को देखने पर ऐसे जिससे और लक्ष्य न कर सकें । उसके बाद विश्राम और भोजनादि की व्यवस्था हुई । यहाँ गोपालदा की मंडली में ब्राह्मणी के साथ किसी एक कारण से मेरी कहा-सुनी हो गई ; धीरे-धीरे तिल का ताड़ हो गया । चारू की माने चुपचाप कहा - ब्राह्मण देवता, उस बूढ़ी के साथ झगड़ा करना भी तुम्हारा अपमान है, तुम चुप हो जाओ । हँसकर मैने कहा - चारू की मा, झगड़ा तो करता नहीं धमकी दे रहा हूँ। चारू की मा ठहाका मारकर हँस पड़ी और बोली- अच्छा, झगड़ा नहीं, धमकी है ? तब तो दो-एक बातें और सुना दो, मैं भी खुश हूँगी । एक सौ उनतीस :: हम सभी चुपचाप हँसने लगे, बूढ़ी ब्राह्मणी रो उठी । स्नान करने का समय हो गया, तौलिया लेकर रामगंगा चला आया। पत्थर तोड़ कर नीचे उतरना होता है । थोड़ी-थोड़ी वृष्टि हो रही है । स्नान करके सावधानी से देखते-भालते रानी उस समय नदी से वापस चली जा रही थीं। एक जगह खड़ी होकर बोलींइतनी कहासुनी कर सकते हैं ! देखती हूँ कि आप पूरे भलेमानस नहीं हैं। सुनिये, इस बार उन लोगों के दल को छोड़ दीजिये, चलिये हमारे साथ, एक साथ इधर-उधर फिरेंगे। और हाँ, आप यहाँ से एक घोड़ा कीजिए, समझ गये, दोनो जने घोड़े पर होंगे तो ठीक होगा । 'किन्तु -' आँखें फाड़कर वह बोलीं- मेरी बात वाध्य नहीं होगी-कहकर हँसती हुई जल्दी-जल्दी उठकर चल दी । अमरसिंह चला गया है, आज कांडीवालों ने भी विदा ले ली । विदाई का दृश्य करुणाजनक था । तुलसी, कालीचरण, तोताराम सभी ने प्रेमपूर्वक विदा माँगी; गढ़वालियों की यह एक विस्मयकर सरलता है । चौधरी महाशय के कांडीवाले तो जोर-जोर से रो रहे थे। रानी उन सबके लिए माता के समान जो है ; उसके समान इतनी दयावती, स्नेहमयी देवी उन्हें जीवन में कहाँ मिल सकती है। रानी के दान से उनकी झोलियाँ भर गईं। कपड़े, चादर, पुराने कम्बल, बर्तन और नकद इनाम ; मजूरी से ईनाम ज्यादा हो गया । उम्र में जो सबसे छोटा कुली था, वह कुछ नहीं चाहता था, केवल एक अबोध शिशु की तरह रानी के आँचल में मुख छिपाकर, सिसक सिसक कर रोने लगा । पराया जिस समय अपना होता है वह उस समय आत्मीय से भी होता है। ऐसा दृश्य जीवन में कभी नहीं देखा था। रानी की आँखें भी सजल हो आईं। राजकुमारी और श्रमिकों के बीच में कोई नहीं रहा । दुःख में, दुर्योग में, पथ-पथ में, इन दीर्घ चालीस दिनों में उन्होंने जाना, वह मा उनकी अपनी मा नहीं है, संसार के अपार जन-अरण्य में उनकी मा अदृश्य हो जायगी । यहाँ मुझे भी सबसे विदा लेनी पड़ी। बूढ़ी ब्राह्मणी के साथ विवाद के बाद गोपालदा की मंडली को आज यहीं से त्याग देना पड़ा। सोचा, यदि सम्भव हुआ तो स्वदेश जाकर फिर मिलूँगा। काफी दिनों तक गोपालदा के साथ रहा हूँ, ऋषीकेश की वही बातचीत, आज उनसे बिछुड़ना बहुत अखर रहा था । खैर, ठीक तीन बजे स्वामीजी और गोपालदा
उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी ने सरकार के चार साल होने पर पूरे प्रदेश की 70 विधानसभाओं में प्रदर्शन की घोषणा की है। इस प्रदर्शन के जरिये सरकार से जवाब दो, हिसाब दो, माफी मांगो आदि की मांग की जाएगी। आप नेता रवींद्र जुगरान और आप प्रवक्ता नवीन पीरसाली ने आप प्रदेश कार्यालय में एक प्रेस वार्ता के दौरान उक्त जानकारी दी। साथ ही सरकार की पिछले चार साल की विफलता पर बीजेपी को आड़े हाथों लिया। आप प्रवक्ता नवीन पीरसाली ने बताया कि आगामी 18 मार्च को काला दिवस के तौर पर मनाया जाएगा। कार्यक्रम के तहत देहरादून में आप कार्यकर्ता प्रदेश अध्यक्ष एस एस कलेर के नेतृत्व में सीएम आवास का घेराव भी करेंगे। सीएम आवास के घेराव पर आप के प्रदेश प्रभारी दिनेश मोहनिया भी देहरादून आयेंगे और इस घेराव में शामिल होंगे। साथ ही सभी विधानसभाओं में प्रदर्शन कर सरकार की चार साल की विफलता को जनता तक पहुंचाया जाएगा। इस दौरान आप नेता रवींद्र जुगरान ने कहा कि बीजेपी ने पिछले चार सालों में जनता को सिर्फ निराश ही किया है। बेरोजगारों को सड़कों पर ला दिया। मातृशक्ति पर अत्याचार, लाठीचार्ज समेत सैकड़ों कर्मचारियों को अपने हक की आवाज उठाने पर मुकदमें दर्ज करवा दिए। बीजेपी ने पिछले चार सालों में अराजकता, निरंकुशता, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी पलायन जैसे मुद्दों पर नियंत्रण करने के बजाय उसको बढ़ाने का काम किया। अगर चार साल के कार्यकाल को देखें तो बिना विजन के बीजेपी ने सरकार चलाई। जिसका खामियाजा उत्तराखंड की जनता को भुगतना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब सरकार में चेहरा बदल कर भाजपा अपनी नाकामयाबी को छुपाने की कोशिश कर रही है, जिसे जनता समझ चुकी है। आप की मांग है बीजेपी को पहले अपने चार सालों का जवाब, हिसाब देने के बाद जनता से माफी मांगनी चाहिए। बीजेपी चेहरा बदल कर अपने चार सालों के पाप को नहीं धो सकती। आप नेता जुगरान ने कहा कि बीजेपी ने सिर्फ सीएम का चेहरा बदला, बाकी मंत्रिमंडल वही है। जिसने पिछले चार सालों में प्रदेश को निराश किया है। चार साल की विफलता से कोई सीख नहीं ली। बीजेपी को अपनी चार सालों की विफलता पर जनता से माफी मांगनी चाहिए। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी ने सरकार के चार साल होने पर पूरे प्रदेश की सत्तर विधानसभाओं में प्रदर्शन की घोषणा की है। इस प्रदर्शन के जरिये सरकार से जवाब दो, हिसाब दो, माफी मांगो आदि की मांग की जाएगी। आप नेता रवींद्र जुगरान और आप प्रवक्ता नवीन पीरसाली ने आप प्रदेश कार्यालय में एक प्रेस वार्ता के दौरान उक्त जानकारी दी। साथ ही सरकार की पिछले चार साल की विफलता पर बीजेपी को आड़े हाथों लिया। आप प्रवक्ता नवीन पीरसाली ने बताया कि आगामी अट्ठारह मार्च को काला दिवस के तौर पर मनाया जाएगा। कार्यक्रम के तहत देहरादून में आप कार्यकर्ता प्रदेश अध्यक्ष एस एस कलेर के नेतृत्व में सीएम आवास का घेराव भी करेंगे। सीएम आवास के घेराव पर आप के प्रदेश प्रभारी दिनेश मोहनिया भी देहरादून आयेंगे और इस घेराव में शामिल होंगे। साथ ही सभी विधानसभाओं में प्रदर्शन कर सरकार की चार साल की विफलता को जनता तक पहुंचाया जाएगा। इस दौरान आप नेता रवींद्र जुगरान ने कहा कि बीजेपी ने पिछले चार सालों में जनता को सिर्फ निराश ही किया है। बेरोजगारों को सड़कों पर ला दिया। मातृशक्ति पर अत्याचार, लाठीचार्ज समेत सैकड़ों कर्मचारियों को अपने हक की आवाज उठाने पर मुकदमें दर्ज करवा दिए। बीजेपी ने पिछले चार सालों में अराजकता, निरंकुशता, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी पलायन जैसे मुद्दों पर नियंत्रण करने के बजाय उसको बढ़ाने का काम किया। अगर चार साल के कार्यकाल को देखें तो बिना विजन के बीजेपी ने सरकार चलाई। जिसका खामियाजा उत्तराखंड की जनता को भुगतना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब सरकार में चेहरा बदल कर भाजपा अपनी नाकामयाबी को छुपाने की कोशिश कर रही है, जिसे जनता समझ चुकी है। आप की मांग है बीजेपी को पहले अपने चार सालों का जवाब, हिसाब देने के बाद जनता से माफी मांगनी चाहिए। बीजेपी चेहरा बदल कर अपने चार सालों के पाप को नहीं धो सकती। आप नेता जुगरान ने कहा कि बीजेपी ने सिर्फ सीएम का चेहरा बदला, बाकी मंत्रिमंडल वही है। जिसने पिछले चार सालों में प्रदेश को निराश किया है। चार साल की विफलता से कोई सीख नहीं ली। बीजेपी को अपनी चार सालों की विफलता पर जनता से माफी मांगनी चाहिए। लोकसाक्ष्य पोर्टल पाठकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसमें लेख, रचनाएं आमंत्रित हैं। शर्त है कि आपकी भेजी सामग्री पहले किसी सोशल मीडिया में न लगी हो। आप विज्ञापन व अन्य आर्थिक सहयोग भी कर सकते हैं। भानु बंगवाल, देहरादून, उत्तराखंड।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को अपने बजट अनुमानों से संबंधित सूची भेज दी है. इसमें डीजल पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की जबरदस्त वकालत की गई है. तेल मंत्रालय ने अपनी इस सिफारिश के पीछे दो वजहें बताई हैं. पहली, भारतीय कार उद्योग का जिस तरह से 'डीजलीकरण' हो रहा है, उसे हर कीमत पर रोका जाना चाहिए. इससे न सिर्फ अर्थव्यवस्था पर काफी बुरा असर पड़ेगा, बल्कि ये कारें आगे चलकर पर्यावरण के लिए भी बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती हैं. दूसरी, अतिरिक्त शुल्क से जो राजस्व मिलेगा, उसके एक हिस्से से डीजल बिक्री पर तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे की भरपाई की जा सकेगी. पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सरकार ने डीजल की कीमत तय करने का अधिकार अभी सिर्फ आंशिक तौर पर ही तेल कंपनियों को दिया है. यह देखना दिलचस्प होगा कि तेल कंपनियों कितने महीने तक लगभग 50 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि कर पाती हैं. इस वृद्धि के बावजूद चालू वित्त वर्ष के दौरान तेल कंपनियों को डीजल को लागत से भी कम कीमत पर बेचने की वजह से 90 हजार करोड़ रुपये का संभावित घाटा होने की बात कही जा रही है. इसका आधा से ज्यादा हिस्सा सरकार के खजाने से भरना होगा. अगले वित्त वर्ष में डीजल की कीमत बढऩे के बावजूद सरकार को एक बड़ी राशि बतौर सब्सिडी देनी पड़ सकती है. ऐसे में डीजल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाकर वित्त मंत्रालय व तेल कंपनियों पर बोझ काफी कम किया जा सकता है. अगर ऐसा हुआ तो देश में न सिर्फ डीजल कारों की कीमत बढ़ेगी, बल्कि इनकी बिक्री पर भी असर पडऩा तय है. वित्त मंत्रालय ने पहले ही वित्त सचिव की अध्यक्षता में इस बारे में विचार के लिए एक समिति बना रखी है. समिति ने शुरुआती दौर में कार बनाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत भी की थी. इससे पहले पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत तय करने पर गठित किरीट पारिख समिति ने डीजल कारों पर 80 हजार रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया था.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को अपने बजट अनुमानों से संबंधित सूची भेज दी है. इसमें डीजल पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की जबरदस्त वकालत की गई है. तेल मंत्रालय ने अपनी इस सिफारिश के पीछे दो वजहें बताई हैं. पहली, भारतीय कार उद्योग का जिस तरह से 'डीजलीकरण' हो रहा है, उसे हर कीमत पर रोका जाना चाहिए. इससे न सिर्फ अर्थव्यवस्था पर काफी बुरा असर पड़ेगा, बल्कि ये कारें आगे चलकर पर्यावरण के लिए भी बेहद नुकसानदेह साबित हो सकती हैं. दूसरी, अतिरिक्त शुल्क से जो राजस्व मिलेगा, उसके एक हिस्से से डीजल बिक्री पर तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे की भरपाई की जा सकेगी. पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सरकार ने डीजल की कीमत तय करने का अधिकार अभी सिर्फ आंशिक तौर पर ही तेल कंपनियों को दिया है. यह देखना दिलचस्प होगा कि तेल कंपनियों कितने महीने तक लगभग पचास पैसे प्रति लीटर की वृद्धि कर पाती हैं. इस वृद्धि के बावजूद चालू वित्त वर्ष के दौरान तेल कंपनियों को डीजल को लागत से भी कम कीमत पर बेचने की वजह से नब्बे हजार करोड़ रुपये का संभावित घाटा होने की बात कही जा रही है. इसका आधा से ज्यादा हिस्सा सरकार के खजाने से भरना होगा. अगले वित्त वर्ष में डीजल की कीमत बढऩे के बावजूद सरकार को एक बड़ी राशि बतौर सब्सिडी देनी पड़ सकती है. ऐसे में डीजल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाकर वित्त मंत्रालय व तेल कंपनियों पर बोझ काफी कम किया जा सकता है. अगर ऐसा हुआ तो देश में न सिर्फ डीजल कारों की कीमत बढ़ेगी, बल्कि इनकी बिक्री पर भी असर पडऩा तय है. वित्त मंत्रालय ने पहले ही वित्त सचिव की अध्यक्षता में इस बारे में विचार के लिए एक समिति बना रखी है. समिति ने शुरुआती दौर में कार बनाने वाली कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत भी की थी. इससे पहले पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत तय करने पर गठित किरीट पारिख समिति ने डीजल कारों पर अस्सी हजार रुपये का अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया था.
इस्लाम से बहुत दूर रहने वाला व्यक्तिबार-बार पवित्र पर्व के विभिन्न व्याख्याओं को सुनकर, ग्रेट लेन्ट के अंत को चिह्नित करते हुए। और शायद मैं सोच रहा था, ठीक ही - "रमजान" या "रमजान" मूल संस्करण में उल्लिखित है? और क्या ये दो शब्द अर्थ में ही हैं? आज हम यह समझाने की कोशिश करेंगे कि इसी तरह के समान मतभेदों में ध्वनि के साथ क्या संबंध हैं। रमजान (या रमजान): मुसलमान के लिए इसका क्या मतलब है? अरबी से, इस शब्द का अनुवाद "गर्म", "तेज गर्मी" के रूप में किया जाता है और चंद्र कैलेंडर के नौवें महीने को भी दर्शाता है। इस्लामी कैलेंडर में चंद्रमा की शुरुआत होती है, जो कि नए चाँद से शुरु होती है। इस कारण से, प्रत्येक वर्ष रमजान पहले 10-11 दिनों के लिए आता है। जब रमजान आएगा, तो आस्तिक होना चाहिएकुरान के नुस्खे का पालन करें और उपवास रखना। उनसे बच्चे, गर्भवती, स्तनपान कराने वाली मां, बुजुर्ग लोग, बीमार और यात्रियों को छोड़ दिया जाता है। चूंकि भोजन और पानी से बचे लोगों का यह वर्ग स्वास्थ्य स्थिति को प्रभावित कर सकता है। हम जानते हैं कि रमज़ान या रमजान है। और मुसलमान तेजी से कैसे काम करते हैं? 29-30 दिनों के लिए, दुनिया भर के मुसलमान,जो ग्रह पर लगभग 1 बिलियन लोगों की संख्या, पापों की छुटकारे और विश्वास के प्रति प्रतिबद्धता के नाम पर, रमजान के उपवास का आयोजन करेगा। यह एक बहुत सख्त पोस्ट है, जिसका अर्थ है कि कोई व्यक्ति भोजन, पानी, बुरा आदतों, बुरी भाषा और अन्य चीजों से मना करेगा - सूर्योदय से सूर्यास्त तक और जब सूर्य क्षितिज से परे गायब हो जाता है, तो मुसलमान भोजन और पेय की उनकी ज़रूरतों को पूरा कर सकते हैं। भोजन, पानी और अभिव्यक्ति से संयम के अलावादयालुता और अपने पड़ोसी के लिए प्यार, आस्तिक सुबह और शाम में प्रार्थना पढ़ना चाहिए यह माना जाता है कि इस समय, अल्लाह लोगों के कार्यों को देख रहा है। इसलिए, दुनिया भर के मुसलमानों ने प्रार्थना को पढ़ा, कुरान, गरीबों को दया करें, भूखे खिलाओ। फिर भी विश्वासियों का मानना है कि रमज़ान काल के दौरान शैतान (शैतान) को एक श्रृंखला में झोंक दिया जाता है ताकि वह लोगों को अच्छे काम करने से रोक नहीं सकें। तुर्की लोग सख्त पोस्ट कहते हैं - "उराजा",और मुसलमान रमजान हैं कुछ लोग "रमजान" कह सकते हैं (उदाहरण के लिए, तुर्की के लोग), जो अर्थ का विरोध नहीं करता है, लेकिन सच नहीं है। बात यह है कि "दान" शब्द का तीसरा शब्दांश "ज़ान" के समान लगता है। मुस्लिम गांवों के निवासियों की पुरानी पीढ़ी, उनकी सुविधा के लिए, इस शब्द को "डी" के साथ "डी" पत्र के प्रतिस्थापन के साथ दिया, जो बाद में शेष आबादी में फैल गया। लेकिन कुरान को पढ़ते समय, ऐसे प्रतिस्थापनविशेषकर दूसरे शब्दों के लिए, अपर्याप्त, जिसका अर्थ गलत उच्चारण से बदल सकता है ऐसा होता है कि इमामों की अज्ञानी या आदत "कठबोली" शैली का सहारा लेती है यह प्रश्न पर एक निष्कर्ष निकालना उचित है, कितनी सही है - रमज़ान या रमजान पहली बार हर रोज़ की आदतों का मामला है, और बाद में एक भाषाविज्ञान दृष्टिकोण से सही है। उज्ज़े का क्या कहना हैः रमजान या रमजान? यहां अन्य मुसलमानों के साथ समानता के अनुसार, दो संस्करण हैं एक अरबी अर्थ का है, और दूसरा तुर्की का है। इसलिए, विभिन्न स्रोतों में, इस शब्द के उच्चारण के दोनों रूप हैं।
इस्लाम से बहुत दूर रहने वाला व्यक्तिबार-बार पवित्र पर्व के विभिन्न व्याख्याओं को सुनकर, ग्रेट लेन्ट के अंत को चिह्नित करते हुए। और शायद मैं सोच रहा था, ठीक ही - "रमजान" या "रमजान" मूल संस्करण में उल्लिखित है? और क्या ये दो शब्द अर्थ में ही हैं? आज हम यह समझाने की कोशिश करेंगे कि इसी तरह के समान मतभेदों में ध्वनि के साथ क्या संबंध हैं। रमजान : मुसलमान के लिए इसका क्या मतलब है? अरबी से, इस शब्द का अनुवाद "गर्म", "तेज गर्मी" के रूप में किया जाता है और चंद्र कैलेंडर के नौवें महीने को भी दर्शाता है। इस्लामी कैलेंडर में चंद्रमा की शुरुआत होती है, जो कि नए चाँद से शुरु होती है। इस कारण से, प्रत्येक वर्ष रमजान पहले दस-ग्यारह दिनों के लिए आता है। जब रमजान आएगा, तो आस्तिक होना चाहिएकुरान के नुस्खे का पालन करें और उपवास रखना। उनसे बच्चे, गर्भवती, स्तनपान कराने वाली मां, बुजुर्ग लोग, बीमार और यात्रियों को छोड़ दिया जाता है। चूंकि भोजन और पानी से बचे लोगों का यह वर्ग स्वास्थ्य स्थिति को प्रभावित कर सकता है। हम जानते हैं कि रमज़ान या रमजान है। और मुसलमान तेजी से कैसे काम करते हैं? उनतीस-तीस दिनों के लिए, दुनिया भर के मुसलमान,जो ग्रह पर लगभग एक बिलियन लोगों की संख्या, पापों की छुटकारे और विश्वास के प्रति प्रतिबद्धता के नाम पर, रमजान के उपवास का आयोजन करेगा। यह एक बहुत सख्त पोस्ट है, जिसका अर्थ है कि कोई व्यक्ति भोजन, पानी, बुरा आदतों, बुरी भाषा और अन्य चीजों से मना करेगा - सूर्योदय से सूर्यास्त तक और जब सूर्य क्षितिज से परे गायब हो जाता है, तो मुसलमान भोजन और पेय की उनकी ज़रूरतों को पूरा कर सकते हैं। भोजन, पानी और अभिव्यक्ति से संयम के अलावादयालुता और अपने पड़ोसी के लिए प्यार, आस्तिक सुबह और शाम में प्रार्थना पढ़ना चाहिए यह माना जाता है कि इस समय, अल्लाह लोगों के कार्यों को देख रहा है। इसलिए, दुनिया भर के मुसलमानों ने प्रार्थना को पढ़ा, कुरान, गरीबों को दया करें, भूखे खिलाओ। फिर भी विश्वासियों का मानना है कि रमज़ान काल के दौरान शैतान को एक श्रृंखला में झोंक दिया जाता है ताकि वह लोगों को अच्छे काम करने से रोक नहीं सकें। तुर्की लोग सख्त पोस्ट कहते हैं - "उराजा",और मुसलमान रमजान हैं कुछ लोग "रमजान" कह सकते हैं , जो अर्थ का विरोध नहीं करता है, लेकिन सच नहीं है। बात यह है कि "दान" शब्द का तीसरा शब्दांश "ज़ान" के समान लगता है। मुस्लिम गांवों के निवासियों की पुरानी पीढ़ी, उनकी सुविधा के लिए, इस शब्द को "डी" के साथ "डी" पत्र के प्रतिस्थापन के साथ दिया, जो बाद में शेष आबादी में फैल गया। लेकिन कुरान को पढ़ते समय, ऐसे प्रतिस्थापनविशेषकर दूसरे शब्दों के लिए, अपर्याप्त, जिसका अर्थ गलत उच्चारण से बदल सकता है ऐसा होता है कि इमामों की अज्ञानी या आदत "कठबोली" शैली का सहारा लेती है यह प्रश्न पर एक निष्कर्ष निकालना उचित है, कितनी सही है - रमज़ान या रमजान पहली बार हर रोज़ की आदतों का मामला है, और बाद में एक भाषाविज्ञान दृष्टिकोण से सही है। उज्ज़े का क्या कहना हैः रमजान या रमजान? यहां अन्य मुसलमानों के साथ समानता के अनुसार, दो संस्करण हैं एक अरबी अर्थ का है, और दूसरा तुर्की का है। इसलिए, विभिन्न स्रोतों में, इस शब्द के उच्चारण के दोनों रूप हैं।
रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच बुधवार (14 अप्रैल) को खेले गए आईपीएल 2021 के मुकाबले में दोनों ही टीम के खिलाड़ियों से शानदार फील्डिंग देखने को मिली। जिसके चलते इस मुकाबले में एक आईपीएल मैच में सबसे ज्यादा कैच पकड़े जाने का रिकॉर्ड बन गया। दोनों ही टीम के खिलाड़ियों ने इस मुकाबले में कुल 16 कैच लपके। जिसमें हैदराबाद के खिलाड़ियों ने 8 औऱ आरसीबी के खिलाड़ियों ने भी 8 कैच लपके। इससे पहले एक आईपीएल मैच मे सबसे ज्यादा कैच 11 साल पहले पकड़े गए थे। 2010 में राजस्थान रॉयल्स और डेक्कन चार्जर्स के बीच खेले गए मुकाबले में दोनों टीम के खिलाड़ियों ने कुल 15 मैच लपके थे। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी आरबीसी की टीम ने ग्लेन मैक्सवेल (59) के अर्धशतक के दम पर निर्धारित 20 ओवरों में 8 विकेट के नुकसान पर 149 रन बनाए। जीत के लक्ष्य का पीछे करने उतरी हैदारबाद की टीम एक बार आसानी से जितती हुई लग रही थी। टीम का स्कोर 13.2 ओवर में 2 विकेट के नुकसान पर 96 था। लेकिन स्पिनर शाहबाज अहमद ने एक ही ओवर में जॉनी बेयरस्टो ,मनीष पांडे औऱ अब्दुल समद को आउट कर मैच का पासा पलट दिया। हैदराबाद के लिए कप्तान डेविड वॉर्नर ने सबसे ज्यादा 54 रन बनाए, इसके अलावा पांडे ने 38 रनों की पारी खेली।
रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच बुधवार को खेले गए आईपीएल दो हज़ार इक्कीस के मुकाबले में दोनों ही टीम के खिलाड़ियों से शानदार फील्डिंग देखने को मिली। जिसके चलते इस मुकाबले में एक आईपीएल मैच में सबसे ज्यादा कैच पकड़े जाने का रिकॉर्ड बन गया। दोनों ही टीम के खिलाड़ियों ने इस मुकाबले में कुल सोलह कैच लपके। जिसमें हैदराबाद के खिलाड़ियों ने आठ औऱ आरसीबी के खिलाड़ियों ने भी आठ कैच लपके। इससे पहले एक आईपीएल मैच मे सबसे ज्यादा कैच ग्यारह साल पहले पकड़े गए थे। दो हज़ार दस में राजस्थान रॉयल्स और डेक्कन चार्जर्स के बीच खेले गए मुकाबले में दोनों टीम के खिलाड़ियों ने कुल पंद्रह मैच लपके थे। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी आरबीसी की टीम ने ग्लेन मैक्सवेल के अर्धशतक के दम पर निर्धारित बीस ओवरों में आठ विकेट के नुकसान पर एक सौ उनचास रन बनाए। जीत के लक्ष्य का पीछे करने उतरी हैदारबाद की टीम एक बार आसानी से जितती हुई लग रही थी। टीम का स्कोर तेरह.दो ओवर में दो विकेट के नुकसान पर छियानवे था। लेकिन स्पिनर शाहबाज अहमद ने एक ही ओवर में जॉनी बेयरस्टो ,मनीष पांडे औऱ अब्दुल समद को आउट कर मैच का पासा पलट दिया। हैदराबाद के लिए कप्तान डेविड वॉर्नर ने सबसे ज्यादा चौवन रन बनाए, इसके अलावा पांडे ने अड़तीस रनों की पारी खेली।